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संभल जिले में कानून को अपने हाथ में लेने की परंपरा सी बन गई है लगातार मारपीट के वीडियो सामने आ रहे हैं। वहीं जिले से एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें बाइक सवार दंपत्ति एवं स्कूटी सवार युवक के बीच जमकर मारपीट हुई है गाली गलौज और धमकी बाजी की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने एक आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। मारपीट का यह पूरा मामला चंदौसी कोतवाली इलाके के गौशाला रोड का बताया जा रहा है, जहां स्कूटी सवार युवक और बाइक सवार दंपत्ति के बीच बीच सड़क पर हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला है, जमकर गाली-गलौज के बीच धमकीबाजी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी के साथ वायरल हो रहा है बताते हैं कि चंदौसी इलाके के मोहल्ला होली निवासी उत्तम सिंह अपनी पत्नी सुषमा एवं 3 साल की बच्ची काव्या सिंह के साथ बीते बुधवार को बाइक पर सवार होकर रिश्तेदारी में जा रहा था। गौशाला रोड पर पीछे से एक स्कूटी गुजरी स्कूटी सवार युवक वाहन को लहराते हुए गुजर रहा था। इसी बात को लेकर स्कूटी सवार एवं बाइक सवार दंपति के बीच कहा सुनी हो गई बस फिर क्या था इसके बाद दोनों के बीच मारपीट होने लगी इस मारपीट के दौरान बाइक पर बैठी मासूम बच्ची धक्का-मुक्की के बीच बाइक सहित नीचे गिर पड़ी वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से स्कूटी सवार एवं बाइक सवार के बीच, बीच सड़क पर मारपीट हो रही है और एक दूसरे को गंदी गंदी गालियां दे रहे हैं सोशल मीडिया पर यह वीडियो अब तेजी के साथ वायरल हो रहा है। वही चंदौसी कोतवाली प्रभारी सत्येंद्र सिंह पंवार ने बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुई है वायरल वीडियो के आधार पर गगन नाम के आरोपी युवक के खिलाफ धारा 323 , 504 एवं 506 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है बताते चलें कि संभल जिले में लगातार मारपीट एवं कानून को अपने हाथ में लेने की अब तक कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है हालांकि इन मामलों में पुलिस कार्रवाई भी कर चुकी है लेकिन इसके बावजूद लोग कानून को अपने हाथ में लेने से बाज नहीं आ रहे।
संभल जिले में कानून को अपने हाथ में लेने की परंपरा सी बन गई है लगातार मारपीट के वीडियो सामने आ रहे हैं। वहीं जिले से एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें बाइक सवार दंपत्ति एवं स्कूटी सवार युवक के बीच जमकर मारपीट हुई है गाली गलौज और धमकी बाजी की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने एक आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। मारपीट का यह पूरा मामला चंदौसी कोतवाली इलाके के गौशाला रोड का बताया जा रहा है, जहां स्कूटी सवार युवक और बाइक सवार दंपत्ति के बीच बीच सड़क पर हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला है, जमकर गाली-गलौज के बीच धमकीबाजी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी के साथ वायरल हो रहा है बताते हैं कि चंदौसी इलाके के मोहल्ला होली निवासी उत्तम सिंह अपनी पत्नी सुषमा एवं तीन साल की बच्ची काव्या सिंह के साथ बीते बुधवार को बाइक पर सवार होकर रिश्तेदारी में जा रहा था। गौशाला रोड पर पीछे से एक स्कूटी गुजरी स्कूटी सवार युवक वाहन को लहराते हुए गुजर रहा था। इसी बात को लेकर स्कूटी सवार एवं बाइक सवार दंपति के बीच कहा सुनी हो गई बस फिर क्या था इसके बाद दोनों के बीच मारपीट होने लगी इस मारपीट के दौरान बाइक पर बैठी मासूम बच्ची धक्का-मुक्की के बीच बाइक सहित नीचे गिर पड़ी वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से स्कूटी सवार एवं बाइक सवार के बीच, बीच सड़क पर मारपीट हो रही है और एक दूसरे को गंदी गंदी गालियां दे रहे हैं सोशल मीडिया पर यह वीडियो अब तेजी के साथ वायरल हो रहा है। वही चंदौसी कोतवाली प्रभारी सत्येंद्र सिंह पंवार ने बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुई है वायरल वीडियो के आधार पर गगन नाम के आरोपी युवक के खिलाफ धारा तीन सौ तेईस , पाँच सौ चार एवं पाँच सौ छः के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है बताते चलें कि संभल जिले में लगातार मारपीट एवं कानून को अपने हाथ में लेने की अब तक कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है हालांकि इन मामलों में पुलिस कार्रवाई भी कर चुकी है लेकिन इसके बावजूद लोग कानून को अपने हाथ में लेने से बाज नहीं आ रहे।
भारत में साइंस फिक्शन एक दुर्लभ शैली है, लेकिन सत्यजीत दुबे स्टार टीवी के इस दुर्लभ साइंस फिक्शन में अभिनय के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस फिनाइट श्रृंखला में साइंस फिक्शन और पौराणिक कथाओं के मिश्रण के साथ ही इसमें हास्य के पुट भी होंगे। इसे एक बिल्कुल नए शो के रूप में प्रचारित किया जा रहा है और बताया जा रहा है कि यह शो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एहसास कराएगा। इतना ही नहीं,इसमें भविष्य के साथ ही टाइम ट्रैवेल के जरिए महाभारत काल को भी दर्शाया गया है।समान रूप से उत्साहित, खुशी से सराबोर और नर्वस,दुबे कहते हैं, 'इस शो को लेकर मुझे खुद के चांद पर होने जैसा एहसास हो रहा है, क्योंकि इस तरह का शो कंटेंट के लिहाज से एक गेम चेंजर हो सकता है। इससे मुझे कड़ी मेहनत करने की इच्छा होती है। मुझे इस कहानी के प्रति जिम्मेदारी का बोध होता है। उन्होंने कहा कि इसके शुरुआती 10 एपिसोड पढ़ते ही मेरी हंसी छूट गई और मैं काफी देर तक हंसता रहा। इसका मुख्य किरदार आज के समय का एक वास्तविक व्यक्ति है, लेकिन कहानी भविष्य से संबंधित और रहस्यमयी है। इसकी पृष्ठभूमि को समझने के लिए मैं अपनी पूरी कोशिश करना चाहता हूं। यह इतना जटिल है कि मैं इस साहसिक कार्य को करने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। वस्तुतः यह एक भारतीय कहानी है, जो महत्वाकांक्षी और शानदार है, और अगर सही तरीके सेबनाया गया तो इससे बेहतरीन कुछ नहीं हो सकता है।निर्देशक और लेखक डेविड पॉलीकार्प और निर्माता फज़ी डक के महाराज की जय हो, शीर्षक वाले इस शो में नितेश पांडे, अश्विन मुशरान औरआकाश दाभाडे जैसे कलाकार भी हैं। सत्यजीत के इस रोमांचक सफर की शुरुआत संजय दत्त और अली फज़ल की मुख्य भूमिका वाली प्रस्थानम की अगले माह रिलीज से हो रही है।
भारत में साइंस फिक्शन एक दुर्लभ शैली है, लेकिन सत्यजीत दुबे स्टार टीवी के इस दुर्लभ साइंस फिक्शन में अभिनय के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस फिनाइट श्रृंखला में साइंस फिक्शन और पौराणिक कथाओं के मिश्रण के साथ ही इसमें हास्य के पुट भी होंगे। इसे एक बिल्कुल नए शो के रूप में प्रचारित किया जा रहा है और बताया जा रहा है कि यह शो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एहसास कराएगा। इतना ही नहीं,इसमें भविष्य के साथ ही टाइम ट्रैवेल के जरिए महाभारत काल को भी दर्शाया गया है।समान रूप से उत्साहित, खुशी से सराबोर और नर्वस,दुबे कहते हैं, 'इस शो को लेकर मुझे खुद के चांद पर होने जैसा एहसास हो रहा है, क्योंकि इस तरह का शो कंटेंट के लिहाज से एक गेम चेंजर हो सकता है। इससे मुझे कड़ी मेहनत करने की इच्छा होती है। मुझे इस कहानी के प्रति जिम्मेदारी का बोध होता है। उन्होंने कहा कि इसके शुरुआती दस एपिसोड पढ़ते ही मेरी हंसी छूट गई और मैं काफी देर तक हंसता रहा। इसका मुख्य किरदार आज के समय का एक वास्तविक व्यक्ति है, लेकिन कहानी भविष्य से संबंधित और रहस्यमयी है। इसकी पृष्ठभूमि को समझने के लिए मैं अपनी पूरी कोशिश करना चाहता हूं। यह इतना जटिल है कि मैं इस साहसिक कार्य को करने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। वस्तुतः यह एक भारतीय कहानी है, जो महत्वाकांक्षी और शानदार है, और अगर सही तरीके सेबनाया गया तो इससे बेहतरीन कुछ नहीं हो सकता है।निर्देशक और लेखक डेविड पॉलीकार्प और निर्माता फज़ी डक के महाराज की जय हो, शीर्षक वाले इस शो में नितेश पांडे, अश्विन मुशरान औरआकाश दाभाडे जैसे कलाकार भी हैं। सत्यजीत के इस रोमांचक सफर की शुरुआत संजय दत्त और अली फज़ल की मुख्य भूमिका वाली प्रस्थानम की अगले माह रिलीज से हो रही है।
अक्सर कुछ लोग लंबे समय तक एक-दूसरे के साथ काम करने से अच्छे दोस्त बन जाते हैं और WWE सुपरस्टार्स भी उन लोगों से अलग नहीं हैं। कुछ WWE सुपरस्टार्स तो इतने करीबी दोस्त रहे हैं कि वो एक ही घर में भी साथ रह चुके हैं। ये बात जगजाहिर है कि डेनियल ब्रायन (Daniel Bryan) और शिंस्के नाकामुरा (Shinsuke Nakamura) एक समय पर रूममेट हुआ करते थे। वहीं शेल्टन बेंजामिन (Shelton Benjamin) और ब्रॉक लैसनर (Brock Lesnar) की दोस्ती भी बहुत गहरी रही है और दोनों एकसाथ एक ही घर में भी रह चुके हैं। उनके अलावा भी ऐसे कई बड़े सुपरस्टार्स रहे हैं, जो एक ही कमरे या घर में साथ रहे हैं। अक्सर अपने प्रो रेसलिंग करियर के शुरुआती दौर में ज्यादा कमाई ना करने के कारण भी कई रेसलर्स ऐसा करते हैं। खैर स्थिति चाहे कैसी भी रही हो, लेकिन इस आर्टिकल में आइए जानते हैं उन 10 WWE सुपरस्टार्स के बारे में जो एकसाथ रह चुके हैं। WWE की द न्यू डे टीम के मेंबर्स लंबे समय से साथ रहे हैं कई मौकों पर कहा जाता रहा है कि तीनों अच्छे दोस्त भी हैं, जो सच भी है। मगर वो बिग ई या कोफी किंग्सटन नहीं थे जिनके साथ ज़ेवियर वुड्स ने रूम शेयर किया था। एक समय पर वुड्स ने टायलर ब्रीज़ के WWE करियर को खत्म होने से बचाया था और उस समय ब्रीज़ को खुद में बदलाव की सख्त जरूरत थी। उस समय वुड्स और ब्रीज़ एकसाथ रहे और उन्होंने लगातार 48 घंटे इस विषय पर विचार किया कि ब्रीज़ पर कौन सा नया कैरेक्टर सूट कर सकता है। इसलिए इस बात में भी कोई संदेह नहीं कि ब्रीज़ के कैरेक्टर को सफल बनाने के पीछे वुड्स का बहुत बड़ा योगदान रहा था। WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं। कुछ साल पहले NXT में मिया यिम और शायना बैज़लर एक-दूसरे की बड़ी दुश्मन हुआ करती थीं, लेकिन असल जिंदगी में दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब हैं। एक समय पर जेसामिन ड्यूक, मिया यिम और शायना बैज़लर एक ही रूम में साथ रहती थीं। इस ग्रुप को उन्होंने BSE का नाम दिया था, जिसका मतलब 'Best Roommates Ever' है। उन्हें यूट्यूब पर एक-दूसरे से जुड़ी कहानियां बताते भी देखा जा चुका है। एंजेलो डॉकिंस और सैमी जेन WWE रिंग में कई बार एक-दूसरे के आमने-सामने आ चुके हैं, लेकिन रिंग से बाहर की दुनिया वो काफी अच्छे दोस्त प्रतीत होते हैं। WWE परफॉरमेंस सेंटर में दोनों एक ही क्लास का हिस्सा हुआ करते थे। कंपनी द्वारा ही उन्हें रूममेट बनाया गया था, वहीं WWE The Bump पर डॉकिंस कह चुके हैं कि उन्हें शुरुआत में जेन के बारे में कुछ नहीं पता था, पहले जेन ने ही खुद को उनसे इंट्रोड्यूस कराया था। कुछ साल पहले WWE NXT में जॉनी गार्गानो और टॉमैसो सिएम्पा के बीच दुश्मनी शुरू हुई, जो NXT के इतिहास की सबसे ऐतिहासिक फ्यूड्स में से एक रही। दोनों के बीच स्टोरीलाइन भी व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर शुरू हुई थी, वहीं उनकी रियल लाइफ दोस्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिएम्पा साल 2016 में गार्गानो और केंडिस ली रे की शादी में भी शामिल हुए थे और दोनों कुछ समय के लिए एकसाथ भी रहे थे। WWE टीवी पर शेमस और ड्रू मैकइंटायर भी एक-दूसरे के दुश्मन रह चुके हैं, यहां तक कि कुछ समय पहले इनकी फ्यूड में दोनों की रियल लाइफ दोस्ती का भी जिक्र किया गया था। कुछ समय पहले Busted Open को दिए इंटरव्यू में मैकइंटायर ने खुलासा किया था कि वो दोनों लंबे समय से दोस्त रहे हैं, एक समय पर एक ही घर में भी रहे और बुरे दौर में भी शेमस ने उनकी काफी मदद की थी। मैकइंटायर, शेमस को अपने बड़े भाई सा सम्मान देते हैं।
अक्सर कुछ लोग लंबे समय तक एक-दूसरे के साथ काम करने से अच्छे दोस्त बन जाते हैं और WWE सुपरस्टार्स भी उन लोगों से अलग नहीं हैं। कुछ WWE सुपरस्टार्स तो इतने करीबी दोस्त रहे हैं कि वो एक ही घर में भी साथ रह चुके हैं। ये बात जगजाहिर है कि डेनियल ब्रायन और शिंस्के नाकामुरा एक समय पर रूममेट हुआ करते थे। वहीं शेल्टन बेंजामिन और ब्रॉक लैसनर की दोस्ती भी बहुत गहरी रही है और दोनों एकसाथ एक ही घर में भी रह चुके हैं। उनके अलावा भी ऐसे कई बड़े सुपरस्टार्स रहे हैं, जो एक ही कमरे या घर में साथ रहे हैं। अक्सर अपने प्रो रेसलिंग करियर के शुरुआती दौर में ज्यादा कमाई ना करने के कारण भी कई रेसलर्स ऐसा करते हैं। खैर स्थिति चाहे कैसी भी रही हो, लेकिन इस आर्टिकल में आइए जानते हैं उन दस WWE सुपरस्टार्स के बारे में जो एकसाथ रह चुके हैं। WWE की द न्यू डे टीम के मेंबर्स लंबे समय से साथ रहे हैं कई मौकों पर कहा जाता रहा है कि तीनों अच्छे दोस्त भी हैं, जो सच भी है। मगर वो बिग ई या कोफी किंग्सटन नहीं थे जिनके साथ ज़ेवियर वुड्स ने रूम शेयर किया था। एक समय पर वुड्स ने टायलर ब्रीज़ के WWE करियर को खत्म होने से बचाया था और उस समय ब्रीज़ को खुद में बदलाव की सख्त जरूरत थी। उस समय वुड्स और ब्रीज़ एकसाथ रहे और उन्होंने लगातार अड़तालीस घंटाटे इस विषय पर विचार किया कि ब्रीज़ पर कौन सा नया कैरेक्टर सूट कर सकता है। इसलिए इस बात में भी कोई संदेह नहीं कि ब्रीज़ के कैरेक्टर को सफल बनाने के पीछे वुड्स का बहुत बड़ा योगदान रहा था। WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं। कुछ साल पहले NXT में मिया यिम और शायना बैज़लर एक-दूसरे की बड़ी दुश्मन हुआ करती थीं, लेकिन असल जिंदगी में दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब हैं। एक समय पर जेसामिन ड्यूक, मिया यिम और शायना बैज़लर एक ही रूम में साथ रहती थीं। इस ग्रुप को उन्होंने BSE का नाम दिया था, जिसका मतलब 'Best Roommates Ever' है। उन्हें यूट्यूब पर एक-दूसरे से जुड़ी कहानियां बताते भी देखा जा चुका है। एंजेलो डॉकिंस और सैमी जेन WWE रिंग में कई बार एक-दूसरे के आमने-सामने आ चुके हैं, लेकिन रिंग से बाहर की दुनिया वो काफी अच्छे दोस्त प्रतीत होते हैं। WWE परफॉरमेंस सेंटर में दोनों एक ही क्लास का हिस्सा हुआ करते थे। कंपनी द्वारा ही उन्हें रूममेट बनाया गया था, वहीं WWE The Bump पर डॉकिंस कह चुके हैं कि उन्हें शुरुआत में जेन के बारे में कुछ नहीं पता था, पहले जेन ने ही खुद को उनसे इंट्रोड्यूस कराया था। कुछ साल पहले WWE NXT में जॉनी गार्गानो और टॉमैसो सिएम्पा के बीच दुश्मनी शुरू हुई, जो NXT के इतिहास की सबसे ऐतिहासिक फ्यूड्स में से एक रही। दोनों के बीच स्टोरीलाइन भी व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर शुरू हुई थी, वहीं उनकी रियल लाइफ दोस्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिएम्पा साल दो हज़ार सोलह में गार्गानो और केंडिस ली रे की शादी में भी शामिल हुए थे और दोनों कुछ समय के लिए एकसाथ भी रहे थे। WWE टीवी पर शेमस और ड्रू मैकइंटायर भी एक-दूसरे के दुश्मन रह चुके हैं, यहां तक कि कुछ समय पहले इनकी फ्यूड में दोनों की रियल लाइफ दोस्ती का भी जिक्र किया गया था। कुछ समय पहले Busted Open को दिए इंटरव्यू में मैकइंटायर ने खुलासा किया था कि वो दोनों लंबे समय से दोस्त रहे हैं, एक समय पर एक ही घर में भी रहे और बुरे दौर में भी शेमस ने उनकी काफी मदद की थी। मैकइंटायर, शेमस को अपने बड़े भाई सा सम्मान देते हैं।
इसमें कहा गया है कि 19 और 20 मई को प्रकाशित अधिसूचनाएं मनमानी हैं और भारत के संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन करती हैं। याचिका में आरबीआई और एसबीआई को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि 2,000 रुपये के नोट संबंधित बैंक खातों में ही जमा किए जाएं, ताकि काला धन और आय से अधिक संपत्ति रखने वाले लोगों की पहचान की जा सके। जनहित याचिका में आरबीआई, एसबीआई और केंद्रीय गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय को प्रतिवादी बनाया गया है। इसमें भ्रष्टाचार, बेनामी लेन-देन को खत्म करने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार को उचित कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है, हाल ही में केंद्र द्वारा यह घोषणा की गई थी कि प्रत्येक परिवार के पास आधार कार्ड और बैंक खाता है। इसलिए, आरबीआई पहचान प्रमाण प्राप्त किए बिना 2,000 रुपये के बैंक नोट बदलने की अनुमति क्यों दे रहा है। यह भी बताना आवश्यक है कि 80 करोड़ बीपीएल परिवारों को मुफ्त अनाज मिलता है। इसका मतलब है कि 80 करोड़ भारतीय शायद ही कभी 2,000 रुपये के नोटों का उपयोग करते हैं। इसलिए, याचिकाकर्ता ने आरबीआई और एसबीआई को भी निर्देश देने की मांग की है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएं कि 2,000 रुपये के बैंक नोट केवल बैंक खाते में ही जमा किए जाएं।
इसमें कहा गया है कि उन्नीस और बीस मई को प्रकाशित अधिसूचनाएं मनमानी हैं और भारत के संविधान के अनुच्छेद-चौदह का उल्लंघन करती हैं। याचिका में आरबीआई और एसबीआई को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि दो,शून्य रुपयापये के नोट संबंधित बैंक खातों में ही जमा किए जाएं, ताकि काला धन और आय से अधिक संपत्ति रखने वाले लोगों की पहचान की जा सके। जनहित याचिका में आरबीआई, एसबीआई और केंद्रीय गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय को प्रतिवादी बनाया गया है। इसमें भ्रष्टाचार, बेनामी लेन-देन को खत्म करने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार को उचित कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है, हाल ही में केंद्र द्वारा यह घोषणा की गई थी कि प्रत्येक परिवार के पास आधार कार्ड और बैंक खाता है। इसलिए, आरबीआई पहचान प्रमाण प्राप्त किए बिना दो,शून्य रुपयापये के बैंक नोट बदलने की अनुमति क्यों दे रहा है। यह भी बताना आवश्यक है कि अस्सी करोड़ बीपीएल परिवारों को मुफ्त अनाज मिलता है। इसका मतलब है कि अस्सी करोड़ भारतीय शायद ही कभी दो,शून्य रुपयापये के नोटों का उपयोग करते हैं। इसलिए, याचिकाकर्ता ने आरबीआई और एसबीआई को भी निर्देश देने की मांग की है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएं कि दो,शून्य रुपयापये के बैंक नोट केवल बैंक खाते में ही जमा किए जाएं।
कैंपस रिक्रूटमेंट ड्राईव में बैंकिंग, इंश्योरेंस, सेल्स मार्केटिंग, एग्रीकल्चर, ऑटोमोबाईल, सिक्युरिटी, टेक्सटाईल्स, बीपीओ आदि निजी क्षेत्र की कंपनियां भाग लेंगी। निजी क्षेत्रों में रोजगार के इच्छुक आवेदक जो 8वीं, 10वीं, 12वीं, स्नातक, आईटीआई एवं विभिन्न तकनीकी डिप्लोमा धारी हैं तथा जिनकी आयु 18 से 30 वर्ष हों, अपनी मार्कशीट आधार कार्ड, फोटो तथा रिज्यूम आदि सहित उपस्थित होकर कंपनी प्रतिनिधियों से संपर्क कर साक्षात्कार में सम्मिलित हो सकते हैं। अधिक जानकारी के लिये दूरभाष क्रमांक 0761-4007028 पर संपर्क कर सकते है। जिला रोजगार अधिकारी ने बताया कि रिक्रूटमेंट ड्राईव में मास्क पहनना तथा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य है।
कैंपस रिक्रूटमेंट ड्राईव में बैंकिंग, इंश्योरेंस, सेल्स मार्केटिंग, एग्रीकल्चर, ऑटोमोबाईल, सिक्युरिटी, टेक्सटाईल्स, बीपीओ आदि निजी क्षेत्र की कंपनियां भाग लेंगी। निजी क्षेत्रों में रोजगार के इच्छुक आवेदक जो आठवीं, दसवीं, बारहवीं, स्नातक, आईटीआई एवं विभिन्न तकनीकी डिप्लोमा धारी हैं तथा जिनकी आयु अट्ठारह से तीस वर्ष हों, अपनी मार्कशीट आधार कार्ड, फोटो तथा रिज्यूम आदि सहित उपस्थित होकर कंपनी प्रतिनिधियों से संपर्क कर साक्षात्कार में सम्मिलित हो सकते हैं। अधिक जानकारी के लिये दूरभाष क्रमांक सात सौ इकसठ-चालीस लाख सात हज़ार अट्ठाईस पर संपर्क कर सकते है। जिला रोजगार अधिकारी ने बताया कि रिक्रूटमेंट ड्राईव में मास्क पहनना तथा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य है।
सुचिता ने कहा, "सख्त डेडलाइंस और व्यस्त शूटिंग के बीच सेट पर कुछ पल भी ऐसे आए, जिसने मेरे जन्मदिन को खास बना दिया. मेरे को-स्टार्स का यह प्रयास मेरे दिल को छू गया. यह कुछ ऐसा था, जिसकी मैंने उम्मीद नहीं की थी. "जन्मदिन हमारे बीच खुशियां और उमंग लाते हैं." यह कहना है एक्ट्रेस सुचिता त्रिवेदी का, जो सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के शो इंडिया वाली मां में एक निस्वार्थ मां काकू का रोल निभा रही हैं. हाल ही में सुचिता का जन्मदिन था और वो इसे अपने परिवार के साथ मनाना चाहती थीं, लेकिन अपने व्यस्त शेड्यूल के कारण वे ऐसा नहीं कर सकीं और अपने जन्मदिन पर इंडिया वाली मां के सेट पर काम करती रहीं, जहां उन्हें अपने सहयोगी कलाकारों से बहुत प्यार मिला. अपना अनुभव बताते हुए सुचिता ने कहा, "सख्त डेडलाइंस और व्यस्त शूटिंग के बीच सेट पर कुछ पल भी ऐसे आए, जिसने मेरे जन्मदिन को खास बना दिया. मेरे को-स्टार्स का यह प्रयास मेरे दिल को छू गया. यह कुछ ऐसा था, जिसकी मैंने उम्मीद नहीं की थी. Sushant Singh Death Mystery : सीबीआई और एम्स मेडिकल बोर्ड की बैठक कल, होगा बड़ा खुलासा? असल में जन्मदिन वाले दिन काम करने पर मैं थोड़ी निराश थी, क्योंकि मैंने अपनी फैमिली के साथ कुछ अलग प्लान बनाया था, लेकिन 'इंडिया वाली मां' ने इसे मेरी जिंदगी के सबसे बेहतरीन पलों में से एक बना दिया, जिसे मैं हमेशा संजोकर रखूंगी.
सुचिता ने कहा, "सख्त डेडलाइंस और व्यस्त शूटिंग के बीच सेट पर कुछ पल भी ऐसे आए, जिसने मेरे जन्मदिन को खास बना दिया. मेरे को-स्टार्स का यह प्रयास मेरे दिल को छू गया. यह कुछ ऐसा था, जिसकी मैंने उम्मीद नहीं की थी. "जन्मदिन हमारे बीच खुशियां और उमंग लाते हैं." यह कहना है एक्ट्रेस सुचिता त्रिवेदी का, जो सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के शो इंडिया वाली मां में एक निस्वार्थ मां काकू का रोल निभा रही हैं. हाल ही में सुचिता का जन्मदिन था और वो इसे अपने परिवार के साथ मनाना चाहती थीं, लेकिन अपने व्यस्त शेड्यूल के कारण वे ऐसा नहीं कर सकीं और अपने जन्मदिन पर इंडिया वाली मां के सेट पर काम करती रहीं, जहां उन्हें अपने सहयोगी कलाकारों से बहुत प्यार मिला. अपना अनुभव बताते हुए सुचिता ने कहा, "सख्त डेडलाइंस और व्यस्त शूटिंग के बीच सेट पर कुछ पल भी ऐसे आए, जिसने मेरे जन्मदिन को खास बना दिया. मेरे को-स्टार्स का यह प्रयास मेरे दिल को छू गया. यह कुछ ऐसा था, जिसकी मैंने उम्मीद नहीं की थी. Sushant Singh Death Mystery : सीबीआई और एम्स मेडिकल बोर्ड की बैठक कल, होगा बड़ा खुलासा? असल में जन्मदिन वाले दिन काम करने पर मैं थोड़ी निराश थी, क्योंकि मैंने अपनी फैमिली के साथ कुछ अलग प्लान बनाया था, लेकिन 'इंडिया वाली मां' ने इसे मेरी जिंदगी के सबसे बेहतरीन पलों में से एक बना दिया, जिसे मैं हमेशा संजोकर रखूंगी.
मुंबई से सटे भायंदर इलाके में कृष्णा नाम के एक शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. परिवार न्याय की मांग कर रहा है. अभी तक न कोई नेता यहां पर पहुंचा है और न ही अभी तक किसी अधिकारी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की है. हमारे सहयोगी सोहित मिश्रा ने पीड़ित के परिवार से बातचीत की है.
मुंबई से सटे भायंदर इलाके में कृष्णा नाम के एक शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. परिवार न्याय की मांग कर रहा है. अभी तक न कोई नेता यहां पर पहुंचा है और न ही अभी तक किसी अधिकारी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की है. हमारे सहयोगी सोहित मिश्रा ने पीड़ित के परिवार से बातचीत की है.
बॉलीवुड एक्ट्रेस विद्या बालन कि अपकमिंग फिल्म 'बेगम जान' की स्पेशल स्क्रीनिंग मुंबई में शुक्रवार रात रखी गई थी. रेखा, आलिया भट्ट सहित कई और सेलिब्रिटी स्क्रीनिंग में पहुंचे. इस मौके पर रेखा, विद्या बालन और आलिया भट्ट ने मीडिया के लिए पोज दिए. रेखा के साथ एक फोटो विद्या ने शेयर की और विद्या ने लिखा, "Umrao Jaan aur Begum Jaan" इनके अलावा इस स्क्रीनिंग पर विद्या बालन के पति सिद्धार्थ रॉय कपूर महेश भट्ट औप इनके बेटे विशेष भट्ट और मुकेश भट्ट को भी स्पेशल स्क्रीनिंग वेन्यू के बाहर देखा गया. बता दें, सृजित मुखर्जी के डायरेक्शन में बनी 'बेगम जान' 14 अप्रैल को रिलीज होगी. (प्रतिभा त्रिपाठी)
बॉलीवुड एक्ट्रेस विद्या बालन कि अपकमिंग फिल्म 'बेगम जान' की स्पेशल स्क्रीनिंग मुंबई में शुक्रवार रात रखी गई थी. रेखा, आलिया भट्ट सहित कई और सेलिब्रिटी स्क्रीनिंग में पहुंचे. इस मौके पर रेखा, विद्या बालन और आलिया भट्ट ने मीडिया के लिए पोज दिए. रेखा के साथ एक फोटो विद्या ने शेयर की और विद्या ने लिखा, "Umrao Jaan aur Begum Jaan" इनके अलावा इस स्क्रीनिंग पर विद्या बालन के पति सिद्धार्थ रॉय कपूर महेश भट्ट औप इनके बेटे विशेष भट्ट और मुकेश भट्ट को भी स्पेशल स्क्रीनिंग वेन्यू के बाहर देखा गया. बता दें, सृजित मुखर्जी के डायरेक्शन में बनी 'बेगम जान' चौदह अप्रैल को रिलीज होगी.
RRB NTPC भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए पहले चरण की ऑनलाइन परीक्षा के एडमिट कार्ड फिलहाल जारी नहीं जारी हुए हैं। बोर्ड नवंबर माह में परीक्षा आयोजित करने वाला था मगर परीक्षा समय से आयोजित नहीं की जा सकी। उम्मीद है कि दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक बोर्ड परीक्षा की तिथि और एडमिट कार्ड के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी जारी कर सकता है। परीक्षा से 10 से 15 दिन पहले ही एडमिट कार्ड जारी किए जा सकते हैं। 35 हजार से अधिक पदों पर उम्मीदवारों की भर्ती के लिए बोर्ड के पास ढ़ेरों आवेदन पहले ही आ चुके हैं। इसके चलते बोर्ड एक परीक्षा एजेंसी को यह परीक्षा आयोजित कराने का जिम्मा सौंपने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में परीक्षा एजेंसी के नाम पर मुहर लगते ही परीक्षा की तिथि की घोषणा भी कर दी जाएगी। उम्मीदवारों को सुझाव है कि वे एडमिट कार्ड जारी होने का इंतजार न करें तथा अपनी परीक्षा की तैयारी पूरी रखें।
RRB NTPC भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए पहले चरण की ऑनलाइन परीक्षा के एडमिट कार्ड फिलहाल जारी नहीं जारी हुए हैं। बोर्ड नवंबर माह में परीक्षा आयोजित करने वाला था मगर परीक्षा समय से आयोजित नहीं की जा सकी। उम्मीद है कि दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक बोर्ड परीक्षा की तिथि और एडमिट कार्ड के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी जारी कर सकता है। परीक्षा से दस से पंद्रह दिन पहले ही एडमिट कार्ड जारी किए जा सकते हैं। पैंतीस हजार से अधिक पदों पर उम्मीदवारों की भर्ती के लिए बोर्ड के पास ढ़ेरों आवेदन पहले ही आ चुके हैं। इसके चलते बोर्ड एक परीक्षा एजेंसी को यह परीक्षा आयोजित कराने का जिम्मा सौंपने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में परीक्षा एजेंसी के नाम पर मुहर लगते ही परीक्षा की तिथि की घोषणा भी कर दी जाएगी। उम्मीदवारों को सुझाव है कि वे एडमिट कार्ड जारी होने का इंतजार न करें तथा अपनी परीक्षा की तैयारी पूरी रखें।
Sooji Halwa Recipe : कई त्योहारों के दौरान हलवा का भोग देवताओं को प्रसाद के रूप में लगाया जाता है. सूजी पोटैशियम, आयरन और प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है. ये स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है. ये भारतीय डेजर्ट बहुत लोकप्रिय है और लगभग हर त्योहार और अवसर के लिए बनाया जाता है. भारत के हर क्षेत्र में इस व्यंजन को बनाने का एक अनोखा तरीका है. सूजी, चीनी, घी, हरी इलायची का इस्तेमाल करके और बादाम से सजाकर तैयार की गई ये आसान रेसिपी शाम के नाश्ते के लिए या डेजर्ट के रूप में परोस सकते हैं. कई त्योहारों के दौरान हलवा का भोग देवताओं को प्रसाद के रूप में लगाया जाता है. सूजी पोटैशियम, आयरन और प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है और हृदय रोगों को कम करने में मदद करता है. अपने परिवार और दोस्तों के लिए ये हलवा परोसे और इसका आनंद लें. इस रेसिपी को बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन को धीमी आंच पर रखें और इसमें घी डालें. जब घी पूरी तरह से पिघल जाए तो सूजी डालकर हल्का ब्राउन होने तक भूनें. इस बीच, धीमी आंच पर एक और पैन गरम करें. इसमें पानी डालकर उबाल आने दें. जब ये उबलने लगे तो चीनी डालें और अच्छी तरह मिलाएं. सूजी हल्का ब्राउन होने पर इसमें हरी इलायची पाउडर और चीनी का घोल डाल दीजिए. सूजी के मिश्रण के साथ अच्छी तरह मिलाने तक अच्छी तरह मिलाएं. इसके बाद सूखे मेवों से गार्निश करें और गर्मागर्म परोसें. सूजी वजन घटाने में मदद करता है. इसमें फाइबर होता है. ये वजन घटाने में मदद करता है. डायबिटीज के जोखिम को कम करने में भी सूजी मदद कर सकती है. एक अध्ययन के अनुसार डाईट्री फाइबर की बढ़ी हुई मात्रा ग्लाइसेमिक में सुधार करने का काम करती है. शरीर में आयरन की कमी एनीमिया का कारण बन सकती है. सूजी में आयरन भरपूर होता है. ये एनीमिया के खतरे को कम करने में मदद करता है. सूजी में जिंक, मैग्नेशियम, विटामिन-बी6 आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं. ये हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं. कोलेस्ट्रॉल के बेहतर संतुलन के लिए आप सूजी का सेवन कर सकते हैं. इसमें नियासिन होता है. ये कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करने में मदद करता है. सूजी-ऑक्सीडेंट की तरह काम करती है. इसमें मौजूद सेलेनियम नामक पोषक तत्व कैंसर को रोक सकता है.
Sooji Halwa Recipe : कई त्योहारों के दौरान हलवा का भोग देवताओं को प्रसाद के रूप में लगाया जाता है. सूजी पोटैशियम, आयरन और प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है. ये स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है. ये भारतीय डेजर्ट बहुत लोकप्रिय है और लगभग हर त्योहार और अवसर के लिए बनाया जाता है. भारत के हर क्षेत्र में इस व्यंजन को बनाने का एक अनोखा तरीका है. सूजी, चीनी, घी, हरी इलायची का इस्तेमाल करके और बादाम से सजाकर तैयार की गई ये आसान रेसिपी शाम के नाश्ते के लिए या डेजर्ट के रूप में परोस सकते हैं. कई त्योहारों के दौरान हलवा का भोग देवताओं को प्रसाद के रूप में लगाया जाता है. सूजी पोटैशियम, आयरन और प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है और हृदय रोगों को कम करने में मदद करता है. अपने परिवार और दोस्तों के लिए ये हलवा परोसे और इसका आनंद लें. इस रेसिपी को बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन को धीमी आंच पर रखें और इसमें घी डालें. जब घी पूरी तरह से पिघल जाए तो सूजी डालकर हल्का ब्राउन होने तक भूनें. इस बीच, धीमी आंच पर एक और पैन गरम करें. इसमें पानी डालकर उबाल आने दें. जब ये उबलने लगे तो चीनी डालें और अच्छी तरह मिलाएं. सूजी हल्का ब्राउन होने पर इसमें हरी इलायची पाउडर और चीनी का घोल डाल दीजिए. सूजी के मिश्रण के साथ अच्छी तरह मिलाने तक अच्छी तरह मिलाएं. इसके बाद सूखे मेवों से गार्निश करें और गर्मागर्म परोसें. सूजी वजन घटाने में मदद करता है. इसमें फाइबर होता है. ये वजन घटाने में मदद करता है. डायबिटीज के जोखिम को कम करने में भी सूजी मदद कर सकती है. एक अध्ययन के अनुसार डाईट्री फाइबर की बढ़ी हुई मात्रा ग्लाइसेमिक में सुधार करने का काम करती है. शरीर में आयरन की कमी एनीमिया का कारण बन सकती है. सूजी में आयरन भरपूर होता है. ये एनीमिया के खतरे को कम करने में मदद करता है. सूजी में जिंक, मैग्नेशियम, विटामिन-बीछः आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं. ये हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं. कोलेस्ट्रॉल के बेहतर संतुलन के लिए आप सूजी का सेवन कर सकते हैं. इसमें नियासिन होता है. ये कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करने में मदद करता है. सूजी-ऑक्सीडेंट की तरह काम करती है. इसमें मौजूद सेलेनियम नामक पोषक तत्व कैंसर को रोक सकता है.
जीवन को गोधूली में, कौतूहल से तुम सम्भव है कि पूर्वोक्त पंक्ति लिखते समय डॉ० सुमन के अवचेतन में उक्त पंक्तियाँ रही हों. 'झीनी- वौछार' शब्द में मौलिक चित्रात्मकता है. 'शरद-सी तुम कर रही होगी कहीं शृंगार' कविता से उद्धृत निम्न पंक्तियों के साथ एक सुन्दर छाया चित्र 'धर्मयुग' में निकला है - 'काँस-सी मेरी व्यथा विखरी चतुर्दिक बाढ़-सा उमड़ा हृदयगत प्यार'. काव्य में विम्व उपस्थित करना कवि का मूलधर्म है. अलंकारादि इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए हैं. भारतीय काव्य शास्त्र में इसे विभाव के अन्तर्गत समझा जाता है और पश्चिम में इसका पृथक् नाम रखा गया है 'चित्रात्मकता' ( Pictu( resqueness ). बिम्व ( Image ) इसका भी अन्तरंग है, जिस कवि के तर अनुभूतियाँ जितनी गम्भीर और अभिव्यक्ति जितनी स्पष्ट और सशक्त होगी - उसी के अनुपात से उसके काव्य में विम्व उपस्थित करने की क्षमता भी होगी. कवि सुमन मे गहरी भावुकता और अभिव्यक्ति-पाण्डित्य है. उसके शब्द - चित्र इसके प्रमाण है. 'आज की साँझ सलोनी बड़ी मन भावनी री' - सवैया छंद मे लिखी गई इस कविता का प्रत्येक छंद पद्माकर, देव या रत्नाकर के किसी भी सवैये की कोटि में रखा जा सकता है. रीतिकालीन अभिव्यक्ति प्रौर तदनुसार परिवेश इसका आदर्श है. 'ग्रागमिष्यत्पतिका' की उत्कंठा, हर्प और उत्साहमयी उन्मद चेष्टाएँ अपनी सरस अभिव्यंजना के कारण मन मोह लेती हैं. उद्दीपन के लिये प्रकृति के सुन्दर चित्र को मधुर पृष्ठभूमि है. 'दूब की चादर फैली दिगंत लौं, मोर को शोर मरोरे जिया'. शृंगार के अनुकूल सानुप्रासिक शब्दावली में प्रकट किया गया है कि इधर मोर शोर कर रहा है और उधर नायिका का मन 'मरोर !' उत्सुक लज्जा का यही लक्षण है. प्रसादजी ने लिखा है 'कुंचित अलकों सो घुंघराली मन को मरोर बन कर जगतो.' ८० [1] सुमन : मनुष्य और स्रष्टा ( कामायनी - लज्जा ) नायिका के प्रियतम की आज 'आवती' है. इसलिये उसे निशा कैसी लग रही है - 'आ रही, काजल आँजे निशा, पुतली में घिरी घटा सावनो रो.' यहाँ रात्रि का मानवीकरण तो है हो, पर नायिका के आगत सौभाग्य जे की भी सुन्दर व्यंजना है. 'निशा का काजल ना - मुग्धा की शृंगारमयो रजनी का आगमन है. 'पुतली में सावनी घटा घिरना' - भावी सरसता, माधुर्य - और हर्ष गद्गद्ता का सूचक है. इसी बेला में नायिका चाली के साथ भुला भूल रही है. सावन में झूला भूलना लोक परम्परा है. संयोगकाल में अक्सर अमराइयों में प्रेमी युगल झूला करते हैं. अतः आली के साथ भूलने में वही स्मृति ताजी हो जाना मनोवैज्ञानिक सत्य है. सब जानते हैं कि झूला जव उतार पर होता है, तव हृदय में एक मीठीसी गुदगुदी होती है. जब संयोग की उत्कंठित स्मृति भी इस गुदगुदी से मिल जाये तब जैसा लगता है, वह कवि के शब्दों में 'हूक' है. इससे अधिक उपयुक्त शब्द नहीं खोजा जा सकता - 'आम को डाल पे झूले पड़े करती हुई कारण बताती है -- चढ़ी पॅग, उतार में हूक उठे.' इसी अवसर पर आली ने 'वालो' को लपेट लिया. वेचारी दयनीय विरोध 'आलो लपेट न आंचर में, मोरे जानी अजानी-सी कूक उठे. यह जानी- अजानी 'कूक' क्या है ? जानी हुई इसलिए है कि 'इसी' प्रकार की 'किसी' चेष्टा में वह उठी थी. क्यों उठी थी ? क्या अर्थ रखती थी ? वाला क्या जाने ? उसके सामने तो एक रंगीन चित्र है, रेखाएं अनजानी हैं. छायावादी विरोधाभास यहाँ सफलता से प्रयुक्त हुआ है. 'कूक' शब्द रूढ़ा लक्षणा के माध्यम से समझने पर विशेष सार्थक लगता है. इसी अवसर पर नटखट चाली ने झूले को चक्कर दे दिया. इधर डोर ऐंठी और उवर नायिका का मन ! एक पुलक-विह्वल खिजलाहट भरे अनुनय से उसने विरोध किया - पर आँखें नहीं भरीं : परखें भरीं भरों []८१ 'डोर की ऐंठन माती करें मन, सई साँझ से लगी अनटूटी झड़ी के क्रम में मुग्धा को रात की याद ग्रा गई. उद्दाम और परुष रति की कल्पना मात्र से तन्वंगी सिहर उठी. अज्ञात 'शंका' ने कँपा दिया - मानरो मान मनावनो रो'. रूपक्रातिशयोक्ति के माध्यम से सारा प्रसंग उद्भासित हो उठा है. परिखामतः पूर्वकल्पित रंगीन रात भयानक लगने लगो'आज को रात को राम ही मालिक, लौनी लता पै गाज गिरी. 'छान को वान टपाटप चू रही, भिन्नार्थक शब्दों से निकलने वाली ध्वनि कितनो तीक्ष्ण है ? यहाँ उन्मुक्त और निर्मम रति की सांकेतिक व्यंजना में कवि कौशल प्रकट हुआ है. अनघड़ कवि इस प्रसंग को अश्लील वना देता है. वीज़ की कौंध डरावनी री'. प्रिय की प्रतीक्षा मे देहली पर खड़ी खड़ी नायिका भोंज गई. वौछार की मार प्रसह्य हो गई. मन मे अनेक बातें उठती है, पर कही नहीं जाती, सच है मन के पास वारणी होती तभी यह सम्भव था. वात ग्राए मन में और कहे जीभ ! यह दुहरा तत्व ज्ञान प्रेम के क्षेत्र से बाहर है. वाणी का क्षेत्र अधिक सीमित है -- 'क्षण भर की पहिचान' में भी कवि ने लिखा है-... 'और बहुत सी बातें हैं, दीपक वालने की वेला या गई. नायिका सखो से कहती है - - प्राली ! मेरे सिंगार का ही दीपक जला दे न ! ( दीप-शिखा - सी देह् तो है हो ) भाव यह है कि घर में उजाले को आवश्यकता नहीं है, तो प्रिय की उजला करना है. विहारी कवि ने लिखा है-भाषामें जिनके शब्द नहीं हैं. ' कहा कुसुम कह कौमुदी कितक आरसो जोति जाको उजराई लखें, आँख ऊजरी होति'. कवि सुमन की भोली नायिका के पास इतना कौशल कहाँ, सीधे-सादे शब्दों देती है ---- ८२ सुमनः मतृप्य और टा 'साज री साज सिंगार को दोपक, आज पिया की है आवनो रो. 'साजरी - साज' और 'मान री मान' दोनों में ही 'वीप्सा' का प्रयोजनवैभिन्य कला को दृष्टि से महत्वपूर्ण है. एक में त्वरा और उत्सुकता तथा दूसरे में खिजलाहट और भुंझलाहट इसी के माध्यम से व्यक्त हुई है. भाषा में सई साँझ और हिया जैसे अनेक ब्रजभाषा के शब्दों का सुन्दर प्रयोग हुआ है. तद्भव शब्दों की योजना - माधुर्य, सौकुमार्य और लोक-जीवन की अभिव्यक्ति के लिए की गई है. वस्तुतः इस कविता में लोक-गीतों का सा माधुर्य है. स्वाभाविक, यथार्थ एवं मनोविज्ञान संमत भावाभिव्यंजन की दृष्टि से वियोग शृंगार की उत्कृष्ट कविताओं में इसकी गणना हो सकती है. कलात्मक दृष्टि से भारतीय और पाश्चात्य अलंकारों तथा प्राचीन और नवीन शैलियों का संतुलित समन्वय श्लाघ्य है. जादू वह जो सर पर चढ़कर वोले. जिस साँवनी साँझ को मेघ घिर ग्राएँ, उस समय जिसने पढ़ी हो, उसे यह कविता याद न आजाएयह सम्भव नहीं. सुमनजी की ऐसी कविताएँ ठीक उनके व्यक्तित्व की तरह खींचती, बाँधती, भिगोती और डुवोती हैं. इस कविता की विस्तृत व्याख्या इसीलिए को गई कि कवि की प्रतिभा के स्तर से परिचय हो जाय. ऐसी कविताओं में पूर्वोल्लेखितकविताओं के अतिरिक्त 'शरद-सी तुम कर रही होगी कहीं शृंगार,' 'फागुन में सावन, ' 'मरुस्थल और नदी,' 'मिट्टी की महिमा', 'कलाकार के प्रति, साँसों का हिसाव दिती हैं, परन्तु विस्तार भय से उन पर विहंगम दृष्टि से ही विचार किया जा सकता है. 'टूटी डोर' मुक्त छंद में लिखी गई संग्रह की इकलौती कविता है. प्रतीकों का उभार, चिह्नों की योग्यता एवं अभिव्यक्ति की नव्यता के कारण इसमें नई कविता के बीज हैं. मन की पतंग टूट कर उड़ जाती है और पहुँच के बाहर हो जाती है. हाय में केवल टों और समस्याओं की उलझी गुत्थी ही शेष रह जाती है. प्रखर वायु दुनिया की विषम परिस्थितियों को प्रतीक है. यह स्वार्थी संसार का चित्र यथार्थ है --- 'डोर सावना कठिन, कठिन तर दाँव फँसाना पेच काटना धूल धूसरित, गहन नीलिमामय संभ्रम आ काश में.' पर आँखें नहीं भरीं : पर आँखें भरीं भरी [] ८३ सांग रूपक का निर्वाह श्रेष्ठ है. 'आकाश' शब्द के बीच डैशों के माध्यम से व्यापकता अभिव्यक्त की गई है. दाँव फँसाने और पेंच काटने में व्यस्त इतने बड़े संसार में एक असहाय मन की पतंग का कट कर भटकना कितना घातक है ? परिस्थिति का रूपकात्मक चित्र सटीक है. 'प्यार का सत्कार' उपालंभ कविता है. कुछ पंक्तियों में उपालंभमिश्रित असूया की व्यंजना वड़ी मर्मस्पर्शी है - 'उस दिन तुम मुझको हँस कर टाल रहे थे. मैं प्यासा तुम औरों को ढाल रहे थे.' एक शायर ने भी लिखा है - 'हम बैठे रहे प्यासे, छलका किया पैमाना.' रसिक इन पंक्तियों के मन चाहे अर्थ निकाल सकते हैं. संयोग की 'स्मृति' वियोग की लम्बी घड़ियों को भी कितना संक्षिप्त बना देती है - 'उस दिन को दूरी कितनी पास रही है ? अब सपनों पर मेरा विश्वास नहीं है. क्योंकि पार्थिव दूरी का क्या महत्व है, यदि मन ही दूर न हो जाए तो ! 'दूर हूँ जितना तुम्हारे पास उतना ही कविता में भी इसी प्रकार की भावना है. 'मरुस्थल और नदी' प्रेम के स्वरूप की व्यंजना करनेवाली वहुत सुन्दर कविता है. दो विषम का संयोजन करनेवाली अद्भुत शक्ति ही प्रेम है - वही पुरुप को स्त्री से, कठोर को तरल से ग्रौर मरुस्थल को नदी से मिलाती है. पुरुष और स्त्री की अपनी-अपनी क्षमताओं, आकांक्षाओं और स्वभाओं का काव्यमय निदर्शन भी यहाँ उपलब्ध है. मरुस्थल पुरुष मात्र का प्रतीक है और नदी नारी की दोनों में कितना वैषम्य है - 'मुझ में अंकित बेडोल पगों की कर्मठता तुझ में शंकित मन को शफरी-सो चंचलता.' पुरुष सहज-कर्मठ है और नारी तरल - चंचल पुरुष सहज- मुक्त है, नारी तरल बन्धन पुरुष का अहम् उसको जीत है - 'मैने ही गिरि को दी थी सागर की शर्तें.' नारी सुलझन है और पुरुप उलझाव. नारी हृदय की गहराई है, पुरुप अधर की विडम्वित प्रतृप्ति - ८४ सुमन : मनुष्य और स्रष्टा 'जो कुछ प्रवाह में सुलझ गया वह तेरा है. जो कुछ बाहों में उलझ गया वह मेरा है. जो कुछ अन्तर में भटक गया वह तेरा है. जो कुछ अधरों में अटक गया वह मेरा है.' मैं गोला हो जाता हूँ भोग नहीं पाता. जयशंकर प्रसाद ने लिखा है - 'पुरुष है - कुतूहल और प्रश्न और स्त्री विश्लेपण, उत्तर और सव वातों का समाधान. पुरुष के प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देने के लिए वह प्रस्तुत है. उसके कुतूहल -- उसके प्रभावों को परिपूर्ण करने का उष्ण प्रयत्न और शीतल उपचार !' इसीलिए शायद युगों-युगों से दोनों का नाता है. एक प्रभाव है, दूसरी भाव - - 'मेरे सूखे अधरों में एक कहानी है, मैं रोझ गया इसलिये कि तुझमें पानी है.' और तारीफ यह कि फिर भी वह युग-युग से अतृप्त है. सच है - जिस दिन प्यास बुझ जाएगी. उस दिन मनुहारों का आधार ही ढह जायेगा. इसलिये न बुझी प्यास और न भरी आँखें ही बेहतर है. दूसरे वर्ग की रचनाओं में 'कलाकार के प्रति' कविता निस्सन्देह सर्वश्रेष्ठ है. कवि की भावी काव्य-दिशा, दुर्दम साधनाकांक्षा, कला की परिभाषा और तद्गत यथार्थ यहाँ 'शुगर क्वोटेड कुनेन' की भाँति व्यक्त हुए हैं. कर्म की जो अदम्य भावना कवि के जीवन में दीख पड़ती है, उसकी भूमिका के रूप में यह कविता चिरस्मरणीय रहेगी. वह यहाँ एक ऋषि की भाँति प्रौढ वयस् मे नवोदित कलापीढ़ी को कर्मण्यता का संदेश देता है -- 'तुम क्या दिन भर पोथी-पत्रा पढ़ते हो ? कैसे शिल्पी, हो मूर्ति नहीं गढ़ते हो ?" स्मरण रहे कि उपदेशक की तरह यह संदेश अभिधात्मक नहीं है. वह व्यथासिक्त भर्त्सना के माध्यम से ध्वनित हुआ है. सम्भवतः कलाकार ने उपकरणों के प्रभाव का रोना रोया होगा. कवि उत्तेजित हो उठा - 'क्या फूलों, पत्तों में रंग नहीं है ? चाँद सितारे, उपा-संध्या, चपला-चपला, वहार का मटमैला रंग, सोन जुही का फूल, चम्पा की महक सभी तो हैं ?" इतना ही नहीं. कला की, सामग्री यहाँ भी है -- पर आँखें नहीं भरीं : पर आँखें भरी भरी ८५
जीवन को गोधूली में, कौतूहल से तुम सम्भव है कि पूर्वोक्त पंक्ति लिखते समय डॉशून्य सुमन के अवचेतन में उक्त पंक्तियाँ रही हों. 'झीनी- वौछार' शब्द में मौलिक चित्रात्मकता है. 'शरद-सी तुम कर रही होगी कहीं शृंगार' कविता से उद्धृत निम्न पंक्तियों के साथ एक सुन्दर छाया चित्र 'धर्मयुग' में निकला है - 'काँस-सी मेरी व्यथा विखरी चतुर्दिक बाढ़-सा उमड़ा हृदयगत प्यार'. काव्य में विम्व उपस्थित करना कवि का मूलधर्म है. अलंकारादि इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए हैं. भारतीय काव्य शास्त्र में इसे विभाव के अन्तर्गत समझा जाता है और पश्चिम में इसका पृथक् नाम रखा गया है 'चित्रात्मकता' . बिम्व इसका भी अन्तरंग है, जिस कवि के तर अनुभूतियाँ जितनी गम्भीर और अभिव्यक्ति जितनी स्पष्ट और सशक्त होगी - उसी के अनुपात से उसके काव्य में विम्व उपस्थित करने की क्षमता भी होगी. कवि सुमन मे गहरी भावुकता और अभिव्यक्ति-पाण्डित्य है. उसके शब्द - चित्र इसके प्रमाण है. 'आज की साँझ सलोनी बड़ी मन भावनी री' - सवैया छंद मे लिखी गई इस कविता का प्रत्येक छंद पद्माकर, देव या रत्नाकर के किसी भी सवैये की कोटि में रखा जा सकता है. रीतिकालीन अभिव्यक्ति प्रौर तदनुसार परिवेश इसका आदर्श है. 'ग्रागमिष्यत्पतिका' की उत्कंठा, हर्प और उत्साहमयी उन्मद चेष्टाएँ अपनी सरस अभिव्यंजना के कारण मन मोह लेती हैं. उद्दीपन के लिये प्रकृति के सुन्दर चित्र को मधुर पृष्ठभूमि है. 'दूब की चादर फैली दिगंत लौं, मोर को शोर मरोरे जिया'. शृंगार के अनुकूल सानुप्रासिक शब्दावली में प्रकट किया गया है कि इधर मोर शोर कर रहा है और उधर नायिका का मन 'मरोर !' उत्सुक लज्जा का यही लक्षण है. प्रसादजी ने लिखा है 'कुंचित अलकों सो घुंघराली मन को मरोर बन कर जगतो.' अस्सी [एक] सुमन : मनुष्य और स्रष्टा नायिका के प्रियतम की आज 'आवती' है. इसलिये उसे निशा कैसी लग रही है - 'आ रही, काजल आँजे निशा, पुतली में घिरी घटा सावनो रो.' यहाँ रात्रि का मानवीकरण तो है हो, पर नायिका के आगत सौभाग्य जे की भी सुन्दर व्यंजना है. 'निशा का काजल ना - मुग्धा की शृंगारमयो रजनी का आगमन है. 'पुतली में सावनी घटा घिरना' - भावी सरसता, माधुर्य - और हर्ष गद्गद्ता का सूचक है. इसी बेला में नायिका चाली के साथ भुला भूल रही है. सावन में झूला भूलना लोक परम्परा है. संयोगकाल में अक्सर अमराइयों में प्रेमी युगल झूला करते हैं. अतः आली के साथ भूलने में वही स्मृति ताजी हो जाना मनोवैज्ञानिक सत्य है. सब जानते हैं कि झूला जव उतार पर होता है, तव हृदय में एक मीठीसी गुदगुदी होती है. जब संयोग की उत्कंठित स्मृति भी इस गुदगुदी से मिल जाये तब जैसा लगता है, वह कवि के शब्दों में 'हूक' है. इससे अधिक उपयुक्त शब्द नहीं खोजा जा सकता - 'आम को डाल पे झूले पड़े करती हुई कारण बताती है -- चढ़ी पॅग, उतार में हूक उठे.' इसी अवसर पर आली ने 'वालो' को लपेट लिया. वेचारी दयनीय विरोध 'आलो लपेट न आंचर में, मोरे जानी अजानी-सी कूक उठे. यह जानी- अजानी 'कूक' क्या है ? जानी हुई इसलिए है कि 'इसी' प्रकार की 'किसी' चेष्टा में वह उठी थी. क्यों उठी थी ? क्या अर्थ रखती थी ? वाला क्या जाने ? उसके सामने तो एक रंगीन चित्र है, रेखाएं अनजानी हैं. छायावादी विरोधाभास यहाँ सफलता से प्रयुक्त हुआ है. 'कूक' शब्द रूढ़ा लक्षणा के माध्यम से समझने पर विशेष सार्थक लगता है. इसी अवसर पर नटखट चाली ने झूले को चक्कर दे दिया. इधर डोर ऐंठी और उवर नायिका का मन ! एक पुलक-विह्वल खिजलाहट भरे अनुनय से उसने विरोध किया - पर आँखें नहीं भरीं : परखें भरीं भरों []इक्यासी 'डोर की ऐंठन माती करें मन, सई साँझ से लगी अनटूटी झड़ी के क्रम में मुग्धा को रात की याद ग्रा गई. उद्दाम और परुष रति की कल्पना मात्र से तन्वंगी सिहर उठी. अज्ञात 'शंका' ने कँपा दिया - मानरो मान मनावनो रो'. रूपक्रातिशयोक्ति के माध्यम से सारा प्रसंग उद्भासित हो उठा है. परिखामतः पूर्वकल्पित रंगीन रात भयानक लगने लगो'आज को रात को राम ही मालिक, लौनी लता पै गाज गिरी. 'छान को वान टपाटप चू रही, भिन्नार्थक शब्दों से निकलने वाली ध्वनि कितनो तीक्ष्ण है ? यहाँ उन्मुक्त और निर्मम रति की सांकेतिक व्यंजना में कवि कौशल प्रकट हुआ है. अनघड़ कवि इस प्रसंग को अश्लील वना देता है. वीज़ की कौंध डरावनी री'. प्रिय की प्रतीक्षा मे देहली पर खड़ी खड़ी नायिका भोंज गई. वौछार की मार प्रसह्य हो गई. मन मे अनेक बातें उठती है, पर कही नहीं जाती, सच है मन के पास वारणी होती तभी यह सम्भव था. वात ग्राए मन में और कहे जीभ ! यह दुहरा तत्व ज्ञान प्रेम के क्षेत्र से बाहर है. वाणी का क्षेत्र अधिक सीमित है -- 'क्षण भर की पहिचान' में भी कवि ने लिखा है-... 'और बहुत सी बातें हैं, दीपक वालने की वेला या गई. नायिका सखो से कहती है - - प्राली ! मेरे सिंगार का ही दीपक जला दे न ! भाव यह है कि घर में उजाले को आवश्यकता नहीं है, तो प्रिय की उजला करना है. विहारी कवि ने लिखा है-भाषामें जिनके शब्द नहीं हैं. ' कहा कुसुम कह कौमुदी कितक आरसो जोति जाको उजराई लखें, आँख ऊजरी होति'. कवि सुमन की भोली नायिका के पास इतना कौशल कहाँ, सीधे-सादे शब्दों देती है ---- बयासी सुमनः मतृप्य और टा 'साज री साज सिंगार को दोपक, आज पिया की है आवनो रो. 'साजरी - साज' और 'मान री मान' दोनों में ही 'वीप्सा' का प्रयोजनवैभिन्य कला को दृष्टि से महत्वपूर्ण है. एक में त्वरा और उत्सुकता तथा दूसरे में खिजलाहट और भुंझलाहट इसी के माध्यम से व्यक्त हुई है. भाषा में सई साँझ और हिया जैसे अनेक ब्रजभाषा के शब्दों का सुन्दर प्रयोग हुआ है. तद्भव शब्दों की योजना - माधुर्य, सौकुमार्य और लोक-जीवन की अभिव्यक्ति के लिए की गई है. वस्तुतः इस कविता में लोक-गीतों का सा माधुर्य है. स्वाभाविक, यथार्थ एवं मनोविज्ञान संमत भावाभिव्यंजन की दृष्टि से वियोग शृंगार की उत्कृष्ट कविताओं में इसकी गणना हो सकती है. कलात्मक दृष्टि से भारतीय और पाश्चात्य अलंकारों तथा प्राचीन और नवीन शैलियों का संतुलित समन्वय श्लाघ्य है. जादू वह जो सर पर चढ़कर वोले. जिस साँवनी साँझ को मेघ घिर ग्राएँ, उस समय जिसने पढ़ी हो, उसे यह कविता याद न आजाएयह सम्भव नहीं. सुमनजी की ऐसी कविताएँ ठीक उनके व्यक्तित्व की तरह खींचती, बाँधती, भिगोती और डुवोती हैं. इस कविता की विस्तृत व्याख्या इसीलिए को गई कि कवि की प्रतिभा के स्तर से परिचय हो जाय. ऐसी कविताओं में पूर्वोल्लेखितकविताओं के अतिरिक्त 'शरद-सी तुम कर रही होगी कहीं शृंगार,' 'फागुन में सावन, ' 'मरुस्थल और नदी,' 'मिट्टी की महिमा', 'कलाकार के प्रति, साँसों का हिसाव दिती हैं, परन्तु विस्तार भय से उन पर विहंगम दृष्टि से ही विचार किया जा सकता है. 'टूटी डोर' मुक्त छंद में लिखी गई संग्रह की इकलौती कविता है. प्रतीकों का उभार, चिह्नों की योग्यता एवं अभिव्यक्ति की नव्यता के कारण इसमें नई कविता के बीज हैं. मन की पतंग टूट कर उड़ जाती है और पहुँच के बाहर हो जाती है. हाय में केवल टों और समस्याओं की उलझी गुत्थी ही शेष रह जाती है. प्रखर वायु दुनिया की विषम परिस्थितियों को प्रतीक है. यह स्वार्थी संसार का चित्र यथार्थ है --- 'डोर सावना कठिन, कठिन तर दाँव फँसाना पेच काटना धूल धूसरित, गहन नीलिमामय संभ्रम आ काश में.' पर आँखें नहीं भरीं : पर आँखें भरीं भरी [] तिरासी सांग रूपक का निर्वाह श्रेष्ठ है. 'आकाश' शब्द के बीच डैशों के माध्यम से व्यापकता अभिव्यक्त की गई है. दाँव फँसाने और पेंच काटने में व्यस्त इतने बड़े संसार में एक असहाय मन की पतंग का कट कर भटकना कितना घातक है ? परिस्थिति का रूपकात्मक चित्र सटीक है. 'प्यार का सत्कार' उपालंभ कविता है. कुछ पंक्तियों में उपालंभमिश्रित असूया की व्यंजना वड़ी मर्मस्पर्शी है - 'उस दिन तुम मुझको हँस कर टाल रहे थे. मैं प्यासा तुम औरों को ढाल रहे थे.' एक शायर ने भी लिखा है - 'हम बैठे रहे प्यासे, छलका किया पैमाना.' रसिक इन पंक्तियों के मन चाहे अर्थ निकाल सकते हैं. संयोग की 'स्मृति' वियोग की लम्बी घड़ियों को भी कितना संक्षिप्त बना देती है - 'उस दिन को दूरी कितनी पास रही है ? अब सपनों पर मेरा विश्वास नहीं है. क्योंकि पार्थिव दूरी का क्या महत्व है, यदि मन ही दूर न हो जाए तो ! 'दूर हूँ जितना तुम्हारे पास उतना ही कविता में भी इसी प्रकार की भावना है. 'मरुस्थल और नदी' प्रेम के स्वरूप की व्यंजना करनेवाली वहुत सुन्दर कविता है. दो विषम का संयोजन करनेवाली अद्भुत शक्ति ही प्रेम है - वही पुरुप को स्त्री से, कठोर को तरल से ग्रौर मरुस्थल को नदी से मिलाती है. पुरुष और स्त्री की अपनी-अपनी क्षमताओं, आकांक्षाओं और स्वभाओं का काव्यमय निदर्शन भी यहाँ उपलब्ध है. मरुस्थल पुरुष मात्र का प्रतीक है और नदी नारी की दोनों में कितना वैषम्य है - 'मुझ में अंकित बेडोल पगों की कर्मठता तुझ में शंकित मन को शफरी-सो चंचलता.' पुरुष सहज-कर्मठ है और नारी तरल - चंचल पुरुष सहज- मुक्त है, नारी तरल बन्धन पुरुष का अहम् उसको जीत है - 'मैने ही गिरि को दी थी सागर की शर्तें.' नारी सुलझन है और पुरुप उलझाव. नारी हृदय की गहराई है, पुरुप अधर की विडम्वित प्रतृप्ति - चौरासी सुमन : मनुष्य और स्रष्टा 'जो कुछ प्रवाह में सुलझ गया वह तेरा है. जो कुछ बाहों में उलझ गया वह मेरा है. जो कुछ अन्तर में भटक गया वह तेरा है. जो कुछ अधरों में अटक गया वह मेरा है.' मैं गोला हो जाता हूँ भोग नहीं पाता. जयशंकर प्रसाद ने लिखा है - 'पुरुष है - कुतूहल और प्रश्न और स्त्री विश्लेपण, उत्तर और सव वातों का समाधान. पुरुष के प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देने के लिए वह प्रस्तुत है. उसके कुतूहल -- उसके प्रभावों को परिपूर्ण करने का उष्ण प्रयत्न और शीतल उपचार !' इसीलिए शायद युगों-युगों से दोनों का नाता है. एक प्रभाव है, दूसरी भाव - - 'मेरे सूखे अधरों में एक कहानी है, मैं रोझ गया इसलिये कि तुझमें पानी है.' और तारीफ यह कि फिर भी वह युग-युग से अतृप्त है. सच है - जिस दिन प्यास बुझ जाएगी. उस दिन मनुहारों का आधार ही ढह जायेगा. इसलिये न बुझी प्यास और न भरी आँखें ही बेहतर है. दूसरे वर्ग की रचनाओं में 'कलाकार के प्रति' कविता निस्सन्देह सर्वश्रेष्ठ है. कवि की भावी काव्य-दिशा, दुर्दम साधनाकांक्षा, कला की परिभाषा और तद्गत यथार्थ यहाँ 'शुगर क्वोटेड कुनेन' की भाँति व्यक्त हुए हैं. कर्म की जो अदम्य भावना कवि के जीवन में दीख पड़ती है, उसकी भूमिका के रूप में यह कविता चिरस्मरणीय रहेगी. वह यहाँ एक ऋषि की भाँति प्रौढ वयस् मे नवोदित कलापीढ़ी को कर्मण्यता का संदेश देता है -- 'तुम क्या दिन भर पोथी-पत्रा पढ़ते हो ? कैसे शिल्पी, हो मूर्ति नहीं गढ़ते हो ?" स्मरण रहे कि उपदेशक की तरह यह संदेश अभिधात्मक नहीं है. वह व्यथासिक्त भर्त्सना के माध्यम से ध्वनित हुआ है. सम्भवतः कलाकार ने उपकरणों के प्रभाव का रोना रोया होगा. कवि उत्तेजित हो उठा - 'क्या फूलों, पत्तों में रंग नहीं है ? चाँद सितारे, उपा-संध्या, चपला-चपला, वहार का मटमैला रंग, सोन जुही का फूल, चम्पा की महक सभी तो हैं ?" इतना ही नहीं. कला की, सामग्री यहाँ भी है -- पर आँखें नहीं भरीं : पर आँखें भरी भरी पचासी
सोलन जिले के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी के विद्युत उप केन्द्र अक्कावाली में मरम्मत व रखरखाव कार्य के चलते विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। यह जानकारी विद्युत उपमण्डल बद्दी के वरिष्ठ अधिशाषी अभियंता ने दी। उन्होंने बताया कि 3 जनवरी को सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक गुरूमाजरा, हरियापूर, चुनड़ी, अक्कावाली, मलकूमाजरा, किश्नपूरा, बंगला बेली, बेरीवाला, फौजी कालोनी, खरूनी, टाहलीवाला, मानपूरा, निचला थाना एवं आस-पास के क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। इसके अतिरिक्त मैसर्ज़ लिवगार्ड, डॉ. रेड्डी, मैसर्ज़ माईक्रोटनर, मैसर्ज़ ग्लेनमार्क, मैसर्ज़ आईटीसी, मैसर्ज़ हिम टैक्नो फोरजे, मैसर्ज़ खुराना ओलिओ, मैसर्ज़ ऑक्सालिस लैब, मैसर्ज़ मैकलोड की भी विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सोलन जिले के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी के विद्युत उप केन्द्र अक्कावाली में मरम्मत व रखरखाव कार्य के चलते विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। यह जानकारी विद्युत उपमण्डल बद्दी के वरिष्ठ अधिशाषी अभियंता ने दी। उन्होंने बताया कि तीन जनवरी को सुबह आठ बजे से दोपहर एक बजे तक गुरूमाजरा, हरियापूर, चुनड़ी, अक्कावाली, मलकूमाजरा, किश्नपूरा, बंगला बेली, बेरीवाला, फौजी कालोनी, खरूनी, टाहलीवाला, मानपूरा, निचला थाना एवं आस-पास के क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। इसके अतिरिक्त मैसर्ज़ लिवगार्ड, डॉ. रेड्डी, मैसर्ज़ माईक्रोटनर, मैसर्ज़ ग्लेनमार्क, मैसर्ज़ आईटीसी, मैसर्ज़ हिम टैक्नो फोरजे, मैसर्ज़ खुराना ओलिओ, मैसर्ज़ ऑक्सालिस लैब, मैसर्ज़ मैकलोड की भी विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
प्रसिद्ध अभिनेत्री विद्या बालन ने शुक्रवार को बिलिंग घाटी में पैराग्लाइडिंग का आनंद लिया। विद्या वालन यहां घूमने पहुंची हैं। उन्होंने यहां घूमने के साथ हवाबाजी के खेल का रोमांच भी उठाया। उन्होंने बताया कि यह घाटी बेहद खूबसूरत है और यहां पैराग्लाइडिंग का अपना अलग ही अनुभव है। बिलिंग घाटी की प्रसिद्ध ट्रैवल एजेंसी ट्रेनड्रिल के माध्यम से विद्या वालन ने यहां फ्लाइंग की। ट्रेनड्रिल के एमडी राज अबरोल ने बताया कि उनके पायलट सचिन ठाकुर ने विद्या बालन को फ्लाइंग करवाई। इस मौके पर विद्या बालन ने कहा कि जैसा सुना था, उससे भी बेहतर है यह पेरागलैडिग की बिलिंग घाटी।
प्रसिद्ध अभिनेत्री विद्या बालन ने शुक्रवार को बिलिंग घाटी में पैराग्लाइडिंग का आनंद लिया। विद्या वालन यहां घूमने पहुंची हैं। उन्होंने यहां घूमने के साथ हवाबाजी के खेल का रोमांच भी उठाया। उन्होंने बताया कि यह घाटी बेहद खूबसूरत है और यहां पैराग्लाइडिंग का अपना अलग ही अनुभव है। बिलिंग घाटी की प्रसिद्ध ट्रैवल एजेंसी ट्रेनड्रिल के माध्यम से विद्या वालन ने यहां फ्लाइंग की। ट्रेनड्रिल के एमडी राज अबरोल ने बताया कि उनके पायलट सचिन ठाकुर ने विद्या बालन को फ्लाइंग करवाई। इस मौके पर विद्या बालन ने कहा कि जैसा सुना था, उससे भी बेहतर है यह पेरागलैडिग की बिलिंग घाटी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजधानी देहरादून में सीएम कैंप कार्यालय परिसर से 'अपणि सरकार' नागरिक सेवाएं आपके द्वार योजना का फ्लैग ऑफ किया। इस योजना के तहत देहरादून के नागरिकों को एक फोन कॉल पर अपणि सरकार पोर्टल की नागरिक सेवाएं उनके द्वार पर उपलब्ध होगी। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजधानी देहरादून में सीएम कैंप कार्यालय परिसर से 'अपणि सरकार' नागरिक सेवाएं आपके द्वार योजना का फ्लैग ऑफ किया। इस योजना के तहत देहरादून के नागरिकों को एक फोन कॉल पर अपणि सरकार पोर्टल की नागरिक सेवाएं उनके द्वार पर उपलब्ध होगी। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
बूंदी जिले की हिंडोली पुलिस ने हाईवे किनारे लोहे की दुकान में बिना लाइसेंस शराब बेचते एक युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 2 लाख रुपए कीमत की अंग्रेजी और देसी शराब जब्त की है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है। थानाधिकारी मुकेश मीणा ने बताया कि आरोपी रामप्रसाद निवासी रेगर मोहल्ला पगारा बूंदी को गिरफ्तार किया है। दोपहर मुखबिर से सूचना मिली कि पगारा रोड पर हाईवे किनारे लोहे की दुकान बनाकर एक युवक बिना लाइसेंस के शराब बिक्री करता है। सूचना पर पुलिस ने कार्रवाई कर दुकान पर दबिश दी। दुकान पर शराब बेचते मिले आरोपी रामप्रसाद से लाइसेंस मांगा तो नहीं मिला। पुलिस ने आबकारी एक्ट के तहत आरोपी रामप्रसाद को गिरफ्तार किया। जिसके कब्जे से मिली देसी शराब की 40 और अंग्रेजी शराब की 6 पेटी जब्त की गई। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से शराब बिक्री के 1120 रुपए भी बरामद किए है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बूंदी जिले की हिंडोली पुलिस ने हाईवे किनारे लोहे की दुकान में बिना लाइसेंस शराब बेचते एक युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो लाख रुपए कीमत की अंग्रेजी और देसी शराब जब्त की है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है। थानाधिकारी मुकेश मीणा ने बताया कि आरोपी रामप्रसाद निवासी रेगर मोहल्ला पगारा बूंदी को गिरफ्तार किया है। दोपहर मुखबिर से सूचना मिली कि पगारा रोड पर हाईवे किनारे लोहे की दुकान बनाकर एक युवक बिना लाइसेंस के शराब बिक्री करता है। सूचना पर पुलिस ने कार्रवाई कर दुकान पर दबिश दी। दुकान पर शराब बेचते मिले आरोपी रामप्रसाद से लाइसेंस मांगा तो नहीं मिला। पुलिस ने आबकारी एक्ट के तहत आरोपी रामप्रसाद को गिरफ्तार किया। जिसके कब्जे से मिली देसी शराब की चालीस और अंग्रेजी शराब की छः पेटी जब्त की गई। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से शराब बिक्री के एक हज़ार एक सौ बीस रुपयापए भी बरामद किए है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Astrology: ज्योतिष शास्त्र में व्यक्ति की बीमारी से लेकर उसके जीवन में घटने वाली अनेक घटनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है. बात की जाए उनके ऑफिस क्षेत्र की तो 12 राशियों में से तीन राशि ऐसी हैं जिन्हें अक्सर अपने बॉस की डांट का सामना करना पड़ता है. कभी-कभी तो करता कोई और है और शिकार इन राशि के जातक हो जाते हैं. यह कौन सी तीन राशियां है जिन्हें अक्सर अपने बॉस की डांट का शिकार होना पड़ता है. इस विषय में हमें अधिक जानकारी दे रहे हैं ज्योतिषी एवं पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा, आइए जानते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बॉस से सबसे अधिक डांट खाने वाली 3 राशियां हैं. पहली कन्या, दूसरी मकर और तीसरी मीन. इन 3 राशि के जातकों को अक्सर अपने बॉस की नाराजगी सहना पड़ती है. कन्या राशि वालों पर बॉस नाराज होते हैं तो व्यक्तिगत विवाद होने लगता है. वहीं मकर राशि वालों को अपने बॉस को अधिक सम्मान देना चाहिए. मीन राशि के जातकों को अपने बॉस को गुरु की तरह मानते हुए उनसे कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन तीन राशियों को अपने बॉस की डांट से बचने के लिए या फिर अपने बॉस की नाराजगी से बचने के लिए सूर्य देव की आराधना करनी चाहिए क्योंकि बॉस को सूर्य के समान माना जाता है. अगर आप अपने कार्य क्षेत्र में लगातार बॉस की नाराजगी के शिकार हो रहे हैं तो रविवार के दिन सूर्य देव को प्रसन्न करना आपके लिए सर्वोत्तम हो सकता है. रविवार के दिन सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है. अर्घ्य देते समय जल में लाल फूल, अक्षत, रोली और मिश्री अवश्य डालें. इसके अलावा नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जाप भी करना लाभदायक होता है. सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए उच्च पद पर आसीन लोगों का सम्मान करना चाहिए. .
Astrology: ज्योतिष शास्त्र में व्यक्ति की बीमारी से लेकर उसके जीवन में घटने वाली अनेक घटनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है. बात की जाए उनके ऑफिस क्षेत्र की तो बारह राशियों में से तीन राशि ऐसी हैं जिन्हें अक्सर अपने बॉस की डांट का सामना करना पड़ता है. कभी-कभी तो करता कोई और है और शिकार इन राशि के जातक हो जाते हैं. यह कौन सी तीन राशियां है जिन्हें अक्सर अपने बॉस की डांट का शिकार होना पड़ता है. इस विषय में हमें अधिक जानकारी दे रहे हैं ज्योतिषी एवं पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा, आइए जानते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बॉस से सबसे अधिक डांट खाने वाली तीन राशियां हैं. पहली कन्या, दूसरी मकर और तीसरी मीन. इन तीन राशि के जातकों को अक्सर अपने बॉस की नाराजगी सहना पड़ती है. कन्या राशि वालों पर बॉस नाराज होते हैं तो व्यक्तिगत विवाद होने लगता है. वहीं मकर राशि वालों को अपने बॉस को अधिक सम्मान देना चाहिए. मीन राशि के जातकों को अपने बॉस को गुरु की तरह मानते हुए उनसे कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन तीन राशियों को अपने बॉस की डांट से बचने के लिए या फिर अपने बॉस की नाराजगी से बचने के लिए सूर्य देव की आराधना करनी चाहिए क्योंकि बॉस को सूर्य के समान माना जाता है. अगर आप अपने कार्य क्षेत्र में लगातार बॉस की नाराजगी के शिकार हो रहे हैं तो रविवार के दिन सूर्य देव को प्रसन्न करना आपके लिए सर्वोत्तम हो सकता है. रविवार के दिन सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है. अर्घ्य देते समय जल में लाल फूल, अक्षत, रोली और मिश्री अवश्य डालें. इसके अलावा नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जाप भी करना लाभदायक होता है. सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए उच्च पद पर आसीन लोगों का सम्मान करना चाहिए. .
तीन तलाक पर प्रस्तावित बिल गुरुवार को लोकसभा में पेश किया। इस बिल को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पेश किया है। लोकसभा में बिल के पेश होने के शीघ्र बाद इस पर बहस होनी शुरू हो गई। नई दिल्लीः तीन तलाक का प्रस्तावित बिल गुरुवार को लोकसभा में पेश किया। इस विधेयक को सरकार की तरफ से कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा पेश किया गया। जैसे ही ये बिल पेश हुआ वैसे ही संसद में बहस शुरू हो गई। सुप्रीम कोर्ट भी तीन तलाक को असंवैधानिक और अमानवीय करार दे चुका है। तीन तलाक विधेयक को पास कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी संसद में उपस्थित रहने को कहा है। कांग्रेस पार्टी समेत कुछ दलों ने कुछ सवालों के साथ इस बिल का समर्थन करने की बात कही है। सरकार के इस विधेयक में तीन तलाक पर कम से कम 3 साल का सजा समेत कई प्रावधान किये गये है। लोक सभा में पेश किये गये इस बिल का कुछ पार्टियां विरोध भी कर रही है, जिसमें राजद, बीजद और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM पार्टी प्रमुख है। विपक्षी पार्टियां बिल में सजा के प्रावधान को गलत बता रही है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस बिल का विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में तीन तलाक के मुद्दे पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इस पर 6 महीने की रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले में तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए इस मामले में केंद्र सरकार से कानून बनाने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि 6 महीने में सरकार मुस्लिमों के लिए तलाक का कानून बनाये और यदि सरकार तीन तलाक पर कानून नहीं बनाती तो रोक जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय जजों की बेंच में से 3 ने इसे असंवैधानिक बताया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जेएस खेहर ने कहा था कि तालाक-ए-बिद्दत संविधान के अनुच्छेद 14,15,21 और 25 का उल्लंघन नहीं कर रहा है।
तीन तलाक पर प्रस्तावित बिल गुरुवार को लोकसभा में पेश किया। इस बिल को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पेश किया है। लोकसभा में बिल के पेश होने के शीघ्र बाद इस पर बहस होनी शुरू हो गई। नई दिल्लीः तीन तलाक का प्रस्तावित बिल गुरुवार को लोकसभा में पेश किया। इस विधेयक को सरकार की तरफ से कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा पेश किया गया। जैसे ही ये बिल पेश हुआ वैसे ही संसद में बहस शुरू हो गई। सुप्रीम कोर्ट भी तीन तलाक को असंवैधानिक और अमानवीय करार दे चुका है। तीन तलाक विधेयक को पास कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी संसद में उपस्थित रहने को कहा है। कांग्रेस पार्टी समेत कुछ दलों ने कुछ सवालों के साथ इस बिल का समर्थन करने की बात कही है। सरकार के इस विधेयक में तीन तलाक पर कम से कम तीन साल का सजा समेत कई प्रावधान किये गये है। लोक सभा में पेश किये गये इस बिल का कुछ पार्टियां विरोध भी कर रही है, जिसमें राजद, बीजद और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM पार्टी प्रमुख है। विपक्षी पार्टियां बिल में सजा के प्रावधान को गलत बता रही है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस बिल का विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में तीन तलाक के मुद्दे पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इस पर छः महीने की रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले में तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए इस मामले में केंद्र सरकार से कानून बनाने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि छः महीने में सरकार मुस्लिमों के लिए तलाक का कानून बनाये और यदि सरकार तीन तलाक पर कानून नहीं बनाती तो रोक जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय जजों की बेंच में से तीन ने इसे असंवैधानिक बताया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जेएस खेहर ने कहा था कि तालाक-ए-बिद्दत संविधान के अनुच्छेद चौदह,पंद्रह,इक्कीस और पच्चीस का उल्लंघन नहीं कर रहा है।
Twitter: ट्विटर ने भारत में नियुक्त किए गए RGO की जानकारी भी दी गई है। जिसके मुताबिक, विनय प्रकाश की ई-मेल आईडी [email protected] है। इनका दफ्तर कर्नाटक स्थित बेंगलुरु में द स्टेट बिल्डिंग के चौथे मंजिल पर है। कंपनी की वेबसाइट ट्विटर ने लिखा, "भारत में 'चौथी मंजिल, द एस्टेट, 121 डिकेंसन रोड, बैंगलोर 560042' पर संपर्क किया जा सकता है"। नई दिल्ली। नये आईटी नियमों (New IT Rules) को लेकर सरकार से जारी तकरार के बीच ट्विटर ने भारत में विनय प्रकाश (Vinay Prakash) को शिकायत निवारण अधिकारी (RGO) नियुक्त किया है। इसकी जानकारी देते हुए ट्विटर द्वारा नियुक्त किए गए अधिकारी का स्थानीय पता भी दिया गया है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति उनसे संपर्क करना चाहता है तो वह उनसे मुलाकात भी कर सकता है। बता दें, बीते दिनों अपना पद संभालने के बाद नए आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्विटर के साथ रहे गतिरोध को लेकर कहा था कि भारत में रहने और काम करने वालों को देश के नियमों का अनुपालन करना होगा जिसके बाद अब भारत के बढ़ते दबाव को देख ट्विटर ने भारत में शिकायत निवारण अधिकारी (RGO) नियुक्त किया है। RGO की नियुक्ति के साथ ही कंपनी ने 26 मई, 2021 से 25 जून, 2021 के दौरान की कंप्लायंस रिपोर्ट भी जारी की है जो कि 26 मई को लागू हुए आईटी नियमों के तहत एक और अहम नियम था। ट्विटर ने भारत में नियुक्त किए गए RGO की जानकारी भी साझा की है। जिसके मुताबिक, विनय प्रकाश की ई-मेल आईडी [email protected] है। इनका दफ्तर कर्नाटक स्थित बेंगलुरु में द स्टेट बिल्डिंग के चौथे मंजिल पर है। कंपनी की वेबसाइट ट्विटर ने लिखा, "भारत में 'चौथी मंजिल, द एस्टेट, 121 डिकेंसन रोड, बैंगलोर 560042' पर संपर्क किया जा सकता है"। आपको बता दें, नये आईटी नियमों को लेकर केंद्र सरकार के टकराव का सामना कर रहे ट्विटर ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान बताया था कि उसने एक अंतरिम मुख्य अनुपालन अधिकारी नियुक्त किया है, जो भारत के निवासी हैं। इसके अलावा ट्विटर ने ये भी कहा था कि वह (ट्विटर) नियमों के अनुसार, आठ हफ्तों के अंदर इस पद के लिए नियमित अधिकारी को नियुक्त करेगा। ट्विटर के इस बयान के बाद अदालत ने नये नियमों के अनुपालन पर एक हलफनामा, अमेरिका में नोटरी द्वारा सत्यापित, दाखिल करने के लिए उसे दो हफ्तों का समय दिया था।
Twitter: ट्विटर ने भारत में नियुक्त किए गए RGO की जानकारी भी दी गई है। जिसके मुताबिक, विनय प्रकाश की ई-मेल आईडी [email protected] है। इनका दफ्तर कर्नाटक स्थित बेंगलुरु में द स्टेट बिल्डिंग के चौथे मंजिल पर है। कंपनी की वेबसाइट ट्विटर ने लिखा, "भारत में 'चौथी मंजिल, द एस्टेट, एक सौ इक्कीस डिकेंसन रोड, बैंगलोर पाँच लाख साठ हज़ार बयालीस' पर संपर्क किया जा सकता है"। नई दिल्ली। नये आईटी नियमों को लेकर सरकार से जारी तकरार के बीच ट्विटर ने भारत में विनय प्रकाश को शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त किया है। इसकी जानकारी देते हुए ट्विटर द्वारा नियुक्त किए गए अधिकारी का स्थानीय पता भी दिया गया है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति उनसे संपर्क करना चाहता है तो वह उनसे मुलाकात भी कर सकता है। बता दें, बीते दिनों अपना पद संभालने के बाद नए आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ट्विटर के साथ रहे गतिरोध को लेकर कहा था कि भारत में रहने और काम करने वालों को देश के नियमों का अनुपालन करना होगा जिसके बाद अब भारत के बढ़ते दबाव को देख ट्विटर ने भारत में शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त किया है। RGO की नियुक्ति के साथ ही कंपनी ने छब्बीस मई, दो हज़ार इक्कीस से पच्चीस जून, दो हज़ार इक्कीस के दौरान की कंप्लायंस रिपोर्ट भी जारी की है जो कि छब्बीस मई को लागू हुए आईटी नियमों के तहत एक और अहम नियम था। ट्विटर ने भारत में नियुक्त किए गए RGO की जानकारी भी साझा की है। जिसके मुताबिक, विनय प्रकाश की ई-मेल आईडी [email protected] है। इनका दफ्तर कर्नाटक स्थित बेंगलुरु में द स्टेट बिल्डिंग के चौथे मंजिल पर है। कंपनी की वेबसाइट ट्विटर ने लिखा, "भारत में 'चौथी मंजिल, द एस्टेट, एक सौ इक्कीस डिकेंसन रोड, बैंगलोर पाँच लाख साठ हज़ार बयालीस' पर संपर्क किया जा सकता है"। आपको बता दें, नये आईटी नियमों को लेकर केंद्र सरकार के टकराव का सामना कर रहे ट्विटर ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान बताया था कि उसने एक अंतरिम मुख्य अनुपालन अधिकारी नियुक्त किया है, जो भारत के निवासी हैं। इसके अलावा ट्विटर ने ये भी कहा था कि वह नियमों के अनुसार, आठ हफ्तों के अंदर इस पद के लिए नियमित अधिकारी को नियुक्त करेगा। ट्विटर के इस बयान के बाद अदालत ने नये नियमों के अनुपालन पर एक हलफनामा, अमेरिका में नोटरी द्वारा सत्यापित, दाखिल करने के लिए उसे दो हफ्तों का समय दिया था।
भारत के नए क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने गुजरात दंगों के संबंध में मज़बूत रुख़ अपनाने के लिए देश की न्याय व्यवस्था की तारीफ़ की है. भारद्वाज ने बुधवार को कार्यभार संभालने के बाद कहा कि गुजरात दंगों के पीड़ितों को राहत पहुँचाने और उन्हें राहत दिलाने के लिए पूर्व गृहमंत्री और गुजरात सरकार ने कुछ भी नहीं किया. भारद्वाज ने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात दंगों के एक मामले में न सिर्फ़ दोबारा मुक़दमा चलाने के आदेश दिए बल्कि दंगा पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित नहीं कर पाने के लिए गुजरात सरकार की आलोचना भी की. ग़ौरतलब है कि गुजरात में 2002 में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हुए थे जिनमें क़रीब दो हज़ार लोग मारे गए थे और उनमें ज़्यादातर मुसलमान थे. गुजरात सरकार पर आरोप लगाया जाता है कि उसने दंगे रोकने के लिए सही समय पर ठोस क़दम नहीं उठाए. विवादास्पद 'आतंकवाद निरोधक क़ानून' पोटा को समाप्त करने की संभावनाओं के बारे में हंसराज भारद्वाज ने कहा कि यह फ़ैसला मंत्रिमंडल ही लेगा. उन्होंने कहा कि वह उच्च न्यायालयों में ख़ाली पड़े पदों को भरने के लिए तुरंत प्रभावी क़दम उठाएंगे.
भारत के नए क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने गुजरात दंगों के संबंध में मज़बूत रुख़ अपनाने के लिए देश की न्याय व्यवस्था की तारीफ़ की है. भारद्वाज ने बुधवार को कार्यभार संभालने के बाद कहा कि गुजरात दंगों के पीड़ितों को राहत पहुँचाने और उन्हें राहत दिलाने के लिए पूर्व गृहमंत्री और गुजरात सरकार ने कुछ भी नहीं किया. भारद्वाज ने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात दंगों के एक मामले में न सिर्फ़ दोबारा मुक़दमा चलाने के आदेश दिए बल्कि दंगा पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित नहीं कर पाने के लिए गुजरात सरकार की आलोचना भी की. ग़ौरतलब है कि गुजरात में दो हज़ार दो में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हुए थे जिनमें क़रीब दो हज़ार लोग मारे गए थे और उनमें ज़्यादातर मुसलमान थे. गुजरात सरकार पर आरोप लगाया जाता है कि उसने दंगे रोकने के लिए सही समय पर ठोस क़दम नहीं उठाए. विवादास्पद 'आतंकवाद निरोधक क़ानून' पोटा को समाप्त करने की संभावनाओं के बारे में हंसराज भारद्वाज ने कहा कि यह फ़ैसला मंत्रिमंडल ही लेगा. उन्होंने कहा कि वह उच्च न्यायालयों में ख़ाली पड़े पदों को भरने के लिए तुरंत प्रभावी क़दम उठाएंगे.
बिया रिट्ज (फ्रांस)। फ्रांस के शहर बिआरित्ज में जी 7 समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संयुक्त प्रेसवार्ता में सोमवार को तब हास्य-विनोद देखने को मिला, जब ट्रम्प ने मजाकिया लहजे में कहा, मोदी वास्तव में बहुत अच्छी अंग्रेजी बोलते हैं। बात बस इतनी है कि वह बोलना नहीं चाहते। मोदी के इस कथन के बाद ट्रम्प ने मजाकिया टिप्पणी की। इन क्षणों में दोनों ने एक दूसरे के साथ हाथ मिलाया और एक दूसरे की पीठ थपथपाई।
बिया रिट्ज । फ्रांस के शहर बिआरित्ज में जी सात समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संयुक्त प्रेसवार्ता में सोमवार को तब हास्य-विनोद देखने को मिला, जब ट्रम्प ने मजाकिया लहजे में कहा, मोदी वास्तव में बहुत अच्छी अंग्रेजी बोलते हैं। बात बस इतनी है कि वह बोलना नहीं चाहते। मोदी के इस कथन के बाद ट्रम्प ने मजाकिया टिप्पणी की। इन क्षणों में दोनों ने एक दूसरे के साथ हाथ मिलाया और एक दूसरे की पीठ थपथपाई।
DEHRADUN: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने केहरी गांव में उत्तर प्रदेश के मंत्री साहब सिंह सैनी की पत्नी के अवैध हॉस्टल के निर्माण पर कैंट बोर्ड सीईओ की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। इसको लेकर उन्होंने रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर को पत्र भेजकर सीईओ की भूमिका की विभागीय व सीबीआई जांच की मांग उठाई। रक्षा मंत्री को भेजे पत्र में अजय भट्ट ने कहा कि केहरी गांव का जो हिस्सा प्रतिबंधित सजरा मानचित्र में दर्ज है वहां न सिर्फ उत्तर प्रदेश के मंत्री की पत्नी का अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है, बल्कि कैंट बोर्ड की पूरी शह भी मिल रही है। यहां तक कि निर्माण पर कोर्ट ने रोक भी लगा रखी है। बावजूद इसके बोर्ड अधिकारी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहे। अब तक बोर्ड ने कोर्ट में जो भी पैरवी की वह बेहद लचर और मिलीभगत की ओर साफ इशारे करती है। प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि अवैध निर्माण को हर हाल में पूरा कराने को लेकर उत्तर प्रदेश के मंत्री पूरी गुंडागर्दी पर उतर आए हैं। अवैध निर्माण की शिकायत करने वाले स्थानीय लोगों को डराया धमकाया जा रहा रहा है और प्रशासन व सरकार के विभिन्न स्तर पर बैठे लोगों की मिलीभगत से झूठी शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मंत्री पर महिला उत्पीड़न का भी आरोप लगाते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में इस तरह की ज्यादती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रक्षा मंत्री से मांग की कि अवैध निर्माण को तत्काल सील कराकर उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाए।
DEHRADUN: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने केहरी गांव में उत्तर प्रदेश के मंत्री साहब सिंह सैनी की पत्नी के अवैध हॉस्टल के निर्माण पर कैंट बोर्ड सीईओ की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। इसको लेकर उन्होंने रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर को पत्र भेजकर सीईओ की भूमिका की विभागीय व सीबीआई जांच की मांग उठाई। रक्षा मंत्री को भेजे पत्र में अजय भट्ट ने कहा कि केहरी गांव का जो हिस्सा प्रतिबंधित सजरा मानचित्र में दर्ज है वहां न सिर्फ उत्तर प्रदेश के मंत्री की पत्नी का अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है, बल्कि कैंट बोर्ड की पूरी शह भी मिल रही है। यहां तक कि निर्माण पर कोर्ट ने रोक भी लगा रखी है। बावजूद इसके बोर्ड अधिकारी प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहे। अब तक बोर्ड ने कोर्ट में जो भी पैरवी की वह बेहद लचर और मिलीभगत की ओर साफ इशारे करती है। प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि अवैध निर्माण को हर हाल में पूरा कराने को लेकर उत्तर प्रदेश के मंत्री पूरी गुंडागर्दी पर उतर आए हैं। अवैध निर्माण की शिकायत करने वाले स्थानीय लोगों को डराया धमकाया जा रहा रहा है और प्रशासन व सरकार के विभिन्न स्तर पर बैठे लोगों की मिलीभगत से झूठी शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मंत्री पर महिला उत्पीड़न का भी आरोप लगाते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में इस तरह की ज्यादती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रक्षा मंत्री से मांग की कि अवैध निर्माण को तत्काल सील कराकर उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाए।
Muzaffarnagar: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां अपने बच्चों के तिरस्कार से दुखी एक बुजुर्ग ने अपनी पूरी संपत्ति को प्रदेश सरकार के नाम कर दिया है। बुजुर्ग ने अपनी संपत्ति की वसीहत में कहा है कि इस जमीन पर स्कूल या फिर अस्पताल बनाया जाए। इसके साथ ही बुजुर्ग ने बच्चों से अपने अंतिम संस्कार का भी हक छीन लिया है। मामला इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के मुताबिक मामला मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना तहसील क्षेत्र का है। यहां के बिराल गांव के रहने वाले 80 वर्षीय नत्थू सिंह राजपूत के एक बेटा और तीन बेटियां हैं, लेकिन किसी के पास भी उनकी देखभाल का समय नहीं है। इसके कारण वे पिछले चार महिने से खतौली के वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। बच्चों की बेरुखी से आहत होकर बुजुर्ग ने अपनी सारी संपत्ति को सरकार (राज्यपाल) के नाम करने का फैसला लिया। बताया गया है कि नत्थू सिंह के पास करीब डेढ़ करोड़ रुपये की संपत्ति है। उनका एक ही बेटा है, जो सहारनपुर में सरकारी शिक्षक है। इसके अलावा उनकी चार बेटियां हैं। बुजुर्ग की ओर से बताया गया है कि चारों बेटियों की शादी संपन्न परिवारों में हुई है। लेकिन अब किसी के पास बुजुर्ग की सेवा या देखभाल का समय नहीं है। बुढ़ना तहसील के सब रजिस्ट्रार पंकज जैन ने बताया कि नत्थू सिंह ने अपनी संपत्ति राज्यपाल उत्तर प्रदेश के नाम कर दी है। वसीहत में उन्होंने कहा है कि मेरे मरने के बाद इस संपत्ति पर स्कूल या फिर अस्पताल बनाया जाए। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि देहांत के बाद उनके शरीर पर शोध या अनुसंधान के लिए इस्तेमाल किया जाए।
Muzaffarnagar: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां अपने बच्चों के तिरस्कार से दुखी एक बुजुर्ग ने अपनी पूरी संपत्ति को प्रदेश सरकार के नाम कर दिया है। बुजुर्ग ने अपनी संपत्ति की वसीहत में कहा है कि इस जमीन पर स्कूल या फिर अस्पताल बनाया जाए। इसके साथ ही बुजुर्ग ने बच्चों से अपने अंतिम संस्कार का भी हक छीन लिया है। मामला इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के मुताबिक मामला मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना तहसील क्षेत्र का है। यहां के बिराल गांव के रहने वाले अस्सी वर्षीय नत्थू सिंह राजपूत के एक बेटा और तीन बेटियां हैं, लेकिन किसी के पास भी उनकी देखभाल का समय नहीं है। इसके कारण वे पिछले चार महिने से खतौली के वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। बच्चों की बेरुखी से आहत होकर बुजुर्ग ने अपनी सारी संपत्ति को सरकार के नाम करने का फैसला लिया। बताया गया है कि नत्थू सिंह के पास करीब डेढ़ करोड़ रुपये की संपत्ति है। उनका एक ही बेटा है, जो सहारनपुर में सरकारी शिक्षक है। इसके अलावा उनकी चार बेटियां हैं। बुजुर्ग की ओर से बताया गया है कि चारों बेटियों की शादी संपन्न परिवारों में हुई है। लेकिन अब किसी के पास बुजुर्ग की सेवा या देखभाल का समय नहीं है। बुढ़ना तहसील के सब रजिस्ट्रार पंकज जैन ने बताया कि नत्थू सिंह ने अपनी संपत्ति राज्यपाल उत्तर प्रदेश के नाम कर दी है। वसीहत में उन्होंने कहा है कि मेरे मरने के बाद इस संपत्ति पर स्कूल या फिर अस्पताल बनाया जाए। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि देहांत के बाद उनके शरीर पर शोध या अनुसंधान के लिए इस्तेमाल किया जाए।
दमोह में जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में दमोह विधायक अजय टंडन ने एक जन जागरण रैली निकाली। इस रैली का समापन बांदकपुर में होगा। रैली के दौरान विधायक ने प्रदेश की शिवराज सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा की शिवराज सिंह बताएं कि दमोह का मेडिकल कॉलेज कहां गया, जिसे उन्होंने चुनावी मुद्दा बनाया था। विधायक टंडन ने अपने स्टेटमेंट में कहा कि दमोह में बीते विधानसभा उप चुनाव के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने मेडिकल कॉलेज की घोषणा की थी, उसका भूमि पूजन भी किया था, लेकिन 8 माह बीत जाने के बाद भी मेडिकल कॉलेज का एक पत्थर भी नहीं रखा गया है। वह जानना चाहते हैं कि शिवराज सिंह केवल घोषणाएं करते हैं, या हकीकत में भी कुछ करते हैं। टंडन ने कहा कि हाल ही में प्रदेश में 6 नए मेडिकल कॉलेजों की घोषणा की गई है, जिसके लिए 1247 करोड रुपए की राशि भी जारी की गई है, लेकिन उस सूची में दमोह मेडिकल कॉलेज का नाम नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता के साथ इस तरह का धोखा और छलावा अब नहीं चलेगा। जनता समझ चुकी है कि भाजपा और शिवराज सिंह चौहान झूठ बोलकर जनता को गुमराह करते हैं। इसके अलावा उन्होंने लगातार बढ़ रही महंगाई, पेट्रोल, डीजल के बढ़ रहे दामों को कम करने की भी मांग की है। इस रैली में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता पैदल मार्च करते हुए बांदकपुर के लिए रवाना हुए, जहां पर रैली का समापन किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
दमोह में जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में दमोह विधायक अजय टंडन ने एक जन जागरण रैली निकाली। इस रैली का समापन बांदकपुर में होगा। रैली के दौरान विधायक ने प्रदेश की शिवराज सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा की शिवराज सिंह बताएं कि दमोह का मेडिकल कॉलेज कहां गया, जिसे उन्होंने चुनावी मुद्दा बनाया था। विधायक टंडन ने अपने स्टेटमेंट में कहा कि दमोह में बीते विधानसभा उप चुनाव के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने मेडिकल कॉलेज की घोषणा की थी, उसका भूमि पूजन भी किया था, लेकिन आठ माह बीत जाने के बाद भी मेडिकल कॉलेज का एक पत्थर भी नहीं रखा गया है। वह जानना चाहते हैं कि शिवराज सिंह केवल घोषणाएं करते हैं, या हकीकत में भी कुछ करते हैं। टंडन ने कहा कि हाल ही में प्रदेश में छः नए मेडिकल कॉलेजों की घोषणा की गई है, जिसके लिए एक हज़ार दो सौ सैंतालीस करोड रुपए की राशि भी जारी की गई है, लेकिन उस सूची में दमोह मेडिकल कॉलेज का नाम नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता के साथ इस तरह का धोखा और छलावा अब नहीं चलेगा। जनता समझ चुकी है कि भाजपा और शिवराज सिंह चौहान झूठ बोलकर जनता को गुमराह करते हैं। इसके अलावा उन्होंने लगातार बढ़ रही महंगाई, पेट्रोल, डीजल के बढ़ रहे दामों को कम करने की भी मांग की है। इस रैली में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता पैदल मार्च करते हुए बांदकपुर के लिए रवाना हुए, जहां पर रैली का समापन किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
शिमला - जीएसटी के विरोध में शुक्रवार को हिमाचल में कई दुकानें बंद रहीं। प्रदेश व्यापार मंडल का दावा है कि विरोध में सभी कारोबारियों ने भाग लिया है और 500 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। प्रदेश व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष सुमेश शर्मा ने कहा कि राज्य के कारोबारी जीएसटी का विरोध नहीं कर रहे हैं, मगर कारोबारी जीएसटी में सुधार की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने जा रहा है मगर अभी तक इस बाबत कारोबारियों को जागरूक नहीं किया गया है। कारोबारी असमंजस में हैं कि वे कैसे इन्वायस भरेंगे और कैसे स्टॉक का रिकार्ड रखेंगे। इसमें चूक पर कारोबारियों को जुर्माना लगाने और सजा का प्रावधान भी है जो न्यायसंगत नहीं है।
शिमला - जीएसटी के विरोध में शुक्रवार को हिमाचल में कई दुकानें बंद रहीं। प्रदेश व्यापार मंडल का दावा है कि विरोध में सभी कारोबारियों ने भाग लिया है और पाँच सौ करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। प्रदेश व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष सुमेश शर्मा ने कहा कि राज्य के कारोबारी जीएसटी का विरोध नहीं कर रहे हैं, मगर कारोबारी जीएसटी में सुधार की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने जा रहा है मगर अभी तक इस बाबत कारोबारियों को जागरूक नहीं किया गया है। कारोबारी असमंजस में हैं कि वे कैसे इन्वायस भरेंगे और कैसे स्टॉक का रिकार्ड रखेंगे। इसमें चूक पर कारोबारियों को जुर्माना लगाने और सजा का प्रावधान भी है जो न्यायसंगत नहीं है।
वह सार्वजनिक परिवहन से यात्रा का आम दिन था। भीड़ थी, भीड़ में युवाओं की संख्या भी अच्छी-खासी थी। अधिकांश के कानों में इयर फ़ोन लगा था और सब अपनी पसंद के गीतों पर झूम रहे थे, मन ही मन गुनगुना रहे थे या आनंद ले रहे थे। इसे आनंद के निजीकरण का उदाहरण कह सकते हैं। अब सबकी खुशी अपनी खुशी, सबका दुःख अपना नहीं रह गया है, वैसा ही कुछ यह भी था। ख़ैर इतने में कंडक्टर ने उस लड़की से कुछ पूछा, उसने अपने कानों में से इयर फ़ोन निकाला और प्रश्नार्थक निगाह डाली, हैडफ़ोन के बाहर रैना बीती जाए. . . सुनाई पड़ने लगा, उस लड़की की झल्लाहट और बढ़ गई और उसने तुरंत रेडियो चैनल बदला और फिर कंडक्टर से मुख़ातिब हुई। मैं अभी उस रैना बीती जाए का आनंद पूरा ले भी नहीं पाई थी कि कुछ ढिंकचैक म्यूज़िक शुरू हो गया। सबकी अपनी-अपनी पसंद होती है और नई पीढ़ी की पसंद हमेशा पुरानी से अलग ही होती है पर इस पीढ़ी के पास कई विकल्प हैं, वैसे हमारे पास नहीं थे। उस दौर के एक ही रेडियो स्टेशन पर जो लग जाता था, वह सुनना पड़ता था, बीच में आने वाले विज्ञापनों सहित। अब विज्ञापन आए तो चैनल बदल दिया जाता है, इस चैनल से उस चैनल पर कूद-फाँद जारी रहती है। विकल्पों के अपने लाभ हैं लेकिन इसकी एक हानि यह है कि इसने इस पीढ़ी से धैर्य छीन लिया है। ज़रा-सा उनके मन का नहीं हुआ तो वे कोप भवन में जाने को प्रवृत्त हो जाते हैं। छोटी-छोटी बातों पर बच्चों के घर छोड़कर चले जाने के किस्से आम हो गए हैं। सिंगल चाइल्ड होना एक मनोवैज्ञानिक कारण हो सकता है लेकिन केवल उतना भर नहीं है। शंकराचार्य भी अकेले बेटे थे, नचिकेता भी इकलौते थे लेकिन उनमें जो धीर था, वह अब कहाँ है? हो सकता है आप कहेंगे कि वे महान् थे और आम बच्चे ऐसे नहीं होते पर आप यह भी भूल जाते हैं कि अब बच्चों को वैसे महान् या कह लीजिए आदर्श हालात भी नसीब नहीं होते। चाणक्य के नाम से जाने जाते इकलौते बेटे विष्णु गुप्त ने आजीवन आम-सा जीवन जीया। आज के बच्चे घर में भी अप-टु-डेट रहना चाहते हैं, खुद को अपडेटेड रखना चाहते हैं। यह अच्छी बात है कि फ़ैशन की दुनिया से लेकर अपने कैरियर तक वे पहले की पीढ़ी से कहीं अधिक सजग हैं। लेकिन राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक उथल-पुथल से उन्हें उतना वास्ता नहीं रहा है, वे इस तरह की बहसों में शामिल नहीं होते न उनकी वैसी रुचि है। उनके पास ढेरों विकल्प हैं। लेकिन ये विकल्प उन्हें एक जगह टिकने नहीं दे रहे, वे पल में इस ओर झुकते हैं पल में दूसरी ओर। किसी एक विषय पर चिंतन करना, घंटों मनन करना उन्हें नहीं भाता। मोटी किताबें वे नहीं पढ़ते, वे यू-ट्यूब पर जाकर ज्ञान वृद्धि करना चाहते हैं, वहाँ भी 11 सेकंड में उन्हें ग्रिप नहीं लगी तो फिर वे चैनल बदल लेते हैं। परिवर्तन संसार का नियम है लेकिन इतनी तेज़ी से बदलाव कि कुछ सेकंड भी न रुक पाए। दो मिनट की मैगी भी दो मिनट में कभी नहीं बनती, छप्पन भोग या पंच पकवान की थाली बनने में तो और भी समय लगता है। जो जितनी जल्दी बनता है उसका स्वाद और जो जितने लंबे समय में पककर तैयार होता है उसका स्वाद और उसका टिकाऊपन अनुभवों से ही जाना जा सकता है। अलबत्ता आज की पीढ़ी जेन ज़ेड (Z) से भी आगे की है। जनरेशन मिलीनियम जिसे जनरेशन वाई (Y) कहा जाता था वे लोग माने गए जो वर्ष 1978 से 2000 के बीच जन्मे थे, उसके बाद की पीढ़ी मिलेनियल (सन् 1981 से 1995 तक जन्मे) और उसकी भी अगली पीढ़ी जनरेशन ज़ेड (Z) है जो सन् 1996 से 2005 के बीच जन्मे और आज के युवाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
वह सार्वजनिक परिवहन से यात्रा का आम दिन था। भीड़ थी, भीड़ में युवाओं की संख्या भी अच्छी-खासी थी। अधिकांश के कानों में इयर फ़ोन लगा था और सब अपनी पसंद के गीतों पर झूम रहे थे, मन ही मन गुनगुना रहे थे या आनंद ले रहे थे। इसे आनंद के निजीकरण का उदाहरण कह सकते हैं। अब सबकी खुशी अपनी खुशी, सबका दुःख अपना नहीं रह गया है, वैसा ही कुछ यह भी था। ख़ैर इतने में कंडक्टर ने उस लड़की से कुछ पूछा, उसने अपने कानों में से इयर फ़ोन निकाला और प्रश्नार्थक निगाह डाली, हैडफ़ोन के बाहर रैना बीती जाए. . . सुनाई पड़ने लगा, उस लड़की की झल्लाहट और बढ़ गई और उसने तुरंत रेडियो चैनल बदला और फिर कंडक्टर से मुख़ातिब हुई। मैं अभी उस रैना बीती जाए का आनंद पूरा ले भी नहीं पाई थी कि कुछ ढिंकचैक म्यूज़िक शुरू हो गया। सबकी अपनी-अपनी पसंद होती है और नई पीढ़ी की पसंद हमेशा पुरानी से अलग ही होती है पर इस पीढ़ी के पास कई विकल्प हैं, वैसे हमारे पास नहीं थे। उस दौर के एक ही रेडियो स्टेशन पर जो लग जाता था, वह सुनना पड़ता था, बीच में आने वाले विज्ञापनों सहित। अब विज्ञापन आए तो चैनल बदल दिया जाता है, इस चैनल से उस चैनल पर कूद-फाँद जारी रहती है। विकल्पों के अपने लाभ हैं लेकिन इसकी एक हानि यह है कि इसने इस पीढ़ी से धैर्य छीन लिया है। ज़रा-सा उनके मन का नहीं हुआ तो वे कोप भवन में जाने को प्रवृत्त हो जाते हैं। छोटी-छोटी बातों पर बच्चों के घर छोड़कर चले जाने के किस्से आम हो गए हैं। सिंगल चाइल्ड होना एक मनोवैज्ञानिक कारण हो सकता है लेकिन केवल उतना भर नहीं है। शंकराचार्य भी अकेले बेटे थे, नचिकेता भी इकलौते थे लेकिन उनमें जो धीर था, वह अब कहाँ है? हो सकता है आप कहेंगे कि वे महान् थे और आम बच्चे ऐसे नहीं होते पर आप यह भी भूल जाते हैं कि अब बच्चों को वैसे महान् या कह लीजिए आदर्श हालात भी नसीब नहीं होते। चाणक्य के नाम से जाने जाते इकलौते बेटे विष्णु गुप्त ने आजीवन आम-सा जीवन जीया। आज के बच्चे घर में भी अप-टु-डेट रहना चाहते हैं, खुद को अपडेटेड रखना चाहते हैं। यह अच्छी बात है कि फ़ैशन की दुनिया से लेकर अपने कैरियर तक वे पहले की पीढ़ी से कहीं अधिक सजग हैं। लेकिन राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक उथल-पुथल से उन्हें उतना वास्ता नहीं रहा है, वे इस तरह की बहसों में शामिल नहीं होते न उनकी वैसी रुचि है। उनके पास ढेरों विकल्प हैं। लेकिन ये विकल्प उन्हें एक जगह टिकने नहीं दे रहे, वे पल में इस ओर झुकते हैं पल में दूसरी ओर। किसी एक विषय पर चिंतन करना, घंटों मनन करना उन्हें नहीं भाता। मोटी किताबें वे नहीं पढ़ते, वे यू-ट्यूब पर जाकर ज्ञान वृद्धि करना चाहते हैं, वहाँ भी ग्यारह सेकंड में उन्हें ग्रिप नहीं लगी तो फिर वे चैनल बदल लेते हैं। परिवर्तन संसार का नियम है लेकिन इतनी तेज़ी से बदलाव कि कुछ सेकंड भी न रुक पाए। दो मिनट की मैगी भी दो मिनट में कभी नहीं बनती, छप्पन भोग या पंच पकवान की थाली बनने में तो और भी समय लगता है। जो जितनी जल्दी बनता है उसका स्वाद और जो जितने लंबे समय में पककर तैयार होता है उसका स्वाद और उसका टिकाऊपन अनुभवों से ही जाना जा सकता है। अलबत्ता आज की पीढ़ी जेन ज़ेड से भी आगे की है। जनरेशन मिलीनियम जिसे जनरेशन वाई कहा जाता था वे लोग माने गए जो वर्ष एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर से दो हज़ार के बीच जन्मे थे, उसके बाद की पीढ़ी मिलेनियल और उसकी भी अगली पीढ़ी जनरेशन ज़ेड है जो सन् एक हज़ार नौ सौ छियानवे से दो हज़ार पाँच के बीच जन्मे और आज के युवाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आप अगर आज शहर में निकल रहे हैं तो बड़े वाहन लेकर बिल्कुल भी न जाएं। क्योंकि ईद-उल-अजहा (बकरीद) के त्योहार को देखते हुए शहर में रूट डायवर्जन की व्यवस्था लागू की गर्इ है और कई इलाकों व चौराहों पर भारी वाहन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे। बकरीद पर नमाज अदा करने के साथ ही कुर्बानी की रस्म अदा की जाएगी, जिसके चलते यातायात पुलिस ने यह व्यवस्था लागू की है। डायवर्जन की व्यवस्था सुबह 7 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक लागू रहेगी और शहर में आने वाले हर व्यक्ति को इसका पालन करना होगा। कई मार्गों पर वाहन ले जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। (अ)- सभी भारी वाहन, हल्के वाहन, जिसमें चार पहिया वाहन एंव ऑटो रिक्शा व ई-रिक्शा सम्मिलित है, उनके लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। 1. बन्नादेवी फायर सर्विस वाले तिराह से गूलर रोड तथा रघुवीर रोड की ओर। 2. मसूदाबाद चौराहे से जमीराबाद चौराहे की ओर। 3. रसलगंज चौराहे से मलखान सिंह की ओर। 4. कवरकुत्ता तिराहे से रेलवे रोड की ओर। 5. आगरा रोड से मामू भान्जा की ओर। 6. मदारगेट तिराहे से हलवाई खाना की ओर। 7. सासनीगेट चौराहे से भुजपुरा की ओर। 8. इगलास रोड से कासिम नगर बाईपास की ओर। 9-खैर रोड पर गोन्डा तिराहे से देहलीगेट चौराहे की ओर। 10-गोण्डा रोड बाइ्रपास पुलिस चौकी कुतुबपुर शाह से रोरावर की ओर। (ब)-समस्त प्रकार के भारी वाहन, चार पहिया वाहन के साथ-साथ दो पहिया वाहन ई-रिक्शा, ऑटो, हाथ गाड़ी, बैलगाड़ी, भैंसाबुग्गी, ट्रैक्टर ट्राली आदि सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश इस तरह प्रतिबन्धित रहेगा। 2. खैर रोड पशुचिकित्सालय के पास स्थित सम्पूर्ण मार्ग। 3. खटीकान चौराहे से खैर रोड की ओर। 4. हीरानगर चौराहे से खैर रोड की ओर। 5. हीरानगर चौराहे से पटपटगंज तिराहे की ओर। 6. हीरागंज चौराहे से चरखवलान की ओर। 8. करवला से ईदगाह की ओर। 9. महेशपुर फाटक से क्वार्सी चौराहे की ओर। 10. जमालपुर फाटक से चौकी जमालपुर की ओर। 11. पुरानी चुंगी से जमालपुर की ओर। रूट डायवर्जन की व्यवस्था तो सुबह 7 बजे से लागू होगी। लेकिन भारी वाहनों की नो-इन्ट्री सुबह 5 बजे से ही लागू हो जाएगी। एसपी ट्रैफिक मुकेश कुमार उत्तम ने बताया कि यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कर्मियों की ड्यूटियां निर्धारित कर दी गई हैं। अगर कोई नियमों को तोड़ेगा तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आप अगर आज शहर में निकल रहे हैं तो बड़े वाहन लेकर बिल्कुल भी न जाएं। क्योंकि ईद-उल-अजहा के त्योहार को देखते हुए शहर में रूट डायवर्जन की व्यवस्था लागू की गर्इ है और कई इलाकों व चौराहों पर भारी वाहन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे। बकरीद पर नमाज अदा करने के साथ ही कुर्बानी की रस्म अदा की जाएगी, जिसके चलते यातायात पुलिस ने यह व्यवस्था लागू की है। डायवर्जन की व्यवस्था सुबह सात बजे से लेकर शाम पाँच बजे तक लागू रहेगी और शहर में आने वाले हर व्यक्ति को इसका पालन करना होगा। कई मार्गों पर वाहन ले जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। - सभी भारी वाहन, हल्के वाहन, जिसमें चार पहिया वाहन एंव ऑटो रिक्शा व ई-रिक्शा सम्मिलित है, उनके लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। एक. बन्नादेवी फायर सर्विस वाले तिराह से गूलर रोड तथा रघुवीर रोड की ओर। दो. मसूदाबाद चौराहे से जमीराबाद चौराहे की ओर। तीन. रसलगंज चौराहे से मलखान सिंह की ओर। चार. कवरकुत्ता तिराहे से रेलवे रोड की ओर। पाँच. आगरा रोड से मामू भान्जा की ओर। छः. मदारगेट तिराहे से हलवाई खाना की ओर। सात. सासनीगेट चौराहे से भुजपुरा की ओर। आठ. इगलास रोड से कासिम नगर बाईपास की ओर। नौ-खैर रोड पर गोन्डा तिराहे से देहलीगेट चौराहे की ओर। दस-गोण्डा रोड बाइ्रपास पुलिस चौकी कुतुबपुर शाह से रोरावर की ओर। -समस्त प्रकार के भारी वाहन, चार पहिया वाहन के साथ-साथ दो पहिया वाहन ई-रिक्शा, ऑटो, हाथ गाड़ी, बैलगाड़ी, भैंसाबुग्गी, ट्रैक्टर ट्राली आदि सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश इस तरह प्रतिबन्धित रहेगा। दो. खैर रोड पशुचिकित्सालय के पास स्थित सम्पूर्ण मार्ग। तीन. खटीकान चौराहे से खैर रोड की ओर। चार. हीरानगर चौराहे से खैर रोड की ओर। पाँच. हीरानगर चौराहे से पटपटगंज तिराहे की ओर। छः. हीरागंज चौराहे से चरखवलान की ओर। आठ. करवला से ईदगाह की ओर। नौ. महेशपुर फाटक से क्वार्सी चौराहे की ओर। दस. जमालपुर फाटक से चौकी जमालपुर की ओर। ग्यारह. पुरानी चुंगी से जमालपुर की ओर। रूट डायवर्जन की व्यवस्था तो सुबह सात बजे से लागू होगी। लेकिन भारी वाहनों की नो-इन्ट्री सुबह पाँच बजे से ही लागू हो जाएगी। एसपी ट्रैफिक मुकेश कुमार उत्तम ने बताया कि यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कर्मियों की ड्यूटियां निर्धारित कर दी गई हैं। अगर कोई नियमों को तोड़ेगा तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Fatehpur News: हिन्दू संगठनों सहित भाजपा नेता व महिला संगठनों ने किया प्रदर्शन, डीएम को दिया ज्ञापन। Fatehpur: जिले में हिन्दू युवती को दोस्ती करने के बाद प्रेम जाल में फंसाकर अपहरण करने के बाद जबरन दुष्कर्म किया और ईंट से सिर कुचकर हत्या करने के मामले में हिंदू संगठनों ने आरोपी युवक को फांसी देने के मांग की है। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, बजरंग दल हिंदुस्तान, भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं सहित महिला संगठनों के सैकड़ों लोगों ने नहर कालोनी से जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे और डीएम, एसपी को ज्ञापन सौंपा। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे हिन्दू संगठनों सहित भाजपा नेता व कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों ने डीएम को ज्ञापन दिया। प्रांतीय उपाध्यक्ष वीरेंद्र पांडेय ने कहा कि 22 जून को एक हिन्दू युवती को बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के फरीदपुर गांव स्थित एक मैरिज लॉज से लव जिहाद में आरोपी युवक सोनू उर्फ सिकंदर घोसी ने मिलने के बहाने बाहर बुलाया और उसका अपहरण करने के बाद सामूहिक दुष्कर्म किया। उसके बाद युवती को ईंट से बुरी तरह सिर कुचकर भाग गया था। युवती की कानपुर हैलट में इलाज के दौरान 26 जून को मौत हो गई, पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन उसके साथ अन्य लोगों की गिरफ्तारी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि हम लोगों की मांग है कि आरोपी युवक को फांसी देने के साथ आरोपी के गैर कानूनी ढंग से अर्जित की गई संपति को जिला प्रशासन अपने कब्जे में ले साथ ही उसका मकान पूरी तरह से तोड़ा जाए। ज्ञापन देने से पहले भीड़ के रूप में पहुंचे लोगों को रोकने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर का गेट बंद करा दिया गया था और भारी संख्या में पुलिस व पीएसी बल तैनात किया गए थे। सभी की मांग रही कि बाहर आकर डीएम, एसपी ज्ञापन लें और कार्यवाही का भरोसा दें जब दोनों अधिकारियों ने प्रतिनिधि मंडल को चेम्बर में आने की बात कही तो कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा शुरू हो गया। मौके पर एएसपी विजय शंकर मिश्रा ने ज्ञापन लिया और प्रतिनिधिमंडल को दोनों अधिकारियों से वार्ता करायी।
Fatehpur News: हिन्दू संगठनों सहित भाजपा नेता व महिला संगठनों ने किया प्रदर्शन, डीएम को दिया ज्ञापन। Fatehpur: जिले में हिन्दू युवती को दोस्ती करने के बाद प्रेम जाल में फंसाकर अपहरण करने के बाद जबरन दुष्कर्म किया और ईंट से सिर कुचकर हत्या करने के मामले में हिंदू संगठनों ने आरोपी युवक को फांसी देने के मांग की है। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, बजरंग दल हिंदुस्तान, भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं सहित महिला संगठनों के सैकड़ों लोगों ने नहर कालोनी से जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे और डीएम, एसपी को ज्ञापन सौंपा। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे हिन्दू संगठनों सहित भाजपा नेता व कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों ने डीएम को ज्ञापन दिया। प्रांतीय उपाध्यक्ष वीरेंद्र पांडेय ने कहा कि बाईस जून को एक हिन्दू युवती को बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के फरीदपुर गांव स्थित एक मैरिज लॉज से लव जिहाद में आरोपी युवक सोनू उर्फ सिकंदर घोसी ने मिलने के बहाने बाहर बुलाया और उसका अपहरण करने के बाद सामूहिक दुष्कर्म किया। उसके बाद युवती को ईंट से बुरी तरह सिर कुचकर भाग गया था। युवती की कानपुर हैलट में इलाज के दौरान छब्बीस जून को मौत हो गई, पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन उसके साथ अन्य लोगों की गिरफ्तारी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि हम लोगों की मांग है कि आरोपी युवक को फांसी देने के साथ आरोपी के गैर कानूनी ढंग से अर्जित की गई संपति को जिला प्रशासन अपने कब्जे में ले साथ ही उसका मकान पूरी तरह से तोड़ा जाए। ज्ञापन देने से पहले भीड़ के रूप में पहुंचे लोगों को रोकने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर का गेट बंद करा दिया गया था और भारी संख्या में पुलिस व पीएसी बल तैनात किया गए थे। सभी की मांग रही कि बाहर आकर डीएम, एसपी ज्ञापन लें और कार्यवाही का भरोसा दें जब दोनों अधिकारियों ने प्रतिनिधि मंडल को चेम्बर में आने की बात कही तो कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा शुरू हो गया। मौके पर एएसपी विजय शंकर मिश्रा ने ज्ञापन लिया और प्रतिनिधिमंडल को दोनों अधिकारियों से वार्ता करायी।
(आते हुए) ने नही, उस ( चौक कर ) तुम पोताम्बर ठेवदार तुम तो मुचे पहचानत हो। मैं सुल्ताना वा नायब पीताम्बर हू पीताम्बर । ( डरकर ) पीताम्बर । (फुसफुसाकर ) ठेगर जी, यह पीताम्बर हो है यह सुल्ताना से भी ज्यादा जालिम है । घुबेर सिंह as मैंने मारा है। पत्ररदार । काई यहां से भागने की काशिश न करे । किसी न भी हरक्त की तो इस बहुप की गाली से मैं उसे पुजारिन तुम तो बहुत सु हो ! पीताम्बर, सुल्ताना रहा है ? ठेकेदार, जब धम्पा नटनी तुम्हारी चिटठी लेकर पहुंची, तो हमारा सरदार सुल्ताना अपनी का इलाज करा रहा था । सो मरदार ने मुझे हुक्म दिया, "पताम्बर फारेस्ट आफिसर सिंह ने मेरी भेना परदूरी नजर डालने वा जुम किया है। गिरोह के श्रादमी लेकर फौरन लाल ढाग पहुंचा और उस वदमाश अफसर का ठिकान लगा दो और मैंने एक गाली से उस बदमाश अफसर ठिकान लगा दिया। उस राणा रेंजर को भी घायल कर दिया (दुख से) ठेवदार तुमन यह सब क्या किया ? क्या तुम्हें विश्वास नहीं था कि मैं (दूर से गोलिया चलने और लोगो के चीखने चिल्लाने शोर सुनाई देता है।) पीताम्बर वस्ती में यह गालिया क्या चल रही ह (हसर) आज हमें इसका भी लूटन का बहाना मित्र गया। जित वस्ती म हमारे सरकार को बहुत पर बुरी नज़र डाली गई है उससजा मिलनी चाहिए। सोमैन अपन प्रामिया का हुक्म दिया, तूट लो इस बस्ती
ने नही, उस तुम पोताम्बर ठेवदार तुम तो मुचे पहचानत हो। मैं सुल्ताना वा नायब पीताम्बर हू पीताम्बर । पीताम्बर । ठेगर जी, यह पीताम्बर हो है यह सुल्ताना से भी ज्यादा जालिम है । घुबेर सिंह as मैंने मारा है। पत्ररदार । काई यहां से भागने की काशिश न करे । किसी न भी हरक्त की तो इस बहुप की गाली से मैं उसे पुजारिन तुम तो बहुत सु हो ! पीताम्बर, सुल्ताना रहा है ? ठेकेदार, जब धम्पा नटनी तुम्हारी चिटठी लेकर पहुंची, तो हमारा सरदार सुल्ताना अपनी का इलाज करा रहा था । सो मरदार ने मुझे हुक्म दिया, "पताम्बर फारेस्ट आफिसर सिंह ने मेरी भेना परदूरी नजर डालने वा जुम किया है। गिरोह के श्रादमी लेकर फौरन लाल ढाग पहुंचा और उस वदमाश अफसर का ठिकान लगा दो और मैंने एक गाली से उस बदमाश अफसर ठिकान लगा दिया। उस राणा रेंजर को भी घायल कर दिया ठेवदार तुमन यह सब क्या किया ? क्या तुम्हें विश्वास नहीं था कि मैं पीताम्बर वस्ती में यह गालिया क्या चल रही ह आज हमें इसका भी लूटन का बहाना मित्र गया। जित वस्ती म हमारे सरकार को बहुत पर बुरी नज़र डाली गई है उससजा मिलनी चाहिए। सोमैन अपन प्रामिया का हुक्म दिया, तूट लो इस बस्ती
हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर में चोरों ने BBMB कॉलोनी में बने क्वाटर से हजारों रुपए के आभूषणों को चोरी कर लिया। पुलिस ने क्वाटर मालिक की शिकायत पर चोरी का मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। BBMB कॉलोनी निवासी विजय कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह छ़टि्टयों में परिवार के साथ बाहर गया हुआ था। जब वह वापस लौटा तो क्वाटर का ताला टूटा हुआ था। जब उसने अंदर जाकर देखा तो सारा सामान बिखरा हुआ था और मंगल सुत्र, अंगूठी, चांदी की पाजेब, चूडी समेत अन्य आभूषण गायब थे। सामान की कुल कीमत लगभग 80 हजार रुपए थी। पुलिस ने विजय की शिकायत के आधार पर चोरी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर में चोरों ने BBMB कॉलोनी में बने क्वाटर से हजारों रुपए के आभूषणों को चोरी कर लिया। पुलिस ने क्वाटर मालिक की शिकायत पर चोरी का मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। BBMB कॉलोनी निवासी विजय कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह छ़टि्टयों में परिवार के साथ बाहर गया हुआ था। जब वह वापस लौटा तो क्वाटर का ताला टूटा हुआ था। जब उसने अंदर जाकर देखा तो सारा सामान बिखरा हुआ था और मंगल सुत्र, अंगूठी, चांदी की पाजेब, चूडी समेत अन्य आभूषण गायब थे। सामान की कुल कीमत लगभग अस्सी हजार रुपए थी। पुलिस ने विजय की शिकायत के आधार पर चोरी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हमने देखे हैं बहुत दोस्त और दुश्मन भी, किन्तु काँटों से बड़ा कोई पड़ोसी न मिला। दूर घाटी में चहकते हुए इन फूलों को, संग और साथ निभाने को हितैषी न मिला।। बन्द पलकों में सजे स्वप्न चाँद-तारों के, जब खुली आँख हुए दूर भ्रम नज़ारों के, अज़नबी शहर में कोई भी स्वदेशी न मिला। संग और साथ निभाने को हितैषी न मिला।। टेढ़ी-मेड़ी थी डगर, ज़िन्दगी की मंजिल की, देख तूफान को बढ़ जाती थी धड़कन दिल की, सिर छिपाने को, कहीं द्वार-दरेशी न मिला। संग और साथ निभाने को हितैषी न मिला।। हर मुहल्ले, गली-चौराहे और बस्ती में, लोग मशग़ूल दिखे, हमको बुतपरस्ती में, जो करम हम पे करे, ऐसा उवैसी न मिला। संग और साथ निभाने को हितैषी न मिला।। "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए "आपका ब्लॉग" तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको "आपका ब्लॉग" पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। "गीत-...हितैषी न मिला" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
हमने देखे हैं बहुत दोस्त और दुश्मन भी, किन्तु काँटों से बड़ा कोई पड़ोसी न मिला। दूर घाटी में चहकते हुए इन फूलों को, संग और साथ निभाने को हितैषी न मिला।। बन्द पलकों में सजे स्वप्न चाँद-तारों के, जब खुली आँख हुए दूर भ्रम नज़ारों के, अज़नबी शहर में कोई भी स्वदेशी न मिला। संग और साथ निभाने को हितैषी न मिला।। टेढ़ी-मेड़ी थी डगर, ज़िन्दगी की मंजिल की, देख तूफान को बढ़ जाती थी धड़कन दिल की, सिर छिपाने को, कहीं द्वार-दरेशी न मिला। संग और साथ निभाने को हितैषी न मिला।। हर मुहल्ले, गली-चौराहे और बस्ती में, लोग मशग़ूल दिखे, हमको बुतपरस्ती में, जो करम हम पे करे, ऐसा उवैसी न मिला। संग और साथ निभाने को हितैषी न मिला।। "उच्चारण" एक हज़ार नौ सौ छियानवे से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए "आपका ब्लॉग" तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति
हरियाणा के रेवाड़ी में युवक से मोबाइल फोन व नकदी छीनने वाले दोषी को बुधवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सुशील कुमार गर्ग की अदालत ने 5 साल की सजा सुनाई है। साथ ही उसके उपर जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर उसे अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। उसे एक दिन पहले ही कोर्ट ने दोषी करार दिया था। मिली जानकारी के अनुसार, यूपी के जिला सिद्धार्थ नगर के गांव बनकटा मिठवल बांसी बंसी निवासी नागेश्वर 18 अगस्त 2021 को वह रोजगार की तलाश में यूपी से धारूहेड़ा आया था। रात बिताने के लिए वह औद्योगिक क्षेत्र में एक बंद चाय की दुकान के सामने बैठ गया। इसी दौरान बाइक पर सामने से आए दो युवक आए। बदमाशों ने उसको अकेला देखकर उससे पूछताछ की और फिर वहीं दबोच लिया। बदमाशों ने उसका मोबाइल व बैग छीन लिया। बैग में कपड़े के साथ 1300 रुपए थे। विरोध करने पर आरोपियों ने पीड़ित के साथ मारपीट भी की। सुबह जब लोग पहुंचे तो पीड़ित ने अपने साथ हुई वारदात की जानकारी दी। साथ ही इसकी सूचना धारूहेड़ा थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस भी तुरंत मौके पर पहुंची और बताए गए हुलिया के अनुसार मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने जांच के बाद एक आरोपी धारूहेड़ा निवासी संदीप उर्फ हीनू को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों व गवाहों के बयान के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सुशील कुमार गर्ग की अदालत ने मंगलवार को उसे दोषी करार दे दिया है। बुधवार दोपहर बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए संदीप को 5 साल की सजा सुनाई और उस पर जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना नहीं भरने पर संदीप को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हरियाणा के रेवाड़ी में युवक से मोबाइल फोन व नकदी छीनने वाले दोषी को बुधवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सुशील कुमार गर्ग की अदालत ने पाँच साल की सजा सुनाई है। साथ ही उसके उपर जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर उसे अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। उसे एक दिन पहले ही कोर्ट ने दोषी करार दिया था। मिली जानकारी के अनुसार, यूपी के जिला सिद्धार्थ नगर के गांव बनकटा मिठवल बांसी बंसी निवासी नागेश्वर अट्ठारह अगस्त दो हज़ार इक्कीस को वह रोजगार की तलाश में यूपी से धारूहेड़ा आया था। रात बिताने के लिए वह औद्योगिक क्षेत्र में एक बंद चाय की दुकान के सामने बैठ गया। इसी दौरान बाइक पर सामने से आए दो युवक आए। बदमाशों ने उसको अकेला देखकर उससे पूछताछ की और फिर वहीं दबोच लिया। बदमाशों ने उसका मोबाइल व बैग छीन लिया। बैग में कपड़े के साथ एक हज़ार तीन सौ रुपयापए थे। विरोध करने पर आरोपियों ने पीड़ित के साथ मारपीट भी की। सुबह जब लोग पहुंचे तो पीड़ित ने अपने साथ हुई वारदात की जानकारी दी। साथ ही इसकी सूचना धारूहेड़ा थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस भी तुरंत मौके पर पहुंची और बताए गए हुलिया के अनुसार मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने जांच के बाद एक आरोपी धारूहेड़ा निवासी संदीप उर्फ हीनू को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों व गवाहों के बयान के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सुशील कुमार गर्ग की अदालत ने मंगलवार को उसे दोषी करार दे दिया है। बुधवार दोपहर बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए संदीप को पाँच साल की सजा सुनाई और उस पर जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना नहीं भरने पर संदीप को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
वाशिंगटन, (भाषा)। अमेरिका के राष्ट्रपति पद के प्रतिद्वंदी उम्मीदवारों में इसकी विदेश नीति को लेकर कितने ही मतभेद क्यों न हों लेकिन यदि बात भारत और जापान को समर्थन देने की आती है तो दोनों ही उसके पक्ष में हैं। वाशिंगटन के एक प्रतिष्"ित थिंकटैंक ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूट द्वारा ओबामा और रोमनी के चुनाव अभियानों पर आयोजित चर्चा में इस बात पर भी सहमति बनी कि दोनों उम्मीदवार पाकिस्तान के लिए अमेरिकी नीति पर भी एक राय रखते हैं। बराक ओबामा के चुनावी अभियान की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार समिति की सह अध्यक्षा मिशेल फ्लर्नी कहती हैं,भारत एक ऐसा क्षेत्र है जिसे दोनों पक्षों की ओर से समर्थन प्राप्त है। सुरक्षा के क्षेत्र में भारत महत्वपूर्ण सहयोगी है और हमारा सैन्य संबंध उससे कभी टूटा नहीं है बल्कि लगातार बढ़ रहा है। भारत और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यासों के बारे में फ्लर्नी ने कहा कि दस्युता और अन्य खतरों से निपटने के लिए दोनों देश अब हिंद महासागर में पहले से भी ज्यादा सैन्य अभ्यास कर रहे हैं। फ्लर्नी ने कहा कि एशिया में भारत अमेरिका के लिए एक ताकतवर सहयोगी है। ओबामा प्रशासन ने भारत के साथ संबंधों में बहुत निवेश किया है। रोमनी के चुनावी अभियान की विदेश और रक्षा नीति के वरिष्" सलाहाकार रिच विलियमसन ने भी फ्लर्नी के इन बयानों से सहमति जताई और भारत के साथ संबंध मजबूत बनाने के लिए पूर्व राष्ट्रपति बुश के प्रशासन की तारीफ की।
वाशिंगटन, । अमेरिका के राष्ट्रपति पद के प्रतिद्वंदी उम्मीदवारों में इसकी विदेश नीति को लेकर कितने ही मतभेद क्यों न हों लेकिन यदि बात भारत और जापान को समर्थन देने की आती है तो दोनों ही उसके पक्ष में हैं। वाशिंगटन के एक प्रतिष्"ित थिंकटैंक ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूट द्वारा ओबामा और रोमनी के चुनाव अभियानों पर आयोजित चर्चा में इस बात पर भी सहमति बनी कि दोनों उम्मीदवार पाकिस्तान के लिए अमेरिकी नीति पर भी एक राय रखते हैं। बराक ओबामा के चुनावी अभियान की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार समिति की सह अध्यक्षा मिशेल फ्लर्नी कहती हैं,भारत एक ऐसा क्षेत्र है जिसे दोनों पक्षों की ओर से समर्थन प्राप्त है। सुरक्षा के क्षेत्र में भारत महत्वपूर्ण सहयोगी है और हमारा सैन्य संबंध उससे कभी टूटा नहीं है बल्कि लगातार बढ़ रहा है। भारत और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यासों के बारे में फ्लर्नी ने कहा कि दस्युता और अन्य खतरों से निपटने के लिए दोनों देश अब हिंद महासागर में पहले से भी ज्यादा सैन्य अभ्यास कर रहे हैं। फ्लर्नी ने कहा कि एशिया में भारत अमेरिका के लिए एक ताकतवर सहयोगी है। ओबामा प्रशासन ने भारत के साथ संबंधों में बहुत निवेश किया है। रोमनी के चुनावी अभियान की विदेश और रक्षा नीति के वरिष्" सलाहाकार रिच विलियमसन ने भी फ्लर्नी के इन बयानों से सहमति जताई और भारत के साथ संबंध मजबूत बनाने के लिए पूर्व राष्ट्रपति बुश के प्रशासन की तारीफ की।
साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया समेत कई पहलवान बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. नई दिल्ली. महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न करने के आरोपी बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर खुद को निर्दोष बताया है. भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने जांच में सहयोगी की बात भी कही है. बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अगर उन पर एक भी प्रकरण साबित हो जाए तो वे फांसी पर लटक जाएंगे. साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया समेत कई पहलवान बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उधर, साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया समेत कई पहलवानों का बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है. इस बीच द्रोणाचार्य अवॉर्डी महावीर फोगाट का बयान भी सामने आया है. महावीर फोगाट ने एक टीवी चैनल से कहा कि उनसे बेटियों की हालत देखी नहीं जा रही है. अगर सरकार इस मामले में कोई एक्शन नहीं लेती है तो पूरा देश एकजुट होकर आंदोलन करेगा. .
साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया समेत कई पहलवान बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. नई दिल्ली. महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न करने के आरोपी बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर खुद को निर्दोष बताया है. भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने जांच में सहयोगी की बात भी कही है. बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अगर उन पर एक भी प्रकरण साबित हो जाए तो वे फांसी पर लटक जाएंगे. साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया समेत कई पहलवान बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उधर, साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया समेत कई पहलवानों का बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है. इस बीच द्रोणाचार्य अवॉर्डी महावीर फोगाट का बयान भी सामने आया है. महावीर फोगाट ने एक टीवी चैनल से कहा कि उनसे बेटियों की हालत देखी नहीं जा रही है. अगर सरकार इस मामले में कोई एक्शन नहीं लेती है तो पूरा देश एकजुट होकर आंदोलन करेगा. .
नई दिल्ली, (भाषा)। अगला विश्व चैंपियन कौन होगा? क्या भारत अपनी सरजमीं पर विश्व कप 2011 जीतने में सफल होगा या कोई और विजेता बनकर उभरेगा? इन सवालों का जवाब दो अप्रैल को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में होने वाले दिन-रात्रि के खिताबी मुकाबले के बाद मिल जाएगा। क्रिकेट के चाहने वालों को उम्मीद रहेगी कि यह स्टेडियम निर्माण कार्य संबंधी चिंताओं को दूर करते हुए ऐतिहासिक समापन समारोह और फाइनल मैच का गवाह बने। उपमहाद्वीप में 19 फरवरी से शुरू हो रहे विश्व कप के तीन मुकाबले वानखेड़े स्टेडियम में आयोजित होंगे जिसमें 13 मार्च को कनाडा बनाम न्यूजीलैंड, 18 मार्च को न्यूजीलैंड बनाम श्रीलंका (दिन-रात्रि) और दो अप्रैल को फाइनल मैच शामिल है। मुंबई के इस स्टेडियम में अब तक 15 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जा चुके हैं जिसमें से 14 मैच मेजबान भारत ने खेले हैं। भारत ने इनमें से आ" मैच जीते हैं जबकि छह में उसे हार का सामना करना पड़ा। विश्व कप के यहां तीन मैच खेले जा चुके हैं जिसमें दो मैच विश्व कप 1987 में जबकि एक मैच विश्व कप 1987 के दौरान खेला गया था। वानखेड़े स्टेडियम में आज तक कोई भी टीम वनडे में 300 या इससे रन बनाने में सफल नहीं रही है। इस मैदान पर सर्वोच्च स्कोर 17 जनवरी 1987 को खेले गए पहले वनडे में बना था। भारत और श्रीलंका के बीच हुए इस मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए मोहम्मद अजहरूद्दीन (108) के नाबाद शतक की मदद से 40 ओवर में चार विकेट के नुकसान पर 299 रन बनाए थे। जवाब में श्रीलंका सात विकेट पर 289 रन ही बना पायी थी। भारत ने इस मैच में 10 रन से जीत दर्ज की थी। वानखेड़े स्टेडियम में सर्वाधिक रन मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने बनाए हैं जिन्होंने 10 वनडे मैचों में 43-70 की औसत से 437 रन बनाए जिसमें एक शतक और तीन अर्धशतक शामिल हैं। भारतीय तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद के नाम यहां छह वनडे मैचों में सबसे ज्यादा 15 विकेट लेने का रिकार्ड है। भारत की सहमेजबानी में हुए 1987 विश्व कप में ग्रुप ए लीग मैच में भारत ने जिम्बाब्वे को इसी मैदान पर आ" विकेट से मात दी थी जिसमें दायें हाथ के गेंदबाज मनोज प्रभाकर (चार विकेट) को मैन आफ द मैच पुरस्कार से नवाजा गया था। भारत और इंग्लैंड के बीच हुए इसी विश्व कप के सेमीफाइनल में मेजबान टीम को 35 रन से हार झेलनी पड़ी थी जिससे उनका 1983 के बाद लगातार दूसरे विश्व कप के फाइनल में पहुंचने का सपना टूट गया। इंग्लैंड ने इस मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए सलामी बल्लेबाज ग्राहम गूच ः115ः और कप्तान माइक गैटिंग ः56ः के शानदार प्रदर्शन की मदद से 50 ओवर में छह विकेट के नुकसान पर 254 रन बनाए थे। जवाब में पूरी भारतीय टीम 219 रन पर ढेर हो गई थी। वर्ष 1996 विश्व कप में यहां भारत और आस्ट्रेलिया के बीच खेला गया ग्रुप मैच काफी रोमांचक रहा था। आस्ट्रेलिया ने मार्क वा ः126ः के शतक से 258 रन बनाए थे। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की ओर से मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने आतिशी पारी खेली। उन्होंने 84 गेंदों में 90 रन बनाये जिसमें 14 चौके और एक छक्का भी शामिल है। सचिन के आउट होने के बाद भारतीय पारी लड़खड़ा गई और पूरी टीम 242 रन पर आउट हो गई। यह वानखेड़े के मैदान पर खेला गया पहला दिन-रात्रि मैच था। इस मैदान पर खेले गए यादगार मैचों में भारत और दक्षिण अफीका के बीच खेला गया टाइटन कप फाइनल भी शामिल है जिसमें भारत ने 35 रन से जीत दर्ज की थी। वानखेड़े स्टेडियम में अंतिम वनडे मैच भी भारत और आस्ट्रेलिया के बीच ही अक्तूबर 2007 में खेला गया था जिसमें भारत ने दो विकेट से जीत दर्ज की थी और छह विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनर मुरली कार्तिक को मैन आफ द मैच पुरस्कार से नवाजा गया था।
नई दिल्ली, । अगला विश्व चैंपियन कौन होगा? क्या भारत अपनी सरजमीं पर विश्व कप दो हज़ार ग्यारह जीतने में सफल होगा या कोई और विजेता बनकर उभरेगा? इन सवालों का जवाब दो अप्रैल को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में होने वाले दिन-रात्रि के खिताबी मुकाबले के बाद मिल जाएगा। क्रिकेट के चाहने वालों को उम्मीद रहेगी कि यह स्टेडियम निर्माण कार्य संबंधी चिंताओं को दूर करते हुए ऐतिहासिक समापन समारोह और फाइनल मैच का गवाह बने। उपमहाद्वीप में उन्नीस फरवरी से शुरू हो रहे विश्व कप के तीन मुकाबले वानखेड़े स्टेडियम में आयोजित होंगे जिसमें तेरह मार्च को कनाडा बनाम न्यूजीलैंड, अट्ठारह मार्च को न्यूजीलैंड बनाम श्रीलंका और दो अप्रैल को फाइनल मैच शामिल है। मुंबई के इस स्टेडियम में अब तक पंद्रह एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जा चुके हैं जिसमें से चौदह मैच मेजबान भारत ने खेले हैं। भारत ने इनमें से आ" मैच जीते हैं जबकि छह में उसे हार का सामना करना पड़ा। विश्व कप के यहां तीन मैच खेले जा चुके हैं जिसमें दो मैच विश्व कप एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में जबकि एक मैच विश्व कप एक हज़ार नौ सौ सत्तासी के दौरान खेला गया था। वानखेड़े स्टेडियम में आज तक कोई भी टीम वनडे में तीन सौ या इससे रन बनाने में सफल नहीं रही है। इस मैदान पर सर्वोच्च स्कोर सत्रह जनवरी एक हज़ार नौ सौ सत्तासी को खेले गए पहले वनडे में बना था। भारत और श्रीलंका के बीच हुए इस मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए मोहम्मद अजहरूद्दीन के नाबाद शतक की मदद से चालीस ओवर में चार विकेट के नुकसान पर दो सौ निन्यानवे रन बनाए थे। जवाब में श्रीलंका सात विकेट पर दो सौ नवासी रन ही बना पायी थी। भारत ने इस मैच में दस रन से जीत दर्ज की थी। वानखेड़े स्टेडियम में सर्वाधिक रन मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने बनाए हैं जिन्होंने दस वनडे मैचों में तैंतालीस-सत्तर की औसत से चार सौ सैंतीस रन बनाए जिसमें एक शतक और तीन अर्धशतक शामिल हैं। भारतीय तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद के नाम यहां छह वनडे मैचों में सबसे ज्यादा पंद्रह विकेट लेने का रिकार्ड है। भारत की सहमेजबानी में हुए एक हज़ार नौ सौ सत्तासी विश्व कप में ग्रुप ए लीग मैच में भारत ने जिम्बाब्वे को इसी मैदान पर आ" विकेट से मात दी थी जिसमें दायें हाथ के गेंदबाज मनोज प्रभाकर को मैन आफ द मैच पुरस्कार से नवाजा गया था। भारत और इंग्लैंड के बीच हुए इसी विश्व कप के सेमीफाइनल में मेजबान टीम को पैंतीस रन से हार झेलनी पड़ी थी जिससे उनका एक हज़ार नौ सौ तिरासी के बाद लगातार दूसरे विश्व कप के फाइनल में पहुंचने का सपना टूट गया। इंग्लैंड ने इस मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए सलामी बल्लेबाज ग्राहम गूच ःएक सौ पंद्रहः और कप्तान माइक गैटिंग ःछप्पनः के शानदार प्रदर्शन की मदद से पचास ओवर में छह विकेट के नुकसान पर दो सौ चौवन रन बनाए थे। जवाब में पूरी भारतीय टीम दो सौ उन्नीस रन पर ढेर हो गई थी। वर्ष एक हज़ार नौ सौ छियानवे विश्व कप में यहां भारत और आस्ट्रेलिया के बीच खेला गया ग्रुप मैच काफी रोमांचक रहा था। आस्ट्रेलिया ने मार्क वा ःएक सौ छब्बीसः के शतक से दो सौ अट्ठावन रन बनाए थे। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की ओर से मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने आतिशी पारी खेली। उन्होंने चौरासी गेंदों में नब्बे रन बनाये जिसमें चौदह चौके और एक छक्का भी शामिल है। सचिन के आउट होने के बाद भारतीय पारी लड़खड़ा गई और पूरी टीम दो सौ बयालीस रन पर आउट हो गई। यह वानखेड़े के मैदान पर खेला गया पहला दिन-रात्रि मैच था। इस मैदान पर खेले गए यादगार मैचों में भारत और दक्षिण अफीका के बीच खेला गया टाइटन कप फाइनल भी शामिल है जिसमें भारत ने पैंतीस रन से जीत दर्ज की थी। वानखेड़े स्टेडियम में अंतिम वनडे मैच भी भारत और आस्ट्रेलिया के बीच ही अक्तूबर दो हज़ार सात में खेला गया था जिसमें भारत ने दो विकेट से जीत दर्ज की थी और छह विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनर मुरली कार्तिक को मैन आफ द मैच पुरस्कार से नवाजा गया था।
कांग्रेसी सांसद रवनीत सिंह बिट्टू एक बार फिर चर्चा में बने हुए हैं। दरअसल सांसद रवनीत बिट्टू ने एनएचएआइ को अपनी अधूरी योजनाओं को पूरा करने के लिए कहा है। अधिकारियों ने उनको आश्वासन दिया है कि काम जल्द पूरा होगा। जागरण संवाददाता, लुधियानाः सांसद रवनीत बिट्टू ने शुक्रवार को नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआइ) को साफ चेतावनी दी है कि अगर 31 मार्च तक उन्होंने अपनी अधूरी योजनाओं को पूरा नहीं किया तो लाडोवाली टोल प्लाजा पर ताला जड़ दिया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी अधिकारियों की होगी। सांसद बिट्टू ने प्रेस के नाम जारी बयान में बताया कि कुछ दिन पहले उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसमें एनएचएआइ अधिकारियों से अधूरी योजनाओं को लेकर विस्तृत बातचीत हुई थी। शहर के सभी हाईवे अधूरे पड़े हैं। यहां पर काम कछुआ चाल से चल रहा है। इससे यहां के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। लाडोवाल टोल प्लाजा से हर दिन करोड़ों रुपये एकत्र किए जा रहे हैं। अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। एनएचएआइ अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि 31 मार्च तक वह अपनी सभी अधूरी योजनाओं को पूरा कर देंगे। बता दें कि, रवनीत बिट्टू हमेशा ही अपने तीखे तेवरों को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। जासं, लुधियानाः लोधी क्लब व सेक्रेड हार्ट स्कूल की तरफ से ग्रीन बेल्ट में बनाई पार्किंग मामले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कड़ा संज्ञान लिया है। मामले पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने चार सदस्यों की कमेटी का गठन कर दिया है। इसमें पर्यावरण मंत्रालय, डीसी लुधियाना, निगम कमिश्नर लुधियाना और पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को दो सप्ताह के अंदर मौका देखकर रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट को हर हाल में 15 दिन के अंदर एनजीटी के समक्ष पेश करने के आदेश दिए गए हैं। इंजीनियर कपिल अरोड़ा ने बताया कि लोधी क्लब, सेक्रेड हार्ट स्कूल की तरफ से ग्रीन बेल्ट की जगह अतिक्रमण कर पार्किंग के लिए इस्तेमाल की जा रही है। निगम की तरफ से ढोलेवाल चौक, जगराओं ब्रिज से शेरपुर चौक के दोनों तरफ ग्रीन बेल्ट को पार्किंग में बदला गया है।
कांग्रेसी सांसद रवनीत सिंह बिट्टू एक बार फिर चर्चा में बने हुए हैं। दरअसल सांसद रवनीत बिट्टू ने एनएचएआइ को अपनी अधूरी योजनाओं को पूरा करने के लिए कहा है। अधिकारियों ने उनको आश्वासन दिया है कि काम जल्द पूरा होगा। जागरण संवाददाता, लुधियानाः सांसद रवनीत बिट्टू ने शुक्रवार को नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया को साफ चेतावनी दी है कि अगर इकतीस मार्च तक उन्होंने अपनी अधूरी योजनाओं को पूरा नहीं किया तो लाडोवाली टोल प्लाजा पर ताला जड़ दिया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी अधिकारियों की होगी। सांसद बिट्टू ने प्रेस के नाम जारी बयान में बताया कि कुछ दिन पहले उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसमें एनएचएआइ अधिकारियों से अधूरी योजनाओं को लेकर विस्तृत बातचीत हुई थी। शहर के सभी हाईवे अधूरे पड़े हैं। यहां पर काम कछुआ चाल से चल रहा है। इससे यहां के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। लाडोवाल टोल प्लाजा से हर दिन करोड़ों रुपये एकत्र किए जा रहे हैं। अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। एनएचएआइ अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इकतीस मार्च तक वह अपनी सभी अधूरी योजनाओं को पूरा कर देंगे। बता दें कि, रवनीत बिट्टू हमेशा ही अपने तीखे तेवरों को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। जासं, लुधियानाः लोधी क्लब व सेक्रेड हार्ट स्कूल की तरफ से ग्रीन बेल्ट में बनाई पार्किंग मामले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कड़ा संज्ञान लिया है। मामले पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने चार सदस्यों की कमेटी का गठन कर दिया है। इसमें पर्यावरण मंत्रालय, डीसी लुधियाना, निगम कमिश्नर लुधियाना और पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को दो सप्ताह के अंदर मौका देखकर रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट को हर हाल में पंद्रह दिन के अंदर एनजीटी के समक्ष पेश करने के आदेश दिए गए हैं। इंजीनियर कपिल अरोड़ा ने बताया कि लोधी क्लब, सेक्रेड हार्ट स्कूल की तरफ से ग्रीन बेल्ट की जगह अतिक्रमण कर पार्किंग के लिए इस्तेमाल की जा रही है। निगम की तरफ से ढोलेवाल चौक, जगराओं ब्रिज से शेरपुर चौक के दोनों तरफ ग्रीन बेल्ट को पार्किंग में बदला गया है।
नई दिल्ली, जुलाई 19: श्रीलंका के गोटाबाया राजपक्षे देश छोड़कर भाग गए हैं और देश के बिगड़ते आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर हो गए। लेकिन द्वीप राष्ट्र की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। श्रीलंका, ईंधन, दवा और भोजन की भारी कमी का सामना कर रहा है। इन जरूरी चीजों को खरीदने के लिए पैसे खत्म हो गए हैं। सार्वजनिक परिवहन प्रभावित हुआ है और स्कूलों को बार-बार बंद करने के लिए मजबूर किया जाता है। श्रीलंका में आर्थिक संकट का उसके वित्त के कुप्रबंधन से बहुत कुछ लेना-देना है। 2019 ईस्टर बम विस्फोट और COVID-19 महामारी, जिसने देश की पर्यटन अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है और अब देश दिवालिया हो चुका है। लेकिन, दुनिया में सिर्फ श्रीलंका ही एकमात्र ऐसा देश नहीं है, जो दिवालिया हो चुका है, बल्कि कई और देश अगले कुछ महीने में दिवालिया हो सकते हैं। दुनिया भर में अस्थिरता के दौर के बीच श्रीलंका की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं और देश के 60 लाख से ज्यादा लोगों के सामने खाद्य संकट मंडरा रहा है। वहीं, यूक्रेन में युद्ध और इसके नतीजों का भी व्यापक प्रभाव पड़ा है। लेकिन, छोटा सा दक्षिण एशियाई राष्ट्र अकेला पीड़ित नहीं है। कई विकासशील और अविकसित राष्ट्र आर्थिक संकट के कगार पर हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई देशों की मुद्राएं बुरी तरह से गिर चुकी है और डॉलर के काफी ज्यादा ताकतवर होने से कई देशों की विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी आई है। आइये, हम उन देशों पर एक नज़र डालते हैं जो श्रीलंका के रास्ते पर जा सकते हैं। पड़ोसी देश पाकिस्तान में सब कुछ ठीक नहीं है। पिछले हफ्ते, पाकिस्तान ने अपने ऋण कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ एक समझौता किया है। पाकिस्तान पिछले साल से गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। श्रीलंका की तरह पाकिस्तान भी चीन से भारी कर्ज और निवेश का कर्जदार है। जबकि श्रीलंका पुनर्भुगतान में फेल हो चुका है और पहले से ही कर्ज के जाल में बुरी तरह से फंसा हुआ है। वहीं, चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के तहत पाकिस्तान में भारी निवेश कर चुका है और चीनी कर्ज लेने में पाकिस्तान दूसरे स्थान पर है। पाकिस्तान ने अपनी कुछ बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं को चीनी फर्मों को पट्टे पर दिया है, जिसके कारण उन्हें और ज्यादा कर्ज लेना पड़ा है। यह वही दुष्चक्र है जिसमें लंका फंसी थी और फिर उसका बचना नामुमकिन हो गया था। ऊर्जा आयात की लागत में वृद्धि का मतलब है कि देश भुगतान संकट के संतुलन का सामना कर सकता है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार घटकर केवल करीब 8 अरब डॉलर रह गया है, जिससे पाकिस्तान सिर्फ अगले पांच हफ्ते तक ही जरूरी सामान खरीद सकता है। वहीं, पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं और भीषण बिजली संकट से जूझ रहा है। नेपाल भी बुरी तरह से आर्थिक संकट में फंस गया है और नेपाल के पास भी विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने वाला है और नेपाल भी विदेशी कर्ज का भुगतान करने में फेल हो सकता है। नेपाल में जरूरी सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और खाद्य पदार्थ और ईंधन की कीमतों में इजाफा होने से नेपाल की वार्षिक खुदरा मुद्रास्फीति जून में बढ़कर 8. 56 प्रतिशत हो गई, जो पिछले छह साल में सबसे ज्यादा है। पिछले कुछ महीनों में आयात में वृद्धि ने नेपाल के विदेशी मुद्रा भंडार को खत्म कर दिया है। नेपाल के सीमा शुल्क विभाग के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में देश का कुल आयात बिल बढ़कर 1. 76 ट्रिलियन रुपये हो गया। काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले 27. 5 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, नेपाल तरलता संकट का भी सामना कर रहा है और इसके परिणामस्वरूप, बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान कृषि, पर्यटन, विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्रों जैसे उत्पादक क्षेत्रों को ऋण देने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जेपी मॉर्गन के अनुसार, मिस्र की कुल जीडीपी का 95 प्रतिशत हिस्सा कर्ज का हो गया है और मिस्र के बाजार से इस साल 11 अरब डॉलर की राशि देश से बाहर निकली है। वहीं, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फंड मैनेजमेंट कंपनी एफआईएम पार्टनर्स के अनुसार, मिस्र को अगले पांच वर्षों में कठिन मुद्रा ऋण में $ 100 बिलियन का भुगतान करने की उम्मीद है, जिसमें 2024 में $ 3. 3 बिलियन का एक बड़ा बांड शामिल है। रविवार को, मिस्र सरकार ने उन अफवाहों का खंडन किया है, कि देश में चल रहे वैश्विक खाद्य संकट के कारण खाद्य वस्तुओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, मिस्र पहले ही आईएमएफ से अपने कर्ज का कोटा पार कर लिया है। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक, नेपास आईएमएफ से और कर्ज के लिए बात कर रहा है, जो उसे मई 2022 में 20 20 अरब डॉलर पहले ही दे चुका है। वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ने और मंदी की आशंका के साथ अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था भी संकट की तरफ बढ़ रही है। इस साल मई महीने में अर्जेंटीना में महंगाई दर 58 फीसदी पर थी। यहां तक कि, जब पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ रही है, उस वक्त अर्जेंटीना की स्थिति और भी ज्यादा खराब हो चुकी है और साल के अंत तक घरेलू महंगाई दर बढ़कर 70 फीसदी होने की आशंका जताई गई है, जिसका मतबल ये हुआ, कि अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था कभी भी ढहाकर गिर सकती है। वहीं, अर्जेंटीना, जो सोयाबीन, मक्का और गेहूं का एक महत्वपूर्ण वैश्विक आपूर्तिकर्ता है, लेकिन साल की दूसरी छमाही में अनाज के निर्यात में गिरावट आ रही है। इससे देश के लिए आईएमएफ के साथ सहमत 44 अरब डॉलर के सौदे से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। इसके साथ ही देश में आर्थिक संकट के साथ राजनीतिक संकट भी छाया हुआ है औऱ सत्तारूढ़ पेरोनिस्ट गठबंधन में टूट-फूट हो जाने के बाद देश के वित्तमंत्री मार्टिम गुजमैन को अप्रैल महीने में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। वहीं, गुज़मैन की जगह लेने वाली सिल्विना बटाकिस ने आईएमएफ से किए गए वादों पर टिके रहने की कसम खाई है। हालांकि, द फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, सरपट मुद्रास्फीति और खराब सार्वजनिक वित्त के बीच निवेशक एक और संप्रभु ऋण डिफ़ॉल्ट के बारे में चिंतित हैं। प्रदेश में महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी को लेकर सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं। विश्व बैंक ने हाल ही में नाइजीरिया को 2021 के आंकड़ों के आधार पर सबसे खराब मुद्रास्फीति दर के साथ दुनिया के शीर्ष 10 देशों में सूचीबद्ध किया है। यह 16. 95 प्रतिशत की वार्षिक मुद्रास्फीति दर के साथ सूची में आठवें स्थान पर है। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि मुद्रास्फीति, कर्ज और खाद्य संकट नाइजीरियाई अर्थव्यवस्था को पतन के कगार पर धकेल रहे हैं। किराने का सामान, पेय पदार्थ और प्रावधानों की कीमतें पिछले साल से दोगुने से अधिक हो गई हैं। देश के ऋण प्रबंधन कार्यालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च तक अफ्रीका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश पर कुल 100 अरब डॉलर का बकाया कर्ज था। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, नाइजीरिया के ऊपर रियायती और वाणिज्यिक ऋण करीब 40 अरब डॉलर और बाकी 60 अरब डॉलर का कर्ज घरेलू जारीकर्ताओं पर बकाया था। माना जा रहा है, कि नाइजीरिया की स्थिति श्रीलंका से भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है। मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, एक और अफ्रीकी देश केन्या भी किसी भी वक्त आर्थिक संकट में फंस सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, केन्या की करेंसी काफी ज्यादा गिर चुकी है और देश के पास विदेशी मुद्रा भंडार भी खत्म होने वाला है। मूडीज के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ विश्लेषक डेविड रोगोविच के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार की तुलना में देश में काफी ज्यादा कर्ज ले रखा है और खराब वित्त प्रबंधन की वजह से केन्या कभी भी खतरनाक हालात में फंस सकता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, केन्या को अपनी आय का लगभग 30 प्रतिशत ब्याज भुगतान ही करना पड़ा है। वहीं, वैश्विक वित्तपोषण बाजारों जर केन्या की पहुंच अब बंद हो गई है और 2024 तक केन्या को विदेशी कर्ज चुकाना है, लेकिन पूरी संभावना है कि, केन्या अपने कर्ज को नहीं चुका पाएगा। यूके स्थित डेट जस्टिस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रीकी सरकारें पश्चिम में निजी लेनदारों से तीन गुना अधिक कर्ज लेती हैं, जितना कि वे चीन को देते हैं। इथियोपिया को भुगतान करने और अपनी अर्थव्यवस्था को अपने पूर्व-कोविड जीडीपी विकास स्तरों पर वापस करने के दोहरे बोझ का सामना करना पड़ रहा है। इथियोपिया ने जो अपना ताजा बजट पेश किया है, उससे पता चलता है कि, सरकार ने कर्ज में कमी करना अपना प्राथमिक लक्ष्य रखा है और टाइग्रे संघर्ष से भी बाहर निकलना सरकार का प्रुमख लक्ष्य है। नवंबर 2020 में गृहयुद्ध छिड़ने के बाद इथियोपियों की अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है और देश की सड़कें, कारखाने और हवाई अड्डे ध्वस्त हो चुके हैं। एफटी में एक रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी दानदाताओं ने वित्तीय सहायता वापस देनी शुरू कर दी है और वाशिंगटन ने अमेरिकी बाजार में इथियोपिया की टैरिफ मुक्त पहुंच को समाप्त कर दिया, जिससे देश में लोगं की नौकरी पर भारी खतरा मंडराने लगा है। घाना की वार्षिक मुद्रास्फीति जून 2022 में 18 वर्षों में पहली बार बढ़कर 29. 82 प्रतिशत हो गई है। परिवहन से लेकर बिजली, गैस और पानी जैसी जरूरी सामग्रियों का अकाल पड़ने लगा है और सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें इस पश्चिम अफ्रीकी देश में काफी बढ़ गई हैं। वहीं, देश की वित्तीय स्थिति, जो कोविड महामारी से पहसे से ही प्रभावित थी, रूस-यूक्रेन युद्ध से उसकी स्थिति और भी खराब हो गई है। पिछले दिसंबर में, घाना में बेरोजगारी 13. 4 प्रतिशत थी, जो दस साल पहले की तुलना में तीन गुना ज्यादा है। अत्यधिक उधारी के कारण अर्थव्यवस्था ऋण संकट का सामना कर रही है। रहने की बढ़ती लागत के खिलाफ घाना के लोगों ने जून में कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन भी किया है। वहीं, घाना सरकार आईएमएफ बेलआउट पैकेज के लिए बातचीत करने पर विचार कर रही है। पनामा में पिछले साल के मुकाबले मुद्रास्फीति मई महीने में 4. 2 प्रतिशत बढ़ गई है साथ ही जनवरी से लगभग 10 प्रतिशत की बेरोजगारी दर और ईंधन की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी डॉलर की अर्थव्यवस्था और उच्च विकास के आंकड़ों के बावजूद, देश में सामाजिक असमानता काफी ज्यादा बढ़ गई है। आर्थिक संकट के कारण देश के कुछ हिस्सों में ईंधन की कमी हो गई है, और राजधानी के खाद्य बाजारों में स्टालों पर बेचने के लिए उत्पादों की कमी हो गई है। हजारों लोग पिछले दो हफ्तों से सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उनकी एक मांग है, कि सरकार को बुनियादी खाद्य पदार्थों की कीमतें नियंत्रित करनी चाहिए। विरोध प्रदर्शनों के कारण पब्लिक स्कूलों को बंद कर दिया गया है, परिवहन को निलंबित कर दिया गया है और हड़ताल का आह्वान किया गया है। अल्बानियाई लोगों ने राजधानी शहर तिराना में मार्च किया और लोग सरकार से काफी ज्यादा नाराज है, जिसके पीछे की सबसे बड़़ी वजह सरकार पर लगे भारी भ्रष्टाचार के आरोप हैं। लोगों की मांग है, कि सरकार कथित भ्रष्टाचार और उपभोक्ता कीमतों में भारी वृद्धि के कारण इस्तीफा दे। फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, अल्बानियाई केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर में 1. 25 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की, जबकि आधिकारिक जून मुद्रास्फीति 6. 7 प्रतिशत थी। चीन के लिए बल्लेबाजी करती इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां, ड्रैगन ने कैसे खत्म कर दिया भारत का इलेक्ट्रॉनिक मार्केट?
नई दिल्ली, जुलाई उन्नीस: श्रीलंका के गोटाबाया राजपक्षे देश छोड़कर भाग गए हैं और देश के बिगड़ते आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर हो गए। लेकिन द्वीप राष्ट्र की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। श्रीलंका, ईंधन, दवा और भोजन की भारी कमी का सामना कर रहा है। इन जरूरी चीजों को खरीदने के लिए पैसे खत्म हो गए हैं। सार्वजनिक परिवहन प्रभावित हुआ है और स्कूलों को बार-बार बंद करने के लिए मजबूर किया जाता है। श्रीलंका में आर्थिक संकट का उसके वित्त के कुप्रबंधन से बहुत कुछ लेना-देना है। दो हज़ार उन्नीस ईस्टर बम विस्फोट और COVID-उन्नीस महामारी, जिसने देश की पर्यटन अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है और अब देश दिवालिया हो चुका है। लेकिन, दुनिया में सिर्फ श्रीलंका ही एकमात्र ऐसा देश नहीं है, जो दिवालिया हो चुका है, बल्कि कई और देश अगले कुछ महीने में दिवालिया हो सकते हैं। दुनिया भर में अस्थिरता के दौर के बीच श्रीलंका की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं और देश के साठ लाख से ज्यादा लोगों के सामने खाद्य संकट मंडरा रहा है। वहीं, यूक्रेन में युद्ध और इसके नतीजों का भी व्यापक प्रभाव पड़ा है। लेकिन, छोटा सा दक्षिण एशियाई राष्ट्र अकेला पीड़ित नहीं है। कई विकासशील और अविकसित राष्ट्र आर्थिक संकट के कगार पर हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई देशों की मुद्राएं बुरी तरह से गिर चुकी है और डॉलर के काफी ज्यादा ताकतवर होने से कई देशों की विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी आई है। आइये, हम उन देशों पर एक नज़र डालते हैं जो श्रीलंका के रास्ते पर जा सकते हैं। पड़ोसी देश पाकिस्तान में सब कुछ ठीक नहीं है। पिछले हफ्ते, पाकिस्तान ने अपने ऋण कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ एक समझौता किया है। पाकिस्तान पिछले साल से गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। श्रीलंका की तरह पाकिस्तान भी चीन से भारी कर्ज और निवेश का कर्जदार है। जबकि श्रीलंका पुनर्भुगतान में फेल हो चुका है और पहले से ही कर्ज के जाल में बुरी तरह से फंसा हुआ है। वहीं, चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के तहत पाकिस्तान में भारी निवेश कर चुका है और चीनी कर्ज लेने में पाकिस्तान दूसरे स्थान पर है। पाकिस्तान ने अपनी कुछ बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं को चीनी फर्मों को पट्टे पर दिया है, जिसके कारण उन्हें और ज्यादा कर्ज लेना पड़ा है। यह वही दुष्चक्र है जिसमें लंका फंसी थी और फिर उसका बचना नामुमकिन हो गया था। ऊर्जा आयात की लागत में वृद्धि का मतलब है कि देश भुगतान संकट के संतुलन का सामना कर सकता है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार घटकर केवल करीब आठ अरब डॉलर रह गया है, जिससे पाकिस्तान सिर्फ अगले पांच हफ्ते तक ही जरूरी सामान खरीद सकता है। वहीं, पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं और भीषण बिजली संकट से जूझ रहा है। नेपाल भी बुरी तरह से आर्थिक संकट में फंस गया है और नेपाल के पास भी विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने वाला है और नेपाल भी विदेशी कर्ज का भुगतान करने में फेल हो सकता है। नेपाल में जरूरी सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और खाद्य पदार्थ और ईंधन की कीमतों में इजाफा होने से नेपाल की वार्षिक खुदरा मुद्रास्फीति जून में बढ़कर आठ. छप्पन प्रतिशत हो गई, जो पिछले छह साल में सबसे ज्यादा है। पिछले कुछ महीनों में आयात में वृद्धि ने नेपाल के विदेशी मुद्रा भंडार को खत्म कर दिया है। नेपाल के सीमा शुल्क विभाग के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले ग्यारह महीनों में देश का कुल आयात बिल बढ़कर एक. छिहत्तर ट्रिलियन रुपये हो गया। काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले सत्ताईस. पाँच प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, नेपाल तरलता संकट का भी सामना कर रहा है और इसके परिणामस्वरूप, बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान कृषि, पर्यटन, विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्रों जैसे उत्पादक क्षेत्रों को ऋण देने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जेपी मॉर्गन के अनुसार, मिस्र की कुल जीडीपी का पचानवे प्रतिशत हिस्सा कर्ज का हो गया है और मिस्र के बाजार से इस साल ग्यारह अरब डॉलर की राशि देश से बाहर निकली है। वहीं, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फंड मैनेजमेंट कंपनी एफआईएम पार्टनर्स के अनुसार, मिस्र को अगले पांच वर्षों में कठिन मुद्रा ऋण में एक सौ डॉलर बिलियन का भुगतान करने की उम्मीद है, जिसमें दो हज़ार चौबीस में तीन डॉलर. तीन बिलियन का एक बड़ा बांड शामिल है। रविवार को, मिस्र सरकार ने उन अफवाहों का खंडन किया है, कि देश में चल रहे वैश्विक खाद्य संकट के कारण खाद्य वस्तुओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, मिस्र पहले ही आईएमएफ से अपने कर्ज का कोटा पार कर लिया है। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक, नेपास आईएमएफ से और कर्ज के लिए बात कर रहा है, जो उसे मई दो हज़ार बाईस में बीस बीस अरब डॉलर पहले ही दे चुका है। वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ने और मंदी की आशंका के साथ अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था भी संकट की तरफ बढ़ रही है। इस साल मई महीने में अर्जेंटीना में महंगाई दर अट्ठावन फीसदी पर थी। यहां तक कि, जब पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ रही है, उस वक्त अर्जेंटीना की स्थिति और भी ज्यादा खराब हो चुकी है और साल के अंत तक घरेलू महंगाई दर बढ़कर सत्तर फीसदी होने की आशंका जताई गई है, जिसका मतबल ये हुआ, कि अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था कभी भी ढहाकर गिर सकती है। वहीं, अर्जेंटीना, जो सोयाबीन, मक्का और गेहूं का एक महत्वपूर्ण वैश्विक आपूर्तिकर्ता है, लेकिन साल की दूसरी छमाही में अनाज के निर्यात में गिरावट आ रही है। इससे देश के लिए आईएमएफ के साथ सहमत चौंतालीस अरब डॉलर के सौदे से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। इसके साथ ही देश में आर्थिक संकट के साथ राजनीतिक संकट भी छाया हुआ है औऱ सत्तारूढ़ पेरोनिस्ट गठबंधन में टूट-फूट हो जाने के बाद देश के वित्तमंत्री मार्टिम गुजमैन को अप्रैल महीने में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। वहीं, गुज़मैन की जगह लेने वाली सिल्विना बटाकिस ने आईएमएफ से किए गए वादों पर टिके रहने की कसम खाई है। हालांकि, द फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, सरपट मुद्रास्फीति और खराब सार्वजनिक वित्त के बीच निवेशक एक और संप्रभु ऋण डिफ़ॉल्ट के बारे में चिंतित हैं। प्रदेश में महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी को लेकर सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं। विश्व बैंक ने हाल ही में नाइजीरिया को दो हज़ार इक्कीस के आंकड़ों के आधार पर सबसे खराब मुद्रास्फीति दर के साथ दुनिया के शीर्ष दस देशों में सूचीबद्ध किया है। यह सोलह. पचानवे प्रतिशत की वार्षिक मुद्रास्फीति दर के साथ सूची में आठवें स्थान पर है। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि मुद्रास्फीति, कर्ज और खाद्य संकट नाइजीरियाई अर्थव्यवस्था को पतन के कगार पर धकेल रहे हैं। किराने का सामान, पेय पदार्थ और प्रावधानों की कीमतें पिछले साल से दोगुने से अधिक हो गई हैं। देश के ऋण प्रबंधन कार्यालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इकतीस मार्च तक अफ्रीका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश पर कुल एक सौ अरब डॉलर का बकाया कर्ज था। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, नाइजीरिया के ऊपर रियायती और वाणिज्यिक ऋण करीब चालीस अरब डॉलर और बाकी साठ अरब डॉलर का कर्ज घरेलू जारीकर्ताओं पर बकाया था। माना जा रहा है, कि नाइजीरिया की स्थिति श्रीलंका से भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है। मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, एक और अफ्रीकी देश केन्या भी किसी भी वक्त आर्थिक संकट में फंस सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, केन्या की करेंसी काफी ज्यादा गिर चुकी है और देश के पास विदेशी मुद्रा भंडार भी खत्म होने वाला है। मूडीज के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ विश्लेषक डेविड रोगोविच के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार की तुलना में देश में काफी ज्यादा कर्ज ले रखा है और खराब वित्त प्रबंधन की वजह से केन्या कभी भी खतरनाक हालात में फंस सकता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, केन्या को अपनी आय का लगभग तीस प्रतिशत ब्याज भुगतान ही करना पड़ा है। वहीं, वैश्विक वित्तपोषण बाजारों जर केन्या की पहुंच अब बंद हो गई है और दो हज़ार चौबीस तक केन्या को विदेशी कर्ज चुकाना है, लेकिन पूरी संभावना है कि, केन्या अपने कर्ज को नहीं चुका पाएगा। यूके स्थित डेट जस्टिस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रीकी सरकारें पश्चिम में निजी लेनदारों से तीन गुना अधिक कर्ज लेती हैं, जितना कि वे चीन को देते हैं। इथियोपिया को भुगतान करने और अपनी अर्थव्यवस्था को अपने पूर्व-कोविड जीडीपी विकास स्तरों पर वापस करने के दोहरे बोझ का सामना करना पड़ रहा है। इथियोपिया ने जो अपना ताजा बजट पेश किया है, उससे पता चलता है कि, सरकार ने कर्ज में कमी करना अपना प्राथमिक लक्ष्य रखा है और टाइग्रे संघर्ष से भी बाहर निकलना सरकार का प्रुमख लक्ष्य है। नवंबर दो हज़ार बीस में गृहयुद्ध छिड़ने के बाद इथियोपियों की अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है और देश की सड़कें, कारखाने और हवाई अड्डे ध्वस्त हो चुके हैं। एफटी में एक रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी दानदाताओं ने वित्तीय सहायता वापस देनी शुरू कर दी है और वाशिंगटन ने अमेरिकी बाजार में इथियोपिया की टैरिफ मुक्त पहुंच को समाप्त कर दिया, जिससे देश में लोगं की नौकरी पर भारी खतरा मंडराने लगा है। घाना की वार्षिक मुद्रास्फीति जून दो हज़ार बाईस में अट्ठारह वर्षों में पहली बार बढ़कर उनतीस. बयासी प्रतिशत हो गई है। परिवहन से लेकर बिजली, गैस और पानी जैसी जरूरी सामग्रियों का अकाल पड़ने लगा है और सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें इस पश्चिम अफ्रीकी देश में काफी बढ़ गई हैं। वहीं, देश की वित्तीय स्थिति, जो कोविड महामारी से पहसे से ही प्रभावित थी, रूस-यूक्रेन युद्ध से उसकी स्थिति और भी खराब हो गई है। पिछले दिसंबर में, घाना में बेरोजगारी तेरह. चार प्रतिशत थी, जो दस साल पहले की तुलना में तीन गुना ज्यादा है। अत्यधिक उधारी के कारण अर्थव्यवस्था ऋण संकट का सामना कर रही है। रहने की बढ़ती लागत के खिलाफ घाना के लोगों ने जून में कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन भी किया है। वहीं, घाना सरकार आईएमएफ बेलआउट पैकेज के लिए बातचीत करने पर विचार कर रही है। पनामा में पिछले साल के मुकाबले मुद्रास्फीति मई महीने में चार. दो प्रतिशत बढ़ गई है साथ ही जनवरी से लगभग दस प्रतिशत की बेरोजगारी दर और ईंधन की कीमतों में लगभग पचास प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी डॉलर की अर्थव्यवस्था और उच्च विकास के आंकड़ों के बावजूद, देश में सामाजिक असमानता काफी ज्यादा बढ़ गई है। आर्थिक संकट के कारण देश के कुछ हिस्सों में ईंधन की कमी हो गई है, और राजधानी के खाद्य बाजारों में स्टालों पर बेचने के लिए उत्पादों की कमी हो गई है। हजारों लोग पिछले दो हफ्तों से सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उनकी एक मांग है, कि सरकार को बुनियादी खाद्य पदार्थों की कीमतें नियंत्रित करनी चाहिए। विरोध प्रदर्शनों के कारण पब्लिक स्कूलों को बंद कर दिया गया है, परिवहन को निलंबित कर दिया गया है और हड़ताल का आह्वान किया गया है। अल्बानियाई लोगों ने राजधानी शहर तिराना में मार्च किया और लोग सरकार से काफी ज्यादा नाराज है, जिसके पीछे की सबसे बड़़ी वजह सरकार पर लगे भारी भ्रष्टाचार के आरोप हैं। लोगों की मांग है, कि सरकार कथित भ्रष्टाचार और उपभोक्ता कीमतों में भारी वृद्धि के कारण इस्तीफा दे। फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, अल्बानियाई केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर में एक. पच्चीस प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की, जबकि आधिकारिक जून मुद्रास्फीति छः. सात प्रतिशत थी। चीन के लिए बल्लेबाजी करती इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां, ड्रैगन ने कैसे खत्म कर दिया भारत का इलेक्ट्रॉनिक मार्केट?
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस (आईएसबी) हैदराबाद, आंध्र प्रदेश, भारत, में स्थित एक अंतरराष्ट्रीय बिज़नेस स्कूल है। यह स्कूल मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर कार्यक्रम (पीजीपी), पोस्ट-डॉक्टरेट कार्यक्रम और साथ ही साथ व्यावसायिक अधिशाषी के लिए प्रबंधक शिक्षा कार्यक्रम प्रदान करता है। इसके विचार की कल्पना आंध्र प्रदेश राज्य सरकार के साथ मिलकर फॉर्च्यून 500 उद्यमी समूह के द्वारा 1995 में की गयी थी। रजत गुप्ता, मैकिन्से एंड कंपनी विश्वव्यापी के पूर्व प्रबंध निदेशक और नारा चंद्रबाबू नायडू, आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री, ने संस्था की स्थापना में निर्णायक भूमिका निभाई. माइक्रोसॉफ्ट, विश्व की एक जानी मानी बहुराष्ट्रीय कम्पनी है जो मुख्यतः संगणक अभियान्त्रिकी के क्षेत्र में काम करती है। माईक्रोसॉफ्ट दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कम्पनी है। 100 से भी अधिक देशों में फैली इसकी शाखाओं में 70000 से भी अधिक लोग काम करते हैं। इसका वार्षिक व्यापार लगभग 20 खरब रूपयों (~ 45 बिलियन डॉलर्स) का है। कम्पनी का मुख्यालय अमेरिका में रेडमण्ड, वॉशिंगटन में स्थित है। इसकी स्थापना बिल गेट्स ने 4 अप्रैल 1975 को की थी। इसका मुख्य उत्पाद विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम है। इसके अलावा माईक्रोसॉफ्ट नाना प्रकार के सॉफ्टवेयर भी बनाती है। . इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस और माइक्रोसॉफ़्ट आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस 14 संबंध है और माइक्रोसॉफ़्ट 26 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (14 + 26)। यह लेख इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस और माइक्रोसॉफ़्ट के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस हैदराबाद, आंध्र प्रदेश, भारत, में स्थित एक अंतरराष्ट्रीय बिज़नेस स्कूल है। यह स्कूल मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर कार्यक्रम , पोस्ट-डॉक्टरेट कार्यक्रम और साथ ही साथ व्यावसायिक अधिशाषी के लिए प्रबंधक शिक्षा कार्यक्रम प्रदान करता है। इसके विचार की कल्पना आंध्र प्रदेश राज्य सरकार के साथ मिलकर फॉर्च्यून पाँच सौ उद्यमी समूह के द्वारा एक हज़ार नौ सौ पचानवे में की गयी थी। रजत गुप्ता, मैकिन्से एंड कंपनी विश्वव्यापी के पूर्व प्रबंध निदेशक और नारा चंद्रबाबू नायडू, आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री, ने संस्था की स्थापना में निर्णायक भूमिका निभाई. माइक्रोसॉफ्ट, विश्व की एक जानी मानी बहुराष्ट्रीय कम्पनी है जो मुख्यतः संगणक अभियान्त्रिकी के क्षेत्र में काम करती है। माईक्रोसॉफ्ट दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कम्पनी है। एक सौ से भी अधिक देशों में फैली इसकी शाखाओं में सत्तर हज़ार से भी अधिक लोग काम करते हैं। इसका वार्षिक व्यापार लगभग बीस खरब रूपयों का है। कम्पनी का मुख्यालय अमेरिका में रेडमण्ड, वॉशिंगटन में स्थित है। इसकी स्थापना बिल गेट्स ने चार अप्रैल एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर को की थी। इसका मुख्य उत्पाद विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम है। इसके अलावा माईक्रोसॉफ्ट नाना प्रकार के सॉफ्टवेयर भी बनाती है। . इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस और माइक्रोसॉफ़्ट आम में शून्य बातें हैं । इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस चौदह संबंध है और माइक्रोसॉफ़्ट छब्बीस है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस और माइक्रोसॉफ़्ट के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
(आगा खान) कान्हीवाड़ा (साई)। केवलारी के युवा तुर्क विधायक राकेश पाल सिंह शुक्रवार से कान्हीवाड़ा मण्डल के ग्रामों में जन संपर्क करेंगे। इस हेतु ग्रामीणों की समस्याओं को मौके पर ही हल करने के प्रयास उनके द्वारा किये जायेंगे। इसके लिये उनके द्वारा प्रशासकीय अधिकारियों की उपस्थिति के लिये जिला प्रशासन को पत्र भी लिखा गया है। केवलारी विधायक राकेश पाल सिंह का कान्हीवाड़ा मण्डल में शुक्रवार से चार दिवसीय जन संपर्क के दौरान वे कान्हीवाड़ा मण्डल के गाँवों का भ्रमण करेंगे। वे शुक्रवार को 11 बजे छीतापार 12 बजे सालीवाड़ा, दोपहर 01 बजे, कान्हान पिपरिया, 02 बजे कूड़ो, 03 बजे जोरावारी एवं शाम 04 बजे भोमाटोला में ग्रामीणों से रूबरू होंगे। शनिवार को राकेश पाल सिंह के द्वारा प्रातः 11 बजे कटिया, 12 बजे माहुलझिर, 01 बजे धनौरा, 02 बजे समनापुर, 03 बजे लुंगसा, साढ़े 03 बजे घूरवाड़ा, शाम 04 बजे मैली, 05 बजे मेहरा पिपरिया एवं 06 बजे भटेखारी पहुँचेंगे। रविवार को केवलारी विधायक प्रातः 11 बजे सहजपुरी, 12 बजे पिपरिया, दोपहर 01 बजे जुरतरा, 02 बजे हिनोतिया, 03 बजे पांजरा, शाम 04 बजे ढेका एवं 05 बजे छुई पहुँचेंगे। चौथे दिन केवलारी के युवा तुर्क विधायक राकेश पाल सिंह के द्वारा प्रातः 11 बजे खैरी, साढ़े 11 बजे पतरई, 12 बजे आमाकोला, दोपहर 01 बजे जामुनटोला, 02 बजे सुकतरा, ढाई बजे ड्यूटी, 03 बजे छतरपुर, 04 बजे जटलापुर, साढ़े 04 बजे मलाजपुर एवं 05 बजे बम्हनी गाँवों का भ्रमण किया जायेगा।
कान्हीवाड़ा । केवलारी के युवा तुर्क विधायक राकेश पाल सिंह शुक्रवार से कान्हीवाड़ा मण्डल के ग्रामों में जन संपर्क करेंगे। इस हेतु ग्रामीणों की समस्याओं को मौके पर ही हल करने के प्रयास उनके द्वारा किये जायेंगे। इसके लिये उनके द्वारा प्रशासकीय अधिकारियों की उपस्थिति के लिये जिला प्रशासन को पत्र भी लिखा गया है। केवलारी विधायक राकेश पाल सिंह का कान्हीवाड़ा मण्डल में शुक्रवार से चार दिवसीय जन संपर्क के दौरान वे कान्हीवाड़ा मण्डल के गाँवों का भ्रमण करेंगे। वे शुक्रवार को ग्यारह बजे छीतापार बारह बजे सालीवाड़ा, दोपहर एक बजे, कान्हान पिपरिया, दो बजे कूड़ो, तीन बजे जोरावारी एवं शाम चार बजे भोमाटोला में ग्रामीणों से रूबरू होंगे। शनिवार को राकेश पाल सिंह के द्वारा प्रातः ग्यारह बजे कटिया, बारह बजे माहुलझिर, एक बजे धनौरा, दो बजे समनापुर, तीन बजे लुंगसा, साढ़े तीन बजे घूरवाड़ा, शाम चार बजे मैली, पाँच बजे मेहरा पिपरिया एवं छः बजे भटेखारी पहुँचेंगे। रविवार को केवलारी विधायक प्रातः ग्यारह बजे सहजपुरी, बारह बजे पिपरिया, दोपहर एक बजे जुरतरा, दो बजे हिनोतिया, तीन बजे पांजरा, शाम चार बजे ढेका एवं पाँच बजे छुई पहुँचेंगे। चौथे दिन केवलारी के युवा तुर्क विधायक राकेश पाल सिंह के द्वारा प्रातः ग्यारह बजे खैरी, साढ़े ग्यारह बजे पतरई, बारह बजे आमाकोला, दोपहर एक बजे जामुनटोला, दो बजे सुकतरा, ढाई बजे ड्यूटी, तीन बजे छतरपुर, चार बजे जटलापुर, साढ़े चार बजे मलाजपुर एवं पाँच बजे बम्हनी गाँवों का भ्रमण किया जायेगा।
चर्चा में क्यों? 4 जुलाई, 2022 को केंद्रीय उद्योग संवर्द्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा जारी स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग के तीसरे संस्करण के अंतर्गत केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ को प्रदेश में स्टार्टअप्स ईकोसिस्टम के विकास हेतु एस्पायरिंग लीडर के रूप में सम्मानित किया गया। - गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ की वर्तमान औद्योगिक नीति, 2019-24 के अंतर्गत स्टार्टअप इकाइयों को लाभान्वित करने हेतु स्टार्टअप पैकेज लागू किया गया है। राज्य में कुल 748 स्टार्टअप पंजीकृत हैं। - एस्पायरिंग लीडर के रूप में छत्तीसगढ़ को प्रदान किये गए प्रशस्ति-पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिये कई सराहनीय पहल की गई है, जिनमें स्टार्टअप पॉलिसी की स्थापना, स्टार्टअप्स के लिये करों में छूट और अनुदान का प्रावधान तथा इन्क्यूबेटर्स की स्थापना और उनका उन्नयन प्रमुख पहल है। इन्क्यूबेटर्स के माध्यम से स्टार्टअप्स के लिये को-वर्क़िग स्पेस, मेंटरशिप, फंडिंग और प्रौद्योगिकी सपोर्ट के प्रावधान किये गए हैं। - केंद्रीय मंत्री द्वारा स्टार्टअप क्षेत्र में विशेष योगदान हेतु छत्तीसगढ़ के तीन अधिकारियों- अनुराग पांडेय (विशेष सचिव वाणिज्य एवं उद्योग विभाग), प्रवीण शुक्ला (अपर संचालक उद्योग) एवं सुमन देवांगन (सहायक संचालक) को सम्मानित किया गया। - उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक नीति, 2019-24 के अंतर्गत स्टार्टअप इकाईयों को प्रोत्साहित करने के लिये छत्तीसगढ़ राज्य स्टार्टअप पैकेज लागू किया गया है। - भारत सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त इकाईयों को छत्तीसगढ़ में स्थापित होने पर विशेष प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया गया है। पैकेज के तहत ब्याज अनुदान अधिकतम 70 प्रतिशत अधिकतम 11 वर्ष के लिये, स्थायी पूंजी निवेश अनुदान अधिकतम 55 प्रतिशत, नेट एसजीएसटी प्रतिपूर्ति अधिकतम 15 वर्ष तक, विद्युत शुल्क छूट अधिकतम 10 वर्ष तक एवं पात्रता अनुसार औद्योगिक नीति, 2019-24 में उल्लेखित अन्य अनुदान जैसे भू-प्रब्याजी में छूट, स्टांप शुल्क छूट, परियोजना प्रतिवेदन में छूट आदि की सुविधा प्रदान की जाती है। - स्टार्टअप को तीन वर्षों तक भवन किराए का 40 प्रतिशत, जिसकी अधिकतम सीमा 8 हजार रुपए प्रतिमाह प्रतिपूर्ति दी जा रही है और स्टार्टअप इकाईयों द्वारा सेमीनार, वर्कशॉप, संगोष्ठी, प्रदर्शनी में भाग लिये जाने पर 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति, जिसकी अधिकतम सीमा एक लाख रुपए प्रतिवर्ष होगी, दी जा रही है। - राज्य में स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने हेतु इन्क्यूबेटर की स्थापना के लिये किये जाने वाले व्यय का 50 प्रतिशत अधिकतम राशि 50 लाख रुपए एवं संचालन के लिये 3 लाख रुपए प्रति वर्ष अनुदान के रूप में दी जा रही है। - औद्योगिक पुरस्कार योजना पुरस्कार योजना के अंतर्गत स्टार्टअप श्रेणी में भी पुरस्कार देने का प्रावधान किया गया है। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कारों के रूप में क्रमशः 1,51,000 रुपए, 1,00,000 रुपए एवं 51,000 रुपए की राशि एवं प्रशस्ति-पत्र देने का प्रावधान किया गया है।
चर्चा में क्यों? चार जुलाई, दो हज़ार बाईस को केंद्रीय उद्योग संवर्द्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा जारी स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग के तीसरे संस्करण के अंतर्गत केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ को प्रदेश में स्टार्टअप्स ईकोसिस्टम के विकास हेतु एस्पायरिंग लीडर के रूप में सम्मानित किया गया। - गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ की वर्तमान औद्योगिक नीति, दो हज़ार उन्नीस-चौबीस के अंतर्गत स्टार्टअप इकाइयों को लाभान्वित करने हेतु स्टार्टअप पैकेज लागू किया गया है। राज्य में कुल सात सौ अड़तालीस स्टार्टअप पंजीकृत हैं। - एस्पायरिंग लीडर के रूप में छत्तीसगढ़ को प्रदान किये गए प्रशस्ति-पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिये कई सराहनीय पहल की गई है, जिनमें स्टार्टअप पॉलिसी की स्थापना, स्टार्टअप्स के लिये करों में छूट और अनुदान का प्रावधान तथा इन्क्यूबेटर्स की स्थापना और उनका उन्नयन प्रमुख पहल है। इन्क्यूबेटर्स के माध्यम से स्टार्टअप्स के लिये को-वर्क़िग स्पेस, मेंटरशिप, फंडिंग और प्रौद्योगिकी सपोर्ट के प्रावधान किये गए हैं। - केंद्रीय मंत्री द्वारा स्टार्टअप क्षेत्र में विशेष योगदान हेतु छत्तीसगढ़ के तीन अधिकारियों- अनुराग पांडेय , प्रवीण शुक्ला एवं सुमन देवांगन को सम्मानित किया गया। - उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक नीति, दो हज़ार उन्नीस-चौबीस के अंतर्गत स्टार्टअप इकाईयों को प्रोत्साहित करने के लिये छत्तीसगढ़ राज्य स्टार्टअप पैकेज लागू किया गया है। - भारत सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त इकाईयों को छत्तीसगढ़ में स्थापित होने पर विशेष प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया गया है। पैकेज के तहत ब्याज अनुदान अधिकतम सत्तर प्रतिशत अधिकतम ग्यारह वर्ष के लिये, स्थायी पूंजी निवेश अनुदान अधिकतम पचपन प्रतिशत, नेट एसजीएसटी प्रतिपूर्ति अधिकतम पंद्रह वर्ष तक, विद्युत शुल्क छूट अधिकतम दस वर्ष तक एवं पात्रता अनुसार औद्योगिक नीति, दो हज़ार उन्नीस-चौबीस में उल्लेखित अन्य अनुदान जैसे भू-प्रब्याजी में छूट, स्टांप शुल्क छूट, परियोजना प्रतिवेदन में छूट आदि की सुविधा प्रदान की जाती है। - स्टार्टअप को तीन वर्षों तक भवन किराए का चालीस प्रतिशत, जिसकी अधिकतम सीमा आठ हजार रुपए प्रतिमाह प्रतिपूर्ति दी जा रही है और स्टार्टअप इकाईयों द्वारा सेमीनार, वर्कशॉप, संगोष्ठी, प्रदर्शनी में भाग लिये जाने पर पचास प्रतिशत की प्रतिपूर्ति, जिसकी अधिकतम सीमा एक लाख रुपए प्रतिवर्ष होगी, दी जा रही है। - राज्य में स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने हेतु इन्क्यूबेटर की स्थापना के लिये किये जाने वाले व्यय का पचास प्रतिशत अधिकतम राशि पचास लाख रुपए एवं संचालन के लिये तीन लाख रुपए प्रति वर्ष अनुदान के रूप में दी जा रही है। - औद्योगिक पुरस्कार योजना पुरस्कार योजना के अंतर्गत स्टार्टअप श्रेणी में भी पुरस्कार देने का प्रावधान किया गया है। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कारों के रूप में क्रमशः एक,इक्यावन,शून्य रुपयापए, एक,शून्य,शून्य रुपयापए एवं इक्यावन,शून्य रुपयापए की राशि एवं प्रशस्ति-पत्र देने का प्रावधान किया गया है।
Rani Mukherji: रानी मुखर्जी को उनकी आवाज के लिए मिलते थे ताने, बोलीं- 'लोगों की. . . ' रानी मुखर्जी बॉलीवुड की सफल एक्ट्रेसेस में से एक हैं। उन्होंने अपने करियर में कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया है। हालांकि शुरुआत में उनका स्ट्रगल भी कम नहीं रहा। रानी को उनकी आवाज के लिए ताने भी दिए जाते थे। नई दिल्ली, जेएनएन। Rani Mukherji: रानी मुखर्जी को उनकी बेहतरीन अदाकारी के लिए जाना जाता है। एक्ट्रेस ने बॉलीवुड में 25 साल पूरे कर लिए हैं। रानी मुखर्जी ने अपने करियर की शुरुआत 1997 में आई फिल्म 'राजा की आएगी बारात' से की थी। इस फिल्म में उनके अपोजिट शादाब खान ने लीड रोल प्ले किया था। रानी ने इस फिल्म में एक्टिंग तो अच्छी की थी, लेकिन उनकी आवाज और हाइट को लेकर उन्हें इंडस्ट्री में शुरुआत में काफी ताने दिए गए। अब रानी ने अपने इस स्ट्रगल के बारे में खुलकर बात की है। रानी मुखर्जी इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म 'मिसेज चटर्जी बनाम नॉर्वे' का प्रमोशन कर रही हैं। इस बीच एक्ट्रेस ने पिंकविला को दिए इंटरव्यू में बताया, 'अगर मैं वास्तव में विश्वास करती कि लोग मेरी आवाज के बारे में क्या सोचते हैं, तो मेरी आवाज लाखों लोगों द्वारा पसंद नहीं की जाती। अगर मैंने अपना पैर नीचे नहीं रखा होता और अपनी खुद की फिल्मों को डब नहीं किया होता... लोग आज मुझे मेरी आवाज से पहचानते हैं। बहुत से लोगों ने नहीं सोचा था कि मेरी आवाज इतनी खास हो सकती है। ' रानी मुखर्जी ने बताया कि उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि लोग क्या कहेंगे। उन्होंने हमेशा अपनी शर्तों पर जीवन जिया है। रानी ने बताया वो अपना विश्वास बनाने और उस पर टिके रहने में विश्वास करती हैं। उन्होंने कहा, 'अगर मैं इसे ऐसे देखना शुरू कर दूं, तो मुझे अपने बजाय दूसरे लोगों के लिए जीना शुरू करना होगा। ' वहीं इंडस्ट्री में हो बदलाव पर रानी ने कहा, 'चीजें बेहतर के लिए बदल रही हैं। ' साथ ही उन्होंने कहा कि हर चीज के लिए अलग-अलग स्थिति है। बता दें कि रानी मुखर्जी की अपकमिंग फिल्म मिसेस चटर्जी बनाम नॉर्वे 17 मार्च को रिलीज होगी। फिल्म का ट्रेलर खासा पसंद किया गया है।
Rani Mukherji: रानी मुखर्जी को उनकी आवाज के लिए मिलते थे ताने, बोलीं- 'लोगों की. . . ' रानी मुखर्जी बॉलीवुड की सफल एक्ट्रेसेस में से एक हैं। उन्होंने अपने करियर में कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया है। हालांकि शुरुआत में उनका स्ट्रगल भी कम नहीं रहा। रानी को उनकी आवाज के लिए ताने भी दिए जाते थे। नई दिल्ली, जेएनएन। Rani Mukherji: रानी मुखर्जी को उनकी बेहतरीन अदाकारी के लिए जाना जाता है। एक्ट्रेस ने बॉलीवुड में पच्चीस साल पूरे कर लिए हैं। रानी मुखर्जी ने अपने करियर की शुरुआत एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में आई फिल्म 'राजा की आएगी बारात' से की थी। इस फिल्म में उनके अपोजिट शादाब खान ने लीड रोल प्ले किया था। रानी ने इस फिल्म में एक्टिंग तो अच्छी की थी, लेकिन उनकी आवाज और हाइट को लेकर उन्हें इंडस्ट्री में शुरुआत में काफी ताने दिए गए। अब रानी ने अपने इस स्ट्रगल के बारे में खुलकर बात की है। रानी मुखर्जी इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म 'मिसेज चटर्जी बनाम नॉर्वे' का प्रमोशन कर रही हैं। इस बीच एक्ट्रेस ने पिंकविला को दिए इंटरव्यू में बताया, 'अगर मैं वास्तव में विश्वास करती कि लोग मेरी आवाज के बारे में क्या सोचते हैं, तो मेरी आवाज लाखों लोगों द्वारा पसंद नहीं की जाती। अगर मैंने अपना पैर नीचे नहीं रखा होता और अपनी खुद की फिल्मों को डब नहीं किया होता... लोग आज मुझे मेरी आवाज से पहचानते हैं। बहुत से लोगों ने नहीं सोचा था कि मेरी आवाज इतनी खास हो सकती है। ' रानी मुखर्जी ने बताया कि उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि लोग क्या कहेंगे। उन्होंने हमेशा अपनी शर्तों पर जीवन जिया है। रानी ने बताया वो अपना विश्वास बनाने और उस पर टिके रहने में विश्वास करती हैं। उन्होंने कहा, 'अगर मैं इसे ऐसे देखना शुरू कर दूं, तो मुझे अपने बजाय दूसरे लोगों के लिए जीना शुरू करना होगा। ' वहीं इंडस्ट्री में हो बदलाव पर रानी ने कहा, 'चीजें बेहतर के लिए बदल रही हैं। ' साथ ही उन्होंने कहा कि हर चीज के लिए अलग-अलग स्थिति है। बता दें कि रानी मुखर्जी की अपकमिंग फिल्म मिसेस चटर्जी बनाम नॉर्वे सत्रह मार्च को रिलीज होगी। फिल्म का ट्रेलर खासा पसंद किया गया है।
कई बार लोग ज्यादा जरूरत नहीं होने पर भी आसानी से उपलब्ध हो जाने की वजह से पर्सनल लोन ले लेते हैं और बाद में उन्हें नुकसान भुगतने पढ़ते हैं। पर्सनल लोन की ब्याज दर कार लोन, होम लोन या और किसी भी लोन की तुलना में काफी ज्यादा होती है। इसलिए आपको लोन चुकाते समय ज्यादा बड़ी ईएमआई देनी पड़ती है, जिसका असर आपके महीने के बजट पर पड़ता है। इसमें कई बार 24 फीसदी तक ब्याज़ देना पढ़ सकता है। इसलिए लोन लेने से पहले इसकी ईएमआई की जानकारी ले लें। आप पर्सनल लोन ईएमआई लोन कैलकुलेटर के जरिए ऑनलाइन भी अपनी ईएमआई को कैलकुलेट कर सकते हैं। पर्सनल लोन में आपको प्री-पेमेंट चार्ज देना होता है, जबकि अन्य किसी लोन को लेते समय ये चार्ज नहीं लगता है। इसलिए यह अमाउंट आपको बिना बात के ही खर्च करना पड़ेगा। पर्सनल लोन में प्रोसेसिंग फीस काफी ज्यादा लगती है। अगर आप गोल्ड लोन या किसी और लोन से तुलना करें तो ये बहुत ज्यादा है, इसलिए लोन लेने के पहले सारी जानकारी हासिल कर लें। अगर आप प्रॉपर्टी या गोल्ड को गिरवी रखकर लोन ले सकते हैं, तो उस विकल्प को चुनें, वो आपको सस्ता पड़ेगा। अगर आप पर्सनल लोन लेते हैं और आप उसका भुगतान समय से नहीं कर पाते हैं तो इससे आपका क्रेडिट स्कोर ख़राब हो सकता है जिससे आपको भविष्य में जरूरत होने पर किसी भी तरह के लोन लेने में दिक्कत हो सकती है। अगर हम होम लोन, ऑटो लोन या फिर कोई और लोन लेते हैं तो हमारे पास पैसा होने पर हम एक साथ पार्ट पेमेंट या प्री-क्लोज़र कर सकते हैं, लेकिन पर्सनल लोन देने वाले ज्यादातर बैंक इस तरह की सुविधा नहीं देते और आपको पेमेंट जितने समय के लिए लोन लिया है उतने ही समय में करना होता है, इससे आपको नुकसान हो सकता है। अगर आप भी पर्सनल लोन लेने का सोच रहे हैं, तो एक बार इन बातों पर ज़रूर गौर कर लें।
कई बार लोग ज्यादा जरूरत नहीं होने पर भी आसानी से उपलब्ध हो जाने की वजह से पर्सनल लोन ले लेते हैं और बाद में उन्हें नुकसान भुगतने पढ़ते हैं। पर्सनल लोन की ब्याज दर कार लोन, होम लोन या और किसी भी लोन की तुलना में काफी ज्यादा होती है। इसलिए आपको लोन चुकाते समय ज्यादा बड़ी ईएमआई देनी पड़ती है, जिसका असर आपके महीने के बजट पर पड़ता है। इसमें कई बार चौबीस फीसदी तक ब्याज़ देना पढ़ सकता है। इसलिए लोन लेने से पहले इसकी ईएमआई की जानकारी ले लें। आप पर्सनल लोन ईएमआई लोन कैलकुलेटर के जरिए ऑनलाइन भी अपनी ईएमआई को कैलकुलेट कर सकते हैं। पर्सनल लोन में आपको प्री-पेमेंट चार्ज देना होता है, जबकि अन्य किसी लोन को लेते समय ये चार्ज नहीं लगता है। इसलिए यह अमाउंट आपको बिना बात के ही खर्च करना पड़ेगा। पर्सनल लोन में प्रोसेसिंग फीस काफी ज्यादा लगती है। अगर आप गोल्ड लोन या किसी और लोन से तुलना करें तो ये बहुत ज्यादा है, इसलिए लोन लेने के पहले सारी जानकारी हासिल कर लें। अगर आप प्रॉपर्टी या गोल्ड को गिरवी रखकर लोन ले सकते हैं, तो उस विकल्प को चुनें, वो आपको सस्ता पड़ेगा। अगर आप पर्सनल लोन लेते हैं और आप उसका भुगतान समय से नहीं कर पाते हैं तो इससे आपका क्रेडिट स्कोर ख़राब हो सकता है जिससे आपको भविष्य में जरूरत होने पर किसी भी तरह के लोन लेने में दिक्कत हो सकती है। अगर हम होम लोन, ऑटो लोन या फिर कोई और लोन लेते हैं तो हमारे पास पैसा होने पर हम एक साथ पार्ट पेमेंट या प्री-क्लोज़र कर सकते हैं, लेकिन पर्सनल लोन देने वाले ज्यादातर बैंक इस तरह की सुविधा नहीं देते और आपको पेमेंट जितने समय के लिए लोन लिया है उतने ही समय में करना होता है, इससे आपको नुकसान हो सकता है। अगर आप भी पर्सनल लोन लेने का सोच रहे हैं, तो एक बार इन बातों पर ज़रूर गौर कर लें।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
सतना। मध्य प्रदेश के सतना से आई इस खबर को पढ़ने के बाद आप निश्चित रूप से अपनी पत्नी को नाश्ते के बारे में कुछ बोलने से पहले दस बार सोचेंगे जरूर। दरअसल हुआ यह कि पति-पत्नी में एक सुबह नाश्ते को लेकर झगड़ा हुआ। बात हाथापाई तक पहुंच गई। इतना तक तो ठीक था, लेकिन झगड़े से नाराज पत्नी इतने गुस्से में आ गई कि इसने अपने पति के प्राइवेट पार्ट पर जोर से काट खाया। एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के अनुसार, वाकया मध्य प्रदेश के सतना जिले के एक गांव में रहने वाले जीतेंद्र पटेल और उमा का है। जीतेंद्र पटेल और उमा की शादी वर्ष 2010 में दो साल तक चले प्रेम प्रसंग के बाद हुई थी। इनके बीच सबकुछ सही चल रहा था लेकिन अचानक एक दिन पति-पत्नी में दिनभर किसी मुद्दे पर तरकार चलती रही। अगली सुबह जीतेंद्र ने काम पर जाने के पहले नाश्ता मांगा, लेकिन इस पर उसकी बीवी ने कोई ध्यान नहीं दिया। गुस्से में जीतेंद्र खुद ही रसोई में जाकर नाश्ता बनाने लगा। इस बीच उसकी बीवी उमा भी रसोई में पहुंच गई और दोनों में पहले बहस हुई और फिर हाथापाई शुरू हो गई। इस दौरान उनके बच्चे रोने लगे तो दोनों अलग हुए। लेकिन, उमा घरेलू सामान हाथ में लेकर जीतेंद्र पर वार करती रही। इस दौरान अचानक जीतेंद्र का तौलिया खुल गया और उमा ने जीतेंद्र के प्राइवेट पार्ट्स को दांतों से काट खाया। जीतेंद्र ने जैसे-तैसे खुद को छुड़ाया और पुलिस में इसकी शिकायत की। उस की बीवी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया और फिर उसे जमानत पर रिहा भी कर दिया गया। बाद में पुलिस ने दोनों में समझौता करवा दिया, जिसके बाद वे एक बार फिर साथ रहने लगे। हालांकि, शर्म के कारण वह डॉक्टर के पास नहीं गया। इस कारण जीतेंद्र के अंग में तकलीफ बढ़ती गई। उसके अंग में सूजन और मवाद की शिकायत हो गई। गांव के एक बुजुर्ग की सलाह पर वह डॉक्टर के पास गया। डॉक्टरों ने फौरन उसका इलाज शुरू किया और उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया। अब पुलिस के सामने यहह सवाल खड़ा हो गया है कि जीतेंद्र की पत्नी उमा के खिलाफ जान से मारने की कोशिश का मामला भी दर्ज करे या नहीं।
सतना। मध्य प्रदेश के सतना से आई इस खबर को पढ़ने के बाद आप निश्चित रूप से अपनी पत्नी को नाश्ते के बारे में कुछ बोलने से पहले दस बार सोचेंगे जरूर। दरअसल हुआ यह कि पति-पत्नी में एक सुबह नाश्ते को लेकर झगड़ा हुआ। बात हाथापाई तक पहुंच गई। इतना तक तो ठीक था, लेकिन झगड़े से नाराज पत्नी इतने गुस्से में आ गई कि इसने अपने पति के प्राइवेट पार्ट पर जोर से काट खाया। एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के अनुसार, वाकया मध्य प्रदेश के सतना जिले के एक गांव में रहने वाले जीतेंद्र पटेल और उमा का है। जीतेंद्र पटेल और उमा की शादी वर्ष दो हज़ार दस में दो साल तक चले प्रेम प्रसंग के बाद हुई थी। इनके बीच सबकुछ सही चल रहा था लेकिन अचानक एक दिन पति-पत्नी में दिनभर किसी मुद्दे पर तरकार चलती रही। अगली सुबह जीतेंद्र ने काम पर जाने के पहले नाश्ता मांगा, लेकिन इस पर उसकी बीवी ने कोई ध्यान नहीं दिया। गुस्से में जीतेंद्र खुद ही रसोई में जाकर नाश्ता बनाने लगा। इस बीच उसकी बीवी उमा भी रसोई में पहुंच गई और दोनों में पहले बहस हुई और फिर हाथापाई शुरू हो गई। इस दौरान उनके बच्चे रोने लगे तो दोनों अलग हुए। लेकिन, उमा घरेलू सामान हाथ में लेकर जीतेंद्र पर वार करती रही। इस दौरान अचानक जीतेंद्र का तौलिया खुल गया और उमा ने जीतेंद्र के प्राइवेट पार्ट्स को दांतों से काट खाया। जीतेंद्र ने जैसे-तैसे खुद को छुड़ाया और पुलिस में इसकी शिकायत की। उस की बीवी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया और फिर उसे जमानत पर रिहा भी कर दिया गया। बाद में पुलिस ने दोनों में समझौता करवा दिया, जिसके बाद वे एक बार फिर साथ रहने लगे। हालांकि, शर्म के कारण वह डॉक्टर के पास नहीं गया। इस कारण जीतेंद्र के अंग में तकलीफ बढ़ती गई। उसके अंग में सूजन और मवाद की शिकायत हो गई। गांव के एक बुजुर्ग की सलाह पर वह डॉक्टर के पास गया। डॉक्टरों ने फौरन उसका इलाज शुरू किया और उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया। अब पुलिस के सामने यहह सवाल खड़ा हो गया है कि जीतेंद्र की पत्नी उमा के खिलाफ जान से मारने की कोशिश का मामला भी दर्ज करे या नहीं।
वीर अर्जुन संवाददाता धौलपुर। मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसरण में विद्यार्थीयो के लिये शैक्षिक एवं सांस्कृतिक यात्रा के अन्तर्गत राजकीय विद्यालयो में अध्ययनरत कक्षा 9 एवं 10 के विद्यार्थियो के लिये अन्तर जिला शैक्षिक भ्रमण दल दिनांक 25-10-2012 को पात 10. 00 बजे रा...य के अन्य जिलो में 5 दिवसीय राजस्थान दर्शन कार्यकम अन्तर्गत शैक्षिक भ्रमण हेतु भेजा जायेगा। जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक गणेश धाकरे उपरोक्प दल को इस कार्यालय से पात 10. 00 बजे हरी झण्डी दिखाकर रवाना करेंगे। उपरोक्प दल में राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 9 एवं 10 के विद्यार्थी जिन्होने गत परीक्षा कक्षा 8 एवं 9 में न्यूनतम 70 पतिशत अंक पाप्त किये हो एवं राष्ट्रीय, रा...य स्तर पर सांस्कृतिक साहित्यिक एवं खेलकूद पतियोगिता मे भाग लेकर सहभागी, विजेता रहे छात्रो से पाप्त आवेदन पत्रो के आधार पर निर्धारित मेरिट पकिया द्वारा कक्षा 9 के 10 छात्र एवं कक्षा 10 के 10 छात्र कुल 20 छात्रो का चयन किया गया है। अनुपस्थित पाये गये बीएलओ को कारण बताओं नोटिस जारी-विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र 79 की मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कार्यकम के अन्तर्गत विशेष अभियान का सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण पदाधिकारी धौलपुर द्वारा बीएलओ का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान भाग संख्या 55 के बीएलओ मुकेश कुमार अध्यापक राजकीय पाथमिक विद्यालय सरानी तथा भाग संख्या 56 के बीएलओ रनवीर सिंह अध्यापक राजकीय पाथमिक विद्यालय चैनाकापुरा अनुपस्थित पाये गये। बीएलओ को कारण बताओं नोटिस जारी कर निर्वाचन नियमाकें के अन्तर्गत कार्यवाही अमल में लाई जा रही है। 28 अक्टूबर एवं 4 नवम्बर रविवार को भी पशासनिक अधिकारी पर्यवेक्षकों द्वारा निरीक्षण किया जायेगा। सभी बीएलओ आवश्यक रूप से अपने मतदान केन्द पर उपस्थित रहकर दावें आपत्तियां पाप्त करें। सभी पर्यवेक्षक अपने भाग से सम्बन्धित बीएलओ का निरीक्षण कर पगति रिपोर्ट से अवगत करायें। साप्ताहिक समीक्ष बैठक आयोजित-जिला कलक्टर कमलेश कुमार सिंघल की अध्यक्षता में पेयजल, विद्युत आपूर्ति एवं मौसमी बीमारियों की रोकथाम सम्बन्धी साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित हुई जिसमें उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में खराब हैण्डपम्पों को शीघ्र ठीक करवाने तथा शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की पाईप लाईनों के लीकेज ठीक करवाने के निर्देश दिये। उन्होंने राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत कार्य करने वाले ठेकेदार को पाथमिकता से कनेक्शन जारी करने के लिए गांवों की सूची उपलब्ध करवाने के निर्देश दिये।
वीर अर्जुन संवाददाता धौलपुर। मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसरण में विद्यार्थीयो के लिये शैक्षिक एवं सांस्कृतिक यात्रा के अन्तर्गत राजकीय विद्यालयो में अध्ययनरत कक्षा नौ एवं दस के विद्यार्थियो के लिये अन्तर जिला शैक्षिक भ्रमण दल दिनांक पच्चीस अक्टूबर दो हज़ार बारह को पात दस. शून्य बजे रा...य के अन्य जिलो में पाँच दिवसीय राजस्थान दर्शन कार्यकम अन्तर्गत शैक्षिक भ्रमण हेतु भेजा जायेगा। जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक गणेश धाकरे उपरोक्प दल को इस कार्यालय से पात दस. शून्य बजे हरी झण्डी दिखाकर रवाना करेंगे। उपरोक्प दल में राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा नौ एवं दस के विद्यार्थी जिन्होने गत परीक्षा कक्षा आठ एवं नौ में न्यूनतम सत्तर पतिशत अंक पाप्त किये हो एवं राष्ट्रीय, रा...य स्तर पर सांस्कृतिक साहित्यिक एवं खेलकूद पतियोगिता मे भाग लेकर सहभागी, विजेता रहे छात्रो से पाप्त आवेदन पत्रो के आधार पर निर्धारित मेरिट पकिया द्वारा कक्षा नौ के दस छात्र एवं कक्षा दस के दस छात्र कुल बीस छात्रो का चयन किया गया है। अनुपस्थित पाये गये बीएलओ को कारण बताओं नोटिस जारी-विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र उन्यासी की मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कार्यकम के अन्तर्गत विशेष अभियान का सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण पदाधिकारी धौलपुर द्वारा बीएलओ का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान भाग संख्या पचपन के बीएलओ मुकेश कुमार अध्यापक राजकीय पाथमिक विद्यालय सरानी तथा भाग संख्या छप्पन के बीएलओ रनवीर सिंह अध्यापक राजकीय पाथमिक विद्यालय चैनाकापुरा अनुपस्थित पाये गये। बीएलओ को कारण बताओं नोटिस जारी कर निर्वाचन नियमाकें के अन्तर्गत कार्यवाही अमल में लाई जा रही है। अट्ठाईस अक्टूबर एवं चार नवम्बर रविवार को भी पशासनिक अधिकारी पर्यवेक्षकों द्वारा निरीक्षण किया जायेगा। सभी बीएलओ आवश्यक रूप से अपने मतदान केन्द पर उपस्थित रहकर दावें आपत्तियां पाप्त करें। सभी पर्यवेक्षक अपने भाग से सम्बन्धित बीएलओ का निरीक्षण कर पगति रिपोर्ट से अवगत करायें। साप्ताहिक समीक्ष बैठक आयोजित-जिला कलक्टर कमलेश कुमार सिंघल की अध्यक्षता में पेयजल, विद्युत आपूर्ति एवं मौसमी बीमारियों की रोकथाम सम्बन्धी साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित हुई जिसमें उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में खराब हैण्डपम्पों को शीघ्र ठीक करवाने तथा शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की पाईप लाईनों के लीकेज ठीक करवाने के निर्देश दिये। उन्होंने राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत कार्य करने वाले ठेकेदार को पाथमिकता से कनेक्शन जारी करने के लिए गांवों की सूची उपलब्ध करवाने के निर्देश दिये।
नई दिल्ली। रिलायंस जियो ने अचानक अपने रिचार्ज प्लान में कैशबैंक की झड़ी लगा दी है। करीब आधा दर्जन कैशबैक के ऑफर इस समय चल रहे हैं। इनका फायदा उठा कर लोग 2020 रुपये तक का कैशबैक पा सकते हैं। इस रिलायंस जियाे ने हाल ही अपना सबसे सस्ता 1 साल का रिचार्ज प्लान '2020 हैप्पी न्यू ईयर ऑफर' शुरू किया है, जिसे 2020 रुपये में दिया जा रहा है। लोग चाहें तो यह रिचार्ज प्लान उन्हें फ्री में मिल सकता है। इस समय रिलायंस जियो के जो-जो कैशबैक ऑफर चल रहे हैं, आइये उनको जानते हैं। लेकिन यहां पर एक बार याद रखने की है कि यह कैशबैक ऑफर कुछ ही समय के लिए हैं। इसलिए जिस कैशबैक ऑफर का फायदा उठाना चाहते हैं, पहले उसकी लास्ट डेट जरूर देख लें। रिलायंस जियो का मोबाइल नंबर अगर कोई अमेजन से रिचार्ज कराता है, तो वह 300 रुपये तक का कैशबैक ले सकता है। जियो का यह ऑफर नए और पुराने दोनों तरह के ग्राहकों के लिए है। हालांकि अमेजन के माध्यम से रिलायंस जियो ऑफर का लाभ केवल 1 बार ही लिया जा सकता है। इस कैशबैक ऑफर का लाभ जनवरी 2020 में ही लिया जा सकता है। 149 रुपये या इससे ज्यादा का रिचार्ज कराने वालों को अमेजन पे-यूपीआई से रिचार्ज कराने पर 25 रुपये का सीधे-सीधे डिस्काउंट दिया जा रहा है। इस ऑफर का लाभ ग्राहक जनवरी 2020 में ही उठा सकते हैं। इसका लाभ ग्राहक केवल 1 बार ही उठा सकता है। यह 25 रुपये का डिस्काउंट पाने के लिए माई जियो ऐप या जियो डॉट काम से ही रिचार्ज कराना पड़ेगा। अगर रिलायंस जिया के ग्राहक पेटीएम से रिचार्ज कराते हैं तो वह 2020 रुपये का कैशबैक वाउचर पा सकते हैं। हालांकि यह ऑफर केवल ग्राहकों तक ही सीमित है। इस कैशबैक ऑफर का लाभ लेने के लिए लोगों को न्यूनतम 149 रुपये या इससे ज्यादा वाले रिचार्ज प्लान लेने होंगे। फोनपे से यूपीआई के तहत पेमेंट करके रिचार्ज कराने पर भी कैशबैक ऑफर दिया जा रहा है। ऐसे करने पर ग्राहक को 100 रुपये तक का कैशबैक लाभ मिल सकता है। वहीं इसके अलावा 50 रुपये का रिवॉर्ड भी जिता जा सकता है। ऐसे में अगर दोनों फायदों को जोड़ लिया जाए तो यह 150 रुपये तक का हो सकता है। वैसे अभी तक फोनपे से रिचार्ज कराने वाले ग्राहको को 50 रुपये का रिवॉर्ड बेनिफिट ही मिल रहा था। मोबीक्विक से अगर रिलायंस जियो के फोन को रिचार्ज कराया जाए तो 200 रुपये का सुपरकैश दिया जा रहा है। अगर इसका फायदा लेना चाहते हैं तो ग्राहक को रिचार्ज करते सयम JIO50P कोड लिख कर रिचार्ज कराना होगा। इसके बाद सुपरकैश का लाभ मिलेगा। रिलायंस जियो का अगर फोन फ्रीचार्ज कराएंगे तो नए ग्राहकों को 30 रुपये का सीधा-सीधा डिस्काउंट लाभ दिया जा रहा है। वहीं, पुराने ग्राहकों को 20 फीसदी का लाभ या 15 रुपये तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है।
नई दिल्ली। रिलायंस जियो ने अचानक अपने रिचार्ज प्लान में कैशबैंक की झड़ी लगा दी है। करीब आधा दर्जन कैशबैक के ऑफर इस समय चल रहे हैं। इनका फायदा उठा कर लोग दो हज़ार बीस रुपयापये तक का कैशबैक पा सकते हैं। इस रिलायंस जियाे ने हाल ही अपना सबसे सस्ता एक साल का रिचार्ज प्लान 'दो हज़ार बीस हैप्पी न्यू ईयर ऑफर' शुरू किया है, जिसे दो हज़ार बीस रुपयापये में दिया जा रहा है। लोग चाहें तो यह रिचार्ज प्लान उन्हें फ्री में मिल सकता है। इस समय रिलायंस जियो के जो-जो कैशबैक ऑफर चल रहे हैं, आइये उनको जानते हैं। लेकिन यहां पर एक बार याद रखने की है कि यह कैशबैक ऑफर कुछ ही समय के लिए हैं। इसलिए जिस कैशबैक ऑफर का फायदा उठाना चाहते हैं, पहले उसकी लास्ट डेट जरूर देख लें। रिलायंस जियो का मोबाइल नंबर अगर कोई अमेजन से रिचार्ज कराता है, तो वह तीन सौ रुपयापये तक का कैशबैक ले सकता है। जियो का यह ऑफर नए और पुराने दोनों तरह के ग्राहकों के लिए है। हालांकि अमेजन के माध्यम से रिलायंस जियो ऑफर का लाभ केवल एक बार ही लिया जा सकता है। इस कैशबैक ऑफर का लाभ जनवरी दो हज़ार बीस में ही लिया जा सकता है। एक सौ उनचास रुपयापये या इससे ज्यादा का रिचार्ज कराने वालों को अमेजन पे-यूपीआई से रिचार्ज कराने पर पच्चीस रुपयापये का सीधे-सीधे डिस्काउंट दिया जा रहा है। इस ऑफर का लाभ ग्राहक जनवरी दो हज़ार बीस में ही उठा सकते हैं। इसका लाभ ग्राहक केवल एक बार ही उठा सकता है। यह पच्चीस रुपयापये का डिस्काउंट पाने के लिए माई जियो ऐप या जियो डॉट काम से ही रिचार्ज कराना पड़ेगा। अगर रिलायंस जिया के ग्राहक पेटीएम से रिचार्ज कराते हैं तो वह दो हज़ार बीस रुपयापये का कैशबैक वाउचर पा सकते हैं। हालांकि यह ऑफर केवल ग्राहकों तक ही सीमित है। इस कैशबैक ऑफर का लाभ लेने के लिए लोगों को न्यूनतम एक सौ उनचास रुपयापये या इससे ज्यादा वाले रिचार्ज प्लान लेने होंगे। फोनपे से यूपीआई के तहत पेमेंट करके रिचार्ज कराने पर भी कैशबैक ऑफर दिया जा रहा है। ऐसे करने पर ग्राहक को एक सौ रुपयापये तक का कैशबैक लाभ मिल सकता है। वहीं इसके अलावा पचास रुपयापये का रिवॉर्ड भी जिता जा सकता है। ऐसे में अगर दोनों फायदों को जोड़ लिया जाए तो यह एक सौ पचास रुपयापये तक का हो सकता है। वैसे अभी तक फोनपे से रिचार्ज कराने वाले ग्राहको को पचास रुपयापये का रिवॉर्ड बेनिफिट ही मिल रहा था। मोबीक्विक से अगर रिलायंस जियो के फोन को रिचार्ज कराया जाए तो दो सौ रुपयापये का सुपरकैश दिया जा रहा है। अगर इसका फायदा लेना चाहते हैं तो ग्राहक को रिचार्ज करते सयम JIOपचासP कोड लिख कर रिचार्ज कराना होगा। इसके बाद सुपरकैश का लाभ मिलेगा। रिलायंस जियो का अगर फोन फ्रीचार्ज कराएंगे तो नए ग्राहकों को तीस रुपयापये का सीधा-सीधा डिस्काउंट लाभ दिया जा रहा है। वहीं, पुराने ग्राहकों को बीस फीसदी का लाभ या पंद्रह रुपयापये तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है।
नीमच(नईदुनिया प्रतिनिधि)। एक्य एकेडमी के तत्वावधान में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी परंपरा अनुसार रन फार यूनिटी दौड़ का आयोजन शनिवार सुबह सात बजे विद्युत केंद्र के सामने से प्रारंभ हुआ। एकेडमी के संस्थापक धीरेंद्र गहलोत ने बताया कि प्रतियोगिता दौड़ में पुरुष और महिला दोनों वर्ग शामिल हुए एवं दोनों वर्गों से प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं उपविजिताओ को पुरुस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। रन फार यूनिटी प्रतियोगिता में पुरुष वर्ग में देवीलाल मेघवाल प्रथम, दीपक खटीक द्वितीय, ईश्वर खींची तृतीय स्थान पर रहे तथा महिला वर्ग में जयललिता बैरागी प्रथम, ममता भाभर द्वितीय एवं हेमां अहीर तृतीय स्थान पर रहे। विजेता उपविजेता को पुरस्कार शुभम पाटीदार, जितेंद्र धनगर, मेजर समीर सिंह, पीतेश अग्रवाल की ओर से प्रथम को शूज, दितीय को ट्रैक सूट, तृतीय को ट्रैवल बैग आगामी कार्यक्रम एनीमेंस इंस्टिट्यूट एंड एकय अकैडमी विकासनगर में प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। रन फार यूनिटी में प्रथम 50 विजेताओं को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। रन फार यूनिटी की दौड़ 18 मिनट 26 सेकंड में पूरी हुई। विजेताओं को पुरस्कार स्टेट बैंक आफ इंडिया के सेवानिवृत्त उप प्रबंधक महेंद्र मदनलाल चौहान के कर कमलों से प्रदान किए गए। चौहान ने कहा कि भारतीय नागरिकों ने एकता के लिए विद्यार्थियों में दौड़ने के प्रति उत्साह सम्मान जो दम और जोश दिखाया है हमें देश के प्रति इसी प्रकार जागरूक रहना चाहिए। तभी देश विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में अग्रिम स्थान पर आगे बढ़ पाएगा। उल्लेखनीय है कि शहर के हाई सेकंडरी स्कूल क्रमांक-दो मैदान पर संचालित डिफेंस कैप्टन एकेडमी के निदेशक गणपत मेघवाल ने बताया कि उनके द्वारा प्रशिक्षित धावक प्रथम देवीलाल मेघवाल, जयललिता बैरागी, ममता भाभर, हेमा अहीर विजेता टीम में रहे हैं। जोकि इन के निरंतर अभ्यास का परिणाम है। कार्यक्रम का संचालन धीरेंद्र गहलोत ने किया तथा आभार पायल चौहान ने माना।
नीमच। एक्य एकेडमी के तत्वावधान में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी परंपरा अनुसार रन फार यूनिटी दौड़ का आयोजन शनिवार सुबह सात बजे विद्युत केंद्र के सामने से प्रारंभ हुआ। एकेडमी के संस्थापक धीरेंद्र गहलोत ने बताया कि प्रतियोगिता दौड़ में पुरुष और महिला दोनों वर्ग शामिल हुए एवं दोनों वर्गों से प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं उपविजिताओ को पुरुस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। रन फार यूनिटी प्रतियोगिता में पुरुष वर्ग में देवीलाल मेघवाल प्रथम, दीपक खटीक द्वितीय, ईश्वर खींची तृतीय स्थान पर रहे तथा महिला वर्ग में जयललिता बैरागी प्रथम, ममता भाभर द्वितीय एवं हेमां अहीर तृतीय स्थान पर रहे। विजेता उपविजेता को पुरस्कार शुभम पाटीदार, जितेंद्र धनगर, मेजर समीर सिंह, पीतेश अग्रवाल की ओर से प्रथम को शूज, दितीय को ट्रैक सूट, तृतीय को ट्रैवल बैग आगामी कार्यक्रम एनीमेंस इंस्टिट्यूट एंड एकय अकैडमी विकासनगर में प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। रन फार यूनिटी में प्रथम पचास विजेताओं को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। रन फार यूनिटी की दौड़ अट्ठारह मिनट छब्बीस सेकंड में पूरी हुई। विजेताओं को पुरस्कार स्टेट बैंक आफ इंडिया के सेवानिवृत्त उप प्रबंधक महेंद्र मदनलाल चौहान के कर कमलों से प्रदान किए गए। चौहान ने कहा कि भारतीय नागरिकों ने एकता के लिए विद्यार्थियों में दौड़ने के प्रति उत्साह सम्मान जो दम और जोश दिखाया है हमें देश के प्रति इसी प्रकार जागरूक रहना चाहिए। तभी देश विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में अग्रिम स्थान पर आगे बढ़ पाएगा। उल्लेखनीय है कि शहर के हाई सेकंडरी स्कूल क्रमांक-दो मैदान पर संचालित डिफेंस कैप्टन एकेडमी के निदेशक गणपत मेघवाल ने बताया कि उनके द्वारा प्रशिक्षित धावक प्रथम देवीलाल मेघवाल, जयललिता बैरागी, ममता भाभर, हेमा अहीर विजेता टीम में रहे हैं। जोकि इन के निरंतर अभ्यास का परिणाम है। कार्यक्रम का संचालन धीरेंद्र गहलोत ने किया तथा आभार पायल चौहान ने माना।
नई दिल्लीः एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य मौलाना सलमान नदवी ने अयोध्या में विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण का समर्थन किया है। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर के साथ बातचीत के बाद मौलाना नदवी ने कहा कि मस्जिद निर्माण के लिए अलग से जमीन मुहैया कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उस जगह पर यूनिवर्सिटी भी बनाई जा सकती है। इंडिया टीवी के खास बातचीत में मौलाना नदवी ने कहा कि अंग्रेजों की फूट डालो और शासन करो की नीति के चलते हिंदू और मुसलमानों के बीच हमेशा दरार पैदा करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि इसी का नतीजा रहा कि भीड़ ने मस्जिद को तोड़ दिया और लोग तमाशा देखते रहे। नदवी ने कहा कि हम तो चाहते हैं कि विन विन की पोजिशन हो। हम भी जीतें और वे भी जीतें। जो खराब वाक्या हो चुका है उसे अब न दोहराया जाए। मस्जिद को कहीं शिफ्ट कर झगड़े को खत्म किया जा सकता है। फैजाबाद से लखनऊ के दरम्यां के दौरान एक ऐसी जगह दी जाए जहां मस्जिद और यूनिवर्सिटी बनाई जाए। हर चीज हो सकती है अगर मिलजुल कर फैसला किया जाए। उन्होंने कहा कि इस्लाम के अंदर यह व्यवस्था है कि मस्जिद को कहीं शिफ्ट किया जा सकता है लेकिन इस संबंध में अंतिम फैसला ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य को करना है।
नई दिल्लीः एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना सलमान नदवी ने अयोध्या में विवादित भूमि पर राम मंदिर निर्माण का समर्थन किया है। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर के साथ बातचीत के बाद मौलाना नदवी ने कहा कि मस्जिद निर्माण के लिए अलग से जमीन मुहैया कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उस जगह पर यूनिवर्सिटी भी बनाई जा सकती है। इंडिया टीवी के खास बातचीत में मौलाना नदवी ने कहा कि अंग्रेजों की फूट डालो और शासन करो की नीति के चलते हिंदू और मुसलमानों के बीच हमेशा दरार पैदा करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि इसी का नतीजा रहा कि भीड़ ने मस्जिद को तोड़ दिया और लोग तमाशा देखते रहे। नदवी ने कहा कि हम तो चाहते हैं कि विन विन की पोजिशन हो। हम भी जीतें और वे भी जीतें। जो खराब वाक्या हो चुका है उसे अब न दोहराया जाए। मस्जिद को कहीं शिफ्ट कर झगड़े को खत्म किया जा सकता है। फैजाबाद से लखनऊ के दरम्यां के दौरान एक ऐसी जगह दी जाए जहां मस्जिद और यूनिवर्सिटी बनाई जाए। हर चीज हो सकती है अगर मिलजुल कर फैसला किया जाए। उन्होंने कहा कि इस्लाम के अंदर यह व्यवस्था है कि मस्जिद को कहीं शिफ्ट किया जा सकता है लेकिन इस संबंध में अंतिम फैसला ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य को करना है।
- कई संकेत बुल्स के पक्ष में गार्ड में संभावित बदलाव की ओर इशारा करते हैं। - गिरती कीमतों के बावजूद ALGO ने स्वस्थ पता वृद्धि बरकरार रखी है। अल्गोरंड [ALGO] ऐसा प्रतीत होता है कि बैलों को ब्रेक नहीं मिल रहा है क्योंकि क्रिप्टोकरेंसी से तरलता का रिसाव जारी है। लेकिन क्या इस मंदी के हमले का कोई अंत नज़र आ रहा है? हाल के आंकड़ों से पता चला है कि ए तेजी से राहत ALGO के कार्ड पर हो सकता है। ALGO ने पिछले कुछ महीनों में कई तेजी से पुनर्प्राप्ति प्रयास किए। दुर्भाग्य से, प्रत्येक प्रयास को विफल कर दिया गया। जुलाई की शुरुआत से ही इसके प्रदर्शन का यही हाल रहा है। इसके मंदी के प्रदर्शन को परिप्रेक्ष्य में रखने के लिए, जून में यह $0.091 तक गिर गया। यह इतिहास में इसकी सबसे कम दर्ज कीमत थी। पिछले 24 घंटों में ALGO $0.10 के निचले स्तर पर पहुँच गया। यह इस महीने अब तक का सबसे कम मूल्य बिंदु दर्शाता है। इस गिरावट ने इसके रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) और मनी फ्लो इंडेक्स (एमएफआई) को ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंचा दिया। तथ्य यह है कि कीमत में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई, यह पहला संकेत था कि कुछ संचय हुआ है। लेखन के समय 8% की वृद्धि के बाद प्रेस समय में इसका कारोबार 0.11 पर हुआ। यह मामूली बढ़त ही तेजी के आशावाद का एकमात्र कारण नहीं थी। हमने पिछले 24 घंटों में अल्गोरैंड के सामाजिक प्रभुत्व में वृद्धि देखी, जिसके दौरान यह पिछले चार हफ्तों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा, गिरती कीमतों के बावजूद ALGO की भारित भावना मीट्रिक बढ़ रही है। इस मेट्रिक्स संयोजन ने संकेत दिया कि क्रिप्टोकरेंसी पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। अधिक ध्यान और तेजी की भावना एक धुरी के लिए पर्याप्त मांग को ट्रिगर करने के लिए बाध्य थी। विशेष रूप से ALGO द्वारा अनुभव किए गए नकारात्मक पक्ष के बाद। निचले मूल्य स्तरों पर अधिक दृश्यता तेजी की मात्रा का समर्थन करती है। आश्चर्य की बात नहीं है कि पिछले कुछ दिनों में क्रिप्टोकरेंसी का वॉल्यूम धीरे-धीरे बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटों में इसने चार सप्ताह का उच्चतम स्तर दर्ज किया। जबकि बढ़ती मात्रा और भावना ने एक बेहतर दृष्टिकोण की ओर इशारा किया, एक प्रमुख अवलोकन था जिसने एक मजबूत धुरी की संभावना का समर्थन किया। अल्गोरंड नेटवर्क ने पिछले 30 दिनों में मजबूत सकारात्मक पता वृद्धि बनाए रखी है। यह उन रिपोर्टों के बावजूद है कि यह बंद हो जाएगा इसका सबसे बड़ा DeFi प्रोटोकॉल. अल्गोरंड की पता वृद्धि ने पुष्टि की कि नेटवर्क अभी भी सही प्रक्षेपवक्र पर है, भले ही ALGO की कीमत कार्रवाई अन्यथा सुझाती हो। हालाँकि, मूल्य कार्रवाई हमेशा अंतर्निहित नेटवर्क के प्रदर्शन का सटीक प्रतिनिधित्व नहीं करती है। हालिया धुरी ने समग्र बाजार के प्रदर्शन को भी प्रतिबिंबित किया। के बीच लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में एक अनुकूल फैसले के सौजन्य से पिछले 24 घंटों में क्रिप्टो बैलों को स्वस्थ बढ़ावा मिला। रिपल और एसईसी.
- कई संकेत बुल्स के पक्ष में गार्ड में संभावित बदलाव की ओर इशारा करते हैं। - गिरती कीमतों के बावजूद ALGO ने स्वस्थ पता वृद्धि बरकरार रखी है। अल्गोरंड [ALGO] ऐसा प्रतीत होता है कि बैलों को ब्रेक नहीं मिल रहा है क्योंकि क्रिप्टोकरेंसी से तरलता का रिसाव जारी है। लेकिन क्या इस मंदी के हमले का कोई अंत नज़र आ रहा है? हाल के आंकड़ों से पता चला है कि ए तेजी से राहत ALGO के कार्ड पर हो सकता है। ALGO ने पिछले कुछ महीनों में कई तेजी से पुनर्प्राप्ति प्रयास किए। दुर्भाग्य से, प्रत्येक प्रयास को विफल कर दिया गया। जुलाई की शुरुआत से ही इसके प्रदर्शन का यही हाल रहा है। इसके मंदी के प्रदर्शन को परिप्रेक्ष्य में रखने के लिए, जून में यह शून्य दशमलव इक्यानवे डॉलर तक गिर गया। यह इतिहास में इसकी सबसे कम दर्ज कीमत थी। पिछले चौबीस घंटाटों में ALGO शून्य दशमलव दस डॉलर के निचले स्तर पर पहुँच गया। यह इस महीने अब तक का सबसे कम मूल्य बिंदु दर्शाता है। इस गिरावट ने इसके रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स और मनी फ्लो इंडेक्स को ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंचा दिया। तथ्य यह है कि कीमत में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई, यह पहला संकेत था कि कुछ संचय हुआ है। लेखन के समय आठ% की वृद्धि के बाद प्रेस समय में इसका कारोबार शून्य.ग्यारह पर हुआ। यह मामूली बढ़त ही तेजी के आशावाद का एकमात्र कारण नहीं थी। हमने पिछले चौबीस घंटाटों में अल्गोरैंड के सामाजिक प्रभुत्व में वृद्धि देखी, जिसके दौरान यह पिछले चार हफ्तों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा, गिरती कीमतों के बावजूद ALGO की भारित भावना मीट्रिक बढ़ रही है। इस मेट्रिक्स संयोजन ने संकेत दिया कि क्रिप्टोकरेंसी पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। अधिक ध्यान और तेजी की भावना एक धुरी के लिए पर्याप्त मांग को ट्रिगर करने के लिए बाध्य थी। विशेष रूप से ALGO द्वारा अनुभव किए गए नकारात्मक पक्ष के बाद। निचले मूल्य स्तरों पर अधिक दृश्यता तेजी की मात्रा का समर्थन करती है। आश्चर्य की बात नहीं है कि पिछले कुछ दिनों में क्रिप्टोकरेंसी का वॉल्यूम धीरे-धीरे बढ़ रहा है। पिछले चौबीस घंटाटों में इसने चार सप्ताह का उच्चतम स्तर दर्ज किया। जबकि बढ़ती मात्रा और भावना ने एक बेहतर दृष्टिकोण की ओर इशारा किया, एक प्रमुख अवलोकन था जिसने एक मजबूत धुरी की संभावना का समर्थन किया। अल्गोरंड नेटवर्क ने पिछले तीस दिनों में मजबूत सकारात्मक पता वृद्धि बनाए रखी है। यह उन रिपोर्टों के बावजूद है कि यह बंद हो जाएगा इसका सबसे बड़ा DeFi प्रोटोकॉल. अल्गोरंड की पता वृद्धि ने पुष्टि की कि नेटवर्क अभी भी सही प्रक्षेपवक्र पर है, भले ही ALGO की कीमत कार्रवाई अन्यथा सुझाती हो। हालाँकि, मूल्य कार्रवाई हमेशा अंतर्निहित नेटवर्क के प्रदर्शन का सटीक प्रतिनिधित्व नहीं करती है। हालिया धुरी ने समग्र बाजार के प्रदर्शन को भी प्रतिबिंबित किया। के बीच लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में एक अनुकूल फैसले के सौजन्य से पिछले चौबीस घंटाटों में क्रिप्टो बैलों को स्वस्थ बढ़ावा मिला। रिपल और एसईसी.
दूसरे दिन भी उस ही नाम की चर्चा रही जिसकी पहले दिन रही थी। जो रूट ने शुक्रवार को अपने सौंवे टेस्ट में शुक्रवार को शतक जड़ा था तो शनिवार को दोहरा शतक जड़ दिया। चेन्नई के एम ए चिदंबरम स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में जो रूट ने अपने खेल में बदलाव दिखाया। कल जब वह सिब्ली के साथ खेल रहे थे तो वह तेजी से रन बना रहे थे लेकिन आज जब उनके सामने बेन स्टोक्स थे तो वह एक छोर पर खूंटा गाड़ कर बैठे रहे। स्टोक्स के आउट होने के बाद उन्होंने जरूर कुछ शॉट लगाए। शनिवार को खबर लिखे जाने तक जो रूट ने सिर्फ 3 चौके ही मारे हैं। यह दर्शाता है कि उनको अपनी पारी को सजाना आता है। पहले दिन रुट 197 गेंदों में 14 चौकों और एक छक्के की मदद से 128 रन बनाकर क्रीज पर थे। आज खेल शुरु हुआ तो उन्होंने धीमे गति से बल्लेबाजी की और सामने स्ट्रोक्स खेलने वाले बेन स्टोक्स को तेज खेलने के लिए प्रेरित किया। कल रूट ने प्रेस कॉंफ्रेस में कहा था कि वह पिच के अनुसार ढ़लने की कोशिश कर रहे थे और बड़ी पारी खेलना चाहते हैं। इस पिच पर उनका खेलनाआसान हो गया है क्योंकि जितनी देर पिच पर टिकेंगे आपके लिए खेलना ज्यादा आसान हो जाता है। दोहरे शतक के पास पहुंचने के बाद उन्होंने ज्यादा इंतजार नहीं किया और अश्विन की गेंद पर छक्का जड़ कर 341 गेंदो में अपना दोहरा शतक पूरा किया। यह तीन टेस्ट मैचों में उनका दूसरा दोहरा शतक है और करियर का पांचवा दोहरा शतक। इंग्लैंड के कप्तान की मैराथन 377 गेंदें खेलने के बाद खत्म हुई। 218 के स्कोर पर जो रूट शाबाज नदीम की गेंद पर पगबाधा आउट हो गए। (वेबदुनिया डेस्क)
दूसरे दिन भी उस ही नाम की चर्चा रही जिसकी पहले दिन रही थी। जो रूट ने शुक्रवार को अपने सौंवे टेस्ट में शुक्रवार को शतक जड़ा था तो शनिवार को दोहरा शतक जड़ दिया। चेन्नई के एम ए चिदंबरम स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में जो रूट ने अपने खेल में बदलाव दिखाया। कल जब वह सिब्ली के साथ खेल रहे थे तो वह तेजी से रन बना रहे थे लेकिन आज जब उनके सामने बेन स्टोक्स थे तो वह एक छोर पर खूंटा गाड़ कर बैठे रहे। स्टोक्स के आउट होने के बाद उन्होंने जरूर कुछ शॉट लगाए। शनिवार को खबर लिखे जाने तक जो रूट ने सिर्फ तीन चौके ही मारे हैं। यह दर्शाता है कि उनको अपनी पारी को सजाना आता है। पहले दिन रुट एक सौ सत्तानवे गेंदों में चौदह चौकों और एक छक्के की मदद से एक सौ अट्ठाईस रन बनाकर क्रीज पर थे। आज खेल शुरु हुआ तो उन्होंने धीमे गति से बल्लेबाजी की और सामने स्ट्रोक्स खेलने वाले बेन स्टोक्स को तेज खेलने के लिए प्रेरित किया। कल रूट ने प्रेस कॉंफ्रेस में कहा था कि वह पिच के अनुसार ढ़लने की कोशिश कर रहे थे और बड़ी पारी खेलना चाहते हैं। इस पिच पर उनका खेलनाआसान हो गया है क्योंकि जितनी देर पिच पर टिकेंगे आपके लिए खेलना ज्यादा आसान हो जाता है। दोहरे शतक के पास पहुंचने के बाद उन्होंने ज्यादा इंतजार नहीं किया और अश्विन की गेंद पर छक्का जड़ कर तीन सौ इकतालीस गेंदो में अपना दोहरा शतक पूरा किया। यह तीन टेस्ट मैचों में उनका दूसरा दोहरा शतक है और करियर का पांचवा दोहरा शतक। इंग्लैंड के कप्तान की मैराथन तीन सौ सतहत्तर गेंदें खेलने के बाद खत्म हुई। दो सौ अट्ठारह के स्कोर पर जो रूट शाबाज नदीम की गेंद पर पगबाधा आउट हो गए।
Aaj Samaj, (आज समाज) Sri Krishna School Seehama , नीरज कौशिक, महेंद्रगढ़ः श्रीकृष्णा स्कूल सीहमा में मातृदिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूपमें स्कूल के चैयरमेन डॉ. बीरसिंह यादव उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल प्राचार्य द्वारा की गई। इस बारे में जानकारी देते कॉर्डिनेटर सुशीला व स्मृति रानी ने संयुक्त रूप से बताया कि श्रीकृष्णा स्कूल सीहमा में मातृ दिवस को लेकर मास्टर शैफ, म्यूजिकल चेयर एवं बच्चों व माताओं के साथ रैप व डांस सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। मास्टर शैफ कार्यक्रम के दौरान बच्चों की माताएं घर से खाना बनाकर लेकर आई वहीं माताओं एवं विद्यार्थियों ने म्यूजिकल चेयर व रैंप वॉक में शानदार प्रस्तुतियां दी। कॉर्डिनेटर ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान कक्षा प्रथम से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस मौके पर स्कूल के चेयरमैन डॉ. बीरसिंह यादव ने विद्यार्थियों बधाई देते उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि मां परिवार की रीढ़ होती हैं जो पूरे परिवार को बांधती हैं मां हमें दुनिया का सामना करने का आत्मविश्वास देती हैं और हमें अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि एक अच्छी मां एक मूर्तिकार की तरह काम करती है जो अपने बच्चों को सुंदर मूर्तियों में ढालती है जिन्हें समाज में बहुत सराहा जाता है और सम्मानित किया जाता है। इस अवसर पर प्राचार्य वीरेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि मां का स्थान भगवान से कम नहीं है। मां ने हमें जीवन दिया और हमें अपने पैरों पर खड़ा किया। मां थके होने के बावजूद भी निस्वार्थ प्रेम करती है। उन्होंने कहा कि मां के लिए उसका बच्चा ही पूरी दुनिया होता है तथा एक मां अपने बच्चें को विश्व पटल पर उसकी पहचान दिलाती है। मां अपने बच्चों के लिए गर्भ से लेकर जीवन भर तक संघर्ष करती रहती है। इस मौके पर स्कूल के प्राचार्य ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि मां को धरती पर भगवान का रूप कहा जाता है। हर व्यक्ति के जीवन में मां की अलग ही अहमियत होती है तथा मां एक संरक्षक एवं मार्गदर्शक के रूप में भी काम करती है, जो दुनिया को अपनी संतान से परिचित कराती है तथा उनकी भलाई भी सुनिश्चित करती है। इस मौके पर स्कूल का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
Aaj Samaj, Sri Krishna School Seehama , नीरज कौशिक, महेंद्रगढ़ः श्रीकृष्णा स्कूल सीहमा में मातृदिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूपमें स्कूल के चैयरमेन डॉ. बीरसिंह यादव उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल प्राचार्य द्वारा की गई। इस बारे में जानकारी देते कॉर्डिनेटर सुशीला व स्मृति रानी ने संयुक्त रूप से बताया कि श्रीकृष्णा स्कूल सीहमा में मातृ दिवस को लेकर मास्टर शैफ, म्यूजिकल चेयर एवं बच्चों व माताओं के साथ रैप व डांस सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। मास्टर शैफ कार्यक्रम के दौरान बच्चों की माताएं घर से खाना बनाकर लेकर आई वहीं माताओं एवं विद्यार्थियों ने म्यूजिकल चेयर व रैंप वॉक में शानदार प्रस्तुतियां दी। कॉर्डिनेटर ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान कक्षा प्रथम से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस मौके पर स्कूल के चेयरमैन डॉ. बीरसिंह यादव ने विद्यार्थियों बधाई देते उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि मां परिवार की रीढ़ होती हैं जो पूरे परिवार को बांधती हैं मां हमें दुनिया का सामना करने का आत्मविश्वास देती हैं और हमें अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि एक अच्छी मां एक मूर्तिकार की तरह काम करती है जो अपने बच्चों को सुंदर मूर्तियों में ढालती है जिन्हें समाज में बहुत सराहा जाता है और सम्मानित किया जाता है। इस अवसर पर प्राचार्य वीरेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि मां का स्थान भगवान से कम नहीं है। मां ने हमें जीवन दिया और हमें अपने पैरों पर खड़ा किया। मां थके होने के बावजूद भी निस्वार्थ प्रेम करती है। उन्होंने कहा कि मां के लिए उसका बच्चा ही पूरी दुनिया होता है तथा एक मां अपने बच्चें को विश्व पटल पर उसकी पहचान दिलाती है। मां अपने बच्चों के लिए गर्भ से लेकर जीवन भर तक संघर्ष करती रहती है। इस मौके पर स्कूल के प्राचार्य ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि मां को धरती पर भगवान का रूप कहा जाता है। हर व्यक्ति के जीवन में मां की अलग ही अहमियत होती है तथा मां एक संरक्षक एवं मार्गदर्शक के रूप में भी काम करती है, जो दुनिया को अपनी संतान से परिचित कराती है तथा उनकी भलाई भी सुनिश्चित करती है। इस मौके पर स्कूल का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
बन्सा [ २६ जनवरी ] स्वाधीनता दिवस का समारोह नोआखाली के सुदूर एक कोने में पड़े हुए बन्ला गाँव को महात्मा गान्धीका मेहमान के रूप में स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जब कि सारे देश में स्वाधीनता दिवस मनाया गया। आज २६ जनवरी का दिन देश की स्वाधीनतां के लिये दृढ़ प्रयत्न करने की शपथ दुहराने का पुनीत दिवस था। आज संसार को एक बार फिर यह याद दिलाने का दिन था कि आज हम भारतवासी अपनी स्वाधीनता लेने के लिये पहिले की अपेक्षा अधिक दृढ़-प्रतिज्ञ हैं और अनिच्छुक हाथों से ले लेने में संसार की कोई भी शक्ति रोक नहीं सकती । ! गान्धीजी आज प्रातःकालः हीरापुर में अपनी कुटी से जब बन्ला चलने को तैयार हुए, तो आपकी आज की यात्रा में साथ चलते को उद्यत सभी लोगों ने एक साथ 'वन्देमातरम्' गायन गाया। : इसके बाद जब महात्माजी ने प्रस्थान किया, तो 'वंदेमातरम्' और अकबर' की गगन भेदी ध्वनि की गयी और चलने के साथ रामधुन भजन गाया जाने लगा। दूर-दूर के गाँवों में भी राष्ट्रीय गाने की ध्वनि गूंज उठी। यह गाना आज के अवसर के लिये विशेष रूप से तैयार किया गया था । यात्री में रास्ते भर बराबर यह गाना गाया जाता रहा । बन्सा हीरापुर से ठीक दो मील दक्षिण में है । १५ मिनट में गान्धीजी ने यह दो मील का मार्ग पूरा किया और में बजर ३५ मिनट पर पहुँच गये। वहाँ आप कविराज जग बंधु सील के मकान पर ठहरे। गांधीजी की कुटी' में आज स्वाधीनता दिवस मनाया गया । सरदार जीवन सिंह ने तिरङ्गा भएडा गान्धीजी की कुटी के सामने फहराया । गान्धीजी वहाँ से थोड़ी दूर पर मालिस करो रहे थे । झण्डाभिवादन के समय आजाद हिन्द फौज लोगों ने 'जन-गण-मन अधिनायक' गाना गाया और 'वंदेमातरम्' 'अल्लाहो अकबर' 'महात्मा गांधी की जय' 'नेताजी की जय' आदि नारे लगाये गये । इसके अतिरिक्त अन्य कोई कार्य गांधीजी की कुटी में नहीं हुआ । गांधीजी के साथ चलने वाले पत्र सम्बाददाताओं ने भी अपने खेमे में स्वाधीनता-दिवस गांधीजी के आशीर्वाद के साथ मनाया । अ०भा कॉग्रेस कमेटी और विधान सम्मेलन के सर्वस्य श्री यदुनंदन सहाय ने राष्ट्रीय झण्डा फहराया, जो बिहार सरकार की ओर से गांधीजी के साथ रहते हैं। गांधीजा के उर्दू 'हरिजन' सेवक' के कार्यकर्ता तथा गांधीजी के पास आने वाली 'ऽर्दू चिट्टियों का उत्तर देने वाले मिद " महमूंद अहमद हुनर ने हिन्दुस्तानी में स्वाधीनता की शपथ दुहरायी, जिसे
बन्सा [ छब्बीस जनवरी ] स्वाधीनता दिवस का समारोह नोआखाली के सुदूर एक कोने में पड़े हुए बन्ला गाँव को महात्मा गान्धीका मेहमान के रूप में स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जब कि सारे देश में स्वाधीनता दिवस मनाया गया। आज छब्बीस जनवरी का दिन देश की स्वाधीनतां के लिये दृढ़ प्रयत्न करने की शपथ दुहराने का पुनीत दिवस था। आज संसार को एक बार फिर यह याद दिलाने का दिन था कि आज हम भारतवासी अपनी स्वाधीनता लेने के लिये पहिले की अपेक्षा अधिक दृढ़-प्रतिज्ञ हैं और अनिच्छुक हाथों से ले लेने में संसार की कोई भी शक्ति रोक नहीं सकती । ! गान्धीजी आज प्रातःकालः हीरापुर में अपनी कुटी से जब बन्ला चलने को तैयार हुए, तो आपकी आज की यात्रा में साथ चलते को उद्यत सभी लोगों ने एक साथ 'वन्देमातरम्' गायन गाया। : इसके बाद जब महात्माजी ने प्रस्थान किया, तो 'वंदेमातरम्' और अकबर' की गगन भेदी ध्वनि की गयी और चलने के साथ रामधुन भजन गाया जाने लगा। दूर-दूर के गाँवों में भी राष्ट्रीय गाने की ध्वनि गूंज उठी। यह गाना आज के अवसर के लिये विशेष रूप से तैयार किया गया था । यात्री में रास्ते भर बराबर यह गाना गाया जाता रहा । बन्सा हीरापुर से ठीक दो मील दक्षिण में है । पंद्रह मिनट में गान्धीजी ने यह दो मील का मार्ग पूरा किया और में बजर पैंतीस मिनट पर पहुँच गये। वहाँ आप कविराज जग बंधु सील के मकान पर ठहरे। गांधीजी की कुटी' में आज स्वाधीनता दिवस मनाया गया । सरदार जीवन सिंह ने तिरङ्गा भएडा गान्धीजी की कुटी के सामने फहराया । गान्धीजी वहाँ से थोड़ी दूर पर मालिस करो रहे थे । झण्डाभिवादन के समय आजाद हिन्द फौज लोगों ने 'जन-गण-मन अधिनायक' गाना गाया और 'वंदेमातरम्' 'अल्लाहो अकबर' 'महात्मा गांधी की जय' 'नेताजी की जय' आदि नारे लगाये गये । इसके अतिरिक्त अन्य कोई कार्य गांधीजी की कुटी में नहीं हुआ । गांधीजी के साथ चलने वाले पत्र सम्बाददाताओं ने भी अपने खेमे में स्वाधीनता-दिवस गांधीजी के आशीर्वाद के साथ मनाया । अशून्यभा कॉग्रेस कमेटी और विधान सम्मेलन के सर्वस्य श्री यदुनंदन सहाय ने राष्ट्रीय झण्डा फहराया, जो बिहार सरकार की ओर से गांधीजी के साथ रहते हैं। गांधीजा के उर्दू 'हरिजन' सेवक' के कार्यकर्ता तथा गांधीजी के पास आने वाली 'ऽर्दू चिट्टियों का उत्तर देने वाले मिद " महमूंद अहमद हुनर ने हिन्दुस्तानी में स्वाधीनता की शपथ दुहरायी, जिसे
क्या देश के नौकरशाह नहीं सुन रहे नेताओं की बात? नई दिल्ली (भाषा)। लोकसभा में शुक्रवार को सांसदों ने अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहा कि पहले एक सांसद की शिकायत पर कमीश्नर तक का तबादला हो जाता था लेकिन आज सांसद के कहने पर क्लर्क तक का कुछ नहीं बिगड़ता और नौकरशाह तो उनकी बात तक नहीं सुनते। सदन में शून्यकाल में भाजपा के उदित राज ने ये मामला उठाते हुए कहा कि वह इस वर्ष जनवरी से लेकर अब तक विभिन्न विभागों को 1940 पत्र लिख चुके हैं जो विभिन्न शिकायतों को लेकर हैं लेकिन आज तक अधिकतर का कोई उत्तर नहीं आया है। उदित राज ने कहा, 'हम लोग पावरलेस महसूस कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि नौकरशाहों के ऐसे रवैये से सांसदों की स्थिति खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि जब वो सांसद नहीं थे तो उनके लिखे पत्रों का नौकरशाह फिर भी जवाब दे दिया करते थे और सकारात्मक उत्तर मिलता था लेकिन बतौर सांसद पत्र लिखने पर उन्हें टालने वाले जवाब मिलते हैं। लगभग सभी दलों के सदस्यों ने उदित राज की बात से सहमति जतायी है। उदित राज ने कहा कि जब वो सांसद बनने से पहले नौकरशाह थे तो किसी सांसद की फर्जी शिकायत पर उनका तबादला हो गया था लेकिन आज एक क्लर्क तक का कुछ नहीं बिगड़ता। उन्होंने कहा कि सांसदों की शिकायतों के निपटान और पत्रों का जवाब देने के लिए कोई व्यवस्था होनी चाहिए। और मंत्रियों को खुद सांसदों के पत्रों को देखना चाहिए। बीजद के भृतुहरि महताब ने हालांकि कहा कि इसके लिए एक प्रोटोकाल कमेटी है जहां शिकायत की जा सकती है और उदित राज जी को उसके बारे में पता है। वो पहले भी शिकायत कर चुके हैं।
क्या देश के नौकरशाह नहीं सुन रहे नेताओं की बात? नई दिल्ली । लोकसभा में शुक्रवार को सांसदों ने अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहा कि पहले एक सांसद की शिकायत पर कमीश्नर तक का तबादला हो जाता था लेकिन आज सांसद के कहने पर क्लर्क तक का कुछ नहीं बिगड़ता और नौकरशाह तो उनकी बात तक नहीं सुनते। सदन में शून्यकाल में भाजपा के उदित राज ने ये मामला उठाते हुए कहा कि वह इस वर्ष जनवरी से लेकर अब तक विभिन्न विभागों को एक हज़ार नौ सौ चालीस पत्र लिख चुके हैं जो विभिन्न शिकायतों को लेकर हैं लेकिन आज तक अधिकतर का कोई उत्तर नहीं आया है। उदित राज ने कहा, 'हम लोग पावरलेस महसूस कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि नौकरशाहों के ऐसे रवैये से सांसदों की स्थिति खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि जब वो सांसद नहीं थे तो उनके लिखे पत्रों का नौकरशाह फिर भी जवाब दे दिया करते थे और सकारात्मक उत्तर मिलता था लेकिन बतौर सांसद पत्र लिखने पर उन्हें टालने वाले जवाब मिलते हैं। लगभग सभी दलों के सदस्यों ने उदित राज की बात से सहमति जतायी है। उदित राज ने कहा कि जब वो सांसद बनने से पहले नौकरशाह थे तो किसी सांसद की फर्जी शिकायत पर उनका तबादला हो गया था लेकिन आज एक क्लर्क तक का कुछ नहीं बिगड़ता। उन्होंने कहा कि सांसदों की शिकायतों के निपटान और पत्रों का जवाब देने के लिए कोई व्यवस्था होनी चाहिए। और मंत्रियों को खुद सांसदों के पत्रों को देखना चाहिए। बीजद के भृतुहरि महताब ने हालांकि कहा कि इसके लिए एक प्रोटोकाल कमेटी है जहां शिकायत की जा सकती है और उदित राज जी को उसके बारे में पता है। वो पहले भी शिकायत कर चुके हैं।
इन्नाकल चंडी जॉर्ज सुदर्शन, भारतीय विज्ञान जगत के सबसे बड़े सितारों में से एक, अब हमारे बीच नहीं हैं। 14 मई यानी कल, अमेरिका के टेक्सस में 86 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गयी। सुदर्शन भौतिकी के जाने माने वैज्ञानिक थे। उन्हें भौतिकी के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए जाना जाता है। क्वांटम फिजिक्स व क्वांटम ऑप्टिक्स में उनका कार्य अभूतपूर्व था। उनकी सबसे महत्वपूर्ण खोजो में से एक "टैकियोन" कणों ने आइंस्टाइन के इस सिद्धांत को चुनौती दी कि कोई भी वस्तु प्रकाश की गति से तेज नहीं चल सकती है। सुदर्शन का जन्म 1931 में केरला के बल्लम में एक सीरियाई ईसाई परिवार में हुआ था। उन्होंने मद्रास क्रिश्चन कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की, व मद्रास विश्वविद्यालय से 1952 में स्नाकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। कुछ समय उन्होंने टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में भी काम किया। वहां उनके सहकर्मियों में से एक होगी जहांगीर भाभा भी थे। यहां से वह रोचेस्टर यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क गये। यहां उन्होंने रॉबर्ट मार्शक की देखरेख में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। ईसीजी सुदर्शन ने अपनी पीएचडी की अध्ययन अवधि के दौरान ही कई महत्वपूर्ण शोध प्रकाशित किए। उन्होंने रॉबर्ट मार्शक के साथ मिलकर कमजोर परमाणु बल की खोज की। जिसे आग बढ़ाने के लिए रिचर्ड फेमन को नोबेल प्राइज भी मिला। उन्होंने अविरुद्ध प्रकाश के लिए क्वांटम निरूपण भी तैयार किया था। जिसे सुदर्शन-ग्लॉबर निरूपण भी कहा जाता है। सुदर्शन विश्व के पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने टैकियोन कणों की थ्योरी को सामने रखा। टैकियोन ऐसे कण हैं जो प्रकाश की गति से भी तेज चलते हैं। सुदर्शन का भारत में व विदेशों में भी शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान रहा अपने जीवन के दौरान वह कई बड़े कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाने का मौका मिला। उन्होंने टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में भी अध्ययन शिक्षण संबंधी कार्य किया था। वह टेक्सास यूनिवर्सिटी में भौतिकी के प्रोफेसर रह चुके हैं भारतीय विज्ञान संस्थान मैं वह वरिष्ठ पर प्रोफेसर के पद पर सेवा दे चुके हैं। उन्होंने 5 साल इंस्टिट्यूट ऑफ मैथमेटिकल साइंस के निदेशक के तौर पर भी काम किया। उनके कार्यकाल में इस संस्थान नई उपलब्धियां प्राप्त की। ईसीजी सुदर्शन अपनी विद्वता व विज्ञान क्षेत्र में योगदान के लिए नोबेल प्राइज के हकदार थे। पर कई मौकों पर उन्हें नोबेल प्राइज के लिए नजरअंदाज कर दिया गया। सबसे बड़ा मुद्दा 2005 में सामने आया जब "सुदर्शन-ग्लॉबर निरूपण" के लिए सुदर्शन को नजरअंदाज करके सिर्फ ग्लॉबर को नोबेल प्राइज दे दिया गया। इसके खिलाफ कई वैज्ञानिकों ने नोबेल कमेटी को पत्र लिखकर असंतोष जताया था। कई अन्य मौकों पर भी सुदर्शन का नाम नोबल कमिटी को प्रस्तावित किया गया था, पर उन्हें नोबल पुरस्कार नहीं मिल पाया। सुदर्शन का जन्म एक ईसाई परिवार में हुआ था। पर अपनी सहपाठी मित्र से शादी करने के बाद वह इसे त्याग कर हिन्दू बन गए थे। हिन्दू धर्म की तरफ वो आकर्षित थे। उनका वेदों के ज्ञान के प्रति काफी उत्साह था। व वेदांत पर भी उन्होंने काफी कुछ लिखा था। वेदांत पर आयोजित समारोहों में भी उन्हें अक्सर देखा जाता था। उनकी मृत्यु पूरे विश्व के वैज्ञानिक तथा शिक्षण जगत व खासकर हमारे देश के लिए एक बड़ी क्षति है।
इन्नाकल चंडी जॉर्ज सुदर्शन, भारतीय विज्ञान जगत के सबसे बड़े सितारों में से एक, अब हमारे बीच नहीं हैं। चौदह मई यानी कल, अमेरिका के टेक्सस में छियासी वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गयी। सुदर्शन भौतिकी के जाने माने वैज्ञानिक थे। उन्हें भौतिकी के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए जाना जाता है। क्वांटम फिजिक्स व क्वांटम ऑप्टिक्स में उनका कार्य अभूतपूर्व था। उनकी सबसे महत्वपूर्ण खोजो में से एक "टैकियोन" कणों ने आइंस्टाइन के इस सिद्धांत को चुनौती दी कि कोई भी वस्तु प्रकाश की गति से तेज नहीं चल सकती है। सुदर्शन का जन्म एक हज़ार नौ सौ इकतीस में केरला के बल्लम में एक सीरियाई ईसाई परिवार में हुआ था। उन्होंने मद्रास क्रिश्चन कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की, व मद्रास विश्वविद्यालय से एक हज़ार नौ सौ बावन में स्नाकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। कुछ समय उन्होंने टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में भी काम किया। वहां उनके सहकर्मियों में से एक होगी जहांगीर भाभा भी थे। यहां से वह रोचेस्टर यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क गये। यहां उन्होंने रॉबर्ट मार्शक की देखरेख में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। ईसीजी सुदर्शन ने अपनी पीएचडी की अध्ययन अवधि के दौरान ही कई महत्वपूर्ण शोध प्रकाशित किए। उन्होंने रॉबर्ट मार्शक के साथ मिलकर कमजोर परमाणु बल की खोज की। जिसे आग बढ़ाने के लिए रिचर्ड फेमन को नोबेल प्राइज भी मिला। उन्होंने अविरुद्ध प्रकाश के लिए क्वांटम निरूपण भी तैयार किया था। जिसे सुदर्शन-ग्लॉबर निरूपण भी कहा जाता है। सुदर्शन विश्व के पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने टैकियोन कणों की थ्योरी को सामने रखा। टैकियोन ऐसे कण हैं जो प्रकाश की गति से भी तेज चलते हैं। सुदर्शन का भारत में व विदेशों में भी शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान रहा अपने जीवन के दौरान वह कई बड़े कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाने का मौका मिला। उन्होंने टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में भी अध्ययन शिक्षण संबंधी कार्य किया था। वह टेक्सास यूनिवर्सिटी में भौतिकी के प्रोफेसर रह चुके हैं भारतीय विज्ञान संस्थान मैं वह वरिष्ठ पर प्रोफेसर के पद पर सेवा दे चुके हैं। उन्होंने पाँच साल इंस्टिट्यूट ऑफ मैथमेटिकल साइंस के निदेशक के तौर पर भी काम किया। उनके कार्यकाल में इस संस्थान नई उपलब्धियां प्राप्त की। ईसीजी सुदर्शन अपनी विद्वता व विज्ञान क्षेत्र में योगदान के लिए नोबेल प्राइज के हकदार थे। पर कई मौकों पर उन्हें नोबेल प्राइज के लिए नजरअंदाज कर दिया गया। सबसे बड़ा मुद्दा दो हज़ार पाँच में सामने आया जब "सुदर्शन-ग्लॉबर निरूपण" के लिए सुदर्शन को नजरअंदाज करके सिर्फ ग्लॉबर को नोबेल प्राइज दे दिया गया। इसके खिलाफ कई वैज्ञानिकों ने नोबेल कमेटी को पत्र लिखकर असंतोष जताया था। कई अन्य मौकों पर भी सुदर्शन का नाम नोबल कमिटी को प्रस्तावित किया गया था, पर उन्हें नोबल पुरस्कार नहीं मिल पाया। सुदर्शन का जन्म एक ईसाई परिवार में हुआ था। पर अपनी सहपाठी मित्र से शादी करने के बाद वह इसे त्याग कर हिन्दू बन गए थे। हिन्दू धर्म की तरफ वो आकर्षित थे। उनका वेदों के ज्ञान के प्रति काफी उत्साह था। व वेदांत पर भी उन्होंने काफी कुछ लिखा था। वेदांत पर आयोजित समारोहों में भी उन्हें अक्सर देखा जाता था। उनकी मृत्यु पूरे विश्व के वैज्ञानिक तथा शिक्षण जगत व खासकर हमारे देश के लिए एक बड़ी क्षति है।
एक नई और अनूठी पहल के तहत भारत 12-13 जनवरी को एक विशेष आभासी शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। यह "वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट" थीम "एकता की आवाज, एकता की उद्देश्य" के तहत ग्लोबल साउथ के देशों को एक साथ लाने की परिकल्पना करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सदस्य देशों को भाई कहकर संबोधित किया। समिट को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारा उद्देश्य वैश्विक दक्षिण की आवाज को बढ़ाना है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि हमने एक और कठिन वर्ष को पीछे छोड़ दिया जो युद्ध, संघर्ष, आतंकवाद और भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती खाद्य उर्वरक और ईंधन की कीमतों को दर्शाता है। अधिकांश वैश्विक चुनौतियां ग्लोबल साउथ द्वारा नहीं बनाई गई हैं, लेकिन वो हमें अधिक प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने इस वर्ष अपनी G20 अध्यक्षता शुरू की है, ये स्वाभाविक है कि हमारा उद्देश्य वैश्विक दक्षिण की आवाज को बढ़ाना है। वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमने विदेशी शासन के खिलाफ लड़ाई में एक-दूसरे का समर्थन किया और हम इस सदी में फिर से एक नई विश्व व्यवस्था बनाने के लिए ऐसा कर सकते हैं जो हमारे नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करेगी। आपकी आवाज भारत की आवाज है और आपकी प्राथमिकताएं भारत की प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक मुद्दों को हल करने में संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की बड़ी भूमिका है। हमें इनमें सुधार और प्रगति को शामिल करना चाहिए। शिखर सम्मेलन में दस सत्रों की परिकल्पना की गई है। चार सत्र 12 जनवरी को और छह सत्र 13 जनवरी को होंगे। प्रत्येक सत्र में 10-20 देशों के नेताओं/मंत्रियों के भाग लेने की उम्मीद है। गौरतलब है कि यह पहल प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास से प्रेरित है और भारत के वसुधैव कुटुम्बकम के दर्शन से प्रेरित है।
एक नई और अनूठी पहल के तहत भारत बारह-तेरह जनवरी को एक विशेष आभासी शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। यह "वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट" थीम "एकता की आवाज, एकता की उद्देश्य" के तहत ग्लोबल साउथ के देशों को एक साथ लाने की परिकल्पना करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सदस्य देशों को भाई कहकर संबोधित किया। समिट को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारा उद्देश्य वैश्विक दक्षिण की आवाज को बढ़ाना है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि हमने एक और कठिन वर्ष को पीछे छोड़ दिया जो युद्ध, संघर्ष, आतंकवाद और भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती खाद्य उर्वरक और ईंधन की कीमतों को दर्शाता है। अधिकांश वैश्विक चुनौतियां ग्लोबल साउथ द्वारा नहीं बनाई गई हैं, लेकिन वो हमें अधिक प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने इस वर्ष अपनी Gबीस अध्यक्षता शुरू की है, ये स्वाभाविक है कि हमारा उद्देश्य वैश्विक दक्षिण की आवाज को बढ़ाना है। वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमने विदेशी शासन के खिलाफ लड़ाई में एक-दूसरे का समर्थन किया और हम इस सदी में फिर से एक नई विश्व व्यवस्था बनाने के लिए ऐसा कर सकते हैं जो हमारे नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करेगी। आपकी आवाज भारत की आवाज है और आपकी प्राथमिकताएं भारत की प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक मुद्दों को हल करने में संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की बड़ी भूमिका है। हमें इनमें सुधार और प्रगति को शामिल करना चाहिए। शिखर सम्मेलन में दस सत्रों की परिकल्पना की गई है। चार सत्र बारह जनवरी को और छह सत्र तेरह जनवरी को होंगे। प्रत्येक सत्र में दस-बीस देशों के नेताओं/मंत्रियों के भाग लेने की उम्मीद है। गौरतलब है कि यह पहल प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास से प्रेरित है और भारत के वसुधैव कुटुम्बकम के दर्शन से प्रेरित है।
दुबई : ऑस्ट्रेलिया के अपने जमाने के दिग्गज बल्लेबाज रिकी पोंटिंग ने भारत के हार्दिक पांड्या और जसप्रीत बुमराह को विश्व टी20 एकादश के लिए अपने पहले पांच खिलाड़ियों में शामिल किया है। पोंटिंग ने पांड्या को विश्व में टी20 का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर करार दिया जबकि बुमराह को तीनों प्रारूपों में संपूर्ण गेंदबाज बताया। पोंटिंग ने कहा, 'वर्तमान फॉर्म को देखते हुए हार्दिक पांड्या को तीसरे नंबर पर नहीं रखना बहुत मुश्किल होगा। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था। ' इस पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने 'आईसीसी रिव्यु' में कहा, 'उनके फिर से गेंदबाजी करने को लेकर मैं थोड़ा अनिश्चित था कि क्या कभी ऐसा होगा। वह चोटों से जूझ रहे थे जिससे उनका खेल प्रभावित हुआ था। ' पांड्या ने फिर से गेंदबाजी करनी शुरू कर दी है जिससे कि भारतीय टीम को जरूरी संतुलन भी मिल गया है। पोंटिंग ने कहा, 'उन्होंने फिर से गेंदबाजी करनी शुरू कर दी है और उनकी रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटा है जैसे कि वह चार पांच साल पहले किया करते थे। लेकिन अपनी बल्लेबाजी और बल्लेबाजी करते समय परिपक्वता के मामले में वह मीलों आगे निकल गए हैं। ' उन्होंने कहा, 'वह खेल को बेहतर समझ रहे हैं और वह पहले की तुलना में अपने खेल की बेहतर समझ रख रहे हैं और वर्तमान समय में वह संभवत है विश्व में टी20 क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर हैं। उनमें वनडे क्रिकेट का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर बनने की क्षमता भी है। ' पोंटिंग ने अपने शीर्ष पांच खिलाड़ियों में जिन अन्य तीन खिलाड़ियों को शामिल किया है उनमें राशिद खान, बाबर आजम और जोस बटलर शामिल हैं। भारतीय तेज गेंदबाजी के अगुआ बुमराह के बारे में पोंटिंग ने कहा, 'वह संभवतः विश्व में अभी टेस्ट क्रिकेट, वनडे क्रिकेट और टी-20 क्रिकेट में सबसे संपूर्ण गेंदबाज हैं। जब भी कोई उनका नई गेंद के साथ इस्तेमाल करना चाहता है तो वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं। ' उन्होंने कहा, 'भारत ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी20 विश्वकप में उन्हें नई गेंद से एक ओवर देने के बारे में सोच सकता है लेकिन आप इसकी गारंटी दे सकते हैं कि डेथ ओवरों में उनके दो ओवर शानदार होंगे जो कि प्रत्येक टीम चाहती है। वह एक ऐसे गेंदबाज हैं जो धीमी गेंद और बाउंसर भी कर लेते हैं। ' बुमराह चोटिल होने के कारण अभी एशिया कप में नहीं खेल रहे हैं। पोंटिंग ने अफगानिस्तान के स्टार गेंदबाज राशिद खान की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, 'मैं असल में राशिद खान को नंबर एक पर रखना चाहूंगा। मैं सोचता हूं कि अगर आईपीएल नीलामी में खिलाड़ियों की प्रतियोगिता होती और वेतन की कोई सीमा तय नहीं होती तो संभवतः सबसे अधिक कीमत उन्हीं पर लगती। '
दुबई : ऑस्ट्रेलिया के अपने जमाने के दिग्गज बल्लेबाज रिकी पोंटिंग ने भारत के हार्दिक पांड्या और जसप्रीत बुमराह को विश्व टीबीस एकादश के लिए अपने पहले पांच खिलाड़ियों में शामिल किया है। पोंटिंग ने पांड्या को विश्व में टीबीस का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर करार दिया जबकि बुमराह को तीनों प्रारूपों में संपूर्ण गेंदबाज बताया। पोंटिंग ने कहा, 'वर्तमान फॉर्म को देखते हुए हार्दिक पांड्या को तीसरे नंबर पर नहीं रखना बहुत मुश्किल होगा। इंडियन प्रीमियर लीग में उनका प्रदर्शन शानदार रहा था। ' इस पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने 'आईसीसी रिव्यु' में कहा, 'उनके फिर से गेंदबाजी करने को लेकर मैं थोड़ा अनिश्चित था कि क्या कभी ऐसा होगा। वह चोटों से जूझ रहे थे जिससे उनका खेल प्रभावित हुआ था। ' पांड्या ने फिर से गेंदबाजी करनी शुरू कर दी है जिससे कि भारतीय टीम को जरूरी संतुलन भी मिल गया है। पोंटिंग ने कहा, 'उन्होंने फिर से गेंदबाजी करनी शुरू कर दी है और उनकी रफ्तार एक सौ चालीस किलोग्राममीटर प्रति घंटा है जैसे कि वह चार पांच साल पहले किया करते थे। लेकिन अपनी बल्लेबाजी और बल्लेबाजी करते समय परिपक्वता के मामले में वह मीलों आगे निकल गए हैं। ' उन्होंने कहा, 'वह खेल को बेहतर समझ रहे हैं और वह पहले की तुलना में अपने खेल की बेहतर समझ रख रहे हैं और वर्तमान समय में वह संभवत है विश्व में टीबीस क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर हैं। उनमें वनडे क्रिकेट का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर बनने की क्षमता भी है। ' पोंटिंग ने अपने शीर्ष पांच खिलाड़ियों में जिन अन्य तीन खिलाड़ियों को शामिल किया है उनमें राशिद खान, बाबर आजम और जोस बटलर शामिल हैं। भारतीय तेज गेंदबाजी के अगुआ बुमराह के बारे में पोंटिंग ने कहा, 'वह संभवतः विश्व में अभी टेस्ट क्रिकेट, वनडे क्रिकेट और टी-बीस क्रिकेट में सबसे संपूर्ण गेंदबाज हैं। जब भी कोई उनका नई गेंद के साथ इस्तेमाल करना चाहता है तो वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं। ' उन्होंने कहा, 'भारत ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टीबीस विश्वकप में उन्हें नई गेंद से एक ओवर देने के बारे में सोच सकता है लेकिन आप इसकी गारंटी दे सकते हैं कि डेथ ओवरों में उनके दो ओवर शानदार होंगे जो कि प्रत्येक टीम चाहती है। वह एक ऐसे गेंदबाज हैं जो धीमी गेंद और बाउंसर भी कर लेते हैं। ' बुमराह चोटिल होने के कारण अभी एशिया कप में नहीं खेल रहे हैं। पोंटिंग ने अफगानिस्तान के स्टार गेंदबाज राशिद खान की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, 'मैं असल में राशिद खान को नंबर एक पर रखना चाहूंगा। मैं सोचता हूं कि अगर आईपीएल नीलामी में खिलाड़ियों की प्रतियोगिता होती और वेतन की कोई सीमा तय नहीं होती तो संभवतः सबसे अधिक कीमत उन्हीं पर लगती। '
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने आईपीएल टूर्नामेंट समाप्त हो जाने के बाद भारत के खिलाफ होने वाले दौरे के लिए पूरा शेड्यूल की घोषणा की जा चुकी है। बता दें आस्ट्रेलिया और भारत के बीच इस दौरे की शुरूआत सिडनी में होनी है जहां पर दोनों टीमों के बीच वनडे सीरीज का पहला मुकाबला खेला जाना है। वहीं सीरीज का दूसरा वनडे भी सिडनी में होगा,जबकि इसका तीसरा मुकाबला कैनबरा में खेला जाना है। खास बात इस दौरे पर दोनों देशों के बीच पहली बार डे-नाइट टेस्ट मैच खेला जाना है,जो कि एडिलेड मैदान पर खेला जाएगा। वैसे अब बॉक्सिंग डे टेस्ट पर जारी संस्पेस भी काफी हद तक खत्म हो गया है और यह मेलबर्न में खेला जाना है। इसके अलावा सिडनी और ब्रिस्बेन में अगले दो टेस्ट मैचे खेले जाएंगे। दोनों देशों के बीच टी-20 सीरीज का आयोजन वनडे सीरीज के बाद और टेस्ट सीरीज से पहले होना है। इस सीरीज के मुकाबले कैनबरा और सिडनी मैदान पर खेले जाने हैं। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने बुधवार को भारतीय टीम के 69 दिन तक चलने वाले इस दौरे का पूरा कार्यक्रम जारी किया है। इस कार्यक्रम में भारतीय टीम का सिडनी में 14 दिन का पृथकवास भी शामिल है, जो कि 12 नवंबर से शुरू होगा। भारतीय टीम इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 10 नवंबर को होने वाले फाइनल के बाद ऑस्ट्रेलिया रवाना होगी। बोर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए खेली जाने वाली टेस्ट सीरीज की शुरुआत 17 दिसंबर को एडिलेड ओवल में दिन रात के टेस्ट मैच से होगी। इसके बाद के मैच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (26 दिसंबर से), सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (सात जनवरी से) और ब्रिस्बेन के गाबा (15 जनवरी से) में खेले जाएंगे। इससे पहले सीमित ओवरों की सीरीज होगी। पहला वनडे-शुक्रवार, 27 नवंबरः सिडनी (दिन-रात्रि) दूसरा वनडे-रविवार, 29 नवंबरः सिडनी (दिन-रात्रि) तीसरा वनडे-बुधवार, 2 दिसंबरः कैनबरा (दिन-रात्रि) पहला टी20-शुक्रवार, 4 दिसंबरः कैनबरा (रात) दूसरा टी20-रविवार, 6 दिसंबर - सिडनी (रात) तीसरा टी20-मंगलवार, 8 दिसंबर - सिडनी (रात) पहला टेस्ट-17-21 दिसंबर - एडिलेड (डे-नाइट)
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने आईपीएल टूर्नामेंट समाप्त हो जाने के बाद भारत के खिलाफ होने वाले दौरे के लिए पूरा शेड्यूल की घोषणा की जा चुकी है। बता दें आस्ट्रेलिया और भारत के बीच इस दौरे की शुरूआत सिडनी में होनी है जहां पर दोनों टीमों के बीच वनडे सीरीज का पहला मुकाबला खेला जाना है। वहीं सीरीज का दूसरा वनडे भी सिडनी में होगा,जबकि इसका तीसरा मुकाबला कैनबरा में खेला जाना है। खास बात इस दौरे पर दोनों देशों के बीच पहली बार डे-नाइट टेस्ट मैच खेला जाना है,जो कि एडिलेड मैदान पर खेला जाएगा। वैसे अब बॉक्सिंग डे टेस्ट पर जारी संस्पेस भी काफी हद तक खत्म हो गया है और यह मेलबर्न में खेला जाना है। इसके अलावा सिडनी और ब्रिस्बेन में अगले दो टेस्ट मैचे खेले जाएंगे। दोनों देशों के बीच टी-बीस सीरीज का आयोजन वनडे सीरीज के बाद और टेस्ट सीरीज से पहले होना है। इस सीरीज के मुकाबले कैनबरा और सिडनी मैदान पर खेले जाने हैं। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने बुधवार को भारतीय टीम के उनहत्तर दिन तक चलने वाले इस दौरे का पूरा कार्यक्रम जारी किया है। इस कार्यक्रम में भारतीय टीम का सिडनी में चौदह दिन का पृथकवास भी शामिल है, जो कि बारह नवंबर से शुरू होगा। भारतीय टीम इंडियन प्रीमियर लीग के दस नवंबर को होने वाले फाइनल के बाद ऑस्ट्रेलिया रवाना होगी। बोर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए खेली जाने वाली टेस्ट सीरीज की शुरुआत सत्रह दिसंबर को एडिलेड ओवल में दिन रात के टेस्ट मैच से होगी। इसके बाद के मैच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड , सिडनी क्रिकेट ग्राउंड और ब्रिस्बेन के गाबा में खेले जाएंगे। इससे पहले सीमित ओवरों की सीरीज होगी। पहला वनडे-शुक्रवार, सत्ताईस नवंबरः सिडनी दूसरा वनडे-रविवार, उनतीस नवंबरः सिडनी तीसरा वनडे-बुधवार, दो दिसंबरः कैनबरा पहला टीबीस-शुक्रवार, चार दिसंबरः कैनबरा दूसरा टीबीस-रविवार, छः दिसंबर - सिडनी तीसरा टीबीस-मंगलवार, आठ दिसंबर - सिडनी पहला टेस्ट-सत्रह-इक्कीस दिसंबर - एडिलेड
नई दिल्ली, 9 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली राज्य निर्वाचन कार्यालय विधानसभा चुनाव में मतदान का ग्राफ हर कीमत पर अधिकतम ऊंचाई तक ले जाने के लिए जूझ रहा है। इसी के चलते अब उसने युवा और पहली बार मतदान के योग्य होने वाले मतदाताओं को जुड़ने का एक और मौका दिया है। ताकि 8 फरवरी को होने वाले मतदान में ज्यादा से ज्यादा नए मतदाता अपनी भागीदारी दर्ज करा सकें। यह जानकारी गुरुवार को राज्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से जारी अधिकृत बयान में दी गई है। जानकारी के मुताबिक, 8 फरवरी को होने वाले चुनाव में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नए मतदाता 11 जनवरी 2020 तक अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करवा सकते हैं। क्योंकि सिर्फ मतदाता पहचान पत्र किसी को भी मतदान का अधिकार नहीं देगा। मतदान के लिए मतदाता सूची में नाम मौजूद होना अनिवार्य होगा। ऐसे मतदाता जिनकी आयु 1 जनवरी 2020 को 18 साल हो गई है और जिन्होंने दिल्ली की मतदाता सूची में अपना नाम नहीं जुड़वाया है, वे दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय की अधिकृत वेबसाइट पर जाकर या फिर वोटर हेल्पलाइन मोबाइल एप के जरिये 11 जनवरी तक अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं। इसके लिए बस फॉर्म-6 भरना होगा। साथ ही वोटर कार्ड धारक मतदाता सूची में अपना नाम एसएमएस के जरिये भी जुड़वा सकते हैं। इसके लिए 7738299899 पर मैसेज (एपिक स्पेस वोटर आईडी नंबर) कर सकते हैं। इस कार्य के लिए मतदाता मोबाइल हेल्पलाइन नंबर 1950 पर भी मैसेज करके जांच सकते हैं कि संबंधित मतदाता का नाम मतदाता सूची में जुड़ा है या नहीं। इसके अलावा मतदाता अपनी सुविधा के अनुसार विधानसभा क्षेत्र के निकटतम मतदाता केंद्र या सामान्य सेवा केंद्र में भी पहुंच सकता है। इन जगहों पर भी फार्म-6 जमा हो सकता है। यह करते वक्त मतदाता को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका नाम एक ही मतदान केंद्र में पंजीकृत हो। जबकि मतदाताओं को नए स्थान पर मतदाता सूची में नामांकन के लिए आवेदन करते समय फॉर्म-6 के संबंधित कॉलम में पिछले पंजीकरण के बारे में जानकारी देनी होगी।
नई दिल्ली, नौ जनवरी । दिल्ली राज्य निर्वाचन कार्यालय विधानसभा चुनाव में मतदान का ग्राफ हर कीमत पर अधिकतम ऊंचाई तक ले जाने के लिए जूझ रहा है। इसी के चलते अब उसने युवा और पहली बार मतदान के योग्य होने वाले मतदाताओं को जुड़ने का एक और मौका दिया है। ताकि आठ फरवरी को होने वाले मतदान में ज्यादा से ज्यादा नए मतदाता अपनी भागीदारी दर्ज करा सकें। यह जानकारी गुरुवार को राज्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से जारी अधिकृत बयान में दी गई है। जानकारी के मुताबिक, आठ फरवरी को होने वाले चुनाव में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए नए मतदाता ग्यारह जनवरी दो हज़ार बीस तक अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करवा सकते हैं। क्योंकि सिर्फ मतदाता पहचान पत्र किसी को भी मतदान का अधिकार नहीं देगा। मतदान के लिए मतदाता सूची में नाम मौजूद होना अनिवार्य होगा। ऐसे मतदाता जिनकी आयु एक जनवरी दो हज़ार बीस को अट्ठारह साल हो गई है और जिन्होंने दिल्ली की मतदाता सूची में अपना नाम नहीं जुड़वाया है, वे दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय की अधिकृत वेबसाइट पर जाकर या फिर वोटर हेल्पलाइन मोबाइल एप के जरिये ग्यारह जनवरी तक अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं। इसके लिए बस फॉर्म-छः भरना होगा। साथ ही वोटर कार्ड धारक मतदाता सूची में अपना नाम एसएमएस के जरिये भी जुड़वा सकते हैं। इसके लिए सात सात तीन आठ दो नौ नौ आठ नौ नौ पर मैसेज कर सकते हैं। इस कार्य के लिए मतदाता मोबाइल हेल्पलाइन नंबर एक हज़ार नौ सौ पचास पर भी मैसेज करके जांच सकते हैं कि संबंधित मतदाता का नाम मतदाता सूची में जुड़ा है या नहीं। इसके अलावा मतदाता अपनी सुविधा के अनुसार विधानसभा क्षेत्र के निकटतम मतदाता केंद्र या सामान्य सेवा केंद्र में भी पहुंच सकता है। इन जगहों पर भी फार्म-छः जमा हो सकता है। यह करते वक्त मतदाता को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका नाम एक ही मतदान केंद्र में पंजीकृत हो। जबकि मतदाताओं को नए स्थान पर मतदाता सूची में नामांकन के लिए आवेदन करते समय फॉर्म-छः के संबंधित कॉलम में पिछले पंजीकरण के बारे में जानकारी देनी होगी।
Khali Joins BJP Party- डब्ल्यूडब्ल्यूइ रेसलर (WWE Wrestler ) द ग्रेट खली (The Great Khali) ने अपने पोलिटिकल करियर की शुरुआत कर दी है। वह केंद्र में शासन कर रही भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya janata party) के सदस्य बन चुके हैं। उन्होंने पार्टी के हेडक्वार्टर में पार्टी ज्वाइन की। पंजाब इलेक्शन (Bunjab Election Date) समेत अन्य पांच राज्यों में इलेक्शन से पहले द ग्रेट खली की बीजेपी में एंट्री पार्टी को फायदा पहुंचा सकती है। भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya janata party) के महासचिव अरुण सिंह ने द ग्रेट खली को बीजेपी (The Great Khali in BJP) में शामिल कराया। द ग्रेट खली ने बीजेपी ज्वाइन करने के बाद कहा - मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काम उन्हें सही पीएम बनाता है। तो इसलिए मैंने सोचा कि क्यों ना देश के विकास के लिए उनकी पार्टी का हिस्सा बन जाऊं। बीजेपी की अध्यक्षता लेने वाले पूर्व डब्ल्यूडब्ल्यूइ रेसलर खली हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं। द ग्रेट खली (The Great Khali) नाम से उनको ना सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में लोग पहचानते हैं। खली का असली नाम दलीप सिंह राणा हैं, और वह हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं। खली ने बहुत मेहनत करते हुए दुनियाभर में अपनी पहचान बनाई. अब वह डब्ल्यूडब्ल्यूइ फाइट नहीं लड़ते हैं।
Khali Joins BJP Party- डब्ल्यूडब्ल्यूइ रेसलर द ग्रेट खली ने अपने पोलिटिकल करियर की शुरुआत कर दी है। वह केंद्र में शासन कर रही भारतीय जनता पार्टी के सदस्य बन चुके हैं। उन्होंने पार्टी के हेडक्वार्टर में पार्टी ज्वाइन की। पंजाब इलेक्शन समेत अन्य पांच राज्यों में इलेक्शन से पहले द ग्रेट खली की बीजेपी में एंट्री पार्टी को फायदा पहुंचा सकती है। भारतीय जनता पार्टी के महासचिव अरुण सिंह ने द ग्रेट खली को बीजेपी में शामिल कराया। द ग्रेट खली ने बीजेपी ज्वाइन करने के बाद कहा - मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काम उन्हें सही पीएम बनाता है। तो इसलिए मैंने सोचा कि क्यों ना देश के विकास के लिए उनकी पार्टी का हिस्सा बन जाऊं। बीजेपी की अध्यक्षता लेने वाले पूर्व डब्ल्यूडब्ल्यूइ रेसलर खली हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं। द ग्रेट खली नाम से उनको ना सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में लोग पहचानते हैं। खली का असली नाम दलीप सिंह राणा हैं, और वह हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं। खली ने बहुत मेहनत करते हुए दुनियाभर में अपनी पहचान बनाई. अब वह डब्ल्यूडब्ल्यूइ फाइट नहीं लड़ते हैं।
नई दिल्ली. स्मार्टफोन का लोकेशन ऑफ करना भी कई बार आपको ट्रैक होने से नहीं बचा सकता है. ताजा उदाहरण गूगल है लोकेशन है. लोकेशन ऑफ करने के बाद यूजर्स श्योर हो जाते हैं कि अब उन्हें कोई ट्रैक नहीं कर सकता है. लेकिन गूगल लोकेशन ऑफ होने के बाद भी आपकी लोकेशन ट्रैक करता है और जानकारियां अपने पास रखता है. AP की रिपोर्ट के मुताबिक गूगल द्वारा कलेक्ट किया गया डेटा मिनट दर मिनट का होता है. गूगल इसे न सिर्फ गूगल मैप्स के जरिए ट्रैक करता है बल्कि ब्राउजर, वेदर अपडेट्स और ब्राउजर सर्च के आधार पर भी ट्रैक करता है. लोकेशन ऑफ करने से सिर्फ इतना होगा कि आपकी लोकेशन टाइमलाइन पर नहीं दिखेगी, लेकिन फिर भी आप ट्रैक किए जा रहे हैं. हालांकि यह पहली बार नहीं हुआ है जब ये खबर आई कि गूगल आपकी लोकेशन ट्रैक कर रहा है. पिछले नवंबर में क्वॉर्ट्ज ने एक रिपोर्ट पब्लिश की थी. इसमें कहा गया है कि लोकेशन ऑफ करने के बावजूद नजदीकी फोन टावर से आपकी लोकेशन डेटा गूगल को भेजी जाती है. इतना ही नहीं सिम न होने की स्थिति में भी ऐसा होता है. लेकिन इस रिपोर्ट में सेल फोन टावर नहीं, बल्कि इसके लिए गूगल की वेब सर्विस को जिम्मेदार ठहराया गया है. ब्लूमबर्ग को दिए गए एक बयान में गूगल ने कहा है, 'लोकेशन हिस्ट्री गूगल का प्रोडक्ट है और यह आपकी मर्जी पर है. आप इसे एडिट या डिलीट कर सकते हैं बंद या चालू कर सकते हैं. हम आगे भी गूगल एक्सपीरिएंस के लिए लोगेशन का इस्तेमाल करते रहेंगे ताकि उन्हें गूगल सर्च या ड्राइविंग में सहूलियत हो.
नई दिल्ली. स्मार्टफोन का लोकेशन ऑफ करना भी कई बार आपको ट्रैक होने से नहीं बचा सकता है. ताजा उदाहरण गूगल है लोकेशन है. लोकेशन ऑफ करने के बाद यूजर्स श्योर हो जाते हैं कि अब उन्हें कोई ट्रैक नहीं कर सकता है. लेकिन गूगल लोकेशन ऑफ होने के बाद भी आपकी लोकेशन ट्रैक करता है और जानकारियां अपने पास रखता है. AP की रिपोर्ट के मुताबिक गूगल द्वारा कलेक्ट किया गया डेटा मिनट दर मिनट का होता है. गूगल इसे न सिर्फ गूगल मैप्स के जरिए ट्रैक करता है बल्कि ब्राउजर, वेदर अपडेट्स और ब्राउजर सर्च के आधार पर भी ट्रैक करता है. लोकेशन ऑफ करने से सिर्फ इतना होगा कि आपकी लोकेशन टाइमलाइन पर नहीं दिखेगी, लेकिन फिर भी आप ट्रैक किए जा रहे हैं. हालांकि यह पहली बार नहीं हुआ है जब ये खबर आई कि गूगल आपकी लोकेशन ट्रैक कर रहा है. पिछले नवंबर में क्वॉर्ट्ज ने एक रिपोर्ट पब्लिश की थी. इसमें कहा गया है कि लोकेशन ऑफ करने के बावजूद नजदीकी फोन टावर से आपकी लोकेशन डेटा गूगल को भेजी जाती है. इतना ही नहीं सिम न होने की स्थिति में भी ऐसा होता है. लेकिन इस रिपोर्ट में सेल फोन टावर नहीं, बल्कि इसके लिए गूगल की वेब सर्विस को जिम्मेदार ठहराया गया है. ब्लूमबर्ग को दिए गए एक बयान में गूगल ने कहा है, 'लोकेशन हिस्ट्री गूगल का प्रोडक्ट है और यह आपकी मर्जी पर है. आप इसे एडिट या डिलीट कर सकते हैं बंद या चालू कर सकते हैं. हम आगे भी गूगल एक्सपीरिएंस के लिए लोगेशन का इस्तेमाल करते रहेंगे ताकि उन्हें गूगल सर्च या ड्राइविंग में सहूलियत हो.
इंडिया अगेंस्ट कॅरप्शन के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री को लोकपाल पर आधारित अपने प्रस्ताव का एक मसौदा भी पेश किया। समूह ने प्रधानमंत्री के इस सुझाव को स्वीकार किया कि मंत्रियों के समूह की एक उप-समिति नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं के साथ इस मसौदे पर बातचीत करेगी। प्रधानमंत्री ने श्री अन्ना हजारे से यह भी अनुरोध किया कि उपवास पर जाने की अपनी चेतावनी को वापस ले लें। 7. आर्चबिशप विंसेंट8. डॉ. कुलदीप चिकारा (भारत स्वाभिमान न्यास) 9. श्री दर्शक हाथी (आर्ट ऑफ लीविंग) 10. श्री पी.वी. राजगोपाल प्रधानमंत्री के साथ विधि मंत्री श्री वीरप्पा मोइली और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री श्री वी. नारायणसामी सहयोग कर रहे थे। (Release ID :8432)
इंडिया अगेंस्ट कॅरप्शन के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री को लोकपाल पर आधारित अपने प्रस्ताव का एक मसौदा भी पेश किया। समूह ने प्रधानमंत्री के इस सुझाव को स्वीकार किया कि मंत्रियों के समूह की एक उप-समिति नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं के साथ इस मसौदे पर बातचीत करेगी। प्रधानमंत्री ने श्री अन्ना हजारे से यह भी अनुरोध किया कि उपवास पर जाने की अपनी चेतावनी को वापस ले लें। सात. आर्चबिशप विंसेंटआठ. डॉ. कुलदीप चिकारा नौ. श्री दर्शक हाथी दस. श्री पी.वी. राजगोपाल प्रधानमंत्री के साथ विधि मंत्री श्री वीरप्पा मोइली और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री श्री वी. नारायणसामी सहयोग कर रहे थे।
इंडिया न्यूज, कानपुरः Famous Golden Of Kanpur Went Missing कानपुर में गोल्डन बाबा के नाम से चर्चित हुए काकादेव निवासी मनोज सेंगर आखिरकार चित्रकूट में मिल गए। वह वहां पर कामदगिरी की परिक्रमा कर रहे थे इस बीच उन्हें एक रिश्तेदार ने देखा और परिजनों को फोन कर बताया। उनके वहां होने की जानकारी मिलते ही परिजन वहां के लिए रवाना हो गए। बाबा दो किलों के सोने के जेवर पहनते हैं। चर्चित काकादेव निवासी मनोज सिंह सेंगर उर्फ गोल्डन बाबा मंगलवार की सुबह साढ़े छह बजे से लापता थे। परिवार वालों के मुताबिक रोजाना सुबह वह उठने के बाद पड़ोस में स्थित हास्टल जाते और एक डेढ़ घंटे तक वहां की व्यवस्था देखने के बाद लौट आते। लौटने के बाद दैनिक कार्यों को करते। मंगलवार की सुबह आम दिनों की तरह ही वह उठे, लेकिन सबसे पहले नहाने चले गए। नहाने के बाद उन्होंने गेरुए वस्त्र पहने चले गए। सुबह दस बजे तक जब वह नहीं लौटे तो परिवार वालों ने उनकी तलाश शुरू की। दोपहर बाद तक जब उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो स्वजनों ने कल्याणपुर पुलिस को सूचना दी। उनके जाने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे खंगाले, जिसमें वह घर के पास पैदल जाते और मुख्य मार्ग पर एक ई रिक्शा में बैठकर जाते दिखाई दिए थे। जिस तरह से वह जेवरात, मोबाइल आदि घर पर ही छोड़कर गए थे, उससे इस बात की पूरी आशंका थी कि वह किसी बात से नाराज होकर घर छोड़कर गए थे।
इंडिया न्यूज, कानपुरः Famous Golden Of Kanpur Went Missing कानपुर में गोल्डन बाबा के नाम से चर्चित हुए काकादेव निवासी मनोज सेंगर आखिरकार चित्रकूट में मिल गए। वह वहां पर कामदगिरी की परिक्रमा कर रहे थे इस बीच उन्हें एक रिश्तेदार ने देखा और परिजनों को फोन कर बताया। उनके वहां होने की जानकारी मिलते ही परिजन वहां के लिए रवाना हो गए। बाबा दो किलों के सोने के जेवर पहनते हैं। चर्चित काकादेव निवासी मनोज सिंह सेंगर उर्फ गोल्डन बाबा मंगलवार की सुबह साढ़े छह बजे से लापता थे। परिवार वालों के मुताबिक रोजाना सुबह वह उठने के बाद पड़ोस में स्थित हास्टल जाते और एक डेढ़ घंटे तक वहां की व्यवस्था देखने के बाद लौट आते। लौटने के बाद दैनिक कार्यों को करते। मंगलवार की सुबह आम दिनों की तरह ही वह उठे, लेकिन सबसे पहले नहाने चले गए। नहाने के बाद उन्होंने गेरुए वस्त्र पहने चले गए। सुबह दस बजे तक जब वह नहीं लौटे तो परिवार वालों ने उनकी तलाश शुरू की। दोपहर बाद तक जब उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो स्वजनों ने कल्याणपुर पुलिस को सूचना दी। उनके जाने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे खंगाले, जिसमें वह घर के पास पैदल जाते और मुख्य मार्ग पर एक ई रिक्शा में बैठकर जाते दिखाई दिए थे। जिस तरह से वह जेवरात, मोबाइल आदि घर पर ही छोड़कर गए थे, उससे इस बात की पूरी आशंका थी कि वह किसी बात से नाराज होकर घर छोड़कर गए थे।
नेताओं की बिगड़ी जुबान अक्सर महिलाओं का सम्मान भूल जाती है. एक बार फिर मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री ने सुखदेव पांसे कंगना रनौत पर विवादित टिप्पणी की है, जिन्होंने कंगना को नाचने वाली कहा है. आज तक ने सुखदेव से बेहद तीखे सवाल किया. आखिर क्यों मध्यप्रदेश में नेताजी ऐसी मर्यादा पार कर जाते हैं. मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा. दरअसल पहले महाराष्ट्र में कांग्रेस समर्थन वाली उद्धव सरकार पर निशाना. फिर किसान आंदोलन पर लगातार बयान, जिसके बाद कांग्रेस ने कंगना को घेरने की कोशिश की. कांग्रेस का आरोप है कि कंगना किसानों के आंदोलन का अपमान कर रही हैं. देखें शंखनाद, चित्रा त्रिपाठी के साथ.
नेताओं की बिगड़ी जुबान अक्सर महिलाओं का सम्मान भूल जाती है. एक बार फिर मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री ने सुखदेव पांसे कंगना रनौत पर विवादित टिप्पणी की है, जिन्होंने कंगना को नाचने वाली कहा है. आज तक ने सुखदेव से बेहद तीखे सवाल किया. आखिर क्यों मध्यप्रदेश में नेताजी ऐसी मर्यादा पार कर जाते हैं. मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा. दरअसल पहले महाराष्ट्र में कांग्रेस समर्थन वाली उद्धव सरकार पर निशाना. फिर किसान आंदोलन पर लगातार बयान, जिसके बाद कांग्रेस ने कंगना को घेरने की कोशिश की. कांग्रेस का आरोप है कि कंगना किसानों के आंदोलन का अपमान कर रही हैं. देखें शंखनाद, चित्रा त्रिपाठी के साथ.
15- बालका में बल का विकास । विज्ञान की परम्परागत शिक्षण पद्धति और नवोन पद्धति में अंतर पहन विज्ञान की शिक्षण पद्धति में शिक्षक की भूमि अधियो । शिक्षक प्रयोग करके दिखाता था और धान मान लिया करत थे कि जो बुट बजाया जा रहा है, सिखाया जा रहा है, वही ठीक है । उसम छात को दखन का क्म अवसर था । उदाहरण के लिए बनाया चुम्बर में दो ध्रुव होत तो बालक ने मान लिया । अब नई पद्धति मे स्थिति मिन है छात्र चुम्बर क माथ खेलगा, उनझेगा और उसके बारे में बई जानकारियाँ प्राप्त करेगा। नई विधिम शिक्षक की भूमिका अहम् रही है, शिक्षक तटस्थ है । वह केवल प्रयोग करते हुए बालन का यदि यह यहीं हट रहा है तो इशारा मात्र वरेगा ताकि छा अपना प्रयोग सही पर सके। किसी याजना वा पल तत्वात नहीं मिलना आने वाली पीडिया में मिलगा । अभी बहुत कुछ जानता है । इस नइ विधि म बच्चे विशेषना से भी एक कदम आगे हैं। प्रयोग निष्ठ विधिको विक और बच्चा है। लोगा न विज्ञान को अचमा और हौवा बना दिया है। जब हम कहत हैं कि बच्चाको विज्ञान सिखाना है तो एक चित्र बनता है प्रयोगशाला का, क्याकि बिना इसत्रे पढाएंगे पेस ? हमार यहाँ छात्र ब परेंगे जब महर्ग उपकरण हा, काफी पैसा हो, लेकिन सो० वी० रमन, वमु जैसे वैज्ञानिको मामूली उपकरणो से खोजें की । सोखने के सस्त और सरल तरीके हैं । खेती की सारी प्रक्रिया विज्ञान से भरी हुई है। जो हौवा विनान का हमारे भीतर बिठा दिया गया है उसे भगाना है। हम गरीब देश के निवासी है, इसलिए यह कहना कि हम विज्ञान नही साख सक्त, गलन है । हम सस्ते उपकरणा से नया विज्ञान पै करेंगे, सीखेंगे, यही नई पद्धति की प्रमुख विशेषता है । शालेय शिक्षा से सम्बन्धित यूनीसेफ सहायता प्राप्त प्रायोजनाएँ (Unicef Projects Relating to School Education) आज के इस युग मे इस विश्वास को सारे विश्व के लोगा ने स्वीकार किया है कि सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त साधन शिक्षा है। शिक्षा से से एक नैतिक, औद्योगिक एवं व्यावसायिक किन्तु रत्तहीन क्राति सभव है । त नुसार भारत, शिक्षा के गुणात्मक विकास एवं विस्तार हेतु सतत प्रयत्नशील है । भारत स्वतत्र होते हो हमने संविधान की धारा 45 मे यह स्वीकार किया कि 14 वर्ष तक के सभी बच्चा का अनिवाय रूप से शालाओ मे शिक्षा हनु लाया जाय और उन्ह नि शुल्क शिक्षा दी जाय । यह सवैधानिक दायित्व 1960 तक पूरा हो जाना चाहिए था । कि तु वतमान म हमार देश में 6-11 आयु के शाला में दर्ज वालक-बालिकाओं का प्रतिशत 83 है और 11-14 वर्ष बालक-बालिकाओ का दर्ज प्रतिशत 37 है । म० प्र० मे इही आयु वर्गो मदज सख्या प्रतिशत क्रमश 63 और 305 है । म० प्र० म शिक्षा के लाग् व्यापीकरण की स्थिति अत्यन्त सोचनीय है । जाति, जन जाति ग्रामाण अचन के बालक तथा बालिकाएं अधिक है। अनेक प्रयासों के बावत भी हम प्राथ मिव शिक्षा के सावजनीकरण के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पा रह है। य बाला सावभौमिक शिक्षा समस्या के बिंदु है । प्राथमिक शिक्षा को उच्च प्राथ मिकता दी गई है और उसक सत्यात्मक तथा गुणात्मक सुधार के लिए बहु आयामी प्रयास किए जाते है । पाठ्यक्रम नवीनीकरण, पाठयपुस्तका में सुधार, शिक्षक प्रशिक्षण में सुधार, औपचारिकेतर शिक्षा व्यवस्था, बहू बिंदु प्रव अनेत्र कायमो के द्वारा हम प्रारम्भिक शिक्षा के लश्य को प्राप्त करन को वोशिन पर रह हैं । 'यूनीसक' भारत में शिया के गुणात्मक विस्तार और विकास के लिए अनेक शैक्षिक प्रायोजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान कर रहा है । प सभी प्रायोजनाएँ प्राथमिक शिक्षा के मास्टर प्लान के परिन्द छह में सम्मिलित है और यह परिच्छ भारत शसन और यूनीफ द्वारा सीन दस्तावेज है । दीय स्तर पर इन प्रायोजनाओं वा सचाना राष्ट्रीय और प्रशिक्षण परिषद् नली करती है। मध्य प्रशम के प्रायोजनाएँ शिक्षा विभाग के अन्तगत राज्य शिक्षा संस्थान, राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान व मार्फत संचालित है। मध्य प्रदेश म यूनासफ का सहायता ने पांव प्रायोजनाऐ शिक्षा के गुणात्मक एवं संख्यात्मक सुधार की दिशा मे मार्यावित पा जा रही हैं । मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा के लोक व्यापीकरणको दिशा में बहुमुखी प्रायोजनाएं समस्या के आर्थिक, सामाजिर, कि आधार पर प्रारम्भ की गई हैं । प्रदेश में इस प्रकार की मवालिन प्रायोजनाएँ इस प्रकार हैं-1- प्रायोजना ० 1 - प्रारम्भिव शालेय विज्ञान प्रशिक्षण । 2 - प्रायाजना क्र० 2 - प्राथमिक शिक्षा पाठयक्रम नवीनाकरण । 3 - प्रायोजना प्र० 3 सामुदायिक शिक्षा एवं सहयाग का विकासात्मक गतिविधिया । 4- प्रायोजना क्र० 4 - प्राथमिक शालाओं मे पोषण स्वास्थ्य एवं परिवेश स्वच्छता शिक्षा । 5- प्रायोजना क्र० 5- प्राथमिक शिक्षा व्यापक उपागम । प्रायोजना ०1-प्रारम्भिव शालेय विज्ञान प्रशिक्षण यह योजना म० प्र० मे 1972 से एन-सी-ई-आर टी० के माध्यम से प्रारम्भ की गई थी। प्रदेश में यह प्रायाजना राज्य विज्ञान संस्थान द्वारा राचालित की गई । यह प्रायोजना मुख्यन विनान शिक्षा में गुणात्मक विकास की दिशा मे अग्रसर रहो। जब विज्ञान का नवीन पाठ्यक्रम राज्य को प्रायमित्र और पूर्व माध्यमिक शालाओं में लागू किया गया तो प्रारम्भिक शालाओं के शिका में इसे कार्यावित करने की क्षमता एव योग्यता उत्पन्न पश्ने को एक गंभीर समस्या उठ खड़ी हुई । इस समस्या पा मुलझान के लिए विभाग द्वारा विज्ञान प्रशिक्षण की एक वृहद् याजना तैयार की गई और जुलाई 1972 स राज्य में लगभग 10 लाख शिक्षका को विज्ञान प्रशिक्षण देना प्रारम्भ दिया गया । उद्देश्य प्रायोजना के प्रमुख उद्देश्य ये पे1 - विज्ञान शिक्षा का पुनगठन और विस्तार ! 2- विज्ञान शिक्षक का प्रभावशाली बनाना । 3-पाठयक्रम समुन्नत वरना ।
पंद्रह- बालका में बल का विकास । विज्ञान की परम्परागत शिक्षण पद्धति और नवोन पद्धति में अंतर पहन विज्ञान की शिक्षण पद्धति में शिक्षक की भूमि अधियो । शिक्षक प्रयोग करके दिखाता था और धान मान लिया करत थे कि जो बुट बजाया जा रहा है, सिखाया जा रहा है, वही ठीक है । उसम छात को दखन का क्म अवसर था । उदाहरण के लिए बनाया चुम्बर में दो ध्रुव होत तो बालक ने मान लिया । अब नई पद्धति मे स्थिति मिन है छात्र चुम्बर क माथ खेलगा, उनझेगा और उसके बारे में बई जानकारियाँ प्राप्त करेगा। नई विधिम शिक्षक की भूमिका अहम् रही है, शिक्षक तटस्थ है । वह केवल प्रयोग करते हुए बालन का यदि यह यहीं हट रहा है तो इशारा मात्र वरेगा ताकि छा अपना प्रयोग सही पर सके। किसी याजना वा पल तत्वात नहीं मिलना आने वाली पीडिया में मिलगा । अभी बहुत कुछ जानता है । इस नइ विधि म बच्चे विशेषना से भी एक कदम आगे हैं। प्रयोग निष्ठ विधिको विक और बच्चा है। लोगा न विज्ञान को अचमा और हौवा बना दिया है। जब हम कहत हैं कि बच्चाको विज्ञान सिखाना है तो एक चित्र बनता है प्रयोगशाला का, क्याकि बिना इसत्रे पढाएंगे पेस ? हमार यहाँ छात्र ब परेंगे जब महर्ग उपकरण हा, काफी पैसा हो, लेकिन सोशून्य वीशून्य रमन, वमु जैसे वैज्ञानिको मामूली उपकरणो से खोजें की । सोखने के सस्त और सरल तरीके हैं । खेती की सारी प्रक्रिया विज्ञान से भरी हुई है। जो हौवा विनान का हमारे भीतर बिठा दिया गया है उसे भगाना है। हम गरीब देश के निवासी है, इसलिए यह कहना कि हम विज्ञान नही साख सक्त, गलन है । हम सस्ते उपकरणा से नया विज्ञान पै करेंगे, सीखेंगे, यही नई पद्धति की प्रमुख विशेषता है । शालेय शिक्षा से सम्बन्धित यूनीसेफ सहायता प्राप्त प्रायोजनाएँ आज के इस युग मे इस विश्वास को सारे विश्व के लोगा ने स्वीकार किया है कि सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त साधन शिक्षा है। शिक्षा से से एक नैतिक, औद्योगिक एवं व्यावसायिक किन्तु रत्तहीन क्राति सभव है । त नुसार भारत, शिक्षा के गुणात्मक विकास एवं विस्तार हेतु सतत प्रयत्नशील है । भारत स्वतत्र होते हो हमने संविधान की धारा पैंतालीस मे यह स्वीकार किया कि चौदह वर्ष तक के सभी बच्चा का अनिवाय रूप से शालाओ मे शिक्षा हनु लाया जाय और उन्ह नि शुल्क शिक्षा दी जाय । यह सवैधानिक दायित्व एक हज़ार नौ सौ साठ तक पूरा हो जाना चाहिए था । कि तु वतमान म हमार देश में छः-ग्यारह आयु के शाला में दर्ज वालक-बालिकाओं का प्रतिशत तिरासी है और ग्यारह-चौदह वर्ष बालक-बालिकाओ का दर्ज प्रतिशत सैंतीस है । मशून्य प्रशून्य मे इही आयु वर्गो मदज सख्या प्रतिशत क्रमश तिरेसठ और तीन सौ पाँच है । मशून्य प्रशून्य म शिक्षा के लाग् व्यापीकरण की स्थिति अत्यन्त सोचनीय है । जाति, जन जाति ग्रामाण अचन के बालक तथा बालिकाएं अधिक है। अनेक प्रयासों के बावत भी हम प्राथ मिव शिक्षा के सावजनीकरण के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पा रह है। य बाला सावभौमिक शिक्षा समस्या के बिंदु है । प्राथमिक शिक्षा को उच्च प्राथ मिकता दी गई है और उसक सत्यात्मक तथा गुणात्मक सुधार के लिए बहु आयामी प्रयास किए जाते है । पाठ्यक्रम नवीनीकरण, पाठयपुस्तका में सुधार, शिक्षक प्रशिक्षण में सुधार, औपचारिकेतर शिक्षा व्यवस्था, बहू बिंदु प्रव अनेत्र कायमो के द्वारा हम प्रारम्भिक शिक्षा के लश्य को प्राप्त करन को वोशिन पर रह हैं । 'यूनीसक' भारत में शिया के गुणात्मक विस्तार और विकास के लिए अनेक शैक्षिक प्रायोजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान कर रहा है । प सभी प्रायोजनाएँ प्राथमिक शिक्षा के मास्टर प्लान के परिन्द छह में सम्मिलित है और यह परिच्छ भारत शसन और यूनीफ द्वारा सीन दस्तावेज है । दीय स्तर पर इन प्रायोजनाओं वा सचाना राष्ट्रीय और प्रशिक्षण परिषद् नली करती है। मध्य प्रशम के प्रायोजनाएँ शिक्षा विभाग के अन्तगत राज्य शिक्षा संस्थान, राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान व मार्फत संचालित है। मध्य प्रदेश म यूनासफ का सहायता ने पांव प्रायोजनाऐ शिक्षा के गुणात्मक एवं संख्यात्मक सुधार की दिशा मे मार्यावित पा जा रही हैं । मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा के लोक व्यापीकरणको दिशा में बहुमुखी प्रायोजनाएं समस्या के आर्थिक, सामाजिर, कि आधार पर प्रारम्भ की गई हैं । प्रदेश में इस प्रकार की मवालिन प्रायोजनाएँ इस प्रकार हैं-एक- प्रायोजना शून्य एक - प्रारम्भिव शालेय विज्ञान प्रशिक्षण । दो - प्रायाजना क्रशून्य दो - प्राथमिक शिक्षा पाठयक्रम नवीनाकरण । तीन - प्रायोजना प्रशून्य तीन सामुदायिक शिक्षा एवं सहयाग का विकासात्मक गतिविधिया । चार- प्रायोजना क्रशून्य चार - प्राथमिक शालाओं मे पोषण स्वास्थ्य एवं परिवेश स्वच्छता शिक्षा । पाँच- प्रायोजना क्रशून्य पाँच- प्राथमिक शिक्षा व्यापक उपागम । प्रायोजना एक-प्रारम्भिव शालेय विज्ञान प्रशिक्षण यह योजना मशून्य प्रशून्य मे एक हज़ार नौ सौ बहत्तर से एन-सी-ई-आर टीशून्य के माध्यम से प्रारम्भ की गई थी। प्रदेश में यह प्रायाजना राज्य विज्ञान संस्थान द्वारा राचालित की गई । यह प्रायोजना मुख्यन विनान शिक्षा में गुणात्मक विकास की दिशा मे अग्रसर रहो। जब विज्ञान का नवीन पाठ्यक्रम राज्य को प्रायमित्र और पूर्व माध्यमिक शालाओं में लागू किया गया तो प्रारम्भिक शालाओं के शिका में इसे कार्यावित करने की क्षमता एव योग्यता उत्पन्न पश्ने को एक गंभीर समस्या उठ खड़ी हुई । इस समस्या पा मुलझान के लिए विभाग द्वारा विज्ञान प्रशिक्षण की एक वृहद् याजना तैयार की गई और जुलाई एक हज़ार नौ सौ बहत्तर स राज्य में लगभग दस लाख शिक्षका को विज्ञान प्रशिक्षण देना प्रारम्भ दिया गया । उद्देश्य प्रायोजना के प्रमुख उद्देश्य ये पेएक - विज्ञान शिक्षा का पुनगठन और विस्तार ! दो- विज्ञान शिक्षक का प्रभावशाली बनाना । तीन-पाठयक्रम समुन्नत वरना ।
वैज्ञानिकों ने कहा है कि उन्होंने मंगल की सतह पर ऐसी प्राचीन झीलों का भूगर्भीय साक्ष्य ढूंढा है, जो आपस में जुड़ी थीं और जिनका अस्तित्व कभी इस लाल ग्रह की सतह के नीचे गहरे तक रहा होगा। वैज्ञानिकों ने संभावना जतायी है कि इनमें से पांच झीलों में संभवतः जीवन के लिये आवश्यक खनिज लवण हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक प्रतियोगिता शुरू की है। उन्होंने लोगों से कार्बन डाइऑक्साइड को उपयोगी तत्वों में बदलने के लिए उपाय सुझाने के लिए कहा है। नासा के वैज्ञानिकों की एक प्रयोगशाला अब मंगल ग्रह पर एलियन के सबूत खोजेगी। ग्रह पर खुदाई कर वैज्ञानिक जल्द इसका काम शुरू करेंगे। इस छोटी रसायन लेबोरेट्री को मार्स ऑर्गेनिक मोलिक्यूल एनालाइजर (एमओएमए) कहा जा रहा है और यह एक्सोमार्स रोवर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अंतरिक्ष यात्रियों की एक टीम ओमान के रेगिस्तान में मंगल ग्रह जैसी स्थिति पैदा करने के काम में जुटी है। इस अभियान का मकसद मंगल ग्रह पर. . एक निजी कंपनी द्वारा रॉकेट के जरिए मंगल ग्रह भेजी गई कार अपने लक्ष्य को साधने में असफल रही है। इस कार को मंगल और पृथ्वी के बीच में स्थापित किया जाना था, लेकिन वह रास्ता भटकने की वजह से फिलहाल वह मंगल ग्रह में स्थापित नहीं हो सकी है। रेड प्लैनेट कहे जाने वाले मंगल ग्रह पर जाने के लिए दुनियाभर के लोग बेहद उत्साहित हैं। वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर ऐसा वातावरण खोज निकाला है जो लोगों के रहने के लिए अनूकूल बनाया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर बोरॉन की खोज की है। इस आधार पर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि मंगल ग्रह कभी रहने योग्य था। भारत का कोई नागरिक अगर मंगल ग्रह पर भी फंंसा होगा तो वहां भी विदेश मंत्रालय मदद के लिए तैयार है।
वैज्ञानिकों ने कहा है कि उन्होंने मंगल की सतह पर ऐसी प्राचीन झीलों का भूगर्भीय साक्ष्य ढूंढा है, जो आपस में जुड़ी थीं और जिनका अस्तित्व कभी इस लाल ग्रह की सतह के नीचे गहरे तक रहा होगा। वैज्ञानिकों ने संभावना जतायी है कि इनमें से पांच झीलों में संभवतः जीवन के लिये आवश्यक खनिज लवण हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक प्रतियोगिता शुरू की है। उन्होंने लोगों से कार्बन डाइऑक्साइड को उपयोगी तत्वों में बदलने के लिए उपाय सुझाने के लिए कहा है। नासा के वैज्ञानिकों की एक प्रयोगशाला अब मंगल ग्रह पर एलियन के सबूत खोजेगी। ग्रह पर खुदाई कर वैज्ञानिक जल्द इसका काम शुरू करेंगे। इस छोटी रसायन लेबोरेट्री को मार्स ऑर्गेनिक मोलिक्यूल एनालाइजर कहा जा रहा है और यह एक्सोमार्स रोवर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अंतरिक्ष यात्रियों की एक टीम ओमान के रेगिस्तान में मंगल ग्रह जैसी स्थिति पैदा करने के काम में जुटी है। इस अभियान का मकसद मंगल ग्रह पर. . एक निजी कंपनी द्वारा रॉकेट के जरिए मंगल ग्रह भेजी गई कार अपने लक्ष्य को साधने में असफल रही है। इस कार को मंगल और पृथ्वी के बीच में स्थापित किया जाना था, लेकिन वह रास्ता भटकने की वजह से फिलहाल वह मंगल ग्रह में स्थापित नहीं हो सकी है। रेड प्लैनेट कहे जाने वाले मंगल ग्रह पर जाने के लिए दुनियाभर के लोग बेहद उत्साहित हैं। वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर ऐसा वातावरण खोज निकाला है जो लोगों के रहने के लिए अनूकूल बनाया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर बोरॉन की खोज की है। इस आधार पर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि मंगल ग्रह कभी रहने योग्य था। भारत का कोई नागरिक अगर मंगल ग्रह पर भी फंंसा होगा तो वहां भी विदेश मंत्रालय मदद के लिए तैयार है।
पुलिस लोन ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। चेन्नईः तमिलनाडु पुलिस लोन ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई कर रही है । वहींं राज्य के पुलिस महानिदेशक सी. सिलेंद्र कुमार ने लोगों से अपील की है, कि वह लोन ऐप्स के झांसे में न आएं। लोन ऐप पर धोखाधड़ी के शिकार लोगों द्वारा आत्महत्या करने की कई शिकायतों के बाद तमिलनाडु पुलिस ने इस मामले पर संज्ञान लिया। बता दें, कि पुलिस को डिफॉल्टरों की एडिट की गई तस्वीरें उनके परिचत संपर्कों को भेजे जाने की शिकायतें मिल रही थी। पुलिस ने कहा है कि वह अभियान चलाकर लोगों को ऐसे ऐप्स से छोटी राशि लोन लेने के खिलाफ जागरूक कर रही है। तमिलनाडु पुलिस साइबर सेल ने भी इन ऐप्स पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। पुुुलिस सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि इनमें से ज्यादातर ऐप्स चीनी मूल के हैं, यह ऐप्स लोन लेने वालों के बारे में पूरी जानकारी जुटाकर उन्हें मानसिक परेशानी देते हैं। डीजीपी ने लोगों से ऐसे ऐप्स से दूूूरी बनाने को कहा है। वहीं पुलिस ने गूगल प्ले स्टोर के समाने यह मामला उठाया है। पुुलिस ने धोखाधड़ी करने वाले लगभग 211 लोन ऐप्स को गूगल से हटाने को कहा है। हालांकि लोग इन लोन ऐप्स को विभिन्न वेबसाइटों से भी डाउनलोड कर रहे हैं और पुलिस ने लोगों से आह्वान किया है कि वे उन वेबसाइटों से कोई भी ऐप डाउनलोड न करें। ऐसी कई धोखाधड़ी वाली वेबसाइटों में, घोटालेबाज डिस्प्ले पिक्चर्स (डीपी) का उपयोग कर विभिन्न कार्यालयों में काम करने वाले लोगों को उपहार देनेे वाले संदेश भेज रहे हैं, और लिंक पर क्लिक करने का अनुरोध कर रहे हैं। पुलिस ने लोगों से ऐसे लिंक पर क्लिक नहीं करने का अनुरोध किया है। वहीं 'सेक्सटॉर्शन' नाम का एक घोटाला भी सामने आ रहा है। इस घोटाले में पीड़ित को एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आती है। एक बार जब व्यक्ति कॉल स्वीकार कर लेता है तो दूसरी ओर से घोटालेबाज, ज्यादातर महिलाएं, निर्वस्त्र होकर इस वीडियो कॉल के स्क्रीनशॉट का उपयोग कर पीड़ितों को ब्लैकमेल करती हैं। पुलिस ने लोगों को आगाह किया है कि वे ऐसे अज्ञात व्यक्तियों या नंबरों से आने वाले कॉल के झांसे में न आएं। पुलिस ने लोगों को ऐसे मामलों को लेकर तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके सूचना देनेे को कहा है। पुलिस साइबर क्राइम विंग मुख्यालय अब ऐसे मामलों को लेकर सतर्कता बरत रहा है। पुलिस के मुताबिक, लोग जितनी जल्दी हेल्पलाइन पर शिकायत करेंगे, पैसा वापस मिलने की संभावना उतनी ही मजबूत होगी।
पुलिस लोन ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। चेन्नईः तमिलनाडु पुलिस लोन ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई कर रही है । वहींं राज्य के पुलिस महानिदेशक सी. सिलेंद्र कुमार ने लोगों से अपील की है, कि वह लोन ऐप्स के झांसे में न आएं। लोन ऐप पर धोखाधड़ी के शिकार लोगों द्वारा आत्महत्या करने की कई शिकायतों के बाद तमिलनाडु पुलिस ने इस मामले पर संज्ञान लिया। बता दें, कि पुलिस को डिफॉल्टरों की एडिट की गई तस्वीरें उनके परिचत संपर्कों को भेजे जाने की शिकायतें मिल रही थी। पुलिस ने कहा है कि वह अभियान चलाकर लोगों को ऐसे ऐप्स से छोटी राशि लोन लेने के खिलाफ जागरूक कर रही है। तमिलनाडु पुलिस साइबर सेल ने भी इन ऐप्स पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। पुुुलिस सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि इनमें से ज्यादातर ऐप्स चीनी मूल के हैं, यह ऐप्स लोन लेने वालों के बारे में पूरी जानकारी जुटाकर उन्हें मानसिक परेशानी देते हैं। डीजीपी ने लोगों से ऐसे ऐप्स से दूूूरी बनाने को कहा है। वहीं पुलिस ने गूगल प्ले स्टोर के समाने यह मामला उठाया है। पुुलिस ने धोखाधड़ी करने वाले लगभग दो सौ ग्यारह लोन ऐप्स को गूगल से हटाने को कहा है। हालांकि लोग इन लोन ऐप्स को विभिन्न वेबसाइटों से भी डाउनलोड कर रहे हैं और पुलिस ने लोगों से आह्वान किया है कि वे उन वेबसाइटों से कोई भी ऐप डाउनलोड न करें। ऐसी कई धोखाधड़ी वाली वेबसाइटों में, घोटालेबाज डिस्प्ले पिक्चर्स का उपयोग कर विभिन्न कार्यालयों में काम करने वाले लोगों को उपहार देनेे वाले संदेश भेज रहे हैं, और लिंक पर क्लिक करने का अनुरोध कर रहे हैं। पुलिस ने लोगों से ऐसे लिंक पर क्लिक नहीं करने का अनुरोध किया है। वहीं 'सेक्सटॉर्शन' नाम का एक घोटाला भी सामने आ रहा है। इस घोटाले में पीड़ित को एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आती है। एक बार जब व्यक्ति कॉल स्वीकार कर लेता है तो दूसरी ओर से घोटालेबाज, ज्यादातर महिलाएं, निर्वस्त्र होकर इस वीडियो कॉल के स्क्रीनशॉट का उपयोग कर पीड़ितों को ब्लैकमेल करती हैं। पुलिस ने लोगों को आगाह किया है कि वे ऐसे अज्ञात व्यक्तियों या नंबरों से आने वाले कॉल के झांसे में न आएं। पुलिस ने लोगों को ऐसे मामलों को लेकर तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर एक हज़ार नौ सौ तीस पर कॉल करके सूचना देनेे को कहा है। पुलिस साइबर क्राइम विंग मुख्यालय अब ऐसे मामलों को लेकर सतर्कता बरत रहा है। पुलिस के मुताबिक, लोग जितनी जल्दी हेल्पलाइन पर शिकायत करेंगे, पैसा वापस मिलने की संभावना उतनी ही मजबूत होगी।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
zodiac signs : कुछ राशियों के लोग इस साल सभी लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे, जिन्हें पूरा करने के लिए वे लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. ग्रहों की बदलती चाल के वजह से वे सफलताओं को हासिल कर सकेंगे. साल 2022 शुरू हो गया है. सफलता, पैसा, तरक्की पाने की चाहत हर किसी के मन में होती है, लेकिन कुछ राशियों के लोग इस मामले में वाकई भाग्यशाली होते हैं. इन लोगों का सपना इस साल पूरा होने जा रहा है. वे उन सभी लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे, जिन्हें पूरा करने के लिए वे लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. ग्रहों की बदलती चाल के वजह से वे सफलताओं को हासिल कर सकेंगे. शनि की महादशा झेल रहे राशि के जातकों को अप्रैल 2022 में शनि के राशि परिवर्तन के बाद काफी राहत महसूस होगी. उन्हें शनि की साढ़े साती से राहत मिलेगी. शनि के गोचर के साथ ही उनके जीवन की परेशानियां खत्म हो जाएंगी. सालों से अटका हुआ काम अपने आप पूरा होना शुरू हो जाएगा. उन्नति और समृद्धि होगी. अप्रैल में शनि के राशि परिवर्तन के बाद 12 जुलाई 2022 को अशुभ ग्रह राहु राशि परिवर्तन करेगा. इसके साथ ही हर काम में रुकावट आने का सिलसिला भी खत्म हो जाएगा. वृष राशि के जातकों को इसका अधिक लाभ मिलेगा. पिछले सालों से मुश्किलों का पहाड़ ढो रहे वृष राशि के जातक अब समस्याओं से जल्दी दूर हो पाएंगे. अभी राहु वृष राशि में है और 12 जुलाई 2022 को इस राशि को छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करेगा. जैसे ही पाप ग्रह राहु राशि छोड़ता है, वृषभ राशि के लोगों के जीवन में सभी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं. उन्हें अनेक लाभ प्राप्त होंगे. करियर में बड़ी सफलता मिलेगी. बस बुरी आदतों और संगत से दूर रहें. साथ ही जब भी संभव हो कुत्ते को ब्रेड-बिस्किट और दूध दें. मिथुन राशि वालों को इस साल शनि की ढैय्या से मुक्ति मिलने वाली है. 29 अप्रैल 2022 को शनि के राशि परिवर्तन के साथ ही उनके जीवन के सभी कष्ट भी समाप्त हो जाएंगे. आपको प्रमोशन-इन्क्रीमेंट मिलेगा. कई तरह से आमदनी होगी. लेकिन क्रोध और अहंकार से बचें, साथ ही बुजुर्गों और महिलाओं का सम्मान करें. मीन राशि के जातकों के लिए भी नए साल की ग्रह स्थिति बहुत ही शुभ है. उन्हें अपने करियर में बड़ा लाभ मिलेगा. अगर आप बदलाव करना चाहते हैं तो वह भी सुखद रहेगा. पदोन्नति-वृद्धि, व्यापार में लाभ के अनेक अवसर प्राप्त होंगे. कहा जा सकता है कि पूरा साल सफल साबित होगा. केवल स्वार्थी और धोखेबाज लोगों से सावधान रहें.
zodiac signs : कुछ राशियों के लोग इस साल सभी लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे, जिन्हें पूरा करने के लिए वे लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. ग्रहों की बदलती चाल के वजह से वे सफलताओं को हासिल कर सकेंगे. साल दो हज़ार बाईस शुरू हो गया है. सफलता, पैसा, तरक्की पाने की चाहत हर किसी के मन में होती है, लेकिन कुछ राशियों के लोग इस मामले में वाकई भाग्यशाली होते हैं. इन लोगों का सपना इस साल पूरा होने जा रहा है. वे उन सभी लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे, जिन्हें पूरा करने के लिए वे लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. ग्रहों की बदलती चाल के वजह से वे सफलताओं को हासिल कर सकेंगे. शनि की महादशा झेल रहे राशि के जातकों को अप्रैल दो हज़ार बाईस में शनि के राशि परिवर्तन के बाद काफी राहत महसूस होगी. उन्हें शनि की साढ़े साती से राहत मिलेगी. शनि के गोचर के साथ ही उनके जीवन की परेशानियां खत्म हो जाएंगी. सालों से अटका हुआ काम अपने आप पूरा होना शुरू हो जाएगा. उन्नति और समृद्धि होगी. अप्रैल में शनि के राशि परिवर्तन के बाद बारह जुलाई दो हज़ार बाईस को अशुभ ग्रह राहु राशि परिवर्तन करेगा. इसके साथ ही हर काम में रुकावट आने का सिलसिला भी खत्म हो जाएगा. वृष राशि के जातकों को इसका अधिक लाभ मिलेगा. पिछले सालों से मुश्किलों का पहाड़ ढो रहे वृष राशि के जातक अब समस्याओं से जल्दी दूर हो पाएंगे. अभी राहु वृष राशि में है और बारह जुलाई दो हज़ार बाईस को इस राशि को छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करेगा. जैसे ही पाप ग्रह राहु राशि छोड़ता है, वृषभ राशि के लोगों के जीवन में सभी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं. उन्हें अनेक लाभ प्राप्त होंगे. करियर में बड़ी सफलता मिलेगी. बस बुरी आदतों और संगत से दूर रहें. साथ ही जब भी संभव हो कुत्ते को ब्रेड-बिस्किट और दूध दें. मिथुन राशि वालों को इस साल शनि की ढैय्या से मुक्ति मिलने वाली है. उनतीस अप्रैल दो हज़ार बाईस को शनि के राशि परिवर्तन के साथ ही उनके जीवन के सभी कष्ट भी समाप्त हो जाएंगे. आपको प्रमोशन-इन्क्रीमेंट मिलेगा. कई तरह से आमदनी होगी. लेकिन क्रोध और अहंकार से बचें, साथ ही बुजुर्गों और महिलाओं का सम्मान करें. मीन राशि के जातकों के लिए भी नए साल की ग्रह स्थिति बहुत ही शुभ है. उन्हें अपने करियर में बड़ा लाभ मिलेगा. अगर आप बदलाव करना चाहते हैं तो वह भी सुखद रहेगा. पदोन्नति-वृद्धि, व्यापार में लाभ के अनेक अवसर प्राप्त होंगे. कहा जा सकता है कि पूरा साल सफल साबित होगा. केवल स्वार्थी और धोखेबाज लोगों से सावधान रहें.
Best Mid Cap Funds in 3 years- पिछले तीन वर्षों में कुछ मिड कैप फंड्स ने निवेशकों को जोरदा रिटर्न दिया है. 6 मिड कैप फंड्स के डायरेक्ट प्लान में पैसा लगाने वाले निवेशकों को तो 41 फीसदी तक रिटर्न मिला है. वहीं, रेगुलर प्लान का मुनाफा इस अवधि में 38 फीसदी तक रहा है. एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) की वेबसाइट पर 12 अप्रैल तक उपलब्ध डेटा से ही पता चला है कि 6 मिड कैप फंड्स ने तीन साल में धान्सू रिटर्न दिया है. यह रिटर्न एफडी सहित अन्य इनवेस्टमेंट इंस्ट्रुमेंट से बहुत ज्यादा है. (Image : Canva) क्वांट मिड कैप फंड (Quant Mid Cap Fund) के डायरेक्ट प्लान ने पिछले तीन साल में 41. 77% का रिटर्न दिया है, जबकि रेगुलर प्लान ने तीन साल में 38. 88 फीसदी रिटर्न दिया है. यह स्कीम निफ्टी मिडकैप 150 टोटल रिटर्न इंडेक्स को ट्रैक करती है. (Image : Canva) पीजीआईएम इंडिया मिडकैप ऑपर्च्युनिटीज फंड (PGIM India Midcap Opportunities Fund) के डायरेक्ट प्लान ने 41. 73 फीसदी का रिटर्न दिया है जबकि रेगुलर प्लान ने तीन साल में 39. 29 फीसदी का मुनाफा निवेशकों को दिया है. यह स्कीम निफ्टी मिडकैप 150 टोटल रिटर्न इंडेक्स को ट्रैक करती है. (Image : Canva) एसबीआई मैग्नम मिडकैप फंड (SBI Magnum Midcap Fund) के डायरेक्ट प्लान ने निवेशकों को तीन साल में 39. 82 फीसदी मुनाफा दिया है. इस स्कीम के रेगुलर प्लान का तीन साल का रिटर्न 38. 59 फीसदी रहा है. यह फंड निफ्टी मिडकैप 150 टोटल रिटर्न इंडेक्स को ट्रैक करता है. (Image : Canva) मोतीलाल ओसवाल मिडकैप फंड (Motilal Oswal Midcap Fund) के डायरेक्ट प्लान में पैसा लगाने वालों की भी मौज हो गई है. पिछले तीन साल में इस फंड का रिटर्न 37. 11 फीसदी रहा है. रेगुलर प्लान ने भी 35. 47 फीसदी रिटर्न दिया है. (Image : Canva) एचडीएफसी मिड-कैप ऑपर्च्युनिटीज फंड (HDFC Mid-Cap Opportunities Fund) के डायरेक्ट प्लान का नाम भी मोटा मुनाफा देने वाले मिड कैप फंड की लिस्ट में शामिल है. पिछले तीन साल में इस फंड के डायरेक्ट प्लान ने 36. 63 फीसदी तो रेगुलर प्लान ने 35. 68 फीसदी रिटर्न निवेशकों को दिया है. यह फंड निफ्टी मिडकैप 150 टोटल रिटर्न इंडेक्स को ट्रैक करता है. (Image : Canva) कोटक इमर्जिंग इक्विटी फंड (Kotak Emerging Equity Fund) के डायरेक्ट प्लान ने में पैसा लगाने वालों को तीन साल की अवधि में 36. 28 फीसदी तो रेगुलर प्लान में निवेश करने वालों को 34. 59 फीसदी मुनाफा हुआ है. यह स्कीम निफ्टी मिडकैप 150 टोटल रिटर्न इंडेक्स को ट्रैक करती है. (Disclaimer: यहां बताए गए म्यूचुअल फंड वित्तीय सलाहकार की सलाह पर आधारित हैं. यदि आप इनमें से किसी में भी पैसा लगाना चाहते हैं तो पहले सर्टिफाइड इनवेस्टमेंट एडवायजर से परामर्श कर लें. आपके किसी भी तरह की लाभ या हानि के लिए लिए News18 जिम्मेदार नहीं होगा. ) Team India Opening Pair: टेस्ट में फिर नया ओपनर, 18 महीने में सातवीं सलामी जोड़ी, क्या इस बार पलटेगी किस्मत? एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) की वेबसाइट पर 12 अप्रैल तक उपलब्ध डेटा से ही पता चला है कि 6 मिड कैप फंड्स ने तीन साल में धान्सू रिटर्न दिया है. यह रिटर्न एफडी सहित अन्य इनवेस्टमेंट इंस्ट्रुमेंट से बहुत ज्यादा है. (Image : Canva)
Best Mid Cap Funds in तीन years- पिछले तीन वर्षों में कुछ मिड कैप फंड्स ने निवेशकों को जोरदा रिटर्न दिया है. छः मिड कैप फंड्स के डायरेक्ट प्लान में पैसा लगाने वाले निवेशकों को तो इकतालीस फीसदी तक रिटर्न मिला है. वहीं, रेगुलर प्लान का मुनाफा इस अवधि में अड़तीस फीसदी तक रहा है. एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया की वेबसाइट पर बारह अप्रैल तक उपलब्ध डेटा से ही पता चला है कि छः मिड कैप फंड्स ने तीन साल में धान्सू रिटर्न दिया है. यह रिटर्न एफडी सहित अन्य इनवेस्टमेंट इंस्ट्रुमेंट से बहुत ज्यादा है. क्वांट मिड कैप फंड के डायरेक्ट प्लान ने पिछले तीन साल में इकतालीस. सतहत्तर% का रिटर्न दिया है, जबकि रेगुलर प्लान ने तीन साल में अड़तीस. अठासी फीसदी रिटर्न दिया है. यह स्कीम निफ्टी मिडकैप एक सौ पचास टोटल रिटर्न इंडेक्स को ट्रैक करती है. पीजीआईएम इंडिया मिडकैप ऑपर्च्युनिटीज फंड के डायरेक्ट प्लान ने इकतालीस. तिहत्तर फीसदी का रिटर्न दिया है जबकि रेगुलर प्लान ने तीन साल में उनतालीस. उनतीस फीसदी का मुनाफा निवेशकों को दिया है. यह स्कीम निफ्टी मिडकैप एक सौ पचास टोटल रिटर्न इंडेक्स को ट्रैक करती है. एसबीआई मैग्नम मिडकैप फंड के डायरेक्ट प्लान ने निवेशकों को तीन साल में उनतालीस. बयासी फीसदी मुनाफा दिया है. इस स्कीम के रेगुलर प्लान का तीन साल का रिटर्न अड़तीस. उनसठ फीसदी रहा है. यह फंड निफ्टी मिडकैप एक सौ पचास टोटल रिटर्न इंडेक्स को ट्रैक करता है. मोतीलाल ओसवाल मिडकैप फंड के डायरेक्ट प्लान में पैसा लगाने वालों की भी मौज हो गई है. पिछले तीन साल में इस फंड का रिटर्न सैंतीस. ग्यारह फीसदी रहा है. रेगुलर प्लान ने भी पैंतीस. सैंतालीस फीसदी रिटर्न दिया है. एचडीएफसी मिड-कैप ऑपर्च्युनिटीज फंड के डायरेक्ट प्लान का नाम भी मोटा मुनाफा देने वाले मिड कैप फंड की लिस्ट में शामिल है. पिछले तीन साल में इस फंड के डायरेक्ट प्लान ने छत्तीस. तिरेसठ फीसदी तो रेगुलर प्लान ने पैंतीस. अड़सठ फीसदी रिटर्न निवेशकों को दिया है. यह फंड निफ्टी मिडकैप एक सौ पचास टोटल रिटर्न इंडेक्स को ट्रैक करता है. कोटक इमर्जिंग इक्विटी फंड के डायरेक्ट प्लान ने में पैसा लगाने वालों को तीन साल की अवधि में छत्तीस. अट्ठाईस फीसदी तो रेगुलर प्लान में निवेश करने वालों को चौंतीस. उनसठ फीसदी मुनाफा हुआ है. यह स्कीम निफ्टी मिडकैप एक सौ पचास टोटल रिटर्न इंडेक्स को ट्रैक करती है. Team India Opening Pair: टेस्ट में फिर नया ओपनर, अट्ठारह महीने में सातवीं सलामी जोड़ी, क्या इस बार पलटेगी किस्मत? एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया की वेबसाइट पर बारह अप्रैल तक उपलब्ध डेटा से ही पता चला है कि छः मिड कैप फंड्स ने तीन साल में धान्सू रिटर्न दिया है. यह रिटर्न एफडी सहित अन्य इनवेस्टमेंट इंस्ट्रुमेंट से बहुत ज्यादा है.
तो है ?' फिर क्या था, नारदजी अपने काम-विजयकी कथा सरकारको सुनाने लगे। पूरी कथा सुनकर गर्वहरण श्रीभगवान्ने कहा - 'हॉ, भला आप- -जैसे ज्ञानीको मोह कैसे हो सकता है।' नारदजीने अभिमानपूर्वक उत्तर दिया कि 'आपकी दयासे ऐसा ही है ।' सरकार श्रीकरुणानिधानने देखा कि नारदजीके हृदयमें गर्वका महान् वृक्ष उग रहा है, इसे जल्द निर्मूल कर दिया जाय तभी ठीक है; क्योंकि सेवकका हित करना हमारा प्रण है।' यहाॅ 'चराचरराय' और 'रघुपति' शब्द भी एकार्थसूचक हैं । ऐसी करुणा भला, श्रीरामजीको छोड़ और किसमे सम्भव है। बस, श्रीपतिने निज मायाको प्रेरणा कर वैकुण्ठकी अपेक्षा भी सुन्दर एक नगरकी रचना मार्गमें कर दी । नारदजीने वैकुण्ठसे लौटते हुए उस नगरमें प्रवेश किया और वे वहाँके राजा शीलनिधिके दरबारमे पहुॅचे। राजाके एक अत्यन्त सुन्दरी विश्वमोहिनी कन्या थी । (हरिमायाने ही यह सारा साज सजा रखा था।) उसे बुलाकर राजाने मुनिको उसका हाथ देखनेके लिये कहा। मुनि उसका रूप देखते ही सारा वैराग्य भूल गये। बड़ी देरतक एकटक देखते ही रह गये, और उसके शुभ लक्षणोंको देख उनके चित्तमे उत्कण्ठा हुई कि 'इस अवसरपर यदि मेरा परम सुशोभित रूप हो जाता तो यह कन्या मुझे ही वर लेती । श्रीहरि हमारे परम हित हैं, उन्हींसे सौन्दर्य माँगना चाहिये । परन्तु प्रभुके धामतक जानेमें तो बहुत देर होगी; वे सर्वव्यापक हैं ही, यहीं प्रार्थना करें ।' यह सोचकर उन्होंने मन-ही-मन श्रीहरिका स्मरण कर कहा कि 'हे हरे ! कृपया यहीं प्रकट होकर मेरी सहायता कीजिये ।' कौतुक - निधि कृपालुने तुरंत प्रकट होकर नारदजीसे पूछा कि 'मुनिवर, किसलिये याद किया है ?' नारदजीने उन्हें सारी कथा सुनाकर अपने हितके लिये प्रार्थना की । इसपर दीनदयालु प्रभु हँसकर बोले कि 'हे मुनि, जिसमें तुम्हारा कल्याण होगा मैं वही करूँगा ।' परन्तु ये गूढ़ वचन नारदजीकी समझमें नहीं आये - ये कुपथ माग रुज ब्याकुल रोगी । बैद न देइ सुनहु मुनि जोगी ॥ मुनि हित कारन कृपानिधाना । दीन्ह कुरूप न जाइ बखाना ॥
तो है ?' फिर क्या था, नारदजी अपने काम-विजयकी कथा सरकारको सुनाने लगे। पूरी कथा सुनकर गर्वहरण श्रीभगवान्ने कहा - 'हॉ, भला आप- -जैसे ज्ञानीको मोह कैसे हो सकता है।' नारदजीने अभिमानपूर्वक उत्तर दिया कि 'आपकी दयासे ऐसा ही है ।' सरकार श्रीकरुणानिधानने देखा कि नारदजीके हृदयमें गर्वका महान् वृक्ष उग रहा है, इसे जल्द निर्मूल कर दिया जाय तभी ठीक है; क्योंकि सेवकका हित करना हमारा प्रण है।' यहाॅ 'चराचरराय' और 'रघुपति' शब्द भी एकार्थसूचक हैं । ऐसी करुणा भला, श्रीरामजीको छोड़ और किसमे सम्भव है। बस, श्रीपतिने निज मायाको प्रेरणा कर वैकुण्ठकी अपेक्षा भी सुन्दर एक नगरकी रचना मार्गमें कर दी । नारदजीने वैकुण्ठसे लौटते हुए उस नगरमें प्रवेश किया और वे वहाँके राजा शीलनिधिके दरबारमे पहुॅचे। राजाके एक अत्यन्त सुन्दरी विश्वमोहिनी कन्या थी । उसे बुलाकर राजाने मुनिको उसका हाथ देखनेके लिये कहा। मुनि उसका रूप देखते ही सारा वैराग्य भूल गये। बड़ी देरतक एकटक देखते ही रह गये, और उसके शुभ लक्षणोंको देख उनके चित्तमे उत्कण्ठा हुई कि 'इस अवसरपर यदि मेरा परम सुशोभित रूप हो जाता तो यह कन्या मुझे ही वर लेती । श्रीहरि हमारे परम हित हैं, उन्हींसे सौन्दर्य माँगना चाहिये । परन्तु प्रभुके धामतक जानेमें तो बहुत देर होगी; वे सर्वव्यापक हैं ही, यहीं प्रार्थना करें ।' यह सोचकर उन्होंने मन-ही-मन श्रीहरिका स्मरण कर कहा कि 'हे हरे ! कृपया यहीं प्रकट होकर मेरी सहायता कीजिये ।' कौतुक - निधि कृपालुने तुरंत प्रकट होकर नारदजीसे पूछा कि 'मुनिवर, किसलिये याद किया है ?' नारदजीने उन्हें सारी कथा सुनाकर अपने हितके लिये प्रार्थना की । इसपर दीनदयालु प्रभु हँसकर बोले कि 'हे मुनि, जिसमें तुम्हारा कल्याण होगा मैं वही करूँगा ।' परन्तु ये गूढ़ वचन नारदजीकी समझमें नहीं आये - ये कुपथ माग रुज ब्याकुल रोगी । बैद न देइ सुनहु मुनि जोगी ॥ मुनि हित कारन कृपानिधाना । दीन्ह कुरूप न जाइ बखाना ॥
Rakhi Sawant News: एंटरटेनमेंट क्वीन राखी सावंत सुर्खियों में रहने की कोई न कोई वजह ढूंढ ही लेती हैं। बीते कुछ दिनों से राखी की मां कैंसर के इलाज के लिए मुंबई के अस्पताल में भर्ती हैं। इसी बीच उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड आदिल दुर्रानी संग निकाह का खुलासा भी किया। अब राखी हाल ही में हिजाब पहनकर अपनी मां से मिलने अस्पताल पहुंचीं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में राखी और आदिल अस्पताल में एंट्री कर रहे हैं, इस बीच राखी काफी उदास नजर आ रही हैं। वह अपनी मां से मिलती हैं और उन्हें कहती हैं कि आदिल आपसे मिलने आए हैं। इसके बाद वापस जाते वक्त वह बिना मीडिया से बात करते हुए कार में बैठ जाती हैं। इसके अलावा एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें राखी कार से उतरकर अस्पताल की तरफ जाती हैं और मीडिया उन्हें घेर लेती है। इसके बाद वह पीछे मुड़कर आदिल का इंतजार करती हैं। इस वीडियो में भी वह बिना बात किए आगे बढ़ जाती हैं। बता दें कि वीरल भयानी ने अपने इस्टाग्राम अकाउंट पर दावा किया था कि राखी का मिसकैरेज हुआ था और उन्होंने खुद ये बात कॉल पर बताई। हालांकि कुछ समय बाद आदिल ने सोशल मीडिया पर इसे फेक न्यूज बताया और लोगों से इस तरह की झूठी खबरें न फैलाने की अपील की। गौरतलब है कि राखी सावंत ने हाल ही में खुलासा किया है कि उन्होंने सात महीने पहले आदिल दुर्रानी के साथ निकाह और कोर्ट मैरिज की थी। जिसकी तस्वीरें भी उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल की। 3-4 दिनों तक चुप रहने के बाद आदिल ने भी राखी संग अपनी शादी का ऐलान किया। अब राखी का कहना है कि कुछ लोग उन्हें और आदिल को अलग करना चाहते हैं और उन्हें धमकी दे रहे हैं।
Rakhi Sawant News: एंटरटेनमेंट क्वीन राखी सावंत सुर्खियों में रहने की कोई न कोई वजह ढूंढ ही लेती हैं। बीते कुछ दिनों से राखी की मां कैंसर के इलाज के लिए मुंबई के अस्पताल में भर्ती हैं। इसी बीच उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड आदिल दुर्रानी संग निकाह का खुलासा भी किया। अब राखी हाल ही में हिजाब पहनकर अपनी मां से मिलने अस्पताल पहुंचीं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में राखी और आदिल अस्पताल में एंट्री कर रहे हैं, इस बीच राखी काफी उदास नजर आ रही हैं। वह अपनी मां से मिलती हैं और उन्हें कहती हैं कि आदिल आपसे मिलने आए हैं। इसके बाद वापस जाते वक्त वह बिना मीडिया से बात करते हुए कार में बैठ जाती हैं। इसके अलावा एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें राखी कार से उतरकर अस्पताल की तरफ जाती हैं और मीडिया उन्हें घेर लेती है। इसके बाद वह पीछे मुड़कर आदिल का इंतजार करती हैं। इस वीडियो में भी वह बिना बात किए आगे बढ़ जाती हैं। बता दें कि वीरल भयानी ने अपने इस्टाग्राम अकाउंट पर दावा किया था कि राखी का मिसकैरेज हुआ था और उन्होंने खुद ये बात कॉल पर बताई। हालांकि कुछ समय बाद आदिल ने सोशल मीडिया पर इसे फेक न्यूज बताया और लोगों से इस तरह की झूठी खबरें न फैलाने की अपील की। गौरतलब है कि राखी सावंत ने हाल ही में खुलासा किया है कि उन्होंने सात महीने पहले आदिल दुर्रानी के साथ निकाह और कोर्ट मैरिज की थी। जिसकी तस्वीरें भी उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल की। तीन-चार दिनों तक चुप रहने के बाद आदिल ने भी राखी संग अपनी शादी का ऐलान किया। अब राखी का कहना है कि कुछ लोग उन्हें और आदिल को अलग करना चाहते हैं और उन्हें धमकी दे रहे हैं।
कश्मीर में पिछले दो वर्षों में आपरेशन आल आउट के तहत तीन दर्जन आतंकी कमांडर मारे जाने से आतंकी संगठनों की कमर टूट गई है। ऐसे में अब आतंकी गतिविधियों को चलाने के लिए आतंकी संगठन पाकिस्तान में बैठे कश्मीरी आतंकियों का सहारा ले रहे हैं। कश्मीरी आतंकी पाकिस्तान में बैठ कर कश्मीर में रहने वाले अपने सगे संबंधियों की मदद से आतंक का नेटवर्क चला रहे हैं। सुरक्षा बलों के लिए ये बड़ी चुनौती बन गए हैं। पिछली कई आतंकी वारदातें ऐसी हैं, जो कश्मीरी आतंकियों ने पाकिस्तान में बैठकर अंजाम दीं। झज्जर कोटली का आतंकी हमला, पंजाब के तरनतारन में ड्रोन से हथियार भेजने का मामला, परमंडल और बिश्नाह के पल्ली मोड़ से पकड़े गए आतंकी, कालूचक मिलिट्री स्टेशन में पकड़े गए आतंकी और मेंढर में हेरोइन की तस्करी में पकड़े गए हिजबुल आतंकी। यह तमाम ऐसी गतिविधियां हैं, जो पाकिस्तान में बैठे हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी चला रहे हैं। कश्मीर में लोकल कमांडरों का नेटवर्क ध्वस्त हो चुका है। इसकी वजह से अब पाकिस्तान में बैठ कर हमलों को प्लान कर रहे हैं। आने वाले दिनों में पाकिस्तान में बैठे कश्मीरी आतंकी पंजाब, जम्मू और श्रीनगर में बड़े हमलों को अंजाम देने की फिराक में बैठे हुए हैं। इसके लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कश्मीरी आतंकी अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर बड़े खून खराबे की फिराक में है। खुफिया एजेंसियां भी लगातार पाक में बैठे आतंकियों के संचार नेटवर्क पर नजर रख रही हैं।
कश्मीर में पिछले दो वर्षों में आपरेशन आल आउट के तहत तीन दर्जन आतंकी कमांडर मारे जाने से आतंकी संगठनों की कमर टूट गई है। ऐसे में अब आतंकी गतिविधियों को चलाने के लिए आतंकी संगठन पाकिस्तान में बैठे कश्मीरी आतंकियों का सहारा ले रहे हैं। कश्मीरी आतंकी पाकिस्तान में बैठ कर कश्मीर में रहने वाले अपने सगे संबंधियों की मदद से आतंक का नेटवर्क चला रहे हैं। सुरक्षा बलों के लिए ये बड़ी चुनौती बन गए हैं। पिछली कई आतंकी वारदातें ऐसी हैं, जो कश्मीरी आतंकियों ने पाकिस्तान में बैठकर अंजाम दीं। झज्जर कोटली का आतंकी हमला, पंजाब के तरनतारन में ड्रोन से हथियार भेजने का मामला, परमंडल और बिश्नाह के पल्ली मोड़ से पकड़े गए आतंकी, कालूचक मिलिट्री स्टेशन में पकड़े गए आतंकी और मेंढर में हेरोइन की तस्करी में पकड़े गए हिजबुल आतंकी। यह तमाम ऐसी गतिविधियां हैं, जो पाकिस्तान में बैठे हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी चला रहे हैं। कश्मीर में लोकल कमांडरों का नेटवर्क ध्वस्त हो चुका है। इसकी वजह से अब पाकिस्तान में बैठ कर हमलों को प्लान कर रहे हैं। आने वाले दिनों में पाकिस्तान में बैठे कश्मीरी आतंकी पंजाब, जम्मू और श्रीनगर में बड़े हमलों को अंजाम देने की फिराक में बैठे हुए हैं। इसके लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कश्मीरी आतंकी अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर बड़े खून खराबे की फिराक में है। खुफिया एजेंसियां भी लगातार पाक में बैठे आतंकियों के संचार नेटवर्क पर नजर रख रही हैं।
व्लादिवोस्तोक Oceanarium - यह सही मायने में एक रोमांचक जगह है। इसका निश्चित रूप से एक यात्रा के लायक। यह ब्याज की एक बहुत कुछ है। Oceanarium समुद्री संग्रहालय का एक प्रकार है। यह में आप देख सकते प्रशांत महासागर, के निवासियों नदियों और समुद्र, झीलों सुदूर पूर्व, साथ ही एशियाई और अफ्रीकी पानी, और अन्य जानवरों की एक किस्म। व्लादिवोस्तोक में Oceanarium दोनों जीवित और शुष्क जोखिम मनन करना संभव है। वे एक क्षेत्र तीन प्रदर्शनी हॉल में रखा जाता है जो, अगर संयुक्त, 1500 से अधिक वर्ग मीटर के लिए राशि। एक हजार से अधिक संग्रहालय प्रदर्शन का संग्रह है प्रतियां और एक्वैरियम बोले 120 जलीय प्रजातियों, जो लगभग दो हजार प्रतियां है होते हैं। तीस टन के बारे में पानी की मात्रा के लिए बनाया गया सबसे बड़ा एक्वैरियम में से एक। जरा कल्पना क्या यह मछली या समुद्र के जानवरों रह सकते हैं। आप क्या देख सकते हैं? प्रदर्शनियों की सूची काफी महत्वपूर्ण है। हर पर्यटक जो अपेक्षाकृत कम लागत पर व्लादिवोस्तोक Oceanarium में बॉक्स ऑफिस पर पहली बार में एक टिकट खरीदा है, आंखों को देखने के लिए ही कर सकते हैंः • सुदूर पूर्व की ताजा पानी के निवासियों; पेट्रा Velikogo की खाड़ी के निवासियों •; • उष्णकटिबंधीय समुद्र की रंगीन मछली; • विचित्र निवासियों समुद्र (जापान, ओखोत्स्क) ठंडे पानी एक्वैरियम में; • एक्वैरियम मछली (सजावटी); • चित्रावली "जवानों और पक्षी कॉलोनी के रूकेरी"; • albatrosses, पेंगुइन मजेदार और शानदार कोरल रीफ के साथ biogroups; • समुद्र के गोले, स्पंज, कोरल, आदि के संग्रह को प्रदर्शित करता है। • मछलीघर में इस तरह के रूप में, उदाहरण के लिए, मगरमच्छ उभयचर शिकारियों प्रस्तुत; • और यहां तक कि लाइव तितलियों की एक सुंदर संग्रह है। व्लादिवोस्तोक में प्रदर्श Oceanarium समुद्री जानवरों की दुर्लभ प्रजातियों में शामिल हैं। यहाँ वे एक ही स्थान पर, विभिन्न देशों की यात्रा करने की कोई जरूरत उन्हें देखने के लिए कर रहे हैं। दुर्लभ प्रदर्शन खोपड़ी रहे हैं समुद्री गाय (स्टेलार), और साथ ही एक विवर्ण समुद्री ऊदबिलाव की भ्रूण। यह कहाँ है? पहले से ही उल्लेख किया है, यह व्लादिवोस्तोक Oceanarium यात्रा करने के लिए आवश्यक है। यह पता - व्लादिवोस्तोक, बैटरी स्ट्रीट, 4, जिला खेल क्वे। संस्थानों के इतिहास बहुत लंबा नहीं है। व्लादिवोस्तोक Oceanarium 1990 में बनाई गई है, जो है, यह एक अपेक्षाकृत युवा इकाई है। और इसकी डिजाइन 1987 में शुरू किया। क्रिएटिव टीम इस परियोजना, जिसके बाद यह लागू किया गया था और इस परियोजना "Primorgrazhdanproekt" संस्थान पर काम शुरू कर दिया। इमारत के निर्माण के संबंध में मार्गदर्शन वास्तुकार ए वी पर ले लिया अल्ताई, और वास्तुकला DVPI विभाग के सीधे शामिल विशेषज्ञों। तकनीकी उपकरण और स्थापना जापानी कंपनी द्वारा किया गया था "Nitiren निगम। " बारहवीं जुलाई 1991 - मछुआरे की दिन - व्लादिवोस्तोक Oceanarium के पवित्र खोलने का एक दिन था। यही कारण है कि जब वह अपनी पहली आगंतुकों का स्वागत किया है। व्लादिवोस्तोक के शहर के प्रमुख, आठ साल बाद, 1999 में, Oceanarium की गतिविधियों का संचालन करने, कंपनी "Aquaworld" स्थापित किया गया था। इस मछलीघर आकर्षक उपस्थिति हासिल कर ली है, अविकसित क्षेत्र पास में है और नियमित रूप से अपडेट प्रदर्शनी थी। यह posetitelley आकर्षित करती है, बार-बार मजबूर कर मछलीघर यात्रा करने के लिए, पानी के भीतर दुनिया की असामान्य सुंदरता देखते हैं। MUP "Aquaworld" की कड़ी मेहनत के लिए धन्यवाद, लगातार विस्तारित और अद्यतन मछलीघर का संग्रह। फरवरी से मार्च तक एक्सपोज़र के 2002 पुनर्निर्माण हो गई। एक नया। यह उष्णकटिबंधीय पानी के रहने वाले निवासियों प्रस्तुत करता है। 2010 (मई में) में, मुखौटा अद्यतन किया गया है। इन परिवर्तनों को मछलीघर सबसे सुंदर में से एक बना दिया है व्लादिवोस्तोक के स्थलों। छह महीने बाद, निर्माण और अधिक आधुनिक और सौंदर्य उपस्थिति बन गया है। यही कारण है कि प्रसिद्ध मछलीघर की पूरी कहानी है। सुंदर छोटे, मुझे कहना पड़ेगा। तिथि करने के लिए, मछलीघर शहर है, जो ब्याज के साथ वयस्कों और बच्चों, आगंतुकों, पर्यटकों और शहर में ही के निवासियों ने दौरा के मुख्य आकर्षणों में से एक है। उन्होंने कहा कि हर दिन के काम करता है। सुबह में दस बजे से - यह अपने दरवाजे आगंतुकों व्लादिवोस्तोक Oceanarium सोमवार को ग्यारह से सुबह में, मंगलवार से रविवार तक खुलता है। आगंतुकों के लिए एक बंद व्लादिवोस्तोक Oceanarium शाम को छह बजे के बाद। मछलीघर के लिए टिकट के लिए कीमतों में काफी स्वीकार्य है और नागरिकों के विभिन्न श्रेणियों के लिए उनके मतभेद हैं। कई लोगों के लिए, जाहिर है, लाभ प्रदान किया। • ताकि बच्चों के तहत पांच साल पुराने विकलांग और महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध भागीदार है, साथ ही सैन्य मछलीघर के लिए निः शुल्क उपयोग प्रदान की; • 6 से 14 साल के बच्चों व्लादिवोस्तोक Oceanarium में टिकट पर पारित कर सकते हैं, उसे दे रही डेढ़ सौ रूबल; • वयस्कों के लिए प्रवेश की कीमत 250 रूबल है, इस राशि टिकट की उच्चतम कीमत है, यह है कि आप सहमत होंगे, काफी सस्ती है। इस प्रकार, व्लादिवोस्तोक मछलीघर निश्चित रूप से लायक का दौरा। कई अलग अलग प्रदर्शन, सनकी मछली, छोटी से विशाल कर रहे हैं। वहाँ भी दूर कमचटका और छोटे से अजीब केकड़ों की एक किस्म है समुद्री घोड़े, प्रशांत महासागर से एक दिलचस्प और ऑक्टोपस के समक्ष प्रस्तुत किया। वैसे, सभी ऑक्टोपस withe अंधा ऐसे कुत्तों और बिल्लियों के रूप में रंग, रूप में अच्छी तरह, और कुछ पालतू जानवर, भेद नहीं कर सकते। और फिर भी वे लगता है, लेकिन उनके स्पर्श से अच्छी तरह से विकसित भावना नहीं सुना है। मछलीघर जाने से, सुखद अनुभवों और सकारात्मक भावनाओं का एक बहुत कुछ मिलता है। व्लादिवोस्तोक में आ रहा है, तो आप निश्चित रूप से समुद्री जीवन के इस अद्भुत दुनिया की यात्रा करनी चाहिए। यह ध्यान देने योग्य है कि वहाँ का आदेश दिया और निर्देशित पर्यटन जा सकता है। बिल्डर सहर्ष मछलीघर के सभी निवासियों के बारे में बताना। बस व्लादिवोस्तोक Oceanarium (व्लादिवोस्तोक), एक तस्वीर जिसमें से लेख में प्रस्तुत किया है में एक दौरे के आदेश। नहीं चित्र में मछली को देखें, और अपनी आंखों से देखने के लिए।
व्लादिवोस्तोक Oceanarium - यह सही मायने में एक रोमांचक जगह है। इसका निश्चित रूप से एक यात्रा के लायक। यह ब्याज की एक बहुत कुछ है। Oceanarium समुद्री संग्रहालय का एक प्रकार है। यह में आप देख सकते प्रशांत महासागर, के निवासियों नदियों और समुद्र, झीलों सुदूर पूर्व, साथ ही एशियाई और अफ्रीकी पानी, और अन्य जानवरों की एक किस्म। व्लादिवोस्तोक में Oceanarium दोनों जीवित और शुष्क जोखिम मनन करना संभव है। वे एक क्षेत्र तीन प्रदर्शनी हॉल में रखा जाता है जो, अगर संयुक्त, एक हज़ार पाँच सौ से अधिक वर्ग मीटर के लिए राशि। एक हजार से अधिक संग्रहालय प्रदर्शन का संग्रह है प्रतियां और एक्वैरियम बोले एक सौ बीस जलीय प्रजातियों, जो लगभग दो हजार प्रतियां है होते हैं। तीस टन के बारे में पानी की मात्रा के लिए बनाया गया सबसे बड़ा एक्वैरियम में से एक। जरा कल्पना क्या यह मछली या समुद्र के जानवरों रह सकते हैं। आप क्या देख सकते हैं? प्रदर्शनियों की सूची काफी महत्वपूर्ण है। हर पर्यटक जो अपेक्षाकृत कम लागत पर व्लादिवोस्तोक Oceanarium में बॉक्स ऑफिस पर पहली बार में एक टिकट खरीदा है, आंखों को देखने के लिए ही कर सकते हैंः • सुदूर पूर्व की ताजा पानी के निवासियों; पेट्रा Velikogo की खाड़ी के निवासियों •; • उष्णकटिबंधीय समुद्र की रंगीन मछली; • विचित्र निवासियों समुद्र ठंडे पानी एक्वैरियम में; • एक्वैरियम मछली ; • चित्रावली "जवानों और पक्षी कॉलोनी के रूकेरी"; • albatrosses, पेंगुइन मजेदार और शानदार कोरल रीफ के साथ biogroups; • समुद्र के गोले, स्पंज, कोरल, आदि के संग्रह को प्रदर्शित करता है। • मछलीघर में इस तरह के रूप में, उदाहरण के लिए, मगरमच्छ उभयचर शिकारियों प्रस्तुत; • और यहां तक कि लाइव तितलियों की एक सुंदर संग्रह है। व्लादिवोस्तोक में प्रदर्श Oceanarium समुद्री जानवरों की दुर्लभ प्रजातियों में शामिल हैं। यहाँ वे एक ही स्थान पर, विभिन्न देशों की यात्रा करने की कोई जरूरत उन्हें देखने के लिए कर रहे हैं। दुर्लभ प्रदर्शन खोपड़ी रहे हैं समुद्री गाय , और साथ ही एक विवर्ण समुद्री ऊदबिलाव की भ्रूण। यह कहाँ है? पहले से ही उल्लेख किया है, यह व्लादिवोस्तोक Oceanarium यात्रा करने के लिए आवश्यक है। यह पता - व्लादिवोस्तोक, बैटरी स्ट्रीट, चार, जिला खेल क्वे। संस्थानों के इतिहास बहुत लंबा नहीं है। व्लादिवोस्तोक Oceanarium एक हज़ार नौ सौ नब्बे में बनाई गई है, जो है, यह एक अपेक्षाकृत युवा इकाई है। और इसकी डिजाइन एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में शुरू किया। क्रिएटिव टीम इस परियोजना, जिसके बाद यह लागू किया गया था और इस परियोजना "Primorgrazhdanproekt" संस्थान पर काम शुरू कर दिया। इमारत के निर्माण के संबंध में मार्गदर्शन वास्तुकार ए वी पर ले लिया अल्ताई, और वास्तुकला DVPI विभाग के सीधे शामिल विशेषज्ञों। तकनीकी उपकरण और स्थापना जापानी कंपनी द्वारा किया गया था "Nitiren निगम। " बारहवीं जुलाई एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे - मछुआरे की दिन - व्लादिवोस्तोक Oceanarium के पवित्र खोलने का एक दिन था। यही कारण है कि जब वह अपनी पहली आगंतुकों का स्वागत किया है। व्लादिवोस्तोक के शहर के प्रमुख, आठ साल बाद, एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में, Oceanarium की गतिविधियों का संचालन करने, कंपनी "Aquaworld" स्थापित किया गया था। इस मछलीघर आकर्षक उपस्थिति हासिल कर ली है, अविकसित क्षेत्र पास में है और नियमित रूप से अपडेट प्रदर्शनी थी। यह posetitelley आकर्षित करती है, बार-बार मजबूर कर मछलीघर यात्रा करने के लिए, पानी के भीतर दुनिया की असामान्य सुंदरता देखते हैं। MUP "Aquaworld" की कड़ी मेहनत के लिए धन्यवाद, लगातार विस्तारित और अद्यतन मछलीघर का संग्रह। फरवरी से मार्च तक एक्सपोज़र के दो हज़ार दो पुनर्निर्माण हो गई। एक नया। यह उष्णकटिबंधीय पानी के रहने वाले निवासियों प्रस्तुत करता है। दो हज़ार दस में, मुखौटा अद्यतन किया गया है। इन परिवर्तनों को मछलीघर सबसे सुंदर में से एक बना दिया है व्लादिवोस्तोक के स्थलों। छह महीने बाद, निर्माण और अधिक आधुनिक और सौंदर्य उपस्थिति बन गया है। यही कारण है कि प्रसिद्ध मछलीघर की पूरी कहानी है। सुंदर छोटे, मुझे कहना पड़ेगा। तिथि करने के लिए, मछलीघर शहर है, जो ब्याज के साथ वयस्कों और बच्चों, आगंतुकों, पर्यटकों और शहर में ही के निवासियों ने दौरा के मुख्य आकर्षणों में से एक है। उन्होंने कहा कि हर दिन के काम करता है। सुबह में दस बजे से - यह अपने दरवाजे आगंतुकों व्लादिवोस्तोक Oceanarium सोमवार को ग्यारह से सुबह में, मंगलवार से रविवार तक खुलता है। आगंतुकों के लिए एक बंद व्लादिवोस्तोक Oceanarium शाम को छह बजे के बाद। मछलीघर के लिए टिकट के लिए कीमतों में काफी स्वीकार्य है और नागरिकों के विभिन्न श्रेणियों के लिए उनके मतभेद हैं। कई लोगों के लिए, जाहिर है, लाभ प्रदान किया। • ताकि बच्चों के तहत पांच साल पुराने विकलांग और महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध भागीदार है, साथ ही सैन्य मछलीघर के लिए निः शुल्क उपयोग प्रदान की; • छः से चौदह साल के बच्चों व्लादिवोस्तोक Oceanarium में टिकट पर पारित कर सकते हैं, उसे दे रही डेढ़ सौ रूबल; • वयस्कों के लिए प्रवेश की कीमत दो सौ पचास रूबल है, इस राशि टिकट की उच्चतम कीमत है, यह है कि आप सहमत होंगे, काफी सस्ती है। इस प्रकार, व्लादिवोस्तोक मछलीघर निश्चित रूप से लायक का दौरा। कई अलग अलग प्रदर्शन, सनकी मछली, छोटी से विशाल कर रहे हैं। वहाँ भी दूर कमचटका और छोटे से अजीब केकड़ों की एक किस्म है समुद्री घोड़े, प्रशांत महासागर से एक दिलचस्प और ऑक्टोपस के समक्ष प्रस्तुत किया। वैसे, सभी ऑक्टोपस withe अंधा ऐसे कुत्तों और बिल्लियों के रूप में रंग, रूप में अच्छी तरह, और कुछ पालतू जानवर, भेद नहीं कर सकते। और फिर भी वे लगता है, लेकिन उनके स्पर्श से अच्छी तरह से विकसित भावना नहीं सुना है। मछलीघर जाने से, सुखद अनुभवों और सकारात्मक भावनाओं का एक बहुत कुछ मिलता है। व्लादिवोस्तोक में आ रहा है, तो आप निश्चित रूप से समुद्री जीवन के इस अद्भुत दुनिया की यात्रा करनी चाहिए। यह ध्यान देने योग्य है कि वहाँ का आदेश दिया और निर्देशित पर्यटन जा सकता है। बिल्डर सहर्ष मछलीघर के सभी निवासियों के बारे में बताना। बस व्लादिवोस्तोक Oceanarium , एक तस्वीर जिसमें से लेख में प्रस्तुत किया है में एक दौरे के आदेश। नहीं चित्र में मछली को देखें, और अपनी आंखों से देखने के लिए।
एक मैच में सबसे ज्यादा चौके लगाने वाले 5 बल्लेबाज, जानें सभी का नाम। 1 . रोहित शर्माः एक मैच में सबसे ज्यादा चौके लगाने का रिकॉड भारत के रोहित शर्मा के नाम हैं। इन्होने साल 2014 में श्रीलंका के खिलाफ एक मैच में कुल 33 चौंके लगाए थे। 2 . सचिन तेंदुलकरः इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर सचिन तेंदुलकर का नाम हैं। इन्होने साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध एक मैच में 25 चौके लगाए थे। 3 . वीरेंद्र सहवागः एक वनडे मैच में सबसे ज्यादा चौंके लगाने वालों की लिस्ट में वीरेंद्र सहवाग तीसरे नंबर पर हैं। इन्होने साल 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ एक मैच में 25 चौके मारे थें। 4 . सनथ जयसूर्याः इस लिस्ट में श्रीलंका सनथ जयसूर्या चौथे नंबर पर हैं। इन्होने साल 2006 में नीदरलैंड के खिलाफ 24 चौंके लगाए थे। 5 . मार्टिन गुप्टिल : न्यूजीलैंड के मार्टिन गुप्टिल ने साल 2015 में वेस्टइंडीज के खिलाफ एक मैच में 24 चौके लगाए थे। इस लिस्ट में ये पांचवे नंबर पर हैं।
एक मैच में सबसे ज्यादा चौके लगाने वाले पाँच बल्लेबाज, जानें सभी का नाम। एक . रोहित शर्माः एक मैच में सबसे ज्यादा चौके लगाने का रिकॉड भारत के रोहित शर्मा के नाम हैं। इन्होने साल दो हज़ार चौदह में श्रीलंका के खिलाफ एक मैच में कुल तैंतीस चौंके लगाए थे। दो . सचिन तेंदुलकरः इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर सचिन तेंदुलकर का नाम हैं। इन्होने साल दो हज़ार दस में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध एक मैच में पच्चीस चौके लगाए थे। तीन . वीरेंद्र सहवागः एक वनडे मैच में सबसे ज्यादा चौंके लगाने वालों की लिस्ट में वीरेंद्र सहवाग तीसरे नंबर पर हैं। इन्होने साल दो हज़ार ग्यारह में वेस्टइंडीज के खिलाफ एक मैच में पच्चीस चौके मारे थें। चार . सनथ जयसूर्याः इस लिस्ट में श्रीलंका सनथ जयसूर्या चौथे नंबर पर हैं। इन्होने साल दो हज़ार छः में नीदरलैंड के खिलाफ चौबीस चौंके लगाए थे। पाँच . मार्टिन गुप्टिल : न्यूजीलैंड के मार्टिन गुप्टिल ने साल दो हज़ार पंद्रह में वेस्टइंडीज के खिलाफ एक मैच में चौबीस चौके लगाए थे। इस लिस्ट में ये पांचवे नंबर पर हैं।
मेक्सिको सिटी। अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी मंत्री जॉन केली ने अवैध आव्रजन और नशीले पदार्थो की तस्करी रोकने के अपने प्रयासों को मेक्सिको के साथ साझा किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार केली ने मेक्सिको के आंतरिक मामलों के मंत्री मिग्युएल एंजेल ओसोरियो के साथ शुक्रवार को संवाददाताओं को जारी संयुक्त बयान में कहा, हम नशीले पदार्थो की तस्करी रोकने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। हमारा विशेष जोर हेरोइन, कोकेन और फेंटानिल पर है, क्योंकि इससे दोनों देशों के लोगों की मौत होती है। बीते बुधवार को मेक्सिको पहुंचे अमेरिकी अधिकारी ने कहा, मैं अपने समकक्ष के समक्ष स्वीकार करता हूं कि नशीले पदार्थो के कारण ही दोनों देशों की सीमा पर संकट है। अमेरिका के होमलैंड सुरक्षा मंत्री ने आव्रजन के मुद्दे पर कहा कि दोनों देशों ने लोगों और सामान को वैध तरीके से सीमा पार कराने के लिए हाथ मिलाया है।
मेक्सिको सिटी। अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी मंत्री जॉन केली ने अवैध आव्रजन और नशीले पदार्थो की तस्करी रोकने के अपने प्रयासों को मेक्सिको के साथ साझा किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार केली ने मेक्सिको के आंतरिक मामलों के मंत्री मिग्युएल एंजेल ओसोरियो के साथ शुक्रवार को संवाददाताओं को जारी संयुक्त बयान में कहा, हम नशीले पदार्थो की तस्करी रोकने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। हमारा विशेष जोर हेरोइन, कोकेन और फेंटानिल पर है, क्योंकि इससे दोनों देशों के लोगों की मौत होती है। बीते बुधवार को मेक्सिको पहुंचे अमेरिकी अधिकारी ने कहा, मैं अपने समकक्ष के समक्ष स्वीकार करता हूं कि नशीले पदार्थो के कारण ही दोनों देशों की सीमा पर संकट है। अमेरिका के होमलैंड सुरक्षा मंत्री ने आव्रजन के मुद्दे पर कहा कि दोनों देशों ने लोगों और सामान को वैध तरीके से सीमा पार कराने के लिए हाथ मिलाया है।
धनराज शौर्य कराएंगे सिलगढ़ पट्टी की सैर,जल्द होगा गीत रिलीज़। Shahrukh Khan के नए सॉन्ग पर झूमते हुए नजर आए अबराम,आप भी देखें वीडियो। झुमकी गीत नृत्य प्रतियोगिता का रिजल्ट घोषित,जानिए कौन रहा विजेता। दिल की राजुला रिलीज,हर्ष मोहन,सीमा पंगरियाल की जुगलबंदी को दर्शकों ने किया पसंद। नीरज डबराल नया अंदाज आया सामने, सूरज बंदवाल के स्वरों में आशिक2 गीत रिलीज। रूमाती की क्यूटनेस ने लूटा दर्शकों का चैन,वीडियो हो रहा वायरल। उत्तराखंड की मीनू ने बढ़ाया प्रदेश का मान, जीता मिसेज एशिया अमेरिका का खिताब।
धनराज शौर्य कराएंगे सिलगढ़ पट्टी की सैर,जल्द होगा गीत रिलीज़। Shahrukh Khan के नए सॉन्ग पर झूमते हुए नजर आए अबराम,आप भी देखें वीडियो। झुमकी गीत नृत्य प्रतियोगिता का रिजल्ट घोषित,जानिए कौन रहा विजेता। दिल की राजुला रिलीज,हर्ष मोहन,सीमा पंगरियाल की जुगलबंदी को दर्शकों ने किया पसंद। नीरज डबराल नया अंदाज आया सामने, सूरज बंदवाल के स्वरों में आशिकदो गीत रिलीज। रूमाती की क्यूटनेस ने लूटा दर्शकों का चैन,वीडियो हो रहा वायरल। उत्तराखंड की मीनू ने बढ़ाया प्रदेश का मान, जीता मिसेज एशिया अमेरिका का खिताब।
मौत के पहले सोनिया गांधी से नरसिम्हा राव ने कहा था , तुम लोग मुझ पर मस्जिद तुड़वाने का. . देश में आर्थिक सुधारों का बड़ा श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव (Former Prime Minister PV Narsimha Rao) को दिया जाता है। जी हां उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐतिहासिक फैसले किए, ताकि देश गरीबी से बाहर आ सके। बता दें कि वो ऐसा दौर था, जब देश को अपना सोना तक विदेशों में गिरवी रखना पड़ा था। इसके बाद राव ने देसी बाजार को खोल दिया था, जो उस दौर में तो आलोचना का शिकार हुआ, लेकिन आज जिसकी बदौलत हम दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हैं। मालूम हो कि नरसिम्हा राव देश के एकमात्र ऐसे पीएम थे। जो काफी भूचालों के बाद इस पद पर पहुँचें थे। यह बात वर्ष 1991 की है। जब मई महीनें में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौत हो गई थी। जिसके बाद पीएम पद पर कौन बैठे, इसे लेकर काफी झमेला हुआ था। बाद में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के कहने पर राव को सत्ता मिली। हालांकि ये दौर सत्ता सुख भोगने का नहीं, बल्कि कई सारी चुनौतियों से भरा हुआ था। नरसिम्हा राव एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे। जिन्हें 17 भाषाओं का ज्ञान था। आज हम इसी नेता से जुड़ी एक ऐसी कहानी आपको बताने जा रहें। जिसके बारें में अधिकतर लोगों को पता नहीं। जी हां यह बात उस दौरान की है। जब नरसिम्हा राव काफ़ी बीमार चल रहे थे। लोगों का उनसे मिलने के लिए आना-जाना लगातार जारी था। इसी बीच एक दिन सोनिया गांधी के अस्पताल में आने की सूचना होती है। बता दें कि राव परिवार को गृह मंत्री शिवराज पाटिल का फोन आता है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी विजिट करना चाहती हैं। राव यहीं नहीं रुके वह बीमार होने के कारण रुक-रुककर बोलते रहे। उन्होंने कहा कि, "किससे गलतियां नहीं होती हैं। मगर मुझे ऐसी गलती के लिए जिम्मेदार क्यों ठहराया जा रहा है जो मैंने की ही नहीं? " सोनिया, शिवराज पाटिल और अहमद पटेल चुपचाप उनकी बात सुनते रहें और रात के क़रीब ढाई बजे वे तीनों अस्पताल से रवाना हो गए। फिर राव को नींद का इंजेक्शन दिया गया और वह अगली सुबह उठे तो बस एक बात बोले, कल रात मैं कुछ ज्यादा तो नहीं बोल गया। वहीं इसी बीच 10 दिसंबर 2004 को नरसिम्हा राव की तबीयत और भी ज्यादा खराब हो गई। जिसके बाद अब गए कि तब गए वाली हालत बताई जाने लगी। ऐसे में सोनिया गांधी का एक सहयोगी एम्स पहुंचा। घरवालों से पूछने के लिए कि अंतिम संस्कार कहां करवाना चाहेंगे? इतने में परिवार वाले बिफर गए और बोले, अभी राव जिंदा हैं। इसी के कुछ दिन बाद यानी 23 दिसंबर 2004 को उनका निधन हो गया, लेकिन उन्हें इस बात का जवाब नहीं मिला, कि आख़िर उन्हें बाबरी मस्ज़िद ढहाने का दोषी क्यों बनाया जाता रहा। जिसका ज़िक्र उन्होंने सोनिया गांधी से हुई अपनी आख़िर मुलाकात में भी किया था। इतना ही नही सोनिया गांधी ने कभी देश के लिए बड़े बड़े सुधार करने वाले प्रधानमंत्री को तवज्जो नही दिया। जिसका जिक्र कांग्रेस नेता केवी थॉमस ने अपनी किताब में भी किया है। 'सोनिया- द बीलव्ड ऑफ द मासेज' नाम की किताब में थॉमस ने लिखा है कि, " सोनिया और राव के बीच रिश्ते नॉर्मल नहीं थे। यहां तक कि राव ने कई बार उनसे शिकायत की थी कि सोनिया उनका अपमान करती हैं। कई बार 10 जनपथ में बुलाकर राव को काफी लंबा इंतजार करवाया जाता था। " कुछ भी हो भले किसी भी कारण से सोनिया और कांग्रेस पार्टी नरसिम्हा राव को अदब से याद न करती हो, लेकिन देश के लिए उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। यह बात तो तय है।
मौत के पहले सोनिया गांधी से नरसिम्हा राव ने कहा था , तुम लोग मुझ पर मस्जिद तुड़वाने का. . देश में आर्थिक सुधारों का बड़ा श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को दिया जाता है। जी हां उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐतिहासिक फैसले किए, ताकि देश गरीबी से बाहर आ सके। बता दें कि वो ऐसा दौर था, जब देश को अपना सोना तक विदेशों में गिरवी रखना पड़ा था। इसके बाद राव ने देसी बाजार को खोल दिया था, जो उस दौर में तो आलोचना का शिकार हुआ, लेकिन आज जिसकी बदौलत हम दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हैं। मालूम हो कि नरसिम्हा राव देश के एकमात्र ऐसे पीएम थे। जो काफी भूचालों के बाद इस पद पर पहुँचें थे। यह बात वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे की है। जब मई महीनें में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौत हो गई थी। जिसके बाद पीएम पद पर कौन बैठे, इसे लेकर काफी झमेला हुआ था। बाद में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के कहने पर राव को सत्ता मिली। हालांकि ये दौर सत्ता सुख भोगने का नहीं, बल्कि कई सारी चुनौतियों से भरा हुआ था। नरसिम्हा राव एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे। जिन्हें सत्रह भाषाओं का ज्ञान था। आज हम इसी नेता से जुड़ी एक ऐसी कहानी आपको बताने जा रहें। जिसके बारें में अधिकतर लोगों को पता नहीं। जी हां यह बात उस दौरान की है। जब नरसिम्हा राव काफ़ी बीमार चल रहे थे। लोगों का उनसे मिलने के लिए आना-जाना लगातार जारी था। इसी बीच एक दिन सोनिया गांधी के अस्पताल में आने की सूचना होती है। बता दें कि राव परिवार को गृह मंत्री शिवराज पाटिल का फोन आता है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी विजिट करना चाहती हैं। राव यहीं नहीं रुके वह बीमार होने के कारण रुक-रुककर बोलते रहे। उन्होंने कहा कि, "किससे गलतियां नहीं होती हैं। मगर मुझे ऐसी गलती के लिए जिम्मेदार क्यों ठहराया जा रहा है जो मैंने की ही नहीं? " सोनिया, शिवराज पाटिल और अहमद पटेल चुपचाप उनकी बात सुनते रहें और रात के क़रीब ढाई बजे वे तीनों अस्पताल से रवाना हो गए। फिर राव को नींद का इंजेक्शन दिया गया और वह अगली सुबह उठे तो बस एक बात बोले, कल रात मैं कुछ ज्यादा तो नहीं बोल गया। वहीं इसी बीच दस दिसंबर दो हज़ार चार को नरसिम्हा राव की तबीयत और भी ज्यादा खराब हो गई। जिसके बाद अब गए कि तब गए वाली हालत बताई जाने लगी। ऐसे में सोनिया गांधी का एक सहयोगी एम्स पहुंचा। घरवालों से पूछने के लिए कि अंतिम संस्कार कहां करवाना चाहेंगे? इतने में परिवार वाले बिफर गए और बोले, अभी राव जिंदा हैं। इसी के कुछ दिन बाद यानी तेईस दिसंबर दो हज़ार चार को उनका निधन हो गया, लेकिन उन्हें इस बात का जवाब नहीं मिला, कि आख़िर उन्हें बाबरी मस्ज़िद ढहाने का दोषी क्यों बनाया जाता रहा। जिसका ज़िक्र उन्होंने सोनिया गांधी से हुई अपनी आख़िर मुलाकात में भी किया था। इतना ही नही सोनिया गांधी ने कभी देश के लिए बड़े बड़े सुधार करने वाले प्रधानमंत्री को तवज्जो नही दिया। जिसका जिक्र कांग्रेस नेता केवी थॉमस ने अपनी किताब में भी किया है। 'सोनिया- द बीलव्ड ऑफ द मासेज' नाम की किताब में थॉमस ने लिखा है कि, " सोनिया और राव के बीच रिश्ते नॉर्मल नहीं थे। यहां तक कि राव ने कई बार उनसे शिकायत की थी कि सोनिया उनका अपमान करती हैं। कई बार दस जनपथ में बुलाकर राव को काफी लंबा इंतजार करवाया जाता था। " कुछ भी हो भले किसी भी कारण से सोनिया और कांग्रेस पार्टी नरसिम्हा राव को अदब से याद न करती हो, लेकिन देश के लिए उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। यह बात तो तय है।
असम एक बेहद ही खूबसूरत जगह है। वहां की प्राकृतिक सौंदर्य और विभिन्न संस्कृतियां देखने लायक होती है। प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ बिहू नाम का त्योहार भी असम का गौरव है। यह पर्व 15 अप्रैल को होता है और असम वाले बहुत धूम-धाम से इस पर्व को सेलिब्रेट करते हैं। लगभग सात दिनों तक यह पर्व मनाया जाता है और अलग-अलग रीति-रिवाज से लोग इसे मनाते हैं। यह बहुत ही रंगीन पर्व है और इसलिए असम के लोग रंगीन कपड़े पहनकर झुंड बनाकर डांस करते हैं। इस त्योहार की खुशी को अपनों के साथ बांटने के लिए आप कोट्स, इमेजेज और स्टेटस का इस्तेमाल कर सकते हैं। It's time to welcome the colors of spring and enjoy the festivities that Bihu brings. Let us look forward to a year filled with peace, prosperity, joy and satisfaction. नया सवेरा नयी किरण के साथ, नया दिन एक प्यारी सी मुस्कान के साथ, आपको नया साल मुबारक हो, ढेर सारी दुआओं के साथ। । Let this Bihu give you the strength to do all that you wanted to do last year but couldn't accomplish. Another Bihu is here. Let us banish our worries and mistakes and start afresh. पल पल से बनता है एहसास, एहसास से बनता है विश्वास, विश्वास से बनते है रिश्ते, और रिश्तों से बनता है कोई खास, जैसे कि आप, मुबारक हो आपको ये माघ का मास। । पल पल से बनता है एहसास, एहसास से बनता है विश्वास, विश्वास से बनते है रिश्ते, और रिश्तों से बनता है कोई खास, जैसे कि आप, मुबारक हो आपको ये माघ का मास।
असम एक बेहद ही खूबसूरत जगह है। वहां की प्राकृतिक सौंदर्य और विभिन्न संस्कृतियां देखने लायक होती है। प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ बिहू नाम का त्योहार भी असम का गौरव है। यह पर्व पंद्रह अप्रैल को होता है और असम वाले बहुत धूम-धाम से इस पर्व को सेलिब्रेट करते हैं। लगभग सात दिनों तक यह पर्व मनाया जाता है और अलग-अलग रीति-रिवाज से लोग इसे मनाते हैं। यह बहुत ही रंगीन पर्व है और इसलिए असम के लोग रंगीन कपड़े पहनकर झुंड बनाकर डांस करते हैं। इस त्योहार की खुशी को अपनों के साथ बांटने के लिए आप कोट्स, इमेजेज और स्टेटस का इस्तेमाल कर सकते हैं। It's time to welcome the colors of spring and enjoy the festivities that Bihu brings. Let us look forward to a year filled with peace, prosperity, joy and satisfaction. नया सवेरा नयी किरण के साथ, नया दिन एक प्यारी सी मुस्कान के साथ, आपको नया साल मुबारक हो, ढेर सारी दुआओं के साथ। । Let this Bihu give you the strength to do all that you wanted to do last year but couldn't accomplish. Another Bihu is here. Let us banish our worries and mistakes and start afresh. पल पल से बनता है एहसास, एहसास से बनता है विश्वास, विश्वास से बनते है रिश्ते, और रिश्तों से बनता है कोई खास, जैसे कि आप, मुबारक हो आपको ये माघ का मास। । पल पल से बनता है एहसास, एहसास से बनता है विश्वास, विश्वास से बनते है रिश्ते, और रिश्तों से बनता है कोई खास, जैसे कि आप, मुबारक हो आपको ये माघ का मास।
पटना, 30 नवंबर विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन आज राज्य विधान परिषद पोर्टिको में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने पत्रकारों को धक्का दिया और वहां से निकालना शुरू कर दिया। दरअसल 12:00 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने के पूर्व विपक्ष पोर्टिको में प्रदर्शन कर रहा था, जिसका नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी कर रही थी। पत्रकार प्रदर्शन के कवरेज के लिए पहुंचे थे लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने सभी को सदन पोर्टिको से धक्का देकर निकालना शुरू कर दिया। घटना में कुछ पत्रकारों को चोट भी आयी है । कुछ पत्रकारों का कैमरा और मोबाइल भी टूट गया। इससे नाराज होकर पत्रकार वहीं धरने पर बैठ गये । पत्रकारों का कहना है कि वे विपक्ष के नेताओं की प्रतिक्रिया ले रहे थे लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी करनी शुरू कर दी। पत्रकारों का कहना है कि विधान परिषद में समाचार संकलन को लेकर कोई सिस्टम नहीं होने की वजह से अक्सर यह स्थिति उत्पन्न होती है । उल्लेखनीय है कि विपक्ष के नेता सदन पोर्टिको में प्रदर्शन करते हैं, वह बाहर नहीं आते। इसलिए पत्रकारों को ही पोर्टिको के पास जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में सुरक्षाकर्मी उनके साथ धक्का-मुक्की करते हैं। पत्रकारों का कहना है कि इस समस्या का समाधान अध्यक्ष को निकालना चाहिए । देश के चौथे स्तम्भ का अपमान नहीं सहा जायेगा ।
पटना, तीस नवंबर विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन आज राज्य विधान परिषद पोर्टिको में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने पत्रकारों को धक्का दिया और वहां से निकालना शुरू कर दिया। दरअसल बारह:शून्य बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने के पूर्व विपक्ष पोर्टिको में प्रदर्शन कर रहा था, जिसका नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी कर रही थी। पत्रकार प्रदर्शन के कवरेज के लिए पहुंचे थे लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने सभी को सदन पोर्टिको से धक्का देकर निकालना शुरू कर दिया। घटना में कुछ पत्रकारों को चोट भी आयी है । कुछ पत्रकारों का कैमरा और मोबाइल भी टूट गया। इससे नाराज होकर पत्रकार वहीं धरने पर बैठ गये । पत्रकारों का कहना है कि वे विपक्ष के नेताओं की प्रतिक्रिया ले रहे थे लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी करनी शुरू कर दी। पत्रकारों का कहना है कि विधान परिषद में समाचार संकलन को लेकर कोई सिस्टम नहीं होने की वजह से अक्सर यह स्थिति उत्पन्न होती है । उल्लेखनीय है कि विपक्ष के नेता सदन पोर्टिको में प्रदर्शन करते हैं, वह बाहर नहीं आते। इसलिए पत्रकारों को ही पोर्टिको के पास जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में सुरक्षाकर्मी उनके साथ धक्का-मुक्की करते हैं। पत्रकारों का कहना है कि इस समस्या का समाधान अध्यक्ष को निकालना चाहिए । देश के चौथे स्तम्भ का अपमान नहीं सहा जायेगा ।
दाजचर्मपर्व ] जो द्विज चारों वेदोंका अध्ययन करनेके बाद भी मोहवश पतित मनुष्योंसे दान लेता है, उसका गदहेकी योनिमें जन्म होता है ॥ ४६ ॥ खरो जोवति वर्षाणि दस पश्च व भारत । खरो मृतो बलीवदः सप्त वर्षाणि जीवति ॥४७॥ भारत ! गदहेकी योनिमें वह पंद्रह वर्षों तक जीवित रहता है । उसके बाद मरकर बैल होता है । उस योनिमें वह सात वर्षोंतक जीवित रहता है ॥ ४७ ॥ बकीवों मृतश्चापि जायते ब्रह्मराक्षसः । ब्रह्मरक्षश्च मासांस्त्रीस्ततो जायति ब्राह्मणः ॥४८॥ जब बैलका शरीर छूट जाता है, तब वह ब्रह्मराक्षस होता है। तीन मासतक ब्रह्मराक्षस रहने के बाद फिर वह ब्राह्मणका जन्म पाता है ।। ४८ ॥ पतित याजयित्वा तु कृमियोनौ प्रजायते । तत्र जीवति वर्षाणि दश पञ्च च भारत ॥४९॥ भारत ! जो ब्राह्मण पतित पुरुषका यज्ञ कराता है, वह मरनेके बाद कीड़ेकी योनिमें जन्म लेता है और उस योनिमें पंद्रह वर्मोंतक जीवित रहता है ।। ४९ ॥ कृमिभावाद् विमुक्तस्तु ततो जायति गर्दभः । गर्दभः पञ्च वर्षाणि पञ्च वर्षाणि सूकरः ॥५०॥ कुक्कुटः पञ्च वर्षाणि पञ्च वर्षाणि जम्बुकः । श्वा वर्षमेकं भवति ततो जायति मानवः ॥५१॥ कीड़ेको योनिसे छूटनेपर वह गदहेका जन्म पाता है। पाँच वर्षतक गदहा रहकर, पाँच वर्ष सूअर, पाँच वर्ष मुर्गा पाँच वर्ष सियार और एक वर्ष कुत्ता होता है। उसके बाद वह मनुष्ययोनिमें उत्पन्न होता है । ५०-५१ ॥ उपाध्यायस्य यः पापं शिष्यः कुर्यादबुद्धिमान् । स जीव इह संसारांस्त्रीनाप्नोति न संशयः ॥५२॥ प्राक् श्वा भवति राजेन्द्र ततः क्रव्यात्ततः खरः । ततः प्रेतः परिक्लिष्टः पश्चाज्जापति ब्राह्मणः ॥५३॥ जो मूर्ख शिष्य अपने अध्यापकका अपराध करता है, वह यहाँ निम्नाङ्कित तीन योनियों में जन्म ग्रहण करता है, इसमें संशय नहीं है। राजेन्द्र ! पहले तो वह कुत्ता होता है, फिर राक्षस और गदहा होता है। उसके बाद मरकर प्रेतावस्था में अनेक कष्ट भोगनेके पश्चात् ब्राह्मणका जन्म पाता है।५२-५३। मनसापि गुरोर्माय यः शिष्यो याति पापकृत् । स उप्रान् प्रति संसारानधर्मेणेह चेतसा ॥५४॥ जो पापाचारी शिष्य गुरुपत्नी के साथ समागमका विचार भी मनमें लाता है, वह अपने मानसिक पापके कारण भयंकर योनियोंमें जन्म लेता है ॥ ५४ ।। भ्ययोनौ तु स सम्भूतस्त्रीणि वर्षाणि जीवति । तत्रापि निधनं प्राप्तः कृमियोनौ प्रजायते ॥५५॥ कृमिभावमनुप्राप्तो वर्षमेकं तु जीवति । ततस्तु निधनं प्राप्तो ब्रह्मयोनौ प्रज्जायते ॥५६॥ पहले कुत्तेकी योनिमें जन्म लेकर वह तीन वर्षतक जीवन धारण करता है। उस योनिमें मृत्युको प्राप्त होकर वह कीड़ेकी योनि में उत्पन्न होता है। कीटयोनिमें जन्म लेकर वह एक वर्षतक जीवित रहता है। फर मरनेके बाद उसका ब्राह्मण-योनिमें जन्म होता है ॥ ५५-५६ ॥ यदि पुत्रसमं शिष्यं गुरुर्हन्यादकारणे । आत्मनः कामकारेण सोऽपि हिंस्र प्रजायते ॥५७॥ यदि गुरु अपने पुत्रके समान शिष्यको बिना कारण के ही मारता-पीटता है तो वह अपनी स्वेच्छाचारिता के कारण हिंसक पशुकी योनिमें जन्म लेता है ।। ५७ ।। पितरं मातरं चैव यस्तु पुत्रोऽवमन्यते । सोऽपि राजन् मृतो जन्तुः पूर्व जायेत गर्दभः ॥५८ ॥ राजन् ! जो पुत्र अपने माता-पिता का अनादर करता है, वह भी मरने के बाद पहले गदद्दा नामक प्राणी होता है॥ गर्दभत्वं तु सम्भाप्य दश वर्षाणि जीवति । संवत्सरं तुकुम्भीरस्ततो जायेत मानवः ॥ ५९॥ गदहेका शरीर पाकर वह दस वर्षोंतक जीवित रहता है । फिर एक सालतक घड़ियाल रहनेके बाद मानव-योनिमें उत्पन्न होता है ।। ५९ ॥ पुत्रस्य मातापितरौ यस्य रुष्टावभावपि । गुर्वपण्यानतः सोऽपि मृतो जायति गर्दभः ॥३०॥ जिस पुत्रके ऊपर माता और पिता दोनों ही रुष्ट होते है, वह गुरुजनोंके अनिष्टचिन्तन के कारण मृत्यु के बाद गदहा होता है । ६० ।। खरो जीवति मासांस्तु दश श्वा च चतुर्दश । बिडालः सप्तमासांस्तु ततो जायत मानवः ॥ ११ ॥ गदहेकी योनि में वह दस मासतक जीवित रहता है। उसके बाद चौदह महीनतिक कुत्ता और सात मास तक बिलाव होकर अन्तमें वह मनुष्यकी योनिमें जन्म ग्रहण करता है ।। ६१ ॥ मातापितरावाक्रश्य सारिकः सम्प्रज्ञायते । ताडयित्वा तु तावेव जायते कच्छपो नृप ॥६२।। माता-पिताको निन्दा करके अथवा उन्हें गाली देकर मनुष्य दूसरे जन्ममें मैना होता है। नरेश्वर ! जो मातापिताको मारता है, वह कछुआ होता है ॥ ६२ ॥ कच्छपो दश वर्षाणि त्रीणि वर्षाणि शल्यकः । व्यालो भूत्वा च षण्मा सांस्ततो जयति मानुषः॥६३॥ दस वर्षतक फछुआ रहनेके पश्चात् तीन वर्ष साही और छः महीनेतक सर्प होता है। उसके अनन्तर वह मनुष्यको योनिमें जन्म लेता है ॥ ६३ ॥ भर्तृपिण्ड मुपाइनन् यो राजद्विष्टानि सेवते । सोऽपि मोहसमापन्नो मृतो जायति वानरः ॥६४।। बो पुरुष राजाके टुकड़े खाकर पलता हुआ भी मोहवश उसके शत्रुओंकी सेवा करता है, वह मरनेके बाद वानर होता है । ६४ ॥ वानरो दश वर्षाणि पञ्च वर्षाणि मूषिकः । भ्वाथ भूत्वा तु षण्मासांस्ततो जायति मानुषः । ६५ ॥ दस वर्षोंतक वानर, पाँच वर्षोंतक चूहा और छः महीनोंतक कुत्ता होकर वह मनुष्यका जन्म पाता है ॥६५॥ भ्यासापहर्ता तु नरो यमस्य विषयं गतः । संसाराणां शतं गत्वा कृमियोनौ प्रजायते ॥६६॥ दूसरोंकी धरोहर हड़प लेनेबाला मनुष्य यमलोक में जाता और क्रमशः सौ योनियोंमें भ्रमण करके अन्तमें कीड़ा होता है। ६६ । तत्र जोवति वर्षाणि दश पञ्च च भारत । दुष्कृतस्य क्षयं कृत्वा ततो जायति मानुषः ॥ ६७॥ भारत ! कीड़ेकी योनिमें बह पंद्रह वर्षोंतक जीवित रहता है और अपने पापोंका क्षय करके अन्तमें मनुष्ययोनिमें जन्म लेता है ॥ ६७ ।। असूयको नरस्यापि मृतो जायति शार्ङ्गकः । विश्वासहर्ता तु नरो मीनो जायति दुर्मतिः ॥६८॥ दूसरोंके दोष ढूंढ़नेवाला मनुष्य हरिणकी योनिमें जन्म लेता है तथा जो अपनी खोटी बुद्धिके कारण किसी के साथ विश्वासघात करता है, वह मनुष्य मछली होता है ॥ ६८ ॥ भूत्वा मीनोऽष्ट वर्षाणि मृतो जायति भारत । मृगस्तु चतुरो मासांस्ततश्छागः प्रजायते ॥६९॥ भारत ! आठ वर्षौंतक मछली रहकर मरनेके बाद वह चार मासतक मृग होता है। उसके बाद बकरेकी योनिमें जन्म लेता है ।। ६९ ॥ [ मनुशासनपर्वचि महाराज ! जो पुरुष लजाका परित्याग करके अज्ञान और मोहके वशीभूत होकर धान, जौ, तिल, उड़द, कुलथी, सरसों, चना, मटर, मूँग, गेहूँ और तीसी तथा दूसरे-दूसरे अनाजोंकी चोरी करता है, वह मरनेके बाद पहले चूहा होता है ।। ७१-७२ ॥ छागस्तु निधनं प्राप्य पूर्ण संवत्सरे ततः । कीटः संजायते जन्तुस्ततो जायत मानुषः ॥७०॥ बकरा पूरे एक वर्षपर मृत्युको प्राप्त होने के पश्चात् कोड़ा होता है। उसके बाद उस जीवको मनुष्यका जन्म मिलता है । घान्यान् यवांस्तिलान् माषान् कुलत्थान सर्षपांचणान् कलापानथ मुद्गांच गोधूमानतसींस्तथा ॥७१. सस्यस्यान्यस्य हर्ता व मोहा जन्तुर चेतनः । स जायते महाराज भूषिको निरपत्रफ ॥७२॥ ततः प्रेत्य महाराज मृतो जायति सुकरः । स्करो जातमात्रस्तु रोगेण म्रियते नृप ॥७३॥ राजन् ! फिर वह चूहा मृत्युके पश्चात् सूअर होता है। नरेश्वर ! वद्द सूअर जन्म लेते ही रोगसे मर जाता है ॥७३॥ ध्वा ततो जायते मूढः कर्मणा तेन पार्थिव । भूत्वा श्वा पञ्च वर्षाणि ततो जायति मानवः ॥७४॥ पृथ्वीनाथ ! फिर उसी कर्मसे वह मूढ़ जीव कुत्ता होता है और पॉच वर्षतक कुत्ता रहकर अन्तमें मनुष्यका जन्म पाता है ।। ७४ ॥ परदाराभिमर्श तु कृत्वा जायति वै वृकः । भ्वा शृगालस्ततो गृध्रो व्यालः कङ्को बकस्तथा ॥ ७५ ॥ परस्त्री गननका पाप करके मनुष्य क्रमशः भेड़िया, कुत्ता, सियार, गीध, साँप, कङ्क और बगुला होता है ॥ ७५ ॥ भ्रातुर्भाय तु पापात्मा यो धर्षयति मोहितः । पुंस्कोकिळत्वमाप्नोति सोऽपि संवत्सरं नृप ॥७६॥ नरेश्वर ! जो पापात्मा मोहवश भाईकी स्त्री के साथ बलात्कार करता है, वह एक वर्षतक कोयलकी योनिमें पड़ा रहता है । ७६ ॥ सखिभार्या गुरोर्भाय राजभार्या तथैव च । प्रघर्षयित्वा कामाय मृतो जायति सूकरः ॥७७॥ जो कामनाको पूर्ति के लिये मित्र, गुरु और राजाको स्त्रीका सतीत्व भङ्ग करता है, वह मरने के बाद सूअर होता है। सूकरः पञ्च वर्षाणि दश वर्षाणि श्वाविधः । बिडालः पञ्च वर्षाणि दश वर्षाणि कुक्कुटः ॥७८ ॥ पिपोलिकस्तु मासांत्रोन कीटः स्यान्मासमेव तु । पतानासाद्य संसारान् कृमियोनौ प्रजायते ॥७९॥ पाँच वर्षतक सूअर रहकर दस वर्ष भेड़िया, पाँच वर्ष बिलाव, दस वर्ष मुर्गा, तीन महीने चींटी और एक महीने कीड़ेकी योनिमें रहता है। इन सभी योनियों में चक्कर लगानेके बाद वह पुनः कीड़ेकी योनिमें जन्म लेता है ॥७८-७९॥ तत्र जीवति मासांस्तु कृमियोनौ चतुर्दश । ततोऽघमंक्षयं कृत्वा पुनर्जायति मानवः ।।८०॥ उस कीट-योनिमें वह चौदह महीनोंतक जोवन धारण करता है। तदनन्तर पापचय करके वह पुनः मनुष्य-योनिमें भन्म लेता है ॥ ८० ॥ दानधमपर्व ] उपस्थिते बिवाहे तु यज्ञे दानेऽपि वा विभो । मोहात् करोति यो विष्णुं स मृतो जायते कृमिः॥८१॥ प्रभो । जो विवाह, यश अथवा दानका अवसर आनेपर मोहवश उसमें विघ्न डालता है, वह भी मरनेके बाद कीड़ा ही होता है ॥ ८१ ॥ कृमिर्जीवति वर्षाणि दश पञ्च च भारत । अधमस्य क्षयं कृत्वा ततो जयति मानवः ॥८२ ।। भारत ! वह कीट पंद्रह वर्षों तक जीवित रहता है। फिर पापका क्षय करके वह मनुष्ययोनिमें जन्म लेता है ॥ ८२ ॥ दत्त्वा तु यः कन्यां द्वितीये दातुमिच्छति । सोऽपि राजन् मृतो जन्तुः कृमियोनौ प्रजायते ।।८३।। राजन् ! जो पहले एक व्यक्तिको कन्यादान करके फिर दूसरेको उसी कन्याका दान करना चाहता है, वह भी मरनेके बाद कीड़ेकी योनिमें जन्म लेता है ।। ८३ ।। तत्र जीवति वर्षाणि त्रयोदश युधिष्ठिर । अधर्मसंक्षये युक्तस्ततो जायति मानवः ॥२४॥ युधिष्ठिर ! उस योनिमें वह तेरह वर्षों तक जीवन धारण करता है। तदनन्तर पापक्षयके पश्चात् वह पुनः मनुष्ययोनिमें उपन्न होता देवकार्यमकृत्वा तु पितृकार्यमथापि वा । मनिर्वाप्य समझनन् वै मृतो जायति वायसः ॥८५॥ जो देवकार्य अथवा पितृकार्य न करके बलिवैश्वदेव किये बिना ही अन्न ग्रहण करता है, वह मरने के बाद कौएकी योनिमें जन्म लेता है । ८५ ॥ वायसः शतवर्षाणि ततो जायति कुक्कुटः । जायते व्याळकश्चापि मासं तस्मात् तु मानुषः ॥८६॥ सौ वर्षोंतक कौए के शरीरमें रहकर वह मुर्गा होता है। उसके बाद एक मासतक सर्प रहता है । तत्पश्चात् मनुष्यका जन्म पाता है ॥ ८६ ॥ ज्येष्ठं पितृसमं चापि भ्रातरं योऽवमन्यते । सोऽपि मृत्युमुपागम्य क्रौञ्चयोनी प्रजायते ॥८७॥ बड़ा भाई पिताके समान आदरणीय है, जो उसका अपमान करता है, उसे मृत्यु के बाद क्रौञ्च पक्षीकी योनिमें चन्म लेना पड़ता है ।। ८७ ।। कोचो जीवति वर्ष तु ततो जायति धीरकः । ततो निधनमापन्नो मानुषत्वनुपाश्नुते ।।८८।। कौन होकर वह एक वर्षतक जीवित रहता है। उसके बाद चीरक जातिका पक्षी होता है और फिर मरनेके बाद मनुष्य-योनि में जन्म पाता है ॥ ८८ ॥ वृषलो ब्राह्मणीं गत्वा कमियोनौ प्रजायते । ततः सम्प्राप्य निधनं जायते सूकरः पुनः ॥ ८९४ शुद्ध-जातिका पुरुष ब्राह्मण जातिकी स्त्री के साथ समागम करके देहत्याग के पश्चात् पहले कीड़ेकी योनि में जन्म लेता है। फिर मरनेके बाद सूअर होता है ।। ८९ ।। सूकरो जातमात्रस्तु रोगेण म्रियते नृप । भ्वा ततो जायते मूढः कर्मणा तेन पार्थिव ॥९०॥ नरेश्वर ! सूअरकी योनिमें जन्म लेते ही वह रोगसे मर जाता है । पृथ्वीनाथ ! तत्पश्चात् वह मूढ़ जीव उसी पापकर्मके कारण कुत्ता होता है ॥ ९० ॥ श्वा भूत्वा कृतकर्मासौ जायते मानुषस्ततः । तत्रापत्यं समुत्पाद्य मृतो जायति मूषिकः ॥९१॥ कुत्ता होनेपर पापकर्मका भोग समाप्त करके वह मनुष्ययोनिमें जन्म लेता है। मनुष्ययोनिमें भी वह एक ही संतान पैदा करके मर जाता और शेष पापका फल भोगनेके लिये चूहा होता है । ९१ ॥ कृतघ्नस्तु मृतो राजन् यमस्य विषयं गतः । यमस्य पुरुषैः क्रुद्धैवधं प्राप्नोति दारुणम् ।।१२।। राजन् ! कृतघ्न मनुष्य मरने के बाद यमराजके लोक में जाता है। वहाँ क्रोधमें भरे हुए यमदूत उसके ऊपर बड़ो निर्दत्रताके साथ प्रहार करते हैं । ९२ ।। दण्डं समुद्गरं शूलमग्निकुम्भं च दारुणम् । असिपत्रवनं घोरवालुकं कूटशाल्मलीम् ॥९३॥ पताश्चान्याश्च वहीश्च यमस्य विषयं गतः । यातनाः प्राप्य तत्रोप्रास्ततो वध्यति भारत ॥४॥ भारत ! वह दण्ड, मुद्गर और शूलकी चोट खाकर दारुण अग्निकुम्भ ( कुम्भीपाक ), असिपत्रवन, तपी हुईं भयंकर बालू काँटोंसे भरी हुई शाल्मली आदि नरकोंमें कष्ट भोगता है । यमलोकमें पहुँचकर इन ऊपर बताये हुए तथा और भी बहुत से नरकोंकी भयंकर यातनाएँ भोगकर वह वहाँ यमदूतोंद्वारा पीटा जाता है । ९३-९४ ।। ततो हतः कृतघ्नः स तत्रोग्रैर्भरतर्षभ । संसारचक्रमासाद्य कृमियोनौ प्रजायते ॥९५॥ भरतश्रेष्ठ ! इस प्रकार निर्दयी यमदूतोंसे पीड़ित हुआ कृतघ्न पुरुष पुनः संसारचक्र में आता और कीड़ेकी योनिमें जन्म लेता है ।। ९५ ॥ कृमिर्भवति वर्षाणि दश पञ्च च भारत । ततो गर्भ समासाद्य तत्रैव म्रियते शिशुः ॥९६॥ भारत ! पंद्रह वर्षोंतक वह कीड़ेकी योनिमें रहता है। फिर गर्भमें आकर वहीं गर्भस्थ शिशुकी दशामें ही मर जाता है ।। १६ ।। ततो गर्भशतैर्जन्तुर्बहुभिः सम्प्रपद्यते । संसारांश्च बहून् गत्वा ततस्तिर्यक्षु जायते ॥९७॥ इस तरह कई सौ बार वह जीव गर्भको यन्त्रणा भोगता है। तदनन्तर बहुत बार जन्म लेने के पश्चात् वह तिर्यग्योनिमें उत्पन्न होता है ।। ९७ ॥ ततो दुःखमनुप्राप्य बहु वर्षगणानिह । अपुनर्भवसंयुकस्ततः कुर्मः प्रजायते ॥९८॥ इन योनियों में बहुत वर्षों तक दुःख भोगनेके पश्चात् वह फिर मनुष्ययोनिमें न आकर दीर्घकाल के लिये कछुआ हो जाता है । ९८ ।। दधि हत्वा बकश्चापि प्लवो मत्स्थान संस्कृतान् । चोरयित्वा तु दुर्बुद्धिर्मधु दंशः प्रजायते ॥ ९९ ।। दुर्बुद्धि मनुष्य दहीकी चोरी करके बगला होता है, कच्ची मछलियोंकी चोरी करके वह कारण्डव नामक जलपक्षी होता है और मधुका अपहरण करके वह डॉस (मच्छर ) की योनिमें जन्म लेता है ।। ९९ ।। फलं वा मूलकं हृत्वा अपूपं वा पिपीलिकाः । चोरयित्वा व निष्पावं जायते हलगोलकः ॥१००॥ फल, मूल अथवा पूएकी चोरी करनेपर मनुष्यको चींटी की योनिमें जन्म लेना पड़ता है। निष्पाव ( मटर या उड़द ) को चोरी करनेवाला इलगोलक नामवाला कीड़ा होता है ।। ००॥ पायसं बोरयित्वा तु तित्तिरित्वमवाप्नुते । हत्या पिष्टमयं पूपं कुम्भौलूकः प्रजायते ॥१०१॥ खीरकी चोरी करनेवाला तीतरकी योनिमें जन्म लेता है। आटेका पूआ चुराकर मनुष्य मरने के बाद उल्लू होता है ।। १०१ ।। अयो हृत्वा तु दुर्बुद्धिर्वायसो जायते नरः । कांस्यं हृत्वा तु दुर्बुद्धिरितो जायते नरः ॥१०२॥ लोहेकी चोरी करनेवाला मूर्ख मानव कौवा होता है। काँसकी चोरी करके खोटी बुद्धिवाला मनुष्य हारीत नामक पक्षी होता है । १०२ ॥ [ मनुशासनपर्वाण जन्म लेता है। कौशेय ( रेशमी ) वस्त्रको चोरी करनेपर मनुष्य बत्तक होता है ।। १०४ ॥ है राजतं भाजनं हत्वा कपोतः सम्प्रजायते । हत्वा तु काञ्चनं माण्डं कृमियोनौ प्रजायते ॥१०३ ॥ चाँदीका बर्तन चुरानेवाला कबूतर होता है और सुवर्णमय भाण्डकी चोरी करके मनुष्यको कोड़ेकी योनि में जन्म लेना पड़ता है ।॥ १०३ ॥ अंशुकं चोरयित्वा तु शुको जायति मानवः । चोरयित्वा दुकूलं तु मृतोः हंसः प्रजायते ॥१०५ ॥ अंशुक ( महीन कपड़े ) की चोरी करके मनुष्य तोतेका जन्म पाता है तथा दुकूल ( उत्तरीय वस्त्र ) की चोरी करके मृत्युको प्रान हुआ मानव हंसकी योनिमें जन्म लेता है । १०५ ।। क्रौञ्चः कार्पासिकं हृत्वा मृतो जायत मानवः। चोरयित्वा नरः पट्ट् त्वाविकं चैव भारत ॥१०६॥ क्षौमं च वस्त्रमादाय शशो जन्तुः प्रजायते । सूती वस्त्रकी चोरी करके मरा हुआ मनुष्य क्रौञ्च पक्षीकी योनि में जन्म लेता है। भारत ! पाटम्बर, मेड़के ऊनका बना हुआ तथा क्षौन ( रेशमी ) वस्त्र चुरानेवाला मनुष्य खरगोश नामक अन्तु होता है ।। १०६३ ।। वर्णान् हत्वा तु पुरुषो मृतो जायत बर्हिणः ॥१०७॥ हत्वा रक्तानि वस्त्राणि जायते जीवजीवकः । पत्रोर्ण चोरयित्वा तु कृकलत्वं निगच्छति । कौशिकं तु ततो हत्वा नरो जायति वर्तकः ॥१०४॥ कनी वस्त्र चुरानेबाला कुकल ( गिरगिट ) की योनि में अनेक प्रकारके रंगोंकी चोरी करके मृत्युको प्राप्त हुआ पुरुष मोर होता है। लाल कपड़े चुरानेवाला मनुष्य चकोरको योनिमें जन्म लेता है ॥ १०७ ॥ वर्णका दींस्तथा गन्धांश्चोरयित्वेह मानवः ॥१०८॥ छुच्छन्दरित्वमाप्नोति राजँल्लोभपरायणः । तत्र जीर्वात वर्षाणि ततो दश च पञ्च च ॥ १०९५ राजन् ! जो मनुष्य लोभके वशीभूत होकर वर्णक ( अनुलेपन ) आदि तथा चन्दनकी चोरी करता है, वह छछूंदर होता है। उस योनिमें वह पंद्रह वर्षतक जीवित अधर्मस्य क्षयं गत्वा ततो जायति मानुषः । चोरयित्वा पयश्चापि बलाका सम्प्रजायते ॥११०॥ फिर अधर्मका क्षय हो जानेपर वह मनुष्यका जन्म पाता है। दूध चुरानेवाली स्त्री बगुली होती है ॥ ११० ॥ यस्तु चोरयते तैलं नरो मोहसमम्वितः । सोऽपि राजन् मृतो जन्तुस्तैलपायी प्रजायते ॥ १११॥ राजन् ! जो मनुष्य मोहयुक्त होकर तेल चुराता है, वह मरनेपर तेलपायी नामक कीड़ा होता है ॥ १११ ॥ मशस्त्रं पुरुषं हत्वा सशस्त्रः पुरुषाधमः । अर्थार्थी यदि वा वैरी स मृतो जायते खरः ॥११२॥ जो नोच मनुष्य धन के लोमसे अथवा शत्रुताके कारण हथियार लेकर निहत्ये पुरुषको मार डालता है, वह अपनी मृत्यु के बाद गदहेकी योनिमें जन्म पाती है । ११२ ॥
दाजचर्मपर्व ] जो द्विज चारों वेदोंका अध्ययन करनेके बाद भी मोहवश पतित मनुष्योंसे दान लेता है, उसका गदहेकी योनिमें जन्म होता है ॥ छियालीस ॥ खरो जोवति वर्षाणि दस पश्च व भारत । खरो मृतो बलीवदः सप्त वर्षाणि जीवति ॥सैंतालीस॥ भारत ! गदहेकी योनिमें वह पंद्रह वर्षों तक जीवित रहता है । उसके बाद मरकर बैल होता है । उस योनिमें वह सात वर्षोंतक जीवित रहता है ॥ सैंतालीस ॥ बकीवों मृतश्चापि जायते ब्रह्मराक्षसः । ब्रह्मरक्षश्च मासांस्त्रीस्ततो जायति ब्राह्मणः ॥अड़तालीस॥ जब बैलका शरीर छूट जाता है, तब वह ब्रह्मराक्षस होता है। तीन मासतक ब्रह्मराक्षस रहने के बाद फिर वह ब्राह्मणका जन्म पाता है ।। अड़तालीस ॥ पतित याजयित्वा तु कृमियोनौ प्रजायते । तत्र जीवति वर्षाणि दश पञ्च च भारत ॥उनचास॥ भारत ! जो ब्राह्मण पतित पुरुषका यज्ञ कराता है, वह मरनेके बाद कीड़ेकी योनिमें जन्म लेता है और उस योनिमें पंद्रह वर्मोंतक जीवित रहता है ।। उनचास ॥ कृमिभावाद् विमुक्तस्तु ततो जायति गर्दभः । गर्दभः पञ्च वर्षाणि पञ्च वर्षाणि सूकरः ॥पचास॥ कुक्कुटः पञ्च वर्षाणि पञ्च वर्षाणि जम्बुकः । श्वा वर्षमेकं भवति ततो जायति मानवः ॥इक्यावन॥ कीड़ेको योनिसे छूटनेपर वह गदहेका जन्म पाता है। पाँच वर्षतक गदहा रहकर, पाँच वर्ष सूअर, पाँच वर्ष मुर्गा पाँच वर्ष सियार और एक वर्ष कुत्ता होता है। उसके बाद वह मनुष्ययोनिमें उत्पन्न होता है । पचास-इक्यावन ॥ उपाध्यायस्य यः पापं शिष्यः कुर्यादबुद्धिमान् । स जीव इह संसारांस्त्रीनाप्नोति न संशयः ॥बावन॥ प्राक् श्वा भवति राजेन्द्र ततः क्रव्यात्ततः खरः । ततः प्रेतः परिक्लिष्टः पश्चाज्जापति ब्राह्मणः ॥तिरेपन॥ जो मूर्ख शिष्य अपने अध्यापकका अपराध करता है, वह यहाँ निम्नाङ्कित तीन योनियों में जन्म ग्रहण करता है, इसमें संशय नहीं है। राजेन्द्र ! पहले तो वह कुत्ता होता है, फिर राक्षस और गदहा होता है। उसके बाद मरकर प्रेतावस्था में अनेक कष्ट भोगनेके पश्चात् ब्राह्मणका जन्म पाता है।बावन-तिरेपन। मनसापि गुरोर्माय यः शिष्यो याति पापकृत् । स उप्रान् प्रति संसारानधर्मेणेह चेतसा ॥चौवन॥ जो पापाचारी शिष्य गुरुपत्नी के साथ समागमका विचार भी मनमें लाता है, वह अपने मानसिक पापके कारण भयंकर योनियोंमें जन्म लेता है ॥ चौवन ।। भ्ययोनौ तु स सम्भूतस्त्रीणि वर्षाणि जीवति । तत्रापि निधनं प्राप्तः कृमियोनौ प्रजायते ॥पचपन॥ कृमिभावमनुप्राप्तो वर्षमेकं तु जीवति । ततस्तु निधनं प्राप्तो ब्रह्मयोनौ प्रज्जायते ॥छप्पन॥ पहले कुत्तेकी योनिमें जन्म लेकर वह तीन वर्षतक जीवन धारण करता है। उस योनिमें मृत्युको प्राप्त होकर वह कीड़ेकी योनि में उत्पन्न होता है। कीटयोनिमें जन्म लेकर वह एक वर्षतक जीवित रहता है। फर मरनेके बाद उसका ब्राह्मण-योनिमें जन्म होता है ॥ पचपन-छप्पन ॥ यदि पुत्रसमं शिष्यं गुरुर्हन्यादकारणे । आत्मनः कामकारेण सोऽपि हिंस्र प्रजायते ॥सत्तावन॥ यदि गुरु अपने पुत्रके समान शिष्यको बिना कारण के ही मारता-पीटता है तो वह अपनी स्वेच्छाचारिता के कारण हिंसक पशुकी योनिमें जन्म लेता है ।। सत्तावन ।। पितरं मातरं चैव यस्तु पुत्रोऽवमन्यते । सोऽपि राजन् मृतो जन्तुः पूर्व जायेत गर्दभः ॥अट्ठावन ॥ राजन् ! जो पुत्र अपने माता-पिता का अनादर करता है, वह भी मरने के बाद पहले गदद्दा नामक प्राणी होता है॥ गर्दभत्वं तु सम्भाप्य दश वर्षाणि जीवति । संवत्सरं तुकुम्भीरस्ततो जायेत मानवः ॥ उनसठ॥ गदहेका शरीर पाकर वह दस वर्षोंतक जीवित रहता है । फिर एक सालतक घड़ियाल रहनेके बाद मानव-योनिमें उत्पन्न होता है ।। उनसठ ॥ पुत्रस्य मातापितरौ यस्य रुष्टावभावपि । गुर्वपण्यानतः सोऽपि मृतो जायति गर्दभः ॥तीस॥ जिस पुत्रके ऊपर माता और पिता दोनों ही रुष्ट होते है, वह गुरुजनोंके अनिष्टचिन्तन के कारण मृत्यु के बाद गदहा होता है । साठ ।। खरो जीवति मासांस्तु दश श्वा च चतुर्दश । बिडालः सप्तमासांस्तु ततो जायत मानवः ॥ ग्यारह ॥ गदहेकी योनि में वह दस मासतक जीवित रहता है। उसके बाद चौदह महीनतिक कुत्ता और सात मास तक बिलाव होकर अन्तमें वह मनुष्यकी योनिमें जन्म ग्रहण करता है ।। इकसठ ॥ मातापितरावाक्रश्य सारिकः सम्प्रज्ञायते । ताडयित्वा तु तावेव जायते कच्छपो नृप ॥बासठ।। माता-पिताको निन्दा करके अथवा उन्हें गाली देकर मनुष्य दूसरे जन्ममें मैना होता है। नरेश्वर ! जो मातापिताको मारता है, वह कछुआ होता है ॥ बासठ ॥ कच्छपो दश वर्षाणि त्रीणि वर्षाणि शल्यकः । व्यालो भूत्वा च षण्मा सांस्ततो जयति मानुषः॥तिरेसठ॥ दस वर्षतक फछुआ रहनेके पश्चात् तीन वर्ष साही और छः महीनेतक सर्प होता है। उसके अनन्तर वह मनुष्यको योनिमें जन्म लेता है ॥ तिरेसठ ॥ भर्तृपिण्ड मुपाइनन् यो राजद्विष्टानि सेवते । सोऽपि मोहसमापन्नो मृतो जायति वानरः ॥चौंसठ।। बो पुरुष राजाके टुकड़े खाकर पलता हुआ भी मोहवश उसके शत्रुओंकी सेवा करता है, वह मरनेके बाद वानर होता है । चौंसठ ॥ वानरो दश वर्षाणि पञ्च वर्षाणि मूषिकः । भ्वाथ भूत्वा तु षण्मासांस्ततो जायति मानुषः । पैंसठ ॥ दस वर्षोंतक वानर, पाँच वर्षोंतक चूहा और छः महीनोंतक कुत्ता होकर वह मनुष्यका जन्म पाता है ॥पैंसठ॥ भ्यासापहर्ता तु नरो यमस्य विषयं गतः । संसाराणां शतं गत्वा कृमियोनौ प्रजायते ॥छयासठ॥ दूसरोंकी धरोहर हड़प लेनेबाला मनुष्य यमलोक में जाता और क्रमशः सौ योनियोंमें भ्रमण करके अन्तमें कीड़ा होता है। छयासठ । तत्र जोवति वर्षाणि दश पञ्च च भारत । दुष्कृतस्य क्षयं कृत्वा ततो जायति मानुषः ॥ सरसठ॥ भारत ! कीड़ेकी योनिमें बह पंद्रह वर्षोंतक जीवित रहता है और अपने पापोंका क्षय करके अन्तमें मनुष्ययोनिमें जन्म लेता है ॥ सरसठ ।। असूयको नरस्यापि मृतो जायति शार्ङ्गकः । विश्वासहर्ता तु नरो मीनो जायति दुर्मतिः ॥अड़सठ॥ दूसरोंके दोष ढूंढ़नेवाला मनुष्य हरिणकी योनिमें जन्म लेता है तथा जो अपनी खोटी बुद्धिके कारण किसी के साथ विश्वासघात करता है, वह मनुष्य मछली होता है ॥ अड़सठ ॥ भूत्वा मीनोऽष्ट वर्षाणि मृतो जायति भारत । मृगस्तु चतुरो मासांस्ततश्छागः प्रजायते ॥उनहत्तर॥ भारत ! आठ वर्षौंतक मछली रहकर मरनेके बाद वह चार मासतक मृग होता है। उसके बाद बकरेकी योनिमें जन्म लेता है ।। उनहत्तर ॥ [ मनुशासनपर्वचि महाराज ! जो पुरुष लजाका परित्याग करके अज्ञान और मोहके वशीभूत होकर धान, जौ, तिल, उड़द, कुलथी, सरसों, चना, मटर, मूँग, गेहूँ और तीसी तथा दूसरे-दूसरे अनाजोंकी चोरी करता है, वह मरनेके बाद पहले चूहा होता है ।। इकहत्तर-बहत्तर ॥ छागस्तु निधनं प्राप्य पूर्ण संवत्सरे ततः । कीटः संजायते जन्तुस्ततो जायत मानुषः ॥सत्तर॥ बकरा पूरे एक वर्षपर मृत्युको प्राप्त होने के पश्चात् कोड़ा होता है। उसके बाद उस जीवको मनुष्यका जन्म मिलता है । घान्यान् यवांस्तिलान् माषान् कुलत्थान सर्षपांचणान् कलापानथ मुद्गांच गोधूमानतसींस्तथा ॥इकहत्तर. सस्यस्यान्यस्य हर्ता व मोहा जन्तुर चेतनः । स जायते महाराज भूषिको निरपत्रफ ॥बहत्तर॥ ततः प्रेत्य महाराज मृतो जायति सुकरः । स्करो जातमात्रस्तु रोगेण म्रियते नृप ॥तिहत्तर॥ राजन् ! फिर वह चूहा मृत्युके पश्चात् सूअर होता है। नरेश्वर ! वद्द सूअर जन्म लेते ही रोगसे मर जाता है ॥तिहत्तर॥ ध्वा ततो जायते मूढः कर्मणा तेन पार्थिव । भूत्वा श्वा पञ्च वर्षाणि ततो जायति मानवः ॥चौहत्तर॥ पृथ्वीनाथ ! फिर उसी कर्मसे वह मूढ़ जीव कुत्ता होता है और पॉच वर्षतक कुत्ता रहकर अन्तमें मनुष्यका जन्म पाता है ।। चौहत्तर ॥ परदाराभिमर्श तु कृत्वा जायति वै वृकः । भ्वा शृगालस्ततो गृध्रो व्यालः कङ्को बकस्तथा ॥ पचहत्तर ॥ परस्त्री गननका पाप करके मनुष्य क्रमशः भेड़िया, कुत्ता, सियार, गीध, साँप, कङ्क और बगुला होता है ॥ पचहत्तर ॥ भ्रातुर्भाय तु पापात्मा यो धर्षयति मोहितः । पुंस्कोकिळत्वमाप्नोति सोऽपि संवत्सरं नृप ॥छिहत्तर॥ नरेश्वर ! जो पापात्मा मोहवश भाईकी स्त्री के साथ बलात्कार करता है, वह एक वर्षतक कोयलकी योनिमें पड़ा रहता है । छिहत्तर ॥ सखिभार्या गुरोर्भाय राजभार्या तथैव च । प्रघर्षयित्वा कामाय मृतो जायति सूकरः ॥सतहत्तर॥ जो कामनाको पूर्ति के लिये मित्र, गुरु और राजाको स्त्रीका सतीत्व भङ्ग करता है, वह मरने के बाद सूअर होता है। सूकरः पञ्च वर्षाणि दश वर्षाणि श्वाविधः । बिडालः पञ्च वर्षाणि दश वर्षाणि कुक्कुटः ॥अठहत्तर ॥ पिपोलिकस्तु मासांत्रोन कीटः स्यान्मासमेव तु । पतानासाद्य संसारान् कृमियोनौ प्रजायते ॥उन्यासी॥ पाँच वर्षतक सूअर रहकर दस वर्ष भेड़िया, पाँच वर्ष बिलाव, दस वर्ष मुर्गा, तीन महीने चींटी और एक महीने कीड़ेकी योनिमें रहता है। इन सभी योनियों में चक्कर लगानेके बाद वह पुनः कीड़ेकी योनिमें जन्म लेता है ॥अठहत्तर-उन्यासी॥ तत्र जीवति मासांस्तु कृमियोनौ चतुर्दश । ततोऽघमंक्षयं कृत्वा पुनर्जायति मानवः ।।अस्सी॥ उस कीट-योनिमें वह चौदह महीनोंतक जोवन धारण करता है। तदनन्तर पापचय करके वह पुनः मनुष्य-योनिमें भन्म लेता है ॥ अस्सी ॥ दानधमपर्व ] उपस्थिते बिवाहे तु यज्ञे दानेऽपि वा विभो । मोहात् करोति यो विष्णुं स मृतो जायते कृमिः॥इक्यासी॥ प्रभो । जो विवाह, यश अथवा दानका अवसर आनेपर मोहवश उसमें विघ्न डालता है, वह भी मरनेके बाद कीड़ा ही होता है ॥ इक्यासी ॥ कृमिर्जीवति वर्षाणि दश पञ्च च भारत । अधमस्य क्षयं कृत्वा ततो जयति मानवः ॥बयासी ।। भारत ! वह कीट पंद्रह वर्षों तक जीवित रहता है। फिर पापका क्षय करके वह मनुष्ययोनिमें जन्म लेता है ॥ बयासी ॥ दत्त्वा तु यः कन्यां द्वितीये दातुमिच्छति । सोऽपि राजन् मृतो जन्तुः कृमियोनौ प्रजायते ।।तिरासी।। राजन् ! जो पहले एक व्यक्तिको कन्यादान करके फिर दूसरेको उसी कन्याका दान करना चाहता है, वह भी मरनेके बाद कीड़ेकी योनिमें जन्म लेता है ।। तिरासी ।। तत्र जीवति वर्षाणि त्रयोदश युधिष्ठिर । अधर्मसंक्षये युक्तस्ततो जायति मानवः ॥चौबीस॥ युधिष्ठिर ! उस योनिमें वह तेरह वर्षों तक जीवन धारण करता है। तदनन्तर पापक्षयके पश्चात् वह पुनः मनुष्ययोनिमें उपन्न होता देवकार्यमकृत्वा तु पितृकार्यमथापि वा । मनिर्वाप्य समझनन् वै मृतो जायति वायसः ॥पचासी॥ जो देवकार्य अथवा पितृकार्य न करके बलिवैश्वदेव किये बिना ही अन्न ग्रहण करता है, वह मरने के बाद कौएकी योनिमें जन्म लेता है । पचासी ॥ वायसः शतवर्षाणि ततो जायति कुक्कुटः । जायते व्याळकश्चापि मासं तस्मात् तु मानुषः ॥छियासी॥ सौ वर्षोंतक कौए के शरीरमें रहकर वह मुर्गा होता है। उसके बाद एक मासतक सर्प रहता है । तत्पश्चात् मनुष्यका जन्म पाता है ॥ छियासी ॥ ज्येष्ठं पितृसमं चापि भ्रातरं योऽवमन्यते । सोऽपि मृत्युमुपागम्य क्रौञ्चयोनी प्रजायते ॥सत्तासी॥ बड़ा भाई पिताके समान आदरणीय है, जो उसका अपमान करता है, उसे मृत्यु के बाद क्रौञ्च पक्षीकी योनिमें चन्म लेना पड़ता है ।। सत्तासी ।। कोचो जीवति वर्ष तु ततो जायति धीरकः । ततो निधनमापन्नो मानुषत्वनुपाश्नुते ।।अठासी।। कौन होकर वह एक वर्षतक जीवित रहता है। उसके बाद चीरक जातिका पक्षी होता है और फिर मरनेके बाद मनुष्य-योनि में जन्म पाता है ॥ अठासी ॥ वृषलो ब्राह्मणीं गत्वा कमियोनौ प्रजायते । ततः सम्प्राप्य निधनं जायते सूकरः पुनः ॥ आठ सौ चौरानवे शुद्ध-जातिका पुरुष ब्राह्मण जातिकी स्त्री के साथ समागम करके देहत्याग के पश्चात् पहले कीड़ेकी योनि में जन्म लेता है। फिर मरनेके बाद सूअर होता है ।। नवासी ।। सूकरो जातमात्रस्तु रोगेण म्रियते नृप । भ्वा ततो जायते मूढः कर्मणा तेन पार्थिव ॥नब्बे॥ नरेश्वर ! सूअरकी योनिमें जन्म लेते ही वह रोगसे मर जाता है । पृथ्वीनाथ ! तत्पश्चात् वह मूढ़ जीव उसी पापकर्मके कारण कुत्ता होता है ॥ नब्बे ॥ श्वा भूत्वा कृतकर्मासौ जायते मानुषस्ततः । तत्रापत्यं समुत्पाद्य मृतो जायति मूषिकः ॥इक्यानवे॥ कुत्ता होनेपर पापकर्मका भोग समाप्त करके वह मनुष्ययोनिमें जन्म लेता है। मनुष्ययोनिमें भी वह एक ही संतान पैदा करके मर जाता और शेष पापका फल भोगनेके लिये चूहा होता है । इक्यानवे ॥ कृतघ्नस्तु मृतो राजन् यमस्य विषयं गतः । यमस्य पुरुषैः क्रुद्धैवधं प्राप्नोति दारुणम् ।।बारह।। राजन् ! कृतघ्न मनुष्य मरने के बाद यमराजके लोक में जाता है। वहाँ क्रोधमें भरे हुए यमदूत उसके ऊपर बड़ो निर्दत्रताके साथ प्रहार करते हैं । बानवे ।। दण्डं समुद्गरं शूलमग्निकुम्भं च दारुणम् । असिपत्रवनं घोरवालुकं कूटशाल्मलीम् ॥तिरानवे॥ पताश्चान्याश्च वहीश्च यमस्य विषयं गतः । यातनाः प्राप्य तत्रोप्रास्ततो वध्यति भारत ॥चार॥ भारत ! वह दण्ड, मुद्गर और शूलकी चोट खाकर दारुण अग्निकुम्भ , असिपत्रवन, तपी हुईं भयंकर बालू काँटोंसे भरी हुई शाल्मली आदि नरकोंमें कष्ट भोगता है । यमलोकमें पहुँचकर इन ऊपर बताये हुए तथा और भी बहुत से नरकोंकी भयंकर यातनाएँ भोगकर वह वहाँ यमदूतोंद्वारा पीटा जाता है । तिरानवे-चौरानवे ।। ततो हतः कृतघ्नः स तत्रोग्रैर्भरतर्षभ । संसारचक्रमासाद्य कृमियोनौ प्रजायते ॥पचानवे॥ भरतश्रेष्ठ ! इस प्रकार निर्दयी यमदूतोंसे पीड़ित हुआ कृतघ्न पुरुष पुनः संसारचक्र में आता और कीड़ेकी योनिमें जन्म लेता है ।। पचानवे ॥ कृमिर्भवति वर्षाणि दश पञ्च च भारत । ततो गर्भ समासाद्य तत्रैव म्रियते शिशुः ॥छियानवे॥ भारत ! पंद्रह वर्षोंतक वह कीड़ेकी योनिमें रहता है। फिर गर्भमें आकर वहीं गर्भस्थ शिशुकी दशामें ही मर जाता है ।। सोलह ।। ततो गर्भशतैर्जन्तुर्बहुभिः सम्प्रपद्यते । संसारांश्च बहून् गत्वा ततस्तिर्यक्षु जायते ॥सत्तानवे॥ इस तरह कई सौ बार वह जीव गर्भको यन्त्रणा भोगता है। तदनन्तर बहुत बार जन्म लेने के पश्चात् वह तिर्यग्योनिमें उत्पन्न होता है ।। सत्तानवे ॥ ततो दुःखमनुप्राप्य बहु वर्षगणानिह । अपुनर्भवसंयुकस्ततः कुर्मः प्रजायते ॥अट्ठानवे॥ इन योनियों में बहुत वर्षों तक दुःख भोगनेके पश्चात् वह फिर मनुष्ययोनिमें न आकर दीर्घकाल के लिये कछुआ हो जाता है । अट्ठानवे ।। दधि हत्वा बकश्चापि प्लवो मत्स्थान संस्कृतान् । चोरयित्वा तु दुर्बुद्धिर्मधु दंशः प्रजायते ॥ निन्यानवे ।। दुर्बुद्धि मनुष्य दहीकी चोरी करके बगला होता है, कच्ची मछलियोंकी चोरी करके वह कारण्डव नामक जलपक्षी होता है और मधुका अपहरण करके वह डॉस की योनिमें जन्म लेता है ।। निन्यानवे ।। फलं वा मूलकं हृत्वा अपूपं वा पिपीलिकाः । चोरयित्वा व निष्पावं जायते हलगोलकः ॥एक सौ॥ फल, मूल अथवा पूएकी चोरी करनेपर मनुष्यको चींटी की योनिमें जन्म लेना पड़ता है। निष्पाव को चोरी करनेवाला इलगोलक नामवाला कीड़ा होता है ।। शून्य॥ पायसं बोरयित्वा तु तित्तिरित्वमवाप्नुते । हत्या पिष्टमयं पूपं कुम्भौलूकः प्रजायते ॥एक सौ एक॥ खीरकी चोरी करनेवाला तीतरकी योनिमें जन्म लेता है। आटेका पूआ चुराकर मनुष्य मरने के बाद उल्लू होता है ।। एक सौ एक ।। अयो हृत्वा तु दुर्बुद्धिर्वायसो जायते नरः । कांस्यं हृत्वा तु दुर्बुद्धिरितो जायते नरः ॥एक सौ दो॥ लोहेकी चोरी करनेवाला मूर्ख मानव कौवा होता है। काँसकी चोरी करके खोटी बुद्धिवाला मनुष्य हारीत नामक पक्षी होता है । एक सौ दो ॥ [ मनुशासनपर्वाण जन्म लेता है। कौशेय वस्त्रको चोरी करनेपर मनुष्य बत्तक होता है ।। एक सौ चार ॥ है राजतं भाजनं हत्वा कपोतः सम्प्रजायते । हत्वा तु काञ्चनं माण्डं कृमियोनौ प्रजायते ॥एक सौ तीन ॥ चाँदीका बर्तन चुरानेवाला कबूतर होता है और सुवर्णमय भाण्डकी चोरी करके मनुष्यको कोड़ेकी योनि में जन्म लेना पड़ता है ।॥ एक सौ तीन ॥ अंशुकं चोरयित्वा तु शुको जायति मानवः । चोरयित्वा दुकूलं तु मृतोः हंसः प्रजायते ॥एक सौ पाँच ॥ अंशुक की चोरी करके मनुष्य तोतेका जन्म पाता है तथा दुकूल की चोरी करके मृत्युको प्रान हुआ मानव हंसकी योनिमें जन्म लेता है । एक सौ पाँच ।। क्रौञ्चः कार्पासिकं हृत्वा मृतो जायत मानवः। चोरयित्वा नरः पट्ट् त्वाविकं चैव भारत ॥एक सौ छः॥ क्षौमं च वस्त्रमादाय शशो जन्तुः प्रजायते । सूती वस्त्रकी चोरी करके मरा हुआ मनुष्य क्रौञ्च पक्षीकी योनि में जन्म लेता है। भारत ! पाटम्बर, मेड़के ऊनका बना हुआ तथा क्षौन वस्त्र चुरानेवाला मनुष्य खरगोश नामक अन्तु होता है ।। एक हज़ार तिरेसठ ।। वर्णान् हत्वा तु पुरुषो मृतो जायत बर्हिणः ॥एक सौ सात॥ हत्वा रक्तानि वस्त्राणि जायते जीवजीवकः । पत्रोर्ण चोरयित्वा तु कृकलत्वं निगच्छति । कौशिकं तु ततो हत्वा नरो जायति वर्तकः ॥एक सौ चार॥ कनी वस्त्र चुरानेबाला कुकल की योनि में अनेक प्रकारके रंगोंकी चोरी करके मृत्युको प्राप्त हुआ पुरुष मोर होता है। लाल कपड़े चुरानेवाला मनुष्य चकोरको योनिमें जन्म लेता है ॥ एक सौ सात ॥ वर्णका दींस्तथा गन्धांश्चोरयित्वेह मानवः ॥एक सौ आठ॥ छुच्छन्दरित्वमाप्नोति राजँल्लोभपरायणः । तत्र जीर्वात वर्षाणि ततो दश च पञ्च च ॥ एक हज़ार पचानवे राजन् ! जो मनुष्य लोभके वशीभूत होकर वर्णक आदि तथा चन्दनकी चोरी करता है, वह छछूंदर होता है। उस योनिमें वह पंद्रह वर्षतक जीवित अधर्मस्य क्षयं गत्वा ततो जायति मानुषः । चोरयित्वा पयश्चापि बलाका सम्प्रजायते ॥एक सौ दस॥ फिर अधर्मका क्षय हो जानेपर वह मनुष्यका जन्म पाता है। दूध चुरानेवाली स्त्री बगुली होती है ॥ एक सौ दस ॥ यस्तु चोरयते तैलं नरो मोहसमम्वितः । सोऽपि राजन् मृतो जन्तुस्तैलपायी प्रजायते ॥ एक सौ ग्यारह॥ राजन् ! जो मनुष्य मोहयुक्त होकर तेल चुराता है, वह मरनेपर तेलपायी नामक कीड़ा होता है ॥ एक सौ ग्यारह ॥ मशस्त्रं पुरुषं हत्वा सशस्त्रः पुरुषाधमः । अर्थार्थी यदि वा वैरी स मृतो जायते खरः ॥एक सौ बारह॥ जो नोच मनुष्य धन के लोमसे अथवा शत्रुताके कारण हथियार लेकर निहत्ये पुरुषको मार डालता है, वह अपनी मृत्यु के बाद गदहेकी योनिमें जन्म पाती है । एक सौ बारह ॥
[ श्री शिव कुमार सिंह ठ कर] बुरहानपुर में पड़ी डकैती में बहुत प्रशंसनीय कार्य किया था, उनको श्रापकी ओर से एप्रीसिएशन लेटर भेजे जायें । मेरा आपसे यह भी निवेदन है कि भिण्ड दतीया को मिला कर एक पोस्ट आफ़िस डिवीजन होना चाहिए । मेरा आप से यह भी निवेदन है कि भिण्ड दिल्ली आगरा कानपुर डायरेक्ट लाइन होनी चाहिए । भिंड से दतिया वाया लहार दबो सीधे लाइन है, लेकिन बात ठीक तरह से नहीं होती है । ग्वालियर होकर होती है । इसलिए वहां पर बात ठीक से हो सके, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए । इन्हीं शब्दों के साथ में संचार मंत्रालय की मांगों का समर्थन करता हूं । MR. DEPUTY-SPEAKER: There are 3 or 4 Members who have to speak. If they stick to 5 minutes each, I will allow them. Now, Mr. Vyas may speak. श्री गिरधारी लाल व्यास (भीलवाड़ा) : उपाध्यक्ष महोदय, मैं संचार मंत्रालय की मांगों का समर्थन करता हूं और जो कठिनाइयां हैं, उनकी ओर ध्यान प्राकर्षित करना चाहता हूं । लम्बीचौड़ी बात करने से कोई फ़ायदा नहीं है, क्योंकि समय कम है । सबसे पहली कठिनाई यह है कि भीलवाड़ा में टेलीफोन एक्सचेंज की कोई अपनी बिल्डिंग नहीं है । आपने पैसे की स्वीकृति दे दी है, लेकिन बिल्डिंग नहीं बन पा रही है । दो-तीन साल से जब से मैं इस पार्लियामेंट का मैम्बर बना हूं, मैं लगातार कहता आ रहा हूं । दो साल से आपने पैसा भी मंजूर कर दिया है, कलैक्टर ने जमीन भी दे दी है, लेकिन बिल्डिंग नहीं बन पा रही है । प्राप कृपया करके बिल्डिंग बनाने की व्यवस्था of Communications 4528 कीजिए । सौ लाइन के टेलीफोन एक्सचेंज के लिए आपने जो बिल्डिंग किराए पर ली थी, अब वहां पर वहां पर 2000 लाइनें हो गई हैं । फ़िर भी वही बिल्डिंग चल रही है, इसलिए लोग कहते हैं कि टेलीफोन की व्यवस्था खराब है । आप नई बिल्डिंग बना दीजिए तो सारी व्यवस्था ठीक हो जाएगी। इसमें आपका भी नाम होगा और हमारी सरकार की भी वाह-वाही होगी । मेरा दूसरा निवेदन यह है कि टैलेक्स सिस्टम आपने वहां पर स्वीकृत किया है । लोग उसको लेने के लिए तैयार हैं । लेकिन आप डिपार्टमेंट की तरफ से नोटिस दे दी गई कि क्योंकि दस आदमियों ने नहीं लिया, इसलिए हम इसको हटाते हैं । वहां पर लोग लेने के लिए तैयार हैं, इसलिए आपने जो नोटिस दी है, उसको विद ड्रा कीजिए । मेरा तीसरा निवेदन यह है कि भीलवाड़ा डिस्ट्रिक्ट हैडक्वार्टर हैं । इसकी दो तहसीलें ऐसी हैं, असीन्द और जहाजपुर, जो डायरेक्ट नहीं मिली हुई हैं । आदमी बस में बैठकर भीलवाड़ा हो कर लौट आए, तब तक भी टेलीफोन नहीं मिलता है । इसमें दस-पन्द्रह किलोमीटर से ज्यादा लाइन नहीं मिलानी है । इसलिए मेरा निवेदन है कि असीन्द और जहाजपुर को भीलवाड़ा से मिला दिया जाए तो मेरी कान्स्टीचूयेंसी की प्राधी आबादी को बहुत बड़ा फायदा पहुंचेगा । इसलिए इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही की जानी चाहिए । पी०सी०ओ० को खोलने के लिए मैं बराबर दो साल से कह रहा हूं । एक शम्भूगढ़ का पी०सी०प्रो० आपने दो साल में खोला है, बाकी कोई नहीं खोला है । वहां पर ऐसे बड़े-बड़े गांव हैं, जिनकी D.G., '82-'83-Min. CHAITRA 30, 1904 (SAKA) of Communications 454 • सात-सात हजार की आबादी है । जैसे अन्टाली, जंगपुरा, सरेणी, निम्बा हेडा, आसीन्द तहसील कारोई, बरूदणी, स्टेशन सरेणी और बोरापावहां पर पी०सी० ग्रो० खोलने के लिए वर्षों से पैरवी की जा रही है, लेकिन पता नहीं क्या कारण है कि पी०सी०प्रो० नहीं खोले जा रहे हैं । मेरा आपसे निवेदन है कि जल्दी से जल्दी पी०सी०प्रो० खुलवा दिए जायें । एक निवेदन मैं यह कहना चाहता हूं कि एक्सट्रा डिपार्टमेंटल पोस्ट आफिस जो लोग काम करते हैं, उनके बारे में कहना चाहता हूं । उनको आप 75 रु० देते हैं, अब शायद उसको 150 रु० कर दिया है । क्या 150 रु० मिनिमम वेज के अन्तर्गत आता है ? जब आप आठ रुपया, दस रुपया या 12 रु० मिनिमम वेज देते हैं, किसी भी माइनिंग में आप देख लीजिए, अन्य डिपार्टमेंट में देख लीजिए, वहां दस रुपए मिनिमम वेज हो गई है । जब कि आप एक्सट्रा डिपार्टमेंटल पोस्ट आफिसेस में केवल 150 रु० देते हैं । उनको पूरा पैसा नहीं मिलता है, इसलिए वे पूरा नहीं देते हैं और इस तरह की गड़बड़ियां होती हैं । यदि उनको पूरा पैसा कलर्क का दिया जाएगा, तो ये लोग एफिशियेंटली पोस्ट आफिस रन कर सकेंगे । इसी प्रकार नियुक्तियों में भी बड़ी धांधलेबाजी होती है । आपके जो अधिकारी लोग हैं, इन्सपैक्टर लोग हैं, वे मन-माने तरीके से अपने लोगों को नियुक्त कर देते हैं । इस संबंध में चुने हुए प्रतिनिधियों, एम०पी० या एम०पल०एज० से भी कोई राय नहीं ली जाती है । इसलिए इसमें निश्चित तरीके से वहां के जनप्रतिनिधियों की या वहां के पंचायत के लोगों की राय ली जानी चाहिए । फ़लिया गांव में सात गांव में सात हजार से ज्यादा की आबादी है, इसलिए इसको सब पोस्ट आफिस बनाया जाए । वहां पर जो एक्सट्रा डिपार्टमेंटल पोस्ट आफिस है, उसमें जो आदमी काम करता है, उसको 75 रु० तनख्वाह मिलती थी । वह अपने 75रु० कायम रखने के लिए वहां की आमदनी पूरी नहीं बताता है और बराबर आपके डिपार्टमेंट के लोग कहते हैं कि आमदनी नहीं है, इस वजह से उसको सब पोस्ट आफिस नहीं बनाया जा सकता है । वह इतना बड़ा कसबा है और उसके आसपास सौ पोस्ट आफिस होंगे, यदि इसको बना दिया जाएगा तो निश्चित तरीके से आपके विभाग की आमदनी बढ़ेगी । इसलिए इस व्यवस्था को किया जाना चाहिए । फुलिया को सब पोस्ट आफिस बनाया जाना चाहिए । बिल्डिंग बनाने के बारे में मैं यह कहना चाहता हूं कि बनेडा, गुलाबपुरा और माडल में पोस्ट आफिस की बिल्डिंग बनाई जानी चाहिए। पंचायत व म्यूनि सिपैलिटी बोर्ड ने आपको जमीन दे दी है और इस संबंध में मैं बराबर दो साल से आपसे कहता आ रहा हूं, लेकिन आपका डिपार्टमेंट कहता है कि यह काम नहीं हो सकता है । इस व्यवस्था को भी आपको जल्दी से जल्दी ठीक करा देना चाहिए । टेलीफोन की व्यवस्था भी निश्चित तरीके से काफी आगे बढ़ी है, मगर उसमें भी काफी सुधार की आवश्यकता है । मैं कोई बुराई नहीं करना चाहता हूं, क्योंकि अपनी सरकार की बुराई करना कोई अच्छी बात नहीं है, लेकिन जो खराबियां हैं, उनको निश्चित तरीके से दूर कीजिए । डागा जी ने ठीक कहा कि 10-10 और 15-15 साल से एक आदमी एक जगह पर जमा हुआ है, क्योंकि उसका वहां पर वैस्टेड इन्टरेस्ट है । हमारे मोहन देव जी ने
[ श्री शिव कुमार सिंह ठ कर] बुरहानपुर में पड़ी डकैती में बहुत प्रशंसनीय कार्य किया था, उनको श्रापकी ओर से एप्रीसिएशन लेटर भेजे जायें । मेरा आपसे यह भी निवेदन है कि भिण्ड दतीया को मिला कर एक पोस्ट आफ़िस डिवीजन होना चाहिए । मेरा आप से यह भी निवेदन है कि भिण्ड दिल्ली आगरा कानपुर डायरेक्ट लाइन होनी चाहिए । भिंड से दतिया वाया लहार दबो सीधे लाइन है, लेकिन बात ठीक तरह से नहीं होती है । ग्वालियर होकर होती है । इसलिए वहां पर बात ठीक से हो सके, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए । इन्हीं शब्दों के साथ में संचार मंत्रालय की मांगों का समर्थन करता हूं । MR. DEPUTY-SPEAKER: There are तीन or चार Members who have to speak. If they stick to पाँच minutes each, I will allow them. Now, Mr. Vyas may speak. श्री गिरधारी लाल व्यास : उपाध्यक्ष महोदय, मैं संचार मंत्रालय की मांगों का समर्थन करता हूं और जो कठिनाइयां हैं, उनकी ओर ध्यान प्राकर्षित करना चाहता हूं । लम्बीचौड़ी बात करने से कोई फ़ायदा नहीं है, क्योंकि समय कम है । सबसे पहली कठिनाई यह है कि भीलवाड़ा में टेलीफोन एक्सचेंज की कोई अपनी बिल्डिंग नहीं है । आपने पैसे की स्वीकृति दे दी है, लेकिन बिल्डिंग नहीं बन पा रही है । दो-तीन साल से जब से मैं इस पार्लियामेंट का मैम्बर बना हूं, मैं लगातार कहता आ रहा हूं । दो साल से आपने पैसा भी मंजूर कर दिया है, कलैक्टर ने जमीन भी दे दी है, लेकिन बिल्डिंग नहीं बन पा रही है । प्राप कृपया करके बिल्डिंग बनाने की व्यवस्था of Communications चार हज़ार पाँच सौ अट्ठाईस कीजिए । सौ लाइन के टेलीफोन एक्सचेंज के लिए आपने जो बिल्डिंग किराए पर ली थी, अब वहां पर वहां पर दो हज़ार लाइनें हो गई हैं । फ़िर भी वही बिल्डिंग चल रही है, इसलिए लोग कहते हैं कि टेलीफोन की व्यवस्था खराब है । आप नई बिल्डिंग बना दीजिए तो सारी व्यवस्था ठीक हो जाएगी। इसमें आपका भी नाम होगा और हमारी सरकार की भी वाह-वाही होगी । मेरा दूसरा निवेदन यह है कि टैलेक्स सिस्टम आपने वहां पर स्वीकृत किया है । लोग उसको लेने के लिए तैयार हैं । लेकिन आप डिपार्टमेंट की तरफ से नोटिस दे दी गई कि क्योंकि दस आदमियों ने नहीं लिया, इसलिए हम इसको हटाते हैं । वहां पर लोग लेने के लिए तैयार हैं, इसलिए आपने जो नोटिस दी है, उसको विद ड्रा कीजिए । मेरा तीसरा निवेदन यह है कि भीलवाड़ा डिस्ट्रिक्ट हैडक्वार्टर हैं । इसकी दो तहसीलें ऐसी हैं, असीन्द और जहाजपुर, जो डायरेक्ट नहीं मिली हुई हैं । आदमी बस में बैठकर भीलवाड़ा हो कर लौट आए, तब तक भी टेलीफोन नहीं मिलता है । इसमें दस-पन्द्रह किलोमीटर से ज्यादा लाइन नहीं मिलानी है । इसलिए मेरा निवेदन है कि असीन्द और जहाजपुर को भीलवाड़ा से मिला दिया जाए तो मेरी कान्स्टीचूयेंसी की प्राधी आबादी को बहुत बड़ा फायदा पहुंचेगा । इसलिए इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही की जानी चाहिए । पीशून्यसीशून्यओशून्य को खोलने के लिए मैं बराबर दो साल से कह रहा हूं । एक शम्भूगढ़ का पीशून्यसीशून्यप्रोशून्य आपने दो साल में खोला है, बाकी कोई नहीं खोला है । वहां पर ऐसे बड़े-बड़े गांव हैं, जिनकी D.G., 'बयासी-'तिरासी-Min. CHAITRA तीस, एक हज़ार नौ सौ चार of Communications चार सौ चौवन • सात-सात हजार की आबादी है । जैसे अन्टाली, जंगपुरा, सरेणी, निम्बा हेडा, आसीन्द तहसील कारोई, बरूदणी, स्टेशन सरेणी और बोरापावहां पर पीशून्यसीशून्य ग्रोशून्य खोलने के लिए वर्षों से पैरवी की जा रही है, लेकिन पता नहीं क्या कारण है कि पीशून्यसीशून्यप्रोशून्य नहीं खोले जा रहे हैं । मेरा आपसे निवेदन है कि जल्दी से जल्दी पीशून्यसीशून्यप्रोशून्य खुलवा दिए जायें । एक निवेदन मैं यह कहना चाहता हूं कि एक्सट्रा डिपार्टमेंटल पोस्ट आफिस जो लोग काम करते हैं, उनके बारे में कहना चाहता हूं । उनको आप पचहत्तर रुपयाशून्य देते हैं, अब शायद उसको एक सौ पचास रुपयाशून्य कर दिया है । क्या एक सौ पचास रुपयाशून्य मिनिमम वेज के अन्तर्गत आता है ? जब आप आठ रुपया, दस रुपया या बारह रुपयाशून्य मिनिमम वेज देते हैं, किसी भी माइनिंग में आप देख लीजिए, अन्य डिपार्टमेंट में देख लीजिए, वहां दस रुपए मिनिमम वेज हो गई है । जब कि आप एक्सट्रा डिपार्टमेंटल पोस्ट आफिसेस में केवल एक सौ पचास रुपयाशून्य देते हैं । उनको पूरा पैसा नहीं मिलता है, इसलिए वे पूरा नहीं देते हैं और इस तरह की गड़बड़ियां होती हैं । यदि उनको पूरा पैसा कलर्क का दिया जाएगा, तो ये लोग एफिशियेंटली पोस्ट आफिस रन कर सकेंगे । इसी प्रकार नियुक्तियों में भी बड़ी धांधलेबाजी होती है । आपके जो अधिकारी लोग हैं, इन्सपैक्टर लोग हैं, वे मन-माने तरीके से अपने लोगों को नियुक्त कर देते हैं । इस संबंध में चुने हुए प्रतिनिधियों, एमशून्यपीशून्य या एमशून्यपलशून्यएजशून्य से भी कोई राय नहीं ली जाती है । इसलिए इसमें निश्चित तरीके से वहां के जनप्रतिनिधियों की या वहां के पंचायत के लोगों की राय ली जानी चाहिए । फ़लिया गांव में सात गांव में सात हजार से ज्यादा की आबादी है, इसलिए इसको सब पोस्ट आफिस बनाया जाए । वहां पर जो एक्सट्रा डिपार्टमेंटल पोस्ट आफिस है, उसमें जो आदमी काम करता है, उसको पचहत्तर रुपयाशून्य तनख्वाह मिलती थी । वह अपने पचहत्तर रुपयाशून्य कायम रखने के लिए वहां की आमदनी पूरी नहीं बताता है और बराबर आपके डिपार्टमेंट के लोग कहते हैं कि आमदनी नहीं है, इस वजह से उसको सब पोस्ट आफिस नहीं बनाया जा सकता है । वह इतना बड़ा कसबा है और उसके आसपास सौ पोस्ट आफिस होंगे, यदि इसको बना दिया जाएगा तो निश्चित तरीके से आपके विभाग की आमदनी बढ़ेगी । इसलिए इस व्यवस्था को किया जाना चाहिए । फुलिया को सब पोस्ट आफिस बनाया जाना चाहिए । बिल्डिंग बनाने के बारे में मैं यह कहना चाहता हूं कि बनेडा, गुलाबपुरा और माडल में पोस्ट आफिस की बिल्डिंग बनाई जानी चाहिए। पंचायत व म्यूनि सिपैलिटी बोर्ड ने आपको जमीन दे दी है और इस संबंध में मैं बराबर दो साल से आपसे कहता आ रहा हूं, लेकिन आपका डिपार्टमेंट कहता है कि यह काम नहीं हो सकता है । इस व्यवस्था को भी आपको जल्दी से जल्दी ठीक करा देना चाहिए । टेलीफोन की व्यवस्था भी निश्चित तरीके से काफी आगे बढ़ी है, मगर उसमें भी काफी सुधार की आवश्यकता है । मैं कोई बुराई नहीं करना चाहता हूं, क्योंकि अपनी सरकार की बुराई करना कोई अच्छी बात नहीं है, लेकिन जो खराबियां हैं, उनको निश्चित तरीके से दूर कीजिए । डागा जी ने ठीक कहा कि दस-दस और पंद्रह-पंद्रह साल से एक आदमी एक जगह पर जमा हुआ है, क्योंकि उसका वहां पर वैस्टेड इन्टरेस्ट है । हमारे मोहन देव जी ने
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन में उपयोग की गई 3डी प्रिंटेड बायोरिएक्टर प्रौद्योगिकी अल्जाइमर्स एवं पार्किन्संस जैसे तंत्रिका-तंत्र विकारों और कैंसर संबंधी मेडिकल एवं उपचार से जुड़ी नयी खोजों में तेजी लाने में मददगार हो सकती है। आईआईटी मद्रास के वक्तव्य में बताया गया है कि 3डी प्रिंटेड बायोरिएक्टर इस अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं ने विकसित किया है। अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं का कहना है कि इस शोध का प्रमुख उद्देश्य मस्तिष्क ऊतकों के विकसित होने की कार्यप्रणाली को बेहतर तरीके से समझना है। चाहे कोविड-19 के लिए पूर्व-चिकित्सीय अध्ययन हों, कैंसर की दवा की खोज हो, या फिर मनुष्यों के उपयोग से जुड़ी अन्य दवाओं का मामला, सेल कल्चर (कोशिका संवर्द्धन) को मानव अंगों के मॉडल की पुष्टि करने से संबंधित मूलभूत चरणों में से एक माना जाता है। हालांकि, दवाओं के प्रभाव की बेहतर समझ प्राप्त करने के दौरान कोशिकाओं को विकसित करने की लंबी अवधि में, और वास्तविक समय में उनका अध्ययन करने में, शोधकर्ताओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वर्तमान सेल कल्चर प्रोटोकॉल्स में इनक्यूबेशन और इमेजिंग दोनों के लिए अलग-अलग चेंबर होते हैं। इसमें आवश्यकता यह होती है कि कोशिकाएं इमेजिंग चेंबर से भौतिक रूप से रूप स्थानांतरित हों। हालांकि, इस प्रक्रिया में गलत नतीजों और संदूषण की आशंका बढ़ जाती है। इसी जोखिम को कम करने के लिए आईआईटी मद्रास और एमआईटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा समाधान खोजा है, जो कोशिकाओं को निर्बाध रूप से विकसित होने के लिए आधार उपलब्ध कराता है। शोधकर्ताओं ने 3डी प्रिंटेड माइक्रो-इनक्यूबेटर और इमेजिंग चेंबर विकसित किया है, जो हथेली में समा जाने वाली एक सरल संरचना है। इसमें दीर्घकालिक मानव मस्तिष्क कोशिकाओं के कल्चर और वास्तविक समय में इमेजिंग को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया है। आईआईटी मद्रास द्वारा इन्क्यूबेट स्टार्टअप आईएसएमओ बायो-फोटॉनिक्स के सीईओ एवं इस अध्ययन के प्रमुख शोधार्थी इकरम खान एस. आई. ने बताया कि 'यह तकनीक हेल्थकेयर और फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री में दूरगामी महत्व रखने वाली है। किसी मरीज को दवा देकर उसके परिणाम जानने में डॉक्टर को समय लग सकता है। आईआईटी मद्रास के सेंटर फॉर कम्प्यूटेशनल ब्रेन रिसर्च (सीसीबीआर) के अनुदान, और एमआईटी के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन के आधार पर यह अध्ययन किया गया है। भारत में इस तकनीक का पेटेंट करा लिया गया है, और शोधकर्ता अब इस तकनीक को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन में उपयोग की गई तीनडी प्रिंटेड बायोरिएक्टर प्रौद्योगिकी अल्जाइमर्स एवं पार्किन्संस जैसे तंत्रिका-तंत्र विकारों और कैंसर संबंधी मेडिकल एवं उपचार से जुड़ी नयी खोजों में तेजी लाने में मददगार हो सकती है। आईआईटी मद्रास के वक्तव्य में बताया गया है कि तीनडी प्रिंटेड बायोरिएक्टर इस अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं ने विकसित किया है। अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं का कहना है कि इस शोध का प्रमुख उद्देश्य मस्तिष्क ऊतकों के विकसित होने की कार्यप्रणाली को बेहतर तरीके से समझना है। चाहे कोविड-उन्नीस के लिए पूर्व-चिकित्सीय अध्ययन हों, कैंसर की दवा की खोज हो, या फिर मनुष्यों के उपयोग से जुड़ी अन्य दवाओं का मामला, सेल कल्चर को मानव अंगों के मॉडल की पुष्टि करने से संबंधित मूलभूत चरणों में से एक माना जाता है। हालांकि, दवाओं के प्रभाव की बेहतर समझ प्राप्त करने के दौरान कोशिकाओं को विकसित करने की लंबी अवधि में, और वास्तविक समय में उनका अध्ययन करने में, शोधकर्ताओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। वर्तमान सेल कल्चर प्रोटोकॉल्स में इनक्यूबेशन और इमेजिंग दोनों के लिए अलग-अलग चेंबर होते हैं। इसमें आवश्यकता यह होती है कि कोशिकाएं इमेजिंग चेंबर से भौतिक रूप से रूप स्थानांतरित हों। हालांकि, इस प्रक्रिया में गलत नतीजों और संदूषण की आशंका बढ़ जाती है। इसी जोखिम को कम करने के लिए आईआईटी मद्रास और एमआईटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा समाधान खोजा है, जो कोशिकाओं को निर्बाध रूप से विकसित होने के लिए आधार उपलब्ध कराता है। शोधकर्ताओं ने तीनडी प्रिंटेड माइक्रो-इनक्यूबेटर और इमेजिंग चेंबर विकसित किया है, जो हथेली में समा जाने वाली एक सरल संरचना है। इसमें दीर्घकालिक मानव मस्तिष्क कोशिकाओं के कल्चर और वास्तविक समय में इमेजिंग को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया है। आईआईटी मद्रास द्वारा इन्क्यूबेट स्टार्टअप आईएसएमओ बायो-फोटॉनिक्स के सीईओ एवं इस अध्ययन के प्रमुख शोधार्थी इकरम खान एस. आई. ने बताया कि 'यह तकनीक हेल्थकेयर और फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री में दूरगामी महत्व रखने वाली है। किसी मरीज को दवा देकर उसके परिणाम जानने में डॉक्टर को समय लग सकता है। आईआईटी मद्रास के सेंटर फॉर कम्प्यूटेशनल ब्रेन रिसर्च के अनुदान, और एमआईटी के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन के आधार पर यह अध्ययन किया गया है। भारत में इस तकनीक का पेटेंट करा लिया गया है, और शोधकर्ता अब इस तकनीक को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
मथुरा। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव वृन्दावन पहुंचे। उन्होंने मघेरा स्थित सीता राम आश्रम में संतों से मन्त्रणा की । लालू यादव ने कहा-राहुल गांधी जोकरी करते रहते हैं,अन्ना हजारे का आप से मोह टूटा,रासलीला मंडी में आप का मंत्री पकड़ा गया।
मथुरा। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव वृन्दावन पहुंचे। उन्होंने मघेरा स्थित सीता राम आश्रम में संतों से मन्त्रणा की । लालू यादव ने कहा-राहुल गांधी जोकरी करते रहते हैं,अन्ना हजारे का आप से मोह टूटा,रासलीला मंडी में आप का मंत्री पकड़ा गया।
मैनपुरी और रामपुर उपचुनाव से पहले सियासी माहौल एक बार फिर से गर्म दिखाई पड़ रहा है। इस बीच शिवपाल यादव ने कहा कि प्रसपा ही असली समाजवादी है। उन्होंने यह भी कहा कि मैनपुरी का चुनाव देश और प्रदेश की तकदीर का फैसला करेगा। मैनपुरी और रामपुर उपचुनाव से पहले प्रसपा प्रमुख शिवपाल यादव ने एक बार फिर सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। गोरखपुर पहुंचे शिवपाल यादव ने कहा कि मैनपुरी का चुनाव देश औऱ प्रदेश की तकदीर का फैसला करने वाला चुनाव होगा। इस चुनाव से बहुत कुछ साफ हो जाएगा। इसी के साथ उन्होंने कहा कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ही असली समाजवादी पार्टी है। शिवपाल यादव ने कहा कि हम लोगों को देश और प्रदेश की लड़ाई लड़ना है। प्रसपा के लोग किसी भी तरह के लालच में आने वाले नहीं हैं। हम लोगों को समाज की लड़ाई लड़नी है। इसीलिए हमारे साथ जो भी लोग है सभी वफादार लोग है। मैनपुरी चुनाव को लेकर उन्होंने कहा जो भी फैसला होगा वह जल्द सभी के सामने होगा।
मैनपुरी और रामपुर उपचुनाव से पहले सियासी माहौल एक बार फिर से गर्म दिखाई पड़ रहा है। इस बीच शिवपाल यादव ने कहा कि प्रसपा ही असली समाजवादी है। उन्होंने यह भी कहा कि मैनपुरी का चुनाव देश और प्रदेश की तकदीर का फैसला करेगा। मैनपुरी और रामपुर उपचुनाव से पहले प्रसपा प्रमुख शिवपाल यादव ने एक बार फिर सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। गोरखपुर पहुंचे शिवपाल यादव ने कहा कि मैनपुरी का चुनाव देश औऱ प्रदेश की तकदीर का फैसला करने वाला चुनाव होगा। इस चुनाव से बहुत कुछ साफ हो जाएगा। इसी के साथ उन्होंने कहा कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ही असली समाजवादी पार्टी है। शिवपाल यादव ने कहा कि हम लोगों को देश और प्रदेश की लड़ाई लड़ना है। प्रसपा के लोग किसी भी तरह के लालच में आने वाले नहीं हैं। हम लोगों को समाज की लड़ाई लड़नी है। इसीलिए हमारे साथ जो भी लोग है सभी वफादार लोग है। मैनपुरी चुनाव को लेकर उन्होंने कहा जो भी फैसला होगा वह जल्द सभी के सामने होगा।
एक वर्ष या एक वर्ष या एक महीने के लिए हो सकता है। इसलिए, एक बैलेंस शीट के विपरीत, मान लें कि पिछले वर्ष की बिक्री या पिछले वर्ष के खर्चों को पी और एल खाते में नहीं दिखाया जा सकता है, जो भी आपने लाभ अर्जित किया है वह विशेष अवधि के लिए एक लाभ है। मुझे आशा है कि आप पी और एल को समझ गए हैं, यदि आपके कोई प्रश्न हैं, तो कृपया उन्हें हमारे चर्चा मंच पर चर्चा करें। अब, हम केवल एक या दो महत्वपूर्ण अवधारणाओं पर विचार करेंगे। एक महत्वपूर्ण अवधारणा आय है क्योंकि हमने यहां राजस्व कहा था; हमने कहा था कि परिचालन से राजस्व मिलता है। (Refer Slide Time: 10:48) Income is the increase in economic benefits during the accounting period in the form of inflows or enhancement of asset or decreases of the liability. The definition of income encompasses revenue and gains. Revenue is an income that arises in the ordinary course of activities. e.g. sales Gains are income, which may or may not arises in the ordinary course of activities. e.g. profit on sale of fixed asset इसलिए, सबसे पहले हमें यह स्पष्ट होना चाहिए कि आय क्या है। अब, एक विशेष लेखांकन अवधि के दौरान आर्थिक लाभ में वृद्धि के रूप में आय को परिभाषित किया गया है। आम तौर पर यह आमदनी या संपत्ति में वृद्धि को दर्शाता है या तो आपको नकदी मिलती है या आपकी कुछ संपत्तियां बढ़ जाती हैं या आपकी देनदारियां कम हो जाती हैं, तो इसे आय कहा जाता है। प्रत्येक आय राजस्व नहीं है, आय दो प्रकार की है। यह राजस्व हो सकता है या यह लाभ हो सकता है। आय जो आपको एक सामान्य व्यावसायिक गतिविधि से या एक दिन से दिन की व्यावसायिक गतिविधि से प्राप्त होती है, उसे राजस्व और आय कहा जाता है, जो एक सामयिक गतिविधि के कारण होता है, क्योंकि एक जीवन भर की गतिविधि को लाभ के रूप में कहा जाता है। इसलिए, हमने पहले से ही एक उदाहरण देखा था कि आपके पास 10 से 15 या 20 वर्षों के बाद जमीन का एक टुकड़ा है। यह आपका सामान्य व्यवसाय नहीं है, आप एक डेवलपर या एक बिल्डर के रूप में नहीं हैं। एक बिल्डर के लिए ज़मीन खरीदना और बेचना सामान्य कोर्स होगा जो राजस्व होगा, लेकिन किसी भी अन्य कंपनी के लिए जमीन की बिक्री या अचल संपत्ति की बिक्री एक जीवन भर की गतिविधि होगी; यह कोई सामान्य या सामान्य गतिविधि नहीं है। तो, अचल संपत्ति की बिक्री से किसी भी लाभ को एक लाभ के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। इसलिए, सभी आय राजस्व में हैं और लाभ पी और एल में ध्यान में रखते हैं कि आइटम संख्या मैं राजस्व है, इसलिए आप वहां कोई लाभ नहीं लिखते हैं। क्या मेरी बात तुम्हारी समझ में आ रही है? तो, जो भी आपके सामान्य ऑपरेशन हैं; यदि सेवाओं के प्रावधान से कोई बिक्री या कोई राजस्व होता है, जो कि आपका सामान्य व्यवसाय होगा। इसके अलावा अन्य आय के रूप में वर्गीकृत किया गया है, तो आप सोचेंगे कि इसे राजस्व कहा जाता है, लेकिन यहां इसे आय कहा जाता है। क्योंकि यहां आप राजस्व के साथ-साथ लाभ भी दिखा सकते हैं जो सामान्य व्यवसायों से नहीं हैं। इसलिए, उदाहरण के लिए, यदि आपके पास शेयरों की खरीद है, तो आपको इस पर कुछ लाभांश मिलेगा या यदि आप बेचकर लाभ कमाते हैं, तो लाभांश के साथ-साथ बिक्री से प्राप्त लाभ दोनों अन्य आय के रूप में दिखाए जाएंगे। उसी तरह, अन्य लाभ भी हैं जिन्हें हमने एक बड़ी भूमि की बिक्री से असाधारण या असाधारण वस्तुओं के रूप में वर्गीकृत किया था। क्या मेरी बात तुम्हारी समझ में आ रही है? (Refer Slide Time: 13:36) Expense is the decrease in economic benefits during the accounting period in the form of outflows or depletion of asset or incurrence of the liability. Expense arises in the ordinary course of activities. e.g. wages Losses may or may not arises in the ordinary course of activities. e.g. loss on sale of fixed asset तो, यहाँ सिर्फ एक वैचारिक समझ है कि आय क्या है। अन्य एक व्यय है। अब लगभग हर कोई खर्च जानता है क्योंकि हर अब और फिर हम कुछ खर्चों पर खर्च करते रहते हैं। तो, व्यय का अर्थ है कि एक सामान्य व्यक्ति के लिए क्या होगा यदि उसकी नकदी कम हो जाती है तो वह व्यक्ति व्यय के रूप में कहता है क्योंकि नकदी का बहिर्वाह होता है। कभी-कभी परिसंपत्ति के मूल्य में कमी होती है जैसे कि संपत्ति में कमी या कभी-कभी अचानक एक नई देनदारियों का निर्माण। यह सब एक साथ आर्थिक लाभ में कमी का कारण बनता है जिसे व्यय के रूप में कहा जाता है। अब, खर्च भी दो प्रकार के होते हैं। जब यह सामान्य पाठ्यक्रम में होता है, तो हम इसे खर्च के रूप में कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप वेतन का भुगतान करते हैं यदि आप किराया देते हैं, यदि आप बिजली का शुल्क देते हैं, यदि आप यात्रा व्यय का भुगतान करते हैं; यह सब खर्चों के उदाहरण हैं। एक अजीब प्रकार का खर्च भी है जिसे नुकसान के रूप में जाना जाता है, इसलिए यह एक सामान्य पाठ्यक्रम में नहीं है । इसलिए, यदि आपके पास खरीद मशीनरी जीवन 5 वर्ष होने की उम्मीद है, तो हर साल आप मूल्यह्रास करेंगे; मूल्यह्रास आपका खर्च है। लेकिन अचानक मशीनरी एक खराब मशीनरी साबित होती है, यह आपके उद्देश्य की सेवा नहीं करती है या तो यह एक पुरानी तकनीक का है या मशीनरी के चलने में कुछ समस्याएं हैं, इसलिए आपको शून्य मूल्य के लिए दूसरे वर्ष में मशीनरी का निपटान करना होगा । तो, पूरी राशि खो जाती है, फिर हम इसे दिन-प्रतिदिन के खर्च के रूप में नहीं कहेंगे, हम इसे मशीनरी की बिक्री पर नुकसान के रूप में कहेंगे और इसे नुकसान के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। क्या आप समझ रहे हैं? तो, ऐसे प्रकार का कोई भी व्यय जो दिन-प्रतिदिन या सामान्य नहीं है, क्या आप इस तरह के किसी भी नुकसान का कोई अन्य उदाहरण दे सकते हैं? तो, मान लीजिए कि आपने एक पेटेंट खरीदा है; पेटेंट में 4 साल का जीवन है, आप उम्मीद कर रहे थे कि प्रौद्योगिकी 4 वर्षों के लिए उपयोग करने योग्य है, लेकिन अगले साल के भीतर एक बेहतर तकनीक आ गई है; मुझे लगता है कि हम सभी ज्ञान युग में हैं। तो, आप जानते हैं कि पिछले साल आपने एक नया मोबाइल खरीदा था, लेकिन इस साल अब आपके पास एक बेहतर मोबाइल उपलब्ध है, इसलिए आपको लगता है कि पुराना मोबाइल पुराना है। इसलिए, उस विशेष पेटेंट को खरीदने में जो भी खर्च होता है, वह किसी काम का नहीं है, आपको इसे लिखना पड़ सकता है, तो यह भी नुकसान का एक उदाहरण है। इसलिए, जैसा कि आपको खर्च मिला है, हम दो प्रकारों में विभाजित हैं। यदि आप P और L पर वापस जाते हैं, तो आप आइटम IV में देख सकते हैं कि जिस शब्द का उपयोग किया गया है वह खर्च है। इसलिए, राजस्व से हम केवल उन वस्तुओं को काटते हैं जो प्रकृति में सामान्य हैं। जो सामान्य नहीं थे, हम उन्हें ज्यादातर असाधारण या कभी-कभी असाधारण और कुछ मामलों में बंद परिचालन से संबंधित के रूप में वर्गीकृत कर रहे हैं, लेकिन आम तौर पर IV में आइटम, इस IV में आइटम दिन के प्रकार के ख़र्चों के दिन हैं। क्या आप समझ रहे हैं? तो, यह ऐसा था जैसे पी और एल अनिवार्य रूप से आय और व्यय की एक सूची है। (Refer Slide Time: 17:03) Matching Concept The matching concept is an accounting practice whereby expenses are recognized in the same accounting period when the related revenues are recognized. The matching concept thus helps avoid misstating earnings for a period. Reporting revenues for a period without reporting the costs of producing those revenues would result in overstated profits. अब, अंतिम भाग में, हम एक महत्वपूर्ण अवधारणा को देखेंगे जिसे मिलान अवधारणा के रूप में जाना जाता है। अब, आय और व्यय को सूचीबद्ध करने की आवश्यकता क्यों है? एक लेखांकन सिद्धांत के कारण की आवश्यकता है जिसे मिलान के रूप में जाना जाता है। इसलिए, लेखांकन मानदंडों के अनुसार या लेखांकन आवश्यकता के अनुसार वर्ष के अंत में, आपको सभी आय और सभी ख़र्चों की एक सूची बनानी होगी। ऐसी आवश्यकता क्यों है? क्योंकि जब तक आप ऐसा नहीं करेंगे कि आप लाभ या यानि नहीं जान पाएंगे, इसीलिए एकाउंटेंट ने यह नियम बनाया है कि आय और व्यय को अवधि के अंत में सूचीबद्ध किया जाना चाहिए और यह शुद्ध परिणाम पी और एल खाते में उपलब्ध होना चाहिए। अब, मिलान अवधारणा कमाई में ग़लतफहमी से बचती है। तो, क्या होता है मान लीजिए कि आपने वर्तमान अवधि में राजस्व उत्पन्न किया है, जो व्यय उस से संबंधित है उसे भी उसी अवधि में मान्यता दी जानी चाहिए। यदि आप अब राजस्व रिकॉर्ड करते हैं, तो आप इस वर्ष में बहुत अधिक मुनाफा दिखाएंगे; व्यय अगले वर्ष में आ जाएगा, लेकिन राजस्व में वह वर्ष नहीं है क्योंकि आप फिर से अगले वर्ष में बहुत अधिक नुकसान दिखाएंगे, जिससे गलत स्थिति पैदा हो जाएगी। इसलिए, मिलान अवधारणा कहती है कि जब भी आप राजस्व को पहचानते हैं, तो उससे संबंधित व्यय को भी पहचानते हैं। तो, न तो पहले वर्ष में अत्यधिक लाभ होता है और अगले वर्ष अचानक होने वाले नुकसान से बचा जाता है। इसी तरह, ऐसा नहीं होना चाहिए कि अब आप व्यय रिकॉर्ड करते हैं, लेकिन आप अगले वर्ष में अचानक राजस्व रिकॉर्ड करते हैं जो एक गलत विवरण भी है। क्या आप इस तरह की घटना का उदाहरण दे सकते हैं कि राजस्व अभी दर्ज किया गया है, लेकिन व्यय बाद में अचानक आता है? मान लें कि आप कुछ आइटम बेच रहे हैं और आप ग्राहक को 5 साल की गारंटी देते हैं, आप अभी राजस्व रिकॉर्ड करते हैं, अब लाभ भी दिखाते हैं, लेकिन गारंटी अगले 5 वर्षों के लिए है; इसका मतलब है, अगले 5 वर्षों में जो भी बेची गई वस्तु पर मरम्मत वगैरह है, हमें वर्ष 2, 3, 4 और 5 में व्यवसाय द्वारा खर्च करना होगा। लेकिन वर्ष 1 में आप सभी राजस्व दर्ज किए जाते हैं। तो, आप इससे कैसे बचेंगे? यदि आप हमारी पिछली कक्षा में याद करते हैं, तो हमने चर्चा की थी कि हम एक प्रावधान बनाते हैं कि गारंटी के कारण कितना खर्च होगा, किसी को पता नहीं है, लेकिन हम वर्ष 2, 3, 4 और 5 के लिए एक उचित प्रावधान बनाएंगे और इसे वर्ष में लिखेंगे। 1. यह मिलान अवधारणा के कारण है। क्या आप किसी अन्य उदाहरण के बारे में सोच सकते हैं? मुझे लगता है कि आपने पिछली दो कक्षाओं में मूल्यह्रास के बारे में सुना है, मूल्यह्रास पर होने वाली थोड़ी चर्चा। उदाहरण के लिए, यदि आप 5 वर्ष की आयु वाले 5 लाख की मशीनरी खरीदते हैं। अब, आपने वर्ष 1 में पूरे 5 लाख का भुगतान किया है, लेकिन आप वर्ष 5 तक लिखी मशीनरी का उपयोग करेंगे। क्या यह सही है कि पूरा व्यय केवल 1 वर्ष में दिखाया गया है? इसका उत्तर नहीं है क्योंकि आप वर्ष 1, 2, 3, 4 और 5 में उस मशीनरी का उपयोग करने जा रहे हैं। इसलिए, उस मशीनरी का उपयोग करके जो राजस्व उत्पन्न होता है, वह 5 वर्षों में फैलता है, इसलिए हम जो करते हैं, उस पर क्या खर्च होता है 5 साल में भी फैल गया। इसलिए, हम जो करते हैं वह विभिन्न प्रकार के प्रावधानों का निर्माण करता है। यदि आपको याद है कि हमने बैलेंस शीट में एक अवधारणा पर चर्चा की थी जिसे प्रावधान कहा जाता है तो प्रावधान की क्या आवश्यकता है क्योंकि मिलान अवधारणा है। उसी तरह से क्यों आपको मूल्यह्रास के लिए प्रदान करना है यह मिलान अवधारणा के कारण भी है; मैं सिर्फ मिलान अवधारणा पर चर्चा कर रहा हूं क्योंकि यह पी और एल के लिए एक आधार है। P और L खाता क्यों तैयार किया गया? यह इस तरह की मिलान अवधारणा के कारण था कि वास्तव में लेखांकन में कई सिद्धांत और अवधारणाएं हैं। इसलिए, जब मैं संबंधित कथन चित्र में आता हूं, तब मैं चर्चा करने जा रहा हूं, ताकि आप अचानक बोर्ड न हों और आप संबंधित विवरण को अवधारणा से संबंधित कर सकें, मुझे आशा है कि आपको मिल रहा है। इसलिए, इस चर्चा के साथ हमने पी पर चर्चा पूरी कर ली है और हमने पहले से ही बैलेंस शीट पर चर्चा की थी, इसलिए अब आप बुनियादी बातों को समझ गए हैं। मुझे पता है कि हमने बाद के सत्रों में कोई केस या समस्याएं नहीं की हैं, लेकिन बयानों की समग्र समझ आपको हो गई है आप इस बयान को पढ़ सकते हैं और एक बार फिर आपको याद दिलाएंगे कि आपको अपनी कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट डाउनलोड करनी है, जिसे आप शुरू करते हैं मेरे व्याख्यान के साथ उनके पी और एल खाते और बैलेंस शीट को पढ़ना। इसलिए, कि आप केवल सैद्धांतिक चर्चा के बजाय वास्तविक वक्तव्य भी देखें, आने वाले सत्रों में हम कुछ प्रासंगिक अवधारणाओं पर चर्चा करेंगे। उदाहरण के लिए, मूल्यह्रास क्या है, आप सूची की गणना कैसे करते हैं और महत्वपूर्ण लेखा नियम क्या हैं। हम इस तरह की कुछ अवधारणाओं पर चर्चा करेंगे और फिर हम पी और एल और बैलेंस शीट की वास्तविक तैयारी करेंगे। उस समय तक उन पी और एल और बैलेंस शीट को पढ़कर अपने आप को तरोताजा रखें। इसलिए, इसके साथ हम यहां रुकेंगे। English Word balance sheet Financial Accounting फाइनेंसियल एकाउंटिंग वित्तीय लेखांकन
एक वर्ष या एक वर्ष या एक महीने के लिए हो सकता है। इसलिए, एक बैलेंस शीट के विपरीत, मान लें कि पिछले वर्ष की बिक्री या पिछले वर्ष के खर्चों को पी और एल खाते में नहीं दिखाया जा सकता है, जो भी आपने लाभ अर्जित किया है वह विशेष अवधि के लिए एक लाभ है। मुझे आशा है कि आप पी और एल को समझ गए हैं, यदि आपके कोई प्रश्न हैं, तो कृपया उन्हें हमारे चर्चा मंच पर चर्चा करें। अब, हम केवल एक या दो महत्वपूर्ण अवधारणाओं पर विचार करेंगे। एक महत्वपूर्ण अवधारणा आय है क्योंकि हमने यहां राजस्व कहा था; हमने कहा था कि परिचालन से राजस्व मिलता है। Income is the increase in economic benefits during the accounting period in the form of inflows or enhancement of asset or decreases of the liability. The definition of income encompasses revenue and gains. Revenue is an income that arises in the ordinary course of activities. e.g. sales Gains are income, which may or may not arises in the ordinary course of activities. e.g. profit on sale of fixed asset इसलिए, सबसे पहले हमें यह स्पष्ट होना चाहिए कि आय क्या है। अब, एक विशेष लेखांकन अवधि के दौरान आर्थिक लाभ में वृद्धि के रूप में आय को परिभाषित किया गया है। आम तौर पर यह आमदनी या संपत्ति में वृद्धि को दर्शाता है या तो आपको नकदी मिलती है या आपकी कुछ संपत्तियां बढ़ जाती हैं या आपकी देनदारियां कम हो जाती हैं, तो इसे आय कहा जाता है। प्रत्येक आय राजस्व नहीं है, आय दो प्रकार की है। यह राजस्व हो सकता है या यह लाभ हो सकता है। आय जो आपको एक सामान्य व्यावसायिक गतिविधि से या एक दिन से दिन की व्यावसायिक गतिविधि से प्राप्त होती है, उसे राजस्व और आय कहा जाता है, जो एक सामयिक गतिविधि के कारण होता है, क्योंकि एक जीवन भर की गतिविधि को लाभ के रूप में कहा जाता है। इसलिए, हमने पहले से ही एक उदाहरण देखा था कि आपके पास दस से पंद्रह या बीस वर्षों के बाद जमीन का एक टुकड़ा है। यह आपका सामान्य व्यवसाय नहीं है, आप एक डेवलपर या एक बिल्डर के रूप में नहीं हैं। एक बिल्डर के लिए ज़मीन खरीदना और बेचना सामान्य कोर्स होगा जो राजस्व होगा, लेकिन किसी भी अन्य कंपनी के लिए जमीन की बिक्री या अचल संपत्ति की बिक्री एक जीवन भर की गतिविधि होगी; यह कोई सामान्य या सामान्य गतिविधि नहीं है। तो, अचल संपत्ति की बिक्री से किसी भी लाभ को एक लाभ के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। इसलिए, सभी आय राजस्व में हैं और लाभ पी और एल में ध्यान में रखते हैं कि आइटम संख्या मैं राजस्व है, इसलिए आप वहां कोई लाभ नहीं लिखते हैं। क्या मेरी बात तुम्हारी समझ में आ रही है? तो, जो भी आपके सामान्य ऑपरेशन हैं; यदि सेवाओं के प्रावधान से कोई बिक्री या कोई राजस्व होता है, जो कि आपका सामान्य व्यवसाय होगा। इसके अलावा अन्य आय के रूप में वर्गीकृत किया गया है, तो आप सोचेंगे कि इसे राजस्व कहा जाता है, लेकिन यहां इसे आय कहा जाता है। क्योंकि यहां आप राजस्व के साथ-साथ लाभ भी दिखा सकते हैं जो सामान्य व्यवसायों से नहीं हैं। इसलिए, उदाहरण के लिए, यदि आपके पास शेयरों की खरीद है, तो आपको इस पर कुछ लाभांश मिलेगा या यदि आप बेचकर लाभ कमाते हैं, तो लाभांश के साथ-साथ बिक्री से प्राप्त लाभ दोनों अन्य आय के रूप में दिखाए जाएंगे। उसी तरह, अन्य लाभ भी हैं जिन्हें हमने एक बड़ी भूमि की बिक्री से असाधारण या असाधारण वस्तुओं के रूप में वर्गीकृत किया था। क्या मेरी बात तुम्हारी समझ में आ रही है? Expense is the decrease in economic benefits during the accounting period in the form of outflows or depletion of asset or incurrence of the liability. Expense arises in the ordinary course of activities. e.g. wages Losses may or may not arises in the ordinary course of activities. e.g. loss on sale of fixed asset तो, यहाँ सिर्फ एक वैचारिक समझ है कि आय क्या है। अन्य एक व्यय है। अब लगभग हर कोई खर्च जानता है क्योंकि हर अब और फिर हम कुछ खर्चों पर खर्च करते रहते हैं। तो, व्यय का अर्थ है कि एक सामान्य व्यक्ति के लिए क्या होगा यदि उसकी नकदी कम हो जाती है तो वह व्यक्ति व्यय के रूप में कहता है क्योंकि नकदी का बहिर्वाह होता है। कभी-कभी परिसंपत्ति के मूल्य में कमी होती है जैसे कि संपत्ति में कमी या कभी-कभी अचानक एक नई देनदारियों का निर्माण। यह सब एक साथ आर्थिक लाभ में कमी का कारण बनता है जिसे व्यय के रूप में कहा जाता है। अब, खर्च भी दो प्रकार के होते हैं। जब यह सामान्य पाठ्यक्रम में होता है, तो हम इसे खर्च के रूप में कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप वेतन का भुगतान करते हैं यदि आप किराया देते हैं, यदि आप बिजली का शुल्क देते हैं, यदि आप यात्रा व्यय का भुगतान करते हैं; यह सब खर्चों के उदाहरण हैं। एक अजीब प्रकार का खर्च भी है जिसे नुकसान के रूप में जाना जाता है, इसलिए यह एक सामान्य पाठ्यक्रम में नहीं है । इसलिए, यदि आपके पास खरीद मशीनरी जीवन पाँच वर्ष होने की उम्मीद है, तो हर साल आप मूल्यह्रास करेंगे; मूल्यह्रास आपका खर्च है। लेकिन अचानक मशीनरी एक खराब मशीनरी साबित होती है, यह आपके उद्देश्य की सेवा नहीं करती है या तो यह एक पुरानी तकनीक का है या मशीनरी के चलने में कुछ समस्याएं हैं, इसलिए आपको शून्य मूल्य के लिए दूसरे वर्ष में मशीनरी का निपटान करना होगा । तो, पूरी राशि खो जाती है, फिर हम इसे दिन-प्रतिदिन के खर्च के रूप में नहीं कहेंगे, हम इसे मशीनरी की बिक्री पर नुकसान के रूप में कहेंगे और इसे नुकसान के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। क्या आप समझ रहे हैं? तो, ऐसे प्रकार का कोई भी व्यय जो दिन-प्रतिदिन या सामान्य नहीं है, क्या आप इस तरह के किसी भी नुकसान का कोई अन्य उदाहरण दे सकते हैं? तो, मान लीजिए कि आपने एक पेटेंट खरीदा है; पेटेंट में चार साल का जीवन है, आप उम्मीद कर रहे थे कि प्रौद्योगिकी चार वर्षों के लिए उपयोग करने योग्य है, लेकिन अगले साल के भीतर एक बेहतर तकनीक आ गई है; मुझे लगता है कि हम सभी ज्ञान युग में हैं। तो, आप जानते हैं कि पिछले साल आपने एक नया मोबाइल खरीदा था, लेकिन इस साल अब आपके पास एक बेहतर मोबाइल उपलब्ध है, इसलिए आपको लगता है कि पुराना मोबाइल पुराना है। इसलिए, उस विशेष पेटेंट को खरीदने में जो भी खर्च होता है, वह किसी काम का नहीं है, आपको इसे लिखना पड़ सकता है, तो यह भी नुकसान का एक उदाहरण है। इसलिए, जैसा कि आपको खर्च मिला है, हम दो प्रकारों में विभाजित हैं। यदि आप P और L पर वापस जाते हैं, तो आप आइटम IV में देख सकते हैं कि जिस शब्द का उपयोग किया गया है वह खर्च है। इसलिए, राजस्व से हम केवल उन वस्तुओं को काटते हैं जो प्रकृति में सामान्य हैं। जो सामान्य नहीं थे, हम उन्हें ज्यादातर असाधारण या कभी-कभी असाधारण और कुछ मामलों में बंद परिचालन से संबंधित के रूप में वर्गीकृत कर रहे हैं, लेकिन आम तौर पर IV में आइटम, इस IV में आइटम दिन के प्रकार के ख़र्चों के दिन हैं। क्या आप समझ रहे हैं? तो, यह ऐसा था जैसे पी और एल अनिवार्य रूप से आय और व्यय की एक सूची है। Matching Concept The matching concept is an accounting practice whereby expenses are recognized in the same accounting period when the related revenues are recognized. The matching concept thus helps avoid misstating earnings for a period. Reporting revenues for a period without reporting the costs of producing those revenues would result in overstated profits. अब, अंतिम भाग में, हम एक महत्वपूर्ण अवधारणा को देखेंगे जिसे मिलान अवधारणा के रूप में जाना जाता है। अब, आय और व्यय को सूचीबद्ध करने की आवश्यकता क्यों है? एक लेखांकन सिद्धांत के कारण की आवश्यकता है जिसे मिलान के रूप में जाना जाता है। इसलिए, लेखांकन मानदंडों के अनुसार या लेखांकन आवश्यकता के अनुसार वर्ष के अंत में, आपको सभी आय और सभी ख़र्चों की एक सूची बनानी होगी। ऐसी आवश्यकता क्यों है? क्योंकि जब तक आप ऐसा नहीं करेंगे कि आप लाभ या यानि नहीं जान पाएंगे, इसीलिए एकाउंटेंट ने यह नियम बनाया है कि आय और व्यय को अवधि के अंत में सूचीबद्ध किया जाना चाहिए और यह शुद्ध परिणाम पी और एल खाते में उपलब्ध होना चाहिए। अब, मिलान अवधारणा कमाई में ग़लतफहमी से बचती है। तो, क्या होता है मान लीजिए कि आपने वर्तमान अवधि में राजस्व उत्पन्न किया है, जो व्यय उस से संबंधित है उसे भी उसी अवधि में मान्यता दी जानी चाहिए। यदि आप अब राजस्व रिकॉर्ड करते हैं, तो आप इस वर्ष में बहुत अधिक मुनाफा दिखाएंगे; व्यय अगले वर्ष में आ जाएगा, लेकिन राजस्व में वह वर्ष नहीं है क्योंकि आप फिर से अगले वर्ष में बहुत अधिक नुकसान दिखाएंगे, जिससे गलत स्थिति पैदा हो जाएगी। इसलिए, मिलान अवधारणा कहती है कि जब भी आप राजस्व को पहचानते हैं, तो उससे संबंधित व्यय को भी पहचानते हैं। तो, न तो पहले वर्ष में अत्यधिक लाभ होता है और अगले वर्ष अचानक होने वाले नुकसान से बचा जाता है। इसी तरह, ऐसा नहीं होना चाहिए कि अब आप व्यय रिकॉर्ड करते हैं, लेकिन आप अगले वर्ष में अचानक राजस्व रिकॉर्ड करते हैं जो एक गलत विवरण भी है। क्या आप इस तरह की घटना का उदाहरण दे सकते हैं कि राजस्व अभी दर्ज किया गया है, लेकिन व्यय बाद में अचानक आता है? मान लें कि आप कुछ आइटम बेच रहे हैं और आप ग्राहक को पाँच साल की गारंटी देते हैं, आप अभी राजस्व रिकॉर्ड करते हैं, अब लाभ भी दिखाते हैं, लेकिन गारंटी अगले पाँच वर्षों के लिए है; इसका मतलब है, अगले पाँच वर्षों में जो भी बेची गई वस्तु पर मरम्मत वगैरह है, हमें वर्ष दो, तीन, चार और पाँच में व्यवसाय द्वारा खर्च करना होगा। लेकिन वर्ष एक में आप सभी राजस्व दर्ज किए जाते हैं। तो, आप इससे कैसे बचेंगे? यदि आप हमारी पिछली कक्षा में याद करते हैं, तो हमने चर्चा की थी कि हम एक प्रावधान बनाते हैं कि गारंटी के कारण कितना खर्च होगा, किसी को पता नहीं है, लेकिन हम वर्ष दो, तीन, चार और पाँच के लिए एक उचित प्रावधान बनाएंगे और इसे वर्ष में लिखेंगे। एक. यह मिलान अवधारणा के कारण है। क्या आप किसी अन्य उदाहरण के बारे में सोच सकते हैं? मुझे लगता है कि आपने पिछली दो कक्षाओं में मूल्यह्रास के बारे में सुना है, मूल्यह्रास पर होने वाली थोड़ी चर्चा। उदाहरण के लिए, यदि आप पाँच वर्ष की आयु वाले पाँच लाख की मशीनरी खरीदते हैं। अब, आपने वर्ष एक में पूरे पाँच लाख का भुगतान किया है, लेकिन आप वर्ष पाँच तक लिखी मशीनरी का उपयोग करेंगे। क्या यह सही है कि पूरा व्यय केवल एक वर्ष में दिखाया गया है? इसका उत्तर नहीं है क्योंकि आप वर्ष एक, दो, तीन, चार और पाँच में उस मशीनरी का उपयोग करने जा रहे हैं। इसलिए, उस मशीनरी का उपयोग करके जो राजस्व उत्पन्न होता है, वह पाँच वर्षों में फैलता है, इसलिए हम जो करते हैं, उस पर क्या खर्च होता है पाँच साल में भी फैल गया। इसलिए, हम जो करते हैं वह विभिन्न प्रकार के प्रावधानों का निर्माण करता है। यदि आपको याद है कि हमने बैलेंस शीट में एक अवधारणा पर चर्चा की थी जिसे प्रावधान कहा जाता है तो प्रावधान की क्या आवश्यकता है क्योंकि मिलान अवधारणा है। उसी तरह से क्यों आपको मूल्यह्रास के लिए प्रदान करना है यह मिलान अवधारणा के कारण भी है; मैं सिर्फ मिलान अवधारणा पर चर्चा कर रहा हूं क्योंकि यह पी और एल के लिए एक आधार है। P और L खाता क्यों तैयार किया गया? यह इस तरह की मिलान अवधारणा के कारण था कि वास्तव में लेखांकन में कई सिद्धांत और अवधारणाएं हैं। इसलिए, जब मैं संबंधित कथन चित्र में आता हूं, तब मैं चर्चा करने जा रहा हूं, ताकि आप अचानक बोर्ड न हों और आप संबंधित विवरण को अवधारणा से संबंधित कर सकें, मुझे आशा है कि आपको मिल रहा है। इसलिए, इस चर्चा के साथ हमने पी पर चर्चा पूरी कर ली है और हमने पहले से ही बैलेंस शीट पर चर्चा की थी, इसलिए अब आप बुनियादी बातों को समझ गए हैं। मुझे पता है कि हमने बाद के सत्रों में कोई केस या समस्याएं नहीं की हैं, लेकिन बयानों की समग्र समझ आपको हो गई है आप इस बयान को पढ़ सकते हैं और एक बार फिर आपको याद दिलाएंगे कि आपको अपनी कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट डाउनलोड करनी है, जिसे आप शुरू करते हैं मेरे व्याख्यान के साथ उनके पी और एल खाते और बैलेंस शीट को पढ़ना। इसलिए, कि आप केवल सैद्धांतिक चर्चा के बजाय वास्तविक वक्तव्य भी देखें, आने वाले सत्रों में हम कुछ प्रासंगिक अवधारणाओं पर चर्चा करेंगे। उदाहरण के लिए, मूल्यह्रास क्या है, आप सूची की गणना कैसे करते हैं और महत्वपूर्ण लेखा नियम क्या हैं। हम इस तरह की कुछ अवधारणाओं पर चर्चा करेंगे और फिर हम पी और एल और बैलेंस शीट की वास्तविक तैयारी करेंगे। उस समय तक उन पी और एल और बैलेंस शीट को पढ़कर अपने आप को तरोताजा रखें। इसलिए, इसके साथ हम यहां रुकेंगे। English Word balance sheet Financial Accounting फाइनेंसियल एकाउंटिंग वित्तीय लेखांकन
बादाम, दूध, काजू जैसे मसालों से मिलकर बनाई गई ठंडाई आपको तरोताजा करने के साथ-साथ दिमाग को शांत करने में मदद करती हैं। आमतौर पर ठंडाई दिवाली, शिवरात्रि और होली जैसे त्योहारों में बनाई जाती हैं। अगर आप घर पर ही स्पेशल ठंडाई बनाना चाहते हैं तो स्वामी रामदेव से जानिए कैसे झट से तैयार करें ठंडाई। स्वामी रामदेव के अनुसार रात को थोड़े से पानी में बादाम, अखरोट, काजू, किशमिश और मुनक्का भिगो दें। सुबह इसमें थोड़ी सी गुलाब की पंखुडिया और सौंफ मिलाकर पेस्ट बना लें। इसके बाद एक जग में दूध और थोड़ी सी कालीमिर्च पाउडर डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। आपकी ठंडाई बनकर तैयार हो गया है।
बादाम, दूध, काजू जैसे मसालों से मिलकर बनाई गई ठंडाई आपको तरोताजा करने के साथ-साथ दिमाग को शांत करने में मदद करती हैं। आमतौर पर ठंडाई दिवाली, शिवरात्रि और होली जैसे त्योहारों में बनाई जाती हैं। अगर आप घर पर ही स्पेशल ठंडाई बनाना चाहते हैं तो स्वामी रामदेव से जानिए कैसे झट से तैयार करें ठंडाई। स्वामी रामदेव के अनुसार रात को थोड़े से पानी में बादाम, अखरोट, काजू, किशमिश और मुनक्का भिगो दें। सुबह इसमें थोड़ी सी गुलाब की पंखुडिया और सौंफ मिलाकर पेस्ट बना लें। इसके बाद एक जग में दूध और थोड़ी सी कालीमिर्च पाउडर डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। आपकी ठंडाई बनकर तैयार हो गया है।
गोरखपुर, 30 जून . अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) पूर्वी Uttar Pradesh क्षेत्र के दो दिवसीय क्षेत्रीय प्राध्यापक वर्ग का समापन Friday को हुआ. 29 और 30 जून को गोकुल अतिथि भवन में आयोजित होने वाले इस वर्ग में अनेक बिंदुओं पर मंथन में हुआ. शिक्षक कार्यकर्ताओं को स्थायी कार्यकर्ता बनाने पर जोर दिया गया. इस दो दिवसीय क्षेत्रीय प्राध्यापक वर्ग में विभिन्न सत्रों में अनेक प्रांतों से आये शिक्षकों ने मंथन में हिस्सा लिया. संगठन और समाज के अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विचार विमर्श कर भविष्य की योजनाओं को मूर्त रूप देने का खाका तैयार किया. वर्ग को संबोधित करते हुए एबीवीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजशरण शाही ने कहा कि अभ्यास वर्गो से हम साधना से सिद्धि की ओर बढ़ते हैं. इसलिए, शिक्षकों को राष्ट्र प्रथम के भाव को लेकर आगे आना होगा; क्योकि शिक्षा को आनंदमय प्रक्रिया बनाने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. उन्होंने कहा कि अभाविप ही एक ऐसा student संगठन है, जिसमें शिक्षक और student कार्यकर्ता दोनों एक साथ संगठनात्मक कार्य को गति देते हैं. हालांकि अभी हमें शिक्षक कार्यकर्ता को स्थायी कार्यकर्ता बनने की दिशा में कार्य करना होगा. इनके मार्गदर्शन में संगठन कार्य को अधिक विस्तार मिल सकेगा. उन्होंने कहा कि यह सदी भारत की सदी है. भारत की सदी केवल अपने देश की ही नहीं, अपितु दुनिया की होगी. आज पूरा विश्व भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है. इसलिए अब समय आ गया है कि हम यह तय करें कि अपने देश के लिए हमारी क्या भूमिका हो सकती है. एबीवीपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नागेश ठाकुर ने कहा कि पूर्व जन्मों के बहुत सारे पुण्य जब संचित होते हैं, तब जाकर कोई व्यक्ति एक शिक्षक बनता है. आज भारतीय समाज को चाणक्य जैसे शिक्षकों की जरुरत है. अध्यापक का कार्य आजीविका प्राप्त करना नहीं, बल्कि उच्च आदर्शपूर्ण कार्य करना है. इस दौरान उन्होंने अभाविप को एक महासागर बताया. इस क्षेत्रीय प्राध्यापक वर्ग में आये प्रतिभागियों को Rashtriya Swayamsevak Sangh (आरएसएस) पूर्वी, Uttar Pradesh क्षेत्र के सह-प्रचार प्रमुख मनोजकांत, एबीवीपी पूर्वी Uttar Pradesh के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही, गोरक्ष प्रांत के संगठन मंत्री हरिदेव आदि का भी मार्गदर्शन मिला.
गोरखपुर, तीस जून . अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पूर्वी Uttar Pradesh क्षेत्र के दो दिवसीय क्षेत्रीय प्राध्यापक वर्ग का समापन Friday को हुआ. उनतीस और तीस जून को गोकुल अतिथि भवन में आयोजित होने वाले इस वर्ग में अनेक बिंदुओं पर मंथन में हुआ. शिक्षक कार्यकर्ताओं को स्थायी कार्यकर्ता बनाने पर जोर दिया गया. इस दो दिवसीय क्षेत्रीय प्राध्यापक वर्ग में विभिन्न सत्रों में अनेक प्रांतों से आये शिक्षकों ने मंथन में हिस्सा लिया. संगठन और समाज के अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विचार विमर्श कर भविष्य की योजनाओं को मूर्त रूप देने का खाका तैयार किया. वर्ग को संबोधित करते हुए एबीवीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजशरण शाही ने कहा कि अभ्यास वर्गो से हम साधना से सिद्धि की ओर बढ़ते हैं. इसलिए, शिक्षकों को राष्ट्र प्रथम के भाव को लेकर आगे आना होगा; क्योकि शिक्षा को आनंदमय प्रक्रिया बनाने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. उन्होंने कहा कि अभाविप ही एक ऐसा student संगठन है, जिसमें शिक्षक और student कार्यकर्ता दोनों एक साथ संगठनात्मक कार्य को गति देते हैं. हालांकि अभी हमें शिक्षक कार्यकर्ता को स्थायी कार्यकर्ता बनने की दिशा में कार्य करना होगा. इनके मार्गदर्शन में संगठन कार्य को अधिक विस्तार मिल सकेगा. उन्होंने कहा कि यह सदी भारत की सदी है. भारत की सदी केवल अपने देश की ही नहीं, अपितु दुनिया की होगी. आज पूरा विश्व भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है. इसलिए अब समय आ गया है कि हम यह तय करें कि अपने देश के लिए हमारी क्या भूमिका हो सकती है. एबीवीपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नागेश ठाकुर ने कहा कि पूर्व जन्मों के बहुत सारे पुण्य जब संचित होते हैं, तब जाकर कोई व्यक्ति एक शिक्षक बनता है. आज भारतीय समाज को चाणक्य जैसे शिक्षकों की जरुरत है. अध्यापक का कार्य आजीविका प्राप्त करना नहीं, बल्कि उच्च आदर्शपूर्ण कार्य करना है. इस दौरान उन्होंने अभाविप को एक महासागर बताया. इस क्षेत्रीय प्राध्यापक वर्ग में आये प्रतिभागियों को Rashtriya Swayamsevak Sangh पूर्वी, Uttar Pradesh क्षेत्र के सह-प्रचार प्रमुख मनोजकांत, एबीवीपी पूर्वी Uttar Pradesh के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही, गोरक्ष प्रांत के संगठन मंत्री हरिदेव आदि का भी मार्गदर्शन मिला.
कर्नाटक में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव जीत कर सरकार बना ली है। स्थिति यह है की कांग्रेस के लिए जीत से ज्यादा चुनौतीपूर्ण सीएम चुनना साबित हो गया है। क्षत्रपों के बीच तालमेल बिठाने में पार्टी को पसीने छूट जाते हैं। कर्नाटक में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार में खींचतान साफ नजर आई।
कर्नाटक में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव जीत कर सरकार बना ली है। स्थिति यह है की कांग्रेस के लिए जीत से ज्यादा चुनौतीपूर्ण सीएम चुनना साबित हो गया है। क्षत्रपों के बीच तालमेल बिठाने में पार्टी को पसीने छूट जाते हैं। कर्नाटक में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार में खींचतान साफ नजर आई।
UPI Payment: बैंक अकाउंट पूरी तरह खाली होने पर भी कर सकते हैं UPI से पेमेंट, जानिए कैसे उठा सकते हैं इस सुविधा का फायदा देश में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) सिस्टम के जरिए लेनदेन का चलन तेजी से बढ़ा है। हालाँकि, किसी व्यापारी को भुगतान करने के लिए UPI को अभी भी आपके बैंक खाते में धनराशि की आवश्यकता होती है। लेकिन जल्द ही आप खाते में पैसे न होने पर भी भुगतान कर सकेंगे. मालूम हो कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने UPI सिस्टम में लेनदेन के लिए बैंकों द्वारा जारी पूर्व-अनुमोदित क्रेडिट लाइनों को मंजूरी दे दी है। आरबीआई से मंजूरी मिलने के बाद अब बैंकों द्वारा जारी प्री-अप्रूव्ड लोन सर्विस को यूपीआई ट्रांजेक्शन से जोड़ा जाएगा। इससे ग्राहक के खाते में पैसा न होने पर भी बैंक भुगतान कर सकेगा। क्या है ये क्रेडिट लाइन सुविधा? यहां बता दें कि क्रेडिट लाइन सुविधा एक प्रकार का लोन होगा जो बैंकों द्वारा अपने ग्राहकों को पूर्व-अनुमोदित किया जाएगा। इसका मतलब है कि बैंक आपको एक निश्चित ऋण राशि पूर्व-अनुमोदन देगा। जरूरत पड़ने पर आप इस पैसे का इस्तेमाल यूपीआई भुगतान करने के लिए कर सकते हैं। जिसके तहत बैंक आपसे प्री-अप्रूव्ड लोन में से खर्च की गई राशि पर ब्याज वसूलेगा। यूपीआई क्रेडिट लाइन के तहत बैंक आपकी क्रेडिट हिस्ट्री और प्रोफाइल देखकर आपकी लोन सीमा तय करेगा। इसलिए यह सीमा हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकती है. अपनी क्रेडिट लाइन सुविधा का लाभ उठाने के लिए आपको बैंक में आवेदन करना होगा। इसके बाद बैंक इस सुविधा को आपके खाते से लिंक कर देगा। आरबीआई की मंजूरी मिलते ही ज्यादातर सरकारी और निजी बैंक यह सुविधा शुरू कर सकते हैं। एनपीसीआई के प्रबंध निदेशक और सीईओ दिलीप एस्बे ने मंगलवार को कहा कि भारत में यूपीआई के माध्यम से 100 अरब से अधिक लेनदेन को संभालने की क्षमता है। यह देश में यूपीआई के जरिए मौजूदा मासिक लेनदेन का 10 गुना होगा। 2016 में एकीकृत भुगतान प्लेटफॉर्म के रूप में यूपीआई की शुरुआत के बाद से अगस्त महीने में इसके माध्यम से लेनदेन की संख्या 10 अरब को पार कर गई। ग्लोबल फिनटेक इवेंट को संबोधित करते हुए एस्बे ने कहा कि फिलहाल देश में 35 करोड़ लोग यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं और यह संख्या तीन गुना बढ़ने की संभावना है।
UPI Payment: बैंक अकाउंट पूरी तरह खाली होने पर भी कर सकते हैं UPI से पेमेंट, जानिए कैसे उठा सकते हैं इस सुविधा का फायदा देश में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस सिस्टम के जरिए लेनदेन का चलन तेजी से बढ़ा है। हालाँकि, किसी व्यापारी को भुगतान करने के लिए UPI को अभी भी आपके बैंक खाते में धनराशि की आवश्यकता होती है। लेकिन जल्द ही आप खाते में पैसे न होने पर भी भुगतान कर सकेंगे. मालूम हो कि भारतीय रिजर्व बैंक ने UPI सिस्टम में लेनदेन के लिए बैंकों द्वारा जारी पूर्व-अनुमोदित क्रेडिट लाइनों को मंजूरी दे दी है। आरबीआई से मंजूरी मिलने के बाद अब बैंकों द्वारा जारी प्री-अप्रूव्ड लोन सर्विस को यूपीआई ट्रांजेक्शन से जोड़ा जाएगा। इससे ग्राहक के खाते में पैसा न होने पर भी बैंक भुगतान कर सकेगा। क्या है ये क्रेडिट लाइन सुविधा? यहां बता दें कि क्रेडिट लाइन सुविधा एक प्रकार का लोन होगा जो बैंकों द्वारा अपने ग्राहकों को पूर्व-अनुमोदित किया जाएगा। इसका मतलब है कि बैंक आपको एक निश्चित ऋण राशि पूर्व-अनुमोदन देगा। जरूरत पड़ने पर आप इस पैसे का इस्तेमाल यूपीआई भुगतान करने के लिए कर सकते हैं। जिसके तहत बैंक आपसे प्री-अप्रूव्ड लोन में से खर्च की गई राशि पर ब्याज वसूलेगा। यूपीआई क्रेडिट लाइन के तहत बैंक आपकी क्रेडिट हिस्ट्री और प्रोफाइल देखकर आपकी लोन सीमा तय करेगा। इसलिए यह सीमा हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकती है. अपनी क्रेडिट लाइन सुविधा का लाभ उठाने के लिए आपको बैंक में आवेदन करना होगा। इसके बाद बैंक इस सुविधा को आपके खाते से लिंक कर देगा। आरबीआई की मंजूरी मिलते ही ज्यादातर सरकारी और निजी बैंक यह सुविधा शुरू कर सकते हैं। एनपीसीआई के प्रबंध निदेशक और सीईओ दिलीप एस्बे ने मंगलवार को कहा कि भारत में यूपीआई के माध्यम से एक सौ अरब से अधिक लेनदेन को संभालने की क्षमता है। यह देश में यूपीआई के जरिए मौजूदा मासिक लेनदेन का दस गुना होगा। दो हज़ार सोलह में एकीकृत भुगतान प्लेटफॉर्म के रूप में यूपीआई की शुरुआत के बाद से अगस्त महीने में इसके माध्यम से लेनदेन की संख्या दस अरब को पार कर गई। ग्लोबल फिनटेक इवेंट को संबोधित करते हुए एस्बे ने कहा कि फिलहाल देश में पैंतीस करोड़ लोग यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं और यह संख्या तीन गुना बढ़ने की संभावना है।
Water Home Remedies: पानी (Water) पीना सेहत के लिए फायदेमंद है और ये बात हम सभी ने हजारों बार सुनी होगी. शरीर (Body) को हाइड्रेट रखने के लिए पानी बहुत जरूरी है. लेकिन कई बार सादा पानी से काम नहीं चलता और ऐसे में कुछ खाद्य पदार्थों का पानी हमारे शरीर में पोषण पहुंचाता है. ऐसी ही कुछ खास चीजें हैं जिनको खाने के साथ साथ अगर इनका पानी पिया जाए तो ये सेहत को काफी लाभ पहुंचाता है. चलिए जानते हैं ऐसी ही कुछ चीजों के खास पानी के फायदे. चावल सेहत के लिए अच्छा है, इसमें ढेर सारा कार्बोहाइड्रेट होता है. लेकिन चावल के पानी का भी शरीर का ढेर सारा लाभ मिलता है. चावल का पानी पीने से एनर्जी बूस्ट होती है. इसे चेहरे पर लगाने से चेहरे की चमक दोगुनी हो जाती है और चेहरे को भरपूर नैचुरल पोषण मिलता है. इतना ही नहीं अगर चावल का पानी बालों पर लगाया जाए तो बाल मजबूत होते हैं और उनका गिरना कम हो जाता है. नींबू पानी के बारे में तो आप जानते ही हैं. विटामिन सी से भरपूर नींबू पानी वजन कंट्रोल करने का एक बेस्ट विकल्प माना जाता है. इसके सेवन से गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचाव होता है. इससे पाचन तंत्र स्मूथ होता है और इसके अंदर पाया जाने वाला विटामिन सी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. मजबूत प्रतिरोधक क्षमता के चलते शरीर बाहरी बीमारियों का सामना करने के लिए तैयार होता है. नींबू पानी को चेहरे पर लगाएंगे तो आपके चेहरे की चमक बढ़ेगी और चेहरे पर निखार आ जाएगा. सौंफ का पानी वजन घटाने के लिए एक बेस्ट फार्मूला कहा जा सकता है. इसके पाचक एंजाइम्स मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करते हैं जिससे पाचन तंत्र भी स्मूथ हो जाता है और पेट संबंधी दिक्कतें खत्म होती हैं. इसके सेवन से महिलाओं की माहवारी का साइकिल भी दुरुस्त हो जाता है. जिस तरह अदरक शरीर को कई सारे फायदेमंद माना जाता है, उसी प्रकार इसका पानी भी बॉडी के लिए काफी काम की चीज है. अदरक के पानी के सेवन से पाचन तंत्र स्मूथ होता है. इसके सेवन से मेटाबॉलिज्म दुरुस्त होता है और शरीर के टॉक्सिन बाहर निकल जाते हैं. इसके एंटी इंफ्लेमेटरी गुण सिर में या शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द कम करने में सहायक साबित होते हैं. पुदीने का पानी अपनी खुशबू के साथ साथ शरीर को हाईड्रेट रखता है. इसके सेवन से शरीर में जमा सभी तरह के विषाक्त तत्व बाहर निकल जाते हैं. ये पाचन शक्ति को मजबूत करता है और एक्स्ट्रा फैट को पिघला कर बाहर निकाल देता है. इसे चेहरे पर लगाया जाए तो चेहरे की रंगत में सुधार होता है. अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
Water Home Remedies: पानी पीना सेहत के लिए फायदेमंद है और ये बात हम सभी ने हजारों बार सुनी होगी. शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पानी बहुत जरूरी है. लेकिन कई बार सादा पानी से काम नहीं चलता और ऐसे में कुछ खाद्य पदार्थों का पानी हमारे शरीर में पोषण पहुंचाता है. ऐसी ही कुछ खास चीजें हैं जिनको खाने के साथ साथ अगर इनका पानी पिया जाए तो ये सेहत को काफी लाभ पहुंचाता है. चलिए जानते हैं ऐसी ही कुछ चीजों के खास पानी के फायदे. चावल सेहत के लिए अच्छा है, इसमें ढेर सारा कार्बोहाइड्रेट होता है. लेकिन चावल के पानी का भी शरीर का ढेर सारा लाभ मिलता है. चावल का पानी पीने से एनर्जी बूस्ट होती है. इसे चेहरे पर लगाने से चेहरे की चमक दोगुनी हो जाती है और चेहरे को भरपूर नैचुरल पोषण मिलता है. इतना ही नहीं अगर चावल का पानी बालों पर लगाया जाए तो बाल मजबूत होते हैं और उनका गिरना कम हो जाता है. नींबू पानी के बारे में तो आप जानते ही हैं. विटामिन सी से भरपूर नींबू पानी वजन कंट्रोल करने का एक बेस्ट विकल्प माना जाता है. इसके सेवन से गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचाव होता है. इससे पाचन तंत्र स्मूथ होता है और इसके अंदर पाया जाने वाला विटामिन सी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. मजबूत प्रतिरोधक क्षमता के चलते शरीर बाहरी बीमारियों का सामना करने के लिए तैयार होता है. नींबू पानी को चेहरे पर लगाएंगे तो आपके चेहरे की चमक बढ़ेगी और चेहरे पर निखार आ जाएगा. सौंफ का पानी वजन घटाने के लिए एक बेस्ट फार्मूला कहा जा सकता है. इसके पाचक एंजाइम्स मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करते हैं जिससे पाचन तंत्र भी स्मूथ हो जाता है और पेट संबंधी दिक्कतें खत्म होती हैं. इसके सेवन से महिलाओं की माहवारी का साइकिल भी दुरुस्त हो जाता है. जिस तरह अदरक शरीर को कई सारे फायदेमंद माना जाता है, उसी प्रकार इसका पानी भी बॉडी के लिए काफी काम की चीज है. अदरक के पानी के सेवन से पाचन तंत्र स्मूथ होता है. इसके सेवन से मेटाबॉलिज्म दुरुस्त होता है और शरीर के टॉक्सिन बाहर निकल जाते हैं. इसके एंटी इंफ्लेमेटरी गुण सिर में या शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द कम करने में सहायक साबित होते हैं. पुदीने का पानी अपनी खुशबू के साथ साथ शरीर को हाईड्रेट रखता है. इसके सेवन से शरीर में जमा सभी तरह के विषाक्त तत्व बाहर निकल जाते हैं. ये पाचन शक्ति को मजबूत करता है और एक्स्ट्रा फैट को पिघला कर बाहर निकाल देता है. इसे चेहरे पर लगाया जाए तो चेहरे की रंगत में सुधार होता है. अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
४७ कवित्त ( जीवन मुक्ति ) वेद कहे याको ज्ञान, सो तो प्रवल प्रमान । हुये पुरुष जो शंकर, आदि सब गायी है । याते होवत मुक्त, यह पाय के वखत । मिथ्या भास यह जगत, जाको सच्चा जानि धायो है । जीवनमुक्ती जो कहावे, भेद भ्राती को उड़ावे । पुनरावृत्ती को मिटावे, एक ब्रह्म मन लायो है । छूटे धारना औ ध्यान, पाया पद जो महान् । सव ज्ञान औ अज्ञान, ब्रह्म-नीर में बहायो है ।। १७ ।। दोहा - - यह जीवन मुक्ति कही, दूजी कही विदेह । स्थित है निज रूप में, छूटि जाय जब देह । ४८ कवित्त ( विदेह मुक्ति ) कही मुक्की जो विदेह, सो तो झगड़ों का गेह । कीजे कौन से सनेह, नाना भाति कहि रोवते ॥ कोई दोऊ को सुनावे, एक जीवत बतावे । कोई ईश्वर में मिलावे, कोई शुद्ध ब्रम्ह पोते ।। कोई कर्म से घतावे, कोई ध्यानहू ते गावे । कोई वासना मिटावे कोई शिला पत्थर जोवते ॥ कोई लोकों में बताचे, कोई कहे लौटिआवें । नाना झगड़े मचावे, चीर पंक माहिं धोवते ।। १८ ।। विआती यही करो दिन रावी, मन फरि वृद्धि होने झाकार उड़े वासना की हार गुभ ज्ञानफरि साजना ।। देखा जो माम् पद पावना ।। पृष्टि होने परिपक, घोर सक्ष वक्म बामें नहीं , जो समाभी कहे गावना ॥ १५ ॥ बोड़ानिदिध्यासन अषण मनन, तीनो बसते धान ॥ तेहि पर अमरप पभारते, भूपति निश्चय ज्ञान । ४६ कवित्त ( ज्ञान ) बड़ी शान का सवारी देगा हाथ कियो भारी 'अहं' सिफारी, करी, दळवित्र आाय के ।। दूओ राव या अज्ञान, सो धो सबध मैदान । छूटे ज्ञान के बान, पोधा चाया है पाब के ॥ अचान एल मारे वादे ज्ञान के मगारे । दोनो अयमय कभरे, निम अमाय के ।। पाया राज भो गुप छुप जीवत मुक्त । तीनों का मेना जगत कई एक गत्रमवि मठि गाय के ॥ १६ ॥ वोशजीव नहीं तू ग्रह्म है, अविनाशी मिरबान । बजे दंढोरा पेद का, करें इसी को ज्ञान ।। कहानी, कछु मनन धरत है । जान्या आपको असंग, चढ़ काहू का न रंग । जाने जीत्यो अति जग, सो तो मार्यो ना मरत है ॥ २० ॥ काल नगारे शीस पै, डंका ज्ञान लगाय । सब कल्पित निजरूप में विचरत सहज सुभाव । ५१ कवित्त ( पूर्वोक्त लक्षण) कभी तीर्थों में जावे, कभी मरूभूमि आवे । कभी भोजन अतिखावे, कभी भूखों ही रहत है ॥ राखै काहुसेना काम, रहे दिल में आराम, एक आतम में धाम, निजरूप में चरत है । करने योग किया काज, तजी जगत् की लाज । मिथ्या जाने सब राज, स्वयं राज को करत है ।। देह इन्द्रिय अरु मान, मन रहत है दीवान, बुद्धि नारी है महान, चित् चिंतन करत है ॥ २१ ॥ जपै ईश को न जाप, मिटा भेद भरम पाप । स्वयंरूप चिदाकाश कोई समसध्ययमानते, कोइकर्मसमरूपवाद । भागम मिगम पुराम का, सार गई कोई साथ । ४९ कवित्त ( जीवन मुक्तों का व्यवहार ) जीवनमुक्त, निकेक्षण व्यकाष्पक नहीं विषयों में आसफ सो ठो साम माना साजते ।। कभी कटी में लिये हाथ माहीं सोटो। कभी सोरी ना लंगोटी, नागे बिराजये । कमी भ्यान को निजरूप में समाये कमी दृष्म मन कम नहीं ये कभी को विचारें कमी वाक्य मारें, कमी मौन ही को भारें, कर्म सिंह सम गाजते ॥ १९ ॥ बोडातिमके वचयको खम्बें, जिनको जाम्या बच । बाध्य अर्थ को स्पागि के, निर्भया ५० कवित्त (पूर्वोक्त लक्षण) आम नाही आति कुछ धर्म नाहीं । मम को परन माई स्थत ही भरत है। कोई कहे जीवन् सुत, कोई बिचम भासक । ठगि लायो सारा जगव, माना षेप ही को पारवे कोई आने दत्व, ज्ञानो वास बोसे भीठी बानी । सुनस कहानी, कछु मनन धरत हैं । जान्या आपको असंग, चढ़ काहू का न रंग । जाने जीत्यो अति जग, सो तो मार्यो ना मरत है ॥ २२ ॥ दोद्दा - med på काल नगारे शीस पै डंका ज्ञान लगाय । सब कल्पित निजरूप में विचरत सहज सुभाय ॥ ५१ कवित्त ( पूर्वोक्त लक्षण ) कभी तीर्थों में जावे, कभी मरूभूमि आवे । कभी भोजन अतिखावे, कभी भूखों ही रहत है ॥ राखे काहुसे ना काम, रहे दिल में आराम, एक आतम मे धाम, निजरूप में चरत है । करने योग किया काज, तजी जगत् की लाज । मिथ्या जाने सब राज, स्वयं राज को करत है ॥ देह इन्द्रिय अरु मान, मन रहत है दीवान, बुद्धि नारी है महान, चित् चिंतन करत है ॥ २१ ॥ जपै ईश को न जाप, मिटा भेद भरम पाप । स्वयंरूप चिदाकाश
सैंतालीस कवित्त वेद कहे याको ज्ञान, सो तो प्रवल प्रमान । हुये पुरुष जो शंकर, आदि सब गायी है । याते होवत मुक्त, यह पाय के वखत । मिथ्या भास यह जगत, जाको सच्चा जानि धायो है । जीवनमुक्ती जो कहावे, भेद भ्राती को उड़ावे । पुनरावृत्ती को मिटावे, एक ब्रह्म मन लायो है । छूटे धारना औ ध्यान, पाया पद जो महान् । सव ज्ञान औ अज्ञान, ब्रह्म-नीर में बहायो है ।। सत्रह ।। दोहा - - यह जीवन मुक्ति कही, दूजी कही विदेह । स्थित है निज रूप में, छूटि जाय जब देह । अड़तालीस कवित्त कही मुक्की जो विदेह, सो तो झगड़ों का गेह । कीजे कौन से सनेह, नाना भाति कहि रोवते ॥ कोई दोऊ को सुनावे, एक जीवत बतावे । कोई ईश्वर में मिलावे, कोई शुद्ध ब्रम्ह पोते ।। कोई कर्म से घतावे, कोई ध्यानहू ते गावे । कोई वासना मिटावे कोई शिला पत्थर जोवते ॥ कोई लोकों में बताचे, कोई कहे लौटिआवें । नाना झगड़े मचावे, चीर पंक माहिं धोवते ।। अट्ठारह ।। विआती यही करो दिन रावी, मन फरि वृद्धि होने झाकार उड़े वासना की हार गुभ ज्ञानफरि साजना ।। देखा जो माम् पद पावना ।। पृष्टि होने परिपक, घोर सक्ष वक्म बामें नहीं , जो समाभी कहे गावना ॥ पंद्रह ॥ बोड़ानिदिध्यासन अषण मनन, तीनो बसते धान ॥ तेहि पर अमरप पभारते, भूपति निश्चय ज्ञान । छियालीस कवित्त बड़ी शान का सवारी देगा हाथ कियो भारी 'अहं' सिफारी, करी, दळवित्र आाय के ।। दूओ राव या अज्ञान, सो धो सबध मैदान । छूटे ज्ञान के बान, पोधा चाया है पाब के ॥ अचान एल मारे वादे ज्ञान के मगारे । दोनो अयमय कभरे, निम अमाय के ।। पाया राज भो गुप छुप जीवत मुक्त । तीनों का मेना जगत कई एक गत्रमवि मठि गाय के ॥ सोलह ॥ वोशजीव नहीं तू ग्रह्म है, अविनाशी मिरबान । बजे दंढोरा पेद का, करें इसी को ज्ञान ।। कहानी, कछु मनन धरत है । जान्या आपको असंग, चढ़ काहू का न रंग । जाने जीत्यो अति जग, सो तो मार्यो ना मरत है ॥ बीस ॥ काल नगारे शीस पै, डंका ज्ञान लगाय । सब कल्पित निजरूप में विचरत सहज सुभाव । इक्यावन कवित्त कभी तीर्थों में जावे, कभी मरूभूमि आवे । कभी भोजन अतिखावे, कभी भूखों ही रहत है ॥ राखै काहुसेना काम, रहे दिल में आराम, एक आतम में धाम, निजरूप में चरत है । करने योग किया काज, तजी जगत् की लाज । मिथ्या जाने सब राज, स्वयं राज को करत है ।। देह इन्द्रिय अरु मान, मन रहत है दीवान, बुद्धि नारी है महान, चित् चिंतन करत है ॥ इक्कीस ॥ जपै ईश को न जाप, मिटा भेद भरम पाप । स्वयंरूप चिदाकाश कोई समसध्ययमानते, कोइकर्मसमरूपवाद । भागम मिगम पुराम का, सार गई कोई साथ । उनचास कवित्त जीवनमुक्त, निकेक्षण व्यकाष्पक नहीं विषयों में आसफ सो ठो साम माना साजते ।। कभी कटी में लिये हाथ माहीं सोटो। कभी सोरी ना लंगोटी, नागे बिराजये । कमी भ्यान को निजरूप में समाये कमी दृष्म मन कम नहीं ये कभी को विचारें कमी वाक्य मारें, कमी मौन ही को भारें, कर्म सिंह सम गाजते ॥ उन्नीस ॥ बोडातिमके वचयको खम्बें, जिनको जाम्या बच । बाध्य अर्थ को स्पागि के, निर्भया पचास कवित्त आम नाही आति कुछ धर्म नाहीं । मम को परन माई स्थत ही भरत है। कोई कहे जीवन् सुत, कोई बिचम भासक । ठगि लायो सारा जगव, माना षेप ही को पारवे कोई आने दत्व, ज्ञानो वास बोसे भीठी बानी । सुनस कहानी, कछु मनन धरत हैं । जान्या आपको असंग, चढ़ काहू का न रंग । जाने जीत्यो अति जग, सो तो मार्यो ना मरत है ॥ बाईस ॥ दोद्दा - med på काल नगारे शीस पै डंका ज्ञान लगाय । सब कल्पित निजरूप में विचरत सहज सुभाय ॥ इक्यावन कवित्त कभी तीर्थों में जावे, कभी मरूभूमि आवे । कभी भोजन अतिखावे, कभी भूखों ही रहत है ॥ राखे काहुसे ना काम, रहे दिल में आराम, एक आतम मे धाम, निजरूप में चरत है । करने योग किया काज, तजी जगत् की लाज । मिथ्या जाने सब राज, स्वयं राज को करत है ॥ देह इन्द्रिय अरु मान, मन रहत है दीवान, बुद्धि नारी है महान, चित् चिंतन करत है ॥ इक्कीस ॥ जपै ईश को न जाप, मिटा भेद भरम पाप । स्वयंरूप चिदाकाश
रांचीः इस महीने से ऑस्ट्रेलिया में टी20 वर्ल्ड कप (T20 World Cup 2022) खेला जाने वाला है। इस बड़े टूर्नामेंट के लिए भारतीत टीम ऑस्ट्रेलिया पहुंच गई है। वहीं, वर्ल्ड कप की टीम में चुने जाने के वजह से एक खिलाड़ी ने अपना दर्द बयां किया है। हम बात कर रहे हैं, भारतीय टीम में 'लॉर्ड' के नाम से मशहूर शार्दुल ठाकुर (Shardul Thakur) की। शार्दुल ठाकुर को टी20 विश्व कप के लिए नहीं चुने जाने की 'बड़ी निराशा' है।
रांचीः इस महीने से ऑस्ट्रेलिया में टीबीस वर्ल्ड कप खेला जाने वाला है। इस बड़े टूर्नामेंट के लिए भारतीत टीम ऑस्ट्रेलिया पहुंच गई है। वहीं, वर्ल्ड कप की टीम में चुने जाने के वजह से एक खिलाड़ी ने अपना दर्द बयां किया है। हम बात कर रहे हैं, भारतीय टीम में 'लॉर्ड' के नाम से मशहूर शार्दुल ठाकुर की। शार्दुल ठाकुर को टीबीस विश्व कप के लिए नहीं चुने जाने की 'बड़ी निराशा' है।
कन्नौज/देहरादून, 12 फरवरी (एजेंसी) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को उत्तर-प्रदेश की तुलना गुजरात से करते हुए कहा कि एक समय गुजरात में भी दंगे हुआ करते थे, मगर भाजपा के सत्ता में आने पर गुजरात की ही तरह उत्तर प्रदेश में भी फसाद की घटनाएं बंद हो गयीं। नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी सभा में विपक्षी दलों पर दंगाइयों को आश्रय देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुझे याद है कि एक समय था जब गुजरात में भी ऐसी ही स्थिति थी। कांग्रेस के वर्षों के शासन में वहां ऐसी स्थितियां बना दी गई थीं कि न तो व्यापार फलता-फूलता था और न लोग सुरक्षित महसूस करते थे। हर साल अनेक दंगे होते थे। वहां पर छोटी-छोटी बातों को लेकर दंगा हो जाया करता था। इसी तरह के दुष्चक्र में गुजरात लंबे अरसे तक फंसा हुआ था। गुजरात के लोगों ने जब भाजपा को मौका दिया तो स्थितियां बदलना शुरू हो गईं। हमने सबसे बड़ी प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को दी। इसी का नतीजा है कि पिछले दो दशकों से गुजरात में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ। इसी तरह, उत्तर प्रदेश में गुंडागर्दी और माफिया शाही को बंद करने का काम योगी जी की सरकार ही कर सकती है। योगी के नेतृत्व में सरकार ने जिस तरह से दंगों को रोका है, हमें उसे स्थाई रूप देना है। उधर, चुनाव प्रचार के आखिरी दिन उधमसिंह नगर जिले के रूद्रपुर में भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना करने की कांग्रेस की योजना को 'तुष्टिकरण का एजेंडा' बताते हुए पूछा कि क्या जनता देवभूमि के इस अपमान को सहन करेगी। देश के पहले रक्षा प्रमुख दिवंगत बिपिन रावत का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के एक नेता ने उन्हें 'सड़क का गुंडा' तक कहा था। उन्होंने उत्तराखंड की जनता से आगामी विधानसभा चुनाव में उनसे इसका बदला लेने का आह्वान भी किया।
कन्नौज/देहरादून, बारह फरवरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को उत्तर-प्रदेश की तुलना गुजरात से करते हुए कहा कि एक समय गुजरात में भी दंगे हुआ करते थे, मगर भाजपा के सत्ता में आने पर गुजरात की ही तरह उत्तर प्रदेश में भी फसाद की घटनाएं बंद हो गयीं। नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी सभा में विपक्षी दलों पर दंगाइयों को आश्रय देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुझे याद है कि एक समय था जब गुजरात में भी ऐसी ही स्थिति थी। कांग्रेस के वर्षों के शासन में वहां ऐसी स्थितियां बना दी गई थीं कि न तो व्यापार फलता-फूलता था और न लोग सुरक्षित महसूस करते थे। हर साल अनेक दंगे होते थे। वहां पर छोटी-छोटी बातों को लेकर दंगा हो जाया करता था। इसी तरह के दुष्चक्र में गुजरात लंबे अरसे तक फंसा हुआ था। गुजरात के लोगों ने जब भाजपा को मौका दिया तो स्थितियां बदलना शुरू हो गईं। हमने सबसे बड़ी प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को दी। इसी का नतीजा है कि पिछले दो दशकों से गुजरात में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ। इसी तरह, उत्तर प्रदेश में गुंडागर्दी और माफिया शाही को बंद करने का काम योगी जी की सरकार ही कर सकती है। योगी के नेतृत्व में सरकार ने जिस तरह से दंगों को रोका है, हमें उसे स्थाई रूप देना है। उधर, चुनाव प्रचार के आखिरी दिन उधमसिंह नगर जिले के रूद्रपुर में भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना करने की कांग्रेस की योजना को 'तुष्टिकरण का एजेंडा' बताते हुए पूछा कि क्या जनता देवभूमि के इस अपमान को सहन करेगी। देश के पहले रक्षा प्रमुख दिवंगत बिपिन रावत का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के एक नेता ने उन्हें 'सड़क का गुंडा' तक कहा था। उन्होंने उत्तराखंड की जनता से आगामी विधानसभा चुनाव में उनसे इसका बदला लेने का आह्वान भी किया।
( 1 ) एकमात्र सरकारी एकाधिकार वाले उद्योग - इस श्रेणी मे 3 उद्योग रखे गए - अस्त्र-शस्त्र का निर्माण, अणुशक्ति का उत्पादन और रेलवे एवं यातायात तथा डाक-तार । यह निश्चित किया गया कि इसकी स्थापना और विकास का दायित्व पूर्णरूप से सरकार के एकाधिकार में ही रहेगा। ( 11 ) सरकार नियन्त्रित क्षेत्र - इस श्रेणी के अन्तर्गत 6 उद्योग रखे गएकोयला, लोहा व इस्पात, हवाई जहाज निर्माण, समुद्री जहाज निर्माण, टेलीफोन तथा बेतार उपक्रमो का निर्माण । इन उद्योगो के सम्बन्ध मे तीन महत्त्वपूर्ण बातें कही गयी थी ) इस श्रेणी के उद्योगो मे नयी इकाइयो की स्थापना केन्द्रीय व प्रान्तीय सरकारी अथवा अन्य सार्वजनिक संस्थाओ द्वारा की जा सकती है । ( ब ) इन उद्योगो से सम्बन्धित वर्तमान इकाइयो को दस वर्ष तक विकसित होने का पूर्ण अवसर दिया जाएगा। दस वर्षों के पश्चात् ही इन उद्योगो के राष्ट्रीयकरण के प्रश्न पर विचार किया जाएगा । यदि राज्य किसी औद्योगिक इकाई को अपने अधिकार मे लेगा तो उसका उचित मुआवजा दिया जाएगा। ( स ) सिद्धान्त के रूप में सरकारी उपक्रम राज्य के नियन्त्रण मे सार्वजनिक निगमो के रूप मे चलाए जाएँगे । ( 111 ) सरकारी नियन्त्रण तथा नियमन के अन्तर्गत उद्योग - इन श्रेणी मे 15 आधारभूत महत्त्व के उद्योग सरकार के नियन्त्रण तथा निर्देशन मे रखे गए, तथा इस श्रेणी में रखे गए प्रमुख उद्योग ये थे • नमक, मोटर, ट्रैक्टर, इलेक्ट्रिकल्स इजीनियरिंग भारी रसायन, भारी मशीन, अल्कोहल, सूती तथा ऊनी वस्त्र, सीमेट, चीनी, कागज, जल तथा वायु यातायात आदि । ये उद्योग निजी क्षेत्र मे रहेगे और इनको राष्ट्रीयकरण का कोई भय नही रहेगा। परन्तु इन उद्योगो मे भी सरकार नई इकाइयाँ स्थापित कर सकती है । (1v ) अन्य उद्योग - शेष सभी उद्योग सामान्यत निजी तथा सहकारी उपक्रम के लिए छोड दिए गए। यदि किसी उद्योग की प्रगति सन्तोषजनक नही रही तो सरकार को हस्तक्षेप करने का अधिकार है। 3 फुटीर तथा लघु उद्योग - औद्योगिक नीति मे इन उद्योगो के महत्त्व को स्वीकार किया गया । क्योकि इनमे व्यक्तिगत, ग्रामीण तथा सहकारी उपक्रम सभव होते है । ऐसे उद्योग स्थानीय साधनों के पूर्ण उपभोग तथा कुछ उपभोग-योग्य वस्तुओ के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दृष्टि से उपयोगी होते है । प्रस्ताव मे यह भी कहा गया है कि विशाल उद्योगो के साथ इनका समन्वय किया जाना चाहिए । 4 श्रमनीति - औद्योगिक विकास के लिए श्रम के महत्त्व को भी स्वीकार किया गया और कहा गया कि सरकार श्रमिको की स्थिति सुधारने का प्रयत्न करेगी। उद्योगों के लाभ मे श्रमिको को भी हिस्सा मिलेगा । उद्योगों में संचालन के लिए श्रमिको को भागीदार बनाने का प्रयत्न किया जाएगा । औद्योगिक झगड़ो के फैसले के लिए उचित व्यवस्था की जाएगी तथा श्रमिको की गृह- समस्या के समाधान के लिए आगामी 10 वर्षों में 10 लाख मकान बनाए जाएँगे । 5. तटकर नीति व कर नीति- सरकार की तटकर नीति इस प्रकार की होगी कि उपभोक्ताओ पर अनावश्यक भार डाले बिना, देश के साधनो का उपभोग किया जा सके और अनावश्यक विदेशी प्रतिस्पर्धा को रोका जा सके । यह भी कहा गया कि करप्रणाली मे आवश्यक सुधार किया जाएगा, ताकि पूंजीगत नियोजन व बचत मे वृद्धि हो सके और कुछ व्यक्तियों के हाथ में ही सम्पत्तियो का संकेन्द्रण न हो सके। 6. विदेशी पूंजी - सरकार विदेशी पूंजी का स्वागत करेगी यदि उसे के हित मे समझा गया। यदि विदेशी पूंजी का राष्ट्रीयकरण किया गया तो उचित मुआवजा दिया जायगा । 7. वितरण - प्रस्ताव मे कहा गया कि वर्तमान समय मे उत्पादन वृद्धि पर जो दिया जायगा और वितरण की समस्या पर भविष्य में विचार किया जाएगा। सन् 1948 की नीति की आलोचनात्मक समीक्षा - सन् 1948 की नीति पर टीका-टिप्पणी मिश्रित रही । कुछ व्यक्तियों ने इसका स्वागत किया। श्री मीनू मसानी के अनुसार " इस नीति के द्वारा प्रजातंत्रात्मक समाजवाद की नीव डाली गयी ।" प्रो० रगा के अनुसार "यह नीति गाँधीवाद की विजय थी।" इसके विपरीत कुछ प्रमुख पूंजीपतियों ने इसको एक मार्गीय तथा निजी उपक्रमो के प्रति पक्षपात कहकर इसकी निन्दा की । प्रो० के० टी० शाह के अनुसार, "यह वह नीति नही थी जिसे एक प्रगतिशील तथा उन्नति की आशा रखने वाले देश को अपनाना चाहिए।" श्री वी० के० आर० वी० राव ने इस औद्योगिक नीति को 'ढुलमुल' बताया था । भारत सरकार की सन् 1956 की औद्योगिक नीति सन् 1948 की औद्योगिक नीति लगभग 8 वर्षों तक चलती रही, परन्तु इन वर्षों मे भारत की राजनैतिक एवं आर्थिक व्यवस्था मे अनेक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए, जिनके कारण औद्योगिक नीति में परिवर्तन की आवश्यकता पडी। सक्षेप मे सन् 1948 की औद्योगिक नीति में संशोधन की अनिवार्यता के प्रमुख कारण निम्न थे (1) भारतीय संविधान - भारत का नवीन संविधान 26 जनवरी सन् 1950 को लागू किया गया, जिसमे जनता को कुछ मौलिक अधिकारी का आश्वासन दिया गया और राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वो का उल्लेख किया गया। अतः यह आवश्यक समझा गया कि संविधान की धाराओं के अनुसार ही औद्योगिक नीति को रखा जाय । (2) द्वितीय पंचवर्षीय योजना--देश में आर्थिक नियोजन का कार्य संगठित ढंग से 1 अप्रैल 1956 से आरम्भ हुआ। योजना के अनुभवो को ध्यान में रखते हुए भारत में औद्योगिक विकास आवश्यक समझा गया । (3) समाजवादी समाज की स्थापना - दिसम्बर सन् 1953 में भारतीय संसद ने देश में समाजवादी ढांचे की सामाजिक व्यवस्था का निर्माण अपनी सामा
एकमात्र सरकारी एकाधिकार वाले उद्योग - इस श्रेणी मे तीन उद्योग रखे गए - अस्त्र-शस्त्र का निर्माण, अणुशक्ति का उत्पादन और रेलवे एवं यातायात तथा डाक-तार । यह निश्चित किया गया कि इसकी स्थापना और विकास का दायित्व पूर्णरूप से सरकार के एकाधिकार में ही रहेगा। सरकार नियन्त्रित क्षेत्र - इस श्रेणी के अन्तर्गत छः उद्योग रखे गएकोयला, लोहा व इस्पात, हवाई जहाज निर्माण, समुद्री जहाज निर्माण, टेलीफोन तथा बेतार उपक्रमो का निर्माण । इन उद्योगो के सम्बन्ध मे तीन महत्त्वपूर्ण बातें कही गयी थी ) इस श्रेणी के उद्योगो मे नयी इकाइयो की स्थापना केन्द्रीय व प्रान्तीय सरकारी अथवा अन्य सार्वजनिक संस्थाओ द्वारा की जा सकती है । इन उद्योगो से सम्बन्धित वर्तमान इकाइयो को दस वर्ष तक विकसित होने का पूर्ण अवसर दिया जाएगा। दस वर्षों के पश्चात् ही इन उद्योगो के राष्ट्रीयकरण के प्रश्न पर विचार किया जाएगा । यदि राज्य किसी औद्योगिक इकाई को अपने अधिकार मे लेगा तो उसका उचित मुआवजा दिया जाएगा। सिद्धान्त के रूप में सरकारी उपक्रम राज्य के नियन्त्रण मे सार्वजनिक निगमो के रूप मे चलाए जाएँगे । सरकारी नियन्त्रण तथा नियमन के अन्तर्गत उद्योग - इन श्रेणी मे पंद्रह आधारभूत महत्त्व के उद्योग सरकार के नियन्त्रण तथा निर्देशन मे रखे गए, तथा इस श्रेणी में रखे गए प्रमुख उद्योग ये थे • नमक, मोटर, ट्रैक्टर, इलेक्ट्रिकल्स इजीनियरिंग भारी रसायन, भारी मशीन, अल्कोहल, सूती तथा ऊनी वस्त्र, सीमेट, चीनी, कागज, जल तथा वायु यातायात आदि । ये उद्योग निजी क्षेत्र मे रहेगे और इनको राष्ट्रीयकरण का कोई भय नही रहेगा। परन्तु इन उद्योगो मे भी सरकार नई इकाइयाँ स्थापित कर सकती है । अन्य उद्योग - शेष सभी उद्योग सामान्यत निजी तथा सहकारी उपक्रम के लिए छोड दिए गए। यदि किसी उद्योग की प्रगति सन्तोषजनक नही रही तो सरकार को हस्तक्षेप करने का अधिकार है। तीन फुटीर तथा लघु उद्योग - औद्योगिक नीति मे इन उद्योगो के महत्त्व को स्वीकार किया गया । क्योकि इनमे व्यक्तिगत, ग्रामीण तथा सहकारी उपक्रम सभव होते है । ऐसे उद्योग स्थानीय साधनों के पूर्ण उपभोग तथा कुछ उपभोग-योग्य वस्तुओ के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दृष्टि से उपयोगी होते है । प्रस्ताव मे यह भी कहा गया है कि विशाल उद्योगो के साथ इनका समन्वय किया जाना चाहिए । चार श्रमनीति - औद्योगिक विकास के लिए श्रम के महत्त्व को भी स्वीकार किया गया और कहा गया कि सरकार श्रमिको की स्थिति सुधारने का प्रयत्न करेगी। उद्योगों के लाभ मे श्रमिको को भी हिस्सा मिलेगा । उद्योगों में संचालन के लिए श्रमिको को भागीदार बनाने का प्रयत्न किया जाएगा । औद्योगिक झगड़ो के फैसले के लिए उचित व्यवस्था की जाएगी तथा श्रमिको की गृह- समस्या के समाधान के लिए आगामी दस वर्षों में दस लाख मकान बनाए जाएँगे । पाँच. तटकर नीति व कर नीति- सरकार की तटकर नीति इस प्रकार की होगी कि उपभोक्ताओ पर अनावश्यक भार डाले बिना, देश के साधनो का उपभोग किया जा सके और अनावश्यक विदेशी प्रतिस्पर्धा को रोका जा सके । यह भी कहा गया कि करप्रणाली मे आवश्यक सुधार किया जाएगा, ताकि पूंजीगत नियोजन व बचत मे वृद्धि हो सके और कुछ व्यक्तियों के हाथ में ही सम्पत्तियो का संकेन्द्रण न हो सके। छः. विदेशी पूंजी - सरकार विदेशी पूंजी का स्वागत करेगी यदि उसे के हित मे समझा गया। यदि विदेशी पूंजी का राष्ट्रीयकरण किया गया तो उचित मुआवजा दिया जायगा । सात. वितरण - प्रस्ताव मे कहा गया कि वर्तमान समय मे उत्पादन वृद्धि पर जो दिया जायगा और वितरण की समस्या पर भविष्य में विचार किया जाएगा। सन् एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस की नीति की आलोचनात्मक समीक्षा - सन् एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस की नीति पर टीका-टिप्पणी मिश्रित रही । कुछ व्यक्तियों ने इसका स्वागत किया। श्री मीनू मसानी के अनुसार " इस नीति के द्वारा प्रजातंत्रात्मक समाजवाद की नीव डाली गयी ।" प्रोशून्य रगा के अनुसार "यह नीति गाँधीवाद की विजय थी।" इसके विपरीत कुछ प्रमुख पूंजीपतियों ने इसको एक मार्गीय तथा निजी उपक्रमो के प्रति पक्षपात कहकर इसकी निन्दा की । प्रोशून्य केशून्य टीशून्य शाह के अनुसार, "यह वह नीति नही थी जिसे एक प्रगतिशील तथा उन्नति की आशा रखने वाले देश को अपनाना चाहिए।" श्री वीशून्य केशून्य आरशून्य वीशून्य राव ने इस औद्योगिक नीति को 'ढुलमुल' बताया था । भारत सरकार की सन् एक हज़ार नौ सौ छप्पन की औद्योगिक नीति सन् एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस की औद्योगिक नीति लगभग आठ वर्षों तक चलती रही, परन्तु इन वर्षों मे भारत की राजनैतिक एवं आर्थिक व्यवस्था मे अनेक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए, जिनके कारण औद्योगिक नीति में परिवर्तन की आवश्यकता पडी। सक्षेप मे सन् एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस की औद्योगिक नीति में संशोधन की अनिवार्यता के प्रमुख कारण निम्न थे भारतीय संविधान - भारत का नवीन संविधान छब्बीस जनवरी सन् एक हज़ार नौ सौ पचास को लागू किया गया, जिसमे जनता को कुछ मौलिक अधिकारी का आश्वासन दिया गया और राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वो का उल्लेख किया गया। अतः यह आवश्यक समझा गया कि संविधान की धाराओं के अनुसार ही औद्योगिक नीति को रखा जाय । द्वितीय पंचवर्षीय योजना--देश में आर्थिक नियोजन का कार्य संगठित ढंग से एक अप्रैल एक हज़ार नौ सौ छप्पन से आरम्भ हुआ। योजना के अनुभवो को ध्यान में रखते हुए भारत में औद्योगिक विकास आवश्यक समझा गया । समाजवादी समाज की स्थापना - दिसम्बर सन् एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में भारतीय संसद ने देश में समाजवादी ढांचे की सामाजिक व्यवस्था का निर्माण अपनी सामा
अक्सर महिलाओं को लगता है कि पुरुष सिर्फ उनकी खूबसूरती पर ही ध्यान देते हैं लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। पुरुष महिलाओं में खूबसूरती के अलावा भी कई चीजों पर गौर करते हैं। तो अगर आपको किसी पुरुष को अपनी ओर आकर्षित करना है तो ये टिप्स आपके काम के हो सकते हैं। लड़कियों को लगता है कि लड़कों को स्लिम या जीरो फिगर वाली लड़कियां पसंद होती हैं, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। बल्कि लड़कों को मोटी लड़कियां और कर्व्स फिगर वाली लड़कियां ज्यादा भांती हैं। अगर कोई लड़का आपको पसंद करता है और आप भी उसे पसंद करती हैं तो उससे किसी भी तरह की बात करने में झिझके नहीं। शुरू में ऐसी बातें करने में थोड़ा अटपटा लग सकता है लेकिन लड़कों को वे लड़कियां पसंद होती है जो बिंदास होकर उनसे अपनी बातें शेयर करें। लड़कों को शर्माने वाली लड़कियां खास पसंद नहीं होतीं। इसलिए अगर किसी लड़के को आप पसंद करती हैं तो उससे आई कॉन्टेक्ट बनाएं और दिखाएं कि आप किसी से डरती नहीं हैं। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ज्यादातर लड़कों को बिना मेकअप वाली लड़कियां पसंद आती है। इसलिए अगर आप किसी लड़के को आकर्षित करना चाहती हैं तो मेकअप पर पैसा खर्च ना करें और जैसी हैं वैसी ही उसके सामने जाएं।
अक्सर महिलाओं को लगता है कि पुरुष सिर्फ उनकी खूबसूरती पर ही ध्यान देते हैं लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। पुरुष महिलाओं में खूबसूरती के अलावा भी कई चीजों पर गौर करते हैं। तो अगर आपको किसी पुरुष को अपनी ओर आकर्षित करना है तो ये टिप्स आपके काम के हो सकते हैं। लड़कियों को लगता है कि लड़कों को स्लिम या जीरो फिगर वाली लड़कियां पसंद होती हैं, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। बल्कि लड़कों को मोटी लड़कियां और कर्व्स फिगर वाली लड़कियां ज्यादा भांती हैं। अगर कोई लड़का आपको पसंद करता है और आप भी उसे पसंद करती हैं तो उससे किसी भी तरह की बात करने में झिझके नहीं। शुरू में ऐसी बातें करने में थोड़ा अटपटा लग सकता है लेकिन लड़कों को वे लड़कियां पसंद होती है जो बिंदास होकर उनसे अपनी बातें शेयर करें। लड़कों को शर्माने वाली लड़कियां खास पसंद नहीं होतीं। इसलिए अगर किसी लड़के को आप पसंद करती हैं तो उससे आई कॉन्टेक्ट बनाएं और दिखाएं कि आप किसी से डरती नहीं हैं। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ज्यादातर लड़कों को बिना मेकअप वाली लड़कियां पसंद आती है। इसलिए अगर आप किसी लड़के को आकर्षित करना चाहती हैं तो मेकअप पर पैसा खर्च ना करें और जैसी हैं वैसी ही उसके सामने जाएं।
सोहेल खान उसके बेटे का दोस्त था। करीब दो साल से वह उसके घर आ रहा था। सोहेल भी उसे अपने बेटे जैसा ही लगता। लेकिन, उसी सोहेल ने पहले नहाते हुए उसका वीडियो बनाया। फिर उसे वायरल करने की धमकी देकर रेप किया और पैसे भी वसूले। घटना मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले की है। सोहेल खान पर अपने दोस्त की माँ के साथ रेप का आरोप है। पीड़ित महिला द्वारा उसकी करतूतों की शिकायत पुलिस से किए जाने के बाद से आरोपित फरार है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता के घर में सोहेल का आना-जाना लगभग 2 साल से था। एक दिन सोहेल ने नहाते समय दोस्त के माँ की आपत्तिजनक वीडियो बनाई। साथ ही कुछ फोटो भी खींच लिए। कुछ दिनों बाद उसने वही फोटो और वीडियो दिखा कर पीड़िता को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। वीडियो वायरल करने की धमकी दे कर आरोपित ने कई बार उससे रेप किया। कुछ दिनों बाद सोहेल पीड़िता से पैसे की माँग करने लगा। उसने धमका कर 25 हजार रुपए ऐंठ भी लिए। साथ ही आए दिन मारपीट भी करने लगा। बाद में सोहेल पीड़िता पर अपने पति से अलग होकर उसके साथ रहने का दबाव बनाने लगा। ऐसा न करने पर वह उसके बेटे और पति को जान से मार देने की धमकी देने लगा। मिली जानकारी के मुताबिक पीड़िता ग्वालियर के मेवाती मोहल्ले में रहती है। एक रात सोहेल ने उसके घर मे घुस कर हंगामा भी किया। पीड़िता के पति ने भी सोहेल को समझाने की कोशिश की तो उसके साथ भी गाली-गलौज की। साथ ही धमकियाँ भी दी। मजबूर हो महिला ने इसकी शिकायत बहोड़ापुर थाने में की। SHO अमर सिंह सिकरवार ने बताया कि पुलिस आरोपित को खोज रही है। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
सोहेल खान उसके बेटे का दोस्त था। करीब दो साल से वह उसके घर आ रहा था। सोहेल भी उसे अपने बेटे जैसा ही लगता। लेकिन, उसी सोहेल ने पहले नहाते हुए उसका वीडियो बनाया। फिर उसे वायरल करने की धमकी देकर रेप किया और पैसे भी वसूले। घटना मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले की है। सोहेल खान पर अपने दोस्त की माँ के साथ रेप का आरोप है। पीड़ित महिला द्वारा उसकी करतूतों की शिकायत पुलिस से किए जाने के बाद से आरोपित फरार है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता के घर में सोहेल का आना-जाना लगभग दो साल से था। एक दिन सोहेल ने नहाते समय दोस्त के माँ की आपत्तिजनक वीडियो बनाई। साथ ही कुछ फोटो भी खींच लिए। कुछ दिनों बाद उसने वही फोटो और वीडियो दिखा कर पीड़िता को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। वीडियो वायरल करने की धमकी दे कर आरोपित ने कई बार उससे रेप किया। कुछ दिनों बाद सोहेल पीड़िता से पैसे की माँग करने लगा। उसने धमका कर पच्चीस हजार रुपए ऐंठ भी लिए। साथ ही आए दिन मारपीट भी करने लगा। बाद में सोहेल पीड़िता पर अपने पति से अलग होकर उसके साथ रहने का दबाव बनाने लगा। ऐसा न करने पर वह उसके बेटे और पति को जान से मार देने की धमकी देने लगा। मिली जानकारी के मुताबिक पीड़िता ग्वालियर के मेवाती मोहल्ले में रहती है। एक रात सोहेल ने उसके घर मे घुस कर हंगामा भी किया। पीड़िता के पति ने भी सोहेल को समझाने की कोशिश की तो उसके साथ भी गाली-गलौज की। साथ ही धमकियाँ भी दी। मजबूर हो महिला ने इसकी शिकायत बहोड़ापुर थाने में की। SHO अमर सिंह सिकरवार ने बताया कि पुलिस आरोपित को खोज रही है। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
बाबासाहब आंबेडकर जब कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद भारत लोटे तो बड़ौदा के महाराजा ने उन्हें बड़ौदा राज्य के लेजिस्लेटिव असेंबली का सदस्य बनाया,. बड़ोदा के राजा को उस समय के शासकों में सबसे बड़ा समाज सुधारक माना जाता था. आंबेडकर भी उसका काफी प्रभाव पड़ा. संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर को वंचितों, गरीबो और शोषितों का मसीहा बनाने में एक राजा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. बड़ौदा के तत्कालीन महाराजा सायाजीराव गायकवाड़ ने अंबेडकर की उस वक्त मदद की, जब उनके सामने आगे पढ़ाई करने का संकट खड़ा हो गया था. आइए हम आपको बताते हैं कि बड़ौदा के राजा ने एक दलित को कैसे करोड़ों लोगों का मसीहा बना दिया. महाराज के अंबेडकर के साथ हमेशा मधुर संबंध रहे. अंबेडकर का दलितों के उत्थान में बहुत बड़ा हाथ है. वहीं महाराज ने अंबेडकर को अपना उद्देश्य पूरा करने में पूरी मदद की. आंबेडकर का जीवन गरीबी में बीता था. इसी के साथ उन्होंने बचपन से जाति के आधार पर काफी भेदभाव झेला था. आंबेडकर जब युवा थे और वो उच्च एजुकेशन के लिए विदेश जाना चाहते थे. लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे. ऐसे में कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने में बड़ौदा के तत्कालीन महाराजा सायाजीराव गायकवाड़ तृतीय ने उनकी आर्थिक मदद की. आंबेडकर ने साल 1913 में विदेश में पढ़ाई करने के लिए उनके पास आर्थिक मदद का आवेदन भेजा. उनके आवेदन को स्वीकार करते हुए उन्होंने आंबेडकर को सालाना स्कॉलरशिप देने का फैसला लिया. इस तरह आंबेडकर का विदेश में पढ़ने का सपना साकार हुआ. आंबेडकर जब कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद भारत लोटे तो बड़ौदा के महाराजा ने उन्हें बड़ौदा राज्य के लेजिस्लेटिव असेंबली का सदस्य बनाया. बड़ोदा के राजा को उस समय के शासकों में सबसे बड़ा समाज सुधारक माना जाता था. आंबेडकर भी उसका काफी प्रभाव पड़ा. संविधान के निर्माण के समय आंबेडकर की सोच में भी ये नजर आया. दरअसल महाराज ने अपने शासनकाल के दौरान राज्य में अनुसूचित जाति के लोगों के चुनाव लड़ने का कानून बनाया. इसके अलावा उन्होंने आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों के साथ-साथ महिलाओं और पिछड़े वर्ग के लिए कई योजनाएं चलाईं. ये भी पढ़ें-देश के सबसे पढ़े लिखे शख्स बाबा साहेब भगवदगीता के घोर आलोचक क्यों थे?
बाबासाहब आंबेडकर जब कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद भारत लोटे तो बड़ौदा के महाराजा ने उन्हें बड़ौदा राज्य के लेजिस्लेटिव असेंबली का सदस्य बनाया,. बड़ोदा के राजा को उस समय के शासकों में सबसे बड़ा समाज सुधारक माना जाता था. आंबेडकर भी उसका काफी प्रभाव पड़ा. संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर को वंचितों, गरीबो और शोषितों का मसीहा बनाने में एक राजा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. बड़ौदा के तत्कालीन महाराजा सायाजीराव गायकवाड़ ने अंबेडकर की उस वक्त मदद की, जब उनके सामने आगे पढ़ाई करने का संकट खड़ा हो गया था. आइए हम आपको बताते हैं कि बड़ौदा के राजा ने एक दलित को कैसे करोड़ों लोगों का मसीहा बना दिया. महाराज के अंबेडकर के साथ हमेशा मधुर संबंध रहे. अंबेडकर का दलितों के उत्थान में बहुत बड़ा हाथ है. वहीं महाराज ने अंबेडकर को अपना उद्देश्य पूरा करने में पूरी मदद की. आंबेडकर का जीवन गरीबी में बीता था. इसी के साथ उन्होंने बचपन से जाति के आधार पर काफी भेदभाव झेला था. आंबेडकर जब युवा थे और वो उच्च एजुकेशन के लिए विदेश जाना चाहते थे. लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे. ऐसे में कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने में बड़ौदा के तत्कालीन महाराजा सायाजीराव गायकवाड़ तृतीय ने उनकी आर्थिक मदद की. आंबेडकर ने साल एक हज़ार नौ सौ तेरह में विदेश में पढ़ाई करने के लिए उनके पास आर्थिक मदद का आवेदन भेजा. उनके आवेदन को स्वीकार करते हुए उन्होंने आंबेडकर को सालाना स्कॉलरशिप देने का फैसला लिया. इस तरह आंबेडकर का विदेश में पढ़ने का सपना साकार हुआ. आंबेडकर जब कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद भारत लोटे तो बड़ौदा के महाराजा ने उन्हें बड़ौदा राज्य के लेजिस्लेटिव असेंबली का सदस्य बनाया. बड़ोदा के राजा को उस समय के शासकों में सबसे बड़ा समाज सुधारक माना जाता था. आंबेडकर भी उसका काफी प्रभाव पड़ा. संविधान के निर्माण के समय आंबेडकर की सोच में भी ये नजर आया. दरअसल महाराज ने अपने शासनकाल के दौरान राज्य में अनुसूचित जाति के लोगों के चुनाव लड़ने का कानून बनाया. इसके अलावा उन्होंने आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों के साथ-साथ महिलाओं और पिछड़े वर्ग के लिए कई योजनाएं चलाईं. ये भी पढ़ें-देश के सबसे पढ़े लिखे शख्स बाबा साहेब भगवदगीता के घोर आलोचक क्यों थे?
पीएम मोदी भी पहले ही कर चुके है। सरकार लगातार मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने पर जोर देती रही है लेकिन अंतरिम बजट में विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए कोई घोषणा नहीं हुई। इसके साथ ही जीएसटी की दर भी घटने की उम्मीद थी लेकिन इस पर कोई घोषणा नहीं हुई। म्यूचुअल फंड : बजट में पीयूष गोयल ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। निवेशकों को उम्मीद थी कि पिछले बजट में लगाए गए लांग टर्म कैपिटर गैन टैक्स को वापस लिया जाएगा। न तो इसे हटाया गया और न ही इसकी सीमा को बढ़ाया गया। हालांकि आयकर छूट सीमा बढ़ने से लोगों को पहले से ज्यादा बचत होगी और इसका फायदा इस इंडस्ट्री को मिलने की उम्मीद है। सोना : सोना पर लगने वाला आयात शुल्क को भी 10 प्रतिशत से कुछ कम होने की उम्मीद थी। अगर सरकार ऐसा कोई कदम उठाती तो देश में सोने की खपत बढ़ जाती। हालांकि सरकार ने यह कदम नहीं उठाकर सोने में दिलचस्पी रखने वालों को निराश ही किया। शेयर और कमोडिटी : बजट से शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट दोनों में ही निराशा देखी गई। लांग टर्म कैपिटर गैन टैक्स, सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स और कमोडिटी ट्रांजेक्शन टैक्स कम करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इनमें कोई राहत नहीं मिली।
पीएम मोदी भी पहले ही कर चुके है। सरकार लगातार मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने पर जोर देती रही है लेकिन अंतरिम बजट में विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए कोई घोषणा नहीं हुई। इसके साथ ही जीएसटी की दर भी घटने की उम्मीद थी लेकिन इस पर कोई घोषणा नहीं हुई। म्यूचुअल फंड : बजट में पीयूष गोयल ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। निवेशकों को उम्मीद थी कि पिछले बजट में लगाए गए लांग टर्म कैपिटर गैन टैक्स को वापस लिया जाएगा। न तो इसे हटाया गया और न ही इसकी सीमा को बढ़ाया गया। हालांकि आयकर छूट सीमा बढ़ने से लोगों को पहले से ज्यादा बचत होगी और इसका फायदा इस इंडस्ट्री को मिलने की उम्मीद है। सोना : सोना पर लगने वाला आयात शुल्क को भी दस प्रतिशत से कुछ कम होने की उम्मीद थी। अगर सरकार ऐसा कोई कदम उठाती तो देश में सोने की खपत बढ़ जाती। हालांकि सरकार ने यह कदम नहीं उठाकर सोने में दिलचस्पी रखने वालों को निराश ही किया। शेयर और कमोडिटी : बजट से शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट दोनों में ही निराशा देखी गई। लांग टर्म कैपिटर गैन टैक्स, सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स और कमोडिटी ट्रांजेक्शन टैक्स कम करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इनमें कोई राहत नहीं मिली।
चर्चा में क्यों? 9 दिसंबर, 2022 को मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार रायसेन ज़िले में स्थित एक छोटा सा कस्बा साँची, जो स्तूपों और बौद्ध तीर्थ स्थल के लिये विश्वविख्यात है, अब जल्द ही देश की पहली सोलर सिटी के रूप में भी जाना जाएगा। साँची में सौर ऊर्जा से 7.3 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। - सोलर सिटी बनने से बिजली आपूर्ति में आत्म-निर्भर होने के साथ ही साँची की अगले पाँच वर्षों की विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति सौर ऊर्जा से सुनिश्चित होगी। साथ ही सौर स्ट्रीट लाइट, गार्डन लाइट, स्टड लाइट, हाई-मास्ट लाइट, सौर पेयजल कियोस्क, लोक परिवहन के लिये बैटरी चालित ई-रिक्शा, चार्जिंग स्टेशन, अक्षय ऊर्जा आधारित संयंत्र विंड टर्बाइन एवं पिजो इलेक्ट्रिक जनरेटर्स स्थापित किये जाएंगे। - इसी क्रम में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा साँची में ग्रीन इनर्जी को बढ़ावा देने एवं सोलर रूफटॉप लगाने के लिये आम जन को प्रेरित करने के उद्देश्घ्य से 12 से 18 दिसंबर तक साँची में सोलर रूफटॉप नोडल एजेंसियों के माध्यम से जन-जागृति शिविर लगाए जाएंगे। शिविर में सोलर लगाने के लाभ एवं सोलर रूफटॉप लगाने की प्रक्रिया के बारे में बताया जाएगा। - अपने घर/ग्रुप हाउसिंग सोसायटी की छत या खुली जगह पर सोलर पैनल लगाएँ और बिजली पर होने वाले खर्च को बचाएँ। - सोलर पैनल से बिजली 25 साल तक मिलेगी और इसके लगाने के खर्च का भुगतान 4-5 वर्षों में बराबर हो जाएगा। इसके बाद अगले 20 वर्षों तक सोलर से बिजली का लाभ सतत् मिलता रहेगा। - इससे कार्बन फुटप्रिंट कम होगा और पर्यावरण को लाभ मिलेगा। - एक किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा पैनल के लिये लगभग 100 स्क्वायर फुट जगह की ज़रूरत होगी। - 3 किलोवाट तक के सोलर प्लांट पर 40 प्रतिशत की सब्सिडी और 3 किलोवाट के बाद 10 किलोवाट तक 20 प्रतिशत की सब्सिडी केंद्र सरकार द्वारा मिलेगी। - सोलर प्लांट लगाने पर खर्चः ग्रुप हाउसिंग सोसायटी को कॉमन सुविधा वाले संयोजन पर 500 किलोवाट तक (10 किलोवाट प्रति घर) 20 प्रतिशत की सब्सिडी मिलेगी।
चर्चा में क्यों? नौ दिसंबर, दो हज़ार बाईस को मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार रायसेन ज़िले में स्थित एक छोटा सा कस्बा साँची, जो स्तूपों और बौद्ध तीर्थ स्थल के लिये विश्वविख्यात है, अब जल्द ही देश की पहली सोलर सिटी के रूप में भी जाना जाएगा। साँची में सौर ऊर्जा से सात.तीन मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। - सोलर सिटी बनने से बिजली आपूर्ति में आत्म-निर्भर होने के साथ ही साँची की अगले पाँच वर्षों की विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति सौर ऊर्जा से सुनिश्चित होगी। साथ ही सौर स्ट्रीट लाइट, गार्डन लाइट, स्टड लाइट, हाई-मास्ट लाइट, सौर पेयजल कियोस्क, लोक परिवहन के लिये बैटरी चालित ई-रिक्शा, चार्जिंग स्टेशन, अक्षय ऊर्जा आधारित संयंत्र विंड टर्बाइन एवं पिजो इलेक्ट्रिक जनरेटर्स स्थापित किये जाएंगे। - इसी क्रम में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा साँची में ग्रीन इनर्जी को बढ़ावा देने एवं सोलर रूफटॉप लगाने के लिये आम जन को प्रेरित करने के उद्देश्घ्य से बारह से अट्ठारह दिसंबर तक साँची में सोलर रूफटॉप नोडल एजेंसियों के माध्यम से जन-जागृति शिविर लगाए जाएंगे। शिविर में सोलर लगाने के लाभ एवं सोलर रूफटॉप लगाने की प्रक्रिया के बारे में बताया जाएगा। - अपने घर/ग्रुप हाउसिंग सोसायटी की छत या खुली जगह पर सोलर पैनल लगाएँ और बिजली पर होने वाले खर्च को बचाएँ। - सोलर पैनल से बिजली पच्चीस साल तक मिलेगी और इसके लगाने के खर्च का भुगतान चार-पाँच वर्षों में बराबर हो जाएगा। इसके बाद अगले बीस वर्षों तक सोलर से बिजली का लाभ सतत् मिलता रहेगा। - इससे कार्बन फुटप्रिंट कम होगा और पर्यावरण को लाभ मिलेगा। - एक किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा पैनल के लिये लगभग एक सौ स्क्वायर फुट जगह की ज़रूरत होगी। - तीन किलोग्रामवाट तक के सोलर प्लांट पर चालीस प्रतिशत की सब्सिडी और तीन किलोग्रामवाट के बाद दस किलोग्रामवाट तक बीस प्रतिशत की सब्सिडी केंद्र सरकार द्वारा मिलेगी। - सोलर प्लांट लगाने पर खर्चः ग्रुप हाउसिंग सोसायटी को कॉमन सुविधा वाले संयोजन पर पाँच सौ किलोग्रामवाट तक बीस प्रतिशत की सब्सिडी मिलेगी।
GORAKHPUR: पीपीगंज एरिया में लुटेरों का ऐसा गैंग पुलिस की गिरफ्त में आया है जो घोड़े पर सवार होकर घटना को अंजाम देता था। आधी रात के बाद एरियाज में निकलने वाले यह बदमाश किसी भी राहगीर को लूट लेते थे। पकड़े गए दो बदमाशों से पूछताछ के बाद चार घटनाओं का खुलासा हुआ है। उनके पास से लूट का सामान भी बरामद किया गया है। एसएसपी रामलाल वर्मा ने बुधवार को पुलिस लाइंस में घटना का खुलासा किया। बताया कि पीपीगंज, पिपराइच आदि एरियाज में कुछ दिनों से लुटेरों का गैंग सक्रिय था जो रात में राहगीरों से लूटपाट करता था। वारदात के समय लुटेरे घोड़ा भी साथ रखते थे। एसपीआरए ब्रजेश सिंह के निर्देश पर पीपीगंज और क्राइम ब्रांच पुलिस काम कर रही थी। सीआइयू प्रभारी अनिल उपाध्याय को मंगलवार की दोपहर सूचना मिली कि तीन युवक बाइक बेचने पीपीगंज के समयमाता मंदिर पर जा रहे हैं। पुलिस टीम ने धरपकड़ की कोशिश की तो एक युवक बाइक लेकर फरार हो गया। जबकि दो युवकों को पुलिस ने बाइक के साथ अरेस्ट कर लिया। उन्होंने बताया कि बाइक चोरी की है। उनकी पहचान अभिषेक साहनी निवासी हमीनपुर चिलुआताल और व्यासमुनि निषाद निवासी नवापार चिलुआताल के रूप में हुई। एसएसपी ने बदमाशों को पकड़ने वाली टीम को पांच हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की है। अरेस्ट किए गए आरोपियों ने बताया कि वारदात को अंजाम देने से पहले वह प्रधान के घर पर बंधे घोड़े को रात में खोल लेते थे। घोड़ा दौड़ाने में एक्सपर्ट अभिषेक उसकी सवारी करता था। रात में किसी से भी लूटपाट करने के बाद वह रात को ही घोड़ा दोबारा बांधकर चले जाते थे। पुलिस के पूछने पर प्रधान ने बताया कि उन्हें आज तक पता नहीं चल पाया कि रात में उनका घोड़ा खोल लिया जाता था। वहीं, पकड़े गए बदमाशों से पता चला है कि गैंग के तीनों सदस्य एक साथ अपराध को अंजाम देते थे। अभिषेक और व्यासमुनि ने फरार हुए तीसरे साथी का भी नाम पुलिस को बताया है। बदमाशों पर जितने केस दर्ज हैं। उन सभी में वह एक साथ शामिल रहे हैं। घोड़ा गैंग को पुलिस पहले भी अरेस्ट कर चुकी है। चिलुआताल में हुई लूट के मामले में पकड़े जाने के बाद ये जेल गए थे। करीब दो माह पूर्व यह जेल से छूटे थे। इसके बाद मुंबई चले गए। वहां से लौटकर आने के बाद ताबड़तोड़ घटनाओं को अंजाम दिया था।
GORAKHPUR: पीपीगंज एरिया में लुटेरों का ऐसा गैंग पुलिस की गिरफ्त में आया है जो घोड़े पर सवार होकर घटना को अंजाम देता था। आधी रात के बाद एरियाज में निकलने वाले यह बदमाश किसी भी राहगीर को लूट लेते थे। पकड़े गए दो बदमाशों से पूछताछ के बाद चार घटनाओं का खुलासा हुआ है। उनके पास से लूट का सामान भी बरामद किया गया है। एसएसपी रामलाल वर्मा ने बुधवार को पुलिस लाइंस में घटना का खुलासा किया। बताया कि पीपीगंज, पिपराइच आदि एरियाज में कुछ दिनों से लुटेरों का गैंग सक्रिय था जो रात में राहगीरों से लूटपाट करता था। वारदात के समय लुटेरे घोड़ा भी साथ रखते थे। एसपीआरए ब्रजेश सिंह के निर्देश पर पीपीगंज और क्राइम ब्रांच पुलिस काम कर रही थी। सीआइयू प्रभारी अनिल उपाध्याय को मंगलवार की दोपहर सूचना मिली कि तीन युवक बाइक बेचने पीपीगंज के समयमाता मंदिर पर जा रहे हैं। पुलिस टीम ने धरपकड़ की कोशिश की तो एक युवक बाइक लेकर फरार हो गया। जबकि दो युवकों को पुलिस ने बाइक के साथ अरेस्ट कर लिया। उन्होंने बताया कि बाइक चोरी की है। उनकी पहचान अभिषेक साहनी निवासी हमीनपुर चिलुआताल और व्यासमुनि निषाद निवासी नवापार चिलुआताल के रूप में हुई। एसएसपी ने बदमाशों को पकड़ने वाली टीम को पांच हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की है। अरेस्ट किए गए आरोपियों ने बताया कि वारदात को अंजाम देने से पहले वह प्रधान के घर पर बंधे घोड़े को रात में खोल लेते थे। घोड़ा दौड़ाने में एक्सपर्ट अभिषेक उसकी सवारी करता था। रात में किसी से भी लूटपाट करने के बाद वह रात को ही घोड़ा दोबारा बांधकर चले जाते थे। पुलिस के पूछने पर प्रधान ने बताया कि उन्हें आज तक पता नहीं चल पाया कि रात में उनका घोड़ा खोल लिया जाता था। वहीं, पकड़े गए बदमाशों से पता चला है कि गैंग के तीनों सदस्य एक साथ अपराध को अंजाम देते थे। अभिषेक और व्यासमुनि ने फरार हुए तीसरे साथी का भी नाम पुलिस को बताया है। बदमाशों पर जितने केस दर्ज हैं। उन सभी में वह एक साथ शामिल रहे हैं। घोड़ा गैंग को पुलिस पहले भी अरेस्ट कर चुकी है। चिलुआताल में हुई लूट के मामले में पकड़े जाने के बाद ये जेल गए थे। करीब दो माह पूर्व यह जेल से छूटे थे। इसके बाद मुंबई चले गए। वहां से लौटकर आने के बाद ताबड़तोड़ घटनाओं को अंजाम दिया था।
नयी दिल्ली। टेस्ला कार के मालिक एलन मस्क द्वारा ट्विटर को खरीदने की खबरों के बीच भारत में एक बार फिर इलेक्ट्रिक कार चर्चा में है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिकी कंपनी टेस्ला अपने इलेक्ट्रिक वाहनों का भारत में विनिर्माण करना चाहती है, इसमें कोई समस्या नहीं है। भारत सरकार की एक मात्र शर्त यह है कि टेस्ला कार को चीन से आयात नहीं किया जाए। भारी उद्योग मंत्रालय ने भी पिछले साल कहा था कि टेस्ला पहले भारत में अपने प्रतिष्ठित इलेक्ट्रिक वाहनों का विनिर्माण शुरू करे, उसके बाद ही कर रियायतों पर विचार किया जा सकता है।
नयी दिल्ली। टेस्ला कार के मालिक एलन मस्क द्वारा ट्विटर को खरीदने की खबरों के बीच भारत में एक बार फिर इलेक्ट्रिक कार चर्चा में है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिकी कंपनी टेस्ला अपने इलेक्ट्रिक वाहनों का भारत में विनिर्माण करना चाहती है, इसमें कोई समस्या नहीं है। भारत सरकार की एक मात्र शर्त यह है कि टेस्ला कार को चीन से आयात नहीं किया जाए। भारी उद्योग मंत्रालय ने भी पिछले साल कहा था कि टेस्ला पहले भारत में अपने प्रतिष्ठित इलेक्ट्रिक वाहनों का विनिर्माण शुरू करे, उसके बाद ही कर रियायतों पर विचार किया जा सकता है।