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हेल्थ डेस्कः आपके माथे पर अचानक से खुजली शुरू होती है यह लक्षण एक्जेमा, स्किन की खुजली, डैंड्रफ और एक्ने के लक्षण हो सकते हैं। इसके साथ ही कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स के यूज से भी यह खुजली हो सकती है। साथ ही सनबर्न, स्ट्रेस और प्रेग्नेंसी की वजह से भी यह हो सकता है। आपको बता दें कि स्किन में खुजली, स्किन का लाल होना, स्किन का उतरना, यह एक आम समस्या है। लेकिन अगर यह ज्यादा हो तो आपको डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। अगर आपके स्किन में लगातर खुजली हो रही है तो इसके लिए सबसे पहले चेहरे को साफ करते हुए ठंडे पानी से धोएं साथ ही कुछ देर बाद एलोवेरा जेल, संसक्रीम अप्लाई करें।
बालों का डैंड्रफकई बार आपके बालों के डैंड्रप का रिएक्शन आपके चेहरे पर दिखता है। जिसकी वजह से आपके स्किन पर एलर्जी की शुरूआत होती है। अगर आपके स्किन पर इस तरह का असर दिख रहा है तो एक्जेमा और कई बीमारी के लक्षण हैं। डैंड्रफ की वजह से आपके माथे से लेकर, आपके छाती, चेहरा और पीठ पर इंफेक्शन हो सकती है।
हेयर और स्किन के ब्यूटी प्रोडक्ट्स से भी आपके माथे पर एलर्जी हो सकती है। इसमें साबुन, फेशियल क्रीम, हेयर स्टाइल, हेयर जेल से भी आपको एलर्जी हो सकती है।
कुछ लोगों को टोपी, स्कार्फ, बैंड्स पहनना पसंद होता है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि उनके ऐसा करने से माथे पर खुजली भी हो सकती है। हेलमेट से भी खुजली हो सकती है। आपको बता दें कि गंदगी, गर्मी, और पसीना जो स्किन के टच में रहती है उससे भी खुजली होती है, जिसकी वजह से उस एरिया में जलन होती है। ऑइली स्किन, पोर्स की प्रॉब्लम, या संक्रमण से मुंहासे पैदा होते हैं और यह माथे, गाल और चेहरे के किसी भी भाग को प्रभावित कर सकता है।
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हेल्थ डेस्कः आपके माथे पर अचानक से खुजली शुरू होती है यह लक्षण एक्जेमा, स्किन की खुजली, डैंड्रफ और एक्ने के लक्षण हो सकते हैं। इसके साथ ही कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स के यूज से भी यह खुजली हो सकती है। साथ ही सनबर्न, स्ट्रेस और प्रेग्नेंसी की वजह से भी यह हो सकता है। आपको बता दें कि स्किन में खुजली, स्किन का लाल होना, स्किन का उतरना, यह एक आम समस्या है। लेकिन अगर यह ज्यादा हो तो आपको डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। अगर आपके स्किन में लगातर खुजली हो रही है तो इसके लिए सबसे पहले चेहरे को साफ करते हुए ठंडे पानी से धोएं साथ ही कुछ देर बाद एलोवेरा जेल, संसक्रीम अप्लाई करें। बालों का डैंड्रफकई बार आपके बालों के डैंड्रप का रिएक्शन आपके चेहरे पर दिखता है। जिसकी वजह से आपके स्किन पर एलर्जी की शुरूआत होती है। अगर आपके स्किन पर इस तरह का असर दिख रहा है तो एक्जेमा और कई बीमारी के लक्षण हैं। डैंड्रफ की वजह से आपके माथे से लेकर, आपके छाती, चेहरा और पीठ पर इंफेक्शन हो सकती है। हेयर और स्किन के ब्यूटी प्रोडक्ट्स से भी आपके माथे पर एलर्जी हो सकती है। इसमें साबुन, फेशियल क्रीम, हेयर स्टाइल, हेयर जेल से भी आपको एलर्जी हो सकती है। कुछ लोगों को टोपी, स्कार्फ, बैंड्स पहनना पसंद होता है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि उनके ऐसा करने से माथे पर खुजली भी हो सकती है। हेलमेट से भी खुजली हो सकती है। आपको बता दें कि गंदगी, गर्मी, और पसीना जो स्किन के टच में रहती है उससे भी खुजली होती है, जिसकी वजह से उस एरिया में जलन होती है। ऑइली स्किन, पोर्स की प्रॉब्लम, या संक्रमण से मुंहासे पैदा होते हैं और यह माथे, गाल और चेहरे के किसी भी भाग को प्रभावित कर सकता है।
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हिसार (निस) : छाजूराम मेमोरियल जाट कॉलेज, हिसार में राजनीतिक विज्ञान विषय के सहायक प्रोफेसर प्रविन्द्र सिंह द्वारा धार्मिक राजनीति और अरब-इस्राइल संघर्ष पर लिखे लेख को वर्ल्ड फोकस इंडो-पेसिफिक फोरन अफेयर के अप्रैल 2022 में प्रकाशित किया गया है। वर्ल्ड फोकस 1980 से अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विश्लेषण करने वाली पत्रिका है, जिसमें विभिन्न शोधकर्ताओं द्वारा राजनीति विज्ञान के अति महत्वपूर्ण लेख प्रकाशित किए जाते रहे हैं। प्रविन्द्र सिंह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शोधार्थी रहे हैं और उन्होंने महिलाओं से सम्बंधित विषयों पर अनेक पत्रिकाओं में अपने विचारों को रखते हुए लोगों में जागरूकता फैलाने का सराहनीय कार्य किया है।
दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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हिसार : छाजूराम मेमोरियल जाट कॉलेज, हिसार में राजनीतिक विज्ञान विषय के सहायक प्रोफेसर प्रविन्द्र सिंह द्वारा धार्मिक राजनीति और अरब-इस्राइल संघर्ष पर लिखे लेख को वर्ल्ड फोकस इंडो-पेसिफिक फोरन अफेयर के अप्रैल दो हज़ार बाईस में प्रकाशित किया गया है। वर्ल्ड फोकस एक हज़ार नौ सौ अस्सी से अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विश्लेषण करने वाली पत्रिका है, जिसमें विभिन्न शोधकर्ताओं द्वारा राजनीति विज्ञान के अति महत्वपूर्ण लेख प्रकाशित किए जाते रहे हैं। प्रविन्द्र सिंह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शोधार्थी रहे हैं और उन्होंने महिलाओं से सम्बंधित विषयों पर अनेक पत्रिकाओं में अपने विचारों को रखते हुए लोगों में जागरूकता फैलाने का सराहनीय कार्य किया है। दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने दो फरवरी, एक हज़ार आठ सौ इक्यासी को लाहौर से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है। 'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में पंद्रह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास , न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शक्ति स्थल जाकर इंदिरा गांधी को दी श्रद्धांजलि.
नई दिल्ली. देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) की आज 102वीं जयंती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इस मौके पर ट्विटर के जरिए इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि दी. पीएम मोदी के अलावा पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह, कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने भी इंदिरा गांधी मेमोरियल जाकर श्रद्धांजलि दी है.
Tributes to our former PM Smt. Indira Gandhi Ji on her birth anniversary.
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कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शक्ति स्थल जाकर इंदिरा गांधी को दी श्रद्धांजलि. नई दिल्ली. देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आज एक सौ दोवीं जयंती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर ट्विटर के जरिए इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि दी. पीएम मोदी के अलावा पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह, कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने भी इंदिरा गांधी मेमोरियल जाकर श्रद्धांजलि दी है. Tributes to our former PM Smt. Indira Gandhi Ji on her birth anniversary. .
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IPL 2022 की 50वीं भिड़ंत में आज गुरूवार, 5 मई की शाम दिल्ली कैपिटल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मुक़ाबला होगा। यह मैच मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में शाम 7:30 बजे आरंभ होगा। इस ताज़ा सीज़न में SRH ने अब तक खेले 9 मैचों में 5 में जीत दर्ज़ की है और DC ने 9 में से 4 में जीत हासिल की है। DC को इससे पहले के मैच में LSG ने 6 रन से हरा दिया था। आज के मैच में ऋषभ पंत (Rishabh Pant), पृथ्वी शॉ (Prithvi Shaw) और अक्षर पटेल (Axar Patel) जैसे कुछ खिलाड़ी नया कीर्तिमान अपने नाम कर सकते हैं।
दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals DC) के ऑल-राउंडर अक्षर पटेल आज के मैच में विकेटों की सेंचुरी लगा सकते हैं। उन्होंने अब तक खेले IPL के 118 मैचों में 7. 24 की औसत से 99 विकेट चटकाए हैं। आज अगर वो 1 विकेट हासिल कर लेते हैं, तो वे 100 विकेट चटकाने वाले महारथी गेंदबाजों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे। इसके अलावा वे IPL में 50 कैच लपकने वाले फील्डर भी बन सकते हैं। इसके लिए उन्हे बस एक कैच लपकने की जरूरत है।
'दिल्ली कैपिटल्स' (DC) के कप्तान ऋषत पंत (Rishabh Pant) एक खास कीर्तिमान रच सकते हैं। यदि आज ऋषभ 56 रन बनाने में सफल हो गए, तो T20 Cricket (ओवरऑल) में उनके 4 हज़र रन पूरे हो जाएंगे।
'दिल्ली कैपिटल्स' (Delhi Capitals DC) के धाकड़ ओपनर पृथ्वी शॉ भी आज के मैच में एक नया रिकॉर्ड बना सकते हैं। ताबड़तोड़ शुरुआती बल्लेबाज़ी के लिए पहचाने जाने वाले पृथ्वी शॉ यदि आज SRH के खिलाफ़ 10 चौके लगाने में सफल रहे, तो IPL में उनकी चौकों की डबल सेंचुरी पूरी हो जाएगी। आईपीएल के करियर में पृथ्वी ने अब तक खेले कुल 62 मैचों में 190 चौके लगाए हैं।
'दिल्ली कैपिटल्स' के घातक गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान (Mustafizur Rahman) 4 विकेट हासिल करते ही IPL में अपने 50 विकेट पूरे कर लेंगे। इसके साथ ही, अगर 1 विकेट भी चटकाए तो ओवरऑल T20 Cricket में 250 विकेट पूरे कर लेंगे।
दिल्ली कैपिटल्स के धुआंधार ओपनर डेविड वॉर्नर (David Warner) 2 छक्के ठोकते ही ओवरऑल T20 Cricket में 400 छक्के पूरे कर लेंगे।
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IPL दो हज़ार बाईस की पचासवीं भिड़ंत में आज गुरूवार, पाँच मई की शाम दिल्ली कैपिटल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मुक़ाबला होगा। यह मैच मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में शाम सात:तीस बजे आरंभ होगा। इस ताज़ा सीज़न में SRH ने अब तक खेले नौ मैचों में पाँच में जीत दर्ज़ की है और DC ने नौ में से चार में जीत हासिल की है। DC को इससे पहले के मैच में LSG ने छः रन से हरा दिया था। आज के मैच में ऋषभ पंत , पृथ्वी शॉ और अक्षर पटेल जैसे कुछ खिलाड़ी नया कीर्तिमान अपने नाम कर सकते हैं। दिल्ली कैपिटल्स के ऑल-राउंडर अक्षर पटेल आज के मैच में विकेटों की सेंचुरी लगा सकते हैं। उन्होंने अब तक खेले IPL के एक सौ अट्ठारह मैचों में सात. चौबीस की औसत से निन्यानवे विकेट चटकाए हैं। आज अगर वो एक विकेट हासिल कर लेते हैं, तो वे एक सौ विकेट चटकाने वाले महारथी गेंदबाजों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे। इसके अलावा वे IPL में पचास कैच लपकने वाले फील्डर भी बन सकते हैं। इसके लिए उन्हे बस एक कैच लपकने की जरूरत है। 'दिल्ली कैपिटल्स' के कप्तान ऋषत पंत एक खास कीर्तिमान रच सकते हैं। यदि आज ऋषभ छप्पन रन बनाने में सफल हो गए, तो Tबीस Cricket में उनके चार हज़र रन पूरे हो जाएंगे। 'दिल्ली कैपिटल्स' के धाकड़ ओपनर पृथ्वी शॉ भी आज के मैच में एक नया रिकॉर्ड बना सकते हैं। ताबड़तोड़ शुरुआती बल्लेबाज़ी के लिए पहचाने जाने वाले पृथ्वी शॉ यदि आज SRH के खिलाफ़ दस चौके लगाने में सफल रहे, तो IPL में उनकी चौकों की डबल सेंचुरी पूरी हो जाएगी। आईपीएल के करियर में पृथ्वी ने अब तक खेले कुल बासठ मैचों में एक सौ नब्बे चौके लगाए हैं। 'दिल्ली कैपिटल्स' के घातक गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान चार विकेट हासिल करते ही IPL में अपने पचास विकेट पूरे कर लेंगे। इसके साथ ही, अगर एक विकेट भी चटकाए तो ओवरऑल Tबीस Cricket में दो सौ पचास विकेट पूरे कर लेंगे। दिल्ली कैपिटल्स के धुआंधार ओपनर डेविड वॉर्नर दो छक्के ठोकते ही ओवरऑल Tबीस Cricket में चार सौ छक्के पूरे कर लेंगे।
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राजधानी दिल्ली में छोटी-छोटी बातों पर चाकूबाजी आम बात हो गई है. उत्तर पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके अंतर्गत में मामूली विवाद में 17 साल के लड़के की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है.
Delhi Crime News: राजधानी दिल्ली में छोटी-छोटी बातों पर चाकूबाजी आम बात हो गई है. उत्तर पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके अंतर्गत में मामूली विवाद में 17 साल के लड़के की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस का कहना है कि आरोपी लड़कों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है.
उत्तर पूर्वी दिल्ली के डीसीपी डॉक्टर जॉय टिर्की ने शनिवार को बताया कि मृतक की पहचान 17 वर्षीय अदनान के तौर पर हुई है. वह दयालपुर थाना क्षेत्र के मूंगा नगर का रहने वाला था. डीसीपी ने बताया कि शुक्रवार रात 12 बजकर 2 मिनट पर दयालपुर थाना क्षेत्र के ब्रिजपुरी पुलिया के पास एक लड़के को चाकू मारे जाने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही दयालपुर थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और घायल को जीटीबी अस्पताल ले जाया गया . जहां डॉक्टरों ने उसे मृत्य घोषित कर दिया.
मृतक की पहचान 17 वर्षीय अदनान के तौर पर हुई है, उसके शरीर पर छाती, गर्दन पर कई घाव मिले. डीसीपी ने बताया कि दयालपुर थाना में हत्या का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है. साथ ही घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल जा रहे हैं. जांच में पता चला है कि अदनान शुक्रवार शाम कुछ दोस्तों के साथ अपने घर से बाहर निकला था.
करीब एक सप्ताह पहले कुछ लड़कों से विवाद होने की बात भी सामने आ रही है. डीसीपी का कहना कि आरोपियों की जल्द ही पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा. मृतक अपने परिवार का सबसे बड़ा बेटा था वह सिलाई का काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था. वह अपने परिवार में एकलौता कमाने वाला था, उसके पिता बेरोजगार है.
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राजधानी दिल्ली में छोटी-छोटी बातों पर चाकूबाजी आम बात हो गई है. उत्तर पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके अंतर्गत में मामूली विवाद में सत्रह साल के लड़के की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है. Delhi Crime News: राजधानी दिल्ली में छोटी-छोटी बातों पर चाकूबाजी आम बात हो गई है. उत्तर पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके अंतर्गत में मामूली विवाद में सत्रह साल के लड़के की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस का कहना है कि आरोपी लड़कों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है. उत्तर पूर्वी दिल्ली के डीसीपी डॉक्टर जॉय टिर्की ने शनिवार को बताया कि मृतक की पहचान सत्रह वर्षीय अदनान के तौर पर हुई है. वह दयालपुर थाना क्षेत्र के मूंगा नगर का रहने वाला था. डीसीपी ने बताया कि शुक्रवार रात बारह बजकर दो मिनट पर दयालपुर थाना क्षेत्र के ब्रिजपुरी पुलिया के पास एक लड़के को चाकू मारे जाने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही दयालपुर थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और घायल को जीटीबी अस्पताल ले जाया गया . जहां डॉक्टरों ने उसे मृत्य घोषित कर दिया. मृतक की पहचान सत्रह वर्षीय अदनान के तौर पर हुई है, उसके शरीर पर छाती, गर्दन पर कई घाव मिले. डीसीपी ने बताया कि दयालपुर थाना में हत्या का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है. साथ ही घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल जा रहे हैं. जांच में पता चला है कि अदनान शुक्रवार शाम कुछ दोस्तों के साथ अपने घर से बाहर निकला था. करीब एक सप्ताह पहले कुछ लड़कों से विवाद होने की बात भी सामने आ रही है. डीसीपी का कहना कि आरोपियों की जल्द ही पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा. मृतक अपने परिवार का सबसे बड़ा बेटा था वह सिलाई का काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था. वह अपने परिवार में एकलौता कमाने वाला था, उसके पिता बेरोजगार है.
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Full List of Cheaper and Costlier Items: 1 अप्रैल, 2023 से नया वित्त वर्ष शुरू हो गया है. नए वित्त वर्ष से कई नई चीजें लागू होंगी, जिनका ऐलान इस साल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitaraman) ने किया था. वित्त मंत्री ने कई आइटम्स पर इंपोर्ट ड्यूटी में बदलाव का ऐलान किया था, जिसकी वजह से कई चीजों के दाम बढ़ जाएंगे और कई के दाम 1 अप्रैल से कम भी हो जाएंगे. इस वजह से आपका बजट प्रभावित हो सकता है. चलिए एक नजर डालते हैं.
सबसे पहले तो जरूरी दवाओं (essential medicines ) के दाम बढ़ जाएंगे, क्योंकि नेशनल लिस्ट ऑफ इसेंशियल मेडिसिन (NLEM) के लिए दवाओं की कीमतों के लिए NPPA ने WPI में बदलाव किया है. जिसकी वजह से पेन किलर से लेकर एंटी बायोटिक तक सारी दवाएं 12% तक महंगी हो जाएंगी.
वित्त मंत्री, निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2023 में घोषणा की थी कि 1अप्रैल से इलेक्ट्रिक चिमनी, सोना और प्लेटिनम जैसे सामानों की कीमतों में इजाफा हो जाएगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चिमनियों पर कस्टम ड्यूटी को 7. 5 % से बढ़ाकर 15% कर दिया गया है. यानी ये सारे आइटम 1 अप्रैल से महंगे हो जाएंगे.
बजट में ऐलान किया गया था कि कुछ सिगरेट पर 16% कस्टम ड्यूटी बढ़ाई जाएगी. यानी कुछ सिगरेट ब्रांड की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है. इसके अलावा नकली ज्वेलरी, गोल्ड बार से बनी चीजें, प्लेटिनम जैसी चीजें महंगी हो जाएंगीं, क्योंकि इन पर ड्यूटी बढ़ाने का प्रस्ताव बजट में दिया गया है. सरकार ने चांदी की ईंटों यानी सिल्वर बार पर भी एग्री एंड डेवलपमेंट सेस को 2. 5% से बढ़ाकर 5% कर दिया है. सिल्वर डोर पर भी इसी सेस को 2. 5% से बढ़ाकर 4. 35% कर दिया गया है.
किचन में लगने वाली इलेक्ट्रिक चिमनी भी महंगी हो जाएगी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में कस्टम्स ड्यूटी को 7. 5% से बढ़ाकर 15% करने का प्रस्ताव दिया था. इसके अलावा प्लास्टिक के सामान, हाई-ग्लॉस पेपर, निजी विमान, हेलीकॉप्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है.
इंपोर्टेड कारें, जिसमें इलेक्ट्रिक व्हीकल भी शामिल हैं, महंगे हो जाएंगे. क्योंकि वित्त मंत्री ने बजट में इन पर कस्टम्स ड्यूटी को बढ़ाने का ऐलान किया था. इनमें वो गाड़ियां भी शामिल हैं जो इंपोर्टेड पार्ट्स से भारत में असेंबल की जाती है. बजट डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक ऐसी गाड़ियां जिनकी कीमत 40,000 डॉलर से कम है, पेट्रोल वर्जन के लिए जिनकी इंजन क्षमता 3000cc से कम है, डीजल वर्जन के लिए 2500cc से कम है. ऐसी गाड़ियों पर कस्टम ड्यूटी को 60% से बढ़ाकर 70% कर दिया गया है. इसी तरह से पूरी तरह से कंप्लीट (CBU) इलेक्ट्रिक व्हीकल पर कस्टम ड्यूटी, जिनकी कीमत 40,000 डॉलर से ज्यादा है, इन पर कस्टम ड्यूटी को 60% से बढ़ाकर 70% कर दिया गया है.
कारों के अलावा इंपोर्टेड साइकिलें भी महंगी हो जाएंगी. बजट में वित्त मंत्री ने साइकिलों पर बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी को 30% से बढ़ाकर 35% कर दिया था. बच्चों के खिलौने भी महंगे हो गए हैं. स्टाइरीन, विनायल क्लोराइड मोनोमर, खिलौने और उसके पार्ट्स पर कस्टम्स ड्यूटी बढ़ाने का ऐलान किया गया था. खिलौनों और इसके पार्ट्स पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को 60% से बढ़ाकर 70% करने का प्रस्ताव है.
अब एक नजर उन चीजों पर जो 1 अप्रैल से सस्ती हो सकती हैं. बजट 2023 में वित्त मंत्री ने ऐलान किया था कि उनका फोकस भारत की इंडस्ट्री को बढ़ावा देना है. सरकार ने भारत में बनने वाले कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स पर ड्यूटी को घटा दिया है. इसके अलावा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले कुछ पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी को भी घटाने का प्रस्ताव दिया था.
देश में मोबाइल फोन की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कैमरा लेंस पर कस्टम्स ड्यूटी को खत्म करने का प्रस्ताव दिया है. इसके अलावा TV पैनल्स के ओपन सेल्स पार्ट्स पर लगने वाली कस्टम्स ड्यूटी को 5% से घटाकर 2. 5% करने का प्रस्ताव दिया है. यानी भारत में बनने वाले मोबाइल और TV दोनों ही सस्ते हो सकते हैं. हालांकि इसका फायदा ग्राहकों को मिलेगा या नहीं, ये कंपनियों पर निर्भर करेगा. अगर वो फायदा देते हैं तो टीवी और मोबाइल सस्ते होंगे.
स्मार्टफोन, DSLR और लैपटॉप के लिए कुछ चुनिंदा पार्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाई गई है. सरकार PLI स्कीम के तहत देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना चाहती है. कस्टम ड्यूटी में ये छूट कैमरा लेंस, लीथियम आयन सेल्स पर भी मिलेगी.
लीथियम आयन सेल्स की मैन्युफैक्चरिंग के लिए जिन मशीनों की जरूरत होती है, उस पर कस्टम ड्यूटी की छूट मिलने से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (Electric vehicle) खरीदने वालों को फायदा होगा.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह BQ PRIME से प्रकाशित की गई है. )
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Full List of Cheaper and Costlier Items: एक अप्रैल, दो हज़ार तेईस से नया वित्त वर्ष शुरू हो गया है. नए वित्त वर्ष से कई नई चीजें लागू होंगी, जिनका ऐलान इस साल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया था. वित्त मंत्री ने कई आइटम्स पर इंपोर्ट ड्यूटी में बदलाव का ऐलान किया था, जिसकी वजह से कई चीजों के दाम बढ़ जाएंगे और कई के दाम एक अप्रैल से कम भी हो जाएंगे. इस वजह से आपका बजट प्रभावित हो सकता है. चलिए एक नजर डालते हैं. सबसे पहले तो जरूरी दवाओं के दाम बढ़ जाएंगे, क्योंकि नेशनल लिस्ट ऑफ इसेंशियल मेडिसिन के लिए दवाओं की कीमतों के लिए NPPA ने WPI में बदलाव किया है. जिसकी वजह से पेन किलर से लेकर एंटी बायोटिक तक सारी दवाएं बारह% तक महंगी हो जाएंगी. वित्त मंत्री, निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट दो हज़ार तेईस में घोषणा की थी कि एकअप्रैल से इलेक्ट्रिक चिमनी, सोना और प्लेटिनम जैसे सामानों की कीमतों में इजाफा हो जाएगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चिमनियों पर कस्टम ड्यूटी को सात. पाँच % से बढ़ाकर पंद्रह% कर दिया गया है. यानी ये सारे आइटम एक अप्रैल से महंगे हो जाएंगे. बजट में ऐलान किया गया था कि कुछ सिगरेट पर सोलह% कस्टम ड्यूटी बढ़ाई जाएगी. यानी कुछ सिगरेट ब्रांड की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है. इसके अलावा नकली ज्वेलरी, गोल्ड बार से बनी चीजें, प्लेटिनम जैसी चीजें महंगी हो जाएंगीं, क्योंकि इन पर ड्यूटी बढ़ाने का प्रस्ताव बजट में दिया गया है. सरकार ने चांदी की ईंटों यानी सिल्वर बार पर भी एग्री एंड डेवलपमेंट सेस को दो. पाँच% से बढ़ाकर पाँच% कर दिया है. सिल्वर डोर पर भी इसी सेस को दो. पाँच% से बढ़ाकर चार. पैंतीस% कर दिया गया है. किचन में लगने वाली इलेक्ट्रिक चिमनी भी महंगी हो जाएगी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में कस्टम्स ड्यूटी को सात. पाँच% से बढ़ाकर पंद्रह% करने का प्रस्ताव दिया था. इसके अलावा प्लास्टिक के सामान, हाई-ग्लॉस पेपर, निजी विमान, हेलीकॉप्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. इंपोर्टेड कारें, जिसमें इलेक्ट्रिक व्हीकल भी शामिल हैं, महंगे हो जाएंगे. क्योंकि वित्त मंत्री ने बजट में इन पर कस्टम्स ड्यूटी को बढ़ाने का ऐलान किया था. इनमें वो गाड़ियां भी शामिल हैं जो इंपोर्टेड पार्ट्स से भारत में असेंबल की जाती है. बजट डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक ऐसी गाड़ियां जिनकी कीमत चालीस,शून्य डॉलर से कम है, पेट्रोल वर्जन के लिए जिनकी इंजन क्षमता तीन हज़ारcc से कम है, डीजल वर्जन के लिए दो हज़ार पाँच सौcc से कम है. ऐसी गाड़ियों पर कस्टम ड्यूटी को साठ% से बढ़ाकर सत्तर% कर दिया गया है. इसी तरह से पूरी तरह से कंप्लीट इलेक्ट्रिक व्हीकल पर कस्टम ड्यूटी, जिनकी कीमत चालीस,शून्य डॉलर से ज्यादा है, इन पर कस्टम ड्यूटी को साठ% से बढ़ाकर सत्तर% कर दिया गया है. कारों के अलावा इंपोर्टेड साइकिलें भी महंगी हो जाएंगी. बजट में वित्त मंत्री ने साइकिलों पर बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी को तीस% से बढ़ाकर पैंतीस% कर दिया था. बच्चों के खिलौने भी महंगे हो गए हैं. स्टाइरीन, विनायल क्लोराइड मोनोमर, खिलौने और उसके पार्ट्स पर कस्टम्स ड्यूटी बढ़ाने का ऐलान किया गया था. खिलौनों और इसके पार्ट्स पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को साठ% से बढ़ाकर सत्तर% करने का प्रस्ताव है. अब एक नजर उन चीजों पर जो एक अप्रैल से सस्ती हो सकती हैं. बजट दो हज़ार तेईस में वित्त मंत्री ने ऐलान किया था कि उनका फोकस भारत की इंडस्ट्री को बढ़ावा देना है. सरकार ने भारत में बनने वाले कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स पर ड्यूटी को घटा दिया है. इसके अलावा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले कुछ पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी को भी घटाने का प्रस्ताव दिया था. देश में मोबाइल फोन की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कैमरा लेंस पर कस्टम्स ड्यूटी को खत्म करने का प्रस्ताव दिया है. इसके अलावा TV पैनल्स के ओपन सेल्स पार्ट्स पर लगने वाली कस्टम्स ड्यूटी को पाँच% से घटाकर दो. पाँच% करने का प्रस्ताव दिया है. यानी भारत में बनने वाले मोबाइल और TV दोनों ही सस्ते हो सकते हैं. हालांकि इसका फायदा ग्राहकों को मिलेगा या नहीं, ये कंपनियों पर निर्भर करेगा. अगर वो फायदा देते हैं तो टीवी और मोबाइल सस्ते होंगे. स्मार्टफोन, DSLR और लैपटॉप के लिए कुछ चुनिंदा पार्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाई गई है. सरकार PLI स्कीम के तहत देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना चाहती है. कस्टम ड्यूटी में ये छूट कैमरा लेंस, लीथियम आयन सेल्स पर भी मिलेगी. लीथियम आयन सेल्स की मैन्युफैक्चरिंग के लिए जिन मशीनों की जरूरत होती है, उस पर कस्टम ड्यूटी की छूट मिलने से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स खरीदने वालों को फायदा होगा.
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62 दण्डो
ये दो पुत्रा चण्डवर्मा और दारवर्मा को सौप रखा था। नमे दारवमा वडा अनाचारी था वह वालचंद्रिका को वलात् ग्रहण करना चाहता था। पुष्पोद्भव ने वालचद्रिवा वे वप मे दारवर्मा से मिलकर उसको मार डाला। फिर उसने वालचंद्रवा स विधिवत् परिणय किया ।
पुरपोदभव को कथा सुनकर राजवाहन उसका साथ पृथ्वी के स्वग अर्थातका पुरी ( उज्जयिनी) मे गया। वहीं पुष्पादभव न अपने मित्रास उसका परिचय दिया। नगर में राजवाह्न की प्रसिद्धि वला प्रवीण ब्राह्मण के रूप में की गयी । नगरवामिया से उसका सही परिचय गुप्त रखा गया।
पञ्चम उच्छ्वास (पूर्व पीठिका)
पाँचवें उच्छवास मे राजवाहन से मालवनरेश मानसार की पुत्री अवतिसुदरी के परिणय होने की कहानी है। यह परिणय एक एद्रजालिय ( जादूगर) व चमत्कार से सम्पन्न होता है ।
उच्छवास का आरम्भ वसन्तागम के ललित वणन से होता है। पुष्पाद्भव की पत्नी बालचंद्रिका मानसार की पुत्री अर्वा तसुदरी की सहचरी है ।
वम तागम म विहार की इच्छा से अवतमुदरी सहचरी बालर्चा द्रका के साथ नगर वे समीप उपवन म गयी हुई थी जहाँ उसने कामदेव का पूजन किया और सखिया के साथ क्रीडा विनोद करने लगी। राजवाहन भी पुष्पोद्भव के साथ उसी उपवन मे घूमने पहुँच गया। राजवाहन के वहा पहुचन पर ऐसा लगा कि इस वमन्त ऋऋतु म इस उपवन म स्वय कामदव ( राजवाहन ) अपनी पत्नी रति (अर्वा तमुन्दरी) को देखने आ गया है ।
यहाँ कवि ने अर्वा तसुदरी के सौदय का सुविस्तत वणन किया है। सौ दय की अभिव्यक्ति म परम्परागत उपमान अधिक हैं पर कहीं-कही कवि को अपनी अनोखी दष्टि है जैस वाणायमानपुष्पलावण्येन शुचिस्मितम् । (अर्थात् जो फूल काम के बाण बन रह थे उन फूलो को हो सुदरता मे उदभासित उसकी अछूती पवित्र मुसकान थी )
रानवाहन और अवन्तिसुदरी परस्पर एक-दूसरे को देखकर रीझ गय तथा वाम भाव की प्रवल पीडा ने उन्हे आक्राप्त कर लिया। सामान्य रूप स दोनो की बातचीत भी हुई। अर्वा तमुदरी ने वालचंद्रका को एक राजहस को पक्डन का निर्देश दिया। राजवाहन न इस काय से उसे मना किया। इस सन्दर्भ में उसन एक राजहस द्वारा राजा शाम्ब को शाप दिये जाने वो क्या सुनापी । लगभग उसी समय जव तमुदरी की राजमाता पुत्री का क्रीडा विनोद दखन के लिए उपवन म आ गयो, तत्काल अर्वातसुदरीन राजवाहन को पुष्पोदभाव के साथ वक्षो वे
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बासठ दण्डो ये दो पुत्रा चण्डवर्मा और दारवर्मा को सौप रखा था। नमे दारवमा वडा अनाचारी था वह वालचंद्रिका को वलात् ग्रहण करना चाहता था। पुष्पोद्भव ने वालचद्रिवा वे वप मे दारवर्मा से मिलकर उसको मार डाला। फिर उसने वालचंद्रवा स विधिवत् परिणय किया । पुरपोदभव को कथा सुनकर राजवाहन उसका साथ पृथ्वी के स्वग अर्थातका पुरी मे गया। वहीं पुष्पादभव न अपने मित्रास उसका परिचय दिया। नगर में राजवाह्न की प्रसिद्धि वला प्रवीण ब्राह्मण के रूप में की गयी । नगरवामिया से उसका सही परिचय गुप्त रखा गया। पञ्चम उच्छ्वास पाँचवें उच्छवास मे राजवाहन से मालवनरेश मानसार की पुत्री अवतिसुदरी के परिणय होने की कहानी है। यह परिणय एक एद्रजालिय व चमत्कार से सम्पन्न होता है । उच्छवास का आरम्भ वसन्तागम के ललित वणन से होता है। पुष्पाद्भव की पत्नी बालचंद्रिका मानसार की पुत्री अर्वा तसुदरी की सहचरी है । वम तागम म विहार की इच्छा से अवतमुदरी सहचरी बालर्चा द्रका के साथ नगर वे समीप उपवन म गयी हुई थी जहाँ उसने कामदेव का पूजन किया और सखिया के साथ क्रीडा विनोद करने लगी। राजवाहन भी पुष्पोद्भव के साथ उसी उपवन मे घूमने पहुँच गया। राजवाहन के वहा पहुचन पर ऐसा लगा कि इस वमन्त ऋऋतु म इस उपवन म स्वय कामदव अपनी पत्नी रति को देखने आ गया है । यहाँ कवि ने अर्वा तसुदरी के सौदय का सुविस्तत वणन किया है। सौ दय की अभिव्यक्ति म परम्परागत उपमान अधिक हैं पर कहीं-कही कवि को अपनी अनोखी दष्टि है जैस वाणायमानपुष्पलावण्येन शुचिस्मितम् । रानवाहन और अवन्तिसुदरी परस्पर एक-दूसरे को देखकर रीझ गय तथा वाम भाव की प्रवल पीडा ने उन्हे आक्राप्त कर लिया। सामान्य रूप स दोनो की बातचीत भी हुई। अर्वा तमुदरी ने वालचंद्रका को एक राजहस को पक्डन का निर्देश दिया। राजवाहन न इस काय से उसे मना किया। इस सन्दर्भ में उसन एक राजहस द्वारा राजा शाम्ब को शाप दिये जाने वो क्या सुनापी । लगभग उसी समय जव तमुदरी की राजमाता पुत्री का क्रीडा विनोद दखन के लिए उपवन म आ गयो, तत्काल अर्वातसुदरीन राजवाहन को पुष्पोदभाव के साथ वक्षो वे
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केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा को नया कैबिनेट सचिव नियुक्त किया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो वे पीके सिन्हा का स्थान लेंगे जिनका चार वर्षीय कार्यकाल 12 जून को समाप्त हो रहा है।
नई दिल्लीः केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा को नया कैबिनेट सचिव नियुक्त किया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो वे पीके सिन्हा का स्थान लेंगे जिनका चार वर्षीय कार्यकाल 12 जून को समाप्त हो रहा है। 1987 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम भी इस पद की दौड़ में हैं। मूलतः छत्तीसगढ़ कैडर के अधिकारी सुब्रमण्यम को गाबा के बाद सबसे ज्यादा मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
राजीव गाबा के पास केंद्र के कई महकमों में महत्वपूर्ण पदों को संभालने का अनुभव है। केंद्र से पहले वे झारखंड तथा बिहार सरकार में भी महती जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। 31 अगस्त को गाबा को बतौर गृह सचिव दो वर्ष पूरे हो जाएंगे। गाबा 1982 बैच के झारखंड कैडर के आईएएस अधिकारी हैं।
गौरतलब है कि केंद्रीय कैबिनेट सचिव का कार्यकाल दो वर्ष का होता है, जिसे दो वर्षों के लिए बढ़ाया भी जा सकता है। यानी एक अधिकारी चार वर्ष तक कैबिनेट सचिव रह सकता है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में तत्कालीन गृह सचिव राजीव महर्षि के बाद राजीव गौबा को इस पद पर नियुक्त किया गया था। 1959 में पंजाब में जन्मे गाबा ने भौतिकी विज्ञान से स्नातक किया है।
वे केंद्र में गृह के अलावा, पर्यावरण, वन मंत्रालय तथा सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में भी कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में चार वर्षों तक भारत का प्रतिनिधित्व भी किया था।
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केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा को नया कैबिनेट सचिव नियुक्त किया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो वे पीके सिन्हा का स्थान लेंगे जिनका चार वर्षीय कार्यकाल बारह जून को समाप्त हो रहा है। नई दिल्लीः केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा को नया कैबिनेट सचिव नियुक्त किया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो वे पीके सिन्हा का स्थान लेंगे जिनका चार वर्षीय कार्यकाल बारह जून को समाप्त हो रहा है। एक हज़ार नौ सौ सत्तासी बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम भी इस पद की दौड़ में हैं। मूलतः छत्तीसगढ़ कैडर के अधिकारी सुब्रमण्यम को गाबा के बाद सबसे ज्यादा मजबूत दावेदार माना जा रहा है। राजीव गाबा के पास केंद्र के कई महकमों में महत्वपूर्ण पदों को संभालने का अनुभव है। केंद्र से पहले वे झारखंड तथा बिहार सरकार में भी महती जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। इकतीस अगस्त को गाबा को बतौर गृह सचिव दो वर्ष पूरे हो जाएंगे। गाबा एक हज़ार नौ सौ बयासी बैच के झारखंड कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। गौरतलब है कि केंद्रीय कैबिनेट सचिव का कार्यकाल दो वर्ष का होता है, जिसे दो वर्षों के लिए बढ़ाया भी जा सकता है। यानी एक अधिकारी चार वर्ष तक कैबिनेट सचिव रह सकता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष दो हज़ार सत्रह में तत्कालीन गृह सचिव राजीव महर्षि के बाद राजीव गौबा को इस पद पर नियुक्त किया गया था। एक हज़ार नौ सौ उनसठ में पंजाब में जन्मे गाबा ने भौतिकी विज्ञान से स्नातक किया है। वे केंद्र में गृह के अलावा, पर्यावरण, वन मंत्रालय तथा सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में भी कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में चार वर्षों तक भारत का प्रतिनिधित्व भी किया था।
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंदर सिंह ने पिछले एक माह से तीन कृषि कानूनों को निरस्त कराने के लिए आंदोलन कर रहे किसानों के मसले जल्द हल होने की कामना करते हुए लोगों को नव वर्ष की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कोरोना महामारी से मुक्ति मिलने आस जताते हुए सभी पंजाबियों को दुनिया के कुछ हिस्सों में कोविड का नया रूप में सामने आने और उससे सावधानी और संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने किसानों को शांतिपूर्वक संघर्ष जारी रखने के लिए बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने इस ढंग से दुनिया भर के लोगों का दिल जीत लिया है।
पहले पंजाब में और अब दिल्ली की सरहदों पर किसानों के संघर्ष के दौरान दंगे या हिंसा की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई । मुख्यमंत्री ने आज प्रदेशवासियोें के नाम संदेश में कोरोना महामारी का डटकर मुकाबला करने की प्रशंसा की । यही नहीं राज्य के लोगों ने कृषि, उद्योग और व्यापारिक क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने डाक्टरों, नर्सों, पैरा-मेडिकल स्टाफ, पुलिस आदि समेत अगली कतार के सभी वर्करों का विशेष तौर पर ज़िक्र किया जिन्होंने महामारी के दौरान पंजाब के लोगों की सुरक्षा के लिए दिन-रात एक करते हुए बहादुरी के साथ लड़ाई लड़ी। उन्होंने विश्व में कोरोना का नया रूप सामने आने को लेकर आगाह किया कि कोविड अभी ़खत्म नहीं हुआ और लोगों को अपना और अपने परिवारों का ़ख्याल रखना चाहिए।
पिछले साल 22 मार्च से लेकर कोविड संकट के बाद इन्साफ के लिए किसान लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, उसके बावजूद राज्य में गेहूं और धान का रिकार्ड उत्पादन हुआ है। इन कठिन परिस्थितियों में भी पंजाबी हर मोर्चे पर अपनी ड्यूटी दृढ़ता और दिलेरी के साथ निभा रहे हैं। व्यापार और उद्योग की मिसाल देते हुए कहा कि पंजाबियों की कड़ी मेहनत के चलते ही कारोबारी गतिविधियां कुछ महीने बंद रहने के बाद फिर पटरी पर लौट आई हैं। लुधियाना में स्थित 2,40,000 इंडस्ट्रियल यूनिट अब चालू हो चुके हैं और इस समय पंजाब में 65,000 से 70,000 करोड़ रुपए की लागत से उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया पंजाब की उपलब्धियों को पहचान रही है। राज्य ने जहाँ कोविड को काबू करने में सफलता हासिल की, वहीं राज्य अमन-कानून बनाए रखा । हमारे बच्चों के लिए रोज़गार के मौके सृजन करने के लिए राज्य में निवेश हो और औद्योगिक यूनिट स्थापित हों, जिससे उनको रोज़गार के लिए पंजाब से बाहर न जाना पड़े। कैप्टन सिंह ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक युग में तरक्की और गतिशीलता के लिए संचार बहुत महत्वपूर्ण है तथा पंजाब किसी भी कीमत पर पीछे नहीं रह सकता और राज्य को तेज़ रफ़्तार से आगे बढऩे की ज़रूरत है। आशा जताते हुए कहा कि साल 2021 में राज्य में विकास के नये युग की शुरुआत देखने को मिलेगी और किसानों की मुश्किलें जल्द हल हो जाएंगी। उनकी सरकार विकास तथा प्रगति के पथ पर राज्य को आगे ले जाएगी ।
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंदर सिंह ने पिछले एक माह से तीन कृषि कानूनों को निरस्त कराने के लिए आंदोलन कर रहे किसानों के मसले जल्द हल होने की कामना करते हुए लोगों को नव वर्ष की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कोरोना महामारी से मुक्ति मिलने आस जताते हुए सभी पंजाबियों को दुनिया के कुछ हिस्सों में कोविड का नया रूप में सामने आने और उससे सावधानी और संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने किसानों को शांतिपूर्वक संघर्ष जारी रखने के लिए बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने इस ढंग से दुनिया भर के लोगों का दिल जीत लिया है। पहले पंजाब में और अब दिल्ली की सरहदों पर किसानों के संघर्ष के दौरान दंगे या हिंसा की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई । मुख्यमंत्री ने आज प्रदेशवासियोें के नाम संदेश में कोरोना महामारी का डटकर मुकाबला करने की प्रशंसा की । यही नहीं राज्य के लोगों ने कृषि, उद्योग और व्यापारिक क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने डाक्टरों, नर्सों, पैरा-मेडिकल स्टाफ, पुलिस आदि समेत अगली कतार के सभी वर्करों का विशेष तौर पर ज़िक्र किया जिन्होंने महामारी के दौरान पंजाब के लोगों की सुरक्षा के लिए दिन-रात एक करते हुए बहादुरी के साथ लड़ाई लड़ी। उन्होंने विश्व में कोरोना का नया रूप सामने आने को लेकर आगाह किया कि कोविड अभी ़खत्म नहीं हुआ और लोगों को अपना और अपने परिवारों का ़ख्याल रखना चाहिए। पिछले साल बाईस मार्च से लेकर कोविड संकट के बाद इन्साफ के लिए किसान लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, उसके बावजूद राज्य में गेहूं और धान का रिकार्ड उत्पादन हुआ है। इन कठिन परिस्थितियों में भी पंजाबी हर मोर्चे पर अपनी ड्यूटी दृढ़ता और दिलेरी के साथ निभा रहे हैं। व्यापार और उद्योग की मिसाल देते हुए कहा कि पंजाबियों की कड़ी मेहनत के चलते ही कारोबारी गतिविधियां कुछ महीने बंद रहने के बाद फिर पटरी पर लौट आई हैं। लुधियाना में स्थित दो,चालीस,शून्य इंडस्ट्रियल यूनिट अब चालू हो चुके हैं और इस समय पंजाब में पैंसठ,शून्य से सत्तर,शून्य करोड़ रुपए की लागत से उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया पंजाब की उपलब्धियों को पहचान रही है। राज्य ने जहाँ कोविड को काबू करने में सफलता हासिल की, वहीं राज्य अमन-कानून बनाए रखा । हमारे बच्चों के लिए रोज़गार के मौके सृजन करने के लिए राज्य में निवेश हो और औद्योगिक यूनिट स्थापित हों, जिससे उनको रोज़गार के लिए पंजाब से बाहर न जाना पड़े। कैप्टन सिंह ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक युग में तरक्की और गतिशीलता के लिए संचार बहुत महत्वपूर्ण है तथा पंजाब किसी भी कीमत पर पीछे नहीं रह सकता और राज्य को तेज़ रफ़्तार से आगे बढऩे की ज़रूरत है। आशा जताते हुए कहा कि साल दो हज़ार इक्कीस में राज्य में विकास के नये युग की शुरुआत देखने को मिलेगी और किसानों की मुश्किलें जल्द हल हो जाएंगी। उनकी सरकार विकास तथा प्रगति के पथ पर राज्य को आगे ले जाएगी ।
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वेबिनार में 16 मंत्रालय, नीति आयोग, क्षमता निर्माण आयोग और राज्य सरकारें शामिल होंगी। साथ ही इसमें आरबीआई, सेबी, आईएफएससीए, आईआरडीएआई, नाबार्ड, उद्योग संघों और विषय विशेषज्ञ/ निवेशक समुदाय जैसे नियामक ही इस वेबिनार का हिस्सा होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आठ मार्च को वित्त मंत्रालय द्वारा एक वेबिनार के उद्घाटन सत्र के दौरान 'विकास और आकांक्षात्मक अर्थव्यवस्था के लिए वित्तपोषण' शीर्षक पर एक विशेष भाषण देंगे।
बजट घोषणाओं के कुशल और त्वरित कार्यान्वयन की सुविधा के लिए भारत सरकार विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में वेबिनार की एक श्रृंखला आयोजित कर रही है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों, शिक्षा और उद्योग के विशेषज्ञों के साथ विचार-मंथन करना और विभिन्न क्षेत्रों के तहत विभिन्न मुद्दों के कार्यान्वयन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए रणनीतियों की पहचान करना है।
इस श्रृंखला के हिस्से के रूप में, वित्त मंत्रालय मंगलवार को 'वित्तपोषण और आकांक्षात्मक अर्थव्यवस्था' शीर्षक के साथ पोस्ट बजट वेबिनार का आयोजन कर रहा है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उच्चतम स्तर की भागीदारी में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन सत्र के दौरान एक विशेष भाषण देंगे।
इस वेबिनार में 16 मंत्रालय, नीति आयोग, क्षमता निर्माण आयोग और राज्य सरकारें शामिल होंगी। साथ ही इसमें आरबीआई, सेबी, आईएफएससीए, आईआरडीएआई, नाबार्ड, उद्योग संघों और विषय विशेषज्ञ/ निवेशक समुदाय जैसे नियामक ही इस वेबिनार का हिस्सा होंगे।
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वेबिनार में सोलह मंत्रालय, नीति आयोग, क्षमता निर्माण आयोग और राज्य सरकारें शामिल होंगी। साथ ही इसमें आरबीआई, सेबी, आईएफएससीए, आईआरडीएआई, नाबार्ड, उद्योग संघों और विषय विशेषज्ञ/ निवेशक समुदाय जैसे नियामक ही इस वेबिनार का हिस्सा होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आठ मार्च को वित्त मंत्रालय द्वारा एक वेबिनार के उद्घाटन सत्र के दौरान 'विकास और आकांक्षात्मक अर्थव्यवस्था के लिए वित्तपोषण' शीर्षक पर एक विशेष भाषण देंगे। बजट घोषणाओं के कुशल और त्वरित कार्यान्वयन की सुविधा के लिए भारत सरकार विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में वेबिनार की एक श्रृंखला आयोजित कर रही है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों, शिक्षा और उद्योग के विशेषज्ञों के साथ विचार-मंथन करना और विभिन्न क्षेत्रों के तहत विभिन्न मुद्दों के कार्यान्वयन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए रणनीतियों की पहचान करना है। इस श्रृंखला के हिस्से के रूप में, वित्त मंत्रालय मंगलवार को 'वित्तपोषण और आकांक्षात्मक अर्थव्यवस्था' शीर्षक के साथ पोस्ट बजट वेबिनार का आयोजन कर रहा है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उच्चतम स्तर की भागीदारी में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन सत्र के दौरान एक विशेष भाषण देंगे। इस वेबिनार में सोलह मंत्रालय, नीति आयोग, क्षमता निर्माण आयोग और राज्य सरकारें शामिल होंगी। साथ ही इसमें आरबीआई, सेबी, आईएफएससीए, आईआरडीएआई, नाबार्ड, उद्योग संघों और विषय विशेषज्ञ/ निवेशक समुदाय जैसे नियामक ही इस वेबिनार का हिस्सा होंगे। वेबिनार के माध्यम से, वित्त मंत्रालय गति को तेज करने और विषयों के एजेंडे को प्राप्त करने के तरीकों पर मूल्यवान इनपुट प्राप्त करना चाहता है। हितधारकों की विशेषज्ञता और अनुभव का लाभ उठाकर, विकास सुधारों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक कार्य योजना को उत्प्रेरित किया जाएगा। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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सौंठ, शलक्की, गगलू और गुडूची से अर्थराइटिस की चिकित्सा कैसे करें।
सौंठ, शलक्की, गगलू और गुडूची का मिश्रण तैयार करें। यह भी अर्थराइटिस की चिकित्सा का एक अच्छा समाधान है।
शिलाजीत से अर्थराइटिस की चिकित्सा।
अर्थराइटिस के लिए शिलाजीत दूसरा प्राकृतिक नुस्खा है।
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सौंठ, शलक्की, गगलू और गुडूची से अर्थराइटिस की चिकित्सा कैसे करें। सौंठ, शलक्की, गगलू और गुडूची का मिश्रण तैयार करें। यह भी अर्थराइटिस की चिकित्सा का एक अच्छा समाधान है। शिलाजीत से अर्थराइटिस की चिकित्सा। अर्थराइटिस के लिए शिलाजीत दूसरा प्राकृतिक नुस्खा है।
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मुंबई, फिल्म जगत में कोई संबंध नहीं होने के कारण नवोदित अभिनेत्री निधि अग्रवाल के लिए उनकी पदार्पण फिल्म 'मुन्ना माइकल' में काम पाने तक का सफर मुश्किल भरा रहा लेकिन इस अभिनेत्री का कहना है कि असली संघर्ष तो पहली फिल्म के बाद काम मिलने और इसे बनाए रखने में है। अपने सपनों को उड़ान देने के लिए निधि दो साल पहले बेंगलुरू से मुंबई जा पहुंचीं और इस दौरान उन्होंने कई ऑडिशन दिए तब जाकर उन्हें पहली फिल्म करने को मिली, जिसमें उनके साथ टाइगर श्रॉफ और नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी हैं।
निधि ने बताया, फिल्म जगत से मेरा कोई संपर्क नहीं था। मैं एक व्यवसायिक घराने से आती हूं। यहां तक पहुंचना काफी मुश्किल था लेकिन ऐसा नही हैं कि अब चीजें मेरे लिए बिल्कुल आसान हो गयी हैं। पहले मुझे लगता था कि एक फिल्म कर लूंगी तो फिर सब कुछ आसान हो जाएगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होता है। उन्होंने कहा, एक बार जब आपको फिल्म मिल जाती है, तो उसके बाद दबाव बढ़ जाता है और फिर यह कभी कम नहीं होता है।
आपको अपना काम अच्छी तरह से करना होता है, लोगों को बहुत उम्मीदें होती हैं। तो वहीं दूसरी ओर आपको हर समय अच्छा भी दिखना होता है लेकिन फिलहाल मैं इन सब चीजों का आनंद ले रही हूं। सब्बीर खान द्वारा निर्देशित उनकी यह फिल्म 'मुन्ना माइकल' 21 जुलाई को रिलीज होने जा रही है।
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मुंबई, फिल्म जगत में कोई संबंध नहीं होने के कारण नवोदित अभिनेत्री निधि अग्रवाल के लिए उनकी पदार्पण फिल्म 'मुन्ना माइकल' में काम पाने तक का सफर मुश्किल भरा रहा लेकिन इस अभिनेत्री का कहना है कि असली संघर्ष तो पहली फिल्म के बाद काम मिलने और इसे बनाए रखने में है। अपने सपनों को उड़ान देने के लिए निधि दो साल पहले बेंगलुरू से मुंबई जा पहुंचीं और इस दौरान उन्होंने कई ऑडिशन दिए तब जाकर उन्हें पहली फिल्म करने को मिली, जिसमें उनके साथ टाइगर श्रॉफ और नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी हैं। निधि ने बताया, फिल्म जगत से मेरा कोई संपर्क नहीं था। मैं एक व्यवसायिक घराने से आती हूं। यहां तक पहुंचना काफी मुश्किल था लेकिन ऐसा नही हैं कि अब चीजें मेरे लिए बिल्कुल आसान हो गयी हैं। पहले मुझे लगता था कि एक फिल्म कर लूंगी तो फिर सब कुछ आसान हो जाएगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होता है। उन्होंने कहा, एक बार जब आपको फिल्म मिल जाती है, तो उसके बाद दबाव बढ़ जाता है और फिर यह कभी कम नहीं होता है। आपको अपना काम अच्छी तरह से करना होता है, लोगों को बहुत उम्मीदें होती हैं। तो वहीं दूसरी ओर आपको हर समय अच्छा भी दिखना होता है लेकिन फिलहाल मैं इन सब चीजों का आनंद ले रही हूं। सब्बीर खान द्वारा निर्देशित उनकी यह फिल्म 'मुन्ना माइकल' इक्कीस जुलाई को रिलीज होने जा रही है।
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आपने अक्सर देखा होगा कि पुराने समय के लोग अक्सर अपने पेट की मालिश करते हैं। दरअसल, वे पेट की मालिश कर सेहत से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते है। जी हां, पेट की मालिश से कई तरह की समस्याओं का निवारण होता हैं और व्यक्ति शारीरिक व मानसिक रूप से भी फिट रहता हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर किस तरह पेट की मालिश सेहत के लिए फायदेमंद साबित होती हैं।
नर्सिंग अध्ययन इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक पेट की मालिश कब्ज और पेट दर्द को दूर करता है। नियमित रूप से पेट की मालिश करने से पेट की मांसपेशियां पूरी तरह से टोन्ड हो जाती हैं और मौजूदा कब्ज खत्म होता है।
पेट की मालिश करने से पेट की गैस आराम से निकल जाती है और अपच भी नहीं होती है। नियमित रूप से तीन मिनट तक की जाने वाली ये मसाज पेट संबंध कई बीमारियों से छुटकारा दिलाती है। अगर पेट में दर्द हो तो मालिश करने से उस जगह का रक्त संचार बढ़ जाता है। पेट की मालिश लिवर समेत आपके कई आंतरिक अंगों को राहत पहुंचाता है।
पेट की मालिश वजन कम करने के लिए फायदेमंद है। नियमित रूप से की जाने वाली पेट की मालिश चयापचय की दर को बढ़ाती है, जिससे पाचन को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा पेट संबंधी समस्याओं से परेशान हैं तो पेट की मालिश आपके लिए बहुत लाभकारी हो सकती है।
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आपने अक्सर देखा होगा कि पुराने समय के लोग अक्सर अपने पेट की मालिश करते हैं। दरअसल, वे पेट की मालिश कर सेहत से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते है। जी हां, पेट की मालिश से कई तरह की समस्याओं का निवारण होता हैं और व्यक्ति शारीरिक व मानसिक रूप से भी फिट रहता हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर किस तरह पेट की मालिश सेहत के लिए फायदेमंद साबित होती हैं। नर्सिंग अध्ययन इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक पेट की मालिश कब्ज और पेट दर्द को दूर करता है। नियमित रूप से पेट की मालिश करने से पेट की मांसपेशियां पूरी तरह से टोन्ड हो जाती हैं और मौजूदा कब्ज खत्म होता है। पेट की मालिश करने से पेट की गैस आराम से निकल जाती है और अपच भी नहीं होती है। नियमित रूप से तीन मिनट तक की जाने वाली ये मसाज पेट संबंध कई बीमारियों से छुटकारा दिलाती है। अगर पेट में दर्द हो तो मालिश करने से उस जगह का रक्त संचार बढ़ जाता है। पेट की मालिश लिवर समेत आपके कई आंतरिक अंगों को राहत पहुंचाता है। पेट की मालिश वजन कम करने के लिए फायदेमंद है। नियमित रूप से की जाने वाली पेट की मालिश चयापचय की दर को बढ़ाती है, जिससे पाचन को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा पेट संबंधी समस्याओं से परेशान हैं तो पेट की मालिश आपके लिए बहुत लाभकारी हो सकती है।
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कटिहार में मशहूर गेंदालाल बाबा और इनकी धर्मपत्नी का आज एकसाथ देहांत हो गया। गेंदालाल बाबा अपने इलाके सहित दूरदराज के क्षेत्रों में तलवार वाले बाबा के नाम से मशहूर थे। वो लम्बे समय से अपने धाम में बैठकर तलवार एवं तांत्रिक विद्या के द्वारा लोगों के जटिल से जटिल रोगों का इलाज करने के लिए इलाके में काफी चर्चित थे।
आज ग्रामीणों द्वारा दोपहर में बाबा एवं उनकी धर्मपत्नी दोनों की अर्थी एकसाथ पूरे धूमधाम से उठाई जा रही है। उनके आखिरी दर्शन के लिए लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है।
गेंदालाल बाबा कटिहार जिले के कोढा़ प्रखंड अंतर्गत कोलासी स्थित दक्षिणी सिमरिया पंचायत के भगत टोला में धाम चलाते थे। बाबा के चाहने वाले बड़ी संख्या में उपस्थित होकर उन्हें अश्रुपूर्ण विदाई दे रहे हैं।
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कटिहार में मशहूर गेंदालाल बाबा और इनकी धर्मपत्नी का आज एकसाथ देहांत हो गया। गेंदालाल बाबा अपने इलाके सहित दूरदराज के क्षेत्रों में तलवार वाले बाबा के नाम से मशहूर थे। वो लम्बे समय से अपने धाम में बैठकर तलवार एवं तांत्रिक विद्या के द्वारा लोगों के जटिल से जटिल रोगों का इलाज करने के लिए इलाके में काफी चर्चित थे। आज ग्रामीणों द्वारा दोपहर में बाबा एवं उनकी धर्मपत्नी दोनों की अर्थी एकसाथ पूरे धूमधाम से उठाई जा रही है। उनके आखिरी दर्शन के लिए लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। गेंदालाल बाबा कटिहार जिले के कोढा़ प्रखंड अंतर्गत कोलासी स्थित दक्षिणी सिमरिया पंचायत के भगत टोला में धाम चलाते थे। बाबा के चाहने वाले बड़ी संख्या में उपस्थित होकर उन्हें अश्रुपूर्ण विदाई दे रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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हमीरपुर से प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता प्रेम कौशल ने कहा कि प्रधानमंत्री देश के विपक्ष और कांग्रेस पार्टी द्वारा देशहित में किये जाने वाले सवालों को लेकर परेशान रहते हैं और अपमानजनक टिप्पणीयां कर देते हैं। प्रेम कौशल ने कहा कि नरेन्द्र मोदी और बीजेपी नेताओं को आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल जैसे सम्प्रदायिकता को प्रोमोट कर हिंसा फैलाने का कार्य करने वाले संगठन और इनके नेता ही देशभक्त नज़र आते हैं।
प्रेम कौशल ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ना केवल बेहद आपत्तिजनक है बल्कि यह उनके आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर व्याप्त डर को भी दर्शाती है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा और बलिदानों के इतिहास से न केवल देश की जनता बल्कि पूरा विश्व अच्छे से परिचित है। कांग्रेस पार्टी को ऐसे नेतायों से देशभक्ति का प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता नहीं है जिनके शासनकाल में उनके अपने राज्य में हज़ारों लोगों को सम्प्रदायिक हिंसा की आग में जिंदा जला दिया गया हो और उनकी अपनी पार्टी के ही प्रधानमंत्री ने राजधर्म निभाने की नसीहत दी हो।
प्रेम कौशल ने कहा कि कारगिल, सांसद पर हमला, पठानकोट एयर बेस पर हमला उड़ी सेक्टर में आतंकी हमला और पुलवामा में सैनिकों पर कायराना और दिल को दहला देने वाला आतंकी हमला सब के सब बीजेपी सरकारों के शासनकाल में हुए हैं और इनमें देश की रक्षा करते 2 हज़ारों वीर जवान शहीद हुए हैं। क्या देश की सुरक्षा व्यवस्था में रही नाकामियों को लेकर सवाल करना देश द्रोह है? कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री और बीजेपी नेताओं को आगाह किया कि अगर शहीदों की शहादत और सैनिकों के पराक्रम का इसी तरह राजनीतीकरण करते रहे तो यह देश और उनके अपने लिये अत्यंत घातक होगा।
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हमीरपुर से प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता प्रेम कौशल ने कहा कि प्रधानमंत्री देश के विपक्ष और कांग्रेस पार्टी द्वारा देशहित में किये जाने वाले सवालों को लेकर परेशान रहते हैं और अपमानजनक टिप्पणीयां कर देते हैं। प्रेम कौशल ने कहा कि नरेन्द्र मोदी और बीजेपी नेताओं को आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल जैसे सम्प्रदायिकता को प्रोमोट कर हिंसा फैलाने का कार्य करने वाले संगठन और इनके नेता ही देशभक्त नज़र आते हैं। प्रेम कौशल ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ना केवल बेहद आपत्तिजनक है बल्कि यह उनके आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर व्याप्त डर को भी दर्शाती है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा और बलिदानों के इतिहास से न केवल देश की जनता बल्कि पूरा विश्व अच्छे से परिचित है। कांग्रेस पार्टी को ऐसे नेतायों से देशभक्ति का प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता नहीं है जिनके शासनकाल में उनके अपने राज्य में हज़ारों लोगों को सम्प्रदायिक हिंसा की आग में जिंदा जला दिया गया हो और उनकी अपनी पार्टी के ही प्रधानमंत्री ने राजधर्म निभाने की नसीहत दी हो। प्रेम कौशल ने कहा कि कारगिल, सांसद पर हमला, पठानकोट एयर बेस पर हमला उड़ी सेक्टर में आतंकी हमला और पुलवामा में सैनिकों पर कायराना और दिल को दहला देने वाला आतंकी हमला सब के सब बीजेपी सरकारों के शासनकाल में हुए हैं और इनमें देश की रक्षा करते दो हज़ारों वीर जवान शहीद हुए हैं। क्या देश की सुरक्षा व्यवस्था में रही नाकामियों को लेकर सवाल करना देश द्रोह है? कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री और बीजेपी नेताओं को आगाह किया कि अगर शहीदों की शहादत और सैनिकों के पराक्रम का इसी तरह राजनीतीकरण करते रहे तो यह देश और उनके अपने लिये अत्यंत घातक होगा।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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राजस्थान में आज कई सालों बाद प्राइवेट और सरकारी अस्पताल के डॉक्टर सामूहिक हड़ताल पर है। राइट टू हेल्थ बिल का डॉक्टरों ने विरोध किया है। सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने ओपीडी सर्विस बंद कर दी है।
सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने 1 दिन की ओपीडी सर्विस का बहिष्कार किया था। इसी के तहत निवाई के राजकीय सामुदायिक चिकित्सालय के चिकित्सकों ने भी बंद का पूर्ण का समर्थन किया और ओपीडी सेवाएं पूर्ण रूप से बंद कर दी। राजकीय सामुदायिक चिकित्सालय में आने वाले मरीजों को इलाज के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
ब्लॉक सीएमएचओ शैलेंद्र चौधरी ने बताया कि सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों द्वारा राइट टू हेल्थ का विरोध किया जा रहा है। जिसके तहत डॉक्टरों ने ओपीडी सर्विस बंद की है। किंतु मरीजों को किसी प्रकार की समस्या नहीं हो इसके लिए अतिरिक्त जिले से चिकित्सक लगाए गए हैं। वह अस्पताल में आने वाले मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
डॉक्टर के के विजय ने बताया कि राजस्थान के डॉक्टरों द्वारा राइट टू हेल्थ का विरोध किया जा रहा है। इसके तहत ओपीडी सेवाएं पूर्ण रूप से बंद की गई है। बंद का डॉक्टरों ने पूर्ण रूप से समर्थन दिया है।
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राजस्थान में आज कई सालों बाद प्राइवेट और सरकारी अस्पताल के डॉक्टर सामूहिक हड़ताल पर है। राइट टू हेल्थ बिल का डॉक्टरों ने विरोध किया है। सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने ओपीडी सर्विस बंद कर दी है। सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने एक दिन की ओपीडी सर्विस का बहिष्कार किया था। इसी के तहत निवाई के राजकीय सामुदायिक चिकित्सालय के चिकित्सकों ने भी बंद का पूर्ण का समर्थन किया और ओपीडी सेवाएं पूर्ण रूप से बंद कर दी। राजकीय सामुदायिक चिकित्सालय में आने वाले मरीजों को इलाज के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ब्लॉक सीएमएचओ शैलेंद्र चौधरी ने बताया कि सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों द्वारा राइट टू हेल्थ का विरोध किया जा रहा है। जिसके तहत डॉक्टरों ने ओपीडी सर्विस बंद की है। किंतु मरीजों को किसी प्रकार की समस्या नहीं हो इसके लिए अतिरिक्त जिले से चिकित्सक लगाए गए हैं। वह अस्पताल में आने वाले मरीजों का इलाज कर रहे हैं। डॉक्टर के के विजय ने बताया कि राजस्थान के डॉक्टरों द्वारा राइट टू हेल्थ का विरोध किया जा रहा है। इसके तहत ओपीडी सेवाएं पूर्ण रूप से बंद की गई है। बंद का डॉक्टरों ने पूर्ण रूप से समर्थन दिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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आप अपनी मृत्यु के बाद इस तरह की स्थिति को बचा सकते हैं और इसके लिए बहुत ज़रूरी है, मृत्यु के पहले अपनी वसीयत लिखित रूप से बनाना. अब आप सोचेंगे यह तो बड़े बुज़ुर्गाों वाली बात हो गई, अभी मेरी उम्र ही क्या है. पर संपूर्ण फ़ायनैंशियल प्लैनिंग के बेसिक रूल्स में यह भी है कि आप अपने बाद अपनी संपत्ति का बटवारा कैसे होगा, पहले ही तय कर दें. ताकि यह स्पष्ट रहे कि आपके बाद आपकी संपत्ति में से किसको कितना मिलनेवाला है.
वसीयत कैसे बनाएं?
* अपनी कुल संपत्ति और ज़िम्मेदारियों की सूची बनाएं, जिसमें सबकुछ स्पष्ट रूप से लिखा हो.
* अपनी हर संपत्ति के लिए लिखें कि इसे पाने के नियम और शर्त क्या हैं?
* यह स्पष्ट रूप से लिखें कि आपके बाद आपकी कौन-सी संपत्ति परिवार के किस सदस्य को मिलेगी?
* आपके जाने के बाद इस वसीयत को अमली जामा पहुंचाने वाला व्यक्ति कौन होगा?
* नाबालिग नॉमिनी के केस में यह लिखें कि उसके बालिग होने तक दोनों अभिभावकों की मृत्यु होने की कंडिशन में संपत्ति का गार्डियन कौन होगा?
ऊपर बताई गई बातों को वसीयत में लिखते समय आप अपने वक़ील की मदद ले सकते हैं. वह आपकी वसीयत को क़ानूनी तरीक़े से लिखेगा, उससे संबंधित क़ानूनी क़ायदे भी स्पष्ट रूप से लिखेगा.
जिनके पास पहले से ही अपनी वसीयत मौजूद है, उन्हें समय-समय पर उसकी समीक्षा करते रहनी चहिए, ताकि उसमें किसी तरह के बदलाव की ज़रूरत हो तो किया जा सके. उदाहरण के लिए वसीयत बनाने के बाद शादी, तलाक़, बच्चे होने, परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होने, या नई संपत्ति अर्जित होने, उत्तराधिकारियों में बदलाव करने की इच्छा होने जैसे तमाम घटनाक्रम कुछ सालों में होते रहते हैं. आप अपनी मौजूदा वसीयत में ही कुछ छोटे-बड़े बदलाव कर सकते हैं, या आपको लगे कि तब से लेकर अब तक चीज़ें बहुत ज़्यादा बदल गई हैं तो आप नई वसीयत बनवा सकते हैं.
जब एक बार वसीयत बन जाए तो उसे आप किसी सादे पेपर पर प्रिंट करा सकते हैं, उसमें साक्षीदारों के हस्ताक्षर किए गए हों. साक्षीदार ऐसे व्यक्ति होने चाहिए, जिन्हें आपकी वसीयत में कुछ मिल न रहा हो यानी वे आपकी वसीयत के लाभार्थी न हों. वसीयत का रजिस्ट्रेशन यानी पंजीकरण अनिवार्य नहीं है. पर एक रजिस्टर्ड वसीयत आपके बाद अमल में लाने के लिहाज़ से बहुत ही सुविधाजनक होगी. वसीयत के लाभार्थियों में किसी भी तरह का झगड़ा होने की संभावना कम से कम हो जाएगी.
क्या होता है, जब आप वसीयत नहीं बनवाते?
वसीयत की ग़ैरमौजूदगी में आपकी संपत्ति का बंटवारा आपके सभी उत्तराधिकारियों में किया जाएगा. इस दौरान यह ज़रूर देखा जाएगा कि आप किस धर्म के हैं, क्योंकि भारत में अलग-अलग धर्मों के उत्तराधिकार नियम थोड़े-बहुत अलग हैं. आमतौर पर लोग उत्तराधिकार नियम के अनुसार अपनी संपत्ति का बंटवारा पसंद नहीं करते इसलिए या तो वे लिखित में अपनी वसीयत छोड़ जाते हैं या बुढ़ापे में यह स्पष्ट कर देते हैं कि किसे क्या देना चाहते हैं.
वसीयत न होने पर, किस तरह की समस्याएं आ सकती हैं?
वसीयत न होने की स्थिति में परिवार में संपत्ति को लेकर लंबा विवाद चल सकता है. मामला कोर्ट तक जा सकता है. वहीं जब परिवार के पास एक ऐसी वसीयत हो, जिसमें हर प्रॉपर्टी के बारे में डीटेल में लिखा हो तो किसी तरह के झगड़े जैसी बात नहीं होती. परिवार के लोगों में मनमुटाव नहीं होता. संपत्ति का बंटवारा आसानी से हो जाता है. अदालती कार्रवाही से छुटकारा मिलता है. जिसके हिस्से में जो होता है, तुरंत मिल जाता है.
तो अगर आप चाहते हैं कि आपके बाद आपके अपने सुकून से रहें और उनके बीच प्यार बना रहे तो आप अपनी ओर से यह छोटा-सा काम कर जाएं. बेशक़, उसे बनाते समय काफ़ी सोच-विचार और माथापच्ची करने की ज़रूरत होगी, पर फ़्यूचर के लिहाज़ से यह माथापच्ची सही ही कहलाएगी.
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आप अपनी मृत्यु के बाद इस तरह की स्थिति को बचा सकते हैं और इसके लिए बहुत ज़रूरी है, मृत्यु के पहले अपनी वसीयत लिखित रूप से बनाना. अब आप सोचेंगे यह तो बड़े बुज़ुर्गाों वाली बात हो गई, अभी मेरी उम्र ही क्या है. पर संपूर्ण फ़ायनैंशियल प्लैनिंग के बेसिक रूल्स में यह भी है कि आप अपने बाद अपनी संपत्ति का बटवारा कैसे होगा, पहले ही तय कर दें. ताकि यह स्पष्ट रहे कि आपके बाद आपकी संपत्ति में से किसको कितना मिलनेवाला है. वसीयत कैसे बनाएं? * अपनी कुल संपत्ति और ज़िम्मेदारियों की सूची बनाएं, जिसमें सबकुछ स्पष्ट रूप से लिखा हो. * अपनी हर संपत्ति के लिए लिखें कि इसे पाने के नियम और शर्त क्या हैं? * यह स्पष्ट रूप से लिखें कि आपके बाद आपकी कौन-सी संपत्ति परिवार के किस सदस्य को मिलेगी? * आपके जाने के बाद इस वसीयत को अमली जामा पहुंचाने वाला व्यक्ति कौन होगा? * नाबालिग नॉमिनी के केस में यह लिखें कि उसके बालिग होने तक दोनों अभिभावकों की मृत्यु होने की कंडिशन में संपत्ति का गार्डियन कौन होगा? ऊपर बताई गई बातों को वसीयत में लिखते समय आप अपने वक़ील की मदद ले सकते हैं. वह आपकी वसीयत को क़ानूनी तरीक़े से लिखेगा, उससे संबंधित क़ानूनी क़ायदे भी स्पष्ट रूप से लिखेगा. जिनके पास पहले से ही अपनी वसीयत मौजूद है, उन्हें समय-समय पर उसकी समीक्षा करते रहनी चहिए, ताकि उसमें किसी तरह के बदलाव की ज़रूरत हो तो किया जा सके. उदाहरण के लिए वसीयत बनाने के बाद शादी, तलाक़, बच्चे होने, परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होने, या नई संपत्ति अर्जित होने, उत्तराधिकारियों में बदलाव करने की इच्छा होने जैसे तमाम घटनाक्रम कुछ सालों में होते रहते हैं. आप अपनी मौजूदा वसीयत में ही कुछ छोटे-बड़े बदलाव कर सकते हैं, या आपको लगे कि तब से लेकर अब तक चीज़ें बहुत ज़्यादा बदल गई हैं तो आप नई वसीयत बनवा सकते हैं. जब एक बार वसीयत बन जाए तो उसे आप किसी सादे पेपर पर प्रिंट करा सकते हैं, उसमें साक्षीदारों के हस्ताक्षर किए गए हों. साक्षीदार ऐसे व्यक्ति होने चाहिए, जिन्हें आपकी वसीयत में कुछ मिल न रहा हो यानी वे आपकी वसीयत के लाभार्थी न हों. वसीयत का रजिस्ट्रेशन यानी पंजीकरण अनिवार्य नहीं है. पर एक रजिस्टर्ड वसीयत आपके बाद अमल में लाने के लिहाज़ से बहुत ही सुविधाजनक होगी. वसीयत के लाभार्थियों में किसी भी तरह का झगड़ा होने की संभावना कम से कम हो जाएगी. क्या होता है, जब आप वसीयत नहीं बनवाते? वसीयत की ग़ैरमौजूदगी में आपकी संपत्ति का बंटवारा आपके सभी उत्तराधिकारियों में किया जाएगा. इस दौरान यह ज़रूर देखा जाएगा कि आप किस धर्म के हैं, क्योंकि भारत में अलग-अलग धर्मों के उत्तराधिकार नियम थोड़े-बहुत अलग हैं. आमतौर पर लोग उत्तराधिकार नियम के अनुसार अपनी संपत्ति का बंटवारा पसंद नहीं करते इसलिए या तो वे लिखित में अपनी वसीयत छोड़ जाते हैं या बुढ़ापे में यह स्पष्ट कर देते हैं कि किसे क्या देना चाहते हैं. वसीयत न होने पर, किस तरह की समस्याएं आ सकती हैं? वसीयत न होने की स्थिति में परिवार में संपत्ति को लेकर लंबा विवाद चल सकता है. मामला कोर्ट तक जा सकता है. वहीं जब परिवार के पास एक ऐसी वसीयत हो, जिसमें हर प्रॉपर्टी के बारे में डीटेल में लिखा हो तो किसी तरह के झगड़े जैसी बात नहीं होती. परिवार के लोगों में मनमुटाव नहीं होता. संपत्ति का बंटवारा आसानी से हो जाता है. अदालती कार्रवाही से छुटकारा मिलता है. जिसके हिस्से में जो होता है, तुरंत मिल जाता है. तो अगर आप चाहते हैं कि आपके बाद आपके अपने सुकून से रहें और उनके बीच प्यार बना रहे तो आप अपनी ओर से यह छोटा-सा काम कर जाएं. बेशक़, उसे बनाते समय काफ़ी सोच-विचार और माथापच्ची करने की ज़रूरत होगी, पर फ़्यूचर के लिहाज़ से यह माथापच्ची सही ही कहलाएगी.
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RPSC RAS Recruitment 2023: राजस्थान में सरकारी नौकरी की तलाश में बैठे कैंडिडेट्स के लिए एक अच्छी खबर है। राजस्थान लोक सेवा आयोग की तरफ से राजस्थान राज्य सेवा और सब-ऑर्डिनेट सेवा परीक्षा 2023 के लिए आवेदन प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। एप्लीकेशन प्रोसेस को आधिकारिक वेबसाइ पर 1 जुलाई को शुरू किया जा चुका है। इस भर्ती के लिए इच्छुक व योग्य कैंडिडेट्स आधिकारिक वेबसाइट rpsc. rajasthan. gov. in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। कैंडिडेट्स इस भर्ती के लिए 31 जुलाई 2023 तक आवदेन कर सकते हैं, जो कि लास्ट डेट है।
- इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले General / BC/OBC Creamy Layer / अदर स्टेट्स के कैंडिडेट्स को 600 रुपये का आवेदन शुल्क के रूप में भुगतान करना होगा।
- जबकि, OBC(नॉन क्रीमी लेयर) / BC / EWS/SC / ST वर्ग के कैंडिडेट्स को 400 रुपये का भुगतान करना होगा।
- कैंडिडेट्स आवेदन शुल्क का भुगतान राजस्थान ई मित्र पोर्टल या डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, यूपीआई भुगतान मोड के माध्यम से कर सकते हैं।
1. आरपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट rpsc. rajasthan. gov. in पर जाएं।
2. 'वन टाइम रजिस्ट्रेशन' लिंक पर क्लिक करें और बेसिक रजिस्ट्रेशन पूरा करें।
3. अपने ओटीआर क्रेडेंशियल का उपयोग करके लॉगिन करें और आरपीएससी आरएएस आवेदन पत्र 2023 भरने के लिए आगे बढ़ें।
4. आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें और दर्ज किए गए विवरणों को क्रॉस-सत्यापित करें।
5. आवेदन शुल्क का भुगतान करें और अंत में फॉर्म जमा कर दें।
6. भविष्य के संदर्भ के लिए आरपीएससी आरएएस परीक्षा फॉर्म को डाउनलोड करें और उसका प्रिंटआउट ले लें।
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RPSC RAS Recruitment दो हज़ार तेईस: राजस्थान में सरकारी नौकरी की तलाश में बैठे कैंडिडेट्स के लिए एक अच्छी खबर है। राजस्थान लोक सेवा आयोग की तरफ से राजस्थान राज्य सेवा और सब-ऑर्डिनेट सेवा परीक्षा दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। एप्लीकेशन प्रोसेस को आधिकारिक वेबसाइ पर एक जुलाई को शुरू किया जा चुका है। इस भर्ती के लिए इच्छुक व योग्य कैंडिडेट्स आधिकारिक वेबसाइट rpsc. rajasthan. gov. in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। कैंडिडेट्स इस भर्ती के लिए इकतीस जुलाई दो हज़ार तेईस तक आवदेन कर सकते हैं, जो कि लास्ट डेट है। - इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले General / BC/OBC Creamy Layer / अदर स्टेट्स के कैंडिडेट्स को छः सौ रुपयापये का आवेदन शुल्क के रूप में भुगतान करना होगा। - जबकि, OBC / BC / EWS/SC / ST वर्ग के कैंडिडेट्स को चार सौ रुपयापये का भुगतान करना होगा। - कैंडिडेट्स आवेदन शुल्क का भुगतान राजस्थान ई मित्र पोर्टल या डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, यूपीआई भुगतान मोड के माध्यम से कर सकते हैं। एक. आरपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट rpsc. rajasthan. gov. in पर जाएं। दो. 'वन टाइम रजिस्ट्रेशन' लिंक पर क्लिक करें और बेसिक रजिस्ट्रेशन पूरा करें। तीन. अपने ओटीआर क्रेडेंशियल का उपयोग करके लॉगिन करें और आरपीएससी आरएएस आवेदन पत्र दो हज़ार तेईस भरने के लिए आगे बढ़ें। चार. आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें और दर्ज किए गए विवरणों को क्रॉस-सत्यापित करें। पाँच. आवेदन शुल्क का भुगतान करें और अंत में फॉर्म जमा कर दें। छः. भविष्य के संदर्भ के लिए आरपीएससी आरएएस परीक्षा फॉर्म को डाउनलोड करें और उसका प्रिंटआउट ले लें।
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फाइनैंशियल इमर्जेंसी के दौर में पर्सनल लोन एक भरोसेमंद समाधान होता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इसके बदले में कुछ गिरवी रखने की जरूरत नहीं पड़ती और दूसरी बात यह है कि लोन की धनराशि का उपयोग करने को लेकर कोई पाबंदी नहीं है। ये दोनों फीचर किसी पर्सनल लोन को लेना आसान और सुविधाजनक बनाते हैं।
आम तौर पर आपको केवल पर्सनल लोन का इलीजिबिलिटी क्राइटीरिया पूरा करने की आवश्यकता होती है और यह पक्का करना होता है कि आपका सिबिल स्कोर पर्याप्त ऊंचा हो, ताकि पर्सनल लोन की किफायती ब्याज दरों का लाभ मिल सके। कुछ लेंडर आजकल ऐसे-ऐसे पर्सनल लोन की पेशकश करते हैं जो उधार लेने वालों को 24 घंटे जितनी छोटी अवधि में फंड दिला सकते हैं।
दरअसल बजाज फिनसर्व जैसे लेंडरों ने योग्य ग्राहकों के लिए एक इंस्टैंट पर्सनल लोन की पेशकश करके प्रोसेसिंग में लगने वाले इस समय को और भी घटा दिया है। सिर्फ दो क्लिक दबाकर आपको अपनी जरूरत का पैसा जल्द से जल्द मिल सकता है, क्योंकि लोन की राशि केवल 20 मिनट में आपके बैंक खाते में डाल दी जाती है! लोन का तेज डिस्बर्सल होने के अलावा कोई हिडेन चार्ज चुकाए बगैर और कोई डॉक्यूमेंट जमा किए बिना ही लोन की पर्याप्त धनराशि आपके हाथ में आ जाती है। यह 100% डिजिटल प्रोसेस आपको अपने घर बैठे आराम से लोन हासिल करने में सक्षम बनाती है और आपको कहीं बाहर जाने की जरूरत तक नहीं पड़ती।
हालांकि किसी पर्सनल लोन के द्वारा पेश किए गए तमाम फायदों के बावजूद कुछ गलतफहमियां आपको समय पर लोन प्राप्त करने में बाधक बन जाती हैं। अगली बार कैश क्रंच की कोई स्थिति पैदा होने पर आपको ठोस विकल्प चुनने में मदद करने के लिए पर्सनल लोन से जुड़े यहां वे 6 कॉमन मिथ यहां बताए जा रहे हैं, जिन्हें आपको नजरअंदाज करना चाहिएः
हालांकि आपका CIBIL स्कोर एक महत्वपूर्ण फैक्टर होता है, जिस पर लेंडर आपके लोन एप्लीकेशन को रिव्यू करते समय विचार करते हैं, लेकिन एकमात्र यही फैक्टर नहीं होता। कोई डिसीजन लेने से पहले लेंडर आपकी इनकम और रोजगार की स्थिति जैसे अन्य फैक्टर भी देखते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपने सिबिल स्कोर पर ध्यान देना छोड़ दें, क्योंकि 750 और उससे अधिक का बढ़िया सिबिल स्कोर आपको पर्सनल लोन की किफायती ब्याज दरें और पर्याप्त लोन की मंजूरी दिलाता है। कुछ लेंडर आपका CIBIL स्कोर कम होने के बावजूद आपको पर्सनल लोन ऑफर करते हैं- लेकिन इसके लिए वे आपको किसी ऊंचे सिबिल स्कोर वाले को-एप्लीकेंट के साथ आवेदन करने को कह सकते हैं।
इस मिथ का हकीकत में कोई आधार नहीं है क्योंकि किसी लोन की मंजूरी देते समय लेंडर आपकी रीपेमेंट कैपेसिटी को रिव्यू करते हैं। इसलिए अगर आपकी इनकम आपके मौजूदा लोन के साथ-साथ किसी नए पर्सनल लोन को भी चुकाने के लिए पर्याप्त है, तो आप बिना किसी परेशानी के नया लोन प्राप्त कर सकते हैं। आमतौर पर लेंडर आपकी रीपेमेंट कैपेसिटी को कैलक्युलेट करते वक्त 40% से कम के डेब्ट टू इनकम रेश्यू को देखते हैं।
उधार लेने वालों के बीच का यह एक और कॉमन मिथ है। हालांकि आप बैंकों से पर्सनल लोन प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन नॉन-बैंकिंग फाइनैंस कंपनीज (एनबीएफसी) भी कंपटीटिव और एफोर्डेबल शर्तों पर पर्सनल लोन ऑफर करती हैं। कुछ मामलों में एनबीएफसी आपके लोन के लिए ज्यादा सरल इलिजिबिलिटी क्राइटीरिया ऑफर कर सकती हैं। अन्य लोग आपको बेहतर सेवा का ऑफर कर सकते हैं। इसलिए इस बात को जांच लें कि क्या आप अपने लेंडर के पर्सनल लोन इलिजिबिलिटी क्राइटीरिया को पूरा करते हैं या नहीं। साथ ही साथ आवेदन करने से पहले पक्के तौर पर कई विकल्पों की तुलना करें।
एक अन्य मिथ जो उधार लेने वालों को कोई पर्सनल लोन लेने से रोकता है, वो यह विश्वास है कि ऐसे लोन केवल वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए ही मंजूर किए जाते हैं। हालांकि रेग्युलर इनकम होने के चलते वेतनभोगियों का लोन जल्द मंजूर हो जाता है, लेकिन सेल्फ-एम्पलॉयड व्यक्ति भी पर्सनल लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। यदि आप सेल्फ-एम्पलॉयड हैं, फिर चाहे आप कोई प्रोफेशनल व्यक्ति हों या कोई बिजनेस चलाते हों, अपना सिबिल स्कोर ऊंचा रखिए और अपने बिजनेस को खास बनाइए, आपको बड़ी आसानी से पर्सनल लोन मिल जाएगा।
यह मिथ इस फैक्ट से पैदा होता है कि अन्य प्रकार के लोन की तुलना में पर्सनल लोन का रीपेमेंट टेनर कम होता है। इसलिए उधार लेने वालों को लगता है कि वे चुने हुए टेनर के समाप्त होने से पहले पूरा लोन नहीं चुका सकते। हालांकि ऐसी कोई बात नहीं है, क्योंकि पर्सनल लोन को भी फोरक्लोज किया जा सकता है, फिर भी लेंडर इसके लिए कोई मिनिमम टेनर तय कर सकता है। आप लेंडर द्वारा लगाए गए प्रीपेमेंट चार्ज का भुगतान करके लोन को निबटा सकते हैं, जिनका उल्लेख उनके नियमों और शर्तों में किया जाता है।
यह एक ऑउटडेटेड मान्यता है जो आज के समय का सच नहीं है। चूंकि पर्सनल लोन बिना कुछ गिरवी रखे ही डिस्बर्स किए जाते हैं, इसलिए इनकी प्रोसेसिंग में होम लोन जैसे सिक्योर्ड लोन की तुलना में काफी कम समय लगता है। एक ओर जहां कुछ लेंडर पर्सनल लोन एप्लीकेशन को प्रोसेस करने में दो दिन या एक सप्ताह का समय लगा देते हैं, वहीं बजाज फिनसर्व जैसे लेंडर ने इस अवधि को एक दिन या कुछ मिनटों में ही समेट दिया है। उदाहरण के लिए जब आप किसी प्री-एप्रूव्ड ऑफर का उपयोग करके बजाज फिनसर्व पर्सनल लोन प्राप्त करते हैं, तो इसकी 100% डिजिटल प्रोसेस केवल 20 मिनट के अंदर आपके बैंक खाते में लोन की राशि मिल जाना सुनिश्चित करती है। एक नए ग्राहक के रूप में आप आवेदन करने के केवल 24 घंटों में ही लोन की राशि पा सकते हैं!
यह क्विक प्रोसेसिंग टाइम पर्सनल लोन को तत्कालिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने का एक आदर्श समाधान बनाता है।
पर्सनल लोन से जुड़े इन मिथों को आप जितनी जल्दी नजरअंदाज करेंगे, उतनी जल्दी आपको अपनी विभिन्न जरूरतों को पूरा करने के लिए धन मिलने में आसानी होगी। इसके अलावा बजाज फिनसर्व का इंस्टैंट पर्सनल लोन चुनने पर आपको धनराशि तुरंत मिलेगी। आपकी पर्सनल लोन इलिजिबिलिटी पहले ही तय हो जाने तथा आपके बेसिक डिल्टेल पहले से ही भरे होने के चलते आपको बस इतना करना है कि अपनी जरूरत का लोन पाने के लिए एक सिम्पल 2-क्लिक प्रोसेस को पूरा करना है।
अपनी इलिजिबिलिटी देखने के लिए आप अपने प्री-एप्रूव्ड ऑफर की जांच करें और अपने लिए तैयार रखे गए पर्सनलाइज्ड लोन का लाभ उठाएं।
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फाइनैंशियल इमर्जेंसी के दौर में पर्सनल लोन एक भरोसेमंद समाधान होता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इसके बदले में कुछ गिरवी रखने की जरूरत नहीं पड़ती और दूसरी बात यह है कि लोन की धनराशि का उपयोग करने को लेकर कोई पाबंदी नहीं है। ये दोनों फीचर किसी पर्सनल लोन को लेना आसान और सुविधाजनक बनाते हैं। आम तौर पर आपको केवल पर्सनल लोन का इलीजिबिलिटी क्राइटीरिया पूरा करने की आवश्यकता होती है और यह पक्का करना होता है कि आपका सिबिल स्कोर पर्याप्त ऊंचा हो, ताकि पर्सनल लोन की किफायती ब्याज दरों का लाभ मिल सके। कुछ लेंडर आजकल ऐसे-ऐसे पर्सनल लोन की पेशकश करते हैं जो उधार लेने वालों को चौबीस घंटाटे जितनी छोटी अवधि में फंड दिला सकते हैं। दरअसल बजाज फिनसर्व जैसे लेंडरों ने योग्य ग्राहकों के लिए एक इंस्टैंट पर्सनल लोन की पेशकश करके प्रोसेसिंग में लगने वाले इस समय को और भी घटा दिया है। सिर्फ दो क्लिक दबाकर आपको अपनी जरूरत का पैसा जल्द से जल्द मिल सकता है, क्योंकि लोन की राशि केवल बीस मिनट में आपके बैंक खाते में डाल दी जाती है! लोन का तेज डिस्बर्सल होने के अलावा कोई हिडेन चार्ज चुकाए बगैर और कोई डॉक्यूमेंट जमा किए बिना ही लोन की पर्याप्त धनराशि आपके हाथ में आ जाती है। यह एक सौ% डिजिटल प्रोसेस आपको अपने घर बैठे आराम से लोन हासिल करने में सक्षम बनाती है और आपको कहीं बाहर जाने की जरूरत तक नहीं पड़ती। हालांकि किसी पर्सनल लोन के द्वारा पेश किए गए तमाम फायदों के बावजूद कुछ गलतफहमियां आपको समय पर लोन प्राप्त करने में बाधक बन जाती हैं। अगली बार कैश क्रंच की कोई स्थिति पैदा होने पर आपको ठोस विकल्प चुनने में मदद करने के लिए पर्सनल लोन से जुड़े यहां वे छः कॉमन मिथ यहां बताए जा रहे हैं, जिन्हें आपको नजरअंदाज करना चाहिएः हालांकि आपका CIBIL स्कोर एक महत्वपूर्ण फैक्टर होता है, जिस पर लेंडर आपके लोन एप्लीकेशन को रिव्यू करते समय विचार करते हैं, लेकिन एकमात्र यही फैक्टर नहीं होता। कोई डिसीजन लेने से पहले लेंडर आपकी इनकम और रोजगार की स्थिति जैसे अन्य फैक्टर भी देखते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपने सिबिल स्कोर पर ध्यान देना छोड़ दें, क्योंकि सात सौ पचास और उससे अधिक का बढ़िया सिबिल स्कोर आपको पर्सनल लोन की किफायती ब्याज दरें और पर्याप्त लोन की मंजूरी दिलाता है। कुछ लेंडर आपका CIBIL स्कोर कम होने के बावजूद आपको पर्सनल लोन ऑफर करते हैं- लेकिन इसके लिए वे आपको किसी ऊंचे सिबिल स्कोर वाले को-एप्लीकेंट के साथ आवेदन करने को कह सकते हैं। इस मिथ का हकीकत में कोई आधार नहीं है क्योंकि किसी लोन की मंजूरी देते समय लेंडर आपकी रीपेमेंट कैपेसिटी को रिव्यू करते हैं। इसलिए अगर आपकी इनकम आपके मौजूदा लोन के साथ-साथ किसी नए पर्सनल लोन को भी चुकाने के लिए पर्याप्त है, तो आप बिना किसी परेशानी के नया लोन प्राप्त कर सकते हैं। आमतौर पर लेंडर आपकी रीपेमेंट कैपेसिटी को कैलक्युलेट करते वक्त चालीस% से कम के डेब्ट टू इनकम रेश्यू को देखते हैं। उधार लेने वालों के बीच का यह एक और कॉमन मिथ है। हालांकि आप बैंकों से पर्सनल लोन प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन नॉन-बैंकिंग फाइनैंस कंपनीज भी कंपटीटिव और एफोर्डेबल शर्तों पर पर्सनल लोन ऑफर करती हैं। कुछ मामलों में एनबीएफसी आपके लोन के लिए ज्यादा सरल इलिजिबिलिटी क्राइटीरिया ऑफर कर सकती हैं। अन्य लोग आपको बेहतर सेवा का ऑफर कर सकते हैं। इसलिए इस बात को जांच लें कि क्या आप अपने लेंडर के पर्सनल लोन इलिजिबिलिटी क्राइटीरिया को पूरा करते हैं या नहीं। साथ ही साथ आवेदन करने से पहले पक्के तौर पर कई विकल्पों की तुलना करें। एक अन्य मिथ जो उधार लेने वालों को कोई पर्सनल लोन लेने से रोकता है, वो यह विश्वास है कि ऐसे लोन केवल वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए ही मंजूर किए जाते हैं। हालांकि रेग्युलर इनकम होने के चलते वेतनभोगियों का लोन जल्द मंजूर हो जाता है, लेकिन सेल्फ-एम्पलॉयड व्यक्ति भी पर्सनल लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। यदि आप सेल्फ-एम्पलॉयड हैं, फिर चाहे आप कोई प्रोफेशनल व्यक्ति हों या कोई बिजनेस चलाते हों, अपना सिबिल स्कोर ऊंचा रखिए और अपने बिजनेस को खास बनाइए, आपको बड़ी आसानी से पर्सनल लोन मिल जाएगा। यह मिथ इस फैक्ट से पैदा होता है कि अन्य प्रकार के लोन की तुलना में पर्सनल लोन का रीपेमेंट टेनर कम होता है। इसलिए उधार लेने वालों को लगता है कि वे चुने हुए टेनर के समाप्त होने से पहले पूरा लोन नहीं चुका सकते। हालांकि ऐसी कोई बात नहीं है, क्योंकि पर्सनल लोन को भी फोरक्लोज किया जा सकता है, फिर भी लेंडर इसके लिए कोई मिनिमम टेनर तय कर सकता है। आप लेंडर द्वारा लगाए गए प्रीपेमेंट चार्ज का भुगतान करके लोन को निबटा सकते हैं, जिनका उल्लेख उनके नियमों और शर्तों में किया जाता है। यह एक ऑउटडेटेड मान्यता है जो आज के समय का सच नहीं है। चूंकि पर्सनल लोन बिना कुछ गिरवी रखे ही डिस्बर्स किए जाते हैं, इसलिए इनकी प्रोसेसिंग में होम लोन जैसे सिक्योर्ड लोन की तुलना में काफी कम समय लगता है। एक ओर जहां कुछ लेंडर पर्सनल लोन एप्लीकेशन को प्रोसेस करने में दो दिन या एक सप्ताह का समय लगा देते हैं, वहीं बजाज फिनसर्व जैसे लेंडर ने इस अवधि को एक दिन या कुछ मिनटों में ही समेट दिया है। उदाहरण के लिए जब आप किसी प्री-एप्रूव्ड ऑफर का उपयोग करके बजाज फिनसर्व पर्सनल लोन प्राप्त करते हैं, तो इसकी एक सौ% डिजिटल प्रोसेस केवल बीस मिनट के अंदर आपके बैंक खाते में लोन की राशि मिल जाना सुनिश्चित करती है। एक नए ग्राहक के रूप में आप आवेदन करने के केवल चौबीस घंटाटों में ही लोन की राशि पा सकते हैं! यह क्विक प्रोसेसिंग टाइम पर्सनल लोन को तत्कालिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने का एक आदर्श समाधान बनाता है। पर्सनल लोन से जुड़े इन मिथों को आप जितनी जल्दी नजरअंदाज करेंगे, उतनी जल्दी आपको अपनी विभिन्न जरूरतों को पूरा करने के लिए धन मिलने में आसानी होगी। इसके अलावा बजाज फिनसर्व का इंस्टैंट पर्सनल लोन चुनने पर आपको धनराशि तुरंत मिलेगी। आपकी पर्सनल लोन इलिजिबिलिटी पहले ही तय हो जाने तथा आपके बेसिक डिल्टेल पहले से ही भरे होने के चलते आपको बस इतना करना है कि अपनी जरूरत का लोन पाने के लिए एक सिम्पल दो-क्लिक प्रोसेस को पूरा करना है। अपनी इलिजिबिलिटी देखने के लिए आप अपने प्री-एप्रूव्ड ऑफर की जांच करें और अपने लिए तैयार रखे गए पर्सनलाइज्ड लोन का लाभ उठाएं।
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केरल में दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली यात्रा के दौरान नरेंद्र मोदी शनिवार को गुरुवायूर में स्थित श्री कृष्ण मंदिर जाएंगे और यहां पूजा-अर्चना करेंगे। थ्रिसूर जिले में स्थित यह मंदिर सदियों पुराना है। यह राज्य में हिंदू पूजा के महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है। प्रधानमंत्री शुक्रवार देर रात कोच्चि में नौसेना के हवाई अड्डे पर रात के 11 बजे उतरेंगे। यहां से वह एरनाकुलम के गेस्ट हाउस जाएंगे और रात में यहीं ठहरेंगे।
शनिवार सुबह वह चॉपर से नौसेना के हवाई अड्डे से गुरुवायूर मंदिर के पास बनाए गए हेलीपैड तक हेलिकॉप्टर से जाएंगे। मंदिर में पूजा-अर्चना करने के अलावा मोदी यहां कमल के फूलों से थुलाभरम (व्यक्ति के बराबर वजन की किसी चीज को रखना) भी करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी यहां अतीत में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए आ चुके हैं।
प्रधानमंत्री बनने के बाद किसी धार्मिक स्थल पर यह उनकी पहली यात्रा होगी। इससे पहले 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए थ्रिसूर को चुना था। गुरुवयूर में भाजपा के कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री शनिवार दोपहर को कोच्ची वापस जाएंगे और यहां से वह दूसरे कार्यकाल की पहले द्वीपक्षीय वार्ता के लिए मालदीव रवाना हो जाएंगे।
इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी शुक्रवार को केरल की यात्रा पर पहुंच रहे हैं। वायनाड लोकसभा सीट से जीतने के बाद वह मतदाताओं का आभार व्यक्त करने के लिए आ रहे हैं। तीन दिन के अंदर वह 15 कार्यक्रमों का हिस्सा बनेंगे।
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केरल में दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली यात्रा के दौरान नरेंद्र मोदी शनिवार को गुरुवायूर में स्थित श्री कृष्ण मंदिर जाएंगे और यहां पूजा-अर्चना करेंगे। थ्रिसूर जिले में स्थित यह मंदिर सदियों पुराना है। यह राज्य में हिंदू पूजा के महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है। प्रधानमंत्री शुक्रवार देर रात कोच्चि में नौसेना के हवाई अड्डे पर रात के ग्यारह बजे उतरेंगे। यहां से वह एरनाकुलम के गेस्ट हाउस जाएंगे और रात में यहीं ठहरेंगे। शनिवार सुबह वह चॉपर से नौसेना के हवाई अड्डे से गुरुवायूर मंदिर के पास बनाए गए हेलीपैड तक हेलिकॉप्टर से जाएंगे। मंदिर में पूजा-अर्चना करने के अलावा मोदी यहां कमल के फूलों से थुलाभरम भी करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी यहां अतीत में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए आ चुके हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद किसी धार्मिक स्थल पर यह उनकी पहली यात्रा होगी। इससे पहले दो हज़ार चौदह में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए थ्रिसूर को चुना था। गुरुवयूर में भाजपा के कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री शनिवार दोपहर को कोच्ची वापस जाएंगे और यहां से वह दूसरे कार्यकाल की पहले द्वीपक्षीय वार्ता के लिए मालदीव रवाना हो जाएंगे। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी शुक्रवार को केरल की यात्रा पर पहुंच रहे हैं। वायनाड लोकसभा सीट से जीतने के बाद वह मतदाताओं का आभार व्यक्त करने के लिए आ रहे हैं। तीन दिन के अंदर वह पंद्रह कार्यक्रमों का हिस्सा बनेंगे।
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1. एसपीएम : सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (एसपीएम) को नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता। ये बेहद खतरनाक कण अब दुनियाभर में वायु प्रदूषण का नया पैमाना बन चुके हैं क्योंकि ये शरीर के हर हिस्से पर प्रभाव डालते हैं।
2. नाइट्रोजन ऑक्साइड : ये तीव्र प्रतिक्रियाशील गैसों का समूह है, जिसमें नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड घुली होती है। यह वातावरण में लाल-कत्थई रंग कुहरा पैदा करता है। इससे त्वचा का कैंसर हो सकता है।
3. कार्बन मोनोऑक्साइड : यह रंगहीन और गंधहीन गैस है और वाहन के ईंधन से पैदा होती है। इससे दृश्यता घटती है, सुनने की क्षमता घट सकती है, सिर और सीने में दर्द रहता है।
4. सल्फर डाईऑक्साइड : यह ऐसी रंगहीन गैस है जो पानी में घुलकर भाप के रूप में अम्ल बनाती है। यह औद्योगिक कार्यों से पैदा होती है, जिससे सांस उखड़ने की समस्या पैदा होती है।
5. ओजोन : यह हल्के नीले रंग की गैस है जो वातावरण में मौजूद गैसों के सूर्य से प्रतिक्रिया करने पर पैदा होती है। कूड़ा वाली जगहों पर यह पैदा होती है। इससे आंखों में पानी, गले में खराश, सीने में खिंचाव की समस्या आती है।
हवा के प्रदूषित कणों को पीएम कहते हैं जो वाहन और ईंधन जलाने से वातावरण में पैदा होते हैं। हवा में इन कणों की संख्या निर्धारित मानक से अधिक हो जाने पर वायु की गुणवत्ता घटती है और प्रदूषण बढ़ता है। इसे माइक्रोन में मानते हैं जो एक इंच के 25 हजार होते हैं।
असर : आंख, नाक, गला और फेफड़े में जलन, खांसी, छींक, नाक बहना और सांस फूलना। अस्थमा और दिल के रोगियों के लिए जानलेवा हो सकते हैं।
बालों से 30 गुना पतला कण है, जिसका शरीर में प्रवेश रोकना बहुत मुश्किल है। 2. 5 माइक्रोन धनत्व वाले इन कणों की संख्या बढ़ने पर वातावरण की दृश्यता घटती है। दिन में हवा बंद होने पर ये कण बढ़ जाते हैं।
पीएम 10 से मास्क बचाएगा : 10 माइक्रोन धनत्व वाले प्रदूषित कणों को मास्क के माध्यम से शरीर में घुसने से रोका जा सकता है। ये पीएम 2. 5 से कम खतरनाक होते हैं।
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एक. एसपीएम : सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर को नग्न आंखों से नहीं देखा जा सकता। ये बेहद खतरनाक कण अब दुनियाभर में वायु प्रदूषण का नया पैमाना बन चुके हैं क्योंकि ये शरीर के हर हिस्से पर प्रभाव डालते हैं। दो. नाइट्रोजन ऑक्साइड : ये तीव्र प्रतिक्रियाशील गैसों का समूह है, जिसमें नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड घुली होती है। यह वातावरण में लाल-कत्थई रंग कुहरा पैदा करता है। इससे त्वचा का कैंसर हो सकता है। तीन. कार्बन मोनोऑक्साइड : यह रंगहीन और गंधहीन गैस है और वाहन के ईंधन से पैदा होती है। इससे दृश्यता घटती है, सुनने की क्षमता घट सकती है, सिर और सीने में दर्द रहता है। चार. सल्फर डाईऑक्साइड : यह ऐसी रंगहीन गैस है जो पानी में घुलकर भाप के रूप में अम्ल बनाती है। यह औद्योगिक कार्यों से पैदा होती है, जिससे सांस उखड़ने की समस्या पैदा होती है। पाँच. ओजोन : यह हल्के नीले रंग की गैस है जो वातावरण में मौजूद गैसों के सूर्य से प्रतिक्रिया करने पर पैदा होती है। कूड़ा वाली जगहों पर यह पैदा होती है। इससे आंखों में पानी, गले में खराश, सीने में खिंचाव की समस्या आती है। हवा के प्रदूषित कणों को पीएम कहते हैं जो वाहन और ईंधन जलाने से वातावरण में पैदा होते हैं। हवा में इन कणों की संख्या निर्धारित मानक से अधिक हो जाने पर वायु की गुणवत्ता घटती है और प्रदूषण बढ़ता है। इसे माइक्रोन में मानते हैं जो एक इंच के पच्चीस हजार होते हैं। असर : आंख, नाक, गला और फेफड़े में जलन, खांसी, छींक, नाक बहना और सांस फूलना। अस्थमा और दिल के रोगियों के लिए जानलेवा हो सकते हैं। बालों से तीस गुना पतला कण है, जिसका शरीर में प्रवेश रोकना बहुत मुश्किल है। दो. पाँच माइक्रोन धनत्व वाले इन कणों की संख्या बढ़ने पर वातावरण की दृश्यता घटती है। दिन में हवा बंद होने पर ये कण बढ़ जाते हैं। पीएम दस से मास्क बचाएगा : दस माइक्रोन धनत्व वाले प्रदूषित कणों को मास्क के माध्यम से शरीर में घुसने से रोका जा सकता है। ये पीएम दो. पाँच से कम खतरनाक होते हैं।
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यदि आप भी गूगल क्रोम का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपके लिए बड़ी खबर है। सरकार की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पान्स टीम (सीईआरटी-इन) ने गूगल क्रोम (Google Chrome) को लेकर चेतावनी जारी की है और कहा है कि यूजर्स तुरंत अपने क्रोम ब्राउजर को अपडेट करें।
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यदि आप भी गूगल क्रोम का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपके लिए बड़ी खबर है। सरकार की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पान्स टीम ने गूगल क्रोम को लेकर चेतावनी जारी की है और कहा है कि यूजर्स तुरंत अपने क्रोम ब्राउजर को अपडेट करें। Get all Tech News in Hindi related to live news update of latest mobile reviews apps, tablets etc. Stay updated with us for all breaking news from Tech and more Hindi News.
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इंडियन आर्मी ने टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स (TGC-135) के लिए अविवाहित भारतीय पुरुष उम्मीदवारों से एप्लीकेशन मांगे हैं। इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स इसके लिए अंतिम तिथि यानी 15 सितंबर 2021 तक इंडियन आर्मी की ऑफिशियल वेबसाइट https://joinindianarmy. nic. in/ के माध्यम से ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं।
मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स अप्लाई कर सकते हैं। फाइनल ईयर की परीक्षा में शामिल होने वाले भी जनवरी 2022 में IMA (इंडियन मिलिट्री एकेडमी, देहरादून) में शुरू होने वाले TGC-134 कोर्स के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे।
इस बार टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स में कुल 40 सीटें हैं। जो, सिविल, बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, कंप्यूटर टेक्नोलॉजी, इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन, टेलीकम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन, माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स एंड माइक्रोवेव, एयरोनॉटिकल एरोस्पेस, एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन, फाइबर ऑप्टिक्स, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग, वर्कशॉप टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग के लिए है। पूर्ण विवरण के लिए नोटिफिकेशन देखें।
1 जनवरी 2022 तक इसके लिए न्यूनतम उम्र सीमा 20 और अधिकतम 27 साल है। जन्म 2 जनवरी 1995 से पहले और 1 जनवरी 2002 के बाद नहीं हुआ हो।
इस कोर्स में सिलेक्ट होने के साल सफलतापूर्वक अपनी ट्रेनिंग पूरी करने वाले की नियुक्ति लेफ्टिनेंट के रूप में की जाएगी। जिन्हें समय-समय पर प्रमोशन के साथ 7वीं सीपीसी के अनुरूप वेतन दिए जाएंगे।
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इंडियन आर्मी ने टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स के लिए अविवाहित भारतीय पुरुष उम्मीदवारों से एप्लीकेशन मांगे हैं। इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स इसके लिए अंतिम तिथि यानी पंद्रह सितंबर दो हज़ार इक्कीस तक इंडियन आर्मी की ऑफिशियल वेबसाइट https://joinindianarmy. nic. in/ के माध्यम से ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स अप्लाई कर सकते हैं। फाइनल ईयर की परीक्षा में शामिल होने वाले भी जनवरी दो हज़ार बाईस में IMA में शुरू होने वाले TGC-एक सौ चौंतीस कोर्स के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे। इस बार टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स में कुल चालीस सीटें हैं। जो, सिविल, बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, कंप्यूटर टेक्नोलॉजी, इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन, टेलीकम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन, माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स एंड माइक्रोवेव, एयरोनॉटिकल एरोस्पेस, एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन, फाइबर ऑप्टिक्स, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग, वर्कशॉप टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग के लिए है। पूर्ण विवरण के लिए नोटिफिकेशन देखें। एक जनवरी दो हज़ार बाईस तक इसके लिए न्यूनतम उम्र सीमा बीस और अधिकतम सत्ताईस साल है। जन्म दो जनवरी एक हज़ार नौ सौ पचानवे से पहले और एक जनवरी दो हज़ार दो के बाद नहीं हुआ हो। इस कोर्स में सिलेक्ट होने के साल सफलतापूर्वक अपनी ट्रेनिंग पूरी करने वाले की नियुक्ति लेफ्टिनेंट के रूप में की जाएगी। जिन्हें समय-समय पर प्रमोशन के साथ सातवीं सीपीसी के अनुरूप वेतन दिए जाएंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लॉकडाउन की मियाद को अगले 19 दिन यानी 3 मई तक बढ़ाने के ऐलान के बाद रेल मंत्रालय ने भी इसकी घोषणा कर दी है कि 3 मई तक देश में कोई भी ट्रेन नहीं चलेगी फिर मालगाड़ियां चलेंगी जो सामान की आवाजाही देशभर में करेंगे. लॉक डाउन के कारण कोई यात्री ट्रेन 3 मई तक नहीं चलेगी. इसमें पैसेंजर ट्रेनों से लेकर राजधानी शताब्दी और तमाम एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल है.
रेलवे ने बताया कि जिन यात्रियों ने 14 अप्रैल के बाद की तारीखों में अपनी-अपनी टिकट बुक की थी उनकी टिकट भी अपने आप रद्द हो जाएंगी और उनका पैसा रिटर्न होगा. इसके साथ ही सब अर्बन रेलगाड़ियां भी बंद रहेंगी जिसमें मुंबई, कोलकाता, मेट्रो रेल, कोंकण रेलवे समेत सभी लोकल ट्रेनें भी रद्द रहेंगी. हालांकि देशभर में आवश्यक सामग्री की सप्लाई के लिए गुड्स ट्रेनों की आवाजाही अभी भी सुचारू रूप से चलती रहेगी. सभी मुसाफिरों की बुकिंग कैंसिल रहेगी. 3 मई तक स्टेशन के बाहर और अंदर रेलवे के सभी रिजर्वेशन काउंटर भी पूरी तरह बंद रहेंगे.
इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिये लागू किए गए देशव्यापी लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने की मंगलवार को घोषणा करते हुए कहा कि इस महामारी को मात देने के लिये यह जरूरी है .
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नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लॉकडाउन की मियाद को अगले उन्नीस दिन यानी तीन मई तक बढ़ाने के ऐलान के बाद रेल मंत्रालय ने भी इसकी घोषणा कर दी है कि तीन मई तक देश में कोई भी ट्रेन नहीं चलेगी फिर मालगाड़ियां चलेंगी जो सामान की आवाजाही देशभर में करेंगे. लॉक डाउन के कारण कोई यात्री ट्रेन तीन मई तक नहीं चलेगी. इसमें पैसेंजर ट्रेनों से लेकर राजधानी शताब्दी और तमाम एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल है. रेलवे ने बताया कि जिन यात्रियों ने चौदह अप्रैल के बाद की तारीखों में अपनी-अपनी टिकट बुक की थी उनकी टिकट भी अपने आप रद्द हो जाएंगी और उनका पैसा रिटर्न होगा. इसके साथ ही सब अर्बन रेलगाड़ियां भी बंद रहेंगी जिसमें मुंबई, कोलकाता, मेट्रो रेल, कोंकण रेलवे समेत सभी लोकल ट्रेनें भी रद्द रहेंगी. हालांकि देशभर में आवश्यक सामग्री की सप्लाई के लिए गुड्स ट्रेनों की आवाजाही अभी भी सुचारू रूप से चलती रहेगी. सभी मुसाफिरों की बुकिंग कैंसिल रहेगी. तीन मई तक स्टेशन के बाहर और अंदर रेलवे के सभी रिजर्वेशन काउंटर भी पूरी तरह बंद रहेंगे. इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिये लागू किए गए देशव्यापी लॉकडाउन को तीन मई तक बढ़ाने की मंगलवार को घोषणा करते हुए कहा कि इस महामारी को मात देने के लिये यह जरूरी है .
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GORAKHPUR: दि होम्योपैथिक साइंटिफिक चैम्बर, गोरखपुर की ओर से 9 अप्रैल, वेंस्डे को होम्योपैथी के जनक हैनीमन के ख्भ्9वीं जयंती पर सेंट एंड्रयूज कॉलेज के पास एक रेस्टोरेंट में एक प्रोग्राम का आयोजन किया जाएगा। एसोसिएशन के कंवेनर डॉ। केके श्रीवास्तव ने बताया कि इस प्रोग्राम के चीफ गेस्ट डीडीयू यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो। अशोक कुमार होंगे।
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GORAKHPUR: दि होम्योपैथिक साइंटिफिक चैम्बर, गोरखपुर की ओर से नौ अप्रैल, वेंस्डे को होम्योपैथी के जनक हैनीमन के ख्भ्नौवीं जयंती पर सेंट एंड्रयूज कॉलेज के पास एक रेस्टोरेंट में एक प्रोग्राम का आयोजन किया जाएगा। एसोसिएशन के कंवेनर डॉ। केके श्रीवास्तव ने बताया कि इस प्रोग्राम के चीफ गेस्ट डीडीयू यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो। अशोक कुमार होंगे।
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चेन्नई,: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने गुरुवार को राज्य में मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों की खातिर मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के लिए मनानाला नल्लाथरवु मंद्रम (मानम) योजना शुरू की।
मुख्यमंत्री ने शहर में मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में कई अन्य सुविधाओं का भी शुभारंभ किया। राज्य में आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों को मद्देनजर रखते हुए, सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता मंच भी स्थापित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य राज्य में मानसिक रूप से कमजोर लोगों की देखभाल करके आत्महत्या को रोकना है और इसके लिए विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
इससे पहले, स्वास्थ्य मंत्री मा सुब्रमण्यन ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य मंचों में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, मनोरोग विभाग के प्रमुख सहित सभी विभाग प्रमुख, सहायक प्रोफेसर और विद्यार्थियों की एक समिति का गठन किया जाएगा, जिसके बाद, विद्यार्थियों के मानसिक सुधार के उपाय किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों सहित विद्यार्थियों के कल्याण के लिए नवीन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस योजना के माध्यम से विद्यार्थी आवश्यकता होने पर हेल्पलाइन नंबर 14416 पर कॉल कर सकते हैं और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श ले सकते हैं। इस योजना को भविष्य में अन्य महाविद्यालयों और विद्यालयों में विस्तारित करने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने संस्थान में आधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों से लैस गैर-लाभकारी संगठन की जीवीके ईएमआरआई 108 एंबुलेंस सेवा द्वारा उन्नत 75 एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इसके अलावा, एक इंटरमीडिएट केयर सेंटर की लागत 2. 36 करोड़ रुपये हैं, जिसका लोकार्पण भी मुख्यमंत्री ने किया। इसमें 14 कमरों की सुविधा है। पहले से ही काम कर रहा 'हाफ वे होम' कई रोगियों के लिए एक घर है, जिन्हें परिवार द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है और हाल ही में इसे आधिकारिक तौर पर लॉन्च करने के लिए अपग्रेड किया गया था।
-(एजेंसी/वार्ता)
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चेन्नई,: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने गुरुवार को राज्य में मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों की खातिर मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के लिए मनानाला नल्लाथरवु मंद्रम योजना शुरू की। मुख्यमंत्री ने शहर में मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में कई अन्य सुविधाओं का भी शुभारंभ किया। राज्य में आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों को मद्देनजर रखते हुए, सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता मंच भी स्थापित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य राज्य में मानसिक रूप से कमजोर लोगों की देखभाल करके आत्महत्या को रोकना है और इसके लिए विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे पहले, स्वास्थ्य मंत्री मा सुब्रमण्यन ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य मंचों में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, मनोरोग विभाग के प्रमुख सहित सभी विभाग प्रमुख, सहायक प्रोफेसर और विद्यार्थियों की एक समिति का गठन किया जाएगा, जिसके बाद, विद्यार्थियों के मानसिक सुधार के उपाय किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों सहित विद्यार्थियों के कल्याण के लिए नवीन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस योजना के माध्यम से विद्यार्थी आवश्यकता होने पर हेल्पलाइन नंबर चौदह हज़ार चार सौ सोलह पर कॉल कर सकते हैं और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श ले सकते हैं। इस योजना को भविष्य में अन्य महाविद्यालयों और विद्यालयों में विस्तारित करने की योजना है। मुख्यमंत्री ने संस्थान में आधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों से लैस गैर-लाभकारी संगठन की जीवीके ईएमआरआई एक सौ आठ एंबुलेंस सेवा द्वारा उन्नत पचहत्तर एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके अलावा, एक इंटरमीडिएट केयर सेंटर की लागत दो. छत्तीस करोड़ रुपये हैं, जिसका लोकार्पण भी मुख्यमंत्री ने किया। इसमें चौदह कमरों की सुविधा है। पहले से ही काम कर रहा 'हाफ वे होम' कई रोगियों के लिए एक घर है, जिन्हें परिवार द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है और हाल ही में इसे आधिकारिक तौर पर लॉन्च करने के लिए अपग्रेड किया गया था। -
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नई दिल्लीः
बॉलीवुड एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन की बेटी आराध्या (Aaradhya Bachchan) अपनी क्यूटनेस के कारण अक्सर चर्चा में रहती हैं. कोई फंक्शन हो या पार्टी आराध्या हमेशा अपनी मां के साथ नजर आती हैं. अमिताभ बच्चन की पोती आराध्या ने श्यामक डावर के इंस्टीट्यूट फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स में जबरदस्त परफॉर्मेंस दी. आराध्या के परफॉर्मे 'समर फंक 2019' को देखने के लिए उनके माता-पिता के साथ दादी जया बच्चन और श्र्वेता बच्चन भी मौजूद थीं.
अपने इस डांस परफॉर्मेंस में आराध्या किसी प्रोफेशनल डांसर की तरह स्टेज पर डांस कर रही थीं. तो वहीं अभिषेक-ऐश अपनी बेटी को चीयर करते नजर आए. इस दौरान आराध्या ने पिंक कलर की फ्रॉक और डेनिम जैकेट पहनी थी.
बता दें कि आराध्या अपने दादा जी अमिताभ बच्चन के काफी करीब हैं. लेकिन इस प्रोग्राम में बिग बी कहीं नजर नहीं आए. बताया जा रहा है कि वह किसी फिल्म की शूटिंग में बिजी चल रहे हैं.
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नई दिल्लीः बॉलीवुड एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन की बेटी आराध्या अपनी क्यूटनेस के कारण अक्सर चर्चा में रहती हैं. कोई फंक्शन हो या पार्टी आराध्या हमेशा अपनी मां के साथ नजर आती हैं. अमिताभ बच्चन की पोती आराध्या ने श्यामक डावर के इंस्टीट्यूट फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स में जबरदस्त परफॉर्मेंस दी. आराध्या के परफॉर्मे 'समर फंक दो हज़ार उन्नीस' को देखने के लिए उनके माता-पिता के साथ दादी जया बच्चन और श्र्वेता बच्चन भी मौजूद थीं. अपने इस डांस परफॉर्मेंस में आराध्या किसी प्रोफेशनल डांसर की तरह स्टेज पर डांस कर रही थीं. तो वहीं अभिषेक-ऐश अपनी बेटी को चीयर करते नजर आए. इस दौरान आराध्या ने पिंक कलर की फ्रॉक और डेनिम जैकेट पहनी थी. बता दें कि आराध्या अपने दादा जी अमिताभ बच्चन के काफी करीब हैं. लेकिन इस प्रोग्राम में बिग बी कहीं नजर नहीं आए. बताया जा रहा है कि वह किसी फिल्म की शूटिंग में बिजी चल रहे हैं.
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सुप्रिया पांडेय, रायपुर. छत्तीसगढ़ में महंगाई के खिलाफ कांग्रेस का तीन चरणों में आंदोलन होगा. आंदोलन को लेकर प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने चर्चा में बताया कि एआईसीसी से निर्देश मिले हैं कि, तीन चरणों में आंदोलन किए जाएं. जिसकी रूपरेखा बन गई है, कल पीएल पुनिया का दौरा भी है वे भी आंदोलन के संबंध में दिशा निर्देश देंगे. 31 मई 3 और 4 अप्रैल को बड़े पैमाने पर केंद्र के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा. केंद्र सरकार आम जनता को लूटने का काम कर रही है.
पीसीसी चीफ मोहन मरकाम ने कहा कि महंगाई मुक्त भारत के तहत तीन चरणों में हम आंदोलन कर रहे हैं. 31 मार्च को पेट्रोल पंप, गैस सिलेंडर और मोटरसाइकिल को माला पहनाया जाएगा. उसकी आरती उतारी जाएगी, हम क्रमबद्ध आंदोलन करेंगे और केंद्र में बैठी भाजपा आम जनता लूटने का काम कर रही है. उसके विरोध में कांग्रेस पार्टी सड़क में उतर रही है और आम जनता को राहत दिलाने के लिए लगातार धरना प्रदर्शन किया जाएगा.
वहीं गुरुवार को पीएल पुनिया छत्तीसगढ़ दौरे पर आएंगे सबसे पहले सदस्यता अभियान और विभिन्न मुद्दों की समीक्षा करेंगे, वे शाम को ही खैरागढ़ के लिए निकल जाएंगे. रात्त में वहां के वरिष्ठ नेताओं से समीक्षा बैठक लेंगे. सुबह भी वरिष्ठ नेताओं से बैठकर समीक्षा करेंगे. वहां जीत का मूलमंत्र भी देंगे.
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सुप्रिया पांडेय, रायपुर. छत्तीसगढ़ में महंगाई के खिलाफ कांग्रेस का तीन चरणों में आंदोलन होगा. आंदोलन को लेकर प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने चर्चा में बताया कि एआईसीसी से निर्देश मिले हैं कि, तीन चरणों में आंदोलन किए जाएं. जिसकी रूपरेखा बन गई है, कल पीएल पुनिया का दौरा भी है वे भी आंदोलन के संबंध में दिशा निर्देश देंगे. इकतीस मई तीन और चार अप्रैल को बड़े पैमाने पर केंद्र के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा. केंद्र सरकार आम जनता को लूटने का काम कर रही है. पीसीसी चीफ मोहन मरकाम ने कहा कि महंगाई मुक्त भारत के तहत तीन चरणों में हम आंदोलन कर रहे हैं. इकतीस मार्च को पेट्रोल पंप, गैस सिलेंडर और मोटरसाइकिल को माला पहनाया जाएगा. उसकी आरती उतारी जाएगी, हम क्रमबद्ध आंदोलन करेंगे और केंद्र में बैठी भाजपा आम जनता लूटने का काम कर रही है. उसके विरोध में कांग्रेस पार्टी सड़क में उतर रही है और आम जनता को राहत दिलाने के लिए लगातार धरना प्रदर्शन किया जाएगा. वहीं गुरुवार को पीएल पुनिया छत्तीसगढ़ दौरे पर आएंगे सबसे पहले सदस्यता अभियान और विभिन्न मुद्दों की समीक्षा करेंगे, वे शाम को ही खैरागढ़ के लिए निकल जाएंगे. रात्त में वहां के वरिष्ठ नेताओं से समीक्षा बैठक लेंगे. सुबह भी वरिष्ठ नेताओं से बैठकर समीक्षा करेंगे. वहां जीत का मूलमंत्र भी देंगे.
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अलग-अलग स्तरों से विकसित होती है, उनमें ध्वनि, शब्दांश, शब्द, उप-वाक्य, वाक्य और फिर संपूर्ण संभाषण प्राप्त किया जाता है। यह केवल वह है कि इन बच्चों के विषय में, यह तीव्र था, 4 साल नही, 200 हफ्ते नहीं, यह केवल कुछ हफ्ते, कुछ दिन । किंतु अवस्थाएं.... या आधारभूत स्थिति बिल्कुल एक सी हैं। और यहां तक कि डॉ. विभूति गिरी नाथन भी आपको कहेंगे.... आप जानते होंगे...... सभी बच्चे एक ही तरह की विकास दर से विकास नहीं करते हैं। सभी सामान्य बच्चे भी एक ही प्रकार की दर से विकास नहीं करते हैं। आप जानते हैं। भगवान की दुनिया में, बहुत बड़ा उत्पादन हो रहा है किंतु हर उत्पाद अद्वितीय है, हमें उन्हें समझना चाहिए और उन सभी प्रकारों को समझने की कोशिश करनी चाहिए और उनकी मदद करनी चाहिए, आप जानते हैं, बच्चों की मदद कीजिए। इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि किसी बच्चे को सहायता की आवश्यकता नहीं है, सभी बच्चे सामान्य है,नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कुछ बच्चे अलग तरह से जन्म लेते हैं।
एक बच्चा क्या पसंद करता है यह बहुत स्पष्ट नहीं है, ठीक ह... किंतु दो चीज है बहुत स्पष्ट है। पहेली के बच्चा सुनना चाहता है कम से कम कुछ मात्रा में भाषा सुनना चाहता है ताकि वह सीख सके और दूसरा, जैसा कि आप जानते हैं कि चोम्स्की ने उसे प्लेटो की समस्या कहा है क्योंकि आप जानते हैं यह दार्शनिकीकरण (philosophising) है, यह हम सभी के लिए, की किस तरह आप और मैं जानेंगे की कोई झूठ बोल रहा है, मैंने कहा कि महिलाएं इन निर्णयों को लेने में बहुत अच्छी होती है, कृपया इस निर्णय को मेरे बारे में न ले....
हम जानते हैं कि जितना हम देखते हैं उससे ज्यादा हम किस तरह जानते हैं ? सबसे बड़ा प्रकरण भाषा है। कौन सा बच्चा इस तरह बैठता है, कौन सी मां इस तरह बैठ कर कहती है कि बेटा आज मैं तुम्हें पैसिव वॉइस सिखाने जा रही हूँ जोकि बंगाली में या मैथिली में या इंग्लिश में या किसी और दूसरी भाषा में जो विदेशी भाषा हो या मुझे इसकी अनुमति दो कि मैं तुम्हें एक
आश्चर्यजनक उदाहरण दूं।
इस विषय में मेरी बच्ची बहुत ही कहती है और मैंने इस बात को अनेक सेमिनार ओं में भी कहा है कि जब मेरी पत्नी कोई गलती करती है और दूध फट जाता है तब वह बहुत पसंद करती है और कहती है अरे मिल्क फट गया, पैसिव वॉइस, अरे दूध तो जल गया, दूध तो गिर गया, किंतु मेरी बच्ची इस तरह कहती है जब उससे होता है तो तुमने तो जला दिया, इस प्रकार बच्चे कैसे यह पैसिव वॉइस बनाना सीख जाते है। जब आप आरोप को बदल देते हैं जैसे आप यह नहीं चाहते कि वह उस पर जाए, हम नहीं जानत, हम जानते हैं हम जानते हैं, जितना हम सुनते हैं उससे अधिक, जितना हम अनुभव करते हैं उससे अधिक, जो कि हमें एक मनुष्य बनाता है और यही है जो व्यवहारवादी लोग एक अच्छे साथ के रूप में देखते हैं, जैसे आप जानते हैं चार पैर वाले, घोड़े, कुत्ते आदि आदि।
प्रतिभागीः यह व्यक्तिगत प्रकृति का अधिक है, मैं शोभा हूँ और मैं महाराष्ट्रीयन हूँ मैंने 1 तमिल व्यक्ति से विवाह किया है, मेरे दो बेटे हैं और और आप जानते हैं कि यह कभी-कभी बड़ा भ्रम उत्पन्न करने वाला होता है जब मैं घर पर होती हूँ और सभी रहते हैं। हम एक संयुक्त परिवार हैं जहां मेरे ससुर और मेरे पति के भाई और उनके बच्चे, सभी रहते हैं, हम सब एक साथ रहते हैं, लेकिन कभी-कभी जब मेरी मां आती, वह मेरी मां मेरे बच्चों के देखभाल के लिए आती है, जब मैं बाहर होती हूँ, मैं इस तरह का अनुवाद पाती हूँ। जो बहुत ही सहज होता है। जैसे कि मेरा बड़ा बेटा उदाहरण के लिए 10 साल का है और जब वह मुझसे बोलता है तो वह मराठी में बात करता है, मराठी और अंग्रेजी मोड में बात करता है और वह जब उसके पिता से बात करता है तब वह अंग्रेजी और तमिल मोड में बात करता है। और वह जब उसके दादा दादी से बात करता है तब वह तमिल में बात करता है और जब वह मेरी मां से बात करता है तो वह केवल मराठी बोलता है।
इस तरह मैं बहुत ही उत्सुक हूँ और और मैंने उससे कहा जब वह लगभग 5 या 6 साल का था ठीक है तुम ऐसा क्यों करते हो, तब वह कहता है मैं नहीं जानता मां, मैं नहीं जानता कि मैं ऐसा क्यों करता हूँ किंतु मैं यह करता हूँ, और जब वह लगभग 10 साल का हुआ, अब वह छठवीं कक्षा में है, मैं उससे कहती हूँ कि तुम फिर से वही वही करो, क्या तुम नहीं जानते कि अप्पा को मराठी नहीं आती या तुम सोचते हो कि तुम जानते हो कि मैं तमिल नहीं जानती, नही, सभी को सभी भाषाओं का पता है किंतु मैं सोचता हूँ कि वह सभी असहज महसूस करेंगे, वह उसी भाषा में मुझे जवाब देते हैं और इसीलिए मैं उनसे उसी विशेष भाषा में बात करता हूँ।
अब मेरा बड़ा बेटा जो 5 साल का है वह भी यही करता है इसलिए मैंने उससे कहा कि तुम ऐसा क्यों करते हो, मैं यह देखना चाहती थी कि क्या सभी बच्चे ऐसा करते हैं इसी तरह से या उनमें और इनमें कोई अंतर है उनके दृष्टिकोण (perspective) या भाषाई दृष्टिकोण (perspective) में। इसलिए जब मैं उनसे कहती हूँ तो वह कहते हैं नहीं मां बस ऐसे ही, मैं जानता हूँ तुम मुझसे उसी तरह बोलती हो, इसलिए मैं आपसे उसी तरह बोलता
मुझे लगता है यह एक दर्पण जैसा प्रभाव है और बाद में मैंने यह भी सीखा की मेरा बड़ा बेटा बहुत बाद के स्तर तक पहुंच चुका है उसने मुझसे कहा मां और आप समझ गए क्या आई कहती हैं, वह बोली मराठी में। और आपको पता है कि मेरा टाटा क्या कहता है, उनके दादाजी तमिल डान पेष्णुम। आपको आपको मालूम है उसके बर्थ सर्टिफिकेट में मेरे पति ने उसकी मातृभाषा में मराठी लिखवाया हुआ है। तो ऐसा है वह, लेकिन वह तमिल है और वह सीख भी रहा है, मैं बहुत ज्यादा टीवी हिंदी में देखती हूँ और वे हिंदी बोलते हैं। लेकिन मेरे बहनोई का बेटा जो हमारे साथ हर समय रहता है, इन दिनों इन लड़कों के साथ मुझे नहीं मालूम कि वह मराठी बोल सकता है।
इस प्रकार एक दिन जब हम सभी बैठकर मराठी में बात कर रहे थे, वह भी वहीं था और उसने
कहा हाँ काकी और इस तरह की सब बातें और मुझे लगता है वह भी अब मराठी बोलेगा। मेरे पति बहुत अच्छी तरह मराठी जानते हैं, जब भी मैं अपनी मां से कोई गुप्त बातें करती हूँ फोन पर, वह मुझसे कहते हैं कि नौकर ने कहा है कि तुम्हारी बहन आ रही है, मैं कहती हूँ ठीक है, आप जानते हैं.. अब यह है कोई गोपनीयता नहीं है। तो यह मेरी रुचि का विषय है...
इस प्रकार हम सभी सभी भाषाएं जानते हैं लेकिन आप जानते हैं, मैं सचमुच में इस प्रभाव के द्वारा उत्साहित हूँ की यह एक बहुत ही शक्तिशाली यंत्र की तरह है इसे ले लिया जाए। क्योंकि मेरे 'ससुर जब यह देखते हैं कि बच्चे मराठी सीखने के कारण कहीं उनकी दादी से दूर न चले जाएं तो वे उन्हें रोकते हैं कि वे मराठी से संबंधित सांस्कृतिक मूल्यों को ही ना चुन लें । और मेरी मां को यह बात कुछ चुभती है और वह कहती है नहीं नहीं तुम मराठी में ही बात करो।
प्रोफ़ेसर चौधरीः मैं मेरी पोती के और से भी कुछ जानकारी प्रस्तुत करना चाहता हूँ उसकी बंगाली बोलती है उसकी माता के माता-पिता बंगाली उसके पिता के माता-पिता जो हम हैं हम मैथिली बोलते हैं और यहां पर हिंदी, अंग्रेजी और तेलुगु हिंदी मिश्रित। हमने कुछ जानकारियां प्रस्तुत की थी इसी कैंपस में जहां आप बैठे हुए हैं इस समय मेरे मत में यह संसार के सबसे बहुभाषी समुदायों में से है।
कोई भी बच्चा यहां कम से कम 6 भाषाएं बोलता है आप जानते हैं तमिल हिंदी अंग्रेजी बाय डिफ़ॉल्ट उसके बाद उसका पड़ोसी जो तेलुगु बोलता है और यदि उसका पड़ोसी मलयाली है और मेरे विषय में मेरे पास मैं जो रहती है वह मराठी मां और तमिल पिता की पुत्री है उनके दोनों अभिभावक काम करते हैं तो जब उनका बच्चा मैथिली बोलने वाली पड़ोसी आंटी के संपर्क में आता है तो वह बच्चा भी मैथिली हिंदी अंग्रेजी तमिल मराठी सभी भाषाएं बहुत अच्छी क्षमता के साथ बोलने लगता है और आज वह विवाहित है और मुंबई में रहती है।
मैं आपको उसकी ईमेल आईडी दे सकता हूँ कृपया उससे मत कहिएगा कि मैंने आपको दिया
है। ठीक है अगली टिप्पणी, काफी लोग हैं इसके पहले कि बहुत देर हो जाए कृपया इसे रिकॉर्ड कीजिए हमें सभी जानकारियों की आवश्यकता है।
प्रतिभागीः सर अभी आपने कहा कि बहुभाषी (multilingual) स्थितियां अधिक जानकारी की अपेक्षा रखती हैं और तभी रिसर्च हो सकेगी.....
प्रोफ़ेसर चौधरीः इसलिए कृपया रिकॉर्ड (record) कीजिए और आप अपना कॉपीराईट (copyright) रखिए। किंतु सभी के साथ शेयर कीजिए देवकी, राजेश और मेरे साथ भी और कृपया प्रथा के साथ भी।
प्रतिभागीः धन्यवाद।
प्रतिभागीः मैंने जो कुछ समझा मैं उसे यहां साझा करना चाहता हूँ कि लोग उस तरह क्यों बोलते हैं जिस तरह से वे करते हैं। मैं सोचता हूँ कि मानव बहुत ही बुद्धिमान है और इसलिये हमें कम प्रयत्न करना चाहिए कुछ भी प्राप्त करने के लिए। इसलिए, जब हम अनुकरण करते हैं या जब हम अपनी अभिव्यक्ति के उद्देश्य को प्राप्त करना चाहते हैं और जब हम कहते हैं कि किसी में कोई भाषा विकृति है, क्या हम बहुत जल्दबाजी नहीं करते हैं। वह इस तरह कि हम कुछ चीजों को नियम की तरह स्थापित कर देते हैं। और उससे थोड़ा भी आजू-बाजू जाने पर हम उसे विकृति का नाम दे देते हैं। मैं यह भी सोचता हूँ कि हम बहुत ही थोड़ा चाहते हैं या हम काफी जल्दबाजी करते हैं। क्योंकि जैसा हमने चर्चा मैं देखा कि लोग किस तरह अपनी भाषाओं को मिश्रित कर लेते हैं और एक भाषा से दूसरी भाषा में बहुत अधिक परम आनंद के साथ और बहुत ही सरलता से वे अपना व्यवहार करते हैं। क्या आप इसे भाषा विकृति का नाम देंगे या एक बुद्धिमानी भरा अभिव्यक्ति का रास्ता? यही है जो मैं कहना चाहता हूँ।
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अलग-अलग स्तरों से विकसित होती है, उनमें ध्वनि, शब्दांश, शब्द, उप-वाक्य, वाक्य और फिर संपूर्ण संभाषण प्राप्त किया जाता है। यह केवल वह है कि इन बच्चों के विषय में, यह तीव्र था, चार साल नही, दो सौ हफ्ते नहीं, यह केवल कुछ हफ्ते, कुछ दिन । किंतु अवस्थाएं.... या आधारभूत स्थिति बिल्कुल एक सी हैं। और यहां तक कि डॉ. विभूति गिरी नाथन भी आपको कहेंगे.... आप जानते होंगे...... सभी बच्चे एक ही तरह की विकास दर से विकास नहीं करते हैं। सभी सामान्य बच्चे भी एक ही प्रकार की दर से विकास नहीं करते हैं। आप जानते हैं। भगवान की दुनिया में, बहुत बड़ा उत्पादन हो रहा है किंतु हर उत्पाद अद्वितीय है, हमें उन्हें समझना चाहिए और उन सभी प्रकारों को समझने की कोशिश करनी चाहिए और उनकी मदद करनी चाहिए, आप जानते हैं, बच्चों की मदद कीजिए। इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि किसी बच्चे को सहायता की आवश्यकता नहीं है, सभी बच्चे सामान्य है,नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कुछ बच्चे अलग तरह से जन्म लेते हैं। एक बच्चा क्या पसंद करता है यह बहुत स्पष्ट नहीं है, ठीक ह... किंतु दो चीज है बहुत स्पष्ट है। पहेली के बच्चा सुनना चाहता है कम से कम कुछ मात्रा में भाषा सुनना चाहता है ताकि वह सीख सके और दूसरा, जैसा कि आप जानते हैं कि चोम्स्की ने उसे प्लेटो की समस्या कहा है क्योंकि आप जानते हैं यह दार्शनिकीकरण है, यह हम सभी के लिए, की किस तरह आप और मैं जानेंगे की कोई झूठ बोल रहा है, मैंने कहा कि महिलाएं इन निर्णयों को लेने में बहुत अच्छी होती है, कृपया इस निर्णय को मेरे बारे में न ले.... हम जानते हैं कि जितना हम देखते हैं उससे ज्यादा हम किस तरह जानते हैं ? सबसे बड़ा प्रकरण भाषा है। कौन सा बच्चा इस तरह बैठता है, कौन सी मां इस तरह बैठ कर कहती है कि बेटा आज मैं तुम्हें पैसिव वॉइस सिखाने जा रही हूँ जोकि बंगाली में या मैथिली में या इंग्लिश में या किसी और दूसरी भाषा में जो विदेशी भाषा हो या मुझे इसकी अनुमति दो कि मैं तुम्हें एक आश्चर्यजनक उदाहरण दूं। इस विषय में मेरी बच्ची बहुत ही कहती है और मैंने इस बात को अनेक सेमिनार ओं में भी कहा है कि जब मेरी पत्नी कोई गलती करती है और दूध फट जाता है तब वह बहुत पसंद करती है और कहती है अरे मिल्क फट गया, पैसिव वॉइस, अरे दूध तो जल गया, दूध तो गिर गया, किंतु मेरी बच्ची इस तरह कहती है जब उससे होता है तो तुमने तो जला दिया, इस प्रकार बच्चे कैसे यह पैसिव वॉइस बनाना सीख जाते है। जब आप आरोप को बदल देते हैं जैसे आप यह नहीं चाहते कि वह उस पर जाए, हम नहीं जानत, हम जानते हैं हम जानते हैं, जितना हम सुनते हैं उससे अधिक, जितना हम अनुभव करते हैं उससे अधिक, जो कि हमें एक मनुष्य बनाता है और यही है जो व्यवहारवादी लोग एक अच्छे साथ के रूप में देखते हैं, जैसे आप जानते हैं चार पैर वाले, घोड़े, कुत्ते आदि आदि। प्रतिभागीः यह व्यक्तिगत प्रकृति का अधिक है, मैं शोभा हूँ और मैं महाराष्ट्रीयन हूँ मैंने एक तमिल व्यक्ति से विवाह किया है, मेरे दो बेटे हैं और और आप जानते हैं कि यह कभी-कभी बड़ा भ्रम उत्पन्न करने वाला होता है जब मैं घर पर होती हूँ और सभी रहते हैं। हम एक संयुक्त परिवार हैं जहां मेरे ससुर और मेरे पति के भाई और उनके बच्चे, सभी रहते हैं, हम सब एक साथ रहते हैं, लेकिन कभी-कभी जब मेरी मां आती, वह मेरी मां मेरे बच्चों के देखभाल के लिए आती है, जब मैं बाहर होती हूँ, मैं इस तरह का अनुवाद पाती हूँ। जो बहुत ही सहज होता है। जैसे कि मेरा बड़ा बेटा उदाहरण के लिए दस साल का है और जब वह मुझसे बोलता है तो वह मराठी में बात करता है, मराठी और अंग्रेजी मोड में बात करता है और वह जब उसके पिता से बात करता है तब वह अंग्रेजी और तमिल मोड में बात करता है। और वह जब उसके दादा दादी से बात करता है तब वह तमिल में बात करता है और जब वह मेरी मां से बात करता है तो वह केवल मराठी बोलता है। इस तरह मैं बहुत ही उत्सुक हूँ और और मैंने उससे कहा जब वह लगभग पाँच या छः साल का था ठीक है तुम ऐसा क्यों करते हो, तब वह कहता है मैं नहीं जानता मां, मैं नहीं जानता कि मैं ऐसा क्यों करता हूँ किंतु मैं यह करता हूँ, और जब वह लगभग दस साल का हुआ, अब वह छठवीं कक्षा में है, मैं उससे कहती हूँ कि तुम फिर से वही वही करो, क्या तुम नहीं जानते कि अप्पा को मराठी नहीं आती या तुम सोचते हो कि तुम जानते हो कि मैं तमिल नहीं जानती, नही, सभी को सभी भाषाओं का पता है किंतु मैं सोचता हूँ कि वह सभी असहज महसूस करेंगे, वह उसी भाषा में मुझे जवाब देते हैं और इसीलिए मैं उनसे उसी विशेष भाषा में बात करता हूँ। अब मेरा बड़ा बेटा जो पाँच साल का है वह भी यही करता है इसलिए मैंने उससे कहा कि तुम ऐसा क्यों करते हो, मैं यह देखना चाहती थी कि क्या सभी बच्चे ऐसा करते हैं इसी तरह से या उनमें और इनमें कोई अंतर है उनके दृष्टिकोण या भाषाई दृष्टिकोण में। इसलिए जब मैं उनसे कहती हूँ तो वह कहते हैं नहीं मां बस ऐसे ही, मैं जानता हूँ तुम मुझसे उसी तरह बोलती हो, इसलिए मैं आपसे उसी तरह बोलता मुझे लगता है यह एक दर्पण जैसा प्रभाव है और बाद में मैंने यह भी सीखा की मेरा बड़ा बेटा बहुत बाद के स्तर तक पहुंच चुका है उसने मुझसे कहा मां और आप समझ गए क्या आई कहती हैं, वह बोली मराठी में। और आपको पता है कि मेरा टाटा क्या कहता है, उनके दादाजी तमिल डान पेष्णुम। आपको आपको मालूम है उसके बर्थ सर्टिफिकेट में मेरे पति ने उसकी मातृभाषा में मराठी लिखवाया हुआ है। तो ऐसा है वह, लेकिन वह तमिल है और वह सीख भी रहा है, मैं बहुत ज्यादा टीवी हिंदी में देखती हूँ और वे हिंदी बोलते हैं। लेकिन मेरे बहनोई का बेटा जो हमारे साथ हर समय रहता है, इन दिनों इन लड़कों के साथ मुझे नहीं मालूम कि वह मराठी बोल सकता है। इस प्रकार एक दिन जब हम सभी बैठकर मराठी में बात कर रहे थे, वह भी वहीं था और उसने कहा हाँ काकी और इस तरह की सब बातें और मुझे लगता है वह भी अब मराठी बोलेगा। मेरे पति बहुत अच्छी तरह मराठी जानते हैं, जब भी मैं अपनी मां से कोई गुप्त बातें करती हूँ फोन पर, वह मुझसे कहते हैं कि नौकर ने कहा है कि तुम्हारी बहन आ रही है, मैं कहती हूँ ठीक है, आप जानते हैं.. अब यह है कोई गोपनीयता नहीं है। तो यह मेरी रुचि का विषय है... इस प्रकार हम सभी सभी भाषाएं जानते हैं लेकिन आप जानते हैं, मैं सचमुच में इस प्रभाव के द्वारा उत्साहित हूँ की यह एक बहुत ही शक्तिशाली यंत्र की तरह है इसे ले लिया जाए। क्योंकि मेरे 'ससुर जब यह देखते हैं कि बच्चे मराठी सीखने के कारण कहीं उनकी दादी से दूर न चले जाएं तो वे उन्हें रोकते हैं कि वे मराठी से संबंधित सांस्कृतिक मूल्यों को ही ना चुन लें । और मेरी मां को यह बात कुछ चुभती है और वह कहती है नहीं नहीं तुम मराठी में ही बात करो। प्रोफ़ेसर चौधरीः मैं मेरी पोती के और से भी कुछ जानकारी प्रस्तुत करना चाहता हूँ उसकी बंगाली बोलती है उसकी माता के माता-पिता बंगाली उसके पिता के माता-पिता जो हम हैं हम मैथिली बोलते हैं और यहां पर हिंदी, अंग्रेजी और तेलुगु हिंदी मिश्रित। हमने कुछ जानकारियां प्रस्तुत की थी इसी कैंपस में जहां आप बैठे हुए हैं इस समय मेरे मत में यह संसार के सबसे बहुभाषी समुदायों में से है। कोई भी बच्चा यहां कम से कम छः भाषाएं बोलता है आप जानते हैं तमिल हिंदी अंग्रेजी बाय डिफ़ॉल्ट उसके बाद उसका पड़ोसी जो तेलुगु बोलता है और यदि उसका पड़ोसी मलयाली है और मेरे विषय में मेरे पास मैं जो रहती है वह मराठी मां और तमिल पिता की पुत्री है उनके दोनों अभिभावक काम करते हैं तो जब उनका बच्चा मैथिली बोलने वाली पड़ोसी आंटी के संपर्क में आता है तो वह बच्चा भी मैथिली हिंदी अंग्रेजी तमिल मराठी सभी भाषाएं बहुत अच्छी क्षमता के साथ बोलने लगता है और आज वह विवाहित है और मुंबई में रहती है। मैं आपको उसकी ईमेल आईडी दे सकता हूँ कृपया उससे मत कहिएगा कि मैंने आपको दिया है। ठीक है अगली टिप्पणी, काफी लोग हैं इसके पहले कि बहुत देर हो जाए कृपया इसे रिकॉर्ड कीजिए हमें सभी जानकारियों की आवश्यकता है। प्रतिभागीः सर अभी आपने कहा कि बहुभाषी स्थितियां अधिक जानकारी की अपेक्षा रखती हैं और तभी रिसर्च हो सकेगी..... प्रोफ़ेसर चौधरीः इसलिए कृपया रिकॉर्ड कीजिए और आप अपना कॉपीराईट रखिए। किंतु सभी के साथ शेयर कीजिए देवकी, राजेश और मेरे साथ भी और कृपया प्रथा के साथ भी। प्रतिभागीः धन्यवाद। प्रतिभागीः मैंने जो कुछ समझा मैं उसे यहां साझा करना चाहता हूँ कि लोग उस तरह क्यों बोलते हैं जिस तरह से वे करते हैं। मैं सोचता हूँ कि मानव बहुत ही बुद्धिमान है और इसलिये हमें कम प्रयत्न करना चाहिए कुछ भी प्राप्त करने के लिए। इसलिए, जब हम अनुकरण करते हैं या जब हम अपनी अभिव्यक्ति के उद्देश्य को प्राप्त करना चाहते हैं और जब हम कहते हैं कि किसी में कोई भाषा विकृति है, क्या हम बहुत जल्दबाजी नहीं करते हैं। वह इस तरह कि हम कुछ चीजों को नियम की तरह स्थापित कर देते हैं। और उससे थोड़ा भी आजू-बाजू जाने पर हम उसे विकृति का नाम दे देते हैं। मैं यह भी सोचता हूँ कि हम बहुत ही थोड़ा चाहते हैं या हम काफी जल्दबाजी करते हैं। क्योंकि जैसा हमने चर्चा मैं देखा कि लोग किस तरह अपनी भाषाओं को मिश्रित कर लेते हैं और एक भाषा से दूसरी भाषा में बहुत अधिक परम आनंद के साथ और बहुत ही सरलता से वे अपना व्यवहार करते हैं। क्या आप इसे भाषा विकृति का नाम देंगे या एक बुद्धिमानी भरा अभिव्यक्ति का रास्ता? यही है जो मैं कहना चाहता हूँ।
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फ्लिप-फ्लॉप्स और वेजहील फ्लिप-फ्लाप फुटवेयर आज की कॉलेज गल्� की पहली पसंद बन रही है। इस समय आप मार्केट में इसकी खासा डिमांड भी है।
ब्लैक गाउन, क्लीवेज और ग्लैमर, बेसिक्स में आपका स्वागत है !
रवीना टंडन को इस साल मिली खास पहचान!
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Priyanka Chahar Viral Video प्रियंका चहर चौधरी बिग बॉस से निकलने के बाद सोशल मीडिया पर लगातार एक्टिव हैं। अब हाल ही में एक्ट्रेस की एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है जिसे देखने के बाद सोशल मीडिया पर लोग भड़क गए हैं।
नई दिल्ली, जेएनएन। Priyanka Chahar Viral Video: प्रियंका चहर चौधरी बिग बॉस सीजन 16 की सबसे लोकप्रिय कंटेस्टेंट में से एक रही हैं। वह सलमान खान के शो की सेकंड रनरअप रहीं। इस शो में उड़ारिया एक्ट्रेस के व्यक्तित्व को लोगों ने बहुत पसंद किया। इस रियलिटी शो में प्रियंका खुद में जिस तरह से बदलाव लेकर आईं, उसे देखकर सलमान खान भी काफी इम्प्रेस हुए।
इस शो के खत्म होने के बाद भी प्रियंका चहर चौधरी लगातार मीडिया में छाई हुई हैं। लेकिन हाल ही में उनका एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर सोशल मीडिया पर लोग भड़क उठे हैं।
प्रियंका चहर चौधरी के इस वीडियो को उनके एक फैन क्लब ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। वीडियो में प्रियंका ने ब्लैक रंग की ब्रालेट पहनी हुई है और आंखों पर काला चश्मा लगाया हुआ है। एक्ट्रेस ट्रेंडिंग रील पर अपने हॉट मूव्स और स्टाइल दिखाती हुई नजर आ रही हैं।
प्रियंका चहर चौधरी का ये वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों को बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रहा है। कुछ यूजर्स एक्ट्रेस के मेकअप और उनके इस ब्रालेट लुक को देखकर सोशल मीडिया पर भद्दे-भद्दे कमेंट्स कर रहे हैं।
इस वीडियो को देखने के बाद प्रियंका के कई फैंस भी उनसे काफी नाराज हो गए। एक यूजर ने एक्ट्रेस के इस वीडियो पर उन्हें ट्रोल करते हुए लिखा, 'सच में इस वीडियो में आप बिल्कुल भी अच्छी नहीं लग रही हैं'। दूसरे यूजर ने लिखा, 'सच में शेमड़ी लग रही हो पूरी'।
एक अन्य यूजर ने लिखा, '100 किलो का मेकअप थोपा हुआ है'। इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया पर लोग कमेन्ट बॉक्स में उनकी तुलना मिया खलीफा और उर्फी जावेद के ड्रेसिंग सेंस से कर दी। हालांकि इस बीच कुछ फैंस ऐसे भी हैं, जो एक्ट्रेस को इस तरह की बातों पर ध्यान न देने के लिए कह रहे हैं।
आपको बता दें कि प्रियंका चहर चौधरी ने बिग बॉस में अपनी बुलंद आवाज के साथ-साथ अपने ड्रेसिंग सेंस से भी फैंस को काफी इम्प्रेस किया, जब वह बिग बॉस के घर में थीं तो उस दौरान उन्हें सलमान खान ने उनसे मुलाकात करने के लिए कहा था। कुछ दिनों पहले ही प्रियंका ने ये बताया कि वह अंकित गुप्ता संग म्यूजिक वीडियो में नजर आने वाली हैं।
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Priyanka Chahar Viral Video प्रियंका चहर चौधरी बिग बॉस से निकलने के बाद सोशल मीडिया पर लगातार एक्टिव हैं। अब हाल ही में एक्ट्रेस की एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है जिसे देखने के बाद सोशल मीडिया पर लोग भड़क गए हैं। नई दिल्ली, जेएनएन। Priyanka Chahar Viral Video: प्रियंका चहर चौधरी बिग बॉस सीजन सोलह की सबसे लोकप्रिय कंटेस्टेंट में से एक रही हैं। वह सलमान खान के शो की सेकंड रनरअप रहीं। इस शो में उड़ारिया एक्ट्रेस के व्यक्तित्व को लोगों ने बहुत पसंद किया। इस रियलिटी शो में प्रियंका खुद में जिस तरह से बदलाव लेकर आईं, उसे देखकर सलमान खान भी काफी इम्प्रेस हुए। इस शो के खत्म होने के बाद भी प्रियंका चहर चौधरी लगातार मीडिया में छाई हुई हैं। लेकिन हाल ही में उनका एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर सोशल मीडिया पर लोग भड़क उठे हैं। प्रियंका चहर चौधरी के इस वीडियो को उनके एक फैन क्लब ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। वीडियो में प्रियंका ने ब्लैक रंग की ब्रालेट पहनी हुई है और आंखों पर काला चश्मा लगाया हुआ है। एक्ट्रेस ट्रेंडिंग रील पर अपने हॉट मूव्स और स्टाइल दिखाती हुई नजर आ रही हैं। प्रियंका चहर चौधरी का ये वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों को बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रहा है। कुछ यूजर्स एक्ट्रेस के मेकअप और उनके इस ब्रालेट लुक को देखकर सोशल मीडिया पर भद्दे-भद्दे कमेंट्स कर रहे हैं। इस वीडियो को देखने के बाद प्रियंका के कई फैंस भी उनसे काफी नाराज हो गए। एक यूजर ने एक्ट्रेस के इस वीडियो पर उन्हें ट्रोल करते हुए लिखा, 'सच में इस वीडियो में आप बिल्कुल भी अच्छी नहीं लग रही हैं'। दूसरे यूजर ने लिखा, 'सच में शेमड़ी लग रही हो पूरी'। एक अन्य यूजर ने लिखा, 'एक सौ किलो का मेकअप थोपा हुआ है'। इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया पर लोग कमेन्ट बॉक्स में उनकी तुलना मिया खलीफा और उर्फी जावेद के ड्रेसिंग सेंस से कर दी। हालांकि इस बीच कुछ फैंस ऐसे भी हैं, जो एक्ट्रेस को इस तरह की बातों पर ध्यान न देने के लिए कह रहे हैं। आपको बता दें कि प्रियंका चहर चौधरी ने बिग बॉस में अपनी बुलंद आवाज के साथ-साथ अपने ड्रेसिंग सेंस से भी फैंस को काफी इम्प्रेस किया, जब वह बिग बॉस के घर में थीं तो उस दौरान उन्हें सलमान खान ने उनसे मुलाकात करने के लिए कहा था। कुछ दिनों पहले ही प्रियंका ने ये बताया कि वह अंकित गुप्ता संग म्यूजिक वीडियो में नजर आने वाली हैं।
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सारा अली खान की 'केदारनाथ' पर पहली बार बोलीं करीना कपूर खान, कहा 'मेरे लिए सारा बॉर्न स्टार है और उसकी फिल्म...'
सारा अली खान की डेब्यू फिल्म 'केदारनाथ' 7 दिसम्बर 2018 के दिन रिलीज होगी।
सारा अली खान के साथ-साथ उनके परिवारवाले भी 'केदारनाथ' का खूब प्रचार कर रहे हैं। बीते दिन 'कॉफी विद करण' पर सारा अली खान अपने पिता सैफ अली खान के साथ पहुंची थीं और दोनों ने कई सारे मुद्दों पर दिल खोलकर बातें की। इसके बाद अब 'केदारनाथ' का प्रचार करने के लिए करीना कपूर खान भी सारा के साथ आ गई हैं और उन्होंने फिल्म की टीम के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
बता दें सारा अली खान इस साल अपनी दो फिल्में 'केदारनाथ' और 'सिम्बा' दर्शकों के सामने पेश करेंगी। जहां 'केदारनाथ' एक रोमांटिक फिल्म है, वहीं रोहित शेट्टी द्वारा निर्देशित 'सिम्बा' एक मसाला एंटरटेनर है। सुनने में आ रहा है कि दोनों फिल्मों में सारा अली खान के किरदार काफी अलग हैं और सारा ने दोनों ही किरदारों को अच्छे से निभाया है। दर्शक सारा अली खान की दोनों फिल्में देखकर यह समझ जाएंगे कि उनमें एक अच्छी अदाकारा बनने के सारे गुण हैं।
बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज,
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सारा अली खान की 'केदारनाथ' पर पहली बार बोलीं करीना कपूर खान, कहा 'मेरे लिए सारा बॉर्न स्टार है और उसकी फिल्म...' सारा अली खान की डेब्यू फिल्म 'केदारनाथ' सात दिसम्बर दो हज़ार अट्ठारह के दिन रिलीज होगी। सारा अली खान के साथ-साथ उनके परिवारवाले भी 'केदारनाथ' का खूब प्रचार कर रहे हैं। बीते दिन 'कॉफी विद करण' पर सारा अली खान अपने पिता सैफ अली खान के साथ पहुंची थीं और दोनों ने कई सारे मुद्दों पर दिल खोलकर बातें की। इसके बाद अब 'केदारनाथ' का प्रचार करने के लिए करीना कपूर खान भी सारा के साथ आ गई हैं और उन्होंने फिल्म की टीम के लिए शुभकामनाएं दी हैं। बता दें सारा अली खान इस साल अपनी दो फिल्में 'केदारनाथ' और 'सिम्बा' दर्शकों के सामने पेश करेंगी। जहां 'केदारनाथ' एक रोमांटिक फिल्म है, वहीं रोहित शेट्टी द्वारा निर्देशित 'सिम्बा' एक मसाला एंटरटेनर है। सुनने में आ रहा है कि दोनों फिल्मों में सारा अली खान के किरदार काफी अलग हैं और सारा ने दोनों ही किरदारों को अच्छे से निभाया है। दर्शक सारा अली खान की दोनों फिल्में देखकर यह समझ जाएंगे कि उनमें एक अच्छी अदाकारा बनने के सारे गुण हैं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
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इस अभियुक्त पर एसपी भरतपुर द्वारा 3000 रुपये का इनाम घोषित किया हुआ है।
एसपी श्याम सिंह ने बताया कि 10 सितंबर 2015 को कामां कस्बे में स्थित रिलायंस पेट्रोल पंप पर 7-8 बदमाश करीब 3 बजे एक बोलेरो में आए। बदमाश चौकीदार व सेल्समैन के साथ मारपीट कर नकदी लूट ले गए थे। थाना पुलिस द्वारा पूर्व में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका। आरोपी साबिर मेव घटना के बाद से ही फरार चल रहा था।
फरार चल रहे आरोपियों की गिरफ्तारी एवं मेवात क्षेत्र में हो रहे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए एएसपी हिम्मत सिंह व सीओ प्रदीप यादव के सुपरविजन में अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान की निरंतरता में प्रोबेशनर एसआई वीरेंद्र सिंह व कॉन्स्टेबल वारिस खान व चंद्रशेखर की टीम द्वारा आसूचना एवं तकनीकी सहायता से इस इनामी अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया।
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इस अभियुक्त पर एसपी भरतपुर द्वारा तीन हज़ार रुपयापये का इनाम घोषित किया हुआ है। एसपी श्याम सिंह ने बताया कि दस सितंबर दो हज़ार पंद्रह को कामां कस्बे में स्थित रिलायंस पेट्रोल पंप पर सात-आठ बदमाश करीब तीन बजे एक बोलेरो में आए। बदमाश चौकीदार व सेल्समैन के साथ मारपीट कर नकदी लूट ले गए थे। थाना पुलिस द्वारा पूर्व में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका। आरोपी साबिर मेव घटना के बाद से ही फरार चल रहा था। फरार चल रहे आरोपियों की गिरफ्तारी एवं मेवात क्षेत्र में हो रहे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए एएसपी हिम्मत सिंह व सीओ प्रदीप यादव के सुपरविजन में अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान की निरंतरता में प्रोबेशनर एसआई वीरेंद्र सिंह व कॉन्स्टेबल वारिस खान व चंद्रशेखर की टीम द्वारा आसूचना एवं तकनीकी सहायता से इस इनामी अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया।
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नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली दंगा (Delhi Riots) केस में यूएपीए (UAPA) के तहत गिरफ्तार किए गए जेएनयू (JNU) के पूर्व छात्र उमर खालिद (Omar Khalid) की सुरक्षा बढ़ाने को लेकर कोर्ट ने तिहाड़ जेल को निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने तिहाड़ जेल (Tihar Jail) के सुपरिटेंडेंड को इस बाबत निर्देश दिया है कि बिना किसी भेदभाव के खालिद की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएं।
सुरक्षा बढ़ाए जाने की मांग करने के लिए आरोपी खालिद ने कोर्ट में आवेदन किया था। आवेदन में खालिद ने लिखा था कि न्यायिक हिरासत के दौरान उन्हें कोई नुकसान न पहुंचाया जा सके इसलिए उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जानी चाहिए। इस आवेदन के बाद ही तिहाड़ जेल प्रशासन को कोर्ट की ओर से ये निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जेल नियमों के तहत बिना किसी भेदभाव के उमर खालिद को प्रतिदिन की दिनचर्या का पालन करने दिया जाए। न्यायिक हिरासत के चलते जो नियम अन्य कैदियों के लिए हैं वो ही नियम खालिद पर भी लागू होते हैं। इसलिए जेल प्रशासन को आदेश दिया जाता है कि भेदभाव के बिना ही आरोपी उमर खालिद को पर्याप्त सुरक्षा दी जाए।
बता दें कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उमर खालिद की गिरफ्तारी गैर कानूनी गतिविधि निषेद्ध कानून (यूएपीए) के तहत की थी। खालिद पर दंगा भड़काने, साजिश रचने, लोगों को उकसाने, भड़काऊ भाषण देने के गंभीर आरोप लगे हैं। एफआईआर में दर्ज आरोपों के मुताबिक ट्रंप के दौरे के वक्त उमर खालिद ने लोगों को प्रदर्शन के लिए उकसाया था।
दिल्ली दंगे के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 2 सितंबर को कुछ घंटे तक उमर से पूछताछ की थी। इससे पहले पुलिस ने दंगे से जुड़े एक अन्य मामले में उमर के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया था। उसे 13 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और 24 सितंबर तक 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। पुलिस हिरासत की मियाद पूरी होने के बाद अदालत ने उमर खालिद को 22 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
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नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली दंगा केस में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किए गए जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद की सुरक्षा बढ़ाने को लेकर कोर्ट ने तिहाड़ जेल को निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने तिहाड़ जेल के सुपरिटेंडेंड को इस बाबत निर्देश दिया है कि बिना किसी भेदभाव के खालिद की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाएं। सुरक्षा बढ़ाए जाने की मांग करने के लिए आरोपी खालिद ने कोर्ट में आवेदन किया था। आवेदन में खालिद ने लिखा था कि न्यायिक हिरासत के दौरान उन्हें कोई नुकसान न पहुंचाया जा सके इसलिए उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जानी चाहिए। इस आवेदन के बाद ही तिहाड़ जेल प्रशासन को कोर्ट की ओर से ये निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जेल नियमों के तहत बिना किसी भेदभाव के उमर खालिद को प्रतिदिन की दिनचर्या का पालन करने दिया जाए। न्यायिक हिरासत के चलते जो नियम अन्य कैदियों के लिए हैं वो ही नियम खालिद पर भी लागू होते हैं। इसलिए जेल प्रशासन को आदेश दिया जाता है कि भेदभाव के बिना ही आरोपी उमर खालिद को पर्याप्त सुरक्षा दी जाए। बता दें कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उमर खालिद की गिरफ्तारी गैर कानूनी गतिविधि निषेद्ध कानून के तहत की थी। खालिद पर दंगा भड़काने, साजिश रचने, लोगों को उकसाने, भड़काऊ भाषण देने के गंभीर आरोप लगे हैं। एफआईआर में दर्ज आरोपों के मुताबिक ट्रंप के दौरे के वक्त उमर खालिद ने लोगों को प्रदर्शन के लिए उकसाया था। दिल्ली दंगे के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दो सितंबर को कुछ घंटे तक उमर से पूछताछ की थी। इससे पहले पुलिस ने दंगे से जुड़े एक अन्य मामले में उमर के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया था। उसे तेरह सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और चौबीस सितंबर तक दस दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था। पुलिस हिरासत की मियाद पूरी होने के बाद अदालत ने उमर खालिद को बाईस अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
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नई दिल्लीः उत्तरप्रदेश के मथुरा में वृंदावन थाना क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग प्रेमिका से मिलने पहुंचे प्रेमी और दोस्त को घरवालों ने पकड़ लिया और उसके बाद उसकी इतनी पिटाई की उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. यह मामला मथुरा के भरतिया और परखम गांव के बीच का है. जहां के यह लोग रहने वाले थे.
लड़के के पिता भगवान सिंह ने प्रेमिका के पिता समेत 7 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. जिसमें से पुलिस ने 4 को पकड़ लिया है. पुलिस ने इसके अलावा मौके पर तनाव को देखते हुए वहां पुलिस के अतिरिक्त जवानों की तैनाती भी की है.
मारे गए युवक का नाम साहब सिंह है वह अपने साथी लक्ष्मण सिंह के साथ सोमवार रात को प्रेमिका के घर उससे मिलने गया था. वह वहां चुपके से उसके घर में कूद गया. जिसके बाद घरवालों ने उसे पकड़ लिया और उसके साथ बुरी तरह से मारपीट की. घरवालों ने उसके अलावा उसके साथी को भी बुरी तरह से मारा. बाद में दोनों को वृंदावन के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया .
पुलिस ने अभी तक इस मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार किया है और अन्य लोगों की तलाश जारी है. पुलिस मामले को गंभीरता से ले रही है. गांव में भी अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है. स्वयं एसएसपी (SSP) गौरव ग्रोवर ने भी मौके पर आकर घटना का जायजा लिया है.
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नई दिल्लीः उत्तरप्रदेश के मथुरा में वृंदावन थाना क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग प्रेमिका से मिलने पहुंचे प्रेमी और दोस्त को घरवालों ने पकड़ लिया और उसके बाद उसकी इतनी पिटाई की उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. यह मामला मथुरा के भरतिया और परखम गांव के बीच का है. जहां के यह लोग रहने वाले थे. लड़के के पिता भगवान सिंह ने प्रेमिका के पिता समेत सात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. जिसमें से पुलिस ने चार को पकड़ लिया है. पुलिस ने इसके अलावा मौके पर तनाव को देखते हुए वहां पुलिस के अतिरिक्त जवानों की तैनाती भी की है. मारे गए युवक का नाम साहब सिंह है वह अपने साथी लक्ष्मण सिंह के साथ सोमवार रात को प्रेमिका के घर उससे मिलने गया था. वह वहां चुपके से उसके घर में कूद गया. जिसके बाद घरवालों ने उसे पकड़ लिया और उसके साथ बुरी तरह से मारपीट की. घरवालों ने उसके अलावा उसके साथी को भी बुरी तरह से मारा. बाद में दोनों को वृंदावन के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया . पुलिस ने अभी तक इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है और अन्य लोगों की तलाश जारी है. पुलिस मामले को गंभीरता से ले रही है. गांव में भी अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है. स्वयं एसएसपी गौरव ग्रोवर ने भी मौके पर आकर घटना का जायजा लिया है.
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प्रभजीत सिंह लक्की, यमुनानगरः
केंद्र सरकार द्वारा पारित 3 कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संघर्ष के दौरान शहीद हुए साथियों की याद में व श्रमिकों और किसानों की एकता की मजबूती के लिए 7 अगस्त को दीवान हाल, गुरुद्वारा श्री कतलगढ़ साहिब, चमकौर साहिब (रूपनगर) में सुखमनी साहिब का पाठ एवं अरदास विनती समागम होगा, जिसमें हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में संगत शामिल होगी। इस संबंध में बीबी शरण कौर चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि. ) के प्रमुख सुखविंदर सिंह मंडेबर (यमुनानगर) ने बताया कि गुरमुख सिंह ढोलन माजरा नेता मजदूर किसान दलित मोर्चा और महासचिव नरेगा वर्कर्स फ्रंट (पंजाब), दलजीत सिंह अध्यक्ष इंटरनेशनल पंजाबी फाउंडेशन कनाडा (इंडिया डिवीजन) और कुलवंत सिंह सैनी अध्यक्ष कीर्ति किसान मोर्चा (रोपड़) के द्वारा विभिन्न संगठनों के सहयोग से आयोजित किए जा रहे इस अरदास समागम में किसानी संघर्ष दौरान दिल्ली में शहीद हुए नवरित सिंह के दादा सरदार हरदीप सिंह डिबडिबा भी शामिल होंगे। उन्होंने सभी से इस प्रार्थना समारोह में शामिल होने की अपील की। सुखविंदर सिंह मंडेबर ने आगे कहा कि जब तक केंद्र सरकार यह काले कानून वापस नहीं लेती, तब तक सरकार के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि किसान संघर्ष में सैकड़ों किसान शहीद हो चुके हैं । उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
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प्रभजीत सिंह लक्की, यमुनानगरः केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संघर्ष के दौरान शहीद हुए साथियों की याद में व श्रमिकों और किसानों की एकता की मजबूती के लिए सात अगस्त को दीवान हाल, गुरुद्वारा श्री कतलगढ़ साहिब, चमकौर साहिब में सुखमनी साहिब का पाठ एवं अरदास विनती समागम होगा, जिसमें हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में संगत शामिल होगी। इस संबंध में बीबी शरण कौर चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रमुख सुखविंदर सिंह मंडेबर ने बताया कि गुरमुख सिंह ढोलन माजरा नेता मजदूर किसान दलित मोर्चा और महासचिव नरेगा वर्कर्स फ्रंट , दलजीत सिंह अध्यक्ष इंटरनेशनल पंजाबी फाउंडेशन कनाडा और कुलवंत सिंह सैनी अध्यक्ष कीर्ति किसान मोर्चा के द्वारा विभिन्न संगठनों के सहयोग से आयोजित किए जा रहे इस अरदास समागम में किसानी संघर्ष दौरान दिल्ली में शहीद हुए नवरित सिंह के दादा सरदार हरदीप सिंह डिबडिबा भी शामिल होंगे। उन्होंने सभी से इस प्रार्थना समारोह में शामिल होने की अपील की। सुखविंदर सिंह मंडेबर ने आगे कहा कि जब तक केंद्र सरकार यह काले कानून वापस नहीं लेती, तब तक सरकार के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि किसान संघर्ष में सैकड़ों किसान शहीद हो चुके हैं । उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
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जीवन को सफल बनाने और विवाह को सफल बनाने के लिए आप रामायण से प्रेरणा ले सकते हैं।
भगवान श्रीराम और माता सीता के वैवाहिक जीवन से बहुत सारी ऐसी बातें हैं जिन्हें अपनाकर दंपत्ती खुश रह सकते हैं। सुखी गृहस्थ जीवन पाने की कामना हर किसी को होती है। हिन्दू धर्म के पवित्र धार्मिक ग्रन्थ रामायण में सफल गृहस्थ जीवन के कई रहस्य छिपे हैं।
जीवन को सफल बनाने और विवाह को सफल बनाने के लिए आप रामायण से प्रेरणा ले सकते हैं। हां, माता सीता और श्री राम के 14 साल वनवास वाले जीवन में भी कुछ ऐसी बातें थीं जो आपको सफल विवाह के लिए सीख लेनी चाहिए।
वैवाहिक जीवन की शुरुआत में ही भगवान राम ने एक मिसाल पेश की थी। उन्होंने अपनी पत्नी सीता को शादी के बाद ये वचन दिया था कि अन्य राजाओं की तरह वे एक से अधिक विवाह नहीं करेंगे। उन्होंने माता सीता से कहा था कि वो जीवन भर केवल उन्हीं के प्रति निष्ठावान रहेंगे।
विवाह के ठीक बाद प्रभु श्रीराम ने माता सीता को बराबर का हक दिया। जो वादा उन्होंने अपनी पत्नी से किया उसे हमेशा निभाया। कभी अपनी पत्नी को जीवन में कमतर नहीं आंका। कोई भी बड़े-छोटे निर्णय में माता सीता की सलाह जरूर ली।
पति-पत्नी को हमेशा एक माना जाता है। भले ही दो अलग शरीर हों मगर इनकी आत्मा एक ही मानी जाती है। अगर किसी भी तरह दोनों का अलगाव हुआ तो उनका जीवन रुक-सा जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ श्रीराम और माता सीता के बीच। सीता हरण के बाद दोनों का जीवन मानो ठहर गया था।
वैवाहिक जीवन में पती-पत्नी को एक-दूसरों के गुणों को समझना और अपनाना भी जरूरी है। प्रेम, सेवा, उदारता, समर्पण, स्त्रियों के इन गुणों को समय के साथ पतियों को अपनाना चाहिए। यह दोनों को सफल वैवाहिक जीवन की ओर ले जाता है।
वैवाहिक जीवन में जो नियम और क़ानून पत्नी पर लागू होते है, उन्हें पति पर भी यदि लागू किया जाए तो दोनों एक ही धारा पर चलते हैं। इससे आपसी मतभेद कम होते हैं और प्यार भी बना रहता है।
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जीवन को सफल बनाने और विवाह को सफल बनाने के लिए आप रामायण से प्रेरणा ले सकते हैं। भगवान श्रीराम और माता सीता के वैवाहिक जीवन से बहुत सारी ऐसी बातें हैं जिन्हें अपनाकर दंपत्ती खुश रह सकते हैं। सुखी गृहस्थ जीवन पाने की कामना हर किसी को होती है। हिन्दू धर्म के पवित्र धार्मिक ग्रन्थ रामायण में सफल गृहस्थ जीवन के कई रहस्य छिपे हैं। जीवन को सफल बनाने और विवाह को सफल बनाने के लिए आप रामायण से प्रेरणा ले सकते हैं। हां, माता सीता और श्री राम के चौदह साल वनवास वाले जीवन में भी कुछ ऐसी बातें थीं जो आपको सफल विवाह के लिए सीख लेनी चाहिए। वैवाहिक जीवन की शुरुआत में ही भगवान राम ने एक मिसाल पेश की थी। उन्होंने अपनी पत्नी सीता को शादी के बाद ये वचन दिया था कि अन्य राजाओं की तरह वे एक से अधिक विवाह नहीं करेंगे। उन्होंने माता सीता से कहा था कि वो जीवन भर केवल उन्हीं के प्रति निष्ठावान रहेंगे। विवाह के ठीक बाद प्रभु श्रीराम ने माता सीता को बराबर का हक दिया। जो वादा उन्होंने अपनी पत्नी से किया उसे हमेशा निभाया। कभी अपनी पत्नी को जीवन में कमतर नहीं आंका। कोई भी बड़े-छोटे निर्णय में माता सीता की सलाह जरूर ली। पति-पत्नी को हमेशा एक माना जाता है। भले ही दो अलग शरीर हों मगर इनकी आत्मा एक ही मानी जाती है। अगर किसी भी तरह दोनों का अलगाव हुआ तो उनका जीवन रुक-सा जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ श्रीराम और माता सीता के बीच। सीता हरण के बाद दोनों का जीवन मानो ठहर गया था। वैवाहिक जीवन में पती-पत्नी को एक-दूसरों के गुणों को समझना और अपनाना भी जरूरी है। प्रेम, सेवा, उदारता, समर्पण, स्त्रियों के इन गुणों को समय के साथ पतियों को अपनाना चाहिए। यह दोनों को सफल वैवाहिक जीवन की ओर ले जाता है। वैवाहिक जीवन में जो नियम और क़ानून पत्नी पर लागू होते है, उन्हें पति पर भी यदि लागू किया जाए तो दोनों एक ही धारा पर चलते हैं। इससे आपसी मतभेद कम होते हैं और प्यार भी बना रहता है।
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जब भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि बाणासुरने तो बाणोंकी झड़ी लगा दी है, तब वे छुरेको समान तीखी धारवाले चक्रसे उसकी भुजाएँ काटने लगे, मानो कोई किसी वृक्षकी छोटी-छोटी डालियाँ काट रहा हो ॥ ३२ ॥ जब भक्तवत्सल भगवान् शङ्करने देखा कि बाणासुरकी भुजाएँ कट रही हैं, तब वे चक्रधारी भगवान् श्रीकृष्णके पास आये और स्तुति करने लगे ॥ ३३ ॥
भगवान् शङ्करने कहा- प्रभो । आप वेदमन्त्रों तात्पर्यरूपसे छिपे हुए परमज्योतिःखरूप परब्रह्म हैं। शुद्धहृदय महात्मागण आपके आकाशके समान सर्व व्यापक और निर्विकार ( निर्देप) खरूपका साक्षात्कार करते हैं. ॥ ३४ ॥ आकाश आपकी नाभि है, अग्नि मुख है और जल वीर्य । वर्ग सिर, दिशाएँ कान और पृथ्वी चरण है। चन्द्रमा मन, सूर्य नेत्र और मैं शिव आपका अहङ्कार हूँ । समुद्र आपका पेट है और इन्द्र भुजा ॥ ३५ ॥ धान्यादि ओषधियाँ रोम हैं, मेघ केश हैं और ब्रह्मा बुद्धि । प्रजापति लिङ्ग हैं और धर्म हृदय । इस प्रकार समस्त लोक और लोकान्तरोंके साथ जिसके शरीरकी तुलना की जाती है, वे परमपुरुष आप ही हैं ॥ ३६ ॥ अखण्ड ज्योतिःखरूप परमात्मन् । आपका यह अवतार धर्मकी रक्षा और संसारके अभ्युदयअभिवृद्धिके लिये हुआ है। हम सब भी आपके प्रभावसे ही प्रमावान्वित होकर सातों सुषनोंका पालन करते हैं ॥ ३७ ॥ आप सजातीय, विजातीय और स्वगतभेदसे रहित हैं - एक और अद्वितीय आदिपुरुष हैं। मायाकृत जाप्रत्, खम और सुषुप्ति - इन तीन अवस्थाओं में - अनुगत और उनसे अतीत तुरीयतत्त्व भी आप ही हैं। आप किसी दूसरी वस्तुके द्वारा प्रकाशित नहीं होते, स्वयंप्रकाश हैं । आप सबके कारण हैं, परन्तु आपका न- तो कोई कारण है और न तो आपमें कारणपना ही है। भगवन् ! ऐसा होनेपर भी आप तीनों गुणोंकी विभिन्न विषमताओंको प्रकाशित करने के लिये अपनी मायासे देवता, पशु-पक्षी, मनुष्य आदि शरीरोंके अनुसार भिन्न-भिन्न रूपों में प्रतीत होते है ॥ ३८ ॥ प्रभो ! जैसे सूर्य अपनी छाया बादलोंसे ही ढक जाता है और उन बादलों तथा विभिन्न रूपोंको प्रकाशित करता है
उसी प्रकार आप तो स्वयंप्रकाश हैं, परन्तु गुणोंके द्वारा मानो ढक से जाते हैं और समस्त गुणों तथा गुणाभिमानी जीवोंको प्रकाशित करते हैं। धास्तवमें आप अनन्त हैं ॥ ३९ ॥
भगवन् ! आपकी मायासे मोहित होकर लोग स्त्री-पुत्र, देह-लोह आदिमें आसक्त हो जाते हैं और फिर दुःखके अपार सागरमें डूबने-उतराने लगते हैं ॥ ४० ॥ संसारके मानवको यह मनुष्य-शरीर आपने अत्यन्त कृपा करके दिया है । जो पुरुष इसे पाकर भी अपनी इन्द्रियोंको वशमें नहीं करता और आपके चरणकमलोंका आश्रय नहीं लेता-उनका सेवन नहीं करता, उसका जीवन अत्यन्त शोचनीय है और वह स्वयं अपने आपको धोखा दे रहा है ॥४१॥ प्रभो ! आप समस्त प्राणियोंके आत्मा, प्रियतम और ईश्वर हैं। जो मृत्युका ग्रास मनुष्य आपको छोड़ देता है और अनात्म, दुःखरूप एवं तुच्छ विषयों में सुखबुद्धि करके उनके पीछे भटकता है, वह इतना मूर्ख है कि अमृतको छोड़कर विष पी रहा है ॥ ४२ ॥ मैं, ब्रह्मा, सारे देवता और विशुद्ध हृदयवाले ऋषि-मुनि स प्रकारसे और सर्वात्मभावसे आपके शरणागत हैं क्योंकि आप ही हमलोगोंके आत्मा, प्रियतम और ईश्वर - हैं ॥ ४३ ॥ आप जगत् की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलयके कारण हूँ। आप सबमें सम, परम शान्त, सबके सुहृद् आत्मा और इष्टदेव हैं। आप एक, अद्वितीय और जगत्के आधार तथा अधिष्ठान है । हे प्रभो ! हम सब संसारसे मुक्त होनेके लिये आपका भजन करते हैं ॥ १४ ॥ देव ! यह बाणासुर मेरा परमप्रिय, कृपापात्र और सेवक है। मैंने इसे अभयदान दिया है। प्रभो । जिस प्रकार इसके परदादा दैत्यराज प्रह्लादपर आपका कृपाप्रसाद है, वैसा ही कृपाप्रसाद आप इसपर भी करें ॥ ४५ ॥
भगवान् श्रीकृष्णने कहा- भगवन् ! आपकी बात मानकर - जैसा आप चाहते हैं, मे इसे निर्भय किये देता हूँ। आपने पहले इसके सम्बन्धमें जैसा निश्चय किया था - मैंने इसकी भुजाएँ काटकर उसीका अनुमोदन किया है ॥ १६ ॥ मैं जानता हूँ कि बाणासुर दैत्यराज बलिका पुत्र है । इसलिये मैं भी इसका वध नहीं कर सकता; क्योंकि मैंने प्रह्लादको वर दे दिया है कि मैं तुम्हारे वंशमें पैदा होनेवाले किसी भी दैत्यका
वघ नहीं करूंगा' ॥ १७ ॥ इसका घमंड चूर करनेके लिये ही मैंने इसकी भुजाएँ काट दी हैं। इसकी बहुत बड़ी सेना पृथ्वीके लिये भार हो रही थी, इसीलिये मैंने उसका सहार कर दिया है ॥ १८ ॥ अब इसकी चार भुजाएँ बच रही हैं। ये अजर, अमर बनी रहेंगी। यह बाणासुर आपके पार्पदोंमें मुख्य होगा। अब इसको किसीसे किसी प्रकारका भय नहीं है ॥ ४९ ।।
हिणी सेनाके साथ आगे करके द्वारकाके लिये प्रस्थान किया ॥ ५१ ॥ इधर द्वारका में भगवान् श्रीकृष्ण आदिके शुभागमनका समाचार सुनकर झाडियों और तोरणोंसे नगरका कोना कोना सजा दिया गया। बड़ी-बड़ी सड़कों और चौराहोंको चन्दन- मिश्रित जलसे सौंच दिया गया। नगरके नागरिकों, बन्धुबान्धवों और ब्राह्मणोंने आगे आकर खूब धूमधामसे भगवान्का स्वागत किया। उस समय शङ्ख, नगारों और ढोलोंकी तुमुल ध्वनि हो रही थी। इस प्रकार भगवान् श्रीकृष्णने अपनी राजधानी में प्रवेश किया ॥ ५२ ॥
श्रीकृष्णसे इस प्रकार अभयदान प्राप्त करके बाणासुरने उनके पास आकर धरतीमें माथा टेका, प्रणाम किया और अनिरुद्धजीको अपनी पुत्री ऊषाके साथ रयपर बैठाकर भगवान् के पास ले आया ॥ ५० ॥ इसके बाद भगवान् श्रीकृष्णने महादेवजीकी सम्मतिसे बखाकारविभूपित ऊषा और अनिरुद्धनीको एक अक्षीपरीक्षित् ! जो पुरुष श्रीशङ्करजी के साथ भगवान् श्रीकृष्णका युद्ध और उनकी विजयकी कथाका प्रातःकाल उठकर स्मरण करता है, उसकी पराजय नहीं होती ॥ ५३ ॥
चौसठवाँ अध्याय
नृग राजाकी कथा
श्रीशुकदेवजी कहते हैं - प्रिय परीक्षित् । एक स्वर्गीय देवताके रूपमें परिणत हो गया । अब उसके दिन साम्ब, प्रधुम्न, चारुभानु और गद आदि यदुवंशी राजकुमार धूमनेके लिये उपवनमें गये ॥ १ ॥ वहाँ बहुत देरतक खेल खेलते हुए उन्हें प्यास लग आयी। अब वे इधर-उधर जलकी खोज करने लगे। वे एक कूएँके पास गये; उसमें जल तो या नहीं, एक बड़ा विचित्र जीव दीख पड़ा ॥ २ ॥ वह जीव पर्वतके समान आकारका एक गिरगिट था । उसे देखकर उनके आश्चर्य की सीमा न रहो । उनका हृदय करुणासे भर आया और वे उसे बाहर निकालनेका प्रयत्न करने लगे ॥ ३ ॥ परन्तु जब वे राजकुमार उस गिरे हुए गिरगिटको चमड़े और सूतकी रस्सियोंसे बॉधकर बाहर न निकाल सके, तब कुवहलवश उन्होंने यह आश्चर्य मय वृत्तान्त भगवान् श्रीकृष्ण के पास जाकर निवेदन किया ॥ ४ ॥ जगत्के जीवनदाता कमलनयन भगवान् श्रीकृष्ण उस कुएँपर आये । उसे देखकर उन्होंने बायें हायसे खेल खेलमें - अनायास ही उसको बाहर निकाल से लिया ॥ ५॥ मगवान् श्रीकृष्णके करकमलोंका स्पर्श होते ही उसका गिरगिट रूप जाता रहा और वह एक
मा० द० २९-श्रीमद्भागवत
राजा नृगने कहा- प्रभो । मैं महाराज इक्ष्वाकुका पुत्र राजा नूग हूँ । जब कभी किसीने आपके सामने दानियों की गिनती की होगी, तब उसमें मेरा नाम भी अवश्य ही आपके कानोंमे पड़ा होगा ॥ १० ॥ प्रभो ! आप समस्त प्राणियोंकी एक-एक वृत्तिके साक्षी हैं। मूत और भविष्यका व्यवधान भी आपके अखण्ड ज्ञानमें किसी प्रकारकी बाधा नहीं डाल सकता । अतः आपसे छिपा ही क्या है ? फिर भी मैं आपकी आज्ञाका पालन करनेके लिये कहता हूँ ॥ ११ ॥ भगवन् । पृथ्वी में जितने धूलिकण हैं, आकाशमें जितने तारे हैं और वर्षा में जितनी जलकी धाराएँ गिरती हैं, मैंने उतनी ही गौएँ दान की थीं ॥ १२ ॥ वे सभी गौएँ दुधार, नौजवान, सीधी, सुन्दर, सुलक्षणा और कपिला थीं। उन्हें मैंने न्यायके धनसे प्राप्त किया था। सबके साथ बछड़े थे। उनके सींगों में सोना मढ़ दिया गया था और खुरोंमे चॉदी। उन्हें वस्त्र, हार और गइनोंसे सजा दिया जाता था। ऐसी गौएँ मैने दी थीं ॥ १३ ॥ भगवन् । मैं युवावस्थासे सम्पन्न श्रेष्ठ ब्राह्मणकुमारोंको-जो सद्गुणी, शीलसम्पन्न, कष्टमें पड़े हुए कुटुम्बवाले, दम्भरहित तपस्वी, वेदपाठी, शिष्योंको विद्यादान करनेवाले तथा सच्चरित्र होते- त्राभूषणसे अळकृत करता और उन गौओंका दान करता ॥ १४ ॥ इस प्रकार मैंने बहुत सी गौएँ, पृथ्वी, सोना, घर, घोड़े, हाथी, दासियोंके सहित कन्याएँ, तिर्लोके पर्वत, चॉदी, शम्या, वस्त्र, रत्न, गृह-सामग्री और रथ आदि दान किये । अनेक किये और बहुत से कूऍ, बावली आदि बनवाये ॥१५॥
एक दिन किसी अप्रतिग्रही ( दान न लेनेवाले ), तपस्वी ब्राह्मणको एक गाय बिछुड़कर मेरी गौओमे आ मिली। मुझे इस बातका बिल्कुल पता न चला । इसलिये मैंने अनजानमें उसे किसी दूसरे ब्राह्मणको दान कर दिया ॥ १६ ॥ जब उस गायको वे ब्राह्मण ले चले, तब उस गायके असली खामीने कहा - 'यह गौ मेरी है । दान ले जानेवाले ब्राह्मणने कहा - 'यह तो मेरी है, क्योंकि राजा नृगने मुझे इसका दान किया है ॥ १७ ॥ वे दोनों ब्राह्मण आपसमें झगड़ते हुए अपनी-अपनी बात कायम करनेके लिये मेरे पास आये। एकने कहा- 'यह गाय अभी-अभी आपने मुझे दी है और
दूसरेने कहा कि यदि ऐसी बात है तो तुमने मेरी गाय चुरा ली है ।" भगवन् ! उन दोनों ब्राह्मणोंकी बात सुनकर मेरा चित्त भ्रमित हो गया ॥ १८ ॥ मैने धर्मसंकटमें पड़कर उन दोनोंसे बड़ी अनुनय-विनय की और कहा कि 'मैं बदलेमें एक लाख उत्तम गौएँ दूंगा। आपलोग मुझे यह गाय दे दीजिये ॥ १९ ॥ मैं आपलोगोंका सेवक हूँ। मुझसे अनजान में यह अपराध बन गया है। मुझपर आपलोग कृपा कीजिये और मुझे इस घोर कष्टसे तथा घोर नरकमे गिरनेसे बचा लीजिये ॥ २० ॥ 'राजन् । मैं इसके बदलेमें कुछ नहीं लूँगा।" यह कहकर गायका खामी चला गया । 'तुम इसके बदलेमें एक लाख ही नहीं, दस हजार गौएँ और दो तो भी मैं लेनेका नहीं । इस प्रकार कहकर दूसरा ब्राह्मण भी चला गया ॥ २१ ॥ देवाधिदेव जग दीश्वर ! इसके बाद आयु समाप्त होनेपर यमराजके दूत आये और मुझे यमपुरी ले गये। वहाँ यमराजने मुझसे पूछा- ॥ २२ ॥ राजन् ! तुम पहले अपने पापका फूल भोगना चाहते हो या पुण्यका! तुम्हारे दान और धर्मके फलस्वरूप तुम्हें ऐसा तेजखी लोक प्राप्त होनेवाला है, जिसकी कोई सीमा ही नहीं है ॥ २३ ॥ भगवन् ! तब मैंने यमराजसे कहा-'देव ! पहले मैं अपने पापका फल भोगना चाहता हूँ ।" और उसी क्षण यमराजने कहा- 'तुम गिर जाओ ।" उनके ऐसा कहते ही मैं वहाँसे गिरा और गिरते ही समय मैंने देखा कि मैं गिरगिट हो गया हूँ ॥ २४ ॥ प्रमो ! मैं ब्राह्मणोंका सेवक उदार दानी और आपका भक्त था । मुझे इस बातकी उत्कट अभिलाषा थी कि किसी प्रकार आपके दर्शन हो जायें। इस प्रकार आपकी कृपासे मेरे पूर्वजन्मकी स्मृति नष्ट न हुई ॥ २५ ॥ भगवन् ! आप परमात्मा हैं। बड़े-बड़े शुद्ध-हृदय योगीश्वर उपनिषदोंकी दृष्टिसे (अभेददृष्टिसे) अपने हृदयमें आपका ध्यान करते रहते हैं। इन्द्रियातीत परमात्मन् । साक्षात् आप मेरे नेत्रोंके सामने कैसे आ गये ! क्योंकि मैं तो अनेक प्रकारके व्यसनों, दुःखद कर्मोमें फँसकर अंधा हो रहा था । आपका दर्शन तो तब होता है, जब संसारके चक्करसे छुटकारा मिलनेका समय आता है ॥ २६ ॥ देवताओंके भी आराध्यदेव !
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जब भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि बाणासुरने तो बाणोंकी झड़ी लगा दी है, तब वे छुरेको समान तीखी धारवाले चक्रसे उसकी भुजाएँ काटने लगे, मानो कोई किसी वृक्षकी छोटी-छोटी डालियाँ काट रहा हो ॥ बत्तीस ॥ जब भक्तवत्सल भगवान् शङ्करने देखा कि बाणासुरकी भुजाएँ कट रही हैं, तब वे चक्रधारी भगवान् श्रीकृष्णके पास आये और स्तुति करने लगे ॥ तैंतीस ॥ भगवान् शङ्करने कहा- प्रभो । आप वेदमन्त्रों तात्पर्यरूपसे छिपे हुए परमज्योतिःखरूप परब्रह्म हैं। शुद्धहृदय महात्मागण आपके आकाशके समान सर्व व्यापक और निर्विकार खरूपका साक्षात्कार करते हैं. ॥ चौंतीस ॥ आकाश आपकी नाभि है, अग्नि मुख है और जल वीर्य । वर्ग सिर, दिशाएँ कान और पृथ्वी चरण है। चन्द्रमा मन, सूर्य नेत्र और मैं शिव आपका अहङ्कार हूँ । समुद्र आपका पेट है और इन्द्र भुजा ॥ पैंतीस ॥ धान्यादि ओषधियाँ रोम हैं, मेघ केश हैं और ब्रह्मा बुद्धि । प्रजापति लिङ्ग हैं और धर्म हृदय । इस प्रकार समस्त लोक और लोकान्तरोंके साथ जिसके शरीरकी तुलना की जाती है, वे परमपुरुष आप ही हैं ॥ छत्तीस ॥ अखण्ड ज्योतिःखरूप परमात्मन् । आपका यह अवतार धर्मकी रक्षा और संसारके अभ्युदयअभिवृद्धिके लिये हुआ है। हम सब भी आपके प्रभावसे ही प्रमावान्वित होकर सातों सुषनोंका पालन करते हैं ॥ सैंतीस ॥ आप सजातीय, विजातीय और स्वगतभेदसे रहित हैं - एक और अद्वितीय आदिपुरुष हैं। मायाकृत जाप्रत्, खम और सुषुप्ति - इन तीन अवस्थाओं में - अनुगत और उनसे अतीत तुरीयतत्त्व भी आप ही हैं। आप किसी दूसरी वस्तुके द्वारा प्रकाशित नहीं होते, स्वयंप्रकाश हैं । आप सबके कारण हैं, परन्तु आपका न- तो कोई कारण है और न तो आपमें कारणपना ही है। भगवन् ! ऐसा होनेपर भी आप तीनों गुणोंकी विभिन्न विषमताओंको प्रकाशित करने के लिये अपनी मायासे देवता, पशु-पक्षी, मनुष्य आदि शरीरोंके अनुसार भिन्न-भिन्न रूपों में प्रतीत होते है ॥ अड़तीस ॥ प्रभो ! जैसे सूर्य अपनी छाया बादलोंसे ही ढक जाता है और उन बादलों तथा विभिन्न रूपोंको प्रकाशित करता है उसी प्रकार आप तो स्वयंप्रकाश हैं, परन्तु गुणोंके द्वारा मानो ढक से जाते हैं और समस्त गुणों तथा गुणाभिमानी जीवोंको प्रकाशित करते हैं। धास्तवमें आप अनन्त हैं ॥ उनतालीस ॥ भगवन् ! आपकी मायासे मोहित होकर लोग स्त्री-पुत्र, देह-लोह आदिमें आसक्त हो जाते हैं और फिर दुःखके अपार सागरमें डूबने-उतराने लगते हैं ॥ चालीस ॥ संसारके मानवको यह मनुष्य-शरीर आपने अत्यन्त कृपा करके दिया है । जो पुरुष इसे पाकर भी अपनी इन्द्रियोंको वशमें नहीं करता और आपके चरणकमलोंका आश्रय नहीं लेता-उनका सेवन नहीं करता, उसका जीवन अत्यन्त शोचनीय है और वह स्वयं अपने आपको धोखा दे रहा है ॥इकतालीस॥ प्रभो ! आप समस्त प्राणियोंके आत्मा, प्रियतम और ईश्वर हैं। जो मृत्युका ग्रास मनुष्य आपको छोड़ देता है और अनात्म, दुःखरूप एवं तुच्छ विषयों में सुखबुद्धि करके उनके पीछे भटकता है, वह इतना मूर्ख है कि अमृतको छोड़कर विष पी रहा है ॥ बयालीस ॥ मैं, ब्रह्मा, सारे देवता और विशुद्ध हृदयवाले ऋषि-मुनि स प्रकारसे और सर्वात्मभावसे आपके शरणागत हैं क्योंकि आप ही हमलोगोंके आत्मा, प्रियतम और ईश्वर - हैं ॥ तैंतालीस ॥ आप जगत् की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलयके कारण हूँ। आप सबमें सम, परम शान्त, सबके सुहृद् आत्मा और इष्टदेव हैं। आप एक, अद्वितीय और जगत्के आधार तथा अधिष्ठान है । हे प्रभो ! हम सब संसारसे मुक्त होनेके लिये आपका भजन करते हैं ॥ चौदह ॥ देव ! यह बाणासुर मेरा परमप्रिय, कृपापात्र और सेवक है। मैंने इसे अभयदान दिया है। प्रभो । जिस प्रकार इसके परदादा दैत्यराज प्रह्लादपर आपका कृपाप्रसाद है, वैसा ही कृपाप्रसाद आप इसपर भी करें ॥ पैंतालीस ॥ भगवान् श्रीकृष्णने कहा- भगवन् ! आपकी बात मानकर - जैसा आप चाहते हैं, मे इसे निर्भय किये देता हूँ। आपने पहले इसके सम्बन्धमें जैसा निश्चय किया था - मैंने इसकी भुजाएँ काटकर उसीका अनुमोदन किया है ॥ सोलह ॥ मैं जानता हूँ कि बाणासुर दैत्यराज बलिका पुत्र है । इसलिये मैं भी इसका वध नहीं कर सकता; क्योंकि मैंने प्रह्लादको वर दे दिया है कि मैं तुम्हारे वंशमें पैदा होनेवाले किसी भी दैत्यका वघ नहीं करूंगा' ॥ सत्रह ॥ इसका घमंड चूर करनेके लिये ही मैंने इसकी भुजाएँ काट दी हैं। इसकी बहुत बड़ी सेना पृथ्वीके लिये भार हो रही थी, इसीलिये मैंने उसका सहार कर दिया है ॥ अट्ठारह ॥ अब इसकी चार भुजाएँ बच रही हैं। ये अजर, अमर बनी रहेंगी। यह बाणासुर आपके पार्पदोंमें मुख्य होगा। अब इसको किसीसे किसी प्रकारका भय नहीं है ॥ उनचास ।। हिणी सेनाके साथ आगे करके द्वारकाके लिये प्रस्थान किया ॥ इक्यावन ॥ इधर द्वारका में भगवान् श्रीकृष्ण आदिके शुभागमनका समाचार सुनकर झाडियों और तोरणोंसे नगरका कोना कोना सजा दिया गया। बड़ी-बड़ी सड़कों और चौराहोंको चन्दन- मिश्रित जलसे सौंच दिया गया। नगरके नागरिकों, बन्धुबान्धवों और ब्राह्मणोंने आगे आकर खूब धूमधामसे भगवान्का स्वागत किया। उस समय शङ्ख, नगारों और ढोलोंकी तुमुल ध्वनि हो रही थी। इस प्रकार भगवान् श्रीकृष्णने अपनी राजधानी में प्रवेश किया ॥ बावन ॥ श्रीकृष्णसे इस प्रकार अभयदान प्राप्त करके बाणासुरने उनके पास आकर धरतीमें माथा टेका, प्रणाम किया और अनिरुद्धजीको अपनी पुत्री ऊषाके साथ रयपर बैठाकर भगवान् के पास ले आया ॥ पचास ॥ इसके बाद भगवान् श्रीकृष्णने महादेवजीकी सम्मतिसे बखाकारविभूपित ऊषा और अनिरुद्धनीको एक अक्षीपरीक्षित् ! जो पुरुष श्रीशङ्करजी के साथ भगवान् श्रीकृष्णका युद्ध और उनकी विजयकी कथाका प्रातःकाल उठकर स्मरण करता है, उसकी पराजय नहीं होती ॥ तिरेपन ॥ चौसठवाँ अध्याय नृग राजाकी कथा श्रीशुकदेवजी कहते हैं - प्रिय परीक्षित् । एक स्वर्गीय देवताके रूपमें परिणत हो गया । अब उसके दिन साम्ब, प्रधुम्न, चारुभानु और गद आदि यदुवंशी राजकुमार धूमनेके लिये उपवनमें गये ॥ एक ॥ वहाँ बहुत देरतक खेल खेलते हुए उन्हें प्यास लग आयी। अब वे इधर-उधर जलकी खोज करने लगे। वे एक कूएँके पास गये; उसमें जल तो या नहीं, एक बड़ा विचित्र जीव दीख पड़ा ॥ दो ॥ वह जीव पर्वतके समान आकारका एक गिरगिट था । उसे देखकर उनके आश्चर्य की सीमा न रहो । उनका हृदय करुणासे भर आया और वे उसे बाहर निकालनेका प्रयत्न करने लगे ॥ तीन ॥ परन्तु जब वे राजकुमार उस गिरे हुए गिरगिटको चमड़े और सूतकी रस्सियोंसे बॉधकर बाहर न निकाल सके, तब कुवहलवश उन्होंने यह आश्चर्य मय वृत्तान्त भगवान् श्रीकृष्ण के पास जाकर निवेदन किया ॥ चार ॥ जगत्के जीवनदाता कमलनयन भगवान् श्रीकृष्ण उस कुएँपर आये । उसे देखकर उन्होंने बायें हायसे खेल खेलमें - अनायास ही उसको बाहर निकाल से लिया ॥ पाँच॥ मगवान् श्रीकृष्णके करकमलोंका स्पर्श होते ही उसका गिरगिट रूप जाता रहा और वह एक माशून्य दशून्य उनतीस-श्रीमद्भागवत राजा नृगने कहा- प्रभो । मैं महाराज इक्ष्वाकुका पुत्र राजा नूग हूँ । जब कभी किसीने आपके सामने दानियों की गिनती की होगी, तब उसमें मेरा नाम भी अवश्य ही आपके कानोंमे पड़ा होगा ॥ दस ॥ प्रभो ! आप समस्त प्राणियोंकी एक-एक वृत्तिके साक्षी हैं। मूत और भविष्यका व्यवधान भी आपके अखण्ड ज्ञानमें किसी प्रकारकी बाधा नहीं डाल सकता । अतः आपसे छिपा ही क्या है ? फिर भी मैं आपकी आज्ञाका पालन करनेके लिये कहता हूँ ॥ ग्यारह ॥ भगवन् । पृथ्वी में जितने धूलिकण हैं, आकाशमें जितने तारे हैं और वर्षा में जितनी जलकी धाराएँ गिरती हैं, मैंने उतनी ही गौएँ दान की थीं ॥ बारह ॥ वे सभी गौएँ दुधार, नौजवान, सीधी, सुन्दर, सुलक्षणा और कपिला थीं। उन्हें मैंने न्यायके धनसे प्राप्त किया था। सबके साथ बछड़े थे। उनके सींगों में सोना मढ़ दिया गया था और खुरोंमे चॉदी। उन्हें वस्त्र, हार और गइनोंसे सजा दिया जाता था। ऐसी गौएँ मैने दी थीं ॥ तेरह ॥ भगवन् । मैं युवावस्थासे सम्पन्न श्रेष्ठ ब्राह्मणकुमारोंको-जो सद्गुणी, शीलसम्पन्न, कष्टमें पड़े हुए कुटुम्बवाले, दम्भरहित तपस्वी, वेदपाठी, शिष्योंको विद्यादान करनेवाले तथा सच्चरित्र होते- त्राभूषणसे अळकृत करता और उन गौओंका दान करता ॥ चौदह ॥ इस प्रकार मैंने बहुत सी गौएँ, पृथ्वी, सोना, घर, घोड़े, हाथी, दासियोंके सहित कन्याएँ, तिर्लोके पर्वत, चॉदी, शम्या, वस्त्र, रत्न, गृह-सामग्री और रथ आदि दान किये । अनेक किये और बहुत से कूऍ, बावली आदि बनवाये ॥पंद्रह॥ एक दिन किसी अप्रतिग्रही , तपस्वी ब्राह्मणको एक गाय बिछुड़कर मेरी गौओमे आ मिली। मुझे इस बातका बिल्कुल पता न चला । इसलिये मैंने अनजानमें उसे किसी दूसरे ब्राह्मणको दान कर दिया ॥ सोलह ॥ जब उस गायको वे ब्राह्मण ले चले, तब उस गायके असली खामीने कहा - 'यह गौ मेरी है । दान ले जानेवाले ब्राह्मणने कहा - 'यह तो मेरी है, क्योंकि राजा नृगने मुझे इसका दान किया है ॥ सत्रह ॥ वे दोनों ब्राह्मण आपसमें झगड़ते हुए अपनी-अपनी बात कायम करनेके लिये मेरे पास आये। एकने कहा- 'यह गाय अभी-अभी आपने मुझे दी है और दूसरेने कहा कि यदि ऐसी बात है तो तुमने मेरी गाय चुरा ली है ।" भगवन् ! उन दोनों ब्राह्मणोंकी बात सुनकर मेरा चित्त भ्रमित हो गया ॥ अट्ठारह ॥ मैने धर्मसंकटमें पड़कर उन दोनोंसे बड़ी अनुनय-विनय की और कहा कि 'मैं बदलेमें एक लाख उत्तम गौएँ दूंगा। आपलोग मुझे यह गाय दे दीजिये ॥ उन्नीस ॥ मैं आपलोगोंका सेवक हूँ। मुझसे अनजान में यह अपराध बन गया है। मुझपर आपलोग कृपा कीजिये और मुझे इस घोर कष्टसे तथा घोर नरकमे गिरनेसे बचा लीजिये ॥ बीस ॥ 'राजन् । मैं इसके बदलेमें कुछ नहीं लूँगा।" यह कहकर गायका खामी चला गया । 'तुम इसके बदलेमें एक लाख ही नहीं, दस हजार गौएँ और दो तो भी मैं लेनेका नहीं । इस प्रकार कहकर दूसरा ब्राह्मण भी चला गया ॥ इक्कीस ॥ देवाधिदेव जग दीश्वर ! इसके बाद आयु समाप्त होनेपर यमराजके दूत आये और मुझे यमपुरी ले गये। वहाँ यमराजने मुझसे पूछा- ॥ बाईस ॥ राजन् ! तुम पहले अपने पापका फूल भोगना चाहते हो या पुण्यका! तुम्हारे दान और धर्मके फलस्वरूप तुम्हें ऐसा तेजखी लोक प्राप्त होनेवाला है, जिसकी कोई सीमा ही नहीं है ॥ तेईस ॥ भगवन् ! तब मैंने यमराजसे कहा-'देव ! पहले मैं अपने पापका फल भोगना चाहता हूँ ।" और उसी क्षण यमराजने कहा- 'तुम गिर जाओ ।" उनके ऐसा कहते ही मैं वहाँसे गिरा और गिरते ही समय मैंने देखा कि मैं गिरगिट हो गया हूँ ॥ चौबीस ॥ प्रमो ! मैं ब्राह्मणोंका सेवक उदार दानी और आपका भक्त था । मुझे इस बातकी उत्कट अभिलाषा थी कि किसी प्रकार आपके दर्शन हो जायें। इस प्रकार आपकी कृपासे मेरे पूर्वजन्मकी स्मृति नष्ट न हुई ॥ पच्चीस ॥ भगवन् ! आप परमात्मा हैं। बड़े-बड़े शुद्ध-हृदय योगीश्वर उपनिषदोंकी दृष्टिसे अपने हृदयमें आपका ध्यान करते रहते हैं। इन्द्रियातीत परमात्मन् । साक्षात् आप मेरे नेत्रोंके सामने कैसे आ गये ! क्योंकि मैं तो अनेक प्रकारके व्यसनों, दुःखद कर्मोमें फँसकर अंधा हो रहा था । आपका दर्शन तो तब होता है, जब संसारके चक्करसे छुटकारा मिलनेका समय आता है ॥ छब्बीस ॥ देवताओंके भी आराध्यदेव !
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बेंगलुरू। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली को संबोधित किया। इस दौरान राहुल ने राज्य की बोम्मई सरकार पर निशाना साधने के साथ ही केंद्र की मोदी सरकार पर भी जमकर हमला बोला। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री मोदी अडानी को हजारों करोड़ रुपये दे सकते हैं तो हम भी गरीबों, महिलाओं और युवाओं को पैसा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने दिल भर के अडानी की मदद की, हम दिल भर के कर्नाटक के लोगों की मदद करेंगे।
राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी सरकार ने कर्नाटक में क्या किया? उन्होंने सिर्फ 40 प्रतिशत कमीशन खाया है। काम करवाने के लिए बीजेपी सरकार के लोगों ने कर्नाटक की जनता का पैसा चोरी किया है। उन्होंने जनता से 40% कमीशन लिया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि ये सारी बातें मैं नहीं कह रहां हूं, कर्नाटक ठेकेदार संघ ने पीएम को खत लिखकर ये बातें कही है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस खत का जवाब भी नहीं दिया। इसका मतलब उन्होंने ये बात मान ली कि कर्नाटक में 40 फीसदी कमीशन लिया जाता है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि मैने संसद में पूछा था कि अडानी की शेल कंपनी में 20 हजार करोड़ रुपये किसके हैं? इसके बाद भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि सरकार के लोगों ने संसद नहीं चलने दी है। आमतौर पर विपक्ष के सांसद संसद को रोकते हैं। लेकिन पहली बार सरकार के मंत्रियों ने खुद ही संसद को रोका है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि अडानी की डिफेंस इंन्फ्रास्ट्रक्चर की कंपनी में चीन का व्यक्ति डायरेक्टर बनकर बैठा हुआ है। अडानी की शेल कंपनियों में भी चीन का डायरेक्टर है। लेकिन इसकी जांच कोई नहीं करता है, सरकार के लोग सिर्फ ध्यान भटकाने की बात करते हैं।
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बेंगलुरू। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली को संबोधित किया। इस दौरान राहुल ने राज्य की बोम्मई सरकार पर निशाना साधने के साथ ही केंद्र की मोदी सरकार पर भी जमकर हमला बोला। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री मोदी अडानी को हजारों करोड़ रुपये दे सकते हैं तो हम भी गरीबों, महिलाओं और युवाओं को पैसा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने दिल भर के अडानी की मदद की, हम दिल भर के कर्नाटक के लोगों की मदद करेंगे। राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी सरकार ने कर्नाटक में क्या किया? उन्होंने सिर्फ चालीस प्रतिशत कमीशन खाया है। काम करवाने के लिए बीजेपी सरकार के लोगों ने कर्नाटक की जनता का पैसा चोरी किया है। उन्होंने जनता से चालीस% कमीशन लिया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि ये सारी बातें मैं नहीं कह रहां हूं, कर्नाटक ठेकेदार संघ ने पीएम को खत लिखकर ये बातें कही है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस खत का जवाब भी नहीं दिया। इसका मतलब उन्होंने ये बात मान ली कि कर्नाटक में चालीस फीसदी कमीशन लिया जाता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि मैने संसद में पूछा था कि अडानी की शेल कंपनी में बीस हजार करोड़ रुपये किसके हैं? इसके बाद भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि सरकार के लोगों ने संसद नहीं चलने दी है। आमतौर पर विपक्ष के सांसद संसद को रोकते हैं। लेकिन पहली बार सरकार के मंत्रियों ने खुद ही संसद को रोका है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि अडानी की डिफेंस इंन्फ्रास्ट्रक्चर की कंपनी में चीन का व्यक्ति डायरेक्टर बनकर बैठा हुआ है। अडानी की शेल कंपनियों में भी चीन का डायरेक्टर है। लेकिन इसकी जांच कोई नहीं करता है, सरकार के लोग सिर्फ ध्यान भटकाने की बात करते हैं।
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कोटा। राजस्थान के कोटा शहर में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। फैक्ट्री में घुसे चोर की दो चौकीदारों ने एक ऑटो चालक के साथ मिलकर नृसंस हत्या कर दी। तीनों ने फैक्ट्री में घुसे चोर रवि को बांधकर लठ और पाइप से बुरी तरह पीटा। तीनों रवि को चोरी का सबक सिखाना चाहते थे। लेकिन कानून हाथ में लेकर चोर को इतना पीटा की फैक्ट्री के अंदर ही उसने दम तोड़ दिया।
चोर रवि की सांसें टूट जाने का जैसे ही तीनों अहसास हुआ, तो बुरी तरह घबरा गए। किसी को इस घटना की कानों-कान खबर ना लगे। किसी को इस वारदात का शक ना हो। ऐसे में प्लानिंग की गई। रवि की बाॅडी पानी के टांके में डाली दी। चोर का मर्डर करने से घबराए दोनों चौकीदार और ऑटो चालक ने दूसरे दिन रवि के शव को फैक्ट्री के पास के नाले में फैंक दिया। घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचकर अनंतपुरा थाना पुलिस ने शव को बरामद किया। उसे कोटा एमबीएस अस्पताल की मोर्चरी में शिनाख्त को रखवाया। वहीं तीनों मुल्जिमों की पुलिस तलाश कर रही है। चोर रवि की हत्या का आरोप फैक्ट्री के चैकीदार शंभूसिंह, पत्थर स्टॉक चैकीदार राधेश्याम और ऑटो चालक देवेंद्र मेघवाल पर हैं।
इस सनसनीखेज वारदात का राजफाश मर्डर करने में शामिल रहें ऑटो चालक देवेंद्र मेघवाल ने किया। वह रवि की हत्या करने से काफी घबराया हुआ था। घटनाक्रम को 19 जुलाई को अंजाम दिया गया। दो दिन तक हत्या करने से परेशान अनंतापुरा बरडा बस्ती में रहने वाला देवेंद्र अपने दोस्त राहुल चैधरी के पास 21 जुलाई को पहुंचा। चैधरी को देवेंद्र के माथे पर चिंता की लकीरें नजर आई। चौधरी ने देवेंद्र से पूछा क्या बात हैं, परेशान दिख रहा हैं। फिर क्या था, देंवेद्र ने अपने दोस्त के सामने रवि की हत्या का राज खोल दिया। फिलहाल चौकीदार शंभूसिंह, राधेश्याम और देवेंद्र तीनों फरार हैं। यह फैक्ट्री कोटा रीको इंडस्ट्रीज एरिया रोड नंबर-5 की हैं। जहां फैक्ट्री स्थित हैं।
कोटा शहर जिला पुलिस अधीक्षक विकास पाठक के मुताबिक ऑटो चालक के द्वारा दोस्त राहुल चौधरी को घटना के बारे में उगला। इसके बाद, चौधरी ने 22 जुलाई को अनंतपुरा पुलिस थाने जाकर घटना की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस हरकत में आई। मौके पर जाकर नाले से रवि का शव बरामद किया। ऑटो चालक ने चौधरी को बताया था कि शंभूसिंह के कहने पर राधेश्याम वह खुद चोर को पकडने गए थे। वरना वह बैठे हुए थे। शंभूसिंह ने रवि के आए दिन फैक्ट्री में घुसकर चोरी करने से बाज नहीं आने पर उसे नसीहत देने के लिए उसे पकड़कर बांधा और पीटा। और तब उसकी मौत हो गई। (रिपोर्ट- अर्जुन अरविंद)
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कोटा। राजस्थान के कोटा शहर में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। फैक्ट्री में घुसे चोर की दो चौकीदारों ने एक ऑटो चालक के साथ मिलकर नृसंस हत्या कर दी। तीनों ने फैक्ट्री में घुसे चोर रवि को बांधकर लठ और पाइप से बुरी तरह पीटा। तीनों रवि को चोरी का सबक सिखाना चाहते थे। लेकिन कानून हाथ में लेकर चोर को इतना पीटा की फैक्ट्री के अंदर ही उसने दम तोड़ दिया। चोर रवि की सांसें टूट जाने का जैसे ही तीनों अहसास हुआ, तो बुरी तरह घबरा गए। किसी को इस घटना की कानों-कान खबर ना लगे। किसी को इस वारदात का शक ना हो। ऐसे में प्लानिंग की गई। रवि की बाॅडी पानी के टांके में डाली दी। चोर का मर्डर करने से घबराए दोनों चौकीदार और ऑटो चालक ने दूसरे दिन रवि के शव को फैक्ट्री के पास के नाले में फैंक दिया। घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचकर अनंतपुरा थाना पुलिस ने शव को बरामद किया। उसे कोटा एमबीएस अस्पताल की मोर्चरी में शिनाख्त को रखवाया। वहीं तीनों मुल्जिमों की पुलिस तलाश कर रही है। चोर रवि की हत्या का आरोप फैक्ट्री के चैकीदार शंभूसिंह, पत्थर स्टॉक चैकीदार राधेश्याम और ऑटो चालक देवेंद्र मेघवाल पर हैं। इस सनसनीखेज वारदात का राजफाश मर्डर करने में शामिल रहें ऑटो चालक देवेंद्र मेघवाल ने किया। वह रवि की हत्या करने से काफी घबराया हुआ था। घटनाक्रम को उन्नीस जुलाई को अंजाम दिया गया। दो दिन तक हत्या करने से परेशान अनंतापुरा बरडा बस्ती में रहने वाला देवेंद्र अपने दोस्त राहुल चैधरी के पास इक्कीस जुलाई को पहुंचा। चैधरी को देवेंद्र के माथे पर चिंता की लकीरें नजर आई। चौधरी ने देवेंद्र से पूछा क्या बात हैं, परेशान दिख रहा हैं। फिर क्या था, देंवेद्र ने अपने दोस्त के सामने रवि की हत्या का राज खोल दिया। फिलहाल चौकीदार शंभूसिंह, राधेश्याम और देवेंद्र तीनों फरार हैं। यह फैक्ट्री कोटा रीको इंडस्ट्रीज एरिया रोड नंबर-पाँच की हैं। जहां फैक्ट्री स्थित हैं। कोटा शहर जिला पुलिस अधीक्षक विकास पाठक के मुताबिक ऑटो चालक के द्वारा दोस्त राहुल चौधरी को घटना के बारे में उगला। इसके बाद, चौधरी ने बाईस जुलाई को अनंतपुरा पुलिस थाने जाकर घटना की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस हरकत में आई। मौके पर जाकर नाले से रवि का शव बरामद किया। ऑटो चालक ने चौधरी को बताया था कि शंभूसिंह के कहने पर राधेश्याम वह खुद चोर को पकडने गए थे। वरना वह बैठे हुए थे। शंभूसिंह ने रवि के आए दिन फैक्ट्री में घुसकर चोरी करने से बाज नहीं आने पर उसे नसीहत देने के लिए उसे पकड़कर बांधा और पीटा। और तब उसकी मौत हो गई।
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पुनर्मतदान का आदेश दिया गया था, जिस दौरान मात्र दो फीसदी ही मतदान हुआ।
हिंसा में सात लोगों की मौत हुई थी।
कुल नौ उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला तथा नजीर अहमद खान के बीच था। अलगाववादियों ने इस चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया था।
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पुनर्मतदान का आदेश दिया गया था, जिस दौरान मात्र दो फीसदी ही मतदान हुआ। हिंसा में सात लोगों की मौत हुई थी। कुल नौ उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला तथा नजीर अहमद खान के बीच था। अलगाववादियों ने इस चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया था।
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- #Halअब मलेशिया में दिखेगी भारत की धमक, HAL ने खोला ऑफिस, तेजस की बिक्री को मिलेगी बूस्ट!
डीजीसीए ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के 19 यात्रियों वाले यात्री विमान के नए वर्जन को मंजूरी दे दी है। यह विमान हल्का होने के साथ-साथ बहुत ही कम ऑपरेशनल लागत वाला है, जिसकी वजह से इसका घरेलू उपयोग काफी दमदादार होने की संभावना है। साथ ही साथ भविष्य में इसकी डिमांड बाहर के मुल्कों से भी हो सकती है। इसके रखरखाव पर आने वाला खर्च भी कम है, जिससे इसकी लोकप्रियता ज्यादा रहने की संभावना है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है, तो स्वदेशी अभियान के लिए भी काफी उत्साहजनक है।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नए यात्री विमान 'हिंदुस्तान 228-201 LW'को डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) की मंजूरी मिल गई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के यात्री विमान के नए वेरिएंट की विशेषताओं से भरा हुआ है। रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के मुताबिक मॉडिफिकेशन की वजह से इस यात्री विमान का नया वेरिएंट सब-5,700 किलोग्राम वाले एयरक्राफ्ट की श्रेणी में आ जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि यात्रियों को लेकर उड़ान भरने के लिए यह कई तरह से बेहतर हो जाएगा।
एचएएल हेडक्वार्टर की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक इसके यात्री विमान का नया वेरिएंट 'हिंदुस्तान 228-201 LW' की अधिकतम टेक-ऑफ वजन क्षमता 19 यात्रियों के साथ 5695 किलोग्राम है। इसी वजह से यह विमान सब-5,700 किलोग्राम वाले एयरक्राफ्ट की श्रेणी में आ रहा है। यह विमान इसलिए ज्यादा उपयोगी माना जा रहा है कि यह ऑपरेटरों के लिए भी कई तरह से फायदेमंद है। 19 यात्रियों वाले इस विमान में दो सदस्यीय क्रू होते हैं। इस विमान को विभिन्न तरह के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया है। इसमें यात्री सेवाओं के अलावा, वीआईवी मूवमेंट, सामान ढोने, एयर एंबुलेंस, एरियल सर्विलांस और तस्वीरें खींचने, क्लाउड सीडिंग के अलावा पैरा जंपिंग जैसे स्पोर्ट इवेंट के लिए।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नए यात्री विमान में पायलटों के लिए कम अहर्ता की आवश्यकता है। कमर्शियल पायलट के लाइसेंसधारी पायलट इस विमान को उड़ा सकते हैं, इसका अर्थ यह हुआ कि इसे उड़ाने वाले पायलटों की संख्या (pilot pool) बढ़ जाएगी, जिससे कि इसके संचालन पर आने वाली लागत घट जाएगी।
इसके अलावा नए विमान का यह भी फायदा है कि इसकी उड़ान के लिए ट्रेनिंग की आवश्यकता भी कम होगी और यहां तक कि एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरों और ग्राउंड क्रू के लिए भी कम प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी। एचएएल की ओर से कहा गया है, 'ये वैरिएंट ऑपरेटरों के लिए कई तरह से संचालन लाभ देता है। जैसे कि कम पायलट अहर्ता आवश्यकता, विमान उड़ाने के लिए कमर्शियल पायलट लाइसेंस, विमान के लिए पायलट पूल की उपलब्धता में इजाफा और ऑपरेशनल लागत में कमी। '
कैसे विकसित हुआ मेड इन इंडिया विमान ?
मेड इन इंडिया 'हिंदुस्तान 228' Do-228 का सिविलियन रूप है। इसे हिंदुस्तान एयोनॉटिक्स ने मल्टीफंक्शनल लाइट कार्गो विमान के तौर पर जर्मनी की कंपनी Dornier GmbH से प्राप्त लाइसेंस के तहत विकसित किया था। उसी विमान का स्वदेशी उन्नत रूप 'हिंदुस्तान 228-201 LW'के तौर पर अब सामने आया है, जो 19 यात्रियों के साथ उड़ान भरने में सक्षम है। 1916 के आखिर में ही एचएएल ने अपने उत्पाद का सिविल वर्जन बनाने का इरादा जाहिर किया ता। एक साल बाद इसके लिए उत्तर प्रदेश के कानपुर में असेंबली यूनिट का निर्माण शुरू किया गया था। कानपुर में एचएएल का ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट डिविजन है। (पहली तस्वीर के अलावा-सांकेतिक। इनपुट-एजेंसियां)
SDM Jyoti Maurya के बाद अंजलि मीणा का शपथ पत्र, 'RAS बनकर पति को छोड़ा तो दूंगी 1 करोड़ रुपए'
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- #Halअब मलेशिया में दिखेगी भारत की धमक, HAL ने खोला ऑफिस, तेजस की बिक्री को मिलेगी बूस्ट! डीजीसीए ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के उन्नीस यात्रियों वाले यात्री विमान के नए वर्जन को मंजूरी दे दी है। यह विमान हल्का होने के साथ-साथ बहुत ही कम ऑपरेशनल लागत वाला है, जिसकी वजह से इसका घरेलू उपयोग काफी दमदादार होने की संभावना है। साथ ही साथ भविष्य में इसकी डिमांड बाहर के मुल्कों से भी हो सकती है। इसके रखरखाव पर आने वाला खर्च भी कम है, जिससे इसकी लोकप्रियता ज्यादा रहने की संभावना है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है, तो स्वदेशी अभियान के लिए भी काफी उत्साहजनक है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नए यात्री विमान 'हिंदुस्तान दो सौ अट्ठाईस-दो सौ एक LW'को डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन की मंजूरी मिल गई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के यात्री विमान के नए वेरिएंट की विशेषताओं से भरा हुआ है। रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के मुताबिक मॉडिफिकेशन की वजह से इस यात्री विमान का नया वेरिएंट सब-पाँच,सात सौ किलोग्रामग्राम वाले एयरक्राफ्ट की श्रेणी में आ जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि यात्रियों को लेकर उड़ान भरने के लिए यह कई तरह से बेहतर हो जाएगा। एचएएल हेडक्वार्टर की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक इसके यात्री विमान का नया वेरिएंट 'हिंदुस्तान दो सौ अट्ठाईस-दो सौ एक LW' की अधिकतम टेक-ऑफ वजन क्षमता उन्नीस यात्रियों के साथ पाँच हज़ार छः सौ पचानवे किलोग्रामग्राम है। इसी वजह से यह विमान सब-पाँच,सात सौ किलोग्रामग्राम वाले एयरक्राफ्ट की श्रेणी में आ रहा है। यह विमान इसलिए ज्यादा उपयोगी माना जा रहा है कि यह ऑपरेटरों के लिए भी कई तरह से फायदेमंद है। उन्नीस यात्रियों वाले इस विमान में दो सदस्यीय क्रू होते हैं। इस विमान को विभिन्न तरह के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया है। इसमें यात्री सेवाओं के अलावा, वीआईवी मूवमेंट, सामान ढोने, एयर एंबुलेंस, एरियल सर्विलांस और तस्वीरें खींचने, क्लाउड सीडिंग के अलावा पैरा जंपिंग जैसे स्पोर्ट इवेंट के लिए। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नए यात्री विमान में पायलटों के लिए कम अहर्ता की आवश्यकता है। कमर्शियल पायलट के लाइसेंसधारी पायलट इस विमान को उड़ा सकते हैं, इसका अर्थ यह हुआ कि इसे उड़ाने वाले पायलटों की संख्या बढ़ जाएगी, जिससे कि इसके संचालन पर आने वाली लागत घट जाएगी। इसके अलावा नए विमान का यह भी फायदा है कि इसकी उड़ान के लिए ट्रेनिंग की आवश्यकता भी कम होगी और यहां तक कि एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरों और ग्राउंड क्रू के लिए भी कम प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी। एचएएल की ओर से कहा गया है, 'ये वैरिएंट ऑपरेटरों के लिए कई तरह से संचालन लाभ देता है। जैसे कि कम पायलट अहर्ता आवश्यकता, विमान उड़ाने के लिए कमर्शियल पायलट लाइसेंस, विमान के लिए पायलट पूल की उपलब्धता में इजाफा और ऑपरेशनल लागत में कमी। ' कैसे विकसित हुआ मेड इन इंडिया विमान ? मेड इन इंडिया 'हिंदुस्तान दो सौ अट्ठाईस' Do-दो सौ अट्ठाईस का सिविलियन रूप है। इसे हिंदुस्तान एयोनॉटिक्स ने मल्टीफंक्शनल लाइट कार्गो विमान के तौर पर जर्मनी की कंपनी Dornier GmbH से प्राप्त लाइसेंस के तहत विकसित किया था। उसी विमान का स्वदेशी उन्नत रूप 'हिंदुस्तान दो सौ अट्ठाईस-दो सौ एक LW'के तौर पर अब सामने आया है, जो उन्नीस यात्रियों के साथ उड़ान भरने में सक्षम है। एक हज़ार नौ सौ सोलह के आखिर में ही एचएएल ने अपने उत्पाद का सिविल वर्जन बनाने का इरादा जाहिर किया ता। एक साल बाद इसके लिए उत्तर प्रदेश के कानपुर में असेंबली यूनिट का निर्माण शुरू किया गया था। कानपुर में एचएएल का ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट डिविजन है। SDM Jyoti Maurya के बाद अंजलि मीणा का शपथ पत्र, 'RAS बनकर पति को छोड़ा तो दूंगी एक करोड़ रुपए'
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आश्रम में बच्चों को बंधक बनाने का आरोपी विवादित स्वयंभू बाबा नित्यानंद देश छोड़कर फरार हो गया है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने यह जानकारी दी। बुधवार को नित्यानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
नई दिल्ली. आश्रम में बच्चों को बंधक बनाने का आरोपी विवादित स्वयंभू बाबा नित्यानंद देश छोड़कर फरार हो गया है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने यह जानकारी दी। बुधवार को नित्यानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि नित्यानंद ने बच्चों का अपहरण कर अपने आश्रम में बंधक बनाकर रखा था, इनसे अनुयायियों से चंदा जुटाने का काम किया जाता था।
नित्यानंद के त्रिनिदाद एंड टोबैगो भागने की खबरों के बीच विदेश मंत्रालय ने उसके बारे में कोई भी जानकारी होने या प्रत्यर्पण की अपील से इनकार किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, "हमें कोई भी औपचारिक जानकारी नहीं है, ना ही गुजरात पुलिस की तरफ और ना ही गृह मंत्रालय की ओर से। हमें प्रत्यर्पण की अपील के लिए उसके लोकेशन और नागरिकता के बारे में भी जानकारी चाहिए। हमें उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। "
समाचार एजेंसी पीटीआई को गुजरात पुलिस अफसर ने बताया कि नित्यानंद विदेश में है। अगर जरूरत पड़ी तो गुजरात पुलिस जरूरी माध्यम से नित्यानंद को हिरासत में लेने की मांग करेगी। पुलिस के मुताबिक, नित्यानंद पर जब कर्नाटक में दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था, वह देश छोड़कर भाग गया, उसकी खोज करना बेकार है। नित्यानंद की दो सहयोगियों हरिणी चेलप्पन उर्फ मां नित्य प्राणप्रिया नंदा (30) और रिद्धि रविकिरण उर्फ मां नित्य प्रियातत्वा नंदा (24) को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने उन्हें पांच दिन की रिमांड पर भेजा है।
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आश्रम में बच्चों को बंधक बनाने का आरोपी विवादित स्वयंभू बाबा नित्यानंद देश छोड़कर फरार हो गया है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने यह जानकारी दी। बुधवार को नित्यानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। नई दिल्ली. आश्रम में बच्चों को बंधक बनाने का आरोपी विवादित स्वयंभू बाबा नित्यानंद देश छोड़कर फरार हो गया है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने यह जानकारी दी। बुधवार को नित्यानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि नित्यानंद ने बच्चों का अपहरण कर अपने आश्रम में बंधक बनाकर रखा था, इनसे अनुयायियों से चंदा जुटाने का काम किया जाता था। नित्यानंद के त्रिनिदाद एंड टोबैगो भागने की खबरों के बीच विदेश मंत्रालय ने उसके बारे में कोई भी जानकारी होने या प्रत्यर्पण की अपील से इनकार किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, "हमें कोई भी औपचारिक जानकारी नहीं है, ना ही गुजरात पुलिस की तरफ और ना ही गृह मंत्रालय की ओर से। हमें प्रत्यर्पण की अपील के लिए उसके लोकेशन और नागरिकता के बारे में भी जानकारी चाहिए। हमें उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। " समाचार एजेंसी पीटीआई को गुजरात पुलिस अफसर ने बताया कि नित्यानंद विदेश में है। अगर जरूरत पड़ी तो गुजरात पुलिस जरूरी माध्यम से नित्यानंद को हिरासत में लेने की मांग करेगी। पुलिस के मुताबिक, नित्यानंद पर जब कर्नाटक में दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था, वह देश छोड़कर भाग गया, उसकी खोज करना बेकार है। नित्यानंद की दो सहयोगियों हरिणी चेलप्पन उर्फ मां नित्य प्राणप्रिया नंदा और रिद्धि रविकिरण उर्फ मां नित्य प्रियातत्वा नंदा को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने उन्हें पांच दिन की रिमांड पर भेजा है।
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Rewa Government Hospitals OPD Timing Changed: रीवा. सरकारी अस्पतालों की ओपीडी के समय में फिर बदलाव किया गया है. अब सभी सरकारी अस्पताल में ओपीडी का संचालन सुबह 9 से दोपहर 2 बजे और शाम को 5 से 6 बजे तक होगा. अभी सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक ओपीडी का संचालन किया जा रहा था. दोपहर में एक घंटे का लंच होता था. रोगियों का पंजीयन दोपहर 1.45 बजे तक किया जाएगा, इसके पहले पंजीयन बंद नहीं करने के निर्देश हैं. अंतः रोग विभाग में भर्ती मरीजों सुबह का राउंड सभी चिकित्सक विशेषज्ञ और चिकित्सा अधिकारी 9:30 बजे के पहले करेंगे. जिन विभाग में मरीज नहीं होंगे उस विभाग के चिकित्सक राउंड नहीं करेंगे, सुबह 9 बजे से ओपीडी में बैठेंगे.
जिला अस्पताल में जांच, परीक्षण विभाग पैथोलॉजी, बायोकेमेस्ट्री, रेडियोलॉजी, एक्स-रे सुबह 8 से दोपहर 3 बजे तक खुलेंगे.
जिला चिकित्सालय की ओपीडी में उपलब्ध चिकित्सकों का नाम, कक्ष क्रमांक की जानकारी हेल्प डेस्क और डिजीटल बोर्ड में प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा.
रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल में आपातकालीन सेवाएं 24 घंटे जारी रहेंगी. आपातकालीन सेवाओं का संचालन आपातकालीन कक्ष से ही किया जाएगा. दो दिन का अवकाश होने पर दोनों दिन ओपीडी बंद नहीं रहेगी. दूसरे दिन सुबह 9 से 11 संचालन किया जाएगा.
चिकित्सकों की आपातकालीन ड्यूटी तीन शिट की होगी. सुबह 8 से दोपहर 2 बजे, दोपहर 2 से रात 8 और रात 8 से सुबह 8 बजे तक. ड्यूटी समाप्त होने पर चिकित्सक को चार्ज हैंडओवर करना होगा. वार्ड में भर्ती मरीजों का संक्षिप्त विवरण भी देना होगा. चार सौ से अधिक बेड वाले अस्पताल में दो-दो चिकित्सक आकस्मिक ड्यूटी करेंगे.
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Rewa Government Hospitals OPD Timing Changed: रीवा. सरकारी अस्पतालों की ओपीडी के समय में फिर बदलाव किया गया है. अब सभी सरकारी अस्पताल में ओपीडी का संचालन सुबह नौ से दोपहर दो बजे और शाम को पाँच से छः बजे तक होगा. अभी सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक ओपीडी का संचालन किया जा रहा था. दोपहर में एक घंटे का लंच होता था. रोगियों का पंजीयन दोपहर एक.पैंतालीस बजे तक किया जाएगा, इसके पहले पंजीयन बंद नहीं करने के निर्देश हैं. अंतः रोग विभाग में भर्ती मरीजों सुबह का राउंड सभी चिकित्सक विशेषज्ञ और चिकित्सा अधिकारी नौ:तीस बजे के पहले करेंगे. जिन विभाग में मरीज नहीं होंगे उस विभाग के चिकित्सक राउंड नहीं करेंगे, सुबह नौ बजे से ओपीडी में बैठेंगे. जिला अस्पताल में जांच, परीक्षण विभाग पैथोलॉजी, बायोकेमेस्ट्री, रेडियोलॉजी, एक्स-रे सुबह आठ से दोपहर तीन बजे तक खुलेंगे. जिला चिकित्सालय की ओपीडी में उपलब्ध चिकित्सकों का नाम, कक्ष क्रमांक की जानकारी हेल्प डेस्क और डिजीटल बोर्ड में प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा. रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल में आपातकालीन सेवाएं चौबीस घंटाटे जारी रहेंगी. आपातकालीन सेवाओं का संचालन आपातकालीन कक्ष से ही किया जाएगा. दो दिन का अवकाश होने पर दोनों दिन ओपीडी बंद नहीं रहेगी. दूसरे दिन सुबह नौ से ग्यारह संचालन किया जाएगा. चिकित्सकों की आपातकालीन ड्यूटी तीन शिट की होगी. सुबह आठ से दोपहर दो बजे, दोपहर दो से रात आठ और रात आठ से सुबह आठ बजे तक. ड्यूटी समाप्त होने पर चिकित्सक को चार्ज हैंडओवर करना होगा. वार्ड में भर्ती मरीजों का संक्षिप्त विवरण भी देना होगा. चार सौ से अधिक बेड वाले अस्पताल में दो-दो चिकित्सक आकस्मिक ड्यूटी करेंगे.
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तीसरा अङ्क
छाया-पहचान लिया ? क्या वह भूलने की बात है ? पगली हो पर भी मैं भूल न सकी।
शुजाउद्दौला तुम यहाँ कैसे आई १ जिन्नतउन्निसा कहाँ है ? छायाउम्मीद के साथ आये थे - नाउम्मीद हुए ? एक और - की का सत्यानाश न कर सके- क्यो ? श्राग के अन्दर रहते होन लगेगी। सॉप के खिलाड़ी हो, सोचा है उसमें जहर है। कभी यह भी हो सकता है । हाः हाः हाः--बदमाश, कायर अमीर इसलिए सोचा है आसानी से निकल भागोगे । असभव हे अभव ठो नारी जागो --असहाय अनाथ लड़की का सत्यानाश जिसने किया 1-- श्राज उसी के खून से उसके पापों का प्रायश्चित्त करो । यह छुरी तने रोज सावधानी के साथ में छिपा रक्खी थी- आज
अपने लायक जगह पर यह आराम करेगी।
( नवाब की छाती में छुरी भोकती है ) शुजाउद्दौला --- ( हाथ पकडकर ) बदजात, कौन है, दौड़ो- खून ।
छाया- फिर हाथ पकड़ा है-- हा. हाः हाः लेकिन वह ताकत अब इन हाथों में नहीं ।
सत्र--हाय हाय क्या हुआ क्या हुआ या अल्लाह
शुजाउद्दौला - जल्द वजीसे को खबर दो, पहरा बुलाओ।
पहली--क्या हुज़ूर को ज्यादा चोट आई है ? दूसरी-भर करती हूँ ।
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तीसरा अङ्क छाया-पहचान लिया ? क्या वह भूलने की बात है ? पगली हो पर भी मैं भूल न सकी। शुजाउद्दौला तुम यहाँ कैसे आई एक जिन्नतउन्निसा कहाँ है ? छायाउम्मीद के साथ आये थे - नाउम्मीद हुए ? एक और - की का सत्यानाश न कर सके- क्यो ? श्राग के अन्दर रहते होन लगेगी। सॉप के खिलाड़ी हो, सोचा है उसमें जहर है। कभी यह भी हो सकता है । हाः हाः हाः--बदमाश, कायर अमीर इसलिए सोचा है आसानी से निकल भागोगे । असभव हे अभव ठो नारी जागो --असहाय अनाथ लड़की का सत्यानाश जिसने किया एक-- श्राज उसी के खून से उसके पापों का प्रायश्चित्त करो । यह छुरी तने रोज सावधानी के साथ में छिपा रक्खी थी- आज अपने लायक जगह पर यह आराम करेगी। शुजाउद्दौला --- बदजात, कौन है, दौड़ो- खून । छाया- फिर हाथ पकड़ा है-- हा. हाः हाः लेकिन वह ताकत अब इन हाथों में नहीं । सत्र--हाय हाय क्या हुआ क्या हुआ या अल्लाह शुजाउद्दौला - जल्द वजीसे को खबर दो, पहरा बुलाओ। पहली--क्या हुज़ूर को ज्यादा चोट आई है ? दूसरी-भर करती हूँ ।
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नई दिल्ली. फिल्म पद्मावती को लेकर चल रहा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है अब इसका निशाना अभिनेत्री दीपिका पादुकोण बन गई है. करनी सेना के सदस्य ने दीपिका पादुकोण को धमकी दी है जिसके बाद मुंबई पुलिस ने दीपिका की सुरक्षा बढ़ा दी है.
करनी सेना के सदस्य महिपाल सिंह मकराना ने गुरुवार को धमकी दी कि दीपिका पादुकोण ने भड़काऊ बातों से लोगों की भावनाओं को आहत करना बंद नहीं किया और फिल्म पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो जिस तरह रामायण में सूर्पणखा की नाक कट गई थी वैसे ही यहां भी किया जायेगा.
इसके साथ-साथ फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली को मारने और सिर धड़ से अलग करने की धमकी दी जा रही है और भंसाली का सिर काटने वाले को 5 करोड़ का इनाम देने की भी बात कही.
फिल्म पद्मावती को लेकर विभिन्न समुदाय लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी बीच केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी बड़ा बयान दे दिया है. उन्होंने निर्देशक और स्क्रिप्ट राइटर पर सवाल उठाये हैं तो फिल्म के कलाकारों का बचाव भी किया है. अपने ट्विटर अंकाउट से उन्होंने कई ट्वीट किये.
1. जब हम पद्मावती के सम्मान की बात करते हैं तो हमें सभी महिलाओं के सम्मान का ध्यान रखना होगा।
If we are talking about the respect of #Padmavati, then it is our moral obligation that we respect every woman.
उन्होने अपने ट्वीट से कलाकारों का बचाव करते हुये कहा कि जब पद्मावती की बात हो तो हमें महिलाओं का सम्मान करना चाहिये, फिल्म के कालाकारोंं को लेकर किसी भी प्रकार की टिप्पणी या धमकी अनैतिक है, उनकी आलोचना करना गलत है.
2. फिल्म पद्मावती के संदर्भ में उस फिल्म की अभिनेत्री या अभिनेताओं के बारे में कोई भी टिप्पणी उचित नहीं है। उनकी आलोचना अनैतिक होगी।
Disrespect of the actress or actor of #Padmavati is uncalled for and immoral.
3. पद्मावती फिल्म के निर्देशक तथा उनके सहयोगी के रूप में उनके स्क्रिप्ट राइटर ही कथानक के लिए जिम्मेदार हैं। उन्हें ही लोगों की भावनाओं और ऐतिहासिक तथ्यों का ध्यान रखना था।
संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती 1 दिसंबर को रिलीज होने वाली है जिसे रोकने के लिये तमाम हथकंडे अपनाये जा रहे है. इस फिल्म को लेकर अब तक सेंसर बोर्ड के फैसले का इंतजार था लेकिन अब गेंद हाईकोर्ट के पाले में चली गई है. रिलीज रोकने के लिये हाईकोर्ट में याचिक दायर हुई है. इसमें कहा गया है कि फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जाए क्योंकि फिल्म में रानी पद्मिनी की छवि को खराब करने की कोशिश हुई है.
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नई दिल्ली. फिल्म पद्मावती को लेकर चल रहा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है अब इसका निशाना अभिनेत्री दीपिका पादुकोण बन गई है. करनी सेना के सदस्य ने दीपिका पादुकोण को धमकी दी है जिसके बाद मुंबई पुलिस ने दीपिका की सुरक्षा बढ़ा दी है. करनी सेना के सदस्य महिपाल सिंह मकराना ने गुरुवार को धमकी दी कि दीपिका पादुकोण ने भड़काऊ बातों से लोगों की भावनाओं को आहत करना बंद नहीं किया और फिल्म पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो जिस तरह रामायण में सूर्पणखा की नाक कट गई थी वैसे ही यहां भी किया जायेगा. इसके साथ-साथ फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली को मारने और सिर धड़ से अलग करने की धमकी दी जा रही है और भंसाली का सिर काटने वाले को पाँच करोड़ का इनाम देने की भी बात कही. फिल्म पद्मावती को लेकर विभिन्न समुदाय लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी बीच केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी बड़ा बयान दे दिया है. उन्होंने निर्देशक और स्क्रिप्ट राइटर पर सवाल उठाये हैं तो फिल्म के कलाकारों का बचाव भी किया है. अपने ट्विटर अंकाउट से उन्होंने कई ट्वीट किये. एक. जब हम पद्मावती के सम्मान की बात करते हैं तो हमें सभी महिलाओं के सम्मान का ध्यान रखना होगा। If we are talking about the respect of #Padmavati, then it is our moral obligation that we respect every woman. उन्होने अपने ट्वीट से कलाकारों का बचाव करते हुये कहा कि जब पद्मावती की बात हो तो हमें महिलाओं का सम्मान करना चाहिये, फिल्म के कालाकारोंं को लेकर किसी भी प्रकार की टिप्पणी या धमकी अनैतिक है, उनकी आलोचना करना गलत है. दो. फिल्म पद्मावती के संदर्भ में उस फिल्म की अभिनेत्री या अभिनेताओं के बारे में कोई भी टिप्पणी उचित नहीं है। उनकी आलोचना अनैतिक होगी। Disrespect of the actress or actor of #Padmavati is uncalled for and immoral. तीन. पद्मावती फिल्म के निर्देशक तथा उनके सहयोगी के रूप में उनके स्क्रिप्ट राइटर ही कथानक के लिए जिम्मेदार हैं। उन्हें ही लोगों की भावनाओं और ऐतिहासिक तथ्यों का ध्यान रखना था। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती एक दिसंबर को रिलीज होने वाली है जिसे रोकने के लिये तमाम हथकंडे अपनाये जा रहे है. इस फिल्म को लेकर अब तक सेंसर बोर्ड के फैसले का इंतजार था लेकिन अब गेंद हाईकोर्ट के पाले में चली गई है. रिलीज रोकने के लिये हाईकोर्ट में याचिक दायर हुई है. इसमें कहा गया है कि फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जाए क्योंकि फिल्म में रानी पद्मिनी की छवि को खराब करने की कोशिश हुई है.
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संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अधिकारियों ने सोमवार को लोगों की निजता का उल्लंघन करने के लिए 500,000 डॉलर या जेल की सजा की घोषणा की।
यूएई पब्लिक प्रॉसिक्यूशन ने फैसले की घोषणा की और कहा कि कुछ मामलों में अपराधियों को छह महीने की जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है। प्राधिकरण ने उन कृत्यों की एक सूची जारी की है जिन्हें गोपनीयता के आक्रमण के रूप में माना जाएगा।
छिपकर बात करना, हस्तक्षेप करना, या रिकॉर्डिंग, स्थानांतरण, प्रसारण, या बात करने, संचार, या ऑडियो या दृश्य सामग्री का प्रकटीकरण। किसी सार्वजनिक या निजी कार्यक्रम में सहमति के बिना तस्वीरें लेना। इसी तरह, प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक समाचार प्रकाशित करना; गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक सच या झूठ, किसी को चोट पहुंचाने के इरादे से भी एक अपराध है।
किसी घायल, मृत व्यक्ति की तस्वीरें लेना और संबंधित पक्ष की पूर्व सहमति के बिना उन्हें प्रकाशित करना भी अपराध माना जाएगा। इसके अलावा, किसी व्यक्ति के भौगोलिक साइट डेटा का पता लगाना और जानकारी को प्रकाशित करना, अपराधियों के लिए परेशानी का कारण बनेगा। दंड की प्रकृति और गोपनीयता आक्रमण की गंभीरता पर निर्भर हो सकता है, Dh150,000 से Dh 5,00,000 तक।
"जो कोई भी किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ अपराध के उद्देश्य से किसी रिकॉर्डिंग, छवि या दृश्य में कोई परिवर्तन या प्रसंस्करण करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के साधनों का उपयोग करता है, उसे कम से कम एक वर्ष की अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, और/या जुर्माना लगाया जाएगा ... Dh250,000 से कम नहीं और Dh500,000 से अधिक नहीं "प्राधिकरण ने एक बयान में कहा।
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संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने सोमवार को लोगों की निजता का उल्लंघन करने के लिए पाँच सौ,शून्य डॉलर या जेल की सजा की घोषणा की। यूएई पब्लिक प्रॉसिक्यूशन ने फैसले की घोषणा की और कहा कि कुछ मामलों में अपराधियों को छह महीने की जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है। प्राधिकरण ने उन कृत्यों की एक सूची जारी की है जिन्हें गोपनीयता के आक्रमण के रूप में माना जाएगा। छिपकर बात करना, हस्तक्षेप करना, या रिकॉर्डिंग, स्थानांतरण, प्रसारण, या बात करने, संचार, या ऑडियो या दृश्य सामग्री का प्रकटीकरण। किसी सार्वजनिक या निजी कार्यक्रम में सहमति के बिना तस्वीरें लेना। इसी तरह, प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक समाचार प्रकाशित करना; गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक सच या झूठ, किसी को चोट पहुंचाने के इरादे से भी एक अपराध है। किसी घायल, मृत व्यक्ति की तस्वीरें लेना और संबंधित पक्ष की पूर्व सहमति के बिना उन्हें प्रकाशित करना भी अपराध माना जाएगा। इसके अलावा, किसी व्यक्ति के भौगोलिक साइट डेटा का पता लगाना और जानकारी को प्रकाशित करना, अपराधियों के लिए परेशानी का कारण बनेगा। दंड की प्रकृति और गोपनीयता आक्रमण की गंभीरता पर निर्भर हो सकता है, Dhएक सौ पचास,शून्य से Dh पाँच,शून्य,शून्य तक। "जो कोई भी किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ अपराध के उद्देश्य से किसी रिकॉर्डिंग, छवि या दृश्य में कोई परिवर्तन या प्रसंस्करण करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के साधनों का उपयोग करता है, उसे कम से कम एक वर्ष की अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, और/या जुर्माना लगाया जाएगा ... Dhदो सौ पचास,शून्य से कम नहीं और Dhपाँच सौ,शून्य से अधिक नहीं "प्राधिकरण ने एक बयान में कहा।
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आजादी के 75वें साल को केंद्र सरकार अमृत महोत्सव के तौर पर मना रही है। इसी को लेकर 1857 की क्रांति के दौरान बाबू वीर कुंवर सिंह की अंग्रेजों पर जीत हासिल करने की स्मृति में विजय उत्सव मनाया जा रहा है। हालांकि यह विजय उत्सव हर साल मनाया जाता है। लेकिन, इस बार भारत सरकार के कला संस्कृति मंत्रालय के तरफ से इसे भव्य रुप दिया गया है।
आरा के जगदीशपुर में 23 अप्रैल को आयोजित समारोह में शामिल होने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आ रहे हैं। अमित शाह के आने के बाद इस कार्यक्रम को भव्य रुप दिया जा रहा है। बताया तो यह भी जा रहा है कि यह कार्यक्रम भारत सरकार के तरफ से आयोजित की गई है लेकिन, इस कार्यक्रम में भाजपा नेताओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है।
हालांकि सरकारी कार्यक्रम होने की वजह से पोस्टर बैनर पर भाजपा का जिक्र नहीं है। लेकिन विजय उत्सव से ज्यादा भाजपा नेताओं ने अमित शाह के स्वागत के बैनर पोस्टर लगाया है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस साल ऐसा क्या हुआ कि केंद्र के गृह मंत्री अमित शाह को इस विजय उत्सव में आना पड़ा। दैनिक भास्कर इस बाबत कई क्षत्रिय नेता और गैर क्षेत्रीय नेताओं से बातचीत की।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय सिंह टाइगर बताते हैं कि वीर कुंवर सिंह देश के लिए लड़े हैं वीर कुंवर सिंह के लिए जाति मायने नहीं रखती। उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दिया था। ऐसे में उनको किसी एक जाति वर्ग से बांधना बेमानी हो जाएगी। संजय टाइगर बताते हैं देश के गृह मंत्री अमित शाह इसलिए इस कार्यक्रम में आ रहे हैं क्योंकि हमारे देश के उन योद्धाओं के बारे में कम लिखा गया जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने खून बहाए है। इतिहासकारों ने देश के वीरो के बारे में लिखने में कंजूसी की थी। हम उन योद्धाओं को वह सम्मान देना चाहते हैं। जिसके वह हकदार हैं।
संजय टाइगर कहते है कि अमित शाह देश के गृह मंत्री हैं। उन्होंने पूरे देश को एक सूत्र से बांधा है। कश्मीर जो भारत में रहते हुए भी भारत का अंग नहीं माना जाता था, उसे एक डोर में बांधा है। धारा 370 या 35a खत्म करके इतिहास रचा है। जैसे आजादी के समय उन योद्धाओं ने अंग्रेजों से मुक्ति पाने के लिए अपना लहू बहाया और इतिहास में उन्हें कम पन्ने मिले इसका मलाल देश की सरकार को है। अब आजादी के 75वें साल में जब हम अमृत महोत्सव मना रहे हैं तो ऐसे ही योद्धाओं को सम्मान देना और उन्हें देश स्तर पर उनकी ख्याति को बताना जिम्मेदारी है और इसीलिए अमित शाह जी इस कार्यक्रम में आ रहे हैं।
पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक राणा रणधीर सिंह कहते हैं कि वीर कुंवर सिंह को जाति के बंधन में बांधकर उन्हें छोटा कर दिया जाएगा। इसीलिए केंद्र की सरकार की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम में देश के गृहमंत्री अमित शाह आ रहे हैं। इसके साथ कई मंत्री, एमपी और एमएलए भी शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में हर राजनीतिक दलों को न्योता दिया गया है कि वह भी आकर इसमें शामिल हो। यह कार्यक्रम भाजपा का नहीं है। यह कार्यक्रम पूरी तरह से सरकारी है।
राणा रणधीर सिंह यह भी बताते हैं भले वीर कुंवर सिंह क्षत्रिय समुदाय से आते थे लेकिन उनके सेनापति पासवान जाति से थे, उनकी सेना में यादव से लेकर कई जातियां शामिल थी। ऐसे में वीर कुंवर सिंह को एक जाति समुदाय में नहीं बांधा जा सकता है। वह सन 1857 के ऐसे योद्धा थे जिन्होंने अपने 80 साल की उम्र में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। तभी तो एक अंग्रेज दे लिखा है कि गनीमत है कि सन 1857 में वीर कुंवर सिंह की उम्र 80 साल थी यदि यह जवान होते तो देश की आजादी उसी समय मिल गई होती।
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आजादी के पचहत्तरवें साल को केंद्र सरकार अमृत महोत्सव के तौर पर मना रही है। इसी को लेकर एक हज़ार आठ सौ सत्तावन की क्रांति के दौरान बाबू वीर कुंवर सिंह की अंग्रेजों पर जीत हासिल करने की स्मृति में विजय उत्सव मनाया जा रहा है। हालांकि यह विजय उत्सव हर साल मनाया जाता है। लेकिन, इस बार भारत सरकार के कला संस्कृति मंत्रालय के तरफ से इसे भव्य रुप दिया गया है। आरा के जगदीशपुर में तेईस अप्रैल को आयोजित समारोह में शामिल होने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आ रहे हैं। अमित शाह के आने के बाद इस कार्यक्रम को भव्य रुप दिया जा रहा है। बताया तो यह भी जा रहा है कि यह कार्यक्रम भारत सरकार के तरफ से आयोजित की गई है लेकिन, इस कार्यक्रम में भाजपा नेताओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है। हालांकि सरकारी कार्यक्रम होने की वजह से पोस्टर बैनर पर भाजपा का जिक्र नहीं है। लेकिन विजय उत्सव से ज्यादा भाजपा नेताओं ने अमित शाह के स्वागत के बैनर पोस्टर लगाया है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस साल ऐसा क्या हुआ कि केंद्र के गृह मंत्री अमित शाह को इस विजय उत्सव में आना पड़ा। दैनिक भास्कर इस बाबत कई क्षत्रिय नेता और गैर क्षेत्रीय नेताओं से बातचीत की। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय सिंह टाइगर बताते हैं कि वीर कुंवर सिंह देश के लिए लड़े हैं वीर कुंवर सिंह के लिए जाति मायने नहीं रखती। उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दिया था। ऐसे में उनको किसी एक जाति वर्ग से बांधना बेमानी हो जाएगी। संजय टाइगर बताते हैं देश के गृह मंत्री अमित शाह इसलिए इस कार्यक्रम में आ रहे हैं क्योंकि हमारे देश के उन योद्धाओं के बारे में कम लिखा गया जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने खून बहाए है। इतिहासकारों ने देश के वीरो के बारे में लिखने में कंजूसी की थी। हम उन योद्धाओं को वह सम्मान देना चाहते हैं। जिसके वह हकदार हैं। संजय टाइगर कहते है कि अमित शाह देश के गृह मंत्री हैं। उन्होंने पूरे देश को एक सूत्र से बांधा है। कश्मीर जो भारत में रहते हुए भी भारत का अंग नहीं माना जाता था, उसे एक डोर में बांधा है। धारा तीन सौ सत्तर या पैंतीसa खत्म करके इतिहास रचा है। जैसे आजादी के समय उन योद्धाओं ने अंग्रेजों से मुक्ति पाने के लिए अपना लहू बहाया और इतिहास में उन्हें कम पन्ने मिले इसका मलाल देश की सरकार को है। अब आजादी के पचहत्तरवें साल में जब हम अमृत महोत्सव मना रहे हैं तो ऐसे ही योद्धाओं को सम्मान देना और उन्हें देश स्तर पर उनकी ख्याति को बताना जिम्मेदारी है और इसीलिए अमित शाह जी इस कार्यक्रम में आ रहे हैं। पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक राणा रणधीर सिंह कहते हैं कि वीर कुंवर सिंह को जाति के बंधन में बांधकर उन्हें छोटा कर दिया जाएगा। इसीलिए केंद्र की सरकार की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम में देश के गृहमंत्री अमित शाह आ रहे हैं। इसके साथ कई मंत्री, एमपी और एमएलए भी शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में हर राजनीतिक दलों को न्योता दिया गया है कि वह भी आकर इसमें शामिल हो। यह कार्यक्रम भाजपा का नहीं है। यह कार्यक्रम पूरी तरह से सरकारी है। राणा रणधीर सिंह यह भी बताते हैं भले वीर कुंवर सिंह क्षत्रिय समुदाय से आते थे लेकिन उनके सेनापति पासवान जाति से थे, उनकी सेना में यादव से लेकर कई जातियां शामिल थी। ऐसे में वीर कुंवर सिंह को एक जाति समुदाय में नहीं बांधा जा सकता है। वह सन एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के ऐसे योद्धा थे जिन्होंने अपने अस्सी साल की उम्र में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। तभी तो एक अंग्रेज दे लिखा है कि गनीमत है कि सन एक हज़ार आठ सौ सत्तावन में वीर कुंवर सिंह की उम्र अस्सी साल थी यदि यह जवान होते तो देश की आजादी उसी समय मिल गई होती। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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अमरावती/दि. 28 - 18 सितंबर 1953 को पश्चिम महाराष्ट्र के नेता तथा विदर्भ के नेताओं के बीच नागपुर करार किया गया था. उस करार के अनुसार विदर्भ की जनता को विश्वास में लिये बगैर विदर्भ को महाराष्ट्र में शामिल कर लिया गया था और तभी से विदर्भ वासियों पर अन्याय का सिलसिला शुरु है. करार में विदर्भ की जनता का विचार नहीं किया गया. इतने साल बितने के पश्चात भी बेरोजगारी, उद्योग, कृषी के लिए सिंचाई योजना, बिजली का इस्तेमाल आदि क्षेत्रों में अन्याय शुरु ही है.
नागपुर करार के अनुसार विदर्भ के युवकों को जनसंख्या के अनुसार 23 प्रतिशत नौकरियां दी जानी थी. किंतु नहीं दी गई. पश्चिम विदर्भ में सर्वाधिक हालत खराब है. सर्वाधिक किसानों की आत्महत्या विदर्भ में हो रही है. शेष महाराष्ट्र की अपेक्षा विदर्भ के साथ दुजाभाव किया जा रहा है. 75 हजार करोड से अधिक विदर्भ का बैकलॉग तैयार हुआ है. इन सभी समस्याओं को लेकर विश्वासघाती नागपुर करार की होली इर्विन चौक पर आज विदर्भ राज्य आंदोलन समिति द्बारा जलाई गई. इस अवसर पर रंजना मामर्डे, राजेंद्र आगरकर, सरला सपकाल, डॉ. विजय कुबडे, सतीश प्रेमलवार, प्रकाश लढ्ढा, विजय मोहोड, अनिल वानखडे, डॉ. महेश बलांसे, सुभाष धोटे, धनराज गोटे, अरुण साकुरे, विनायक इंगोले, ज्ञानेश्वर गादे, सुधीर डांगे उपस्थित थे.
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अमरावती/दि. अट्ठाईस - अट्ठारह सितंबर एक हज़ार नौ सौ तिरेपन को पश्चिम महाराष्ट्र के नेता तथा विदर्भ के नेताओं के बीच नागपुर करार किया गया था. उस करार के अनुसार विदर्भ की जनता को विश्वास में लिये बगैर विदर्भ को महाराष्ट्र में शामिल कर लिया गया था और तभी से विदर्भ वासियों पर अन्याय का सिलसिला शुरु है. करार में विदर्भ की जनता का विचार नहीं किया गया. इतने साल बितने के पश्चात भी बेरोजगारी, उद्योग, कृषी के लिए सिंचाई योजना, बिजली का इस्तेमाल आदि क्षेत्रों में अन्याय शुरु ही है. नागपुर करार के अनुसार विदर्भ के युवकों को जनसंख्या के अनुसार तेईस प्रतिशत नौकरियां दी जानी थी. किंतु नहीं दी गई. पश्चिम विदर्भ में सर्वाधिक हालत खराब है. सर्वाधिक किसानों की आत्महत्या विदर्भ में हो रही है. शेष महाराष्ट्र की अपेक्षा विदर्भ के साथ दुजाभाव किया जा रहा है. पचहत्तर हजार करोड से अधिक विदर्भ का बैकलॉग तैयार हुआ है. इन सभी समस्याओं को लेकर विश्वासघाती नागपुर करार की होली इर्विन चौक पर आज विदर्भ राज्य आंदोलन समिति द्बारा जलाई गई. इस अवसर पर रंजना मामर्डे, राजेंद्र आगरकर, सरला सपकाल, डॉ. विजय कुबडे, सतीश प्रेमलवार, प्रकाश लढ्ढा, विजय मोहोड, अनिल वानखडे, डॉ. महेश बलांसे, सुभाष धोटे, धनराज गोटे, अरुण साकुरे, विनायक इंगोले, ज्ञानेश्वर गादे, सुधीर डांगे उपस्थित थे.
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पत्नी से हुआ विवाद तो विकलांग युवक ने जहर खाकर दे दी जान. .
ऊर्जा निगम पर भड़के ग्रामीण, चेकिंग टीम पर छेड़छाड़ सहित गंभीर आरोप, पुलिस को दी तहरीरें. .
हिन्दू दोस्त के साथ कांवड़ लेने आया मुस्लिम युवक हादसे में घायल. .
ससुराल से लापता दामाद का शव बुलंदशहर में मिला. .
बिजली चोरी पकड़ने गई विजिलेंस टीम और ग्रामीणों में मारपीट. .
नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले युवक को 12 वर्ष कठोर कैद. .
पीठ बाजार में नमाज अदा कर रहे आठ दुकानदार गिरफ्तार. .
महिला अधिवक्ता से पड़ोसी ने की छेड़छाड़, आरोपी हिरासत में. .
साध्वी प्राची को मिली "सर तन से जुदा" करने की धमकी. .
गज़ब की भक्तिः कमर में कुंडे गुदवा कर खींच रहे कांवड़. .
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पत्नी से हुआ विवाद तो विकलांग युवक ने जहर खाकर दे दी जान. . ऊर्जा निगम पर भड़के ग्रामीण, चेकिंग टीम पर छेड़छाड़ सहित गंभीर आरोप, पुलिस को दी तहरीरें. . हिन्दू दोस्त के साथ कांवड़ लेने आया मुस्लिम युवक हादसे में घायल. . ससुराल से लापता दामाद का शव बुलंदशहर में मिला. . बिजली चोरी पकड़ने गई विजिलेंस टीम और ग्रामीणों में मारपीट. . नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले युवक को बारह वर्ष कठोर कैद. . पीठ बाजार में नमाज अदा कर रहे आठ दुकानदार गिरफ्तार. . महिला अधिवक्ता से पड़ोसी ने की छेड़छाड़, आरोपी हिरासत में. . साध्वी प्राची को मिली "सर तन से जुदा" करने की धमकी. . गज़ब की भक्तिः कमर में कुंडे गुदवा कर खींच रहे कांवड़. .
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मुंबई सहीत महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। राज्य सरकार के साथ साथ बीएमसी ने भी कई तरह की पाबंदियों का एलान कर दिया है। तो वही अब अगर आप को किसी भी कार्य के लिए स्थानिय बीएमसी दफ्तर जाना है तो आपको कोरोना टेस्ट कराना होगा।
दरअसल हम पानी का बिल भरना, प्रॉपर्टी टैक्स भरना , जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र जैसे रोजमरा के कई कार्यों के लिए बीएमसी के स्थानिय कार्यालय जाते है, लेकिन अब इन दफ्तरो में जाने से पहले आप को कोरोना टेस्ट कराना होगा।
मुंबई के कांदिवली इलाके में बीएमसी के आर दक्षिण वार्ड में पानी का बिल भरना, प्रॉपर्टी टैक्स भरना , जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र जैसे कार्यो के लिए आनेवाले लोगो का कोरोना टेस्ट किया जा रहा है। जिन्होने कोरोना वैक्सीन की दोनो डोज ले ली है उनका भी कोरोना टेस्ट किया जा रहा है।
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मुंबई सहीत महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। राज्य सरकार के साथ साथ बीएमसी ने भी कई तरह की पाबंदियों का एलान कर दिया है। तो वही अब अगर आप को किसी भी कार्य के लिए स्थानिय बीएमसी दफ्तर जाना है तो आपको कोरोना टेस्ट कराना होगा। दरअसल हम पानी का बिल भरना, प्रॉपर्टी टैक्स भरना , जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र जैसे रोजमरा के कई कार्यों के लिए बीएमसी के स्थानिय कार्यालय जाते है, लेकिन अब इन दफ्तरो में जाने से पहले आप को कोरोना टेस्ट कराना होगा। मुंबई के कांदिवली इलाके में बीएमसी के आर दक्षिण वार्ड में पानी का बिल भरना, प्रॉपर्टी टैक्स भरना , जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र जैसे कार्यो के लिए आनेवाले लोगो का कोरोना टेस्ट किया जा रहा है। जिन्होने कोरोना वैक्सीन की दोनो डोज ले ली है उनका भी कोरोना टेस्ट किया जा रहा है।
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Caribbean Premier League 2021: कैरेबियन प्रीमियर लीग के तीसरे मुकाबले में जमैका तालावाहस का सामना सेंट लुसिया किंग्स के साथ होगा।
जमैका तालावाहस बनाम सेंट लुसिया किंग्स मैच प्रीव्यूः
जमैका की टीम में कई धाकड़ खिलाड़ी हैं जिसमें आंद्रे रसल, कार्लोस ब्रेथवेट जैसे खिलाड़ी है। शमारह ब्रूक्स और चाडविक वाल्टन भी बल्लेबाजी में कमाल करते हुए नजर आ सकते हैं।
टीम के लिए फिडेल एडवर्ड्स बेहतरीन गेंदबाजी कर सकते हैं। कैश अहमद से भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद होगी।
सेंट लुसिया किंग्स के लिए फाफ डू प्लेसिस बतौर कप्तान नजर आएंगे। वो कई दिनों के बाद मैदान पर वापसी कर रहे हैं। आंद्रे फ्लेचर टीम के लिए बल्लेबाजी में बड़ी अहम कड़ी साबित हो सकते हैं। इस टीम में हाल ही में आरसीबी में शामिल होने वाले टिम डेविड भी खेलते हुए नजर आएंगे। समित पटेल में गेंद और बल्ले दोनों के साथ टीम के लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकता है।
जमैका तालावाहस बनाम सेंट लुसिया किंग्स Head To Head:
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Caribbean Premier League दो हज़ार इक्कीस: कैरेबियन प्रीमियर लीग के तीसरे मुकाबले में जमैका तालावाहस का सामना सेंट लुसिया किंग्स के साथ होगा। जमैका तालावाहस बनाम सेंट लुसिया किंग्स मैच प्रीव्यूः जमैका की टीम में कई धाकड़ खिलाड़ी हैं जिसमें आंद्रे रसल, कार्लोस ब्रेथवेट जैसे खिलाड़ी है। शमारह ब्रूक्स और चाडविक वाल्टन भी बल्लेबाजी में कमाल करते हुए नजर आ सकते हैं। टीम के लिए फिडेल एडवर्ड्स बेहतरीन गेंदबाजी कर सकते हैं। कैश अहमद से भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद होगी। सेंट लुसिया किंग्स के लिए फाफ डू प्लेसिस बतौर कप्तान नजर आएंगे। वो कई दिनों के बाद मैदान पर वापसी कर रहे हैं। आंद्रे फ्लेचर टीम के लिए बल्लेबाजी में बड़ी अहम कड़ी साबित हो सकते हैं। इस टीम में हाल ही में आरसीबी में शामिल होने वाले टिम डेविड भी खेलते हुए नजर आएंगे। समित पटेल में गेंद और बल्ले दोनों के साथ टीम के लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकता है। जमैका तालावाहस बनाम सेंट लुसिया किंग्स Head To Head:
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इगलास। हर वर्ष श्रावण शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन तुलसी जयंती मनाई जाती है। शनिवार को अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा द्वारा महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पूर्व संध्या पर महामंत्री के आवास पर सुंदर कांड पाठ आयोजित कर मनाई गई। इस दौरान विश्व कल्याण व कोरोना से मुक्ति दिलाए जाने के लिए हवन-यज्ञ किया गया। अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण कौशिक ने कहा कि तुलसीदास ने सगुण भक्ति की रामभक्ति धारा को ऐसा प्रवाहित किया कि वह धारा आज भी प्रवाहित हो रही है। उन्होंने रामभक्ति से सिर्फ अपना ही जीवन कृतार्थ नहीं किया बल्कि सभी को श्रीराम के आदर्श से बांधने का प्रयास भी किया। डा. नृपतिदेव भारद्वाज ने कहा कि तुलसीदास ने भगवान श्रीराम के जीवन को रामचरित मानस में दर्शाया है। तुलसीदास ने अपनी रचनाओं को आम जन तक पहुंचाने के लिए उन्हीं की भाषा का प्रयोग किया है। कालीचरन गौड़ ने कहा कि तुलसी भारत के सर्वश्रेष्ठ कवियों में एक हैं। इस मौके पर गोकुलचंद कटारा, फूलचंद तिवारी, प्रभात कुमार शर्मा, बाबूदत्त शर्मा, गौरीशंकर उपाध्याय, दीवान सिंह, अमित कटारा, सूरजपाल शर्मा, चौ. रामवीर सिंह, जगदीश प्रसाद, राजकुमार शर्मा, अरुन कटारा, आंशू शर्मा, डा. सुभाषचंद्र शर्मा, भीष्म कुमार, आदित्य कटारा आदि थे।
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इगलास। हर वर्ष श्रावण शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन तुलसी जयंती मनाई जाती है। शनिवार को अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा द्वारा महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पूर्व संध्या पर महामंत्री के आवास पर सुंदर कांड पाठ आयोजित कर मनाई गई। इस दौरान विश्व कल्याण व कोरोना से मुक्ति दिलाए जाने के लिए हवन-यज्ञ किया गया। अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण कौशिक ने कहा कि तुलसीदास ने सगुण भक्ति की रामभक्ति धारा को ऐसा प्रवाहित किया कि वह धारा आज भी प्रवाहित हो रही है। उन्होंने रामभक्ति से सिर्फ अपना ही जीवन कृतार्थ नहीं किया बल्कि सभी को श्रीराम के आदर्श से बांधने का प्रयास भी किया। डा. नृपतिदेव भारद्वाज ने कहा कि तुलसीदास ने भगवान श्रीराम के जीवन को रामचरित मानस में दर्शाया है। तुलसीदास ने अपनी रचनाओं को आम जन तक पहुंचाने के लिए उन्हीं की भाषा का प्रयोग किया है। कालीचरन गौड़ ने कहा कि तुलसी भारत के सर्वश्रेष्ठ कवियों में एक हैं। इस मौके पर गोकुलचंद कटारा, फूलचंद तिवारी, प्रभात कुमार शर्मा, बाबूदत्त शर्मा, गौरीशंकर उपाध्याय, दीवान सिंह, अमित कटारा, सूरजपाल शर्मा, चौ. रामवीर सिंह, जगदीश प्रसाद, राजकुमार शर्मा, अरुन कटारा, आंशू शर्मा, डा. सुभाषचंद्र शर्मा, भीष्म कुमार, आदित्य कटारा आदि थे।
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अडानी ग्रुप के खिलाफ कांग्रेस नेता की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। याचिका में अमेरिका की हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों का जिक्र है।
बिजनेस डेस्कः अडानी ग्रुप के खिलाफ कांग्रेस नेता की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। याचिका में अमेरिका की हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों का जिक्र है।
इन आरोपों के आलोक में अडानी ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ शीर्ष अदालत के न्यायाधीश की निगरानी में जांच की मांग की गई है। यह याचिका कांग्रेस नेता जया ठाकुर की ओर से दायर की गई है।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने इसका संज्ञान लिया है। जया ठाकुर का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने याचिका पर तत्काल सुनवाई की जरूरत बताई थी।
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अडानी ग्रुप के खिलाफ कांग्रेस नेता की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। याचिका में अमेरिका की हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों का जिक्र है। बिजनेस डेस्कः अडानी ग्रुप के खिलाफ कांग्रेस नेता की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। याचिका में अमेरिका की हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों का जिक्र है। इन आरोपों के आलोक में अडानी ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ शीर्ष अदालत के न्यायाधीश की निगरानी में जांच की मांग की गई है। यह याचिका कांग्रेस नेता जया ठाकुर की ओर से दायर की गई है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने इसका संज्ञान लिया है। जया ठाकुर का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने याचिका पर तत्काल सुनवाई की जरूरत बताई थी।
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देश में पिछले 24 घंटें में कोरोना की रफ्तार ने एक बार फिर टेंशन बढ़ा दी है. पिछले 24 घंटे में कोरोना से संक्रमण के 15 हजार से अधिक नए मामले सामने आए हैं. देश में कोरोना की सुपर स्पीड के बीच एक्टिव केस की तादाद भी बढ़ती जा रही है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शनिवार सुबह जारी बीते 24 घंटे की रिपोर्ट के अनुसार देश में औसत दैनिक कोरोना संक्रमण दर 4. 39 फीसदी है।
इसके बाद केरल में 3 हजार 981 मामले, दिल्ली में 1 हजार 447 मामले, तमिलनाडु में 1 हजार 359 मामले और कर्नाटक में 816 मामले सामने आए हैं. देश में मिले कुल नए मामलों में से 74. 08% नए मामले इन पांच राज्यों से सामने आए हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, बाद 12 राज्यों में कोरोना संक्रमण की रफ्तार बढ़ी है।
इसमें महाराष्ट्र, केरल, दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, गुजरात, गोवा, पंजाब में साप्ताहिक मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। कोरोना के नए केस मिलने के बाद देश में अब तक मिले संक्रमितों की संख्या 4 करोड़ 33 लाख 78 हजार 234 हो गई है.
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देश में पिछले चौबीस घंटाटें में कोरोना की रफ्तार ने एक बार फिर टेंशन बढ़ा दी है. पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना से संक्रमण के पंद्रह हजार से अधिक नए मामले सामने आए हैं. देश में कोरोना की सुपर स्पीड के बीच एक्टिव केस की तादाद भी बढ़ती जा रही है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शनिवार सुबह जारी बीते चौबीस घंटाटे की रिपोर्ट के अनुसार देश में औसत दैनिक कोरोना संक्रमण दर चार. उनतालीस फीसदी है। इसके बाद केरल में तीन हजार नौ सौ इक्यासी मामले, दिल्ली में एक हजार चार सौ सैंतालीस मामले, तमिलनाडु में एक हजार तीन सौ उनसठ मामले और कर्नाटक में आठ सौ सोलह मामले सामने आए हैं. देश में मिले कुल नए मामलों में से चौहत्तर. आठ% नए मामले इन पांच राज्यों से सामने आए हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, बाद बारह राज्यों में कोरोना संक्रमण की रफ्तार बढ़ी है। इसमें महाराष्ट्र, केरल, दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, गुजरात, गोवा, पंजाब में साप्ताहिक मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। कोरोना के नए केस मिलने के बाद देश में अब तक मिले संक्रमितों की संख्या चार करोड़ तैंतीस लाख अठहत्तर हजार दो सौ चौंतीस हो गई है.
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पूरे जिले की पुलिस टीम एसडीएम की खोजबीन में जुटी है। देर शाम एसडीएम के खानसामा रमेश राणा ने उनके लापता होने की गुमशुदगी चंपावत कोतवाली में दर्ज कराई है। सोमवार को जिला सभागार में डीएम ने विकास कार्यों की समीक्षा को लेकर अधिकारियों की बैठक ली। इसमें एसडीएम सदर अनिल चन्याल नहीं पहुंचे। संपर्क करने पर उनका फोन बंद मिला। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
एसडीएम के खाना बनाने वाले खानसामे से जब उनके बारे में जानकारी ली तो पता चला कि बीते शनिवार को एसडीएम ने उसे छुट्टी दे दी थी। सोमवार को वह अपनी ड्यूटी पर लौटा तो एसडीएम के कमरे में ताला लगा हुआ था लेकिन लॉबी खुली थी। जानकारी मिली है कि शनिवार को एसडीएम किसी को कुछ बताये बिना कहीं चले गए हैं। वह अपना सरकारी फोन अपने कमरे में रखा छोड़ गए हैं। साथ में उन्होंने एक पत्र अपनी टेबल पर छोड़ा है। जिसमें लिखा है कि-ये सरकारी नंबर आपदा में जमा करवा देना। पुलिस के मुताबिक, बीते शनिवार को खानसामे को एसडीएम ने छुट्टी दे दी थी। जब खानसामा ड्यूटी पर लौटकर आया तो खुली मिली लॉबी में एसडीएम का सरकारी फोन और पत्र रखा पाया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
लापता एसडीएम अनिल चन्याल का निजी आवास हल्द्वानी के दमुआढूंगा में है। उनका परिवार हल्द्वानी में ही रहता है। चम्पावत में चन्याल अकेले ही रहते हैं। जानकारी के अनुसार, हल्द्वानी में चन्याल के परिजनों से भी उनके बारे में कोई जानकारी फिलहाल नहीं मिल सकी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सूत्रों के अनुसार, एसडीएम रविवार की शाम से ही अपने घर से लापता हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने शनिवार की सुबह उन्होंने अपने कार्यालय में पंत जयंती मनाई थी और शाम को अपने कुक रमेश राम को छुट्टी देकर घर भेज दिया था। रविवार की दोपहर बाद उन्होंने अपने गनर मोहन भट्ट को भी घर भेज दिया। एसडीएम सदर के लापता होने की जानकारी सोमवार की सुबह हुई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
चालक और गनर वाहन लेकर पूल्ड आवास स्थित उनके कमरे में पहुंचे तो वे वहां नहीं मिले। दोपहर तक उनका कहीं सुराग नहीं लगा तो कार्यालय में तैनात पीआरडी जवान ने कोतवाली में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी है। घटना की सूचना के बाद छुट्टी में गए एसपी देवेंद्र पींचा भी लौट आए हैं। एसपी मंगलवार को अपने कार्यालय पहुंचेंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
एसडीएम सदर अनिल चन्याल मानसिक रूप से काफी परेशान दिख रहे थे। 9 सितंबर को उन्होंने अपनी फेसबुक पर 'Tracking and long drive is also a peace of mind...' नाम से पोस्ट भी अपडेट की थी। सूत्रों का कहना है की उन्होंने अवकाश के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया था लेकिन अवकाश न मिलने से काफी परेशान थे। बताया जा रहा है कि उनके सरकारी और निजी वाहन घर पर ही मिले। यानि वह पैदल ही घर से कहीं निकल गए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
एडीएम हेमंत वर्मा ने बताया कि एसडीम की तलाश के लिए तीन टीमों का गठन किया गया है कि राजस्व, पुलिस, एसओजी की टीम अपने अपने स्तर से एसडीएम की तलाश करने में जुटी हुई है। माना जा रहा है कि हो सकता है कि वह कुछ मानसिक रूप से परेशान हों तो कहीं घूमने चले गए हों।
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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पूरे जिले की पुलिस टीम एसडीएम की खोजबीन में जुटी है। देर शाम एसडीएम के खानसामा रमेश राणा ने उनके लापता होने की गुमशुदगी चंपावत कोतवाली में दर्ज कराई है। सोमवार को जिला सभागार में डीएम ने विकास कार्यों की समीक्षा को लेकर अधिकारियों की बैठक ली। इसमें एसडीएम सदर अनिल चन्याल नहीं पहुंचे। संपर्क करने पर उनका फोन बंद मिला। एसडीएम के खाना बनाने वाले खानसामे से जब उनके बारे में जानकारी ली तो पता चला कि बीते शनिवार को एसडीएम ने उसे छुट्टी दे दी थी। सोमवार को वह अपनी ड्यूटी पर लौटा तो एसडीएम के कमरे में ताला लगा हुआ था लेकिन लॉबी खुली थी। जानकारी मिली है कि शनिवार को एसडीएम किसी को कुछ बताये बिना कहीं चले गए हैं। वह अपना सरकारी फोन अपने कमरे में रखा छोड़ गए हैं। साथ में उन्होंने एक पत्र अपनी टेबल पर छोड़ा है। जिसमें लिखा है कि-ये सरकारी नंबर आपदा में जमा करवा देना। पुलिस के मुताबिक, बीते शनिवार को खानसामे को एसडीएम ने छुट्टी दे दी थी। जब खानसामा ड्यूटी पर लौटकर आया तो खुली मिली लॉबी में एसडीएम का सरकारी फोन और पत्र रखा पाया। लापता एसडीएम अनिल चन्याल का निजी आवास हल्द्वानी के दमुआढूंगा में है। उनका परिवार हल्द्वानी में ही रहता है। चम्पावत में चन्याल अकेले ही रहते हैं। जानकारी के अनुसार, हल्द्वानी में चन्याल के परिजनों से भी उनके बारे में कोई जानकारी फिलहाल नहीं मिल सकी है। सूत्रों के अनुसार, एसडीएम रविवार की शाम से ही अपने घर से लापता हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने शनिवार की सुबह उन्होंने अपने कार्यालय में पंत जयंती मनाई थी और शाम को अपने कुक रमेश राम को छुट्टी देकर घर भेज दिया था। रविवार की दोपहर बाद उन्होंने अपने गनर मोहन भट्ट को भी घर भेज दिया। एसडीएम सदर के लापता होने की जानकारी सोमवार की सुबह हुई। चालक और गनर वाहन लेकर पूल्ड आवास स्थित उनके कमरे में पहुंचे तो वे वहां नहीं मिले। दोपहर तक उनका कहीं सुराग नहीं लगा तो कार्यालय में तैनात पीआरडी जवान ने कोतवाली में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी है। घटना की सूचना के बाद छुट्टी में गए एसपी देवेंद्र पींचा भी लौट आए हैं। एसपी मंगलवार को अपने कार्यालय पहुंचेंगे। एसडीएम सदर अनिल चन्याल मानसिक रूप से काफी परेशान दिख रहे थे। नौ सितंबर को उन्होंने अपनी फेसबुक पर 'Tracking and long drive is also a peace of mind...' नाम से पोस्ट भी अपडेट की थी। सूत्रों का कहना है की उन्होंने अवकाश के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया था लेकिन अवकाश न मिलने से काफी परेशान थे। बताया जा रहा है कि उनके सरकारी और निजी वाहन घर पर ही मिले। यानि वह पैदल ही घर से कहीं निकल गए। एडीएम हेमंत वर्मा ने बताया कि एसडीम की तलाश के लिए तीन टीमों का गठन किया गया है कि राजस्व, पुलिस, एसओजी की टीम अपने अपने स्तर से एसडीएम की तलाश करने में जुटी हुई है। माना जा रहा है कि हो सकता है कि वह कुछ मानसिक रूप से परेशान हों तो कहीं घूमने चले गए हों। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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Jio, Airtel 4G Data Recharge Plans: कई टेलीकॉम कंपनियों के प्लान के बारे में सोच-सोच कर आप परेशान हो जाते होंगे। बेहतर प्लान को चुनने में हमेशा आपको मुश्किल का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आपकी इस परेशानी को कम करने की एक कोशिश हमने की है। मार्केट 84GB के डेटा प्लान्स के काफी सारे ऑपशन्स उपलब्ध हैं।
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Jio, Airtel चारG Data Recharge Plans: कई टेलीकॉम कंपनियों के प्लान के बारे में सोच-सोच कर आप परेशान हो जाते होंगे। बेहतर प्लान को चुनने में हमेशा आपको मुश्किल का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आपकी इस परेशानी को कम करने की एक कोशिश हमने की है। मार्केट चौरासीGB के डेटा प्लान्स के काफी सारे ऑपशन्स उपलब्ध हैं।
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West Bengal में Mamata Banerjee सरकार के खिलाफ BJP ने जमकर प्रदर्शन किया। खबर है कि Bengal SSC Scam को लेकर BJP सड़क पर प्रदर्शन कर रही है। वहीं CM सचिवालय के बाहर हजारों कार्यकर्त्ता जुटे हुए हैैं। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास अपने लोगों का समर्थन नहीं है और इसलिए वह बंगाल में उत्तर कोरिया की तरह तानाशाही लागू कर रही है। पुलिस को उसके लिए भुगतान करना होगा जो वह दिन से कर रही है, भाजपा आ रही है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को राज्य सचिवालय 'नबन्ना' तक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मार्च के दौरान संतरागाछी जाने की कोशिश करते समय सोमवार को हिरासत में ले लिया गया। भाजपा के नेता एवं सांसद लॉकेट चटर्जी और पार्टी नेता राहुल सिन्हा को भी हिरासत में लिया गया और उन्हें एक जेल वैन से ले जाया गया। उन्हें सचिवालय के पास 'सेकंड हुगली ब्रिज' के नजदीक पुलिस प्रशिक्षण स्कूल के सामने रोका गया। राज्य में तृणमूल कांग्रेस सरकार के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ 'नबन्ना अभियान' में हिस्सा लेने के लिए राज्य भर से भाजपा समर्थक मंगलवार सुबह कोलकाता और पड़ोसी हावड़ा पहुंचना शुरू हो गए थे।
बीजेपी के नबन्ना चलो मार्च के मद्देनजर भाजपा कार्यकर्ताओं का एक समूह हुगली में त्रिबेनी नदी पार करने के लिए नबन्ना पहुंचने के लिए एक नाव का उपयोग करता है। शुभेंदु अधिकारी और लॉकेट चटर्जी सहित पार्टी के नेताओं को आज पुलिस ने रास्ते में रोक लिया और हिरासत में ले लिया।
Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
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West Bengal में Mamata Banerjee सरकार के खिलाफ BJP ने जमकर प्रदर्शन किया। खबर है कि Bengal SSC Scam को लेकर BJP सड़क पर प्रदर्शन कर रही है। वहीं CM सचिवालय के बाहर हजारों कार्यकर्त्ता जुटे हुए हैैं। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास अपने लोगों का समर्थन नहीं है और इसलिए वह बंगाल में उत्तर कोरिया की तरह तानाशाही लागू कर रही है। पुलिस को उसके लिए भुगतान करना होगा जो वह दिन से कर रही है, भाजपा आ रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को राज्य सचिवालय 'नबन्ना' तक भारतीय जनता पार्टी के मार्च के दौरान संतरागाछी जाने की कोशिश करते समय सोमवार को हिरासत में ले लिया गया। भाजपा के नेता एवं सांसद लॉकेट चटर्जी और पार्टी नेता राहुल सिन्हा को भी हिरासत में लिया गया और उन्हें एक जेल वैन से ले जाया गया। उन्हें सचिवालय के पास 'सेकंड हुगली ब्रिज' के नजदीक पुलिस प्रशिक्षण स्कूल के सामने रोका गया। राज्य में तृणमूल कांग्रेस सरकार के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ 'नबन्ना अभियान' में हिस्सा लेने के लिए राज्य भर से भाजपा समर्थक मंगलवार सुबह कोलकाता और पड़ोसी हावड़ा पहुंचना शुरू हो गए थे। बीजेपी के नबन्ना चलो मार्च के मद्देनजर भाजपा कार्यकर्ताओं का एक समूह हुगली में त्रिबेनी नदी पार करने के लिए नबन्ना पहुंचने के लिए एक नाव का उपयोग करता है। शुभेंदु अधिकारी और लॉकेट चटर्जी सहित पार्टी के नेताओं को आज पुलिस ने रास्ते में रोक लिया और हिरासत में ले लिया। Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
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इस स्कूल में चार वर्ष तक अध्ययन करने के पश्चात के अचानक बहुत बीमार हो गए। विवश होकर उन्हें दो वर्ष तक स्कूल की पढ़ाई बन्द करनी पड़ी। उन दिनों भी आप रोग-शय्या पर पड़े-पड़े पुस्तकों का अध्ययन करते रहते थे। बीमारी से उठने पर फिर आपको 'एलवर्ट स्कूल में भर्ती कराया गया। १८७६ में आपने मैट्रिक की परीक्षा पास की। इसके पश्चात् आप कलकत्ता के 'मेट्रोपॉलिटन इंस्टोलाट में प्रविष्ट हो गए और १८८ तक इस संस्था में अध्ययन करते रहे ।
अपने छात्र जीवन के प्रारम्भ से ही श्री राय की रुचि साहित्य और इतिहास की अपेक्षा विज्ञान की ओर अधिक थी। जिन दिनों की यह बात है तब तक मेट्रोपॉलिटन इंस्टीट्यूट में विज्ञान के सक्रिय अध्ययन का कोई विशेष प्रबन्ध नहीं हो पाया था, अतः के अपना विज्ञानसम्बन्धी पिपासा को शान्त करने के लिए प्रेसीडेन्सी कालिज में चले माया करते थे। सौभाग्यवश वहाँ आपको सर जान इलियट और पर अलैग्जेण्डर पडलर जैसे सुयोग्य विद्वानों का सहयोग किल गया। इससे भौतिक और रसायन शास्त्र के अध्ययन में उन्हें कोई कठिनाई नहुई। इन दोनों विद्वानों के सहयोग को पाकर मानों उनके लिए इस दिशा में उन्नति का मार्ग ही खुल गया। यहाँ यह उल्लेखनीय बात है कि भारत में उन दिनों विज्ञान की शिक्षा का समुचित प्रबन्ध नहीं हो पाया था, अतः उन्होंने विलायत जाकर अध्ययन करने की सोसी । अपनी अपूर्व मेधा तथा परिश्रम के कारण
साथ-साथ आपने 'गिलकाइस्ट' यात्रवृत्ति भी प्राप्त कर ली। इस छात्रत द्व प faश ज की प्रवृत्ति को पर्याप्त प्रेरणा मिली और शीघ्र ही आप इंगलैंड चले गए। वहाँ पहुँचकर के 'एडिनबरा विश्वविद्यालय में दाखिल हो राष्ट्र और ६ वर्ष तक विज्ञान सम्बन्धी समस्त प्रवृत्तियों का सक्रिय अध्ययन
सद्यपि वहाँ पर आपने रसायन और भौतिक विज्ञान विषय लिय
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इस स्कूल में चार वर्ष तक अध्ययन करने के पश्चात के अचानक बहुत बीमार हो गए। विवश होकर उन्हें दो वर्ष तक स्कूल की पढ़ाई बन्द करनी पड़ी। उन दिनों भी आप रोग-शय्या पर पड़े-पड़े पुस्तकों का अध्ययन करते रहते थे। बीमारी से उठने पर फिर आपको 'एलवर्ट स्कूल में भर्ती कराया गया। एक हज़ार आठ सौ छिहत्तर में आपने मैट्रिक की परीक्षा पास की। इसके पश्चात् आप कलकत्ता के 'मेट्रोपॉलिटन इंस्टोलाट में प्रविष्ट हो गए और एक सौ अठासी तक इस संस्था में अध्ययन करते रहे । अपने छात्र जीवन के प्रारम्भ से ही श्री राय की रुचि साहित्य और इतिहास की अपेक्षा विज्ञान की ओर अधिक थी। जिन दिनों की यह बात है तब तक मेट्रोपॉलिटन इंस्टीट्यूट में विज्ञान के सक्रिय अध्ययन का कोई विशेष प्रबन्ध नहीं हो पाया था, अतः के अपना विज्ञानसम्बन्धी पिपासा को शान्त करने के लिए प्रेसीडेन्सी कालिज में चले माया करते थे। सौभाग्यवश वहाँ आपको सर जान इलियट और पर अलैग्जेण्डर पडलर जैसे सुयोग्य विद्वानों का सहयोग किल गया। इससे भौतिक और रसायन शास्त्र के अध्ययन में उन्हें कोई कठिनाई नहुई। इन दोनों विद्वानों के सहयोग को पाकर मानों उनके लिए इस दिशा में उन्नति का मार्ग ही खुल गया। यहाँ यह उल्लेखनीय बात है कि भारत में उन दिनों विज्ञान की शिक्षा का समुचित प्रबन्ध नहीं हो पाया था, अतः उन्होंने विलायत जाकर अध्ययन करने की सोसी । अपनी अपूर्व मेधा तथा परिश्रम के कारण साथ-साथ आपने 'गिलकाइस्ट' यात्रवृत्ति भी प्राप्त कर ली। इस छात्रत द्व प faश ज की प्रवृत्ति को पर्याप्त प्रेरणा मिली और शीघ्र ही आप इंगलैंड चले गए। वहाँ पहुँचकर के 'एडिनबरा विश्वविद्यालय में दाखिल हो राष्ट्र और छः वर्ष तक विज्ञान सम्बन्धी समस्त प्रवृत्तियों का सक्रिय अध्ययन सद्यपि वहाँ पर आपने रसायन और भौतिक विज्ञान विषय लिय
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पुलिस को मौके से एक डिस्कवर बाइक मिली है। बाइक पर सुल्तानपुर जिले का नंबर पड़ा हुआ है। इसी बाइक के सहारे पुलिस बदमाशों के ठिकाने तक पहुंचने में जुट गई है। घटना क्यूं हुई इस बात पर पुलिस स्वयं पशोपेश में है।
अमेठीः यूपी का अमेठी जिला बुधवार को दहल उठा था। मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र में दो दर्जन बाइक सवार बदमाशों ने दर्जनों दुकानों में तांडव मचाया था। घटना के बाद एसपी का कहना था कि संप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने का नही। नागरिक संशोधन एक्ट के समर्थन और विरोध की भी घटना नही।
हां सरफिरे लड़कों घटना कारित की गई या रंगदारी वसूलने और वर्चस्व क़ायम करने के लिए ऐसा किया गया। लेकिन किस लिए इतनी बड़ी वारदात अंजाम पाई इस बात का खुलासा चौबीस घंटे बाद भी पुलिस नहीं कर सकी है। इस बीच वारदात के बाद का एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक बदमाश की बाइक मौके से बरामद हुई है। पुलिस इसके नंबर को ट्रेज कर क्ल्यू तक पहुंचने की राह तक रही है।
ग़ौरतलब हो कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी के मुसाफिरखाना कोतवाली अंतर्गत मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के करपिया गाँव में बुधवार को दिनदहाड़े हड़कंप मच गया था। लोग जिधर देखो उधर भाग रहे थे। दो दर्जनों से अधिक नकाबपोश बदमाशो ने दर्जनों दुकानों में की तोड़फोड़ की थी और जमकर तांडव मचा रखा था। ग्रामीणों के अनुसार 25 से 30 की संख्या में बदमाश हाथों में डंडा लिए और हथियारों से लैस इलाके में पहुंचे थें।
बदमाशों ने दुकानदारों को जमकर मारा-पीटा था। सब्जी आदि की दुकानों को क्षतिग्रस्त कर बदमाशों ने आधा दर्जन से अधिक बाइकों को भी क्षतिग्रस्त किया था और फिर जिस रूट से आए थे उसी से वापस चले गए थे। मिठाई की दुकान चलाने वाले अनिल कुमार बताते हैं कि बदमाश आए दुकानों में तोड़फोड़ की और चार-पांच लोगों को भी मारा जिन्हें चोटें आई थीं।
इस मामले में घटना के बाद एसपी डा. ख्याति गर्ग ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर निरीक्षण किया था। पुलिस को मौके से एक डिस्कवर बाइक मिली है। बाइक पर सुल्तानपुर जिले का नंबर पड़ा हुआ है। इसी बाइक के सहारे पुलिस बदमाशों के ठिकाने तक पहुंचने में जुट गई है। घटना क्यूं हुई इस बात पर पुलिस स्वयं पशोपेश में है।
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पुलिस को मौके से एक डिस्कवर बाइक मिली है। बाइक पर सुल्तानपुर जिले का नंबर पड़ा हुआ है। इसी बाइक के सहारे पुलिस बदमाशों के ठिकाने तक पहुंचने में जुट गई है। घटना क्यूं हुई इस बात पर पुलिस स्वयं पशोपेश में है। अमेठीः यूपी का अमेठी जिला बुधवार को दहल उठा था। मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र में दो दर्जन बाइक सवार बदमाशों ने दर्जनों दुकानों में तांडव मचाया था। घटना के बाद एसपी का कहना था कि संप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने का नही। नागरिक संशोधन एक्ट के समर्थन और विरोध की भी घटना नही। हां सरफिरे लड़कों घटना कारित की गई या रंगदारी वसूलने और वर्चस्व क़ायम करने के लिए ऐसा किया गया। लेकिन किस लिए इतनी बड़ी वारदात अंजाम पाई इस बात का खुलासा चौबीस घंटे बाद भी पुलिस नहीं कर सकी है। इस बीच वारदात के बाद का एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक बदमाश की बाइक मौके से बरामद हुई है। पुलिस इसके नंबर को ट्रेज कर क्ल्यू तक पहुंचने की राह तक रही है। ग़ौरतलब हो कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी के मुसाफिरखाना कोतवाली अंतर्गत मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के करपिया गाँव में बुधवार को दिनदहाड़े हड़कंप मच गया था। लोग जिधर देखो उधर भाग रहे थे। दो दर्जनों से अधिक नकाबपोश बदमाशो ने दर्जनों दुकानों में की तोड़फोड़ की थी और जमकर तांडव मचा रखा था। ग्रामीणों के अनुसार पच्चीस से तीस की संख्या में बदमाश हाथों में डंडा लिए और हथियारों से लैस इलाके में पहुंचे थें। बदमाशों ने दुकानदारों को जमकर मारा-पीटा था। सब्जी आदि की दुकानों को क्षतिग्रस्त कर बदमाशों ने आधा दर्जन से अधिक बाइकों को भी क्षतिग्रस्त किया था और फिर जिस रूट से आए थे उसी से वापस चले गए थे। मिठाई की दुकान चलाने वाले अनिल कुमार बताते हैं कि बदमाश आए दुकानों में तोड़फोड़ की और चार-पांच लोगों को भी मारा जिन्हें चोटें आई थीं। इस मामले में घटना के बाद एसपी डा. ख्याति गर्ग ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर निरीक्षण किया था। पुलिस को मौके से एक डिस्कवर बाइक मिली है। बाइक पर सुल्तानपुर जिले का नंबर पड़ा हुआ है। इसी बाइक के सहारे पुलिस बदमाशों के ठिकाने तक पहुंचने में जुट गई है। घटना क्यूं हुई इस बात पर पुलिस स्वयं पशोपेश में है।
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इस आर्टिकल के सहायक लेखक (co-author) हमारी बहुत ही अनुभवी एडिटर और रिसर्चर्स (researchers) टीम से हैं जो इस आर्टिकल में शामिल प्रत्येक जानकारी की सटीकता और व्यापकता की अच्छी तरह से जाँच करते हैं।
wikiHow's Content Management Team बहुत ही सावधानी से हमारे एडिटोरियल स्टाफ (editorial staff) द्वारा किये गए कार्य को मॉनिटर करती है ये सुनिश्चित करने के लिए कि सभी आर्टिकल्स में दी गई जानकारी उच्च गुणवत्ता की है कि नहीं।
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आप कंप्यूटर और मोबाइल डिवाइस दोनों से फोटोशॉप में इमेज इंपोर्ट कर सकते हैं। भले आप फ़ोटोशॉप के कंप्यूटर वर्जन में असीमित इमेज को इम्पोर्ट कर सकते हैं, आपको एक से अधिक इमेज के साथ काम करने के लिए फ़ोटोशॉप एक्सप्रेस के अलावा किसी दूसरे ऐप का इस्तेमाल करने की जरूरत होगी। आपको अडोबी फोटोशॉप मिक्स को गूगल प्ले स्टोर (एंड्रॉयड) या ऐप स्टोर (iOS) से डाउनलोड करना होगा। यह विकिहाउ गाइड आपको कंप्यूटर और मोबाइल डिवाइस पर फोटोशॉप में इमेज को इंपोर्ट करना सिखाएगी।
कंप्यूटर पर फोटोशॉप का इस्तेमाल करना (Using Photoshop on a Computer)
{"smallUrl":"https:\/\/www2उस फ़ाइल को खोलें, जिस पर आप काम करना चाहते हैंः ऐसा करने के लिए, File मेनू पर क्लिक करें, Open को सिलैक्ट करें, फिर फ़ाइल पर डबल-क्लिक करें।
- एक नई फ़ाइल बनाने के लिए, Ctrl+N(Windows) या ⌘ Cmd+N (Mac) दबाएं, फ़ाइल को नाम दें, फिर OK पर क्लिक करें।
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{"smallUrl":"https:\/\/www1अडोबी फोटोशॉप मिक्स खोलेंः यह ऐप आइकॉन दो सर्किल को ओवरलैप करने जैसा दिखता है। आप इसे होम स्क्रीन पर, ऐप ड्रॉअर में या सर्च करके पा सकते हैं।
- यदि आपके पास अडोबी फोटोशॉप मिक्स नहीं है, तो आप इसे गूगल प्ले स्टोर (एंड्रॉयड) या ऐप स्टोर (iOS) से फ्री में पा सकते हैं।
- फोटोशॉप एक्सप्रेस ऐप एक समय में केवल एक इमेज को एडिट करने का सपोर्ट करता है और आप File मेनू से Open पर टैप करके ऐसा कर सकते हैं। हालाँकि, फ़ोटोशॉप मिक्स के लिए आपको Adobe Suite का इस्तेमाल करने के लिए एक सब्स्क्रिप्शन की जरूरत होती है। आप 7 दिन के फ्री ट्राइल के साथ ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं।
{"smallUrl":"https:\/\/www3प्लस (+) आइकॉन के साथ ब्लू सर्कल पर टैप करेंः आप इसे अपनी स्क्रीन के नीचे की तरफ दाएं कोने में पाएंगे। यह एक नया प्रोजेक्ट बनाने का बटन होता है।
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इस आर्टिकल के सहायक लेखक हमारी बहुत ही अनुभवी एडिटर और रिसर्चर्स टीम से हैं जो इस आर्टिकल में शामिल प्रत्येक जानकारी की सटीकता और व्यापकता की अच्छी तरह से जाँच करते हैं। wikiHow's Content Management Team बहुत ही सावधानी से हमारे एडिटोरियल स्टाफ द्वारा किये गए कार्य को मॉनिटर करती है ये सुनिश्चित करने के लिए कि सभी आर्टिकल्स में दी गई जानकारी उच्च गुणवत्ता की है कि नहीं। यह आर्टिकल चार,चार सौ पचानवे बार देखा गया है। आप कंप्यूटर और मोबाइल डिवाइस दोनों से फोटोशॉप में इमेज इंपोर्ट कर सकते हैं। भले आप फ़ोटोशॉप के कंप्यूटर वर्जन में असीमित इमेज को इम्पोर्ट कर सकते हैं, आपको एक से अधिक इमेज के साथ काम करने के लिए फ़ोटोशॉप एक्सप्रेस के अलावा किसी दूसरे ऐप का इस्तेमाल करने की जरूरत होगी। आपको अडोबी फोटोशॉप मिक्स को गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से डाउनलोड करना होगा। यह विकिहाउ गाइड आपको कंप्यूटर और मोबाइल डिवाइस पर फोटोशॉप में इमेज को इंपोर्ट करना सिखाएगी। कंप्यूटर पर फोटोशॉप का इस्तेमाल करना {"smallUrl":"https:\/\/wwwदोउस फ़ाइल को खोलें, जिस पर आप काम करना चाहते हैंः ऐसा करने के लिए, File मेनू पर क्लिक करें, Open को सिलैक्ट करें, फिर फ़ाइल पर डबल-क्लिक करें। - एक नई फ़ाइल बनाने के लिए, Ctrl+N या ⌘ Cmd+N दबाएं, फ़ाइल को नाम दें, फिर OK पर क्लिक करें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwचारFile मेनू पर क्लिक करेंः यह स्क्रीन के ऊपरी-बाएं कोने में होता है। {"smallUrl":"https:\/\/wwwछःउस इमेज को सिलैक्ट करें, जिसे आप इम्पोर्ट करना चाहते हैं और Place पर क्लिक करें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwएकअडोबी फोटोशॉप मिक्स खोलेंः यह ऐप आइकॉन दो सर्किल को ओवरलैप करने जैसा दिखता है। आप इसे होम स्क्रीन पर, ऐप ड्रॉअर में या सर्च करके पा सकते हैं। - यदि आपके पास अडोबी फोटोशॉप मिक्स नहीं है, तो आप इसे गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से फ्री में पा सकते हैं। - फोटोशॉप एक्सप्रेस ऐप एक समय में केवल एक इमेज को एडिट करने का सपोर्ट करता है और आप File मेनू से Open पर टैप करके ऐसा कर सकते हैं। हालाँकि, फ़ोटोशॉप मिक्स के लिए आपको Adobe Suite का इस्तेमाल करने के लिए एक सब्स्क्रिप्शन की जरूरत होती है। आप सात दिन के फ्री ट्राइल के साथ ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। {"smallUrl":"https:\/\/wwwतीनप्लस आइकॉन के साथ ब्लू सर्कल पर टैप करेंः आप इसे अपनी स्क्रीन के नीचे की तरफ दाएं कोने में पाएंगे। यह एक नया प्रोजेक्ट बनाने का बटन होता है। {"smallUrl":"https:\/\/wwwपाँचएक इमेज पर टैप करेंः आप इमेज के ऊपर और नीचे सभी टूल का इस्तेमाल करके उस इमेज को और एडिट कर सकते हैं। {"smallUrl":"https:\/\/wwwसातDevice पर टैप करेंः यदि आपके पास पहले से आपके फ़ोन में सेव किए गए इमेज हैं, तो यह आपको आपके लोकल इमेज फ़ोल्डर में ले जाएगा। यदि आपके पास दूसरे लोकेशन पर इमेज सेव किए गए हैं, तो उन्हें खोजने के लिए टैप करें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwनौइमेज और लेयर्स के बीच स्विच करने के लिए इमेजेज़ पर टैप करें।
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प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस पिछले कुछ दिनों से पेरिस में थे । प्रियंका अपने जेठ जो जोनस की दूसरी शादी में शामिल होने के लिए वहां पहुंची थीं । पेरिस से इस कपल की कई तस्वीरें सामने आईं । प्रियंका हर दिन अलग लुक में दिखीं, जिसे उनके फैंस ने बहुत पसंद किया । कुछ दिन पहले प्रियंका और निक बोट पर एंज्वॉय करते दिखे थे । उसी समय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है ।
इस वीडियो में दिखा कि प्रियंका बोट से पानी में गिरने वाली थीं, तभी निक ने उन्हें बचा लिया । प्रियंका के हाथ में ड्रिंक का गिलास था जो पानी में गिर गया । इसके बाद प्रियंका और निक हंसने लगे । बता दें कि प्रियंका की बोट की जो तस्वीरें सामने आई थीं उसमें वो पति निक के साथ डांस करती दिखी थीं ।
बता दें कि इससे पहले भी प्रियंका का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वो सीढ़ियों से गिरते-गिरते बची थीं और निक ने संभाल लिया था । इस वीडियो में प्रियंका पति निक के साथ किसी म्यूजिक कॉन्सर्ट से बाहर आ रहे थे । तभी वह लगभग गिरने ही वाली होती हैं कि निक उन्हें अपनी बाहों में थाम लेते हैं।
इस दौरान प्रियंका ने प्रिंटेड रफेल हाई स्लिट ड्रेस पहनी थी। वहीं निक कैजुअल शर्ट और जींस में नजर आए । इस दौरान भी दोनों को एक-दूसरे को किस करते देखा गया । प्रियंका और निक पहले भी पब्लिकली किस करते नजर आ चुके हैं ।
बता दें कि पिछले महीने सोफी और जो जोनस ने लॉस वेगास में शादी की थी । ये एक प्राइवेट सेरेमनी थी । इसमें दोनों के करीबी रिश्तेदार और परिवारवाले ही शामिल हुए थे । सोफी ने यूरोप में एक मल्टीस्टॉप वैकेशन कर अपनी बैचलर पार्टी भी सेलिब्रेट की थी। अब जो और सोफी की शादी हो चुकी है ।
इस बार इस कपल की फ्रेंच वेडिंग होगी। शादी में प्रियंका की मां मधु चोपड़ा भी पहुंची थीं । प्रियंका और निक भी पेरिस से वापस लौट आए हैं । प्राइवेट जेट से वापस लौटते हुए दोनों की तस्वीरें भी सामने आई थीं । वर्क फ्रंट की बात करें तो प्रियंका ने हाल ही में अपनी बॉलीवुड फिल्म द स्काई इज पिंक की शूटिंग खत्म की है। इस फिल्म में वो एक मां की भूमिका में नजर आएंगी।
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प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस पिछले कुछ दिनों से पेरिस में थे । प्रियंका अपने जेठ जो जोनस की दूसरी शादी में शामिल होने के लिए वहां पहुंची थीं । पेरिस से इस कपल की कई तस्वीरें सामने आईं । प्रियंका हर दिन अलग लुक में दिखीं, जिसे उनके फैंस ने बहुत पसंद किया । कुछ दिन पहले प्रियंका और निक बोट पर एंज्वॉय करते दिखे थे । उसी समय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है । इस वीडियो में दिखा कि प्रियंका बोट से पानी में गिरने वाली थीं, तभी निक ने उन्हें बचा लिया । प्रियंका के हाथ में ड्रिंक का गिलास था जो पानी में गिर गया । इसके बाद प्रियंका और निक हंसने लगे । बता दें कि प्रियंका की बोट की जो तस्वीरें सामने आई थीं उसमें वो पति निक के साथ डांस करती दिखी थीं । बता दें कि इससे पहले भी प्रियंका का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वो सीढ़ियों से गिरते-गिरते बची थीं और निक ने संभाल लिया था । इस वीडियो में प्रियंका पति निक के साथ किसी म्यूजिक कॉन्सर्ट से बाहर आ रहे थे । तभी वह लगभग गिरने ही वाली होती हैं कि निक उन्हें अपनी बाहों में थाम लेते हैं। इस दौरान प्रियंका ने प्रिंटेड रफेल हाई स्लिट ड्रेस पहनी थी। वहीं निक कैजुअल शर्ट और जींस में नजर आए । इस दौरान भी दोनों को एक-दूसरे को किस करते देखा गया । प्रियंका और निक पहले भी पब्लिकली किस करते नजर आ चुके हैं । बता दें कि पिछले महीने सोफी और जो जोनस ने लॉस वेगास में शादी की थी । ये एक प्राइवेट सेरेमनी थी । इसमें दोनों के करीबी रिश्तेदार और परिवारवाले ही शामिल हुए थे । सोफी ने यूरोप में एक मल्टीस्टॉप वैकेशन कर अपनी बैचलर पार्टी भी सेलिब्रेट की थी। अब जो और सोफी की शादी हो चुकी है । इस बार इस कपल की फ्रेंच वेडिंग होगी। शादी में प्रियंका की मां मधु चोपड़ा भी पहुंची थीं । प्रियंका और निक भी पेरिस से वापस लौट आए हैं । प्राइवेट जेट से वापस लौटते हुए दोनों की तस्वीरें भी सामने आई थीं । वर्क फ्रंट की बात करें तो प्रियंका ने हाल ही में अपनी बॉलीवुड फिल्म द स्काई इज पिंक की शूटिंग खत्म की है। इस फिल्म में वो एक मां की भूमिका में नजर आएंगी।
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वॉशिंगटन। ओसामा बिन लादेन का बेटा हमजा जिसे अलकायदा की लीडरशिप का वारिस चुना गया था, मारा गया है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से वहां की स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी। एनबीसी ने कहा कि तीन अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उनके पास हमजा बिन लादेन के मारे जाने की सूचना थी, लेकिन उन्होंने इस घटना की तारीख और स्थान के बारे में कुछ भी नहीं बताया।
वहीं एक अन्य मीडिया संस्थान न्यूयॉर्क टाइम्स ने दो अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए कहा कि उनके पास इस बात की पक्की खबर थी कि पिछले दो साल से चलाए जा रहे एक ऑपरेशन में जिसमें अमेरिका भी शामिल था, में हमजा मारा गया है। हालांकि, रिपोटर्स ने जब ओवल ऑफिस में हमजा के मारे जाने पर सवाल किया, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ना तो इनकार किया और ना ही एनबीसी की रिपोर्ट को गलत ठहराया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा, "मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। "एनबीसी और न्यूयॉर्क टाइम्स दोनों की ही रिपोर्ट यह इस बात की ओर इशारा करती है कि हमजा बिन लादेन अमेरिकी विदेश विभाग की उस घोषणा से पहले ही मारा गया था, जिसमें उसके ऊपर 10 लाख डॉलर का इनाम रखा गया था।
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वॉशिंगटन। ओसामा बिन लादेन का बेटा हमजा जिसे अलकायदा की लीडरशिप का वारिस चुना गया था, मारा गया है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से वहां की स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी। एनबीसी ने कहा कि तीन अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उनके पास हमजा बिन लादेन के मारे जाने की सूचना थी, लेकिन उन्होंने इस घटना की तारीख और स्थान के बारे में कुछ भी नहीं बताया। वहीं एक अन्य मीडिया संस्थान न्यूयॉर्क टाइम्स ने दो अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए कहा कि उनके पास इस बात की पक्की खबर थी कि पिछले दो साल से चलाए जा रहे एक ऑपरेशन में जिसमें अमेरिका भी शामिल था, में हमजा मारा गया है। हालांकि, रिपोटर्स ने जब ओवल ऑफिस में हमजा के मारे जाने पर सवाल किया, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ना तो इनकार किया और ना ही एनबीसी की रिपोर्ट को गलत ठहराया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा, "मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। "एनबीसी और न्यूयॉर्क टाइम्स दोनों की ही रिपोर्ट यह इस बात की ओर इशारा करती है कि हमजा बिन लादेन अमेरिकी विदेश विभाग की उस घोषणा से पहले ही मारा गया था, जिसमें उसके ऊपर दस लाख डॉलर का इनाम रखा गया था।
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उपयोगी कार्य हो रहा है। ब्रिटिशभारत तथा हैदराबाद, ट्रावनकोर, ग्वालियर, जयपुर आदि रियासतों मे भी यह कार्य हो रहा है। बंगाल मे सरकारी उद्योग के अतिरिक्त शांति-निकेतन द्वारा भी ग्रामोत्थान कार्य हो रहा है । युक्त-प्रांत के बहुत से स्कूलों और कालेजों ने भी यह काम हाथ मे लिया है।
ग्रामोत्थान कार्य मे जनता और सरकार दोनो के ही सहयोग है। ग्रामोत्थान का कार्य, चाहे सरकार द्वारा हो
और चाहे प्राइवेट उद्योग से हो, तीन भागों में विभक्त किया जा सकता है ।
(१) सफाई और स्वास्थ्य संबंधी ।
(२) अर्थिक, जिसमें कृषि और पशुओं की उन्नति, घरेलू उद्योग-धंधे और ऋणभार हलका करने के कार्य सम्मिलित हैं। (३) शिक्षा संबंधी ।
अब तीनों प्रकार के कार्यों पर संक्षेप में प्रकाश डाला जाता है। (१) सफाई और स्वास्थ्य - यद्यपि धनाभाव के कारण गाँव में शहर की सी सफाई नहीं रक्खी जा सकती तथापि उद्योग से बहुत कुछ कार्य किया जा सकता है। घरों के पास के गढ़े मिट्टी से भरे जा सकते हैं तालाबो और पोखरों पर मिट्टी का तेल डालकर मच्छड़ों का पैदा होना या बढ़ना बंद करने में विशेष कठिनाई न होगी । मैले के दबाने के लिए खाइयाँ खुदवाई जा सकती हैं। गोबर और कूड़ा भी गढ़ों दबाया जा सकता है । संयुक्तप्रांत की गोरखपुर कमिश्नरी में छः महीने में ७६७ गढ़े भरवाये गये; २००० से ऊपर खाद के गढ़े खुदवाये गये, ६००० से अधिक घूरे साफ़ किए गये ।
गाँव की सफाई के लिए ऐसे कार्य बड़े उपयोगी हैं । कुओ का पानी पोटाशियम परमैगनेट यानी लाल दवा से शुद्ध कराया जा सकता है। मकान अधिक हवादार बनाये जा सकते है। ऐसे बहुत से काम हैं, जिनके करने से थोडे पैसे मे बहुत कुछ लाभ होने की संभावना रहती है । गाँव के लोगो को चेचक कालरा के टीको के लिए तैयार कराना, मलेरिया के दिनो मे कुनीन का बॉटना आदि ऐसे काम हैं जिनमें जनता सरकार का हाथ वॅटा सकती है। यथा-संभव प्रत्येक तीन या चार गाँव के वर्ग के लिए एक छोटा अस्पताल खुलवाना चाहिए और आवश्यक दवाइयाँ तो प्रत्येक गाँव के जिमीदार या पटवारी के पास रक्खी जाना वांछनीय है। गाँव की दाइयो को प्रसूति काम मे शिक्षा दिलाना एक आव श्यक कार्य है । गाँव वालो को शरीर और कपड़ों की सफाई के संबंध मे मेजिक-लैटर्न वा साधारण व्याख्यानो द्वारा शिक्षा देना बहुत लाभ-प्रद सिद्ध होगा।
(२) आर्थिक - यह समस्या बहुत बडी है। परंतु सदुद्योग के आगे कोई कठिनाई नहीं रह जाती । कृषि-सुधार के लिए बहुत सी वस्तुएँ आवश्यक हैं। उन में से कुछ इस प्रकार हैं। उत्तम-भूमि, किसान को उस भूमि से वेदखल होने का भय न रहना, उत्तम,खाद, उत्तम वीज और सिचाई का सुभीता । इन वातो मे कुछ का सरकार से प्रबंध कराकर और कुछ के लिए अच्छी सलाह देकर किसानों को कृपि-कार्य मे द्विगुणित उत्साह के साथ प्रवृत्त किया जा सकता है। इस के अतिरिक्त प्रत्येक लोक सेवी का भी यह वर्तव्य है कि वह
प्रवन्ध - प्रभाकर
किसान को अपनी उपज उपयुक्त बाजार में अच्छे भाव से बेचने में सहायता दे।
पशुधन की उन्नति के लिए सरकार को गोचर भूमियों का प्रवन्ध करना चाहिए। इसके अतिरिक्त अच्छी नसल के साँडों का भी प्रबंध होना आवश्यक है। जहाँ तक हो पशु-धन बाहर न जाने दिया जाय । पशुओ को वीमारियों से सुरक्षित रख कर उनको मरने से बचाया जाय । ग्राम वासियों को बतलाया जाय कि पशु-सेवा एक धर्म है।
यद्यपि किसान लोग बड़े मेहनती होते हैं तथापि वे सारे वर्ष कृषि-कार्य में नहीं लगे रहते । किसान को साल में छः महीने फुरसत रहती है । यदि वह अपनी फुरसत के समय का सदुपयोग करे तो उसकी आर्थिक समस्या बहुत कुछ हल हो जाय । बहुत से ऐसे धंधे हैं जो बिना अधिक पूँजी लगाये सफलता पूर्वक किये जा सकते हैं। रस्सी बटना, डलिया बनाना, शहद पैदा करना, रुई ओटना, चरखा कातना, कपड़ा बुनना, लाख पैदा करना, गुड़ बनाना, साबुन बनाना, ईदें पाथना, इत्यादि कामों को करके किसान अपनी फुरसत के समय का सदुपयोग कर सकता है।
कर्ज की समस्या सहयोग समितियों द्वारा बहुत कुछ हल की जा सकती है। किंतु सहयोग समितियों से लाभ उठाना सहज कार्य नहीं। उसके लिए भी शिक्षा की आवश्यकता है। सहयोग समितियों मे भी बहुत कुछ कागज़ी घोड़ों का काम रहता है। भेट-पूजा भी चलती है। सुधारकों का काम है कि वे किसान को इन से पूरा-पूरा लाभ उठाने में सहायता दें और यदि किसान का हिसाब बनिये से हो तो वे देखे कि बनिया किसान को लूटता तो नहीं है।
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उपयोगी कार्य हो रहा है। ब्रिटिशभारत तथा हैदराबाद, ट्रावनकोर, ग्वालियर, जयपुर आदि रियासतों मे भी यह कार्य हो रहा है। बंगाल मे सरकारी उद्योग के अतिरिक्त शांति-निकेतन द्वारा भी ग्रामोत्थान कार्य हो रहा है । युक्त-प्रांत के बहुत से स्कूलों और कालेजों ने भी यह काम हाथ मे लिया है। ग्रामोत्थान कार्य मे जनता और सरकार दोनो के ही सहयोग है। ग्रामोत्थान का कार्य, चाहे सरकार द्वारा हो और चाहे प्राइवेट उद्योग से हो, तीन भागों में विभक्त किया जा सकता है । सफाई और स्वास्थ्य संबंधी । अर्थिक, जिसमें कृषि और पशुओं की उन्नति, घरेलू उद्योग-धंधे और ऋणभार हलका करने के कार्य सम्मिलित हैं। शिक्षा संबंधी । अब तीनों प्रकार के कार्यों पर संक्षेप में प्रकाश डाला जाता है। सफाई और स्वास्थ्य - यद्यपि धनाभाव के कारण गाँव में शहर की सी सफाई नहीं रक्खी जा सकती तथापि उद्योग से बहुत कुछ कार्य किया जा सकता है। घरों के पास के गढ़े मिट्टी से भरे जा सकते हैं तालाबो और पोखरों पर मिट्टी का तेल डालकर मच्छड़ों का पैदा होना या बढ़ना बंद करने में विशेष कठिनाई न होगी । मैले के दबाने के लिए खाइयाँ खुदवाई जा सकती हैं। गोबर और कूड़ा भी गढ़ों दबाया जा सकता है । संयुक्तप्रांत की गोरखपुर कमिश्नरी में छः महीने में सात सौ सरसठ गढ़े भरवाये गये; दो हज़ार से ऊपर खाद के गढ़े खुदवाये गये, छः हज़ार से अधिक घूरे साफ़ किए गये । गाँव की सफाई के लिए ऐसे कार्य बड़े उपयोगी हैं । कुओ का पानी पोटाशियम परमैगनेट यानी लाल दवा से शुद्ध कराया जा सकता है। मकान अधिक हवादार बनाये जा सकते है। ऐसे बहुत से काम हैं, जिनके करने से थोडे पैसे मे बहुत कुछ लाभ होने की संभावना रहती है । गाँव के लोगो को चेचक कालरा के टीको के लिए तैयार कराना, मलेरिया के दिनो मे कुनीन का बॉटना आदि ऐसे काम हैं जिनमें जनता सरकार का हाथ वॅटा सकती है। यथा-संभव प्रत्येक तीन या चार गाँव के वर्ग के लिए एक छोटा अस्पताल खुलवाना चाहिए और आवश्यक दवाइयाँ तो प्रत्येक गाँव के जिमीदार या पटवारी के पास रक्खी जाना वांछनीय है। गाँव की दाइयो को प्रसूति काम मे शिक्षा दिलाना एक आव श्यक कार्य है । गाँव वालो को शरीर और कपड़ों की सफाई के संबंध मे मेजिक-लैटर्न वा साधारण व्याख्यानो द्वारा शिक्षा देना बहुत लाभ-प्रद सिद्ध होगा। आर्थिक - यह समस्या बहुत बडी है। परंतु सदुद्योग के आगे कोई कठिनाई नहीं रह जाती । कृषि-सुधार के लिए बहुत सी वस्तुएँ आवश्यक हैं। उन में से कुछ इस प्रकार हैं। उत्तम-भूमि, किसान को उस भूमि से वेदखल होने का भय न रहना, उत्तम,खाद, उत्तम वीज और सिचाई का सुभीता । इन वातो मे कुछ का सरकार से प्रबंध कराकर और कुछ के लिए अच्छी सलाह देकर किसानों को कृपि-कार्य मे द्विगुणित उत्साह के साथ प्रवृत्त किया जा सकता है। इस के अतिरिक्त प्रत्येक लोक सेवी का भी यह वर्तव्य है कि वह प्रवन्ध - प्रभाकर किसान को अपनी उपज उपयुक्त बाजार में अच्छे भाव से बेचने में सहायता दे। पशुधन की उन्नति के लिए सरकार को गोचर भूमियों का प्रवन्ध करना चाहिए। इसके अतिरिक्त अच्छी नसल के साँडों का भी प्रबंध होना आवश्यक है। जहाँ तक हो पशु-धन बाहर न जाने दिया जाय । पशुओ को वीमारियों से सुरक्षित रख कर उनको मरने से बचाया जाय । ग्राम वासियों को बतलाया जाय कि पशु-सेवा एक धर्म है। यद्यपि किसान लोग बड़े मेहनती होते हैं तथापि वे सारे वर्ष कृषि-कार्य में नहीं लगे रहते । किसान को साल में छः महीने फुरसत रहती है । यदि वह अपनी फुरसत के समय का सदुपयोग करे तो उसकी आर्थिक समस्या बहुत कुछ हल हो जाय । बहुत से ऐसे धंधे हैं जो बिना अधिक पूँजी लगाये सफलता पूर्वक किये जा सकते हैं। रस्सी बटना, डलिया बनाना, शहद पैदा करना, रुई ओटना, चरखा कातना, कपड़ा बुनना, लाख पैदा करना, गुड़ बनाना, साबुन बनाना, ईदें पाथना, इत्यादि कामों को करके किसान अपनी फुरसत के समय का सदुपयोग कर सकता है। कर्ज की समस्या सहयोग समितियों द्वारा बहुत कुछ हल की जा सकती है। किंतु सहयोग समितियों से लाभ उठाना सहज कार्य नहीं। उसके लिए भी शिक्षा की आवश्यकता है। सहयोग समितियों मे भी बहुत कुछ कागज़ी घोड़ों का काम रहता है। भेट-पूजा भी चलती है। सुधारकों का काम है कि वे किसान को इन से पूरा-पूरा लाभ उठाने में सहायता दें और यदि किसान का हिसाब बनिये से हो तो वे देखे कि बनिया किसान को लूटता तो नहीं है।
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की हालत लगातार तीसरे दिन भी गंभीर बनी हुई है। सोमवार को अस्पताल प्रबंधन द्वारा मेडिकल बुलेटिन जारी कर दिया है। पूर्व सीएम और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के सुप्रीमो अजीत जोगी को कार्डियक अरेस्ट के बाद रायपुर के नारायणा अस्पताल में बीते 9 मई को भर्ती कराया गया है, तब से उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
चिकित्सकों के मुताबिक पूर्व सीएम जोगी कोमा में हैं और उनकी ब्रेन एक्टिविटी लगभग न के बराबर है। स्थिति गंभीर बनी हुई है। कई राज नेता जोगी से मिलकर उनका हाल चाल पूछा तो देश कई बड़े वरिष्ठ नेताओ ने फोन व मेल के द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का हाल चाल जान रहे हैं। वहीं आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने फोन के माध्यम से जोगी का हाल पूछा व उनके अच्छे स्वास्थ्य होने की कामना भी की।
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की हालत लगातार तीसरे दिन भी गंभीर बनी हुई है। सोमवार को अस्पताल प्रबंधन द्वारा मेडिकल बुलेटिन जारी कर दिया है। पूर्व सीएम और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के सुप्रीमो अजीत जोगी को कार्डियक अरेस्ट के बाद रायपुर के नारायणा अस्पताल में बीते नौ मई को भर्ती कराया गया है, तब से उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। चिकित्सकों के मुताबिक पूर्व सीएम जोगी कोमा में हैं और उनकी ब्रेन एक्टिविटी लगभग न के बराबर है। स्थिति गंभीर बनी हुई है। कई राज नेता जोगी से मिलकर उनका हाल चाल पूछा तो देश कई बड़े वरिष्ठ नेताओ ने फोन व मेल के द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का हाल चाल जान रहे हैं। वहीं आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने फोन के माध्यम से जोगी का हाल पूछा व उनके अच्छे स्वास्थ्य होने की कामना भी की।
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जयपुर। राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा शुक्रवार को जयपुर में 'महिला जन सुनवाई' का आयोजन किया जाएगा। पानीपेच स्थित राजस्थान पुलिस अकादमी में प्रातः 10 बजे से आरम्भ होने वाली इस जन सुनवाई में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू, काउन्सलर नीलम चौधरी तथा महिला आयोग की टीम प्रकरणों की सुनवाई करेगी।
राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू ने बताया कि महिला जन सुनवाई में आयोग के स्तर पर पहले से विचाराधीन करीब 5 दर्जन प्रकरणों में सुनवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह सुनवाई 'ओपन फोर ऑल' होगी, जिसमें महिलाएं किसी भी विभाग से संबंधित अपने नए प्रकरण भी मौके पर प्रस्तुत कर सकेंगी।
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जयपुर। राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा शुक्रवार को जयपुर में 'महिला जन सुनवाई' का आयोजन किया जाएगा। पानीपेच स्थित राजस्थान पुलिस अकादमी में प्रातः दस बजे से आरम्भ होने वाली इस जन सुनवाई में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू, काउन्सलर नीलम चौधरी तथा महिला आयोग की टीम प्रकरणों की सुनवाई करेगी। राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू ने बताया कि महिला जन सुनवाई में आयोग के स्तर पर पहले से विचाराधीन करीब पाँच दर्जन प्रकरणों में सुनवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह सुनवाई 'ओपन फोर ऑल' होगी, जिसमें महिलाएं किसी भी विभाग से संबंधित अपने नए प्रकरण भी मौके पर प्रस्तुत कर सकेंगी।
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मध्यप्रदेश के मंदसौर में तोते अफीम खा रहे हैं। फसल में नुकसान होने से किसान परेशान हैं। किसानों को अफीम की फसल बचाने के लिए चोरों और नशेड़ियों से ज्यादा तोतों से सतर्क रहना पड़ रहा है। क्योंकि जहां अफीम की खेती होती है, वहां आसपास तोते ज्यादा हैं, इसलिए वह थोड़ा-थोड़ा अफीम खाते हुए इसके आदी से हो गए हैं। इसके अलावा, नीलगाय भी किसानों को परेशान कर रही हैं।
इन दिनों मंदसौर में अफीम की फसल शबाब पर है। अफीम के डोडा पर लुआई चिराई का काम किया जा रहा है। किसान दिनभर खेतों में काम कर के अफीम की औसत देने में जुटे हैं, लेकिन इन दिनों किसानों के लिए बड़ी मुसीबत तोते और नीलगाय बन रहे हैं। किसानों ने खेत के आसपास लोहे के तार और जालियां बांध दी हैं। नशे के आदी हो चुके तोते जाली भी तोड़ देते हैं।
किसान कमल कुमार का कहना है कि कई साल से अफीम की खेती कर रहा हूं। तोते हमारी समस्या बन गए हैं। दरअसल, खेतों के पास ज्यादा तोते हैं। यहां के तोते थोड़ा-थोड़ा अफीम खाने से इसके आदी हो गए हैं। तोते कुछ सेकंडों में ही अफीम का डोडा काट कर उड़ जाते हैं। हमने उनसे बचने के लिए फसल के ऊपर जालियां लगाई हैं।
मान लीजिए, अगर हम थोड़ी देर के लिए खेत से बाहर चले जाते हैं तो ढेरों तोते खेत से कई डोडे चट कर जाते हैं। इसके अलावा, नीलगाय से बचने के लिए खेत के आसपास लोहे की जलियां और पुराने कपड़े बांधे हैं। परिवार भी खेतों की निगरानी करता रहता है। जिस किसान ने खेत के ऊपर जाल नहीं लगाया है, वे किसान ज्यादा परेशान हैं।
किसान विनोद पाटीदार ने बताया कि किसान पशु-पक्षियों से अफीम जैसी नशीली और नाजुक फसल को बचाने के लिए कई उपाय करते हैं। अफीम की फसल के आसपास साड़ियां और तार बांधने के साथ-साथ सफेद नेट वाली जालियां भी लगा रखी हैं। रात में खेतों में ध्वनि यंत्र बजाते हैं। अलग-अलग रंगों की एलईडी लाइट भी चमकाते हैं।
आसपास के खेतों में अन्य फसल भी हैं, लेकिन तोते सिर्फ अफीम पर ही अटैक करते हैं। अफीम की खेती बहुत छोटी जगह में की जाती है, जबकि इसके आसपास बड़े पैमाने पर अन्य फसलें होती है। अन्य ग्रामीण अंजनी सिंह का कहना है कि जब नीलगाय अफीम खा लेती हैं तो वह और अधिक हिंसक हो जाते हैं। इसके बाद कई बार उन्होंने लोगों पर हमले भी किए हैं।
केंद्र सरकार द्वारा किसानों को अफीम उत्पादन के लिए 10 से 20 आरी तक के ही पट्टे दिए जाते हैं। जिसका एक निश्चित औसत किसानों को देना पड़ता है। अगर औसत कम हो जाए तो अगली बार के लिए पट्टे निरस्त कर दिए जाते हैं। कई बार तो किसानों को कम औसत के चलते कार्रवाई भी झेलनी पड़ती है। जिले में 19 हजार से अधिक किसान हैं, जो अफीम की खेती कर रहे हैं। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने लांसिंग और सीपीएस पद्धति से अफीम उत्पादन के लिए लाइसेंस जारी किए हैं।
अफीम पर रिसर्च कर रहे वैज्ञानिक वसंत कुमार पंचोली भी मानते है कि इलाके में तोते नशेड़ी हो गए हैं। उनका कहना है कि अफीम नशीला और मादक पदार्थ है। तोते जब अफीम के डोडे खाते हैं, तो जाहिर है कि अफीम में मौजूद नशीले पदार्थ के चलते इनके नर्वस सिस्टम पर असर डालते हैं। जिस वजह से तोतों को इसकी लत लग जाती है। वन विभाग भी तोतों के नशेड़ी होने की बात मानता है, लेकिन अफीम को तोतों से बचाने और तोतों को नशे की लत से निजात दिलाने का विभाग के पास उपाय नहीं है।
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मध्यप्रदेश के मंदसौर में तोते अफीम खा रहे हैं। फसल में नुकसान होने से किसान परेशान हैं। किसानों को अफीम की फसल बचाने के लिए चोरों और नशेड़ियों से ज्यादा तोतों से सतर्क रहना पड़ रहा है। क्योंकि जहां अफीम की खेती होती है, वहां आसपास तोते ज्यादा हैं, इसलिए वह थोड़ा-थोड़ा अफीम खाते हुए इसके आदी से हो गए हैं। इसके अलावा, नीलगाय भी किसानों को परेशान कर रही हैं। इन दिनों मंदसौर में अफीम की फसल शबाब पर है। अफीम के डोडा पर लुआई चिराई का काम किया जा रहा है। किसान दिनभर खेतों में काम कर के अफीम की औसत देने में जुटे हैं, लेकिन इन दिनों किसानों के लिए बड़ी मुसीबत तोते और नीलगाय बन रहे हैं। किसानों ने खेत के आसपास लोहे के तार और जालियां बांध दी हैं। नशे के आदी हो चुके तोते जाली भी तोड़ देते हैं। किसान कमल कुमार का कहना है कि कई साल से अफीम की खेती कर रहा हूं। तोते हमारी समस्या बन गए हैं। दरअसल, खेतों के पास ज्यादा तोते हैं। यहां के तोते थोड़ा-थोड़ा अफीम खाने से इसके आदी हो गए हैं। तोते कुछ सेकंडों में ही अफीम का डोडा काट कर उड़ जाते हैं। हमने उनसे बचने के लिए फसल के ऊपर जालियां लगाई हैं। मान लीजिए, अगर हम थोड़ी देर के लिए खेत से बाहर चले जाते हैं तो ढेरों तोते खेत से कई डोडे चट कर जाते हैं। इसके अलावा, नीलगाय से बचने के लिए खेत के आसपास लोहे की जलियां और पुराने कपड़े बांधे हैं। परिवार भी खेतों की निगरानी करता रहता है। जिस किसान ने खेत के ऊपर जाल नहीं लगाया है, वे किसान ज्यादा परेशान हैं। किसान विनोद पाटीदार ने बताया कि किसान पशु-पक्षियों से अफीम जैसी नशीली और नाजुक फसल को बचाने के लिए कई उपाय करते हैं। अफीम की फसल के आसपास साड़ियां और तार बांधने के साथ-साथ सफेद नेट वाली जालियां भी लगा रखी हैं। रात में खेतों में ध्वनि यंत्र बजाते हैं। अलग-अलग रंगों की एलईडी लाइट भी चमकाते हैं। आसपास के खेतों में अन्य फसल भी हैं, लेकिन तोते सिर्फ अफीम पर ही अटैक करते हैं। अफीम की खेती बहुत छोटी जगह में की जाती है, जबकि इसके आसपास बड़े पैमाने पर अन्य फसलें होती है। अन्य ग्रामीण अंजनी सिंह का कहना है कि जब नीलगाय अफीम खा लेती हैं तो वह और अधिक हिंसक हो जाते हैं। इसके बाद कई बार उन्होंने लोगों पर हमले भी किए हैं। केंद्र सरकार द्वारा किसानों को अफीम उत्पादन के लिए दस से बीस आरी तक के ही पट्टे दिए जाते हैं। जिसका एक निश्चित औसत किसानों को देना पड़ता है। अगर औसत कम हो जाए तो अगली बार के लिए पट्टे निरस्त कर दिए जाते हैं। कई बार तो किसानों को कम औसत के चलते कार्रवाई भी झेलनी पड़ती है। जिले में उन्नीस हजार से अधिक किसान हैं, जो अफीम की खेती कर रहे हैं। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने लांसिंग और सीपीएस पद्धति से अफीम उत्पादन के लिए लाइसेंस जारी किए हैं। अफीम पर रिसर्च कर रहे वैज्ञानिक वसंत कुमार पंचोली भी मानते है कि इलाके में तोते नशेड़ी हो गए हैं। उनका कहना है कि अफीम नशीला और मादक पदार्थ है। तोते जब अफीम के डोडे खाते हैं, तो जाहिर है कि अफीम में मौजूद नशीले पदार्थ के चलते इनके नर्वस सिस्टम पर असर डालते हैं। जिस वजह से तोतों को इसकी लत लग जाती है। वन विभाग भी तोतों के नशेड़ी होने की बात मानता है, लेकिन अफीम को तोतों से बचाने और तोतों को नशे की लत से निजात दिलाने का विभाग के पास उपाय नहीं है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने म्याँमार में, प्रदर्शनकारियों पर घातक बल प्रयोग किये जाने की निन्दा की है. ध्यान रहे कि म्याँमार में, सेना द्वारा, 1 फ़रवरी 2021 को, सरकार अपने हाथों में लेने के विरोध में, प्रदर्शनों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है.
मीडिया ख़बरों के अनुसार, मंडालय में, शनिवार को प्रदर्शनों के दौरान कम से कम दो लोगों को मौत हो गई.
I condemn the use of deadly violence in Myanmar.
The use of lethal force, intimidation & harassment against peaceful demonstrators is unacceptable.
Everyone has a right to peaceful assembly. I call on all parties to respect election results and return to civilian rule.
मंडालय, यंगून के बाद, म्याँमार का दूसरा सबसे बड़ा शहर है.
म्याँमार में, 1 फ़रवरी को सेना द्वारा देश की सत्ता पर क़ब्ज़ा किये जाने के बाद, जन प्रदर्शनों का सिलसिला बढ़ता देखा गया है.
ध्यान रहे कि नवम्बर 2020 में, देश की सिविल सरकार के लिये चुनाव हुए थे, जिसमें आँग सान सू ची के नेतृत्व वाली पार्टी - नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) ने जीत हासिल की थी.
उसके बाद से ही, देश में राजनैतिक तनाव बढ़ता देखा गया था.
सेना ने, 1 फ़रवरी को, सत्ता पर क़ब्ज़ा करने के साथ-साथ, देश के शीर्ष राजनेताओं को गिरफ़्तार कर लिया था, जिनमें आँग सान सू ची भी शामिल थीं.
प्रदर्शनों के दौरान मौत का शिकार हुई एक युवती म्या थ्वेट थ्वेट ख़ाइन के अन्तिम संस्कार में, रविवार को, राजधानी नाय प्यी थाव में, बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए.
19 वर्षीय इस युवती की, प्रदर्शनों में जान गँवाने वाले पहले व्यक्ति के रूप में पुष्टि की गई है.
उन्हें 9 फ़रवरी को, प्रदर्शनों के दौरान, सिर में गोली लगी थी, और शुक्रवार, 19 फ़रवरी को उनकी मौत हो गई.
म्याँमार में, मानवाधिकार स्थिति पर, सयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत टॉम एंड्रयूज़ ने इस युवती की मौत पर गहरा दुख प्रकट किया.
शनिवार को, मंडालय में उस समय दो लोगों की मौत हो गई, जब सुरक्षा बलों ने, शिपयार्ड (जहाज़ मरम्मत स्थल) पर हड़तालकर्मियों पर गोलियाँ चला दीं.
टॉम एंड्रयूज़ ने और भी ज़्यादा लोगों के मौत का शिकार होने पर असीम क्रोध व्यक्त किया. मारे गए दो लोगों में, एक किशोर लड़का भी था.
शनिवार को ही, उससे पहले, एक अन्य ट्वीट सन्देश में उन्होंने कहा था कि मंडालय में (शनिवार को) प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाने में 33वीं लाइट इनफ़ैन्टरी डिवीज़न शामिल थी.
टॉम एंड्रयूज़ जैसे विशेष रैपोर्टेयर, संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं और ना ही उन्हें संगठन से कोई वेतन मिलता है. उनकी नियुक्ति, किसी विशेष देश में किसी ख़ास स्थिति या किसी विशेष मानवाधिकार मुद्दे की निगरानी करने, और सलाह देने के लिये, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा की जाती है.
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने म्याँमार में, प्रदर्शनकारियों पर घातक बल प्रयोग किये जाने की निन्दा की है. ध्यान रहे कि म्याँमार में, सेना द्वारा, एक फ़रवरी दो हज़ार इक्कीस को, सरकार अपने हाथों में लेने के विरोध में, प्रदर्शनों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है. मीडिया ख़बरों के अनुसार, मंडालय में, शनिवार को प्रदर्शनों के दौरान कम से कम दो लोगों को मौत हो गई. I condemn the use of deadly violence in Myanmar. The use of lethal force, intimidation & harassment against peaceful demonstrators is unacceptable. Everyone has a right to peaceful assembly. I call on all parties to respect election results and return to civilian rule. मंडालय, यंगून के बाद, म्याँमार का दूसरा सबसे बड़ा शहर है. म्याँमार में, एक फ़रवरी को सेना द्वारा देश की सत्ता पर क़ब्ज़ा किये जाने के बाद, जन प्रदर्शनों का सिलसिला बढ़ता देखा गया है. ध्यान रहे कि नवम्बर दो हज़ार बीस में, देश की सिविल सरकार के लिये चुनाव हुए थे, जिसमें आँग सान सू ची के नेतृत्व वाली पार्टी - नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी ने जीत हासिल की थी. उसके बाद से ही, देश में राजनैतिक तनाव बढ़ता देखा गया था. सेना ने, एक फ़रवरी को, सत्ता पर क़ब्ज़ा करने के साथ-साथ, देश के शीर्ष राजनेताओं को गिरफ़्तार कर लिया था, जिनमें आँग सान सू ची भी शामिल थीं. प्रदर्शनों के दौरान मौत का शिकार हुई एक युवती म्या थ्वेट थ्वेट ख़ाइन के अन्तिम संस्कार में, रविवार को, राजधानी नाय प्यी थाव में, बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए. उन्नीस वर्षीय इस युवती की, प्रदर्शनों में जान गँवाने वाले पहले व्यक्ति के रूप में पुष्टि की गई है. उन्हें नौ फ़रवरी को, प्रदर्शनों के दौरान, सिर में गोली लगी थी, और शुक्रवार, उन्नीस फ़रवरी को उनकी मौत हो गई. म्याँमार में, मानवाधिकार स्थिति पर, सयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत टॉम एंड्रयूज़ ने इस युवती की मौत पर गहरा दुख प्रकट किया. शनिवार को, मंडालय में उस समय दो लोगों की मौत हो गई, जब सुरक्षा बलों ने, शिपयार्ड पर हड़तालकर्मियों पर गोलियाँ चला दीं. टॉम एंड्रयूज़ ने और भी ज़्यादा लोगों के मौत का शिकार होने पर असीम क्रोध व्यक्त किया. मारे गए दो लोगों में, एक किशोर लड़का भी था. शनिवार को ही, उससे पहले, एक अन्य ट्वीट सन्देश में उन्होंने कहा था कि मंडालय में प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाने में तैंतीसवीं लाइट इनफ़ैन्टरी डिवीज़न शामिल थी. टॉम एंड्रयूज़ जैसे विशेष रैपोर्टेयर, संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं और ना ही उन्हें संगठन से कोई वेतन मिलता है. उनकी नियुक्ति, किसी विशेष देश में किसी ख़ास स्थिति या किसी विशेष मानवाधिकार मुद्दे की निगरानी करने, और सलाह देने के लिये, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा की जाती है. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
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यमुनानगर, 08 मई (हि. स. ) । रेस्टोरेँट के मेन्यू कार्ड पर लिखी मांसाहारी डिश (non-vegetarian dish) के नाम में तुलसी नाम लिखे जाने के विरोध में रविवार शाम को हिन्दू संगठनों (Hindu organizations) ने रोष मार्च करते हुए रेस्टोरेँट के सामने धरना प्रदर्शन कर हनुमान चालीसा का पाठ किया । जिसको लेकर मौके पर पुलिस भी तैनात रही।
हिन्दू संगठनों के प्रतिनिधियों ने नाम हटाने को लेकर कहा कि सनातन हिंदू धर्म में तुलसी का अत्यंत पवित्र स्थान है। अगर किसी व्यक्ति ने तुलसी की लकड़ी की कंठी भी गले में पहनी हो तो उसे प्याज़ लहसुन तक खाने की अनुमति नहीं होती।
मॉडल टाउन , यमुनानगर स्थित एक नए रेस्टोरेँट के मेन्यू कार्ड में एक मांसाहारी डिश में मुर्ग़े के मांस के साथ तुलसी का नाम जानबूझ कर लिखा जाना हिन्दू विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। इसका विरोध होना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि तुलसी का पौधा हमारे लिए केवल एक पौधा ही नहीं है। बल्कि तुलसी को हिन्दू धर्म में माँ माना गया है। यदि किसी व्यंजन में तुलसी पत्र छोड़ा जाए तो ये माना जाता है कि वह वस्तु भगवान को भोग लग गयी है।
ऐसी तुल्सी का नाम मांस के साथ लिखना हिंदुओं की भावना का मज़ाक़ उड़ाना ही है। उन्होंने कहा कि हम इसका कड़ा विरोध करते मांग करते है कि कोई भी बेशर्मी के साथ खुले आम अपने में तुलसी का नाम मांस के साथ न लिख सकें। इस मौके पर बडी संख्या में हिन्दू संगठन के सदस्य बडी संख्या में शामिल हुए।
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यमुनानगर, आठ मई । रेस्टोरेँट के मेन्यू कार्ड पर लिखी मांसाहारी डिश के नाम में तुलसी नाम लिखे जाने के विरोध में रविवार शाम को हिन्दू संगठनों ने रोष मार्च करते हुए रेस्टोरेँट के सामने धरना प्रदर्शन कर हनुमान चालीसा का पाठ किया । जिसको लेकर मौके पर पुलिस भी तैनात रही। हिन्दू संगठनों के प्रतिनिधियों ने नाम हटाने को लेकर कहा कि सनातन हिंदू धर्म में तुलसी का अत्यंत पवित्र स्थान है। अगर किसी व्यक्ति ने तुलसी की लकड़ी की कंठी भी गले में पहनी हो तो उसे प्याज़ लहसुन तक खाने की अनुमति नहीं होती। मॉडल टाउन , यमुनानगर स्थित एक नए रेस्टोरेँट के मेन्यू कार्ड में एक मांसाहारी डिश में मुर्ग़े के मांस के साथ तुलसी का नाम जानबूझ कर लिखा जाना हिन्दू विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। इसका विरोध होना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि तुलसी का पौधा हमारे लिए केवल एक पौधा ही नहीं है। बल्कि तुलसी को हिन्दू धर्म में माँ माना गया है। यदि किसी व्यंजन में तुलसी पत्र छोड़ा जाए तो ये माना जाता है कि वह वस्तु भगवान को भोग लग गयी है। ऐसी तुल्सी का नाम मांस के साथ लिखना हिंदुओं की भावना का मज़ाक़ उड़ाना ही है। उन्होंने कहा कि हम इसका कड़ा विरोध करते मांग करते है कि कोई भी बेशर्मी के साथ खुले आम अपने में तुलसी का नाम मांस के साथ न लिख सकें। इस मौके पर बडी संख्या में हिन्दू संगठन के सदस्य बडी संख्या में शामिल हुए।
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भोपाल (एएनआई): मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने गुरुवार को सनातन धर्म और जिहाद की परिभाषा से संबंधित अपने ट्वीट के लिए पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह पर कटाक्ष किया।
"सिंह ने कितनी मासूमियत से कहा है, और उन्होंने क्या परिभाषा दी है। क्या दिग्विजय सिंह ने कभी पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) और सिमी (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) को यह समझाया है? सनातन का अपमान करना दिग्विजय सिंह की आदत बन गई है। " मिश्रा ने संवाददाताओं से कहा।
उन्होंने आगे कहा, 'मैं प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के प्रमुख कमलनाथ और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से पूछना चाहता हूं कि दिग्विजय सिंह ने संतों के बारे में जो कहा है, उसका समर्थन करते हैं या विरोध करते हैं. अगर वे विरोध करते हैं, तो कार्रवाई की जानी चाहिए. '
विशेष रूप से ट्वीट्स की एक श्रृंखला में, सिंह ने गुरुवार सुबह RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) को टैग करते हुए लिखा, "जिहाद एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है प्रयास करना, नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करना, कठिन प्रयास करना या आंदोलन करना। एक जायज मांग और जिसका मतलब कड़ी मेहनत और प्रयास भी है। "
उन्होंने आगे लिखा, "क्या पढ़ाई और रोजगार में मेहनत और मेहनत भी 'जिहाद' है? क्या करें जब अनपढ़ लोग ताकतवर पदों पर पहुंच जाएं, फ्रॉड बाबा लोग सनातन धर्म का उपदेश देने लगें तो क्या देश और सनातन धर्म की ओर नहीं जाएगा? " विनाश? "
"प्रत्येक हिंदू धार्मिक आयोजन में किस नारे का प्रयोग किया जाता है? 'धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्रणियो में सदभावना हो, विश्व का कल्याण हो' सिंह ने लिखा, 'हमें दुख है कि कुछ लोग इतनी व्यापक सोच वाले हिंदू सनातन धर्म को संकुचित कर रहे हैं।
इस बीच, 15 जून से पूरे राज्य में निकाली जाने वाली कमलनाथ की संदेश यात्रा पर प्रतिक्रिया देते हुए मिश्रा ने कहा, 'पहले जन संदेश यात्रा निकाली गई, फिर तिरंगा यात्रा, जितनी भी यात्राएं निकाली जाएंगी, वे विफल हो जाएंगी. आज यह संदेश यात्रा कल से दिखाई नहीं देगी। "
राज्य में गोंडवाना पार्टी के साथ कांग्रेस पार्टी के गठबंधन पर टिप्पणी करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के पास उम्मीदवार नहीं थे, इसलिए उन्हें गठबंधन करना होगा. (एएनआई)
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भोपाल : मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने गुरुवार को सनातन धर्म और जिहाद की परिभाषा से संबंधित अपने ट्वीट के लिए पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह पर कटाक्ष किया। "सिंह ने कितनी मासूमियत से कहा है, और उन्होंने क्या परिभाषा दी है। क्या दिग्विजय सिंह ने कभी पीएफआई और सिमी को यह समझाया है? सनातन का अपमान करना दिग्विजय सिंह की आदत बन गई है। " मिश्रा ने संवाददाताओं से कहा। उन्होंने आगे कहा, 'मैं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख कमलनाथ और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से पूछना चाहता हूं कि दिग्विजय सिंह ने संतों के बारे में जो कहा है, उसका समर्थन करते हैं या विरोध करते हैं. अगर वे विरोध करते हैं, तो कार्रवाई की जानी चाहिए. ' विशेष रूप से ट्वीट्स की एक श्रृंखला में, सिंह ने गुरुवार सुबह RSS और विश्व हिंदू परिषद को टैग करते हुए लिखा, "जिहाद एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है प्रयास करना, नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करना, कठिन प्रयास करना या आंदोलन करना। एक जायज मांग और जिसका मतलब कड़ी मेहनत और प्रयास भी है। " उन्होंने आगे लिखा, "क्या पढ़ाई और रोजगार में मेहनत और मेहनत भी 'जिहाद' है? क्या करें जब अनपढ़ लोग ताकतवर पदों पर पहुंच जाएं, फ्रॉड बाबा लोग सनातन धर्म का उपदेश देने लगें तो क्या देश और सनातन धर्म की ओर नहीं जाएगा? " विनाश? " "प्रत्येक हिंदू धार्मिक आयोजन में किस नारे का प्रयोग किया जाता है? 'धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्रणियो में सदभावना हो, विश्व का कल्याण हो' सिंह ने लिखा, 'हमें दुख है कि कुछ लोग इतनी व्यापक सोच वाले हिंदू सनातन धर्म को संकुचित कर रहे हैं। इस बीच, पंद्रह जून से पूरे राज्य में निकाली जाने वाली कमलनाथ की संदेश यात्रा पर प्रतिक्रिया देते हुए मिश्रा ने कहा, 'पहले जन संदेश यात्रा निकाली गई, फिर तिरंगा यात्रा, जितनी भी यात्राएं निकाली जाएंगी, वे विफल हो जाएंगी. आज यह संदेश यात्रा कल से दिखाई नहीं देगी। " राज्य में गोंडवाना पार्टी के साथ कांग्रेस पार्टी के गठबंधन पर टिप्पणी करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के पास उम्मीदवार नहीं थे, इसलिए उन्हें गठबंधन करना होगा.
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अस्थमा के मरीज को अधिक तनाव, की वजह से सांस का दौरा पड़ जाता है जिससे कई बार जान को भी खतरा हो सकता है. रोगी को ज्यादातर खांसी, जुकाम और रात-दिन सांस लेने में तकलीफ होती है. मरीज को हमेशा अपने पास इनहेलर रखना चाहिए जिससे सांस कम होने पर इसका इस्तेमाल किया जा सके. यह बीमारी कभी ठीक नहीं होती लेकिन दवाईयों की मदद से इस पर नियंत्रण लगाया जा सकता है.
कुछ घरेलू तरीके अपनाकर भी इस समस्या में फायदा होता है.
1-सांस की परेशानी ज्यादा न बढ़े इसके लिए एक पके केले को गैस पर अच्छी तरह सेक लें. इसका छिलका उतारकर इसे छोटे टुकड़ों में काटें और गर्म केले पर काली मिर्च डालकर खाने से रोगी को फायदा होता है.
2-30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां डालकर उबालें और इसको पीने से फायदा होता है. रोज सुबह इसका सेवन करने से रोगी को काफी लाभ होता है.
3-पानी में अजवाइन डालकर इसे अच्छी तरह उबालें और इस उबलते पानी की स्टीम लेने से सांस की परेशानी नहीं होती. इसके अलावा 5 लौंग को 1 कटोरी पानी में उबालें और इसको छान कर इसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर पीने से बहुत फायदा होता है.
4-तुलसी के पत्तों को अच्छी तरह साफ करके इसमें पीसी काली मिर्च डालकर खाने से अस्थमा नियंत्रण में रहता है. इसके अलावा तुलसी को पानी के साथ पीसकर उसमें शहद डालकर चाटने से भी राहत मिलती है.
5-अस्थमा का अटैक बार-बार न हो इसके लिए हल्दी और शहद को मिलाकर लेना चाहिए. इसके अलावा दूध में हल्दी डालकर पीने से भी काफी फायदा होता है.
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अस्थमा के मरीज को अधिक तनाव, की वजह से सांस का दौरा पड़ जाता है जिससे कई बार जान को भी खतरा हो सकता है. रोगी को ज्यादातर खांसी, जुकाम और रात-दिन सांस लेने में तकलीफ होती है. मरीज को हमेशा अपने पास इनहेलर रखना चाहिए जिससे सांस कम होने पर इसका इस्तेमाल किया जा सके. यह बीमारी कभी ठीक नहीं होती लेकिन दवाईयों की मदद से इस पर नियंत्रण लगाया जा सकता है. कुछ घरेलू तरीके अपनाकर भी इस समस्या में फायदा होता है. एक-सांस की परेशानी ज्यादा न बढ़े इसके लिए एक पके केले को गैस पर अच्छी तरह सेक लें. इसका छिलका उतारकर इसे छोटे टुकड़ों में काटें और गर्म केले पर काली मिर्च डालकर खाने से रोगी को फायदा होता है. दो-तीस मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां डालकर उबालें और इसको पीने से फायदा होता है. रोज सुबह इसका सेवन करने से रोगी को काफी लाभ होता है. तीन-पानी में अजवाइन डालकर इसे अच्छी तरह उबालें और इस उबलते पानी की स्टीम लेने से सांस की परेशानी नहीं होती. इसके अलावा पाँच लौंग को एक कटोरी पानी में उबालें और इसको छान कर इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से बहुत फायदा होता है. चार-तुलसी के पत्तों को अच्छी तरह साफ करके इसमें पीसी काली मिर्च डालकर खाने से अस्थमा नियंत्रण में रहता है. इसके अलावा तुलसी को पानी के साथ पीसकर उसमें शहद डालकर चाटने से भी राहत मिलती है. पाँच-अस्थमा का अटैक बार-बार न हो इसके लिए हल्दी और शहद को मिलाकर लेना चाहिए. इसके अलावा दूध में हल्दी डालकर पीने से भी काफी फायदा होता है.
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2 संबंधोंः त्रिआयामी चलचित्र, त्रिआयामी दूरदर्शन।
त्रिआयामी चलचित्र (अंग्रेज़ीःथ्री-डी फिल्म) एक चलचित्र होता है, जिसकी छवियां आम चलचित्रों से कुछ भिन्न बनती हैं। चित्रों की छाया अंकित (रिकॉर्ड) करने के लिए विशेष मोशन पिक्चर कैमरे का प्रयोग किया जाता है।। हिन्दुस्तान लाइव। २० दिसम्बर २००९ त्रि-आयामी चलचित्र १८९० के दौरान भी हुआ करते थे, लेकिन उस समय के इन चलचित्रों को थिएटर पर दिखाया जाना काफी महंगा काम होता था। मुख्यतः १९५० से १९८० के अमेरिकी सिनेमा में ये फिल्में प्रमुखता से दिखने लगी। सैद्धांतिक त्रि-आयामी चलचित्र (थियोरिटिकल थ्री-डी इमेज) प्रस्तुत करने का आरंभिक तरीका एनाजिफ इमेज होता है। इन तरीकों को इसलिये प्रसिद्धि मिली, क्योंकि इनका निर्माण और प्रदर्शन सरल था। इसके अलावा, इकलिप्स मैथड, लेंटीकुलर और बैरियर स्क्रीन, इंटरफेरेंस फिल्टर प्रौद्योगिकी और ध्रुवीकरण प्रणाली (पोलराइजेशन सिस्टम) इसकी प्रचलित तकनीक हुआ करती थी। मोशन पिक्चर का स्टीरियोस्कोपिक युग १८९० के दशक के अंतिम दौर में आरंभ हुआ जब ब्रिटिश फिल्मों के पुरोधा विलियम ग्रीन ने त्रि-आयामी प्रक्रिया का पेटेंट फाइल किया। फ्रेडरिक युजीन आइव्स ने स्टीरियो कैमरा रिग का पेटेंट १९०० में कराया। इस कैमरे में दो लैंस लगाये जाते थे जो एक दूसरे से तीन-चौथाई इंच की दूरी पर होते थे। २७ सितंबर, १९२२ को पहली बार दर्शकों को लॉस एंजिल्स के एंबैसेडर थिएटर होटल में द पावर ऑफ लव का प्रदर्शन आयोजित किया गया था। सन १९५२ में प्रथम रंगीन त्रिविम यानि कलर स्टीरियोस्कोपिक फीचर, वान डेविल बनाई गई। इसके लेखक, निर्माता और निर्देशक एम.एल.गुंजबर्ग थे। स्टीरियोस्कोपिक साउंड में बनी पहली थ्री-डी फीचर हाउस ऑफ वैक्स थी। २८ मई, १९५३ से वॉल्ट डिजनी इंका.
एल.जी इलेक्ट्रॉनिक्स का त्रिआयामी दूरदर्शन उपकरण त्रिआयामी दूरदर्शन (अंग्रेज़ीःथ्री-डी टेलीविज़न) एक प्रकार का दूरदर्शन होता है, जिसमें प्रदर्शन की त्रिआयामी तकनीकों का प्रयोग किया जाता है, जैसेः स्टीरियोस्कोपिक कैप्चर, बहु-दृश्य कैप्चर या द्विआयामी गहरायी एवं एक त्रिआयामी पटल। त्रिआयामी पटल एक विशेष दर्शन युक्ति होती है, जो किसी कार्यक्रम का प्रोजेक्शन एक यथार्थ स्वरूपी त्रि-आयामी क्षेत्र की तरह करता है।। हिन्दुस्तान लाइव। १८ मार्च २०१० त्रिआयामी कार्यक्रम के धारावाहिक संयुक्त राज्य में १९९० के दशक के अंतिमदौर में लोकप्रिय रहे और दर्शकों में इन्होंने काफी लोकप्रियता अर्जित की। थ्रीडी तकनीक को एक उदाहरण के तौर पर समझा जा सकता है। एक कंप्यूटर माउस को देखते हुए मूलतः बाईं और दाईं आंख के दो अलग-अलग लैंस होते हैं जो माउस के भिन्न कोणों की पहचान करते हैं। दोनों लैंस यही संदेश अपने अपने तरीके से मस्तिष्क तक पहुंचाते हैं। मस्तिष्क उस छवि के लिये इमेज प्रोसेसर की तरह काम करता है, यानी दोनों लैंसों से पहुंचने वाली अलग अलग छवियों को मिलाकर एक कर के त्रिआयामी छवि का निर्माण करता है। सिद्धांत रूप में यह वही तरीका है जिसके आधार पर फ्यूजीफिल्म कंपनी का फाइनपिक्स त्रिआयामी कैमरा काम करता है। .
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दो संबंधोंः त्रिआयामी चलचित्र, त्रिआयामी दूरदर्शन। त्रिआयामी चलचित्र एक चलचित्र होता है, जिसकी छवियां आम चलचित्रों से कुछ भिन्न बनती हैं। चित्रों की छाया अंकित करने के लिए विशेष मोशन पिक्चर कैमरे का प्रयोग किया जाता है।। हिन्दुस्तान लाइव। बीस दिसम्बर दो हज़ार नौ त्रि-आयामी चलचित्र एक हज़ार आठ सौ नब्बे के दौरान भी हुआ करते थे, लेकिन उस समय के इन चलचित्रों को थिएटर पर दिखाया जाना काफी महंगा काम होता था। मुख्यतः एक हज़ार नौ सौ पचास से एक हज़ार नौ सौ अस्सी के अमेरिकी सिनेमा में ये फिल्में प्रमुखता से दिखने लगी। सैद्धांतिक त्रि-आयामी चलचित्र प्रस्तुत करने का आरंभिक तरीका एनाजिफ इमेज होता है। इन तरीकों को इसलिये प्रसिद्धि मिली, क्योंकि इनका निर्माण और प्रदर्शन सरल था। इसके अलावा, इकलिप्स मैथड, लेंटीकुलर और बैरियर स्क्रीन, इंटरफेरेंस फिल्टर प्रौद्योगिकी और ध्रुवीकरण प्रणाली इसकी प्रचलित तकनीक हुआ करती थी। मोशन पिक्चर का स्टीरियोस्कोपिक युग एक हज़ार आठ सौ नब्बे के दशक के अंतिम दौर में आरंभ हुआ जब ब्रिटिश फिल्मों के पुरोधा विलियम ग्रीन ने त्रि-आयामी प्रक्रिया का पेटेंट फाइल किया। फ्रेडरिक युजीन आइव्स ने स्टीरियो कैमरा रिग का पेटेंट एक हज़ार नौ सौ में कराया। इस कैमरे में दो लैंस लगाये जाते थे जो एक दूसरे से तीन-चौथाई इंच की दूरी पर होते थे। सत्ताईस सितंबर, एक हज़ार नौ सौ बाईस को पहली बार दर्शकों को लॉस एंजिल्स के एंबैसेडर थिएटर होटल में द पावर ऑफ लव का प्रदर्शन आयोजित किया गया था। सन एक हज़ार नौ सौ बावन में प्रथम रंगीन त्रिविम यानि कलर स्टीरियोस्कोपिक फीचर, वान डेविल बनाई गई। इसके लेखक, निर्माता और निर्देशक एम.एल.गुंजबर्ग थे। स्टीरियोस्कोपिक साउंड में बनी पहली थ्री-डी फीचर हाउस ऑफ वैक्स थी। अट्ठाईस मई, एक हज़ार नौ सौ तिरेपन से वॉल्ट डिजनी इंका. एल.जी इलेक्ट्रॉनिक्स का त्रिआयामी दूरदर्शन उपकरण त्रिआयामी दूरदर्शन एक प्रकार का दूरदर्शन होता है, जिसमें प्रदर्शन की त्रिआयामी तकनीकों का प्रयोग किया जाता है, जैसेः स्टीरियोस्कोपिक कैप्चर, बहु-दृश्य कैप्चर या द्विआयामी गहरायी एवं एक त्रिआयामी पटल। त्रिआयामी पटल एक विशेष दर्शन युक्ति होती है, जो किसी कार्यक्रम का प्रोजेक्शन एक यथार्थ स्वरूपी त्रि-आयामी क्षेत्र की तरह करता है।। हिन्दुस्तान लाइव। अट्ठारह मार्च दो हज़ार दस त्रिआयामी कार्यक्रम के धारावाहिक संयुक्त राज्य में एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक के अंतिमदौर में लोकप्रिय रहे और दर्शकों में इन्होंने काफी लोकप्रियता अर्जित की। थ्रीडी तकनीक को एक उदाहरण के तौर पर समझा जा सकता है। एक कंप्यूटर माउस को देखते हुए मूलतः बाईं और दाईं आंख के दो अलग-अलग लैंस होते हैं जो माउस के भिन्न कोणों की पहचान करते हैं। दोनों लैंस यही संदेश अपने अपने तरीके से मस्तिष्क तक पहुंचाते हैं। मस्तिष्क उस छवि के लिये इमेज प्रोसेसर की तरह काम करता है, यानी दोनों लैंसों से पहुंचने वाली अलग अलग छवियों को मिलाकर एक कर के त्रिआयामी छवि का निर्माण करता है। सिद्धांत रूप में यह वही तरीका है जिसके आधार पर फ्यूजीफिल्म कंपनी का फाइनपिक्स त्रिआयामी कैमरा काम करता है। .
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उत्तराखंड के सरकारी कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम सिस्टम शुरू हो गया है। मुख्य सचिव ने इसके आदेश जारी कर दिए है।
देहरादून, राज्य ब्यूरो। कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर सोशल डिस्टेंसिंग यानी लोगों को एकदूसरे के नजदीक जाने से बचाने की कवायद शुरू कर दी है। सचिवालय समेत सरकारी महकमों, निजी कार्यालयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, औद्योगिक संस्थानों के कार्य स्थलों पर कार्मिकों को घर से काम करने की अनुमति दी गई है। स्वास्थ्य, पुलिस, परिवहन, खाद्य आपूर्ति, बिजली जैसे आवश्यक सेवाओं से जुड़े महकमों में केवल जरूरी कार्य से जुड़े कार्मिकों को बुलाया जाएगा। मुख्य सचिव के ये निर्देश गुरुवार से अगले बुधवार यानी 25 मार्च तक लागू रहेंगे। निजी प्रतिष्ठानों, कार्यालयों में कार्मिकों से घर से ही काम कराने को प्राथमिकता देने के आदेश दिए गए हैं। साथ में कार्यस्थलों में कोरोना की रोकथाम को लेकर 13 सूत्रीय दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे से निपटने के उपायों को लेकर सरकारी मशीनरी बुधवार दिनभर सक्रिय रही। सबसे पहले सचिवालय प्रशासन अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सचिवालय में बड़ी संख्या में कार्मिकों के घर से ही काम करने, कर्मचारियों और आगंतुकों के सचिवालय में हफ्तेभर तक आवागमन बंद करने के आदेश जारी किए थे। बाद में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के नए आदेश के बाद उक्त आदेश को वापस लिया गया।
मुख्य सचिव ने सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों व विभागाध्यक्षों को जारी आदेश में कर्मचारियों से घर से ही काम कराने को कहा। अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या सचिव उन कार्मिकों को बुला सकेंगे, जिनकी जरूरत होगी। इसीतरह जिलाधिकारियों भी यह अधिकार होगा कि वह किसी भी विभाग के अधिकारी या कर्मचारी को उसके काम की आवश्यकता देखते हुए बुला सकेंगे। उक्त आदेश का पालन करने के लिए कार्मिक बाध्य होंगे।
चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण प्रभारी सचिव डॉ पंकज कुमार पांडेय ने भी सभी जिलाधिकारियों, श्रमायुक्त व उद्योग विभाग के निदेशक को आदेश जारी किए। इसमें निजी कार्यालयों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों से कार्मिकों से घर से ही काम कराने को प्राथमिकता देने को कहा गया है। कार्मिकों से शिफ्ट में काम कराने व प्रत्येक शिफ्ट में जरूरत के मुताबिक व कम कार्मिक बुलाने के निर्देश हैं।
कार्यस्थलों में बैठकों या समारोह का आयोजन स्थगित होगा। खांसी, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ के लक्षण वाले कर्मचारियों को कार्यस्थल पर न आने देने और उसे अवकाश स्वीकृत करने को कहा गया है। कार्यस्थलों में हाथ नहीं मिलाने, सेनेटाइज करने, खुले एवं असुरक्षित पदार्थों का सेवन बिल्कुल नहीं करने समेत 13 सूत्रीय निर्देशों का पालन करना होगा।
कोरोना का वायरस दुनियाभर में कहर बरपा रहा है। दून में भी एक व्यक्ति में कोरोना की पुष्टि होने के बाद दूनवासियों को भी खतरा बढ़ गया है। ऐेसे में लोग पूरी सतर्कता बरत रहे हैं। विभिन्न संस्थाएं आगे आकर लोगों को इससे बचाव में सहयोग कर रही हैं। मास्क और सैनिटाइजर बांटकर लोगों को खुद के बचाव के लिए प्रेरित किया जा रहा है। मंगलवार को कई जगह लोगों को मास्क और सैनिटाइजर बांटे गए और स्वच्छता के साथ खुद को सुरक्षित रखने को जागरूक किया गया।
मंडी समिति की ओर से निरंजनपुर स्थित मंडी परिसर में आढ़तियों और श्रमिकों को मास्क के साथ सेनिटाइजर बांटे गए। समिति के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने लोगों को कोरोना से बचाव को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि कोरोना से भयभीत होने की बजाय उसके बचाव के तरीकों को अपनाना चाहिए। मंडी सचिव विजय थपलियाल और निरीक्षण अजय डबराल ने भी लोगों को जागरूक किया। उधर, आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र आनंद और महासचिव आदेश चौहान ने भी आढ़तियों को जागरूक किया।
उमेश अग्रवाल फाउंडेशन की ओर से गांधीग्राम में लोगों को मास्क वितरित किए गए। फाउंडेशन के महासचिव सिद्धार्थ अग्रवाल ने बच्चों और महिलाओं को मास्क प्रदान करते हुए कहा कि कोरोना से सुरक्षा स्वयं करें।
उत्तरांचल प्रेस क्लब की ओर से 'कोरोना से मुकाबला' पर जागरूकता गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें मुख्य वक्ता आरोग्यधाम के एमडी डॉ. विपुल कंडवाल और सीएमआइ अस्पताल की डॉ. अंशिका जैन ने क्लब के सदस्यों को कोरोना से बचाव की बारीकियां बताईं। इस दौरान मास्क और सेनिटाइजर भी बांटे गए।
मंगलवार को क्लब में आयोजित गोष्ठी में डॉ. विपुल कंडवाल ने बताया कि कोरोना में हर किसी को मास्क जरूरी नहीं है। समय-समय पर साबुन से हाथ धोते रहें। साथ ही भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, खाने पर जरूर ध्यान दें और रोजाना व्यायाम करें। सीएमआइ की डॉ. अंशिका जैन ने बताया कि यदि किसी मरीज को कोरोना के लक्षण लग रहें हो तो अस्पताल आने से पहले इसकी सूचना अस्पताल को जरूर दें। मानवाधिकार और न्याय संगठन की अध्यक्ष मधु जैन ने क्लब को सैनिटाइजर उपलब्ध करवाए।
कोरोना के प्रति सतर्कता और जागरूकता को लेकर पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर सेवा दल ने लोगों को मास्क वितरित किए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मास्क लगाकर सुंदरकांड पाठ किया। मंगलवार को महंत रविंद्र पुरी महाराज के सानिध्य में सेवादल ने मंदिर परिसर में कोरोना की शांति के लिए सामूहिक सुंदरकांड पाठ किया। इस दौरान दिगंबर भागवत पुरी ने बताया कि मास्क लगाकर पाठ करने के बाद भक्तों को तकरीबन 500 मास्क बांटे गए।
मसूरी विधायक गणेश जोशी ने मंगलवार को लंढौर स्थित संयुक्त सिविल चिकित्सालय में कोरोना वायरस से बचाव के लिए रोगियों, तीमारदारों, चिकित्सकों तथा सपोर्टिंग स्टाफ को मास्क प्रदान किए।
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उत्तराखंड के सरकारी कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम सिस्टम शुरू हो गया है। मुख्य सचिव ने इसके आदेश जारी कर दिए है। देहरादून, राज्य ब्यूरो। कोरोना वायरस के खतरे से निपटने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर सोशल डिस्टेंसिंग यानी लोगों को एकदूसरे के नजदीक जाने से बचाने की कवायद शुरू कर दी है। सचिवालय समेत सरकारी महकमों, निजी कार्यालयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, औद्योगिक संस्थानों के कार्य स्थलों पर कार्मिकों को घर से काम करने की अनुमति दी गई है। स्वास्थ्य, पुलिस, परिवहन, खाद्य आपूर्ति, बिजली जैसे आवश्यक सेवाओं से जुड़े महकमों में केवल जरूरी कार्य से जुड़े कार्मिकों को बुलाया जाएगा। मुख्य सचिव के ये निर्देश गुरुवार से अगले बुधवार यानी पच्चीस मार्च तक लागू रहेंगे। निजी प्रतिष्ठानों, कार्यालयों में कार्मिकों से घर से ही काम कराने को प्राथमिकता देने के आदेश दिए गए हैं। साथ में कार्यस्थलों में कोरोना की रोकथाम को लेकर तेरह सूत्रीय दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे से निपटने के उपायों को लेकर सरकारी मशीनरी बुधवार दिनभर सक्रिय रही। सबसे पहले सचिवालय प्रशासन अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सचिवालय में बड़ी संख्या में कार्मिकों के घर से ही काम करने, कर्मचारियों और आगंतुकों के सचिवालय में हफ्तेभर तक आवागमन बंद करने के आदेश जारी किए थे। बाद में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के नए आदेश के बाद उक्त आदेश को वापस लिया गया। मुख्य सचिव ने सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों व विभागाध्यक्षों को जारी आदेश में कर्मचारियों से घर से ही काम कराने को कहा। अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या सचिव उन कार्मिकों को बुला सकेंगे, जिनकी जरूरत होगी। इसीतरह जिलाधिकारियों भी यह अधिकार होगा कि वह किसी भी विभाग के अधिकारी या कर्मचारी को उसके काम की आवश्यकता देखते हुए बुला सकेंगे। उक्त आदेश का पालन करने के लिए कार्मिक बाध्य होंगे। चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण प्रभारी सचिव डॉ पंकज कुमार पांडेय ने भी सभी जिलाधिकारियों, श्रमायुक्त व उद्योग विभाग के निदेशक को आदेश जारी किए। इसमें निजी कार्यालयों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों से कार्मिकों से घर से ही काम कराने को प्राथमिकता देने को कहा गया है। कार्मिकों से शिफ्ट में काम कराने व प्रत्येक शिफ्ट में जरूरत के मुताबिक व कम कार्मिक बुलाने के निर्देश हैं। कार्यस्थलों में बैठकों या समारोह का आयोजन स्थगित होगा। खांसी, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ के लक्षण वाले कर्मचारियों को कार्यस्थल पर न आने देने और उसे अवकाश स्वीकृत करने को कहा गया है। कार्यस्थलों में हाथ नहीं मिलाने, सेनेटाइज करने, खुले एवं असुरक्षित पदार्थों का सेवन बिल्कुल नहीं करने समेत तेरह सूत्रीय निर्देशों का पालन करना होगा। कोरोना का वायरस दुनियाभर में कहर बरपा रहा है। दून में भी एक व्यक्ति में कोरोना की पुष्टि होने के बाद दूनवासियों को भी खतरा बढ़ गया है। ऐेसे में लोग पूरी सतर्कता बरत रहे हैं। विभिन्न संस्थाएं आगे आकर लोगों को इससे बचाव में सहयोग कर रही हैं। मास्क और सैनिटाइजर बांटकर लोगों को खुद के बचाव के लिए प्रेरित किया जा रहा है। मंगलवार को कई जगह लोगों को मास्क और सैनिटाइजर बांटे गए और स्वच्छता के साथ खुद को सुरक्षित रखने को जागरूक किया गया। मंडी समिति की ओर से निरंजनपुर स्थित मंडी परिसर में आढ़तियों और श्रमिकों को मास्क के साथ सेनिटाइजर बांटे गए। समिति के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने लोगों को कोरोना से बचाव को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि कोरोना से भयभीत होने की बजाय उसके बचाव के तरीकों को अपनाना चाहिए। मंडी सचिव विजय थपलियाल और निरीक्षण अजय डबराल ने भी लोगों को जागरूक किया। उधर, आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र आनंद और महासचिव आदेश चौहान ने भी आढ़तियों को जागरूक किया। उमेश अग्रवाल फाउंडेशन की ओर से गांधीग्राम में लोगों को मास्क वितरित किए गए। फाउंडेशन के महासचिव सिद्धार्थ अग्रवाल ने बच्चों और महिलाओं को मास्क प्रदान करते हुए कहा कि कोरोना से सुरक्षा स्वयं करें। उत्तरांचल प्रेस क्लब की ओर से 'कोरोना से मुकाबला' पर जागरूकता गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें मुख्य वक्ता आरोग्यधाम के एमडी डॉ. विपुल कंडवाल और सीएमआइ अस्पताल की डॉ. अंशिका जैन ने क्लब के सदस्यों को कोरोना से बचाव की बारीकियां बताईं। इस दौरान मास्क और सेनिटाइजर भी बांटे गए। मंगलवार को क्लब में आयोजित गोष्ठी में डॉ. विपुल कंडवाल ने बताया कि कोरोना में हर किसी को मास्क जरूरी नहीं है। समय-समय पर साबुन से हाथ धोते रहें। साथ ही भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, खाने पर जरूर ध्यान दें और रोजाना व्यायाम करें। सीएमआइ की डॉ. अंशिका जैन ने बताया कि यदि किसी मरीज को कोरोना के लक्षण लग रहें हो तो अस्पताल आने से पहले इसकी सूचना अस्पताल को जरूर दें। मानवाधिकार और न्याय संगठन की अध्यक्ष मधु जैन ने क्लब को सैनिटाइजर उपलब्ध करवाए। कोरोना के प्रति सतर्कता और जागरूकता को लेकर पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर सेवा दल ने लोगों को मास्क वितरित किए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मास्क लगाकर सुंदरकांड पाठ किया। मंगलवार को महंत रविंद्र पुरी महाराज के सानिध्य में सेवादल ने मंदिर परिसर में कोरोना की शांति के लिए सामूहिक सुंदरकांड पाठ किया। इस दौरान दिगंबर भागवत पुरी ने बताया कि मास्क लगाकर पाठ करने के बाद भक्तों को तकरीबन पाँच सौ मास्क बांटे गए। मसूरी विधायक गणेश जोशी ने मंगलवार को लंढौर स्थित संयुक्त सिविल चिकित्सालय में कोरोना वायरस से बचाव के लिए रोगियों, तीमारदारों, चिकित्सकों तथा सपोर्टिंग स्टाफ को मास्क प्रदान किए।
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दिल्ली के उत्तम नगर में बाइक सवार बदमाशों ने रविवार आधी रात को एक कपड़ा कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी। घर वापस लौटते समय कारोबारी को रोककर गोली मारी। घटना का सीसीटीवी फुटेज आया सामने।
दिल्ली के उत्तम नगर में बेखौफ बदमाशों ने आधी रात को कपड़ा व्यापारी को गोली मार दी। दिल्ली साड़ी हाउस शोरूम के मालिक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान 32 साल के मोहित अरोड़ा के तौर पर हुई है। वे आधी रात को 12. 30 बजे अपने भाई के साथ स्कूटी पर दुकान से लौट रहे थे। इस दौरान विपरीत दिशा से आए दो बाइक सवार ने उन्हें रोका। फिर एक ने उनपर गोली चला दी। बिंदापुर पुलिस स्टेशन को फायरिंग की सूचना दी गई। इस घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। जिसमें आरोपी बाइक पर जाते हुए दिख रहे हैं। वारदात को अंजाम देने के बाद एक आरोपी पैदल भागते हुए दिख रहा है।
जानकारी के अनुसार उत्तम नगर के मानस कुंज में रहने वाले मोहित अरोड़ा पर बदमाशों ने आधी रात को फायरिंग कर दी। घटना के समय वे अपने भाई के साथ स्कूटी से घर जा रहे थे। तभी दो बाइक सवार और उन्हें रोका। एक ने उनपर गोली चला दी। घायल हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टर्स ने अरोड़ा को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने बिंदापुर थाने में आईपीसी की धारा 302/34 और आर्म्स एक्ट 25/27 के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं।
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दिल्ली के उत्तम नगर में बाइक सवार बदमाशों ने रविवार आधी रात को एक कपड़ा कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी। घर वापस लौटते समय कारोबारी को रोककर गोली मारी। घटना का सीसीटीवी फुटेज आया सामने। दिल्ली के उत्तम नगर में बेखौफ बदमाशों ने आधी रात को कपड़ा व्यापारी को गोली मार दी। दिल्ली साड़ी हाउस शोरूम के मालिक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान बत्तीस साल के मोहित अरोड़ा के तौर पर हुई है। वे आधी रात को बारह. तीस बजे अपने भाई के साथ स्कूटी पर दुकान से लौट रहे थे। इस दौरान विपरीत दिशा से आए दो बाइक सवार ने उन्हें रोका। फिर एक ने उनपर गोली चला दी। बिंदापुर पुलिस स्टेशन को फायरिंग की सूचना दी गई। इस घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। जिसमें आरोपी बाइक पर जाते हुए दिख रहे हैं। वारदात को अंजाम देने के बाद एक आरोपी पैदल भागते हुए दिख रहा है। जानकारी के अनुसार उत्तम नगर के मानस कुंज में रहने वाले मोहित अरोड़ा पर बदमाशों ने आधी रात को फायरिंग कर दी। घटना के समय वे अपने भाई के साथ स्कूटी से घर जा रहे थे। तभी दो बाइक सवार और उन्हें रोका। एक ने उनपर गोली चला दी। घायल हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टर्स ने अरोड़ा को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने बिंदापुर थाने में आईपीसी की धारा तीन सौ दो/चौंतीस और आर्म्स एक्ट पच्चीस/सत्ताईस के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं।
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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी में शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद राज्य आन्दोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मसूरी में शहीद हुए राज्य आन्दोलनकारियों के परिवारजनों को सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि राज्य आन्दोलनकारियों के बलिदान के कारण ही हमें उत्तराखण्ड राज्य मिला। उत्तराखण्ड राज्य आन्दोनकारियों ने जिस उद्देश्य से अलग राज्य की मांग की थी, उसके अनुरूप ही राज्य को आगे बढ़ाने के लिए सरकार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्य बनाने के लिए 10 साल का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। 2025 में उत्तराखण्ड राज्य स्थापना की रजत जयंती मनायेगा, तब तक सभी विभागों को लक्ष्य दिया गया है।
पूरी खबर देखने के लिए वीडियो पर क्लिक करें।
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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी में शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद राज्य आन्दोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मसूरी में शहीद हुए राज्य आन्दोलनकारियों के परिवारजनों को सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि राज्य आन्दोलनकारियों के बलिदान के कारण ही हमें उत्तराखण्ड राज्य मिला। उत्तराखण्ड राज्य आन्दोनकारियों ने जिस उद्देश्य से अलग राज्य की मांग की थी, उसके अनुरूप ही राज्य को आगे बढ़ाने के लिए सरकार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्य बनाने के लिए दस साल का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। दो हज़ार पच्चीस में उत्तराखण्ड राज्य स्थापना की रजत जयंती मनायेगा, तब तक सभी विभागों को लक्ष्य दिया गया है। पूरी खबर देखने के लिए वीडियो पर क्लिक करें।
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नई दिल्ली, भारतीय टीम ने ब्लाइंड वल्र्ड कप 2017 हासिल कर सभी भारतीय क्रिकेट फैंस का दिल जीत लिया है। इस जीत के बाद इस टीम के लिए एक बड़ी खुशखबरी हैं। इस बड़ी जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी दृष्टीहीन भारतीय टीम से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद बीसीसीआई ने भारतीय टीम को 1 करोड़ रुपए की इनामी राशि देना तय किया है।
टीम इंडिया को 1 करोड़ रुपए की इनामी राशि देने का निर्णय बीसीसीआई की प्रशासकीय कमेटी ने किया है। इस कमेटी को सुप्रीम कोर्ट ने तय किया था। जिसमें विनोद राय, रामचन्द्र गुहा, डायना इडुल्जी और विक्रम लिमाहे शामिल थे। यह इनामी राशि क्रिकेट एसोशियेशन फोर द ब्लाइंड इन इंडिया को दी जाएगी।
भारतीय टीम के कप्तान अजय रेड्डी ने कहा कि बीसीसीआई के इस फैसले से खुश हूं और उनका शुक्र गुजार हूं। अब हमारी टीम को आर्थिक संकट से नहीं जूझाना होगा। टीम के सभी खिलाड़ी तनाव मुक्त हो कर खेलेंगे। हम पिछले कई वर्षों से इस पल का इंतजार कर रहे थे। बीसीसीआई के इस फैसले से टीम काफी बदलाव आएंगे।
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नई दिल्ली, भारतीय टीम ने ब्लाइंड वल्र्ड कप दो हज़ार सत्रह हासिल कर सभी भारतीय क्रिकेट फैंस का दिल जीत लिया है। इस जीत के बाद इस टीम के लिए एक बड़ी खुशखबरी हैं। इस बड़ी जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी दृष्टीहीन भारतीय टीम से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद बीसीसीआई ने भारतीय टीम को एक करोड़ रुपए की इनामी राशि देना तय किया है। टीम इंडिया को एक करोड़ रुपए की इनामी राशि देने का निर्णय बीसीसीआई की प्रशासकीय कमेटी ने किया है। इस कमेटी को सुप्रीम कोर्ट ने तय किया था। जिसमें विनोद राय, रामचन्द्र गुहा, डायना इडुल्जी और विक्रम लिमाहे शामिल थे। यह इनामी राशि क्रिकेट एसोशियेशन फोर द ब्लाइंड इन इंडिया को दी जाएगी। भारतीय टीम के कप्तान अजय रेड्डी ने कहा कि बीसीसीआई के इस फैसले से खुश हूं और उनका शुक्र गुजार हूं। अब हमारी टीम को आर्थिक संकट से नहीं जूझाना होगा। टीम के सभी खिलाड़ी तनाव मुक्त हो कर खेलेंगे। हम पिछले कई वर्षों से इस पल का इंतजार कर रहे थे। बीसीसीआई के इस फैसले से टीम काफी बदलाव आएंगे।
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बॉलीवुड में सलमान खान (Salman Khan) की इमेज दबंग वाली है. यहाँ लोग भाईजान से पंगा लेने से बचते हैं. फिल्मों की बात करें तो ऑनस्क्रीन भी सल्लू भाई गुंडों की धड़ाधड़ पिटाई करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रियल लाइफ में सलमान अपने फैंस से ही लात - घुसे खा चुके हैं. ये मार भी उन्हें तब पड़ी थी जब वे अपने छोटे भाई सोहेल खान (Sohail Khan) को हीरो बन बचाने गए थे. लेकिन रियल लाइफ के इस एक्शन में दोनों भाइयों की जमकर पिटाई हुई थी. आइए इस मामले को विस्तार से जानते हैं.
जैसा की आप सभी जानते हैं इन दिनों लॉकडाउन का माहोल है. वैसे तो सरकार ने अनलॉक स्टार्ट कर दिया है लेकिन फिर भी मार्केट में पहले जैसी आजादी नहीं है. उधर हमारे सलमान भाई लॉकडाउन की शुरुआत से ही अपने पनवेल स्थित फॉर्महाउस में है. अब तो लॉकडाउन में आने जाने को लेकर ढील भी मिल गई हैं लेकिन सलमान भाई का मन फॉर्महाउस में ही लगा हुआ है. यहाँ रहकर वे 'भाई भाई' और 'प्यार करोना' जैसे गाने भी रिलीज कर रहे चुके हैं. उधर उनके छोटे भाई सोहेल भी लॉकडाउन में बिना मास्क के बाइक रीडिंग करते दिखे थे. आज हम आपको इन दोनों भाइयों से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा बताने जा रहे हैं.
कुछ सालों पहले सलमान और सोहेल कपिल शर्मा (Kapil Sharma) के शो पर गए थे. यहाँ दोनों ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी बातों पर चर्चा की थी. इस दौरान सोहेल ने एक बड़ा ही मजेदार किस्सा सुनाया था. उन्होंने बताया था कि मैं बैंडस्टैंड से लौट रहा था तभी घर के नीचे कुछ फैंस मुझे गालिया देने लगे. कुछ फैंस ऐसा अटेंशन पाने के लिए करते हैं. तब मैंने सोचा कि चलो पंगा ले लेता हूँ, एक ही तो खड़ा है.
सलमान आए बचाने लेकिन. .
अभी तक लॉकडाउन में फिल्म शूटिंग की इजाजत नहीं थी, लेकिन अनलॉक में राज्य सरकार ने इसकी परमिशन दे दी है. ऐसे में सलमान भाई जल्द ही अपनी आगामी तीन फिल्मों राधे- योर मोस्ट वांटेड भाई, कभी ईद कभी दिवाली और गन्स ऑफ नॉर्थ लाइन में लग जाएंगे. इसमें राधे की शूटिंग तो लगभग पूरी हो ही चुकी है. बस थोड़ा सा काम बाकी है. इसलिए भाईजान पहले इस फिल्म को ख़त्म करेंगे.
प्रभुदेवा द्वारा निर्देशित फिल्म 'राधे- योर मोस्ट वांटेड भाई' पहले ईद पर रिलीज होने वाली थी लेकिन कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते इसे आगे के लिए टालना पड़ गया. इस फिल्म में सलमान के साथ दिशा पाटनी मुख्य भूमिका में नजर आएंगी.
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बॉलीवुड में सलमान खान की इमेज दबंग वाली है. यहाँ लोग भाईजान से पंगा लेने से बचते हैं. फिल्मों की बात करें तो ऑनस्क्रीन भी सल्लू भाई गुंडों की धड़ाधड़ पिटाई करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रियल लाइफ में सलमान अपने फैंस से ही लात - घुसे खा चुके हैं. ये मार भी उन्हें तब पड़ी थी जब वे अपने छोटे भाई सोहेल खान को हीरो बन बचाने गए थे. लेकिन रियल लाइफ के इस एक्शन में दोनों भाइयों की जमकर पिटाई हुई थी. आइए इस मामले को विस्तार से जानते हैं. जैसा की आप सभी जानते हैं इन दिनों लॉकडाउन का माहोल है. वैसे तो सरकार ने अनलॉक स्टार्ट कर दिया है लेकिन फिर भी मार्केट में पहले जैसी आजादी नहीं है. उधर हमारे सलमान भाई लॉकडाउन की शुरुआत से ही अपने पनवेल स्थित फॉर्महाउस में है. अब तो लॉकडाउन में आने जाने को लेकर ढील भी मिल गई हैं लेकिन सलमान भाई का मन फॉर्महाउस में ही लगा हुआ है. यहाँ रहकर वे 'भाई भाई' और 'प्यार करोना' जैसे गाने भी रिलीज कर रहे चुके हैं. उधर उनके छोटे भाई सोहेल भी लॉकडाउन में बिना मास्क के बाइक रीडिंग करते दिखे थे. आज हम आपको इन दोनों भाइयों से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा बताने जा रहे हैं. कुछ सालों पहले सलमान और सोहेल कपिल शर्मा के शो पर गए थे. यहाँ दोनों ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी बातों पर चर्चा की थी. इस दौरान सोहेल ने एक बड़ा ही मजेदार किस्सा सुनाया था. उन्होंने बताया था कि मैं बैंडस्टैंड से लौट रहा था तभी घर के नीचे कुछ फैंस मुझे गालिया देने लगे. कुछ फैंस ऐसा अटेंशन पाने के लिए करते हैं. तब मैंने सोचा कि चलो पंगा ले लेता हूँ, एक ही तो खड़ा है. सलमान आए बचाने लेकिन. . अभी तक लॉकडाउन में फिल्म शूटिंग की इजाजत नहीं थी, लेकिन अनलॉक में राज्य सरकार ने इसकी परमिशन दे दी है. ऐसे में सलमान भाई जल्द ही अपनी आगामी तीन फिल्मों राधे- योर मोस्ट वांटेड भाई, कभी ईद कभी दिवाली और गन्स ऑफ नॉर्थ लाइन में लग जाएंगे. इसमें राधे की शूटिंग तो लगभग पूरी हो ही चुकी है. बस थोड़ा सा काम बाकी है. इसलिए भाईजान पहले इस फिल्म को ख़त्म करेंगे. प्रभुदेवा द्वारा निर्देशित फिल्म 'राधे- योर मोस्ट वांटेड भाई' पहले ईद पर रिलीज होने वाली थी लेकिन कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते इसे आगे के लिए टालना पड़ गया. इस फिल्म में सलमान के साथ दिशा पाटनी मुख्य भूमिका में नजर आएंगी.
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नई दिल्लीः विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) भारत में पीएचडी अनुसंधान की गुणवत्ता को लेकर चिंतित है, और उसकी चिंता की एक बड़ी वजह भी है.
पीएचडी या डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी शैक्षणिक योग्यता के उच्चतम स्तर की प्रतीक है, और इसका मकसद है दिचलस्पी या अध्ययन के क्षेत्र में नई अंतर्दृष्टि हासिल करने में सहायता के लिए मौलिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है.
2010 से 2017 के बीच भारतीय विश्वविद्यालयों में पीएचडी के विषयों - मानविकी और विशुद्ध विज्ञान - की दिप्रिंट की पड़ताल से पता चलता है कि ये अक्सर बिना आनुभविक अध्ययन वाले अतिसैद्धांतिक विषय होते हैं, या फिर समकालीन उपयोगिता से परे ऐतिहासिक विषय.
उपरोक्त अवधि में पीएचडी कार्यक्रमों में दाखिले में 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी को देखते हुए, यूजीसी ने गत एक दशक में हुए शोधों की गुणवत्ता के आकलन के लिए छह महीने के अध्ययन के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं.
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.
इसी तरह इतिहास श्रेणी में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के जीवन, सामाजिक एवं राजनीतिक आंदोलन और उनमें महिलाओं की भूमिका, धार्मिक सुधार, वास्तुकला और पुरातत्व शास्त्र, और जिलों और उनकी महत्ता के सांस्कृतिक अध्ययन जैसे असंगत और सतही विषय शामिल रहे हैं. इनमें से कुछ विषय हैंः 'दारा शिकोह का जीवन और कार्य', 'अमरेली नगरपालिका का इतिहास', 'गुजरात में आदिवासी मेलों का अध्ययन' और 'कर्नाटक में प्रजनन के देवताओं का अध्ययन'.
लोक कथाओं के अंतर्गत एक अध्ययन 'रंगोली की कला और इसकी संस्कृति' पर केंद्रित था. हिंदी साहित्य के अंतर्गत, 'हिंदी साहित्य में लोटे का महत्व' को कई लोगों ने अपनी पीएचडी का विषय चुना है- कुछ ने काव्य में इस बर्तन के महत्व पर फोकस किया है, जबकि कुछ अन्य ने गद्य रचनाओं में इसकी भूमिका पर विचार किया है.
मणिपुर में 2010 में राजनीति विज्ञान के तहत 'मणिपुर में राजनीति' और 'मणिपुर के दल' जैसे व्यापक मुद्दों को शोध का विषय बनाया गया. जबकि 2015 में, बहुतों के लिए कर्नाटक लोकायुक्त पीएचडी का विषय रहा था. ओडिशा में कई छात्रों ने राज्य में जिलाधिकारियों की भूमिका पर रिसर्च किए हैं.
जबकि इसी अवधि में, तुलना के लिए, अमेरिका के ब्राउन विश्वविद्यालय में शोध के विषयों में 'परस्पर संबद्धः अधिक हरित विश्व के लिए धारणीयता की संस्कृति' और 'विरोध के ज़रिए समर्थन जुटानाः ट्रंप के अमेरिका और किर्चनर के अर्जेंटीना में लोकप्रियतावादी पहचान का निर्माण' शामिल रहे हैं, जो कि सामयिक संदर्भों में प्रासंगिक हैं.
इस समस्या का एक सांस्थानिक निहितार्थ है.
अंग्रेज़ी भाषा की बात करें तो भारत के अधिकतर शोधकर्ता अपने अध्ययनों को विलियम शेक्सपियर, जॉर्ज ऑरवेल, अमिताव घोष, विक्रम सेठ, खुशवंत सिंह, रवींद्रनाथ टैगोर और सलमान रुश्दी जैसे प्रसिद्ध साहित्यकारों के कार्यों पर केंद्रित रखते हैं. उदाहरण के लिए, 'अमिताव घोष के उपन्यासः उपन्यासकार और मानव विज्ञानी' और 'अमिताव घोष के उपन्यासों का आलोचनात्मक अध्ययन' जैसे पीएचडी शोध हाल के वर्षों में बारंबार किए गए हैं.
बिजनेस मैनेजमेंट, कॉमर्स, खेल और अर्थशास्त्र के क्षेत्रों में अधिकतर अध्ययन सर्वे पर आधारित होते हैं. नई सूचनाएं एकत्रित करने की बजाय अनुसंधानकर्ता पूर्व में हो चुके सर्वेक्षणों को अपने शोध-प्रबंधों का विषय बनाते हैं. उदाहरण के लिए, अर्थशास्त्र की पीएचडी का एक विषय था 'जूनागढ़ जिले के हीरा उद्योग का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन', जबकि कॉमर्स का एक विषय था, 'आंध्र प्रदेश के दवा उद्योग के बिक्री विभाग के कर्मचारियों में नौकरी से संतुष्टि का अध्ययन'.
भूगोल के तहत अधिकांश शोध-प्रबंध छोटी जगहों के कम मान्यता वाले विश्वविद्यालयों के छात्रों ने लिखे हैं. विश्लेषण आधारित इन अनुसंधानों में कृषि, पर्यावरण, जनसंख्या, संसाधन, शहरी निर्धनता, पर्यटन और विभिन्न राज्यों में फसलों का प्रचलन जैसे विषय शामिल रहे हैं.
देश में पीएचडी कार्यक्रमों के तहत जमा सभी शोध-प्रबंधों का रिकॉर्ड रखने वाले संगठन भारतीय विश्वविद्यालय एसोसिएशन के पूर्व महासचिव फुरकान क़मर ने दिप्रिंट को बताया कि शोध के विषय अकेले छात्र या गाइड द्वारा ही तय नहीं किए जाते, बल्कि उसका निर्णय एक एक सख्त प्रक्रिया के ज़रिए होता है, जिसमें कई लोगों के विचारों पर गौर किया जाता है.
प्रस्तावित विषय सबसे पहले विश्वविद्यालय विशेष के अनुसंधान बोर्ड और अध्ययन बोर्ड में जाता है, फिर उसे स्वीकृति के लिए संबंधित संस्थान के संकाय बोर्ड और संकाय समिति के पास भेजा जाता है. यह फिर अकादमिक परिषद में जाता है, जिसमें शिक्षक और विशेषज्ञ शामिल होते हैं. इस पूरी प्रक्रिया के आखिर में जाकर पीएचडी के विषय को स्वीकृति दी जाती है और उम्मीदवार शोध का काम करना शुरू कर देता है.
क़मर सवाल करते हैं, 'पीएचडी के विषय चुनने की प्रक्रिया बहुत ही सख्त है... यदि इससे पीएचडी की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं होती है, तो किससे होगी?
विशेषज्ञ विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे, और उद्योग-अकादमिक भागीदारी के अभाव की ओर इशारा करते हैं. उनका कहना है कि नए विचारों को सामने नहीं लाया जाता है और ज्यादातर लोग उन मुद्दों पर शोध किए जाते हैं जिनमें कि कोई दिलचस्पी नहीं रखता.
राव के अनुसार, दूसरे पायदान के ऐसे संस्थानों में अक्सर शिक्षकों को नवीनतम प्रौद्योगिकियों की जानकारी नहीं रहती है, जिसका असर अनुसंधान की गुणवत्ता पर पड़ता है.
छोटे शहरों में लोकप्रिय?
पीएचडी हासिल करने का चलन मेरठ, राजकोट, पाटन, भागलपुर, शिमला, रोहतक और सागर जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में ज़्यादा नज़र आता है.
छोटे शहरों के छात्र अपनी थीसिस क्षेत्रीय भाषाओं में भी जमा करा सकते हैं, जिसका कि उन्हें फायदा मिलता है.
शुरुआती अध्ययन के बाद भारत से बाहर विदेशों में चले गए विशेषज्ञों की भारत में अनुसंधान की गुणवत्ता पर मिश्रित राय है.
हालांकि थचिल ये भी मानते हैं कि विगत छह वर्षों के भीतर पीएचडी कार्यक्रमों में दाखिले में 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी मानकों में गिरावट के बगैर संभव नहीं लगती. उन्होंने कहा कि सख्त निर्देशन, अच्छे पाठ्यक्रम और पाठ्य सामग्री और बौद्धिक और वित्तीय समर्थन के बिना रातों-रात उच्च गुणवत्ता का अनुसंधान संभव नहीं है.
अमेरिका में अनुसंधानरत एक पीएचडी शोधार्थी की राय में भारत की शिक्षा प्रणाली गुणवत्ता वाले अनुसंधान को बढ़ावा देने के अनुकूल नहीं है.
(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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नई दिल्लीः विश्वविद्यालय अनुदान आयोग भारत में पीएचडी अनुसंधान की गुणवत्ता को लेकर चिंतित है, और उसकी चिंता की एक बड़ी वजह भी है. पीएचडी या डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी शैक्षणिक योग्यता के उच्चतम स्तर की प्रतीक है, और इसका मकसद है दिचलस्पी या अध्ययन के क्षेत्र में नई अंतर्दृष्टि हासिल करने में सहायता के लिए मौलिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है. दो हज़ार दस से दो हज़ार सत्रह के बीच भारतीय विश्वविद्यालयों में पीएचडी के विषयों - मानविकी और विशुद्ध विज्ञान - की दिप्रिंट की पड़ताल से पता चलता है कि ये अक्सर बिना आनुभविक अध्ययन वाले अतिसैद्धांतिक विषय होते हैं, या फिर समकालीन उपयोगिता से परे ऐतिहासिक विषय. उपरोक्त अवधि में पीएचडी कार्यक्रमों में दाखिले में पचास प्रतिशत की बढ़ोत्तरी को देखते हुए, यूजीसी ने गत एक दशक में हुए शोधों की गुणवत्ता के आकलन के लिए छह महीने के अध्ययन के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. इसी तरह इतिहास श्रेणी में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के जीवन, सामाजिक एवं राजनीतिक आंदोलन और उनमें महिलाओं की भूमिका, धार्मिक सुधार, वास्तुकला और पुरातत्व शास्त्र, और जिलों और उनकी महत्ता के सांस्कृतिक अध्ययन जैसे असंगत और सतही विषय शामिल रहे हैं. इनमें से कुछ विषय हैंः 'दारा शिकोह का जीवन और कार्य', 'अमरेली नगरपालिका का इतिहास', 'गुजरात में आदिवासी मेलों का अध्ययन' और 'कर्नाटक में प्रजनन के देवताओं का अध्ययन'. लोक कथाओं के अंतर्गत एक अध्ययन 'रंगोली की कला और इसकी संस्कृति' पर केंद्रित था. हिंदी साहित्य के अंतर्गत, 'हिंदी साहित्य में लोटे का महत्व' को कई लोगों ने अपनी पीएचडी का विषय चुना है- कुछ ने काव्य में इस बर्तन के महत्व पर फोकस किया है, जबकि कुछ अन्य ने गद्य रचनाओं में इसकी भूमिका पर विचार किया है. मणिपुर में दो हज़ार दस में राजनीति विज्ञान के तहत 'मणिपुर में राजनीति' और 'मणिपुर के दल' जैसे व्यापक मुद्दों को शोध का विषय बनाया गया. जबकि दो हज़ार पंद्रह में, बहुतों के लिए कर्नाटक लोकायुक्त पीएचडी का विषय रहा था. ओडिशा में कई छात्रों ने राज्य में जिलाधिकारियों की भूमिका पर रिसर्च किए हैं. जबकि इसी अवधि में, तुलना के लिए, अमेरिका के ब्राउन विश्वविद्यालय में शोध के विषयों में 'परस्पर संबद्धः अधिक हरित विश्व के लिए धारणीयता की संस्कृति' और 'विरोध के ज़रिए समर्थन जुटानाः ट्रंप के अमेरिका और किर्चनर के अर्जेंटीना में लोकप्रियतावादी पहचान का निर्माण' शामिल रहे हैं, जो कि सामयिक संदर्भों में प्रासंगिक हैं. इस समस्या का एक सांस्थानिक निहितार्थ है. अंग्रेज़ी भाषा की बात करें तो भारत के अधिकतर शोधकर्ता अपने अध्ययनों को विलियम शेक्सपियर, जॉर्ज ऑरवेल, अमिताव घोष, विक्रम सेठ, खुशवंत सिंह, रवींद्रनाथ टैगोर और सलमान रुश्दी जैसे प्रसिद्ध साहित्यकारों के कार्यों पर केंद्रित रखते हैं. उदाहरण के लिए, 'अमिताव घोष के उपन्यासः उपन्यासकार और मानव विज्ञानी' और 'अमिताव घोष के उपन्यासों का आलोचनात्मक अध्ययन' जैसे पीएचडी शोध हाल के वर्षों में बारंबार किए गए हैं. बिजनेस मैनेजमेंट, कॉमर्स, खेल और अर्थशास्त्र के क्षेत्रों में अधिकतर अध्ययन सर्वे पर आधारित होते हैं. नई सूचनाएं एकत्रित करने की बजाय अनुसंधानकर्ता पूर्व में हो चुके सर्वेक्षणों को अपने शोध-प्रबंधों का विषय बनाते हैं. उदाहरण के लिए, अर्थशास्त्र की पीएचडी का एक विषय था 'जूनागढ़ जिले के हीरा उद्योग का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन', जबकि कॉमर्स का एक विषय था, 'आंध्र प्रदेश के दवा उद्योग के बिक्री विभाग के कर्मचारियों में नौकरी से संतुष्टि का अध्ययन'. भूगोल के तहत अधिकांश शोध-प्रबंध छोटी जगहों के कम मान्यता वाले विश्वविद्यालयों के छात्रों ने लिखे हैं. विश्लेषण आधारित इन अनुसंधानों में कृषि, पर्यावरण, जनसंख्या, संसाधन, शहरी निर्धनता, पर्यटन और विभिन्न राज्यों में फसलों का प्रचलन जैसे विषय शामिल रहे हैं. देश में पीएचडी कार्यक्रमों के तहत जमा सभी शोध-प्रबंधों का रिकॉर्ड रखने वाले संगठन भारतीय विश्वविद्यालय एसोसिएशन के पूर्व महासचिव फुरकान क़मर ने दिप्रिंट को बताया कि शोध के विषय अकेले छात्र या गाइड द्वारा ही तय नहीं किए जाते, बल्कि उसका निर्णय एक एक सख्त प्रक्रिया के ज़रिए होता है, जिसमें कई लोगों के विचारों पर गौर किया जाता है. प्रस्तावित विषय सबसे पहले विश्वविद्यालय विशेष के अनुसंधान बोर्ड और अध्ययन बोर्ड में जाता है, फिर उसे स्वीकृति के लिए संबंधित संस्थान के संकाय बोर्ड और संकाय समिति के पास भेजा जाता है. यह फिर अकादमिक परिषद में जाता है, जिसमें शिक्षक और विशेषज्ञ शामिल होते हैं. इस पूरी प्रक्रिया के आखिर में जाकर पीएचडी के विषय को स्वीकृति दी जाती है और उम्मीदवार शोध का काम करना शुरू कर देता है. क़मर सवाल करते हैं, 'पीएचडी के विषय चुनने की प्रक्रिया बहुत ही सख्त है... यदि इससे पीएचडी की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं होती है, तो किससे होगी? विशेषज्ञ विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे, और उद्योग-अकादमिक भागीदारी के अभाव की ओर इशारा करते हैं. उनका कहना है कि नए विचारों को सामने नहीं लाया जाता है और ज्यादातर लोग उन मुद्दों पर शोध किए जाते हैं जिनमें कि कोई दिलचस्पी नहीं रखता. राव के अनुसार, दूसरे पायदान के ऐसे संस्थानों में अक्सर शिक्षकों को नवीनतम प्रौद्योगिकियों की जानकारी नहीं रहती है, जिसका असर अनुसंधान की गुणवत्ता पर पड़ता है. छोटे शहरों में लोकप्रिय? पीएचडी हासिल करने का चलन मेरठ, राजकोट, पाटन, भागलपुर, शिमला, रोहतक और सागर जैसे टियर-दो और टियर-तीन शहरों में ज़्यादा नज़र आता है. छोटे शहरों के छात्र अपनी थीसिस क्षेत्रीय भाषाओं में भी जमा करा सकते हैं, जिसका कि उन्हें फायदा मिलता है. शुरुआती अध्ययन के बाद भारत से बाहर विदेशों में चले गए विशेषज्ञों की भारत में अनुसंधान की गुणवत्ता पर मिश्रित राय है. हालांकि थचिल ये भी मानते हैं कि विगत छह वर्षों के भीतर पीएचडी कार्यक्रमों में दाखिले में पचास प्रतिशत की बढ़ोत्तरी मानकों में गिरावट के बगैर संभव नहीं लगती. उन्होंने कहा कि सख्त निर्देशन, अच्छे पाठ्यक्रम और पाठ्य सामग्री और बौद्धिक और वित्तीय समर्थन के बिना रातों-रात उच्च गुणवत्ता का अनुसंधान संभव नहीं है. अमेरिका में अनुसंधानरत एक पीएचडी शोधार्थी की राय में भारत की शिक्षा प्रणाली गुणवत्ता वाले अनुसंधान को बढ़ावा देने के अनुकूल नहीं है.
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भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक सौरव गांगुली बुधवार को बीसीसीआई के 39वें अध्यक्ष बन गए, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति का 30 महीने से चला आ रहा शासन खत्म हो गया। गांगुली को भारतीय क्रिकेट का एक बड़ा सुधारक कहा जाता है,0 उनके पास टैलेंट को पहचानने की गजब की क्षमता है।
युवाओं पर हमेशा भरोसा जताने वाले कप्तान अब बीसीआई के बॉस बन चुके हैं। गांगुली जोशीले कप्तान थे, टीम के खिलाड़ियों पर कोई दबाव नहीं डालते, उन्हें पता था कि किन हालातों पर कौन से खिलाड़ी पर दाव लगाना है। तभी तो हरभजन के लिए चयनकर्ताओं से भिड़ गए। इन खूबियों की बदलौत गांगुली ने टीम इंडिया को विश्व क्रिकेट में शिखर तक पहुंचाया और भारतीय क्रिकेट के सफल कप्तान के साथ 'दादा' बन गए। ऐसे में आइए देखते हैं दादा के एक सुनहरे सफर को, जब दादा ने मैदान पर अपनी दादगिरी दिखाई।
बीसीसीई में गांगुली का चुनाव भारतीय क्रिकेट में एक नया मोड़ लाने का संकेत दे रहा है। ऐसा इसलिए लग रहा है, क्योंकि जब सौरव गांगुली ने साल 2000 में भारतीय क्रिकेट टीम की कमान संभालते ही टीम की सुरत बदलकर रख दी थी। सौरव के टीम की कप्तानी उस समय मिली थी, जब भारतीय क्रिकेट संकट के दौर से गुजर रहा था। कई खिलाड़ियों पर मैच फिक्सिंग के आरोप लगे थे। इस समय दादा ने टीम की कमान संभाली और भारतीय क्रिकेट को नए सफर के लिए तैयार कर जीत की पटरी पर दौड़ा दिया।
सौरव गांगुली ने एक कप्तान के रूप में बेहतरीन शुरुआत की, उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत को पांच मैच की एक दिवसीय श्रृंखला में जीत दिलाई। दक्षिण अफ्रीका में 2003 में खेले गए विश्व कप में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा। सौरव ने युवा खिलाड़ियों से भरी टीम को अपने आक्रामक फैसलों से वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा दिया। हालांकि फाइनल में भारत को ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार झेलनी पड़ी। गांगुली के लिए व्यक्तिगत रूप से यह एक सफल टूर्नामेंट था, जिसमें उन्होंने 58. 12 के औसत से 465 रन बनाए और तीन शतक जड़े।
गांगुली की कप्तानी में भारत विदेशी जमीन पर भी अपने विरोधियों को कड़ी टक्कर देने में सफल रहा। इससे पहले भारतीय टीम को विदेशी दौरे के लिए अच्छी टीम नहीं माना जाता था, लेकिन गांगुली ने अपनी आक्रामक कप्तानी से भारतीय क्रिकेट के इतिहास को बदल दिया। 2002 नेटवेस्ट सीरीज गांगुली की कप्तानी में खेला गया और टीम इंडिया ने अंग्रेजी जमीन पर इंग्लैंड को हराकर तिरंगा लहरा दिया और दादा ने लॉर्ड्स की बालकनी से अपनी टी-शर्ट को हवा उड़ा दिया। भारत का 2003-04 का ऑस्ट्रेलिया दौरा काफी सफल रहा। चार टेस्ट मुकाबलों की श्रृंखला 1-1 से ड्रॉ रही और भारत ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी पर अपना कब्जा बरकरार रखा।
गांगुली ने युवा खिलाड़ियों में विश्वास पैदा किया। उन्होंने खिलाड़ियों को दबाव में भी डटकर खेलना सिखाया और स्लेजिंग का जवाब स्लेजिंग से ही देने को कहा। गांगुली हमेशा से ही टीम के साथियों का साथ देते थे, जिससे खिलाड़ियों को मैदान पर आक्रामक होकर खेलने की आजादी मिलती थी। यही कारण था कि भारत घर और बाहर दोनों ही जगह एक सफल टीम के रूप में उभरी। दादा ने जहीर खान, युवराज सिंह, हरभजन सिंह, वीरेंद्र सहवाग और एम एस धोनी जैसे स्टार खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचाना और टीम में मौके दिए।
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भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक सौरव गांगुली बुधवार को बीसीसीआई के उनतालीसवें अध्यक्ष बन गए, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति का तीस महीने से चला आ रहा शासन खत्म हो गया। गांगुली को भारतीय क्रिकेट का एक बड़ा सुधारक कहा जाता है,शून्य उनके पास टैलेंट को पहचानने की गजब की क्षमता है। युवाओं पर हमेशा भरोसा जताने वाले कप्तान अब बीसीआई के बॉस बन चुके हैं। गांगुली जोशीले कप्तान थे, टीम के खिलाड़ियों पर कोई दबाव नहीं डालते, उन्हें पता था कि किन हालातों पर कौन से खिलाड़ी पर दाव लगाना है। तभी तो हरभजन के लिए चयनकर्ताओं से भिड़ गए। इन खूबियों की बदलौत गांगुली ने टीम इंडिया को विश्व क्रिकेट में शिखर तक पहुंचाया और भारतीय क्रिकेट के सफल कप्तान के साथ 'दादा' बन गए। ऐसे में आइए देखते हैं दादा के एक सुनहरे सफर को, जब दादा ने मैदान पर अपनी दादगिरी दिखाई। बीसीसीई में गांगुली का चुनाव भारतीय क्रिकेट में एक नया मोड़ लाने का संकेत दे रहा है। ऐसा इसलिए लग रहा है, क्योंकि जब सौरव गांगुली ने साल दो हज़ार में भारतीय क्रिकेट टीम की कमान संभालते ही टीम की सुरत बदलकर रख दी थी। सौरव के टीम की कप्तानी उस समय मिली थी, जब भारतीय क्रिकेट संकट के दौर से गुजर रहा था। कई खिलाड़ियों पर मैच फिक्सिंग के आरोप लगे थे। इस समय दादा ने टीम की कमान संभाली और भारतीय क्रिकेट को नए सफर के लिए तैयार कर जीत की पटरी पर दौड़ा दिया। सौरव गांगुली ने एक कप्तान के रूप में बेहतरीन शुरुआत की, उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत को पांच मैच की एक दिवसीय श्रृंखला में जीत दिलाई। दक्षिण अफ्रीका में दो हज़ार तीन में खेले गए विश्व कप में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा। सौरव ने युवा खिलाड़ियों से भरी टीम को अपने आक्रामक फैसलों से वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा दिया। हालांकि फाइनल में भारत को ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार झेलनी पड़ी। गांगुली के लिए व्यक्तिगत रूप से यह एक सफल टूर्नामेंट था, जिसमें उन्होंने अट्ठावन. बारह के औसत से चार सौ पैंसठ रन बनाए और तीन शतक जड़े। गांगुली की कप्तानी में भारत विदेशी जमीन पर भी अपने विरोधियों को कड़ी टक्कर देने में सफल रहा। इससे पहले भारतीय टीम को विदेशी दौरे के लिए अच्छी टीम नहीं माना जाता था, लेकिन गांगुली ने अपनी आक्रामक कप्तानी से भारतीय क्रिकेट के इतिहास को बदल दिया। दो हज़ार दो नेटवेस्ट सीरीज गांगुली की कप्तानी में खेला गया और टीम इंडिया ने अंग्रेजी जमीन पर इंग्लैंड को हराकर तिरंगा लहरा दिया और दादा ने लॉर्ड्स की बालकनी से अपनी टी-शर्ट को हवा उड़ा दिया। भारत का दो हज़ार तीन-चार का ऑस्ट्रेलिया दौरा काफी सफल रहा। चार टेस्ट मुकाबलों की श्रृंखला एक-एक से ड्रॉ रही और भारत ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी पर अपना कब्जा बरकरार रखा। गांगुली ने युवा खिलाड़ियों में विश्वास पैदा किया। उन्होंने खिलाड़ियों को दबाव में भी डटकर खेलना सिखाया और स्लेजिंग का जवाब स्लेजिंग से ही देने को कहा। गांगुली हमेशा से ही टीम के साथियों का साथ देते थे, जिससे खिलाड़ियों को मैदान पर आक्रामक होकर खेलने की आजादी मिलती थी। यही कारण था कि भारत घर और बाहर दोनों ही जगह एक सफल टीम के रूप में उभरी। दादा ने जहीर खान, युवराज सिंह, हरभजन सिंह, वीरेंद्र सहवाग और एम एस धोनी जैसे स्टार खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचाना और टीम में मौके दिए।
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बॉलीवुड में मल्टीस्टारर फिल्में बहुत समय पहले से बनती आ रही हैं और एक बार फिल्म संजय दत्त अपने प्रोडक्शन में बनी फिल्म प्रस्थानम के साथ मल्टीस्टारर फिल्म प्रस्थानम के साथ आ रहे हैं। इससे पहले उन्होने फिल्म कलंक में माधुरी दीक्षित, वरुण धवन, आलिया भट्ट, सोनाक्षी सिन्हा और आदित्य रॉय कपूर के साथ नजर आए थे। फिल्म प्रस्थानम में एक्ट्रेस अमायरा दस्तूर भी मुख्य किरदार में नजर आएंगी लेकिन फिल्म 'प्रस्थानम' की रिलीज से पहले अमायरा ने कराया बोल्ड फोटोशूट, और उनकी ऐसी तस्वीरें अक्सर आती रहती हैं।
#LWD ◻️⬜️◻️ #judgementalhaikya Success Party ?
फिल्म कालाकांडी, राजमा चावल और जजमेंटल है क्या जैसी फिल्मों में काम कर चुकी एक्ट्रेस अमायरा दस्तूर अब जल्दी ही संजय दत्त स्टारर फिल्म प्रस्थानम में दिखेंगी। फिल्म प्रस्थानम रिलीज होने के पहले ही अमायरा दस्तूर ने फिल्म को लेकर एक बड़ी बात कही है और इसके साथ ही अमायरा का एक इंटरव्यू भी हुआ जिसमें उन्होने कई राज खोले। फिल्मों के साथ ही अमायरा दस्तूर अपनी लेटेस्ट फोटोशूट के लिए भी सुर्खियां बटोर रही हैं। अमायरा का कहना है कि वे हमेशा अपने करियीर को लेकर एक मास एंटरटेनर फिल्म करना चाह रही थीं।
मिस्टर एक्स, कालाकांडी, राजमा चावल और जजमेंटल है क्या जैसी फिल्में करके वे कुछ अलग नहीं कर पाईं। मगर उन्हें फिल्म प्रस्थानम में काम करके अच्छा लगा और उनका कहना है कि ये फिल्म जरूर देखें इसमें एक जरूरी संदेश भी है। फिल्म में अपने किरदार को लेकर अमायरा ने बताया कि वे एक एनआरआई लड़की के किरदार में दिखेंगी, जिसका नाम शिवी होता है और वो अमेरिका से एक पॉलिटिकल थीसिस पेपर लिखने भारत आती है। वो भारतीय राजनीति के बारे में जानना चाहती है और इसलिए फिल्म में अली फजल से मिलती हैं। इसके बाद अली के परिवार के माध्यम से वे राजनीति में होने वाले भ्रष्टाचार को देखती हैं। प्रस्थानम एक पॉलिटिकल एक्शन फिल्म है जो निर्देशक देवा कट्टा ने बनाई है। संजय दत्त की पत्नी मान्यता दत्त ने इसे प्रोड्यूस किया है और संजय दत्त के बैनर तले ये फिल्म बनी है।
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बॉलीवुड में मल्टीस्टारर फिल्में बहुत समय पहले से बनती आ रही हैं और एक बार फिल्म संजय दत्त अपने प्रोडक्शन में बनी फिल्म प्रस्थानम के साथ मल्टीस्टारर फिल्म प्रस्थानम के साथ आ रहे हैं। इससे पहले उन्होने फिल्म कलंक में माधुरी दीक्षित, वरुण धवन, आलिया भट्ट, सोनाक्षी सिन्हा और आदित्य रॉय कपूर के साथ नजर आए थे। फिल्म प्रस्थानम में एक्ट्रेस अमायरा दस्तूर भी मुख्य किरदार में नजर आएंगी लेकिन फिल्म 'प्रस्थानम' की रिलीज से पहले अमायरा ने कराया बोल्ड फोटोशूट, और उनकी ऐसी तस्वीरें अक्सर आती रहती हैं। #LWD ◻️⬜️◻️ #judgementalhaikya Success Party ? फिल्म कालाकांडी, राजमा चावल और जजमेंटल है क्या जैसी फिल्मों में काम कर चुकी एक्ट्रेस अमायरा दस्तूर अब जल्दी ही संजय दत्त स्टारर फिल्म प्रस्थानम में दिखेंगी। फिल्म प्रस्थानम रिलीज होने के पहले ही अमायरा दस्तूर ने फिल्म को लेकर एक बड़ी बात कही है और इसके साथ ही अमायरा का एक इंटरव्यू भी हुआ जिसमें उन्होने कई राज खोले। फिल्मों के साथ ही अमायरा दस्तूर अपनी लेटेस्ट फोटोशूट के लिए भी सुर्खियां बटोर रही हैं। अमायरा का कहना है कि वे हमेशा अपने करियीर को लेकर एक मास एंटरटेनर फिल्म करना चाह रही थीं। मिस्टर एक्स, कालाकांडी, राजमा चावल और जजमेंटल है क्या जैसी फिल्में करके वे कुछ अलग नहीं कर पाईं। मगर उन्हें फिल्म प्रस्थानम में काम करके अच्छा लगा और उनका कहना है कि ये फिल्म जरूर देखें इसमें एक जरूरी संदेश भी है। फिल्म में अपने किरदार को लेकर अमायरा ने बताया कि वे एक एनआरआई लड़की के किरदार में दिखेंगी, जिसका नाम शिवी होता है और वो अमेरिका से एक पॉलिटिकल थीसिस पेपर लिखने भारत आती है। वो भारतीय राजनीति के बारे में जानना चाहती है और इसलिए फिल्म में अली फजल से मिलती हैं। इसके बाद अली के परिवार के माध्यम से वे राजनीति में होने वाले भ्रष्टाचार को देखती हैं। प्रस्थानम एक पॉलिटिकल एक्शन फिल्म है जो निर्देशक देवा कट्टा ने बनाई है। संजय दत्त की पत्नी मान्यता दत्त ने इसे प्रोड्यूस किया है और संजय दत्त के बैनर तले ये फिल्म बनी है।
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इन जलसोंमें कौवालों द्वारा कौवाली नामक धार्मिक गीत गाये जाते थे" ।* "कहनेका मतलब यह है कि मुस्लिम भारतमें संगीतकलाका उससे कहीं ज्यादा प्रचार था जितना हमलोग समझते हैं । इसकी प्रसिद्धिका एक कारण यह हो सकता है कि भारतीय मुसमानों में अधिकांश वे मुसमान थे जो पहले हिन्दू थे या जिनके पुरखे हिन्दू थे । इस्लाम धर्म ग्रहण करनेके बाद भी वे लोग अपनी प्रिय वस्तु संगीतका त्याग नहीं करना चाहते थे। इसका परिणाम यह हुआ थे कि संगीतकलाका प्रवेश मुसलमानों में हो गया और उसकी ख्याति वहाँ भी बढ़ी । यहाँ यह भी लिख देना उचित प्रतीत होता है कि अन्य सूक्ष्म कलाओं की भाँति संगीतकलाने भी हिन्दू और मुसलमानों के बीच मेल-मिलापका नया रास्ता खोल दिया । परस्पर आदान-प्रदान और मेल-मिलापका यह काम मुसलमानों के आगमनकालसे ही आरम्भ हुआ और एक दूसरेके पास जो समृद्धि थी, उसका परस्पर आदान-प्रदान कर दोनोंने अपनेको समृद्ध बनाया । ।
"सम्राट्ने भी सङ्गीतकलाको प्रोत्साहित किया । उनके शासन कालमें उस कलाकी अत्यधिक उन्नति हुई । इनके दरबार में संगीतकलाके अनेक विद्वान रहते थे - हिन्दू, ईरानी, तूरानी, काश्मीरी, इनमें पुरुष और महिलाएँ दोनों थीं । •• विश्वविख्यात संगीतज्ञ मियाँ तानसेन- जो हिन्दूसे मुसलमान हो गये थे - अकबर के दरबारके गवैया थे । इनकी ग्वालियर स्थित कब्र भारतीय संगीतज्ञोंका तीर्थक्षेत्र बन गयी है । इसी युग में प्रसिद्ध गवैया हरिदास हुए थे । ये तानसेन और रामदासके गुरु थे। रामदास लखनऊके निवासी थे और दूसरे तानसेनके नामसे प्रसिद्ध थे । कहा जाता है कि खानखानाने उन्हें एकबार एक लाखकी थैली भेंट की थी। अकबरके दरबार में सङ्गीत-कला उन्नतिकी चरम सीमापर पहुँच गयी थी । सङ्गीत विद्या तथा भिन्न-भिन्न राग-रागिणियों,
* एस० एम० जाफर - कल्चरल आस्पेक्ट ऑव मुस्लिम रूल इन इण्डिया
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इन जलसोंमें कौवालों द्वारा कौवाली नामक धार्मिक गीत गाये जाते थे" ।* "कहनेका मतलब यह है कि मुस्लिम भारतमें संगीतकलाका उससे कहीं ज्यादा प्रचार था जितना हमलोग समझते हैं । इसकी प्रसिद्धिका एक कारण यह हो सकता है कि भारतीय मुसमानों में अधिकांश वे मुसमान थे जो पहले हिन्दू थे या जिनके पुरखे हिन्दू थे । इस्लाम धर्म ग्रहण करनेके बाद भी वे लोग अपनी प्रिय वस्तु संगीतका त्याग नहीं करना चाहते थे। इसका परिणाम यह हुआ थे कि संगीतकलाका प्रवेश मुसलमानों में हो गया और उसकी ख्याति वहाँ भी बढ़ी । यहाँ यह भी लिख देना उचित प्रतीत होता है कि अन्य सूक्ष्म कलाओं की भाँति संगीतकलाने भी हिन्दू और मुसलमानों के बीच मेल-मिलापका नया रास्ता खोल दिया । परस्पर आदान-प्रदान और मेल-मिलापका यह काम मुसलमानों के आगमनकालसे ही आरम्भ हुआ और एक दूसरेके पास जो समृद्धि थी, उसका परस्पर आदान-प्रदान कर दोनोंने अपनेको समृद्ध बनाया । । "सम्राट्ने भी सङ्गीतकलाको प्रोत्साहित किया । उनके शासन कालमें उस कलाकी अत्यधिक उन्नति हुई । इनके दरबार में संगीतकलाके अनेक विद्वान रहते थे - हिन्दू, ईरानी, तूरानी, काश्मीरी, इनमें पुरुष और महिलाएँ दोनों थीं । •• विश्वविख्यात संगीतज्ञ मियाँ तानसेन- जो हिन्दूसे मुसलमान हो गये थे - अकबर के दरबारके गवैया थे । इनकी ग्वालियर स्थित कब्र भारतीय संगीतज्ञोंका तीर्थक्षेत्र बन गयी है । इसी युग में प्रसिद्ध गवैया हरिदास हुए थे । ये तानसेन और रामदासके गुरु थे। रामदास लखनऊके निवासी थे और दूसरे तानसेनके नामसे प्रसिद्ध थे । कहा जाता है कि खानखानाने उन्हें एकबार एक लाखकी थैली भेंट की थी। अकबरके दरबार में सङ्गीत-कला उन्नतिकी चरम सीमापर पहुँच गयी थी । सङ्गीत विद्या तथा भिन्न-भिन्न राग-रागिणियों, * एसशून्य एमशून्य जाफर - कल्चरल आस्पेक्ट ऑव मुस्लिम रूल इन इण्डिया
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग के लिए भारत और मिस्र के बीच सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर को मंजूरी दे दी है।
इस एमओयू के तहत सहयोग के क्षेत्रों में फसल (विशेष तौर पर गेहूं और मक्का), कृषि जैव प्रौद्योगिकी, नेनो टेक्नोलॉजी, जल संरक्षण एवं सूक्ष्म सिंचाई प्रौद्यागिकी सहित सिंचाई एवं जल प्रबंधन तकनीक, ऊर्जा उत्पादन के लिए कृषि अपशिष्ट प्रबंधन, खाद्य संरक्षण, सुरक्षा एवं गुणवत्ता, बागवानी, जैविक कृषि, पशुपालन डेरी, मत्स्य पालन, चारा उत्पादन, कृषि उत्पाद एवं मूल्यवर्धन, पादप एवं पशु उत्पादों के व्यापार से संबंधित स्वच्छता मामलों, कृषि औजारों एवं उपकरणों, कृषि कारोबार एवं विपणन, कटाई से पहले और बाद की प्रक्रियाओं, खाद्य प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण, कृषि में एकीकृत कीट प्रबंधन, कृषि विस्तार एवं ग्रामीण विकास, कृषि व्यापार एवं निवेश, बौद्धिक संपदा अधिकारसंबंधी मुद्दों, बीज के क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान एवं मानव संसाधन और पारस्परिक हित वाले अन्य सहमति के मुद्दे शामिल हैं।
शोध वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, कृषि संबंधी सूचनाओं एवं विज्ञान संबंधी प्रकाशनों (पत्र-पत्रिकाओं, पुस्तकों, बुलेटिन, कृषि एवं सहायक क्षेत्र के सांख्यिकीय आंकड़े), जर्मप्लाज्म एवं कृषि प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान और सेमीनारों, कार्यशालाओं एवं अन्य गतिविधियों के जरिए सहयोग को प्रभावी बनाया जाएगा।
इस एमओयू के तहत एक संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) का गठन किया जाएगा ताकि द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत सहित पारपरिक हित वाले अन्य मुद्दों पर सहयोग को बेहतर किया जा सके। शुरूआती दो वर्षों के दौरान संयुक्त कार्य समूह की बैठक कम से कम साल में एक बार (भारत और मिस्र में) जरूर होगी। इसके तहत संयुक्त कार्य के लिए कार्यक्रम तैयार करने, सुविधा एवं परामर्श मुहैया कराने और खास मुद्दों के संदर्भ में अतिरिक्त सहयोग आदि मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
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Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग के लिए भारत और मिस्र के बीच सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर को मंजूरी दे दी है। इस एमओयू के तहत सहयोग के क्षेत्रों में फसल , कृषि जैव प्रौद्योगिकी, नेनो टेक्नोलॉजी, जल संरक्षण एवं सूक्ष्म सिंचाई प्रौद्यागिकी सहित सिंचाई एवं जल प्रबंधन तकनीक, ऊर्जा उत्पादन के लिए कृषि अपशिष्ट प्रबंधन, खाद्य संरक्षण, सुरक्षा एवं गुणवत्ता, बागवानी, जैविक कृषि, पशुपालन डेरी, मत्स्य पालन, चारा उत्पादन, कृषि उत्पाद एवं मूल्यवर्धन, पादप एवं पशु उत्पादों के व्यापार से संबंधित स्वच्छता मामलों, कृषि औजारों एवं उपकरणों, कृषि कारोबार एवं विपणन, कटाई से पहले और बाद की प्रक्रियाओं, खाद्य प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण, कृषि में एकीकृत कीट प्रबंधन, कृषि विस्तार एवं ग्रामीण विकास, कृषि व्यापार एवं निवेश, बौद्धिक संपदा अधिकारसंबंधी मुद्दों, बीज के क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान एवं मानव संसाधन और पारस्परिक हित वाले अन्य सहमति के मुद्दे शामिल हैं। शोध वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, कृषि संबंधी सूचनाओं एवं विज्ञान संबंधी प्रकाशनों , जर्मप्लाज्म एवं कृषि प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान और सेमीनारों, कार्यशालाओं एवं अन्य गतिविधियों के जरिए सहयोग को प्रभावी बनाया जाएगा। इस एमओयू के तहत एक संयुक्त कार्य समूह का गठन किया जाएगा ताकि द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत सहित पारपरिक हित वाले अन्य मुद्दों पर सहयोग को बेहतर किया जा सके। शुरूआती दो वर्षों के दौरान संयुक्त कार्य समूह की बैठक कम से कम साल में एक बार जरूर होगी। इसके तहत संयुक्त कार्य के लिए कार्यक्रम तैयार करने, सुविधा एवं परामर्श मुहैया कराने और खास मुद्दों के संदर्भ में अतिरिक्त सहयोग आदि मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
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सरकार की ओर से आवास और शौचालय बनवाने के नाम पर झांसा देने में सफल रहे बदमाश जब युवक से पैसा नहीं ले पाए तो उसे असलहा सटाकर उसके पास से 45 हजार रुपये लूट लिए। झांसे में आये कपसेठी के बाराडीह गांव निवासी लालचन्द चौहान को बदमाशों ने शिवपुर में लाकर इस वारदात को अंजाम दिया। भुक्तभोगी ने शिवपुर थाने में तहरीर दी है।
लालचंद के घर शुक्रवार की शाम बाइक सवार दो युवक पहुंचे और खुद को सरकारी अफसर बताया। दोनों ने उससे बताया कि मकान और शौचालय बनाने के लिए पैसा मिलना है उसके लिए कुछ खर्च लगेगा। दोनों ने उसे बताया कि उसे साहब से चलकर मिलना होगा। इस काम को पास कराने के लिए 45 हजार देना होगा। लालचंद्र उनकी बात में आ गया और ग्रामीण बैंक से पैसा निकाल कर उनके साथ चल दिया।
इस दौरान बदमाश जब शिवपुर पहुंचे तो उन्होंने बाइक रोक दी और लालचंद से पैसों की मांग करने लगे। उसके इनकार कर दिये जाने व पहले साहब के पास चलने की जिद करने पर बदमाशों ने उसे असलहा सटा कर उसके पास मौजूद 45 हजार रुपये लूट लिये और भाग निकले। शिवपुर से देर रात किसी तरह घर पहुंचने पर परिवार को अपने साथ हुई घटना बताई।
बडागांव के वीरापट्टी गांव निवासी बीमा एजेंट कन्हैयालाल प्रजापति को जालसाजों ने इनाम में लाखों रुपये और बाइक देने का सब्जबाग दिखाकर 78 हजार रुपये ऐंठ लिए। अपने साथ हुई इस घटना के बाद कन्हैया ने एसएसपी से गुहार लगायी। एसएसपी के आदेश पर बड़ागांव पुलिस मामले की जांच में जुट गयी है।
कन्हैया के मोबाइल पर बीते छह जून को फोन आया कि मैं आइडिया कम्पनी का सुपरवाइजर राकेश तिवारी बोल रहा हूं। आपका लकी ड्रॉ निकला है क्क् लाख रुपये का। इसे पाने के लिए आपको बैंक अकाउंट में क्ख्,म्00 रुपये जमा करने होंगे। इनाम के लालच में कन्हैयालाल ने छह जून को ही यूबीआई के एक अकाउंट में पहले क्ख्,म्00 और सात जून को ख्8 हजार रुपये जमा कर दिये। लेकिन उसे इनाम की राशि नहीं मिली। उसके पास दोबारा फोन में उसे आठ जून को पीएनबी की महमूरगंज ब्रांच में फ्7,800 रुपये जमा करने को कहा गया। उसने यह पैसे भी जमा कर दिये। लेकिन ईनाम की राशि नहीं मिली।
तीन बार 78,ब्00 रुपये अलग-अलग अकाउंट में डालने के बाद जब इनाम की रकम नहीं मिली तो कन्हैया ने राकेश तिवारी को फोन मिलाया तो वह बंद था। इस पर कन्हैया के होश उड़ गये। उसने पुलिस को सूचना दी। कन्हैया ने बताया की यूबीआई का अकाउंट संजय कुमार के नाम पर है जबकि पीएनबी का अकाउंट बिजनौर निवासी माखन के नाम पर चल रहा है। फोन करने वाले जालसाज राकेश का मोबाइल नम्बर 87ख्म्फ्8म्7ब्7 बताया।
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सरकार की ओर से आवास और शौचालय बनवाने के नाम पर झांसा देने में सफल रहे बदमाश जब युवक से पैसा नहीं ले पाए तो उसे असलहा सटाकर उसके पास से पैंतालीस हजार रुपये लूट लिए। झांसे में आये कपसेठी के बाराडीह गांव निवासी लालचन्द चौहान को बदमाशों ने शिवपुर में लाकर इस वारदात को अंजाम दिया। भुक्तभोगी ने शिवपुर थाने में तहरीर दी है। लालचंद के घर शुक्रवार की शाम बाइक सवार दो युवक पहुंचे और खुद को सरकारी अफसर बताया। दोनों ने उससे बताया कि मकान और शौचालय बनाने के लिए पैसा मिलना है उसके लिए कुछ खर्च लगेगा। दोनों ने उसे बताया कि उसे साहब से चलकर मिलना होगा। इस काम को पास कराने के लिए पैंतालीस हजार देना होगा। लालचंद्र उनकी बात में आ गया और ग्रामीण बैंक से पैसा निकाल कर उनके साथ चल दिया। इस दौरान बदमाश जब शिवपुर पहुंचे तो उन्होंने बाइक रोक दी और लालचंद से पैसों की मांग करने लगे। उसके इनकार कर दिये जाने व पहले साहब के पास चलने की जिद करने पर बदमाशों ने उसे असलहा सटा कर उसके पास मौजूद पैंतालीस हजार रुपये लूट लिये और भाग निकले। शिवपुर से देर रात किसी तरह घर पहुंचने पर परिवार को अपने साथ हुई घटना बताई। बडागांव के वीरापट्टी गांव निवासी बीमा एजेंट कन्हैयालाल प्रजापति को जालसाजों ने इनाम में लाखों रुपये और बाइक देने का सब्जबाग दिखाकर अठहत्तर हजार रुपये ऐंठ लिए। अपने साथ हुई इस घटना के बाद कन्हैया ने एसएसपी से गुहार लगायी। एसएसपी के आदेश पर बड़ागांव पुलिस मामले की जांच में जुट गयी है। कन्हैया के मोबाइल पर बीते छह जून को फोन आया कि मैं आइडिया कम्पनी का सुपरवाइजर राकेश तिवारी बोल रहा हूं। आपका लकी ड्रॉ निकला है क्क् लाख रुपये का। इसे पाने के लिए आपको बैंक अकाउंट में क्ख्,म्शून्य रुपयापये जमा करने होंगे। इनाम के लालच में कन्हैयालाल ने छह जून को ही यूबीआई के एक अकाउंट में पहले क्ख्,म्शून्य और सात जून को ख्आठ हजार रुपये जमा कर दिये। लेकिन उसे इनाम की राशि नहीं मिली। उसके पास दोबारा फोन में उसे आठ जून को पीएनबी की महमूरगंज ब्रांच में फ्सात,आठ सौ रुपयापये जमा करने को कहा गया। उसने यह पैसे भी जमा कर दिये। लेकिन ईनाम की राशि नहीं मिली। तीन बार अठहत्तर,ब्शून्य रुपयापये अलग-अलग अकाउंट में डालने के बाद जब इनाम की रकम नहीं मिली तो कन्हैया ने राकेश तिवारी को फोन मिलाया तो वह बंद था। इस पर कन्हैया के होश उड़ गये। उसने पुलिस को सूचना दी। कन्हैया ने बताया की यूबीआई का अकाउंट संजय कुमार के नाम पर है जबकि पीएनबी का अकाउंट बिजनौर निवासी माखन के नाम पर चल रहा है। फोन करने वाले जालसाज राकेश का मोबाइल नम्बर सत्तासीख्म्फ्आठम्सातब्सात बताया।
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चर्चा में क्यों?
24 अगस्त, 2022 को नई दिल्ली में आयोजित 19वें वार्षिक आउटलुक ट्रैवलर्स अवार्ड्स समारोह में आउटलुक ग्रुप की ओर से विभिन्न श्रेणियों में दिये जाने वाले पुरस्कार की कड़ी में आउटलुक ट्रैवलर्स अवार्ड-2022 श्रेणी में छत्तीसगढ़ के बस्तर को एक विशेष जूरी पुरस्कार के साथ 'बेस्ट ऑफ बीट डेस्टिनेशन'के रूप में सम्मानित किया गया।
- केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री जी. किशन रेड्डी की उपस्थिति में आउटलुक ट्रैवलर अवार्ड्स दिया गया। समारोह में छत्तीसगढ़ की ओर से यह अवार्ड पर्यटन और संस्कृति विभाग के सचिव अंबलगन पी. ने ग्रहण किया।
- उल्लेखनीय है कि इस वर्ष पुरस्कारों का 19वाँ वर्ष है। वहीं इस वर्ष आउटलुक ग्रुप के शिखर सम्मेलन का विषय 'यात्रा का तीसरा युग' निर्धारित है।
- इस वर्ष पुरस्कार का निर्णय एक शोध एजेंसी द्वारा यात्रा सर्वेक्षण तथा जूरी सदस्यों द्वारा प्रतिक्रियाओं की जाँच के आधार पर किया गया।
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चर्चा में क्यों? चौबीस अगस्त, दो हज़ार बाईस को नई दिल्ली में आयोजित उन्नीसवें वार्षिक आउटलुक ट्रैवलर्स अवार्ड्स समारोह में आउटलुक ग्रुप की ओर से विभिन्न श्रेणियों में दिये जाने वाले पुरस्कार की कड़ी में आउटलुक ट्रैवलर्स अवार्ड-दो हज़ार बाईस श्रेणी में छत्तीसगढ़ के बस्तर को एक विशेष जूरी पुरस्कार के साथ 'बेस्ट ऑफ बीट डेस्टिनेशन'के रूप में सम्मानित किया गया। - केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री जी. किशन रेड्डी की उपस्थिति में आउटलुक ट्रैवलर अवार्ड्स दिया गया। समारोह में छत्तीसगढ़ की ओर से यह अवार्ड पर्यटन और संस्कृति विभाग के सचिव अंबलगन पी. ने ग्रहण किया। - उल्लेखनीय है कि इस वर्ष पुरस्कारों का उन्नीसवाँ वर्ष है। वहीं इस वर्ष आउटलुक ग्रुप के शिखर सम्मेलन का विषय 'यात्रा का तीसरा युग' निर्धारित है। - इस वर्ष पुरस्कार का निर्णय एक शोध एजेंसी द्वारा यात्रा सर्वेक्षण तथा जूरी सदस्यों द्वारा प्रतिक्रियाओं की जाँच के आधार पर किया गया।
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28 अप्रैल को दिन भर बीबीसी अपनी टीवी, डिजिटल और रेडियो सेवाओं पर इस संकट से जुड़ीं रिपोर्ट्स, इंटरव्यूज और विश्लेषण का प्रसारण करेगा।
देश के चार बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के लिए वर्ष 2021 के सातवें हफ्ते से दसवें हफ्ते के बीच की 'रेडियो ऑडियंस मीजरमेंट' (RAM) रेटिंग्स जारी हो गई हैं।
टीवी एंकर ज्योत्सना बेदी ने 'रिपब्लिक भारत' चैनल में अपनी पारी को विराम दे दिया है।
'एक्सचेंज4मीडिया' समूह की न्यूजनेक्स्ट कॉन्फ्रेंस 2021 के दौरान दिग्गजों ने टीवी पर होने वाले शोरशराबे को लेकर अपनी राय रखी।
'आजतक सबसे तेज' कैंपेन के तहत प्रदीप सरकार के निर्देशन में बनी इस फिल्म में देश में मौजूदा समाचार परिवेश पर करारा व्यंग्य किया गया है।
देश के चार बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के लिए वर्ष 2021 के पांचवें हफ्ते से आठवें हफ्ते के बीच की 'रेडियो ऑडियंस मीजरमेंट' (RAM) रेटिंग्स जारी हो गई हैं।
'आजतक सबसे तेज' कैंपेन के तहत प्रदीप सरकार के निर्देशन में बनी पांचवी फिल्म 'जरा झुक के' (Zara Jhuk Ke) लॉन्च कर दी गई है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि आजादी के बाद इतिहास संकलन का कार्य हो रहा है।
अपनी लॉन्चिंग के 20 साल पूरे होने पर हिंदी न्यूज चैनल 'आजतक' (AajTak) द्वारा चलाए जा रहे 'आजतक सबसे तेज' (AajTakSabseTez) कैंपेन के तहत सीरीज की तीसरी फिल्म 'अफवाह' लॉन्च की गई है।
साल 2020 में 29 देशों में जानबूझकर कम से कम 155 बार या तो इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया या फिर उसकी स्पीड को कम किया गया।
हिंदी न्यूज चैनल 'आजतक' ने अपनी लॉन्चिंग के 20 साल पूरे कर लिए हैं। इसी कड़ी में चैनल द्वारा पिछले दिनों 'आजतक सबसे तेज' नाम से कैंपेन की शुरुआत की गई है।
इस कैंपेन को जाने-माने लेखक और डायरेक्टर प्रदीप सरकार के निर्देशन में तैयार किया गया है।
भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाकर आतंकवाद को बढ़ावा देने के मामले में एक ब्रिटिश टीवी चैनल पर कड़ी कार्रवाई की गई है।
इंदिरा गांधी राष्ट्री य कला केंद्र की ओर से नोबेल शांति पुरस्कारर से सम्माानित कैलाश सत्यार्थी की पुस्तिक 'कोविड-19 सभ्याता का संकट और समाधान' पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया।
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने पहली बार प्रेस नोट जारी कर पत्रकारों को धमकी दी है।
महिमा ने वर्ष 2015 में ट्विटर को जॉइन किया था। वह इस साल मार्च के अंत तक इस पद पर नई नियुक्ति होने तक अपनी भूमिका निभाती रहेंगी।
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अट्ठाईस अप्रैल को दिन भर बीबीसी अपनी टीवी, डिजिटल और रेडियो सेवाओं पर इस संकट से जुड़ीं रिपोर्ट्स, इंटरव्यूज और विश्लेषण का प्रसारण करेगा। देश के चार बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के लिए वर्ष दो हज़ार इक्कीस के सातवें हफ्ते से दसवें हफ्ते के बीच की 'रेडियो ऑडियंस मीजरमेंट' रेटिंग्स जारी हो गई हैं। टीवी एंकर ज्योत्सना बेदी ने 'रिपब्लिक भारत' चैनल में अपनी पारी को विराम दे दिया है। 'एक्सचेंजचारमीडिया' समूह की न्यूजनेक्स्ट कॉन्फ्रेंस दो हज़ार इक्कीस के दौरान दिग्गजों ने टीवी पर होने वाले शोरशराबे को लेकर अपनी राय रखी। 'आजतक सबसे तेज' कैंपेन के तहत प्रदीप सरकार के निर्देशन में बनी इस फिल्म में देश में मौजूदा समाचार परिवेश पर करारा व्यंग्य किया गया है। देश के चार बड़े शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के लिए वर्ष दो हज़ार इक्कीस के पांचवें हफ्ते से आठवें हफ्ते के बीच की 'रेडियो ऑडियंस मीजरमेंट' रेटिंग्स जारी हो गई हैं। 'आजतक सबसे तेज' कैंपेन के तहत प्रदीप सरकार के निर्देशन में बनी पांचवी फिल्म 'जरा झुक के' लॉन्च कर दी गई है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि आजादी के बाद इतिहास संकलन का कार्य हो रहा है। अपनी लॉन्चिंग के बीस साल पूरे होने पर हिंदी न्यूज चैनल 'आजतक' द्वारा चलाए जा रहे 'आजतक सबसे तेज' कैंपेन के तहत सीरीज की तीसरी फिल्म 'अफवाह' लॉन्च की गई है। साल दो हज़ार बीस में उनतीस देशों में जानबूझकर कम से कम एक सौ पचपन बार या तो इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया या फिर उसकी स्पीड को कम किया गया। हिंदी न्यूज चैनल 'आजतक' ने अपनी लॉन्चिंग के बीस साल पूरे कर लिए हैं। इसी कड़ी में चैनल द्वारा पिछले दिनों 'आजतक सबसे तेज' नाम से कैंपेन की शुरुआत की गई है। इस कैंपेन को जाने-माने लेखक और डायरेक्टर प्रदीप सरकार के निर्देशन में तैयार किया गया है। भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाकर आतंकवाद को बढ़ावा देने के मामले में एक ब्रिटिश टीवी चैनल पर कड़ी कार्रवाई की गई है। इंदिरा गांधी राष्ट्री य कला केंद्र की ओर से नोबेल शांति पुरस्कारर से सम्माानित कैलाश सत्यार्थी की पुस्तिक 'कोविड-उन्नीस सभ्याता का संकट और समाधान' पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने पहली बार प्रेस नोट जारी कर पत्रकारों को धमकी दी है। महिमा ने वर्ष दो हज़ार पंद्रह में ट्विटर को जॉइन किया था। वह इस साल मार्च के अंत तक इस पद पर नई नियुक्ति होने तक अपनी भूमिका निभाती रहेंगी।
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पूर्व सांसद तरुण विजय सीता माता मंदिर, भू समाधि आदि की जानकारी जुटाने के लिए 12 दिसंबर को पौड़ी जा रहे हैं। इस दौरान वह मंदिर, भूसमाधिस्थल की ऐतिहासिकता, मान्यता, प्रमाणिकता आदि विषयों की जानकारी जुटाएंगे।
राज्यसभा के पूर्व सदस्य तरुण विजय श्री नंदा राज जात पूर्वपीठिका समिति के अध्यक्ष भी हैं। वह 12 दिसंबर को शासकीय प्रवास पर पौड़ी जाएंगे। इस दौरान वह माता सीता मंदिर, उनके भू समाधि लेने की कथा के मूल स्रोतों की जानकारी लेने का प्रयास करेंगे। साथ ही इस संबंध में स्थानीय लेखकों, लोकगायकों और विद्वानों की रचनाओं का भी संकलन करेंगे।
उन्होंने बताया कि उनका प्रयास है कि सीता माता भू समाधिस्थल की अधिक से अधिक जानकारी जुटाकर इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाए। साथ ही वह कुछ लोक कलाकारों के उन गीतों को भी रिकार्ड करना चाहेंगे, जिन्होंने माता सीता को लेकर या यहां की महीमा में गीत गाए हैं।
ऐसे कलाकारों का एक कार्यक्रम आकाशवाणी और दूरदर्शन में देने का भी प्रयास होगा। साथ ही सीता माता के गीत गायकों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रयास होगा कि प्राचीन कथाओं पर आधारित गीतों का एक संग्रह तैयार किया जाए। इस कार्य के लिए उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को श्रेय दिया। कहा कि वे उत्तराखंड की धरोहरों की रक्षा के लिए सक्रिय व विचारशील नेता हैं।
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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पूर्व सांसद तरुण विजय सीता माता मंदिर, भू समाधि आदि की जानकारी जुटाने के लिए बारह दिसंबर को पौड़ी जा रहे हैं। इस दौरान वह मंदिर, भूसमाधिस्थल की ऐतिहासिकता, मान्यता, प्रमाणिकता आदि विषयों की जानकारी जुटाएंगे। राज्यसभा के पूर्व सदस्य तरुण विजय श्री नंदा राज जात पूर्वपीठिका समिति के अध्यक्ष भी हैं। वह बारह दिसंबर को शासकीय प्रवास पर पौड़ी जाएंगे। इस दौरान वह माता सीता मंदिर, उनके भू समाधि लेने की कथा के मूल स्रोतों की जानकारी लेने का प्रयास करेंगे। साथ ही इस संबंध में स्थानीय लेखकों, लोकगायकों और विद्वानों की रचनाओं का भी संकलन करेंगे। उन्होंने बताया कि उनका प्रयास है कि सीता माता भू समाधिस्थल की अधिक से अधिक जानकारी जुटाकर इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाए। साथ ही वह कुछ लोक कलाकारों के उन गीतों को भी रिकार्ड करना चाहेंगे, जिन्होंने माता सीता को लेकर या यहां की महीमा में गीत गाए हैं। ऐसे कलाकारों का एक कार्यक्रम आकाशवाणी और दूरदर्शन में देने का भी प्रयास होगा। साथ ही सीता माता के गीत गायकों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रयास होगा कि प्राचीन कथाओं पर आधारित गीतों का एक संग्रह तैयार किया जाए। इस कार्य के लिए उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को श्रेय दिया। कहा कि वे उत्तराखंड की धरोहरों की रक्षा के लिए सक्रिय व विचारशील नेता हैं। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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उनकी इस बात के लिए सराहना की जानी चाहिए कि उन्होंने आधुनिक चिकित्सा पद्धति को अपना कर स्पष्ट संदेश दिया है कि बाकी सब ठीक है पर संकट आये तो तुरंत विज्ञान का रास्ता ही अपनाओ। नित नए अनुसंधानों से समृद्ध आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का विकल्प नहीं हो सकता।
देश में अमित शाह से प्रेरणा लेने वाले हर व्यक्ति के साथ-साथ बाकी सभी से यह उम्मीद की जानी चाहिए कि वह यह जाने कि रास्ता विज्ञान के पास ही है।
बीमारी पर कटाक्ष उचित नहीं है। कटाक्ष के ढेर सारे अवसर राजनीति दे ही देगी,लेकिन अभी यह सोचना चाहिए कि पूरी दुनिया में फ्रंट फुट पर सिर्फ विज्ञान है।
उन नासमझों पर कोई टिप्पणी का औचित्य नहीं है जिन्हें लगता था कि कोरोना ताली-थाली से भाग जाएगा या जिन्हें लगता था कि गो-कोरोना-गो बोलने से कोरोना चीन चला जायेगा। वो सब तो आज भी नहीं मानेंगे कि वो एक इवेंट के किरदार भर थे। फिर भी ऐसे लोगों से आग्रह है कि भरी सभा में भले मत मानना कि ताली-थाली बजा कर वो जो अनजाने में विज्ञान को चुनौती दे रहे थे वो उनकी गलती थी,पर कम से कम व्यक्तिगत चर्चाओं में ही सही अपने बच्चों ,परिजनों,मित्रों,पड़ोसियों से इस विषय पर चर्चा ज़रूर करें।
चर्चा करें कि समय ने हर बार साबित किया है कि दुनिया बचेगी तो सिर्फ विज्ञान की बदौलत और विज्ञान सम्पन्न होगा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही।
हमने और जिन देशों ने भी इस बात को समझने में देर की उन्होंने कीमत चुकाई।
इस चर्चा का एक पक्ष यह भी है कि लोक कल्याण का अगर विज्ञान,वैज्ञानिक अनुसंधान,वैज्ञानिक शिक्षा से नाता कमज़ोर होने लगते है तब मुनाफे का वैज्ञानिक अनुसंधानों से नाता मजबूत होने लगता है। हालांकि यह अलग वृहत चर्चा का विषय है। दुनिया के बड़े कॉरपोरेट्स ,उनका पोषण करने वाली सरकारों की जनविरोधी नीतियां और ऐसी नीतियों की बदौलत उनका अकूत मुनाफा यह सब अलग से बताता है कि केवल विज्ञान में आस्था से ही काम नहीं चलेगा बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण ज़रूरी है,हम आप सवाल करते रहें यह चेतना ज़रूरी है और इस बात के लिए लड़ाई भी ज़रूरी है कि विज्ञान का लाभ मुनाफे के लिए नहीं बल्कि विश्व मानवता की रक्षा के लिए हो। ये लड़ाई पूंजी के वर्चस्व के खिलाफ भी है।
ये लड़ाई हर रोज़,हर जगह लड़नी होगी। कल जिसने आपसे कहा था कि ताली-थाली बजाओ आज उससे पूछना होगा कि बताओ रास्ता किधर है? उससे पूछना होगा कि क्या उसे आज इस बात का एहसास हो रहा है कि हिंदुस्तान में इस पूरी महामारी के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण थी! उसको याद दिलाना चाहिए कि एम्स की भूमिका ,तमाम उपेक्षाओं और कमज़ोर करने की तमाम कोशिशों के बावजूद देश भर के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ के सरकारी ढांचे की भूमिका कितनी शानदार थी! उसको याद दिलाना चाहिए कि देश भर में निजी क्षेत्र में भी कितने डॉक्टर्स थे जो सेवा भाव के साथ कोरोना में अपने मरीजों के साथ खड़े थे। विज्ञान के साथ अगर लोककल्याण का नाता बना रहे तो ऐसा बहुत स्वाभाविक ही होता है।
अगर हम सिर्फ अपने देश की बात करें तो इस महामारी ने यह मौका दिया है कि हम स्वतंत्र भारत के निर्माण की पूरी प्रक्रिया को पढ़ें,जानें,समझें। जाने कि इस देश को फौलादी बनाने में रेल,सेल,भेल से लेकर एयर इंडिया,एम्स ,बाल्को, नाल्को या आईआईएम जैसे संस्थानों का क्या योगदान था!
आज भी जिन्हें लगता है कि देश में सिर्फ राजनीतिक सत्ता संघर्ष चल रहा है तो वो गलती पर होंगे। देश में जड़ता के खिलाफ विज्ञान की भी बड़ी लड़ाई है।
यूं ही नहीं है कि विज्ञान के मुकाबले अवैज्ञानिक चीजों को प्रोत्साहन दिया जाता है। यह विज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर एक सुनियोजित हमले का हिस्सा है।
हमारी जड़ता बड़ी आपदा है और यह किसी के लिए अवसर है।
हमारे लिए यह अवसर है कि हम अपने आसपास सवाल करने की संस्कृति प्रोत्साहित करें। जानने की संस्कृति प्रोत्साहित करें। आज चूके तो फिर हम ताली-थाली बजाते रहेंगे और अपनी गलियों से एम्बुलेंस या शव वाहन गुजरते ही देखते रहेंगे या युद्ध के बिगुल बजाते रहेंगे।
आज ज़रूरी यह कि हम शिक्षा और विज्ञान का दिया जलाएं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण की रौशनी फैलेगी। आज बड़ी जरूरत है हमारे घरों में घुस आई जड़ता का मुकाबला करने की।
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उनकी इस बात के लिए सराहना की जानी चाहिए कि उन्होंने आधुनिक चिकित्सा पद्धति को अपना कर स्पष्ट संदेश दिया है कि बाकी सब ठीक है पर संकट आये तो तुरंत विज्ञान का रास्ता ही अपनाओ। नित नए अनुसंधानों से समृद्ध आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का विकल्प नहीं हो सकता। देश में अमित शाह से प्रेरणा लेने वाले हर व्यक्ति के साथ-साथ बाकी सभी से यह उम्मीद की जानी चाहिए कि वह यह जाने कि रास्ता विज्ञान के पास ही है। बीमारी पर कटाक्ष उचित नहीं है। कटाक्ष के ढेर सारे अवसर राजनीति दे ही देगी,लेकिन अभी यह सोचना चाहिए कि पूरी दुनिया में फ्रंट फुट पर सिर्फ विज्ञान है। उन नासमझों पर कोई टिप्पणी का औचित्य नहीं है जिन्हें लगता था कि कोरोना ताली-थाली से भाग जाएगा या जिन्हें लगता था कि गो-कोरोना-गो बोलने से कोरोना चीन चला जायेगा। वो सब तो आज भी नहीं मानेंगे कि वो एक इवेंट के किरदार भर थे। फिर भी ऐसे लोगों से आग्रह है कि भरी सभा में भले मत मानना कि ताली-थाली बजा कर वो जो अनजाने में विज्ञान को चुनौती दे रहे थे वो उनकी गलती थी,पर कम से कम व्यक्तिगत चर्चाओं में ही सही अपने बच्चों ,परिजनों,मित्रों,पड़ोसियों से इस विषय पर चर्चा ज़रूर करें। चर्चा करें कि समय ने हर बार साबित किया है कि दुनिया बचेगी तो सिर्फ विज्ञान की बदौलत और विज्ञान सम्पन्न होगा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही। हमने और जिन देशों ने भी इस बात को समझने में देर की उन्होंने कीमत चुकाई। इस चर्चा का एक पक्ष यह भी है कि लोक कल्याण का अगर विज्ञान,वैज्ञानिक अनुसंधान,वैज्ञानिक शिक्षा से नाता कमज़ोर होने लगते है तब मुनाफे का वैज्ञानिक अनुसंधानों से नाता मजबूत होने लगता है। हालांकि यह अलग वृहत चर्चा का विषय है। दुनिया के बड़े कॉरपोरेट्स ,उनका पोषण करने वाली सरकारों की जनविरोधी नीतियां और ऐसी नीतियों की बदौलत उनका अकूत मुनाफा यह सब अलग से बताता है कि केवल विज्ञान में आस्था से ही काम नहीं चलेगा बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण ज़रूरी है,हम आप सवाल करते रहें यह चेतना ज़रूरी है और इस बात के लिए लड़ाई भी ज़रूरी है कि विज्ञान का लाभ मुनाफे के लिए नहीं बल्कि विश्व मानवता की रक्षा के लिए हो। ये लड़ाई पूंजी के वर्चस्व के खिलाफ भी है। ये लड़ाई हर रोज़,हर जगह लड़नी होगी। कल जिसने आपसे कहा था कि ताली-थाली बजाओ आज उससे पूछना होगा कि बताओ रास्ता किधर है? उससे पूछना होगा कि क्या उसे आज इस बात का एहसास हो रहा है कि हिंदुस्तान में इस पूरी महामारी के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण थी! उसको याद दिलाना चाहिए कि एम्स की भूमिका ,तमाम उपेक्षाओं और कमज़ोर करने की तमाम कोशिशों के बावजूद देश भर के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ के सरकारी ढांचे की भूमिका कितनी शानदार थी! उसको याद दिलाना चाहिए कि देश भर में निजी क्षेत्र में भी कितने डॉक्टर्स थे जो सेवा भाव के साथ कोरोना में अपने मरीजों के साथ खड़े थे। विज्ञान के साथ अगर लोककल्याण का नाता बना रहे तो ऐसा बहुत स्वाभाविक ही होता है। अगर हम सिर्फ अपने देश की बात करें तो इस महामारी ने यह मौका दिया है कि हम स्वतंत्र भारत के निर्माण की पूरी प्रक्रिया को पढ़ें,जानें,समझें। जाने कि इस देश को फौलादी बनाने में रेल,सेल,भेल से लेकर एयर इंडिया,एम्स ,बाल्को, नाल्को या आईआईएम जैसे संस्थानों का क्या योगदान था! आज भी जिन्हें लगता है कि देश में सिर्फ राजनीतिक सत्ता संघर्ष चल रहा है तो वो गलती पर होंगे। देश में जड़ता के खिलाफ विज्ञान की भी बड़ी लड़ाई है। यूं ही नहीं है कि विज्ञान के मुकाबले अवैज्ञानिक चीजों को प्रोत्साहन दिया जाता है। यह विज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर एक सुनियोजित हमले का हिस्सा है। हमारी जड़ता बड़ी आपदा है और यह किसी के लिए अवसर है। हमारे लिए यह अवसर है कि हम अपने आसपास सवाल करने की संस्कृति प्रोत्साहित करें। जानने की संस्कृति प्रोत्साहित करें। आज चूके तो फिर हम ताली-थाली बजाते रहेंगे और अपनी गलियों से एम्बुलेंस या शव वाहन गुजरते ही देखते रहेंगे या युद्ध के बिगुल बजाते रहेंगे। आज ज़रूरी यह कि हम शिक्षा और विज्ञान का दिया जलाएं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण की रौशनी फैलेगी। आज बड़ी जरूरत है हमारे घरों में घुस आई जड़ता का मुकाबला करने की।
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व्हाट्सएप (WhatsApp) आज दुनिया का सबसे पॉपुलर इंस्टेंट मैसेजिंग बनकर उभरा है और करोड़ों यूजर्स इसका इस्तेमाल करते हैं। मेटा के स्वामित्व वाले इस प्लेटफॉर्म के फायदे बहुत है लेकिन अगर गलती करते हुए पकड़े जाते हैं, तो कंपनी किसी भी यूजर के अकाउंट को बैन कर सकती है। जिसका मतलब यह होता है कि वो यूजर इसके बाद अपने नंबर पर WhatsApp का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। खैर, आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि हमने वो बाते बताई है जो आपको करने से बचना है अन्यथा आपका व्हाट्सएप (WhatsApp) हमेशा के लिए बैन किया जा सकता है।
अगर आप भी अपने व्हाट्सएप अकाउंट को बैन होने से बचाना चाहते हैं, तो आपको निम्न बातों का पूरा ध्यान रखना होगा अन्यथा WhatsApp आपके अकाउंट पर कभी भी एक्शन ले सकती हैं।
यदि आपको व्हाट्सएप को ठीक से इस्तेमाल करना है तो, आपको इसके टर्म्स और सर्विस को नहीं तोड़ना है। अगर आप कभी इसका उल्लंघन करते हुए पाये जाते हैं, तो WhatsApp आपके अकाउंट को कभी भी बैन कर सकती है।
WhatsApp और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेक न्यूज को खत्म करने से लड़ रहे हैं। आपको जब भी कोई न्यूज मिले तो उसको जाँचने के बाद ही आगे किसी को फॉरवर्ड करें, क्योंकि फेक न्यूज फैलाने वाले अकाउंट को कंपनी कभी भी बैन कर सकती हैं।
यदि आप किसी दूसरे व्यक्ति को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से फेक अकाउंट बनाते हैं, तो भी आपके व्हाट्सएप अकाउंट को कंपनी बैन कर सकती हैं। इसलिए गैर लोगों के फेक अकाउंट बनाने से बचें।
वहीं आज मार्केट में कई थर्ड-पार्टी व्हाट्सएप एप्लिकेशन मौजूद हैं जो ठीक ऐसे ही काम करते हैं, लेकिन इनमें कुछ ज्यादा फीचर्स मिलते हैं। इनमें से एक GB WhatsApp हैं जिसका इस्तेमाल बहुत से यूजर्स करते हैं। लेकिन इन ऐप्स का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के अकाउंट भी बैन किए जा सकते हैं।
अगर आप 1 या 2 नहीं बल्कि बहुत सारे यूजर्स को व्हाट्सएप पर ब्लॉक करते हैं, तो कंपनी आपके अकाउंट पर एक्शन लेकर उसको ब्लॉक कर सकती है। इसलिए यह काम करने से बचना ही बेहतर होगा।
आपको इस बात का भी ध्यान रखना है कि आप जो कंटैंट भेज रहे हैं वो गलत तो नहीं है, क्या उससे किसी को आपत्ति तो नहीं होगी, अगर ऐसा कंटैंट यानि फोटो या वीडियो अपलोड करते हैं तो आपके व्हाट्सएप अकाउंट को हमेशा के लिए बैन किया जा सकता हैं।
WhatsApp पर अगर कोई अश्लील फोटो और वीडियो शेयर करता हुआ पाया जाता है और उसके खिलाफ शिकायत होती हैं, तो उसके अकाउंट को परमानेंटली बैन किया जा सकता हैं। इसलिए ऐसे फोटो और वीडियो गलती से फॉरवर्ड न करें।
उम्मीद करते हैं, हमारी ये बातें आपको सही लगी होंगी और अगर आप भी इन बातों का ध्यान रखेंगे तो आपका WhatsApp अकाउंट कभी भी बैन नहीं होगा। इस आर्टिकल को अपने दोस्तों और फैमिली वालों के साथ जरूर शेयर करें।
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व्हाट्सएप आज दुनिया का सबसे पॉपुलर इंस्टेंट मैसेजिंग बनकर उभरा है और करोड़ों यूजर्स इसका इस्तेमाल करते हैं। मेटा के स्वामित्व वाले इस प्लेटफॉर्म के फायदे बहुत है लेकिन अगर गलती करते हुए पकड़े जाते हैं, तो कंपनी किसी भी यूजर के अकाउंट को बैन कर सकती है। जिसका मतलब यह होता है कि वो यूजर इसके बाद अपने नंबर पर WhatsApp का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। खैर, आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि हमने वो बाते बताई है जो आपको करने से बचना है अन्यथा आपका व्हाट्सएप हमेशा के लिए बैन किया जा सकता है। अगर आप भी अपने व्हाट्सएप अकाउंट को बैन होने से बचाना चाहते हैं, तो आपको निम्न बातों का पूरा ध्यान रखना होगा अन्यथा WhatsApp आपके अकाउंट पर कभी भी एक्शन ले सकती हैं। यदि आपको व्हाट्सएप को ठीक से इस्तेमाल करना है तो, आपको इसके टर्म्स और सर्विस को नहीं तोड़ना है। अगर आप कभी इसका उल्लंघन करते हुए पाये जाते हैं, तो WhatsApp आपके अकाउंट को कभी भी बैन कर सकती है। WhatsApp और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेक न्यूज को खत्म करने से लड़ रहे हैं। आपको जब भी कोई न्यूज मिले तो उसको जाँचने के बाद ही आगे किसी को फॉरवर्ड करें, क्योंकि फेक न्यूज फैलाने वाले अकाउंट को कंपनी कभी भी बैन कर सकती हैं। यदि आप किसी दूसरे व्यक्ति को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से फेक अकाउंट बनाते हैं, तो भी आपके व्हाट्सएप अकाउंट को कंपनी बैन कर सकती हैं। इसलिए गैर लोगों के फेक अकाउंट बनाने से बचें। वहीं आज मार्केट में कई थर्ड-पार्टी व्हाट्सएप एप्लिकेशन मौजूद हैं जो ठीक ऐसे ही काम करते हैं, लेकिन इनमें कुछ ज्यादा फीचर्स मिलते हैं। इनमें से एक GB WhatsApp हैं जिसका इस्तेमाल बहुत से यूजर्स करते हैं। लेकिन इन ऐप्स का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के अकाउंट भी बैन किए जा सकते हैं। अगर आप एक या दो नहीं बल्कि बहुत सारे यूजर्स को व्हाट्सएप पर ब्लॉक करते हैं, तो कंपनी आपके अकाउंट पर एक्शन लेकर उसको ब्लॉक कर सकती है। इसलिए यह काम करने से बचना ही बेहतर होगा। आपको इस बात का भी ध्यान रखना है कि आप जो कंटैंट भेज रहे हैं वो गलत तो नहीं है, क्या उससे किसी को आपत्ति तो नहीं होगी, अगर ऐसा कंटैंट यानि फोटो या वीडियो अपलोड करते हैं तो आपके व्हाट्सएप अकाउंट को हमेशा के लिए बैन किया जा सकता हैं। WhatsApp पर अगर कोई अश्लील फोटो और वीडियो शेयर करता हुआ पाया जाता है और उसके खिलाफ शिकायत होती हैं, तो उसके अकाउंट को परमानेंटली बैन किया जा सकता हैं। इसलिए ऐसे फोटो और वीडियो गलती से फॉरवर्ड न करें। उम्मीद करते हैं, हमारी ये बातें आपको सही लगी होंगी और अगर आप भी इन बातों का ध्यान रखेंगे तो आपका WhatsApp अकाउंट कभी भी बैन नहीं होगा। इस आर्टिकल को अपने दोस्तों और फैमिली वालों के साथ जरूर शेयर करें।
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New Delhi : बिहार के चर्चित मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. मामले में 20 में से 19 लोगों को दोषी पाया गया है. इसमें मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर भी शामिल है. कोर्ट ने लंबी बहस के बाद 1546 पन्ने का फैसला सुनाया है.
कानून के जानकारों के अनुसार मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर समेत दोषियों को न्यूनतम 10 साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा हो सकती है. दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों से खबर है कि इस फैसले से बिहार में मुख्य विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल के साथ कांग्रेस और अन्य दल भी राज्य में सत्तासीन जनता दल युनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी को घेर सकते हैं.
आपको बता दें कि पिछली सुनवाई के दौरान साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने फैसले को टालते हुए 20 जनवरी की तारीख तय की थी. लेकिन केंद्रीय जांच एजेंसी मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर समेत 21 आरोपितों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दिया था.
शेल्टर होम केस मामले में मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर सहित सभी 20 आरोपी पहले से जेल में हैं. इन सभी को सोमवार को होने वाले फैसले के दिन कोर्ट में पेश किया गया. सीबीआइ ने अपनी ओर से दाखिल चार्जशीट में आरोपितों पर दुष्कर्म और बाल यौन शोषण रोकथाम अधिनियम पोक्सो की धारा-6 के तहत भी आरोप लगाये हैं.
सीबीआइ की चार्जशीट के अनुसार मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में नाबालिग बच्चियों के साथ कर्मचारी भी शोषण कर रहे थे. इसी के साथ ये भी आरोप है कि बिहार सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारी भी बच्चियों का शोषण कर रहे थे.
यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद बच्चियों का मेडिकल टेस्ट कराया गया था. इस टेस्ट में लगभग 34 बच्चियों के यौन शोषण की पुष्टि की गयी थी. सुनवाई के दौरान पीड़ितों ने यह भी बताया कि उन्हें नशा वाली दवाएं दी जाती थी और उनके साथ मारपीट की जाती थी. फिर उनके साथ जबरन संबंध बनाये जाते थे.
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New Delhi : बिहार के चर्चित मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. मामले में बीस में से उन्नीस लोगों को दोषी पाया गया है. इसमें मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर भी शामिल है. कोर्ट ने लंबी बहस के बाद एक हज़ार पाँच सौ छियालीस पन्ने का फैसला सुनाया है. कानून के जानकारों के अनुसार मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर समेत दोषियों को न्यूनतम दस साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा हो सकती है. दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों से खबर है कि इस फैसले से बिहार में मुख्य विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल के साथ कांग्रेस और अन्य दल भी राज्य में सत्तासीन जनता दल युनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी को घेर सकते हैं. आपको बता दें कि पिछली सुनवाई के दौरान साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने फैसले को टालते हुए बीस जनवरी की तारीख तय की थी. लेकिन केंद्रीय जांच एजेंसी मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर समेत इक्कीस आरोपितों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दिया था. शेल्टर होम केस मामले में मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर सहित सभी बीस आरोपी पहले से जेल में हैं. इन सभी को सोमवार को होने वाले फैसले के दिन कोर्ट में पेश किया गया. सीबीआइ ने अपनी ओर से दाखिल चार्जशीट में आरोपितों पर दुष्कर्म और बाल यौन शोषण रोकथाम अधिनियम पोक्सो की धारा-छः के तहत भी आरोप लगाये हैं. सीबीआइ की चार्जशीट के अनुसार मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में नाबालिग बच्चियों के साथ कर्मचारी भी शोषण कर रहे थे. इसी के साथ ये भी आरोप है कि बिहार सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारी भी बच्चियों का शोषण कर रहे थे. यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद बच्चियों का मेडिकल टेस्ट कराया गया था. इस टेस्ट में लगभग चौंतीस बच्चियों के यौन शोषण की पुष्टि की गयी थी. सुनवाई के दौरान पीड़ितों ने यह भी बताया कि उन्हें नशा वाली दवाएं दी जाती थी और उनके साथ मारपीट की जाती थी. फिर उनके साथ जबरन संबंध बनाये जाते थे.
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साउथ इंटस्ट्री की एक्ट्रेस को बॉलीवुड की फिल्मों में काम करते या बॉलीवुड की एक्ट्रेसस को साउथ की फिल्मों में काम करते तो आपने जरूर देखा होगा। लेकिन भोजपुरी इंडस्ट्री की फिल्मों में साउथ की एक्ट्रेसस का काम करना शायद आपको आश्चर्यजनक लगे। चलिए जानते हैं कौन-कौन सी एक्ट्रेसस भोजपुरी इंडस्ट्री में अपना परचम लहरा रही हैं।
Madhu Sharmaमधु शर्मा ने 1998 में तमिल फिल्म 'गुरु पारवाई' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी और इसके बाद वह साल 2013 में भोजपुरी फिल्म 'एक दूजे के लिए' में पहली बार नजर आईं और आज वह इस इंडस्ट्री की जान और दर्शकों की पसंद बनी हुई हैं। (Source: Social Media)
Raai Laxmiसाउथ फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर एक्ट्रेस राय लक्ष्मी भी पवन सिंह के साथ म्यूजिक एलबम 'करंट' में नजर आ चुकी हैं। (Source: Raai Laxmi/Facebook)
Rambhaरंभा ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत साउथ इंडियन फिल्मों से की थी। वह साल 2007 में रवि किशन के साथ भोजपुरी फिल्म राम बलराम में काम कर चुकी हैं। (Source: Rambha/Facebook)
Tridha Chaudharyभोजपुरी में त्रिधा चौधरी पवन सिंह के साथ म्यूजिक वीडियो बबुनी में काम कर चुकी हैं। वह साउथ सिनेमा में भी काम कर चुकी हैं। (Source: Social Media)
Nagmaनगमा का आज भोजपुरी इंडस्ट्री में बड़ा नाम हैं। वो भोजपुरी में ही नहीं बल्कि हिंदी और साउथ फिल्म इंडस्ट्री में भी काम कर चुकी हैं। (Source: Social Media)
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साउथ इंटस्ट्री की एक्ट्रेस को बॉलीवुड की फिल्मों में काम करते या बॉलीवुड की एक्ट्रेसस को साउथ की फिल्मों में काम करते तो आपने जरूर देखा होगा। लेकिन भोजपुरी इंडस्ट्री की फिल्मों में साउथ की एक्ट्रेसस का काम करना शायद आपको आश्चर्यजनक लगे। चलिए जानते हैं कौन-कौन सी एक्ट्रेसस भोजपुरी इंडस्ट्री में अपना परचम लहरा रही हैं। Madhu Sharmaमधु शर्मा ने एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में तमिल फिल्म 'गुरु पारवाई' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी और इसके बाद वह साल दो हज़ार तेरह में भोजपुरी फिल्म 'एक दूजे के लिए' में पहली बार नजर आईं और आज वह इस इंडस्ट्री की जान और दर्शकों की पसंद बनी हुई हैं। Raai Laxmiसाउथ फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर एक्ट्रेस राय लक्ष्मी भी पवन सिंह के साथ म्यूजिक एलबम 'करंट' में नजर आ चुकी हैं। Rambhaरंभा ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत साउथ इंडियन फिल्मों से की थी। वह साल दो हज़ार सात में रवि किशन के साथ भोजपुरी फिल्म राम बलराम में काम कर चुकी हैं। Tridha Chaudharyभोजपुरी में त्रिधा चौधरी पवन सिंह के साथ म्यूजिक वीडियो बबुनी में काम कर चुकी हैं। वह साउथ सिनेमा में भी काम कर चुकी हैं। Nagmaनगमा का आज भोजपुरी इंडस्ट्री में बड़ा नाम हैं। वो भोजपुरी में ही नहीं बल्कि हिंदी और साउथ फिल्म इंडस्ट्री में भी काम कर चुकी हैं।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
विभिन्न संरक्षित खाद्य पदार्थ कनाडा का विश्व युद्ध प्रथम के समय का पोस्टर जो लोगों को सर्दियों के लिए भोजन संरक्षित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। खाद्य परिरक्षण खाद्य को उपचारित करने और संभालने की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके खराब होने (गुणवत्ता, खाद्यता या पौष्टिक मूल्य में कमी) की उस प्रक्रिया को रोकता है या बहुत कम कर देता है, जो सूक्ष्म जीवाणुओं द्वारा होती या तेज कर दी जाती है। यद्दपि कुछ तरीकों में, सौम्य बैक्टीरिया, जैसे खमीर या कवक का प्रयोग किया जाता है ताकि विशेष गुण बढ़ाए जा सके और खाद्य पदार्थों को संरक्षित किया जा सके (उदाहरण के तौर पर पनीर और शराब). नाशपाती (अंग्रेजीः Pear; वानस्पतिक नाम) एक फल है। नाशपाती भी सेब से जुड़ा एक उप-अम्लीय फल है, लेकिन इसमें शर्करा अधिक तथा अम्ल कम पाया जाता है। यह मूल रूप से उत्तरी अफ्रीका, पश्चिमी यूरोप का निवासी था और पूर्वी जंबुद्वीप तक इसका विस्तार हुआ करता था। यह एक मध्यम ऊंचाई का पेड़ होता है जो तक पहुंचता है, प्रायः ऊपर ऊंचा, संकरा किरीट आकार होता है। इसकी कुछ प्रजातियां झाड़ रूपी भी होती हैं, जिनकी ऊंचाई अधिक नहीं होती। इसकी पत्तियां एक एक करके दायें बाएं व्यवस्थित होती हैं व सीधी लम्बी, कुछ प्रजातियों में चमकदार हरी, तो कुछ अन्य प्रजातियों में घने रजतवर्णी रोयें से ढंकी हरी होती हैं। इनका आकार चौड़ा ओवल से लेकर संकरा भालानुमा भी होता है। अधिकतर नाश्पाती की प्रजातियाँ पर्णपाती होती हैं, किन्तु दक्षिण-पूर्वी एशिया में एक-दो प्रजातियां सदाबहार भी पायी जाती हैं। अधिकतर ठंड सहने वाली कुछ सख्त होती हैं, जिनमें शीत ऋतु में शून्य के नीचे से शून्य के नीचे तापमान सहने की क्षमता होती है। जो सदाबहार प्रजातियाँ होती हैं, उनकी क्षमता मात्र शून्य के नीचे ही होती है। .
खाद्य परिरक्षण और नाशपाती आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): सेब।
कोई विवरण नहीं।
खाद्य परिरक्षण 60 संबंध है और नाशपाती 21 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 1.23% है = 1 / (60 + 21)।
यह लेख खाद्य परिरक्षण और नाशपाती के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। विभिन्न संरक्षित खाद्य पदार्थ कनाडा का विश्व युद्ध प्रथम के समय का पोस्टर जो लोगों को सर्दियों के लिए भोजन संरक्षित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। खाद्य परिरक्षण खाद्य को उपचारित करने और संभालने की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके खराब होने की उस प्रक्रिया को रोकता है या बहुत कम कर देता है, जो सूक्ष्म जीवाणुओं द्वारा होती या तेज कर दी जाती है। यद्दपि कुछ तरीकों में, सौम्य बैक्टीरिया, जैसे खमीर या कवक का प्रयोग किया जाता है ताकि विशेष गुण बढ़ाए जा सके और खाद्य पदार्थों को संरक्षित किया जा सके . नाशपाती एक फल है। नाशपाती भी सेब से जुड़ा एक उप-अम्लीय फल है, लेकिन इसमें शर्करा अधिक तथा अम्ल कम पाया जाता है। यह मूल रूप से उत्तरी अफ्रीका, पश्चिमी यूरोप का निवासी था और पूर्वी जंबुद्वीप तक इसका विस्तार हुआ करता था। यह एक मध्यम ऊंचाई का पेड़ होता है जो तक पहुंचता है, प्रायः ऊपर ऊंचा, संकरा किरीट आकार होता है। इसकी कुछ प्रजातियां झाड़ रूपी भी होती हैं, जिनकी ऊंचाई अधिक नहीं होती। इसकी पत्तियां एक एक करके दायें बाएं व्यवस्थित होती हैं व सीधी लम्बी, कुछ प्रजातियों में चमकदार हरी, तो कुछ अन्य प्रजातियों में घने रजतवर्णी रोयें से ढंकी हरी होती हैं। इनका आकार चौड़ा ओवल से लेकर संकरा भालानुमा भी होता है। अधिकतर नाश्पाती की प्रजातियाँ पर्णपाती होती हैं, किन्तु दक्षिण-पूर्वी एशिया में एक-दो प्रजातियां सदाबहार भी पायी जाती हैं। अधिकतर ठंड सहने वाली कुछ सख्त होती हैं, जिनमें शीत ऋतु में शून्य के नीचे से शून्य के नीचे तापमान सहने की क्षमता होती है। जो सदाबहार प्रजातियाँ होती हैं, उनकी क्षमता मात्र शून्य के नीचे ही होती है। . खाद्य परिरक्षण और नाशपाती आम में एक बात है : सेब। कोई विवरण नहीं। खाद्य परिरक्षण साठ संबंध है और नाशपाती इक्कीस है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक एक.तेईस% है = एक / । यह लेख खाद्य परिरक्षण और नाशपाती के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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मेषः राशि का स्वामी मंगल षष्ठम भाव में चल रहा है। आप धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में सहयोग करेंगे, यदि आप व्यापार कर रहे हैं तो आपके व्यापार में आज कुछ नए परिवर्तन होंगे जिससे आगे चलकर आपको लाभ होगा।
वृषभःआज आपकी राशि से अष्टम भाव में चन्द्रमा बाधाएं पैदा कर सकता है। सांसारिक सुख भोग और नौकर चाकरों के असहयोग से परेशानी हो सकती है। सायं 5 बजे के बाद चन्द्रमा के धनुः राशि में प्रवेश करने के उपरान्त कुछ धैर्य बंधेगा, पड़ोसी सहयोग करेंगे।
मिथुनः आज आपमें अपने कार्य के प्रति लगन रहेगी एवं रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे। आप नए-नए कार्यों में विनियोग करेंगे। सायंकाल के वक्त वाहन खराब होने से अकस्मात् खर्च बढ़ सकता है। आप इस समय में धैर्य से काम लें क्योंकि जल्दबाजी में किए गए कार्य से आप परेशान हो सकते हैं।
कर्कःआज आपके लिए व्यस्तता भरा दिन है। सायंकाल से देर रात तक आपकी भौतिक सुख सुविधाओं में वृद्धि होगी। आपका बुद्धि विवेक, नए-नए कार्यों की खोज करने में लगेगा। आप दूसरों की कमियां ढूंढ़ना छोड़ दें तो आज से ही आपकी शान में चार चांद लग सकते हैं।
सिंहःआज धनुः का चन्द्रमा आपको बहुमूल्य वस्तु से लाभ प्राप्त कराएगा। अपनी शान शौकत के लिए धन का व्यय करेंगे। गरीबों की सहायता और अपनी वाक्पटुता, कार्य कुशलता से दूसरे व्यक्तियों को अपनी ओर आकृष्ट करने में सक्षम रहेंगे।
कन्याः आज राशि से चतुर्थ भाव में चन्द्रमा राज्य विजयकारक है। आपके प्रभाव प्रताप में वृद्वि होगी। सायंकाल से लेकर देर रात्रि तक ऐसे अनावश्यक खर्चे सामने आ सकते हैं जो कि चाहते हुए भी मजबूरी में करने पड़ सकते हैं।
तुलाः अधिक परिश्रम करने के कारण स्वास्थ्य कुछ नरम रहेगा। राज्य और समाज की ओर से वांछित सहयोग मिलेगा। परिवार की तरफ से भी शुभ समाचार मिलने के संकेत हैं। यदि आप नौकरी करते हैं तो आपके अधिकारों में वृद्धि होगी। उत्तरदायित्व बढ़ेगा। सब लोग आपके साहस और पराक्रम की प्रसंशा करेंगे।
वृश्चिकःआज का दिन मिश्रित फलकारक है। ऐसे अनावश्यक खर्चे सामने आएंगे जो आपकी खिन्नता को बढ़ा देंगे। सायंकाल के समय कोई खुशखबरी मिलने से आपका उत्साह बढ़ेगा। रात्रि के समय किसी मांगलिक समारोह में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त होगा।
धनुः दिन का कुछ समय सामाजिक क्रियाकलापों में भी लगेगा। आपकी भौतिक सुख सुविधाओं में कुछ कमी आ सकती है। यदि आप अपने मन की बात को शीघ्र दूसरों से उजागर न करें तो रुके हुए धन की प्राप्ति हो सकती है।
मकरः आज ग्रहों के संयोग के कारण आपकी निर्णय लेने की क्षमता से आपको लाभ होगा। यदि आपका कोई विवाद राज्य में या समाज में लंबित हो तो उनमें सफलता मिलने की पूर्ण संभावना है। धन का लाभ होगा।
कुंभःआज का दिन आपके लिए भविष्य की नवीन संभावनाओं को लेकर आ रहा है। आपके अच्छे कर्मों से आपके खानदान का नाम ऊंचा होगा। बुजुर्गों के आशीर्वाद से कार्य में सफलता मिलेगी। सायंकाल का समय गाने बजाने संगीत और सैर सपाटे में बीतेगा।
मीनः आज शत्रुओं को लेकर खासे सावधान रहें। मानसिक अशांति खिन्नता एवं उदासीनता के कारण आप भटक सकते हैं। यदि आपकी प्रोन्नति होने वाली है तो अवश्य प्राप्त होगी। आपको आकस्मिक चिन्ता होने की संभावना है। जिससे आप अपनी वाक पटुता से शीघ्र ही दूर कर लेंगे। रात्रि में अकस्मात् अतिथियों के आगमन से असुविधा हो सकती है।
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मेषः राशि का स्वामी मंगल षष्ठम भाव में चल रहा है। आप धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में सहयोग करेंगे, यदि आप व्यापार कर रहे हैं तो आपके व्यापार में आज कुछ नए परिवर्तन होंगे जिससे आगे चलकर आपको लाभ होगा। वृषभःआज आपकी राशि से अष्टम भाव में चन्द्रमा बाधाएं पैदा कर सकता है। सांसारिक सुख भोग और नौकर चाकरों के असहयोग से परेशानी हो सकती है। सायं पाँच बजे के बाद चन्द्रमा के धनुः राशि में प्रवेश करने के उपरान्त कुछ धैर्य बंधेगा, पड़ोसी सहयोग करेंगे। मिथुनः आज आपमें अपने कार्य के प्रति लगन रहेगी एवं रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे। आप नए-नए कार्यों में विनियोग करेंगे। सायंकाल के वक्त वाहन खराब होने से अकस्मात् खर्च बढ़ सकता है। आप इस समय में धैर्य से काम लें क्योंकि जल्दबाजी में किए गए कार्य से आप परेशान हो सकते हैं। कर्कःआज आपके लिए व्यस्तता भरा दिन है। सायंकाल से देर रात तक आपकी भौतिक सुख सुविधाओं में वृद्धि होगी। आपका बुद्धि विवेक, नए-नए कार्यों की खोज करने में लगेगा। आप दूसरों की कमियां ढूंढ़ना छोड़ दें तो आज से ही आपकी शान में चार चांद लग सकते हैं। सिंहःआज धनुः का चन्द्रमा आपको बहुमूल्य वस्तु से लाभ प्राप्त कराएगा। अपनी शान शौकत के लिए धन का व्यय करेंगे। गरीबों की सहायता और अपनी वाक्पटुता, कार्य कुशलता से दूसरे व्यक्तियों को अपनी ओर आकृष्ट करने में सक्षम रहेंगे। कन्याः आज राशि से चतुर्थ भाव में चन्द्रमा राज्य विजयकारक है। आपके प्रभाव प्रताप में वृद्वि होगी। सायंकाल से लेकर देर रात्रि तक ऐसे अनावश्यक खर्चे सामने आ सकते हैं जो कि चाहते हुए भी मजबूरी में करने पड़ सकते हैं। तुलाः अधिक परिश्रम करने के कारण स्वास्थ्य कुछ नरम रहेगा। राज्य और समाज की ओर से वांछित सहयोग मिलेगा। परिवार की तरफ से भी शुभ समाचार मिलने के संकेत हैं। यदि आप नौकरी करते हैं तो आपके अधिकारों में वृद्धि होगी। उत्तरदायित्व बढ़ेगा। सब लोग आपके साहस और पराक्रम की प्रसंशा करेंगे। वृश्चिकःआज का दिन मिश्रित फलकारक है। ऐसे अनावश्यक खर्चे सामने आएंगे जो आपकी खिन्नता को बढ़ा देंगे। सायंकाल के समय कोई खुशखबरी मिलने से आपका उत्साह बढ़ेगा। रात्रि के समय किसी मांगलिक समारोह में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त होगा। धनुः दिन का कुछ समय सामाजिक क्रियाकलापों में भी लगेगा। आपकी भौतिक सुख सुविधाओं में कुछ कमी आ सकती है। यदि आप अपने मन की बात को शीघ्र दूसरों से उजागर न करें तो रुके हुए धन की प्राप्ति हो सकती है। मकरः आज ग्रहों के संयोग के कारण आपकी निर्णय लेने की क्षमता से आपको लाभ होगा। यदि आपका कोई विवाद राज्य में या समाज में लंबित हो तो उनमें सफलता मिलने की पूर्ण संभावना है। धन का लाभ होगा। कुंभःआज का दिन आपके लिए भविष्य की नवीन संभावनाओं को लेकर आ रहा है। आपके अच्छे कर्मों से आपके खानदान का नाम ऊंचा होगा। बुजुर्गों के आशीर्वाद से कार्य में सफलता मिलेगी। सायंकाल का समय गाने बजाने संगीत और सैर सपाटे में बीतेगा। मीनः आज शत्रुओं को लेकर खासे सावधान रहें। मानसिक अशांति खिन्नता एवं उदासीनता के कारण आप भटक सकते हैं। यदि आपकी प्रोन्नति होने वाली है तो अवश्य प्राप्त होगी। आपको आकस्मिक चिन्ता होने की संभावना है। जिससे आप अपनी वाक पटुता से शीघ्र ही दूर कर लेंगे। रात्रि में अकस्मात् अतिथियों के आगमन से असुविधा हो सकती है।
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आज हम यह पता लगाएंगे कि गेमिंग सेंटर क्या हैवार्फेस को लॉन्च करने के लिए वास्तव में, यह आभासी वस्तु एक बहुत ही उपयोगी चीज है लेकिन इसके लिए क्या है? इसे कहाँ ले जाना है? वह क्या करता है? आज हमारे सामने पेश किए गए सवालों के जवाब देने की कोशिश करते हैं।
शुरू करने के लिए, समझने की कोशिश करो कि हमें क्या चाहिएको आज सौदा करना होगा वास्तव में, आधुनिक उपयोगकर्ता को समझने के लिए, वॉर्फेस लॉन्च करने के लिए आज का गेम सेंटर एक बहुत सरल बात है। बात यह है कि रूसी में कई ऑनलाइन गेम खरीदे जाते हैं और अब कंपनी "मेल" द्वारा विकसित की जाती है। यह वह थी जिसने विशेष आवेदन बनाया है जो उपयोगकर्ताओं को खिलौने के विराम के साथ डाउनलोड करने, इंस्टॉल करने, अपडेट करने और हटाने के लिए मदद करता है। यह तथाकथित गेमिंग केंद्र है "मेल" से वॉर्फ़स और अन्य गेम लॉन्च करने के लिए यह आवश्यक रूप से जरूरी है इसके बिना, आप खिलौना का उपयोग नहीं कर सकते जब तक स्थापना फ़ाइल डाउनलोड न करें। और वह सब कुछ है गेम के पहले लॉन्च के लिए आपके साथ तैयार करने का प्रयास करें, ताकि वारफेस से संदेश प्राप्त न करेंः "कृपया शुरू करने के लिए गेमिंग सेंटर का उपयोग करें।"
ठीक है, सबसे सरल और समस्त कार्रवाई के लिए- यह चलाने के लिए गेम क्लाइंट की तैयारी है यहां हमें खेल केंद्र को Mail.ru से डाउनलोड और इंस्टॉल करना होगा। आप इस विचार को कैसे लागू कर सकते हैं? समझने की कोशिश करते हैं।
के साथ शुरू करने के लिए, बस ले लो और जाने के लिएMail.ru की आधिकारिक वेबसाइट इसके बाद, आपको "गेम्स" अनुभाग में देखना होगा। वहां आपके पास खिलौनों की एक सूची होगी, जिन्हें आप अपने कंप्यूटर पर डाउनलोड कर सकते हैं। लेकिन सिर्फ ऊपर आपको शिलालेख "गेम सेंटर" दिखाई देगा यदि आप उस पर क्लिक करते हैं, तो आप अपने कंप्यूटर पर इंस्टॉलर डाउनलोड करेंगे। यह विशेष रूप से "भारी" नहीं है - औसत इंटरनेट की गति के साथ कुछ मिनट पर्याप्त होंगे।
जब प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो आप इंस्टॉल कर सकते हैंकार्यक्रम, और फिर Warface और अन्य क्लाइंट खिलौने को लॉन्च करने के लिए गेम केंद्र का उपयोग करें। जैसा कि आप देख सकते हैं, यह उतना मुश्किल नहीं है क्योंकि यह पहली नज़र में लग सकता है।
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आज हम यह पता लगाएंगे कि गेमिंग सेंटर क्या हैवार्फेस को लॉन्च करने के लिए वास्तव में, यह आभासी वस्तु एक बहुत ही उपयोगी चीज है लेकिन इसके लिए क्या है? इसे कहाँ ले जाना है? वह क्या करता है? आज हमारे सामने पेश किए गए सवालों के जवाब देने की कोशिश करते हैं। शुरू करने के लिए, समझने की कोशिश करो कि हमें क्या चाहिएको आज सौदा करना होगा वास्तव में, आधुनिक उपयोगकर्ता को समझने के लिए, वॉर्फेस लॉन्च करने के लिए आज का गेम सेंटर एक बहुत सरल बात है। बात यह है कि रूसी में कई ऑनलाइन गेम खरीदे जाते हैं और अब कंपनी "मेल" द्वारा विकसित की जाती है। यह वह थी जिसने विशेष आवेदन बनाया है जो उपयोगकर्ताओं को खिलौने के विराम के साथ डाउनलोड करने, इंस्टॉल करने, अपडेट करने और हटाने के लिए मदद करता है। यह तथाकथित गेमिंग केंद्र है "मेल" से वॉर्फ़स और अन्य गेम लॉन्च करने के लिए यह आवश्यक रूप से जरूरी है इसके बिना, आप खिलौना का उपयोग नहीं कर सकते जब तक स्थापना फ़ाइल डाउनलोड न करें। और वह सब कुछ है गेम के पहले लॉन्च के लिए आपके साथ तैयार करने का प्रयास करें, ताकि वारफेस से संदेश प्राप्त न करेंः "कृपया शुरू करने के लिए गेमिंग सेंटर का उपयोग करें।" ठीक है, सबसे सरल और समस्त कार्रवाई के लिए- यह चलाने के लिए गेम क्लाइंट की तैयारी है यहां हमें खेल केंद्र को Mail.ru से डाउनलोड और इंस्टॉल करना होगा। आप इस विचार को कैसे लागू कर सकते हैं? समझने की कोशिश करते हैं। के साथ शुरू करने के लिए, बस ले लो और जाने के लिएMail.ru की आधिकारिक वेबसाइट इसके बाद, आपको "गेम्स" अनुभाग में देखना होगा। वहां आपके पास खिलौनों की एक सूची होगी, जिन्हें आप अपने कंप्यूटर पर डाउनलोड कर सकते हैं। लेकिन सिर्फ ऊपर आपको शिलालेख "गेम सेंटर" दिखाई देगा यदि आप उस पर क्लिक करते हैं, तो आप अपने कंप्यूटर पर इंस्टॉलर डाउनलोड करेंगे। यह विशेष रूप से "भारी" नहीं है - औसत इंटरनेट की गति के साथ कुछ मिनट पर्याप्त होंगे। जब प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो आप इंस्टॉल कर सकते हैंकार्यक्रम, और फिर Warface और अन्य क्लाइंट खिलौने को लॉन्च करने के लिए गेम केंद्र का उपयोग करें। जैसा कि आप देख सकते हैं, यह उतना मुश्किल नहीं है क्योंकि यह पहली नज़र में लग सकता है।
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पंजाब चेस एसोसिएशन की तरफ से शहर में करवाई दो दिवसीय चेस चैंपियनशिप में ओवरआल जालंधर का दबदबा रहा। सेठ हुक्म चंद एसडी पब्लिक स्कूल में 8-9 अप्रैल को पंजाब स्टेट अंडर-17 ओपन व लड़कियों की इस चैंपियनशिप में पंजाब भर से खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
इस मौके पर बतौर मुख्यातिथि के रुप में स्कूल प्रिंसिपल ममता बहल सहित पंजाब चैस एसोसिएशन के प्रधान मुनीष थापर ने हिस्सा लिया, जिन्होंने सभी विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया और उन्हें बेहतर खेल खेलने के लिए प्रेरित किया।
मुनीष थापर ने बताया कि पंजाब के मेडलिस्ट खिलाड़ी अगले महीने 1 से 9 अप्रैल को डेविएट कालेज में होने वाली अंडर-17 नेशनल कंपीटीशन में पंजाब का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस मौके पर राजेश बत्रा प्रधान कपूरथला चैस एसोसिएशन, सीईओ राजेश दुग्गल, प्रधान शुभम दुग्गल, सेक्रेटरी सुनील शर्मा, कैशियर पराग भसीन, ज्वाइंट सेक्रेटरी हरसिमरन सिंह, राघव मल्होत्रा, वरुण कुमार, शिल्पा, चंद्रेश बख्शी आदि मौजूद रहे।
परिणाम : अंडर-17 ओपन में जालंधर का तन्मय जैन पहले, पटियाला का गोयल सक्षम दूसरे, होशियारपुर प्रीतिश विशिष्ट तीसरे स्थान पर रहा। लड़कियों में पहले तीनों स्थानों पर जालंधर की लड़कियों का दबदबा रहा। जिसमें श्रृष्ठि पहले, अनाहिता वर्मा दूसरे, रिद्धि खन्ना तीसरे स्थान पर रही।
अंडर-11 ओपन में जालंधर का हरिधान पहले, बठिंडा का मेघांश गोयल दूसरे व सुसेन बाहरी तीसरे स्थान पर रही।
अंडर-15 ओपन में उत्कृष्ट तुली पहले, पटियाला का गुर शब्द दूसरे, होशियारपुर का पुनीत वर्मा तीसरे स्थान पर रहा।
अंडर-11 लड़कियों में बठिंडा की अर्शिया पहले, जालंधर की साक्षी दूसरे, पटियाला की वानिका तीसरे स्थान पर रही।
अंडर-15 लड़कियों में महाली की गुनिका जलोटा पहले, जालंधर की अनन्या अरोड़ा दूसरे, पटियाला की जाह्नवी तीसरे स्थान पर रही।
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पंजाब चेस एसोसिएशन की तरफ से शहर में करवाई दो दिवसीय चेस चैंपियनशिप में ओवरआल जालंधर का दबदबा रहा। सेठ हुक्म चंद एसडी पब्लिक स्कूल में आठ-नौ अप्रैल को पंजाब स्टेट अंडर-सत्रह ओपन व लड़कियों की इस चैंपियनशिप में पंजाब भर से खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर बतौर मुख्यातिथि के रुप में स्कूल प्रिंसिपल ममता बहल सहित पंजाब चैस एसोसिएशन के प्रधान मुनीष थापर ने हिस्सा लिया, जिन्होंने सभी विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया और उन्हें बेहतर खेल खेलने के लिए प्रेरित किया। मुनीष थापर ने बताया कि पंजाब के मेडलिस्ट खिलाड़ी अगले महीने एक से नौ अप्रैल को डेविएट कालेज में होने वाली अंडर-सत्रह नेशनल कंपीटीशन में पंजाब का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस मौके पर राजेश बत्रा प्रधान कपूरथला चैस एसोसिएशन, सीईओ राजेश दुग्गल, प्रधान शुभम दुग्गल, सेक्रेटरी सुनील शर्मा, कैशियर पराग भसीन, ज्वाइंट सेक्रेटरी हरसिमरन सिंह, राघव मल्होत्रा, वरुण कुमार, शिल्पा, चंद्रेश बख्शी आदि मौजूद रहे। परिणाम : अंडर-सत्रह ओपन में जालंधर का तन्मय जैन पहले, पटियाला का गोयल सक्षम दूसरे, होशियारपुर प्रीतिश विशिष्ट तीसरे स्थान पर रहा। लड़कियों में पहले तीनों स्थानों पर जालंधर की लड़कियों का दबदबा रहा। जिसमें श्रृष्ठि पहले, अनाहिता वर्मा दूसरे, रिद्धि खन्ना तीसरे स्थान पर रही। अंडर-ग्यारह ओपन में जालंधर का हरिधान पहले, बठिंडा का मेघांश गोयल दूसरे व सुसेन बाहरी तीसरे स्थान पर रही। अंडर-पंद्रह ओपन में उत्कृष्ट तुली पहले, पटियाला का गुर शब्द दूसरे, होशियारपुर का पुनीत वर्मा तीसरे स्थान पर रहा। अंडर-ग्यारह लड़कियों में बठिंडा की अर्शिया पहले, जालंधर की साक्षी दूसरे, पटियाला की वानिका तीसरे स्थान पर रही। अंडर-पंद्रह लड़कियों में महाली की गुनिका जलोटा पहले, जालंधर की अनन्या अरोड़ा दूसरे, पटियाला की जाह्नवी तीसरे स्थान पर रही। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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प्रदेश में तीसरे चरण का चुनाव एपी- कांग्रेस गठबंधन के लिए घरेलू पिच सरीखा ही है। 'यूपी को ये साथ पसंद है' नारे का असली सच तीसरा चरण ही बताएगा क्योंकि यहां की 80 फीसदी से अधिक सीटें इस समय गठबंधन के ही जेब में है।
लखनऊ जब आपके फॉर्म पर सवाल उठ रहे हों तो घरेलू पिच जवाब देने के लिए सबसे बेहतर होती है। 19 फरवरी को प्रदेश में तीसरे चरण का चुनाव एपी- कांग्रेस गठबंधन के लिए घरेलू पिच सरीखा ही है। 'यूपी को ये साथ पसंद है' नारे का असली सच तीसरा चरण ही बताएगा क्योंकि यहां की 80 फीसदी से अधिक सीटें इस समय गठबंधन के ही जेब में है। वहीं, एसपी परिवार के झगड़े को मुद्दा बनाना बीजेपी को कितना भाया है यह भी यहां साफ हो जाएगा।
तीसरे चरण में 12 जिले की 69 सीटों पर चुनाव है। इसमें यादव बेल्ट के नाम से जाने जाने वाले इटावा, फर्रूखाबाद, औरैया, कन्नौज, मैनपुरी, कानपुर देहात सहित 6 जिले भी शामिल हैं।
पिछले चुनाव में तीसरे चरण में एसपी की ऐसी आंधी रही थी कि उसके अलावा कोई पार्टी दहाई का आंकड़ा तक पार नहीं कर पाई थी। हालांकि, इस बार सियासी रिश्ते भी बदले हैं, पार्टियों के चेहरे भी बदले हैं और सैफई परिवार का आंतरिक गणित भी। नतीजों पर इसका असर साफ दिखेगा।
'फ्रेंडली' फाइट से बगावत के सुर : एसपी-कांग्रेस गठबंधन में कई सीटों पर गांठ नहीं खुली है। इसका असर यह है कि दोनों ही पार्टियों के स्टार प्रचारक इन सीटों पर तय नहीं कर पा रहे कि किसकी बात रखें। मसलन, लखनऊ मध्य से मारुफ खान को हाथ का पंजा अलॉट हो चुका है। मारुफ खान का दावा है कि यूपी प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने फोन कर उन्हें पर्चा दाखिल करने को कहा था। यहां एसपी से रविदास मेहरोत्रा उम्मीदवार हैं। मारुफ पार्टी के कहने के बाद भी पर्चा वापसी को तैयार नहीं हैं।
महराजपुर से अरुणा तोमर के समर्थन डिंपल यादव, जया बच्चन और प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम सभा कर चुके हैं। यहां कांग्रेस से राजाराम पाल भी मैदान में हैं। अब एसपी ने अरुणा तोमर को सीट छोड़ने के लिए कहा है। जबकि अरुणा का दावा है कि हाईकमान की मर्जी से वह अब भी उम्मीदवार हैं। कानपुर कैंट से एसपी ने मोहम्मद हसन रूमी का टिकट वापस लिया। यहां आखिरी दौर में आजम खान की सभा कैंसल की गई। भोगनीपुर में भी यही हाल है।
बांगरमऊ से एसपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर सपा के टिकट पर उम्मीदवार हैं। सरोजनीनगर से टिकट कटने पर पूर्व मंत्री शारदा प्रताप शुक्ला लोकदल के टिकट पर अखिलेश के चचेरे भाई अनुराग यादव की राह रोकने के लिए खड़े हो गए हैं। इसलिए गठबंधन की राह मुश्किल हो गई है जिसमें बीजेपी और बीएसपी उम्मीद तलाश रही है।
मुलायम के गढ़ में अखिलेश इटावा, फर्रूखाबाद, औरैया, कन्नौज, मैनपुरी जैसे जिलों में पिछली बार एसपी ने क्लीन स्वीप किया था। इस बार सबसे अधिक चुनौती गठबंधन के लिए इसी क्षेत्र में है। मुलायम-शिवपाल बनाम अखिलेश यादव की टसल का जो सियासी ड्रामा चला था उसका असर इस बेल्ट में दिख सकता है।
जसवंतनगर से चाचा शिवपाल यादव लड़ भले ही एसपी के टिकट पर रहे हैं लेकिन उनकी राह एकला चलो की है। उनके प्रचार के लिए केवल मुलायम सिंह यादव ही मैदान में गए हैं। संकट यह है कि इस क्षेत्र में टीम अखिलेश ने मुलायम-शिवपाल की टीम के कई लोगों को भी किनारे किया है। मसलन, इटावा के विधायक रघुराज सिंह शाक्य, भरथना की विधायक सुखदेवी वर्मा और फर्रुखाबाद जिले के कायमगंज के विधायक अजीत कठेरिया शिवपाल के खास हैं। विधूना के विधायक प्रमोद गुप्ता मुलायम सिंह यादव के साढ़ू हैं। इनके टिकट काट दिए गए हैं। इसलिए इस असंतोष को शांत करना एक अहम चुनौती है। विपक्ष इसे हवा देने में लगा है।
इन कैंडिडेट्स पर रहेगी नजरः शिवपाल यादव : मुलायम के छोटे भाई, जसवंतनगर से प्रतिष्ठा बचाने की जंग। रीता बहुगुणा : कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, लखनऊ कैंट से BJP दावेदार। अपर्णा यादव : मुलायम की छोटी बहू, लखनऊ कैंट से उम्मीदवार। तनुज पुनिया : कांग्रेस नेता पीएल पुनिया के बेटे। जैदपुर से सियासत का आगाज कर रहे हैं। स्वाति सिंह : माया पर अभद्र टिप्पणी करने वाले नेता दयाशंकर सिंह की पत्नी। मायावती को चुनौती दे चर्चा में आईं। बीजेपी की महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष, सरोजनीनगर से उम्मीदवार। अनुराग यादव : सीएम अखिलेश यादव के चचेरे भाई, सरोजनीनगर से उम्मीदवार। गोपाल टंडन : लखनऊ पूर्व से उम्मीदवार, पूर्व सांसद लालजी टंडन के बेटे। नितिन अग्रवाल : एसपी के राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल के बेटे, हरदोई से उम्मीदवार। अरविंद सिंह गोप : एसपी सरकार में कैबिनेट मंत्री, रामनगर सीट पर त्रिकोणीय लड़ाई में फंसे हैं। सतीश महाना : बीजेपी के सदन में उपनेता, महारजपुर से सीट बचाने का संघर्ष।
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प्रदेश में तीसरे चरण का चुनाव एपी- कांग्रेस गठबंधन के लिए घरेलू पिच सरीखा ही है। 'यूपी को ये साथ पसंद है' नारे का असली सच तीसरा चरण ही बताएगा क्योंकि यहां की अस्सी फीसदी से अधिक सीटें इस समय गठबंधन के ही जेब में है। लखनऊ जब आपके फॉर्म पर सवाल उठ रहे हों तो घरेलू पिच जवाब देने के लिए सबसे बेहतर होती है। उन्नीस फरवरी को प्रदेश में तीसरे चरण का चुनाव एपी- कांग्रेस गठबंधन के लिए घरेलू पिच सरीखा ही है। 'यूपी को ये साथ पसंद है' नारे का असली सच तीसरा चरण ही बताएगा क्योंकि यहां की अस्सी फीसदी से अधिक सीटें इस समय गठबंधन के ही जेब में है। वहीं, एसपी परिवार के झगड़े को मुद्दा बनाना बीजेपी को कितना भाया है यह भी यहां साफ हो जाएगा। तीसरे चरण में बारह जिले की उनहत्तर सीटों पर चुनाव है। इसमें यादव बेल्ट के नाम से जाने जाने वाले इटावा, फर्रूखाबाद, औरैया, कन्नौज, मैनपुरी, कानपुर देहात सहित छः जिले भी शामिल हैं। पिछले चुनाव में तीसरे चरण में एसपी की ऐसी आंधी रही थी कि उसके अलावा कोई पार्टी दहाई का आंकड़ा तक पार नहीं कर पाई थी। हालांकि, इस बार सियासी रिश्ते भी बदले हैं, पार्टियों के चेहरे भी बदले हैं और सैफई परिवार का आंतरिक गणित भी। नतीजों पर इसका असर साफ दिखेगा। 'फ्रेंडली' फाइट से बगावत के सुर : एसपी-कांग्रेस गठबंधन में कई सीटों पर गांठ नहीं खुली है। इसका असर यह है कि दोनों ही पार्टियों के स्टार प्रचारक इन सीटों पर तय नहीं कर पा रहे कि किसकी बात रखें। मसलन, लखनऊ मध्य से मारुफ खान को हाथ का पंजा अलॉट हो चुका है। मारुफ खान का दावा है कि यूपी प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने फोन कर उन्हें पर्चा दाखिल करने को कहा था। यहां एसपी से रविदास मेहरोत्रा उम्मीदवार हैं। मारुफ पार्टी के कहने के बाद भी पर्चा वापसी को तैयार नहीं हैं। महराजपुर से अरुणा तोमर के समर्थन डिंपल यादव, जया बच्चन और प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम सभा कर चुके हैं। यहां कांग्रेस से राजाराम पाल भी मैदान में हैं। अब एसपी ने अरुणा तोमर को सीट छोड़ने के लिए कहा है। जबकि अरुणा का दावा है कि हाईकमान की मर्जी से वह अब भी उम्मीदवार हैं। कानपुर कैंट से एसपी ने मोहम्मद हसन रूमी का टिकट वापस लिया। यहां आखिरी दौर में आजम खान की सभा कैंसल की गई। भोगनीपुर में भी यही हाल है। बांगरमऊ से एसपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर सपा के टिकट पर उम्मीदवार हैं। सरोजनीनगर से टिकट कटने पर पूर्व मंत्री शारदा प्रताप शुक्ला लोकदल के टिकट पर अखिलेश के चचेरे भाई अनुराग यादव की राह रोकने के लिए खड़े हो गए हैं। इसलिए गठबंधन की राह मुश्किल हो गई है जिसमें बीजेपी और बीएसपी उम्मीद तलाश रही है। मुलायम के गढ़ में अखिलेश इटावा, फर्रूखाबाद, औरैया, कन्नौज, मैनपुरी जैसे जिलों में पिछली बार एसपी ने क्लीन स्वीप किया था। इस बार सबसे अधिक चुनौती गठबंधन के लिए इसी क्षेत्र में है। मुलायम-शिवपाल बनाम अखिलेश यादव की टसल का जो सियासी ड्रामा चला था उसका असर इस बेल्ट में दिख सकता है। जसवंतनगर से चाचा शिवपाल यादव लड़ भले ही एसपी के टिकट पर रहे हैं लेकिन उनकी राह एकला चलो की है। उनके प्रचार के लिए केवल मुलायम सिंह यादव ही मैदान में गए हैं। संकट यह है कि इस क्षेत्र में टीम अखिलेश ने मुलायम-शिवपाल की टीम के कई लोगों को भी किनारे किया है। मसलन, इटावा के विधायक रघुराज सिंह शाक्य, भरथना की विधायक सुखदेवी वर्मा और फर्रुखाबाद जिले के कायमगंज के विधायक अजीत कठेरिया शिवपाल के खास हैं। विधूना के विधायक प्रमोद गुप्ता मुलायम सिंह यादव के साढ़ू हैं। इनके टिकट काट दिए गए हैं। इसलिए इस असंतोष को शांत करना एक अहम चुनौती है। विपक्ष इसे हवा देने में लगा है। इन कैंडिडेट्स पर रहेगी नजरः शिवपाल यादव : मुलायम के छोटे भाई, जसवंतनगर से प्रतिष्ठा बचाने की जंग। रीता बहुगुणा : कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, लखनऊ कैंट से BJP दावेदार। अपर्णा यादव : मुलायम की छोटी बहू, लखनऊ कैंट से उम्मीदवार। तनुज पुनिया : कांग्रेस नेता पीएल पुनिया के बेटे। जैदपुर से सियासत का आगाज कर रहे हैं। स्वाति सिंह : माया पर अभद्र टिप्पणी करने वाले नेता दयाशंकर सिंह की पत्नी। मायावती को चुनौती दे चर्चा में आईं। बीजेपी की महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष, सरोजनीनगर से उम्मीदवार। अनुराग यादव : सीएम अखिलेश यादव के चचेरे भाई, सरोजनीनगर से उम्मीदवार। गोपाल टंडन : लखनऊ पूर्व से उम्मीदवार, पूर्व सांसद लालजी टंडन के बेटे। नितिन अग्रवाल : एसपी के राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल के बेटे, हरदोई से उम्मीदवार। अरविंद सिंह गोप : एसपी सरकार में कैबिनेट मंत्री, रामनगर सीट पर त्रिकोणीय लड़ाई में फंसे हैं। सतीश महाना : बीजेपी के सदन में उपनेता, महारजपुर से सीट बचाने का संघर्ष।
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का मंदिर था जिसे मध्यकाल में मुसलमानों ने नष्ट कर दिया। अब इस स्थान को धरणीधर कहते हैं । धरणीधर पुराणों के अनुसार वराह (शुकर ) का ही पर्याय है ।
वराहमूल = बारामूला वरुणद्वीप - वारुणद्वीप
'इंद्रद्वीपंकशेरुं च ताम्रद्वीपं गभस्तिमत् गांधर्व वारुणं द्वीपं सौम्याक्षमिति च प्रभुः' महा० सभा० 38 दाक्षिणात्य पाठ । इस उल्लेख के अनुसार वारुण (या वरुण) द्वीप को अन्य द्वीपों के साथ, शक्तिशाली सहस्रबाहु ने जीत लिया था । यह द्वीप संभवत; बोर्नियो ( इंडोनीसिया ) है । ताम्रद्वीप लंका का ही नाम है । बोर्नियो का एक अन्य नाम संभवतः बहिण भी था । मार्कंडेय पुराण में वारुण के साथ भारत के व्यापार का उल्लेख है ।
(1) वाराणसी के निकट गंगा से मिलने वाली एक छोटी नदी जिसे अब बरना कहते हैं । जनश्रुति है कि वरुणा और असी नदियों के बीच में बसे होने के कारण वाराणसी का यह नाम हुआ था ।
( 2 ) ( म० प्र० ) नर्मदा की सहायक नदी जो सोहागपुर स्टेशन ( इटारसीइलाहाबाद रेलपथ) से कुछ मील दूर नर्मदा में मिलती है। संगम पर वारुणेश्वरमंदिर स्थित है और पास ही सिगलवाड़ा नामक ग्राम । वरुणिक दे० देवबरनार्क
'तोरणं दक्षिणार्धेन जंबूप्रस्थं समागतम्, वरूथं च ययौ रम्यं ग्रामं दशरथात्मजः - वाल्मीकि० अयो० 71, 11 । भरत केकय देश से अयोध्या जाते समय जंबूप्रस्थ के निकट इस ग्राम से होकर निकले थे। प्रसंग से जंबूप्रस्थ तथा वरूथ की स्थिति गंगा के पूर्व की ओर जान पड़ती है । यह दोनों स्थान संभवतः वर्तमान रूहेलखंड के अंतर्गत रहे होंगे । अयोध्या० 71, 12 से यह भी ज्ञात होता है कि वरूय के निकट एक रम्य वन भी स्थित था जहां भरत ने विश्राम किया था - 'तत्र रम्ये वने वासं कृत्वासो प्रांङ मुखौययो' ।
उत्तर बंगाल का प्राचीन व मध्ययुगीन नाम । वरेंद्र सेनवंशीय नरेशों के शासनकाल में बंगाल के चार प्रांतों ( वंग, बागरा, राढी, वरेंद्र) का संपूर्ण भाग प्रायः वर्तमान राजशाही डिवीजन में स्थित था। भंडारकर के अनुसार अशोक के शिलालेख सं० 13 में उल्लिखित पारिंद लोग वरेंद्र के ही निवासी थे ।
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का मंदिर था जिसे मध्यकाल में मुसलमानों ने नष्ट कर दिया। अब इस स्थान को धरणीधर कहते हैं । धरणीधर पुराणों के अनुसार वराह का ही पर्याय है । वराहमूल = बारामूला वरुणद्वीप - वारुणद्वीप 'इंद्रद्वीपंकशेरुं च ताम्रद्वीपं गभस्तिमत् गांधर्व वारुणं द्वीपं सौम्याक्षमिति च प्रभुः' महाशून्य सभाशून्य अड़तीस दाक्षिणात्य पाठ । इस उल्लेख के अनुसार वारुण द्वीप को अन्य द्वीपों के साथ, शक्तिशाली सहस्रबाहु ने जीत लिया था । यह द्वीप संभवत; बोर्नियो है । ताम्रद्वीप लंका का ही नाम है । बोर्नियो का एक अन्य नाम संभवतः बहिण भी था । मार्कंडेय पुराण में वारुण के साथ भारत के व्यापार का उल्लेख है । वाराणसी के निकट गंगा से मिलने वाली एक छोटी नदी जिसे अब बरना कहते हैं । जनश्रुति है कि वरुणा और असी नदियों के बीच में बसे होने के कारण वाराणसी का यह नाम हुआ था । नर्मदा की सहायक नदी जो सोहागपुर स्टेशन से कुछ मील दूर नर्मदा में मिलती है। संगम पर वारुणेश्वरमंदिर स्थित है और पास ही सिगलवाड़ा नामक ग्राम । वरुणिक देशून्य देवबरनार्क 'तोरणं दक्षिणार्धेन जंबूप्रस्थं समागतम्, वरूथं च ययौ रम्यं ग्रामं दशरथात्मजः - वाल्मीकिशून्य अयोशून्य इकहत्तर, ग्यारह । भरत केकय देश से अयोध्या जाते समय जंबूप्रस्थ के निकट इस ग्राम से होकर निकले थे। प्रसंग से जंबूप्रस्थ तथा वरूथ की स्थिति गंगा के पूर्व की ओर जान पड़ती है । यह दोनों स्थान संभवतः वर्तमान रूहेलखंड के अंतर्गत रहे होंगे । अयोध्याशून्य इकहत्तर, बारह से यह भी ज्ञात होता है कि वरूय के निकट एक रम्य वन भी स्थित था जहां भरत ने विश्राम किया था - 'तत्र रम्ये वने वासं कृत्वासो प्रांङ मुखौययो' । उत्तर बंगाल का प्राचीन व मध्ययुगीन नाम । वरेंद्र सेनवंशीय नरेशों के शासनकाल में बंगाल के चार प्रांतों का संपूर्ण भाग प्रायः वर्तमान राजशाही डिवीजन में स्थित था। भंडारकर के अनुसार अशोक के शिलालेख संशून्य तेरह में उल्लिखित पारिंद लोग वरेंद्र के ही निवासी थे ।
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Jamshedpur (Ashok Kumar) : बागबेड़ा-घाघीडीह जेल रोड के बीच जर्जर सड़क नहीं बनने से परेशान बागबेड़ावासियों ने अपनी पीड़ा को सबसे पहले स्थानीय विधायक संजीव सरदार से अवगत कराया था. इसके बाद सांसद के पास गये थे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. अंततः जनप्रतिनिधियों से नाराज बागबेड़ावासियों ने खुद ही जर्जर सड़क को बनाने का निर्णय लिया. वर्तमान में एक सप्ताह से सड़क का काम चल रहा है. जेल रोड की सड़क को आवागमन के लायक बना दिया गया है.
जेल रोड पर जाने पर अगर किसी से जनप्रतिनिधियों के बारे में पूछा जाता है तब वे पूरी तरह से भड़क जाते हैं. उनका स्पष्ट जवाब होता है कि जनप्रतिनिधियों ने सहयोग करने से साफ मना कर दिया है. अब लोगों के पास खुद से ही सड़क बनाने के लिये और कोई दूसरा चारा नहीं था.
जेल रोड की सड़क की बात करें तो एक दशक के पहले सड़क को बनाने का काम किया गया था. इसके बाद लोगों ने पोटका के पूर्व विधायक से भी अनुरोध किया था. विधायक भी सड़क पर पहुंची थी, लेकिन सड़क निर्माण का कार्य नहीं कराया गया. आज एक दशक बीत जाने के बाद भी सड़क उसी हाल में है.
एक दशक पहले हरहरगुट्टू प्रेमकुंज से लेकर शिव मंदिर तक की सड़क को वहां के लोगों ने बनायी थी. तब लोगों ने सड़क पर पीसीसी ढलाई का काम करवाया था और एक उदाहरण देने का काम किया था. ठीक उसी तरह की पहल एक बार फिर बागबेड़ावासियों ने की है. यह काम किसी एक के सहयोग से नहीं हो रहा है, बल्कि कई लोग संयुक्त रूप से पहल कर रहे हैं.
करनडीह चौक से लेकर बागबेड़ा लाल बिल्डिंग तक की जर्जर सड़क को बनाने की मांग को लेकर स्थानीय नेता बस्ती के लोगों के साथ कई बार आंदोलन कर चुके हैं. प्रखंड से लेकर जिले के अधिकारियों तक को ज्ञापन सौंपा है. बावजूद उनकी मांगों की अनदेखी की गयी. जिस तरह से यहां के लोगों ने खुद ही सड़क को दुरूस्त किया है उससे यहां के जनप्रतिनिधियों के गाल पर तमाचा से कम नहीं है. अब इसका हिसाब लोग अगले लोकसभा, विधानसभा और पंचायत चुनाव में लेंगे.
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Jamshedpur : बागबेड़ा-घाघीडीह जेल रोड के बीच जर्जर सड़क नहीं बनने से परेशान बागबेड़ावासियों ने अपनी पीड़ा को सबसे पहले स्थानीय विधायक संजीव सरदार से अवगत कराया था. इसके बाद सांसद के पास गये थे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. अंततः जनप्रतिनिधियों से नाराज बागबेड़ावासियों ने खुद ही जर्जर सड़क को बनाने का निर्णय लिया. वर्तमान में एक सप्ताह से सड़क का काम चल रहा है. जेल रोड की सड़क को आवागमन के लायक बना दिया गया है. जेल रोड पर जाने पर अगर किसी से जनप्रतिनिधियों के बारे में पूछा जाता है तब वे पूरी तरह से भड़क जाते हैं. उनका स्पष्ट जवाब होता है कि जनप्रतिनिधियों ने सहयोग करने से साफ मना कर दिया है. अब लोगों के पास खुद से ही सड़क बनाने के लिये और कोई दूसरा चारा नहीं था. जेल रोड की सड़क की बात करें तो एक दशक के पहले सड़क को बनाने का काम किया गया था. इसके बाद लोगों ने पोटका के पूर्व विधायक से भी अनुरोध किया था. विधायक भी सड़क पर पहुंची थी, लेकिन सड़क निर्माण का कार्य नहीं कराया गया. आज एक दशक बीत जाने के बाद भी सड़क उसी हाल में है. एक दशक पहले हरहरगुट्टू प्रेमकुंज से लेकर शिव मंदिर तक की सड़क को वहां के लोगों ने बनायी थी. तब लोगों ने सड़क पर पीसीसी ढलाई का काम करवाया था और एक उदाहरण देने का काम किया था. ठीक उसी तरह की पहल एक बार फिर बागबेड़ावासियों ने की है. यह काम किसी एक के सहयोग से नहीं हो रहा है, बल्कि कई लोग संयुक्त रूप से पहल कर रहे हैं. करनडीह चौक से लेकर बागबेड़ा लाल बिल्डिंग तक की जर्जर सड़क को बनाने की मांग को लेकर स्थानीय नेता बस्ती के लोगों के साथ कई बार आंदोलन कर चुके हैं. प्रखंड से लेकर जिले के अधिकारियों तक को ज्ञापन सौंपा है. बावजूद उनकी मांगों की अनदेखी की गयी. जिस तरह से यहां के लोगों ने खुद ही सड़क को दुरूस्त किया है उससे यहां के जनप्रतिनिधियों के गाल पर तमाचा से कम नहीं है. अब इसका हिसाब लोग अगले लोकसभा, विधानसभा और पंचायत चुनाव में लेंगे.
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मध्यप्रदेश का मौसम फिलहाल खुशनुमा बना हुआ है, लेकिन जल्द ही कड़ाके की ठंड झेलने के लिए तैयार रहें। गौरतलब है कि साल का आखिरी महीना चल रहा है और हर साल के अनुसार इस समय मौसम में तेज ठंड होना चाहिए था, लेकिन प्रदेश भर में इस समय बादल छाए हुए हैं। यही कारण है कि इस समय का मौसम मध्य प्रदेश में गुलाबी ठंड वाला है। ऐसे में लोग एंजॉय भी कर रहे हैं।
मौसम विभाग की माने तो दिसंबर महीने के आखिरी दिनों में मौसम में बदलाव संभव है। नए साल की एंट्री कड़कड़ाती सर्दी के साथ होगी यह संभावना है। ऐसे में अगर आप नए साल की पार्टी के बारे में भी प्लान कर रहे हैं तो आप ठंड का ध्यान रखते हुए प्लान करें और डेस्टिनेशन भी सर्दी के हिसाब से तय कर सकते हैं। झीलों के शहर मध्य प्रदेश में सर्दी का सितम शुरू हो चुका है। अचानक से पहाड़ों पर शुरू हुई बर्फबारी का असर राज्य में दिखने लगा है, प्रदेश में लगातार गिर रहे तापमान से ठंड का असर बढ़ता जा रहा है।
गौरतलब है कि हिमालय में बर्फबारी और उत्तरी हवाएं चलने से मध्य प्रदेश में भी असर हुआ है, दिन और रात के तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जिससे दिसंबर के महीने में पहली बार पारा नीचे आने से ठंड का एहसास हुआ। आपको बताएं 2013 के बाद इस बार का दिसंबर सबसे ज्यादा गर्म रहा। हालांकि, यह गर्मी अब सर्दी में बदल चुकी है लेकिन खुशी की बात यह जरूर है कि नए साल में खुशनुमा मौसम बना रहेगा, जिससे पर्यटक और युवाओं में खुशी की लहर दौड़ चली है नए वर्ष की पार्टी और घूमने को लेकर।
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मध्यप्रदेश का मौसम फिलहाल खुशनुमा बना हुआ है, लेकिन जल्द ही कड़ाके की ठंड झेलने के लिए तैयार रहें। गौरतलब है कि साल का आखिरी महीना चल रहा है और हर साल के अनुसार इस समय मौसम में तेज ठंड होना चाहिए था, लेकिन प्रदेश भर में इस समय बादल छाए हुए हैं। यही कारण है कि इस समय का मौसम मध्य प्रदेश में गुलाबी ठंड वाला है। ऐसे में लोग एंजॉय भी कर रहे हैं। मौसम विभाग की माने तो दिसंबर महीने के आखिरी दिनों में मौसम में बदलाव संभव है। नए साल की एंट्री कड़कड़ाती सर्दी के साथ होगी यह संभावना है। ऐसे में अगर आप नए साल की पार्टी के बारे में भी प्लान कर रहे हैं तो आप ठंड का ध्यान रखते हुए प्लान करें और डेस्टिनेशन भी सर्दी के हिसाब से तय कर सकते हैं। झीलों के शहर मध्य प्रदेश में सर्दी का सितम शुरू हो चुका है। अचानक से पहाड़ों पर शुरू हुई बर्फबारी का असर राज्य में दिखने लगा है, प्रदेश में लगातार गिर रहे तापमान से ठंड का असर बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि हिमालय में बर्फबारी और उत्तरी हवाएं चलने से मध्य प्रदेश में भी असर हुआ है, दिन और रात के तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जिससे दिसंबर के महीने में पहली बार पारा नीचे आने से ठंड का एहसास हुआ। आपको बताएं दो हज़ार तेरह के बाद इस बार का दिसंबर सबसे ज्यादा गर्म रहा। हालांकि, यह गर्मी अब सर्दी में बदल चुकी है लेकिन खुशी की बात यह जरूर है कि नए साल में खुशनुमा मौसम बना रहेगा, जिससे पर्यटक और युवाओं में खुशी की लहर दौड़ चली है नए वर्ष की पार्टी और घूमने को लेकर।
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