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2 अप्रैल 2023 को कर्नाटक के चित्रदुर्ग में ISRO, डीआरडीओ और वायुसेना ने मिलकर एक टेस्ट किया. यह एक लैंडिंग टेस्ट था. लैंडिंग हो रही थी RLV की. यानी रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल (Reusable Launch Vehicle). चिनूक हेलिकॉप्टर से RLV को साढ़े चार किलोमीटर की ऊंचाई से छोड़ा गया. यान ने सफल लैंडिंग की. पर क्यों जरूरी था ये टेस्ट?
पहले जानिए ये क्यों जरूरी है. . . RLV एक स्वदेशी स्पेस शटल है. यानी हमारे वैज्ञानिक इस टेक्नोलॉजी को खुद डेवलप कर चुके हैं. कुछ साल में हमारे एस्ट्रोनॉट्स इसके बड़े वर्जन में बैठकर अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे. इसके जरिए सैटेलाइट्स लॉन्च किए जा सकते हैं. सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़कर ये वापस आएगा. ताकि फिर इस्तेमाल हो सके.
इसके जरिए किसी भी देश के ऊपर जासूसी करवा सकते हैं. या फिर हमला कर सकते हैं. या अंतरिक्ष में ही दुश्मन की सैटेलाइट को मार सकते हैं. उसे बर्बाद कर सकते हैं. RLV के जरिए भारत अंतरिक्ष में न सिर्फ सैटेलाइट लॉन्च कर पाएगा. बल्कि भारत अपने आसमान की सुरक्षा में भी एक कदम आगे बढ़ जाएगा.
ऐसी ही टेक्नोलॉजी का फायदा अमेरिका, रूस और चीन भी उठाना चाहते है. आज जब इसका परीक्षण हुआ तो चिनूक हेल्कॉप्टर से गिरने के बाद यह खुद ही लैंडिंग कर गया. यह एक ऑटोमेटेड रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल है. ऐसे ऐसे विमानों से डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) चला सकते हैं. यानी ऊर्जा की किरण भेजकर दुश्मन के संचार तकनीक को खत्म कर देना.
RLV के जरिए बिजली ग्रिड उड़ा देना या फिर किसी कंप्यूटर सिस्टम को नष्ट कर देना. भारत भी अपने दुश्मन के इलाके में यह काम इसी यान के जरिए कर सकता है. इसरो का मकसद है कि साल 2030 तक इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने का मकसद है. ताकि बार-बार रॉकेट बनाने का खर्च बचे.
पूरी तरह से सफलता मिलने के बाद सैटेलाइट लॉन्च का खर्च कम से कम 10 गुना कम हो जाएगी. बार-बार रॉकेट बनाने का खर्च बचेगा. थोड़ा मेंटेन करने के बाद RLV से वापस सैटेलाइट लॉन्च किया जा सकता है. रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल के अत्याधुनिक और अगले वर्जन से भारतीय अंतरिक्षयात्रियों को स्पेस में भी भेजा जा सकता है.
अभी ऐसे स्पेस शटल बनाने वालों में अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन और जापान ही हैं. रूस ने 1989 में ऐसा ही शटल बनाया था जिसने सिर्फ एक बार ही उड़ान भरी. अभी जो स्पेस शटल बनाया जा रहा है वो अपने असली फॉर्मैट से करीब 6 गुना छोटा है. सारे टेस्ट सफल होने के बाद इसका असली आकार बनाया जाएगा.
छह साल पहले 2016 में रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल की टेस्ट फ्लाइट हुई थी. तब यह एक रॉकेट के ऊपर लगाकर अंतरिक्ष में छोड़ा गया था. करीब 65 किलोमीटर तक गया था. यह एक हाइपरसोनिक उड़ान थी. इसकी स्पीड आवाज की गति से पांच गुना ज्यादा है. उसके बाद 180 डिग्री पर घूमकर वापस आ गया था. 6. 5 मीटर लंबे इस स्पेसक्राफ्ट का वजन 1. 75 टन है. बाद में इसे बंगाल की खाड़ी में उतार लिया गया.
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दो अप्रैल दो हज़ार तेईस को कर्नाटक के चित्रदुर्ग में ISRO, डीआरडीओ और वायुसेना ने मिलकर एक टेस्ट किया. यह एक लैंडिंग टेस्ट था. लैंडिंग हो रही थी RLV की. यानी रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल . चिनूक हेलिकॉप्टर से RLV को साढ़े चार किलोमीटर की ऊंचाई से छोड़ा गया. यान ने सफल लैंडिंग की. पर क्यों जरूरी था ये टेस्ट? पहले जानिए ये क्यों जरूरी है. . . RLV एक स्वदेशी स्पेस शटल है. यानी हमारे वैज्ञानिक इस टेक्नोलॉजी को खुद डेवलप कर चुके हैं. कुछ साल में हमारे एस्ट्रोनॉट्स इसके बड़े वर्जन में बैठकर अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे. इसके जरिए सैटेलाइट्स लॉन्च किए जा सकते हैं. सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़कर ये वापस आएगा. ताकि फिर इस्तेमाल हो सके. इसके जरिए किसी भी देश के ऊपर जासूसी करवा सकते हैं. या फिर हमला कर सकते हैं. या अंतरिक्ष में ही दुश्मन की सैटेलाइट को मार सकते हैं. उसे बर्बाद कर सकते हैं. RLV के जरिए भारत अंतरिक्ष में न सिर्फ सैटेलाइट लॉन्च कर पाएगा. बल्कि भारत अपने आसमान की सुरक्षा में भी एक कदम आगे बढ़ जाएगा. ऐसी ही टेक्नोलॉजी का फायदा अमेरिका, रूस और चीन भी उठाना चाहते है. आज जब इसका परीक्षण हुआ तो चिनूक हेल्कॉप्टर से गिरने के बाद यह खुद ही लैंडिंग कर गया. यह एक ऑटोमेटेड रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल है. ऐसे ऐसे विमानों से डायरेक्टेड एनर्जी वेपन चला सकते हैं. यानी ऊर्जा की किरण भेजकर दुश्मन के संचार तकनीक को खत्म कर देना. RLV के जरिए बिजली ग्रिड उड़ा देना या फिर किसी कंप्यूटर सिस्टम को नष्ट कर देना. भारत भी अपने दुश्मन के इलाके में यह काम इसी यान के जरिए कर सकता है. इसरो का मकसद है कि साल दो हज़ार तीस तक इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने का मकसद है. ताकि बार-बार रॉकेट बनाने का खर्च बचे. पूरी तरह से सफलता मिलने के बाद सैटेलाइट लॉन्च का खर्च कम से कम दस गुना कम हो जाएगी. बार-बार रॉकेट बनाने का खर्च बचेगा. थोड़ा मेंटेन करने के बाद RLV से वापस सैटेलाइट लॉन्च किया जा सकता है. रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल के अत्याधुनिक और अगले वर्जन से भारतीय अंतरिक्षयात्रियों को स्पेस में भी भेजा जा सकता है. अभी ऐसे स्पेस शटल बनाने वालों में अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन और जापान ही हैं. रूस ने एक हज़ार नौ सौ नवासी में ऐसा ही शटल बनाया था जिसने सिर्फ एक बार ही उड़ान भरी. अभी जो स्पेस शटल बनाया जा रहा है वो अपने असली फॉर्मैट से करीब छः गुना छोटा है. सारे टेस्ट सफल होने के बाद इसका असली आकार बनाया जाएगा. छह साल पहले दो हज़ार सोलह में रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल की टेस्ट फ्लाइट हुई थी. तब यह एक रॉकेट के ऊपर लगाकर अंतरिक्ष में छोड़ा गया था. करीब पैंसठ किलोग्राममीटर तक गया था. यह एक हाइपरसोनिक उड़ान थी. इसकी स्पीड आवाज की गति से पांच गुना ज्यादा है. उसके बाद एक सौ अस्सी डिग्री पर घूमकर वापस आ गया था. छः. पाँच मीटर लंबे इस स्पेसक्राफ्ट का वजन एक. पचहत्तर टन है. बाद में इसे बंगाल की खाड़ी में उतार लिया गया.
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बाब 101 : नमाज़े इशा में सज्दा की सूरत पढ़ना
(768) हमसे मुसद्दद बिन मुस्रहिद ने बयान किया, कहा कि हमसे यज़ीद बिन जुरैअ ने बयान किया, कहा कि हमसे तैमी ने अबूबक्र से, उन्होंने अबू राफ़ेअ से, उन्होंने कहा कि मैंने हज़रत अबू हुरैरह (रज़ि.) के साथ इशा पढ़ी, आपने इज़स्समाउन्न शक्कत पढ़ी और सज्दा किया। इस पर मैंने कहा कि ये सज्दा कैसा है? आपने जवाब दिया कि इस सूरत में मैंने अबुल क़ासिम () के पीछे सज्दा किया था। इसलिए मैं भी हमेशा इसमें सज्दा करूंगा, यहाँ तक कि आपसे मिल जाऊँ । (राजेअ : 766 ).
बाब 102 : नमाज़े इशा में क़िरअत का बयान (769) हमसे ख़ल्लाद बिन यह्या ने बयान किया, उन्होंने कहा कि हमसे मिस्अर बिन कुदाम ने बयान किया, उन्होंने कहा कि मुझसे अदी बिन ष़ाबित ने बयान किया। उन्होंने बराअ (रजि.) से सुना, उन्होंने बयान किया कि मैंने नबी करीम (M) को इशा में 'वत्तीनि वज़्ज़ैतून' पढ़ते सुना । मैंने आपसे ज़्यादा अच्छी आवाज़ और अच्छी क़िरअत वाला किसी को नहीं पाया । (राजेअः 767)
बाब 103 : इशा की पहली दो रकअतें लम्बी और आख़िरी दो रकअतें हल्की करनी चाहिए (770) हमसे सुलैमान बिन हर्ब ने बयान किया, कहा कि हमसे शुअबा ने अबू औन मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह ष़क़्फ़ी से बयान किया, उन्होंने कहा कि मैंने जाबिर बिन समुरा से सुना, उन्होंने बयान किया कि अमीरुल मोमिनीन हज़रत उमर (रजि.) ने हज़रत सअद बिन अबी वक्लास (रज़ि.) से कहा कि आपकी शिकायत कूफ़ा वालों ने तमाम ही बातों में की है, यहाँ तक कि नमाज़ में भी। उन्होंने कहा कि मेरा अमल तो ये है कि पहली दोरकअत में क़िरअत लम्बी करता हूँ और दूसरी दो रकअतें हल्की जिस तरह मैंने नबी करीम (X) के पीछे नमाज़ पढ़ी थी उसमें किसी क़िस्म की कमी नहीं करता। हज़रत उमर (रजि.) ने कहा कि सच कहते
۱۰۱ - باب القراءة في العشاء بالسجدة
٧٦٨- حدثنا مسدد قال: حدثنا يزيد بن زريع قال: حدثنا التيمي عن أبي بكر عن أبي رافع قال: صليت مع أبي هريرة
{ cisii saeji (गुळे :fiddi
فسجد، فقلت، ما هذه؟ قال: سجدت خلف أبي القاسم ، فلا أزال
أسجد بها
۱۰۲- باب القراءة في العشاء ٧٦٩- حدثنا خلاد بن يحيى قال: حدثنا مسعر قال : حدثنا عدي بن ثابت سمع البراء رضي الله عنه قال: سمعت النبي ﷺ يقرأ: «والتين والزيتون» في العشاء ، ما سمعت أحدا أحسن صوتا
۱۰۳- باب يطول في الأوليين، ويحذف في الأخريين ۷۷۰- حدثنا سليمان بن حرب قال: حدثنا شعبة عن أبي عون قال : سمعت جابر بن سمرة قال: قال عمر لسعد: لقد شكوك في كل شيء حتى الصلاة. قال: أما أنا فأمد الأوليين وأخذف في الأخريين، ولا آلو ما اقتديت به صلاة رسول الله . قال: صدقت، ذاك
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बाब एक सौ एक : नमाज़े इशा में सज्दा की सूरत पढ़ना हमसे मुसद्दद बिन मुस्रहिद ने बयान किया, कहा कि हमसे यज़ीद बिन जुरैअ ने बयान किया, कहा कि हमसे तैमी ने अबूबक्र से, उन्होंने अबू राफ़ेअ से, उन्होंने कहा कि मैंने हज़रत अबू हुरैरह के साथ इशा पढ़ी, आपने इज़स्समाउन्न शक्कत पढ़ी और सज्दा किया। इस पर मैंने कहा कि ये सज्दा कैसा है? आपने जवाब दिया कि इस सूरत में मैंने अबुल क़ासिम के पीछे सज्दा किया था। इसलिए मैं भी हमेशा इसमें सज्दा करूंगा, यहाँ तक कि आपसे मिल जाऊँ । . बाब एक सौ दो : नमाज़े इशा में क़िरअत का बयान हमसे ख़ल्लाद बिन यह्या ने बयान किया, उन्होंने कहा कि हमसे मिस्अर बिन कुदाम ने बयान किया, उन्होंने कहा कि मुझसे अदी बिन ष़ाबित ने बयान किया। उन्होंने बराअ से सुना, उन्होंने बयान किया कि मैंने नबी करीम को इशा में 'वत्तीनि वज़्ज़ैतून' पढ़ते सुना । मैंने आपसे ज़्यादा अच्छी आवाज़ और अच्छी क़िरअत वाला किसी को नहीं पाया । बाब एक सौ तीन : इशा की पहली दो रकअतें लम्बी और आख़िरी दो रकअतें हल्की करनी चाहिए हमसे सुलैमान बिन हर्ब ने बयान किया, कहा कि हमसे शुअबा ने अबू औन मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह ष़क़्फ़ी से बयान किया, उन्होंने कहा कि मैंने जाबिर बिन समुरा से सुना, उन्होंने बयान किया कि अमीरुल मोमिनीन हज़रत उमर ने हज़रत सअद बिन अबी वक्लास से कहा कि आपकी शिकायत कूफ़ा वालों ने तमाम ही बातों में की है, यहाँ तक कि नमाज़ में भी। उन्होंने कहा कि मेरा अमल तो ये है कि पहली दोरकअत में क़िरअत लम्बी करता हूँ और दूसरी दो रकअतें हल्की जिस तरह मैंने नबी करीम के पीछे नमाज़ पढ़ी थी उसमें किसी क़िस्म की कमी नहीं करता। हज़रत उमर ने कहा कि सच कहते एक सौ एक - باب القراءة في العشاء بالسجدة सात सौ अड़सठ- حدثنا مسدد قال: حدثنا يزيد بن زريع قال: حدثنا التيمي عن أبي بكر عن أبي رافع قال: صليت مع أبي هريرة { cisii saeji (गुळे :fiddi فسجد، فقلت، ما هذه؟ قال: سجدت خلف أبي القاسم ، فلا أزال أسجد بها एक सौ दो- باب القراءة في العشاء सात सौ उनहत्तर- حدثنا خلاد بن يحيى قال: حدثنا مسعر قال : حدثنا عدي بن ثابت سمع البراء رضي الله عنه قال: سمعت النبي ﷺ يقرأ: «والتين والزيتون» في العشاء ، ما سمعت أحدا أحسن صوتا एक सौ तीन- باب يطول في الأوليين، ويحذف في الأخريين सात सौ सत्तर- حدثنا سليمان بن حرب قال: حدثنا شعبة عن أبي عون قال : سمعت جابر بن سمرة قال: قال عمر لسعد: لقد شكوك في كل شيء حتى الصلاة. قال: أما أنا فأمد الأوليين وأخذف في الأخريين، ولا آلو ما اقتديت به صلاة رسول الله . قال: صدقت، ذاك
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एशिया कप 2022 के ग्रुप चरण के दौरान भारत और हांगकांग के बीच हुआ मुकाबला फैंस कभी नहीं भूल सकते। इस मैच में भारतीय बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव ने मैदान पर आते ही स्टेडियम का माहौल बदल दिया। उन्होंने टीम के लिए 26 गेंदों में 68 रनों की नाबाद पारी खेली। इस पारी के दौरान फैंस को उनके बल्ले से 6 चौके और 6 छक्के देखने को मिले।
उन्होंने टीम के लिए यह स्कोर 261. 54 के स्ट्राइक रेट से बनाया। साथ ही उन्होंने विराट के साथ बेहतरीन साझेदारी भी निभाई। उनकी इस आतिशी पारी को देखने के बाद टीम के धाकड़ बल्लेबाज विराट कोहली ने उनके सामने सिरमस्तक होकर उनका अभिवादन किया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ।
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एशिया कप दो हज़ार बाईस के ग्रुप चरण के दौरान भारत और हांगकांग के बीच हुआ मुकाबला फैंस कभी नहीं भूल सकते। इस मैच में भारतीय बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव ने मैदान पर आते ही स्टेडियम का माहौल बदल दिया। उन्होंने टीम के लिए छब्बीस गेंदों में अड़सठ रनों की नाबाद पारी खेली। इस पारी के दौरान फैंस को उनके बल्ले से छः चौके और छः छक्के देखने को मिले। उन्होंने टीम के लिए यह स्कोर दो सौ इकसठ. चौवन के स्ट्राइक रेट से बनाया। साथ ही उन्होंने विराट के साथ बेहतरीन साझेदारी भी निभाई। उनकी इस आतिशी पारी को देखने के बाद टीम के धाकड़ बल्लेबाज विराट कोहली ने उनके सामने सिरमस्तक होकर उनका अभिवादन किया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ।
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बेगूसराय, 17 मार्च । बिहार के बेगूसराय जिले के नगर थाना क्षेत्र में शनिवार को मिट्टी धंसने से उसमें दबकर तीन लड़कियों की मौत हो गई जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गई।
बेगूसराय के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) विवेकानंद ने बताया कि पुलिस लाईन के समीप बने में एक तालाब के किनारे से प्रतिदिन कुछ लड़कियां मिट्टी काटकर घर ले जाती थीं। इस क्रम में मिट्टी में दो-तीन मीटर अंदर तक सुरंग बन गया था। शनिवार सुबह मिट्टी निकालने के क्रम अचानक ऊपर की मिट्टी धंस गई जिसमें दब कर तीन लड़कियों की मौत हो गई जबकि एक लड़की गंभीर रूप से घायल हो गई।
उन्होंने बताया कि घायल लड़की को स्थानीय अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है जहां उसकी स्थिति चिन्ताजनक बनी हुई है। सभी मृत लड़कियों की उम्र करीब 15 वर्ष बताई जा रही है जो नजदीक के ही बाधा गांव की निवासी बताई जा रही है।
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बेगूसराय, सत्रह मार्च । बिहार के बेगूसराय जिले के नगर थाना क्षेत्र में शनिवार को मिट्टी धंसने से उसमें दबकर तीन लड़कियों की मौत हो गई जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गई। बेगूसराय के पुलिस उपाधीक्षक विवेकानंद ने बताया कि पुलिस लाईन के समीप बने में एक तालाब के किनारे से प्रतिदिन कुछ लड़कियां मिट्टी काटकर घर ले जाती थीं। इस क्रम में मिट्टी में दो-तीन मीटर अंदर तक सुरंग बन गया था। शनिवार सुबह मिट्टी निकालने के क्रम अचानक ऊपर की मिट्टी धंस गई जिसमें दब कर तीन लड़कियों की मौत हो गई जबकि एक लड़की गंभीर रूप से घायल हो गई। उन्होंने बताया कि घायल लड़की को स्थानीय अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है जहां उसकी स्थिति चिन्ताजनक बनी हुई है। सभी मृत लड़कियों की उम्र करीब पंद्रह वर्ष बताई जा रही है जो नजदीक के ही बाधा गांव की निवासी बताई जा रही है।
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1986 में, सोवियत सेना द्वारा टोर सैन्य वायु रक्षा प्रणाली के लिए एक छोटी दूरी की विमान भेदी मिसाइल प्रणाली को अपनाया गया था। भविष्य में, वह बार-बार विभिन्न आधुनिकीकरणों से गुजरा, जिसके परिणामस्वरूप हर बार मुख्य युद्ध और तकनीकी विशेषताओं में वृद्धि हुई। "टोरा" की आधुनिकीकरण क्षमता अभी तक समाप्त नहीं हुई है, और अभी एक और नवीकरण परियोजना बनाई जा रही है, जिसका उद्देश्य मापदंडों में आमूल-चूल वृद्धि करना है।
मूल डिजाइन "थोर" और इसके नए संशोधनों की विकास प्रक्रियाओं को हाल के मंच "सेना-2021" में स्पष्ट रूप से दिखाया गया था। इस वायु रक्षा प्रणाली के निर्माता, इज़ेव्स्क इलेक्ट्रोमैकेनिकल प्लांट "कुपोल" ने एक साथ प्रदर्शनी में कई आधुनिक संशोधन प्रस्तुत किए। रूसी सेना और विदेशी ग्राहकों के लिए विभिन्न चेसिस पर और विभिन्न लड़ाकू क्षमताओं के साथ वाहन दिखाए गए थे।
TASS के अनुसार, मंच के दौरान, परिसरों के परिवार के विकास और निकट भविष्य की योजनाओं की मुख्य विशेषताएं सामने आईं। कुपोल के जनरल डायरेक्टर फैनिल ज़ियातदीनोव ने याद किया कि टोरा को इसके निर्माण के क्षण से व्यावहारिक रूप से नवीनीकृत किया गया है। वहीं, 2013 से इसके आधुनिकीकरण पर सीधे निर्माता द्वारा काम किया जा रहा है। प्रमुख विशिष्ट संस्थानों के सहयोग से कुपोला डिजाइन ब्यूरो द्वारा नई परियोजनाएं बनाई गई हैं।
एफ। ज़ियातदीनोव के अनुसार, "उत्पाद की सभी मुख्य विशेषताओं को मौलिक रूप से सुधारने के लिए" काम चल रहा है। उनका उद्देश्य युद्ध और परिचालन मापदंडों में सुधार करना है। हालांकि, इस तरह के काम का कोई विवरण और विशेषताओं में सुधार के संभावित स्तर को निर्दिष्ट नहीं किया गया था।
IEMZ "कुपोल" के सामान्य निदेशक के शब्दों से यह अनुसरण हो सकता है कि "टोर" वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली का अगला संशोधन अभी विकसित किया जा रहा है। तदनुसार, निकट भविष्य में, अद्यतन तकनीक को परीक्षण के लिए जारी किया जा सकता है, और फिर यह सेवा में जाएगी। यह ज्ञात नहीं है कि टोर परिवार के आगे के विकास के लिए रक्षा मंत्रालय और कुपोल की योजनाएं कैसी दिखती हैं। लेकिन आप हाल की सफलताओं पर विचार कर सकते हैं और कल्पना कर सकते हैं कि भविष्य में परिसर का आधुनिकीकरण कैसे किया जाना चाहिए।
सैम "टोर" एक सैन्य वायु रक्षा प्रणाली है जो मार्च में जमीनी बलों का साथ देने और उनकी रक्षा करने में सक्षम है। इस प्रकार का एक लड़ाकू वाहन उच्च गतिशीलता वाले चेसिस पर बनाया गया है और सभी आवश्यक उपकरण रखता है। लक्ष्य का पता लगाने और ट्रैकिंग के अपने रडार साधन हैं; मशीन पर कई निर्देशित मिसाइलों के साथ एक लड़ाकू मॉड्यूल स्थापित किया गया है। "थोर" स्वतंत्र रूप से या एक सबयूनिट के हिस्से के रूप में काम करने में सक्षम है, इस कदम पर मिसाइलों को लॉन्च किया जाता है।
Tor परिवार का नवीनतम विकास Tor-M2 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली और इसके कई संशोधन हैं। वास्तव में "टोर-एम 2" अपने पूर्ववर्तियों की वास्तुकला को बरकरार रखता है, लेकिन अधिक उन्नत उपकरण रखता है। इसके अलावा, इसके लिए बेहतर उड़ान विशेषताओं के साथ छोटे आयामों की एक नई 9M338 मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित की गई थी। नई मिसाइल के कारण, परिसर का गोला-बारूद भार दोगुना हो गया है और इसे 16 इकाइयों तक लाया गया है।
आधार चेसिस में भिन्न, परिसर के कई संशोधनों की पेशकश की जाती है। हमारी सेना के आर्कटिक डिवीजनों के लिए, "टोर-एम 2 डीटी" दो-लिंक ट्रैक किए गए चेसिस पर बनाया गया था। प्रदर्शनियों में, Tor-M2K वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली को MZKT से तीन-एक्सल प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित किया गया था। अंत में, कॉम्प्लेक्स के उपकरण को एक सार्वभौमिक कंटेनर - "टोर-एम 2 केएम" में रखा जा सकता है।
मौके से और चलते-फिरते, "टोर-एम 2" हवाई क्षेत्र की निगरानी और विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों का पता लगाने में सक्षम है, इसे तीसरे पक्ष के लक्ष्य पदनाम के साथ भी प्रदान किया जाता है। सामरिक विमान जैसे बड़े लक्ष्यों का पता लगाने की सीमा 30-32 किमी तक पहुंच जाती है। 5-10 किमी से छोटे यूएवी देखे जाते हैं। कई दर्जन लक्ष्यों के लिए सहायता प्रदान की जाती है। रेडियो कमांड मिसाइल नियंत्रण प्रणाली में 4 लक्ष्य चैनल हैं।
आधुनिक 9M338 मिसाइल रक्षा प्रणाली लगभग 1000 m / s की गति विकसित करती है और 16 किमी तक की दूरी और 10 किमी की ऊंचाई पर लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। मिसाइल 1000 m / s तक की गति से लक्ष्य को भेदती है और 30 इकाइयों के अधिभार के साथ युद्धाभ्यास करती है। सभी मुख्य विशेषताओं के अनुसार, टोरा-एम 2 मिसाइल पिछली मिसाइलों से आगे निकल जाती है, जो समग्र रूप से परिसर की प्रभावशीलता को काफी बढ़ा देती है।
यह देखना आसान है कि सभी प्रमुख परियोजनाओं में, टोर वायु रक्षा प्रणाली का आधुनिकीकरण तीन तरीकों से किया गया था। सबसे पहले, संचार और नियंत्रण के लिए, लक्ष्यों की खोज और विनाश के लिए जिम्मेदार रेडियो-इलेक्ट्रॉनिक साधनों का एक व्यवस्थित विकास हुआ। हाल की परियोजनाओं में हासिल किया गया दूसरा लक्ष्य विमान भेदी मिसाइल में सुधार करना था। अंत में, गतिशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से एक बुनियादी मंच के साथ प्रयोग किए गए हैं।
"थोर" की गतिशीलता की समस्या आम तौर पर हल हो गई है और वांछित परिणाम प्राप्त हुए हैं। हमारी सेना और विदेशी ग्राहकों को एक मानक ट्रैक किए गए चेसिस पर उपकरणों की आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा, आर्कटिक में रूसी इकाइयों के लिए दो-लिंक ट्रांसपोर्टर पर एक विकल्प बनाया गया है। अन्य विकल्पों को सीरीज में नहीं लाया गया है। यदि सेना उन्हें प्राप्त करना चाहती है, तो उद्योग मौजूदा विकास का उपयोग करके इस तरह के अनुरोध को पूरा करेगा।
रेडियो-इलेक्ट्रॉनिक साधनों में और सुधार की आवश्यकता स्पष्ट है। अब "टोर-एम 2" लक्ष्य का पता लगाने की सीमा और सटीकता की उच्च विशेषताओं को दिखाता है, लेकिन इन मापदंडों को फिर से बढ़ाया जाना चाहिए। इसके अलावा, पहचान और मार्गदर्शन स्टेशन छोटे आकार और अगोचर यूएवी पर पूरी तरह से काम करने में सक्षम होना चाहिए - वर्तमान समय का एक विशिष्ट खतरा। संचार और कमांड सुविधाओं में सुधार करना भी आवश्यक है, जिससे "थोर" और सैन्य वायु रक्षा प्रणाली की समग्र क्षमता में वृद्धि होगी।
"थोर" के लिए एसएएम पहले ही उच्च स्तर के प्रदर्शन पर पहुंच चुका है, लेकिन यह उनके आगे के सुधार को बाहर नहीं करता है। सबसे पहले, उनके आधुनिकीकरण से इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रणोदन प्रणाली प्रभावित होनी चाहिए। यह फिर से सीमा और ऊंचाई को बढ़ाएगा, साथ ही हार की सटीकता में सुधार करेगा। इस तरह के एक अद्यतन के बाद, "थोर" सैन्य वायु रक्षा के प्रदर्शन में सुधार करते हुए, छोटी दूरी के परिसरों के वर्ग से आगे जाने में सक्षम होगा।
पिछले अक्टूबर में, यह ज्ञात हो गया कि टोरा-एम 2 के लिए एक मौलिक रूप से नई मिसाइल विकसित की जाएगी। यह उत्पाद विशेष रूप से मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है ड्रोन. इस तरह के एक आवेदन की विशिष्टता के कारण, यह मौजूदा मिसाइलों की तुलना में छोटा, हल्का और सस्ता होगा। तकनीकी विवरण अभी तक रिपोर्ट नहीं किए गए हैं, लेकिन इस तरह के उपकरण को विकसित करने का तथ्य बहुत रुचि का है।
हाल की रिपोर्टों में "मुख्य सुधार" और सभी विशेषताओं में वृद्धि पर काम का उल्लेख है। यह सभी मुख्य घटकों और साधनों को प्रभावित करने वाली वायु रक्षा प्रणाली के गहन आधुनिकीकरण के लिए एक परियोजना के विकास का संकेत दे सकता है। यह पहले से ही नई मारक क्षमता के बारे में जाना जाता है, और भविष्य में लड़ाकू वाहन के इलेक्ट्रॉनिक्स के बारे में नए विवरण दिखाई दे सकते हैं।
टोर वायु रक्षा प्रणाली परिवार का विकास कई दशकों से चल रहा है और नियमित रूप से नए उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त करता है। अब तक, सभी सामरिक और तकनीकी विशेषताओं में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की गई है। परीक्षणों, अभ्यासों और वास्तविक युद्धक उपयोग के दौरान उच्च लड़ाकू गुणों और व्यापक क्षमताओं की बार-बार पुष्टि की गई है। उसी समय, यहां तक कि नवीनतम टोर-एम 2 कॉम्प्लेक्स पहले से ही काफी पुराना है - इसे दशक की शुरुआत में बनाया गया था और 2016 में सेवा में प्रवेश किया।
जाहिर है, अब तक टोर वायु रक्षा प्रणाली के एक और आधुनिकीकरण की आवश्यकता है। यह इस तरह की एक परियोजना के बारे में था कि आईईएमजेड कुपोल के प्रमुख हाल ही में एक मंच पर बोल सकते थे। आधुनिकीकृत परिसर का तैयार नमूना कितनी जल्दी सामने आएगा और यह वर्तमान टोर-एम2 से कैसे भिन्न होगा, यह किसी का अनुमान नहीं है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि भविष्य में यह परिसर सैनिकों में आवेदन पाएगा और पूरे परिवार की उच्चतम आधुनिकीकरण क्षमता की फिर से पुष्टि करेगा।
- लेखकः
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एक हज़ार नौ सौ छियासी में, सोवियत सेना द्वारा टोर सैन्य वायु रक्षा प्रणाली के लिए एक छोटी दूरी की विमान भेदी मिसाइल प्रणाली को अपनाया गया था। भविष्य में, वह बार-बार विभिन्न आधुनिकीकरणों से गुजरा, जिसके परिणामस्वरूप हर बार मुख्य युद्ध और तकनीकी विशेषताओं में वृद्धि हुई। "टोरा" की आधुनिकीकरण क्षमता अभी तक समाप्त नहीं हुई है, और अभी एक और नवीकरण परियोजना बनाई जा रही है, जिसका उद्देश्य मापदंडों में आमूल-चूल वृद्धि करना है। मूल डिजाइन "थोर" और इसके नए संशोधनों की विकास प्रक्रियाओं को हाल के मंच "सेना-दो हज़ार इक्कीस" में स्पष्ट रूप से दिखाया गया था। इस वायु रक्षा प्रणाली के निर्माता, इज़ेव्स्क इलेक्ट्रोमैकेनिकल प्लांट "कुपोल" ने एक साथ प्रदर्शनी में कई आधुनिक संशोधन प्रस्तुत किए। रूसी सेना और विदेशी ग्राहकों के लिए विभिन्न चेसिस पर और विभिन्न लड़ाकू क्षमताओं के साथ वाहन दिखाए गए थे। TASS के अनुसार, मंच के दौरान, परिसरों के परिवार के विकास और निकट भविष्य की योजनाओं की मुख्य विशेषताएं सामने आईं। कुपोल के जनरल डायरेक्टर फैनिल ज़ियातदीनोव ने याद किया कि टोरा को इसके निर्माण के क्षण से व्यावहारिक रूप से नवीनीकृत किया गया है। वहीं, दो हज़ार तेरह से इसके आधुनिकीकरण पर सीधे निर्माता द्वारा काम किया जा रहा है। प्रमुख विशिष्ट संस्थानों के सहयोग से कुपोला डिजाइन ब्यूरो द्वारा नई परियोजनाएं बनाई गई हैं। एफ। ज़ियातदीनोव के अनुसार, "उत्पाद की सभी मुख्य विशेषताओं को मौलिक रूप से सुधारने के लिए" काम चल रहा है। उनका उद्देश्य युद्ध और परिचालन मापदंडों में सुधार करना है। हालांकि, इस तरह के काम का कोई विवरण और विशेषताओं में सुधार के संभावित स्तर को निर्दिष्ट नहीं किया गया था। IEMZ "कुपोल" के सामान्य निदेशक के शब्दों से यह अनुसरण हो सकता है कि "टोर" वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली का अगला संशोधन अभी विकसित किया जा रहा है। तदनुसार, निकट भविष्य में, अद्यतन तकनीक को परीक्षण के लिए जारी किया जा सकता है, और फिर यह सेवा में जाएगी। यह ज्ञात नहीं है कि टोर परिवार के आगे के विकास के लिए रक्षा मंत्रालय और कुपोल की योजनाएं कैसी दिखती हैं। लेकिन आप हाल की सफलताओं पर विचार कर सकते हैं और कल्पना कर सकते हैं कि भविष्य में परिसर का आधुनिकीकरण कैसे किया जाना चाहिए। सैम "टोर" एक सैन्य वायु रक्षा प्रणाली है जो मार्च में जमीनी बलों का साथ देने और उनकी रक्षा करने में सक्षम है। इस प्रकार का एक लड़ाकू वाहन उच्च गतिशीलता वाले चेसिस पर बनाया गया है और सभी आवश्यक उपकरण रखता है। लक्ष्य का पता लगाने और ट्रैकिंग के अपने रडार साधन हैं; मशीन पर कई निर्देशित मिसाइलों के साथ एक लड़ाकू मॉड्यूल स्थापित किया गया है। "थोर" स्वतंत्र रूप से या एक सबयूनिट के हिस्से के रूप में काम करने में सक्षम है, इस कदम पर मिसाइलों को लॉन्च किया जाता है। Tor परिवार का नवीनतम विकास Tor-Mदो वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली और इसके कई संशोधन हैं। वास्तव में "टोर-एम दो" अपने पूर्ववर्तियों की वास्तुकला को बरकरार रखता है, लेकिन अधिक उन्नत उपकरण रखता है। इसके अलावा, इसके लिए बेहतर उड़ान विशेषताओं के साथ छोटे आयामों की एक नई नौMतीन सौ अड़तीस मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित की गई थी। नई मिसाइल के कारण, परिसर का गोला-बारूद भार दोगुना हो गया है और इसे सोलह इकाइयों तक लाया गया है। आधार चेसिस में भिन्न, परिसर के कई संशोधनों की पेशकश की जाती है। हमारी सेना के आर्कटिक डिवीजनों के लिए, "टोर-एम दो डीटी" दो-लिंक ट्रैक किए गए चेसिस पर बनाया गया था। प्रदर्शनियों में, Tor-Mदो केल्विन वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली को MZKT से तीन-एक्सल प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित किया गया था। अंत में, कॉम्प्लेक्स के उपकरण को एक सार्वभौमिक कंटेनर - "टोर-एम दो केएम" में रखा जा सकता है। मौके से और चलते-फिरते, "टोर-एम दो" हवाई क्षेत्र की निगरानी और विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों का पता लगाने में सक्षम है, इसे तीसरे पक्ष के लक्ष्य पदनाम के साथ भी प्रदान किया जाता है। सामरिक विमान जैसे बड़े लक्ष्यों का पता लगाने की सीमा तीस-बत्तीस किमी तक पहुंच जाती है। पाँच-दस किमी से छोटे यूएवी देखे जाते हैं। कई दर्जन लक्ष्यों के लिए सहायता प्रदान की जाती है। रेडियो कमांड मिसाइल नियंत्रण प्रणाली में चार लक्ष्य चैनल हैं। आधुनिक नौMतीन सौ अड़तीस मिसाइल रक्षा प्रणाली लगभग एक हज़ार मीटर / s की गति विकसित करती है और सोलह किमी तक की दूरी और दस किमी की ऊंचाई पर लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। मिसाइल एक हज़ार मीटर / s तक की गति से लक्ष्य को भेदती है और तीस इकाइयों के अधिभार के साथ युद्धाभ्यास करती है। सभी मुख्य विशेषताओं के अनुसार, टोरा-एम दो मिसाइल पिछली मिसाइलों से आगे निकल जाती है, जो समग्र रूप से परिसर की प्रभावशीलता को काफी बढ़ा देती है। यह देखना आसान है कि सभी प्रमुख परियोजनाओं में, टोर वायु रक्षा प्रणाली का आधुनिकीकरण तीन तरीकों से किया गया था। सबसे पहले, संचार और नियंत्रण के लिए, लक्ष्यों की खोज और विनाश के लिए जिम्मेदार रेडियो-इलेक्ट्रॉनिक साधनों का एक व्यवस्थित विकास हुआ। हाल की परियोजनाओं में हासिल किया गया दूसरा लक्ष्य विमान भेदी मिसाइल में सुधार करना था। अंत में, गतिशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से एक बुनियादी मंच के साथ प्रयोग किए गए हैं। "थोर" की गतिशीलता की समस्या आम तौर पर हल हो गई है और वांछित परिणाम प्राप्त हुए हैं। हमारी सेना और विदेशी ग्राहकों को एक मानक ट्रैक किए गए चेसिस पर उपकरणों की आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा, आर्कटिक में रूसी इकाइयों के लिए दो-लिंक ट्रांसपोर्टर पर एक विकल्प बनाया गया है। अन्य विकल्पों को सीरीज में नहीं लाया गया है। यदि सेना उन्हें प्राप्त करना चाहती है, तो उद्योग मौजूदा विकास का उपयोग करके इस तरह के अनुरोध को पूरा करेगा। रेडियो-इलेक्ट्रॉनिक साधनों में और सुधार की आवश्यकता स्पष्ट है। अब "टोर-एम दो" लक्ष्य का पता लगाने की सीमा और सटीकता की उच्च विशेषताओं को दिखाता है, लेकिन इन मापदंडों को फिर से बढ़ाया जाना चाहिए। इसके अलावा, पहचान और मार्गदर्शन स्टेशन छोटे आकार और अगोचर यूएवी पर पूरी तरह से काम करने में सक्षम होना चाहिए - वर्तमान समय का एक विशिष्ट खतरा। संचार और कमांड सुविधाओं में सुधार करना भी आवश्यक है, जिससे "थोर" और सैन्य वायु रक्षा प्रणाली की समग्र क्षमता में वृद्धि होगी। "थोर" के लिए एसएएम पहले ही उच्च स्तर के प्रदर्शन पर पहुंच चुका है, लेकिन यह उनके आगे के सुधार को बाहर नहीं करता है। सबसे पहले, उनके आधुनिकीकरण से इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रणोदन प्रणाली प्रभावित होनी चाहिए। यह फिर से सीमा और ऊंचाई को बढ़ाएगा, साथ ही हार की सटीकता में सुधार करेगा। इस तरह के एक अद्यतन के बाद, "थोर" सैन्य वायु रक्षा के प्रदर्शन में सुधार करते हुए, छोटी दूरी के परिसरों के वर्ग से आगे जाने में सक्षम होगा। पिछले अक्टूबर में, यह ज्ञात हो गया कि टोरा-एम दो के लिए एक मौलिक रूप से नई मिसाइल विकसित की जाएगी। यह उत्पाद विशेष रूप से मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है ड्रोन. इस तरह के एक आवेदन की विशिष्टता के कारण, यह मौजूदा मिसाइलों की तुलना में छोटा, हल्का और सस्ता होगा। तकनीकी विवरण अभी तक रिपोर्ट नहीं किए गए हैं, लेकिन इस तरह के उपकरण को विकसित करने का तथ्य बहुत रुचि का है। हाल की रिपोर्टों में "मुख्य सुधार" और सभी विशेषताओं में वृद्धि पर काम का उल्लेख है। यह सभी मुख्य घटकों और साधनों को प्रभावित करने वाली वायु रक्षा प्रणाली के गहन आधुनिकीकरण के लिए एक परियोजना के विकास का संकेत दे सकता है। यह पहले से ही नई मारक क्षमता के बारे में जाना जाता है, और भविष्य में लड़ाकू वाहन के इलेक्ट्रॉनिक्स के बारे में नए विवरण दिखाई दे सकते हैं। टोर वायु रक्षा प्रणाली परिवार का विकास कई दशकों से चल रहा है और नियमित रूप से नए उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त करता है। अब तक, सभी सामरिक और तकनीकी विशेषताओं में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की गई है। परीक्षणों, अभ्यासों और वास्तविक युद्धक उपयोग के दौरान उच्च लड़ाकू गुणों और व्यापक क्षमताओं की बार-बार पुष्टि की गई है। उसी समय, यहां तक कि नवीनतम टोर-एम दो कॉम्प्लेक्स पहले से ही काफी पुराना है - इसे दशक की शुरुआत में बनाया गया था और दो हज़ार सोलह में सेवा में प्रवेश किया। जाहिर है, अब तक टोर वायु रक्षा प्रणाली के एक और आधुनिकीकरण की आवश्यकता है। यह इस तरह की एक परियोजना के बारे में था कि आईईएमजेड कुपोल के प्रमुख हाल ही में एक मंच पर बोल सकते थे। आधुनिकीकृत परिसर का तैयार नमूना कितनी जल्दी सामने आएगा और यह वर्तमान टोर-एमदो से कैसे भिन्न होगा, यह किसी का अनुमान नहीं है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि भविष्य में यह परिसर सैनिकों में आवेदन पाएगा और पूरे परिवार की उच्चतम आधुनिकीकरण क्षमता की फिर से पुष्टि करेगा। - लेखकः
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देश में चल रही आर्थिक मंदी को लेकर कांग्रेस आज देश भर में धरना प्रदर्शन और सम्मलेन कर रही है। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ने भी प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल की अध्यक्षता में राज्यपाल बंडारू दंतात्रेय के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। रजनी पाटिल ने कहा कि जीडीपी 5 फीसदी से नीचे आ गयी है रोजगार छीन रहा है और बेरोजगारी बढ़ रही है। रूपया डॉलर के मुकाबले हर दिन गिरता जा रहा है और केंद्र सरकार लोगों को गुमराह करने में लगी है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जीएसटी, नोटबंदी और गलत आर्थिक नीतियों के कारण आज देश मंदी की मार झेल रहा है। कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आर्थिक नीतियों को लागू करने कि मांग कि है जिससे देश के हालत सुधर सके।
रजनी पाटिल ने कहा कि राजनीति हमेशा बदलती रहती है। कांग्रेस को विश्वास है कि आने वाले समय में देश के साथ साथ राज्यों में भी कांग्रेस की सरकारे बनेगी। लोकसभा चुनावों में राहुल गांधी ने पार्टी को संभाला और भाजपा को टक्कर देने की कोशिश की। अब एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी की कमान सोनिया गांधी के हाथों में आ गयी है पार्टी मजबूत होकर भविष्य में फिर से सत्ता में आएगी।
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देश में चल रही आर्थिक मंदी को लेकर कांग्रेस आज देश भर में धरना प्रदर्शन और सम्मलेन कर रही है। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ने भी प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल की अध्यक्षता में राज्यपाल बंडारू दंतात्रेय के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। रजनी पाटिल ने कहा कि जीडीपी पाँच फीसदी से नीचे आ गयी है रोजगार छीन रहा है और बेरोजगारी बढ़ रही है। रूपया डॉलर के मुकाबले हर दिन गिरता जा रहा है और केंद्र सरकार लोगों को गुमराह करने में लगी है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जीएसटी, नोटबंदी और गलत आर्थिक नीतियों के कारण आज देश मंदी की मार झेल रहा है। कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आर्थिक नीतियों को लागू करने कि मांग कि है जिससे देश के हालत सुधर सके। रजनी पाटिल ने कहा कि राजनीति हमेशा बदलती रहती है। कांग्रेस को विश्वास है कि आने वाले समय में देश के साथ साथ राज्यों में भी कांग्रेस की सरकारे बनेगी। लोकसभा चुनावों में राहुल गांधी ने पार्टी को संभाला और भाजपा को टक्कर देने की कोशिश की। अब एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी की कमान सोनिया गांधी के हाथों में आ गयी है पार्टी मजबूत होकर भविष्य में फिर से सत्ता में आएगी।
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संबद्ध सामानों को उनके के-मूल्य के आधार पर विभिन्न ग्रेडों में वर्गीकृत किया जाता है। संबद्ध सामानों का मुख्य अनुप्रयोग उनके के-मूल्य पर निर्भर करता है; जितना अधिक के मूल्य होगा उतना ही अधिक मॉलक्यूलर भार भी होगा। लो मॉलक्यूलर भार वाले पीवीसी सस्पेंसन मुख्य रूप से रिजिड फिल्म और शीट, ब्लो मॉल्डेड बोतल और अन्य इंजेक्शन मॉल्डिंग वस्तुओं में प्रयोग पाते हैं। अधिक मॉलक्यूलर भार वाला पीवीसी सस्पेंसन मुख्य रूप से एक्सट्रूजन पाइपों और प्रोफाइल में अनुप्रयोग पाता है। उच्च क्षरण के साथ अधिक पीवीसी सस्पेंसन भी तारों और केबिलों में विशिष्ट अनुप्रयोग पाते हैं और शू लास्ट्स, फ्लेक्सिबल फिल्म्स आदि जैसे अन्य लचीले अनुप्रयोगों में स्थान पाते हैं।
वर्तमान जांच एक निर्णायक समीक्षा जांच होने के नाते और संबद्ध देशों से संबद्ध सामानों के आयातों पर पाटनरोधी शुल्क लागू होने के नाते प्राधिकारी मानते हैं कि वर्तमान जांच में विचाराधीन उत्पाद का क्षेत्र वही रहता है जो मूल तथा बाद की समीक्षा जांच में है। इसके अतिरिक्त, किसी भी हितबद्ध पक्षकार ने समीक्षा के क्षेत्र में संशोधन (स्थगन सहित) का अनुरोध करते हुए कोई उचित अनुरोध नहीं किया है। इस संबंध में, दिनांक 04 अप्रैल, 2014 की अधिसूचना संख्या 21/29/2011 - डीजीएडी द्वारा जारी अंतिम निष्कर्ष वाले निर्णायक समीक्षा जांच परिणाम पर विश्वास किया जाता है जिसमें विचाराधीन उत्पाद निम्नलिखित रूप में माना गया थाः
"7. वर्तमान जांच में विचाराधीन उत्पाद "विनाइल क्लोराइड मोनोमर (सस्पेंसन ग्रेड) का होमो पॉलीमर ऑफ है जिसमें विभिन्न पॉलीमर श्रृंखलाएं सीमा शुल्क वर्गीकरण संख्या 3904.21 के तहत आने वाली एक-दूसरे से संबद्ध नहीं होते हैं। विचाराधीन उत्पाद क्रॉस लिंक्ड पीवीसी, क्लोरीनेटिड पीवीसी (सीपीवीसी), विनाइल क्लोराइड विनाइल एसीटेट कोपोलाइमर (वीसी - वीएसी), पीवीसी पेस्ट रेसिन और पीवीसी ब्लैंडिंग रेसिन जैसे विशिष्ट पीवीसी सस्पेंसन रेसिन को अलग करता है। विचाराधीन उत्पाद मूल जांच में माने गए उत्पाद के समान है।
8. विचाराधीन उत्पाद में समर्पित एचएस कोड नहीं है और आयातों को 3904 के तहत आने वाले विभिन्न एचएस कोडों के तहत मंजूर किया जाता है। सीमा शुल्क वर्गीकरण केवल संकेतात्मक है और किसी भी तरह वर्तमान जांच के क्षेत्र पर और प्रस्तावित उपायों पर बाध्यकारी नहीं है ।
10. रिकार्ड में साक्ष्य और जांच की शुरूआत की अधिसूचना को ध्यान में रखते हुए, प्राधिकारी विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र को मूल जांच परिणाम में माने गए क्षेत्र के समान ही रखना उपयुक्त मानते हैं। "
प्राधिकारी चार अंक के स्तर पर आईटीसीएचएस के निर्धारण के संबंध में प्रकटन के उत्तर में किए गए अनुरोधों को नोट करते हैं। इस संबंध में प्राधिकारी नोट करते हैं कि यद्यपि उत्पादकों/निर्यातकों द्वारा भिन्न आईटीसीएचएस उल्लिखित किए जा सकते हैं, तथापि उत्पाद विवरण में आईटीसीएचएस में प्राथमिक है, इन चिंताओं को मद्देनजर रखते हुए विचाराधीन उत्पाद का वर्गीकरण चार अंक के स्तर पर उल्लिखित किया गया है, जैसा कि पूर्व के मामले में किया गया था। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि सीमा शुल्क वर्गीकरण प्रकृति में केवल संकेतात्मक है और बाध्यकारी नहीं है ।
समान वस्तु के संबंध में पाटनरोधी नियमावली के नियम 2(घ) में निम्नानुसार प्रावधान हैः
"ऐसी वस्तु जो भारत में पाटित किये जाने के लिए जांचाधीन वस्तु से हर तरीके से समनरूप अथवा समान है अथवा ऐसी वस्तु के अभाव में ऐसी दूसरी वस्तु जो यद्यपि हर प्रकार से समान नहीं है तथापि, उसमें जांचाधीन वस्तुओं से अत्यधिक मिलती-जुलती विशेषताएं हैं। "
रिकार्ड में सूचना पर विचार करने के बाद प्राधिकारी मानते हैं कि संबद्ध देशों से निर्यातित विचाराधीन उत्पाद और भारतीय उद्योग द्वारा उत्पादित संबद्ध उत्पाद में कोई ज्ञात अंतर नहीं है। घरेलू उद्योग द्वारा उत्पादित संबद्ध सामान भौतिक एवं रासायनिक विशेषताओं, प्रकार्य एवं प्रयोग, उत्पाद विशिष्टियों, वितरण और विपणन एवं सामानों के प्रशुल्क वर्गीकरण जैसी विशेषताओं के संदर्भ में संबद्ध देशों से निर्यातित संबद्ध सामानों की तुलनीय है। ये दोनों तकनीकी और वाणिज्यिक रूप से प्रतिस्थापनीय हैं। उपभोक्ता इन दोनों का प्रयोग परस्पर परिवर्तनीय रूप से कर रहे हैं।
इस प्रकार, प्राधिकारी मानते हैं कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उत्पादित संबद्ध सामान पाटनरोधी नियमावली के अनुसार संबद्ध देशों से निर्यातित विचाराधीन उत्पाद की समान वस्तु हैं।
घरेलू उद्योग का क्षेत्र एवं आधार
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संबद्ध सामानों को उनके के-मूल्य के आधार पर विभिन्न ग्रेडों में वर्गीकृत किया जाता है। संबद्ध सामानों का मुख्य अनुप्रयोग उनके के-मूल्य पर निर्भर करता है; जितना अधिक के मूल्य होगा उतना ही अधिक मॉलक्यूलर भार भी होगा। लो मॉलक्यूलर भार वाले पीवीसी सस्पेंसन मुख्य रूप से रिजिड फिल्म और शीट, ब्लो मॉल्डेड बोतल और अन्य इंजेक्शन मॉल्डिंग वस्तुओं में प्रयोग पाते हैं। अधिक मॉलक्यूलर भार वाला पीवीसी सस्पेंसन मुख्य रूप से एक्सट्रूजन पाइपों और प्रोफाइल में अनुप्रयोग पाता है। उच्च क्षरण के साथ अधिक पीवीसी सस्पेंसन भी तारों और केबिलों में विशिष्ट अनुप्रयोग पाते हैं और शू लास्ट्स, फ्लेक्सिबल फिल्म्स आदि जैसे अन्य लचीले अनुप्रयोगों में स्थान पाते हैं। वर्तमान जांच एक निर्णायक समीक्षा जांच होने के नाते और संबद्ध देशों से संबद्ध सामानों के आयातों पर पाटनरोधी शुल्क लागू होने के नाते प्राधिकारी मानते हैं कि वर्तमान जांच में विचाराधीन उत्पाद का क्षेत्र वही रहता है जो मूल तथा बाद की समीक्षा जांच में है। इसके अतिरिक्त, किसी भी हितबद्ध पक्षकार ने समीक्षा के क्षेत्र में संशोधन का अनुरोध करते हुए कोई उचित अनुरोध नहीं किया है। इस संबंध में, दिनांक चार अप्रैल, दो हज़ार चौदह की अधिसूचना संख्या इक्कीस उनतीस दो हज़ार ग्यारह - डीजीएडी द्वारा जारी अंतिम निष्कर्ष वाले निर्णायक समीक्षा जांच परिणाम पर विश्वास किया जाता है जिसमें विचाराधीन उत्पाद निम्नलिखित रूप में माना गया थाः "सात. वर्तमान जांच में विचाराधीन उत्पाद "विनाइल क्लोराइड मोनोमर का होमो पॉलीमर ऑफ है जिसमें विभिन्न पॉलीमर श्रृंखलाएं सीमा शुल्क वर्गीकरण संख्या तीन हज़ार नौ सौ चार.इक्कीस के तहत आने वाली एक-दूसरे से संबद्ध नहीं होते हैं। विचाराधीन उत्पाद क्रॉस लिंक्ड पीवीसी, क्लोरीनेटिड पीवीसी , विनाइल क्लोराइड विनाइल एसीटेट कोपोलाइमर , पीवीसी पेस्ट रेसिन और पीवीसी ब्लैंडिंग रेसिन जैसे विशिष्ट पीवीसी सस्पेंसन रेसिन को अलग करता है। विचाराधीन उत्पाद मूल जांच में माने गए उत्पाद के समान है। आठ. विचाराधीन उत्पाद में समर्पित एचएस कोड नहीं है और आयातों को तीन हज़ार नौ सौ चार के तहत आने वाले विभिन्न एचएस कोडों के तहत मंजूर किया जाता है। सीमा शुल्क वर्गीकरण केवल संकेतात्मक है और किसी भी तरह वर्तमान जांच के क्षेत्र पर और प्रस्तावित उपायों पर बाध्यकारी नहीं है । दस. रिकार्ड में साक्ष्य और जांच की शुरूआत की अधिसूचना को ध्यान में रखते हुए, प्राधिकारी विचाराधीन उत्पाद के क्षेत्र को मूल जांच परिणाम में माने गए क्षेत्र के समान ही रखना उपयुक्त मानते हैं। " प्राधिकारी चार अंक के स्तर पर आईटीसीएचएस के निर्धारण के संबंध में प्रकटन के उत्तर में किए गए अनुरोधों को नोट करते हैं। इस संबंध में प्राधिकारी नोट करते हैं कि यद्यपि उत्पादकों/निर्यातकों द्वारा भिन्न आईटीसीएचएस उल्लिखित किए जा सकते हैं, तथापि उत्पाद विवरण में आईटीसीएचएस में प्राथमिक है, इन चिंताओं को मद्देनजर रखते हुए विचाराधीन उत्पाद का वर्गीकरण चार अंक के स्तर पर उल्लिखित किया गया है, जैसा कि पूर्व के मामले में किया गया था। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि सीमा शुल्क वर्गीकरण प्रकृति में केवल संकेतात्मक है और बाध्यकारी नहीं है । समान वस्तु के संबंध में पाटनरोधी नियमावली के नियम दो में निम्नानुसार प्रावधान हैः "ऐसी वस्तु जो भारत में पाटित किये जाने के लिए जांचाधीन वस्तु से हर तरीके से समनरूप अथवा समान है अथवा ऐसी वस्तु के अभाव में ऐसी दूसरी वस्तु जो यद्यपि हर प्रकार से समान नहीं है तथापि, उसमें जांचाधीन वस्तुओं से अत्यधिक मिलती-जुलती विशेषताएं हैं। " रिकार्ड में सूचना पर विचार करने के बाद प्राधिकारी मानते हैं कि संबद्ध देशों से निर्यातित विचाराधीन उत्पाद और भारतीय उद्योग द्वारा उत्पादित संबद्ध उत्पाद में कोई ज्ञात अंतर नहीं है। घरेलू उद्योग द्वारा उत्पादित संबद्ध सामान भौतिक एवं रासायनिक विशेषताओं, प्रकार्य एवं प्रयोग, उत्पाद विशिष्टियों, वितरण और विपणन एवं सामानों के प्रशुल्क वर्गीकरण जैसी विशेषताओं के संदर्भ में संबद्ध देशों से निर्यातित संबद्ध सामानों की तुलनीय है। ये दोनों तकनीकी और वाणिज्यिक रूप से प्रतिस्थापनीय हैं। उपभोक्ता इन दोनों का प्रयोग परस्पर परिवर्तनीय रूप से कर रहे हैं। इस प्रकार, प्राधिकारी मानते हैं कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उत्पादित संबद्ध सामान पाटनरोधी नियमावली के अनुसार संबद्ध देशों से निर्यातित विचाराधीन उत्पाद की समान वस्तु हैं। घरेलू उद्योग का क्षेत्र एवं आधार
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Monalisa Hot Photo: भोजपुरी क्वीन मोनालिसा सोशल मीडिया पर रोजाना तहलका मचाए रहती हैं। वह आए दिन अपनी हॉट और ग्लैमरस तस्वीरों के चलते इंटरनेट का पारा हाई कर देती हैं।
Monalisa Hot Photo: भोजपुरी क्वीन मोनालिसा सोशल मीडिया पर रोजाना तहलका मचाए रहती हैं। वह आए दिन अपनी हॉट और ग्लैमरस तस्वीरों के चलते इंटरनेट का पारा हाई कर देती हैं। आज फिर मोनालिसा ने सोशल मीडिया पर अपने हुस्न का जलवा बिखेरा है, दरअसल उन्होंने अपनी हद से ज्यादा बोल्ड फोटो शेयर की है।
भोजपुरी हसीना मोनालिसा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं, आए दिन उनका नया पोस्ट सामने आता है, जो किसी ना किसी कारणवश चर्चा में आ ही जाता है। वहीं अब उनके द्वारा शेयर किए गए लेटेस्ट पोस्ट की बात करें तो वह भी लाइमलाइट में आ चुका है, क्योंकि उस पोस्ट में मोनालिसा का बेहद ग्लैमरस भरा अंदाज देखने को मिल रहा है।
मोनालिसा बेहद हॉट हैं और वह अधिकतर ही अपनी हॉटनेस दिखाती रहती हैं। एक्ट्रेस ने अपने लेटेस्ट पोस्ट में भी अपना कुछ ऐसा हॉट रूप दिखाया है, जिसे देखने के बाद तो फैंस आहें भरने पर मजबूर हो जा रहें हैं। समुंदर किनारे रेत पर बैठकर मोनालिसा का कातिलाना अंदाज देखते बन रहा है, वहीं उनका आउटफिट तो उनकी हॉटनेस को और अधिक बढ़ा रहा है। मोनालिसा के आउटफिट की बात करें तो वह पिंक और व्हाइट कलर की शॉर्ट्स के साथ ब्लैक कलर का बेहद ही रिवीलिंग टॉप पहने हुए हैं और साथ ही हैट भी लगाई हुई है, इस पूरे लुक में मोनालिसा किलर लग रहीं हैं।
मोनालिसा के हर पोस्ट पर फैंस भर-भरकर प्यार लुटाते हैं। वहीं अभिनेत्री के इस पोस्ट पर भी फैंस टूट पड़े हैं। एक फैन ने लिखा, "बेबी बीच। " दूसरे ने लिखा, "हाय गर्मी। " तीसरे ने लिखा, "हॉटी", इसी तरह तमाम फैंस उन्हें हॉट, ब्यूटीफुल, प्यारी, बिकिनी बेबी जैसा कॉम्प्लीमेंट दे रहें हैं। वहीं कुछ फैंस कमेंट बॉक्स में फायर और दिल वाला इमोजी भी भेज रहें हैं।
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Monalisa Hot Photo: भोजपुरी क्वीन मोनालिसा सोशल मीडिया पर रोजाना तहलका मचाए रहती हैं। वह आए दिन अपनी हॉट और ग्लैमरस तस्वीरों के चलते इंटरनेट का पारा हाई कर देती हैं। Monalisa Hot Photo: भोजपुरी क्वीन मोनालिसा सोशल मीडिया पर रोजाना तहलका मचाए रहती हैं। वह आए दिन अपनी हॉट और ग्लैमरस तस्वीरों के चलते इंटरनेट का पारा हाई कर देती हैं। आज फिर मोनालिसा ने सोशल मीडिया पर अपने हुस्न का जलवा बिखेरा है, दरअसल उन्होंने अपनी हद से ज्यादा बोल्ड फोटो शेयर की है। भोजपुरी हसीना मोनालिसा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं, आए दिन उनका नया पोस्ट सामने आता है, जो किसी ना किसी कारणवश चर्चा में आ ही जाता है। वहीं अब उनके द्वारा शेयर किए गए लेटेस्ट पोस्ट की बात करें तो वह भी लाइमलाइट में आ चुका है, क्योंकि उस पोस्ट में मोनालिसा का बेहद ग्लैमरस भरा अंदाज देखने को मिल रहा है। मोनालिसा बेहद हॉट हैं और वह अधिकतर ही अपनी हॉटनेस दिखाती रहती हैं। एक्ट्रेस ने अपने लेटेस्ट पोस्ट में भी अपना कुछ ऐसा हॉट रूप दिखाया है, जिसे देखने के बाद तो फैंस आहें भरने पर मजबूर हो जा रहें हैं। समुंदर किनारे रेत पर बैठकर मोनालिसा का कातिलाना अंदाज देखते बन रहा है, वहीं उनका आउटफिट तो उनकी हॉटनेस को और अधिक बढ़ा रहा है। मोनालिसा के आउटफिट की बात करें तो वह पिंक और व्हाइट कलर की शॉर्ट्स के साथ ब्लैक कलर का बेहद ही रिवीलिंग टॉप पहने हुए हैं और साथ ही हैट भी लगाई हुई है, इस पूरे लुक में मोनालिसा किलर लग रहीं हैं। मोनालिसा के हर पोस्ट पर फैंस भर-भरकर प्यार लुटाते हैं। वहीं अभिनेत्री के इस पोस्ट पर भी फैंस टूट पड़े हैं। एक फैन ने लिखा, "बेबी बीच। " दूसरे ने लिखा, "हाय गर्मी। " तीसरे ने लिखा, "हॉटी", इसी तरह तमाम फैंस उन्हें हॉट, ब्यूटीफुल, प्यारी, बिकिनी बेबी जैसा कॉम्प्लीमेंट दे रहें हैं। वहीं कुछ फैंस कमेंट बॉक्स में फायर और दिल वाला इमोजी भी भेज रहें हैं।
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नए घर में शादी के बाद आज रचना का चौथा दिन था।अब तक तो सब ठीक ही था।रचना को मायके की ही तरह प्यार और दुलार यहाँ भी मिल रहा था आज रचना का रसोई पूजन थाजिससे रचना कुछ डरी हुई थी। हाथों में मेहंदी, बालो में गजरा लगाए महकती हुई रचना को जब उसकी दोनों जेठानियाँ रसोईघर की ओर ले जाने लगीं तो घबराहट के मारे रचना काँप उठी और एक पल को ठिठक गई । दोनों जेठानियाँ ज़ोर से हँसते हुए बोलीं अरे घबराने की ज़रूरत नहीं है बस घर के ही लोग होंगे। रचना भारी मन से रसोईघर की ओर चल पड़ी अपनी दोनों जेठानियों के साथ, वह मन ही मन अपनी माँ को याद करने लगी साथ ही माँ पर नाराज़ भी होने लगी मैं तो नादान थी माँ को तो मुझे खाना बनाना सिखाना चाहिए था,अब क्या होगा ? शादी के बाद आज पहली बार मुझे खाना बनाना है कल तक तो सब मेरी सुंदरता , पढाई-लिखाई , कपड़ों आदि की बहुत तारीफ कर रहे थे जब सबको पता चलेगा कि मुझे खाना बनाना नहीं आता तब क्या होगा? नई नवेली दुल्हन रचना सिर से पैर तक सिहर उठी।उसने खुद को रसोईघर में पाया। बड़ी जेठानी बोली, बताओ रचना क्या बनाओगी? छोटी जेठानी तुरंत बोली क्यों दीदी? ये तो हम बताएँगे। अच्छा मंझली तो तू ही बता क्या बनवाएँ इससे ? अब तो रचना की आँखों से आँसूं निकल पड़े और वो सुबकने लगी।बड़ी और मँझली दोनो एक साथ बोल उठीं अरे.. रचना हम तो मज़ाक कर रहीं थी तुम तो हमारी छोटी बहन हो जो जी चाहे बना लो ।रचना सुबकते हुए बोली दीदी मुझे खाना बनाना नहीं आता और रोने लगी ।दोनो जेठानियों ने एक दूसरे का मुँह देखा और हँस पड़ीं। बस इतनी सी बात; तुमने तो हमें डरा ही दिया था। हम दोनों तुम्हारी बड़ी बहने हैं और आज तो तुम्हारे चूल्हा पूजन की रस्म है चलो चूल्हा पूज कर तुम एक तरफ बैठ जाना, हम तुम्हारी तरफ से सूजी का हलवा बनाएंगे , पर हाँ जितनी देर हलवा बनेगा तुम्हे रसोई में ही रहना होगा। रचना का हृदय कुछ शांत तो हुआ वह सोचने लगी जब भी माँ मुझे खाना बनाने को कहती तो मै अपनी किताबें लेकर भाग जाती और कहती मुझे थोड़ी ना ज़िंदगी भर तुम्हारी तरह खाना बनाना है।काश मैंने माँ की बात मान ली होती खैर अब जब मै घर जाऊँगी तो पूरा खाना बनाना सीख कर आऊँगी।रचना को अपनी दोनो जेठानियों के व्यव्हार में इतना अपनापन लगा कि उसके अंदर का सारा डर छूमन्तर हो गया।उसने मन ही मन निश्चय किया कि जब ईश्वर ने मुझे इतना अच्छा ससुराल दिया है तो क्या मै अपनी एक छोटी सी कमी को पूरा नहीं कर सकती।तभी बड़ी जेठानी की आवाज़ आई रचना हलवा बन गया है चलो अब तुम चल कर सबको परोस दो।रचना ने अपनी दोनों जेठानियों के पैर पकड़ते हुए कहा दीदी मैं आपसे वादा करती हूँ इस बार जब मायके से आऊँगी तो सच में सबको अपने हाथ से बनाकर पूरा खाना खिलाऊँगी। दोनो जेठानियों ने रचना को प्यार से उठाया और उसे आशीर्वाद देते हुए गले लगा लिया फिर तीनों एक साथ डाइनिंग रूम की ओर बढ़ चलीं। टेबल पर जब रचना ने हलवा परोसा तो ननद ननदोई दोनोजेठजी और बड़ी बुआ जी सभी ने रचना को आशीर्वाद के रूप में रूपए और उपहार दिए और हलवे की खूब प्रशंसा कीरचना ने भी अपने सभी उपहार अपनी जेठानियों को देते हुए कहा दीदी जिस दिन मैं सच में इनके योग्य हो जाऊँगी आपसे ले लूँगी।
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नए घर में शादी के बाद आज रचना का चौथा दिन था।अब तक तो सब ठीक ही था।रचना को मायके की ही तरह प्यार और दुलार यहाँ भी मिल रहा था आज रचना का रसोई पूजन थाजिससे रचना कुछ डरी हुई थी। हाथों में मेहंदी, बालो में गजरा लगाए महकती हुई रचना को जब उसकी दोनों जेठानियाँ रसोईघर की ओर ले जाने लगीं तो घबराहट के मारे रचना काँप उठी और एक पल को ठिठक गई । दोनों जेठानियाँ ज़ोर से हँसते हुए बोलीं अरे घबराने की ज़रूरत नहीं है बस घर के ही लोग होंगे। रचना भारी मन से रसोईघर की ओर चल पड़ी अपनी दोनों जेठानियों के साथ, वह मन ही मन अपनी माँ को याद करने लगी साथ ही माँ पर नाराज़ भी होने लगी मैं तो नादान थी माँ को तो मुझे खाना बनाना सिखाना चाहिए था,अब क्या होगा ? शादी के बाद आज पहली बार मुझे खाना बनाना है कल तक तो सब मेरी सुंदरता , पढाई-लिखाई , कपड़ों आदि की बहुत तारीफ कर रहे थे जब सबको पता चलेगा कि मुझे खाना बनाना नहीं आता तब क्या होगा? नई नवेली दुल्हन रचना सिर से पैर तक सिहर उठी।उसने खुद को रसोईघर में पाया। बड़ी जेठानी बोली, बताओ रचना क्या बनाओगी? छोटी जेठानी तुरंत बोली क्यों दीदी? ये तो हम बताएँगे। अच्छा मंझली तो तू ही बता क्या बनवाएँ इससे ? अब तो रचना की आँखों से आँसूं निकल पड़े और वो सुबकने लगी।बड़ी और मँझली दोनो एक साथ बोल उठीं अरे.. रचना हम तो मज़ाक कर रहीं थी तुम तो हमारी छोटी बहन हो जो जी चाहे बना लो ।रचना सुबकते हुए बोली दीदी मुझे खाना बनाना नहीं आता और रोने लगी ।दोनो जेठानियों ने एक दूसरे का मुँह देखा और हँस पड़ीं। बस इतनी सी बात; तुमने तो हमें डरा ही दिया था। हम दोनों तुम्हारी बड़ी बहने हैं और आज तो तुम्हारे चूल्हा पूजन की रस्म है चलो चूल्हा पूज कर तुम एक तरफ बैठ जाना, हम तुम्हारी तरफ से सूजी का हलवा बनाएंगे , पर हाँ जितनी देर हलवा बनेगा तुम्हे रसोई में ही रहना होगा। रचना का हृदय कुछ शांत तो हुआ वह सोचने लगी जब भी माँ मुझे खाना बनाने को कहती तो मै अपनी किताबें लेकर भाग जाती और कहती मुझे थोड़ी ना ज़िंदगी भर तुम्हारी तरह खाना बनाना है।काश मैंने माँ की बात मान ली होती खैर अब जब मै घर जाऊँगी तो पूरा खाना बनाना सीख कर आऊँगी।रचना को अपनी दोनो जेठानियों के व्यव्हार में इतना अपनापन लगा कि उसके अंदर का सारा डर छूमन्तर हो गया।उसने मन ही मन निश्चय किया कि जब ईश्वर ने मुझे इतना अच्छा ससुराल दिया है तो क्या मै अपनी एक छोटी सी कमी को पूरा नहीं कर सकती।तभी बड़ी जेठानी की आवाज़ आई रचना हलवा बन गया है चलो अब तुम चल कर सबको परोस दो।रचना ने अपनी दोनों जेठानियों के पैर पकड़ते हुए कहा दीदी मैं आपसे वादा करती हूँ इस बार जब मायके से आऊँगी तो सच में सबको अपने हाथ से बनाकर पूरा खाना खिलाऊँगी। दोनो जेठानियों ने रचना को प्यार से उठाया और उसे आशीर्वाद देते हुए गले लगा लिया फिर तीनों एक साथ डाइनिंग रूम की ओर बढ़ चलीं। टेबल पर जब रचना ने हलवा परोसा तो ननद ननदोई दोनोजेठजी और बड़ी बुआ जी सभी ने रचना को आशीर्वाद के रूप में रूपए और उपहार दिए और हलवे की खूब प्रशंसा कीरचना ने भी अपने सभी उपहार अपनी जेठानियों को देते हुए कहा दीदी जिस दिन मैं सच में इनके योग्य हो जाऊँगी आपसे ले लूँगी।
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नई दिल्लीः अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ी राहत मिली है। अमेरिका के कैपिटल हिल में हिंसा भड़काने के आरोप में उन्हें बरी कर दिया गया है। ट्रंप के खिलाफ दूसरी बार लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर सीनेट में सुनवाई पूरी हुई और बाद में वोटिंग हुई। वोटिंग के बाद ट्रंप को बरी करने का फैसला किया गया।
अमेरिकी सीनेट ने पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप को यूएस कैपिटल में 6 जनवरी को हुए दंगा भड़काने के आरोप में बरी करने के लिए 57-43 वोट दिए। 57 ने उन्हें दोषी माना, जबकि 43 ने उनके पक्ष में वोट किया। ऐसे में दोषी करार देने के लिए जरूरी 67 वोट (2 तिहाई बहुमत) नहीं मिल सके।
डोनाल्ड ट्रंप के वकीलों ने सीनेट में कहा कि ट्रंप कानून-व्यवस्था के प्रमुख थे और उनके भाषण ने दंगा नहीं भड़काया। वकीलों ने दावा किया कि ट्रंप के खिलाफ महाभियोग के दौरान लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
ट्रंप के वकील ब्रूस कैस्टर ने बचाव में कहा था, 'प्रतिनिधि सभा के प्रबंधकों ने महाभियोग के लिए जो आरोप पेश किए हैं, उन्हें सही साबित करने के लिए सबूतों का अभाव है। प्रतिनिधि सभा ने राजनीति से प्रेरित होकर यह महाभियोग चलाया है। ' कैस्टर ने विभिन्न डेमोक्रेटिक नेताओं की वीडियो क्लिप दिखाते हुए कहा कि उनका लक्ष्य एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को हटाना है, मतदाताओं की इच्छा के नाम पर अपना फैसला लागू करना करना है।
उन्होंने कहा, 'इस महाभियोग सुनवाई के दौरान सबसे अहम बात यह है कि 45वें राष्ट्रपति ने भीड़ को उकसाया या नहीं, डेमोक्रेटिक नेता इसे राजद्रोह कह रहे हैं, लेकिन यह निश्चित ही राजद्रोह नहीं है। राजद्रोह तब होता है, जब देश की सत्ता हथियाने की कोशिश की जाती है, लेकिन इस मामले में स्पष्ट रूप से ऐसा कुछ नहीं है। '
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नई दिल्लीः अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ी राहत मिली है। अमेरिका के कैपिटल हिल में हिंसा भड़काने के आरोप में उन्हें बरी कर दिया गया है। ट्रंप के खिलाफ दूसरी बार लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर सीनेट में सुनवाई पूरी हुई और बाद में वोटिंग हुई। वोटिंग के बाद ट्रंप को बरी करने का फैसला किया गया। अमेरिकी सीनेट ने पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप को यूएस कैपिटल में छः जनवरी को हुए दंगा भड़काने के आरोप में बरी करने के लिए सत्तावन-तैंतालीस वोट दिए। सत्तावन ने उन्हें दोषी माना, जबकि तैंतालीस ने उनके पक्ष में वोट किया। ऐसे में दोषी करार देने के लिए जरूरी सरसठ वोट नहीं मिल सके। डोनाल्ड ट्रंप के वकीलों ने सीनेट में कहा कि ट्रंप कानून-व्यवस्था के प्रमुख थे और उनके भाषण ने दंगा नहीं भड़काया। वकीलों ने दावा किया कि ट्रंप के खिलाफ महाभियोग के दौरान लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। ट्रंप के वकील ब्रूस कैस्टर ने बचाव में कहा था, 'प्रतिनिधि सभा के प्रबंधकों ने महाभियोग के लिए जो आरोप पेश किए हैं, उन्हें सही साबित करने के लिए सबूतों का अभाव है। प्रतिनिधि सभा ने राजनीति से प्रेरित होकर यह महाभियोग चलाया है। ' कैस्टर ने विभिन्न डेमोक्रेटिक नेताओं की वीडियो क्लिप दिखाते हुए कहा कि उनका लक्ष्य एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को हटाना है, मतदाताओं की इच्छा के नाम पर अपना फैसला लागू करना करना है। उन्होंने कहा, 'इस महाभियोग सुनवाई के दौरान सबसे अहम बात यह है कि पैंतालीसवें राष्ट्रपति ने भीड़ को उकसाया या नहीं, डेमोक्रेटिक नेता इसे राजद्रोह कह रहे हैं, लेकिन यह निश्चित ही राजद्रोह नहीं है। राजद्रोह तब होता है, जब देश की सत्ता हथियाने की कोशिश की जाती है, लेकिन इस मामले में स्पष्ट रूप से ऐसा कुछ नहीं है। '
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नई दिल्ली. पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का अंतिम संस्कार रविवार को दिल्ली के निगमबोध घाट पर किया गया था। इसमें शामिल हुए भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो और पतंजलि के प्रवक्ता एसके तिजारावाला समेत 11 लोगों के मोबाइल चोरी हो गए। सोमवार को तिजारावाला ने इसकी जानकारी दी।
पुलिस के मुताबिक, "बाबुल सुप्रियो समेत पांच लोगों ने मोबाइल चोरी होने की शिकायत की है। हमने मामले की जांच भी शुरू कर दी है। " वहीं, तिजारावाला ने ट्वीट कर मोबाइल की फोटो, उसकी लोकेशन और आईएमईआई नंबर भी शेयर किया।
दिल्ली पुलिस वाले बाबू मेरा फोन दिला दो. . !
अभी मेरे चोरी किए गए फोन में 3. 11 बजे वोडाफोन का सिम डाला गया है। स्क्रीन शाट में देख लो।
मैंने आपको फोन की लोकेशन आदि सब भेज दी है।
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नई दिल्ली. पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का अंतिम संस्कार रविवार को दिल्ली के निगमबोध घाट पर किया गया था। इसमें शामिल हुए भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो और पतंजलि के प्रवक्ता एसके तिजारावाला समेत ग्यारह लोगों के मोबाइल चोरी हो गए। सोमवार को तिजारावाला ने इसकी जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, "बाबुल सुप्रियो समेत पांच लोगों ने मोबाइल चोरी होने की शिकायत की है। हमने मामले की जांच भी शुरू कर दी है। " वहीं, तिजारावाला ने ट्वीट कर मोबाइल की फोटो, उसकी लोकेशन और आईएमईआई नंबर भी शेयर किया। दिल्ली पुलिस वाले बाबू मेरा फोन दिला दो. . ! अभी मेरे चोरी किए गए फोन में तीन. ग्यारह बजे वोडाफोन का सिम डाला गया है। स्क्रीन शाट में देख लो। मैंने आपको फोन की लोकेशन आदि सब भेज दी है।
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पेंशन का चलन ब्रिटिश शासन काल में हुआ था। जो राजा ब्रिटिश शासन के अधीन आ जाते थे उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन बिताने के लिए सरकार कुछ भत्ता देती थी, जिसे पेंशन कहा जाता था। यही परंपरा अंग्रेजी सरकार में वृत्ति करने वालों को, सेवा निवृत्ति के बाद दी जाती रही। स्वतंत्र भारत की सरकारों ने उसे ज्यों का त्यों अपनाए रखा। दशकों बाद विधायकों और सांसदों पर भी इस नीति को लागू कर दिया गया। ऊपर से एक तमाशा और किया गया कि जो विधायक या सांसद जितनी बार जीत कर सदन में पहुंचेगा उसे उतनी बार की अलग-अलग पेंशन मिलेगी। यहां तक कि अगर वह एक वर्ष भी विधायक या सांसद रह चुका, तो उसे आजीवन पेंशन मिलेगी।
सवाल है कि जब संविधान ने राजनीति को व्यवसाय न मान कर समाजसेवा या देशसेवा माना है, तो वेतन और पेंशन कैसी? फिर जब इन जनप्रतिधियों को समस्त खर्चे, सुविधाएं, आवास, भोजन आदि सरकार की तरफ से निशुल्क दिया जाता है तो जनता की गाढ़ी कमाई को इनके वेतन और पेंशन पर क्यों लुटाया जाता है? अगर इनका वेतन और पेंशन बंद कर दी जाए, तो राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। राजनीति में फिर वही लोग जाएंगे, जो ईमानदार और सेवाभाव लिए होंगे।
कुछ राज्यों में तेल कंपनियां (बीपीसीएल और एचपीसीएल) पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति पूरी तरह नहीं कर पा रही हैं। कहीं-कहीं तो पचास फीसद आपूर्ति कम हो गई है। तेल की कमी के चलते पंप मालिक आठ घंटे तक ही पंप खोलने को मजबूर हैं। पेट्रोल पंप संगठन ने मांग की है कि आपूर्ति बराबर रखी जाए। इससे आम उपभोक्ता और किसानों को परेशानी हो रही है।
तेल कंपनियां कह रही हैं कि हमें डीजल पर तेईस रुपए और पेट्रोल पर सोलह रुपए प्रति लीटर घाटा हो रहा है, क्योंकि सरकार ने उत्पाद शुल्क घटा दिया है। यह बात कुछ समझ से परे लगती है। इससे तो सरकार की आमदनी कम हुई है, कंपनी की आमदनी से इसका क्या लेना देना?
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पेंशन का चलन ब्रिटिश शासन काल में हुआ था। जो राजा ब्रिटिश शासन के अधीन आ जाते थे उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन बिताने के लिए सरकार कुछ भत्ता देती थी, जिसे पेंशन कहा जाता था। यही परंपरा अंग्रेजी सरकार में वृत्ति करने वालों को, सेवा निवृत्ति के बाद दी जाती रही। स्वतंत्र भारत की सरकारों ने उसे ज्यों का त्यों अपनाए रखा। दशकों बाद विधायकों और सांसदों पर भी इस नीति को लागू कर दिया गया। ऊपर से एक तमाशा और किया गया कि जो विधायक या सांसद जितनी बार जीत कर सदन में पहुंचेगा उसे उतनी बार की अलग-अलग पेंशन मिलेगी। यहां तक कि अगर वह एक वर्ष भी विधायक या सांसद रह चुका, तो उसे आजीवन पेंशन मिलेगी। सवाल है कि जब संविधान ने राजनीति को व्यवसाय न मान कर समाजसेवा या देशसेवा माना है, तो वेतन और पेंशन कैसी? फिर जब इन जनप्रतिधियों को समस्त खर्चे, सुविधाएं, आवास, भोजन आदि सरकार की तरफ से निशुल्क दिया जाता है तो जनता की गाढ़ी कमाई को इनके वेतन और पेंशन पर क्यों लुटाया जाता है? अगर इनका वेतन और पेंशन बंद कर दी जाए, तो राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। राजनीति में फिर वही लोग जाएंगे, जो ईमानदार और सेवाभाव लिए होंगे। कुछ राज्यों में तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति पूरी तरह नहीं कर पा रही हैं। कहीं-कहीं तो पचास फीसद आपूर्ति कम हो गई है। तेल की कमी के चलते पंप मालिक आठ घंटे तक ही पंप खोलने को मजबूर हैं। पेट्रोल पंप संगठन ने मांग की है कि आपूर्ति बराबर रखी जाए। इससे आम उपभोक्ता और किसानों को परेशानी हो रही है। तेल कंपनियां कह रही हैं कि हमें डीजल पर तेईस रुपए और पेट्रोल पर सोलह रुपए प्रति लीटर घाटा हो रहा है, क्योंकि सरकार ने उत्पाद शुल्क घटा दिया है। यह बात कुछ समझ से परे लगती है। इससे तो सरकार की आमदनी कम हुई है, कंपनी की आमदनी से इसका क्या लेना देना?
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Bokaro : केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये अग्निपथ योजना का कांग्रेसी जमकर विरोध कर रहे हैं. कांग्रेस पार्टी के निर्देश पर बोकारो जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में इस योजना को लेकर सत्याग्रह किया जा रहा है. बोकारो विधानसभा के चास स्थित नेताजी सुभाष चौक पर कांग्रेस नेताओं ने सत्याग्रह के माध्यम से योजना को वापस लेने की मांग की है. वहीं नेताओं ने कहा कि यह योजना युवा विरोधी नीति का परिणाम है.
कांग्रेस नेत्री श्वेता सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के द्वारा जो भी योजना अभी तक आम लोगों के हित में बताकर लाया गया है. वह सभी योजना पूरी तरह से फेल साबित हुई है. वहीं उन्होंने कहा कि हम सभी चाहते हैं कि युवाओं के भविष्य और देश के भविष्य को देखते हुए इस योजना को वापस लिया जाए क्योंकि देश की सुरक्षा में जाने वाले युवाओं के साथ यह सिर्फ मजाक है.
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Bokaro : केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये अग्निपथ योजना का कांग्रेसी जमकर विरोध कर रहे हैं. कांग्रेस पार्टी के निर्देश पर बोकारो जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में इस योजना को लेकर सत्याग्रह किया जा रहा है. बोकारो विधानसभा के चास स्थित नेताजी सुभाष चौक पर कांग्रेस नेताओं ने सत्याग्रह के माध्यम से योजना को वापस लेने की मांग की है. वहीं नेताओं ने कहा कि यह योजना युवा विरोधी नीति का परिणाम है. कांग्रेस नेत्री श्वेता सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के द्वारा जो भी योजना अभी तक आम लोगों के हित में बताकर लाया गया है. वह सभी योजना पूरी तरह से फेल साबित हुई है. वहीं उन्होंने कहा कि हम सभी चाहते हैं कि युवाओं के भविष्य और देश के भविष्य को देखते हुए इस योजना को वापस लिया जाए क्योंकि देश की सुरक्षा में जाने वाले युवाओं के साथ यह सिर्फ मजाक है.
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उक्त पडद्य के अध्ययनसे निम्नलिखित निष्कर्ष उपस्थित होते हैं। (१) गुप्तचर राज्य व्यवस्था एवं शासन व्यवस्थाको सुदृढ़ बनानेमें सहायक हैं। (२) प्रजाके सुख एवं उसकी शान्तिमें बाधा उत्पन्न करनेवालोंका पता गुप्तचरों द्वारा ही लगता है। (३) प्रमुख सूचनाओंको एकत्रकर गुप्तचर राजाके पास पहुंचाते हैं।
शासनव्यवस्था के लिए गुप्तचर विभाग अत्यन्त आवश्यक है। शासनमें विघ्न या गढ़बढ़ी उत्पन्न करनेवालों को जानकारी गुप्तचर विभागसे ही प्राप्त होती थी। स्वराष्ट्र और परराष्ट्र सम्बन्धी व्यवस्थाएं और सूचनाएं एकत्र करनेका कार्य गुप्तचर विभाग ही करता था। शासन सञ्चालन के लिए कौटिल्यने भी सन्धि, विग्रह, चतुरुपाय और तोन शक्तियोंको उपयोगी माना है।
शासनको सुदृढ बनानेके हेतु गुप्त मन्त्रणा आवश्यक है। यह गुप्तमंत्रणा मन्त्रिपरिषद्के साथ की जाती थी। शत्रु देशकी ओर दूतोंको भेजना और अपने सन्देश वहाँ पहुँचाकर शासनव्यवस्थाको सुदृढ करना आवश्यक था। दूत तीन प्रकारके बताये गये है---
१. निःसृष्टार्थ
२. परमितार्थ ३. शासनार्थ
आदिपुराणमे निःसृष्टार्थ दूतका उल्लेख आया है जिसमें अमात्यके सम्पूर्ण गुण वर्तमान हों उसे निसृष्टार्थ, जिसमे चौपाई गुण हीन हों उसे परमितार्थ और आधे गुण होन हों उसे शासनार्थ कहा गया है। राजदूतको चाहिए कि वह शत्रु देशके वनरक्षक, सीमारक्षक, नगररक्षक, नगरवासियों और जनपदवासियोंसे मित्रता करे। शत्रु देशको राजधानी, दुर्ग, राज्यसोमा, आय, उपज, आजीविकाके साधन, राष्ट्ररक्षाके तरीके एवं वहाँके गुप्त भेदोको दूतको जानकारी प्राप्तकरनी चाहिये । शत्रुराजाके देशमे प्रवेश करनेके पूर्व वहाँके राजासे उसे आज्ञा प्राप्त कर लेनी चाहिए, तभी वह वहाँ अपने कार्य मे सिद्धि प्राप्त कर सकेगा ।
शासनव्यवस्था के लिए दण्ड परमावश्यक माना गया है। यदि अपराधी को दण्ड न दिया जाय, तो अपराधोकी संख्या निरन्तर बढ़ती जायगी। एवं राष्ट्रकी रक्षा बुराइयोसे नही हो सकेगी। अपराधीको दण्ड देकर शासनव्यवस्थाको चरितार्थ किया जाता है। भोगभूमिके बाद हा, मा, धिक्के रूपमें दण्डव्यवस्था प्रचलित थी, पर जैसे जैसे अपराध करनेकी प्रवृत्ति बढ़ती गयी वैसे वैसे दण्डव्यवस्था भी उत्तरोत्तर कड़ी होती गयी। आदिपुराणके भारतमें तीन प्रकारके दण्ड प्रचलित मे जो अपराधके अनुसार दिये जाते थे।
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उक्त पडद्य के अध्ययनसे निम्नलिखित निष्कर्ष उपस्थित होते हैं। गुप्तचर राज्य व्यवस्था एवं शासन व्यवस्थाको सुदृढ़ बनानेमें सहायक हैं। प्रजाके सुख एवं उसकी शान्तिमें बाधा उत्पन्न करनेवालोंका पता गुप्तचरों द्वारा ही लगता है। प्रमुख सूचनाओंको एकत्रकर गुप्तचर राजाके पास पहुंचाते हैं। शासनव्यवस्था के लिए गुप्तचर विभाग अत्यन्त आवश्यक है। शासनमें विघ्न या गढ़बढ़ी उत्पन्न करनेवालों को जानकारी गुप्तचर विभागसे ही प्राप्त होती थी। स्वराष्ट्र और परराष्ट्र सम्बन्धी व्यवस्थाएं और सूचनाएं एकत्र करनेका कार्य गुप्तचर विभाग ही करता था। शासन सञ्चालन के लिए कौटिल्यने भी सन्धि, विग्रह, चतुरुपाय और तोन शक्तियोंको उपयोगी माना है। शासनको सुदृढ बनानेके हेतु गुप्त मन्त्रणा आवश्यक है। यह गुप्तमंत्रणा मन्त्रिपरिषद्के साथ की जाती थी। शत्रु देशकी ओर दूतोंको भेजना और अपने सन्देश वहाँ पहुँचाकर शासनव्यवस्थाको सुदृढ करना आवश्यक था। दूत तीन प्रकारके बताये गये है--- एक. निःसृष्टार्थ दो. परमितार्थ तीन. शासनार्थ आदिपुराणमे निःसृष्टार्थ दूतका उल्लेख आया है जिसमें अमात्यके सम्पूर्ण गुण वर्तमान हों उसे निसृष्टार्थ, जिसमे चौपाई गुण हीन हों उसे परमितार्थ और आधे गुण होन हों उसे शासनार्थ कहा गया है। राजदूतको चाहिए कि वह शत्रु देशके वनरक्षक, सीमारक्षक, नगररक्षक, नगरवासियों और जनपदवासियोंसे मित्रता करे। शत्रु देशको राजधानी, दुर्ग, राज्यसोमा, आय, उपज, आजीविकाके साधन, राष्ट्ररक्षाके तरीके एवं वहाँके गुप्त भेदोको दूतको जानकारी प्राप्तकरनी चाहिये । शत्रुराजाके देशमे प्रवेश करनेके पूर्व वहाँके राजासे उसे आज्ञा प्राप्त कर लेनी चाहिए, तभी वह वहाँ अपने कार्य मे सिद्धि प्राप्त कर सकेगा । शासनव्यवस्था के लिए दण्ड परमावश्यक माना गया है। यदि अपराधी को दण्ड न दिया जाय, तो अपराधोकी संख्या निरन्तर बढ़ती जायगी। एवं राष्ट्रकी रक्षा बुराइयोसे नही हो सकेगी। अपराधीको दण्ड देकर शासनव्यवस्थाको चरितार्थ किया जाता है। भोगभूमिके बाद हा, मा, धिक्के रूपमें दण्डव्यवस्था प्रचलित थी, पर जैसे जैसे अपराध करनेकी प्रवृत्ति बढ़ती गयी वैसे वैसे दण्डव्यवस्था भी उत्तरोत्तर कड़ी होती गयी। आदिपुराणके भारतमें तीन प्रकारके दण्ड प्रचलित मे जो अपराधके अनुसार दिये जाते थे।
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27 जनवरी (CRICKETNMORE)। टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 3 शतक मारने वाले दुनिया के अकेले खिलाड़ी न्यूजीलैंड के कॉलिन मुनरो सिर्फ 1 करोड़ 90 लाख रुपए में बिके। उन्हें दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम ने खरीदा। इससे पहले वह कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम का हिस्सा थे। मुनरो इस ऑक्शन में उन खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्हें लेकर माना जा रहा था कि इन्हें बहुत बड़ी कीमत मिलेगी।
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सत्ताईस जनवरी । टीबीस इंटरनेशनल क्रिकेट में तीन शतक मारने वाले दुनिया के अकेले खिलाड़ी न्यूजीलैंड के कॉलिन मुनरो सिर्फ एक करोड़ नब्बे लाख रुपए में बिके। उन्हें दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम ने खरीदा। इससे पहले वह कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम का हिस्सा थे। मुनरो इस ऑक्शन में उन खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्हें लेकर माना जा रहा था कि इन्हें बहुत बड़ी कीमत मिलेगी।
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नई दिल्ली। मनीष पांडे की आकर्षक पारी और विजय शंकर के साथ उनकी अटूट शतकीय साझेदारी से सनराइजर्स हैदराबाद ने गुरुवार को राजस्थान रॉयल्स को आठ विकेट से एकतरफा अंदाज में हराकर इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के प्लेऑफ में पहुंचने की अपनी उम्मीदें बनाए रखीं। सनराइजर्स के सामने 155 रन के लक्ष्य के सामने अपने दो प्रमुख बल्लेबाज शुरू में ही गंवा दिए थे लेकिन पांडे ने 47 गेंदों पर चार चौकों और आठ छक्कों की मदद से नाबाद 83 रन बनाए।
उन्होंने और शंकर (51 गेंदों पर नाबाद 52) ने समझदारी भरी बल्लेबाजी करते हुए तीसरे विकेट के लिए 140 रन जोड़कर अपनी टीम को 18. 1 ओवर में दो विकेट पर 156 रन तक पहुंचाया। सनराइजर्स की यह दस मैचों में चौथी जीत है और उसके प्वॉइंट टेबल में रॉयल्स के समान आठ अंक हो गए हैं। रॉयल्स ने हालांकि उससे एक मैच अधिक खेला है और इसलिए प्लेऑफ की उसकी राह अधिक मुश्किल हो गई है।
दोनों टीमों की प्लेइंग XI:
राजस्थान रॉयल्सः रॉबिन उथप्पा, बेन स्टोक्स, संजू सैमसन, स्टीव स्मिथ (कप्तान), जोस बटलर, रियान पराग, राहुल तेवतिया, जोफ्रा आर्चर, श्रेयस गोपाल, अंकित राजपूत, कार्तिक त्यागी।
सनराइजर्स हैदराबादः डेविड वॉर्नर (कप्तान), जॉनी बेयरस्टो, मनीष पांडे, जेसन होल्डर, प्रियम गर्ग, विजय शंकर, अब्दुल समद, राशिद खान, संदीप शर्मा, टी नटराजन, शाहबाज नदीम।
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नई दिल्ली। मनीष पांडे की आकर्षक पारी और विजय शंकर के साथ उनकी अटूट शतकीय साझेदारी से सनराइजर्स हैदराबाद ने गुरुवार को राजस्थान रॉयल्स को आठ विकेट से एकतरफा अंदाज में हराकर इंडियन प्रीमियर लीग के प्लेऑफ में पहुंचने की अपनी उम्मीदें बनाए रखीं। सनराइजर्स के सामने एक सौ पचपन रन के लक्ष्य के सामने अपने दो प्रमुख बल्लेबाज शुरू में ही गंवा दिए थे लेकिन पांडे ने सैंतालीस गेंदों पर चार चौकों और आठ छक्कों की मदद से नाबाद तिरासी रन बनाए। उन्होंने और शंकर ने समझदारी भरी बल्लेबाजी करते हुए तीसरे विकेट के लिए एक सौ चालीस रन जोड़कर अपनी टीम को अट्ठारह. एक ओवर में दो विकेट पर एक सौ छप्पन रन तक पहुंचाया। सनराइजर्स की यह दस मैचों में चौथी जीत है और उसके प्वॉइंट टेबल में रॉयल्स के समान आठ अंक हो गए हैं। रॉयल्स ने हालांकि उससे एक मैच अधिक खेला है और इसलिए प्लेऑफ की उसकी राह अधिक मुश्किल हो गई है। दोनों टीमों की प्लेइंग XI: राजस्थान रॉयल्सः रॉबिन उथप्पा, बेन स्टोक्स, संजू सैमसन, स्टीव स्मिथ , जोस बटलर, रियान पराग, राहुल तेवतिया, जोफ्रा आर्चर, श्रेयस गोपाल, अंकित राजपूत, कार्तिक त्यागी। सनराइजर्स हैदराबादः डेविड वॉर्नर , जॉनी बेयरस्टो, मनीष पांडे, जेसन होल्डर, प्रियम गर्ग, विजय शंकर, अब्दुल समद, राशिद खान, संदीप शर्मा, टी नटराजन, शाहबाज नदीम।
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नई दिल्लीःRealme Neo GT Smartphone: मार्केट में चाईनीज फोन मेकर कंपनी धमाल करी रही है, जिससे ग्राहकों के एक से बढ़कर एक स्मार्टफोन मिल रही है। इस कढ़ी में सस्ते फोन मेकर कंपनी रियलमी के मोबाइल धमाल मचा रहे है। कंपनी ने हाल ही में लॉन्च किया फोन मार्केट में खूब सेल हो रहा है, जिसे आप भी खरीदने का प्लान कर रहे हैं जो यहां पर जान सकते हैं। Realme Neo GT Smartphone के बारे में.....
जब से भारतीय बाजार में रियलमी कंपनी आई तो ग्राहकों के लिए धांकड़ खासियत के साथ में सस्ते फोन को लॉन्च किए जा रही है। वही कंपनी के पोर्टफोलियों में ऐसे-ऐसे धांसू फोन हैं जो ग्राहकों के दिलों पर राज कर रहे हैं, इन फोन्स में Realme Neo GT भी एक Realme के इस सबसे जबरदस्त स्मार्टफोन है। इसमें शानदार फीचर्स के साथ खूब सेल हो रहा है।
कंपनी ने Realme Neo GT मोबाइल में प्रोसेसर के तौर पर इसमें आपको MediaTek Dimensity 1200 MT6893 प्रोसेसर दिया है ये फोन Android v11 ऑपरेटिंग सिस्टम पर रन करता है।
Realme Neo GT में 6.43 इंच का Super AMOLED डिस्प्ले देखने को मिल जाता है जो कि 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है। इसके अलावा आपको इसमें गोरिल्ला ग्लास की प्रोटेक्शन देखने को मिल जाती है !
वही इस फोनके रैम और इंटरनल स्टोरेज की बात की जाए तो आपको इस स्मार्टफोन के अंदर 128GB 6GB RAM, 128GB 8GB RAM, 256GB 12GB RAM और इंटरनल स्टोरेज देखने को मिल जाएगी !
इस फोन में कंपनी ने जबरदस्त कैमरा सेटअप दिया है जो अच्छी फोटो और विडियों को कैप्चर करता है,स्मार्टफोन में आपको पीछे की तरफ ट्रिपल कैमरा का सेटअप है जिसका प्राइमरी कैमरा 64MP मेगापिक्सल का उसके अलावा 8MP मेगापिक्सल का अल्ट्रा वाइड कैमरा और 2MP मेगापिक्सल का माइक्रो कैमरा लगा है वहीं सेल्फी फोटो लेने के लिए 16MP मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा देखने को मिलेगा।
कंपनी ने Realme Neo GT में आपको 4500mAh की पावरफुल बैटरी देखने को मिलती है तो 50W वाट की फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है और चार्ज करने के लिए टाइप सी चार्जिंग सॉकेट दिया गया है।
Realme Neo GT 3 स्टोरेज वेरिएंट में सेल किया जा रहा है,
- इसके 6GB + 128GB मॉडल की कीमत 29,999 रुपये है।
- 8GB + 128GB मॉडल की कीमत 31,999 रुपये है।
- 8GB + 256GB की कीमत 33,999 रुपये है।
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नई दिल्लीःRealme Neo GT Smartphone: मार्केट में चाईनीज फोन मेकर कंपनी धमाल करी रही है, जिससे ग्राहकों के एक से बढ़कर एक स्मार्टफोन मिल रही है। इस कढ़ी में सस्ते फोन मेकर कंपनी रियलमी के मोबाइल धमाल मचा रहे है। कंपनी ने हाल ही में लॉन्च किया फोन मार्केट में खूब सेल हो रहा है, जिसे आप भी खरीदने का प्लान कर रहे हैं जो यहां पर जान सकते हैं। Realme Neo GT Smartphone के बारे में..... जब से भारतीय बाजार में रियलमी कंपनी आई तो ग्राहकों के लिए धांकड़ खासियत के साथ में सस्ते फोन को लॉन्च किए जा रही है। वही कंपनी के पोर्टफोलियों में ऐसे-ऐसे धांसू फोन हैं जो ग्राहकों के दिलों पर राज कर रहे हैं, इन फोन्स में Realme Neo GT भी एक Realme के इस सबसे जबरदस्त स्मार्टफोन है। इसमें शानदार फीचर्स के साथ खूब सेल हो रहा है। कंपनी ने Realme Neo GT मोबाइल में प्रोसेसर के तौर पर इसमें आपको MediaTek Dimensity एक हज़ार दो सौ MTछः हज़ार आठ सौ तिरानवे प्रोसेसर दिया है ये फोन Android vग्यारह ऑपरेटिंग सिस्टम पर रन करता है। Realme Neo GT में छः.तैंतालीस इंच का Super AMOLED डिस्प्ले देखने को मिल जाता है जो कि एक सौ बीस हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट के साथ आता है। इसके अलावा आपको इसमें गोरिल्ला ग्लास की प्रोटेक्शन देखने को मिल जाती है ! वही इस फोनके रैम और इंटरनल स्टोरेज की बात की जाए तो आपको इस स्मार्टफोन के अंदर एक सौ अट्ठाईसGB छःGB RAM, एक सौ अट्ठाईसGB आठGB RAM, दो सौ छप्पनGB बारहGB RAM और इंटरनल स्टोरेज देखने को मिल जाएगी ! इस फोन में कंपनी ने जबरदस्त कैमरा सेटअप दिया है जो अच्छी फोटो और विडियों को कैप्चर करता है,स्मार्टफोन में आपको पीछे की तरफ ट्रिपल कैमरा का सेटअप है जिसका प्राइमरी कैमरा चौंसठMP मेगापिक्सल का उसके अलावा आठMP मेगापिक्सल का अल्ट्रा वाइड कैमरा और दोMP मेगापिक्सल का माइक्रो कैमरा लगा है वहीं सेल्फी फोटो लेने के लिए सोलहMP मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा देखने को मिलेगा। कंपनी ने Realme Neo GT में आपको चार हज़ार पाँच सौmAh की पावरफुल बैटरी देखने को मिलती है तो पचास वाट वाट की फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है और चार्ज करने के लिए टाइप सी चार्जिंग सॉकेट दिया गया है। Realme Neo GT तीन स्टोरेज वेरिएंट में सेल किया जा रहा है, - इसके छःGB + एक सौ अट्ठाईसGB मॉडल की कीमत उनतीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है। - आठGB + एक सौ अट्ठाईसGB मॉडल की कीमत इकतीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है। - आठGB + दो सौ छप्पनGB की कीमत तैंतीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है।
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अमेरिका के 3 दिवसीय दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र (UN) के मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने 180 देशों के 8,000 लोगों के साथ योग किया। इसमें हॉलीवुड अभिनेता रिचर्ड गेरे के साथ-साथ कई अन्य क्षेत्रों की हस्तियां शामिल हुईं। कार्यक्रम शुरू होने से पहले मोदी ने मुख्यालय में स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
क्या कहा प्रधानमंत्री मोदी ने?
प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में कहा, "मुझे बताया गया कि यहां लगभग सभी देशों का प्रतिनिधित्व है और हम सभी को यहां लाने का अद्भुत कारण योग है। योग का अर्थ है जोड़ना, तो आपका एक साथ आना योग के दूसरे रूप की अभिव्यक्ति है। " इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के अध्यक्ष साबा कोरोसी ने कहा, "जो शक्तियां ब्रह्मांड में और हमारे अंदर हैं, वो एक ही नियम का पालन करती हैं और वह है संतुलन हासिल करना। "
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अमेरिका के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने एक सौ अस्सी देशों के आठ,शून्य लोगों के साथ योग किया। इसमें हॉलीवुड अभिनेता रिचर्ड गेरे के साथ-साथ कई अन्य क्षेत्रों की हस्तियां शामिल हुईं। कार्यक्रम शुरू होने से पहले मोदी ने मुख्यालय में स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। क्या कहा प्रधानमंत्री मोदी ने? प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में कहा, "मुझे बताया गया कि यहां लगभग सभी देशों का प्रतिनिधित्व है और हम सभी को यहां लाने का अद्भुत कारण योग है। योग का अर्थ है जोड़ना, तो आपका एक साथ आना योग के दूसरे रूप की अभिव्यक्ति है। " इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष साबा कोरोसी ने कहा, "जो शक्तियां ब्रह्मांड में और हमारे अंदर हैं, वो एक ही नियम का पालन करती हैं और वह है संतुलन हासिल करना। "
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स्त्रियों में से 20 प्रतिशत भौरतों में घबराहट पैदा होने लगती है और उनके चेहरे पर मुंहासे निकल प्राते हैं तथा उनमें मोटापा श्रा जाता है;
( ख ) क्या इस सम्बन्ध में पेरिस के दो वैज्ञानिकों, डा० फिकाइस मिटक्लाने तथा डा० जार्ज मेलकी की रिपोर्टों की धार सरकार का ध्यान दिलाया गया है; और
(ग) यदि हां, तो इस बारे में सरकार की क्या प्रतिक्रिया है ?
स्वास्थ्य तथा परिवार नियोजन मंत्री (डा० भीपति चन्द्रशेवर ) : ( क ) इस प्रकार के कोई निश्चित आकड़े नहीं हैं जिनसे पता चले कि गर्भनिरोधक गोलियों से मोटापा या शारीरिक कमजोरी हो जाती है। अधिक समय तक गोलियों के प्रयोग से झाइयों की शक्ल में कुछ हद तक एण्ड्रोजनिसिटी (पुंसत्वजनक बीमारी) हो जाती है ।
लूप का प्रयोग मोटापा, झाइयां या शारीरिक कमजोरी उत्पन्न नहीं करता है ।
(ख) जी नहीं । सरकार को इन रिपोटों की कोई जानकारी नहीं है । (ग) यह प्रश्न नहीं उठता । योजना आयोग में कर्मचारी
2625. श्री मोलहू प्रसाब :
श्री रवि राय :
श्री महारज सिंह भारती :
क्या योजना मंत्री यह बढ़ाने की कृपा करेंगे कि :
(क) योजना आयोग में इस समय श्रेणी एक, दो, तीन और चार के क्रमशः कितने कर्मचारी कार्य करते हैं;
(ग) 1965-66 में उन पर कुल कितना धन व्यय हया ?
( ख ) उनमें से तकनीकी तथा गैरतकनीकी प्रत्येक श्रेणी की संध्या क्रमशः कितनी है; और
योजन, पेट्रोलियम और रसयम तथा समाज कल्याण मंत्रः (अः अशोक मेहता) : (क) से (ग) योजना प्रयोग कार्यक्रम मूल्याकन संगठन और याजना कार्य समिति के सम्बन्ध में सूचना देते हुए दा विवरण सभा-पटल पर प्रस्तुत है। [पुस्कालय में रख दिया गया । देखिये संख्या L.T. 68/५ ]
Jawaharlal Postgraduate Medical Instihute, Pondicherry
2626. Shri Sheopujan Shastri: Shri Gunanand Thakur: Shri Madhu Limaye: Shri Devan Sen:
Will the Minister of Health and Family Planning be pleased to state:
(a) the total amount of money so far spent on the Pondicherry Postgraduate Institution;
(b) the part thereof spent on build ings, furnishings etc.;
(c) whether a Printing Press is attached to the institution;
(d) the total outlay on the Pres to-date;
(e) whether over a dozen statuen have been put up at the Institution; ( 1 ) if so, the money spent thereon; (g) whether the Institution "sports" hundreds of clocks all over the place;
(h) whether only one out of three operating theatres is at present airconditioned but the college council room is fitted with four air-conditioners; and
(i) the total outlay on medicines to-date;
The Minister of Health and Family Planning (Dr. S. Chandrasekhar): (a) The total expenditure incurred on the Institute including the Under-graduate wing since 1957-58 in Rs. 453.48 lakhs.
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स्त्रियों में से बीस प्रतिशत भौरतों में घबराहट पैदा होने लगती है और उनके चेहरे पर मुंहासे निकल प्राते हैं तथा उनमें मोटापा श्रा जाता है; क्या इस सम्बन्ध में पेरिस के दो वैज्ञानिकों, डाशून्य फिकाइस मिटक्लाने तथा डाशून्य जार्ज मेलकी की रिपोर्टों की धार सरकार का ध्यान दिलाया गया है; और यदि हां, तो इस बारे में सरकार की क्या प्रतिक्रिया है ? स्वास्थ्य तथा परिवार नियोजन मंत्री : इस प्रकार के कोई निश्चित आकड़े नहीं हैं जिनसे पता चले कि गर्भनिरोधक गोलियों से मोटापा या शारीरिक कमजोरी हो जाती है। अधिक समय तक गोलियों के प्रयोग से झाइयों की शक्ल में कुछ हद तक एण्ड्रोजनिसिटी हो जाती है । लूप का प्रयोग मोटापा, झाइयां या शारीरिक कमजोरी उत्पन्न नहीं करता है । जी नहीं । सरकार को इन रिपोटों की कोई जानकारी नहीं है । यह प्रश्न नहीं उठता । योजना आयोग में कर्मचारी दो हज़ार छः सौ पच्चीस. श्री मोलहू प्रसाब : श्री रवि राय : श्री महारज सिंह भारती : क्या योजना मंत्री यह बढ़ाने की कृपा करेंगे कि : योजना आयोग में इस समय श्रेणी एक, दो, तीन और चार के क्रमशः कितने कर्मचारी कार्य करते हैं; एक हज़ार नौ सौ पैंसठ-छयासठ में उन पर कुल कितना धन व्यय हया ? उनमें से तकनीकी तथा गैरतकनीकी प्रत्येक श्रेणी की संध्या क्रमशः कितनी है; और योजन, पेट्रोलियम और रसयम तथा समाज कल्याण मंत्रः : से योजना प्रयोग कार्यक्रम मूल्याकन संगठन और याजना कार्य समिति के सम्बन्ध में सूचना देते हुए दा विवरण सभा-पटल पर प्रस्तुत है। [पुस्कालय में रख दिया गया । देखिये संख्या L.T. अड़सठ/पाँच ] Jawaharlal Postgraduate Medical Instihute, Pondicherry दो हज़ार छः सौ छब्बीस. Shri Sheopujan Shastri: Shri Gunanand Thakur: Shri Madhu Limaye: Shri Devan Sen: Will the Minister of Health and Family Planning be pleased to state: the total amount of money so far spent on the Pondicherry Postgraduate Institution; the part thereof spent on build ings, furnishings etc.; whether a Printing Press is attached to the institution; the total outlay on the Pres to-date; whether over a dozen statuen have been put up at the Institution; if so, the money spent thereon; whether the Institution "sports" hundreds of clocks all over the place; whether only one out of three operating theatres is at present airconditioned but the college council room is fitted with four air-conditioners; and the total outlay on medicines to-date; The Minister of Health and Family Planning : The total expenditure incurred on the Institute including the Under-graduate wing since एक हज़ार नौ सौ सत्तावन-अट्ठावन in Rs. चार सौ तिरेपन.अड़तालीस lakhs.
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सिरमौर (नाहन). औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में एक बार फिर फर्जी चेक का मामला सामने आया है. फर्जी चेक के जरिए करोड़ों रुपए की राशि हड़पने की कोशिश की गई है. शिकायत पर पुलिस मामले की जांंच में जुट गई है.
मिली जानकारी के मुताबिक स्पार्क एनजीओ ने कालाअंब की पीएनबी शाखा में तीन करोड़ का चेक लगाया. पीएनबी ने राशि जारी करने से पहले इसकी जांच करना उचित समझा. जांच करने पर चेक को फर्जी पाया गया. यह चेक आगरा की फर्म द्वारा जारी किया गया बताया है. स्पार्क एनजीओ ने चेक को भुगतान के लिए कालाअंब पीएनबी में जमा करवाया.
पीएनबी कालाअंब शाखा के प्रबंधक रूपेश कुमार ने पड़ताल की तो चेक फर्जी पाया गया. जांच में पाया गया कि एके ट्रेडर्स आगरा की चेकबुक से ही चेक को गायब किया गया है. गौर हो कि इससे पहले भी कालाअंब में फर्जी चेक के कई मामले सामने आए हैं. कालाअंब पुलिस ने पंजाब नेशनल बैंक शाखा प्रबंधक की शिकायत पर स्पार्क एनजीओ के खिलाफ जांच शुरू कर दी है. एसपी रोहित मालपानी ने बताया कि मामले को लेकर जांच की जा रही है.
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सिरमौर . औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में एक बार फिर फर्जी चेक का मामला सामने आया है. फर्जी चेक के जरिए करोड़ों रुपए की राशि हड़पने की कोशिश की गई है. शिकायत पर पुलिस मामले की जांंच में जुट गई है. मिली जानकारी के मुताबिक स्पार्क एनजीओ ने कालाअंब की पीएनबी शाखा में तीन करोड़ का चेक लगाया. पीएनबी ने राशि जारी करने से पहले इसकी जांच करना उचित समझा. जांच करने पर चेक को फर्जी पाया गया. यह चेक आगरा की फर्म द्वारा जारी किया गया बताया है. स्पार्क एनजीओ ने चेक को भुगतान के लिए कालाअंब पीएनबी में जमा करवाया. पीएनबी कालाअंब शाखा के प्रबंधक रूपेश कुमार ने पड़ताल की तो चेक फर्जी पाया गया. जांच में पाया गया कि एके ट्रेडर्स आगरा की चेकबुक से ही चेक को गायब किया गया है. गौर हो कि इससे पहले भी कालाअंब में फर्जी चेक के कई मामले सामने आए हैं. कालाअंब पुलिस ने पंजाब नेशनल बैंक शाखा प्रबंधक की शिकायत पर स्पार्क एनजीओ के खिलाफ जांच शुरू कर दी है. एसपी रोहित मालपानी ने बताया कि मामले को लेकर जांच की जा रही है.
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मोरनी - मोरनी के बिजली रहित गांवों को रोशन करने के लिए मार्च माह की डैड लाइन थी, मगर विभाग का ठेकेदार अभी सामान भी पूरा नहीं पहुंचा पाया। ऐसे में मार्च माह तक काम होना संशय में ही है। मोरनी खंड की बिजली से वंचित 110 गांवों को रोशन करने का कार्य नंवबर माह में टेंडर अलाट हो जाने के बावजूद रफ्तार नहीं पकड़ पाया है, हालांकि विभाग ने टेंडर में इस कार्य को आगामी 31 मार्च तक पूर्ण करने की समय सीमा निधारित की है, लेकिन कार्य शुरू होने में लेटलतीफ ी के चलते आज तक बिजली की रोशनी से महरूम इन गांवों के लोगों तक बिजली पहुंचने में और समय लगेगा। हलका विधायक लतिका शर्मा के प्रयासों से मोरनी खंड के 110 छोटे गांव जिन्हें आजादी के बाद भी आज तक बिजली से रोशन नहीं किया जा सका है, उन गांवों में बिजली पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर द्वारा शिवालिक विकास बोर्ड से गत मई 2016 में दो करोड़ 15 लाख के बजट अलाट किया गया था, जिस पर आज तक कार्य रफ्तार नहीं पकड़ पाया है।
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मोरनी - मोरनी के बिजली रहित गांवों को रोशन करने के लिए मार्च माह की डैड लाइन थी, मगर विभाग का ठेकेदार अभी सामान भी पूरा नहीं पहुंचा पाया। ऐसे में मार्च माह तक काम होना संशय में ही है। मोरनी खंड की बिजली से वंचित एक सौ दस गांवों को रोशन करने का कार्य नंवबर माह में टेंडर अलाट हो जाने के बावजूद रफ्तार नहीं पकड़ पाया है, हालांकि विभाग ने टेंडर में इस कार्य को आगामी इकतीस मार्च तक पूर्ण करने की समय सीमा निधारित की है, लेकिन कार्य शुरू होने में लेटलतीफ ी के चलते आज तक बिजली की रोशनी से महरूम इन गांवों के लोगों तक बिजली पहुंचने में और समय लगेगा। हलका विधायक लतिका शर्मा के प्रयासों से मोरनी खंड के एक सौ दस छोटे गांव जिन्हें आजादी के बाद भी आज तक बिजली से रोशन नहीं किया जा सका है, उन गांवों में बिजली पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर द्वारा शिवालिक विकास बोर्ड से गत मई दो हज़ार सोलह में दो करोड़ पंद्रह लाख के बजट अलाट किया गया था, जिस पर आज तक कार्य रफ्तार नहीं पकड़ पाया है।
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रायपुरः प्रभास और कृति सेनन स्टारर आदिपुरुष फिल्म विवादों में घिरी हुई है कई दिग्गज कलाकारों और राजनेताओं की इस पर प्रतिक्रिया आई है वही इस बीच अब फिल्म को लेकर छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने रायपुर में कहा कि सबसे अच्छा तरीका है कि लोग फिल्म को देखने ही न जाएं। फिल्म के बारे में सब कुछ सुन लेने के पश्चात् जबरदस्ती देखने जाना सही नहीं है। पैसा आपका, समय आपका है। इस प्रकार से हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचाने की बात होती है, तब सेंसर बोर्ड को देखना चाहिए था कि हमारे आराध्य के मुख से इस प्रकार के डायलाग बुलवाना सही नहीं है। ऐसे लोगों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
इधर, छत्तीसगढ़ में फिल्म आदिपरूष के विरोध में कांग्रेस एवं बीजेपी एक सुर में बोल रहे हैं। शनिवार को सीएम भूपेश बघेल ने फिल्म के संवादों पर आपत्ति व्यक्त की थी। उन्होंने सवाल किया था कि हिंदुत्व के ठेकेदार राजनेता इस पर मौन क्यों हैं। रविवार को केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने भी फिल्म में प्रभु श्रीराम के अपमान का मुद्दा उठाते हुए सीएम से फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।
उन्होंने ट्वीट किया है कि फिल्म में हमारे आराध्य प्रभु श्रीराम, माता जानकी, वीर हनुमान एवं अन्य चरित्रों का फिल्मांकन जिस प्रकार से किया गया है, पात्रों के मुंह से जिस तरह से भद्दे डायलाग बुलवाए गए हैं इससे करोड़ों व्यक्तियों की भावना आहत हुई है। मैं सीएम भूपेश बघेल से आशा करती हूं कि श्रीराम के ननिहाल में इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाने का जल्द ही आदेश देंगे। वहीं, जगदलपुर में हिंदू संगठनों ने टाकीज से फिल्म के पोस्टर हटा दिए हैं। दृश्यों एवं संवाद को बदहने की मांग की है। संभावना जताई जा रही है कि छत्तीसगढ़ में फिल्म को प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
'गीता प्रेस' गोरखपुर को मिला गाँधी शांति पुरस्कार! भड़की कांग्रेस ने कहा- ये गोडसे को सम्मान मिलने जैसा. . . '
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रायपुरः प्रभास और कृति सेनन स्टारर आदिपुरुष फिल्म विवादों में घिरी हुई है कई दिग्गज कलाकारों और राजनेताओं की इस पर प्रतिक्रिया आई है वही इस बीच अब फिल्म को लेकर छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने रायपुर में कहा कि सबसे अच्छा तरीका है कि लोग फिल्म को देखने ही न जाएं। फिल्म के बारे में सब कुछ सुन लेने के पश्चात् जबरदस्ती देखने जाना सही नहीं है। पैसा आपका, समय आपका है। इस प्रकार से हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचाने की बात होती है, तब सेंसर बोर्ड को देखना चाहिए था कि हमारे आराध्य के मुख से इस प्रकार के डायलाग बुलवाना सही नहीं है। ऐसे लोगों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। इधर, छत्तीसगढ़ में फिल्म आदिपरूष के विरोध में कांग्रेस एवं बीजेपी एक सुर में बोल रहे हैं। शनिवार को सीएम भूपेश बघेल ने फिल्म के संवादों पर आपत्ति व्यक्त की थी। उन्होंने सवाल किया था कि हिंदुत्व के ठेकेदार राजनेता इस पर मौन क्यों हैं। रविवार को केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने भी फिल्म में प्रभु श्रीराम के अपमान का मुद्दा उठाते हुए सीएम से फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। उन्होंने ट्वीट किया है कि फिल्म में हमारे आराध्य प्रभु श्रीराम, माता जानकी, वीर हनुमान एवं अन्य चरित्रों का फिल्मांकन जिस प्रकार से किया गया है, पात्रों के मुंह से जिस तरह से भद्दे डायलाग बुलवाए गए हैं इससे करोड़ों व्यक्तियों की भावना आहत हुई है। मैं सीएम भूपेश बघेल से आशा करती हूं कि श्रीराम के ननिहाल में इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाने का जल्द ही आदेश देंगे। वहीं, जगदलपुर में हिंदू संगठनों ने टाकीज से फिल्म के पोस्टर हटा दिए हैं। दृश्यों एवं संवाद को बदहने की मांग की है। संभावना जताई जा रही है कि छत्तीसगढ़ में फिल्म को प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। 'गीता प्रेस' गोरखपुर को मिला गाँधी शांति पुरस्कार! भड़की कांग्रेस ने कहा- ये गोडसे को सम्मान मिलने जैसा. . . '
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हिंदू धर्म में भगवान श्री कृष्ण को बहुत ही पूजनीय माना जाता है. कुछ ही दिनों में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव यानी कृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtami 2021) आने वाली है. इस बार ये त्यौहार 30 अगस्त को मनाया जाने वाला है. बता दें कि श्री कृष्ण का जन्म भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, तभी इस तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी कहा जाता है और ये पर्व मनाया जाता है. वे लोग जो कृष्ण की भक्ति में डूबे रहते हैं, उनके लिए ये व्रत और त्यौहार बहुत ही खास होता है. रात के 12 बजे इस दिन व्रत रख कर लोग भगवान कृष्ण का जन्म करते हैं.
-शुरु में एक बर्तन लें और उसे गैस पर रख कर उसमें घी डाल दें.
-अब बर्तन में पड़े घी को गर्म होने दें और उसमें मखाना डाल दें.
- अब इन मखाने को हल्का लाल होने तक भून लें और बाद में ठंडा होने के लिए रख दें.
- जैसे ही मखाने ठंडे हो जाए, तो उनको छोटे छोटे टुकड़ों में काट लें.
-अब दूसरी तरफ एक बर्तन गैस पर रखें और उसमें दूध उबाले और बाद में उबाल आने पर इसमें तुंरत ही मखाना डाल दें.
-अब इसे 15 मिनट तक पकाएं और लेकिन ध्यान रहे बीच-बीच में इसे चलाते भी रहना है.
-15 मिनट पकाने के बाद गैस बंद कर दें और जब यह गुनगुनी हो जाएं तो इसे गैस से उतार लें.
-अब इस खीर में चीनी, इलायची पाउडर, कटे हुए बादाम और मेवे मिला लें.
-लीजिये आपकी मखाने की खीर तैयार हो गयी.
- अब भगवान श्री कृष्ण को स्वादिष्ट मखाने की खीर का भोग लगाएं और खुश करें.
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हिंदू धर्म में भगवान श्री कृष्ण को बहुत ही पूजनीय माना जाता है. कुछ ही दिनों में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव यानी कृष्ण जन्माष्टमी आने वाली है. इस बार ये त्यौहार तीस अगस्त को मनाया जाने वाला है. बता दें कि श्री कृष्ण का जन्म भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, तभी इस तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी कहा जाता है और ये पर्व मनाया जाता है. वे लोग जो कृष्ण की भक्ति में डूबे रहते हैं, उनके लिए ये व्रत और त्यौहार बहुत ही खास होता है. रात के बारह बजे इस दिन व्रत रख कर लोग भगवान कृष्ण का जन्म करते हैं. -शुरु में एक बर्तन लें और उसे गैस पर रख कर उसमें घी डाल दें. -अब बर्तन में पड़े घी को गर्म होने दें और उसमें मखाना डाल दें. - अब इन मखाने को हल्का लाल होने तक भून लें और बाद में ठंडा होने के लिए रख दें. - जैसे ही मखाने ठंडे हो जाए, तो उनको छोटे छोटे टुकड़ों में काट लें. -अब दूसरी तरफ एक बर्तन गैस पर रखें और उसमें दूध उबाले और बाद में उबाल आने पर इसमें तुंरत ही मखाना डाल दें. -अब इसे पंद्रह मिनट तक पकाएं और लेकिन ध्यान रहे बीच-बीच में इसे चलाते भी रहना है. -पंद्रह मिनट पकाने के बाद गैस बंद कर दें और जब यह गुनगुनी हो जाएं तो इसे गैस से उतार लें. -अब इस खीर में चीनी, इलायची पाउडर, कटे हुए बादाम और मेवे मिला लें. -लीजिये आपकी मखाने की खीर तैयार हो गयी. - अब भगवान श्री कृष्ण को स्वादिष्ट मखाने की खीर का भोग लगाएं और खुश करें.
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IBPS RRB Recruitment 2023: आईबीपीएस आरआरबी पीओ भर्ती 2023 के लिए आवेदन करने की इच्छा रखने वाले कैंडिडेट्स इधचर ध्यान दें। इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल (IBPS) अधिकारी स्केल I, II और III और कार्यालय सहायक भर्ती 2023 के लिए आज यानी 21 जून 2023 को आवेदन प्रक्रिया को बंद कर देगा। जिन इच्छुक उम्मीदवारों ने किसी कारणवश अभी तक आवेदन नहीं किया है, वे सभी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर जल्द से जल्द आवेदन कर दें।
IBPS की इस रिक्रूटमेंट ड्राइव के जरिए कुल 9हजार से ज्यादा पदों पर योग्य कैंडिडेट्स को भर्ती किया जाएगा। इस ड्राइव के जरिए अधिकारी सहायक (बहुउद्देशीय), अधिकारी स्केल I, अधिकारी स्केल II और अधिकारी स्केल III के कुल 9,075 पदों को भरा जाएगा। IBPS RRB प्रीलिम्स अगस्त 2023 में आयोजित होने की संभावना है।
इस भर्ती के लिए सामान्य और ओबीसी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 850 रुपये है, जबकि एससी, एसटी और अलग-अलग श्रेणी के उम्मीदवारों को 175 रुपये का भुगतान करना होगा। संबंधित विषय में ज्यादा जानकारी के लिए कैंडिडेट्स आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।
डायरेक्ट लिंक फॉर ऑफिसर असिस्टेंट(मल्टीपर्पज)
- सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट ibps. in पर जाएं।
- इसके बाद 'IBPS CRPs XII RRB रजिस्ट्रेशन' लिंक पर क्लिक करें।
- फिर वांछित पदों का चयन करें और आईबीपीएस आरआरबी आवेदन पत्र भरने के लिए आगे बढ़ें।
- इसके बाद आवेदन शुल्क का भुगतान करें।
- इसके बाद आवेदन पत्र को सबमिट करें और पेज को डाउनलोड करें।
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IBPS RRB Recruitment दो हज़ार तेईस: आईबीपीएस आरआरबी पीओ भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करने की इच्छा रखने वाले कैंडिडेट्स इधचर ध्यान दें। इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल अधिकारी स्केल I, II और III और कार्यालय सहायक भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आज यानी इक्कीस जून दो हज़ार तेईस को आवेदन प्रक्रिया को बंद कर देगा। जिन इच्छुक उम्मीदवारों ने किसी कारणवश अभी तक आवेदन नहीं किया है, वे सभी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर जल्द से जल्द आवेदन कर दें। IBPS की इस रिक्रूटमेंट ड्राइव के जरिए कुल नौहजार से ज्यादा पदों पर योग्य कैंडिडेट्स को भर्ती किया जाएगा। इस ड्राइव के जरिए अधिकारी सहायक , अधिकारी स्केल I, अधिकारी स्केल II और अधिकारी स्केल III के कुल नौ,पचहत्तर पदों को भरा जाएगा। IBPS RRB प्रीलिम्स अगस्त दो हज़ार तेईस में आयोजित होने की संभावना है। इस भर्ती के लिए सामान्य और ओबीसी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क आठ सौ पचास रुपयापये है, जबकि एससी, एसटी और अलग-अलग श्रेणी के उम्मीदवारों को एक सौ पचहत्तर रुपयापये का भुगतान करना होगा। संबंधित विषय में ज्यादा जानकारी के लिए कैंडिडेट्स आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। डायरेक्ट लिंक फॉर ऑफिसर असिस्टेंट - सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट ibps. in पर जाएं। - इसके बाद 'IBPS CRPs XII RRB रजिस्ट्रेशन' लिंक पर क्लिक करें। - फिर वांछित पदों का चयन करें और आईबीपीएस आरआरबी आवेदन पत्र भरने के लिए आगे बढ़ें। - इसके बाद आवेदन शुल्क का भुगतान करें। - इसके बाद आवेदन पत्र को सबमिट करें और पेज को डाउनलोड करें।
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लखनऊ। राजधानी लखनऊ के एक मोहल्ले में अपनी नौ माह की बेटी के साथ एक महिला रहती है। कई महीनों से अपने पति के रात-रात भर गायब रहने से वो परेशान थी। पुलिस थाने न जाकर उसने अपनी समस्या वहां रहने वाली 'वीरांगना' सिद्धेश्वरी को बताई। सिद्धेश्वरी ने उसकी समस्या को सुलझा दिया।
सिद्धेश्वरी सिंह (43 वर्ष) मडियांव की रहने वाली हैं। सिद्धेश्वरी की तरह राजधानी लखनऊ में 6500 'वीरांगनाएं' हैं। जो अलग-अलग क्षेत्रों से आकर नशा मुक्त, 1090, बाल आयोग, महिला आयोग, ट्रैफिक जैसे कार्यों में उत्तर-प्रदेश सरकार की मदद करने के लिए तत्पर हैं।
ये वीरांगनाएं बाराबंकी, सीतापुर और लखनऊ के कई गाँवों की महिलाएं और लड़कियां हैं। घरेलू हिंसा से लेकर ट्रैफिक पुलिस तक की समस्याएं ये वीरांगनाएं बखूबी सुलझा रही हैं। स्वयं सेवी संस्था उम्मीद ने इन्हें वीरांगना नाम दिया है। दो साल पहले तक ये लड़कियां अपने घरों तक ही सीमित थी लेकिन आज ये पूरे लखनऊ में लोगों की सुरक्षा के लिए काम कर रही हैं। लखनऊ में छह से आठ जोन हैं, जिसमें 110 वार्ड हैं और 2500 से ज्यादा मोहल्ले हैं। हर मोहल्ले में एक-एक वीरांगना हैं, जो अपने-अपने मोहल्ले की छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान कर रही हैं।
गैर सरकारी संस्था 'उम्मीद' जो 2003 से लखनऊ में विभिन्न मुद्दों पर काम कर रही हैं। संस्था के संस्थापक बलबीर सिंह बताते हैं, "लड़कियों में बहुत जज्बा होता है वो जिस भी काम को ठान ले, उसे पूरा करती हैं।
लखनऊ को स्मार्ट शहर बनाने में हम सबको आगे आना होगा। इस दिशा में उम्मीद संस्था ने ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर यातायात व्यवस्था को प्लेटफ़ॉर्म पर लाने की जिम्मेदारी ली है। 100 वीरांगनाओं को 20-20 करके 15 दिनों में ट्रैफिक रूल्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन ट्रैफिक सम्भालने वाली वीरांगनाओं को "वीरांगना कोप्स" नाम दिया गया है। बाराबंकी जिले के सिद्धौर ब्लॉक से आठ किलोमीटर दूर बाबा का टढवा गाँव है। इस गाँव में रहने वाली दीपिका (21 वर्ष) खुश होकर बताती हैं, "हमेशा हमारे गाँव में ये कहा जाता हैं कि लड़कियां ये नहीं कर सकती वो नहीं कर सकती। मैं इस गलत धारणा को ट्रैफिक पुलिस की मदद करके दूर करना चाहती हूं। वो आगे कहती हैं, "मुझे वीरांगना काप्स की ट्रेनिंग लेते 15 दिन हो गये हैं। मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। 10 अगस्त से मानदेय के तौर पर आठ हजार रुपए मिलना शुरू हो जाएगा।
इन वीरांगनाओं की कमांडर आराधना सिंह सिकरवार का कहना हैं कि आज के समय में हर एक लड़की अपने ही शहर में खुद को महफूज नहीं मानती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए केवल पुलिस प्रशासन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है बल्कि हम लड़कियों को खुद की सुरक्षा करने के लिए स्वयं आगे आना होगा। ये वीरांगनाएं हमारे शहर के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हैं। आराधना आगे बताती हैं कि इन वीरांगनाओं को प्रशिक्षित करके उन्हें पूर्ण रूप से ट्रैफिक पुलिस के सहयोग के लिए जागरूक करना हैं। ये वीरांगनाएं लखनऊ शहर के यातायात को सुचारू रूप से चलाने और स्मार्ट सिटी को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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लखनऊ। राजधानी लखनऊ के एक मोहल्ले में अपनी नौ माह की बेटी के साथ एक महिला रहती है। कई महीनों से अपने पति के रात-रात भर गायब रहने से वो परेशान थी। पुलिस थाने न जाकर उसने अपनी समस्या वहां रहने वाली 'वीरांगना' सिद्धेश्वरी को बताई। सिद्धेश्वरी ने उसकी समस्या को सुलझा दिया। सिद्धेश्वरी सिंह मडियांव की रहने वाली हैं। सिद्धेश्वरी की तरह राजधानी लखनऊ में छः हज़ार पाँच सौ 'वीरांगनाएं' हैं। जो अलग-अलग क्षेत्रों से आकर नशा मुक्त, एक हज़ार नब्बे, बाल आयोग, महिला आयोग, ट्रैफिक जैसे कार्यों में उत्तर-प्रदेश सरकार की मदद करने के लिए तत्पर हैं। ये वीरांगनाएं बाराबंकी, सीतापुर और लखनऊ के कई गाँवों की महिलाएं और लड़कियां हैं। घरेलू हिंसा से लेकर ट्रैफिक पुलिस तक की समस्याएं ये वीरांगनाएं बखूबी सुलझा रही हैं। स्वयं सेवी संस्था उम्मीद ने इन्हें वीरांगना नाम दिया है। दो साल पहले तक ये लड़कियां अपने घरों तक ही सीमित थी लेकिन आज ये पूरे लखनऊ में लोगों की सुरक्षा के लिए काम कर रही हैं। लखनऊ में छह से आठ जोन हैं, जिसमें एक सौ दस वार्ड हैं और दो हज़ार पाँच सौ से ज्यादा मोहल्ले हैं। हर मोहल्ले में एक-एक वीरांगना हैं, जो अपने-अपने मोहल्ले की छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान कर रही हैं। गैर सरकारी संस्था 'उम्मीद' जो दो हज़ार तीन से लखनऊ में विभिन्न मुद्दों पर काम कर रही हैं। संस्था के संस्थापक बलबीर सिंह बताते हैं, "लड़कियों में बहुत जज्बा होता है वो जिस भी काम को ठान ले, उसे पूरा करती हैं। लखनऊ को स्मार्ट शहर बनाने में हम सबको आगे आना होगा। इस दिशा में उम्मीद संस्था ने ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर यातायात व्यवस्था को प्लेटफ़ॉर्म पर लाने की जिम्मेदारी ली है। एक सौ वीरांगनाओं को बीस-बीस करके पंद्रह दिनों में ट्रैफिक रूल्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन ट्रैफिक सम्भालने वाली वीरांगनाओं को "वीरांगना कोप्स" नाम दिया गया है। बाराबंकी जिले के सिद्धौर ब्लॉक से आठ किलोमीटर दूर बाबा का टढवा गाँव है। इस गाँव में रहने वाली दीपिका खुश होकर बताती हैं, "हमेशा हमारे गाँव में ये कहा जाता हैं कि लड़कियां ये नहीं कर सकती वो नहीं कर सकती। मैं इस गलत धारणा को ट्रैफिक पुलिस की मदद करके दूर करना चाहती हूं। वो आगे कहती हैं, "मुझे वीरांगना काप्स की ट्रेनिंग लेते पंद्रह दिन हो गये हैं। मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। दस अगस्त से मानदेय के तौर पर आठ हजार रुपए मिलना शुरू हो जाएगा। इन वीरांगनाओं की कमांडर आराधना सिंह सिकरवार का कहना हैं कि आज के समय में हर एक लड़की अपने ही शहर में खुद को महफूज नहीं मानती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए केवल पुलिस प्रशासन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है बल्कि हम लड़कियों को खुद की सुरक्षा करने के लिए स्वयं आगे आना होगा। ये वीरांगनाएं हमारे शहर के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हैं। आराधना आगे बताती हैं कि इन वीरांगनाओं को प्रशिक्षित करके उन्हें पूर्ण रूप से ट्रैफिक पुलिस के सहयोग के लिए जागरूक करना हैं। ये वीरांगनाएं लखनऊ शहर के यातायात को सुचारू रूप से चलाने और स्मार्ट सिटी को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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नई दिल्लीः वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज ट्रेविस हेड ने बहुत बढ़िया शतक जमाया था. हेड को अहम मुकाबले में शतक के बाद टेस्ट बैटिंग रैंकिंग में बड़ा पुरस्कार मिला है. द ओवल में हिंदुस्तान के विरूद्ध WTC फाइनल के पहले दो दिनों में 163 रन बनाकर हेड ने 3 जगह की छलांग लगाई. वह 884 रेटिंग पॉइंट्स के साथ शीर्ष तीन में शामिल हो गए हैं. टेस्ट रैंकिंग में पहले तीन स्थानों पर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों का अतिक्रमण हो गया है. खास बात यह है कि ऐसा 39 वर्ष बाद हुआ है जब एक ही राष्ट्र के तीन बल्लेबाज टॉप पर हैं. मार्नस लाबुशेन पहले और स्टीव स्मिथ दूसरे पर काबिज हैं.
इससे पहले 1984 में वेस्ट इंडीज के तीन बल्लेबाजों ने यह कारनामा पहली बार करके दिखाया था. गॉर्डन ग्रीनिज, क्लाइव लॉयड और लैरी गोम्स टेस्ट क्रिकेट की रैंकिंग में टॉप तीन पोजीशन पर काबिज रहे थे. 39 वर्ष बाद ऑस्ट्रेलिया के तीन बल्लेबाजों ने यह कारनामा फिर से दोहराया है.
ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा भी 777 अंकों के साथ नौवें जगह पर काबिज हैं. यानी टॉप-10 में अब ऑस्ट्रेलिया के 4 बल्लेबाज शामिल हो गए हैं. एलेक्स कैरी ने भी 48 और नाबाद 66 रनों के बाद लंबी छलांग लगाई है. उन्होंने 11 स्थानों की छलांग के साथ 36वें जगह पर रखा गया. रोहित शर्मा 12वें और विराट कोहली 13वें जगह पर हैं.
टेस्ट गेंदबाजी में ऑस्ट्रेलियाई ऑफ स्पिनर नाथन ल्योन इंग्लैंड के तेज ओली रॉबिन्सन (777) के साथ छठे जगह पर रहे. ल्योन को पहली पारी के फाइनल में गेंदबाजी करने का बहुत कम मौका दिया गया था. हालांकि उन्होंने एक विकेट लिया. स्पिनर ने हिंदुस्तान की दूसरी पारी में 41 रन देकर 4 विकेट चटकाए. रैंकिंग में नीचे की ओर स्कॉट बोलैंड को काफी लाभ हुआ. वे मोहम्मद सिराज से चार जगह आगे 36वें जगह पर पहुंच गए. रविचंद्रन अश्विन फाइनल में हिंदुस्तान की हार के बावजूद 860 अंकों के साथ नंबर 1 पर बने हुए हैं.
टेस्ट ऑल-राउंडर रैंकिंग में शीर्ष दस में कोई परिवर्तन नहीं हुआ, हालांकि कैमरन ग्रीन ने एक जगह की छलांग लगाकर 15वां जगह हासिल किया, जबकि हिंदुस्तान के शार्दुल ठाकुर ने टेस्ट के दौरान गेंद और बल्ले से अच्छा प्रदर्शन कर 31वें जगह पर तीन पायदान की छलांग लगाई.
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नई दिल्लीः वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज ट्रेविस हेड ने बहुत बढ़िया शतक जमाया था. हेड को अहम मुकाबले में शतक के बाद टेस्ट बैटिंग रैंकिंग में बड़ा पुरस्कार मिला है. द ओवल में हिंदुस्तान के विरूद्ध WTC फाइनल के पहले दो दिनों में एक सौ तिरेसठ रन बनाकर हेड ने तीन जगह की छलांग लगाई. वह आठ सौ चौरासी रेटिंग पॉइंट्स के साथ शीर्ष तीन में शामिल हो गए हैं. टेस्ट रैंकिंग में पहले तीन स्थानों पर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों का अतिक्रमण हो गया है. खास बात यह है कि ऐसा उनतालीस वर्ष बाद हुआ है जब एक ही राष्ट्र के तीन बल्लेबाज टॉप पर हैं. मार्नस लाबुशेन पहले और स्टीव स्मिथ दूसरे पर काबिज हैं. इससे पहले एक हज़ार नौ सौ चौरासी में वेस्ट इंडीज के तीन बल्लेबाजों ने यह कारनामा पहली बार करके दिखाया था. गॉर्डन ग्रीनिज, क्लाइव लॉयड और लैरी गोम्स टेस्ट क्रिकेट की रैंकिंग में टॉप तीन पोजीशन पर काबिज रहे थे. उनतालीस वर्ष बाद ऑस्ट्रेलिया के तीन बल्लेबाजों ने यह कारनामा फिर से दोहराया है. ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा भी सात सौ सतहत्तर अंकों के साथ नौवें जगह पर काबिज हैं. यानी टॉप-दस में अब ऑस्ट्रेलिया के चार बल्लेबाज शामिल हो गए हैं. एलेक्स कैरी ने भी अड़तालीस और नाबाद छयासठ रनों के बाद लंबी छलांग लगाई है. उन्होंने ग्यारह स्थानों की छलांग के साथ छत्तीसवें जगह पर रखा गया. रोहित शर्मा बारहवें और विराट कोहली तेरहवें जगह पर हैं. टेस्ट गेंदबाजी में ऑस्ट्रेलियाई ऑफ स्पिनर नाथन ल्योन इंग्लैंड के तेज ओली रॉबिन्सन के साथ छठे जगह पर रहे. ल्योन को पहली पारी के फाइनल में गेंदबाजी करने का बहुत कम मौका दिया गया था. हालांकि उन्होंने एक विकेट लिया. स्पिनर ने हिंदुस्तान की दूसरी पारी में इकतालीस रन देकर चार विकेट चटकाए. रैंकिंग में नीचे की ओर स्कॉट बोलैंड को काफी लाभ हुआ. वे मोहम्मद सिराज से चार जगह आगे छत्तीसवें जगह पर पहुंच गए. रविचंद्रन अश्विन फाइनल में हिंदुस्तान की हार के बावजूद आठ सौ साठ अंकों के साथ नंबर एक पर बने हुए हैं. टेस्ट ऑल-राउंडर रैंकिंग में शीर्ष दस में कोई परिवर्तन नहीं हुआ, हालांकि कैमरन ग्रीन ने एक जगह की छलांग लगाकर पंद्रहवां जगह हासिल किया, जबकि हिंदुस्तान के शार्दुल ठाकुर ने टेस्ट के दौरान गेंद और बल्ले से अच्छा प्रदर्शन कर इकतीसवें जगह पर तीन पायदान की छलांग लगाई.
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अर्थशास्त्र का विषयक्षेत्र तथा इसको प्रणाली
समझने में सहायता पहुँचाता है कि "अनेवः समयो मे समाज का संस्थापन ढाँचा क्या रहा है, विभिन्न प्रकार के सामाजिक वर्गों का क्या स्वरूप रहा है तथा उनका एक दूसरे के प्रति क्या सम्बन्ध रहा है": इसमें से प्रश्न उठाय जा सकते है कि "सामाजिक अस्तित्व का क्या भौतिक आधार रहा है जावन का आवश्यकताएं तथा सुविधाएँ कैसे पैदा हुई है, किस संगठन के फलस्वरूप श्रम सुलभ हुआ है तथा इसका मार्ग निदेपशन हुआ है, किस प्रकार से इस प्रकार प्रदा को गयी चाजो का विवरण किया गया है, वे कान-सा संस्थाएं है जो इस दिशा तथा वितरण में आश्रित रहा है, तथा इसी भांति आगे भी ।"
चूंकि यह स्वय ही रोचक तथा महत्वपूर्ण है, अतः इसके लिए बहुत अधिक विश्लेपण को आवश्यकता नहीं होता। और इसके लिए जिस किसा चाज का आवश्यकता होती है उसके अधिकांश भाग का एक सक्रिय तथा जिज्ञासु व्यक्ति द्वारा स्वय पूर्ति का जाती है। धार्मिक तथा नैतिक, बौद्धिक तथा सौन्दर्यमय, राजनीतिक तथा सामाजिक वातावरण के ज्ञान से ओतप्रोत होकर आर्थिक इतिहासकार हमारे ज्ञान के भण्डार मे वृद्धि कर सकता है, ओर नये तथा बहुमूल्य विचारों को बतला सकता है, यद्यपि उसने स्वयं उन्ही लगावो तथा आकस्मिक सम्बन्धी के अवलोकन से अपने को सतुष्ट कर लिया हो जिनका पता लगाने के लिए गहराई में जाने की आवश्यकता नहीं होती ।
किन्तु स्वयं उसके बावजूद भी उसके उद्देश्यो का क्षेत्र निश्चित रूप से इन सीमाओ से भी परे होगा, और इसमें आर्थिक इतिहास के आन्तरिक अभिप्राय की खोज करने, प्रगति तथा प्रथा के पतन के रहस्यो तथा ऐस अन्य विषयों के उद्घाटन के निमित्त किये गये कुछ प्रयास भी शामिल होगे जिन्हें हम अब अधिक समय के लिए प्रकृति द्वारा प्रदान किये गये अन्तिम तथा पेचादे तथ्य मानने को तैयार नहीं है। वह विगत की घटनाओं से वर्तमान के मार्गदर्शन के लिए अनुमितियों का सुझाव देने से भी अपने को पूर्णरूप से नहीं रोवः सकता। और वास्तव में मानव मस्तिष्कः अपने सम्मुख स्पष्ट रूप में प्रस्तुत की गयी घटनाओं के आवास्मिक सम्बन्ध के विषय मे अपने विचारी मे शून्यता से घृणा करता है । वस्तुओं को किसी निश्चित कम से एक साथ रखने, और चतन अथवा अचेतन रूप से (Post hoe ergo propter hoc ) की राय मात्र देने से इतिहासकार अपने ऊपर मार्गनिदेशक के रूप में कुछ उत्तरदायित्व ले लेता है ।
उदाहरण के लिए इंग्लैंड के उत्तर भाग में निश्चित मौद्रिक लगान पर लम्बे समय के लिए दिये जाने वाले पट्टो को शुरुआत से कृषि तथा वहाँ के लोगों को सामान्य दशा मे महान सुधार हुआ किन्तु यह अनुमति निकालने के पूर्व कि यही सुधार का एकमात्र अथवा यहाँ तकः निः मुख्य कारण रहा है, हमें इस बात का पता लगाना चाहिए कि ठीक उस समय कौन कौन से अन्य परिवर्तन हो रहे थे, और उनमें से प्रत्येक के कारण कितना कितना सुधार हुआ है। दृष्टान्त के लिए हमे कृषि उपज की कामतो तथा सीमान्त प्रान्तो में नागरिकः कानून की स्थापना करने में होने वाले परिवर्तनों के प्रभावों को ध्यान में रखना चाहिए। ऐसा करने के लिए सावधानी तथा वैज्ञानिक प्रणाली के अपनाने की
1 ऐपैले ( ashloy ) को On the Stady of Eoonomio History देखिए ।
प्रकार का
सूक्ष्म विश्लेषण सभी के
लिए आवश्यक
नहीं :
किन्तु विगत से
वर्तमान के
लिए मार्ग निदेशन प्राप्त करने में इसको आवश्यकता
आवश्यकता होती है। और जब तक ऐसा नहीं किया जाता तब तक लम्बे पट्टों को पद्धति की सामान्य प्रवृत्ति के बारे में कोई विश्वसनीय अनुमति नहीं निकाली जा सकती। के लिए, और यहाँ तक कि जब ऐसा हो भी जाय तब भी हम इस अनुभव से, उदाहरण वर्तमान आयरलैंड मे अनेक प्रकार की कृषि उपज के स्थानीय तथा विश्व बाजारों के स्वरूप मे, सोने तथा चाँदी के उत्पादन तथा उपभोग इत्यादि मे सम्भावित परिवर्तनों को दृष्टि मे बिना रखे लम्बे समय के लिए पट्टे देने की प्रणाली का सुझाव नही रख सकते। भूमि पट्टो का इतिहास पुराविद् रोचवता से पूर्ण है, किन्तु जब तक आर्थिक सिद्धान्त की सहायता से सतर्कतापूर्वक विश्लेषण एवं व्याख्या न की जाय तब तक इस प्रश्न पर कोई विश्वसनीय प्रकाश नहीं पड़ता कि अब किसी देश में भूमि-पट्टे के किस रूप को अपनाना सर्वोत्तम होगा। इस प्रकार कुछ लोग यह तर्क देते है कि चूंकि आदिकालीन समाज की भूमि पर संयुक्त अधिकार होता था, अतः भूमि के रूप मे व्यक्तिगत सम्पत्ति को निश्चित रूप से एक अस्वाभाविक तथा सक्रमण कालीन व्यवस्था मानना चाहिए । अन्य लोग समान विश्वास से यह तर्क-वितर्क करते है कि चूंकि भूमि के रूप मे निजी सम्पत्ति की सीमा का सभ्यता के विकास के साथ विस्तार हुआ है, अतः यह भविष्य में होने वाली प्रगति के लिए आवश्यक है। किन्तु इतिहास से इस विषय पर वास्तविक शिक्षा का पता लगाने के लिए भूतकाल मे भूमि की सामान्य जोत के प्रभावो की व्याख्या करने की आवश्यकता होती है जिससे यह पता लग सके कि उनमें से प्रत्येक का कहाँ तक सदैव एक सा प्रभाव पड़ता है तथा आदतो, ज्ञान, सम्पत्ति तथा मानव जाति के सामाजिक सगटन में परिवर्तन होने से इस प्रभाव मे कहाँ तक अन्तर पड़ता है।
उद्योग, घरेलू तथा वैदेशिक व्यापार मे श्रमिक निकायो (gilds ) तथा अन्य निगमो एवं सघो द्वारा निर्मित पेशो का इतिहास इससे भी अधिक रोचक तथा शिक्षाप्रद है, वे अपनी विशेष सुविधाओं को जनता के लाभ के लिए उपयोग में लाते थे। विन्तु इस विषय पर एक पूर्ण पचनिर्णय देने तथा इससे भी बढ़कर यह कि हमारे अपने समय मे इससे उचित मार्ग निर्देशन प्राप्त करने के लिए न केवल अनुभवी इतिहासकार के विस्तृत सामान्य ज्ञान तथा सूक्ष्म प्रेरणाओं को आवश्यकता होती है, अपितु एकाधिकार, वैदेशिक व्यापार तथा कर आयात इत्यादि से सम्बन्धित अनेक सबसे कठिन विश्लेषणो तथा तर्कों को समझना भी आवश्यक है।
तव यदि आधिक इतिहासकार का उद्देश्य विश्व के आर्थिक नियम के छिपे हुए स्रोतो को ढूंढ़ना है, और भूतकाल से वर्तमान के मार्ग दर्शन के लिए प्रकाश प्राप्त करना है तो उसे प्रत्येक ऐसे साधन से लाभ उठाना चाहिए जो एक ही नाम या बाह्य रूप में निहित वास्तविक अन्तर वा तथा नाममात्र के अन्तर से भिन्न दिखायी देने वाली वास्तविक समानताओं का पता लगाने में सहायता पहुंचाता है। उसे प्रत्येक घटना के वास्तविक कारणों के चयन करने का यत्न करना चाहिए और इसमें से प्रत्येक को उचित महत्व देना चाहिए। इन सबके अतिरिक्त उसे परिवर्तन के अधिक दूर के कारणों का पता लगाना चाहिए ।
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अर्थशास्त्र का विषयक्षेत्र तथा इसको प्रणाली समझने में सहायता पहुँचाता है कि "अनेवः समयो मे समाज का संस्थापन ढाँचा क्या रहा है, विभिन्न प्रकार के सामाजिक वर्गों का क्या स्वरूप रहा है तथा उनका एक दूसरे के प्रति क्या सम्बन्ध रहा है": इसमें से प्रश्न उठाय जा सकते है कि "सामाजिक अस्तित्व का क्या भौतिक आधार रहा है जावन का आवश्यकताएं तथा सुविधाएँ कैसे पैदा हुई है, किस संगठन के फलस्वरूप श्रम सुलभ हुआ है तथा इसका मार्ग निदेपशन हुआ है, किस प्रकार से इस प्रकार प्रदा को गयी चाजो का विवरण किया गया है, वे कान-सा संस्थाएं है जो इस दिशा तथा वितरण में आश्रित रहा है, तथा इसी भांति आगे भी ।" चूंकि यह स्वय ही रोचक तथा महत्वपूर्ण है, अतः इसके लिए बहुत अधिक विश्लेपण को आवश्यकता नहीं होता। और इसके लिए जिस किसा चाज का आवश्यकता होती है उसके अधिकांश भाग का एक सक्रिय तथा जिज्ञासु व्यक्ति द्वारा स्वय पूर्ति का जाती है। धार्मिक तथा नैतिक, बौद्धिक तथा सौन्दर्यमय, राजनीतिक तथा सामाजिक वातावरण के ज्ञान से ओतप्रोत होकर आर्थिक इतिहासकार हमारे ज्ञान के भण्डार मे वृद्धि कर सकता है, ओर नये तथा बहुमूल्य विचारों को बतला सकता है, यद्यपि उसने स्वयं उन्ही लगावो तथा आकस्मिक सम्बन्धी के अवलोकन से अपने को सतुष्ट कर लिया हो जिनका पता लगाने के लिए गहराई में जाने की आवश्यकता नहीं होती । किन्तु स्वयं उसके बावजूद भी उसके उद्देश्यो का क्षेत्र निश्चित रूप से इन सीमाओ से भी परे होगा, और इसमें आर्थिक इतिहास के आन्तरिक अभिप्राय की खोज करने, प्रगति तथा प्रथा के पतन के रहस्यो तथा ऐस अन्य विषयों के उद्घाटन के निमित्त किये गये कुछ प्रयास भी शामिल होगे जिन्हें हम अब अधिक समय के लिए प्रकृति द्वारा प्रदान किये गये अन्तिम तथा पेचादे तथ्य मानने को तैयार नहीं है। वह विगत की घटनाओं से वर्तमान के मार्गदर्शन के लिए अनुमितियों का सुझाव देने से भी अपने को पूर्णरूप से नहीं रोवः सकता। और वास्तव में मानव मस्तिष्कः अपने सम्मुख स्पष्ट रूप में प्रस्तुत की गयी घटनाओं के आवास्मिक सम्बन्ध के विषय मे अपने विचारी मे शून्यता से घृणा करता है । वस्तुओं को किसी निश्चित कम से एक साथ रखने, और चतन अथवा अचेतन रूप से की राय मात्र देने से इतिहासकार अपने ऊपर मार्गनिदेशक के रूप में कुछ उत्तरदायित्व ले लेता है । उदाहरण के लिए इंग्लैंड के उत्तर भाग में निश्चित मौद्रिक लगान पर लम्बे समय के लिए दिये जाने वाले पट्टो को शुरुआत से कृषि तथा वहाँ के लोगों को सामान्य दशा मे महान सुधार हुआ किन्तु यह अनुमति निकालने के पूर्व कि यही सुधार का एकमात्र अथवा यहाँ तकः निः मुख्य कारण रहा है, हमें इस बात का पता लगाना चाहिए कि ठीक उस समय कौन कौन से अन्य परिवर्तन हो रहे थे, और उनमें से प्रत्येक के कारण कितना कितना सुधार हुआ है। दृष्टान्त के लिए हमे कृषि उपज की कामतो तथा सीमान्त प्रान्तो में नागरिकः कानून की स्थापना करने में होने वाले परिवर्तनों के प्रभावों को ध्यान में रखना चाहिए। ऐसा करने के लिए सावधानी तथा वैज्ञानिक प्रणाली के अपनाने की एक ऐपैले को On the Stady of Eoonomio History देखिए । प्रकार का सूक्ष्म विश्लेषण सभी के लिए आवश्यक नहीं : किन्तु विगत से वर्तमान के लिए मार्ग निदेशन प्राप्त करने में इसको आवश्यकता आवश्यकता होती है। और जब तक ऐसा नहीं किया जाता तब तक लम्बे पट्टों को पद्धति की सामान्य प्रवृत्ति के बारे में कोई विश्वसनीय अनुमति नहीं निकाली जा सकती। के लिए, और यहाँ तक कि जब ऐसा हो भी जाय तब भी हम इस अनुभव से, उदाहरण वर्तमान आयरलैंड मे अनेक प्रकार की कृषि उपज के स्थानीय तथा विश्व बाजारों के स्वरूप मे, सोने तथा चाँदी के उत्पादन तथा उपभोग इत्यादि मे सम्भावित परिवर्तनों को दृष्टि मे बिना रखे लम्बे समय के लिए पट्टे देने की प्रणाली का सुझाव नही रख सकते। भूमि पट्टो का इतिहास पुराविद् रोचवता से पूर्ण है, किन्तु जब तक आर्थिक सिद्धान्त की सहायता से सतर्कतापूर्वक विश्लेषण एवं व्याख्या न की जाय तब तक इस प्रश्न पर कोई विश्वसनीय प्रकाश नहीं पड़ता कि अब किसी देश में भूमि-पट्टे के किस रूप को अपनाना सर्वोत्तम होगा। इस प्रकार कुछ लोग यह तर्क देते है कि चूंकि आदिकालीन समाज की भूमि पर संयुक्त अधिकार होता था, अतः भूमि के रूप मे व्यक्तिगत सम्पत्ति को निश्चित रूप से एक अस्वाभाविक तथा सक्रमण कालीन व्यवस्था मानना चाहिए । अन्य लोग समान विश्वास से यह तर्क-वितर्क करते है कि चूंकि भूमि के रूप मे निजी सम्पत्ति की सीमा का सभ्यता के विकास के साथ विस्तार हुआ है, अतः यह भविष्य में होने वाली प्रगति के लिए आवश्यक है। किन्तु इतिहास से इस विषय पर वास्तविक शिक्षा का पता लगाने के लिए भूतकाल मे भूमि की सामान्य जोत के प्रभावो की व्याख्या करने की आवश्यकता होती है जिससे यह पता लग सके कि उनमें से प्रत्येक का कहाँ तक सदैव एक सा प्रभाव पड़ता है तथा आदतो, ज्ञान, सम्पत्ति तथा मानव जाति के सामाजिक सगटन में परिवर्तन होने से इस प्रभाव मे कहाँ तक अन्तर पड़ता है। उद्योग, घरेलू तथा वैदेशिक व्यापार मे श्रमिक निकायो तथा अन्य निगमो एवं सघो द्वारा निर्मित पेशो का इतिहास इससे भी अधिक रोचक तथा शिक्षाप्रद है, वे अपनी विशेष सुविधाओं को जनता के लाभ के लिए उपयोग में लाते थे। विन्तु इस विषय पर एक पूर्ण पचनिर्णय देने तथा इससे भी बढ़कर यह कि हमारे अपने समय मे इससे उचित मार्ग निर्देशन प्राप्त करने के लिए न केवल अनुभवी इतिहासकार के विस्तृत सामान्य ज्ञान तथा सूक्ष्म प्रेरणाओं को आवश्यकता होती है, अपितु एकाधिकार, वैदेशिक व्यापार तथा कर आयात इत्यादि से सम्बन्धित अनेक सबसे कठिन विश्लेषणो तथा तर्कों को समझना भी आवश्यक है। तव यदि आधिक इतिहासकार का उद्देश्य विश्व के आर्थिक नियम के छिपे हुए स्रोतो को ढूंढ़ना है, और भूतकाल से वर्तमान के मार्ग दर्शन के लिए प्रकाश प्राप्त करना है तो उसे प्रत्येक ऐसे साधन से लाभ उठाना चाहिए जो एक ही नाम या बाह्य रूप में निहित वास्तविक अन्तर वा तथा नाममात्र के अन्तर से भिन्न दिखायी देने वाली वास्तविक समानताओं का पता लगाने में सहायता पहुंचाता है। उसे प्रत्येक घटना के वास्तविक कारणों के चयन करने का यत्न करना चाहिए और इसमें से प्रत्येक को उचित महत्व देना चाहिए। इन सबके अतिरिक्त उसे परिवर्तन के अधिक दूर के कारणों का पता लगाना चाहिए ।
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नई दिल्ली. भारतीय रेलवे (Indian Railways) कोरोना काल में यात्रियों की सहूलियत को देखते हुए लगातार नई स्पेशल ट्रेनों का संचालन कर रहा है। अब उत्तर रेलवे (Northern Railway) की तरफ से कई और रूट्स पर नई ट्रेनों का ऐलान किया गया है। ये सभी ट्रेनें पूरी तरह से रिजर्व हैं, इनमें सफर करने के लिए यात्रियों को पहले से रिजर्वेशन करवाना होगा और कोरोना संक्रमण के तहत बनाए गए सभी प्रोटोकॉल्स का पालन करना होगा। आइए आपको बतातें हैं रेलवे की तरफ से किया गया किन नई स्पेशल ट्रनों का ऐलान।
- 03239/03240 पटना-कोटा-पटना स्पेशल ट्रेन (हफ्ते में दो दिन) - पटना-कोटा के बीच चलने वाली गाड़ी संख्या 03239 11 जनवरी 2021 से पटना रेलवे स्टेशन से हर सोमवार और शुक्रवार को पटना से सुबह 11. 45 पर चलेगी और कोटा स्पेशन पर अगले दिन सुबह 11. 55 पर पहुंचेगी। कोटा से पटना के बीच चलने वाली गाड़ी संख्या 03240 12 जनवरी से कोटा रेलवे स्टेशन से हर मंगलवार और शनिवार को रवाना होगी। ये ट्रेन दानापुर, आरा, पंडित दीन दयाल जंक्शन, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, टूंडला, आगरा कैंट, मथुरा के रास्ते कोटा और पटना के बीच की दूरी तय करेगी।
- 02591/02592 गोरखपुर-यशवंतपुर-गोरखपुर एक्सप्रेस ट्रेन (हफ्ते में एक दिन)- गोरखपुर से यशवंतपुर के बीच चलने वाली ट्रेन नंबर 02591 अप्रैल महीने की 10 तारीख से हर गोरखपुर रेलवे स्टेशन से हर शनिवार को सुबह 6. 35 पर चलेगी और सुबह तड़के 2. 45 बजे पहुंचेगी। इसी तरह यशवंतपुर से गोरखपुर के बीच चलने वाली गाड़ी संख्या 02592 यशवंतपुर से 12 अप्रैल से हर सोमवार शाम 17. 20 बजे चलेगी और गोरखपुर 15. 40 पर पहुंचेगी। ये ट्रेन खलीलाबाद, बस्ती, एशबाग, उन्नाव, कानपुर, झांसी, ललितपुर, भोपाल, इटारसी, नागपुर, काजीपेट, सिकंदराबाद, अनंतपुर, हिंदुपुर रेलवे स्टेशनों के रास्ते यशवंतपुर और गोरखपुर का सफर तय करेगी।
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नई दिल्ली. भारतीय रेलवे कोरोना काल में यात्रियों की सहूलियत को देखते हुए लगातार नई स्पेशल ट्रेनों का संचालन कर रहा है। अब उत्तर रेलवे की तरफ से कई और रूट्स पर नई ट्रेनों का ऐलान किया गया है। ये सभी ट्रेनें पूरी तरह से रिजर्व हैं, इनमें सफर करने के लिए यात्रियों को पहले से रिजर्वेशन करवाना होगा और कोरोना संक्रमण के तहत बनाए गए सभी प्रोटोकॉल्स का पालन करना होगा। आइए आपको बतातें हैं रेलवे की तरफ से किया गया किन नई स्पेशल ट्रनों का ऐलान। - तीन हज़ार दो सौ उनतालीस/तीन हज़ार दो सौ चालीस पटना-कोटा-पटना स्पेशल ट्रेन - पटना-कोटा के बीच चलने वाली गाड़ी संख्या तीन हज़ार दो सौ उनतालीस ग्यारह जनवरी दो हज़ार इक्कीस से पटना रेलवे स्टेशन से हर सोमवार और शुक्रवार को पटना से सुबह ग्यारह. पैंतालीस पर चलेगी और कोटा स्पेशन पर अगले दिन सुबह ग्यारह. पचपन पर पहुंचेगी। कोटा से पटना के बीच चलने वाली गाड़ी संख्या तीन हज़ार दो सौ चालीस बारह जनवरी से कोटा रेलवे स्टेशन से हर मंगलवार और शनिवार को रवाना होगी। ये ट्रेन दानापुर, आरा, पंडित दीन दयाल जंक्शन, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, टूंडला, आगरा कैंट, मथुरा के रास्ते कोटा और पटना के बीच की दूरी तय करेगी। - दो हज़ार पाँच सौ इक्यानवे/दो हज़ार पाँच सौ बानवे गोरखपुर-यशवंतपुर-गोरखपुर एक्सप्रेस ट्रेन - गोरखपुर से यशवंतपुर के बीच चलने वाली ट्रेन नंबर दो हज़ार पाँच सौ इक्यानवे अप्रैल महीने की दस तारीख से हर गोरखपुर रेलवे स्टेशन से हर शनिवार को सुबह छः. पैंतीस पर चलेगी और सुबह तड़के दो. पैंतालीस बजे पहुंचेगी। इसी तरह यशवंतपुर से गोरखपुर के बीच चलने वाली गाड़ी संख्या दो हज़ार पाँच सौ बानवे यशवंतपुर से बारह अप्रैल से हर सोमवार शाम सत्रह. बीस बजे चलेगी और गोरखपुर पंद्रह. चालीस पर पहुंचेगी। ये ट्रेन खलीलाबाद, बस्ती, एशबाग, उन्नाव, कानपुर, झांसी, ललितपुर, भोपाल, इटारसी, नागपुर, काजीपेट, सिकंदराबाद, अनंतपुर, हिंदुपुर रेलवे स्टेशनों के रास्ते यशवंतपुर और गोरखपुर का सफर तय करेगी।
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सांप्रदायिक नफरत फैलाने की रणनीति के तहत रूद्रप्रयाग शहर के अगस्त्यमुनि इलाके में मुस्लिम व्यवसायियों की 6 दुकानों को जला दिया गया। गढ़वाल जिले की यह घटना सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाह की वजह से हुई।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से कथित तौर पर जुड़े लोगों के साथ मिलकर दक्षिणपंथी समूहों के सदस्यों ने एक जुलूस निकाला और मुस्लिम दुकानदारों की 6 दुकानों को निशाना बनाया। यह घटना सोशल मीडिया पर फैलाई गई इस अफवाह की वजह से हुई कि एक मुस्लिम युवक ने नाबालिग लड़की का बलात्कार किया है। प्रदर्शनकारियों ने मुस्लिम-विरोधी नारे लगाए और 'गुस्से' में उस कथित बलात्कार के खिलाफ दुकानों को आग लगा दी, जो बलात्कार हुआ ही नहीं था।
इसमें खास बात यह है कि रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी ने यह बयान दिया कि यह सिर्फ सोशल मीडिया पर फैलाई गई एक अफवाह थी। रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि कुछ लोगों ने युवक और युवती की फोटो फेसबुक पर पोस्ट की जिसमें चेहरा साफ तौर पर नहीं दिख रहा है। पोस्ट में यह भी लिखा गया कि एक विशेष समुदाय के युवक ने दूसरे समुदाय की नाबालिग लड़की का बलात्कार किया है। युवक और युवती की पहचान को जाहिर नहीं किया गया और इस मामले में कोई शिकायत भी दर्ज नहीं की गई क्योंकि यह पूरी घटना सिर्फ एक अफवाह थी। जिलाधिकारी ने कहा कि पुलिस उस आदमी की तलाश कर रही है जिसने इस अफवाह को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।
उन्होंने कहा कि इस तरह की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।
जब से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार उत्तराखंड में बनी है, तब से किसी न किसी बात को लेकर यहां रह रहे अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की दुकानों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य द्वारा की गई हत्या, कोई आपराधिक घटना या उनके कथित प्रेम संबंध दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों द्वारा बेकसूर मुस्लिम दुकानदारों को निशाना बनाने के लिए पर्याप्त बहाना हैं।
पिछले साल अक्टूबर में, रायवाला में हुई एक हत्या के बाद हिंदू समूहों ने ऋषिकेश से लेकर हरिद्वार तक मुस्लिम समुदाय की दुकानों और घरों पर हमले किए गए और तोड़-फोड़ की।
बहुसंख्यक हिंदू आबादी को गोलबंद करने की कोशिश में मुस्लिम समुदाय के सदस्यों की आपराधिक घटनाओं को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है और पिछले एक साल में लगातार मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया है।
खास बात यह है कि कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय के सदस्यों द्वारा की गई छोटी सी आपराधिक घटना को भी दक्षिणपंथी संगठन बहुत बड़ी बात की तरह पेश करते हैं। सितंबर 2017 में सात मुस्लिम युवाओं पर लड़कियों को छेड़ने का आरोप लगाकर उन्हें टिहड़ी गढ़वाल जिले के चंबा शहर में जेल में डाल दिया गया और हिंदू दक्षिणपंथी संगठन चंबा मार्केट को जबरदस्ती बंद कराकर इलाके में तनाव फैलाते रहे।
इससे पहले 8 सितंबर 2017 को टिहड़ी गढ़वाल के कीर्तिनगर के दो मुस्लिम युवाओं को बहुसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाली लड़कियों के साथ देहरादून में घूमते हुए पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। कीर्तिनगर में इस खबर को पहुंचाने में पुलिस ने तत्परता दिखाई, जहां दक्षिणपंथी समूह के सदस्यों ने मुस्लिम लड़कों से जुड़ी दुकानों में तोड़-फोड़ कर दी। लड़कों को जेल भेज दिया गया।
जुलाई के महीने में दक्षिणपंथी सदस्यों ने पौढ़ी गढ़वाल जिले के सतपुली शहर में मुस्लिम समुदाय की दुकानों पर हमला कर दिया। दरअसल, एक मुस्लिम लड़के ने फेसबुक पर एक तस्वीर पोस्ट की थी। तस्वीर में उसके पीछे केदारनाथ मंदिर था और उसकी चप्पल पर एक नारा लिखा था 'नॉट इन माई नेम' (मेरे नाम पर नहीं)। मुसलमानों के खिलाफ दक्षिणपंथियों के हमले की एक और घटना सतपुली में तब हुई, जब कथित तौर पर एक मुसलमान पर गाय के साथ अप्राकृतिक सेक्स करने का आरोप लगा।
उसी साल जुलाई में दक्षिणपंथी समूहों ने मसूरी में कश्मीरी व्यापारियों को निशाना बनाया और उन्हें मार्च 2018 तक अपना सामान बांध कर मसूरी छोड़ देने का फरमान जारी कर दिया। ऐसा कहा गया कि उकसावे की पहली घटना कथित तौर पर भारत-पाकिस्तान के बीच हुए चैपिंयस ट्रॉफी मैच के दौरान पाकिस्तान-समर्थक नारे लगाने की वजह से हुई। अजीब बात यह है कि जो कश्मीरी व्यापारी वहां अपना काम कर रहे हैं उनका इस पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं था।
आरएसएस से जुड़े समूहों की यह कोशिश है कि हर छोटी-बड़ी घटना को सांप्रदायिक रूप दिया जाए और उत्तराखंड में रह रहे मुस्लिम समुदाय पर हमला किया जाए।
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सांप्रदायिक नफरत फैलाने की रणनीति के तहत रूद्रप्रयाग शहर के अगस्त्यमुनि इलाके में मुस्लिम व्यवसायियों की छः दुकानों को जला दिया गया। गढ़वाल जिले की यह घटना सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाह की वजह से हुई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से कथित तौर पर जुड़े लोगों के साथ मिलकर दक्षिणपंथी समूहों के सदस्यों ने एक जुलूस निकाला और मुस्लिम दुकानदारों की छः दुकानों को निशाना बनाया। यह घटना सोशल मीडिया पर फैलाई गई इस अफवाह की वजह से हुई कि एक मुस्लिम युवक ने नाबालिग लड़की का बलात्कार किया है। प्रदर्शनकारियों ने मुस्लिम-विरोधी नारे लगाए और 'गुस्से' में उस कथित बलात्कार के खिलाफ दुकानों को आग लगा दी, जो बलात्कार हुआ ही नहीं था। इसमें खास बात यह है कि रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी ने यह बयान दिया कि यह सिर्फ सोशल मीडिया पर फैलाई गई एक अफवाह थी। रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि कुछ लोगों ने युवक और युवती की फोटो फेसबुक पर पोस्ट की जिसमें चेहरा साफ तौर पर नहीं दिख रहा है। पोस्ट में यह भी लिखा गया कि एक विशेष समुदाय के युवक ने दूसरे समुदाय की नाबालिग लड़की का बलात्कार किया है। युवक और युवती की पहचान को जाहिर नहीं किया गया और इस मामले में कोई शिकायत भी दर्ज नहीं की गई क्योंकि यह पूरी घटना सिर्फ एक अफवाह थी। जिलाधिकारी ने कहा कि पुलिस उस आदमी की तलाश कर रही है जिसने इस अफवाह को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। उन्होंने कहा कि इस तरह की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार उत्तराखंड में बनी है, तब से किसी न किसी बात को लेकर यहां रह रहे अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की दुकानों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य द्वारा की गई हत्या, कोई आपराधिक घटना या उनके कथित प्रेम संबंध दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों द्वारा बेकसूर मुस्लिम दुकानदारों को निशाना बनाने के लिए पर्याप्त बहाना हैं। पिछले साल अक्टूबर में, रायवाला में हुई एक हत्या के बाद हिंदू समूहों ने ऋषिकेश से लेकर हरिद्वार तक मुस्लिम समुदाय की दुकानों और घरों पर हमले किए गए और तोड़-फोड़ की। बहुसंख्यक हिंदू आबादी को गोलबंद करने की कोशिश में मुस्लिम समुदाय के सदस्यों की आपराधिक घटनाओं को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है और पिछले एक साल में लगातार मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया है। खास बात यह है कि कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय के सदस्यों द्वारा की गई छोटी सी आपराधिक घटना को भी दक्षिणपंथी संगठन बहुत बड़ी बात की तरह पेश करते हैं। सितंबर दो हज़ार सत्रह में सात मुस्लिम युवाओं पर लड़कियों को छेड़ने का आरोप लगाकर उन्हें टिहड़ी गढ़वाल जिले के चंबा शहर में जेल में डाल दिया गया और हिंदू दक्षिणपंथी संगठन चंबा मार्केट को जबरदस्ती बंद कराकर इलाके में तनाव फैलाते रहे। इससे पहले आठ सितंबर दो हज़ार सत्रह को टिहड़ी गढ़वाल के कीर्तिनगर के दो मुस्लिम युवाओं को बहुसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाली लड़कियों के साथ देहरादून में घूमते हुए पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। कीर्तिनगर में इस खबर को पहुंचाने में पुलिस ने तत्परता दिखाई, जहां दक्षिणपंथी समूह के सदस्यों ने मुस्लिम लड़कों से जुड़ी दुकानों में तोड़-फोड़ कर दी। लड़कों को जेल भेज दिया गया। जुलाई के महीने में दक्षिणपंथी सदस्यों ने पौढ़ी गढ़वाल जिले के सतपुली शहर में मुस्लिम समुदाय की दुकानों पर हमला कर दिया। दरअसल, एक मुस्लिम लड़के ने फेसबुक पर एक तस्वीर पोस्ट की थी। तस्वीर में उसके पीछे केदारनाथ मंदिर था और उसकी चप्पल पर एक नारा लिखा था 'नॉट इन माई नेम' । मुसलमानों के खिलाफ दक्षिणपंथियों के हमले की एक और घटना सतपुली में तब हुई, जब कथित तौर पर एक मुसलमान पर गाय के साथ अप्राकृतिक सेक्स करने का आरोप लगा। उसी साल जुलाई में दक्षिणपंथी समूहों ने मसूरी में कश्मीरी व्यापारियों को निशाना बनाया और उन्हें मार्च दो हज़ार अट्ठारह तक अपना सामान बांध कर मसूरी छोड़ देने का फरमान जारी कर दिया। ऐसा कहा गया कि उकसावे की पहली घटना कथित तौर पर भारत-पाकिस्तान के बीच हुए चैपिंयस ट्रॉफी मैच के दौरान पाकिस्तान-समर्थक नारे लगाने की वजह से हुई। अजीब बात यह है कि जो कश्मीरी व्यापारी वहां अपना काम कर रहे हैं उनका इस पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं था। आरएसएस से जुड़े समूहों की यह कोशिश है कि हर छोटी-बड़ी घटना को सांप्रदायिक रूप दिया जाए और उत्तराखंड में रह रहे मुस्लिम समुदाय पर हमला किया जाए।
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अल बगदादी की गुलाम बनाने के लिए अगवा की गई यजीदी महिला आईएस के चंगुल से छूटकर शरर्णाथी कैंप में पहुंची युवती ने बताया है कि अमेरिकी महिला केल्या मुलर को गुलाम बनने के लिए राजी करने के लिए उसके सारे नाखून उखाड़ लिए गए थे।
वैसे तो केल्या मुलर बगदादी के साथ ही एक हमले में मारी जा चुकी है लेकिन इससे पहले उसे आईएस के मुखिया अल बगदादी का गुलाम बनाने के लिए तो यातनाएं दी गई वह बहुत ही दर्दनांक हैं।
आईएस के चंगुल से छुटी 16 वर्षीय मुना ने बताया कि बगदादी मुलर को अपनी बीवी बनाना चाहता था। बगदादी ने एक बार मुलर से कहा था कि वह जबरन उसे अपनी बीवी बनाएगा। लेकिन वह तैयार नहीं तो बगदादी के गुर्गों ने रोज उसके साथ अत्याचार करना शुरू कर दिया था।
मुना ने बताया कि बाद में मुलर को बगदादी के सहयोगी अबु सयाफ के घर में उसे कैद कर दिया गया। यहां उससे रोज कई-कई लोग बलात्कार करते थे।
डेली मेल के अनुसार, शरणाथियों की सहयता करने सीरिया पहुंची मुलर को बगदादी ने चुपचाप तरीके से अपहरण करा लिया था ताकि वह मुलर को अपनी बीवी बना सके।
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अल बगदादी की गुलाम बनाने के लिए अगवा की गई यजीदी महिला आईएस के चंगुल से छूटकर शरर्णाथी कैंप में पहुंची युवती ने बताया है कि अमेरिकी महिला केल्या मुलर को गुलाम बनने के लिए राजी करने के लिए उसके सारे नाखून उखाड़ लिए गए थे। वैसे तो केल्या मुलर बगदादी के साथ ही एक हमले में मारी जा चुकी है लेकिन इससे पहले उसे आईएस के मुखिया अल बगदादी का गुलाम बनाने के लिए तो यातनाएं दी गई वह बहुत ही दर्दनांक हैं। आईएस के चंगुल से छुटी सोलह वर्षीय मुना ने बताया कि बगदादी मुलर को अपनी बीवी बनाना चाहता था। बगदादी ने एक बार मुलर से कहा था कि वह जबरन उसे अपनी बीवी बनाएगा। लेकिन वह तैयार नहीं तो बगदादी के गुर्गों ने रोज उसके साथ अत्याचार करना शुरू कर दिया था। मुना ने बताया कि बाद में मुलर को बगदादी के सहयोगी अबु सयाफ के घर में उसे कैद कर दिया गया। यहां उससे रोज कई-कई लोग बलात्कार करते थे। डेली मेल के अनुसार, शरणाथियों की सहयता करने सीरिया पहुंची मुलर को बगदादी ने चुपचाप तरीके से अपहरण करा लिया था ताकि वह मुलर को अपनी बीवी बना सके।
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मैने क्षमा प्रार्थनापूर्वक विश्वास दिलाया, 'मैं सुन रहा हूँ, सुन रहा हूँ।'
' सुन रहे हैं तो सुनिए' वह बोले, ' हमारे माथेमे आँखें हैं । हमारे बाहुओ बल है । आपकी तरह की मौनकी प्रतीक्षा ही हमारा काम नहीं है । प्रकृतिका जितना वैभव है, हमारे लिए है । उसमें जो गुप्त है इसलिए है कि हम उसे उद्घाटित करें। धरतीमें छिपा जल है तो इसलिए कि हम उस धरतीको छेद डालें और कुए खोदकर पानी खीच ले । धरतीके भीतर सोना-चाँदी दबा है और कोयला बंद है, - अब हम है कि धरतीको पोला करके उसके भीतरसे सब कुछ उगलवा ले । आप कहिए कि कुछ हमारे लिए नहीं है तो बेशक कुछ भी आपके लिए न होगा। पर मै कहता हूँ कि सब-कुछ हमारे लिए है; और तब, कुछ भी हमारी मुट्ठी में आये बिना नहीं रह सकता । '
वह विद्वान् पुरुष देखनेसे अभी पकी आयुके नहीं जान पड़ते । उनकी देह दुर्बल है, पर चेहरेपर प्रतिभा दीखती है। ऊपरकी बात कहते हुए उनका मुख जो पीला है, रक्ताभ हो आया है। मैने पूछा भाई, आप कौन हो ? काफी साहस आपने प्राप्त किया है । '
' जी हाँ, साहस हमारा हक है । मै युवक हूँ । मै वही हूँ जो स्रष्टा होते हैं । मानवका उपकार किसने किया है ? उसने जिसने कि निर्माण किया है । उसने जिसने कि साहस किया है। निर्माता साहसी होता है। वह आत्म-विश्वासी होता है। मैं वही युवक हूँ। मै वृद्ध नहीं होना चाहता।'
कहते कहते युवक मानो कॉप आये। उनकी आवाज़ काफी
तेज हो गई थी। मानो किसीको चुनौती दे रहे हों। मुझे नही प्रतीत हुआ कि यह युवक वृद्ध होनेमें सचमुच देर लगाएँगे । बाल उनके अब भी जहाँ-तहाँसे पक चले है । उनका स्वास्थ्य हर्षप्रद नहीं है और उनकी इंद्रियाँ बिना बाहरी सहायताके मानो काम करनेसे अब भी इन्कार करना चाहती है ।
मैने कहा, ' भाई, मान भी लिया कि सब कुछ हमारे लिए है । तब फिर हम किसके लिए है ? '
युवकने उद्दीप्त भावसे कहा, 'हम किसके लिए है ? हम किसीके लिए नहीं है। हम अपने लिए हैं । मनुष्य सचराचर विश्वमें मूर्धन्य है । वह विश्वका भोता है । सब उसके लिए साधन है । वह स्वयं अपने आपमें साध्य है । मनुष्य अपने लिए है । बाकी और सब-कुछ मनुष्य के लिए है ----
मैने देखा कि युवकका उद्दीपन इस भाँति अधिक न हो जाय । मानव-प्राणीकी श्रेष्ठतासे मानो उनका मस्तक चहक रहा है। मानों वह श्रेष्ठता उनसे झिल नही रही है, उनमें समा नहीं रही है । श्रेष्ठता तो अच्छी ही चीज़ है, पर वह बोझ बन जाय यह ठीक नहीं है । मैने कहा, 'भाई, मैने जल-पानको पूछा ही नहीं । ठहरो, कुछ जल-पान मँगाता हूँ।'
युवकने कहा, 'नहीं - नहीं, ' और वह कुछ अस्थिर हो गया। मैने उनका संकोच देखकर हठ नहीं की। कहा, ' देखो भाई, हम अपने आपमे पूरे नहीं है । ऐसा होता तो किसी चीज़की ज़रूरत न होती । पूरे होनेके रास्ते में ज़रूरतें होती है। पूरे हो जानेका लक्षण ही यह है कि हम कहें यह ज़रूरत नहीं रह गई।
कोई वस्तु उपयोगी है, इसका अर्थ यही है कि हमारे भीतर उसकी उपयोगिता के लिए जगह खाली है । सब-कुछ हमे चाहिए, इसका मतलब यह है कि अपने भीतर हम बिल्कुल खाली है । सब कुछ हमारा हो, - इस हविसकी जड़मे तथ्य यह है कि हम अपने नही है । सबपर अगर हम कुब्ज़ा करना चाहते है तो आशय है कि हमपर हमारा ही काबू नहीं है, हम पदार्थोंके गुलाम है। क्यों भाई, आप गुलाम होना पसंद करते हो ?
युवकका चेहरा तमतमा आया। उन्होंने कहा, 'गुलाम । मैं सबका मालिक हूँ । मै पुरुष हूँ । पुरुषकी कौन बराबरी कर सकता । है ? सब प्राणी और सब पदार्थ उसके चाकर है । है, वह स्वामी है । मै गुलाम ? मै पुरुष हूँ, मै गुलाम !.... '
आवेशमे आकर युवक खड़े हो गये । देखा कि इस बार उनको रोकना कठिन हो जायगा । बढ़कर मैने उनके कंधेपर हाथ रक्खा और प्रेमके अधिकारसे कहा, 'जो दूसरेको पकड़ता है, वह खुद पकड़ा जाता है। जो दूसरेको बाँधता है वह खुदको बाँधता है । जो दूसरेको खोलता है वह खुद भी खुलता है। अपने प्रयोजनके घेरेमे किसी पदार्थको या प्राणीको घेरना खुद अपने चारों ओर घेरा डाल लेना है । इस प्रकार स्वामी बनना दूसरे अर्थो में दास बनना है । इसीलिए, मैं कहता हूँ कि कुछ हमारे लिए नहीं है। इस तरह सबको आजाद करके अपनानेसे हम सच्चे अर्थोमे उन्हें 'अपना' बना सकते हैं। अनुरक्तिमे हम क्षुद्र बनते है, विरक्त होकर हम ही विस्तृत हो जाते हैं। हाथमे कुंडी बगलमे सोटा, चारो दिसि
जागीरीमे- भाई, चारों दिशाओको अपनी जागीर बनानेकी राह है तो यह है । - '
अब तक युवक धैर्यपूर्वक सुनते रहे थे । अब उन्होने मेरा हाथ अपने कंधेपरसे भटक दिया और बोले, 'आपकी बुद्धि बहक गई है । मै आपकी प्रशंसा सुनकर आया था। आप कुछ कर्तृत्वका उपदेश न देकर यह मीठी बहककी बाते सुनाते है । मै उनमें फॅसनेवाला नहीं हूँ । प्रकृतिसे युद्धकी आवश्यकता है । निरंतर युद्ध, अविराम युद्ध । प्रकृतिने मनुष्यको हीन बनाया है । यह मनुष्यका काम है कि उसपर विजय पाये और उसे चेरी बनाकर छोड़े। मै कभी यह नहीं सुनूँगा कि मनुष्य प्रारब्धका दास है ---
मैंने कहा, ' ठीक तो है । लेकिन भाई - '
पर मुझे युवकने बीचहीमें तोड़ दिया। कहा, 'जी नहीं, मैं कुछ नहीं सुन सकता। देश हमारा रसातलको जा रहा है । और उसके लिए आप जैसे लोग जिम्मेदार हैं- '
मैं एक इकेला-सा आदमी कैसे इस भारी देशको रसातल जितनी दूर भेजनेका श्रेय पा सकता हूँ, यह कुछ मेरी समझमे नही आया कहना चाहा, 'सुनो तो भाई - '
लेकिन युवकने कहा, 'जी नही, माफ़ कीजिए।' यह कहकर वह युवक मुझे वहीं छोड़ तेज़ चालसे चले गये ।
असल इतनी बात बढ़नेपर में पूछना चाहता था कि भाई, तुम्हारी शादी हुई या नहीं? कोई बाल-बच्चा है? कुछ नौकरी चाकरीका ठीक-ठाक है, या कि क्या ? गुज़ारा कैसे चलता है :मैं उनसे कहना चाहता था कि भाई, यह दुनिया अजव जगह है;
सो तुम्हें जब ज़रूरत हो और मै जिस योग्य समझा जाऊँ, उसे कहनेमे मुझसे हिचकनेकी आवश्यकता नहीं है । तुम विद्वान् हो, कुछ करना चाहते हो । मैं इसके लिए तुम्हारा कृतज्ञ हूँ। मुझे तुम अपना ही जानो । देखो भाई, संकोच न करना । - पर उन युवकने यह कहनेका मुझे अवसर नहीं दिया, रोष भावसे मुझे परे हटाकर चलते चले गये ।
उन युवककी एक भी बात मुझे नामुनासिब नहीं मालूम हुई । सब बातें युवकोचित थीं । पर उन बातोंको लेकर अधीर होनेकी आवश्यकता मेरी समझ में नही आई । मुझे जान पड़ता है कि सब कुछका स्वामी बनने से पहले खुद अपना मालिक बननेका प्रयत्न वह करे तो ज्यादा कार्यकारी हो । युवककी योग्यता असंदिग्ध है, पर दृष्टि उनकी कही सदोष भी न हो ! उनके ऐनक लगी थी, इससे शायद निगाह निर्दोष पूरी तरह न रही होगी ।
पर वह युवक तो मुझे छोड़ ही गये है । तब यह अनुचित होगा कि मैं उन्हें न छोहूँ । इससे आइए, उन युवकके प्रति अपनी मंगल कामनाओंका देय देकर इस अपनी बातचीतके सूत्रको सँभालें ।
प्रश्न यह है कि अपनेको समस्तका केंद्र मानकर क्या हम यथार्थ सत्यको समझ सकते अथवा पा सकते है ?
निस्संदेह सहज हमारे लिए यही है कि केंद्र हम अपनेको मानें और शेष विश्वको उसी अपेक्षा ग्रहण करें । जिस जगह हम खड़े हैं, दुनिया उसी स्थलको मध्य बिंदु मानकर वृत्ताकार फैली हुई दीख पड़ती है। जान पड़ता है, धरती चपटी है, थालीकी भाँति गोल है और स्थिर है। सूरज उसके चारों ओर घूमता है । स्थूल
आँखोंसे और स्थूल वुद्धिसे यह बात इतनी सहज सत्य मालूम होती है कि जैसे अन्यथा कुछ हो ही नहीं सकता। अगर कुछ प्रत्यक्ष सत्य है तो यह ही है ।
पर आज हम जानते हैं कि यह वात यथार्थ नहीं है। जो यथार्थ है उसे हम तभी पा सकते हैं जब अपनेको विश्वके केंद्र माननेसे हम ऊँचे उठे । - अपनेको मानकर भी किसी भाँति अपनेको न मानना आरंभ करें ।
सृष्टि हमारे निमित्त है, यह धारणा अप्राकृतिक नहीं है। पर उस धारणापर अटक कर कल्पनाहीन प्राणी ही रह सकता है । मानव अन्य प्राणियोंकी भाँति कल्पनाशून्य प्राणी नहीं है । - मानवको तो यह जानना ही होगा कि सृष्टिका हेतु हममें निहित नहीं है । हम स्वयं सृष्टिका भाग हैं । हम नहीं थे, पर सृष्टि थी । हम नहीं रहेंगे, पर सृष्टि रहेगी ।
सृष्टिके साथ और सृष्टिके पदार्थोंके साथ हमारा सच्चा संबंध क्या है ? क्या हो ?
मेरी प्रतीति है कि प्रयोजन और ' युटिलिटी' शब्दसे जिस संबंधका बोध होता है वह सच्चा नहीं है । वह काम चलाऊ भर है वह परिमित है, कृत्रिम है और वंधनकारक है। उससे कोई किसीको पा नहीं सकता ।
सच्चा संबंध प्रेमका, भ्रातृत्वका और आनन्दका है। इसी संबंध में पूर्णता है, उपलब्धि है और आह्लाद है; न यहाँ किसीको किसीकी अपेक्षा है, न उपेक्षा है । यह प्रसन्न, उदात्त, समभावका संबंध है पानी हमारे पीनेके लिए बना है, हवा जीनेके लिए, यदि
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मैने क्षमा प्रार्थनापूर्वक विश्वास दिलाया, 'मैं सुन रहा हूँ, सुन रहा हूँ।' ' सुन रहे हैं तो सुनिए' वह बोले, ' हमारे माथेमे आँखें हैं । हमारे बाहुओ बल है । आपकी तरह की मौनकी प्रतीक्षा ही हमारा काम नहीं है । प्रकृतिका जितना वैभव है, हमारे लिए है । उसमें जो गुप्त है इसलिए है कि हम उसे उद्घाटित करें। धरतीमें छिपा जल है तो इसलिए कि हम उस धरतीको छेद डालें और कुए खोदकर पानी खीच ले । धरतीके भीतर सोना-चाँदी दबा है और कोयला बंद है, - अब हम है कि धरतीको पोला करके उसके भीतरसे सब कुछ उगलवा ले । आप कहिए कि कुछ हमारे लिए नहीं है तो बेशक कुछ भी आपके लिए न होगा। पर मै कहता हूँ कि सब-कुछ हमारे लिए है; और तब, कुछ भी हमारी मुट्ठी में आये बिना नहीं रह सकता । ' वह विद्वान् पुरुष देखनेसे अभी पकी आयुके नहीं जान पड़ते । उनकी देह दुर्बल है, पर चेहरेपर प्रतिभा दीखती है। ऊपरकी बात कहते हुए उनका मुख जो पीला है, रक्ताभ हो आया है। मैने पूछा भाई, आप कौन हो ? काफी साहस आपने प्राप्त किया है । ' ' जी हाँ, साहस हमारा हक है । मै युवक हूँ । मै वही हूँ जो स्रष्टा होते हैं । मानवका उपकार किसने किया है ? उसने जिसने कि निर्माण किया है । उसने जिसने कि साहस किया है। निर्माता साहसी होता है। वह आत्म-विश्वासी होता है। मैं वही युवक हूँ। मै वृद्ध नहीं होना चाहता।' कहते कहते युवक मानो कॉप आये। उनकी आवाज़ काफी तेज हो गई थी। मानो किसीको चुनौती दे रहे हों। मुझे नही प्रतीत हुआ कि यह युवक वृद्ध होनेमें सचमुच देर लगाएँगे । बाल उनके अब भी जहाँ-तहाँसे पक चले है । उनका स्वास्थ्य हर्षप्रद नहीं है और उनकी इंद्रियाँ बिना बाहरी सहायताके मानो काम करनेसे अब भी इन्कार करना चाहती है । मैने कहा, ' भाई, मान भी लिया कि सब कुछ हमारे लिए है । तब फिर हम किसके लिए है ? ' युवकने उद्दीप्त भावसे कहा, 'हम किसके लिए है ? हम किसीके लिए नहीं है। हम अपने लिए हैं । मनुष्य सचराचर विश्वमें मूर्धन्य है । वह विश्वका भोता है । सब उसके लिए साधन है । वह स्वयं अपने आपमें साध्य है । मनुष्य अपने लिए है । बाकी और सब-कुछ मनुष्य के लिए है ---- मैने देखा कि युवकका उद्दीपन इस भाँति अधिक न हो जाय । मानव-प्राणीकी श्रेष्ठतासे मानो उनका मस्तक चहक रहा है। मानों वह श्रेष्ठता उनसे झिल नही रही है, उनमें समा नहीं रही है । श्रेष्ठता तो अच्छी ही चीज़ है, पर वह बोझ बन जाय यह ठीक नहीं है । मैने कहा, 'भाई, मैने जल-पानको पूछा ही नहीं । ठहरो, कुछ जल-पान मँगाता हूँ।' युवकने कहा, 'नहीं - नहीं, ' और वह कुछ अस्थिर हो गया। मैने उनका संकोच देखकर हठ नहीं की। कहा, ' देखो भाई, हम अपने आपमे पूरे नहीं है । ऐसा होता तो किसी चीज़की ज़रूरत न होती । पूरे होनेके रास्ते में ज़रूरतें होती है। पूरे हो जानेका लक्षण ही यह है कि हम कहें यह ज़रूरत नहीं रह गई। कोई वस्तु उपयोगी है, इसका अर्थ यही है कि हमारे भीतर उसकी उपयोगिता के लिए जगह खाली है । सब-कुछ हमे चाहिए, इसका मतलब यह है कि अपने भीतर हम बिल्कुल खाली है । सब कुछ हमारा हो, - इस हविसकी जड़मे तथ्य यह है कि हम अपने नही है । सबपर अगर हम कुब्ज़ा करना चाहते है तो आशय है कि हमपर हमारा ही काबू नहीं है, हम पदार्थोंके गुलाम है। क्यों भाई, आप गुलाम होना पसंद करते हो ? युवकका चेहरा तमतमा आया। उन्होंने कहा, 'गुलाम । मैं सबका मालिक हूँ । मै पुरुष हूँ । पुरुषकी कौन बराबरी कर सकता । है ? सब प्राणी और सब पदार्थ उसके चाकर है । है, वह स्वामी है । मै गुलाम ? मै पुरुष हूँ, मै गुलाम !.... ' आवेशमे आकर युवक खड़े हो गये । देखा कि इस बार उनको रोकना कठिन हो जायगा । बढ़कर मैने उनके कंधेपर हाथ रक्खा और प्रेमके अधिकारसे कहा, 'जो दूसरेको पकड़ता है, वह खुद पकड़ा जाता है। जो दूसरेको बाँधता है वह खुदको बाँधता है । जो दूसरेको खोलता है वह खुद भी खुलता है। अपने प्रयोजनके घेरेमे किसी पदार्थको या प्राणीको घेरना खुद अपने चारों ओर घेरा डाल लेना है । इस प्रकार स्वामी बनना दूसरे अर्थो में दास बनना है । इसीलिए, मैं कहता हूँ कि कुछ हमारे लिए नहीं है। इस तरह सबको आजाद करके अपनानेसे हम सच्चे अर्थोमे उन्हें 'अपना' बना सकते हैं। अनुरक्तिमे हम क्षुद्र बनते है, विरक्त होकर हम ही विस्तृत हो जाते हैं। हाथमे कुंडी बगलमे सोटा, चारो दिसि जागीरीमे- भाई, चारों दिशाओको अपनी जागीर बनानेकी राह है तो यह है । - ' अब तक युवक धैर्यपूर्वक सुनते रहे थे । अब उन्होने मेरा हाथ अपने कंधेपरसे भटक दिया और बोले, 'आपकी बुद्धि बहक गई है । मै आपकी प्रशंसा सुनकर आया था। आप कुछ कर्तृत्वका उपदेश न देकर यह मीठी बहककी बाते सुनाते है । मै उनमें फॅसनेवाला नहीं हूँ । प्रकृतिसे युद्धकी आवश्यकता है । निरंतर युद्ध, अविराम युद्ध । प्रकृतिने मनुष्यको हीन बनाया है । यह मनुष्यका काम है कि उसपर विजय पाये और उसे चेरी बनाकर छोड़े। मै कभी यह नहीं सुनूँगा कि मनुष्य प्रारब्धका दास है --- मैंने कहा, ' ठीक तो है । लेकिन भाई - ' पर मुझे युवकने बीचहीमें तोड़ दिया। कहा, 'जी नहीं, मैं कुछ नहीं सुन सकता। देश हमारा रसातलको जा रहा है । और उसके लिए आप जैसे लोग जिम्मेदार हैं- ' मैं एक इकेला-सा आदमी कैसे इस भारी देशको रसातल जितनी दूर भेजनेका श्रेय पा सकता हूँ, यह कुछ मेरी समझमे नही आया कहना चाहा, 'सुनो तो भाई - ' लेकिन युवकने कहा, 'जी नही, माफ़ कीजिए।' यह कहकर वह युवक मुझे वहीं छोड़ तेज़ चालसे चले गये । असल इतनी बात बढ़नेपर में पूछना चाहता था कि भाई, तुम्हारी शादी हुई या नहीं? कोई बाल-बच्चा है? कुछ नौकरी चाकरीका ठीक-ठाक है, या कि क्या ? गुज़ारा कैसे चलता है :मैं उनसे कहना चाहता था कि भाई, यह दुनिया अजव जगह है; सो तुम्हें जब ज़रूरत हो और मै जिस योग्य समझा जाऊँ, उसे कहनेमे मुझसे हिचकनेकी आवश्यकता नहीं है । तुम विद्वान् हो, कुछ करना चाहते हो । मैं इसके लिए तुम्हारा कृतज्ञ हूँ। मुझे तुम अपना ही जानो । देखो भाई, संकोच न करना । - पर उन युवकने यह कहनेका मुझे अवसर नहीं दिया, रोष भावसे मुझे परे हटाकर चलते चले गये । उन युवककी एक भी बात मुझे नामुनासिब नहीं मालूम हुई । सब बातें युवकोचित थीं । पर उन बातोंको लेकर अधीर होनेकी आवश्यकता मेरी समझ में नही आई । मुझे जान पड़ता है कि सब कुछका स्वामी बनने से पहले खुद अपना मालिक बननेका प्रयत्न वह करे तो ज्यादा कार्यकारी हो । युवककी योग्यता असंदिग्ध है, पर दृष्टि उनकी कही सदोष भी न हो ! उनके ऐनक लगी थी, इससे शायद निगाह निर्दोष पूरी तरह न रही होगी । पर वह युवक तो मुझे छोड़ ही गये है । तब यह अनुचित होगा कि मैं उन्हें न छोहूँ । इससे आइए, उन युवकके प्रति अपनी मंगल कामनाओंका देय देकर इस अपनी बातचीतके सूत्रको सँभालें । प्रश्न यह है कि अपनेको समस्तका केंद्र मानकर क्या हम यथार्थ सत्यको समझ सकते अथवा पा सकते है ? निस्संदेह सहज हमारे लिए यही है कि केंद्र हम अपनेको मानें और शेष विश्वको उसी अपेक्षा ग्रहण करें । जिस जगह हम खड़े हैं, दुनिया उसी स्थलको मध्य बिंदु मानकर वृत्ताकार फैली हुई दीख पड़ती है। जान पड़ता है, धरती चपटी है, थालीकी भाँति गोल है और स्थिर है। सूरज उसके चारों ओर घूमता है । स्थूल आँखोंसे और स्थूल वुद्धिसे यह बात इतनी सहज सत्य मालूम होती है कि जैसे अन्यथा कुछ हो ही नहीं सकता। अगर कुछ प्रत्यक्ष सत्य है तो यह ही है । पर आज हम जानते हैं कि यह वात यथार्थ नहीं है। जो यथार्थ है उसे हम तभी पा सकते हैं जब अपनेको विश्वके केंद्र माननेसे हम ऊँचे उठे । - अपनेको मानकर भी किसी भाँति अपनेको न मानना आरंभ करें । सृष्टि हमारे निमित्त है, यह धारणा अप्राकृतिक नहीं है। पर उस धारणापर अटक कर कल्पनाहीन प्राणी ही रह सकता है । मानव अन्य प्राणियोंकी भाँति कल्पनाशून्य प्राणी नहीं है । - मानवको तो यह जानना ही होगा कि सृष्टिका हेतु हममें निहित नहीं है । हम स्वयं सृष्टिका भाग हैं । हम नहीं थे, पर सृष्टि थी । हम नहीं रहेंगे, पर सृष्टि रहेगी । सृष्टिके साथ और सृष्टिके पदार्थोंके साथ हमारा सच्चा संबंध क्या है ? क्या हो ? मेरी प्रतीति है कि प्रयोजन और ' युटिलिटी' शब्दसे जिस संबंधका बोध होता है वह सच्चा नहीं है । वह काम चलाऊ भर है वह परिमित है, कृत्रिम है और वंधनकारक है। उससे कोई किसीको पा नहीं सकता । सच्चा संबंध प्रेमका, भ्रातृत्वका और आनन्दका है। इसी संबंध में पूर्णता है, उपलब्धि है और आह्लाद है; न यहाँ किसीको किसीकी अपेक्षा है, न उपेक्षा है । यह प्रसन्न, उदात्त, समभावका संबंध है पानी हमारे पीनेके लिए बना है, हवा जीनेके लिए, यदि
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बचपन की सबसे सुरीली यादों में से एक का नाम है हीरा सिंह राणा. वो बचपन जिसे कुमाउंनी और गढ़वाली में भेद मालूम न था. और वो बचपन जिसमें खेल-खिलौने, पिक्चर-सर्कस के बीच गीतों के लिए बहुत कम जगह थी. आश्चर्य कि गीतों ने तब भी जगह बनायी. और ये जगह बनाने बाले गीत थे - रंगीली बिंदी, के संध्या झूली रे, आ लिली बाकरी, मेरी मानिला डानी, आजकाल हरे ज्वाना. इसमें भी कोई शक़ नहीं कि गढ़वाल में उस दौर में सुरीले और सुगठित गीतों की न्यूनता थी और कुमाँउनी गीत हाथों-हाथ लिए जाते थे, खूब लोकप्रिय होते थे.
(Tribute to Heera Singh Rana)
हीरा सिंह राणा जी की हाथों में हुड़का लेकर माइक पर लाइव गायन की तस्वीर भी मन-मस्तिष्क में स्थायी रूप से अंकित है. शायद सांग एण्ड ड्रामा डिविजन द्वारा राणा जी की टीम अनुबंधित होकर पूरे उत्तराखण्ड में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दिया करती थी.
अंग्रेजो, भारत छोड़ो आंदोलन के साल 16 सितम्बर को उत्तराखण्ड में एक हीरा जन्मा था. अल्मोड़े के मानिला गाँव में. रोजी-रोटी के लिए 1958-59 में दिल्ली चले गए. पाँच रुपया महीने पर एक कपड़े की दुकान पर काम करने लगे. अपनी शिक्षा के बारे में राणाजी बताते थे कि लोग यूनिवर्सिटी गए पढ़ने के लिए और मैं समाज के पास गया. मिडिल भी पास हुआ या फेल, नहीं मालूम. सरस्वती की सद्भावना थी उन पर. इसलिए उस दौर में उत्तराखण्ड के गम्भीर सांस्कृतिक अध्येता जैसे नारायण दत्त पालीवाल, गोविंद चातक का सान्निध्य प्राप्त हुआ. और फिर आत्मविश्वास से लबरेज हो समाज से जो कुछ सीखा था उसी समाज को लौटाने को कृतसंकल्प हो गया. गीत-संगीत कला से अपने समाज के लिए जो कुछ भी किया जा सकता था हीरा सिंह राणा ने वो सब निपुणता से सफलतापूर्वक किया. दिल्ली में रहते हुए भी अपने गीत-संगीत पर कोई परदेसी दाग न लगने दिया. 13 जून 2020 को 78 वर्ष की अवस्था में हीरा सिंह राणा ने दिल्ली में ही अंतिम साँस ली.
(Tribute to Heera Singh Rana)
न्योली से प्राण वाले इस पखेरू की आत्मा तो संगीत में बसती थी, गीत में चहचहाती थी. सो संगीत शिक्षा के लिए देश की सांस्कतिक राजधानी कलकत्ता चले गए. और फिर आजीवन दिल्ली में रहकर अपने मातृ-प्रदेश की गीत-संगीत साधना में रत रहे. संतोष की बात ये कि उनका एक बड़ा सपना उनके जीवनकाल में पूरा हो सका. दिल्ली में गढ़वाली-कुमांउनी-जौनसारी भाषा की अकादमी के गठन का जो पिछले साल ही अस्तित्व में आयी. हीरा सिंह राणा को दिल्ली सरकार द्वारा इस अकादमी का कार्यकारी मुखिया अर्थात उपाध्यक्ष बनाया गया तो पूरे उत्तराखण्ड में हर्ष की लहर फैल गयी थी. ऐसा लगा इन पहाड़ों की न्योली-हिलांस-कफ्फू राजपीठ पर बिठा दी गयी हो. अकादमी का महत्व इसलिए भी अधिक है कि ये उस शहर में स्थापित हुई थी जहाँ दुनिया के तमाम देशों के दूतावास हैं, भारत की सभी भाषाओं के व्यवहारी रहते हैं.
हिरदा के नाम से लोकप्रिय, हीरा सिंह राणा के 50 वर्षों की गीत-संगीत साधना पर प्रख्यात पत्रकार-आंदोलनकारी-अध्येता चारू तिवारी ने संघर्षों का राही नाम से एक पुस्तक भी लिखी है. पुस्तक में हीरा सिंह राणा पर केंद्रित आलेख और संस्मरणों के जरिए उनके व्यक्तित्व को समग्रता में समझा जा सकता है.
इसी पुस्तक में राणाजी एक साक्षात्कार में बताते हैं कि दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान, आ ली ली बाकरी छू छू... का गायन-मंचन किया गया. तत्कालीन रेलमंत्री भी इस कार्यक्रम में पधारे थे. साथ में गोविंद बलभ पंत जी की पत्नी और पुत्र केसी पंत भी थे. पंत जी की आँखों में इस सुरीले मंचन को देखकर आँसू आ गए थे. अगले दिन उन्होंने गायक राणा को घर पर बुलाकर इनाम-इकराम भी दिया.
हीरा सिंह राणा सशक्त गीतकार भी थे. उनका सर्वाधिक लोकप्रिय गीत रंगीली बिंदी, नायिका के नख-शिख वर्णन के रूप में ग्रहण किया जाता है. जबकि हिरदा बताया करते थे कि कालाढुंगी से नैनीताल जाते हुए ये गीत लिखा गया था. रंगीली बिंदी और कुछ नहीं उदित होता सूर्य है, नौपाट घाघर लहरों की तरह दिखते गदेरे हैं, नीचे भाबर की गहरी हरियाली काली धोती है, रेशमी चैना तराई के खेत हैं, एक हाथ दाथी एक हाथी ऐना अर्थात एक तरफ श्रमशील महिलाएं काम कर रही हैं दूसरी तरफ आईने की तरफ चमचमाता हिमालय.
कुल मिलाकर प्रकृति सुन्दरी की प्रशंसा में लिखा गया गीत है. उन्होंने सिर्फ नाॅस्टेलजिक और श्रृंगार के गीत ही नहीं लिखे बल्कि जनसरोकारों पर भी सफल गीत लिखे. उत्तराखण्ड आंदोलन के दौर का, लश्का कमर बांदा गीत को उत्तराखण्ड कभी बिसरा नहीं सकता. पलायन पर भी एक सुन्दर व्यंग्य-गीत लिखा था. उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद दिल्ली से उत्तराखण्ड की साहित्यिक-सांस्कृतिक राजधानी के देहरादून-हल्द्वानी शिफ्ट हो जाने के बाद फिर से दिल्ली में उत्तराखण्ड की साहित्यिक-सांस्कतिक गतिविधियों को राज्याश्रय दिलवाने के लिए हीरा सिंह राणा अर्थात हमारे हिरदा को सदैव याद किया जाएगा.
(Tribute to Heera Singh Rana)
दिल्ली में रहते हुए भी हिरदा अपनी मानिला डानी को कभी नहीं भूले. तलहटी में समृद्ध रामनगर और शिखर पर सुरम्य गैरसैंण. उसे देवी-सदृश पूजनीय मानते हुए वो उसकी बलाएं अपने सर लेते रहे. उसकी समृद्धि की कामना करते रहे, स्वयं भी समृद्ध करते रहे. उत्तराखण्ड भी अपने इस सुरीले सपूत को नहीं भूल सकता जिसकी आवाज़ डानी-कानी में गूँज पैदा करने के लिए पूरी तरह अनुकूलित थी जो साउण्ड-सिस्टम के बगैर भी किसी भी सभा में श्रोताओं को बाँध कर मंत्रमुग्ध कर सकते थे.
अलविदा हिरदा. रंगीली बिंदी, काली घाघरी पहने, एक हाथ में दाथी और दूसरे में ऐना रखकर उत्तराखण्ड की धरती तुम्हें कृतज्ञ विदा देती है. हे मानीला के मायादार दाज्यू! हो सके तो फिर से यहीं अपनी गूँजती आवाज़ के साथ जन्म लेना.
(Tribute to Heera Singh Rana)
1 अगस्त 1967 को जन्मे देवेश जोशी अंगरेजी में परास्नातक हैं. उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैः जिंदा रहेंगी यात्राएँ (संपादन, पहाड़ नैनीताल से प्रकाशित), उत्तरांचल स्वप्निल पर्वत प्रदेश (संपादन, गोपेश्वर से प्रकाशित) और घुघती ना बास (लेख संग्रह विनसर देहरादून से प्रकाशित). उनके दो कविता संग्रह - घाम-बरखा-छैल, गाणि गिणी गीणि धरीं भी छपे हैं. वे एक दर्जन से अधिक विभागीय पत्रिकाओं में लेखन-सम्पादन और आकाशवाणी नजीबाबाद से गीत-कविता का प्रसारण कर चुके हैं. फिलहाल राजकीय इण्टरमीडिएट काॅलेज में प्रवक्ता हैं.
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बचपन की सबसे सुरीली यादों में से एक का नाम है हीरा सिंह राणा. वो बचपन जिसे कुमाउंनी और गढ़वाली में भेद मालूम न था. और वो बचपन जिसमें खेल-खिलौने, पिक्चर-सर्कस के बीच गीतों के लिए बहुत कम जगह थी. आश्चर्य कि गीतों ने तब भी जगह बनायी. और ये जगह बनाने बाले गीत थे - रंगीली बिंदी, के संध्या झूली रे, आ लिली बाकरी, मेरी मानिला डानी, आजकाल हरे ज्वाना. इसमें भी कोई शक़ नहीं कि गढ़वाल में उस दौर में सुरीले और सुगठित गीतों की न्यूनता थी और कुमाँउनी गीत हाथों-हाथ लिए जाते थे, खूब लोकप्रिय होते थे. हीरा सिंह राणा जी की हाथों में हुड़का लेकर माइक पर लाइव गायन की तस्वीर भी मन-मस्तिष्क में स्थायी रूप से अंकित है. शायद सांग एण्ड ड्रामा डिविजन द्वारा राणा जी की टीम अनुबंधित होकर पूरे उत्तराखण्ड में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दिया करती थी. अंग्रेजो, भारत छोड़ो आंदोलन के साल सोलह सितम्बर को उत्तराखण्ड में एक हीरा जन्मा था. अल्मोड़े के मानिला गाँव में. रोजी-रोटी के लिए एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन-उनसठ में दिल्ली चले गए. पाँच रुपया महीने पर एक कपड़े की दुकान पर काम करने लगे. अपनी शिक्षा के बारे में राणाजी बताते थे कि लोग यूनिवर्सिटी गए पढ़ने के लिए और मैं समाज के पास गया. मिडिल भी पास हुआ या फेल, नहीं मालूम. सरस्वती की सद्भावना थी उन पर. इसलिए उस दौर में उत्तराखण्ड के गम्भीर सांस्कृतिक अध्येता जैसे नारायण दत्त पालीवाल, गोविंद चातक का सान्निध्य प्राप्त हुआ. और फिर आत्मविश्वास से लबरेज हो समाज से जो कुछ सीखा था उसी समाज को लौटाने को कृतसंकल्प हो गया. गीत-संगीत कला से अपने समाज के लिए जो कुछ भी किया जा सकता था हीरा सिंह राणा ने वो सब निपुणता से सफलतापूर्वक किया. दिल्ली में रहते हुए भी अपने गीत-संगीत पर कोई परदेसी दाग न लगने दिया. तेरह जून दो हज़ार बीस को अठहत्तर वर्ष की अवस्था में हीरा सिंह राणा ने दिल्ली में ही अंतिम साँस ली. न्योली से प्राण वाले इस पखेरू की आत्मा तो संगीत में बसती थी, गीत में चहचहाती थी. सो संगीत शिक्षा के लिए देश की सांस्कतिक राजधानी कलकत्ता चले गए. और फिर आजीवन दिल्ली में रहकर अपने मातृ-प्रदेश की गीत-संगीत साधना में रत रहे. संतोष की बात ये कि उनका एक बड़ा सपना उनके जीवनकाल में पूरा हो सका. दिल्ली में गढ़वाली-कुमांउनी-जौनसारी भाषा की अकादमी के गठन का जो पिछले साल ही अस्तित्व में आयी. हीरा सिंह राणा को दिल्ली सरकार द्वारा इस अकादमी का कार्यकारी मुखिया अर्थात उपाध्यक्ष बनाया गया तो पूरे उत्तराखण्ड में हर्ष की लहर फैल गयी थी. ऐसा लगा इन पहाड़ों की न्योली-हिलांस-कफ्फू राजपीठ पर बिठा दी गयी हो. अकादमी का महत्व इसलिए भी अधिक है कि ये उस शहर में स्थापित हुई थी जहाँ दुनिया के तमाम देशों के दूतावास हैं, भारत की सभी भाषाओं के व्यवहारी रहते हैं. हिरदा के नाम से लोकप्रिय, हीरा सिंह राणा के पचास वर्षों की गीत-संगीत साधना पर प्रख्यात पत्रकार-आंदोलनकारी-अध्येता चारू तिवारी ने संघर्षों का राही नाम से एक पुस्तक भी लिखी है. पुस्तक में हीरा सिंह राणा पर केंद्रित आलेख और संस्मरणों के जरिए उनके व्यक्तित्व को समग्रता में समझा जा सकता है. इसी पुस्तक में राणाजी एक साक्षात्कार में बताते हैं कि दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान, आ ली ली बाकरी छू छू... का गायन-मंचन किया गया. तत्कालीन रेलमंत्री भी इस कार्यक्रम में पधारे थे. साथ में गोविंद बलभ पंत जी की पत्नी और पुत्र केसी पंत भी थे. पंत जी की आँखों में इस सुरीले मंचन को देखकर आँसू आ गए थे. अगले दिन उन्होंने गायक राणा को घर पर बुलाकर इनाम-इकराम भी दिया. हीरा सिंह राणा सशक्त गीतकार भी थे. उनका सर्वाधिक लोकप्रिय गीत रंगीली बिंदी, नायिका के नख-शिख वर्णन के रूप में ग्रहण किया जाता है. जबकि हिरदा बताया करते थे कि कालाढुंगी से नैनीताल जाते हुए ये गीत लिखा गया था. रंगीली बिंदी और कुछ नहीं उदित होता सूर्य है, नौपाट घाघर लहरों की तरह दिखते गदेरे हैं, नीचे भाबर की गहरी हरियाली काली धोती है, रेशमी चैना तराई के खेत हैं, एक हाथ दाथी एक हाथी ऐना अर्थात एक तरफ श्रमशील महिलाएं काम कर रही हैं दूसरी तरफ आईने की तरफ चमचमाता हिमालय. कुल मिलाकर प्रकृति सुन्दरी की प्रशंसा में लिखा गया गीत है. उन्होंने सिर्फ नाॅस्टेलजिक और श्रृंगार के गीत ही नहीं लिखे बल्कि जनसरोकारों पर भी सफल गीत लिखे. उत्तराखण्ड आंदोलन के दौर का, लश्का कमर बांदा गीत को उत्तराखण्ड कभी बिसरा नहीं सकता. पलायन पर भी एक सुन्दर व्यंग्य-गीत लिखा था. उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद दिल्ली से उत्तराखण्ड की साहित्यिक-सांस्कृतिक राजधानी के देहरादून-हल्द्वानी शिफ्ट हो जाने के बाद फिर से दिल्ली में उत्तराखण्ड की साहित्यिक-सांस्कतिक गतिविधियों को राज्याश्रय दिलवाने के लिए हीरा सिंह राणा अर्थात हमारे हिरदा को सदैव याद किया जाएगा. दिल्ली में रहते हुए भी हिरदा अपनी मानिला डानी को कभी नहीं भूले. तलहटी में समृद्ध रामनगर और शिखर पर सुरम्य गैरसैंण. उसे देवी-सदृश पूजनीय मानते हुए वो उसकी बलाएं अपने सर लेते रहे. उसकी समृद्धि की कामना करते रहे, स्वयं भी समृद्ध करते रहे. उत्तराखण्ड भी अपने इस सुरीले सपूत को नहीं भूल सकता जिसकी आवाज़ डानी-कानी में गूँज पैदा करने के लिए पूरी तरह अनुकूलित थी जो साउण्ड-सिस्टम के बगैर भी किसी भी सभा में श्रोताओं को बाँध कर मंत्रमुग्ध कर सकते थे. अलविदा हिरदा. रंगीली बिंदी, काली घाघरी पहने, एक हाथ में दाथी और दूसरे में ऐना रखकर उत्तराखण्ड की धरती तुम्हें कृतज्ञ विदा देती है. हे मानीला के मायादार दाज्यू! हो सके तो फिर से यहीं अपनी गूँजती आवाज़ के साथ जन्म लेना. एक अगस्त एक हज़ार नौ सौ सरसठ को जन्मे देवेश जोशी अंगरेजी में परास्नातक हैं. उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैः जिंदा रहेंगी यात्राएँ , उत्तरांचल स्वप्निल पर्वत प्रदेश और घुघती ना बास . उनके दो कविता संग्रह - घाम-बरखा-छैल, गाणि गिणी गीणि धरीं भी छपे हैं. वे एक दर्जन से अधिक विभागीय पत्रिकाओं में लेखन-सम्पादन और आकाशवाणी नजीबाबाद से गीत-कविता का प्रसारण कर चुके हैं. फिलहाल राजकीय इण्टरमीडिएट काॅलेज में प्रवक्ता हैं.
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घुड़दौड़ पर सट्टेबाजी मजेदार हो सकती है लेकिन आकस्मिक शर्त प्लेसर के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि कौन सा घोड़ा शर्त लगा सकता है। जबकि कुछ जुआरी घोड़ों और उनके सवारों के बारे में सबकुछ जानने के लिए अपना काम करते हैं, लेकिन कई लोगों के पास बस तरह के शोध के लिए समय या झुकाव नहीं होता है। E-ponies. com जैसी घोड़े की पिकिंग वेबसाइट का उपयोग करके अपना समय बचा सकता है और यदि आप भाग्यशाली हैं, तो आपको थोड़ा पॉकेट परिवर्तन कमाएं।
बेशक, जुआ के किसी भी गेम के साथ, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि डर्बिन की युक्तियां चुकानी पड़ेगी लेकिन कई लोगों को घोड़े की दौड़ का मौका मौका मिलता है। आप शर्त लगाए बिना हमेशा पालन कर सकते हैं।
सभी e-ponies. com विश्लेषण मालिक लिम डर्बिन द्वारा लिखे गए कोड के आधार पर पूरी तरह से कंप्यूटर उत्पन्न होते हैं। उन्होंने 1 999 में डिजिटल चाक लाइन नाम का उपयोग करके अपनी वेबसाइट शुरू की। कुछ समाचार पत्रों में उनके आंकड़े उठाए जाने के बाद साइट बढ़ी और अब इसे E-ponies. com के नाम से जाना जाता है। उनके एल्गोरिदम को वर्षों से tweaked किया गया है, लेकिन इसकी मूल बातें काफी समान रही है। वेबसाइट कई कारकों के आधार पर प्रत्येक जानवर की निष्पक्ष समीक्षा देने के लिए काम करती है। प्रत्येक घोड़ा जिसे वेबसाइट समीक्षा की गति, कक्षा, फॉर्म, अंतिम, कनेक्शन और रेखा के आधार पर स्कोर किया जाता है। घोड़े के स्कोर पर एक कृत्रिम विकलांगता भी लगाई गई है।
डर्बिन की साइट पर सबसे लोकप्रिय सेवा रेसिंग पिक्स है जो प्रत्येक रेसिंग सर्किट के लिए प्रतिदिन पोस्ट की जाती है।
वे युक्तियों को भी ट्वीट करते हैं और वे दिन में दो बार "उच्च मूल्य वाले विजेताओं" पर विचार करते हैं। यदि आप रेसिंग दुनिया पर स्कूप की तलाश में हैं या बस आंकड़ों से प्यार करते हैं तो यह वेबसाइट आपके लिए ब्याज होगी। वेबसाइट पर, आप देश के हर हिस्से से घोड़े रेसिंग सर्किट विश्लेषण पा सकते हैं।
जबकि वेब साइट्स प्रसिद्धि का सबसे बड़ा दावा है, डर्बिन के एल्गोरिदम है, प्रशंसकों को वेबसाइट पर और भी अधिक मिलेगा।
सक्रिय उपयोगकर्ता मंच घुड़दौड़ उत्साही के लिए सिर्फ एक ड्रॉ है। उन लोगों के लिए वन ट्रिक टट्टू नामक एक ऐप भी है जो सिर्फ घोड़े की दौड़ के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता है। रेसिंग सर्किट से विश्लेषण प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें जो आपकी रूचि रखते हैं। देश भर के अन्य प्रमुख रेसिंग सर्किटों के अन्य मुक्त विश्लेषणों के लिए कृपया e-ponies. com पर जाएं।
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सम्बन्ध में विचार प्रकट करने का अधिकार कांग्रेसजनों को देते हैं तो आप यह नहीं कह सकते कि केवल अनुकूमतों को हो प्रकट करने दिया जायगा और प्रतिकूल मतों को रोक दिया जायगा। यदि हमें विचार प्रकट करने का वैध अधिकार प्राप्त है तो विचारों के अनुकूतया प्रतिकूत होने का प्रश्न नहीं उठता। आपके पत्र से यह ध्वनि निकलती है कि सिर्फ प्रतिज्ञ मतों पर हो रोक लगाई गई है ।
"हम इतने दिनों से ब्रिटिश सरकार से अन्य बातों के अलावा नागरिक स्वतंत्र के लिए लड़ रहे हैं ! मैं यह भी माने लेता हूँ कि नागरिक स्वतंत्र में भाषण का स्वतंत्रता लित है आपका दृष्टिकोण तो यह है कि यदि हमारा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी या के बहुमत से विरोध है तो हमें भाषण की स्वतंत्रता का दावा न करना चाहिए । यदि हम ब्रिटेश सरकार के विरुद्ध भाषण का स्वतंत्रता का दावा करें र कांग्रेस या उसके अधीन किसी संस्था के विरुद्ध ऐसा न करें तो यह परिस्थिति बड़े अचरज की होगी। यदि हमें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के ऐसे प्रस्तावों की श्रालोचना का अधिकार नहीं दिया जाता, जो हमारे विचार में देश के लिए हानिकर हैं, हमें दरअसल एक लोकतंत्रीय अधिकार से वंचित किया जाता है। क्या मैं शापसे गम्भीरतापूर्वक पूछ सकता हूं कि लोकतंत्रीय अधिकारों का उपयोग सिर्फ कांग्रेस के बाहर हो हो सकता है उसके भीतर नहीं ?
"मुझे आशा है थाप यह भी स्वीकार करेंगे कि जन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी कोई प्रस्ताव पास करती है तो हमें याद की किसो भी बैठक में उस प्रस्ताव को समीक्षा, परिवर्तन, संशोधन या रद्द करने का अधिकार होता है। मुझे याशा है कि शाप यह भी मानेंगे कि हमें खिला भारतीय कांग्रेस कमेटी के निश्चय के विरुद्ध खुले अधिवेशन में अपील करने का भी एक है। आप यह भ प्रस्थाकार नहीं कर सकते कि किस अल्पसंख्यक समुदाय की प्रचार द्वारा बहुसंख्यक समुदाय को अपने मत का बनाने का हक है। ऐसा हम सार्वजनिक सभाओं में अपीलों तथा समाचारपत्र में लेखों और कैसे कर सकते हैं ? अब कांग्रेस मुट्ठी भर लोगों को संस्था नहीं रह गई है। इसके सदस्यों की संख्या ४५ लाख के निकट पहुंच गई है। यदि हमें सभाएं करने दिया जाता है और लेख लिखने दिया जाता है तभी हम साधारण कांग्रेस जन से अपील करके उन्हें
नेमका बना सकते हैं। यदि आप मानते हैं कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा पास किया गया कोई प्रस्ताव पवित्र है और उसमें कभी परिवर्तन न होना चाहिए तो उसके विरुद्ध थालोबना पर पाबंदी लगाने का कुछ कारण हो सकता है। लेकिन अगर किसी प्रस्ताव की समीक्षा, उसके संशोधन, परिवर्तन या उसे रद्द करने का अधिकार स्वयं अखिल भारतीय कांग्रेस द्वारा या सुले अधिवेशन में श्राप हमें देते हैं तो मेरी समझ में नहीं श्राता कि श्रार उसकी आलोचना पर पाबंदी कैसे लगा सकते हैं, जैसी लगाने का प्रयत्न झाप करते आये है ?
"आप'अनुशासन शब्द का जो अर्थ लगा रहे हैं उसे मैं स्वीकार नहीं कर सकता। मैं अपने को कड़ा अनुशासक मानता हूं, किन्तु श्राप तो अनुशासन के नाम पर उचित श्रालोचना को बोक रहे हैं। अनुशासन का मतलब यह तो नहीं है कि किसी व्यक्ति से वैध तथा लोकतंत्रीय के अधिकार छीन लिया जाय।
"इस बात के अलावा कि जिन प्रस्तावों को हम देश के लिए हानिकर समझ उनके विरोध का हमें वैध तथा लोकतंत्रीय अधिकार है। दोनों प्रस्तावों की निजी अछाईया बुराई पर विचार करने से हम इस परिणाम पर पहुंचते हैं कि यदि उन्हें अमल में लाया गया तो विधानवाद की मञ्जुलि बढ़ेगो, कांग्रेसी संगठन के मुकाबले में प्रान्तोय मंत्रिमंडलों के प्रभाव, शक्ति और अधिकार
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सम्बन्ध में विचार प्रकट करने का अधिकार कांग्रेसजनों को देते हैं तो आप यह नहीं कह सकते कि केवल अनुकूमतों को हो प्रकट करने दिया जायगा और प्रतिकूल मतों को रोक दिया जायगा। यदि हमें विचार प्रकट करने का वैध अधिकार प्राप्त है तो विचारों के अनुकूतया प्रतिकूत होने का प्रश्न नहीं उठता। आपके पत्र से यह ध्वनि निकलती है कि सिर्फ प्रतिज्ञ मतों पर हो रोक लगाई गई है । "हम इतने दिनों से ब्रिटिश सरकार से अन्य बातों के अलावा नागरिक स्वतंत्र के लिए लड़ रहे हैं ! मैं यह भी माने लेता हूँ कि नागरिक स्वतंत्र में भाषण का स्वतंत्रता लित है आपका दृष्टिकोण तो यह है कि यदि हमारा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी या के बहुमत से विरोध है तो हमें भाषण की स्वतंत्रता का दावा न करना चाहिए । यदि हम ब्रिटेश सरकार के विरुद्ध भाषण का स्वतंत्रता का दावा करें र कांग्रेस या उसके अधीन किसी संस्था के विरुद्ध ऐसा न करें तो यह परिस्थिति बड़े अचरज की होगी। यदि हमें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के ऐसे प्रस्तावों की श्रालोचना का अधिकार नहीं दिया जाता, जो हमारे विचार में देश के लिए हानिकर हैं, हमें दरअसल एक लोकतंत्रीय अधिकार से वंचित किया जाता है। क्या मैं शापसे गम्भीरतापूर्वक पूछ सकता हूं कि लोकतंत्रीय अधिकारों का उपयोग सिर्फ कांग्रेस के बाहर हो हो सकता है उसके भीतर नहीं ? "मुझे आशा है थाप यह भी स्वीकार करेंगे कि जन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी कोई प्रस्ताव पास करती है तो हमें याद की किसो भी बैठक में उस प्रस्ताव को समीक्षा, परिवर्तन, संशोधन या रद्द करने का अधिकार होता है। मुझे याशा है कि शाप यह भी मानेंगे कि हमें खिला भारतीय कांग्रेस कमेटी के निश्चय के विरुद्ध खुले अधिवेशन में अपील करने का भी एक है। आप यह भ प्रस्थाकार नहीं कर सकते कि किस अल्पसंख्यक समुदाय की प्रचार द्वारा बहुसंख्यक समुदाय को अपने मत का बनाने का हक है। ऐसा हम सार्वजनिक सभाओं में अपीलों तथा समाचारपत्र में लेखों और कैसे कर सकते हैं ? अब कांग्रेस मुट्ठी भर लोगों को संस्था नहीं रह गई है। इसके सदस्यों की संख्या पैंतालीस लाख के निकट पहुंच गई है। यदि हमें सभाएं करने दिया जाता है और लेख लिखने दिया जाता है तभी हम साधारण कांग्रेस जन से अपील करके उन्हें नेमका बना सकते हैं। यदि आप मानते हैं कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा पास किया गया कोई प्रस्ताव पवित्र है और उसमें कभी परिवर्तन न होना चाहिए तो उसके विरुद्ध थालोबना पर पाबंदी लगाने का कुछ कारण हो सकता है। लेकिन अगर किसी प्रस्ताव की समीक्षा, उसके संशोधन, परिवर्तन या उसे रद्द करने का अधिकार स्वयं अखिल भारतीय कांग्रेस द्वारा या सुले अधिवेशन में श्राप हमें देते हैं तो मेरी समझ में नहीं श्राता कि श्रार उसकी आलोचना पर पाबंदी कैसे लगा सकते हैं, जैसी लगाने का प्रयत्न झाप करते आये है ? "आप'अनुशासन शब्द का जो अर्थ लगा रहे हैं उसे मैं स्वीकार नहीं कर सकता। मैं अपने को कड़ा अनुशासक मानता हूं, किन्तु श्राप तो अनुशासन के नाम पर उचित श्रालोचना को बोक रहे हैं। अनुशासन का मतलब यह तो नहीं है कि किसी व्यक्ति से वैध तथा लोकतंत्रीय के अधिकार छीन लिया जाय। "इस बात के अलावा कि जिन प्रस्तावों को हम देश के लिए हानिकर समझ उनके विरोध का हमें वैध तथा लोकतंत्रीय अधिकार है। दोनों प्रस्तावों की निजी अछाईया बुराई पर विचार करने से हम इस परिणाम पर पहुंचते हैं कि यदि उन्हें अमल में लाया गया तो विधानवाद की मञ्जुलि बढ़ेगो, कांग्रेसी संगठन के मुकाबले में प्रान्तोय मंत्रिमंडलों के प्रभाव, शक्ति और अधिकार
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लम्बी और स्पष्ट होती हैं। इनकी चौड़ाई प्रायः 8-10 मील तक की होती है ।
पृथ्वी की तरह वायुमण्डल अथवा सूर्य की भाँति वर्णमण्डल चन्द्र में नहीं होता । यदि होता भी होगा तो वह नहीं के बराबर । इसका प्रमारग विद्वान यह बताते हैं कि चन्द्र पर परछाइयाँ तीक्ष्ण और अत्यन्त काली जान पड़ती हैं। हमने कई बार देखा है कि चन्द्र जब किसी तारे के सामने आ जाता है तो वह उसे ढक लेता है । यदि चन्द्र में इसी प्रकार का वायुमण्डल होता तो उसका प्रकाश धीरे-धीरे मन्द पड़ता अथवा तेज होता । किन्तु यह भी सम्भव नहीं कि चन्द्र में वायुमण्डल कभी न रहा हो । विद्वानों का मत है कि पृथ्वी की उत्पत्ति की तरह ही चन्द्र की भी उत्पत्ति हुई है। कई विद्वान तो यहाँ तक कहते हैं कि चन्द्र की उत्पत्ति पृथ्वी से ही हुई है । यह सिद्धान्त सर्वविदित है कि गैस दूर तक फैलती है और गैस के अणु पृथक्-पृथक् रहते हैं । वे सदैव तीव्र वेग से चलते और एक दूसरे से टकराते है । गैस जितनी भी दबी रहेगी, उतने ही उसके र एक दूसरे से अधिक टकराएँगे जिससे गैस की फैलने की प्रवृत्ति अधिक तीव्र होगी। किन्तु जब गैस अत्यधिक फैल जाती है तो उसके अणुओं का टकराना कम हो जाता है और गैस इससे अधिक नहीं फैलती । विद्वानों ने खोज की है कि चन्द्र के कम आकर्षण के कारण वहाँ गैस फैलते-फैलते एकदम शून्य आकाश में निकल गई । पृथ्वी पर चन्द्र को अपेक्षा छः गुना अधिक प्रकरण के कारण गैस के अणु पृथ्वी से बँधे रहे । इसी कारण वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला कि पृथ्वी पर वायुमण्डल है और चन्द्र पर नहीं ।
चन्द्र पर वायुमण्डल की शून्यता के कारण अत्यधिक शीत होगी । चन्द्र का तापमान 100 अंश से० माना जाता है । चन्द्र का दिन हमारे आधे मास के बराबर होता है । इसी तरह निरन्तर दो सप्ताह धूप में तपने से वहाँ के प्रस्तर खण्ड उबलते हुए पानी से भी अधिक ऊष्ण हो जाते होंगे । चन्द्र के सर्वग्रसित होने पर धूप से तपी चन्द्र की भूमि पर पृथ्वी की छाया पड़ते ही वैज्ञानिक भाँप लेते हैं कि चन्द्रमा कितनी जल्दी शीत प्राप्त कर लेता है। केवल एक घंटे में ही चन्द्र बिलकुल शीतल हो जाता है जो कि बर्फ से भी कई गुना अधिक ठंडा होता है । एक घंटे पूर्व उबलते पानी जैसे चन्द्र का हिम से भी अधिक शीतल हो जाना कुछ कम श्राश्चर्यजनक बात नहीं है ।
प्रो० डब्ल्यू एच० मिकरंग नामक विद्वान का कथन है कि चन्द्र पर वनस्पति भी विद्यमान है। किन्तु इसकी उत्पत्ति और समाप्ति की अवधि केवल दो सप्ताह है। उनका तो कथन यह भी है कि चन्द्र पर जल और जलवाष्प दोनों का अस्तित्व है ।
चन्द्र ग्रहरण
सूर्य की भाँति चन्द्र को भी ग्रहरण लगता है। यह ग्रहरण
भी सूर्य की भाँति प्रच्छाया तथा उपच्छाया ही है। जब सूर्य और चन्द्र के मध्य पृथ्वी श्रा जाती है तो धरावासी इसे ग्रहर की संज्ञा देते है । सूर्य की भाँति चन्द्र भी सर्वग्रसित होता है ।
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लम्बी और स्पष्ट होती हैं। इनकी चौड़ाई प्रायः आठ-दस मील तक की होती है । पृथ्वी की तरह वायुमण्डल अथवा सूर्य की भाँति वर्णमण्डल चन्द्र में नहीं होता । यदि होता भी होगा तो वह नहीं के बराबर । इसका प्रमारग विद्वान यह बताते हैं कि चन्द्र पर परछाइयाँ तीक्ष्ण और अत्यन्त काली जान पड़ती हैं। हमने कई बार देखा है कि चन्द्र जब किसी तारे के सामने आ जाता है तो वह उसे ढक लेता है । यदि चन्द्र में इसी प्रकार का वायुमण्डल होता तो उसका प्रकाश धीरे-धीरे मन्द पड़ता अथवा तेज होता । किन्तु यह भी सम्भव नहीं कि चन्द्र में वायुमण्डल कभी न रहा हो । विद्वानों का मत है कि पृथ्वी की उत्पत्ति की तरह ही चन्द्र की भी उत्पत्ति हुई है। कई विद्वान तो यहाँ तक कहते हैं कि चन्द्र की उत्पत्ति पृथ्वी से ही हुई है । यह सिद्धान्त सर्वविदित है कि गैस दूर तक फैलती है और गैस के अणु पृथक्-पृथक् रहते हैं । वे सदैव तीव्र वेग से चलते और एक दूसरे से टकराते है । गैस जितनी भी दबी रहेगी, उतने ही उसके र एक दूसरे से अधिक टकराएँगे जिससे गैस की फैलने की प्रवृत्ति अधिक तीव्र होगी। किन्तु जब गैस अत्यधिक फैल जाती है तो उसके अणुओं का टकराना कम हो जाता है और गैस इससे अधिक नहीं फैलती । विद्वानों ने खोज की है कि चन्द्र के कम आकर्षण के कारण वहाँ गैस फैलते-फैलते एकदम शून्य आकाश में निकल गई । पृथ्वी पर चन्द्र को अपेक्षा छः गुना अधिक प्रकरण के कारण गैस के अणु पृथ्वी से बँधे रहे । इसी कारण वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला कि पृथ्वी पर वायुमण्डल है और चन्द्र पर नहीं । चन्द्र पर वायुमण्डल की शून्यता के कारण अत्यधिक शीत होगी । चन्द्र का तापमान एक सौ अंश सेशून्य माना जाता है । चन्द्र का दिन हमारे आधे मास के बराबर होता है । इसी तरह निरन्तर दो सप्ताह धूप में तपने से वहाँ के प्रस्तर खण्ड उबलते हुए पानी से भी अधिक ऊष्ण हो जाते होंगे । चन्द्र के सर्वग्रसित होने पर धूप से तपी चन्द्र की भूमि पर पृथ्वी की छाया पड़ते ही वैज्ञानिक भाँप लेते हैं कि चन्द्रमा कितनी जल्दी शीत प्राप्त कर लेता है। केवल एक घंटे में ही चन्द्र बिलकुल शीतल हो जाता है जो कि बर्फ से भी कई गुना अधिक ठंडा होता है । एक घंटे पूर्व उबलते पानी जैसे चन्द्र का हिम से भी अधिक शीतल हो जाना कुछ कम श्राश्चर्यजनक बात नहीं है । प्रोशून्य डब्ल्यू एचशून्य मिकरंग नामक विद्वान का कथन है कि चन्द्र पर वनस्पति भी विद्यमान है। किन्तु इसकी उत्पत्ति और समाप्ति की अवधि केवल दो सप्ताह है। उनका तो कथन यह भी है कि चन्द्र पर जल और जलवाष्प दोनों का अस्तित्व है । चन्द्र ग्रहरण सूर्य की भाँति चन्द्र को भी ग्रहरण लगता है। यह ग्रहरण भी सूर्य की भाँति प्रच्छाया तथा उपच्छाया ही है। जब सूर्य और चन्द्र के मध्य पृथ्वी श्रा जाती है तो धरावासी इसे ग्रहर की संज्ञा देते है । सूर्य की भाँति चन्द्र भी सर्वग्रसित होता है ।
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बिहार में मछली पालन से किसान बढ़िया मुनाफा कमा सकते है. इसे बढ़ावा देने के लिए नीतीश कुमार की सरकार लगातार प्रयास कर रही है. सरकार की कोशिश रहती है कि किसान कृषि क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्र से भी जुड़कर बढ़िया मुनाफा कमाएं. मछली पालन करके भी एक अच्छा भविष्य है. इस क्षेत्र में किसानों को आगे बढ़ाने के लिए कदम बढ़ाया जा रहा है.
गौरतलब है कि बिहार सरकार के जलाशय मात्स्यिकी विकास योजना के अंतर्गत मछली पालन के व्यापार को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है. इसी क्रम में बिहार सरकार किसानों को सब्सीडी दे रही है. साथ ही कई तरीके के ट्रेनिंग कार्यक्रम भी सरकार की ओर से चलाया जा रहा है. मछली पालन एक ऐसा क्षेत्र है, जहां बिहार सरकार की ओर से किसानों को 70 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है. सरकार ने मछली पालन के क्षेत्र में किसानों के बढ़िया भविष्य के लिए यह कदम उठाया है.
बिहार सरकार की पशु एवं मत्स्य संसाधन की ओर से सब्सिडी देने की घोषणा की गई है. बता दें कि मत्स्य अंगुलिका संचयन के प्रति हेक्टेयर में यूनिट की लागत 60,000 रूपए तय की गयी है. जलाशय का तीन लाख रूपए प्रति केज और जलाशय का दस लाख 50 हजार रुपए प्रति पेन तय है. इनपर सरकार की ओर से 70 प्रतिशत सब्सिडि दी जा रही है. इसके लिए बिहार पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से जलाशय मात्स्यिकी विकास योजना लाई जा रही है. सब्सिडी के लिए https://state. bihar. gov. in/ahd/CitizenHome. html पर आवेदन किया जा सकता है.
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बिहार में मछली पालन से किसान बढ़िया मुनाफा कमा सकते है. इसे बढ़ावा देने के लिए नीतीश कुमार की सरकार लगातार प्रयास कर रही है. सरकार की कोशिश रहती है कि किसान कृषि क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्र से भी जुड़कर बढ़िया मुनाफा कमाएं. मछली पालन करके भी एक अच्छा भविष्य है. इस क्षेत्र में किसानों को आगे बढ़ाने के लिए कदम बढ़ाया जा रहा है. गौरतलब है कि बिहार सरकार के जलाशय मात्स्यिकी विकास योजना के अंतर्गत मछली पालन के व्यापार को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है. इसी क्रम में बिहार सरकार किसानों को सब्सीडी दे रही है. साथ ही कई तरीके के ट्रेनिंग कार्यक्रम भी सरकार की ओर से चलाया जा रहा है. मछली पालन एक ऐसा क्षेत्र है, जहां बिहार सरकार की ओर से किसानों को सत्तर प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है. सरकार ने मछली पालन के क्षेत्र में किसानों के बढ़िया भविष्य के लिए यह कदम उठाया है. बिहार सरकार की पशु एवं मत्स्य संसाधन की ओर से सब्सिडी देने की घोषणा की गई है. बता दें कि मत्स्य अंगुलिका संचयन के प्रति हेक्टेयर में यूनिट की लागत साठ,शून्य रूपए तय की गयी है. जलाशय का तीन लाख रूपए प्रति केज और जलाशय का दस लाख पचास हजार रुपए प्रति पेन तय है. इनपर सरकार की ओर से सत्तर प्रतिशत सब्सिडि दी जा रही है. इसके लिए बिहार पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से जलाशय मात्स्यिकी विकास योजना लाई जा रही है. सब्सिडी के लिए https://state. bihar. gov. in/ahd/CitizenHome. html पर आवेदन किया जा सकता है.
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अनौपचारिक मूत्रमार्ग सूजन हैमूत्रमार्ग, जो पुरुषों और महिलाओं दोनों में विकसित हो सकता है। इस तथ्य के बावजूद कि बीमारी के बारे में जानकारी पर्याप्त है, इसे निदान करना इतना आसान नहीं है। विकास के शुरुआती चरण में इसका इलाज करना वांछनीय है, क्योंकि इस मामले में इसे जल्दी से सामना करने की अधिक संभावना है। हालांकि, जब मूल्यवान समय गुम हो जाता है, तो लक्षणों को पहले ही देखा जा सकता है, और पैथोलॉजी ने एक पुरानी चरित्र हासिल की है।
बीमारी क्या है?
प्रस्तुत बीमारी यूरोजेनिक नहर की सूजन है, जो विभिन्न प्रकार के रोगजनक सूक्ष्मजीवों के कारण होती हैः स्टेफिलोकोकस, कवक, दाद।
आमतौर पर रोग के दौरान रोग प्रसारित होता हैसंपर्क या अन्य संपर्क मार्ग (किसी और के अंडरवियर का उपयोग)। यह अक्सर पुरुषों में विकसित होता है, क्योंकि उनके पास महिलाओं की तुलना में मूत्रमार्ग की अधिक लंबाई होती है।
गैर-विशिष्ट यूरिथ्रिटिस रोग का कम से कम अध्ययन किया गया रूप है। हालांकि, इसे क्या कहा जाता है निर्धारित किया जा सकता है। बीमारी के विकास के लिए ऐसे कारण हैंः
- शरीर में एक साथी के साथ असुरक्षित यौन संबंध जिसमें रोगजनक सूक्ष्मजीव मौजूद हैं।
- कमजोर प्रतिरक्षा, जिसमें शरीर प्रभावी ढंग से कवक के नकारात्मक प्रभावों के खिलाफ सुरक्षा नहीं कर सकता है।
- शराब का अत्यधिक उपयोग।
- एक आसन्न जीवनशैली।
- मूत्रमार्ग को नुकसान, जिसे स्ट्रोक द्वारा ट्रिगर किया जा सकता है, कैथेटर की स्थापना।
- शरीर में चयापचय प्रक्रियाओं का उल्लंघन।
- हाइपोथर्मिया।
- बहुत सक्रिय यौन जीवन।
- मूत्र प्रणाली के विकृतियां।
ये कारण अद्वितीय नहीं हैं। पैथोलॉजी को उत्तेजित करने के लिए यहां तक कि एक संक्रामक बीमारी भी हो सकती है, जो जीनियंत्र प्रणाली को प्रभावित नहीं करती है।
गैर-विशिष्ट मूत्रमार्गशोथ में आमतौर पर ये लक्षण होते हैंः
- पुरुषों में, प्रचुर मात्रा में निर्वहन होता है, जो सूखने के बाद, पीला हो जाता है।
- यौन अंग दर्दनाक हो जाता है, और उसका सिर सूज जाता है।
- पेशाब तेज होता है और दर्द के साथ होता है।
- मूत्रमार्ग में खुजली दिखाई देती है।
- दर्द निचले पेट में फैल सकता है।
- जलन।
- कुछ मामलों में, शरीर का तापमान बढ़ता है।
- सामान्य कमजोरी, सुस्ती, अस्वस्थता।
पुरानी बीमारी समय-समय पर हो सकती हैआगे बढ़ना। हालांकि, मुख्य रूप से लक्षणों में थोड़ी गंभीरता है। महिलाओं में गैर-विशिष्ट मूत्रमार्गशोथ निर्वहन की एक समृद्ध छाया की विशेषता है। पैथोलॉजी का जीर्ण रूप खतरनाक है क्योंकि यह विभिन्न जटिलताओं (उदाहरण के लिए, पुरुषों में प्यूरुलेंट प्रोस्टेटाइटिस) से भरा हुआ है। इसलिए, बीमारी का इलाज किया जाना चाहिए।
निरर्थक मूत्रमार्ग एक कपटी बीमारी है, इसलिए आपको उपचार शुरू करने से पहले पूरी तरह से जांच करानी होगी। निदान में ऐसी प्रक्रियाओं का उपयोग शामिल हैः
- सामान्य और बैक्टीरियोलाजिकल स्मीयर, साथ ही बैक्टीरियोस्कोपिक विश्लेषण। यह अध्ययन संक्रमण के प्रेरक एजेंट को निर्धारित करने में मदद करेगा।
- मूत्र और रक्त के प्रयोगशाला विश्लेषण। उनके लिए धन्यवाद, गोनोकोकी, क्लैमाइडिया या अन्य सूक्ष्मजीवों की पहचान की जा सकती है।
- मूत्रमार्ग से सीडिंग डिस्चार्ज।
- इम्यूनोलॉजिकल अध्ययन।
- प्रोस्टेट की अल्ट्रासाउंड परीक्षा। यह पता लगाना आवश्यक है कि क्या वह सूजन है।
- प्रभावित क्षेत्र और बाहरी परीक्षा का झुकाव।
- अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने के लिए रोगी का सर्वेक्षण, शिकायतों को स्पष्ट करें।
- पीसीआर प्रतिक्रिया।
क्या जटिलताओं हो सकती है?
पुरुषों में असुरक्षित मूत्रमार्ग ज्यादातर नहीं होते हैंजान का खतरा है हालांकि, कभी-कभी देर से उपचार विकृति के संक्रमण को क्रोनिक रूप में ले जाता है। इसके अलावा, कुछ मामलों में, ऐसी जटिलताओं की घटना हो सकती हैः
- मूत्रमार्ग का जमाव।
- प्रोस्टेटिटिस (प्रोस्टेट में भड़काऊ प्रक्रिया का विकास) और ऑर्काइटिस (अंडकोष में होने वाली एक रोग प्रक्रिया)।
- सिस्टिटिस (मूत्राशय का सूजन घाव)।
- स्खलन और निर्माण का उल्लंघन।
- बांझपन।
हम यह नहीं सोच सकते कि बीमारी से स्वतंत्र रूप से निपटा जा सकता है, भले ही लक्षण बहुत स्पष्ट न हों। जितनी जल्दी हो सके अनुभव किया जाना बेहतर है।
गैर-विशिष्ट मूत्रमार्गशोथ का उपचार होना चाहिएतत्काल। अपने आप में, रोग गायब नहीं होगा। इसके अलावा, आपको उन गोलियों को नहीं पीना चाहिए जो लक्षणों को खत्म करते हैं। कारण अभी भी रहेगा, और विकृति प्रगति के लिए जारी रहेगी।
थेरेपी में ऐसी दवाओं का उपयोग शामिल हैः
- एंटीबायोटिक्सः टेट्रासाइक्लिन, डॉक्सीसाइक्लिन। रोगजनक ने किस बीमारी को उकसाया, इसके आधार पर, अन्य दवाओं का उपयोग किया जा सकता हैः एमोक्सिकालव, नॉरफ्लोक्सासिन।
- स्थानीय जीवाणुरोधी दवाएंः प्रोटारगोल, कैमोमाइल-आधारित दवाएं।
- एंटीसेप्टिक समाधान जिसमें चांदी होता है, "एंटीऑक्सिडिन"। फ्लश मूत्रमार्ग भी "फुरसिलिन" हो सकता है।
- विटामिन कॉम्प्लेक्स।
- शरीर की प्रतिरक्षा बलों को बहाल करने की तैयारी।
- ऐंटिफंगल दवाओं।
कभी-कभी, एक मरीज को ऑपरेटिव दिया जाता है।हस्तक्षेप। हालांकि, घटनाओं का ऐसा परिणाम केवल तभी संभव है जब पारंपरिक चिकित्सा ने मदद नहीं की या पैथोलॉजी की बहुत उपेक्षा की। इसके अलावा, अगर किसी पुरुष का संक्रमण संभोग के कारण होता है, तो दोनों भागीदारों को चिकित्सा की आवश्यकता होगी। और पूर्ण वसूली से पहले संभोग के बारे में भूलना होगा।
गैर-विशिष्ट मूत्रमार्गशोथ (इसके लक्षण पहले से ही ज्ञात हैं) का इलाज गैर-पारंपरिक तरीकों से किया जा सकता है। इस मामले में, ऐसे व्यंजन सहायक हो सकते हैंः
- दूध और अजमोद। कच्चे माल को अच्छी तरह से कटा होना चाहिए और दूध डालना चाहिए (अजमोद को पूरी तरह से कवर किया जाना चाहिए)। इसके बाद, मिश्रण को ओवन में रखा जाना चाहिए और दूध को वाष्पीकृत होने तक वहीं पकड़ना चाहिए। हर 2 घंटे में उपकरण 2 बड़े चम्मच होना चाहिए।
- काढ़े चूने का रंग। आपको कच्चे माल के 2 बड़े चम्मच लेने और उबलते पानी के 400 मिलीलीटर के साथ भाप लेने की आवश्यकता है। अगला, मिश्रण लगभग 10 मिनट के लिए कम गर्मी पर उबला जाना चाहिए। उसके बाद, तरल को ठंडा और तनाव देना वांछनीय है, और फिर बिस्तर पर जाने से पहले इसे 200-400 मिलीलीटर पर ले जाएं।
- क्रैनबेरी रस (ताजा) भी एक अच्छा परिणाम देता है।
- कॉर्नफ्लावर फूलों का काढ़ा। उबलते पानी के एक गिलास को भाप देने के लिए 1 चम्मच फूलों की आवश्यकता होती है। जोर शोरबा कम से कम एक घंटे होना चाहिए। उसके बाद, तरल को फ़िल्टर किया जाना चाहिए। उपकरण को अधिमानतः 2 बड़े चम्मच दिन में तीन बार लें। खाने से पहले इसे करना बेहतर है।
- व्हीटग्रास का आसव। प्रस्तुत साधनों की तैयारी के लिए पौधे की ताजा जड़ों का उपयोग किया जाता है। पूर्व-कच्चे माल को अच्छी तरह से कुचल दिया जाता है, पानी से भरा होता है और एक अंधेरी जगह में रखा जाता है। आपको 4 बड़े चम्मच कच्चे माल और एक गिलास पानी की आवश्यकता होती है। व्हीटग्रास 12 घंटे के भीतर जलसेक करना चाहिए। उसके बाद, दवा को दिन में तीन बार 100 ग्राम पर लिया जा सकता है। कच्चे माल को फिर से डाला जा सकता है, जिसके बाद इसे बदलने की आवश्यकता है।
बैक्टीरियल गैर-विशिष्ट मूत्रमार्गशोथ काफी हैलोक उपचार द्वारा समाप्त किया जा सकता है, केवल आपको पहले डॉक्टर से अनुमति लेने की आवश्यकता है। अन्यथा, आप अपनी स्थिति को बढ़ा सकते हैं। जड़ी बूटियों के काढ़े की मदद से इलाज किया जाना चाहिए कम से कम 1-2 महीने। केवल इस मामले में, आप एक सकारात्मक प्रभाव प्राप्त कर सकते हैं। तत्काल परिणाम इंतजार के लायक नहीं है।
यदि पुरुषों में गैर-विशिष्ट मूत्रमार्ग का निदान किया गया था, तो उपचार कुछ सरल नियमों का पालन करना चाहिएः
- उचित आहार का अनुपालन करना उचित है। मसालेदार, स्मोक्ड, बहुत वसायुक्त या अत्यधिक नमकीन खाद्य पदार्थ नहीं खाना सबसे अच्छा है। वे मूत्रमार्ग की अतिरिक्त जलन भड़काने कर सकते हैं।
- मादक पेय पदार्थों की खपत को मना करना या सीमित करना बेहतर है।
- चिकित्सा के दौरान, आपको बहुत सारे तरल पदार्थ पीने की जरूरत है। यह साधारण पानी, खाद, ताजा रस, कमजोर चाय, फल पेय हो सकता है।
- व्यायाम कम करना चाहिए।
- उपचार के दौरान, यौन गतिविधि की गतिविधि को सीमित करना या अस्थायी रूप से इसे छोड़ना आवश्यक है।
- इन सिफारिशों के अनुपालन के कारण, चिकित्सा प्रभावी होगी, और इसकी शर्तें काफी कम हो जाएंगी।
पुरानी गैर-विशिष्ट मूत्रमार्गशोथ हो सकती हैएक आदमी के जीवन को काफी जटिल करता है, क्योंकि वह गंभीर जटिलताओं को देने में सक्षम है और यहां तक कि बांझपन को भी जन्म देता है। हालांकि, बीमारी को रोका जा सकता है। ऐसा करने के लिए, निम्नलिखित निवारक उपायों का पालन करेंः
- हम शरीर को ओवरकोल करने की अनुमति नहीं दे सकते हैं - यह सभी विकृति विज्ञान की उत्तेजना को उत्तेजित कर सकता है।
- पहले लक्षण प्रकट होने पर श्रोणि अंगों के किसी भी संक्रामक और जीवाणु रोगों का अधिमानतः इलाज किया जाता है। हम उन्हें जीर्ण नहीं होने दे सकते।
- यह जननांगों को चोट से बचाने के लिए आवश्यक है।
- उचित आहार पाचन तंत्र और सभी परिणामी समस्याओं (दस्त, कब्ज) के विघटन से बचेंगे।
- सेक्स लाइफ अनियमित नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, यह बेहतर है अगर यौन कार्य संरक्षित हैं।
- शराब के उपयोग को सीमित करना, धूम्रपान और अन्य बुरी आदतों को रोकना उचित है।
- आपको व्यक्तिगत स्वच्छता के नियमों के बारे में भी नहीं भूलना चाहिए।
- समय में विकासशील समस्या की पहचान करने के लिए, आपको समय-समय पर मूत्र रोग विशेषज्ञ द्वारा जांच की जानी चाहिए।
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अनौपचारिक मूत्रमार्ग सूजन हैमूत्रमार्ग, जो पुरुषों और महिलाओं दोनों में विकसित हो सकता है। इस तथ्य के बावजूद कि बीमारी के बारे में जानकारी पर्याप्त है, इसे निदान करना इतना आसान नहीं है। विकास के शुरुआती चरण में इसका इलाज करना वांछनीय है, क्योंकि इस मामले में इसे जल्दी से सामना करने की अधिक संभावना है। हालांकि, जब मूल्यवान समय गुम हो जाता है, तो लक्षणों को पहले ही देखा जा सकता है, और पैथोलॉजी ने एक पुरानी चरित्र हासिल की है। बीमारी क्या है? प्रस्तुत बीमारी यूरोजेनिक नहर की सूजन है, जो विभिन्न प्रकार के रोगजनक सूक्ष्मजीवों के कारण होती हैः स्टेफिलोकोकस, कवक, दाद। आमतौर पर रोग के दौरान रोग प्रसारित होता हैसंपर्क या अन्य संपर्क मार्ग । यह अक्सर पुरुषों में विकसित होता है, क्योंकि उनके पास महिलाओं की तुलना में मूत्रमार्ग की अधिक लंबाई होती है। गैर-विशिष्ट यूरिथ्रिटिस रोग का कम से कम अध्ययन किया गया रूप है। हालांकि, इसे क्या कहा जाता है निर्धारित किया जा सकता है। बीमारी के विकास के लिए ऐसे कारण हैंः - शरीर में एक साथी के साथ असुरक्षित यौन संबंध जिसमें रोगजनक सूक्ष्मजीव मौजूद हैं। - कमजोर प्रतिरक्षा, जिसमें शरीर प्रभावी ढंग से कवक के नकारात्मक प्रभावों के खिलाफ सुरक्षा नहीं कर सकता है। - शराब का अत्यधिक उपयोग। - एक आसन्न जीवनशैली। - मूत्रमार्ग को नुकसान, जिसे स्ट्रोक द्वारा ट्रिगर किया जा सकता है, कैथेटर की स्थापना। - शरीर में चयापचय प्रक्रियाओं का उल्लंघन। - हाइपोथर्मिया। - बहुत सक्रिय यौन जीवन। - मूत्र प्रणाली के विकृतियां। ये कारण अद्वितीय नहीं हैं। पैथोलॉजी को उत्तेजित करने के लिए यहां तक कि एक संक्रामक बीमारी भी हो सकती है, जो जीनियंत्र प्रणाली को प्रभावित नहीं करती है। गैर-विशिष्ट मूत्रमार्गशोथ में आमतौर पर ये लक्षण होते हैंः - पुरुषों में, प्रचुर मात्रा में निर्वहन होता है, जो सूखने के बाद, पीला हो जाता है। - यौन अंग दर्दनाक हो जाता है, और उसका सिर सूज जाता है। - पेशाब तेज होता है और दर्द के साथ होता है। - मूत्रमार्ग में खुजली दिखाई देती है। - दर्द निचले पेट में फैल सकता है। - जलन। - कुछ मामलों में, शरीर का तापमान बढ़ता है। - सामान्य कमजोरी, सुस्ती, अस्वस्थता। पुरानी बीमारी समय-समय पर हो सकती हैआगे बढ़ना। हालांकि, मुख्य रूप से लक्षणों में थोड़ी गंभीरता है। महिलाओं में गैर-विशिष्ट मूत्रमार्गशोथ निर्वहन की एक समृद्ध छाया की विशेषता है। पैथोलॉजी का जीर्ण रूप खतरनाक है क्योंकि यह विभिन्न जटिलताओं से भरा हुआ है। इसलिए, बीमारी का इलाज किया जाना चाहिए। निरर्थक मूत्रमार्ग एक कपटी बीमारी है, इसलिए आपको उपचार शुरू करने से पहले पूरी तरह से जांच करानी होगी। निदान में ऐसी प्रक्रियाओं का उपयोग शामिल हैः - सामान्य और बैक्टीरियोलाजिकल स्मीयर, साथ ही बैक्टीरियोस्कोपिक विश्लेषण। यह अध्ययन संक्रमण के प्रेरक एजेंट को निर्धारित करने में मदद करेगा। - मूत्र और रक्त के प्रयोगशाला विश्लेषण। उनके लिए धन्यवाद, गोनोकोकी, क्लैमाइडिया या अन्य सूक्ष्मजीवों की पहचान की जा सकती है। - मूत्रमार्ग से सीडिंग डिस्चार्ज। - इम्यूनोलॉजिकल अध्ययन। - प्रोस्टेट की अल्ट्रासाउंड परीक्षा। यह पता लगाना आवश्यक है कि क्या वह सूजन है। - प्रभावित क्षेत्र और बाहरी परीक्षा का झुकाव। - अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने के लिए रोगी का सर्वेक्षण, शिकायतों को स्पष्ट करें। - पीसीआर प्रतिक्रिया। क्या जटिलताओं हो सकती है? पुरुषों में असुरक्षित मूत्रमार्ग ज्यादातर नहीं होते हैंजान का खतरा है हालांकि, कभी-कभी देर से उपचार विकृति के संक्रमण को क्रोनिक रूप में ले जाता है। इसके अलावा, कुछ मामलों में, ऐसी जटिलताओं की घटना हो सकती हैः - मूत्रमार्ग का जमाव। - प्रोस्टेटिटिस और ऑर्काइटिस । - सिस्टिटिस । - स्खलन और निर्माण का उल्लंघन। - बांझपन। हम यह नहीं सोच सकते कि बीमारी से स्वतंत्र रूप से निपटा जा सकता है, भले ही लक्षण बहुत स्पष्ट न हों। जितनी जल्दी हो सके अनुभव किया जाना बेहतर है। गैर-विशिष्ट मूत्रमार्गशोथ का उपचार होना चाहिएतत्काल। अपने आप में, रोग गायब नहीं होगा। इसके अलावा, आपको उन गोलियों को नहीं पीना चाहिए जो लक्षणों को खत्म करते हैं। कारण अभी भी रहेगा, और विकृति प्रगति के लिए जारी रहेगी। थेरेपी में ऐसी दवाओं का उपयोग शामिल हैः - एंटीबायोटिक्सः टेट्रासाइक्लिन, डॉक्सीसाइक्लिन। रोगजनक ने किस बीमारी को उकसाया, इसके आधार पर, अन्य दवाओं का उपयोग किया जा सकता हैः एमोक्सिकालव, नॉरफ्लोक्सासिन। - स्थानीय जीवाणुरोधी दवाएंः प्रोटारगोल, कैमोमाइल-आधारित दवाएं। - एंटीसेप्टिक समाधान जिसमें चांदी होता है, "एंटीऑक्सिडिन"। फ्लश मूत्रमार्ग भी "फुरसिलिन" हो सकता है। - विटामिन कॉम्प्लेक्स। - शरीर की प्रतिरक्षा बलों को बहाल करने की तैयारी। - ऐंटिफंगल दवाओं। कभी-कभी, एक मरीज को ऑपरेटिव दिया जाता है।हस्तक्षेप। हालांकि, घटनाओं का ऐसा परिणाम केवल तभी संभव है जब पारंपरिक चिकित्सा ने मदद नहीं की या पैथोलॉजी की बहुत उपेक्षा की। इसके अलावा, अगर किसी पुरुष का संक्रमण संभोग के कारण होता है, तो दोनों भागीदारों को चिकित्सा की आवश्यकता होगी। और पूर्ण वसूली से पहले संभोग के बारे में भूलना होगा। गैर-विशिष्ट मूत्रमार्गशोथ का इलाज गैर-पारंपरिक तरीकों से किया जा सकता है। इस मामले में, ऐसे व्यंजन सहायक हो सकते हैंः - दूध और अजमोद। कच्चे माल को अच्छी तरह से कटा होना चाहिए और दूध डालना चाहिए । इसके बाद, मिश्रण को ओवन में रखा जाना चाहिए और दूध को वाष्पीकृत होने तक वहीं पकड़ना चाहिए। हर दो घंटाटे में उपकरण दो बड़े चम्मच होना चाहिए। - काढ़े चूने का रंग। आपको कच्चे माल के दो बड़े चम्मच लेने और उबलते पानी के चार सौ मिलीलीटर के साथ भाप लेने की आवश्यकता है। अगला, मिश्रण लगभग दस मिनट के लिए कम गर्मी पर उबला जाना चाहिए। उसके बाद, तरल को ठंडा और तनाव देना वांछनीय है, और फिर बिस्तर पर जाने से पहले इसे दो सौ-चार सौ मिलीलीटर पर ले जाएं। - क्रैनबेरी रस भी एक अच्छा परिणाम देता है। - कॉर्नफ्लावर फूलों का काढ़ा। उबलते पानी के एक गिलास को भाप देने के लिए एक चम्मच फूलों की आवश्यकता होती है। जोर शोरबा कम से कम एक घंटे होना चाहिए। उसके बाद, तरल को फ़िल्टर किया जाना चाहिए। उपकरण को अधिमानतः दो बड़े चम्मच दिन में तीन बार लें। खाने से पहले इसे करना बेहतर है। - व्हीटग्रास का आसव। प्रस्तुत साधनों की तैयारी के लिए पौधे की ताजा जड़ों का उपयोग किया जाता है। पूर्व-कच्चे माल को अच्छी तरह से कुचल दिया जाता है, पानी से भरा होता है और एक अंधेरी जगह में रखा जाता है। आपको चार बड़े चम्मच कच्चे माल और एक गिलास पानी की आवश्यकता होती है। व्हीटग्रास बारह घंटाटे के भीतर जलसेक करना चाहिए। उसके बाद, दवा को दिन में तीन बार एक सौ ग्राम पर लिया जा सकता है। कच्चे माल को फिर से डाला जा सकता है, जिसके बाद इसे बदलने की आवश्यकता है। बैक्टीरियल गैर-विशिष्ट मूत्रमार्गशोथ काफी हैलोक उपचार द्वारा समाप्त किया जा सकता है, केवल आपको पहले डॉक्टर से अनुमति लेने की आवश्यकता है। अन्यथा, आप अपनी स्थिति को बढ़ा सकते हैं। जड़ी बूटियों के काढ़े की मदद से इलाज किया जाना चाहिए कम से कम एक-दो महीने। केवल इस मामले में, आप एक सकारात्मक प्रभाव प्राप्त कर सकते हैं। तत्काल परिणाम इंतजार के लायक नहीं है। यदि पुरुषों में गैर-विशिष्ट मूत्रमार्ग का निदान किया गया था, तो उपचार कुछ सरल नियमों का पालन करना चाहिएः - उचित आहार का अनुपालन करना उचित है। मसालेदार, स्मोक्ड, बहुत वसायुक्त या अत्यधिक नमकीन खाद्य पदार्थ नहीं खाना सबसे अच्छा है। वे मूत्रमार्ग की अतिरिक्त जलन भड़काने कर सकते हैं। - मादक पेय पदार्थों की खपत को मना करना या सीमित करना बेहतर है। - चिकित्सा के दौरान, आपको बहुत सारे तरल पदार्थ पीने की जरूरत है। यह साधारण पानी, खाद, ताजा रस, कमजोर चाय, फल पेय हो सकता है। - व्यायाम कम करना चाहिए। - उपचार के दौरान, यौन गतिविधि की गतिविधि को सीमित करना या अस्थायी रूप से इसे छोड़ना आवश्यक है। - इन सिफारिशों के अनुपालन के कारण, चिकित्सा प्रभावी होगी, और इसकी शर्तें काफी कम हो जाएंगी। पुरानी गैर-विशिष्ट मूत्रमार्गशोथ हो सकती हैएक आदमी के जीवन को काफी जटिल करता है, क्योंकि वह गंभीर जटिलताओं को देने में सक्षम है और यहां तक कि बांझपन को भी जन्म देता है। हालांकि, बीमारी को रोका जा सकता है। ऐसा करने के लिए, निम्नलिखित निवारक उपायों का पालन करेंः - हम शरीर को ओवरकोल करने की अनुमति नहीं दे सकते हैं - यह सभी विकृति विज्ञान की उत्तेजना को उत्तेजित कर सकता है। - पहले लक्षण प्रकट होने पर श्रोणि अंगों के किसी भी संक्रामक और जीवाणु रोगों का अधिमानतः इलाज किया जाता है। हम उन्हें जीर्ण नहीं होने दे सकते। - यह जननांगों को चोट से बचाने के लिए आवश्यक है। - उचित आहार पाचन तंत्र और सभी परिणामी समस्याओं के विघटन से बचेंगे। - सेक्स लाइफ अनियमित नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, यह बेहतर है अगर यौन कार्य संरक्षित हैं। - शराब के उपयोग को सीमित करना, धूम्रपान और अन्य बुरी आदतों को रोकना उचित है। - आपको व्यक्तिगत स्वच्छता के नियमों के बारे में भी नहीं भूलना चाहिए। - समय में विकासशील समस्या की पहचान करने के लिए, आपको समय-समय पर मूत्र रोग विशेषज्ञ द्वारा जांच की जानी चाहिए।
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Chakulia (Dharish Chandra Singh) : चाकुलिया प्रखंड के कुचियाशोली गांव निवासी भोला नाथ पात्र (42) की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गयी. घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि मंगलवार की रात रेलवे लाइन पार करने के दौरान अज्ञात ट्रेन की चपेट में आने से मौत हुई है. लोगों द्वारा सूचना पाकर बुधवार की सुबह पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में कर लिया. जानकारी के अनुसार रेलवे लाइन के पोल संख्या 183/16 के पास शव बरामद किया गया है. घटना के बाद काफी संख्या में स्थानीय लोगों की भीड़ रेलवे ट्रैक पर जमा हो गई. फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन कर रही है.
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Chakulia : चाकुलिया प्रखंड के कुचियाशोली गांव निवासी भोला नाथ पात्र की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गयी. घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि मंगलवार की रात रेलवे लाइन पार करने के दौरान अज्ञात ट्रेन की चपेट में आने से मौत हुई है. लोगों द्वारा सूचना पाकर बुधवार की सुबह पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में कर लिया. जानकारी के अनुसार रेलवे लाइन के पोल संख्या एक सौ तिरासी/सोलह के पास शव बरामद किया गया है. घटना के बाद काफी संख्या में स्थानीय लोगों की भीड़ रेलवे ट्रैक पर जमा हो गई. फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन कर रही है.
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उज्जैन। धीरज गोमे। एक ट्रेन हादसे में दोनों पैर गंवा दिए तो उन्होंने गुमनामी के अंधेरों से निकल हौसलों से सफलता की उड़ान भरी।
खुद की खोई पहचान फिर स्थापित की। तैराकी में डायविंग मास्टर के नाम से मशहूर वह शख्स आज दूसरों के लिए मिसाल है। नाम है दीपक सक्सेना। उनके करियर का सफर स्वीमिंग पुल और अस्पताल के रास्ते एक फार्मास्युटिकल कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटिटव की नौकरी तक जा पहुंचा।
2006 में एक ट्रेन दुर्घटना में वे अपने दोनों पैर गंवा बैठे। मायूसी के बीच उन्होंने कुछ वक्त गुजारा। फिर पत्नी और दोस्तों के सहयोग से खुद को मजबूत किया और हौसले के दम पर आर्टिफिशियल पैर लगाकर अपनी पुरानी पहचान फिर स्थापित की।
वे आज एक सफल मेडिकल रिप्रेजेंटिटव हैं और तैराकी में डायविंग मास्टर भी। 49 वर्षीय दीपक विभिन्न् संस्थाओं के माध्यम से मोटिवेशनल कार्यक्रम चलाते हैं। वे राष्ट्रीय स्तर के पैराओलंपिक खिलाड़ी हैं। उनके संघर्षपूर्ण जीवन पर गूगल ने 'इंडिया इन ए डे" नाम से डाक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई है। दीपक कहते हैं- कोई भी विपत्ति जिंदगी से बड़ी नहीं हो सकती। परिस्थितियां कैसी भी हों इंसान को कभी भी हिम्मत, जज्बा नहीं खोना चाहिए।
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उज्जैन। धीरज गोमे। एक ट्रेन हादसे में दोनों पैर गंवा दिए तो उन्होंने गुमनामी के अंधेरों से निकल हौसलों से सफलता की उड़ान भरी। खुद की खोई पहचान फिर स्थापित की। तैराकी में डायविंग मास्टर के नाम से मशहूर वह शख्स आज दूसरों के लिए मिसाल है। नाम है दीपक सक्सेना। उनके करियर का सफर स्वीमिंग पुल और अस्पताल के रास्ते एक फार्मास्युटिकल कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटिटव की नौकरी तक जा पहुंचा। दो हज़ार छः में एक ट्रेन दुर्घटना में वे अपने दोनों पैर गंवा बैठे। मायूसी के बीच उन्होंने कुछ वक्त गुजारा। फिर पत्नी और दोस्तों के सहयोग से खुद को मजबूत किया और हौसले के दम पर आर्टिफिशियल पैर लगाकर अपनी पुरानी पहचान फिर स्थापित की। वे आज एक सफल मेडिकल रिप्रेजेंटिटव हैं और तैराकी में डायविंग मास्टर भी। उनचास वर्षीय दीपक विभिन्न् संस्थाओं के माध्यम से मोटिवेशनल कार्यक्रम चलाते हैं। वे राष्ट्रीय स्तर के पैराओलंपिक खिलाड़ी हैं। उनके संघर्षपूर्ण जीवन पर गूगल ने 'इंडिया इन ए डे" नाम से डाक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई है। दीपक कहते हैं- कोई भी विपत्ति जिंदगी से बड़ी नहीं हो सकती। परिस्थितियां कैसी भी हों इंसान को कभी भी हिम्मत, जज्बा नहीं खोना चाहिए।
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नाहन - विधानसभा अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा नाहन सब्जी मंडी में विभिन्न विकास कार्यों पर 30 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नाहन सब्जी मंडी क्षेत्र के किसानों और कृषि उत्पाद से संबंधित व्यापारी वर्ग की रोजी-रोटी से जुड़ी हुई महत्त्वपूर्ण मंडी है। उन्होंने कहा कि इस सब्जी मंडी की सभी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल ने सब्जी मंडी नाहन की विभिन्न समस्याओं के संबंध में रविवार को उनसे मिलने आए सब्जी मंडी और फल एवं सब्जी एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल से भेंट के दौरान यह जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि प्रदेश कृषि एवं विपणन बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष बलदेव भंडारी ने भी सब्जी मंडी का दौरा करके स्थितियों की जानकारी ली है। डा. बिंदल ने कहा कि श्री भंडारी से चर्चा कर सब्जी मंडी के लिए 30 लाख रुपए स्वीकृत करवाए गए हैं जो कि भविष्य में खर्च किए जाएंगे। डा. बिंदल ने सब्जी मंडी परिसर में लाइट संबंधी समस्या के तुरंत समाधान के लिए नगर परिषद अधिकारियों को आदेश दिए। प्रतिनिधिमंडल में सब्जी मंडी नाहन के प्रधान तेजिंद्र पाल, फल एवं सब्जी एसोसिएशन के प्रधान रामकुमार के अलावा आढ़ती एवं खुदरा व्यापारी सूरत सैणी, लतीफ मोहम्मद, बलबीर सैणी, धर्म प्रकाश, महिंद्र, रमेश चंद, मोहित सचदेवा, सागर शेख, अशोक कश्यप, राजीव कश्यप, ललन और गगन अरोड़ा शामिल थे।
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नाहन - विधानसभा अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा नाहन सब्जी मंडी में विभिन्न विकास कार्यों पर तीस लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नाहन सब्जी मंडी क्षेत्र के किसानों और कृषि उत्पाद से संबंधित व्यापारी वर्ग की रोजी-रोटी से जुड़ी हुई महत्त्वपूर्ण मंडी है। उन्होंने कहा कि इस सब्जी मंडी की सभी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल ने सब्जी मंडी नाहन की विभिन्न समस्याओं के संबंध में रविवार को उनसे मिलने आए सब्जी मंडी और फल एवं सब्जी एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल से भेंट के दौरान यह जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि प्रदेश कृषि एवं विपणन बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष बलदेव भंडारी ने भी सब्जी मंडी का दौरा करके स्थितियों की जानकारी ली है। डा. बिंदल ने कहा कि श्री भंडारी से चर्चा कर सब्जी मंडी के लिए तीस लाख रुपए स्वीकृत करवाए गए हैं जो कि भविष्य में खर्च किए जाएंगे। डा. बिंदल ने सब्जी मंडी परिसर में लाइट संबंधी समस्या के तुरंत समाधान के लिए नगर परिषद अधिकारियों को आदेश दिए। प्रतिनिधिमंडल में सब्जी मंडी नाहन के प्रधान तेजिंद्र पाल, फल एवं सब्जी एसोसिएशन के प्रधान रामकुमार के अलावा आढ़ती एवं खुदरा व्यापारी सूरत सैणी, लतीफ मोहम्मद, बलबीर सैणी, धर्म प्रकाश, महिंद्र, रमेश चंद, मोहित सचदेवा, सागर शेख, अशोक कश्यप, राजीव कश्यप, ललन और गगन अरोड़ा शामिल थे।
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चंडीगढ़, 14 सितंबर (ब्यूरो) विदेशी फ्लाइंग डाइनिंग की तर्ज पर ट्राइसिटी में पहला डाइनिंग रेस्तरां खुला है, जो कि जमीन से लगभग 100 फीट से भी ऊंचा मधुर संगीत के बीच डाइनर्स के खाने का लुत्फ दोगुना करेगा। जीरकपुर स्थित कॉस्मो मॉल में एयरफिस्ट द्वारा अपर नार्थ में इस कॉन्सेप्ट को पेश किया गया है।
चंडीगढ़ पुलिस ने आरोपी की शिकायत पर दर्ज किया मामला, अदालत ने भेजा नोटिस चंडीगढ़, 14 सितंबर (मुकेश संगर) बुड़ैल जेल से चलाए जा रहे कथित जबरन वसूली रैकेट में चंडीगढ़ पुलिस ने 2 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। इनमें गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के कथित सहयोगी अंकित नरवाल और प्रभात त्यागी शामिल हैं।
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चंडीगढ़, चौदह सितंबर विदेशी फ्लाइंग डाइनिंग की तर्ज पर ट्राइसिटी में पहला डाइनिंग रेस्तरां खुला है, जो कि जमीन से लगभग एक सौ फीट से भी ऊंचा मधुर संगीत के बीच डाइनर्स के खाने का लुत्फ दोगुना करेगा। जीरकपुर स्थित कॉस्मो मॉल में एयरफिस्ट द्वारा अपर नार्थ में इस कॉन्सेप्ट को पेश किया गया है। चंडीगढ़ पुलिस ने आरोपी की शिकायत पर दर्ज किया मामला, अदालत ने भेजा नोटिस चंडीगढ़, चौदह सितंबर बुड़ैल जेल से चलाए जा रहे कथित जबरन वसूली रैकेट में चंडीगढ़ पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। इनमें गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के कथित सहयोगी अंकित नरवाल और प्रभात त्यागी शामिल हैं।
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UP Nikay Chunav. बहुजन समाज पार्टी ने सोमवार को यूपी निकाय चुनाव के लिए सात महापौर के उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. पार्टी ने कानपुर, मेरठ, शाहजहांपुर, अयोध्या, गाजियाबाद, अलीगढ़ और बरेली के महापौर प्रत्याशियों की घोषणा की है.
बसपा ने कानपुर मेयर पद के लिए अर्चना निषाद, मेरठ के लिए हसमत अली, शाहजहांपुर के लिए शागुफ्ता अंजुम, अयोध्या के लिए राममूर्ति यादव, गाजियाबाद के लिए निसारा खान को प्रत्याशी बनाया है.
बता दें कि यूपी निकाय चुनाव के लिए दो चरणों में मतदान होना है, जिसमें 4 और 11 मई को वोटिंग होगी. इसके साथ ही इस चुनाव के नतीजे 13 मई को जारी होंगे. इस चुनाव के लिए 17 नगर निगम, 199 नगरपालिका और 544 नगर पंचायतों में चुनाव कराया जाना है.
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UP Nikay Chunav. बहुजन समाज पार्टी ने सोमवार को यूपी निकाय चुनाव के लिए सात महापौर के उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. पार्टी ने कानपुर, मेरठ, शाहजहांपुर, अयोध्या, गाजियाबाद, अलीगढ़ और बरेली के महापौर प्रत्याशियों की घोषणा की है. बसपा ने कानपुर मेयर पद के लिए अर्चना निषाद, मेरठ के लिए हसमत अली, शाहजहांपुर के लिए शागुफ्ता अंजुम, अयोध्या के लिए राममूर्ति यादव, गाजियाबाद के लिए निसारा खान को प्रत्याशी बनाया है. बता दें कि यूपी निकाय चुनाव के लिए दो चरणों में मतदान होना है, जिसमें चार और ग्यारह मई को वोटिंग होगी. इसके साथ ही इस चुनाव के नतीजे तेरह मई को जारी होंगे. इस चुनाव के लिए सत्रह नगर निगम, एक सौ निन्यानवे नगरपालिका और पाँच सौ चौंतालीस नगर पंचायतों में चुनाव कराया जाना है.
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हरिद्वार, सिडकुल क्षेत्र में डिफेंस कॉलोनी नवोदय नगर निवासी एक व्यक्ति ने ऑनलाइन फैंटेसी गेमिंग प्लेटफॉर्म ड्रीम इलेवन पर एक करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जीती। रकम जीतने की खुशी में उसने जमकर शराब पी और शराब पीकर जमकर उत्पात मचाया। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों से भी उसने बदसलूकी की। खुद को मुख्यमंत्री का भाई बताते हुए रौब गालिब किया, जिसके बाद पुलिस ने आरोपित का शांति भंग के आरोप में चालान कर दिया।
जानकारी के मुताबिक सिडकुल क्षेत्र स्थित डिफेंस कॉलोनी नवोदय नगर निवासी महेश सिंह धामी ने ड्रीम इलेवन टीम में एक करोड़ से अधिक की रकम जीती। जीती हुई रकम का टैक्स कटने के बाद उसके खाते में 96 लाख रुपये जमा हो गए। एक साथ इतनी रकम पाकर महेश खुश हो गया और उसने खुशी में जमकर शराब पी।
शराब पीने के बाद नशे में उसने जमकर उत्पात मचाया। इसी दौरान किसी व्यक्ति ने उत्पात मचाने की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को देखकर आरोपित पुलिस के साथ भी बदसलूकी करने लगा। पुलिस आरोपित को हिरासत में लेकर थाने ले आई। जहां उसने स्वयं को मुख्यमंत्री का भाई बताते हुए अपना रौब गालिब किया। साथ ही वर्दी उतरवाने तक की बात कह डाली। पुलिस ने आरोपित को काफी समझाने का प्रयास किया, किन्तु उसका उत्पात कम नहीं हुआ। जिसके बाद पुलिस ने आरोपित का शांतिभंग में चालान कर दिया।
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हरिद्वार, सिडकुल क्षेत्र में डिफेंस कॉलोनी नवोदय नगर निवासी एक व्यक्ति ने ऑनलाइन फैंटेसी गेमिंग प्लेटफॉर्म ड्रीम इलेवन पर एक करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जीती। रकम जीतने की खुशी में उसने जमकर शराब पी और शराब पीकर जमकर उत्पात मचाया। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों से भी उसने बदसलूकी की। खुद को मुख्यमंत्री का भाई बताते हुए रौब गालिब किया, जिसके बाद पुलिस ने आरोपित का शांति भंग के आरोप में चालान कर दिया। जानकारी के मुताबिक सिडकुल क्षेत्र स्थित डिफेंस कॉलोनी नवोदय नगर निवासी महेश सिंह धामी ने ड्रीम इलेवन टीम में एक करोड़ से अधिक की रकम जीती। जीती हुई रकम का टैक्स कटने के बाद उसके खाते में छियानवे लाख रुपये जमा हो गए। एक साथ इतनी रकम पाकर महेश खुश हो गया और उसने खुशी में जमकर शराब पी। शराब पीने के बाद नशे में उसने जमकर उत्पात मचाया। इसी दौरान किसी व्यक्ति ने उत्पात मचाने की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को देखकर आरोपित पुलिस के साथ भी बदसलूकी करने लगा। पुलिस आरोपित को हिरासत में लेकर थाने ले आई। जहां उसने स्वयं को मुख्यमंत्री का भाई बताते हुए अपना रौब गालिब किया। साथ ही वर्दी उतरवाने तक की बात कह डाली। पुलिस ने आरोपित को काफी समझाने का प्रयास किया, किन्तु उसका उत्पात कम नहीं हुआ। जिसके बाद पुलिस ने आरोपित का शांतिभंग में चालान कर दिया।
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मन में कुछ करने की जज्बा हो तो फलीभूत होने में देरी नहीं लगती है। छह माह पूर्व 30 महिलाओं का समूह ने दूध उत्पादक समूह का गठन कर बिना सरकारी लाभ लिए मिनी डेयरी का काम शुरु किया है।
बसिया (गुमला), श्रीकांतः मन में कुछ करने की जज्बा हो तो फलीभूत होने में देरी नहीं लगती है। ऐसा ही जज्बा के साथ काम करने वाली महिलाएं इन दिनों चर्चा में हैं।
छह माह पूर्व 30 महिलाओं के समूह ने दूध उत्पादक समूह का गठन कर बिना सरकारी लाभ लिए मिनी डेयरी का काम शुरु किया है।
सीआईएफ फंड से बैंक के माध्यम से प्रति महिला डेढ-डेढ़ लाख रुपया ऋण लिया और होलस्टीन फ्रिजीयन नस्ल की 30 गाय से डेयरी का काम शुरु कर दिया।
महिला घर की दहलीज से बाहर आकर आत्मनिर्भरता की कहानी लिख रही हैं। यह कहानी दूसरी महिलाओं को भी प्रेरणा दे रही हैं। अन्य महिलाओं को भी यह कहानी भाने लगा है।
इस कार्य से महिलाओं का न केवल परिवार और समाज में मान सम्मान बढ़ा, बल्कि उनके इस कार्य ने उन्हें आर्थिक रुप से भी मजबूत बनाया। प्रतिदिन कम से कम 300 लीटर दूध का उत्पादन इस डेयरी से होता है।
दूध बेचने की कोई टेंशन नहीं । रांची से मेधा डेयरी दूध लेने पहुंचता है और एकमुश्त दूध क्रय कर लेता है। 40 रुपये प्रति लीटर दूध की बिक्री होती है। प्रतिदिन भी उन्हें राशि भी मिल जाता है। महिलाओं को डेयरी का काम ऐसा भाने लगा है कि अब वे डेयरी से संबंधित अन्य कार्य भी करने का इच्छा जता रही हैं।
महिलाएं केवल दूध उत्पादन तक ही सीमित नहीं रहना चाहती है बल्कि दूध से बनने वाले अन्य सामग्री का निर्माण करने का भी इच्छा जताती है।
दूध पाश्चराइज्ड के साथ-साथ दूध पैकेजिंग, पनीर, घी, दही आदि का भी निर्माण करना चाहती है। इसके अलावा गोबर से केचुआ खाद का निर्माण के साथ साथ गोबर गैस प्लांट लगाने के लिए भी तत्पर हैं।
राजकुमारी देवी, आश्रिता मिंज, दशमी कुल्लू, संगीता देवी, फ्लोरा सोरेंग, छुनु देवी, रजनी केरकेट्टा, लक्ष्मी देवी, संजीता मिंज आदि महिलाएं डेयरी से जुड़ी हैं। इनके चेहरे पर मुस्कान है।
वे कहती है कि यदि इस क्षेत्र में महिलाओं को डेयरी से जोड़ दिया जाए तो शराबबंदी स्वतः हो जाएगी। शराब बेचनेवाली महिलाओं को विकल्प देना होगा। बताया कि अब कई महिलाएं डेयरी से जुड़ना चाहती है।
बीडीओ रबिन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा कि बसिया प्रखंड में महिलाओं स्वरोजगार से जोड़कर पूरे जिले में दूध उत्पादन के क्षेत्र में मॉडल बनाने का लक्ष्य है।
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मन में कुछ करने की जज्बा हो तो फलीभूत होने में देरी नहीं लगती है। छह माह पूर्व तीस महिलाओं का समूह ने दूध उत्पादक समूह का गठन कर बिना सरकारी लाभ लिए मिनी डेयरी का काम शुरु किया है। बसिया , श्रीकांतः मन में कुछ करने की जज्बा हो तो फलीभूत होने में देरी नहीं लगती है। ऐसा ही जज्बा के साथ काम करने वाली महिलाएं इन दिनों चर्चा में हैं। छह माह पूर्व तीस महिलाओं के समूह ने दूध उत्पादक समूह का गठन कर बिना सरकारी लाभ लिए मिनी डेयरी का काम शुरु किया है। सीआईएफ फंड से बैंक के माध्यम से प्रति महिला डेढ-डेढ़ लाख रुपया ऋण लिया और होलस्टीन फ्रिजीयन नस्ल की तीस गाय से डेयरी का काम शुरु कर दिया। महिला घर की दहलीज से बाहर आकर आत्मनिर्भरता की कहानी लिख रही हैं। यह कहानी दूसरी महिलाओं को भी प्रेरणा दे रही हैं। अन्य महिलाओं को भी यह कहानी भाने लगा है। इस कार्य से महिलाओं का न केवल परिवार और समाज में मान सम्मान बढ़ा, बल्कि उनके इस कार्य ने उन्हें आर्थिक रुप से भी मजबूत बनाया। प्रतिदिन कम से कम तीन सौ लीटरटर दूध का उत्पादन इस डेयरी से होता है। दूध बेचने की कोई टेंशन नहीं । रांची से मेधा डेयरी दूध लेने पहुंचता है और एकमुश्त दूध क्रय कर लेता है। चालीस रुपयापये प्रति लीटर दूध की बिक्री होती है। प्रतिदिन भी उन्हें राशि भी मिल जाता है। महिलाओं को डेयरी का काम ऐसा भाने लगा है कि अब वे डेयरी से संबंधित अन्य कार्य भी करने का इच्छा जता रही हैं। महिलाएं केवल दूध उत्पादन तक ही सीमित नहीं रहना चाहती है बल्कि दूध से बनने वाले अन्य सामग्री का निर्माण करने का भी इच्छा जताती है। दूध पाश्चराइज्ड के साथ-साथ दूध पैकेजिंग, पनीर, घी, दही आदि का भी निर्माण करना चाहती है। इसके अलावा गोबर से केचुआ खाद का निर्माण के साथ साथ गोबर गैस प्लांट लगाने के लिए भी तत्पर हैं। राजकुमारी देवी, आश्रिता मिंज, दशमी कुल्लू, संगीता देवी, फ्लोरा सोरेंग, छुनु देवी, रजनी केरकेट्टा, लक्ष्मी देवी, संजीता मिंज आदि महिलाएं डेयरी से जुड़ी हैं। इनके चेहरे पर मुस्कान है। वे कहती है कि यदि इस क्षेत्र में महिलाओं को डेयरी से जोड़ दिया जाए तो शराबबंदी स्वतः हो जाएगी। शराब बेचनेवाली महिलाओं को विकल्प देना होगा। बताया कि अब कई महिलाएं डेयरी से जुड़ना चाहती है। बीडीओ रबिन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा कि बसिया प्रखंड में महिलाओं स्वरोजगार से जोड़कर पूरे जिले में दूध उत्पादन के क्षेत्र में मॉडल बनाने का लक्ष्य है।
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नई दिल्ली : अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए एक बड़ी राहत में, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को भारतीय पासपोर्ट रखने वालों के लिए आधार कार्ड जारी करने का आश्वासन दिया।
वर्तमान नियम के तहत, भारतीय पासपोर्ट वाले अनिवासी भारतीयों को आधार कार्ड प्राप्त करने के लिए 180 दिनों तक इंतजार करना होगा। 31 मई, 2019 को, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने देश के निवासियों के लिए कुल 123. 82 करोड़ आधार तैयार किए थे।
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नई दिल्ली : अनिवासी भारतीयों के लिए एक बड़ी राहत में, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को भारतीय पासपोर्ट रखने वालों के लिए आधार कार्ड जारी करने का आश्वासन दिया। वर्तमान नियम के तहत, भारतीय पासपोर्ट वाले अनिवासी भारतीयों को आधार कार्ड प्राप्त करने के लिए एक सौ अस्सी दिनों तक इंतजार करना होगा। इकतीस मई, दो हज़ार उन्नीस को, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने देश के निवासियों के लिए कुल एक सौ तेईस. बयासी करोड़ आधार तैयार किए थे।
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का स्वभाव विक्षेप अथवा प्रस्त्रारण है। वायु चन्द्र और सूर्य की किरणोंको फैलाता है प्रसारित करता है । वायु पञ्चभूतका द्वितीय पदार्थ है; किन्तु सर्वगुण सम्पन्न है। सबका नेता है । वायुके बाद ही या सूर्य है जिसका प्रधान गुण ग्रहण है; किन्तु वायुका विक्षेप और चन्द्रका विसर्ग गुण भी उसमें वर्तमान है । इसीलिए सूर्य अपने प्रधान गुण द्वारा रसका आकर्षण करने पर भी प्रधान गुण द्वारा रस वर्षण भी करता है । दक्षिणायनमें रस वर्षण और उत्तरायणमें रसाकर्षण करता है। इसी तरह चन्द्र अपने प्रधान गुण द्वारा रसवर्षण करने पर भी उसमें प्रसारण और आदानगुरण भी वर्तमान है। क्योंकि रस ग्रहण किये बिना उसका वर्षण और विस्तार नहीं हो सकता । वाह्य जगत में वायु, श्रमि और जलकी क्रिया जैसी होती है, देह जगतमें वात-पित्त-कफकी क्रिया भी उसी प्रकार चलती रहती है। जिस प्रकार अग्नि-जल-वायुके स्थानीय शरीर में पित्त-कफवायु हैं, उसी तरह पञ्चतन्मात्रके तेज-जल और वायु हैं । जगत में जैसे मृत्तिकाके ऊपर जल, जलके ऊपर के ऊपर वायु और ऊपर आकाश है; शरीरमें उसी प्रकार मूलाधार में पृथ्वी, स्वाधिष्ठान में जल, मणिपूर (नाभिसे कुछ नीचे) में तेज, हत (नाभि) में समान वायु और विशुद्ध चक्र में श्राकाशका स्थान है। जिस प्रकार पृथ्वीका जल भाफ बनकर ऊपर जाता और वृष्टि रूपसे फिर गिरता है, उसी प्रकार जल शरीरस्थ जलाधारसे भाफ रूपमें उठकर श्लेष्मारूपमें मस्तकमें संचित होता और फिराक और मुखके द्वारा बाहर निकलता है। जैसे वृष्टिका जल, नदी तालाबका जल, सबजल ही हैं; स्थान भेदसे उनके अलग अलग नाम होते हैं, उसी तरह जल और श्लेष्मा एक ही वस्तु होने पर भी रूपान्तर भेदसे स्थानभेद,
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का स्वभाव विक्षेप अथवा प्रस्त्रारण है। वायु चन्द्र और सूर्य की किरणोंको फैलाता है प्रसारित करता है । वायु पञ्चभूतका द्वितीय पदार्थ है; किन्तु सर्वगुण सम्पन्न है। सबका नेता है । वायुके बाद ही या सूर्य है जिसका प्रधान गुण ग्रहण है; किन्तु वायुका विक्षेप और चन्द्रका विसर्ग गुण भी उसमें वर्तमान है । इसीलिए सूर्य अपने प्रधान गुण द्वारा रसका आकर्षण करने पर भी प्रधान गुण द्वारा रस वर्षण भी करता है । दक्षिणायनमें रस वर्षण और उत्तरायणमें रसाकर्षण करता है। इसी तरह चन्द्र अपने प्रधान गुण द्वारा रसवर्षण करने पर भी उसमें प्रसारण और आदानगुरण भी वर्तमान है। क्योंकि रस ग्रहण किये बिना उसका वर्षण और विस्तार नहीं हो सकता । वाह्य जगत में वायु, श्रमि और जलकी क्रिया जैसी होती है, देह जगतमें वात-पित्त-कफकी क्रिया भी उसी प्रकार चलती रहती है। जिस प्रकार अग्नि-जल-वायुके स्थानीय शरीर में पित्त-कफवायु हैं, उसी तरह पञ्चतन्मात्रके तेज-जल और वायु हैं । जगत में जैसे मृत्तिकाके ऊपर जल, जलके ऊपर के ऊपर वायु और ऊपर आकाश है; शरीरमें उसी प्रकार मूलाधार में पृथ्वी, स्वाधिष्ठान में जल, मणिपूर में तेज, हत में समान वायु और विशुद्ध चक्र में श्राकाशका स्थान है। जिस प्रकार पृथ्वीका जल भाफ बनकर ऊपर जाता और वृष्टि रूपसे फिर गिरता है, उसी प्रकार जल शरीरस्थ जलाधारसे भाफ रूपमें उठकर श्लेष्मारूपमें मस्तकमें संचित होता और फिराक और मुखके द्वारा बाहर निकलता है। जैसे वृष्टिका जल, नदी तालाबका जल, सबजल ही हैं; स्थान भेदसे उनके अलग अलग नाम होते हैं, उसी तरह जल और श्लेष्मा एक ही वस्तु होने पर भी रूपान्तर भेदसे स्थानभेद,
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वर्धा/दि. 1 - जिले के कारंजा घाडगे के राष्ट्रीय महामार्ग क्रमांक 6 पर नागलवाडी के करीब ट्रक ने इंडिका कार को टक्कर मार दी थी. इस हादसे में इंडिका कार सवार लोग घायल हो गए थे, लेकिन घायलों की मदद करने की बजाय ट्रक चालक ट्रक लेकर फरार हो गया था. तकरीबन 14 दिन बाद कारंजा घाडगे पुलिस ने फरार ट्रक चालक को हिरासत में लिया है.
मिली जानकारी के अनुसार 17 दिसंबर को राष्ट्रीय महामार्ग 6 के नागलवाडी के करीब ट्रक नंबर एमएच 49/1123 ने रास्ते पर खडी इंडिका कार को टक्कर मार दी थी. इस हादसे में अमरावती निवासी नकुल भेले की गाडी के निचे दबने से मौत हो गई थी. नकुल भेले अपने छोटे भाई तथा दामाद के साथ नागपुर से अमरावती आ रहे थे. इस समय उनकी गाडी अचानक बंद पड गई. गाडी को टोचन देकर वे अमरावती निकले थे. लेकिन नागलवाडी के पास टोचन टूट गया. जिसके बाद टोचन बांधने के लिए निचे उतरे, इसी दौरान नागपुर से तेज गति से आ रहे ट्रक ने इंडिका कार को जबर्दस्त टक्कर मार दी. जिससे कार पलट गई. जिसके निचे दबने से नकुल भेले की मौत हो गई और अन्य दों घायल हुए. इस हादसे के बाद ट्रक चालक ट्रक सहित फरार हो गया. कारंजा घाडगे पुलिस ने मामले की जांच पडताल शुरु की. 24 दिसंबर को कारंजा पुलिस ने नांदगांव पेठ टोल नाके पर जाकर सीसीटीवी फूटेज भी जांचे. जिसमें एमएच 49/1123 नंबर का ट्रक क्षतिग्रस्त दिखाई दिया. जिसके बाद पुलिस ने आरटीओ से वाहन की जानकारी निकाली और नागपुर जाकर ट्रक चालक अक्षय बान्ते को हिरासत में लिया. थानेदार दारासिंग राजपुत के मार्गदर्शन में एपीआई मोहन धुले, प्रवीण चोरे, सुजितसिंग बावरी ने हादसे के मामले को सुलझाया.
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वर्धा/दि. एक - जिले के कारंजा घाडगे के राष्ट्रीय महामार्ग क्रमांक छः पर नागलवाडी के करीब ट्रक ने इंडिका कार को टक्कर मार दी थी. इस हादसे में इंडिका कार सवार लोग घायल हो गए थे, लेकिन घायलों की मदद करने की बजाय ट्रक चालक ट्रक लेकर फरार हो गया था. तकरीबन चौदह दिन बाद कारंजा घाडगे पुलिस ने फरार ट्रक चालक को हिरासत में लिया है. मिली जानकारी के अनुसार सत्रह दिसंबर को राष्ट्रीय महामार्ग छः के नागलवाडी के करीब ट्रक नंबर एमएच उनचास/एक हज़ार एक सौ तेईस ने रास्ते पर खडी इंडिका कार को टक्कर मार दी थी. इस हादसे में अमरावती निवासी नकुल भेले की गाडी के निचे दबने से मौत हो गई थी. नकुल भेले अपने छोटे भाई तथा दामाद के साथ नागपुर से अमरावती आ रहे थे. इस समय उनकी गाडी अचानक बंद पड गई. गाडी को टोचन देकर वे अमरावती निकले थे. लेकिन नागलवाडी के पास टोचन टूट गया. जिसके बाद टोचन बांधने के लिए निचे उतरे, इसी दौरान नागपुर से तेज गति से आ रहे ट्रक ने इंडिका कार को जबर्दस्त टक्कर मार दी. जिससे कार पलट गई. जिसके निचे दबने से नकुल भेले की मौत हो गई और अन्य दों घायल हुए. इस हादसे के बाद ट्रक चालक ट्रक सहित फरार हो गया. कारंजा घाडगे पुलिस ने मामले की जांच पडताल शुरु की. चौबीस दिसंबर को कारंजा पुलिस ने नांदगांव पेठ टोल नाके पर जाकर सीसीटीवी फूटेज भी जांचे. जिसमें एमएच उनचास/एक हज़ार एक सौ तेईस नंबर का ट्रक क्षतिग्रस्त दिखाई दिया. जिसके बाद पुलिस ने आरटीओ से वाहन की जानकारी निकाली और नागपुर जाकर ट्रक चालक अक्षय बान्ते को हिरासत में लिया. थानेदार दारासिंग राजपुत के मार्गदर्शन में एपीआई मोहन धुले, प्रवीण चोरे, सुजितसिंग बावरी ने हादसे के मामले को सुलझाया.
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मीका सिंह से नाराज हुए बजरंगी भाईजान, गाना चाहते थे "आज की पार्टी"
दरअसल सलमान खान पेंटिंग के साथ-साथ सिंगिग का भी शौक रखते हैं, जिसके चलते उन्होने बजरंगी भाईजान में भी "आज की पार्टी" के गाने को अपनी आवाज देने की इच्छा जताई थी। हालांकि, यह पहली बार नहीं जब सलमान की गाने की ख्वाहिश अधूरी रह गई हो। इससे पहले भी फिल्म किक का गाना "जुम्मे की रात है" सलमान गाने वाले थे। जिसके बाद यह गाना मीका को मिल गया।
फिल्म का यह गाना काफी हिट रहा। ठीक उसी तरह 'बजरंगी भाईजान' का गाना "आज की पार्टी" सलमान को मिलते-मिलते मीका की झोली में जा गिरा। आपको बता दें कि सलमान ने फिल्म 'किक' में एक गाने को अपनी आवाज दी थी। "हैंगओवर" जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया। लेकिन अब सलमान को इस बात का दुख है कि उनके हाथ से यह गाना निकल गया। इसके चलते सलमान मीका सिंह से भी नाराज हैं।
गौरतलब है कि डायरेक्टर कबीर खान की फिल्म बजरंगी भाईजान ईद पर रिलीज होगी। फिल्म में सलमान खान, करीना कपूर, नवाजुद्दीन सिद्धीकी मुख्य भूमिका में हैं। वहीं सलमान के फैन्स को इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार रहेगा।
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मीका सिंह से नाराज हुए बजरंगी भाईजान, गाना चाहते थे "आज की पार्टी" दरअसल सलमान खान पेंटिंग के साथ-साथ सिंगिग का भी शौक रखते हैं, जिसके चलते उन्होने बजरंगी भाईजान में भी "आज की पार्टी" के गाने को अपनी आवाज देने की इच्छा जताई थी। हालांकि, यह पहली बार नहीं जब सलमान की गाने की ख्वाहिश अधूरी रह गई हो। इससे पहले भी फिल्म किक का गाना "जुम्मे की रात है" सलमान गाने वाले थे। जिसके बाद यह गाना मीका को मिल गया। फिल्म का यह गाना काफी हिट रहा। ठीक उसी तरह 'बजरंगी भाईजान' का गाना "आज की पार्टी" सलमान को मिलते-मिलते मीका की झोली में जा गिरा। आपको बता दें कि सलमान ने फिल्म 'किक' में एक गाने को अपनी आवाज दी थी। "हैंगओवर" जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया। लेकिन अब सलमान को इस बात का दुख है कि उनके हाथ से यह गाना निकल गया। इसके चलते सलमान मीका सिंह से भी नाराज हैं। गौरतलब है कि डायरेक्टर कबीर खान की फिल्म बजरंगी भाईजान ईद पर रिलीज होगी। फिल्म में सलमान खान, करीना कपूर, नवाजुद्दीन सिद्धीकी मुख्य भूमिका में हैं। वहीं सलमान के फैन्स को इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार रहेगा।
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खैरागढ़। अभिनव रंग मंडल द्वारा आयोजित 36वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह की शुरूआत 22 मार्च को नाटक 'ग्लोबल राजा' के मंचन से हुई। नाटक ने शासन व्यवस्था के संपूर्ण पटल से रूबरू कराते हुए समाज में व्याप्त सोच को व्यंग्यात्मक और सांकेतिक तरीके से प्रस्तुत किया। पूरी अवधि में यह नाटक गुदगुदाता रहा और अंत में एक गम्भीर संदेश छोड़ गया कि हमारा रास्ता स्वदेशी का ही होना चाहिए।
'ग्लोबल राजा' अलखनंदन द्वारा लिखित मूल नाटक 'उजबक राजा तीन डकैत' हैस क्रिश्चेयन की बालकथा 'द एम्परर्स न्यू क्लॉथ्स' का नाट्य रूपांतरण है। व्यंग्यात्मक शैली में लिखे गए इस नाटक में नाटककार ने मल्टीनेशनल दर्जियों के बहाने राजव्यवस्था में राष्ट्रीय व बहुराष्ट्रीय कंपनियों के षडयंत्रों को प्रभावी रूप से प्रदर्शित किया। सत्ता में बैठे लोगों के द्वारा देशी वस्तुओं को बढ़ावा न देने और उनकी अवहेलना कर विदेशी वस्तुओं का अधिक से अधिक आयात करने के कारण ही आज देश की अर्थव्यवस्था डगमगाई हुई है और अधिकांश कुटीर व लघु उद्योग लगभग खत्म हो चुके हैं। इस नाटक ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अधिकांश कुटीर व लघु उद्योगों पर या विश्व के बड़े बाजारों द्वारा छोटे बाजारों पर किये जा रहे हमले को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक विदेशी पूंजी के बढ़ते प्रभाव व उससे उपजे हमारी सांस्कृतिक अस्मिता के खतरों को भी प्रकट करता है। नाटक में राजा का उजबकपन एवं मंत्री की कमीशनखोरी व्यवस्था के विकृत स्वरूप को अच्छी तरह से उभारने के साथ-साथ गहरी राजनैतिक सोच को भी बड़ी सहजता से प्रदर्शित किया गया। 'ग्लोबल राजा' का मंचन योगेंद्र चौबे के निर्देशन में हुआ तथा प्रस्तुति रंगमंडल नाट्य विभाग इंदिरा कला संगीत विवि खैरागढ़ की रही। योगेंद्र चौबे देश के युवा निर्देशक के रूप में प्रसिद्ध हैं। 2020 में उनका नाटक 'बाबा पाखंडी' भी उज्जैन में चर्चा में रहा । अभिनव रंगमंडल उज्जैन ने श्री चौबे को 'राष्ट्रीय अभिनव रंग सम्मान' से सम्मानित किया है। योगेन्द्र एक बहुत ही सुलझे हुए नाट्य निर्देशक हैं। उनके नाटक मूलतः सोशियो-पोलिटिकल होते हैं, जिसमें समाज व समाज में चल रही घटनाओं को बहुत ही सहज रूप से मंच पर उद्घाटित करते हैं। संगीत का संयोजन एवं मास्क मेकअप का प्रयोग इस नाटक का प्रभावी पक्ष था।
नाटक को मूर्तरूप देने वालो में राजा की भूमिका में धीरज सोनी, मंत्री परमानंद पांडेय, नौकरानी दीक्षा अग्रवाल, चोबदार अमन मालेकर, ढिंढोरची कुशाल सुधाकर, खंडाला दूत एवं भोपाली दर्जी अनुराग पांडा, मद्रासी दर्जी सोनल बागड़े, बिहारी दर्जी हिमांशु कुमार, ठग एक लखविंदर, ठग दो शनि राणा, ठग तीन उन्नति दे, राजा देशाबंधु सोमनाथ साहू, बच्चा विक्रम लोधी, कवि धूमकेतू की भूमिका हिमांशू ने निभाई। मंच प्रबंधन डॉ. चेतन्य आठले, संगीत संयोजन डॉ. योगेंद्र चौबे व मोहन सागर, गीत अलखनंदन, घनश्याम साहू, हारमोनियम हितेंद्र वर्मा, ढोलक जानेश्वर तांडिया, मंच परिकल्पना धीरज सोनी, सामग्री अनुराग पंडा, रोहन जघेल, वेशभूषा एवं रूपसज्जा धीरज सोनी, दीक्षा अग्रवाल, प्रकाश परिकल्पना डॉ. चैतन्य आठले, परिकल्पना एवं निर्देशन डॉ. योगेंद्र चौबे का रहा।
उल्लेखनीय है कि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के नाट्य विभाग ने अभी हाल ही में रंगमण्डल की स्थापना की है, जिसका उद्घाटन कुलाधिपति और राज्यपाल अनुसुइया उइके की उपस्थिति में संपन्न हुआ। यह प्रयोग देश के विश्वविद्यालयीन संरचना में अनूठा है, जिसकी चर्चा देश भर में हो रही है। नाटक की सफल प्रस्तुति के लिए विश्वविद्यालय की कुलपति पद्मश्री ममता चंद्राकर कुलसचिव प्रो. डॉ. आईडी तिवारी ने निर्देशक डॉ. योगेन्द्र चौबे व उनकी पूरी टीम को बधाई दी है।
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खैरागढ़। अभिनव रंग मंडल द्वारा आयोजित छत्तीसवें राष्ट्रीय नाट्य समारोह की शुरूआत बाईस मार्च को नाटक 'ग्लोबल राजा' के मंचन से हुई। नाटक ने शासन व्यवस्था के संपूर्ण पटल से रूबरू कराते हुए समाज में व्याप्त सोच को व्यंग्यात्मक और सांकेतिक तरीके से प्रस्तुत किया। पूरी अवधि में यह नाटक गुदगुदाता रहा और अंत में एक गम्भीर संदेश छोड़ गया कि हमारा रास्ता स्वदेशी का ही होना चाहिए। 'ग्लोबल राजा' अलखनंदन द्वारा लिखित मूल नाटक 'उजबक राजा तीन डकैत' हैस क्रिश्चेयन की बालकथा 'द एम्परर्स न्यू क्लॉथ्स' का नाट्य रूपांतरण है। व्यंग्यात्मक शैली में लिखे गए इस नाटक में नाटककार ने मल्टीनेशनल दर्जियों के बहाने राजव्यवस्था में राष्ट्रीय व बहुराष्ट्रीय कंपनियों के षडयंत्रों को प्रभावी रूप से प्रदर्शित किया। सत्ता में बैठे लोगों के द्वारा देशी वस्तुओं को बढ़ावा न देने और उनकी अवहेलना कर विदेशी वस्तुओं का अधिक से अधिक आयात करने के कारण ही आज देश की अर्थव्यवस्था डगमगाई हुई है और अधिकांश कुटीर व लघु उद्योग लगभग खत्म हो चुके हैं। इस नाटक ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अधिकांश कुटीर व लघु उद्योगों पर या विश्व के बड़े बाजारों द्वारा छोटे बाजारों पर किये जा रहे हमले को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक विदेशी पूंजी के बढ़ते प्रभाव व उससे उपजे हमारी सांस्कृतिक अस्मिता के खतरों को भी प्रकट करता है। नाटक में राजा का उजबकपन एवं मंत्री की कमीशनखोरी व्यवस्था के विकृत स्वरूप को अच्छी तरह से उभारने के साथ-साथ गहरी राजनैतिक सोच को भी बड़ी सहजता से प्रदर्शित किया गया। 'ग्लोबल राजा' का मंचन योगेंद्र चौबे के निर्देशन में हुआ तथा प्रस्तुति रंगमंडल नाट्य विभाग इंदिरा कला संगीत विवि खैरागढ़ की रही। योगेंद्र चौबे देश के युवा निर्देशक के रूप में प्रसिद्ध हैं। दो हज़ार बीस में उनका नाटक 'बाबा पाखंडी' भी उज्जैन में चर्चा में रहा । अभिनव रंगमंडल उज्जैन ने श्री चौबे को 'राष्ट्रीय अभिनव रंग सम्मान' से सम्मानित किया है। योगेन्द्र एक बहुत ही सुलझे हुए नाट्य निर्देशक हैं। उनके नाटक मूलतः सोशियो-पोलिटिकल होते हैं, जिसमें समाज व समाज में चल रही घटनाओं को बहुत ही सहज रूप से मंच पर उद्घाटित करते हैं। संगीत का संयोजन एवं मास्क मेकअप का प्रयोग इस नाटक का प्रभावी पक्ष था। नाटक को मूर्तरूप देने वालो में राजा की भूमिका में धीरज सोनी, मंत्री परमानंद पांडेय, नौकरानी दीक्षा अग्रवाल, चोबदार अमन मालेकर, ढिंढोरची कुशाल सुधाकर, खंडाला दूत एवं भोपाली दर्जी अनुराग पांडा, मद्रासी दर्जी सोनल बागड़े, बिहारी दर्जी हिमांशु कुमार, ठग एक लखविंदर, ठग दो शनि राणा, ठग तीन उन्नति दे, राजा देशाबंधु सोमनाथ साहू, बच्चा विक्रम लोधी, कवि धूमकेतू की भूमिका हिमांशू ने निभाई। मंच प्रबंधन डॉ. चेतन्य आठले, संगीत संयोजन डॉ. योगेंद्र चौबे व मोहन सागर, गीत अलखनंदन, घनश्याम साहू, हारमोनियम हितेंद्र वर्मा, ढोलक जानेश्वर तांडिया, मंच परिकल्पना धीरज सोनी, सामग्री अनुराग पंडा, रोहन जघेल, वेशभूषा एवं रूपसज्जा धीरज सोनी, दीक्षा अग्रवाल, प्रकाश परिकल्पना डॉ. चैतन्य आठले, परिकल्पना एवं निर्देशन डॉ. योगेंद्र चौबे का रहा। उल्लेखनीय है कि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के नाट्य विभाग ने अभी हाल ही में रंगमण्डल की स्थापना की है, जिसका उद्घाटन कुलाधिपति और राज्यपाल अनुसुइया उइके की उपस्थिति में संपन्न हुआ। यह प्रयोग देश के विश्वविद्यालयीन संरचना में अनूठा है, जिसकी चर्चा देश भर में हो रही है। नाटक की सफल प्रस्तुति के लिए विश्वविद्यालय की कुलपति पद्मश्री ममता चंद्राकर कुलसचिव प्रो. डॉ. आईडी तिवारी ने निर्देशक डॉ. योगेन्द्र चौबे व उनकी पूरी टीम को बधाई दी है।
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Jharkhand News: जैनियों के तीर्थस्थल पार्श्वनाथ पर्वत यानि शिखरजी की तलहट्टी में बसे मधुबन में हाल के दिनों में कई विकास के कार्य हुए हैं. खासकर मंदिरों एवं धर्मशालाओं की बात करें, तो जैनियों के श्वेतांबर और दिगंबर पंथ की विभिन्न संस्थाओं की ओर से काफी सारे मंदिर पूर्व में भी बने हुए हैं. जबकि कई नये मंदिरों एवं धर्मशालाओं का निर्माण तेजी से किया जा रहा है.
जैनियों के उपासना का केंद्र और 24 में से 20 तीर्थंकरों का मोक्ष स्थल होने के कारण यह पार्श्वनाथ पर्वत अत्यंत ही पावन माना जाता है. फलस्वरूप देश के कोने-कोने में रहनेवाले जैनियों के साथ-साथ विश्व के अलग-अलग देशों में रहने वाले जैन धर्मावलंबी इस पर्वत का दर्शन करने जरूर पहुंचते हैं, जिनका ठहराव पर्वत की तलहट्टी में बसे मधुबन में होता है. शिखर जी का दर्शन करने जब यात्री यहां पहुंचते हैं या पर्वत की 27 किमी की धार्मिक यात्रा और वंदना करने के बाद जब वे वापस मधुबन लौटते हैं, तो उन्हें काफी थकावट का अनुभव होता है, ऐसे में वे कुछ वक्त आराम करना चाहते हैं. यही कारण है कि यात्रियों की सुविधाओं और भावनाओं को ध्यान में रखकर जैन संस्थाएं धर्मशालाओं एवं मंदिरों का निर्माण यहां तेजी से कर रही हैं. मंदिरों की संख्या अब इतनी बढ़ गई है कि लोग मधुबन को मंदिरों के शहर के रूप में चिह्नित करने लगे हैं.
पार्श्वनाथ पर्वत की तलहट्टी में स्थित मधुबन में करोड़ों की लागत से कई धर्मशालाएं एवं मंदिरों का निर्माण विभिन्न संस्थाओं द्वारा कराया गया है और कई का निर्माण कार्य जारी है. मधुबन में पहले से धर्ममंगल जैन विद्यापीठ में पार्श्वनाथ भगवान का मंदिर समेत कई भगवान की मूर्तियां व मंदिर हैं. साथ ही तलहटी में बने भगवान पार्श्वनाथ का मंदिर काफी आकर्षक है. इस मंदिर के गर्भगृह के स्तंभ कलात्मक हैं और गर्भगृह में तीन मेराब भी स्थापित है. इस मंदिर में पद्मासन मुद्रा में चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान की काले रंग की मूर्ति है जो छह फीट की है, जो बहुत ही आकर्षक है. यहां महावीर जिनालय स्थापित है जिसमें भगवान महावीर की 7. 30 फीट ऊंची मूर्ति स्थापित है. इसी मंदिर में जैनियों के सभी 24 तीर्थंकरों की मूर्तियां भी स्थापित की गई है. प्रवेश मंडप शांतिनाथ जिनालय, नेमिनाथ जिनालय, श्री समवशरण मंदिर, अजीत नाथ मंदिर, भोमिया जी मंदिर, श्री दिगंबर जैन मध्य लोक अनुसंधान केंद्र, कच्छी भवन समेत दर्जनों मंदिर पूर्व से बने हुए हैं. इसके अलावा गुणायतन, तलेटी तीर्थ मंदिर, तनमोदय, श्री समवशरण, बुंदेलखंड आदि मंदिर का निर्माण किया जा रहा है जो और भी भव्य और आकर्षक है.
सुविधाओं से युक्त धर्मशालाओं का भी निर्माण यहां काफी संख्या में किया गया है. यहां धर्मशालाओं की विशेषता यह है कि हर धर्मशाला के परिसर में मंदिर का निर्माण किया गया है और इन मंदिरों में जैनियों के तीर्थंकरों की प्रतिमा भी स्थापित की गई है. बताया जाता है कि जो जैन यात्री तीर्थयात्रा के लिए यहां आते हैं और धर्मशाला में रहते हैं, वे सुबह में बिना भगवान के दर्शन के भोजन की शुरुआत नहीं करते. श्रीधर्म मंगल जैन विद्यापीठ, बीसपंथी कोठी, 13 पंथी कोठी, सिद्धायतन, तमिलनाडु जैन भवन, निहारिका, कुंद-कुंद, गुणायतन, जैन श्वेतांबर सोसायटी की धर्मशाला समेत कई धर्मशालाएं हैं जिसके परिसर के अंदर भव्य एवं आकर्षक मंदिर स्थापित की गई है. इन मंदिरों के दर्शन यात्रियों को काफी सुकून देता है.
जैसे-जैसे नक्सलियों की गतिविधियां घट रही है, वैसे-वैसे नक्सलियों का खौफ भी घटता जा रहा है और नक्सलियों का खौफ घटने के साथ मधुबन में विकास कार्य में तेजी आती जा रही है. पिछले कुछ वर्षों में मधुबन में अप्रत्याशित रूप से मंदिरों एवं धर्मशालाओं का निर्माण किया गया है और इसके निर्माण में लगातार बढ़ोतरी भी हो रही है. जानकार बताते हैं कि मंदिरों एवं धर्मशालाओं के निर्माण में करोड़ों रुपये का पूंजीनिवेश अभी तक किया जा चुका है. साथ ही इस वक्त लगभग 2000 करोड़ से भी ज्यादा का मंदिर एवं धर्मशाला का निर्माण जारी है. विभिन्न संस्थाओं के ट्रस्टियों में कई ट्रस्टी विदेश में हैं जिसके कारण एनआरआई जैनियों का अच्छा खासा पूंजी निवेश यहां के मंदिरों एवं धर्मशालाओं में हो रहा है. हाल के दिनों में गुणायतन, तलेटी क्षेत्र, कुंद-कुंद, सौरभांचल, बुंदेलखंड, तनमोदय, शांतिसागरधाम जैसे भव्य एवं आकर्षक मंदिर का निर्माण तेजी से किया जा रहा है. गुणायतन और तलेटी तीर्थ क्षेत्र मंदिर का निर्माण आज से पांच-छह वर्ष पूर्व शुरू किया गया था और अब भी जारी है. बताया जा रहा है कि इसके निर्माण कार्य में अभी भी लगभग चार-पांच साल और लगेंगे.
रिपोर्ट : राकेश सिन्हा, गिरिडीह.
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Jharkhand News: जैनियों के तीर्थस्थल पार्श्वनाथ पर्वत यानि शिखरजी की तलहट्टी में बसे मधुबन में हाल के दिनों में कई विकास के कार्य हुए हैं. खासकर मंदिरों एवं धर्मशालाओं की बात करें, तो जैनियों के श्वेतांबर और दिगंबर पंथ की विभिन्न संस्थाओं की ओर से काफी सारे मंदिर पूर्व में भी बने हुए हैं. जबकि कई नये मंदिरों एवं धर्मशालाओं का निर्माण तेजी से किया जा रहा है. जैनियों के उपासना का केंद्र और चौबीस में से बीस तीर्थंकरों का मोक्ष स्थल होने के कारण यह पार्श्वनाथ पर्वत अत्यंत ही पावन माना जाता है. फलस्वरूप देश के कोने-कोने में रहनेवाले जैनियों के साथ-साथ विश्व के अलग-अलग देशों में रहने वाले जैन धर्मावलंबी इस पर्वत का दर्शन करने जरूर पहुंचते हैं, जिनका ठहराव पर्वत की तलहट्टी में बसे मधुबन में होता है. शिखर जी का दर्शन करने जब यात्री यहां पहुंचते हैं या पर्वत की सत्ताईस किमी की धार्मिक यात्रा और वंदना करने के बाद जब वे वापस मधुबन लौटते हैं, तो उन्हें काफी थकावट का अनुभव होता है, ऐसे में वे कुछ वक्त आराम करना चाहते हैं. यही कारण है कि यात्रियों की सुविधाओं और भावनाओं को ध्यान में रखकर जैन संस्थाएं धर्मशालाओं एवं मंदिरों का निर्माण यहां तेजी से कर रही हैं. मंदिरों की संख्या अब इतनी बढ़ गई है कि लोग मधुबन को मंदिरों के शहर के रूप में चिह्नित करने लगे हैं. पार्श्वनाथ पर्वत की तलहट्टी में स्थित मधुबन में करोड़ों की लागत से कई धर्मशालाएं एवं मंदिरों का निर्माण विभिन्न संस्थाओं द्वारा कराया गया है और कई का निर्माण कार्य जारी है. मधुबन में पहले से धर्ममंगल जैन विद्यापीठ में पार्श्वनाथ भगवान का मंदिर समेत कई भगवान की मूर्तियां व मंदिर हैं. साथ ही तलहटी में बने भगवान पार्श्वनाथ का मंदिर काफी आकर्षक है. इस मंदिर के गर्भगृह के स्तंभ कलात्मक हैं और गर्भगृह में तीन मेराब भी स्थापित है. इस मंदिर में पद्मासन मुद्रा में चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान की काले रंग की मूर्ति है जो छह फीट की है, जो बहुत ही आकर्षक है. यहां महावीर जिनालय स्थापित है जिसमें भगवान महावीर की सात. तीस फीट ऊंची मूर्ति स्थापित है. इसी मंदिर में जैनियों के सभी चौबीस तीर्थंकरों की मूर्तियां भी स्थापित की गई है. प्रवेश मंडप शांतिनाथ जिनालय, नेमिनाथ जिनालय, श्री समवशरण मंदिर, अजीत नाथ मंदिर, भोमिया जी मंदिर, श्री दिगंबर जैन मध्य लोक अनुसंधान केंद्र, कच्छी भवन समेत दर्जनों मंदिर पूर्व से बने हुए हैं. इसके अलावा गुणायतन, तलेटी तीर्थ मंदिर, तनमोदय, श्री समवशरण, बुंदेलखंड आदि मंदिर का निर्माण किया जा रहा है जो और भी भव्य और आकर्षक है. सुविधाओं से युक्त धर्मशालाओं का भी निर्माण यहां काफी संख्या में किया गया है. यहां धर्मशालाओं की विशेषता यह है कि हर धर्मशाला के परिसर में मंदिर का निर्माण किया गया है और इन मंदिरों में जैनियों के तीर्थंकरों की प्रतिमा भी स्थापित की गई है. बताया जाता है कि जो जैन यात्री तीर्थयात्रा के लिए यहां आते हैं और धर्मशाला में रहते हैं, वे सुबह में बिना भगवान के दर्शन के भोजन की शुरुआत नहीं करते. श्रीधर्म मंगल जैन विद्यापीठ, बीसपंथी कोठी, तेरह पंथी कोठी, सिद्धायतन, तमिलनाडु जैन भवन, निहारिका, कुंद-कुंद, गुणायतन, जैन श्वेतांबर सोसायटी की धर्मशाला समेत कई धर्मशालाएं हैं जिसके परिसर के अंदर भव्य एवं आकर्षक मंदिर स्थापित की गई है. इन मंदिरों के दर्शन यात्रियों को काफी सुकून देता है. जैसे-जैसे नक्सलियों की गतिविधियां घट रही है, वैसे-वैसे नक्सलियों का खौफ भी घटता जा रहा है और नक्सलियों का खौफ घटने के साथ मधुबन में विकास कार्य में तेजी आती जा रही है. पिछले कुछ वर्षों में मधुबन में अप्रत्याशित रूप से मंदिरों एवं धर्मशालाओं का निर्माण किया गया है और इसके निर्माण में लगातार बढ़ोतरी भी हो रही है. जानकार बताते हैं कि मंदिरों एवं धर्मशालाओं के निर्माण में करोड़ों रुपये का पूंजीनिवेश अभी तक किया जा चुका है. साथ ही इस वक्त लगभग दो हज़ार करोड़ से भी ज्यादा का मंदिर एवं धर्मशाला का निर्माण जारी है. विभिन्न संस्थाओं के ट्रस्टियों में कई ट्रस्टी विदेश में हैं जिसके कारण एनआरआई जैनियों का अच्छा खासा पूंजी निवेश यहां के मंदिरों एवं धर्मशालाओं में हो रहा है. हाल के दिनों में गुणायतन, तलेटी क्षेत्र, कुंद-कुंद, सौरभांचल, बुंदेलखंड, तनमोदय, शांतिसागरधाम जैसे भव्य एवं आकर्षक मंदिर का निर्माण तेजी से किया जा रहा है. गुणायतन और तलेटी तीर्थ क्षेत्र मंदिर का निर्माण आज से पांच-छह वर्ष पूर्व शुरू किया गया था और अब भी जारी है. बताया जा रहा है कि इसके निर्माण कार्य में अभी भी लगभग चार-पांच साल और लगेंगे. रिपोर्ट : राकेश सिन्हा, गिरिडीह.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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4 जून। विराट कोहली चोटिल हो जाने के कारण काउंटी क्रिकेट में खेल नहीं पाए लेकिन उनके साथी खिलाड़ी खासकर इशांत शर्मा और पुजारा ने काउंटी क्रिकेट में कमाल का परफॉर्मेंस कर हर किसी का दिल जीत लिया।
अभी हाल ही में इशांत शर्मा ने काउंटी क्रिकेट में लंदन रॉयल वनडे कप में उन्होंने अपनी गेंदबाजी के ऐसा कहर ढ़ाया कि हर कोई चकित रह गया। इशांत शर्मा ने इस वनडे टूर्नामेंट में अपनी स्विंग गेंदबाजी से कहर बरपा रखा है।
इस समय इशांत शर्मा ससेक्स के लिए काउंटी क्रिकेट खेल रहे हैं और ग्लेमोर्गन के खिलाफ मैच में निकोलस सेल्मन को क्लीन बोल्ड कर दिया। इस मैच में इशांत शर्मा ने दो विकेट हासिल किए लेकिन अपनी गेंदबाजी से स्विंग गेंदबाजी का जो नजरा पेश किया उससे हर कोई हैरान रह गया है।
गौरतलब है इशांत शर्मा को आईपीएल 2018 में किसी भी फ्रेंचाइजी ने नहीं खरीदा था लेकिन काउंटी क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी से जलवा बिखेरकर जता दिया कि गेंदबाजी के माकूल माहौल मिले तो गजब ढ़ा सकते हैं।
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चार जून। विराट कोहली चोटिल हो जाने के कारण काउंटी क्रिकेट में खेल नहीं पाए लेकिन उनके साथी खिलाड़ी खासकर इशांत शर्मा और पुजारा ने काउंटी क्रिकेट में कमाल का परफॉर्मेंस कर हर किसी का दिल जीत लिया। अभी हाल ही में इशांत शर्मा ने काउंटी क्रिकेट में लंदन रॉयल वनडे कप में उन्होंने अपनी गेंदबाजी के ऐसा कहर ढ़ाया कि हर कोई चकित रह गया। इशांत शर्मा ने इस वनडे टूर्नामेंट में अपनी स्विंग गेंदबाजी से कहर बरपा रखा है। इस समय इशांत शर्मा ससेक्स के लिए काउंटी क्रिकेट खेल रहे हैं और ग्लेमोर्गन के खिलाफ मैच में निकोलस सेल्मन को क्लीन बोल्ड कर दिया। इस मैच में इशांत शर्मा ने दो विकेट हासिल किए लेकिन अपनी गेंदबाजी से स्विंग गेंदबाजी का जो नजरा पेश किया उससे हर कोई हैरान रह गया है। गौरतलब है इशांत शर्मा को आईपीएल दो हज़ार अट्ठारह में किसी भी फ्रेंचाइजी ने नहीं खरीदा था लेकिन काउंटी क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी से जलवा बिखेरकर जता दिया कि गेंदबाजी के माकूल माहौल मिले तो गजब ढ़ा सकते हैं।
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न्यूयॉर्कः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यात्रा प्रतिबंध के विरोध में लंदन और पेरिस से लेकर न्यूयॉर्क और वाशिंगटन की सड़कों पर हजारों लोग उमड़ पडे। इससे पहले एक अमेरिकी संघीय जज ने भी इस प्रतिबंध को स्थगित कर दिया था। प्रतिबंध के विरोध में सबसे बड़ा प्रदर्शन ब्रिटेन की राजधानी में हुआ, जहां करीब 10,000 लोगों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। प्रदर्शन में टेरीजा मे :शेम ऑन यू का नारा ब्रिटेन की प्रधानमंत्री की ओर से अमेरिकी नेता को दिए गए समर्थन की निन्दा करते हुए लगाया जा रहा था।
- 'ईरान आंतकवाद का सबसे बड़ा सरकारी प्रायोजक'
अमेरिकी राष्ट्रपति ने 27 जनवरी को जारी किए अपने शासकीय आदेश में सात मुस्लिम बहुल देशों ईरान, इराक, लीबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन के नागरिकों के अमेरिका आने पर 90 दिनों के लिए रोक लगा दी थी। न्यूयॉर्क में भी कल ट्रंप के आदेश के खिलाफ 3,000 लोगों ने प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता और समर्थक ऐतिहासिक स्टोनवॉल इन के बाहर जमा होकर प्रदर्शन कर रहे थे। वहीं वाशिंगटन में सैकड़ों लोगों ने एकजुटता दिखाने के लिए व्हाइट हाउस से लेकर कैपिटोल हिल तक प्रदर्शन किया।
ब्रिटेन में 18 लाख लोगों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर किया। इस याचिका में कहा गया है कि ट्रंप को आधिकारिक यात्रा पर नहीं बुलाया जाना चाहिए क्योंकि इससे महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का अपमान होगा। यूरोप में करीब 1,000 लोगों ने पेरिस और बर्लिन की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया।
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न्यूयॉर्कः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यात्रा प्रतिबंध के विरोध में लंदन और पेरिस से लेकर न्यूयॉर्क और वाशिंगटन की सड़कों पर हजारों लोग उमड़ पडे। इससे पहले एक अमेरिकी संघीय जज ने भी इस प्रतिबंध को स्थगित कर दिया था। प्रतिबंध के विरोध में सबसे बड़ा प्रदर्शन ब्रिटेन की राजधानी में हुआ, जहां करीब दस,शून्य लोगों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। प्रदर्शन में टेरीजा मे :शेम ऑन यू का नारा ब्रिटेन की प्रधानमंत्री की ओर से अमेरिकी नेता को दिए गए समर्थन की निन्दा करते हुए लगाया जा रहा था। - 'ईरान आंतकवाद का सबसे बड़ा सरकारी प्रायोजक' अमेरिकी राष्ट्रपति ने सत्ताईस जनवरी को जारी किए अपने शासकीय आदेश में सात मुस्लिम बहुल देशों ईरान, इराक, लीबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन के नागरिकों के अमेरिका आने पर नब्बे दिनों के लिए रोक लगा दी थी। न्यूयॉर्क में भी कल ट्रंप के आदेश के खिलाफ तीन,शून्य लोगों ने प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता और समर्थक ऐतिहासिक स्टोनवॉल इन के बाहर जमा होकर प्रदर्शन कर रहे थे। वहीं वाशिंगटन में सैकड़ों लोगों ने एकजुटता दिखाने के लिए व्हाइट हाउस से लेकर कैपिटोल हिल तक प्रदर्शन किया। ब्रिटेन में अट्ठारह लाख लोगों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर किया। इस याचिका में कहा गया है कि ट्रंप को आधिकारिक यात्रा पर नहीं बुलाया जाना चाहिए क्योंकि इससे महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का अपमान होगा। यूरोप में करीब एक,शून्य लोगों ने पेरिस और बर्लिन की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया।
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सोफा के साथ रखे जाने वाले पिलोज और कुशंस वाइब्रेंट कलर्स के होने चाहिए। उन्हें सोफा कवर यादीवान सैट के साथ मैच करने की कोशिश नहीं करें।
सोफा पर हमेशा एक से अधिक पिलोज या कुशंस का सैट रखें। एक सैट परंपरागत फीलिंग देता है।
आप अलग लुक के लिए इनका आकार भी बदल सकते हैं। कुशंस गोल, वर्गाकार या आयताकार हो सकते हैं।
आजकल मार्केट में बड़े आकार के कुशंस भी अवेलेबल हैं। आप इन्हें जमीन पर पाइल अप कर सकते हैं और इन पर बैठ भी सकते हैं।
कुशंस के साथ साइड पिलोज का इस्तेमाल भी आपके घर को नया लुक देगा। ये परंपरागत तौर पर बेलनाकार होते हैं।
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सोफा के साथ रखे जाने वाले पिलोज और कुशंस वाइब्रेंट कलर्स के होने चाहिए। उन्हें सोफा कवर यादीवान सैट के साथ मैच करने की कोशिश नहीं करें। सोफा पर हमेशा एक से अधिक पिलोज या कुशंस का सैट रखें। एक सैट परंपरागत फीलिंग देता है। आप अलग लुक के लिए इनका आकार भी बदल सकते हैं। कुशंस गोल, वर्गाकार या आयताकार हो सकते हैं। आजकल मार्केट में बड़े आकार के कुशंस भी अवेलेबल हैं। आप इन्हें जमीन पर पाइल अप कर सकते हैं और इन पर बैठ भी सकते हैं। कुशंस के साथ साइड पिलोज का इस्तेमाल भी आपके घर को नया लुक देगा। ये परंपरागत तौर पर बेलनाकार होते हैं।
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भाग I-खण्ड 1]
भारत का राजपत्र, दिसम्बर 17, 2011 (अंग्रहायण 26, 1933)
दिनांक 08.05.2009 को शाम के समय सूचना प्राप्त हुई कि लश्कर-ए-तैयबा का डिवीजनल कमांडर (पाक ) मोहम्मद इशाक (सलामतुल्ला) कोड अबु सुमना पुत्र मोहम्मद अरशद निवासी साइवाल पंजाब स्थानीय आतंकवादी बरकत अली कोड यासिर पुत्र अब्दुल जबर नाइक निवासी चितरीन के साथ कुछ विविलियनों को मारने के इरादे से दिफा-ढर दशमन गाँव में घुस गया है। इस पर, आतंकवादियों का खात्मा करने के लिए डोडा मुख्यालय के उप पुलिस अधीक्षक मुख्यालय की सहायता से श्री प्रभात सिंह, एस एस पी डोडा ने एक अभियान की योजना बनाई और अभियान शुरू कर दिया। पुलिस और सी आर पी एफ / सेना ने गाँव की घेराबंदी कर ली। आगे बढ़ते सैन्य-दलों पर छिपे हुए आतंकवादियों ने घातक हथियारों से भारी गोलीबारी शुरू कर दी जिसका पुलिस सैन्य दल द्वारा प्रभावकारी जवाब दिया गया और भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई जब पुलिस पार्टी आतंकवादियों के छिपने के विशेष स्थान के पास पहुँची, तब आतंकवादियों ने पुलिस पार्टी पर भारी गोलीबारी की और 2-3 हथगोले भी फेंके। पुलिस कार्मिक इसमें चमत्कारी रूप से बच गए। पुलिस पार्टी ने आतंकवादियों को समाप्त करने के लिए पोजीशन ले ली। एस एस पी डोडा श्री प्रभात सिंह ने पुलिस पार्टी को तत्काल पाँच विभिन्न समूहों में बाँट दिया। एस एस पी का पहला और मुख्य कर्तव्य आतंकवादियों द्वारा बंधक बनाए गए लोगों को बचाना था। आतंकवादियों को आत्मसमर्पण करने और बंधकों को रिहा करने की चेतावनी दी गई लेकिन इसकी बजाय उन्होंने पुलिस पार्टी पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। भारी गोलीबारी और हथगोले / अश्रु गैस के गोले फेंकने के बाद एस एस पी डोडा बंधकों को मुक्त कराने में सफल हुए में और इसके बाद भीषण आक्रमण शुरू किया गया। आतंकवादियों से पुनः आत्मसमर्पण की चेतावनी दी गई किन्तु इसकी बजाय उन्होंने एस एस पी डोड़ा के नेतृत्व वाली अग्रणी पार्टी पर ए के बन्दूकों से गोलीबारी शुरू कर दी और 02 हथगोले भी फेंके। इस प्रक्रण में, मकान में आग लग गई और आतंकवादी अपने छिपने के स्थान से बाहर कूद पड़े और श्री प्रभात सिंह, एस एस पी को मारने के गंभीर प्रयत्न किए लेकिन अधिकारी ने गोलीबारी का बिलकुल पास से जवाब दिया और एक आतंकवादी को मार गिराया । इसी बीच, हेड कांस्टेबल गुरमीत सिंह उस स्थान पर रेंगकर पहुंच गए जहाँ से दूसरे आतंकवादी द्वारा लगातार गोली चलाई जा रही थी और उसे घटनास्थल पर ही मार गिराया।
इस मुठभेड़ में श्री गुरमीत सिंह, हेड कांस्टेबल ने अदम्य वीरता, साहस और उच्चकोटि की कर्तव्यपरायणता का परिचय दिया।
यह पुरस्कार, पुलिस पदक नियमावली के नियम 4 (i) के अंतर्गत वीरता के लिए दिया जा रहा है तथा फलस्वरुप इसके साथ नियम 5 के अंतर्गत विशेष भत्ता भी दिनांक 09.05.2009 से दिया जाएगा।
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भाग I-खण्ड एक] भारत का राजपत्र, दिसम्बर सत्रह, दो हज़ार ग्यारह दिनांक आठ.पाँच.दो हज़ार नौ को शाम के समय सूचना प्राप्त हुई कि लश्कर-ए-तैयबा का डिवीजनल कमांडर मोहम्मद इशाक कोड अबु सुमना पुत्र मोहम्मद अरशद निवासी साइवाल पंजाब स्थानीय आतंकवादी बरकत अली कोड यासिर पुत्र अब्दुल जबर नाइक निवासी चितरीन के साथ कुछ विविलियनों को मारने के इरादे से दिफा-ढर दशमन गाँव में घुस गया है। इस पर, आतंकवादियों का खात्मा करने के लिए डोडा मुख्यालय के उप पुलिस अधीक्षक मुख्यालय की सहायता से श्री प्रभात सिंह, एस एस पी डोडा ने एक अभियान की योजना बनाई और अभियान शुरू कर दिया। पुलिस और सी आर पी एफ / सेना ने गाँव की घेराबंदी कर ली। आगे बढ़ते सैन्य-दलों पर छिपे हुए आतंकवादियों ने घातक हथियारों से भारी गोलीबारी शुरू कर दी जिसका पुलिस सैन्य दल द्वारा प्रभावकारी जवाब दिया गया और भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई जब पुलिस पार्टी आतंकवादियों के छिपने के विशेष स्थान के पास पहुँची, तब आतंकवादियों ने पुलिस पार्टी पर भारी गोलीबारी की और दो-तीन हथगोले भी फेंके। पुलिस कार्मिक इसमें चमत्कारी रूप से बच गए। पुलिस पार्टी ने आतंकवादियों को समाप्त करने के लिए पोजीशन ले ली। एस एस पी डोडा श्री प्रभात सिंह ने पुलिस पार्टी को तत्काल पाँच विभिन्न समूहों में बाँट दिया। एस एस पी का पहला और मुख्य कर्तव्य आतंकवादियों द्वारा बंधक बनाए गए लोगों को बचाना था। आतंकवादियों को आत्मसमर्पण करने और बंधकों को रिहा करने की चेतावनी दी गई लेकिन इसकी बजाय उन्होंने पुलिस पार्टी पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। भारी गोलीबारी और हथगोले / अश्रु गैस के गोले फेंकने के बाद एस एस पी डोडा बंधकों को मुक्त कराने में सफल हुए में और इसके बाद भीषण आक्रमण शुरू किया गया। आतंकवादियों से पुनः आत्मसमर्पण की चेतावनी दी गई किन्तु इसकी बजाय उन्होंने एस एस पी डोड़ा के नेतृत्व वाली अग्रणी पार्टी पर ए के बन्दूकों से गोलीबारी शुरू कर दी और दो हथगोले भी फेंके। इस प्रक्रण में, मकान में आग लग गई और आतंकवादी अपने छिपने के स्थान से बाहर कूद पड़े और श्री प्रभात सिंह, एस एस पी को मारने के गंभीर प्रयत्न किए लेकिन अधिकारी ने गोलीबारी का बिलकुल पास से जवाब दिया और एक आतंकवादी को मार गिराया । इसी बीच, हेड कांस्टेबल गुरमीत सिंह उस स्थान पर रेंगकर पहुंच गए जहाँ से दूसरे आतंकवादी द्वारा लगातार गोली चलाई जा रही थी और उसे घटनास्थल पर ही मार गिराया। इस मुठभेड़ में श्री गुरमीत सिंह, हेड कांस्टेबल ने अदम्य वीरता, साहस और उच्चकोटि की कर्तव्यपरायणता का परिचय दिया। यह पुरस्कार, पुलिस पदक नियमावली के नियम चार के अंतर्गत वीरता के लिए दिया जा रहा है तथा फलस्वरुप इसके साथ नियम पाँच के अंतर्गत विशेष भत्ता भी दिनांक नौ.पाँच.दो हज़ार नौ से दिया जाएगा।
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- #IplShah Rukh Khan On Rinku Singh: 'रिंकू सिंह बच्चा नहीं बाप है', जानिए शाहरुख खान ने क्यों कहा ऐसा?
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IPL 2022: KKR की शानदार जीत के बाद शाहरुख ने क्यों और किससे कहा- 'मैं आपसे गले मिलना चाहता हूं'
नई दिल्ली, 07 अप्रैल। आईपीएल 2022 का रोमांच शबाब पर है। इस सीजन के 14वें मैच में केकेआर ने मुंबई इंडियंस को 5 विकेट से पटखनी दे दी। इस रोमांचकारी मैच में मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 161 रन बनाए थे लेकिन कोलकाता ने जीत का लक्ष्य मात्र 16 ओवर में ही हासिल कर लिया लेकिन जब मुंबई ने स्टार आंद्रे रसेल को आउट किया तो लगने लगा था कि केकेआर के लिए जीत आसान नहीं होने वाली है लेकिन पैट कमिंस ने अपने शानदार गेम से रोहित शर्मा की टीम के अरमानों पर पानी फेर दिया।
आपको बता दें कि पैट कमिंस ने 15 गेंद पर 56 रनों की नाबाद पारी खेलकर हर किसी का मन मोह लिया। टीम की इस जीत के बाद आंद्रे रसेल ने पैट कमिंस के चारों और बड़े ही मजेदार ढंग से पूरे मैदान पर डांस किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
उनके इस मोहक नृत्य को देखकर टीम के सहमालिक शाहरुख खान भी मोहित हो गए और उन्होंने भी रसेल के वीडियो को शेयर करते हुए इतनी मजेदार बात कही, जो कि इस वक्त सोशल मीडिया पर सुर्खियां बन गई है।
'मैं आपके गले लगना चाहता हूं'
शाहरुख ने Tweet किया-'पेट कमिंस में आपके साथ आंद्रे रसैल की तरह डांस करना चाहता हूं साथ ही जिस प्रकार पूरी टीम आपके गले मिली वैसे में आपके गले लगना चाहता हूं। टीम ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और क्या ही कहने को बचा है। "'PAT' DIYE CHAKKE! ! ! '
शाहरुख खान ने अंत में पंजाबी डायलॉग 'चक दे फटे' को रूपांतरित करके पेट कमिंस की तारीफ में लिखा की "पेट दिए छक्के"। अब आप खुद सोचिए किंग ऑफ रोमांस के हर कोई गले मिलना चाहता है,ऐसे में वो अगर किसी से कहें कि वो किसी को गले लगाना चाहते हैं तो जाहिर सी बात है वो इंसान तो काफी खुशी का अनुभव करेगा। कुछ ऐसा ही हाल पेट कमिंस का भी दिखा।
उन्होंने खुद शाहरुख के इस ट्वीट को Smile ईमोजी के साथ Re-tweet किया है, जो कि वायरल हो गया है।
आपको बता दें कि कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम के लिये इस सीजन पहली बार खेल रहे पैट कमिंस ने ना केवल इस मैच में शानदार रन बनाए बल्कि उन्होंने कई रिकॉर्ड भी अपने नाम किए। इस जीत के बाद ही केकेआर की टीम आईपीएल के चार्ट में नंबर वन पर पहुंच गई है।
'पांडव वन' जहां प्राकृति 5 हजार साल से कर रही 12 शिवलिंग का 365 दिन 'दिव्य अभिषेक'
Parliament Monsoon Session 20 जुलाई से, एक दिन पहले NDA फ्लोर लीडर्स की बैठक, प्रह्लाद जोशी ने क्या बताया?
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- #IplShah Rukh Khan On Rinku Singh: 'रिंकू सिंह बच्चा नहीं बाप है', जानिए शाहरुख खान ने क्यों कहा ऐसा? - #IplVirender Sehwag: 'IPL में ऑलराउंडर्स महंगे बिकते हैं', जानिए 'मुल्तान के सुल्तान' ने क्यों कहा ऐसा? IPL दो हज़ार बाईस: KKR की शानदार जीत के बाद शाहरुख ने क्यों और किससे कहा- 'मैं आपसे गले मिलना चाहता हूं' नई दिल्ली, सात अप्रैल। आईपीएल दो हज़ार बाईस का रोमांच शबाब पर है। इस सीजन के चौदहवें मैच में केकेआर ने मुंबई इंडियंस को पाँच विकेट से पटखनी दे दी। इस रोमांचकारी मैच में मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए एक सौ इकसठ रन बनाए थे लेकिन कोलकाता ने जीत का लक्ष्य मात्र सोलह ओवर में ही हासिल कर लिया लेकिन जब मुंबई ने स्टार आंद्रे रसेल को आउट किया तो लगने लगा था कि केकेआर के लिए जीत आसान नहीं होने वाली है लेकिन पैट कमिंस ने अपने शानदार गेम से रोहित शर्मा की टीम के अरमानों पर पानी फेर दिया। आपको बता दें कि पैट कमिंस ने पंद्रह गेंद पर छप्पन रनों की नाबाद पारी खेलकर हर किसी का मन मोह लिया। टीम की इस जीत के बाद आंद्रे रसेल ने पैट कमिंस के चारों और बड़े ही मजेदार ढंग से पूरे मैदान पर डांस किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उनके इस मोहक नृत्य को देखकर टीम के सहमालिक शाहरुख खान भी मोहित हो गए और उन्होंने भी रसेल के वीडियो को शेयर करते हुए इतनी मजेदार बात कही, जो कि इस वक्त सोशल मीडिया पर सुर्खियां बन गई है। 'मैं आपके गले लगना चाहता हूं' शाहरुख ने Tweet किया-'पेट कमिंस में आपके साथ आंद्रे रसैल की तरह डांस करना चाहता हूं साथ ही जिस प्रकार पूरी टीम आपके गले मिली वैसे में आपके गले लगना चाहता हूं। टीम ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और क्या ही कहने को बचा है। "'PAT' DIYE CHAKKE! ! ! ' शाहरुख खान ने अंत में पंजाबी डायलॉग 'चक दे फटे' को रूपांतरित करके पेट कमिंस की तारीफ में लिखा की "पेट दिए छक्के"। अब आप खुद सोचिए किंग ऑफ रोमांस के हर कोई गले मिलना चाहता है,ऐसे में वो अगर किसी से कहें कि वो किसी को गले लगाना चाहते हैं तो जाहिर सी बात है वो इंसान तो काफी खुशी का अनुभव करेगा। कुछ ऐसा ही हाल पेट कमिंस का भी दिखा। उन्होंने खुद शाहरुख के इस ट्वीट को Smile ईमोजी के साथ Re-tweet किया है, जो कि वायरल हो गया है। आपको बता दें कि कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम के लिये इस सीजन पहली बार खेल रहे पैट कमिंस ने ना केवल इस मैच में शानदार रन बनाए बल्कि उन्होंने कई रिकॉर्ड भी अपने नाम किए। इस जीत के बाद ही केकेआर की टीम आईपीएल के चार्ट में नंबर वन पर पहुंच गई है। 'पांडव वन' जहां प्राकृति पाँच हजार साल से कर रही बारह शिवलिंग का तीन सौ पैंसठ दिन 'दिव्य अभिषेक' Parliament Monsoon Session बीस जुलाई से, एक दिन पहले NDA फ्लोर लीडर्स की बैठक, प्रह्लाद जोशी ने क्या बताया?
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डॉ० सुधीन्द्र, एम० ए०, पी-एच० डी०
तुलसी का भक्ति-दर्शन
तुलसीदाम, सूरदास, कबीर और मीरा हिन्दी साहित्य के भक्त कवियों मे ऊँचे स्थान के अधिकारी है। उन्होंने जिस काव्यनिधि का दान हिन्दी भाषा को दिया है उसे भाव-लोक और विषयक्षेत्र की दृष्टि से भक्ति काव्य कहा जाता है। भक्ति के साथ सगुण और साकार ईश्वर की उपासना का अर्थ जुड़ा हुआ है इसलिए निर्गुण और निराकार की उपासना को इसमें सम्मिलित करना आपत्तिजनक हो सकता है । इस दृष्टि से भक्ति-काव्य के स्थान पर धार्मिक काव्य का प्रयोग करना अधिक न्यायसंगत है। धार्मिक काव्य में निर्गुण और सगुण दोनो रूपो के ईश्वर की निराकार और साकार उपासना का विवेचन, अनुशीलन और निरूपण करनेवाली कविता का समावेश हो जाता है । धार्मिक कविता के विशाल क्रोड़ में निर्गुण और सगुण दोनो प्रकार की कविता समाविष्ट हो जाती है।
तुलसीदास एक भक्त थे, सगुण ईश्वर के उपासक । वे निर्गुण और निराकार ईश्वर की उपासना करनेवाले 'सन्त' नहीं थे जैसे कबीर और जायसी । इस प्रकार तुलसीदास उम परम्परा मे है जो निर्गुण सम्प्रदाय की परम्परा से भिन्न है। वे राम के भक्त थे; उनका राम परब्रह्म परमेश्वर था, अवतार था। यह ठीक है कि 'राम' शब्द हिन्दी के धार्मिक काव्य मे भिन्नभिन्न अर्थ और संसर्गों ( associations ) का सूचक है - कबीर के आराध्य भी राम थे और तुलसीदास के आराध्य भी। परंतु जहाँ कबीर के राम सब से ऊँचे स्थान के अधिकारी निर्गुण ब्रह्म है वहाँ तुलसी के राम निर्गुण और सगुण रूपधारी परब्रह्म परमेश्वर के साकार रूप वा अवतार है । दशरथ पुत्र ( दाशरथि ) राम में उन्होंने अपने राम की यह कल्पना, भावना और धारणा केंद्रित कर दी थी। उसी ब्रह्म का पार्थिव रूप राम किस प्रकार लोक-लीला करता है और भक्तों के मन को लुभाता है तथा गाथ ही लोकमर्यादा और लोकनीति का पालन और प्रतिष्ठा करता है, यह दिखाना तुलसीदास का उद्देश्य था ।
तुलसी- दर्शन
तुलसी के भगवान् निर्गुण और सगुण, अखण्ड और अनन्त, अरूप और अनाम, अज और अनादि सच्चिदानन्द ब्रह्म हैं ।
एक अनीह अरूप अनामा । अज सच्चिदानन्द परषामा ॥
अगुण अखण्ड अनन्त अनादी ।
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डॉशून्य सुधीन्द्र, एमशून्य एशून्य, पी-एचशून्य डीशून्य तुलसी का भक्ति-दर्शन तुलसीदाम, सूरदास, कबीर और मीरा हिन्दी साहित्य के भक्त कवियों मे ऊँचे स्थान के अधिकारी है। उन्होंने जिस काव्यनिधि का दान हिन्दी भाषा को दिया है उसे भाव-लोक और विषयक्षेत्र की दृष्टि से भक्ति काव्य कहा जाता है। भक्ति के साथ सगुण और साकार ईश्वर की उपासना का अर्थ जुड़ा हुआ है इसलिए निर्गुण और निराकार की उपासना को इसमें सम्मिलित करना आपत्तिजनक हो सकता है । इस दृष्टि से भक्ति-काव्य के स्थान पर धार्मिक काव्य का प्रयोग करना अधिक न्यायसंगत है। धार्मिक काव्य में निर्गुण और सगुण दोनो रूपो के ईश्वर की निराकार और साकार उपासना का विवेचन, अनुशीलन और निरूपण करनेवाली कविता का समावेश हो जाता है । धार्मिक कविता के विशाल क्रोड़ में निर्गुण और सगुण दोनो प्रकार की कविता समाविष्ट हो जाती है। तुलसीदास एक भक्त थे, सगुण ईश्वर के उपासक । वे निर्गुण और निराकार ईश्वर की उपासना करनेवाले 'सन्त' नहीं थे जैसे कबीर और जायसी । इस प्रकार तुलसीदास उम परम्परा मे है जो निर्गुण सम्प्रदाय की परम्परा से भिन्न है। वे राम के भक्त थे; उनका राम परब्रह्म परमेश्वर था, अवतार था। यह ठीक है कि 'राम' शब्द हिन्दी के धार्मिक काव्य मे भिन्नभिन्न अर्थ और संसर्गों का सूचक है - कबीर के आराध्य भी राम थे और तुलसीदास के आराध्य भी। परंतु जहाँ कबीर के राम सब से ऊँचे स्थान के अधिकारी निर्गुण ब्रह्म है वहाँ तुलसी के राम निर्गुण और सगुण रूपधारी परब्रह्म परमेश्वर के साकार रूप वा अवतार है । दशरथ पुत्र राम में उन्होंने अपने राम की यह कल्पना, भावना और धारणा केंद्रित कर दी थी। उसी ब्रह्म का पार्थिव रूप राम किस प्रकार लोक-लीला करता है और भक्तों के मन को लुभाता है तथा गाथ ही लोकमर्यादा और लोकनीति का पालन और प्रतिष्ठा करता है, यह दिखाना तुलसीदास का उद्देश्य था । तुलसी- दर्शन तुलसी के भगवान् निर्गुण और सगुण, अखण्ड और अनन्त, अरूप और अनाम, अज और अनादि सच्चिदानन्द ब्रह्म हैं । एक अनीह अरूप अनामा । अज सच्चिदानन्द परषामा ॥ अगुण अखण्ड अनन्त अनादी ।
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"इस दासी को छोड़ो । हमको अपने सारे काम अपने नियमों में रह कर ही करने चाहिये जैसे हम सब अपना खाना एक ही वर्तन में बनाते हैं। तुम इसको छोड़ दो । इसको बहुत ज़्यादा बिगाड़ने की जरूरत नहीं है ।
पर बैरन क्योंकि बहुत ही दयावान था वह उससे पूछता ही रहा कि वह उसके लिये मेले से क्या ले कर आये ।
आखिर उस बच्ची ने जवाब दिया
"मुझे एक गुड़िया चाहिये, एक चाकू चाहिये और थोड़ा सा प्यूमिस पत्थर¨ चाहिये । और अगर आप यह लाना भूल जायें तो आपके रास्ते में जो नदी पड़ती है आप उसे पार न कर सकें । यह सुन कर बैरन चला गया । वहाँ जा कर उसने जिस जिसके लिये जो भी सामान खरीदना था खरीद लिया पर वह वह सामान खरीदना भूल गया जो उसकी बहिन की लड़की ने उसको लाने के लिये कहा था ।
जब घर आते समय वह नदी के किनारे आया तो नदी ने पत्थर फेंकने शुरू कर दिये और वह पहाडों से पेड़ बहा कर ले जाने लगी। यह देख कर बैरन डर गया और आश्चर्य में पड़ गया ।
29 Pumice stone is lighter than the water and thus can float on it. It is believed that Shree Raam built His bridge to Lankaa by those stones only. See its picture above.
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"इस दासी को छोड़ो । हमको अपने सारे काम अपने नियमों में रह कर ही करने चाहिये जैसे हम सब अपना खाना एक ही वर्तन में बनाते हैं। तुम इसको छोड़ दो । इसको बहुत ज़्यादा बिगाड़ने की जरूरत नहीं है । पर बैरन क्योंकि बहुत ही दयावान था वह उससे पूछता ही रहा कि वह उसके लिये मेले से क्या ले कर आये । आखिर उस बच्ची ने जवाब दिया "मुझे एक गुड़िया चाहिये, एक चाकू चाहिये और थोड़ा सा प्यूमिस पत्थर¨ चाहिये । और अगर आप यह लाना भूल जायें तो आपके रास्ते में जो नदी पड़ती है आप उसे पार न कर सकें । यह सुन कर बैरन चला गया । वहाँ जा कर उसने जिस जिसके लिये जो भी सामान खरीदना था खरीद लिया पर वह वह सामान खरीदना भूल गया जो उसकी बहिन की लड़की ने उसको लाने के लिये कहा था । जब घर आते समय वह नदी के किनारे आया तो नदी ने पत्थर फेंकने शुरू कर दिये और वह पहाडों से पेड़ बहा कर ले जाने लगी। यह देख कर बैरन डर गया और आश्चर्य में पड़ गया । उनतीस Pumice stone is lighter than the water and thus can float on it. It is believed that Shree Raam built His bridge to Lankaa by those stones only. See its picture above.
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हरियाणा में कोरोना वायरस के मामलों ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। हरियाणा के झज्जर में कोरोना वायरस के 10 मामले सामने आए हैं। इनमें से 9 मरीज सब्जी विक्रेता हैं, जिन्होंने हाल दिल्ली की यात्रा की है और एक मरीज अस्पताल में नर्स हैं। झज्जर जिले में कोरोना वायरस के कुल मामले 18 हैं।
इतनी बड़ी संख्या में सब्जीवालों में कोरोना मिलने से जिले में हड़कंप मच गया है। इसके चलते लोगों में डर का माहौल है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. रणदीप पुनिया ने बताया कि इनके संपर्क में आने वालों की तलाश की जा रही है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार को कोरोना वायरस को रोकने के लिए दिल्ली से लगी गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत की सभी सीमाओं को सील करने को जायज ठहराया था। मुख्यमंत्री खट्टर ने स्पष्ट रूप से कहा कि हम कोरोना वायरस को दिल्ली से हरियाणा में किसी भी कीमत पर नहीं घुसने देंगे। उन्होंने कहा कि आत्मसुरक्षा के लिए सख्ती करना आवश्यक है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है, क्योंकि जिंदगी जो शेष है, वही विशेष है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे इस बात का संतोष है कि हमने हरियाणा में कोरोना के संक्रमण को फैलने से काफी हद तक रोका है। हरियाणा में अभी कोरोना के केसों का डबलिंग टाइम 21 दिन है। उन्होंने कहा कि इसके लिए कोरोना के खिलाफ लड़ाई में शामिल सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी बधाई के पात्र हैं। सबने मिलकर ही कोरोना को फैलने से रोका है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान दी गई छूट को थोड़ा और बढ़ाने के विषय में विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी की गईं गाइडलाइन्स को राज्य सरकार द्वारा निरंतर फॉलो किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिकों को कतई परेशान होने की जरूरत नहीं है। सरकार श्रमिकों के लिए हर व्यवस्था करेगी।
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हरियाणा में कोरोना वायरस के मामलों ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। हरियाणा के झज्जर में कोरोना वायरस के दस मामले सामने आए हैं। इनमें से नौ मरीज सब्जी विक्रेता हैं, जिन्होंने हाल दिल्ली की यात्रा की है और एक मरीज अस्पताल में नर्स हैं। झज्जर जिले में कोरोना वायरस के कुल मामले अट्ठारह हैं। इतनी बड़ी संख्या में सब्जीवालों में कोरोना मिलने से जिले में हड़कंप मच गया है। इसके चलते लोगों में डर का माहौल है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणदीप पुनिया ने बताया कि इनके संपर्क में आने वालों की तलाश की जा रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार को कोरोना वायरस को रोकने के लिए दिल्ली से लगी गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत की सभी सीमाओं को सील करने को जायज ठहराया था। मुख्यमंत्री खट्टर ने स्पष्ट रूप से कहा कि हम कोरोना वायरस को दिल्ली से हरियाणा में किसी भी कीमत पर नहीं घुसने देंगे। उन्होंने कहा कि आत्मसुरक्षा के लिए सख्ती करना आवश्यक है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है, क्योंकि जिंदगी जो शेष है, वही विशेष है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे इस बात का संतोष है कि हमने हरियाणा में कोरोना के संक्रमण को फैलने से काफी हद तक रोका है। हरियाणा में अभी कोरोना के केसों का डबलिंग टाइम इक्कीस दिन है। उन्होंने कहा कि इसके लिए कोरोना के खिलाफ लड़ाई में शामिल सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी बधाई के पात्र हैं। सबने मिलकर ही कोरोना को फैलने से रोका है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान दी गई छूट को थोड़ा और बढ़ाने के विषय में विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी की गईं गाइडलाइन्स को राज्य सरकार द्वारा निरंतर फॉलो किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिकों को कतई परेशान होने की जरूरत नहीं है। सरकार श्रमिकों के लिए हर व्यवस्था करेगी।
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सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) में बुधवार सुबह करीब 30 साल की दो महिलाओं के प्रवेश करने की कोशिश के बाद फिर से हिंसा शुरू हो गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों महिलाओं को श्रद्धालुओं ने पम्बा (Pamba) के करीब रोक दिया. दोनों महिला पुलिस की सुरक्षा में मंदिर की ओर बढ़ रही थीं लेकिन 6-7 श्रद्धालुओं ने उन्हें बेस कैंप के पास ही रोक दिया और विरोध के कारण महिलाओं को बिना पूजा-अर्चना किए ही लौटना पड़ा. दोनों महिला सुरक्षित हैं और उन्हें निलाक्कल (Nilakkal) ले जाया गया है. इस घटना की खबर फैलते ही करीब 2000 श्रद्धालु पवित्र स्थल पर इकट्ठा हो गए. इसे देखते हुए हिंसा फैलने से रोकने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई. कुछ श्रद्धालुओं की पुलिस के साथ झड़प होने की भी खबरें हैं.
गौरतलब है कि सबरीमाला मंदिर में 50 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर केरल में माहौल शांतिपूर्ण नहीं रह पा रहा. 7 जनवरी तक हिंसा के मामलों में 1869 केस दर्ज किए जा चुके हैं जबकि 5769 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. मुख्यमंत्री पी. विजयन ने कहा था कि हर आयु वर्ग की महिलाओं को सबरीमला मंदिर में पूजा-अर्चना करने की इजाजत देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू कराना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि वह सबरीमला हिंसा के "संवैधानिक परिणामों" की धमकियों से डरकर घुटने नहीं टेकने वाले.
बता दें कि सबरीमाला मंदिर में 10-50 साल की आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पारंपरिक रूप से लगी रोक के खिलाफ आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश और पूजा की अनुमति दे दी थी. तब से मंदिर में प्रवेश को लेकर कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं. केरल सरकार के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने के निर्णय के बाद से श्रद्धालुओं ने सबरीमला मंदिर के पास व्यापक स्तर पर प्रदर्शन किए हैं.
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सबरीमाला मंदिर में बुधवार सुबह करीब तीस साल की दो महिलाओं के प्रवेश करने की कोशिश के बाद फिर से हिंसा शुरू हो गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों महिलाओं को श्रद्धालुओं ने पम्बा के करीब रोक दिया. दोनों महिला पुलिस की सुरक्षा में मंदिर की ओर बढ़ रही थीं लेकिन छः-सात श्रद्धालुओं ने उन्हें बेस कैंप के पास ही रोक दिया और विरोध के कारण महिलाओं को बिना पूजा-अर्चना किए ही लौटना पड़ा. दोनों महिला सुरक्षित हैं और उन्हें निलाक्कल ले जाया गया है. इस घटना की खबर फैलते ही करीब दो हज़ार श्रद्धालु पवित्र स्थल पर इकट्ठा हो गए. इसे देखते हुए हिंसा फैलने से रोकने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई. कुछ श्रद्धालुओं की पुलिस के साथ झड़प होने की भी खबरें हैं. गौरतलब है कि सबरीमाला मंदिर में पचास वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर केरल में माहौल शांतिपूर्ण नहीं रह पा रहा. सात जनवरी तक हिंसा के मामलों में एक हज़ार आठ सौ उनहत्तर केस दर्ज किए जा चुके हैं जबकि पाँच हज़ार सात सौ उनहत्तर लोगों को गिरफ्तार किया गया है. मुख्यमंत्री पी. विजयन ने कहा था कि हर आयु वर्ग की महिलाओं को सबरीमला मंदिर में पूजा-अर्चना करने की इजाजत देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू कराना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि वह सबरीमला हिंसा के "संवैधानिक परिणामों" की धमकियों से डरकर घुटने नहीं टेकने वाले. बता दें कि सबरीमाला मंदिर में दस-पचास साल की आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पारंपरिक रूप से लगी रोक के खिलाफ आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अट्ठाईस सितंबर को सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश और पूजा की अनुमति दे दी थी. तब से मंदिर में प्रवेश को लेकर कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं. केरल सरकार के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने के निर्णय के बाद से श्रद्धालुओं ने सबरीमला मंदिर के पास व्यापक स्तर पर प्रदर्शन किए हैं.
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प्रश्न 1 डीआईसीजीसी द्वारा किन बैंकों का बीमा किया जाता है?
वाणिज्य बैंकः भारत में कार्यरत विदेशी बैंकों की शाखाओं, स्थानीय क्षेत्र बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सहित सभी वाणिज्य बैंक का बीमा डीआईसीजीसी द्वारा किया जाता है।
सहकारी बैंकः राज्यों /संघ शासित क्षेत्रों में कार्य कर रहे सभी राज्य, मध्यवर्ती और प्राथमिक सहकारी बैंक, जिन्हें शहरी सहकारी बैंक भी कहा जाता है, के संबंधित राज्य/संघशासित क्षेत्र की सरकारों द्वारा रिज़र्व बैंक को यह अधिकार देने के लिए अपने सहकारी समिति अधिनियम को संशोधित किया गया है कि वह राज्यों /संघ शासित क्षेत्रों की समितियों के रजिस्ट्रार को आदेश दे सके कि किसी सहकारी बैंक का समापन कर दे अथवा इसकी प्रबंध समिति को अधिक्रमित करे और रजिस्ट्रार से अपेक्षित है कि वह रिज़र्व बैंक से लिखित पूर्व स्वीकृति के बिना किसी सहकारी बैंक के समापन, समामेलन या पुनर्निमाण के लिए कोई कार्रवाई न करें, जमा बीमा स्कीम के अंतर्गत आते हैं । वर्तमान में सभी सहकारी बैंक डीआईसीजीसी द्वारा बीमित किए जाते हैं।
डीआईसीजीसी द्वारा प्राथमिक सहकारी समितियों का बीमा नहीं किया जाता है।
प्रश्न 2 डीआईसीजीसी किसका बीमा करता है?
विदेशी सरकारों की जमाराशियां;
केंद्र/राज्य सरकारों की जमाराशियां;
अंतर बैंक जमाराशियां;
राज्य सहकारी बैंकों में रखी गई राज्य भूमि विकास बैंकों की जमाराशियां;
प्रश्न 3 डीआईसीजीसी द्वारा बीमा की जाने वाली अधिकतम जमाराशि क्या है?
बैंक के लाइसेंस रद्द करने/परिसमापन की तारीख तक अथवा समामेलन/विलय/पुनर्निर्माण स्कीम लागू होने की तारीख तक, प्रत्येक जमाकर्ता को किसी बैंक में समान अधिकार एवं क्षमता में रखे गए मूलधन और ब्याज दोनों के लिए अधिकतम रु 5,00,000 (पांच लाख रुपए) तक बीमा प्रदान किया जाता है।
प्रश्न 4 मुझे किस तरह पता चलेगा कि मेरा बैंक डीआईसीजीसी द्वारा बीमाकृत है या नहीं?
डीआईसीजीसी बैंकों को बीमाकृत बैंकों के रूप में पंजीकृत करते समय उन्हें मुद्रित पर्चे प्रदर्शित करने के लिए उपलब्ध कराता है जिसमें बीमाकृत बैकों के जमाकर्ताओं को निगम द्वारा दी जाने वाली बीमा सुरक्षा संबंधी जानकारी दी जाती है। किसी संदेह की स्थिति में जमाकर्ता इस संबंध में शाखा अधिकारी से पूछताछ कर सकता है।
प्रश्न 5 किसी बैंक की विभिन्न शाखाओं में एक व्यक्ति द्वारा रखी गई बीमाकृत जमाराशि की उच्चतम सीमा क्या है?
किसी बैंक की विभिन्न शाखाओं में रखी गई विभिन्न जमाराशियों को बीमा सुरक्षा कवर के प्रयोजन से जोड़ा जाता है और अधिकतम पाँच लाख रुपए तक भुगतान किया जाता है।
प्रश्न 6 क्या डीआईसीजीसी केवल खाते के मूलधन का बीमा करता है या मूलधन और उस पर उपचित ब्याज दोनों का?
डीआईसीजीसी मूलधन और ब्याज का अधिकतम पांच लाख रु. तक बीमा करता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति के खाते में 4,95,000 रु. मूलधन और उस पर उपचित ब्याज 4,000 रु है तो डीआईसीजीसी द्वारा बीमाकृत राशि 4,99,000 रु. है। यदि उस खाते में मूलधन पांच लाख है तो उस पर उपचित ब्याज का बीमा नहीं किया जाएगा, इसलिए नहीं कि यह राशि ब्याज है बल्कि इसलिए कि यह राशि बीमा सीमा से अधिक है।
प्रश्न 7 क्या किसी एक ही बैंक के विभिन्न खाते में निधियां जमा करने से जमा बीमा को बढ़ाया जा सकता है?
जमा बीमा निर्धारित करने से पहले एक ही बैंक में एक ही स्वामित्व के अंतर्गत रखी गई सभी निधियों को जोड़ा जाता है। यदि निधियां विभिन्न स्वामित्व वाली हैं अथवा अलग-अलग बैंकों में रखी गई हों फिर उनका अलग-अलग बीमा किया जाएगा।
प्रश्न 8 क्या विभिन्न बैंकों में रखी गई जमाराशियों का बीमा अलग -अलग किया जाता है?
हां। यदि आपकी जमाराशियां एक से अधिक बैंक में हैं तो जमा बीमा कवरेज की सीमा प्रत्येक बैंक के लिए अलग-अलग लागू होगी।
प्रश्न 9 यदि दो भिन्न-भिन्न बैंकों में मेरी निधियां हैं और दोनों बैंक एक ही दिन बंद हो जाते हैं तो क्या मेरी निधियों को एक साथ जोड़ा जाएगा या अलग -अलग बीमा किया जाएगा?
समापन तारीख पर विचार किए बिना प्रत्येक बैंक में आपकी निधियों का अलग-अलग बीमा किया जाएगा।
प्रश्न 10 समान अधिकार और क्षमता में और विभिन्न अधिकार और क्षमता में रखी गई जमाराशियों का अर्थ क्या है?
यदि कोई व्यक्ति बैंक की एक या अधिक शाखाओं में एक से अधिक जमा खाता खोलता है, उदाहरण के लिए, श्री एस.के. पंडित एक या एक से अधिक बचत/चालू खाता और एक या एक से अधिक सावधि/आवर्ती जमा खाते आदि खोलते हैं, इन सभी को एक ही क्षमता और एक ही अधिकार में धारित खाते के रूप में माना जाता है। इसलिए, इन सभी खातों में शेष राशि एकत्र की जाती है और बीमा कवर अधिकतम पांच लाख रुपये तक उपलब्ध है।
यदि श्री एस.के. पंडित बैंक की एक या एक से अधिक शाखाओं में एक फर्म के भागीदार या नाबालिग के अभिभावक या कंपनी के निदेशक या ट्रस्ट के ट्रस्टी या अपनी पत्नी श्रीमती के. ए. पंडित के साथ संयुक्त खाते के रूप में अन्य जमा खाते भी खोलते हैं, ऐसे खातों को अलग-अलग क्षमता और अलग-अलग अधिकार में माना जाता है। तदनुसार, ऐसे जमा खाते पर भी अलग से पांच लाख रुपये तक का बीमा कवर प्रदान किया जाएगा।
आगे यह भी स्पष्ट किया जाता है कि स्वामित्व वाली संस्था के नाम पर रखी गई जमाराशि जहां एक जमाकर्ता एकमात्र मालिक है और उसकी व्यक्तिगत क्षमता में रखी गई जमा राशि को एकत्रित किया जाता है और बीमा कवर अधिकतम पांच लाख रुपये तक उपलब्ध है।
उदाहरण :
।श्री.एस.के.पंडित (व्यक्तिगत)
।श्री.एस.के.पंडित (एबीसी एंड कं के भागीदार)
।श्री.एस.के.पंडित (मास्टर अजित के अभिभावक)
।श्री.एस.के.पंडित (निदेशक जे.के उद्योग लिमि.)
।श्री.एस.के.पंडित (श्रीमती के.ए.पंडित के साथ संयुक्त)
।संयुक्त खाते में रखी गई जमाराशियाँ (26 अप्रैल 2007 से संशोधित)
यदि किसी बैंक की एक अथवा उसकी कई शाखाओं में कई व्यक्तियों के एक या अधिक संयुक्त जमा खाते (बचत, चालू, आवर्ती अथवा मीयादी जमा खाता) हैं जैसे ए, बी और सी नाम के तीन व्यक्तियों के नाम से संयुक्त रूप से एक से अधिक संयुक्त जमा खाते हैं जहाँ इन सभी खातों में ये नाम इसी क्रम में प्रदर्शित हैं, तो इन सभी खातों को समान अधिकार तथा समान क्षमता वाला खाते माना जाएगा। तदनुसार, इन सभी खातों में रखी शेष राशि को रु.5 लाख तक की सीमा के अंतर्गत बीमित जमाराशि का निर्धारण करते समय जोड़/शामिल कर लिया जाएगा।
तथापि यदि व्यक्तियों द्वारा एक से अधिक संयुक्त खाते खोले जाते हैं और वहाँ इनके नाम उसी क्रम में नहीं लिखे गए हैं उदाहरण के लिए ए,बी और सी; सी, बी और ए; सी,ए और बी; ए, सी और बी अथवा व्यक्तियों के समूह में अंतर है जैसेः ए, बी और सी तथा ए, बी और डी तो इन संयुक्त खातों में रखी जमाराशि को विभिन्न क्षमता तथा विभिन्न अधिकार के अंतर्गत माना जाएगा। तदनुसार ऐसे प्रत्येक संयुक्त खाते, जहाँ पर नाम अलग क्रम में प्रदर्शित हैं अथवा अलग-अलग नाम हैं, के लिए पांच लाख रुपए तक का बीमा कवर उपलब्ध होगा।
।खाता (i)
(बचत अथवा चालू खाता)
।पहला खाता धारक - "ए"
दूसरा खाता धारक - "बी"
।खाता (ii)
।पहला खाता धारक - "ए"
दूसरा खाता धारक - "सी"
।खाता (iii)
।पहला खाता धारक - "बी"
दूसरा खाता धारक - "ए"
।बैंक की 'एक्स' शाखा में खाता (iv)
।पहला खाता धारक - "ए"
दूसरा खाता धारक - "बी"
।खाता (v)
।पहला खाता धारक - "बी"
दूसरा खाता धारक - "सी"
।खाता(vi) (आवर्ती अथवा मीयादी जमा)
।पहला खाता धारक - "ए"
दूसरा खाता धारक - "बी"
।इस खाते को खाता (i) के साथ जोड़ दिया जाएगा।
।बैंक की 'वाई' शाखा में खाता (vii)
।पहला खाता धारक - "ए"
दूसरा खाता धारक - "बी"
।इस खाते को खाता (iv) के साथ जोड़ दिया जाएगा।
।खाता (viii)
।पहला खाता धारक - "ए"
दूसरा खाता धारक - "बी"
प्रश्न 11 क्या बैंक जमाकर्ता द्वारा देय राशि की कटौती कर सकता है?
हाँ। बैंकों को यह अधिकार है कि वे कट ऑफ तिथि को जमा राशि में से अपनी देय राशि का समायोजन कर सकते हैं। जमा बीमा ऐसी देय राशियों के समायोजन के बाद उपलब्ध है।
प्रश्न 12 जमा बीमा की लागत का वहन कौन करता है?
जमा बीमा प्रीमियम पूर्णतः बीमाकृत बैंक द्वारा वहन किया जाता है।
प्रश्न 13 डीआईसीजीसी भुगतान करने के लिए कब जिम्मेदार होगा?
यदि कोई बैंक परिसमापन में जाता है, तो डीआईसीजीसी परिसमापक को दावा सूची प्राप्त होने की तारीख से दो महीने के भीतर प्रत्येक जमाकर्ता की पांच लाख रुपये तक की दावा राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। परिसमापक को प्रत्येक बीमित जमाकर्ता को उनकी दावा राशि के अनुरूप दावा राशि का वितरण करना होता है।
यदि एक बैंक का पुनर्निर्माण या समामेलन / दूसरे बैंक के साथ विलय किया जाता हैः डीआईसीजीसी संबंधित बैंक को जमा की पूरी राशि या उस समय लागू बीमा कवर की सीमा के बीच का अंतर, जो भी कम हो और पुनर्गठन / समामेलन योजना के तहत उसके द्वारा प्राप्त राशि को हस्तांतरिती बैंक / बीमित बैंक / हस्तांतरिती बैंक, जो भी हो, के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से दावा सूची की प्राप्ति की तारीख से दो महीने के भीतर भुगतान करता है।
प्रश्न 14 क्या डीआईसीजीसी विफल बैंकों के जमाकर्ताओं साथ सीधे व्यवहार करता है?
नहीं । किसी बैंक के परिसमापन की स्थिति में परिसमापक जमाकर्तावार दावा सूची तैयार करता है और संवीक्षा तथा भुगतान हेतु डीआईसीजीसी को प्रेषित करता है। डीआईसीजीसी परिसमापक को भुगतान करता है जो जमाकर्ताओं को भुगतान करने के लिए जिम्मेदार है। बैंकों के समामेलन/विलय की स्थिति में प्रत्येक जमाकर्ता को देय राशि का भुगतान अंतरिती बैंक को किया जाता है।
प्रश्न 15 क्या कोई बीमाकृत बैंक डीआईसीजीसी कवरेज से अलग हो सकते हैं?
नहीं। जमा बीमा स्कीम अनिवार्य है और कोई बैंक इससे अलग नहीं हो सकता है।
प्रश्न 16 क्या डीआईसीजीसी किसी बैंक का बीमा कवरेज समाप्त कर सकता है?
यदि बीमाकृत बैंक लगातार तीन अवधियों तक प्रीमियम का भुगतान करने में विफल रहता है तो निगम उसका पंजीकरण रद्द कर सकता है। प्रीमियम के भुगतान में चूक के लिए डीआईसीजीसी द्वारा किसी भी बैंक से अपना कवरेज वापस लेने की स्थिति में जनता को समाचार पत्रों के माध्यम से सूचित किया जाएगा। यदि बैंक को नई जमा राशि प्राप्त करने से प्रतिबंधित किया जाता है; या इसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया है या आरबीआई द्वारा लाइसेंस देने से इनकार कर दिया गया है; या इसे स्वेच्छा से या अनिवार्य रूप से समाप्त किया गया है; या यह बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 36ए(2) के अर्थ के तहत एक बैंकिंग कंपनी या सहकारी बैंक नहीं रह जाता है; या इसने अपनी सभी जमा देनदारियों को किसी अन्य संस्था को हस्तांतरित कर दिया है; या इसे किसी अन्य बैंक के साथ समामेलित किया गया है या किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा समझौता या व्यवस्था या पुनर्निर्माण की योजना को मंजूरी दी गई है और उक्त योजना नए जमा की स्वीकृति की अनुमति नहीं देती है, तो बीमित बैंक का पंजीकरण रद्द कर दिया जाता है। बैंक का पंजीकरण रद्द होने की स्थिति में, बैंक की जमा राशि, रद्द होने की तिथि तक बीमा द्वारा कवर की जाती है।
प्रश्न 17 पंजीकरण रद्द करने की स्थिति में बैंकों के प्रति निगम का क्या दायित्व है?
"बीमाकृत बैंकों" के परिसमापन आदि की स्थिति में अर्थात् ऐसे बैंक जिनका पंजीकरण निम्नलिखित कारणों से रद्द कर दिया गया हैः (क) भविष्य में और जमाराशियां स्वीकार करने से प्रतिबंधित किया हो अथवा (ख) जिसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया हो या यह पाये जाने पर कि लाइसेस नहीं दिया जा सकता है, उन बैंकों के प्रति जमा बीमा दायित्व है। इन मामलों में निगम का दायित्व बीमाकृत बैंक के रूप में बैंक का पंजीकरण रद्द किए जाने की तारीख तक जमाराशियों की सीमा तक है।
पंजीकरण रद्द किए गए अन्य बैंकों के परिसमापन आदि के संबंध में अर्थात ऐसे बैंक जिनका पंजीकरण प्रीमियम का भुगतान न करने अथवा डीआईसीजीसी अधिनियम, 1961 की धारा 2(जीजी) के आशय के अंतर्गत पात्र सहकारी बैंकों के रूप में कार्य करना बंद कर दिया हो तो निगम का कोई दायित्व नहीं है।
नोटिसः ऊपर दी गई जानकारी निगम की जमा बीमा योजना के मूल प्रावधानों से अवगत कराने के लिए है। यह जानकारी गैर-तकनीकी प्रकृति की है और और निक्षेप बीमा योजना का विधिक आशय प्रदर्शित नहीं करती है।
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प्रश्न एक डीआईसीजीसी द्वारा किन बैंकों का बीमा किया जाता है? वाणिज्य बैंकः भारत में कार्यरत विदेशी बैंकों की शाखाओं, स्थानीय क्षेत्र बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सहित सभी वाणिज्य बैंक का बीमा डीआईसीजीसी द्वारा किया जाता है। सहकारी बैंकः राज्यों /संघ शासित क्षेत्रों में कार्य कर रहे सभी राज्य, मध्यवर्ती और प्राथमिक सहकारी बैंक, जिन्हें शहरी सहकारी बैंक भी कहा जाता है, के संबंधित राज्य/संघशासित क्षेत्र की सरकारों द्वारा रिज़र्व बैंक को यह अधिकार देने के लिए अपने सहकारी समिति अधिनियम को संशोधित किया गया है कि वह राज्यों /संघ शासित क्षेत्रों की समितियों के रजिस्ट्रार को आदेश दे सके कि किसी सहकारी बैंक का समापन कर दे अथवा इसकी प्रबंध समिति को अधिक्रमित करे और रजिस्ट्रार से अपेक्षित है कि वह रिज़र्व बैंक से लिखित पूर्व स्वीकृति के बिना किसी सहकारी बैंक के समापन, समामेलन या पुनर्निमाण के लिए कोई कार्रवाई न करें, जमा बीमा स्कीम के अंतर्गत आते हैं । वर्तमान में सभी सहकारी बैंक डीआईसीजीसी द्वारा बीमित किए जाते हैं। डीआईसीजीसी द्वारा प्राथमिक सहकारी समितियों का बीमा नहीं किया जाता है। प्रश्न दो डीआईसीजीसी किसका बीमा करता है? विदेशी सरकारों की जमाराशियां; केंद्र/राज्य सरकारों की जमाराशियां; अंतर बैंक जमाराशियां; राज्य सहकारी बैंकों में रखी गई राज्य भूमि विकास बैंकों की जमाराशियां; प्रश्न तीन डीआईसीजीसी द्वारा बीमा की जाने वाली अधिकतम जमाराशि क्या है? बैंक के लाइसेंस रद्द करने/परिसमापन की तारीख तक अथवा समामेलन/विलय/पुनर्निर्माण स्कीम लागू होने की तारीख तक, प्रत्येक जमाकर्ता को किसी बैंक में समान अधिकार एवं क्षमता में रखे गए मूलधन और ब्याज दोनों के लिए अधिकतम पाँच रुपया,शून्य,शून्य तक बीमा प्रदान किया जाता है। प्रश्न चार मुझे किस तरह पता चलेगा कि मेरा बैंक डीआईसीजीसी द्वारा बीमाकृत है या नहीं? डीआईसीजीसी बैंकों को बीमाकृत बैंकों के रूप में पंजीकृत करते समय उन्हें मुद्रित पर्चे प्रदर्शित करने के लिए उपलब्ध कराता है जिसमें बीमाकृत बैकों के जमाकर्ताओं को निगम द्वारा दी जाने वाली बीमा सुरक्षा संबंधी जानकारी दी जाती है। किसी संदेह की स्थिति में जमाकर्ता इस संबंध में शाखा अधिकारी से पूछताछ कर सकता है। प्रश्न पाँच किसी बैंक की विभिन्न शाखाओं में एक व्यक्ति द्वारा रखी गई बीमाकृत जमाराशि की उच्चतम सीमा क्या है? किसी बैंक की विभिन्न शाखाओं में रखी गई विभिन्न जमाराशियों को बीमा सुरक्षा कवर के प्रयोजन से जोड़ा जाता है और अधिकतम पाँच लाख रुपए तक भुगतान किया जाता है। प्रश्न छः क्या डीआईसीजीसी केवल खाते के मूलधन का बीमा करता है या मूलधन और उस पर उपचित ब्याज दोनों का? डीआईसीजीसी मूलधन और ब्याज का अधिकतम पांच लाख रु. तक बीमा करता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति के खाते में चार,पचानवे,शून्य रुपया. मूलधन और उस पर उपचित ब्याज चार,शून्य रुपया है तो डीआईसीजीसी द्वारा बीमाकृत राशि चार,निन्यानवे,शून्य रुपया. है। यदि उस खाते में मूलधन पांच लाख है तो उस पर उपचित ब्याज का बीमा नहीं किया जाएगा, इसलिए नहीं कि यह राशि ब्याज है बल्कि इसलिए कि यह राशि बीमा सीमा से अधिक है। प्रश्न सात क्या किसी एक ही बैंक के विभिन्न खाते में निधियां जमा करने से जमा बीमा को बढ़ाया जा सकता है? जमा बीमा निर्धारित करने से पहले एक ही बैंक में एक ही स्वामित्व के अंतर्गत रखी गई सभी निधियों को जोड़ा जाता है। यदि निधियां विभिन्न स्वामित्व वाली हैं अथवा अलग-अलग बैंकों में रखी गई हों फिर उनका अलग-अलग बीमा किया जाएगा। प्रश्न आठ क्या विभिन्न बैंकों में रखी गई जमाराशियों का बीमा अलग -अलग किया जाता है? हां। यदि आपकी जमाराशियां एक से अधिक बैंक में हैं तो जमा बीमा कवरेज की सीमा प्रत्येक बैंक के लिए अलग-अलग लागू होगी। प्रश्न नौ यदि दो भिन्न-भिन्न बैंकों में मेरी निधियां हैं और दोनों बैंक एक ही दिन बंद हो जाते हैं तो क्या मेरी निधियों को एक साथ जोड़ा जाएगा या अलग -अलग बीमा किया जाएगा? समापन तारीख पर विचार किए बिना प्रत्येक बैंक में आपकी निधियों का अलग-अलग बीमा किया जाएगा। प्रश्न दस समान अधिकार और क्षमता में और विभिन्न अधिकार और क्षमता में रखी गई जमाराशियों का अर्थ क्या है? यदि कोई व्यक्ति बैंक की एक या अधिक शाखाओं में एक से अधिक जमा खाता खोलता है, उदाहरण के लिए, श्री एस.के. पंडित एक या एक से अधिक बचत/चालू खाता और एक या एक से अधिक सावधि/आवर्ती जमा खाते आदि खोलते हैं, इन सभी को एक ही क्षमता और एक ही अधिकार में धारित खाते के रूप में माना जाता है। इसलिए, इन सभी खातों में शेष राशि एकत्र की जाती है और बीमा कवर अधिकतम पांच लाख रुपये तक उपलब्ध है। यदि श्री एस.के. पंडित बैंक की एक या एक से अधिक शाखाओं में एक फर्म के भागीदार या नाबालिग के अभिभावक या कंपनी के निदेशक या ट्रस्ट के ट्रस्टी या अपनी पत्नी श्रीमती के. ए. पंडित के साथ संयुक्त खाते के रूप में अन्य जमा खाते भी खोलते हैं, ऐसे खातों को अलग-अलग क्षमता और अलग-अलग अधिकार में माना जाता है। तदनुसार, ऐसे जमा खाते पर भी अलग से पांच लाख रुपये तक का बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। आगे यह भी स्पष्ट किया जाता है कि स्वामित्व वाली संस्था के नाम पर रखी गई जमाराशि जहां एक जमाकर्ता एकमात्र मालिक है और उसकी व्यक्तिगत क्षमता में रखी गई जमा राशि को एकत्रित किया जाता है और बीमा कवर अधिकतम पांच लाख रुपये तक उपलब्ध है। उदाहरण : ।श्री.एस.के.पंडित ।श्री.एस.के.पंडित ।श्री.एस.के.पंडित ।श्री.एस.के.पंडित ।श्री.एस.के.पंडित ।संयुक्त खाते में रखी गई जमाराशियाँ यदि किसी बैंक की एक अथवा उसकी कई शाखाओं में कई व्यक्तियों के एक या अधिक संयुक्त जमा खाते हैं जैसे ए, बी और सी नाम के तीन व्यक्तियों के नाम से संयुक्त रूप से एक से अधिक संयुक्त जमा खाते हैं जहाँ इन सभी खातों में ये नाम इसी क्रम में प्रदर्शित हैं, तो इन सभी खातों को समान अधिकार तथा समान क्षमता वाला खाते माना जाएगा। तदनुसार, इन सभी खातों में रखी शेष राशि को रु.पाँच लाख तक की सीमा के अंतर्गत बीमित जमाराशि का निर्धारण करते समय जोड़/शामिल कर लिया जाएगा। तथापि यदि व्यक्तियों द्वारा एक से अधिक संयुक्त खाते खोले जाते हैं और वहाँ इनके नाम उसी क्रम में नहीं लिखे गए हैं उदाहरण के लिए ए,बी और सी; सी, बी और ए; सी,ए और बी; ए, सी और बी अथवा व्यक्तियों के समूह में अंतर है जैसेः ए, बी और सी तथा ए, बी और डी तो इन संयुक्त खातों में रखी जमाराशि को विभिन्न क्षमता तथा विभिन्न अधिकार के अंतर्गत माना जाएगा। तदनुसार ऐसे प्रत्येक संयुक्त खाते, जहाँ पर नाम अलग क्रम में प्रदर्शित हैं अथवा अलग-अलग नाम हैं, के लिए पांच लाख रुपए तक का बीमा कवर उपलब्ध होगा। ।खाता ।पहला खाता धारक - "ए" दूसरा खाता धारक - "बी" ।खाता ।पहला खाता धारक - "ए" दूसरा खाता धारक - "सी" ।खाता ।पहला खाता धारक - "बी" दूसरा खाता धारक - "ए" ।बैंक की 'एक्स' शाखा में खाता ।पहला खाता धारक - "ए" दूसरा खाता धारक - "बी" ।खाता ।पहला खाता धारक - "बी" दूसरा खाता धारक - "सी" ।खाता ।पहला खाता धारक - "ए" दूसरा खाता धारक - "बी" ।इस खाते को खाता के साथ जोड़ दिया जाएगा। ।बैंक की 'वाई' शाखा में खाता ।पहला खाता धारक - "ए" दूसरा खाता धारक - "बी" ।इस खाते को खाता के साथ जोड़ दिया जाएगा। ।खाता ।पहला खाता धारक - "ए" दूसरा खाता धारक - "बी" प्रश्न ग्यारह क्या बैंक जमाकर्ता द्वारा देय राशि की कटौती कर सकता है? हाँ। बैंकों को यह अधिकार है कि वे कट ऑफ तिथि को जमा राशि में से अपनी देय राशि का समायोजन कर सकते हैं। जमा बीमा ऐसी देय राशियों के समायोजन के बाद उपलब्ध है। प्रश्न बारह जमा बीमा की लागत का वहन कौन करता है? जमा बीमा प्रीमियम पूर्णतः बीमाकृत बैंक द्वारा वहन किया जाता है। प्रश्न तेरह डीआईसीजीसी भुगतान करने के लिए कब जिम्मेदार होगा? यदि कोई बैंक परिसमापन में जाता है, तो डीआईसीजीसी परिसमापक को दावा सूची प्राप्त होने की तारीख से दो महीने के भीतर प्रत्येक जमाकर्ता की पांच लाख रुपये तक की दावा राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। परिसमापक को प्रत्येक बीमित जमाकर्ता को उनकी दावा राशि के अनुरूप दावा राशि का वितरण करना होता है। यदि एक बैंक का पुनर्निर्माण या समामेलन / दूसरे बैंक के साथ विलय किया जाता हैः डीआईसीजीसी संबंधित बैंक को जमा की पूरी राशि या उस समय लागू बीमा कवर की सीमा के बीच का अंतर, जो भी कम हो और पुनर्गठन / समामेलन योजना के तहत उसके द्वारा प्राप्त राशि को हस्तांतरिती बैंक / बीमित बैंक / हस्तांतरिती बैंक, जो भी हो, के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से दावा सूची की प्राप्ति की तारीख से दो महीने के भीतर भुगतान करता है। प्रश्न चौदह क्या डीआईसीजीसी विफल बैंकों के जमाकर्ताओं साथ सीधे व्यवहार करता है? नहीं । किसी बैंक के परिसमापन की स्थिति में परिसमापक जमाकर्तावार दावा सूची तैयार करता है और संवीक्षा तथा भुगतान हेतु डीआईसीजीसी को प्रेषित करता है। डीआईसीजीसी परिसमापक को भुगतान करता है जो जमाकर्ताओं को भुगतान करने के लिए जिम्मेदार है। बैंकों के समामेलन/विलय की स्थिति में प्रत्येक जमाकर्ता को देय राशि का भुगतान अंतरिती बैंक को किया जाता है। प्रश्न पंद्रह क्या कोई बीमाकृत बैंक डीआईसीजीसी कवरेज से अलग हो सकते हैं? नहीं। जमा बीमा स्कीम अनिवार्य है और कोई बैंक इससे अलग नहीं हो सकता है। प्रश्न सोलह क्या डीआईसीजीसी किसी बैंक का बीमा कवरेज समाप्त कर सकता है? यदि बीमाकृत बैंक लगातार तीन अवधियों तक प्रीमियम का भुगतान करने में विफल रहता है तो निगम उसका पंजीकरण रद्द कर सकता है। प्रीमियम के भुगतान में चूक के लिए डीआईसीजीसी द्वारा किसी भी बैंक से अपना कवरेज वापस लेने की स्थिति में जनता को समाचार पत्रों के माध्यम से सूचित किया जाएगा। यदि बैंक को नई जमा राशि प्राप्त करने से प्रतिबंधित किया जाता है; या इसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया है या आरबीआई द्वारा लाइसेंस देने से इनकार कर दिया गया है; या इसे स्वेच्छा से या अनिवार्य रूप से समाप्त किया गया है; या यह बैंकिंग विनियमन अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ उनचास की धारा छत्तीसए के अर्थ के तहत एक बैंकिंग कंपनी या सहकारी बैंक नहीं रह जाता है; या इसने अपनी सभी जमा देनदारियों को किसी अन्य संस्था को हस्तांतरित कर दिया है; या इसे किसी अन्य बैंक के साथ समामेलित किया गया है या किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा समझौता या व्यवस्था या पुनर्निर्माण की योजना को मंजूरी दी गई है और उक्त योजना नए जमा की स्वीकृति की अनुमति नहीं देती है, तो बीमित बैंक का पंजीकरण रद्द कर दिया जाता है। बैंक का पंजीकरण रद्द होने की स्थिति में, बैंक की जमा राशि, रद्द होने की तिथि तक बीमा द्वारा कवर की जाती है। प्रश्न सत्रह पंजीकरण रद्द करने की स्थिति में बैंकों के प्रति निगम का क्या दायित्व है? "बीमाकृत बैंकों" के परिसमापन आदि की स्थिति में अर्थात् ऐसे बैंक जिनका पंजीकरण निम्नलिखित कारणों से रद्द कर दिया गया हैः भविष्य में और जमाराशियां स्वीकार करने से प्रतिबंधित किया हो अथवा जिसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया हो या यह पाये जाने पर कि लाइसेस नहीं दिया जा सकता है, उन बैंकों के प्रति जमा बीमा दायित्व है। इन मामलों में निगम का दायित्व बीमाकृत बैंक के रूप में बैंक का पंजीकरण रद्द किए जाने की तारीख तक जमाराशियों की सीमा तक है। पंजीकरण रद्द किए गए अन्य बैंकों के परिसमापन आदि के संबंध में अर्थात ऐसे बैंक जिनका पंजीकरण प्रीमियम का भुगतान न करने अथवा डीआईसीजीसी अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ की धारा दो के आशय के अंतर्गत पात्र सहकारी बैंकों के रूप में कार्य करना बंद कर दिया हो तो निगम का कोई दायित्व नहीं है। नोटिसः ऊपर दी गई जानकारी निगम की जमा बीमा योजना के मूल प्रावधानों से अवगत कराने के लिए है। यह जानकारी गैर-तकनीकी प्रकृति की है और और निक्षेप बीमा योजना का विधिक आशय प्रदर्शित नहीं करती है।
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CBSE CTET 2023 City Pre-Admit Card: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सीटीईटी अगस्त-2023 के लिए परीक्षा तिथि और शहर (प्री एडमिट कार्ड) की जानकारी दी है।
CBSE CTET 2023 City Pre-Admit Card: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सीटीईटी अगस्त-2023 के लिए परीक्षा तिथि और शहर (प्री एडमिट कार्ड) की जानकारी दी है। उम्मीदवार जो सीटीईटी अगस्त 2023 परीक्षा के लिए पंजीकृत हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in से अपना प्री-एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। यह फाइनल एडमिट कार्ड नहीं है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सीटीईटी परीक्षा के लिए 18 अगस्त को फाइनल एडमिट कार्ड जारी करेगा। शेड्यूल के मुताबिक, CTET 2023 परीक्षा 20 अगस्त को आयोजित की जाएगी। सीबीएसई बोर्ड ने यह भी कहा कि परीक्षा उन उम्मीदवारों के लिए भी ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएगी, जिन्होंने पहले ऑनलाइन परीक्षा का विकल्प चुना था। इसमें आगे कहा गया है कि उम्मीदवारों को उनके निवास पते से निकटतम शहर में परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए हैं।
सीटीईटी 2023 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 27 अप्रैल से शुरू हुई और 26 मई को बंद हो गई। इसके बाद ऑनलाइन आवेदन सुधार विंडो 29 मई से 02 जून तक खुली थी। परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी - पहली पाली सुबह 9.30 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2.30 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जाएगी।
इस साल, CTET 2023 परीक्षा लगभग 32.45 लाख उम्मीदवारों के लिए आयोजित की जा रही है। CTET परीक्षा 2023 73 शहरों के 211 केंद्रों पर आयोजित की जानी है, जिसके लिए पूरी जानकारी उम्मीदवार के संबंधित CTET 2023 एडमिट कार्ड पर दी गई है।
सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट- ctet.nic.in पर जाएं।
होमपेज पर CTET 2023 एडमिट कार्ड डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें।
आवश्यक लॉगिन क्रेडेंशियल दर्ज करें।
सीटीईटी एडमिट कार्ड 2023 स्क्रीन पर दिखाई देगा।
एडमिट कार्ड जांचें और डाउनलोड करें।
अब इसका प्रिंटआउट ले लें।
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CBSE CTET दो हज़ार तेईस City Pre-Admit Card: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सीटीईटी अगस्त-दो हज़ार तेईस के लिए परीक्षा तिथि और शहर की जानकारी दी है। CBSE CTET दो हज़ार तेईस City Pre-Admit Card: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सीटीईटी अगस्त-दो हज़ार तेईस के लिए परीक्षा तिथि और शहर की जानकारी दी है। उम्मीदवार जो सीटीईटी अगस्त दो हज़ार तेईस परीक्षा के लिए पंजीकृत हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in से अपना प्री-एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। यह फाइनल एडमिट कार्ड नहीं है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सीटीईटी परीक्षा के लिए अट्ठारह अगस्त को फाइनल एडमिट कार्ड जारी करेगा। शेड्यूल के मुताबिक, CTET दो हज़ार तेईस परीक्षा बीस अगस्त को आयोजित की जाएगी। सीबीएसई बोर्ड ने यह भी कहा कि परीक्षा उन उम्मीदवारों के लिए भी ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएगी, जिन्होंने पहले ऑनलाइन परीक्षा का विकल्प चुना था। इसमें आगे कहा गया है कि उम्मीदवारों को उनके निवास पते से निकटतम शहर में परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए हैं। सीटीईटी दो हज़ार तेईस के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सत्ताईस अप्रैल से शुरू हुई और छब्बीस मई को बंद हो गई। इसके बाद ऑनलाइन आवेदन सुधार विंडो उनतीस मई से दो जून तक खुली थी। परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी - पहली पाली सुबह नौ.तीस बजे से दोपहर बारह बजे तक और दूसरी पाली दोपहर दो.तीस बजे से शाम पाँच बजे तक आयोजित की जाएगी। इस साल, CTET दो हज़ार तेईस परीक्षा लगभग बत्तीस.पैंतालीस लाख उम्मीदवारों के लिए आयोजित की जा रही है। CTET परीक्षा दो हज़ार तेईस तिहत्तर शहरों के दो सौ ग्यारह केंद्रों पर आयोजित की जानी है, जिसके लिए पूरी जानकारी उम्मीदवार के संबंधित CTET दो हज़ार तेईस एडमिट कार्ड पर दी गई है। सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट- ctet.nic.in पर जाएं। होमपेज पर CTET दो हज़ार तेईस एडमिट कार्ड डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें। आवश्यक लॉगिन क्रेडेंशियल दर्ज करें। सीटीईटी एडमिट कार्ड दो हज़ार तेईस स्क्रीन पर दिखाई देगा। एडमिट कार्ड जांचें और डाउनलोड करें। अब इसका प्रिंटआउट ले लें।
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गांधीनगरः कल कांग्रेस के बड़े नेता शंकर सिंह वाघेला ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. कयास ये लग रहे थे कि वाघेला गुजरात में पाटीदार आंदोलन से जुड़े हार्दिक पटेल जैसे नेताओं के साथ मिलकर मोर्चा बनाएंगे, लेकिन हार्दिक पटेल ने चुनाव लड़ने से साफ इनकार कर दिया है. हार्दिक पटेल ने कहा है कि वो चुनाव नहीं लड़ेंगे.
शंकर सिंह वाघेला के कांग्रेस छोड़ने पर हार्दिक पटेल ने कहा, "वाघेला जी की उम्र हो चुकी है उन्होंने सही फैसला लिया है." वहीं आगामी चुनाव में उनके साथ जाने या बाघेला के साथ राजनीतिक लड़ाई लड़ने को लेकर उन्होंने साफ कहा, "मैं अभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ूंगा. मैं 26 या 27 की उम्र में चुनाव लड़ूंगा." उन्होंने कहा कि हम किसानों के मुद्दों पर भी आवाज़ उठाएंगे.
गुजरात में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं. वाघेला ने कल कल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. कांग्रेस के पास गुजरात में फिलहाल कोई बड़ा चेहरा नहीं है. वहीं हार्दिक ने भी विधानसभा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है. इससे अब बीजेपी को अपना फायदा दिख रहा है.
गांधीनगर में अपने 77वें जन्मदिन के मौके पर वाघेला ने समर्थकों का एक सम्मेलन बुलाकर कहा, "मैं अपने आप कांगेस को मेरी ओर से मुक्त करता हूं. अपने गले में कोई झंडा नहीं लगाना. मैं कोई दल में शामिल नहीं होऊंगा.विपक्ष के नेता पद से इस्तीफा भेज रहा हूं." कांग्रेस से वाघेला की नाराजगी पिछले लंबे समय से चल रही थी. हालांकि वाघेला ने कांग्रेस छोड़ने के साथ ही ये एलान भी किया कि वो अब न बीजेपी में शामिल होंगे न किसी और दल में बल्कि राजनीति से ही संन्यास ले लेगें.
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गांधीनगरः कल कांग्रेस के बड़े नेता शंकर सिंह वाघेला ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. कयास ये लग रहे थे कि वाघेला गुजरात में पाटीदार आंदोलन से जुड़े हार्दिक पटेल जैसे नेताओं के साथ मिलकर मोर्चा बनाएंगे, लेकिन हार्दिक पटेल ने चुनाव लड़ने से साफ इनकार कर दिया है. हार्दिक पटेल ने कहा है कि वो चुनाव नहीं लड़ेंगे. शंकर सिंह वाघेला के कांग्रेस छोड़ने पर हार्दिक पटेल ने कहा, "वाघेला जी की उम्र हो चुकी है उन्होंने सही फैसला लिया है." वहीं आगामी चुनाव में उनके साथ जाने या बाघेला के साथ राजनीतिक लड़ाई लड़ने को लेकर उन्होंने साफ कहा, "मैं अभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ूंगा. मैं छब्बीस या सत्ताईस की उम्र में चुनाव लड़ूंगा." उन्होंने कहा कि हम किसानों के मुद्दों पर भी आवाज़ उठाएंगे. गुजरात में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं. वाघेला ने कल कल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. कांग्रेस के पास गुजरात में फिलहाल कोई बड़ा चेहरा नहीं है. वहीं हार्दिक ने भी विधानसभा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है. इससे अब बीजेपी को अपना फायदा दिख रहा है. गांधीनगर में अपने सतहत्तरवें जन्मदिन के मौके पर वाघेला ने समर्थकों का एक सम्मेलन बुलाकर कहा, "मैं अपने आप कांगेस को मेरी ओर से मुक्त करता हूं. अपने गले में कोई झंडा नहीं लगाना. मैं कोई दल में शामिल नहीं होऊंगा.विपक्ष के नेता पद से इस्तीफा भेज रहा हूं." कांग्रेस से वाघेला की नाराजगी पिछले लंबे समय से चल रही थी. हालांकि वाघेला ने कांग्रेस छोड़ने के साथ ही ये एलान भी किया कि वो अब न बीजेपी में शामिल होंगे न किसी और दल में बल्कि राजनीति से ही संन्यास ले लेगें.
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मंदिर का तकरीबन 90 फिसदी काम पूरा किया जा चुका है. अब मंदिर की नक्काशियों पर काम किया जा रहा है. 1 जनवरी 2024 तक मंदिर का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाना है.
Ram Mandir Construction: अयोध्या में राममंदिर निर्माण का काम तेजी से किया जा रहा है. चंपत राय ने इसकी कुछ तस्वीरें ट्वीटर पर शेयर की हैं. राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय ने तस्वीरें शेयर की हैं. एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा गया है कि राम राष्ट्र की संस्कृति और राष्ट्र के प्राण हैं. और राम के मंदिर बनने का मतलब भारत का नवनिर्माण है.
मंदिर का तकरीबन 90 फिसदी काम पूरा किया जा चुका है. अब मंदिर की नक्काशियों पर काम किया जा रहा है. 1 जनवरी 2024 तक मंदिर का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाना है. आपको बता दें कि मंदिर निर्माण में वैज्ञानिक पद्धतियों का भी ध्यान दिया जा रहा है. मंदिर किसी भी स्थिति में अगले 1 हजार साल तक अपनी मूल स्थिति में बना रहेगा.
समय समय से जारी किए जा रहे निर्माण कार्य की तस्वीरों को खूब देखा जा रहा है. लोग अपनी आस्था के अनुरूप अयोध्या में हो रहे निर्माण पर अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं. देखें मंदिर निर्माण का वीडियो.
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मंदिर का तकरीबन नब्बे फिसदी काम पूरा किया जा चुका है. अब मंदिर की नक्काशियों पर काम किया जा रहा है. एक जनवरी दो हज़ार चौबीस तक मंदिर का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाना है. Ram Mandir Construction: अयोध्या में राममंदिर निर्माण का काम तेजी से किया जा रहा है. चंपत राय ने इसकी कुछ तस्वीरें ट्वीटर पर शेयर की हैं. राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय ने तस्वीरें शेयर की हैं. एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा गया है कि राम राष्ट्र की संस्कृति और राष्ट्र के प्राण हैं. और राम के मंदिर बनने का मतलब भारत का नवनिर्माण है. मंदिर का तकरीबन नब्बे फिसदी काम पूरा किया जा चुका है. अब मंदिर की नक्काशियों पर काम किया जा रहा है. एक जनवरी दो हज़ार चौबीस तक मंदिर का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाना है. आपको बता दें कि मंदिर निर्माण में वैज्ञानिक पद्धतियों का भी ध्यान दिया जा रहा है. मंदिर किसी भी स्थिति में अगले एक हजार साल तक अपनी मूल स्थिति में बना रहेगा. समय समय से जारी किए जा रहे निर्माण कार्य की तस्वीरों को खूब देखा जा रहा है. लोग अपनी आस्था के अनुरूप अयोध्या में हो रहे निर्माण पर अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं. देखें मंदिर निर्माण का वीडियो.
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भोज में भी उसके रूप में माना है। वैदिम मसिनाम से स्पृष्टू र माना के साथ लंगर का मानते हैं। व्यापण ग उल्लेव :ने शंकरों की ही भांति व्याकरण की और भी नहीं की है। उमग्री में सरक. प्रस्थय समास, यादि का विस्तृत वियन किया गया है। व्याकरण की प्रामाणिक सिद्धजरने के लिए पाणिनि पतंजलि केयूट आदि प्रसिद्ध वैयाकरण के मत के का उल्लेख करते हैं। उदावरण से उनके व्याकरणशाम का परिचय प्राप्त हो जायेगाारसम्भव ११२ में सौभाग्यक्तिोषि दे पर सिख ई - सुभान्यभावः सौभान्यम् । इभासिन्य पूर्णवस्य प (पा० ७१३॥१६) इत्यु दम्पतीति सौभाव्यतिषि
१३१० में तमा विताय १११ में बाये परशय पर करतीति वनैबरः बीट (पा०३।२।१५) इति मु प्रत्ययः ।
मरिमा के व्यापण पाण्डित्य का परिचय
बायगा ।
अध्याय में
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भोज में भी उसके रूप में माना है। वैदिम मसिनाम से स्पृष्टू र माना के साथ लंगर का मानते हैं। व्यापण ग उल्लेव :ने शंकरों की ही भांति व्याकरण की और भी नहीं की है। उमग्री में सरक. प्रस्थय समास, यादि का विस्तृत वियन किया गया है। व्याकरण की प्रामाणिक सिद्धजरने के लिए पाणिनि पतंजलि केयूट आदि प्रसिद्ध वैयाकरण के मत के का उल्लेख करते हैं। उदावरण से उनके व्याकरणशाम का परिचय प्राप्त हो जायेगाारसम्भव एक सौ बारह में सौभाग्यक्तिोषि दे पर सिख ई - सुभान्यभावः सौभान्यम् । इभासिन्य पूर्णवस्य प इत्यु दम्पतीति सौभाव्यतिषि एक हज़ार तीन सौ दस में तमा विताय एक सौ ग्यारह में बाये परशय पर करतीति वनैबरः बीट इति मु प्रत्ययः । मरिमा के व्यापण पाण्डित्य का परिचय बायगा । अध्याय में
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।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ( नदारद )
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ( नदारद )
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों।
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि।
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ( नदारद )
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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बरेली (उत्तर प्रदेश) 10 मई (भाषा) बरेली शहर से बीस किलोमीटर दूर फरीदपुर थाना क्षेत्र के जेड गांव के पास एक गोदाम में बुधवार देर शाम भीषण आग लग गई, जिसमें दो लोग झुलस गये ।
आग इतनी भीषण थी कि लपटें दस किलोमीटर दूर फरीदपुर कस्बे तक देखी गयी । पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) राज कुमार अग्रवाल ने बताया कि कई दमकल गाड़ियों को मौके पर भेजा गया और उन्हें आग पर काबू पाने में तीन घंटे से अधिक समय लगा ।
उन्होंने कहा कि दो व्यक्ति अभी भी लापता हैं और उनका पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि दो अन्य आग में घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
फरीदपुर के थाना प्रभारी दयाशंकर ने बताया कि आग की सूचना पर दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का प्रयास चल रहा है।
यह खबर 'भाषा' न्यूज़ एजेंसी से 'ऑटो-फीड' द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
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बरेली दस मई बरेली शहर से बीस किलोमीटर दूर फरीदपुर थाना क्षेत्र के जेड गांव के पास एक गोदाम में बुधवार देर शाम भीषण आग लग गई, जिसमें दो लोग झुलस गये । आग इतनी भीषण थी कि लपटें दस किलोमीटर दूर फरीदपुर कस्बे तक देखी गयी । पुलिस अधीक्षक राज कुमार अग्रवाल ने बताया कि कई दमकल गाड़ियों को मौके पर भेजा गया और उन्हें आग पर काबू पाने में तीन घंटे से अधिक समय लगा । उन्होंने कहा कि दो व्यक्ति अभी भी लापता हैं और उनका पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि दो अन्य आग में घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फरीदपुर के थाना प्रभारी दयाशंकर ने बताया कि आग की सूचना पर दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का प्रयास चल रहा है। यह खबर 'भाषा' न्यूज़ एजेंसी से 'ऑटो-फीड' द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
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मैं लेखक द्वारा निर्धारित क्रम में शुरू करूंगा। चेचन्या। तथ्य यह है कि "सबसे svidomykh" के प्रतिनिधि थे। मैं सहमत हूं। यह तथ्य कि सभी को दफनाया या पकड़ा नहीं गया था। हालाँकि, मुझे यह कहना चाहिए कि दूसरा अभियान सीरिया नहीं है। तब यह केवल सबसे आशावादी नागरिक था, जो हमारी सेना में विशेष रूप से और पूरे देश में इस बारे में बात कर सकता था।
उस समय प्रत्यर्पण के संदर्भ में यूक्रेनी अधिकारियों को "स्थानांतरित करना" बस व्यर्थ था। यह किसी भी स्तर के अपराधियों के प्रत्यर्पण पर एक समझौते की अनुपस्थिति भी नहीं है, लेकिन यूक्रेन सामान्य रूप से ऐसी आवश्यकताओं को किस हद तक सुनेगा। उस स्तर पर रूस उस स्तर पर नहीं था, यहां क्या छिपा हो सकता है।
हां, और पकड़ने के लिए बिजली संरचनाएं भी अपने सबसे अच्छे रूप में नहीं थीं। देशों के बीच वीज़ा मुक्त शासन के अस्तित्व और सीमा के अभाव को देखते हुए, मेरे लिए यह समझना मुश्किल है कि उन स्वयंसेवकों को पकड़ना कैसे संभव होगा जो चेचन्या से यूक्रेन वापस आए थे। और अगर आपको याद है कि मानव कारोबार सीमाओं पर क्या था, तो यह मामला उस समय संभव नहीं लगता है।
बेशक, यदि आप यूक्रेनी पक्ष से देखते हैं, तो निश्चित रूप से रूस को इस तथ्य के लिए दोषी ठहराया जाता है कि यूक्रेन के नत्त्सिक ने रूस में लड़ाई लड़ी। हालांकि, यह रूस नहीं था जो उन्हें लाया था, न कि रूस जो रास्ते पर इकट्ठा हुए थे, न कि रूस, जो फूलों के साथ मिले और खुशी की बात थी, उनकी वापसी पर। और मेरे लिए - हमारी गलती केवल इस तथ्य में है कि कुछ लोग अपनी वीरता के फल का उपयोग करने में सक्षम थे।
रूस में RNE और अन्य मजेदार संरचनाओं के लिए . . . हाँ, यह था। हां, उन्होंने रैली की और मार्च किया। लेकिन मुझे खेद है, लेकिन वे अब कहां हैं? और उनमें से कितने? यह कहना कि वे जड़ से तड़प रहे थे, असंभव है। अभी भी बुर् पर बैठे हैं। लेकिन "बैंडरेड के आदेश" की शैली में कितना शोर है, इसकी तुलना करने के लिए आज यूक्रेन (और खुले तौर पर) के आसपास चला जाता है और रूस में यह कैसा है, इसे हल्के ढंग से रखना गलत है।
तुलना के लिए क्षमा करें, लेकिन हमारे भूरे और काले राष्ट्रवादी तिलचट्टे की तरह हैं। वे दरार में चुपचाप बैठते हैं और दिन की रोशनी में बाहर नहीं निकलते हैं।
चुनावों के बारे में। सर्वेक्षण, यह ध्यान दिया जाना चाहिए, ऐसी चीज . . . पतली। कहां इंटरव्यू देना है, किसके बीच, कैसे सवाल पूछना है।
हाल ही में, कीव इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशियोलॉजी ने यूक्रेन के नागरिकों के बीच एक सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण के परिणाम आपको खुश नहीं करेंगे। Ukrainians के 63% सुनिश्चित हैं कि हम रूस के साथ युद्ध में हैं। बिल्कुल! 65% यह सुनिश्चित करने के लिए जानते हैं कि यूक्रेन में रूसी सैनिक हैं। और केवल 18% का कहना है कि कोई युद्ध नहीं है।
मैंने केवल आपको समझने के लिए आंकड़ों का हवाला दियाः Ukrainians के बीच कोई अंतर्दृष्टि नहीं है। एक हिस्सा है जो शुरू से ही रूसी समर्थक था, लेकिन उनमें से बहुत से "लड़" रहे हैं।
सब ठीक है। मैंने कीव में एक हजार लोगों का साक्षात्कार लिया। या दो भी। अब अभ्यास में पूछताछ नहीं की जाती है। बहुत ज़्यादा। आम तौर पर सभ्य चुनावों में वे लिखते हैंः "विभिन्न सामाजिक श्रेणियों के एक्सएनयूएमएक्स लोगों का साक्षात्कार लिया गया। " और फिर इस सर्वेक्षण के आंकड़े पूरे देश के लिए अनुमानित हैं। दूसरे शब्दों में, उन लोगों को जिम्मेदार ठहराया जिन्होंने जवाब नहीं दिया।
यदि आपका साक्षात्कार कीव में हुआ था, और ग्रेशेव्स्की क्षेत्र में या मैदान चौक पर भी, तो हाँ, मैं पूरी तरह से अपने आप से सहमत हूं कि एक हजार में से 650 लोगों ने ठीक उसी तरह से उत्तर दिया। लेकिन उसी खार्कोव के लिए मैं इतना निश्चित नहीं था। हालांकि सब कुछ हो सकता है। लेकिन किसी भी मामले में, एक लाख में से 1000 उत्तरदाता सिर्फ 0,1% हैं। और कीव में, एक लाख से अधिक असमान रूप से रहते हैं।
इस तथ्य के साथ कि यूक्रेनियन का 65% रूस के साथ युद्ध में संदिग्ध है।
क्या, और चर्च भी, हम? यहाँ रूस क्या पक्ष है? तथ्य यह है कि यूक्रेन पूरी तरह से कृत्रिम शिक्षा है लंबे समय से जाना जाता है और समझा जाता है। और यह तथ्य कि इसे वहां बहुत मजबूती से मिलाया जाता है। लेकिन अफ़सोस, पिछली सदी की शुरुआत से पहले ऐसा कोई राष्ट्र नहीं था - Ukrainians। यह नहीं था ! ! ! इसीलिए हर एक तुम पर थोपता है। लेकिन रूस का इससे कोई लेना-देना नहीं है। यहां तक कि यूएसएसआर के उत्तराधिकारी के रूप में, जिसमें बोल्शेविकों ने इस राज्य को जन्म देना शुरू कर दिया।
अंत में, 23 में, एक रजाई हो सकता है और इसे फिर से तैयार कर सकता है। अवसर थे। और समय था और पैसा। Zababahali एक संघीय घटना के रूप में पश्चिमी यूक्रेन होगा, और बाकी सभी भी। किसने बाधा दी? रूस फिर?
तो मुझे माफ कर दो, आज यह वही है जो यूक्रेन में है।
राष्ट्रीय विचार के बारे में। निरंतरता में।
आज के लिए हमारा राष्ट्रीय विचार यह है कि रूसी हमारी सभी परेशानियों के लिए दोषी हैं। हम यूक्रेन के बाहर एक विचार की तलाश कर रहे हैं। हम एक दुश्मन की तलाश कर रहे हैं। जब कुछ भी नहीं है जो लोगों को एकजुट करता है, तो राज्य को बचाने का एकमात्र तरीका बाहरी दुश्मन का आविष्कार करना है।
खैर, कम से कम प्रतिरोध का रास्ता अपनाएं। सामान्य। शत्रु मिला। ठीक। लेकिन क्षमा करें, दुश्मन आपसे बिल्कुल भी नहीं लड़ना चाहता है। "बिल्कुल" शब्द के अधिकतम अर्थ में। और प्रतिबंधों, एम्बार्गो और नाकाबंदी के साथ सभी आर्थिक कूद और हरकतों को पीटा, पीटा गया और मुख्य रूप से यूक्रेनी जेब में पीटा जाएगा। है ना?
ठीक है, हम हेलीकॉप्टर और जहाजों के बिना नहीं कर सकते। यहाँ हम हैं, जैसा कि हम कर सकते हैं। और हम कर सकते हैं . . . इसलिए, हमारे पास हेलीकॉप्टर हैं और जहाजों को पानी में लॉन्च करते हैं। हां, बवासीर को जोड़ दिया गया है, लेकिन कुछ भी नहीं, यह अचूक और हल करने योग्य है। लेकिन हम इस तथ्य के लिए दोषी नहीं हैं कि यूक्रेनी सरकार ने इस योजना में एक कील बनाई है।
С другой стороны, в связи с этими ужимками в украинских ВСУ тоже много чего нет. Точнее, проще посмотреть, что есть. Но ни о новых танках, ни о самолетах, ни о вертолетах, ни тем более, о кораблях речь не идет. Тоже Россия виновата?
खैर, हम क्या करेंगे? तथ्य यह है कि कुछ किया जाना चाहिए स्पष्ट है। ऐसे लोग हैं जो मानते हैं कि डेज़रज़िन्स्की डिवीजन के बाद के काम के साथ एक सैन्य अभियान के माध्यम से दिमाग को साफ करना आवश्यक है। जो कि साल का 1946 वेरिएंट है। लेकिन इसके लिए मूल रूप से जो लोग 100% पर हैं, वे यह सुनिश्चित करने के लिए लड़ रहे हैं कि वह इस ऑपरेशन में भाग नहीं लेंगे।
मस्तिष्क प्रसंस्करण जानकारीपूर्ण? बतख और इसलिए मीडिया काम करते हैं। दिल के काम से। लेकिन सबसे चौकसी में उसी लगन से संघर्ष करते हुए। तो यह एक क्लब के साथ एक गोरिल्ला नहीं है, जैसा कि पहले मामले में है, लेकिन कठफोड़वा। जल्दी या बाद में लार्वा तक पहुंचें। एक समय की बात है। जो हम, मैं ध्यान दें, अभी भी गायब है। और तथ्य यह है कि कुछ Ukrainians को समझ में आया है, लेकिन अभी तक आकार नहीं लिया है, निश्चित रूप से, अच्छा है। लेकिन किसी को इतनी उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि एक तरह का जादूगर आ जाएगा, देशद्रोही दफन हो जाएगा, और अचानक सब कुछ सुंदर हो जाएगा।
नेप्रीगली और नामायडिली कि "यूक्रेन - त्से यूरोप"? का प्रयोग करें। क्या अनुमति नहीं है? लेकिन रूस का इससे कोई लेना-देना नहीं है। हमने किसी को एक स्थान के नीचे नहीं धकेला। उन्होंने लात नहीं मारी, वे सभी सम्मानित थे।
अब, और स्पष्ट करना शुरू करें कि यूक्रेन का भविष्य केवल रूस के साथ है? हां, और इसे एक खुले गैस पाइप के साथ ऐसे दामों पर सुदृढ़ करें कि संपूर्ण अभिजात वर्ग ईवामी में समा जाए? हाँ, और नष्ट करने के लिए एक दर्जन अरब डॉलर फेंक दिए?
क्षमा करें, पिछला चरण। यह सब पहले से ही है। हम भरा। उन्होंने खरीदा, इसे कुंद करने के लिए, बेल पर यूक्रेन के सभी, अगर केवल सेवस्तोपोल खो नहीं जाएगा। परिणाम ज्ञात है। कुछ ने भविष्य में बहुत बचत की है, और कुछ दिवालिया हो गए हैं।
भविष्य में उपहारों और लाभों को भरने के लिए, ताकि यूक्रेनी दिमाग को रोशनी दिखाई दे, और यह देखने में सक्षम हो कि रूस के साथ रिश्ते और दोस्ती में फायदेमंद है, आज हमारी सरकार की योजनाओं में शायद ही कोई हो। यूक्रेनी रेक एक महंगी और दर्दनाक चीज है।
यहां से केवल एक निष्कर्षः हमें इंतजार करना चाहिए।
हर सेकंड यूक्रेन आने तक इंतजार करना जरूरी है कि यूरोप के लिए कोई रास्ता नहीं था, नहीं, और वहां नहीं होगा। यूरोप में, बदमाशों की ज़रूरत नहीं है, उनके पास पर्याप्त हैं। और यह बेहतर है यदि प्रत्येक पहले से पहले।
और आपको उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि पुतिन एक नीले हेलिकॉप्टर में पैसे के कंटेनर के साथ आएंगे, और सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा। यूक्रेन क्रीमिया नहीं है, लेकिन क्रीमिया अब दो साल के लिए यूक्रेन रहा है। और कभी इसका हिस्सा नहीं होंगे। और क्रीमियन परिदृश्य नहीं होगा।
जब (मुझे आशा है, जब, और नहीं तो) यूक्रेनी लोगों को यह समझ में आ जाएगा कि रूस दुश्मन नहीं है, लेकिन एक दोस्त है, और फिर कुछ करना शुरू करना संभव होगा। रिश्तों का पुनर्निर्माण, व्यापार को पुनर्जीवित करना, अर्थव्यवस्था और बाकी सब कुछ।
हां, इसके लिए सत्ता के आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता होगी। लेकिन - कीव की सड़कों पर रूसी टैंक के बिना। पोलतावा में हमारे पैराट्रूपर्स के बिना। खुद को सामना करना होगा। निस्संदेह, हम मदद कर सकते हैं। और हम कर सकते हैं। लेकिन उतना नहीं जितना बहुमत चाहेंगे। एकमुश्त आक्रामकता के साथ। मूर्तियां।
और यह सब समय, ज़ाहिर है, हम Ukrainians के सिर (सामग्री द्वारा) पर काम करने के लिए बाध्य हैं। के बारे में बताएं। इसे साबित करो। बहस करना। और शायद, फिर बाहर निकलने पर, हमें कम से कम, एक दोस्ताना यूक्रेन मिलेगा।
मैं एक बात में कॉकरोच से सहमत हूंः हाँ, हम Ukrainians के दिमाग की लड़ाई हार गए। लेकिन अभियान में हारी हुई लड़ाई हार नहीं है। इसके अलावा, बड़े और हम फिर से इस लड़ाई में नहीं आए।
खैर, आपको बदला लेना है। और खरोंच से शुरू करो। फिर। स्वाभाविक रूप से, दोनों पक्षों की पिछली गलतियों को ध्यान में रखते हुए। बड़े और छोटे भाइयों से बचने के लिए। और बस रिश्तेदार थे।
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मैं लेखक द्वारा निर्धारित क्रम में शुरू करूंगा। चेचन्या। तथ्य यह है कि "सबसे svidomykh" के प्रतिनिधि थे। मैं सहमत हूं। यह तथ्य कि सभी को दफनाया या पकड़ा नहीं गया था। हालाँकि, मुझे यह कहना चाहिए कि दूसरा अभियान सीरिया नहीं है। तब यह केवल सबसे आशावादी नागरिक था, जो हमारी सेना में विशेष रूप से और पूरे देश में इस बारे में बात कर सकता था। उस समय प्रत्यर्पण के संदर्भ में यूक्रेनी अधिकारियों को "स्थानांतरित करना" बस व्यर्थ था। यह किसी भी स्तर के अपराधियों के प्रत्यर्पण पर एक समझौते की अनुपस्थिति भी नहीं है, लेकिन यूक्रेन सामान्य रूप से ऐसी आवश्यकताओं को किस हद तक सुनेगा। उस स्तर पर रूस उस स्तर पर नहीं था, यहां क्या छिपा हो सकता है। हां, और पकड़ने के लिए बिजली संरचनाएं भी अपने सबसे अच्छे रूप में नहीं थीं। देशों के बीच वीज़ा मुक्त शासन के अस्तित्व और सीमा के अभाव को देखते हुए, मेरे लिए यह समझना मुश्किल है कि उन स्वयंसेवकों को पकड़ना कैसे संभव होगा जो चेचन्या से यूक्रेन वापस आए थे। और अगर आपको याद है कि मानव कारोबार सीमाओं पर क्या था, तो यह मामला उस समय संभव नहीं लगता है। बेशक, यदि आप यूक्रेनी पक्ष से देखते हैं, तो निश्चित रूप से रूस को इस तथ्य के लिए दोषी ठहराया जाता है कि यूक्रेन के नत्त्सिक ने रूस में लड़ाई लड़ी। हालांकि, यह रूस नहीं था जो उन्हें लाया था, न कि रूस जो रास्ते पर इकट्ठा हुए थे, न कि रूस, जो फूलों के साथ मिले और खुशी की बात थी, उनकी वापसी पर। और मेरे लिए - हमारी गलती केवल इस तथ्य में है कि कुछ लोग अपनी वीरता के फल का उपयोग करने में सक्षम थे। रूस में RNE और अन्य मजेदार संरचनाओं के लिए . . . हाँ, यह था। हां, उन्होंने रैली की और मार्च किया। लेकिन मुझे खेद है, लेकिन वे अब कहां हैं? और उनमें से कितने? यह कहना कि वे जड़ से तड़प रहे थे, असंभव है। अभी भी बुर् पर बैठे हैं। लेकिन "बैंडरेड के आदेश" की शैली में कितना शोर है, इसकी तुलना करने के लिए आज यूक्रेन के आसपास चला जाता है और रूस में यह कैसा है, इसे हल्के ढंग से रखना गलत है। तुलना के लिए क्षमा करें, लेकिन हमारे भूरे और काले राष्ट्रवादी तिलचट्टे की तरह हैं। वे दरार में चुपचाप बैठते हैं और दिन की रोशनी में बाहर नहीं निकलते हैं। चुनावों के बारे में। सर्वेक्षण, यह ध्यान दिया जाना चाहिए, ऐसी चीज . . . पतली। कहां इंटरव्यू देना है, किसके बीच, कैसे सवाल पूछना है। हाल ही में, कीव इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशियोलॉजी ने यूक्रेन के नागरिकों के बीच एक सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण के परिणाम आपको खुश नहीं करेंगे। Ukrainians के तिरेसठ% सुनिश्चित हैं कि हम रूस के साथ युद्ध में हैं। बिल्कुल! पैंसठ% यह सुनिश्चित करने के लिए जानते हैं कि यूक्रेन में रूसी सैनिक हैं। और केवल अट्ठारह% का कहना है कि कोई युद्ध नहीं है। मैंने केवल आपको समझने के लिए आंकड़ों का हवाला दियाः Ukrainians के बीच कोई अंतर्दृष्टि नहीं है। एक हिस्सा है जो शुरू से ही रूसी समर्थक था, लेकिन उनमें से बहुत से "लड़" रहे हैं। सब ठीक है। मैंने कीव में एक हजार लोगों का साक्षात्कार लिया। या दो भी। अब अभ्यास में पूछताछ नहीं की जाती है। बहुत ज़्यादा। आम तौर पर सभ्य चुनावों में वे लिखते हैंः "विभिन्न सामाजिक श्रेणियों के एक्सएनयूएमएक्स लोगों का साक्षात्कार लिया गया। " और फिर इस सर्वेक्षण के आंकड़े पूरे देश के लिए अनुमानित हैं। दूसरे शब्दों में, उन लोगों को जिम्मेदार ठहराया जिन्होंने जवाब नहीं दिया। यदि आपका साक्षात्कार कीव में हुआ था, और ग्रेशेव्स्की क्षेत्र में या मैदान चौक पर भी, तो हाँ, मैं पूरी तरह से अपने आप से सहमत हूं कि एक हजार में से छः सौ पचास लोगों ने ठीक उसी तरह से उत्तर दिया। लेकिन उसी खार्कोव के लिए मैं इतना निश्चित नहीं था। हालांकि सब कुछ हो सकता है। लेकिन किसी भी मामले में, एक लाख में से एक हज़ार उत्तरदाता सिर्फ शून्य,एक% हैं। और कीव में, एक लाख से अधिक असमान रूप से रहते हैं। इस तथ्य के साथ कि यूक्रेनियन का पैंसठ% रूस के साथ युद्ध में संदिग्ध है। क्या, और चर्च भी, हम? यहाँ रूस क्या पक्ष है? तथ्य यह है कि यूक्रेन पूरी तरह से कृत्रिम शिक्षा है लंबे समय से जाना जाता है और समझा जाता है। और यह तथ्य कि इसे वहां बहुत मजबूती से मिलाया जाता है। लेकिन अफ़सोस, पिछली सदी की शुरुआत से पहले ऐसा कोई राष्ट्र नहीं था - Ukrainians। यह नहीं था ! ! ! इसीलिए हर एक तुम पर थोपता है। लेकिन रूस का इससे कोई लेना-देना नहीं है। यहां तक कि यूएसएसआर के उत्तराधिकारी के रूप में, जिसमें बोल्शेविकों ने इस राज्य को जन्म देना शुरू कर दिया। अंत में, तेईस में, एक रजाई हो सकता है और इसे फिर से तैयार कर सकता है। अवसर थे। और समय था और पैसा। Zababahali एक संघीय घटना के रूप में पश्चिमी यूक्रेन होगा, और बाकी सभी भी। किसने बाधा दी? रूस फिर? तो मुझे माफ कर दो, आज यह वही है जो यूक्रेन में है। राष्ट्रीय विचार के बारे में। निरंतरता में। आज के लिए हमारा राष्ट्रीय विचार यह है कि रूसी हमारी सभी परेशानियों के लिए दोषी हैं। हम यूक्रेन के बाहर एक विचार की तलाश कर रहे हैं। हम एक दुश्मन की तलाश कर रहे हैं। जब कुछ भी नहीं है जो लोगों को एकजुट करता है, तो राज्य को बचाने का एकमात्र तरीका बाहरी दुश्मन का आविष्कार करना है। खैर, कम से कम प्रतिरोध का रास्ता अपनाएं। सामान्य। शत्रु मिला। ठीक। लेकिन क्षमा करें, दुश्मन आपसे बिल्कुल भी नहीं लड़ना चाहता है। "बिल्कुल" शब्द के अधिकतम अर्थ में। और प्रतिबंधों, एम्बार्गो और नाकाबंदी के साथ सभी आर्थिक कूद और हरकतों को पीटा, पीटा गया और मुख्य रूप से यूक्रेनी जेब में पीटा जाएगा। है ना? ठीक है, हम हेलीकॉप्टर और जहाजों के बिना नहीं कर सकते। यहाँ हम हैं, जैसा कि हम कर सकते हैं। और हम कर सकते हैं . . . इसलिए, हमारे पास हेलीकॉप्टर हैं और जहाजों को पानी में लॉन्च करते हैं। हां, बवासीर को जोड़ दिया गया है, लेकिन कुछ भी नहीं, यह अचूक और हल करने योग्य है। लेकिन हम इस तथ्य के लिए दोषी नहीं हैं कि यूक्रेनी सरकार ने इस योजना में एक कील बनाई है। С другой стороны, в связи с этими ужимками в украинских ВСУ тоже много чего нет. Точнее, проще посмотреть, что есть. Но ни о новых танках, ни о самолетах, ни о вертолетах, ни тем более, о кораблях речь не идет. Тоже Россия виновата? खैर, हम क्या करेंगे? तथ्य यह है कि कुछ किया जाना चाहिए स्पष्ट है। ऐसे लोग हैं जो मानते हैं कि डेज़रज़िन्स्की डिवीजन के बाद के काम के साथ एक सैन्य अभियान के माध्यम से दिमाग को साफ करना आवश्यक है। जो कि साल का एक हज़ार नौ सौ छियालीस वेरिएंट है। लेकिन इसके लिए मूल रूप से जो लोग एक सौ% पर हैं, वे यह सुनिश्चित करने के लिए लड़ रहे हैं कि वह इस ऑपरेशन में भाग नहीं लेंगे। मस्तिष्क प्रसंस्करण जानकारीपूर्ण? बतख और इसलिए मीडिया काम करते हैं। दिल के काम से। लेकिन सबसे चौकसी में उसी लगन से संघर्ष करते हुए। तो यह एक क्लब के साथ एक गोरिल्ला नहीं है, जैसा कि पहले मामले में है, लेकिन कठफोड़वा। जल्दी या बाद में लार्वा तक पहुंचें। एक समय की बात है। जो हम, मैं ध्यान दें, अभी भी गायब है। और तथ्य यह है कि कुछ Ukrainians को समझ में आया है, लेकिन अभी तक आकार नहीं लिया है, निश्चित रूप से, अच्छा है। लेकिन किसी को इतनी उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि एक तरह का जादूगर आ जाएगा, देशद्रोही दफन हो जाएगा, और अचानक सब कुछ सुंदर हो जाएगा। नेप्रीगली और नामायडिली कि "यूक्रेन - त्से यूरोप"? का प्रयोग करें। क्या अनुमति नहीं है? लेकिन रूस का इससे कोई लेना-देना नहीं है। हमने किसी को एक स्थान के नीचे नहीं धकेला। उन्होंने लात नहीं मारी, वे सभी सम्मानित थे। अब, और स्पष्ट करना शुरू करें कि यूक्रेन का भविष्य केवल रूस के साथ है? हां, और इसे एक खुले गैस पाइप के साथ ऐसे दामों पर सुदृढ़ करें कि संपूर्ण अभिजात वर्ग ईवामी में समा जाए? हाँ, और नष्ट करने के लिए एक दर्जन अरब डॉलर फेंक दिए? क्षमा करें, पिछला चरण। यह सब पहले से ही है। हम भरा। उन्होंने खरीदा, इसे कुंद करने के लिए, बेल पर यूक्रेन के सभी, अगर केवल सेवस्तोपोल खो नहीं जाएगा। परिणाम ज्ञात है। कुछ ने भविष्य में बहुत बचत की है, और कुछ दिवालिया हो गए हैं। भविष्य में उपहारों और लाभों को भरने के लिए, ताकि यूक्रेनी दिमाग को रोशनी दिखाई दे, और यह देखने में सक्षम हो कि रूस के साथ रिश्ते और दोस्ती में फायदेमंद है, आज हमारी सरकार की योजनाओं में शायद ही कोई हो। यूक्रेनी रेक एक महंगी और दर्दनाक चीज है। यहां से केवल एक निष्कर्षः हमें इंतजार करना चाहिए। हर सेकंड यूक्रेन आने तक इंतजार करना जरूरी है कि यूरोप के लिए कोई रास्ता नहीं था, नहीं, और वहां नहीं होगा। यूरोप में, बदमाशों की ज़रूरत नहीं है, उनके पास पर्याप्त हैं। और यह बेहतर है यदि प्रत्येक पहले से पहले। और आपको उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि पुतिन एक नीले हेलिकॉप्टर में पैसे के कंटेनर के साथ आएंगे, और सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा। यूक्रेन क्रीमिया नहीं है, लेकिन क्रीमिया अब दो साल के लिए यूक्रेन रहा है। और कभी इसका हिस्सा नहीं होंगे। और क्रीमियन परिदृश्य नहीं होगा। जब यूक्रेनी लोगों को यह समझ में आ जाएगा कि रूस दुश्मन नहीं है, लेकिन एक दोस्त है, और फिर कुछ करना शुरू करना संभव होगा। रिश्तों का पुनर्निर्माण, व्यापार को पुनर्जीवित करना, अर्थव्यवस्था और बाकी सब कुछ। हां, इसके लिए सत्ता के आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता होगी। लेकिन - कीव की सड़कों पर रूसी टैंक के बिना। पोलतावा में हमारे पैराट्रूपर्स के बिना। खुद को सामना करना होगा। निस्संदेह, हम मदद कर सकते हैं। और हम कर सकते हैं। लेकिन उतना नहीं जितना बहुमत चाहेंगे। एकमुश्त आक्रामकता के साथ। मूर्तियां। और यह सब समय, ज़ाहिर है, हम Ukrainians के सिर पर काम करने के लिए बाध्य हैं। के बारे में बताएं। इसे साबित करो। बहस करना। और शायद, फिर बाहर निकलने पर, हमें कम से कम, एक दोस्ताना यूक्रेन मिलेगा। मैं एक बात में कॉकरोच से सहमत हूंः हाँ, हम Ukrainians के दिमाग की लड़ाई हार गए। लेकिन अभियान में हारी हुई लड़ाई हार नहीं है। इसके अलावा, बड़े और हम फिर से इस लड़ाई में नहीं आए। खैर, आपको बदला लेना है। और खरोंच से शुरू करो। फिर। स्वाभाविक रूप से, दोनों पक्षों की पिछली गलतियों को ध्यान में रखते हुए। बड़े और छोटे भाइयों से बचने के लिए। और बस रिश्तेदार थे।
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आज के समय में सबके हाथों में मोबाइल है और उसमें ओटीटी प्लेटफार्म। जिस पर कभी भी कहीं भी आराम से अपनी मन-पसंद का कंटेंट देखा जा सकता है, लेकिन 90 के दशक में लोग सीरियल्स आते ही सारा काम छोड़कर टीवी देखने लगते थे। उस समय में कई लोकप्रिय टीवी शो प्रसारित हुए जिन्हें आज भी लोग देखना पसंद करते हैं। उस समय में शो शक्तिमान तो इतना पॉपुलर हुआ था कि अब इस पर फिल्म बनाने को लेकर भी बात चल रही है, यानी बच्चों का सुपरहीरो पर्दे पर एक बार फिर पर्दे पर वापसी करने वाला है। फिलहाल आपको बता दें कि शक्तिमान से लेकर शाका लाका बूम-बू और राजा रेंचो जैसे कई टीवी शोज आप ओटीटी प्लेटफार्म पर आराम से किसी भी समय देख सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कि कौन से हैं वो शो।
सबसे पहले बात करते हैं टीवी शो शक्तिमान की, जो आज भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। इस पर बन रही फिल्म हिट होगी या नहीं ये वक्त ही बताएगा लेकिन अगर आप भी शक्तिमान सीरियल के दीवाने हैं, तो इसे ओटीटी प्लेटफार्म अमेजन प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं।
डीडी नेशनल पर प्रसारित होने वाले जादुई शो शाका लाका बूम बूम खासतौर पर बच्चों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। इसे बाद में स्टार प्लस पर भी प्रसारित किया गया। शो की कहानी संजू नाम के बच्चे पर थी, जिसके पास एक ऐसी जादुई पेंसिल थी, जिससे कुछ भी बनाने से वो चीज असली हो जाती थी। आज भी बच्चों को इस सीरियल में दिखाए गए पेंसिल का डिजाइन बहुत पसंद है। इस शो को आप डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर देख सकते हैं।
इस टीवी शो की कहानी एक डिटेक्टिव पर आधारित थी। इसमें सबसे दिलचस्प बात ये दिखाई गई थी, कि एक बंदर मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने में मदद करता था। लोगों को इंसान और बंदर की ये जोड़ी काफी पसंद आई थी। फिलहाल अब इस शो को अमेजन प्राइम और वूट सेलेक्ट ऐप पर देख सकते हैं।
महाभारत पर सीरियल से लेकर फिल्में तक हमेशा बनाई जाती रही हैं। इन्हीं में से एक बीआर चोपड़ा द्वारा निर्मित शो महाभारत 1988 के समय में टेलीकास्ट किया गया था। जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। इस शो को आप ओटीटी प्लेटफार्म जी5 पर देख सकते हैं।
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आज के समय में सबके हाथों में मोबाइल है और उसमें ओटीटी प्लेटफार्म। जिस पर कभी भी कहीं भी आराम से अपनी मन-पसंद का कंटेंट देखा जा सकता है, लेकिन नब्बे के दशक में लोग सीरियल्स आते ही सारा काम छोड़कर टीवी देखने लगते थे। उस समय में कई लोकप्रिय टीवी शो प्रसारित हुए जिन्हें आज भी लोग देखना पसंद करते हैं। उस समय में शो शक्तिमान तो इतना पॉपुलर हुआ था कि अब इस पर फिल्म बनाने को लेकर भी बात चल रही है, यानी बच्चों का सुपरहीरो पर्दे पर एक बार फिर पर्दे पर वापसी करने वाला है। फिलहाल आपको बता दें कि शक्तिमान से लेकर शाका लाका बूम-बू और राजा रेंचो जैसे कई टीवी शोज आप ओटीटी प्लेटफार्म पर आराम से किसी भी समय देख सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कि कौन से हैं वो शो। सबसे पहले बात करते हैं टीवी शो शक्तिमान की, जो आज भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। इस पर बन रही फिल्म हिट होगी या नहीं ये वक्त ही बताएगा लेकिन अगर आप भी शक्तिमान सीरियल के दीवाने हैं, तो इसे ओटीटी प्लेटफार्म अमेजन प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं। डीडी नेशनल पर प्रसारित होने वाले जादुई शो शाका लाका बूम बूम खासतौर पर बच्चों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। इसे बाद में स्टार प्लस पर भी प्रसारित किया गया। शो की कहानी संजू नाम के बच्चे पर थी, जिसके पास एक ऐसी जादुई पेंसिल थी, जिससे कुछ भी बनाने से वो चीज असली हो जाती थी। आज भी बच्चों को इस सीरियल में दिखाए गए पेंसिल का डिजाइन बहुत पसंद है। इस शो को आप डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर देख सकते हैं। इस टीवी शो की कहानी एक डिटेक्टिव पर आधारित थी। इसमें सबसे दिलचस्प बात ये दिखाई गई थी, कि एक बंदर मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने में मदद करता था। लोगों को इंसान और बंदर की ये जोड़ी काफी पसंद आई थी। फिलहाल अब इस शो को अमेजन प्राइम और वूट सेलेक्ट ऐप पर देख सकते हैं। महाभारत पर सीरियल से लेकर फिल्में तक हमेशा बनाई जाती रही हैं। इन्हीं में से एक बीआर चोपड़ा द्वारा निर्मित शो महाभारत एक हज़ार नौ सौ अठासी के समय में टेलीकास्ट किया गया था। जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। इस शो को आप ओटीटी प्लेटफार्म जीपाँच पर देख सकते हैं।
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Highlightsएशियन क्रिकेट काउंसिल के अंडर-19 क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान अजीबोगरीब वाकया देखने को मिला। नेपाल और हॉन्गकॉन्ग के बीच खेले गए मैच में टॉस के दौरान किसी ओर नहीं गिरा और सीधा खड़ा हो गया।
मैच की शुरुआत सिक्का उछालकर टॉस के साथ होती है और इससे तय होता है कि कौन सी टीम पहले बल्लेबाजी करेगी और कौन सी टीम गेंदबाजी करेगी। लेकिन जब टॉस के दौरान सिक्का खड़ा हो जाए तो क्या होगा। एशियन क्रिकेट काउंसिल (एसीसी) के अंडर-19 क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान नेपाल और हॉन्गकॉन्ग के बीच खेले गए मैच में कुछ ऐसा ही अजीबोगरीब वाकया देखने को मिला।
मैच शुरू होने से पहले जब टॉस के लिए सिक्का उछालकर हेड या टेल के बारे में पूछा गया, तब सिक्का नीचे आया तो यह किसी ओर नहीं गिरा और सीधा खड़ा हो गया। रेफरी ने इसके बाद दोबारा टॉस करने को कहा। इसके बाद नेपाल ने टॉस जीता और पहले फील्डिंग करने का फैसला किया।
सोशल मीडिया पर टॉस के वीडियो और फोटोज वायरल हो गए हैं। आईसीसी ने इस अनोखे टॉस की फोटो शेयर की और लिखा, 'क्या कभी इससे पहले ऐसा देखा है? '
इस मैच में हॉन्ग कॉन्ग की टीम 43. 1 ओवर में 95 रनों पर ऑल आउट हो गई और नेपाल के सामने 96 रनों का लक्ष्य रखा। नेपाल ने फाइनल में 16. 1 ओवर में 96 रन बनाकर टूर्नामेंट जीत लिया।
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Highlightsएशियन क्रिकेट काउंसिल के अंडर-उन्नीस क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान अजीबोगरीब वाकया देखने को मिला। नेपाल और हॉन्गकॉन्ग के बीच खेले गए मैच में टॉस के दौरान किसी ओर नहीं गिरा और सीधा खड़ा हो गया। मैच की शुरुआत सिक्का उछालकर टॉस के साथ होती है और इससे तय होता है कि कौन सी टीम पहले बल्लेबाजी करेगी और कौन सी टीम गेंदबाजी करेगी। लेकिन जब टॉस के दौरान सिक्का खड़ा हो जाए तो क्या होगा। एशियन क्रिकेट काउंसिल के अंडर-उन्नीस क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान नेपाल और हॉन्गकॉन्ग के बीच खेले गए मैच में कुछ ऐसा ही अजीबोगरीब वाकया देखने को मिला। मैच शुरू होने से पहले जब टॉस के लिए सिक्का उछालकर हेड या टेल के बारे में पूछा गया, तब सिक्का नीचे आया तो यह किसी ओर नहीं गिरा और सीधा खड़ा हो गया। रेफरी ने इसके बाद दोबारा टॉस करने को कहा। इसके बाद नेपाल ने टॉस जीता और पहले फील्डिंग करने का फैसला किया। सोशल मीडिया पर टॉस के वीडियो और फोटोज वायरल हो गए हैं। आईसीसी ने इस अनोखे टॉस की फोटो शेयर की और लिखा, 'क्या कभी इससे पहले ऐसा देखा है? ' इस मैच में हॉन्ग कॉन्ग की टीम तैंतालीस. एक ओवर में पचानवे रनों पर ऑल आउट हो गई और नेपाल के सामने छियानवे रनों का लक्ष्य रखा। नेपाल ने फाइनल में सोलह. एक ओवर में छियानवे रन बनाकर टूर्नामेंट जीत लिया।
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पैसे को लोग अलग-अलग जगह निवेश कर इससे अधिक रिटर्न लेने की उम्मीद में रहते हैं। जब भी निवेश की बात आती है तो लोग फिक्स्ड डिपॉजिट, सरकारी योजनाएं, म्यूच्यूअल फंड्स शेयर्स और अन्य कई अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट पॉलिसी में पैसे लगाते हैं। इनमें कई बार प्रिंसिपल अमाउंट भी डूब जाने का खतरा रहता है। इससे बचने के लिए लोग प्रॉपर्टी और महंगी चीजों में निवेश करते हैं जिसकी कीमत समय के अनुसार बढ़ें। इनमें गोल्ड, डिजिटल गोल्ड, सिल्वर और भी कई चीजें शामिल हैं। इसमें निवेश करने से पहले सिल्वर इन्वेस्टमेंट रूल के बारे में जरूर जानें।
जिस तरह से निवेशक शेयर स्टॉक में पैसे लगाकर इसकी खरीद बेच करते हैं। इसी तरह सिल्वर ईटीएफ में भी निवेश कर इससे स्टॉक और शेयर की तरह मुनाफा देखते हुए इसकी खरीद बेच कर सकते हैं। ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड शेयर बाजार में लिस्ट होने एक तरह का फंड है। NFO यानी न्यू फंड ऑफर किस समय इसे फंड हाउस से खरीद सकेंगे। इसके बाद इसकी लिस्टिंग शेयर बाजार पर होती है। इसे वहां से अपने अनुसार खरीदा और बेचा जा सकता है।
सिल्वर में केवल मिडिल क्लास के लोग ही नहीं बल्कि अमीर वर्ग के लोग भी निवेश करते हैं। यह एक तरह का बेहद जरूरी कमोडिटी है। इसमें निवेश कर महंगाई और संकट के समय इसका लाभ ले सकते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं इसमें निवेश करने के लिए डिमैट अकाउंट की भी जरूरत नहीं है। केवल 100 रुपये से भी चांदी में निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ आप फिजिकल की जगह डिजिटल गोल्ड और सिल्वर में पैसे लगाते हैं तो इसे खोने या चोरी होने का खतरा नहीं रहता है।
सिल्वर इन्वेस्टमेंट रूल यानी अगर आप भी चांदी में निवेश कर अच्छा रिटर्न लेना चाहते हैं तो इसके लिए इंपॉर्टेंट रूल को फॉलो जरूर करें। छोटे निवेशक चांदी के सिक्के और बड़े निवेशक सिल्वर बार में निवेश करें। ऑनलाइन कमोडिटी मार्केट का सही तड़के से उपयोग करें। इसे हमेशा किसी मशहूर आपूर्तिकर्ताओं से ही खरीदें। फिजिकल सिल्वर को बैंक लॉकर में सुरक्षित रख सकते हैं। एक ही बार में ज्यादा सिल्वर खरीदने से बचें। अलग अलग वेबसाइट और मार्केट से कीमत को ट्रैक करते रहें। अधिक कीमत मिलने पर कभी भी बेच सकते हैं। भारत के साथ ही वैश्विक बाजार पर भी नजर रखें।
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पैसे को लोग अलग-अलग जगह निवेश कर इससे अधिक रिटर्न लेने की उम्मीद में रहते हैं। जब भी निवेश की बात आती है तो लोग फिक्स्ड डिपॉजिट, सरकारी योजनाएं, म्यूच्यूअल फंड्स शेयर्स और अन्य कई अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट पॉलिसी में पैसे लगाते हैं। इनमें कई बार प्रिंसिपल अमाउंट भी डूब जाने का खतरा रहता है। इससे बचने के लिए लोग प्रॉपर्टी और महंगी चीजों में निवेश करते हैं जिसकी कीमत समय के अनुसार बढ़ें। इनमें गोल्ड, डिजिटल गोल्ड, सिल्वर और भी कई चीजें शामिल हैं। इसमें निवेश करने से पहले सिल्वर इन्वेस्टमेंट रूल के बारे में जरूर जानें। जिस तरह से निवेशक शेयर स्टॉक में पैसे लगाकर इसकी खरीद बेच करते हैं। इसी तरह सिल्वर ईटीएफ में भी निवेश कर इससे स्टॉक और शेयर की तरह मुनाफा देखते हुए इसकी खरीद बेच कर सकते हैं। ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड शेयर बाजार में लिस्ट होने एक तरह का फंड है। NFO यानी न्यू फंड ऑफर किस समय इसे फंड हाउस से खरीद सकेंगे। इसके बाद इसकी लिस्टिंग शेयर बाजार पर होती है। इसे वहां से अपने अनुसार खरीदा और बेचा जा सकता है। सिल्वर में केवल मिडिल क्लास के लोग ही नहीं बल्कि अमीर वर्ग के लोग भी निवेश करते हैं। यह एक तरह का बेहद जरूरी कमोडिटी है। इसमें निवेश कर महंगाई और संकट के समय इसका लाभ ले सकते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं इसमें निवेश करने के लिए डिमैट अकाउंट की भी जरूरत नहीं है। केवल एक सौ रुपयापये से भी चांदी में निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ आप फिजिकल की जगह डिजिटल गोल्ड और सिल्वर में पैसे लगाते हैं तो इसे खोने या चोरी होने का खतरा नहीं रहता है। सिल्वर इन्वेस्टमेंट रूल यानी अगर आप भी चांदी में निवेश कर अच्छा रिटर्न लेना चाहते हैं तो इसके लिए इंपॉर्टेंट रूल को फॉलो जरूर करें। छोटे निवेशक चांदी के सिक्के और बड़े निवेशक सिल्वर बार में निवेश करें। ऑनलाइन कमोडिटी मार्केट का सही तड़के से उपयोग करें। इसे हमेशा किसी मशहूर आपूर्तिकर्ताओं से ही खरीदें। फिजिकल सिल्वर को बैंक लॉकर में सुरक्षित रख सकते हैं। एक ही बार में ज्यादा सिल्वर खरीदने से बचें। अलग अलग वेबसाइट और मार्केट से कीमत को ट्रैक करते रहें। अधिक कीमत मिलने पर कभी भी बेच सकते हैं। भारत के साथ ही वैश्विक बाजार पर भी नजर रखें।
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ज्येष्ठ माह में पानी का वाष्पीकरण तेजी से होता है जिसके कारण से नदियां और तालाब सूख जाते हैं। हिन्दू सभ्यता में इस महीने जल के संरक्षण का विशेष जोर दिया जाता है।
ज्येष्ठ महीने में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे व्रत भी रखे जाते हैं। ये व्रत प्रकृति में जल को बचाने का संदेश देते हैं। गंगा दशहरा में नदियों की पूजा और निर्जला एकादशी में बिना जल का व्रत रखा जाता है।
नारद जयंती 'देवऋषि नारद मुनि' के जन्म दिवस के रूप में वैशाख कृष्ण प्रतिपदा के दिन मनाई जाती है। इस साल नारद जयंती 8 मई को है।
अपरा एकादशी 18 मई को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अपरा एकादशी अथवा अचला एकादशी के नाम से जाना जाता है। सनातन मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
शनि जयंती पर्व 22 मई को है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रति वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है। इस दिन शनिदेव की विशेष पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, वट सावित्री व्रत हिंदू विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। इस साल वट सावित्री व्रत 22 मई को है।
महेश नवमी 31 मई को है। महेश नवमी प्रतिवर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति भगवान शिव के वरदान स्वरूप मानी गई है जिसका उत्पत्ति दिवस ज्येष्ठ शुक्ल नवमी है।
गायंत्री का पर्व 2 जून को है। यह पर्व मां गायत्री का जन्मोत्सव है। मां गायत्री को वेद माता भी कहा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार गायत्री जयंती का पर्व प्रति वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है।
ज्येष्ठ मास में शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी और भीमसेनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है. इस एकादशी व्रत में पानी पीना वर्जित माना जाता है इसलिए इस एकादशी को निर्जला कहते है। यह व्रत 2 जून को रखा जाएगा।
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ज्येष्ठ माह में पानी का वाष्पीकरण तेजी से होता है जिसके कारण से नदियां और तालाब सूख जाते हैं। हिन्दू सभ्यता में इस महीने जल के संरक्षण का विशेष जोर दिया जाता है। ज्येष्ठ महीने में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे व्रत भी रखे जाते हैं। ये व्रत प्रकृति में जल को बचाने का संदेश देते हैं। गंगा दशहरा में नदियों की पूजा और निर्जला एकादशी में बिना जल का व्रत रखा जाता है। नारद जयंती 'देवऋषि नारद मुनि' के जन्म दिवस के रूप में वैशाख कृष्ण प्रतिपदा के दिन मनाई जाती है। इस साल नारद जयंती आठ मई को है। अपरा एकादशी अट्ठारह मई को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अपरा एकादशी अथवा अचला एकादशी के नाम से जाना जाता है। सनातन मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। शनि जयंती पर्व बाईस मई को है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रति वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है। इस दिन शनिदेव की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वट सावित्री व्रत हिंदू विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। इस साल वट सावित्री व्रत बाईस मई को है। महेश नवमी इकतीस मई को है। महेश नवमी प्रतिवर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति भगवान शिव के वरदान स्वरूप मानी गई है जिसका उत्पत्ति दिवस ज्येष्ठ शुक्ल नवमी है। गायंत्री का पर्व दो जून को है। यह पर्व मां गायत्री का जन्मोत्सव है। मां गायत्री को वेद माता भी कहा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार गायत्री जयंती का पर्व प्रति वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। ज्येष्ठ मास में शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी और भीमसेनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है. इस एकादशी व्रत में पानी पीना वर्जित माना जाता है इसलिए इस एकादशी को निर्जला कहते है। यह व्रत दो जून को रखा जाएगा।
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नयी दिल्ली , सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में बंद जनादेश गुरुवार को सामने आ जायेगा और इसके साथ ही यह तय हो जायेगा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ,क बार फिर सत्ता में आयेगा या देश की कमान किसी अन्य गठबंधन के हाथ में जायेगी।
मतदान बाद के अधिकतर सर्वेक्षणों ;एग्जिट पोल में राजग को फिर से बहुमत का अनुमान लगाया गया है, लेकिन असली फैसला कल की मतगणना से होगा। राजग जहाँ ,एग्जिट पोल के अनुमानों को सही ठहराते हुये दावा कर रहा है कि पाँच साल के उसके काम के आधार पर उसकी जीत सुनिश्चित है, वहीं कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने ,ग्जिट पोल को गुमराह करने वाला बताया है।
लोकसभा की 542 सीटों के लिए 11 अप्रैल से 19 मई तक सात चरणों में मतदान हुआ जिसमें करीब 91 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 67 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस चुनाव में 7,988 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन अध्यक्ष सोनिया गाँधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के अधिकतर मंत्री, कई दलों के प्रमुख, कई पूर्व मुख्यमंत्री तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री शामिल हैं।
लोकसभा के साथ-साथ चार राज्यों - आँध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश तथा सिक्किम - के विधानसभा चुनावों की मतगणना भी कल सुबह आठ बजे शुरू होगी। इन राज्यों में भी 11 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच मतदान कराये गये थे। इसके लिये देशभर में सभी मतगणना केंद्रों पर तैयारियाँ पूरी कर ली गयी हैं और सुरक्षा के सख्त और व्यापक इंतजाम किये गये हैं। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तथा पुलिस महानिदेशकों से मतगणना के दौरान कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लि, सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिये हैं।
मतगणना शुरू होने के समय वीवीपैट की पर्चियों का ईवीएम से मिलान करने की 22 विपक्षी दलों की माँग ठुकराने के बाद आयोग ने पहले की तरह ही मतों की गिनती कराने का फैसला किया है। इसके तहत प्रत्येक लोकसभा सीट के तहत आने वाले हर विधानसभा क्षेत्र की पाँच वीवीपैट मशीनों की पर्चियों का ईवीएम में दर्ज मतों से मिलान मतगणना पूरी होने के बाद किया जायेगा। इस बारे में सभी आवश्यक दिशानिर्देश राज्य चुनाव अधिकारियों को दे दिये गये हैं।
मतों की गिनती के लिए चुनाव आयोग द्वारा पहले से निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया जायेगा और इसमें किसी तरह की खामियों तथा गड़बड़ियों को तत्काल दूर करने की भी व्यवस्था की गयी है ताकि मतगणना सुचारू और निर्बाध रूप से चलती रहे। भीषण गर्मी को देखते हुये मतगणना में भाग लेने वाले कर्मचारियों और राजनीतिक दलों के ,जेंटों की सुविधा के लि, भी विशेष प्रबंध किये गये हैं। चुनाव परिणाम आयोग की वेबसाइट और ष्वोटर हेल्पलाइन ऐप पर उपलब्ध होंगे। आयोग ने इस बार के लोकसभा चुनाव के लि, 55 लाख ईवीएम का उपयोग किया है। वीवीपैट मिलान प्रक्रिया में चार से पाँच घंटे का समय लग सकता है जिसके कारण चुनाव परिणाम में कुछ देरी होने की संभावना है।
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नयी दिल्ली , सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में बंद जनादेश गुरुवार को सामने आ जायेगा और इसके साथ ही यह तय हो जायेगा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ,क बार फिर सत्ता में आयेगा या देश की कमान किसी अन्य गठबंधन के हाथ में जायेगी। मतदान बाद के अधिकतर सर्वेक्षणों ;एग्जिट पोल में राजग को फिर से बहुमत का अनुमान लगाया गया है, लेकिन असली फैसला कल की मतगणना से होगा। राजग जहाँ ,एग्जिट पोल के अनुमानों को सही ठहराते हुये दावा कर रहा है कि पाँच साल के उसके काम के आधार पर उसकी जीत सुनिश्चित है, वहीं कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने ,ग्जिट पोल को गुमराह करने वाला बताया है। लोकसभा की पाँच सौ बयालीस सीटों के लिए ग्यारह अप्रैल से उन्नीस मई तक सात चरणों में मतदान हुआ जिसमें करीब इक्यानवे करोड़ मतदाताओं में से लगभग सरसठ प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस चुनाव में सात,नौ सौ अठासी उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन अध्यक्ष सोनिया गाँधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के अधिकतर मंत्री, कई दलों के प्रमुख, कई पूर्व मुख्यमंत्री तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। लोकसभा के साथ-साथ चार राज्यों - आँध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश तथा सिक्किम - के विधानसभा चुनावों की मतगणना भी कल सुबह आठ बजे शुरू होगी। इन राज्यों में भी ग्यारह अप्रैल से उनतीस अप्रैल के बीच मतदान कराये गये थे। इसके लिये देशभर में सभी मतगणना केंद्रों पर तैयारियाँ पूरी कर ली गयी हैं और सुरक्षा के सख्त और व्यापक इंतजाम किये गये हैं। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तथा पुलिस महानिदेशकों से मतगणना के दौरान कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लि, सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिये हैं। मतगणना शुरू होने के समय वीवीपैट की पर्चियों का ईवीएम से मिलान करने की बाईस विपक्षी दलों की माँग ठुकराने के बाद आयोग ने पहले की तरह ही मतों की गिनती कराने का फैसला किया है। इसके तहत प्रत्येक लोकसभा सीट के तहत आने वाले हर विधानसभा क्षेत्र की पाँच वीवीपैट मशीनों की पर्चियों का ईवीएम में दर्ज मतों से मिलान मतगणना पूरी होने के बाद किया जायेगा। इस बारे में सभी आवश्यक दिशानिर्देश राज्य चुनाव अधिकारियों को दे दिये गये हैं। मतों की गिनती के लिए चुनाव आयोग द्वारा पहले से निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया जायेगा और इसमें किसी तरह की खामियों तथा गड़बड़ियों को तत्काल दूर करने की भी व्यवस्था की गयी है ताकि मतगणना सुचारू और निर्बाध रूप से चलती रहे। भीषण गर्मी को देखते हुये मतगणना में भाग लेने वाले कर्मचारियों और राजनीतिक दलों के ,जेंटों की सुविधा के लि, भी विशेष प्रबंध किये गये हैं। चुनाव परिणाम आयोग की वेबसाइट और ष्वोटर हेल्पलाइन ऐप पर उपलब्ध होंगे। आयोग ने इस बार के लोकसभा चुनाव के लि, पचपन लाख ईवीएम का उपयोग किया है। वीवीपैट मिलान प्रक्रिया में चार से पाँच घंटे का समय लग सकता है जिसके कारण चुनाव परिणाम में कुछ देरी होने की संभावना है।
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लोढ़ा समिति की सिफारिशों के कारण बीसीसीआई तो काफी समय से चर्चा में रहा है, अब लोढ़ा कमिटी के निशाने पर डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन भी आ गए है.
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उस चिट्ठी में बीसीसीआई ने की स्टेटस रिपोर्ट में यह साफ़ लिखा गया है, कि वर्किंग कमिटी के सभी सदस्यों ने कमिटी द्वारा रखे गये प्रस्तावों को स्वीकार किया था. जिसके अनुसार एमसीए पहले ही इस निर्णय के लिए कुछ बदलाव करने के लिए राज़ी हो गया था.
एमसीए ने 7 नवम्बर को हुई एसजीएम बैठक में जो फैसले लिए है, वो सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए आदेशो का उल्लंघन है. लोढ़ा समिति का गठन बीसीसीआई और बीसीसीआई से जुड़े क्रिकेट एसोसिएशंस में पारदर्शिता लाने के लिए किया गया था, लेकिन जबसे लोढ़ा समिति ने अपना काम संभाला है, तभी से बीसीसीआई और जस्टिस आर एम लोढ़ा के बीच मतभेद शुरू हो चूका है.
हाल ही में लोढ़ा समिति ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह प्रस्ताव रखा था, कि बीसीसीआई के सभी उच्च पदों पर नियुक्त अधिकारीयों को हटा देना चाहिए. साथ ही यह भी प्रस्ताव रखा गया था, कि बीसीसीआई का प्रेक्षक पूर्व गृह राज्य मंत्री गोपाल कृष्ण पिल्लाई को बना देना चाहिए.
लोढ़ा समिति और बीसीसीआई के बीच विवाद के कारण बीसीसीआई की छवि पर काफी असर पड़ा है, अगर यह मामला जल्द ही सुलझाया नहीं गया, तो भारत के प्रदर्शन पर भी इसका असर पड़ सकता है.
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लोढ़ा समिति की सिफारिशों के कारण बीसीसीआई तो काफी समय से चर्चा में रहा है, अब लोढ़ा कमिटी के निशाने पर डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन भी आ गए है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उस चिट्ठी में बीसीसीआई ने की स्टेटस रिपोर्ट में यह साफ़ लिखा गया है, कि वर्किंग कमिटी के सभी सदस्यों ने कमिटी द्वारा रखे गये प्रस्तावों को स्वीकार किया था. जिसके अनुसार एमसीए पहले ही इस निर्णय के लिए कुछ बदलाव करने के लिए राज़ी हो गया था. एमसीए ने सात नवम्बर को हुई एसजीएम बैठक में जो फैसले लिए है, वो सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए आदेशो का उल्लंघन है. लोढ़ा समिति का गठन बीसीसीआई और बीसीसीआई से जुड़े क्रिकेट एसोसिएशंस में पारदर्शिता लाने के लिए किया गया था, लेकिन जबसे लोढ़ा समिति ने अपना काम संभाला है, तभी से बीसीसीआई और जस्टिस आर एम लोढ़ा के बीच मतभेद शुरू हो चूका है. हाल ही में लोढ़ा समिति ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह प्रस्ताव रखा था, कि बीसीसीआई के सभी उच्च पदों पर नियुक्त अधिकारीयों को हटा देना चाहिए. साथ ही यह भी प्रस्ताव रखा गया था, कि बीसीसीआई का प्रेक्षक पूर्व गृह राज्य मंत्री गोपाल कृष्ण पिल्लाई को बना देना चाहिए. लोढ़ा समिति और बीसीसीआई के बीच विवाद के कारण बीसीसीआई की छवि पर काफी असर पड़ा है, अगर यह मामला जल्द ही सुलझाया नहीं गया, तो भारत के प्रदर्शन पर भी इसका असर पड़ सकता है.
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नई दिल्लीः आम जनता को महंगाई की मार से राहत मिलने के संकेत नज़र आने लगे हैं. खुदरा महंगाई (Retail Inflation) के बाद अब थोक महंगाई (Wholesale Inflation) में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. अप्रैल माह में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर शून्य से भी नीचे पहुँच गई है. यह थोक महंगाई का लगभग 3 साल का सबसे निम्न स्तर है.
सोमवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर 0 से निचे गिरकर - 0. 92 फीसदी हो गई है. जुलाई 2020 के बाद ऐसा पहली दफा हुआ है, जब थोक महंगाई दर 0 से भी नीचे गिर गई हो. इससे पहले मार्च माह के दौरान भी थोक महंगाई की दर में भारी गिरावट देखने को मिली थी और यह कम होकर 1. 34 फीसदी दर्ज की गई थी. बता दें कि, बीते कुछ समय से थोक महंगाई की दर लगातार कम हो रही है.
अप्रैल 2023 निरंतर 11वां महीना है, जब थोक महंगाई की दर में गिरावट दर्ज की गई है. यह फरवरी में 3. 85 फीसदी और जनवरी में 4. 73 फीसदी दर्ज की गई थी. यह आम जनता के लिए डबल राहत है, क्योंकि इससे पहले जारी किए गए खुदरा मूल्य आधारित महंगाई के आंकड़ों में भी गिरावट आई थी. अप्रैल माह के दौरान खुदरा महंगाई की दर मार्च के 5. 7 फीसदी की तुलना में कम होकर 4. 7 फीसदी तक लुढ़क गई थी. यह खुदरा महंगाई का 18 महीने का सबसे कम स्तर है.
बैंकों में पड़े 35000 करोड़ लौटाने जा रही केंद्र सरकार, कहीं इसमें आपका भी पैसा तो नहीं ?
मोदी सरकार के 9 वर्षों में दोगुनी हुई प्रति व्यक्ति आय, विकास को मिलेगी रफ़्तार, मंदी की आशंका 'शुन्य'
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नई दिल्लीः आम जनता को महंगाई की मार से राहत मिलने के संकेत नज़र आने लगे हैं. खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. अप्रैल माह में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर शून्य से भी नीचे पहुँच गई है. यह थोक महंगाई का लगभग तीन साल का सबसे निम्न स्तर है. सोमवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर शून्य से निचे गिरकर - शून्य. बानवे फीसदी हो गई है. जुलाई दो हज़ार बीस के बाद ऐसा पहली दफा हुआ है, जब थोक महंगाई दर शून्य से भी नीचे गिर गई हो. इससे पहले मार्च माह के दौरान भी थोक महंगाई की दर में भारी गिरावट देखने को मिली थी और यह कम होकर एक. चौंतीस फीसदी दर्ज की गई थी. बता दें कि, बीते कुछ समय से थोक महंगाई की दर लगातार कम हो रही है. अप्रैल दो हज़ार तेईस निरंतर ग्यारहवां महीना है, जब थोक महंगाई की दर में गिरावट दर्ज की गई है. यह फरवरी में तीन. पचासी फीसदी और जनवरी में चार. तिहत्तर फीसदी दर्ज की गई थी. यह आम जनता के लिए डबल राहत है, क्योंकि इससे पहले जारी किए गए खुदरा मूल्य आधारित महंगाई के आंकड़ों में भी गिरावट आई थी. अप्रैल माह के दौरान खुदरा महंगाई की दर मार्च के पाँच. सात फीसदी की तुलना में कम होकर चार. सात फीसदी तक लुढ़क गई थी. यह खुदरा महंगाई का अट्ठारह महीने का सबसे कम स्तर है. बैंकों में पड़े पैंतीस हज़ार करोड़ लौटाने जा रही केंद्र सरकार, कहीं इसमें आपका भी पैसा तो नहीं ? मोदी सरकार के नौ वर्षों में दोगुनी हुई प्रति व्यक्ति आय, विकास को मिलेगी रफ़्तार, मंदी की आशंका 'शुन्य'
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IIM Ahmedabad admission 2022 new criteria: भारतीय प्रबंधन संस्थान (Indian Institute of Management) में एडमिशन की तैयारी कर रहे कैंडिडेट्स के लिए बेहद जरूरी सूचना है. आईआईएम अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) ने एमबीए एडमिशन 2022 के लिए योग्यता मापदंड बदल दिया है. नए नियम के अनुसार, अब यहां एमबीए कोर्स में एडमिशन के लिए ग्रेजुएशन के मार्क्स नहीं गिने जाएंगे. यानी एडमिशन के लिए आपके ग्रेजुएशन के मार्क्स का कोई वेटेज नहीं होगा. बैचलर डिग्री में मिले मार्क्स को आईआईएम एडमिशन 2022 (IIM Admissions 2022) के आधार से बाहर कर दिया गया है. हालांकि इसके लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा कॉमन एडमिशन टेस्ट यानी कैट (CAT Exam) का वेटेज पहले जैसा ही रहेगा. जानिए क्या है नया नियम?
आईआईएम अहमदाबाद एमबीए एडमिशन के लिए कैंडिडेट्स की एकेडेमिक रेटिंग कैलकुलेट करता है. इसे शॉर्ट फॉर्म में एआर स्कोर (AR Score) भी कहा जाता है. यह स्कोर कैलकुलेट करने के लिए पहले स्टूडेंट्स के कैट स्कोर (CAT Score) और बैचलर डिग्री में मिले मार्क्स की गणना की जाती थी. लेकिन अब बैचलर के मार्क्स इसमें नहीं जोड़े जाएंगे.
ग्रेजुएशन की जगह अब आईआईएम अहमदाबाद एमबीए एडमिशन में क्लास 10 और 12 बोर्ड एग्जाम के मार्क्स को वेटेज दिया जाएगा. साथ ही वर्क एक्सपीरिएंस को भी वेटेज मिलेगा. आईआईएम अहमदाबाद (IIM A) ने बताया है कि अब एआर स्कोर 10वीं, 12वीं के मार्क्स और वर्क एक्सपीरिएंस को मिलाकर 25 प्वाइंट के स्केल पर कैलकुलेट होगा. एडमिशन के लिए कंपोजिट स्कोर इस तरह कैलकुलेट होगा- CS = 0.35 X (pro rated AR score/35) + 0.65 X (normalized overall CAT score)
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IIM Ahmedabad admission दो हज़ार बाईस new criteria: भारतीय प्रबंधन संस्थान में एडमिशन की तैयारी कर रहे कैंडिडेट्स के लिए बेहद जरूरी सूचना है. आईआईएम अहमदाबाद ने एमबीए एडमिशन दो हज़ार बाईस के लिए योग्यता मापदंड बदल दिया है. नए नियम के अनुसार, अब यहां एमबीए कोर्स में एडमिशन के लिए ग्रेजुएशन के मार्क्स नहीं गिने जाएंगे. यानी एडमिशन के लिए आपके ग्रेजुएशन के मार्क्स का कोई वेटेज नहीं होगा. बैचलर डिग्री में मिले मार्क्स को आईआईएम एडमिशन दो हज़ार बाईस के आधार से बाहर कर दिया गया है. हालांकि इसके लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा कॉमन एडमिशन टेस्ट यानी कैट का वेटेज पहले जैसा ही रहेगा. जानिए क्या है नया नियम? आईआईएम अहमदाबाद एमबीए एडमिशन के लिए कैंडिडेट्स की एकेडेमिक रेटिंग कैलकुलेट करता है. इसे शॉर्ट फॉर्म में एआर स्कोर भी कहा जाता है. यह स्कोर कैलकुलेट करने के लिए पहले स्टूडेंट्स के कैट स्कोर और बैचलर डिग्री में मिले मार्क्स की गणना की जाती थी. लेकिन अब बैचलर के मार्क्स इसमें नहीं जोड़े जाएंगे. ग्रेजुएशन की जगह अब आईआईएम अहमदाबाद एमबीए एडमिशन में क्लास दस और बारह बोर्ड एग्जाम के मार्क्स को वेटेज दिया जाएगा. साथ ही वर्क एक्सपीरिएंस को भी वेटेज मिलेगा. आईआईएम अहमदाबाद ने बताया है कि अब एआर स्कोर दसवीं, बारहवीं के मार्क्स और वर्क एक्सपीरिएंस को मिलाकर पच्चीस प्वाइंट के स्केल पर कैलकुलेट होगा. एडमिशन के लिए कंपोजिट स्कोर इस तरह कैलकुलेट होगा- CS = शून्य.पैंतीस X + शून्य.पैंसठ X
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देहरादून/तपोवन, 14 फरवरी उत्तराखंड के चमोली जिले के आपदाग्रस्त क्षेत्रों में चलाए जा रहे बचाव अभियान के आठवें दिन रविवार को 13 और शव मिलने से बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 51 हो गई है।
तेरह में से छह शव 520 मेगावाट की एनटीपीसी की तपोवन-विष्णुगाड परियोजना की सुरंग से मिले जबकि छह रैंणी से और एक रूद्रप्रयाग जिले में नदी के किनारे से बरामद हुआ।
लगातार तलाश और बचाव अभियान का जायजा ले रहीं चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने लापता लोगों के शव बरामद होने पर बचाव दलों को तेजी से कार्य करने को कहा है।
तपोवन सुरंग में पिछले एक सप्ताह से सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा प्रतिवादन बल और भारत तिब्बत सीमा पुलिस का संयुक्त बचाव अभियान जारी है।
तपोवन बैराज क्षेत्र में जहां पोकलैंड और जेसीबी मशीनें युद्धस्तर पर कार्य कर रही हैं। वहीं, नदी किनारे जिला प्रशासन के नेतृत्व में खोजबीन का कार्य गतिमान है।
जिलाधिकारी स्वाति ने बताया कि रैंणी क्षेत्र में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीम मलबे में लापता लोगों की तलाश कर रही है।
उन्होंने कहा कि मौके पर एक हेलीकॉप्टर भी तैयार है जिससे अगर कोई व्यक्ति जीवित अवस्था में मिले तो उसे तत्काल मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
सात फरवरी को चमोली जिले की ऋषिगंगा घाटी में आई बाढ़ के बाद अब तक 51 शव बरामद हो चुके हैं जबकि 153 अन्य अभी भी लापता हैं।
रविवार को मिले शवों में से 11 की शिनाख्त हो गयी जिनमें टिहरी निवासी आलम सिंह, जितेंद्र धनाई, देहरादून के कालसी के अनिल, जम्मू-कश्मीर के जीतेंद्र कुमार, फरीदाबाद के शेषनाथ, कुशीनगर के सूरज ठाकुर, पंजाब के जुगल किशोर, हिमाचल प्रदेश के राकेश कपूर, चमोली के हरपाल सिंह, और गोरखपुर के राजेंद्र सिंह और धनुर्धारी शामिल हैं।
इस बीच, चमोली जिले में डीएनए नमूने लेने के बाद मिले शवों के अंतिम संस्कार का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। आज छह शवों का अंतिम संस्कार किया गया।
बाढ़ के कारण 13. 2 मेगावाट ऋषिगंगा जलविद्युत परियोजना पूरी तरह तबाह हो गई जबकि तपोवन विष्णुगाड को भारी क्षति पहुंची थी।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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देहरादून/तपोवन, चौदह फरवरी उत्तराखंड के चमोली जिले के आपदाग्रस्त क्षेत्रों में चलाए जा रहे बचाव अभियान के आठवें दिन रविवार को तेरह और शव मिलने से बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर इक्यावन हो गई है। तेरह में से छह शव पाँच सौ बीस मेगावाट की एनटीपीसी की तपोवन-विष्णुगाड परियोजना की सुरंग से मिले जबकि छह रैंणी से और एक रूद्रप्रयाग जिले में नदी के किनारे से बरामद हुआ। लगातार तलाश और बचाव अभियान का जायजा ले रहीं चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने लापता लोगों के शव बरामद होने पर बचाव दलों को तेजी से कार्य करने को कहा है। तपोवन सुरंग में पिछले एक सप्ताह से सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा प्रतिवादन बल और भारत तिब्बत सीमा पुलिस का संयुक्त बचाव अभियान जारी है। तपोवन बैराज क्षेत्र में जहां पोकलैंड और जेसीबी मशीनें युद्धस्तर पर कार्य कर रही हैं। वहीं, नदी किनारे जिला प्रशासन के नेतृत्व में खोजबीन का कार्य गतिमान है। जिलाधिकारी स्वाति ने बताया कि रैंणी क्षेत्र में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीम मलबे में लापता लोगों की तलाश कर रही है। उन्होंने कहा कि मौके पर एक हेलीकॉप्टर भी तैयार है जिससे अगर कोई व्यक्ति जीवित अवस्था में मिले तो उसे तत्काल मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। सात फरवरी को चमोली जिले की ऋषिगंगा घाटी में आई बाढ़ के बाद अब तक इक्यावन शव बरामद हो चुके हैं जबकि एक सौ तिरेपन अन्य अभी भी लापता हैं। रविवार को मिले शवों में से ग्यारह की शिनाख्त हो गयी जिनमें टिहरी निवासी आलम सिंह, जितेंद्र धनाई, देहरादून के कालसी के अनिल, जम्मू-कश्मीर के जीतेंद्र कुमार, फरीदाबाद के शेषनाथ, कुशीनगर के सूरज ठाकुर, पंजाब के जुगल किशोर, हिमाचल प्रदेश के राकेश कपूर, चमोली के हरपाल सिंह, और गोरखपुर के राजेंद्र सिंह और धनुर्धारी शामिल हैं। इस बीच, चमोली जिले में डीएनए नमूने लेने के बाद मिले शवों के अंतिम संस्कार का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। आज छह शवों का अंतिम संस्कार किया गया। बाढ़ के कारण तेरह. दो मेगावाट ऋषिगंगा जलविद्युत परियोजना पूरी तरह तबाह हो गई जबकि तपोवन विष्णुगाड को भारी क्षति पहुंची थी। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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अल्ट्रासाउंड सेंटरों में चल रही अनियमिताओं और लिंग जांच की शिकायतों के बाद राज्य भर में चल रहे अभियान की कड़ी में सोमवार को पटना के कई बड़े अस्पतालों में भी छापेमारी हुई. बेली रोड स्थित एक निजी अस्पताल के अल्ट्रासाउंड सेंटर सहित 40 से अधिक अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर जिला प्रशासन की टीम ने छापेमारी की. सूत्रों के मुताबिक करीब 20 अल्ट्रासाउंड सेंटर गलत तरीके से संचालित हो रहे थे, जिन्हें तुरंत बंद करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही उनके संचालकों पर कानूनी कार्रवाई भी होगी.
डीएम डॉ चंद्रशेखर सिंह के निर्देश पर सोमवार को हुई इस छापेमारी में जांच दल में चिकित्सा पदाधिकारी डॉ दिनकर मिश्रा, वरीय उप समाहर्ता अभिलाषा सिन्हा, पुलिस पदाधिकारी रूपेश कुमार शामिल रहे. डॉ दिनकर मिश्रा ने बताया कि यह छापेमारी गुप्त तरीके से की गयी है और जांच से जुड़े सारे दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में डीएम को सौंपे गये हैं. जो भी अल्ट्रासाउंड सेंटर लिंग जांच जैसे गलत कार्यों में लिप्त पाये जायेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी.
जिले में सोमवार को पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के तहत विशेष अभियान चलाकर 532 अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच हुई. अल्ट्रासाउंड सेंटर/क्लिनिक के औचक निरीक्षण के लिए अनुमंडलों में मजिस्ट्रेट, पुलिस पदाधिकारियों व डॉक्टरों की 37 टीमों को लगाया गया है. डीएम को जांच टीम ने निरीक्षण रिपोर्ट सौंप दी है. डीएम डॉ चंद्रशेखर सिंह ने जिले में अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच करने को लेकर निर्देश जारी किया था. जांच के दौरान पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत मानकों के अनुपालन का निरीक्षण किया गया. डीएम ने कहा कि 532 अल्ट्रासाउंड सेंटर/क्लिनिक की जांच की गयी. इनमें पटना सदर अनुमंडल में 400, पटना सिटी अनुमंडल में 37, दानापुर अनुमंडल में 58, पालीगंज अनुमंडल में आठ, मसौढ़ी अनुमंडल में 12 व बाढ़ अनुमंडल में 17 अल्ट्रासाउंड सेंटरों का निरीक्षण किया गया. इसके लिए पटना सदर अनुमंडल में 25, पटना सिटी व दानापुर अनुमंडल में चार-चार, मसौढ़ी अनुमंडल में दो और पालीगंज व बाढ़ अनुमंडल में एक-एक टीमों को लगाया गया था.
जिले में संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों की विभिन्न बिंदुओं पर जांच की गयी, उनमें पंजीकरण प्रमाणपत्र, निबंधन प्रमाणपत्र संख्या व वैधता अवधि, नोटिस बोर्ड प्रदर्शन, पीसी-पीएनडीटी एक्ट की किताब, प्रसव की सुविधा, अल्ट्रासाउंड मशीनों की संख्या, मेक, मॉडल व सीरियल नंबर, भ्रूण जांच की जा रही है या नहीं आदि शामिल हैं. इसके अलावा मशीन संचालक, योग्यताधारक डॉक्टर का नाम, पंजीयन संख्या, अल्ट्रासाउंड सेंटर/क्लिनिक में निबंधन अनुरूप डाॅक्टर काम कर रहे हैं या नहीं, फॉर्म एफ, ओपीडी रजिस्टर में गर्भवती महिलाओं की प्रविष्टि की जानकारी, मरीज़ों से ली जाने वाली शुल्क रसीद व किसी प्रकार का पोस्टर, वस्तु, कैलेंडर आदि, जो किसी विशेष लिंग की ओर इंगित कर रहा है.
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अल्ट्रासाउंड सेंटरों में चल रही अनियमिताओं और लिंग जांच की शिकायतों के बाद राज्य भर में चल रहे अभियान की कड़ी में सोमवार को पटना के कई बड़े अस्पतालों में भी छापेमारी हुई. बेली रोड स्थित एक निजी अस्पताल के अल्ट्रासाउंड सेंटर सहित चालीस से अधिक अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर जिला प्रशासन की टीम ने छापेमारी की. सूत्रों के मुताबिक करीब बीस अल्ट्रासाउंड सेंटर गलत तरीके से संचालित हो रहे थे, जिन्हें तुरंत बंद करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही उनके संचालकों पर कानूनी कार्रवाई भी होगी. डीएम डॉ चंद्रशेखर सिंह के निर्देश पर सोमवार को हुई इस छापेमारी में जांच दल में चिकित्सा पदाधिकारी डॉ दिनकर मिश्रा, वरीय उप समाहर्ता अभिलाषा सिन्हा, पुलिस पदाधिकारी रूपेश कुमार शामिल रहे. डॉ दिनकर मिश्रा ने बताया कि यह छापेमारी गुप्त तरीके से की गयी है और जांच से जुड़े सारे दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में डीएम को सौंपे गये हैं. जो भी अल्ट्रासाउंड सेंटर लिंग जांच जैसे गलत कार्यों में लिप्त पाये जायेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी. जिले में सोमवार को पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के तहत विशेष अभियान चलाकर पाँच सौ बत्तीस अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच हुई. अल्ट्रासाउंड सेंटर/क्लिनिक के औचक निरीक्षण के लिए अनुमंडलों में मजिस्ट्रेट, पुलिस पदाधिकारियों व डॉक्टरों की सैंतीस टीमों को लगाया गया है. डीएम को जांच टीम ने निरीक्षण रिपोर्ट सौंप दी है. डीएम डॉ चंद्रशेखर सिंह ने जिले में अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच करने को लेकर निर्देश जारी किया था. जांच के दौरान पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत मानकों के अनुपालन का निरीक्षण किया गया. डीएम ने कहा कि पाँच सौ बत्तीस अल्ट्रासाउंड सेंटर/क्लिनिक की जांच की गयी. इनमें पटना सदर अनुमंडल में चार सौ, पटना सिटी अनुमंडल में सैंतीस, दानापुर अनुमंडल में अट्ठावन, पालीगंज अनुमंडल में आठ, मसौढ़ी अनुमंडल में बारह व बाढ़ अनुमंडल में सत्रह अल्ट्रासाउंड सेंटरों का निरीक्षण किया गया. इसके लिए पटना सदर अनुमंडल में पच्चीस, पटना सिटी व दानापुर अनुमंडल में चार-चार, मसौढ़ी अनुमंडल में दो और पालीगंज व बाढ़ अनुमंडल में एक-एक टीमों को लगाया गया था. जिले में संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों की विभिन्न बिंदुओं पर जांच की गयी, उनमें पंजीकरण प्रमाणपत्र, निबंधन प्रमाणपत्र संख्या व वैधता अवधि, नोटिस बोर्ड प्रदर्शन, पीसी-पीएनडीटी एक्ट की किताब, प्रसव की सुविधा, अल्ट्रासाउंड मशीनों की संख्या, मेक, मॉडल व सीरियल नंबर, भ्रूण जांच की जा रही है या नहीं आदि शामिल हैं. इसके अलावा मशीन संचालक, योग्यताधारक डॉक्टर का नाम, पंजीयन संख्या, अल्ट्रासाउंड सेंटर/क्लिनिक में निबंधन अनुरूप डाॅक्टर काम कर रहे हैं या नहीं, फॉर्म एफ, ओपीडी रजिस्टर में गर्भवती महिलाओं की प्रविष्टि की जानकारी, मरीज़ों से ली जाने वाली शुल्क रसीद व किसी प्रकार का पोस्टर, वस्तु, कैलेंडर आदि, जो किसी विशेष लिंग की ओर इंगित कर रहा है.
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चैत्र माह में रामनवमी के बाद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कामदा एकादशी कहते हैं। इस एकादशी को फलदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित इस व्रत को विधि विधान से करने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कामदा एकादशी का व्रत इंसान को सभी प्रकार की बुराइयों, अवगुणों से दूर रखता है। कहते हैं जो लोग इस व्रत का विधि-विधान से पालन करते हैं वे अपने अतीत और वर्तमान में हुए पापों से मुक्ति पा जाते हैं और मोक्ष को प्राप्त करते हैं। कामदा एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु को फल, फूल, दूध, पंचामृत, तिल आदि अर्पित करना चाहिए। इस व्रत को करते समय हर पल भगवान विष्णु का स्मरण करना शुभ होता है।
इस व्रत में रात्रि में जागरण करें। द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद ही व्रत का पारण करना शुभ होता है। भगवान श्री हरि की पूजा में पंचामृत और तुलसी के पत्ते का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। द्वादशी को पूजा के बाद सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण को भोजन कराएं और उन्हें दान दें। इसके साथ ही जो लोग एकादशी का व्रत नहीं रखते हैं, उन्हें भी इस दिन चावल नहीं खाना चाहिए।
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चैत्र माह में रामनवमी के बाद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कामदा एकादशी कहते हैं। इस एकादशी को फलदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित इस व्रत को विधि विधान से करने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कामदा एकादशी का व्रत इंसान को सभी प्रकार की बुराइयों, अवगुणों से दूर रखता है। कहते हैं जो लोग इस व्रत का विधि-विधान से पालन करते हैं वे अपने अतीत और वर्तमान में हुए पापों से मुक्ति पा जाते हैं और मोक्ष को प्राप्त करते हैं। कामदा एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु को फल, फूल, दूध, पंचामृत, तिल आदि अर्पित करना चाहिए। इस व्रत को करते समय हर पल भगवान विष्णु का स्मरण करना शुभ होता है। इस व्रत में रात्रि में जागरण करें। द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद ही व्रत का पारण करना शुभ होता है। भगवान श्री हरि की पूजा में पंचामृत और तुलसी के पत्ते का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। द्वादशी को पूजा के बाद सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण को भोजन कराएं और उन्हें दान दें। इसके साथ ही जो लोग एकादशी का व्रत नहीं रखते हैं, उन्हें भी इस दिन चावल नहीं खाना चाहिए।
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साहस का शुभ नुवा होवे, ऐसी पगडी टेक न खोवे ।
पाग कहा वह नलित श्राग है
थान- मान का तडित-गग है ।
इस घटना का हुआ प्रकाशन
शुरू हुआ यों नव विज्ञापन ।
गौरों ने गान्धी को जाना
धूम-केतु निज उनको माना । स्वजनि नियति ने मार्ग दिसाया. गान्धी ने निज अभिमत पाया । मिले यहा भी सहचर इनको, गौरव-धन था प्यारा जिनको ।
वळे यहा से ये प्रिटोरिया जहा मुस्ठमा चन्ता था, नये कुली 'वैरिटर' को यो प्रतिदिन अनुभव मिलता था । प्रथम 'क्लास' का टिकट कटाकर,
ये गाड़ी में बैठे जावर । में
फिर रस्ते में एक मुसाफिरचढा उसी डिब्बे में आकर । उसने इनको ताक व्यान मे, खोया साग धैर्य शान में । झट डिच्चे से बाहर प्रया.
ॠर भाव था मुह पर छाया । क्रूर
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साहस का शुभ नुवा होवे, ऐसी पगडी टेक न खोवे । पाग कहा वह नलित श्राग है थान- मान का तडित-गग है । इस घटना का हुआ प्रकाशन शुरू हुआ यों नव विज्ञापन । गौरों ने गान्धी को जाना धूम-केतु निज उनको माना । स्वजनि नियति ने मार्ग दिसाया. गान्धी ने निज अभिमत पाया । मिले यहा भी सहचर इनको, गौरव-धन था प्यारा जिनको । वळे यहा से ये प्रिटोरिया जहा मुस्ठमा चन्ता था, नये कुली 'वैरिटर' को यो प्रतिदिन अनुभव मिलता था । प्रथम 'क्लास' का टिकट कटाकर, ये गाड़ी में बैठे जावर । में फिर रस्ते में एक मुसाफिरचढा उसी डिब्बे में आकर । उसने इनको ताक व्यान मे, खोया साग धैर्य शान में । झट डिच्चे से बाहर प्रया. ॠर भाव था मुह पर छाया । क्रूर
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Brahmastra 2: ब्रह्मास्त्र पार्ट 1 बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही थी. फिल्म में लीड किरदार रणबीर कपूर ने शिवा का रोल निभाया था और आलिया भट्ट ने ईशा का. मूवी में जबरदस्त वीएफएक्स का इस्तेमाल किया गया था. फिल्म के दूसरे पार्ट का फैंस काफी समय से इंतजार कर रहे थे. ब्रह्मास्त्र 2 में कौन देव बनेगा और इसमें लीड एक्टर कौन होगा, इसपर अलग-अलग नामों पर कयास लगाए जा रहे है.
कब रिलीज होगी ब्रह्मास्त्र पार्ट 2?
अयान मुखर्जी ने लेटेस्ट अपडेट दिया है कि दूसरे पार्ट देव किसे कास्ट किया जाएगा. हालांकि पहले रिपोर्ट्स में कहा गया था कि पहले रणवीर सिंह इसमें होंगे. फिर ऋतिक रोशन का नाम आया. न्यूज 18 से बातचीत में अयान ने बताया कि, हम फिल्म पर काम कर रहे है और ये पहले पार्ट से बेहतर होगा. अगर हम दस साल और लेते हैं तो कोई भी ब्रह्मास्त्र 2 देखने नहीं आएगा. हम इसे दो साल में पूरा कर लेंगे. हम इसे उससे बहुत पहले तैयार करने जा रहे है.
ब्रह्मास्त्र 2 में ऋतिक रोशन से लेकर रणवीर सिंह और यश के नामों पर चर्चा हो रही थी. कयास लगाया जा रहा था कि इनमें से कोई लीड एक्टर देव का रोल निभाएंगे. हालांकि इसपर अभी कुछ फिक्स नहीं हुआ है. इस सवाल के पूछे जाने पर अयान मुखर्जी ने जवाब दिया, अभी तक इस सवाल का कोई जवाब नहीं है. हमें इंतजार करना होगा.
गौरतलब है कि अयान मुखर्जी निर्देशित फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड बनाकर सुर्खियां बटोरीं. ब्रह्मास्त्र 2022 के सबसे बड़े बॉलीवुड ओपनर के रूप में उभरा, जिसने भूल भुलैया 2 को पछाड़ दिया. हिंदी सिनेमा की अब तक की सबसे महंगी फिल्म करार दी जा चुकी ब्रह्मास्त्र की कहानी को अपनी सोच से निकालकर परदे तक लाने में 11 सालों का लंबा समय लगा है.
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Brahmastra दो: ब्रह्मास्त्र पार्ट एक बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही थी. फिल्म में लीड किरदार रणबीर कपूर ने शिवा का रोल निभाया था और आलिया भट्ट ने ईशा का. मूवी में जबरदस्त वीएफएक्स का इस्तेमाल किया गया था. फिल्म के दूसरे पार्ट का फैंस काफी समय से इंतजार कर रहे थे. ब्रह्मास्त्र दो में कौन देव बनेगा और इसमें लीड एक्टर कौन होगा, इसपर अलग-अलग नामों पर कयास लगाए जा रहे है. कब रिलीज होगी ब्रह्मास्त्र पार्ट दो? अयान मुखर्जी ने लेटेस्ट अपडेट दिया है कि दूसरे पार्ट देव किसे कास्ट किया जाएगा. हालांकि पहले रिपोर्ट्स में कहा गया था कि पहले रणवीर सिंह इसमें होंगे. फिर ऋतिक रोशन का नाम आया. न्यूज अट्ठारह से बातचीत में अयान ने बताया कि, हम फिल्म पर काम कर रहे है और ये पहले पार्ट से बेहतर होगा. अगर हम दस साल और लेते हैं तो कोई भी ब्रह्मास्त्र दो देखने नहीं आएगा. हम इसे दो साल में पूरा कर लेंगे. हम इसे उससे बहुत पहले तैयार करने जा रहे है. ब्रह्मास्त्र दो में ऋतिक रोशन से लेकर रणवीर सिंह और यश के नामों पर चर्चा हो रही थी. कयास लगाया जा रहा था कि इनमें से कोई लीड एक्टर देव का रोल निभाएंगे. हालांकि इसपर अभी कुछ फिक्स नहीं हुआ है. इस सवाल के पूछे जाने पर अयान मुखर्जी ने जवाब दिया, अभी तक इस सवाल का कोई जवाब नहीं है. हमें इंतजार करना होगा. गौरतलब है कि अयान मुखर्जी निर्देशित फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड बनाकर सुर्खियां बटोरीं. ब्रह्मास्त्र दो हज़ार बाईस के सबसे बड़े बॉलीवुड ओपनर के रूप में उभरा, जिसने भूल भुलैया दो को पछाड़ दिया. हिंदी सिनेमा की अब तक की सबसे महंगी फिल्म करार दी जा चुकी ब्रह्मास्त्र की कहानी को अपनी सोच से निकालकर परदे तक लाने में ग्यारह सालों का लंबा समय लगा है.
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SSC Delhi Police SI Result 2021: स्टाफ सेलेक्शन कमीशन यानी एसएससी ने पुलिस भर्ती का रिजल्ट जारी कर दिया है। इसके तहत दिल्ली पुलिस सब-इंस्पेक्टर, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा अधिकारी में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर 2019 भर्ती के रिजल्ट को जारी किया गया है। जो उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल हुए थे, वे आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर जाकर नतीजे चेक कर सकते हैं।
बता दें कि आयोग की तरफ से 4003 उम्मीदवारों के नतीजे घोषित किए गए हैं, इन कैंडीडेट्स को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए जल्द बुलाया जाएगा।
चयनित 4003 उम्मीदवारों में 396 महिलाएं और 3607 पुरुष हैं। इसके अलावा 3 अस्थायी अनफिट महिला उम्मीदवारों को भी डॉक्यूमेंट्स वेरीफिकेशन के लिए निमंत्रण जाएगा।
संभावना जताई जा रही है कि डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन की प्रक्रिया दिसंबर के आखिरी हफ्ते में आयोजित की जा सकती है। एडमिट कार्ड भी जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिए जाएंगे।
जो कैंडीडेट अपना रिजल्ट डाउनलोड करना चाहते हैं, वे ssc. nic. in पर विजिट करके ऐसा कर सकते हैं।
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SSC Delhi Police SI Result दो हज़ार इक्कीस: स्टाफ सेलेक्शन कमीशन यानी एसएससी ने पुलिस भर्ती का रिजल्ट जारी कर दिया है। इसके तहत दिल्ली पुलिस सब-इंस्पेक्टर, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा अधिकारी में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर दो हज़ार उन्नीस भर्ती के रिजल्ट को जारी किया गया है। जो उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल हुए थे, वे आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर जाकर नतीजे चेक कर सकते हैं। बता दें कि आयोग की तरफ से चार हज़ार तीन उम्मीदवारों के नतीजे घोषित किए गए हैं, इन कैंडीडेट्स को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए जल्द बुलाया जाएगा। चयनित चार हज़ार तीन उम्मीदवारों में तीन सौ छियानवे महिलाएं और तीन हज़ार छः सौ सात पुरुष हैं। इसके अलावा तीन अस्थायी अनफिट महिला उम्मीदवारों को भी डॉक्यूमेंट्स वेरीफिकेशन के लिए निमंत्रण जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन की प्रक्रिया दिसंबर के आखिरी हफ्ते में आयोजित की जा सकती है। एडमिट कार्ड भी जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिए जाएंगे। जो कैंडीडेट अपना रिजल्ट डाउनलोड करना चाहते हैं, वे ssc. nic. in पर विजिट करके ऐसा कर सकते हैं।
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जब चॉकलेट की बात आती है तो शायद ही कोई होगा जो इससे जी चुराए। लेकिन यह जानकर आश्चर्य होगा कि आपका पसंदीदा चॉकलेट न केवल आपकी स्वाद कलियों को तृप्त करती है बल्कि स्किन के लिए भी काफी लाभदायक है। जी हां, चॉकलेट को चेहरे पर लगाया जा सकता है क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है और आपकी स्किन को डैमेज होने से बचाने में मदद करता है। इतना ही नहीं चॉकलेट फेस मास्क आपकी डेड स्किन सेल्स को भी हटा सकता है और आपकी त्वचा को मुलायम और चमकदार बनाने के साथ-साथ मॉइस्चराइज रखता है।
आइए जानते हैं चॉकलेट से तैयार किए जाने वाले फेस मास्क घर पर आसानी से बनाए जा सकते हैं और इसके इस्तेमाल से आपके स्किन को लाभ मिलेगा।
डार्क चॉकलेट और क्ले फेस मास्कक्ले स्किन से अतिरिक्त तेल निकालता है और डेड स्किन सेल्स को हटाकर इसे रिजुविनेट करता है। यह फेस मास्क आपकी त्वचा को टाइट करने और बढ़े हुए पोर्स को निखारने में मदद करेगा।
- 1/2 कप पिघली हुई डार्क चॉकलेट, 2 बड़े चम्मच फुलर अर्थ डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
- एक बार जब यह सूख जाए, तो इसे पानी से धो लें और अपनी त्वचा को एक मुलायम तौलिये से थपथपाकर सुखा लें।
- आप बाकी के पेस्ट को भविष्य में उपयोग के लिए एक कंटेनर में भी स्टोर कर सकते हैं।
शहद आपकी त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करता है। इसे डार्क चॉकलेट के साथ मिलाकर अपने चेहरे पर लगाने से आपको एक प्राकृतिक चमक मिलेगी।
- एक बाउल में कप पिघली हुई डार्क चॉकलेट, 1 टेबल-स्पून शहद और कुछ बूंदे ताज़े निचोड़े हुए नींबू के रस की डालें।
- अच्छी तरह मिलाएं और पेस्ट को अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं।
- इसे 15 मिनट तक ऐसे ही रहने दें और पेस्ट को अपने चेहरे पर धीरे-धीरे सर्कुलर मोशन में मसाज करते रहें।
- इसे गर्म पानी से धो लें।
दही में लैक्टिक एसिड होता है जो डेड स्किन सेल्स को हटाता है और आपकी त्वचा को रिजुविनेट करता है।
- सबसे पहले पांच क्यूब डार्क चॉकलेट को पिघलाएं और इसमें 1 1/2 चम्मच ताजा दही मिलाएं।
- अच्छी तरह मिलाएं और फिर 1 बड़ा चम्मच बेसन भी मिलाएं।
- अच्छी तरह मिलाएं और इसे अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं।
- 15 मिनट बाद मास्क को स्क्रब करने के बाद इसे धो लें।
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जब चॉकलेट की बात आती है तो शायद ही कोई होगा जो इससे जी चुराए। लेकिन यह जानकर आश्चर्य होगा कि आपका पसंदीदा चॉकलेट न केवल आपकी स्वाद कलियों को तृप्त करती है बल्कि स्किन के लिए भी काफी लाभदायक है। जी हां, चॉकलेट को चेहरे पर लगाया जा सकता है क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है और आपकी स्किन को डैमेज होने से बचाने में मदद करता है। इतना ही नहीं चॉकलेट फेस मास्क आपकी डेड स्किन सेल्स को भी हटा सकता है और आपकी त्वचा को मुलायम और चमकदार बनाने के साथ-साथ मॉइस्चराइज रखता है। आइए जानते हैं चॉकलेट से तैयार किए जाने वाले फेस मास्क घर पर आसानी से बनाए जा सकते हैं और इसके इस्तेमाल से आपके स्किन को लाभ मिलेगा। डार्क चॉकलेट और क्ले फेस मास्कक्ले स्किन से अतिरिक्त तेल निकालता है और डेड स्किन सेल्स को हटाकर इसे रिजुविनेट करता है। यह फेस मास्क आपकी त्वचा को टाइट करने और बढ़े हुए पोर्स को निखारने में मदद करेगा। - एक/दो कप पिघली हुई डार्क चॉकलेट, दो बड़े चम्मच फुलर अर्थ डालकर अच्छी तरह मिलाएं। - एक बार जब यह सूख जाए, तो इसे पानी से धो लें और अपनी त्वचा को एक मुलायम तौलिये से थपथपाकर सुखा लें। - आप बाकी के पेस्ट को भविष्य में उपयोग के लिए एक कंटेनर में भी स्टोर कर सकते हैं। शहद आपकी त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करता है। इसे डार्क चॉकलेट के साथ मिलाकर अपने चेहरे पर लगाने से आपको एक प्राकृतिक चमक मिलेगी। - एक बाउल में कप पिघली हुई डार्क चॉकलेट, एक टेबल-स्पून शहद और कुछ बूंदे ताज़े निचोड़े हुए नींबू के रस की डालें। - अच्छी तरह मिलाएं और पेस्ट को अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं। - इसे पंद्रह मिनट तक ऐसे ही रहने दें और पेस्ट को अपने चेहरे पर धीरे-धीरे सर्कुलर मोशन में मसाज करते रहें। - इसे गर्म पानी से धो लें। दही में लैक्टिक एसिड होता है जो डेड स्किन सेल्स को हटाता है और आपकी त्वचा को रिजुविनेट करता है। - सबसे पहले पांच क्यूब डार्क चॉकलेट को पिघलाएं और इसमें एक एक/दो चम्मच ताजा दही मिलाएं। - अच्छी तरह मिलाएं और फिर एक बड़ा चम्मच बेसन भी मिलाएं। - अच्छी तरह मिलाएं और इसे अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं। - पंद्रह मिनट बाद मास्क को स्क्रब करने के बाद इसे धो लें।
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SSC MTS 2022 Admit card: एसएससी एमटीएस 2022 की परीक्षा में शामिल होने वाले कैंडिडेट्स के लिए एक खबर है। स्टाफ सेलेक्शन कमीशन आयोग की तरफ से SSC MTS 2022 परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिया गया है। एडमिट कार्ड को आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया गया है। उम्मीदवार जो मल्टी-टास्किंग (गैर-तकनीकी) स्टाफ और हवलदार (सीबीआईसी और सीबीएन) परीक्षा, 2022 के लिए शामिल होंगे, वे सभी एसएससी केकेआर की आधिकारिक वेबसाइट ssckkr. kar. nic. in पर जाकर अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।
इस परीक्षा को 2 मई 2023 को आयोजित किया जाएगा। इस कंप्यूटर आधारित परीक्षा(CBT) को हिंदी, अंग्रेजी और 13 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित किया जाएगा। इस परीक्षा को दो सेशंस में आयोजित की जाएगी। दोनों सेशंस की परीक्षा को अटेम्प्ट करना अनिवार्य होगा। कैंडिडेट्स नीचे दिए गए डायरेक्ट लिंक से अपने एडमिट कार्ड को डाउनलोड कर सकते हैं।
इस भर्ती अभियान के जरिए संगठन में सीबीआईसी और सीबीएन में एमटीएस के लिए 10880 और हवलदार के लिए 529 खाली पदों को भरा जाएगा। इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 17 जनवरी 2023 को शुरू हुई और 17 फरवरी 2023 को समाप्त हुई। ज्यादा संबंधित विवरण के लिए उम्मीदवार एसएससी की आधिकारिक साइट देख सकते हैं। कैंडिडेट्स नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके भी एडमिट कार्ड को डाउनलोड कर सकते हैं।
- एसएससी क्षेत्रीय वेबसाइट की आधिकारिक साइट पर जाएं।
- होम पेज पर उपलब्ध एसएससी एमटीएस 2022 एडमिट कार्ड लिंक पर क्लिक करें।
- एक नया पेज खुलेगा जहां उम्मीदवारों को आवश्यक विवरण दर्ज करना होगा।
- सबमिट पर क्लिक करें और आपका प्रवेश पत्र प्रदर्शित किया जाएगा।
- एडमिट कार्ड चेक करें और पेज डाउनलोड करें।
- आगे की जरूरत के लिए उसी की एक हार्ड कॉपी अपने पास रखें।
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SSC MTS दो हज़ार बाईस Admit card: एसएससी एमटीएस दो हज़ार बाईस की परीक्षा में शामिल होने वाले कैंडिडेट्स के लिए एक खबर है। स्टाफ सेलेक्शन कमीशन आयोग की तरफ से SSC MTS दो हज़ार बाईस परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिया गया है। एडमिट कार्ड को आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया गया है। उम्मीदवार जो मल्टी-टास्किंग स्टाफ और हवलदार परीक्षा, दो हज़ार बाईस के लिए शामिल होंगे, वे सभी एसएससी केकेआर की आधिकारिक वेबसाइट ssckkr. kar. nic. in पर जाकर अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। इस परीक्षा को दो मई दो हज़ार तेईस को आयोजित किया जाएगा। इस कंप्यूटर आधारित परीक्षा को हिंदी, अंग्रेजी और तेरह क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित किया जाएगा। इस परीक्षा को दो सेशंस में आयोजित की जाएगी। दोनों सेशंस की परीक्षा को अटेम्प्ट करना अनिवार्य होगा। कैंडिडेट्स नीचे दिए गए डायरेक्ट लिंक से अपने एडमिट कार्ड को डाउनलोड कर सकते हैं। इस भर्ती अभियान के जरिए संगठन में सीबीआईसी और सीबीएन में एमटीएस के लिए दस हज़ार आठ सौ अस्सी और हवलदार के लिए पाँच सौ उनतीस खाली पदों को भरा जाएगा। इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया सत्रह जनवरी दो हज़ार तेईस को शुरू हुई और सत्रह फरवरी दो हज़ार तेईस को समाप्त हुई। ज्यादा संबंधित विवरण के लिए उम्मीदवार एसएससी की आधिकारिक साइट देख सकते हैं। कैंडिडेट्स नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके भी एडमिट कार्ड को डाउनलोड कर सकते हैं। - एसएससी क्षेत्रीय वेबसाइट की आधिकारिक साइट पर जाएं। - होम पेज पर उपलब्ध एसएससी एमटीएस दो हज़ार बाईस एडमिट कार्ड लिंक पर क्लिक करें। - एक नया पेज खुलेगा जहां उम्मीदवारों को आवश्यक विवरण दर्ज करना होगा। - सबमिट पर क्लिक करें और आपका प्रवेश पत्र प्रदर्शित किया जाएगा। - एडमिट कार्ड चेक करें और पेज डाउनलोड करें। - आगे की जरूरत के लिए उसी की एक हार्ड कॉपी अपने पास रखें।
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बॉल टेंपरिंग का जिन्न सामने आने के बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने टीम के तत्कालिक कप्तान स्टीव स्मिथ, उपकप्तान डेविड वॉर्नर को 1-1 साल और केमरन बेनक्राफ्ट को 9 महीने बैन की सजा दी थी। जिसके बाद सभी खिलाड़ियों को आईपीएल से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। अब तीनों के लिए एक और बुरी खबर आई है।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के नए केंद्रीय अनुबंध में निलंबित पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ, डेविड वॉर्नर के अलावा केमरन बेनक्रॉफ्ट को शामिल नहीं किया गया है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने पिछले 12 महीने के प्रदर्शन के आधार पर 2018. 19 सत्र के लिए 20 खिलाड़ियों को अनुबंध दिए हैं। इनमें पांच नए खिलाड़ी शामिल हैं।
स्मिथ, वॉर्नर सरीखे दिग्गजों के अलावा तेज गेंदबाज जैकसन बर्ड, स्पिनर एडम जांपा , हरफनमौला हिल्टन कार्टराइट और विकेटकीपर मैथ्यू वेड को भी अनुबंध में जगह नहीं मिली। अनुबंध पाने में सफल रहने वालों में 5 नए चेहरे हैं, जिनमें तेज गेंदबाज जे रिचर्डसन, केन रिचर्डसन, एंड्रयू टाय के अलावा हरफनमौला मार्कस स्टोइनिस और विकेटकीपर एलेक्स कारे अहम हैं।
स्टीव स्मिथ पर लगे एक साल के बैन के बाद नए टेस्ट कप्तान नियुक्त किए गए टिम पेन और सलामी बल्लेबाज शॉन मार्श की भी कॉन्ट्रेक्ट लिस्ट में वापसी हुई है। बता दें कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ केपटाउन में खेले गए टेस्ट मैच में गेंद से बेनकाफ्ट को छेड़छाड़ करते रंगे हाथों पकड़ा गया था, जिसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान स्टीव स्मिथ और बेनक्रॉफ्ट ने सारे आरोपों को कबूला था।
एस्टन एगर, एलेक्स कारे, पैट कमिंस, एरॉन फिंच, पीटर हैंडस्कॉम्ब, जोश हेजलवुड, ट्रेविस हेड, उस्मान ख्वाजा, नाथन लियोन, ग्लेन मैक्सवेल, शॉन मार्श, मिशेल मार्श, टिम पेन, मैट रेनशॉ, जे रिचर्डसन, केन रिचर्डसन, बिली स्टानलेक, मिशेल स्टार्क, मार्कस स्टोइनिस, एंड्रयू टाय.
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बॉल टेंपरिंग का जिन्न सामने आने के बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने टीम के तत्कालिक कप्तान स्टीव स्मिथ, उपकप्तान डेविड वॉर्नर को एक-एक साल और केमरन बेनक्राफ्ट को नौ महीने बैन की सजा दी थी। जिसके बाद सभी खिलाड़ियों को आईपीएल से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। अब तीनों के लिए एक और बुरी खबर आई है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के नए केंद्रीय अनुबंध में निलंबित पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ, डेविड वॉर्नर के अलावा केमरन बेनक्रॉफ्ट को शामिल नहीं किया गया है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने पिछले बारह महीने के प्रदर्शन के आधार पर दो हज़ार अट्ठारह. उन्नीस सत्र के लिए बीस खिलाड़ियों को अनुबंध दिए हैं। इनमें पांच नए खिलाड़ी शामिल हैं। स्मिथ, वॉर्नर सरीखे दिग्गजों के अलावा तेज गेंदबाज जैकसन बर्ड, स्पिनर एडम जांपा , हरफनमौला हिल्टन कार्टराइट और विकेटकीपर मैथ्यू वेड को भी अनुबंध में जगह नहीं मिली। अनुबंध पाने में सफल रहने वालों में पाँच नए चेहरे हैं, जिनमें तेज गेंदबाज जे रिचर्डसन, केन रिचर्डसन, एंड्रयू टाय के अलावा हरफनमौला मार्कस स्टोइनिस और विकेटकीपर एलेक्स कारे अहम हैं। स्टीव स्मिथ पर लगे एक साल के बैन के बाद नए टेस्ट कप्तान नियुक्त किए गए टिम पेन और सलामी बल्लेबाज शॉन मार्श की भी कॉन्ट्रेक्ट लिस्ट में वापसी हुई है। बता दें कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ केपटाउन में खेले गए टेस्ट मैच में गेंद से बेनकाफ्ट को छेड़छाड़ करते रंगे हाथों पकड़ा गया था, जिसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान स्टीव स्मिथ और बेनक्रॉफ्ट ने सारे आरोपों को कबूला था। एस्टन एगर, एलेक्स कारे, पैट कमिंस, एरॉन फिंच, पीटर हैंडस्कॉम्ब, जोश हेजलवुड, ट्रेविस हेड, उस्मान ख्वाजा, नाथन लियोन, ग्लेन मैक्सवेल, शॉन मार्श, मिशेल मार्श, टिम पेन, मैट रेनशॉ, जे रिचर्डसन, केन रिचर्डसन, बिली स्टानलेक, मिशेल स्टार्क, मार्कस स्टोइनिस, एंड्रयू टाय.
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IPL Final के बाद रवींद्र जडेजा की तस्वीर और वीडियो वायरल हो रहे, जिसमें वो पत्नी रिवाबा को गले लगाते नजर आ रहे हैं. (IPL Twitter)
नई दिल्ली. चेन्नई सुपर किंग्स ने पांचवीं बार आईपीएल का खिताब जीत लिया. सीएसके ने फाइनल में डिफेंडिंग चैंपियन गुजरात टाइटंस को 5 विकेट से हराया. चेन्नई की जीत के हीरो रवींद्र जडेजा रहे. उन्होंने आखिरी 2 गेंद में बाजी पलट दी. जडेजा ने पांचवीं गेंद पर छक्का और फिर आखिरी बॉल पर चौका लगा चेन्नई को यादगार जीत दिलाई. जीत के बाद रवींद्र जडेजा दौड़ते हुए डगआउट की तरफ गए और वहां खड़े कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने उन्हें गले लगा लिया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
सिर्फ धोनी ने ही जडेजा को गले नहीं लगाया, बल्कि फाइनल देखने के लिए स्टेडियम में जडेजा की विधायक पत्नी रिवाबा भी मौजूद थीं. जडेजा के जीत का चौका लगाते ही वो भावुक हो गईं और उनकी आंखें नम हो गईं. इसके बाद वो मैदान में आईं और उन्होंने जडेजा को गले लगा लिया. इसकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं.
फाइनल के बाद की कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आईं हैं, जिसमें धोनी के सामने पड़ते ही रवींद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा की आंखों से आंसू बहने लगे. बता दें कि आईपीएल 2023 के बीच कई मौकों पर धोनी और जडेजा के बीच अनबन की खबरें आईं थीं. दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ चेन्नई सुपर किंग्स के आखिरी लीग मैच के बाद सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में धोनी और जडेजा के हावभाव से ऐसा लगा था कि जैसे दोनों के बीच किसी बात की तनातनी है. इसके बाद जडेजा ने एक ट्वीट किया था, जिसपर पत्नी रिवाबा ने भी कमेंट किया था.
दिल्ली के खिलाफ मैच में रवींद्र जडेजा ने 4 ओवर में 50 रन दिए थे. लेकिन उनके हाथ कोई विकेट नहीं आया था. इसके बाद एक वीडियो सामने आया था, जिसमें धोनी और जडेजा के बीच बातचीत का वीडियो वायरल हुआ था. ऐसी अटकलें लगाई जा रहीं थीं कि धोनी और जडेजा के बीच गेंदबाजी को लेकर ही बहस हो रही थी.
अब धोनी और जडेजा के बीच अनबन की खबरों में कितनी सच्चाई थी, ये तो शायद उन दोनों को ही पता होगा. पर जडेजा ने फाइनल में अहम पारी खेल, सीएसके के लिए जरूर अपनी अहमियत साबित कर दी.
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IPL Final के बाद रवींद्र जडेजा की तस्वीर और वीडियो वायरल हो रहे, जिसमें वो पत्नी रिवाबा को गले लगाते नजर आ रहे हैं. नई दिल्ली. चेन्नई सुपर किंग्स ने पांचवीं बार आईपीएल का खिताब जीत लिया. सीएसके ने फाइनल में डिफेंडिंग चैंपियन गुजरात टाइटंस को पाँच विकेट से हराया. चेन्नई की जीत के हीरो रवींद्र जडेजा रहे. उन्होंने आखिरी दो गेंद में बाजी पलट दी. जडेजा ने पांचवीं गेंद पर छक्का और फिर आखिरी बॉल पर चौका लगा चेन्नई को यादगार जीत दिलाई. जीत के बाद रवींद्र जडेजा दौड़ते हुए डगआउट की तरफ गए और वहां खड़े कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने उन्हें गले लगा लिया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. सिर्फ धोनी ने ही जडेजा को गले नहीं लगाया, बल्कि फाइनल देखने के लिए स्टेडियम में जडेजा की विधायक पत्नी रिवाबा भी मौजूद थीं. जडेजा के जीत का चौका लगाते ही वो भावुक हो गईं और उनकी आंखें नम हो गईं. इसके बाद वो मैदान में आईं और उन्होंने जडेजा को गले लगा लिया. इसकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं. फाइनल के बाद की कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आईं हैं, जिसमें धोनी के सामने पड़ते ही रवींद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा की आंखों से आंसू बहने लगे. बता दें कि आईपीएल दो हज़ार तेईस के बीच कई मौकों पर धोनी और जडेजा के बीच अनबन की खबरें आईं थीं. दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ चेन्नई सुपर किंग्स के आखिरी लीग मैच के बाद सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में धोनी और जडेजा के हावभाव से ऐसा लगा था कि जैसे दोनों के बीच किसी बात की तनातनी है. इसके बाद जडेजा ने एक ट्वीट किया था, जिसपर पत्नी रिवाबा ने भी कमेंट किया था. दिल्ली के खिलाफ मैच में रवींद्र जडेजा ने चार ओवर में पचास रन दिए थे. लेकिन उनके हाथ कोई विकेट नहीं आया था. इसके बाद एक वीडियो सामने आया था, जिसमें धोनी और जडेजा के बीच बातचीत का वीडियो वायरल हुआ था. ऐसी अटकलें लगाई जा रहीं थीं कि धोनी और जडेजा के बीच गेंदबाजी को लेकर ही बहस हो रही थी. अब धोनी और जडेजा के बीच अनबन की खबरों में कितनी सच्चाई थी, ये तो शायद उन दोनों को ही पता होगा. पर जडेजा ने फाइनल में अहम पारी खेल, सीएसके के लिए जरूर अपनी अहमियत साबित कर दी. .
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मुंबईः
मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे पर ट्रैफिक नियमों का उल्लघंन करने वालों को पकड़ने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली जाएगी। एक्सप्रेस वे पर कैमरे लगा दिए गए हैं। बता दें कि यहां पर हजारों की संख्या में वाहनों का आवाजाही होती है और तेज रफ्तार की वजह से आए दिन हादसे भी होते रहते हैं।
जानकारी के मुताबिक, ट्रैफिक जाम-दुर्घटना की समस्या से निजात पाने और हाईवे पर ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए ड्रोन का सहारा लिया जा रहा है। कैमरे में कैद तस्वीरों के आधार पर नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही चालान भी काटे जाएंगे।
बता दें कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे करीब 94 किलोमीटर लंबा है। बीते कुछ दिनों में यहां कई दुर्घटनाएं हुई हैं, जिसमें करीब 17 लोग जान गंवा चुके हैं।
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मुंबईः मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे पर ट्रैफिक नियमों का उल्लघंन करने वालों को पकड़ने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली जाएगी। एक्सप्रेस वे पर कैमरे लगा दिए गए हैं। बता दें कि यहां पर हजारों की संख्या में वाहनों का आवाजाही होती है और तेज रफ्तार की वजह से आए दिन हादसे भी होते रहते हैं। जानकारी के मुताबिक, ट्रैफिक जाम-दुर्घटना की समस्या से निजात पाने और हाईवे पर ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए ड्रोन का सहारा लिया जा रहा है। कैमरे में कैद तस्वीरों के आधार पर नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही चालान भी काटे जाएंगे। बता दें कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे करीब चौरानवे किलोग्राममीटर लंबा है। बीते कुछ दिनों में यहां कई दुर्घटनाएं हुई हैं, जिसमें करीब सत्रह लोग जान गंवा चुके हैं।
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तेहरान (आईएएनएस)। ईरान में राष्ट्रपति चुनाव 2017 के लिए हुए मतदान के बाद शनिवार को मतगणना जारी है। यहां शुक्रवार को हुए मतदान में 70 फीसदी वोट पड़े थे। निवर्तमान राष्ट्रपति हसन रूहानी दूसरे कार्यकाल के लिए चुनाव मैदान में हैं। उनका मुख्य मुकाबला कट्टरपंथी मौलवी व पूर्व अभियोजक इब्राहिम रईसी से है, जो देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी हैं।
'बीबीसी' की रिपोर्ट के अनुसार, देश के आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने बताया कि शुक्रवार को हुए मतदान में चार करोड़ से अधिक लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान के लिए बड़ी संख्या में उमड़ी भीड़ को देखते हुए मतदान का समय पांच घंटे के लिए बढ़ा दिया गया था।
यदि चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को 50 फीसदी से अधिक वोट नहीं मिलते हैं तो अगले सप्ताह दूसरे दौर का मुकाबला होगा। ईरान में 1985 से ही प्रत्येक निवर्तमान राष्ट्रपति का दोबारा चुनाव होता है, जब खामेनेई खुद दूसरे कार्यकाल के लिए निर्वाचित हुए थे।
खामेनेई ने शुक्रवार सुबह आठ बजे मतदान शुरू होने के कुछ मिनट बाद ही अपना वोट डाला था।
रूहानी ने एक घंटे बाद वोट डाला। राष्ट्रपति चुनाव के लिए 5.4 करोड़ से अधिक लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करने के योग्य थे।
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तेहरान । ईरान में राष्ट्रपति चुनाव दो हज़ार सत्रह के लिए हुए मतदान के बाद शनिवार को मतगणना जारी है। यहां शुक्रवार को हुए मतदान में सत्तर फीसदी वोट पड़े थे। निवर्तमान राष्ट्रपति हसन रूहानी दूसरे कार्यकाल के लिए चुनाव मैदान में हैं। उनका मुख्य मुकाबला कट्टरपंथी मौलवी व पूर्व अभियोजक इब्राहिम रईसी से है, जो देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी हैं। 'बीबीसी' की रिपोर्ट के अनुसार, देश के आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने बताया कि शुक्रवार को हुए मतदान में चार करोड़ से अधिक लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान के लिए बड़ी संख्या में उमड़ी भीड़ को देखते हुए मतदान का समय पांच घंटे के लिए बढ़ा दिया गया था। यदि चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को पचास फीसदी से अधिक वोट नहीं मिलते हैं तो अगले सप्ताह दूसरे दौर का मुकाबला होगा। ईरान में एक हज़ार नौ सौ पचासी से ही प्रत्येक निवर्तमान राष्ट्रपति का दोबारा चुनाव होता है, जब खामेनेई खुद दूसरे कार्यकाल के लिए निर्वाचित हुए थे। खामेनेई ने शुक्रवार सुबह आठ बजे मतदान शुरू होने के कुछ मिनट बाद ही अपना वोट डाला था। रूहानी ने एक घंटे बाद वोट डाला। राष्ट्रपति चुनाव के लिए पाँच.चार करोड़ से अधिक लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करने के योग्य थे।
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इंडिया न्यूज, सोनीपत।
Deep Sidhu Death Case Trala Driver Arrested : हरियाणा के सोनीपत में पंजाबी अभिनेता व गायक दीप सिद्धू की सड़क हादसे में मौत मामले के आरोपी ट्राला चालक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दीप के भाई के बयान पर ट्राला चालक पर मुकदमा दर्ज किया गया था।
इस दौरान पंजाब से आए परिवार के सदस्य व अन्य लोग काफी संख्या में मौजूद रहे। पुलिस ने उनके भाई के बयान पर ट्राला चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी थी। गुरुवार को पुलिस ने आरोपी ट्राला चालक को गिरफ्तार कर लिया है।
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इंडिया न्यूज, सोनीपत। Deep Sidhu Death Case Trala Driver Arrested : हरियाणा के सोनीपत में पंजाबी अभिनेता व गायक दीप सिद्धू की सड़क हादसे में मौत मामले के आरोपी ट्राला चालक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दीप के भाई के बयान पर ट्राला चालक पर मुकदमा दर्ज किया गया था। इस दौरान पंजाब से आए परिवार के सदस्य व अन्य लोग काफी संख्या में मौजूद रहे। पुलिस ने उनके भाई के बयान पर ट्राला चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी थी। गुरुवार को पुलिस ने आरोपी ट्राला चालक को गिरफ्तार कर लिया है।
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शिवपुरी। इन दिनों शहर में पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। पूरी राजनीति पानी पर ही आधारित हो गई है। चारों ओर सिर्फ एक ही काम बचा है। और वह काम है है पानी-पानी-पानी। लेकिन इसी पानी के बीच अचानक क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के पुत्र महाआर्यमन सिंधिया का शिवपुरी दौरा निर्धारित हुआ। अचानक निर्धारित हुए इस दौरे से राजनैतिक गलियारों में हडक़ंप तय था प्रत्येक कांग्रेसी अपने-अपने स्तर से राजकुमार को खुश करने में जुट गए।
इस दौरान शिवपुरी आए महाआर्यमन सिंधिया ने युवाओं और प्रतिभावान छात्र छात्राओं से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि उन्होंने यहां पर युवाओं की नब्ज टटोलने का प्रयास किया। कांग्रेस के युवा संवाद कार्यक्रम में उन्होंने जहां झूठे वायदे और झूठी राजनीति करने वाले राजनीतिज्ञों की खबर लेने की बात कही। साथ ही युवाओं से सच्चे और अच्छे लोगों को राजनीति में आगे बढाने की बात भी कही। वहीं मेरिट में आए विद्यार्थियों को टॉफी देकर कहा- सपने देखो, मंजिल अवश्य मिलेगी।
महाआर्यमन सिंधिया शनिवार को अपने दिल्ली के दो दोस्तों के साथ शिवपुरी आए। दोपहर 1.30 बजे वह सीधे मेडिकल कॉलेज और एनटीपीसी कॉलेज के साथ फिल्टर प्लांट सतनवाड़ा पहुंचे। यहां पर उन्होंने कांग्रेस नेताओं और स्थानीय लोगों से इन योजनाओं के बारे में जानकारी ली। इसके बाद वह कांग्रेस युवाओं द्वारा आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में पहुंचे। यहां उन्होंने युवाओं से सीधा संवाद करते हुए कहा कि वह तीन बिंदु सोचकर आए थे। उन पर चर्चा करने के बजाए वह दिल की बात कहेंगे।
युवाओं से उन्होंने कहा कि जनता में झूठे वादे करके कुछ नेताओं ने जनता में राजनीतिज्ञों की छवि बिगाड़ी है। किसी का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि वर्तमान में राजनीति का जो गलत तरीका बनाया है, उसमें सुधार करना होगा। हमें हर परिस्थिति में सच का साथ देना है और सच की ही लड़ाई पूरी ताकत से लडऩी है। तभी मप्र की राजनीति में बदलाव आएगा और प्रदेश की राजनीति में चेहरा भी बदलेगा। हमें सच्चाई से यह लड़ाई जीतनी है, झूठे वादों से नहीं।
उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए फिल्म रॉकी का गाना सुनाते हुए कहा कि आ देखें जरा किसमें कितना है दम, जमके रखना कदम मेरे साथिया। और इसी थीम पर उन्होंने युवाओं से आगे बढ़ जोश के साथ राजनीति करने की बात भी कही। कार्यक्रम का आयोजन अमित शिवहरे,सिद्धार्थ चौहान,पुनीत शर्मा,आकाश शर्मा,सिद्धार्थ लढा आदि कांग्रेस युवा नेताओं ने किया।
राजनीतिक हल्कों में महाआर्यमन सिंधिया का यह दौरा चर्चाओं में रहा। आम तौर पर सिंधिया परिवार के जो कार्यक्रम होते हैं, उनकी रूपरेखा पहले से बन जाती है,लेकिन सांसद सिंधिया के पुत्र महाआर्यमन का यह दौरा अचानक से बना जिसकी कांग्रेस ने भी कोई सूचना जारी नहीं की। बताया जा रहा है कि गुना शिवपुरी लोकसभा क्षेत्र में जिस तरह से सिंधिया परिवार का दबदबा है, उस वजह से नब्ज टटोलने के लिए महाआर्यमन का यह दौरा बना। जिसमें जनसेवा से जुड़े कार्यक्रमों के अलावा किसानों के सम्मेलन, खेल गतिविधियां और शिविर आदि में शामिल होने के कार्यक्रम भी बने। जिसे देखकर माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में वह प्रचार में कूदने वाले हैं।
आदर्श बंधु विद्यालय में आयोजित प्रतिभाओं के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए महाआर्यमन सिंधिया ने कहा कि पढ़े लिखे युवाओं को भी राजनीति में आना चाहिए। वे बोले कि उन्होंने अपने दादा माधवराव सिंधिया और पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया से सीखा है कि चाहे राजनीति में जाओ या फिर अन्य क्षेत्र में जनसेवा का लक्ष्य हमेशा हमारा होना चाहिए। प्रतिभावान छात्रों से कहा कि अच्छे और सच्चे दोस्त बनाएं और भविष्य गढऩे के लिप्त सपने अवश्य देखें ताकि उन्हें आप साकार कर सकें। इस दौरान प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित करने के अलावा उन्होंने उनके स्थान पर जाकर टॉफी और कॉपी पेन भी वितरित किए।
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शिवपुरी। इन दिनों शहर में पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। पूरी राजनीति पानी पर ही आधारित हो गई है। चारों ओर सिर्फ एक ही काम बचा है। और वह काम है है पानी-पानी-पानी। लेकिन इसी पानी के बीच अचानक क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के पुत्र महाआर्यमन सिंधिया का शिवपुरी दौरा निर्धारित हुआ। अचानक निर्धारित हुए इस दौरे से राजनैतिक गलियारों में हडक़ंप तय था प्रत्येक कांग्रेसी अपने-अपने स्तर से राजकुमार को खुश करने में जुट गए। इस दौरान शिवपुरी आए महाआर्यमन सिंधिया ने युवाओं और प्रतिभावान छात्र छात्राओं से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि उन्होंने यहां पर युवाओं की नब्ज टटोलने का प्रयास किया। कांग्रेस के युवा संवाद कार्यक्रम में उन्होंने जहां झूठे वायदे और झूठी राजनीति करने वाले राजनीतिज्ञों की खबर लेने की बात कही। साथ ही युवाओं से सच्चे और अच्छे लोगों को राजनीति में आगे बढाने की बात भी कही। वहीं मेरिट में आए विद्यार्थियों को टॉफी देकर कहा- सपने देखो, मंजिल अवश्य मिलेगी। महाआर्यमन सिंधिया शनिवार को अपने दिल्ली के दो दोस्तों के साथ शिवपुरी आए। दोपहर एक.तीस बजे वह सीधे मेडिकल कॉलेज और एनटीपीसी कॉलेज के साथ फिल्टर प्लांट सतनवाड़ा पहुंचे। यहां पर उन्होंने कांग्रेस नेताओं और स्थानीय लोगों से इन योजनाओं के बारे में जानकारी ली। इसके बाद वह कांग्रेस युवाओं द्वारा आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में पहुंचे। यहां उन्होंने युवाओं से सीधा संवाद करते हुए कहा कि वह तीन बिंदु सोचकर आए थे। उन पर चर्चा करने के बजाए वह दिल की बात कहेंगे। युवाओं से उन्होंने कहा कि जनता में झूठे वादे करके कुछ नेताओं ने जनता में राजनीतिज्ञों की छवि बिगाड़ी है। किसी का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि वर्तमान में राजनीति का जो गलत तरीका बनाया है, उसमें सुधार करना होगा। हमें हर परिस्थिति में सच का साथ देना है और सच की ही लड़ाई पूरी ताकत से लडऩी है। तभी मप्र की राजनीति में बदलाव आएगा और प्रदेश की राजनीति में चेहरा भी बदलेगा। हमें सच्चाई से यह लड़ाई जीतनी है, झूठे वादों से नहीं। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए फिल्म रॉकी का गाना सुनाते हुए कहा कि आ देखें जरा किसमें कितना है दम, जमके रखना कदम मेरे साथिया। और इसी थीम पर उन्होंने युवाओं से आगे बढ़ जोश के साथ राजनीति करने की बात भी कही। कार्यक्रम का आयोजन अमित शिवहरे,सिद्धार्थ चौहान,पुनीत शर्मा,आकाश शर्मा,सिद्धार्थ लढा आदि कांग्रेस युवा नेताओं ने किया। राजनीतिक हल्कों में महाआर्यमन सिंधिया का यह दौरा चर्चाओं में रहा। आम तौर पर सिंधिया परिवार के जो कार्यक्रम होते हैं, उनकी रूपरेखा पहले से बन जाती है,लेकिन सांसद सिंधिया के पुत्र महाआर्यमन का यह दौरा अचानक से बना जिसकी कांग्रेस ने भी कोई सूचना जारी नहीं की। बताया जा रहा है कि गुना शिवपुरी लोकसभा क्षेत्र में जिस तरह से सिंधिया परिवार का दबदबा है, उस वजह से नब्ज टटोलने के लिए महाआर्यमन का यह दौरा बना। जिसमें जनसेवा से जुड़े कार्यक्रमों के अलावा किसानों के सम्मेलन, खेल गतिविधियां और शिविर आदि में शामिल होने के कार्यक्रम भी बने। जिसे देखकर माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में वह प्रचार में कूदने वाले हैं। आदर्श बंधु विद्यालय में आयोजित प्रतिभाओं के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए महाआर्यमन सिंधिया ने कहा कि पढ़े लिखे युवाओं को भी राजनीति में आना चाहिए। वे बोले कि उन्होंने अपने दादा माधवराव सिंधिया और पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया से सीखा है कि चाहे राजनीति में जाओ या फिर अन्य क्षेत्र में जनसेवा का लक्ष्य हमेशा हमारा होना चाहिए। प्रतिभावान छात्रों से कहा कि अच्छे और सच्चे दोस्त बनाएं और भविष्य गढऩे के लिप्त सपने अवश्य देखें ताकि उन्हें आप साकार कर सकें। इस दौरान प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित करने के अलावा उन्होंने उनके स्थान पर जाकर टॉफी और कॉपी पेन भी वितरित किए।
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एक सवाल के जवाब में कहा था कि महात्मा गांधी के हत्यारे गोडसे सबसे बड़े देशभक्त थे और जो लोग उन्हें आतंकवादी कहते हैं, वे अपने गिरेबां में झांककर देखें। हालांकि उनके बयान से भाजपा ने पल्ला झाड़ लिया था और विवाद बढ़ता देख प्रज्ञा ठाकुर ने अपने बयान पर माफी मांग ली थी।
हेगड़े के पेज पर एक अन्य ट्वीट में कहा गया, " अपनी बात पर जोर देने तथा क्षमा मुद्रा से बचने का समय आ गया है। अभी नहीं . . . तो कब? ' यह टिप्पणी शकुंतला अय्यर के इस ट्वीट साझा करते हुए की गयी कि "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जेएनयू वामपंथी समुदाय की जागीर नहीं है। यदि वे एक पाकिस्तानी कसाब के साथ खड़े हो सकते हैं जिसने सरेआम भारतीयों की हत्या की और जिसके सबूत हैं, तो गोडसे के समर्थन में और गांधी के खिलाफ लिखी गई बातों को कम से कम पढ़ा क्यों नहीं जा सकता।
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एक सवाल के जवाब में कहा था कि महात्मा गांधी के हत्यारे गोडसे सबसे बड़े देशभक्त थे और जो लोग उन्हें आतंकवादी कहते हैं, वे अपने गिरेबां में झांककर देखें। हालांकि उनके बयान से भाजपा ने पल्ला झाड़ लिया था और विवाद बढ़ता देख प्रज्ञा ठाकुर ने अपने बयान पर माफी मांग ली थी। हेगड़े के पेज पर एक अन्य ट्वीट में कहा गया, " अपनी बात पर जोर देने तथा क्षमा मुद्रा से बचने का समय आ गया है। अभी नहीं . . . तो कब? ' यह टिप्पणी शकुंतला अय्यर के इस ट्वीट साझा करते हुए की गयी कि "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जेएनयू वामपंथी समुदाय की जागीर नहीं है। यदि वे एक पाकिस्तानी कसाब के साथ खड़े हो सकते हैं जिसने सरेआम भारतीयों की हत्या की और जिसके सबूत हैं, तो गोडसे के समर्थन में और गांधी के खिलाफ लिखी गई बातों को कम से कम पढ़ा क्यों नहीं जा सकता।
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इसुज़ु हाई-लैंडर कुल 7 कलर विकल्पों में उपलब्ध है। इनमें galena ग्रे, स्प्लैश व्हाइट, nautilus ब्लू, रेड spinal mica, ब्लैक माइका, वेलेंशिया ऑरेंज and सिल्वर मैटेलिक कलर शामिल हैं।
- सभी (3)
- Looks (3)
- Comfort (1)
- Mileage (2)
- Engine (1)
- Price (2)
- Power (2)
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Isuzu Hi-Lander That Defies Limits!
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अपना प्रश्न पूछें और 48 घंटों के भीतर जवाब पाएं।
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इसुज़ु हाई-लैंडर कुल सात कलर विकल्पों में उपलब्ध है। इनमें galena ग्रे, स्प्लैश व्हाइट, nautilus ब्लू, रेड spinal mica, ब्लैक माइका, वेलेंशिया ऑरेंज and सिल्वर मैटेलिक कलर शामिल हैं। - सभी - Looks - Comfort - Mileage - Engine - Price - Power - Experience Isuzu Hi-Lander That Defies Limits! क्या आप उलझन में हैं? अपना प्रश्न पूछें और अड़तालीस घंटाटों के भीतर जवाब पाएं।
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आज हम एक ऐसी एक्ट्रेस के बारे में बात करने जा रहे है, जो एक गाने की वजह से रातोरात सुपरस्टार बन गई थी. जी हां यह एक्ट्रेस एक गाने की वजह से रातोरात प्रसिद्ध हो गई थी. वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दे कि हम यहाँ किसी और एक्ट्रेस की नहीं बल्कि काँटा लगा गर्ल शैफाली जरीवाला की बात कर रहे है. गौरतलब है कि ये वही शैफाली है जिसने काँटा लगा गाने पर डांस करके लाखो नहीं बल्कि करोड़ो लोगो का दिल लूट लिया था. अब यूँ तो ये गाना कई सालो पहले आया था, लेकिन फिर भी लोग आज भी इस गाने के दीवाने है.
शायद यही वजह है कि आज भी कई पार्टियों और डिस्को में यह गाना बजाय जाता है. बता दे कि यह गाना नब्बे के दशक का सबसे प्रसिद्ध गाना है और उस दशक में यह आइटम सांग काफी प्रसिद्ध भी था. वैसे आप सोच रहे होंगे कि हम अचानक इस गाने की बात क्यों कर रहे है, तो हम आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इस गाने से प्रसिद्ध होने वाली एक्ट्रेस शैफाली जरीवाला इतने सालो के बाद एक बार फिर से अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाली है. यानि अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो वो टीवी की दुनिया में फिर से वापसी करने वाली है.
गौरतलब है कि इससे पहले उन्होंने साल 2002 में काँटा लगा गाने पर डांस करके टीवी की दुनिया में चारो तरफ धमाल मचाया था. मगर इस बार वो किसी वीडियो सांग में नहीं बल्कि एक वेब सीरीज में नजर आने वाली है. जी हां ये तो सब जानते ही है कि आज कल इंटरनेट का दौर चल रहा है और अब टीवी सीरियल्स से ज्यादा वेब सीरीज को तवज्जु दिया जाता है. बरहलाल जिस वेब सीरीज में वो काम करने वाली है, उसका नाम बेबी कम ना है. इसके इलावा आपकी जानकारी के लिए बता दे कि यह वेब सीरीज फरहाद समजी द्वारा बनाई गई है और यह वेब सीरीज कॉमेडी होगी.
जी हां इसका मतलब ये है कि अब शैफाली अपने फैंस को अपनी अदाओ से खूब हंसाती हुई नजर आएंगी. वैसे जो लोग नहीं जानते उनकी जानकारी के लिए हम बता दे कि इससे पहले शैफाली मुझसे शादी करोगी फिल्म में केमियो भी कर चुकी है. जी हां इस फिल्म में भी उन्होंने अपने ही गाने पर डांस किया था और इस फिल्म में उनका किरदार केवल एक सेकंड का ही था. इसके साथ ही हम आपको बता दे कि इस वेब सीरीज में वह बॉलीवुड एक्टर श्रेयस तलपड़े के साथ नजर आएंगी.
वैसे भी श्रेयस तलपड़े इससे पहले भी कई फिल्मो में कॉमेडी कर चुके है. ऐसे में इस सीरीज के लिए उनसे बेहतर एक्टर तो कोई हो ही नहीं सकता. गौरतलब है कि यह एकता कपूर के बाला जी टेलीफिल्म्स के बाइस ऑरिजनल्स शोज में से एक है. जिसे उन्होंने खुद प्रोड्यूस किया है. गौरतलब है कि शैफाली ने इससे पहले कभी किसी कॉमेडी शो में काम नहीं किया है.
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आज हम एक ऐसी एक्ट्रेस के बारे में बात करने जा रहे है, जो एक गाने की वजह से रातोरात सुपरस्टार बन गई थी. जी हां यह एक्ट्रेस एक गाने की वजह से रातोरात प्रसिद्ध हो गई थी. वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दे कि हम यहाँ किसी और एक्ट्रेस की नहीं बल्कि काँटा लगा गर्ल शैफाली जरीवाला की बात कर रहे है. गौरतलब है कि ये वही शैफाली है जिसने काँटा लगा गाने पर डांस करके लाखो नहीं बल्कि करोड़ो लोगो का दिल लूट लिया था. अब यूँ तो ये गाना कई सालो पहले आया था, लेकिन फिर भी लोग आज भी इस गाने के दीवाने है. शायद यही वजह है कि आज भी कई पार्टियों और डिस्को में यह गाना बजाय जाता है. बता दे कि यह गाना नब्बे के दशक का सबसे प्रसिद्ध गाना है और उस दशक में यह आइटम सांग काफी प्रसिद्ध भी था. वैसे आप सोच रहे होंगे कि हम अचानक इस गाने की बात क्यों कर रहे है, तो हम आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इस गाने से प्रसिद्ध होने वाली एक्ट्रेस शैफाली जरीवाला इतने सालो के बाद एक बार फिर से अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाली है. यानि अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो वो टीवी की दुनिया में फिर से वापसी करने वाली है. गौरतलब है कि इससे पहले उन्होंने साल दो हज़ार दो में काँटा लगा गाने पर डांस करके टीवी की दुनिया में चारो तरफ धमाल मचाया था. मगर इस बार वो किसी वीडियो सांग में नहीं बल्कि एक वेब सीरीज में नजर आने वाली है. जी हां ये तो सब जानते ही है कि आज कल इंटरनेट का दौर चल रहा है और अब टीवी सीरियल्स से ज्यादा वेब सीरीज को तवज्जु दिया जाता है. बरहलाल जिस वेब सीरीज में वो काम करने वाली है, उसका नाम बेबी कम ना है. इसके इलावा आपकी जानकारी के लिए बता दे कि यह वेब सीरीज फरहाद समजी द्वारा बनाई गई है और यह वेब सीरीज कॉमेडी होगी. जी हां इसका मतलब ये है कि अब शैफाली अपने फैंस को अपनी अदाओ से खूब हंसाती हुई नजर आएंगी. वैसे जो लोग नहीं जानते उनकी जानकारी के लिए हम बता दे कि इससे पहले शैफाली मुझसे शादी करोगी फिल्म में केमियो भी कर चुकी है. जी हां इस फिल्म में भी उन्होंने अपने ही गाने पर डांस किया था और इस फिल्म में उनका किरदार केवल एक सेकंड का ही था. इसके साथ ही हम आपको बता दे कि इस वेब सीरीज में वह बॉलीवुड एक्टर श्रेयस तलपड़े के साथ नजर आएंगी. वैसे भी श्रेयस तलपड़े इससे पहले भी कई फिल्मो में कॉमेडी कर चुके है. ऐसे में इस सीरीज के लिए उनसे बेहतर एक्टर तो कोई हो ही नहीं सकता. गौरतलब है कि यह एकता कपूर के बाला जी टेलीफिल्म्स के बाइस ऑरिजनल्स शोज में से एक है. जिसे उन्होंने खुद प्रोड्यूस किया है. गौरतलब है कि शैफाली ने इससे पहले कभी किसी कॉमेडी शो में काम नहीं किया है.
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Shilpa Shinde News: टीवी शो 'भाभी जी घर पर हैं'में अंगूरी भाभी के किरदार से मश्हूर हुईं एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। कई सालों बाद शिल्पा 'मैडम सर' में पुलिस के किरदार में आई थीं। ये शो भी उन्होंने छोड़ दिया है और अब वह मेकर्स और लीड एक्ट्रेस गुल्की जोशी के खिलाफ गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।
आपको बता दें कि इससे पहले भी शिल्पा शिंदे ने 'भाभी जी घर पर हैं', 'बिग बॉस' के मेकर्स और 'झलक दिखला जा' के जजेज पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था उनके साथ शो में गलत हुआ है। Bhabiji Ghar par hain के बाद शिल्पा ने कुछ सालों तक टीवी से दूरी बनाए रखी। इसके बाद वह Bigg Boss 11 में आईं और विजेता बनीं। हालांकि बाद में उन्होंने शो पर पक्षपात का आरोप लगाया था।
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Shilpa Shinde News: टीवी शो 'भाभी जी घर पर हैं'में अंगूरी भाभी के किरदार से मश्हूर हुईं एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। कई सालों बाद शिल्पा 'मैडम सर' में पुलिस के किरदार में आई थीं। ये शो भी उन्होंने छोड़ दिया है और अब वह मेकर्स और लीड एक्ट्रेस गुल्की जोशी के खिलाफ गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। आपको बता दें कि इससे पहले भी शिल्पा शिंदे ने 'भाभी जी घर पर हैं', 'बिग बॉस' के मेकर्स और 'झलक दिखला जा' के जजेज पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था उनके साथ शो में गलत हुआ है। Bhabiji Ghar par hain के बाद शिल्पा ने कुछ सालों तक टीवी से दूरी बनाए रखी। इसके बाद वह Bigg Boss ग्यारह में आईं और विजेता बनीं। हालांकि बाद में उन्होंने शो पर पक्षपात का आरोप लगाया था।
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आपने सर्च किया थाः
बंगाल सरकार देशभर से आए ऐसे लोगों का स्वागत करती है जिनपर गंभीर आरोप हैं। घुसपैठियों का भी स्वागत करती है लेकिन दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल, भाजपा के नेताओं को रोका जाता है।
क्या मार दिए गए किसी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए न्याय नहीं मिलना चाहिए, क्योंकि उसका नाम अख़लाक़ नहीं बल्कि रामलिंगम है?
योगी जी ने आज सुबह कहा था मैं पुरुलिया पहुँच कर लोकतंत्र की रक्षा के लिए परमहंस की धरती से क्रांति का शंखनाद करूँगा।
भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्याओं को अवैध अप्रवासी बताते हुए उन्हें देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा बताया था। सरकार का तर्क था कि रोहिंग्या लोगों को रहने की अनुमति देने से हमारे अपने नागरिकों के हित काफी प्रभावित होंगे और देश में तनाव भी पैदा होगा।
अदालत ने कहा; "पकिस्तान ने खुद को एक इस्लामिक राष्ट्र घोषित किया लेकिन भारत, जिसे धर्म के आधार पर विभाजित होने के कारण एक हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए था- एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना रहा। "
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आपने सर्च किया थाः बंगाल सरकार देशभर से आए ऐसे लोगों का स्वागत करती है जिनपर गंभीर आरोप हैं। घुसपैठियों का भी स्वागत करती है लेकिन दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल, भाजपा के नेताओं को रोका जाता है। क्या मार दिए गए किसी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए न्याय नहीं मिलना चाहिए, क्योंकि उसका नाम अख़लाक़ नहीं बल्कि रामलिंगम है? योगी जी ने आज सुबह कहा था मैं पुरुलिया पहुँच कर लोकतंत्र की रक्षा के लिए परमहंस की धरती से क्रांति का शंखनाद करूँगा। भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्याओं को अवैध अप्रवासी बताते हुए उन्हें देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा बताया था। सरकार का तर्क था कि रोहिंग्या लोगों को रहने की अनुमति देने से हमारे अपने नागरिकों के हित काफी प्रभावित होंगे और देश में तनाव भी पैदा होगा। अदालत ने कहा; "पकिस्तान ने खुद को एक इस्लामिक राष्ट्र घोषित किया लेकिन भारत, जिसे धर्म के आधार पर विभाजित होने के कारण एक हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए था- एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना रहा। "
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अलंकार - ढोत्तर । (परशुराम ) मदिरा -
तोरि सरासन संकर को सुभ सोय स्वयम्बर मात बरी । ताने बढ्यो अभिमान महा मन मेरियो नेक न संक करो ॥ (राम) -
सो अपराध परो हमसों अब क्यों सुघरं तुमहो तो कहौ । ( परशुराम ) -
बाहू द दोऊ कुठाराह केशव श्रापने धाम को पंथ गहौ ॥ १० ॥
भावाय - ( पहले नरमी से मामला तय करना चाहते थे, पर जब राम जी ने बान काट कर और चिडा दिया तव परशुराम कहने लगे कि ) शंकर का धनुष तोड कर स्वयम्बर में मीना को विवाहा है, इससे तुम्हारे मन मे ममिमान अधिक बढ़ गया है । भला यह बनायो कि धनुष तोडते समय तुमने मेरा भी तनिक भय न किया मो क्यो ? ( तव राम ने कहा कि ) हाँ, यह अपराध तो अवश्य मुझसे हो गया, भव मापही बतलाइए कि क्सि दंड से इस अपराध का प्रायश्चित होगा। ( तब परशुराम बोले ) अपने दोनो हाय कुठार को देकर अपने घर का रास्ता लो- अर्थात् हम तुम्हारे दोनो हाय काट लेंगे तब घर जाने देंगे ।
(राम) कुंडलिया-टूट टूटनहार तद वायुहि बोजत दोष ।
त्यों भब हर के धनुध को हम पर कोजत रोप हम पर कोजत रोष कालगति जान न जाई । होनहार हूं रहे मिटं मेटो न मिटाई । होनहार हूँ रहे मोह मद सब काटे । होप तिनूका बसन्वय तिनुश हूं टूटं ॥२०॥
अलंकर- लोकोकिन से पुष्ट यूरोत्तर ।
नोट- - इस काव्य मे व्यंगा यह कि राम जी परशुराम को सूचित करते हैं कि का समय गया, भव रामावतार का समय भाया है, अतः
प्रापरा वज्रवत् वल मेरे सामने तिनका के समान टूट जायगा, ग्राप चाहे हमे कुमार ही समझते रहिए । (देखो छद न० १८ ) । (परशुराम कुठार-प्रति) मत्तगयंद सवैया -
वेशक हैहयराज को माम हलाहल कौरन खाय लियो रे । ता लगि मेद महोपन को घृत घोरि दियो न सिरानो हियो रे ॥ मेरो क्ह्यो करि मित्र कुठार जो चाहत है बहुकाल जियो रे । तो लो नहीं सुख जौ लग तू रघुवीर को श्रोण सुधा न पियो रे ॥२१॥ शब्दार्य - मेद चवीं । मिरानो-ठा हुआ । श्रोण रक्त । भावार्य - (परशुराम की शक्ति क्षीण होती जाती थी। परशु के प्रति कहते हैं । ) हे कुठार ! तू ने हेयराज सहस्रार्जुन का माम काटा है सो मानो तू मे हलाहल विप के कौर खा लिए है । उस विष को शान्ति के लिए मैंने तुझको अनेक राजाश्री की चर्बी घी की तरह घोल कर पिलाई, पर तब भी तेरा हृदय उडा न हुश्रा । प्रतः हे मित्र कुठार ? जो तू बहुत दिनों तक जीना चाहता है तो मेरा बहना मान ले । तुझको तब तक मुख न मिलेगा जब तक तू रघुवीर की रक्तपी सुधा न पियेगा ।
प्रलंकार रूपक
नोट- वास्तव में विप गाए हुए व्यक्ति वा उपचार भी वेशव ने प्रच्छा बनाया है कि घी पिलाना चाहिए, ताजा खून पिलाना चाहिए और सुधा (चूने का पानी) पिलाना चाहिए। इससे प्रक्ट है कि वेदशव वैद्यक भी प्रदो तरह जानते थे । हमारा अनुभव है निलिया के विप का प्रभाव चूने के पानी से शीघ्र नष्ट होता है।
विशेष - महात्मा जानकी प्रसाद ने इस छद में सरस्वती उक्नायें यों लगाया है - हे कुठार, तुझको नव तक मुख न प्राप्त होगा जब तक तू (रघुवीर का सुधा श्रोण न पिया) श्रीराम जी के सुधा सम मधुर वचत वान से न पियेगा -- प्रर्थात् राम जी के क्षमा के वचन जब तक न सुन लेगा ।
१. जब कवि प्रसवश कोई ऐसी बात कहता है जिसे टीकाकार अपनी भक्ति के कारण प्रकयनीय समझता है तब वह निज बुद्धिन्वल से उसका कोई दूसरा अयं करता है । ऐसे अयं को सरस्वती उपना कहते हैं । देखो इसो प्रवाद का नं० ३१ ।
( भरत ) तन्वी'बोलत कैसे, भृगपति सुनिये, सो कहिए तन मन बनि भावं । आादि वड हो, बड़पन रखिये, जा हित तू सव जग जस पावै । चंदन हूँ में, प्रति तन घसिए, आागि उठे यह गुति सब लोजं । हैहय भारो, नूप जन संहरे, सो यश लं किन युग-युग जोजं ।।२२।।
शब्दार्य --सो कहिए तन मन वनि भावै ऐसी बात हो जो तन से
अथवा मन से भी हो सके --नात्पर्य यह है कि जो तुम वहते हो उसे तन से तो क्या मन से भी नहीं कर सकते । आदि हो = प्रादिवर्ण अर्थात् ब्राह्मणवणं होने से अवध्य हो ।
भावार्य -- हे भृगुपति, कैसी बात कहते हो ( ऐसा कहना उचित नही), ऐसी बात वही जिसे तुम तन से वा मन से पूर्ण कर सको। तुम ब्राह्मण हो, अतः हमसे बडे हो, सो अपना बडप्पन रखे रहो, जिसमे तुम समस्त जग मे यश पाम्रो । नहीं तो यह बात मच्छी तरह समझ लो कि प्रति रगड से चदन मे भी भाग उठती है। भापने हैहयराज का और अन्य अनेक क्षत्रिय राजाधो वा सहार दिया, यही यश लेकर मसार मे क्यों नहीं पुगयुगान्तर तक भमर बने रहते हो (तात्पर्य यह कि यदि हमसे लडोगे तो हम तुम्हें प्रवश्य पराजित करेंगे तो तुम्हारा विजय-यश लुप्त हो जायगा ) ।
सूचना--पिगल के अनुसार तो इस छन्द का ढांचा शुद्ध है, पर व्यावरण के अनुसार दूसरे चरण में यह मशुद्धि जान पड़ती है कि 'बडे हीँ' मादर है मौर 'तू " निरादरसूचक है । ऐसा न होना चाहिए था। चौर्य चरण मे 'सँहरे' शब्द 'संहारे' वा भयं देता है । यह भी ठीक नही जँचना । समझ में नहीं माता वि वेशव से ऐसी भूल क्यो हुई।
( परशुराम ) नाराचभलो कही भरत्य तं उठाय प्राषि मंग तँ । चङ्गाय चोपि चाप भाप वान से नियंग तें : प्रभाउ पापनो दिलाउ छोडि बाल भाई के रिझाउ राजपुत्र मोहि राम से छुडाइ
भावार्य -- ( परशुघर कहते हैं ) हे भरत, तू ने अच्छी कही, अच्छा ले अपने अंग से आग उठा (भरत ने कहा है कि अति रगड से चन्दन से भी श्राग निकलती है, उसी पर यह कथन है) और तूणीर से वाण लेकर शौक से धनुप पर चढा, अपना प्रभाव दिखला, वालभाव को छोड़ दे । हे राजपुत्र, युद्ध करके मुझे प्रसन्न कर और राम को छुडा ले ( तब जानू कि तू वडा वीर है) ।
सो० लियो चाप जब हाय, सोनिहु भैयन रोप करि । बरज्यो श्रीरघुनाय, तुम बालक जानत कहा ॥ २४ ॥ शब्दार्थ तीनिहु भयन = मरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न । भावार्य सरल है ।
(राम) दो०- भगवन्तन सो जीतिए, कबहूँ न कीन्हें शक्ति । जोतिय एक बात तँ, केवल कीन्हें भक्ति ॥२५॥
भावार्य - राम जी अपने भाइयो को समझाते हैं कि भगवंतो से शक्ति द्वारा कोई नहीं जीनता केवल उनकी भक्ति करने से ही जीने जा सकते हैं ।
नोट -परशुराम की गणना 'भगवानो' मे है। भगवान वह व्यक्ति बहुनाता है जिसमें ऐश्वयं, धर्म, यश, श्री, विराग और विज्ञान ये छ शक्तियाँ हो ।
हरिपोतिकाजय हपो हैहयराज इन दिन छत्र छिति मंडल कर्यो । गिरि बंध घट्मुख जोति तारकनन्द को जब ज्यों हो ॥ मुत में न जायो राम सो यह कह्यो पर्वतनन्दिनी । वह रेणुका तिय धन्य धरणी में भई जग बन्दिनी ।।२६।।
शब्दार्थ-विन छत्र = विना राजा का छिनि महल = समस्त पृथ्वी गिरि वेध पद्मुख = नामक पहाड को तोड़ने वाले स्वामी कार्तिक । तारसनन्द = नारव नामक प्रमुर का पुत्र राम-परशुराम । पर्वतनन्दिनी=
पार्वती । रेणुका = परशुराम की माता । जगबंदिनी = समस्त संसार मे वंदनीय, सर्वपूज्य ।
भावार्य - ( राम जी कहते है) जब इन्होने हैहयराज को मारा था तब समस्त पृथ्वी को विना राजा के कर दिया था और क्रौंच पहाड को तोड़ने वाले कार्तिकेय को जीत कर जब तारक के पुत्र को मारा था, तव पार्वती ने कहा था कि मैने परशुराम सा पुत्र न पैदा किया ! धन्य है वह रेणुका जो ऐसा वोर पुत्र पैदा करके इस पृथ्वी पर वंदनीय हुई । तात्पर्य यह है कि इनको वीरता वीरमाता पार्वती द्वारा प्रशंसित है। प्रत ये बड़े वीर है ।
(पुरशुराम ) तोमरसुनि राम शोल समुद्र । तव बंधु है प्रति क्षुद्र ।। मम बाड़वानल कोप । श्रव कियो चाहत लोप ॥२७॥
भावार्थ- हे शोलसागर राम, सुनो तुम्हारे ये तीनो भाई बडे क्षुद्र हैं प्रतः भव मेरा त्रोध-बड़वानल इनको नष्ट करना चाहता है (तुम कुशल चाहो तो इन्हें हटा दो ) ।
अलंकार रूपक ।
( शत्रुघ्न ) दोधक- ही भुगुनन्द यलो जगमाहीं । राम विदा करिए घर जाहीं ॥
हो तुमनों फिर युद्धहि माड़ी : क्षत्रिय वंश को घर से छाडौं ॥२८॥
भावार्थ - हे भृगुनन्दन ! सचमच भाप समार में बड़े चली है ( तात्पर्यं कि तुम्हारा थल मंसारी जीवो पर घनेगा, हम लोग मायारण गंगारी जीव से है) प्रतः राम बो तो विदा कीजिए वे घर को जायें। उनसे जाने पर तुमने युद्ध करूंगा और समस्त दात्रिय वश या बदला तुमसे चुरा लूंगा । भतंतर स्वभावोक्ति (प्रतिज्ञावद ) ।
सात प्रकाश
यह बात सुनी भूगुनाय जर्व । कहि रामहि लं घर जानु प्रवे । इनपं जग जोवत जो बचिहाँ । रण हाँ तुम सौ फिर के रचिहीं ॥२६॥
भावार्य -जब परशुराम ने शत्रुघ्न का यह कथन सुना तो भरत से कहा कि तुम राम को लेकर प्रभो घर जाम्रो । यदि इनसे जीता बच जाऊंगा तो तुमसे फिर युद्ध करूंगा (व्यंग यह कि बड़े मियाँ तो बड़े मियां छोटे मियाँ सुमानल्लाह है, बडा भाई तो अपनी नम्रता दिखाता है, सबसे छोटा भाई हमें ललकारता है) ।
दो०- निज अपराधी क्यों हतों, गुरु अपराधी छाँड़ि ।
ताते कठिन कुठार श्रव, रामहि सो रण माँहि ॥३०॥
भावार्य - ( पुन परशुराम मन मे विचार कर परशु प्रति कहते हैं) गुरुदोषी को छोडकर निजदोषी को क्या मारु श्रत हे कठिन कुठार ! अब तू राम ही में युद्ध कर
( परशुधर) मत्तगयन्द सर्वया --
भूतल के सब भूपन को मद भोजन तो बहू भांति कियोई । मोद मों तारकनन्द को मेद पछ्यावरि पान सिरायो हिसोई ॥ सोर पडानन को मद केशव सो पल में करि पान लियोई । राम तिहारेइ कंठ को श्रोनित पान को चाहे कुठार पियोई ।।३१।।
भावार्य-पटयावर= छौंछ से बना हुआ एक पेय पदार्थ जो भोजनान्त में परोसा जाता है। इसके प्रभाव से भोजन शीघ्र पचता है। सीर ( क्षीर ) = दूध । श्रोनित = ( १ ) रक्त ( २ ) श्री श्रवितपदार्थ + नित= नित्य ।
भावार्य - ( परशुराम जी श्रीरामचन्द्र प्रति कहते हैं) मेरे इस कुठार ने संमार के साथ राजाओं के मद का भोजन तो कर लिया है और बडे मानन्द के साथ तारकपुत्र को चरवी पछ्यावर पीकर अपना हृदय ठंडा वर चुका है। षडानन के मद को भी दूध की तरह एक पलमात्र मे पी
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अलंकार - ढोत्तर । मदिरा - तोरि सरासन संकर को सुभ सोय स्वयम्बर मात बरी । ताने बढ्यो अभिमान महा मन मेरियो नेक न संक करो ॥ - सो अपराध परो हमसों अब क्यों सुघरं तुमहो तो कहौ । - बाहू द दोऊ कुठाराह केशव श्रापने धाम को पंथ गहौ ॥ दस ॥ भावाय - शंकर का धनुष तोड कर स्वयम्बर में मीना को विवाहा है, इससे तुम्हारे मन मे ममिमान अधिक बढ़ गया है । भला यह बनायो कि धनुष तोडते समय तुमने मेरा भी तनिक भय न किया मो क्यो ? हाँ, यह अपराध तो अवश्य मुझसे हो गया, भव मापही बतलाइए कि क्सि दंड से इस अपराध का प्रायश्चित होगा। अपने दोनो हाय कुठार को देकर अपने घर का रास्ता लो- अर्थात् हम तुम्हारे दोनो हाय काट लेंगे तब घर जाने देंगे । कुंडलिया-टूट टूटनहार तद वायुहि बोजत दोष । त्यों भब हर के धनुध को हम पर कोजत रोप हम पर कोजत रोष कालगति जान न जाई । होनहार हूं रहे मिटं मेटो न मिटाई । होनहार हूँ रहे मोह मद सब काटे । होप तिनूका बसन्वय तिनुश हूं टूटं ॥बीस॥ अलंकर- लोकोकिन से पुष्ट यूरोत्तर । नोट- - इस काव्य मे व्यंगा यह कि राम जी परशुराम को सूचित करते हैं कि का समय गया, भव रामावतार का समय भाया है, अतः प्रापरा वज्रवत् वल मेरे सामने तिनका के समान टूट जायगा, ग्राप चाहे हमे कुमार ही समझते रहिए । । मत्तगयंद सवैया - वेशक हैहयराज को माम हलाहल कौरन खाय लियो रे । ता लगि मेद महोपन को घृत घोरि दियो न सिरानो हियो रे ॥ मेरो क्ह्यो करि मित्र कुठार जो चाहत है बहुकाल जियो रे । तो लो नहीं सुख जौ लग तू रघुवीर को श्रोण सुधा न पियो रे ॥इक्कीस॥ शब्दार्य - मेद चवीं । मिरानो-ठा हुआ । श्रोण रक्त । भावार्य - हे कुठार ! तू ने हेयराज सहस्रार्जुन का माम काटा है सो मानो तू मे हलाहल विप के कौर खा लिए है । उस विष को शान्ति के लिए मैंने तुझको अनेक राजाश्री की चर्बी घी की तरह घोल कर पिलाई, पर तब भी तेरा हृदय उडा न हुश्रा । प्रतः हे मित्र कुठार ? जो तू बहुत दिनों तक जीना चाहता है तो मेरा बहना मान ले । तुझको तब तक मुख न मिलेगा जब तक तू रघुवीर की रक्तपी सुधा न पियेगा । प्रलंकार रूपक नोट- वास्तव में विप गाए हुए व्यक्ति वा उपचार भी वेशव ने प्रच्छा बनाया है कि घी पिलाना चाहिए, ताजा खून पिलाना चाहिए और सुधा पिलाना चाहिए। इससे प्रक्ट है कि वेदशव वैद्यक भी प्रदो तरह जानते थे । हमारा अनुभव है निलिया के विप का प्रभाव चूने के पानी से शीघ्र नष्ट होता है। विशेष - महात्मा जानकी प्रसाद ने इस छद में सरस्वती उक्नायें यों लगाया है - हे कुठार, तुझको नव तक मुख न प्राप्त होगा जब तक तू श्रीराम जी के सुधा सम मधुर वचत वान से न पियेगा -- प्रर्थात् राम जी के क्षमा के वचन जब तक न सुन लेगा । एक. जब कवि प्रसवश कोई ऐसी बात कहता है जिसे टीकाकार अपनी भक्ति के कारण प्रकयनीय समझता है तब वह निज बुद्धिन्वल से उसका कोई दूसरा अयं करता है । ऐसे अयं को सरस्वती उपना कहते हैं । देखो इसो प्रवाद का नंशून्य इकतीस । तन्वी'बोलत कैसे, भृगपति सुनिये, सो कहिए तन मन बनि भावं । आादि वड हो, बड़पन रखिये, जा हित तू सव जग जस पावै । चंदन हूँ में, प्रति तन घसिए, आागि उठे यह गुति सब लोजं । हैहय भारो, नूप जन संहरे, सो यश लं किन युग-युग जोजं ।।बाईस।। शब्दार्य --सो कहिए तन मन वनि भावै ऐसी बात हो जो तन से अथवा मन से भी हो सके --नात्पर्य यह है कि जो तुम वहते हो उसे तन से तो क्या मन से भी नहीं कर सकते । आदि हो = प्रादिवर्ण अर्थात् ब्राह्मणवणं होने से अवध्य हो । भावार्य -- हे भृगुपति, कैसी बात कहते हो , ऐसी बात वही जिसे तुम तन से वा मन से पूर्ण कर सको। तुम ब्राह्मण हो, अतः हमसे बडे हो, सो अपना बडप्पन रखे रहो, जिसमे तुम समस्त जग मे यश पाम्रो । नहीं तो यह बात मच्छी तरह समझ लो कि प्रति रगड से चदन मे भी भाग उठती है। भापने हैहयराज का और अन्य अनेक क्षत्रिय राजाधो वा सहार दिया, यही यश लेकर मसार मे क्यों नहीं पुगयुगान्तर तक भमर बने रहते हो । सूचना--पिगल के अनुसार तो इस छन्द का ढांचा शुद्ध है, पर व्यावरण के अनुसार दूसरे चरण में यह मशुद्धि जान पड़ती है कि 'बडे हीँ' मादर है मौर 'तू " निरादरसूचक है । ऐसा न होना चाहिए था। चौर्य चरण मे 'सँहरे' शब्द 'संहारे' वा भयं देता है । यह भी ठीक नही जँचना । समझ में नहीं माता वि वेशव से ऐसी भूल क्यो हुई। नाराचभलो कही भरत्य तं उठाय प्राषि मंग तँ । चङ्गाय चोपि चाप भाप वान से नियंग तें : प्रभाउ पापनो दिलाउ छोडि बाल भाई के रिझाउ राजपुत्र मोहि राम से छुडाइ भावार्य -- हे भरत, तू ने अच्छी कही, अच्छा ले अपने अंग से आग उठा और तूणीर से वाण लेकर शौक से धनुप पर चढा, अपना प्रभाव दिखला, वालभाव को छोड़ दे । हे राजपुत्र, युद्ध करके मुझे प्रसन्न कर और राम को छुडा ले । सोशून्य लियो चाप जब हाय, सोनिहु भैयन रोप करि । बरज्यो श्रीरघुनाय, तुम बालक जानत कहा ॥ चौबीस ॥ शब्दार्थ तीनिहु भयन = मरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न । भावार्य सरल है । दोशून्य- भगवन्तन सो जीतिए, कबहूँ न कीन्हें शक्ति । जोतिय एक बात तँ, केवल कीन्हें भक्ति ॥पच्चीस॥ भावार्य - राम जी अपने भाइयो को समझाते हैं कि भगवंतो से शक्ति द्वारा कोई नहीं जीनता केवल उनकी भक्ति करने से ही जीने जा सकते हैं । नोट -परशुराम की गणना 'भगवानो' मे है। भगवान वह व्यक्ति बहुनाता है जिसमें ऐश्वयं, धर्म, यश, श्री, विराग और विज्ञान ये छ शक्तियाँ हो । हरिपोतिकाजय हपो हैहयराज इन दिन छत्र छिति मंडल कर्यो । गिरि बंध घट्मुख जोति तारकनन्द को जब ज्यों हो ॥ मुत में न जायो राम सो यह कह्यो पर्वतनन्दिनी । वह रेणुका तिय धन्य धरणी में भई जग बन्दिनी ।।छब्बीस।। शब्दार्थ-विन छत्र = विना राजा का छिनि महल = समस्त पृथ्वी गिरि वेध पद्मुख = नामक पहाड को तोड़ने वाले स्वामी कार्तिक । तारसनन्द = नारव नामक प्रमुर का पुत्र राम-परशुराम । पर्वतनन्दिनी= पार्वती । रेणुका = परशुराम की माता । जगबंदिनी = समस्त संसार मे वंदनीय, सर्वपूज्य । भावार्य - जब इन्होने हैहयराज को मारा था तब समस्त पृथ्वी को विना राजा के कर दिया था और क्रौंच पहाड को तोड़ने वाले कार्तिकेय को जीत कर जब तारक के पुत्र को मारा था, तव पार्वती ने कहा था कि मैने परशुराम सा पुत्र न पैदा किया ! धन्य है वह रेणुका जो ऐसा वोर पुत्र पैदा करके इस पृथ्वी पर वंदनीय हुई । तात्पर्य यह है कि इनको वीरता वीरमाता पार्वती द्वारा प्रशंसित है। प्रत ये बड़े वीर है । तोमरसुनि राम शोल समुद्र । तव बंधु है प्रति क्षुद्र ।। मम बाड़वानल कोप । श्रव कियो चाहत लोप ॥सत्ताईस॥ भावार्थ- हे शोलसागर राम, सुनो तुम्हारे ये तीनो भाई बडे क्षुद्र हैं प्रतः भव मेरा त्रोध-बड़वानल इनको नष्ट करना चाहता है । अलंकार रूपक । दोधक- ही भुगुनन्द यलो जगमाहीं । राम विदा करिए घर जाहीं ॥ हो तुमनों फिर युद्धहि माड़ी : क्षत्रिय वंश को घर से छाडौं ॥अट्ठाईस॥ भावार्थ - हे भृगुनन्दन ! सचमच भाप समार में बड़े चली है प्रतः राम बो तो विदा कीजिए वे घर को जायें। उनसे जाने पर तुमने युद्ध करूंगा और समस्त दात्रिय वश या बदला तुमसे चुरा लूंगा । भतंतर स्वभावोक्ति । सात प्रकाश यह बात सुनी भूगुनाय जर्व । कहि रामहि लं घर जानु प्रवे । इनपं जग जोवत जो बचिहाँ । रण हाँ तुम सौ फिर के रचिहीं ॥छब्बीस॥ भावार्य -जब परशुराम ने शत्रुघ्न का यह कथन सुना तो भरत से कहा कि तुम राम को लेकर प्रभो घर जाम्रो । यदि इनसे जीता बच जाऊंगा तो तुमसे फिर युद्ध करूंगा । दोशून्य- निज अपराधी क्यों हतों, गुरु अपराधी छाँड़ि । ताते कठिन कुठार श्रव, रामहि सो रण माँहि ॥तीस॥ भावार्य - गुरुदोषी को छोडकर निजदोषी को क्या मारु श्रत हे कठिन कुठार ! अब तू राम ही में युद्ध कर मत्तगयन्द सर्वया -- भूतल के सब भूपन को मद भोजन तो बहू भांति कियोई । मोद मों तारकनन्द को मेद पछ्यावरि पान सिरायो हिसोई ॥ सोर पडानन को मद केशव सो पल में करि पान लियोई । राम तिहारेइ कंठ को श्रोनित पान को चाहे कुठार पियोई ।।इकतीस।। भावार्य-पटयावर= छौंछ से बना हुआ एक पेय पदार्थ जो भोजनान्त में परोसा जाता है। इसके प्रभाव से भोजन शीघ्र पचता है। सीर = दूध । श्रोनित = रक्त श्री श्रवितपदार्थ + नित= नित्य । भावार्य - मेरे इस कुठार ने संमार के साथ राजाओं के मद का भोजन तो कर लिया है और बडे मानन्द के साथ तारकपुत्र को चरवी पछ्यावर पीकर अपना हृदय ठंडा वर चुका है। षडानन के मद को भी दूध की तरह एक पलमात्र मे पी
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गौरतलब है कि आज 2 जून 2023 (2 जून) है। आज के इतिहास की बात करें तो आज तेलंगाना राज्य का स्थापना दिवस है. तेलंगाना राज्य को वर्ष 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग कर बनाया गया था। इस राज्य की प्रमुख भाषाएँ तेलुगु और उर्दू हैं। और, इस राज्य में हिंदुओं की आबादी 84 प्रतिशत है। जबकि दूसरे स्थान पर मुस्लिम धर्म के लोग रहते हैं।
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गौरतलब है कि आज दो जून दो हज़ार तेईस है। आज के इतिहास की बात करें तो आज तेलंगाना राज्य का स्थापना दिवस है. तेलंगाना राज्य को वर्ष दो हज़ार चौदह में आंध्र प्रदेश से अलग कर बनाया गया था। इस राज्य की प्रमुख भाषाएँ तेलुगु और उर्दू हैं। और, इस राज्य में हिंदुओं की आबादी चौरासी प्रतिशत है। जबकि दूसरे स्थान पर मुस्लिम धर्म के लोग रहते हैं।
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Rain in Kumaon कुमाऊं में गुरुवार से ही बारिश हो रही है। और अभी तक जारी है। मौसम विभाग ने आज भी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही बारिश के कारण कुमाऊं में कई जगहों पर रास्ते बंद हो गए हैं।
जागरण टीम, हल्द्वानी : Rain in Kumaon : लगातार हो रही बारिश से मुसीबतें खड़ी होने लगी हैं। कुमाऊं में दो दिनों से लगातार बारिश हो रही है और अभी तक जारी है। इसके कारण स्कूल बंद कर दिए गए हैं। वहीं कई स्थानों पर पहाड़ियों से पत्थर और मलबा गिरने की भी खबरें आ रही हैं, जिससे रास्तों पर आवाजाही ठप हो गई है।
चंपावत में वर्षा का सिलसिला जारी है। दो दिन से हो रही वर्षा के चलते जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सूखीढांग से लेकर घाट तक कई स्थानों पर मलबा गिर रहा है, जिससे बार-बार आवागमन बाधित हो रहा है। सुबह नौ बजे तक एनएच पार वाहनों की आवाजाही सुचारू बनी हुई थी। जबकि एक राज्य मार्ग सहित सात सड़कें मलबा आने से बंद हैं।
आपदा नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार चंपावत में ककरालीगेट-ठूलीगाड़ मौराड़ी-शानी मंदिर, रीठा-मीनार, पुनावै-सिप्टी-न्याड़ी, मूलाकोट-कांडे-भूमियां, पटनगांव-कजीना-पुनौली और धौन-द्यूरी-बजौन सड़कें मलबा आने से बंद हैं। पोलों को नुकसान पहुंचने से सिमलखेत व चल्थी क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई है। टनकपुर और बनबसा में भी वर्षा से जनजीवन पटरी से उतर गया है। कई जगह जलभराव हुआ है। शारदा नदी और हुड्डी नदी का जल स्तर पिछले दो दिन की अपेक्षा काफी बढ़ गया है।
पिथौरागढ़ में भी जोरदार बारिश हो रही है। इससे टनकपुर-तवाघाट एनएच घाट के निकट दिल्ली बैंड के पास बंद हो गया। लगातार बारिश और पत्थर गिरने से मलबा हटाने में दिक्कतें आ रही हैं, जिसके चलते जेसीबी भी खड़ी है। बाहर से आए वाहन रास्ते में फंसे हुए हैं।
बागेश्वर में भी दो दिन से लगातार बारिश हो रही है। इससे जनजीवन प्रभावित हो गया है। ठंड भी बढ़ गई है। कई जगहों पर पहाड़ी से पत्थर गिरने की भी खबरें आ रही हैं।
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Rain in Kumaon कुमाऊं में गुरुवार से ही बारिश हो रही है। और अभी तक जारी है। मौसम विभाग ने आज भी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही बारिश के कारण कुमाऊं में कई जगहों पर रास्ते बंद हो गए हैं। जागरण टीम, हल्द्वानी : Rain in Kumaon : लगातार हो रही बारिश से मुसीबतें खड़ी होने लगी हैं। कुमाऊं में दो दिनों से लगातार बारिश हो रही है और अभी तक जारी है। इसके कारण स्कूल बंद कर दिए गए हैं। वहीं कई स्थानों पर पहाड़ियों से पत्थर और मलबा गिरने की भी खबरें आ रही हैं, जिससे रास्तों पर आवाजाही ठप हो गई है। चंपावत में वर्षा का सिलसिला जारी है। दो दिन से हो रही वर्षा के चलते जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सूखीढांग से लेकर घाट तक कई स्थानों पर मलबा गिर रहा है, जिससे बार-बार आवागमन बाधित हो रहा है। सुबह नौ बजे तक एनएच पार वाहनों की आवाजाही सुचारू बनी हुई थी। जबकि एक राज्य मार्ग सहित सात सड़कें मलबा आने से बंद हैं। आपदा नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार चंपावत में ककरालीगेट-ठूलीगाड़ मौराड़ी-शानी मंदिर, रीठा-मीनार, पुनावै-सिप्टी-न्याड़ी, मूलाकोट-कांडे-भूमियां, पटनगांव-कजीना-पुनौली और धौन-द्यूरी-बजौन सड़कें मलबा आने से बंद हैं। पोलों को नुकसान पहुंचने से सिमलखेत व चल्थी क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई है। टनकपुर और बनबसा में भी वर्षा से जनजीवन पटरी से उतर गया है। कई जगह जलभराव हुआ है। शारदा नदी और हुड्डी नदी का जल स्तर पिछले दो दिन की अपेक्षा काफी बढ़ गया है। पिथौरागढ़ में भी जोरदार बारिश हो रही है। इससे टनकपुर-तवाघाट एनएच घाट के निकट दिल्ली बैंड के पास बंद हो गया। लगातार बारिश और पत्थर गिरने से मलबा हटाने में दिक्कतें आ रही हैं, जिसके चलते जेसीबी भी खड़ी है। बाहर से आए वाहन रास्ते में फंसे हुए हैं। बागेश्वर में भी दो दिन से लगातार बारिश हो रही है। इससे जनजीवन प्रभावित हो गया है। ठंड भी बढ़ गई है। कई जगहों पर पहाड़ी से पत्थर गिरने की भी खबरें आ रही हैं। ये भी पढ़ें :
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दीपिका और रणवीर दोनों बॉलीवुड के पावर कपल्स में से एक हैं। कपल्स इन दिनों अमेरिका में वेकेशन मना रहा है। अपने वेकेशन के दौरान कपल बॉलीवुड सिंगर शंकर महादेवन के कॉन्सर्ट में भी पहुंचा था। जिसमें दोनों कोंकणी संगीत का हिस्सा भी बने। आपको बता दें कि कोंकणी संगीत में दीपिका को चीफ गेस्ट के रुप में बुलाया था। कोकंणी में रणवीर सिंह के अभिवादन से पूरा शो पर चार चांद लगा दिए। इसके बाद रणवीर सिंह ने खुलासा किया कि वह कोंकणी भाषा क्यों सिखना चाहते हैं। रणवीर ने बताया कि उन्हें कोंकणी भाषा समझ में भी आती है।
इस इवेंट के कई सारी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियोज में रणवीर सिंह का मस्ती भरा अंदाज देखने को मिल रहा है । वीडियो में रणवीर कोंकणी भाषा सिखने की बात करते हुए देखा जा रहा है। उनका कहना है कि- 'मैं एक ऐसी स्थिति में हूं, जहां मैं कोंकणी भाषा को थोड़ा बहुत समझ सकता हूं। लेकिन मैं नहीं चाहता कि जब हमारे बच्चे हों तो उनकी मां उनसे कोंकणी में बात करे और मुझे समझ ही न आए। '
पति रणवीर सिंह की बात सुनकर दीपिका पादुकोण ने रिएक्श देते हुए कहा कि- मैं रणवीर की इस बात से बहुत खूश हूं, जब तक मुझे इसका असली कारण नहीं पता था, तब तक मैं इसे उनकी एक अच्छी कोशिश ही समझ रही थी। दीपिका बताती हैं कि- 'यह एक दिन मेरे पास आए और बोले, बेबी में कोंकणी सिखना चाहता हूं, तो मुझे लगा बढ़िया है। बाद में बातचीत में पता चला कि ये कोंकणी इसलिए सिखना चाहते हैं कि ताकि मैं हमारे बच्चों को इनके खिलाफ न भड़का दूं। '
बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह आज अपना 37वां जन्मदिन मना रहें हैं। रणवीर का जन्म 6 जुलाई 1985 को मुबंई की सिंधी फैमिली में हुआ था। रणवीर दीपिका के साथ एक बहुत ही खुशहाल जिंदगी बिता रहे हैं। कुछ दिन पहले दीपिका-रणवीर को एशिया के टॉप 4th पॉवर कपल के तौर पर चुना गया है।
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दीपिका और रणवीर दोनों बॉलीवुड के पावर कपल्स में से एक हैं। कपल्स इन दिनों अमेरिका में वेकेशन मना रहा है। अपने वेकेशन के दौरान कपल बॉलीवुड सिंगर शंकर महादेवन के कॉन्सर्ट में भी पहुंचा था। जिसमें दोनों कोंकणी संगीत का हिस्सा भी बने। आपको बता दें कि कोंकणी संगीत में दीपिका को चीफ गेस्ट के रुप में बुलाया था। कोकंणी में रणवीर सिंह के अभिवादन से पूरा शो पर चार चांद लगा दिए। इसके बाद रणवीर सिंह ने खुलासा किया कि वह कोंकणी भाषा क्यों सिखना चाहते हैं। रणवीर ने बताया कि उन्हें कोंकणी भाषा समझ में भी आती है। इस इवेंट के कई सारी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियोज में रणवीर सिंह का मस्ती भरा अंदाज देखने को मिल रहा है । वीडियो में रणवीर कोंकणी भाषा सिखने की बात करते हुए देखा जा रहा है। उनका कहना है कि- 'मैं एक ऐसी स्थिति में हूं, जहां मैं कोंकणी भाषा को थोड़ा बहुत समझ सकता हूं। लेकिन मैं नहीं चाहता कि जब हमारे बच्चे हों तो उनकी मां उनसे कोंकणी में बात करे और मुझे समझ ही न आए। ' पति रणवीर सिंह की बात सुनकर दीपिका पादुकोण ने रिएक्श देते हुए कहा कि- मैं रणवीर की इस बात से बहुत खूश हूं, जब तक मुझे इसका असली कारण नहीं पता था, तब तक मैं इसे उनकी एक अच्छी कोशिश ही समझ रही थी। दीपिका बताती हैं कि- 'यह एक दिन मेरे पास आए और बोले, बेबी में कोंकणी सिखना चाहता हूं, तो मुझे लगा बढ़िया है। बाद में बातचीत में पता चला कि ये कोंकणी इसलिए सिखना चाहते हैं कि ताकि मैं हमारे बच्चों को इनके खिलाफ न भड़का दूं। ' बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह आज अपना सैंतीसवां जन्मदिन मना रहें हैं। रणवीर का जन्म छः जुलाई एक हज़ार नौ सौ पचासी को मुबंई की सिंधी फैमिली में हुआ था। रणवीर दीपिका के साथ एक बहुत ही खुशहाल जिंदगी बिता रहे हैं। कुछ दिन पहले दीपिका-रणवीर को एशिया के टॉप चारth पॉवर कपल के तौर पर चुना गया है।
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