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मोराबहन और मेहरताज दोनों ने एक इटालियन जहाज़ में 'डेक' पर सफर किया और २२ नवम्बर १९३४ को वर्धा पहुँच गईं।
बालिका मेहरताज ने डेढ़ वर्ष बाद अपने पिता के दर्शन किये, पर उसका जो छोटा भाई कर्नल ब्राउन के स्कूल ( देहरादून ) में था उसे तो बाप से मिले चार वर्ष हो चुके थे । खानसाहब के संयुक्तप्रान्तीय भ्रमण के समय वह ( अब्दुलअलो ) उनसे मिला और उनके साथ ४ दिसम्बर १६३४ को वर्धा आया । ज़रा कल्पना कीजिए कि ७ दिसम्बर की शाम को जब इन छोटे बच्चों ने अपने पिता की गिरफ़्तारी का समाचार सुना तो उन्हें कैसा दुःख हुआ होगा ! जमनालालजी ने जब यह खबर सुनाई, तो बारह बरस के उस छोटे बच्चे ने उनसे पूछा- "जब आप और महात्माजी आदि सब लोग आज़ाद हैं, तो मेरे पिता ही क्यों गिरफ़्तार होने चाहिए ?" "क्योंकि, " जमनालालजी ने सिसकते हुए बच्चे को तसल्ली देते हुए कहा, "उन्होंने बम्बई में राजद्रोही भाषण दिया बताते हैं ।" और तब "राजद्रोह क्या है ?" सहजस्वभाव बच्चे की इस जिज्ञासा को भी सरल भाषा में जमनालालजी को शान्त करना पड़ा।
परन्तु यह ध्यान रहे कि बच्चों के साथ पिता ने आँसू नहीं ढलकाये । वह जानते थे कि उन्हें ऐसो मित्रता का सौभाग्य हुआ है, जो कभी नष्ट नहीं होगी और कठोर परीक्षाओं एवं कठिनाइयों के साथ उत्तरोत्तर बढ़ती ही रहेगी। सचमुच जमनालालजी और गाँधीजी की यह मित्रता ऐसी है कि बिना किसी पशोपेश के वह अपने बच्चों को इनके सुपुर्द कर सकते हैं। वर्धा के इन कुछ दिनों ने
दोनों भाइयों को जमनालालजी और गांधीजी के इतना निकट ला दिया है कि मेहमान और यजमान दोनों के बीच आध्यात्मिक आत्मीयता एवं भाईचारे का सम्बन्ध स्थापित हो गया है। इनके बीच राजनीतिक बातें तो मुश्किल से ही कभी हुई होंगी, परन्तु प्रार्थनापूर्ण और मौन आध्यात्मिक विचार-विनिमय काफ़ी हुआ है, और इस बात का तो हरेक पर बहुत ही अच्छा असर पड़ा है कि गाँधीजी रोज़ सबेरे तुलसी-कृत रामायण का जो पाठ करते थे उसमें शरीक होने के लिए तो रोज़ और सुबह-शाम होनेवाली प्रार्थनाओं में भी अक्सर खानसाहब आश्रम आया करते थे । " इस भजन का संगीत मेरी आत्मा को तृप्त कर देता है, " उन्होंने एक दिन प्यारेलालजी से कहा, "मेहरबानी करके इसे उर्दू में लिखकर इसका उर्दू तर्जुमा मुझे करदीजिए ।" मूलतः एकान्तप्रिय होने के कारण, उन्हें और कोई बात इतनी पसन्द नहीं है जितना शान्तिपूर्वक प्रार्थना और चुपचाप काम करना पसन्द है, और इन दोनों उद्देशों से प्रेरित होकर ही उन्होंने अपनेको बंगाल के गाँवों में खपा देने का निश्चय किया था । कोई दो महीने पहले जब वह बंगाल गये तो झोंपड़ियों में जा जाकर उन्होंने वहाँ के ग़रीब मुसलमान किसानों की हालत देखी, और तब उन्हें खादी के महत्त्व का प्रत्यक्ष अनुभव होगया । इसलिए उनतक ग्रामीण उद्योगों के पुनरुद्धार का सन्देश पहुँचाना चाहा । ६ दिसम्बर को ही वह इसके लिए बंगाल चले जानेवाले थे, परन्तु शीघ्र ही जिस ग्राम उद्योग संघ की कार्यकारिणी का निर्माण होनेवाला था उसकी पहली बैठक के लिए रुक जाने का
जमनालालजी ने उनसे आग्रह किया और तब उनका जाना १५ तारीख के लिए स्थगित कर दिया गया था । वस्तुतः हम उनके बंगाल में जाकर काम करने की कल्पना और चर्चा ही कर रहे थे, कि ७ तारीख की शाम को पुलिस का डिस्ट्रिक्ट सुप्रिण्टेण्डण्ट उनकी गिरफ़्तारी का वारण्ट लेकर आ पहुँचा। ऐसी बातों के लिए सदा तैयार रहनेवाले इस महान् पठान ने वारण्ट को देखते के साथ ही कहा, 'मैं तैयार हूँ ।' परन्तु उन्हें कुछ समय दिया गया कि वह अपने मित्रों, भाई तथा बच्चों से मिललें । जब वह जाने की तैयारी कर रहे थे, गाँधीजी ने उनसे कहा - "अच्छा खानसाहब, यह याद रखना, अबतक जैसा हम करते आये हैं उसके बर्खिलाफ़ इस बार हम सफ़ाई पेश करेंगे । " पर खानसाहब तो इस बात से कुछ चौंक से पड़े । उन्होंने कहा कि १६१६ से हम जैसा करते आये हैं उससे भिन्न कुछ करने की इच्छा नहीं होती। " मैं इस सम्बन्ध की आपकी भावना को समझता हूँ," गाँधीजी ने कहा, "परन्तु यह मौक़ा वैसा नहीं है । जहाँतक हो सके, हम अभी जेल नहीं जाना चाहते।" और तब चुपचाप यह जवाब मिला - "अच्छा, तो जैसा आप कहें।" यह उनकी सुन्दर श्रद्धा का दूसरा उदाहरण है।
बड़े भाई के लिए निश्चय ही यह बड़े दुःख की बात थी कि जो भाई तीन वर्ष से अधिक के जेल-वास में तथा उसके बाद की सौ दिनों की मर्यादित स्वतंत्रता में उनके हर्ष - विषाद का भागीदार रहा वही उनसे बिछुड़ गया । परन्तु इस व्यक्तिगत बात के लिए भी छोटे भाई को कोई रंज नहीं हुआ । उन्होंने अपने छोटे बच्चों से कहा कि
वे बहादुर बनें और अपने स्वीकृत अभिभावक गांधीजो व जमनालालजी की कृपापूर्ण देख-भाल में सादगी और आत्म-नियंत्रण का सबक लें ।
परन्तु एक रंज ऐसा था, जिसकी कुछ परछाईं उनके चेहरे पर पड़ी मालूम पड़ती थी । "मेरी बड़ी इच्छा थी कि बंगाल के गाँवों में रहनेवाले गरीब मुसलमानों से मैंने जो वादा किया, मैं उसको पूरा कर सकता । मैंने उनसे वादा किया था कि मैं उनके साथ रहकर उन्हींके बीच काम करूंगा, पर अब मैं वह छोटी-सी सेवा भी नहीं कर सकूँगा।" और कुछ देरतक विषादयुक्त गम्भीरमुद्रा से देखते हुए उन्होंने कहा, "सीमाप्रान्त के बारे में मैं क्या कहूँ, यह मैं नहीं जानता। मैं चाहता हूँ कि मेरी गिरफ़्तारी से उत्तेजित होकर मेरे भाई कोई गड़बड़ न करें । उन्हें शान्ति के साथ इसे बर्दाश्त करना चाहिए और ठण्डे साहस के साथ अपने आन्तरिक मतभेदों को दूर कर संयुक्त होने के शान्त कार्य में जुट पड़ना चाहिए। मुझे इस बात का दुःख है कि जब सब तरह के आक्षेप हमपर किये जा रहे हैं, हमें यह सिद्ध करने का कोई मौक़ा नहीं दिया जाता कि वे सब ग़लत हैं। एक सरकारी रिपोर्ट में मेरे प्रान्त (सीमाप्रान्त) को 'खूनी प्रान्त' कहा गया है, मगर सीधे-सादे अपढ़ पठानों में, और तो और, शिक्षा व समाज-सुधार के अराजनीतिक काम करने तक की हमें क्या सुविधाएँ दी गई हैं ?"
परन्तु ज्यों ही बम्बई रवाना होने का समय आया, इस सच्चे खुदाई खिदमतगार के मन से यह रंज भी निकल गया । "मुझे पक्का
विश्वास है, " जमनालालजी और उनकी धर्मपत्नी जानकीदेवी से विदा लेते हुए खानसाहब ने कहा, "मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह सब अल्लाह का काम है। उसने मुझे उतने समयतक बाहर रक्खा, जितने के लिए कि उसे बाहर मेरा उपयोग करना था। अब उसकी इच्छा है कि मैं अन्दर रहकर सेवा करूं, तो यही सही। जिसमें वह खुश रहे उसीमें मेरी भी खुशी है ।"
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मोराबहन और मेहरताज दोनों ने एक इटालियन जहाज़ में 'डेक' पर सफर किया और बाईस नवम्बर एक हज़ार नौ सौ चौंतीस को वर्धा पहुँच गईं। बालिका मेहरताज ने डेढ़ वर्ष बाद अपने पिता के दर्शन किये, पर उसका जो छोटा भाई कर्नल ब्राउन के स्कूल में था उसे तो बाप से मिले चार वर्ष हो चुके थे । खानसाहब के संयुक्तप्रान्तीय भ्रमण के समय वह उनसे मिला और उनके साथ चार दिसम्बर एक हज़ार छः सौ चौंतीस को वर्धा आया । ज़रा कल्पना कीजिए कि सात दिसम्बर की शाम को जब इन छोटे बच्चों ने अपने पिता की गिरफ़्तारी का समाचार सुना तो उन्हें कैसा दुःख हुआ होगा ! जमनालालजी ने जब यह खबर सुनाई, तो बारह बरस के उस छोटे बच्चे ने उनसे पूछा- "जब आप और महात्माजी आदि सब लोग आज़ाद हैं, तो मेरे पिता ही क्यों गिरफ़्तार होने चाहिए ?" "क्योंकि, " जमनालालजी ने सिसकते हुए बच्चे को तसल्ली देते हुए कहा, "उन्होंने बम्बई में राजद्रोही भाषण दिया बताते हैं ।" और तब "राजद्रोह क्या है ?" सहजस्वभाव बच्चे की इस जिज्ञासा को भी सरल भाषा में जमनालालजी को शान्त करना पड़ा। परन्तु यह ध्यान रहे कि बच्चों के साथ पिता ने आँसू नहीं ढलकाये । वह जानते थे कि उन्हें ऐसो मित्रता का सौभाग्य हुआ है, जो कभी नष्ट नहीं होगी और कठोर परीक्षाओं एवं कठिनाइयों के साथ उत्तरोत्तर बढ़ती ही रहेगी। सचमुच जमनालालजी और गाँधीजी की यह मित्रता ऐसी है कि बिना किसी पशोपेश के वह अपने बच्चों को इनके सुपुर्द कर सकते हैं। वर्धा के इन कुछ दिनों ने दोनों भाइयों को जमनालालजी और गांधीजी के इतना निकट ला दिया है कि मेहमान और यजमान दोनों के बीच आध्यात्मिक आत्मीयता एवं भाईचारे का सम्बन्ध स्थापित हो गया है। इनके बीच राजनीतिक बातें तो मुश्किल से ही कभी हुई होंगी, परन्तु प्रार्थनापूर्ण और मौन आध्यात्मिक विचार-विनिमय काफ़ी हुआ है, और इस बात का तो हरेक पर बहुत ही अच्छा असर पड़ा है कि गाँधीजी रोज़ सबेरे तुलसी-कृत रामायण का जो पाठ करते थे उसमें शरीक होने के लिए तो रोज़ और सुबह-शाम होनेवाली प्रार्थनाओं में भी अक्सर खानसाहब आश्रम आया करते थे । " इस भजन का संगीत मेरी आत्मा को तृप्त कर देता है, " उन्होंने एक दिन प्यारेलालजी से कहा, "मेहरबानी करके इसे उर्दू में लिखकर इसका उर्दू तर्जुमा मुझे करदीजिए ।" मूलतः एकान्तप्रिय होने के कारण, उन्हें और कोई बात इतनी पसन्द नहीं है जितना शान्तिपूर्वक प्रार्थना और चुपचाप काम करना पसन्द है, और इन दोनों उद्देशों से प्रेरित होकर ही उन्होंने अपनेको बंगाल के गाँवों में खपा देने का निश्चय किया था । कोई दो महीने पहले जब वह बंगाल गये तो झोंपड़ियों में जा जाकर उन्होंने वहाँ के ग़रीब मुसलमान किसानों की हालत देखी, और तब उन्हें खादी के महत्त्व का प्रत्यक्ष अनुभव होगया । इसलिए उनतक ग्रामीण उद्योगों के पुनरुद्धार का सन्देश पहुँचाना चाहा । छः दिसम्बर को ही वह इसके लिए बंगाल चले जानेवाले थे, परन्तु शीघ्र ही जिस ग्राम उद्योग संघ की कार्यकारिणी का निर्माण होनेवाला था उसकी पहली बैठक के लिए रुक जाने का जमनालालजी ने उनसे आग्रह किया और तब उनका जाना पंद्रह तारीख के लिए स्थगित कर दिया गया था । वस्तुतः हम उनके बंगाल में जाकर काम करने की कल्पना और चर्चा ही कर रहे थे, कि सात तारीख की शाम को पुलिस का डिस्ट्रिक्ट सुप्रिण्टेण्डण्ट उनकी गिरफ़्तारी का वारण्ट लेकर आ पहुँचा। ऐसी बातों के लिए सदा तैयार रहनेवाले इस महान् पठान ने वारण्ट को देखते के साथ ही कहा, 'मैं तैयार हूँ ।' परन्तु उन्हें कुछ समय दिया गया कि वह अपने मित्रों, भाई तथा बच्चों से मिललें । जब वह जाने की तैयारी कर रहे थे, गाँधीजी ने उनसे कहा - "अच्छा खानसाहब, यह याद रखना, अबतक जैसा हम करते आये हैं उसके बर्खिलाफ़ इस बार हम सफ़ाई पेश करेंगे । " पर खानसाहब तो इस बात से कुछ चौंक से पड़े । उन्होंने कहा कि एक हज़ार छः सौ सोलह से हम जैसा करते आये हैं उससे भिन्न कुछ करने की इच्छा नहीं होती। " मैं इस सम्बन्ध की आपकी भावना को समझता हूँ," गाँधीजी ने कहा, "परन्तु यह मौक़ा वैसा नहीं है । जहाँतक हो सके, हम अभी जेल नहीं जाना चाहते।" और तब चुपचाप यह जवाब मिला - "अच्छा, तो जैसा आप कहें।" यह उनकी सुन्दर श्रद्धा का दूसरा उदाहरण है। बड़े भाई के लिए निश्चय ही यह बड़े दुःख की बात थी कि जो भाई तीन वर्ष से अधिक के जेल-वास में तथा उसके बाद की सौ दिनों की मर्यादित स्वतंत्रता में उनके हर्ष - विषाद का भागीदार रहा वही उनसे बिछुड़ गया । परन्तु इस व्यक्तिगत बात के लिए भी छोटे भाई को कोई रंज नहीं हुआ । उन्होंने अपने छोटे बच्चों से कहा कि वे बहादुर बनें और अपने स्वीकृत अभिभावक गांधीजो व जमनालालजी की कृपापूर्ण देख-भाल में सादगी और आत्म-नियंत्रण का सबक लें । परन्तु एक रंज ऐसा था, जिसकी कुछ परछाईं उनके चेहरे पर पड़ी मालूम पड़ती थी । "मेरी बड़ी इच्छा थी कि बंगाल के गाँवों में रहनेवाले गरीब मुसलमानों से मैंने जो वादा किया, मैं उसको पूरा कर सकता । मैंने उनसे वादा किया था कि मैं उनके साथ रहकर उन्हींके बीच काम करूंगा, पर अब मैं वह छोटी-सी सेवा भी नहीं कर सकूँगा।" और कुछ देरतक विषादयुक्त गम्भीरमुद्रा से देखते हुए उन्होंने कहा, "सीमाप्रान्त के बारे में मैं क्या कहूँ, यह मैं नहीं जानता। मैं चाहता हूँ कि मेरी गिरफ़्तारी से उत्तेजित होकर मेरे भाई कोई गड़बड़ न करें । उन्हें शान्ति के साथ इसे बर्दाश्त करना चाहिए और ठण्डे साहस के साथ अपने आन्तरिक मतभेदों को दूर कर संयुक्त होने के शान्त कार्य में जुट पड़ना चाहिए। मुझे इस बात का दुःख है कि जब सब तरह के आक्षेप हमपर किये जा रहे हैं, हमें यह सिद्ध करने का कोई मौक़ा नहीं दिया जाता कि वे सब ग़लत हैं। एक सरकारी रिपोर्ट में मेरे प्रान्त को 'खूनी प्रान्त' कहा गया है, मगर सीधे-सादे अपढ़ पठानों में, और तो और, शिक्षा व समाज-सुधार के अराजनीतिक काम करने तक की हमें क्या सुविधाएँ दी गई हैं ?" परन्तु ज्यों ही बम्बई रवाना होने का समय आया, इस सच्चे खुदाई खिदमतगार के मन से यह रंज भी निकल गया । "मुझे पक्का विश्वास है, " जमनालालजी और उनकी धर्मपत्नी जानकीदेवी से विदा लेते हुए खानसाहब ने कहा, "मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह सब अल्लाह का काम है। उसने मुझे उतने समयतक बाहर रक्खा, जितने के लिए कि उसे बाहर मेरा उपयोग करना था। अब उसकी इच्छा है कि मैं अन्दर रहकर सेवा करूं, तो यही सही। जिसमें वह खुश रहे उसीमें मेरी भी खुशी है ।"
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दिल्ली का लोक नायक जय प्रकाश हॉस्पिटल. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश हॉस्पिटल (LNJP Hospital) में कोरोना संक्रमितों के इलाज के दौरान बरती जा रही बदइंतजामी की खबर सामने आ रही है. जानकारी मिली है कि हॉस्पिटल में मरीजों की सही तरीके से केयर नहीं हो रही है. मरीजों के परिजनों ने हॉस्पिटल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. दरअसल, कहा जा रहा है कि यहां जिंदा लोगों का इलाज करने वाला कोई भी नहीं है. इस कारण मरीजों और उनके परिजन काफी परेशान दिख रहे हैं. मरीजों के परिजनों का आरोप है कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली के इस हॉस्पिटल में कोविड-19 मरीजों का इलाज चल रहा है. लेकिन अव्यवस्था का आलम इस तरह का है कि मरीज काफी परेशान हैं. हॉस्पिटल की लॉबी में मरीज बेहोश पड़े दिख रहे हैं और उल्टियां कर रहे हैं. लेकिन इनकी मदद करने वाला वहां कोई नहीं है. इस कारण कई मरीजों के दिल में खौफ दिख रहा है. इसके अलावा कई वार्डों में लाशें भी दिखाई दे रहीं थीं. दरअसल ये कहानी लोक नायक जय प्रकाश हॉस्पिटल की है. जो कोविड-19 के इलाज के लिए डेडिकेटेड हैं.
गौरतलब है कि दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इस कारण हॉस्पिटलों में संक्रमितों की संख्या में इजाफा हुआ है. वैसे केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार लगातार इस संबंध में पहल की बात कह रही है. लेकिन हालात काफी बदतर दिख रहे हैं.
लोग क्यों नहीं जाते सरकारी हॉस्पिटल में?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां के एक कोरोना पॉजिटिव मरीज के शरीर पर कोई कपड़ा नहीं दिखा. हॉस्पिटल के अंदर वीडियो में मरीज तो दिख रहे थे, लेकिन कोई नर्स नहीं थी. इसके अलावा कॉरिडोर में कई लाशें देखने को मिलीं. वार्ड में पेशेंट को मॉनिटर करते कोई नहीं मिला. इसी कारण शायद लोग सरकारी हॉस्पिटलों में जाने से बचने का प्रयास करते हैं. LNJP हॉस्पिटल के एक कोरोना वार्ड में लाश देखने को मिली. इसी वार्ड में दो मरीज की हालत गंभीर लग रही थी. इसके अलावा वेटिंग एरिया में कई शव देखे गए. जबकि स्ट्रेचर पर चार लाशें दिखाई दे रही थीं. दो और शव कॉरिडोर में देखे गए.
इस हॉस्पिटल में चारों तरफ कुवयवस्था दिख रही थी. यहां कमजोर मरीज गैलरी में पड़े दिख रहे हैं. कई ऐसे पेशेंट दिखें, जिनके बदन पर कपड़े नहीं थे. मॉर्चरी में मौजूद डॉक्टर से लाश की बाबत पूछने पर उन्होंने ज्यादा प्रेशर और कैपेसिटी क्रॉस करने की बात कही.
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क्या 'दंगल', क्या 'पठान'. . . इस धांसू मूवी के सामने सब पड़ जाएंगे फीके! रिलीज से पहले ही कमा लिए 800 करोड़!
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दिल्ली का लोक नायक जय प्रकाश हॉस्पिटल. नई दिल्ली. दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश हॉस्पिटल में कोरोना संक्रमितों के इलाज के दौरान बरती जा रही बदइंतजामी की खबर सामने आ रही है. जानकारी मिली है कि हॉस्पिटल में मरीजों की सही तरीके से केयर नहीं हो रही है. मरीजों के परिजनों ने हॉस्पिटल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. दरअसल, कहा जा रहा है कि यहां जिंदा लोगों का इलाज करने वाला कोई भी नहीं है. इस कारण मरीजों और उनके परिजन काफी परेशान दिख रहे हैं. मरीजों के परिजनों का आरोप है कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली के इस हॉस्पिटल में कोविड-उन्नीस मरीजों का इलाज चल रहा है. लेकिन अव्यवस्था का आलम इस तरह का है कि मरीज काफी परेशान हैं. हॉस्पिटल की लॉबी में मरीज बेहोश पड़े दिख रहे हैं और उल्टियां कर रहे हैं. लेकिन इनकी मदद करने वाला वहां कोई नहीं है. इस कारण कई मरीजों के दिल में खौफ दिख रहा है. इसके अलावा कई वार्डों में लाशें भी दिखाई दे रहीं थीं. दरअसल ये कहानी लोक नायक जय प्रकाश हॉस्पिटल की है. जो कोविड-उन्नीस के इलाज के लिए डेडिकेटेड हैं. गौरतलब है कि दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इस कारण हॉस्पिटलों में संक्रमितों की संख्या में इजाफा हुआ है. वैसे केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार लगातार इस संबंध में पहल की बात कह रही है. लेकिन हालात काफी बदतर दिख रहे हैं. लोग क्यों नहीं जाते सरकारी हॉस्पिटल में? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां के एक कोरोना पॉजिटिव मरीज के शरीर पर कोई कपड़ा नहीं दिखा. हॉस्पिटल के अंदर वीडियो में मरीज तो दिख रहे थे, लेकिन कोई नर्स नहीं थी. इसके अलावा कॉरिडोर में कई लाशें देखने को मिलीं. वार्ड में पेशेंट को मॉनिटर करते कोई नहीं मिला. इसी कारण शायद लोग सरकारी हॉस्पिटलों में जाने से बचने का प्रयास करते हैं. LNJP हॉस्पिटल के एक कोरोना वार्ड में लाश देखने को मिली. इसी वार्ड में दो मरीज की हालत गंभीर लग रही थी. इसके अलावा वेटिंग एरिया में कई शव देखे गए. जबकि स्ट्रेचर पर चार लाशें दिखाई दे रही थीं. दो और शव कॉरिडोर में देखे गए. इस हॉस्पिटल में चारों तरफ कुवयवस्था दिख रही थी. यहां कमजोर मरीज गैलरी में पड़े दिख रहे हैं. कई ऐसे पेशेंट दिखें, जिनके बदन पर कपड़े नहीं थे. मॉर्चरी में मौजूद डॉक्टर से लाश की बाबत पूछने पर उन्होंने ज्यादा प्रेशर और कैपेसिटी क्रॉस करने की बात कही. . क्या 'दंगल', क्या 'पठान'. . . इस धांसू मूवी के सामने सब पड़ जाएंगे फीके! रिलीज से पहले ही कमा लिए आठ सौ करोड़!
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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आगरा। अयोध्या सरयू नदी के गुप्तार घाट पर डूबे पिता ललित को सात वर्षिय बेटी धौर्या बार-बार यादकर रोने लगी। शास्त्रीपुरम ए ब्लॉक परिवार के साथ शनिवार शाम घर पहुंची धौर्या ने पापा को इधर-उधर देखना शुरू किया, जब वह नहीं मिले तो पापा को बुलाने की जिद कर रोने लगी।
गुप्तार घाट पर रेस्क्यू कर धौर्या को बचा लिया गया। लेकिन उसके पापा ललित तेज बहाव में बह गए। बाद में गोताखोरों ने उनको निकाला। गुप्तार घाट पर बेटी धौर्या हादसे के बाद पापा से मिलने की जिद करने लगी, इस पर परिजनों ने बताया कि वह आगरा शास्त्रीपुरम पहुंच चुके हैं। शाम को जब धौर्या को उसके पापा ललित नहीं मिले तो उसने पापा को बुलाने की जिद कर रोना शुरू कर दिया। मेरे पापा को बुलाओ अब वो कैसे आएंगे? , आसपास खड़े लोगों ने बेटी को समझाने का प्रयास कि या, लेकिन वह समझ चुकी थी कि अब उसके पापा इस दुनिया में नहीं हैं।
शास्त्रीपुरम घर पहुंचते ही परिवार के सभी लोग एक दूसरे से लिपट कर रोने लगे। उस समय को कोसने लगे जब वह घर से निकले थे। अशोक की बेटी आरती ने बताया कि मेरे दोनों भाई और मां राजकुमारी तेज बहाव में बह गई, उस दौरान वह भी बचाने को पानी में उतरी थीं, लेकिन पानी के तेज बहाव के कारण उनके पैर उखड़ने लगे और वह कई किलो मीटर दूर चली गई। बाद में उनको रेस्क्यू किया गया।
अशोक गोयल की पुत्री आरती और उनके बेटे नमन को रेस्क्यू कर लिया गया है। जबकि बेटी प्रियांशी की मौत हो गई। अपने नाना के घर पहुंचने पर नमन ने घर में अंदर जाने से इंकार कर दिया और सभी को वापस लाने के लिए जाने लगा। तभी संवेदना व्यक्त करने पहुंचे लोगों ने उसको रोक कर समझाने का प्रयास किया, लेकिन उसने अपनी आंखों के सामने अपनी बहन और मामा, नानी को डूबते देखा था, उसको यकीन नहीं हो रहा था कि अब वह कभी नहीं आएंगे।
सरयू नदी में डूबने से सात लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अभी लापता हैं। अशोक गोयल के नजदीकी सुबवीर ने बताया कि हादसे में मृत लोगों की बॉडी पांच बजे अयोध्या से रवाना कर दी गई। वहीं परिवार के जीवित सदस्य शाम छह बजे पहुंच गए। अयोध्या से सात बॉडी आने से पहले स्थानीय लोगों और रिश्तेदरों ने सोलह वर्फ की सिल्ली, शव को रखा जाएगा। वहीं शवों को अलग-अलग स्थानों पर ले जाने के इंतजाम भी किए हैं। जिसमें अशोक गोयल की बेटी नामनेर, सिकंदरा और शास्त्रीपुरम में रहती हैं। वहां शवों को पहुंचाने के इंतजाम किए हैं।
सरयू नदी में मृत लोगां की अंत्येष्टि के इंतजाम किए गए हैं, परिजनों ने बताया कि रात होने पर सुबह ही शवों का अंतिम संस्कार कराया जाएगा। जिसको लेकर आसपास के लोगों ने इंतजाम किए हैं।
शवों को लेकर सभी इंतजाम किए गए हैं। नामनेर और सिकंदरा में भी शवों को भेजने के लिए वाहनों के इंतजाम किए हैं। रात बारह बजे तक शवों को लाया जा सकता है।
सबसे पहले हादसे की जानकारी मुझे हुई थी, वहीं पुलिस के आने पर मैने बताया कि इस समय परिवार में एक विकलांगबेटा पदमेश है। उनको घटना की जानकारी दी गई।
हादसे से आसपास के घरों में शोक का माहौल है, पिछले चौबीस घंटे में किसी के घर भी खाना नहीं बना है। अशोक गोयल के परिवार में दो बेटे नहीं रहे।
शाम होते ही परिवार के सदस्य एक दूसरे से घंटो बैठकर बात करते थे, राजकुमारी अप्रैल से अयोध्या जाने की बात कर रहीं थीं।
गोयल फैमली में सभी का व्यवहार बहुत अच्छा था, आसपास किसी को अगर कोई परेशानी होती है तो पूरा परिवार सहयोग करता था।
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आगरा। अयोध्या सरयू नदी के गुप्तार घाट पर डूबे पिता ललित को सात वर्षिय बेटी धौर्या बार-बार यादकर रोने लगी। शास्त्रीपुरम ए ब्लॉक परिवार के साथ शनिवार शाम घर पहुंची धौर्या ने पापा को इधर-उधर देखना शुरू किया, जब वह नहीं मिले तो पापा को बुलाने की जिद कर रोने लगी। गुप्तार घाट पर रेस्क्यू कर धौर्या को बचा लिया गया। लेकिन उसके पापा ललित तेज बहाव में बह गए। बाद में गोताखोरों ने उनको निकाला। गुप्तार घाट पर बेटी धौर्या हादसे के बाद पापा से मिलने की जिद करने लगी, इस पर परिजनों ने बताया कि वह आगरा शास्त्रीपुरम पहुंच चुके हैं। शाम को जब धौर्या को उसके पापा ललित नहीं मिले तो उसने पापा को बुलाने की जिद कर रोना शुरू कर दिया। मेरे पापा को बुलाओ अब वो कैसे आएंगे? , आसपास खड़े लोगों ने बेटी को समझाने का प्रयास कि या, लेकिन वह समझ चुकी थी कि अब उसके पापा इस दुनिया में नहीं हैं। शास्त्रीपुरम घर पहुंचते ही परिवार के सभी लोग एक दूसरे से लिपट कर रोने लगे। उस समय को कोसने लगे जब वह घर से निकले थे। अशोक की बेटी आरती ने बताया कि मेरे दोनों भाई और मां राजकुमारी तेज बहाव में बह गई, उस दौरान वह भी बचाने को पानी में उतरी थीं, लेकिन पानी के तेज बहाव के कारण उनके पैर उखड़ने लगे और वह कई किलो मीटर दूर चली गई। बाद में उनको रेस्क्यू किया गया। अशोक गोयल की पुत्री आरती और उनके बेटे नमन को रेस्क्यू कर लिया गया है। जबकि बेटी प्रियांशी की मौत हो गई। अपने नाना के घर पहुंचने पर नमन ने घर में अंदर जाने से इंकार कर दिया और सभी को वापस लाने के लिए जाने लगा। तभी संवेदना व्यक्त करने पहुंचे लोगों ने उसको रोक कर समझाने का प्रयास किया, लेकिन उसने अपनी आंखों के सामने अपनी बहन और मामा, नानी को डूबते देखा था, उसको यकीन नहीं हो रहा था कि अब वह कभी नहीं आएंगे। सरयू नदी में डूबने से सात लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अभी लापता हैं। अशोक गोयल के नजदीकी सुबवीर ने बताया कि हादसे में मृत लोगों की बॉडी पांच बजे अयोध्या से रवाना कर दी गई। वहीं परिवार के जीवित सदस्य शाम छह बजे पहुंच गए। अयोध्या से सात बॉडी आने से पहले स्थानीय लोगों और रिश्तेदरों ने सोलह वर्फ की सिल्ली, शव को रखा जाएगा। वहीं शवों को अलग-अलग स्थानों पर ले जाने के इंतजाम भी किए हैं। जिसमें अशोक गोयल की बेटी नामनेर, सिकंदरा और शास्त्रीपुरम में रहती हैं। वहां शवों को पहुंचाने के इंतजाम किए हैं। सरयू नदी में मृत लोगां की अंत्येष्टि के इंतजाम किए गए हैं, परिजनों ने बताया कि रात होने पर सुबह ही शवों का अंतिम संस्कार कराया जाएगा। जिसको लेकर आसपास के लोगों ने इंतजाम किए हैं। शवों को लेकर सभी इंतजाम किए गए हैं। नामनेर और सिकंदरा में भी शवों को भेजने के लिए वाहनों के इंतजाम किए हैं। रात बारह बजे तक शवों को लाया जा सकता है। सबसे पहले हादसे की जानकारी मुझे हुई थी, वहीं पुलिस के आने पर मैने बताया कि इस समय परिवार में एक विकलांगबेटा पदमेश है। उनको घटना की जानकारी दी गई। हादसे से आसपास के घरों में शोक का माहौल है, पिछले चौबीस घंटे में किसी के घर भी खाना नहीं बना है। अशोक गोयल के परिवार में दो बेटे नहीं रहे। शाम होते ही परिवार के सदस्य एक दूसरे से घंटो बैठकर बात करते थे, राजकुमारी अप्रैल से अयोध्या जाने की बात कर रहीं थीं। गोयल फैमली में सभी का व्यवहार बहुत अच्छा था, आसपास किसी को अगर कोई परेशानी होती है तो पूरा परिवार सहयोग करता था।
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विश्वास न्यूज की जांच में वायरल पोस्ट फर्जी साबित हुई। 2014 में कोलकाता में हुई नरेंद्र मोदी की एक रैली की तस्वीर को अब बिहार चुनाव में योगी आदित्यनाथ की रैली की फोटो बताकर वायरल किया जा रहा है।
नई दिल्ली (Vishvas News)। बिहार चुनाव के दरमियान सोशल मीडिया में एक फर्जी पोस्ट वायरल हो रही है। इस पोस्ट के जरिए दावा किया जा रहा है कि वायरल तस्वीर योगी आदित्यनाथ की रैली का है।
विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्ट की बारीकी से जांच की। हमें पता चला कि वायरल तस्वीर का बिहार में योगी आदित्यनाथ की रैली से कोई संबंध नहीं है। 2014 में कोलकाता में नरेंद्र मोदी की एक रैली हुई थी। तस्वीर उसी रैली की है। इसे अब बिहार चुनाव में वायरल किया जा रहा है।
फेसबुक पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन देखें।
इस तस्वीर को दूसरे यूजर्स भी सच मानकर वायरल कर रहे हैं।
विश्वास न्यूज ने सबसे पहले वायरल हो रही तस्वीर को ध्यान से देखा। इसे देखकर ही अंदाजा लग गया कि तस्वीर काफी पुरानी है। फोटो की क्वालिटी काफी खराब थी। इसके बाद हमने वायरल तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज टूल में अपलोड करके सर्च किया। हमें सबसे पुरानी तस्वीर देशगुजरात नाम की एक वेबसाइट पर मिली। 5 फरवरी 2014 को अपलोड एक खबर में इस तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था। खबर में दावा किया गया कि तस्वीर 2014 में कोलकाता में हुई नरेंद्र मोदी की रैली की है। पूरी खबर आप यहां पढ़ सकते हैं।
'नरेंद्र मोदी की 2014 में कोलकाता में रैली' जैसे कीवर्ड की मदद से हमें कोलकाता में पांच फरवरी 2014 को हुई रैली की खबर मिली। newsx.com ने अपने यूट्यूब चैनल पर संबंधित खबर को अपलोड किया था।
इसके बाद हमने फोटो एजेंसी की वेबसाइट को खंगालने का निर्णय लिया। गेट्टी फोटो की वेबसाइट पर हमने अलग-अलग कीवर्ड टाइप करके 5 फरवरी 2014 की टाइमलाइन सेट की। हमें आखिरकार मोदी की कोलकाता रैली की तस्वीरें मिल ही गईं। इन तस्वीर को जब हमने अब वायरल हो रही तस्वीर से मिलाया तो हमें कई समानताएं नजर आईं। तस्वीर में दिख रहे साइड स्टेज की कारपेट दोनों में हमें हरे रंग की नजर आई। इसके अलावा इस मंच के पीछे बने स्पेस के टेंट का नीला रंग दोनों तस्वीर में नजर आया।
पड़ताल के अगले चरण में गूगल सर्च के दौरान हमें पता चला कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भाजपा ने बिहार चुनाव में स्टार प्रचारक बनाया है। 20 अक्टूबर से उन्होंने प्रचार की शुरुआत कर दी है। वे बिहार में अब तक कई रैलियां कर चुके हैं, लेकिन वायरल तस्वीर उनकी रैली की नहीं है।
वायरल तस्वीर को लेकर हमने दैनिक जागरण के बिहार के डिजिटल प्रभारी अमित आलोक से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि योगी आदित्यनाथ की रैलियां बिहार में चालू हो चुकी हैं, लेकिन वायरल तस्वीर उनकी किसी भी रैली की नहीं है।
अंत में हमने फर्जी पोस्ट करने वाले यूजर के अकाउंट की जांच की। हमें पता चला कि यूजर एक विचारधारा विशेष से प्रभावित है। इसके अकाउंट से हमें ज्यादा जानकारी नहीं मिल सकी।
निष्कर्षः विश्वास न्यूज की जांच में वायरल पोस्ट फर्जी साबित हुई। 2014 में कोलकाता में हुई नरेंद्र मोदी की एक रैली की तस्वीर को अब बिहार चुनाव में योगी आदित्यनाथ की रैली की फोटो बताकर वायरल किया जा रहा है।
कॉरपोरेट और राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर सत्ता को हमेशा आइना दिखाने वाली फैक्ट चेक जर्नलिज्म सिर्फ और सिर्फ आपके सहयोग से संभव है। इस मुहिम में हमें आपके साथ और सहयोगी की जरूरत है। फर्जी और गुमराह करने वाली खबर के खिलाफ जारी इस लड़ाई में हमारी मदद करें और कृपया हमें आर्थिक सहयोग दें।
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विश्वास न्यूज की जांच में वायरल पोस्ट फर्जी साबित हुई। दो हज़ार चौदह में कोलकाता में हुई नरेंद्र मोदी की एक रैली की तस्वीर को अब बिहार चुनाव में योगी आदित्यनाथ की रैली की फोटो बताकर वायरल किया जा रहा है। नई दिल्ली । बिहार चुनाव के दरमियान सोशल मीडिया में एक फर्जी पोस्ट वायरल हो रही है। इस पोस्ट के जरिए दावा किया जा रहा है कि वायरल तस्वीर योगी आदित्यनाथ की रैली का है। विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्ट की बारीकी से जांच की। हमें पता चला कि वायरल तस्वीर का बिहार में योगी आदित्यनाथ की रैली से कोई संबंध नहीं है। दो हज़ार चौदह में कोलकाता में नरेंद्र मोदी की एक रैली हुई थी। तस्वीर उसी रैली की है। इसे अब बिहार चुनाव में वायरल किया जा रहा है। फेसबुक पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन देखें। इस तस्वीर को दूसरे यूजर्स भी सच मानकर वायरल कर रहे हैं। विश्वास न्यूज ने सबसे पहले वायरल हो रही तस्वीर को ध्यान से देखा। इसे देखकर ही अंदाजा लग गया कि तस्वीर काफी पुरानी है। फोटो की क्वालिटी काफी खराब थी। इसके बाद हमने वायरल तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज टूल में अपलोड करके सर्च किया। हमें सबसे पुरानी तस्वीर देशगुजरात नाम की एक वेबसाइट पर मिली। पाँच फरवरी दो हज़ार चौदह को अपलोड एक खबर में इस तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था। खबर में दावा किया गया कि तस्वीर दो हज़ार चौदह में कोलकाता में हुई नरेंद्र मोदी की रैली की है। पूरी खबर आप यहां पढ़ सकते हैं। 'नरेंद्र मोदी की दो हज़ार चौदह में कोलकाता में रैली' जैसे कीवर्ड की मदद से हमें कोलकाता में पांच फरवरी दो हज़ार चौदह को हुई रैली की खबर मिली। newsx.com ने अपने यूट्यूब चैनल पर संबंधित खबर को अपलोड किया था। इसके बाद हमने फोटो एजेंसी की वेबसाइट को खंगालने का निर्णय लिया। गेट्टी फोटो की वेबसाइट पर हमने अलग-अलग कीवर्ड टाइप करके पाँच फरवरी दो हज़ार चौदह की टाइमलाइन सेट की। हमें आखिरकार मोदी की कोलकाता रैली की तस्वीरें मिल ही गईं। इन तस्वीर को जब हमने अब वायरल हो रही तस्वीर से मिलाया तो हमें कई समानताएं नजर आईं। तस्वीर में दिख रहे साइड स्टेज की कारपेट दोनों में हमें हरे रंग की नजर आई। इसके अलावा इस मंच के पीछे बने स्पेस के टेंट का नीला रंग दोनों तस्वीर में नजर आया। पड़ताल के अगले चरण में गूगल सर्च के दौरान हमें पता चला कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भाजपा ने बिहार चुनाव में स्टार प्रचारक बनाया है। बीस अक्टूबर से उन्होंने प्रचार की शुरुआत कर दी है। वे बिहार में अब तक कई रैलियां कर चुके हैं, लेकिन वायरल तस्वीर उनकी रैली की नहीं है। वायरल तस्वीर को लेकर हमने दैनिक जागरण के बिहार के डिजिटल प्रभारी अमित आलोक से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि योगी आदित्यनाथ की रैलियां बिहार में चालू हो चुकी हैं, लेकिन वायरल तस्वीर उनकी किसी भी रैली की नहीं है। अंत में हमने फर्जी पोस्ट करने वाले यूजर के अकाउंट की जांच की। हमें पता चला कि यूजर एक विचारधारा विशेष से प्रभावित है। इसके अकाउंट से हमें ज्यादा जानकारी नहीं मिल सकी। निष्कर्षः विश्वास न्यूज की जांच में वायरल पोस्ट फर्जी साबित हुई। दो हज़ार चौदह में कोलकाता में हुई नरेंद्र मोदी की एक रैली की तस्वीर को अब बिहार चुनाव में योगी आदित्यनाथ की रैली की फोटो बताकर वायरल किया जा रहा है। कॉरपोरेट और राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर सत्ता को हमेशा आइना दिखाने वाली फैक्ट चेक जर्नलिज्म सिर्फ और सिर्फ आपके सहयोग से संभव है। इस मुहिम में हमें आपके साथ और सहयोगी की जरूरत है। फर्जी और गुमराह करने वाली खबर के खिलाफ जारी इस लड़ाई में हमारी मदद करें और कृपया हमें आर्थिक सहयोग दें।
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ईडी यूपीए सरकार वित्त मंत्रालय के कामकाज की जांच करेगा। गौरतलब है कि FIPB को प्रभावित करने केआरोप में कार्ति चिदंबरम को न्यायिक हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है।
नई दिल्ली, 6 मार्च; कार्ति चिदंबरम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड ( FIPB) के पूर्व सदस्यों के साथ पूछताछ करने की योजना बनाई है। ईडी की इस कार्रवाई से जांच यूपीए सरकार तक पहुंच जाएगा। ईडी यूपीए सरकार के वित्त मंत्रालय के कामकाज की जांच करेगा। गौरतलब है कि FIPB को प्रभावित करने के आरोप में कार्ति चिदंबरम को न्यायिक हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है। सुप्रीम कोर्ट कार्ति चिदंबरम की याचिका पर आज (6 मार्च) को सुनवाई भी कर सकता है।
इकनॉमिक टाइम्स के आईएनएक्स मीडिया के जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में अब तक आधा दर्जन से ज्यादा नोटिस भेजे जा चुके हैं, जो उस वक्त FIPB से जुड़े हुए थे। ये सारे नोटिस तकरीबन उस वक्त गए थे, जब आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश में मंजूरी मिली थी। अधिकारी ने यह भी बताया कि जांच एजेंसियों ने इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी की कंपनी आईएनएक्स मीडिया को मिली एफआईपीबी की मंजूरी की जांच-पड़ताल के लिए भी नोटिस भेजा था।
एफआईआर में अज्ञात एफआईपीबी मेंबर्स और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के नाम होने से प्रवर्तन निदेशालय (ED) को इस केस को सुलझाने में काफी मदद मिलेगी। हालांकि जांच एजेंसियों ने नोटिस भेजे गए मंत्रियों के नाम उजागर नहीं किए हैं। बता दें कि एफआईपीबी को पिछले साल 2017 में ही भंग कर दिया गया था। आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव इसके हेड हुआ करते थे। ये डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी ऐंड प्रमोशन( DIPP) और वाणिज्य और विदेश मंत्रालयों का भी प्रतिनिधित्व किया करता था।
वहीं, 5 मार्च को ईडी के अफसरों ने दावा किया है कि कार्ति चिदंबरम ने किसी बड़े नेता के बैंक अकाउंट में 1. 8 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। ईडी के अफसरों के मुताबिक इस रकम को रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड की चेन्नै स्थित शाखा में ट्रांसफर किया गया था। गौरतलब है कि आईएनएक्स मीडिया घोटाला मामले में फिलहाल कार्ति चिदंबरम सीबीआई कस्टडी में हैं। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने ईडी के समन को रद्द करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है। कार्ति को सीबीआई ने 28 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। उन पर पीटर और इंद्राणी मुखर्जी के आईएनएक्स (INX) मीडिया से रिश्वत लेने का आरोप है।
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ईडी यूपीए सरकार वित्त मंत्रालय के कामकाज की जांच करेगा। गौरतलब है कि FIPB को प्रभावित करने केआरोप में कार्ति चिदंबरम को न्यायिक हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है। नई दिल्ली, छः मार्च; कार्ति चिदंबरम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने फॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड के पूर्व सदस्यों के साथ पूछताछ करने की योजना बनाई है। ईडी की इस कार्रवाई से जांच यूपीए सरकार तक पहुंच जाएगा। ईडी यूपीए सरकार के वित्त मंत्रालय के कामकाज की जांच करेगा। गौरतलब है कि FIPB को प्रभावित करने के आरोप में कार्ति चिदंबरम को न्यायिक हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है। सुप्रीम कोर्ट कार्ति चिदंबरम की याचिका पर आज को सुनवाई भी कर सकता है। इकनॉमिक टाइम्स के आईएनएक्स मीडिया के जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में अब तक आधा दर्जन से ज्यादा नोटिस भेजे जा चुके हैं, जो उस वक्त FIPB से जुड़े हुए थे। ये सारे नोटिस तकरीबन उस वक्त गए थे, जब आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश में मंजूरी मिली थी। अधिकारी ने यह भी बताया कि जांच एजेंसियों ने इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी की कंपनी आईएनएक्स मीडिया को मिली एफआईपीबी की मंजूरी की जांच-पड़ताल के लिए भी नोटिस भेजा था। एफआईआर में अज्ञात एफआईपीबी मेंबर्स और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के नाम होने से प्रवर्तन निदेशालय को इस केस को सुलझाने में काफी मदद मिलेगी। हालांकि जांच एजेंसियों ने नोटिस भेजे गए मंत्रियों के नाम उजागर नहीं किए हैं। बता दें कि एफआईपीबी को पिछले साल दो हज़ार सत्रह में ही भंग कर दिया गया था। आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव इसके हेड हुआ करते थे। ये डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी ऐंड प्रमोशन और वाणिज्य और विदेश मंत्रालयों का भी प्रतिनिधित्व किया करता था। वहीं, पाँच मार्च को ईडी के अफसरों ने दावा किया है कि कार्ति चिदंबरम ने किसी बड़े नेता के बैंक अकाउंट में एक. आठ करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। ईडी के अफसरों के मुताबिक इस रकम को रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड की चेन्नै स्थित शाखा में ट्रांसफर किया गया था। गौरतलब है कि आईएनएक्स मीडिया घोटाला मामले में फिलहाल कार्ति चिदंबरम सीबीआई कस्टडी में हैं। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने ईडी के समन को रद्द करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है। कार्ति को सीबीआई ने अट्ठाईस फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। उन पर पीटर और इंद्राणी मुखर्जी के आईएनएक्स मीडिया से रिश्वत लेने का आरोप है।
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Increasing your ear power: A program for effective listening
• Listening to culture's influence
• Dialogic listening-awareness of what happens between people as they respond to each other
हम एक दूसरे विषय में बढ़ते हैं जिस पर मैं आपके साथ बात करना चाहूंगी जिसको संवाद सुनना [ dialogic listening ] कहा जाता है इसको एक जागरूकता के रूप में परिभाषित करना होगा कि लोगों के बीच में क्या होता है क्योंकि वह एक दूसरे को प्रतिक्रिया देते हैं प्रतिक्रिया मतलब संवाद साझा किए जा रहे हैं। दो लोगों में शब्दों के रूप में संवाद होते हैं या एक दूसरे के साथ चर्चा या बातचीत होती है।
भारत भारत
Refer Slide Time 34.52
• Listening is a deliberate process through which we
seek to understand and retain aural stimuli.
• The average person listens at only 45 percent efficiency.
Understanding and using the listening level-energy
involvement scale can help us develop more effective listening skills.
• A prerequisite of effective listening is effective feedback.
वास्तव में उनके बीच में जो हो रहा है उसे तार्किक श्रवण के रूप में परिभाषित किया गया है क्योंकि दोनों विभिन्न बिंदुओं में एक दूसरे को प्रतिक्रिया कर रहे हैं। आइए अभी तक हमने जो पढ़ा है उसका संक्षेप में वर्णन करते हैं सबसे पहले हमने यह सीखा कि सुनना एक जानबूझकर की जाने वाली प्रक्रिया है, यह अनैच्छिक नहीं है । यह एक ऐसी जानबूझकर की जाने वाली प्रक्रिया है जिसके द्वारा हम मौखिक उत्तेजना को समझना और बरकरार रखना चाहते हैं जोकि कानो द्वारा प्रवेश करती है। नंबर दो एक औसत व्यक्ति जो कि शोध व उसके सुझाव या प्रस्ताव पर आधारित है औसत व्यक्ति में केवल 45% सुनने की दक्षता होती है इसका मतलब है कि हमें अभी भी लंबा सीखना है और हम अपने सुनने के कौशल को बढ़ाने के लिए एक कार्यक्रम पर काम कर सकते हैं ।
नंबर 3 लिसनिंग लेवल एनर्जी इंवॉल्वमेंट स्केल [ listening level energy involvement scale ] को समझना और प्रयोग करना हमें ज्यादा प्रभावी ढंग से सुनने के कौशल को विकसित करने में मदद कर सकता है। दूसरे शब्दों में, आप की आंतरिक ऊर्जा कितनी है, सुनने की प्रक्रिया में आप वास्तव में कितना संलग्न है, आपको बेहतर श्रोता बनने में मदद कर सकता है, और चौथे नंबर पर यहां, यह है कि आपको यह साबित करने के लिए कि आप एक प्रभावित श्रोता रहे हैं उचित प्रक्रिया देनी चाहिए।
Refer Slide Time 36.06
• Feedback consist of all the verbal and nonverbal messages that a person consciously or unconsciously sends out in response to another person's communication.
• Improve your listening skills by learning to focus your attention while listening and by setting appropriate listening goals.
• Recognizing how culture, gender, and technology
influence listening skills may further enhance our ability to develop more effective listening practices.
सिक्षित भारत उजत भारत
प्रतिक्रिया में क्या होता है ? प्रतिक्रिया के अंतर्गत सभी शाब्दिक और अशाब्दिक संदेश आते हैं जो व्यक्ति चेतन अचेतन रूप से संचारक के संचार के जवाब में भेजता है।
हमने इस पर भी बात की है कि अपने सुनने की कला को बेहतर कैसे किया जाए। ध्यान देना सीख कर और अपने खुद के लिए एक उचित उद्देश्य बनाकर क्योंकि एक अच्छा श्रोता बनने के प्रयास में हम लगे हैं। जो हमने अपने व्याख्यान में शामिल किया था वह वह संस्कृति, व तकनीकी परिप्रेक्ष्य को समझना है और क तरह से यह तीन संप्रत्य सुनने की कला को प्रभावित करते हैं। इसलिए इन तीनों की समझ एक अच्छी सुनने की कला को विकसित करने की हमारी क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करेगी ।
Refer Slide Time 3705
Selected References:
Understanding Human Communication - Adler & Rodman, OUP: 2003
Skills Development for Business & Management Students - Kevin Gallagher, 2001: OUP Listening Skills - lan Mackay, 2000
Communication Works- Gamble and Gamble,
5. The Effective Communicator - John Adair, Jaico
Pub. House: 2004 www.youtube.com
सिक्षित भारत भारत
कुछ संदर्भ है जिनका प्रयोग मैंने इस व्याख्यान को बनाने में किया था और मेरे साथ रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, हम जल्द ही फिर से मिलेंगे।
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Increasing your ear power: A program for effective listening • Listening to culture's influence • Dialogic listening-awareness of what happens between people as they respond to each other हम एक दूसरे विषय में बढ़ते हैं जिस पर मैं आपके साथ बात करना चाहूंगी जिसको संवाद सुनना [ dialogic listening ] कहा जाता है इसको एक जागरूकता के रूप में परिभाषित करना होगा कि लोगों के बीच में क्या होता है क्योंकि वह एक दूसरे को प्रतिक्रिया देते हैं प्रतिक्रिया मतलब संवाद साझा किए जा रहे हैं। दो लोगों में शब्दों के रूप में संवाद होते हैं या एक दूसरे के साथ चर्चा या बातचीत होती है। भारत भारत Refer Slide Time चौंतीस.बावन • Listening is a deliberate process through which we seek to understand and retain aural stimuli. • The average person listens at only पैंतालीस percent efficiency. Understanding and using the listening level-energy involvement scale can help us develop more effective listening skills. • A prerequisite of effective listening is effective feedback. वास्तव में उनके बीच में जो हो रहा है उसे तार्किक श्रवण के रूप में परिभाषित किया गया है क्योंकि दोनों विभिन्न बिंदुओं में एक दूसरे को प्रतिक्रिया कर रहे हैं। आइए अभी तक हमने जो पढ़ा है उसका संक्षेप में वर्णन करते हैं सबसे पहले हमने यह सीखा कि सुनना एक जानबूझकर की जाने वाली प्रक्रिया है, यह अनैच्छिक नहीं है । यह एक ऐसी जानबूझकर की जाने वाली प्रक्रिया है जिसके द्वारा हम मौखिक उत्तेजना को समझना और बरकरार रखना चाहते हैं जोकि कानो द्वारा प्रवेश करती है। नंबर दो एक औसत व्यक्ति जो कि शोध व उसके सुझाव या प्रस्ताव पर आधारित है औसत व्यक्ति में केवल पैंतालीस% सुनने की दक्षता होती है इसका मतलब है कि हमें अभी भी लंबा सीखना है और हम अपने सुनने के कौशल को बढ़ाने के लिए एक कार्यक्रम पर काम कर सकते हैं । नंबर तीन लिसनिंग लेवल एनर्जी इंवॉल्वमेंट स्केल [ listening level energy involvement scale ] को समझना और प्रयोग करना हमें ज्यादा प्रभावी ढंग से सुनने के कौशल को विकसित करने में मदद कर सकता है। दूसरे शब्दों में, आप की आंतरिक ऊर्जा कितनी है, सुनने की प्रक्रिया में आप वास्तव में कितना संलग्न है, आपको बेहतर श्रोता बनने में मदद कर सकता है, और चौथे नंबर पर यहां, यह है कि आपको यह साबित करने के लिए कि आप एक प्रभावित श्रोता रहे हैं उचित प्रक्रिया देनी चाहिए। Refer Slide Time छत्तीस.छः • Feedback consist of all the verbal and nonverbal messages that a person consciously or unconsciously sends out in response to another person's communication. • Improve your listening skills by learning to focus your attention while listening and by setting appropriate listening goals. • Recognizing how culture, gender, and technology influence listening skills may further enhance our ability to develop more effective listening practices. सिक्षित भारत उजत भारत प्रतिक्रिया में क्या होता है ? प्रतिक्रिया के अंतर्गत सभी शाब्दिक और अशाब्दिक संदेश आते हैं जो व्यक्ति चेतन अचेतन रूप से संचारक के संचार के जवाब में भेजता है। हमने इस पर भी बात की है कि अपने सुनने की कला को बेहतर कैसे किया जाए। ध्यान देना सीख कर और अपने खुद के लिए एक उचित उद्देश्य बनाकर क्योंकि एक अच्छा श्रोता बनने के प्रयास में हम लगे हैं। जो हमने अपने व्याख्यान में शामिल किया था वह वह संस्कृति, व तकनीकी परिप्रेक्ष्य को समझना है और क तरह से यह तीन संप्रत्य सुनने की कला को प्रभावित करते हैं। इसलिए इन तीनों की समझ एक अच्छी सुनने की कला को विकसित करने की हमारी क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करेगी । Refer Slide Time तीन हज़ार सात सौ पाँच Selected References: Understanding Human Communication - Adler & Rodman, OUP: दो हज़ार तीन Skills Development for Business & Management Students - Kevin Gallagher, दो हज़ार एक: OUP Listening Skills - lan Mackay, दो हज़ार Communication Works- Gamble and Gamble, पाँच. The Effective Communicator - John Adair, Jaico Pub. House: दो हज़ार चार www.youtube.com सिक्षित भारत भारत कुछ संदर्भ है जिनका प्रयोग मैंने इस व्याख्यान को बनाने में किया था और मेरे साथ रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, हम जल्द ही फिर से मिलेंगे।
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Bangladesh beat Zimbabwe लिटन दास की शतकीय पारी के दम पर बांग्लादेश ने वनडे क्रिकेट में रन के आधार पर सबसे बड़ी जीत दर्ज की।
नई दिल्ली, जेएनएन। Ban vs Zim: Bangladesh biggest win in ODI बांग्लादेश की टीम ने जिम्बाब्वे को पहले वनडे मैच में 169 रन के बड़े अंतर से हराया। बांग्लादेश टीम की जीत के हीरो लिटन दास रहे जिन्होंने शतकीय पारी खेली और रिटायर हर्ट होकर पवेलियन लौटे। वनडे क्रिकेट इतिहास में रनों के लिहाज से ये बांग्लादेश क्रिकेट टीम की सबसे बड़ी जीत साबित हुई। इस मैच में लिटन दास को उनकी शानदार पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया जिनकी पारी की बदौलत जिम्बाब्वे के खिलाफ इस टीम ने 50 ओवर में 6 विकेट पर 321 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।
जिम्बाब्वे की टीम को 322 रन का टारगेट जीत के लिए मिला था, लेकिन ये टीम 39. 1 ओवर में 152 रन पर ऑल आउट हो गई। बांग्लादेश के गेंदबाजों की गेंदबाजी भी काफी अच्छी रही और उनके सामने जिम्बाब्वे के बल्लेबाज जीत के लक्ष्य तक पहुंचने में नाकाम रहे।
इस मैच में बांग्लादेश ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और ओपनर बल्लेबाज लिटन दास ने 105 गेंदों पर 126 रन बनाकर टीम को मजबूत आधार दिया। लिटन दास ने अपनी पारी में 13 चौके व 2 छक्के लगाए और रिटायर हर्ट हो गए। बांग्लादेश की तरफ से मो. मिथुन ने भी अर्धशतकीय पारी खेली और 50 रन का योगदान दिया तो वहीं महमुदूल्लाह ने 32 रन की पारी खेली।
बांग्लादेश ने वनडे क्रिकेट में अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए जिम्बाब्वे को 169 रन के बड़े अंतर से हराया। इससे पहले वनडे में बांग्लादेश ने सबसे बड़ी जीत साल 2018 में श्रीलंका के खिलाफ दर्ज की थी और उसे 163 रन से हराया था। रन के मामले में ये बांग्लादेश की सबसे बड़ी जीत साबित हुई।
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Bangladesh beat Zimbabwe लिटन दास की शतकीय पारी के दम पर बांग्लादेश ने वनडे क्रिकेट में रन के आधार पर सबसे बड़ी जीत दर्ज की। नई दिल्ली, जेएनएन। Ban vs Zim: Bangladesh biggest win in ODI बांग्लादेश की टीम ने जिम्बाब्वे को पहले वनडे मैच में एक सौ उनहत्तर रन के बड़े अंतर से हराया। बांग्लादेश टीम की जीत के हीरो लिटन दास रहे जिन्होंने शतकीय पारी खेली और रिटायर हर्ट होकर पवेलियन लौटे। वनडे क्रिकेट इतिहास में रनों के लिहाज से ये बांग्लादेश क्रिकेट टीम की सबसे बड़ी जीत साबित हुई। इस मैच में लिटन दास को उनकी शानदार पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया जिनकी पारी की बदौलत जिम्बाब्वे के खिलाफ इस टीम ने पचास ओवर में छः विकेट पर तीन सौ इक्कीस रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जिम्बाब्वे की टीम को तीन सौ बाईस रन का टारगेट जीत के लिए मिला था, लेकिन ये टीम उनतालीस. एक ओवर में एक सौ बावन रन पर ऑल आउट हो गई। बांग्लादेश के गेंदबाजों की गेंदबाजी भी काफी अच्छी रही और उनके सामने जिम्बाब्वे के बल्लेबाज जीत के लक्ष्य तक पहुंचने में नाकाम रहे। इस मैच में बांग्लादेश ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और ओपनर बल्लेबाज लिटन दास ने एक सौ पाँच गेंदों पर एक सौ छब्बीस रन बनाकर टीम को मजबूत आधार दिया। लिटन दास ने अपनी पारी में तेरह चौके व दो छक्के लगाए और रिटायर हर्ट हो गए। बांग्लादेश की तरफ से मो. मिथुन ने भी अर्धशतकीय पारी खेली और पचास रन का योगदान दिया तो वहीं महमुदूल्लाह ने बत्तीस रन की पारी खेली। बांग्लादेश ने वनडे क्रिकेट में अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए जिम्बाब्वे को एक सौ उनहत्तर रन के बड़े अंतर से हराया। इससे पहले वनडे में बांग्लादेश ने सबसे बड़ी जीत साल दो हज़ार अट्ठारह में श्रीलंका के खिलाफ दर्ज की थी और उसे एक सौ तिरेसठ रन से हराया था। रन के मामले में ये बांग्लादेश की सबसे बड़ी जीत साबित हुई।
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अमरिया तहसील क्षेत्र में आज शासन के आदेश के बाद राजस्व विभाग, शिक्षा विभाग, विकास विभाग की संयुक्त टीम ने मदरसों का सत्यापन किया गया है। सत्यापन में मदरसा संचालकों से मान्यता प्राप्त राज्य सरकार द्वारा कितने लोगों का वेतन आ रहा है। इसके बारे में जानकारी ली गई है। बिल्डिंग किराए पर है या मदरसों के नाम में है। इसके बारे में भी मदरसा चलाने वाले संचालकों से जानकारी जुटाई गई है। मानको जांचने के लिए टीम द्वारा अभियान चलाया गया है।
तहसील क्षेत्र में आज शासन के आदेश के बाद मदरसों को चेक किया गया है। क्षेत्र में 3 सदस्यी टीम ने आज मदरसों में पहुंचकर सत्यापन किया है। जिसमें नायब तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह, खंड विकास अधिकारी नेम चंद्र, खंड शिक्षा अधिकारी राम सक्सेना ने तहसील क्षेत्र के मदरसा हबीब रजा मदरसा, ताहिरा फातिमा मदरसा, मदीना तुल उलूम मदरसा, फैजुल उलूम कादरिया में पहुंचकर मदरसों के अभिलेखों को चेक किया गया है।
मदरसों में पहुंचकर अधिकारियों ने मानकों को भी चेक किया है। अधिकारियों ने कितनी क्लास तक मदरसे में कक्षाएं चलाई जा रही है। उसको लेकर भी जानकारी जुटाई है। बिल्डिंग में कितने क्लास रूम बनाए गए हैं। इसको लेकर भी अभिलेख लिए गए हैं। बिल्डिंग कितने वर्ग मीटर में बनाकर मदरसा संचालित किया जा रहा है। इसकी भी जानकारी ली गई है।
मदरसे में कितने टीचर राज्य सरकार से वेतन ले रहे हैं। इसके भी जांच की गई है। मदरसों के सत्यापन को लेकर शासन से निर्देश आने के बाद 3 सदस्य टीम ने क्षेत्र के 3 मदरसों में पहुंचकर जांच की है। टीम ने मदरसा संचालकों से मानता प्राप्त की कॉपी भी ली गई है। अस्थाई मान्यता प्राप्त है या स्थाई मानता प्राप्त है, इसकी भी जांच पड़ताल की जा रही है।
तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह ने बताया के शासन के आदेश के बाद मदरसों का सत्यापन किया जा रहा है। तहसील क्षेत्र में सभी मदरसों में पहुंचकर टीम जांच कर रही है।
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अमरिया तहसील क्षेत्र में आज शासन के आदेश के बाद राजस्व विभाग, शिक्षा विभाग, विकास विभाग की संयुक्त टीम ने मदरसों का सत्यापन किया गया है। सत्यापन में मदरसा संचालकों से मान्यता प्राप्त राज्य सरकार द्वारा कितने लोगों का वेतन आ रहा है। इसके बारे में जानकारी ली गई है। बिल्डिंग किराए पर है या मदरसों के नाम में है। इसके बारे में भी मदरसा चलाने वाले संचालकों से जानकारी जुटाई गई है। मानको जांचने के लिए टीम द्वारा अभियान चलाया गया है। तहसील क्षेत्र में आज शासन के आदेश के बाद मदरसों को चेक किया गया है। क्षेत्र में तीन सदस्यी टीम ने आज मदरसों में पहुंचकर सत्यापन किया है। जिसमें नायब तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह, खंड विकास अधिकारी नेम चंद्र, खंड शिक्षा अधिकारी राम सक्सेना ने तहसील क्षेत्र के मदरसा हबीब रजा मदरसा, ताहिरा फातिमा मदरसा, मदीना तुल उलूम मदरसा, फैजुल उलूम कादरिया में पहुंचकर मदरसों के अभिलेखों को चेक किया गया है। मदरसों में पहुंचकर अधिकारियों ने मानकों को भी चेक किया है। अधिकारियों ने कितनी क्लास तक मदरसे में कक्षाएं चलाई जा रही है। उसको लेकर भी जानकारी जुटाई है। बिल्डिंग में कितने क्लास रूम बनाए गए हैं। इसको लेकर भी अभिलेख लिए गए हैं। बिल्डिंग कितने वर्ग मीटर में बनाकर मदरसा संचालित किया जा रहा है। इसकी भी जानकारी ली गई है। मदरसे में कितने टीचर राज्य सरकार से वेतन ले रहे हैं। इसके भी जांच की गई है। मदरसों के सत्यापन को लेकर शासन से निर्देश आने के बाद तीन सदस्य टीम ने क्षेत्र के तीन मदरसों में पहुंचकर जांच की है। टीम ने मदरसा संचालकों से मानता प्राप्त की कॉपी भी ली गई है। अस्थाई मान्यता प्राप्त है या स्थाई मानता प्राप्त है, इसकी भी जांच पड़ताल की जा रही है। तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह ने बताया के शासन के आदेश के बाद मदरसों का सत्यापन किया जा रहा है। तहसील क्षेत्र में सभी मदरसों में पहुंचकर टीम जांच कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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गर्मियों के मौसम में जब कभी आप बिना बाजू के ब्लाउज या कोई अन्य परिधान पहने तो इस बात का अवश्य ख्याल रखे कि बगलों के बाल साफ़ हों, फिर आप निसंकोच स्लीव लेस परिधान पहन सकती है, और तब ये आपकी फैशन व अभिरुचि का परिचय भी देगा. इसीलिए आवश्यक है कि रोजाना नहाते समय बगल को भी साबुन लगाकर अच्छे से साफ़ करें ताकि बगल में मैल व दुर्गन्ध बसी न रहे.
यदि गुप्तांग की बात की जाए तो यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि यहाँ की त्वचा कितनी कोमल होती है. गुप्तांग की नाजुकता व कोमलता किसी से छुपी नहीं है. यहाँ पर हलकी सी चोट लगने पर भी व्यक्ति के प्राणों पर बन आती है, अर्थात व्यक्ति के प्राण भी ले सकती है.
इसलिए गुप्तांग की सुरक्षा के लिए ही प्रक्रति ने इस पर बालों की गद्दी बनाई है, जो हमारे गुप्तांगों की रक्षा करते है. हाँ, गर्मियों के दिनों में पसीने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है, ऐसे में इस परेशानी के बचने के लिए आप इन बालों को साफ कर सकती है. परन्तु गुप्तांगो के बाल साफ करने के लिए आप हेयर रेमुविंग क्रीम का ही प्रयोग तो अधिक बेहतर होगा.
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गर्मियों के मौसम में जब कभी आप बिना बाजू के ब्लाउज या कोई अन्य परिधान पहने तो इस बात का अवश्य ख्याल रखे कि बगलों के बाल साफ़ हों, फिर आप निसंकोच स्लीव लेस परिधान पहन सकती है, और तब ये आपकी फैशन व अभिरुचि का परिचय भी देगा. इसीलिए आवश्यक है कि रोजाना नहाते समय बगल को भी साबुन लगाकर अच्छे से साफ़ करें ताकि बगल में मैल व दुर्गन्ध बसी न रहे. यदि गुप्तांग की बात की जाए तो यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि यहाँ की त्वचा कितनी कोमल होती है. गुप्तांग की नाजुकता व कोमलता किसी से छुपी नहीं है. यहाँ पर हलकी सी चोट लगने पर भी व्यक्ति के प्राणों पर बन आती है, अर्थात व्यक्ति के प्राण भी ले सकती है. इसलिए गुप्तांग की सुरक्षा के लिए ही प्रक्रति ने इस पर बालों की गद्दी बनाई है, जो हमारे गुप्तांगों की रक्षा करते है. हाँ, गर्मियों के दिनों में पसीने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है, ऐसे में इस परेशानी के बचने के लिए आप इन बालों को साफ कर सकती है. परन्तु गुप्तांगो के बाल साफ करने के लिए आप हेयर रेमुविंग क्रीम का ही प्रयोग तो अधिक बेहतर होगा.
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रेवाड़ी में भीषण गर्मी के बीच पीने का पानी नहीं मिलने पर बुधवार दोपहर को गांव चांदावास के ग्रामीणों ने रेवाड़ी-कोसली मार्ग पर जाम लगा दिया। बड़ी संख्या में एकत्रित होकर पहुंची महिलाओं ने पुरुषों के साथ मिलकर सड़क पर बड़े-बड़े अवरोधक और पेड़ गिरा दिए। जाम की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और अधिकारियों के लिखित आश्वासन के बाद जाम खोला।
चांदावास निवासी किरण, राज सिंह, इंदिरा ने बताया कि भीषण गर्मी में भी उन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रही है। पिछले 10 दिनों से तो हालात और भी ज्यादा खराब है। गांव के लोग बूंद-बूंद पानी को तरह रहे हैं। कई बार अधिकारियों को सूचित किया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। आखिर में उन्हें अपनी मांग मनवाने के लिए गांव के बस स्टाप पर जाम लगाना पड़ा।
जाम की वजह से सड़क पर वाहनों की दोनों तरफ लंबी लाइनें लग गई। सूचना के बाद रामपुरा थाना प्रभारी शिवचरण दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे।
इसके बाद संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने पीने के पानी को लेकर लिखित में आश्वासन मांगा। साथ ही कहा कि वह बूस्टिंग स्टेशन को लेकर जमीन देने को तैयार है। सरकार की तरफ से उनके गांव में बूस्टिंग स्टेशन बनाया जाए, जिससे आसपास के गांव के लोगों को भी फायदा मिल सके। SDO द्वारा लिखित में आश्वासन देने के बाद ग्रामीणों ने जाम खोल दिया।
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रेवाड़ी में भीषण गर्मी के बीच पीने का पानी नहीं मिलने पर बुधवार दोपहर को गांव चांदावास के ग्रामीणों ने रेवाड़ी-कोसली मार्ग पर जाम लगा दिया। बड़ी संख्या में एकत्रित होकर पहुंची महिलाओं ने पुरुषों के साथ मिलकर सड़क पर बड़े-बड़े अवरोधक और पेड़ गिरा दिए। जाम की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और अधिकारियों के लिखित आश्वासन के बाद जाम खोला। चांदावास निवासी किरण, राज सिंह, इंदिरा ने बताया कि भीषण गर्मी में भी उन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रही है। पिछले दस दिनों से तो हालात और भी ज्यादा खराब है। गांव के लोग बूंद-बूंद पानी को तरह रहे हैं। कई बार अधिकारियों को सूचित किया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। आखिर में उन्हें अपनी मांग मनवाने के लिए गांव के बस स्टाप पर जाम लगाना पड़ा। जाम की वजह से सड़क पर वाहनों की दोनों तरफ लंबी लाइनें लग गई। सूचना के बाद रामपुरा थाना प्रभारी शिवचरण दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। इसके बाद संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने पीने के पानी को लेकर लिखित में आश्वासन मांगा। साथ ही कहा कि वह बूस्टिंग स्टेशन को लेकर जमीन देने को तैयार है। सरकार की तरफ से उनके गांव में बूस्टिंग स्टेशन बनाया जाए, जिससे आसपास के गांव के लोगों को भी फायदा मिल सके। SDO द्वारा लिखित में आश्वासन देने के बाद ग्रामीणों ने जाम खोल दिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अभी आगामी कुछ दिन सुबह के वक्त हल्का कोहरा और धुंध का असर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा असम, पश्चिम बंगाल, अरूणाचल प्रदेश, सिक्किम और आंध्र प्रदेश में हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है।
IMD Alert Today 2023 : देशभर के मौसम में बदलाव का दौर जारी है। अगले 2 दिनों तक जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित बाल्टिस्तान, हिमाचल प्रदेश में कुछ जगहों पर बारिश और बर्फबारी के आसार है। आज 20 फरवरी को हल्की से मध्यम बारिश, 21 फरवरी को कम बारिश और बर्फबारी और 22 फरवरी से इन इलाकों में मौसम शुष्क रहेगा। 21 फरवरी तक गुजरात और महाराष्ट्र-गोवा क्षेत्र के कुछ हिस्सों में हीटवेव की की भविष्यवाणी की है। वही 25 फरवरी तक दिल्ली का अधिकतम तापमान 30 डिग्री ही बने रहने का अनुमान है।
IMD मौसम विभाग के मुताबिक, गुजरात के कोंकण, कच्छ और पश्चिमी राजस्थान में अगले दो दिन में तापमान 37 से 39 डिग्री रहने की संभावना है, वही पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अभी आगामी कुछ दिन सुबह के वक्त हल्का कोहरा और धुंध का असर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा असम, पश्चिम बंगाल, अरूणाचल प्रदेश, सिक्किम और आंध्र प्रदेश में हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है। राजस्थान में अगले 4 दिनों में तापमान में और ज्यादा वृद्धि होने की संभावना है। हालांकि 22 फरवरी बाद उत्तरी हवाओं के असर के चलते तापमान में मामूली गिरावट हो सकती है।
IMD मौसम विभाग के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश, असम, सिक्किम, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में आज बादल छाए रहेंगे और बूंदाबांदी भी हो सकती है, वही आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी आज रविवार बारिश का अलर्ट है। अगले 3 से 4 दिन सुबह के समय दिल्ली, चंडीगढ़ व हरियाणा में मौसम साफ रहेगा। दिल्ली में सोमवार सुबह हल्की धुंध छा सकती है और अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री रहने का अनुमान है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस तो अधिकतम 31 डिग्री दर्ज किया जा सकता है। सुबह के समय हल्का कोहरा और धुंध नजर आ सकता है। कहीं आसमान में हल्के बादल नजर आ सकते हैं।
- भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा में 20 और 21 फरवरी को बारिश होने के आसार है। उत्तराखंड, पंजाब में कुछ जगहों पर हल्की बारिश की संभावना है। 21 फरवरी को उत्तरी हरियाणा के इलाकों में बूंदाबांदी हो सकती है।
- अरुणाचल प्रदेश में 21 फरवरी से बारिश बढ़ने की संभावना है। 21-22 फरवरी को कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होगी। असम, नागालैंड, मणिपुर में अगले पांच दिनों तक कहीं-कहीं हल्की बारिश और बूंदाबांदी की संभावना है।
- आज गिलगित, मुजफ्फराबाद, उत्तराखंड ,अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों, जम्मू कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी के आसार है।
- पश्चिमी हिमालय, उत्तर पश्चिम और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में दिन और रात का तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहेगा और बाकी देश में कोई महत्वपूर्ण मौसम गतिविधि की उम्मीद नहीं है।
मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक, जम्मू कश्मीर और आसपास के क्षेत्रों पर एक पश्चिमी विक्षोभ और एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र मध्य पाकिस्तान पर बना हुआ है। वही एक और चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र छत्तीसगढ़ और आसपास के निचले स्तरों पर बना हुआ है, जिसके चलते मौसम में बदलाव नजर आ रहा है। उत्तर भारत में लगातार सक्रिय हुए वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह मौसम परिवर्तन हुआ है।
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पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अभी आगामी कुछ दिन सुबह के वक्त हल्का कोहरा और धुंध का असर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा असम, पश्चिम बंगाल, अरूणाचल प्रदेश, सिक्किम और आंध्र प्रदेश में हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है। IMD Alert Today दो हज़ार तेईस : देशभर के मौसम में बदलाव का दौर जारी है। अगले दो दिनों तक जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित बाल्टिस्तान, हिमाचल प्रदेश में कुछ जगहों पर बारिश और बर्फबारी के आसार है। आज बीस फरवरी को हल्की से मध्यम बारिश, इक्कीस फरवरी को कम बारिश और बर्फबारी और बाईस फरवरी से इन इलाकों में मौसम शुष्क रहेगा। इक्कीस फरवरी तक गुजरात और महाराष्ट्र-गोवा क्षेत्र के कुछ हिस्सों में हीटवेव की की भविष्यवाणी की है। वही पच्चीस फरवरी तक दिल्ली का अधिकतम तापमान तीस डिग्री ही बने रहने का अनुमान है। IMD मौसम विभाग के मुताबिक, गुजरात के कोंकण, कच्छ और पश्चिमी राजस्थान में अगले दो दिन में तापमान सैंतीस से उनतालीस डिग्री रहने की संभावना है, वही पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अभी आगामी कुछ दिन सुबह के वक्त हल्का कोहरा और धुंध का असर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा असम, पश्चिम बंगाल, अरूणाचल प्रदेश, सिक्किम और आंध्र प्रदेश में हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है। राजस्थान में अगले चार दिनों में तापमान में और ज्यादा वृद्धि होने की संभावना है। हालांकि बाईस फरवरी बाद उत्तरी हवाओं के असर के चलते तापमान में मामूली गिरावट हो सकती है। IMD मौसम विभाग के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश, असम, सिक्किम, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में आज बादल छाए रहेंगे और बूंदाबांदी भी हो सकती है, वही आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी आज रविवार बारिश का अलर्ट है। अगले तीन से चार दिन सुबह के समय दिल्ली, चंडीगढ़ व हरियाणा में मौसम साफ रहेगा। दिल्ली में सोमवार सुबह हल्की धुंध छा सकती है और अधिकतम तापमान बत्तीस डिग्री और न्यूनतम तापमान बारह डिग्री रहने का अनुमान है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में न्यूनतम तापमान पंद्रह डिग्री सेल्सियस तो अधिकतम इकतीस डिग्री दर्ज किया जा सकता है। सुबह के समय हल्का कोहरा और धुंध नजर आ सकता है। कहीं आसमान में हल्के बादल नजर आ सकते हैं। - भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा में बीस और इक्कीस फरवरी को बारिश होने के आसार है। उत्तराखंड, पंजाब में कुछ जगहों पर हल्की बारिश की संभावना है। इक्कीस फरवरी को उत्तरी हरियाणा के इलाकों में बूंदाबांदी हो सकती है। - अरुणाचल प्रदेश में इक्कीस फरवरी से बारिश बढ़ने की संभावना है। इक्कीस-बाईस फरवरी को कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होगी। असम, नागालैंड, मणिपुर में अगले पांच दिनों तक कहीं-कहीं हल्की बारिश और बूंदाबांदी की संभावना है। - आज गिलगित, मुजफ्फराबाद, उत्तराखंड ,अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों, जम्मू कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी के आसार है। - पश्चिमी हिमालय, उत्तर पश्चिम और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में दिन और रात का तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहेगा और बाकी देश में कोई महत्वपूर्ण मौसम गतिविधि की उम्मीद नहीं है। मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक, जम्मू कश्मीर और आसपास के क्षेत्रों पर एक पश्चिमी विक्षोभ और एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र मध्य पाकिस्तान पर बना हुआ है। वही एक और चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र छत्तीसगढ़ और आसपास के निचले स्तरों पर बना हुआ है, जिसके चलते मौसम में बदलाव नजर आ रहा है। उत्तर भारत में लगातार सक्रिय हुए वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह मौसम परिवर्तन हुआ है।
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Work From Home: कोरोना महामारी के दौरान वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) की सुविधा प्रदान की गई थी। भारत समेत दुनियाभर में कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह सुविधा दी, ताकि काम भी चल सके और संक्रमण भी न फैले। अब न्यूजीलैंड से एक रोचक अध्ययन जारी हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, Work From Home के दौरान पुरुष कर्मचारियों के दिन मजे में कटे। वहीं महिला कर्मचारियों पर ऑफिस के साथ ही घर-परिवार और बच्चों की अतिरिक्त जिम्मेदारी पड़ी। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (Women's Day 2022) के मौके पर जारी न्यूजीलैंड इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च की इस स्टडी की जबरदस्त चर्चा है और बहस भी छिड़ गई है।
अध्ययन में कहा गया है कि घर से काम (Work From Home) करने में अनुमति होना बहुत अच्छा है, लेकिन अगर आप एक पुरुष हैं तो और भी बेहतर। ज्यादातर लोगों ने महामारी के दौरान घर से काम करना पसंद किया, लेकिन कामकाजी महिलाओं के हिस्से में घर के काम और बच्चों की देखभाल का अतिरिक्त बोझ आया। एएसबी बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विटोरिया शॉर्ट ने कहा, 'हमारे अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि इस तरह काम करने की लचीली व्यवस्था के कई फायदे हैं, लेकिन यह इन अंतर को भी उजागर करता है कि किस तरह महिलाओं से घर के अन्य कामों की उम्मीद भी की जाती है। महिलाएं अभी भी अधिकांश घरेलू कामों की जिम्मेदारी ले रही हैं।
न्यूजीलैंड इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च के इस अध्ययन के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 60% से अधिक लोगों की नजर में घर से काम करना सकारात्मक रहा। हालांकि, 22% ही ऐसे रहे जिन्होंने घर की अन्य जिम्मेदारियों का निर्वहन भी किया। दरअसल, कोरोना काल और लॉकडाउन के दौरान स्कूल भी बंद कर दिए गए। बच्चों के घर में रहने से ऑफिस का कामकाज मुश्किल रहा और होम-स्कूलिंग का पूरा लोड महिलाओं पर रहा। घर से काम (Work From Home) करने के लिए उपकरण और उचित स्थान मिलने मामले में भी पुरुष आगे रहे।
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Work From Home: कोरोना महामारी के दौरान वर्क फ्रॉम होम की सुविधा प्रदान की गई थी। भारत समेत दुनियाभर में कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह सुविधा दी, ताकि काम भी चल सके और संक्रमण भी न फैले। अब न्यूजीलैंड से एक रोचक अध्ययन जारी हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, Work From Home के दौरान पुरुष कर्मचारियों के दिन मजे में कटे। वहीं महिला कर्मचारियों पर ऑफिस के साथ ही घर-परिवार और बच्चों की अतिरिक्त जिम्मेदारी पड़ी। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर जारी न्यूजीलैंड इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च की इस स्टडी की जबरदस्त चर्चा है और बहस भी छिड़ गई है। अध्ययन में कहा गया है कि घर से काम करने में अनुमति होना बहुत अच्छा है, लेकिन अगर आप एक पुरुष हैं तो और भी बेहतर। ज्यादातर लोगों ने महामारी के दौरान घर से काम करना पसंद किया, लेकिन कामकाजी महिलाओं के हिस्से में घर के काम और बच्चों की देखभाल का अतिरिक्त बोझ आया। एएसबी बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विटोरिया शॉर्ट ने कहा, 'हमारे अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि इस तरह काम करने की लचीली व्यवस्था के कई फायदे हैं, लेकिन यह इन अंतर को भी उजागर करता है कि किस तरह महिलाओं से घर के अन्य कामों की उम्मीद भी की जाती है। महिलाएं अभी भी अधिकांश घरेलू कामों की जिम्मेदारी ले रही हैं। न्यूजीलैंड इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च के इस अध्ययन के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल साठ% से अधिक लोगों की नजर में घर से काम करना सकारात्मक रहा। हालांकि, बाईस% ही ऐसे रहे जिन्होंने घर की अन्य जिम्मेदारियों का निर्वहन भी किया। दरअसल, कोरोना काल और लॉकडाउन के दौरान स्कूल भी बंद कर दिए गए। बच्चों के घर में रहने से ऑफिस का कामकाज मुश्किल रहा और होम-स्कूलिंग का पूरा लोड महिलाओं पर रहा। घर से काम करने के लिए उपकरण और उचित स्थान मिलने मामले में भी पुरुष आगे रहे।
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BBC News,
कोरोना वैक्सीनः कोवैक्सीन को मंज़ूरी मिलने पर हंगामा क्यों हो रहा है?
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पाकिस्तान में कोरोना वैक्सीन पर क्या हो रहा?
आज का कार्टूनः सबसे लास्ट में कौन?
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कोरोना वैक्सीन पर उठ रहे सवालों का ड्रग कंट्रोलर ने क्या जवाब दिया?
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कितना ख़तरनाक है कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन?
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Cover Story: ऑक्सफ़ोर्ड वैक्सीन को मंज़ूरी मिलने से भारत का क्या फ़ायदा?
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कोरोना के नए स्ट्रेन पर काम करेगी वैक्सीन?
कोविड-19: कैसे होता है वायरस म्यूटेट?
कोरोना वायरसः नए वैरिएंट पर वैक्सीन नहीं होगा कारगर?
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कोरोना वैक्सीन हलाल है या हराम, इस पर बहस क्यों?
कोरोनाः चीन का वुहान लैब जाँच के लिए तैयार, ताँबे की खदान में छिपा है राज़?
वीडियो,
कोरोना वायरस का नया रूप कितना ख़तरनाक है?
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BBC News, कोरोना वैक्सीनः कोवैक्सीन को मंज़ूरी मिलने पर हंगामा क्यों हो रहा है? वीडियो, पाकिस्तान में कोरोना वैक्सीन पर क्या हो रहा? आज का कार्टूनः सबसे लास्ट में कौन? वीडियो, कोरोना वैक्सीन पर उठ रहे सवालों का ड्रग कंट्रोलर ने क्या जवाब दिया? वीडियो, कितना ख़तरनाक है कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन? वीडियो, Cover Story: ऑक्सफ़ोर्ड वैक्सीन को मंज़ूरी मिलने से भारत का क्या फ़ायदा? वीडियो, कोरोना के नए स्ट्रेन पर काम करेगी वैक्सीन? कोविड-उन्नीस: कैसे होता है वायरस म्यूटेट? कोरोना वायरसः नए वैरिएंट पर वैक्सीन नहीं होगा कारगर? वीडियो, कोरोना वैक्सीन हलाल है या हराम, इस पर बहस क्यों? कोरोनाः चीन का वुहान लैब जाँच के लिए तैयार, ताँबे की खदान में छिपा है राज़? वीडियो, कोरोना वायरस का नया रूप कितना ख़तरनाक है?
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केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री राम विलास पासवान ने य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा किसानों, युवाओं, महिलाओं और समाज के सभी वर्गों के सशक्तिकरण के लिए समावेशी और ऐतिहासिक बजट पेश करने पर उनका हार्दिक अभिनन्दन किया। श्री पासवान ने कहा कि निश्चित ही बजट 2018-19 से आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।
श्री पासवान ने बताया कि देश में रिकॉर्ड स्तर पर खाद्यान्न का उत्पादन हुआ है। वर्ष 2017-18 में 275 मिलियन टन खाद्यान्न और 300 मिलियन टन से अधिक फलों का उत्पादन हुआ है। किसानों के कल्याण के लिए हमारी सरकार ने निरन्तर प्रयास किए हैं, जिन्हें इस बजट में भी जारी रखा गया है और किसानों को उनकी लागत के 1½ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य दिए जाने के लिए बजट में किए गए प्रावधान से उनकी आय में बढ़ोतरी होगी।
वर्ष 2022 तक हर सिर को छत देने के लिए सरकार द्वारा 51 लाख नए घरों का निर्माण, 4 करोड़ गरीबों को बिजली कनेक्शन, 2 करोड़ शौचालयों का निर्माण, 8 करोड़ गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जाने से समाज के गरीबी रेखा के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को इसका लाभ मिलेगा, जिससे विकास के साथ-साथ रोज़गार के अवसर भी पैदा होंगे।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी योजना के तहत 10 करोड़ परिवारों को हर साल 5 लाख रुपए प्रति परिवार की दर से चिकित्सा प्रतिपूर्ति की योजना स्वागत योग्य है।
आधारभूत संरचना - सड़क और विद्युत, रेलवे का विस्तार, शिक्षा के विकास के साथ-साथ रोज़गार सृजन के लिए बजट में समुचित प्रावधान किए गए हैं। आईटी के क्षेत्र में क्रान्ति लाने के लिए 5 करोड़ ग्रामीण क्षेत्रों में 5 लाख वाई-फाई हॉटस्पॉट देकर 5 करोड़ ग्रामीणों को जोड़ने से क्रान्ति आएगी।
श्री पासवान ने कहा कि सरकार ने खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत वितरित किए जाने वाले अनाज की दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया है और आज भी गरीबों को 2/- रुपए प्रति किलो गेहूं, 3/- रुपए प्रति किलो चावल और 1/- रुपए प्रति किलो की दर से मोटा अनाज मिल रहा है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में आईटी का उपयोग कर पारदर्शिता लाई गई है और अनाज सही लाभार्थी तक पहुंचे, इसके लिए राशन कार्डों की सीडिंग आधार से की गई है। उन्होंने विश्व में सबसे बड़ी अर्थात् 84 करोड़ लोगों तक अनाज पहुंचाने वाली इस योजना की सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को दिया। श्री पासवान ने आश्वस्त किया कि आम उपभोक्ता के लिए आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को किसी भी हालत में बढ़ने नहीं दिया जाएगा।
श्री पासवान ने कहा कि कुल मिलाकर यह बजट किसानों, गरीबों, खास कर अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए हितकारी है। देश को विकास के मार्ग पर ले जाने वाले प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा ऐतिहासिक बजट प्रस्तुत करने पर मैं उन्हें पुनः हार्दिक धन्यवाद देता हूं।
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Posted On: केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री राम विलास पासवान ने य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा किसानों, युवाओं, महिलाओं और समाज के सभी वर्गों के सशक्तिकरण के लिए समावेशी और ऐतिहासिक बजट पेश करने पर उनका हार्दिक अभिनन्दन किया। श्री पासवान ने कहा कि निश्चित ही बजट दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस से आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। श्री पासवान ने बताया कि देश में रिकॉर्ड स्तर पर खाद्यान्न का उत्पादन हुआ है। वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में दो सौ पचहत्तर मिलियन टन खाद्यान्न और तीन सौ मिलियन टन से अधिक फलों का उत्पादन हुआ है। किसानों के कल्याण के लिए हमारी सरकार ने निरन्तर प्रयास किए हैं, जिन्हें इस बजट में भी जारी रखा गया है और किसानों को उनकी लागत के एक½ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य दिए जाने के लिए बजट में किए गए प्रावधान से उनकी आय में बढ़ोतरी होगी। वर्ष दो हज़ार बाईस तक हर सिर को छत देने के लिए सरकार द्वारा इक्यावन लाख नए घरों का निर्माण, चार करोड़ गरीबों को बिजली कनेक्शन, दो करोड़ शौचालयों का निर्माण, आठ करोड़ गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जाने से समाज के गरीबी रेखा के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को इसका लाभ मिलेगा, जिससे विकास के साथ-साथ रोज़गार के अवसर भी पैदा होंगे। स्वास्थ्य के क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी योजना के तहत दस करोड़ परिवारों को हर साल पाँच लाख रुपए प्रति परिवार की दर से चिकित्सा प्रतिपूर्ति की योजना स्वागत योग्य है। आधारभूत संरचना - सड़क और विद्युत, रेलवे का विस्तार, शिक्षा के विकास के साथ-साथ रोज़गार सृजन के लिए बजट में समुचित प्रावधान किए गए हैं। आईटी के क्षेत्र में क्रान्ति लाने के लिए पाँच करोड़ ग्रामीण क्षेत्रों में पाँच लाख वाई-फाई हॉटस्पॉट देकर पाँच करोड़ ग्रामीणों को जोड़ने से क्रान्ति आएगी। श्री पासवान ने कहा कि सरकार ने खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत वितरित किए जाने वाले अनाज की दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया है और आज भी गरीबों को दो/- रुपए प्रति किलो गेहूं, तीन/- रुपए प्रति किलो चावल और एक/- रुपए प्रति किलो की दर से मोटा अनाज मिल रहा है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में आईटी का उपयोग कर पारदर्शिता लाई गई है और अनाज सही लाभार्थी तक पहुंचे, इसके लिए राशन कार्डों की सीडिंग आधार से की गई है। उन्होंने विश्व में सबसे बड़ी अर्थात् चौरासी करोड़ लोगों तक अनाज पहुंचाने वाली इस योजना की सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को दिया। श्री पासवान ने आश्वस्त किया कि आम उपभोक्ता के लिए आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को किसी भी हालत में बढ़ने नहीं दिया जाएगा। श्री पासवान ने कहा कि कुल मिलाकर यह बजट किसानों, गरीबों, खास कर अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए हितकारी है। देश को विकास के मार्ग पर ले जाने वाले प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा ऐतिहासिक बजट प्रस्तुत करने पर मैं उन्हें पुनः हार्दिक धन्यवाद देता हूं।
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Palamu: मेदिनीनगर शहर थाना क्षेत्र के बाईपास रोड सिंचाई विभाग के सामने वाले तालाब में रविवार की देर शाम एक 45 वर्षीय अविवाहित युवती का शव बरामद किया गया. जिस तालाब में शव बरामद किया गया है. उससे लगभग 500 मीटर की दूरी पर बारालोटा चैंपियन चौक में युवती अपने भाई के साथ किराए के मकान में रहती थी. युवती की पहचान पूर्व डीएसपी स्व. भिखारी राम की 45 वर्षीय पुत्री कंचन कुमारी के रूप में हुई है. कंचन पिछले 2 दिनों से लापता थी और उसकी गुमशुदगी के संबंध में शहर थाना में सन्हा दर्ज कराया गया था. पुलिस और परिजन कंचन की तलाश में जुटे हुए थे इसी क्रम में उसका शव तालाब से बरामद हुआ. सूचना मिलने के बाद शहर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया पोस्टमार्टम के लिए एनआरएमसीएच में भेज दिया गया है पोस्टमार्टम के बाद क्लियर होगा कि युवती की मौत कैसे हुई. युवती मूल रूप से बिहार के बक्सर जिला के सोहनी पट्टी की रहने वाली थी.
मृतका के भाई गुड्डू ने बताया कि दो दिनों से घर से कंचन गायब थी, जिसकी लिखित सूचना मोदिनीनगर शहर थाना में दी गई है. हत्या या आत्महत्या का कारण अभी स्पष्ट नहीं है. शहर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अभय कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि शुक्रवार की रात परिजनों को बिना जानकारी दिए कंचन घर से निकल गई थी. इसके बाद से उसका कुछ अता पता नहीं चल रहा था. मानसिक रूप से कमजोर भी थी. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि रात के अंधेरे में घर से निकलने के बाद वह तालाब में गिर गई होगी, जिसमें डूबने से उसकी मौत हुई. हालाकी मौत का कारण स्पष्ट रूप से पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा.
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Palamu: मेदिनीनगर शहर थाना क्षेत्र के बाईपास रोड सिंचाई विभाग के सामने वाले तालाब में रविवार की देर शाम एक पैंतालीस वर्षीय अविवाहित युवती का शव बरामद किया गया. जिस तालाब में शव बरामद किया गया है. उससे लगभग पाँच सौ मीटर की दूरी पर बारालोटा चैंपियन चौक में युवती अपने भाई के साथ किराए के मकान में रहती थी. युवती की पहचान पूर्व डीएसपी स्व. भिखारी राम की पैंतालीस वर्षीय पुत्री कंचन कुमारी के रूप में हुई है. कंचन पिछले दो दिनों से लापता थी और उसकी गुमशुदगी के संबंध में शहर थाना में सन्हा दर्ज कराया गया था. पुलिस और परिजन कंचन की तलाश में जुटे हुए थे इसी क्रम में उसका शव तालाब से बरामद हुआ. सूचना मिलने के बाद शहर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया पोस्टमार्टम के लिए एनआरएमसीएच में भेज दिया गया है पोस्टमार्टम के बाद क्लियर होगा कि युवती की मौत कैसे हुई. युवती मूल रूप से बिहार के बक्सर जिला के सोहनी पट्टी की रहने वाली थी. मृतका के भाई गुड्डू ने बताया कि दो दिनों से घर से कंचन गायब थी, जिसकी लिखित सूचना मोदिनीनगर शहर थाना में दी गई है. हत्या या आत्महत्या का कारण अभी स्पष्ट नहीं है. शहर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अभय कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि शुक्रवार की रात परिजनों को बिना जानकारी दिए कंचन घर से निकल गई थी. इसके बाद से उसका कुछ अता पता नहीं चल रहा था. मानसिक रूप से कमजोर भी थी. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि रात के अंधेरे में घर से निकलने के बाद वह तालाब में गिर गई होगी, जिसमें डूबने से उसकी मौत हुई. हालाकी मौत का कारण स्पष्ट रूप से पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा.
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श्वास चिकित्सा में, रोगी को सांस लेने और संभवतः इसे बदलने के लिए जानना चाहिए। नतीजतन, कई मानसिक और शारीरिक शिकायतों का इलाज किया जा सकता है।
- चेतना श्वास का मन और शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और कई बीमारियों में मदद कर सकता है।
रेस्पिरेटरी थेरेपी सांस लेने और सांस लेने पर नियंत्रण करने के लिए विभिन्न तकनीकों को सीखने पर आधारित है। श्वास एक बेहोश प्रक्रिया है जिसे आपको इसके बारे में सोचना नहीं है लेकिन हम जानबूझकर प्रभावित कर सकते हैं।
शारीरिक श्रम या मानसिक तनाव के दौरान यह स्पष्ट हो जाता है कि सांस लेने का अर्थ क्या है। तनाव, व्यस्त, व्यायाम की कमी, खराब मुद्रा या वजन और आहार खोने से प्राकृतिक श्वास पैटर्न बदल सकते हैं और गलत सांस लेने की तकनीक हो सकती है। यह बदले में विभिन्न बीमारियों या बीमारियों के विकास का पक्ष ले सकता है।
प्रत्येक व्यक्ति का अपना व्यक्तिगत श्वास पैटर्न होता है। सांस तनाव को स्पष्ट रूप से प्रतिक्रिया देती है, न केवल शारीरिक, बल्कि भावनात्मक के रूप में। इसके विपरीत, शारीरिक और मानसिक तनावों के माध्यम से श्वास को प्रभावित करना भी संभव है, जैसा कि कई छूट तकनीकों के मामले में है।
इसका उपयोग श्वसन चिकित्सा में किया जाता है। यह लोगों को उनकी प्राकृतिक, स्वस्थ और लयबद्ध श्वास हासिल करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। श्वसन चिकित्सा के पास मानसिक संविधान पर सकारात्मक प्रभाव डालने का लक्ष्य है, विश्राम स्वास्थ्य की स्थिति को बढ़ावा देने और प्रभावित करने के लिए अनुकूल रूप से।
एक श्वसन चिकित्सा की संभावित सामग्री हैंः
श्वास चिकित्सा में, रोगी को शरीर के माध्यम से महसूस करने और सांस पर ध्यान आकर्षित करने का निर्देश दिया जाता है। रोगी को सांस लेने के बारे में पता होना चाहिए और महसूस करना चाहिए कि सांस कहाँ और कैसे बहती है। इस उद्देश्य के लिए, विभिन्न श्वास अभ्यास का उपयोग किया जाता है।
सांस लेने का काम और विभिन्न अभ्यास अलग-अलग पाठों या समूह सत्रों में हो सकते हैं। अक्सर, अभ्यास योग के साथ भी संयुक्त होते हैं। व्यक्तिगत उपचार आमतौर पर झूठ बोलते समय किया जाता है और रोगी के लिए व्यक्तिगत रूप से तैयार किया जाता है।
समूह सत्रों में, चिकित्सक बैठे, खड़े या झूठ बोलते समय किए गए कुछ आंदोलनों या अभ्यासों को निर्दिष्ट करता है। यहां, रोगी को अपनी सांस का अनुभव करना चाहिए और सांस लेने की लय, मुद्रा और कल्याण में बदलावों को खोजना चाहिए।
श्वसन चिकित्सा सभी की तरह है प्राकृतिक चिकित्सा एक सहायक थेरेपी के रूप में और चिकित्सा उपचार की जगह नहीं है। श्वसन चिकित्सा विशेष रूप से श्वसन संबंधी शिकायतों, सिरदर्द, आवाज और आवाज के लिए उपयुक्त है भाषण विकारोंमानसिक कठिनाइयों जैसे चिंता, घबराहट या अवसाद, साथ ही नींद की समस्याएं। मासिक धर्म दर्द, सूजन, पाचन समस्याओं या भी संचार विकारों श्वसन चिकित्सा में मदद कर सकते हैं।
बेहतर आराम करने के लिए सीखकर स्वस्थ लोग श्वास चिकित्सा से लाभ उठा सकते हैं।
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श्वास चिकित्सा में, रोगी को सांस लेने और संभवतः इसे बदलने के लिए जानना चाहिए। नतीजतन, कई मानसिक और शारीरिक शिकायतों का इलाज किया जा सकता है। - चेतना श्वास का मन और शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और कई बीमारियों में मदद कर सकता है। रेस्पिरेटरी थेरेपी सांस लेने और सांस लेने पर नियंत्रण करने के लिए विभिन्न तकनीकों को सीखने पर आधारित है। श्वास एक बेहोश प्रक्रिया है जिसे आपको इसके बारे में सोचना नहीं है लेकिन हम जानबूझकर प्रभावित कर सकते हैं। शारीरिक श्रम या मानसिक तनाव के दौरान यह स्पष्ट हो जाता है कि सांस लेने का अर्थ क्या है। तनाव, व्यस्त, व्यायाम की कमी, खराब मुद्रा या वजन और आहार खोने से प्राकृतिक श्वास पैटर्न बदल सकते हैं और गलत सांस लेने की तकनीक हो सकती है। यह बदले में विभिन्न बीमारियों या बीमारियों के विकास का पक्ष ले सकता है। प्रत्येक व्यक्ति का अपना व्यक्तिगत श्वास पैटर्न होता है। सांस तनाव को स्पष्ट रूप से प्रतिक्रिया देती है, न केवल शारीरिक, बल्कि भावनात्मक के रूप में। इसके विपरीत, शारीरिक और मानसिक तनावों के माध्यम से श्वास को प्रभावित करना भी संभव है, जैसा कि कई छूट तकनीकों के मामले में है। इसका उपयोग श्वसन चिकित्सा में किया जाता है। यह लोगों को उनकी प्राकृतिक, स्वस्थ और लयबद्ध श्वास हासिल करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। श्वसन चिकित्सा के पास मानसिक संविधान पर सकारात्मक प्रभाव डालने का लक्ष्य है, विश्राम स्वास्थ्य की स्थिति को बढ़ावा देने और प्रभावित करने के लिए अनुकूल रूप से। एक श्वसन चिकित्सा की संभावित सामग्री हैंः श्वास चिकित्सा में, रोगी को शरीर के माध्यम से महसूस करने और सांस पर ध्यान आकर्षित करने का निर्देश दिया जाता है। रोगी को सांस लेने के बारे में पता होना चाहिए और महसूस करना चाहिए कि सांस कहाँ और कैसे बहती है। इस उद्देश्य के लिए, विभिन्न श्वास अभ्यास का उपयोग किया जाता है। सांस लेने का काम और विभिन्न अभ्यास अलग-अलग पाठों या समूह सत्रों में हो सकते हैं। अक्सर, अभ्यास योग के साथ भी संयुक्त होते हैं। व्यक्तिगत उपचार आमतौर पर झूठ बोलते समय किया जाता है और रोगी के लिए व्यक्तिगत रूप से तैयार किया जाता है। समूह सत्रों में, चिकित्सक बैठे, खड़े या झूठ बोलते समय किए गए कुछ आंदोलनों या अभ्यासों को निर्दिष्ट करता है। यहां, रोगी को अपनी सांस का अनुभव करना चाहिए और सांस लेने की लय, मुद्रा और कल्याण में बदलावों को खोजना चाहिए। श्वसन चिकित्सा सभी की तरह है प्राकृतिक चिकित्सा एक सहायक थेरेपी के रूप में और चिकित्सा उपचार की जगह नहीं है। श्वसन चिकित्सा विशेष रूप से श्वसन संबंधी शिकायतों, सिरदर्द, आवाज और आवाज के लिए उपयुक्त है भाषण विकारोंमानसिक कठिनाइयों जैसे चिंता, घबराहट या अवसाद, साथ ही नींद की समस्याएं। मासिक धर्म दर्द, सूजन, पाचन समस्याओं या भी संचार विकारों श्वसन चिकित्सा में मदद कर सकते हैं। बेहतर आराम करने के लिए सीखकर स्वस्थ लोग श्वास चिकित्सा से लाभ उठा सकते हैं।
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टिप्पणियाँ --
१. अदम - प्र० एक व० प्रथम पुरुष वाचक सर्वनाम, अहम् ८ भारो० *एघोम ( *eg( h )om, हिन्द - ईरानियन *अझम्, अवे० अ. जम्, सं० अहम्, प्रा० फा० अदम्,
१. दारयवउश - प्र० एक व० नपुं० ८ *दारय, सं० धारय / धारयन्तु, पकड़ना ८ भारो० * / धेर्, प्रा० फा० / दर्, अवे० / दर्, सं० Vधृ -, पह० / दाश्तन् - आ० फा० / दाश्तन्, धारण करना, रखना;
सं० वसु ८ भारो० * उएसु ( uesu - ), अवे० वहु, वोहु ८V वन्,
= अच्छा, प्रशंसायोग्य, पह० वेह, आ० फा० बह, यह नाम है, सं० धारयवसुः, ग्रीक दारेईओस् ( dāreīos ).
१. ख्याय. थय - प्र० एक व० पु० 'राजा' ८ प्रा० फा० /क्षि, अवे० V क्षि, सं० / - ि, शासन करना + इय, तु० सं० *क्षायथ्यः, पह० शाह, आ० फा० शाह ।
१. वज्रक - प्र० एक व० पु० विशे०, महान्, तु० सं० वज्र *वजूकः, अवे० वज्र, आ० फा० बुजुर्ग ८ भारो० * / उएग्- 'मजबूत होना' ।
१- २ . ख्यायथयानाम् - ष० व० व० पु० 'राजाओं का', तु० सं० क्षायथ्यानाम् पह० शाहान्, आ० फा० शाहान्
२. पार्सइय - सं० एक व० पु० पार्स शब्द से 'पर्सिया में', तु० सं० * पार्से, आ० फा० दर फारस । फार्स
२. दहयूनाम् - ष० व० व० स्त्रो० दह्यु शब्द से, अवे० दैङ्हु-, दख्यु, सं० दस्यु - पह० दह्यु - , दिह, आ० फा० दिह, देह 'देशों का' । प्राचीन ईरानियन राज्य का विस्तृत रूप से चार भाग होता था - मान वीस, जन्तु - और दख्यु , तु० सं० दस्यूनाम्, अवे० दख्युनाम् ( गाथिक अवे० ) ।
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टिप्पणियाँ -- एक. अदम - प्रशून्य एक वशून्य प्रथम पुरुष वाचक सर्वनाम, अहम् आठ भारोशून्य *एघोम om, हिन्द - ईरानियन *अझम्, अवेशून्य अ. जम्, संशून्य अहम्, प्राशून्य फाशून्य अदम्, एक. दारयवउश - प्रशून्य एक वशून्य नपुंशून्य आठ *दारय, संशून्य धारय / धारयन्तु, पकड़ना आठ भारोशून्य * / धेर्, प्राशून्य फाशून्य / दर्, अवेशून्य / दर्, संशून्य Vधृ -, पहशून्य / दाश्तन् - आशून्य फाशून्य / दाश्तन्, धारण करना, रखना; संशून्य वसु आठ भारोशून्य * उएसु , अवेशून्य वहु, वोहु आठ वोल्ट वन्, = अच्छा, प्रशंसायोग्य, पहशून्य वेह, आशून्य फाशून्य बह, यह नाम है, संशून्य धारयवसुः, ग्रीक दारेईओस् . एक. ख्याय. थय - प्रशून्य एक वशून्य पुशून्य 'राजा' आठ प्राशून्य फाशून्य /क्षि, अवेशून्य वोल्ट क्षि, संशून्य / - ि, शासन करना + इय, तुशून्य संशून्य *क्षायथ्यः, पहशून्य शाह, आशून्य फाशून्य शाह । एक. वज्रक - प्रशून्य एक वशून्य पुशून्य विशेशून्य, महान्, तुशून्य संशून्य वज्र *वजूकः, अवेशून्य वज्र, आशून्य फाशून्य बुजुर्ग आठ भारोशून्य * / उएग्- 'मजबूत होना' । एक- दो . ख्यायथयानाम् - षशून्य वशून्य वशून्य पुशून्य 'राजाओं का', तुशून्य संशून्य क्षायथ्यानाम् पहशून्य शाहान्, आशून्य फाशून्य शाहान् दो. पार्सइय - संशून्य एक वशून्य पुशून्य पार्स शब्द से 'पर्सिया में', तुशून्य संशून्य * पार्से, आशून्य फाशून्य दर फारस । फार्स दो. दहयूनाम् - षशून्य वशून्य वशून्य स्त्रोशून्य दह्यु शब्द से, अवेशून्य दैङ्हु-, दख्यु, संशून्य दस्यु - पहशून्य दह्यु - , दिह, आशून्य फाशून्य दिह, देह 'देशों का' । प्राचीन ईरानियन राज्य का विस्तृत रूप से चार भाग होता था - मान वीस, जन्तु - और दख्यु , तुशून्य संशून्य दस्यूनाम्, अवेशून्य दख्युनाम् ।
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आज की युवा पीढ़ी के पसंदीदा गायकों में अरिजीत सिंह, अरमान मलिक, बादशाह, रफ्तार सिंह शामिल जरूर हैं लेकिन इन युवाओं में एक तबका ऐसा भी है, जो रेडियो या टीवी पर बजने वाले नए गीतों के साथ ही साथ पुराने गीतों को सुनने से परहेज नहीं करता। इन्हीं पुराने गीतों में शैलेन्द्र ऐसा नाम हैं जिनके लिखे गीत आज भी उतने ही कर्णप्रिय हैं, जो 4-5 दशक पूर्व हुआ करते थे। शैलेन्द्र साहब का 30 अगस्त को जन्मदिन आता है और 'विविध भारती' ने शिद्दत के साथ उन्हें याद करते हुए कई ऐसी परतें खोलीं जिन पर धूल की मोटी परत जमा हो गई थी।
अपने जीवनकाल में शैलेन्द्रजी ने सिर्फ एक ही फिल्म बनाई 'तीसरी कसम', जो आज भी बेहद पसंद की जाती है। देश के महान साहित्यकार फणीश्वर नाथ 'रेणु' की किताब 'मारे गए गुलफाम' की कहानी पर आधारित फिल्म 'तीसरी कसम' एक विशेष पीढ़ी के लिए कालजयी फिल्म मानी जाती है।
विविध भारती ने 30 अगस्त, शुक्रवार को अपने विशेष कार्यक्रम 'विविधा' में शैलेन्द्र के बेटे दिनेश शैलेन्द्र से बातचीत की। उनके बेटे ने बताया कि हमारे परिवार ने बहुत गरीबी देखी। पिताजी ने रेणुजी की कहानी 'मारे गए गुलफाम' जैसे ही पढ़ी, अगले दिन उन्हें चिट्ठी लिखकर इस पर फिल्म बनाने की अनुमति ली। रेणुजी ने भी सहर्ष स्वीकृति दे दी।
एक साल में बनने वाली फिल्म 5 साल में पूरी हुई : फिल्म 'तीसरी कसम' में मुख्य कलाकारों में राजकपूर, वहीदा रहमान, इफ्तिखार, असित सेन, केस्टो मुखर्जी और सीएस दुबे थे। बिहार की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म में देश की मिट्टी की खुशबू थी। दिनेश शैलेन्द्र के अनुसार यह फिल्म 1 साल या कुछ महीनों के भीतर बननी थी लेकिन इसे बनने में 5 साल लग गए।
साथी कलाकारों ने साथ छोड़ा : शैलेन्द्र के बेटे ने बताया कि मेरे पिता उस वक्त के सबसे ज्यादा दाम लेने वाले गीतकार थे। जब फिल्म बन रही थी, तब काफी पैसा लग रहा था। चूंकि वक्त बीत रहा था और 1 साल की फिल्म में 5 साल लग गए थे, तब वे थोड़े निराश हो गए थे, क्योंकि सभी साथी कलाकारों ने उनका साथ छोड़ दिया था।
'तीसरी कसम' को राष्ट्रीय पुरस्कार : 'तीसरी कसम' सितंबर 1966 में परदे पर आई थी और मार्च 1967 में इस फिल्म को बेस्ट फिल्म के 'राष्ट्रीय पुरस्कार' से नवाजा गया। फिल्म को पुरस्कार जरूर मिला लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि फिल्म की कामयाबी देखने वाला ही शख्स इस दुनिया से चला गया था।
'तीसरी कसम' के गीतों ने धूम मचाई : इस फिल्म के गीतों ने उस जमाने में तो धूम मचाई थी, लेकिन आज भी इसे बेहद चाव के साथ सुना जाता है। 'सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है, ना हाथी है ना घोड़ा है, वहां पैदल ही जाना है. . . ' इस गीत में कितनी सच्चाई है, यह तो समझने वाला ही समझ सकता है। 'सजनवा बैरी हो गए हमार, चिठिया हो तो हर कोई बांचे, बांचे न भाग कोई. . . । 'दुनिया बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई, काहे को दुनिया बनाई. . . । ' 'पान खाए सैय्या हमार. . . । ' 'आ आ भी जा, रात ढलने लगी, चांद छुपने लगा. . . ' आदि ऐसे गीत हैं जिनसे देश की मिट्टी की खुशबू आती है।
पिता से मिली कई सीख : दिनेश शैलेन्द्र ने बताया कि हमने काफी गुरबत के दिन देखे, ऐसा पिता बताते थे। उन्हें जमीन पर खाना, खाना हमेशा रास आता था। वे कहते थे कि जमीन पर बैठोगे तो हमेशा इससे जुड़े रहोगे। यहां तक कि खार में जब पिताजी ने बंगला खरीदा तब भी वे जमीन पर बैठकर ही भोजन करते थे।
गुलजार ने कही यह बड़ी बात : दिनेश ने बताया कि एक बार कार्यक्रम में गुलजार साहब मिल गए। उन्होंने कहा कि तुम्हारे पिता को मैं बहुत पसंद करता था। उन्होंने जो भी गीत लिखे, वे अमर हो गए। गुलजार ने फिल्म 'श्री 420' के 'मेरा जूता है जापानी. . . ' नगमे को याद किया जिसके अंतरे में आता है. . . ' 'होंगे राजे राजकुंवर हम बिगड़े दिल शहज़ादे, बिगड़े दिल शहज़ादे, हम सिंघासन पर जा बैठें, जब-जब करें इरादे. . . '। यानी लोकतंत्र आ गया, यहां पर एक आम आदमी भी सिंहासन पर बैठ सकता है. . . क्या आप इसे नरेन्द्र मोदी से नहीं जोड़ेंगे, जो एक साधारण से आदमी थे और आज दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने हुए हैं. . . !
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आज की युवा पीढ़ी के पसंदीदा गायकों में अरिजीत सिंह, अरमान मलिक, बादशाह, रफ्तार सिंह शामिल जरूर हैं लेकिन इन युवाओं में एक तबका ऐसा भी है, जो रेडियो या टीवी पर बजने वाले नए गीतों के साथ ही साथ पुराने गीतों को सुनने से परहेज नहीं करता। इन्हीं पुराने गीतों में शैलेन्द्र ऐसा नाम हैं जिनके लिखे गीत आज भी उतने ही कर्णप्रिय हैं, जो चार-पाँच दशक पूर्व हुआ करते थे। शैलेन्द्र साहब का तीस अगस्त को जन्मदिन आता है और 'विविध भारती' ने शिद्दत के साथ उन्हें याद करते हुए कई ऐसी परतें खोलीं जिन पर धूल की मोटी परत जमा हो गई थी। अपने जीवनकाल में शैलेन्द्रजी ने सिर्फ एक ही फिल्म बनाई 'तीसरी कसम', जो आज भी बेहद पसंद की जाती है। देश के महान साहित्यकार फणीश्वर नाथ 'रेणु' की किताब 'मारे गए गुलफाम' की कहानी पर आधारित फिल्म 'तीसरी कसम' एक विशेष पीढ़ी के लिए कालजयी फिल्म मानी जाती है। विविध भारती ने तीस अगस्त, शुक्रवार को अपने विशेष कार्यक्रम 'विविधा' में शैलेन्द्र के बेटे दिनेश शैलेन्द्र से बातचीत की। उनके बेटे ने बताया कि हमारे परिवार ने बहुत गरीबी देखी। पिताजी ने रेणुजी की कहानी 'मारे गए गुलफाम' जैसे ही पढ़ी, अगले दिन उन्हें चिट्ठी लिखकर इस पर फिल्म बनाने की अनुमति ली। रेणुजी ने भी सहर्ष स्वीकृति दे दी। एक साल में बनने वाली फिल्म पाँच साल में पूरी हुई : फिल्म 'तीसरी कसम' में मुख्य कलाकारों में राजकपूर, वहीदा रहमान, इफ्तिखार, असित सेन, केस्टो मुखर्जी और सीएस दुबे थे। बिहार की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म में देश की मिट्टी की खुशबू थी। दिनेश शैलेन्द्र के अनुसार यह फिल्म एक साल या कुछ महीनों के भीतर बननी थी लेकिन इसे बनने में पाँच साल लग गए। साथी कलाकारों ने साथ छोड़ा : शैलेन्द्र के बेटे ने बताया कि मेरे पिता उस वक्त के सबसे ज्यादा दाम लेने वाले गीतकार थे। जब फिल्म बन रही थी, तब काफी पैसा लग रहा था। चूंकि वक्त बीत रहा था और एक साल की फिल्म में पाँच साल लग गए थे, तब वे थोड़े निराश हो गए थे, क्योंकि सभी साथी कलाकारों ने उनका साथ छोड़ दिया था। 'तीसरी कसम' को राष्ट्रीय पुरस्कार : 'तीसरी कसम' सितंबर एक हज़ार नौ सौ छयासठ में परदे पर आई थी और मार्च एक हज़ार नौ सौ सरसठ में इस फिल्म को बेस्ट फिल्म के 'राष्ट्रीय पुरस्कार' से नवाजा गया। फिल्म को पुरस्कार जरूर मिला लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि फिल्म की कामयाबी देखने वाला ही शख्स इस दुनिया से चला गया था। 'तीसरी कसम' के गीतों ने धूम मचाई : इस फिल्म के गीतों ने उस जमाने में तो धूम मचाई थी, लेकिन आज भी इसे बेहद चाव के साथ सुना जाता है। 'सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है, ना हाथी है ना घोड़ा है, वहां पैदल ही जाना है. . . ' इस गीत में कितनी सच्चाई है, यह तो समझने वाला ही समझ सकता है। 'सजनवा बैरी हो गए हमार, चिठिया हो तो हर कोई बांचे, बांचे न भाग कोई. . . । 'दुनिया बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई, काहे को दुनिया बनाई. . . । ' 'पान खाए सैय्या हमार. . . । ' 'आ आ भी जा, रात ढलने लगी, चांद छुपने लगा. . . ' आदि ऐसे गीत हैं जिनसे देश की मिट्टी की खुशबू आती है। पिता से मिली कई सीख : दिनेश शैलेन्द्र ने बताया कि हमने काफी गुरबत के दिन देखे, ऐसा पिता बताते थे। उन्हें जमीन पर खाना, खाना हमेशा रास आता था। वे कहते थे कि जमीन पर बैठोगे तो हमेशा इससे जुड़े रहोगे। यहां तक कि खार में जब पिताजी ने बंगला खरीदा तब भी वे जमीन पर बैठकर ही भोजन करते थे। गुलजार ने कही यह बड़ी बात : दिनेश ने बताया कि एक बार कार्यक्रम में गुलजार साहब मिल गए। उन्होंने कहा कि तुम्हारे पिता को मैं बहुत पसंद करता था। उन्होंने जो भी गीत लिखे, वे अमर हो गए। गुलजार ने फिल्म 'श्री चार सौ बीस' के 'मेरा जूता है जापानी. . . ' नगमे को याद किया जिसके अंतरे में आता है. . . ' 'होंगे राजे राजकुंवर हम बिगड़े दिल शहज़ादे, बिगड़े दिल शहज़ादे, हम सिंघासन पर जा बैठें, जब-जब करें इरादे. . . '। यानी लोकतंत्र आ गया, यहां पर एक आम आदमी भी सिंहासन पर बैठ सकता है. . . क्या आप इसे नरेन्द्र मोदी से नहीं जोड़ेंगे, जो एक साधारण से आदमी थे और आज दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने हुए हैं. . . !
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जैसे कन्या-भ्रूण की हत्या इस देश में घटित होती है या फिर नारी-जीवन को आजीवन बंधन में रखने, तड़पाने, तड़पा-तड़पाकर मारने, जलाने आदि की घटनाएँ आम हैं, उसी तरह यहाँ घरवालों और बाहरी दोनों के दुर्व्यवहार से पीड़ित हिन्दी का उद्भव और विकास उसके जन्म-काल से अब तक बाधाग्रस्त रहा है।
1025-26 ई. में मुहम्मद गजनवी के आक्रमण तथा सोमनाथ मंदिर के विध्वंश की ऐतिहासिक घटना के आस-पास की सामयिकता में हिन्दी का उद्भव हुआ। बलात्कारी घटनाओं से शंकित भारतीय कन्याओं की तरह 1191 ई. में मुहम्मद गौरी के तराइन-युद्ध, 1398 ई. में तैमूर लंग के नर-संहार और 1519 ई. में बाबर के हमले-जैसे अत्यंत दूषित वातावरण में हिन्दी का बालपन आगे बढ़ा। अंतस्तल की उदारता और काया के लचीलेपन से हिन्दी जन-जन के हृदय में स्थान बनाती गई, तब भी 1526 ई. में मुग़ल वंश की स्थापना के साथ राजकाज की भाषा अधिकृत रूप से फ़ारसी हो गई और आगे अनेक मुगलवंशी बादशाहों के काल में राजदरबार की भाषा और लिपि फ़ारसी ही रही। मुगलों की छावनियों में जब हिन्दी की नई शैली के रूप में उर्दू का जन्म और विकास हुआ तथा उसे राजदरबार की भाषा-जैसा दर्ज़ा दिया जाने लगा, तो उसकी भी लिपि फ़ारसी ही रही।
1857 ई. की क्रांति के पश्चात् 1861 ई. में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के ब्रिटिश-तंत्र में समाहित होते ही करोड़ों भारतीयों की अनदेखी करते हुए अंग्रेज़ी को ब्रिटिश-सरकार द्वारा भारत की राजभाषा घोषित कर दिया गया। 16वीं शताब्दी के मध्य से जो संक्रमण शुरू हुआ था, वह 20वीं शताब्दी के मध्य तक चलता रहा और लगभग 400 वर्षों तक हिन्दी राजकीय कोप का शिकार रही; उसका विकास क्रूरतापूर्वक अवरुद्ध किया जाता रहा।
1947 ई. में देश की स्वतंत्रता के साथ ऐसा लगा कि स्वतंत्रता-संग्राम की वाणी हिन्दी का अब नया सूरज उगने वाला है, किन्तु महज़ ढाई वर्ष बाद, जैसे ही 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया; सारा स्वप्न धूल-धूसरित हो गया और कहने के लिए तो अंग्रेज़ी को भारतीय संविधान में द्वितीय राजभाषा का स्थान दिया गया; परन्तु भारत के ही सपूतों द्वारा व्यवहार में अंग्रेज़ी को राजकाज का सिरमौर बनाकर हिन्दी को वंचित कर दिया गया। तब से स्वतंत्रता के विगत 66 वर्षों से इस देश की कन्याओं-युवतियों के प्रति दुराचार की समस्या के समान हिन्दी के कंटकाकीर्ण मार्ग का प्रश्न अनुत्तरित चला आ रहा है।
शासन की ओर से भीतर-भीतर उपेक्षा और ऊपर से दिखावे की रुचि के साथ हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा-राजभाषा और अनेक राज्यों की राजभाषा के रूप में संकुचित तो है; किन्तु यह देश की अधिसंख्यक जनता की ज़बान की भाषा है तथा पूरे भारत में अहिन्दी भाषी प्रदेशों के निवासियों द्वारा बड़े चाव से सम्पर्क-भाषा के रूप में अपनाई जाती है। यह ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, मारिशस, फीजी, सूरीनाम, ट्रिनिडाड, सीमावर्ती नेपाल आदि देशों में बोल-चाल की भाषा के रूप में व्यवहृत होती है। बोल-चाल की दृष्टि से विश्व में इसका अंग्रेज़ी और चीनी के बाद तीसरा स्थान है। जैसे बँटवारे के बाद धूर्त-चालाक बेटे अधिकांश माल-असबाब लेकर अलग हो जाते हैं और बूढ़े माँ-बाप की सेवा-शुश्रूषा का दायित्व श्रवणकुमार-जैसा सीधा-सादा बेटा सँभालता है, वैसे ही हिन्दी का सौम्य, मृदु मातृत्व गरीब-अनपढ़-दलित-पीड़ित किन्तु सोंधी मिट्टी से जुड़े भारतीयों के हिस्से में अधिक आता है। मुट्ठी भर उच्च वर्ग हिन्दी के श्वास से ही साँस लेकर जीता है; किन्तु बाह्य भाषाई गुरुर में ऐंठा रहता है।
अंग्रेज़ी को भारत में सत्ता की सनक वाले अमीरों की कृत्रिम भाषा और गरीबों के लिए अभिशाप कहना असंगत नहीं है; किन्तु हिन्दी तो यहाँ सबकी भाषा है - ग़रीब-अमीर, अनपढ़-पढ़े-लिखे, शहरी-ग्रामीण, किसान-मज़दूर, शासक-प्रशासक, व्यापारी, उद्योगपति, नेता, अफ़सर आदि सब की। मन-बेमन से कमोबेश इसे हर कोई अपनाता है। भाषाओं में हिन्दी ही है, जो इस देश में सर्वात्मार्द्र है। ऐसे में जब आज जन-शक्ति देश की शक्ति सिद्ध हो रही है और उद्योग, व्यापार, बाज़ार आदि में जन-शक्ति को स्वीकार किया जा रहा है, तब देश की अभिव्यक्ति की प्रमुख माध्यम हिन्दी को ग़रीबों-अनपढ़ों की भाषा कहना सर्वथा अनुचित है।
सबके होंठों पर है फ़बती, सबके हित की है हिन्दी।
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जैसे कन्या-भ्रूण की हत्या इस देश में घटित होती है या फिर नारी-जीवन को आजीवन बंधन में रखने, तड़पाने, तड़पा-तड़पाकर मारने, जलाने आदि की घटनाएँ आम हैं, उसी तरह यहाँ घरवालों और बाहरी दोनों के दुर्व्यवहार से पीड़ित हिन्दी का उद्भव और विकास उसके जन्म-काल से अब तक बाधाग्रस्त रहा है। एक हज़ार पच्चीस-छब्बीस ई. में मुहम्मद गजनवी के आक्रमण तथा सोमनाथ मंदिर के विध्वंश की ऐतिहासिक घटना के आस-पास की सामयिकता में हिन्दी का उद्भव हुआ। बलात्कारी घटनाओं से शंकित भारतीय कन्याओं की तरह एक हज़ार एक सौ इक्यानवे ई. में मुहम्मद गौरी के तराइन-युद्ध, एक हज़ार तीन सौ अट्ठानवे ई. में तैमूर लंग के नर-संहार और एक हज़ार पाँच सौ उन्नीस ई. में बाबर के हमले-जैसे अत्यंत दूषित वातावरण में हिन्दी का बालपन आगे बढ़ा। अंतस्तल की उदारता और काया के लचीलेपन से हिन्दी जन-जन के हृदय में स्थान बनाती गई, तब भी एक हज़ार पाँच सौ छब्बीस ई. में मुग़ल वंश की स्थापना के साथ राजकाज की भाषा अधिकृत रूप से फ़ारसी हो गई और आगे अनेक मुगलवंशी बादशाहों के काल में राजदरबार की भाषा और लिपि फ़ारसी ही रही। मुगलों की छावनियों में जब हिन्दी की नई शैली के रूप में उर्दू का जन्म और विकास हुआ तथा उसे राजदरबार की भाषा-जैसा दर्ज़ा दिया जाने लगा, तो उसकी भी लिपि फ़ारसी ही रही। एक हज़ार आठ सौ सत्तावन ई. की क्रांति के पश्चात् एक हज़ार आठ सौ इकसठ ई. में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के ब्रिटिश-तंत्र में समाहित होते ही करोड़ों भारतीयों की अनदेखी करते हुए अंग्रेज़ी को ब्रिटिश-सरकार द्वारा भारत की राजभाषा घोषित कर दिया गया। सोलहवीं शताब्दी के मध्य से जो संक्रमण शुरू हुआ था, वह बीसवीं शताब्दी के मध्य तक चलता रहा और लगभग चार सौ वर्षों तक हिन्दी राजकीय कोप का शिकार रही; उसका विकास क्रूरतापूर्वक अवरुद्ध किया जाता रहा। एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस ई. में देश की स्वतंत्रता के साथ ऐसा लगा कि स्वतंत्रता-संग्राम की वाणी हिन्दी का अब नया सूरज उगने वाला है, किन्तु महज़ ढाई वर्ष बाद, जैसे ही छब्बीस जनवरी एक हज़ार नौ सौ पचास को भारत का संविधान लागू किया गया; सारा स्वप्न धूल-धूसरित हो गया और कहने के लिए तो अंग्रेज़ी को भारतीय संविधान में द्वितीय राजभाषा का स्थान दिया गया; परन्तु भारत के ही सपूतों द्वारा व्यवहार में अंग्रेज़ी को राजकाज का सिरमौर बनाकर हिन्दी को वंचित कर दिया गया। तब से स्वतंत्रता के विगत छयासठ वर्षों से इस देश की कन्याओं-युवतियों के प्रति दुराचार की समस्या के समान हिन्दी के कंटकाकीर्ण मार्ग का प्रश्न अनुत्तरित चला आ रहा है। शासन की ओर से भीतर-भीतर उपेक्षा और ऊपर से दिखावे की रुचि के साथ हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा-राजभाषा और अनेक राज्यों की राजभाषा के रूप में संकुचित तो है; किन्तु यह देश की अधिसंख्यक जनता की ज़बान की भाषा है तथा पूरे भारत में अहिन्दी भाषी प्रदेशों के निवासियों द्वारा बड़े चाव से सम्पर्क-भाषा के रूप में अपनाई जाती है। यह ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, मारिशस, फीजी, सूरीनाम, ट्रिनिडाड, सीमावर्ती नेपाल आदि देशों में बोल-चाल की भाषा के रूप में व्यवहृत होती है। बोल-चाल की दृष्टि से विश्व में इसका अंग्रेज़ी और चीनी के बाद तीसरा स्थान है। जैसे बँटवारे के बाद धूर्त-चालाक बेटे अधिकांश माल-असबाब लेकर अलग हो जाते हैं और बूढ़े माँ-बाप की सेवा-शुश्रूषा का दायित्व श्रवणकुमार-जैसा सीधा-सादा बेटा सँभालता है, वैसे ही हिन्दी का सौम्य, मृदु मातृत्व गरीब-अनपढ़-दलित-पीड़ित किन्तु सोंधी मिट्टी से जुड़े भारतीयों के हिस्से में अधिक आता है। मुट्ठी भर उच्च वर्ग हिन्दी के श्वास से ही साँस लेकर जीता है; किन्तु बाह्य भाषाई गुरुर में ऐंठा रहता है। अंग्रेज़ी को भारत में सत्ता की सनक वाले अमीरों की कृत्रिम भाषा और गरीबों के लिए अभिशाप कहना असंगत नहीं है; किन्तु हिन्दी तो यहाँ सबकी भाषा है - ग़रीब-अमीर, अनपढ़-पढ़े-लिखे, शहरी-ग्रामीण, किसान-मज़दूर, शासक-प्रशासक, व्यापारी, उद्योगपति, नेता, अफ़सर आदि सब की। मन-बेमन से कमोबेश इसे हर कोई अपनाता है। भाषाओं में हिन्दी ही है, जो इस देश में सर्वात्मार्द्र है। ऐसे में जब आज जन-शक्ति देश की शक्ति सिद्ध हो रही है और उद्योग, व्यापार, बाज़ार आदि में जन-शक्ति को स्वीकार किया जा रहा है, तब देश की अभिव्यक्ति की प्रमुख माध्यम हिन्दी को ग़रीबों-अनपढ़ों की भाषा कहना सर्वथा अनुचित है। सबके होंठों पर है फ़बती, सबके हित की है हिन्दी।
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जुलाई 2017 में लागू वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी ) व्यवस्था का बीते पांच वर्षों में क्रियान्वयन कई नीतिगत दिक्कतों का शिकार रहा है। जाहिर है इसका नयी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। जुलाई 2022 में जीएसटी को शुरू हुए पांच वर्ष हो रहे हैं, ऐसे में इससे जुड़ी गड़बडिय़ों की समीक्षा उचित होगी। पहली दिक्कत जीएसटी की शुरुआत के भी पहले सामने आई। नयी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के लिए सभी राज्यों का समर्थन हासिल करने के लिए तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उन्हें आश्वस्त किया था कि जीएसटी से सालाना 14 फीसदी की राजस्व वृद्धि मिलेगी। कहा गया कि इससे कम राजस्व मिलने पर पांच साल तक केंद्र भरपायी करेगा। इस वादे को शायद इस आधार पर उचित ठहराया जा सकता है कि बड़े कर सुधारों में अंशधारकों के लिए विशेष प्रोत्साहन की जरूरत होती है ताकि वे इसे अपनाएं। परंतु इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि 14 फीसदी की वांछित राजस्व दर बहुत ऊंची थी और जुलाई 2020 में क्षतिपूर्ति की व्यवस्था समाप्त होने के यह एक बड़ी समस्या होगी। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) देश के आधे से अधिक राज्यों में सत्तारूढ़ है। जीएसटी परिषद की मतदान प्रणाली में केंद्र को राज्यों के किसी भी प्रस्ताव के विरुद्ध वीटो का अधिकार होने के बावजूद गैर भाजपा शासित राज्यों के कारण जीएसटी परिषद का अहम निर्णयों पर पहुंचना कठिन रहा है। यदि क्षतिपूर्ति समाप्त करने की व्यवस्था टाली जाती है तो इसका दोष राज्यों से राजस्व वृद्धि के अस्वाभाविक वादे को दिया जान चाहिए। ऐसे में पहला सबक यही है कि गैर जरूरी वादे नहीं किए जाने चाहिए। दूसरी दुर्घटना दो बार में घटी। पहले नवंबर 2017 में और उसके बाद दिसंबर 2018 में यानी 2019 के आम चुनाव से कुछ माह पहले। राजस्व की आवक को एक लाख करोड़ रुपये मासिक के स्तर पर पहुंचने के पहले ही जीएसटी परिषद ने दरें कम करने का निर्णय कर लिया। जीएसटी परिषद ने 10 नवंबर, 2017 को 23वीं बैठक में वस्तुओं की 94 श्रेणियों में दरें कम कर दीं। इसकी वजह से दरों में कमी आई। दरों के समग्र तार्किकीकरण में एक भी वस्तु पर शुल्क दर बढ़ायी नहीं गई। करीब 13 महीने बाद 22 दिसंबर, 2018 को जीएसटी परिषद की 31वीं बैठक में एक बार फिर दरों में कटौती की गई। इस दौरान कई राज्यों के वित्त मंत्रियों ने राजस्व पर असर पडऩे की चिंता जाहिर की जिसकी अनदेखी कर दी गई। इस बैठक में परिषद ने 17 श्रेणियों की वस्तुओं की दरें कम कीं। सोने आदि के लिए 3 फीसदी की दर को छोड़ दिया जाए तो भी शुल्क दरों के स्लैब को 5 से कम करने और 3 स्लैब में लाना तो भूल जाइए, कुछ वस्तुओं की दरें बढ़ाकर उन्हें तार्किक करने का प्रयास भी नहीं किया गया। केंद्र के निर्देशन में दो बार दरें कम की गईं और जीएसटी संग्रह पर उनके असर की अनदेखी कर दी गई। जीएसटी शुरू होने के बाद आरंभिक चार महीनों में औसत मासिक संग्रह 0. 93 लाख करोड़ रुपये से 0. 95 लाख करोड़ रुपये रहा। परंतु नवंबर 2017 में भारी कटौती के बाद 2017-18 के बाकी महीनों में यह घटकर 0. 9 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। 2018-19 के शुरुआती आठ महीनों में यह लगभग 0. 97 लाख करोड़ रुपये रहा। इस दौरान इसने केवल दो बार एक लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा छुआ। इसके बावजूद दिसंबर 2018 में दरों में पुनः कमी की गई। इसका असर 2019-20 में दिखा जब मासिक संग्रह थोड़ा बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये हो गया। 2020-21 में मासिक जीएसटी संग्रह गिरकर 0. 94 लाख करोड़ रुपये रह गया जो कोविड महामारी तथा लॉकडाउन के असर को देखते हुए समझा जा सकता है। परंतु दरों में कमी से हुआ नुकसान कोविड के असर से कहीं अधिक था। दूसरी घटना से सीधा सबक यह निकला कि जीएसटी परिषद को नयी कर व्यवस्था लागू होने के बाद इतनी जल्दी इतनी वस्तुओं के लिए दरों में इस कदर कटौती नहीं करनी चाहिए थी। अगर उसने दरों में कटौती करने का निर्णय कर भी लिया था तो उसे इसके साथ स्लैब में कमी करनी चाहिए थी जिससे कुछ दरें ऊपर भी जातीं। जाहिर है यह अदूरदर्शी कदम था जिसे जीएसटी सुधार के बजाय चुनावों को ध्यान में रखकर अंजाम दिया गया था। यकीनन भारत की जीएसटी व्यवस्था को कुछ कदमों से फायदा भी हुआ। परिषद ने अप्रैल 2018 से वस्तुओं के अंतरराज्यीय आवागमन के लिए ई-वे बिलिंग की व्यवस्था की। अक्टूबर 2020 में ई-इनवॉइसिंग की अधिक कड़ी व्यवस्था लागू की गई ताकि एक तय मूल्य से अधिक के लेनदेन को दर्ज किया जा सके। समय के साथ इसका दायरा बढ़ता गया। आर्थिक स्थितियों में सुधार, वस्तुओं के आवागमन पर नजर रखने की तकनीकी क्षमता विकसित होने तथा ई-इनवॉइसिंग के जरिये लेनदेन तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर के आंकड़ों पर बेहतर नजर की बदौलत 2021-22 में जीएसटी संग्रह में सुधार हुआ। इस दौरान औसत मासिक संग्रह बढ़कर 1. 23 लाख करोड़ रुपये हो गया। 2021-22 में सकल घरेलू उत्पाद में जीएसटी संग्रह की हिस्सेदारी में 6. 28 फीसदी का मामूली इजाफा हुआ लेकिन कुल संग्रह में सुधार से केंद्र एवं राज्यों को जरूरी बचाव मिला। परंतु अब खतरा यह है कि आर्थिक सुधार के लाभ सामने आने तथा संग्रह के सक्षम ढंग से स्थिर होने के पहले ही जीएसटी परिषद एक बार फिर दरों में बदलाव का प्रयास कर रही है। अगर इस बदलाव को प्रस्तावित ढंग से लागू किया गया तो यह पुनः एक गलती होगी। दो विचार चर्चा में हैं। एक कहता है कि 5 फीसदी के न्यूनतम शुल्क दायरे को 3 फीसदी और 8 फीसदी की दो दरों में बांट दिया जाए। दूसरा विचार कहता है कि 140 वस्तुओं, जिनमें से ज्यादातर टिकाऊ उपभाक्ता वस्तुएं हैं, उनके लिए दरें मौजूदा 18 फीसदी से बढ़ाकर 28 फीसदी कर दी जाएं। दोनों विचार दिक्कतदेह हैं। ऐसे समय में जबकि मुद्रास्फीति बढ़ी हुई है, दरों में इजाफा करना समझदारी नहीं होगी। ये विचार इसलिए भी गलत हैं क्योंकि ये मानते हैं कि दरों को बढ़ाने से जीएसटी परिषद को अपनी चुनौतियों से पार पाने में मदद मिलेगी। समय की मांग तो यह है कि जीएसटी दरों के ढांचे में सुधार किया जाए, न कि केवल दरें बढ़ायी जाएं। स्लैब को कम करके 3 तक सीमित किया जा सकता है। ऐसे में कुछ दरों में इजाफा करने तथा कई अन्य में कटौती करने की जरूरत पड़ेगी। बीते पांच वर्ष से मिले सबक को भूलना नहीं चाहिए। परिषद 2017 और 2018 में दरें कम करते समय स्लैब कम करने अवसर गंवा चुकी है। यदि अब उसने दरें बढ़ाईं तो उसे साथ में स्लैब की तादाद कम करनी चाहिए।
Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
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जुलाई दो हज़ार सत्रह में लागू वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था का बीते पांच वर्षों में क्रियान्वयन कई नीतिगत दिक्कतों का शिकार रहा है। जाहिर है इसका नयी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। जुलाई दो हज़ार बाईस में जीएसटी को शुरू हुए पांच वर्ष हो रहे हैं, ऐसे में इससे जुड़ी गड़बडिय़ों की समीक्षा उचित होगी। पहली दिक्कत जीएसटी की शुरुआत के भी पहले सामने आई। नयी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के लिए सभी राज्यों का समर्थन हासिल करने के लिए तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उन्हें आश्वस्त किया था कि जीएसटी से सालाना चौदह फीसदी की राजस्व वृद्धि मिलेगी। कहा गया कि इससे कम राजस्व मिलने पर पांच साल तक केंद्र भरपायी करेगा। इस वादे को शायद इस आधार पर उचित ठहराया जा सकता है कि बड़े कर सुधारों में अंशधारकों के लिए विशेष प्रोत्साहन की जरूरत होती है ताकि वे इसे अपनाएं। परंतु इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि चौदह फीसदी की वांछित राजस्व दर बहुत ऊंची थी और जुलाई दो हज़ार बीस में क्षतिपूर्ति की व्यवस्था समाप्त होने के यह एक बड़ी समस्या होगी। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी देश के आधे से अधिक राज्यों में सत्तारूढ़ है। जीएसटी परिषद की मतदान प्रणाली में केंद्र को राज्यों के किसी भी प्रस्ताव के विरुद्ध वीटो का अधिकार होने के बावजूद गैर भाजपा शासित राज्यों के कारण जीएसटी परिषद का अहम निर्णयों पर पहुंचना कठिन रहा है। यदि क्षतिपूर्ति समाप्त करने की व्यवस्था टाली जाती है तो इसका दोष राज्यों से राजस्व वृद्धि के अस्वाभाविक वादे को दिया जान चाहिए। ऐसे में पहला सबक यही है कि गैर जरूरी वादे नहीं किए जाने चाहिए। दूसरी दुर्घटना दो बार में घटी। पहले नवंबर दो हज़ार सत्रह में और उसके बाद दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह में यानी दो हज़ार उन्नीस के आम चुनाव से कुछ माह पहले। राजस्व की आवक को एक लाख करोड़ रुपये मासिक के स्तर पर पहुंचने के पहले ही जीएसटी परिषद ने दरें कम करने का निर्णय कर लिया। जीएसटी परिषद ने दस नवंबर, दो हज़ार सत्रह को तेईसवीं बैठक में वस्तुओं की चौरानवे श्रेणियों में दरें कम कर दीं। इसकी वजह से दरों में कमी आई। दरों के समग्र तार्किकीकरण में एक भी वस्तु पर शुल्क दर बढ़ायी नहीं गई। करीब तेरह महीने बाद बाईस दिसंबर, दो हज़ार अट्ठारह को जीएसटी परिषद की इकतीसवीं बैठक में एक बार फिर दरों में कटौती की गई। इस दौरान कई राज्यों के वित्त मंत्रियों ने राजस्व पर असर पडऩे की चिंता जाहिर की जिसकी अनदेखी कर दी गई। इस बैठक में परिषद ने सत्रह श्रेणियों की वस्तुओं की दरें कम कीं। सोने आदि के लिए तीन फीसदी की दर को छोड़ दिया जाए तो भी शुल्क दरों के स्लैब को पाँच से कम करने और तीन स्लैब में लाना तो भूल जाइए, कुछ वस्तुओं की दरें बढ़ाकर उन्हें तार्किक करने का प्रयास भी नहीं किया गया। केंद्र के निर्देशन में दो बार दरें कम की गईं और जीएसटी संग्रह पर उनके असर की अनदेखी कर दी गई। जीएसटी शुरू होने के बाद आरंभिक चार महीनों में औसत मासिक संग्रह शून्य. तिरानवे लाख करोड़ रुपये से शून्य. पचानवे लाख करोड़ रुपये रहा। परंतु नवंबर दो हज़ार सत्रह में भारी कटौती के बाद दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के बाकी महीनों में यह घटकर शून्य. नौ लाख करोड़ रुपये पर आ गया। दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस के शुरुआती आठ महीनों में यह लगभग शून्य. सत्तानवे लाख करोड़ रुपये रहा। इस दौरान इसने केवल दो बार एक लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा छुआ। इसके बावजूद दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह में दरों में पुनः कमी की गई। इसका असर दो हज़ार उन्नीस-बीस में दिखा जब मासिक संग्रह थोड़ा बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये हो गया। दो हज़ार बीस-इक्कीस में मासिक जीएसटी संग्रह गिरकर शून्य. चौरानवे लाख करोड़ रुपये रह गया जो कोविड महामारी तथा लॉकडाउन के असर को देखते हुए समझा जा सकता है। परंतु दरों में कमी से हुआ नुकसान कोविड के असर से कहीं अधिक था। दूसरी घटना से सीधा सबक यह निकला कि जीएसटी परिषद को नयी कर व्यवस्था लागू होने के बाद इतनी जल्दी इतनी वस्तुओं के लिए दरों में इस कदर कटौती नहीं करनी चाहिए थी। अगर उसने दरों में कटौती करने का निर्णय कर भी लिया था तो उसे इसके साथ स्लैब में कमी करनी चाहिए थी जिससे कुछ दरें ऊपर भी जातीं। जाहिर है यह अदूरदर्शी कदम था जिसे जीएसटी सुधार के बजाय चुनावों को ध्यान में रखकर अंजाम दिया गया था। यकीनन भारत की जीएसटी व्यवस्था को कुछ कदमों से फायदा भी हुआ। परिषद ने अप्रैल दो हज़ार अट्ठारह से वस्तुओं के अंतरराज्यीय आवागमन के लिए ई-वे बिलिंग की व्यवस्था की। अक्टूबर दो हज़ार बीस में ई-इनवॉइसिंग की अधिक कड़ी व्यवस्था लागू की गई ताकि एक तय मूल्य से अधिक के लेनदेन को दर्ज किया जा सके। समय के साथ इसका दायरा बढ़ता गया। आर्थिक स्थितियों में सुधार, वस्तुओं के आवागमन पर नजर रखने की तकनीकी क्षमता विकसित होने तथा ई-इनवॉइसिंग के जरिये लेनदेन तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर के आंकड़ों पर बेहतर नजर की बदौलत दो हज़ार इक्कीस-बाईस में जीएसटी संग्रह में सुधार हुआ। इस दौरान औसत मासिक संग्रह बढ़कर एक. तेईस लाख करोड़ रुपये हो गया। दो हज़ार इक्कीस-बाईस में सकल घरेलू उत्पाद में जीएसटी संग्रह की हिस्सेदारी में छः. अट्ठाईस फीसदी का मामूली इजाफा हुआ लेकिन कुल संग्रह में सुधार से केंद्र एवं राज्यों को जरूरी बचाव मिला। परंतु अब खतरा यह है कि आर्थिक सुधार के लाभ सामने आने तथा संग्रह के सक्षम ढंग से स्थिर होने के पहले ही जीएसटी परिषद एक बार फिर दरों में बदलाव का प्रयास कर रही है। अगर इस बदलाव को प्रस्तावित ढंग से लागू किया गया तो यह पुनः एक गलती होगी। दो विचार चर्चा में हैं। एक कहता है कि पाँच फीसदी के न्यूनतम शुल्क दायरे को तीन फीसदी और आठ फीसदी की दो दरों में बांट दिया जाए। दूसरा विचार कहता है कि एक सौ चालीस वस्तुओं, जिनमें से ज्यादातर टिकाऊ उपभाक्ता वस्तुएं हैं, उनके लिए दरें मौजूदा अट्ठारह फीसदी से बढ़ाकर अट्ठाईस फीसदी कर दी जाएं। दोनों विचार दिक्कतदेह हैं। ऐसे समय में जबकि मुद्रास्फीति बढ़ी हुई है, दरों में इजाफा करना समझदारी नहीं होगी। ये विचार इसलिए भी गलत हैं क्योंकि ये मानते हैं कि दरों को बढ़ाने से जीएसटी परिषद को अपनी चुनौतियों से पार पाने में मदद मिलेगी। समय की मांग तो यह है कि जीएसटी दरों के ढांचे में सुधार किया जाए, न कि केवल दरें बढ़ायी जाएं। स्लैब को कम करके तीन तक सीमित किया जा सकता है। ऐसे में कुछ दरों में इजाफा करने तथा कई अन्य में कटौती करने की जरूरत पड़ेगी। बीते पांच वर्ष से मिले सबक को भूलना नहीं चाहिए। परिषद दो हज़ार सत्रह और दो हज़ार अट्ठारह में दरें कम करते समय स्लैब कम करने अवसर गंवा चुकी है। यदि अब उसने दरें बढ़ाईं तो उसे साथ में स्लैब की तादाद कम करनी चाहिए। Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
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मोगादिशूः सोमालिया की राजधानी में हुए भयंकर बम विस्फोट में मृतकों की संख्या बढ़ कर 81 पर पहुंच गई है। सरकार के एक प्रवक्ता ने लापता लोगों की तलाश जारी रहने के बीच सोमवार को यह जानकारी दी। मोगादिशू के भीड़-भाड़ वाले चौराहे पर शनिवार को हुआ विस्फोट पिछले दो वर्षों में देश में हुआ सबसे घातक विस्फोट था। अब तक किसी ने भी इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है लेकिन राष्ट्रपति मोहम्मद अब्दुल्लाही मोहम्मद ने इसके लिए इस्लामी संगठन अल शबाब को जिम्मेदार ठहराया है।
मुख्तार ने कहा कि दम तोड़ने वाले इन घायलों में तुर्की के सैन्य विमान के जरिए रविवार को तुर्की ले जाया गया व्यक्ति भी शामिल है। उन्होंने कहा कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है जहां बचाव अभियान तीसरे दिन भी जारी है। हमले के बाद से करीब 24-25 लोग लापता लोगों की सूची में शामिल किए गए थे लेकिन 12 लोगों का पता चल गया-इनमें से पांच मरे हुए मिले और बाकी की पहचान नहीं हो पाई है। शनिवार के विस्फोट में करीब 125 लोग घायल हो गए थे।
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मोगादिशूः सोमालिया की राजधानी में हुए भयंकर बम विस्फोट में मृतकों की संख्या बढ़ कर इक्यासी पर पहुंच गई है। सरकार के एक प्रवक्ता ने लापता लोगों की तलाश जारी रहने के बीच सोमवार को यह जानकारी दी। मोगादिशू के भीड़-भाड़ वाले चौराहे पर शनिवार को हुआ विस्फोट पिछले दो वर्षों में देश में हुआ सबसे घातक विस्फोट था। अब तक किसी ने भी इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है लेकिन राष्ट्रपति मोहम्मद अब्दुल्लाही मोहम्मद ने इसके लिए इस्लामी संगठन अल शबाब को जिम्मेदार ठहराया है। मुख्तार ने कहा कि दम तोड़ने वाले इन घायलों में तुर्की के सैन्य विमान के जरिए रविवार को तुर्की ले जाया गया व्यक्ति भी शामिल है। उन्होंने कहा कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है जहां बचाव अभियान तीसरे दिन भी जारी है। हमले के बाद से करीब चौबीस-पच्चीस लोग लापता लोगों की सूची में शामिल किए गए थे लेकिन बारह लोगों का पता चल गया-इनमें से पांच मरे हुए मिले और बाकी की पहचान नहीं हो पाई है। शनिवार के विस्फोट में करीब एक सौ पच्चीस लोग घायल हो गए थे।
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यह प्रश्न करते समय भगवती को राजा और उनकी बहन के बीच वैमनस्य की बात का पता चल गया था। फिर भी उसने ऐसे पूछा मानो उमे पता न हो । रानी ने स्वाभाविक रूप से जब यह उत्तर दिया कि जी हाँ एक ननद है तो उम क्षण उसके मन में मन्देह जागा । क्या यह मद बातें सचमुच ही नहीं जानती था बहाना कर रही है ? पर उसने अपने भाव की व्यक्त होने नहीं दिया
भगवती ने कहा, "रिश्तेदारी में मन-मुटाव हो तो उसको ठीक करने के लिए भगवती की सेवा की जा सकती है। वे शीघ्र फल देती है। आपकी इस समय पूजा आगम की रीत है और वे पूजाएँ तन्त्र की पूजाएँ हैं। उनमें नेम और निष्ठा ज्यादा है। उनका सर्वथोड़ा ज्यादा ही है पर महल के लिए सर्च आदि की कोई बात नहीं है।"
इमकी बात से यह पता चल गया कि भाई-बहन के वैमनस्य की बात इसे पता है। रानी बोली, "घर-गृहस्थो में ऊंच-नीच लगा ही रहता है। सब ठीक-ठाक चलता रहे इसके लिए आप भगवती से प्रार्थना कीजिए । तान्त्रिक पूजा फिलहाल नहीं चाहिए।"
"चाहिए या अभी कहने की आवश्यकता नहीं। बाद में सोच-विचारकर निश्चय कीजिए । सहोदर की बात नहीं पति-पत्नी, माँ-बेटी, नौकर-मालिक यदि किसो सम्बन्ध में भी विगाड़ हो तो उसे ठीक करने के लिए तान्त्रिक पूजा में व्यवस्था है ।"
"अच्छा मां ।"
भगवती ने देखा कि अब बात बागे बढ़ाने की और गुंजाइश नहीं तो वह चुप गई। दो क्षण के बाद वह बोली, पूजा कराने वाले भक्तों से मिलने की प्रथा है। अब हम मिल लिये, चलते हैं, फिर आएंगे।" बहकर उठ खड़ी हुई ।
रानी भी उठ कर खड़ी हो गयी। उसने दासी को इग़ारे से पान की थाली लाने को कहा। स्वयं अपने हाथ में थाली पकड़ भगवती के सम्मुख रखी। भगवती पान-सुपारी लेकर विदा हुई ।
भगवती स्वयं अपने आप राजमहल से सम्बन्ध बढ़ाने का प्रयत्न कर रही है इस बात का मबको आभास हुआ । उसकी बात पहले उठाने वाली दोहब्या थी । उस बुढ़िया की बात से उसे पता लगा कि भगवती उससे परिचित है, पहले वह कोडग में ही थी। इम स्त्रो का उद्देश्य क्या हो सकता है ? राजा को दवा देकर ठीक करने भर का है या कुछ और ? यह संदेह उसके मन में उत्पन्न हुआ।
यदि वह सामान्य स्त्री होती तो वसव एक क्षण भर को संकोच किये बिना
चिक्कवीर राजेन्द्र / 83
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यह प्रश्न करते समय भगवती को राजा और उनकी बहन के बीच वैमनस्य की बात का पता चल गया था। फिर भी उसने ऐसे पूछा मानो उमे पता न हो । रानी ने स्वाभाविक रूप से जब यह उत्तर दिया कि जी हाँ एक ननद है तो उम क्षण उसके मन में मन्देह जागा । क्या यह मद बातें सचमुच ही नहीं जानती था बहाना कर रही है ? पर उसने अपने भाव की व्यक्त होने नहीं दिया भगवती ने कहा, "रिश्तेदारी में मन-मुटाव हो तो उसको ठीक करने के लिए भगवती की सेवा की जा सकती है। वे शीघ्र फल देती है। आपकी इस समय पूजा आगम की रीत है और वे पूजाएँ तन्त्र की पूजाएँ हैं। उनमें नेम और निष्ठा ज्यादा है। उनका सर्वथोड़ा ज्यादा ही है पर महल के लिए सर्च आदि की कोई बात नहीं है।" इमकी बात से यह पता चल गया कि भाई-बहन के वैमनस्य की बात इसे पता है। रानी बोली, "घर-गृहस्थो में ऊंच-नीच लगा ही रहता है। सब ठीक-ठाक चलता रहे इसके लिए आप भगवती से प्रार्थना कीजिए । तान्त्रिक पूजा फिलहाल नहीं चाहिए।" "चाहिए या अभी कहने की आवश्यकता नहीं। बाद में सोच-विचारकर निश्चय कीजिए । सहोदर की बात नहीं पति-पत्नी, माँ-बेटी, नौकर-मालिक यदि किसो सम्बन्ध में भी विगाड़ हो तो उसे ठीक करने के लिए तान्त्रिक पूजा में व्यवस्था है ।" "अच्छा मां ।" भगवती ने देखा कि अब बात बागे बढ़ाने की और गुंजाइश नहीं तो वह चुप गई। दो क्षण के बाद वह बोली, पूजा कराने वाले भक्तों से मिलने की प्रथा है। अब हम मिल लिये, चलते हैं, फिर आएंगे।" बहकर उठ खड़ी हुई । रानी भी उठ कर खड़ी हो गयी। उसने दासी को इग़ारे से पान की थाली लाने को कहा। स्वयं अपने हाथ में थाली पकड़ भगवती के सम्मुख रखी। भगवती पान-सुपारी लेकर विदा हुई । भगवती स्वयं अपने आप राजमहल से सम्बन्ध बढ़ाने का प्रयत्न कर रही है इस बात का मबको आभास हुआ । उसकी बात पहले उठाने वाली दोहब्या थी । उस बुढ़िया की बात से उसे पता लगा कि भगवती उससे परिचित है, पहले वह कोडग में ही थी। इम स्त्रो का उद्देश्य क्या हो सकता है ? राजा को दवा देकर ठीक करने भर का है या कुछ और ? यह संदेह उसके मन में उत्पन्न हुआ। यदि वह सामान्य स्त्री होती तो वसव एक क्षण भर को संकोच किये बिना चिक्कवीर राजेन्द्र / तिरासी
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हरियाणा में अब जिला लेवल पर खिलाड़ियों के ग्रेडेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं होंगे। खिलाड़ियों के सी व डी ग्रेड लेवल के सर्टिफिकेट डिप्टी डायरेक्टर जारी करेंगे। ए व बी लेवल के सर्टिफिकेट पंचकूला से जारी होंगे। इस बारे में मुख्यालय की तरफ से आदेश जारी हो चुके हैं।
हिसार में जिले के अलावा भिवानी, चरखी दादरी, सिरसा, फतेहाबाद के खिलाड़ियों के सी व डी ग्रेड के सर्टिफिकेट जारी होंगे। जिला खेल अधिकारी कृष्ण कुमार बेनीवाल ने बताया कि खिलाड़ी महीने के दूसरे व चौथे मंगलवार को महाबीर स्टेडियम से सर्टिफिकेट ले सकते हैं।
इसके इलावा खिलाड़ी अपने अन्य जरूरी कागजात भी साथ लेकर आएं, ताकि उनको समस्या का सामना ना करना पड़े। हिसार के अलावा अंबाला, गुरुग्राम, रोहतक के डिप्टी डायरेक्टर इनके आसपास के जिलों के खिलाड़ियों के सी व डी ग्रेड सर्टिफिकेट जारी करेंगे।
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हरियाणा में अब जिला लेवल पर खिलाड़ियों के ग्रेडेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं होंगे। खिलाड़ियों के सी व डी ग्रेड लेवल के सर्टिफिकेट डिप्टी डायरेक्टर जारी करेंगे। ए व बी लेवल के सर्टिफिकेट पंचकूला से जारी होंगे। इस बारे में मुख्यालय की तरफ से आदेश जारी हो चुके हैं। हिसार में जिले के अलावा भिवानी, चरखी दादरी, सिरसा, फतेहाबाद के खिलाड़ियों के सी व डी ग्रेड के सर्टिफिकेट जारी होंगे। जिला खेल अधिकारी कृष्ण कुमार बेनीवाल ने बताया कि खिलाड़ी महीने के दूसरे व चौथे मंगलवार को महाबीर स्टेडियम से सर्टिफिकेट ले सकते हैं। इसके इलावा खिलाड़ी अपने अन्य जरूरी कागजात भी साथ लेकर आएं, ताकि उनको समस्या का सामना ना करना पड़े। हिसार के अलावा अंबाला, गुरुग्राम, रोहतक के डिप्टी डायरेक्टर इनके आसपास के जिलों के खिलाड़ियों के सी व डी ग्रेड सर्टिफिकेट जारी करेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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यूपी के सिद्धार्थनगर जिले के कालानमक चावल की चमक सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी होने वाली है। ओडीओपी के तहत प्लेटफॉर्म मिलने की वजह से अब इस चावल की चमक सिंगापुर तक भी होने वाली है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन डा0 नवनीत सहगल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद का काला नमक चावल सिंगापुर में निर्यात किया जायेगा। राज्य सरकार द्वारा एक जिला-एक उत्पाद योजना (ओडीओपी) के तहत किसानों को दी गई सुविधाओं के फलस्वरूप इस प्रकार की सफलता मिलने जा रही है।
डा0 सहगल ने बताया कि ओडीओपी के तहत सिद्धार्थनगर जिले का चावल आता है। उन्होंने बताया कि सिद्धार्थनगर जिले में एसपीवी ने सिंगापुर को निर्यात किये जाने वाले काला नमक चावल का प्रदर्शन किया जाएगा। आकर्षक पैकेजिंग और चावल के अंदर मौजूद सभी खूबियों को जानकारी रैपर के माध्यम से उपलब्ध कराई गई। साथ ही चावल के जार पर बारकोड की सुविधा दी गई है, जिससे चावल खरीदने वाले व्यक्ति बारकोड स्कैन कर काला नमक चावल के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
डा0 सहगल ने बताया कि जल्द ही अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान केन्द्र (आईआरआरआई) वाराणसी के सहयोग से सिद्धार्थनगर में भी अनुसंधान केन्द्र खोला जायेगा। इसके माध्यम से चावल की वैरायटी, ब्रीड तथा उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही आस-पास के जिलों के किसानों को भी इससे लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त काला नमक चावल के उत्पादन से जुड़े किसानों को स्थानीय स्तर पर बड़ा बाजार मुहैया कराने के लिए काला नमक महोत्सव का आयोजन भी किया जायेगा। काला नमक चावल को मार्केट बढ़ाने और इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुचाने के लिए सरकार किसानों व उद्यमियों को हर सम्भव मदद व सुविधा देने के लिए तत्पर है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में किसानों को स्थानीय स्तर पर बड़ा बाजार मुहैया कराया जाएगा और कालानमक महोत्सव का आयोजन भी किया जाएगा।
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यूपी के सिद्धार्थनगर जिले के कालानमक चावल की चमक सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी होने वाली है। ओडीओपी के तहत प्लेटफॉर्म मिलने की वजह से अब इस चावल की चमक सिंगापुर तक भी होने वाली है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन डाशून्य नवनीत सहगल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद का काला नमक चावल सिंगापुर में निर्यात किया जायेगा। राज्य सरकार द्वारा एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत किसानों को दी गई सुविधाओं के फलस्वरूप इस प्रकार की सफलता मिलने जा रही है। डाशून्य सहगल ने बताया कि ओडीओपी के तहत सिद्धार्थनगर जिले का चावल आता है। उन्होंने बताया कि सिद्धार्थनगर जिले में एसपीवी ने सिंगापुर को निर्यात किये जाने वाले काला नमक चावल का प्रदर्शन किया जाएगा। आकर्षक पैकेजिंग और चावल के अंदर मौजूद सभी खूबियों को जानकारी रैपर के माध्यम से उपलब्ध कराई गई। साथ ही चावल के जार पर बारकोड की सुविधा दी गई है, जिससे चावल खरीदने वाले व्यक्ति बारकोड स्कैन कर काला नमक चावल के बारे में सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। डाशून्य सहगल ने बताया कि जल्द ही अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान केन्द्र वाराणसी के सहयोग से सिद्धार्थनगर में भी अनुसंधान केन्द्र खोला जायेगा। इसके माध्यम से चावल की वैरायटी, ब्रीड तथा उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही आस-पास के जिलों के किसानों को भी इससे लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त काला नमक चावल के उत्पादन से जुड़े किसानों को स्थानीय स्तर पर बड़ा बाजार मुहैया कराने के लिए काला नमक महोत्सव का आयोजन भी किया जायेगा। काला नमक चावल को मार्केट बढ़ाने और इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुचाने के लिए सरकार किसानों व उद्यमियों को हर सम्भव मदद व सुविधा देने के लिए तत्पर है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में किसानों को स्थानीय स्तर पर बड़ा बाजार मुहैया कराया जाएगा और कालानमक महोत्सव का आयोजन भी किया जाएगा।
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तिरुवनंतपुरम, 23 मार्च केरल में क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम को विभिन्न प्रणालीगत पहलुओं के जरिए बीमारी के प्रसार को कम करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
यहां स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बयान में बताया गया कि केरल एकमात्र ऐसा राज्य है, जिसे राज्य श्रेणी में चुना गया। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए विशेषज्ञों के पैनल ने हाल में पाया कि दक्षिणी राज्य ने सतत विकास के लक्ष्यों को पूरा करने के रूप में पिछले पांच वर्षों में टीबी प्रसार दर में 37. 5 प्रतिशत तक की कमी की है।
बयान में बताया गया कि इसकी वजह से राज्य को यह राष्ट्रीय सम्मान दिया गया। पैनल ने यह भी कहा कि राज्य में टीबी अनुसंधान प्रणाली दुनिया में सर्वश्रेष्ठ अनुसंधान प्रणालियों में से एक है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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तिरुवनंतपुरम, तेईस मार्च केरल में क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम को विभिन्न प्रणालीगत पहलुओं के जरिए बीमारी के प्रसार को कम करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यहां स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बयान में बताया गया कि केरल एकमात्र ऐसा राज्य है, जिसे राज्य श्रेणी में चुना गया। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए विशेषज्ञों के पैनल ने हाल में पाया कि दक्षिणी राज्य ने सतत विकास के लक्ष्यों को पूरा करने के रूप में पिछले पांच वर्षों में टीबी प्रसार दर में सैंतीस. पाँच प्रतिशत तक की कमी की है। बयान में बताया गया कि इसकी वजह से राज्य को यह राष्ट्रीय सम्मान दिया गया। पैनल ने यह भी कहा कि राज्य में टीबी अनुसंधान प्रणाली दुनिया में सर्वश्रेष्ठ अनुसंधान प्रणालियों में से एक है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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आज से IPL मेगा ऑक्शन (IPL 2022 Mega Auction) का आगाज हो रहा है. आखिरी बार मेगा ऑक्शन (IPL 2022 Mega Auction) का आयोजन 2018 में हुआ था. उस समय 8 टीमों ने ऑक्शन में हिस्सा लिया था. इस बार 10 टीमें ऑक्शन का हिस्सा बन रही है. IPL 2022 Mega Auction के लिए BCCI की पहली लिस्ट में 590 खिलाड़ियों के नाम थे, लेकिन ऑक्शन से ठीक पहले 10 और खिलाड़ियों को जोड़ा गया है. अब 590 खिलाड़ियों की जगह 600 खिलाड़ी नीलामी का हिस्सा होंगे. वहीं, ऑक्शन से पहले लखनऊ सुपर जायंट्स (Lucknow Super Joints) ट्विटर पर ट्रेंड कर रही है.
लखनऊ (Lucknow Franchise) और अहमदाबाद (Aehmadabad Franchise) अब गुजरात लायंस के आने से पुराने फ्रेंचाइजी के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं. सभी फ्रेंचाइजी रिलीज किए गए मैच विनर खिलाड़ियों को ऑक्शन में खरीदने के लिए बेताव है लेकिन उससे पहले दो नई फ्रेंचाइजी ने बड़े खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़ लिया है. केएल राहुल को लेकर सबसे ज्यादा सरगर्मी रही लेकिन लखनऊ इस खिलाड़ी को अपने पाले में कर कप्तान बनाने में लखनऊ सुपर जाइंट्स सफल रही. लखनऊ सुपर जायंट्स के अधिकारी मेगा ऑक्शन में हिस्सा लेने के लिए बेंगलुरू में हैं. टीम के मालिक संजीव गोयनका, मेंटोर गौतम गंभीर, कोच एंडी फ्लावर समेत अन्य सदस्य मौजूद हैं.
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आज से IPL मेगा ऑक्शन का आगाज हो रहा है. आखिरी बार मेगा ऑक्शन का आयोजन दो हज़ार अट्ठारह में हुआ था. उस समय आठ टीमों ने ऑक्शन में हिस्सा लिया था. इस बार दस टीमें ऑक्शन का हिस्सा बन रही है. IPL दो हज़ार बाईस Mega Auction के लिए BCCI की पहली लिस्ट में पाँच सौ नब्बे खिलाड़ियों के नाम थे, लेकिन ऑक्शन से ठीक पहले दस और खिलाड़ियों को जोड़ा गया है. अब पाँच सौ नब्बे खिलाड़ियों की जगह छः सौ खिलाड़ी नीलामी का हिस्सा होंगे. वहीं, ऑक्शन से पहले लखनऊ सुपर जायंट्स ट्विटर पर ट्रेंड कर रही है. लखनऊ और अहमदाबाद अब गुजरात लायंस के आने से पुराने फ्रेंचाइजी के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं. सभी फ्रेंचाइजी रिलीज किए गए मैच विनर खिलाड़ियों को ऑक्शन में खरीदने के लिए बेताव है लेकिन उससे पहले दो नई फ्रेंचाइजी ने बड़े खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़ लिया है. केएल राहुल को लेकर सबसे ज्यादा सरगर्मी रही लेकिन लखनऊ इस खिलाड़ी को अपने पाले में कर कप्तान बनाने में लखनऊ सुपर जाइंट्स सफल रही. लखनऊ सुपर जायंट्स के अधिकारी मेगा ऑक्शन में हिस्सा लेने के लिए बेंगलुरू में हैं. टीम के मालिक संजीव गोयनका, मेंटोर गौतम गंभीर, कोच एंडी फ्लावर समेत अन्य सदस्य मौजूद हैं. Menu to aa gaya,
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मुंबई :
कॉमेडियन भारती सिंह के पति हर्ष लिंबाचिया को पूछताछ के बाद एनसीबी ने आज गिरफ्तार कर लिया. एनसीबी की पूछताछ में दोनों ने ड्रग्स का लेने की बात स्वीकार की है. नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक शख्स से पूछताछ में भारती सिंह का नाम सामने आने के बाद एनसीबी के अधिकारियों ने शनिवार की सुबह सात बजे भारती सिंह के लोखंडवाला काम्प्लेक्स स्थित घर एवं कार्यालय पर एक साथ छापा मारा था.
भारती और हर्ष लिंबाचिया ने घर पर पूछताछ के दौरान एनसीबी के कई सवालों के जवाब नहीं दे सके, फिर एनसीबी के बेलार्ड एस्टेट स्थित कार्यालय में ले जाकर दोनों से पूछताछ शुरू की गई. वहां चली करीब लंबी पूछताछ के बाद एनसीबी ने भारती सिंह को गिरफ्तार कर लिया था. अब उनके पति हर्ष लिंबाचिया को भी गिरफ्तार कर लिया गया है.
भारती सिंह को गिरफ्तारी के बाद एनसीबी ऑफिस में ही रातभर रखा गया. वहां कॉमेडियन से पूछताछ चली है. भारती की मां उनसे मिलने के लिए रात को एनसीबी ऑफिस पहुंची थीं, लेकिन उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गयी. आज भारती सिंह को कोर्ट में पेश किया जायेगा. अब कोर्ट उनपर क्या फैसला सुनाता है यह देखने वाली बात होगी.
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मुंबई : कॉमेडियन भारती सिंह के पति हर्ष लिंबाचिया को पूछताछ के बाद एनसीबी ने आज गिरफ्तार कर लिया. एनसीबी की पूछताछ में दोनों ने ड्रग्स का लेने की बात स्वीकार की है. नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक शख्स से पूछताछ में भारती सिंह का नाम सामने आने के बाद एनसीबी के अधिकारियों ने शनिवार की सुबह सात बजे भारती सिंह के लोखंडवाला काम्प्लेक्स स्थित घर एवं कार्यालय पर एक साथ छापा मारा था. भारती और हर्ष लिंबाचिया ने घर पर पूछताछ के दौरान एनसीबी के कई सवालों के जवाब नहीं दे सके, फिर एनसीबी के बेलार्ड एस्टेट स्थित कार्यालय में ले जाकर दोनों से पूछताछ शुरू की गई. वहां चली करीब लंबी पूछताछ के बाद एनसीबी ने भारती सिंह को गिरफ्तार कर लिया था. अब उनके पति हर्ष लिंबाचिया को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. भारती सिंह को गिरफ्तारी के बाद एनसीबी ऑफिस में ही रातभर रखा गया. वहां कॉमेडियन से पूछताछ चली है. भारती की मां उनसे मिलने के लिए रात को एनसीबी ऑफिस पहुंची थीं, लेकिन उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गयी. आज भारती सिंह को कोर्ट में पेश किया जायेगा. अब कोर्ट उनपर क्या फैसला सुनाता है यह देखने वाली बात होगी.
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कोरोना संक्रमण प्रसार की अधिकता के मद्देनजर किसी क्षेत्र को कंटेंनमेंट जोन घोषित किया जाता है। लेकिन शहरों के अनौपचारिक बस्तियों में कंटेंनमेंट प्लान लागू करने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। यह बताया गया है कि इन बस्तियों में संक्रमण की निगरानी करना काफी जरुरी है। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मी, आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, म्युनिसिपल स्वास्थ्य कर्मी, सामुदायिक हेल्थ वालंटियर्स के साथ एनएसएस, एनवाईके एवं अन्य गैर-सरकारी संस्स्थानों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी या कार्यपालक स्वास्थ्य पदाधिकारी द्वारा प्रशिक्षण प्रदान कराया जाए।
कांग्रेस के श्वेताबंर मिश्र का निधनः
मधुबनी। मधुबनी कांग्रेस के मजबूत स्तंभ श्वेताम्बर मिश्र उर्फ छोटू बाबू के आकस्मिक निधन से कांग्रेस को भारी क्षति हुई है। वे पार्टी के कर्मठ संकल्पित कार्यकर्ता थे। उनके निधन से अत्यंय दुखी बिहार प्रदेश कांग्रेस के संगठन सचिव कृष्ण कांत झा गुड्डू ने अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा की उन्होंने आजीवन कांग्रेस के विचारों को जागृत रखने में अपना योगदान दिया। शोक व्यक्त करनेवालों में बिहार प्रभारी राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल, प्रदेश अध्यक्ष डॉ मदन मोहन झा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा, पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, विधान परिषद सदस्य प्रेम चन्द्र मिश्र, पूर्व मंत्री तारिक अनवर, कार्यकारी अध्यक्ष डॉ अशोक कुमार व समीर कुमार सिंह आदि थे।
भैरबा के विद्यालय से हजारों की चोरीः
बिस्फी। क्षेत्र के भैरबा गांव स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय में चोरों ने हजारों रूपये मूल्य के सामान की चोरी कर ली है । चार पंखे, पंखे का बोर्ड, दरी, चादर आदि सामान शामिल है । चोरी की घटना बीते रविवार की रात की बतायी जा रही है । विद्यालय के एचएम विजेन्द्र कुमार मिश्र जब सोमवार को विद्यालय पहुंचे तो उन्हें चोरी होने की जानकारी मिली । बिस्फी थाने में आवेदन दिया गया है ।
हुआ कोरोना पॉजिटिवः
रहिका । कोतवाली पुलिस लाइन का एक 44 वर्षीय आरक्षी की जांच कोरोना पाजिटिव होने की पुष्टि हुई है। आरक्षी को इलाज के लिए रामपट्टी स्थित आइसोलेशन में भेज दिया गया है।
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कोरोना संक्रमण प्रसार की अधिकता के मद्देनजर किसी क्षेत्र को कंटेंनमेंट जोन घोषित किया जाता है। लेकिन शहरों के अनौपचारिक बस्तियों में कंटेंनमेंट प्लान लागू करने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। यह बताया गया है कि इन बस्तियों में संक्रमण की निगरानी करना काफी जरुरी है। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मी, आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, म्युनिसिपल स्वास्थ्य कर्मी, सामुदायिक हेल्थ वालंटियर्स के साथ एनएसएस, एनवाईके एवं अन्य गैर-सरकारी संस्स्थानों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी या कार्यपालक स्वास्थ्य पदाधिकारी द्वारा प्रशिक्षण प्रदान कराया जाए। कांग्रेस के श्वेताबंर मिश्र का निधनः मधुबनी। मधुबनी कांग्रेस के मजबूत स्तंभ श्वेताम्बर मिश्र उर्फ छोटू बाबू के आकस्मिक निधन से कांग्रेस को भारी क्षति हुई है। वे पार्टी के कर्मठ संकल्पित कार्यकर्ता थे। उनके निधन से अत्यंय दुखी बिहार प्रदेश कांग्रेस के संगठन सचिव कृष्ण कांत झा गुड्डू ने अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा की उन्होंने आजीवन कांग्रेस के विचारों को जागृत रखने में अपना योगदान दिया। शोक व्यक्त करनेवालों में बिहार प्रभारी राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल, प्रदेश अध्यक्ष डॉ मदन मोहन झा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा, पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, विधान परिषद सदस्य प्रेम चन्द्र मिश्र, पूर्व मंत्री तारिक अनवर, कार्यकारी अध्यक्ष डॉ अशोक कुमार व समीर कुमार सिंह आदि थे। भैरबा के विद्यालय से हजारों की चोरीः बिस्फी। क्षेत्र के भैरबा गांव स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय में चोरों ने हजारों रूपये मूल्य के सामान की चोरी कर ली है । चार पंखे, पंखे का बोर्ड, दरी, चादर आदि सामान शामिल है । चोरी की घटना बीते रविवार की रात की बतायी जा रही है । विद्यालय के एचएम विजेन्द्र कुमार मिश्र जब सोमवार को विद्यालय पहुंचे तो उन्हें चोरी होने की जानकारी मिली । बिस्फी थाने में आवेदन दिया गया है । हुआ कोरोना पॉजिटिवः रहिका । कोतवाली पुलिस लाइन का एक चौंतालीस वर्षीय आरक्षी की जांच कोरोना पाजिटिव होने की पुष्टि हुई है। आरक्षी को इलाज के लिए रामपट्टी स्थित आइसोलेशन में भेज दिया गया है।
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लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में भरोसा बनाए रखने के लिए लड़कों को इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।
फिजिकल दूरी की वजह से अपने रिश्ते के बीच में मेंटल दूरी न आने दें। अपने अहम फैसले लेने से पहले अपने पार्टनर की राय जरूर लें।
जब आप अपने फैसलों में अपनी गर्लफ्रेंड को शामिल करेंगे तो आपका रिश्ता मजबूत बनेगा।
लड़कों को अपने बिजी शेड्यूल में से समय निकालकर रोजाना अपनी गर्लफ्रेंड से बात करनी चाहिए वरना आपका लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप टूटने की कगार पर पहुंच सकता है।
अगर आपका किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ है तो उसे दो से तीन दिन में सुलझा लें वरना आपके रिश्ते में दरार भी पड़ सकती है।
लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप की दूरी को कभी-कभी ब्रेक करना जरूरी होता है। आपको समय निकालकर अपनी गर्लफ्रेंड से मिलते रहना चाहिए।
साल में दो बार अपने पार्टनर के साथ वेकेशन प्लान करें। इससे आपके रिश्ते में प्यार बढ़ सकता है।
किसी भी रिश्ते में भरोसा बेहद जरूरी होता है। इसलिए आपकी जिम्मेदारी है कि आप अपने पार्टनर के भरोसे को टूटने न दें।
अगर आप अपनी गर्लफ्रेंड से वाकई में प्यार करते हैं तो लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में भी आप उन्हें चीट करने के बारे में नहीं सोचेंगे।
Thanks For Reading!
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लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में भरोसा बनाए रखने के लिए लड़कों को इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। फिजिकल दूरी की वजह से अपने रिश्ते के बीच में मेंटल दूरी न आने दें। अपने अहम फैसले लेने से पहले अपने पार्टनर की राय जरूर लें। जब आप अपने फैसलों में अपनी गर्लफ्रेंड को शामिल करेंगे तो आपका रिश्ता मजबूत बनेगा। लड़कों को अपने बिजी शेड्यूल में से समय निकालकर रोजाना अपनी गर्लफ्रेंड से बात करनी चाहिए वरना आपका लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप टूटने की कगार पर पहुंच सकता है। अगर आपका किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ है तो उसे दो से तीन दिन में सुलझा लें वरना आपके रिश्ते में दरार भी पड़ सकती है। लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप की दूरी को कभी-कभी ब्रेक करना जरूरी होता है। आपको समय निकालकर अपनी गर्लफ्रेंड से मिलते रहना चाहिए। साल में दो बार अपने पार्टनर के साथ वेकेशन प्लान करें। इससे आपके रिश्ते में प्यार बढ़ सकता है। किसी भी रिश्ते में भरोसा बेहद जरूरी होता है। इसलिए आपकी जिम्मेदारी है कि आप अपने पार्टनर के भरोसे को टूटने न दें। अगर आप अपनी गर्लफ्रेंड से वाकई में प्यार करते हैं तो लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में भी आप उन्हें चीट करने के बारे में नहीं सोचेंगे। Thanks For Reading!
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रांची में मिनी लॉकडाउन के बाद से चोरी की घटनाएं बढ़ गई हैं। चोर न सिर्फ बंद घरों को निशाना बना रहे हैं, बल्कि सरकारी कार्यालयों को भी नहीं छोड़ रहे। ताजा मामला हेहल अंचल कार्यालय का है, जहां का ताला तोड़कर चोरों ने एक लाख से अधिक के सामानों की चोरी कर ली।
चोरों ने इस कार्यालय में लगे 37 नलों की भी चोरी की है। घटना रविवार देर रात की है। इस संबंध में हेहल अंचलाधिकारी ने पंडरा ओपी में प्राथमिकी दर्ज कराई है। दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि चोर उसी इलाका का है। पुलिस उस इलाके में लगे सीसीटीवी से घटना का फुटेज निकाल रही है।
कंप्यूटर और कुर्सी भी ले गए चोरः
सीओ की ओर से दिए गए आवेदन में कहा गया है कि कार्यालय में कार्यरत अनुसेवक रीता देवी सोमवार की सुबह कार्यालय खोलने आयी। मुख्य दरवाजा का ताला खोलकर जब वह भीतर गई, तो देखी कि कार्यालय के ग्रिल समेत तीन जगहों के ताले टूटे हुए हैं। सामान बिखरा पड़ा। इसकी सूचना मिलने के बाद पंडरा ओपी की पुलिस और सीओ मौके पर पहुंचे। मिलान कराने के बाद पता चला कि एक मॉनिटर, पांच कुर्सी, एक एचपी का डेस्कटॉप, प्रिंटर, अग्निशमन यंत्र, 37 नल व ताला गायब थे। सूचना मिलने के बाद पहुंची पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की। उस इलाके में लगे सीसीटीवी से फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। हालांकि, पुलिस को अब तक चोरों का कोई सुराग हाथ नहीं लगा है।
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रांची में मिनी लॉकडाउन के बाद से चोरी की घटनाएं बढ़ गई हैं। चोर न सिर्फ बंद घरों को निशाना बना रहे हैं, बल्कि सरकारी कार्यालयों को भी नहीं छोड़ रहे। ताजा मामला हेहल अंचल कार्यालय का है, जहां का ताला तोड़कर चोरों ने एक लाख से अधिक के सामानों की चोरी कर ली। चोरों ने इस कार्यालय में लगे सैंतीस नलों की भी चोरी की है। घटना रविवार देर रात की है। इस संबंध में हेहल अंचलाधिकारी ने पंडरा ओपी में प्राथमिकी दर्ज कराई है। दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि चोर उसी इलाका का है। पुलिस उस इलाके में लगे सीसीटीवी से घटना का फुटेज निकाल रही है। कंप्यूटर और कुर्सी भी ले गए चोरः सीओ की ओर से दिए गए आवेदन में कहा गया है कि कार्यालय में कार्यरत अनुसेवक रीता देवी सोमवार की सुबह कार्यालय खोलने आयी। मुख्य दरवाजा का ताला खोलकर जब वह भीतर गई, तो देखी कि कार्यालय के ग्रिल समेत तीन जगहों के ताले टूटे हुए हैं। सामान बिखरा पड़ा। इसकी सूचना मिलने के बाद पंडरा ओपी की पुलिस और सीओ मौके पर पहुंचे। मिलान कराने के बाद पता चला कि एक मॉनिटर, पांच कुर्सी, एक एचपी का डेस्कटॉप, प्रिंटर, अग्निशमन यंत्र, सैंतीस नल व ताला गायब थे। सूचना मिलने के बाद पहुंची पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की। उस इलाके में लगे सीसीटीवी से फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। हालांकि, पुलिस को अब तक चोरों का कोई सुराग हाथ नहीं लगा है।
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पाउडर, क्रीम सुरमादानी, वट्टी तीन साबुनदानी पिया फैशन
हरमुनिया सितार टेलीफोन हो तयार जामे रेडियो का काम जर्मन जापानी पिया तोता मैना दुरग लोडी बाँदी हो सग मोटर कार हो पास बडी तूफानी पिया० पिया कमरा सजाय, वाप पलिका बिछाय बामैं गद्दा लगाय, वा तकिया सजाय लगा मच्छर दानी पिया०
पलिका ऊपर पावदाना, पलिका नीचे पीकदाना
वामे इत्ते सामान और नल का पानी पिया फैशन
चटक-मटक कर रहने वाली स्त्री वहुधा दुश्चरित्र मानी जाती है। ऐसी ही एक स्त्री को सम्बोधित कर निम्नलिखित गीत गाया गया है । कहावत है कि ऐसे पै तो ऐसी, जाने काजर दिये कैसी ? वह स्त्री वैसे ही बडी सुन्दर और नव युवती है फिर इस पर उसने सौन्दर्य प्रसाधनो का भी प्रयोग कर रखा है। ऐसी स्थिति मे भय है कि देखने वाले उस पर मुग्ध न हो जाये । इसीलिये उसका प्रेमी उससे कहता हैगोरी पिछवारे को जानो छोडि दे । टेक
जुल्फें तिहारी कारी नगिनिया, गोरी अतरु लगानो छोडि दै । आँखें तिहारी जैसे निबुआ की फाँके, गोरी सुरमा लगानो छोड़ि है । दाँत तिहारे है दाने अनारन के, गोरी मिस्सी लगानो छोडि है ।
चार दिन की चाँदनी की भाँति यह दीवानी जवानी नाच-गा कर जब चली जाती है तो बुढापे मे शारीरिक और मानसिक कष्ट वडे भयकर रूप से सताने लगते हैं। रह-रह कर अपनी जवानी की याद कर बूढ़े रोते-झीखते रहते है। इस दुर्दशा का वर्णन एक 'रसिया' लोकगीत मे दृष्टव्य है -
बुढापी वैरी कैसे कटै मेरी ज्वानी को ससार जवांनी वैरिन जौई तो गई
बुढ़ापे मे मट्टी ख्वार भई न अब पहली सी कदर रई कदर न पहली सी रही जब है तावेदार वेई रहुआ दिन करै माम अब मारै फटकार
देह की सुकर गई सब खाल मूड के धौरे परि गये वाल दिन करे वैठ गये दोऊ गाल
गाल गये दोउ बैठ के आँखन ते लाचार कानन ते कमती सुन्नु मेरी डगमग हालै नार बऊ- बेटा नित करे कलेस
झीकने रह गये जेई हमेस काऊ बिध जाय न मेरी पेस पेस कोइ जावै नही कहा करूं रुजगार जीवे ते मरवो भलो कोई ये मेरे करतार
२. लोकगीतकारों के जीवन-वृत सम्बन्धी जन-श्न तियों की परीक्षा
लोकगीतकार जनता की भावनाओ का सच्चा प्रतिनिधित्व करने वाला एक 'ऐसा कलाकार होता है जो जन-जीवन की प्रमुख गतिविधियों से परिचित रह कर उन्हे अपने गीतो में प्रकट करता है। उसके गीतो की भाषा लोक-भाषा होती है । वह अपनी सरलता और सरसता से जन-मानस को प्रभावित करता रहता है। वह अपने गीतो मे सांस्कृतिक, राजनीतिक, समाजिक पारिवारिक, वार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं को व्यक्त करता रहता है। लोकगीतो के रचयिताओ के विषय मे पूर्ण जानकारी प्राप्त नहीं की जा सकती । हमारे लोकगीत तो अनेक वर्षों से चली आती हुई हमारे पूर्वजो की परम्पराओं के प्रदर्शक है । लोकगीतकारो का परिचय देना भी सभव इसलिए नही हो सकता क्योकि ये लोकगीत स्वाभाविक रूप से ही बनते, सुधरते, सँवरते, निखरते और विकसित होते चले आए है । इन गीतो के रचयिता इतने महान थे कि उन्होने अपने गीतो मे अपने नाम देना भी उचित नही समझा ।
जिन लोकगीतकारो का परिचय मिला भी है वह जन-श्र तियो के आधार पर ही मिल सका है । बाद के लोकगीतकारो ने अपने नाम अपने गीतो के अन्त या मध्य मे अवश्य रख दिये हे । इनसे भी इनके विषय मे कुछ जानकारी प्राप्त हो सकती है । आगरा जिले में जिन लोकगीतकारो के गीत पिछले कुछ वर्षो मे लोकप्रिय हुए है उनके जीवन वृत्त सम्बन्धी जन-श्रुतियो की परीक्षा अवश्य की जा सकती है । गत वर्षो मे लोकप्रियता पाने वाले वाले कुछ लोकगीतकार निम्नलिखित हैहैपतोला, सुखैया, मोहनसिंह, हरनाम सिंह ( हन्ना), हरफूला, गनेसा, सोभा राम, चदसखी, ईसुरी (बुन्देलखन्डी ), निर्भय, छाजू, नत्थन, माधो प्रसाद जोगी ।
आधुनिक राजपूती होली के जन्मदाता आगरा जनपद के अन्तर्गत भाहई नामक गाँव के निवासी थे । वे जाति के धाकरे ठाकुर थे । इनका असली नाम पातीराम था किन्तु शरीर से दुबले-पतले होने के कारण लोग उन्हे 'पतोला' कहते थे । होली पर एक वार किसी ने उनके "पतोला" नाम की व्युत्पत्ति के विषय में पूछा तो उन्होने तुरन्त उत्तर दिया
अन्न टका भरि खाऊ, सूखि गयौ चोला । ताते मेरो परि गयौ नामु पतोला ।।
पतोला से पूर्व या तो एक 'कडी' की राजपूती होलियाँ गायी जाती थी अथवा ढफयायी होलियाँ । इन्होने होलियो को नया रूप देकर प्रस्तुत किया जिसके प्रभाव से गीत भी वड़े बनने लगे और वे राग-रागनियो मे बद्ध होकर गाए जाने लगे । पहले होलियाँ बहुधा 'चिकारे' पर ही गायी जाती थी, पतोला ने होलियाँ "इसराज" पर गाने की प्रथा डाली । ढफयायी होलियो मे प्रतिवर्ष प्रायः पुरानी होलियाँ ही गायी जाती है। इनका सम्बन्ध मुख्यतः राधा-कृष्ण की रास लीला से होता है। राजपूती होलियाँ प्रतिवर्ष नई तर्जो पर स्वर-सम्वाद के साथ गायी जाती है । पतोला से पूर्व राजपूती और ढफयायी होलियो में कोई विशेष अन्तर नही था । इनमें अन्तर केवल साज और विषय - प्रतिपादन का ही था । राजपूती होलियो मे पौराणिक, ऐतिहासिक और सामाजिक जीवन के चित्रण रहते है ।
इघर आगरा जिले के भदावर क्षेत्र मे 'सुखैया' नाम के एक अति प्रसिद्ध लोकगीतकार हुए हैं। उनकी 'होली' देश भर में प्रसिद्ध हो गई है। वैसे स्वर सम्वाद की दृष्टि से राजपूती होलियों के जन्मदाता 'पतोला' ही हैं किन्तु राजपूती होलियो को अधिक लोकप्रियता दिलाने का श्रेय सुखया को ही है । वे अपने समय के नामी 'हुरियार' थे । सुखैया का असली नाम सुखलाल पटवारी था । वे बाह के अन्तर्गत सुखलपुरा नामक ग्राम में पैदा हुए थे । वे जाति के कायस्थ थे और पटवारी का काम करते थे । होली गाने के बाद से ही उनका नाम सुखैया पड़ा। उन्होंने स्वय एक गीत में कहा हैवंसी, मोहन सीग सुरीलो, दिमना नीको ऐ,
अतरौली गामु जाको ने कराम गोकुल को सीखौ ऐ, औरु बिरखा गड़सा से देई तुकम बेतमीज गावुत ऐऽऽऽ रे मुम्मा पतिया सूरा लालराम - जे मैंने नामी सुने गवैया । ताते मेरौ परि गयौ नाम सुखैया ।।
इस गीत से विदित होता है कि सुखैया अपने समय के अन्य अनेक लोकगीतकारों से प्रभावित हुए थे किन्तु अपनी सरसता मे वे इनसे भी बढ गए । इन्हे बचपन ही से होली गाने की रुचि थी । प्रारम्भ मे वे अन्य गितारियो की फैटी में रहकर होली गाते थे । बाद मे स्वय अपनी फैटी बनाकर होली गाने लगे । वे रात को
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पाउडर, क्रीम सुरमादानी, वट्टी तीन साबुनदानी पिया फैशन हरमुनिया सितार टेलीफोन हो तयार जामे रेडियो का काम जर्मन जापानी पिया तोता मैना दुरग लोडी बाँदी हो सग मोटर कार हो पास बडी तूफानी पियाशून्य पिया कमरा सजाय, वाप पलिका बिछाय बामैं गद्दा लगाय, वा तकिया सजाय लगा मच्छर दानी पियाशून्य पलिका ऊपर पावदाना, पलिका नीचे पीकदाना वामे इत्ते सामान और नल का पानी पिया फैशन चटक-मटक कर रहने वाली स्त्री वहुधा दुश्चरित्र मानी जाती है। ऐसी ही एक स्त्री को सम्बोधित कर निम्नलिखित गीत गाया गया है । कहावत है कि ऐसे पै तो ऐसी, जाने काजर दिये कैसी ? वह स्त्री वैसे ही बडी सुन्दर और नव युवती है फिर इस पर उसने सौन्दर्य प्रसाधनो का भी प्रयोग कर रखा है। ऐसी स्थिति मे भय है कि देखने वाले उस पर मुग्ध न हो जाये । इसीलिये उसका प्रेमी उससे कहता हैगोरी पिछवारे को जानो छोडि दे । टेक जुल्फें तिहारी कारी नगिनिया, गोरी अतरु लगानो छोडि दै । आँखें तिहारी जैसे निबुआ की फाँके, गोरी सुरमा लगानो छोड़ि है । दाँत तिहारे है दाने अनारन के, गोरी मिस्सी लगानो छोडि है । चार दिन की चाँदनी की भाँति यह दीवानी जवानी नाच-गा कर जब चली जाती है तो बुढापे मे शारीरिक और मानसिक कष्ट वडे भयकर रूप से सताने लगते हैं। रह-रह कर अपनी जवानी की याद कर बूढ़े रोते-झीखते रहते है। इस दुर्दशा का वर्णन एक 'रसिया' लोकगीत मे दृष्टव्य है - बुढापी वैरी कैसे कटै मेरी ज्वानी को ससार जवांनी वैरिन जौई तो गई बुढ़ापे मे मट्टी ख्वार भई न अब पहली सी कदर रई कदर न पहली सी रही जब है तावेदार वेई रहुआ दिन करै माम अब मारै फटकार देह की सुकर गई सब खाल मूड के धौरे परि गये वाल दिन करे वैठ गये दोऊ गाल गाल गये दोउ बैठ के आँखन ते लाचार कानन ते कमती सुन्नु मेरी डगमग हालै नार बऊ- बेटा नित करे कलेस झीकने रह गये जेई हमेस काऊ बिध जाय न मेरी पेस पेस कोइ जावै नही कहा करूं रुजगार जीवे ते मरवो भलो कोई ये मेरे करतार दो. लोकगीतकारों के जीवन-वृत सम्बन्धी जन-श्न तियों की परीक्षा लोकगीतकार जनता की भावनाओ का सच्चा प्रतिनिधित्व करने वाला एक 'ऐसा कलाकार होता है जो जन-जीवन की प्रमुख गतिविधियों से परिचित रह कर उन्हे अपने गीतो में प्रकट करता है। उसके गीतो की भाषा लोक-भाषा होती है । वह अपनी सरलता और सरसता से जन-मानस को प्रभावित करता रहता है। वह अपने गीतो मे सांस्कृतिक, राजनीतिक, समाजिक पारिवारिक, वार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं को व्यक्त करता रहता है। लोकगीतो के रचयिताओ के विषय मे पूर्ण जानकारी प्राप्त नहीं की जा सकती । हमारे लोकगीत तो अनेक वर्षों से चली आती हुई हमारे पूर्वजो की परम्पराओं के प्रदर्शक है । लोकगीतकारो का परिचय देना भी सभव इसलिए नही हो सकता क्योकि ये लोकगीत स्वाभाविक रूप से ही बनते, सुधरते, सँवरते, निखरते और विकसित होते चले आए है । इन गीतो के रचयिता इतने महान थे कि उन्होने अपने गीतो मे अपने नाम देना भी उचित नही समझा । जिन लोकगीतकारो का परिचय मिला भी है वह जन-श्र तियो के आधार पर ही मिल सका है । बाद के लोकगीतकारो ने अपने नाम अपने गीतो के अन्त या मध्य मे अवश्य रख दिये हे । इनसे भी इनके विषय मे कुछ जानकारी प्राप्त हो सकती है । आगरा जिले में जिन लोकगीतकारो के गीत पिछले कुछ वर्षो मे लोकप्रिय हुए है उनके जीवन वृत्त सम्बन्धी जन-श्रुतियो की परीक्षा अवश्य की जा सकती है । गत वर्षो मे लोकप्रियता पाने वाले वाले कुछ लोकगीतकार निम्नलिखित हैहैपतोला, सुखैया, मोहनसिंह, हरनाम सिंह , हरफूला, गनेसा, सोभा राम, चदसखी, ईसुरी , निर्भय, छाजू, नत्थन, माधो प्रसाद जोगी । आधुनिक राजपूती होली के जन्मदाता आगरा जनपद के अन्तर्गत भाहई नामक गाँव के निवासी थे । वे जाति के धाकरे ठाकुर थे । इनका असली नाम पातीराम था किन्तु शरीर से दुबले-पतले होने के कारण लोग उन्हे 'पतोला' कहते थे । होली पर एक वार किसी ने उनके "पतोला" नाम की व्युत्पत्ति के विषय में पूछा तो उन्होने तुरन्त उत्तर दिया अन्न टका भरि खाऊ, सूखि गयौ चोला । ताते मेरो परि गयौ नामु पतोला ।। पतोला से पूर्व या तो एक 'कडी' की राजपूती होलियाँ गायी जाती थी अथवा ढफयायी होलियाँ । इन्होने होलियो को नया रूप देकर प्रस्तुत किया जिसके प्रभाव से गीत भी वड़े बनने लगे और वे राग-रागनियो मे बद्ध होकर गाए जाने लगे । पहले होलियाँ बहुधा 'चिकारे' पर ही गायी जाती थी, पतोला ने होलियाँ "इसराज" पर गाने की प्रथा डाली । ढफयायी होलियो मे प्रतिवर्ष प्रायः पुरानी होलियाँ ही गायी जाती है। इनका सम्बन्ध मुख्यतः राधा-कृष्ण की रास लीला से होता है। राजपूती होलियाँ प्रतिवर्ष नई तर्जो पर स्वर-सम्वाद के साथ गायी जाती है । पतोला से पूर्व राजपूती और ढफयायी होलियो में कोई विशेष अन्तर नही था । इनमें अन्तर केवल साज और विषय - प्रतिपादन का ही था । राजपूती होलियो मे पौराणिक, ऐतिहासिक और सामाजिक जीवन के चित्रण रहते है । इघर आगरा जिले के भदावर क्षेत्र मे 'सुखैया' नाम के एक अति प्रसिद्ध लोकगीतकार हुए हैं। उनकी 'होली' देश भर में प्रसिद्ध हो गई है। वैसे स्वर सम्वाद की दृष्टि से राजपूती होलियों के जन्मदाता 'पतोला' ही हैं किन्तु राजपूती होलियो को अधिक लोकप्रियता दिलाने का श्रेय सुखया को ही है । वे अपने समय के नामी 'हुरियार' थे । सुखैया का असली नाम सुखलाल पटवारी था । वे बाह के अन्तर्गत सुखलपुरा नामक ग्राम में पैदा हुए थे । वे जाति के कायस्थ थे और पटवारी का काम करते थे । होली गाने के बाद से ही उनका नाम सुखैया पड़ा। उन्होंने स्वय एक गीत में कहा हैवंसी, मोहन सीग सुरीलो, दिमना नीको ऐ, अतरौली गामु जाको ने कराम गोकुल को सीखौ ऐ, औरु बिरखा गड़सा से देई तुकम बेतमीज गावुत ऐऽऽऽ रे मुम्मा पतिया सूरा लालराम - जे मैंने नामी सुने गवैया । ताते मेरौ परि गयौ नाम सुखैया ।। इस गीत से विदित होता है कि सुखैया अपने समय के अन्य अनेक लोकगीतकारों से प्रभावित हुए थे किन्तु अपनी सरसता मे वे इनसे भी बढ गए । इन्हे बचपन ही से होली गाने की रुचि थी । प्रारम्भ मे वे अन्य गितारियो की फैटी में रहकर होली गाते थे । बाद मे स्वय अपनी फैटी बनाकर होली गाने लगे । वे रात को
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आज हम आपको एक बेहद ही खूबसूरत मां की तस्वीरें दिखाने जा रहे हैं जिनके आगे उनकी दुल्हन बेटी भी फीकी लगी। हम बात कर रहे हैं हाल ही में शादी के बंधन में बंधी कियारा आडवाणी की जिनका ब्राइडल लुक खूब चर्चाओं में चल रहा है। जितनी प्यारी कियारा लग रही हैं उतनी ही खूबसूरत दिखी उनकी मां जेनेविव आडवाणी।
वैसे ताे कियारा और सिद्धार्थ की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई है, लेकिन जेनेविव आडवाणी को देखते ही लोग उनकी तारीफें करते नहीं थके। इस खास दिन में वह अपनी दुल्हन बेटी के साथ मैचिंग करती दिखाई दी। एक बार तो उनको देखकर अंदाजा लगाया ही नहीं जा सकता था कि वह इतनी बड़ी बेटी की मां है।
बताया जा रहा है कि उन्होंने भी मनीष मल्होत्रा का डिज़ाइन किया हुआ लहंगा कैरी किया था। लाइट पिंक लहंगे को ग्लोइंग मेकअप और अनकट जूलरी के साथ पूरा किया गया था। इस उम्र में भी वह जिस तरह फिट और खूबसूरत लग रही हैं वह काबिले तारीफ है।
यह कहना गलत नहीं होगा कि जेनेविव आडवाणी ने बच्चों की शादी में मॉम्स के लिए फैशन गोल सेट कर दिया है। अगर आप भी जल्द अपनी बेटी की शादी करने जा रही हैं तो इनसे इंस्पिरेशन लेना ना भूलें।
इससे पहले भी कियारा की मां की तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें वह अपने बेटे के साथ पोज देती दिखाई दी थी। पिंक और ऑरेंज शेड लहंगे में वह बेहद प्यारी लग रही थी। गोल्डन और ग्रीन कलर की ज्पवेलरी, हैवी ब्लाउज, खुले बालों में वह काफी यंग लग रही थी।
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आज हम आपको एक बेहद ही खूबसूरत मां की तस्वीरें दिखाने जा रहे हैं जिनके आगे उनकी दुल्हन बेटी भी फीकी लगी। हम बात कर रहे हैं हाल ही में शादी के बंधन में बंधी कियारा आडवाणी की जिनका ब्राइडल लुक खूब चर्चाओं में चल रहा है। जितनी प्यारी कियारा लग रही हैं उतनी ही खूबसूरत दिखी उनकी मां जेनेविव आडवाणी। वैसे ताे कियारा और सिद्धार्थ की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई है, लेकिन जेनेविव आडवाणी को देखते ही लोग उनकी तारीफें करते नहीं थके। इस खास दिन में वह अपनी दुल्हन बेटी के साथ मैचिंग करती दिखाई दी। एक बार तो उनको देखकर अंदाजा लगाया ही नहीं जा सकता था कि वह इतनी बड़ी बेटी की मां है। बताया जा रहा है कि उन्होंने भी मनीष मल्होत्रा का डिज़ाइन किया हुआ लहंगा कैरी किया था। लाइट पिंक लहंगे को ग्लोइंग मेकअप और अनकट जूलरी के साथ पूरा किया गया था। इस उम्र में भी वह जिस तरह फिट और खूबसूरत लग रही हैं वह काबिले तारीफ है। यह कहना गलत नहीं होगा कि जेनेविव आडवाणी ने बच्चों की शादी में मॉम्स के लिए फैशन गोल सेट कर दिया है। अगर आप भी जल्द अपनी बेटी की शादी करने जा रही हैं तो इनसे इंस्पिरेशन लेना ना भूलें। इससे पहले भी कियारा की मां की तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें वह अपने बेटे के साथ पोज देती दिखाई दी थी। पिंक और ऑरेंज शेड लहंगे में वह बेहद प्यारी लग रही थी। गोल्डन और ग्रीन कलर की ज्पवेलरी, हैवी ब्लाउज, खुले बालों में वह काफी यंग लग रही थी।
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लॉर्ड्स टेस्ट से पहले रिकी पोंटिंग ने मार्नस लाबुशेन और ट्रेविस हेड के लिए खास सलाह साझा की है।
इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच एशेज सीरीज 2023 का दूसरा टेस्ट लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर 28 जून (बुधवार) से खेला जाएगा। मेहमान टीम ऑस्ट्रेलिया ने एजबेस्टन टेस्ट जीतकर सीरीज में 1-0 से बढ़त हासिल कर रखी है, लेकिन इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग संतुष्ट नहीं हैं। दरअसल, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान को मार्नस लाबुशेन और ट्रेविस हेड की तकनीक में कमजोरी नज़र आई है जिस वजह से वह चिंतित हैं।
लाबुशेन के अलावा महान बल्लेबाज़ पोंटिंग ने ऑस्ट्रेलिया के विस्फोटक मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़ ट्रेविस हेड को भी बड़ी सलाह दी है। पोंटिंग का मानना है कि हेड को बाउंसर से निपटना होगा। पोंटिंग के अनुसार हेड को अपनी मानसिकता पर काम करने की जरूरत है। उन्हें यह समझना होगा कि वह बाउंसर के खिलाफ हुक या पुल शॉट खेल सकते हैं? या वह बाउंसर को बेहतर तरीके से छोड़ सकते हैं ताकि गेंदबाज़ थक जाए?
बता दें कि एजबेस्टन टेस्ट में ट्रेविस हेड ने पहली इनिंग में अर्धशतकीय पारी खेली थी, लेकिन इस दौरान इंग्लिश गेंदबाज़ों ने उन्हें अपनी बाउंसर से खूब परेशान किया था। हेड दूसरी इनिंग में महज 16 रन बनाकर आउट हुए थे। बात करें अगर लाबुशेन की तो उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए पहले टेस्ट की पहली इनिंग में शून्य और दूसरी इनिंग में 15 गेंदों पर सिर्फ 13 रन बनाए थे। यह दोनों ही खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया के बैटिंग लाइनअप की ताकत हैं, ऐसे में उनका अच्छा प्रदर्शन टीम के लिए काफी जरूरी होगा।
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लॉर्ड्स टेस्ट से पहले रिकी पोंटिंग ने मार्नस लाबुशेन और ट्रेविस हेड के लिए खास सलाह साझा की है। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच एशेज सीरीज दो हज़ार तेईस का दूसरा टेस्ट लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर अट्ठाईस जून से खेला जाएगा। मेहमान टीम ऑस्ट्रेलिया ने एजबेस्टन टेस्ट जीतकर सीरीज में एक-शून्य से बढ़त हासिल कर रखी है, लेकिन इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग संतुष्ट नहीं हैं। दरअसल, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान को मार्नस लाबुशेन और ट्रेविस हेड की तकनीक में कमजोरी नज़र आई है जिस वजह से वह चिंतित हैं। लाबुशेन के अलावा महान बल्लेबाज़ पोंटिंग ने ऑस्ट्रेलिया के विस्फोटक मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़ ट्रेविस हेड को भी बड़ी सलाह दी है। पोंटिंग का मानना है कि हेड को बाउंसर से निपटना होगा। पोंटिंग के अनुसार हेड को अपनी मानसिकता पर काम करने की जरूरत है। उन्हें यह समझना होगा कि वह बाउंसर के खिलाफ हुक या पुल शॉट खेल सकते हैं? या वह बाउंसर को बेहतर तरीके से छोड़ सकते हैं ताकि गेंदबाज़ थक जाए? बता दें कि एजबेस्टन टेस्ट में ट्रेविस हेड ने पहली इनिंग में अर्धशतकीय पारी खेली थी, लेकिन इस दौरान इंग्लिश गेंदबाज़ों ने उन्हें अपनी बाउंसर से खूब परेशान किया था। हेड दूसरी इनिंग में महज सोलह रन बनाकर आउट हुए थे। बात करें अगर लाबुशेन की तो उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए पहले टेस्ट की पहली इनिंग में शून्य और दूसरी इनिंग में पंद्रह गेंदों पर सिर्फ तेरह रन बनाए थे। यह दोनों ही खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया के बैटिंग लाइनअप की ताकत हैं, ऐसे में उनका अच्छा प्रदर्शन टीम के लिए काफी जरूरी होगा।
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""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""(समाप्ति काल)
देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्। ।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत । ।
आज का दिन आपके लिए मध्यम रूप से फलदायक रहेगा। यात्रा, नौकरी व निवेश मनोनुकूल लाभ देंगे। भेंट आदि की प्राप्ति होगी। कोई बड़ा कार्य होने से प्रसन्नता रहेगी। व्यापार में उन्नति के योग हैं। संतान की ओर से सुखद स्थिति बनेगी। प्रयास की मात्रा के अनुसार लाभ की अधिकता रहेगी। अपनी वस्तुएँ संभालकर रखें। आपको कुछ नया कार्य सीखने को मिलेगा। आप अपनी बातों को किसी वाद विवाद को समाप्त करने में सफल रहेंगे। माता पिता और गुरु के प्रति आपकी भक्ति देखकर लोग भी हैरान रहेंगे। विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक दिशा में परिवर्तन कर सकते हैं,लेकिन अपनी शिक्षा में आपको मन मुताबिक परिणाम मिलेंगे। आपको यदि किसी से उधार लेना पड़े,तो बहुत ही मजबूरी में ही लें,नहीं तो आपको उनको पाना बहुत मुश्किल होगा। आपके मित्रों के सहयोग से आपका कोई लंबे समय से रुका हुआ काम पूरा हो सकता है।
(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
नोट- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् । ।
शिव वास एवं फल -:
भद्रा वास एवं फल -:
स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागमः।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी। ।
* फलहारिणी कालिका पूजा (बंगाल)
अग्निहोत्रं विना वेदाः न च दानं विना क्रियाः ।
न भावेनविना सिध्दिस्तस्माद्भावो हि कारणम् । ।
। । चा o नी o। ।
यह बाते बेकार है. वेद मंत्रो का उच्चारण करना लेकिन निहित यज्ञ कर्मो को ना करना. यज्ञ करना लेकिन बाद में लोगो को दान दे कर तृप्त ना करना. पूर्णता तो भक्ति से ही आती है. भक्ति ही सभी सफलताओ का मूल है.
एतैर्विमुक्तः कौन्तेय तमोद्वारैस्त्रिभिर्नरः। ,
आचरत्यात्मनः श्रेयस्ततो याति परां गतिम्॥ ,
हे अर्जुन! इन तीनों नरक के द्वारों से मुक्त पुरुष अपने कल्याण का आचरण करता है (अपने उद्धार के लिए भगवदाज्ञानुसार बरतना ही 'अपने कल्याण का आचरण करना' है), इससे वह परमगति को जाता है अर्थात् मुझको प्राप्त हो जाता है॥ ,22॥ ,
आचार्य नीरज पाराशर (वृन्दावन)
(व्याकरण,ज्योतिष,एवं पुराणाचार्य)
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"""""""""""""""""""""""""""""""""""""""" देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके। नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्। । विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे। जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत । । आज का दिन आपके लिए मध्यम रूप से फलदायक रहेगा। यात्रा, नौकरी व निवेश मनोनुकूल लाभ देंगे। भेंट आदि की प्राप्ति होगी। कोई बड़ा कार्य होने से प्रसन्नता रहेगी। व्यापार में उन्नति के योग हैं। संतान की ओर से सुखद स्थिति बनेगी। प्रयास की मात्रा के अनुसार लाभ की अधिकता रहेगी। अपनी वस्तुएँ संभालकर रखें। आपको कुछ नया कार्य सीखने को मिलेगा। आप अपनी बातों को किसी वाद विवाद को समाप्त करने में सफल रहेंगे। माता पिता और गुरु के प्रति आपकी भक्ति देखकर लोग भी हैरान रहेंगे। विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक दिशा में परिवर्तन कर सकते हैं,लेकिन अपनी शिक्षा में आपको मन मुताबिक परिणाम मिलेंगे। आपको यदि किसी से उधार लेना पड़े,तो बहुत ही मजबूरी में ही लें,नहीं तो आपको उनको पाना बहुत मुश्किल होगा। आपके मित्रों के सहयोग से आपका कोई लंबे समय से रुका हुआ काम पूरा हो सकता है। नोट- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार । रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार । अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । लाभ में व्यापार करें । रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । अमृत में सभी शुभ कार्य करें । इस मंत्र का उच्चारण करें-: अग्नि वास ज्ञान -: यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु, चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु । दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ, नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् । । शिव वास एवं फल -: भद्रा वास एवं फल -: स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागमः। मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी। । * फलहारिणी कालिका पूजा अग्निहोत्रं विना वेदाः न च दानं विना क्रियाः । न भावेनविना सिध्दिस्तस्माद्भावो हि कारणम् । । । । चा o नी o। । यह बाते बेकार है. वेद मंत्रो का उच्चारण करना लेकिन निहित यज्ञ कर्मो को ना करना. यज्ञ करना लेकिन बाद में लोगो को दान दे कर तृप्त ना करना. पूर्णता तो भक्ति से ही आती है. भक्ति ही सभी सफलताओ का मूल है. एतैर्विमुक्तः कौन्तेय तमोद्वारैस्त्रिभिर्नरः। , आचरत्यात्मनः श्रेयस्ततो याति परां गतिम्॥ , हे अर्जुन! इन तीनों नरक के द्वारों से मुक्त पुरुष अपने कल्याण का आचरण करता है , इससे वह परमगति को जाता है अर्थात् मुझको प्राप्त हो जाता है॥ ,बाईस॥ , आचार्य नीरज पाराशर
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न्यूजीलैंड और श्रीलंका के बीच चल रही टेस्ट सीरीज में मेजबान टीम ने टेस्ट की चौथी पारी में 250 के स्कोर का पीछा करते हुए मेजबान टीम को मात दी। श्रीलंका गाले में 2 मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले टेस्ट की चौथी पारी में 268 के लक्ष्य का पीछा किया।
चौथी पारी में श्रीलंका के कप्तान दिमुथ करुणारत्ने और लाहिरू थिरिमाने के बीच पहले विकेट के लिए 164 रन की साझेदारी हुई। 64 रन बनाकर थिरिमाने पवेलियन लौट गए। कप्तान ने बल्ले से अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा और 122 रनों की शानदार मैच जिताऊ पारी खेली और श्रीलंका ने 6 विकेट्स से जीत दर्ज की।
इससे पहले टेस्ट में मेहमान टीम ने 267 के लिए मेजबान टीम को गेंदबाजी करने से पहले अपनी पहली पारी में 249 रन बनाए थे। न्यूजीलैंड ने अपनी तीसरी पारी में 285 रन बनाए जिसमें कीपर-बल्लेबाज बीजे वाटलिंग ने शानदार 77 रन और विलियम सोमरविले ने नाबाद 40 रन बनाए।
न्यूजीलैंड के स्पिन तिकड़ी को देखते हुए 268 रनों का लक्ष्य भी मेजबान टीम के लिए मुश्किल था। हालांकि, लक्ष्य का आसानी से पीछा किया गया और श्रीलंका ने आईसीसी विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के अपने अभियान को एक जीत के साथ खाता खोला।
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न्यूजीलैंड और श्रीलंका के बीच चल रही टेस्ट सीरीज में मेजबान टीम ने टेस्ट की चौथी पारी में दो सौ पचास के स्कोर का पीछा करते हुए मेजबान टीम को मात दी। श्रीलंका गाले में दो मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले टेस्ट की चौथी पारी में दो सौ अड़सठ के लक्ष्य का पीछा किया। चौथी पारी में श्रीलंका के कप्तान दिमुथ करुणारत्ने और लाहिरू थिरिमाने के बीच पहले विकेट के लिए एक सौ चौंसठ रन की साझेदारी हुई। चौंसठ रन बनाकर थिरिमाने पवेलियन लौट गए। कप्तान ने बल्ले से अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा और एक सौ बाईस रनों की शानदार मैच जिताऊ पारी खेली और श्रीलंका ने छः विकेट्स से जीत दर्ज की। इससे पहले टेस्ट में मेहमान टीम ने दो सौ सरसठ के लिए मेजबान टीम को गेंदबाजी करने से पहले अपनी पहली पारी में दो सौ उनचास रन बनाए थे। न्यूजीलैंड ने अपनी तीसरी पारी में दो सौ पचासी रन बनाए जिसमें कीपर-बल्लेबाज बीजे वाटलिंग ने शानदार सतहत्तर रन और विलियम सोमरविले ने नाबाद चालीस रन बनाए। न्यूजीलैंड के स्पिन तिकड़ी को देखते हुए दो सौ अड़सठ रनों का लक्ष्य भी मेजबान टीम के लिए मुश्किल था। हालांकि, लक्ष्य का आसानी से पीछा किया गया और श्रीलंका ने आईसीसी विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के अपने अभियान को एक जीत के साथ खाता खोला।
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लखनऊ। कोरोना के दूसरी लहर के बीच गंगा में अचानक लाशें मिलने लगी थी। BHU के वैज्ञानिकों ने कोरोना संक्रमण के खतरा को देखते हुए बनारस में 16 जगहों से गंगा के जल का सैम्पल इक्कठा किया और उसे कोरोना की जांच के लिए बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान लखनऊ में भेज दिया था।
करीब एक महीने बाद जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट निगेटिव आई, गंगा में कोरोना संक्रमण नहीं पाया गया। वहीं, जबकि लखनऊ में गोमती नदी में गिरने वाले अस्सी फीसदी नालों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है। इसके साथ ही अन्य कई नदियों और सीवेज के जल परीक्षण में आरएनए वायरस होने के प्रमाण मिल चुके हैं।
गंगा के जल की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद वैज्ञानिकों में उत्साह है। दरअसल,बीएचयू के वैज्ञानिकों ने गंगाजल से कोरोना के इलाज का दावा किया था। वैज्ञानिको का ये दावा अब और पुख्ता हुआ है। उनके मुताबिक गंगाजल से तैयार नोजल स्प्रे से कोरोना की काट संभव है।
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लखनऊ। कोरोना के दूसरी लहर के बीच गंगा में अचानक लाशें मिलने लगी थी। BHU के वैज्ञानिकों ने कोरोना संक्रमण के खतरा को देखते हुए बनारस में सोलह जगहों से गंगा के जल का सैम्पल इक्कठा किया और उसे कोरोना की जांच के लिए बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान लखनऊ में भेज दिया था। करीब एक महीने बाद जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट निगेटिव आई, गंगा में कोरोना संक्रमण नहीं पाया गया। वहीं, जबकि लखनऊ में गोमती नदी में गिरने वाले अस्सी फीसदी नालों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है। इसके साथ ही अन्य कई नदियों और सीवेज के जल परीक्षण में आरएनए वायरस होने के प्रमाण मिल चुके हैं। गंगा के जल की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद वैज्ञानिकों में उत्साह है। दरअसल,बीएचयू के वैज्ञानिकों ने गंगाजल से कोरोना के इलाज का दावा किया था। वैज्ञानिको का ये दावा अब और पुख्ता हुआ है। उनके मुताबिक गंगाजल से तैयार नोजल स्प्रे से कोरोना की काट संभव है।
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बालों की विघटन उनकी रोशनी हैअधिकतम सीमा तक संभव है। एक नियम के रूप में, यदि इस प्रक्रिया को पहले से ही चित्रित किया गया है, तो एक नई रंग में खुद को पेंट करने की इच्छा होने पर यह प्रक्रिया जरूरी है। अक्सर, हाइड्रोजन पेरोक्साइड का उपयोग करके मलिनकिरण किया जाता है। हालांकि, यह प्रक्रिया घर पर की जा सकती है। तो, कैसे हाइड्रोजन पेरोक्साइड के साथ बालों को decolour?
सामान्य बाल रंग की तरह,मलिनकिरण उन्हें नुकसान पहुंचाता है। इसलिए, प्रक्रिया को सिर धोने के पल से लगभग तीसरे या चौथे दिन किया जाना चाहिए। ऐसा क्यों? सब बेहद सरल हैः बालों और खोपड़ी पर इतने सारे समय के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षात्मक फैटी परत दिखाई देती है। इसी कारण से, प्रक्रिया से ठीक पहले, उन्हें या तो गीला नहीं होना चाहिए।
बालों को विसर्जित करने का पहला चरणहाइड्रोजन पेरोक्साइड -, समाधान की तैयारी वास्तव में है। इस प्रयोजन के लिए, हम बर्तन की जरूरत है। किसी भी स्थिति में एक धातु नहीं होना चाहिए, के रूप में धातु प्रतिकूल प्रतिक्रिया की ऑक्सीजन यौगिकों का एक परिणाम हो सकता है। हाइड्रोजन पेरोक्साइड की एकाग्रता बाल की संरचना पर निर्भर करता है। वांछित छाया भी महत्वपूर्ण है। छिद्रपूर्ण पतले बालों के लिए, एकाग्रता कम होगी (3-6% समाधान), और मोटी और मजबूत के लिए - थोड़ा बढ़ा (8-12% समाधान)। सामान्य उपयोग के 6-12% मिश्रण के लिए।
3% समाधान प्राप्त करने के लिए, 12% - 3: 7 के लिए, 12% - 4: 6 के लिए, 2: 8 के अनुपात में, 6% के अनुपात में पानी के साथ 1: 9 के अनुपात में पानी के साथ मिश्रित किया जाता है।
बालों के सिर की लंबाई और मोटाई से मिश्रण की सही मात्रा पर निर्भर करेगा। एक नियम के रूप में, मध्यम बाल के लिए 50-60 ग्राम समाधान पर्याप्त है।
दवा की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए, 50-60 मिलीलीटर में अमोनिया की 5-6 बूंदें जोड़ें। संरचना को मोटा करने के लिए, आप इसमें थोड़ा क्षारीय शैम्पू या तरल साबुन डाल सकते हैं।
पाक कला समाधान प्रक्रिया से पहले सबसे अच्छा है। इसके अलावा, विशेषज्ञों की आवश्यकता से थोड़ा अधिक धन मिश्रण मिश्रण सलाह देते हैं।
तो, हम सबसे महत्वपूर्ण आ गए हैंः कैसे हाइड्रोजन पेरोक्साइड के साथ बाल decolour? सबसे पहले, जड़ों के क्षेत्र में पेट्रोलियम जेली या वसा क्रीम के साथ माथे को चिकनाई करना आवश्यक है। इसके अलावा, हमें निश्चित रूप से दस्ताने की आवश्यकता होगी। प्रोड्रग्स बनाने, occiput से शुरू, समाधान लागू करें। यदि बाल कम है, तो आप एक सूती तलछट का उपयोग कर सकते हैं। जड़ों से उत्पाद लागू करें। लेकिन लंबे, अनपेक्षित बाल सुझावों से दाग। ऑक्सीजन तारों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया के अंत में सावधानी से कंघी जानी चाहिए। लेकिन एक तौलिया के साथ सिर लपेटें और पॉलीथीन नहीं होना चाहिए। सबसे पहले, मलिनकिरण की प्रक्रिया को नियंत्रित किया जाना चाहिए, और दूसरी बात, गर्म होने के बाद, संरचना बालों और त्वचा दोनों को जला सकती है।
बालों को विघटित करने के तरीके पर प्रतिबिंबित करना,यह मानना महत्वपूर्ण है कि अंधेरे कर्ल अधिक कठिन हो जाते हैं। 6-7 दिनों के अंतराल के साथ कई रिसेप्शन में ऐसा करना सबसे अच्छा है ताकि उनके पास थोड़ा सा ठीक करने का समय हो। लेकिन लाल बाल बनाना प्रकाश लगभग असंभव है - "लोमड़ी" छाया बनी हुई है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
पेरोक्साइड के साथ बाल decolorize कैसे करेंहाइड्रोजन, प्रक्रिया की अवधि की निगरानी करना बेहद महत्वपूर्ण है। कई मायनों में, यह स्वयं के तारों की संरचना पर निर्भर करेगा। याद रखें कि समाधान को अधिक आराम करने और अपने बालों को जलाए जाने की तुलना में थोड़ा कम पकड़ना हमेशा बेहतर होता है। जांचें कि क्या वे क्षतिग्रस्त नहीं हैं, आप मंदिरों पर समय-समय पर तारों को जोड़ सकते हैं। एक नियम के रूप में, पूरी प्रक्रिया में लगभग 20-30 मिनट लगते हैं।
रोशनी के बाद, बालों को नरम धोया जाना चाहिएशैम्पू या गैर-क्षारीय साबुन, क्षतिग्रस्त (रंगीन) बाल और / या पौष्टिक मुखौटा के लिए एक विशेष बाम लागू करें, और नींबू के रस या सिरका के साथ अम्लीकृत पानी के साथ कुल्ला लें।
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बालों की विघटन उनकी रोशनी हैअधिकतम सीमा तक संभव है। एक नियम के रूप में, यदि इस प्रक्रिया को पहले से ही चित्रित किया गया है, तो एक नई रंग में खुद को पेंट करने की इच्छा होने पर यह प्रक्रिया जरूरी है। अक्सर, हाइड्रोजन पेरोक्साइड का उपयोग करके मलिनकिरण किया जाता है। हालांकि, यह प्रक्रिया घर पर की जा सकती है। तो, कैसे हाइड्रोजन पेरोक्साइड के साथ बालों को decolour? सामान्य बाल रंग की तरह,मलिनकिरण उन्हें नुकसान पहुंचाता है। इसलिए, प्रक्रिया को सिर धोने के पल से लगभग तीसरे या चौथे दिन किया जाना चाहिए। ऐसा क्यों? सब बेहद सरल हैः बालों और खोपड़ी पर इतने सारे समय के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षात्मक फैटी परत दिखाई देती है। इसी कारण से, प्रक्रिया से ठीक पहले, उन्हें या तो गीला नहीं होना चाहिए। बालों को विसर्जित करने का पहला चरणहाइड्रोजन पेरोक्साइड -, समाधान की तैयारी वास्तव में है। इस प्रयोजन के लिए, हम बर्तन की जरूरत है। किसी भी स्थिति में एक धातु नहीं होना चाहिए, के रूप में धातु प्रतिकूल प्रतिक्रिया की ऑक्सीजन यौगिकों का एक परिणाम हो सकता है। हाइड्रोजन पेरोक्साइड की एकाग्रता बाल की संरचना पर निर्भर करता है। वांछित छाया भी महत्वपूर्ण है। छिद्रपूर्ण पतले बालों के लिए, एकाग्रता कम होगी , और मोटी और मजबूत के लिए - थोड़ा बढ़ा । सामान्य उपयोग के छः-बारह% मिश्रण के लिए। तीन% समाधान प्राप्त करने के लिए, बारह% - तीन: सात के लिए, बारह% - चार: छः के लिए, दो: आठ के अनुपात में, छः% के अनुपात में पानी के साथ एक: नौ के अनुपात में पानी के साथ मिश्रित किया जाता है। बालों के सिर की लंबाई और मोटाई से मिश्रण की सही मात्रा पर निर्भर करेगा। एक नियम के रूप में, मध्यम बाल के लिए पचास-साठ ग्राम समाधान पर्याप्त है। दवा की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए, पचास-साठ मिलीलीटर में अमोनिया की पाँच-छः बूंदें जोड़ें। संरचना को मोटा करने के लिए, आप इसमें थोड़ा क्षारीय शैम्पू या तरल साबुन डाल सकते हैं। पाक कला समाधान प्रक्रिया से पहले सबसे अच्छा है। इसके अलावा, विशेषज्ञों की आवश्यकता से थोड़ा अधिक धन मिश्रण मिश्रण सलाह देते हैं। तो, हम सबसे महत्वपूर्ण आ गए हैंः कैसे हाइड्रोजन पेरोक्साइड के साथ बाल decolour? सबसे पहले, जड़ों के क्षेत्र में पेट्रोलियम जेली या वसा क्रीम के साथ माथे को चिकनाई करना आवश्यक है। इसके अलावा, हमें निश्चित रूप से दस्ताने की आवश्यकता होगी। प्रोड्रग्स बनाने, occiput से शुरू, समाधान लागू करें। यदि बाल कम है, तो आप एक सूती तलछट का उपयोग कर सकते हैं। जड़ों से उत्पाद लागू करें। लेकिन लंबे, अनपेक्षित बाल सुझावों से दाग। ऑक्सीजन तारों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया के अंत में सावधानी से कंघी जानी चाहिए। लेकिन एक तौलिया के साथ सिर लपेटें और पॉलीथीन नहीं होना चाहिए। सबसे पहले, मलिनकिरण की प्रक्रिया को नियंत्रित किया जाना चाहिए, और दूसरी बात, गर्म होने के बाद, संरचना बालों और त्वचा दोनों को जला सकती है। बालों को विघटित करने के तरीके पर प्रतिबिंबित करना,यह मानना महत्वपूर्ण है कि अंधेरे कर्ल अधिक कठिन हो जाते हैं। छः-सात दिनों के अंतराल के साथ कई रिसेप्शन में ऐसा करना सबसे अच्छा है ताकि उनके पास थोड़ा सा ठीक करने का समय हो। लेकिन लाल बाल बनाना प्रकाश लगभग असंभव है - "लोमड़ी" छाया बनी हुई है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। पेरोक्साइड के साथ बाल decolorize कैसे करेंहाइड्रोजन, प्रक्रिया की अवधि की निगरानी करना बेहद महत्वपूर्ण है। कई मायनों में, यह स्वयं के तारों की संरचना पर निर्भर करेगा। याद रखें कि समाधान को अधिक आराम करने और अपने बालों को जलाए जाने की तुलना में थोड़ा कम पकड़ना हमेशा बेहतर होता है। जांचें कि क्या वे क्षतिग्रस्त नहीं हैं, आप मंदिरों पर समय-समय पर तारों को जोड़ सकते हैं। एक नियम के रूप में, पूरी प्रक्रिया में लगभग बीस-तीस मिनट लगते हैं। रोशनी के बाद, बालों को नरम धोया जाना चाहिएशैम्पू या गैर-क्षारीय साबुन, क्षतिग्रस्त बाल और / या पौष्टिक मुखौटा के लिए एक विशेष बाम लागू करें, और नींबू के रस या सिरका के साथ अम्लीकृत पानी के साथ कुल्ला लें।
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गोण्डा, । जिले में मूसलाधार बारिश को देखते हुए डीएम डा. उज्ज्वल कुमार ने 12वीं तक के स्कूलों को शुक्रवार व शनिवार को बंद रखने का निर्देश दिया है। आठवीं तक के स्कूल सोमवार को खुलेंगे।
गुरुवार शाम डीएम ने बताया कि मौसम की स्थिति को देखते हुए 12वीं तक के स्कूलों को दो दिन बंद रखने का निर्णय किया गया है। जिले में भारी बारिश के कारण तमाम परिषदीय व इंटरमीडिएट स्कूलों में पानी भर गया है।
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गोण्डा, । जिले में मूसलाधार बारिश को देखते हुए डीएम डा. उज्ज्वल कुमार ने बारहवीं तक के स्कूलों को शुक्रवार व शनिवार को बंद रखने का निर्देश दिया है। आठवीं तक के स्कूल सोमवार को खुलेंगे। गुरुवार शाम डीएम ने बताया कि मौसम की स्थिति को देखते हुए बारहवीं तक के स्कूलों को दो दिन बंद रखने का निर्णय किया गया है। जिले में भारी बारिश के कारण तमाम परिषदीय व इंटरमीडिएट स्कूलों में पानी भर गया है।
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आजादी के अमृत महोत्सव के साथ हिमाचल प्रदेश की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में अगस्त माह में जिला सोलन के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस संबंध में शनिवार को सोलन में ऊर्जा मंत्री सुख राम चौधरी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। प्रदेश के स्वास्थ्य आयुष मंत्री डॉ. राजीव सैजल इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे। सुख राम चौधरी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की स्थापना के 75 वर्ष पूर्ण होने तथा आज़ादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
इन कार्यक्रमों में हिमाचल प्रदेश के अस्तित्व में आने व वर्तमान सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में हुई विकासात्मक उपलब्धियों को प्रदर्शनियों व वृत्त चित्रों के माध्यम से 75 वर्ष में हुए कार्यों को प्रदर्शित किया जाएगा। इनमें विशेष रूप से स्वास्थ्य, बागवानी, कृषि, ऊर्जा, शिक्षा, पर्यटन, जल शक्ति, लोक निर्माण, सामाजिक न्याय व अधिकारिता और उद्योग विभाग से संबंधित विकासात्मक प्रदर्शनियों के माध्यम से लोगों को प्रदेश में 75 वर्षाेे के दौरान हुए विकास से अवगत करवाया जाएगा।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इन कार्यक्रमों में स्वयं सहायता समूह, युवा व महिला मंडलों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, पंचायती राज व शहरी निकाय के प्रतिनिधियों का सहयोग विशेष रूप से लिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा कार्यान्वित की जा रही कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी इस दौरान लोगों को उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम प्रदेश के युवाओं को विकास यात्रा के इतिहास, वर्तमान और भविष्य से भी अवगत करवाएंगे।
भाजपा जिला सोलन की विशेष बैठक शनिवार को न्यू सर्किट हाउस में आयोजित की गई। इसमें सोलन के प्रभारी ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने शिरिकत की। स्वास्थ मंत्री डॉ. राजीव सैजल मुख्य तौर पर उपस्थित रहे। चौधरी ने कार्यकर्ताओं को कड़ा संदेश देकर कहा कि अंतिम चरण की लड़ाई में भाजपा पीछे नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा की आज से पूर्व की सरकारें कभी ऐसा नहीं कर पाई भाजपा की सरकार रहते ही ऐसे देशभक्ति के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है।
मुख्य्मंत्री जयराम ठाकुर जल्द ही सभी विधानसभा का दौरा करेंगे। कांग्रेस छोड़ो अभियान की शुरुआत कर दी है। यह सिलसिला पूरे प्रदेश भर में चलेगा और बहुत से दूसरे दलों के अच्छे लोग भाजपा में शामिल होंगे। 125 यूनिट बिजली मुफ्त करने के बाद प्रदेश के लाखों लोगों को लाभ हुआ है। जिला की पांचों सीटों पर जीत दर्ज करेंगे।
सोनम भाजपा के मीडिया प्रभारी मुकेश शर्मा ने बताया कि संसदीय क्षेत्र के पालक स्वास्थ मंत्री राजीव सैजल ने पार्टी के आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा रखी। जिसमें कारगिल विजय दिवस पर प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना नालागढ़ और सोलन का प्रवास करेंगे। 9 से 11अगस्त तक युवा मोर्चा की तिरंगा यात्रा निकलेगी।
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आजादी के अमृत महोत्सव के साथ हिमाचल प्रदेश की स्थापना के पचहत्तर वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में अगस्त माह में जिला सोलन के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस संबंध में शनिवार को सोलन में ऊर्जा मंत्री सुख राम चौधरी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। प्रदेश के स्वास्थ्य आयुष मंत्री डॉ. राजीव सैजल इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे। सुख राम चौधरी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की स्थापना के पचहत्तर वर्ष पूर्ण होने तथा आज़ादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में हिमाचल प्रदेश के अस्तित्व में आने व वर्तमान सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में हुई विकासात्मक उपलब्धियों को प्रदर्शनियों व वृत्त चित्रों के माध्यम से पचहत्तर वर्ष में हुए कार्यों को प्रदर्शित किया जाएगा। इनमें विशेष रूप से स्वास्थ्य, बागवानी, कृषि, ऊर्जा, शिक्षा, पर्यटन, जल शक्ति, लोक निर्माण, सामाजिक न्याय व अधिकारिता और उद्योग विभाग से संबंधित विकासात्मक प्रदर्शनियों के माध्यम से लोगों को प्रदेश में पचहत्तर वर्षाेे के दौरान हुए विकास से अवगत करवाया जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इन कार्यक्रमों में स्वयं सहायता समूह, युवा व महिला मंडलों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, पंचायती राज व शहरी निकाय के प्रतिनिधियों का सहयोग विशेष रूप से लिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा कार्यान्वित की जा रही कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी इस दौरान लोगों को उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम प्रदेश के युवाओं को विकास यात्रा के इतिहास, वर्तमान और भविष्य से भी अवगत करवाएंगे। भाजपा जिला सोलन की विशेष बैठक शनिवार को न्यू सर्किट हाउस में आयोजित की गई। इसमें सोलन के प्रभारी ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने शिरिकत की। स्वास्थ मंत्री डॉ. राजीव सैजल मुख्य तौर पर उपस्थित रहे। चौधरी ने कार्यकर्ताओं को कड़ा संदेश देकर कहा कि अंतिम चरण की लड़ाई में भाजपा पीछे नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा की आज से पूर्व की सरकारें कभी ऐसा नहीं कर पाई भाजपा की सरकार रहते ही ऐसे देशभक्ति के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। मुख्य्मंत्री जयराम ठाकुर जल्द ही सभी विधानसभा का दौरा करेंगे। कांग्रेस छोड़ो अभियान की शुरुआत कर दी है। यह सिलसिला पूरे प्रदेश भर में चलेगा और बहुत से दूसरे दलों के अच्छे लोग भाजपा में शामिल होंगे। एक सौ पच्चीस यूनिट बिजली मुफ्त करने के बाद प्रदेश के लाखों लोगों को लाभ हुआ है। जिला की पांचों सीटों पर जीत दर्ज करेंगे। सोनम भाजपा के मीडिया प्रभारी मुकेश शर्मा ने बताया कि संसदीय क्षेत्र के पालक स्वास्थ मंत्री राजीव सैजल ने पार्टी के आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा रखी। जिसमें कारगिल विजय दिवस पर प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना नालागढ़ और सोलन का प्रवास करेंगे। नौ से ग्यारहअगस्त तक युवा मोर्चा की तिरंगा यात्रा निकलेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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जैसलमेर। सचिन पायलट खेमे की वापसी के बाद लग रहा था कि राजस्थान में सियासी घमासान थम गया है, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। पायलट गुट की वापसी से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का खेमा नाराज हो गया है। मुख्यमंत्री ने भी विधायकों की नाराजगी को स्वाभाविक बताया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से यह प्रकरण हुआ और जिस तरह से विधायक एक महीने तक रहे, यह स्वाभाविक है। मैंने उन्हें समझाया है कि राष्ट्र, राज्य, लोगों की सेवा करने के लिए और लोकतंत्र को बचाने के लिए कभी-कभी हमें सहनशील होने की आवश्यकता होती है।
गहलोत ने आगे कहा कि हम साथ काम करेंगे। हमारे जो दोस्त चले गए थे वो अब वापस आ गए हैं। मुझे उम्मीद है कि हम अपने सभी मतभेदों को दूर करेंगे और राज्य की सेवा करने के अपने संकल्प को पूरा करेंगे। हम भाजपा को लोकतंत्र की हत्या नहीं करने देंगे। जानकारी के अनुसार जैसलमेर में मंगलवार को विधायक दल की बैठक में पायलट खेमे की वापसी का विरोध हुआ था। वहीं कांग्रेस ने कहा है कि राजस्थान में सियासी संकट का अध्याय बंद हो गया है। उसकी सरकार का समर्थन करने वाले सभी विधायक राजस्थान को मजबूत करने और कोरोना और अन्य आर्थिक आपदाओं से लड़ने की दिशा में काम करेंगे।
मुख्यमंत्री गहलोत ने इस दौरान एक बार फिर दोहराया कि भाजपा ने राज्य सरकार को गिराने की कोशिश की और वह पूरी तरह से बेनकाब हो गई है। वो अपने खेल में सफल नहीं हो सकी ... सत्यमेव जयते। वहीं भाजपा ने पूर्व में गहलोत द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने हाल ही में सभी विधायकों को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्हें अंतरात्मा और लोगों। की आवाज सुनने और लोकतंत्र को बचाने और सच्चाई के साथ खड़े होने के लिए कहा था। उन्होंने दावा किया कि यह उस पत्र का असर था कि भाजपा ने अपने विधायकों को गुजरात ले जाने के लिए तीन चार्टर प्लेन बुक किए, लेकिन एक ही विमान जा सका।
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जैसलमेर। सचिन पायलट खेमे की वापसी के बाद लग रहा था कि राजस्थान में सियासी घमासान थम गया है, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। पायलट गुट की वापसी से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का खेमा नाराज हो गया है। मुख्यमंत्री ने भी विधायकों की नाराजगी को स्वाभाविक बताया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से यह प्रकरण हुआ और जिस तरह से विधायक एक महीने तक रहे, यह स्वाभाविक है। मैंने उन्हें समझाया है कि राष्ट्र, राज्य, लोगों की सेवा करने के लिए और लोकतंत्र को बचाने के लिए कभी-कभी हमें सहनशील होने की आवश्यकता होती है। गहलोत ने आगे कहा कि हम साथ काम करेंगे। हमारे जो दोस्त चले गए थे वो अब वापस आ गए हैं। मुझे उम्मीद है कि हम अपने सभी मतभेदों को दूर करेंगे और राज्य की सेवा करने के अपने संकल्प को पूरा करेंगे। हम भाजपा को लोकतंत्र की हत्या नहीं करने देंगे। जानकारी के अनुसार जैसलमेर में मंगलवार को विधायक दल की बैठक में पायलट खेमे की वापसी का विरोध हुआ था। वहीं कांग्रेस ने कहा है कि राजस्थान में सियासी संकट का अध्याय बंद हो गया है। उसकी सरकार का समर्थन करने वाले सभी विधायक राजस्थान को मजबूत करने और कोरोना और अन्य आर्थिक आपदाओं से लड़ने की दिशा में काम करेंगे। मुख्यमंत्री गहलोत ने इस दौरान एक बार फिर दोहराया कि भाजपा ने राज्य सरकार को गिराने की कोशिश की और वह पूरी तरह से बेनकाब हो गई है। वो अपने खेल में सफल नहीं हो सकी ... सत्यमेव जयते। वहीं भाजपा ने पूर्व में गहलोत द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने हाल ही में सभी विधायकों को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्हें अंतरात्मा और लोगों। की आवाज सुनने और लोकतंत्र को बचाने और सच्चाई के साथ खड़े होने के लिए कहा था। उन्होंने दावा किया कि यह उस पत्र का असर था कि भाजपा ने अपने विधायकों को गुजरात ले जाने के लिए तीन चार्टर प्लेन बुक किए, लेकिन एक ही विमान जा सका।
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संयुक्त राज्य अमेरिका में छुट्टी के बाद मुंबई लौटने के बाद अक्षय ओबेरॉय 2023 के लिए कमर कस रहे हैं। वो जल्द ही फाइटर में दीपिका पादुकोण और ऋतिक रोशन को ज्वाइन करेंगे। यह फिल्म 2024 तक रिलीज होगी। अक्षय ओबेरॉय के पास फिलहाल वास्तव में कुछ दिलचस्प प्रोजेक्ट्स हैं। ऐसे में इसमें कोई शक नहीं है कि आने वाले दिनों में वो बॉलीवुड में छा जाने के लिए तैयार हैं।
अक्षय ओबेरॉय को आने वाली फिल्मों में सारा अली खान, ऋतिक रोशन और दीपिका पादुकोण जैसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करते हुए देखा जाएगा। ऋतिक और दीपिका अभिनीत फिल्म फाइटर में अक्षय वायु सेना ऑफिसर की भूमिका निभाते नज़र आएंगे। अगले जनवरी के अंत में रिलीज़ होने की उम्मीद है, फाइटर भारत की पहली एरियल एक्शन फिल्म होगी।
अक्षय ने इसके बारे में बात की और कहा- 'यह एक रोमांचक साल है। बहुत सारे नए और दिलचस्प काम आए है, अभिनेताओं के कुछ अद्भुत समूह के साथ मुझे काम मिला है। अभिनय एक ऐसा पेशा है जहां आप हर जगह से प्रेरणा लेते हैं, यहां तक कि अपने सह-अभिनेताओं से भी। मैंने दीपिका के साथ पहले पीकू में काम किया है और फिर से काम करना अच्छा है।'
आगे उन्होंने कहा- 'काम के प्रति ऋतिक का समर्पण काफी प्रभावशाली है और सारा एक खुश मिजाज़ सह कलाकार है। 2023 एक बेहतरीन साल होने वाला है। मैं इसे पहले ही महसूस कर सकता हूं।' बता दें कि अक्षय ओबेरॉय फिल्म गैसलाइट का भी हिस्सा है, जिसमें सारा अली खान और विक्रांत मैसी मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
दीपिका पादुकोण की बात करें तो, उनकी फिल्म 'पठान' हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीद हुई है। इस फिल्म के जरिए शाहरुख खान ने भी चार सालों के बाद सिनेमाघरों में वापसी की है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई है। फिल्म अब 351 करोड़ का बिजनेस कर चुकी है।
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- एक hr ago Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...' Don't Miss! संयुक्त राज्य अमेरिका में छुट्टी के बाद मुंबई लौटने के बाद अक्षय ओबेरॉय दो हज़ार तेईस के लिए कमर कस रहे हैं। वो जल्द ही फाइटर में दीपिका पादुकोण और ऋतिक रोशन को ज्वाइन करेंगे। यह फिल्म दो हज़ार चौबीस तक रिलीज होगी। अक्षय ओबेरॉय के पास फिलहाल वास्तव में कुछ दिलचस्प प्रोजेक्ट्स हैं। ऐसे में इसमें कोई शक नहीं है कि आने वाले दिनों में वो बॉलीवुड में छा जाने के लिए तैयार हैं। अक्षय ओबेरॉय को आने वाली फिल्मों में सारा अली खान, ऋतिक रोशन और दीपिका पादुकोण जैसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करते हुए देखा जाएगा। ऋतिक और दीपिका अभिनीत फिल्म फाइटर में अक्षय वायु सेना ऑफिसर की भूमिका निभाते नज़र आएंगे। अगले जनवरी के अंत में रिलीज़ होने की उम्मीद है, फाइटर भारत की पहली एरियल एक्शन फिल्म होगी। अक्षय ने इसके बारे में बात की और कहा- 'यह एक रोमांचक साल है। बहुत सारे नए और दिलचस्प काम आए है, अभिनेताओं के कुछ अद्भुत समूह के साथ मुझे काम मिला है। अभिनय एक ऐसा पेशा है जहां आप हर जगह से प्रेरणा लेते हैं, यहां तक कि अपने सह-अभिनेताओं से भी। मैंने दीपिका के साथ पहले पीकू में काम किया है और फिर से काम करना अच्छा है।' आगे उन्होंने कहा- 'काम के प्रति ऋतिक का समर्पण काफी प्रभावशाली है और सारा एक खुश मिजाज़ सह कलाकार है। दो हज़ार तेईस एक बेहतरीन साल होने वाला है। मैं इसे पहले ही महसूस कर सकता हूं।' बता दें कि अक्षय ओबेरॉय फिल्म गैसलाइट का भी हिस्सा है, जिसमें सारा अली खान और विक्रांत मैसी मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। दीपिका पादुकोण की बात करें तो, उनकी फिल्म 'पठान' हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीद हुई है। इस फिल्म के जरिए शाहरुख खान ने भी चार सालों के बाद सिनेमाघरों में वापसी की है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई है। फिल्म अब तीन सौ इक्यावन करोड़ का बिजनेस कर चुकी है।
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लखनऊ : राजधानी में पेट्रोल पंपों पर तेल चोरी करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की गयी है। पेट्रोल पंपों पर चिप व डिवाइस लगा कर तेल चोरी करने पर इंडियन ऑयल ने राजधानी के पांच पेट्रोल पंपों की डीलरशिप निरस्त कर दी है। इस तरह कंपनी द्वारा अब तक नौ पेट्रोल पंपों की डीलरशिप निरस्त की जा चुकी है।
इंडियन ऑयल ने मंगलवार को राजधानी के पांच और झांसी के एक पंप सहित करीब छह पेट्रोल पंपों की डीलरशिप निरस्त की। राज्य तेल समन्वयक एवं आइओसी के ईडी एके वर्मा ने बताया कि जांच के दौरान इन पंपों पर अनियमितता पाईं गईं थीं। इनकी डीलरशिप निरस्त कर दी गई है। अब कंपनी इनको टेकओवर करेगी।
खास बात है कि जन पंपों के खिलाफ कार्रवाई की गयी उनमें यूपी पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएन शुक्ला का भी पंप है। शुक्ला और उनके बेटे के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज है।
प्रशासन को रिपोर्ट का इंतजार : प्रशासन भी गड़बड़ी करने वाले पंपों पर और शिकंजा कसने के मूड में है। अपर जिलाधिकारी आपूर्ति आशुतोष मोहन अग्निहोत्री के मुताबिक प्रशासन ने तेल कंपनियों से चिपों कर जांच कराकर रिपोर्ट मांगी है। कुल 51 पंप जांच में गड़बड़ी के दोषी पाए गए हैं सबके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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लखनऊ : राजधानी में पेट्रोल पंपों पर तेल चोरी करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की गयी है। पेट्रोल पंपों पर चिप व डिवाइस लगा कर तेल चोरी करने पर इंडियन ऑयल ने राजधानी के पांच पेट्रोल पंपों की डीलरशिप निरस्त कर दी है। इस तरह कंपनी द्वारा अब तक नौ पेट्रोल पंपों की डीलरशिप निरस्त की जा चुकी है। इंडियन ऑयल ने मंगलवार को राजधानी के पांच और झांसी के एक पंप सहित करीब छह पेट्रोल पंपों की डीलरशिप निरस्त की। राज्य तेल समन्वयक एवं आइओसी के ईडी एके वर्मा ने बताया कि जांच के दौरान इन पंपों पर अनियमितता पाईं गईं थीं। इनकी डीलरशिप निरस्त कर दी गई है। अब कंपनी इनको टेकओवर करेगी। खास बात है कि जन पंपों के खिलाफ कार्रवाई की गयी उनमें यूपी पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएन शुक्ला का भी पंप है। शुक्ला और उनके बेटे के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज है। प्रशासन को रिपोर्ट का इंतजार : प्रशासन भी गड़बड़ी करने वाले पंपों पर और शिकंजा कसने के मूड में है। अपर जिलाधिकारी आपूर्ति आशुतोष मोहन अग्निहोत्री के मुताबिक प्रशासन ने तेल कंपनियों से चिपों कर जांच कराकर रिपोर्ट मांगी है। कुल इक्यावन पंप जांच में गड़बड़ी के दोषी पाए गए हैं सबके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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- इटाढी प्रखंड के बडका गाव मे स्वामी विवेकानन्द के जयंती के मौका प आदर्श बाल विकास क्लब के तरफ से जदयू नेता गरीबन में कंबल आ कपड़ा बँटले.
- खिचड़ी 15 जनवरी के मनावल जाई. चोदह जनवरी के साँझ सात बज के आठ मिनट पर सूरज भगवान मकर राशि में प्रवेश करीहें आ पन्द्रह जनवरी के दिन एगारह बजे ले रहीहें. उदया तिथि माने का परंपरा का चलते खिचड़ी पन्द्रहे जनवरी के मनावल जाई.
- सिमरी थाना के मझवारी गांव क नियरा शुक कादिने पुलिस सवा सात क्विंटल गांजा बरामद कइलसि. साथही तस्करन के गिरफ्तारो क लिहलसि.
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- इटाढी प्रखंड के बडका गाव मे स्वामी विवेकानन्द के जयंती के मौका प आदर्श बाल विकास क्लब के तरफ से जदयू नेता गरीबन में कंबल आ कपड़ा बँटले. - खिचड़ी पंद्रह जनवरी के मनावल जाई. चोदह जनवरी के साँझ सात बज के आठ मिनट पर सूरज भगवान मकर राशि में प्रवेश करीहें आ पन्द्रह जनवरी के दिन एगारह बजे ले रहीहें. उदया तिथि माने का परंपरा का चलते खिचड़ी पन्द्रहे जनवरी के मनावल जाई. - सिमरी थाना के मझवारी गांव क नियरा शुक कादिने पुलिस सवा सात क्विंटल गांजा बरामद कइलसि. साथही तस्करन के गिरफ्तारो क लिहलसि.
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पदों की संख्या : कुल 260 पद।
आयु सीमा : 18 से 37 वर्ष।
चयन प्रक्रिया : एग्जाम के द्वारा।
पदों की संख्या : कुल 200 पद।
योग्यता : बीएससी, एमएससी।
चयन प्रक्रिया : एग्जाम के द्वारा।
आयु सीमा : 18 से 37 वर्ष।
ऐसे करें आवेदन : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार इन संस्थानों की आधिकारिक वेबसाइट पर जा कर ऑनलाइन के द्वारा आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने से पहले प्रकाशित नोटिफिकेशन को आवश्य पढ़ें। इससे आवेदन करने में आसानी होगी।
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पदों की संख्या : कुल दो सौ साठ पद। आयु सीमा : अट्ठारह से सैंतीस वर्ष। चयन प्रक्रिया : एग्जाम के द्वारा। पदों की संख्या : कुल दो सौ पद। योग्यता : बीएससी, एमएससी। चयन प्रक्रिया : एग्जाम के द्वारा। आयु सीमा : अट्ठारह से सैंतीस वर्ष। ऐसे करें आवेदन : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार इन संस्थानों की आधिकारिक वेबसाइट पर जा कर ऑनलाइन के द्वारा आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने से पहले प्रकाशित नोटिफिकेशन को आवश्य पढ़ें। इससे आवेदन करने में आसानी होगी।
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कुछ मामलों में, आप त्रुटि कोड देख सकते हैं और 0x80004005 विफल हो सकते हैं। यह विफलता तब होती है जब आप ओरेकल वर्चुअलबॉक्स प्रोग्राम के माध्यम से वर्चुअल मशीन शुरू करने का प्रयास करते हैं।
यदि स्क्रीन पर त्रुटि कोड दिखाई देता है और विफल रहता है0x80004005, ड्राइव सी ओपन पिता उपयोगकर्ता के पास जाओ। हम उपयोगकर्ता नाम के साथ निर्देशिका दर्ज करते हैं। वर्चुअलबॉक्स VMs फ़ोल्डर खोलें। हम मशीन के नाम से निर्देशिका में जाते हैं। अगले चरण में समाप्त करने के लिए ई किसी भी सुविधाजनक स्थान में vbox साथ फ़ाइलों को स्थानांतरित करने 0x80004005 विफलता असफल। आप इसे भी हटा सकते हैं। यह मशीन के नाम के साथ एक फाइल है। विस्तार तत्व vbox-पिछला निकालें उपसर्ग से। निर्देशिका फाइलों एक्सएमएल-tmp या XML- पिछला शामिल है, तो हम एल्गोरिथ्म ऊपर वर्णित के अनुसार उनसे निपटने के।
"स्टार्ट" मेनू पर जाएं। खोज बार में, cmd दर्ज करें। परिणामों में, हम कार्यक्रम को इसी नाम से पाते हैं। दाहिने माउस बटन के साथ इस आइटम पर क्लिक करें। प्रकट मेनू में, व्यवस्थापक अधिकारों के साथ शुरुआत का चयन करें। एक कमांड विंडो खुलती है। इसमें हम घटक KB3004394 को हटाने का कार्य दर्ज करते हैं। एंटर दबाएं। यदि यह अद्यतन सिस्टम में मौजूद है, तो इसे तुरंत हटा दिया जाएगा। उसके बाद, हम कंप्यूटर को पुनरारंभ करते हैं। फिर वर्चुअल मशीन चलाएं।
यदि कोई त्रुटि कोड है और 0x80004005 विफल है,इसे एक और तरीके से हटाया जा सकता है। हमें पीसी के BIOS में वर्चुअलाइजेशन सक्षम करने की आवश्यकता है। यह इंटेल वर्चुअलाइजेशन नामक एक तकनीक है। यह विभिन्न स्रोतों में भी उल्लेख किया गया है, कोडनामयुक्त वेंडरपूल। प्रौद्योगिकी का अर्थ एक कंप्यूटर के संचालन की संभावना में है, जो एक केंद्रीय प्रोसेसर पर बनाया गया है, कई वर्चुअल डिवाइस के रूप में। वर्चुअलाइजेशन कई अनुप्रयोगों या ऑपरेटिंग सिस्टम को एक चयनित प्लेटफ़ॉर्म पर स्वतंत्र रूप से और साथ ही लॉन्च करने की अनुमति देता है।
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कुछ मामलों में, आप त्रुटि कोड देख सकते हैं और शून्यxआठ करोड़ चार हज़ार पाँच विफल हो सकते हैं। यह विफलता तब होती है जब आप ओरेकल वर्चुअलबॉक्स प्रोग्राम के माध्यम से वर्चुअल मशीन शुरू करने का प्रयास करते हैं। यदि स्क्रीन पर त्रुटि कोड दिखाई देता है और विफल रहता हैशून्यxआठ करोड़ चार हज़ार पाँच, ड्राइव सी ओपन पिता उपयोगकर्ता के पास जाओ। हम उपयोगकर्ता नाम के साथ निर्देशिका दर्ज करते हैं। वर्चुअलबॉक्स VMs फ़ोल्डर खोलें। हम मशीन के नाम से निर्देशिका में जाते हैं। अगले चरण में समाप्त करने के लिए ई किसी भी सुविधाजनक स्थान में vbox साथ फ़ाइलों को स्थानांतरित करने शून्यxआठ करोड़ चार हज़ार पाँच विफलता असफल। आप इसे भी हटा सकते हैं। यह मशीन के नाम के साथ एक फाइल है। विस्तार तत्व vbox-पिछला निकालें उपसर्ग से। निर्देशिका फाइलों एक्सएमएल-tmp या XML- पिछला शामिल है, तो हम एल्गोरिथ्म ऊपर वर्णित के अनुसार उनसे निपटने के। "स्टार्ट" मेनू पर जाएं। खोज बार में, cmd दर्ज करें। परिणामों में, हम कार्यक्रम को इसी नाम से पाते हैं। दाहिने माउस बटन के साथ इस आइटम पर क्लिक करें। प्रकट मेनू में, व्यवस्थापक अधिकारों के साथ शुरुआत का चयन करें। एक कमांड विंडो खुलती है। इसमें हम घटक KBतीस लाख चार हज़ार तीन सौ चौरानवे को हटाने का कार्य दर्ज करते हैं। एंटर दबाएं। यदि यह अद्यतन सिस्टम में मौजूद है, तो इसे तुरंत हटा दिया जाएगा। उसके बाद, हम कंप्यूटर को पुनरारंभ करते हैं। फिर वर्चुअल मशीन चलाएं। यदि कोई त्रुटि कोड है और शून्यxआठ करोड़ चार हज़ार पाँच विफल है,इसे एक और तरीके से हटाया जा सकता है। हमें पीसी के BIOS में वर्चुअलाइजेशन सक्षम करने की आवश्यकता है। यह इंटेल वर्चुअलाइजेशन नामक एक तकनीक है। यह विभिन्न स्रोतों में भी उल्लेख किया गया है, कोडनामयुक्त वेंडरपूल। प्रौद्योगिकी का अर्थ एक कंप्यूटर के संचालन की संभावना में है, जो एक केंद्रीय प्रोसेसर पर बनाया गया है, कई वर्चुअल डिवाइस के रूप में। वर्चुअलाइजेशन कई अनुप्रयोगों या ऑपरेटिंग सिस्टम को एक चयनित प्लेटफ़ॉर्म पर स्वतंत्र रूप से और साथ ही लॉन्च करने की अनुमति देता है।
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Giridih : लायंस क्लब ऑफ गिरिडीह एलिट ने 6 मार्च को होटल जायका में होली मिलन का आयोजन किया. समारोह में क्लब के सदस्यों ने एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामना दी. क्लब के अध्यक्ष धर्म प्रकाश ने कहा कि होली आपसी भाईचारा का पर्व है. समारोह का आयोजन आपसी प्रेम और सौहार्द बढ़ाने के लिए किया गया है, जिससे हमलोग सामाजिक कार्यों में और अधिक भागीदारी निभा सकें. लाइंस क्लब एलीट हमेशा ही सामाजिक कार्यों में अहम भूमिका निभाता रहा है. क्लब के सचिव दशरथ प्रसाद ने कहा कि होली मिलन समारोह से प्रेम और सद्भावना का संदेश समाज में जाएगा. क्लब के पदाधिकारी व सदस्य होली गीतों पर झूम उठे. समारोह में राजेश कुमार गुप्ता, संजय कुमार सिंह, परमजीत सिंह छाबड़ा, राहुल कुमार, लायन अरुण कुमार साहू, डॉ. अरविंद कुमार समेत क्लब के अन्य सदस्य शामिल हुए.
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Giridih : लायंस क्लब ऑफ गिरिडीह एलिट ने छः मार्च को होटल जायका में होली मिलन का आयोजन किया. समारोह में क्लब के सदस्यों ने एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामना दी. क्लब के अध्यक्ष धर्म प्रकाश ने कहा कि होली आपसी भाईचारा का पर्व है. समारोह का आयोजन आपसी प्रेम और सौहार्द बढ़ाने के लिए किया गया है, जिससे हमलोग सामाजिक कार्यों में और अधिक भागीदारी निभा सकें. लाइंस क्लब एलीट हमेशा ही सामाजिक कार्यों में अहम भूमिका निभाता रहा है. क्लब के सचिव दशरथ प्रसाद ने कहा कि होली मिलन समारोह से प्रेम और सद्भावना का संदेश समाज में जाएगा. क्लब के पदाधिकारी व सदस्य होली गीतों पर झूम उठे. समारोह में राजेश कुमार गुप्ता, संजय कुमार सिंह, परमजीत सिंह छाबड़ा, राहुल कुमार, लायन अरुण कुमार साहू, डॉ. अरविंद कुमार समेत क्लब के अन्य सदस्य शामिल हुए.
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IND vs WI Test Series : टीम इंडिया का वेस्टइंडीज दौरा अब करीब आ रहा है। माना जा रहा है कि ये सीरीज भारतीय टीम के लिए काफी अहम होगी। साथ ही टीम में काफी बदलाव और फेरबदल भी देखने के लिए मिल सकते हैं। हालांकि अभी टीम का ऐलान होने में वक्त है, लेकिन इस बीच अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं कि वेस्टइंडीज के दौरे पर कौन कौन से खिलाड़ी जा सकते हैं। साथ ही ये भी पक्का नजर आ रहा है कि इस सीरीज में एक नहीं, बल्कि कई डेब्यू होंगे। खासतौर पर उस खिलाड़ी को भी डेब्यू का मौका मिल सकता है, जो पिछले करीब चार महीने से टीम के साथ है, लेकिन अभी तक टेस्ट खेलने का मौका नहीं मिल पाया है।
आईपीएल 2023 से पहले टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार टेस्ट मैच खेले थे। इस टीम में इशान किशन को शामिल किया था। लेकिन एक भी मैच में उन्हें खेलने का मौका नहीं मिल पाया। चार के चार मैच बतौर विकेट कीपर बल्लेबाज केएस भरत ने खेले। इस तरह से इशान किशन के डेब्यू किए बिना ही सीरीज खत्म हो गई। इसके बाद आईपीएल शुरू हो गया जो करीब दो महीने तक चला। इसके बाद जब विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल के लिए टीम इंडिया का ऐलान किया गया तो उसमें इशान किशन को जगह ही नहीं दी गई। लेकिन इस बीच आईपीएल में केएल राहुल चोटिल हो गए और अचानक से बीसीसीआई ने फैसला किया कि केएल राहुल की जगह इशान किशन टीम में शामिल किए जाएंगे। उम्मीद जागी कि कि हो सकता है फाइनल में ही सही इशान किशन को डेब्यू का मौका मिल जाए, लेकिन इस बार भी केएस भरत को मौका मिला और किशन बाहर ही बैठे रहे।
अब टीम इंडिया अगले महीने वेस्टइंडीज के खिलाफ दो टेस्ट मैच खेलेगी, उसके लिए भारतीय टीम का ऐलान अभी तक नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि इशान किशन इस टीम में होंगे जरूर। ऐसे में फिर से संभावना है कि इशान किशन को डेब्यू का मौका मिल सकता है। इसका बड़ा कारण ये भी है कि केएस भरत ने अभी तक टीम इंडिया के लिए जो पांच टेस्ट खेले हैं, उसमें उन्होंने कीपिंग तो सही की है, लेकिन एक भी बार वे बल्लेबाजी से अपने हाथ दिखाने में नाकाम रहे हैं। वैसे भी इशान किशन एक्स फैक्टर माने जाते हैं। वे अगर मिडल ऑर्डर में आकर अच्छी बल्लेबाजी कर जाते हैं तो फिर भारतीय स्कोर पर बड़े रन भी टांग सकती है। लेकिन पहले तो ये देखना होगा कि क्या सेलेक्टर्स अगली सीरीज के लिए भी इशान किशन पर भरोसा जताते हैं। अगर इसका जवाब हां है तो क्या कप्तान रोहित शर्मा उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ अपनी प्लेइंग इलेवन में शामिल करना चाहेंगे।
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IND vs WI Test Series : टीम इंडिया का वेस्टइंडीज दौरा अब करीब आ रहा है। माना जा रहा है कि ये सीरीज भारतीय टीम के लिए काफी अहम होगी। साथ ही टीम में काफी बदलाव और फेरबदल भी देखने के लिए मिल सकते हैं। हालांकि अभी टीम का ऐलान होने में वक्त है, लेकिन इस बीच अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं कि वेस्टइंडीज के दौरे पर कौन कौन से खिलाड़ी जा सकते हैं। साथ ही ये भी पक्का नजर आ रहा है कि इस सीरीज में एक नहीं, बल्कि कई डेब्यू होंगे। खासतौर पर उस खिलाड़ी को भी डेब्यू का मौका मिल सकता है, जो पिछले करीब चार महीने से टीम के साथ है, लेकिन अभी तक टेस्ट खेलने का मौका नहीं मिल पाया है। आईपीएल दो हज़ार तेईस से पहले टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार टेस्ट मैच खेले थे। इस टीम में इशान किशन को शामिल किया था। लेकिन एक भी मैच में उन्हें खेलने का मौका नहीं मिल पाया। चार के चार मैच बतौर विकेट कीपर बल्लेबाज केएस भरत ने खेले। इस तरह से इशान किशन के डेब्यू किए बिना ही सीरीज खत्म हो गई। इसके बाद आईपीएल शुरू हो गया जो करीब दो महीने तक चला। इसके बाद जब विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल के लिए टीम इंडिया का ऐलान किया गया तो उसमें इशान किशन को जगह ही नहीं दी गई। लेकिन इस बीच आईपीएल में केएल राहुल चोटिल हो गए और अचानक से बीसीसीआई ने फैसला किया कि केएल राहुल की जगह इशान किशन टीम में शामिल किए जाएंगे। उम्मीद जागी कि कि हो सकता है फाइनल में ही सही इशान किशन को डेब्यू का मौका मिल जाए, लेकिन इस बार भी केएस भरत को मौका मिला और किशन बाहर ही बैठे रहे। अब टीम इंडिया अगले महीने वेस्टइंडीज के खिलाफ दो टेस्ट मैच खेलेगी, उसके लिए भारतीय टीम का ऐलान अभी तक नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि इशान किशन इस टीम में होंगे जरूर। ऐसे में फिर से संभावना है कि इशान किशन को डेब्यू का मौका मिल सकता है। इसका बड़ा कारण ये भी है कि केएस भरत ने अभी तक टीम इंडिया के लिए जो पांच टेस्ट खेले हैं, उसमें उन्होंने कीपिंग तो सही की है, लेकिन एक भी बार वे बल्लेबाजी से अपने हाथ दिखाने में नाकाम रहे हैं। वैसे भी इशान किशन एक्स फैक्टर माने जाते हैं। वे अगर मिडल ऑर्डर में आकर अच्छी बल्लेबाजी कर जाते हैं तो फिर भारतीय स्कोर पर बड़े रन भी टांग सकती है। लेकिन पहले तो ये देखना होगा कि क्या सेलेक्टर्स अगली सीरीज के लिए भी इशान किशन पर भरोसा जताते हैं। अगर इसका जवाब हां है तो क्या कप्तान रोहित शर्मा उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ अपनी प्लेइंग इलेवन में शामिल करना चाहेंगे।
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३१६. पत्र : दादाभाई नौरोजीको
२१-२४ कोर्ट चेम्बर्स नुक्कड़, रिसिक व ऐंडर्सन स्ट्रीट्स पो० ऑ० बॉक्स ६५२२ जोहानिसबर्ग मार्च ११, १९०५
यह पत्र आपको जोहानिसबर्गके श्री एल० डब्ल्यू ० रिचका परिचय दे सकेगा । श्री रिच और मै कई बरसोसे एक दूसरेको अच्छी तरह जानते है । श्री रिचके भारतीयोके पक्षमे खूब निश्चित विचार है और कई बातोके साथ भारतीय हितको ज्यादा ठीक सेवा कर सकनेके खयालसे वे बैरिस्टरी पढने इंग्लैंड रवाना हो रहे है ।
मै बडी कृपा मानूंगा यदि आप अपनी सहायताका लाभ उन्हे दे सके । श्री रिचने दक्षिण आफ्रिकामे भारतीय प्रश्नका अध्ययन किया है।
मूल अंग्रेजी प्रतिकी फोटो-नकल (जी० एन० २२६६ ) से ।
३१७. हिन्दू धर्म
[ जोहानिसवर्ग मार्च ११, १९०५]
श्री गाधीने शनिवारकी शामको जोहानिसबर्ग थियोसॉफिकल लॉजके तत्त्वावधानमे मेसॉनिक टेम्पलमे हिन्दू धर्मपर दूसरा भाषण दिया। भवन खचाखच भरा था ।
पिछले भाषणका साराश देनेके बाद वक्ताने कहा कि दूसरे भाषणमे हिन्दू धर्मके उस कालका निरूपण किया जायेगा, जिसे उसका अद्वितीय युग कह सकते है । बुद्धके उपदेशोके प्रभावसे जो आन्तरिक सुधार हुए उनके बाद हिन्दू धर्म मूर्तिपूजाका अत्यधिक अभ्यस्त हो गया। वक्ताने बातको निर्दोष दिखानेके लिए कई स्पष्टीकरण किये, किन्तु वे इस तथ्यको अस्वीकार नहीं कर सके कि हिन्दू दृश्य रूपमे लकड़ी-पत्थर जैसी जड चीजे पूजते है। हिन्दू दार्शनिक ईश्वरको सरलतासे शुद्धतम आत्माके रूपमे जानते और पूजते थे तथा अद्वैतवादके आधारपर उच्चतम कल्पनातक पहुँच जाते थे। इसी भाँति अज्ञानी जन-साधारण इससे निम्नतम अवस्थामे गिर जाते थे। 'यदि बाल-बुद्धि ईश्वरका अनुभव निर्गुण आत्माके रूपमें नही कर पाती
हिन्दू धर्म
तो उसके विविध सगुण रूपोके माध्यमसे उसको पूजनेमे उसे कोई कठिनाई नही होती। अनेक उसे सूर्य, चन्द्र और तारोके माध्यमसे पूजते है और अनेक उसे लकडी पत्थरके रूपमे भी पूजते है । दर्शन - प्रधान हिन्दू धर्मको सहिष्णु-भावनाके कारण पूजाका यह प्रकार अगीकार करनेमें कोई कठिनाई नही हुई । इस प्रकार हिन्दू- जीवनका चक्र आनन्दसे चलता रहा। किन्तु तभी अरबके मरुस्थलमे एक ऐसी शक्ति उदित हुई जो विचारोमे क्रान्ति उत्पन्न किये और जीवनपर अपनी स्थायी छाप छोडे बिना रह नही सकती थी । मुहम्मद वचपनसे ही अपने आसपासके लोगोको मूर्तिपूजा, विलासपूर्ण असंयम और शराबखोरीमे डूवा देखकर मन ही मन कोबसे सुलगते रहते थे। उन्होने यहूदी धर्मको धराशायी और ईसाइयतको पतित देखा। उन्होने मूसा और ईसाकी ही तरह अनुभव किया कि उनके पास एक दिव्य सन्देश है । उन्होने ससारको अपना सन्देश देनेका निश्चय किया और पहले अपने कुटुम्बी-जनोको उसका पात्र चुना। जो लोग इस्लामको तलवारका धर्म मानते है वक्ताने अपनेको उनसे अलग बताया और कहा कि वाशिगटन इरविनने इस्लाम धर्मपर अपने ग्रथमे प्रश्न उठाया है, "अपनी पहली अवस्थामे इस्लामके पास तलवार चलानेवाले लोग कहाँ थे ?" उनके विचारमे इस्लामकी सफलताका कारण अधिकतर उसकी सादगी और मनुष्यकी कमजोरियोकी स्वीकृति है । मुहम्मदने सिखाया कि ईश्वर एक और केवल एक है, और वे उसके पैगम्बर है। उन्होंने यह भी सिखाया कि आत्मोत्थानकारी प्रभावके रूपमे प्रार्थना नितान्त आवश्यक है। जो कर सके ऐसे अपने समस्त अनुयायियोको उन्होने, वर्षमे भले ही एक बार, इकट्ठा होनेके लिए मक्काकी यात्राका विधान किया । और यह मानकर कि लोग धन-सग्रह करेगे, उन्होने अपने अनुयायियोसे अनुरोध किया कि वे उसका एक निश्चित अश दान कार्य के लिए धर्मबुद्धिसे अलग सुरक्षित कर दे । बहरहाल इस्लामकी मुख्य ध्वनि उसकी समताकी भावना थी । जो उसके दायरेमे आये उसने उन सबको ऐसे भावसे समान व्यवहार प्रदान किया जैसे भावसे संसारके किसी और धर्मने नहीं किया था । इसलिए जब ईसाके ९०० वर्ष बाद उसके अनुयाइयोने भारतपर चढाई की, तब हिन्दू धर्म किकर्त्तव्यविमूढ हो गया । उसे ऐसा लगा कि इस्लामको सफलता मिलकर रहेगी । जातिभेदसे त्रस्त जनतापर समताके सिद्धान्तका प्रभाव पड़े बिना नहीं रह सकता था। इस आन्तरिक शक्तिके साथ तलवारकी ताकत भी जोड दी गई । वे कट्टर हमलावर, जो समय-समयपर भारतमे आ घुसते थे, यदि समझाबुझाकर सम्भव न होता तो तलवारके बलपर धर्म परिवर्तन करनेमे हिचकते नहीं थे। मूर्तियोपर मूर्तियाँ तोड़ते हुए उन्होने लगभग सारा देश रौद डाला और यद्यपि राजपूती शौर्य हिन्दुत्वकी ओर था, किन्तु वह इस्लामके अचानक हमलेसे उसकी रक्षा करनेमे असमर्थ रहा। प्रारम्भमे हिन्दू धर्मकी भावनाके अनुरूप दोनो धर्मोके समन्वयका प्रयत्न किया गया । वाराणसीमे लगभग १३वी शताब्दीमे कबीर नामके एक सन्त हुए जिन्होंने हिन्दूधर्म के प्रधान सिद्धान्तोको अक्षुण्ण रखकर और थोडा बहुत इस्लामसे लेकर दोनो धर्मोके एकीकरणकी चेष्टा की, किन्तु उनका वह प्रयत्न बहुत सफल नही हुआ । जहाँसे होकर मुसलमान विजेता भारतमे वडी सख्यामे घुसे और जिसने उनकी पहली अनीको झेला उस पजाबने सिख धर्मके संस्थापक गुरु नानकको जन्म दिया। उन्होने अपने धर्मके सिद्धान्त कबीरसे लिए और उनमे लडाकू हिन्दू-तत्त्वको मिलाया । उन्होने मुस्लिम भावनाओका आदर करते हुए समझौते के लिए हाथ बढ़ाया, किन्तु यदि वह स्वीकार नही किया गया तो वे हिन्दू धर्मकी इस्लामके आक्रमणसे रक्षा करनेके लिए भी उतने ही तैयार थे । और इस तरह सिख धर्म इस्लामका सीधा परिणाम था । यह सर्वविदित है कि सिख कैसा बहादुर होता है और उसने ब्रिटिश सत्ताकी क्या सेवा की है। हिन्दू धर्मपर इस्लामका यह प्रभाव हुआ कि उसने सिख धर्मको जन्म दिया और धर्मके एक प्रधान गुण अर्थात् सहि
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तीन सौ सोलह. पत्र : दादाभाई नौरोजीको इक्कीस-चौबीस कोर्ट चेम्बर्स नुक्कड़, रिसिक व ऐंडर्सन स्ट्रीट्स पोशून्य ऑशून्य बॉक्स छः हज़ार पाँच सौ बाईस जोहानिसबर्ग मार्च ग्यारह, एक हज़ार नौ सौ पाँच यह पत्र आपको जोहानिसबर्गके श्री एलशून्य डब्ल्यू शून्य रिचका परिचय दे सकेगा । श्री रिच और मै कई बरसोसे एक दूसरेको अच्छी तरह जानते है । श्री रिचके भारतीयोके पक्षमे खूब निश्चित विचार है और कई बातोके साथ भारतीय हितको ज्यादा ठीक सेवा कर सकनेके खयालसे वे बैरिस्टरी पढने इंग्लैंड रवाना हो रहे है । मै बडी कृपा मानूंगा यदि आप अपनी सहायताका लाभ उन्हे दे सके । श्री रिचने दक्षिण आफ्रिकामे भारतीय प्रश्नका अध्ययन किया है। मूल अंग्रेजी प्रतिकी फोटो-नकल से । तीन सौ सत्रह. हिन्दू धर्म [ जोहानिसवर्ग मार्च ग्यारह, एक हज़ार नौ सौ पाँच] श्री गाधीने शनिवारकी शामको जोहानिसबर्ग थियोसॉफिकल लॉजके तत्त्वावधानमे मेसॉनिक टेम्पलमे हिन्दू धर्मपर दूसरा भाषण दिया। भवन खचाखच भरा था । पिछले भाषणका साराश देनेके बाद वक्ताने कहा कि दूसरे भाषणमे हिन्दू धर्मके उस कालका निरूपण किया जायेगा, जिसे उसका अद्वितीय युग कह सकते है । बुद्धके उपदेशोके प्रभावसे जो आन्तरिक सुधार हुए उनके बाद हिन्दू धर्म मूर्तिपूजाका अत्यधिक अभ्यस्त हो गया। वक्ताने बातको निर्दोष दिखानेके लिए कई स्पष्टीकरण किये, किन्तु वे इस तथ्यको अस्वीकार नहीं कर सके कि हिन्दू दृश्य रूपमे लकड़ी-पत्थर जैसी जड चीजे पूजते है। हिन्दू दार्शनिक ईश्वरको सरलतासे शुद्धतम आत्माके रूपमे जानते और पूजते थे तथा अद्वैतवादके आधारपर उच्चतम कल्पनातक पहुँच जाते थे। इसी भाँति अज्ञानी जन-साधारण इससे निम्नतम अवस्थामे गिर जाते थे। 'यदि बाल-बुद्धि ईश्वरका अनुभव निर्गुण आत्माके रूपमें नही कर पाती हिन्दू धर्म तो उसके विविध सगुण रूपोके माध्यमसे उसको पूजनेमे उसे कोई कठिनाई नही होती। अनेक उसे सूर्य, चन्द्र और तारोके माध्यमसे पूजते है और अनेक उसे लकडी पत्थरके रूपमे भी पूजते है । दर्शन - प्रधान हिन्दू धर्मको सहिष्णु-भावनाके कारण पूजाका यह प्रकार अगीकार करनेमें कोई कठिनाई नही हुई । इस प्रकार हिन्दू- जीवनका चक्र आनन्दसे चलता रहा। किन्तु तभी अरबके मरुस्थलमे एक ऐसी शक्ति उदित हुई जो विचारोमे क्रान्ति उत्पन्न किये और जीवनपर अपनी स्थायी छाप छोडे बिना रह नही सकती थी । मुहम्मद वचपनसे ही अपने आसपासके लोगोको मूर्तिपूजा, विलासपूर्ण असंयम और शराबखोरीमे डूवा देखकर मन ही मन कोबसे सुलगते रहते थे। उन्होने यहूदी धर्मको धराशायी और ईसाइयतको पतित देखा। उन्होने मूसा और ईसाकी ही तरह अनुभव किया कि उनके पास एक दिव्य सन्देश है । उन्होने ससारको अपना सन्देश देनेका निश्चय किया और पहले अपने कुटुम्बी-जनोको उसका पात्र चुना। जो लोग इस्लामको तलवारका धर्म मानते है वक्ताने अपनेको उनसे अलग बताया और कहा कि वाशिगटन इरविनने इस्लाम धर्मपर अपने ग्रथमे प्रश्न उठाया है, "अपनी पहली अवस्थामे इस्लामके पास तलवार चलानेवाले लोग कहाँ थे ?" उनके विचारमे इस्लामकी सफलताका कारण अधिकतर उसकी सादगी और मनुष्यकी कमजोरियोकी स्वीकृति है । मुहम्मदने सिखाया कि ईश्वर एक और केवल एक है, और वे उसके पैगम्बर है। उन्होंने यह भी सिखाया कि आत्मोत्थानकारी प्रभावके रूपमे प्रार्थना नितान्त आवश्यक है। जो कर सके ऐसे अपने समस्त अनुयायियोको उन्होने, वर्षमे भले ही एक बार, इकट्ठा होनेके लिए मक्काकी यात्राका विधान किया । और यह मानकर कि लोग धन-सग्रह करेगे, उन्होने अपने अनुयायियोसे अनुरोध किया कि वे उसका एक निश्चित अश दान कार्य के लिए धर्मबुद्धिसे अलग सुरक्षित कर दे । बहरहाल इस्लामकी मुख्य ध्वनि उसकी समताकी भावना थी । जो उसके दायरेमे आये उसने उन सबको ऐसे भावसे समान व्यवहार प्रदान किया जैसे भावसे संसारके किसी और धर्मने नहीं किया था । इसलिए जब ईसाके नौ सौ वर्ष बाद उसके अनुयाइयोने भारतपर चढाई की, तब हिन्दू धर्म किकर्त्तव्यविमूढ हो गया । उसे ऐसा लगा कि इस्लामको सफलता मिलकर रहेगी । जातिभेदसे त्रस्त जनतापर समताके सिद्धान्तका प्रभाव पड़े बिना नहीं रह सकता था। इस आन्तरिक शक्तिके साथ तलवारकी ताकत भी जोड दी गई । वे कट्टर हमलावर, जो समय-समयपर भारतमे आ घुसते थे, यदि समझाबुझाकर सम्भव न होता तो तलवारके बलपर धर्म परिवर्तन करनेमे हिचकते नहीं थे। मूर्तियोपर मूर्तियाँ तोड़ते हुए उन्होने लगभग सारा देश रौद डाला और यद्यपि राजपूती शौर्य हिन्दुत्वकी ओर था, किन्तु वह इस्लामके अचानक हमलेसे उसकी रक्षा करनेमे असमर्थ रहा। प्रारम्भमे हिन्दू धर्मकी भावनाके अनुरूप दोनो धर्मोके समन्वयका प्रयत्न किया गया । वाराणसीमे लगभग तेरहवी शताब्दीमे कबीर नामके एक सन्त हुए जिन्होंने हिन्दूधर्म के प्रधान सिद्धान्तोको अक्षुण्ण रखकर और थोडा बहुत इस्लामसे लेकर दोनो धर्मोके एकीकरणकी चेष्टा की, किन्तु उनका वह प्रयत्न बहुत सफल नही हुआ । जहाँसे होकर मुसलमान विजेता भारतमे वडी सख्यामे घुसे और जिसने उनकी पहली अनीको झेला उस पजाबने सिख धर्मके संस्थापक गुरु नानकको जन्म दिया। उन्होने अपने धर्मके सिद्धान्त कबीरसे लिए और उनमे लडाकू हिन्दू-तत्त्वको मिलाया । उन्होने मुस्लिम भावनाओका आदर करते हुए समझौते के लिए हाथ बढ़ाया, किन्तु यदि वह स्वीकार नही किया गया तो वे हिन्दू धर्मकी इस्लामके आक्रमणसे रक्षा करनेके लिए भी उतने ही तैयार थे । और इस तरह सिख धर्म इस्लामका सीधा परिणाम था । यह सर्वविदित है कि सिख कैसा बहादुर होता है और उसने ब्रिटिश सत्ताकी क्या सेवा की है। हिन्दू धर्मपर इस्लामका यह प्रभाव हुआ कि उसने सिख धर्मको जन्म दिया और धर्मके एक प्रधान गुण अर्थात् सहि
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बॉयोपिक फिल्मों की श्रृंखला में सोनम कपूर अभिनीत 'नीरजा' शामिल है. राम माधवानी के निर्देशन में बन रही फिल्म सीनियर फ्लाइट अटेंडेंट नीरजा भनोट के जीवन पर आधारित है जिन्होंने 1986 में कराची में अपहृत एक विमान में अपनी जिंदगी की कुर्बानी देकर 360 लोगों की जान बचायी थी. 2013 में फिल्म 'शाहिद' के माध्यम से बड़े पर्दे पर वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता शाहिद आजमी की कहानी दिखाने वाले फिल्मकार हंसल मेहता एक और बॉयोपिक ड्रामा फिल्म 'अलीगढ़' लेकर आ रहे हैं. फिल्म प्रोफेसर डॉ श्रीनिवास रामचंद्र सिरास से जुड़ी एक सच्ची घटना पर आधारित है. सिरास को उनकी यौन प्रवृति के लिए नौकरी से निलंबित कर दिया गया था. अभिनेत्री ऐश्वर्या राय उमंग कुमार निर्देशित फिल्म 'सरबजीत' में काम कर रही है जो पाकिस्तान की जेल में पीट पीटकर मार दिए गए भारतीय कैदी सरबजीत सिंह के जीवन पर आधारित है. फिल्म में ऐश्वर्या सरबजीत की बहन दलबीर कौर की भूमिका में हैं वहीं रणदीप हुडा सरबजीत का किरदार निभा रहे हैं.
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बॉयोपिक फिल्मों की श्रृंखला में सोनम कपूर अभिनीत 'नीरजा' शामिल है. राम माधवानी के निर्देशन में बन रही फिल्म सीनियर फ्लाइट अटेंडेंट नीरजा भनोट के जीवन पर आधारित है जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ छियासी में कराची में अपहृत एक विमान में अपनी जिंदगी की कुर्बानी देकर तीन सौ साठ लोगों की जान बचायी थी. दो हज़ार तेरह में फिल्म 'शाहिद' के माध्यम से बड़े पर्दे पर वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता शाहिद आजमी की कहानी दिखाने वाले फिल्मकार हंसल मेहता एक और बॉयोपिक ड्रामा फिल्म 'अलीगढ़' लेकर आ रहे हैं. फिल्म प्रोफेसर डॉ श्रीनिवास रामचंद्र सिरास से जुड़ी एक सच्ची घटना पर आधारित है. सिरास को उनकी यौन प्रवृति के लिए नौकरी से निलंबित कर दिया गया था. अभिनेत्री ऐश्वर्या राय उमंग कुमार निर्देशित फिल्म 'सरबजीत' में काम कर रही है जो पाकिस्तान की जेल में पीट पीटकर मार दिए गए भारतीय कैदी सरबजीत सिंह के जीवन पर आधारित है. फिल्म में ऐश्वर्या सरबजीत की बहन दलबीर कौर की भूमिका में हैं वहीं रणदीप हुडा सरबजीत का किरदार निभा रहे हैं.
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MHA writes to states: केंद्र सरकार ने जेल में बंद कैदियों के लिए नया आदेश जारी किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चिट्ठी लिखकर कहा है कि जो भी कैदी कट्टर विचारधारा वाले हैं उन्हें जेल में अलग रखा जाए। ऐसा आदेश इसलिए जारी किया गया है ताकि अन्य कैदियों पर इसका प्रभाव न पड़े। साथ ही नकारात्मकता फैलाने वाले कैदी अलग रहें।
केंद्रीय गृह मंत्रायल ने चिट्ठी में लिखा कि राज्य के जेल अधिकारियों को डी-रेडिकलाइजेशन पर विशेष सत्र का आयोजन करना चाहिए। इससे गलत रास्ते पर चलने वाले और गुमराह मानसिकता वाले अपराधियों को ठीक करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही जो कैदी ड्रग्स औऱ स्मगलिंग के चलते जेल में बंद हैं उन्हें अन्य कैदियों से दूर ही रखा जाए।
केंद्र ने कहा कि जेल अधिकारी मॉडल जेल मैनुअल 2016 को अपनाएं। अगर राज्यों में अबतक इसे अपनाया नहीं गया है तो इसे लाने में तेजी लाएं और मैनुअल में दिए गए जेल के लिए दिशा-निर्देशों का पालन करें। जेल में सुधार लाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। चिट्ठी में जेल अधिकारियों से यह भी अपील की गई कि वे सभी जिला स्तरीय जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायलय में सुविधा हो सके इसकी सुविधा का प्रयास करें। जेल कर्मचारियों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान शुरू करें।
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MHA writes to states: केंद्र सरकार ने जेल में बंद कैदियों के लिए नया आदेश जारी किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चिट्ठी लिखकर कहा है कि जो भी कैदी कट्टर विचारधारा वाले हैं उन्हें जेल में अलग रखा जाए। ऐसा आदेश इसलिए जारी किया गया है ताकि अन्य कैदियों पर इसका प्रभाव न पड़े। साथ ही नकारात्मकता फैलाने वाले कैदी अलग रहें। केंद्रीय गृह मंत्रायल ने चिट्ठी में लिखा कि राज्य के जेल अधिकारियों को डी-रेडिकलाइजेशन पर विशेष सत्र का आयोजन करना चाहिए। इससे गलत रास्ते पर चलने वाले और गुमराह मानसिकता वाले अपराधियों को ठीक करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही जो कैदी ड्रग्स औऱ स्मगलिंग के चलते जेल में बंद हैं उन्हें अन्य कैदियों से दूर ही रखा जाए। केंद्र ने कहा कि जेल अधिकारी मॉडल जेल मैनुअल दो हज़ार सोलह को अपनाएं। अगर राज्यों में अबतक इसे अपनाया नहीं गया है तो इसे लाने में तेजी लाएं और मैनुअल में दिए गए जेल के लिए दिशा-निर्देशों का पालन करें। जेल में सुधार लाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। चिट्ठी में जेल अधिकारियों से यह भी अपील की गई कि वे सभी जिला स्तरीय जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायलय में सुविधा हो सके इसकी सुविधा का प्रयास करें। जेल कर्मचारियों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान शुरू करें। संबंधित खबरेंः
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सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत और युजवेंद्र चहल ने एडिलेड एयरपोर्ट पर मिटाई थकान. (@imVkohli)
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम शनिवार को न्यूजीलैंड दौरे (IND vs NZ) के लिए रवाना हो गई. टीम इंडिया टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद हार्दिक पंड्या (Hardik Pandya) की कप्तानी में मेजबान न्यूजीलैंड के खिलाफ 3 मैचों की टी20 सीरीज खेलेगी. टी20 सीरीज के बाद दोनों टीमों के बीच इतने ही मैचों की वनडे सीरीज खेली जाएगी. वनडे सीरीज में टीम इंडिया की कमान शिखर धवन (Shikhar Dhawan) संभालेंगे. पंड्या सहित सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) , लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल और ऋषभ पंत (Rishabh Pant) एडिलेड एयरपोर्ट से सीधे न्यूजीलैंड के लिए रवाना हुए.
टीम इंडिया के मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव, युजवेंद्र चहल (Yuzvendra Chahal) और विकेटकीपर ऋषभ पंत एडिलेड एयरपोर्ट पर एक दूसरे के ऊपर सिर रखकर फर्श पर सोते हुए नजर आए. युजवेंद्र चहल की पत्नी धनश्री वर्मा (Dhanashree Verma) ने इस फोटो को क्लिक किया है. धनश्री वर्मा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में इस फोटो को शेयर किया है. देखते ही देखते यह फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
यह भी पढ़ेंःPakistan Probable XI T20 WC Final: पाकिस्तान की फाइनल में क्या होगी प्लेइंग XI, विनिंग कॉम्बिनेशन में बाबर आजम करेंगे बदलाव?
भारतीय टीम को टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने 10 विकेट से हराकर उसे बाहर कर रास्ता दिखा दिया. टीम इंडिया 15 साल के खिताबी सूखे को खत्म करने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंची थी लेकिन उसका इंतजार और लंबा हो गया. न्यूजीलैंड दौरे पर नियमित कप्तान रोहित शर्मा सहित विराट कोहली और कई अन्य सीनियर खिलाड़ियों को आराम दिया गया है. ऐसे में इस दौरे पर युवाओं के लिए खुद को साबित करने का बढ़िया मौका है.
टीम इडिया मेजबान न्यूजीलैंड के खिलाफ दौरे की शुरुआत टी20 सीरीज से करेगी. 3 मैचों की सीरीज का पहला टी20 मैच 18 नवंबर को वेलिंग्टन के SKY स्टेडियम में खेला जाएगा. टी20 सीरीज के बाद भारतीय टीम 3 मैचों की वनडे सीरीज खेलेगी.
न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीमः हार्दिक पंड्या (कप्तान), ऋषभ पंत (उप कप्तान), ईशान किशन, दीपक हुडा, सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर, संजू सैमसन, वॉशिंगटन सुंदर, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, हर्षल पटेल, मोहम्मद सिराज, भुवनेश्वर कुमार, उमरान मलिक और अर्शदीप सिंह.
न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीमः शिखर धवन (कप्तान), ऋषभ पंत (उप कप्तान), शुभमन गिल, दीपक हुडा, श्रेयस अय्यर, सूर्यकुमार यादव, संजू सैमसन, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, शाहबाज अहमद, वॉशिंगटन सुंदर, उमरान मलिक, कुलदीप सेन, शार्दुल ठाकुर, दीपक चाहर और अर्शदीप सिंह.
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'जवान' से पहले. . . इन 5 फिल्मों में अपनी खलनायकी से डरा चुके हैं शाहरुख खान, विलेनगिरी से फिर मचाएंगे धमाल!
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सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत और युजवेंद्र चहल ने एडिलेड एयरपोर्ट पर मिटाई थकान. नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम शनिवार को न्यूजीलैंड दौरे के लिए रवाना हो गई. टीम इंडिया टीबीस वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद हार्दिक पंड्या की कप्तानी में मेजबान न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की टीबीस सीरीज खेलेगी. टीबीस सीरीज के बाद दोनों टीमों के बीच इतने ही मैचों की वनडे सीरीज खेली जाएगी. वनडे सीरीज में टीम इंडिया की कमान शिखर धवन संभालेंगे. पंड्या सहित सूर्यकुमार यादव , लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल और ऋषभ पंत एडिलेड एयरपोर्ट से सीधे न्यूजीलैंड के लिए रवाना हुए. टीम इंडिया के मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव, युजवेंद्र चहल और विकेटकीपर ऋषभ पंत एडिलेड एयरपोर्ट पर एक दूसरे के ऊपर सिर रखकर फर्श पर सोते हुए नजर आए. युजवेंद्र चहल की पत्नी धनश्री वर्मा ने इस फोटो को क्लिक किया है. धनश्री वर्मा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में इस फोटो को शेयर किया है. देखते ही देखते यह फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. यह भी पढ़ेंःPakistan Probable XI Tबीस WC Final: पाकिस्तान की फाइनल में क्या होगी प्लेइंग XI, विनिंग कॉम्बिनेशन में बाबर आजम करेंगे बदलाव? भारतीय टीम को टीबीस विश्व कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने दस विकेट से हराकर उसे बाहर कर रास्ता दिखा दिया. टीम इंडिया पंद्रह साल के खिताबी सूखे को खत्म करने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंची थी लेकिन उसका इंतजार और लंबा हो गया. न्यूजीलैंड दौरे पर नियमित कप्तान रोहित शर्मा सहित विराट कोहली और कई अन्य सीनियर खिलाड़ियों को आराम दिया गया है. ऐसे में इस दौरे पर युवाओं के लिए खुद को साबित करने का बढ़िया मौका है. टीम इडिया मेजबान न्यूजीलैंड के खिलाफ दौरे की शुरुआत टीबीस सीरीज से करेगी. तीन मैचों की सीरीज का पहला टीबीस मैच अट्ठारह नवंबर को वेलिंग्टन के SKY स्टेडियम में खेला जाएगा. टीबीस सीरीज के बाद भारतीय टीम तीन मैचों की वनडे सीरीज खेलेगी. न्यूजीलैंड के खिलाफ टीबीस सीरीज के लिए भारतीय टीमः हार्दिक पंड्या , ऋषभ पंत , ईशान किशन, दीपक हुडा, सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर, संजू सैमसन, वॉशिंगटन सुंदर, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, हर्षल पटेल, मोहम्मद सिराज, भुवनेश्वर कुमार, उमरान मलिक और अर्शदीप सिंह. न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीमः शिखर धवन , ऋषभ पंत , शुभमन गिल, दीपक हुडा, श्रेयस अय्यर, सूर्यकुमार यादव, संजू सैमसन, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, शाहबाज अहमद, वॉशिंगटन सुंदर, उमरान मलिक, कुलदीप सेन, शार्दुल ठाकुर, दीपक चाहर और अर्शदीप सिंह. . 'जवान' से पहले. . . इन पाँच फिल्मों में अपनी खलनायकी से डरा चुके हैं शाहरुख खान, विलेनगिरी से फिर मचाएंगे धमाल!
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कोरोना वायरस के लक्षणों (Coronavirus Symptoms) पर हुए एक अध्ययन में पता चला है कि इंग्लैंड में अब भी मामले कम हो रहे हैं. प्रतिदिन बीमार पड़ने वाले लोगों की अनुमानित संख्या बीते हफ्ते 757 थी.
Britain Coronavirus Update: ब्रिटेन में कोरोना वायरस के मामले तेजी से कम हो रहे हैं. इग्लैंड में एक हफ्ते के भीतर ही मामलों में 40 फीसदी की कमी हो गई है. यहां 1010 लोगों में से केवल एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित है (Britain Coronavirus Vaccine). नेशनल स्टैंटिस्टिक्स कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर के शुरू से ही संक्रमण के मामलों में कमी देखी जा रही है और बीते पांच हफ्तों से लगातार मामले गिर रहे हैं. रिपोर्ट से पता चलता है कि मामले यॉकशायर और ईस्ट ऑफ इंग्लैंड को छोड़कर बाकी सभी क्षेत्रों में कम हो रहे हैं. इन दोनों ही क्षेत्रों में आंकड़े ऊपर नीचे हो रहे हैं.
संक्रमण के मामले बच्चों, टीनेजर्स और 35 साल से अधिक उम्र के लोगों में कम देखे जा रहे हैं. यहां का आर रेट 0.8 और 1.1 के बीच बना हुआ है, इस रेट से संक्रमण के फैलने की दर का पता चलता है (Britain Coronavirus Update). आर रेट बीते हफ्ते 0.8-1.0 के बीच था. देश के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने आंकड़ों को लेकर ट्वीट किया है और कहा है, 'ये डाटा विश्वसनीय है और दिखाता है कि हमारी रणनीति काम कर रही है.' वहीं विशेषज्ञों ने कहा है कि डाटा पर 'खुशी मनानी' चाहिए.
इसके अलावा कोरोना वायरस के लक्षणों पर हुए एक अध्ययन में पता चला है कि इंग्लैंड में अब भी मामले कम हो रहे हैं. प्रतिदिन बीमार पड़ने वाले लोगों की अनुमानित संख्या बीते हफ्ते 757 थी. देश के डिप्टी चीफ मेडिकल अफसर जोनाथन वान-ताम ने इस हफ्ते डाउनिंग स्ट्रीट ब्रीफिंग में बताया है कि ब्रिटेन 'वायरस के प्रकोप के काफी करीब था.' ऐसे सबूत भी हैं कि कोविड अब ब्रिटेन में खत्म हो रहा है क्योंकि तेज गति से टीकाकरण हुआ है (Britain Coronavirus Vaccine) और आधिकारिक आंकड़े कहते हैं कि इलाके में इस महीने एक भी मौत नहीं हुई है.
जहां जनवरी में ये देश वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा था, वहीं अब यहां हालात सामान्य होने लगे हैं. यूके के सभी देशों में मामलों में कमी देखी जा रही है. ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं, जो संक्रमण दर बढ़ने की ओर इशारा करते हों. सर्वे के अनुसार, स्कॉटलैंड में संक्रमण दर सबसे अधिक है. ऐसा माना जा रहा है कि यहां 640 लोगों में से एक शख्स संक्रमित है (Britain Coronavirus Update). इसके बाद उत्तरी आयरलैंड का स्थान आता है, जहां 940 में से एक शख्स संक्रमित है. वहीं इंग्लैंड में 1010 में से एक शख्स संक्रमित मिला है और वेल्स में 1570 में से एक शख्स संक्रमित है.
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कोरोना वायरस के लक्षणों पर हुए एक अध्ययन में पता चला है कि इंग्लैंड में अब भी मामले कम हो रहे हैं. प्रतिदिन बीमार पड़ने वाले लोगों की अनुमानित संख्या बीते हफ्ते सात सौ सत्तावन थी. Britain Coronavirus Update: ब्रिटेन में कोरोना वायरस के मामले तेजी से कम हो रहे हैं. इग्लैंड में एक हफ्ते के भीतर ही मामलों में चालीस फीसदी की कमी हो गई है. यहां एक हज़ार दस लोगों में से केवल एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित है . नेशनल स्टैंटिस्टिक्स कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर के शुरू से ही संक्रमण के मामलों में कमी देखी जा रही है और बीते पांच हफ्तों से लगातार मामले गिर रहे हैं. रिपोर्ट से पता चलता है कि मामले यॉकशायर और ईस्ट ऑफ इंग्लैंड को छोड़कर बाकी सभी क्षेत्रों में कम हो रहे हैं. इन दोनों ही क्षेत्रों में आंकड़े ऊपर नीचे हो रहे हैं. संक्रमण के मामले बच्चों, टीनेजर्स और पैंतीस साल से अधिक उम्र के लोगों में कम देखे जा रहे हैं. यहां का आर रेट शून्य.आठ और एक.एक के बीच बना हुआ है, इस रेट से संक्रमण के फैलने की दर का पता चलता है . आर रेट बीते हफ्ते शून्य.आठ-एक.शून्य के बीच था. देश के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने आंकड़ों को लेकर ट्वीट किया है और कहा है, 'ये डाटा विश्वसनीय है और दिखाता है कि हमारी रणनीति काम कर रही है.' वहीं विशेषज्ञों ने कहा है कि डाटा पर 'खुशी मनानी' चाहिए. इसके अलावा कोरोना वायरस के लक्षणों पर हुए एक अध्ययन में पता चला है कि इंग्लैंड में अब भी मामले कम हो रहे हैं. प्रतिदिन बीमार पड़ने वाले लोगों की अनुमानित संख्या बीते हफ्ते सात सौ सत्तावन थी. देश के डिप्टी चीफ मेडिकल अफसर जोनाथन वान-ताम ने इस हफ्ते डाउनिंग स्ट्रीट ब्रीफिंग में बताया है कि ब्रिटेन 'वायरस के प्रकोप के काफी करीब था.' ऐसे सबूत भी हैं कि कोविड अब ब्रिटेन में खत्म हो रहा है क्योंकि तेज गति से टीकाकरण हुआ है और आधिकारिक आंकड़े कहते हैं कि इलाके में इस महीने एक भी मौत नहीं हुई है. जहां जनवरी में ये देश वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा था, वहीं अब यहां हालात सामान्य होने लगे हैं. यूके के सभी देशों में मामलों में कमी देखी जा रही है. ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं, जो संक्रमण दर बढ़ने की ओर इशारा करते हों. सर्वे के अनुसार, स्कॉटलैंड में संक्रमण दर सबसे अधिक है. ऐसा माना जा रहा है कि यहां छः सौ चालीस लोगों में से एक शख्स संक्रमित है . इसके बाद उत्तरी आयरलैंड का स्थान आता है, जहां नौ सौ चालीस में से एक शख्स संक्रमित है. वहीं इंग्लैंड में एक हज़ार दस में से एक शख्स संक्रमित मिला है और वेल्स में एक हज़ार पाँच सौ सत्तर में से एक शख्स संक्रमित है.
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एक कहावत आपने सुनी होगी कि भूख इंसान से कुछ भी करवा सकती है. यह कहावत तो उन लोगों पर फिट बैठती है जिन्हे भूख लगती हो लेकिन जिन्हे भूख ही ना लगती हो उसके बारे में क्या कहेंगे। बहुत से ऐसे लोग हैं जो या तो बहुत कम खाते हैं या फिर उन्हें भूख ही नहीं लगती। इस बीमारी को मंदाग्नि के नाम से भी जाना जाता है. अगर आप को भी ये बीमारी है तो आज हम आपको ऐसे उपाय बातएंगे जिनसे आपको खुलकर भूख लगने लगेगी।
काली मिर्च को पीसकर चूर्णं बनायें और उसमें थोड़ा नमक मिलाकर मूली पर लगायें, और इसे भोजन के समय खायें। यदि भूख कम लगती है तो आप अदरक, नींबू, भुना जीरा और काला नमक को मिलाकर चटनी बनायें और इसका सेवन करें। एक गिलास गर्म पानी में खाने वाले सोड़े की आधी चम्मच मिलाकर पीते रहें, भूख न लगने की समस्या दूर होगी। भोजन करने से पहले यदि आप 1 चम्मच अदरक का रस और 1 चम्मच नींबू का रस और थोड़ा-सा काला नमक को पानी में घोलकर पीतें रहना चाहिए।
सलाद में अदरक के छोटे-छोटे टुकड़ों को काटकर उन पर नमक लगाकर इसे खाना खाते समय जरूर खायें। यह आपकी भूख की क्षमता को बढ़ायेगा। भोजन के तुंरत बाद कभी भी पानी का सेवन न करें। 30 ग्राम पानी में हरे धनिये का रस मिलाकर रोज पीते रहने से थोड़े ही दिनों में भूख न लगने की बीमारी दूर होने लगती है। अजवाइन को सेकें और उसे पीसकर उसका चूर्ण बनायें फिर उसमें थोड़ा सा नमक मिलाकर खाना खाने के बाद एक चुटकी मुंह में रखें। धनिये, नींबू और अदरक की मिक्स चटनी बनायें और इसे डेली अपने खाने में इस्तेमाल करने से भूख बढ़ती है।
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एक कहावत आपने सुनी होगी कि भूख इंसान से कुछ भी करवा सकती है. यह कहावत तो उन लोगों पर फिट बैठती है जिन्हे भूख लगती हो लेकिन जिन्हे भूख ही ना लगती हो उसके बारे में क्या कहेंगे। बहुत से ऐसे लोग हैं जो या तो बहुत कम खाते हैं या फिर उन्हें भूख ही नहीं लगती। इस बीमारी को मंदाग्नि के नाम से भी जाना जाता है. अगर आप को भी ये बीमारी है तो आज हम आपको ऐसे उपाय बातएंगे जिनसे आपको खुलकर भूख लगने लगेगी। काली मिर्च को पीसकर चूर्णं बनायें और उसमें थोड़ा नमक मिलाकर मूली पर लगायें, और इसे भोजन के समय खायें। यदि भूख कम लगती है तो आप अदरक, नींबू, भुना जीरा और काला नमक को मिलाकर चटनी बनायें और इसका सेवन करें। एक गिलास गर्म पानी में खाने वाले सोड़े की आधी चम्मच मिलाकर पीते रहें, भूख न लगने की समस्या दूर होगी। भोजन करने से पहले यदि आप एक चम्मच अदरक का रस और एक चम्मच नींबू का रस और थोड़ा-सा काला नमक को पानी में घोलकर पीतें रहना चाहिए। सलाद में अदरक के छोटे-छोटे टुकड़ों को काटकर उन पर नमक लगाकर इसे खाना खाते समय जरूर खायें। यह आपकी भूख की क्षमता को बढ़ायेगा। भोजन के तुंरत बाद कभी भी पानी का सेवन न करें। तीस ग्राम पानी में हरे धनिये का रस मिलाकर रोज पीते रहने से थोड़े ही दिनों में भूख न लगने की बीमारी दूर होने लगती है। अजवाइन को सेकें और उसे पीसकर उसका चूर्ण बनायें फिर उसमें थोड़ा सा नमक मिलाकर खाना खाने के बाद एक चुटकी मुंह में रखें। धनिये, नींबू और अदरक की मिक्स चटनी बनायें और इसे डेली अपने खाने में इस्तेमाल करने से भूख बढ़ती है।
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जान लेना चाहिए कि सूक्ष्म प्राण की गति वहाँ होने लगी है और ज्योंज्यों भृकुटि की विशेष नाड़ी ध्यान से शुद्धि होती जायेगी, यह सूक्ष्म प्राण ललाट चक्र ब्रह्मरन्ध्र में चला जायेगा ! सूक्ष्म प्राण की गति के साथ चित्त भी वहीं बाँधा जायेगा । इस प्रकार प्रतिदिन कम से कम एक घण्टा अवश्य धारणा ध्यान कर लेना चाहिए । यदि अधिक समय दिया जा सके तो लाभ अधिक होगा ।
निरन्तर ध्यानावस्थित होने का अभ्यास करने से और ज्योति अथवा सनसनाहट को अनुभव करने से बुद्धि की मलीनता दूर होने लगती है । ज्योति जितनी शुभ अथवा सनसनाहट जितनी तीव्र होती जायेगी, निर्मलता, पवित्रता भी उतनी मात्रा में बढ़ती जायेगी ।"
योग में ध्यान के पूर्व आसन पर स्थित होकर १०-१५ मिनट तक त्राटक करना आवश्यक बताया है । त्राटक अपने गुरु के चित्र, अपनी इष्टदेव मूर्ति अथवा स्फटिक मणि का श्रेष्ठ बताया गया है। त्राटक का यह लाभ होता है कि दृष्टि इधर उधर से हटकर एक ओर केन्द्रित हो जाती हैं, मन की चञ्चलता कम होने लगते है त्राटक के बाद नेत्र बन्द कर लेने चाहिए क्योंकि नेत्र खुले रहने से मन बाह्य वस्तुओं की ओर आकर्षित होता है और नाना प्रकार के विचार मन में आने लगते हैं ।
ध्यान से पूर्व मन में दृढ़ सङ्कल्प करना चाहिए कि ध्यान के समय में किसी सांसारिक विषय को मन में नहीं आने दूंगा । न तो कोई सङ्कल विकल्प हो पायेगा मैं केवल ध्यान ही करूंगा ।
जप के समय या किसी अन्य सुविधा के समय भी ध्यान किया जा सकता है । ध्यान के लिए एकान्त व शान्त स्थान का चुनाव करना चाहिए । जप समय की विधि तो पालती मारकर करने की है परन्तु यदि इसे किसी अन्य समय करना हो तो दीवार, वृक्ष के सहारे मसनद
साथ या आराम कुर्सी पर लेटकर ध्यान साधना की जा सकती है। लेटकः देह को इस प्रकार से शिथिल कर दिया जाए जैसे निर्जीव
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जान लेना चाहिए कि सूक्ष्म प्राण की गति वहाँ होने लगी है और ज्योंज्यों भृकुटि की विशेष नाड़ी ध्यान से शुद्धि होती जायेगी, यह सूक्ष्म प्राण ललाट चक्र ब्रह्मरन्ध्र में चला जायेगा ! सूक्ष्म प्राण की गति के साथ चित्त भी वहीं बाँधा जायेगा । इस प्रकार प्रतिदिन कम से कम एक घण्टा अवश्य धारणा ध्यान कर लेना चाहिए । यदि अधिक समय दिया जा सके तो लाभ अधिक होगा । निरन्तर ध्यानावस्थित होने का अभ्यास करने से और ज्योति अथवा सनसनाहट को अनुभव करने से बुद्धि की मलीनता दूर होने लगती है । ज्योति जितनी शुभ अथवा सनसनाहट जितनी तीव्र होती जायेगी, निर्मलता, पवित्रता भी उतनी मात्रा में बढ़ती जायेगी ।" योग में ध्यान के पूर्व आसन पर स्थित होकर दस-पंद्रह मिनट तक त्राटक करना आवश्यक बताया है । त्राटक अपने गुरु के चित्र, अपनी इष्टदेव मूर्ति अथवा स्फटिक मणि का श्रेष्ठ बताया गया है। त्राटक का यह लाभ होता है कि दृष्टि इधर उधर से हटकर एक ओर केन्द्रित हो जाती हैं, मन की चञ्चलता कम होने लगते है त्राटक के बाद नेत्र बन्द कर लेने चाहिए क्योंकि नेत्र खुले रहने से मन बाह्य वस्तुओं की ओर आकर्षित होता है और नाना प्रकार के विचार मन में आने लगते हैं । ध्यान से पूर्व मन में दृढ़ सङ्कल्प करना चाहिए कि ध्यान के समय में किसी सांसारिक विषय को मन में नहीं आने दूंगा । न तो कोई सङ्कल विकल्प हो पायेगा मैं केवल ध्यान ही करूंगा । जप के समय या किसी अन्य सुविधा के समय भी ध्यान किया जा सकता है । ध्यान के लिए एकान्त व शान्त स्थान का चुनाव करना चाहिए । जप समय की विधि तो पालती मारकर करने की है परन्तु यदि इसे किसी अन्य समय करना हो तो दीवार, वृक्ष के सहारे मसनद साथ या आराम कुर्सी पर लेटकर ध्यान साधना की जा सकती है। लेटकः देह को इस प्रकार से शिथिल कर दिया जाए जैसे निर्जीव
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आरके राणा कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद रांची की होटवार जेल के कैदी थे। उनकी तबीयत खराब होने के कारण रांची के अस्पताल में रिम्स में इलाज कराया जा रहा था, जहां उनकी हालत गंभीर होने पर दिल्ली रेफर कर दिया गया था। राणा का जन्म 23 जनवरी 1947 को भागलपुर में हुआ था। वे 14वीं लोकसभा में खगड़िया से लालू की पार्टी के सांसद रहे। चारा घोटाले में नाम आने के बाद वे काफी चर्चा में आए। उनका पूरा नाम रबींद्र कुमार राणा था। वे राष्ट्रीय जनता दल से लोकसभा के लिए चुने गए थे। वे भागलपुर जिले के बिहपुर थाने के नारायणपुर गांव के रहने वाले थे।
चारा घोटाला में लालू प्रसाद के साथ सजायाफ्ता डॉ. आर के राणा का दिल्ली एम्स में बुधवार को निधन हो गया। मल्टीपल आर्गन फेल होने की वजह से मौत हुई है। मंगलवार को ही उन्हें रांची से बेहतर इलाज के लिए दिल्ली एम्स भेजा गया था। रांची कोषागार से अवैध निकासी में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें पांच साल की जेल एवं 60 लाख जुर्माने की सजा सुनाई थी।
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आरके राणा कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद रांची की होटवार जेल के कैदी थे। उनकी तबीयत खराब होने के कारण रांची के अस्पताल में रिम्स में इलाज कराया जा रहा था, जहां उनकी हालत गंभीर होने पर दिल्ली रेफर कर दिया गया था। राणा का जन्म तेईस जनवरी एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को भागलपुर में हुआ था। वे चौदहवीं लोकसभा में खगड़िया से लालू की पार्टी के सांसद रहे। चारा घोटाले में नाम आने के बाद वे काफी चर्चा में आए। उनका पूरा नाम रबींद्र कुमार राणा था। वे राष्ट्रीय जनता दल से लोकसभा के लिए चुने गए थे। वे भागलपुर जिले के बिहपुर थाने के नारायणपुर गांव के रहने वाले थे। चारा घोटाला में लालू प्रसाद के साथ सजायाफ्ता डॉ. आर के राणा का दिल्ली एम्स में बुधवार को निधन हो गया। मल्टीपल आर्गन फेल होने की वजह से मौत हुई है। मंगलवार को ही उन्हें रांची से बेहतर इलाज के लिए दिल्ली एम्स भेजा गया था। रांची कोषागार से अवैध निकासी में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें पांच साल की जेल एवं साठ लाख जुर्माने की सजा सुनाई थी।
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कानपुर के पनकी इलाके में शुक्रवार को एक केमिकल फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई. एक दर्जन से ज्यादा दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही हैं. केमिकल फैक्ट्री के धुएं से आसपास रहने वाले लोगों को सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही है. सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने फैक्ट्री को पूरी तरह खाली करा रही है. वहीं आसपास के लोगों को फैक्ट्री से हटकर सुरक्षित स्थान पर जाने की हिदायत दी जा रही है.
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Pawan Singh- Khesari Lal की दुश्मनी खत्म, एक-दूसरे के गले लगे और किया Kiss, रवि किशन ने कराई सुलह!
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कानपुर के पनकी इलाके में शुक्रवार को एक केमिकल फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई. एक दर्जन से ज्यादा दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही हैं. केमिकल फैक्ट्री के धुएं से आसपास रहने वाले लोगों को सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही है. सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने फैक्ट्री को पूरी तरह खाली करा रही है. वहीं आसपास के लोगों को फैक्ट्री से हटकर सुरक्षित स्थान पर जाने की हिदायत दी जा रही है. . Pawan Singh- Khesari Lal की दुश्मनी खत्म, एक-दूसरे के गले लगे और किया Kiss, रवि किशन ने कराई सुलह!
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मिस्टर इंडिया फैंस के लिए खुशखबरी.. हाल ही में अनिल कपूर- श्रीदेवी की ब्लॉकबस्टर और पॉपुलर फिल्म मिस्टर इंडिया ने 32 साल पूरे किये। इस बारे में बात करते हुए बोनी कपूर ने एक इंटरव्यू में कंफर्म किया कि अब फिल्म के सीक्वल पर प्लानिंग चल रही है। और हो सकता है कि फिल्म को एक फ्रैंचाइजी का रुप दिया जाए। बता दें, मिस्टर इंडिया को बोनी कपूर ने प्रोड्यूस किया था, जबकि फिल्म के निर्देशक थे शेखर कपूर।
सलमान के 'भारत' की ब्लॉकबस्टर होगी ओपनिंग- लेकिन ये रिकॉर्ड तोड़ना मुश्किल!
बोनी कपूर ने कहा- सीक्वल को लेकर हमारे दिमाग में एक बेसिक आइडिया है। लेकिन फिलहाल फिल्म कब शुरु किया जाएगा, यह तय नहीं किया गया है। लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही मिस्टर इंडिया 2 पर काम शुरु होगा।
फिल्म को याद करते हुए उन्होंने बताया- 1980 में इस फिल्म को 4 करोड़ के बजट में बनाया गया था। उस वक्त यह बजट काफी बड़ा था। हमने वर्सोवा बीच पर इसका सेट बनाया था। इस फिल्म के कॉस्टयूम से मैं इतना खुश था कि मैंने स्टाइलिस्ट को बोनस दे दिया था। अमरीश पुरी फिल्म के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हुए.. उन्होंने मोगैंबो के रोल को शानदार निभाया।
श्रीदेवी के बारे में उन्होंने कहा- श्रीदेवी को पहले ग्लैमरस एक्ट्रेस माना जाता था। लेकिन इस फिल्म के बाद लोगों का नजरिया श्री के लिए बदला था, वो एक पावरफुल एक्ट्रेस मानी जाने लगी थीं। अनिल को फिल्म ने जबरदस्त लाइमलाइट दी। श्री के बाद (श्रीदेवी के निधन के बाद) मेरे पास इस फिल्म का सीक्वल बनाने की एक नहीं कई वजहें हैं..
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Don't Miss! मिस्टर इंडिया फैंस के लिए खुशखबरी.. हाल ही में अनिल कपूर- श्रीदेवी की ब्लॉकबस्टर और पॉपुलर फिल्म मिस्टर इंडिया ने बत्तीस साल पूरे किये। इस बारे में बात करते हुए बोनी कपूर ने एक इंटरव्यू में कंफर्म किया कि अब फिल्म के सीक्वल पर प्लानिंग चल रही है। और हो सकता है कि फिल्म को एक फ्रैंचाइजी का रुप दिया जाए। बता दें, मिस्टर इंडिया को बोनी कपूर ने प्रोड्यूस किया था, जबकि फिल्म के निर्देशक थे शेखर कपूर। सलमान के 'भारत' की ब्लॉकबस्टर होगी ओपनिंग- लेकिन ये रिकॉर्ड तोड़ना मुश्किल! बोनी कपूर ने कहा- सीक्वल को लेकर हमारे दिमाग में एक बेसिक आइडिया है। लेकिन फिलहाल फिल्म कब शुरु किया जाएगा, यह तय नहीं किया गया है। लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही मिस्टर इंडिया दो पर काम शुरु होगा। फिल्म को याद करते हुए उन्होंने बताया- एक हज़ार नौ सौ अस्सी में इस फिल्म को चार करोड़ के बजट में बनाया गया था। उस वक्त यह बजट काफी बड़ा था। हमने वर्सोवा बीच पर इसका सेट बनाया था। इस फिल्म के कॉस्टयूम से मैं इतना खुश था कि मैंने स्टाइलिस्ट को बोनस दे दिया था। अमरीश पुरी फिल्म के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हुए.. उन्होंने मोगैंबो के रोल को शानदार निभाया। श्रीदेवी के बारे में उन्होंने कहा- श्रीदेवी को पहले ग्लैमरस एक्ट्रेस माना जाता था। लेकिन इस फिल्म के बाद लोगों का नजरिया श्री के लिए बदला था, वो एक पावरफुल एक्ट्रेस मानी जाने लगी थीं। अनिल को फिल्म ने जबरदस्त लाइमलाइट दी। श्री के बाद मेरे पास इस फिल्म का सीक्वल बनाने की एक नहीं कई वजहें हैं..
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मुगली हरम में राजपूतो को जाने देता था क्योंकि राजपूतों में चारित्रिक नैतिकता थी तथा राजपूतों की बहन बेटियां हरम में थी राजपूत मुस्लिम महिला का अपहरण नहीं करेगा। यह विश्वास हिन्दुत्व की नैतिकता के कारण था । अम्बर खुद चरित्रहीन था । वह अपने दरबारियो की चरित्र हीनता जानता था ।
अकबर को राजपूत - हिन्दू एव मुसलमान किसी भी सामन्त सरदार सलाहकार मन्सबदार सुवेदार आदि पर सही विश्वास नही था बनावटी था । इसी कारण किसी भी महत्वपूर्ण सैनिक अभियान मे राजपूत एवं मुसलमान दोनों जाति के सेनापति साथ भेजा है तथा दोनों को परस्पर शंकित कर स्वयं का विश्वासपात्र ( छलपूर्ण ) प्रदशित करता रहा है। ताकि उनमें परस्पर अविश्वास रहे, अकबर के विरुद्ध कोई षडयंत्र न हो - या षडयंत्र की रूपरेखा कही बने तो गुप्त नही रह सके ताकि दमन मे विलम्ब न हो। दो का झगड़ा तीसरे
का लाभ ।
अकबर के 'चार सौ सोलह मन्सबदार थे । ये सेनापति ही थे इन में राजपूत केवल सैतालिस थे । इन सैतालिस में तैतीस मन्सबदार एक हजार जात व सवार वाले थे। एक हजार से अधिक संख्या वाले मन्सबदार कुल चौदह थे । इन सैतालिस मन्सवदारों के अधीन वेपन हजार अश्व सेना थी। शेष तीन सौ उनसत्तर मुस्लिम मन्सबदारों के आधीन चार लाख सतहत्तर हजार अश्व सेना थी । कुल योग पाँच लाख तीस हजार हुआ अर्थात राजपूत मन्सूबदारों के पास इस कुल सैन्य संख्या का लगभग दसवां भाग था । अर्थात मुस्लिम हिन्दू से समान नीति एवं राजपूतों पर अकबर को अधिक विश्वास था कहीं जानेवाली घनघोर झूठ पर यह चमरौदा जूता लड़ाक । और इन के अलावा1
खुद अकबर के आधीन चालीस लाख पैदल सेना थी तथा गज
सेना पांच हजार थी । याने कुल सैन्य संख्यां पैंतालिस लाख पैंतीस
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मुगली हरम में राजपूतो को जाने देता था क्योंकि राजपूतों में चारित्रिक नैतिकता थी तथा राजपूतों की बहन बेटियां हरम में थी राजपूत मुस्लिम महिला का अपहरण नहीं करेगा। यह विश्वास हिन्दुत्व की नैतिकता के कारण था । अम्बर खुद चरित्रहीन था । वह अपने दरबारियो की चरित्र हीनता जानता था । अकबर को राजपूत - हिन्दू एव मुसलमान किसी भी सामन्त सरदार सलाहकार मन्सबदार सुवेदार आदि पर सही विश्वास नही था बनावटी था । इसी कारण किसी भी महत्वपूर्ण सैनिक अभियान मे राजपूत एवं मुसलमान दोनों जाति के सेनापति साथ भेजा है तथा दोनों को परस्पर शंकित कर स्वयं का विश्वासपात्र प्रदशित करता रहा है। ताकि उनमें परस्पर अविश्वास रहे, अकबर के विरुद्ध कोई षडयंत्र न हो - या षडयंत्र की रूपरेखा कही बने तो गुप्त नही रह सके ताकि दमन मे विलम्ब न हो। दो का झगड़ा तीसरे का लाभ । अकबर के 'चार सौ सोलह मन्सबदार थे । ये सेनापति ही थे इन में राजपूत केवल सैतालिस थे । इन सैतालिस में तैतीस मन्सबदार एक हजार जात व सवार वाले थे। एक हजार से अधिक संख्या वाले मन्सबदार कुल चौदह थे । इन सैतालिस मन्सवदारों के अधीन वेपन हजार अश्व सेना थी। शेष तीन सौ उनसत्तर मुस्लिम मन्सबदारों के आधीन चार लाख सतहत्तर हजार अश्व सेना थी । कुल योग पाँच लाख तीस हजार हुआ अर्थात राजपूत मन्सूबदारों के पास इस कुल सैन्य संख्या का लगभग दसवां भाग था । अर्थात मुस्लिम हिन्दू से समान नीति एवं राजपूतों पर अकबर को अधिक विश्वास था कहीं जानेवाली घनघोर झूठ पर यह चमरौदा जूता लड़ाक । और इन के अलावाएक खुद अकबर के आधीन चालीस लाख पैदल सेना थी तथा गज सेना पांच हजार थी । याने कुल सैन्य संख्यां पैंतालिस लाख पैंतीस
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दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की तरफ से निकाली गई 7,236 पदों पर भर्ती।
दिल्ली में कैब-मेट्रो, होम डिलिवरी से दुकान तक, जानें 6 दिन की 'तालाबंदी' से जुड़ी हर जरूरी बात।
देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण और छात्रों के मिलने से विश्वविद्यालय ने बनाए खास नियम।
दिल्ली में 12000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती के लिए जून से आवेदन और जनवरी में होगी परीक्षा।
दिल्ली में निकाली गई वैकेंसी, आज से dsssbonline.nic.in पर करें आवेदन, पढ़ें पदों का विवरण।
दिल्ली सरकार के विभागों में 1809 सरकारी नौकरियां, स्पेशल एजुकेटर (प्राइमरी) और अन्य पदों की भर्ती।
दिल्ली शिक्षक भर्ती का इंतजार करने वालों के लिए खुशखबरी, सरकार जल्द ही निकालेगी पद।
इस बार तेजस एक्सप्रेस के जरिए दिल्ली को अयोध्या से जोड़ने की तैयारी है।
डीयू एसओएल की तरफ से तीसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं 12 दिसंबर से होनी है आयोजित।
दिल्ली में अतिथि शिक्षक बनकर पढ़ाने का अच्छा मौका, हजारों की संख्या में निकलेंगे पद।
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You searched for "Delhi" दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की तरफ से निकाली गई सात,दो सौ छत्तीस पदों पर भर्ती। दिल्ली में कैब-मेट्रो, होम डिलिवरी से दुकान तक, जानें छः दिन की 'तालाबंदी' से जुड़ी हर जरूरी बात। देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण और छात्रों के मिलने से विश्वविद्यालय ने बनाए खास नियम। दिल्ली में बारह हज़ार से अधिक शिक्षकों की भर्ती के लिए जून से आवेदन और जनवरी में होगी परीक्षा। दिल्ली में निकाली गई वैकेंसी, आज से dsssbonline.nic.in पर करें आवेदन, पढ़ें पदों का विवरण। दिल्ली सरकार के विभागों में एक हज़ार आठ सौ नौ सरकारी नौकरियां, स्पेशल एजुकेटर और अन्य पदों की भर्ती। दिल्ली शिक्षक भर्ती का इंतजार करने वालों के लिए खुशखबरी, सरकार जल्द ही निकालेगी पद। इस बार तेजस एक्सप्रेस के जरिए दिल्ली को अयोध्या से जोड़ने की तैयारी है। डीयू एसओएल की तरफ से तीसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं बारह दिसंबर से होनी है आयोजित। दिल्ली में अतिथि शिक्षक बनकर पढ़ाने का अच्छा मौका, हजारों की संख्या में निकलेंगे पद।
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गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए अजित पवार ने कहा कि पूरी तरह से शटडाउन को लेकर जनप्रतिनिधियों में मतभेद हैं और इस पर चर्चा की जा रही है। सीएम उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे और उनके मंत्री बेटे आदित्य ठाकरे भी कोरोना पाॅजिटिव हो गए हैं।
मुंबई । महाराष्ट्र में कोरोना के फैलाव और तीन दिन में एक लाख मामले मिलने के बाद लाॅकडाउन की आशंका बढ रही है। इसे लेकर कोई अहम फैसला हो सकता है।
कोरोना के बढते मामलों के बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आज राज्य के सभी जिलों के कलेक्टर्स की मीटिंग बुलाई है। इस बैठक में वह राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों की समीक्षा करेंगे। सभी जिलों से रिपोर्ट लेने और बंदिशों पर सुझाव के बाद सीएम उद्धव ठाकरे की ओर से कोई बड़ा ऐलान किया जा सकता है। जानकार सूत्रों के अनुसार पूरे राज्य में कंप्लीट लाॅकडाउन की उम्मीदें कम ही हैं, लेकिन सख्ती में इजाफा किया जा सकता है और कई जिलों में लाॅकडाउन लग सकता है। महाराष्ट्र के बीड जिले में आज से 4 अप्रैल तक लाॅकडाउन की शुरुआत हो गई है। नागपुर में भी 15 से 21 मार्च तक पूर्ण लाॅकडाउन लागू था। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा है कि यदि केसों में कमी नहीं आई और लोग नहीं माने तो फिर लाॅकडाउन का भी फैसला लिया जा सकता है। गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए अजित पवार ने कहा कि पूरी तरह से शटडाउन को लेकर जनप्रतिनिधियों में मतभेद हैं और इस पर चर्चा की जा रही है। सीएम उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे और उनके मंत्री बेटे आदित्य ठाकरे भी कोरोना पाॅजिटिव हो गए हैं।
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गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए अजित पवार ने कहा कि पूरी तरह से शटडाउन को लेकर जनप्रतिनिधियों में मतभेद हैं और इस पर चर्चा की जा रही है। सीएम उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे और उनके मंत्री बेटे आदित्य ठाकरे भी कोरोना पाॅजिटिव हो गए हैं। मुंबई । महाराष्ट्र में कोरोना के फैलाव और तीन दिन में एक लाख मामले मिलने के बाद लाॅकडाउन की आशंका बढ रही है। इसे लेकर कोई अहम फैसला हो सकता है। कोरोना के बढते मामलों के बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आज राज्य के सभी जिलों के कलेक्टर्स की मीटिंग बुलाई है। इस बैठक में वह राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों की समीक्षा करेंगे। सभी जिलों से रिपोर्ट लेने और बंदिशों पर सुझाव के बाद सीएम उद्धव ठाकरे की ओर से कोई बड़ा ऐलान किया जा सकता है। जानकार सूत्रों के अनुसार पूरे राज्य में कंप्लीट लाॅकडाउन की उम्मीदें कम ही हैं, लेकिन सख्ती में इजाफा किया जा सकता है और कई जिलों में लाॅकडाउन लग सकता है। महाराष्ट्र के बीड जिले में आज से चार अप्रैल तक लाॅकडाउन की शुरुआत हो गई है। नागपुर में भी पंद्रह से इक्कीस मार्च तक पूर्ण लाॅकडाउन लागू था। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा है कि यदि केसों में कमी नहीं आई और लोग नहीं माने तो फिर लाॅकडाउन का भी फैसला लिया जा सकता है। गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए अजित पवार ने कहा कि पूरी तरह से शटडाउन को लेकर जनप्रतिनिधियों में मतभेद हैं और इस पर चर्चा की जा रही है। सीएम उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे और उनके मंत्री बेटे आदित्य ठाकरे भी कोरोना पाॅजिटिव हो गए हैं।
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दूवे - तुम्हारे वकीलका क्या हम पहरा दे रहे थे ?
इतने में पाखानेका द्वार फिर हिला । श्रीराम चिल्ला उठा, अरे अरे ! वह पायो पुलिस !
चौबेजी फिर गाड़ी के भीतर घुस आये और जल्दीबल्दी दूसरी तरफफा दरवाजा खोलकर स्टेशन की उल्टी तरफ उतर गये, और इधर गाड़ी चल पड़ी।
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दूवे - तुम्हारे वकीलका क्या हम पहरा दे रहे थे ? इतने में पाखानेका द्वार फिर हिला । श्रीराम चिल्ला उठा, अरे अरे ! वह पायो पुलिस ! चौबेजी फिर गाड़ी के भीतर घुस आये और जल्दीबल्दी दूसरी तरफफा दरवाजा खोलकर स्टेशन की उल्टी तरफ उतर गये, और इधर गाड़ी चल पड़ी।
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कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में जीवन दीप समिति कार्यकारिणी समिति की बैठक हुई। कलेक्टर जन्मेजय महोबे की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पूर्व कार्यकारिणी की पारित प्रस्ताव के संबंध में चर्चा की गई। इसके साथ ही चिकित्सा के लिए विभिन्न आवश्यकताओं के संबंध में चर्चा की गई। सीएमएचओ डॉ. सुजॉय मुखर्जी और सिविल सर्जन डॉ. सूर्यवंशी ने जिला अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी। बैठक में जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
कवर्धा । प्रयास आवासीय विद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन मंगाए जा रहे हैं। आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ने बताया कि कक्षा 11वीं में विभिन्न जाति वर्ग समूह अंतर्गत 121 सीट रिक्त हैं। इन रिक्त सीटों पर प्रवेश एक प्राक्चयन परीक्षा लेटरल एंट्री के माध्यम से होगा। प्रश्न पत्र कक्षा 10 वीं स्तर का होगा। 27 जून से ऑनलाइन आवेदन पत्र भरे जा रहे हैं, जो 6 जुलाई तक भरा जाएगा।
कवर्धा । छत्तीसगढ़ के पंचम विधानसभा का सत्रहवां सत्र 18 जुलाई से शुरू होकर 21 जुलाई तक चलेगा। कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने सत्र के प्रश्नों के उत्तर तैयार कर समय पर उपलब्ध कराने के लिए जिले में विधानसभा प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी अपर कलेक्टर इंद्रजीत बर्मन को नियुक्त किया है। उनकी अनुपस्थिति में डिप्टी कलेक्टर संदीप ठाकुर लिंक ऑफिसर होंगे। श्री बर्मन का मोबाइल नंबर- 97533-10969 और कार्यालय का दूरभाष नंबर-07741232609 है। इसी तरह डिप्टी कलेक्टर व लिंक ऑफिसर का मोबाइल नंबर-9926603709 है।
कवर्धा । मानसून में प्राकृतिक आपदा से बचाव, राहत व्यवस्था करने और निगरानी के लिए कलेक्ट्रेट के अधीक्षक कक्ष में कंट्रोल रूम बनाया गयाहै। नियंत्रण कक्ष का दूरभाष नंबर- 07741-232038 है। यहां 24 घंटे अमला ड्यूटी पर रहेगा। अधिकारी-कर्मचारी आपात स्थिति में नोडल प्रभारी अधिकारी दिप्ती गौते मोबाइल नंबर 93037-17818 पर सूचित करें।
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कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में जीवन दीप समिति कार्यकारिणी समिति की बैठक हुई। कलेक्टर जन्मेजय महोबे की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पूर्व कार्यकारिणी की पारित प्रस्ताव के संबंध में चर्चा की गई। इसके साथ ही चिकित्सा के लिए विभिन्न आवश्यकताओं के संबंध में चर्चा की गई। सीएमएचओ डॉ. सुजॉय मुखर्जी और सिविल सर्जन डॉ. सूर्यवंशी ने जिला अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी। बैठक में जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। कवर्धा । प्रयास आवासीय विद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन मंगाए जा रहे हैं। आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ने बताया कि कक्षा ग्यारहवीं में विभिन्न जाति वर्ग समूह अंतर्गत एक सौ इक्कीस सीट रिक्त हैं। इन रिक्त सीटों पर प्रवेश एक प्राक्चयन परीक्षा लेटरल एंट्री के माध्यम से होगा। प्रश्न पत्र कक्षा दस वीं स्तर का होगा। सत्ताईस जून से ऑनलाइन आवेदन पत्र भरे जा रहे हैं, जो छः जुलाई तक भरा जाएगा। कवर्धा । छत्तीसगढ़ के पंचम विधानसभा का सत्रहवां सत्र अट्ठारह जुलाई से शुरू होकर इक्कीस जुलाई तक चलेगा। कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने सत्र के प्रश्नों के उत्तर तैयार कर समय पर उपलब्ध कराने के लिए जिले में विधानसभा प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी अपर कलेक्टर इंद्रजीत बर्मन को नियुक्त किया है। उनकी अनुपस्थिति में डिप्टी कलेक्टर संदीप ठाकुर लिंक ऑफिसर होंगे। श्री बर्मन का मोबाइल नंबर- सत्तानवे हज़ार पाँच सौ तैंतीस-दस हज़ार नौ सौ उनहत्तर और कार्यालय का दूरभाष नंबर- सात सात चार एक दो तीन दो छः शून्य नौ है। इसी तरह डिप्टी कलेक्टर व लिंक ऑफिसर का मोबाइल नंबर- नौ नौ दो छः छः शून्य तीन सात शून्य नौ है। कवर्धा । मानसून में प्राकृतिक आपदा से बचाव, राहत व्यवस्था करने और निगरानी के लिए कलेक्ट्रेट के अधीक्षक कक्ष में कंट्रोल रूम बनाया गयाहै। नियंत्रण कक्ष का दूरभाष नंबर- सात हज़ार सात सौ इकतालीस-दो लाख बत्तीस हज़ार अड़तीस है। यहां चौबीस घंटाटे अमला ड्यूटी पर रहेगा। अधिकारी-कर्मचारी आपात स्थिति में नोडल प्रभारी अधिकारी दिप्ती गौते मोबाइल नंबर तिरानवे हज़ार सैंतीस-सत्रह हज़ार आठ सौ अट्ठारह पर सूचित करें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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होते ही ऐसी दशा हो गई थी कि एक अर्से तक रोटी तो क्या, पाव-भर आलू भौ खाने को मिटना दुधार था। अनेकों ने पेड़ की पत्तियों से अपने पेट पाले हैं ! आज जरा हम सहले है, परंतु घन्दा नहीं है। घन्दे के लिए राष्ट्र अर्थ-सामर्थ्य अनु भव नहीं कर रहा है। इधर यहा यह दगा है उधर सिर पर युद्ध की विधि निकट आती दीख रही है और भविष्य पुनः अंधकारमय विदित हो रहा है ।" मैंने देखा, उसकी आँखों में पानी भर आया था !
"परंतु अब आप युद्ध को टालने का कौन-सा रास्ता सोच रहे हैं ? और, मान लीजिए कि युद्ध नहीं टला तो क्या स्थिति होगी ?" मैंने पूछा । ।
वह सम्हल कर साहम के साथ बोला- "युद्ध टालने से टल नहीं सकता और न आस्ट्रिया ही स्वतंत्रता से अपना अfre अस्तित्व कायम रख सकता है। अब तो आस्ट्रिया के निवासी यही सोच रहे हैं कि हिटलर का- जो हमारा, आस्ट्रियन - ही है, सहारा लेना ही श्रेयस्कर होगा। हम जर्मनी के साथ होकर ही रह सकते हैं।"
मैंने उसकी बात काटकर पूछा "लेकिन इसमें आस्टिया अपना स्वतन्त्र अस्तित्व कैसे कायम रख सकेगा ? और, अभी आप यह कह चुके हैं कि डा० शुभनिंग ( चांसलर-आदिया), ओो एक सबे देश-भक्त और चतुर व्यक्ति है, हर तरह आस्ट्रिया को अन्य राष्ट्रों के साथ समुन्नत बनाए रखेंगे और रमी पंक्ति में रखने के लिए सारी बुद्धि-शक्ति खर्च कर रहे हैं। यह कैसे शक्य है ?"
वह क्षण भर चुप रहा। कुछ सोचने के पश्चात् निस्तब्धता भंग करते हुए कहने लगा- "आप ठीक कहते हैं, लेकिन आस्ट्रिया को जर्मनी में मिलने के सिवा दूसरा चारा नहीं है । यह राष्ट्र ऐसे घातक वैज्ञानिक साधनों से समन्वित युद्ध में अकेला तो रह नहीं सकता। डॉ० शुसनिंग की भावनाएँ पवित्र और आदरणीय है, तथापि वे जर्मनों के जाल में पूरी तरह आ
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होते ही ऐसी दशा हो गई थी कि एक अर्से तक रोटी तो क्या, पाव-भर आलू भौ खाने को मिटना दुधार था। अनेकों ने पेड़ की पत्तियों से अपने पेट पाले हैं ! आज जरा हम सहले है, परंतु घन्दा नहीं है। घन्दे के लिए राष्ट्र अर्थ-सामर्थ्य अनु भव नहीं कर रहा है। इधर यहा यह दगा है उधर सिर पर युद्ध की विधि निकट आती दीख रही है और भविष्य पुनः अंधकारमय विदित हो रहा है ।" मैंने देखा, उसकी आँखों में पानी भर आया था ! "परंतु अब आप युद्ध को टालने का कौन-सा रास्ता सोच रहे हैं ? और, मान लीजिए कि युद्ध नहीं टला तो क्या स्थिति होगी ?" मैंने पूछा । । वह सम्हल कर साहम के साथ बोला- "युद्ध टालने से टल नहीं सकता और न आस्ट्रिया ही स्वतंत्रता से अपना अfre अस्तित्व कायम रख सकता है। अब तो आस्ट्रिया के निवासी यही सोच रहे हैं कि हिटलर का- जो हमारा, आस्ट्रियन - ही है, सहारा लेना ही श्रेयस्कर होगा। हम जर्मनी के साथ होकर ही रह सकते हैं।" मैंने उसकी बात काटकर पूछा "लेकिन इसमें आस्टिया अपना स्वतन्त्र अस्तित्व कैसे कायम रख सकेगा ? और, अभी आप यह कह चुके हैं कि डाशून्य शुभनिंग , ओो एक सबे देश-भक्त और चतुर व्यक्ति है, हर तरह आस्ट्रिया को अन्य राष्ट्रों के साथ समुन्नत बनाए रखेंगे और रमी पंक्ति में रखने के लिए सारी बुद्धि-शक्ति खर्च कर रहे हैं। यह कैसे शक्य है ?" वह क्षण भर चुप रहा। कुछ सोचने के पश्चात् निस्तब्धता भंग करते हुए कहने लगा- "आप ठीक कहते हैं, लेकिन आस्ट्रिया को जर्मनी में मिलने के सिवा दूसरा चारा नहीं है । यह राष्ट्र ऐसे घातक वैज्ञानिक साधनों से समन्वित युद्ध में अकेला तो रह नहीं सकता। डॉशून्य शुसनिंग की भावनाएँ पवित्र और आदरणीय है, तथापि वे जर्मनों के जाल में पूरी तरह आ
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बेंगलूर, (भाषा)। एयर चीफ मार्शल एनएके ब्राउने ने आज इस आरोप को ``गलत" बताते हुए खारिज कर दिया कि नक्सल विरोधी एक अभियान के दौरान चालक दल के सदस्य और कर्मियें ने एक घायल पुलिसकर्मी को हेलीकाप्टर में ही छोड़ दिया था। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को एक दूसरे पर ``कटाक्ष" करने से बचना चाहिए। ब्राउने ने यहां आयोजित एयरो इंडिया प्रदर्शनी के दौरान संवाददाता सम्मेलन में कहा, ``ऐसी धारणा है कि उन्होंने छोड़ दिया, वे भाग गए, मैं समझता हूं कि यह सब गलत है। " यह कथित रूप से संकेत दिया गया कि वायुसेना टीम ने हेलीकाप्टर और घायल पुलिसकर्मी को छोड़ दिया था क्योंकि वे माओवाद प्रभावित इलाके में बंधक बनाए जाने से बचना चाहते थे। वायुसेना प्रमुख ने गृह सचिव आर के सिंह द्वारा लिखे गए पत्र के लीक होने पर आश्चर्य जताया। इस पत्र में सिंह ने कथित रूप से वायु सेना के आचरण पर आपत्ति जतायी थी। उन्होंने कहा कि हमें यह सीख लेनी होगी कि एक दुर्घटना में गलती खोजने के बजाय हम सब मिलकर एक टीम की तरह एक दिशा में कार्य करें। ब्राउने ने यह चेतावनी भी दी कि नक्सल विरोधी अभियान लंबा मामला है और इसका आसान हल नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर हम इस तरह कटाक्ष करते रहेंगे, ऐसा ही कश्मीर घाटी में हुआ और अब भी वहां हो रहा है, जहां वे ःराष्ट्र विरोधी ताकतेंः सुरक्षाबलों ओwर सुरक्षा एजेंसियों के बीच मतभेद पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, `` मैं नहीं समझता कि ऐसी स्थिति में काम करने का यह तरीका है। " यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी टिप्पणी गृह सचिव की ओर है, वायुसेना प्रमुख ने कहा कि यह वहां काम कर रही ``सभी एजेंसियों" के लिए है। गृह मंत्रालय के तहत केंद्रीय पुलिस बलों पर परोक्ष जवाबी हमले के अंदाज़ में वायुसेना प्रमुख ने नक्सली इलाकों में कुछ हेलीपैड की सुरक्षा का मुद्दा उ"ाया और कहा कि अगर इसका ख्याल नहीं रखा गया तो उन क्षेत्रों में वायुसेना के हेलीकाप्टरों को निशाना बनाया जाना जारी रहेगा। उनसे नक्सल अभियान में वायुसेना कर्मियों के खिलाफ गृह मंत्रालय की शिकायत पर प्रतिक्रिया मांगी गयी थी।
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बेंगलूर, । एयर चीफ मार्शल एनएके ब्राउने ने आज इस आरोप को ``गलत" बताते हुए खारिज कर दिया कि नक्सल विरोधी एक अभियान के दौरान चालक दल के सदस्य और कर्मियें ने एक घायल पुलिसकर्मी को हेलीकाप्टर में ही छोड़ दिया था। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को एक दूसरे पर ``कटाक्ष" करने से बचना चाहिए। ब्राउने ने यहां आयोजित एयरो इंडिया प्रदर्शनी के दौरान संवाददाता सम्मेलन में कहा, ``ऐसी धारणा है कि उन्होंने छोड़ दिया, वे भाग गए, मैं समझता हूं कि यह सब गलत है। " यह कथित रूप से संकेत दिया गया कि वायुसेना टीम ने हेलीकाप्टर और घायल पुलिसकर्मी को छोड़ दिया था क्योंकि वे माओवाद प्रभावित इलाके में बंधक बनाए जाने से बचना चाहते थे। वायुसेना प्रमुख ने गृह सचिव आर के सिंह द्वारा लिखे गए पत्र के लीक होने पर आश्चर्य जताया। इस पत्र में सिंह ने कथित रूप से वायु सेना के आचरण पर आपत्ति जतायी थी। उन्होंने कहा कि हमें यह सीख लेनी होगी कि एक दुर्घटना में गलती खोजने के बजाय हम सब मिलकर एक टीम की तरह एक दिशा में कार्य करें। ब्राउने ने यह चेतावनी भी दी कि नक्सल विरोधी अभियान लंबा मामला है और इसका आसान हल नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर हम इस तरह कटाक्ष करते रहेंगे, ऐसा ही कश्मीर घाटी में हुआ और अब भी वहां हो रहा है, जहां वे ःराष्ट्र विरोधी ताकतेंः सुरक्षाबलों ओwर सुरक्षा एजेंसियों के बीच मतभेद पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, `` मैं नहीं समझता कि ऐसी स्थिति में काम करने का यह तरीका है। " यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी टिप्पणी गृह सचिव की ओर है, वायुसेना प्रमुख ने कहा कि यह वहां काम कर रही ``सभी एजेंसियों" के लिए है। गृह मंत्रालय के तहत केंद्रीय पुलिस बलों पर परोक्ष जवाबी हमले के अंदाज़ में वायुसेना प्रमुख ने नक्सली इलाकों में कुछ हेलीपैड की सुरक्षा का मुद्दा उ"ाया और कहा कि अगर इसका ख्याल नहीं रखा गया तो उन क्षेत्रों में वायुसेना के हेलीकाप्टरों को निशाना बनाया जाना जारी रहेगा। उनसे नक्सल अभियान में वायुसेना कर्मियों के खिलाफ गृह मंत्रालय की शिकायत पर प्रतिक्रिया मांगी गयी थी।
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UP Congress candidate third list 2022: यूपी विधानसभा चुनाव-2022 के लिए कांग्रेस ने बुधवार को अपनी तीसरी लिस्ट जारी कर दी. इसमें 89 उम्मीदवारों की घोषणा की गई है, जिसमें से 37 महिलाएं हैं.
सरोज देवी- हाथरस (SC)
नीलिमा राज- जलेसर (SC)
ममता वर्मा- हरगांव (SC)
बबिता आर्य- बलरामपुर (SC)
नीलम कोरी- मिल्कीपुर (SC)
सत्यमवदा पासवान- अलापुर (SC)
कमला रावत- सिधौली (SC)
मनोरमा शंखवार- रसूलाबाद (SC)
कांग्रेस ने नकुड़ से रणधीर सिंह, सहारनपुर से संदीप राणा, देवबंद से राहत खलील, रामपुर मनिहारन सुरक्षित सीट से ओमपाल सिंह, गंगोह से अशोक सैनी, बरहापुर से हाजी एहसान अली अंसारी, धामपुर से हुसैन अहमद अंसारी, चंदपुर से उदय त्यागी उर्फ माइकल, कांठ से मोहम्मद इसरार सैफी, स्वार सीट से राम रक्षपाल सिंह, मिलक सुरक्षित सीट से कुमार एकलव्य वाल्मीकि, हसनपुर से असीम हुसैन साबरी, सादाबाद से मथुरा प्रसाद कुशवाहा और फिरोजाबाद से संदीप तिवारी को टिकट दिया गया है.
पटियाली से मोहम्मद इमरान अली, अलीगंज से सुभाष चंद्र वर्मा, उन्नाव से विजय शर्मा, सहसवान से राजवीर सिंह यादव, बिल्सी से अंकित चौहान, दातागंज से आतिफ खान जख्मी, भोजीपुरा से सरदार खान, फरीदपुर सुरक्षित सीट से विशाल सागर, बरेली से कृष्णकांत शर्मा, बरेली कैंट से मोहम्मद इस्लाम अंसारी उर्फ बब्बू, मोहाली से आशीष मिश्रा, मिश्रिख सुरक्षित सीट से सुभाष चंद्र राजवंशी, सवायजपुर से राजवर्धन सिंह राजू, हरदोई से आशीष कुमार सिंह, गोपामऊ बालामऊ सुरक्षित सीट से सुरेंद्र कुमार और सफीपुर सुरक्षित सीट से शंकरलाल गौतम को प्रत्याशी बनाया गया है.
सदर सीट से अभिषेक सिंह राणा, दिबियापुर से मनोज कुमार पाल, अकबरपुर रनिया से अमर सिंह, सिकंदरा से नरेश कटियार, भोगनीपुर से गोविंद निषाद, बिठूर से अशोक कुमार निषाद, मुरलीपुर सुरक्षित सीट से भगवानदास कोरी, चरखारी सीट से निर्दोष दीक्षित को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया है.
बिंदकी से अभिमन्यु सिंह, फतेहपुर से मोहम्मद मोहसिन खान, कुर्सी से जमील अहमद, रुदौली से दयानंद शुक्ला, बीकापुर से अखिलेश यादव, टांडा से सैयद सिराजुद्दीन, नानपारा से डॉक्टर अब्दुल मोहम्मद सिद्दीकी, मतेरा से अली अकबर, पयागपुर से मेजर राणा शिवम सिंह, गैंसड़ी से अली अहमद खान, शोहरतगढ़ से चौधरी रविंद्र प्रताप उर्फ पप्पू, इटवा से अरशद खुर्शीद, बस्ती सदर से देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव और बांसडीह से पुनीत पाठक को टिकट दिया गया है.
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UP Congress candidate third list दो हज़ार बाईस: यूपी विधानसभा चुनाव-दो हज़ार बाईस के लिए कांग्रेस ने बुधवार को अपनी तीसरी लिस्ट जारी कर दी. इसमें नवासी उम्मीदवारों की घोषणा की गई है, जिसमें से सैंतीस महिलाएं हैं. सरोज देवी- हाथरस नीलिमा राज- जलेसर ममता वर्मा- हरगांव बबिता आर्य- बलरामपुर नीलम कोरी- मिल्कीपुर सत्यमवदा पासवान- अलापुर कमला रावत- सिधौली मनोरमा शंखवार- रसूलाबाद कांग्रेस ने नकुड़ से रणधीर सिंह, सहारनपुर से संदीप राणा, देवबंद से राहत खलील, रामपुर मनिहारन सुरक्षित सीट से ओमपाल सिंह, गंगोह से अशोक सैनी, बरहापुर से हाजी एहसान अली अंसारी, धामपुर से हुसैन अहमद अंसारी, चंदपुर से उदय त्यागी उर्फ माइकल, कांठ से मोहम्मद इसरार सैफी, स्वार सीट से राम रक्षपाल सिंह, मिलक सुरक्षित सीट से कुमार एकलव्य वाल्मीकि, हसनपुर से असीम हुसैन साबरी, सादाबाद से मथुरा प्रसाद कुशवाहा और फिरोजाबाद से संदीप तिवारी को टिकट दिया गया है. पटियाली से मोहम्मद इमरान अली, अलीगंज से सुभाष चंद्र वर्मा, उन्नाव से विजय शर्मा, सहसवान से राजवीर सिंह यादव, बिल्सी से अंकित चौहान, दातागंज से आतिफ खान जख्मी, भोजीपुरा से सरदार खान, फरीदपुर सुरक्षित सीट से विशाल सागर, बरेली से कृष्णकांत शर्मा, बरेली कैंट से मोहम्मद इस्लाम अंसारी उर्फ बब्बू, मोहाली से आशीष मिश्रा, मिश्रिख सुरक्षित सीट से सुभाष चंद्र राजवंशी, सवायजपुर से राजवर्धन सिंह राजू, हरदोई से आशीष कुमार सिंह, गोपामऊ बालामऊ सुरक्षित सीट से सुरेंद्र कुमार और सफीपुर सुरक्षित सीट से शंकरलाल गौतम को प्रत्याशी बनाया गया है. सदर सीट से अभिषेक सिंह राणा, दिबियापुर से मनोज कुमार पाल, अकबरपुर रनिया से अमर सिंह, सिकंदरा से नरेश कटियार, भोगनीपुर से गोविंद निषाद, बिठूर से अशोक कुमार निषाद, मुरलीपुर सुरक्षित सीट से भगवानदास कोरी, चरखारी सीट से निर्दोष दीक्षित को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया है. बिंदकी से अभिमन्यु सिंह, फतेहपुर से मोहम्मद मोहसिन खान, कुर्सी से जमील अहमद, रुदौली से दयानंद शुक्ला, बीकापुर से अखिलेश यादव, टांडा से सैयद सिराजुद्दीन, नानपारा से डॉक्टर अब्दुल मोहम्मद सिद्दीकी, मतेरा से अली अकबर, पयागपुर से मेजर राणा शिवम सिंह, गैंसड़ी से अली अहमद खान, शोहरतगढ़ से चौधरी रविंद्र प्रताप उर्फ पप्पू, इटवा से अरशद खुर्शीद, बस्ती सदर से देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव और बांसडीह से पुनीत पाठक को टिकट दिया गया है.
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[ खंड १ : राजस्थानी : अध्याय ४
मोटे तौर पर इन लोकगीतो को विषय की दृष्टि से निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है - ( १ ) ऋतुगीत, ( २ ) श्रमगीत, ( ३ ) संस्कार (२) गीत, ( ४ ) प्रेम ( शृंगार ) गीत, ( ५ ) धार्मिक गीत, ( ६ ) बाल गीत, ( ७ ) विविध गीत ।
बहुत से गीत अत्यंत सरसता के साथ गाए जाते हैं। माँड राग यहाँ का एक मौलिक राग है, जिसमें मूमल गीत बड़ी खूबी के साथ गाया जाता है। श्रम संबंधी गीतों की अपनी लय है। राग रागिनियों के हिसाब से जो गीत जिस समय या पहर में गाने के होते हैं, वे उसी समय तथा पहर में गाए जाते हैं। राग रागिनियों की सुविधा के हिसाब से विभिन्न याद्ययंत्रों का प्रयोग भी इनके साथ होता है। निम्नलिखित वाद्य अधिक प्रचलित है :
( १) तार वाद्य -- सारंगी, कमाइची, जंतर, खाज, रावणहत्या, इकतारा, तबूरा, वीणा आदि ।
( २ ) फूँक के बाद्य -वशी, लगूँजा, उतारा, शहनाई, टोटा, पूँगी, नड़, बरूण ( चाँकिया ), संख, सिंगी श्रादि ।
( ३ ) ताल वाद्य - ढोलफ, मादल, मृदंग, ढोल, नगाड़ा, नौबत, धुँवा, चंग, दपड़ा, चंगड़ी, खँजरी, ढीबका, श्रपंग, मटकी, डमरू श्रादि ।
इनके अतिरिक्त कई गीतों के साथ काँसे फी थाली, मजीरा, पायल, चिमटा, घुँघरू श्रादि का भी प्रयोग होता है। आजकल हार्मोनियम तथा तबले का भी कुछ प्रयोग होने लगा है।
गीत स्त्रियों का व्यत प्रिय विषय है। स्त्री जाति ने अपने हृदय को जितना इन गीतों में व्यक्त किया है उतना और किसी रूप में नहीं। समय को आवश्यकता के अनुसार इन गीतों को गाना कई जातियों का पेशा भी रहा है। ढोलो, दाढी, मिरासी, माँगणियार, फदाली ( दफाली ), फल्लवत, लंगा, पातर, कंचनी, नट, रावल, मँवाऊ श्रादि ऐसी ही जातियाँ हैं जिनकी जीविका का प्रमुख साधन गीत ही रहे हैं। इन लोकगीतों की सहजता तथा सरलता इनका अपने ग्राम में बहुत बड़ा गुण है, जिसके कारण स्वतः प्रचारित होते हुए ये पीढ़ियों से जीरित रहे हैं। ये समय के साथ थोडे बहुत परिवर्तन भी इनकी वस्तु तथा रूप में राजस्थानी क्षेत्र के विभिन्न भागों में ये गीत थोडे परिवर्तन से गाए जाते हैं।
श्राधुनिक जनतानिक युग में, जब कि लोफसंस्कृति पर पढे लिखे लोगों का ध्यान जाने लगा है, लोग इन गीतों को फिर से सराहना करने लगे हैं । राजस्थान तथा अन्य प्रात के रेडियो स्टेशनों से भी राजस्थानी गीत प्रसारित होते हैं। यह एक
हिंदी साहित्य का
श्रत्यंत शुभ लक्षगा है कि आधुनिक राजस्थानी के कई कवियों ने भी इन लोकगीतों की सहजता और सरसता से प्रेरित होकर अपनी काव्यरचना में इनसे बहुत कुछ ग्रहण करने का प्रयत्न किया है ।
यहाँ कुछ विभिन्न विषयों के राजस्थानी लोकगीतों के उदाहरण दिए
जाते हैं :
( क ) ऋतुगीत
सावण -
बाप चाल्याछा भँवर जी पीपली जी ।
हाजी ढोला हो गई घेर घूमेर बैठण की रुत चाल्या चाकरी जी । हाजी माँरी लाल ननद का बोर आप बिन घड़ी मन मालगेजी। परण चल्या छा भँवर जी गोरड़ी जी, हाँजी ढोला हो गई जोध जवाँन । माँगरण की रूत चाल्या चाकरी जी । सरस जलेबी भँवर जी में वणों जी । हाँजी ढोला वण ज्याउ फूंसुवाल । भूक लगे जद जीम त्यो जी । सकलर कई तो भँवर जी मैं वणोजी । हाँजी ढोला बण ज्याउ लोटो गेर । प्यास लगे जद पीय ल्यो जी, हींगलु रोढ़ोलीयो भँवर जी मैं वर्गों जी । हाँजी ढोला वण ज्याऊ फुलडाँरी सेज । नींद लगे जद पौड़ज्यो जी हाँजी माँरी सास सपूती का पूत । थाँ विन घड़ीयन आ लगेजी।
( २ ) झूला -
जोड़ो खुदादे श्री मोरे मेरा जलवल जाँमी याप । श्रावण सावणीयाँ की तीजाँ बाई नायसो । खुधो खुदायो बाई थारो
पड्यो होलोरा खाय नावण पालीवई सासरे ।
इसमें बहुत से गीत ठाबुराखी गुलाबबुमारी (सैरवा, जोधपुर) के संग्रह से लिए गए है।
२] पारी ( रावणा राजपूत ), सेतो (एभुनू ) 1
होंडो घला दे श्री श्ररे मारा काँनवर सा वीर । सावणीयों की लीजॉ बाई ह्रींड लो । घल्यो घलायो ये बाई थारो पड्यो हिंडोला । खाय हींड़ावाली बाई सासरे। लेहरियो रँगा देप मोए म्हारी राता देई माय, श्रीड़णवाली बाई सासरे ।
[ खंड ४. राजस्थानी : अध्याय ४
( ३ ) पपइयाभँवर वागों में इज्यो जी, बागों में नार अकेली पपइयो बोल्यो जी । सुंदर गोरी किस विद आऊँ जी, थ्रोजी मॉरी परणी नार अकेली । भँवर सहजा में आइज्यो जो सहजा मैं डरूँ अकेलो पपइयो बोल्यो जी । मिरगानेणी किस विद आउँजी, ओजी माँरी परणी नार अकेली। भँवर यापरी परणी मरज्यो जी, सूतीने खाइज्यो सॉप पपइयो बोल्योजी ।
गढ़यूँ तो होली माता उतरी,
याँरा हाथ फॅवल सिर मोड़प रायाँ होली । लूँगर डोडाजी होली का सेवरा । वीरा ऐ ये कृण होली मे साँडो घाल सो ।
( ४ ) तोज के गीतआईआई पेल सावण की ये तीज, मने भेजो माँ सासरे जी । और सयली मा खेलण रमण न ये जाय, मने दीयो मॉ पीसणो जी । ये फोडु तोडु मॉ चाकलडी कोय पाट, बगड़ पसेरुँ माँ पीसणो जी । पोई पोई मॉ, रोटीयॉ की ये जेट, पछलो पोयो मा मॉडीयो जी ओरॉने तो मॉमिरीयाँ मिराया ये घी, मने मिरीयो मा तेल की जी ओराँते तो मापलियाँ पलियाँ ये खोर, भने पलीमो राव को जी । ओराँने तो मा दो दो रोटीय साँड़, भने अॅडक्यो मा छाछ को जी । आयो आयो मेरा पीवरीया कोप काग, बोत्री एडक्यो मा ले गयो जी । लेज्या लेज्या मेरे पीवरीया कारे काग, जाए दिसा जे मेरी माय ने जी । देखो देखो मारी राजकॅबर फोमे माँ सदा फॅबर कोएमा, देखो बाई माँ जीमणों जी ।
( ५ ) होली (फाग ) -
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[ खंड एक : राजस्थानी : अध्याय चार मोटे तौर पर इन लोकगीतो को विषय की दृष्टि से निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है - ऋतुगीत, श्रमगीत, संस्कार गीत, प्रेम गीत, धार्मिक गीत, बाल गीत, विविध गीत । बहुत से गीत अत्यंत सरसता के साथ गाए जाते हैं। माँड राग यहाँ का एक मौलिक राग है, जिसमें मूमल गीत बड़ी खूबी के साथ गाया जाता है। श्रम संबंधी गीतों की अपनी लय है। राग रागिनियों के हिसाब से जो गीत जिस समय या पहर में गाने के होते हैं, वे उसी समय तथा पहर में गाए जाते हैं। राग रागिनियों की सुविधा के हिसाब से विभिन्न याद्ययंत्रों का प्रयोग भी इनके साथ होता है। निम्नलिखित वाद्य अधिक प्रचलित है : तार वाद्य -- सारंगी, कमाइची, जंतर, खाज, रावणहत्या, इकतारा, तबूरा, वीणा आदि । फूँक के बाद्य -वशी, लगूँजा, उतारा, शहनाई, टोटा, पूँगी, नड़, बरूण , संख, सिंगी श्रादि । ताल वाद्य - ढोलफ, मादल, मृदंग, ढोल, नगाड़ा, नौबत, धुँवा, चंग, दपड़ा, चंगड़ी, खँजरी, ढीबका, श्रपंग, मटकी, डमरू श्रादि । इनके अतिरिक्त कई गीतों के साथ काँसे फी थाली, मजीरा, पायल, चिमटा, घुँघरू श्रादि का भी प्रयोग होता है। आजकल हार्मोनियम तथा तबले का भी कुछ प्रयोग होने लगा है। गीत स्त्रियों का व्यत प्रिय विषय है। स्त्री जाति ने अपने हृदय को जितना इन गीतों में व्यक्त किया है उतना और किसी रूप में नहीं। समय को आवश्यकता के अनुसार इन गीतों को गाना कई जातियों का पेशा भी रहा है। ढोलो, दाढी, मिरासी, माँगणियार, फदाली , फल्लवत, लंगा, पातर, कंचनी, नट, रावल, मँवाऊ श्रादि ऐसी ही जातियाँ हैं जिनकी जीविका का प्रमुख साधन गीत ही रहे हैं। इन लोकगीतों की सहजता तथा सरलता इनका अपने ग्राम में बहुत बड़ा गुण है, जिसके कारण स्वतः प्रचारित होते हुए ये पीढ़ियों से जीरित रहे हैं। ये समय के साथ थोडे बहुत परिवर्तन भी इनकी वस्तु तथा रूप में राजस्थानी क्षेत्र के विभिन्न भागों में ये गीत थोडे परिवर्तन से गाए जाते हैं। श्राधुनिक जनतानिक युग में, जब कि लोफसंस्कृति पर पढे लिखे लोगों का ध्यान जाने लगा है, लोग इन गीतों को फिर से सराहना करने लगे हैं । राजस्थान तथा अन्य प्रात के रेडियो स्टेशनों से भी राजस्थानी गीत प्रसारित होते हैं। यह एक हिंदी साहित्य का श्रत्यंत शुभ लक्षगा है कि आधुनिक राजस्थानी के कई कवियों ने भी इन लोकगीतों की सहजता और सरसता से प्रेरित होकर अपनी काव्यरचना में इनसे बहुत कुछ ग्रहण करने का प्रयत्न किया है । यहाँ कुछ विभिन्न विषयों के राजस्थानी लोकगीतों के उदाहरण दिए जाते हैं : ऋतुगीत सावण - बाप चाल्याछा भँवर जी पीपली जी । हाजी ढोला हो गई घेर घूमेर बैठण की रुत चाल्या चाकरी जी । हाजी माँरी लाल ननद का बोर आप बिन घड़ी मन मालगेजी। परण चल्या छा भँवर जी गोरड़ी जी, हाँजी ढोला हो गई जोध जवाँन । माँगरण की रूत चाल्या चाकरी जी । सरस जलेबी भँवर जी में वणों जी । हाँजी ढोला वण ज्याउ फूंसुवाल । भूक लगे जद जीम त्यो जी । सकलर कई तो भँवर जी मैं वणोजी । हाँजी ढोला बण ज्याउ लोटो गेर । प्यास लगे जद पीय ल्यो जी, हींगलु रोढ़ोलीयो भँवर जी मैं वर्गों जी । हाँजी ढोला वण ज्याऊ फुलडाँरी सेज । नींद लगे जद पौड़ज्यो जी हाँजी माँरी सास सपूती का पूत । थाँ विन घड़ीयन आ लगेजी। झूला - जोड़ो खुदादे श्री मोरे मेरा जलवल जाँमी याप । श्रावण सावणीयाँ की तीजाँ बाई नायसो । खुधो खुदायो बाई थारो पड्यो होलोरा खाय नावण पालीवई सासरे । इसमें बहुत से गीत ठाबुराखी गुलाबबुमारी के संग्रह से लिए गए है। दो] पारी , सेतो एक होंडो घला दे श्री श्ररे मारा काँनवर सा वीर । सावणीयों की लीजॉ बाई ह्रींड लो । घल्यो घलायो ये बाई थारो पड्यो हिंडोला । खाय हींड़ावाली बाई सासरे। लेहरियो रँगा देप मोए म्हारी राता देई माय, श्रीड़णवाली बाई सासरे । [ खंड चार. राजस्थानी : अध्याय चार पपइयाभँवर वागों में इज्यो जी, बागों में नार अकेली पपइयो बोल्यो जी । सुंदर गोरी किस विद आऊँ जी, थ्रोजी मॉरी परणी नार अकेली । भँवर सहजा में आइज्यो जो सहजा मैं डरूँ अकेलो पपइयो बोल्यो जी । मिरगानेणी किस विद आउँजी, ओजी माँरी परणी नार अकेली। भँवर यापरी परणी मरज्यो जी, सूतीने खाइज्यो सॉप पपइयो बोल्योजी । गढ़यूँ तो होली माता उतरी, याँरा हाथ फॅवल सिर मोड़प रायाँ होली । लूँगर डोडाजी होली का सेवरा । वीरा ऐ ये कृण होली मे साँडो घाल सो । तोज के गीतआईआई पेल सावण की ये तीज, मने भेजो माँ सासरे जी । और सयली मा खेलण रमण न ये जाय, मने दीयो मॉ पीसणो जी । ये फोडु तोडु मॉ चाकलडी कोय पाट, बगड़ पसेरुँ माँ पीसणो जी । पोई पोई मॉ, रोटीयॉ की ये जेट, पछलो पोयो मा मॉडीयो जी ओरॉने तो मॉमिरीयाँ मिराया ये घी, मने मिरीयो मा तेल की जी ओराँते तो मापलियाँ पलियाँ ये खोर, भने पलीमो राव को जी । ओराँने तो मा दो दो रोटीय साँड़, भने अॅडक्यो मा छाछ को जी । आयो आयो मेरा पीवरीया कोप काग, बोत्री एडक्यो मा ले गयो जी । लेज्या लेज्या मेरे पीवरीया कारे काग, जाए दिसा जे मेरी माय ने जी । देखो देखो मारी राजकॅबर फोमे माँ सदा फॅबर कोएमा, देखो बाई माँ जीमणों जी । होली -
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इले बाबाल (1) ########84HHHI हिकायासे सहाना रजि०
फ्- यह कमाल एहतियात थी और अपने आपको महल्ल तोहमत से बचाना वरना जो भी तौलेगा, उसके हाथ को तो लगेगा ही। इसलिए इसके जवाज़ में कोई तरद्दुद न था, लेकिन फिर हज़रत उमर रजि० ने अपनी बीवी के लिए उसको गवारा न फुर्माया ।
हजरत उमर बिन अब्दुल अजीज रजि० जिनको उमर सानी भी कहा जाता है, इनके ज़माने में एक मर्तबा मुश्क तोला जा रहा था, तो उन्होंने अपनी नाक बन्द फ़र्मा ली, और इर्शाद फर्माया कि मुश्क का नफा तो खुश्बू ही सूघना है। 2
फ्- यह है एहतियात इन सहाबा रज़ि० और ताबईन रह० की और हमारे बड़ों की पेशवाओं को ।
10. हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रज़ि० का हज्जाज के हाकिम को हाकिम न बनाना
हज़रत उमर बिन अब्दुल अजीज रजि० ने एक शख़्स को किसी जगह का हाकिम बनाया, किसी शरत ने अर्ज किया कि यह साहब हज्जाज बिन यूसुफ के जमाने में उसकी तरफ से हाकिम रह चुके हैं। उभार बिन अब्दुल अजीज रजि० ने उन हाकिम को माजूल कर दिया। उन्होंने ऊर्ज किया कि मैंने तो हज्जाज बिन यूसुफ़ के यहां थोड़े ही ज़माना काम किया। उमर बिन अब्दुल अजीज रजि० ने फर्माया कि बुरा होने के लिए इतना ही काफी है कि तू उसके साथ एक दिन या उससे भी कम रहा।
फु- मतलब यह है कि पास रहने का असर ज़रूर पड़ता है। जो शख़्स मुत्तकियों के पास रहता है, उसके ऊपर गैर-मामूली और गैर महसूस तरीकें से तक्वा का असर पड़ता है और जो फ़ासिकों के पास रहता है, उसके ऊपर फिस्कु का असर होता है, इसी वजह से बुरी सोहबत से रोका जाता है। आदमी तो दर किनार जानवरों तक के असरात पास रहने से आते हैं।
हुज़ूर सल्ल० का इर्शाद है कि फंख और बड़ाई ऊंट और घोड़े वालों में होती है और मस्कनत बकरी वालों में । हुजूर सल्ल० का इर्शाद है कि सालेह आदमी के पास बैठने वालों की मिसाल उस शख़्स की सी है, जो मुश्क वाले के पास बैठा है कि अगर मुश्क न भी मिले तब भी उसकी खुश्बू से दिमाग को फरहत होगी और
1 बदनामी, 2. अलम, 3. कंज, 4. एहया, 5. कमज़ोरी, 6. बुखारी नरमी ।
हिकायाते सहाना रजि० मै
बुरे साथी की मिसाल आग की भट्टी वाले की सी है कि अगर चिंगारी न भी पड़े तो घुंआ तो कहीं गया ही नहीं।
पाँचवां बाब
नमाज़ का शग्फ और शौक और उसमें खुशू व खुज़ूअ
नमाज सारी इबादतों में सबसे ज्यादा अहम चीज़ है क़यामत में ईमान के बाद सबसे पहले नमाज़ ही का सवाल होता है। हुज़ूर सल्ल० का इर्शाद है कि कुफ्र और इस्लाम के दर्मियान में नमाज ही आड़ है, इसके अलावा और बहुत से इर्शादात • इस बारे में, वारिद हैं जो मेरे एक दूसरे रिसाले, में मजकूर हैं।
1. अल्लाह तआला का इर्शाद नवाफिल वाले के हक में
हक तआला शानुहू इर्शाद फर्माते हैं, जो शख़्स मेरे किसी वली से दुश्मनी करता है, मेरी तरफ से उसको लड़ाई का एलान है और कोई शख़्स मेरा कुर्ब उस चीज़ की बनिस्बत ज्यादा नहीं हासिल करता, जो मैंने उस पर फ़र्ज की है, यानी सब से ज्यादा कुर्बे और नजदीकी मुझसे फ़रायाज़ के अदा करने से हासिल होती है और नवाफिल की वजह से बन्दा मुझसे करीब होता रहता है, यहां तक कि मैं उसको अपना महबूब बना लेता हूं, तो फिर मैं उसका कान बन जाता हूं, जिससे सुने और उस की आंख बन जाता हूं, जिससे वह देखे और उसका हाथ बन जाता हूं, जिससे वह किसी चीज़ को पकड़े और उसका पांव बन जाता हूं, जिससे वह चले। अगर वह मुझसे कुछ मांगता है तो मैं उसको अता करता हूं और किसी चीज से पनाह चाहता है, तो पनाह देता हूं। 2
फ्- आंख-कान बन जाने का मतलब यह है कि उसका देखना, सुनना, चलना, फिरना, सब मेरी खुशी के ताबेअ बन जाता है और कोई बात भी मेरी खिलाफे
1. यानी फुजाईल नमाज़ में, 2. जमउल कवाइद,
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इले बाबाल ########चौरासीHHHI हिकायासे सहाना रजिशून्य फ्- यह कमाल एहतियात थी और अपने आपको महल्ल तोहमत से बचाना वरना जो भी तौलेगा, उसके हाथ को तो लगेगा ही। इसलिए इसके जवाज़ में कोई तरद्दुद न था, लेकिन फिर हज़रत उमर रजिशून्य ने अपनी बीवी के लिए उसको गवारा न फुर्माया । हजरत उमर बिन अब्दुल अजीज रजिशून्य जिनको उमर सानी भी कहा जाता है, इनके ज़माने में एक मर्तबा मुश्क तोला जा रहा था, तो उन्होंने अपनी नाक बन्द फ़र्मा ली, और इर्शाद फर्माया कि मुश्क का नफा तो खुश्बू ही सूघना है। दो फ्- यह है एहतियात इन सहाबा रज़िशून्य और ताबईन रहशून्य की और हमारे बड़ों की पेशवाओं को । दस. हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रज़िशून्य का हज्जाज के हाकिम को हाकिम न बनाना हज़रत उमर बिन अब्दुल अजीज रजिशून्य ने एक शख़्स को किसी जगह का हाकिम बनाया, किसी शरत ने अर्ज किया कि यह साहब हज्जाज बिन यूसुफ के जमाने में उसकी तरफ से हाकिम रह चुके हैं। उभार बिन अब्दुल अजीज रजिशून्य ने उन हाकिम को माजूल कर दिया। उन्होंने ऊर्ज किया कि मैंने तो हज्जाज बिन यूसुफ़ के यहां थोड़े ही ज़माना काम किया। उमर बिन अब्दुल अजीज रजिशून्य ने फर्माया कि बुरा होने के लिए इतना ही काफी है कि तू उसके साथ एक दिन या उससे भी कम रहा। फु- मतलब यह है कि पास रहने का असर ज़रूर पड़ता है। जो शख़्स मुत्तकियों के पास रहता है, उसके ऊपर गैर-मामूली और गैर महसूस तरीकें से तक्वा का असर पड़ता है और जो फ़ासिकों के पास रहता है, उसके ऊपर फिस्कु का असर होता है, इसी वजह से बुरी सोहबत से रोका जाता है। आदमी तो दर किनार जानवरों तक के असरात पास रहने से आते हैं। हुज़ूर सल्लशून्य का इर्शाद है कि फंख और बड़ाई ऊंट और घोड़े वालों में होती है और मस्कनत बकरी वालों में । हुजूर सल्लशून्य का इर्शाद है कि सालेह आदमी के पास बैठने वालों की मिसाल उस शख़्स की सी है, जो मुश्क वाले के पास बैठा है कि अगर मुश्क न भी मिले तब भी उसकी खुश्बू से दिमाग को फरहत होगी और एक बदनामी, दो. अलम, तीन. कंज, चार. एहया, पाँच. कमज़ोरी, छः. बुखारी नरमी । हिकायाते सहाना रजिशून्य मै बुरे साथी की मिसाल आग की भट्टी वाले की सी है कि अगर चिंगारी न भी पड़े तो घुंआ तो कहीं गया ही नहीं। पाँचवां बाब नमाज़ का शग्फ और शौक और उसमें खुशू व खुज़ूअ नमाज सारी इबादतों में सबसे ज्यादा अहम चीज़ है क़यामत में ईमान के बाद सबसे पहले नमाज़ ही का सवाल होता है। हुज़ूर सल्लशून्य का इर्शाद है कि कुफ्र और इस्लाम के दर्मियान में नमाज ही आड़ है, इसके अलावा और बहुत से इर्शादात • इस बारे में, वारिद हैं जो मेरे एक दूसरे रिसाले, में मजकूर हैं। एक. अल्लाह तआला का इर्शाद नवाफिल वाले के हक में हक तआला शानुहू इर्शाद फर्माते हैं, जो शख़्स मेरे किसी वली से दुश्मनी करता है, मेरी तरफ से उसको लड़ाई का एलान है और कोई शख़्स मेरा कुर्ब उस चीज़ की बनिस्बत ज्यादा नहीं हासिल करता, जो मैंने उस पर फ़र्ज की है, यानी सब से ज्यादा कुर्बे और नजदीकी मुझसे फ़रायाज़ के अदा करने से हासिल होती है और नवाफिल की वजह से बन्दा मुझसे करीब होता रहता है, यहां तक कि मैं उसको अपना महबूब बना लेता हूं, तो फिर मैं उसका कान बन जाता हूं, जिससे सुने और उस की आंख बन जाता हूं, जिससे वह देखे और उसका हाथ बन जाता हूं, जिससे वह किसी चीज़ को पकड़े और उसका पांव बन जाता हूं, जिससे वह चले। अगर वह मुझसे कुछ मांगता है तो मैं उसको अता करता हूं और किसी चीज से पनाह चाहता है, तो पनाह देता हूं। दो फ्- आंख-कान बन जाने का मतलब यह है कि उसका देखना, सुनना, चलना, फिरना, सब मेरी खुशी के ताबेअ बन जाता है और कोई बात भी मेरी खिलाफे एक. यानी फुजाईल नमाज़ में, दो. जमउल कवाइद,
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Income Tax Department Recruitment: आयकर विभाग ने टैक्स असिस्टेंट, स्टेनोग्राफर ग्रेड 2 और मल्टी टास्किंग स्टाफ पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किया है। इच्छुक अभ्यर्थी 15 नवंबर, 2021 तक इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
आयकर विभाग विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर अधिसूचना जारी कर मेधावी खिलाड़ियों से आवेदन आमंत्रित कर रहा है। भर्ती दिल्ली क्षेत्र में टैक्स असिस्टेंट, स्टेनोग्राफर ग्रेड 2 और मल्टी टास्किंग स्टाफ पदों के लिए है।
आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 नवंबर, 2021 है। लेकिन, उत्तर पूर्वी राज्यों, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, जम्मू और कश्मीर और केरल में रहने वाले उम्मीदवार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 30 नवंबर, 2021 निर्धारित की है।
इन पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवार की आयु 18 वर्ष से 27 वर्ष के बीच होनी चाहिए, हालांकि ओबीसी श्रेणी के उम्मीदवारों को सरकार के नियमों के अनुसार 5 वर्ष की छूट दी जाएगी। वहीं, एससी/एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को 10 साल की छूट मिलेगी।
आवेदक को निम्नलिखित प्रमाणपत्रों की सत्यापित प्रतियां संलग्न करनी होंगीः
आवेदन उपायुक्त, आयकर विभाग, तीसरी मंजिल, कमरा नंबर 378ए, केंद्रीय राजस्व भवन, आई. पी. एस्टेट, नई दिल्ली - 110002।
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Income Tax Department Recruitment: आयकर विभाग ने टैक्स असिस्टेंट, स्टेनोग्राफर ग्रेड दो और मल्टी टास्किंग स्टाफ पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किया है। इच्छुक अभ्यर्थी पंद्रह नवंबर, दो हज़ार इक्कीस तक इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। आयकर विभाग विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर अधिसूचना जारी कर मेधावी खिलाड़ियों से आवेदन आमंत्रित कर रहा है। भर्ती दिल्ली क्षेत्र में टैक्स असिस्टेंट, स्टेनोग्राफर ग्रेड दो और मल्टी टास्किंग स्टाफ पदों के लिए है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, आवेदन करने की अंतिम तिथि पंद्रह नवंबर, दो हज़ार इक्कीस है। लेकिन, उत्तर पूर्वी राज्यों, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, जम्मू और कश्मीर और केरल में रहने वाले उम्मीदवार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि तीस नवंबर, दो हज़ार इक्कीस निर्धारित की है। इन पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवार की आयु अट्ठारह वर्ष से सत्ताईस वर्ष के बीच होनी चाहिए, हालांकि ओबीसी श्रेणी के उम्मीदवारों को सरकार के नियमों के अनुसार पाँच वर्ष की छूट दी जाएगी। वहीं, एससी/एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को दस साल की छूट मिलेगी। आवेदक को निम्नलिखित प्रमाणपत्रों की सत्यापित प्रतियां संलग्न करनी होंगीः आवेदन उपायुक्त, आयकर विभाग, तीसरी मंजिल, कमरा नंबर तीन सौ अठहत्तरए, केंद्रीय राजस्व भवन, आई. पी. एस्टेट, नई दिल्ली - एक लाख दस हज़ार दो। रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
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बताया जा रहा है कि गांजा को ओड़िशा की तरफ से रांची के रास्ते बिहार होते हुए नेपाल ले जाया जा रहा था. इसी बीच पुलिस ने इसे वाहन चेकिंग के दौरान सिमडेगा से गिरफ्तार कर लिया.
गांजा तस्करी के खिलाफ के झारखंड पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है. पुलिस ने सिमडेगा जिला अंतर्गत वाहन चेकिंग के दौरान एक कार से 76 किलोग्राम गांजा बरामद किया है. इसके साथ ही कार के साथ एक इंटरस्टेट तस्कर को भी गिरफ्तार किया है. बरामद गांजा की कीमत 38 लाख रुपए बतायी जा रही है.
बताया जा रहा है कि गांजा को ओड़िशा की तरफ से रांची के रास्ते बिहार होते हुए नेपाल ले जाया जा रहा था. इसी बीच पुलिस ने इसे वाहन चेकिंग के दौरान सिमडेगा से गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक बांसजोर ओपी प्रभारी के नेतृत्व में NH 143 पर वाहनों की जांच की जा रही थी. इस दौरान पुलिस ने एक कार को रोकने का इशारा किया. कार के रुकते ही कारसे व्यक्ति निकल कर भागने लगा. जिसे बांसजोर ओपी पुलिस टीम ने खेदड़कर दबोच लिया. पूछताछ करने पर उस व्यक्ति ने अपना नाम आनंद साहू बताया. जिसकी उम्र लगभग 32 वर्ष है. वह ओड़िशा के बोध जिले के खोलियापाली, का रहने वाला बताया जा रहा है.
पूछताछ करने पर गिरफ्तार व्यक्ति ने बताया कि कार में गांजा है जिसे ओड़िशा के बोध से राउरकेला, वेदव्यास होते हुए रांची ले जाया जा रहा था. फिर यहा से बिहार होते हुए गांजा को नेपाल ले जाना था. तलाशी के दौरान कार के बीच वाली सीट के नीचे से एक-एक किलोग्राम का 36 पैकेट बरामद किये गये, साथ ही , कार की डिक्की से लाल रंग के बोरे से 11 किलोग्राम के तीन बोले और सात किलोग्राम का एक पैकेट बरामद किया गया है, जिसका कुल वजन 76 किलो है. अंतरराज्यीय बाजारों में जब्त किये गये गांजा की कीमत करीब 38 लाख रुपये बताये गये हैं.
इस संबंध में एसपी डॉ शम्स तबरेज ने बताया कि गिरफ्तार गांजा तस्कर के बारे में पूरी जांच पड़ताल की जा रही है पुलिस उस व्यक्ति का आपराधिक रिकार्ड पुलिस खंगाल रही है. वहीं, इस उपलब्धि पर बांसजोर ओपी पुलिस टीम को पुरस्कृत करने की भी बात कही. इधर, पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी को जेल भेज दिया है.
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बताया जा रहा है कि गांजा को ओड़िशा की तरफ से रांची के रास्ते बिहार होते हुए नेपाल ले जाया जा रहा था. इसी बीच पुलिस ने इसे वाहन चेकिंग के दौरान सिमडेगा से गिरफ्तार कर लिया. गांजा तस्करी के खिलाफ के झारखंड पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है. पुलिस ने सिमडेगा जिला अंतर्गत वाहन चेकिंग के दौरान एक कार से छिहत्तर किलोग्रामग्राम गांजा बरामद किया है. इसके साथ ही कार के साथ एक इंटरस्टेट तस्कर को भी गिरफ्तार किया है. बरामद गांजा की कीमत अड़तीस लाख रुपए बतायी जा रही है. बताया जा रहा है कि गांजा को ओड़िशा की तरफ से रांची के रास्ते बिहार होते हुए नेपाल ले जाया जा रहा था. इसी बीच पुलिस ने इसे वाहन चेकिंग के दौरान सिमडेगा से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक बांसजोर ओपी प्रभारी के नेतृत्व में NH एक सौ तैंतालीस पर वाहनों की जांच की जा रही थी. इस दौरान पुलिस ने एक कार को रोकने का इशारा किया. कार के रुकते ही कारसे व्यक्ति निकल कर भागने लगा. जिसे बांसजोर ओपी पुलिस टीम ने खेदड़कर दबोच लिया. पूछताछ करने पर उस व्यक्ति ने अपना नाम आनंद साहू बताया. जिसकी उम्र लगभग बत्तीस वर्ष है. वह ओड़िशा के बोध जिले के खोलियापाली, का रहने वाला बताया जा रहा है. पूछताछ करने पर गिरफ्तार व्यक्ति ने बताया कि कार में गांजा है जिसे ओड़िशा के बोध से राउरकेला, वेदव्यास होते हुए रांची ले जाया जा रहा था. फिर यहा से बिहार होते हुए गांजा को नेपाल ले जाना था. तलाशी के दौरान कार के बीच वाली सीट के नीचे से एक-एक किलोग्राम का छत्तीस पैकेट बरामद किये गये, साथ ही , कार की डिक्की से लाल रंग के बोरे से ग्यारह किलोग्रामग्राम के तीन बोले और सात किलोग्राम का एक पैकेट बरामद किया गया है, जिसका कुल वजन छिहत्तर किलो है. अंतरराज्यीय बाजारों में जब्त किये गये गांजा की कीमत करीब अड़तीस लाख रुपये बताये गये हैं. इस संबंध में एसपी डॉ शम्स तबरेज ने बताया कि गिरफ्तार गांजा तस्कर के बारे में पूरी जांच पड़ताल की जा रही है पुलिस उस व्यक्ति का आपराधिक रिकार्ड पुलिस खंगाल रही है. वहीं, इस उपलब्धि पर बांसजोर ओपी पुलिस टीम को पुरस्कृत करने की भी बात कही. इधर, पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी को जेल भेज दिया है.
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होलाष्टक के कारण बंद हुए शुभ कार्य होली के दिन से यानि चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ हो जाएंगे. यदि आप कोई नया या शुभ कार्य करना चाहते हैं तो उसे 8 मार्च से कर सकते हैं।
होलाष्टक की 8 तिथियों में 8 प्रमुख ग्रह उग्र रहेंगे. ऐसे में व्यक्ति का मन अशांत हो सकता है, इस वजह से होलाष्टक के समय में बड़े फैसलों को करने से बचने की सलाह दी जाती है. होलाष्टक में क्रमशः चंद्रमा, सूर्य, शनि, शुक्र, गुरु, बुध, मंगल और राहु ग्रह अष्टमी से पूर्णिमा के बीच उग्र रहते हैं।
होलाष्टक में भगवान की भक्ति और पूजा पाठ में समय व्यतीत करें. होलाष्टक में आमलकी एकादशी, रंगभरी एकादशी, शनि प्रदोष जैसे व्रत आने वाले हैं. फाल्गुन पूर्णिमा पर स्नान दान करें और माता लक्ष्मी की पूजा करके धन-समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। होलाष्टक के इन 9 दिनों में विवाह, मुंडन, सगाई, गृह प्रवेश या कोई नया कार्य न करें. इन दिनों में नए वाहन की खरीदारी भी करना अशुभ माना जाता है।
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होलाष्टक के कारण बंद हुए शुभ कार्य होली के दिन से यानि चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ हो जाएंगे. यदि आप कोई नया या शुभ कार्य करना चाहते हैं तो उसे आठ मार्च से कर सकते हैं। होलाष्टक की आठ तिथियों में आठ प्रमुख ग्रह उग्र रहेंगे. ऐसे में व्यक्ति का मन अशांत हो सकता है, इस वजह से होलाष्टक के समय में बड़े फैसलों को करने से बचने की सलाह दी जाती है. होलाष्टक में क्रमशः चंद्रमा, सूर्य, शनि, शुक्र, गुरु, बुध, मंगल और राहु ग्रह अष्टमी से पूर्णिमा के बीच उग्र रहते हैं। होलाष्टक में भगवान की भक्ति और पूजा पाठ में समय व्यतीत करें. होलाष्टक में आमलकी एकादशी, रंगभरी एकादशी, शनि प्रदोष जैसे व्रत आने वाले हैं. फाल्गुन पूर्णिमा पर स्नान दान करें और माता लक्ष्मी की पूजा करके धन-समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। होलाष्टक के इन नौ दिनों में विवाह, मुंडन, सगाई, गृह प्रवेश या कोई नया कार्य न करें. इन दिनों में नए वाहन की खरीदारी भी करना अशुभ माना जाता है।
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बलियापुर : बलियापुर के रघुनाथपुर में ग्रामीणों के विरोध के कारण चंदनकयारी से गोविंदपुर ट्रांसमिशन लाइन का काम रोक दिया गया है. इस जगह खाली जमीन और खेत से 1 लाख 32 हजार वोल्ट के हाइ टेंशन तार ले जाया जा रहा है, जिसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं. काफी समझाने के बाद के बावजूद भी ग्रामीण समझने को तैयार नहीं हैं. ग्रामीणों के विरोध के कारण ट्रांसमिशन लाइन के अधिकारियों ने फिलहाल काम रोक दिया है. चंदनकियारी ग्रिड से गोविंदपुर सेंट्रल ग्रिड का लाइन जोड़ने का काम चल रहा था. यह काम पूरा होने पर धनबाद को 100 मेगावाट की बिजली आपूर्ति की जाएगी. ग्रिड में तेनुघाट से बिजली सप्लाई की जाएगी, जिससे डीवीसी पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी. शहर में अभी दुमका से गोविंदपुर (कांड्रा) ग्रिड में सेंट्रल की बिजली आपूर्ति की जा रही है, जिससे गोविंदपुर, धैया, हीरापुर, आमाघाटा और टुंडी सहित अन्य क्षेत्रों में बिजली संकट की समस्या खत्म हो गई है. इस लाइन के जुड़ने से दूसरा सर्किट चालू हो जाएगा, जिससे किसी एक जगह लाइन में खराबी आने पर दूसरी लाइन से बिजली आपूर्ति की जाएगी. लेकिन ग्रामीणों द्वारा विरोध के बाद फिलहाल काम रोक दिया गया है.
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बलियापुर : बलियापुर के रघुनाथपुर में ग्रामीणों के विरोध के कारण चंदनकयारी से गोविंदपुर ट्रांसमिशन लाइन का काम रोक दिया गया है. इस जगह खाली जमीन और खेत से एक लाख बत्तीस हजार वोल्ट के हाइ टेंशन तार ले जाया जा रहा है, जिसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं. काफी समझाने के बाद के बावजूद भी ग्रामीण समझने को तैयार नहीं हैं. ग्रामीणों के विरोध के कारण ट्रांसमिशन लाइन के अधिकारियों ने फिलहाल काम रोक दिया है. चंदनकियारी ग्रिड से गोविंदपुर सेंट्रल ग्रिड का लाइन जोड़ने का काम चल रहा था. यह काम पूरा होने पर धनबाद को एक सौ मेगावाट की बिजली आपूर्ति की जाएगी. ग्रिड में तेनुघाट से बिजली सप्लाई की जाएगी, जिससे डीवीसी पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी. शहर में अभी दुमका से गोविंदपुर ग्रिड में सेंट्रल की बिजली आपूर्ति की जा रही है, जिससे गोविंदपुर, धैया, हीरापुर, आमाघाटा और टुंडी सहित अन्य क्षेत्रों में बिजली संकट की समस्या खत्म हो गई है. इस लाइन के जुड़ने से दूसरा सर्किट चालू हो जाएगा, जिससे किसी एक जगह लाइन में खराबी आने पर दूसरी लाइन से बिजली आपूर्ति की जाएगी. लेकिन ग्रामीणों द्वारा विरोध के बाद फिलहाल काम रोक दिया गया है.
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बांग्लादेश के टेस्ट कप्तान हैं शाकिब बीपीएल में फॉर्च्यून बरीशाल की ओर से खेलते हैं। 16वें ओवर में वह 22 गेंद में 39 रन बनाकर खेल रहे थे। चौथी बॉल उनके सिर के काफी ऊपर से निकली। नियमों के मुताबिक यह वाइड बॉल होनी थी, लेकिन अंपायर ने इसे फेयर डिलिवरी करार दिया, ये देखते ही शाकिब स्क्वायर लेग अंपायर पर बुरी तरह चिल्ला उठे। गुस्से में बैट लेकर तेजी से अंपायर की ओर गए।
शाकिब का बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड से भी पंगा होते रहता है। उन्होंने बीपीएल की मार्केटिंग में विफल रहने के लिए अपने देश के क्रिकेट बोर्ड की तीखी आलोचना की थी। शाकिब ने संवाददाताओं से कहा था कि, 'अगर उन्हें बीपीएल का सीईओ बना दिया गया, तो सब कुछ ठीक करने में एक या दो महीने लगेंगे। आपने नायक फिल्म देखी है? अगर आप कुछ करना चाहते हैं, तो आप इसे एक दिन में कर सकते हैं। '
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बांग्लादेश के टेस्ट कप्तान हैं शाकिब बीपीएल में फॉर्च्यून बरीशाल की ओर से खेलते हैं। सोलहवें ओवर में वह बाईस गेंद में उनतालीस रन बनाकर खेल रहे थे। चौथी बॉल उनके सिर के काफी ऊपर से निकली। नियमों के मुताबिक यह वाइड बॉल होनी थी, लेकिन अंपायर ने इसे फेयर डिलिवरी करार दिया, ये देखते ही शाकिब स्क्वायर लेग अंपायर पर बुरी तरह चिल्ला उठे। गुस्से में बैट लेकर तेजी से अंपायर की ओर गए। शाकिब का बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड से भी पंगा होते रहता है। उन्होंने बीपीएल की मार्केटिंग में विफल रहने के लिए अपने देश के क्रिकेट बोर्ड की तीखी आलोचना की थी। शाकिब ने संवाददाताओं से कहा था कि, 'अगर उन्हें बीपीएल का सीईओ बना दिया गया, तो सब कुछ ठीक करने में एक या दो महीने लगेंगे। आपने नायक फिल्म देखी है? अगर आप कुछ करना चाहते हैं, तो आप इसे एक दिन में कर सकते हैं। '
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इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन- आईबीपीएस ने आईबीपीएस कर्ल्क प्रीलिम्स परीक्षा 2022 का स्कोर कार्ड बुधवार, 27 सितंबर 2022 को जारी कर दिए गए थें। आईबीपीएस कर्ल्क प्रीलिम्स परीक्षा 2022 का स्कोरकार्ड ऑनलाइन मोड में आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया गया है। इस परीक्षा मे शामिल हुए उम्मीदवार अपना स्कोरकार्ड आधिकारिक वेबसाइट ibps. in पर जा कर देख सकते हैं।
आईबीपीएस कर्ल्क प्रीलिम्स परीक्षा 2022 का स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों को अपना रजिस्ट्रशन नंबर, परीक्षा रोल नंबर और जन्मतिथि की आवश्यकता होगी। इनके माध्यम से ही आप अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। लेख में नीच स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के लिए कुछ आसान चरण बताएं गए हैं।
ईबीपीएस कर्ल्क प्रीलिम्स 2022 का स्कोर कार्ड डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट ibps. in पर जाना होगा।
वेबसाइट के होमपेज पर आपको एक लिंक दिखेगा जिसपर "सीपीआर क्लेरिकल" लिखा है इस लिंक पर क्लिक करना है।
अब आपके सामने एक नया पेज खुलेगा। इस नए पेज पर आपको "कॉमन रिक्रूटमेंट प्रोसेस- क्लेरिकल केडर XII" का लिंक है। इस लिंक पर क्लिक करना है।
लिंक पर क्लिक करने के बाद आपको अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड जालना है।
सबमिट के बटन पर क्लिक करने के बाद आपक आईबीपीएस कर्ल्क प्रीलिम्स 2022 का स्कोरकार्ड आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा।
जारी इस स्कोरकार्ड को अब आप डाउनलोड कर सकते हैं।
आईबीपीएस कर्ल्क की भर्ती के लिए दो परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है। पहले प्रीलिम्स परीक्षा फिर मेन की परीक्षा। प्रीलिम्स परीक्षा में पास होने वाले छात्र मेन की परीक्षा के लिए योग्य माने जाते हैं। हाल ही में आईबीपीएस ने प्रीलिम्स परीक्षा 2022 का स्कोर कार्ड जारी किया है। इस परीक्षा में पास हुए छात्र 8 अक्टूबर 2022 को होने वाली मेन की परीक्षा में शामिल होंगे। आईबीपीएस मेन परीक्षा 2022 के एडमिट कार्ड जल्द ही जारी किए जा सकते है। एडमिट कार्ड का अन्य जानकारी के लिए उम्मीदवारों को सलाह है कि वह आधिकारिक वेसाइट पर अपनी नजर बनाए रखें।
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इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन- आईबीपीएस ने आईबीपीएस कर्ल्क प्रीलिम्स परीक्षा दो हज़ार बाईस का स्कोर कार्ड बुधवार, सत्ताईस सितंबर दो हज़ार बाईस को जारी कर दिए गए थें। आईबीपीएस कर्ल्क प्रीलिम्स परीक्षा दो हज़ार बाईस का स्कोरकार्ड ऑनलाइन मोड में आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया गया है। इस परीक्षा मे शामिल हुए उम्मीदवार अपना स्कोरकार्ड आधिकारिक वेबसाइट ibps. in पर जा कर देख सकते हैं। आईबीपीएस कर्ल्क प्रीलिम्स परीक्षा दो हज़ार बाईस का स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों को अपना रजिस्ट्रशन नंबर, परीक्षा रोल नंबर और जन्मतिथि की आवश्यकता होगी। इनके माध्यम से ही आप अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। लेख में नीच स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के लिए कुछ आसान चरण बताएं गए हैं। ईबीपीएस कर्ल्क प्रीलिम्स दो हज़ार बाईस का स्कोर कार्ड डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट ibps. in पर जाना होगा। वेबसाइट के होमपेज पर आपको एक लिंक दिखेगा जिसपर "सीपीआर क्लेरिकल" लिखा है इस लिंक पर क्लिक करना है। अब आपके सामने एक नया पेज खुलेगा। इस नए पेज पर आपको "कॉमन रिक्रूटमेंट प्रोसेस- क्लेरिकल केडर XII" का लिंक है। इस लिंक पर क्लिक करना है। लिंक पर क्लिक करने के बाद आपको अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड जालना है। सबमिट के बटन पर क्लिक करने के बाद आपक आईबीपीएस कर्ल्क प्रीलिम्स दो हज़ार बाईस का स्कोरकार्ड आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा। जारी इस स्कोरकार्ड को अब आप डाउनलोड कर सकते हैं। आईबीपीएस कर्ल्क की भर्ती के लिए दो परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है। पहले प्रीलिम्स परीक्षा फिर मेन की परीक्षा। प्रीलिम्स परीक्षा में पास होने वाले छात्र मेन की परीक्षा के लिए योग्य माने जाते हैं। हाल ही में आईबीपीएस ने प्रीलिम्स परीक्षा दो हज़ार बाईस का स्कोर कार्ड जारी किया है। इस परीक्षा में पास हुए छात्र आठ अक्टूबर दो हज़ार बाईस को होने वाली मेन की परीक्षा में शामिल होंगे। आईबीपीएस मेन परीक्षा दो हज़ार बाईस के एडमिट कार्ड जल्द ही जारी किए जा सकते है। एडमिट कार्ड का अन्य जानकारी के लिए उम्मीदवारों को सलाह है कि वह आधिकारिक वेसाइट पर अपनी नजर बनाए रखें।
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कई उपयोगकर्ताओं अक्सर एक समस्या का सामना कर रहे ट्रे आइकन से गायब हो जाता है जब कीबोर्ड लेआउट स्विच। अनुभवहीन उपयोगकर्ताओं के मामले में, वे कुंजीपटल भाषा बदलने की एक समस्या है। आपके कंप्यूटर तो भाषा पट्टी गायब हो गया है, घबराओ मत। यदि आपके पास पर्याप्त बस इसे बहाल करने के लिए कुछ कार्रवाई करने के लिए किया जाएगा। आप पर मँडरा के बाद, उसके हाथ की सही बटन दबाएँ टास्कबार। जब शॉर्टकट मेनू, आप "टूलबार" का चयन करना होगा। आप Vista या "सात" windose है, तो यह "पैनल" कहा जाएगा। अब जाँच लाइन "भाषा बार" में बॉक्स सेट कर दिया जाता है या नहीं।
उसके बाद आप ट्रे में यह देखना चाहिए। यदि चेक बॉक्स उपलब्ध है, लेकिन Vidovs एक्स पी प्रेस "प्रारंभ" में भाषा पट्टी प्रदर्शित नहीं करता है, "नियंत्रण कक्ष", जहां का चयन करें "क्षेत्रीय और भाषा विकल्प" पर जाएं, और उसके बाद एक "विवरण"। जब विंडो खोलता है, "उन्नत" टैब पर जाएं। वहाँ, अतिरिक्त अनुभाग "सिस्टम सेटअप" में, से चिह्न निकालने "बंद करें उन्नत सेवाएं। " अब आपके सिस्टम ट्रे, जहां निश्चित रूप से एक में ग्रहण आइकन हो जाएगा पर ध्यान देना।
आपके कंप्यूटर तो 7 windose सेट किया गया है, जो मामले में भाषा पट्टी थोड़ा अलग वापस आ जाएगी। "क्षेत्रीय और भाषा विकल्प। " "नियंत्रण कक्ष" और अंत में - "प्रारंभ", उसके पीछे इससे पहले कि आप एक खिड़की है जिसमें आप "कीबोर्ड और भाषाएं" का चयन करना होगा और उसके बाद खोलना चाहिए "कीबोर्ड बदलें"। इसके बाद, "भाषा बार" टैब पर जाएँ। अब, आप पॉप अनुभाग में, जिसके बाद यह ध्यान दिया जाना चाहिए "टास्कबार में पिन किए गए" सेट "पाठ लेबल दिखाएं। " आपके सिस्टम ट्रे आइकन में सब कुछ आप के लिए आवश्यक है।
अब विचार करना कैसे भाषा पट्टी बहाल करने के लिए रजिस्ट्री को सही करने से। सबसे पहले, windose 7. के लिए विकल्प पर विचार हमेशा की तरह, हम "प्रारंभ", जहां लाइन में "प्रारंभ खोज" प्रकार "regedit" के साथ शुरू। अब नामस्रोत "ekzeshny" फाइल अपने चप्पू सही बटन का उपयोग करें चुनें। जब आप संदर्भ मेनू देखते हैं, आप चुनते हैं "व्यवस्थापक के रूप में चलाने के"। अब आप रजिस्ट्री संपादक में की जरूरत है, खंड «HKEY वर्तमान उपयोगकर्ता \ सॉफ्टवेयर \ Microsoft \ Windows \ CURRENT_VERSION \ भागो» पाते हैं। के बाद "संपादित करें", "नया" के बाद का चयन करें "स्ट्रिंग मान। " \> Windows \ System32 \ ctfmon. exe: अब आप नव निर्मित पैरामीटर REG_SZ नाम ctfmon. exe आवंटित करने के लिए, साथ ही सी की पहचान करने की जरूरत है। आपके कंप्यूटर पर ऑपरेटिंग सिस्टम एक और ड्राइव में स्थापित किया गया था, तो 'सी' इसी को बदलने के लिए। अब आप बंद करने की आवश्यकता रजिस्ट्री संपादक, और उसके बाद कंप्यूटर को पुनरारंभ। यह सुनिश्चित करने के लिए आप परिवर्तन प्रभाव में आ जाता है।
स्विचिंग कीबोर्ड लेआउट CTF-लोडर जो «System32» «विंडोज» फ़ोल्डर में स्थित निर्देशिका में है के लिए जिम्मेदार। भाषा पट्टी सिस्टम ट्रे से लापता है, तो आप कीबोर्ड लेआउट कीबोर्ड शॉर्टकट Alt + स्विच + Shift या Kontral शिफ्ट कर सकते हैं।
यह ध्यान देने योग्य आप, बहुत सावधानी से रजिस्ट्री के साथ काम करने क्योंकि अगर आप कुछ गलत करते हैं, वे ऑपरेटिंग सिस्टम है, जो अनिवार्य रूप से पुनर्स्थापित करने के लिए की जरूरत की ओर जाता है, और अपने सभी डेटा की हानि को बाधित कर सकते है लायक है।
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कई उपयोगकर्ताओं अक्सर एक समस्या का सामना कर रहे ट्रे आइकन से गायब हो जाता है जब कीबोर्ड लेआउट स्विच। अनुभवहीन उपयोगकर्ताओं के मामले में, वे कुंजीपटल भाषा बदलने की एक समस्या है। आपके कंप्यूटर तो भाषा पट्टी गायब हो गया है, घबराओ मत। यदि आपके पास पर्याप्त बस इसे बहाल करने के लिए कुछ कार्रवाई करने के लिए किया जाएगा। आप पर मँडरा के बाद, उसके हाथ की सही बटन दबाएँ टास्कबार। जब शॉर्टकट मेनू, आप "टूलबार" का चयन करना होगा। आप Vista या "सात" windose है, तो यह "पैनल" कहा जाएगा। अब जाँच लाइन "भाषा बार" में बॉक्स सेट कर दिया जाता है या नहीं। उसके बाद आप ट्रे में यह देखना चाहिए। यदि चेक बॉक्स उपलब्ध है, लेकिन Vidovs एक्स पी प्रेस "प्रारंभ" में भाषा पट्टी प्रदर्शित नहीं करता है, "नियंत्रण कक्ष", जहां का चयन करें "क्षेत्रीय और भाषा विकल्प" पर जाएं, और उसके बाद एक "विवरण"। जब विंडो खोलता है, "उन्नत" टैब पर जाएं। वहाँ, अतिरिक्त अनुभाग "सिस्टम सेटअप" में, से चिह्न निकालने "बंद करें उन्नत सेवाएं। " अब आपके सिस्टम ट्रे, जहां निश्चित रूप से एक में ग्रहण आइकन हो जाएगा पर ध्यान देना। आपके कंप्यूटर तो सात windose सेट किया गया है, जो मामले में भाषा पट्टी थोड़ा अलग वापस आ जाएगी। "क्षेत्रीय और भाषा विकल्प। " "नियंत्रण कक्ष" और अंत में - "प्रारंभ", उसके पीछे इससे पहले कि आप एक खिड़की है जिसमें आप "कीबोर्ड और भाषाएं" का चयन करना होगा और उसके बाद खोलना चाहिए "कीबोर्ड बदलें"। इसके बाद, "भाषा बार" टैब पर जाएँ। अब, आप पॉप अनुभाग में, जिसके बाद यह ध्यान दिया जाना चाहिए "टास्कबार में पिन किए गए" सेट "पाठ लेबल दिखाएं। " आपके सिस्टम ट्रे आइकन में सब कुछ आप के लिए आवश्यक है। अब विचार करना कैसे भाषा पट्टी बहाल करने के लिए रजिस्ट्री को सही करने से। सबसे पहले, windose सात. के लिए विकल्प पर विचार हमेशा की तरह, हम "प्रारंभ", जहां लाइन में "प्रारंभ खोज" प्रकार "regedit" के साथ शुरू। अब नामस्रोत "ekzeshny" फाइल अपने चप्पू सही बटन का उपयोग करें चुनें। जब आप संदर्भ मेनू देखते हैं, आप चुनते हैं "व्यवस्थापक के रूप में चलाने के"। अब आप रजिस्ट्री संपादक में की जरूरत है, खंड «HKEY वर्तमान उपयोगकर्ता \ सॉफ्टवेयर \ Microsoft \ Windows \ CURRENT_VERSION \ भागो» पाते हैं। के बाद "संपादित करें", "नया" के बाद का चयन करें "स्ट्रिंग मान। " \> Windows \ Systemबत्तीस \ ctfmon. exe: अब आप नव निर्मित पैरामीटर REG_SZ नाम ctfmon. exe आवंटित करने के लिए, साथ ही सी की पहचान करने की जरूरत है। आपके कंप्यूटर पर ऑपरेटिंग सिस्टम एक और ड्राइव में स्थापित किया गया था, तो 'सी' इसी को बदलने के लिए। अब आप बंद करने की आवश्यकता रजिस्ट्री संपादक, और उसके बाद कंप्यूटर को पुनरारंभ। यह सुनिश्चित करने के लिए आप परिवर्तन प्रभाव में आ जाता है। स्विचिंग कीबोर्ड लेआउट CTF-लोडर जो «Systemबत्तीस» «विंडोज» फ़ोल्डर में स्थित निर्देशिका में है के लिए जिम्मेदार। भाषा पट्टी सिस्टम ट्रे से लापता है, तो आप कीबोर्ड लेआउट कीबोर्ड शॉर्टकट Alt + स्विच + Shift या Kontral शिफ्ट कर सकते हैं। यह ध्यान देने योग्य आप, बहुत सावधानी से रजिस्ट्री के साथ काम करने क्योंकि अगर आप कुछ गलत करते हैं, वे ऑपरेटिंग सिस्टम है, जो अनिवार्य रूप से पुनर्स्थापित करने के लिए की जरूरत की ओर जाता है, और अपने सभी डेटा की हानि को बाधित कर सकते है लायक है।
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पांवटा साहिब में पुलिस ने शराब की खेप के साथ एक तस्कर को धर दबोचा है। आरोपी से भारी मात्रा में शराब की खेप बरामद हुई है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक बीती देर रात को पुलिस थाना पांवटा साहिब की टीम ने अंतरराज्यीय सीमा बहराल पर नाकाबंदी की हुई थी। नाकाबंदी के दौरान आने जाने वाली गाडिय़ों की तलाशी की जा रही थी। इस दौरान रात करीब अढ़ाई बजे एक पिकअप वाहन यमुनानगर की ओर से आई।
पुलिस द्वारा पिकअप की तलाशी के दौरान ईंटों के नीचे से देशी शराब हरियाणा मार्का की 600 बोतल और 60 बोतल बीयर की बरामद हुई। उक्त पिकअप को 32 वर्षीय चालक निवासी कांडो भटनौल तहसील शिलाई चला रहा था। वाहन चालक के विरुद्ध पुलिस थाना पांवटा साहिब में एक्साइज एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज कर मामले में आगामी अन्वेषण किया जा रहा है। डीएसपी पांवटा साहिब वीर बहादुर ने मामले की पुष्टि की है।
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पांवटा साहिब में पुलिस ने शराब की खेप के साथ एक तस्कर को धर दबोचा है। आरोपी से भारी मात्रा में शराब की खेप बरामद हुई है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक बीती देर रात को पुलिस थाना पांवटा साहिब की टीम ने अंतरराज्यीय सीमा बहराल पर नाकाबंदी की हुई थी। नाकाबंदी के दौरान आने जाने वाली गाडिय़ों की तलाशी की जा रही थी। इस दौरान रात करीब अढ़ाई बजे एक पिकअप वाहन यमुनानगर की ओर से आई। पुलिस द्वारा पिकअप की तलाशी के दौरान ईंटों के नीचे से देशी शराब हरियाणा मार्का की छः सौ बोतल और साठ बोतल बीयर की बरामद हुई। उक्त पिकअप को बत्तीस वर्षीय चालक निवासी कांडो भटनौल तहसील शिलाई चला रहा था। वाहन चालक के विरुद्ध पुलिस थाना पांवटा साहिब में एक्साइज एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज कर मामले में आगामी अन्वेषण किया जा रहा है। डीएसपी पांवटा साहिब वीर बहादुर ने मामले की पुष्टि की है।
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बैतूल (ब्यूरो)। बैतूल-परतवाड़ा रोड पर बीती रात्रि में ताप्ती घाट में एक टवेरा वाहन के पलटने से उसमें 7 युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। इन सभी को रात्रि में नागपुर और पाढर रेफर कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा जिले के दमुआ निवासी 7 लोग रविवार रात्रि में परतवाड़ा की ओर जा रहे थे। ताप्ती घाट में क्रॉसिंग के दौरान टवेरा वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। इससे उसमें सवार सभी 7 युवक बुरी तरह जख्मी हो गए। घायलों में संजय पिता रामकिशोर मालवी (30), नजुद्दीन पिता अजीत सिद्दीकी (32), जयदीप पिता परितोष मंडल (30), रामप्रसाद पिता दर्शनसिंह पंवार (30), आशीष नागले (28), परशुराम फुरसुले (24) और मुकेश (28) घायल हो गए। इन सभी को तत्काल ही जिला अस्पताल लाया गया। सभी की स्थिति गंभीर होने के कारण प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद 4 को नागपुर और 3 को पाढर रेफर कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि इन दिनों सड़क हादसों की जिले में बाढ़ सी आ गई है।
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बैतूल । बैतूल-परतवाड़ा रोड पर बीती रात्रि में ताप्ती घाट में एक टवेरा वाहन के पलटने से उसमें सात युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। इन सभी को रात्रि में नागपुर और पाढर रेफर कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा जिले के दमुआ निवासी सात लोग रविवार रात्रि में परतवाड़ा की ओर जा रहे थे। ताप्ती घाट में क्रॉसिंग के दौरान टवेरा वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। इससे उसमें सवार सभी सात युवक बुरी तरह जख्मी हो गए। घायलों में संजय पिता रामकिशोर मालवी , नजुद्दीन पिता अजीत सिद्दीकी , जयदीप पिता परितोष मंडल , रामप्रसाद पिता दर्शनसिंह पंवार , आशीष नागले , परशुराम फुरसुले और मुकेश घायल हो गए। इन सभी को तत्काल ही जिला अस्पताल लाया गया। सभी की स्थिति गंभीर होने के कारण प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद चार को नागपुर और तीन को पाढर रेफर कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि इन दिनों सड़क हादसों की जिले में बाढ़ सी आ गई है।
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टेक्टोनिक संरचनाओं का उपयोग करके जांच की जाती हैभौगोलिक मानचित्रण, भूभौतिकीय तरीकों (विशेष रूप से भूकंपी पूर्वेक्षण), साथ ही साथ ड्रिलिंग। इन साइटों का अध्ययन स्वीकार किए गए वर्गीकरण के अनुसार किया जाता है। बड़े के गठन, 100 किमी से अधिक - भूविज्ञान मध्यम और पार अनुभाग में लगभग 10 किमी, टेक्टोनिक्स के छोटे आकार आकार की पड़ताल। पहले को विभिन्न प्रकार के विलोपन (असंतत, इंजेक्शन, आदि) कहा जाता है। दूसरे समूह मुड़ा क्षेत्रों aulacogens, syncline, प्लेटें, ढाल, perikratornyh घटाव के भीतर anticline में synclinoria और anticlinoria संदर्भित करता है। इस श्रेणी में भी पानी के नीचे निष्क्रिय और सक्रिय महाद्वीपीय मार्जिन, मंच, geosynclinal बेल्ट, महासागरों, orogenes, मध्य समुद्र लकीरें, दरार, और इतने पर। ये सबसे बड़े पैमाने पर विवर्तनिक संरचनाओं कवर कठिन खोल भी शामिल है और स्थलमंडल और गहरी कहा जाता है।
सुपरग्लोबॉलल प्राचीन टेक्टोनिकसंरचनाएं करोड़ों वर्ग मीटर तक पहुंचती हैं। क्षेत्र में किमी और इसकी लंबाई में किलोमीटर हजारों। वे ग्रह के इतिहास के पूरे भूवैज्ञानिक चरण में विकसित होते हैं। ग्लोबल टेक्टोनिक संरचनाएं उन 10 लाख वर्ग मीटर तक फैली हैं। किमी। उनकी लंबाई कई हजार किलोमीटर तक पहुंचती है। उनके अस्तित्व की अवधि पिछले वर्गों के साथ मेल खाती है। धरती की पपड़ी के उप-भौगोलिक टेक्टोनिक संरचनाएं भी विशिष्ट हैं। वे कई लाख वर्ग मीटर के क्षेत्र में हैं। किलोमीटर और हजारों किलोमीटर के लिए खिंचाव उनके विकास की अवधि 1 अरब वर्ष से अधिक है।
विस्थापन की एकता के आधार पर, तुलनात्मकलिथोस्पेहेरिक प्लेटों का अखंड अलगाव आज तक, 7 प्रमुख और 11-13 छोटी साइटें हैं पूर्व में यूरेशियन, उत्तर- और दक्षिण-अमेरिकी, अफ्रीकी, इंडो-ऑस्ट्रेलियाई, प्रशांत, अंटार्कटिक टेक्टोनिक संरचना शामिल हैं। छोटी संरचनाओं में फिलीपीन, अरब, कैरेबियन प्लेट्स, नारियल, नाजका आदि शामिल हैं।
ये विवर्तनिक संरचनाएं लिथोस्फेरीक को साझा करती हैंप्लेट। उनमें से, सबसे पहले, दरारें बाहर निकली जाती हैं वे महाद्वीपीय और मध्य महासागर में विभाजित हैं उत्तरार्द्ध एक वैश्विक प्रणाली के रूप में, जिसकी लंबाई 64 हजार किमी से अधिक है ऐसी साइटों के उदाहरण पूर्व अफ़्रीकी (ग्रह पर सबसे बड़ा), बाइकल हैं एक अन्य प्रकार की दोषपूर्ण संरचनाएं हैं ट्रांसफॉर्म करने वाले क्षेत्रों जो कि लंबवत रूप से कटौती करते हैं उनकी रेखाओं पर उनके समीप लिथोस्पेहेरिक प्लेटों के वर्गों का एक क्षैतिज बदलाव होता है।
वे धीमे गति से चल रहे कठोर हैंछाल के ब्लॉक इन साइटों ने विकास का काफी लंबा चरण पार किया है। प्लेटफार्मों की एक तीन-स्तरीय संरचना होती है उनकी संरचना में एक क्रिस्टलीय तहखाने है, जो बेसाल्ट और ग्रेनाइट-गनीस परतों द्वारा बनाई जाती है। प्लेटफार्मों में एक तलछटी कवर भी होता है। क्रिस्टलीय तहखाने मैटैर्फिक चट्टानों के स्तर से बनता है, जो घूमते हैं। यह सब मुश्किल से विस्थापन मोटाई घुसपैठ से टूट गया है (इनमें से अधिकतर एक औसत और एसिड संरचना है)। नींव की उम्र के आधार पर, प्लेटफॉर्म युवा और प्राचीन टेक्टोनिक संरचनाओं में विभाजित हैं। उत्तरार्द्ध महाद्वीपों के प्रमुख के रूप में कार्य करता है, उनकी केंद्रीय हिस्से पर कब्जा कर रहा है। छोटी संरचना उनके परिधि में स्थित हैं तलछटी कवर में मुख्य रूप से लैगून, शेल्फ़ और दुर्लभ मामलों में, महाद्वीपीय तलछटों की गैर-विघटित परतें शामिल हैं।
वे सबसे बड़ा सकारात्मक प्रतिनिधित्व करते हैंप्लेट क्षेत्रों के गठन नींव की सतह उत्तल है। काठी कवर बहुत शक्तिशाली नहीं है क्षेत्र की उत्प्रेरक उत्थान की वजह से एन्टेक्लेज़ का निर्माण होता है। इस संबंध में, पड़ोसी नकारात्मक क्षेत्रों में मौजूद कई क्षितिज उन में नहीं मिल सकते हैं।
वे नकारात्मक सबसे बड़ी हैंप्लेट संरचनाओं के सुपर-क्षेत्रीय ढांचे उनके तहखाने की सतह अवतल है। इन्हें सपाट तल से अलग किया जाता है, साथ ही ढलानों पर तेजी की घटनाओं के बहुत कोमल कोण होते हैं। क्षेत्र के विवर्तनिक विसर्जन के दौरान सिनेक्लिज़ का गठन किया जाता है। इस संबंध में, उनके तलछटी कवर को उच्च शक्ति की विशेषता है।
वे सत्ता में तेजी से वृद्धि की विशेषता हैपपड़ी। पर्वत-मुड़ा हुआ क्षेत्र तब बनते हैं जब लिथोस्फेहेरिक क्षेत्र एकजुट होते हैं। उनमें से ज्यादातर, खासकर युवा, उच्च भूकंपता की विशेषता है। संरचनाओं की उम्र पहाड़ी गुना क्षेत्रों के वर्गीकरण का बुनियादी सिद्धांत है। यह सबसे कम उम्र के crumpled स्तर पर स्थापित है पर्वत श्रृंखलाएं विभाजित हैं, इसलिए, मेंः
इस वर्गीकरण को सशर्त माना जाता है, क्योंकि अधिकांश वैज्ञानिक तह की निरंतरता को पहचानते हैं।
इन संरचनाएं पुनरुद्धार द्वारा बनाई गई हैंपहले से उत्पन्न होने वाली सीमाओं के भीतर क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर विवर्तनिक आंदोलनों और अक्सर पहले ही नष्ट किए गए सिस्टम। इस संबंध में, पेलोजोइक और पहले चरण के लिए गुना-अवरोध संरचना अधिक विशिष्ट है। सामान्य रूप से, मासफिफ़ों की राहत, रॉक संरचनाओं के विन्यास के अनुरूप है। हालांकि, यह हमेशा गुना-अवरोध वाले क्षेत्रों में प्रकट नहीं होता है उदाहरण के लिए, युवा पहाड़ियों में anticlinor संरचनाओं लकीरें के अनुरूप हैं, और synclinoria अंतरमार्ग troughs के अनुरूप है। जोड़ वर्गों के अंदर, साथ ही उनकी परिधि पर, क्रमशः, बढ़त और प्रमुख घाटियों और घाटियों को प्रतिष्ठित किया जाता है। इन संरचनाओं की सतह पर मोटे तौर पर क्लॉस्टिक उत्पाद होते हैं, जो पहाड़ संरचनाओं के विनाश से उत्पन्न होते हैं - गुड़। लिथोस्फेर्शिक साइट्स के सबडक्शन के परिणामस्वरूप फुटिले ट्रेट्स का निर्माण होता है।
इस क्षेत्र में शिक्षा स्टैक्ड हैप्रागैतिहासिक गनीस और प्रोटेरोजोइक शेल्स वे प्रीकैब्रियन साइबेरियन प्लेटफार्म से संबंधित हैं। यह आवश्यक है, हालांकि, कुछ विशेषताओं के बारे में कहने के लिए कि टेक्टॉनिक संरचना के पास है अलदैन हाइलैंड्स ने दक्षिणी उत्तरी बाइकाल स्थलों और मंच के बीच मेसो-सेनोोजोइक इतिहास के दौरान विकसित किया था। कई साइटों पर क्रिस्टलीय तहखाने की चट्टान सतह पर हैं वे ठीक ग्रेनाइट, प्राचीन क्वार्टजाइट्स, पत्थर और गनीस द्वारा प्रस्तुत किए जाते हैं। उत्तरी ढलान पर एक क्षेत्र है, इसकी नींव लगभग 1.5 किमी की गहराई में है। भूगर्भीय विकास के विभिन्न चरणों में ग्रेनाइट घुसपैठ के कारण इसकी चट्टानें टूट गई हैं।
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टेक्टोनिक संरचनाओं का उपयोग करके जांच की जाती हैभौगोलिक मानचित्रण, भूभौतिकीय तरीकों , साथ ही साथ ड्रिलिंग। इन साइटों का अध्ययन स्वीकार किए गए वर्गीकरण के अनुसार किया जाता है। बड़े के गठन, एक सौ किमी से अधिक - भूविज्ञान मध्यम और पार अनुभाग में लगभग दस किमी, टेक्टोनिक्स के छोटे आकार आकार की पड़ताल। पहले को विभिन्न प्रकार के विलोपन कहा जाता है। दूसरे समूह मुड़ा क्षेत्रों aulacogens, syncline, प्लेटें, ढाल, perikratornyh घटाव के भीतर anticline में synclinoria और anticlinoria संदर्भित करता है। इस श्रेणी में भी पानी के नीचे निष्क्रिय और सक्रिय महाद्वीपीय मार्जिन, मंच, geosynclinal बेल्ट, महासागरों, orogenes, मध्य समुद्र लकीरें, दरार, और इतने पर। ये सबसे बड़े पैमाने पर विवर्तनिक संरचनाओं कवर कठिन खोल भी शामिल है और स्थलमंडल और गहरी कहा जाता है। सुपरग्लोबॉलल प्राचीन टेक्टोनिकसंरचनाएं करोड़ों वर्ग मीटर तक पहुंचती हैं। क्षेत्र में किमी और इसकी लंबाई में किलोमीटर हजारों। वे ग्रह के इतिहास के पूरे भूवैज्ञानिक चरण में विकसित होते हैं। ग्लोबल टेक्टोनिक संरचनाएं उन दस लाख वर्ग मीटर तक फैली हैं। किमी। उनकी लंबाई कई हजार किलोमीटर तक पहुंचती है। उनके अस्तित्व की अवधि पिछले वर्गों के साथ मेल खाती है। धरती की पपड़ी के उप-भौगोलिक टेक्टोनिक संरचनाएं भी विशिष्ट हैं। वे कई लाख वर्ग मीटर के क्षेत्र में हैं। किलोमीटर और हजारों किलोमीटर के लिए खिंचाव उनके विकास की अवधि एक अरब वर्ष से अधिक है। विस्थापन की एकता के आधार पर, तुलनात्मकलिथोस्पेहेरिक प्लेटों का अखंड अलगाव आज तक, सात प्रमुख और ग्यारह-तेरह छोटी साइटें हैं पूर्व में यूरेशियन, उत्तर- और दक्षिण-अमेरिकी, अफ्रीकी, इंडो-ऑस्ट्रेलियाई, प्रशांत, अंटार्कटिक टेक्टोनिक संरचना शामिल हैं। छोटी संरचनाओं में फिलीपीन, अरब, कैरेबियन प्लेट्स, नारियल, नाजका आदि शामिल हैं। ये विवर्तनिक संरचनाएं लिथोस्फेरीक को साझा करती हैंप्लेट। उनमें से, सबसे पहले, दरारें बाहर निकली जाती हैं वे महाद्वीपीय और मध्य महासागर में विभाजित हैं उत्तरार्द्ध एक वैश्विक प्रणाली के रूप में, जिसकी लंबाई चौंसठ हजार किमी से अधिक है ऐसी साइटों के उदाहरण पूर्व अफ़्रीकी , बाइकल हैं एक अन्य प्रकार की दोषपूर्ण संरचनाएं हैं ट्रांसफॉर्म करने वाले क्षेत्रों जो कि लंबवत रूप से कटौती करते हैं उनकी रेखाओं पर उनके समीप लिथोस्पेहेरिक प्लेटों के वर्गों का एक क्षैतिज बदलाव होता है। वे धीमे गति से चल रहे कठोर हैंछाल के ब्लॉक इन साइटों ने विकास का काफी लंबा चरण पार किया है। प्लेटफार्मों की एक तीन-स्तरीय संरचना होती है उनकी संरचना में एक क्रिस्टलीय तहखाने है, जो बेसाल्ट और ग्रेनाइट-गनीस परतों द्वारा बनाई जाती है। प्लेटफार्मों में एक तलछटी कवर भी होता है। क्रिस्टलीय तहखाने मैटैर्फिक चट्टानों के स्तर से बनता है, जो घूमते हैं। यह सब मुश्किल से विस्थापन मोटाई घुसपैठ से टूट गया है । नींव की उम्र के आधार पर, प्लेटफॉर्म युवा और प्राचीन टेक्टोनिक संरचनाओं में विभाजित हैं। उत्तरार्द्ध महाद्वीपों के प्रमुख के रूप में कार्य करता है, उनकी केंद्रीय हिस्से पर कब्जा कर रहा है। छोटी संरचना उनके परिधि में स्थित हैं तलछटी कवर में मुख्य रूप से लैगून, शेल्फ़ और दुर्लभ मामलों में, महाद्वीपीय तलछटों की गैर-विघटित परतें शामिल हैं। वे सबसे बड़ा सकारात्मक प्रतिनिधित्व करते हैंप्लेट क्षेत्रों के गठन नींव की सतह उत्तल है। काठी कवर बहुत शक्तिशाली नहीं है क्षेत्र की उत्प्रेरक उत्थान की वजह से एन्टेक्लेज़ का निर्माण होता है। इस संबंध में, पड़ोसी नकारात्मक क्षेत्रों में मौजूद कई क्षितिज उन में नहीं मिल सकते हैं। वे नकारात्मक सबसे बड़ी हैंप्लेट संरचनाओं के सुपर-क्षेत्रीय ढांचे उनके तहखाने की सतह अवतल है। इन्हें सपाट तल से अलग किया जाता है, साथ ही ढलानों पर तेजी की घटनाओं के बहुत कोमल कोण होते हैं। क्षेत्र के विवर्तनिक विसर्जन के दौरान सिनेक्लिज़ का गठन किया जाता है। इस संबंध में, उनके तलछटी कवर को उच्च शक्ति की विशेषता है। वे सत्ता में तेजी से वृद्धि की विशेषता हैपपड़ी। पर्वत-मुड़ा हुआ क्षेत्र तब बनते हैं जब लिथोस्फेहेरिक क्षेत्र एकजुट होते हैं। उनमें से ज्यादातर, खासकर युवा, उच्च भूकंपता की विशेषता है। संरचनाओं की उम्र पहाड़ी गुना क्षेत्रों के वर्गीकरण का बुनियादी सिद्धांत है। यह सबसे कम उम्र के crumpled स्तर पर स्थापित है पर्वत श्रृंखलाएं विभाजित हैं, इसलिए, मेंः इस वर्गीकरण को सशर्त माना जाता है, क्योंकि अधिकांश वैज्ञानिक तह की निरंतरता को पहचानते हैं। इन संरचनाएं पुनरुद्धार द्वारा बनाई गई हैंपहले से उत्पन्न होने वाली सीमाओं के भीतर क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर विवर्तनिक आंदोलनों और अक्सर पहले ही नष्ट किए गए सिस्टम। इस संबंध में, पेलोजोइक और पहले चरण के लिए गुना-अवरोध संरचना अधिक विशिष्ट है। सामान्य रूप से, मासफिफ़ों की राहत, रॉक संरचनाओं के विन्यास के अनुरूप है। हालांकि, यह हमेशा गुना-अवरोध वाले क्षेत्रों में प्रकट नहीं होता है उदाहरण के लिए, युवा पहाड़ियों में anticlinor संरचनाओं लकीरें के अनुरूप हैं, और synclinoria अंतरमार्ग troughs के अनुरूप है। जोड़ वर्गों के अंदर, साथ ही उनकी परिधि पर, क्रमशः, बढ़त और प्रमुख घाटियों और घाटियों को प्रतिष्ठित किया जाता है। इन संरचनाओं की सतह पर मोटे तौर पर क्लॉस्टिक उत्पाद होते हैं, जो पहाड़ संरचनाओं के विनाश से उत्पन्न होते हैं - गुड़। लिथोस्फेर्शिक साइट्स के सबडक्शन के परिणामस्वरूप फुटिले ट्रेट्स का निर्माण होता है। इस क्षेत्र में शिक्षा स्टैक्ड हैप्रागैतिहासिक गनीस और प्रोटेरोजोइक शेल्स वे प्रीकैब्रियन साइबेरियन प्लेटफार्म से संबंधित हैं। यह आवश्यक है, हालांकि, कुछ विशेषताओं के बारे में कहने के लिए कि टेक्टॉनिक संरचना के पास है अलदैन हाइलैंड्स ने दक्षिणी उत्तरी बाइकाल स्थलों और मंच के बीच मेसो-सेनोोजोइक इतिहास के दौरान विकसित किया था। कई साइटों पर क्रिस्टलीय तहखाने की चट्टान सतह पर हैं वे ठीक ग्रेनाइट, प्राचीन क्वार्टजाइट्स, पत्थर और गनीस द्वारा प्रस्तुत किए जाते हैं। उत्तरी ढलान पर एक क्षेत्र है, इसकी नींव लगभग एक.पाँच किमी की गहराई में है। भूगर्भीय विकास के विभिन्न चरणों में ग्रेनाइट घुसपैठ के कारण इसकी चट्टानें टूट गई हैं।
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मेघालय के चेरापूंजी की पहचान कभी देश में सर्वाधिक बारिश को लेकर थी। मगर मायानगरी मुंबई में लगातार हो रही बारिश चेरापूंजी को भी टक्कर दे रही है। मुंबई में दो दिन में 214 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हो चुकी है, जिसके चलते मुंबईवासी बेहाल हो गए हैं। सोमवार से मंगलवार के बीच 24 घंटे के भीतर चेरापूंजी में 148 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके बाद मुंबई का नंबर था, जहां इस दौरान 131 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यही नहीं मंगलवार को छह घंटे के भीतर ही मुंबई में 83 मिलीमीटर बारिश हो गई।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भी बारिश से बुरे हालात बने हुए हैं। यहां बारिश ने पिछले 13 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। शिमला में 2005 के बाद पिछले 24 घंटे में 118 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। इससे पहले 15 अप्रैल, 2005 को 108. 5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी।
उत्तराखंड में भी मंगलवार शाम तक 24 घंटे में 167 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। अगले 24 घंटों में राज्य में पिथौरागढ़, नैनीताल, चंपावत, उधमसिंहनगर, हरिद्वार, देहरादून और पौड़ी में 200 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश होने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र ने अलर्ट जारी किया है और पर्वतीय सड़कों पर यात्रा करने से बचने की सलाह दी गई है।
धारचूला में अस्थायी पुल बहा :
पिथौरागढ़ के धारचूला के सोबला गांव में सीपीडब्ल्यूडी द्वारा बनाया अस्थायी पुल बह गया है। पुल बहने के कारण दारमा घाटी के 14 गांवों के लोग 10 किलोमीटर पैदल चलकर धारचूला तहसील पहुंच रहे हैं। इस बीच मुनस्यारी के दरकोट गांव में बारिश से प्राथमिक स्कूल के नीचे से पहाड़ी खिसक गई है। स्कूल के किसी भी वक्त गिरने की आशंका है। पिथौरागढ़ जिले में मुनस्यारी और नाचनी को जोड़ने वाली सड़क पहाड़ी से आए मलबे के कारण नदी में समा गई है।
बिहार के पूर्णिया में मंगलवार सुबह तक 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश सुपौल में दर्ज की गई। यहां 52. 6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई जबकि पूर्णिया में 48. 2 मिलीमीटर बारिश हुई। भागलपुर में 32 मिलीमीटर, मुजफ्फरपुर में 21. 6 और पटना में 1. 4 मिलीमीटर बारिश हुई है।
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मेघालय के चेरापूंजी की पहचान कभी देश में सर्वाधिक बारिश को लेकर थी। मगर मायानगरी मुंबई में लगातार हो रही बारिश चेरापूंजी को भी टक्कर दे रही है। मुंबई में दो दिन में दो सौ चौदह मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हो चुकी है, जिसके चलते मुंबईवासी बेहाल हो गए हैं। सोमवार से मंगलवार के बीच चौबीस घंटाटे के भीतर चेरापूंजी में एक सौ अड़तालीस मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके बाद मुंबई का नंबर था, जहां इस दौरान एक सौ इकतीस मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यही नहीं मंगलवार को छह घंटे के भीतर ही मुंबई में तिरासी मिलीमीटर बारिश हो गई। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भी बारिश से बुरे हालात बने हुए हैं। यहां बारिश ने पिछले तेरह साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। शिमला में दो हज़ार पाँच के बाद पिछले चौबीस घंटाटे में एक सौ अट्ठारह मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। इससे पहले पंद्रह अप्रैल, दो हज़ार पाँच को एक सौ आठ. पाँच मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। उत्तराखंड में भी मंगलवार शाम तक चौबीस घंटाटे में एक सौ सरसठ मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। अगले चौबीस घंटाटों में राज्य में पिथौरागढ़, नैनीताल, चंपावत, उधमसिंहनगर, हरिद्वार, देहरादून और पौड़ी में दो सौ मिलीमीटर से ज्यादा बारिश होने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र ने अलर्ट जारी किया है और पर्वतीय सड़कों पर यात्रा करने से बचने की सलाह दी गई है। धारचूला में अस्थायी पुल बहा : पिथौरागढ़ के धारचूला के सोबला गांव में सीपीडब्ल्यूडी द्वारा बनाया अस्थायी पुल बह गया है। पुल बहने के कारण दारमा घाटी के चौदह गांवों के लोग दस किलोग्राममीटर पैदल चलकर धारचूला तहसील पहुंच रहे हैं। इस बीच मुनस्यारी के दरकोट गांव में बारिश से प्राथमिक स्कूल के नीचे से पहाड़ी खिसक गई है। स्कूल के किसी भी वक्त गिरने की आशंका है। पिथौरागढ़ जिले में मुनस्यारी और नाचनी को जोड़ने वाली सड़क पहाड़ी से आए मलबे के कारण नदी में समा गई है। बिहार के पूर्णिया में मंगलवार सुबह तक चौबीस घंटाटे में सबसे ज्यादा बारिश सुपौल में दर्ज की गई। यहां बावन. छः मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई जबकि पूर्णिया में अड़तालीस. दो मिलीमीटर बारिश हुई। भागलपुर में बत्तीस मिलीमीटर, मुजफ्फरपुर में इक्कीस. छः और पटना में एक. चार मिलीमीटर बारिश हुई है।
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राजस्थान में बारां शहर में पांच दिन पूर्व एक युवक की मौत के मामले में कोतवाली पुलिस ने खुलासा करते हुए उसकी प्रेमिका को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में अरेस्ट कर लिया है. राजकुमार के परिजनों की रिपोर्ट पर पुलिस ने हत्या के आरोप में मामला दर्ज किया था.
कोतवाली प्रभारी मांगेलाल यादव ने बताया कि 21 सितम्बर को मोतीलाल कुम्हार ने जिला चिकित्सालय बारां में एक रिपोर्ट पेश की थी कि मेरा पुत्र राजकुमार 20 सितम्बर की को रात करीब 12 बजे घर से निकला था. रात के 2 बजे सोनिया ऐरवाल व उसके साथ और एक लड़की ने हमारे घर पर आकर राजकुमार के मरा पड़े होने की जानकारी दी. मामले में युवती व परिजनों पर हत्या के आरोप में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी.
पुलिस ने अनुसंधान से पाया कि मृतक राजकुमार उर्फ भाया का उसके पड़ोस में रहने वाली लड़की सोनिया उर्फ सुनीता ऐरवाल से प्रेम प्रसंग था. सोनिया अपने प्रेमी राजकुमार से शादी करना चाहती थी परन्तु करीब 5 माह पहले राजकुमार की कहीं और शादी हो गई. इसी बात को लेकर इन दोनों में आपस में झगड़े होने लगे.
इसी बात को लेकर 20 सितम्बर की रात को राजकुमार उसकी प्रेमिका सोनिया उर्फ सुनीता के मकान पर गया जहां पर भी इन दोनों का आपस में झगड़ा हुआ. राजकुमार ने उसकी प्रेमिका सोनिया से परेशान होकर उसी के कमरे में पंखा लगाने के कड़े से फंदा लगा लिया. घटना के संबध में सोनिया उर्फ सुनीता ऐरवाल निवासी मधुवन रिसोर्ट के पास लंका कॉलोनी को उसे आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया.
पुलिस जांच में सामने आया कि राजकुमार व उसकी प्रेमिका के बीच आए दिन अनबन होती रहती थी. कई बार सोनिया राजकुमार को पुलिस कार्रवाई की धमकी दे चुकी थी. इसको लेकर लोगों की ओर से समझाईश की बात भी सामने आई है.
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राजस्थान में बारां शहर में पांच दिन पूर्व एक युवक की मौत के मामले में कोतवाली पुलिस ने खुलासा करते हुए उसकी प्रेमिका को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में अरेस्ट कर लिया है. राजकुमार के परिजनों की रिपोर्ट पर पुलिस ने हत्या के आरोप में मामला दर्ज किया था. कोतवाली प्रभारी मांगेलाल यादव ने बताया कि इक्कीस सितम्बर को मोतीलाल कुम्हार ने जिला चिकित्सालय बारां में एक रिपोर्ट पेश की थी कि मेरा पुत्र राजकुमार बीस सितम्बर की को रात करीब बारह बजे घर से निकला था. रात के दो बजे सोनिया ऐरवाल व उसके साथ और एक लड़की ने हमारे घर पर आकर राजकुमार के मरा पड़े होने की जानकारी दी. मामले में युवती व परिजनों पर हत्या के आरोप में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी. पुलिस ने अनुसंधान से पाया कि मृतक राजकुमार उर्फ भाया का उसके पड़ोस में रहने वाली लड़की सोनिया उर्फ सुनीता ऐरवाल से प्रेम प्रसंग था. सोनिया अपने प्रेमी राजकुमार से शादी करना चाहती थी परन्तु करीब पाँच माह पहले राजकुमार की कहीं और शादी हो गई. इसी बात को लेकर इन दोनों में आपस में झगड़े होने लगे. इसी बात को लेकर बीस सितम्बर की रात को राजकुमार उसकी प्रेमिका सोनिया उर्फ सुनीता के मकान पर गया जहां पर भी इन दोनों का आपस में झगड़ा हुआ. राजकुमार ने उसकी प्रेमिका सोनिया से परेशान होकर उसी के कमरे में पंखा लगाने के कड़े से फंदा लगा लिया. घटना के संबध में सोनिया उर्फ सुनीता ऐरवाल निवासी मधुवन रिसोर्ट के पास लंका कॉलोनी को उसे आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस जांच में सामने आया कि राजकुमार व उसकी प्रेमिका के बीच आए दिन अनबन होती रहती थी. कई बार सोनिया राजकुमार को पुलिस कार्रवाई की धमकी दे चुकी थी. इसको लेकर लोगों की ओर से समझाईश की बात भी सामने आई है.
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सलमान खान चार साल बाद ईद के दिन अपनी फिल्म रिलीज करने वाले हैं। ऐसा माना जाता है कि ईद पर रिलीज हुई भाई की फिल्म सुपरहिट होती है। 'किसी का भाई किसी की जान' को लेकर भी ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने ट्वीट कर ऐसी ही संभावना जताई है। सलमान खान की यह फिल्म साउथ की 'वीरम' फिल्म की रीमेक है। साउथ की फिल्म में अजीत कुमार ने मुख्य किरदार निभाया था। सलमान खान को साउथ रीमेक का स्टार माना जाता है। उनकी कई फिल्में साउथ की रीमेक रही हैं, जिन्होंने ऑडियंस के बीच वाहवाही बटोरी है।
चलिए आज हम आपको सलमान की 10 ऐसी फिल्मों के बारे में बताते हैं जो साउथ की फिल्मों की रीमेक रही है।
1 किक (Kick)
सलमान खान की यह फिल्म 2009 में आई तेलुगु फिल्म eponymous 2009 (किक) की रीमेक थी। इस फिल्म के साथ एक्शन कॉमेडी वाली फिल्में बहुत ही ज्यादा फेमस हो गई थीं। सलमान खान की यह फिल्म 200 करोड़ क्लब में एंटर हो गई थी। 2014 की यह सबसे बड़ी फिल्मों में से एक थी।
10 हर दिल जो प्यार करेगा (Har dil jo pyar karega)
1995 में एक हॉलीवुड फिल्म आई थी जिसका नाम था 'वाइल यू वर स्लीपिंग', इस फिल्म के आधार पर प्रियदर्शन ने 1997 में मलयालम ब्लॉकबस्टर 'चंद्रलेखा' बनाई थी। इसके बाद तेलुगु फिल्म बनी जिसकी कहानी ऐसी ही थी। उसके दो साल बाद साजिद नाडियावाला ने सलमान खान, प्रीति जिंटा और रानी मुखर्जी के साथ 'हर दिल जो प्यार करेगा' फिल्म बनाई। इस फिल्म में शाहरुख खान का गेस्ट अपीयरेंस भी था।
अब अगर ऐसे में सलमान को रीमेक किंग कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। आपकी इस मामले में क्या राय है? हमें अपने जवाब आर्टिकल के नीचे दिए कमेंट बॉक्स में बताएं। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
2 वॉन्टेड (Wanted)
बॉलीवुड की मसाला एक्शन फिल्मों की शुरुआत इस फिल्म को ही माना जाता है। सलमान खान ने शरीफ गुंडे वाला किरदार सबसे पहले इसी फिल्म में निभाया था। उसके बाद से ही मसाला एक्शन फिल्मों का ट्रेंड चल निकला। 'वॉन्टेड' फिल्म तेलुगु सुपरहिट फिल्म 'पोखिरी' का रीमेक थी।
3 क्योंकी. . (Kyoki)
प्रियदर्शन द्वारा डायरेक्ट की गई यह मूवी 1986 में आई मलयालम फिल्म 'थलावत्तम' की रीमेक थी। ओरिजनल फिल्म को भी प्रियदर्शन ने ही डायरेक्ट किया था। इस फिल्म को सलमान की सेंसिटिव परफॉर्मेंस के लिए तो सराहा गया, लेकिन यह बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई।
4 बंधन (Bandhan)
1998 में सलमान खान और जैकी श्रॉफ की फिल्म 'बंधन' आई थी। यह तमिल फिल्म 'पंडिथुराई' का रीमेक थी। इस फिल्म में जैकी श्रॉफ और सलमान खान का ब्रोमैंस बहुत पसंद किया गया था।
5 रेडी (Ready)
सलमान खान और असिन की फिल्म 'रेडी' 2008 में आई तेलुगु फिल्म 'रेडी' का चौथा रीमेक थी। इसके पहले तमिल और कन्नड़ भाषा में यह बन चुकी थी। 2011 में आई यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी। लोगों को सलमान खान की कॉमिक टाइमिंग इस फिल्म में पसंद आई थी।
6 बॉडीगार्ड (Bodyguard)
यह एक्शन रोमांटिक फिल्म मलयालम फिल्म 'बॉडीगार्ड' का आधिकारिक रीमेक थी। इस फिल्म में करीना और सलमान की जोड़ी को बहुत पसंद किया गया था। यह फिल्म 2011 की सबसे बड़ी हिट फिल्म थी जिसने कई रिकॉर्ड्स तोड़ दिए थे।
7 बीवी नंबर 1 (Biwi Number 1)
डायरेक्टर डेविड धवन ने 1995 में आई तमिल फिल्म 'सती लीलावती' का रीमेक बनाया था। इसमें सलमान खान, करिश्मा कपूर, अनिल कपूर और तबू मुख्य किरदार में थे। 1999 क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान इसे रिलीज किया गया था और यह उस साल की सबसे बड़ी हिट साबित हुई थी।
8 जुड़वा (Judwaa)
डेविड धवन और सलमान की जोड़ी ने एक और साउथ की फिल्म का रीमेक बनाया। यह थी 'जुड़वा' जो तेलुगु फिल्म 'हैलो ब्रदर' का रीमेक थी। यह तेलुगु फिल्म खुद जैकी चैन की फिल्म 'ट्विन ड्रैगन्स' से प्रेरित थी।
9 तेरे नाम (Tere Naam)
सलमान खान की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक गिनी जाने वाली फिल्म 'तेरे नाम' दरअसल तमिल फिल्म 'सेतु' का रीमेक थी। यह फिल्म अपने इमोशनल सीन्स और कहानी के लिए प्रसिद्ध थी। तमिल फिल्म अपने आप में एक कल्ट क्लासिक के तौर पर देखी जाती है।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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सलमान खान चार साल बाद ईद के दिन अपनी फिल्म रिलीज करने वाले हैं। ऐसा माना जाता है कि ईद पर रिलीज हुई भाई की फिल्म सुपरहिट होती है। 'किसी का भाई किसी की जान' को लेकर भी ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने ट्वीट कर ऐसी ही संभावना जताई है। सलमान खान की यह फिल्म साउथ की 'वीरम' फिल्म की रीमेक है। साउथ की फिल्म में अजीत कुमार ने मुख्य किरदार निभाया था। सलमान खान को साउथ रीमेक का स्टार माना जाता है। उनकी कई फिल्में साउथ की रीमेक रही हैं, जिन्होंने ऑडियंस के बीच वाहवाही बटोरी है। चलिए आज हम आपको सलमान की दस ऐसी फिल्मों के बारे में बताते हैं जो साउथ की फिल्मों की रीमेक रही है। एक किक सलमान खान की यह फिल्म दो हज़ार नौ में आई तेलुगु फिल्म eponymous दो हज़ार नौ की रीमेक थी। इस फिल्म के साथ एक्शन कॉमेडी वाली फिल्में बहुत ही ज्यादा फेमस हो गई थीं। सलमान खान की यह फिल्म दो सौ करोड़ क्लब में एंटर हो गई थी। दो हज़ार चौदह की यह सबसे बड़ी फिल्मों में से एक थी। दस हर दिल जो प्यार करेगा एक हज़ार नौ सौ पचानवे में एक हॉलीवुड फिल्म आई थी जिसका नाम था 'वाइल यू वर स्लीपिंग', इस फिल्म के आधार पर प्रियदर्शन ने एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में मलयालम ब्लॉकबस्टर 'चंद्रलेखा' बनाई थी। इसके बाद तेलुगु फिल्म बनी जिसकी कहानी ऐसी ही थी। उसके दो साल बाद साजिद नाडियावाला ने सलमान खान, प्रीति जिंटा और रानी मुखर्जी के साथ 'हर दिल जो प्यार करेगा' फिल्म बनाई। इस फिल्म में शाहरुख खान का गेस्ट अपीयरेंस भी था। अब अगर ऐसे में सलमान को रीमेक किंग कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। आपकी इस मामले में क्या राय है? हमें अपने जवाब आर्टिकल के नीचे दिए कमेंट बॉक्स में बताएं। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से। दो वॉन्टेड बॉलीवुड की मसाला एक्शन फिल्मों की शुरुआत इस फिल्म को ही माना जाता है। सलमान खान ने शरीफ गुंडे वाला किरदार सबसे पहले इसी फिल्म में निभाया था। उसके बाद से ही मसाला एक्शन फिल्मों का ट्रेंड चल निकला। 'वॉन्टेड' फिल्म तेलुगु सुपरहिट फिल्म 'पोखिरी' का रीमेक थी। तीन क्योंकी. . प्रियदर्शन द्वारा डायरेक्ट की गई यह मूवी एक हज़ार नौ सौ छियासी में आई मलयालम फिल्म 'थलावत्तम' की रीमेक थी। ओरिजनल फिल्म को भी प्रियदर्शन ने ही डायरेक्ट किया था। इस फिल्म को सलमान की सेंसिटिव परफॉर्मेंस के लिए तो सराहा गया, लेकिन यह बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई। चार बंधन एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में सलमान खान और जैकी श्रॉफ की फिल्म 'बंधन' आई थी। यह तमिल फिल्म 'पंडिथुराई' का रीमेक थी। इस फिल्म में जैकी श्रॉफ और सलमान खान का ब्रोमैंस बहुत पसंद किया गया था। पाँच रेडी सलमान खान और असिन की फिल्म 'रेडी' दो हज़ार आठ में आई तेलुगु फिल्म 'रेडी' का चौथा रीमेक थी। इसके पहले तमिल और कन्नड़ भाषा में यह बन चुकी थी। दो हज़ार ग्यारह में आई यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी। लोगों को सलमान खान की कॉमिक टाइमिंग इस फिल्म में पसंद आई थी। छः बॉडीगार्ड यह एक्शन रोमांटिक फिल्म मलयालम फिल्म 'बॉडीगार्ड' का आधिकारिक रीमेक थी। इस फिल्म में करीना और सलमान की जोड़ी को बहुत पसंद किया गया था। यह फिल्म दो हज़ार ग्यारह की सबसे बड़ी हिट फिल्म थी जिसने कई रिकॉर्ड्स तोड़ दिए थे। सात बीवी नंबर एक डायरेक्टर डेविड धवन ने एक हज़ार नौ सौ पचानवे में आई तमिल फिल्म 'सती लीलावती' का रीमेक बनाया था। इसमें सलमान खान, करिश्मा कपूर, अनिल कपूर और तबू मुख्य किरदार में थे। एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान इसे रिलीज किया गया था और यह उस साल की सबसे बड़ी हिट साबित हुई थी। आठ जुड़वा डेविड धवन और सलमान की जोड़ी ने एक और साउथ की फिल्म का रीमेक बनाया। यह थी 'जुड़वा' जो तेलुगु फिल्म 'हैलो ब्रदर' का रीमेक थी। यह तेलुगु फिल्म खुद जैकी चैन की फिल्म 'ट्विन ड्रैगन्स' से प्रेरित थी। नौ तेरे नाम सलमान खान की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक गिनी जाने वाली फिल्म 'तेरे नाम' दरअसल तमिल फिल्म 'सेतु' का रीमेक थी। यह फिल्म अपने इमोशनल सीन्स और कहानी के लिए प्रसिद्ध थी। तमिल फिल्म अपने आप में एक कल्ट क्लासिक के तौर पर देखी जाती है। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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एक वरिष्ठ तालिबान नेता ने द न्यूज को बताया, "अमीरुल मोमिनीन शेख हिबतुल्ला अखुनजादा ने खुद मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को रईस-ए-जम्हूर, या रईस-उल-वजारा या अफगानिस्तान के नए प्रमुख राज्य के रूप में प्रस्तावित किया था। मुल्ला बरादर अखुंद और मुल्ला अब्दुस सलाम उनके प्रतिनिधि के रूप में काम करेंगे। " रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान के तीन नेताओं ने मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद के नामांकन की पुष्टि की।
उन्होंने कहा कि मुल्ला हसन 20 साल तक शेख हिबतुल्ला अखुनजादा के करीबी रहे। तालिबान के अनुसार, मुल्ला हसन ने अफगानिस्तान में अपनी पिछली सरकार के दौरान महत्वपूर्ण पदों पर काम किया था। रिपोर्ट के अनुसार, इसी तरह, तालिबान ने कहा कि हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख तालिबान नेता सिराजुद्दीन हक्कानी को संघीय आंतरिक मंत्री के रूप में प्रस्तावित किया गया है। उन्हें पूर्वी प्रांतों के लिए गर्वनरों को नामित करने के लिए भी अधिकृत किया गया है।
इसी तरह तालिबान के संस्थापक मुल्ला मोहम्मद उमर के बेटे मुल्ला याकूब को अफगानिस्तान का रक्षा मंत्री बनाया गया है। मुल्ला याकूब अपने मदरसे में शेख हिबतुल्लाह अखुनजादा का छात्र था। तालिबान के सूत्रों के अनुसार, शेख हिबतुल्लाह अखुनजादा ने हमेशा अपने पिता और याकूब के काम के प्रति समर्पण के कारण मुल्ला याकूब का सम्मान किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शेख हबीबुल्लाह ने ही मुल्ला याकूब को अपने सशस्त्र लड़ाकों का कमांडर इन चीफ नियुक्त किया और फिर उसे शक्तिशाली सैन्य आयोग का प्रमुख चुना।
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एक वरिष्ठ तालिबान नेता ने द न्यूज को बताया, "अमीरुल मोमिनीन शेख हिबतुल्ला अखुनजादा ने खुद मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को रईस-ए-जम्हूर, या रईस-उल-वजारा या अफगानिस्तान के नए प्रमुख राज्य के रूप में प्रस्तावित किया था। मुल्ला बरादर अखुंद और मुल्ला अब्दुस सलाम उनके प्रतिनिधि के रूप में काम करेंगे। " रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान के तीन नेताओं ने मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद के नामांकन की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि मुल्ला हसन बीस साल तक शेख हिबतुल्ला अखुनजादा के करीबी रहे। तालिबान के अनुसार, मुल्ला हसन ने अफगानिस्तान में अपनी पिछली सरकार के दौरान महत्वपूर्ण पदों पर काम किया था। रिपोर्ट के अनुसार, इसी तरह, तालिबान ने कहा कि हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख तालिबान नेता सिराजुद्दीन हक्कानी को संघीय आंतरिक मंत्री के रूप में प्रस्तावित किया गया है। उन्हें पूर्वी प्रांतों के लिए गर्वनरों को नामित करने के लिए भी अधिकृत किया गया है। इसी तरह तालिबान के संस्थापक मुल्ला मोहम्मद उमर के बेटे मुल्ला याकूब को अफगानिस्तान का रक्षा मंत्री बनाया गया है। मुल्ला याकूब अपने मदरसे में शेख हिबतुल्लाह अखुनजादा का छात्र था। तालिबान के सूत्रों के अनुसार, शेख हिबतुल्लाह अखुनजादा ने हमेशा अपने पिता और याकूब के काम के प्रति समर्पण के कारण मुल्ला याकूब का सम्मान किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शेख हबीबुल्लाह ने ही मुल्ला याकूब को अपने सशस्त्र लड़ाकों का कमांडर इन चीफ नियुक्त किया और फिर उसे शक्तिशाली सैन्य आयोग का प्रमुख चुना।
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MP: हत्यारिन प्रेमिका अपने प्रेमी से छुटकारा पाना चाहती थी, जबकि मृतक प्रेमी अपने प्यार को नहीं भुलाना चाहता था। यही वजह थी कि प्रेमिका ने अपने भाई व अन्य लोगों के संग षडयंत्र रच उसे अपने रास्ते से हटा दिया। प्रेमी का गला घोंट कर हत्या करने के बाद उसकी लाश को कट्टे में पैक कर पहले तिघरा बांध में फेंकने की योजना थी, मगर पुलिस की चैकिंग देख कर हाईवे पर ही डेड बाॅडी फेंक दी। पुलिस ने दो महिलाओं व दो पुरुषों को अरेस्ट किया है।
एमपी के ग्वालियर में प्रेमी की हत्या के मामले का एसएसपी अमित सांघी ने किया खुलासा (फाइल फोटो)
ये है पूरी घटनाग्वालियर एसएपी अमित सांघी के मुताबिक, बीती 27 जनवरी को तिघरा थाना इलाके के रायरू-निरावली रोड के बीच कुलैथ रोड पर एक अज्ञात व्यक्ति की प्लास्टिक के कट्टे में बंद डेड बाॅडी मिली थी। जिसके हाथ व पांव बंधे थे। इसके बाद पुलिस ने मृतक की शिनाख्त राजवीर बघेल निवासी गांव बिलासपुर दतिया के तौर पर हुई। मृतक वर्तमान में पिछोर तिराहा डबरा में रहता था। जो कि, पेशे से ट्रक चालक था। शव की पहचान होने के बाद एएसपी मृगाखी डेका ने ग्वालियर सीएसपी संदीप मालवीय व तिघरा थाने के एसएचओ सुरेश सिंह कुशवाह की अगुवाई में टीम का गठन कर मामले की पड़ताल के लिए भेजा। टीम ने पड़ताल के दौरान जानकारी जुटाई तो सामने आया कि, डबरा के एक ट्रांसपोर्टर के यहां नौकरी करता था।
प्रेमिका को नहीं छोड़ रहा था इसलिए दे दी मौतएसएसपी के मुताबिक, पुलिस टीम को जानकारी मिली कि, मृतक वीरपुर क्षेत्र में एक महिला के यहां जाता था। इसके बाद पुलिस ने उस महिला को थाने बुलाकर पूछताछ की तो वह पहले तो गुमराह करती रही। लेकिन पुलिस की सख्ती से वह टूट गई और हत्या का सारा राज उगल दिया। एसएसपी के मुताबिक, आरोपी ने बताया कि, मृतक राजवीर के साथ उसके अवैध सबंध थे। वारदात वाले दिन वह उसके घर आया था। उस समय उसकी सहेली घर पर थी। सेहली बाहर जाकर खड़ी हो गई। कमरे में मृतक व मैं अकेले रह गए। इस बीच मेरा भाई अपने दोस्त संग घर आ गया व हमें साथ में देख लिया। इसके बाद भाई ने मृतक से झगड़ा किया। बाद में हमने उसका मफलर से गला घोंट दिया। आरोपी ने बताया कि, वह उससे छुटकारा पाना चाहती थी, मगर वह उसे नहीं छोड़ रहा था। इसके बाद मैंने उसे ठिकाने लगाने का प्लान बनाया था।
पारखी नजर वाले का ही है खेल, दोनों तस्वीरों में से ढूंढकर दिखाना है तीन अंतर, खोज लिया तो कहलाएंगे 'धुरंधर'
Big And Bold Trending : बारिश को लेकर अगले 24 घंटे में इन राज्यों में अलर्ट !
Big And Bold । Mafia Atique Ahmed ही 'बेगम' को पकड़वाएगा !
B&B International । Modi का विकास. . उभरता भारत, China में वायरल !
Big And Bold Political: 24 का वास्ता, जनसंपर्क से बनाएंगे जीत का रास्ता !
Delhi Sakshi Murder । साक्षी अकेली नहीं, कई और लड़कियां टारगेट पर ?
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MP: हत्यारिन प्रेमिका अपने प्रेमी से छुटकारा पाना चाहती थी, जबकि मृतक प्रेमी अपने प्यार को नहीं भुलाना चाहता था। यही वजह थी कि प्रेमिका ने अपने भाई व अन्य लोगों के संग षडयंत्र रच उसे अपने रास्ते से हटा दिया। प्रेमी का गला घोंट कर हत्या करने के बाद उसकी लाश को कट्टे में पैक कर पहले तिघरा बांध में फेंकने की योजना थी, मगर पुलिस की चैकिंग देख कर हाईवे पर ही डेड बाॅडी फेंक दी। पुलिस ने दो महिलाओं व दो पुरुषों को अरेस्ट किया है। एमपी के ग्वालियर में प्रेमी की हत्या के मामले का एसएसपी अमित सांघी ने किया खुलासा ये है पूरी घटनाग्वालियर एसएपी अमित सांघी के मुताबिक, बीती सत्ताईस जनवरी को तिघरा थाना इलाके के रायरू-निरावली रोड के बीच कुलैथ रोड पर एक अज्ञात व्यक्ति की प्लास्टिक के कट्टे में बंद डेड बाॅडी मिली थी। जिसके हाथ व पांव बंधे थे। इसके बाद पुलिस ने मृतक की शिनाख्त राजवीर बघेल निवासी गांव बिलासपुर दतिया के तौर पर हुई। मृतक वर्तमान में पिछोर तिराहा डबरा में रहता था। जो कि, पेशे से ट्रक चालक था। शव की पहचान होने के बाद एएसपी मृगाखी डेका ने ग्वालियर सीएसपी संदीप मालवीय व तिघरा थाने के एसएचओ सुरेश सिंह कुशवाह की अगुवाई में टीम का गठन कर मामले की पड़ताल के लिए भेजा। टीम ने पड़ताल के दौरान जानकारी जुटाई तो सामने आया कि, डबरा के एक ट्रांसपोर्टर के यहां नौकरी करता था। प्रेमिका को नहीं छोड़ रहा था इसलिए दे दी मौतएसएसपी के मुताबिक, पुलिस टीम को जानकारी मिली कि, मृतक वीरपुर क्षेत्र में एक महिला के यहां जाता था। इसके बाद पुलिस ने उस महिला को थाने बुलाकर पूछताछ की तो वह पहले तो गुमराह करती रही। लेकिन पुलिस की सख्ती से वह टूट गई और हत्या का सारा राज उगल दिया। एसएसपी के मुताबिक, आरोपी ने बताया कि, मृतक राजवीर के साथ उसके अवैध सबंध थे। वारदात वाले दिन वह उसके घर आया था। उस समय उसकी सहेली घर पर थी। सेहली बाहर जाकर खड़ी हो गई। कमरे में मृतक व मैं अकेले रह गए। इस बीच मेरा भाई अपने दोस्त संग घर आ गया व हमें साथ में देख लिया। इसके बाद भाई ने मृतक से झगड़ा किया। बाद में हमने उसका मफलर से गला घोंट दिया। आरोपी ने बताया कि, वह उससे छुटकारा पाना चाहती थी, मगर वह उसे नहीं छोड़ रहा था। इसके बाद मैंने उसे ठिकाने लगाने का प्लान बनाया था। पारखी नजर वाले का ही है खेल, दोनों तस्वीरों में से ढूंढकर दिखाना है तीन अंतर, खोज लिया तो कहलाएंगे 'धुरंधर' Big And Bold Trending : बारिश को लेकर अगले चौबीस घंटाटे में इन राज्यों में अलर्ट ! Big And Bold । Mafia Atique Ahmed ही 'बेगम' को पकड़वाएगा ! B&B International । Modi का विकास. . उभरता भारत, China में वायरल ! Big And Bold Political: चौबीस का वास्ता, जनसंपर्क से बनाएंगे जीत का रास्ता ! Delhi Sakshi Murder । साक्षी अकेली नहीं, कई और लड़कियां टारगेट पर ?
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मानव को वातावरण और मानवीय रिश्तों से तालमेल बिठाना पड़ता है. जो ऐसा करने में सफल होता है उस के लिए सैल्फ ऐक्चुलाइजेशन बहुत आसान हो जाता है. मशहूर मनोवैज्ञानिक मैस्लो के अनुसार, मनुष्य की 5 आवश्यकताएं होती हैं. पहली आवश्यकता रोटी, कपड़ा और मकान की होती है. दूसरी आवश्यकता है सुरक्षा की. तीसरी आवश्यकता है प्यार पाने की. चौथी आवश्यकता सम्मान मिलने की होती है. पांचवी आवश्यकता सैल्फ ऐक्चुलाइजेशन. इस का अर्थ ऐसी जरूरत से है जो जीवन के मकसद से संबंधित है यानी जो आप बनना चाहते हैं वैसे बन सकें. यह जीवन का मिशन या यों समझिए कि यह ऊंचे स्तर का उद्देश्य होता है जिस के लिए आप पूरे जनून के साथ उसे प्राप्त करने के लिए लग जाते हैं.
सैल्फ ऐक्चुलाइज्ड व्यक्ति के लक्षणों और गुणों को इस तरह बयां किया जा सकता है :
- वह जीवन की वास्तविकता का ज्ञान रखता है और सूझबूझ के साथ जीवन की जटिल समस्याओं का हल ढूंढ़ निकालता है. संघर्ष का मुकाबला डट कर करता है.
- खुद को और संपर्क में आने वाले लोगों को, वे जैसे हैं, स्वीकार करता है, सहयोग करता है.
- अपनी सोच और क्रियाकलापों को संयोजित व नियंत्रित रखता है. उस की सकारात्मक सोच ऐसा करने में उस की मदद करती है.
- समस्याओं पर ध्यान केंद्रित कर, उन का समाधान विवेक और व्यावहारिकता के साथ निकालता है.
- वह काम से काम रखता है. अपनी निजता में किसी को दखल नहीं देने देता है.
- पूर्ण स्वतंत्रता से कार्य करता है, अपने माहौल को अपने अनुकूल बनाने की कला में माहिर होता है.
- अपने अनुभव और दूसरों के अनुभव से सीखते हुए लगातार अपनी कार्यशैली में सुधार ला कर अपने काम में निपुणता लाने का प्रयास करता है. इस प्रकार वह अपनी सफलता निश्चित करता है.
- वह अपने आत्मसम्मान को ध्यान में रखते हुए हालात से अनावश्यक समझौता नहीं करता. लोगों के साथ अच्छा व्यवहार बनाए रखता है ताकि उन का सहयोग अपने काम के लिए हासिल कर सके.
- लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाना उसे रुचिकर लगता है.
- तानाशाह न हो कर वह लोकतांत्रिक रवैया बनाए रखता है, लोगों के साथ मिलजुल कर आगे बढ़ता है.
- ऐसे लोग रचनात्मक होते हैं. रचनात्मक होने के कारण उन का जीवन नएनए अनुभवों से भरा होता है. वे लकीर के फकीर नहीं होते. परंपरा का निर्वाह करते हुए नित नवीन तरीकों से अपने काम की गुणवत्ता बनाए रखते हैं.
सैल्फ ऐक्चुलाइजेशन के जीतेजागते उदाहरण हैं सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन, लता मंगेशकर, आशा भोंसले, सचिन तेंदुलकर आदि. इतिहास में इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि जो महान शख्सीयतें जीवन में उपलब्धियों को हासिल कर पाईं उन में ऊपर लिखे हुए लक्षणों और गुणों का बढि़या समन्वय था. उन शख्सीयतों में स्वामी विवेकानंद, जौन एफ कैनेडी, अब्राहम लिंकन, शेक्सपियर, तुलसीदास, को शामिल किया जा सकता है.
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मानव को वातावरण और मानवीय रिश्तों से तालमेल बिठाना पड़ता है. जो ऐसा करने में सफल होता है उस के लिए सैल्फ ऐक्चुलाइजेशन बहुत आसान हो जाता है. मशहूर मनोवैज्ञानिक मैस्लो के अनुसार, मनुष्य की पाँच आवश्यकताएं होती हैं. पहली आवश्यकता रोटी, कपड़ा और मकान की होती है. दूसरी आवश्यकता है सुरक्षा की. तीसरी आवश्यकता है प्यार पाने की. चौथी आवश्यकता सम्मान मिलने की होती है. पांचवी आवश्यकता सैल्फ ऐक्चुलाइजेशन. इस का अर्थ ऐसी जरूरत से है जो जीवन के मकसद से संबंधित है यानी जो आप बनना चाहते हैं वैसे बन सकें. यह जीवन का मिशन या यों समझिए कि यह ऊंचे स्तर का उद्देश्य होता है जिस के लिए आप पूरे जनून के साथ उसे प्राप्त करने के लिए लग जाते हैं. सैल्फ ऐक्चुलाइज्ड व्यक्ति के लक्षणों और गुणों को इस तरह बयां किया जा सकता है : - वह जीवन की वास्तविकता का ज्ञान रखता है और सूझबूझ के साथ जीवन की जटिल समस्याओं का हल ढूंढ़ निकालता है. संघर्ष का मुकाबला डट कर करता है. - खुद को और संपर्क में आने वाले लोगों को, वे जैसे हैं, स्वीकार करता है, सहयोग करता है. - अपनी सोच और क्रियाकलापों को संयोजित व नियंत्रित रखता है. उस की सकारात्मक सोच ऐसा करने में उस की मदद करती है. - समस्याओं पर ध्यान केंद्रित कर, उन का समाधान विवेक और व्यावहारिकता के साथ निकालता है. - वह काम से काम रखता है. अपनी निजता में किसी को दखल नहीं देने देता है. - पूर्ण स्वतंत्रता से कार्य करता है, अपने माहौल को अपने अनुकूल बनाने की कला में माहिर होता है. - अपने अनुभव और दूसरों के अनुभव से सीखते हुए लगातार अपनी कार्यशैली में सुधार ला कर अपने काम में निपुणता लाने का प्रयास करता है. इस प्रकार वह अपनी सफलता निश्चित करता है. - वह अपने आत्मसम्मान को ध्यान में रखते हुए हालात से अनावश्यक समझौता नहीं करता. लोगों के साथ अच्छा व्यवहार बनाए रखता है ताकि उन का सहयोग अपने काम के लिए हासिल कर सके. - लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाना उसे रुचिकर लगता है. - तानाशाह न हो कर वह लोकतांत्रिक रवैया बनाए रखता है, लोगों के साथ मिलजुल कर आगे बढ़ता है. - ऐसे लोग रचनात्मक होते हैं. रचनात्मक होने के कारण उन का जीवन नएनए अनुभवों से भरा होता है. वे लकीर के फकीर नहीं होते. परंपरा का निर्वाह करते हुए नित नवीन तरीकों से अपने काम की गुणवत्ता बनाए रखते हैं. सैल्फ ऐक्चुलाइजेशन के जीतेजागते उदाहरण हैं सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन, लता मंगेशकर, आशा भोंसले, सचिन तेंदुलकर आदि. इतिहास में इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि जो महान शख्सीयतें जीवन में उपलब्धियों को हासिल कर पाईं उन में ऊपर लिखे हुए लक्षणों और गुणों का बढि़या समन्वय था. उन शख्सीयतों में स्वामी विवेकानंद, जौन एफ कैनेडी, अब्राहम लिंकन, शेक्सपियर, तुलसीदास, को शामिल किया जा सकता है.
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बिकवाली दबाव के बीच घरेलू शेयर बाजारों में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट रही और बीएसई सेंसेक्स 398 अंक नुकसान में रहा। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख के साथ धातु, ऊर्जा और रियल्टी शेयरों में बिकवाली से बाजार नीचे आया।
मुंबईः बिकवाली दबाव के बीच घरेलू शेयर बाजारों में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट रही और बीएसई सेंसेक्स 398 अंक नुकसान में रहा। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख के साथ धातु, ऊर्जा और रियल्टी शेयरों में बिकवाली से बाजार नीचे आया।
कारोबारियों के अनुसार इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में गिरावट तथा विदेशी संस्थागत निवेशकों की पूंजी निकासी जारी रहने से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।
इस दौरान, तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 398. 18 अंक यानी 0. 69 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,527. 10 अंक पर बंद हुआ। इसके 24 शेयरों में गिरावट रही। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ऊंचे में 58,066. 40 अंक तक गया और नीचे में 57,422. 98 अंक तक आया।
वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 131. 85 अंक यानी 0. 77 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,000 अंक स्तर के नीचे आ गया और यह 16,945. 05 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी में शामिल 50 शेयरों में से 41 शेयर नुकसान में रहे।
साप्ताहिक आधार पर, सेंसेक्स 462. 8 अंक यानी 0. 79 प्रतिशत तक गिर गया, जबकि निफ्टी 155 अंक या 0. 90 प्रतिशत फिसला।
सेंसेक्स में शामिल शेयरों में से बजाज फिनसर्व को सबसे ज्यादा 3. 81 प्रतिशत नुकसान हुआ। इसके अलावा, बजाज फाइनेंस, टाटा स्टील, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, एचसीएल टेक, भारतीय स्टेट बैंक, लार्सन एंड टुब्रो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एक्सिस बैंक और टाइटन भी प्रमुख रूप से नुकसान में रहे।
सूचकांक में मजबूत हिस्सेदारी रखने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही और 1. 96 प्रतिशत नीचे आया।
दूसरी तरफ, लाभ में रहने वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, पावर ग्रिड, एशियन पेंट्स और विप्रो शामिल हैं।
एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग गिरावट के साथ बंद हुए।
यूरोप के प्रमुख बाजारों में भी दोपहर के कारोबार गिरावट का रुख था। बृहस्पतिवार को अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे।
इस बीच, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1. 73 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74. 60 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बृहस्पतिवार को शुद्ध रूप से 995. 01 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
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बिकवाली दबाव के बीच घरेलू शेयर बाजारों में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट रही और बीएसई सेंसेक्स तीन सौ अट्ठानवे अंक नुकसान में रहा। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख के साथ धातु, ऊर्जा और रियल्टी शेयरों में बिकवाली से बाजार नीचे आया। मुंबईः बिकवाली दबाव के बीच घरेलू शेयर बाजारों में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट रही और बीएसई सेंसेक्स तीन सौ अट्ठानवे अंक नुकसान में रहा। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख के साथ धातु, ऊर्जा और रियल्टी शेयरों में बिकवाली से बाजार नीचे आया। कारोबारियों के अनुसार इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में गिरावट तथा विदेशी संस्थागत निवेशकों की पूंजी निकासी जारी रहने से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। इस दौरान, तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स तीन सौ अट्ठानवे. अट्ठारह अंक यानी शून्य. उनहत्तर प्रतिशत की गिरावट के साथ सत्तावन,पाँच सौ सत्ताईस. दस अंक पर बंद हुआ। इसके चौबीस शेयरों में गिरावट रही। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ऊंचे में अट्ठावन,छयासठ. चालीस अंक तक गया और नीचे में सत्तावन,चार सौ बाईस. अट्ठानवे अंक तक आया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी एक सौ इकतीस. पचासी अंक यानी शून्य. सतहत्तर प्रतिशत की गिरावट के साथ सत्रह,शून्य अंक स्तर के नीचे आ गया और यह सोलह,नौ सौ पैंतालीस. पाँच अंक पर बंद हुआ। निफ्टी में शामिल पचास शेयरों में से इकतालीस शेयर नुकसान में रहे। साप्ताहिक आधार पर, सेंसेक्स चार सौ बासठ. आठ अंक यानी शून्य. उन्यासी प्रतिशत तक गिर गया, जबकि निफ्टी एक सौ पचपन अंक या शून्य. नब्बे प्रतिशत फिसला। सेंसेक्स में शामिल शेयरों में से बजाज फिनसर्व को सबसे ज्यादा तीन. इक्यासी प्रतिशत नुकसान हुआ। इसके अलावा, बजाज फाइनेंस, टाटा स्टील, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, एचसीएल टेक, भारतीय स्टेट बैंक, लार्सन एंड टुब्रो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एक्सिस बैंक और टाइटन भी प्रमुख रूप से नुकसान में रहे। सूचकांक में मजबूत हिस्सेदारी रखने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही और एक. छियानवे प्रतिशत नीचे आया। दूसरी तरफ, लाभ में रहने वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, पावर ग्रिड, एशियन पेंट्स और विप्रो शामिल हैं। एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग गिरावट के साथ बंद हुए। यूरोप के प्रमुख बाजारों में भी दोपहर के कारोबार गिरावट का रुख था। बृहस्पतिवार को अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे। इस बीच, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड एक. तिहत्तर प्रतिशत की गिरावट के साथ चौहत्तर. साठ डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बृहस्पतिवार को शुद्ध रूप से नौ सौ पचानवे. एक करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
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मुंबई में ट्रिपल सुसाइड (Photo Credit: फाइल फोटो)
नई दिल्लीः
मुंबई में ट्रिपल सुसाइड की घटना सामने आई है. एक ही परिवार के 3 लोगों ने गुरुवार को आत्महत्या कर ली. सूचना पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. इस मामले को लेकर पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है. हालांकि, अभी तक सुसाइड का सही कारण पता नहीं चल सका है.
मुंबई के कांदिवली वेस्ट में एक परिवार फ्लैट में रहता है. इस फ्लैट में एक परिवार के तीन लोगों ने सुसाइड कर लिया. इनमें 2 नाबालिग बच्चियां भी शामिल हैं. पड़ोसियों की सूचना पर कांदिवली वेस्ट पुलिस स्टेशन की पुलिस आनन-फानन में घटनास्थल पर पहुंची. इस दौरान पुलिस शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर घर की तलाशी ले रही है.
पुलिस का कहना है कि सुसाइड का कारण घरेलू मतभेद है, लेकिन छानबीन के बाद ही सही कारण पता चल सकेगा. पुलिस मृतकों के पड़ोसियों से पूछताछ कर रही है. हालांकि, अभी तक किसी ने कोई तहरीर नहीं दी है.
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मुंबई में ट्रिपल सुसाइड नई दिल्लीः मुंबई में ट्रिपल सुसाइड की घटना सामने आई है. एक ही परिवार के तीन लोगों ने गुरुवार को आत्महत्या कर ली. सूचना पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. इस मामले को लेकर पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है. हालांकि, अभी तक सुसाइड का सही कारण पता नहीं चल सका है. मुंबई के कांदिवली वेस्ट में एक परिवार फ्लैट में रहता है. इस फ्लैट में एक परिवार के तीन लोगों ने सुसाइड कर लिया. इनमें दो नाबालिग बच्चियां भी शामिल हैं. पड़ोसियों की सूचना पर कांदिवली वेस्ट पुलिस स्टेशन की पुलिस आनन-फानन में घटनास्थल पर पहुंची. इस दौरान पुलिस शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर घर की तलाशी ले रही है. पुलिस का कहना है कि सुसाइड का कारण घरेलू मतभेद है, लेकिन छानबीन के बाद ही सही कारण पता चल सकेगा. पुलिस मृतकों के पड़ोसियों से पूछताछ कर रही है. हालांकि, अभी तक किसी ने कोई तहरीर नहीं दी है.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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लखनऊः उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव पास आ रहे हैं, वैसे-वैसे नेताओं का एक-दूसरे पर हमला तेज होता जा रहा है। सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने मंगलवार को बांदा जेल में कैद गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के साथ मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद राज्य में सियासी सरगर्मी इतनी बढ़ गई कि बुधवार को योगी कैबिनेट में मंत्री अनिल राजभर ने ओमप्रकाश राजभर पर निशाना साधा।
कैबिनेट मंत्री ने ओमप्रकाश राजभर को मुख्तार अंसारी का दलाल करार देते हुए कहा कि मुख्तार अंसारी को मऊ रैली का हिसाब देने ओमप्रकाश राजभर बांदा जेल पहुंचे थे। इतना ही नहीं, कैबिनेट मंत्री ने ओमप्रकाश राजभर को नया नाम भी दे डाला। उन्होंने ओमप्रकाश राजभर को असलम राजभर कहा। बता दें कि मंगलवार को ओमप्रकाश राजभर बांदा जेल में मुख्तार अंसारी से मिलने गए थे।
माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास के साथ जेल पहुंचे ओमप्रकाश ने वहां लगभग एक घंटे बिताया था। वाराणसी के सर्किट हाउस में मीडिया से बात करते हुए कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि माफिया मुख्तार अंसारी से मिलने के बाद ओमप्रकाश राजभर यानी असलम राजभर का असली चेहरा बेनकाब हो गया है। अनिल राजभर ने कहा कि ओमप्रकाश उर्फ़ असलम राजभर मुख्तार और समाजवादी पार्टी (सपा) की सियासी दलाली कर रहे हैं।
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लखनऊः उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव पास आ रहे हैं, वैसे-वैसे नेताओं का एक-दूसरे पर हमला तेज होता जा रहा है। सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने मंगलवार को बांदा जेल में कैद गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के साथ मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद राज्य में सियासी सरगर्मी इतनी बढ़ गई कि बुधवार को योगी कैबिनेट में मंत्री अनिल राजभर ने ओमप्रकाश राजभर पर निशाना साधा। कैबिनेट मंत्री ने ओमप्रकाश राजभर को मुख्तार अंसारी का दलाल करार देते हुए कहा कि मुख्तार अंसारी को मऊ रैली का हिसाब देने ओमप्रकाश राजभर बांदा जेल पहुंचे थे। इतना ही नहीं, कैबिनेट मंत्री ने ओमप्रकाश राजभर को नया नाम भी दे डाला। उन्होंने ओमप्रकाश राजभर को असलम राजभर कहा। बता दें कि मंगलवार को ओमप्रकाश राजभर बांदा जेल में मुख्तार अंसारी से मिलने गए थे। माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास के साथ जेल पहुंचे ओमप्रकाश ने वहां लगभग एक घंटे बिताया था। वाराणसी के सर्किट हाउस में मीडिया से बात करते हुए कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि माफिया मुख्तार अंसारी से मिलने के बाद ओमप्रकाश राजभर यानी असलम राजभर का असली चेहरा बेनकाब हो गया है। अनिल राजभर ने कहा कि ओमप्रकाश उर्फ़ असलम राजभर मुख्तार और समाजवादी पार्टी की सियासी दलाली कर रहे हैं।
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सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को गुरुवार को आरबीआई से एक अन्य राहत मिली। आरबीआई ने कोविड-19 महामारी से प्रभावित छोटे व्यवसायियों के लिए ऋणों के पुनर्गठन की अनुमति दी है। 1 मार्च 2020 तक गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) से बचे रहे और 'स्टैंडर्ड' अकाउंट के तौर पर चिन्हित एमएसएमई को अब उस योजना का लाभ मिलेगा, जिसे 1 मार्च 2021 से लागू किया जाएगा। यह 31 दिसंबर 2020 तक योजना का विस्तार है, जो 1 जनवरी 2020 तक स्टैंडर्ड खातों के लिए मान्य थी।
यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि एमएसएमई ऋण खातों के एनपीए में फंसने की आशंका अन्य की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ गई है। पिछले महीने जारी अपनी वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट में आरबीआई ने कहा था कि एमएसएमई सेक्टर महामारी के दौरान नकदी प्रवाह के अभाव से प्रभावित हुआ है।
हालांकि, सिर्फ जीएसटी के तहत पंजीकृत और 1 मार्च, 2020 तक 25 करोड़ रुपये तक की उधारी वाले एमएसएमई को ही इस योजना में शामिल किया जाएगा।
मौजूदा पुनर्गठन योजना करीब 900,000 एमएसएमई के लिए लागू थी। 31 जनवरी, 2020 तक 6 लाख से ज्यादा एमएसएमई खातों को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा पुनर्गठित किया गया था। ये खाते 22,650 करोड़ रुपये की राशि से जुड़े हुए थे।
आरबीआई के एक ताजा विश्लेषण से पता चलता है कि एमएसएमई का मोरेटोरियम सुविधा (यानी ऋण अदायगी स्थगन) पाने के संदर्भ में ऋण सेगमेंट में सर्वाधिक योगदान था। एमएसएमई के लिए करीब 65 प्रतिशत बकाया ऋण 30 अप्रैल तक मोरेटोरियम के तहत शामिल थे।
यूनियन बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी राजकिरण राय जी ने कहा कि आरबीआई के इस कदम से एमएसएमई अगले एक-दो वर्षों में सामान्य हालात में लौटने में सक्षम हो जाएंगे। राय ने कहा, 'नीतिगत निर्णय एमएसएमई की कार्य प्रणाली की अच्छी समझ को दर्शाते हैं और पुनर्गठन से एमएसएमई क्षेत्र में एनपीए नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलेगी। इस कदम के साथ साथ सरकार की आपात ऋण व्यवस्था से भी छोटे उद्योगों को ऋण अदायगी के त्वरित दबाव के बगैर अपना व्यवसाय पुनः शुरू करने में मदद मिलेगी। ' उन्होंने कहा कि हालांकि कॉरपोरेट खातों का पुनर्गठन कई सुरक्षात्मक उपायों से जुड़ा होगा, वहीं एमएसएमई के लिए यह योजना ज्यादा उदार है। भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम संघ (एफआईएसएमई) का कहना है कि कई लेनदारों के प्रतिस्पर्धी दावों की वजह से पुनर्गठन या परिसमापन प्रक्रिया नुकसान में चल रहे एमएसएइर्म के लिए कठिन हो जाएगी, क्योंकि वे भागीदार कंपनियों में दिवालिया नियमों के अभाव में एमएसएमई परिसंपत्तियों पर नियंत्रण चाहेंगे।
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सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों को गुरुवार को आरबीआई से एक अन्य राहत मिली। आरबीआई ने कोविड-उन्नीस महामारी से प्रभावित छोटे व्यवसायियों के लिए ऋणों के पुनर्गठन की अनुमति दी है। एक मार्च दो हज़ार बीस तक गैर-निष्पादित आस्तियों से बचे रहे और 'स्टैंडर्ड' अकाउंट के तौर पर चिन्हित एमएसएमई को अब उस योजना का लाभ मिलेगा, जिसे एक मार्च दो हज़ार इक्कीस से लागू किया जाएगा। यह इकतीस दिसंबर दो हज़ार बीस तक योजना का विस्तार है, जो एक जनवरी दो हज़ार बीस तक स्टैंडर्ड खातों के लिए मान्य थी। यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि एमएसएमई ऋण खातों के एनपीए में फंसने की आशंका अन्य की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ गई है। पिछले महीने जारी अपनी वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट में आरबीआई ने कहा था कि एमएसएमई सेक्टर महामारी के दौरान नकदी प्रवाह के अभाव से प्रभावित हुआ है। हालांकि, सिर्फ जीएसटी के तहत पंजीकृत और एक मार्च, दो हज़ार बीस तक पच्चीस करोड़ रुपये तक की उधारी वाले एमएसएमई को ही इस योजना में शामिल किया जाएगा। मौजूदा पुनर्गठन योजना करीब नौ सौ,शून्य एमएसएमई के लिए लागू थी। इकतीस जनवरी, दो हज़ार बीस तक छः लाख से ज्यादा एमएसएमई खातों को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा पुनर्गठित किया गया था। ये खाते बाईस,छः सौ पचास करोड़ रुपये की राशि से जुड़े हुए थे। आरबीआई के एक ताजा विश्लेषण से पता चलता है कि एमएसएमई का मोरेटोरियम सुविधा पाने के संदर्भ में ऋण सेगमेंट में सर्वाधिक योगदान था। एमएसएमई के लिए करीब पैंसठ प्रतिशत बकाया ऋण तीस अप्रैल तक मोरेटोरियम के तहत शामिल थे। यूनियन बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी राजकिरण राय जी ने कहा कि आरबीआई के इस कदम से एमएसएमई अगले एक-दो वर्षों में सामान्य हालात में लौटने में सक्षम हो जाएंगे। राय ने कहा, 'नीतिगत निर्णय एमएसएमई की कार्य प्रणाली की अच्छी समझ को दर्शाते हैं और पुनर्गठन से एमएसएमई क्षेत्र में एनपीए नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलेगी। इस कदम के साथ साथ सरकार की आपात ऋण व्यवस्था से भी छोटे उद्योगों को ऋण अदायगी के त्वरित दबाव के बगैर अपना व्यवसाय पुनः शुरू करने में मदद मिलेगी। ' उन्होंने कहा कि हालांकि कॉरपोरेट खातों का पुनर्गठन कई सुरक्षात्मक उपायों से जुड़ा होगा, वहीं एमएसएमई के लिए यह योजना ज्यादा उदार है। भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम संघ का कहना है कि कई लेनदारों के प्रतिस्पर्धी दावों की वजह से पुनर्गठन या परिसमापन प्रक्रिया नुकसान में चल रहे एमएसएइर्म के लिए कठिन हो जाएगी, क्योंकि वे भागीदार कंपनियों में दिवालिया नियमों के अभाव में एमएसएमई परिसंपत्तियों पर नियंत्रण चाहेंगे।
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पूर्व महापौर दीपक भुवानिया को जदयू का मुख्य जिला प्रवक्ता बनाया गया। वे जदयू नेता हैं। इसके अलावा भी विभिन्न संगठन में कई पदों पर कार्यकर्ताओं का मनोनयन हुआ है। पदाधिकारियों के मनोनयन पर उन्हें बधाई दी गई है।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर शहर के पूर्व महापौर दीपक कुमार भुवानियां उर्फ दीपू भुवानियां को प्रदेश जदयू ने मुख्य जिला प्रवक्ता बनाया है। उनके मनोनयन से संबंधित अधिसूचना बिहार प्रदेश जनता दल यूनाइटेड की तरफ से जारी किया गया है। जिसमें 41 जिलों के मुख्य प्रवक्ता शामिल हैं। रवि कुमार को नवगछिया का मुख्य प्रवक्ता बनाया गया है। दीपू भुवानियां के जिला प्रवक्ता बनने में युवा जदयू के राष्ट्रीय सचिव राकेश कुमार ओझा, सुड्डू साईं, संजय साह, अर्जुन प्रसाद साह, संजय राम, दीपक गुप्ता, हसनैन अंसारी, कुणाल रत्नप्रिय आदि शामिल हैं।
कहलगांव के जगन्नाथ स्वामी भवन में कहलगांव व्यवसायी संघ की हुई बैठक में संघ की नई कार्यकारिणी समिति के गठन का निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता अर्जुन चौधरी ने की। सर्वसम्मति से अध्यक्ष सुमित खेतान, कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार सरसहाय, उपाध्यक्ष राजेश बांकिया, पवन चौधरी, अनंत चौधरी, अनिल चौधरी, सचिव मनोज घोष, उप सचिव सौरभ चमडिय़ा, अजित चमडिय़ा, संगठन मंत्री शिवकुमार रूंगटा, हेमंत अग्रवाल, विनोद साह, कोषाध्यक्ष कमल मांझी, अजित गुप्ता, मीडिया प्रभारी सुनील रूंगटा, संरक्षक देवकीनंदन शर्मा, अर्जुन चौधरी, अशोक साह, गोपाल मारोदिया, प्रमोद चमडिय़ा चुने गए।
शंकर साह विक्रमशिला महाविद्यालय कहलगांव में शिक्षक संघ की हुई एक बैठक में संगठन पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता अनादि प्रसाद सिंह ने की। बैठक में डॉ. विनय कुमार सिंह के सेवानिवृत्त होने एवं डॉ. पवन कुमार सिंह के त्यागपत्र देने के कारण अध्यक्ष एवं सचिव का पद रिक्त होने के चलते संघ के पुनर्गठन का निर्णय लिया गया। सर्वसम्मति से अध्यक्ष अनादि प्रसाद सिंह,उपाध्यक्ष अखलेश कुमार,सचिव संतोष कुमार, संयुक्त सचिव डा निकेश कुमार,कार्यालय सचिव तमन कुमार, कोषाध्यक्ष शत्रुघन कुमार, संरक्षक डा संगीता झा एवं डा पवन कुमार सिंह चुने गए।
कन्फेडरेशन ऑफ रियल इस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया बिहार शाखा के पदाधिकारियों का चुनाव किया गया। भागलपुर के आलोक अग्रवाल को उपाध्यक्ष बनाया गया। उपाध्यक्ष बनाए जाने पर स्थानीय बिल्डरों ने बधाई दी है। बधाई देने वालों में नितेश संथालिया, विनीत चौधरी, गोविंद अग्रवाल एवं अन्य शामिल हैं।
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पूर्व महापौर दीपक भुवानिया को जदयू का मुख्य जिला प्रवक्ता बनाया गया। वे जदयू नेता हैं। इसके अलावा भी विभिन्न संगठन में कई पदों पर कार्यकर्ताओं का मनोनयन हुआ है। पदाधिकारियों के मनोनयन पर उन्हें बधाई दी गई है। जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर शहर के पूर्व महापौर दीपक कुमार भुवानियां उर्फ दीपू भुवानियां को प्रदेश जदयू ने मुख्य जिला प्रवक्ता बनाया है। उनके मनोनयन से संबंधित अधिसूचना बिहार प्रदेश जनता दल यूनाइटेड की तरफ से जारी किया गया है। जिसमें इकतालीस जिलों के मुख्य प्रवक्ता शामिल हैं। रवि कुमार को नवगछिया का मुख्य प्रवक्ता बनाया गया है। दीपू भुवानियां के जिला प्रवक्ता बनने में युवा जदयू के राष्ट्रीय सचिव राकेश कुमार ओझा, सुड्डू साईं, संजय साह, अर्जुन प्रसाद साह, संजय राम, दीपक गुप्ता, हसनैन अंसारी, कुणाल रत्नप्रिय आदि शामिल हैं। कहलगांव के जगन्नाथ स्वामी भवन में कहलगांव व्यवसायी संघ की हुई बैठक में संघ की नई कार्यकारिणी समिति के गठन का निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता अर्जुन चौधरी ने की। सर्वसम्मति से अध्यक्ष सुमित खेतान, कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार सरसहाय, उपाध्यक्ष राजेश बांकिया, पवन चौधरी, अनंत चौधरी, अनिल चौधरी, सचिव मनोज घोष, उप सचिव सौरभ चमडिय़ा, अजित चमडिय़ा, संगठन मंत्री शिवकुमार रूंगटा, हेमंत अग्रवाल, विनोद साह, कोषाध्यक्ष कमल मांझी, अजित गुप्ता, मीडिया प्रभारी सुनील रूंगटा, संरक्षक देवकीनंदन शर्मा, अर्जुन चौधरी, अशोक साह, गोपाल मारोदिया, प्रमोद चमडिय़ा चुने गए। शंकर साह विक्रमशिला महाविद्यालय कहलगांव में शिक्षक संघ की हुई एक बैठक में संगठन पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता अनादि प्रसाद सिंह ने की। बैठक में डॉ. विनय कुमार सिंह के सेवानिवृत्त होने एवं डॉ. पवन कुमार सिंह के त्यागपत्र देने के कारण अध्यक्ष एवं सचिव का पद रिक्त होने के चलते संघ के पुनर्गठन का निर्णय लिया गया। सर्वसम्मति से अध्यक्ष अनादि प्रसाद सिंह,उपाध्यक्ष अखलेश कुमार,सचिव संतोष कुमार, संयुक्त सचिव डा निकेश कुमार,कार्यालय सचिव तमन कुमार, कोषाध्यक्ष शत्रुघन कुमार, संरक्षक डा संगीता झा एवं डा पवन कुमार सिंह चुने गए। कन्फेडरेशन ऑफ रियल इस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया बिहार शाखा के पदाधिकारियों का चुनाव किया गया। भागलपुर के आलोक अग्रवाल को उपाध्यक्ष बनाया गया। उपाध्यक्ष बनाए जाने पर स्थानीय बिल्डरों ने बधाई दी है। बधाई देने वालों में नितेश संथालिया, विनीत चौधरी, गोविंद अग्रवाल एवं अन्य शामिल हैं।
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Income Tax: 15 मार्च 2023 वित्त वर्ष 2022-23 के लिए एडवांस टैक्स (Advance Tax) की चौथी किस्त जमा करने की आखिरी तारीख है. इनकम टैक्स विभाग ( Income Tax Department) टैक्सपेयर्स ( Taxpayers) को एडवांस टैक्स जमा करने के लिए लगातार मैसेज भेज रहा है. लेकिन कुछ टैक्सपेयर्स के पास टैक्स विभाग ने ऐसे मैसेज भेजे हैं जिसकी शब्दावली को लेकर घोर आपत्ति जाहिर की जा रही है. टैक्स जानकारों का मानना है कि टैक्स विभाग के इस मैसेज से टैक्सपेयर्स में भय का माहौल पैदा हो रहा है. सोशल मीडिया (Social Media) पर टैक्स विभाग का ये मैसेज वायरल भी हो रहा है.
इनकम टैक्स विभाग ने टैक्सपेयर्स को एडवांस टैक्स जमा करने के लिए मैसेज भेजे हैं. टैक्सपेयर्स को सावधान करते हुए इनकम टैक्स विभाग लिखता है, "इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को वित्त वर्ष 2022-23 ( एसेसमेंट ईयर 2023-24) के दौरान कुछ महत्वपूर्ण फाइनैंशियल ट्रांजैक्शन की जानकारी मिली है. इन ट्रांजैक्शन को कम्पलॉयंस पोर्टल के ई-कैंपेन टैब पर जाकर आप देख सकते हैं और ध्यान से समूचित एडवांस टैक्स जमा करायें. " टैक्स विभाग के मुताबिक आप https://eportal. incometax. gov. in/ में लॉगिन कर सर्विसेस टैब में एनुअल इंफॉरमेशन स्टेटमेंट (AIS) पर क्लिक कर कम्पलॉयंस पोर्टल को एक्सेस कर सकते हैं. कम्पलॉयंस पोर्टल ( Compliance Portal) में ई-कैंपेन टैब पर क्लिक करना होगा. उसके बाद कैंपेन टाईप में सिग्नीफिकेंट ट्रांजैक्शन (Significant Transaction) पर जाना होगा.
आईसीएआई ( ICAI) के पूर्व प्रेसीडेंट वेद जैन के मुताबिक इनकम टैक्स विभाग टैक्सपेयर्स को 15 मार्च 2023 तक एडवांस टैक्स के भुगतान करने के लिए जागरूक कर रहा है. टैक्सपेयर्स को संदेश देना अच्छी बात है. लेकिन मैसेज का जो टेक्स्ट है उससे टैक्सपेयर्स में डर और बेचैनी है. इनकम टैक्स विभाग के मैसेज से टैक्सपेयर्स को ऐसा लग रहा है कि जैसे उसने कुछ गलत काम किया है. वेद जैन ने कहते हैं, फाइनैंशियल ट्रांजैक्शन का अर्थ ये नहीं है कि टैक्सपेयर्स के लिए एडवांस टैक्स देना जरूरी है. उन्होंने टैक्स विभाग को विनम्र और शालीन होने की नसीहत दी है जिससे टैक्सपेयर्स और टैक्स विभाग के बीच भरोसे की खाई को भरने में मदद मिल सके.
सोशल मीडिया पर कुछ चार्टड अकाउंटेंट के पोस्ट वायरल हो रहे हैं. चिराग चौहान ने ट्वीट कर इनकम टैक्स विभाग से कहा कि वो इस प्रकार के डराने वाले बल्क मैसेज भेजना बंद करे. उन्होंने भी कहा कि फाइनैंशियल ट्रांजैक्शन करने का मतलब ये नहीं कि एडवांस टैक्स का भुगतान देना बनता है.
ये पहला मौका नहीं है जब इनकम टैक्स के मैसेज के कंटेंट पर आपत्ति जाहिर की जा रही है. बीते वर्ष जुलाई एसेसमेंट 2022-23 के लिए टैक्स विभाग जब टैक्सपेयर्स को जब आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए मैसेज भेज रहा था तब भी टैक्स विभाग टैक्सपेयर्स से अंजाम भुगतने से बचने के लिए एसेसमेंट ईयर 2022-23 के लिए www. incometax. gov. in पर 31 जुलाई, 2022 से पहले आयकर रिटर्न दाखिल भरने की बात कर रहा था. इनकम टैक्स के इस मैसेज पर भी तब आपत्ति जाहिर की गई थी.
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Income Tax: पंद्रह मार्च दो हज़ार तेईस वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस के लिए एडवांस टैक्स की चौथी किस्त जमा करने की आखिरी तारीख है. इनकम टैक्स विभाग टैक्सपेयर्स को एडवांस टैक्स जमा करने के लिए लगातार मैसेज भेज रहा है. लेकिन कुछ टैक्सपेयर्स के पास टैक्स विभाग ने ऐसे मैसेज भेजे हैं जिसकी शब्दावली को लेकर घोर आपत्ति जाहिर की जा रही है. टैक्स जानकारों का मानना है कि टैक्स विभाग के इस मैसेज से टैक्सपेयर्स में भय का माहौल पैदा हो रहा है. सोशल मीडिया पर टैक्स विभाग का ये मैसेज वायरल भी हो रहा है. इनकम टैक्स विभाग ने टैक्सपेयर्स को एडवांस टैक्स जमा करने के लिए मैसेज भेजे हैं. टैक्सपेयर्स को सावधान करते हुए इनकम टैक्स विभाग लिखता है, "इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस के दौरान कुछ महत्वपूर्ण फाइनैंशियल ट्रांजैक्शन की जानकारी मिली है. इन ट्रांजैक्शन को कम्पलॉयंस पोर्टल के ई-कैंपेन टैब पर जाकर आप देख सकते हैं और ध्यान से समूचित एडवांस टैक्स जमा करायें. " टैक्स विभाग के मुताबिक आप https://eportal. incometax. gov. in/ में लॉगिन कर सर्विसेस टैब में एनुअल इंफॉरमेशन स्टेटमेंट पर क्लिक कर कम्पलॉयंस पोर्टल को एक्सेस कर सकते हैं. कम्पलॉयंस पोर्टल में ई-कैंपेन टैब पर क्लिक करना होगा. उसके बाद कैंपेन टाईप में सिग्नीफिकेंट ट्रांजैक्शन पर जाना होगा. आईसीएआई के पूर्व प्रेसीडेंट वेद जैन के मुताबिक इनकम टैक्स विभाग टैक्सपेयर्स को पंद्रह मार्च दो हज़ार तेईस तक एडवांस टैक्स के भुगतान करने के लिए जागरूक कर रहा है. टैक्सपेयर्स को संदेश देना अच्छी बात है. लेकिन मैसेज का जो टेक्स्ट है उससे टैक्सपेयर्स में डर और बेचैनी है. इनकम टैक्स विभाग के मैसेज से टैक्सपेयर्स को ऐसा लग रहा है कि जैसे उसने कुछ गलत काम किया है. वेद जैन ने कहते हैं, फाइनैंशियल ट्रांजैक्शन का अर्थ ये नहीं है कि टैक्सपेयर्स के लिए एडवांस टैक्स देना जरूरी है. उन्होंने टैक्स विभाग को विनम्र और शालीन होने की नसीहत दी है जिससे टैक्सपेयर्स और टैक्स विभाग के बीच भरोसे की खाई को भरने में मदद मिल सके. सोशल मीडिया पर कुछ चार्टड अकाउंटेंट के पोस्ट वायरल हो रहे हैं. चिराग चौहान ने ट्वीट कर इनकम टैक्स विभाग से कहा कि वो इस प्रकार के डराने वाले बल्क मैसेज भेजना बंद करे. उन्होंने भी कहा कि फाइनैंशियल ट्रांजैक्शन करने का मतलब ये नहीं कि एडवांस टैक्स का भुगतान देना बनता है. ये पहला मौका नहीं है जब इनकम टैक्स के मैसेज के कंटेंट पर आपत्ति जाहिर की जा रही है. बीते वर्ष जुलाई एसेसमेंट दो हज़ार बाईस-तेईस के लिए टैक्स विभाग जब टैक्सपेयर्स को जब आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए मैसेज भेज रहा था तब भी टैक्स विभाग टैक्सपेयर्स से अंजाम भुगतने से बचने के लिए एसेसमेंट ईयर दो हज़ार बाईस-तेईस के लिए www. incometax. gov. in पर इकतीस जुलाई, दो हज़ार बाईस से पहले आयकर रिटर्न दाखिल भरने की बात कर रहा था. इनकम टैक्स के इस मैसेज पर भी तब आपत्ति जाहिर की गई थी. ये भी पढ़ेंः
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दूसरे पक्ष की ओर से मुझे भी तार मिले थे। उनमें से एक मैंने माननीय एन.एन. सरकार को दिखाया था। वह सर्वश्री ठक्कर और बिड़ला ने भेजा था, जिन्होंने पूना समझौते के संबंध में हुई बातचीत के दौरान श्री गांधी की ओर से भाग लिया था और उन्होंने अपने पत्र में उसके मूल पाठ को उद्धृत किया है। किन्तु मैं आपको उनके बारे में परेशान करना नहीं चाहता था। पहले तो इसलिए कि महामहिम की सरकार द्वारा पूना समझौते को स्वीकार कर लिए जाने के बाद मेरी राय में यह मामला बन्द हो गया था और दूसरे इसलिए कि माननीय एन. एन. सरकार ने मुझे आश्वासन दिया था कि वह अपने द्वारा प्राप्त तारों को आपकी सूचनार्थ भेजने मात्र से संतुष्ट नहीं हुए, बल्कि उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि सर्वश्री ठक्कर और बिड़ला द्वारा अपने तार में प्रयुक्त 'अभिकथित व्यतिक्रम द्वारा समझौते के बारे में श्रम साध्य तर्क' में कोई बल नहीं और अंत में उसमें यह जोड़ दिया गया है 'कि बंगाल में गैर-दलित वर्गों के पूना समझौते में पक्षकार होने या उससे आबद्ध होने के तथ्य के बारे में कोई जांच भारत सरकार, बंगाल सरकार अथवा किसी अन्य विचार प्रवण और तटस्थ एजेन्सी के माध्यम से कराई जानी चाहिए', इसलिए उनके द्वारा उठाए गए प्रश्न पर मैं अपने विचार रखना आवश्यक समझता हूं।
मेरा पहला निवेदन है कि यदि यह मान लिया जाए कि बंगाल के हिंदुओं का पूना समझौते में प्रतिनिधित्व नहीं हुआ था, तो भी मात्र इसी कारण उसे बंगाल में लागू होने से नहीं रोका जा सकता। महामहिम की सरकार के सांप्रदायिक एवार्ड का पैरा-4 जिसके अंतर्गत उन्होंने अपने निर्णय की शर्तों को हटाने के लिए एक समझौते का उपबंध किया था, मेरी राय में यह संपूर्ण ब्रिटिश भारत के लिए एक परिकाल्पनिक योजना का अनुबंध नहीं करता और याद रहे पूना समझौता, पूरे ब्रिटिश भारत - सवर्ण और दलित - के लिए था। उसकी स्वीकृति के लिए प्रांत के स्थान पर प्रांत एक आवश्यक शर्त थी। वस्तुतः इससे भी आगे मेरा यह कहना है कि अनुबंध अकेले प्रांत की बाबत किसी समझौते के लिए भी सांप्रदायिक फैसले का आधार- तत्त्व नहीं है। जहां तक मैंने पैरा-4 पढ़ा है, उसमें केवल यह अनुबंधित है कि महामहिम की सरकार का समाधान होना चाहिए कि जिन समुदायों का इस बात से संबंध है, वे एक व्यावहारिक वैकल्पिक स्कीम के आधार पर आपस में सहमत हों। पैरा 4 के इस निर्वचन के बारे में यह कहना चाहता हूं कि बंगाल के सवर्ण हिंदुओं के प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पूना समझौते को बंगाल में लागू होने से नहीं रोक सकती। यदि प्रतिकूल निर्वचन सही है, तो पंजाब, संयुक्त प्रांत, बिहार और उड़ीसा के दलित वर्गों के लिए पूना समझौते को भंग कराने का रास्ता खुला रहेगा, क्योंकि उनका भी कतई प्रतिनिधित्व नहीं हुआ था।
मेरा दूसरा निवेदन है कि इस धारणा पर आगे बढ़ना वास्तव में जरूरी नहीं है कि बंगाल के सवर्ण हिंदुओं का प्रतिनिधित्व नहीं हुआ था, जैसा कि माननीय एन. एन. सरकार द्वारा आपको भेजे गए तार पर हस्ताक्षर करने वालों द्वारा कहा गया है। मैं यह जानता
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दूसरे पक्ष की ओर से मुझे भी तार मिले थे। उनमें से एक मैंने माननीय एन.एन. सरकार को दिखाया था। वह सर्वश्री ठक्कर और बिड़ला ने भेजा था, जिन्होंने पूना समझौते के संबंध में हुई बातचीत के दौरान श्री गांधी की ओर से भाग लिया था और उन्होंने अपने पत्र में उसके मूल पाठ को उद्धृत किया है। किन्तु मैं आपको उनके बारे में परेशान करना नहीं चाहता था। पहले तो इसलिए कि महामहिम की सरकार द्वारा पूना समझौते को स्वीकार कर लिए जाने के बाद मेरी राय में यह मामला बन्द हो गया था और दूसरे इसलिए कि माननीय एन. एन. सरकार ने मुझे आश्वासन दिया था कि वह अपने द्वारा प्राप्त तारों को आपकी सूचनार्थ भेजने मात्र से संतुष्ट नहीं हुए, बल्कि उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि सर्वश्री ठक्कर और बिड़ला द्वारा अपने तार में प्रयुक्त 'अभिकथित व्यतिक्रम द्वारा समझौते के बारे में श्रम साध्य तर्क' में कोई बल नहीं और अंत में उसमें यह जोड़ दिया गया है 'कि बंगाल में गैर-दलित वर्गों के पूना समझौते में पक्षकार होने या उससे आबद्ध होने के तथ्य के बारे में कोई जांच भारत सरकार, बंगाल सरकार अथवा किसी अन्य विचार प्रवण और तटस्थ एजेन्सी के माध्यम से कराई जानी चाहिए', इसलिए उनके द्वारा उठाए गए प्रश्न पर मैं अपने विचार रखना आवश्यक समझता हूं। मेरा पहला निवेदन है कि यदि यह मान लिया जाए कि बंगाल के हिंदुओं का पूना समझौते में प्रतिनिधित्व नहीं हुआ था, तो भी मात्र इसी कारण उसे बंगाल में लागू होने से नहीं रोका जा सकता। महामहिम की सरकार के सांप्रदायिक एवार्ड का पैरा-चार जिसके अंतर्गत उन्होंने अपने निर्णय की शर्तों को हटाने के लिए एक समझौते का उपबंध किया था, मेरी राय में यह संपूर्ण ब्रिटिश भारत के लिए एक परिकाल्पनिक योजना का अनुबंध नहीं करता और याद रहे पूना समझौता, पूरे ब्रिटिश भारत - सवर्ण और दलित - के लिए था। उसकी स्वीकृति के लिए प्रांत के स्थान पर प्रांत एक आवश्यक शर्त थी। वस्तुतः इससे भी आगे मेरा यह कहना है कि अनुबंध अकेले प्रांत की बाबत किसी समझौते के लिए भी सांप्रदायिक फैसले का आधार- तत्त्व नहीं है। जहां तक मैंने पैरा-चार पढ़ा है, उसमें केवल यह अनुबंधित है कि महामहिम की सरकार का समाधान होना चाहिए कि जिन समुदायों का इस बात से संबंध है, वे एक व्यावहारिक वैकल्पिक स्कीम के आधार पर आपस में सहमत हों। पैरा चार के इस निर्वचन के बारे में यह कहना चाहता हूं कि बंगाल के सवर्ण हिंदुओं के प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पूना समझौते को बंगाल में लागू होने से नहीं रोक सकती। यदि प्रतिकूल निर्वचन सही है, तो पंजाब, संयुक्त प्रांत, बिहार और उड़ीसा के दलित वर्गों के लिए पूना समझौते को भंग कराने का रास्ता खुला रहेगा, क्योंकि उनका भी कतई प्रतिनिधित्व नहीं हुआ था। मेरा दूसरा निवेदन है कि इस धारणा पर आगे बढ़ना वास्तव में जरूरी नहीं है कि बंगाल के सवर्ण हिंदुओं का प्रतिनिधित्व नहीं हुआ था, जैसा कि माननीय एन. एन. सरकार द्वारा आपको भेजे गए तार पर हस्ताक्षर करने वालों द्वारा कहा गया है। मैं यह जानता
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आईजीआईएमएस में नर्स की फर्जी नियुक्ति कराने के बदले पैसा लेने के आरोप में एक सहायक को गिरफ्तार किया गया है। अस्पताल सहायक एक नर्स की बहाली कराने की डीलिंग करते समय रंगेहाथ पकड़ा गया था।
राजधानी पटना के आईजीआईएमएस में नर्स की फर्जी नियुक्ति कराने के बदले पैसा लेने के आरोप में एक सहायक को गिरफ्तार किया गया है। अस्पताल सहायक एक नर्स की बहाली कराने की डीलिंग करते समय रंगेहाथ पकड़ा गया था। उसे उपनिदेशक डॉ. मनीष मंडल के नेतृत्व में गठित टीम ने औचक छापेमारी कर पकड़ा। उस समय सहायक सूर्यदीप कुमार एक महिला नर्स से नियुक्ति के बदले 60 हजार रुपये की मांग कर रहा था। वह अस्पताल के सांस एवं छाती रोग विभाग में सहायक के पद पर कार्यरत है। शास्त्रीनगर थाने में उसके खिलाफ अस्पताल प्रशासन ने प्राथमिकी दर्ज करायी है। पिछले एक साल में दूसरी बार ऐसे मामले में किसी अस्पताल के कर्मी की गिरफ्तारी हुई है। एक साल पहले भी अस्पताल के दो कर्मियों की गिरफ्तारी हुई थी।
आईजीआईएमएस में जब भी नर्स व सहायकों की वैकेंसी आती है, वहां नियुक्ति के लिए कई फर्जी कंसल्टेंसी सेंटर भी खुल जाते हैं। वे लोगों को नियुक्ति का भरोसा देकर 50 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक की ठगी करते हैं। ऐसी ही एक शिकायत एक साल पहले अस्पताल प्रशासन को मिली थी। अस्पताल उपनिदेशक मनीष मंडल ने ऐसे कसल्टेंसी सेंटर से बचने की अपील लोगों से की। कहा कि अस्पताल की वेबसाइट पर वैकेंसी और नियुक्ति प्रक्रिया अपलोड की जाती है। विशेष जानकारी के लिए अस्पताल प्रशासन से भी संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी से भी नियुक्ति के लिए पैसे की मांग की जाती है तो वे उनके कार्यालय में आकर शिकायत कर सकते हैं।
उपनिदेशक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि सूर्यदीप की शिकायत एक महिला नर्स ने की थी। कुछ दिन पहले नर्स बहाली का साक्षात्कार हुआ था। इस तरह के फर्जीवाड़ा को रोकने के लिए उसी दिन परिणाम प्रकाशित कर दिया गया। चयनित सूची में नर्स का नाम नहीं था। उस नर्स को सूर्यदीप कुमार ने फोन करके बहाली कराने की बता कही। बदले में पहले 60 हजार रुपये की मांग भी की। नर्स को उसकी बातों पर संदेह हुआ। उसने इसकी शिकायत अस्पताल अधीक्षक से की। अधीक्षक के सामने ही सूर्यदीप से उसने फोन पर बात की। फोन पर उसकी बातों को सुनकर इस तरह के कई अन्य लोगों से पैसे वसूले जाने की जानकारी अधीक्षक को हुई। उन्होंने टीम बनाकर सूर्यकांत को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई। दोपहर बाद सूर्यदीप महिला नर्स को नियुक्ति पत्र देने के बुलाया था, उसी समय धरा गया।
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आईजीआईएमएस में नर्स की फर्जी नियुक्ति कराने के बदले पैसा लेने के आरोप में एक सहायक को गिरफ्तार किया गया है। अस्पताल सहायक एक नर्स की बहाली कराने की डीलिंग करते समय रंगेहाथ पकड़ा गया था। राजधानी पटना के आईजीआईएमएस में नर्स की फर्जी नियुक्ति कराने के बदले पैसा लेने के आरोप में एक सहायक को गिरफ्तार किया गया है। अस्पताल सहायक एक नर्स की बहाली कराने की डीलिंग करते समय रंगेहाथ पकड़ा गया था। उसे उपनिदेशक डॉ. मनीष मंडल के नेतृत्व में गठित टीम ने औचक छापेमारी कर पकड़ा। उस समय सहायक सूर्यदीप कुमार एक महिला नर्स से नियुक्ति के बदले साठ हजार रुपये की मांग कर रहा था। वह अस्पताल के सांस एवं छाती रोग विभाग में सहायक के पद पर कार्यरत है। शास्त्रीनगर थाने में उसके खिलाफ अस्पताल प्रशासन ने प्राथमिकी दर्ज करायी है। पिछले एक साल में दूसरी बार ऐसे मामले में किसी अस्पताल के कर्मी की गिरफ्तारी हुई है। एक साल पहले भी अस्पताल के दो कर्मियों की गिरफ्तारी हुई थी। आईजीआईएमएस में जब भी नर्स व सहायकों की वैकेंसी आती है, वहां नियुक्ति के लिए कई फर्जी कंसल्टेंसी सेंटर भी खुल जाते हैं। वे लोगों को नियुक्ति का भरोसा देकर पचास हजार से लेकर दो लाख रुपये तक की ठगी करते हैं। ऐसी ही एक शिकायत एक साल पहले अस्पताल प्रशासन को मिली थी। अस्पताल उपनिदेशक मनीष मंडल ने ऐसे कसल्टेंसी सेंटर से बचने की अपील लोगों से की। कहा कि अस्पताल की वेबसाइट पर वैकेंसी और नियुक्ति प्रक्रिया अपलोड की जाती है। विशेष जानकारी के लिए अस्पताल प्रशासन से भी संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी से भी नियुक्ति के लिए पैसे की मांग की जाती है तो वे उनके कार्यालय में आकर शिकायत कर सकते हैं। उपनिदेशक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि सूर्यदीप की शिकायत एक महिला नर्स ने की थी। कुछ दिन पहले नर्स बहाली का साक्षात्कार हुआ था। इस तरह के फर्जीवाड़ा को रोकने के लिए उसी दिन परिणाम प्रकाशित कर दिया गया। चयनित सूची में नर्स का नाम नहीं था। उस नर्स को सूर्यदीप कुमार ने फोन करके बहाली कराने की बता कही। बदले में पहले साठ हजार रुपये की मांग भी की। नर्स को उसकी बातों पर संदेह हुआ। उसने इसकी शिकायत अस्पताल अधीक्षक से की। अधीक्षक के सामने ही सूर्यदीप से उसने फोन पर बात की। फोन पर उसकी बातों को सुनकर इस तरह के कई अन्य लोगों से पैसे वसूले जाने की जानकारी अधीक्षक को हुई। उन्होंने टीम बनाकर सूर्यकांत को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई। दोपहर बाद सूर्यदीप महिला नर्स को नियुक्ति पत्र देने के बुलाया था, उसी समय धरा गया।
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'सुपर डांसर 2' (Super Dancer Chapter 2) शो के विजेता बिशाल शर्मा (Bishal Sharma) एक दूध वाले के बेटे हैं. उन्होंने अपने गायों को बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्रियों का नाम दिया है.
सोनी टीवी (Sony Tv) के डांसिंग रियलिटी शो (Dancing Reality Show) सुपर डांसर चैप्टर 4 (Super Dancer Chapter 4) में आज 'तीन की तिकड़ी' (Teen Ki Takdi) स्पेशल एपिसोड पेश किया गया. इस खास एपिसोड में अनीश (Aneesh) और उनके सुपर गुरु आकाश (Super Guru Akash) के साथ तड़का लगाने आए थे सुपर डांसर चैप्टर 2 (Super Dancer Chapter 2 Winner) के विनर बिशाल शर्मा. जोरहाट असम के बिशाल शर्मा (Bishal Sharma) उनकी गायों के लिए जाने जाते हैं. क्योंकि डांस के दीवाने बिशाल ने अपनी गायों के नाम बॉलीवुड की एक्ट्रेस के नाम पर रखे हैं. उनके पास अब तक ऐश्वर्या, दीपिका, कटरीना नाम की गायें है.
जब तीन का तड़का में आए हुए बिशाल को जजों ने उनकी गायों के बारे में पूछा तो असम के इस डांसर ने जवाब दिया कि अब उनकी गायों ने बछड़े को जन्म भी दिया है. जब गीता कपूर (Geeta Kapoor) ने बिशाल को उनके गायों के बछड़े के नाम पूछे तो बिशाल ने कहा कि उन्होंने उन बछड़ों का नाम सारा (Sara) और आलिया (Alia) रख दिया है. उनका जवाब सुनकर शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty), बादशाह के साथ साथ सभी जजेस जोर जोर से हंसने लगे. शो की जज गीता कपूर ने हंसते हंसते कहा कि लगता है 'सारा बॉलीवुड बिशाल ने अपने घर में पाला है.
#SuperAneesh, #SuperGuruAkash and #BishalSharma ki ye fantabulous performance set karegi full-on party vibes.
दरअसल सुपर गुरु आकाश शेट्टी ने बिशाल के साथ अपना एक्ट सेट करते हुए भी उसकी गाय के लिए प्यार ध्यान में रखते हुए, एक डांस कोरियोग्राफ किया था, जिसके लिए उन्हें सभी से स्टैंडिंग ओवेशन मिला.
डांस देख रैपर बादशाह (Rapper Badshah) ने उनसे कहा कि 'अब तक मैंने देखा है, नाच नाच के लोगों का पसीना निकल जाता है, कइयों का खून निकल जाता है लेकिन यह कौनसा तबेला है, जहां डांस करके दूध निकाल लेते हैं.' शो के जज अनुराग बसु (Anurag Basu) ने तुरंत बादशाह को जवाब दिया कि 'यह बिशाल का तबेला है. वहां आपको ऐश्वर्या (Aishwarya), कटरीना (Katrina), दीपिका (Deepika) सभी मिल जाएंगी, आपको एक बार जाना चाहिए वहां पर.'. शिल्पा शेट्टी भी इस परफॉर्मेंस से काफी खुश नज़र आईं. उन्होंने कहा कि यह एक्ट सुपर से ऊपर था.
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'सुपर डांसर दो' शो के विजेता बिशाल शर्मा एक दूध वाले के बेटे हैं. उन्होंने अपने गायों को बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्रियों का नाम दिया है. सोनी टीवी के डांसिंग रियलिटी शो सुपर डांसर चैप्टर चार में आज 'तीन की तिकड़ी' स्पेशल एपिसोड पेश किया गया. इस खास एपिसोड में अनीश और उनके सुपर गुरु आकाश के साथ तड़का लगाने आए थे सुपर डांसर चैप्टर दो के विनर बिशाल शर्मा. जोरहाट असम के बिशाल शर्मा उनकी गायों के लिए जाने जाते हैं. क्योंकि डांस के दीवाने बिशाल ने अपनी गायों के नाम बॉलीवुड की एक्ट्रेस के नाम पर रखे हैं. उनके पास अब तक ऐश्वर्या, दीपिका, कटरीना नाम की गायें है. जब तीन का तड़का में आए हुए बिशाल को जजों ने उनकी गायों के बारे में पूछा तो असम के इस डांसर ने जवाब दिया कि अब उनकी गायों ने बछड़े को जन्म भी दिया है. जब गीता कपूर ने बिशाल को उनके गायों के बछड़े के नाम पूछे तो बिशाल ने कहा कि उन्होंने उन बछड़ों का नाम सारा और आलिया रख दिया है. उनका जवाब सुनकर शिल्पा शेट्टी , बादशाह के साथ साथ सभी जजेस जोर जोर से हंसने लगे. शो की जज गीता कपूर ने हंसते हंसते कहा कि लगता है 'सारा बॉलीवुड बिशाल ने अपने घर में पाला है. #SuperAneesh, #SuperGuruAkash and #BishalSharma ki ye fantabulous performance set karegi full-on party vibes. दरअसल सुपर गुरु आकाश शेट्टी ने बिशाल के साथ अपना एक्ट सेट करते हुए भी उसकी गाय के लिए प्यार ध्यान में रखते हुए, एक डांस कोरियोग्राफ किया था, जिसके लिए उन्हें सभी से स्टैंडिंग ओवेशन मिला. डांस देख रैपर बादशाह ने उनसे कहा कि 'अब तक मैंने देखा है, नाच नाच के लोगों का पसीना निकल जाता है, कइयों का खून निकल जाता है लेकिन यह कौनसा तबेला है, जहां डांस करके दूध निकाल लेते हैं.' शो के जज अनुराग बसु ने तुरंत बादशाह को जवाब दिया कि 'यह बिशाल का तबेला है. वहां आपको ऐश्वर्या , कटरीना , दीपिका सभी मिल जाएंगी, आपको एक बार जाना चाहिए वहां पर.'. शिल्पा शेट्टी भी इस परफॉर्मेंस से काफी खुश नज़र आईं. उन्होंने कहा कि यह एक्ट सुपर से ऊपर था.
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गोरखपुर, 05 जुलाई . खादी तथा ग्रामोद्योग विभाग अब शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के उद्यमियों को एकमुश्त अनुदान देगा. यह 50 लाख रुपये तक की लागत के लिए होगा, जो बैंकों के माध्यम से मुहैया कराया जायेगा.
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी एके पाल के मुताबिक प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के अन्तर्गत अधिकतम 50 लाख रुपये तक के लागत की विभिन्न स्वरोजगारपरक इकाइयों की स्थापना के लिए ग्रामीण और शहरी उद्यमयों के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जायेगा.
सामान्य वर्ग के पुरूष लाभार्थी को कुल प्रोजेक्ट लागत का 10% एवं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक एवं महिलाओं को केवल 05% स्वयं का अंशदान ही लगाना होगा.
Bank से कुल स्वीकृत ऋण पर 15% से 35% तक नियमानुसार एक मुश्त अनुदान की व्यवस्था है. इसके साथ ही ग्रामीण अंचल के उद्यमियों को अधिकतम 25 लाख तक परियोजना लागत पर ही (स्व-अंशदान एवं एकमुश्त अनुदान को छोड़कर) Bank ऋण पर 03 वर्षो तक Bank द्वारा प्रभारित ब्याज छूट की अतिरिक्त सुविधा भी है.
ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के परम्परागत कारीगर एवं प्रशिक्षित, बेरोजगार, नवयुवक व नवयुवती इसका लाभ ले सकते हैं, जिनकी उम्र 18 वर्ष से पूर्ण हो चुकी है.
www. kviconline. gov. in/pmegpeportal/jsp/pmegponline. jsp पोर्टल पर KVIB एजेन्सी का चयन कर 20 जुलाई तक आनलाईन आवेदन कर सकते हैं. आनलाईन आवेदन की प्रिन्टेड प्रति के साथ सभी प्रमाण पत्रों जैसे-आयु, शैक्षिक योग्यता, जाति प्रमाण पत्र, अनुभव/प्रशिक्षण प्रमाणपत्र, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, कार्यशाला व कार्यस्थल का नजरी नक्शा (चौहद्दी सहित ग्राम प्रधान से प्रमाणित), आधार कार्ड, जनसंख्या प्रमाणपत्र आदि की छाया प्रतियां (हार्ड कापी), जिला ग्रामोद्योग कार्यालय, गोरखपुर में 25 जुलाई की शाम 05 बजे तक जमा करें.
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गोरखपुर, पाँच जुलाई . खादी तथा ग्रामोद्योग विभाग अब शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के उद्यमियों को एकमुश्त अनुदान देगा. यह पचास लाख रुपये तक की लागत के लिए होगा, जो बैंकों के माध्यम से मुहैया कराया जायेगा. जिला ग्रामोद्योग अधिकारी एके पाल के मुताबिक प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अन्तर्गत अधिकतम पचास लाख रुपये तक के लागत की विभिन्न स्वरोजगारपरक इकाइयों की स्थापना के लिए ग्रामीण और शहरी उद्यमयों के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जायेगा. सामान्य वर्ग के पुरूष लाभार्थी को कुल प्रोजेक्ट लागत का दस% एवं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक एवं महिलाओं को केवल पाँच% स्वयं का अंशदान ही लगाना होगा. Bank से कुल स्वीकृत ऋण पर पंद्रह% से पैंतीस% तक नियमानुसार एक मुश्त अनुदान की व्यवस्था है. इसके साथ ही ग्रामीण अंचल के उद्यमियों को अधिकतम पच्चीस लाख तक परियोजना लागत पर ही Bank ऋण पर तीन वर्षो तक Bank द्वारा प्रभारित ब्याज छूट की अतिरिक्त सुविधा भी है. ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के परम्परागत कारीगर एवं प्रशिक्षित, बेरोजगार, नवयुवक व नवयुवती इसका लाभ ले सकते हैं, जिनकी उम्र अट्ठारह वर्ष से पूर्ण हो चुकी है. www. kviconline. gov. in/pmegpeportal/jsp/pmegponline. jsp पोर्टल पर KVIB एजेन्सी का चयन कर बीस जुलाई तक आनलाईन आवेदन कर सकते हैं. आनलाईन आवेदन की प्रिन्टेड प्रति के साथ सभी प्रमाण पत्रों जैसे-आयु, शैक्षिक योग्यता, जाति प्रमाण पत्र, अनुभव/प्रशिक्षण प्रमाणपत्र, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, कार्यशाला व कार्यस्थल का नजरी नक्शा , आधार कार्ड, जनसंख्या प्रमाणपत्र आदि की छाया प्रतियां , जिला ग्रामोद्योग कार्यालय, गोरखपुर में पच्चीस जुलाई की शाम पाँच बजे तक जमा करें.
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धर्म मुख्य और सम्प्रदाय गौण होता है। भगवान् महावीर ने सम्प्रदाय को मान्यता दी पर मुख्यता नहीं दी। जो लोग सम्प्रदाय को मुख्यता दे रहे थे, उनके दृष्टि कोण को महावीर ने सारहीन बतलाया ।
जो धर्म-नेता अपने उपस्थान में आने वाले के लिए ही मुक्ति का द्वार खोलते है और दूसरों के लिए उसे बन्द रखते हैं, वे महावीर की दृष्टि में अहिंसक नहीं हैं। अपनी ही कल्पना के ताने-बाने में उलझे हुए हैं।
भगवान् महावीर ने मोक्ष का अनुबन्ध किसी सम्प्रदाय के साथ नहीं माना, किन्तु धर्म के साथ माना। भगवान् 'अश्रुत्वा केवली' के सिद्धान्त की स्थापना कर असाम्प्रदायिक दृष्टि को चरम बिन्दु तक ले गए। 'अश्रुत्वा केवली' उस व्यक्ति का नाम है जिसने कभी धर्म नहीं सुना, किन्तु अपनी नैसर्गिक निर्मलता के कारण केवली की कक्षा तक पहुंच गया । 'अश्रुत्वा केवली' के साथ किसी भी सम्प्रदाय, परम्परा या धर्माराधना की पद्धति का सम्बन्ध नहीं होता। उस सम्प्रदाय - मुक्त व्यक्ति को मोक्ष का अधिकारी मानकर महावीर ने धर्म की असाम्प्रदायिक सत्ता को मान्यता दे दी।
महावीर ने एक सिद्धान्त की स्थापना और की। उसके अनुसार किसी भी सम्प्रदाय में प्रव्रजित व्यक्ति मुक्त हो सकता है। इस स्थापना में सम्प्रदाय के बीच व्यवधान डालने वाली खाइयों को पाटने का प्रयत्न है। कोई भी सम्प्रदाय किसी व्यक्ति को मुक्ति का आश्वासन दे सकता है, यदि वह व्यक्ति धर्म से अनुप्राणित हो । कोई भी सम्प्रदाय किसी व्यक्ति को मुक्ति का आश्वासन नहीं दे सकता, यदि वह व्यक्ति धर्म से अनुप्राणित न हो। मोक्ष को सम्प्रदाय की सीमा से मुक्त कर भगवान् महावीर ने धर्म की असाम्प्रदायिक सत्ता के सिद्धान्त पर दोहरी मोहर लगा दी ।
भगवान् महावीर मुनित्व के महान् प्रवर्तक थे । वे मोक्ष की साधना के लिए मुति - जीवन बिताने को बहुत आवश्यक मानते थे। फिर भी उनकी प्रतिबद्धता का अन्तिम स्पर्श सच्चाई के साथ था, किसी नियम के साथ नहीं । भगवान् ने 'गृहलिंग सिद्ध' की स्वीकृति दे क्या मोक्ष-सिद्धि के लिए मुनि जीवन की एकछत्रता को चुनौती नहीं दी ? घरवासी गृहस्थ भी किसी क्षण मुक्त हो सकता है, इसका अर्थ है कि धर्म की आराधना अमुक प्रकार के वेश या अमुक परम्परा की जीवनप्रणाली को स्वीकार किए बिना भी हो सकती है। जीवन-व्यापी सत्य जीवन को कभी और कहीं भी आलोकित कर सकता है। इस सत्य को अनावृत कर भगवान् ने धर्म को आकाश की भांति व्यापक बना दिया । 'प्रत्येक बुद्ध-सिद्ध' का सिद्धान्त भी साम्प्रदायिक दृष्टि के प्रति मुक्त विद्रोह है। 'प्रत्येक बुद्ध' किसी सम्प्रदाय से प्रभावित तथा किसी धर्म-परम्परा से प्रतिबद्ध होकर प्रव्रजित नहीं होते। वे अपने ज्ञान से ही प्रबुद्ध होते हैं। भगवान् ने उनको उतनी ही मान्यता दी, जितनी अपनी
भगवान् महावीर : ५३
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धर्म मुख्य और सम्प्रदाय गौण होता है। भगवान् महावीर ने सम्प्रदाय को मान्यता दी पर मुख्यता नहीं दी। जो लोग सम्प्रदाय को मुख्यता दे रहे थे, उनके दृष्टि कोण को महावीर ने सारहीन बतलाया । जो धर्म-नेता अपने उपस्थान में आने वाले के लिए ही मुक्ति का द्वार खोलते है और दूसरों के लिए उसे बन्द रखते हैं, वे महावीर की दृष्टि में अहिंसक नहीं हैं। अपनी ही कल्पना के ताने-बाने में उलझे हुए हैं। भगवान् महावीर ने मोक्ष का अनुबन्ध किसी सम्प्रदाय के साथ नहीं माना, किन्तु धर्म के साथ माना। भगवान् 'अश्रुत्वा केवली' के सिद्धान्त की स्थापना कर असाम्प्रदायिक दृष्टि को चरम बिन्दु तक ले गए। 'अश्रुत्वा केवली' उस व्यक्ति का नाम है जिसने कभी धर्म नहीं सुना, किन्तु अपनी नैसर्गिक निर्मलता के कारण केवली की कक्षा तक पहुंच गया । 'अश्रुत्वा केवली' के साथ किसी भी सम्प्रदाय, परम्परा या धर्माराधना की पद्धति का सम्बन्ध नहीं होता। उस सम्प्रदाय - मुक्त व्यक्ति को मोक्ष का अधिकारी मानकर महावीर ने धर्म की असाम्प्रदायिक सत्ता को मान्यता दे दी। महावीर ने एक सिद्धान्त की स्थापना और की। उसके अनुसार किसी भी सम्प्रदाय में प्रव्रजित व्यक्ति मुक्त हो सकता है। इस स्थापना में सम्प्रदाय के बीच व्यवधान डालने वाली खाइयों को पाटने का प्रयत्न है। कोई भी सम्प्रदाय किसी व्यक्ति को मुक्ति का आश्वासन दे सकता है, यदि वह व्यक्ति धर्म से अनुप्राणित हो । कोई भी सम्प्रदाय किसी व्यक्ति को मुक्ति का आश्वासन नहीं दे सकता, यदि वह व्यक्ति धर्म से अनुप्राणित न हो। मोक्ष को सम्प्रदाय की सीमा से मुक्त कर भगवान् महावीर ने धर्म की असाम्प्रदायिक सत्ता के सिद्धान्त पर दोहरी मोहर लगा दी । भगवान् महावीर मुनित्व के महान् प्रवर्तक थे । वे मोक्ष की साधना के लिए मुति - जीवन बिताने को बहुत आवश्यक मानते थे। फिर भी उनकी प्रतिबद्धता का अन्तिम स्पर्श सच्चाई के साथ था, किसी नियम के साथ नहीं । भगवान् ने 'गृहलिंग सिद्ध' की स्वीकृति दे क्या मोक्ष-सिद्धि के लिए मुनि जीवन की एकछत्रता को चुनौती नहीं दी ? घरवासी गृहस्थ भी किसी क्षण मुक्त हो सकता है, इसका अर्थ है कि धर्म की आराधना अमुक प्रकार के वेश या अमुक परम्परा की जीवनप्रणाली को स्वीकार किए बिना भी हो सकती है। जीवन-व्यापी सत्य जीवन को कभी और कहीं भी आलोकित कर सकता है। इस सत्य को अनावृत कर भगवान् ने धर्म को आकाश की भांति व्यापक बना दिया । 'प्रत्येक बुद्ध-सिद्ध' का सिद्धान्त भी साम्प्रदायिक दृष्टि के प्रति मुक्त विद्रोह है। 'प्रत्येक बुद्ध' किसी सम्प्रदाय से प्रभावित तथा किसी धर्म-परम्परा से प्रतिबद्ध होकर प्रव्रजित नहीं होते। वे अपने ज्ञान से ही प्रबुद्ध होते हैं। भगवान् ने उनको उतनी ही मान्यता दी, जितनी अपनी भगवान् महावीर : तिरेपन
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सलामी बल्लेबाज बाबर आजम ने 40 गेंदों पर पांच चौकों व एक छक्के की मदद से 50 रन बनाए। उन्होंने साहिबजादा फरहान के साथ पहले विकेट के लिए 93 रन जोड़े। फरहान ने 38 गेंदों पर दो चौकों व तीन छक्कों की बदौलत 39 रन ठोके।
मोहम्मद हफीज ने 20 गेंदों पर तीन चौकों व एक छक्के के सहारे नाबाद 32 रन की पारी खेली। शोएब मलिक ने 18 रन का योगदान दिया। आसिफ अली (4) व फहीम अशरफ (0) जल्दी आउट हो गए। मिशेल मार्श ने दो और तीन गेंदबाजों एडम जम्पा, एंड्रयू टाई व नाथन लियोन ने 1-1 विकेट लिया।
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सलामी बल्लेबाज बाबर आजम ने चालीस गेंदों पर पांच चौकों व एक छक्के की मदद से पचास रन बनाए। उन्होंने साहिबजादा फरहान के साथ पहले विकेट के लिए तिरानवे रन जोड़े। फरहान ने अड़तीस गेंदों पर दो चौकों व तीन छक्कों की बदौलत उनतालीस रन ठोके। मोहम्मद हफीज ने बीस गेंदों पर तीन चौकों व एक छक्के के सहारे नाबाद बत्तीस रन की पारी खेली। शोएब मलिक ने अट्ठारह रन का योगदान दिया। आसिफ अली व फहीम अशरफ जल्दी आउट हो गए। मिशेल मार्श ने दो और तीन गेंदबाजों एडम जम्पा, एंड्रयू टाई व नाथन लियोन ने एक-एक विकेट लिया।
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बरेली। बीएड काउंसलिंग में हिस्सा ले रहे उन विद्यार्थियों के लिए राहत की बात है, जिनके पास स्नातक, परास्नातक के रिजल्ट की मूल कॉपी नहीं है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि ऐसे विद्यार्थी अब इंटरनेट से रिजल्ट की कॉपी निकालकर ऑनलाइन अपलोड करके काउंसलिंग करा सकेंगे। बीएड के पहले चरण की काउंसलिंग में विद्यार्थी कम हिस्सा ले रहे हैं। इसका एक कारण यह भी पता चला है कि विद्यार्थियों के पास मूल रिजल्ट की कॉपी नहीं है। इसी को देखते हुए रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों को राहत दी है।
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बरेली। बीएड काउंसलिंग में हिस्सा ले रहे उन विद्यार्थियों के लिए राहत की बात है, जिनके पास स्नातक, परास्नातक के रिजल्ट की मूल कॉपी नहीं है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि ऐसे विद्यार्थी अब इंटरनेट से रिजल्ट की कॉपी निकालकर ऑनलाइन अपलोड करके काउंसलिंग करा सकेंगे। बीएड के पहले चरण की काउंसलिंग में विद्यार्थी कम हिस्सा ले रहे हैं। इसका एक कारण यह भी पता चला है कि विद्यार्थियों के पास मूल रिजल्ट की कॉपी नहीं है। इसी को देखते हुए रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों को राहत दी है।
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जियो 129 रुपये रिचार्ज (Recharge) प्लान (Plan)
Jio के 199 रुपये के रिचार्ज (Recharge) पैक में प्रतिदिन 1.5GB इंटरनेट डेटा मिलता है। इस पैक की वैलिडिटी 28 दिनों की है। इसका मतलब है कि ग्राहक को इस रिचार्ज (Recharge) पैक में कुल 42GB डेटा मिलेगा। यह प्रीपेड पैक अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग के साथ आता है। साथ ही ग्राहक रोजाना 100 फ्री एसएमएस भेज सकेंगे। इस जियो रिचार्ज (Recharge) पर जियो टीवी और जियो सिनेमा समेत सभी जियो ऐप्स का सब्सक्रिप्शन मुफ्त में उपलब्ध है। यह भी पढ़ेंः जियो धमाका प्लान्सः डेली डेटा लिमिट नहीं... रोजाना जितना डेटा चाहिए उतना इस्तेमाल करें..!
Jio के इन दोनों प्लान्स (Plans) की वैलिडिटी 28 दिनों की है। 349 रुपये के प्लान (Plan) में प्रतिदिन 3GB डेटा मिलता है। इस प्लान (Plan) में कुल 84GB डेटा मिलेगा। यह प्लान (Plan) प्रति दिन 100 एसएमएस भेजने की सुविधा के साथ Jio ऐप की सदस्यता प्रदान करता है। Jio के 499 रुपये के प्लान (Plan) में प्रतिदिन 3GB डेटा के साथ 6GB अतिरिक्त डेटा मिलता है। यानी इस प्लान (Plan) में कुल 90GB डेटा मिलेगा। Disney+ Hotstar सब्सक्रिप्शन प्लान (Plan) पर उपलब्ध है। इस प्लान (Plan) में रोजाना 100 एसएमएस भेजने की सुविधा है।
Note: यहाँ देखें एयरटेल, जियो, वोडाफोन आईडिया और बीएसएनएल के बेस्ट प्लान्स!
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जियो एक सौ उनतीस रुपयापये रिचार्ज प्लान Jio के एक सौ निन्यानवे रुपयापये के रिचार्ज पैक में प्रतिदिन एक.पाँचGB इंटरनेट डेटा मिलता है। इस पैक की वैलिडिटी अट्ठाईस दिनों की है। इसका मतलब है कि ग्राहक को इस रिचार्ज पैक में कुल बयालीसGB डेटा मिलेगा। यह प्रीपेड पैक अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग के साथ आता है। साथ ही ग्राहक रोजाना एक सौ फ्री एसएमएस भेज सकेंगे। इस जियो रिचार्ज पर जियो टीवी और जियो सिनेमा समेत सभी जियो ऐप्स का सब्सक्रिप्शन मुफ्त में उपलब्ध है। यह भी पढ़ेंः जियो धमाका प्लान्सः डेली डेटा लिमिट नहीं... रोजाना जितना डेटा चाहिए उतना इस्तेमाल करें..! Jio के इन दोनों प्लान्स की वैलिडिटी अट्ठाईस दिनों की है। तीन सौ उनचास रुपयापये के प्लान में प्रतिदिन तीनGB डेटा मिलता है। इस प्लान में कुल चौरासीGB डेटा मिलेगा। यह प्लान प्रति दिन एक सौ एसएमएस भेजने की सुविधा के साथ Jio ऐप की सदस्यता प्रदान करता है। Jio के चार सौ निन्यानवे रुपयापये के प्लान में प्रतिदिन तीनGB डेटा के साथ छःGB अतिरिक्त डेटा मिलता है। यानी इस प्लान में कुल नब्बेGB डेटा मिलेगा। Disney+ Hotstar सब्सक्रिप्शन प्लान पर उपलब्ध है। इस प्लान में रोजाना एक सौ एसएमएस भेजने की सुविधा है। Note: यहाँ देखें एयरटेल, जियो, वोडाफोन आईडिया और बीएसएनएल के बेस्ट प्लान्स!
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर ली है. इस मामले में सीबीआई ने प्रयागराज में दर्ज हुई एफआईआर को ही तहरीर बनाया है.
सीबीआई की दिल्ली यूनिट ने आईपीसी 306 में एफआईआर दर्ज की है और ये एफआईआर आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित यानी उकसाने की धारा में दर्ज हुई है. सीबीआई की टीम ने प्रयागराज पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है.
महंत नरेद्र गिरि महाराज की हत्या हुई थी या उन्हे आत्महत्या के लिए उकसाया गया था और इसके पीछे क्या कोई आपराधिक षडयंत्र भी था? सीबीआई इन तमाम एगंलो की जांच करेगी.
जिस कमरे में महंत नरेंद्र गिरि ने अपनी वसीयत लिखी थी, उस कमरे से एक कथित हस्तलिखित सुसाइड लेटर भी बरामद किया गया था और कई लोगों के नाम उसमें लिखे हुए थे. उनकी मृत्यु के बाद एक बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया जब कई संतों ने कथित सुसाइड नोट को फर्जी करार दिया और महंत की मौत को हत्या करार दिया.
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर ली है. इस मामले में सीबीआई ने प्रयागराज में दर्ज हुई एफआईआर को ही तहरीर बनाया है. सीबीआई की दिल्ली यूनिट ने आईपीसी तीन सौ छः में एफआईआर दर्ज की है और ये एफआईआर आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित यानी उकसाने की धारा में दर्ज हुई है. सीबीआई की टीम ने प्रयागराज पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है. महंत नरेद्र गिरि महाराज की हत्या हुई थी या उन्हे आत्महत्या के लिए उकसाया गया था और इसके पीछे क्या कोई आपराधिक षडयंत्र भी था? सीबीआई इन तमाम एगंलो की जांच करेगी. जिस कमरे में महंत नरेंद्र गिरि ने अपनी वसीयत लिखी थी, उस कमरे से एक कथित हस्तलिखित सुसाइड लेटर भी बरामद किया गया था और कई लोगों के नाम उसमें लिखे हुए थे. उनकी मृत्यु के बाद एक बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया जब कई संतों ने कथित सुसाइड नोट को फर्जी करार दिया और महंत की मौत को हत्या करार दिया.
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