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इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। एमजीएम मेडिकल कालेज के डाक्टर को ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। खजराना थाना पुलिस ने दो कॉलगर्ल सहित पांच बदमाशों को गिरफ्तार किया है। आरोपित डॉक्टर का निर्वस्त्र वीडियो बनाकर 10 लाख रुपयों की मांग कर रहे थे। आरोपितों ने 4 हजार नकद, घड़ी और मोबाइल छीन लिया था। आरोपित इसके पूर्व भी कईं लोगों को ब्लैकमेल चुके हैं। टीआइ दिनेश वर्मा के मुताबिक डा. अमरदीप सिंह द्वारा शिकायत दर्ज करवाई थी कि दो माह पूर्व एक महिला ने एक युवती का नंबर दिया था। उसने बताया था कि यह युवती लड़कियां सप्लाई करती है। 9 दिसंबर को डाक्टर ने युवती को कॉल किया तो रिंग रोड (मयूर अस्पताल के पीछे) मिलने बुलाया। युवती डाक्टर को एक फ्लैट पर ले गई जहां पहले से एक लड़की मौजूद थी। कुछ देर बाद तीन बदमाश आ धमके और चाकू अड़ा दिया। डाक्टर को निर्वस्त्र किया और एक लड़की के साथ अश्लील वीडियो बना लिया। आरोपितों ने उससे कहा कि तुम महिलाओं का शोषण करते हो। आरोपितों ने डाक्टर से मोबाइल, नकदी, स्मार्ट वॉच लूट ली और कहा 10 लाख रुपये देना वरना वीडियो वायरल कर बदनाम कर देंगें। दो दिन पूर्व आरोपितों ने डाक्टर के दोस्त सत्य के मोबाइल पर अश्लील वीडियो भेजा और कहा 10 लाख रुपयों का क्या हुआ। डाक्टर ने दोस्त को पूरा घटनाक्रम बताया और थाने पहुंच कर शिकायत दर्ज करवाई। बुधवार को पुलिस ने दो महिला सहित राज तोमर, शुभम सारे, सोनू उर्फ सोहेल के खिलाफ केस दर्ज कर पांचों को गिरफ्तार कर लिया। टीआइ के मुताबिक आरोपितों से सामान जब्त कर लिया है। गिरोह में शामिल अन्य सदस्यों के बारे में पूछताछ चल रही है। आरोपितों ने संभ्रांत परिवार के कईं लोगों को ब्लैकमेल किया है। कईं लोगों ने बदनामी के डर से शिकायत भी नहीं की। पुलिस आरोपितों के मोबाइल की कॉल डिटेल निकाल कर पीड़ितों को तलाशेगी।
इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। एमजीएम मेडिकल कालेज के डाक्टर को ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। खजराना थाना पुलिस ने दो कॉलगर्ल सहित पांच बदमाशों को गिरफ्तार किया है। आरोपित डॉक्टर का निर्वस्त्र वीडियो बनाकर दस लाख रुपयों की मांग कर रहे थे। आरोपितों ने चार हजार नकद, घड़ी और मोबाइल छीन लिया था। आरोपित इसके पूर्व भी कईं लोगों को ब्लैकमेल चुके हैं। टीआइ दिनेश वर्मा के मुताबिक डा. अमरदीप सिंह द्वारा शिकायत दर्ज करवाई थी कि दो माह पूर्व एक महिला ने एक युवती का नंबर दिया था। उसने बताया था कि यह युवती लड़कियां सप्लाई करती है। नौ दिसंबर को डाक्टर ने युवती को कॉल किया तो रिंग रोड मिलने बुलाया। युवती डाक्टर को एक फ्लैट पर ले गई जहां पहले से एक लड़की मौजूद थी। कुछ देर बाद तीन बदमाश आ धमके और चाकू अड़ा दिया। डाक्टर को निर्वस्त्र किया और एक लड़की के साथ अश्लील वीडियो बना लिया। आरोपितों ने उससे कहा कि तुम महिलाओं का शोषण करते हो। आरोपितों ने डाक्टर से मोबाइल, नकदी, स्मार्ट वॉच लूट ली और कहा दस लाख रुपये देना वरना वीडियो वायरल कर बदनाम कर देंगें। दो दिन पूर्व आरोपितों ने डाक्टर के दोस्त सत्य के मोबाइल पर अश्लील वीडियो भेजा और कहा दस लाख रुपयों का क्या हुआ। डाक्टर ने दोस्त को पूरा घटनाक्रम बताया और थाने पहुंच कर शिकायत दर्ज करवाई। बुधवार को पुलिस ने दो महिला सहित राज तोमर, शुभम सारे, सोनू उर्फ सोहेल के खिलाफ केस दर्ज कर पांचों को गिरफ्तार कर लिया। टीआइ के मुताबिक आरोपितों से सामान जब्त कर लिया है। गिरोह में शामिल अन्य सदस्यों के बारे में पूछताछ चल रही है। आरोपितों ने संभ्रांत परिवार के कईं लोगों को ब्लैकमेल किया है। कईं लोगों ने बदनामी के डर से शिकायत भी नहीं की। पुलिस आरोपितों के मोबाइल की कॉल डिटेल निकाल कर पीड़ितों को तलाशेगी।
उत्तर प्रदेश के झांसी में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई. हत्या के बाद हमलावर हथियार के साथ फरार हो गए. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा. बताया जा रहा है कि रक्सा थानान्तर्गत गांव अठौदना में रहने वाला किशोर अमित यादव अपने साथियों के साथ पार्टी करने गया हुआ था. अचानक उनके बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया. बात इतनी बढ़ गई कि गोली चल गई, जिसमें अमित यादव की गोली लगने से मौत हो गई. पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है. साथ ही शिकायत के आधार पर राहुल यादव समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है. एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया गया है. बताया जा रहा है कि अमित और राहुल के बीच पहले से पारिवारिक विवाद चल रहा था. शराब पीने के दौरान अमित और राहुल के बीच कहासुनी शुरू हो गई. इसी दौरान गुस्से में राहुल ने तमंचे से अमित पर गोली चला दी. गोली लगते ही अमित जमीन पर गिर पड़ा और वहां भगदड़ मच गई. पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है.
उत्तर प्रदेश के झांसी में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई. हत्या के बाद हमलावर हथियार के साथ फरार हो गए. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा. बताया जा रहा है कि रक्सा थानान्तर्गत गांव अठौदना में रहने वाला किशोर अमित यादव अपने साथियों के साथ पार्टी करने गया हुआ था. अचानक उनके बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया. बात इतनी बढ़ गई कि गोली चल गई, जिसमें अमित यादव की गोली लगने से मौत हो गई. पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है. साथ ही शिकायत के आधार पर राहुल यादव समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है. एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया गया है. बताया जा रहा है कि अमित और राहुल के बीच पहले से पारिवारिक विवाद चल रहा था. शराब पीने के दौरान अमित और राहुल के बीच कहासुनी शुरू हो गई. इसी दौरान गुस्से में राहुल ने तमंचे से अमित पर गोली चला दी. गोली लगते ही अमित जमीन पर गिर पड़ा और वहां भगदड़ मच गई. पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है.
तमिळ द्राविड़ भाषा-समूह की सर्वाधिक समृद्ध तथा संसार की प्राचीनतम मौलिक भाषाओं में से है। इस समय इस भाषा के जो प्राचीन ग्रन्थ मिलते हैं, उनका रचना-काल ईसा से पूर्व पाँचवीं या चौथी शताब्दी माना गया है। उनसे इस बात का प्रमाण मिलता है कि उससे कई शताब्दी पूर्व ही तमिळ भाषा सुव्यवस्थित एवं सुसंस्कृत हो चुकी थी और उसमें सुनिश्चित साहित्यिक परम्पराएँ स्थापित हो चुकी थीं । सूक्ष्मतम विचारों के अभिव्यंजन तथा स्थूलतम विषयों के वर्णन के लिए उपयुक्त शब्द भाषा-वाङ्मय में प्रचुर मात्रा में पाये जाते थे । } इस सम्बन्ध में विभिन्न भारतीय एवं पाश्चात्य विद्वानों के विचारों करने के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि कम-से-कम पैंतीस शताब्दियों से तमिळ भाषा में उच्च कोटि की साहित्य-रचना होती रही है और साहित्य सृजन की यह धारा, विभिन्न उतार-चढ़ावों के बावजूद विर गति से चली आई है। तमिळ भापी - तमिळ भाषी भारत के आदिवासी थे अथवा बाहर से यहाँ ग्राये, इस प्रश्न पर भी विद्वानों में गहरा मतभेद पाया जाता है । कुछ विद्वानों के अनुसार तमिळ भाषी, लेरिया कहलाने वाले उस विशाल
तमिळ द्राविड़ भाषा-समूह की सर्वाधिक समृद्ध तथा संसार की प्राचीनतम मौलिक भाषाओं में से है। इस समय इस भाषा के जो प्राचीन ग्रन्थ मिलते हैं, उनका रचना-काल ईसा से पूर्व पाँचवीं या चौथी शताब्दी माना गया है। उनसे इस बात का प्रमाण मिलता है कि उससे कई शताब्दी पूर्व ही तमिळ भाषा सुव्यवस्थित एवं सुसंस्कृत हो चुकी थी और उसमें सुनिश्चित साहित्यिक परम्पराएँ स्थापित हो चुकी थीं । सूक्ष्मतम विचारों के अभिव्यंजन तथा स्थूलतम विषयों के वर्णन के लिए उपयुक्त शब्द भाषा-वाङ्मय में प्रचुर मात्रा में पाये जाते थे । } इस सम्बन्ध में विभिन्न भारतीय एवं पाश्चात्य विद्वानों के विचारों करने के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि कम-से-कम पैंतीस शताब्दियों से तमिळ भाषा में उच्च कोटि की साहित्य-रचना होती रही है और साहित्य सृजन की यह धारा, विभिन्न उतार-चढ़ावों के बावजूद विर गति से चली आई है। तमिळ भापी - तमिळ भाषी भारत के आदिवासी थे अथवा बाहर से यहाँ ग्राये, इस प्रश्न पर भी विद्वानों में गहरा मतभेद पाया जाता है । कुछ विद्वानों के अनुसार तमिळ भाषी, लेरिया कहलाने वाले उस विशाल
- मुलायम सिंह यादव का जन्म कहां हुआ था? मुलायम सिंह यादव का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई नामक गांव में हुआ था। - मुलायम सिंह यादव के पिता क्या करते थे? मुलायम यादव का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता सुघर सिंह यादव पेशे से खेती-किसानी का कार्य करते थे। - मुलायम सिंह यादव कितनी बार मुख्यमंत्री बने? मुलायम सिंह यादव ने तीन बार यूपी के सीएम के तौर पर काम किया। पहली बार 5 दिसंबर 1989 से 24 जनवरी 1991, दूसरी बार 5 दिसंबर 1993 से 3 जून 1996 तक और तीसरी बार 29 अगस्त 2003 से 11 मई 2007 तक उत्तर प्रदेश के सीएम रहे। - मुलायम सिंह यादव के कितने भाई थे? मुलायम यादव के चार सगे भाई थे। सबसे बड़े का नाम रतन सिंह और छोटे भाइयों का नाम- अभयराम सिंह यादव, शिवपाल सिंह यादव, राजपाल सिंह है। रामगोपाल यादव उनके चचेरे भाई हैं। - मुलायम सिंह यादव की पहली पत्नी कौन थीं? सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की पहली पत्नी का नाम मालती देवी था। - मुलायम सिंह यादव की कुल संपत्ति कितनी है? साल 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दिए हलफनामे के मुताबिक, मुलायम सिंह यादव करीब 15 करोड़ से अधिक की संपत्ति के मालिक हैं। नामांकन दाखिल करते समय शपथ पत्र में उन्होंने अपनी चल-अचल संपत्ति 16 करोड़ 52 लाख 44 हजार 300 रुपये बताई थी। - मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी कौन हैं? मुलायम की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता थीं। दोनों के बीच पहले से रिश्ते थे लेकिन पहली पत्नी के निधन के बद 2003 में मुलायम ने साधना के साथ शादी की। - मुलायम सिंह यादव के कितने बेटे हैं? मुलायम को दो पत्नियों से दो बेटे हैं। पहली पत्नी मालती देवी से अखिलेश यादव और दूसरी पत्नी साधना के बेटे का नाम प्रतीक है, जिन्हें मुलायम ने बेटे का दर्जा दिया था। - मुलायम सिंह यादव का जन्म कब हुआ था? मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवंबर सन् 1939 को हुआ था। - मुलायम सिंह यादव ने कहां तक पढ़ाई की है? मुलायम सिंह यादव ने साल 1964 में आगरा यूनिवर्सिटी से BA की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद साल 1968 में आगरा यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में MA किया था।
- मुलायम सिंह यादव का जन्म कहां हुआ था? मुलायम सिंह यादव का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई नामक गांव में हुआ था। - मुलायम सिंह यादव के पिता क्या करते थे? मुलायम यादव का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता सुघर सिंह यादव पेशे से खेती-किसानी का कार्य करते थे। - मुलायम सिंह यादव कितनी बार मुख्यमंत्री बने? मुलायम सिंह यादव ने तीन बार यूपी के सीएम के तौर पर काम किया। पहली बार पाँच दिसंबर एक हज़ार नौ सौ नवासी से चौबीस जनवरी एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे, दूसरी बार पाँच दिसंबर एक हज़ार नौ सौ तिरानवे से तीन जून एक हज़ार नौ सौ छियानवे तक और तीसरी बार उनतीस अगस्त दो हज़ार तीन से ग्यारह मई दो हज़ार सात तक उत्तर प्रदेश के सीएम रहे। - मुलायम सिंह यादव के कितने भाई थे? मुलायम यादव के चार सगे भाई थे। सबसे बड़े का नाम रतन सिंह और छोटे भाइयों का नाम- अभयराम सिंह यादव, शिवपाल सिंह यादव, राजपाल सिंह है। रामगोपाल यादव उनके चचेरे भाई हैं। - मुलायम सिंह यादव की पहली पत्नी कौन थीं? सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की पहली पत्नी का नाम मालती देवी था। - मुलायम सिंह यादव की कुल संपत्ति कितनी है? साल दो हज़ार उन्नीस लोकसभा चुनाव के दौरान दिए हलफनामे के मुताबिक, मुलायम सिंह यादव करीब पंद्रह करोड़ से अधिक की संपत्ति के मालिक हैं। नामांकन दाखिल करते समय शपथ पत्र में उन्होंने अपनी चल-अचल संपत्ति सोलह करोड़ बावन लाख चौंतालीस हजार तीन सौ रुपयापये बताई थी। - मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी कौन हैं? मुलायम की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता थीं। दोनों के बीच पहले से रिश्ते थे लेकिन पहली पत्नी के निधन के बद दो हज़ार तीन में मुलायम ने साधना के साथ शादी की। - मुलायम सिंह यादव के कितने बेटे हैं? मुलायम को दो पत्नियों से दो बेटे हैं। पहली पत्नी मालती देवी से अखिलेश यादव और दूसरी पत्नी साधना के बेटे का नाम प्रतीक है, जिन्हें मुलायम ने बेटे का दर्जा दिया था। - मुलायम सिंह यादव का जन्म कब हुआ था? मुलायम सिंह यादव का जन्म बाईस नवंबर सन् एक हज़ार नौ सौ उनतालीस को हुआ था। - मुलायम सिंह यादव ने कहां तक पढ़ाई की है? मुलायम सिंह यादव ने साल एक हज़ार नौ सौ चौंसठ में आगरा यूनिवर्सिटी से BA की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद साल एक हज़ार नौ सौ अड़सठ में आगरा यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में MA किया था।
दिशा पटानी बोल्ड वीडियोः बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पटानी ने अपने लेटेस्ट सेक्सी वीडियो से इंस्टाग्राम पर सनसनी मचा दी है. अपने बोल्ड और बोल्ड फैशन सेंस के लिए पहचानी जाने वाली एक्ट्रेस दिशा पटानी साड़ी में बेहद ग्लैमरस नजर आती हैं. उन्होंने अपने बोल्ड लुक से अपने फैंस को हैरान कर दिया है. दिशा पटानी ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किए सेक्सी वीडियो में डॉल की तरह नजर आ रही हैं. स्लीवलेस ब्लाउज के साथ झिलमिलाती साड़ी में सेक्सी लग रही हैं। दिशा ने अपने बाल खुले छोड़ रखे थे, जिससे उनका लुक और भी सेक्सी लग रहा था। पोस्ट किए जाने के कुछ देर बाद ही इस वीडियो ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। एक यूजर ने लिखा, "इतनी खूबसूरत लग रही हो. " "आपके पास एक अद्भुत शरीर है," दूसरे ने कहा। दिशा पटानी ने हाल ही में अपना 31वां जन्मदिन मनाया। खास मौके पर दिशा की नई बेस्ट फ्रेंड मौनी रॉय ने उन्हें बर्थडे विश किया। द एंटरटेनर्स टूर के लिए अमेरिका जाने के बाद दिशा और मौनी अच्छे दोस्त बन गए। दिशा पटानी आगामी एक्शन-थ्रिलर फिल्म योद्धा में नजर आएंगी। इस बहुप्रतीक्षित फिल्म में दिशा पटानी सिद्धार्थ मल्होत्रा और राशि खन्ना के साथ स्क्रीन साझा करेंगी। योद्धा में अपनी भूमिका के अलावा, दिशा पटानी एक साथ नाग अश्विन की बहुप्रतीक्षित परियोजना में भी शामिल हैं। कहा जा रहा है कि दिशा पटानी भी प्रोजेक्ट के में होंगी। इसमें प्रभास, दीपिका पादुकोण और अमिताभ बच्चन भी हैं।
दिशा पटानी बोल्ड वीडियोः बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पटानी ने अपने लेटेस्ट सेक्सी वीडियो से इंस्टाग्राम पर सनसनी मचा दी है. अपने बोल्ड और बोल्ड फैशन सेंस के लिए पहचानी जाने वाली एक्ट्रेस दिशा पटानी साड़ी में बेहद ग्लैमरस नजर आती हैं. उन्होंने अपने बोल्ड लुक से अपने फैंस को हैरान कर दिया है. दिशा पटानी ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किए सेक्सी वीडियो में डॉल की तरह नजर आ रही हैं. स्लीवलेस ब्लाउज के साथ झिलमिलाती साड़ी में सेक्सी लग रही हैं। दिशा ने अपने बाल खुले छोड़ रखे थे, जिससे उनका लुक और भी सेक्सी लग रहा था। पोस्ट किए जाने के कुछ देर बाद ही इस वीडियो ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। एक यूजर ने लिखा, "इतनी खूबसूरत लग रही हो. " "आपके पास एक अद्भुत शरीर है," दूसरे ने कहा। दिशा पटानी ने हाल ही में अपना इकतीसवां जन्मदिन मनाया। खास मौके पर दिशा की नई बेस्ट फ्रेंड मौनी रॉय ने उन्हें बर्थडे विश किया। द एंटरटेनर्स टूर के लिए अमेरिका जाने के बाद दिशा और मौनी अच्छे दोस्त बन गए। दिशा पटानी आगामी एक्शन-थ्रिलर फिल्म योद्धा में नजर आएंगी। इस बहुप्रतीक्षित फिल्म में दिशा पटानी सिद्धार्थ मल्होत्रा और राशि खन्ना के साथ स्क्रीन साझा करेंगी। योद्धा में अपनी भूमिका के अलावा, दिशा पटानी एक साथ नाग अश्विन की बहुप्रतीक्षित परियोजना में भी शामिल हैं। कहा जा रहा है कि दिशा पटानी भी प्रोजेक्ट के में होंगी। इसमें प्रभास, दीपिका पादुकोण और अमिताभ बच्चन भी हैं।
जार्जटाउन में डेल्हीवेरी कोरियर एजेंसी में हुई करीब साढ़े चार लाख की लूट फिल्मी अंदाज में हुई। एक अकेला लुटेरा एजेंसी में घुसा और पिस्टल तान फिल्मों की तर्ज पर रुपये बटोरता रहा। सीसीटीवी फुटेज से लुटेरे की पूरी करतूत पुलिस के पास है। लुटेरे का अंदाज पुलिस को परेशान कर रहा है। उसने जिस ढंग से पिस्टल पकड़ी है यह तरीका पुलिस या आर्मी के जवानों सरीखा है। जार्जटाउन पॉश इलाका है। वहां अकेला बदमाश ने तांडव मचाया है, ऐसे में सुरक्षा इंतजाम की हंसी उड़ रही है। इलाहाबाद : अधिवक्ता हत्याकांड में शूटरों की फुटेज जारी होने बाद पुलिस टीमें बदमाशों के पीछे लग गई। इसके बाद भी बदमाश हारे नहीं। कर्नलगंज में कमिश्नरी के पास फार्मासिस्ट राजेंद्र कनौजिया को सरेआम गोली मारी और निकल भागे। इस वारदात में भी शूटरों की तस्वीर सीसीटीवी में कैद हो गई। पुलिस फुटेज लेकर इधर उधर भटक रही है, अब तक शूटरों का सुराग नहीं मिल सका है। जब कमिश्नरी के पास शूटरों को वारदात करने में डर नहीं लगा तो अन्य इलाकों का क्या हाल होगा। अति व्यस्त इलाके कटरा के मनमोहन पार्क के पास शूटरों ने कचहरी के वकील राजेश श्रीवास्तव की गोली मारकर हत्या कर दी। दबंगई की हद थी कि शूटरों ने चेहरा तक नहीं ढका था। यह वारदात पुलिस पर इतनी भारी पड़ी की वकीलों के आक्रोश की वजह से एसएसपी आकाश कुलहरि तक को हटा दिया गया। इस सनसनी की चर्चा शहर में हफ्तों तक रही। बेखौफ शूटर सरेआम वकील को मारकर निकल भागे। इसके बाद शहर में शूटरों ने कई और वारदात अंजाम दी। इतनी धरपकड़ के बाद भी बदमाश पुलिस से नहीं डर रहे हैं। बुधवार की रात धूमनगंज थाना क्षेत्र के ट्रिपल आइटी रोड पर बदमाशों ने सीमेंट व्यवसायी प्रदीप गुप्ता से एक लाख रुपये लूट लिए। दो बाइक से पहुंचे चार बदमाशों ने असलहों के बल पर रुपये लूटे और निकल भागे। मामले में हिस्ट्रीशीटर गदऊ पासी और उसके गुर्गो का नाम सामने आया है। बड़ी वारदातों में पुलिस की लाज सीसीटीवी ने ही बचाई। यूको बैंक में करोड़ों की चोरी हो या फिर अधिवक्ता हत्याकांड में शूटरों की तस्वीर, इन बड़े घटनाक्रमों पर से पुलिस ने पर्दा सीसीटीवी फुटेज से ही उठाया। जार्जटाउन लूटकांड में भी पुलिस को लुटेरे का लाइव वीडियो मिला है। उसी से सुराग पाने की कोशिश की जा रही है। फार्मासिस्ट को गोली मारने वालों की भी सीसीटीवी फुटेज पुलिस को मिली है। इसी आधार पर जांच आगे बढ़ रही है।
जार्जटाउन में डेल्हीवेरी कोरियर एजेंसी में हुई करीब साढ़े चार लाख की लूट फिल्मी अंदाज में हुई। एक अकेला लुटेरा एजेंसी में घुसा और पिस्टल तान फिल्मों की तर्ज पर रुपये बटोरता रहा। सीसीटीवी फुटेज से लुटेरे की पूरी करतूत पुलिस के पास है। लुटेरे का अंदाज पुलिस को परेशान कर रहा है। उसने जिस ढंग से पिस्टल पकड़ी है यह तरीका पुलिस या आर्मी के जवानों सरीखा है। जार्जटाउन पॉश इलाका है। वहां अकेला बदमाश ने तांडव मचाया है, ऐसे में सुरक्षा इंतजाम की हंसी उड़ रही है। इलाहाबाद : अधिवक्ता हत्याकांड में शूटरों की फुटेज जारी होने बाद पुलिस टीमें बदमाशों के पीछे लग गई। इसके बाद भी बदमाश हारे नहीं। कर्नलगंज में कमिश्नरी के पास फार्मासिस्ट राजेंद्र कनौजिया को सरेआम गोली मारी और निकल भागे। इस वारदात में भी शूटरों की तस्वीर सीसीटीवी में कैद हो गई। पुलिस फुटेज लेकर इधर उधर भटक रही है, अब तक शूटरों का सुराग नहीं मिल सका है। जब कमिश्नरी के पास शूटरों को वारदात करने में डर नहीं लगा तो अन्य इलाकों का क्या हाल होगा। अति व्यस्त इलाके कटरा के मनमोहन पार्क के पास शूटरों ने कचहरी के वकील राजेश श्रीवास्तव की गोली मारकर हत्या कर दी। दबंगई की हद थी कि शूटरों ने चेहरा तक नहीं ढका था। यह वारदात पुलिस पर इतनी भारी पड़ी की वकीलों के आक्रोश की वजह से एसएसपी आकाश कुलहरि तक को हटा दिया गया। इस सनसनी की चर्चा शहर में हफ्तों तक रही। बेखौफ शूटर सरेआम वकील को मारकर निकल भागे। इसके बाद शहर में शूटरों ने कई और वारदात अंजाम दी। इतनी धरपकड़ के बाद भी बदमाश पुलिस से नहीं डर रहे हैं। बुधवार की रात धूमनगंज थाना क्षेत्र के ट्रिपल आइटी रोड पर बदमाशों ने सीमेंट व्यवसायी प्रदीप गुप्ता से एक लाख रुपये लूट लिए। दो बाइक से पहुंचे चार बदमाशों ने असलहों के बल पर रुपये लूटे और निकल भागे। मामले में हिस्ट्रीशीटर गदऊ पासी और उसके गुर्गो का नाम सामने आया है। बड़ी वारदातों में पुलिस की लाज सीसीटीवी ने ही बचाई। यूको बैंक में करोड़ों की चोरी हो या फिर अधिवक्ता हत्याकांड में शूटरों की तस्वीर, इन बड़े घटनाक्रमों पर से पुलिस ने पर्दा सीसीटीवी फुटेज से ही उठाया। जार्जटाउन लूटकांड में भी पुलिस को लुटेरे का लाइव वीडियो मिला है। उसी से सुराग पाने की कोशिश की जा रही है। फार्मासिस्ट को गोली मारने वालों की भी सीसीटीवी फुटेज पुलिस को मिली है। इसी आधार पर जांच आगे बढ़ रही है।
नई दिल्ली : महासंग्राम में बदल चुकी लोकसभा चुनाव 2019 की लड़ाई दिनों दिन दिलचस्प होती जा रही है। जहां आज भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन राज्यों में रैली है, जबकि प्रियंका गांधी का भी उत्तर प्रदेश दौरा जारी है। लेकिन दिल्ली में कांग्रेस और आप गठबंधन पर अब तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है। बता दें की चुनाव आयोग में पीएम नरेंद्र मोदी की बायोपिक पर सुनवाई के बाद, विवेक ओबेरॉय के वकील हितेश जैन ने कहा हैं की हमने कारण बताओ नोटिस का विस्तारपूर्वक जवाब दे दिया है। हमने बताया है कि पीएम नरेंद्र मोदी बायोपिक, आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है। वहीं बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने कहा- शत्रुघ्न सिन्हा जी ने फैसला किया है कि वह कांग्रेस में शामिल होंगे और हमारे स्टार नेता और कैंपेनर के तौर पर काम करेंगे। देखा जाये तो यहां के युवाओं को पलायन करने के लिए मजबूर किसने किया था? घोटाले किसने किए थे? बर्बादी कौन लाया था? वहीं उत्तराखंड के गांवों को सड़कों से वंचित रखने वाले कौन थे? क्या ऐसी कांग्रेस पार्टी को मौका मिलना चाहिए। ऐसे झूठे और वादाखिलाफी करने वाले लोगों को सजा मिलनी चाहिए या नहीं? 11 अप्रैल को बटन दबाकर सजा देंगे क्या? । प्रधानमंत्री बनने के बाद मैंने उत्तराखंड के कोने-कोने तक विकास पहुंचाने का संकल्प लिया था। लेकिन कांग्रेस ने मेरे तमाम प्रयासों में अड़ंगे लगाए थे। तब राज्य की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री का काम केवल दिल्ली कांग्रेस दरबार में हाजिरी लगाने का था। दरअसल जेडीएस नेता व कर्नाटक सरकार में मंत्री सी एस पुत्ताराजू के घर पर आयकर विभाग की छापेमारी के खिलाफ बंगलुरू में कांग्रेस-जेडीएस कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन। पीएम नरेंद्र मोदी की बायोपिक पर सुनवाई के लिए फिल्म के एक्टर विवेक ओबेरॉय और प्रोड्यूसर संदीप सिंह, चुनाव आयोग पहुंचे। लेकिन आम आदमी पार्टी से निलंबित पंजाब के फतेहगढ़ साहिब से सांसद हरिंदर सिंह खालसा भाजपा में शामिल हो गए हैं। हरिंदर, भगवंत मान की शिकायत के बाद चर्चा में आए थे।
नई दिल्ली : महासंग्राम में बदल चुकी लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस की लड़ाई दिनों दिन दिलचस्प होती जा रही है। जहां आज भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन राज्यों में रैली है, जबकि प्रियंका गांधी का भी उत्तर प्रदेश दौरा जारी है। लेकिन दिल्ली में कांग्रेस और आप गठबंधन पर अब तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है। बता दें की चुनाव आयोग में पीएम नरेंद्र मोदी की बायोपिक पर सुनवाई के बाद, विवेक ओबेरॉय के वकील हितेश जैन ने कहा हैं की हमने कारण बताओ नोटिस का विस्तारपूर्वक जवाब दे दिया है। हमने बताया है कि पीएम नरेंद्र मोदी बायोपिक, आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है। वहीं बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने कहा- शत्रुघ्न सिन्हा जी ने फैसला किया है कि वह कांग्रेस में शामिल होंगे और हमारे स्टार नेता और कैंपेनर के तौर पर काम करेंगे। देखा जाये तो यहां के युवाओं को पलायन करने के लिए मजबूर किसने किया था? घोटाले किसने किए थे? बर्बादी कौन लाया था? वहीं उत्तराखंड के गांवों को सड़कों से वंचित रखने वाले कौन थे? क्या ऐसी कांग्रेस पार्टी को मौका मिलना चाहिए। ऐसे झूठे और वादाखिलाफी करने वाले लोगों को सजा मिलनी चाहिए या नहीं? ग्यारह अप्रैल को बटन दबाकर सजा देंगे क्या? । प्रधानमंत्री बनने के बाद मैंने उत्तराखंड के कोने-कोने तक विकास पहुंचाने का संकल्प लिया था। लेकिन कांग्रेस ने मेरे तमाम प्रयासों में अड़ंगे लगाए थे। तब राज्य की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री का काम केवल दिल्ली कांग्रेस दरबार में हाजिरी लगाने का था। दरअसल जेडीएस नेता व कर्नाटक सरकार में मंत्री सी एस पुत्ताराजू के घर पर आयकर विभाग की छापेमारी के खिलाफ बंगलुरू में कांग्रेस-जेडीएस कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन। पीएम नरेंद्र मोदी की बायोपिक पर सुनवाई के लिए फिल्म के एक्टर विवेक ओबेरॉय और प्रोड्यूसर संदीप सिंह, चुनाव आयोग पहुंचे। लेकिन आम आदमी पार्टी से निलंबित पंजाब के फतेहगढ़ साहिब से सांसद हरिंदर सिंह खालसा भाजपा में शामिल हो गए हैं। हरिंदर, भगवंत मान की शिकायत के बाद चर्चा में आए थे।
बच्चों में माइग्रेन।यह कैसे संभव है? आंकड़ों के मुताबिक, 40% बच्चे जो 14 साल की उम्र तक नहीं पहुंच चुके हैं, पहले से ही इसका अनुभव कर चुके हैं। और अज्ञात कारणों से माइग्रेन से इस संख्या का केवल एक तिहाई पीड़ित है, बाकी को माता-पिता से एक समान "उपहार" प्राप्त हुआ। बच्चों में माइग्रेन, वयस्कों में, कारण ... घबराहट तनाव, कोई फर्क नहीं पड़ता कि लंबे समय तक या नहीं। लेकिन यह एक तथ्य है। तो इससे पहले कि आप एक बच्चे को परेशान करने से पहले सोचें। एक घबराहट तनाव के साथ, की मात्राएड्रेनालाईन का विकास, जो सीधे मस्तिष्क में मौजूद जहाजों को संकुचित करता है। इस मामले में, संकीर्ण जहाजों की वासोडिलेटर दवाओं की प्रतिक्रिया शून्य हो गई है। मस्तिष्क को पोषक तत्व नहीं मिल सकते हैं जो रक्त प्रवाह के साथ वितरित किए जाते हैं, और नतीजतन यह गंभीर सिरदर्द के रूप में संकेत देता है। इस मामले में, एक सामान्य मामला है, जो डॉक्टर अक्सर एआरवीआई के साथ भ्रमित होते हैं। गर्भवती महिलाओं की जांच करने वाले विशेषज्ञों के मुताबिकमाइग्रेन के लिए महिलाएं, पहले तिमाही में, या बल्कि, इसके पाठ्यक्रम के हर समय, भविष्य की मां इस तरह के लक्षणों की शिकायत करती हैं। गर्भावस्था के दौरान, एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर माइग्रेन से छुटकारा पाने में मदद करेगा, लेकिन केवल प्रसव के बाद पहले मासिक धर्म की अवधि तक ही। ऐसे मामले हैं जब माइग्रेन जारी रहता हैएक लंबा समय - कई घंटों के लिए, या अक्सर सिर दर्द होता है, जबकि दृष्टि की गुणवत्ता बिगड़ती है। इस मामले में, आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करने की आवश्यकता है जो आपको जानकारी प्रदान करेगा जो आपको माइग्रेन को रोकने में मदद करेगा। इस मामले में उपचार डॉक्टर द्वारा भी निर्धारित किया जाना चाहिए, क्योंकि अधिकांश दर्दनाशक भ्रूण के विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं, और यहां तक कि गर्भपात भी कर सकते हैं। क्लासिक और आम माइग्रेन हैं।प्रत्येक मामले में क्रमशः उपचार अलग है। बच्चे आमतौर पर माइग्रेन के क्लासिक रूप से पीड़ित होते हैं, जो दर्द के हमलों के समूह हमलों के साथ नहीं होता है, जिसे दूसरे, सामान्य रूप के बारे में नहीं कहा जा सकता है, जो गर्भवती महिलाओं सहित वयस्कों को प्रभावित करता है। बच्चों में माइग्रेन दो घंटे तक चल सकता है,कुछ मामलों में, उल्टी की घटना के साथ, 3-4 घंटे, कई बार दोहराया। यह शरीर के निर्जलीकरण की ओर जाता है। इस मामले में, तत्काल अस्पताल में जरूरी है। शायद सेरोटोनिन का अंतःशिरा इंजेक्शन, लेकिन इसके कई दुष्प्रभाव हैं। सबसे पहले, सरल एनाल्जेसिक निर्धारित किए जाते हैं, लेकिन यदि वे मदद नहीं करते हैं, तो वे उनके संयोजन का सहारा लेते हैं। एनाल्जेसिक की बेकारता के मामले में, एंटी-माइग्रेन दवाएं प्राप्त करना शुरू करें। आज तक, प्रभावी दवाओं के तीन वर्ग हैं, जिनमें निम्न शामिल हैंः - 5-एचटी 1 agonists या triptans। वे दो प्रकारों में विभाजित हैंः चुनिंदा और गैर-चयनशील। पहले प्रकार में ड्रग्स "ज़ोलमिट्रीप्टन", "एलेट्रीप्टन", "सुमात्रिप्टन" और अन्य शामिल हैं। दूसरे के लिए, एर्गोगामाइन और डायहाइड्रोर्गोटामाइन उत्पादों, ज्यादातर इन दवाओं में उल्टी बढ़ जाती है। ट्रिपटन्स गोलियों में या स्प्रे (नाक) के रूप में, साथ ही इंजेक्शन के रूप में भी उपलब्ध हैं। मध्यम से गंभीर सिरदर्द के लिए प्रयोग किया जाता है। - डोपामाइन प्रतिद्वंद्वियों - एंटीमेटिक दवाएं दोनों हैं, इंजेक्शन के रूप में इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध हैं। - प्रोस्टाग्लैंडिन अवरोधक - हल्के या मध्यम माइग्रेन के लिए उपयोग किया जाता है। Intramuscularly प्रशासित इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध है। मौखिक तैयारी अधिक लंबे समय तक चल रही है। 0.5% समाधान गंभीर सिरदर्द के साथ मदद करता हैसेडुक्सन 2-4 मिलीलीटर, 40% ग्लूकोज समाधान में पतला, दवा को बहुत धीरे-धीरे प्रशासित किया जाता है। सोडियम बाइकार्बोनेट या यूफाइललाइन के साथ अंतःशिरा ग्लूकोज भी मदद करता है।
बच्चों में माइग्रेन।यह कैसे संभव है? आंकड़ों के मुताबिक, चालीस% बच्चे जो चौदह साल की उम्र तक नहीं पहुंच चुके हैं, पहले से ही इसका अनुभव कर चुके हैं। और अज्ञात कारणों से माइग्रेन से इस संख्या का केवल एक तिहाई पीड़ित है, बाकी को माता-पिता से एक समान "उपहार" प्राप्त हुआ। बच्चों में माइग्रेन, वयस्कों में, कारण ... घबराहट तनाव, कोई फर्क नहीं पड़ता कि लंबे समय तक या नहीं। लेकिन यह एक तथ्य है। तो इससे पहले कि आप एक बच्चे को परेशान करने से पहले सोचें। एक घबराहट तनाव के साथ, की मात्राएड्रेनालाईन का विकास, जो सीधे मस्तिष्क में मौजूद जहाजों को संकुचित करता है। इस मामले में, संकीर्ण जहाजों की वासोडिलेटर दवाओं की प्रतिक्रिया शून्य हो गई है। मस्तिष्क को पोषक तत्व नहीं मिल सकते हैं जो रक्त प्रवाह के साथ वितरित किए जाते हैं, और नतीजतन यह गंभीर सिरदर्द के रूप में संकेत देता है। इस मामले में, एक सामान्य मामला है, जो डॉक्टर अक्सर एआरवीआई के साथ भ्रमित होते हैं। गर्भवती महिलाओं की जांच करने वाले विशेषज्ञों के मुताबिकमाइग्रेन के लिए महिलाएं, पहले तिमाही में, या बल्कि, इसके पाठ्यक्रम के हर समय, भविष्य की मां इस तरह के लक्षणों की शिकायत करती हैं। गर्भावस्था के दौरान, एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर माइग्रेन से छुटकारा पाने में मदद करेगा, लेकिन केवल प्रसव के बाद पहले मासिक धर्म की अवधि तक ही। ऐसे मामले हैं जब माइग्रेन जारी रहता हैएक लंबा समय - कई घंटों के लिए, या अक्सर सिर दर्द होता है, जबकि दृष्टि की गुणवत्ता बिगड़ती है। इस मामले में, आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करने की आवश्यकता है जो आपको जानकारी प्रदान करेगा जो आपको माइग्रेन को रोकने में मदद करेगा। इस मामले में उपचार डॉक्टर द्वारा भी निर्धारित किया जाना चाहिए, क्योंकि अधिकांश दर्दनाशक भ्रूण के विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं, और यहां तक कि गर्भपात भी कर सकते हैं। क्लासिक और आम माइग्रेन हैं।प्रत्येक मामले में क्रमशः उपचार अलग है। बच्चे आमतौर पर माइग्रेन के क्लासिक रूप से पीड़ित होते हैं, जो दर्द के हमलों के समूह हमलों के साथ नहीं होता है, जिसे दूसरे, सामान्य रूप के बारे में नहीं कहा जा सकता है, जो गर्भवती महिलाओं सहित वयस्कों को प्रभावित करता है। बच्चों में माइग्रेन दो घंटे तक चल सकता है,कुछ मामलों में, उल्टी की घटना के साथ, तीन-चार घंटाटे, कई बार दोहराया। यह शरीर के निर्जलीकरण की ओर जाता है। इस मामले में, तत्काल अस्पताल में जरूरी है। शायद सेरोटोनिन का अंतःशिरा इंजेक्शन, लेकिन इसके कई दुष्प्रभाव हैं। सबसे पहले, सरल एनाल्जेसिक निर्धारित किए जाते हैं, लेकिन यदि वे मदद नहीं करते हैं, तो वे उनके संयोजन का सहारा लेते हैं। एनाल्जेसिक की बेकारता के मामले में, एंटी-माइग्रेन दवाएं प्राप्त करना शुरू करें। आज तक, प्रभावी दवाओं के तीन वर्ग हैं, जिनमें निम्न शामिल हैंः - पाँच-एचटी एक agonists या triptans। वे दो प्रकारों में विभाजित हैंः चुनिंदा और गैर-चयनशील। पहले प्रकार में ड्रग्स "ज़ोलमिट्रीप्टन", "एलेट्रीप्टन", "सुमात्रिप्टन" और अन्य शामिल हैं। दूसरे के लिए, एर्गोगामाइन और डायहाइड्रोर्गोटामाइन उत्पादों, ज्यादातर इन दवाओं में उल्टी बढ़ जाती है। ट्रिपटन्स गोलियों में या स्प्रे के रूप में, साथ ही इंजेक्शन के रूप में भी उपलब्ध हैं। मध्यम से गंभीर सिरदर्द के लिए प्रयोग किया जाता है। - डोपामाइन प्रतिद्वंद्वियों - एंटीमेटिक दवाएं दोनों हैं, इंजेक्शन के रूप में इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध हैं। - प्रोस्टाग्लैंडिन अवरोधक - हल्के या मध्यम माइग्रेन के लिए उपयोग किया जाता है। Intramuscularly प्रशासित इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध है। मौखिक तैयारी अधिक लंबे समय तक चल रही है। शून्य.पाँच% समाधान गंभीर सिरदर्द के साथ मदद करता हैसेडुक्सन दो-चार मिलीलीटर, चालीस% ग्लूकोज समाधान में पतला, दवा को बहुत धीरे-धीरे प्रशासित किया जाता है। सोडियम बाइकार्बोनेट या यूफाइललाइन के साथ अंतःशिरा ग्लूकोज भी मदद करता है।
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने गुरुवार को डीजल की कीमत में 20 पैसे प्रति लीटर की कटौती की, लेकिन पेट्रोल की दर अपरिवर्तित रही। सरकारी तेल कंपनियों की मूल्य अधिसूचना के अनुसार दिल्ली में डीजल की कीमत 89. 67 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 89. 47 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इससे पहले बुधवार को भी इतनी कटौती की गई थी। गुरुवार को हालांकि पेट्रोल की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। दिल्ली में पेट्रोल 101. 84 रुपये प्रति लीटर के भाव पर था। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया है कि वह आने वाले महीनों में संपत्ति की खरीद को कम करना शुरू कर देगा, जिससे जिंस की कीमतों में कमी आएगी तथा डॉलर मजबूत होगा। फेडरल रिजर्व के इस फैसले के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर कच्चे तेल की कीमत मई के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई है। ब्रेंट कच्चा तेल 2. 13 डॉलर की गिरावट के साथ 66. 10 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 2. 39 डॉलर गिरकर 63. 07 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर है। भारत अपनी तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने गुरुवार को डीजल की कीमत में बीस पैसे प्रति लीटर की कटौती की, लेकिन पेट्रोल की दर अपरिवर्तित रही। सरकारी तेल कंपनियों की मूल्य अधिसूचना के अनुसार दिल्ली में डीजल की कीमत नवासी. सरसठ रुपयापये प्रति लीटर से घटाकर नवासी. सैंतालीस रुपयापये प्रति लीटर कर दी गई है। इससे पहले बुधवार को भी इतनी कटौती की गई थी। गुरुवार को हालांकि पेट्रोल की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। दिल्ली में पेट्रोल एक सौ एक. चौरासी रुपयापये प्रति लीटर के भाव पर था। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया है कि वह आने वाले महीनों में संपत्ति की खरीद को कम करना शुरू कर देगा, जिससे जिंस की कीमतों में कमी आएगी तथा डॉलर मजबूत होगा। फेडरल रिजर्व के इस फैसले के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर कच्चे तेल की कीमत मई के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई है। ब्रेंट कच्चा तेल दो. तेरह डॉलर की गिरावट के साथ छयासठ. दस डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट दो. उनतालीस डॉलर गिरकर तिरेसठ. सात डॉलर प्रति बैरल के भाव पर है। भारत अपनी तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
पानीपत, 13 अप्रैल (निस) पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुभाष बतरा ने कहा कि देश व प्रदेश में रोजाना बढ़ रही महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी एवं बिगड़ी कानून व्यवस्था के खिलाफ कांग्रेस जल्द ही सड़क पर उतरेगी और कांग्रेस कार्यकर्ता ब्लाक स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। सुभाष बतरा बुधवार को लालबत्ती स्थित कांग्रेस भवन में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रोजाना पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस के बढ़ते दामों से आम जनता में आहाकार मचा हुआ है। कांग्रेस रोष प्रदर्शन करके अब नींद में सोई हुई भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार को जगाने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती के साथ सड़क पर उतर कर आम जनता के हकों की लड़ाई लड़ेगी। त्रकारों के सवाल पर सुभाष बतरा ने कहा कि हरियाणा में आप कोई करिश्मा करने वाली नहीं है और वे पूरे दावे के साथ कहते हैं कि प्रदेश में कांग्रेस पूर्ण बहुमत से अगले विधानसभा चुनाव में सरकार बनायेगी। इस मौके पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता धर्मपाल गुप्ता,ओमवीर पंवार, सुशील धानक, सतीश बन्धु, मोहकम सिंह,चांद बुद्धिराजा, सिमरन कौर, तेजिंद्र सिंह, शशि लूथरा, डॉ बलदेव कपूर, सूरज सैनी, मुल्कराज गुरेजा आदि मौजूद रहे।
पानीपत, तेरह अप्रैल पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुभाष बतरा ने कहा कि देश व प्रदेश में रोजाना बढ़ रही महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी एवं बिगड़ी कानून व्यवस्था के खिलाफ कांग्रेस जल्द ही सड़क पर उतरेगी और कांग्रेस कार्यकर्ता ब्लाक स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। सुभाष बतरा बुधवार को लालबत्ती स्थित कांग्रेस भवन में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रोजाना पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस के बढ़ते दामों से आम जनता में आहाकार मचा हुआ है। कांग्रेस रोष प्रदर्शन करके अब नींद में सोई हुई भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार को जगाने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती के साथ सड़क पर उतर कर आम जनता के हकों की लड़ाई लड़ेगी। त्रकारों के सवाल पर सुभाष बतरा ने कहा कि हरियाणा में आप कोई करिश्मा करने वाली नहीं है और वे पूरे दावे के साथ कहते हैं कि प्रदेश में कांग्रेस पूर्ण बहुमत से अगले विधानसभा चुनाव में सरकार बनायेगी। इस मौके पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता धर्मपाल गुप्ता,ओमवीर पंवार, सुशील धानक, सतीश बन्धु, मोहकम सिंह,चांद बुद्धिराजा, सिमरन कौर, तेजिंद्र सिंह, शशि लूथरा, डॉ बलदेव कपूर, सूरज सैनी, मुल्कराज गुरेजा आदि मौजूद रहे।
लखनऊ। सीतापुर के एमएलसी पवन सिंह चौहान ने शुक्रवार को जानकीपुरम में "लखनऊ का हुनरबाज़" (Hunarbaz of Lucknow) इवेंट का ब्रांड एम्बेसडर पोस्टर जारी किया। इस इवेंट के कर्ताधर्ता अनन्त त्रिपाठी ने बताया कि आर्यावर्त मॉर्डन एजुकेशनल सोसायटी के तत्वावधान में लखनऊ जिले के एक लाख बच्चों का बौद्धिक स्तर जांचा जाएगा। इस परीक्षा में सफल बच्चे को लखनऊ का हुनरबाज़ घोषित किया जाएगा। हमारे ब्रांड एम्बेसडर नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान लाखों विद्यार्थियों को नशे के प्रति जागरूक करेंगे। उन्होंने बताया कि नशामुक्त समाज आंदोलन 'अभियान कौशल का' के ब्लॉक प्रभारी नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान को इस इवेंट का ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया है। इस इवेंट में नशामुक्त समाज आंदोलन 'अभियान कौशल का' की सहभागिता रहेगी। आर्यावर्त मॉर्डन एजुकेशनल सोसायटी इस प्रतियोगिता के माध्यम से राजधानी के लाखों विद्यार्थियों को नशे के प्रति जागरूक भी करेगी। इस बौद्धिक परीक्षा के प्रश्न पत्र में नशामुक्ति का संदेश भी होगा। 👉विश्व स्वास्थ्य दिवसः कितना मुमकिन है सभी के लिए स्वस्थ परिवेश उपलब्ध कराना?
लखनऊ। सीतापुर के एमएलसी पवन सिंह चौहान ने शुक्रवार को जानकीपुरम में "लखनऊ का हुनरबाज़" इवेंट का ब्रांड एम्बेसडर पोस्टर जारी किया। इस इवेंट के कर्ताधर्ता अनन्त त्रिपाठी ने बताया कि आर्यावर्त मॉर्डन एजुकेशनल सोसायटी के तत्वावधान में लखनऊ जिले के एक लाख बच्चों का बौद्धिक स्तर जांचा जाएगा। इस परीक्षा में सफल बच्चे को लखनऊ का हुनरबाज़ घोषित किया जाएगा। हमारे ब्रांड एम्बेसडर नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान लाखों विद्यार्थियों को नशे के प्रति जागरूक करेंगे। उन्होंने बताया कि नशामुक्त समाज आंदोलन 'अभियान कौशल का' के ब्लॉक प्रभारी नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान को इस इवेंट का ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया है। इस इवेंट में नशामुक्त समाज आंदोलन 'अभियान कौशल का' की सहभागिता रहेगी। आर्यावर्त मॉर्डन एजुकेशनल सोसायटी इस प्रतियोगिता के माध्यम से राजधानी के लाखों विद्यार्थियों को नशे के प्रति जागरूक भी करेगी। इस बौद्धिक परीक्षा के प्रश्न पत्र में नशामुक्ति का संदेश भी होगा। 👉विश्व स्वास्थ्य दिवसः कितना मुमकिन है सभी के लिए स्वस्थ परिवेश उपलब्ध कराना?
है और उसमे प्रज्ञान और उसका आवरण है । इसमे यह शका होती है - अज्ञान और उसका आवरण विचार दृष्टि से चेतन मे है, घट मे नही है । क्यो ? अज्ञान चेतन के आश्रित है और चेतन को ही विषय करता है। यह वेदान्त का सिद्धान्त है । और सात अवस्था के प्रसंग मे अज्ञान का आश्रय अत करण सहित आभास कहा था, सो अज्ञान का अभिमानी है । "मै अज्ञानी हूँ" ऐसा अभिमान अत कररण सहित आभास को होता है । इस कारण से अज्ञान का आश्रय कहते है । और मुख्य आश्रय चेतन है, आभास सहित अन्त. करण नहीं है । कैसे ? जैसे धन का मुख्य आश्रय कोश (पेटी आदिक धन का भडार) है और "मै धनी हूँ" ऐसा धन का अभिमानीरूप आश्रय पुरुष है । वैसे अज्ञान का मुख्य आश्रय चेतन है और अभिमानीरूप आश्रय साभास अत. करण है । क्यों ? आभाससहित अन्त करण अज्ञान का कार्य है । जो जिसका कार्य होता है, सो उसका आश्रय नही बनता । इससे चेतन ही अज्ञान का अधिष्ठान रूप आश्रय है । चेतन को ही अज्ञान विषय करता है। स्त्ररूप का जो आवरण करना है, सोई अज्ञान का विषय करना है । सो अज्ञानकृत आवरण जड वस्तु मे नही बनता । क्यो ? जड वस्तु स्वरूप से ही आवृत्त है । उसमे अज्ञानकृत आवरण का कुछ भी उपयोग नही है । इस रीति से अज्ञान का आश्रय और विषय चेतन है । कैसे ? जैसे गृह के मध्य जो अधकार है, सो गृह के मध्य को आवरण करता है । इससे घट मे अज्ञान और उसका आवरण नहीं बनता है । उक्त शका का यह समाधान है बाहर के पदार्थ मे वृत्ति और आभास दोनो का उपयोग जैसे चेतन के स्वरूप से भिन्न सत् असत् से विलक्षण प्रज्ञान चेतन के आश्रित है, उस अज्ञान से चेतन आवृत्त होता है, वैसे घट के स्त्ररूप से भिन्न अज्ञान यद्यपि घट के आश्रित नहीं है, तथापि अज्ञान ने घटादिक स्वरूप से प्रकाश रहित जडस्वरूप रचे है । इससे सदा ही अध के समान आवृत्त है । सो आवृत स्वभाव घटादिको का अज्ञान ने ही किया है। क्यों ? समोगुण प्रधान अज्ञान से भूतो की उत्पत्ति द्वारा घटादिक उत्पन्न होते है । सो तमोगुण आवरण स्वभाव वाला है। इससे घटादिक प्रकाश रहित अध ही होते है । इस रीति से अधतारूप आवरण घटादिको मे अज्ञानकृत स्वभावसिद्ध है ओर घटादिको के अधिष्ठान चेनन आश्रित अज्ञान, चेतन को आच्छादित करके स्वभाव से आवृत्त घटादिको को भी आवृत्त करता है । यद्यपि स्वभाव से प्रावृत्त पदार्थ के आवरण मे प्रयोजन नहीं है, तथापि आवरण कर्ता पदार्थ प्रयोजन की अपेक्षा से बिना ही निरावरण के समान आवरण सहित मे भी आवरण करता है । यह लोक मे प्रसिद्ध है । उस अज्ञान से आवृत घट को व्याप्त जो होती है अन्त करण की आभास सहित घटाकार वृत्ति, उसमें वृत्तिभाग तो घट के आवरण को दूर करता है । और वृत्ति मे जो आभासभाग है, सो घट का प्रकाश करता है । इस रीति से बाहर के पदार्थ मे वृत्ति और आभास दोनो का उपयोग है । जैसे अधकार मे कुडे से मृत्तिका अथवा लोह का पात्र ढका धरा हो, वहाँ दड से कू डे को फोड भी दे, पीछे भी दीपक बिना उस निरावरण पात्र का प्रकाश नही होता है, किन्तु दीपक से प्रकाश होता है । वैसे अज्ञान से आवृत्त जो घट, उसके आवरण को वृत्ति भग कर देती है । तथापि घट का प्रकाश नही होता है । क्यो ? घट तो स्त्ररूप से जड है और वृत्ति भी जड है । उसका आवरण भग मात्र प्रयोजन है । उससे प्रकाश नहीं होता । इससे घट का प्रकाशक आभास है । नेत्र का विषय जो वस्तु है, उसके प्रत्यक्ष ज्ञान की यह रीति कही है। और जहा श्रोत्र इन्द्रिय से शब्द विषय का प्रत्यक्ष होता है । वहा श्रोत्र द्वारा निकली जो अन्त. करण की साभास वृत्ति, सो दूर देश मे वा समीप देश मे स्थित शब्द के आकार के समान आकार को प्राप्त होती है । तब वृत्ति से शब्द का आवरण भंग होता है और आभासभाग शब्द का प्रकाश करता है । जहा त्वक् इन्द्रिय से स्पर्शगुण और उसके आश्रय घटादिक का प्रत्यक्ष होता है, वहा शरीररूप गोलक को छोड़कर वृत्ति बाहर नही जाती है। किन्तु शरीर की क्रिया से अथवा अन्य की क्रिया से शरीररूप गोलक के साथ सयोग को प्राप्त जो घटादिक विषय, उसको और उसके आश्रित कठिनतादिकरूप स्पर्शगुण को शरीररूप गोलक मे ही स्थित हुई साभास अत करण की वृत्ति विषय करती है । उस वृत्ति से आश्रय सहित स्पर्श का आवरण भग होता है । और चिदाभास उसका प्रकाश करता है । जहा रसन इन्द्रिय से रस विषय का प्रत्यक्ष होता है, वहा भी जिह्वारूप गोलक को छोडकर वृत्ति बाहर नही जाती है । किन्तु जिह्वारूप गोलक से जब रस विषय का सयोग होता है, तब जिह्वा के अग्रभाग वत्ति रमन इन्द्रिय मे स्थित साभासवृत्ति रस को विषय करती है । वहा वृत्ति से रस का आवरण भग होता है । और चिदाभास मधुरादिरस का प्रकाश करता है । जहा घ्राण इन्द्रिय से गध का प्रत्यक्ष होता है, वहा भी नासिकारूप गोलक से पुष्पादिरूप गध के आश्रय का वा उसके सूक्ष्म अवयवो का जब सयोग होता है, तब नासिका के अग्रभाग वत्ति घ्राणइन्द्रिय मे स्थित साभास अत करण की वृत्ति, पुष्पादिरूप द्रव्य के आश्रित गधमात्र को ग्रहण अर्थात् विषय करती है । वहा वृत्ति भाग से गध का आवरण भग होता है और वृत्ति में स्थित चिदाभास भाग गध का प्रकाश करता है । यह श्रोत्रादिको का जो विषय है, उसके प्रत्यक्ष की रीति है । वृत्ति और घट दोनो एक देश मे स्थित होने से घट का ज्ञान प्रत्यक्ष कहा जाता है । और अन्त करण की वृत्ति तो घटाकार हो, किन्तु घट के सग वृत्ति का सबन्ध न हो, अतर ही वृत्ति हो, उसको घट का परोक्ष ज्ञान कहते है । "यह घट है" ऐसा अपरोक्ष ज्ञान का आकार है । "घट है " वा "सो घट है" ऐसा परोक्ष ज्ञान का प्रकार है । यद्यपि स्मृति ज्ञान भी परोक्ष ज्ञान ही है, तथापि स्मृति ज्ञान तो सस्कारजन्य है और अनुमिति आदिक परोक्ष ज्ञान प्रमाणजन्य है । इतना भेद है । प्रमाण और प्रमा ज्ञान का लक्षण प्रमाण और प्रमा का लक्षण भी बताइये ? यद्यपि प्रमाण और प्रमा का वर्णन प्रमाण निरूपरण अश ३ से अश ८ तक किया गया है,
है और उसमे प्रज्ञान और उसका आवरण है । इसमे यह शका होती है - अज्ञान और उसका आवरण विचार दृष्टि से चेतन मे है, घट मे नही है । क्यो ? अज्ञान चेतन के आश्रित है और चेतन को ही विषय करता है। यह वेदान्त का सिद्धान्त है । और सात अवस्था के प्रसंग मे अज्ञान का आश्रय अत करण सहित आभास कहा था, सो अज्ञान का अभिमानी है । "मै अज्ञानी हूँ" ऐसा अभिमान अत कररण सहित आभास को होता है । इस कारण से अज्ञान का आश्रय कहते है । और मुख्य आश्रय चेतन है, आभास सहित अन्त. करण नहीं है । कैसे ? जैसे धन का मुख्य आश्रय कोश है और "मै धनी हूँ" ऐसा धन का अभिमानीरूप आश्रय पुरुष है । वैसे अज्ञान का मुख्य आश्रय चेतन है और अभिमानीरूप आश्रय साभास अत. करण है । क्यों ? आभाससहित अन्त करण अज्ञान का कार्य है । जो जिसका कार्य होता है, सो उसका आश्रय नही बनता । इससे चेतन ही अज्ञान का अधिष्ठान रूप आश्रय है । चेतन को ही अज्ञान विषय करता है। स्त्ररूप का जो आवरण करना है, सोई अज्ञान का विषय करना है । सो अज्ञानकृत आवरण जड वस्तु मे नही बनता । क्यो ? जड वस्तु स्वरूप से ही आवृत्त है । उसमे अज्ञानकृत आवरण का कुछ भी उपयोग नही है । इस रीति से अज्ञान का आश्रय और विषय चेतन है । कैसे ? जैसे गृह के मध्य जो अधकार है, सो गृह के मध्य को आवरण करता है । इससे घट मे अज्ञान और उसका आवरण नहीं बनता है । उक्त शका का यह समाधान है बाहर के पदार्थ मे वृत्ति और आभास दोनो का उपयोग जैसे चेतन के स्वरूप से भिन्न सत् असत् से विलक्षण प्रज्ञान चेतन के आश्रित है, उस अज्ञान से चेतन आवृत्त होता है, वैसे घट के स्त्ररूप से भिन्न अज्ञान यद्यपि घट के आश्रित नहीं है, तथापि अज्ञान ने घटादिक स्वरूप से प्रकाश रहित जडस्वरूप रचे है । इससे सदा ही अध के समान आवृत्त है । सो आवृत स्वभाव घटादिको का अज्ञान ने ही किया है। क्यों ? समोगुण प्रधान अज्ञान से भूतो की उत्पत्ति द्वारा घटादिक उत्पन्न होते है । सो तमोगुण आवरण स्वभाव वाला है। इससे घटादिक प्रकाश रहित अध ही होते है । इस रीति से अधतारूप आवरण घटादिको मे अज्ञानकृत स्वभावसिद्ध है ओर घटादिको के अधिष्ठान चेनन आश्रित अज्ञान, चेतन को आच्छादित करके स्वभाव से आवृत्त घटादिको को भी आवृत्त करता है । यद्यपि स्वभाव से प्रावृत्त पदार्थ के आवरण मे प्रयोजन नहीं है, तथापि आवरण कर्ता पदार्थ प्रयोजन की अपेक्षा से बिना ही निरावरण के समान आवरण सहित मे भी आवरण करता है । यह लोक मे प्रसिद्ध है । उस अज्ञान से आवृत घट को व्याप्त जो होती है अन्त करण की आभास सहित घटाकार वृत्ति, उसमें वृत्तिभाग तो घट के आवरण को दूर करता है । और वृत्ति मे जो आभासभाग है, सो घट का प्रकाश करता है । इस रीति से बाहर के पदार्थ मे वृत्ति और आभास दोनो का उपयोग है । जैसे अधकार मे कुडे से मृत्तिका अथवा लोह का पात्र ढका धरा हो, वहाँ दड से कू डे को फोड भी दे, पीछे भी दीपक बिना उस निरावरण पात्र का प्रकाश नही होता है, किन्तु दीपक से प्रकाश होता है । वैसे अज्ञान से आवृत्त जो घट, उसके आवरण को वृत्ति भग कर देती है । तथापि घट का प्रकाश नही होता है । क्यो ? घट तो स्त्ररूप से जड है और वृत्ति भी जड है । उसका आवरण भग मात्र प्रयोजन है । उससे प्रकाश नहीं होता । इससे घट का प्रकाशक आभास है । नेत्र का विषय जो वस्तु है, उसके प्रत्यक्ष ज्ञान की यह रीति कही है। और जहा श्रोत्र इन्द्रिय से शब्द विषय का प्रत्यक्ष होता है । वहा श्रोत्र द्वारा निकली जो अन्त. करण की साभास वृत्ति, सो दूर देश मे वा समीप देश मे स्थित शब्द के आकार के समान आकार को प्राप्त होती है । तब वृत्ति से शब्द का आवरण भंग होता है और आभासभाग शब्द का प्रकाश करता है । जहा त्वक् इन्द्रिय से स्पर्शगुण और उसके आश्रय घटादिक का प्रत्यक्ष होता है, वहा शरीररूप गोलक को छोड़कर वृत्ति बाहर नही जाती है। किन्तु शरीर की क्रिया से अथवा अन्य की क्रिया से शरीररूप गोलक के साथ सयोग को प्राप्त जो घटादिक विषय, उसको और उसके आश्रित कठिनतादिकरूप स्पर्शगुण को शरीररूप गोलक मे ही स्थित हुई साभास अत करण की वृत्ति विषय करती है । उस वृत्ति से आश्रय सहित स्पर्श का आवरण भग होता है । और चिदाभास उसका प्रकाश करता है । जहा रसन इन्द्रिय से रस विषय का प्रत्यक्ष होता है, वहा भी जिह्वारूप गोलक को छोडकर वृत्ति बाहर नही जाती है । किन्तु जिह्वारूप गोलक से जब रस विषय का सयोग होता है, तब जिह्वा के अग्रभाग वत्ति रमन इन्द्रिय मे स्थित साभासवृत्ति रस को विषय करती है । वहा वृत्ति से रस का आवरण भग होता है । और चिदाभास मधुरादिरस का प्रकाश करता है । जहा घ्राण इन्द्रिय से गध का प्रत्यक्ष होता है, वहा भी नासिकारूप गोलक से पुष्पादिरूप गध के आश्रय का वा उसके सूक्ष्म अवयवो का जब सयोग होता है, तब नासिका के अग्रभाग वत्ति घ्राणइन्द्रिय मे स्थित साभास अत करण की वृत्ति, पुष्पादिरूप द्रव्य के आश्रित गधमात्र को ग्रहण अर्थात् विषय करती है । वहा वृत्ति भाग से गध का आवरण भग होता है और वृत्ति में स्थित चिदाभास भाग गध का प्रकाश करता है । यह श्रोत्रादिको का जो विषय है, उसके प्रत्यक्ष की रीति है । वृत्ति और घट दोनो एक देश मे स्थित होने से घट का ज्ञान प्रत्यक्ष कहा जाता है । और अन्त करण की वृत्ति तो घटाकार हो, किन्तु घट के सग वृत्ति का सबन्ध न हो, अतर ही वृत्ति हो, उसको घट का परोक्ष ज्ञान कहते है । "यह घट है" ऐसा अपरोक्ष ज्ञान का आकार है । "घट है " वा "सो घट है" ऐसा परोक्ष ज्ञान का प्रकार है । यद्यपि स्मृति ज्ञान भी परोक्ष ज्ञान ही है, तथापि स्मृति ज्ञान तो सस्कारजन्य है और अनुमिति आदिक परोक्ष ज्ञान प्रमाणजन्य है । इतना भेद है । प्रमाण और प्रमा ज्ञान का लक्षण प्रमाण और प्रमा का लक्षण भी बताइये ? यद्यपि प्रमाण और प्रमा का वर्णन प्रमाण निरूपरण अश तीन से अश आठ तक किया गया है,
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा की आग ने कई लोगों को लील लिया। कई घर और दुकान जला दिए गए। जगह-जगह से हिंसा की बेहद दर्दनाक तस्वीरें सामने आईं। लेकिन इस जबरदस्त तनाव और हिंसा के माहौल में कुछ ऐसी खबरें भी आईं जिससे मानवता और भाईचारे की मिसाल कायम की। ऐसा ही एक वाकया अशोक नगर का है जहाँ तकरीबन 40 मुस्लिमों के लिए उनके हिंदू पड़ोसी सहारा बने। रिपोर्ट के मुताबिक, अशोक नगर में उपद्रवियों ने मंगलवार को मुसलमानों के छह मकान जलाकर राख कर दिए। उनकी दुकानें भी फूंक डालीं। रोजर्मरा का हर सामान राख में बदल गया। जब भीड़ ने इनके घर फूंक दिए तो जान बचाकर भागे लोगों के लिए इन हिंदुओं ने अपने घर के दरवाजे खोल दिए। दरअसल, मंगलवार दोपहर को करीब 1000 लोगों की भीड़ बड़ी मस्जिद के निकट कॉलोनी में घुसी। इनमें से कई उपद्रवी मस्जिद में घुस गए, जहां करीब 20 लोग प्रार्थना में जुटे थे। जब अचानक बड़ी संख्या में लोग अंदर घुसे और नारे लगाने लगे तो मुस्लिम अपनी जान बचाने को भागे। भीड़ ने मस्जिद में भी तोड़फोड़ की और आग भी लगा दी। कुछ लोग मस्जिद के ऊपर चढ़ गए और उन्होंने भगवा झंडे के साथ तिरंगा फहराया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे उपद्रवियों से नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील करते रहे, लेकिन उन्होंने किसी कि नहीं सुनी। वे सभी बाहरी थे। एक स्थानीय निवासी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि अधिकतर उपद्रवियों ने अपने चेहरे ढंक रखे थे और उनके हाथ में लोहे का सरिया था। उन्होंने दुकानें जलानी शुरू कर दी। हम लोग डरे हुए थे कि वे हमारी जान ले सकते हैं। दुकानों को निशाना बनाने के बाद वे छह घरों की ओर आगे बढ़े। इस कॉलोनी में छह ही घर मुस्लिम परिवारों के हैं। दंगाइयों ने इन घरों में कुछ नहीं छोड़ा और हर चीज लूट ली। तब पड़ोसी हिंदू भाइयों ने हमारी मदद की। उन्होंने हमारा पूरा साथ दिया है और हमें अपने घर ले जाकर आश्रय दिया है। हम यहां 25 सालों से रह रहे हैं और कभी किसी हिंदू पड़ोसी से झगड़ा नहीं हुआ। हम यहां एक परिवार की तरह रह रहे हैं। वहीं मुस्लिम परिवारों को सहारा देने वाले स्थानीय हिंदू निवासी ने कहा कि जो भी हो जाए हम उनके साथ खड़े रहेंगे। हम भी हिंदू हैं, लेकिन उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की सोच भी नहीं सकते हैं। कुछ दुकानें जिनमें आग लगाई गई, वह इन परिवारों की थीं। अब उनका घर और रोजी-रोटी का साधन बर्बाद हो चुका है। संकट की इस घड़ी में हम उन्हें अकेले नहीं छोड़ सकते हैं। नफरत के नंगे नाच के बीच ऐसी कहानियां वाकई दिल को सुकून देने वाली हैं।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा की आग ने कई लोगों को लील लिया। कई घर और दुकान जला दिए गए। जगह-जगह से हिंसा की बेहद दर्दनाक तस्वीरें सामने आईं। लेकिन इस जबरदस्त तनाव और हिंसा के माहौल में कुछ ऐसी खबरें भी आईं जिससे मानवता और भाईचारे की मिसाल कायम की। ऐसा ही एक वाकया अशोक नगर का है जहाँ तकरीबन चालीस मुस्लिमों के लिए उनके हिंदू पड़ोसी सहारा बने। रिपोर्ट के मुताबिक, अशोक नगर में उपद्रवियों ने मंगलवार को मुसलमानों के छह मकान जलाकर राख कर दिए। उनकी दुकानें भी फूंक डालीं। रोजर्मरा का हर सामान राख में बदल गया। जब भीड़ ने इनके घर फूंक दिए तो जान बचाकर भागे लोगों के लिए इन हिंदुओं ने अपने घर के दरवाजे खोल दिए। दरअसल, मंगलवार दोपहर को करीब एक हज़ार लोगों की भीड़ बड़ी मस्जिद के निकट कॉलोनी में घुसी। इनमें से कई उपद्रवी मस्जिद में घुस गए, जहां करीब बीस लोग प्रार्थना में जुटे थे। जब अचानक बड़ी संख्या में लोग अंदर घुसे और नारे लगाने लगे तो मुस्लिम अपनी जान बचाने को भागे। भीड़ ने मस्जिद में भी तोड़फोड़ की और आग भी लगा दी। कुछ लोग मस्जिद के ऊपर चढ़ गए और उन्होंने भगवा झंडे के साथ तिरंगा फहराया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे उपद्रवियों से नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील करते रहे, लेकिन उन्होंने किसी कि नहीं सुनी। वे सभी बाहरी थे। एक स्थानीय निवासी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि अधिकतर उपद्रवियों ने अपने चेहरे ढंक रखे थे और उनके हाथ में लोहे का सरिया था। उन्होंने दुकानें जलानी शुरू कर दी। हम लोग डरे हुए थे कि वे हमारी जान ले सकते हैं। दुकानों को निशाना बनाने के बाद वे छह घरों की ओर आगे बढ़े। इस कॉलोनी में छह ही घर मुस्लिम परिवारों के हैं। दंगाइयों ने इन घरों में कुछ नहीं छोड़ा और हर चीज लूट ली। तब पड़ोसी हिंदू भाइयों ने हमारी मदद की। उन्होंने हमारा पूरा साथ दिया है और हमें अपने घर ले जाकर आश्रय दिया है। हम यहां पच्चीस सालों से रह रहे हैं और कभी किसी हिंदू पड़ोसी से झगड़ा नहीं हुआ। हम यहां एक परिवार की तरह रह रहे हैं। वहीं मुस्लिम परिवारों को सहारा देने वाले स्थानीय हिंदू निवासी ने कहा कि जो भी हो जाए हम उनके साथ खड़े रहेंगे। हम भी हिंदू हैं, लेकिन उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की सोच भी नहीं सकते हैं। कुछ दुकानें जिनमें आग लगाई गई, वह इन परिवारों की थीं। अब उनका घर और रोजी-रोटी का साधन बर्बाद हो चुका है। संकट की इस घड़ी में हम उन्हें अकेले नहीं छोड़ सकते हैं। नफरत के नंगे नाच के बीच ऐसी कहानियां वाकई दिल को सुकून देने वाली हैं।
Chaibasa : विगत दिनों महिला कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर प्रीति बाला सिन्हा ने छात्र संघ के प्रतिनिधियों के साथ हुए दुर्व्यवहार एवं छात्र संघ के मांगों को अनदेखी की थी. इसके विरोध में छात्र संघ ने महामहिम राज्यपाल महोदय से प्राचार्य को पद मुक्त करने की मांग की थी. राजभवन द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए अविलंब प्रचार्य को पदमुक्त कर दिया. वर्तमान में महिला कॉलेज चाईबासा के कुछ शिक्षक-शिक्षिकाएं कॉलेज का शैक्षणिक माहौल खराब करते हुए छात्राओं को बहला-फुसलाकर विश्वविद्यालय जाने को कह रहे हैं. ऐसी स्थिति में शिक्षिका अपने विभाग का रेगुलर क्लास लेने के बजाए कॉलेज में राजनीति करने में लगी हुई है. छात्र संघ ऐसी शिक्षिकाओं का घोर विरोध एवं निंदा करती है. साथ ही साथ विश्वविद्यालय प्रशासन से यह मांग करती है कि ऐसी शिक्षिकाएं को महिला कॉलेज चाईबासा से अन्य जगह स्थानांतरण कराकर कॉलेज का माहौल को शैक्षणिक माहौल में तब्दील करने का मांग करती है. इस मौके पर कोल्हान विश्वविद्यालय छात्र संघ सचिव सुबोध महाकुड़, पीजी विभाग छात्रसंघ अध्यक्ष सनातन पिंगुआ, टाटा कॉलेज छात्रसंघ विश्वविद्यालय प्रतिनिधि मंजीत हांसदा आदि मौजूद थे.
Chaibasa : विगत दिनों महिला कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर प्रीति बाला सिन्हा ने छात्र संघ के प्रतिनिधियों के साथ हुए दुर्व्यवहार एवं छात्र संघ के मांगों को अनदेखी की थी. इसके विरोध में छात्र संघ ने महामहिम राज्यपाल महोदय से प्राचार्य को पद मुक्त करने की मांग की थी. राजभवन द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए अविलंब प्रचार्य को पदमुक्त कर दिया. वर्तमान में महिला कॉलेज चाईबासा के कुछ शिक्षक-शिक्षिकाएं कॉलेज का शैक्षणिक माहौल खराब करते हुए छात्राओं को बहला-फुसलाकर विश्वविद्यालय जाने को कह रहे हैं. ऐसी स्थिति में शिक्षिका अपने विभाग का रेगुलर क्लास लेने के बजाए कॉलेज में राजनीति करने में लगी हुई है. छात्र संघ ऐसी शिक्षिकाओं का घोर विरोध एवं निंदा करती है. साथ ही साथ विश्वविद्यालय प्रशासन से यह मांग करती है कि ऐसी शिक्षिकाएं को महिला कॉलेज चाईबासा से अन्य जगह स्थानांतरण कराकर कॉलेज का माहौल को शैक्षणिक माहौल में तब्दील करने का मांग करती है. इस मौके पर कोल्हान विश्वविद्यालय छात्र संघ सचिव सुबोध महाकुड़, पीजी विभाग छात्रसंघ अध्यक्ष सनातन पिंगुआ, टाटा कॉलेज छात्रसंघ विश्वविद्यालय प्रतिनिधि मंजीत हांसदा आदि मौजूद थे.
एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग जांच एजेंसी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि याचिका गलत है और इसमें कोई दम नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को झारखंड कैडर की निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले अंतरिम जमानत दे दी. उन्हें ये जमानत अपनी बीमार बेटी की देखभाल के लिए दी गई है. जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय एस ओका की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय को सिंघल की मुख्य जमानत याचिका पर तीन सप्ताह में जवाब देने का भी निर्देश दिया. एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग जांच एजेंसी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि याचिका गलत है और इसमें कोई दम नहीं है. कानून अधिकारी ने कहा, "मैं इस तरह की दलीलों का विरोध करने वाला आखिरी व्यक्ति होऊंगा." सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित आईएएस अधिकारी की याचिका को 6 फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है. इसी के साथ कोर्ट ने कुछ शर्तें लगाई हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि जब तक रांची में सुनवाई के लिए अदालत का मामला सूचीबद्ध नहीं हो जाता, तब तक वह रांची नहीं आएंगी. सिंघल 11 मई से उनसे जुड़ी संपत्तियों पर छापेमारी के बाद से कस्टडी में हैं. ईडी ने राज्य के खान विभाग की पूर्व सचिव सिंघल पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है और कहा है कि उनकी टीम ने दो अलग-अलग मनी लॉन्ड्रिंग जांचों के तहत कथित अवैध खनन से जुड़े 36 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी जब्त की है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सिंघल की अंतरिम जमानत याचिका पर जांच एजेंसी से जवाब मांगा था. पीठ ने कहा, 'इस बीच, प्रतिवादी को निर्देश दिया जाता है कि वह याचिकाकर्ता की बेटी की चिकित्सकीय स्थिति की पुष्टि करे.' पिछली सुनवाई के दौरान, सिंघल के वकील ने कहा था कि उनके मुवक्किल की बेटी की मेडिकल कंडिशन के कारण देखभाल की जरूरत है. शीर्ष अदालत ने एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग जांच एजेंसी से उसकी बेटी की स्थिति की पुष्टि करने और पीठ को सूचित करने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट सिंघल की जमानत याचिका खारिज करने के झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. 2000 बैच की आईएएस अधिकारी के अलावा, उनके व्यवसायी पति, दंपति से जुड़े एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और अन्य लोगों पर भी ईडी ने मनरेगा योजना में कथित भ्रष्टाचार के एक मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत छापा मारा था. सिंघल को उनकी गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया था. सिंघल और उनके पति से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट सुमन कुमार को भी एजेंसी ने गिरफ्तार किया था और उनके पास से कुल 19.76 करोड़ रुपये जब्त किए गए थे.
एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग जांच एजेंसी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि याचिका गलत है और इसमें कोई दम नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को झारखंड कैडर की निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले अंतरिम जमानत दे दी. उन्हें ये जमानत अपनी बीमार बेटी की देखभाल के लिए दी गई है. जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय एस ओका की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय को सिंघल की मुख्य जमानत याचिका पर तीन सप्ताह में जवाब देने का भी निर्देश दिया. एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग जांच एजेंसी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि याचिका गलत है और इसमें कोई दम नहीं है. कानून अधिकारी ने कहा, "मैं इस तरह की दलीलों का विरोध करने वाला आखिरी व्यक्ति होऊंगा." सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित आईएएस अधिकारी की याचिका को छः फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है. इसी के साथ कोर्ट ने कुछ शर्तें लगाई हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि जब तक रांची में सुनवाई के लिए अदालत का मामला सूचीबद्ध नहीं हो जाता, तब तक वह रांची नहीं आएंगी. सिंघल ग्यारह मई से उनसे जुड़ी संपत्तियों पर छापेमारी के बाद से कस्टडी में हैं. ईडी ने राज्य के खान विभाग की पूर्व सचिव सिंघल पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है और कहा है कि उनकी टीम ने दो अलग-अलग मनी लॉन्ड्रिंग जांचों के तहत कथित अवैध खनन से जुड़े छत्तीस करोड़ रुपये से अधिक की नकदी जब्त की है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सिंघल की अंतरिम जमानत याचिका पर जांच एजेंसी से जवाब मांगा था. पीठ ने कहा, 'इस बीच, प्रतिवादी को निर्देश दिया जाता है कि वह याचिकाकर्ता की बेटी की चिकित्सकीय स्थिति की पुष्टि करे.' पिछली सुनवाई के दौरान, सिंघल के वकील ने कहा था कि उनके मुवक्किल की बेटी की मेडिकल कंडिशन के कारण देखभाल की जरूरत है. शीर्ष अदालत ने एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग जांच एजेंसी से उसकी बेटी की स्थिति की पुष्टि करने और पीठ को सूचित करने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट सिंघल की जमानत याचिका खारिज करने के झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. दो हज़ार बैच की आईएएस अधिकारी के अलावा, उनके व्यवसायी पति, दंपति से जुड़े एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और अन्य लोगों पर भी ईडी ने मनरेगा योजना में कथित भ्रष्टाचार के एक मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत छापा मारा था. सिंघल को उनकी गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया था. सिंघल और उनके पति से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट सुमन कुमार को भी एजेंसी ने गिरफ्तार किया था और उनके पास से कुल उन्नीस.छिहत्तर करोड़ रुपये जब्त किए गए थे.
इंग्लैंड ने टॉस जीतकर भारत को पहले बैटिंग के लिए आमंत्रित किया है और फिलहाल जिस तरह से भारत की बैटिंग की शुरुआत हुई है, टीम इंडिया एक दावेदार मानी जा रही है। भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ 1984-85 के सीजन से घर में कोई भी एक दिवसीय सीरीज नहीं हारी है और वे अभी भी अपना आधिपत्य जमाने की कोशिश कर रहे हैं। खेल की बात करें तो कोहली अर्धशतक लगाकर आउट हो गए और शिखर धवन ने शानदार पारी खेली लेकिन 2 रनों से शतक से चूक गए। लेकिन एक अजीबोगरीब बात तब हुई जब तीसरे ओवर में ही गेंद खराब हो गई। हुआ यह कि इंग्लैंड की ओर से पिच पर नमी का शुरुआती का फायदा उठाते हुए मार्क वुड और सैम करन ने गेंदबाजी की और दोनों भारतीय बल्लेबाजों को पिछले पैर पर बनाए रखा। भारतीय शायद ही किसी शॉट की ओर गए। चीजें और भी खराब हो गई जब मार्क वुड की गेंदबाजी पर रोहित शर्मा की कोहनी में एक दर्दनाक चोट लगी हालांकि वे किसी तरह बल्लेबाजी करना जारी रखते रहे। शुरू के 5 ओवर में धवन और रोहित ने केवल 10 ही रन बनाए थे और उसके बाद वे अगले 5 ओवर में 29 रन जोड़ सके। 11 से 15 वे ओवर के बीच में भारतीय ओपनर 35 रन बना पाए जिसके बाद बेन स्टोक्स ने रोहित शर्मा को 16 वें ओवर की पहली ही गेंद पर आउट कर दिया। आमतौर पर क्रिकेट में बॉल काफी लंबे समय बाद खराब होती है या फिर तब खराब होती है जब बल्लेबाज कुछ ज्यादा ही आक्रामक रुख अपना लेता है। ऐसे में यह काफी आश्चर्यजनक था कि मौजूदा मैच में तीसरे ओवर में गेंद को बदलने की मजबूरी आ गई। इसके पीछे कारण यह था कि गेंद में छेद था। इसके बाद मैदानी अंपायरों ने केवल 16 गेंदों के बाद गेंद का मुआयना किया। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि शिखर धवन ने पिछली गेंद पर जो चौका मारा था उसकी वजह से शायद गेंद में छेद हो गया था। या फिर यह भी हो सकता है कि गेद पर किसी और भी तरह का प्रहार हुआ हो। कई बार बाउंड्री पर जो रस्सी लगी होती है उस पर कुछ उभार होते हैं जहां पर गेंद अगर हिट कर जाए तो उस पर कुछ इस तरह का नुकसान वगैराह देखने को मिल जाता है। हालांकि यह सब दुर्लभ है और मौके की बात है।
इंग्लैंड ने टॉस जीतकर भारत को पहले बैटिंग के लिए आमंत्रित किया है और फिलहाल जिस तरह से भारत की बैटिंग की शुरुआत हुई है, टीम इंडिया एक दावेदार मानी जा रही है। भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ एक हज़ार नौ सौ चौरासी-पचासी के सीजन से घर में कोई भी एक दिवसीय सीरीज नहीं हारी है और वे अभी भी अपना आधिपत्य जमाने की कोशिश कर रहे हैं। खेल की बात करें तो कोहली अर्धशतक लगाकर आउट हो गए और शिखर धवन ने शानदार पारी खेली लेकिन दो रनों से शतक से चूक गए। लेकिन एक अजीबोगरीब बात तब हुई जब तीसरे ओवर में ही गेंद खराब हो गई। हुआ यह कि इंग्लैंड की ओर से पिच पर नमी का शुरुआती का फायदा उठाते हुए मार्क वुड और सैम करन ने गेंदबाजी की और दोनों भारतीय बल्लेबाजों को पिछले पैर पर बनाए रखा। भारतीय शायद ही किसी शॉट की ओर गए। चीजें और भी खराब हो गई जब मार्क वुड की गेंदबाजी पर रोहित शर्मा की कोहनी में एक दर्दनाक चोट लगी हालांकि वे किसी तरह बल्लेबाजी करना जारी रखते रहे। शुरू के पाँच ओवर में धवन और रोहित ने केवल दस ही रन बनाए थे और उसके बाद वे अगले पाँच ओवर में उनतीस रन जोड़ सके। ग्यारह से पंद्रह वे ओवर के बीच में भारतीय ओपनर पैंतीस रन बना पाए जिसके बाद बेन स्टोक्स ने रोहित शर्मा को सोलह वें ओवर की पहली ही गेंद पर आउट कर दिया। आमतौर पर क्रिकेट में बॉल काफी लंबे समय बाद खराब होती है या फिर तब खराब होती है जब बल्लेबाज कुछ ज्यादा ही आक्रामक रुख अपना लेता है। ऐसे में यह काफी आश्चर्यजनक था कि मौजूदा मैच में तीसरे ओवर में गेंद को बदलने की मजबूरी आ गई। इसके पीछे कारण यह था कि गेंद में छेद था। इसके बाद मैदानी अंपायरों ने केवल सोलह गेंदों के बाद गेंद का मुआयना किया। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि शिखर धवन ने पिछली गेंद पर जो चौका मारा था उसकी वजह से शायद गेंद में छेद हो गया था। या फिर यह भी हो सकता है कि गेद पर किसी और भी तरह का प्रहार हुआ हो। कई बार बाउंड्री पर जो रस्सी लगी होती है उस पर कुछ उभार होते हैं जहां पर गेंद अगर हिट कर जाए तो उस पर कुछ इस तरह का नुकसान वगैराह देखने को मिल जाता है। हालांकि यह सब दुर्लभ है और मौके की बात है।
स्मृति ईरानी ने कहा कि हावड़ा हिंसा के आरोपितों को ममता बनर्जी ने क्लिनचिट दे दी है। उन्होंने पूछा कि वे कब तक हिंदुओं पर हमले कराती रहेंगी। हावड़ा के शिबपुर इलाके में रामनवमी के अगले दिन स्थिति और हिंसक हो गई। इसको लेकर बीजेपी ने ममता सरकार पर निशाना साधा। रामनवमी को शुरू हुई बंगाल के हावड़ा में हिंसा अगले दिन यानी जुम्मा को भी जारी है। दंगाइयों की भीड़ ने एक बार फिर से पत्थरबाजी की है। मुस्लिम इलाका आखिर होता क्या है? इसका खास ख्याल रखकर क्यों प्रशासन हमेशा हिंदुओं के त्योहारों पर प्रतिबंध लगाता है। सीएम ममता के खिलाफ भाजपा नेता ने राष्ट्रगान का अपमान करने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर कोर्ट ने ममता बनर्जी को समन जारी किया था। पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारी महँगाई भत्ता (DA) बढ़ाने को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इससे इनकार किया है। पश्चिम बंगाल के कॉन्ग्रेस नेता कौस्तव बागची ने जमानत पर रिहा होते ही सिर मुंडवा कर ममता बनर्जी की सरकार गिराने की कसम खाई है। अरविंद केजरीवाल सहित 9 दलों के नेताओं ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है और मनीष सिसोदिया पर कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है। कौस्तव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित तौर पर ममता बनर्जी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस का सबसे बुरा रहा है। ममता की पार्टी को नोटा से भी कम वोट मिले हैं।
स्मृति ईरानी ने कहा कि हावड़ा हिंसा के आरोपितों को ममता बनर्जी ने क्लिनचिट दे दी है। उन्होंने पूछा कि वे कब तक हिंदुओं पर हमले कराती रहेंगी। हावड़ा के शिबपुर इलाके में रामनवमी के अगले दिन स्थिति और हिंसक हो गई। इसको लेकर बीजेपी ने ममता सरकार पर निशाना साधा। रामनवमी को शुरू हुई बंगाल के हावड़ा में हिंसा अगले दिन यानी जुम्मा को भी जारी है। दंगाइयों की भीड़ ने एक बार फिर से पत्थरबाजी की है। मुस्लिम इलाका आखिर होता क्या है? इसका खास ख्याल रखकर क्यों प्रशासन हमेशा हिंदुओं के त्योहारों पर प्रतिबंध लगाता है। सीएम ममता के खिलाफ भाजपा नेता ने राष्ट्रगान का अपमान करने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर कोर्ट ने ममता बनर्जी को समन जारी किया था। पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारी महँगाई भत्ता बढ़ाने को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इससे इनकार किया है। पश्चिम बंगाल के कॉन्ग्रेस नेता कौस्तव बागची ने जमानत पर रिहा होते ही सिर मुंडवा कर ममता बनर्जी की सरकार गिराने की कसम खाई है। अरविंद केजरीवाल सहित नौ दलों के नेताओं ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है और मनीष सिसोदिया पर कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है। कौस्तव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित तौर पर ममता बनर्जी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस का सबसे बुरा रहा है। ममता की पार्टी को नोटा से भी कम वोट मिले हैं।
न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में मिली जीत के बाद भारत के हौसले बुलंद हैं और अगले टेस्ट में भारत न्यूजीलैंड पर मनोवैज्ञानिक दबाव के साथ उतरेगा। भारत चाहेगा कि कोलकाता टेस्ट जीतकर सीरीज पर कब्जा जमाया जाए और सीरीज जीतने के लिए भारत अपना पूरा दमखम लगा देगा। कानपुर टेस्ट में जहां भारत की जीत में स्पिनरों ने अहम भूमिका निभाई थी और दोनों पारियों में कुल 16 विकेट हासिल किए थे। साफ है अगर 20 में से 16 विकेट स्पिनर ले रहे हैं तो सवाल उठता है कि क्या भारत को कोलकाता टेस्ट में 3 स्पिनर और एक तेज गेंदबाज के साथ उतरना चाहिए या फिर 2 तेज गेंदबाज और 2 स्पिनर की रणनीति पर ही कोहली को भरोसा करना चाहिए। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान को तेज गेंदबाजों के मुकाबले स्पिन गेंदबाजों पर ज्यादा भरोसा है या भारतीय पिच को समझते हुए कोहली ने स्पिन गेंदबाजों से ज्यादा गेंदबाजी कराई। इसमें कोई शक नहीं कि भारतीय पिच स्पिन गेंदबाजों के लिए स्वर्ग होती हैं और भारतीय पिचों पर स्पिन गेंदबाजों को अच्छा टर्न और उछाल प्राप्त होता है जिसका फायदा हमारे स्पिनर बखूबी उठाते हैं और विपक्षी टीम को अपनी फिरकी से खूब छकाते हैं। तो क्या विराट कोहली को अगले टेस्ट में 3 स्पिनर और एक तेज गेंदबाज की रणनीति से उतरना चाहिए?, क्या ये रणनीति कोहली के लिए फायदेमंद हो सकती है? कोलकाता की पिच की बात करें तो पिच क्यूरेटर के मुताबिक पिच से स्पिनर्स को फायदा तो जरूर मिलेगा लेकिन शुरुआत से ही स्पिनर्स हावी नहीं हो पाएंगे। जैसे-जैसे दिन ढलेगा वैसे-वैसे स्पिनर मैच में असर छोड़ पाएंगे। साफ है कि दिन पिच के पुरानी होने पर ही स्पिनर्स कारगर साबित हो पाएंगे और शुरुआत से उनके लिए कुछ खास नहीं रहेगा। पिच को पुरानी करने के लिए टीम में कम से कम दो तेज गेंदबाजों का होना जरूरी है जिससे की दोनों छोर से तेज गेंदबाज पिच को और बॉल को पुराना कर सकें। जिसके बाद ही स्पिनर मैदान पर अपना रंग बिखेर सकेंगे। कप्तान कोहली इस बात को अच्छे से जानते हैं कि कोलकाता टेस्ट जीतना उनके लिए बेहद जरूरी है और ऐसे में वह कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहेंगे। क्योंकि शाम को जब बॉल रिवर स्विंग होती है और ऐसे समय में टीम के पास सिर्फ एक तेज गेंदबाज होगा तो टीम को इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है। कानपुर टेस्ट में भले ही तेज गेंदबाजों ने विकेट न लिए हों लेकिन उन्होंने न्यूजीलैंड पर दबाव जरूर बनाया था जिसका फायदा स्पिनर्स ने उठाया था। तेज गेंदबाज टीम को मजबूती प्रदान करते हैं और यही मजबूती टीम के लिए ताकत का काम करती है ऐसे में कोहली को अपने तेज गेंदबाजों पर भरोसा जताते हुए बिना किसी बदलाव के कोलकाता में उतरना चाहिए। वैसे भी विनिंग कॉम्बीनेशन ने छेड़छाड़ टीम के घातक साबित हो सकता है। ये भी पढ़ेंः अब पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस के पाले में ! This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful. Strictly Necessary Cookie should be enabled at all times so that we can save your preferences for cookie settings. If you disable this cookie, we will not be able to save your preferences. This means that every time you visit this website you will need to enable or disable cookies again.
न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में मिली जीत के बाद भारत के हौसले बुलंद हैं और अगले टेस्ट में भारत न्यूजीलैंड पर मनोवैज्ञानिक दबाव के साथ उतरेगा। भारत चाहेगा कि कोलकाता टेस्ट जीतकर सीरीज पर कब्जा जमाया जाए और सीरीज जीतने के लिए भारत अपना पूरा दमखम लगा देगा। कानपुर टेस्ट में जहां भारत की जीत में स्पिनरों ने अहम भूमिका निभाई थी और दोनों पारियों में कुल सोलह विकेट हासिल किए थे। साफ है अगर बीस में से सोलह विकेट स्पिनर ले रहे हैं तो सवाल उठता है कि क्या भारत को कोलकाता टेस्ट में तीन स्पिनर और एक तेज गेंदबाज के साथ उतरना चाहिए या फिर दो तेज गेंदबाज और दो स्पिनर की रणनीति पर ही कोहली को भरोसा करना चाहिए। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान को तेज गेंदबाजों के मुकाबले स्पिन गेंदबाजों पर ज्यादा भरोसा है या भारतीय पिच को समझते हुए कोहली ने स्पिन गेंदबाजों से ज्यादा गेंदबाजी कराई। इसमें कोई शक नहीं कि भारतीय पिच स्पिन गेंदबाजों के लिए स्वर्ग होती हैं और भारतीय पिचों पर स्पिन गेंदबाजों को अच्छा टर्न और उछाल प्राप्त होता है जिसका फायदा हमारे स्पिनर बखूबी उठाते हैं और विपक्षी टीम को अपनी फिरकी से खूब छकाते हैं। तो क्या विराट कोहली को अगले टेस्ट में तीन स्पिनर और एक तेज गेंदबाज की रणनीति से उतरना चाहिए?, क्या ये रणनीति कोहली के लिए फायदेमंद हो सकती है? कोलकाता की पिच की बात करें तो पिच क्यूरेटर के मुताबिक पिच से स्पिनर्स को फायदा तो जरूर मिलेगा लेकिन शुरुआत से ही स्पिनर्स हावी नहीं हो पाएंगे। जैसे-जैसे दिन ढलेगा वैसे-वैसे स्पिनर मैच में असर छोड़ पाएंगे। साफ है कि दिन पिच के पुरानी होने पर ही स्पिनर्स कारगर साबित हो पाएंगे और शुरुआत से उनके लिए कुछ खास नहीं रहेगा। पिच को पुरानी करने के लिए टीम में कम से कम दो तेज गेंदबाजों का होना जरूरी है जिससे की दोनों छोर से तेज गेंदबाज पिच को और बॉल को पुराना कर सकें। जिसके बाद ही स्पिनर मैदान पर अपना रंग बिखेर सकेंगे। कप्तान कोहली इस बात को अच्छे से जानते हैं कि कोलकाता टेस्ट जीतना उनके लिए बेहद जरूरी है और ऐसे में वह कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहेंगे। क्योंकि शाम को जब बॉल रिवर स्विंग होती है और ऐसे समय में टीम के पास सिर्फ एक तेज गेंदबाज होगा तो टीम को इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है। कानपुर टेस्ट में भले ही तेज गेंदबाजों ने विकेट न लिए हों लेकिन उन्होंने न्यूजीलैंड पर दबाव जरूर बनाया था जिसका फायदा स्पिनर्स ने उठाया था। तेज गेंदबाज टीम को मजबूती प्रदान करते हैं और यही मजबूती टीम के लिए ताकत का काम करती है ऐसे में कोहली को अपने तेज गेंदबाजों पर भरोसा जताते हुए बिना किसी बदलाव के कोलकाता में उतरना चाहिए। वैसे भी विनिंग कॉम्बीनेशन ने छेड़छाड़ टीम के घातक साबित हो सकता है। ये भी पढ़ेंः अब पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस के पाले में ! This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful. Strictly Necessary Cookie should be enabled at all times so that we can save your preferences for cookie settings. If you disable this cookie, we will not be able to save your preferences. This means that every time you visit this website you will need to enable or disable cookies again.
Latehar: 14 मार्च से शुरू होने वाली मैट्रिक व इंटर की परीक्षा को लेकर अंचलाधिकारी रूद्र प्रताप ने जिला मुख्यालय के विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया. उन्होंने लातेहार पब्लिक स्कूल समेत कई परीक्षा केंद्रों में जाकर व्यवस्था का जायजा लिया. सीओ रूद्र प्रताप ने बताया कि कि शांतिपूर्ण एवं कदाचार मुक्त परीक्षा संपन्न कराने की तैयारियां पूरी कर ली गयी है. उन्होने परीक्षार्थियों से निर्धारित समय से पहले पहुंच कर अपना स्थान ले लेने की अपील की.
Latehar: चौदह मार्च से शुरू होने वाली मैट्रिक व इंटर की परीक्षा को लेकर अंचलाधिकारी रूद्र प्रताप ने जिला मुख्यालय के विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया. उन्होंने लातेहार पब्लिक स्कूल समेत कई परीक्षा केंद्रों में जाकर व्यवस्था का जायजा लिया. सीओ रूद्र प्रताप ने बताया कि कि शांतिपूर्ण एवं कदाचार मुक्त परीक्षा संपन्न कराने की तैयारियां पूरी कर ली गयी है. उन्होने परीक्षार्थियों से निर्धारित समय से पहले पहुंच कर अपना स्थान ले लेने की अपील की.
( सर्वे भवन्तः) आप सब लोग ( अत्र ) इस शाला में ( मदा) मदा ( प्रा नन्दिताः, भूयासुः) ईश्वर करे कि आनन्दित रहो । मूल मन्त्रों को मुल "संस्कार विधि" में देख लेना चाहिए ! ।। इति महाश्रममकरणे शालासंस्कार प्रकरणम ॥ ক ক विवाह संस्कार की व्याख्या : पहिले सूत्र का भाव यह है कि मुंडन, उपनयन, मार्त और वि वाट पुग्यनक्षत्र में करे । नक्षत्र की टीका कई ऐसी करते हैं कि जिन नक्षत्रों के साथ चन्द्रमा का समागम उत्तम होता है । इस का फल आँधो वादल के विकारों का बहुत कम होना आदि हमें प्रतीत होता है। महर्षि दयानन्द जीने "मस्कार विधि" में इसी पुण्यनक्षत्र के संबन्ध में पहिले पृष्ठ पर यह विवरण दिया है कि - "यह नक्षादि का विचार कल्पना युक्त है इसमे प्रमाण नहीं आज कल भारतीय आर्य संतान पुग्यनक्षत्र के वह अर्थ नहीं ले रही जो 'अनुकूल दिन' हो सकता है प्रत्युत वह समझती है कि प्रमुक नक्षत्र को विद्यमानता में विवाह होने में चाहे लड़की ८ वर्ष और लड़का १० वर्ष का हो विवाह सौभाग्य का दाता और वर वधू में आयुभर प्रीति का कर्ता होगा । यह भ्रममूलक प्रतियुक्ति जो पुग्यनक्षत्र के नाम से प्रसिद्ध यह केवल कल्पनायुक्त ही है इस लिये प्रभाव नहीं हो सक्तो । इसी लिये तो ऋषि दयान्द जी का उक्तविवरण है। हमारा यह वि चार है कि पुण्यनक्षत्र होने की दशा में शोत ना. वर्ष के विषयता नहीं होती और विवाह के लिये मौसम का होना जबकि वर्षा आदि की बाधा बहुत न हो यावश्यक है क्योंकि एक स्थान से दूसरे स्थान को विवाह करने जाने के अतिरिक्त दूर २ मे इष्ट मित्रों को भी तो आना होता है हमारा दृढ विचार है कि पहिले लोग पुग्यनक्षत्र के अर्थ यही मा. नतेथे कि जब उपद्रव रहित ऋतु हो फिर अज्ञानवश पुण्यननत्र के अर्थ वह भ्रममूलक हो गये जो आज हिन्दुओं में प्रचलित हैं। देखिये
आप सब लोग इस शाला में मदा ईश्वर करे कि आनन्दित रहो । मूल मन्त्रों को मुल "संस्कार विधि" में देख लेना चाहिए ! ।। इति महाश्रममकरणे शालासंस्कार प्रकरणम ॥ ক ক विवाह संस्कार की व्याख्या : पहिले सूत्र का भाव यह है कि मुंडन, उपनयन, मार्त और वि वाट पुग्यनक्षत्र में करे । नक्षत्र की टीका कई ऐसी करते हैं कि जिन नक्षत्रों के साथ चन्द्रमा का समागम उत्तम होता है । इस का फल आँधो वादल के विकारों का बहुत कम होना आदि हमें प्रतीत होता है। महर्षि दयानन्द जीने "मस्कार विधि" में इसी पुण्यनक्षत्र के संबन्ध में पहिले पृष्ठ पर यह विवरण दिया है कि - "यह नक्षादि का विचार कल्पना युक्त है इसमे प्रमाण नहीं आज कल भारतीय आर्य संतान पुग्यनक्षत्र के वह अर्थ नहीं ले रही जो 'अनुकूल दिन' हो सकता है प्रत्युत वह समझती है कि प्रमुक नक्षत्र को विद्यमानता में विवाह होने में चाहे लड़की आठ वर्ष और लड़का दस वर्ष का हो विवाह सौभाग्य का दाता और वर वधू में आयुभर प्रीति का कर्ता होगा । यह भ्रममूलक प्रतियुक्ति जो पुग्यनक्षत्र के नाम से प्रसिद्ध यह केवल कल्पनायुक्त ही है इस लिये प्रभाव नहीं हो सक्तो । इसी लिये तो ऋषि दयान्द जी का उक्तविवरण है। हमारा यह वि चार है कि पुण्यनक्षत्र होने की दशा में शोत ना. वर्ष के विषयता नहीं होती और विवाह के लिये मौसम का होना जबकि वर्षा आदि की बाधा बहुत न हो यावश्यक है क्योंकि एक स्थान से दूसरे स्थान को विवाह करने जाने के अतिरिक्त दूर दो मे इष्ट मित्रों को भी तो आना होता है हमारा दृढ विचार है कि पहिले लोग पुग्यनक्षत्र के अर्थ यही मा. नतेथे कि जब उपद्रव रहित ऋतु हो फिर अज्ञानवश पुण्यननत्र के अर्थ वह भ्रममूलक हो गये जो आज हिन्दुओं में प्रचलित हैं। देखिये
रावलपिंडी, सात फरवरी (एपी) ऐडन मार्कराम और रेसी वान डेर डुसेन की आक्रामक बल्लेबाजी से दक्षिण अफ्रीका ने पाकिस्तान के 370 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए दूसरे और अंतिम क्रिकेट टेस्ट के चौथे दिन रविवार को जीत दर्ज करके श्रृंखला बराबर करने की उम्मीदों को जीवंत रखा। मार्कराम (59) और वान डेर डुसेन (48) दोनों दिन का खेल खत्म होने तक क्रीज पर डटे हुए थे जिससे टीम ने एक विकेट पर 127 रन बना लिए हैं। दोनों दूसरे विकेट के लिए अब तक 94 रन की साझेदारी कर चुके हैं। पहला टेस्ट सात विकेट से गंवाने वाली दक्षिण अफ्रीका की टीम ने 18 साल से पाकिस्तान के खिलाफ श्रृंखला नहीं गंवाई है और अंतिम दिन बल्लेबाजी की अनुकूल दिख रही पिच पर उसे जीत के लिए 243 और रन की जरूरत है। विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने इससे पहले अपने करियर का पहला नाबाद शतक जड़ा और नौमान अली के साथ नौवें विकेट के लिए रिकॉर्ड साझेदारी की जिससे पाकिस्तान ने दूसरी पारी में 298 रन बनाकर दक्षिण अफ्रीका को 370 रन का लक्ष्य दिया। रिजवान ने 204 गेंद में 15 चौकों की मदद से नाबाद 115 रन बनाए। दक्षिण अफ्रीका ने पहली पारी में 201 रन बनाए थे जबकि पाकिस्तान ने 272 रन का स्कोर खड़ा किया था। लक्ष्य का पीछा करते हुए दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत खराब रही और उसने डीन एल्गर (17) का विकेट गंवाकर चाय तक एक विकेट पर 37 रन बनाए। एल्गर ने तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी की गेंद पर विकेट के पीछे कैच थमाया। मार्कराम और वान डेर डुसेन ने अंतिम सत्र में स्पिनर नौमान और पाकिस्तान के दो तेज गेंदबाजों हसन अली और फहीम अशरफ को निशाना बनाते हुए उनके खिलाफ 17 चौके मारे। मार्कराम ने खाता खोलने के लिए 22 गेंद ली लेकिन लय में आने के बाद खुलकर शॉट खेले। उन्होंने खाता खोलने के बाद अगली 49 गेंद में आठ चौकों और दो छक्कों की मदद से अर्धशतक पूरा किया। वान डेर डुसेन ने भी अच्छे ड्राइव और पुल शॉट मारे और अपनी पारी में अब तक आठ चौके जड़ चुके हैं। इससे पहले पाकिस्तान ने दिन की शुरुआत छह विकेट पर 129 रन से की और उस समय उसकी बढ़त 200 रन की थी। रिजवान को निचले क्रम से अच्छा सहयोग मिला जिसमें दक्षिण अफ्रीका के खराब क्षेत्ररक्षण का भी योगदान रहा। यासिर शाह ने दो जीवनदान का फायदा उठाते हुए 23 रन की पारी खेली। उन्होंने जॉर्ज लिंडे की गेंद पर आउट होने से पहले रिजवान के साथ 53 रन जोड़े। नौमान ने इसके बाद 25 ओवर तक दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजों को परेशान किया। नौमान ने 78 गेंद में 45 रन की पारी खेलने के अलावा रिजवान के साथ रिकॉर्ड 97 रन की साझेदारी की। नौमान ने अपनी पारी में छह चौके और दो छक्के मारे। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पाकिस्तान की ओर से नौवें विकेट की सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड इससे पहले अजहर महमूद और शोएब अख्तर के नाम था जिन्होंने 1998 में डरबन में 80 रन की साझेदारी की थी। रिजवान ने लंच से पहले 113 गेंद में अर्धशतक पूरा किया और फिर लिंडे की गेंद पर एक रन के साथ 185 गेंद में शतक बनाया। रिजवान ने दिन की शुरुआत तेज गेंदबाज एंनरिज नोर्जे की पहली गेंद पर कवर ड्राइव पर चौके के साथ की। उन्होंन स्पिनरों के खिलाफ कदमों का अच्छा इस्तेमाल करते हुए स्वीप और ड्राइव खेले। पहले टेस्ट में 34 साल की उम्र में पदार्पण करने वाले नौमान कागिसो रबादा (34 रन पर दो विकेट) की गेंद पर मिडविकेट पर कैच दे बैठे जिससे अपने पहले अर्धशतक से चूक गए। अपना तीसरा टेस्ट खेल रहे बायें हाथ के स्पिनर जॉर्ज लिंडे ने 64 रन देकर पांच विकेट चटकाए जबकि केशव महाराज ने 118 रन देकर तीन विकेट हासिल किए। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
रावलपिंडी, सात फरवरी ऐडन मार्कराम और रेसी वान डेर डुसेन की आक्रामक बल्लेबाजी से दक्षिण अफ्रीका ने पाकिस्तान के तीन सौ सत्तर रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए दूसरे और अंतिम क्रिकेट टेस्ट के चौथे दिन रविवार को जीत दर्ज करके श्रृंखला बराबर करने की उम्मीदों को जीवंत रखा। मार्कराम और वान डेर डुसेन दोनों दिन का खेल खत्म होने तक क्रीज पर डटे हुए थे जिससे टीम ने एक विकेट पर एक सौ सत्ताईस रन बना लिए हैं। दोनों दूसरे विकेट के लिए अब तक चौरानवे रन की साझेदारी कर चुके हैं। पहला टेस्ट सात विकेट से गंवाने वाली दक्षिण अफ्रीका की टीम ने अट्ठारह साल से पाकिस्तान के खिलाफ श्रृंखला नहीं गंवाई है और अंतिम दिन बल्लेबाजी की अनुकूल दिख रही पिच पर उसे जीत के लिए दो सौ तैंतालीस और रन की जरूरत है। विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने इससे पहले अपने करियर का पहला नाबाद शतक जड़ा और नौमान अली के साथ नौवें विकेट के लिए रिकॉर्ड साझेदारी की जिससे पाकिस्तान ने दूसरी पारी में दो सौ अट्ठानवे रन बनाकर दक्षिण अफ्रीका को तीन सौ सत्तर रन का लक्ष्य दिया। रिजवान ने दो सौ चार गेंद में पंद्रह चौकों की मदद से नाबाद एक सौ पंद्रह रन बनाए। दक्षिण अफ्रीका ने पहली पारी में दो सौ एक रन बनाए थे जबकि पाकिस्तान ने दो सौ बहत्तर रन का स्कोर खड़ा किया था। लक्ष्य का पीछा करते हुए दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत खराब रही और उसने डीन एल्गर का विकेट गंवाकर चाय तक एक विकेट पर सैंतीस रन बनाए। एल्गर ने तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी की गेंद पर विकेट के पीछे कैच थमाया। मार्कराम और वान डेर डुसेन ने अंतिम सत्र में स्पिनर नौमान और पाकिस्तान के दो तेज गेंदबाजों हसन अली और फहीम अशरफ को निशाना बनाते हुए उनके खिलाफ सत्रह चौके मारे। मार्कराम ने खाता खोलने के लिए बाईस गेंद ली लेकिन लय में आने के बाद खुलकर शॉट खेले। उन्होंने खाता खोलने के बाद अगली उनचास गेंद में आठ चौकों और दो छक्कों की मदद से अर्धशतक पूरा किया। वान डेर डुसेन ने भी अच्छे ड्राइव और पुल शॉट मारे और अपनी पारी में अब तक आठ चौके जड़ चुके हैं। इससे पहले पाकिस्तान ने दिन की शुरुआत छह विकेट पर एक सौ उनतीस रन से की और उस समय उसकी बढ़त दो सौ रन की थी। रिजवान को निचले क्रम से अच्छा सहयोग मिला जिसमें दक्षिण अफ्रीका के खराब क्षेत्ररक्षण का भी योगदान रहा। यासिर शाह ने दो जीवनदान का फायदा उठाते हुए तेईस रन की पारी खेली। उन्होंने जॉर्ज लिंडे की गेंद पर आउट होने से पहले रिजवान के साथ तिरेपन रन जोड़े। नौमान ने इसके बाद पच्चीस ओवर तक दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजों को परेशान किया। नौमान ने अठहत्तर गेंद में पैंतालीस रन की पारी खेलने के अलावा रिजवान के साथ रिकॉर्ड सत्तानवे रन की साझेदारी की। नौमान ने अपनी पारी में छह चौके और दो छक्के मारे। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पाकिस्तान की ओर से नौवें विकेट की सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड इससे पहले अजहर महमूद और शोएब अख्तर के नाम था जिन्होंने एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में डरबन में अस्सी रन की साझेदारी की थी। रिजवान ने लंच से पहले एक सौ तेरह गेंद में अर्धशतक पूरा किया और फिर लिंडे की गेंद पर एक रन के साथ एक सौ पचासी गेंद में शतक बनाया। रिजवान ने दिन की शुरुआत तेज गेंदबाज एंनरिज नोर्जे की पहली गेंद पर कवर ड्राइव पर चौके के साथ की। उन्होंन स्पिनरों के खिलाफ कदमों का अच्छा इस्तेमाल करते हुए स्वीप और ड्राइव खेले। पहले टेस्ट में चौंतीस साल की उम्र में पदार्पण करने वाले नौमान कागिसो रबादा की गेंद पर मिडविकेट पर कैच दे बैठे जिससे अपने पहले अर्धशतक से चूक गए। अपना तीसरा टेस्ट खेल रहे बायें हाथ के स्पिनर जॉर्ज लिंडे ने चौंसठ रन देकर पांच विकेट चटकाए जबकि केशव महाराज ने एक सौ अट्ठारह रन देकर तीन विकेट हासिल किए। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
साल का तीसरा चंद्र ग्रहण 5 जुलाई 2020 को लगने वाला है. बता दें यह 30 दिन के अंदर तीसरा ग्रहण है. दरअसल, इससे पहले 5 जून को भारत में चंद्र ग्रहण और फिर 21 जून को सूर्य ग्रहण देखा गया था. इसके बाद अब 5 जुलाई यानी कि आषाढ़ पूर्णिमा पर साल का तीसरा चंद्र ग्रहण लगने वाला है। आपको बता दें, 5 जुलाई को देशभर में गुरु पूर्णिमाभी मनाई जाएगी. हालांकि, हर साल की तरह इस साल गुरु पूर्णिमा के मौके पर किसी तरह के सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा. कोविड-19 के चलते लोग अपने घरों में ही गुरु पूर्णिमा मनाएंगे. साल का तीसरा चंद्र ग्रहण 5 जुलाई को सुबह 8 बजकर 37 मिनट पर लगेगा और सुबह 11 बजकर 22 मिनट पर खत्म होगा. यह ग्रहण सुबह 9 बजकर 59 मिनट पर अपने सबसे अधिक प्रभाव में होगा. हालांकि, सूर्योदय हो जाने के कारण इस बार यह ग्रहण भारत के लोग नहीं देख पाएंगे. इन बातों का रखें ध्यान : - सूर्य ग्रहण की तरह आपको चंद्र ग्रहण देखने के लिए किसी भी तरह के चश्मे की आवश्यकता नहीं है. आप चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से आसानी से देख सकते हैं. हालांकि, 5 जुलाई को लगने वाला ग्रहण उपछाया चंद्र ग्रहण है और साथ ही यह भारत में दिखाई नहीं देगा. - आप चाहें तो अपने घर की छत, बालकनी या फिर खुले मैदान में जाकर चांद का दीदार कर सकते हैं. - हालांकि, ऐसी भी मान्यताएं हैं कि ग्रहण के वक्त खुले आकाश में ना निकलें, खासकर प्रेग्नेंट महिलाएं, बुजुर्ग, रोगी और बच्चे. ग्रहण से पहले या बाद में ही खाना खाएं. - वैज्ञानिक कारण से परे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का विशेष महत्व रहता है. इस वजह से देश में ग्रहण काल को अशुभ माना जाता है. सूतक की वजह से इस दौरान कोई भी धार्मिक या फिर शुभ कार्य नहीं किया जाता. हालांकि, धार्मिक मान्यताओं में विश्वास रखने वाले लोग ग्रहण के वक्त शिव चालिसा का पाठ कर सकते हैं. - ग्रहण खत्म होने के बाद नहाकर गंगा जल से घर का शुद्धिकरण किया जाता है और फिर पूजा-पाठ कर कई लोग दान-दक्षिणा भी देते हैं. हालांकि, शास्त्रों में उपछाया चंद्र ग्रहण को ग्रहण ही नहीं माना जाता है. इसलिए इस ग्रहण में कोई सूतक काल नहीं लगता. - कहा जाता है कि ग्रहण के दौरान खाना नहीं खाना चाहिए लेकिन यह एक सदियों पुराना मिथक है और इसके पीछे कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. - आमतौर पर माना जाता है कि ग्रहण गर्भवती महिलाओं और उनके भ्रूण को प्रभावित कर सकता है. ऐसा माना जाता है कि इस ग्रहण के कारण जोड़ों और उंगलियों में दर्द हो सकता है. यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ है लेकिन फिर भी लोग अभी भी बाहर जाने से बचते हैं और इन मिथकों में विश्वास करते हैं.
साल का तीसरा चंद्र ग्रहण पाँच जुलाई दो हज़ार बीस को लगने वाला है. बता दें यह तीस दिन के अंदर तीसरा ग्रहण है. दरअसल, इससे पहले पाँच जून को भारत में चंद्र ग्रहण और फिर इक्कीस जून को सूर्य ग्रहण देखा गया था. इसके बाद अब पाँच जुलाई यानी कि आषाढ़ पूर्णिमा पर साल का तीसरा चंद्र ग्रहण लगने वाला है। आपको बता दें, पाँच जुलाई को देशभर में गुरु पूर्णिमाभी मनाई जाएगी. हालांकि, हर साल की तरह इस साल गुरु पूर्णिमा के मौके पर किसी तरह के सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा. कोविड-उन्नीस के चलते लोग अपने घरों में ही गुरु पूर्णिमा मनाएंगे. साल का तीसरा चंद्र ग्रहण पाँच जुलाई को सुबह आठ बजकर सैंतीस मिनट पर लगेगा और सुबह ग्यारह बजकर बाईस मिनट पर खत्म होगा. यह ग्रहण सुबह नौ बजकर उनसठ मिनट पर अपने सबसे अधिक प्रभाव में होगा. हालांकि, सूर्योदय हो जाने के कारण इस बार यह ग्रहण भारत के लोग नहीं देख पाएंगे. इन बातों का रखें ध्यान : - सूर्य ग्रहण की तरह आपको चंद्र ग्रहण देखने के लिए किसी भी तरह के चश्मे की आवश्यकता नहीं है. आप चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से आसानी से देख सकते हैं. हालांकि, पाँच जुलाई को लगने वाला ग्रहण उपछाया चंद्र ग्रहण है और साथ ही यह भारत में दिखाई नहीं देगा. - आप चाहें तो अपने घर की छत, बालकनी या फिर खुले मैदान में जाकर चांद का दीदार कर सकते हैं. - हालांकि, ऐसी भी मान्यताएं हैं कि ग्रहण के वक्त खुले आकाश में ना निकलें, खासकर प्रेग्नेंट महिलाएं, बुजुर्ग, रोगी और बच्चे. ग्रहण से पहले या बाद में ही खाना खाएं. - वैज्ञानिक कारण से परे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का विशेष महत्व रहता है. इस वजह से देश में ग्रहण काल को अशुभ माना जाता है. सूतक की वजह से इस दौरान कोई भी धार्मिक या फिर शुभ कार्य नहीं किया जाता. हालांकि, धार्मिक मान्यताओं में विश्वास रखने वाले लोग ग्रहण के वक्त शिव चालिसा का पाठ कर सकते हैं. - ग्रहण खत्म होने के बाद नहाकर गंगा जल से घर का शुद्धिकरण किया जाता है और फिर पूजा-पाठ कर कई लोग दान-दक्षिणा भी देते हैं. हालांकि, शास्त्रों में उपछाया चंद्र ग्रहण को ग्रहण ही नहीं माना जाता है. इसलिए इस ग्रहण में कोई सूतक काल नहीं लगता. - कहा जाता है कि ग्रहण के दौरान खाना नहीं खाना चाहिए लेकिन यह एक सदियों पुराना मिथक है और इसके पीछे कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. - आमतौर पर माना जाता है कि ग्रहण गर्भवती महिलाओं और उनके भ्रूण को प्रभावित कर सकता है. ऐसा माना जाता है कि इस ग्रहण के कारण जोड़ों और उंगलियों में दर्द हो सकता है. यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ है लेकिन फिर भी लोग अभी भी बाहर जाने से बचते हैं और इन मिथकों में विश्वास करते हैं.
यह ज्ञात है कि कंपनी, जो दिवालिएपन की घोषणा करने वाली है, सेंट्रल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मैटेरियल्स - सेंट्रल साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मैटेरियल्स VNIITransmash - ऑल-रशियन साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट इंजीनियरिंग, और ऑल-रशियन साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ साइंटिफिक एंड इंजीनियरिंग इनोवेशन ऑफ साइंटिफिक एंड इंजीनियरिंग इनोवेशन पर काम करती है। UralVagonZavod के हितों में इन अनुसंधान संस्थानों के प्रयासों के संयोजन की घोषणा 4 साल पहले की गई थी। एकल परिसर को क्रांति के राजमार्ग पर स्थित होना था। परियोजना का प्रारंभिक बजट 13 बिलियन रूबल था, फिर नए प्रस्तावों के आधार पर इसे 5 बिलियन कर दिया गया। 2017 के लिए, यह पुनर्वास पूरा करने की योजना बनाई गई थी, और उद्यम खुद को राज्य के रक्षा आदेश पर काम करने के लिए शुरू करना था। इस परियोजना के आधार पर, उत्तरी राजधानी में एक नया बैटरी प्लांट प्रदर्शित किया जाना था, साथ ही यूरालवैगनज़ावोडा की सुविधाओं पर निर्मित बख्तरबंद वाहनों के लिए हथियारों के विकास के लिए एक उद्यम था। उपरोक्त सेंट पीटर्सबर्ग पोर्टल का दावा है कि इस दौरान क्रांति के राजमार्ग पर कोई जटिल नहीं बनाया गया था, और स्थानांतरण नहीं हुआ था। इसके अलावा, इस परियोजना में ही रणनीतिक निवेश की स्थिति है। Fontanka के अनुसार, दिवालियापन की कार्यवाही 3 जुलाई को शुरू हुई। पर ऑनलाइन SZNTK LLC के पास दिवालियापन की कार्यवाही की शुरुआत में डेटा नहीं है।
यह ज्ञात है कि कंपनी, जो दिवालिएपन की घोषणा करने वाली है, सेंट्रल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मैटेरियल्स - सेंट्रल साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मैटेरियल्स VNIITransmash - ऑल-रशियन साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट इंजीनियरिंग, और ऑल-रशियन साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ साइंटिफिक एंड इंजीनियरिंग इनोवेशन ऑफ साइंटिफिक एंड इंजीनियरिंग इनोवेशन पर काम करती है। UralVagonZavod के हितों में इन अनुसंधान संस्थानों के प्रयासों के संयोजन की घोषणा चार साल पहले की गई थी। एकल परिसर को क्रांति के राजमार्ग पर स्थित होना था। परियोजना का प्रारंभिक बजट तेरह बिलियन रूबल था, फिर नए प्रस्तावों के आधार पर इसे पाँच बिलियन कर दिया गया। दो हज़ार सत्रह के लिए, यह पुनर्वास पूरा करने की योजना बनाई गई थी, और उद्यम खुद को राज्य के रक्षा आदेश पर काम करने के लिए शुरू करना था। इस परियोजना के आधार पर, उत्तरी राजधानी में एक नया बैटरी प्लांट प्रदर्शित किया जाना था, साथ ही यूरालवैगनज़ावोडा की सुविधाओं पर निर्मित बख्तरबंद वाहनों के लिए हथियारों के विकास के लिए एक उद्यम था। उपरोक्त सेंट पीटर्सबर्ग पोर्टल का दावा है कि इस दौरान क्रांति के राजमार्ग पर कोई जटिल नहीं बनाया गया था, और स्थानांतरण नहीं हुआ था। इसके अलावा, इस परियोजना में ही रणनीतिक निवेश की स्थिति है। Fontanka के अनुसार, दिवालियापन की कार्यवाही तीन जुलाई को शुरू हुई। पर ऑनलाइन SZNTK LLC के पास दिवालियापन की कार्यवाही की शुरुआत में डेटा नहीं है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
पटनाः बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आज अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी यादों को साझा किया जहां दिवंगत वरिष्ठ नेता ने उन्हें छात्र आंदोलन से आगे बढ़कर मुख्यधारा की राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया था। पूर्व प्रधानमंत्री की अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद सुशील ने मीडिया के साथ उनकी बातों को साझा किया जो वाजपेयी ने पटना में 13 अप्रैल 1986 को उनकी शादी में शामिल होने के दौरान कही थी। 1970 के दशक से एबीवीपी के सक्रिय सदस्य रहे सुशील मोदी पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के महासचिव रहे और पटना मध्य (अब कुम्हरार) विधानसभा क्षेत्र से 1990 में विधानसभा चुनावों में सफल कदम रखा। वाजपेयी ने भाषा, धर्म और प्रांत की बाधाओं को तोड़ने के लिए युवा दंपति की प्रशंसा की थी। सुशील मोदी की शादी मलयाली ईसाई जेसी जॉर्ज से हुई है जिनकी परवरिश मुंबई में हुई।
पटनाः बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आज अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी यादों को साझा किया जहां दिवंगत वरिष्ठ नेता ने उन्हें छात्र आंदोलन से आगे बढ़कर मुख्यधारा की राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया था। पूर्व प्रधानमंत्री की अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद सुशील ने मीडिया के साथ उनकी बातों को साझा किया जो वाजपेयी ने पटना में तेरह अप्रैल एक हज़ार नौ सौ छियासी को उनकी शादी में शामिल होने के दौरान कही थी। एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक से एबीवीपी के सक्रिय सदस्य रहे सुशील मोदी पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के महासचिव रहे और पटना मध्य विधानसभा क्षेत्र से एक हज़ार नौ सौ नब्बे में विधानसभा चुनावों में सफल कदम रखा। वाजपेयी ने भाषा, धर्म और प्रांत की बाधाओं को तोड़ने के लिए युवा दंपति की प्रशंसा की थी। सुशील मोदी की शादी मलयाली ईसाई जेसी जॉर्ज से हुई है जिनकी परवरिश मुंबई में हुई।
पाकिस्तान क्रिकेट टीम (Pakistan Cricket Team) के कप्तान बाबर आजम (Babar Azam) के लिए साल 2022 बेहद शानदार रहा। उनकी कप्तान में पाकिस्तान ने पिछले वर्ष टी20 वर्ल्ड कप में फाइनल तक का सफर तय किया था। पूरे साल वनडे और टेस्ट क्रिकेट में उनका जलवा रहा जिसके चलते बाबर ने आईसीसी (ICC) के कई बड़े अवार्ड अपने नाम किये। उन्हें क्रिकेटर ऑफ़ द ईयर, वनडे क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया। वहीं उन्हें वनडे टीम ऑफ़ द ईयर का कप्तान बनाया गया और वह टेस्ट टीम ऑफ़ द ईयर का भी हिस्सा हैं। बीते दिन (1 फरवरी) बाबर ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष नजम सेठी से आधिकारिक तौर पर अपने आईसीसी पुरस्कार प्राप्त किये। इसके बाद, पाक कप्तान बाबर ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर दो तस्वीरें साझा की जिसमें वह अवार्ड्स और कैप के साथ नजर आ रहे हैं। तस्वीरों को शेयर करते हुए, उन्होंने कैप्शन में लिखा, आप अपना खुद का जादू हैं। नजम सेठी ने इन अवार्ड्स को बाबर को सौंपते हुए उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन के लिए उनकी तारीफ की, जिसने देश को पहचान दिलाई है। सेठी ने 2023 सत्र के लिए कप्तान के अच्छे प्रदर्शन की भी कामना की और उम्मीद जताई कि टीम उनके नेतृत्व में 2023 वनडे विश्व कप में सफल प्रदर्शन करेगी। गौरतलब है कि बाबर आजम ने पिछले वर्ष तीनों प्रारूपों में कुल 44 मुकाबले खेले जिसमें उन्होंने 54. 12 की औसत से 2598 रन बनाये। इस दौरान उनके बल्ले से आठ शतक और 17 अर्धशतकीय पारियां भी आईं। 2022 में दो हजार से अधिक रन बनाने वाले बाबर इकलौते बल्लेबाज रहे।
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान बाबर आजम के लिए साल दो हज़ार बाईस बेहद शानदार रहा। उनकी कप्तान में पाकिस्तान ने पिछले वर्ष टीबीस वर्ल्ड कप में फाइनल तक का सफर तय किया था। पूरे साल वनडे और टेस्ट क्रिकेट में उनका जलवा रहा जिसके चलते बाबर ने आईसीसी के कई बड़े अवार्ड अपने नाम किये। उन्हें क्रिकेटर ऑफ़ द ईयर, वनडे क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया। वहीं उन्हें वनडे टीम ऑफ़ द ईयर का कप्तान बनाया गया और वह टेस्ट टीम ऑफ़ द ईयर का भी हिस्सा हैं। बीते दिन बाबर ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष नजम सेठी से आधिकारिक तौर पर अपने आईसीसी पुरस्कार प्राप्त किये। इसके बाद, पाक कप्तान बाबर ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर दो तस्वीरें साझा की जिसमें वह अवार्ड्स और कैप के साथ नजर आ रहे हैं। तस्वीरों को शेयर करते हुए, उन्होंने कैप्शन में लिखा, आप अपना खुद का जादू हैं। नजम सेठी ने इन अवार्ड्स को बाबर को सौंपते हुए उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन के लिए उनकी तारीफ की, जिसने देश को पहचान दिलाई है। सेठी ने दो हज़ार तेईस सत्र के लिए कप्तान के अच्छे प्रदर्शन की भी कामना की और उम्मीद जताई कि टीम उनके नेतृत्व में दो हज़ार तेईस वनडे विश्व कप में सफल प्रदर्शन करेगी। गौरतलब है कि बाबर आजम ने पिछले वर्ष तीनों प्रारूपों में कुल चौंतालीस मुकाबले खेले जिसमें उन्होंने चौवन. बारह की औसत से दो हज़ार पाँच सौ अट्ठानवे रन बनाये। इस दौरान उनके बल्ले से आठ शतक और सत्रह अर्धशतकीय पारियां भी आईं। दो हज़ार बाईस में दो हजार से अधिक रन बनाने वाले बाबर इकलौते बल्लेबाज रहे।
Sri Ram Temple: श्रीरामजन्म भूमि में विराजमान रामलला के निर्माणाधीन दिव्य मंदिर में गर्भगृह के परिक्रमा पथ की छत पड़ चुकी है। इसके साथ समतल एरिया में नक्काशीदार पत्थर लगाए जा रहे हैं। Sri Ram Temple: अयोध्या में श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के आवासीय कार्यालय में गृह प्रवेश के लिए सोमवार को पूजन का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम में संघ परिवार के साथ संत-महंत आमन्त्रित हैं। उधर, राममंदिर निर्माण का काम भी तेजी से चल रहा है। जन्मभूमि में विराजमान रामलला के निर्माणाधीन दिव्य मंदिर में गर्भगृह के परिक्रमा पथ की छत पड़ चुकी है। समतल एरिया में नक्काशीदार पत्थर लगाए जा रहे हैं। राम मंदिर के आर्किटेक्ट और मेसर्स सीबी सोमपुरा कांस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशक आशीष सोमपुरा की मानें तो जून में भूतल के साथ प्रथम तल का भी काम शुरू हो जाएगा। दूसरी ओर राम मंदिर के हर काम को पूरी विशिष्टता और विविधता पूर्ण बनाने की दिशा में प्रयास हो रहा है। इसी दृष्टि से राम मंदिर की प्रकाश व्यवस्था भी इस तरह करने का प्रयास है, जिस किसी की नजर पड़े तो वह बस राम मंदिर के सौन्दर्य को निहारता रह जाए। मंदिर परिसर में आधुनिक तकनीक से लाइट व साउंड सिस्टम लगाए जा रहे। इसकी कार्यदाई संस्था बंगलुरु की शंकर इलेक्ट्रिकल्स प्राइवेट लिमिटेड है। इस कंपनी के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक राजेश शेट्टी पहली बार यहां पहुंचे। वह अपने गुरु देव आंध्रप्रदेश के स्वामी वासुदेवानंद नंद महाराज के साथ आए थे। उन्होंने रामजन्म भूमि में विराजमान रामलला के दर्शन करने के साथ राम मंदिर के निर्माण का भी अवलोकन किया। इसके साथ कंपनी को मिली जिम्मेदारी से सम्बन्धित कामों का फीडबैक भी लिया। इस दौरान उनके प्रोजेक्ट मैनेजर संजय पुजारी ने उन्हें आवश्यक जानकारी दी। राम मंदिर माडल के आर्किटेक्ट व मेसर्स सीबी सोमपुरा कांस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशक आशीष सोमपुरा ने बताते हैं कि राममंदिर की प्रकाश व्यवस्था को लेकर इंजीनियरों ने प्रजेंटेशन दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था विशेष थीम पर आधारित है। बताया गया कि मंदिर के आंतरिक व बाहरी हिस्से की प्रकाश व्यवस्था अलग-अलग होगी। मंदिर के बाहरी परिसर को प्रकाशित करने के लिए फसाड लाइट लगाई जानी है। विशेष पर्व एवं त्योहारों पर प्रकाश की अलग-अलग व्यवस्था की जाएगी। बताया गया कि 161 फीट ऊंचे मंदिर के शिखर की नक्काशी व भव्यता रात में नहीं दिख पाएगी। इसीलिए ऐसी डिजाइन की जा रही है कि मंदिर के हर तल समेत शिखर तक की अद्भुत नक्काशी और भव्यता रोशनी के माध्यम से देखी जा सके।
Sri Ram Temple: श्रीरामजन्म भूमि में विराजमान रामलला के निर्माणाधीन दिव्य मंदिर में गर्भगृह के परिक्रमा पथ की छत पड़ चुकी है। इसके साथ समतल एरिया में नक्काशीदार पत्थर लगाए जा रहे हैं। Sri Ram Temple: अयोध्या में श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के आवासीय कार्यालय में गृह प्रवेश के लिए सोमवार को पूजन का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम में संघ परिवार के साथ संत-महंत आमन्त्रित हैं। उधर, राममंदिर निर्माण का काम भी तेजी से चल रहा है। जन्मभूमि में विराजमान रामलला के निर्माणाधीन दिव्य मंदिर में गर्भगृह के परिक्रमा पथ की छत पड़ चुकी है। समतल एरिया में नक्काशीदार पत्थर लगाए जा रहे हैं। राम मंदिर के आर्किटेक्ट और मेसर्स सीबी सोमपुरा कांस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशक आशीष सोमपुरा की मानें तो जून में भूतल के साथ प्रथम तल का भी काम शुरू हो जाएगा। दूसरी ओर राम मंदिर के हर काम को पूरी विशिष्टता और विविधता पूर्ण बनाने की दिशा में प्रयास हो रहा है। इसी दृष्टि से राम मंदिर की प्रकाश व्यवस्था भी इस तरह करने का प्रयास है, जिस किसी की नजर पड़े तो वह बस राम मंदिर के सौन्दर्य को निहारता रह जाए। मंदिर परिसर में आधुनिक तकनीक से लाइट व साउंड सिस्टम लगाए जा रहे। इसकी कार्यदाई संस्था बंगलुरु की शंकर इलेक्ट्रिकल्स प्राइवेट लिमिटेड है। इस कंपनी के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक राजेश शेट्टी पहली बार यहां पहुंचे। वह अपने गुरु देव आंध्रप्रदेश के स्वामी वासुदेवानंद नंद महाराज के साथ आए थे। उन्होंने रामजन्म भूमि में विराजमान रामलला के दर्शन करने के साथ राम मंदिर के निर्माण का भी अवलोकन किया। इसके साथ कंपनी को मिली जिम्मेदारी से सम्बन्धित कामों का फीडबैक भी लिया। इस दौरान उनके प्रोजेक्ट मैनेजर संजय पुजारी ने उन्हें आवश्यक जानकारी दी। राम मंदिर माडल के आर्किटेक्ट व मेसर्स सीबी सोमपुरा कांस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशक आशीष सोमपुरा ने बताते हैं कि राममंदिर की प्रकाश व्यवस्था को लेकर इंजीनियरों ने प्रजेंटेशन दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था विशेष थीम पर आधारित है। बताया गया कि मंदिर के आंतरिक व बाहरी हिस्से की प्रकाश व्यवस्था अलग-अलग होगी। मंदिर के बाहरी परिसर को प्रकाशित करने के लिए फसाड लाइट लगाई जानी है। विशेष पर्व एवं त्योहारों पर प्रकाश की अलग-अलग व्यवस्था की जाएगी। बताया गया कि एक सौ इकसठ फीट ऊंचे मंदिर के शिखर की नक्काशी व भव्यता रात में नहीं दिख पाएगी। इसीलिए ऐसी डिजाइन की जा रही है कि मंदिर के हर तल समेत शिखर तक की अद्भुत नक्काशी और भव्यता रोशनी के माध्यम से देखी जा सके।
हो। म पल मुस्करा देता था। यह युवक' फिर कभी उससे ऐसा इसने कोई प्रस्ताय न करता था !! सरोगो महात्मा अग्राहम लिंकन का जन्मोत्सव निकट आगया । सहमहानगरी में जय नागरिकों ने यह बात सुनी कि भरोरा. पता और मदन राष्ट्रीय नाटक में खेलेंगे तब सो दो दिन के पूर्व सीट रिजयं होगई। खेल के दिन हाल सचा. और इसव भर गया। अंत में नाटक भारंभ हुआ। मदन और अहोरा रंगमंच पर माये । दर्शकों ने तालियों की फड़फडाहट से अपना उत्साह दिखलाया। दोनों का उत्साह बढ़ा और उन्होंने माटपकला का विकाश दिखला दिया। समाचारपत्रों के चित्रप्रेषको उनका कई बार चित्र लिया। किन्तु भाज- मदन का हृदय एक अचिन्त्य और अव्यक्त वेदना से विदार्ण हो रहा था। वह खेलता था, गाता था, हंसता था; रोता था, किन्तु वह विलकुल : स्वाभाविक जान पड़ता था । जिनका जीवन नाटक देखने में व्यतीत हुमा या, ये भी न जान सके कि यह स्वाभाविकता है या कृत्रिमता जय अब्राहम लिंकन की मृत्यु दिपलाई गई, तब दर्शकों की अधू' गिरने लगे। कई नै 'तो' अपनी मोसों में स्माल लगा लिये। अन्त में निकाःपतित हुई, और तालियों को कडकडाहट हुई। अरोशं विकडेल और मदत नाटकघर के बाहर आये। इत्यत्येक पुरुष और स्त्रों के मुख पर दोनों की प्रशंसा थी । भरोत के चिन्ह थे। उसकी और कुछ का ध्यान करता हुआ ! नमय किसी ने कहा - "मदन भी कितना सुन्दर है !" अर ने पीछे फिर कर देखा । दो दशक बात करते चले जारहे मदन अपने ध्यान में ही मग्न रहा। अरोरा फिर मदन का -पकड़कर चलने लगी। अंगस्पर्श होने से मदन चौंक.... अरोग बहुत समय से सदन के हाव भावों का और म्लान मुख का अध्ययन करती चली आ रही थी । वह ल उसके मानसिक क्लेश का कारण न समझ सका, 1.. प्रसन्नता भी चिन्ता के रूप में परिणत होगईः 1: व्याकुलता से मदन के ताले में अपनी कोमल गोल भुजा डाल कर केवल कहा - "प्यारे !" वह फिर उसके मुख • ओर देखने लगी । जिस संवोधन से मदने, काः कमल खिल उठता था. वह आज न ख़िला।257 मदन ने केवल अरोरा की ओर देखा और एक "निश्वास छोड़ दी । अरोरा निकडेल की चिन्ता बढ़ गई फिर पूछाः-"प्यारे, सुख के समय यह दुःख क्यो १८ मदन जैस्नेह से अपेरा का हाथ पकड़ लिया। पर पवित्रता, गंभीरता उदासीनता और चिन्ता अलंक थी । वह कहने लगा- "आज मेराः प्रोम, मेरी सुख, •. और मेराः मीठा स्वतः निराशा को श्वास में मिलगया।. को पुकार पर मेरी वह आशा निराशा में परिणत होगई। अरोरा अब तक शांति से सुन रही थी। उसने हृदय कर कहा- "प्यारे, निराशा कैसी ?" मदन - "बतलाऊँ निराशा कैसो ?-आज जब दु राष्ट्रीय अभिनय हो रहा था, जब गुलामी नष्ट करने अमेरिकनो का बलिदान हुआ था, तब मेरे चज उठे थे। उस समय मैंने सहसा सुना!
हो। म पल मुस्करा देता था। यह युवक' फिर कभी उससे ऐसा इसने कोई प्रस्ताय न करता था !! सरोगो महात्मा अग्राहम लिंकन का जन्मोत्सव निकट आगया । सहमहानगरी में जय नागरिकों ने यह बात सुनी कि भरोरा. पता और मदन राष्ट्रीय नाटक में खेलेंगे तब सो दो दिन के पूर्व सीट रिजयं होगई। खेल के दिन हाल सचा. और इसव भर गया। अंत में नाटक भारंभ हुआ। मदन और अहोरा रंगमंच पर माये । दर्शकों ने तालियों की फड़फडाहट से अपना उत्साह दिखलाया। दोनों का उत्साह बढ़ा और उन्होंने माटपकला का विकाश दिखला दिया। समाचारपत्रों के चित्रप्रेषको उनका कई बार चित्र लिया। किन्तु भाज- मदन का हृदय एक अचिन्त्य और अव्यक्त वेदना से विदार्ण हो रहा था। वह खेलता था, गाता था, हंसता था; रोता था, किन्तु वह विलकुल : स्वाभाविक जान पड़ता था । जिनका जीवन नाटक देखने में व्यतीत हुमा या, ये भी न जान सके कि यह स्वाभाविकता है या कृत्रिमता जय अब्राहम लिंकन की मृत्यु दिपलाई गई, तब दर्शकों की अधू' गिरने लगे। कई नै 'तो' अपनी मोसों में स्माल लगा लिये। अन्त में निकाःपतित हुई, और तालियों को कडकडाहट हुई। अरोशं विकडेल और मदत नाटकघर के बाहर आये। इत्यत्येक पुरुष और स्त्रों के मुख पर दोनों की प्रशंसा थी । भरोत के चिन्ह थे। उसकी और कुछ का ध्यान करता हुआ ! नमय किसी ने कहा - "मदन भी कितना सुन्दर है !" अर ने पीछे फिर कर देखा । दो दशक बात करते चले जारहे मदन अपने ध्यान में ही मग्न रहा। अरोरा फिर मदन का -पकड़कर चलने लगी। अंगस्पर्श होने से मदन चौंक.... अरोग बहुत समय से सदन के हाव भावों का और म्लान मुख का अध्ययन करती चली आ रही थी । वह ल उसके मानसिक क्लेश का कारण न समझ सका, एक.. प्रसन्नता भी चिन्ता के रूप में परिणत होगईः एक: व्याकुलता से मदन के ताले में अपनी कोमल गोल भुजा डाल कर केवल कहा - "प्यारे !" वह फिर उसके मुख • ओर देखने लगी । जिस संवोधन से मदने, काः कमल खिल उठता था. वह आज न ख़िला।दो सौ सत्तावन मदन ने केवल अरोरा की ओर देखा और एक "निश्वास छोड़ दी । अरोरा निकडेल की चिन्ता बढ़ गई फिर पूछाः-"प्यारे, सुख के समय यह दुःख क्यो अट्ठारह मदन जैस्नेह से अपेरा का हाथ पकड़ लिया। पर पवित्रता, गंभीरता उदासीनता और चिन्ता अलंक थी । वह कहने लगा- "आज मेराः प्रोम, मेरी सुख, •. और मेराः मीठा स्वतः निराशा को श्वास में मिलगया।. को पुकार पर मेरी वह आशा निराशा में परिणत होगई। अरोरा अब तक शांति से सुन रही थी। उसने हृदय कर कहा- "प्यारे, निराशा कैसी ?" मदन - "बतलाऊँ निराशा कैसो ?-आज जब दु राष्ट्रीय अभिनय हो रहा था, जब गुलामी नष्ट करने अमेरिकनो का बलिदान हुआ था, तब मेरे चज उठे थे। उस समय मैंने सहसा सुना!
नई दिल्ली, जून 5। बीता हफ्ता सोना और चांदी में तेजी का रहा है। बीते हफ्ते जहां सोमवार को सोने का रेट 51184 रुपये प्रति 10 ग्राम था, वहीं यह रेट शुक्रवार को बढ़कर 51455 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। इस प्रकार से सोने के रेट में एक हफ्ते के दौरान करीब 271 रुपये प्रति दस ग्राम की तेजी दर्ज की गई। वहीं अगर चांदी के रेट पर नजर डाली जाए तो इसमें भी तेजी दर्ज हुई है। बीते सोमवार को चांदी का रेट 62073 रुपये प्रति किलो था, जो सोमवार को बढ़कर 62788 रुपये प्रति किलो हो गया। इस प्रकार से बीते हफ्ते चांदी का रेट करीब 715 रुपये प्रति किलो बढ़़कर बंद हुआ। यहां पर सोना और चांदी का रेट बुलियन एसोशिएशन की वेबसाइट के आधार बताया जा रहा है। आइये अब जानते हैं कि आज देश में खुदरा बाजार में किस रेट पर गोल्ड और सिल्वर का कारोबार हो रहा है। नोट : यहां सोने के 22 कैरेट और 24 कैरेट के रेट प्रति दस ग्राम और चांदी का रेट प्रति किलो के हिसाब दिए गए हैं। सोने के रेट में राज्यों के हिसाब से यह अंतर उन राज्यों के टैक्स के हिसाब से आता है।
नई दिल्ली, जून पाँच। बीता हफ्ता सोना और चांदी में तेजी का रहा है। बीते हफ्ते जहां सोमवार को सोने का रेट इक्यावन हज़ार एक सौ चौरासी रुपयापये प्रति दस ग्राम था, वहीं यह रेट शुक्रवार को बढ़कर इक्यावन हज़ार चार सौ पचपन रुपयापये प्रति दस ग्राम हो गया। इस प्रकार से सोने के रेट में एक हफ्ते के दौरान करीब दो सौ इकहत्तर रुपयापये प्रति दस ग्राम की तेजी दर्ज की गई। वहीं अगर चांदी के रेट पर नजर डाली जाए तो इसमें भी तेजी दर्ज हुई है। बीते सोमवार को चांदी का रेट बासठ हज़ार तिहत्तर रुपयापये प्रति किलो था, जो सोमवार को बढ़कर बासठ हज़ार सात सौ अठासी रुपयापये प्रति किलो हो गया। इस प्रकार से बीते हफ्ते चांदी का रेट करीब सात सौ पंद्रह रुपयापये प्रति किलो बढ़़कर बंद हुआ। यहां पर सोना और चांदी का रेट बुलियन एसोशिएशन की वेबसाइट के आधार बताया जा रहा है। आइये अब जानते हैं कि आज देश में खुदरा बाजार में किस रेट पर गोल्ड और सिल्वर का कारोबार हो रहा है। नोट : यहां सोने के बाईस कैरेट और चौबीस कैरेट के रेट प्रति दस ग्राम और चांदी का रेट प्रति किलो के हिसाब दिए गए हैं। सोने के रेट में राज्यों के हिसाब से यह अंतर उन राज्यों के टैक्स के हिसाब से आता है।
समीक्षक - किये हुए पापों का क्षमा करना जानो पापों को करने की आशा देके बढ़ाना है। पाप क्षमा करने की बात जिस पुस्तक में हो वह न ईश्वर और न किसी विद्वान् का बनाया है किन्तु पापवर्द्धक है, हां आगामी पाप छुड़वाने के लिये किसी से प्रार्थना और स्वयं छोड़ने के लिये पुरुषार्थ प आसाप करना उचित है परन्तु केवल पश्चात्ताप करता रहे छोड़े नहीं तो भी कुछ नहीं हो सकता ॥ ६७॥ ६८-और उस मनुष्य से अधिक पापी कौन है जो अल्लाह पर झूठ बांध लेता है और क हता है कि मेरी ओर वही की गई परन्तु वही उसकी ओर नहीं की गई और जो कहता है कि मैं भी उताऊंगा कि जैसे अन्नाह उतारता है । मं० २ । सि० ७ । सू० ६ । श्रा० १४ ॥ समीक्षक- इस बात से सिद्ध होता है कि जब मुहम्मद साहेब कहते थे कि मेरे पास खुदा की ओर से आयतें आती हैं तब किसी दूसरे ने भी मुहम्मद साहेब के तुल्य लीला रची होगी कि मेरे पास भी आयतें उतरती हैं मुझ को भी पैगम्बर मानो इसको हटाने और अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिये मुहम्मद साहेब ने यह उपाय किया होगा ॥ ६८ ॥ ६६ - अवश्य हमने तुमको उत्पन्न किया फिर तुम्हारी सूरतें बनाई, फिर हमने फ़रिश्तों से कहा कि आदम को लिजा करो, बस उन्होंने सिजदा किया परन्तु शैतान सिजदा करनेवालों में सेन हुआ ।। कहा जब मैंने तुझे आशा दी फिर किसने रोका कि तूने सिजदा न किया, कहा मैं उससे अच्छा हूं तूने मुझको आग से और उसको मिट्टी से उत्पन्न किया ॥ कहा वस उसमें से उतर यह तेरे योग्य नहीं है कि तू उसमें अभिमान करे । कहा उस दिन तक ढील दे कि कवरों में से उठाये जावें ॥ कहा निश्चय तू ढील दिये गयों से है। कहा बस इसकी कसम है कि तूने मुझको गुमराह किया अवश्य में उनके लिये तेरे सीधे मार्ग पर बैदूंगा। और प्रायः तू उनको धन्यवाद करनेवाला न पावेगा कहा उससे दुर्दशा के साथ निकल अवश्य जो कोई उनमें से तेरा पक्ष करेगा तुम सबसे दोज़ख को भरूंगा । मं० २ । सि०८ । सु० ७ । आ० १० । ११ । १२ । १३ । १४ । १५ । १६ । १७ ।। समीक्षक ~ अव ध्यान देकर सुनो खुदा और शैतान के झगड़े को एक फ़रिश्ता जैसा कि चपरासी हो, था, वह भी खुदा से न दवा और खुदा उसके आत्मा को पवित्र भी न कर सका, फिर ऐसे बासी को जो पापी बनाकर गदर करनेवाला था उसको खुदा ने छोड़ दिया। ख़ुदा की यह बड़ी भूल है। शैतान तो सब को बहकाने वाला और खुदा शैतान को बहकाने वाला होने से यह सिद्ध होता है कि शैतान का भी शैतान खुदा है क्योंकि शैतान प्रत्यक्ष कहता है कि तूने मुझे गुमराह किया इससे खुदा में पवित्रता भी नहीं पाई जाती और सब बुराइयों का चलानेवाला मूलकारण खुदा हुआ । ऐसा खुदा मुसलमानों ही का हो सकता है अन्य श्रेष्ठ विद्वानों का नहीं और फरिश्तों से मनुष्यवत् वार्त्तालाप करने से देहधारी, अल्पक्ष, न्यायरहित मुसलमानों का खुदा है इसीसे विद्वान् लोग इसलाम के मज़हब को प्रसन्न नहीं करते ॥ २६ ॥ ७०- निकाय तुम्हारा मालिक अल्लाह है जिसने आसमानों और पृथिवी को छ दिन में उत्पन्न किया फिर करार पकड़ा अर्थ पर । दीनता से अपने मालिक को पुकारो ॥ मं० २ । सि० ८ । सु० ७ १ ० ५३ । ५४ ।। समीक्षक-भला जो छः दिन में जगत् को बनावे ( अर्श ) अर्थात् ऊपर के प्रकाश में विहा सन पर आराम करे वह ईश्वर सर्वशक्तिमान और व्यापक कभी हो सकता है। इसके न होने से वह खुदा भी नहीं कहा सकता। क्या तुम्हारा खुदा बधिर है जो पुकारने से सुनता है ? ये सब बातें
समीक्षक - किये हुए पापों का क्षमा करना जानो पापों को करने की आशा देके बढ़ाना है। पाप क्षमा करने की बात जिस पुस्तक में हो वह न ईश्वर और न किसी विद्वान् का बनाया है किन्तु पापवर्द्धक है, हां आगामी पाप छुड़वाने के लिये किसी से प्रार्थना और स्वयं छोड़ने के लिये पुरुषार्थ प आसाप करना उचित है परन्तु केवल पश्चात्ताप करता रहे छोड़े नहीं तो भी कुछ नहीं हो सकता ॥ सरसठ॥ अड़सठ-और उस मनुष्य से अधिक पापी कौन है जो अल्लाह पर झूठ बांध लेता है और क हता है कि मेरी ओर वही की गई परन्तु वही उसकी ओर नहीं की गई और जो कहता है कि मैं भी उताऊंगा कि जैसे अन्नाह उतारता है । मंशून्य दो । सिशून्य सात । सूशून्य छः । श्राशून्य चौदह ॥ समीक्षक- इस बात से सिद्ध होता है कि जब मुहम्मद साहेब कहते थे कि मेरे पास खुदा की ओर से आयतें आती हैं तब किसी दूसरे ने भी मुहम्मद साहेब के तुल्य लीला रची होगी कि मेरे पास भी आयतें उतरती हैं मुझ को भी पैगम्बर मानो इसको हटाने और अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिये मुहम्मद साहेब ने यह उपाय किया होगा ॥ अड़सठ ॥ छयासठ - अवश्य हमने तुमको उत्पन्न किया फिर तुम्हारी सूरतें बनाई, फिर हमने फ़रिश्तों से कहा कि आदम को लिजा करो, बस उन्होंने सिजदा किया परन्तु शैतान सिजदा करनेवालों में सेन हुआ ।। कहा जब मैंने तुझे आशा दी फिर किसने रोका कि तूने सिजदा न किया, कहा मैं उससे अच्छा हूं तूने मुझको आग से और उसको मिट्टी से उत्पन्न किया ॥ कहा वस उसमें से उतर यह तेरे योग्य नहीं है कि तू उसमें अभिमान करे । कहा उस दिन तक ढील दे कि कवरों में से उठाये जावें ॥ कहा निश्चय तू ढील दिये गयों से है। कहा बस इसकी कसम है कि तूने मुझको गुमराह किया अवश्य में उनके लिये तेरे सीधे मार्ग पर बैदूंगा। और प्रायः तू उनको धन्यवाद करनेवाला न पावेगा कहा उससे दुर्दशा के साथ निकल अवश्य जो कोई उनमें से तेरा पक्ष करेगा तुम सबसे दोज़ख को भरूंगा । मंशून्य दो । सिआठ । सुशून्य सात । आशून्य दस । ग्यारह । बारह । तेरह । चौदह । पंद्रह । सोलह । सत्रह ।। समीक्षक ~ अव ध्यान देकर सुनो खुदा और शैतान के झगड़े को एक फ़रिश्ता जैसा कि चपरासी हो, था, वह भी खुदा से न दवा और खुदा उसके आत्मा को पवित्र भी न कर सका, फिर ऐसे बासी को जो पापी बनाकर गदर करनेवाला था उसको खुदा ने छोड़ दिया। ख़ुदा की यह बड़ी भूल है। शैतान तो सब को बहकाने वाला और खुदा शैतान को बहकाने वाला होने से यह सिद्ध होता है कि शैतान का भी शैतान खुदा है क्योंकि शैतान प्रत्यक्ष कहता है कि तूने मुझे गुमराह किया इससे खुदा में पवित्रता भी नहीं पाई जाती और सब बुराइयों का चलानेवाला मूलकारण खुदा हुआ । ऐसा खुदा मुसलमानों ही का हो सकता है अन्य श्रेष्ठ विद्वानों का नहीं और फरिश्तों से मनुष्यवत् वार्त्तालाप करने से देहधारी, अल्पक्ष, न्यायरहित मुसलमानों का खुदा है इसीसे विद्वान् लोग इसलाम के मज़हब को प्रसन्न नहीं करते ॥ छब्बीस ॥ सत्तर- निकाय तुम्हारा मालिक अल्लाह है जिसने आसमानों और पृथिवी को छ दिन में उत्पन्न किया फिर करार पकड़ा अर्थ पर । दीनता से अपने मालिक को पुकारो ॥ मंशून्य दो । सिशून्य आठ । सुशून्य सात एक शून्य तिरेपन । चौवन ।। समीक्षक-भला जो छः दिन में जगत् को बनावे अर्थात् ऊपर के प्रकाश में विहा सन पर आराम करे वह ईश्वर सर्वशक्तिमान और व्यापक कभी हो सकता है। इसके न होने से वह खुदा भी नहीं कहा सकता। क्या तुम्हारा खुदा बधिर है जो पुकारने से सुनता है ? ये सब बातें
सामग्री : विधि : पैन गरम करें और उसमें तेल और जीरा डालें। फिर इसमें प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद इसमें लहसुन डालकर दो मिनट तक सॉते करें। इसके बाद धनिया और चिली डालकर डालकर कुछ सेकेंड और भूनें। आंच को धीमा कर उसमें मशरूम डालें और 5 मिनट तक और पकाएं। अब इसमें टमाटर प्यूरी और गरम मसाला डालकर दो मिनट और पकाएं। तैयार है मशरूम भाजी। जिसे आप पराठे, रोटी किसी के भी साथ कर सकते हैं सर्व।
सामग्री : विधि : पैन गरम करें और उसमें तेल और जीरा डालें। फिर इसमें प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद इसमें लहसुन डालकर दो मिनट तक सॉते करें। इसके बाद धनिया और चिली डालकर डालकर कुछ सेकेंड और भूनें। आंच को धीमा कर उसमें मशरूम डालें और पाँच मिनट तक और पकाएं। अब इसमें टमाटर प्यूरी और गरम मसाला डालकर दो मिनट और पकाएं। तैयार है मशरूम भाजी। जिसे आप पराठे, रोटी किसी के भी साथ कर सकते हैं सर्व।
वस्त्र शिलिन्ध्रपुष्प की प्रभा के समान (नीले) होते हैं, सुपर्णकुमारों, दिशाकुमारों और स्तनितकुमारों के वस्त्र अश्व के मुख के फेन के सदृश अतिश्वेत होते हैं । १४७ ।। के विद्युत्कुमारों, अग्निकुमारों और द्वीपकुमारों के वस्त्र नीले रंग के होते हैं और वायुकुमारों के वस्त्र सन्ध्याकाल की लालिमा जैसे वर्ण के जानने चाहिए ॥ १४८ ॥ विवेचन - सर्व भवनवासी देवों के स्थानों की प्ररूपणा प्रस्तुत ग्यारह सूत्रों (सू. १७७ से १८७ तक) में शास्त्रकार ने सामान्य भवनवासी देवों से लेकर असुरकुमारादि दस प्रकार के, तथा उनमें भी दक्षिण और उत्तर दिशाओं के, फिर उनके भी प्रत्येक निकाय के इन्द्रों के ( विविध अपेक्षाओं से) स्थानों, भवनावासों की संख्या और विशेषता तथा प्रत्येक प्रकार के भवनवासी देवों और इन्द्रों के स्वरूप, वैभव एवं सामर्थ्य, प्रभाव आदि का विस्तृत वर्णन किया है। अन्त में - संग्रहणी गाथाओं द्वारा प्रत्येक प्रकार के भवनवासी देवों के भवनों, सामानिकों और आत्मरक्षक देवों की संख्या, दाक्षिणात्य और प्रौदीच्य कुल २० इन्द्रों के नाम तथा दस प्रकार के भवनवासियों के प्रत्येक के शारीरिक और वस्त्र सम्बन्धी वर्ण का उल्लेख किया है । ' कुछ कठिन शब्दों की व्याख्या - पुक्खरकण्णियासंठाणसंठिया = पुष्कर = कमल की कणिका के समान आकार में संस्थित हैं। कर्णिका उन्नत एवं समान चित्रविचित्र विन्दु रूप होती है । 'उषिकण्णंत रविउलगंभीरखातपरिहा' = उन भवनों के चारों ओर खाइयाँ और परिखाएं हैं। जिनका अन्तर उत्कीर्ण की तरह स्पष्ट प्रतीत होता है । वे विपुल यानी अत्यन्त गंभीर ( गहरी ) हैं । जो ऊपर से चौड़ी और नीचे से संकड़ी हो, उसे परिखा कहते हैं और जो ऊपर-नीचे समान हो, उसे खात (खाई ) कहते हैं । यही परिखा और खाई में अन्तर है । पागारट्टालय-कवाड-तोरण-वडिदुवारदेसभागा-प्रत्येक भवन में प्राकार, अट्टालक, कपाट, तोरण और प्रतिद्वार यथास्थान बने हुए हैं। प्राकार कहते हैं - साल या परकोटे को । उस पर भृत्यवर्ग के लिए बने हुए कमरों को अट्टालक या अटारी कहते हैं । बड़े दरवाजों ( फाटकों) के निकट छोटे द्वार 'तोरण' कहलाते हैं । वड़े द्वारों के सामने जो छोटे द्वार रहते हैं, उन्हें प्रतिद्वार कहते हैं । अउज्झा = जहाँ शत्रुओं द्वारा युद्ध करना अशक्य हो, ऐसे अयोध्य भवन । खेमा - शत्रुकृत उपद्रव से रहित । सिवा - सदा मंगलयुक्त । चंदणघडसुकयतोरणपडिदुवारदेसभागा = जिन भवनों के प्रतिद्वारों के देशभाग में चन्दन के घड़ों से अच्छी तरह बनाए हुए तोरण हैं । 'सव्वर यणामया लण्हा = वे असुरकुमारों के भवन पूर्णरूप से रत्नमय, अच्छा - स्फटिक के समान स्वच्छ, सण्हा - स्निग्ध पुद्गलस्कन्धों से निर्मित, और कोमल होते हैं । निप्पंका = कलंक या कीचड़ से रहित । निक्कंकडछाया = वे भवन उपघात या आवरण से रहित ( निष्कंकट ) छाया यानी कान्ति वाले होते हैं। समरिया = उनमें से किरणों का जाल बाहर निकलता रहता है । सउज्जोया = उद्योतयुक्त अर्थात् - बाहर स्थित वस्तुओं को भी प्रकाशित करने वाले । पासादोया = मन को प्रसन्न करने वाले दरिसणिज्जा = दर्शनीय = दर्शनयोग्य, जिन्हें देखने में नेत्र थकें नहीं । दिव्वतुडियसद्द संपणादिया = दिव्य वीणा, वेणु, मृदंग आदि वाद्यों की मनोहर ध्वनि सदा गूंजते रहने वाले । पडिरूवा = प्रतिरूप - उनमें प्रतिक्षण नया-नया रूप दृष्टिगोचर होता है। धवलपुष्फदंता = कुद आदि के श्वेतवर्ण- पुष्पों के समान श्वेत दांत वाले, असियकेसा = काले केश वाले । ये दांत और केश औदारिक पुद्गलों के नहीं, वैक्रिय के समझने चाहिए। महिड्ढिया = १. पण्णवणासुत्तं (मूलपाठ - टिप्पणयुक्त ) भा. १, पृ. ५५ से ६३ तक भवन, परिवार आदि महान ऋद्धियों से युक्तं । महज्जुइया = जिनके शरीरगत और ग्राभूषणगत महती द्युति है । महब्वला = शारीरिक और प्राणगत महती शक्ति वाले । महाणुभागे = महान् अनुभाग - सामर्थ्यशील, अर्थात् जिनमें शाप और अनुग्रह का महान् सामर्थ्य हो । दिव्वेण संघयणेणं = दिव्य संहनन से । यहाँ देवों के संहनन का कथन शक्तिविशेष की अपेक्षा से कहा गया है । क्योंकि हनन अस्थिरचनात्मक ( हड्डियों की रचना विशेष) होता है, देवों के हड्डियाँ नहीं होतीं । इसीलिए जीवाभिगमसूत्र में कहा है- 'देवा प्रसंघयणी, जम्हा तेसि नेवट्ठी नेव सिरा....' ( देव असंहनन होते हैं, क्योंकि उनके न तो हड्डी होती है, न ही नसें (शिराएँ) होती हैं, दिव्वाए पभाए = दिव्य प्रभा से, भवनावासगत प्रभा से दिव्वाए छायाए- दिव्य छाया से - देवों के समूह की शोभा से । दिव्वाए प्रच्चीए = शरीरस्थ रत्नों ग्रादि के तेज की ज्वाला से । दिव्वेण तेएण= शरीर से निकलते हुए दिव्य तेज से । दिव्वाए लेसाए - देह के वर्ण की दिव्य सुन्दरता से । प्राणाईसरसेगावच्चं - प्राज्ञा से ईश्वरत्व ( आशा पर प्रभुत्व ) एवं सेनापतित्व करते हुए। भवनवासियों के मुकुट और श्राभूषणों में अंकित चिह्न - मूलपाठ में असुरकुमारादि की पहिचान के लिए चिह्न वताए हैं। वे उनके मुकुटों तथा अन्य आभूषणों में अंकित होते हैं । ' समस्त वाणव्यन्तर देवों के स्थानों की प्ररूपरणा१८८. कहि णं भंते ! वाणमंतराणं देवाणं पज्जत्ताऽपज्जत्ताणं ठाणा पण्णत्ता ? कहि णं भंते ! वाणमंतरा देवा परिवसंति ? गोयमा ! इमोसे रयणप्पभाए पुढवीए रयणामयस्स कंडस्स जोयणसहस्सवाहल्लस्स उर्जार एवं जोयणसतं श्रोगाहित्ता हेट्ठा वि एगं जोयणसतं वज्जेत्ता मज्भं श्रदृसु जोयणसएसु, एत्थ णं चाणमंतराणं देवाणं तिरियमसंखेज्जा भोमेज्जणगरावाससतसहस्सा भवंतीति मक्खातं । ते णं भोमेज्जा णगरा वाहि वट्टा अंतो चउरंसा हे पुक्खरकण्णियासंठाणसंठिता उक्किण्णंतरविउलगंभोरखाय-परिहा पागार-ट्टालय-कवाड-तोरण-पडिदुवारदेसभागा जंत-सयग्घि-सुसल-मुसु ढिपरियरिया प्रयोजभा सदाजता सदागुत्ता श्रडयालकोट्ठगरइया अडयालकयवणमाला खेमा सिवा किकरामरदंडोवर विखया लाउल्लोइयमहिया गोसोस-सरसरत्तचंदणदद्दरदिन्नपंचंगुलितला उर्वाचितचंदणकलसा चंदणघडसुकयतोरणपडिदुवारदेसभागा आसत्तोसत्तविउलवट्टबग्धारियमल्लदामकलावा पंचवण्णसरससुरभिमुक्कपुप्फपु जोवयारकलिया कालागरु-पवरकुंदुरुक्क-तुरुषकधूवमघमर्धेतगंधुद्ध्याभिरामा सुगंधवरगंधगंधिया गंधवट्टिभूता प्रच्छरगणसंघसंविकिण्णा दिव्वतुडितसद्दसंपणदिता पडागमालाउलाभिरामा सव्वरयणामया श्रच्छा सण्हा लण्हा घट्टा मट्ठा नोरया निम्मला निप्पंका णिवकंकडच्छाया सप्पभा समरीया सउज्जोता पासादीया दरिसणिज्जा प्रभिरूवा पडिरूवा, एत्थ णं वाणमंतराणं देवाणं पज्जत्ताऽपज्जत्तानं ठाणा पण्णत्ता । तिसु वि लोगस्स प्रसंखेज्जइभागे । तत्य णं बहवे वाणमंतरा देवा परिवसंति । तं जहापिसाया १ भूया २ जक्खा ३ रक्खसा ४ किन्नरा ५ किपुरिसा ६ भुयगवइणो य महाकाया ७ गंधव्व१. प्रज्ञापनासूत्र मलय. वृत्ति, पत्रांक ८५ से ९५ तक गणा य निउणगंधव्वगीतरइणो अणवण्णिय १ -पणवण्णिय २ इसिवाइय ३ सूयवाइय ४-कंदित ५- महाकंदिया य ६- कुहंड ७ पयगदेवा । ८ चंचलचलचवलचित्तकीलण-दवप्पिया गहिरहसिय-गोय-णच्चणरई वणमाला-मेल-मडलकुंडल- सच्छंद विउ व्वियाभरणचारुभूसणधरा सच्चोउयसुरभिकुसुमसुरइय पलंबसोहंत कंत विसंतचित्तवणमाल रइयवच्छा कामकामा ' कामख्वदेहधारी णाणाविहवण्णरागवरवत्यचित्तचिल्ल[ल]गणियंसणा विविह्देसिणेवच्छगहियवेसा पमुइयकंदप्प-कलह-केलि-कोलाहलप्पिया हास-बोलबहुला प्रसि-मोग्गरसत्ति- कोंत-हत्था प्रणेगमणि रयणविविहणिजुत्तविचित्तचधगया सुरूवा महिड्ढोया महज्जुतीया महायसा महाबला महाणुभागा महासोक्खा हारविराइयवच्छा कडय-तुडि तथंभियभुया अंगय - कुंडलमट्टगंडयलकन्नपीढधारी विचित्तहत्याभरणा विचित्तमाला-मउली कल्लाणगपवरवत्थपरिहिया कल्लाणगपवरमल्लाणुलेवणधरा भासुरबोंदी पलंबवणमालधरा दिव्वेणं वण्णेणं दिव्वेणं गंधेणं दिव्वेणं फासेणं दिव्वेणं संघयणेणं दिव्वेणं संठाणेणं दिव्वाए इड्ढीए दिव्वाए जुतीए दिध्वाए पभाए दिव्वाए छायाए दिव्वाए अच्चोए दिव्वेणं तेएणं दिव्वाए लेस्साए दस दिसाम्रो उज्जोवेमाणा पभासेमाणा, ते णं तत्थ साणं साणं भोमेज्जगणगरावाससतसहस्साणं साणं साणं सामाणियसाहस्सीनं साणं साणं अग्गमहिसीणं साणं साणं परिसाणं साणं साणं ऋणियाणं साणं साणं श्रणियाधिवतीणं साणं साणं प्रायरवखदेवसाहस्सोणं असि च बहूणं वाणमंतराणं देवाण य देवीण य श्राहेवच्चं पोरेवच्चं सामित्तं भट्टित्तं महतरगत्तं आणाईसरसेणावच्चं कारेमाणा पालेमाणा महयाऽहतणट्ट-गीय-वाइयतंती-तल-ताल-तुडियघणमुइंगपडुप्पवाइयरवेणं दिव्वाई भोगभोगाइं भुजमाणा विहति । [१८८५ प्र.] भगवन् ! पर्याप्त और अपर्याप्त वाणव्यन्तर देवों के स्थान कहाँ कहे गए हैं ? भगवन् ! वाणव्यन्तर देव कहाँ निवास करते हैं ? [१८८ उ.] गौतम ! इस रत्नप्रभा पृथ्वी के एक हजार योजन मोटे रत्नमय काण्ड के ऊपर से एक सौ योजन अवगाहन ( प्रवेश ) करके तथा नीचे भी एक सौ योजन छोड़ कर, बीच में आठ सौ योजन (प्रदेश) में, वाणव्यन्तर देवों के तिरछे असंख्यात भौमेय ( भूमिगृह के समान) लाखों नगरावास हैं, ऐसा कहा गया है । वे भौमेयनगर बाहर से गोल और अंदर से चौरस तथा नीचे से कमल की कणिका के आकार में संस्थित हैं। (उन नगरावासों के चारों ओर ) गहरी और विस्तीर्ण खाइयां एवं परिखाएं खुदी हुई हैं, जिनका अन्तर स्पष्ट ( प्रतीत होता ) है । ( यथास्थान ) प्राकारों, अट्टालकों, कपाटों, तोरणों प्रतिद्वारों से ( वे नगरावास ) युक्त हैं । ( तथा वे नगरावास) विविध यन्त्रों, शतघ्नियों, मूसलों एवं मुसुण्ढी नामक शस्त्रों से परिवेष्टित ( घिरे हुए) होते हैं। (वे शत्रुओं द्वारा) अयोध्य (युद्ध न कर सकने योग्य ), सदाजयशील, सदागुप्त (सुरक्षित), प्रडतालीस कोष्ठकों (कमरों) से रचित, अडतालीस वनमालाओं से सुसज्जित, क्षेममय, शिव (मंगल) मय, और किंकर देवों के दण्डों से उपरक्षित है । लिपे-पुते होने के १. पाठान्तर - मलय वृत्ति में 'कामगमा' पाठ है, जिसका अर्थ किया है~-काम- इच्छानुसार गम - प्रवृत्ति करने वाले अर्थात् - स्वेच्छाचारी । कारण ( वे नगरावास ) प्रशस्त रहते हैं । (उन नगरावासों पर ) गोशीर्षचन्दन और सरस रक्तचन्दन से (लिप्त ) पाँचों अंगुलियों ( वाले हाथ ) के छापे लगे होते हैं। उनके तोरण और प्रतिद्वार- देश के भाग चन्दन के घड़ों से भलीभांति निर्मित होते हैं; ( वे नगरावास ) ऊपर से नीचे तक लटकती हुई लम्बी विपुल एवं गोलाकार पुष्पमालाओं के समूह से युक्त होते हैं। पांच वर्णों के सरस सुगन्धित मुक्त पुष्पपु ज से उपचार ( अर्चन) - युक्त होते हैं। वे काले अगर, उत्तम चोड़ा, लोवान, गुग्गल आदि के धूप की महकती हुई सौरभ से रमणीय तथा सुगन्धित वस्तुओं की उत्तमगन्ध से सुगन्धित, मानो गन्धवट्टी ( अगरबत्ती ) के समान (वे नगरावास लगते हैं ।) अप्सरागण के संघों से व्याप्त, दिव्य वाद्यों की ध्वनि से निनादित, पताकाओं की पंक्ति से मनोहर, सर्वरत्नमय, स्फटिकसम स्वच्छ, स्निग्ध, कोमल, घिसे, पौंछे, रजरहित, निर्मल, निष्पंक, श्रावरण-रहित छाया ( कान्ति ) वाले, प्रभायुक्त किरणों से युक्त, उद्योतयुक्त, (प्रकाशमान ), प्रसन्नता उत्पन्न करने वाले, दर्शनीय, अभिरूप एवं प्रतिरूप होते हैं । इन ( पूर्वोक्त नगरावासों) में पर्याप्त और अपर्याप्त वाणव्यन्तर देवों के स्थान कहे गए हैं । स्थान) तीनों अपेक्षों से लोक के असंख्यातवें भाग में हैं; जहाँ कि बहुत से वाणव्यन्तरदेव निवास करते हैं। वे इस प्रकार हैं१ - पिशाच, २ - भूत, ३-यक्ष, ४ - राक्षस, ५ - किन्नर, ६ ~ किम्पुरुष, ७- महाकाय भुजगपति तथा ८ - निपुणगन्धव-गीतों में अनुरक्त गन्धर्वगण । ( इनके ग्राठ अवान्तर भेद - ) १ - ऋणपणक, २ - पणपणिक, ३ - ऋषिवादित, ४ - भूतवादित, ५ - क्रन्दित, ६-महाऋन्दित, ७-कूष्माण्ड और ८-पतंगदेव । ये अनवस्थित चित्त के होने से अत्यन्त चपल, क्रीडा-तत्पर और परिहास - (द्रव) प्रिय होते हैं। गंभीर हास्य, गीत और नृत्य में इनकी अनुरक्ति रहती है । वनमाला, कलंगी, मुकुट, कुण्डल तथा इच्छानुसार विकुक्ति प्राभूषणों से वे भलीभांति मण्डित रहते हैं। सभी ऋतुओं में होने वाले सुगन्धित पुष्पों से सुरचित, लम्बी, शोभनीय, सुन्दर एवं खिलती हुई विचित्र वनमाला से ( उनका ) वक्षस्थल सुशोभित रहता है। अपनी कामनानुसार काम भोगों का सेवन करने वाले, इच्छानुसार रूप एवं देह के धारक, नाना प्रकार के वर्णों वाले, श्रेष्ठ, विचित्र चमकीले वस्त्रों के धारक, विविध देशों की वेशभूषा धारण करने वाले होते हैं, इन्हें प्रमोद, कन्दर्प ( कामक्रीड़ा ) कलह, केलि ( क्रीड़ा) और कोलाहल प्रिय है। इनमें हास्य और विवाद ( बोल ) बहुत होता है। इन के हाथों में खङ्ग, मुद्गर, शक्ति और भाले भी रहते हैं । ये अनेक मणियों और रत्नों के विविध चिह्न वाले होते हैं । ये महद्धिक, महाद्युतिमान महायशस्वी, महावली, महानुभाव या महासामर्थ्यशाली, महासुखी, हार से सुशोभित वक्षस्थल वाले होते हैं । कड़े और वाजूवंद से इनकी भुजाएँ मानो स्तब्ध रहती हैं। अंगद और कुण्डल इनके कपोलस्थल को स्पर्श किये रहते हैं । ये कानों में कर्णपीठ धारण किये रहते हैं, इनके हाथों में विचित्र प्रभूषण एवं मस्तक में विचित्र मालाएँ होती हैं । ये कल्याणकारी उत्तम वस्त्र पहने हुए तथा कल्याणकारी माला एवं अनुलेपन धारण किये रहते हैं । इनके शरीर अत्यन्त देदीप्यमान होते हैं । ये लम्बी वनमालाएँ धारण करते हैं तथा दिव्य वर्ण से, दिव्य गन्ध से, दिव्य स्पर्श से, दिव्य संहनन से, दिव्य संस्थान (आकृति) से, दिव्य ऋद्धि से, दिव्य धुति से, दिव्य प्रभा से, दिव्य छाया ( कान्ति) से दिव्य श्रचि ( ज्योति ) से, दिव्य तेज से एवं दिव्य लेश्या से दशों दिशाओं को उद्योतित एवं प्रभासित करते हुए वे (वाणव्यन्तर देव) वहाँ ( पूर्वोक्त स्थानों में) अपने-अपने लाखों भौमेय नगरावासों का, अपने-अपने हजारों सामानिक देवों का, अपनी
वस्त्र शिलिन्ध्रपुष्प की प्रभा के समान होते हैं, सुपर्णकुमारों, दिशाकुमारों और स्तनितकुमारों के वस्त्र अश्व के मुख के फेन के सदृश अतिश्वेत होते हैं । एक सौ सैंतालीस ।। के विद्युत्कुमारों, अग्निकुमारों और द्वीपकुमारों के वस्त्र नीले रंग के होते हैं और वायुकुमारों के वस्त्र सन्ध्याकाल की लालिमा जैसे वर्ण के जानने चाहिए ॥ एक सौ अड़तालीस ॥ विवेचन - सर्व भवनवासी देवों के स्थानों की प्ररूपणा प्रस्तुत ग्यारह सूत्रों में शास्त्रकार ने सामान्य भवनवासी देवों से लेकर असुरकुमारादि दस प्रकार के, तथा उनमें भी दक्षिण और उत्तर दिशाओं के, फिर उनके भी प्रत्येक निकाय के इन्द्रों के स्थानों, भवनावासों की संख्या और विशेषता तथा प्रत्येक प्रकार के भवनवासी देवों और इन्द्रों के स्वरूप, वैभव एवं सामर्थ्य, प्रभाव आदि का विस्तृत वर्णन किया है। अन्त में - संग्रहणी गाथाओं द्वारा प्रत्येक प्रकार के भवनवासी देवों के भवनों, सामानिकों और आत्मरक्षक देवों की संख्या, दाक्षिणात्य और प्रौदीच्य कुल बीस इन्द्रों के नाम तथा दस प्रकार के भवनवासियों के प्रत्येक के शारीरिक और वस्त्र सम्बन्धी वर्ण का उल्लेख किया है । ' कुछ कठिन शब्दों की व्याख्या - पुक्खरकण्णियासंठाणसंठिया = पुष्कर = कमल की कणिका के समान आकार में संस्थित हैं। कर्णिका उन्नत एवं समान चित्रविचित्र विन्दु रूप होती है । 'उषिकण्णंत रविउलगंभीरखातपरिहा' = उन भवनों के चारों ओर खाइयाँ और परिखाएं हैं। जिनका अन्तर उत्कीर्ण की तरह स्पष्ट प्रतीत होता है । वे विपुल यानी अत्यन्त गंभीर हैं । जो ऊपर से चौड़ी और नीचे से संकड़ी हो, उसे परिखा कहते हैं और जो ऊपर-नीचे समान हो, उसे खात कहते हैं । यही परिखा और खाई में अन्तर है । पागारट्टालय-कवाड-तोरण-वडिदुवारदेसभागा-प्रत्येक भवन में प्राकार, अट्टालक, कपाट, तोरण और प्रतिद्वार यथास्थान बने हुए हैं। प्राकार कहते हैं - साल या परकोटे को । उस पर भृत्यवर्ग के लिए बने हुए कमरों को अट्टालक या अटारी कहते हैं । बड़े दरवाजों के निकट छोटे द्वार 'तोरण' कहलाते हैं । वड़े द्वारों के सामने जो छोटे द्वार रहते हैं, उन्हें प्रतिद्वार कहते हैं । अउज्झा = जहाँ शत्रुओं द्वारा युद्ध करना अशक्य हो, ऐसे अयोध्य भवन । खेमा - शत्रुकृत उपद्रव से रहित । सिवा - सदा मंगलयुक्त । चंदणघडसुकयतोरणपडिदुवारदेसभागा = जिन भवनों के प्रतिद्वारों के देशभाग में चन्दन के घड़ों से अच्छी तरह बनाए हुए तोरण हैं । 'सव्वर यणामया लण्हा = वे असुरकुमारों के भवन पूर्णरूप से रत्नमय, अच्छा - स्फटिक के समान स्वच्छ, सण्हा - स्निग्ध पुद्गलस्कन्धों से निर्मित, और कोमल होते हैं । निप्पंका = कलंक या कीचड़ से रहित । निक्कंकडछाया = वे भवन उपघात या आवरण से रहित छाया यानी कान्ति वाले होते हैं। समरिया = उनमें से किरणों का जाल बाहर निकलता रहता है । सउज्जोया = उद्योतयुक्त अर्थात् - बाहर स्थित वस्तुओं को भी प्रकाशित करने वाले । पासादोया = मन को प्रसन्न करने वाले दरिसणिज्जा = दर्शनीय = दर्शनयोग्य, जिन्हें देखने में नेत्र थकें नहीं । दिव्वतुडियसद्द संपणादिया = दिव्य वीणा, वेणु, मृदंग आदि वाद्यों की मनोहर ध्वनि सदा गूंजते रहने वाले । पडिरूवा = प्रतिरूप - उनमें प्रतिक्षण नया-नया रूप दृष्टिगोचर होता है। धवलपुष्फदंता = कुद आदि के श्वेतवर्ण- पुष्पों के समान श्वेत दांत वाले, असियकेसा = काले केश वाले । ये दांत और केश औदारिक पुद्गलों के नहीं, वैक्रिय के समझने चाहिए। महिड्ढिया = एक. पण्णवणासुत्तं भा. एक, पृ. पचपन से तिरेसठ तक भवन, परिवार आदि महान ऋद्धियों से युक्तं । महज्जुइया = जिनके शरीरगत और ग्राभूषणगत महती द्युति है । महब्वला = शारीरिक और प्राणगत महती शक्ति वाले । महाणुभागे = महान् अनुभाग - सामर्थ्यशील, अर्थात् जिनमें शाप और अनुग्रह का महान् सामर्थ्य हो । दिव्वेण संघयणेणं = दिव्य संहनन से । यहाँ देवों के संहनन का कथन शक्तिविशेष की अपेक्षा से कहा गया है । क्योंकि हनन अस्थिरचनात्मक होता है, देवों के हड्डियाँ नहीं होतीं । इसीलिए जीवाभिगमसूत्र में कहा है- 'देवा प्रसंघयणी, जम्हा तेसि नेवट्ठी नेव सिरा....' होती हैं, दिव्वाए पभाए = दिव्य प्रभा से, भवनावासगत प्रभा से दिव्वाए छायाए- दिव्य छाया से - देवों के समूह की शोभा से । दिव्वाए प्रच्चीए = शरीरस्थ रत्नों ग्रादि के तेज की ज्वाला से । दिव्वेण तेएण= शरीर से निकलते हुए दिव्य तेज से । दिव्वाए लेसाए - देह के वर्ण की दिव्य सुन्दरता से । प्राणाईसरसेगावच्चं - प्राज्ञा से ईश्वरत्व एवं सेनापतित्व करते हुए। भवनवासियों के मुकुट और श्राभूषणों में अंकित चिह्न - मूलपाठ में असुरकुमारादि की पहिचान के लिए चिह्न वताए हैं। वे उनके मुकुटों तथा अन्य आभूषणों में अंकित होते हैं । ' समस्त वाणव्यन्तर देवों के स्थानों की प्ररूपरणाएक सौ अठासी. कहि णं भंते ! वाणमंतराणं देवाणं पज्जत्ताऽपज्जत्ताणं ठाणा पण्णत्ता ? कहि णं भंते ! वाणमंतरा देवा परिवसंति ? गोयमा ! इमोसे रयणप्पभाए पुढवीए रयणामयस्स कंडस्स जोयणसहस्सवाहल्लस्स उर्जार एवं जोयणसतं श्रोगाहित्ता हेट्ठा वि एगं जोयणसतं वज्जेत्ता मज्भं श्रदृसु जोयणसएसु, एत्थ णं चाणमंतराणं देवाणं तिरियमसंखेज्जा भोमेज्जणगरावाससतसहस्सा भवंतीति मक्खातं । ते णं भोमेज्जा णगरा वाहि वट्टा अंतो चउरंसा हे पुक्खरकण्णियासंठाणसंठिता उक्किण्णंतरविउलगंभोरखाय-परिहा पागार-ट्टालय-कवाड-तोरण-पडिदुवारदेसभागा जंत-सयग्घि-सुसल-मुसु ढिपरियरिया प्रयोजभा सदाजता सदागुत्ता श्रडयालकोट्ठगरइया अडयालकयवणमाला खेमा सिवा किकरामरदंडोवर विखया लाउल्लोइयमहिया गोसोस-सरसरत्तचंदणदद्दरदिन्नपंचंगुलितला उर्वाचितचंदणकलसा चंदणघडसुकयतोरणपडिदुवारदेसभागा आसत्तोसत्तविउलवट्टबग्धारियमल्लदामकलावा पंचवण्णसरससुरभिमुक्कपुप्फपु जोवयारकलिया कालागरु-पवरकुंदुरुक्क-तुरुषकधूवमघमर्धेतगंधुद्ध्याभिरामा सुगंधवरगंधगंधिया गंधवट्टिभूता प्रच्छरगणसंघसंविकिण्णा दिव्वतुडितसद्दसंपणदिता पडागमालाउलाभिरामा सव्वरयणामया श्रच्छा सण्हा लण्हा घट्टा मट्ठा नोरया निम्मला निप्पंका णिवकंकडच्छाया सप्पभा समरीया सउज्जोता पासादीया दरिसणिज्जा प्रभिरूवा पडिरूवा, एत्थ णं वाणमंतराणं देवाणं पज्जत्ताऽपज्जत्तानं ठाणा पण्णत्ता । तिसु वि लोगस्स प्रसंखेज्जइभागे । तत्य णं बहवे वाणमंतरा देवा परिवसंति । तं जहापिसाया एक भूया दो जक्खा तीन रक्खसा चार किन्नरा पाँच किपुरिसा छः भुयगवइणो य महाकाया सात गंधव्वएक. प्रज्ञापनासूत्र मलय. वृत्ति, पत्रांक पचासी से पचानवे तक गणा य निउणगंधव्वगीतरइणो अणवण्णिय एक -पणवण्णिय दो इसिवाइय तीन सूयवाइय चार-कंदित पाँच- महाकंदिया य छः- कुहंड सात पयगदेवा । आठ चंचलचलचवलचित्तकीलण-दवप्पिया गहिरहसिय-गोय-णच्चणरई वणमाला-मेल-मडलकुंडल- सच्छंद विउ व्वियाभरणचारुभूसणधरा सच्चोउयसुरभिकुसुमसुरइय पलंबसोहंत कंत विसंतचित्तवणमाल रइयवच्छा कामकामा ' कामख्वदेहधारी णाणाविहवण्णरागवरवत्यचित्तचिल्ल[ल]गणियंसणा विविह्देसिणेवच्छगहियवेसा पमुइयकंदप्प-कलह-केलि-कोलाहलप्पिया हास-बोलबहुला प्रसि-मोग्गरसत्ति- कोंत-हत्था प्रणेगमणि रयणविविहणिजुत्तविचित्तचधगया सुरूवा महिड्ढोया महज्जुतीया महायसा महाबला महाणुभागा महासोक्खा हारविराइयवच्छा कडय-तुडि तथंभियभुया अंगय - कुंडलमट्टगंडयलकन्नपीढधारी विचित्तहत्याभरणा विचित्तमाला-मउली कल्लाणगपवरवत्थपरिहिया कल्लाणगपवरमल्लाणुलेवणधरा भासुरबोंदी पलंबवणमालधरा दिव्वेणं वण्णेणं दिव्वेणं गंधेणं दिव्वेणं फासेणं दिव्वेणं संघयणेणं दिव्वेणं संठाणेणं दिव्वाए इड्ढीए दिव्वाए जुतीए दिध्वाए पभाए दिव्वाए छायाए दिव्वाए अच्चोए दिव्वेणं तेएणं दिव्वाए लेस्साए दस दिसाम्रो उज्जोवेमाणा पभासेमाणा, ते णं तत्थ साणं साणं भोमेज्जगणगरावाससतसहस्साणं साणं साणं सामाणियसाहस्सीनं साणं साणं अग्गमहिसीणं साणं साणं परिसाणं साणं साणं ऋणियाणं साणं साणं श्रणियाधिवतीणं साणं साणं प्रायरवखदेवसाहस्सोणं असि च बहूणं वाणमंतराणं देवाण य देवीण य श्राहेवच्चं पोरेवच्चं सामित्तं भट्टित्तं महतरगत्तं आणाईसरसेणावच्चं कारेमाणा पालेमाणा महयाऽहतणट्ट-गीय-वाइयतंती-तल-ताल-तुडियघणमुइंगपडुप्पवाइयरवेणं दिव्वाई भोगभोगाइं भुजमाणा विहति । [एक हज़ार आठ सौ पचासी प्र.] भगवन् ! पर्याप्त और अपर्याप्त वाणव्यन्तर देवों के स्थान कहाँ कहे गए हैं ? भगवन् ! वाणव्यन्तर देव कहाँ निवास करते हैं ? [एक सौ अठासी उ.] गौतम ! इस रत्नप्रभा पृथ्वी के एक हजार योजन मोटे रत्नमय काण्ड के ऊपर से एक सौ योजन अवगाहन करके तथा नीचे भी एक सौ योजन छोड़ कर, बीच में आठ सौ योजन में, वाणव्यन्तर देवों के तिरछे असंख्यात भौमेय लाखों नगरावास हैं, ऐसा कहा गया है । वे भौमेयनगर बाहर से गोल और अंदर से चौरस तथा नीचे से कमल की कणिका के आकार में संस्थित हैं। गहरी और विस्तीर्ण खाइयां एवं परिखाएं खुदी हुई हैं, जिनका अन्तर स्पष्ट है । प्राकारों, अट्टालकों, कपाटों, तोरणों प्रतिद्वारों से युक्त हैं । विविध यन्त्रों, शतघ्नियों, मूसलों एवं मुसुण्ढी नामक शस्त्रों से परिवेष्टित होते हैं। अयोध्य , सदाजयशील, सदागुप्त , प्रडतालीस कोष्ठकों से रचित, अडतालीस वनमालाओं से सुसज्जित, क्षेममय, शिव मय, और किंकर देवों के दण्डों से उपरक्षित है । लिपे-पुते होने के एक. पाठान्तर - मलय वृत्ति में 'कामगमा' पाठ है, जिसका अर्थ किया है~-काम- इच्छानुसार गम - प्रवृत्ति करने वाले अर्थात् - स्वेच्छाचारी । कारण प्रशस्त रहते हैं । गोशीर्षचन्दन और सरस रक्तचन्दन से पाँचों अंगुलियों के छापे लगे होते हैं। उनके तोरण और प्रतिद्वार- देश के भाग चन्दन के घड़ों से भलीभांति निर्मित होते हैं; ऊपर से नीचे तक लटकती हुई लम्बी विपुल एवं गोलाकार पुष्पमालाओं के समूह से युक्त होते हैं। पांच वर्णों के सरस सुगन्धित मुक्त पुष्पपु ज से उपचार - युक्त होते हैं। वे काले अगर, उत्तम चोड़ा, लोवान, गुग्गल आदि के धूप की महकती हुई सौरभ से रमणीय तथा सुगन्धित वस्तुओं की उत्तमगन्ध से सुगन्धित, मानो गन्धवट्टी के समान अप्सरागण के संघों से व्याप्त, दिव्य वाद्यों की ध्वनि से निनादित, पताकाओं की पंक्ति से मनोहर, सर्वरत्नमय, स्फटिकसम स्वच्छ, स्निग्ध, कोमल, घिसे, पौंछे, रजरहित, निर्मल, निष्पंक, श्रावरण-रहित छाया वाले, प्रभायुक्त किरणों से युक्त, उद्योतयुक्त, , प्रसन्नता उत्पन्न करने वाले, दर्शनीय, अभिरूप एवं प्रतिरूप होते हैं । इन में पर्याप्त और अपर्याप्त वाणव्यन्तर देवों के स्थान कहे गए हैं । स्थान) तीनों अपेक्षों से लोक के असंख्यातवें भाग में हैं; जहाँ कि बहुत से वाणव्यन्तरदेव निवास करते हैं। वे इस प्रकार हैंएक - पिशाच, दो - भूत, तीन-यक्ष, चार - राक्षस, पाँच - किन्नर, छः ~ किम्पुरुष, सात- महाकाय भुजगपति तथा आठ - निपुणगन्धव-गीतों में अनुरक्त गन्धर्वगण । एक - ऋणपणक, दो - पणपणिक, तीन - ऋषिवादित, चार - भूतवादित, पाँच - क्रन्दित, छः-महाऋन्दित, सात-कूष्माण्ड और आठ-पतंगदेव । ये अनवस्थित चित्त के होने से अत्यन्त चपल, क्रीडा-तत्पर और परिहास - प्रिय होते हैं। गंभीर हास्य, गीत और नृत्य में इनकी अनुरक्ति रहती है । वनमाला, कलंगी, मुकुट, कुण्डल तथा इच्छानुसार विकुक्ति प्राभूषणों से वे भलीभांति मण्डित रहते हैं। सभी ऋतुओं में होने वाले सुगन्धित पुष्पों से सुरचित, लम्बी, शोभनीय, सुन्दर एवं खिलती हुई विचित्र वनमाला से वक्षस्थल सुशोभित रहता है। अपनी कामनानुसार काम भोगों का सेवन करने वाले, इच्छानुसार रूप एवं देह के धारक, नाना प्रकार के वर्णों वाले, श्रेष्ठ, विचित्र चमकीले वस्त्रों के धारक, विविध देशों की वेशभूषा धारण करने वाले होते हैं, इन्हें प्रमोद, कन्दर्प कलह, केलि और कोलाहल प्रिय है। इनमें हास्य और विवाद बहुत होता है। इन के हाथों में खङ्ग, मुद्गर, शक्ति और भाले भी रहते हैं । ये अनेक मणियों और रत्नों के विविध चिह्न वाले होते हैं । ये महद्धिक, महाद्युतिमान महायशस्वी, महावली, महानुभाव या महासामर्थ्यशाली, महासुखी, हार से सुशोभित वक्षस्थल वाले होते हैं । कड़े और वाजूवंद से इनकी भुजाएँ मानो स्तब्ध रहती हैं। अंगद और कुण्डल इनके कपोलस्थल को स्पर्श किये रहते हैं । ये कानों में कर्णपीठ धारण किये रहते हैं, इनके हाथों में विचित्र प्रभूषण एवं मस्तक में विचित्र मालाएँ होती हैं । ये कल्याणकारी उत्तम वस्त्र पहने हुए तथा कल्याणकारी माला एवं अनुलेपन धारण किये रहते हैं । इनके शरीर अत्यन्त देदीप्यमान होते हैं । ये लम्बी वनमालाएँ धारण करते हैं तथा दिव्य वर्ण से, दिव्य गन्ध से, दिव्य स्पर्श से, दिव्य संहनन से, दिव्य संस्थान से, दिव्य ऋद्धि से, दिव्य धुति से, दिव्य प्रभा से, दिव्य छाया से दिव्य श्रचि से, दिव्य तेज से एवं दिव्य लेश्या से दशों दिशाओं को उद्योतित एवं प्रभासित करते हुए वे वहाँ अपने-अपने लाखों भौमेय नगरावासों का, अपने-अपने हजारों सामानिक देवों का, अपनी
अमेरिका मेहरबान, पाकिस्तान पहलवान! IMF के बाद FATF जीता, और कितनी मदद देंगे बाइडेन? वर्ष 2018 से लगातार FATF की ग्रे सूची की जंजीर में जकड़ा पाकिस्तान आखिरकार 4 साल बाद इससे निकलने में कामयाब रहा। आतंकी फंडिंग व मनी लान्ड्रिंग मामलों पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) की पेरिस में हुई बैठक में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रहने देने या इससे बाहर निकालने का फैसला हुआ। अध्यक्ष केटी राजा ने पाकिस्तान को इस लिस्ट से बाहर निकालने का ऐलान करते हुए कहा कि पाकिस्तान को ग्रे सूची से हटा दिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से अभी भी काम किया जाना बाकी है। पाकिस्तान को FATF की सूची से बाहर होने में सबसे बड़ा हाथ अमेरिका का बताया जा रहा है। अमेरिका और पाकिस्तान के बीच के संबंध पिछले कुछ समय से बेहद खराब चल रहे थे, विशेषकर इमरान खान के दौर में जब पाक, चीन और रूस संग नजदीकियां बढ़ाने में जुट गया था। लेकिन अब पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन होने के बाद से अमेरिका, पाकिस्तान पर कुछ अधिक मेहरबान होने लगा है। पिछले कई वर्षों से भारत के संग अच्छे संबंध बनाने का हिमायती रहा अमेरिका अब धीरे-धीरे पाकिस्तान के साथ प्यार की पींगे बढ़ाने लगा है। लंबे वक्त से अंतराष्ट्रीय स्तर पर मदद को तरस रहे पाकिस्तान पर अमेरिका की मेहरबानी थमने का नाम ही नहीं ले रही है। यह सभी जानते हैं FATF में अमेरिका की दादागिरी चलती है। अमेरिका पहले भी इसकी मदद से पाकिस्तान पर अंकुश लगाता रहा है। फिलहाल पाकिस्तान को FATF की सूची से निकालने से पहले भी अमेरिका, पाकिस्तान के लिए काफी कुछ कर चुका है। अमेरिका द्वारा पाकिस्तान की मदद करने की शुरुआत आतंकवादी अयमान अल-जवाहिरी के अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने के बाद शुरू हुई। ऐसा माना जाता है कि अल-जवाहिरी के मरने में पाकिस्तान ने अमेरिका की मदद जिसके बाद दोनों देशों के बीच रिश्तो में जमी बर्फ पिघलनी शुरू हुई। जवाहिरी की मौत का अहसान अमेरिका ने चुकाया भी। जवाहिरी के मारे जाने के ठीक एक महीने के बाद अगस्त में अचानक आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच 1. 6 अरब डॉलर के लोन को लेकर समझौता हो गया और आईएमएफ पाकिस्तान को राहत पैकेज देने के लिए तैयार हो गया। आश्चर्य कि बात ये है कि इसी आईएमएफ ने इमरान खान की सरकार से बातचीत तक बंद कर दी थी। इसका फायदा ये हुआ कि दिवालिया होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान को फिर से जीवनदान मिल गया। वर्ना लगातार घट रहे विदेशी मुद्रा भंडार और गोल्ड रिजर्व के कारण पाकिस्तान के लिए कर्ज की किस्तें चुकाना भी बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रहा था। अमेरिका पाकिस्तान की मदद करने यही तक नहीं रुका। अमेरिकी विदेश विभाग ने सितंबर महीने में पाकिस्तान को 450 मिलियन डॉलर का एफ-16 विमान के मरम्मत के लिए पैकेज जारी कर दिया। भारत की आपत्तियों के बावजूद, सीनेट यानी अमेरीकी कांग्रेस के उच्च सदन में इसे लेकर 30 दिनों के अंदर कोई आपत्ति नहीं जताई गई। दरअसल एफ-16 विमान का इस्तेमाल पाकिस्तान 2019 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष में कर चुका है। भारत के विरोध जताने के बाद अमेरिका ने कहा कि उसके लिए भारत और पाकिस्तान दोनों अलग अलग रणनीतिक महत्व रखते हैं। खैर आईएमएफ से लोन, एफ-16 के नाम पर 37 अरब की मदद के बाद अब अमेरिका का पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट बाहर निकालना यह साबित करता है कि इस्लामाबाद अभी भी वाशिंगटन का उपयोग करना जानता है। गिरफ्तार, दम,
अमेरिका मेहरबान, पाकिस्तान पहलवान! IMF के बाद FATF जीता, और कितनी मदद देंगे बाइडेन? वर्ष दो हज़ार अट्ठारह से लगातार FATF की ग्रे सूची की जंजीर में जकड़ा पाकिस्तान आखिरकार चार साल बाद इससे निकलने में कामयाब रहा। आतंकी फंडिंग व मनी लान्ड्रिंग मामलों पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्य बल की पेरिस में हुई बैठक में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रहने देने या इससे बाहर निकालने का फैसला हुआ। अध्यक्ष केटी राजा ने पाकिस्तान को इस लिस्ट से बाहर निकालने का ऐलान करते हुए कहा कि पाकिस्तान को ग्रे सूची से हटा दिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से अभी भी काम किया जाना बाकी है। पाकिस्तान को FATF की सूची से बाहर होने में सबसे बड़ा हाथ अमेरिका का बताया जा रहा है। अमेरिका और पाकिस्तान के बीच के संबंध पिछले कुछ समय से बेहद खराब चल रहे थे, विशेषकर इमरान खान के दौर में जब पाक, चीन और रूस संग नजदीकियां बढ़ाने में जुट गया था। लेकिन अब पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन होने के बाद से अमेरिका, पाकिस्तान पर कुछ अधिक मेहरबान होने लगा है। पिछले कई वर्षों से भारत के संग अच्छे संबंध बनाने का हिमायती रहा अमेरिका अब धीरे-धीरे पाकिस्तान के साथ प्यार की पींगे बढ़ाने लगा है। लंबे वक्त से अंतराष्ट्रीय स्तर पर मदद को तरस रहे पाकिस्तान पर अमेरिका की मेहरबानी थमने का नाम ही नहीं ले रही है। यह सभी जानते हैं FATF में अमेरिका की दादागिरी चलती है। अमेरिका पहले भी इसकी मदद से पाकिस्तान पर अंकुश लगाता रहा है। फिलहाल पाकिस्तान को FATF की सूची से निकालने से पहले भी अमेरिका, पाकिस्तान के लिए काफी कुछ कर चुका है। अमेरिका द्वारा पाकिस्तान की मदद करने की शुरुआत आतंकवादी अयमान अल-जवाहिरी के अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने के बाद शुरू हुई। ऐसा माना जाता है कि अल-जवाहिरी के मरने में पाकिस्तान ने अमेरिका की मदद जिसके बाद दोनों देशों के बीच रिश्तो में जमी बर्फ पिघलनी शुरू हुई। जवाहिरी की मौत का अहसान अमेरिका ने चुकाया भी। जवाहिरी के मारे जाने के ठीक एक महीने के बाद अगस्त में अचानक आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच एक. छः अरब डॉलर के लोन को लेकर समझौता हो गया और आईएमएफ पाकिस्तान को राहत पैकेज देने के लिए तैयार हो गया। आश्चर्य कि बात ये है कि इसी आईएमएफ ने इमरान खान की सरकार से बातचीत तक बंद कर दी थी। इसका फायदा ये हुआ कि दिवालिया होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान को फिर से जीवनदान मिल गया। वर्ना लगातार घट रहे विदेशी मुद्रा भंडार और गोल्ड रिजर्व के कारण पाकिस्तान के लिए कर्ज की किस्तें चुकाना भी बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रहा था। अमेरिका पाकिस्तान की मदद करने यही तक नहीं रुका। अमेरिकी विदेश विभाग ने सितंबर महीने में पाकिस्तान को चार सौ पचास मिलियन डॉलर का एफ-सोलह विमान के मरम्मत के लिए पैकेज जारी कर दिया। भारत की आपत्तियों के बावजूद, सीनेट यानी अमेरीकी कांग्रेस के उच्च सदन में इसे लेकर तीस दिनों के अंदर कोई आपत्ति नहीं जताई गई। दरअसल एफ-सोलह विमान का इस्तेमाल पाकिस्तान दो हज़ार उन्नीस के भारत-पाकिस्तान संघर्ष में कर चुका है। भारत के विरोध जताने के बाद अमेरिका ने कहा कि उसके लिए भारत और पाकिस्तान दोनों अलग अलग रणनीतिक महत्व रखते हैं। खैर आईएमएफ से लोन, एफ-सोलह के नाम पर सैंतीस अरब की मदद के बाद अब अमेरिका का पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट बाहर निकालना यह साबित करता है कि इस्लामाबाद अभी भी वाशिंगटन का उपयोग करना जानता है। गिरफ्तार, दम,
Sahibganj : साहिबगंज जिले के एकदिवसीय दौरे पर आए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 11 फरवरी को बरहरवा प्रखंड के श्रीकुंठ मैदान में जनसभा को संबोधित किया. केंद्र सरकार पर बरसते हुए उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी जोड़-तोड़ की राजनीति में मशगूल है. गोवा, कर्णाटक, महाराष्ट्र और मणिपुर में इस जोड़ी ने स्थिर सरकार को गिराया. देश में महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है. देश में नफरत के बीज बोए जा रहे हैं. देश से महंगाई और बेरोजगारी कैसे खत्म हो इस ओर सरकार का ध्यान नहीं है? अमीरों के लिए योजनाएं बनाई जा रही है. इन योजनाओं से पूंजीपतियों को फायदा तथा गरीबों को नुकसान हो रहा है. गरीब तबके के लोग परेशान हैं. श्रीकुंठ मैदान में हजारों की संख्या में लोग राष्ट्रीय अध्यक्ष का भाषण सुनने आए थे. मैदान में भीड़ को देखकर मल्लिकार्जुन गद्गद हो गए. कार्यकर्ताओं ने उन्होंने घर-घर जाकर आम लोगों की समस्याओं से वाकिफ होने को कहा. मैदान में ही उन्होंने हाथ से हाथ जोड़ो कार्यक्रम का शुभारंभ भी किया. जनसभा को संबोधित करते हुए पार्टी के झारखंड प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा कि मोदी सरकार शुरू से ही पूंजीपतियों की सरकार रही है. गरीबों से इस सरकार का नाता नहीं है. राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने भी संबोधित किया. कहा कि यूपीए गठबंधन की सरकार राज्य में सड़कों का जाल बिछा रही है. आगामी वर्ष 2024 तक झारखंड के हर गांव-मुहल्ले को जिला मुख्यालय से जोड़ दिया जाएगा. जनसभा को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर समेत पार्टी के अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया. जनसभा में खेल मंत्री हफीजुल हसन, स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, कृषि मंत्री बादल पत्रलेख, पूर्व मंत्री सुबोध कांत सहाय, फुरकान अंसारी, दीपिका पांडे, प्रदीप यादव, अनूप सिंह, डॉ. सैय्यद नसीर, विजय हांसदा, प्रदीप बलमुचू, गीता कोड़ा, बंधु तिर्की जलेश्वर महतो, तनवीर आलम, बरकत खान समेत वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद थे.
Sahibganj : साहिबगंज जिले के एकदिवसीय दौरे पर आए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ग्यारह फरवरी को बरहरवा प्रखंड के श्रीकुंठ मैदान में जनसभा को संबोधित किया. केंद्र सरकार पर बरसते हुए उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी जोड़-तोड़ की राजनीति में मशगूल है. गोवा, कर्णाटक, महाराष्ट्र और मणिपुर में इस जोड़ी ने स्थिर सरकार को गिराया. देश में महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है. देश में नफरत के बीज बोए जा रहे हैं. देश से महंगाई और बेरोजगारी कैसे खत्म हो इस ओर सरकार का ध्यान नहीं है? अमीरों के लिए योजनाएं बनाई जा रही है. इन योजनाओं से पूंजीपतियों को फायदा तथा गरीबों को नुकसान हो रहा है. गरीब तबके के लोग परेशान हैं. श्रीकुंठ मैदान में हजारों की संख्या में लोग राष्ट्रीय अध्यक्ष का भाषण सुनने आए थे. मैदान में भीड़ को देखकर मल्लिकार्जुन गद्गद हो गए. कार्यकर्ताओं ने उन्होंने घर-घर जाकर आम लोगों की समस्याओं से वाकिफ होने को कहा. मैदान में ही उन्होंने हाथ से हाथ जोड़ो कार्यक्रम का शुभारंभ भी किया. जनसभा को संबोधित करते हुए पार्टी के झारखंड प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा कि मोदी सरकार शुरू से ही पूंजीपतियों की सरकार रही है. गरीबों से इस सरकार का नाता नहीं है. राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने भी संबोधित किया. कहा कि यूपीए गठबंधन की सरकार राज्य में सड़कों का जाल बिछा रही है. आगामी वर्ष दो हज़ार चौबीस तक झारखंड के हर गांव-मुहल्ले को जिला मुख्यालय से जोड़ दिया जाएगा. जनसभा को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर समेत पार्टी के अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया. जनसभा में खेल मंत्री हफीजुल हसन, स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, कृषि मंत्री बादल पत्रलेख, पूर्व मंत्री सुबोध कांत सहाय, फुरकान अंसारी, दीपिका पांडे, प्रदीप यादव, अनूप सिंह, डॉ. सैय्यद नसीर, विजय हांसदा, प्रदीप बलमुचू, गीता कोड़ा, बंधु तिर्की जलेश्वर महतो, तनवीर आलम, बरकत खान समेत वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद थे.
यह पद्धति वास्तविकता से दूर कल्पना जगत में विचरने लगती है । रूसो इसी प्रकार का विचारक था । उसने ऐसी ही भावुकतापूर्ण विचारधारा में स्वतन्त्रता, समता और भ्रातृत्त्व की आवाज उठाई । इतिहास उसके विचारों की पुष्टि नहीं करता था और उसके कुफल हमें फ्रान्स की राज्यक्रान्ति में देखने को मिलं । फिर भी दर्शनशास्त्र के महान महत्त्व को सभी लोग स्वीकार करते हैं और दार्शनिक पद्धति को हम हेय नहीं समझ सकते । शुद्ध काल्पनिक भावनाओं ने भी इतिहास पर प्रभाव डाला है । इसलिये यदि दार्शनिक और ऐतिहासिक पद्धति को सम्बन्धित कर दिया जाय तो हमारा अध्ययन सम्पूर्ण हो सकता है । इन दोनों पद्धतियों को जोड़ना सम्भव भी है। अरिस्टॉटल और बर्क इसके प्रमाण हैं । इन दोनों पद्धतियों में आपस में संघर्ष नहीं होता । बल्कि ये एक दूसरी की पूरक और सहायक हैं । सच्चा इतिहासकार दर्शन के महत्त्व को पहचानता है और दार्शनिक इतिहास का सहारा लेता है । इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि ऐतिहासिक और दार्शनिक दोनों पद्धतियों के प्रयोग से राजनीति विज्ञान का अध्ययन करना चाहिये । हम कह चुके हैं कि सादृश्यता के अन्तर्गत कुछ रीतियों या दृष्टिकोणों को लोग राजनीति विज्ञान के अध्ययन की पद्धतियाँ मान बैठे हैं । कुछ जर्मन तथा फ्रेंच विद्वानों ने राजनीति विज्ञान का अध्ययन समाजशास्त्र, पद्धति और जीवविज्ञान, मनोविज्ञान, कानूनशास्त्र इत्यादि शास्त्रों दृष्टिकोण विज्ञानों के दृष्टिकोण से किया और अपने अध्ययन को एक स्वतन्त्र पद्धति मान लिया । वास्तव में यह धारणा ग़लत है । ये केवल दृष्टिकोण या विधियाँ हैं, पद्धतियाँ नहीं । यदि जीव विज्ञान का पंडित राजनीति विज्ञान का तुलनात्मक अध्ययन करता है तो वह कहेगा कि एक प्राणी के समान राज्य में भी अंग-प्रत्यंग होते हैं । इस प्रकार का अध्ययन केवल तुलनात्मक और रूपक प्रधान होता है । वह शरीर के रूप में राज्य का रूपक बाँधता है । इसीलिये जब एक न्यायशास्त्री अथवा कानून का पंडित राज्य का अध्ययन करता है तो वह राज्य की इमारत को केवल कानून का एक ढाँचा पाता है । वह उन सब प्रभावों की ओर ध्यान नहीं देता जो मनुष्य के कार्य-कलापों को प्रभावित करते हैं । इन सब पद्धतियों को देखकर हम इस नतीजे पर पहुँचते हैं कि रसायनशास्त्र अथवा भौतिक विज्ञान की तरह राजनीति विज्ञान भी एक विज्ञान है । इसकी सामग्री भी उन्हीं विज्ञानों की तरह होती है । उक्त विज्ञानों के अध्ययन की पद्धतियाँ इस विज्ञान पर भी लागू होती हैं । बल्कि कुछ लोगों का तो यहाँ तक मत है कि यह विज्ञान उन विज्ञानों से कहीं अधिक कठिन है, क्योंकि इसका क्षेत्र इतना विस्तृत है और पद्धतियां भी इतनी भिन्न है कि उनके प्रयोग में तथा निष्कर्ष निकालने में यदि अधिकतम सावधानी न रखो जाय तो कदम-कदम पर गलतियां हो सकती है। इसके प्रयोगों से जो निष्कर्ष प्राप्त होते हैं, उनका प्रभाव करोड़ों व्यक्तियों के दैनिक जीवन पर पड़ता है । राजनीति विज्ञान तथा अन्य सामाजिक विज्ञान मनुष्य एक सुसंगठित समाज में रहता है। सामाजिक प्राणी होने के नाते उसके कार्य कई क्षेत्रों में बंटे हुए होते हैं । यदि समाज के प्रत्येक व्यक्ति के एक से कार्यों का वर्गीकरण किया जाय तो अध्ययन का एक अलग विषय बन जाता है । और ऐसा ही हुआ है। मनुष्य के सामाजिक कार्य-कलापों का अध्ययन आज समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, प्राचारशास्त्र, इतिहास, न्याय या कानूनशास्त्र, मनोविज्ञान इत्यादि आधारों पर होता है । ये सब शास्त्र या विज्ञान एक दूसरे से घनिष्ट सम्बन्ध रखते हैं । एक दूसरे से अपने अध्ययन की सामग्री प्राप्त करते हैं और एक दूसरे को प्रभावित करते हैं । कभी-कभी ये प्रभाव बड़े व्यापक प्रत्यक्ष और स्थायी होते हैं तथा कभी सूक्ष्म और क्षणिक । चूँकि प्रत्येक व्यक्ति राज्य में रहता है और उसके सब कार्य राज्य में होते हैं, इसलिये राजनीति विज्ञान अथवा राज्य विज्ञान का सम्बन्ध सब सामाजिक विज्ञानों से होता है। इसलिये राजनीति विज्ञान के साथ विविध सामाजिक विज्ञानों पर संक्षेप में विचार करना आवश्यक है । समाज विज्ञान ( Sociology ) :--मनुष्य के विभिन्न सामाजिक कार्यों का अध्ययन विभिन्न विज्ञान करते हैं और तदनुसार उनके नाम भी होते हैं । परन्तु जो शास्त्र या विज्ञान मनुष्य के सम्पूर्ण सामाजिक जीवन का अर्थात् सामाजिक जीवन के सब अंगों का अध्ययन समष्टि रूप से करता है, उसे समाज विज्ञान कहते हैं । समाज विज्ञान सामाजिक जीवन के मूल तत्वों का अध्ययन करता है । इस दृष्टि से देखा जाय तो राजनीति विज्ञान समाज विज्ञान का एक अंग है, क्योंकि वह सामाजिक जीवन के केवल एक अंग का अध्ययन करता है। दोनों विज्ञानों की सीमाएँ कई स्थानों पर मिलती हैं और एक दूसरे का अतिक्रमण करती हैं। साथ ही एक कठिनाई यह भी है कि दोनों की सीमाओं का ठीकठीक निर्धारण भी आसान नहीं है। मोटे तौर से केवल इतना कहा जा सकता है कि समाज विज्ञान समाज का अध्ययन करता है और राजनीति विज्ञान राज्य का अध्ययन करता है। इस प्रकार राजनीति विज्ञान के अध्ययन का क्षेत्र अधिक सुनिश्चित है। इसके विपरीत समाज विज्ञान का क्षेत्र इतना विस्तृत है कि बहुत से आधुनिक विद्वान समाज-जीवन के केवल कुछ पहलुओं का अध्ययन करना ही
यह पद्धति वास्तविकता से दूर कल्पना जगत में विचरने लगती है । रूसो इसी प्रकार का विचारक था । उसने ऐसी ही भावुकतापूर्ण विचारधारा में स्वतन्त्रता, समता और भ्रातृत्त्व की आवाज उठाई । इतिहास उसके विचारों की पुष्टि नहीं करता था और उसके कुफल हमें फ्रान्स की राज्यक्रान्ति में देखने को मिलं । फिर भी दर्शनशास्त्र के महान महत्त्व को सभी लोग स्वीकार करते हैं और दार्शनिक पद्धति को हम हेय नहीं समझ सकते । शुद्ध काल्पनिक भावनाओं ने भी इतिहास पर प्रभाव डाला है । इसलिये यदि दार्शनिक और ऐतिहासिक पद्धति को सम्बन्धित कर दिया जाय तो हमारा अध्ययन सम्पूर्ण हो सकता है । इन दोनों पद्धतियों को जोड़ना सम्भव भी है। अरिस्टॉटल और बर्क इसके प्रमाण हैं । इन दोनों पद्धतियों में आपस में संघर्ष नहीं होता । बल्कि ये एक दूसरी की पूरक और सहायक हैं । सच्चा इतिहासकार दर्शन के महत्त्व को पहचानता है और दार्शनिक इतिहास का सहारा लेता है । इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि ऐतिहासिक और दार्शनिक दोनों पद्धतियों के प्रयोग से राजनीति विज्ञान का अध्ययन करना चाहिये । हम कह चुके हैं कि सादृश्यता के अन्तर्गत कुछ रीतियों या दृष्टिकोणों को लोग राजनीति विज्ञान के अध्ययन की पद्धतियाँ मान बैठे हैं । कुछ जर्मन तथा फ्रेंच विद्वानों ने राजनीति विज्ञान का अध्ययन समाजशास्त्र, पद्धति और जीवविज्ञान, मनोविज्ञान, कानूनशास्त्र इत्यादि शास्त्रों दृष्टिकोण विज्ञानों के दृष्टिकोण से किया और अपने अध्ययन को एक स्वतन्त्र पद्धति मान लिया । वास्तव में यह धारणा ग़लत है । ये केवल दृष्टिकोण या विधियाँ हैं, पद्धतियाँ नहीं । यदि जीव विज्ञान का पंडित राजनीति विज्ञान का तुलनात्मक अध्ययन करता है तो वह कहेगा कि एक प्राणी के समान राज्य में भी अंग-प्रत्यंग होते हैं । इस प्रकार का अध्ययन केवल तुलनात्मक और रूपक प्रधान होता है । वह शरीर के रूप में राज्य का रूपक बाँधता है । इसीलिये जब एक न्यायशास्त्री अथवा कानून का पंडित राज्य का अध्ययन करता है तो वह राज्य की इमारत को केवल कानून का एक ढाँचा पाता है । वह उन सब प्रभावों की ओर ध्यान नहीं देता जो मनुष्य के कार्य-कलापों को प्रभावित करते हैं । इन सब पद्धतियों को देखकर हम इस नतीजे पर पहुँचते हैं कि रसायनशास्त्र अथवा भौतिक विज्ञान की तरह राजनीति विज्ञान भी एक विज्ञान है । इसकी सामग्री भी उन्हीं विज्ञानों की तरह होती है । उक्त विज्ञानों के अध्ययन की पद्धतियाँ इस विज्ञान पर भी लागू होती हैं । बल्कि कुछ लोगों का तो यहाँ तक मत है कि यह विज्ञान उन विज्ञानों से कहीं अधिक कठिन है, क्योंकि इसका क्षेत्र इतना विस्तृत है और पद्धतियां भी इतनी भिन्न है कि उनके प्रयोग में तथा निष्कर्ष निकालने में यदि अधिकतम सावधानी न रखो जाय तो कदम-कदम पर गलतियां हो सकती है। इसके प्रयोगों से जो निष्कर्ष प्राप्त होते हैं, उनका प्रभाव करोड़ों व्यक्तियों के दैनिक जीवन पर पड़ता है । राजनीति विज्ञान तथा अन्य सामाजिक विज्ञान मनुष्य एक सुसंगठित समाज में रहता है। सामाजिक प्राणी होने के नाते उसके कार्य कई क्षेत्रों में बंटे हुए होते हैं । यदि समाज के प्रत्येक व्यक्ति के एक से कार्यों का वर्गीकरण किया जाय तो अध्ययन का एक अलग विषय बन जाता है । और ऐसा ही हुआ है। मनुष्य के सामाजिक कार्य-कलापों का अध्ययन आज समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, प्राचारशास्त्र, इतिहास, न्याय या कानूनशास्त्र, मनोविज्ञान इत्यादि आधारों पर होता है । ये सब शास्त्र या विज्ञान एक दूसरे से घनिष्ट सम्बन्ध रखते हैं । एक दूसरे से अपने अध्ययन की सामग्री प्राप्त करते हैं और एक दूसरे को प्रभावित करते हैं । कभी-कभी ये प्रभाव बड़े व्यापक प्रत्यक्ष और स्थायी होते हैं तथा कभी सूक्ष्म और क्षणिक । चूँकि प्रत्येक व्यक्ति राज्य में रहता है और उसके सब कार्य राज्य में होते हैं, इसलिये राजनीति विज्ञान अथवा राज्य विज्ञान का सम्बन्ध सब सामाजिक विज्ञानों से होता है। इसलिये राजनीति विज्ञान के साथ विविध सामाजिक विज्ञानों पर संक्षेप में विचार करना आवश्यक है । समाज विज्ञान :--मनुष्य के विभिन्न सामाजिक कार्यों का अध्ययन विभिन्न विज्ञान करते हैं और तदनुसार उनके नाम भी होते हैं । परन्तु जो शास्त्र या विज्ञान मनुष्य के सम्पूर्ण सामाजिक जीवन का अर्थात् सामाजिक जीवन के सब अंगों का अध्ययन समष्टि रूप से करता है, उसे समाज विज्ञान कहते हैं । समाज विज्ञान सामाजिक जीवन के मूल तत्वों का अध्ययन करता है । इस दृष्टि से देखा जाय तो राजनीति विज्ञान समाज विज्ञान का एक अंग है, क्योंकि वह सामाजिक जीवन के केवल एक अंग का अध्ययन करता है। दोनों विज्ञानों की सीमाएँ कई स्थानों पर मिलती हैं और एक दूसरे का अतिक्रमण करती हैं। साथ ही एक कठिनाई यह भी है कि दोनों की सीमाओं का ठीकठीक निर्धारण भी आसान नहीं है। मोटे तौर से केवल इतना कहा जा सकता है कि समाज विज्ञान समाज का अध्ययन करता है और राजनीति विज्ञान राज्य का अध्ययन करता है। इस प्रकार राजनीति विज्ञान के अध्ययन का क्षेत्र अधिक सुनिश्चित है। इसके विपरीत समाज विज्ञान का क्षेत्र इतना विस्तृत है कि बहुत से आधुनिक विद्वान समाज-जीवन के केवल कुछ पहलुओं का अध्ययन करना ही
त्तर लगता है। प्रेमदेव के वारणों से विधकर जिस हृदय से रोदन की पुकार नहीं उठी उसका जीवन ही व्यर्थ है, ऐसी उसकी धारणा है । यह सत्य है कि प्रेमिकामिलन की बात सपने के सदृश है, परन्तु जितना सुख उसे इस स्वप्न देखने में मिलता है वह क्या वास्तव में मिल सकता है ? की पतवार पर उसकी जीवन नैय्या भूल रही है। वह अपने को एक तुच्छ प्रकिंचन रूप में, तथा नंदिनी को सुख-सरसाने वाली देवता के रूप में देख रहा है । . कवि, अनवरत गति से हृदय के उद्गारों को प्रकट करता चला जा रहा है ।' एक के बाद एक भाव जिस प्रकार हृदय में ग्रा रहे हैं, उसी प्रकार से उस ने उन्हें कविता का रूप दे दिया है । चित्रण, हृदयस्पर्शी तथा मार्मिक हैं और सहज ही सहानुभूति, वियोगी कवि के प्रति हो जाती है । नदिनी के द्वितीय खंड में भी यही भावना मिलती है। अपनी विचार-धारा में डूवता-उतराता हुआ कवि अपने प्रेम के मूल उपकरणों पर ध्यान देता है इस समय उसे अपनी भूल का ध्यान होता है। वह विचार करता है कि भूल से उस ने प्रेयसी की करुण-दया को ही प्रेम समझ लिया, परन्तु उस की नंदिनी ने उसे कभी भी प्यार नहीं किया । किन्तु वह ऐसा सोच कर स्वय अपने पर विश्वास नहीं कर पाता । प्रियतमा के सुन्दर मुख का ध्यान, विद्युत की भाँति चमक कर, उस के नेत्रों के सम्मुख घूम जाता है । "आह एक दिन कितने निकट ग्रह एक दिन इन प्राणों में सरस वह मुख था ! कितना सुख था ! " उस समय उसे देव-दुर्लभ सुख प्राप्त था । पतझर में भी बसन्त दृष्टिगोचर होता था । तथा गिरते हुए पत्र भी उस समय हँस-हँस कर उगते हुए से दिखलाई देते थे । प्रेयसी के अभाव में वह नीरव निश्चल हो गया है । पवन के चलने से श्राशा रूपी पत्र भर गये । इस निराशा में चादनी भी नहीं भाती, कोकिल का गान सुरीला नहीं लगता, तथा ठों पर हास्य भी नहीं मुसकाता । निराशा अपने चरम उत्कर्ष पर पहुँच गई है । आशा कौ एक भी रेखा नहीं दिखाई देती । उस का दुखित मन आज सव दिन के बदले रोना चाहता है । ससार उसे मरु- देश के सदृश लग रहा है, जहाँ प्यासा निर्भर भटक रहा है। उसका धैर्य टूटा ही चाहता है । समझ में नहीं आताRO 'कहाँ हाय लेजाँऊँ इस टूटे, जीवन को ? कैसे आँखों के अकूल रोदन को ?' इसी समय उसकी कल्पना मे उस प्रिय वन को धुंधली सी छाया घूमने लगती है जहाँ नंदिनी से उसका पहला साक्षात्कार हुआ था । वे कुंज तथा लता - मंडप अब भी उस के प्रेम की स्मृति के साक्षी रूप खडे हुए हैं । विचार धारा बदलती है। नदिनी उसकी रानी न होकर किसी और की बधू के रूप में दिखाई पड़ती है - उन्ही परिचित कुंज-लताओं के नीचे जहाँ वह कवि के साथ मिली थी। वही लता-मडप पराये हो गये हैं - "हुए अपरिचित वे चिरपरिचित स्थान प्रणय के । होते व कुछ और और ही भाव हृदय के ।" से, कवि यह सब होते हुए देख रहा है, फिर भी उसे नंदिनी से कोई द्वेष नहीं है - इतना अवश्य है कि अब जीवन के रहने की कोई आशा ( उसे ) नहीं रह गई है। नंदिनी के साथ ही साथ जीवन की भी आशा चली गई । कवि का हृदय मंदिर सूना हो गया । वर्षा- रिंतु का आगमन है । सदैव की ही भाँति, गगन-मंडल में मेघों की पक्तियाँ छा गई । मादक पवन लहराने लगी परतु उसे तो प्रकृति भी निराशा प्रदान करती हुई सी लगती है । भावी जीवन को धन तम से भरता मेरे जीवन का नक्षत्र गगन से भरता निराशा के घोर अंधकार में ईश्वर भी उसके साथ अन्याय करता-सा प्रतीत होता है । "काँटों के किरीट से उसने मुझे सजाया ! काटों का पथ उसने मेरे लिए बनाया !" उसके जीवन को कोई और बिता रहा है -- "कोई और विताता है मेरे जीवन को प्यार और कोई करता मेरी गुंजन को ।" प्रकृति ने भी उसकी अवहेलना कर दी है - 'किसी और के लिए फूलते फूल, विजन में । किसी और के लिए जागते दीप, सदन में ।' कवि, अपने ही नेत्रों से, अपनी संचित राशि को लुटते हुए, देख रहा है। पहले उसे देखकर, उसकी अधीर प्रिया मिलने के लिए, हँसती हुई, तुरंत बाहर निकल नाती थी । परन्तु - 'मुझे देख कोई न निकलता श्रव हँस बाहर' उसकी प्रिया, किसी दूसरे की हो गई है - कवि को अपनी नदिनी के साथ विहार करने का, आनंद मनाने का सौभाग्य न मिल सका । इस समय उसे जीवित रहना, मृत्यु से कठिन जान पड़ता है । यद्यपि न्य सब पदार्थ अपने पूर्व नियमों पर हैं, प्रकृति उसी प्रकार हँस रही है, परन्तु कवि की भावनाओं मे ज़मीन-आसमान का अंतर आ गया है। उसे कुछ नहीं अच्छा लगता१७ 'ये मेरी आँखें हैं जिनको कुछ न सुहाता' इस समय यदि प्रेयसी से साक्षात्कार हो भी जाये तो वह डरते-डरते मिलता है. 'परिचित नयनों से अब डरते-डरते मिलता बुझा दीप-सा, अंधकार में डूबा रहता।' अब वह अपनी नियति के सहारे चुनचाप बैठा है । भाग्य में शायद ऐसा ही होना बदा था । नव बसन्त में ही मेरे तरु को झरना था ? मुझ को इस उठते यौवन में ही मरना था ? यह किस को पता था कि - 'था अदृष्ट में इतना दुख, किसने जाना था ? कवि ने तो जीवन को हँसी खेल ही माना था'हँसी-खेल ही, जीवन को हमने माना था !' परन्तु इतना सब कुछ होने पर भी, कबि में आशा की एक कॉपती हुई किरण शेष है । पूर्ण निराश नहीं है। उसके पथ में अब भी घुषला-सा प्रकाश छाया हुआ है । 'पथ में छाया है प्रकाश अब भी धुँधला-सा' में पहुँचते पहुँचते, कमि की निराशा, फिर, आशा में परिणित होने लगी है, और तृतीय खंड एक नई भावना को लेकर प्रारंभ 'तृतीय खंड का प्रारंभ शांन्ति की एक मधुर किरण को लेकर होता है। कवि, वियोगाग्नि में तप कर शुद्ध हेम के सदृशं हो गया है । इस समय बह अपने जीवन को मंगल के पथ पर ले जाने के लिए उद्यत है, लौकिक प्रेम का. यह अलौकिक स्वरूप, प्रेमी के लिए अग्न-परीक्षा तथा कवि की पवित्र भावना का प्रतीक है । आत्मा का आध्यात्मवाद की ओर झुकना, शान्ति की चिर निद्रा में सोने के सदृश है । यद्यपि प्रारंभिक दो खंड पढ़ चुकने के बाद रसिक तथा भावुक पाठक का मन सहसा ही इस खंड को पढ़ने के लिए उद्यत नहीं हो जाता, प्रारंभ में उसे यह् खंड नौरस-सा प्रतीत होता हैं । जो उत्सुकता प्रारंभ के दो खंडों में जागृतः हुई थी, एकाएक नष्ट होने लगती है, परन्तु साहसी तथा धैर्यवान पाठकराध गति से बढ़ता ही जाता है, इस खंड के अन्दर पैठ जाने पर उसे उसकी महानता का पता लगता है । किसी भी वस्तु का चरमोत्कर्ष हो जाने पर उसमें शिथिलता आने लगती है। काव्य की दृष्टि से नंदिनी के तृतीय खंड में पहुँच कर पाठक में वह उमंग तो नहीं रह जाती जो जिज्ञासा को, मन में तीव्र बनाये रहती है। किन्तु यदि सदैव' दूसरे खंड में ही नंदिनी समाप्त हो जाती तो वह भी शायद अन्य साधारण कविताओं के अंतर्गत या जाती । उमंगों के शान्ति हो जाने पर जो सौन्दर्य हृदय में या वर्षा के बाद प्रकृति में आता है वही सौन्दर्य पहले और दूसरे खंड .. की वेदना शान्त हो जाने पर नंदिनी के तीसरे खंड मे आया है । कला की दिव्यता, भारतीय की महानता और जीवन की व्यावहारिकता तीनों के मेल में. नंदिनी का तीसरा खंड है । कालिदास अपनी शकुन्तला, श्रथवा पार्वती का वास्तविक सौंदर्य, रूप वासना के भस्म होजाने के बाद दिखाते हैं और शान्त वातावरण में उसकी पहुँचा देने पर विश्राम लेते हैं। शिव की सिद्धि, काम-दहन हम देखते हैं के पश्चात्, भारतीय संस्कृति की मान्यता है, और व्यावहारिक जीवन में भी कि किसी भी क्षेत्र में पूर्ण निराशा हो जाने के पश्चात् अपनी भावनाओं को सहज ही या तो प्राध्यात्मवाद की ओर या फिर जनसमुदाय की
त्तर लगता है। प्रेमदेव के वारणों से विधकर जिस हृदय से रोदन की पुकार नहीं उठी उसका जीवन ही व्यर्थ है, ऐसी उसकी धारणा है । यह सत्य है कि प्रेमिकामिलन की बात सपने के सदृश है, परन्तु जितना सुख उसे इस स्वप्न देखने में मिलता है वह क्या वास्तव में मिल सकता है ? की पतवार पर उसकी जीवन नैय्या भूल रही है। वह अपने को एक तुच्छ प्रकिंचन रूप में, तथा नंदिनी को सुख-सरसाने वाली देवता के रूप में देख रहा है । . कवि, अनवरत गति से हृदय के उद्गारों को प्रकट करता चला जा रहा है ।' एक के बाद एक भाव जिस प्रकार हृदय में ग्रा रहे हैं, उसी प्रकार से उस ने उन्हें कविता का रूप दे दिया है । चित्रण, हृदयस्पर्शी तथा मार्मिक हैं और सहज ही सहानुभूति, वियोगी कवि के प्रति हो जाती है । नदिनी के द्वितीय खंड में भी यही भावना मिलती है। अपनी विचार-धारा में डूवता-उतराता हुआ कवि अपने प्रेम के मूल उपकरणों पर ध्यान देता है इस समय उसे अपनी भूल का ध्यान होता है। वह विचार करता है कि भूल से उस ने प्रेयसी की करुण-दया को ही प्रेम समझ लिया, परन्तु उस की नंदिनी ने उसे कभी भी प्यार नहीं किया । किन्तु वह ऐसा सोच कर स्वय अपने पर विश्वास नहीं कर पाता । प्रियतमा के सुन्दर मुख का ध्यान, विद्युत की भाँति चमक कर, उस के नेत्रों के सम्मुख घूम जाता है । "आह एक दिन कितने निकट ग्रह एक दिन इन प्राणों में सरस वह मुख था ! कितना सुख था ! " उस समय उसे देव-दुर्लभ सुख प्राप्त था । पतझर में भी बसन्त दृष्टिगोचर होता था । तथा गिरते हुए पत्र भी उस समय हँस-हँस कर उगते हुए से दिखलाई देते थे । प्रेयसी के अभाव में वह नीरव निश्चल हो गया है । पवन के चलने से श्राशा रूपी पत्र भर गये । इस निराशा में चादनी भी नहीं भाती, कोकिल का गान सुरीला नहीं लगता, तथा ठों पर हास्य भी नहीं मुसकाता । निराशा अपने चरम उत्कर्ष पर पहुँच गई है । आशा कौ एक भी रेखा नहीं दिखाई देती । उस का दुखित मन आज सव दिन के बदले रोना चाहता है । ससार उसे मरु- देश के सदृश लग रहा है, जहाँ प्यासा निर्भर भटक रहा है। उसका धैर्य टूटा ही चाहता है । समझ में नहीं आताRO 'कहाँ हाय लेजाँऊँ इस टूटे, जीवन को ? कैसे आँखों के अकूल रोदन को ?' इसी समय उसकी कल्पना मे उस प्रिय वन को धुंधली सी छाया घूमने लगती है जहाँ नंदिनी से उसका पहला साक्षात्कार हुआ था । वे कुंज तथा लता - मंडप अब भी उस के प्रेम की स्मृति के साक्षी रूप खडे हुए हैं । विचार धारा बदलती है। नदिनी उसकी रानी न होकर किसी और की बधू के रूप में दिखाई पड़ती है - उन्ही परिचित कुंज-लताओं के नीचे जहाँ वह कवि के साथ मिली थी। वही लता-मडप पराये हो गये हैं - "हुए अपरिचित वे चिरपरिचित स्थान प्रणय के । होते व कुछ और और ही भाव हृदय के ।" से, कवि यह सब होते हुए देख रहा है, फिर भी उसे नंदिनी से कोई द्वेष नहीं है - इतना अवश्य है कि अब जीवन के रहने की कोई आशा नहीं रह गई है। नंदिनी के साथ ही साथ जीवन की भी आशा चली गई । कवि का हृदय मंदिर सूना हो गया । वर्षा- रिंतु का आगमन है । सदैव की ही भाँति, गगन-मंडल में मेघों की पक्तियाँ छा गई । मादक पवन लहराने लगी परतु उसे तो प्रकृति भी निराशा प्रदान करती हुई सी लगती है । भावी जीवन को धन तम से भरता मेरे जीवन का नक्षत्र गगन से भरता निराशा के घोर अंधकार में ईश्वर भी उसके साथ अन्याय करता-सा प्रतीत होता है । "काँटों के किरीट से उसने मुझे सजाया ! काटों का पथ उसने मेरे लिए बनाया !" उसके जीवन को कोई और बिता रहा है -- "कोई और विताता है मेरे जीवन को प्यार और कोई करता मेरी गुंजन को ।" प्रकृति ने भी उसकी अवहेलना कर दी है - 'किसी और के लिए फूलते फूल, विजन में । किसी और के लिए जागते दीप, सदन में ।' कवि, अपने ही नेत्रों से, अपनी संचित राशि को लुटते हुए, देख रहा है। पहले उसे देखकर, उसकी अधीर प्रिया मिलने के लिए, हँसती हुई, तुरंत बाहर निकल नाती थी । परन्तु - 'मुझे देख कोई न निकलता श्रव हँस बाहर' उसकी प्रिया, किसी दूसरे की हो गई है - कवि को अपनी नदिनी के साथ विहार करने का, आनंद मनाने का सौभाग्य न मिल सका । इस समय उसे जीवित रहना, मृत्यु से कठिन जान पड़ता है । यद्यपि न्य सब पदार्थ अपने पूर्व नियमों पर हैं, प्रकृति उसी प्रकार हँस रही है, परन्तु कवि की भावनाओं मे ज़मीन-आसमान का अंतर आ गया है। उसे कुछ नहीं अच्छा लगतासत्रह 'ये मेरी आँखें हैं जिनको कुछ न सुहाता' इस समय यदि प्रेयसी से साक्षात्कार हो भी जाये तो वह डरते-डरते मिलता है. 'परिचित नयनों से अब डरते-डरते मिलता बुझा दीप-सा, अंधकार में डूबा रहता।' अब वह अपनी नियति के सहारे चुनचाप बैठा है । भाग्य में शायद ऐसा ही होना बदा था । नव बसन्त में ही मेरे तरु को झरना था ? मुझ को इस उठते यौवन में ही मरना था ? यह किस को पता था कि - 'था अदृष्ट में इतना दुख, किसने जाना था ? कवि ने तो जीवन को हँसी खेल ही माना था'हँसी-खेल ही, जीवन को हमने माना था !' परन्तु इतना सब कुछ होने पर भी, कबि में आशा की एक कॉपती हुई किरण शेष है । पूर्ण निराश नहीं है। उसके पथ में अब भी घुषला-सा प्रकाश छाया हुआ है । 'पथ में छाया है प्रकाश अब भी धुँधला-सा' में पहुँचते पहुँचते, कमि की निराशा, फिर, आशा में परिणित होने लगी है, और तृतीय खंड एक नई भावना को लेकर प्रारंभ 'तृतीय खंड का प्रारंभ शांन्ति की एक मधुर किरण को लेकर होता है। कवि, वियोगाग्नि में तप कर शुद्ध हेम के सदृशं हो गया है । इस समय बह अपने जीवन को मंगल के पथ पर ले जाने के लिए उद्यत है, लौकिक प्रेम का. यह अलौकिक स्वरूप, प्रेमी के लिए अग्न-परीक्षा तथा कवि की पवित्र भावना का प्रतीक है । आत्मा का आध्यात्मवाद की ओर झुकना, शान्ति की चिर निद्रा में सोने के सदृश है । यद्यपि प्रारंभिक दो खंड पढ़ चुकने के बाद रसिक तथा भावुक पाठक का मन सहसा ही इस खंड को पढ़ने के लिए उद्यत नहीं हो जाता, प्रारंभ में उसे यह् खंड नौरस-सा प्रतीत होता हैं । जो उत्सुकता प्रारंभ के दो खंडों में जागृतः हुई थी, एकाएक नष्ट होने लगती है, परन्तु साहसी तथा धैर्यवान पाठकराध गति से बढ़ता ही जाता है, इस खंड के अन्दर पैठ जाने पर उसे उसकी महानता का पता लगता है । किसी भी वस्तु का चरमोत्कर्ष हो जाने पर उसमें शिथिलता आने लगती है। काव्य की दृष्टि से नंदिनी के तृतीय खंड में पहुँच कर पाठक में वह उमंग तो नहीं रह जाती जो जिज्ञासा को, मन में तीव्र बनाये रहती है। किन्तु यदि सदैव' दूसरे खंड में ही नंदिनी समाप्त हो जाती तो वह भी शायद अन्य साधारण कविताओं के अंतर्गत या जाती । उमंगों के शान्ति हो जाने पर जो सौन्दर्य हृदय में या वर्षा के बाद प्रकृति में आता है वही सौन्दर्य पहले और दूसरे खंड .. की वेदना शान्त हो जाने पर नंदिनी के तीसरे खंड मे आया है । कला की दिव्यता, भारतीय की महानता और जीवन की व्यावहारिकता तीनों के मेल में. नंदिनी का तीसरा खंड है । कालिदास अपनी शकुन्तला, श्रथवा पार्वती का वास्तविक सौंदर्य, रूप वासना के भस्म होजाने के बाद दिखाते हैं और शान्त वातावरण में उसकी पहुँचा देने पर विश्राम लेते हैं। शिव की सिद्धि, काम-दहन हम देखते हैं के पश्चात्, भारतीय संस्कृति की मान्यता है, और व्यावहारिक जीवन में भी कि किसी भी क्षेत्र में पूर्ण निराशा हो जाने के पश्चात् अपनी भावनाओं को सहज ही या तो प्राध्यात्मवाद की ओर या फिर जनसमुदाय की
एक तस्वीर को शेयर करते हुए, उन्होंने लिखा, "आपको ( वामिका) इस दुनिया और अगले और उससे आगे, मेरी जिंदगी में ले जाएगी। " तस्वीर में कैरियर के पीछे वामिका का नाम नजर आ रहा है। एंटरटेनमेंट डेस्क, Anushka Sharma and Virat Kohli share pictures from Maldives vacation : एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा इन दिनों अपने पति विराट कोहली और बेटी वामिका के साथ मालदीव में छुट्टियां मना रही हैं। अनुष्का ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक बाइक से जुड़ी वामिका के कैरियर की एक झलक शेयर की है। एक तस्वीर को शेयर करते हुए, उन्होंने लिखा, "आपको ( वामिका) इस दुनिया और अगले और उससे आगे, मेरी जिंदगी में ले जाएगी। " तस्वीर में कैरियर के पीछे वामिका का नाम नजर आ रहा है। इससे पहले गुरुवार को अनुष्का ने पॉपुलर डेस्टिनेशन पर अपने ब्रेकफास्ट की तस्वीर शेयर की थी, फलों से भरी प्लेट पर लिखा था, "स्वस्थ शुरुआत दूसरे तरीके से करें" । उन्होंने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर मालदीव के सूर्यास्त की एक तस्वीर भी शेयर की है। बुधवार को अनुष्का और विराट को मुंबई एयरपोर्ट पर मालदीव के लिए उड़ान भरते हुए देखा गया था । इससे पहले एक्ट्रेस ने अपने पति विराट कोहली के साथ वैकेशन पर जाने की पिक शेयर की थी। इसके बाद, सोशल मीडिया फैंस ने उनकी बेटी वामिका को अपने साथ ना ले जाने को लेकर तंज कसा था। ज्यादातर यूजर्स ने कहा कि अपने वैकेशन के लिए बेटी को घर छोड़ दिया। एक यूजर ने कमेंट किया, "वे अपने बच्चे को अकेला छोड़कर यात्रा कैसे कर लेते हैं? " वहीं कुछ ने उन्हें 'पावर कपल' कहा, वहीं कई ने "पसंदीदा जोड़ी। " का कॉमेन्ट किया । प्रोसित रॉय ( Prosit Roy) द्वारा डायरेक्ट, चकड़ा एक्सप्रेस ( Chakda 'Xpress) 2 फरवरी, 2023 को रिलीज़ होगी। अनुष्का आने वाली फिल्म चकड़ा एक्सप्रेस में नजर आएंगी। उसने फिल्म की तैयारी शुरू कर दी है, जहां वह क्रिकेटर झूलन गोस्वामी का रोल प्ले करेंगी। एक्ट्रेस नेने हाल ही में एक 'टेबल रीड' वीडियो शेयर किया और इसे कैप्शन दिया, "मैं अपना सब कुछ टेबल पर लाने का प्रयास करूंगी। " Nayanthara wedding PHOTOS : उम्र में छोटे विग्नेश की हुईं नयनतारा, PHOTOS में देखिए बधाई देने कौन-कौन पहुंचा?
एक तस्वीर को शेयर करते हुए, उन्होंने लिखा, "आपको इस दुनिया और अगले और उससे आगे, मेरी जिंदगी में ले जाएगी। " तस्वीर में कैरियर के पीछे वामिका का नाम नजर आ रहा है। एंटरटेनमेंट डेस्क, Anushka Sharma and Virat Kohli share pictures from Maldives vacation : एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा इन दिनों अपने पति विराट कोहली और बेटी वामिका के साथ मालदीव में छुट्टियां मना रही हैं। अनुष्का ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक बाइक से जुड़ी वामिका के कैरियर की एक झलक शेयर की है। एक तस्वीर को शेयर करते हुए, उन्होंने लिखा, "आपको इस दुनिया और अगले और उससे आगे, मेरी जिंदगी में ले जाएगी। " तस्वीर में कैरियर के पीछे वामिका का नाम नजर आ रहा है। इससे पहले गुरुवार को अनुष्का ने पॉपुलर डेस्टिनेशन पर अपने ब्रेकफास्ट की तस्वीर शेयर की थी, फलों से भरी प्लेट पर लिखा था, "स्वस्थ शुरुआत दूसरे तरीके से करें" । उन्होंने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर मालदीव के सूर्यास्त की एक तस्वीर भी शेयर की है। बुधवार को अनुष्का और विराट को मुंबई एयरपोर्ट पर मालदीव के लिए उड़ान भरते हुए देखा गया था । इससे पहले एक्ट्रेस ने अपने पति विराट कोहली के साथ वैकेशन पर जाने की पिक शेयर की थी। इसके बाद, सोशल मीडिया फैंस ने उनकी बेटी वामिका को अपने साथ ना ले जाने को लेकर तंज कसा था। ज्यादातर यूजर्स ने कहा कि अपने वैकेशन के लिए बेटी को घर छोड़ दिया। एक यूजर ने कमेंट किया, "वे अपने बच्चे को अकेला छोड़कर यात्रा कैसे कर लेते हैं? " वहीं कुछ ने उन्हें 'पावर कपल' कहा, वहीं कई ने "पसंदीदा जोड़ी। " का कॉमेन्ट किया । प्रोसित रॉय द्वारा डायरेक्ट, चकड़ा एक्सप्रेस दो फरवरी, दो हज़ार तेईस को रिलीज़ होगी। अनुष्का आने वाली फिल्म चकड़ा एक्सप्रेस में नजर आएंगी। उसने फिल्म की तैयारी शुरू कर दी है, जहां वह क्रिकेटर झूलन गोस्वामी का रोल प्ले करेंगी। एक्ट्रेस नेने हाल ही में एक 'टेबल रीड' वीडियो शेयर किया और इसे कैप्शन दिया, "मैं अपना सब कुछ टेबल पर लाने का प्रयास करूंगी। " Nayanthara wedding PHOTOS : उम्र में छोटे विग्नेश की हुईं नयनतारा, PHOTOS में देखिए बधाई देने कौन-कौन पहुंचा?
पहले मंगलवार को याचिका पर सुनवाई हुई थी। हालांकि मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे के अवकाश पर रहने के कारण मामले को स्थगित कर दिया गया था। देश की शीर्ष अदालत में दायर इस याचिका में कहा गया था कि संविधान के पहले अनुच्छेद में लिखा है कि इंडिया यानी भारत। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि जब देश एक है तो उसके दो नाम क्यों है? एक ही नाम का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता है? नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को संविधान में संशोधन करके 'इंडिया' शब्द को बदलकर 'भारत' करने की मांग वाली याचिका पर दखल देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को अपनी रिट याचिका की प्रतिलिपि संबंधित मंत्रालयों को प्रतिनिधित्व के रूप में भेजने का निर्देश दिया है, जो उचित रूप से इसका प्रतिनिधित्व तय करेंगे। इससे पहले मंगलवार को याचिका पर सुनवाई हुई थी। हालांकि मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे के अवकाश पर रहने के कारण मामले को स्थगित कर दिया गया था। देश की शीर्ष अदालत में दायर इस याचिका में कहा गया था कि संविधान के पहले अनुच्छेद में लिखा है कि इंडिया यानी भारत। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि जब देश एक है तो उसके दो नाम क्यों है? एक ही नाम का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता है? याचिकाकर्ता का कहना था कि इंडिया शब्द से गुलामी झलकती है और यह भारत की गुलामी की निशानी है। इसलिए इस शब्द की जगह भारत या हिंदुस्तान का इस्तेमाल होना चाहिए। याचिका में दावा किया गया था कि 'भारत' या 'हिंदुस्तान' शब्द हमारी राष्ट्रीयता के प्रति गौरव का भाव पैदा करते हैं। याचिका में सरकार को संविधान के अनुच्छेद 1 में संशोधन के लिए उचित कदम उठाते हुए 'इंडिया' शब्द को हटाकर, देश को 'भारत' या 'हिंदुस्तान' कहने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। यह याचिका दिल्ली के एक निवासी ने दायर की थी और दावा किया था कि यह संशोधन इस देश के नागरिकों की औपनिवेशिक अतीत से मुक्ति सुनिश्चित करेगा। याचिका में 1948 में संविधान सभा में संविधान के तत्कालीन मसौदे के अनुच्छेद 1 पर हुई चर्चा का हवाला दिया गया था और कहा गया था कि उस समय देश का नाम 'भारत' या 'हिंदुस्तान' रखने की पुरजोर हिमायत की गई थी।
पहले मंगलवार को याचिका पर सुनवाई हुई थी। हालांकि मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे के अवकाश पर रहने के कारण मामले को स्थगित कर दिया गया था। देश की शीर्ष अदालत में दायर इस याचिका में कहा गया था कि संविधान के पहले अनुच्छेद में लिखा है कि इंडिया यानी भारत। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि जब देश एक है तो उसके दो नाम क्यों है? एक ही नाम का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता है? नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को संविधान में संशोधन करके 'इंडिया' शब्द को बदलकर 'भारत' करने की मांग वाली याचिका पर दखल देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को अपनी रिट याचिका की प्रतिलिपि संबंधित मंत्रालयों को प्रतिनिधित्व के रूप में भेजने का निर्देश दिया है, जो उचित रूप से इसका प्रतिनिधित्व तय करेंगे। इससे पहले मंगलवार को याचिका पर सुनवाई हुई थी। हालांकि मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे के अवकाश पर रहने के कारण मामले को स्थगित कर दिया गया था। देश की शीर्ष अदालत में दायर इस याचिका में कहा गया था कि संविधान के पहले अनुच्छेद में लिखा है कि इंडिया यानी भारत। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि जब देश एक है तो उसके दो नाम क्यों है? एक ही नाम का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता है? याचिकाकर्ता का कहना था कि इंडिया शब्द से गुलामी झलकती है और यह भारत की गुलामी की निशानी है। इसलिए इस शब्द की जगह भारत या हिंदुस्तान का इस्तेमाल होना चाहिए। याचिका में दावा किया गया था कि 'भारत' या 'हिंदुस्तान' शब्द हमारी राष्ट्रीयता के प्रति गौरव का भाव पैदा करते हैं। याचिका में सरकार को संविधान के अनुच्छेद एक में संशोधन के लिए उचित कदम उठाते हुए 'इंडिया' शब्द को हटाकर, देश को 'भारत' या 'हिंदुस्तान' कहने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। यह याचिका दिल्ली के एक निवासी ने दायर की थी और दावा किया था कि यह संशोधन इस देश के नागरिकों की औपनिवेशिक अतीत से मुक्ति सुनिश्चित करेगा। याचिका में एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में संविधान सभा में संविधान के तत्कालीन मसौदे के अनुच्छेद एक पर हुई चर्चा का हवाला दिया गया था और कहा गया था कि उस समय देश का नाम 'भारत' या 'हिंदुस्तान' रखने की पुरजोर हिमायत की गई थी।
की रात है जिनगी के लागे परछाई है) मिन्हाज की आप बीती सुनकर गांव वाले घराती बारातीयो की आंखे भर आयी उसी जगह बैठे सुजान गंज के ठाकुर चंद्रभान सिंह अपनी जगह से खड़े हुये और बोले गांव वाले आज से बीस वर्ष पूर्व मेरी बड़ी बेटी जब डेढ़ वर्ष की थी तब उसे चिता उठा ले गया था उन्हने तबलची मिर्ज़ा से पूछा कबे तबलची यह बाई जी तुम्हे कब और कहा मिली थी तबलची मिर्जा बड़े अदब से उठा और बोला मालिक आज से बीस वर्ष पहले मैं इधर उधर घुमा मांगा खाया करते थे क्योंकि मेरी मानसिक स्थिति ठीक ना होने के कारण मेरे घर वाले मुझे बोझ समझ कर घर से बाहर कर दिया एक दिन घूमते घूमते शाम को यहां से दस कोस दूर नारायणी नदी की रेता में भूख प्यास से अधमरा पड़ा रहा कि लगभग चार बजे भोर में एक चिता एक नन्ही बच्ची को अपबे जबड़े में दबाए बुरी तरह से घायल भागत भागत हमरे नजदीक आ गया मुझे जरा भी डर नही लगा क्योकि मेरी मानसिक स्थिति ठीक नही थी जो भी मेरे तन पर आधे अधूरे कपड़े थे उनमें से आधा फाड़ कर उस चीते के घायल पैर में बांधा चिता ने नन्ही बच्ची को छोड़ कर मेरे पास बैठ गया मुझे लगा वह नन्ही बच्ची मर चुकी है मगर जब मैं उसके पास गया तब उसमें हल्की आवाज़ आयी मैंने उसे उठाया पानी से उसके घाव धोए घायल चिता मुझे व बच्ची को बड़े ध्यान से देखरहा था सुबह सूरज निकल चुका था मगर उस सुन सान निर्जन रेत में एक तरफ चीता और दूसरी तरफ चेतना की पेट की भूख भय बिल्कुल नही बच्ची मेरे गोद मे बेसुध ऊपर से मंडराते गिद्ध अब था तो सिर्फ मौत का इंतज़ार तभी अचानक एक नाव किनारे आकर रुकी उसमें बैठा आदमी हाथ मे अकारी लिये आया बोला तुम कौन मैंने अपनी जानकारी के अनुसार उसको कुछ बताने की कोशिश की उसने जो भी समझा मुझे पता नही मगर उसने चीते को खाने के लिये मछली दिया और मुझे और चीते को नाव पर साथ लेकर अपने घर ले गया मेरे गोद से लिपटी अचेत पड़ी बच्ची के बारे मे बार बार पूछता मैँ कुछ भी बता सकने में असमर्थ था उस आदमी ने अपना नाम सज्जन मल्लाह बताया एक दो घंटे के नारायणी नदी का सफर तय करके हम लोग चीते के साथ सज्जन के घर पहुँचे जहाँ उसकी बूढ़ी माँ थी बूढ़ी माँ ने पहुंचते बच्ची को मेरे हाथ से लेकर उसका इलाज शुरू किया और सज्जन ने चीते का इलाज लगभग पंद्रह दिन में चीता स्वस्थ हो गया और नन्ही बच्ची भी स्वस्थ होने लगी लगभग तीन माह में बच्ची स्वस्थ हो गयी चीता स्वस्थ होते ही चला गया कभी कभार आता और चला जाता पता नही क्यों मेरी मानसिक स्थिति में सुधार होने लगा लेकिन एकाएक एक दिन सज्जन की नाव गहराई में पलट गई और वह भंवर में फंस कर डूब कर मर गया अब मैं बच्ची बूढ़ी माँ ही रह गयी सारे सहारे समाप्त हो चुके थे।बूढ़ी माँ सुकमा ने कहा मेरी सहेली बिधुनि शहर में रहती है बर्तन माज़ कर गुज़ारा करती हैं तब तक बच्ची तीन चार वर्ष की हो चुकी थी हम सुकमा और मिन्हाज शहर विधुनि को खोजते हुए एक साल में किसी तरह उसके पास पहुंचे मांग कर खाते जहाँ जगह मिलता सो जाते जब विधुनि से मुलाकात हुई उसके दो चार दिन बाद वह मुझे बच्ची को लेकर जहाँ बर्तन माज़ती थी ले गयी जहाँ मालिक मानस उनके बेटे बेटियाँ एव उनकी पत्नी शहर की मशहूर नृत्यांगना क्षमा रहती थी ।मालिक मानस ने मुझे नौकर रख लिया एव क्षमा ने मिन्हाज को नृत्य सिखलाना शुरू कर दिया बहुत जल्द ही मिन्हाज के पैर थिरकने लगे और लगभग दस वर्ष में मिन्हाज बहुत बढ़िया नृत्यांगना बन गयी इस बीच बूढ़ी माँ और बिधुनि दोनों का स्वर्गवास हो गया मैं और मिन्हाज ही बच गए। मुझे मिन्हाज की हुनर देखकर मन मे लालच आ गया और एक दिन मैं मिन्हाज को लेकर चुपके से भाग आया मिन्हाज नाचती देखने वालों की भीड़ एकत्र होती अब मैं पूरी तरह मानसिक स्वस्थ एव जवान हो चुका था एक दिन अपने गांव पहुँचा तो घर वाले देख कर बहुत खुश हुए और उन्होंने ही मंडली बनाकर विवाह आदि के अवसर पर नाचने गाने का कार्य करने के लिये प्रेरित किया एव सहयोग किया इसी तरह यहाँ तक पहुंचे है ठाकुर चंद्रभान सिंह की आंखों से अश्रु की धारा बह रह रही थी साथ ही साथ पूरे गांव वालों की आंखों में अश्रु धारा बह रही थी ठाकुर चंद्रभान सिंह जी ने अपनी पत्नी सुजाता को जनवासे में बुलाया सुजाता ने मिन्हाज को देखते ही पहचान लिया रोते हुए बोली माँ की कोख अपनी औलाद को किसी सूरत में नही भूल सकती है हॉ ठाकुर साहब मिन्हाज मेरी बेटी वही है जिसे चिता उठा ले गया था कड़ाके की सर्द की तीन बजे भोर में भी सम्पूर्ण जनवासे में ममत्व वात्सल्य के प्यार की वापसी के जज्बात की गर्मी से गर्म हो गया मिन्हाज को ठाकुर चंद्र भान सिंह सुजाता के गले लिपट गयी वातावरण में अजीब खामोशी थी नवविवाहित दूल्हे ने बड़े गर्व से मिन्हाज को अपनी पत्नी की बड़ी बहन के रूप में स्वीकार किया ख़ुशी से झूमने लगा बारात की तीसरे दिन पूरे गांव वालों ने बड़े गर्व से बिदाई दी मिन्हाज राष्ट्रीय स्तर की ख्याति प्राप्त नृत्यांगना बनी तबलजी मिर्ज़ा ठाकुर चंद्रभान सिंह जी का सेवक बन गया ठाकुर साहब ने भी मिर्ज़ा को अपने बेटे की तरह स्वीकार किया।। कहानीकार --नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।
की रात है जिनगी के लागे परछाई है) मिन्हाज की आप बीती सुनकर गांव वाले घराती बारातीयो की आंखे भर आयी उसी जगह बैठे सुजान गंज के ठाकुर चंद्रभान सिंह अपनी जगह से खड़े हुये और बोले गांव वाले आज से बीस वर्ष पूर्व मेरी बड़ी बेटी जब डेढ़ वर्ष की थी तब उसे चिता उठा ले गया था उन्हने तबलची मिर्ज़ा से पूछा कबे तबलची यह बाई जी तुम्हे कब और कहा मिली थी तबलची मिर्जा बड़े अदब से उठा और बोला मालिक आज से बीस वर्ष पहले मैं इधर उधर घुमा मांगा खाया करते थे क्योंकि मेरी मानसिक स्थिति ठीक ना होने के कारण मेरे घर वाले मुझे बोझ समझ कर घर से बाहर कर दिया एक दिन घूमते घूमते शाम को यहां से दस कोस दूर नारायणी नदी की रेता में भूख प्यास से अधमरा पड़ा रहा कि लगभग चार बजे भोर में एक चिता एक नन्ही बच्ची को अपबे जबड़े में दबाए बुरी तरह से घायल भागत भागत हमरे नजदीक आ गया मुझे जरा भी डर नही लगा क्योकि मेरी मानसिक स्थिति ठीक नही थी जो भी मेरे तन पर आधे अधूरे कपड़े थे उनमें से आधा फाड़ कर उस चीते के घायल पैर में बांधा चिता ने नन्ही बच्ची को छोड़ कर मेरे पास बैठ गया मुझे लगा वह नन्ही बच्ची मर चुकी है मगर जब मैं उसके पास गया तब उसमें हल्की आवाज़ आयी मैंने उसे उठाया पानी से उसके घाव धोए घायल चिता मुझे व बच्ची को बड़े ध्यान से देखरहा था सुबह सूरज निकल चुका था मगर उस सुन सान निर्जन रेत में एक तरफ चीता और दूसरी तरफ चेतना की पेट की भूख भय बिल्कुल नही बच्ची मेरे गोद मे बेसुध ऊपर से मंडराते गिद्ध अब था तो सिर्फ मौत का इंतज़ार तभी अचानक एक नाव किनारे आकर रुकी उसमें बैठा आदमी हाथ मे अकारी लिये आया बोला तुम कौन मैंने अपनी जानकारी के अनुसार उसको कुछ बताने की कोशिश की उसने जो भी समझा मुझे पता नही मगर उसने चीते को खाने के लिये मछली दिया और मुझे और चीते को नाव पर साथ लेकर अपने घर ले गया मेरे गोद से लिपटी अचेत पड़ी बच्ची के बारे मे बार बार पूछता मैँ कुछ भी बता सकने में असमर्थ था उस आदमी ने अपना नाम सज्जन मल्लाह बताया एक दो घंटे के नारायणी नदी का सफर तय करके हम लोग चीते के साथ सज्जन के घर पहुँचे जहाँ उसकी बूढ़ी माँ थी बूढ़ी माँ ने पहुंचते बच्ची को मेरे हाथ से लेकर उसका इलाज शुरू किया और सज्जन ने चीते का इलाज लगभग पंद्रह दिन में चीता स्वस्थ हो गया और नन्ही बच्ची भी स्वस्थ होने लगी लगभग तीन माह में बच्ची स्वस्थ हो गयी चीता स्वस्थ होते ही चला गया कभी कभार आता और चला जाता पता नही क्यों मेरी मानसिक स्थिति में सुधार होने लगा लेकिन एकाएक एक दिन सज्जन की नाव गहराई में पलट गई और वह भंवर में फंस कर डूब कर मर गया अब मैं बच्ची बूढ़ी माँ ही रह गयी सारे सहारे समाप्त हो चुके थे।बूढ़ी माँ सुकमा ने कहा मेरी सहेली बिधुनि शहर में रहती है बर्तन माज़ कर गुज़ारा करती हैं तब तक बच्ची तीन चार वर्ष की हो चुकी थी हम सुकमा और मिन्हाज शहर विधुनि को खोजते हुए एक साल में किसी तरह उसके पास पहुंचे मांग कर खाते जहाँ जगह मिलता सो जाते जब विधुनि से मुलाकात हुई उसके दो चार दिन बाद वह मुझे बच्ची को लेकर जहाँ बर्तन माज़ती थी ले गयी जहाँ मालिक मानस उनके बेटे बेटियाँ एव उनकी पत्नी शहर की मशहूर नृत्यांगना क्षमा रहती थी ।मालिक मानस ने मुझे नौकर रख लिया एव क्षमा ने मिन्हाज को नृत्य सिखलाना शुरू कर दिया बहुत जल्द ही मिन्हाज के पैर थिरकने लगे और लगभग दस वर्ष में मिन्हाज बहुत बढ़िया नृत्यांगना बन गयी इस बीच बूढ़ी माँ और बिधुनि दोनों का स्वर्गवास हो गया मैं और मिन्हाज ही बच गए। मुझे मिन्हाज की हुनर देखकर मन मे लालच आ गया और एक दिन मैं मिन्हाज को लेकर चुपके से भाग आया मिन्हाज नाचती देखने वालों की भीड़ एकत्र होती अब मैं पूरी तरह मानसिक स्वस्थ एव जवान हो चुका था एक दिन अपने गांव पहुँचा तो घर वाले देख कर बहुत खुश हुए और उन्होंने ही मंडली बनाकर विवाह आदि के अवसर पर नाचने गाने का कार्य करने के लिये प्रेरित किया एव सहयोग किया इसी तरह यहाँ तक पहुंचे है ठाकुर चंद्रभान सिंह की आंखों से अश्रु की धारा बह रह रही थी साथ ही साथ पूरे गांव वालों की आंखों में अश्रु धारा बह रही थी ठाकुर चंद्रभान सिंह जी ने अपनी पत्नी सुजाता को जनवासे में बुलाया सुजाता ने मिन्हाज को देखते ही पहचान लिया रोते हुए बोली माँ की कोख अपनी औलाद को किसी सूरत में नही भूल सकती है हॉ ठाकुर साहब मिन्हाज मेरी बेटी वही है जिसे चिता उठा ले गया था कड़ाके की सर्द की तीन बजे भोर में भी सम्पूर्ण जनवासे में ममत्व वात्सल्य के प्यार की वापसी के जज्बात की गर्मी से गर्म हो गया मिन्हाज को ठाकुर चंद्र भान सिंह सुजाता के गले लिपट गयी वातावरण में अजीब खामोशी थी नवविवाहित दूल्हे ने बड़े गर्व से मिन्हाज को अपनी पत्नी की बड़ी बहन के रूप में स्वीकार किया ख़ुशी से झूमने लगा बारात की तीसरे दिन पूरे गांव वालों ने बड़े गर्व से बिदाई दी मिन्हाज राष्ट्रीय स्तर की ख्याति प्राप्त नृत्यांगना बनी तबलजी मिर्ज़ा ठाकुर चंद्रभान सिंह जी का सेवक बन गया ठाकुर साहब ने भी मिर्ज़ा को अपने बेटे की तरह स्वीकार किया।। कहानीकार --नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।
SSC MTS Admit Card 2021: कर्मचारी चयन आयोग ने एसएससी एमटीएस एडमिट कार्ड 2021 जारी कर दिए हैं। एसएससी मल्टी टास्किंग स्टाफ एडमिट कार्ड क्षेत्रीय एसएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए गए है। SSC MTS Admit Card 2021: कर्मचारी चयन आयोग ने एसएससी एमटीएस एडमिट कार्ड 2021 जारी कर दिए हैं। एसएससी मल्टी टास्किंग स्टाफ एडमिट कार्ड क्षेत्रीय एसएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए गए है। उम्मीदवार जो एडमिट कार्ड डाउनलोड करना चाहते हैं, वे क्षेत्रीय वेबसाइटों की आधिकारिक साइट पर जा सकते हैं। एमटीएस पेपर I परीक्षा 5 अक्टूबर से 2 नवंबर, 2021 तक आयोजित की जाएगी। एसएससी एमटीएस परीक्षा में दो पेपर शामिल होंगे। पेपर I और पेपर II। पेपर I कंप्यूटर आधारित टेस्ट होगा और पेपर II डिस्क्रिप्टिव पेपर होगा। पेपर I में वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न होंगे और प्रत्येक गलत उत्तर के लिए नकारात्मक अंकन होगा। प्रश्न अंग्रेजी और हिंदी दोनों में सेट किए जाएंगे। अंकों के पुनर्मूल्यांकन/पुनः जाँच का कोई प्रावधान नहीं होगा। इस संबंध में किसी भी प्रकार के पत्राचार पर भी विचार नहीं किया जाएगा। चरण 1. एसएससी क्षेत्रीय वेबसाइट की आधिकारिक साइट पर जाएं। चरण 2. होम पेज पर उपलब्ध एसएससी एमटीएस एडमिट कार्ड 2021 लिंक पर क्लिक करें। चरण 3. लॉगिन विवरण दर्ज करें और सबमिट पर क्लिक करें। चरण 4. आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा। चरण 5. एडमिट कार्ड की जांच करें और इसे डाउनलोड करें। चरण 6. आगे की जरूरत के लिए उसी की एक हार्ड कॉपी अपने पास रखें।
SSC MTS Admit Card दो हज़ार इक्कीस: कर्मचारी चयन आयोग ने एसएससी एमटीएस एडमिट कार्ड दो हज़ार इक्कीस जारी कर दिए हैं। एसएससी मल्टी टास्किंग स्टाफ एडमिट कार्ड क्षेत्रीय एसएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए गए है। SSC MTS Admit Card दो हज़ार इक्कीस: कर्मचारी चयन आयोग ने एसएससी एमटीएस एडमिट कार्ड दो हज़ार इक्कीस जारी कर दिए हैं। एसएससी मल्टी टास्किंग स्टाफ एडमिट कार्ड क्षेत्रीय एसएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए गए है। उम्मीदवार जो एडमिट कार्ड डाउनलोड करना चाहते हैं, वे क्षेत्रीय वेबसाइटों की आधिकारिक साइट पर जा सकते हैं। एमटीएस पेपर I परीक्षा पाँच अक्टूबर से दो नवंबर, दो हज़ार इक्कीस तक आयोजित की जाएगी। एसएससी एमटीएस परीक्षा में दो पेपर शामिल होंगे। पेपर I और पेपर II। पेपर I कंप्यूटर आधारित टेस्ट होगा और पेपर II डिस्क्रिप्टिव पेपर होगा। पेपर I में वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न होंगे और प्रत्येक गलत उत्तर के लिए नकारात्मक अंकन होगा। प्रश्न अंग्रेजी और हिंदी दोनों में सेट किए जाएंगे। अंकों के पुनर्मूल्यांकन/पुनः जाँच का कोई प्रावधान नहीं होगा। इस संबंध में किसी भी प्रकार के पत्राचार पर भी विचार नहीं किया जाएगा। चरण एक. एसएससी क्षेत्रीय वेबसाइट की आधिकारिक साइट पर जाएं। चरण दो. होम पेज पर उपलब्ध एसएससी एमटीएस एडमिट कार्ड दो हज़ार इक्कीस लिंक पर क्लिक करें। चरण तीन. लॉगिन विवरण दर्ज करें और सबमिट पर क्लिक करें। चरण चार. आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा। चरण पाँच. एडमिट कार्ड की जांच करें और इसे डाउनलोड करें। चरण छः. आगे की जरूरत के लिए उसी की एक हार्ड कॉपी अपने पास रखें।
BHAGALPUR : भागलपुर के उल्टा पुल के नीचे देर रात सब्जी मंडी में भीषण आग लग गई देखते ही देखते आग फैल गई और 20 दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया लाखों का सामान जलकर खाक हो गया, लगभग 40 मिनट बाद फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची और घंटों मशक्कत कर आग पर काबू पाया, घटना रात के 1:30 बजे के करीब की है आग लगने का कारण शार्ट सर्किट को बताया जा रहा है। यहां अपनी दुकान लगानेवाले संतोष पासवान ने बताया कि रात को मंडी में बने एक गोदाम में तारों मेें शार्ट सर्किट के बाद चिंगारी निकलनी शुरू हुई। जिसके कारण आग गई। उसने बताया कि नुकसान इससे ज्यादा नुकसान हो सकता था। लेकिन, उससे पहले ही कुछ लोगों की मदद से एक हिस्से में लगी आग पर काबू पा लिया गया। फिलहाल, आग बुझाने के बाद मंडी की सफाई का काम शुरू कर दिया गया है। वहीं दुकानदार अपने नुकसान का आकलन करने मे जुटे हैं.
BHAGALPUR : भागलपुर के उल्टा पुल के नीचे देर रात सब्जी मंडी में भीषण आग लग गई देखते ही देखते आग फैल गई और बीस दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया लाखों का सामान जलकर खाक हो गया, लगभग चालीस मिनट बाद फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची और घंटों मशक्कत कर आग पर काबू पाया, घटना रात के एक:तीस बजे के करीब की है आग लगने का कारण शार्ट सर्किट को बताया जा रहा है। यहां अपनी दुकान लगानेवाले संतोष पासवान ने बताया कि रात को मंडी में बने एक गोदाम में तारों मेें शार्ट सर्किट के बाद चिंगारी निकलनी शुरू हुई। जिसके कारण आग गई। उसने बताया कि नुकसान इससे ज्यादा नुकसान हो सकता था। लेकिन, उससे पहले ही कुछ लोगों की मदद से एक हिस्से में लगी आग पर काबू पा लिया गया। फिलहाल, आग बुझाने के बाद मंडी की सफाई का काम शुरू कर दिया गया है। वहीं दुकानदार अपने नुकसान का आकलन करने मे जुटे हैं.
एक धोखेबाज वह है जो झूठे या झूठे को सही के रूप में प्रस्तुत करके धोखा देता है। आमतौर पर अवधारणा का उपयोग उस व्यक्ति के नाम के लिए किया जाता है , जो किसी ऐसे व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जो वास्तव में नहीं है । इसलिए, धोखेबाज एक झूठी पहचान को अपनाता है। सामान्य बात यह है कि वह जो किसी और के होने का दिखावा करता है वह इस चाल से आर्थिक लाभ या सामाजिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से ऐसा करता है। उदाहरण के लिएः "उन्होंने खुद को ब्रोमैटोलॉजी विभाग के एक निरीक्षक के रूप में पेश किया, लेकिन वह एक नपुंसक थाः उसने रेस्तरां को चोरी करना समाप्त कर दिया", "एक नपुंसक ने शादी तक पहुंचने के लिए दूल्हे के चचेरे भाई होने का ढोंग किया, " पुलिस ने पता लगाया कि वह तबाही थी अपने पीड़ितों का दुरुपयोग करने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट के माध्यम से जाओ । " कल्पना कीजिए कि एक युवा एक स्वयंसेवक फायरमैन के रूप में प्रस्तुत करता है । इस तरह से खुद का परिचय देते हुए, वह घरों के माध्यम से एक आर्थिक सहायता का अनुरोध करने के लिए जाता है, जो उसके अनुसार, शहर के बैरकों के कामकाज को बेहतर बनाने में मदद करेगा। जैसा कि यह एक आयातक है, पैसा वास्तव में वास्तविक अग्निशामकों तक नहीं पहुंचेगा, लेकिन यह आपको अमीर होने की अनुमति देगा। यह व्यवहार, निश्चित रूप से, एक अपराध का गठन करता हैः नपुंसक एक चोर आदमी है । एक अन्य व्यक्ति, इस बीच, उस होटल में प्रवेश करने की कोशिश कर सकता है जहां एफसी बार्सिलोना के खिलाड़ी रहते हैं, यह बताते हुए कि वह एक क्लब लीडर का बेटा है। उसका लक्ष्यः लियोनेल मेस्सी से मिलना और उसके साथ एक तस्वीर लेना। यह आवेग अपने झूठ से आर्थिक लाभ प्राप्त करने का इरादा नहीं रखता है, लेकिन अपने सपने को पूरा करने के लिए जनता के लिए वर्जित पहुंच की जगह में प्रवेश करता है।
एक धोखेबाज वह है जो झूठे या झूठे को सही के रूप में प्रस्तुत करके धोखा देता है। आमतौर पर अवधारणा का उपयोग उस व्यक्ति के नाम के लिए किया जाता है , जो किसी ऐसे व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जो वास्तव में नहीं है । इसलिए, धोखेबाज एक झूठी पहचान को अपनाता है। सामान्य बात यह है कि वह जो किसी और के होने का दिखावा करता है वह इस चाल से आर्थिक लाभ या सामाजिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से ऐसा करता है। उदाहरण के लिएः "उन्होंने खुद को ब्रोमैटोलॉजी विभाग के एक निरीक्षक के रूप में पेश किया, लेकिन वह एक नपुंसक थाः उसने रेस्तरां को चोरी करना समाप्त कर दिया", "एक नपुंसक ने शादी तक पहुंचने के लिए दूल्हे के चचेरे भाई होने का ढोंग किया, " पुलिस ने पता लगाया कि वह तबाही थी अपने पीड़ितों का दुरुपयोग करने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट के माध्यम से जाओ । " कल्पना कीजिए कि एक युवा एक स्वयंसेवक फायरमैन के रूप में प्रस्तुत करता है । इस तरह से खुद का परिचय देते हुए, वह घरों के माध्यम से एक आर्थिक सहायता का अनुरोध करने के लिए जाता है, जो उसके अनुसार, शहर के बैरकों के कामकाज को बेहतर बनाने में मदद करेगा। जैसा कि यह एक आयातक है, पैसा वास्तव में वास्तविक अग्निशामकों तक नहीं पहुंचेगा, लेकिन यह आपको अमीर होने की अनुमति देगा। यह व्यवहार, निश्चित रूप से, एक अपराध का गठन करता हैः नपुंसक एक चोर आदमी है । एक अन्य व्यक्ति, इस बीच, उस होटल में प्रवेश करने की कोशिश कर सकता है जहां एफसी बार्सिलोना के खिलाड़ी रहते हैं, यह बताते हुए कि वह एक क्लब लीडर का बेटा है। उसका लक्ष्यः लियोनेल मेस्सी से मिलना और उसके साथ एक तस्वीर लेना। यह आवेग अपने झूठ से आर्थिक लाभ प्राप्त करने का इरादा नहीं रखता है, लेकिन अपने सपने को पूरा करने के लिए जनता के लिए वर्जित पहुंच की जगह में प्रवेश करता है।
Mental health: स्वास्थ्य वर्धक रहने के लिए अच्छी चीजें खाना बहुत महत्वपूर्ण होता है। हेल्दी फूड न सिर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है। फास्ट फूड से भरपूर डाइट विभिन्न रोंगों को जन्म दे सकती है। मानसिक रोग जैसे- डिप्रेशन और एंग्जाइटी के कई कारणों के पीछे भोजन भी है। जर्नल हॉस्पिटल न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक खान के व्यवहार और तनाव, एंग्जाइटी और डिप्रेशन के बीच एक लिंक है। इस शोध में यूनिवर्सिटी के 1055 विद्यार्थियों को शामिल किया गया, जो बहुत अधिक जंक फूड का सेवन करते हैं। इस रिसर्च में यह बात सामने आई कि अनहेल्दी फूड विद्यार्थियों के एंग्जाइटी, डिप्रेशन और तनाव के प्रसार से जरूरी रूप से संबंधित था। हालांकि, उस फूड ग्रुप में कुछ ऐसी चीजें भी होती हैं, जिनका कुछ डिसऑर्डर से खास संबंध होता है। जर्नल साइकोलॉजी में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, सबसे गंभीर बात यह है कि उन फूड में 60% कैलोरी होती है, जिनका सेवन ज्यादातर लोग प्रतिदिन करते हैं। यह आर्टिकल बताता है कि वहां बहुत सारे नुकसानदायक फूड हैं, विशेष रूप से खाली कैलोरी वाले अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड जो आवश्यक पोषक तत्व प्रदान नहीं करते हैं। अन्य कारणों के अलावा, इन फूड में चीनी की मात्रा अधिक होती है, जिससे नर्वस सिस्टम पर नकारात्मक असर पड़ता है। इस प्रकार, शोध में जिन प्रतिभागियों ने कथित तौर पर सबसे अधिक अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का सेवन किया, उनमें हल्के डिप्रेशन की रेट काफी अधिक थी और उन्होंने काफी अधिक एंग्जाइटी और मानसिक रूप से अस्वस्थ दिनों की सूचना दी। Disclaimer: इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव कोशिश किया गया है। हालांकि इसकी नैतिक जिम्मेदारी ज़ी न्यूज़ हिन्दी की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र अनुरोध है कि किसी भी तरीका को आजमाने से पहले अपने डॉक्टर से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी उपलब्ध कराना मात्र है।
Mental health: स्वास्थ्य वर्धक रहने के लिए अच्छी चीजें खाना बहुत महत्वपूर्ण होता है। हेल्दी फूड न सिर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है। फास्ट फूड से भरपूर डाइट विभिन्न रोंगों को जन्म दे सकती है। मानसिक रोग जैसे- डिप्रेशन और एंग्जाइटी के कई कारणों के पीछे भोजन भी है। जर्नल हॉस्पिटल न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक खान के व्यवहार और तनाव, एंग्जाइटी और डिप्रेशन के बीच एक लिंक है। इस शोध में यूनिवर्सिटी के एक हज़ार पचपन विद्यार्थियों को शामिल किया गया, जो बहुत अधिक जंक फूड का सेवन करते हैं। इस रिसर्च में यह बात सामने आई कि अनहेल्दी फूड विद्यार्थियों के एंग्जाइटी, डिप्रेशन और तनाव के प्रसार से जरूरी रूप से संबंधित था। हालांकि, उस फूड ग्रुप में कुछ ऐसी चीजें भी होती हैं, जिनका कुछ डिसऑर्डर से खास संबंध होता है। जर्नल साइकोलॉजी में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, सबसे गंभीर बात यह है कि उन फूड में साठ% कैलोरी होती है, जिनका सेवन ज्यादातर लोग प्रतिदिन करते हैं। यह आर्टिकल बताता है कि वहां बहुत सारे नुकसानदायक फूड हैं, विशेष रूप से खाली कैलोरी वाले अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड जो आवश्यक पोषक तत्व प्रदान नहीं करते हैं। अन्य कारणों के अलावा, इन फूड में चीनी की मात्रा अधिक होती है, जिससे नर्वस सिस्टम पर नकारात्मक असर पड़ता है। इस प्रकार, शोध में जिन प्रतिभागियों ने कथित तौर पर सबसे अधिक अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का सेवन किया, उनमें हल्के डिप्रेशन की रेट काफी अधिक थी और उन्होंने काफी अधिक एंग्जाइटी और मानसिक रूप से अस्वस्थ दिनों की सूचना दी। Disclaimer: इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव कोशिश किया गया है। हालांकि इसकी नैतिक जिम्मेदारी ज़ी न्यूज़ हिन्दी की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र अनुरोध है कि किसी भी तरीका को आजमाने से पहले अपने डॉक्टर से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी उपलब्ध कराना मात्र है।
"रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि पीसीए ढांचे का आशय आम जनता के लिए बैंकों के परिचालनों को सीमित करना नहीं है। आगे, सूचित किया जाता है कि रिज़र्व बैंक बैंकों की अच्छी वित्तीय स्थिति बनाए रखने के लिए अपने पर्यवेक्षी ढांचे के अंतर्गत विभिन्न उपायों/साधनों का उपयोग करता है। पीसीए ढांचा ऐसे ही पर्यवेक्षी साधनों में से एक है जिसमें समय पर चेतावनी कार्रवाई के रूप में बैंकों के कुछ कार्यनिष्पादन संकेतकों की निगरानी करना शामिल है तथा पूंजी, आस्ति गुणवत्ता आदि से संबंधित ऐसी थ्रेशोल्ड का उल्लंघन होते ही इस कार्रवाई को शुरू किया जाता है। इसका उद्देश्य बैंकों को समयबद्ध तरीके से रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित उपायों सहित सुधारात्मक उपाय करने की सुविधा प्रदान करना है जिससे कि उनकी वित्तीय स्थिति को पुनर्स्थापित किया जा सके। यह ढांचा रिज़र्व बैंक को उन क्षेत्रों में अधिक निकटता से प्रबंध-तंत्र के साथ मिलकर ऐसे बैंकों पर संकेंद्रित ध्यानाकर्षण करने का अवसर प्रदान करता है। इस प्रकार पीसीए ढांचा का आशय बैंकों को कतिपय जोखिमपूर्ण गतिविधियों से बचने के लिए प्रोत्साहित करना और पूंजी संरक्षण पर ध्यानकेंद्रित करना जिससे कि उनके तुलन-पत्रों को मजबूत बनाया जा सके। भारतीय रिज़र्व बैंक इसके द्वारा उपर्युक्त स्थिति को पुनःदोहराता है।
"रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि पीसीए ढांचे का आशय आम जनता के लिए बैंकों के परिचालनों को सीमित करना नहीं है। आगे, सूचित किया जाता है कि रिज़र्व बैंक बैंकों की अच्छी वित्तीय स्थिति बनाए रखने के लिए अपने पर्यवेक्षी ढांचे के अंतर्गत विभिन्न उपायों/साधनों का उपयोग करता है। पीसीए ढांचा ऐसे ही पर्यवेक्षी साधनों में से एक है जिसमें समय पर चेतावनी कार्रवाई के रूप में बैंकों के कुछ कार्यनिष्पादन संकेतकों की निगरानी करना शामिल है तथा पूंजी, आस्ति गुणवत्ता आदि से संबंधित ऐसी थ्रेशोल्ड का उल्लंघन होते ही इस कार्रवाई को शुरू किया जाता है। इसका उद्देश्य बैंकों को समयबद्ध तरीके से रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित उपायों सहित सुधारात्मक उपाय करने की सुविधा प्रदान करना है जिससे कि उनकी वित्तीय स्थिति को पुनर्स्थापित किया जा सके। यह ढांचा रिज़र्व बैंक को उन क्षेत्रों में अधिक निकटता से प्रबंध-तंत्र के साथ मिलकर ऐसे बैंकों पर संकेंद्रित ध्यानाकर्षण करने का अवसर प्रदान करता है। इस प्रकार पीसीए ढांचा का आशय बैंकों को कतिपय जोखिमपूर्ण गतिविधियों से बचने के लिए प्रोत्साहित करना और पूंजी संरक्षण पर ध्यानकेंद्रित करना जिससे कि उनके तुलन-पत्रों को मजबूत बनाया जा सके। भारतीय रिज़र्व बैंक इसके द्वारा उपर्युक्त स्थिति को पुनःदोहराता है।
पुख्यान किया हम तामे बनताना भाग-दाम मिला। मयतक मनुष्य अपना वृतियामा भार होता है तबतक वह भारी बना रहता है। सम्पजस व्यक्ति इसा बना रहता है। अनाश भल ही भारी बन भड़ा देनाको अपेक्षा घटपौनी होता है। व्यक्निको सबम पहले ममपित अपन प्रति अपन सत्यके प्रति होगा चाहिए। उसय बागायके प्रति वह सत्य समर्पित हो जायगा। कन्य प्रति समर्पित हुए बिना वह आचावरे प्रति भी समर्पित नही हो पाता। आचाममे साथ या सम्बन्धी आधारभर है। एसमे चिरहता है समनदा बनाव अडिग रहा है। जिला सध्यमान् सत्यकी प्राप्ति ह वह उसके लिए अपना सवस्व समर्पित कर देगा। के बाद भाग-धमकके प्रति समपन्य होना चाहिए। क्योकि सदयसे मिझ होने है। हमारे माय-बाप आचाम है। मन प्रति समयम वा टिया होता है - ानिक पीर नास्मिन बयानिक समपन बुद्धिया स्पस करता है उससे हृदय अभिभूत नहीं होता। हमार किए बधानिक समर्पण बहुत मूल्यमान नही होना चाहिए। विधान मात्र प्रेरक होता है और मर्यादाए मात्र सूचक होती है। सामुमोके रजोहरनको पायक कोन कॉमकर नही बात क्योकि उमम सूचक शक्ति यह दिसौको नही रोकता फिर भी कोई उसे कम नही जादा । जिस वैधानिकता पीछे मात्मीयता नहीं होती पहाँ प्रामाणिकता विजाना भर होती है। कोई दूसरा देता है वाचायके आवेधका पालन किया जाये और कोई नहीं देखता हो म आचायके आदेशका अतिक्रमण करनेने कोई सोच नहीं होता समितिमालका प्रथम नहीं होता। बहा गर विकासम्बन्ध बनानिष नही होता नहीं बात्माका समय होता है। यहाँ बजानिकता प्रथम होती है यहाँ मात्मा दम माती है। एक विचार थाता है-हम दूसरेम अपना बस्तिल विकीन मनी परें ? तुम भगन्ध पनि श्रीह
पुख्यान किया हम तामे बनताना भाग-दाम मिला। मयतक मनुष्य अपना वृतियामा भार होता है तबतक वह भारी बना रहता है। सम्पजस व्यक्ति इसा बना रहता है। अनाश भल ही भारी बन भड़ा देनाको अपेक्षा घटपौनी होता है। व्यक्निको सबम पहले ममपित अपन प्रति अपन सत्यके प्रति होगा चाहिए। उसय बागायके प्रति वह सत्य समर्पित हो जायगा। कन्य प्रति समर्पित हुए बिना वह आचावरे प्रति भी समर्पित नही हो पाता। आचाममे साथ या सम्बन्धी आधारभर है। एसमे चिरहता है समनदा बनाव अडिग रहा है। जिला सध्यमान् सत्यकी प्राप्ति ह वह उसके लिए अपना सवस्व समर्पित कर देगा। के बाद भाग-धमकके प्रति समपन्य होना चाहिए। क्योकि सदयसे मिझ होने है। हमारे माय-बाप आचाम है। मन प्रति समयम वा टिया होता है - ानिक पीर नास्मिन बयानिक समपन बुद्धिया स्पस करता है उससे हृदय अभिभूत नहीं होता। हमार किए बधानिक समर्पण बहुत मूल्यमान नही होना चाहिए। विधान मात्र प्रेरक होता है और मर्यादाए मात्र सूचक होती है। सामुमोके रजोहरनको पायक कोन कॉमकर नही बात क्योकि उमम सूचक शक्ति यह दिसौको नही रोकता फिर भी कोई उसे कम नही जादा । जिस वैधानिकता पीछे मात्मीयता नहीं होती पहाँ प्रामाणिकता विजाना भर होती है। कोई दूसरा देता है वाचायके आवेधका पालन किया जाये और कोई नहीं देखता हो म आचायके आदेशका अतिक्रमण करनेने कोई सोच नहीं होता समितिमालका प्रथम नहीं होता। बहा गर विकासम्बन्ध बनानिष नही होता नहीं बात्माका समय होता है। यहाँ बजानिकता प्रथम होती है यहाँ मात्मा दम माती है। एक विचार थाता है-हम दूसरेम अपना बस्तिल विकीन मनी परें ? तुम भगन्ध पनि श्रीह
उचकागांव, एक संवाददाता। स्थानीय थाना परिसर में रविवार को लाइसेंसी हथियारों के सत्यापन के लिए कैंप लगाया गया। जिसमें थाना क्षेत्र के अंतर्गत उचकागांव प्रखंड के 14 और थावे प्रखंड की दो पंचायतों से पहुंचे 80 लाइसेंसधारियों के हथियारों का सत्यापन किया गया। इसके साथ ही सार्वजनिक कार्यक्रम शादी समारोह आदि के मौके पर हथियारों का प्रदर्शन नहीं करने का निर्देश दिया गया। बताया जा रहा है कि बढ़ते हर्ष फायरिंग की घटनाओं को देखते हुए बिहार पुलिस द्वारा नया एसओपी जारी किया गया है। जिसके आलोक में एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर थाना परिसर में रविवार से कैंप की शुरुआत की गई। मौके पर थानाध्यक्ष सुभाष कुमार सिंह सहित अन्य पुलिस अफसर व जवान मौजूद रहे।
उचकागांव, एक संवाददाता। स्थानीय थाना परिसर में रविवार को लाइसेंसी हथियारों के सत्यापन के लिए कैंप लगाया गया। जिसमें थाना क्षेत्र के अंतर्गत उचकागांव प्रखंड के चौदह और थावे प्रखंड की दो पंचायतों से पहुंचे अस्सी लाइसेंसधारियों के हथियारों का सत्यापन किया गया। इसके साथ ही सार्वजनिक कार्यक्रम शादी समारोह आदि के मौके पर हथियारों का प्रदर्शन नहीं करने का निर्देश दिया गया। बताया जा रहा है कि बढ़ते हर्ष फायरिंग की घटनाओं को देखते हुए बिहार पुलिस द्वारा नया एसओपी जारी किया गया है। जिसके आलोक में एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर थाना परिसर में रविवार से कैंप की शुरुआत की गई। मौके पर थानाध्यक्ष सुभाष कुमार सिंह सहित अन्य पुलिस अफसर व जवान मौजूद रहे।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बैंक्वेट हॉल चलाने वाली एक कंपनी ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए दिल्ली सरकार के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें परिसर को विस्तारित कोविड अस्पताल में परिर्वितत करने के लिए अधिग्रहण किया गया है। याचिका में कहा गया है कि परिसर शादियों के लिए बुक है। यह याचिका वजीरपुर औद्योगिक क्षेत्र में'मरीना ड्रीम्स बैंक्वेट'चलाने वाली मैसर्स चिंतपूर्णी ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड ने दायर किया है। वीडियो जारी कर कांग्रेस ने पूछा- हमारे सैनिकों को दुश्मन के पास निहत्था क्यों भेजा गया? कंपनी ने दावा किया कि 12 जून के आदेश में जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन कानून (डीएमए) के प्रावधानों के तहत अधिग्रहण किया है यह विस्तारित कोविड अस्पताल में परिवर्तित करने के लिए किया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि यह आदेश कानून के विपरीत है और खारिज करने लायक है। यह याचिका बुधवार को न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह के समक्ष सुनवाई के लिए आई। उन्होंने सवाल किया कि क्या सामुदायिक केंद्रों, प्रदर्शनी हॉल और स्टेडियम जैसी सार्वजनिक संपत्ति का भी अधिग्रहण किया गया है। इस पर दिल्ली सरकार के वकील सत्यकाम ने कहा कि यह मुद्दा प्रासंगिक नहीं है क्योंकि सरकार को यह पहचान करने का अधिकार है कि कौन सी इकाई कोविड अस्पताल में परिर्वितत होने के लिए उपयुक्त और प्रभावी हैं। अनुराग कयश्प ने पूछा सवाल- China में सर्जिकल स्ट्राइक allowed नहीं है क्या? उन्होंने कहा कि वह बिना किसी पूर्वाग्रह के, उत्तर-पश्चिम दिल्ली क्षेत्र में उन सभी संपत्ति की सूची दाखिल करने के लिए तैयार हैं जिन्हें कोविड अस्पताल बनाने के लिए लिया गया है। अदालत ने कहा कि सूची 24 जून को अगली सुनवाई से कम से कम एक दिन पहले दाखिल की जाए।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बैंक्वेट हॉल चलाने वाली एक कंपनी ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए दिल्ली सरकार के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें परिसर को विस्तारित कोविड अस्पताल में परिर्वितत करने के लिए अधिग्रहण किया गया है। याचिका में कहा गया है कि परिसर शादियों के लिए बुक है। यह याचिका वजीरपुर औद्योगिक क्षेत्र में'मरीना ड्रीम्स बैंक्वेट'चलाने वाली मैसर्स चिंतपूर्णी ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड ने दायर किया है। वीडियो जारी कर कांग्रेस ने पूछा- हमारे सैनिकों को दुश्मन के पास निहत्था क्यों भेजा गया? कंपनी ने दावा किया कि बारह जून के आदेश में जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन कानून के प्रावधानों के तहत अधिग्रहण किया है यह विस्तारित कोविड अस्पताल में परिवर्तित करने के लिए किया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि यह आदेश कानून के विपरीत है और खारिज करने लायक है। यह याचिका बुधवार को न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह के समक्ष सुनवाई के लिए आई। उन्होंने सवाल किया कि क्या सामुदायिक केंद्रों, प्रदर्शनी हॉल और स्टेडियम जैसी सार्वजनिक संपत्ति का भी अधिग्रहण किया गया है। इस पर दिल्ली सरकार के वकील सत्यकाम ने कहा कि यह मुद्दा प्रासंगिक नहीं है क्योंकि सरकार को यह पहचान करने का अधिकार है कि कौन सी इकाई कोविड अस्पताल में परिर्वितत होने के लिए उपयुक्त और प्रभावी हैं। अनुराग कयश्प ने पूछा सवाल- China में सर्जिकल स्ट्राइक allowed नहीं है क्या? उन्होंने कहा कि वह बिना किसी पूर्वाग्रह के, उत्तर-पश्चिम दिल्ली क्षेत्र में उन सभी संपत्ति की सूची दाखिल करने के लिए तैयार हैं जिन्हें कोविड अस्पताल बनाने के लिए लिया गया है। अदालत ने कहा कि सूची चौबीस जून को अगली सुनवाई से कम से कम एक दिन पहले दाखिल की जाए।
पर्यटन उद्योग में अग्रणी जगह हमेशा रही हैतुर्की। प्रत्येक वर्ष, यह अपने ओरिएंटल रूपों, स्नान हमाम, गर्म डिस्को और साफ समुद्र तटों के साथ पर्यटकों की एक बड़ी संख्या को लुभाता है। कई लोगों ने पहले ही होटल "यूटोपिया वर्ल्ड" (तुर्की) की सराहना की है। प्रशंसापत्र इसका सबूत हैं। और यह आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि होटल अपनी सुंदरता के साथ अद्भुत है। इसमें कई बागानों वाला एक बड़ा अच्छी तरह से तैयार क्षेत्र है, और खिड़कियों से एक शानदार पैनोरमा खुलता है। "यूटोपिया" समुद्र द्वारा सही स्थित है। होटल से आप भूमध्य सागर के मोहक परिदृश्य देख सकते हैं, तुर्की के रोलिंग पहाड़ियों में कई होटल और छोटे घर, लंबे समुद्र तट छाता और सूर्य लाउंजर्स के साथ कब्जे वाले हैं। "यूटोपिया वर्ल्ड" (तुर्की) सबसे पहले हैवास्तुकला की एक राजसी संरचना, जिसमें महल, आरामदायक बंगले, एक आधुनिक जल पार्क, खेल मैदान और, ज़ाहिर है, अंतहीन सीढ़ियों और सीढ़ियों के बुफे के सभी परिणामों को स्तरित कर सकते हैं। खैर, चूंकि यह भोजन के बारे में है, यह ध्यान देने योग्य है कि वे यहां पूरी तरह से खिलाए जाते हैं। व्यंजनों का एक विशाल और विविध चयन उदासीन भी सबसे भयानक नहीं छोड़ेगा। "यूटोपिया वर्ल्ड" (तुर्की) का अपना हैरेत और कंकड़ समुद्र तट, जो होटल से 150 मीटर की दूरी पर स्थित है। इसकी लंबाई 250 मीटर है। 2 बर्थ और एक विशेष मंच है जहां मेहमान धूप से स्नान कर सकते हैं। सूर्य लाउंजर्स, छाता, गद्दे और तौलिए मुफ्त में उपलब्ध कराए जाते हैं। विशेष खेल के लिए कयाक, पानी स्की, स्कूटर, केला, डाइविंग और अन्य भुगतान मनोरंजन हैं। होटल के पास एक जल पार्क है। यह 12 पानी की स्लाइड को समायोजित करता है, जिनमें से 4 विशेष रूप से बच्चों के लिए बनाए जाते हैं। 300 स्विमिंग पूल और 300 मीटर की लंबाई के साथ राफ्टिंग भी हैं। मेहमानों को फिटनेस सेंटर, वॉलीबॉल कोर्ट, मिनी-फुटबॉल, तुर्की बाथ, सौना, बच्चों के खेल का मैदान, बच्चों का बुफे, एम्फीथिएटर, सिनेमा, दुकानें और बहुत कुछ प्रदान किया जाता है। एक रूसी भाषा एनीमेशन है। हर दिन शो कार्यक्रम, बच्चों के डिस्को और बच्चों के लिए विभिन्न खेल होते हैं। "यूटोपिया वर्ल्ड" (तुर्की) में 5 9 5 कमरे शामिल हैंकमरे विशाल हैं। कई अपार्टमेंटों का दृश्य समुद्र में खुलता है। गैर धूम्रपान करने वालों के लिए कमरे हैं, विकलांग लोगों के लिए 2 कमरे हैं। कुछ लोग विला में नहीं रहना पसंद करते हैं, लेकिन मुख्य भवन में, इस तथ्य से यह समझाते हुए कि इमारत से रेस्तरां और समुद्र तट तक दूरी कम है। मानक कमरे में बालकनी या छत है,स्नान (शॉवर), शौचालय, सुरक्षित, वायरलेस इंटरनेट, टीवी, एयर कंडीशनिंग, हेअर ड्रायर, टेलीफोन, मिनी बार। हर दिन कमरे में साफ, सप्ताह में 2 बार बिस्तर लिनन बदल जाते हैं।
पर्यटन उद्योग में अग्रणी जगह हमेशा रही हैतुर्की। प्रत्येक वर्ष, यह अपने ओरिएंटल रूपों, स्नान हमाम, गर्म डिस्को और साफ समुद्र तटों के साथ पर्यटकों की एक बड़ी संख्या को लुभाता है। कई लोगों ने पहले ही होटल "यूटोपिया वर्ल्ड" की सराहना की है। प्रशंसापत्र इसका सबूत हैं। और यह आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि होटल अपनी सुंदरता के साथ अद्भुत है। इसमें कई बागानों वाला एक बड़ा अच्छी तरह से तैयार क्षेत्र है, और खिड़कियों से एक शानदार पैनोरमा खुलता है। "यूटोपिया" समुद्र द्वारा सही स्थित है। होटल से आप भूमध्य सागर के मोहक परिदृश्य देख सकते हैं, तुर्की के रोलिंग पहाड़ियों में कई होटल और छोटे घर, लंबे समुद्र तट छाता और सूर्य लाउंजर्स के साथ कब्जे वाले हैं। "यूटोपिया वर्ल्ड" सबसे पहले हैवास्तुकला की एक राजसी संरचना, जिसमें महल, आरामदायक बंगले, एक आधुनिक जल पार्क, खेल मैदान और, ज़ाहिर है, अंतहीन सीढ़ियों और सीढ़ियों के बुफे के सभी परिणामों को स्तरित कर सकते हैं। खैर, चूंकि यह भोजन के बारे में है, यह ध्यान देने योग्य है कि वे यहां पूरी तरह से खिलाए जाते हैं। व्यंजनों का एक विशाल और विविध चयन उदासीन भी सबसे भयानक नहीं छोड़ेगा। "यूटोपिया वर्ल्ड" का अपना हैरेत और कंकड़ समुद्र तट, जो होटल से एक सौ पचास मीटर की दूरी पर स्थित है। इसकी लंबाई दो सौ पचास मीटर है। दो बर्थ और एक विशेष मंच है जहां मेहमान धूप से स्नान कर सकते हैं। सूर्य लाउंजर्स, छाता, गद्दे और तौलिए मुफ्त में उपलब्ध कराए जाते हैं। विशेष खेल के लिए कयाक, पानी स्की, स्कूटर, केला, डाइविंग और अन्य भुगतान मनोरंजन हैं। होटल के पास एक जल पार्क है। यह बारह पानी की स्लाइड को समायोजित करता है, जिनमें से चार विशेष रूप से बच्चों के लिए बनाए जाते हैं। तीन सौ स्विमिंग पूल और तीन सौ मीटर की लंबाई के साथ राफ्टिंग भी हैं। मेहमानों को फिटनेस सेंटर, वॉलीबॉल कोर्ट, मिनी-फुटबॉल, तुर्की बाथ, सौना, बच्चों के खेल का मैदान, बच्चों का बुफे, एम्फीथिएटर, सिनेमा, दुकानें और बहुत कुछ प्रदान किया जाता है। एक रूसी भाषा एनीमेशन है। हर दिन शो कार्यक्रम, बच्चों के डिस्को और बच्चों के लिए विभिन्न खेल होते हैं। "यूटोपिया वर्ल्ड" में पाँच नौ पाँच कमरे शामिल हैंकमरे विशाल हैं। कई अपार्टमेंटों का दृश्य समुद्र में खुलता है। गैर धूम्रपान करने वालों के लिए कमरे हैं, विकलांग लोगों के लिए दो कमरे हैं। कुछ लोग विला में नहीं रहना पसंद करते हैं, लेकिन मुख्य भवन में, इस तथ्य से यह समझाते हुए कि इमारत से रेस्तरां और समुद्र तट तक दूरी कम है। मानक कमरे में बालकनी या छत है,स्नान , शौचालय, सुरक्षित, वायरलेस इंटरनेट, टीवी, एयर कंडीशनिंग, हेअर ड्रायर, टेलीफोन, मिनी बार। हर दिन कमरे में साफ, सप्ताह में दो बार बिस्तर लिनन बदल जाते हैं।
केतारः केतार प्रखण्ड अंतर्गत बलिगढ़ पंचायत मुखिया चम्पा देवी सहित दर्जनों ग्रामीणों ने शनिवार को हस्ताक्षर युक्त आवेदन बीडीओ मुकेश मछुआ को देकर चौपाल कार्य में बाधित करने वाले लोगों पर करवाई की मांग की है। दिए गए आवेदन में उलेख किया है कि दासीपुर के कुछ स्वार्थी लोग दासीपुर चौपाल कार्य में जान बूझ बाधा डालने का काम कर रहे है उक्त सभी लोग दासीपुर चौपाल का लाभुक भी नही है जो अच्छे कार्य होने के बाद भी बिरोध कर रहे है। आवेदन में मुखिया चम्पा देवी ने ग्राम सभा जे बाद कार्य की स्वीकृति दी गई है । आवेदन देने वालों में वार्ड सदस्य बच्चा देवी, रविन्द्र सोनी, बसन्त ठाकुर,मुंन्ना ठाकुर, चिता देवी, उमेन्द्र प्रसाद, देवनाथ ठाकुर सहित अन्य लोगो का नाम शामिल है।
केतारः केतार प्रखण्ड अंतर्गत बलिगढ़ पंचायत मुखिया चम्पा देवी सहित दर्जनों ग्रामीणों ने शनिवार को हस्ताक्षर युक्त आवेदन बीडीओ मुकेश मछुआ को देकर चौपाल कार्य में बाधित करने वाले लोगों पर करवाई की मांग की है। दिए गए आवेदन में उलेख किया है कि दासीपुर के कुछ स्वार्थी लोग दासीपुर चौपाल कार्य में जान बूझ बाधा डालने का काम कर रहे है उक्त सभी लोग दासीपुर चौपाल का लाभुक भी नही है जो अच्छे कार्य होने के बाद भी बिरोध कर रहे है। आवेदन में मुखिया चम्पा देवी ने ग्राम सभा जे बाद कार्य की स्वीकृति दी गई है । आवेदन देने वालों में वार्ड सदस्य बच्चा देवी, रविन्द्र सोनी, बसन्त ठाकुर,मुंन्ना ठाकुर, चिता देवी, उमेन्द्र प्रसाद, देवनाथ ठाकुर सहित अन्य लोगो का नाम शामिल है।
लगा। यह सब हो जाने के बाद रानी और कुमार सहित महाराज हरिश्चन्द्र सिहासन पर बैठाये गए और विश्वामित्र ने राजा के हाथ मे राजदड सौप दिया। प्रजा उनकी जय-जय बोलने लगी तथा बन्दीजन यशोगान करने लगे। विविध पकार के वाद्यो से सारा आकाश गूज उठा। सब लोगो ने यथाविधि, यथाशक्ति भेटे प्रस्तुत की और महाराज हरिश्चन्द्र ने उन सबका यथोचित आदर सत्कार किया । राज्याभषेक का कार्य सम्पन्न हो जाने के पश्चात् सभा- मच पर खडे होकर इन्द्र कहने लगे- एक दिन वह था जब मैने अपनी सभा मे महाराज हरिश्चन्द्र के सत्य की प्रशसा की थी और एक दिन आज का है जबकि मै उनके सम्मुख ही उनकी प्रशसा करने के लिए खडा हू । पूर्व मे मेरे द्वारा की गई प्रशसा वैसे ही थी जैसे सोने के केवल रग-रूप को देखकर सोना कहना और आज जो प्रशसा कर रहा हू वह सोने को तपाकर, कूटकर और काटकर परीक्षा करने के बाद सोना कहना जैसी है। यद्यपि मैं यह जानता हू कि महाराज हरिश्चन्द्र अपने कर्तव्यमार्ग पर महारानी तारा की सहायता से ही स्थिर हो सके है और उन्ही की सहायता से ही वे सत्य-पालन में समर्थ हुए हैं। लेकिन इसके साथ ही मुझे यह भी मालूम है कि भारत की ललनाये अपने पति के होते हुए अपनी प्रशसा की इच्छुक नही रहती । वे जो कुछ भी सत्कार्य करती है उसका श्रेय पति के गौरव को ही देती हैं और पति की प्रशसा मे प्रसन्न होती है तथा पति के गौरव को ही अपना गौरव समझती है। इसलिए मै महारानी तारा की पृथक् से प्रशसा न करके केवल महाराज हरिश्चन्द्र की ही प्रशसा करता हू जिनकी वे अर्धागिनी हैं । महाराज हरिश्चन्द्र के विषय में कुछ भी कहने से पहले मैं इस भारत और अयोध्या की जितनी भी प्रशसा करू वह कम है। जिसमे महाराज हरिश्चन्द्र जैसे सत्यधारी राजा विराजते है और जिनकी प्रजा भी सत्यपालन मे उनका अनुकरण करती है । यद्यपि महाराज हरिश्चन्द्र के सत्य-पालन की महिमा का पूर्णरूप से वर्णन करने मे तो भै समर्थ नही हू, तथापि इतना अवश्य कहूंगा कि महाराज हरिश्चन्द्र ने धर्म के मर्म को समझकर ही इतनी कष्ट सहन की तपस्या की है। साधारण मनुष्य तो इन पर पडे सकटो को सुनकर ही घबरा जाएगा। परन्तु उनको भी ये धैर्यपूर्वक सहते रहे ओर अपने सत्य से विचलित नहीं हुए। यही कारण है कि आज मनुष्य-लोक में ही नही किन्तु देवलोक हरिश्चन्द्र-तारा १९५
लगा। यह सब हो जाने के बाद रानी और कुमार सहित महाराज हरिश्चन्द्र सिहासन पर बैठाये गए और विश्वामित्र ने राजा के हाथ मे राजदड सौप दिया। प्रजा उनकी जय-जय बोलने लगी तथा बन्दीजन यशोगान करने लगे। विविध पकार के वाद्यो से सारा आकाश गूज उठा। सब लोगो ने यथाविधि, यथाशक्ति भेटे प्रस्तुत की और महाराज हरिश्चन्द्र ने उन सबका यथोचित आदर सत्कार किया । राज्याभषेक का कार्य सम्पन्न हो जाने के पश्चात् सभा- मच पर खडे होकर इन्द्र कहने लगे- एक दिन वह था जब मैने अपनी सभा मे महाराज हरिश्चन्द्र के सत्य की प्रशसा की थी और एक दिन आज का है जबकि मै उनके सम्मुख ही उनकी प्रशसा करने के लिए खडा हू । पूर्व मे मेरे द्वारा की गई प्रशसा वैसे ही थी जैसे सोने के केवल रग-रूप को देखकर सोना कहना और आज जो प्रशसा कर रहा हू वह सोने को तपाकर, कूटकर और काटकर परीक्षा करने के बाद सोना कहना जैसी है। यद्यपि मैं यह जानता हू कि महाराज हरिश्चन्द्र अपने कर्तव्यमार्ग पर महारानी तारा की सहायता से ही स्थिर हो सके है और उन्ही की सहायता से ही वे सत्य-पालन में समर्थ हुए हैं। लेकिन इसके साथ ही मुझे यह भी मालूम है कि भारत की ललनाये अपने पति के होते हुए अपनी प्रशसा की इच्छुक नही रहती । वे जो कुछ भी सत्कार्य करती है उसका श्रेय पति के गौरव को ही देती हैं और पति की प्रशसा मे प्रसन्न होती है तथा पति के गौरव को ही अपना गौरव समझती है। इसलिए मै महारानी तारा की पृथक् से प्रशसा न करके केवल महाराज हरिश्चन्द्र की ही प्रशसा करता हू जिनकी वे अर्धागिनी हैं । महाराज हरिश्चन्द्र के विषय में कुछ भी कहने से पहले मैं इस भारत और अयोध्या की जितनी भी प्रशसा करू वह कम है। जिसमे महाराज हरिश्चन्द्र जैसे सत्यधारी राजा विराजते है और जिनकी प्रजा भी सत्यपालन मे उनका अनुकरण करती है । यद्यपि महाराज हरिश्चन्द्र के सत्य-पालन की महिमा का पूर्णरूप से वर्णन करने मे तो भै समर्थ नही हू, तथापि इतना अवश्य कहूंगा कि महाराज हरिश्चन्द्र ने धर्म के मर्म को समझकर ही इतनी कष्ट सहन की तपस्या की है। साधारण मनुष्य तो इन पर पडे सकटो को सुनकर ही घबरा जाएगा। परन्तु उनको भी ये धैर्यपूर्वक सहते रहे ओर अपने सत्य से विचलित नहीं हुए। यही कारण है कि आज मनुष्य-लोक में ही नही किन्तु देवलोक हरिश्चन्द्र-तारा एक सौ पचानवे
राजकोट। भावनगर में विवाहेतर संबंध के शक में एक शख्स ने सरेआम सड़क कर अपनी पत्नी की चाकू मारकर मर्डर कर दी। शुक्रवार शाम शहर के व्यस्त रूपानी सर्कल के पास छाया राठौड़ नामक एक 50 वर्षीय स्त्री को उसके पति राजू ने पेट और हाथों में कई बार चाकू मार दिया था। हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने छाया को मृत घोषित कर दिया। मृतका छाया की बहू नेहा की ओर से दर्ज कराई गई कम्पलेन में बोला गया है कि दंपति के बेटे कुलदीप की विवाह के बाद से पिछले तीन वर्ष से उसके सास और ससुर में लगातार झगड़ा होता रहता था। टाइम्स ऑफ इण्डिया की एक समाचार के अनुसार राजू को संदेह था कि वेला भरवाड़ नाम के एक आदमी के साथ छाया के गैर कानूनी संबंध थे। राजू और छाया तबसे अलग रहने लगे और राजू रहने के लिए सूरत भी चला गया था। हालांकि वह कुछ समय बाद भावनगर लौट आया लेकिन परिवार से अलग रहने लगा। रोज हो रहे झगड़ों से तंग आकर कुलदीप और नेहा भी अलग रहने चले गए। कुलदीप का कैटरिंग का बिजनेस है। शुक्रवार शाम को कुलदीप ट्रेन से मुंबई के लिए निकला था। लगभग 8:30 बजे नेहा के पास कुलदीप का टेलीफोन आया। जिसने उसे बताया कि उसके पिता ने उसकी मां को चाकू मार दिया है। कुलदीप ने नेहा को अपनी घायल मां के पास हॉस्पिटल जाने के लिए कहा। जब तक नेहा वहां पहुंची तो डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि छाया ने दम तोड़ दिया है। छाया और राजू की दो बेटियां और एक बेटा है जिनकी विवाह हो चुकी है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार की शाम छाया घर जा रही थी, तभी राजू वहां पहुंच गया और उसे बेरहमी से चाकू से वार करने लगा। मौके पर उपस्थित भरवाड़ ने एंबुलेंस बुलाई और घायल छाया को हॉस्पिटल ले गया।
राजकोट। भावनगर में विवाहेतर संबंध के शक में एक शख्स ने सरेआम सड़क कर अपनी पत्नी की चाकू मारकर मर्डर कर दी। शुक्रवार शाम शहर के व्यस्त रूपानी सर्कल के पास छाया राठौड़ नामक एक पचास वर्षीय स्त्री को उसके पति राजू ने पेट और हाथों में कई बार चाकू मार दिया था। हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने छाया को मृत घोषित कर दिया। मृतका छाया की बहू नेहा की ओर से दर्ज कराई गई कम्पलेन में बोला गया है कि दंपति के बेटे कुलदीप की विवाह के बाद से पिछले तीन वर्ष से उसके सास और ससुर में लगातार झगड़ा होता रहता था। टाइम्स ऑफ इण्डिया की एक समाचार के अनुसार राजू को संदेह था कि वेला भरवाड़ नाम के एक आदमी के साथ छाया के गैर कानूनी संबंध थे। राजू और छाया तबसे अलग रहने लगे और राजू रहने के लिए सूरत भी चला गया था। हालांकि वह कुछ समय बाद भावनगर लौट आया लेकिन परिवार से अलग रहने लगा। रोज हो रहे झगड़ों से तंग आकर कुलदीप और नेहा भी अलग रहने चले गए। कुलदीप का कैटरिंग का बिजनेस है। शुक्रवार शाम को कुलदीप ट्रेन से मुंबई के लिए निकला था। लगभग आठ:तीस बजे नेहा के पास कुलदीप का टेलीफोन आया। जिसने उसे बताया कि उसके पिता ने उसकी मां को चाकू मार दिया है। कुलदीप ने नेहा को अपनी घायल मां के पास हॉस्पिटल जाने के लिए कहा। जब तक नेहा वहां पहुंची तो डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि छाया ने दम तोड़ दिया है। छाया और राजू की दो बेटियां और एक बेटा है जिनकी विवाह हो चुकी है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार की शाम छाया घर जा रही थी, तभी राजू वहां पहुंच गया और उसे बेरहमी से चाकू से वार करने लगा। मौके पर उपस्थित भरवाड़ ने एंबुलेंस बुलाई और घायल छाया को हॉस्पिटल ले गया।
अफगानिस्तान पर कब्जा कर लेने के बाद तालिबान के पास युद्ध जीतने से भी बड़ी चुनौती है और वह है प्रशासन चलाना। अफगानिस्तान में बड़ी उथल-पुथल, आर्थिक संकट के साथ अब लोग बेरोजगारी और गरीबी की तरफ बढ़ रहे हैं। देश के आम लोग दो वक्त का खाना खाने के लिए अपने घर का कीमती सामान बेचने को मजबूर हैं। अफगानिस्तान की सड़के साप्ताहिक बाजारों में बदल गई हैं, जहां लोग अपने घरों का सामना बेचने के लिए इकट्ठा होते रहते हैं। अफगान के लोग जो पहले सरकारी नौकरियों का आनंद ले रहे थे या निजी क्षेत्र में काम कर रहे थे, उन्हें रातोंरात बेरोजगार कर दिया गया है। टोलो न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अफगानों ने अब काबुल की सड़कों को साप्ताहिक बाजारों में बदल दिया है जहां वे अपने घरेलू सामान को सस्ते दामों पर बेच रहे हैं ताकि वे अपने परिवार को भोजन मुहैया करा सकें। कुछ लोगों ने तो काबुल के एक पार्क चमन-ए-होजोरी की ओर जाने वाली सड़कों पर इन बाजारों में 1 लाख का सामान 20 हजार से से भी कम में बेचा है। सड़कों के नजारे हैरान करने वाले हैं जहां अफगान के लोग रेफ्रिजरेटर, टेलीविजन सेट, सोफा, अलमारी और हर दूसरे घरेलू फर्नीचर, उपकरण को बेचने के लिए लाइन में लगते दिखाई दे रहे हैं।
अफगानिस्तान पर कब्जा कर लेने के बाद तालिबान के पास युद्ध जीतने से भी बड़ी चुनौती है और वह है प्रशासन चलाना। अफगानिस्तान में बड़ी उथल-पुथल, आर्थिक संकट के साथ अब लोग बेरोजगारी और गरीबी की तरफ बढ़ रहे हैं। देश के आम लोग दो वक्त का खाना खाने के लिए अपने घर का कीमती सामान बेचने को मजबूर हैं। अफगानिस्तान की सड़के साप्ताहिक बाजारों में बदल गई हैं, जहां लोग अपने घरों का सामना बेचने के लिए इकट्ठा होते रहते हैं। अफगान के लोग जो पहले सरकारी नौकरियों का आनंद ले रहे थे या निजी क्षेत्र में काम कर रहे थे, उन्हें रातोंरात बेरोजगार कर दिया गया है। टोलो न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अफगानों ने अब काबुल की सड़कों को साप्ताहिक बाजारों में बदल दिया है जहां वे अपने घरेलू सामान को सस्ते दामों पर बेच रहे हैं ताकि वे अपने परिवार को भोजन मुहैया करा सकें। कुछ लोगों ने तो काबुल के एक पार्क चमन-ए-होजोरी की ओर जाने वाली सड़कों पर इन बाजारों में एक लाख का सामान बीस हजार से से भी कम में बेचा है। सड़कों के नजारे हैरान करने वाले हैं जहां अफगान के लोग रेफ्रिजरेटर, टेलीविजन सेट, सोफा, अलमारी और हर दूसरे घरेलू फर्नीचर, उपकरण को बेचने के लिए लाइन में लगते दिखाई दे रहे हैं।
क्यों करण जौहर ने ब्रह्मास्त्र फिल्म पर खर्च किए 400 करोड़? इस लेख में हम आपको बताएंगे कि क्यों करण जौहर ने ब्रह्मास्त्र फिल्म पर खर्च किए 400 करोड़ रुपये। फिक्शन, माइथोलॉजी और एक्शन के मेल से बनी 'ब्रह्मास्त्र' फिल्म 9 सितंबर को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म के निर्देशक अयान मुखर्जी है। आपको बता दें कि इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, रणबीर कपूर, नागार्जुन, आलिया भट्ट और मौनी रॉय ने एक्टिंग करी है। करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन की यह मूवी कई सारी भाषाओं में रिलीज होगी। ब्रह्मास्त्र फिल्म को लेकर इसके मेकर्स का कहना हैं कि बॉलीवुड के इतिहास में यह सबसे बेहतरीन और महंगी फिल्म होगी। आपको बता दें कि करण जौहर ने इस फिल्म पर अब तक 400 करोड़ रुपये खर्च कर दिए है लेकिन उन्होंने इतने सारे पैसे क्यों खर्च किए है इसके बारे में जानने के लिए यह लेख अंत तक जरूर पढ़ें। क्यो खर्च किए करण जौहर ने 400 करोड़ रुपये? सोशल मीडिया पर कई लोग इस फिल्म का विरोध कर रहे हैं और यह भी सवील कर रहें है कि करण जौहर ने 400 करोड़ कहां खर्च किए हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि ब्रह्मास्त्र के ट्रेलर रिलीज पर एक महंगा लेजर शो हुआ था जिसमें यह पैसे खर्च हुए हैं। लोगों का कहना है कि इस फिल्म में पौराणिक चीजों को रियल दिखाने के लिए कई सारी स्पेशल इफेक्ट का यूज किया है। आपको बता दें कि ब्रह्मास्त्र फिल्म में भगवान शिव जी से जुड़ी हुई चीजों को दिखाया जाएगा। लेकिन ज्यादा स्पेशल इफेक्ट के कारण कुछ लोग इसे कार्टून मूवी से भी कंपेयर कर रहे हैं। इन विजुअल्स को देखने के बाद कुछ लोगों का कहना है कि करण जौहर ने पैसे फिल्म को बेहतर बनाने की बजाए इस फिल्म के सुपरस्टार्स की पेमेंट देने के लिए खर्च कर दिए हैं। यह बात ब्रह्मास्त्र के मेकर्स के खिलाफ जा सकती है। आपको बता दें कि हाल ही में फिल्म लाल सिंह चड्ढा और फिल्म लाइगर भी लोगों को कुछ खास पसंद नहीं आयी है। क्या एडवांस बुकिंग के आंकड़े होंगे सही? कई सिनेमा हाल में ब्रह्मास्त्र की एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है। एडवांस बुकिंग के कलेक्शन को देखते हुए मुवी मेकर्स इसे अच्छी शुरुआत बता रहें है लेकिन कुछ लोग इसे धर्मा प्रोडक्शन का पीआर स्टंट भी बता रहे हैं और दावा कर रहे कि फिल्म की हाइप बनाने के लिए एडवांस बुकिंग के बारे में बढ़ चढ़कर बताया जा रहा है। अब यह देखना होगा कि यह फिल्म कितनी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन करेगी। उम्मीद है कि आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया होगा। इसी तरह के अन्य आर्टिकल पढ़ने के लिए हमें कमेंट कर जरूर बताएं और जुड़ें रहें हमारी वेबसाइट हरजिंदगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
क्यों करण जौहर ने ब्रह्मास्त्र फिल्म पर खर्च किए चार सौ करोड़? इस लेख में हम आपको बताएंगे कि क्यों करण जौहर ने ब्रह्मास्त्र फिल्म पर खर्च किए चार सौ करोड़ रुपये। फिक्शन, माइथोलॉजी और एक्शन के मेल से बनी 'ब्रह्मास्त्र' फिल्म नौ सितंबर को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म के निर्देशक अयान मुखर्जी है। आपको बता दें कि इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, रणबीर कपूर, नागार्जुन, आलिया भट्ट और मौनी रॉय ने एक्टिंग करी है। करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन की यह मूवी कई सारी भाषाओं में रिलीज होगी। ब्रह्मास्त्र फिल्म को लेकर इसके मेकर्स का कहना हैं कि बॉलीवुड के इतिहास में यह सबसे बेहतरीन और महंगी फिल्म होगी। आपको बता दें कि करण जौहर ने इस फिल्म पर अब तक चार सौ करोड़ रुपये खर्च कर दिए है लेकिन उन्होंने इतने सारे पैसे क्यों खर्च किए है इसके बारे में जानने के लिए यह लेख अंत तक जरूर पढ़ें। क्यो खर्च किए करण जौहर ने चार सौ करोड़ रुपये? सोशल मीडिया पर कई लोग इस फिल्म का विरोध कर रहे हैं और यह भी सवील कर रहें है कि करण जौहर ने चार सौ करोड़ कहां खर्च किए हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि ब्रह्मास्त्र के ट्रेलर रिलीज पर एक महंगा लेजर शो हुआ था जिसमें यह पैसे खर्च हुए हैं। लोगों का कहना है कि इस फिल्म में पौराणिक चीजों को रियल दिखाने के लिए कई सारी स्पेशल इफेक्ट का यूज किया है। आपको बता दें कि ब्रह्मास्त्र फिल्म में भगवान शिव जी से जुड़ी हुई चीजों को दिखाया जाएगा। लेकिन ज्यादा स्पेशल इफेक्ट के कारण कुछ लोग इसे कार्टून मूवी से भी कंपेयर कर रहे हैं। इन विजुअल्स को देखने के बाद कुछ लोगों का कहना है कि करण जौहर ने पैसे फिल्म को बेहतर बनाने की बजाए इस फिल्म के सुपरस्टार्स की पेमेंट देने के लिए खर्च कर दिए हैं। यह बात ब्रह्मास्त्र के मेकर्स के खिलाफ जा सकती है। आपको बता दें कि हाल ही में फिल्म लाल सिंह चड्ढा और फिल्म लाइगर भी लोगों को कुछ खास पसंद नहीं आयी है। क्या एडवांस बुकिंग के आंकड़े होंगे सही? कई सिनेमा हाल में ब्रह्मास्त्र की एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है। एडवांस बुकिंग के कलेक्शन को देखते हुए मुवी मेकर्स इसे अच्छी शुरुआत बता रहें है लेकिन कुछ लोग इसे धर्मा प्रोडक्शन का पीआर स्टंट भी बता रहे हैं और दावा कर रहे कि फिल्म की हाइप बनाने के लिए एडवांस बुकिंग के बारे में बढ़ चढ़कर बताया जा रहा है। अब यह देखना होगा कि यह फिल्म कितनी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन करेगी। उम्मीद है कि आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया होगा। इसी तरह के अन्य आर्टिकल पढ़ने के लिए हमें कमेंट कर जरूर बताएं और जुड़ें रहें हमारी वेबसाइट हरजिंदगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
फर्जी प्रशिक्षु आईएएस रूबी चैधरी आखिरकार गिरफता कर ली गई और अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी (एलबीएसए) में छह माह तक वह फर्जी दस्तावेज पर रही थी और एक दिन वह अचानक गायब हो गई। इसके बाद रूबी के खिलाफ केस दर्ज किया गया। रूबी ने मीडिया के सामने स्वीकार किया कि उसने रिश्वत देकर नौकरी लेने की कोशिश की थी। उधर जागरण की रिपोर्ट के अनुसार अदालत में रूबी मीडिया के सामने कही गई बातों का उल्लेख नहीं किया। यहां तक कि उसने अपने बयान में अकादमी के उपनिदेशक सौरभ जैन का जिक्र तक नहीं किया है। दूसरी ओर पुलिस निलंबित गार्ड देव सिंह को भी मसूरी से गिरफ्तार कर देहरादून ले आई। रूबी इसी गार्ड के मकान में रह रही थी। शुक्रवार देर रात होटल से रूबी को गिरफ्तार करने के बाद विशेष जांच दल ने शनिवार सुबह दून चिकित्सालय में उसका मेडिकल कराया और उसे लेकर राजपुर थाने पहुंची। यहां करीब साढ़े तीन घंटे तक पूछताछ की। शाम चार बजे कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस रूबी को लेकर न्यायिक दंडाधिकारी (द्वितीय) छवि बंसल के कोर्ट में पहुंची। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश करते हुए तीन दिन की रिमांड के लिए अर्जी लगाई। पुलिस का तर्क था कि अभी तक रूबी का लैपटॉप और कुछ अन्य सामान की भी बरामदगी की जानी है। वहीं बचाव पक्ष ने अभियोजनों की दलीलों खारिज करते हुए कहा कि पुलिस केवल रूबी को ही आरोपी बनाना चाहती है। अदालत में रूबी मीडिया के सामने कही गई बातों से पलट गई। मीडिया से उसने कहा था कि उसके कमरे से मिला एसडीएम का परिचय पत्र उसे उपनिदेशक सौरभ जैन ने दिया था, लेकिन अदालत में कहा कि परिचय पत्र उसने पचास रुपये देकर खुद बनवाया था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने रूबी को जेल भेजने के आदेश दिए और कहा कि रिमांड अर्जी पर सुनवाई सोमवार को होगी। मसूरी में भी दिनभर गहमागहमी रही। पुलिस ने शनिवार को भी अकादमी में छानबीन की। दोपहर बाद साढ़े तीन बजे एसआइटी ने अकादमी के निलंबित गार्ड देव सिंह को गिरफ्तार कर लिया। गौरतलब है कि रूबी देव सिंह के ही मकान में रह रही थी। रूबी का दावा था कि वह देव सिंह को प्रतिमाह 1500 रुपये किराया देती थी। देर शाम पुलिस ने देव सिंह को भी अदालत में पेश किया।
फर्जी प्रशिक्षु आईएएस रूबी चैधरी आखिरकार गिरफता कर ली गई और अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी में छह माह तक वह फर्जी दस्तावेज पर रही थी और एक दिन वह अचानक गायब हो गई। इसके बाद रूबी के खिलाफ केस दर्ज किया गया। रूबी ने मीडिया के सामने स्वीकार किया कि उसने रिश्वत देकर नौकरी लेने की कोशिश की थी। उधर जागरण की रिपोर्ट के अनुसार अदालत में रूबी मीडिया के सामने कही गई बातों का उल्लेख नहीं किया। यहां तक कि उसने अपने बयान में अकादमी के उपनिदेशक सौरभ जैन का जिक्र तक नहीं किया है। दूसरी ओर पुलिस निलंबित गार्ड देव सिंह को भी मसूरी से गिरफ्तार कर देहरादून ले आई। रूबी इसी गार्ड के मकान में रह रही थी। शुक्रवार देर रात होटल से रूबी को गिरफ्तार करने के बाद विशेष जांच दल ने शनिवार सुबह दून चिकित्सालय में उसका मेडिकल कराया और उसे लेकर राजपुर थाने पहुंची। यहां करीब साढ़े तीन घंटे तक पूछताछ की। शाम चार बजे कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस रूबी को लेकर न्यायिक दंडाधिकारी छवि बंसल के कोर्ट में पहुंची। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश करते हुए तीन दिन की रिमांड के लिए अर्जी लगाई। पुलिस का तर्क था कि अभी तक रूबी का लैपटॉप और कुछ अन्य सामान की भी बरामदगी की जानी है। वहीं बचाव पक्ष ने अभियोजनों की दलीलों खारिज करते हुए कहा कि पुलिस केवल रूबी को ही आरोपी बनाना चाहती है। अदालत में रूबी मीडिया के सामने कही गई बातों से पलट गई। मीडिया से उसने कहा था कि उसके कमरे से मिला एसडीएम का परिचय पत्र उसे उपनिदेशक सौरभ जैन ने दिया था, लेकिन अदालत में कहा कि परिचय पत्र उसने पचास रुपये देकर खुद बनवाया था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने रूबी को जेल भेजने के आदेश दिए और कहा कि रिमांड अर्जी पर सुनवाई सोमवार को होगी। मसूरी में भी दिनभर गहमागहमी रही। पुलिस ने शनिवार को भी अकादमी में छानबीन की। दोपहर बाद साढ़े तीन बजे एसआइटी ने अकादमी के निलंबित गार्ड देव सिंह को गिरफ्तार कर लिया। गौरतलब है कि रूबी देव सिंह के ही मकान में रह रही थी। रूबी का दावा था कि वह देव सिंह को प्रतिमाह एक हज़ार पाँच सौ रुपयापये किराया देती थी। देर शाम पुलिस ने देव सिंह को भी अदालत में पेश किया।
देश के 154 प्रबुद्ध नागरिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा की अपील करते हुए संशोधित नागरिकता कानून के विरोध के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया । नई दिल्ली. देश के 154 प्रबुद्ध नागरिकों ने शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा की अपील करते हुए संशोधित नागरिकता कानून के विरोध के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति से अपील करने वाले इन प्रबुद्ध नागरिकों में पूर्व न्यायाधीश, नौकरशाह, रक्षा कर्मी आदि शामिल हैं । पूर्व न्यायाधीश प्रमोद कोहली के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की और दावा किया कि कुछ राजनीतिक तत्वों के दबाव में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है । (ये खबर न्यूज एजेंसी पीटीआई/भाषा की है। एशियानेट न्यूज हिन्दी ने सिर्फ हेडिंग में बदलाव किया है। )
देश के एक सौ चौवन प्रबुद्ध नागरिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा की अपील करते हुए संशोधित नागरिकता कानून के विरोध के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया । नई दिल्ली. देश के एक सौ चौवन प्रबुद्ध नागरिकों ने शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा की अपील करते हुए संशोधित नागरिकता कानून के विरोध के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति से अपील करने वाले इन प्रबुद्ध नागरिकों में पूर्व न्यायाधीश, नौकरशाह, रक्षा कर्मी आदि शामिल हैं । पूर्व न्यायाधीश प्रमोद कोहली के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की और दावा किया कि कुछ राजनीतिक तत्वों के दबाव में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है ।
SSB 10th pass sarkari naukri: सशस्त्र सीमा बल ने दसवीं पास लड़के और लड़कियों को नौकरी पाने का सुनहरा मौका दिया है. उम्मीदवारों की शैक्षिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से मैट्रिकुलेशन या इसके समकक्ष होना जरूरी है. लेकिन साथ ही उन्हें PET (Physical Efficiency Test) भी पास करना होगा, जानिए क्या होंगे इस टेस्ट के मानक, कैसे करें आवेदन, कैसे करें तैयारी, पूरी डिटेल पढ़ें. अगर पीईटी टेस्ट की बात करें तो कांस्टेबल पोस्ट के लिए दौड़ का क्राइटेरिया रखा गया है. इसमें पुरुष अभ्यर्थियों को 24 मिनट में 4. 8 किमी दौड़ पास करनी होगी. वहीं महिला अभ्यर्थियों के लिए ये 2. 4 किमी है जिसे उन्हें 18 मिनट में पास करना होगा. बता दें कि पीईटी परीक्षण से एक्स सर्विसमैन को बाहर रखा गया है. लेकिन उन्हें रीक्रूटमेंट की दूसरी स्टेज पास करनी होंगी, इसमें पीएसटी यानी फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट शामिल है. इसके अलावा लिखित परीक्षा, स्किल टेस्ट और मेडिकल एग्जामिनेशन भी देना होगा. बता दें कि पीईटी पास करने के बाद पीएसटी टेस्ट देना होता है. इसमें हाइट और चेस्ट आदि की माप शामिल होती है. जो उम्मीदवार पीएसटी पास करेंगे उन्हें लिखित परीक्षा देनी होगी. ये एक कॉमन एंट्रेंस परीक्षा होगी जो दो घंटे की होगी. इसमें 100 नंबर के ऑब्जेक्टिव टाइप सवाल पूछे जाएंगे. पास होने के लिए सामान्य और एक्स सर्विसमेन को मिनिमम क्वालीफाइंग नंबर 50 पर्सेंट और एससी एसटी कैटेगरी को 45 पर्सेंट लाने होंगे. उम्मीदवारों को अगर इस परीक्षा में पास होना है तो उन्हें जनरल नॉलेज यानी सामान्य ज्ञान, गणित, रीजनिंग की तैयारी करनी चाहिए. इसके अलावा जनरल हिंदी और जनरल इंग्लिश से भी सवाल पूछे जाएंगे. इसकी तैयारी के लिए प्रतियोगी पुस्तकों का सहारा ले सकते हैं. बता दें कि SSB ने कांस्टेबल के पदों पर बंपर वैकेंसी निकाली है. इस पर 1500 से ज्यादा उम्मीदवारों की भर्ती होगी. इन पदों पर 29 अगस्त से आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है. इच्छुक उम्मीदवार एसएसबी की वेबसाइट ssb. nic. in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि- 27 सितंबर 2020 है. उपरोक्त पदों पर आवेदन करने के लिए वर्ग के अनुसार उम्मीदवारों के लिए शुल्क का निर्धारण किया गया है. इसके तहत सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस वर्ग को 100 रुपये, जबकि एससी, एसटी, महिला वर्ग के लिए आवेदन निःशुल्क है. शुल्क का भुगतान क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या ई-चालान के माध्यम से किया जा सकता है. इन पदों पर चयनति उम्मीदवारों को वेतनमान के तौर पर 21700 से 69100/- रुपये दिए जाने का प्रावधान है. आवेदन करने के लिए उम्मीवदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और दिए गए निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें. आधिकारिक नोटिफिकेशन से जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां क्लिक करें.
SSB दसth pass sarkari naukri: सशस्त्र सीमा बल ने दसवीं पास लड़के और लड़कियों को नौकरी पाने का सुनहरा मौका दिया है. उम्मीदवारों की शैक्षिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से मैट्रिकुलेशन या इसके समकक्ष होना जरूरी है. लेकिन साथ ही उन्हें PET भी पास करना होगा, जानिए क्या होंगे इस टेस्ट के मानक, कैसे करें आवेदन, कैसे करें तैयारी, पूरी डिटेल पढ़ें. अगर पीईटी टेस्ट की बात करें तो कांस्टेबल पोस्ट के लिए दौड़ का क्राइटेरिया रखा गया है. इसमें पुरुष अभ्यर्थियों को चौबीस मिनट में चार. आठ किमी दौड़ पास करनी होगी. वहीं महिला अभ्यर्थियों के लिए ये दो. चार किमी है जिसे उन्हें अट्ठारह मिनट में पास करना होगा. बता दें कि पीईटी परीक्षण से एक्स सर्विसमैन को बाहर रखा गया है. लेकिन उन्हें रीक्रूटमेंट की दूसरी स्टेज पास करनी होंगी, इसमें पीएसटी यानी फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट शामिल है. इसके अलावा लिखित परीक्षा, स्किल टेस्ट और मेडिकल एग्जामिनेशन भी देना होगा. बता दें कि पीईटी पास करने के बाद पीएसटी टेस्ट देना होता है. इसमें हाइट और चेस्ट आदि की माप शामिल होती है. जो उम्मीदवार पीएसटी पास करेंगे उन्हें लिखित परीक्षा देनी होगी. ये एक कॉमन एंट्रेंस परीक्षा होगी जो दो घंटे की होगी. इसमें एक सौ नंबर के ऑब्जेक्टिव टाइप सवाल पूछे जाएंगे. पास होने के लिए सामान्य और एक्स सर्विसमेन को मिनिमम क्वालीफाइंग नंबर पचास पर्सेंट और एससी एसटी कैटेगरी को पैंतालीस पर्सेंट लाने होंगे. उम्मीदवारों को अगर इस परीक्षा में पास होना है तो उन्हें जनरल नॉलेज यानी सामान्य ज्ञान, गणित, रीजनिंग की तैयारी करनी चाहिए. इसके अलावा जनरल हिंदी और जनरल इंग्लिश से भी सवाल पूछे जाएंगे. इसकी तैयारी के लिए प्रतियोगी पुस्तकों का सहारा ले सकते हैं. बता दें कि SSB ने कांस्टेबल के पदों पर बंपर वैकेंसी निकाली है. इस पर एक हज़ार पाँच सौ से ज्यादा उम्मीदवारों की भर्ती होगी. इन पदों पर उनतीस अगस्त से आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है. इच्छुक उम्मीदवार एसएसबी की वेबसाइट ssb. nic. in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि- सत्ताईस सितंबर दो हज़ार बीस है. उपरोक्त पदों पर आवेदन करने के लिए वर्ग के अनुसार उम्मीदवारों के लिए शुल्क का निर्धारण किया गया है. इसके तहत सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस वर्ग को एक सौ रुपयापये, जबकि एससी, एसटी, महिला वर्ग के लिए आवेदन निःशुल्क है. शुल्क का भुगतान क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या ई-चालान के माध्यम से किया जा सकता है. इन पदों पर चयनति उम्मीदवारों को वेतनमान के तौर पर इक्कीस हज़ार सात सौ से उनहत्तर हज़ार एक सौ/- रुपये दिए जाने का प्रावधान है. आवेदन करने के लिए उम्मीवदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और दिए गए निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें. आधिकारिक नोटिफिकेशन से जानकारी प्राप्त करने के लिए यहां क्लिक करें.
IND vs WI LIVE: भारत और वेस्टइंडीज (IND vs WI) के बीच दूसरा वनडे मैच खेला जा रहा है। पोर्ट ऑफ स्पेन (Port Of Spain) के क्वीन्स पार्क ओवल (Queens Park Oval) में खेले जा रहे इस मुकाबले में टीम इंडिया (Team India) की तरफ से गेंदबाज आवेश खान (Avesh Khan) को वनडे डेब्यू का मौका मिला है। दरअसल इन दिनों आवेश खान बेहद शानदार फॉर्म में चल रहे हैं, उनके पास वो काबिलियत हैं जिसके दम पर वो गेम का रुख अपनी ओर मोड़ सकते हैं। इसके साथ ही वो डेथ ओवर्स में बेहद ही किफायती गेंदबाजी करने के लिए जाने जाते हैं। बता दें कि आवेश खान ने अपने करियर में 9टी20 मुकाबलों में 8विकेट अपने नाम किए हैं। घरेलू मैचों में उन्होंने फर्स्ट क्लास की 47 पारियों में 100 विकेट अपने नाम किए। जबकि लिस्ट ए के 22 मुकाबलों में 17 विकेट झटके। लाइन और लेंथ के महारथी आवेश को इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में मौका नहीं मिल पाया था। जिस कारण वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे में उनका इंतजार खत्म हुआ और उन्हें टीम इंडिया की टोपी मिल गई। उनके डेब्यू के दौरान कप्तान धवन ने उन्हें कैप दी। इस दौरान वहां कोच द्रविड़ भी मौजूद रहे, साथ ही सपोर्ट स्टाफ मौजूद रहे। आईपीएल की बात करें तो वो 15वें सीजन में लखनऊ सुपर जायंट्स की तरफ से खेले और अपनी शानदार गेंदबाजी से सबको प्रभावित भी किया। अबतक के आईपीएल इतिहास में उन्होंने 38 मैच में 47 विकेट अपने नाम किए। यह भी पढ़ेंः IND vs WI T20 Series: टी20 स्क्वॉड में शामिल प्लेयर्स आज हो रहे हैं विंडीज के लिए रवाना, KL Rahul नहीं होंगे साथ! दाएं हाथ के तेज गेंदबाज आवेश के क्रिकेट करियर की बात करें तो उनका घरेलू मैचों में प्रदर्शन अच्छा रहा है। आईपीएल के दम पर ही उन्हें टीम इंडिया में शामिल किया गया। इसी साल 20 फरवरी को उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ ही अपनी टी20 डेब्यू किया था। कई मौकों पर वो बेहतरीन गेंदबाजी कर चुके हैं। पिछले कुछ समय में उन्होंने अपनी गेंदबाजी से सभी का दिल जीता है। 25 साल के इस गेंदबाज की वेस्टइंडीज के खिलाफ अग्निपरीक्षा है, अगर वो बेहतर प्रदर्शन करते हैं तो टी20 वर्ल्डकप के लिए उनका टिकट पक्का हो सकता है। क्रिकेट और अन्य खेल से सम्बंधित खबरों को पढ़ने के लिए हमें गूगल न्यूज (Google News) पर फॉलो करें।
IND vs WI LIVE: भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरा वनडे मैच खेला जा रहा है। पोर्ट ऑफ स्पेन के क्वीन्स पार्क ओवल में खेले जा रहे इस मुकाबले में टीम इंडिया की तरफ से गेंदबाज आवेश खान को वनडे डेब्यू का मौका मिला है। दरअसल इन दिनों आवेश खान बेहद शानदार फॉर्म में चल रहे हैं, उनके पास वो काबिलियत हैं जिसके दम पर वो गेम का रुख अपनी ओर मोड़ सकते हैं। इसके साथ ही वो डेथ ओवर्स में बेहद ही किफायती गेंदबाजी करने के लिए जाने जाते हैं। बता दें कि आवेश खान ने अपने करियर में नौटीबीस मुकाबलों में आठविकेट अपने नाम किए हैं। घरेलू मैचों में उन्होंने फर्स्ट क्लास की सैंतालीस पारियों में एक सौ विकेट अपने नाम किए। जबकि लिस्ट ए के बाईस मुकाबलों में सत्रह विकेट झटके। लाइन और लेंथ के महारथी आवेश को इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में मौका नहीं मिल पाया था। जिस कारण वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे में उनका इंतजार खत्म हुआ और उन्हें टीम इंडिया की टोपी मिल गई। उनके डेब्यू के दौरान कप्तान धवन ने उन्हें कैप दी। इस दौरान वहां कोच द्रविड़ भी मौजूद रहे, साथ ही सपोर्ट स्टाफ मौजूद रहे। आईपीएल की बात करें तो वो पंद्रहवें सीजन में लखनऊ सुपर जायंट्स की तरफ से खेले और अपनी शानदार गेंदबाजी से सबको प्रभावित भी किया। अबतक के आईपीएल इतिहास में उन्होंने अड़तीस मैच में सैंतालीस विकेट अपने नाम किए। यह भी पढ़ेंः IND vs WI Tबीस Series: टीबीस स्क्वॉड में शामिल प्लेयर्स आज हो रहे हैं विंडीज के लिए रवाना, KL Rahul नहीं होंगे साथ! दाएं हाथ के तेज गेंदबाज आवेश के क्रिकेट करियर की बात करें तो उनका घरेलू मैचों में प्रदर्शन अच्छा रहा है। आईपीएल के दम पर ही उन्हें टीम इंडिया में शामिल किया गया। इसी साल बीस फरवरी को उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ ही अपनी टीबीस डेब्यू किया था। कई मौकों पर वो बेहतरीन गेंदबाजी कर चुके हैं। पिछले कुछ समय में उन्होंने अपनी गेंदबाजी से सभी का दिल जीता है। पच्चीस साल के इस गेंदबाज की वेस्टइंडीज के खिलाफ अग्निपरीक्षा है, अगर वो बेहतर प्रदर्शन करते हैं तो टीबीस वर्ल्डकप के लिए उनका टिकट पक्का हो सकता है। क्रिकेट और अन्य खेल से सम्बंधित खबरों को पढ़ने के लिए हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें।
SSC GD Constable Sarkari Result 2023 Date and Time Kab Aayega: एसएससी जीडी कॉन्स्टेबल रिजल्ट 2023 जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर जारी होने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार, परिणाम मार्च के अंत तक जारी होने की उम्मीद है, हालांकि आयोग की ओर से आधिकारिक तौर पर डेट की घोषणा अब तक नहीं की गई है। PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ? Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले 9 सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया' Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ? Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार !
SSC GD Constable Sarkari Result दो हज़ार तेईस Date and Time Kab Aayega: एसएससी जीडी कॉन्स्टेबल रिजल्ट दो हज़ार तेईस जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट ssc. nic. in पर जारी होने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार, परिणाम मार्च के अंत तक जारी होने की उम्मीद है, हालांकि आयोग की ओर से आधिकारिक तौर पर डेट की घोषणा अब तक नहीं की गई है। PM Modi के USA दौरे को लेकर राजदूत ने क्या कहा ? Exclusive Interview में Ashwini Vaishnaw ने कहा, 'पिछले नौ सालों में PM Modi ने रेलवे को ट्रांसफॉर्म किया' Sawal Public Ka : Navika से पहलवानों के प्रदर्शन पर क्या बोली स्मृति ईरानी ? Opinion India Ka : 'गॉडमदर' कहां फरार. . एक्सपोज हुए सारे मददगार !
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ बगावती सुर अपनाने वालों में परगट सिंह के अलावा जालंधर के तीन विधायक शामिल हैं। नार्थ हलके से विधायक बावा हैनरी और करतारपुर के विधायक चौधरी सुरेंद्र सिंह भी नवजोत सिंह सिद्धू का समर्थन कर चुके हैं। जगजीत सिंह सुशांत, जालंधर। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Punjab CM Captain Amrinder Singh) को पद से हटाने के लिए पार्टी हाईकमान से मिलने जाने वाले विधायकों के गुट का नेतृत्व पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) के करीबी साथी और जालंधर कैंट के विधायक परगट सिंह (Pargat Singh MLA) करेंगे। मुख्यमंत्री के खिलाफ बगावती सुर अपनाने वालों की गिनती और दोआबा में भी तेजी से बढ़ती जा रही है। परगट सिंह तो पहले ही इस मुहिम के सक्रिय नेता बन गए थे लेकिन अब जालंधर नार्थ हलके से विधायक बावा हैनरी भी खुलकर सामने आ गए हैं। करतारपुर के विधायक चौधरी सुरेंद्र सिंह भी नवजोत सिंह सिद्धू का समर्थन कर चुके हैं। जालंधर के 6 विधायकों में से तीन अब सिद्धू के साथ नजर आ रहे हैं। विधायक परगट सिंह को नवजोत सिंह सिद्धू खेमे का मास्टरमाइंड भी माना जा रहा है और वह पार्टी महासचिव बनने के बाद से ही संगठन पर पकड़ के लिए अभियान छेड़ चुके हैं। परगट सिंह ने सबसे पहले कांग्रेस भवन की घेराबंदी शुरू की है और वहीं पर डेरा डाल दिया है। सबसे पहले, परगट सिंह ने ही मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की घेराबंदी करीब ढाई साल पहले ही शुरू की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री को लेटर लिखकर नशा, बेअदबी, माइनिंग समेत कई मुद्दे उठाए थे। इसके बाद वे 2 साल तक चुप रहे और अब बदलते समीकरणों में मुख्यमंत्री के खिलाफ तीखे आरोप लगाने शुरू कर दिए। मुख्यमंत्री को घेरने की तैयारी लंबे अरसे से ही चल रही थी। विधायक परगट सिंह ने ही विधायक हैनरी को सिद्धू के साथ जाेड़ा है। विधायक परगट सिंह बेशक अपने विधानसभा क्षेत्र कैंट में पकड़ ढीली कर चुके हैं लेकिन पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के जरिए पार्टी पर पकड़ बनाकर और सत्ता में बने रहने का रास्ता मजबूत कर रहे हैं। परगट को मैनिपुलेशन में माहिर माना जाता है। वह सत्ता विरोधी लहर को पहले से ही भांप जाते हैं और लहर का सामना करने की बजाय खुद ही इस लहर पर सवार हो जाते हैं।
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ बगावती सुर अपनाने वालों में परगट सिंह के अलावा जालंधर के तीन विधायक शामिल हैं। नार्थ हलके से विधायक बावा हैनरी और करतारपुर के विधायक चौधरी सुरेंद्र सिंह भी नवजोत सिंह सिद्धू का समर्थन कर चुके हैं। जगजीत सिंह सुशांत, जालंधर। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पद से हटाने के लिए पार्टी हाईकमान से मिलने जाने वाले विधायकों के गुट का नेतृत्व पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के करीबी साथी और जालंधर कैंट के विधायक परगट सिंह करेंगे। मुख्यमंत्री के खिलाफ बगावती सुर अपनाने वालों की गिनती और दोआबा में भी तेजी से बढ़ती जा रही है। परगट सिंह तो पहले ही इस मुहिम के सक्रिय नेता बन गए थे लेकिन अब जालंधर नार्थ हलके से विधायक बावा हैनरी भी खुलकर सामने आ गए हैं। करतारपुर के विधायक चौधरी सुरेंद्र सिंह भी नवजोत सिंह सिद्धू का समर्थन कर चुके हैं। जालंधर के छः विधायकों में से तीन अब सिद्धू के साथ नजर आ रहे हैं। विधायक परगट सिंह को नवजोत सिंह सिद्धू खेमे का मास्टरमाइंड भी माना जा रहा है और वह पार्टी महासचिव बनने के बाद से ही संगठन पर पकड़ के लिए अभियान छेड़ चुके हैं। परगट सिंह ने सबसे पहले कांग्रेस भवन की घेराबंदी शुरू की है और वहीं पर डेरा डाल दिया है। सबसे पहले, परगट सिंह ने ही मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की घेराबंदी करीब ढाई साल पहले ही शुरू की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री को लेटर लिखकर नशा, बेअदबी, माइनिंग समेत कई मुद्दे उठाए थे। इसके बाद वे दो साल तक चुप रहे और अब बदलते समीकरणों में मुख्यमंत्री के खिलाफ तीखे आरोप लगाने शुरू कर दिए। मुख्यमंत्री को घेरने की तैयारी लंबे अरसे से ही चल रही थी। विधायक परगट सिंह ने ही विधायक हैनरी को सिद्धू के साथ जाेड़ा है। विधायक परगट सिंह बेशक अपने विधानसभा क्षेत्र कैंट में पकड़ ढीली कर चुके हैं लेकिन पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के जरिए पार्टी पर पकड़ बनाकर और सत्ता में बने रहने का रास्ता मजबूत कर रहे हैं। परगट को मैनिपुलेशन में माहिर माना जाता है। वह सत्ता विरोधी लहर को पहले से ही भांप जाते हैं और लहर का सामना करने की बजाय खुद ही इस लहर पर सवार हो जाते हैं।
लगाया गया विवादित पोस्टर (Photo Credit: NewsState BiharJharkhand) Patna: रामचरितमानस को लेकर बिहार की सियासत पूरी तरह से गर्म हो चुकी है. विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी लगातार जारी है. इन सबके बीच आरजेडी कार्यालय के बाहर पोस्टर लगाकर शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर सिंह के बयान का समर्थन किया गया है. RJD कार्यालय के बाहर पोस्टर के माध्यम से रामचरितमानस के विभिन्न श्लोक का वर्णन किया गया है और शिक्षा मंत्री के बयान को सही बताया गया है. बीजेपी पर दलित, पिछड़े, अति पिछड़ा का अपमान करने का आरोप लगाया गया है. राष्ट्रीय जनता दल प्रदेश कार्यालय के बाहर दलित अति पिछड़ा संघर्ष मोर्चा के द्वारा ये पोस्टर लगाया गया है. आरजेडी कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर में लिखा गया है कि " 85% हिंदुओं का अपमान कब तक सहेगा हिंदुस्तान? क्या भाजपा को 85% हिंदुओं( दलित ,अति पिछड़ा का अपमान मंजूर है? ) बताएं भाजपा एंड. . . . . . . " इस पोस्टर से तो ये साफ़ है कि आरजेडी अपने बयान पर टिकी हुई है. जहां एक तरफ पूरा देश शिक्षा मंत्री के खिलाफ हो गया है उन्हें पद से हटाने तक की मांग कर रहा है. वहीं, दूसरी तरफ शिक्षा मंत्री अपने बयान से पीछे नहीं हट रहे हैं. ऐसे में बिहार में बवाल होना तय माना जा रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि किसी धर्म पर विवाद नहीं करना चाहिए. साथ ही उन्होंने मंत्री को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप ना करने की सलाह भी दे दी. उन्होंने कहा कि राम चरित्र मानस को लेकर कोई विवाद नहीं है हम लोग सब धर्म को मानने वाले लोग हैं जो लोग जिस भी धर्म को मानते हैं हम उन लोगों के साथ कोई इंटरफ्रेंस नहीं करते हैं. रामचरित्र मानस पर डिप्टी सीएम ने बोल दिया है कहीं कोई विवाद नहीं. बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने ट्वीट के जरिेए RJD पर हमला बोला था. उन्होंने शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर को पार्टी से निकालने की मांग की. सुशील मोदी ने ट्वीट किए गए तस्वीर में नूपुर शर्मा के खिलाफ BJP की कार्रवाई का हवाला भी दिया और लिखा कि अगर नुपूर के बयान से किसी समुदाय के भावनाओं को ठेस पहुंची तो उनपर कार्रवाई की गई. इसलिए चंद्रशेखर को भी पार्टी से निकाल देना चाहिए.
लगाया गया विवादित पोस्टर Patna: रामचरितमानस को लेकर बिहार की सियासत पूरी तरह से गर्म हो चुकी है. विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी लगातार जारी है. इन सबके बीच आरजेडी कार्यालय के बाहर पोस्टर लगाकर शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर सिंह के बयान का समर्थन किया गया है. RJD कार्यालय के बाहर पोस्टर के माध्यम से रामचरितमानस के विभिन्न श्लोक का वर्णन किया गया है और शिक्षा मंत्री के बयान को सही बताया गया है. बीजेपी पर दलित, पिछड़े, अति पिछड़ा का अपमान करने का आरोप लगाया गया है. राष्ट्रीय जनता दल प्रदेश कार्यालय के बाहर दलित अति पिछड़ा संघर्ष मोर्चा के द्वारा ये पोस्टर लगाया गया है. आरजेडी कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर में लिखा गया है कि " पचासी% हिंदुओं का अपमान कब तक सहेगा हिंदुस्तान? क्या भाजपा को पचासी% हिंदुओं बताएं भाजपा एंड. . . . . . . " इस पोस्टर से तो ये साफ़ है कि आरजेडी अपने बयान पर टिकी हुई है. जहां एक तरफ पूरा देश शिक्षा मंत्री के खिलाफ हो गया है उन्हें पद से हटाने तक की मांग कर रहा है. वहीं, दूसरी तरफ शिक्षा मंत्री अपने बयान से पीछे नहीं हट रहे हैं. ऐसे में बिहार में बवाल होना तय माना जा रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि किसी धर्म पर विवाद नहीं करना चाहिए. साथ ही उन्होंने मंत्री को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप ना करने की सलाह भी दे दी. उन्होंने कहा कि राम चरित्र मानस को लेकर कोई विवाद नहीं है हम लोग सब धर्म को मानने वाले लोग हैं जो लोग जिस भी धर्म को मानते हैं हम उन लोगों के साथ कोई इंटरफ्रेंस नहीं करते हैं. रामचरित्र मानस पर डिप्टी सीएम ने बोल दिया है कहीं कोई विवाद नहीं. बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने ट्वीट के जरिेए RJD पर हमला बोला था. उन्होंने शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर को पार्टी से निकालने की मांग की. सुशील मोदी ने ट्वीट किए गए तस्वीर में नूपुर शर्मा के खिलाफ BJP की कार्रवाई का हवाला भी दिया और लिखा कि अगर नुपूर के बयान से किसी समुदाय के भावनाओं को ठेस पहुंची तो उनपर कार्रवाई की गई. इसलिए चंद्रशेखर को भी पार्टी से निकाल देना चाहिए.
दिल्ली दंगे से जुड़े केस में आतंकवाद निरोधक क़ानून के तहत जामिया मिल्लिया की गिरफ़्तार हुयीं गर्भवती स्टूडेंट सफ़ूरा ज़र्गर मंगलवार को ज़मानत पर रिहा हो गयीं। वह दिल्ली कि तिहाड़ जेल में बंद थीं। उन्हें 10 हज़ार के मुचलके पर ज़मानत मिली है। हाईकोर्ट ने उनके गर्भवती होने की वजह से मेडिकल आधार पर ज़मानत दी है। पुलिस की ओर से मानवीय आधार पर उनकी रिहाई का विरोध न करने पर हाई कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया। 27 साल की सफ़ूरा ज़र्गर को, फ़रवरी में दिल्ली में सीएए के ख़िलाफ़ जारी प्रदर्शन के दौरान फूटे दंगों में साज़िश के इल्ज़ाम में, 10 अप्रैल को गिरफ़्तार किया गया था, जिसके बाद वह रिहा हुयीं लेकिन उन्हें ग़ैर क़ानूनी गतिविधि निरोधक क़ानून के तहत अधिक गंभीर इल्ज़ाम में दोबारा गिरफ़्तार किया गया। उनकी गिरफ़्तारी और क़ैद की, छात्रों और कार्यकर्तोओं ने कड़ी निंदा की। हाई कोर्ट ने मंगलवार को रिहाई का हुक्म देते हुए सफ़ूरा ज़र्गर को ऐसी गतिविधियों से दूर रहने का निर्देश दिया जिनसे जाँच प्रभावित हो सकती है। इसी तरह वह बिना इजाज़त दिल्ली से नहीं जा सकतीं। (MAQ/N)
दिल्ली दंगे से जुड़े केस में आतंकवाद निरोधक क़ानून के तहत जामिया मिल्लिया की गिरफ़्तार हुयीं गर्भवती स्टूडेंट सफ़ूरा ज़र्गर मंगलवार को ज़मानत पर रिहा हो गयीं। वह दिल्ली कि तिहाड़ जेल में बंद थीं। उन्हें दस हज़ार के मुचलके पर ज़मानत मिली है। हाईकोर्ट ने उनके गर्भवती होने की वजह से मेडिकल आधार पर ज़मानत दी है। पुलिस की ओर से मानवीय आधार पर उनकी रिहाई का विरोध न करने पर हाई कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया। सत्ताईस साल की सफ़ूरा ज़र्गर को, फ़रवरी में दिल्ली में सीएए के ख़िलाफ़ जारी प्रदर्शन के दौरान फूटे दंगों में साज़िश के इल्ज़ाम में, दस अप्रैल को गिरफ़्तार किया गया था, जिसके बाद वह रिहा हुयीं लेकिन उन्हें ग़ैर क़ानूनी गतिविधि निरोधक क़ानून के तहत अधिक गंभीर इल्ज़ाम में दोबारा गिरफ़्तार किया गया। उनकी गिरफ़्तारी और क़ैद की, छात्रों और कार्यकर्तोओं ने कड़ी निंदा की। हाई कोर्ट ने मंगलवार को रिहाई का हुक्म देते हुए सफ़ूरा ज़र्गर को ऐसी गतिविधियों से दूर रहने का निर्देश दिया जिनसे जाँच प्रभावित हो सकती है। इसी तरह वह बिना इजाज़त दिल्ली से नहीं जा सकतीं।
Palwal/Alive News : विभिन्न विभागों से संबंधित सीएम विंडो, एसएमजीटी, सीपीग्राम पोर्टल पर प्राप्त सभी शिकायतों को निर्धारित समयावधि में निपटाने का प्रयास किया जाए, ताकि राज्य स्तर पर जिला की रैंकिंग भी अच्छी बनी रहे। नगराधीश अंकिता अधिकारी ने यह निर्देश मंगलवार को लघु सचिवालय के सभागार में संबंधित विभागों के अधिकारियों व सीएम विंडो के नोडल ऑफिसर्स की बैठक लेते हुए दिए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने विभागों से संबंधित जो भी शिकायत सीएम विंडो पोर्टल पर प्राप्त होती है। उस पर तय समय में उचित कार्यवाही अमल में लाई जाए। इसमें किसी भी प्रकार की देरी व कोताही को बर्दाशत नहीं किया जाएगा। इस मौके पर उन्होंने शिकायतों को अधिक समय तक लंबित रखने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। नगराधीश ने बैठक में उपस्थिति सभी अधिकारियों व नोडल अधिकारियों से उनके पोर्टल पर पैंडिंग सीएम विंडो शिकायतों के बारे में जानकारी ली। नगराधीश अंकिता अधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि वे सीएम विंडों शिकायतों को ओवरड्यू करने की प्रतीक्षा न करें, बल्कि इन शिकायतों का तत्परता से निपटाएं। उन्होंने कहा कि अधिकारी आपसी तालमेल के साथ कार्य करें। इस अवसर पर तहसीलदार पलवल रोहताश, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी शमशेर ङ्क्षसह नेहरा, उप सिविल सर्जन डा. रेखा सिंह, बीडीपीओ हथीन रेणु लता सहित अन्य विभागों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
Palwal/Alive News : विभिन्न विभागों से संबंधित सीएम विंडो, एसएमजीटी, सीपीग्राम पोर्टल पर प्राप्त सभी शिकायतों को निर्धारित समयावधि में निपटाने का प्रयास किया जाए, ताकि राज्य स्तर पर जिला की रैंकिंग भी अच्छी बनी रहे। नगराधीश अंकिता अधिकारी ने यह निर्देश मंगलवार को लघु सचिवालय के सभागार में संबंधित विभागों के अधिकारियों व सीएम विंडो के नोडल ऑफिसर्स की बैठक लेते हुए दिए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने विभागों से संबंधित जो भी शिकायत सीएम विंडो पोर्टल पर प्राप्त होती है। उस पर तय समय में उचित कार्यवाही अमल में लाई जाए। इसमें किसी भी प्रकार की देरी व कोताही को बर्दाशत नहीं किया जाएगा। इस मौके पर उन्होंने शिकायतों को अधिक समय तक लंबित रखने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। नगराधीश ने बैठक में उपस्थिति सभी अधिकारियों व नोडल अधिकारियों से उनके पोर्टल पर पैंडिंग सीएम विंडो शिकायतों के बारे में जानकारी ली। नगराधीश अंकिता अधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि वे सीएम विंडों शिकायतों को ओवरड्यू करने की प्रतीक्षा न करें, बल्कि इन शिकायतों का तत्परता से निपटाएं। उन्होंने कहा कि अधिकारी आपसी तालमेल के साथ कार्य करें। इस अवसर पर तहसीलदार पलवल रोहताश, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी शमशेर ङ्क्षसह नेहरा, उप सिविल सर्जन डा. रेखा सिंह, बीडीपीओ हथीन रेणु लता सहित अन्य विभागों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
जयपुर/कोटा। राजस्थान के कोटा में 16 वर्षीया किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। कोटा के पुलिस अधीक्षक अंशुमन भूमिया ने बताया कि दोनों आरोपियों की उम्र लगभग 17 साल है। इन्होंने बुधवार रात को ओरिया कॉलोनी में डांडिया कार्यक्रम स्थल से लगभग 200 मीटर की दूरी पर एक सुनसान स्थान पर किशोरी के साथ रेप किया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी किशोर 16 वर्षीय इस किशोरी को पहले से जानते थे और उन्होंने ही इस वारदात को अंजाम दिया है। हत्यारों ने लड़की की पहचान छिपाने के लिए सिर और चेहरा बुरी तरह से कुचल डाला था और मौके से फरार हो गए। लड़की का शव गुरुवार सुबह बरड़ा बस्ती में एक बहुमंजिला इमारत के पास नाले में मिला। इसकी सूचना वहां शौच करने गए कुछ लोगों ने पुलिस को दी।
जयपुर/कोटा। राजस्थान के कोटा में सोलह वर्षीया किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। कोटा के पुलिस अधीक्षक अंशुमन भूमिया ने बताया कि दोनों आरोपियों की उम्र लगभग सत्रह साल है। इन्होंने बुधवार रात को ओरिया कॉलोनी में डांडिया कार्यक्रम स्थल से लगभग दो सौ मीटर की दूरी पर एक सुनसान स्थान पर किशोरी के साथ रेप किया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी किशोर सोलह वर्षीय इस किशोरी को पहले से जानते थे और उन्होंने ही इस वारदात को अंजाम दिया है। हत्यारों ने लड़की की पहचान छिपाने के लिए सिर और चेहरा बुरी तरह से कुचल डाला था और मौके से फरार हो गए। लड़की का शव गुरुवार सुबह बरड़ा बस्ती में एक बहुमंजिला इमारत के पास नाले में मिला। इसकी सूचना वहां शौच करने गए कुछ लोगों ने पुलिस को दी।
स्पोर्टस डेस्कः WWE सुपरस्टार सोलो सिकोआ ने स्मैकडाउन में एक घटनापूर्ण रात बिताई जब उन्होंने अपने बड़े भाई जिमी उसो को धोखा दिया। थोड़े समय के लिए उनका और जे का साथ देने के बाद, द एनफोर्सर ने रोमन रेंस के प्रति अपनी वफादारी की पुष्टि की। वहीं ट्राइबल चीफ ने स्मैकडाउन पर यूनिवर्सल चैंपियन के रूप में 1,000 दिनों का जश्न मनाया, जिसमें ट्रिपल एच ने उन्हें एक नया टाइटल बेल्ट भेंट किया। हालांकि, पार्टी थोड़े समय के लिए थी क्योंकि नाइट ऑफ चैंपियंस में the big uce पर जिमी की सुपरकिक से छह दिन बाद द उसोस ने रेंस को बाधित किया था। सोलो सिकोआ शुरू में सामोन स्पाइक के साथ जिमी उसो को मारने से पहले आठ बार के टैग टीम चैंपियंस के पक्ष में शामिल हुए। वह रोमन रेन्स और पॉल हेमैन के साथ चले गए और अपने भाइयों को रिंग में दिल टूटने पर छोड़ दिया। स्मैकडाउन के फौरन बाद, सिकोआ ने एक छोटा सा संदेश ट्वीट किया जो टू द पॉइंट था। यहाँ उन्होंने लिखा हैः "Loyalty till the end"
स्पोर्टस डेस्कः WWE सुपरस्टार सोलो सिकोआ ने स्मैकडाउन में एक घटनापूर्ण रात बिताई जब उन्होंने अपने बड़े भाई जिमी उसो को धोखा दिया। थोड़े समय के लिए उनका और जे का साथ देने के बाद, द एनफोर्सर ने रोमन रेंस के प्रति अपनी वफादारी की पुष्टि की। वहीं ट्राइबल चीफ ने स्मैकडाउन पर यूनिवर्सल चैंपियन के रूप में एक,शून्य दिनों का जश्न मनाया, जिसमें ट्रिपल एच ने उन्हें एक नया टाइटल बेल्ट भेंट किया। हालांकि, पार्टी थोड़े समय के लिए थी क्योंकि नाइट ऑफ चैंपियंस में the big uce पर जिमी की सुपरकिक से छह दिन बाद द उसोस ने रेंस को बाधित किया था। सोलो सिकोआ शुरू में सामोन स्पाइक के साथ जिमी उसो को मारने से पहले आठ बार के टैग टीम चैंपियंस के पक्ष में शामिल हुए। वह रोमन रेन्स और पॉल हेमैन के साथ चले गए और अपने भाइयों को रिंग में दिल टूटने पर छोड़ दिया। स्मैकडाउन के फौरन बाद, सिकोआ ने एक छोटा सा संदेश ट्वीट किया जो टू द पॉइंट था। यहाँ उन्होंने लिखा हैः "Loyalty till the end"
भ्रान्तिमात्रात् ततस्तत्सिद्धौ न परमार्थतस्तदनिर्देश्यमसाधारणं वा सिद्धयेत् । प्रत्यक्षात्तथाभूतस्यास्य प्रसिद्धि इत्यपि मनोरथमात्रम्, निर्देश योग्यस्य साधारणासाधारणरूपस्य वस्तुनस्तेन साक्षातकरणात् । वस्तुव्यतिरेकेण नापरा निर्देश्यता साधारणता वा प्रतिभाति' इत्यसाधारणतायामपि समानम् । 'वस्तुस्वरूपमेव सा' इत्यन्यत्रापि समानम् । ' किंच, विकल्पप्रतिभास्यऽन्यापोहगता वाच्यता वस्तुनि प्रतिषिध्यते, वस्तुगता वा आद्यविकल्पे सिद्धसाध्यता । न ह्यन्यापोहवाच्यतैव वस्तुवाच्यता, तत्प्रतिषेधविरोधात् । द्वितीयपक्षे तु शका - वस्तु से अतिरिक्त निर्देश्यता या साधारणता प्रतिभासित नही होती ? समाधान - यही बात असाधारणता के विषय मे भी है अर्थात् असाधारणता भी वस्तु से अंतिरिक्त प्रतिभासित नही होती । शका - असाधारणता तो वस्तु का निजी स्वरूप है उसके साथ प्रत्यक्ष द्वारा प्रतिभासित हो जाती है ? समाधान - साधारणता और निर्देश्यता भी वस्तु का निजो स्वरूप है अतः वे दोनो भी प्रत्यक्षप्रमाण द्वारा प्रतिपादित होते है ऐसा प्रतीति सिद्ध सिद्धात स्वीकार करना चाहिये । भावार्थ - बौद्ध वस्तुगत असाधारण धर्म को वास्तविक और प्रत्यक्षप्रमाण द्वारा प्रतिभासित होना मानते हैं और उसी वस्तुके साधारण धर्मको काल्पनिक एव प्रत्यक्ष प्रमाण द्वारा प्रतिभासित न होकर शब्द द्वारा प्रतिभासित होना मानते है, और इस काल्पनिक धर्म का प्रतिपादक होने से ही शब्द का विषय प्रभाव रूप मानते है । इस मान्यता का निरसन करते हुए आचार्य ने कहा कि प्रत्यक्ष प्रमाण मे तो साधारण असाधारण दोनो ही धर्म प्रतिभासित होते है न कि केवल असाधारण । तथा वस्तु का निर्देश्यपना भी प्रत्यक्ष से प्रतीत होता है । अत. शब्द द्वारा स्वलक्षणभूत वस्तु का प्रतिपादन नही होता, अर्थात् स्वलक्षण शब्द से अनिर्देश्य है ऐसा बौद्ध का कथन गलत ठहरता है । अब इस प्रकरण के अन्त मे बौद्ध के प्रति एक प्रश्न और रह जाता है किआप स्वलक्षण रूप वस्तु मे वाच्यता का निषेध करते हैं सो वह वाच्यता स्वलक्षण रूप वस्तुगत धर्म है अथवा विकल्पप्रतिभासक बुद्धि मे स्थित अन्यापोह गत धर्म है ?
भ्रान्तिमात्रात् ततस्तत्सिद्धौ न परमार्थतस्तदनिर्देश्यमसाधारणं वा सिद्धयेत् । प्रत्यक्षात्तथाभूतस्यास्य प्रसिद्धि इत्यपि मनोरथमात्रम्, निर्देश योग्यस्य साधारणासाधारणरूपस्य वस्तुनस्तेन साक्षातकरणात् । वस्तुव्यतिरेकेण नापरा निर्देश्यता साधारणता वा प्रतिभाति' इत्यसाधारणतायामपि समानम् । 'वस्तुस्वरूपमेव सा' इत्यन्यत्रापि समानम् । ' किंच, विकल्पप्रतिभास्यऽन्यापोहगता वाच्यता वस्तुनि प्रतिषिध्यते, वस्तुगता वा आद्यविकल्पे सिद्धसाध्यता । न ह्यन्यापोहवाच्यतैव वस्तुवाच्यता, तत्प्रतिषेधविरोधात् । द्वितीयपक्षे तु शका - वस्तु से अतिरिक्त निर्देश्यता या साधारणता प्रतिभासित नही होती ? समाधान - यही बात असाधारणता के विषय मे भी है अर्थात् असाधारणता भी वस्तु से अंतिरिक्त प्रतिभासित नही होती । शका - असाधारणता तो वस्तु का निजी स्वरूप है उसके साथ प्रत्यक्ष द्वारा प्रतिभासित हो जाती है ? समाधान - साधारणता और निर्देश्यता भी वस्तु का निजो स्वरूप है अतः वे दोनो भी प्रत्यक्षप्रमाण द्वारा प्रतिपादित होते है ऐसा प्रतीति सिद्ध सिद्धात स्वीकार करना चाहिये । भावार्थ - बौद्ध वस्तुगत असाधारण धर्म को वास्तविक और प्रत्यक्षप्रमाण द्वारा प्रतिभासित होना मानते हैं और उसी वस्तुके साधारण धर्मको काल्पनिक एव प्रत्यक्ष प्रमाण द्वारा प्रतिभासित न होकर शब्द द्वारा प्रतिभासित होना मानते है, और इस काल्पनिक धर्म का प्रतिपादक होने से ही शब्द का विषय प्रभाव रूप मानते है । इस मान्यता का निरसन करते हुए आचार्य ने कहा कि प्रत्यक्ष प्रमाण मे तो साधारण असाधारण दोनो ही धर्म प्रतिभासित होते है न कि केवल असाधारण । तथा वस्तु का निर्देश्यपना भी प्रत्यक्ष से प्रतीत होता है । अत. शब्द द्वारा स्वलक्षणभूत वस्तु का प्रतिपादन नही होता, अर्थात् स्वलक्षण शब्द से अनिर्देश्य है ऐसा बौद्ध का कथन गलत ठहरता है । अब इस प्रकरण के अन्त मे बौद्ध के प्रति एक प्रश्न और रह जाता है किआप स्वलक्षण रूप वस्तु मे वाच्यता का निषेध करते हैं सो वह वाच्यता स्वलक्षण रूप वस्तुगत धर्म है अथवा विकल्पप्रतिभासक बुद्धि मे स्थित अन्यापोह गत धर्म है ?
मैं रोगी नहीं हो सकता पालतू और शिकारी पशु स्वभाव से अलग रहते है । जहां जल सामने बह रहा हो, वहां कोई प्यास से नहीं दुःखी हो सकता। जैसे यह स्वभाव-निद्ध है, वैसे ही में भी सदा रोग-मुक्त रहूं। * (३८) वी ३ मे द्यावापृथिवी इतो विपन्थानो दिश दिशम् । व्य १ हं सर्वेण पाप्मना वि यक्ष्मेण सम।युवा ।। १७४ ।। ( इमे ) यह ( द्यावापृथिवी) द्यु-लोक और पृथिवी ( वि- इतः ) सदा अलग रहते हैं ( दिशं - दिशम ) भिन्न २ दिशाओं में जाने वाले ( पंथानः ) मार्ग सदा अलग २ रहते हैं । ऐसे ही मेरे से रोग सदा अलग रहे । पूर्व और पश्चिम को जाने वाले मार्गों का परस्पर क्या । १ मेल ? ऐसे ही मै अविनाशी, नित्य शुद्ध, मेरे पास रांग ने आ कर क्या लेना है ? + (३९) त्वष्टा दुहित्रे वहतुं युक्तीतीदं विश्वं भुवनं वि याति । व्य १ हं सर्वेण पाप्मना वि यक्ष्मेण समायुषा ।। १७५ ॥ ( त्वष्टा ) सब का बनाने वाला, सूर्य ( दुहित्रे ) अपनी लड़की, उषा के लिए ( वहतुम् ) रथ को (युनक्ति ) जोड़ता है ( इति ) इलें देख कर ( विश्वम्) सारा ( भुवनम् ) संस. र ( वियाति ) अपने २ मार्ग पर चल पड़ता है। ऐले ही जब यह निश्चय है कि मैंने रोगी नहीं होना, तो अब रोग को अपने अलग मार्ग पर चला जाना चाहिये । * ब्रह्म ऋषिः, पाप्महदैवतम् भूरिज् अनुष्टुप् छन्दः । + ब्रह्मऋषिः पाहदैवतम्, विरात्प्रस्तार छन्दः ।
मैं रोगी नहीं हो सकता पालतू और शिकारी पशु स्वभाव से अलग रहते है । जहां जल सामने बह रहा हो, वहां कोई प्यास से नहीं दुःखी हो सकता। जैसे यह स्वभाव-निद्ध है, वैसे ही में भी सदा रोग-मुक्त रहूं। * वी तीन मे द्यावापृथिवी इतो विपन्थानो दिश दिशम् । व्य एक हं सर्वेण पाप्मना वि यक्ष्मेण सम।युवा ।। एक सौ चौहत्तर ।। यह द्यु-लोक और पृथिवी सदा अलग रहते हैं भिन्न दो दिशाओं में जाने वाले मार्ग सदा अलग दो रहते हैं । ऐसे ही मेरे से रोग सदा अलग रहे । पूर्व और पश्चिम को जाने वाले मार्गों का परस्पर क्या । एक मेल ? ऐसे ही मै अविनाशी, नित्य शुद्ध, मेरे पास रांग ने आ कर क्या लेना है ? + त्वष्टा दुहित्रे वहतुं युक्तीतीदं विश्वं भुवनं वि याति । व्य एक हं सर्वेण पाप्मना वि यक्ष्मेण समायुषा ।। एक सौ पचहत्तर ॥ सब का बनाने वाला, सूर्य अपनी लड़की, उषा के लिए रथ को जोड़ता है इलें देख कर सारा संस. र अपने दो मार्ग पर चल पड़ता है। ऐले ही जब यह निश्चय है कि मैंने रोगी नहीं होना, तो अब रोग को अपने अलग मार्ग पर चला जाना चाहिये । * ब्रह्म ऋषिः, पाप्महदैवतम् भूरिज् अनुष्टुप् छन्दः । + ब्रह्मऋषिः पाहदैवतम्, विरात्प्रस्तार छन्दः ।
प्रश्नः क्या लोग स्पैनिश बोलते हैं, हम उससे बहुत तेज बोलते हैं, या ऐसा लगता है कि ऐसा लगता है? उत्तरः जहां तक मैं पता लगाने में सक्षम हूं, यह वही लगता है। हालांकि मुझे यकीन है कि मैंने पढ़ा है कि स्पैनिश वक्ताओं अंग्रेजी बोलने वालों की तुलना में प्रति मिनट अधिक अक्षरों का उपयोग करते हैं, मैंने इस विश्वास को वापस लेने के लिए किसी भी विश्वसनीय अध्ययन के लिए बार-बार व्यर्थ खोज की है। यहां तक कि अगर हम जानते थे कि सामान्य रूप से स्पैनिश वक्ताओं प्रति मिनट अधिक अक्षरों का उपयोग करते हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं हो सकता है, क्योंकि स्पैनिश अक्षरों अंग्रेजी से छोटे होते हैं। किसी भी मामले में, तुलना करना मुश्किल है। व्यक्तिगत वक्ताओं के बीच भाषण की दर भी बहुत अधिक हो सकती है। मुझे याद है कि मैक्सिकन राष्ट्रपति (फिर वीसेंटे फॉक्स) एक औपचारिक भाषण देते हैं, और उन्होंने उस दर पर बात की जिसने उसे समझने में आसान बना दिया। लेकिन उस दिन बाद में एक साक्षात्कार में, उन्होंने और तेजी से बात की, और मुझे लगता है कि अगर वह एनिमेटेड वार्तालाप में थे तो वह उस दर पर बात करेंगे जो गैर देशी वक्ताओं के लिए उसे समझना मुश्किल बना देगा। भाषण की अपनी दर पर ध्यान दें। किसी दिए गए दिन में आप सावधानीपूर्वक घोषणा के साथ कई बार जानबूझ कर बात कर सकते हैं, जबकि दूसरी बार आप "एक मिनट एक मील" बोल सकते हैं। स्पैनिश वक्ताओं के लिए भी यही सच है। मतभेद जो कुछ भी हो, शायद स्पैनिश की तरह ऐसा लगता है कि यह बहुत तेज़ है क्योंकि आप भाषा नहीं जानते हैं। चूंकि आप अच्छी तरह से अंग्रेजी जानते हैं, आपको हर शब्द में हर एक आवाज को सुनने के लिए नहीं कहा जाता है कि क्या कहा जाता है, क्योंकि आपका दिमाग अंतराल को भरने में सक्षम है और यह निर्धारित करने के लिए कि एक शब्द कहां समाप्त होता है और अगला शुरू होता है। लेकिन जब तक आप एक और भाषा अच्छी तरह से नहीं जानते, तब तक आपके पास यह क्षमता नहीं है। यह भी सच है कि elision की प्रक्रिया - शब्दों के साथ चलने के रूप में ध्वनियों को छोड़ना - स्पेनिश में अंग्रेजी की तुलना में अधिक व्यापक है (हालांकि शायद फ्रेंच में जितना व्यापक नहीं है)। स्पैनिश में, उदाहरण के लिए, " ella ha hablado " (जिसका अर्थ है "उसने कहा है") का वाक्यांश आम तौर पर इलब्लाडो की तरह लग रहा है, जिसका अर्थ है कि एक पूरे शब्द ( हेक्टेयर ) के साथ-साथ एक और शब्द का हिस्सा भी चला जाता है। इसके अलावा, अधिकांश स्पैनिश व्यंजन (इसके अलावा) अंग्रेजी के आदी कान के लिए अस्पष्ट प्रतीत हो सकते हैं, जिससे थोड़ा और मुश्किल समझ आती है। मुझे समस्या के लिए किसी भी फिक्स के बारे में पता नहीं है, सिवाय इसके कि अभ्यास सही बनाता है (या यदि सही नहीं है, तो बेहतर)। जैसे ही आप स्पेनिश सीखते हैं, अलग-अलग शब्दों की बजाय स्पेनिश वाक्यांशों को सुनने की कोशिश करें, और शायद यह समझने की प्रक्रिया को तेज करेगा। अनुपूरकः इस आलेख के आरंभिक प्रकाशन के बाद प्राप्त निम्नलिखित पत्र कुछ दिलचस्प अंक उठाते हैं। उनमें से एक, दोनों भाषाओं में अक्षरों के विभिन्न गठन के बारे में, समझ में आता है, इसलिए मैं यहां पत्र जोड़ रहा हूंः "कहीं मैंने एक अध्ययन के नतीजों को पढ़ा जो निष्कर्ष निकाला गया है कि स्पैनिश अंग्रेजी से अधिक तेज़ी से बोली जाती है। कारण यह है कि विशिष्ट स्पैनिश अक्षरों का खुलासा होता है (अर्थात् व्यंजन-स्वर) जिसका अर्थ अंग्रेजी में सामान्य अक्षर बंद है (व्यंजन-स्वर-व्यंजन)। अंग्रेजी में एक से अधिक अक्षरों वाले शब्दों में दो अलग-अलग व्यंजन होते हैं, जिनमें दोनों को ध्वनि सुनने के लिए भाषण धीमा करने की आवश्यकता होती है। "हम प्राकृतिक अंग्रेजी बोलने वालों को एक साथ दो व्यंजनों को सुनने में बहुत ही अच्छे लगते हैं, लेकिन प्राकृतिक स्पैनिश स्पीकर के लिए यह मुश्किल है। स्पेनिश में जब दो व्यंजन एक साथ होते हैं तो प्राकृतिक वक्ता अक्सर एक अतिरिक्त (अवांछित और मुलायम) स्वर ध्वनि के बीच आते हैं उन्हें। उदाहरण के लिए स्पेनिश शब्द AGRUPADO में , आप इसे AGURUPADO उच्चारण सुना सकते हैं। अतिरिक्त आप छोटा और नरम है, लेकिन व्यंजनों को अलग करता है। प्राकृतिक अंग्रेजी बोलने वालों को अतिरिक्त स्वर डालने के बिना "जीआर" लगने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन हम इसे थोड़ा धीमी गति से करते हैं। "वीसेंटे फॉक्स के बारे में आपकी टिप्पणियां दिलचस्प हैं। मैंने पाया है कि राजनीतिक आंकड़े आमतौर पर इतनी स्पष्ट रूप से बोलते हैं कि मैं उन्हें सामान्य स्पेनिश बोलने वाले लोगों की तुलना में बेहतर समझ सकता हूं। यह विशेष रूप से सच है जब वे पते दे रहे हैं। हालांकि मुझे शायद ही कभी वह पसंद आया जो मैंने कहा था, मैं फिदेल कास्त्रो को सुनने का आनंद लेने के लिए इस्तेमाल किया जाता था क्योंकि उन्हें समझना इतना आसान था। इन दिनों उनकी आवाज में एक सभ्य गुणवत्ता है जो कुछ हद तक स्पष्टता में हस्तक्षेप करती है। अधिकांश मंत्रियों के पास राजनीतिक नेताओं के समान स्पष्ट भाषण होता है, और इस प्रकार धार्मिक सेवाएं आपके अभ्यास के लिए अच्छी जगह होती हैं यदि आप एक शिक्षार्थी हैं तो स्पेनिश सुनने के कौशल। "
प्रश्नः क्या लोग स्पैनिश बोलते हैं, हम उससे बहुत तेज बोलते हैं, या ऐसा लगता है कि ऐसा लगता है? उत्तरः जहां तक मैं पता लगाने में सक्षम हूं, यह वही लगता है। हालांकि मुझे यकीन है कि मैंने पढ़ा है कि स्पैनिश वक्ताओं अंग्रेजी बोलने वालों की तुलना में प्रति मिनट अधिक अक्षरों का उपयोग करते हैं, मैंने इस विश्वास को वापस लेने के लिए किसी भी विश्वसनीय अध्ययन के लिए बार-बार व्यर्थ खोज की है। यहां तक कि अगर हम जानते थे कि सामान्य रूप से स्पैनिश वक्ताओं प्रति मिनट अधिक अक्षरों का उपयोग करते हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं हो सकता है, क्योंकि स्पैनिश अक्षरों अंग्रेजी से छोटे होते हैं। किसी भी मामले में, तुलना करना मुश्किल है। व्यक्तिगत वक्ताओं के बीच भाषण की दर भी बहुत अधिक हो सकती है। मुझे याद है कि मैक्सिकन राष्ट्रपति एक औपचारिक भाषण देते हैं, और उन्होंने उस दर पर बात की जिसने उसे समझने में आसान बना दिया। लेकिन उस दिन बाद में एक साक्षात्कार में, उन्होंने और तेजी से बात की, और मुझे लगता है कि अगर वह एनिमेटेड वार्तालाप में थे तो वह उस दर पर बात करेंगे जो गैर देशी वक्ताओं के लिए उसे समझना मुश्किल बना देगा। भाषण की अपनी दर पर ध्यान दें। किसी दिए गए दिन में आप सावधानीपूर्वक घोषणा के साथ कई बार जानबूझ कर बात कर सकते हैं, जबकि दूसरी बार आप "एक मिनट एक मील" बोल सकते हैं। स्पैनिश वक्ताओं के लिए भी यही सच है। मतभेद जो कुछ भी हो, शायद स्पैनिश की तरह ऐसा लगता है कि यह बहुत तेज़ है क्योंकि आप भाषा नहीं जानते हैं। चूंकि आप अच्छी तरह से अंग्रेजी जानते हैं, आपको हर शब्द में हर एक आवाज को सुनने के लिए नहीं कहा जाता है कि क्या कहा जाता है, क्योंकि आपका दिमाग अंतराल को भरने में सक्षम है और यह निर्धारित करने के लिए कि एक शब्द कहां समाप्त होता है और अगला शुरू होता है। लेकिन जब तक आप एक और भाषा अच्छी तरह से नहीं जानते, तब तक आपके पास यह क्षमता नहीं है। यह भी सच है कि elision की प्रक्रिया - शब्दों के साथ चलने के रूप में ध्वनियों को छोड़ना - स्पेनिश में अंग्रेजी की तुलना में अधिक व्यापक है । स्पैनिश में, उदाहरण के लिए, " ella ha hablado " का वाक्यांश आम तौर पर इलब्लाडो की तरह लग रहा है, जिसका अर्थ है कि एक पूरे शब्द के साथ-साथ एक और शब्द का हिस्सा भी चला जाता है। इसके अलावा, अधिकांश स्पैनिश व्यंजन अंग्रेजी के आदी कान के लिए अस्पष्ट प्रतीत हो सकते हैं, जिससे थोड़ा और मुश्किल समझ आती है। मुझे समस्या के लिए किसी भी फिक्स के बारे में पता नहीं है, सिवाय इसके कि अभ्यास सही बनाता है । जैसे ही आप स्पेनिश सीखते हैं, अलग-अलग शब्दों की बजाय स्पेनिश वाक्यांशों को सुनने की कोशिश करें, और शायद यह समझने की प्रक्रिया को तेज करेगा। अनुपूरकः इस आलेख के आरंभिक प्रकाशन के बाद प्राप्त निम्नलिखित पत्र कुछ दिलचस्प अंक उठाते हैं। उनमें से एक, दोनों भाषाओं में अक्षरों के विभिन्न गठन के बारे में, समझ में आता है, इसलिए मैं यहां पत्र जोड़ रहा हूंः "कहीं मैंने एक अध्ययन के नतीजों को पढ़ा जो निष्कर्ष निकाला गया है कि स्पैनिश अंग्रेजी से अधिक तेज़ी से बोली जाती है। कारण यह है कि विशिष्ट स्पैनिश अक्षरों का खुलासा होता है जिसका अर्थ अंग्रेजी में सामान्य अक्षर बंद है । अंग्रेजी में एक से अधिक अक्षरों वाले शब्दों में दो अलग-अलग व्यंजन होते हैं, जिनमें दोनों को ध्वनि सुनने के लिए भाषण धीमा करने की आवश्यकता होती है। "हम प्राकृतिक अंग्रेजी बोलने वालों को एक साथ दो व्यंजनों को सुनने में बहुत ही अच्छे लगते हैं, लेकिन प्राकृतिक स्पैनिश स्पीकर के लिए यह मुश्किल है। स्पेनिश में जब दो व्यंजन एक साथ होते हैं तो प्राकृतिक वक्ता अक्सर एक अतिरिक्त स्वर ध्वनि के बीच आते हैं उन्हें। उदाहरण के लिए स्पेनिश शब्द AGRUPADO में , आप इसे AGURUPADO उच्चारण सुना सकते हैं। अतिरिक्त आप छोटा और नरम है, लेकिन व्यंजनों को अलग करता है। प्राकृतिक अंग्रेजी बोलने वालों को अतिरिक्त स्वर डालने के बिना "जीआर" लगने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन हम इसे थोड़ा धीमी गति से करते हैं। "वीसेंटे फॉक्स के बारे में आपकी टिप्पणियां दिलचस्प हैं। मैंने पाया है कि राजनीतिक आंकड़े आमतौर पर इतनी स्पष्ट रूप से बोलते हैं कि मैं उन्हें सामान्य स्पेनिश बोलने वाले लोगों की तुलना में बेहतर समझ सकता हूं। यह विशेष रूप से सच है जब वे पते दे रहे हैं। हालांकि मुझे शायद ही कभी वह पसंद आया जो मैंने कहा था, मैं फिदेल कास्त्रो को सुनने का आनंद लेने के लिए इस्तेमाल किया जाता था क्योंकि उन्हें समझना इतना आसान था। इन दिनों उनकी आवाज में एक सभ्य गुणवत्ता है जो कुछ हद तक स्पष्टता में हस्तक्षेप करती है। अधिकांश मंत्रियों के पास राजनीतिक नेताओं के समान स्पष्ट भाषण होता है, और इस प्रकार धार्मिक सेवाएं आपके अभ्यास के लिए अच्छी जगह होती हैं यदि आप एक शिक्षार्थी हैं तो स्पेनिश सुनने के कौशल। "
मुंबई, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। पंजाबी गायक हरभजन मान ने बॉलीवुड में पहचान बनाने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण पंजाबी फिल्में करने के लिए अभिनेता जिमी शेरगिल के प्रति सम्मान जाहिर किया है। मान ने शेरगिल को ट्वीट किया, आप बॉलीवुड में सम्मान के साथ सिर ऊंचा किए खड़े हैं और अभी भी गुणवत्तापूर्ण पंजाबी फिल्में करने और बनाने के बारे में सोचते हैं। आपके लिए सम्मान है। जल्द ही किसी प्रोजेक्ट में साथ काम करने की आशा करता हूं। जिम्मी ने इस तारीफ के लिए गायक का शुक्रिया अदा किया और कहा, आपाक बहुत धन्यवाद भाजी। कभी भी भाजी। जिमी ने 1996 में फिल्म 'माचिस' से अपने अभिनय करियर का आगाज किया था और बाद में उन्होंने 'मोहब्बतें', 'हासिल', 'अ वेडनसडे', 'साहेब, बीवी और गैंगस्टर', 'साहेब, बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स' , 'तनु वेड्स मनु' और 'तनु वेड्स मनु : रिटर्न्स' जैसी कई फिल्मों में काम किया। उन्होंने पंजाबी फिल्मों जैसे 'मन्नत', 'धरती' और 'मेल करादे रब्बा' में भी काम किया है। मान ने अपनी हालिया पंजाबी फिल्म 'दाना पानी' में जिमी के साथ काम किया है।
मुंबई, अट्ठारह अप्रैल । पंजाबी गायक हरभजन मान ने बॉलीवुड में पहचान बनाने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण पंजाबी फिल्में करने के लिए अभिनेता जिमी शेरगिल के प्रति सम्मान जाहिर किया है। मान ने शेरगिल को ट्वीट किया, आप बॉलीवुड में सम्मान के साथ सिर ऊंचा किए खड़े हैं और अभी भी गुणवत्तापूर्ण पंजाबी फिल्में करने और बनाने के बारे में सोचते हैं। आपके लिए सम्मान है। जल्द ही किसी प्रोजेक्ट में साथ काम करने की आशा करता हूं। जिम्मी ने इस तारीफ के लिए गायक का शुक्रिया अदा किया और कहा, आपाक बहुत धन्यवाद भाजी। कभी भी भाजी। जिमी ने एक हज़ार नौ सौ छियानवे में फिल्म 'माचिस' से अपने अभिनय करियर का आगाज किया था और बाद में उन्होंने 'मोहब्बतें', 'हासिल', 'अ वेडनसडे', 'साहेब, बीवी और गैंगस्टर', 'साहेब, बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स' , 'तनु वेड्स मनु' और 'तनु वेड्स मनु : रिटर्न्स' जैसी कई फिल्मों में काम किया। उन्होंने पंजाबी फिल्मों जैसे 'मन्नत', 'धरती' और 'मेल करादे रब्बा' में भी काम किया है। मान ने अपनी हालिया पंजाबी फिल्म 'दाना पानी' में जिमी के साथ काम किया है।
सुकृतस्य लोके=शुभ कर्मोंके फलस्वरूप मनुष्य - शरीरमें; परमे परार्धे= परब्रह्मके उत्तम निवास स्थान ( हृदय - आकाश ) में; गुहाम् प्रविष्टौ = बुद्धिरूप गुफामें छिपे हुए; ऋतम् पिबन्तौ = सत्यका पान करनेवाले (दो हैं); छायातपौ= (वे) छाया और धूपकी भाँति परस्पर भिन्न हैं; ( यह बात ) ब्रह्मविद : ब्रह्मवेत्ता ज्ञानी महापुरुष; वदन्ति कहते हैं; च ये = तथा जो; त्रिणाचिकेताः = तीन बार नाचिकेत-अग्निका चयन कर लेनेवाले; (और) पञ्चाग्नयः = पञ्चाग्निसम्पन्न गृहस्थ हैं; [ ते वदन्ति ] = वे भी यही बात कहते हैं ॥ १ ॥ व्याख्या - यमराजने यहाँ जीवात्मा और परमात्माके नित्य सम्बन्धका परिचय देते हुए कहा कि ब्रह्मवेत्ता ज्ञानी महानुभाव तथा यज्ञादि शुभकर्मोंका अनुष्ठान करनेवाले आस्तिक सज्जन - सभी एक स्वरसे यही कहते हैं कि यह मनुष्य-शरीर बहुत ही दुर्लभ है। पूर्वजन्मार्जित अनेकों पुण्यकर्मोंको निमित्त बनाकर परम कृपालु परमात्मा कृपापरवश हो जीवको उसके कल्याणसम्पादनके लिये यह श्रेष्ठ शरीर प्रदान करते हैं और फिर उस जीवात्माके साथ ही स्वयं भी उसीके हृदयके अन्तस्तलमें- परब्रह्म के निवासस्वरूप श्रेष्ठ स्थानमें अन्तर्यामीरूपसे प्रविष्ट हो रहते हैं (छा० उ० ६ । ३। २) इतना ही नहीं, वे दोनों साथ-ही-साथ वहाँ सत्यका पान करते हैं - शुभकर्मोंके अवश्यम्भावी सत्फलका भोग करते हैं (गीता ५ । २९) । अवश्य ही दोनोंके भोगमें बड़ा अन्तर है। (परमात्मा असङ्ग और अभोक्ता हैं) उनका प्रत्येक प्राणीके हृदयमें निवास करके उसके शुभकर्मोंके फलका उपभोग करना उनकी वैसी ही लीला है, जैसी अजन्मा होकर जन्म ग्रहण करना । इसलिये यह कहा जाता है कि वे भोगते हुए भी वस्तुतः नहीं भोगते । अथवा यह भी कहा जा सकता है कि परमात्मा सत्यको पिलाते हैं - शुभ-कर्मका फल भुगताते हैं और जीवात्मा पीता है - फल भोगता है। परंतु जीवात्मा फलभोगके समय असङ्ग नहीं रहता। वह अभिमानवश उसमें सुखका उपभोग करता है। इस प्रकार साथ रहनेपर भी जीवात्मा और परमात्मा दोनों छाया और धूपकी भाँति परस्पर भिन्न हैं। जीवात्मा छायाकी भाँति अल्प प्रकाश - अल्पज्ञ है और परमात्मा धूपकी भाँति पूर्णप्रकाश - सर्वज्ञ ! परंतु जीवात्मामें जो कुछ अल्पज्ञान है, वह भी परमात्माका ही है, जैसे छायामें अल्प- प्रकाश पूर्णप्रकाशरूप धूपका ही होता है। * इस रहस्यको समझकर मनुष्यको अपनेमें किसी प्रकारकी भी शक्तिसामर्थ्यका अभिमान नहीं करना चाहिये और अन्तर्यामीरूपसे सदा सर्वदा अपने हृदयमें रहनेवाले परम आत्मीय परम कृपालु परमात्माका नित्य-निरन्तर चिन्तन करते रहना चाहिये ॥ १ ॥ सम्बन्ध- परमात्माको जानने और प्राप्त करनेका जो सर्वोत्तम साधन 'उन्हें जानने और पानेकी शक्ति प्रदान करनेके लिये उन्हींसे प्रार्थना करना है' इस बातको यमराज स्वयं प्रार्थना करते हुए बतलाते हैंयः सेतुरीजानानामक्षरं ब्रह्म यत् परम् । अभयं तितीर्षतां पारं नाचिकेत शकेमहि ॥ २ ॥ ईजानानाम्=यज्ञ करनेवालोंके लिये; यः सेतुः = जो दुःखसमुद्रसे पार पहुँचा देनेयोग्य सेतु है; [ तम् ] नाचिकेतम् = उस नाचिकेत - अग्निको (और); पारम् तितीर्षताम् = संसार-समुद्रसे पार होनेकी इच्छावालोंके लिये; यत् अभयम्= जो भयरहित पद है; [ तत् ] अक्षरम् = उस अविनाशी; परम् ब्रह्म= परब्रह्म पुरुषोत्तमको; शकेमहि= जानने और प्राप्त करनेमें भी हम समर्थ हों ॥२॥ व्याख्या - यमराज कहते हैं कि हे परमात्मन् ! आप हमें वह सामर्थ्य दीजिये, जिससे हम निष्कामभावसे यज्ञादि शुभकर्म करनेकी विधिको भलीभाँति जान सकें और आपके आज्ञापालनार्थ उनका अनुष्ठान करके आपकी प्रसन्नता प्राप्त कर सकें तथा जो संसार - समुद्रसे पार होनेकी इच्छावाले विरक्त पुरुषोंके * इस मन्त्रमें 'जीवात्मा' और 'परमात्मा को ही गुहामें प्रविष्ट बतलाया गया है, 'बुद्धि' और 'जीव' को नहीं । 'गुहाहितत्वं तु परमात्मन एव दृश्यते' (देखिये - ब्रह्मसूत्र अध्याय १ पाद २ सू० ११ का शाङ्करभाष्य ) । लिये निर्भय पद है, उस परम अविनाशी आप परब्रह्म पुरुषोत्तमभगवान्को भी जानने और प्राप्त करनेके योग्य बन जायँ । इस मन्त्रमें यमराजने परमात्मासे उन्हें जाननेकी शक्ति प्रदान करनेके लिये प्रार्थना करके यह भाव दिखलाया है कि परब्रह्म पुरुषोत्तमको जानने और प्राप्त करनेका सबसे उत्तम और सरल साधन उनसे प्रार्थना करना ही है ॥ २ ॥ सम्बन्ध - अब, उस परब्रह्म पुरुषोत्तमके परमधाममें किन साधनोंसे सम्पन्न मनुष्य पहुँच सकता है, यह बात रथ और रथीके रूपककी कल्पना करके समझायी जाती हैआत्मान रथिनं विद्धि शरीर५ रथमेव तु । बुद्धिं तु सारथिं विद्धि मनः प्रग्रहमेव च ॥ ३ ॥ ॥३॥ आत्मानम्=(हे नचिकेता ! तुम) जीवात्माको तो; रथिनम् = रथका स्वामी ( उसमें बैठकर चलनेवाला); विद्धि समझो; तु और; शरीरम् एव = शरीरको ही ; रथम्=रथ (समझो); तु बुद्धिम् = तथा बुद्धिको; सारथिम्= सारथि (रथको चलानेवाला); विद्धि=समझो; च मनः एव और मनको ही; प्रग्रहम् = लगाम ( समझो) ॥ ३ ॥ इन्द्रियाणि हयानाहुर्विषयाः स्तेषु गोचरान्। आत्मेन्द्रियमनोयुक्तं मनीषिणः =ज्ञानीजन (इस रूपकमें); इन्द्रियाणि - इन्द्रियोंको; हयान्- घोड़े; आहुः = बतलाते हैं (और); विषयान् = विषयोंको; तेषु गोचरान् = उन घोड़ोंके विचरनेका मार्ग (बतलाते हैं); आत्मेन्द्रियमनोयुक्तम् (तथा ) शरीर, इन्द्रिय और मन - इन सबके साथ रहनेवाला जीवात्मा ही ; भोक्ता भोक्ता है; इति आहुः = यों कहते हैं ॥ ४ ॥ व्याख्या - जीवात्मा परमात्मासे बिछुड़ा हुआ है, अनन्त कालसे वह अनवरत संसाररूपी बीहड़ वनमें इधर-उधर सुखकी खोजमें भटक रहा है। सुख समझकर जहाँ भी जाता है, वहीं धोखा खाता है। सर्वथा साधनहीन और दयनीय है। जबतक वह परम सुखस्वरूप परमात्माके समीप नहीं पहुँच जाता, तबतक उसे सुख-शान्ति कभी नहीं मिल सकती । उसकी इस दयनीय दशाको देखकर दयामय परमात्माने उसे मानव-शरीररूपी सुन्दर सर्वसाधनसम्पन्न रथ दिया। इन्द्रियरूप बलवान् घोड़े दिये । उनके मनरूपी लगाम लगाकर उसे बुद्धिरूपी सारथिके हाथोंमें सौंप दिया और जीवात्माको उस रथमें बैठाकर - उसका स्वामी बनाकर यह बतला दिया कि वह निरन्तर बुद्धिकी प्रेरणा करता रहे और परमात्माकी ओर ले जानेवाले भगवान् के नाम, रूप, लीला, धाम आदिके श्रवण, कीर्तन, मननादि विषयरूप प्रशस्त और सहज मार्गपर चलकर शीघ्र परमात्माके धाममें पहुँच जाय। जीवात्मा यदि ऐसा करता तो वह शीघ्र ही परमात्मातक पहुँच जाता; परंतु वह अपने परमानन्दमय भगवत्प्राप्तिरूप इस महान् लक्ष्यको मोहवश भूल गया । उसने बुद्धिको प्रेरणा देना बंद कर दिया, जिससे बुद्धिरूपी सारथि असावधान हो गया, उसने मनरूपी लगामको इन्द्रियरूपी दुष्ट घोड़ोंकी इच्छापर छोड़ दिया । परिणाम यह हुआ कि जीवात्मा विषयप्रवण इन्द्रियोंके अधीन होकर सतत संसारचक्रमें डालनेवाले लौकिक शब्द - स्पर्शादि विषयों में भटकने लगा । अर्थात् वह जिन शरीर, इन्द्रिय, मनके सहयोगसे भगवान्को प्राप्त कर सकता, उन्हींके साथ युक्त होकर वह विषय - विषके उपभोगमें लग गया ॥ ३-४॥ सम्बन्ध - परमात्माकी ओर न जाकर उसकी इन्द्रियाँ लौकिक विषयोंमें क्यों लग गयीं, इसका कारण बतलाते हैंयस्त्वविज्ञानवान् भवत्ययुक्तेन मनसा सदा । तस्येन्द्रियाण्यवश्यानि दुष्टाश्वा इव सारथेः ॥ ५ ॥ यः सदा = जो सदा; अविज्ञानवान् = विवेकहीन बुद्धिवाला; तु = और ; अयुक्तेन =अवशीभूत (चञ्चल); मनसा=मनसे (युक्त); भवति = रहता है; तस्य=उसकी; इन्द्रियाणि = इन्द्रियाँ; सारथेः = असावधान सारथिके; दुष्टाश्वाः इव दुष्ट घोड़ोंकी भाँति; अवश्यानि=वशमें न रहनेवाली; [ भवन्ति ] = हो जाती हैं ॥ ५ ॥ व्याख्या - रथको घोड़े ही चलाते हैं, परंतु उन घोड़ोंको चाहे जिस ओर, चाहे जिस मार्गपर ले जाना - लगाम हाथमें थामे हुए बुद्धिमान् सारथिका काम है। इन्द्रियरूपी बलवान् और दुर्धर्ष घोड़े स्वाभाविक ही आपातरमणीय विषयोंसे भरे संसाररूप हरी - हरी घासके जंगलकी ओर मनमाना दौड़ना चाहते हैं; परंतु यदि बुद्धिरूप सारथि मनरूपी लगामको जोरसे खींचकर उन्हें अपने वशमें कर लेता है तो फिर घोड़े मनरूपी लगामके सहारे बिना चाहे जिस ओर नहीं जा सकते। यह सभी जानते हैं कि इन्द्रियाँ विषयोंका ग्रहण तभी कर सकती हैं, जब मन उनके साथ होता है । घोड़े उसी ओर दौड़ते हैं, जिस ओर लगामका सहारा होता है; पर इस लगामको ठीक रखना सारथिकी बलबुद्धिपर निर्भर करता है। यदि बुद्धिरूपी सारथि विवेकयुक्त स्वामीका आज्ञाकारी, लक्ष्यपर सदा स्थिर, बलवान्, मार्गके ज्ञानसे सम्पन्न और इन्द्रियरूपी घोड़ों को चलानेमें दक्ष नहीं होता तो इन्द्रियरूपी दुष्ट घोड़े उसके वशमें न रहकर लगामके सहारे सम्पूर्ण रथको ही अपने वशमें कर लेते हैं और फलस्वरूप रथी और सारथिसमेत उस रथको लिये हुए गहरे गड्ढेमें जा पड़ते हैं। बुद्धिके नियन्त्रणसे रहित इन्द्रियाँ उत्तरोत्तर उसी प्रकार उच्छृङ्खल होती चली जाती हैं जैसे असावधान सारथिके दुष्ट घोड़े ॥ ५ ॥ सम्बन्ध - अब स्वयं सावधान रहकर अपनी बुद्धिको विवेकशील बनानेका लाभ बतलाते हैंयस्तु विज्ञानवान् भवति युक्तेन मनसा सदा तस्येन्द्रियाणि वश्यानि सदश्वा इव सारथेः ॥ ६ ॥ ॥६॥ तु यः सदा परंतु जो सदा; विज्ञानवान् विवेकयुक्त बुद्धिवाला (और); युक्तेन= वशमें किये हुए; मनसा = मनसे सम्पन्न; भवति = रहता है; तस्य= उसकी; इन्द्रियाणि= इन्द्रियाँ; सारथेः = सावधान सारथिके; सदश्वाः इव अच्छे घोड़ोंकी भाँति; वश्यानि=वशमें; [ भवन्ति ] = रहती हैं ॥ ६ ॥ व्याख्या - जो जीवात्मा अपनी बुद्धिको विवेकसम्पन्न बना लेता है - जिसकी बुद्धि अपने लक्ष्यकी ओर ध्यान रखती हुई नित्य - निरन्तर निपुणताके साथ इन्द्रियोंको सन्मार्गपर चलानेके लिये मनको बाध्य किये रहती है, उसका मन भी लक्ष्यकी ओर लगा रहता है एवं उसकी इन्द्रियाँ निश्चयात्मिका बुद्धिके अधीन रहकर भगवत्सम्बन्धी पवित्र विषयोंके सेवनमें उसी प्रकार संलग्न रहती हैं, जैसे श्रेष्ठ अश्व सावधान सारथिके अधीन रहकर उसके निर्दिष्ट मार्गपर चलते रहते हैं ॥ ६ ॥ ॥६॥ सम्बन्ध - पाँचवें मन्त्रके अनुसार जिसके बुद्धि और मन आदि विवेक और संयमसे हीन होते हैं, उसकी क्या गति होती है - इसे बतलाते हैंहै - - यस्त्वविज्ञानवान् भवत्यमनस्कः सदाशुचिः । न स तत्पदमाप्नोति सरसारं चाधिगच्छति ॥ ७ ॥ यः तु सदा जो कोई सदा; अविज्ञानवान् - विवेकहीन बुद्धिवाला; अमनस्कः=असंयतचित्त (और); अशुचिः= अपवित्र; भवति=रहता है; सः तत्पदम्-वह उस परमपदको; न आप्नोति नहीं पा सकता; च-अपि तु; संसारम् अधिगच्छति= बारबार जन्म-मृत्युरूप संसार- चक्रमें ही भटकता रहता है ॥ ७ ॥ व्याख्या - जिसकी बुद्धि सदा ही विवेकसे- कर्तव्याकर्तव्यके ज्ञानसे रहित और मनको वशमें रखनेमें असमर्थ रहती है, जिसका मन निग्रहरहित - असंयत है और जिसका विचार दूषित रहता है तथा जिसकी इन्द्रियाँ निरन्तर दुराचारमें प्रवृत्त रहती हैं - ऐसे बुद्धिशक्तिसे रहित मन-इन्द्रियोंके वशमें रहनेवाले मनुष्यका जीवन कभी पवित्र नहीं रह पाता और इसलिये वह मानव-शरीरसे प्राप्त होनेयोग्य परमपदको नहीं पा सकता, वरं अपने दुष्कर्मोंके परिणामस्वरूप अनवरत इस संसार - चक्रमें ही भटकता रहता है - कूकर- शूकरादि विभिन्न योनियोंमें जन्मता एवं मरता रहता है ॥ ७॥ यस्तु विज्ञानवान् भवति समनस्कः सदा शुचिः । स तु तत्पदमाप्नोति यस्माद् भूयो न जायते ॥ ८ ॥ तु यः सदा = परंतु जो सदा; विज्ञानवान् विवेकशील बुद्धिसे युक्त; समनस्कः=संयतचित्त (और); शुचिः पवित्र; भवति रहता है; सः तु वह तो ; तत्पदम्=उस परमपदको; आप्नोति प्राप्त कर लेता है; यस्मात् भूयः = जहाँसे (लौटकर) पुनः; न जायते जन्म नहीं लेता ॥ ८ ॥ व्याख्या - इसके विपरीत जो छठे मन्त्रके अनुसार स्वयं सावधान होकर अपनी बुद्धिको निरन्तर विवेकशील बनाये रखता है और उसके द्वारा मनको रोककर पवित्रभावमें स्थित रहता है अर्थात् इन्द्रियोंके द्वारा भगवान्की आज्ञाके अनुसार पवित्र कर्मोंका निष्कामभावसे आचरण करता है तथा भगवान्को अर्पण किये हुए भोगोंका राग-द्वेषसे रहित हो निष्कामभावसे शरीर - निर्वाहके लिये उपभोग करता रहता है, वह परमेश्वरके उस परमधामको प्राप्त कर लेता है, जहाँसे फिर लौटना नहीं होता ॥ ८ ॥ सम्बन्ध - आठवें मन्त्रमें कही हुई बातको फिरसे स्पष्ट करते हुए रथके रूपकका उपसंहार करते हैंविज्ञानसारथिर्यस्तु नरः । सोऽध्वनः पारमाप्नोति तद्विष्णोः परमं पदम् ॥ ९ ॥ यः नरः = जो (कोई) मनुष्य; विज्ञानसारथिः तु - विवेकशील बुद्धिरूप सारथिसे सम्पन्न (और); मनःप्रग्रहवान्=मनरूप लगामको वशमें रखनेवाला है; सः = वह; अध्वनः = संसारमार्गके; पारम्- पार पहुँचकर; विष्णोः- सर्वव्यापी परब्रह्म पुरुषोत्तमभगवान्के; तत् परमम् पदम् = उस सुप्रसिद्ध परमपदको; आप्नोति=प्राप्त हो जाता है॥९॥ व्याख्या - तृतीय मन्त्रसे नवम मन्त्रतक - सात मन्त्रों में रथके रूपकसे यह बात समझायी गयी है कि यह अति दुर्लभ मनुष्य शरीर जिस जीवात्माको परमात्माकी कृपासे मिल गया है, उसे शीघ्र सचेत होकर भगवत्प्राप्तिके मार्गमें लग जाना चाहिये। शरीर अनित्य है, प्रतिक्षण इसका ह्रास हो रहा है । यदि अपने जीवनके इस अमूल्य समयको पशुओंकी भाँति सांसारिक भोगोंके भोगनेमें ही नष्ट कर दिया गया तो फिर बारम्बार जन्म-मृत्युरूप संसार-चक्रमें घूमनेको बाध्य होना पड़ेगा। जिस महान् कार्यकी सिद्धिके लिये यह दुर्लभ मनुष्य शरीर मिला था, वह पूरा नहीं होगा । अतः मनुष्यको भगवान्की कृपासे मिली हुई विवेकशक्तिका सदुपयोग करना चाहिये । संसारकी अनित्यताको और इन आपातरमणीय विषय-जनित सुखोंकी यथार्थ दुःखरूपताको समझकर इनके चिन्तन और उपभोगसे सर्वथा उपरत हो जाना चाहिये । केवल शरीरनिर्वाहके उपयुक्त कर्तव्यकर्मोंका निष्कामभावसे भगवान्की आज्ञा समझकर अनुष्ठान करते हुए अपनी बुद्धिमें भगवान् के नाम, रूप, लीला, धाम तथा उनकी अलौकिक शक्ति और अहैतुकी दयापर दृढ़ विश्वास उत्पन्न करना चाहिये और सर्वतोभावसे भगवान्पर ही निर्भर हो जाना चाहिये । अपने मनको भगवान्के तत्त्व-चिन्तनमें, वाणीको उनके गुण- वर्णनमें, नेत्रोंको उनके दर्शनमें तथा कानोंको उनके महिमा - श्रवणमें लगाना चाहिये । इस प्रकार सारी इन्द्रियोंका सम्बन्ध भगवान्से जोड़ देना चाहिये । जीवनका एक क्षण भी भगवान्की मधुर स्मृतिके बिना न बीतने पाये । इसीमें मनुष्य जीवनकी सार्थकता है। जो ऐसा करता है, वह निश्चय ही परब्रह्म पुरुषोत्तमके अचिन्त्य परमपदको प्राप्त होकर सदाके लिये कृतकृत्य हो जाता है ॥ ९ ॥ सम्बन्ध - उपर्युक्त वर्णनमें रथके रूपककी कल्पना करके भगवत्प्राप्तिके लिये जो साधन बतलाया गया, उसमें विवेकशील बुद्धिके द्वारा मनको वशमें करके, इन्द्रियोंको विपरीत मार्गसे हटाकर, भगवत्प्राप्तिके मार्गमें लगानेकी बात कही गयी । इसपर यह जिज्ञासा होती है कि स्वभावसे ही दुष्ट और बलवान् इन्द्रियोंको उनके प्रिय और अभ्यस्त असत्-मार्गसे किस प्रकार हटाया जाय; अतः इस बातका तात्त्विक विवेचन करके इन्द्रियोंको असत्-मार्गसे रोककर भगवान्की ओर लगानेका प्रकार बतलाते हैं - इन्द्रियेभ्यः परा ह्यर्था अर्थेभ्यश्च परं मनः । मनसस्तु परा बुद्धिर्बुद्धेरात्मा महान् परः ॥ १० ॥ हि इन्द्रियेभ्यः=क्योंकि इन्द्रियोंसे; अर्थाः = शब्दादि विषय; पराः = बलवान् हैं; च= और ; अर्थेभ्यः = शब्दादि विषयोंसे; मनः = मन; परम् = पर ( प्रबल) है; तु मनसः = और मनसे भी; बुद्धिः = बुद्धि; परा= पर ( बलवती) है; बुद्धेः= (तथा) बुद्धिसे; महान् आत्मा = महान् आत्मा (उन सबका स्वामी होनेके कारण); परः = अत्यन्त श्रेष्ठ और बलवान् है ॥ १० ॥ व्याख्या - इस मन्त्रमें 'पर' शब्दका प्रयोग बलवान्के अर्थमें हुआ है, यह बात समझ लेनी चाहिये; क्योंकि कार्य-कारणभावसे या सूक्ष्मताकी दृष्टि से इन्द्रियोंकी अपेक्षा शब्दादि विषयोंको श्रेष्ठ बतलाना युक्तियुक्त नहीं कहा जा सकता। इसी प्रकार 'महान्' विशेषणके सहित, 'आत्मा' शब्द भी 'जीवात्मा' का वाचक है, 'महत्तत्त्व' का नहीं । जीवात्मा इन सबका स्वामी है, अतः उसके लिये महान् विशेषण देना उचित ही है। यदि महत्तत्त्वके अर्थमें इसका प्रयोग होता तो 'आत्मा' शब्दके प्रयोगकी कोई आवश्यकता ही नहीं थी । दूसरी बात यह भी है कि बुद्धि- तत्त्व ही महत्तत्त्व है । तत्त्व - विचारकालमें इनमें भेद नहीं माना जाता। इसके सिवा आगे चलकर जहाँ निरोध - (एक तत्त्वको दूसरेमें लीन करने) का प्रसङ्ग है, वहाँ भी बुद्धिका निरोध 'महान् आत्मा' में करनेके लिये कहा गया है। इन सब कारणोंसे तथा ब्रह्मसूत्रकारको सांख्यमतानुसार महत्तत्त्व और अव्यक्त प्रकृतिरूप अर्थ स्वीकार न होनेसे भी यही मानना चाहिये कि यहाँ 'महान्' विशेषणके सहित 'आत्मा' पदका अर्थ जीवात्मा ही है। * इसलिये मन्त्रका सारांश यह है कि इन्द्रियोंसे अर्थ (विषय) बलवान् हैं। वे साधककी इन्द्रियोंको बलपूर्वक अपनी ओर आकर्षित करते रहते हैं, अतः साधकको उचित है कि इन्द्रियोंको विषयोंसे दूर रखें । विषयोंसे बलवान् मन है। यदि मनकी विषयोंमें आसक्ति न रहे तो इन्द्रियाँ और विषय - ये दोनों साधककी कुछ भी हानि नहीं कर सकते । मनसे भी बुद्धि बलवान् है, अतः बुद्धिके द्वारा विचार करके मनको राग-द्वेषरहित बनाकर अपने वशमें कर लेना चाहिये । एवं बुद्धिसे भी इन सबका स्वामी महान् 'आत्मा' बलवान् है। उसकी आज्ञा माननेके लिये ये सभी बाध्य हैं । अतः मनुष्यको आत्मशक्तिका अनुभव करके उसके द्वारा बुद्धि आदि सबको नियन्त्रणमें रखना चाहिये ॥ १० ॥ परमव्यक्तमव्यक्तात् पुरुषः परः। पुरुषान्न परं किंचित्सा काष्ठा सा परा गतिः ॥ ११ ॥ * भाष्यकार प्रातः स्मरणीय स्वामी शङ्कराचार्यजीने भी यहाँ 'महान् आत्मा' को जीवात्मा ही माना है, महत्तत्त्व नहीं (देखिये ब्रह्मसूत्र अ० १ पा० ४ सू० १ का शाङ्करभाष्य) । महतः = उस जीवात्मासे; परम् - बलवती है; अव्यक्तम् = भगवान्की अव्यक्त मायाशक्ति; अव्यक्तात्=अव्यक्त मायासे भी; परः = श्रेष्ठ है; पुरुषः = परमपुरुष (स्वयं परमेश्वर); पुरुषात्=परमपुरुष भगवान्से; परम् - श्रेष्ठ और बलवान्; किञ्चित्-कुछ भी; न= नहीं है; सा काष्ठा - वही सबकी परम अवधि (और); सा परा गतिः = वही परम गति है ॥११॥ व्याख्या - इस मन्त्रमें 'अव्यक्त' शब्द भगवान्की उस त्रिगुणमयी दैवी मायाशक्तिके लिये प्रयुक्त हुआ है, जो गीतामें दुरत्यय (अतिदुस्तर) बतायी गयी है (गीता ७। १४) तथा जिससे मोहित हुए जीव भगवान्को नहीं जानते (गीता ७। १३)। यही जीवात्मा और परमात्माके बीचमें परदा है, जिसके कारण जीव सर्वव्यापी अन्तर्यामी परमेश्वरको नित्य समीप होनेपर भी नहीं देख पाता । इसे इस प्रकरणमें जीवसे भी बलवान् बतलानेका यह भाव है कि जीव अपनी शक्तिसे इस मायाको नहीं हटा सकता, भगवान्की शरण ग्रहण करनेपर भगवान्की दयाके बलसे ही वह इससे पार हो सकता है (गीता ७ । १४)। यहाँ अव्यक्त' शब्दसे सांख्यमतावलम्बियोंका 'प्रधान तत्त्व' नहीं ग्रहण करना चाहिये; क्योंकि उनके मतमें 'प्रधान' स्वतन्त्र है, वह आत्मासे पर नहीं है; तथा आत्माको भोग और मुक्ति - दोनों वस्तुएँ देकर उसका प्रयोजन सिद्ध करनेवाला है। परंतु उपनिषद् और गीतामें इस अव्यक्त प्रकृतिको कहीं भी मुक्ति देनेमें समर्थ नहीं माना है। अतः इस मन्त्रका तात्पर्य यह है कि इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि - इन सबपर आत्माका अधिकार है; अतः यह स्वयं उनको वशमें करके भगवान्की ओर बढ़ सकता है। परंतु इस आत्मासे भी बलवान् एक और तत्त्व है, जिसका नाम 'अव्यक्त' है। कोई उसे प्रकृति और कोई माया भी कहते हैं। इसीसे सब जीवसमुदाय मोहित होकर उसके वशमें हो रहा है। इसको हटाना जीवके अधिकारकी बात नहीं है; अतः इससे भी बलवान् जो इसके स्वामी परमपुरुष परमेश्वर हैं - जो बल, क्रिया और ज्ञान आदि सभी शक्तियोंकी अन्तिम अवधि और परम आधार हैं - उन्हींकी शरण लेनी चाहिये । जब वे दया करके इस मायारूप परदेको स्वयं हटा लेंगे, तब उसी क्षण वहीं भगवान्की प्राप्ति हो जायगी; क्योंकि वे तो सदासे ही सर्वत्र विद्यमान हैं ॥ ११ ॥ सम्बन्ध - यही भाव अगले मन्त्रमें स्पष्ट करते हैंएष सर्वेषु भूतेषु गूढोत्मा न प्रकाशते । दृश्यते त्वग्र्यया बुद्ध्या सूक्ष्मया सूक्ष्मदर्शिभिः ॥ १२ ॥ एषः आत्मा=यह सबका आत्मरूप परमपुरुष; सर्वेषु भूतेषु - समस्त प्राणियोंमें रहता हुआ भी; गूढ :- मायाके परदेमें छिपा रहनेके कारण; न प्रकाशते=सबके प्रत्यक्ष नहीं होता; तु सूक्ष्मदर्शिभिः = केवल सूक्ष्मतत्त्वोंको समझनेवाले पुरुषोंद्वारा ही ; सूक्ष्मया अग्र्यया बुद्धया - अति सूक्ष्म तीक्ष्ण बुद्धिसे; दृश्यते देखा जाता है ॥ १२ ॥ व्याख्या - ये परब्रह्म पुरुषोत्तमभगवान् सबके अन्तर्यामी हैं, अतः सब प्राणियोंके हृदयमें विराजमान हैं, परंतु अपनी मायाके परदेमें छिपे हुए हैं, इस कारण उनके जाननेमें नहीं आते। जिन्होंने भगवान्का आश्रय लेकर अपनी बुद्धिको तीक्ष्ण बना लिया है, वे सूक्ष्मदर्शी ही भगवान्की दयासे सूक्ष्मबुद्धिके द्वारा उन्हें देख पाते हैं ॥ १२ ॥ सम्बन्ध - विवेकशील मनुष्यको भगवान्के शरण होकर किस प्रकार भगवान्की प्राप्ति के लिये साधन करना चाहिये ? - इस जिज्ञासापर कहते हैंयच्छेद्वाङ्मनसी प्राज्ञस्तद्यच्छेज्ज्ञान ज्ञानमात्मनि महति नियच्छेत्तद्यच्छेच्छान्त आत्मनि ॥ १३ ॥ प्राज्ञः=बुद्धिमान् साधकको चाहिये कि; वाक्- (पहले) वाक् आदि (समस्त इन्द्रियों) को; मनसी मनमें; यच्छेत् निरुद्ध करे; तत् = उस मनको; ज्ञाने आत्मनि=ज्ञानस्वरूप बुद्धिमें; यच्छेत् - विलीन करे; ज्ञानम् - ज्ञानस्वरूप बुद्धिको; महति आत्मनि=महान् आत्मामें; नियच्छेत् = विलीन करे; (और) ; तत्=उसको; शान्ते आत्मनि= शान्तस्वरूप परमपुरुष परमात्मामें; यच्छेत् - विलीन करे ॥ १३ ॥ व्याख्या - - बुद्धिमान् मनुष्यको उचित है कि वह पहले तो वाक् आदि इन्द्रियोंको बाह्य विषयोंसे हटाकर मनमें विलीन कर दे अर्थात् इनकी ऐसी स्थिति कर दे कि इनकी कोई भी क्रिया न हो - मनमें विषयोंकी स्फुरणा न
सुकृतस्य लोके=शुभ कर्मोंके फलस्वरूप मनुष्य - शरीरमें; परमे परार्धे= परब्रह्मके उत्तम निवास स्थान में; गुहाम् प्रविष्टौ = बुद्धिरूप गुफामें छिपे हुए; ऋतम् पिबन्तौ = सत्यका पान करनेवाले ; छायातपौ= छाया और धूपकी भाँति परस्पर भिन्न हैं; ब्रह्मविद : ब्रह्मवेत्ता ज्ञानी महापुरुष; वदन्ति कहते हैं; च ये = तथा जो; त्रिणाचिकेताः = तीन बार नाचिकेत-अग्निका चयन कर लेनेवाले; पञ्चाग्नयः = पञ्चाग्निसम्पन्न गृहस्थ हैं; [ ते वदन्ति ] = वे भी यही बात कहते हैं ॥ एक ॥ व्याख्या - यमराजने यहाँ जीवात्मा और परमात्माके नित्य सम्बन्धका परिचय देते हुए कहा कि ब्रह्मवेत्ता ज्ञानी महानुभाव तथा यज्ञादि शुभकर्मोंका अनुष्ठान करनेवाले आस्तिक सज्जन - सभी एक स्वरसे यही कहते हैं कि यह मनुष्य-शरीर बहुत ही दुर्लभ है। पूर्वजन्मार्जित अनेकों पुण्यकर्मोंको निमित्त बनाकर परम कृपालु परमात्मा कृपापरवश हो जीवको उसके कल्याणसम्पादनके लिये यह श्रेष्ठ शरीर प्रदान करते हैं और फिर उस जीवात्माके साथ ही स्वयं भी उसीके हृदयके अन्तस्तलमें- परब्रह्म के निवासस्वरूप श्रेष्ठ स्थानमें अन्तर्यामीरूपसे प्रविष्ट हो रहते हैं इतना ही नहीं, वे दोनों साथ-ही-साथ वहाँ सत्यका पान करते हैं - शुभकर्मोंके अवश्यम्भावी सत्फलका भोग करते हैं । अवश्य ही दोनोंके भोगमें बड़ा अन्तर है। उनका प्रत्येक प्राणीके हृदयमें निवास करके उसके शुभकर्मोंके फलका उपभोग करना उनकी वैसी ही लीला है, जैसी अजन्मा होकर जन्म ग्रहण करना । इसलिये यह कहा जाता है कि वे भोगते हुए भी वस्तुतः नहीं भोगते । अथवा यह भी कहा जा सकता है कि परमात्मा सत्यको पिलाते हैं - शुभ-कर्मका फल भुगताते हैं और जीवात्मा पीता है - फल भोगता है। परंतु जीवात्मा फलभोगके समय असङ्ग नहीं रहता। वह अभिमानवश उसमें सुखका उपभोग करता है। इस प्रकार साथ रहनेपर भी जीवात्मा और परमात्मा दोनों छाया और धूपकी भाँति परस्पर भिन्न हैं। जीवात्मा छायाकी भाँति अल्प प्रकाश - अल्पज्ञ है और परमात्मा धूपकी भाँति पूर्णप्रकाश - सर्वज्ञ ! परंतु जीवात्मामें जो कुछ अल्पज्ञान है, वह भी परमात्माका ही है, जैसे छायामें अल्प- प्रकाश पूर्णप्रकाशरूप धूपका ही होता है। * इस रहस्यको समझकर मनुष्यको अपनेमें किसी प्रकारकी भी शक्तिसामर्थ्यका अभिमान नहीं करना चाहिये और अन्तर्यामीरूपसे सदा सर्वदा अपने हृदयमें रहनेवाले परम आत्मीय परम कृपालु परमात्माका नित्य-निरन्तर चिन्तन करते रहना चाहिये ॥ एक ॥ सम्बन्ध- परमात्माको जानने और प्राप्त करनेका जो सर्वोत्तम साधन 'उन्हें जानने और पानेकी शक्ति प्रदान करनेके लिये उन्हींसे प्रार्थना करना है' इस बातको यमराज स्वयं प्रार्थना करते हुए बतलाते हैंयः सेतुरीजानानामक्षरं ब्रह्म यत् परम् । अभयं तितीर्षतां पारं नाचिकेत शकेमहि ॥ दो ॥ ईजानानाम्=यज्ञ करनेवालोंके लिये; यः सेतुः = जो दुःखसमुद्रसे पार पहुँचा देनेयोग्य सेतु है; [ तम् ] नाचिकेतम् = उस नाचिकेत - अग्निको ; पारम् तितीर्षताम् = संसार-समुद्रसे पार होनेकी इच्छावालोंके लिये; यत् अभयम्= जो भयरहित पद है; [ तत् ] अक्षरम् = उस अविनाशी; परम् ब्रह्म= परब्रह्म पुरुषोत्तमको; शकेमहि= जानने और प्राप्त करनेमें भी हम समर्थ हों ॥दो॥ व्याख्या - यमराज कहते हैं कि हे परमात्मन् ! आप हमें वह सामर्थ्य दीजिये, जिससे हम निष्कामभावसे यज्ञादि शुभकर्म करनेकी विधिको भलीभाँति जान सकें और आपके आज्ञापालनार्थ उनका अनुष्ठान करके आपकी प्रसन्नता प्राप्त कर सकें तथा जो संसार - समुद्रसे पार होनेकी इच्छावाले विरक्त पुरुषोंके * इस मन्त्रमें 'जीवात्मा' और 'परमात्मा को ही गुहामें प्रविष्ट बतलाया गया है, 'बुद्धि' और 'जीव' को नहीं । 'गुहाहितत्वं तु परमात्मन एव दृश्यते' । लिये निर्भय पद है, उस परम अविनाशी आप परब्रह्म पुरुषोत्तमभगवान्को भी जानने और प्राप्त करनेके योग्य बन जायँ । इस मन्त्रमें यमराजने परमात्मासे उन्हें जाननेकी शक्ति प्रदान करनेके लिये प्रार्थना करके यह भाव दिखलाया है कि परब्रह्म पुरुषोत्तमको जानने और प्राप्त करनेका सबसे उत्तम और सरल साधन उनसे प्रार्थना करना ही है ॥ दो ॥ सम्बन्ध - अब, उस परब्रह्म पुरुषोत्तमके परमधाममें किन साधनोंसे सम्पन्न मनुष्य पहुँच सकता है, यह बात रथ और रथीके रूपककी कल्पना करके समझायी जाती हैआत्मान रथिनं विद्धि शरीरपाँच रथमेव तु । बुद्धिं तु सारथिं विद्धि मनः प्रग्रहमेव च ॥ तीन ॥ ॥तीन॥ आत्मानम्= जीवात्माको तो; रथिनम् = रथका स्वामी ; विद्धि समझो; तु और; शरीरम् एव = शरीरको ही ; रथम्=रथ ; तु बुद्धिम् = तथा बुद्धिको; सारथिम्= सारथि ; विद्धि=समझो; च मनः एव और मनको ही; प्रग्रहम् = लगाम ॥ तीन ॥ इन्द्रियाणि हयानाहुर्विषयाः स्तेषु गोचरान्। आत्मेन्द्रियमनोयुक्तं मनीषिणः =ज्ञानीजन ; इन्द्रियाणि - इन्द्रियोंको; हयान्- घोड़े; आहुः = बतलाते हैं ; विषयान् = विषयोंको; तेषु गोचरान् = उन घोड़ोंके विचरनेका मार्ग ; आत्मेन्द्रियमनोयुक्तम् शरीर, इन्द्रिय और मन - इन सबके साथ रहनेवाला जीवात्मा ही ; भोक्ता भोक्ता है; इति आहुः = यों कहते हैं ॥ चार ॥ व्याख्या - जीवात्मा परमात्मासे बिछुड़ा हुआ है, अनन्त कालसे वह अनवरत संसाररूपी बीहड़ वनमें इधर-उधर सुखकी खोजमें भटक रहा है। सुख समझकर जहाँ भी जाता है, वहीं धोखा खाता है। सर्वथा साधनहीन और दयनीय है। जबतक वह परम सुखस्वरूप परमात्माके समीप नहीं पहुँच जाता, तबतक उसे सुख-शान्ति कभी नहीं मिल सकती । उसकी इस दयनीय दशाको देखकर दयामय परमात्माने उसे मानव-शरीररूपी सुन्दर सर्वसाधनसम्पन्न रथ दिया। इन्द्रियरूप बलवान् घोड़े दिये । उनके मनरूपी लगाम लगाकर उसे बुद्धिरूपी सारथिके हाथोंमें सौंप दिया और जीवात्माको उस रथमें बैठाकर - उसका स्वामी बनाकर यह बतला दिया कि वह निरन्तर बुद्धिकी प्रेरणा करता रहे और परमात्माकी ओर ले जानेवाले भगवान् के नाम, रूप, लीला, धाम आदिके श्रवण, कीर्तन, मननादि विषयरूप प्रशस्त और सहज मार्गपर चलकर शीघ्र परमात्माके धाममें पहुँच जाय। जीवात्मा यदि ऐसा करता तो वह शीघ्र ही परमात्मातक पहुँच जाता; परंतु वह अपने परमानन्दमय भगवत्प्राप्तिरूप इस महान् लक्ष्यको मोहवश भूल गया । उसने बुद्धिको प्रेरणा देना बंद कर दिया, जिससे बुद्धिरूपी सारथि असावधान हो गया, उसने मनरूपी लगामको इन्द्रियरूपी दुष्ट घोड़ोंकी इच्छापर छोड़ दिया । परिणाम यह हुआ कि जीवात्मा विषयप्रवण इन्द्रियोंके अधीन होकर सतत संसारचक्रमें डालनेवाले लौकिक शब्द - स्पर्शादि विषयों में भटकने लगा । अर्थात् वह जिन शरीर, इन्द्रिय, मनके सहयोगसे भगवान्को प्राप्त कर सकता, उन्हींके साथ युक्त होकर वह विषय - विषके उपभोगमें लग गया ॥ तीन-चार॥ सम्बन्ध - परमात्माकी ओर न जाकर उसकी इन्द्रियाँ लौकिक विषयोंमें क्यों लग गयीं, इसका कारण बतलाते हैंयस्त्वविज्ञानवान् भवत्ययुक्तेन मनसा सदा । तस्येन्द्रियाण्यवश्यानि दुष्टाश्वा इव सारथेः ॥ पाँच ॥ यः सदा = जो सदा; अविज्ञानवान् = विवेकहीन बुद्धिवाला; तु = और ; अयुक्तेन =अवशीभूत ; मनसा=मनसे ; भवति = रहता है; तस्य=उसकी; इन्द्रियाणि = इन्द्रियाँ; सारथेः = असावधान सारथिके; दुष्टाश्वाः इव दुष्ट घोड़ोंकी भाँति; अवश्यानि=वशमें न रहनेवाली; [ भवन्ति ] = हो जाती हैं ॥ पाँच ॥ व्याख्या - रथको घोड़े ही चलाते हैं, परंतु उन घोड़ोंको चाहे जिस ओर, चाहे जिस मार्गपर ले जाना - लगाम हाथमें थामे हुए बुद्धिमान् सारथिका काम है। इन्द्रियरूपी बलवान् और दुर्धर्ष घोड़े स्वाभाविक ही आपातरमणीय विषयोंसे भरे संसाररूप हरी - हरी घासके जंगलकी ओर मनमाना दौड़ना चाहते हैं; परंतु यदि बुद्धिरूप सारथि मनरूपी लगामको जोरसे खींचकर उन्हें अपने वशमें कर लेता है तो फिर घोड़े मनरूपी लगामके सहारे बिना चाहे जिस ओर नहीं जा सकते। यह सभी जानते हैं कि इन्द्रियाँ विषयोंका ग्रहण तभी कर सकती हैं, जब मन उनके साथ होता है । घोड़े उसी ओर दौड़ते हैं, जिस ओर लगामका सहारा होता है; पर इस लगामको ठीक रखना सारथिकी बलबुद्धिपर निर्भर करता है। यदि बुद्धिरूपी सारथि विवेकयुक्त स्वामीका आज्ञाकारी, लक्ष्यपर सदा स्थिर, बलवान्, मार्गके ज्ञानसे सम्पन्न और इन्द्रियरूपी घोड़ों को चलानेमें दक्ष नहीं होता तो इन्द्रियरूपी दुष्ट घोड़े उसके वशमें न रहकर लगामके सहारे सम्पूर्ण रथको ही अपने वशमें कर लेते हैं और फलस्वरूप रथी और सारथिसमेत उस रथको लिये हुए गहरे गड्ढेमें जा पड़ते हैं। बुद्धिके नियन्त्रणसे रहित इन्द्रियाँ उत्तरोत्तर उसी प्रकार उच्छृङ्खल होती चली जाती हैं जैसे असावधान सारथिके दुष्ट घोड़े ॥ पाँच ॥ सम्बन्ध - अब स्वयं सावधान रहकर अपनी बुद्धिको विवेकशील बनानेका लाभ बतलाते हैंयस्तु विज्ञानवान् भवति युक्तेन मनसा सदा तस्येन्द्रियाणि वश्यानि सदश्वा इव सारथेः ॥ छः ॥ ॥छः॥ तु यः सदा परंतु जो सदा; विज्ञानवान् विवेकयुक्त बुद्धिवाला ; युक्तेन= वशमें किये हुए; मनसा = मनसे सम्पन्न; भवति = रहता है; तस्य= उसकी; इन्द्रियाणि= इन्द्रियाँ; सारथेः = सावधान सारथिके; सदश्वाः इव अच्छे घोड़ोंकी भाँति; वश्यानि=वशमें; [ भवन्ति ] = रहती हैं ॥ छः ॥ व्याख्या - जो जीवात्मा अपनी बुद्धिको विवेकसम्पन्न बना लेता है - जिसकी बुद्धि अपने लक्ष्यकी ओर ध्यान रखती हुई नित्य - निरन्तर निपुणताके साथ इन्द्रियोंको सन्मार्गपर चलानेके लिये मनको बाध्य किये रहती है, उसका मन भी लक्ष्यकी ओर लगा रहता है एवं उसकी इन्द्रियाँ निश्चयात्मिका बुद्धिके अधीन रहकर भगवत्सम्बन्धी पवित्र विषयोंके सेवनमें उसी प्रकार संलग्न रहती हैं, जैसे श्रेष्ठ अश्व सावधान सारथिके अधीन रहकर उसके निर्दिष्ट मार्गपर चलते रहते हैं ॥ छः ॥ ॥छः॥ सम्बन्ध - पाँचवें मन्त्रके अनुसार जिसके बुद्धि और मन आदि विवेक और संयमसे हीन होते हैं, उसकी क्या गति होती है - इसे बतलाते हैंहै - - यस्त्वविज्ञानवान् भवत्यमनस्कः सदाशुचिः । न स तत्पदमाप्नोति सरसारं चाधिगच्छति ॥ सात ॥ यः तु सदा जो कोई सदा; अविज्ञानवान् - विवेकहीन बुद्धिवाला; अमनस्कः=असंयतचित्त ; अशुचिः= अपवित्र; भवति=रहता है; सः तत्पदम्-वह उस परमपदको; न आप्नोति नहीं पा सकता; च-अपि तु; संसारम् अधिगच्छति= बारबार जन्म-मृत्युरूप संसार- चक्रमें ही भटकता रहता है ॥ सात ॥ व्याख्या - जिसकी बुद्धि सदा ही विवेकसे- कर्तव्याकर्तव्यके ज्ञानसे रहित और मनको वशमें रखनेमें असमर्थ रहती है, जिसका मन निग्रहरहित - असंयत है और जिसका विचार दूषित रहता है तथा जिसकी इन्द्रियाँ निरन्तर दुराचारमें प्रवृत्त रहती हैं - ऐसे बुद्धिशक्तिसे रहित मन-इन्द्रियोंके वशमें रहनेवाले मनुष्यका जीवन कभी पवित्र नहीं रह पाता और इसलिये वह मानव-शरीरसे प्राप्त होनेयोग्य परमपदको नहीं पा सकता, वरं अपने दुष्कर्मोंके परिणामस्वरूप अनवरत इस संसार - चक्रमें ही भटकता रहता है - कूकर- शूकरादि विभिन्न योनियोंमें जन्मता एवं मरता रहता है ॥ सात॥ यस्तु विज्ञानवान् भवति समनस्कः सदा शुचिः । स तु तत्पदमाप्नोति यस्माद् भूयो न जायते ॥ आठ ॥ तु यः सदा = परंतु जो सदा; विज्ञानवान् विवेकशील बुद्धिसे युक्त; समनस्कः=संयतचित्त ; शुचिः पवित्र; भवति रहता है; सः तु वह तो ; तत्पदम्=उस परमपदको; आप्नोति प्राप्त कर लेता है; यस्मात् भूयः = जहाँसे पुनः; न जायते जन्म नहीं लेता ॥ आठ ॥ व्याख्या - इसके विपरीत जो छठे मन्त्रके अनुसार स्वयं सावधान होकर अपनी बुद्धिको निरन्तर विवेकशील बनाये रखता है और उसके द्वारा मनको रोककर पवित्रभावमें स्थित रहता है अर्थात् इन्द्रियोंके द्वारा भगवान्की आज्ञाके अनुसार पवित्र कर्मोंका निष्कामभावसे आचरण करता है तथा भगवान्को अर्पण किये हुए भोगोंका राग-द्वेषसे रहित हो निष्कामभावसे शरीर - निर्वाहके लिये उपभोग करता रहता है, वह परमेश्वरके उस परमधामको प्राप्त कर लेता है, जहाँसे फिर लौटना नहीं होता ॥ आठ ॥ सम्बन्ध - आठवें मन्त्रमें कही हुई बातको फिरसे स्पष्ट करते हुए रथके रूपकका उपसंहार करते हैंविज्ञानसारथिर्यस्तु नरः । सोऽध्वनः पारमाप्नोति तद्विष्णोः परमं पदम् ॥ नौ ॥ यः नरः = जो मनुष्य; विज्ञानसारथिः तु - विवेकशील बुद्धिरूप सारथिसे सम्पन्न ; मनःप्रग्रहवान्=मनरूप लगामको वशमें रखनेवाला है; सः = वह; अध्वनः = संसारमार्गके; पारम्- पार पहुँचकर; विष्णोः- सर्वव्यापी परब्रह्म पुरुषोत्तमभगवान्के; तत् परमम् पदम् = उस सुप्रसिद्ध परमपदको; आप्नोति=प्राप्त हो जाता है॥नौ॥ व्याख्या - तृतीय मन्त्रसे नवम मन्त्रतक - सात मन्त्रों में रथके रूपकसे यह बात समझायी गयी है कि यह अति दुर्लभ मनुष्य शरीर जिस जीवात्माको परमात्माकी कृपासे मिल गया है, उसे शीघ्र सचेत होकर भगवत्प्राप्तिके मार्गमें लग जाना चाहिये। शरीर अनित्य है, प्रतिक्षण इसका ह्रास हो रहा है । यदि अपने जीवनके इस अमूल्य समयको पशुओंकी भाँति सांसारिक भोगोंके भोगनेमें ही नष्ट कर दिया गया तो फिर बारम्बार जन्म-मृत्युरूप संसार-चक्रमें घूमनेको बाध्य होना पड़ेगा। जिस महान् कार्यकी सिद्धिके लिये यह दुर्लभ मनुष्य शरीर मिला था, वह पूरा नहीं होगा । अतः मनुष्यको भगवान्की कृपासे मिली हुई विवेकशक्तिका सदुपयोग करना चाहिये । संसारकी अनित्यताको और इन आपातरमणीय विषय-जनित सुखोंकी यथार्थ दुःखरूपताको समझकर इनके चिन्तन और उपभोगसे सर्वथा उपरत हो जाना चाहिये । केवल शरीरनिर्वाहके उपयुक्त कर्तव्यकर्मोंका निष्कामभावसे भगवान्की आज्ञा समझकर अनुष्ठान करते हुए अपनी बुद्धिमें भगवान् के नाम, रूप, लीला, धाम तथा उनकी अलौकिक शक्ति और अहैतुकी दयापर दृढ़ विश्वास उत्पन्न करना चाहिये और सर्वतोभावसे भगवान्पर ही निर्भर हो जाना चाहिये । अपने मनको भगवान्के तत्त्व-चिन्तनमें, वाणीको उनके गुण- वर्णनमें, नेत्रोंको उनके दर्शनमें तथा कानोंको उनके महिमा - श्रवणमें लगाना चाहिये । इस प्रकार सारी इन्द्रियोंका सम्बन्ध भगवान्से जोड़ देना चाहिये । जीवनका एक क्षण भी भगवान्की मधुर स्मृतिके बिना न बीतने पाये । इसीमें मनुष्य जीवनकी सार्थकता है। जो ऐसा करता है, वह निश्चय ही परब्रह्म पुरुषोत्तमके अचिन्त्य परमपदको प्राप्त होकर सदाके लिये कृतकृत्य हो जाता है ॥ नौ ॥ सम्बन्ध - उपर्युक्त वर्णनमें रथके रूपककी कल्पना करके भगवत्प्राप्तिके लिये जो साधन बतलाया गया, उसमें विवेकशील बुद्धिके द्वारा मनको वशमें करके, इन्द्रियोंको विपरीत मार्गसे हटाकर, भगवत्प्राप्तिके मार्गमें लगानेकी बात कही गयी । इसपर यह जिज्ञासा होती है कि स्वभावसे ही दुष्ट और बलवान् इन्द्रियोंको उनके प्रिय और अभ्यस्त असत्-मार्गसे किस प्रकार हटाया जाय; अतः इस बातका तात्त्विक विवेचन करके इन्द्रियोंको असत्-मार्गसे रोककर भगवान्की ओर लगानेका प्रकार बतलाते हैं - इन्द्रियेभ्यः परा ह्यर्था अर्थेभ्यश्च परं मनः । मनसस्तु परा बुद्धिर्बुद्धेरात्मा महान् परः ॥ दस ॥ हि इन्द्रियेभ्यः=क्योंकि इन्द्रियोंसे; अर्थाः = शब्दादि विषय; पराः = बलवान् हैं; च= और ; अर्थेभ्यः = शब्दादि विषयोंसे; मनः = मन; परम् = पर है; तु मनसः = और मनसे भी; बुद्धिः = बुद्धि; परा= पर है; बुद्धेः= बुद्धिसे; महान् आत्मा = महान् आत्मा ; परः = अत्यन्त श्रेष्ठ और बलवान् है ॥ दस ॥ व्याख्या - इस मन्त्रमें 'पर' शब्दका प्रयोग बलवान्के अर्थमें हुआ है, यह बात समझ लेनी चाहिये; क्योंकि कार्य-कारणभावसे या सूक्ष्मताकी दृष्टि से इन्द्रियोंकी अपेक्षा शब्दादि विषयोंको श्रेष्ठ बतलाना युक्तियुक्त नहीं कहा जा सकता। इसी प्रकार 'महान्' विशेषणके सहित, 'आत्मा' शब्द भी 'जीवात्मा' का वाचक है, 'महत्तत्त्व' का नहीं । जीवात्मा इन सबका स्वामी है, अतः उसके लिये महान् विशेषण देना उचित ही है। यदि महत्तत्त्वके अर्थमें इसका प्रयोग होता तो 'आत्मा' शब्दके प्रयोगकी कोई आवश्यकता ही नहीं थी । दूसरी बात यह भी है कि बुद्धि- तत्त्व ही महत्तत्त्व है । तत्त्व - विचारकालमें इनमें भेद नहीं माना जाता। इसके सिवा आगे चलकर जहाँ निरोध - का प्रसङ्ग है, वहाँ भी बुद्धिका निरोध 'महान् आत्मा' में करनेके लिये कहा गया है। इन सब कारणोंसे तथा ब्रह्मसूत्रकारको सांख्यमतानुसार महत्तत्त्व और अव्यक्त प्रकृतिरूप अर्थ स्वीकार न होनेसे भी यही मानना चाहिये कि यहाँ 'महान्' विशेषणके सहित 'आत्मा' पदका अर्थ जीवात्मा ही है। * इसलिये मन्त्रका सारांश यह है कि इन्द्रियोंसे अर्थ बलवान् हैं। वे साधककी इन्द्रियोंको बलपूर्वक अपनी ओर आकर्षित करते रहते हैं, अतः साधकको उचित है कि इन्द्रियोंको विषयोंसे दूर रखें । विषयोंसे बलवान् मन है। यदि मनकी विषयोंमें आसक्ति न रहे तो इन्द्रियाँ और विषय - ये दोनों साधककी कुछ भी हानि नहीं कर सकते । मनसे भी बुद्धि बलवान् है, अतः बुद्धिके द्वारा विचार करके मनको राग-द्वेषरहित बनाकर अपने वशमें कर लेना चाहिये । एवं बुद्धिसे भी इन सबका स्वामी महान् 'आत्मा' बलवान् है। उसकी आज्ञा माननेके लिये ये सभी बाध्य हैं । अतः मनुष्यको आत्मशक्तिका अनुभव करके उसके द्वारा बुद्धि आदि सबको नियन्त्रणमें रखना चाहिये ॥ दस ॥ परमव्यक्तमव्यक्तात् पुरुषः परः। पुरुषान्न परं किंचित्सा काष्ठा सा परा गतिः ॥ ग्यारह ॥ * भाष्यकार प्रातः स्मरणीय स्वामी शङ्कराचार्यजीने भी यहाँ 'महान् आत्मा' को जीवात्मा ही माना है, महत्तत्त्व नहीं । महतः = उस जीवात्मासे; परम् - बलवती है; अव्यक्तम् = भगवान्की अव्यक्त मायाशक्ति; अव्यक्तात्=अव्यक्त मायासे भी; परः = श्रेष्ठ है; पुरुषः = परमपुरुष ; पुरुषात्=परमपुरुष भगवान्से; परम् - श्रेष्ठ और बलवान्; किञ्चित्-कुछ भी; न= नहीं है; सा काष्ठा - वही सबकी परम अवधि ; सा परा गतिः = वही परम गति है ॥ग्यारह॥ व्याख्या - इस मन्त्रमें 'अव्यक्त' शब्द भगवान्की उस त्रिगुणमयी दैवी मायाशक्तिके लिये प्रयुक्त हुआ है, जो गीतामें दुरत्यय बतायी गयी है तथा जिससे मोहित हुए जीव भगवान्को नहीं जानते । यही जीवात्मा और परमात्माके बीचमें परदा है, जिसके कारण जीव सर्वव्यापी अन्तर्यामी परमेश्वरको नित्य समीप होनेपर भी नहीं देख पाता । इसे इस प्रकरणमें जीवसे भी बलवान् बतलानेका यह भाव है कि जीव अपनी शक्तिसे इस मायाको नहीं हटा सकता, भगवान्की शरण ग्रहण करनेपर भगवान्की दयाके बलसे ही वह इससे पार हो सकता है । यहाँ अव्यक्त' शब्दसे सांख्यमतावलम्बियोंका 'प्रधान तत्त्व' नहीं ग्रहण करना चाहिये; क्योंकि उनके मतमें 'प्रधान' स्वतन्त्र है, वह आत्मासे पर नहीं है; तथा आत्माको भोग और मुक्ति - दोनों वस्तुएँ देकर उसका प्रयोजन सिद्ध करनेवाला है। परंतु उपनिषद् और गीतामें इस अव्यक्त प्रकृतिको कहीं भी मुक्ति देनेमें समर्थ नहीं माना है। अतः इस मन्त्रका तात्पर्य यह है कि इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि - इन सबपर आत्माका अधिकार है; अतः यह स्वयं उनको वशमें करके भगवान्की ओर बढ़ सकता है। परंतु इस आत्मासे भी बलवान् एक और तत्त्व है, जिसका नाम 'अव्यक्त' है। कोई उसे प्रकृति और कोई माया भी कहते हैं। इसीसे सब जीवसमुदाय मोहित होकर उसके वशमें हो रहा है। इसको हटाना जीवके अधिकारकी बात नहीं है; अतः इससे भी बलवान् जो इसके स्वामी परमपुरुष परमेश्वर हैं - जो बल, क्रिया और ज्ञान आदि सभी शक्तियोंकी अन्तिम अवधि और परम आधार हैं - उन्हींकी शरण लेनी चाहिये । जब वे दया करके इस मायारूप परदेको स्वयं हटा लेंगे, तब उसी क्षण वहीं भगवान्की प्राप्ति हो जायगी; क्योंकि वे तो सदासे ही सर्वत्र विद्यमान हैं ॥ ग्यारह ॥ सम्बन्ध - यही भाव अगले मन्त्रमें स्पष्ट करते हैंएष सर्वेषु भूतेषु गूढोत्मा न प्रकाशते । दृश्यते त्वग्र्यया बुद्ध्या सूक्ष्मया सूक्ष्मदर्शिभिः ॥ बारह ॥ एषः आत्मा=यह सबका आत्मरूप परमपुरुष; सर्वेषु भूतेषु - समस्त प्राणियोंमें रहता हुआ भी; गूढ :- मायाके परदेमें छिपा रहनेके कारण; न प्रकाशते=सबके प्रत्यक्ष नहीं होता; तु सूक्ष्मदर्शिभिः = केवल सूक्ष्मतत्त्वोंको समझनेवाले पुरुषोंद्वारा ही ; सूक्ष्मया अग्र्यया बुद्धया - अति सूक्ष्म तीक्ष्ण बुद्धिसे; दृश्यते देखा जाता है ॥ बारह ॥ व्याख्या - ये परब्रह्म पुरुषोत्तमभगवान् सबके अन्तर्यामी हैं, अतः सब प्राणियोंके हृदयमें विराजमान हैं, परंतु अपनी मायाके परदेमें छिपे हुए हैं, इस कारण उनके जाननेमें नहीं आते। जिन्होंने भगवान्का आश्रय लेकर अपनी बुद्धिको तीक्ष्ण बना लिया है, वे सूक्ष्मदर्शी ही भगवान्की दयासे सूक्ष्मबुद्धिके द्वारा उन्हें देख पाते हैं ॥ बारह ॥ सम्बन्ध - विवेकशील मनुष्यको भगवान्के शरण होकर किस प्रकार भगवान्की प्राप्ति के लिये साधन करना चाहिये ? - इस जिज्ञासापर कहते हैंयच्छेद्वाङ्मनसी प्राज्ञस्तद्यच्छेज्ज्ञान ज्ञानमात्मनि महति नियच्छेत्तद्यच्छेच्छान्त आत्मनि ॥ तेरह ॥ प्राज्ञः=बुद्धिमान् साधकको चाहिये कि; वाक्- वाक् आदि को; मनसी मनमें; यच्छेत् निरुद्ध करे; तत् = उस मनको; ज्ञाने आत्मनि=ज्ञानस्वरूप बुद्धिमें; यच्छेत् - विलीन करे; ज्ञानम् - ज्ञानस्वरूप बुद्धिको; महति आत्मनि=महान् आत्मामें; नियच्छेत् = विलीन करे; ; तत्=उसको; शान्ते आत्मनि= शान्तस्वरूप परमपुरुष परमात्मामें; यच्छेत् - विलीन करे ॥ तेरह ॥ व्याख्या - - बुद्धिमान् मनुष्यको उचित है कि वह पहले तो वाक् आदि इन्द्रियोंको बाह्य विषयोंसे हटाकर मनमें विलीन कर दे अर्थात् इनकी ऐसी स्थिति कर दे कि इनकी कोई भी क्रिया न हो - मनमें विषयोंकी स्फुरणा न
- #TigerSatpura Tiger Reserve में टाइगर का सिर काटने वालों का नहीं लगा सुराग, क्या जबलपुर में खुलेगा मौत का राज? - #TigerIndore news: पिकनिक मनाने जाम गेट जाने वाले हो जाएं सावधान, बाघ या तेंदुआ किसने किया गाय का शिकार, जानिए? नई दिल्ली, 2 अप्रैलः शेर और बाघ दोनों ही जंगल के सबसे खूंखार जानवरों में से एक हैं। अब सोशल मीडिया पर दोनों की लड़ाई का एक वीडियो वायरल हो रहा है। ये लड़ाई खाने के साथ बच्चों की रक्षा के लिए भी थी, लेकिन इसका अंत काफी हैरान कर देने वाला है। (वीडियो-नीचे) वायरल हो रहा वीडियो केन्या के मसाई मारा इलाके का है। ये इलाका बहुत बड़ा जंगल है, जिस वजह से शेर, बाघ, चीता समेत कई तरह के जीव यहां पर अच्छी संख्या में पाए जाते हैं। कुछ दिनों पहले वहां पर बाघिन अपने बच्चों के साथ टहल रही थी। उसी इलाके में एक शेरनी भी मौजूद थी। शेरनी ने काफी देर तक शिकार की तलाश की, लेकिन उसके हाथ कुछ नहीं लगा। कुछ ही दूरी पर उसे बाघिन और उसके बच्चे दिखे। बाघिन का शिकार थोड़ा मुश्किल था, जिस वजह से शेरनी उसके बच्चों को निशाना बनाने के लिए आगे बढ़ी। बाघिन भी खूंखार शिकारी है, ऐसे में वो शेरनी के इरादों को पहले से ही भांप गई थी। वीडियो में आप देख सकते हैं कि शेरनी ने जैसे ही बच्चों की ओर बढ़ने की कोशिश की, वैसे ही बाघिन बीच में आ गई। बाघिन उस पर हमला करने जा रही थी कि शेरनी ने बच्चों को छोड़ उसे ही दौड़ा लिया। इसके बाद बाघिन के बच्चे सुरक्षित जगह की ओर भागे। बाघिन के बच्चे तो बच गए थे, लेकिन अब उसकी जान पर बन आई थी। घटना के वक्त उस इलाके में रेंजर भी मौजूद थे। उन्होंने जैसे ही दोनों खूंखार जानवरों को लड़ते देखा वो बीच में आ गए। साथ ही अपनी जिप्सी से उनको खदेड़ने लगे। कुछ देर बाद शेरनी भी थककर वापस खाली हाथ परिवार के पास चली गई। वहीं दूसरी ओर बाघिन भी बच्चों को लेकर सुरक्षित स्थान की ओर गई। वैसे रेंजर्स जंगली जीवों के शिकार में दखल नहीं देते, लेकिन बाघ और शेर की संख्या दुनिया में काफी कम है। इस वजह से उन्होंने इस लड़ाई को रुकवाना जरूरी समझा।
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दिलेर समाचार, Bihar 10th board result 2018, bihar matric Result, Bihar School Examination Board BSEB, biharboard. ac. in, Bihar Result 2018, BSEB Matric Result 2018: Bihar School Examination Board (BSEB) कल यानी 20 जून को 10वीं का रिजल्ट घोषित करने वाला है. बोर्ड ने घोषणा की पूरी तैयारी कर ली है. स्टूडेंट्स अपना रिजल्ट ऑफिशियल वेबसाइट biharboard. ac. in पर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं. बता दें, 10वीं की परीक्षा 21 फरवरी से 28 फरवरी तक हुई थी. इस साल करीब 17 लाख स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी है. 1,426 केंद्रों में परीक्षाएं आयोजित की गई थीं. जिन स्टूडेंट ने इस साल बिहार बोर्ड की 10वीं की परीक्षा दी है वे अपना रिजल्ट इस तरह चेक कर सकते हैः स्टेप 1: ऑफिशियल वेबसाइट www. biharboard. ac. in पर जाएं. स्टेप 2: Class 10 Results लिंक पर क्लिक करें. स्टेप 3 : अपना रोल नंबर डालें. स्टेप 4: सबमिट बटन पर क्लिक करने के बाद अपना रिजल्ट देखें.
दिलेर समाचार, Bihar दसth board result दो हज़ार अट्ठारह, bihar matric Result, Bihar School Examination Board BSEB, biharboard. ac. in, Bihar Result दो हज़ार अट्ठारह, BSEB Matric Result दो हज़ार अट्ठारह: Bihar School Examination Board कल यानी बीस जून को दसवीं का रिजल्ट घोषित करने वाला है. बोर्ड ने घोषणा की पूरी तैयारी कर ली है. स्टूडेंट्स अपना रिजल्ट ऑफिशियल वेबसाइट biharboard. ac. in पर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं. बता दें, दसवीं की परीक्षा इक्कीस फरवरी से अट्ठाईस फरवरी तक हुई थी. इस साल करीब सत्रह लाख स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी है. एक,चार सौ छब्बीस केंद्रों में परीक्षाएं आयोजित की गई थीं. जिन स्टूडेंट ने इस साल बिहार बोर्ड की दसवीं की परीक्षा दी है वे अपना रिजल्ट इस तरह चेक कर सकते हैः स्टेप एक: ऑफिशियल वेबसाइट www. biharboard. ac. in पर जाएं. स्टेप दो: Class दस Results लिंक पर क्लिक करें. स्टेप तीन : अपना रोल नंबर डालें. स्टेप चार: सबमिट बटन पर क्लिक करने के बाद अपना रिजल्ट देखें.
नई दिल्ली/टीम डिजिटल सलमान खान और आमिर खान फिल्म इंडस्ट्री के बड़े स्टार्स में शामिल हैं। दोनों का नाम जब भी सामने आता है, तो उनकी फिल्म अंदाज अपना-अपना जेहन में जरूर आती है। अब इन दोनों ही एक्टर पर एक डायरेक्टर ने फिल्म फ्लॉप होने का आरोप लगाया है। दरअसल, 1994 में आमिर खान और सलमान खान की फिल्म अंदाज अपना अपना रिलीज हुई थी। वैसे तो फिल्म कॉमेडी के मामले में काफी अच्छी थी लेकिन सिनेमाघरों में बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई थी। अब 29 साल बाद इस फिल्म के प्रोड्यूसर, राजकुमार संतोषी ने फिल्म फ्लॉप होने के कारण का खुलासा किया है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि- "जबकि अंदाज अपना अपना उन दिनों बिल्कुल अलग कहानी थी। इसमें रोमांस से ज्यादा कॉमेडी, एडवेंचर और ह्यूमर है। लोगों ने इस फिल्म को समझने में समय लिया। " उन्होंने आगे कहा कि, जब फिल्म रिलीज हुई थी, तब वितरक भी नए कलाकार थे। फिल्म के प्रचार के मौजूदा रुझानों की ओर इशारा करते हुए, राजकुमार ने खुलासा किया कि दोनों लीड एक्टर्स ने फिल्म का प्रचार नहीं किया, न तो सलमान और न ही आमिर फिल्म का प्रचार करने के लिए शहर में थे। फिल्म के प्रचार के लिए जो कुछ करना था, वह भी नहीं हो सका। वितरक भी काफी नाराज थे। " आगे राजकुमार संतोषी से इस फिल्म के रीमेक बारे में पुछा गया। जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि- " जो कोई भी फिल्म का रीमेक बनाने की कोशिश करेगा, उसे नुकसान होगा। संतोषी ने कहा- इसके रीमेक में कुछ भी करने की गुंजाइश नहीं है। फिल्म आज भी फ्रेश लगती है। जो भी इस सदाबहार फिल्म का रीमेक बनाने की कोशिश करेगा वह डूब जाएगा क्योंकि ऐसी फिल्म बनाना संभव नहीं है। "
नई दिल्ली/टीम डिजिटल सलमान खान और आमिर खान फिल्म इंडस्ट्री के बड़े स्टार्स में शामिल हैं। दोनों का नाम जब भी सामने आता है, तो उनकी फिल्म अंदाज अपना-अपना जेहन में जरूर आती है। अब इन दोनों ही एक्टर पर एक डायरेक्टर ने फिल्म फ्लॉप होने का आरोप लगाया है। दरअसल, एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में आमिर खान और सलमान खान की फिल्म अंदाज अपना अपना रिलीज हुई थी। वैसे तो फिल्म कॉमेडी के मामले में काफी अच्छी थी लेकिन सिनेमाघरों में बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई थी। अब उनतीस साल बाद इस फिल्म के प्रोड्यूसर, राजकुमार संतोषी ने फिल्म फ्लॉप होने के कारण का खुलासा किया है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि- "जबकि अंदाज अपना अपना उन दिनों बिल्कुल अलग कहानी थी। इसमें रोमांस से ज्यादा कॉमेडी, एडवेंचर और ह्यूमर है। लोगों ने इस फिल्म को समझने में समय लिया। " उन्होंने आगे कहा कि, जब फिल्म रिलीज हुई थी, तब वितरक भी नए कलाकार थे। फिल्म के प्रचार के मौजूदा रुझानों की ओर इशारा करते हुए, राजकुमार ने खुलासा किया कि दोनों लीड एक्टर्स ने फिल्म का प्रचार नहीं किया, न तो सलमान और न ही आमिर फिल्म का प्रचार करने के लिए शहर में थे। फिल्म के प्रचार के लिए जो कुछ करना था, वह भी नहीं हो सका। वितरक भी काफी नाराज थे। " आगे राजकुमार संतोषी से इस फिल्म के रीमेक बारे में पुछा गया। जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि- " जो कोई भी फिल्म का रीमेक बनाने की कोशिश करेगा, उसे नुकसान होगा। संतोषी ने कहा- इसके रीमेक में कुछ भी करने की गुंजाइश नहीं है। फिल्म आज भी फ्रेश लगती है। जो भी इस सदाबहार फिल्म का रीमेक बनाने की कोशिश करेगा वह डूब जाएगा क्योंकि ऐसी फिल्म बनाना संभव नहीं है। "
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की विशेष अदालत ने देशद्रोह मामले में पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ( Former President Pervez Musharraf) को फांसी की सजा सुनाई है। मुशर्रफ को देशद्रोह (Treason) का दोषी पाया गया था। बता दें, वह लंबे समय से बई में रह रहे हैं। पेशावर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वकार अहमद सेट की अगुवाई वाली विशेष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने पूर्व सैन्य तानाशाह को 2-1 के मत से सजा-ए-मौत की सजा सुनाई। अस्वस्थ चल रहे पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर में हैं। मुशर्रफ के खिलाफ 3 नवंबर 2007 को पाकिस्तान पर इमरजेंसी लगाने के लिए देशद्रोह का केस दर्ज किया गया था। इस मामले में दिसंबर 2013 में सुनवाई शुरू हुई थी।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की विशेष अदालत ने देशद्रोह मामले में पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को फांसी की सजा सुनाई है। मुशर्रफ को देशद्रोह का दोषी पाया गया था। बता दें, वह लंबे समय से बई में रह रहे हैं। पेशावर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वकार अहमद सेट की अगुवाई वाली विशेष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने पूर्व सैन्य तानाशाह को दो-एक के मत से सजा-ए-मौत की सजा सुनाई। अस्वस्थ चल रहे पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर में हैं। मुशर्रफ के खिलाफ तीन नवंबर दो हज़ार सात को पाकिस्तान पर इमरजेंसी लगाने के लिए देशद्रोह का केस दर्ज किया गया था। इस मामले में दिसंबर दो हज़ार तेरह में सुनवाई शुरू हुई थी।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हरियाणा एवं महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अनुच्छेद 370 के मुद्दे का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए करने का आरोप लगाते हुए शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री को जनता के समक्ष यह भी बोलना चाहिए कि उसकी सरकार ने 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े किए थे। नई दिल्ली. कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हरियाणा एवं महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अनुच्छेद 370 के मुद्दे का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए करने का आरोप लगाते हुए शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री को जनता के समक्ष यह भी बोलना चाहिए कि उसकी सरकार ने 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े किए थे। अर्थव्यवस्था की स्थिति का उल्लेख करते हुए सिब्बल ने कहा, ' आईएमएफ, विश्व बैंक और दूसरी संस्थाएं कह रही हैं कि भारत में मंदी है लेकिन सरकार मानने को तैयार नहीं है। पीयूष गोयल कहते हैं कि अभिजीत बनर्जी वाम की ओर झुकाव रखते हैं। ' उन्होंने सवाल किया "क्या आईएमएफ और विश्व बैंक भी वाम की ओर झुकाव रखते हैं? क्या सुब्रमण्यम स्वामी भी वाम की ओर झुकाव रखते हैं? " पंजाब एवं महाराष्ट्र सहकारी (पीएमसी) बैंक मामले का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि बैंक में खाताधारकों को उनका पैसा नहीं मिल रहा है। कुछ लोगों की मौत भी हो गयी। "हमारा कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी इस मामले में 'प्राइम मिनिस्टर कमिटमेंट' (पीएमसी) दिखाएं और यह कहें कि सभी का पैसा वापस मिलेगा। " उन्होंने दावा किया कि इस बैंक के 12 निदेशकों का सम्बंध भाजपा से है और यही वजह है कि उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही। अगर कोई कांग्रेस का होता तो उसके पास सीबीआई भेज दी गयी होती। सिब्बल ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र और हरियाणा में बेरोजगारी बढ़ी है और किसानों की हालत पहले से ज्यादा खराब हो गयी है, लेकिन भाजपा इन पर बात करने से बच रही है। उन्होंने कुछ आंकड़े पेश करते हुए यह दावा भी किया कि मानव विकास सूचकांक और रोजगार की दृष्टि से जम्मू-कश्मीर की स्थिति कई भाजपा शासित राज्यों से बेहतर है। (यह खबर न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा की है। एशियानेट हिंदी की टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है। )
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हरियाणा एवं महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अनुच्छेद तीन सौ सत्तर के मुद्दे का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए करने का आरोप लगाते हुए शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री को जनता के समक्ष यह भी बोलना चाहिए कि उसकी सरकार ने एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में पाकिस्तान के दो टुकड़े किए थे। नई दिल्ली. कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हरियाणा एवं महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अनुच्छेद तीन सौ सत्तर के मुद्दे का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए करने का आरोप लगाते हुए शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री को जनता के समक्ष यह भी बोलना चाहिए कि उसकी सरकार ने एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में पाकिस्तान के दो टुकड़े किए थे। अर्थव्यवस्था की स्थिति का उल्लेख करते हुए सिब्बल ने कहा, ' आईएमएफ, विश्व बैंक और दूसरी संस्थाएं कह रही हैं कि भारत में मंदी है लेकिन सरकार मानने को तैयार नहीं है। पीयूष गोयल कहते हैं कि अभिजीत बनर्जी वाम की ओर झुकाव रखते हैं। ' उन्होंने सवाल किया "क्या आईएमएफ और विश्व बैंक भी वाम की ओर झुकाव रखते हैं? क्या सुब्रमण्यम स्वामी भी वाम की ओर झुकाव रखते हैं? " पंजाब एवं महाराष्ट्र सहकारी बैंक मामले का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि बैंक में खाताधारकों को उनका पैसा नहीं मिल रहा है। कुछ लोगों की मौत भी हो गयी। "हमारा कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी इस मामले में 'प्राइम मिनिस्टर कमिटमेंट' दिखाएं और यह कहें कि सभी का पैसा वापस मिलेगा। " उन्होंने दावा किया कि इस बैंक के बारह निदेशकों का सम्बंध भाजपा से है और यही वजह है कि उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही। अगर कोई कांग्रेस का होता तो उसके पास सीबीआई भेज दी गयी होती। सिब्बल ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र और हरियाणा में बेरोजगारी बढ़ी है और किसानों की हालत पहले से ज्यादा खराब हो गयी है, लेकिन भाजपा इन पर बात करने से बच रही है। उन्होंने कुछ आंकड़े पेश करते हुए यह दावा भी किया कि मानव विकास सूचकांक और रोजगार की दृष्टि से जम्मू-कश्मीर की स्थिति कई भाजपा शासित राज्यों से बेहतर है।
ज्ञानदीप आगे की लाइनें पढ़ पाता कि दरवाजें पर दस्तक हुई। लगा जैसे खाने के बीच कंकड़ आ गया हो। उसने पन्ने उठाकर एक तरफ रखा और दरवाजा खोला। सामने अली खड़ा था। "भैंया, जल्दी चलिये अम्मी को दौरा पड़ा हैं." अली हाँफता हुआ बोला। ज्ञानदीप दरवाजा बंद करके उसके साथ चला गया। जब यह बात अम्मा को पता चली तो उन्होंने मुझे बहुत डाँटा। जबकि उस वक्त मुझे हिजड़ों के बारे में कुछ भी नहीं पता था। मगर विघि का विधान तो देखिये जिस हिजड़े समाज से बोलने के लिए मुझे इतनी बड़ी सज़ा मिली थी। आज मैं उसी हिजड़े समाज की नायक हूँ। डुबोया मुझको होने ने, न होता मैं तो क्या होता। नसीबों के खेल भी कितने निराले होते हैं। यह मैंने इस उमर में जाना था। भाग्य के मैं कितने रूप बखान करूँ, हर एक रूप में दर्द ही दर्द हैं। अब तो मैं इस दुर्भाग्य को अपनी तकदीर मान बैठी हूँ और उसी के सहारे घिसटती जा रही हूँ। न जाने कब तक घिसटती जाऊँगी। माँ-बाप ने क्या सोच कर मेरा नाम दीपक रखा होगा, कि एक दिन दीपक की तरफ सारे संसार में चमकूँगा। मगर अफसोस! मैं बदनसीब दीपक न बन सका। जहाँ चमकना था वहाँ चमक न सका। जहाँ बुझना था वहाँ चमक उठा।। क्या करती परिस्थितियों के आगे विवश थी। परिस्थितियाँ इंसान को क्या से क्या बना देती है। जब भाग्य का पहिया चलता हैं तो वह किसी को नहीं बख़्शता सिर्फ़ रौंदता चला जाता हैं। उस हिजड़े वाले हादसे के बाद से पिताजी मुझे अपने साथ रखते। उनकी पैनी निगाहें हर पल मुझ पर रहती। दिन-रात की कड़ी मेहनत के बाद भी परिवार का खर्चा नहीं चल पा रहा था। दो छोटी बहन और दो छोटे भाइयों की पढ़ाई का खर्चा ठेले से निकाल पाना दूभर हो गया था। फिर क्या था पूरा परिवार दस पैसे किलों पर टाफी लपटने लगा। दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद बीस किलो टाफी पैक हो पाती थी। यह सब देखकर हम-दोनें भाइयों को बहुत तकलीफ़ होती थी। काफी सोचने-विचारने के बाद हमने यह निश्चय निकाला कि हम लोग देहरादून जायेंगे। वहाँ जाने का सबसे बड़ा कारण यह था कि वहाँ हमारे रिश्तेदार थे। जबकि अम्मा-पिताजी नहीं चाहते थे कि हम में से कोई भी किसी से पल भर के लिए दूर हो। कहते हैं ना, तकदीर जो न कराये वह कम हैं। हम-दोनों भाई तैयारी करके देहरादुन चले गए। हमारे रिश्तेदारों ने मदद करना तो दूर, बात करना भी गंवारा न समझा। हम लोगों ने जैसे-तैसे कई रातें फुटपाथ पर काटी। दिन में हम लोग होटलों में काम करते और रात में टैम्पों पर कनडकटरी करते। देखते-देखते मेरा भाई टैम्पों चलाना सीख गया था। तभी अल्लाह का एक बंदा मिल गया जिसने मेरे भाई को टैम्पों दिया और कहा चलाओं। मैं अगले दिन ट्रेन पकड़ कर अपने शहर आ गया। एक हफ्ता रहने के बाद जब मैं देहरादुन आने लगा तो पिताजी मेरे साथ चल पड़े। यह तो मुझे बाद में पता चला कि वह घूमने नहीं, छोटी बहन के लिए लड़का ढूढ़ने आए हैं। तभी दूर की रिश्तेदारी में पिताजी को एक लड़का मिल गया था। पिताजी ने साफ़-साफ़ कह दिया था कि मेरे पास सिर्फ लड़की हैं और कुछ नहीं। लड़के वालों ने भी अपनी बात रख दी, हमें सिर्फ लड़की चाहिए जो हमारे परिवार को चला सके। नतीजा यह निकला कि शादी देहरादून में करनी होगी। पिताजी वापस अपने शहर आ गये। फिर एक हफ्ते के बाद अम्मा और भाई-बहनों को लेकर देहरादून आ गए। हम लोगों ने तो जो शादी में पैसा लगाया साथ-साथ लड़के वालों ने भी हमारी काफी मदद की। शादी ठीक-ठाक निपट गई थी। पिताजी सबको लेकर शहर आ गए थे। आठवे दिन मैं भी शहर आ गया। उसी के दूसरे दिन मेरे भाई का एक्सीडेंट हो गया। देहरादून के रिश्तेदारों ने मेरे बड़े भाई को खैराती अस्पताल में भर्ती कर दिया, और पीछे मुड़कर नहीं देखा। पिताजी-अम्मा को बहुत दुःख हुआ। डॉक्टरों के अनुसार, भाई का एक हाथ बेकार हो चुका था। और अगर जल्दी नहीं काटा गया तो ज़हर पूरे ज़िस्म में फैल जाएगा। पिताजी भाई को लेकर अपने शहर आ गए थे। डॉक्टरों को दिखाया गया तो उन्होंने फौरन आप्ररेशन करने को कहा। रकम एक हज़ार थी मगर जहाँ खाने के लाले लगे हो, वहाँ यह रकम बहुत बड़ी थी। पिताजी ने हर एक के आगे गुज़ारिश की मगर किसी ने उनकी मदद नहीं की। वह पैसे के लिए इधर-उधर भागते रहे। पैसा मिला भी तो ब्याज पर, भाई का आप्ररेशन हुआ। पर डॉक्टर उसका दाया हाथ नहीं बचा सके। शहर में मेरे भाई का नाम था चाहे खेल का मैदान हो या पढ़ाई, वह हर जगह अव्वल आता था। मगर आज वह विकलांग बन कर रह गया था। भाई के ग़म में पिताजी घुटते जा रहे थे। फिर क्या था मैंने उन कलाकरों से मिलना-जुलना शुरू कर दिया, और गुज़ारिश की वे भी मुझे अपने साथ प्रोग्राम में ले चले। उस समय मेरी उम्र चैदह साल की थी। उन लोगों ने मुझे पाँच रूपया रोज पर रामलीला में नाचने का काम दिला दिया। दिन-भर मैं चाय का ठेला खींचता और रात-भर रामलीला में नाचता। फिर सुबह भाई को अस्पताल में ले जाकर डेसिंग कराना। यह सब मेरा रोज का काम था। मेरे तो जैसे काटों खून नहीं। ज्ञानदीप आगे की लाइनें पढ़ पाता कि अचानक बिजली गुल हो गई। उसे रह-रहकर बिजली विभाग पर गुस्सा आ रहा था। मगर वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सका। इस वक्त अँघेरे का वर्चस्व कायम था। तो क्या मज़ाल थी रोशनी की। ठंड़ भी अपने चरम सीमा पर थी। कोहरे का अपना बवाल था। जहाँ दिन में यह मोहल्ला कान फोड़ता हो, वही इस वक्त सन्नाटा अपनी चादर ओढ़े पड़ा था। ज्ञानदीप ने लालटेन में देखा उसमें तेल नहीं था। उसे अपने ऊपर काफी गुस्सा आया। उसका दिल-दिमाग दीपिकामाई के डायरी के पन्नों में खोया था। आगे क्या हुआ? उसकी उत्सुकता बनी हुई थी। ज्ञानदीप दरवाजा बंद करके रोड पर आ गया। मगर दुकान बंद देख वह आगे बढ़ गया। फिर भी उसे मोमबत्ती नहीं मिली तो वह हताश मन से लौट आया। जैसे 'रावन' फ्लाप होने से शाहरूख खान लंदन से मुंबई वापस आए थे। ज्ञानदीप बिस्तर पर ऐसे ढहे, जैसे जीरों पर आउट होने पर कोहली ढहे थे। ज्ञानदीप का दिल-दिमाग अभी भी दीपिकामाई के उन पन्नों में डूबा था। उन्होंने कितना कष्टमय जीवन जिया। जिस उमर में उन्हें खेलना-कूदना, पढ़ना-घूमना, मौज़मस्ती करना था। उस उमर में उन्होंने जी-तोड़ मेहनत करके अपने परिवार को पाला। वैसे तो दुख-तकलीफ़, परेशानी हर एक के साथ होती हैं। मगर दीपिकामाई के खाते में कुछ ज्यादा ही थी। जब परिस्थिति वश दीपक! दीपिकामाई! बनी होगी? तब उन पर क्या नहीं गुज़री होगी? कैसी-कैसी बातें परिवार वालों को सुननी पड़ी होगी। क्या बीती होगी उनके माँ-बाप, भाई-बहनों पर। कल्पना करता हूँ तो रूह काँप उठती हैं। कहते हैं घूर का भी एक अस्तित्व होता हैं। तो क्या दीपिकामाई का कोई अस्तित्व नहीं? ज्ञानदीप के ज़ेहन में तरह-तरह के समीकरण बन रहे थे। वह कभी दायें करवट लेता तो कभी बायें। उसकी भूख-प्यास ऐसे गायब हो गई। जैसे इंसान के जीवन से सच्चाई। मैंने डरते-डरते कहा, कि रामलीला देखने गया था। पिताजी की यह बातें मेरे दिल-दिमाग को झकझौर गई थी। शायद उन्हें मुझ पर शक हो गया था कि मैं कहाँ जाता हूँ, और क्या करता हूँ। वह अपनी बीमारी और परिस्थितियों के आगे विवश थे। वरना वह अब तक मेरे हाथ-पैर तोड़ चुके होते हैं। क्या करूँ मैं भी उनसे झूठ नहीं बोलना चाहता था, पर जो मजबूरियाँ थी उसके आगे मैं मजबूर था। आखि़रकार एक दिन मुझे चाय का ठेला बंद ही करना पड़ा। क्यों कि बनिये ने उधार देना बंद कर दिया था। याह ख़ुदा अगर मेरी झोली में और भी ग़म हैं। तो उठा ले मुझे, वरना खुशी का एक ही लम्हा दे दें ।। वक्त कभी नहीं थमता। थमता तो इंसान हैं। वक्त का पहिया तो हमेशा चलता ही जाता हैं। घर की परिस्थितियाँ दिन पर दिन बिगड़ती जा रही थी। छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी। समझ में नहीं आ रहा था क्या करूँ? मगर परिवार तो चलाना ही था। भाई और पिता जी की बीमारी की चिंता मुझे रात-दिन खाये जा रही थी। मैं मरता क्या न करता, सीधे चंदा से मिली जो एक हिजड़ा थी। मैंने अपनी सारी बात उसे बताई। प्रोग्राम शुरू होने से पहले उसने मेरे पैरों में एक-एक किलों का घुघरूँ बाँध दिया। मैंने जैसे-तैसे उल्टा-सीधा डांस किया। प्रोग्राम खत्म होने के बाद चंदा ने मुझे दस रुपये दिए। मैंने पैसे लाकर अम्मा को दे दिए। जब यह नाचने वाली बात पिताजी को पता चली तो उन्होंने मुझे बहुत गाली दी। अगर उनकी तबियत ठीक होती तो न जाने वह मेरा क्या हाल करते। मैंने चंदा से पचास रूपये लेकर बस स्टैण्ड पर चाय की दुकान खोल ली। दिन मैं दुकान करता और रात मैं उसके साथ प्रोग्राम। मैंने उससे गुज़ारिश की यह बात किसी से मत कहना। इसी तरह मेरी उसकी दोस्ती हो गई। हम रोज़ मिलने लगे। मैंने अपने घर की सारी बातें उसे बतायी। हमारे हाथ में अपना क़ल़म कागज नहीं होता। चंदा के बार-बार हिदायत देने से भी मैं मर्दाना भाषा नहीं छोड़ पा रहा था। और वैसे भी जनानियों की भाषा बोलना मुझे जरा भी अच्छी नहीं लगता था। मैं जैसे ही जाने के लिए उठा कि तभी दो आदमी आये। उनमें से एक ने मेरा हाथ पकड़ा और जबरदस्ती मुझे अपने पास बैठाने लगा। उसकी इस हरकत से मैं तैश में आ गया और चंदा की तरफ़ मुखा़तिब हुआ, "देखो गुरू! इन्हें समझा लो हमसे बत्तमीजी न करे नहीं तो ईटा-वीटा उठा कर मार देगें." मेरे इतना कहते ही उसने मेरा हाथ छोड़ दिया। दूसरे दिन जब चंदा दुकान पर आयी तो मैंने उससे पूछा, "वे लोग तुम्हारे कौन थें? उसी बात को लेकर हम दोनों में खूब बहस हुआ। उस दिन शरीफ बाबा दोपहर में आया और पिक्चर चलने की जिद् करने लगा। मुझे उसकी जिद् के आगे झुकना पड़ा। अभी आधी ही पिक्चर ही हुई थी कि उसने मुझे घर चलने को कहा। वह घर चलने के बहाने मुझे ऐसे रास्ते पर ले गया जहाँ उसने मेरे साथ.....।
ज्ञानदीप आगे की लाइनें पढ़ पाता कि दरवाजें पर दस्तक हुई। लगा जैसे खाने के बीच कंकड़ आ गया हो। उसने पन्ने उठाकर एक तरफ रखा और दरवाजा खोला। सामने अली खड़ा था। "भैंया, जल्दी चलिये अम्मी को दौरा पड़ा हैं." अली हाँफता हुआ बोला। ज्ञानदीप दरवाजा बंद करके उसके साथ चला गया। जब यह बात अम्मा को पता चली तो उन्होंने मुझे बहुत डाँटा। जबकि उस वक्त मुझे हिजड़ों के बारे में कुछ भी नहीं पता था। मगर विघि का विधान तो देखिये जिस हिजड़े समाज से बोलने के लिए मुझे इतनी बड़ी सज़ा मिली थी। आज मैं उसी हिजड़े समाज की नायक हूँ। डुबोया मुझको होने ने, न होता मैं तो क्या होता। नसीबों के खेल भी कितने निराले होते हैं। यह मैंने इस उमर में जाना था। भाग्य के मैं कितने रूप बखान करूँ, हर एक रूप में दर्द ही दर्द हैं। अब तो मैं इस दुर्भाग्य को अपनी तकदीर मान बैठी हूँ और उसी के सहारे घिसटती जा रही हूँ। न जाने कब तक घिसटती जाऊँगी। माँ-बाप ने क्या सोच कर मेरा नाम दीपक रखा होगा, कि एक दिन दीपक की तरफ सारे संसार में चमकूँगा। मगर अफसोस! मैं बदनसीब दीपक न बन सका। जहाँ चमकना था वहाँ चमक न सका। जहाँ बुझना था वहाँ चमक उठा।। क्या करती परिस्थितियों के आगे विवश थी। परिस्थितियाँ इंसान को क्या से क्या बना देती है। जब भाग्य का पहिया चलता हैं तो वह किसी को नहीं बख़्शता सिर्फ़ रौंदता चला जाता हैं। उस हिजड़े वाले हादसे के बाद से पिताजी मुझे अपने साथ रखते। उनकी पैनी निगाहें हर पल मुझ पर रहती। दिन-रात की कड़ी मेहनत के बाद भी परिवार का खर्चा नहीं चल पा रहा था। दो छोटी बहन और दो छोटे भाइयों की पढ़ाई का खर्चा ठेले से निकाल पाना दूभर हो गया था। फिर क्या था पूरा परिवार दस पैसे किलों पर टाफी लपटने लगा। दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद बीस किलो टाफी पैक हो पाती थी। यह सब देखकर हम-दोनें भाइयों को बहुत तकलीफ़ होती थी। काफी सोचने-विचारने के बाद हमने यह निश्चय निकाला कि हम लोग देहरादून जायेंगे। वहाँ जाने का सबसे बड़ा कारण यह था कि वहाँ हमारे रिश्तेदार थे। जबकि अम्मा-पिताजी नहीं चाहते थे कि हम में से कोई भी किसी से पल भर के लिए दूर हो। कहते हैं ना, तकदीर जो न कराये वह कम हैं। हम-दोनों भाई तैयारी करके देहरादुन चले गए। हमारे रिश्तेदारों ने मदद करना तो दूर, बात करना भी गंवारा न समझा। हम लोगों ने जैसे-तैसे कई रातें फुटपाथ पर काटी। दिन में हम लोग होटलों में काम करते और रात में टैम्पों पर कनडकटरी करते। देखते-देखते मेरा भाई टैम्पों चलाना सीख गया था। तभी अल्लाह का एक बंदा मिल गया जिसने मेरे भाई को टैम्पों दिया और कहा चलाओं। मैं अगले दिन ट्रेन पकड़ कर अपने शहर आ गया। एक हफ्ता रहने के बाद जब मैं देहरादुन आने लगा तो पिताजी मेरे साथ चल पड़े। यह तो मुझे बाद में पता चला कि वह घूमने नहीं, छोटी बहन के लिए लड़का ढूढ़ने आए हैं। तभी दूर की रिश्तेदारी में पिताजी को एक लड़का मिल गया था। पिताजी ने साफ़-साफ़ कह दिया था कि मेरे पास सिर्फ लड़की हैं और कुछ नहीं। लड़के वालों ने भी अपनी बात रख दी, हमें सिर्फ लड़की चाहिए जो हमारे परिवार को चला सके। नतीजा यह निकला कि शादी देहरादून में करनी होगी। पिताजी वापस अपने शहर आ गये। फिर एक हफ्ते के बाद अम्मा और भाई-बहनों को लेकर देहरादून आ गए। हम लोगों ने तो जो शादी में पैसा लगाया साथ-साथ लड़के वालों ने भी हमारी काफी मदद की। शादी ठीक-ठाक निपट गई थी। पिताजी सबको लेकर शहर आ गए थे। आठवे दिन मैं भी शहर आ गया। उसी के दूसरे दिन मेरे भाई का एक्सीडेंट हो गया। देहरादून के रिश्तेदारों ने मेरे बड़े भाई को खैराती अस्पताल में भर्ती कर दिया, और पीछे मुड़कर नहीं देखा। पिताजी-अम्मा को बहुत दुःख हुआ। डॉक्टरों के अनुसार, भाई का एक हाथ बेकार हो चुका था। और अगर जल्दी नहीं काटा गया तो ज़हर पूरे ज़िस्म में फैल जाएगा। पिताजी भाई को लेकर अपने शहर आ गए थे। डॉक्टरों को दिखाया गया तो उन्होंने फौरन आप्ररेशन करने को कहा। रकम एक हज़ार थी मगर जहाँ खाने के लाले लगे हो, वहाँ यह रकम बहुत बड़ी थी। पिताजी ने हर एक के आगे गुज़ारिश की मगर किसी ने उनकी मदद नहीं की। वह पैसे के लिए इधर-उधर भागते रहे। पैसा मिला भी तो ब्याज पर, भाई का आप्ररेशन हुआ। पर डॉक्टर उसका दाया हाथ नहीं बचा सके। शहर में मेरे भाई का नाम था चाहे खेल का मैदान हो या पढ़ाई, वह हर जगह अव्वल आता था। मगर आज वह विकलांग बन कर रह गया था। भाई के ग़म में पिताजी घुटते जा रहे थे। फिर क्या था मैंने उन कलाकरों से मिलना-जुलना शुरू कर दिया, और गुज़ारिश की वे भी मुझे अपने साथ प्रोग्राम में ले चले। उस समय मेरी उम्र चैदह साल की थी। उन लोगों ने मुझे पाँच रूपया रोज पर रामलीला में नाचने का काम दिला दिया। दिन-भर मैं चाय का ठेला खींचता और रात-भर रामलीला में नाचता। फिर सुबह भाई को अस्पताल में ले जाकर डेसिंग कराना। यह सब मेरा रोज का काम था। मेरे तो जैसे काटों खून नहीं। ज्ञानदीप आगे की लाइनें पढ़ पाता कि अचानक बिजली गुल हो गई। उसे रह-रहकर बिजली विभाग पर गुस्सा आ रहा था। मगर वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सका। इस वक्त अँघेरे का वर्चस्व कायम था। तो क्या मज़ाल थी रोशनी की। ठंड़ भी अपने चरम सीमा पर थी। कोहरे का अपना बवाल था। जहाँ दिन में यह मोहल्ला कान फोड़ता हो, वही इस वक्त सन्नाटा अपनी चादर ओढ़े पड़ा था। ज्ञानदीप ने लालटेन में देखा उसमें तेल नहीं था। उसे अपने ऊपर काफी गुस्सा आया। उसका दिल-दिमाग दीपिकामाई के डायरी के पन्नों में खोया था। आगे क्या हुआ? उसकी उत्सुकता बनी हुई थी। ज्ञानदीप दरवाजा बंद करके रोड पर आ गया। मगर दुकान बंद देख वह आगे बढ़ गया। फिर भी उसे मोमबत्ती नहीं मिली तो वह हताश मन से लौट आया। जैसे 'रावन' फ्लाप होने से शाहरूख खान लंदन से मुंबई वापस आए थे। ज्ञानदीप बिस्तर पर ऐसे ढहे, जैसे जीरों पर आउट होने पर कोहली ढहे थे। ज्ञानदीप का दिल-दिमाग अभी भी दीपिकामाई के उन पन्नों में डूबा था। उन्होंने कितना कष्टमय जीवन जिया। जिस उमर में उन्हें खेलना-कूदना, पढ़ना-घूमना, मौज़मस्ती करना था। उस उमर में उन्होंने जी-तोड़ मेहनत करके अपने परिवार को पाला। वैसे तो दुख-तकलीफ़, परेशानी हर एक के साथ होती हैं। मगर दीपिकामाई के खाते में कुछ ज्यादा ही थी। जब परिस्थिति वश दीपक! दीपिकामाई! बनी होगी? तब उन पर क्या नहीं गुज़री होगी? कैसी-कैसी बातें परिवार वालों को सुननी पड़ी होगी। क्या बीती होगी उनके माँ-बाप, भाई-बहनों पर। कल्पना करता हूँ तो रूह काँप उठती हैं। कहते हैं घूर का भी एक अस्तित्व होता हैं। तो क्या दीपिकामाई का कोई अस्तित्व नहीं? ज्ञानदीप के ज़ेहन में तरह-तरह के समीकरण बन रहे थे। वह कभी दायें करवट लेता तो कभी बायें। उसकी भूख-प्यास ऐसे गायब हो गई। जैसे इंसान के जीवन से सच्चाई। मैंने डरते-डरते कहा, कि रामलीला देखने गया था। पिताजी की यह बातें मेरे दिल-दिमाग को झकझौर गई थी। शायद उन्हें मुझ पर शक हो गया था कि मैं कहाँ जाता हूँ, और क्या करता हूँ। वह अपनी बीमारी और परिस्थितियों के आगे विवश थे। वरना वह अब तक मेरे हाथ-पैर तोड़ चुके होते हैं। क्या करूँ मैं भी उनसे झूठ नहीं बोलना चाहता था, पर जो मजबूरियाँ थी उसके आगे मैं मजबूर था। आखि़रकार एक दिन मुझे चाय का ठेला बंद ही करना पड़ा। क्यों कि बनिये ने उधार देना बंद कर दिया था। याह ख़ुदा अगर मेरी झोली में और भी ग़म हैं। तो उठा ले मुझे, वरना खुशी का एक ही लम्हा दे दें ।। वक्त कभी नहीं थमता। थमता तो इंसान हैं। वक्त का पहिया तो हमेशा चलता ही जाता हैं। घर की परिस्थितियाँ दिन पर दिन बिगड़ती जा रही थी। छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी। समझ में नहीं आ रहा था क्या करूँ? मगर परिवार तो चलाना ही था। भाई और पिता जी की बीमारी की चिंता मुझे रात-दिन खाये जा रही थी। मैं मरता क्या न करता, सीधे चंदा से मिली जो एक हिजड़ा थी। मैंने अपनी सारी बात उसे बताई। प्रोग्राम शुरू होने से पहले उसने मेरे पैरों में एक-एक किलों का घुघरूँ बाँध दिया। मैंने जैसे-तैसे उल्टा-सीधा डांस किया। प्रोग्राम खत्म होने के बाद चंदा ने मुझे दस रुपये दिए। मैंने पैसे लाकर अम्मा को दे दिए। जब यह नाचने वाली बात पिताजी को पता चली तो उन्होंने मुझे बहुत गाली दी। अगर उनकी तबियत ठीक होती तो न जाने वह मेरा क्या हाल करते। मैंने चंदा से पचास रूपये लेकर बस स्टैण्ड पर चाय की दुकान खोल ली। दिन मैं दुकान करता और रात मैं उसके साथ प्रोग्राम। मैंने उससे गुज़ारिश की यह बात किसी से मत कहना। इसी तरह मेरी उसकी दोस्ती हो गई। हम रोज़ मिलने लगे। मैंने अपने घर की सारी बातें उसे बतायी। हमारे हाथ में अपना क़ल़म कागज नहीं होता। चंदा के बार-बार हिदायत देने से भी मैं मर्दाना भाषा नहीं छोड़ पा रहा था। और वैसे भी जनानियों की भाषा बोलना मुझे जरा भी अच्छी नहीं लगता था। मैं जैसे ही जाने के लिए उठा कि तभी दो आदमी आये। उनमें से एक ने मेरा हाथ पकड़ा और जबरदस्ती मुझे अपने पास बैठाने लगा। उसकी इस हरकत से मैं तैश में आ गया और चंदा की तरफ़ मुखा़तिब हुआ, "देखो गुरू! इन्हें समझा लो हमसे बत्तमीजी न करे नहीं तो ईटा-वीटा उठा कर मार देगें." मेरे इतना कहते ही उसने मेरा हाथ छोड़ दिया। दूसरे दिन जब चंदा दुकान पर आयी तो मैंने उससे पूछा, "वे लोग तुम्हारे कौन थें? उसी बात को लेकर हम दोनों में खूब बहस हुआ। उस दिन शरीफ बाबा दोपहर में आया और पिक्चर चलने की जिद् करने लगा। मुझे उसकी जिद् के आगे झुकना पड़ा। अभी आधी ही पिक्चर ही हुई थी कि उसने मुझे घर चलने को कहा। वह घर चलने के बहाने मुझे ऐसे रास्ते पर ले गया जहाँ उसने मेरे साथ.....।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
सुरक्षित जमा बॉक्स - इन विशेष छोटे जगह है जहां लोग लोगों की आँखें है कि उसके लिए कुछ मूल्य का प्रतिनिधित्व करता से छिपा कर सकते हैं कर रहे हैं। वे क्या हैं? सुरक्षा की गारंटी देता है क्या दिया जाता है? उनके आदेश वहाँ में क्या सुविधाओं? इन सब सवालों का हम इस लेख में संबोधित करेंगे। सुरक्षित जमा बॉक्स घर सुरक्षित के साथ लोकप्रियता के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। बेशक, न है और न ही अन्यथा पूरी तरह से चीजों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते। लेकिन अगर वे बीमा, बैंक के मामले में नकदी समकक्ष प्राप्त करने के लिए आसान हो जाएगा। अधिक जानकारी के लिए, हम इस बारे में बात करेंगे। यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि बैंक एक सेल न केवल विरोधी छेड़छाड़ लेकिन fireproofed प्रदान कर सकते हैं। इसके अलावा, जब उनके घर के वातावरण remodeling जहां यह सुरक्षित ले जाने के लिए लायक है के बारे में सोचने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा, सेल बैंक आम तौर पर सुरक्षा है, जो यह न केवल तोड़ने में, लेकिन यह भी आग जैसी आपदाओं की एक किस्म का सामना करने के लिए अनुमति देता है की दो परतों है। बैंकों में सुरक्षित जमा बॉक्स तकनीकी हालत के साथ पालन, बिना कि वित्तीय संस्था का जुर्माना किया जाएगा। इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण लाभ बैंक के संरक्षण के संगठन है। इस प्रकार, संभावित घुसपैठियों के लिए एक गंभीर समस्या एक अलग कमरे में, जहां सेल, और कहा कि घटना में है कि एक तेजी से प्रतिक्रिया टीम के नाम से जाना जाएगा। (- न्यायाधीश करने का कार्य नहीं है, हालांकि के रूप में चीजों को वास्तविकता में हैं) यह भी विश्वसनीयता के पक्ष में तथ्य यह है कि बैंकों एक अद्वितीय कुंजी के उपयोग की घोषणा है। इसलिए, कर्मचारियों की अशुद्ध हाथों में एक विदेशी सेल खोलने के लिए और वैधता काम नहीं करेगा की उपस्थिति पैदा करते हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि आप चीजों की आवश्यक आकार के तहत भंडारण का चयन करें, पट्टे की अवधि निर्दिष्ट कर सकते हैं, साथ ही, किसी भी इच्छुक व्यक्ति के लिए उपयोग की देखभाल अगर वांछित है। जमा कोशिकाएं भी के अधीन हो सकता त्रिपक्षीय समझौता। ऐसे मामलों में, सेल केवल घटना दोनों साथियों देखते हैं कि खोला जा सकता है। यह भी एक सेल इकाई डिजाइन करने के लिए संभव है। यह उसकी कंपनी की कीमत के लिए भुगतान करने की अनुमति देगा, और केवल उन कर्मचारियों, जो पहले के रूप में सूचीबद्ध किया गया है का उपयोग करने में सक्षम हो जाएगा न्यासियों। इसके अलावा, आप अपने हस्ताक्षर के नमूने रहना होगा। इस प्रकार, आप दस्तावेज़ों को काफी महत्व की हैं अनधिकृत पहुँच को रोकने कर सकते हैं। कितना एक लिफ्ट और सुरक्षित जमा बॉक्स है? बैंक अपनी लागत के आधार पर दरों करता है, पर सामान्य रूप में हम सीमा मान सकते हैं जो वित्तीय संस्थानों के काम के अधिकांश में। इसलिए, यह प्रति दिन (दस्तावेजों के भंडारण के लिए एक सेल के लिए) 40-50 रूबल है। नहीं झाड़ी के आसपास से हराया और चाय की पत्तियां पढ़ने के लिए, हमें देश की सबसे बड़ी वित्तीय संस्था पर गौर करें - जो है, हम Sberbank में मदद मिलेगी। सेल में सुरक्षित यह रेंज ऊपर दिखाए में फिट। वे आकार में आप को पूरा नहीं कर सकते हैं, यह एक वित्तीय संस्थान पूरे तिजोरियां पट्टों है! सच तो यह है कि वे है और मान के संगत है - $ 100 प्रति रात से है, लेकिन आकार ऐसा है कि लगभग सब कुछ के लिए आवश्यक है कि, तुम सब की तरह। स्पष्ट उच्च लागत के बावजूद, मुश्किल एक खाली सुरक्षित जमा बॉक्स खोजने के लिए। मास्को, रियाज़ान, सेंट पीटर्सबर्ग, व्लादिवोस्तोक, Tver - यहाँ यह बैंक की पहली शाखा में आने और एक छोटे से दुकान ऑर्डर करने के लिए कठिन हो जाएगा। इसलिए, लोकप्रिय और दूरदराज के उपयोग की संभावना। वह व्यक्ति जो अपने खुद के प्रयोजनों के लिए, यह एक सहायता सेवा वित्तीय संस्था के साथ जुड़ा हुआ है सुरक्षित जमा बॉक्स की तलाश में है, और यह आप सेवा का उपयोग कर सकते हैं जहां के बारे में जानकारी प्रदान करता है। और विभाग कितना ग्राहक सुविधाजनक उसे सामग्री की जाँच करें या इसे लेने के लिए यात्रा करने के लिए के लिए किया जाएगा के आधार पर संकेत दिया। क्या बैंकों को अपने ग्राहकों की पेशकश? साथ में भंडारण ग्राहकों के साथ कुछ लाभ प्रदान की जाती हैं। पर विचार करें वे खुद क्या कर रहे हैं, हम Sberbank डिपॉजिटरी में मदद मिलेगीः - कोशिकाओं एक कमरे कि विशेष रूप से कार्य करने के लिए सुसज्जित किया गया है में हैं। - निक्षेपागार उन्नत निष्क्रिय सुरक्षा की एक संख्या है, साथ ही दौर घड़ी सुरक्षा है। - कोशिकाओं विभिन्न आकारों कि आगे एक बख़्तरबंद अलमारी में छिपा की तिजोरियां हैं। - आप उनकी जरूरतों और इसके लिए भुगतान करने की इच्छा पर निर्भर करता है भंडारण आकार का चयन कर सकते हैं। - वहाँ छूट का एक लचीला प्रणाली है - तो क्या बड़ा जिस अवधि के लिए सेल पट्टे, आपको उतना ही कम है भुगतान करने के लिए है। - वहाँ मूल्यों कि बैंक में हैं करने के लिए तीसरे पक्ष के उपयोग रोकने के लिए संग्रह मोड की एक विशेष संगठन (यह एक वित्तीय संस्थान के कर्मचारियों से भी सुरक्षित है) है। - सेल में निवेश मूल्य के समय गोपनीयता के लिए केवल वर्तमान मालिक है। यह नियम बीमा है, जो हम बाद में एक छोटे से चर्चा करेंगे के साथ जुड़े एक अपवाद है। - सुरक्षित केवल दो चाबियों का एक साथ इस्तेमाल के साथ खुलता है। उनमें से एक ग्राहक के बैंक में स्थित है, और दूसरा - कर्मचारी। यही कारण है कि Sberbank के डिपॉजिटरी है। अब चलो पैराग्राफ पर ध्यान देना जाने №7। आमतौर पर, बैंक कोशिकाओं क़ीमती सामान स्टोर करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह इस तरह हो सकता है कि वे पैसे कि कर अधिकारियों से छिपा दिया गया था रखने के लिए आदेश दिया जाता है। यह जो कुछ भी था, आमतौर पर कक्ष की सामग्री में गोपनीय रखा जाता है। लेकिन इस वहाँ अपवाद हैं। तो अगर वहाँ मूल्य के कुछ है कि मैं एक ही समय में कम करने के लिए, तो नहीं करना चाहती है, और बाहरी मौजूद हो सकता है। उदाहरण के लिए, एक बीमा एजेंट, जिसका कार्य - यह सुनिश्चित करें कि ग्राहक बात यह है कि बीमा डाल करने के लिए वास्तव में है बनाने के लिए। और इस तथ्य है कि यह मूल और नहीं एक नकली है। इसके अलावा, अपनी यात्रा को विनियमित और चीजों की "अप्रत्याशित" नुकसान से बचने के लिए, एक यात्रा के जिम्मेदार बैंक अधिकारी लॉग इन किया जाएगा। यह आमतौर पर ऐसे मामलों में जहां एक व्यक्ति (इस तरह के मामलों में बीमा गैर आर्थिक नुकसान में) खुद के लिए "सफेद" आभूषण या बस मूल्यवान चीजें रखना चाहता है को दर्शाता है। क्या सुरक्षित जमा बॉक्स में जमा हो जाती है? एक नियम के रूप में, यह दस्तावेज, गहने, प्रतिभूतियों, पैसा है, कला, तस्वीरों के काम करता है - एक शब्द सब कुछ है जो व्यक्ति इसे छिपाने के लिए एक इच्छा है के लिए मूल्य देता है। वहाँ क्या सुरक्षित जमा बॉक्स में रखने के लिए निषिद्ध है की एक सूची है। आमतौर पर, यह द्वारा हम हथियार, ड्रग्स, जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थ (जैसे मांस या मछली के रूप में) मतलब है। बैंकों के नियमों के तहत, वे अनिवार्य सत्यापन कि तिजोरी में रखी है के लिए पात्र नहीं हैं। लेकिन हर आदमी एक अनुबंध है, जो कहता है कि सुरक्षित में वित्तीय संस्थानों के कुछ भी अवैध और गैरकानूनी करार दिए नियम नहीं किया जाएगा है। आदेश के नियमों के अनुसार कार्य करने के लिए, एक नियम के रूप में "प्रेरित" में है, बशर्ते कि ग्राहक के आकार की दृष्टि से महत्वपूर्ण पर अनुबंध के उल्लंघन के मामले में जुर्माना लगाया जाएगा, राशि, जिनमें से रूबल सैकड़ों हजारों के दसियों से भिन्न होता है, और यह उन डिपॉजिटरीज कि आम नागरिकों के लिए उपलब्ध हैं पर है। पारंपरिक, लेख के इस पैरा तीन भागों में बांटा जा सकता हैः - पहुँच प्रॉक्सी। इसका मतलब है कि जो व्यक्ति सुरक्षित किराए के एक दस्तावेज उससे जिसके अनुसार है, के अलावा, सेल के लिए उपयोग लोग हैं, जो जरूरी संलग्न की एक विशिष्ट सूची है। के रूप में प्रवेश और छोटे बारीकियों के एक नंबर के लिए शर्तें निर्धारित किया जा सकता। - बैंक कर्मचारियों का उपयोग। तथ्य यह है एक प्रमुख एक ही तरीका है सेल में पहुँच प्राप्त करने के लिए है कि वे, यदि एक ग्राहक को अपने खो देता है, के बावजूद - यह यह हैक। आमतौर पर, इस प्रक्रिया क्या एक विशेष मास्टर, कर्मचारियों और सामग्री अभ्यास के मालिकों महल बाहर के साथ जो (कम आरी खुद सुरक्षित) कहा जाता है। - एक कानूनी इकाई की ओर से प्रवेश। यह विकल्प एक निश्चित कंपनी है, जो कि भंडार की सामग्री व्यक्तियों की एक संख्या से पहुँचा जा सकता है प्रदान करता है के साथ एक विशिष्ट अनुबंध के ड्राइंग ऊपर निकलता है। आम तौर पर इस विकल्प दस्तावेजों है कि कंपनी के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण हैं पर प्रयोग किया जाता है। जो व्यक्ति उपयोग कर सकते है, आम तौर पर निर्धारित निदेशक, उनके सहायक, मुख्य लेखाकार, साथ ही अन्य लोगों के एक नंबर। मैं सेल के एक नागरिक किराए के लिए क्या करना होगा? यह एक प्राकृतिक व्यक्ति का आदेश देता है, तो वह पहचान दस्तावेज़, साथ ही पहचान कर नंबर के मूल प्रमाण पत्र की काफी है। वेतन सेल जैसे ही अनुबंध के रूप में हस्ताक्षर किए गए थे होना चाहिए। एक समझौते पर एक कानूनी इकाई की ओर से है, तो यह राज्य पंजीकरण, चार्टर दस्तावेजों (सभी और परिवर्तनों के साथ) की आवश्यकता, एक भी रजिस्टर में लाने के बारे में प्रमाण पत्र, साथ ही एक दस्तावेज है कि व्यक्ति है कि ठेके पर हस्ताक्षर के अधिकार की पुष्टि करता है का प्रमाण पत्र की एक प्रति है के लिए आवश्यक है।
सुरक्षित जमा बॉक्स - इन विशेष छोटे जगह है जहां लोग लोगों की आँखें है कि उसके लिए कुछ मूल्य का प्रतिनिधित्व करता से छिपा कर सकते हैं कर रहे हैं। वे क्या हैं? सुरक्षा की गारंटी देता है क्या दिया जाता है? उनके आदेश वहाँ में क्या सुविधाओं? इन सब सवालों का हम इस लेख में संबोधित करेंगे। सुरक्षित जमा बॉक्स घर सुरक्षित के साथ लोकप्रियता के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। बेशक, न है और न ही अन्यथा पूरी तरह से चीजों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते। लेकिन अगर वे बीमा, बैंक के मामले में नकदी समकक्ष प्राप्त करने के लिए आसान हो जाएगा। अधिक जानकारी के लिए, हम इस बारे में बात करेंगे। यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि बैंक एक सेल न केवल विरोधी छेड़छाड़ लेकिन fireproofed प्रदान कर सकते हैं। इसके अलावा, जब उनके घर के वातावरण remodeling जहां यह सुरक्षित ले जाने के लिए लायक है के बारे में सोचने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा, सेल बैंक आम तौर पर सुरक्षा है, जो यह न केवल तोड़ने में, लेकिन यह भी आग जैसी आपदाओं की एक किस्म का सामना करने के लिए अनुमति देता है की दो परतों है। बैंकों में सुरक्षित जमा बॉक्स तकनीकी हालत के साथ पालन, बिना कि वित्तीय संस्था का जुर्माना किया जाएगा। इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण लाभ बैंक के संरक्षण के संगठन है। इस प्रकार, संभावित घुसपैठियों के लिए एक गंभीर समस्या एक अलग कमरे में, जहां सेल, और कहा कि घटना में है कि एक तेजी से प्रतिक्रिया टीम के नाम से जाना जाएगा। यह भी विश्वसनीयता के पक्ष में तथ्य यह है कि बैंकों एक अद्वितीय कुंजी के उपयोग की घोषणा है। इसलिए, कर्मचारियों की अशुद्ध हाथों में एक विदेशी सेल खोलने के लिए और वैधता काम नहीं करेगा की उपस्थिति पैदा करते हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि आप चीजों की आवश्यक आकार के तहत भंडारण का चयन करें, पट्टे की अवधि निर्दिष्ट कर सकते हैं, साथ ही, किसी भी इच्छुक व्यक्ति के लिए उपयोग की देखभाल अगर वांछित है। जमा कोशिकाएं भी के अधीन हो सकता त्रिपक्षीय समझौता। ऐसे मामलों में, सेल केवल घटना दोनों साथियों देखते हैं कि खोला जा सकता है। यह भी एक सेल इकाई डिजाइन करने के लिए संभव है। यह उसकी कंपनी की कीमत के लिए भुगतान करने की अनुमति देगा, और केवल उन कर्मचारियों, जो पहले के रूप में सूचीबद्ध किया गया है का उपयोग करने में सक्षम हो जाएगा न्यासियों। इसके अलावा, आप अपने हस्ताक्षर के नमूने रहना होगा। इस प्रकार, आप दस्तावेज़ों को काफी महत्व की हैं अनधिकृत पहुँच को रोकने कर सकते हैं। कितना एक लिफ्ट और सुरक्षित जमा बॉक्स है? बैंक अपनी लागत के आधार पर दरों करता है, पर सामान्य रूप में हम सीमा मान सकते हैं जो वित्तीय संस्थानों के काम के अधिकांश में। इसलिए, यह प्रति दिन चालीस-पचास रूबल है। नहीं झाड़ी के आसपास से हराया और चाय की पत्तियां पढ़ने के लिए, हमें देश की सबसे बड़ी वित्तीय संस्था पर गौर करें - जो है, हम Sberbank में मदद मिलेगी। सेल में सुरक्षित यह रेंज ऊपर दिखाए में फिट। वे आकार में आप को पूरा नहीं कर सकते हैं, यह एक वित्तीय संस्थान पूरे तिजोरियां पट्टों है! सच तो यह है कि वे है और मान के संगत है - एक सौ डॉलर प्रति रात से है, लेकिन आकार ऐसा है कि लगभग सब कुछ के लिए आवश्यक है कि, तुम सब की तरह। स्पष्ट उच्च लागत के बावजूद, मुश्किल एक खाली सुरक्षित जमा बॉक्स खोजने के लिए। मास्को, रियाज़ान, सेंट पीटर्सबर्ग, व्लादिवोस्तोक, Tver - यहाँ यह बैंक की पहली शाखा में आने और एक छोटे से दुकान ऑर्डर करने के लिए कठिन हो जाएगा। इसलिए, लोकप्रिय और दूरदराज के उपयोग की संभावना। वह व्यक्ति जो अपने खुद के प्रयोजनों के लिए, यह एक सहायता सेवा वित्तीय संस्था के साथ जुड़ा हुआ है सुरक्षित जमा बॉक्स की तलाश में है, और यह आप सेवा का उपयोग कर सकते हैं जहां के बारे में जानकारी प्रदान करता है। और विभाग कितना ग्राहक सुविधाजनक उसे सामग्री की जाँच करें या इसे लेने के लिए यात्रा करने के लिए के लिए किया जाएगा के आधार पर संकेत दिया। क्या बैंकों को अपने ग्राहकों की पेशकश? साथ में भंडारण ग्राहकों के साथ कुछ लाभ प्रदान की जाती हैं। पर विचार करें वे खुद क्या कर रहे हैं, हम Sberbank डिपॉजिटरी में मदद मिलेगीः - कोशिकाओं एक कमरे कि विशेष रूप से कार्य करने के लिए सुसज्जित किया गया है में हैं। - निक्षेपागार उन्नत निष्क्रिय सुरक्षा की एक संख्या है, साथ ही दौर घड़ी सुरक्षा है। - कोशिकाओं विभिन्न आकारों कि आगे एक बख़्तरबंद अलमारी में छिपा की तिजोरियां हैं। - आप उनकी जरूरतों और इसके लिए भुगतान करने की इच्छा पर निर्भर करता है भंडारण आकार का चयन कर सकते हैं। - वहाँ छूट का एक लचीला प्रणाली है - तो क्या बड़ा जिस अवधि के लिए सेल पट्टे, आपको उतना ही कम है भुगतान करने के लिए है। - वहाँ मूल्यों कि बैंक में हैं करने के लिए तीसरे पक्ष के उपयोग रोकने के लिए संग्रह मोड की एक विशेष संगठन है। - सेल में निवेश मूल्य के समय गोपनीयता के लिए केवल वर्तमान मालिक है। यह नियम बीमा है, जो हम बाद में एक छोटे से चर्चा करेंगे के साथ जुड़े एक अपवाद है। - सुरक्षित केवल दो चाबियों का एक साथ इस्तेमाल के साथ खुलता है। उनमें से एक ग्राहक के बैंक में स्थित है, और दूसरा - कर्मचारी। यही कारण है कि Sberbank के डिपॉजिटरी है। अब चलो पैराग्राफ पर ध्यान देना जाने №सात। आमतौर पर, बैंक कोशिकाओं क़ीमती सामान स्टोर करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह इस तरह हो सकता है कि वे पैसे कि कर अधिकारियों से छिपा दिया गया था रखने के लिए आदेश दिया जाता है। यह जो कुछ भी था, आमतौर पर कक्ष की सामग्री में गोपनीय रखा जाता है। लेकिन इस वहाँ अपवाद हैं। तो अगर वहाँ मूल्य के कुछ है कि मैं एक ही समय में कम करने के लिए, तो नहीं करना चाहती है, और बाहरी मौजूद हो सकता है। उदाहरण के लिए, एक बीमा एजेंट, जिसका कार्य - यह सुनिश्चित करें कि ग्राहक बात यह है कि बीमा डाल करने के लिए वास्तव में है बनाने के लिए। और इस तथ्य है कि यह मूल और नहीं एक नकली है। इसके अलावा, अपनी यात्रा को विनियमित और चीजों की "अप्रत्याशित" नुकसान से बचने के लिए, एक यात्रा के जिम्मेदार बैंक अधिकारी लॉग इन किया जाएगा। यह आमतौर पर ऐसे मामलों में जहां एक व्यक्ति खुद के लिए "सफेद" आभूषण या बस मूल्यवान चीजें रखना चाहता है को दर्शाता है। क्या सुरक्षित जमा बॉक्स में जमा हो जाती है? एक नियम के रूप में, यह दस्तावेज, गहने, प्रतिभूतियों, पैसा है, कला, तस्वीरों के काम करता है - एक शब्द सब कुछ है जो व्यक्ति इसे छिपाने के लिए एक इच्छा है के लिए मूल्य देता है। वहाँ क्या सुरक्षित जमा बॉक्स में रखने के लिए निषिद्ध है की एक सूची है। आमतौर पर, यह द्वारा हम हथियार, ड्रग्स, जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थ मतलब है। बैंकों के नियमों के तहत, वे अनिवार्य सत्यापन कि तिजोरी में रखी है के लिए पात्र नहीं हैं। लेकिन हर आदमी एक अनुबंध है, जो कहता है कि सुरक्षित में वित्तीय संस्थानों के कुछ भी अवैध और गैरकानूनी करार दिए नियम नहीं किया जाएगा है। आदेश के नियमों के अनुसार कार्य करने के लिए, एक नियम के रूप में "प्रेरित" में है, बशर्ते कि ग्राहक के आकार की दृष्टि से महत्वपूर्ण पर अनुबंध के उल्लंघन के मामले में जुर्माना लगाया जाएगा, राशि, जिनमें से रूबल सैकड़ों हजारों के दसियों से भिन्न होता है, और यह उन डिपॉजिटरीज कि आम नागरिकों के लिए उपलब्ध हैं पर है। पारंपरिक, लेख के इस पैरा तीन भागों में बांटा जा सकता हैः - पहुँच प्रॉक्सी। इसका मतलब है कि जो व्यक्ति सुरक्षित किराए के एक दस्तावेज उससे जिसके अनुसार है, के अलावा, सेल के लिए उपयोग लोग हैं, जो जरूरी संलग्न की एक विशिष्ट सूची है। के रूप में प्रवेश और छोटे बारीकियों के एक नंबर के लिए शर्तें निर्धारित किया जा सकता। - बैंक कर्मचारियों का उपयोग। तथ्य यह है एक प्रमुख एक ही तरीका है सेल में पहुँच प्राप्त करने के लिए है कि वे, यदि एक ग्राहक को अपने खो देता है, के बावजूद - यह यह हैक। आमतौर पर, इस प्रक्रिया क्या एक विशेष मास्टर, कर्मचारियों और सामग्री अभ्यास के मालिकों महल बाहर के साथ जो कहा जाता है। - एक कानूनी इकाई की ओर से प्रवेश। यह विकल्प एक निश्चित कंपनी है, जो कि भंडार की सामग्री व्यक्तियों की एक संख्या से पहुँचा जा सकता है प्रदान करता है के साथ एक विशिष्ट अनुबंध के ड्राइंग ऊपर निकलता है। आम तौर पर इस विकल्प दस्तावेजों है कि कंपनी के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण हैं पर प्रयोग किया जाता है। जो व्यक्ति उपयोग कर सकते है, आम तौर पर निर्धारित निदेशक, उनके सहायक, मुख्य लेखाकार, साथ ही अन्य लोगों के एक नंबर। मैं सेल के एक नागरिक किराए के लिए क्या करना होगा? यह एक प्राकृतिक व्यक्ति का आदेश देता है, तो वह पहचान दस्तावेज़, साथ ही पहचान कर नंबर के मूल प्रमाण पत्र की काफी है। वेतन सेल जैसे ही अनुबंध के रूप में हस्ताक्षर किए गए थे होना चाहिए। एक समझौते पर एक कानूनी इकाई की ओर से है, तो यह राज्य पंजीकरण, चार्टर दस्तावेजों की आवश्यकता, एक भी रजिस्टर में लाने के बारे में प्रमाण पत्र, साथ ही एक दस्तावेज है कि व्यक्ति है कि ठेके पर हस्ताक्षर के अधिकार की पुष्टि करता है का प्रमाण पत्र की एक प्रति है के लिए आवश्यक है।
Mehsana : गुजरात के मेहसाणा और वड़ोदरा में पतंग के मांझे की चपेट में आने से तीन साल की एक बच्ची और बाइक सवार 35 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गयी. पुलिस के मुताबिक दोपहर में मेहसाणा जिले के विसनगर कस्बे में अपनी मां के साथ घर जा रही कृष्णा ठाकोर की गर्दन में पतंग का मांझा वाली डोर फंस गयाी और उसकी मौत हो गई. नजदीकी सरकारी अस्पताल में पहुंचने पर बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया. वड़ोदरा शहर के छानी इलाके में हुई एक अन्य घटना में पतंग के मांझे से स्वामीजी यादव नामक एक मोटरसाइकिल सवार की गर्दन कट जाने के बाद उनकी मृत्यु हो गई. छानी पुलिस थाने के एक अधिकारी ने कहा, स्वामीजी यादव अपने दोपहिया वाहन पर एक पुल से नीचे आ रहे थे. तभी एक पतंग का मांझा उनके गले में फंस गया, जिससे उनकी तुरंत मौत हो गई. इस बीच, आपातकालीन चिकित्सा सेवा (ईएमएस) तंत्र के अधिकारियों ने कहा कि पूरे गुजरात में दिन भर में पतंग के मांझे से लोगों के घायल होने के कई मामले सामने आए हैं.
Mehsana : गुजरात के मेहसाणा और वड़ोदरा में पतंग के मांझे की चपेट में आने से तीन साल की एक बच्ची और बाइक सवार पैंतीस वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गयी. पुलिस के मुताबिक दोपहर में मेहसाणा जिले के विसनगर कस्बे में अपनी मां के साथ घर जा रही कृष्णा ठाकोर की गर्दन में पतंग का मांझा वाली डोर फंस गयाी और उसकी मौत हो गई. नजदीकी सरकारी अस्पताल में पहुंचने पर बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया. वड़ोदरा शहर के छानी इलाके में हुई एक अन्य घटना में पतंग के मांझे से स्वामीजी यादव नामक एक मोटरसाइकिल सवार की गर्दन कट जाने के बाद उनकी मृत्यु हो गई. छानी पुलिस थाने के एक अधिकारी ने कहा, स्वामीजी यादव अपने दोपहिया वाहन पर एक पुल से नीचे आ रहे थे. तभी एक पतंग का मांझा उनके गले में फंस गया, जिससे उनकी तुरंत मौत हो गई. इस बीच, आपातकालीन चिकित्सा सेवा तंत्र के अधिकारियों ने कहा कि पूरे गुजरात में दिन भर में पतंग के मांझे से लोगों के घायल होने के कई मामले सामने आए हैं.
- PART III - - SEC. 1] THE GAZETTE OF INDIA, JULY 24, 1971 (SRAVANA 2, 1893) श्रीलंका से प्रत्यावर्तित व्यक्तियों तथा कीनिया, उगांडा और संयुक्त गणराज्य टंजानिया के पूर्वी अफ़्रीकी देशो से प्रयजन कर आए लोगो के कुछ वर्गों को 45 वर्ष की आयु तक छूट दी जा सकती है। अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित आदिम जातियों के उम्मीदवारों के लिए ऊपरी आयु सीमा मे 5 वर्ष की छूट दी जा सकती है । विशिष्ट परिस्थितियों को छोड़कर अन्य लोगों को किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी और यह छूट किसी भी स्थिति मे 3 वर्ष से अधिक नहीं होगी । अन्य दृष्टियों से सुयोग्य उम्मीदवारों को, आयोग यदि चाहे तो, योग्यताओ मे छूट प्रदान कर सकता है । केवल उन पदों को छोड़कर जिनके संबंध में ऐसा वेतन न देने का उल्लेख किया गया हो, विशेषतया योग्य एंव अनुभवी उम्मीदवारों को उच्च प्रारंभिक वेतन दिया जा सकता है । आवेदन प्रपत्र और विवरण सचिव, संघ लोक सेवा आयोग, पोस्ट बॉक्स संख्या 186, नई दिल्ली से प्राप्त किए जा सकते हैं । प्रपत्र के लिए अनुरोध करते समय पद का नाम, विज्ञापन संख्या एव मदसंख्या अवश्य लिखे, और साथ ही प्रत्येक पद के लिए कम से कम 23 X 10 सें० मी० आकार का अपना पता लिखा हुआ टिकट रहित लिफ़ाफ़ा भेजना चाहिए । लिफ़ाफ़ा पर उस पद का नाम लिखा होना चाहिए जिसके लिए आवेदन प्रपत्न मांगा जा रहा है । आयोग 1-1-1964 को या उसके बाद पूर्वी पाकिस्तान से वस्तुतः विस्थापित तथा 1 जून, 1963, और 1 नवम्बर, 1964, को या उसके बाद क्रमशः बर्मा और श्रीलंका से प्रत्यावर्तित व्यक्तियों का शुल्क माफ कर सकता है जो यथार्थतः निर्धन हो । प्रत्येक पद के लिए अलग-अलग शुल्क के साथ अलग-अलग आवेदन-प्रत्न भेजना चाहिए । विदेशो में रहने वाले उम्मीदवार आवेदन प्रपत्र न मिलने पर, सादे कागज पर आवेदन कर सकते है और स्थानीय भारतीय दूतावास में शुल्क जमा कर सकते है । अपेक्षित होने पर उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए उपस्थित होना पड़ेगा । रु० 8.00 ( अनुसूचित जातियों एंव अनुसूचित आदिम जातियों के लिए रु० 2.00 ) के रेखांकित किए हुए भारतीय पोस्टल आर्डर सहित आवेदन पत्र स्वीकार करने की अंतिम तारीख 23 अगस्त, 1971 (विदेशो में तथा अंडमान एवं निकोबार, लंकादिव, मिनिफ्याय एवं अमिनदिवि द्वीपसमूहों में रहने वाले आवेदकों के लिए 6 सितम्बर, 1971 है । खज़ाना रसीदों को स्वीकार नहीं किया जाएगा । क्रम संख्या 15 से 18 पद स्थायी है । क्रम संख्या 7 के सात पद तथा क्रम संख्या 1 का पद स्थायी है किन्तु उन पर नियुक्ति अस्थायी आधार पर की जाएगी । क्रम संख्या 2 से 6, 8 से 11 तथा 14 के पद अस्थायी है किन्तु उनके स्थायी कर दिए जाने की संभावना है । क्रम संख्या 7 के पन्द्रह पद तथा क्रम संख्या 12 का पद अस्थायी है किन्तु उनके अनिश्चित काल तक चलते रहने की संभावना है । क्रम संख्या 13 का पद अस्थायी है । क्रम संख्या 7 के चार पद अनुसूचित जातियों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है तथा दो पद अनुसूचित आदिम जातियों के उम्मीदवारो के लिए आरक्षित है । यदि अनुसूचित जातियों / अनुसूचित आदिम जातियों के उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिलते है तो भी इन पदों को अनारक्षित नहीं समझा जाएगा । क्रम संख्या 7 के चार पद, यदि ऐसे उपयुक्त उम्मीदवार मिलते है तो, उन आपातकालीन आयुक्त / अल्पकालीन सेवा आयुक्त अधिकारियों के लिए आरक्षित है जिन्हें 1-11-1962 के बाद सशस्त्र सेनाओं में कमीशन प्राप्त था और जो बाद में निर्मुक्त हों / सैन्य सेवा के कारण हुई विकलांगता के फलस्वरूप अपांग हुए हों / निर्मुक्त होने वाले हों, अन्यथा उन्हें अनारक्षित समझा जाएगा । क्रम संख्या 18 का पद अनुसूचित जातियों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है और इसके लिए केवल उन्हें ही आवेदन करना चाहिए । 1. हवाई सुरक्षा का एक उप-निवेशक, सिविल बिमानन विभाग; पर्यटन और सिविल विमानन मंत्रालय । वेतनः:--रु० 1100-50-1400 । आयुः- - 45 वर्ष या उससे कम योग्यताएं : अनिवार्य :--- (i) लगभग दस वर्ष का अनुभव जो निम्न प्रकार का हो : ( क ) वायुयान और / या इंजनों के उत्पादन या मरम्मत तथा ओवरहाल में उपयुक्त किसी मान्यताप्राप्त कारखाने या निर्माण - शाला से वैमानिक इजीनियरी मे दो वर्ष की "अप्रैटिसशिप" या समकक्ष प्रशिक्षण । (ख ) वायुयान और / या इंजनों के उत्पादन या मरम्मत तथा अनुरक्षण का आठ वर्ष का व्यावहारिक अनुभव । (ii) बहु इंजन - युक्त वायुयान सहित वायुयान दुर्घटनाओं के अन्वेषण का लगभग पांच वर्ष का अनुभव । (iii) पाइलट की हैसियत से अनुभव जिसमें से कम से कम कुछ अनुभव विगत दो वर्षों के दौरान का हो । (iv) वायुयान उत्पादन या निरीक्षण के नियंत्रण से संबद्ध किया दायित्वपूर्ण पद पर रहा हो । 2. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, ग्रेड I, अनुसंधान एवं विकास संगठन, रक्षा मंत्रालय । वेतन :- रु० 700-50-12501 आयु : - - वरीयतः 40 वर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य -(i) किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से समुद्री इंजीनियरी या यांत्रिक इंजीनियरी मे द्वितीय श्रेणी की "बैचलर" डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । (ii) समुद्री - इंजीनियरी में अनुसंधान / अभिकल्पन का लगभग चार वर्ष का अनुभव । मौलिक कार्य का प्रमाण । 3. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, ग्रेड 1, अनुसंधान एवं विकास संगठन; रक्षा मंत्रालय । वेतन :-- रु० 700-50-1250 1 आयु :-- वरीयतः 40 वर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य :(i) किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से नौ-वास्तुकला में द्वितीय श्रेणी की "बैचलर" डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । (ii) पोत निर्माण के क्षेत्र में अभिकल्पन तथा अनुसंधान का लगभग चार वर्ष का अनुभव । 4. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, प्रेड II, अनुसंधान एवं विकास संगठन; रक्षा मंत्रालय । वेतनः रु० 50-950 । आयु :-- वरीयतः 30 वर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य :- (i) किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से नौवास्तुकला में द्वितीय श्रेणी की "बैचलर" डिग्री या जल गति की ( Hydro-Dynamics ) में विशेषज्ञता के साथ प्रयुक्त गणित मे "मास्टर" डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । (ii) पोत मॉडल परीक्षण, कोटरन ( Cavitation ), नोदक ( Propellers ) आदि के क्षेत्र में अनुसंधान / अभिकल्पन का लगभग दो वर्ष का अनुभव । THE GAZETTE OF INDIA, JULY 24, 1971 (SRAVANA 2, 1893) [PART III - SEC. 12 विज्ञान (Large Sized Mirror Optics ), लैसर्स ( Lasers ), पतली फिल्म प्रौद्योगिकी में लगभग दो वर्ष का अनुभव । 5. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, पेड), अनुसंधान एवं विकास संगठन, रक्षा मंत्रालय । वेतन :-- रु० 700-50-12501 आयुः - - वरीयतः 40 वर्ष से कम योग्यताएं अनिवार्य :--- (i) किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से नाभिकीय इंजीनियरी में द्वितीय श्रेणी की "बैचलर" डिग्री या नाभिकीय भौतिक विज्ञान मे "मास्टर" डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । ( i1 ) विशेषकर रियेक्टर तथा नाभिकीय विद्युदुत्पादन संयंत्रों (Reactcrs and Nuclear Power Generating Plants ) के विशेष संदर्भ में नाभिकीय इंजीनियरी के क्षेत्र में अनुसंधान तथा विकास का लगभग चार वर्ष का अनुभव । 6. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, प्रेड II, यंत्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, रक्षा मंत्रालय । वेतनः--- रु०40040-800-50-950 1 आयु :- वरीयतः 30 वर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य -- (i) किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से यांत्रिक या वैद्युत इंजीनियरी में द्वितीय श्रेणी की डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । (ii) उपकरणों / उपस्कार के अभिकल्पन, विकास अथवा निष्पादन मूल्यांकन का लगभग दो वर्ष का अनुभव । 7. बाईस ( चार प्रत्याशित सहित ) सहायक खाम नियंत्रक, भारतीय खान ब्यूरो; इस्पात और खान मंत्रालय । वेतन :--- रु०400400-450-30-600-35-670-द० रो०-35-950। आयुःवर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य :- इंडियन स्कूल एन्ड एप्लाइड जियोलॉजी, धनबाद से खान विद्या में डिप्लोमा । अथवा किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय अथवा संस्थान से खान इंजीनियरी मे डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । (ii) खान विद्या का लगभग तीन वर्ष का अनुभव जिसमें से एक वर्ष का अनुभव धातु उत्पादक खानों ( Metalliferous Mines ) अथवा इसी प्रकार की खानों से संबद्ध सरकारी विभाग में हो । 8. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, प्रेड II, यंत्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, देहरादून; रक्षा मंत्रालय । वेतन :--रु० 400-40-800-50-9501 आयु : वरीयतः 30 वर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य (i) किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिकी के विशेष प्रश्न-पत्र सहित भौतिकविज्ञान में द्वितीय श्रेणी की "मास्टर डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । (ii) अवरक्त भौतिक विज्ञान ( Infra-Rcd Physics ) अथवा प्रोद्योगिकी में अध्यापन या अनुसंधान तथा विकास कार्य का लगभग दो वर्ष का अनुभव । 9. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, ग्रेड 11, यंत्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठाम, देहरादून; रक्षा मंत्रालय । वेतन :-- रु० 400-40-800-50-9501 आयु :- वरीयतः 30 वर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य :- (i) किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से प्रयुक्त प्रकाशविज्ञान (Applied Optics ) के विशेष प्रश्न - पत्र सहित भौतिक विज्ञान में द्वितीय श्रेणी की "मास्टर" डिग्री । (ii) प्रकाशीय यंत्र प्रौद्योगिकी (Optical Instrument Technology ), प्रकाशविज्ञान, बृहदाकार दपर्ण प्रकाश10. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, ग्रेड II, इलैक्ट्रॉनिको एवं रेडार विकास प्रतिष्ठान; रक्षा मंत्रालय । वेतनः रु० 40040-800-50-950 । आयुः - वरीयत 30 वर्ष के कम । योग्यताए अनिवार्य :-- (i) भौतिकविज्ञान (विशेष विषय के रूप में वायरलैस ) में द्वितीय श्रेणी की "मास्टर" डिग्री अथवा दूर संचार इजीनियरी में द्वितीय श्रेणी की डिग्री । (ii) खुरदरे मिलिटरी उपस्कर ( Rugged Military Equipment ) के अभिकल्पन तथा उसके पैकिंग का लगभग दो वर्ष का अनुभव । 11. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, प्रेड II, रक्षा खाद्य अनुसंधान प्रयोगशाला, रक्षा मंत्रालय । वेतन :--रु० 400-40800-50-950। आयु - वरीयतः 30 वर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य - (i) किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में द्वितीय श्रेणी की एम० एस सी० या द्वितीय श्रेणी की बी० टेक० ( खाद्य ) अथवा समकक्ष योग्यता । (ii) अनुसंधान तथा विकास का दो वर्ष का अनुभव । 12. एक सहायक प्रबंधक ( उत्पादन), रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय वेतन :-रु० रो०-35-950 । आयु :35 वर्ष या उससे कम । योग्यताएं : अनिवार्य (i) किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से रसायनविज्ञान की किसी शाखा में "मास्टर" डिग्री अथवा खाद्य प्रौद्योगिकी या रसायन इंजीनियरी या पशुरोगविज्ञान में डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । (ii) किसी प्रतिष्ठित खाद्य निर्जलीकरण कारखाने (Food Dehydration Factory ) मे दो वर्ष का अनुभव । 13. प्राणिविज्ञान का एक रोडर, भारतीय सहकारिता मिशन, नेपाल; विदेश मंत्रालय । वेतम :- रु० 700-40-1100 तथा साथ में नेपाल में प्राप्य विशेष भत्ते । आयु : 45 वर्ष या उससे कम । योग्यताएं : अनिवार्य - (i) किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से प्राणिविज्ञान में द्वितीय श्रेणी की "मास्टर डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । (ii) अध्यापन का लगभग आठ वर्ष का अनुभव जिसमे से कम से कम तीन वर्ष का अनुभव स्नातकोत्तर स्तर का हो । उम्मीदवार ने कीटविज्ञान में विशेषज्ञता प्राप्त की हो । 14. वो कनिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, मनोविज्ञान अनुसंधाम निवेशालय, बिल्ली; रक्षा मंत्रालय । वेतन :--रु०350-25रो०- 30-800-६० रो०-30-830-35900 । आयु : -- वरीयतः 30 वर्ष से कम । योग्यताएं : अभिवार्य :- किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में द्वितीय श्रेणी की "मास्टर" डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । 15. एक प्रिंसिपल, राजकीय संगीत महाविद्यालय, अगरतला, त्रिपुरा सरकार । वेतनः: - रु०500-50-950-६० रो०- 50-10001 आयु : - 40 वर्ष या उससे कम । योग्यताएं : अनिवार्य :--
- PART III - - SEC. एक] THE GAZETTE OF INDIA, JULY चौबीस, एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर श्रीलंका से प्रत्यावर्तित व्यक्तियों तथा कीनिया, उगांडा और संयुक्त गणराज्य टंजानिया के पूर्वी अफ़्रीकी देशो से प्रयजन कर आए लोगो के कुछ वर्गों को पैंतालीस वर्ष की आयु तक छूट दी जा सकती है। अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित आदिम जातियों के उम्मीदवारों के लिए ऊपरी आयु सीमा मे पाँच वर्ष की छूट दी जा सकती है । विशिष्ट परिस्थितियों को छोड़कर अन्य लोगों को किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी और यह छूट किसी भी स्थिति मे तीन वर्ष से अधिक नहीं होगी । अन्य दृष्टियों से सुयोग्य उम्मीदवारों को, आयोग यदि चाहे तो, योग्यताओ मे छूट प्रदान कर सकता है । केवल उन पदों को छोड़कर जिनके संबंध में ऐसा वेतन न देने का उल्लेख किया गया हो, विशेषतया योग्य एंव अनुभवी उम्मीदवारों को उच्च प्रारंभिक वेतन दिया जा सकता है । आवेदन प्रपत्र और विवरण सचिव, संघ लोक सेवा आयोग, पोस्ट बॉक्स संख्या एक सौ छियासी, नई दिल्ली से प्राप्त किए जा सकते हैं । प्रपत्र के लिए अनुरोध करते समय पद का नाम, विज्ञापन संख्या एव मदसंख्या अवश्य लिखे, और साथ ही प्रत्येक पद के लिए कम से कम तेईस X दस सेंशून्य मीशून्य आकार का अपना पता लिखा हुआ टिकट रहित लिफ़ाफ़ा भेजना चाहिए । लिफ़ाफ़ा पर उस पद का नाम लिखा होना चाहिए जिसके लिए आवेदन प्रपत्न मांगा जा रहा है । आयोग एक जनवरी एक हज़ार नौ सौ चौंसठ को या उसके बाद पूर्वी पाकिस्तान से वस्तुतः विस्थापित तथा एक जून, एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ, और एक नवम्बर, एक हज़ार नौ सौ चौंसठ, को या उसके बाद क्रमशः बर्मा और श्रीलंका से प्रत्यावर्तित व्यक्तियों का शुल्क माफ कर सकता है जो यथार्थतः निर्धन हो । प्रत्येक पद के लिए अलग-अलग शुल्क के साथ अलग-अलग आवेदन-प्रत्न भेजना चाहिए । विदेशो में रहने वाले उम्मीदवार आवेदन प्रपत्र न मिलने पर, सादे कागज पर आवेदन कर सकते है और स्थानीय भारतीय दूतावास में शुल्क जमा कर सकते है । अपेक्षित होने पर उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए उपस्थित होना पड़ेगा । शून्य रुपया आठ.शून्य के रेखांकित किए हुए भारतीय पोस्टल आर्डर सहित आवेदन पत्र स्वीकार करने की अंतिम तारीख तेईस अगस्त, एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर लगभग दस वर्ष का अनुभव जो निम्न प्रकार का हो : वायुयान और / या इंजनों के उत्पादन या मरम्मत तथा ओवरहाल में उपयुक्त किसी मान्यताप्राप्त कारखाने या निर्माण - शाला से वैमानिक इजीनियरी मे दो वर्ष की "अप्रैटिसशिप" या समकक्ष प्रशिक्षण । वायुयान और / या इंजनों के उत्पादन या मरम्मत तथा अनुरक्षण का आठ वर्ष का व्यावहारिक अनुभव । बहु इंजन - युक्त वायुयान सहित वायुयान दुर्घटनाओं के अन्वेषण का लगभग पांच वर्ष का अनुभव । पाइलट की हैसियत से अनुभव जिसमें से कम से कम कुछ अनुभव विगत दो वर्षों के दौरान का हो । वायुयान उत्पादन या निरीक्षण के नियंत्रण से संबद्ध किया दायित्वपूर्ण पद पर रहा हो । दो. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, ग्रेड I, अनुसंधान एवं विकास संगठन, रक्षा मंत्रालय । वेतन :- शून्य रुपया सातशून्य पचास एक हज़ार दो सौ पचासएक आयु : - - वरीयतः चालीस वर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य - किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से समुद्री इंजीनियरी या यांत्रिक इंजीनियरी मे द्वितीय श्रेणी की "बैचलर" डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । समुद्री - इंजीनियरी में अनुसंधान / अभिकल्पन का लगभग चार वर्ष का अनुभव । मौलिक कार्य का प्रमाण । तीन. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, ग्रेड एक, अनुसंधान एवं विकास संगठन; रक्षा मंत्रालय । वेतन :-- शून्य रुपया सातशून्य पचास एक हज़ार दो सौ पचास एक आयु :-- वरीयतः चालीस वर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य : किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से नौ-वास्तुकला में द्वितीय श्रेणी की "बैचलर" डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । पोत निर्माण के क्षेत्र में अभिकल्पन तथा अनुसंधान का लगभग चार वर्ष का अनुभव । चार. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, प्रेड II, अनुसंधान एवं विकास संगठन; रक्षा मंत्रालय । वेतनः शून्य रुपया पचास-नौ सौ पचास । आयु :-- वरीयतः तीस वर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य :- किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से नौवास्तुकला में द्वितीय श्रेणी की "बैचलर" डिग्री या जल गति की में विशेषज्ञता के साथ प्रयुक्त गणित मे "मास्टर" डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । पोत मॉडल परीक्षण, कोटरन , नोदक आदि के क्षेत्र में अनुसंधान / अभिकल्पन का लगभग दो वर्ष का अनुभव । THE GAZETTE OF INDIA, JULY चौबीस, एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर [PART III - SEC. बारह विज्ञान , लैसर्स , पतली फिल्म प्रौद्योगिकी में लगभग दो वर्ष का अनुभव । पाँच. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, पेड), अनुसंधान एवं विकास संगठन, रक्षा मंत्रालय । वेतन :-- शून्य रुपया सातशून्य पचास एक हज़ार दो सौ पचासएक आयुः - - वरीयतः चालीस वर्ष से कम योग्यताएं अनिवार्य :--- किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से नाभिकीय इंजीनियरी में द्वितीय श्रेणी की "बैचलर" डिग्री या नाभिकीय भौतिक विज्ञान मे "मास्टर" डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । विशेषकर रियेक्टर तथा नाभिकीय विद्युदुत्पादन संयंत्रों के विशेष संदर्भ में नाभिकीय इंजीनियरी के क्षेत्र में अनुसंधान तथा विकास का लगभग चार वर्ष का अनुभव । छः. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, प्रेड II, यंत्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, रक्षा मंत्रालय । वेतनः--- चालीस हज़ार चालीस रुपया-आठशून्य पचास नौ सौ पचास एक आयु :- वरीयतः तीस वर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य -- किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से यांत्रिक या वैद्युत इंजीनियरी में द्वितीय श्रेणी की डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । उपकरणों / उपस्कार के अभिकल्पन, विकास अथवा निष्पादन मूल्यांकन का लगभग दो वर्ष का अनुभव । सात. बाईस सहायक खाम नियंत्रक, भारतीय खान ब्यूरो; इस्पात और खान मंत्रालय । वेतन :--- चार लाख चार सौ रुपया-चारपचास तीस छः सौ-पैंतीस-छः सौ सत्तर-दशून्य रोशून्य पैंतीस नौ सौ पचास। आयुःवर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य :- इंडियन स्कूल एन्ड एप्लाइड जियोलॉजी, धनबाद से खान विद्या में डिप्लोमा । अथवा किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय अथवा संस्थान से खान इंजीनियरी मे डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । खान विद्या का लगभग तीन वर्ष का अनुभव जिसमें से एक वर्ष का अनुभव धातु उत्पादक खानों अथवा इसी प्रकार की खानों से संबद्ध सरकारी विभाग में हो । आठ. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, प्रेड II, यंत्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, देहरादून; रक्षा मंत्रालय । वेतन :--शून्य रुपया चारशून्य चालीस आठ सौ-पचास-नौ हज़ार पाँच सौ एक आयु : वरीयतः तीस वर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिकी के विशेष प्रश्न-पत्र सहित भौतिकविज्ञान में द्वितीय श्रेणी की "मास्टर डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । अवरक्त भौतिक विज्ञान अथवा प्रोद्योगिकी में अध्यापन या अनुसंधान तथा विकास कार्य का लगभग दो वर्ष का अनुभव । नौ. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, ग्रेड ग्यारह, यंत्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठाम, देहरादून; रक्षा मंत्रालय । वेतन :-- शून्य रुपया चारशून्य चालीस आठ सौ-पचास-नौ हज़ार पाँच सौ एक आयु :- वरीयतः तीस वर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य :- किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से प्रयुक्त प्रकाशविज्ञान के विशेष प्रश्न - पत्र सहित भौतिक विज्ञान में द्वितीय श्रेणी की "मास्टर" डिग्री । प्रकाशीय यंत्र प्रौद्योगिकी , प्रकाशविज्ञान, बृहदाकार दपर्ण प्रकाशदस. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, ग्रेड II, इलैक्ट्रॉनिको एवं रेडार विकास प्रतिष्ठान; रक्षा मंत्रालय । वेतनः शून्य रुपया चालीस हज़ार चालीस-आठशून्य पचास नौ सौ पचास । आयुः - वरीयत तीस वर्ष के कम । योग्यताए अनिवार्य :-- भौतिकविज्ञान में द्वितीय श्रेणी की "मास्टर" डिग्री अथवा दूर संचार इजीनियरी में द्वितीय श्रेणी की डिग्री । खुरदरे मिलिटरी उपस्कर के अभिकल्पन तथा उसके पैकिंग का लगभग दो वर्ष का अनुभव । ग्यारह. एक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, प्रेड II, रक्षा खाद्य अनुसंधान प्रयोगशाला, रक्षा मंत्रालय । वेतन :--शून्य रुपया चार सौ-चारपचानवे पचास आठ सौशून्य। आयु - वरीयतः तीस वर्ष से कम । योग्यताएं : अनिवार्य - किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में द्वितीय श्रेणी की एमशून्य एस सीशून्य या द्वितीय श्रेणी की बीशून्य टेकशून्य अथवा समकक्ष योग्यता । अनुसंधान तथा विकास का दो वर्ष का अनुभव । बारह. एक सहायक प्रबंधक , रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय वेतन :-शून्य रुपया रोशून्य पैंतीस नौ सौ पचास । आयु :पैंतीस वर्ष या उससे कम । योग्यताएं : अनिवार्य किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से रसायनविज्ञान की किसी शाखा में "मास्टर" डिग्री अथवा खाद्य प्रौद्योगिकी या रसायन इंजीनियरी या पशुरोगविज्ञान में डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । किसी प्रतिष्ठित खाद्य निर्जलीकरण कारखाने मे दो वर्ष का अनुभव । तेरह. प्राणिविज्ञान का एक रोडर, भारतीय सहकारिता मिशन, नेपाल; विदेश मंत्रालय । वेतम :- शून्य रुपया सातशून्य चालीस एक हज़ार एक सौ तथा साथ में नेपाल में प्राप्य विशेष भत्ते । आयु : पैंतालीस वर्ष या उससे कम । योग्यताएं : अनिवार्य - किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से प्राणिविज्ञान में द्वितीय श्रेणी की "मास्टर डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । अध्यापन का लगभग आठ वर्ष का अनुभव जिसमे से कम से कम तीन वर्ष का अनुभव स्नातकोत्तर स्तर का हो । उम्मीदवार ने कीटविज्ञान में विशेषज्ञता प्राप्त की हो । चौदह. वो कनिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, मनोविज्ञान अनुसंधाम निवेशालय, बिल्ली; रक्षा मंत्रालय । वेतन :--तीन सौ पचास रुपया-पच्चीसरोशून्य- तीस-आठ सौ-साठ रोशून्य तीस आठ सौ तीस-पैंतीस हज़ार नौ सौ । आयु : -- वरीयतः तीस वर्ष से कम । योग्यताएं : अभिवार्य :- किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में द्वितीय श्रेणी की "मास्टर" डिग्री अथवा समकक्ष योग्यता । पंद्रह. एक प्रिंसिपल, राजकीय संगीत महाविद्यालय, अगरतला, त्रिपुरा सरकार । वेतनः: - रुपचानवे पचास पाँच सौशून्य-साठ रोशून्य- पचास-दस हज़ार एक आयु : - चालीस वर्ष या उससे कम । योग्यताएं : अनिवार्य :--
राष्ट्रीय शासन जापान का शासन है; और चूँकि इन संयुक्त शक्तियों का नेतृत्व है अभी बड़े-बड़े निहित स्वार्थी के प्रतिनिधियों के हाथ में, श्रुतः जापान के राजनीतिक इतिहास के लेखकों को यदि यह प्रतीत होता है कि भविष्य में जापान की राजनीति पूरी तरह सामन्तप्रथा की प्राचीन और परम्परागत धारा मे बह चलेगी तो आर्य हो क्या है ? किन्तु ऐतिहासिक प्रक्रियाओं के फलस्वरूप सारे संसार में फैलती हुई जागरूक श्रेणी भावना का जिन्होंने स सोलकर अध्ययन किया है उनके लिए यह समझ सकना प्रत्यन्त सहल है कि उक्त कृपक नैनिक-संयोग में प्राचीन सामन्तव्यवस्था लाने के स्थान पर सच्चे जनतंत्र को स्थापित कर सकने का साधन बनने के कहीं अधिक उपकरण वर्तमान है क्योंकि हमें भूलना नहीं होगा कि सैनिक भी अधिकांश किसानों ही के बच्चे हैं। वे सामन्त सरदारो के लाल नहीं हैं जिनकी बलि चीन की रणभूमि में दी जा रही है । यद्यपि यह सत्य है कि पूँजीपाडी सभ्यता 'पौर शासन के गर्भ में पलनेवाली सामाजिक वियना की नेतृत्य न पाकर किसी न किसी प्रकार के सैनिक को दो तंत्र जन्म देती हैं और हर यह कहना नहीं भी हो सकता है कि उक्त संगंग सामन्तसाठी के पोन में एक नये मैनिक उ यो जन्म देगा। इस यात की संभावना स्वीकार करने से पंधियों के लेखक की कोई व्यापत्ति नहीं है, किन्तु मान्ति भी वहीं में जन्म लेनी है ज से सेनान से भी मनी है, जिनसे अधिनाय । for fनराशा पानशेष बारा ऐसीयस्था में जम निवा राष्ट्रीय वित्त "चीनी मामले" (Unite. ME) के गया है।
राष्ट्रीय शासन जापान का शासन है; और चूँकि इन संयुक्त शक्तियों का नेतृत्व है अभी बड़े-बड़े निहित स्वार्थी के प्रतिनिधियों के हाथ में, श्रुतः जापान के राजनीतिक इतिहास के लेखकों को यदि यह प्रतीत होता है कि भविष्य में जापान की राजनीति पूरी तरह सामन्तप्रथा की प्राचीन और परम्परागत धारा मे बह चलेगी तो आर्य हो क्या है ? किन्तु ऐतिहासिक प्रक्रियाओं के फलस्वरूप सारे संसार में फैलती हुई जागरूक श्रेणी भावना का जिन्होंने स सोलकर अध्ययन किया है उनके लिए यह समझ सकना प्रत्यन्त सहल है कि उक्त कृपक नैनिक-संयोग में प्राचीन सामन्तव्यवस्था लाने के स्थान पर सच्चे जनतंत्र को स्थापित कर सकने का साधन बनने के कहीं अधिक उपकरण वर्तमान है क्योंकि हमें भूलना नहीं होगा कि सैनिक भी अधिकांश किसानों ही के बच्चे हैं। वे सामन्त सरदारो के लाल नहीं हैं जिनकी बलि चीन की रणभूमि में दी जा रही है । यद्यपि यह सत्य है कि पूँजीपाडी सभ्यता 'पौर शासन के गर्भ में पलनेवाली सामाजिक वियना की नेतृत्य न पाकर किसी न किसी प्रकार के सैनिक को दो तंत्र जन्म देती हैं और हर यह कहना नहीं भी हो सकता है कि उक्त संगंग सामन्तसाठी के पोन में एक नये मैनिक उ यो जन्म देगा। इस यात की संभावना स्वीकार करने से पंधियों के लेखक की कोई व्यापत्ति नहीं है, किन्तु मान्ति भी वहीं में जन्म लेनी है ज से सेनान से भी मनी है, जिनसे अधिनाय । for fनराशा पानशेष बारा ऐसीयस्था में जम निवा राष्ट्रीय वित्त "चीनी मामले" के गया है।
1 . नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ ऑक्यूपेशनल हेल्थ में निकली भर्ती। योग्यता : 10TH, स्नातक, पीजी, BDS, B. Sc, MBBS आदि। पदों की संख्या : कुल 9 पद। नौकरी करने का स्थान : अहमदाबाद। 2 . इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गांधीनगर में कई पदों पर भर्ती। योग्यता : Bachelors Degree, Diploma, ITI, Masters Degree आदि। पदों की संख्या : कुल 7 पद। नौकरी करने का स्थान : गांधीनगर। 3 . सूरत म्युनिसिपल कारपोरेशन में कई पदों पर भर्तियां। योग्यता : पदों के अनुसार। पदों की संख्या : कुल 24 पद। नौकरी करने का स्थान : सूरत। चयन प्रक्रिय : इंटरव्यू के द्वारा।
एक . नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ ऑक्यूपेशनल हेल्थ में निकली भर्ती। योग्यता : दसTH, स्नातक, पीजी, BDS, B. Sc, MBBS आदि। पदों की संख्या : कुल नौ पद। नौकरी करने का स्थान : अहमदाबाद। दो . इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गांधीनगर में कई पदों पर भर्ती। योग्यता : Bachelors Degree, Diploma, ITI, Masters Degree आदि। पदों की संख्या : कुल सात पद। नौकरी करने का स्थान : गांधीनगर। तीन . सूरत म्युनिसिपल कारपोरेशन में कई पदों पर भर्तियां। योग्यता : पदों के अनुसार। पदों की संख्या : कुल चौबीस पद। नौकरी करने का स्थान : सूरत। चयन प्रक्रिय : इंटरव्यू के द्वारा।
- Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate? - Automobiles एलन मस्कः इस साल आ सकती है टेस्ला की सेल्फ-ड्राइविंग कारें - क्या हो पायेगा मुमकिन? - Movies ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स! अगर आप रोज-रोज अपनी मछली को वही पुराना फिश फूड खिला कर थक चुके हैं, तो समय आ गया है कि उनका भोजन बदल दिया जाए। इससे आहार में थोड़ा सा बदलाव आ जाएगा और मछलियों का भी दिल खुश हो जाएगा। चलिए जानते हैं कि मछली को मार्केट में उपलब्ध फिश फूड के अलावा और क्या-क्या खिलाया जा सकता है, जो उनकी सेहत के लिए अच्छे साबित हो सकें। 1. केंचुआ- अपनी मछलियों को केंचुए खिला कर आप मछली की गोलियों से मुक्ती पा सकते हैं। मछलियों को केंचुए खाना बहुत पसंद होता है। इसके अलावा यह पेट भरने वाला भी होता है। अगर आप खुद बाजार जा कर इन्हें नहीं ला सकते, तो इन्हें अपने बगीचे में ही पैदा कर लें। 2. सब्जियों के पत्ते- यह पत्ते मछलियों दा्रा पसंद किये जाते हैं। आपको करना बस इतना है कि इन पत्तों को छोट-छोटा काट लें और मछली के टैंक में डाल दें। कुछ मछलियों को इससे एलर्जी होती है इसलिए इसका ध्यान रखें कि कहीं उसे पत्ते खा कर आलस तो नहीं आ रहा है। इसको टैंक में दो घंटे से ज्यादा न पड़ा रहने दें वरना मानी खराब हो जाता है। 3. उबले चावल- मछलियां उबले तथा फ्रिज में जमें हुए दोनों प्रकार के चावलों को खूब पसंद करती हैं। यही नहीं आपको तो यह जान कर भी आशचर्य होगा कि उन्हें पास्ता तक अच्छा लगता है। इसलिए अगली बार अगर आप पास्ता या चावल पका रहे हों, तो कुछ दाने मछली के टैंक में डालना बिल्कुल मत भूलियेगा। 4. मटर- मटर मछलियों के लिए एक स्वास्थ्यवर्धक आहार है। खासतौर पर उन्हें उबली हुई मटर बहुत पसंद है। लेकिन आप चाहें तो उन्हें फ्रिज में जमी हुई मटर भी दे सकते हैं। 5. फिश फिलेट्स- कमाल की बात यह है कि मछलियां खुद ही अपने मांस की दीवानी होती हैं। इसलिए उन्हें अगर मांस का टुकड़ा खिलाएं तो उसे फ्रिज में थोड़ा जमा लें।
- Travel क्या है पानीपुरी का इतिहास और क्यों सर्च इंजन गूगल कर रहा है इसे Celebrate? - Automobiles एलन मस्कः इस साल आ सकती है टेस्ला की सेल्फ-ड्राइविंग कारें - क्या हो पायेगा मुमकिन? - Movies ब्रालेस ड्रेस पहनकर असहज हुईं जन्नत जुबैर? मीडिया के सामने ही करतीं बार बार फिक्स! अगर आप रोज-रोज अपनी मछली को वही पुराना फिश फूड खिला कर थक चुके हैं, तो समय आ गया है कि उनका भोजन बदल दिया जाए। इससे आहार में थोड़ा सा बदलाव आ जाएगा और मछलियों का भी दिल खुश हो जाएगा। चलिए जानते हैं कि मछली को मार्केट में उपलब्ध फिश फूड के अलावा और क्या-क्या खिलाया जा सकता है, जो उनकी सेहत के लिए अच्छे साबित हो सकें। एक. केंचुआ- अपनी मछलियों को केंचुए खिला कर आप मछली की गोलियों से मुक्ती पा सकते हैं। मछलियों को केंचुए खाना बहुत पसंद होता है। इसके अलावा यह पेट भरने वाला भी होता है। अगर आप खुद बाजार जा कर इन्हें नहीं ला सकते, तो इन्हें अपने बगीचे में ही पैदा कर लें। दो. सब्जियों के पत्ते- यह पत्ते मछलियों दा्रा पसंद किये जाते हैं। आपको करना बस इतना है कि इन पत्तों को छोट-छोटा काट लें और मछली के टैंक में डाल दें। कुछ मछलियों को इससे एलर्जी होती है इसलिए इसका ध्यान रखें कि कहीं उसे पत्ते खा कर आलस तो नहीं आ रहा है। इसको टैंक में दो घंटे से ज्यादा न पड़ा रहने दें वरना मानी खराब हो जाता है। तीन. उबले चावल- मछलियां उबले तथा फ्रिज में जमें हुए दोनों प्रकार के चावलों को खूब पसंद करती हैं। यही नहीं आपको तो यह जान कर भी आशचर्य होगा कि उन्हें पास्ता तक अच्छा लगता है। इसलिए अगली बार अगर आप पास्ता या चावल पका रहे हों, तो कुछ दाने मछली के टैंक में डालना बिल्कुल मत भूलियेगा। चार. मटर- मटर मछलियों के लिए एक स्वास्थ्यवर्धक आहार है। खासतौर पर उन्हें उबली हुई मटर बहुत पसंद है। लेकिन आप चाहें तो उन्हें फ्रिज में जमी हुई मटर भी दे सकते हैं। पाँच. फिश फिलेट्स- कमाल की बात यह है कि मछलियां खुद ही अपने मांस की दीवानी होती हैं। इसलिए उन्हें अगर मांस का टुकड़ा खिलाएं तो उसे फ्रिज में थोड़ा जमा लें।
IYOF 2023: वर्ष 2023 संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित अन्तर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. वर्ष भर चलने वाले विभिन्न सरकारी, गैर सरकारी आयोजन में मोटे अनाज की खेती का प्रचार प्रसार किया जाएगा. हालांकि भारत में प्राचीन काल में मोटे अनाजों के खाद्य रूप में मान्यता रही है, लेकिन अब यह अनियंत्रित मौसम बदलाव के दौरान विभिन्न मौसमी परिस्थितियों में सुपरफूड का कार्य करेगा. अपेक्षाकृत मिलेट्स जैसे कंगनी, कुटकी, कोदो, चेना, रागी, झंगोरा, बैरी, ज्वार, बाजरा में कम से कम देखभाल की आवश्यकता होती है. आजकल बाजार में विभिन्न तरह के सप्लीमेंट के रूप में दवाएं, पाउडर उपलब्ध हैं, जिसे चिकित्सीय सलाह के अनुरूप सेवन करना चाहिए, यद्यपि ये ग्रामीण परिवार के निम्न और मध्यवर्गीय परिवार के लिये पहुंच से अभी भी दूर है. अतः मोटे अनाज विकल्प के तौर खुद स्वयं खेती करने, उपभोग और बिक्री के लिये तैयार है. मिलेट्स की खेती हेतु प्रोत्साहन के लिए सरकार समर्थित विभिन्न योजनाएं संचालित है. बाजरा प्रोटीन, फाइबर, खनिज, आयरन, कैल्शियम का एक समृद्ध स्रोत है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम है. भारत बाजरा का एक प्रमुख उत्पादक है, जो एशिया के उत्पादन का 80% और वैश्विक उत्पादन का 20% है. भारत की बाजरा की औसत उपज 1239 किग्रा/हेक्टेयर जो कि वैश्विक औसत उपज 1229 किग्रा/हेक्टेयर से भी अधिक है. भारत में उगाई जाने वाली प्रमुख बाजरा फसलें और उनके उत्पादन का प्रतिशत हिस्सा पर्ल बाजरा (बाजरा)-61% हिस्सा, ज्वार (सोरघम)-27%, और फिंगर बाजरा (मंडुआ/रागी)-10% हैं.
IYOF दो हज़ार तेईस: वर्ष दो हज़ार तेईस संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित अन्तर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. वर्ष भर चलने वाले विभिन्न सरकारी, गैर सरकारी आयोजन में मोटे अनाज की खेती का प्रचार प्रसार किया जाएगा. हालांकि भारत में प्राचीन काल में मोटे अनाजों के खाद्य रूप में मान्यता रही है, लेकिन अब यह अनियंत्रित मौसम बदलाव के दौरान विभिन्न मौसमी परिस्थितियों में सुपरफूड का कार्य करेगा. अपेक्षाकृत मिलेट्स जैसे कंगनी, कुटकी, कोदो, चेना, रागी, झंगोरा, बैरी, ज्वार, बाजरा में कम से कम देखभाल की आवश्यकता होती है. आजकल बाजार में विभिन्न तरह के सप्लीमेंट के रूप में दवाएं, पाउडर उपलब्ध हैं, जिसे चिकित्सीय सलाह के अनुरूप सेवन करना चाहिए, यद्यपि ये ग्रामीण परिवार के निम्न और मध्यवर्गीय परिवार के लिये पहुंच से अभी भी दूर है. अतः मोटे अनाज विकल्प के तौर खुद स्वयं खेती करने, उपभोग और बिक्री के लिये तैयार है. मिलेट्स की खेती हेतु प्रोत्साहन के लिए सरकार समर्थित विभिन्न योजनाएं संचालित है. बाजरा प्रोटीन, फाइबर, खनिज, आयरन, कैल्शियम का एक समृद्ध स्रोत है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम है. भारत बाजरा का एक प्रमुख उत्पादक है, जो एशिया के उत्पादन का अस्सी% और वैश्विक उत्पादन का बीस% है. भारत की बाजरा की औसत उपज एक हज़ार दो सौ उनतालीस किग्रा/हेक्टेयर जो कि वैश्विक औसत उपज एक हज़ार दो सौ उनतीस किग्रा/हेक्टेयर से भी अधिक है. भारत में उगाई जाने वाली प्रमुख बाजरा फसलें और उनके उत्पादन का प्रतिशत हिस्सा पर्ल बाजरा -इकसठ% हिस्सा, ज्वार -सत्ताईस%, और फिंगर बाजरा -दस% हैं.
मिथिला हिन्दी न्यूज :-मधुबनी नरसंहार मामले में आक्रोशित श्री राजपूत करणी सेना ने आज पटना में जदयू विधान पार्षद सह श्री राजपूत करणी सेना के संरक्षक रणविजय कुमार सिंह के सरकारी आवास से मधुबनी के लिए आक्रोश यात्रा निकाला, जिसका नेतृत्व श्री राजपूत करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी, राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना और बिहार प्रदेश अध्यक्ष बी के सिंह ने किया। इस दौरान उनके साथ बिहार समेत अन्य कई प्रदेशों के श्री राजपूत करणी सेना के सैकड़ो पदाधिकारी मौजूद रहे। सबों ने एक स्वर में मधुबनी की घटना की निंदा की और कहा कि क्षत्रियों के साथ ऐसे जघन्यता बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। आक्रोश यात्रा से पूर्व प्रेस वार्ता में श्री राजपूत करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी, राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना और बिहार प्रदेश अध्यक्ष बी के सिंह ने संयुक्त रूप से कहा कि मधुबनी की घटना से पूरे राष्ट्र के क्षत्रिय दुखी हैं। इसलिए आज यह आक्रोश यात्रा पटना से मधुबनी तक निकाला जा रहा है। इस यात्रा में देश भर से आये श्री राजपूत करणी सेना के पदाधिकारी समेत क्षत्रिय समाज के हजारों लोग शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम मधुबनी जाकर सर्वप्रथम नरसंहार पीड़ितों से मुलाकात करेंगे और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करेंगे। साथ इस तरह की घटनाओं को कैसे रोका जाए, उस पर विचार विमर्श करेंगे। खासकर क्षत्रिय समाज पर हो रहे इस तरह के हमले बर्दाश्त करने लायक नहीं हैं। हम ऐसे कैसे रोके इस पर चर्चा करेंगे। उन्होंने इस नरसंहार मामले में सरकार और प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े किए और कहा कि पहले तो शासन और प्रशासन के द्वारा कुछ किया नहीं गया, उल्टे जिनके घरों में इतना बड़ा नरसंहार हुआ, उसकी लाइसेंसी हथियार भी पुलिस ने जब्त कर रखी है। उन्होंने कहा कि श्री राजपूत करणी सेना मधुबनी घटना की कड़ी निंदा करती है और इस हृदयविदारक घटना में अनाथ हुए बच्चे बच्चियों की शिक्षा -दीक्षा, उनके विवाह समेत अन्य आवश्यक चीजों के लिए इन परिवार के साथ श्री राजपूत करणी सेना पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी। साथ ही हम सरकार से मांग करते हैं कि वे इस घटना के पीड़ितों के परिवार से एक - एक आदमी को नौकरी दे या फिर कम से कम 1 करोड़ का मुआवजा दे। ताकि इनका जीवन यापन हो सके। इसके अलावा पकड़े गए हत्यारों का स्पीडी ट्रायल कर उन्हें फांसी पर लटकाया जाए।
मिथिला हिन्दी न्यूज :-मधुबनी नरसंहार मामले में आक्रोशित श्री राजपूत करणी सेना ने आज पटना में जदयू विधान पार्षद सह श्री राजपूत करणी सेना के संरक्षक रणविजय कुमार सिंह के सरकारी आवास से मधुबनी के लिए आक्रोश यात्रा निकाला, जिसका नेतृत्व श्री राजपूत करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी, राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना और बिहार प्रदेश अध्यक्ष बी के सिंह ने किया। इस दौरान उनके साथ बिहार समेत अन्य कई प्रदेशों के श्री राजपूत करणी सेना के सैकड़ो पदाधिकारी मौजूद रहे। सबों ने एक स्वर में मधुबनी की घटना की निंदा की और कहा कि क्षत्रियों के साथ ऐसे जघन्यता बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। आक्रोश यात्रा से पूर्व प्रेस वार्ता में श्री राजपूत करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी, राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना और बिहार प्रदेश अध्यक्ष बी के सिंह ने संयुक्त रूप से कहा कि मधुबनी की घटना से पूरे राष्ट्र के क्षत्रिय दुखी हैं। इसलिए आज यह आक्रोश यात्रा पटना से मधुबनी तक निकाला जा रहा है। इस यात्रा में देश भर से आये श्री राजपूत करणी सेना के पदाधिकारी समेत क्षत्रिय समाज के हजारों लोग शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम मधुबनी जाकर सर्वप्रथम नरसंहार पीड़ितों से मुलाकात करेंगे और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करेंगे। साथ इस तरह की घटनाओं को कैसे रोका जाए, उस पर विचार विमर्श करेंगे। खासकर क्षत्रिय समाज पर हो रहे इस तरह के हमले बर्दाश्त करने लायक नहीं हैं। हम ऐसे कैसे रोके इस पर चर्चा करेंगे। उन्होंने इस नरसंहार मामले में सरकार और प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े किए और कहा कि पहले तो शासन और प्रशासन के द्वारा कुछ किया नहीं गया, उल्टे जिनके घरों में इतना बड़ा नरसंहार हुआ, उसकी लाइसेंसी हथियार भी पुलिस ने जब्त कर रखी है। उन्होंने कहा कि श्री राजपूत करणी सेना मधुबनी घटना की कड़ी निंदा करती है और इस हृदयविदारक घटना में अनाथ हुए बच्चे बच्चियों की शिक्षा -दीक्षा, उनके विवाह समेत अन्य आवश्यक चीजों के लिए इन परिवार के साथ श्री राजपूत करणी सेना पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी। साथ ही हम सरकार से मांग करते हैं कि वे इस घटना के पीड़ितों के परिवार से एक - एक आदमी को नौकरी दे या फिर कम से कम एक करोड़ का मुआवजा दे। ताकि इनका जीवन यापन हो सके। इसके अलावा पकड़े गए हत्यारों का स्पीडी ट्रायल कर उन्हें फांसी पर लटकाया जाए।
जब यूनस इस प्रकार उस नगर में भविष्यवाणी का डका बजाचुका तो उस किस्से में लिखा है कि इस पुरुष ने उस नगर के पूरत्र ओर कहीं जाके डेरा किया, क्यों? क्या अपने आश्चर्यमय बचाव पर एकान्त में जाकर ईश्वर का ध न्यवाद करने के लिये ' नहीं, नहीं वहतो वहा बैठ कर अत्त्यन्त उत्कंठा के साथ यह आसरा देख रहा था कि, कव ईश्वर उस नगर को नाश करता है । अस्तु तदुपरान्त लिखा है कि नीनवानिवासीयों ने पश्चात्ताप कर के अपनी चाल सुधारली सो इश्वर ने बाइविल के लेखानुसार इस बात का, अत्यन्त पश्चांताप किया और जो कुछ दण्ड उसने उन नगरनिवासियों के लिये विचारा था न दिया, तब तो यूनस अत्यंतही अप्रसन्न हो कर परम क्रोधांध हुआ । उसका हठीला हृदय यहीं विचारता था कि नीनवा नगर जड मूल से नाश हो और उस के निवासी युवा वृद्ध स्त्री बाल बच्चे पर्यंत सभी विनष्ट हों जि में उस की भविष्यवाणी व्यर्थ न जाय निम्नलिखित वृतान्त से इस भविष्यवक्ता का और भी द्वेष प्रगट होता है। बाइविल में लिखा है कि उसी रात ईश्वर ने उसके डेरे के पास एक वृक्ष ऊगाया जिससे यूनस को सूर्य की तीव्र किरणों से रक्षा प्राप्त हुई परन्तु उस के दूसरे ही दिन वह सूख गया। तब तो इस भविष्यवक्ता के क्रोध की सीमा न रही, यहा लों कि वह आत्महत्त्या करने पर प्रस्तुत हुआ और यह बोला कि "इस जीने से तो मरना भला है" । तब एक प्रकार का वादविवाद ईश्वर और इस भविष्यवक्ता में हुआ ।'ईश्वर ने कहा "क्या इस वृक्ष के लिये तेरा क्रोध करना उचित है और यूनस ने कहा "कि हां मेरा तो मरना भी उचित है" तव ईश्वर ने कहा तुझे इस वृक्ष पर जिस्के लिये तूने कुछ भी परिश्रम न किया और न उगाया तुझे दया हुई यह एकही रात में ऊगा और एक ही रात में सूख गया, तो क्या मै इस वृहत् नीनवे के नगर को जिस में साठ हजार ऐसे निवासियों से अधिक है जो अपने दहने और बायें हाथ तक नहीं जानते नाश कर डालूँ, इस किस्से में कटाक्ष और शिक्षा दोनो है । कटाक्षरूपेण तो यह वात वाइबिल के समग्र भविष्यवक्ता ओं के चाल चलन तथा इस सत्त्य पुस्तक के उन समग्र आज्ञाओं पर जिन से स्त्री पुरुप लड़के वाले मारे गये आक्षेप है जिनसे बाइबिल की समग्र पुस्तकै भरी है जैसे नूह का प्रलय, सदूम और गमूस नगरों का नाश, कनानियों का उत्पाटन तथा दूधपीने बच्चों और गर्भिणी स्त्रीयोंकी हत्त्या इत्यादि - - - क्योंकि जब ईश्वर एक वेर यह कहता है कि जहां साठ हजार से भी अधिक ऐसे. निवासी है कि दहने और वाएं हाथ को नहीं पहचान सकते (अर्थात् बच्चे) उन्हें मैं कैसे नाश करूं, तो यह कसे सम्भव हो सकता है कि बाइबिल की लिखीं हुई वे सव हत्त्यायें जिन्हें हम पहले कह चुके है ईश्वर की आज्ञा से हुई हों; क्योंकि ऐसा करने से तो ईश्वर का किसी जाति विशेष पर पक्षपात झलकेगा । शिक्षा इस में इस प्रकार निकलती है कि ज्यों २ मनुष्य बुराई की भविष्यवाणी करता है त्यों २ वह लोगों की बुराई अधिक चाहता है वह अपनी भविष्यवाणी की यथार्थता के घमंड में अपना दिल पत्थर सा कर लेता है और अत्यन्त सन्तोष वा अप्रसन्नता के साथ अपनी भविष्यवाणी की सत्त्यता वा असत्त्यता की राह देखता है इत्यादि सो यह पुस्तक भी भविष्यवक्ताओं पर आक्षेप के साथ समाप्त होती है इतना तो यूनस के पुस्तक का वर्णन हो चुका ॥ बाइबिल के काव्यवद्ध भाग के लिये जो भविष्यवाणी कहलाती है हम प्रथम भाग में लिख चुके है, तथा हमने इस भाग में भी लिखा है कि बाइबिल में कवि के लिये भविष्यव क्ता शब्द है और इन कवियों की विलणक्ष उपमा और उत्प्रेक्षा इत्यादि को क्रिश्चियन लोगों ने भविष्यवाणी मान ली जो उन लेखक विचारों का स्वप्न में भी विचार न था । ये लोग भिन्न २ आयतों को अपनी इच्छानुसार अर्थ लगा कर अपने श्रोताओं को सुना देते थे और उतने पर भी यही कहते हैं कि हम बाइबिल समझते है ! धन्य इनकी बाइबिल और धन्य इन की बुद्धि ।। अब कुछ वे पुस्तकें परीक्षा करने से रह गई है जो छोटे
जब यूनस इस प्रकार उस नगर में भविष्यवाणी का डका बजाचुका तो उस किस्से में लिखा है कि इस पुरुष ने उस नगर के पूरत्र ओर कहीं जाके डेरा किया, क्यों? क्या अपने आश्चर्यमय बचाव पर एकान्त में जाकर ईश्वर का ध न्यवाद करने के लिये ' नहीं, नहीं वहतो वहा बैठ कर अत्त्यन्त उत्कंठा के साथ यह आसरा देख रहा था कि, कव ईश्वर उस नगर को नाश करता है । अस्तु तदुपरान्त लिखा है कि नीनवानिवासीयों ने पश्चात्ताप कर के अपनी चाल सुधारली सो इश्वर ने बाइविल के लेखानुसार इस बात का, अत्यन्त पश्चांताप किया और जो कुछ दण्ड उसने उन नगरनिवासियों के लिये विचारा था न दिया, तब तो यूनस अत्यंतही अप्रसन्न हो कर परम क्रोधांध हुआ । उसका हठीला हृदय यहीं विचारता था कि नीनवा नगर जड मूल से नाश हो और उस के निवासी युवा वृद्ध स्त्री बाल बच्चे पर्यंत सभी विनष्ट हों जि में उस की भविष्यवाणी व्यर्थ न जाय निम्नलिखित वृतान्त से इस भविष्यवक्ता का और भी द्वेष प्रगट होता है। बाइविल में लिखा है कि उसी रात ईश्वर ने उसके डेरे के पास एक वृक्ष ऊगाया जिससे यूनस को सूर्य की तीव्र किरणों से रक्षा प्राप्त हुई परन्तु उस के दूसरे ही दिन वह सूख गया। तब तो इस भविष्यवक्ता के क्रोध की सीमा न रही, यहा लों कि वह आत्महत्त्या करने पर प्रस्तुत हुआ और यह बोला कि "इस जीने से तो मरना भला है" । तब एक प्रकार का वादविवाद ईश्वर और इस भविष्यवक्ता में हुआ ।'ईश्वर ने कहा "क्या इस वृक्ष के लिये तेरा क्रोध करना उचित है और यूनस ने कहा "कि हां मेरा तो मरना भी उचित है" तव ईश्वर ने कहा तुझे इस वृक्ष पर जिस्के लिये तूने कुछ भी परिश्रम न किया और न उगाया तुझे दया हुई यह एकही रात में ऊगा और एक ही रात में सूख गया, तो क्या मै इस वृहत् नीनवे के नगर को जिस में साठ हजार ऐसे निवासियों से अधिक है जो अपने दहने और बायें हाथ तक नहीं जानते नाश कर डालूँ, इस किस्से में कटाक्ष और शिक्षा दोनो है । कटाक्षरूपेण तो यह वात वाइबिल के समग्र भविष्यवक्ता ओं के चाल चलन तथा इस सत्त्य पुस्तक के उन समग्र आज्ञाओं पर जिन से स्त्री पुरुप लड़के वाले मारे गये आक्षेप है जिनसे बाइबिल की समग्र पुस्तकै भरी है जैसे नूह का प्रलय, सदूम और गमूस नगरों का नाश, कनानियों का उत्पाटन तथा दूधपीने बच्चों और गर्भिणी स्त्रीयोंकी हत्त्या इत्यादि - - - क्योंकि जब ईश्वर एक वेर यह कहता है कि जहां साठ हजार से भी अधिक ऐसे. निवासी है कि दहने और वाएं हाथ को नहीं पहचान सकते उन्हें मैं कैसे नाश करूं, तो यह कसे सम्भव हो सकता है कि बाइबिल की लिखीं हुई वे सव हत्त्यायें जिन्हें हम पहले कह चुके है ईश्वर की आज्ञा से हुई हों; क्योंकि ऐसा करने से तो ईश्वर का किसी जाति विशेष पर पक्षपात झलकेगा । शिक्षा इस में इस प्रकार निकलती है कि ज्यों दो मनुष्य बुराई की भविष्यवाणी करता है त्यों दो वह लोगों की बुराई अधिक चाहता है वह अपनी भविष्यवाणी की यथार्थता के घमंड में अपना दिल पत्थर सा कर लेता है और अत्यन्त सन्तोष वा अप्रसन्नता के साथ अपनी भविष्यवाणी की सत्त्यता वा असत्त्यता की राह देखता है इत्यादि सो यह पुस्तक भी भविष्यवक्ताओं पर आक्षेप के साथ समाप्त होती है इतना तो यूनस के पुस्तक का वर्णन हो चुका ॥ बाइबिल के काव्यवद्ध भाग के लिये जो भविष्यवाणी कहलाती है हम प्रथम भाग में लिख चुके है, तथा हमने इस भाग में भी लिखा है कि बाइबिल में कवि के लिये भविष्यव क्ता शब्द है और इन कवियों की विलणक्ष उपमा और उत्प्रेक्षा इत्यादि को क्रिश्चियन लोगों ने भविष्यवाणी मान ली जो उन लेखक विचारों का स्वप्न में भी विचार न था । ये लोग भिन्न दो आयतों को अपनी इच्छानुसार अर्थ लगा कर अपने श्रोताओं को सुना देते थे और उतने पर भी यही कहते हैं कि हम बाइबिल समझते है ! धन्य इनकी बाइबिल और धन्य इन की बुद्धि ।। अब कुछ वे पुस्तकें परीक्षा करने से रह गई है जो छोटे
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए तीसरे टेस्ट मैच में बैनक्रॉफ्ट को गेंद से छेड़खानी करते हुए कैमरे में कैद किया गया था। बाद में स्मिथ और बैनक्रॉफ्ट ने माना था कि यह टीम की योजना थी। इस बारे में वार्नर को भी पता था। इस घटना के बाद सीए ने मामले की जांच की और बुधवार को इन खिलाड़ियों को सजा सुनाई। एक साल के प्रतिबंध के अलावा सीए ने कहा है कि स्मिथ प्रतिबंध खत्म होने के 12 महीने तक आस्ट्रेलिया में किसी भी टीम की कप्तानी नहीं कर सकेंगे।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए तीसरे टेस्ट मैच में बैनक्रॉफ्ट को गेंद से छेड़खानी करते हुए कैमरे में कैद किया गया था। बाद में स्मिथ और बैनक्रॉफ्ट ने माना था कि यह टीम की योजना थी। इस बारे में वार्नर को भी पता था। इस घटना के बाद सीए ने मामले की जांच की और बुधवार को इन खिलाड़ियों को सजा सुनाई। एक साल के प्रतिबंध के अलावा सीए ने कहा है कि स्मिथ प्रतिबंध खत्म होने के बारह महीने तक आस्ट्रेलिया में किसी भी टीम की कप्तानी नहीं कर सकेंगे।
अनुसंधान के आणविक जैविक तरीकोंआधुनिक चिकित्सा, अपराधीकरण और जीव विज्ञान में एक बड़ी भूमिका निभाएं डीएनए और आरएनए अध्ययन के क्षेत्र में प्रगति के लिए धन्यवाद, एक व्यक्ति जीव के जीनोम का अध्ययन कर सकता है, रोग के प्रेरक एजेंट की पहचान करता है, एसिड के मिश्रण में वांछित न्यूक्लिक एसिड को पहचानता है। जहां तक 1 9 70 और 1 9 80 के दशक तक, वैज्ञानिकों नेमानव जीनोम को समझना इस घटना ने आनुवंशिक इंजीनियरिंग और आणविक जीव विज्ञान के विकास को प्रोत्साहन दिया। डीएनए और आरएनए के गुणों के अध्ययन ने इस तथ्य को आगे बढ़ाया है कि अब जीन का अध्ययन करने के लिए, रोग का पता लगाने के लिए अब इन न्यूक्लिक एसिड का उपयोग करना संभव है। निदान के आणविक जैविक तरीकोंप्रारंभिक सामग्री की उपस्थिति की आवश्यकता होती हैः अधिकतर यह न्यूक्लिक एसिड होता है। जीवित जीवों की कोशिकाओं से इन पदार्थों को अलग करने के कई तरीके हैं। उनमें से प्रत्येक के अपने फायदे और नुकसान हैं, और शुद्ध रूप में न्यूक्लिक एसिड के अलगाव की विधि चुनते समय इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए। 2. बूम द्वारा डीएनए अलगाव। यहां इस्तेमाल किया जाने वाला मूल पदार्थ गुआनिडाइन थिओसाइनेट (जीयूएससीएन) है। यह विशेष सब्सट्रेट्स पर डीओक्सीब्रोनक्लिक एसिड के बयान को बढ़ावा देता है, जिसके बाद इसे एक विशेष बफर के साथ एकत्र किया जा सकता है। हालांकि, जीएससीएन पीटीसी का अवरोधक है, और इसका एक छोटा सा हिस्सा, डीआईएन में फैल गया, यह पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन के दौरान प्रभावित हो सकता है, जो न्यूक्लिक एसिड के साथ काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 3. अशुद्धियों की वर्षा यह विधि पिछले लोगों से भिन्न है क्योंकि डीओक्सीरिबोन्यूक्लिक एसिड के अणुओं को तेज़ी से नहीं किया जाता है, लेकिन अशुद्धियों। ऐसा करने के लिए आयन एक्सचेंजर्स का उपयोग करें। यह नुकसान यह है कि सभी पदार्थों में वेग नहीं हो सकता है। 4. मास स्क्रीनिंग इस विधि मामलों में इस्तेमाल किया जब तुम डीएनए अणु की संरचना, और कुछ आँकड़े प्राप्त करने की आवश्यकता के बारे में सटीक जानकारी की आवश्यकता नहीं है। कारण यह है कि न्यूक्लिक एसिड संरचना जब डिटर्जेंट, विशेष रूप से Alkalies निपटने क्षतिग्रस्त किया जा सकता है। अनुसंधान के सभी आणविक जैविक तरीकों को तीन बड़े समूहों में बांटा गया हैः 1. प्रवर्धन (एंजाइमों की एक किस्म का उपयोग करते हुए) इसमें पीसीआर - पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन शामिल है, जो निदान के कई तरीकों में बड़ी भूमिका निभाता है। 2. गैर-पदोन्नति। विधियों का यह समूह सीधे न्यूक्लिक एसिड के मिश्रण के संचालन से संबंधित है। उदाहरण 3 प्रकार के ब्लोटिंग हैं, स्वस्थानी संकरण में, आदि। 3. किसी विशिष्ट डीएनए या आरएनए जांच से जुड़े एक जांच अणु से एक संकेत की पहचान के आधार पर तरीके। एक हाइब्रिड कैप्चर सिस्टम समाधान (एचसी 2) में एक हाइब्रिडेशन सिस्टम है। आणविक निदान के कई तरीकों में एंजाइमों की एक विस्तृत श्रृंखला का उपयोग शामिल है। नीचे सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता हैः 1. प्रतिबंधित - आवश्यक हिस्सों में डीएनए अणु में "कटौती" 2. डीएनए पोलीमरेज़ - डीओक्सीरिबोन्यूक्लिक एसिड के एक डबल-फंसे अणु का संश्लेषण करता है। 3. रिवर्स ट्रांस्क्रिप्टेज़ (रिवर्सेट) - आरएनए मैट्रिक्स पर डीएनए को संश्लेषित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 4. डीएनए ligase - nucleotides के बीच phosphodiester बांड के गठन के लिए जिम्मेदार। 5. Exonuclease - deoxyribonucleic एसिड के अणु के अंत अनुभागों से न्यूक्लियोटाइड्स को हटा देता है। पोलीमरेज़ श्रृंखला प्रतिक्रिया (पीसीआर) सक्रिय हैआधुनिक आणविक जीव विज्ञान में प्रयोग किया जाता है यह एक ऐसी विधि है जिसमें एक बड़ी संख्या में प्रतियां एक डीएनए अणु (अणुओं को बढ़ाना) से प्राप्त की जा सकती हैं। पीसीआर के मुख्य कार्य हैंः - रोगों के निदान; पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन को पूरा करने के लिएप्रारंभिक डीएनए अणु, एक थर्मास्टाइबल डीएनए पोलीमरेज़ (Taq या Pfu), deoxyribonucleotide फॉस्फेट (नाइट्रोजन अड्डों के स्रोतों), प्राइमर (प्राइमर 2 1 डीएनए अणु) और बफर सिस्टम में ही है, जो बाहर सभी प्रतिक्रियाओं ले सकते हैंः निम्नलिखित तत्वों की आवश्यकता है। पीसीआर में तीन चरणों होते हैंः विकृति, प्राइमरों और बढ़ाव के एनेलिंग। 1. निषेध 94-95 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर, दो डीएनए किस्में के बीच हाइड्रोजन बंधन को तोड़ना जारी है, और इसके परिणामस्वरूप हमें दो एकल-श्रृंखला अणु मिलते हैं। 2. प्राइमरों के एनेलिंग 50-60 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर, प्राइमरों पुष्टिकता के प्रकार द्वारा एकल-फंसे हुए न्यूक्लिक अम्ल अणुओं के सिरों से जुड़े होते हैं। 3. बढ़ाव 72 डिग्री के तापमान पर, डैक्सीरिबोन्यूक्लिक एसिड की बेटी डबल फंक्ड अणुओं का संश्लेषण होता है। अनुसंधान के आणविक जैविक तरीकोंअक्सर डीओक्सीरिबोन्यूक्लिक एसिड के अणु में न्यूक्लियोटाइड के अनुक्रम के ज्ञान की आवश्यकता होती है। आनुवंशिक कोड को निर्धारित करने के लिए अनुक्रमण का उपयोग किया जाता है भविष्य के आणविक निदान एक व्यक्ति के अनुक्रम का निर्धारण करने के लिए प्राप्त ज्ञान पर आधारित होगा। निम्नलिखित प्रकार के अनुक्रमण अलग-अलग हैंः
अनुसंधान के आणविक जैविक तरीकोंआधुनिक चिकित्सा, अपराधीकरण और जीव विज्ञान में एक बड़ी भूमिका निभाएं डीएनए और आरएनए अध्ययन के क्षेत्र में प्रगति के लिए धन्यवाद, एक व्यक्ति जीव के जीनोम का अध्ययन कर सकता है, रोग के प्रेरक एजेंट की पहचान करता है, एसिड के मिश्रण में वांछित न्यूक्लिक एसिड को पहचानता है। जहां तक एक नौ सत्तर और एक नौ अस्सी के दशक तक, वैज्ञानिकों नेमानव जीनोम को समझना इस घटना ने आनुवंशिक इंजीनियरिंग और आणविक जीव विज्ञान के विकास को प्रोत्साहन दिया। डीएनए और आरएनए के गुणों के अध्ययन ने इस तथ्य को आगे बढ़ाया है कि अब जीन का अध्ययन करने के लिए, रोग का पता लगाने के लिए अब इन न्यूक्लिक एसिड का उपयोग करना संभव है। निदान के आणविक जैविक तरीकोंप्रारंभिक सामग्री की उपस्थिति की आवश्यकता होती हैः अधिकतर यह न्यूक्लिक एसिड होता है। जीवित जीवों की कोशिकाओं से इन पदार्थों को अलग करने के कई तरीके हैं। उनमें से प्रत्येक के अपने फायदे और नुकसान हैं, और शुद्ध रूप में न्यूक्लिक एसिड के अलगाव की विधि चुनते समय इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए। दो. बूम द्वारा डीएनए अलगाव। यहां इस्तेमाल किया जाने वाला मूल पदार्थ गुआनिडाइन थिओसाइनेट है। यह विशेष सब्सट्रेट्स पर डीओक्सीब्रोनक्लिक एसिड के बयान को बढ़ावा देता है, जिसके बाद इसे एक विशेष बफर के साथ एकत्र किया जा सकता है। हालांकि, जीएससीएन पीटीसी का अवरोधक है, और इसका एक छोटा सा हिस्सा, डीआईएन में फैल गया, यह पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन के दौरान प्रभावित हो सकता है, जो न्यूक्लिक एसिड के साथ काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तीन. अशुद्धियों की वर्षा यह विधि पिछले लोगों से भिन्न है क्योंकि डीओक्सीरिबोन्यूक्लिक एसिड के अणुओं को तेज़ी से नहीं किया जाता है, लेकिन अशुद्धियों। ऐसा करने के लिए आयन एक्सचेंजर्स का उपयोग करें। यह नुकसान यह है कि सभी पदार्थों में वेग नहीं हो सकता है। चार. मास स्क्रीनिंग इस विधि मामलों में इस्तेमाल किया जब तुम डीएनए अणु की संरचना, और कुछ आँकड़े प्राप्त करने की आवश्यकता के बारे में सटीक जानकारी की आवश्यकता नहीं है। कारण यह है कि न्यूक्लिक एसिड संरचना जब डिटर्जेंट, विशेष रूप से Alkalies निपटने क्षतिग्रस्त किया जा सकता है। अनुसंधान के सभी आणविक जैविक तरीकों को तीन बड़े समूहों में बांटा गया हैः एक. प्रवर्धन इसमें पीसीआर - पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन शामिल है, जो निदान के कई तरीकों में बड़ी भूमिका निभाता है। दो. गैर-पदोन्नति। विधियों का यह समूह सीधे न्यूक्लिक एसिड के मिश्रण के संचालन से संबंधित है। उदाहरण तीन प्रकार के ब्लोटिंग हैं, स्वस्थानी संकरण में, आदि। तीन. किसी विशिष्ट डीएनए या आरएनए जांच से जुड़े एक जांच अणु से एक संकेत की पहचान के आधार पर तरीके। एक हाइब्रिड कैप्चर सिस्टम समाधान में एक हाइब्रिडेशन सिस्टम है। आणविक निदान के कई तरीकों में एंजाइमों की एक विस्तृत श्रृंखला का उपयोग शामिल है। नीचे सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता हैः एक. प्रतिबंधित - आवश्यक हिस्सों में डीएनए अणु में "कटौती" दो. डीएनए पोलीमरेज़ - डीओक्सीरिबोन्यूक्लिक एसिड के एक डबल-फंसे अणु का संश्लेषण करता है। तीन. रिवर्स ट्रांस्क्रिप्टेज़ - आरएनए मैट्रिक्स पर डीएनए को संश्लेषित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। चार. डीएनए ligase - nucleotides के बीच phosphodiester बांड के गठन के लिए जिम्मेदार। पाँच. Exonuclease - deoxyribonucleic एसिड के अणु के अंत अनुभागों से न्यूक्लियोटाइड्स को हटा देता है। पोलीमरेज़ श्रृंखला प्रतिक्रिया सक्रिय हैआधुनिक आणविक जीव विज्ञान में प्रयोग किया जाता है यह एक ऐसी विधि है जिसमें एक बड़ी संख्या में प्रतियां एक डीएनए अणु से प्राप्त की जा सकती हैं। पीसीआर के मुख्य कार्य हैंः - रोगों के निदान; पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन को पूरा करने के लिएप्रारंभिक डीएनए अणु, एक थर्मास्टाइबल डीएनए पोलीमरेज़ , deoxyribonucleotide फॉस्फेट , प्राइमर और बफर सिस्टम में ही है, जो बाहर सभी प्रतिक्रियाओं ले सकते हैंः निम्नलिखित तत्वों की आवश्यकता है। पीसीआर में तीन चरणों होते हैंः विकृति, प्राइमरों और बढ़ाव के एनेलिंग। एक. निषेध चौरानवे-पचानवे डिग्री सेल्सियस के तापमान पर, दो डीएनए किस्में के बीच हाइड्रोजन बंधन को तोड़ना जारी है, और इसके परिणामस्वरूप हमें दो एकल-श्रृंखला अणु मिलते हैं। दो. प्राइमरों के एनेलिंग पचास-साठ डिग्री सेल्सियस के तापमान पर, प्राइमरों पुष्टिकता के प्रकार द्वारा एकल-फंसे हुए न्यूक्लिक अम्ल अणुओं के सिरों से जुड़े होते हैं। तीन. बढ़ाव बहत्तर डिग्री के तापमान पर, डैक्सीरिबोन्यूक्लिक एसिड की बेटी डबल फंक्ड अणुओं का संश्लेषण होता है। अनुसंधान के आणविक जैविक तरीकोंअक्सर डीओक्सीरिबोन्यूक्लिक एसिड के अणु में न्यूक्लियोटाइड के अनुक्रम के ज्ञान की आवश्यकता होती है। आनुवंशिक कोड को निर्धारित करने के लिए अनुक्रमण का उपयोग किया जाता है भविष्य के आणविक निदान एक व्यक्ति के अनुक्रम का निर्धारण करने के लिए प्राप्त ज्ञान पर आधारित होगा। निम्नलिखित प्रकार के अनुक्रमण अलग-अलग हैंः
उन्होंने कहा कि 26 फरवरी को भारत ने अपने भाई को सुधारने के लिए तमाचा मारा था। गौरतलब है कि 26 फरवरी को ही भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी। यह एयरस्ट्राइक पुलवामा आतंकी हमले के प्रतिक्रिया स्वरूप की गई थी। इंद्रेश ने कहा कि 26/2 ने भारत को एक ऐसे देश के रूप में स्थापित कर दिया, जो सिर्फ बोलता नहीं, बल्कि कार्रवाई भी करता है, और उसके बाद से भारत-पाकिस्तान सीमा पर संघर्षविराम उल्लंघन की कोई खबर नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि छब्बीस फरवरी को भारत ने अपने भाई को सुधारने के लिए तमाचा मारा था। गौरतलब है कि छब्बीस फरवरी को ही भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी। यह एयरस्ट्राइक पुलवामा आतंकी हमले के प्रतिक्रिया स्वरूप की गई थी। इंद्रेश ने कहा कि छब्बीस/दो ने भारत को एक ऐसे देश के रूप में स्थापित कर दिया, जो सिर्फ बोलता नहीं, बल्कि कार्रवाई भी करता है, और उसके बाद से भारत-पाकिस्तान सीमा पर संघर्षविराम उल्लंघन की कोई खबर नहीं आई है।
अब्दुर रज्जाक (আব্দুর রাজ্জাক; जन्म 15 जून 1982) एक बांग्लादेशी क्रिकेटर है, जो वर्तमान में टेस्ट क्रिकेट खेलता है और खेल के सीमित प्रारूपों से सेवानिवृत्त होता है। देश द्वारा उत्पादित सबसे अच्छे गेंदबाजों में से एक माना जाता है, रज्जाक ओडीआई में 200 विकेट लेने वाले पहले बांग्लादेशी हैं। सक्लेन मुश्ताक ने हैट-ट्रिक लेने के बाद वह पहले बाएं हाथ के स्पिनर और दूसरे स्पिनर भी हैं। वह ट्वेंटी-20 अंतरराष्ट्रीय में बांग्लादेश की पहली टोपी है। उन्होंने 2001/02 सीजन में खुलेना डिवीजन के लिए बांग्लादेशी घरेलू स्तर पर अपनी प्रथम श्रेणी की शुरुआत की। एक लंबे बाएं हाथ के रूढ़िवादी स्पिन गेंदबाज होने के लिए सर्वश्रेष्ठ जाने के लिए, उन्होंने अपने पहले सत्र में राष्ट्रीय विभाजन शीर्षक में अपने विभाजन का मार्गदर्शन करने में मदद की। वहां से उन्हें बांग्लादेश ए (पूर्ण राष्ट्रीय टीम के लिए प्रशिक्षण टीम) के लिए चुना गया था, जो कि जिम्बाब्वे ए के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, जिसमें ढाका में एक खेल में 17 रन देकर 7 विकेट शामिल थे। हालांकि उन्होंने सिर्फ नौ टेस्ट खेले हैं, लेकिन वह वनडे इंटरनेशनल (ओडीआई) में और अधिक सफल रहे हैं और प्रारूप में बांग्लादेश के अग्रणी विकेट लेने वाले हैं। जनवरी 2018 में, वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 500 विकेट लेने वाले पहले बांग्लादेश खिलाड़ी बने। चार साल बाद, उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 8 फरवरी 2018 को टेस्ट टीम में वापसी की। . 11 संबंधोंः दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा, बांग्लादेश क्रिकेट टीम का दक्षिण अफ्रीका दौरा, बांग्लादेश क्रिकेट टीम का ज़िम्बाब्वे दौरा, बांग्लादेश क्रिकेट टीम का आयरलैंड दौरा, बांग्लादेश क्रिकेट टीम का इंग्लैंड दौरा, बांग्लादेश क्रिकेट लीग 2018, सीजन 2018 के क्रिकेट रिकार्ड्स, ज़िम्बाब्वे क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा, आयरलैंड क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा, इंग्लैंड क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा, 2014 आईसीसी विश्व ट्वेंटी20। बांग्लादेश क्रिकेट टीम का दक्षिण अफ्रीका दौरा श्रेणीःबांग्लादेश क्रिकेट टीम. दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा श्रेणीःदक्षिण अफ्रीका क्रिकेट टीम. ज़िम्बाब्वे क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा श्रेणीःबांग्लादेश क्रिकेट टीम. आयरलैंड क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा श्रेणीःक्रिकेट के दौरे. इंग्लैंड क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा श्रेणीःबांग्लादेश क्रिकेट टीम. 2017-18 बांग्लादेश क्रिकेट लीग बांग्लादेश क्रिकेट लीग का छठा संस्करण है, ये एक प्रथम श्रेणी क्रिकेट प्रतियोगिता है। यह बांग्लादेश में आयोजित किया जा रहा है, और 6 जनवरी 2018 को शुरू किया गया। नॉर्थ ज़ोन मौजूदा चैंपियन हैं . साल 2018 का क्रिकेट सब टीमों का लेखाजोखा। सीजन 2017 के क्रिकेट रिकार्ड्स आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप समग्र रिकॉर्ड अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट 2013-14 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट 2018 . बांग्लादेश क्रिकेट टीम का ज़िम्बाब्वे दौरा श्रेणीःक्रिकेट के दौरे. बांग्लादेश क्रिकेट टीम का आयरलैंड दौरा श्रेणीःक्रिकेट के दौरे. बांग्लादेश क्रिकेट टीम का इंग्लैंड दौरा श्रेणीःक्रिकेट के दौरे. 2014 आईसीसी विश्व ट्वेंटी20 आईसीसी विश्व ट्वेंटी20 का पांचवा संस्करण था, जिसकी मेजबानी बांग्लादेश ने की। यह टूर्नामेंट 16 मार्च से 6 अप्रैल 2014 आयोजित हो रहा है। यह बांग्लादेश में तीन स्थानों पर खेला गया ये स्थान थे - ढाका, चटगाँव और सिलहट। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने बांग्लादेश को 2010 में इस टूर्नामेंट की मेजबानी दी। इस टूर्नामेंट का खिताब श्रीलंका ने भारत को 6 विकेट से हराकर जीता। .
अब्दुर रज्जाक एक बांग्लादेशी क्रिकेटर है, जो वर्तमान में टेस्ट क्रिकेट खेलता है और खेल के सीमित प्रारूपों से सेवानिवृत्त होता है। देश द्वारा उत्पादित सबसे अच्छे गेंदबाजों में से एक माना जाता है, रज्जाक ओडीआई में दो सौ विकेट लेने वाले पहले बांग्लादेशी हैं। सक्लेन मुश्ताक ने हैट-ट्रिक लेने के बाद वह पहले बाएं हाथ के स्पिनर और दूसरे स्पिनर भी हैं। वह ट्वेंटी-बीस अंतरराष्ट्रीय में बांग्लादेश की पहली टोपी है। उन्होंने दो हज़ार एक/दो सीजन में खुलेना डिवीजन के लिए बांग्लादेशी घरेलू स्तर पर अपनी प्रथम श्रेणी की शुरुआत की। एक लंबे बाएं हाथ के रूढ़िवादी स्पिन गेंदबाज होने के लिए सर्वश्रेष्ठ जाने के लिए, उन्होंने अपने पहले सत्र में राष्ट्रीय विभाजन शीर्षक में अपने विभाजन का मार्गदर्शन करने में मदद की। वहां से उन्हें बांग्लादेश ए के लिए चुना गया था, जो कि जिम्बाब्वे ए के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, जिसमें ढाका में एक खेल में सत्रह रन देकर सात विकेट शामिल थे। हालांकि उन्होंने सिर्फ नौ टेस्ट खेले हैं, लेकिन वह वनडे इंटरनेशनल में और अधिक सफल रहे हैं और प्रारूप में बांग्लादेश के अग्रणी विकेट लेने वाले हैं। जनवरी दो हज़ार अट्ठारह में, वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पाँच सौ विकेट लेने वाले पहले बांग्लादेश खिलाड़ी बने। चार साल बाद, उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ आठ फरवरी दो हज़ार अट्ठारह को टेस्ट टीम में वापसी की। . ग्यारह संबंधोंः दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा, बांग्लादेश क्रिकेट टीम का दक्षिण अफ्रीका दौरा, बांग्लादेश क्रिकेट टीम का ज़िम्बाब्वे दौरा, बांग्लादेश क्रिकेट टीम का आयरलैंड दौरा, बांग्लादेश क्रिकेट टीम का इंग्लैंड दौरा, बांग्लादेश क्रिकेट लीग दो हज़ार अट्ठारह, सीजन दो हज़ार अट्ठारह के क्रिकेट रिकार्ड्स, ज़िम्बाब्वे क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा, आयरलैंड क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा, इंग्लैंड क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा, दो हज़ार चौदह आईसीसी विश्व ट्वेंटीबीस। बांग्लादेश क्रिकेट टीम का दक्षिण अफ्रीका दौरा श्रेणीःबांग्लादेश क्रिकेट टीम. दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा श्रेणीःदक्षिण अफ्रीका क्रिकेट टीम. ज़िम्बाब्वे क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा श्रेणीःबांग्लादेश क्रिकेट टीम. आयरलैंड क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा श्रेणीःक्रिकेट के दौरे. इंग्लैंड क्रिकेट टीम का बांग्लादेश दौरा श्रेणीःबांग्लादेश क्रिकेट टीम. दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह बांग्लादेश क्रिकेट लीग बांग्लादेश क्रिकेट लीग का छठा संस्करण है, ये एक प्रथम श्रेणी क्रिकेट प्रतियोगिता है। यह बांग्लादेश में आयोजित किया जा रहा है, और छः जनवरी दो हज़ार अट्ठारह को शुरू किया गया। नॉर्थ ज़ोन मौजूदा चैंपियन हैं . साल दो हज़ार अट्ठारह का क्रिकेट सब टीमों का लेखाजोखा। सीजन दो हज़ार सत्रह के क्रिकेट रिकार्ड्स आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप समग्र रिकॉर्ड अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट दो हज़ार तेरह-चौदह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट दो हज़ार अट्ठारह . बांग्लादेश क्रिकेट टीम का ज़िम्बाब्वे दौरा श्रेणीःक्रिकेट के दौरे. बांग्लादेश क्रिकेट टीम का आयरलैंड दौरा श्रेणीःक्रिकेट के दौरे. बांग्लादेश क्रिकेट टीम का इंग्लैंड दौरा श्रेणीःक्रिकेट के दौरे. दो हज़ार चौदह आईसीसी विश्व ट्वेंटीबीस आईसीसी विश्व ट्वेंटीबीस का पांचवा संस्करण था, जिसकी मेजबानी बांग्लादेश ने की। यह टूर्नामेंट सोलह मार्च से छः अप्रैल दो हज़ार चौदह आयोजित हो रहा है। यह बांग्लादेश में तीन स्थानों पर खेला गया ये स्थान थे - ढाका, चटगाँव और सिलहट। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने बांग्लादेश को दो हज़ार दस में इस टूर्नामेंट की मेजबानी दी। इस टूर्नामेंट का खिताब श्रीलंका ने भारत को छः विकेट से हराकर जीता। .
आवश्यकता सम्बंधी सिद्धांत भेद जताना चाहता था, इसलिए मैंने व्यावहारिक को सौंदर्यहीन कहा था । व्यावहारिक संगठन अपने को प्राप्त करने में ही अपने उद्देश्य की पूर्ति कर लेता है । यदि वह उद्देश्य सत्य हो तो संगठन तर्कनिष्ठ और यदि सौंदर्य हो तो संगठन सौंदर्यनिष्ठ कहलायगा । तर्कनिष्ठ संगठन के विभिन्न मार्ग तर्क के प्रनियमों या शुद्ध विवेचन द्वारा एक विवेकशील सम्पूर्णता में ढले हुए होते हैं, परन्तु सौन्दर्यनिष्ठ के सौन्दर्य के प्रनियमों से बंधे हुए होते हैं। गणित या दर्शन सम्बंधी पद्धति तर्कनिष्ठ संगठन का अत्यन्त जटिल उदाहरण है। त्रिपदात्मक प्राक्कथन से निकाला गया अनुमान या संवाक्य ऐसे संगठन का सादा दृष्टान्त है। Beethoven की symphony सौंदर्यनिष्ठ प्रकार का प्रतिश्रेष्ठ और गीत साधारण उदाहरण है। चाहे साधारण हो या जटिल, तर्कनिष्ठ संगठन का आधार विचारों के प्रनियम होते हैं। परन्तु सौंदर्यनिष्ठ सम्पूर्णता को प्रकट करने के लिए विचारसम्बंधी किसी प्रनियम का सहारा ढूंढने की आवश्यकता नहीं । जब चित्रकार अपने चित्र में किसी स्थान पर हरा रंग भर देता है, या संगीतज्ञ पियानो पर विशेष स्वर निकलाता है, तो बड़े से बड़ा तार्किक भी यह नहीं बता सकता कि उसके निकटवर्ती स्थान में वह कौन-सा रंग भरेगा या अगला स्वर क्या होना चाहिए । विचार का कोई भी प्रनियम इन बातों को निर्धारित नहीं कर सकता। इन बातों का निश्चय तो सौंदर्यनिष्ठ भावनाएं और उनके द्वारा श्रभिव्यक्त होते हुए सौंदर्य के प्रनियम ही करेंगे । सौंदर्य के इन प्रनियमों में कुछ हैं विपर्यय, अनुरूपता, संतुलन और ताल । इन सबकी गहरी या विवेचनायुक्त परीक्षा तो मेरे निबन्ध के क्षेत्र के बाहर है। मैं तो केवल यह बताना चाहता हूं कि सौंदर्यनिष्ठ सम्पूर्णता वास्तविक रूप में इन प्रनियमों द्वारा बद्ध होती है, और यही उसकी संतुष्टिप्रद प्रकृति का कारण है, तर्क के 'प्रनियम नहीं । सौंदर्यनिष्ठ सम्पूर्णता में जो प्रामाणिकता रहती है वह उसके शों की सौंदर्य के प्रनियमों के अनुसार प्रबन्धरचना में है, वैचारिक सुसंगति की तर्कनिष्ठ प्रामाणिकता नहीं ।
आवश्यकता सम्बंधी सिद्धांत भेद जताना चाहता था, इसलिए मैंने व्यावहारिक को सौंदर्यहीन कहा था । व्यावहारिक संगठन अपने को प्राप्त करने में ही अपने उद्देश्य की पूर्ति कर लेता है । यदि वह उद्देश्य सत्य हो तो संगठन तर्कनिष्ठ और यदि सौंदर्य हो तो संगठन सौंदर्यनिष्ठ कहलायगा । तर्कनिष्ठ संगठन के विभिन्न मार्ग तर्क के प्रनियमों या शुद्ध विवेचन द्वारा एक विवेकशील सम्पूर्णता में ढले हुए होते हैं, परन्तु सौन्दर्यनिष्ठ के सौन्दर्य के प्रनियमों से बंधे हुए होते हैं। गणित या दर्शन सम्बंधी पद्धति तर्कनिष्ठ संगठन का अत्यन्त जटिल उदाहरण है। त्रिपदात्मक प्राक्कथन से निकाला गया अनुमान या संवाक्य ऐसे संगठन का सादा दृष्टान्त है। Beethoven की symphony सौंदर्यनिष्ठ प्रकार का प्रतिश्रेष्ठ और गीत साधारण उदाहरण है। चाहे साधारण हो या जटिल, तर्कनिष्ठ संगठन का आधार विचारों के प्रनियम होते हैं। परन्तु सौंदर्यनिष्ठ सम्पूर्णता को प्रकट करने के लिए विचारसम्बंधी किसी प्रनियम का सहारा ढूंढने की आवश्यकता नहीं । जब चित्रकार अपने चित्र में किसी स्थान पर हरा रंग भर देता है, या संगीतज्ञ पियानो पर विशेष स्वर निकलाता है, तो बड़े से बड़ा तार्किक भी यह नहीं बता सकता कि उसके निकटवर्ती स्थान में वह कौन-सा रंग भरेगा या अगला स्वर क्या होना चाहिए । विचार का कोई भी प्रनियम इन बातों को निर्धारित नहीं कर सकता। इन बातों का निश्चय तो सौंदर्यनिष्ठ भावनाएं और उनके द्वारा श्रभिव्यक्त होते हुए सौंदर्य के प्रनियम ही करेंगे । सौंदर्य के इन प्रनियमों में कुछ हैं विपर्यय, अनुरूपता, संतुलन और ताल । इन सबकी गहरी या विवेचनायुक्त परीक्षा तो मेरे निबन्ध के क्षेत्र के बाहर है। मैं तो केवल यह बताना चाहता हूं कि सौंदर्यनिष्ठ सम्पूर्णता वास्तविक रूप में इन प्रनियमों द्वारा बद्ध होती है, और यही उसकी संतुष्टिप्रद प्रकृति का कारण है, तर्क के 'प्रनियम नहीं । सौंदर्यनिष्ठ सम्पूर्णता में जो प्रामाणिकता रहती है वह उसके शों की सौंदर्य के प्रनियमों के अनुसार प्रबन्धरचना में है, वैचारिक सुसंगति की तर्कनिष्ठ प्रामाणिकता नहीं ।
पड़ोसी देश पाकिस्तान में महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले दिनों पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार सितंबर माह में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 9 प्रतिशत दर्ज की गई। महंगाई बढ़ने के कारण वहां लोगों को रोजमर्रा के सामान खरीदने में भी अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। महंगाई से त्रस्त जनता को राहत देने की बजाय वहां के नेताओं द्वारा लोगों को अजीबोगरीब नसीहत दिए जाने का पुराना इतिहास है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तो पहले ही वहां के लोगों को कम रोटी खाने की सलाह दे चुके हैं। नवाज शरीफ की राह पर ही चलते हुए अब पाकिस्तान की मौजूदा इमरान सरकार के मंत्री ने भी लोगों को कम खाने की नसीहत देते हुए कहा है कि नौ निवाले कम खाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। दरअसल पाकिस्तान की इमरान सरकार में पीओके और गिलगित बाल्टिस्तान मामलों के मंत्री अली अमीन गंडापुर ने पिछले दिनों एक सभा को संबोधित करते हुए लोगों को महंगाई से मुकाबला करने की एक अजीबोगरीब नसीहत देते हुए चीनी और रोटी कम खाने के लिए कहा। अमीन गंडापुर ने कहा कि मैं चाय में चीनी के सौ दाने डालता हूं, अगर नौ दाने कम डाल दूं तो क्या चाय कम मीठी लगेगी। हम इतने कमजोर हो गए हैं। अपने मुल्क के लिए और अपनी नस्ल के लिए हम इतनी कुर्बानी नहीं कर सकते हैं। आगे गंडापुर ने कहा कि अगर नौ प्रतिशत महंगाई है और मैं आटे के 100 निवाले खाता हूं। तो क्या अपनी कौम के लिए नौ निवाले की कुर्बानी नहीं कर सकता हूं। लोगों ने तो पेट पर पत्थर बांध कर जंग लड़ी है और सुपरपावर को गिराया है। हमें फैसला करना है कि हमें बच्चों को वो पाकिस्तान देना है जहां बच्चा पैदा होते हुए किसी का कर्जदार ना हो। सोशल मीडिया पर गंडापुर के इस भाषण को शेयर कर उनकी जमकर आलोचना की जा रही है। अमीन गंडापुर से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ ने भी एक बार इसी तरह की अजीबोगरीब नसीहत दी थी। साल 1998 में जब पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किया था तो उसे दुनिया के कई देशों की तरफ से आर्थिक प्रतिबंध लगने का खतरा सता रहा था। जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि हम सब लोगों को एक वक्त का खाना खाने के लिए तैयार होना है और इसमें मैं भी आपका साथ दूंगा। पाकिस्तान के आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजार में वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि, पाकिस्तानी रुपयों के गिरते मूल्य और सरकार की तरफ से ईंधन जैसे वस्तुओं पर थोपे गए टैक्स के कारण महंगाई लगातार बढ़ रही है। पिछले दिनों पाकिस्तान के मुख्य विपक्षी नेता शाहबाज शरीफ ने भी कमरतोड़ महंगाई की बात मानते हुए कहा था कि पुरे विश्व में सबसे ज्यादा महंगाई पाकिस्तान में है। पाकिस्तान में सिख 'हकीम' के हत्यारों का पता लगाने के लिए पुलिस ने 4,000 लोगों की पहचान की है और उनके मोबाइल डेटा की जांच शुरू कर दी है। हकीम की हत्या पिछले महीने कर दी गई थी। सरदार सतनाम सिंह (खालसा) यूनानी हकीम थे। वह गत 30 सितंबर को अपने क्लीनिक में थे, जब हमलावरों ने उनके केबिन में घुस कर गोलियां चलाईं, जिसमें मौके पर ही उनकी मौत हो गई। अधिकारियों ने कहा कि इस मामले में 15 अधिकारियों वाली चार विशेष जांच टीमें काम कर रही हैं। तीन टीमें खुफिया जानकारी साझा कर रही हैं, मोबाइल डेटा एकत्र कर रही हैं, संदिग्धों की जांच कर रही हैं, जबकि चौथी टीम को पेशावर और आसपास के अन्य क्षेत्रों से संदिग्धों को गिरफ्तार करने का काम सौंपा गया है। आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट से संबद्ध इस्लामिक स्टेट खुरासान (आईएसआईएस-के) ने सिख की हत्या की जिम्मेदारी ली थी। (भाषा इनपुट्स के साथ)
पड़ोसी देश पाकिस्तान में महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले दिनों पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार सितंबर माह में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक नौ प्रतिशत दर्ज की गई। महंगाई बढ़ने के कारण वहां लोगों को रोजमर्रा के सामान खरीदने में भी अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। महंगाई से त्रस्त जनता को राहत देने की बजाय वहां के नेताओं द्वारा लोगों को अजीबोगरीब नसीहत दिए जाने का पुराना इतिहास है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तो पहले ही वहां के लोगों को कम रोटी खाने की सलाह दे चुके हैं। नवाज शरीफ की राह पर ही चलते हुए अब पाकिस्तान की मौजूदा इमरान सरकार के मंत्री ने भी लोगों को कम खाने की नसीहत देते हुए कहा है कि नौ निवाले कम खाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। दरअसल पाकिस्तान की इमरान सरकार में पीओके और गिलगित बाल्टिस्तान मामलों के मंत्री अली अमीन गंडापुर ने पिछले दिनों एक सभा को संबोधित करते हुए लोगों को महंगाई से मुकाबला करने की एक अजीबोगरीब नसीहत देते हुए चीनी और रोटी कम खाने के लिए कहा। अमीन गंडापुर ने कहा कि मैं चाय में चीनी के सौ दाने डालता हूं, अगर नौ दाने कम डाल दूं तो क्या चाय कम मीठी लगेगी। हम इतने कमजोर हो गए हैं। अपने मुल्क के लिए और अपनी नस्ल के लिए हम इतनी कुर्बानी नहीं कर सकते हैं। आगे गंडापुर ने कहा कि अगर नौ प्रतिशत महंगाई है और मैं आटे के एक सौ निवाले खाता हूं। तो क्या अपनी कौम के लिए नौ निवाले की कुर्बानी नहीं कर सकता हूं। लोगों ने तो पेट पर पत्थर बांध कर जंग लड़ी है और सुपरपावर को गिराया है। हमें फैसला करना है कि हमें बच्चों को वो पाकिस्तान देना है जहां बच्चा पैदा होते हुए किसी का कर्जदार ना हो। सोशल मीडिया पर गंडापुर के इस भाषण को शेयर कर उनकी जमकर आलोचना की जा रही है। अमीन गंडापुर से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ ने भी एक बार इसी तरह की अजीबोगरीब नसीहत दी थी। साल एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में जब पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किया था तो उसे दुनिया के कई देशों की तरफ से आर्थिक प्रतिबंध लगने का खतरा सता रहा था। जिसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि हम सब लोगों को एक वक्त का खाना खाने के लिए तैयार होना है और इसमें मैं भी आपका साथ दूंगा। पाकिस्तान के आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजार में वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि, पाकिस्तानी रुपयों के गिरते मूल्य और सरकार की तरफ से ईंधन जैसे वस्तुओं पर थोपे गए टैक्स के कारण महंगाई लगातार बढ़ रही है। पिछले दिनों पाकिस्तान के मुख्य विपक्षी नेता शाहबाज शरीफ ने भी कमरतोड़ महंगाई की बात मानते हुए कहा था कि पुरे विश्व में सबसे ज्यादा महंगाई पाकिस्तान में है। पाकिस्तान में सिख 'हकीम' के हत्यारों का पता लगाने के लिए पुलिस ने चार,शून्य लोगों की पहचान की है और उनके मोबाइल डेटा की जांच शुरू कर दी है। हकीम की हत्या पिछले महीने कर दी गई थी। सरदार सतनाम सिंह यूनानी हकीम थे। वह गत तीस सितंबर को अपने क्लीनिक में थे, जब हमलावरों ने उनके केबिन में घुस कर गोलियां चलाईं, जिसमें मौके पर ही उनकी मौत हो गई। अधिकारियों ने कहा कि इस मामले में पंद्रह अधिकारियों वाली चार विशेष जांच टीमें काम कर रही हैं। तीन टीमें खुफिया जानकारी साझा कर रही हैं, मोबाइल डेटा एकत्र कर रही हैं, संदिग्धों की जांच कर रही हैं, जबकि चौथी टीम को पेशावर और आसपास के अन्य क्षेत्रों से संदिग्धों को गिरफ्तार करने का काम सौंपा गया है। आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट से संबद्ध इस्लामिक स्टेट खुरासान ने सिख की हत्या की जिम्मेदारी ली थी।
आईसीसी टी-20 विश्व कप-2020 के संभावित स्थगन की अफवाहों को गलत बता रही है। इसके साथ ही उसका कहना है कि वह सभी विकल्पों पर विचार कर रही है। टूर्नमेंट तय समय पर कराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, 'इसमें स्थितियों के हिसाब से हमारे पास मौजूदा सभी विकल्पों पर विचार करना शामिल है। ' टी-20 विश्व कप इस साल ऑस्ट्रेलिया में 15 अक्टूबर से 15 सितंबर के बीच होना है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मौरिसन ने शुक्रवार को चेतावनी देते हुए कहा है कि लोगों पर पाबंदिया एक और साल के लिए जारी रह सकती हैं। आईसीसी प्रवक्ता ने कहा, 'हम विशेषज्ञों और अधिकारियों से सलाह ले रहे हैं जिसमें ऑस्ट्रेलियाई सरकार भी शामिल है। इसके बाद हम सही समय पर फैसला लेंगे। ' उल्लेखनह है कि कोरोना वायरस की वजह से ओलिंपिक तक स्थगित हो चुका है।
आईसीसी टी-बीस विश्व कप-दो हज़ार बीस के संभावित स्थगन की अफवाहों को गलत बता रही है। इसके साथ ही उसका कहना है कि वह सभी विकल्पों पर विचार कर रही है। टूर्नमेंट तय समय पर कराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, 'इसमें स्थितियों के हिसाब से हमारे पास मौजूदा सभी विकल्पों पर विचार करना शामिल है। ' टी-बीस विश्व कप इस साल ऑस्ट्रेलिया में पंद्रह अक्टूबर से पंद्रह सितंबर के बीच होना है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मौरिसन ने शुक्रवार को चेतावनी देते हुए कहा है कि लोगों पर पाबंदिया एक और साल के लिए जारी रह सकती हैं। आईसीसी प्रवक्ता ने कहा, 'हम विशेषज्ञों और अधिकारियों से सलाह ले रहे हैं जिसमें ऑस्ट्रेलियाई सरकार भी शामिल है। इसके बाद हम सही समय पर फैसला लेंगे। ' उल्लेखनह है कि कोरोना वायरस की वजह से ओलिंपिक तक स्थगित हो चुका है।
अगर जंग में उतरे ताइवान,अमेरिका और चीन युद्ध में उतर गए तो दुनिया पर इलेक्ट्रॉनिक इमरजेंसी लग जाएगी. आपने पिछले कुछ सालों में ध्यान दिया होगा कि बाजार में गाड़ियों के नए मॉडल लॉन्च तो होते हैं लेकिन उनकी डिलिवरी देर से होती है. बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के मोबाइल फोन लॉन्च होते हैं लेकिन दुनिया के अलग अलग हिस्सों में उनकी सप्लाई देर से होती है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है 'सेमी कंडक्टर' की कमी. इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक सामानों में किया जाता है. आपको जानकर हैरानी होगी की सेमी कंडक्टर की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी ताइवान की है. पूरी बात जानने के लिए देखें ये वीडियो. China, America, and Taiwan are ready for a war. But the question is if these countries will start the war, what will be the effects of this War? Because Taiwan is the biggest producer of semiconductors, and if it will not able to supply semiconductors then there will be an electronic emergency.
अगर जंग में उतरे ताइवान,अमेरिका और चीन युद्ध में उतर गए तो दुनिया पर इलेक्ट्रॉनिक इमरजेंसी लग जाएगी. आपने पिछले कुछ सालों में ध्यान दिया होगा कि बाजार में गाड़ियों के नए मॉडल लॉन्च तो होते हैं लेकिन उनकी डिलिवरी देर से होती है. बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के मोबाइल फोन लॉन्च होते हैं लेकिन दुनिया के अलग अलग हिस्सों में उनकी सप्लाई देर से होती है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है 'सेमी कंडक्टर' की कमी. इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक सामानों में किया जाता है. आपको जानकर हैरानी होगी की सेमी कंडक्टर की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी ताइवान की है. पूरी बात जानने के लिए देखें ये वीडियो. China, America, and Taiwan are ready for a war. But the question is if these countries will start the war, what will be the effects of this War? Because Taiwan is the biggest producer of semiconductors, and if it will not able to supply semiconductors then there will be an electronic emergency.
Uttar Pradesh: आम आदमी पार्टी ने इस बार उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव में भी कमर कसने का फैसला किया है। इसे लेकर AAP ने प्रदेश में निकाय चुनाव से पहले 'गंदगी हटाओ, झाड़ू चलाओ' नाम से अभियान शुरू किया है। इस अभियान में तीन मुद्दों- स्वच्छता, करप्शन और बीजेपी को टारगेट करने की कोशिश हुई है। इसी तरह का एक अभियान राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी द्वारा चलाया जा रहा है, जहां दिल्ली नगर निगम (MCD) के चुनाव करीब हैं, इसमें 'आप' ने शहर के कचरे के निपटान और उसके तीन लैंडफिल साइटों को प्रमुख मुद्दा बनाया है। '15 नवंबर तक चलेगा अभियानट' उत्तर प्रदेश के आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रभारी सभाजीत सिंह ने कहा कि यह अभियान 15 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान पार्टी लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए पदयात्रा, मोहल्ला सभा, साइकिल रैलियां और स्थानीय सभाएं करेगी। उन्होंने कहा उत्तर प्रदेश में अन्य दलों की तरह जाति के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना आम आदमी पार्टी की कार्यशैली नहीं है। हमारे काम करने का मॉडल स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी, सड़क और जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार पर आधारित है। पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा कि नगरपालिका के मुद्दों में भाजपा का ट्रैक रिकॉर्ड खराब रहा है, भले ही पार्टी कई सालों से सत्ता में है। आज AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पार्टी का मेनिफेस्टो जारी करते हुए दिल्ली वालों को 10 गारंटियां दी हैं। इस दौरान केजरीवाल ने कहा कि हम 10 गारंटी को पूरा करने के लिए काम करेंगे। हम दिल्ली की सड़कों को साफ करेंगे और कचरे के पहाड़ की समस्या का समाधान करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्कों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी पर भी जमकर निशाना साधा।
Uttar Pradesh: आम आदमी पार्टी ने इस बार उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव में भी कमर कसने का फैसला किया है। इसे लेकर AAP ने प्रदेश में निकाय चुनाव से पहले 'गंदगी हटाओ, झाड़ू चलाओ' नाम से अभियान शुरू किया है। इस अभियान में तीन मुद्दों- स्वच्छता, करप्शन और बीजेपी को टारगेट करने की कोशिश हुई है। इसी तरह का एक अभियान राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी द्वारा चलाया जा रहा है, जहां दिल्ली नगर निगम के चुनाव करीब हैं, इसमें 'आप' ने शहर के कचरे के निपटान और उसके तीन लैंडफिल साइटों को प्रमुख मुद्दा बनाया है। 'पंद्रह नवंबर तक चलेगा अभियानट' उत्तर प्रदेश के आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रभारी सभाजीत सिंह ने कहा कि यह अभियान पंद्रह नवंबर तक चलेगा। इस दौरान पार्टी लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए पदयात्रा, मोहल्ला सभा, साइकिल रैलियां और स्थानीय सभाएं करेगी। उन्होंने कहा उत्तर प्रदेश में अन्य दलों की तरह जाति के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना आम आदमी पार्टी की कार्यशैली नहीं है। हमारे काम करने का मॉडल स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी, सड़क और जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार पर आधारित है। पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा कि नगरपालिका के मुद्दों में भाजपा का ट्रैक रिकॉर्ड खराब रहा है, भले ही पार्टी कई सालों से सत्ता में है। आज AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पार्टी का मेनिफेस्टो जारी करते हुए दिल्ली वालों को दस गारंटियां दी हैं। इस दौरान केजरीवाल ने कहा कि हम दस गारंटी को पूरा करने के लिए काम करेंगे। हम दिल्ली की सड़कों को साफ करेंगे और कचरे के पहाड़ की समस्या का समाधान करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्कों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी पर भी जमकर निशाना साधा।
मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष अजित सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दंगा कराकर लोकसभा चुनाव जीतने की कोशिश का आरोप लगाया है।अजित सिंह ने शनिवार को कूकड़ा ब्लॉक में महागठबंधन कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा कि मोदी देश नहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने मुजफ्फरनगर के कवाल में दंगा कराकर लोकसभा का चुनाव जीता था, लेकिन अब मुजफ्फरनगर में ही भाजपा को शिकस्त मिलेगी। रालोद अध्यक्ष ने यह भी कहा कि हर आदमी कभी न कभी झूठ बोलता है लेकिन मोदी कभी सच नहीं बोलते। अजित सिंह ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और रालोद के गठबंधन को कोई पार्टी लोकसभा चुनाव में हरा नहीं सकेगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन से प्रधानमंत्री घबराये हुये हैं। सम्मेलन में बसपा के पूर्व सांसद कादिर राणा, पूर्व सांसद अमीर आलम, चरथावल विधानसभा प्रभारी श्री अरशद राणा पूर्व विधायक अनिल कुमार, पूर्व मंत्री उमा किरण, धर्मवीर बालियान, पूर्व मंत्री योगराज सिंह, पूर्व विधायक नूर सलीम राणा व बहुजन समाज पार्टी के महानगर अध्य्क्ष माजिद सिद्दकी आदि समेत कई नेता मौजूद थे।
मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दंगा कराकर लोकसभा चुनाव जीतने की कोशिश का आरोप लगाया है।अजित सिंह ने शनिवार को कूकड़ा ब्लॉक में महागठबंधन कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा कि मोदी देश नहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने मुजफ्फरनगर के कवाल में दंगा कराकर लोकसभा का चुनाव जीता था, लेकिन अब मुजफ्फरनगर में ही भाजपा को शिकस्त मिलेगी। रालोद अध्यक्ष ने यह भी कहा कि हर आदमी कभी न कभी झूठ बोलता है लेकिन मोदी कभी सच नहीं बोलते। अजित सिंह ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी , बहुजन समाज पार्टी और रालोद के गठबंधन को कोई पार्टी लोकसभा चुनाव में हरा नहीं सकेगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन से प्रधानमंत्री घबराये हुये हैं। सम्मेलन में बसपा के पूर्व सांसद कादिर राणा, पूर्व सांसद अमीर आलम, चरथावल विधानसभा प्रभारी श्री अरशद राणा पूर्व विधायक अनिल कुमार, पूर्व मंत्री उमा किरण, धर्मवीर बालियान, पूर्व मंत्री योगराज सिंह, पूर्व विधायक नूर सलीम राणा व बहुजन समाज पार्टी के महानगर अध्य्क्ष माजिद सिद्दकी आदि समेत कई नेता मौजूद थे।
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई. . . । 16वीं शताब्दी में मीराबाई ने गिरधर गोपाल को ही सर्वस्व मान लिया था. . . । अब 21वीं शताब्दी में कालाडेरा की पूजासिंह शेखावत श्रीकृष्ण प्रेम के रंग में ऐसी रंगी कि ठाकुरजी संग ही ब्याह कर लिया। जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई. . . पद को चरितार्थ करने वाली पूजा राजपूत वंश से आती हैं। पालिटिक्ल साइंस से एमए पूजा ने मंदिर में विराजमान सालिगरामजी (ठाकुरजी) के श्रीविग्रह के साथ शादी की रस्में निभाई। पूजा कहती हैं, ऐसाे वर क्या वरूं जो जन्म सो मर जाय, चूड़ो पहनूं श्याम को, मेरो चूड़ो अमर हो जाय. . . । गणेश पूजन चाकभात, मेहंदी, महिला संगीत और फेरों की रस्में हुई। ठाकुरजी को दूल्हा बनाकर मंदिर से लाया गया। पिता नहीं आए तो मां ने फेरों में बैठकर कन्यादान किया। इसके बाद विदाई हुई। पूजा ने अपनी मांग भी सिंदूर की जगह चंदन से भरी। पूजा कहती हैं. . . मैंने भगवान को ही पति बना लिया है। शादी के बाद ठाकुरजी तो मंदिर में विराजमान हो गए। कमरे में पूजा ने एक छोटा सा मंदिर बनाया है, जिसमें ठाकुरजी हैं। वह जमीन पर सोती हैं और खुद भोग बनाती हैं। धार्मिक रूप से विवाह मान्य : आचार्य राकेश शास्त्री ने बताया शालीग्राम जी से कन्या का विवाह शास्त्रोक्त है। वृंदा तुलसी ने विष्णु भगवान का सौभाग्य प्राप्त करने के लिए ठाकुरजी से विवाह किया है, यह ठीक वैसे ही है। कर्मठ गुरु पुस्तक में विवरण पृष्ठ संख्या 75 पर दिया गया है। विष्णु भगवान से कन्या वरण कर सकती है। 30 साल की हूं। अमूमन 20 से 25 साल की उम्र में लड़कियों की शादी कर दी जाती है। कॉलेज पूरी करने के बाद से ही मेरे रिश्ते आने लगे थे। मैंने बचपन से ही देखा है मामूली बात पर पति-पत्नी में झगड़े होते थे, विवादों में जिंदगी खराब हो जाती थी। फिर मैंने निर्णय कर लिया था कि शादी नहीं करूंगी। कुछ लड़के वाले देखने भी आए, एक दो बार तो रिश्ता जैसे-तैसे टल गया। आखिर मैंने लड़के वालों को ही हाथ जोड़कर मना कर दिया। ननिहाल में तुलसी विवाह देखा तो सोचा ठाकुरजी तुलसाजी से विवाह कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं? पंडितजी से पूछा तो उन्होंने भी कहा कि ऐसा हो सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई. . . । सोलहवीं शताब्दी में मीराबाई ने गिरधर गोपाल को ही सर्वस्व मान लिया था. . . । अब इक्कीसवीं शताब्दी में कालाडेरा की पूजासिंह शेखावत श्रीकृष्ण प्रेम के रंग में ऐसी रंगी कि ठाकुरजी संग ही ब्याह कर लिया। जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई. . . पद को चरितार्थ करने वाली पूजा राजपूत वंश से आती हैं। पालिटिक्ल साइंस से एमए पूजा ने मंदिर में विराजमान सालिगरामजी के श्रीविग्रह के साथ शादी की रस्में निभाई। पूजा कहती हैं, ऐसाे वर क्या वरूं जो जन्म सो मर जाय, चूड़ो पहनूं श्याम को, मेरो चूड़ो अमर हो जाय. . . । गणेश पूजन चाकभात, मेहंदी, महिला संगीत और फेरों की रस्में हुई। ठाकुरजी को दूल्हा बनाकर मंदिर से लाया गया। पिता नहीं आए तो मां ने फेरों में बैठकर कन्यादान किया। इसके बाद विदाई हुई। पूजा ने अपनी मांग भी सिंदूर की जगह चंदन से भरी। पूजा कहती हैं. . . मैंने भगवान को ही पति बना लिया है। शादी के बाद ठाकुरजी तो मंदिर में विराजमान हो गए। कमरे में पूजा ने एक छोटा सा मंदिर बनाया है, जिसमें ठाकुरजी हैं। वह जमीन पर सोती हैं और खुद भोग बनाती हैं। धार्मिक रूप से विवाह मान्य : आचार्य राकेश शास्त्री ने बताया शालीग्राम जी से कन्या का विवाह शास्त्रोक्त है। वृंदा तुलसी ने विष्णु भगवान का सौभाग्य प्राप्त करने के लिए ठाकुरजी से विवाह किया है, यह ठीक वैसे ही है। कर्मठ गुरु पुस्तक में विवरण पृष्ठ संख्या पचहत्तर पर दिया गया है। विष्णु भगवान से कन्या वरण कर सकती है। तीस साल की हूं। अमूमन बीस से पच्चीस साल की उम्र में लड़कियों की शादी कर दी जाती है। कॉलेज पूरी करने के बाद से ही मेरे रिश्ते आने लगे थे। मैंने बचपन से ही देखा है मामूली बात पर पति-पत्नी में झगड़े होते थे, विवादों में जिंदगी खराब हो जाती थी। फिर मैंने निर्णय कर लिया था कि शादी नहीं करूंगी। कुछ लड़के वाले देखने भी आए, एक दो बार तो रिश्ता जैसे-तैसे टल गया। आखिर मैंने लड़के वालों को ही हाथ जोड़कर मना कर दिया। ननिहाल में तुलसी विवाह देखा तो सोचा ठाकुरजी तुलसाजी से विवाह कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं? पंडितजी से पूछा तो उन्होंने भी कहा कि ऐसा हो सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जब भी IPL के किफायती व विकेटचटकाऊ गेंदबाजों की बात होती है, तो उस लिस्ट में आपको सनराइजर्स हैदराबाद के स्पिन गेंदबाज राशिद खान का नाम जरुर नजर आएगा। इस बार भले ही हैदराबाद की टीम अच्छा प्रदर्शन ना कर पा रही हो, लेकिन राशिद अपना काम बखूबी कर रहे हैं। जी हां, उन्होंने 6 मैच में 24 ओवर फेंके हैं, जिसमें 56 डॉट बॉल्स फेंकी हैं। इसके अलावा उन्होंने 16. 44 के औसत व 6. 16 की इकोनॉमी रेट के साथ 9 विकेट चटका चुके हैं। इस दौरान इनकी स्ट्राइक रेट 16 की रही है। राशिद अपनी टीम के अहम गेंदबाज हैं और वह इस सीजन भी उसी लय में गेंदबाजी कर रहे हैं।
जब भी IPL के किफायती व विकेटचटकाऊ गेंदबाजों की बात होती है, तो उस लिस्ट में आपको सनराइजर्स हैदराबाद के स्पिन गेंदबाज राशिद खान का नाम जरुर नजर आएगा। इस बार भले ही हैदराबाद की टीम अच्छा प्रदर्शन ना कर पा रही हो, लेकिन राशिद अपना काम बखूबी कर रहे हैं। जी हां, उन्होंने छः मैच में चौबीस ओवर फेंके हैं, जिसमें छप्पन डॉट बॉल्स फेंकी हैं। इसके अलावा उन्होंने सोलह. चौंतालीस के औसत व छः. सोलह की इकोनॉमी रेट के साथ नौ विकेट चटका चुके हैं। इस दौरान इनकी स्ट्राइक रेट सोलह की रही है। राशिद अपनी टीम के अहम गेंदबाज हैं और वह इस सीजन भी उसी लय में गेंदबाजी कर रहे हैं।
8 संबंधोंः निरूपा रॉय, परवीन बॉबी, फ़िरोज़ ख़ान, रंजीत, रेखा, जितेन्द्र द्वारा अभिनीत फ़िल्में, जगदीप, ओम शिवपुरी। निरूपा राय (जन्मः 4 जनवरी, 1931 निधनः 13 अक्टूबर, 2004) हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री थीं। . परवीन बॉबी (जन्मः 4 अप्रैल, 1949; निधनः 20 जनवरी, 2005) हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री हैं, जिन्हें 1970 के दशक के शीर्ष नायकों के साथ ग्लैमरस भूमिकाएं निभाने के लिए याद किया जाता है। उन्होने 1970 और 1980 की ब्लोकबस्टर फिल्मों मे भी काम किया है, जैसे दीवार, नमक हलाल, अमर अकबर एन्थोनी और शान। उन्हें भारत की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में एक माना जाता है। . फ़िरोज़ ख़ान (25 सितंबर 1939 - अप्रैल 2009) हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता थे। उन्होंने लंबी फ़िल्मी पारी खेली.वे अपनी खास शैली, अलग अंदाज और किरदारों के लिए जाने जाते रहे।. रंजीत हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता हैं। वह अपने खलनायक किरदारों के लिये विशेष रूप से जाने जाते हैं। . भानुरेखा गणेशन उर्फ़ रेखा (जन्मः 10 अक्टूबर, 1954) हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री हैं। प्रतिभाशाली रेखा को हिन्दी फ़िल्मों की सबसे अच्छी अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है। वैसे तो रेखा ने अपने फ़िल्मी जीवन की शुरुआत बतौर एक बाल कलाकार तेलुगु फ़िल्म रंगुला रत्नम से कर दी थी, लेकिन हिन्दी सिनेमा में उनकी प्रविष्टि १९७० की फ़िल्म सावन भादों से हुई। 2010 में, उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। . जितेन्द्र एक भारतीय बॉलीवुड फिल्म अभिनेता है इनका जन्म ०७ अप्रैल १९४२ को पंजाब के अमृतसर जिले में हुआ था। इन्होंने अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत १९६४ में गीत गाया पत्थरों ने नामक फिल्म से की थी। इन्होंने हिन्दी भाषा में दर्जनों फिल्मों में अभिनय किया है। जितेन्द्र के पुत्र तुषार कपूर भी बॉलीवुड उद्योग में है। . जगदीप एक हिन्दी फिल्म हास्य अभिनेता हैं। . ओम शिवपुरी हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता थे। .
आठ संबंधोंः निरूपा रॉय, परवीन बॉबी, फ़िरोज़ ख़ान, रंजीत, रेखा, जितेन्द्र द्वारा अभिनीत फ़िल्में, जगदीप, ओम शिवपुरी। निरूपा राय हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री थीं। . परवीन बॉबी हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री हैं, जिन्हें एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक के शीर्ष नायकों के साथ ग्लैमरस भूमिकाएं निभाने के लिए याद किया जाता है। उन्होने एक हज़ार नौ सौ सत्तर और एक हज़ार नौ सौ अस्सी की ब्लोकबस्टर फिल्मों मे भी काम किया है, जैसे दीवार, नमक हलाल, अमर अकबर एन्थोनी और शान। उन्हें भारत की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में एक माना जाता है। . फ़िरोज़ ख़ान हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता थे। उन्होंने लंबी फ़िल्मी पारी खेली.वे अपनी खास शैली, अलग अंदाज और किरदारों के लिए जाने जाते रहे।. रंजीत हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता हैं। वह अपने खलनायक किरदारों के लिये विशेष रूप से जाने जाते हैं। . भानुरेखा गणेशन उर्फ़ रेखा हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री हैं। प्रतिभाशाली रेखा को हिन्दी फ़िल्मों की सबसे अच्छी अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है। वैसे तो रेखा ने अपने फ़िल्मी जीवन की शुरुआत बतौर एक बाल कलाकार तेलुगु फ़िल्म रंगुला रत्नम से कर दी थी, लेकिन हिन्दी सिनेमा में उनकी प्रविष्टि एक हज़ार नौ सौ सत्तर की फ़िल्म सावन भादों से हुई। दो हज़ार दस में, उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। . जितेन्द्र एक भारतीय बॉलीवुड फिल्म अभिनेता है इनका जन्म सात अप्रैल एक हज़ार नौ सौ बयालीस को पंजाब के अमृतसर जिले में हुआ था। इन्होंने अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत एक हज़ार नौ सौ चौंसठ में गीत गाया पत्थरों ने नामक फिल्म से की थी। इन्होंने हिन्दी भाषा में दर्जनों फिल्मों में अभिनय किया है। जितेन्द्र के पुत्र तुषार कपूर भी बॉलीवुड उद्योग में है। . जगदीप एक हिन्दी फिल्म हास्य अभिनेता हैं। . ओम शिवपुरी हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता थे। .
Indian Army Agniveer Rally Recruitment 2023: अगर आप भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहते हैं तो आपके लिए ये सुनहरा मौका है. दरअसल, भारतीय सेना ने अग्निवीर के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं. अग्निवार के पदों के लिए होने वाली ये भर्ती रैली के माध्यम से होगी. जिसमें उम्मीदवारों को पहले लिखित परीक्षा पास करनी होगी. उसके बाद फिजिकल टेस्ट और मेडिकल परीक्षण के बाद इन पदों के लिए उम्मीदवारों की भर्ती की जाएगी. इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया कल यानी 16 फरवरी 2023 से शुुरु हो रही है. उम्मीदवार भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने की आखिरी तारीख 15 मार्च 2023 है. संस्था का नाम- भारतीय सेना (Indian Army) शैक्षणिक योग्यता- इस भर्ती में शामिल होने वाले उम्मीदवार के पास पोस्ट के मुताबिक, शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए. जिसमें उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड/संस्थान/विश्वविद्यालय से 8वीं, 10वीं और 12 पास होना अनिवार्य है. आयु सीमा- इस भर्ती में शामिल होने के लिए उम्मीदवार की आयु कम से कम 17. 5 साल और अधिकतम 21 साल होनी चाहिए. वहीं आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट दी जाएगी. बता दें कि अग्निवीर के पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन सिर्फ चार साल के लिए होगा. चार साल बाद 75 फीसदी अग्निवीरों को रिटायर किया जाएगा. बाकी 25 फीसदी शारीरिक योग्यता के आधार पर अग्निवीर के पदों पर बने रहेंगे. आवेदन शुल्क- सभी वर्ग के उम्मीदवारों को 250/- रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. कैसे करें आवेदन- उम्मीदवार भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट https://joinindianarmy. nic. in/ पर जाकर इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं.
Indian Army Agniveer Rally Recruitment दो हज़ार तेईस: अगर आप भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहते हैं तो आपके लिए ये सुनहरा मौका है. दरअसल, भारतीय सेना ने अग्निवीर के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं. अग्निवार के पदों के लिए होने वाली ये भर्ती रैली के माध्यम से होगी. जिसमें उम्मीदवारों को पहले लिखित परीक्षा पास करनी होगी. उसके बाद फिजिकल टेस्ट और मेडिकल परीक्षण के बाद इन पदों के लिए उम्मीदवारों की भर्ती की जाएगी. इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया कल यानी सोलह फरवरी दो हज़ार तेईस से शुुरु हो रही है. उम्मीदवार भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने की आखिरी तारीख पंद्रह मार्च दो हज़ार तेईस है. संस्था का नाम- भारतीय सेना शैक्षणिक योग्यता- इस भर्ती में शामिल होने वाले उम्मीदवार के पास पोस्ट के मुताबिक, शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए. जिसमें उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड/संस्थान/विश्वविद्यालय से आठवीं, दसवीं और बारह पास होना अनिवार्य है. आयु सीमा- इस भर्ती में शामिल होने के लिए उम्मीदवार की आयु कम से कम सत्रह. पाँच साल और अधिकतम इक्कीस साल होनी चाहिए. वहीं आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट दी जाएगी. बता दें कि अग्निवीर के पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन सिर्फ चार साल के लिए होगा. चार साल बाद पचहत्तर फीसदी अग्निवीरों को रिटायर किया जाएगा. बाकी पच्चीस फीसदी शारीरिक योग्यता के आधार पर अग्निवीर के पदों पर बने रहेंगे. आवेदन शुल्क- सभी वर्ग के उम्मीदवारों को दो सौ पचास/- रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. कैसे करें आवेदन- उम्मीदवार भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट https://joinindianarmy. nic. in/ पर जाकर इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं.