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न्यूयॉर्क। आईएसआईएस की कैद में रही इस यजीदी लड़की ने जब यूएन सिक्युरिटी काउंसिल में आपबीती बयां की, तो कई मेंबर रो पड़े। इराक की 21 वर्षीय नादिया मुराद बासे ताहा तीन महीने तक आईएस आतंकियों के चंगुल में रही। इस दौरान वो रोजाना टॉर्चर और रेप का शिकार हुई। आईएस के चंगुल से छूटने के बाद अब नादिया जर्मनी में रह रही है।
15 सदस्यों की काउंसिल के सामने नादिया ने बताया, "आईएसआईएस के आतंकियों ने पिछले साल अगस्त में इराक के एक गांव से मुझे अपने कब्जे में लिया था। वो एक बस में मुझे अपने कब्जे वाले मोसुल शहर लेकर गए। पूरे रास्ते उन्होंने मेरे साथ बदसलूकी की। मैंने रो-चिल्लाकर उनसे रहम की भीख मांगी, लेकिन इसके बदले उन्होंने मुझे जमकर पीटा। " नादिया ने बताया कि कुछ दिनों बाद उसे एक आतंकी के हवाले कर दिया गया। जो रोज उसे अपनी हवस का शिकार बनाता। नादिया ने जब भागने की कोशिश की, तो गार्ड ने उसे पकड़ लिया। उस रात नादिया को बहुत मारा पीटा गया और कपड़े उतारकर उसे गार्ड्स के हवाले कर दिया गया। उस रात वो तब तक रेप का शिकार हुई, जब तक वो बेहोश नहीं हो गई।
नादिया ने उस खौफनाक वक्त को याद करते हुए बताया कि उसे पूरे तीन महीने एक सेक्स स्लेव की तरह रखा गया। नादिया के मुताबिक, औरतों और लड़कियों की जिंदगी खराब करने के लिए आतंकी रेप को अपना सबसे बड़ा हथियार मानते हैं। ताकि महिलाएं फिर कभी भी पहले की तरह सामान्य जिंदगी न जी सकें। नादिया ने बताया कि मोसुल में हजारों की संख्या में यजीदी महिलाएं और बच्चे बंधक बनाकर रखे गए थे, जिन्हें आतंकी एक-दूसरे से गिफ्ट के तौर पर बदलते थे।
नादिया ने आईएस से छुटकारा दिलाने की संयुक्त राष्ट्र से अपील की। उसकी आपबीती सुन यूएन के सिक्युरिटी काउंसिल के कई मेंबर्स भी रो पड़े और उन्होंने नादिया की हिम्मत की तारीफ की। वहीं, यूएन ने कहा कि इस्लामिक स्टेट यजीदी समुदाय को खत्म करने के लिए नरसंहार को अंजाम देने की कोशिश कर सकता है। यूएन ने। सिक्युरिटी काउंसिल से इस मुद्दे को इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में ले जाने की अपील की।
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न्यूयॉर्क। आईएसआईएस की कैद में रही इस यजीदी लड़की ने जब यूएन सिक्युरिटी काउंसिल में आपबीती बयां की, तो कई मेंबर रो पड़े। इराक की इक्कीस वर्षीय नादिया मुराद बासे ताहा तीन महीने तक आईएस आतंकियों के चंगुल में रही। इस दौरान वो रोजाना टॉर्चर और रेप का शिकार हुई। आईएस के चंगुल से छूटने के बाद अब नादिया जर्मनी में रह रही है। पंद्रह सदस्यों की काउंसिल के सामने नादिया ने बताया, "आईएसआईएस के आतंकियों ने पिछले साल अगस्त में इराक के एक गांव से मुझे अपने कब्जे में लिया था। वो एक बस में मुझे अपने कब्जे वाले मोसुल शहर लेकर गए। पूरे रास्ते उन्होंने मेरे साथ बदसलूकी की। मैंने रो-चिल्लाकर उनसे रहम की भीख मांगी, लेकिन इसके बदले उन्होंने मुझे जमकर पीटा। " नादिया ने बताया कि कुछ दिनों बाद उसे एक आतंकी के हवाले कर दिया गया। जो रोज उसे अपनी हवस का शिकार बनाता। नादिया ने जब भागने की कोशिश की, तो गार्ड ने उसे पकड़ लिया। उस रात नादिया को बहुत मारा पीटा गया और कपड़े उतारकर उसे गार्ड्स के हवाले कर दिया गया। उस रात वो तब तक रेप का शिकार हुई, जब तक वो बेहोश नहीं हो गई। नादिया ने उस खौफनाक वक्त को याद करते हुए बताया कि उसे पूरे तीन महीने एक सेक्स स्लेव की तरह रखा गया। नादिया के मुताबिक, औरतों और लड़कियों की जिंदगी खराब करने के लिए आतंकी रेप को अपना सबसे बड़ा हथियार मानते हैं। ताकि महिलाएं फिर कभी भी पहले की तरह सामान्य जिंदगी न जी सकें। नादिया ने बताया कि मोसुल में हजारों की संख्या में यजीदी महिलाएं और बच्चे बंधक बनाकर रखे गए थे, जिन्हें आतंकी एक-दूसरे से गिफ्ट के तौर पर बदलते थे। नादिया ने आईएस से छुटकारा दिलाने की संयुक्त राष्ट्र से अपील की। उसकी आपबीती सुन यूएन के सिक्युरिटी काउंसिल के कई मेंबर्स भी रो पड़े और उन्होंने नादिया की हिम्मत की तारीफ की। वहीं, यूएन ने कहा कि इस्लामिक स्टेट यजीदी समुदाय को खत्म करने के लिए नरसंहार को अंजाम देने की कोशिश कर सकता है। यूएन ने। सिक्युरिटी काउंसिल से इस मुद्दे को इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में ले जाने की अपील की।
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फिल्मी पर्दे से लेकर राजनीतिक गलियारों में नगमा के खूब चर्चे रहे हैं।
बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन (varun dhawan) और श्रद्धा कपूर (shraddha kapoor) इन दिनों अपनी आगामी फिल्म "स्ट्रीट डांसर 3डी" (street dancer 3d) के प्रोमोशन में जोरों-शोरों से लगे हुए हैं। हाल ही में फिल्म का पहला गाना "मुकाबला" (muqabla) रिलीज हुआ था जिससे दर्शकों ने खूब पसंद किया है।
जबसे फिल्म "स्ट्रीट डांसर 3डी" (street dancer 3d) का ट्रेलर (trailer) रिलीज हुआ है तभी से फिल्म खूब चर्चा में आ गई है। फिल्म में वरुण धवन (varun dhawan), श्रद्धा कपूर (shraddha kapoor) , प्रभुदेवा (prabhudeva) और नोरा फतेही (nora fatehi) भी लीड रोल में हैंं।
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फिल्मी पर्दे से लेकर राजनीतिक गलियारों में नगमा के खूब चर्चे रहे हैं। बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन और श्रद्धा कपूर इन दिनों अपनी आगामी फिल्म "स्ट्रीट डांसर तीनडी" के प्रोमोशन में जोरों-शोरों से लगे हुए हैं। हाल ही में फिल्म का पहला गाना "मुकाबला" रिलीज हुआ था जिससे दर्शकों ने खूब पसंद किया है। जबसे फिल्म "स्ट्रीट डांसर तीनडी" का ट्रेलर रिलीज हुआ है तभी से फिल्म खूब चर्चा में आ गई है। फिल्म में वरुण धवन , श्रद्धा कपूर , प्रभुदेवा और नोरा फतेही भी लीड रोल में हैंं।
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पिथौरागढ़। हुड़ेती गांव के जंगलों में कश्मीरी अखरोट के पौधे रोपे गए हैं। रविवार को पिथौरागढ़ स्थित हुड़ेती गांव निवासी शिक्षक दंपति राजेश मोहन उप्रेती व उषा उप्रेती की पहल पर जीआईसी सुकौली रोड स्थित कौशल्या माता मंदिर के जंगल में कश्मीर कागजी अखरोट के 20 पौंधे रोपे। पौंधों की सुरक्षा के लिए जाली से उन्हें ढका गया है। जहां पौंधों की सुरक्षा के लिए युवाओं की टीम का भी गठन किया गया। जिसमें गणेश उप्रेती, रमेश उप्रेती, सुबोध उप्रेती, रजत उप्रेती, अजय उप्रेती, चंदन जोशी, सचिन, हर्षित, कौशल, नितिन मौजूद रहे।
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पिथौरागढ़। हुड़ेती गांव के जंगलों में कश्मीरी अखरोट के पौधे रोपे गए हैं। रविवार को पिथौरागढ़ स्थित हुड़ेती गांव निवासी शिक्षक दंपति राजेश मोहन उप्रेती व उषा उप्रेती की पहल पर जीआईसी सुकौली रोड स्थित कौशल्या माता मंदिर के जंगल में कश्मीर कागजी अखरोट के बीस पौंधे रोपे। पौंधों की सुरक्षा के लिए जाली से उन्हें ढका गया है। जहां पौंधों की सुरक्षा के लिए युवाओं की टीम का भी गठन किया गया। जिसमें गणेश उप्रेती, रमेश उप्रेती, सुबोध उप्रेती, रजत उप्रेती, अजय उप्रेती, चंदन जोशी, सचिन, हर्षित, कौशल, नितिन मौजूद रहे।
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पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार को प्रदर्शनकारी पहलवानों का समर्थन करते हुए भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
नई दिल्लीः पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार को प्रदर्शनकारी पहलवानों का समर्थन करते हुए भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की और कहा कि गैर जमानती पोस्को कानून के तहत मामला दर्ज होने के बावजूद उसे अभी तक गिरफ्तार क्यो नहीं किया गया है।
बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट समेत भारत के शीर्ष पहलवान बृजभूषण के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हैं। भाजपा सांसद बृजभूषण के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज हैं।
सिद्धू से पहले प्रियंका गांधी और भूपिंदर सिंह हुड्डा, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी, जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक, दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी सिंह और सौरभ भारद्वाज भी पिछले आठ दिन में धरना स्थल पर पहुंच चुके हैं।
उन्होंने ट्वीट किया, "प्राथमिकी दर्ज करने में देर क्यो की गई। प्राथमिकी सार्वजनिक नहीं करने से साफ है कि उसमें गंभीरता नहीं है और पहलवानों की शिकायत के अनुरूप नहीं है। " उन्होंने कहा, "मकसद साफ है कि दोषी को बचाना है। मामले को ढका जा रहा है। प्राथमिकी दर्ज करने में विलंब करने वाले अधिकारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 166 के तहत कार्रवाई क्यो नहीं की गई। "
उन्होंने कहा, "पोस्को कानून के तहत मामले गैर जमानती हैं। अभी तक गिरफ्तारी क्यो नहीं हुई है। ताकतवर लोगों के लिये क्या अलग कानून है। वह व्यक्ति इतना प्रभावशाली क्यो बना हुआ है जो कैरियर बना और बिगाड़ सकता है। " सिद्धू ने कहा, "यह लड़ाई औरतों के सम्मान और गरिमा की है। "
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पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार को प्रदर्शनकारी पहलवानों का समर्थन करते हुए भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। नई दिल्लीः पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार को प्रदर्शनकारी पहलवानों का समर्थन करते हुए भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की और कहा कि गैर जमानती पोस्को कानून के तहत मामला दर्ज होने के बावजूद उसे अभी तक गिरफ्तार क्यो नहीं किया गया है। बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट समेत भारत के शीर्ष पहलवान बृजभूषण के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हैं। भाजपा सांसद बृजभूषण के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज हैं। सिद्धू से पहले प्रियंका गांधी और भूपिंदर सिंह हुड्डा, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी, जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक, दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी सिंह और सौरभ भारद्वाज भी पिछले आठ दिन में धरना स्थल पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने ट्वीट किया, "प्राथमिकी दर्ज करने में देर क्यो की गई। प्राथमिकी सार्वजनिक नहीं करने से साफ है कि उसमें गंभीरता नहीं है और पहलवानों की शिकायत के अनुरूप नहीं है। " उन्होंने कहा, "मकसद साफ है कि दोषी को बचाना है। मामले को ढका जा रहा है। प्राथमिकी दर्ज करने में विलंब करने वाले अधिकारी के खिलाफ आईपीसी की धारा एक सौ छयासठ के तहत कार्रवाई क्यो नहीं की गई। " उन्होंने कहा, "पोस्को कानून के तहत मामले गैर जमानती हैं। अभी तक गिरफ्तारी क्यो नहीं हुई है। ताकतवर लोगों के लिये क्या अलग कानून है। वह व्यक्ति इतना प्रभावशाली क्यो बना हुआ है जो कैरियर बना और बिगाड़ सकता है। " सिद्धू ने कहा, "यह लड़ाई औरतों के सम्मान और गरिमा की है। "
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हरियाणा पुलिस कांस्टेबल पेपर लीक मामले में वांछित आरोपी को सीआईए-2 पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामले में कैथल पुलिस अब तक कुल 44 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। आरोपी को अदालत में पेश कर व्यापक पूछताछ के लिए 6 दिन का रिमांड पुलिस ने हासिल किया है।
पुलिस अधीक्षक लोकेंद्र सिंह ने बताया कि सीआईए-2 प्रभारी इंस्पेक्टर सोमबीर सिंह की टीम ने कांस्टेबल पेपर लीक मामले में वांछित आरोपी विकास उर्फ विक्की निवासी फरमाना को गिरफ्तार कर लिया। मामले में गिरफ्तार हो चुके आरोपी वेदप्रकाश निवासी रिटौली जिला रोहतक के साथ आरोपी विकास वारदात में लिप्त था। दोनों ने मिलकर आगे कैंडिडेट्स को आंसर-की उपलब्ध करवाई थी। मामले में पुलिस 10 इनामी आरोपियों सहित 44 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस की गिरफ्त में पेपर लीक का आरोपी फरमाना का विकास।
कैथल सीआईए-1 टीम ने 7 अगस्त को माता गेट कैथल के पास से हरियाणा पुलिस कांस्टेबल लिखित परीक्षा लीक करवाने के मामले में संदीप और गौतम दोनों निवासी खापड जिला जींद के साथ नवीन निवासी प्यौदा को आंसर-की सहित काबू किया था। कैथल पुलिस ने मुख्यारोपी को गिरफ्तार करने सहित पूरे गिरोह का भंडाफोड किया है।
- नवीन गांव प्यौदा जिला कैथल।
- संदीप गांव खापड़ जिला जींद।
- गौतम गांव खापड़ जिला जींद।
- रमेश गांव थुआ जिला जींद।
- राजेश गांव किछाना जिला कैथल।
- अनिल गांव थुआ जिला जींद।
- संदीप गांव थुआ जिला जींद।
- संदीप गांव तारखां कलां जिला जींद।
- राजबीर गांव दरौली खेड़ा जिला जींद।
- राजेश गांव उचाना खुर्द जिला जींद।
- अशोक गांव उचाना कला जिला जींद।
- सुरेंद्र उर्फ बिट्टू गांव से सेगा जिला कैथल।
- राजकुमार उर्फ राजू गांव खांडा खेड़ी जिला हिसार।
- अंकित गांव धमतान साहिब जिला जींद।
- विकास गांव धमतान साहिब जिला जींद।
- नसीर अहमद जिला पुलवामा जम्मू-कश्मीर।
- बलजीत सिंह गांव कुंबा खेड़ा जिला हिसार।
- अमन गांव का कापड़ो जिला हिसार।
- सुशील गांव कुचराना कलां जिला जींद।
- नरेश गांव सौंगरी जिला कैथल।
- नसीब गांव ब्राह्मणी वाला जिला कैथल।
- मुकेश थानेसर कुरुक्षेत्र।
- सोनू उकलाना जिला हिसार।
- मुजफ्फर अहमद खान, निवासी गुल, जिला रामबन (जम्मू)
- अशोक उर्फ शोकी, निवासी खुडाना जिला महेंद्रगढ।
- कुलदीप, निवासी गांव खांडाखेडी जिला हिसार।
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हरियाणा पुलिस कांस्टेबल पेपर लीक मामले में वांछित आरोपी को सीआईए-दो पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामले में कैथल पुलिस अब तक कुल चौंतालीस आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। आरोपी को अदालत में पेश कर व्यापक पूछताछ के लिए छः दिन का रिमांड पुलिस ने हासिल किया है। पुलिस अधीक्षक लोकेंद्र सिंह ने बताया कि सीआईए-दो प्रभारी इंस्पेक्टर सोमबीर सिंह की टीम ने कांस्टेबल पेपर लीक मामले में वांछित आरोपी विकास उर्फ विक्की निवासी फरमाना को गिरफ्तार कर लिया। मामले में गिरफ्तार हो चुके आरोपी वेदप्रकाश निवासी रिटौली जिला रोहतक के साथ आरोपी विकास वारदात में लिप्त था। दोनों ने मिलकर आगे कैंडिडेट्स को आंसर-की उपलब्ध करवाई थी। मामले में पुलिस दस इनामी आरोपियों सहित चौंतालीस आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस की गिरफ्त में पेपर लीक का आरोपी फरमाना का विकास। कैथल सीआईए-एक टीम ने सात अगस्त को माता गेट कैथल के पास से हरियाणा पुलिस कांस्टेबल लिखित परीक्षा लीक करवाने के मामले में संदीप और गौतम दोनों निवासी खापड जिला जींद के साथ नवीन निवासी प्यौदा को आंसर-की सहित काबू किया था। कैथल पुलिस ने मुख्यारोपी को गिरफ्तार करने सहित पूरे गिरोह का भंडाफोड किया है। - नवीन गांव प्यौदा जिला कैथल। - संदीप गांव खापड़ जिला जींद। - गौतम गांव खापड़ जिला जींद। - रमेश गांव थुआ जिला जींद। - राजेश गांव किछाना जिला कैथल। - अनिल गांव थुआ जिला जींद। - संदीप गांव थुआ जिला जींद। - संदीप गांव तारखां कलां जिला जींद। - राजबीर गांव दरौली खेड़ा जिला जींद। - राजेश गांव उचाना खुर्द जिला जींद। - अशोक गांव उचाना कला जिला जींद। - सुरेंद्र उर्फ बिट्टू गांव से सेगा जिला कैथल। - राजकुमार उर्फ राजू गांव खांडा खेड़ी जिला हिसार। - अंकित गांव धमतान साहिब जिला जींद। - विकास गांव धमतान साहिब जिला जींद। - नसीर अहमद जिला पुलवामा जम्मू-कश्मीर। - बलजीत सिंह गांव कुंबा खेड़ा जिला हिसार। - अमन गांव का कापड़ो जिला हिसार। - सुशील गांव कुचराना कलां जिला जींद। - नरेश गांव सौंगरी जिला कैथल। - नसीब गांव ब्राह्मणी वाला जिला कैथल। - मुकेश थानेसर कुरुक्षेत्र। - सोनू उकलाना जिला हिसार। - मुजफ्फर अहमद खान, निवासी गुल, जिला रामबन - अशोक उर्फ शोकी, निवासी खुडाना जिला महेंद्रगढ। - कुलदीप, निवासी गांव खांडाखेडी जिला हिसार।
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हर वर्ष 'विश्व फोटोग्राफी दिवस' (World Photography Day) कब मनाया जाता है?
हाल ही में, 19 अगस्त 2020 को दुनियाभर में विश्व फोटोग्राफी दिवस (World Photography Day 2020) मनाया गया है। इस दिवस को मनाने के मकसद दुनियाभर के फोटोग्राफरों को एकजुट करना है। पाठकों को बता दे की ऑस्ट्रेलियाई फोटोग्राफर कोर्स्के आरा ने वर्ष 2009 में विश्व फोटोग्राफी दिवस योजना की शुरुआत की। विश्व फोटोग्राफी दिवस पर 19 अगस्त 2010 को पहले वैश्विक ऑनलाइन गैलरी का आयोजन किया गया था।
Haal Hee Me , 19 August 2020 Ko DuniyaBhar Me Vishwa Photography Diwas (World Photography Day 2020) Manaya Gaya Hai . Is Diwas Ko Manane Ke Maksad DuniyaBhar Ke फोटोग्राफरों Ko ekjut Karna Hai . Pathakon Ko Bata De Ki Australian Photographer कोर्स्के Aara ne Varsh 2009 Me Vishwa Photography Diwas Yojana Ki Shuruat Ki . Vishwa Photography Diwas Par 19 August 2010 Ko Pehle Vaishwik Online Gallery Ka Aayojan Kiya Gaya Tha .
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हर वर्ष 'विश्व फोटोग्राफी दिवस' कब मनाया जाता है? हाल ही में, उन्नीस अगस्त दो हज़ार बीस को दुनियाभर में विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाया गया है। इस दिवस को मनाने के मकसद दुनियाभर के फोटोग्राफरों को एकजुट करना है। पाठकों को बता दे की ऑस्ट्रेलियाई फोटोग्राफर कोर्स्के आरा ने वर्ष दो हज़ार नौ में विश्व फोटोग्राफी दिवस योजना की शुरुआत की। विश्व फोटोग्राफी दिवस पर उन्नीस अगस्त दो हज़ार दस को पहले वैश्विक ऑनलाइन गैलरी का आयोजन किया गया था। Haal Hee Me , उन्नीस अगस्तust दो हज़ार बीस Ko DuniyaBhar Me Vishwa Photography Diwas Manaya Gaya Hai . Is Diwas Ko Manane Ke Maksad DuniyaBhar Ke फोटोग्राफरों Ko ekjut Karna Hai . Pathakon Ko Bata De Ki Australian Photographer कोर्स्के Aara ne Varsh दो हज़ार नौ Me Vishwa Photography Diwas Yojana Ki Shuruat Ki . Vishwa Photography Diwas Par उन्नीस अगस्तust दो हज़ार दस Ko Pehle Vaishwik Online Gallery Ka Aayojan Kiya Gaya Tha .
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रहा है। तन की आँखें खुली और पतझड़ के प्रातःकालीन धूमिल आलोक में देफोर्गे को उसने देखा । फ्राँसीसी एक हाथ में में पिस्तौल लिये दूसरे हाथ से वह बहुमूल्य बेग खोल रहा था । मारे भय के पानी-पानी हो गया ।
"क्या है ? यह क्या कर रहे हो; मोस्सो ? यह कैसा काम है. मोस्सो ?"-- लड़खड़ाती फ्रेंच भाषा में वह बोला : ।
"चुप ! चुप रहो ! नहीं तो जान से हाथ धोना पड़ेगा ! मैं दुब्रोफ्स्की हूँ !" - मृह-शिक्षक ने विशुद्ध रूसी भाषा में जवाब दिया।
अब हम अपनी कहानी की घटनाओं से सम्बन्धित उन परि स्थियों की व्याख्या करना चाहते हैं, जिनके विवृत करने का समय अभी हमें नहीं मिला है ।
पड़ाव - मुशी का उल्लेख पहले एक बार हो चुका है। उसी के घर के एक कोने में एक यात्री बैठा था। उसके चेहरे पर विनम्रः और निस्पृह भाव विद्यमान होना उसकी नीच जात और विदेशीपन को बता रहा था। अर्थात् एक आदमी जिसका पड़ाव पर कोई अधिकार नहीं। उसकी छोटी-सी गाड़ी आँगन में पड़ी तेल का इंतजार कर रही थी। उस पर एक छोटा सा सूटकेस था,
जिसका परिमाण उसके साधन की हीनता बता रहा था । उस यात्री ने न चाय के लिये आदेश दिया न कॉफी के लिये । मुँह की सीटी बजाता खिड़की के बाहर ताकता रहा । और उसकी सीटी से पिछले कमरे में बैठी पड़ाव - मुँशो को पत्नी परेशान हो रही थी ।
मुँशी की पत्नी द्व्नी जबान में बोली- "दूर हो कलमुँहा, सीटी बजा बजाके कान खाये जा रहा है ! कैसी है इसकी आदत ! हरामजादे बेदीन पर गाज गिरे !"
"क्यों ? इससे हमारा क्या बिगड़ता है ? उसे सीटी बजाने दो ।" मुंशी ने कहा ।
"हमारा क्या विगड़ता है ! क्या तुम्हें वह कहावत याद नहीं ?" उसकी पत्नी क्रुद्ध स्वर में बोली ।
"कैसी कहावत ? यही न कि मुँह की सीटो बजाने से लक्ष्मी भाग जाती है ? यह बिल्कुल वाहियात है पहोमोन्ना ! हमारे लिये ? सीटी कां बजाना-न बजाना बराबर है। हमारे पास लक्ष्मी आई ही कब जो भाग जायगी ?"
"उसे यहाँ से बिदा करो सिदोरिच् ! नाहक रोक रखने से फायदा क्या ? घोड़े उसे दे दो, और जहन्नुम में जान दो।"
"वह इन्तजार कर सकता है पहोमोव्ना ! केवल तीन ही तैयार हैं। चौथी आराम कर रही है। किसी भी
दम अच्छे यात्री आ धमकेंगे। इस फ्रांसीसी की खातिर में अपनी पीठफोड़वाना नहीं चाहता। हः ! मैं सोच ही रहा था !
वह देखो किसी की गाड़ी इसी ओर आ रही है । उफ् ! कितनी तेज आ रही है ! मुझे भय है कहीं कोई जनरल न हो ?"
एक गाड़ी पौढ़ियों तक आके खड़ी हो गई । कोच बक्स पर से नौकर कूदकर नीचे आया। गाड़ी का दरवाजा उसने खोल दिया, और एक मिनट के अन्दर ही फौजी पोशाक और सफेद टोपी पहने एक नौजवान पड़ाव - मुंशी के घर में प्रविष्ट हुआ । उसके पीछे हाथ में बक्सा लिये नौकर प्रविष्ट हुआ । बक्से को उसने खिड़की की ताक पर रख दिया ।
"घोड़े !" - अफसर ने रौब के साथ कहा ।
"हाँ बाबू जी ! अपना पास जरा दिखलायेंगे सरकार ?". मुँशी ने जवाब दिया ।
"मेरे पास पास-वास नहीं ! मैं खास रास्ते से नहीं जा क्या तुम मुझे जानते नहीं ?"
रहा ।
पड़ाव - मुँशी घबड़ा गया । चट कमरे से बाहर आकर कोचवान को जल्द गाड़ी तैयार करने की ताकीद कर दी। वह नौजवान कमरे के भीतर चहल कदम करते हुए पिछवाड़े के कमरे में जाकर मुशी की पत्नी से चुपके से पूछा - "यह दूसरा यात्री कौन है ?"
"भगवान जानें कौन है ! कोई फ्राँसीसी है। घोड़े के लिये बैठा है। और पाँच घंटे से मुँह की सीटी बजाये जा रहा है । मेरा तो नाक में दम कर दिया है ! बज्र गिरे उस पर !"
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रहा है। तन की आँखें खुली और पतझड़ के प्रातःकालीन धूमिल आलोक में देफोर्गे को उसने देखा । फ्राँसीसी एक हाथ में में पिस्तौल लिये दूसरे हाथ से वह बहुमूल्य बेग खोल रहा था । मारे भय के पानी-पानी हो गया । "क्या है ? यह क्या कर रहे हो; मोस्सो ? यह कैसा काम है. मोस्सो ?"-- लड़खड़ाती फ्रेंच भाषा में वह बोला : । "चुप ! चुप रहो ! नहीं तो जान से हाथ धोना पड़ेगा ! मैं दुब्रोफ्स्की हूँ !" - मृह-शिक्षक ने विशुद्ध रूसी भाषा में जवाब दिया। अब हम अपनी कहानी की घटनाओं से सम्बन्धित उन परि स्थियों की व्याख्या करना चाहते हैं, जिनके विवृत करने का समय अभी हमें नहीं मिला है । पड़ाव - मुशी का उल्लेख पहले एक बार हो चुका है। उसी के घर के एक कोने में एक यात्री बैठा था। उसके चेहरे पर विनम्रः और निस्पृह भाव विद्यमान होना उसकी नीच जात और विदेशीपन को बता रहा था। अर्थात् एक आदमी जिसका पड़ाव पर कोई अधिकार नहीं। उसकी छोटी-सी गाड़ी आँगन में पड़ी तेल का इंतजार कर रही थी। उस पर एक छोटा सा सूटकेस था, जिसका परिमाण उसके साधन की हीनता बता रहा था । उस यात्री ने न चाय के लिये आदेश दिया न कॉफी के लिये । मुँह की सीटी बजाता खिड़की के बाहर ताकता रहा । और उसकी सीटी से पिछले कमरे में बैठी पड़ाव - मुँशो को पत्नी परेशान हो रही थी । मुँशी की पत्नी द्व्नी जबान में बोली- "दूर हो कलमुँहा, सीटी बजा बजाके कान खाये जा रहा है ! कैसी है इसकी आदत ! हरामजादे बेदीन पर गाज गिरे !" "क्यों ? इससे हमारा क्या बिगड़ता है ? उसे सीटी बजाने दो ।" मुंशी ने कहा । "हमारा क्या विगड़ता है ! क्या तुम्हें वह कहावत याद नहीं ?" उसकी पत्नी क्रुद्ध स्वर में बोली । "कैसी कहावत ? यही न कि मुँह की सीटो बजाने से लक्ष्मी भाग जाती है ? यह बिल्कुल वाहियात है पहोमोन्ना ! हमारे लिये ? सीटी कां बजाना-न बजाना बराबर है। हमारे पास लक्ष्मी आई ही कब जो भाग जायगी ?" "उसे यहाँ से बिदा करो सिदोरिच् ! नाहक रोक रखने से फायदा क्या ? घोड़े उसे दे दो, और जहन्नुम में जान दो।" "वह इन्तजार कर सकता है पहोमोव्ना ! केवल तीन ही तैयार हैं। चौथी आराम कर रही है। किसी भी दम अच्छे यात्री आ धमकेंगे। इस फ्रांसीसी की खातिर में अपनी पीठफोड़वाना नहीं चाहता। हः ! मैं सोच ही रहा था ! वह देखो किसी की गाड़ी इसी ओर आ रही है । उफ् ! कितनी तेज आ रही है ! मुझे भय है कहीं कोई जनरल न हो ?" एक गाड़ी पौढ़ियों तक आके खड़ी हो गई । कोच बक्स पर से नौकर कूदकर नीचे आया। गाड़ी का दरवाजा उसने खोल दिया, और एक मिनट के अन्दर ही फौजी पोशाक और सफेद टोपी पहने एक नौजवान पड़ाव - मुंशी के घर में प्रविष्ट हुआ । उसके पीछे हाथ में बक्सा लिये नौकर प्रविष्ट हुआ । बक्से को उसने खिड़की की ताक पर रख दिया । "घोड़े !" - अफसर ने रौब के साथ कहा । "हाँ बाबू जी ! अपना पास जरा दिखलायेंगे सरकार ?". मुँशी ने जवाब दिया । "मेरे पास पास-वास नहीं ! मैं खास रास्ते से नहीं जा क्या तुम मुझे जानते नहीं ?" रहा । पड़ाव - मुँशी घबड़ा गया । चट कमरे से बाहर आकर कोचवान को जल्द गाड़ी तैयार करने की ताकीद कर दी। वह नौजवान कमरे के भीतर चहल कदम करते हुए पिछवाड़े के कमरे में जाकर मुशी की पत्नी से चुपके से पूछा - "यह दूसरा यात्री कौन है ?" "भगवान जानें कौन है ! कोई फ्राँसीसी है। घोड़े के लिये बैठा है। और पाँच घंटे से मुँह की सीटी बजाये जा रहा है । मेरा तो नाक में दम कर दिया है ! बज्र गिरे उस पर !"
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BJP Amit Shah West Bengal Rally: पश्चिम बंगाल के कोलकाता के शहीद मीनार मैदान में रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली का आयोजन किया गया था। इस रैली में जाते हुए भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने पार्टी का झंडा लहराते हुए "गोली मारो..." नारेबाजी की थी। पुलिस ने इस मामले में तीन भाजपाई को गिरफ्तार किया है।
दरअसल 'गोली मारो...' नारा दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के एक मंत्री की सभा में पहली बार लगाया गया था। इसके बाद पिछले दिनों दिल्ली के राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर भी कुछ लोगों ने यह नारा लगाया था, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया था।
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BJP Amit Shah West Bengal Rally: पश्चिम बंगाल के कोलकाता के शहीद मीनार मैदान में रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली का आयोजन किया गया था। इस रैली में जाते हुए भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने पार्टी का झंडा लहराते हुए "गोली मारो..." नारेबाजी की थी। पुलिस ने इस मामले में तीन भाजपाई को गिरफ्तार किया है। दरअसल 'गोली मारो...' नारा दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के एक मंत्री की सभा में पहली बार लगाया गया था। इसके बाद पिछले दिनों दिल्ली के राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर भी कुछ लोगों ने यह नारा लगाया था, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया था।
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30 मार्च 2023, नई दिल्लीः मध्य भारत में खाद्य एंव बागवानी फसलों को व्यापक नुकसानः क्रिसिल - मार्च 2023 की क्रिसिल की मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि रबी फसलों के लिए चल रही कटाई को बेमौसम बारिश ने झकझोर कर रख दिया हैं, जिससे रबी की फसलों को बहुतायत नुकसान हुआ है - इनमें से कुछ फसले पहले से ही काटी जा चुकी हैं, कुछ फसल कटाई के लिए तैयार हैं, और कुछ पकने को तैयार हैं।
1 मार्च से 21 मार्च, 2022 के बीच संचयी बारिश सामान्य से 20% अधिक और पिछले चार दिनों में सामान्य से 3-4 गुना अधिक रही है। 21 मार्च को मध्य भारत में बारिश की मात्रा सामान्य से ~1600% अधिक थी।
मध्य भारत, जिसमें मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं, में बारिश ने खाद्य और बागवानी दोनों फसलों को व्यापक नुकसान पहुँचाया हैं।
नासिक, महाराष्ट्र में लगभग 5-10% प्याज की फसल (वर्तमान में कटाई के चरण में) खराब हो गई है। अधिक नमी के कारण बल्ब सड़ने से रोकने के लिए किसानों से 8-10 दिनों तक कटाई में देरी होने की उम्मीद है। अंगूर की उपज 8-10% गिरने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश और गुजरात में, ओलावृष्टि से गेहूं में गिरावट आई है, जिसके परिणामस्वरूप 3-4% उपज का नुकसान हो सकता है। हालांकि, जूनागढ़, जो मुख्य रूप से केसर जैसी प्रीमियम आम की किस्मों को उगाता है, में केवल हल्की बारिश हुई है जो फसल के लिए हानिकारक नहीं है।
उत्तर और उत्तर पूर्व में बारिश सब्जियों और आम के लिए फायदेमंद रही है, लेकिन बिहार में इसने गेहूं और लीची की फसल को नुकसान पहुंचाया है। लीची के बाग पूरी तरह से खिले हुए थे और अधिक बारिश से फूलों में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जिससे पैदावार में साल दर साल 5-6% की कमी आने की उम्मीद है। बारिश के कारण कई स्थानों में गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है, जिससे उपज प्रभावित होगी।
पश्चिम बंगाल में धान के दानों में गिरावट देखी गई है, जबकि कूचबिहार और जलपाईगुड़ी में आलू की फसल को नुकसान पहुंचा है। अच्छी बात यह है कि यहां ज्यादातर आलू की खुदाई हो चुकी है, इसलिए नुकसान बहुत ज्यादा होने की संभावना नहीं है।
उत्तर-पश्चिम, जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान शामिल हैं, में भी गेहूं की फसल के खराब होने की स्थिति देखी गई है, जिससे पिछले अनुमानों की तुलना में गेंहू की उपज में 4-5% की गिरावट आ सकती है। फसल पकने की अवस्था में है और अप्रैल के पहले सप्ताह में काटी जानी थी लेकिन बेमौसम बारिश कटाई में देरी कर सकती है।
ईसबगोल और जीरा, दोनों बागवानी फसलों में राजस्थान के जोधपुर और नागौर में फली का नुकसान हुआ है और बीज गिर गए हैं। नतीजतन, राजस्थान में जीरे की पैदावार में 10-15% की गिरावट देखी जा रही है।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी धान के दानों में गिरावट आई है और मक्के की फसल गिरी हुई देखी गई है, जिससे मक्के की परिपक्वता प्रभावित होने की संभावना है। दोनों फसलों में लगभग 3-4% की उपज हानि की उम्मीद है। खरीफ मिर्च, जो सूखने की अवस्था में थी, नमी के अंतर्ग्रहण के कारण गुणवत्ता में सिकुड़ने या खराब होने की संभावना है। आंध्र प्रदेश के चित्तूर के आम के बागानो में फल लगने की अवस्था में कुछ नुकसान देखा गया है। इससे 4-5% कम उपज हो सकती है।
कर्नाटक में बागवानी फसलों को 5-10% नुकसान होने की उम्मीद है। टमाटर में फलों का सड़न रोग लग गया है, प्याज में अंकुर निकल आए हैं, अंगूर के फल गिर रहे हैं और सड़ रहे हैं, और अनार में टूटन देखी जा रही है। गेहूं, धान, जीरा, प्याज, टमाटर और आम को नुकसान होने से इनकी कीमतों पर असर पड़ेगा।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पिछले वर्ष के उच्च आधार पर रबी MY23 (विपणन वर्ष 2023) में गेहूं की कीमतों में मामूली वृद्धि होने की उम्मीद है। उपलब्ध स्टॉक और निर्यात मांग में कमी के कारण धान की कीमतें बढ़ेंगी।
इसके अलावा, रबी MY23 में महाराष्ट्र और कर्नाटक में देखी गई क्षति के कारण प्याज और टमाटर जैसी सब्जियों की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है।
आम की कीमतें अभी भी स्थिर रहेंगी क्योंकि गुजरात और बिहार में बड़े पैमाने पर नुकसान की कोई खबर नहीं है। वहीं, पैदावार में गिरावट के साथ जीरे की कीमतों में तेजी आ सकती है।
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तीस मार्च दो हज़ार तेईस, नई दिल्लीः मध्य भारत में खाद्य एंव बागवानी फसलों को व्यापक नुकसानः क्रिसिल - मार्च दो हज़ार तेईस की क्रिसिल की मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि रबी फसलों के लिए चल रही कटाई को बेमौसम बारिश ने झकझोर कर रख दिया हैं, जिससे रबी की फसलों को बहुतायत नुकसान हुआ है - इनमें से कुछ फसले पहले से ही काटी जा चुकी हैं, कुछ फसल कटाई के लिए तैयार हैं, और कुछ पकने को तैयार हैं। एक मार्च से इक्कीस मार्च, दो हज़ार बाईस के बीच संचयी बारिश सामान्य से बीस% अधिक और पिछले चार दिनों में सामान्य से तीन-चार गुना अधिक रही है। इक्कीस मार्च को मध्य भारत में बारिश की मात्रा सामान्य से ~एक हज़ार छः सौ% अधिक थी। मध्य भारत, जिसमें मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं, में बारिश ने खाद्य और बागवानी दोनों फसलों को व्यापक नुकसान पहुँचाया हैं। नासिक, महाराष्ट्र में लगभग पाँच-दस% प्याज की फसल खराब हो गई है। अधिक नमी के कारण बल्ब सड़ने से रोकने के लिए किसानों से आठ-दस दिनों तक कटाई में देरी होने की उम्मीद है। अंगूर की उपज आठ-दस% गिरने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश और गुजरात में, ओलावृष्टि से गेहूं में गिरावट आई है, जिसके परिणामस्वरूप तीन-चार% उपज का नुकसान हो सकता है। हालांकि, जूनागढ़, जो मुख्य रूप से केसर जैसी प्रीमियम आम की किस्मों को उगाता है, में केवल हल्की बारिश हुई है जो फसल के लिए हानिकारक नहीं है। उत्तर और उत्तर पूर्व में बारिश सब्जियों और आम के लिए फायदेमंद रही है, लेकिन बिहार में इसने गेहूं और लीची की फसल को नुकसान पहुंचाया है। लीची के बाग पूरी तरह से खिले हुए थे और अधिक बारिश से फूलों में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जिससे पैदावार में साल दर साल पाँच-छः% की कमी आने की उम्मीद है। बारिश के कारण कई स्थानों में गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है, जिससे उपज प्रभावित होगी। पश्चिम बंगाल में धान के दानों में गिरावट देखी गई है, जबकि कूचबिहार और जलपाईगुड़ी में आलू की फसल को नुकसान पहुंचा है। अच्छी बात यह है कि यहां ज्यादातर आलू की खुदाई हो चुकी है, इसलिए नुकसान बहुत ज्यादा होने की संभावना नहीं है। उत्तर-पश्चिम, जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान शामिल हैं, में भी गेहूं की फसल के खराब होने की स्थिति देखी गई है, जिससे पिछले अनुमानों की तुलना में गेंहू की उपज में चार-पाँच% की गिरावट आ सकती है। फसल पकने की अवस्था में है और अप्रैल के पहले सप्ताह में काटी जानी थी लेकिन बेमौसम बारिश कटाई में देरी कर सकती है। ईसबगोल और जीरा, दोनों बागवानी फसलों में राजस्थान के जोधपुर और नागौर में फली का नुकसान हुआ है और बीज गिर गए हैं। नतीजतन, राजस्थान में जीरे की पैदावार में दस-पंद्रह% की गिरावट देखी जा रही है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी धान के दानों में गिरावट आई है और मक्के की फसल गिरी हुई देखी गई है, जिससे मक्के की परिपक्वता प्रभावित होने की संभावना है। दोनों फसलों में लगभग तीन-चार% की उपज हानि की उम्मीद है। खरीफ मिर्च, जो सूखने की अवस्था में थी, नमी के अंतर्ग्रहण के कारण गुणवत्ता में सिकुड़ने या खराब होने की संभावना है। आंध्र प्रदेश के चित्तूर के आम के बागानो में फल लगने की अवस्था में कुछ नुकसान देखा गया है। इससे चार-पाँच% कम उपज हो सकती है। कर्नाटक में बागवानी फसलों को पाँच-दस% नुकसान होने की उम्मीद है। टमाटर में फलों का सड़न रोग लग गया है, प्याज में अंकुर निकल आए हैं, अंगूर के फल गिर रहे हैं और सड़ रहे हैं, और अनार में टूटन देखी जा रही है। गेहूं, धान, जीरा, प्याज, टमाटर और आम को नुकसान होने से इनकी कीमतों पर असर पड़ेगा। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पिछले वर्ष के उच्च आधार पर रबी MYतेईस में गेहूं की कीमतों में मामूली वृद्धि होने की उम्मीद है। उपलब्ध स्टॉक और निर्यात मांग में कमी के कारण धान की कीमतें बढ़ेंगी। इसके अलावा, रबी MYतेईस में महाराष्ट्र और कर्नाटक में देखी गई क्षति के कारण प्याज और टमाटर जैसी सब्जियों की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है। आम की कीमतें अभी भी स्थिर रहेंगी क्योंकि गुजरात और बिहार में बड़े पैमाने पर नुकसान की कोई खबर नहीं है। वहीं, पैदावार में गिरावट के साथ जीरे की कीमतों में तेजी आ सकती है।
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लैटिन शब्द एक्टियो में उत्पन्न, कार्रवाई की अवधारणा कुछ करने के लिए एक निष्क्रिय भूमिका होने या उस गतिविधि के परिणाम को रोकने के लिए संदर्भित करती है। यह उस प्रभाव के बारे में भी है जो एक एजेंट के पास एक निश्चित चीज पर होता है, एक लड़ाई का विकास , एक लड़ाई या लड़ाई, कुछ आंदोलनों और इशारों का एक सेट या तथ्यों या परिस्थितियों का एक उत्तराधिकार ।
भौतिकी के क्षेत्र में, क्रिया एक परिमाण का गठन करती है, जो एक प्रक्रिया के ढांचे के भीतर अवशोषित ऊर्जा के परिणाम के आधार पर होती है।
पेंटिंग की दुनिया में, कार्रवाई उस आसन या दृष्टिकोण का वर्णन करती है जो एक प्राकृतिक मॉडल का अधिग्रहण करती है जो एक चित्र को प्रेरित करती है।
वीडियो गेम को वर्गीकृत करने के कई तरीके हैं, और कई लोग कहते हैं कि शैलियों के बारे में बात करना सटीक नहीं है, क्योंकि विभिन्न लुडिक अनुभवों को अलग करने वाले लेबल उपयोगकर्ता को दी जाने वाली सामग्री के प्रकार को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उदाहरण के लिए, एक्शन टाइटल के समूह में, शूटिंग गेम, साथ ही साथ प्लेटफ़ॉर्म और स्पेसशिप भी होते हैं।
एक क्रिया भी एक लेखांकन उपकरण है जो प्रत्येक ऐसे एलिकोट्स का मूल्य बताता है, सूचित करता है और उसका प्रतिनिधित्व करता है जिसमें किसी कंपनी की पूंजी विभाजित होती है।
कार्रवाई की सिनेमाटोग्राफिक शैली में हिंसा और उसके दृश्यों की शानदार प्रकृति की विशेषता है। इस तरह की फिल्मों का कथानक आमतौर पर शूटिंग, झगड़े, उत्पीड़न और मृत्यु को प्रस्तुत करता है।
सिल्वेस्टर स्टेलोन, ब्रूस विलिस, जीन-क्लाउड वान डैम, स्टीवन सीगल और अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर कुछ सबसे प्रसिद्ध एक्शन अभिनेता हैं, जिन्होंने शैली की कई सफल फिल्मों में भाग लिया।
सामाजिक कार्रवाई को एक व्यक्ति या एक समूह के पक्ष में किए गए कृत्यों के रूप में परिभाषित किया जाता है जो उचित माना जाता है और अन्य व्यक्तियों को प्रभावित करता है जो असमान स्थितियों में किसी न किसी रूप में प्रभावित होते हैं।
जैसा कि दार्शनिक मैक्स वेबर द्वारा परिभाषित किया गया है, सभी मानवीय व्यवहार जिनकी मोटर विषयगत रूप से महत्वपूर्ण है और जिसका पर्यावरण में मूल्यवान परिवर्तन करने का प्रभाव है, जिसमें इसका नाम दिया जा सकता है। यह समझा जाता है कि एक सामाजिक कार्रवाई में दो पक्षों के बीच एक निर्धारित संबंध स्थापित होता है जो उस व्यवहार को चिह्नित करेगा जिसे हर कोई अपनाता है।यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि मनुष्य के बीच के प्रत्येक रिश्ते में एक सामाजिक चरित्र नहीं है। जब कोई व्यक्ति एक क्रिया करता है, तो यह उनकी मान्यताओं और विचारधाराओं से प्रेरित होता है; केवल इस मामले में कि उनके कार्य सकारात्मक रूप से उस वातावरण को प्रभावित करते हैं जिसमें वे विकसित होते हैं, हम सामाजिक कार्रवाई की बात कर सकते हैं।
वेबर ने खुद भी समाजशास्त्र को वैज्ञानिक क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया, जहां किसी ने सामाजिक कार्यों को समझने और व्याख्या करने की कोशिश की; इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समाज का पाठ्यक्रम कहां चल रहा है, कार्यों के परिणाम क्या होंगे और वे समूह के जीवन को कैसे बदलेंगे ।
यह तीन प्रकार की सामाजिक क्रियाओं में भी अंतर करता हैः
* पारंपरिक, व्यवहार जो विशेष रूप से वैचारिक सिद्धांतों, मानदंडों और रीति-रिवाजों से प्रेरित है। यह एक उत्तेजना की प्रतिक्रिया है जो निर्णय लेने के कारण का उपयोग किए बिना लगभग स्वचालित रूप से किया जाता है;
* स्नेहपूर्ण, एक तर्कहीन क्रिया जो एक भावना से प्रेरित होती है, या तो प्यार, नफरत या अन्य भावना;
* तर्कसंगत मूल्यों के अनुसार तर्कसंगत, एक तर्कसंगत उद्देश्य से प्रेरित। हालांकि, यह कार्रवाई उस विषय के नियमों या रीति-रिवाजों के अधीन है जो इसे वहन करते हैं।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि वेबर द्वारा लगाए गए समाजशास्त्र और सामाजिक कार्यों को समझने के इस तरीके के प्रति सभी धाराओं का झुकाव नहीं था। उदाहरण के लिए, कार्यात्मकता ने यह सुनिश्चित किया कि सामाजिक क्रिया हमेशा समूह के नियमों और मूल्यों द्वारा सीमित थी।
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लैटिन शब्द एक्टियो में उत्पन्न, कार्रवाई की अवधारणा कुछ करने के लिए एक निष्क्रिय भूमिका होने या उस गतिविधि के परिणाम को रोकने के लिए संदर्भित करती है। यह उस प्रभाव के बारे में भी है जो एक एजेंट के पास एक निश्चित चीज पर होता है, एक लड़ाई का विकास , एक लड़ाई या लड़ाई, कुछ आंदोलनों और इशारों का एक सेट या तथ्यों या परिस्थितियों का एक उत्तराधिकार । भौतिकी के क्षेत्र में, क्रिया एक परिमाण का गठन करती है, जो एक प्रक्रिया के ढांचे के भीतर अवशोषित ऊर्जा के परिणाम के आधार पर होती है। पेंटिंग की दुनिया में, कार्रवाई उस आसन या दृष्टिकोण का वर्णन करती है जो एक प्राकृतिक मॉडल का अधिग्रहण करती है जो एक चित्र को प्रेरित करती है। वीडियो गेम को वर्गीकृत करने के कई तरीके हैं, और कई लोग कहते हैं कि शैलियों के बारे में बात करना सटीक नहीं है, क्योंकि विभिन्न लुडिक अनुभवों को अलग करने वाले लेबल उपयोगकर्ता को दी जाने वाली सामग्री के प्रकार को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उदाहरण के लिए, एक्शन टाइटल के समूह में, शूटिंग गेम, साथ ही साथ प्लेटफ़ॉर्म और स्पेसशिप भी होते हैं। एक क्रिया भी एक लेखांकन उपकरण है जो प्रत्येक ऐसे एलिकोट्स का मूल्य बताता है, सूचित करता है और उसका प्रतिनिधित्व करता है जिसमें किसी कंपनी की पूंजी विभाजित होती है। कार्रवाई की सिनेमाटोग्राफिक शैली में हिंसा और उसके दृश्यों की शानदार प्रकृति की विशेषता है। इस तरह की फिल्मों का कथानक आमतौर पर शूटिंग, झगड़े, उत्पीड़न और मृत्यु को प्रस्तुत करता है। सिल्वेस्टर स्टेलोन, ब्रूस विलिस, जीन-क्लाउड वान डैम, स्टीवन सीगल और अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर कुछ सबसे प्रसिद्ध एक्शन अभिनेता हैं, जिन्होंने शैली की कई सफल फिल्मों में भाग लिया। सामाजिक कार्रवाई को एक व्यक्ति या एक समूह के पक्ष में किए गए कृत्यों के रूप में परिभाषित किया जाता है जो उचित माना जाता है और अन्य व्यक्तियों को प्रभावित करता है जो असमान स्थितियों में किसी न किसी रूप में प्रभावित होते हैं। जैसा कि दार्शनिक मैक्स वेबर द्वारा परिभाषित किया गया है, सभी मानवीय व्यवहार जिनकी मोटर विषयगत रूप से महत्वपूर्ण है और जिसका पर्यावरण में मूल्यवान परिवर्तन करने का प्रभाव है, जिसमें इसका नाम दिया जा सकता है। यह समझा जाता है कि एक सामाजिक कार्रवाई में दो पक्षों के बीच एक निर्धारित संबंध स्थापित होता है जो उस व्यवहार को चिह्नित करेगा जिसे हर कोई अपनाता है।यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि मनुष्य के बीच के प्रत्येक रिश्ते में एक सामाजिक चरित्र नहीं है। जब कोई व्यक्ति एक क्रिया करता है, तो यह उनकी मान्यताओं और विचारधाराओं से प्रेरित होता है; केवल इस मामले में कि उनके कार्य सकारात्मक रूप से उस वातावरण को प्रभावित करते हैं जिसमें वे विकसित होते हैं, हम सामाजिक कार्रवाई की बात कर सकते हैं। वेबर ने खुद भी समाजशास्त्र को वैज्ञानिक क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया, जहां किसी ने सामाजिक कार्यों को समझने और व्याख्या करने की कोशिश की; इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समाज का पाठ्यक्रम कहां चल रहा है, कार्यों के परिणाम क्या होंगे और वे समूह के जीवन को कैसे बदलेंगे । यह तीन प्रकार की सामाजिक क्रियाओं में भी अंतर करता हैः * पारंपरिक, व्यवहार जो विशेष रूप से वैचारिक सिद्धांतों, मानदंडों और रीति-रिवाजों से प्रेरित है। यह एक उत्तेजना की प्रतिक्रिया है जो निर्णय लेने के कारण का उपयोग किए बिना लगभग स्वचालित रूप से किया जाता है; * स्नेहपूर्ण, एक तर्कहीन क्रिया जो एक भावना से प्रेरित होती है, या तो प्यार, नफरत या अन्य भावना; * तर्कसंगत मूल्यों के अनुसार तर्कसंगत, एक तर्कसंगत उद्देश्य से प्रेरित। हालांकि, यह कार्रवाई उस विषय के नियमों या रीति-रिवाजों के अधीन है जो इसे वहन करते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि वेबर द्वारा लगाए गए समाजशास्त्र और सामाजिक कार्यों को समझने के इस तरीके के प्रति सभी धाराओं का झुकाव नहीं था। उदाहरण के लिए, कार्यात्मकता ने यह सुनिश्चित किया कि सामाजिक क्रिया हमेशा समूह के नियमों और मूल्यों द्वारा सीमित थी।
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पराधीनताका उल्लंघन कर सके ? पशु एक दूसरेका आहार कर मर जाते हैं। बहुतसे स्थावर और जंगम जीव वर्गका मनुष्य और तिर्यंच नित्य भक्षण करते हैं। बहुत से विकलेन्द्रिय व पचेन्द्रिय जीव परस्पर एक दूसरेको खाते है, इसमे कोई भ्रान्ति नही । उस क्रूर तरक्षने मुझे मारा और मैने उस कालसर्पका संहार किया। हे राजन् मारिदत्त । तुमने, स्वयं देख लिया कि मैंने कितने दुस्सह दुखका अनुभव किया है।
इस प्रकार मैंने तुम्हें अपनी बात बतला दी और तुमने उसे सुन भी लिया । अब यदि तुम हिंसाका परित्याग कर दो और अपने अहंकारको छोड़ दो तो पुष्पदन्तके समान परमपदको प्राप्त कर सकते हो ।।३७।।
इति महाकवि पुष्पदन्त विरचित महामन्त्री नन्दके कर्णामरण यशोधर महाराज चरित्र नामक महाकाव्य में यशोधर और चन्द्रमतीके मवान्तर वर्णन नामक द्वितीय सन्धि-परिच्छेद समाप्त ॥ २ ॥
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पराधीनताका उल्लंघन कर सके ? पशु एक दूसरेका आहार कर मर जाते हैं। बहुतसे स्थावर और जंगम जीव वर्गका मनुष्य और तिर्यंच नित्य भक्षण करते हैं। बहुत से विकलेन्द्रिय व पचेन्द्रिय जीव परस्पर एक दूसरेको खाते है, इसमे कोई भ्रान्ति नही । उस क्रूर तरक्षने मुझे मारा और मैने उस कालसर्पका संहार किया। हे राजन् मारिदत्त । तुमने, स्वयं देख लिया कि मैंने कितने दुस्सह दुखका अनुभव किया है। इस प्रकार मैंने तुम्हें अपनी बात बतला दी और तुमने उसे सुन भी लिया । अब यदि तुम हिंसाका परित्याग कर दो और अपने अहंकारको छोड़ दो तो पुष्पदन्तके समान परमपदको प्राप्त कर सकते हो ।।सैंतीस।। इति महाकवि पुष्पदन्त विरचित महामन्त्री नन्दके कर्णामरण यशोधर महाराज चरित्र नामक महाकाव्य में यशोधर और चन्द्रमतीके मवान्तर वर्णन नामक द्वितीय सन्धि-परिच्छेद समाप्त ॥ दो ॥
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गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी में दरार देखने पड़ गई है. वांसदा तालुका में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है. वांसदा तालुक के 100 से अधिक आप कार्यकर्ताओं ने पार्टी को छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है. गुजरात चुनाव से पहले संगठन के महासचिव समेत तमाम पदाधिकारियों के कांग्रेस में शामिल होने से सियासत गरमा गई है. गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी ने पहली बार सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया है. हालांकि उम्मीदवारों के नामों की घोषणा के बाद कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है.
बीजेपी ने आज गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए 160 उम्मीदवारों की सूची का एलान कर दिया है. जिसमें 14 महिलाओं को टिकट दिया गया है. हार्दिक पटेल को विरमगाम से टिकट दिया गया है. जबकि कई वरिष्ठ नेताओं का टिकट कट गया है. गुजरात में विजय सिंह रुपाणी और नितिन पटेल ने बुधवार रात को घोषणा की थी कि वे अगले महीने होने वाला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. भूपेंद्रसिंह चुडासमा और प्रदीप सिंह जड़ेजा ने भी एलान किया था कि वे आगामी चुनावों के लिए टिकट नहीं मांगेंगे.
बीजेपी ने गुजरात में आगामी विधानसभा चुनावों में जिन 38 मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया है उनमें मोरबी के विधायक समेत राज्य के पांच मंत्री शामिल हैं. मोरबी के विधायक और श्रम और रोजगार राज्य मंत्री बृजेश मेरजा का नाम बीजेपी द्वारा गुरूवार को जारी की गयी 160 उम्मीदवारों की सूची में शामिल नहीं है. गौरतलब है कि मोरबी में पिछले महीने पुल ढहने की घटना में 135 लोगों की मौत हो गयी थी. कच्छ जिले में 2012 और 2017 में भुज सीट से जीतने वाली गुजरात विधानसभा अध्यक्ष नीमाबेन आचार्य को भी पार्टी ने इस बार टिकट नहीं दिया है.
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गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी में दरार देखने पड़ गई है. वांसदा तालुका में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है. वांसदा तालुक के एक सौ से अधिक आप कार्यकर्ताओं ने पार्टी को छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है. गुजरात चुनाव से पहले संगठन के महासचिव समेत तमाम पदाधिकारियों के कांग्रेस में शामिल होने से सियासत गरमा गई है. गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी ने पहली बार सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया है. हालांकि उम्मीदवारों के नामों की घोषणा के बाद कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. बीजेपी ने आज गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए एक सौ साठ उम्मीदवारों की सूची का एलान कर दिया है. जिसमें चौदह महिलाओं को टिकट दिया गया है. हार्दिक पटेल को विरमगाम से टिकट दिया गया है. जबकि कई वरिष्ठ नेताओं का टिकट कट गया है. गुजरात में विजय सिंह रुपाणी और नितिन पटेल ने बुधवार रात को घोषणा की थी कि वे अगले महीने होने वाला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. भूपेंद्रसिंह चुडासमा और प्रदीप सिंह जड़ेजा ने भी एलान किया था कि वे आगामी चुनावों के लिए टिकट नहीं मांगेंगे. बीजेपी ने गुजरात में आगामी विधानसभा चुनावों में जिन अड़तीस मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया है उनमें मोरबी के विधायक समेत राज्य के पांच मंत्री शामिल हैं. मोरबी के विधायक और श्रम और रोजगार राज्य मंत्री बृजेश मेरजा का नाम बीजेपी द्वारा गुरूवार को जारी की गयी एक सौ साठ उम्मीदवारों की सूची में शामिल नहीं है. गौरतलब है कि मोरबी में पिछले महीने पुल ढहने की घटना में एक सौ पैंतीस लोगों की मौत हो गयी थी. कच्छ जिले में दो हज़ार बारह और दो हज़ार सत्रह में भुज सीट से जीतने वाली गुजरात विधानसभा अध्यक्ष नीमाबेन आचार्य को भी पार्टी ने इस बार टिकट नहीं दिया है.
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पैदा होने वाले संकट की बात सोच रहा था । तलवारें हमारा क्या कर लेंगी ? परन्तु बख्तखां और उसके छः हजार सिपाही बहुत आत पैदा कर सकते हैं और बादशाह खिसक गया तो मुसीबत पर मुसीबत आने की आशङ्का है -- विलसन की कल्पना में समाया ।
उसने इलाही बख्श से अनुरोध किया - नवाब साहब, बात तब है जब बादशाह बिना लड़ाई भिड़ाई करे कराये में समर्पण करदें । इलाही बख्श ने स्वीकार किया ।
बादशाह बहादुरशाह अपने परिवार और साथियों सहित हुमायूँ के मकबरे में थे । फौज-फांटा आस पास की बस्ती में डटा हुआ था । बहादुरशाह बहुत वृद्ध थे, परन्तु उनमें उत्साह था, कभी कभी कविता भी कर डालते थे । मकबरे के एक छोटे से स्थान में बैठे बहादुरशाह भविष्य की योजना पर सलाह कर रहे थे ।
बख्तखां आग्रह कर रहा था, - 'जहाँपनाह यहां से कूच करदें । जगह जगह लोग मुल्क के लिये, आपके लिये लड़ मरने के लिये तैयार हैं ।'
मिर्ज़ा इलाही बख्श हतोत्साहित कर रहा था, 'जहांपनाह, लड़ाई बेकार है । लड़ाई में खून खराबी और बरबादी के अलावा और कुछ भी हाथ नहीं लग सकता ।" इलाही बख्श ने अंग्रेजों के हथियारों, सेना की संख्या और उनके साधनों को बढ़ा चढ़ा कर सराहना की। बादशाह का मन गिर गया वह थोड़ी देर चुप रहे। फिर उन्होंने एक कविता कह डाली'दम दमें में दम नहीं अब खैर मांगो जान की,
ऐ जफ़र ठण्डी हुई तलवार हिन्दुस्तान की, ' बख्त खां के कलेजे में कांटा सा चुप गया । बोला, - 'जहांपनाह, बेअदबी माफ हो । हिन्दुस्तान की तलवार ठण्डी होना नहीं जानती । न ठण्डी हो सकती । और न कभी होगी । लखनऊ में लड़ाई जारी है । झांसी की रानी अपने इलाके में फौलाद की तरह मजबूत है ।'
बख्त खां कुछ और कहता, परन्तु बादशाह के रिश्तेदार मिर्जा इलाही बख्श के सामने उसे मन मसोस कर रह जाना पड़ा। मिर्जा ने नव्याख्या पेश की, 'मैंने पता लगा लिया है, लखनऊ पर कम्पनी सरकार की अनगिनत फौजें पहुँच रहीं है और झांसी तो एक सी पड़ी जगह है । अंग्रेजों का मुकाबला कितने घण्टों कर सकेगी ? खैर इसी में है जो जहांपनाह के शेर से बखूबी जाहिर हो रही है । श्राह! क्या फरमाया है- ठण्डी हुई तलवार हिन्दुस्तान की बख्त खां की सब दलीलें व्यर्थ गई । बादशाह ने आत्म-समर्पण का निश्चय किया । मिर्ज़ा इलाही बख्श के द्वारा श्रात्म-समर्पण का समाचार दिया गया ।
बादशाह की गिरफ्तारी के लिये जनरल विलसन ने अपने एक अफसर कप्तान हौडसन को चुना । हौडसन बड़ा दम्भी, दर्पी, क्रूर, और दुस्साहसी सैनिक था । वह सेना की एक टुकड़ी लेकर हुमायूँ के मकबरे पर जा पहुँचा । उसने बादशाह के पास संवाद भेजा, 'अपने सब हथियार मेरे पास भेज दो। जरा भी गड़बड़ की तो कुत्ते की मौत मारे जाओगे ।' अकबर और औरङ्गजेब के उत्तराधिकारी को एक साधारण फिरङ्गी की यह धमकी ! परन्तु इस धमकी के पीछे भारत का कितना इतिहास आंसू बहा रहा था !! बहादुरशाह को मानना पड़ा । वे कीमती तलवारें भी बहादुरशाह को हौडसन के सुपुर्द करनी पड़ीं ।
पालकी में बैठ कर बहादुरशाह जनरल विलसन के सामने पहुँच गये और तत्काल कैद कर लिये गये ।
हौडसन ने जनरल विलसन को सलाम फटकारा । जनरल बहुत प्रसन्न था । वहीं कहीं आशायें बाधे गम्भीर मुद्रा बनाये मिर्जा इलाहींबख्श भी उपस्थित था । जनरल ने हौडसन से कहा, 'मैं समझता था कि तुम या बादशाह कोई भी मेरे सामने न पाओगे ।
हौडसन ने फिर सलाम फटकारा और दोनों आपके सामने आ गये ।।
बोला, - 'लेकिन हम
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पैदा होने वाले संकट की बात सोच रहा था । तलवारें हमारा क्या कर लेंगी ? परन्तु बख्तखां और उसके छः हजार सिपाही बहुत आत पैदा कर सकते हैं और बादशाह खिसक गया तो मुसीबत पर मुसीबत आने की आशङ्का है -- विलसन की कल्पना में समाया । उसने इलाही बख्श से अनुरोध किया - नवाब साहब, बात तब है जब बादशाह बिना लड़ाई भिड़ाई करे कराये में समर्पण करदें । इलाही बख्श ने स्वीकार किया । बादशाह बहादुरशाह अपने परिवार और साथियों सहित हुमायूँ के मकबरे में थे । फौज-फांटा आस पास की बस्ती में डटा हुआ था । बहादुरशाह बहुत वृद्ध थे, परन्तु उनमें उत्साह था, कभी कभी कविता भी कर डालते थे । मकबरे के एक छोटे से स्थान में बैठे बहादुरशाह भविष्य की योजना पर सलाह कर रहे थे । बख्तखां आग्रह कर रहा था, - 'जहाँपनाह यहां से कूच करदें । जगह जगह लोग मुल्क के लिये, आपके लिये लड़ मरने के लिये तैयार हैं ।' मिर्ज़ा इलाही बख्श हतोत्साहित कर रहा था, 'जहांपनाह, लड़ाई बेकार है । लड़ाई में खून खराबी और बरबादी के अलावा और कुछ भी हाथ नहीं लग सकता ।" इलाही बख्श ने अंग्रेजों के हथियारों, सेना की संख्या और उनके साधनों को बढ़ा चढ़ा कर सराहना की। बादशाह का मन गिर गया वह थोड़ी देर चुप रहे। फिर उन्होंने एक कविता कह डाली'दम दमें में दम नहीं अब खैर मांगो जान की, ऐ जफ़र ठण्डी हुई तलवार हिन्दुस्तान की, ' बख्त खां के कलेजे में कांटा सा चुप गया । बोला, - 'जहांपनाह, बेअदबी माफ हो । हिन्दुस्तान की तलवार ठण्डी होना नहीं जानती । न ठण्डी हो सकती । और न कभी होगी । लखनऊ में लड़ाई जारी है । झांसी की रानी अपने इलाके में फौलाद की तरह मजबूत है ।' बख्त खां कुछ और कहता, परन्तु बादशाह के रिश्तेदार मिर्जा इलाही बख्श के सामने उसे मन मसोस कर रह जाना पड़ा। मिर्जा ने नव्याख्या पेश की, 'मैंने पता लगा लिया है, लखनऊ पर कम्पनी सरकार की अनगिनत फौजें पहुँच रहीं है और झांसी तो एक सी पड़ी जगह है । अंग्रेजों का मुकाबला कितने घण्टों कर सकेगी ? खैर इसी में है जो जहांपनाह के शेर से बखूबी जाहिर हो रही है । श्राह! क्या फरमाया है- ठण्डी हुई तलवार हिन्दुस्तान की बख्त खां की सब दलीलें व्यर्थ गई । बादशाह ने आत्म-समर्पण का निश्चय किया । मिर्ज़ा इलाही बख्श के द्वारा श्रात्म-समर्पण का समाचार दिया गया । बादशाह की गिरफ्तारी के लिये जनरल विलसन ने अपने एक अफसर कप्तान हौडसन को चुना । हौडसन बड़ा दम्भी, दर्पी, क्रूर, और दुस्साहसी सैनिक था । वह सेना की एक टुकड़ी लेकर हुमायूँ के मकबरे पर जा पहुँचा । उसने बादशाह के पास संवाद भेजा, 'अपने सब हथियार मेरे पास भेज दो। जरा भी गड़बड़ की तो कुत्ते की मौत मारे जाओगे ।' अकबर और औरङ्गजेब के उत्तराधिकारी को एक साधारण फिरङ्गी की यह धमकी ! परन्तु इस धमकी के पीछे भारत का कितना इतिहास आंसू बहा रहा था !! बहादुरशाह को मानना पड़ा । वे कीमती तलवारें भी बहादुरशाह को हौडसन के सुपुर्द करनी पड़ीं । पालकी में बैठ कर बहादुरशाह जनरल विलसन के सामने पहुँच गये और तत्काल कैद कर लिये गये । हौडसन ने जनरल विलसन को सलाम फटकारा । जनरल बहुत प्रसन्न था । वहीं कहीं आशायें बाधे गम्भीर मुद्रा बनाये मिर्जा इलाहींबख्श भी उपस्थित था । जनरल ने हौडसन से कहा, 'मैं समझता था कि तुम या बादशाह कोई भी मेरे सामने न पाओगे । हौडसन ने फिर सलाम फटकारा और दोनों आपके सामने आ गये ।। बोला, - 'लेकिन हम
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राजमहल कोल परियोजना की अधिगृहीत जमीन का सीमांकन करने पहुंचे पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारियों को लगातार दूसरे दिन भारी विराेध का सामना करना पड़ा. गुरुवार को प्रशासन, पुलिस व सुरक्षा बलों के बसडीहा मौजा पहुंचने पर विरोध कर रहे तीन गांव के आदिवासियों ने पथराव शुरू कर दिया. उग्र ग्रामीणों ने पथराव के साथ पुलिस पर तीर भी चलाये.
पथराव में एसडीपीओ शिवशंकर तिवारी सहित पांच जवान घायल हो गये. पैर में तीर लगने से हनवारा थाना के सुरक्षा जवान असफाक आलम घायल हो गये. उन्हें महागामा अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए लाठीचार्ज किया. आंसू गैस के गोले दागे. इस कार्रवाई में कई ग्रामीण भी घायल हो गये. इसके बाद ग्रामीण और भड़क उठे. ग्रामीणों का कहना था किसी भी हालत में जमीन नहीं देंगे.
सैकड़ों की संख्या में पहुंचे थे सुरक्षा बल :
परियोजना के बसडीहा मौजा में कोयला उत्खनन को लेकर परियोजना के पदाधिकारी व जिला प्रशासन के अधिकारी दो दिनाें से कैंप कर रहे हैं. गुरुवार को सैकड़ों की संख्या में पुलिस व सुरक्षा जवान कंटीली तार, पोकलेन व वज्रवाहन के साथ बसडीहा साइट पहुंचे थे.
पदाधिकारी व सुरक्षा जवानों को देखते ही विरोध कर रहे ग्रामीण उग्र हो गये. भिरंडा, बसडीहा, तालझाड़ी गांव के सैकड़ों आदिवासी तीर-धनुष व परंपरागत हथियार से लैस होकर विरोध करना शुरू कर दिये. दिन के करीब 12 बजे ग्रामीण अचानक उग्र होकर पथराव शुरू कर दिये. इसके बाद पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किया गया. पुलिस की इस कार्रवाई के बाद ग्रामीणों ने तीन चलाकर प्रतिकार किया. पुलिस की ओर से उग्र भीड़ को रोकने के लिये चार चक्र अश्रुगैस के साथ दो रबर के बुलेट दागे गये.
इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों को खदेड़ दिया. ज्ञात हो कि ग्रामीणों के विरोध को देखते बसडीहा क्षेत्र में एसडीओ ने धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू किया था. ग्रामीणों के सीमांकन एरिया में घुसने पर पाबंदी थी.
ग्रामीणों इस बात का भी विरोध है कि गांव में बिना ग्रामसभा कराये ही गलत तरीके से जमीन ली गयी है. जमीन पर लगी फसल का मुआवजा भी नहीं मिला.
तालझारी मौजा में 125 एकड़ जमीन अधिगृहीत की गयी है. इसको लेकर रैयतों को 10 करोड़ मुआवजा के साथ प्रभावित परिवारों के 22 सदस्यों को नौकरी दी गयी है. प्रशासन के सहयोग से जमीन का सीमांकन करने पहुंचे थे. ग्रामीण लगातार इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि परियोजना की ओर से नियम के तहत मुआवजा की राशि व नौकरी दी गयी है. अधिगृहीत जमीन पर रैयतों ने अरहर की फसल लगायी है. मुआवजे की मांग रहे हैं.
परियोजना की अधिगृहीत जमीन के सीमांकन को लेकर बसडीहा मौजा पहुंचे जिला प्रशासन एवं पुलिस बलों को देखकर उग्र ग्रामीणों ने विरोध करते हुए पथराव कर दिया. तीर भी चलाया गया. ग्रामीणों के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस की ओर से मामला शांत कराने को लेकर चार चक्र अश्रु गैस व दो रबर बुलेट चलाकर ग्रामीणों को खदेडा गया.
इसीएल को ग्रामीणों की ओर से 125 एकड़ जमीन तालझाड़ी मौजा में दिया गया है. प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को विश्वास में लेकर सीमांकन कराने का काम किया जा रहा है. सीमांकन का कार्य जारी रहेगा. बसडीहा मौजा में धारा 144 भी लगाया गया है. ,
तालझाड़ी मौजा में इसीएल की ओर से 2017 में 125 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था. ग्रामीणों ने कोयला खनन के लिए राजमहल कोल परियोजना को जमीन दी थी. मगर, पिछले पांच वर्षों से ग्रामीण विरोध करते हुए खुदाई शुरू करने नहीं दे रहे हैं. मुआवजा व प्रभावित रैयतों को नौकरी देने की मांग कर रहे हैं. बुधवार व गुरुवार को भी बसडीहा मौजा में इसीएल पदाधिकारी प्रशासन की मदद से जमीन का सीमांकन करने पहुंचे थे.
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राजमहल कोल परियोजना की अधिगृहीत जमीन का सीमांकन करने पहुंचे पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारियों को लगातार दूसरे दिन भारी विराेध का सामना करना पड़ा. गुरुवार को प्रशासन, पुलिस व सुरक्षा बलों के बसडीहा मौजा पहुंचने पर विरोध कर रहे तीन गांव के आदिवासियों ने पथराव शुरू कर दिया. उग्र ग्रामीणों ने पथराव के साथ पुलिस पर तीर भी चलाये. पथराव में एसडीपीओ शिवशंकर तिवारी सहित पांच जवान घायल हो गये. पैर में तीर लगने से हनवारा थाना के सुरक्षा जवान असफाक आलम घायल हो गये. उन्हें महागामा अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए लाठीचार्ज किया. आंसू गैस के गोले दागे. इस कार्रवाई में कई ग्रामीण भी घायल हो गये. इसके बाद ग्रामीण और भड़क उठे. ग्रामीणों का कहना था किसी भी हालत में जमीन नहीं देंगे. सैकड़ों की संख्या में पहुंचे थे सुरक्षा बल : परियोजना के बसडीहा मौजा में कोयला उत्खनन को लेकर परियोजना के पदाधिकारी व जिला प्रशासन के अधिकारी दो दिनाें से कैंप कर रहे हैं. गुरुवार को सैकड़ों की संख्या में पुलिस व सुरक्षा जवान कंटीली तार, पोकलेन व वज्रवाहन के साथ बसडीहा साइट पहुंचे थे. पदाधिकारी व सुरक्षा जवानों को देखते ही विरोध कर रहे ग्रामीण उग्र हो गये. भिरंडा, बसडीहा, तालझाड़ी गांव के सैकड़ों आदिवासी तीर-धनुष व परंपरागत हथियार से लैस होकर विरोध करना शुरू कर दिये. दिन के करीब बारह बजे ग्रामीण अचानक उग्र होकर पथराव शुरू कर दिये. इसके बाद पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किया गया. पुलिस की इस कार्रवाई के बाद ग्रामीणों ने तीन चलाकर प्रतिकार किया. पुलिस की ओर से उग्र भीड़ को रोकने के लिये चार चक्र अश्रुगैस के साथ दो रबर के बुलेट दागे गये. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों को खदेड़ दिया. ज्ञात हो कि ग्रामीणों के विरोध को देखते बसडीहा क्षेत्र में एसडीओ ने धारा एक सौ चौंतालीस के तहत निषेधाज्ञा लागू किया था. ग्रामीणों के सीमांकन एरिया में घुसने पर पाबंदी थी. ग्रामीणों इस बात का भी विरोध है कि गांव में बिना ग्रामसभा कराये ही गलत तरीके से जमीन ली गयी है. जमीन पर लगी फसल का मुआवजा भी नहीं मिला. तालझारी मौजा में एक सौ पच्चीस एकड़ जमीन अधिगृहीत की गयी है. इसको लेकर रैयतों को दस करोड़ मुआवजा के साथ प्रभावित परिवारों के बाईस सदस्यों को नौकरी दी गयी है. प्रशासन के सहयोग से जमीन का सीमांकन करने पहुंचे थे. ग्रामीण लगातार इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि परियोजना की ओर से नियम के तहत मुआवजा की राशि व नौकरी दी गयी है. अधिगृहीत जमीन पर रैयतों ने अरहर की फसल लगायी है. मुआवजे की मांग रहे हैं. परियोजना की अधिगृहीत जमीन के सीमांकन को लेकर बसडीहा मौजा पहुंचे जिला प्रशासन एवं पुलिस बलों को देखकर उग्र ग्रामीणों ने विरोध करते हुए पथराव कर दिया. तीर भी चलाया गया. ग्रामीणों के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस की ओर से मामला शांत कराने को लेकर चार चक्र अश्रु गैस व दो रबर बुलेट चलाकर ग्रामीणों को खदेडा गया. इसीएल को ग्रामीणों की ओर से एक सौ पच्चीस एकड़ जमीन तालझाड़ी मौजा में दिया गया है. प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को विश्वास में लेकर सीमांकन कराने का काम किया जा रहा है. सीमांकन का कार्य जारी रहेगा. बसडीहा मौजा में धारा एक सौ चौंतालीस भी लगाया गया है. , तालझाड़ी मौजा में इसीएल की ओर से दो हज़ार सत्रह में एक सौ पच्चीस एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था. ग्रामीणों ने कोयला खनन के लिए राजमहल कोल परियोजना को जमीन दी थी. मगर, पिछले पांच वर्षों से ग्रामीण विरोध करते हुए खुदाई शुरू करने नहीं दे रहे हैं. मुआवजा व प्रभावित रैयतों को नौकरी देने की मांग कर रहे हैं. बुधवार व गुरुवार को भी बसडीहा मौजा में इसीएल पदाधिकारी प्रशासन की मदद से जमीन का सीमांकन करने पहुंचे थे.
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Katrina Kaif: अली अब्बास जफर (Ali Abbas Zafar) भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध फिल्म निर्माताओं में से एक हैं.अली अब्बास जफर के निर्देशन में बनी फिल्म 'ब्लडी डैडी' (Bloody Daddy) हाल ही में रिलीज हुई हैं. फिल्म को दर्शकों की ओर से काफी बेहतरीन रिस्पॉन्स भी मिला हैं. इस बीच खबर आ रही हैं कि अली अब्बास जफर कैटरीना कैफ (Katrina Kaif) के साथ अपनी अपकमिंग फिल्म शुरु करने वाले हैं. जिसपर अली अब्बास जफर ने खुद इस पर प्रतिक्रिया दी हैं.
आपको बता दें कि फिल्म निर्माता अली अब्बास जफर और कैटरीना कैफ ने मेरे ब्रदर की दुल्हन (2011), टाइगर ज़िंदा है (2017) सहित कई प्रोजेक्ट पर एक साथ काम किया है. कफी समय से खबरें आ रही थीं कि ये दोनों सुपर सोल्जर नामक एक एक्शनर पर काम करने वाले हैं. जिस पर अब खुद डायरेक्टर ने इन खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया दी हैं. हाल ही में अली अब्बास जफर ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि जैसे ही वे अन्य प्रोजेक्ट के साथ काम करेंगे. वह और कैटरीना फिल्म पर काम करना शुरू कर देंगे. उन्होंने आगे कहा कि महामारी के कारण फिल्म का शेड्यूल बिगड़ गया और कैटरीना को टाइगर 3 और फिर अपनी अन्य कमिटमेंट को पूरा करना पड़ा. वहीं अली अब्बास जफर फिलहाल अपनी अगली फिल्म के लिए रेकी कर रहे हैं और जल्द ही साथ बैठकर शेड्यूल पर चर्चा करेंगे.
अली अब्बास जफर ने कैटरीना के साथ अपने बंधन पर भी खुलकर बात की और कहा कि दोनों बेहद करीबी दोस्त हैं, लेकिन प्रोफेशनल भी हैं और दोनों के बीच लगातार साथ काम करने की कोई मजबूरी नहीं है. फिल्म निर्माता ने यह भी कहा कि वह और कैटरीना अक्सर एक-दूसरे के विचारों को शेयर करते हैं, यहां तक कि उन प्रोजेक्ट पर भी, जिन पर वे एक साथ काम नहीं कर रहे हैं, क्योंकि इस तरह का रिश्ता वे शेयर करते हैं.
कैटरीना जल्द ही सलमान खान और इमरान हाशमी के साथ 'टाइगर 3' में नजर आएंगी . उनके अपकमिंग प्रोजेक्ट में विजय सेतुपति के साथ श्रीराम राघवन की 'मैरी क्रिसमस' भी है, साथ ही प्रियंका चोपड़ा और आलिया भट्ट के साथ फरहान अख्तर की 'जी ले जरा' भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं.
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Katrina Kaif: अली अब्बास जफर भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध फिल्म निर्माताओं में से एक हैं.अली अब्बास जफर के निर्देशन में बनी फिल्म 'ब्लडी डैडी' हाल ही में रिलीज हुई हैं. फिल्म को दर्शकों की ओर से काफी बेहतरीन रिस्पॉन्स भी मिला हैं. इस बीच खबर आ रही हैं कि अली अब्बास जफर कैटरीना कैफ के साथ अपनी अपकमिंग फिल्म शुरु करने वाले हैं. जिसपर अली अब्बास जफर ने खुद इस पर प्रतिक्रिया दी हैं. आपको बता दें कि फिल्म निर्माता अली अब्बास जफर और कैटरीना कैफ ने मेरे ब्रदर की दुल्हन , टाइगर ज़िंदा है सहित कई प्रोजेक्ट पर एक साथ काम किया है. कफी समय से खबरें आ रही थीं कि ये दोनों सुपर सोल्जर नामक एक एक्शनर पर काम करने वाले हैं. जिस पर अब खुद डायरेक्टर ने इन खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया दी हैं. हाल ही में अली अब्बास जफर ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि जैसे ही वे अन्य प्रोजेक्ट के साथ काम करेंगे. वह और कैटरीना फिल्म पर काम करना शुरू कर देंगे. उन्होंने आगे कहा कि महामारी के कारण फिल्म का शेड्यूल बिगड़ गया और कैटरीना को टाइगर तीन और फिर अपनी अन्य कमिटमेंट को पूरा करना पड़ा. वहीं अली अब्बास जफर फिलहाल अपनी अगली फिल्म के लिए रेकी कर रहे हैं और जल्द ही साथ बैठकर शेड्यूल पर चर्चा करेंगे. अली अब्बास जफर ने कैटरीना के साथ अपने बंधन पर भी खुलकर बात की और कहा कि दोनों बेहद करीबी दोस्त हैं, लेकिन प्रोफेशनल भी हैं और दोनों के बीच लगातार साथ काम करने की कोई मजबूरी नहीं है. फिल्म निर्माता ने यह भी कहा कि वह और कैटरीना अक्सर एक-दूसरे के विचारों को शेयर करते हैं, यहां तक कि उन प्रोजेक्ट पर भी, जिन पर वे एक साथ काम नहीं कर रहे हैं, क्योंकि इस तरह का रिश्ता वे शेयर करते हैं. कैटरीना जल्द ही सलमान खान और इमरान हाशमी के साथ 'टाइगर तीन' में नजर आएंगी . उनके अपकमिंग प्रोजेक्ट में विजय सेतुपति के साथ श्रीराम राघवन की 'मैरी क्रिसमस' भी है, साथ ही प्रियंका चोपड़ा और आलिया भट्ट के साथ फरहान अख्तर की 'जी ले जरा' भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं.
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लखनऊ। प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन मंत्री सत्यदेव पचोरी ने कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकार प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने व प्रदेश से निर्यात को बढ़ाने के लिए कृत संकल्पित है। उद्योगों के विकास के साथ साथ कृषि एवं औद्यानिक उपजों को व्यवसायिक स्वरूप देकर किसानों का आर्थिक सशक्तीकरण सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में है।
इसी कड़ी में एसाइड योजनान्तर्गत फलों, फूलों एवं सब्जियों के संरक्षण, पैकेजिंग एवं प्रसंस्करण के लिए लखनऊ में सामान्य सुविधा केन्द्र को स्थापित कराया गया है। इस सामान्य सुविधा केन्द्र द्वारा कृषकों उद्यमियों एवं निर्यातकों को अत्याधुनिक प्रशीतन, प्रस्संकरण एवं पैकेजिंग की सुविधाओं के साथ साथ गुणवत्ता नियंत्रण, परामर्श एवं प्रशिक्षण की सुविधा मिलेगी।
श्री पचोरी ने आज एसाइड योजनान्तर्गत फल, फूल एवं सब्जियों की पैकेजिंग एवं भण्डारण हेतु ग्राम सादुल्ला नगर, हरौनी, मोहान रोड, लखनऊ में स्थापित सामान्य सुविधा केन्द्र प्रसंस्कृत एवं फ्रोजेन कराकर इनको राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में बेचकर उत्पादों का लाभकारी मूल्य प्राप्त कर सकेंगे। किसान इसके माध्यम से अपने उत्पादों की शेल्फ लाइफ भी बढ़ा सकेंगे, जिससे उचित समय पर इनको बेचकर लाभप्रद मूल्य प्राप्त कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना लखनऊ एवं आस-पास के सब्जियों, फलों एवं फूलों के उत्पादकों को अपनी सेवाएं प्रदान कर उनकी आय बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश से निर्यात में आशातीत बढ़ोत्तरी में सहायक होगी।
प्रमुख सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम अनिल कुमार ने कहा कि परियोजनान्तर्गत सम्बद्ध किये गये कृषक उद्यमी एवं निर्यातक समूहों को आधुनिक उत्पादन तकनीकों एवं विपणन रणनीतियों से सम्बन्धित परामर्श एवं प्रशिक्षण दिया जाये ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सके। उन्होंने कहा कि यह परियोजना किसानों की उपज को औद्योगिक प्रक्रियाओं से जोड़ेगी। किसानों के उत्पादों को लाभप्रद मूल्य दिलाने तथा निर्यात बाजार तक पहुंचाने की यह एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
इस अवसर पर विशेष सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम आर.पी. सिंह, अपर आयुक्त निर्यात प्रोत्साहन आर0के0 सिंह, उपायुक्त जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र लखनऊ सर्वेश्वर शुक्ला उपस्थित थे।
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लखनऊ। प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन मंत्री सत्यदेव पचोरी ने कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकार प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने व प्रदेश से निर्यात को बढ़ाने के लिए कृत संकल्पित है। उद्योगों के विकास के साथ साथ कृषि एवं औद्यानिक उपजों को व्यवसायिक स्वरूप देकर किसानों का आर्थिक सशक्तीकरण सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में है। इसी कड़ी में एसाइड योजनान्तर्गत फलों, फूलों एवं सब्जियों के संरक्षण, पैकेजिंग एवं प्रसंस्करण के लिए लखनऊ में सामान्य सुविधा केन्द्र को स्थापित कराया गया है। इस सामान्य सुविधा केन्द्र द्वारा कृषकों उद्यमियों एवं निर्यातकों को अत्याधुनिक प्रशीतन, प्रस्संकरण एवं पैकेजिंग की सुविधाओं के साथ साथ गुणवत्ता नियंत्रण, परामर्श एवं प्रशिक्षण की सुविधा मिलेगी। श्री पचोरी ने आज एसाइड योजनान्तर्गत फल, फूल एवं सब्जियों की पैकेजिंग एवं भण्डारण हेतु ग्राम सादुल्ला नगर, हरौनी, मोहान रोड, लखनऊ में स्थापित सामान्य सुविधा केन्द्र प्रसंस्कृत एवं फ्रोजेन कराकर इनको राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में बेचकर उत्पादों का लाभकारी मूल्य प्राप्त कर सकेंगे। किसान इसके माध्यम से अपने उत्पादों की शेल्फ लाइफ भी बढ़ा सकेंगे, जिससे उचित समय पर इनको बेचकर लाभप्रद मूल्य प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह परियोजना लखनऊ एवं आस-पास के सब्जियों, फलों एवं फूलों के उत्पादकों को अपनी सेवाएं प्रदान कर उनकी आय बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश से निर्यात में आशातीत बढ़ोत्तरी में सहायक होगी। प्रमुख सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम अनिल कुमार ने कहा कि परियोजनान्तर्गत सम्बद्ध किये गये कृषक उद्यमी एवं निर्यातक समूहों को आधुनिक उत्पादन तकनीकों एवं विपणन रणनीतियों से सम्बन्धित परामर्श एवं प्रशिक्षण दिया जाये ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सके। उन्होंने कहा कि यह परियोजना किसानों की उपज को औद्योगिक प्रक्रियाओं से जोड़ेगी। किसानों के उत्पादों को लाभप्रद मूल्य दिलाने तथा निर्यात बाजार तक पहुंचाने की यह एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस अवसर पर विशेष सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम आर.पी. सिंह, अपर आयुक्त निर्यात प्रोत्साहन आरशून्यकेशून्य सिंह, उपायुक्त जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र लखनऊ सर्वेश्वर शुक्ला उपस्थित थे।
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महंगी बिजली का हल निकालने की दिशा में ऊर्जा मंत्रालय ने 17 जुलाई को जारी किए गए मेरिट ऑर्डर पर एक अगस्त तक सीईआरसी, सीईए और राज्यों के ऊर्जा सचिवों से राय मांगी थी। इसमें थर्मल ऊर्जा उत्पादन तथा शेड्यूलिंग के नियमों में ढील देने को लेकर ज्यादातर ने सकारात्मक पक्ष पेश किया। जवाब सकारात्मक होने की वजह बिजली कंपनियों की लागत में कमी और एकरूपता बताई जा रही है। सरकार इस व्यवस्था को ट्रायल के आधार पर एक साल के लिए लागू कर सकती है, उसके बाद पुनर्विचार कर आगे कदम बढ़ाएगी।
ऊर्जा उत्पादक संघ के पावर प्रोडक्शन के प्रबंध निदेशक अशोक खुराना के मुताबिक, अगर सरकार सभी पक्षकारों की राय के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा। केंद्रीय ग्रिड तंत्र सीमित नहीं रहेगी और सभी संयंत्रों में एकरूपता आएगी।
नियमों में ढील मिलने से बिजली की कमी होने पर भी कंपनियों को महंगी बिजली नहीं खरीदनी पड़ेगी। जबकि वर्तमान में समझौता नहीं होने की वजह से कंपनियों को निर्धारित उत्पादन की स्थिति में ग्रिड से बिजली खरीदनी होती है, जिसमें स्पॉट रेट की वजह से कीमतें समान नहीं रहती हैं।
सरकार द्वारा नियमों में ढील देने पर कंपनियों को अपने किसी भी ऊर्जा संयंत्र से बिजली आपूर्ति करने का रास्ता खुल जाएगा। ऐसे में उसे ग्रिड से खरीद नहीं करनी पड़ेगी, जिससे बिजली की कीमतें देश में एक समान होंगी और कीमतों में कमी आएगी।
गौरतलब है कि ऊर्जा मंत्रालय इस पर तैयार किए गए मसौदे पर विशेषज्ञों से अंतिम चर्चा कर रहा है। माना जा रहा है कि जल्द वह इस पर आगे कदम बढ़ाएगा।
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महंगी बिजली का हल निकालने की दिशा में ऊर्जा मंत्रालय ने सत्रह जुलाई को जारी किए गए मेरिट ऑर्डर पर एक अगस्त तक सीईआरसी, सीईए और राज्यों के ऊर्जा सचिवों से राय मांगी थी। इसमें थर्मल ऊर्जा उत्पादन तथा शेड्यूलिंग के नियमों में ढील देने को लेकर ज्यादातर ने सकारात्मक पक्ष पेश किया। जवाब सकारात्मक होने की वजह बिजली कंपनियों की लागत में कमी और एकरूपता बताई जा रही है। सरकार इस व्यवस्था को ट्रायल के आधार पर एक साल के लिए लागू कर सकती है, उसके बाद पुनर्विचार कर आगे कदम बढ़ाएगी। ऊर्जा उत्पादक संघ के पावर प्रोडक्शन के प्रबंध निदेशक अशोक खुराना के मुताबिक, अगर सरकार सभी पक्षकारों की राय के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा। केंद्रीय ग्रिड तंत्र सीमित नहीं रहेगी और सभी संयंत्रों में एकरूपता आएगी। नियमों में ढील मिलने से बिजली की कमी होने पर भी कंपनियों को महंगी बिजली नहीं खरीदनी पड़ेगी। जबकि वर्तमान में समझौता नहीं होने की वजह से कंपनियों को निर्धारित उत्पादन की स्थिति में ग्रिड से बिजली खरीदनी होती है, जिसमें स्पॉट रेट की वजह से कीमतें समान नहीं रहती हैं। सरकार द्वारा नियमों में ढील देने पर कंपनियों को अपने किसी भी ऊर्जा संयंत्र से बिजली आपूर्ति करने का रास्ता खुल जाएगा। ऐसे में उसे ग्रिड से खरीद नहीं करनी पड़ेगी, जिससे बिजली की कीमतें देश में एक समान होंगी और कीमतों में कमी आएगी। गौरतलब है कि ऊर्जा मंत्रालय इस पर तैयार किए गए मसौदे पर विशेषज्ञों से अंतिम चर्चा कर रहा है। माना जा रहा है कि जल्द वह इस पर आगे कदम बढ़ाएगा।
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झारखंड में विशेष अभियान के तहत नक्सलियों के खात्मे के लिए सेना और राज्य पुलिस ने सर्च ऑपेरशन जारी कर दिया है।
झारखण्ड में सेना और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में सेना को बड़ी कामयाबी हाथ लगी हैं। एक विशेष अभियान के तहत नक्सलियों के खात्मे के लिए सेना और राज्य पुलिस ने सर्च ऑपेरशन कर रही है। सेना और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में सेना ने चार नक्सलियों को मार गिराया हैं।
झारखण्ड में पलामु के नौदिया में सीआरपीएफ और पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ़ एक विशेष अभियान की शुरुआत की। जिसके तहत सेना की 134 बटॅालियन और झारखण्ड पुलिस ने नक्सलियों को पकड़े के लिए मिलकर एक विशेष अभियान चलाया था।
इस सर्च ऑपरेशन के दौरान सेना और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में सेना ने चार नक्सलियों को मार गिराया। इस मुठभेड़ के बाद भी सेना का सर्च ऑपरेशन जारी है। सेना को इलाके में अभी भी कुछ और नक्सलियों के छिपे होने की आशंका है। जिनकी तलाश सेना और पुलिस की टीम अभी भी कर रही है।
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झारखंड में विशेष अभियान के तहत नक्सलियों के खात्मे के लिए सेना और राज्य पुलिस ने सर्च ऑपेरशन जारी कर दिया है। झारखण्ड में सेना और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में सेना को बड़ी कामयाबी हाथ लगी हैं। एक विशेष अभियान के तहत नक्सलियों के खात्मे के लिए सेना और राज्य पुलिस ने सर्च ऑपेरशन कर रही है। सेना और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में सेना ने चार नक्सलियों को मार गिराया हैं। झारखण्ड में पलामु के नौदिया में सीआरपीएफ और पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ़ एक विशेष अभियान की शुरुआत की। जिसके तहत सेना की एक सौ चौंतीस बटॅालियन और झारखण्ड पुलिस ने नक्सलियों को पकड़े के लिए मिलकर एक विशेष अभियान चलाया था। इस सर्च ऑपरेशन के दौरान सेना और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में सेना ने चार नक्सलियों को मार गिराया। इस मुठभेड़ के बाद भी सेना का सर्च ऑपरेशन जारी है। सेना को इलाके में अभी भी कुछ और नक्सलियों के छिपे होने की आशंका है। जिनकी तलाश सेना और पुलिस की टीम अभी भी कर रही है।
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भारत की टॉप प्राइवेट दूरसंचार कंपनियां रिलायंस जियो, भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) की पब्लिक ओपन वाईफाई परियोजना का विरोध कर रही हैं। इस परियोजना से इंटरनेट खर्च में 90% तक कटौती की उम्मीद है।
ट्राई ने कहा कि इस परियोजना के तहत पूरे देश में पब्लिक डेटा ऑफिस (पीडीओ) की स्थापना करने की योजना है जो पहले के पीसीओ की तर्ज पर उपयोगकर्ताओं को बहुत सस्ते क़ीमतों (2 रुपये से प्रारंभ) पर इंटरनेट (बैंडविड्थ) रीसेल करेगा और ये पीडीओ हॉटस्पॉट के रूप में काम करेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक़ पिछले साल अक्टूबर में देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी पायलट परियोजना के तहत 603 वाईफाई हॉटस्पॉट की सफलता के बाद दूरसंचार विभाग ने एक महीने में पूरे देश में 10,000 ऐसे वाईफाई हॉटस्पॉट लॉन्च करने की योजना बना रहा है।
कोई भी व्यापार इकाई यहां तक कि चाय-दुकान मालिक जैसे छोटे उद्यमी आसानी से एक पेड पब्लिक वाईफाई एक्सेस पॉइंट/ हॉटस्पॉट स्थापित करने में सक्षम होंगे और पीडीओ एग्रीगेटर्स नामक इकाइयों से सस्ते दरों पर बैंडविड्थ (bandwidth) खरीद सकेंगे। ये एग्रीगेटर कई इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) से इंटरनेट बैंडविड्थ को एक समूह में इकट्ठा कर देगा और इसे पीडीओ को बेचेगा और इस एग्रीगेटर्स को दूरसंचार लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी लेकिन केवल दूरसंचार विभाग (डीओटी) के साथ पंजीकरण करने की आवश्यकता होगी।
सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के बैनर के तले दूरसंचार सचिव अरुणा सुंदरराजन को इन चार कंपनियों ने एक पत्र लिखा है। .उन्होंने इस बात पर एतराज़ किया कि इससे "असमान अवसर" पैदा होगा चूंकि ये एग्रीगेटर्स अपने बैंडविड्थ को हज़ारों या उससे अधिक पीडीओ को बेचेंगे, उन्हें लाइसेंस शुल्क, स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा और न ही उन्हें सरकार को राजस्व का हिस्सा देने की आवश्यकता होगी।
दूरसंचार कंपनियों ने यह भी दावा किया है कि लाइसेंस के अभाव में "राष्ट्रीय सुरक्षा" के लिए ख़तरा पैदा होगा लेकिन न्यूज़क्लिक से बात करते हुए विशेषज्ञों ने इस तथाकथित चिंता को ख़ारिज कर दिया था। डीओटी ने पहले से ही अनिवार्य कर दिया है कि एग्रीगेटर्स ई-केवाईसी (अपने ग्राहक की जानकारी), प्रमाणीकरण और रिकॉर्ड रखने की आवश्यकताओं को सुनिश्चित करते हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षैतिज प्रणाली के हर स्तर पर नज़र रखना और अवरोध संभव होगा, क्योंकि ये पीडीओ प्रदाता और एग्रीगेटर्स मौजूदा आईएसपी का इस्तेमाल करेंगे और सरकार आसानी से शामिल संगठनों के लिए ज़्यादा सुरक्षा मानकों और संबंधित मानदंडों को अनिवार्य कर सकती है।
आईटी फॉर चेंज के परमिंदर जीत सिंह ने न्यूजक्लिक से बात करते हुए कहा कि मुख्य मुद्दा यह है कि ये दूरसंचार कंपनियां अपने उद्देश्य के लिए ग्राहक (अंतिम ग्राहक के रूप में जानी जाने वाली) तक आखिरी लिंक का एकाधिकार/स्वामित्व लेना चाहती है।
"यह आपके घर की ओर जाने वाली एक एकाधिकार मार्ग के स्वामित्व की तरह है ताकि आप के साथ होने वाली घटना को आप नियंत्रण कर सकें। इस तरह आप इस एकल मार्ग के माध्यम से मौजूदा लंबवत एकीकृत प्रणाली में एक दूसरे के शीर्ष पर अन्य सेवाओं और उत्पादों का इस्तेमाल कर सकते हैं। वास्तविक निरंतर आय उस मार्ग से आती है जो आप उस एकल मार्ग पर प्रचार और बिक्री करते हैं न कि कनेक्टिविटी से।" उदाहरणस्वरूप रिलायंस जियो अब ई-कॉमर्स में शामिल होने की तलाश में है। वे साझा किए गए, क्षैतिज रूप से फैले मॉडल में नियंत्रण खो देंगे।
दरअसल ट्राई स्वयं ही कहती है कि इन लक्ष्यों में से एक लक्ष्य "एकाधिकार को खत्म करना" है। दूरसंचार नियामक ने कहा है कि ये "मल्टी-प्रोवाइडर, इंटर-ऑपरेबल, कोलेबोरेटिव मॉडल इस प्रणाली में इस समग्र नवीनता को बढ़ाता है, एकाधिकार को खत्म करता है और अंतिम उपयोगकर्ता को लाभ देने के लिए प्रोत्साहित करता है।"
ये मॉडल यह सुनिश्चित करता है कि सभी प्रकार के प्रदाता (पीडीओ प्रदाता, हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर का एक्सेस पॉइंट, उपयोगकर्ता प्रमाणीकरण और केवाईसी प्रदाता, और भुगतान प्रदाता) असमूहीकृत हैं, जो "पारिस्थितिक तंत्र में कई पार्टियों के एक साथ आने और बड़े पैमाने पर स्वीकार करने में सक्षम" बनाने की अनुमति देता है।
उन्होंने कहा कि बड़ी दूरसंचार कंपनियों द्वारा इंटरनेट का इतना सस्ता और व्यापक व्यवस्था संभव नहीं है क्योंकि उनके सेवा कार्य की लागत उच्च होती है, चूंकि वे जिस पैमाने पर काम करते हैं उसके कारण बहुत अधिक इनपुट लागत होती है। ये उच्च लागत उन्हें उन लोगों के वर्गों को सस्ती दर पर बेचने और कम करने इजाज़त नहीं देगा जिनसे लाभ आसानी से हासिल नहीं किया जा सकता है। यही कारण है कि छोटे कंपनियों को शामिल होना ज़रूरी है।
दिग्गज दूरसंचार कंपनियों के अनुसार इन एग्रीगेटर्स को सरकार के साथ राजस्व साझा नहीं करना पड़ेगा, सिंह ने कहा कि वे जो राजस्व साझा करते हैं उसे थोक मूल्य में जोड़ दिया जाता है जिसका मतलब है कि यदि आप राजस्व साझा कर रहे हैं तो उसे आपके द्वारा चार्ज की जाने वाली कीमतों में वसूल किया जा सकता या प्राप्त कर लिया जाता है।
इसके अलावा सिंह ने कहा कि "थोक और खुदरा का क्षैतिज पृथक्करण" ज़रूरी है यदि हम वास्तविक तटस्थता का लक्ष्य रखना चाहते हैं, क्योंकि यह दिए जाने वाले सेवाओं के एकीकरण की अनुमति नहीं देगा और वास्तव में समान अवसर का निर्माण करेगा।
और यहां तक कि ये एग्रीगेटर्स बड़ी इकाइयां (कोई भी स्वामित्व, कंपनी, सोसायटी, गैर लाभ आदि जो मानदंडों को पूरा करते हैं एग्रीगेटर्स के रूप में प्रारंभ कर सकता है) होती हैं और भले ही वे इस बैंडविड्थ को कुछ हज़ार पीडीओ को बेच देते हैं तो फिर भी यह संभावना होगी "एक ज़िला या शायद दो" का आकार हो, इसलिए वे किसी भी मामले में इन बहुराष्ट्रीय दूरसंचार कंपनियों के साथ तुलनीय नहीं हैं।
लेकिन इंटरनेट के खुदरा बेचने पर एकाधिकार को खत्म करने और भारत के लोगों तक पहुंच का यही एकमात्र तरीका है, जहां "फाइबर/दूरसंचार के खराब कवरेज और सेलुलर डेटा के निषिद्ध मूल्य निर्धारण के कारण डेटा तक पहुंच सीमित है" और ट्राई के अनुसार, "फ्रांस में 13 मिलियन और संयुक्त राज्य अमेरिका में 10 मिलियन की तुलना में भारत में केवल 31,000 पब्लिक वाईफाई हॉटस्पॉट हैं।"
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भारत की टॉप प्राइवेट दूरसंचार कंपनियां रिलायंस जियो, भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया दूरसंचार नियामक प्राधिकरण की पब्लिक ओपन वाईफाई परियोजना का विरोध कर रही हैं। इस परियोजना से इंटरनेट खर्च में नब्बे% तक कटौती की उम्मीद है। ट्राई ने कहा कि इस परियोजना के तहत पूरे देश में पब्लिक डेटा ऑफिस की स्थापना करने की योजना है जो पहले के पीसीओ की तर्ज पर उपयोगकर्ताओं को बहुत सस्ते क़ीमतों पर इंटरनेट रीसेल करेगा और ये पीडीओ हॉटस्पॉट के रूप में काम करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक़ पिछले साल अक्टूबर में देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी पायलट परियोजना के तहत छः सौ तीन वाईफाई हॉटस्पॉट की सफलता के बाद दूरसंचार विभाग ने एक महीने में पूरे देश में दस,शून्य ऐसे वाईफाई हॉटस्पॉट लॉन्च करने की योजना बना रहा है। कोई भी व्यापार इकाई यहां तक कि चाय-दुकान मालिक जैसे छोटे उद्यमी आसानी से एक पेड पब्लिक वाईफाई एक्सेस पॉइंट/ हॉटस्पॉट स्थापित करने में सक्षम होंगे और पीडीओ एग्रीगेटर्स नामक इकाइयों से सस्ते दरों पर बैंडविड्थ खरीद सकेंगे। ये एग्रीगेटर कई इंटरनेट सेवा प्रदाताओं से इंटरनेट बैंडविड्थ को एक समूह में इकट्ठा कर देगा और इसे पीडीओ को बेचेगा और इस एग्रीगेटर्स को दूरसंचार लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी लेकिन केवल दूरसंचार विभाग के साथ पंजीकरण करने की आवश्यकता होगी। सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के बैनर के तले दूरसंचार सचिव अरुणा सुंदरराजन को इन चार कंपनियों ने एक पत्र लिखा है। .उन्होंने इस बात पर एतराज़ किया कि इससे "असमान अवसर" पैदा होगा चूंकि ये एग्रीगेटर्स अपने बैंडविड्थ को हज़ारों या उससे अधिक पीडीओ को बेचेंगे, उन्हें लाइसेंस शुल्क, स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा और न ही उन्हें सरकार को राजस्व का हिस्सा देने की आवश्यकता होगी। दूरसंचार कंपनियों ने यह भी दावा किया है कि लाइसेंस के अभाव में "राष्ट्रीय सुरक्षा" के लिए ख़तरा पैदा होगा लेकिन न्यूज़क्लिक से बात करते हुए विशेषज्ञों ने इस तथाकथित चिंता को ख़ारिज कर दिया था। डीओटी ने पहले से ही अनिवार्य कर दिया है कि एग्रीगेटर्स ई-केवाईसी , प्रमाणीकरण और रिकॉर्ड रखने की आवश्यकताओं को सुनिश्चित करते हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षैतिज प्रणाली के हर स्तर पर नज़र रखना और अवरोध संभव होगा, क्योंकि ये पीडीओ प्रदाता और एग्रीगेटर्स मौजूदा आईएसपी का इस्तेमाल करेंगे और सरकार आसानी से शामिल संगठनों के लिए ज़्यादा सुरक्षा मानकों और संबंधित मानदंडों को अनिवार्य कर सकती है। आईटी फॉर चेंज के परमिंदर जीत सिंह ने न्यूजक्लिक से बात करते हुए कहा कि मुख्य मुद्दा यह है कि ये दूरसंचार कंपनियां अपने उद्देश्य के लिए ग्राहक तक आखिरी लिंक का एकाधिकार/स्वामित्व लेना चाहती है। "यह आपके घर की ओर जाने वाली एक एकाधिकार मार्ग के स्वामित्व की तरह है ताकि आप के साथ होने वाली घटना को आप नियंत्रण कर सकें। इस तरह आप इस एकल मार्ग के माध्यम से मौजूदा लंबवत एकीकृत प्रणाली में एक दूसरे के शीर्ष पर अन्य सेवाओं और उत्पादों का इस्तेमाल कर सकते हैं। वास्तविक निरंतर आय उस मार्ग से आती है जो आप उस एकल मार्ग पर प्रचार और बिक्री करते हैं न कि कनेक्टिविटी से।" उदाहरणस्वरूप रिलायंस जियो अब ई-कॉमर्स में शामिल होने की तलाश में है। वे साझा किए गए, क्षैतिज रूप से फैले मॉडल में नियंत्रण खो देंगे। दरअसल ट्राई स्वयं ही कहती है कि इन लक्ष्यों में से एक लक्ष्य "एकाधिकार को खत्म करना" है। दूरसंचार नियामक ने कहा है कि ये "मल्टी-प्रोवाइडर, इंटर-ऑपरेबल, कोलेबोरेटिव मॉडल इस प्रणाली में इस समग्र नवीनता को बढ़ाता है, एकाधिकार को खत्म करता है और अंतिम उपयोगकर्ता को लाभ देने के लिए प्रोत्साहित करता है।" ये मॉडल यह सुनिश्चित करता है कि सभी प्रकार के प्रदाता असमूहीकृत हैं, जो "पारिस्थितिक तंत्र में कई पार्टियों के एक साथ आने और बड़े पैमाने पर स्वीकार करने में सक्षम" बनाने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा कि बड़ी दूरसंचार कंपनियों द्वारा इंटरनेट का इतना सस्ता और व्यापक व्यवस्था संभव नहीं है क्योंकि उनके सेवा कार्य की लागत उच्च होती है, चूंकि वे जिस पैमाने पर काम करते हैं उसके कारण बहुत अधिक इनपुट लागत होती है। ये उच्च लागत उन्हें उन लोगों के वर्गों को सस्ती दर पर बेचने और कम करने इजाज़त नहीं देगा जिनसे लाभ आसानी से हासिल नहीं किया जा सकता है। यही कारण है कि छोटे कंपनियों को शामिल होना ज़रूरी है। दिग्गज दूरसंचार कंपनियों के अनुसार इन एग्रीगेटर्स को सरकार के साथ राजस्व साझा नहीं करना पड़ेगा, सिंह ने कहा कि वे जो राजस्व साझा करते हैं उसे थोक मूल्य में जोड़ दिया जाता है जिसका मतलब है कि यदि आप राजस्व साझा कर रहे हैं तो उसे आपके द्वारा चार्ज की जाने वाली कीमतों में वसूल किया जा सकता या प्राप्त कर लिया जाता है। इसके अलावा सिंह ने कहा कि "थोक और खुदरा का क्षैतिज पृथक्करण" ज़रूरी है यदि हम वास्तविक तटस्थता का लक्ष्य रखना चाहते हैं, क्योंकि यह दिए जाने वाले सेवाओं के एकीकरण की अनुमति नहीं देगा और वास्तव में समान अवसर का निर्माण करेगा। और यहां तक कि ये एग्रीगेटर्स बड़ी इकाइयां होती हैं और भले ही वे इस बैंडविड्थ को कुछ हज़ार पीडीओ को बेच देते हैं तो फिर भी यह संभावना होगी "एक ज़िला या शायद दो" का आकार हो, इसलिए वे किसी भी मामले में इन बहुराष्ट्रीय दूरसंचार कंपनियों के साथ तुलनीय नहीं हैं। लेकिन इंटरनेट के खुदरा बेचने पर एकाधिकार को खत्म करने और भारत के लोगों तक पहुंच का यही एकमात्र तरीका है, जहां "फाइबर/दूरसंचार के खराब कवरेज और सेलुलर डेटा के निषिद्ध मूल्य निर्धारण के कारण डेटा तक पहुंच सीमित है" और ट्राई के अनुसार, "फ्रांस में तेरह मिलियन और संयुक्त राज्य अमेरिका में दस मिलियन की तुलना में भारत में केवल इकतीस,शून्य पब्लिक वाईफाई हॉटस्पॉट हैं।" अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और 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· सि० प्र० - काव्य
"अथवा आकर्षण पूण्यभूमि का ऐसा, : अवतरित हुआ मैं, आप उच्च कल जैसा । जो नाम मात्र ही स्मरण मद्रीय करेंगे, वे भी भवसागर विना प्रयास तरंगे ॥"
किन्तु गुप्त जो तुरन्त ही उनको देवत्व के उंच शिखिर से उतार कर मानवता की भाव-भूमि पर लेते हैं और उनसे कहलाते हैंः" पर जो मेरा गुरण कर्म स्वभाव धरेंगे । वे औरों को भी तार पार उतरेंगे ॥".
'साकेत' में भारतीय संस्कृति और पारिवारिक जीवन की भावना, पूर्णरूपेण परिपुष्ट हुई है। जैसा महाकाव्य के लक्षणों के प्रसङ्ग में वतलाया गया है इसके नायक भी आर्यों का आदर्श बताने ही !ये थे, सुर-कार्य-साधना के लिए नहीं ।
'साकेत' का मूल उद्देश्य तो टर्मिला-विषयक उपेक्षा को हो दूर करना है किन्तु उसमें प्रसङ्गचश यत्र-तत्र गांधीवाद के सरल जीवन, हाथ की कताई-बुनाई और विनत विद्रोह आदि के सिद्धान्तों का भी समावेश हो गया है। राजा को प्रजा द्वारा चुने जाने की बात आधुनिक प्रज्ञातन्त्रवाद की प्रतिव्वनि है। उस समय के आदर्श राजा प्रजा के प्रति निधि अवश्य होते थे किन्तु उनमें चुनाव के विपरीत वंशानुक्रम को परम्परा थी । ये विचार कालं-दूपण ( Anachronism ) के अन्तर्गत अवश्य आयेंगे । गुप्त जी के पक्ष में इतना ही कहा जा सकता है कि वे समय के प्रभाव से नहीं बच सके और उनके हृदय की भावनाएँ देश काल के बन्धनों को तोड़कर भंकरित हो उठी हैं
साकेत की प्रबंधात्मकता के सम्बन्ध में कुछ विद्वानों को सन्देह है । यह बात मानना पड़ेगो कि उर्मिला के अत्यधिक विरह वर्णन के कारण साकेत को घटना प्रवाह कुछ कुण्ठित सा हो गया है । 'प्रियप्रवास' की भाँति 'साकेत' में भी बहुत-सा घटना क्रम स्मृति के रूप से आया है किन्तु घटनाओं का प्रत्यक्ष वर्णन भी 'प्रियप्रवास' की अपेक्षा इसमें अधिक है । कथा के प्रवाह वर्णनों के सौष्ठव और साँस्कृतिक
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· सिशून्य प्रशून्य - काव्य "अथवा आकर्षण पूण्यभूमि का ऐसा, : अवतरित हुआ मैं, आप उच्च कल जैसा । जो नाम मात्र ही स्मरण मद्रीय करेंगे, वे भी भवसागर विना प्रयास तरंगे ॥" किन्तु गुप्त जो तुरन्त ही उनको देवत्व के उंच शिखिर से उतार कर मानवता की भाव-भूमि पर लेते हैं और उनसे कहलाते हैंः" पर जो मेरा गुरण कर्म स्वभाव धरेंगे । वे औरों को भी तार पार उतरेंगे ॥". 'साकेत' में भारतीय संस्कृति और पारिवारिक जीवन की भावना, पूर्णरूपेण परिपुष्ट हुई है। जैसा महाकाव्य के लक्षणों के प्रसङ्ग में वतलाया गया है इसके नायक भी आर्यों का आदर्श बताने ही !ये थे, सुर-कार्य-साधना के लिए नहीं । 'साकेत' का मूल उद्देश्य तो टर्मिला-विषयक उपेक्षा को हो दूर करना है किन्तु उसमें प्रसङ्गचश यत्र-तत्र गांधीवाद के सरल जीवन, हाथ की कताई-बुनाई और विनत विद्रोह आदि के सिद्धान्तों का भी समावेश हो गया है। राजा को प्रजा द्वारा चुने जाने की बात आधुनिक प्रज्ञातन्त्रवाद की प्रतिव्वनि है। उस समय के आदर्श राजा प्रजा के प्रति निधि अवश्य होते थे किन्तु उनमें चुनाव के विपरीत वंशानुक्रम को परम्परा थी । ये विचार कालं-दूपण के अन्तर्गत अवश्य आयेंगे । गुप्त जी के पक्ष में इतना ही कहा जा सकता है कि वे समय के प्रभाव से नहीं बच सके और उनके हृदय की भावनाएँ देश काल के बन्धनों को तोड़कर भंकरित हो उठी हैं साकेत की प्रबंधात्मकता के सम्बन्ध में कुछ विद्वानों को सन्देह है । यह बात मानना पड़ेगो कि उर्मिला के अत्यधिक विरह वर्णन के कारण साकेत को घटना प्रवाह कुछ कुण्ठित सा हो गया है । 'प्रियप्रवास' की भाँति 'साकेत' में भी बहुत-सा घटना क्रम स्मृति के रूप से आया है किन्तु घटनाओं का प्रत्यक्ष वर्णन भी 'प्रियप्रवास' की अपेक्षा इसमें अधिक है । कथा के प्रवाह वर्णनों के सौष्ठव और साँस्कृतिक
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पर्यावलोकन किया गया है। श्री शातिप्रिय द्विवेदी के समकालीन निबधकार जिस धरातल पर निबंध साहित्य में अपना योगदान दे रहे थे उसका परित्याग कर आपने अपने नवीन दृष्टिकोण एवं नवीन पद्धति के द्वारा नवीन धरातल पर निबध साहित्य को विशिष्ट स्थान प्रदान किया। इस प्रकार आपने निबध साहित्य की धारा का एक मोड-सा देकर उसके साहित्य को परिपक्वता मे प्रशसात्मक योगदान दिया। यात्री' शोषक निबन्ध में मानव को एक यात्री के रूप में चित्रित कर उसे किसी अज्ञात लोक का वामी माना है। 'जीवन का लक्ष्य' और 'जीवन का उद्देश्य' शीपक निवधा म लक्ष्य और उद्देश्य की महत्ता का प्रतिपादन हुआ है । 'मग तृष्णा' निबन्ध म मावन की अतप्त महत्वाकाक्षाओं का दिग्दशन करते हुए उसकी दो प्रवर लपटोद्वेप और ईर्ष्या की ओर सकेत किया है जो मानव को निरन्तर अवनति की ओर ले जाती है । इनसे आत्मशांति और आत्मानद नही प्राप्त हो सकता । ससार में जीवन के निर्वाह के लिए लौगिक याग्यता की आवश्यकता एवं अनिवायता है, इससे रहित मानव जीवन की क्सौटी पर पूर्णरूपेण खरा नहीं उतर सक्ता । यही निर्देशन लौविक योग्यता नामक निबंध में किया गया है। जीवन में स्थायी सुख शांति के लिए 'आत्म चितन मनन अधिक आवश्यक है तथा जीवन पथ के अधवार को मिटा कर उत्तरोत्तर जीवन विकास के लिए आत्म विश्वास भी एक प्रधान गुण है । जीवन के आगन मे सुख दुख के पौधे तो विकसित होते ही रहते हैं लेकिन निरतर दुख हो दुख की कल्पना घर हृदय द्रवित करना हानिकर है। जीवन की श्रेष्ठता के लिए हसना एव मुस्कराना भी आवश्यक है जिससे उर मे सौरभ से जग का आँगन भी सुवासित हो उठे । यही सार 'हसता जोवन' म अक्ति किया गया है ।
[१३] ज्योति विहग' हिदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग से प्रकाशित श्री शातिप्रिय द्विवेदी की 'ज्योति विहग आलोचना का प्रकाशन काल १९५१ है । प्रस्तुत आलोच नात्मक पुस्तक मे लेखक ने सौदय और संस्कृति के सुकुमार रवि श्री सुमित्रान दन पात जो की कृतिया की आलोचना प्रस्तुत की है। द्विवेदी जी ने प्रस्तुत आलोचनात्मक पुस्तक के साकल्य सत्य शिव सुदरम' 'सुदरम् छायावाद युग' शिवम् प्रगतिशील युग तथा सत्यम् सास्कृतिक युग आदि शीपको के अन्तगत पत जो को समस्त कृतियो का विभाजन प्रस्तुत किया है। प्रथम शोषक में लेखन ने 'शिल्पी अध्याय के अन्तगत हिंदी कविता को कमनीयता और उदयाचल के छायावादी कवि पत को एक उत्कृष्ट शिल्पी के रूप में अकित किया है। हिंदी कविता का श्रम विकास' अध्याय के अतगत ब्रजभाषा और खडी बोली द्विवेदी युग के प्रतिनिधि कवि, छायावाद युग, विरोध और विकास तथा छायावाद के बहत्त्वयी आदि शीषको के अतगत आधुनिक हिंदी कविता के विकास क्रम को प्रतिबिम्बित किया है । अन्तरदशन' में बालिका एक भाव प्रतीक, रवींद्र और पत सस्मरण, सौदय की साधना, युग का प्रभाव, पत की प्रगति शीपको के अतगत पत जी के छायावादी
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पर्यावलोकन किया गया है। श्री शातिप्रिय द्विवेदी के समकालीन निबधकार जिस धरातल पर निबंध साहित्य में अपना योगदान दे रहे थे उसका परित्याग कर आपने अपने नवीन दृष्टिकोण एवं नवीन पद्धति के द्वारा नवीन धरातल पर निबध साहित्य को विशिष्ट स्थान प्रदान किया। इस प्रकार आपने निबध साहित्य की धारा का एक मोड-सा देकर उसके साहित्य को परिपक्वता मे प्रशसात्मक योगदान दिया। यात्री' शोषक निबन्ध में मानव को एक यात्री के रूप में चित्रित कर उसे किसी अज्ञात लोक का वामी माना है। 'जीवन का लक्ष्य' और 'जीवन का उद्देश्य' शीपक निवधा म लक्ष्य और उद्देश्य की महत्ता का प्रतिपादन हुआ है । 'मग तृष्णा' निबन्ध म मावन की अतप्त महत्वाकाक्षाओं का दिग्दशन करते हुए उसकी दो प्रवर लपटोद्वेप और ईर्ष्या की ओर सकेत किया है जो मानव को निरन्तर अवनति की ओर ले जाती है । इनसे आत्मशांति और आत्मानद नही प्राप्त हो सकता । ससार में जीवन के निर्वाह के लिए लौगिक याग्यता की आवश्यकता एवं अनिवायता है, इससे रहित मानव जीवन की क्सौटी पर पूर्णरूपेण खरा नहीं उतर सक्ता । यही निर्देशन लौविक योग्यता नामक निबंध में किया गया है। जीवन में स्थायी सुख शांति के लिए 'आत्म चितन मनन अधिक आवश्यक है तथा जीवन पथ के अधवार को मिटा कर उत्तरोत्तर जीवन विकास के लिए आत्म विश्वास भी एक प्रधान गुण है । जीवन के आगन मे सुख दुख के पौधे तो विकसित होते ही रहते हैं लेकिन निरतर दुख हो दुख की कल्पना घर हृदय द्रवित करना हानिकर है। जीवन की श्रेष्ठता के लिए हसना एव मुस्कराना भी आवश्यक है जिससे उर मे सौरभ से जग का आँगन भी सुवासित हो उठे । यही सार 'हसता जोवन' म अक्ति किया गया है । [तेरह] ज्योति विहग' हिदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग से प्रकाशित श्री शातिप्रिय द्विवेदी की 'ज्योति विहग आलोचना का प्रकाशन काल एक हज़ार नौ सौ इक्यावन है । प्रस्तुत आलोच नात्मक पुस्तक मे लेखक ने सौदय और संस्कृति के सुकुमार रवि श्री सुमित्रान दन पात जो की कृतिया की आलोचना प्रस्तुत की है। द्विवेदी जी ने प्रस्तुत आलोचनात्मक पुस्तक के साकल्य सत्य शिव सुदरम' 'सुदरम् छायावाद युग' शिवम् प्रगतिशील युग तथा सत्यम् सास्कृतिक युग आदि शीपको के अन्तगत पत जो को समस्त कृतियो का विभाजन प्रस्तुत किया है। प्रथम शोषक में लेखन ने 'शिल्पी अध्याय के अन्तगत हिंदी कविता को कमनीयता और उदयाचल के छायावादी कवि पत को एक उत्कृष्ट शिल्पी के रूप में अकित किया है। हिंदी कविता का श्रम विकास' अध्याय के अतगत ब्रजभाषा और खडी बोली द्विवेदी युग के प्रतिनिधि कवि, छायावाद युग, विरोध और विकास तथा छायावाद के बहत्त्वयी आदि शीषको के अतगत आधुनिक हिंदी कविता के विकास क्रम को प्रतिबिम्बित किया है । अन्तरदशन' में बालिका एक भाव प्रतीक, रवींद्र और पत सस्मरण, सौदय की साधना, युग का प्रभाव, पत की प्रगति शीपको के अतगत पत जी के छायावादी
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घियो विश्वा विराजति । -ऋ. वे. १ - ३-१२
इति कर्तव्य है कि स्वसंपत्ति का यथायोग्य विनिमय करने के बाद दान के रूप में अन्य से संविभाग करना चाहिये ।
आपका वेद - प्रचार-प्रसार कार्य की अविरत धारा विश्व के कोने-कोने में बहती भूमि को पावन करती रहती है । कलकत्ता के मारा विश्वनाथ मंदिर में भगवान् वेद का पारायण काशीजी के विद्वानों द्वारा प्रारंभ हुआ । यह पारायण क्या, यह तो वेद कल्लोलिनी गंगा का सुमधुर घोष, या द्विज - मधुरों के गुंजारव में विश्व वाटिका में वसंत का संदेश, या विरही प्रणयिनी को पियु- मिलन की आशा देती कोयल की कुहुक है ! कि या फिर अपने प्रियतम का उद्गार । इस ऋचा रूपी सुरभित सुमनावली से सम्मानित, सत्कारित करती देवांनना की यह प्रशस्ति है, क्या उपमाएं दी जाय ।
वस्तुतः श्री कृष्ण मुखारविन्द से निर्झरित वेद, विश्व संगीत स्वरूप ही हैं, क्योंकि वे स्वयं 'राग' या संगीत ही हैं। दूसरे अर्थ में राग या प्रेम स्वरूप होने से भी, समस्त विश्व उनकी प्रेम - परिमल से, प्रेम - रंग-तरंग से ही आप्लावित है ।
ता. १४ फरवरी को महाशिवरात्रि का उत्सव खूब धूमधाम से मनाया गया । ता. १६ फरवरी को सूर्यग्रहण था । उसका असर वैज्ञानिक दृष्टि से इतना खतरनाक था, कि बहुत दिन पहले से ही, वर्तमान पत्रों तथा डॉक्टरों ने जनता को सूचना दे रखी थी कि ग्रहण के समय कोई भी व्यक्ति उसकी ओर दृष्टि न करे, क्योंकि ऐसा करने से दृष्टि चली जाने की संभावना थी। उस समय दरम्यान खाना-पीना तो प्रथम भी वर्ज्य ही होता है । ता. १५ को आप देहली से मोटर में वृंदावन गये । भाई भूरामल अग्रवाल की ओर से, श्रौत - मुनि निवास में वेद - पारायण शुरू किया गया । उसकी पूर्णाहुति ता. २५ फरवरी को हुई । उसी दिन संस्कृत विद्यालय का शिलान्यास भाई भूरामलजी द्वारा हुआ । दूसरे दिन अखंड कीर्तन तथा होलो उत्सव प्रारंभ हो गया ।
स्वामी रामानंदजी की जन्मजयन्ती
फाल्गुन शुल्क त्रयोदशी को मेरे दादागुरु ब्रह्मलीन स्वामी रामानंदजी महाराज की जन्म जयंति थी । उस दिन प्रतिवर्षानुसार, भक्त - संत- मंडल ने उनके चित्र का अर्चन पूजन कर, भावपूर्ण कीर्तन किया । प्रसिद्ध कीर्तनकार कृष्णप्रेमी श्री दलीलीजी खलीली राम पञ्चषानी, गंगारामजी के कीर्तन तो ब्रजभूमि की श्रीकृष्ण लीलाओं को मूर्तिमान कर देता है । आपने कईबार 'कीर्तन' शब्द को अति सरल सुंदर सारपूर्ण भाव बताया कि कीर्तन शब्द को उलटा करने से 'नर्तकी' बनता है, जिसका अर्थ है
माया । अतः कीर्तन करने से माया नर्तकी की चूड में फँसा हुआ जीव, भगवद्रस में डूब कर लाख चौरासी के चक्कर से छूट जाता है, क्योंकि भगवान के चरण कमल में प्रविष्ट सुभागी जीव को माया कदापि स्पर्श नहीं कर सकती, यह नितान्त सत्य है । एक बार आपने गुरु का महत्व दर्शाया था कि
गुरु का महत्त्व
गुरु शब्द सांसारिक प्रक्रिया में आज रूढ़ हुआ है। जो पढ़ाता है वह हमारा शिक्षक याने गुरु है । शाला में शिक्षक गुरु, संगीतशाला में उस्ताद । उसी प्रकार सब लोग गुरु का अर्थ मानकर चलते हैं। गुरु सांसारिक बातें सिखायें और उनके द्वारा उदरपूर्ति हो ऐसा एक भाव संस्कारवश समाज में दृढ हो रहा है । लेकिन यह तो पानी से भी पतला अर्थ है ।
गुरु वास्तव में सांसारिक बातें नहीं, किन्तु पारमार्थिक रहस्यों के उद्घाटन के लिये होता है । संसार की जाल से माया एवं ममता से, आवागमन के चक्कर से जो हमें छुड़ाये वही सच्चा गुरु है । हम तो अपनी अहंकार ग्रंथि के साथ संत या गुरु के पास जाते हैं। कभी कभी आर्थिक या सांसारिक बातों से महापुरुष को तंग करते हैं । यह उचित नहीं है । सच कहा जाय तो आत्मार्थी शिष्य के अभाव में महान गुरु के जीवन में रिक्तता बनी रहती है । जब आत्मजिज्ञासु आता है, तब सहस्रसूर्य की भाँति ज्ञानप्रकाश फैला कर जन्म जन्म के अज्ञान - अन्धकार को नष्ट करने में गुरु अपना सच्चा सामर्थ्य दिखलाते हैं । कमी हमारी है । हम आत्मकेन्द्री एवं स्वार्थी बनकर जाते हैं और परिणामतः सच्चा ज्ञान नहीं पा सकते
। उल्लू को सूर्य नहीं दिखाई दे, उसमें सूर्य का क्या कसूर ? यहाँ तो उल्लू आंखें बन्द कर लेता है। हम भी उल्लू की भाँति सद्गुरु पाकर भी मुक्ति के दर्शन नहीं कर पाते हैं ।
होली उत्सव : 'सजना' की होली
ता. २ मार्च को होली - उत्सव सानंद मनाया गया। उस दिन मुख्यतया व्रज में एवं अन्य स्थानों में भी सब नर - नारी, रंग की पीचकारियाँ भरभर, एक दूसरे पर छाँट कर, बहुत ही मस्ती में साग दिन झूमते रहते हैं । बड़ा आनंदोत्सव होता है यह । सजन कसाई परमात्मा के परम भक्त थे । श्रीकृष्ण के साथ उनकी हार्दिक श्रीति थी। परंतु वे होली खेलने नहीं जाते थे । एक दिन प्रभु ने उससे पूछा, 'सजना' क्या आज मेरे साथ होरी नहीं खेलोगे ? तो सजना ने
क्या ही सुंदर भावपूर्ण प्रत्युत्तर दिया; कहा, 'मेरे जीवनधन ! आपके साथ अवश्य खेलूँगा । और इन क्षुल्लक बनावटी रंगों से क्या होली खेलूँगा ! मैं तो अपने रक्त की एक एक बूँद से आपके साथ अवश्य खेलूँगा और एक दिन सचमुच ही अकस्मात् एक घर की दीवार उनके सिर पर टूट पड़ी और सजना का सिर फूट जाने से उनके प्राणपखेरू प्रभु की अनंत ज्योति में मिल गये । धन्य है ऐसे अद्भुत प्रेमी !
वृन्दावन में नेत्र यज्ञ
ता. ९ मार्च को श्रौत मुनि आश्रम में नेत्र - शिविर लगाया । भिवानी हरियाणा आदर्श नेत्र अस्पताल के डॉ. मदन मोहन गुप्ता को दस दिन के लिए आश्रम में नेत्र रोगियों की चिकित्सा तथा इलाज के हेतु बुलाया गया । दरम्यान १३० नेत्र ओपरेशन, ७०० को चश्मा, सबको दूध भोजन तथा औषधि निःशुल्क दिये गये । इतना ही नहीं, उनको वापस जाने का किराया तक दिया गया । वृन्दावन निवासी श्री नानकचंद द्वारा यह अति श्लाघनीय परमार्थ कार्य नियोजित था एवं श्री परसराम गुप्ता ने इसमें पूरी तरह सहायक बन, उसको सफल बनाया । आजकल ऐसे अनेक मानवतापूर्ण कार्य, भारत में विभिन्न स्थानों पर दानी सज्जनों एवं परोपकार-रत डॉक्टरों के साथ अनेक सेवाधारी व्यक्तियों के सहयोग से हो रहे हैं। यह बड़े आनंद का विषय है । दूसरे दिन ता. १० मार्च को गुरु गंगेश्वर देवकी भोजराज महाविद्यालय का उद्घाटन, मथुरा जिल्लाधीश श्री वी. डी. माहेश्वर द्वारा, पूज्य स्वामी श्री अखंडानंदजी की अध्यक्षता में किया गया, जब वहाँ के सभी प्रतिष्ठित संत - विद्वान उपस्थित थे । श्रीमती देवकी बहन भोजराज आपके परम पुराने भक्तों में से एक थीं। उनकी इच्छा के अनुसार, इस कन्या महाविद्यालय तथा होमयोपैथिक औषधालय की स्थापना की गई । साथ साथ, ता. १४ मार्च को उपर्युक्त औषधालय में एलोपैथिक दवाखाना भी शुरू किया गया, ताकि उभय प्रकार के चिकित्सक प्रयाग हो सके । इस प्रकार तीन सप्ताह श्री वृन्दावन में रहकर, ता. १७ मार्च को रामनवमी उत्सव के लिये आप दिल्ली पधारे ।
चैत्रो नवरात्र प्रारंभ
रामनवमी उत्सव निमित, गंगेश्वर - घाम आश्रम में १०८ रामायण नवाह पारायण एवं साथ ही भगवान् - वेद का पारायण भी प्रारंभ हो गया । सायंकाल श्रीमती रामादेवी एवं कृष्णदासजी के प्रवचन हुए । ता. २३ मार्च को पटेल नगर शक्तिबाग से भगवगन् - त्रेइ तथा भगवान राम की शोभा यात्रा खूब धूमधाम से निकलकर, गंगेश्वर धाम में पूर्ण की गई । ता. २४ मार्च, रामनवमी के दिन,
रामायण नवाह तथा वेद पारायण की पूर्णाहुति की गई । उस उत्सव के साथ, ब्रह्मलीन स्वामी सर्वांनंदजी महाराज को जन्म जयंति मनाई गई । दूसरे दिन, यज्ञ तथा यमुना स्नान हुआ । ता. २७ मार्च को कश्मीर के डॉ. करणसिंहजी आश्रम में आपके दर्शनार्थ पधारे एवं वेद में नवधा भक्ति इस विषय पर प्रव चन किया ।
वेद में नवधा भक्ति
भगवान् से भक्ति की याचना करते हुए वेद कहता है : 'तस्य ते भक्तिवांसः स्याम'
अर्थात् हम सदा पूर्वोक्तगुण विशिष्ट आपकी अतिशय भक्ति से युक्त रहें ।
भगवान् श्रीकृष्ण ने भी गीता में भगवत्प्राप्ति के लिए भक्ति की साधना का अनेक प्रकार से उपदेश दिया है - सर्वभूतस्थितं यो मां भजत्येकत्वमास्थितः ( ६ - ३१), श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः ( ६ - ४७ ), चतुर्विधा भजन्ते माम् (७-१६), भजन्ते मां दृढव्रताः ( ७ - २८), भक्त्या युक्तो योगबलेन चैव ( ८ - १०), भक्त्या लभ्यस्त्वनन्यया (८ - २२), भजन्त्यनन्यमनसः (९ - १३), नमस्यन्तश्च मां भक्त्या (९-१४ ), पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति (९ - २६), ये भजन्ति तु मां भक्त्या (९ - २९ ), भजते मामनन्यभाक् (९-३० ) न मे भक्तः प्रणश्यति (९ - ३१), अनित्यममुखं लोकमिमं प्राप्य भजस्व माम् ( ९ ३३ ), इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः (१०-८), तेषां सततयुक्तनां भजतां प्रीतिपूर्वकम् (१० - १० ) , भक्त्या त्वनन्यया शक्यः (११-५४), मद्भक्तः सङ्गवर्जितः (११-५५), यो मद्भक्तः स मे प्रियः (१२-१४-१६), भक्तिमान् यः स मे प्रियः (१२ - १७), भक्तिमान् मे प्रियो नरः (१२-१९), भक्तास्तेऽतीव मे प्रियाः (१२-२०), भक्तिरव्यभिचारिणी (१३ - १० ) , भक्तियोगेन सेवते (१४-२६), स सर्वविद् भजति माम् ( १५ - १९ ), मद्भक्तिं लभते पराम् ( १८ - ५४), भक्त्या मामभिजानाति (१८-५५)।
श्रीमद्भागवत आदि पुराणों में भक्ति के नौ भेद बताये गये हैं -
श्रवण कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम् । अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यमात्मनिवेदनम् ॥
एक ही मन्त्र में नवधा भक्ति
वेद में भी विभिन्न स्थलों पर भक्ति के इन नौ भेदों का पृथक्-पृथक् वर्णन तो है ही, जिसका दिग्दर्शन आगे किया जायेगा, यहाँ भगवान् वेद का वह प्राचीन मन्त्र उद्धृत किया जाता है जिसमें भक्ति के उपर्युक्त सभी प्रकारों का अद्भुत कौशल के साथ एकत्र ही समावेश किया गया हैभद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः ॥
अर्थात् (देवाः !) हे देवगण ! हम, ( भद्रम् ) भजनीय, सेवनीय, आराधनीय, विद्वानों की 'कल्याणानां निधानम्' इस उक्ति से कल्याणमय तथा 'मङ्गलं मङ्गलानाम्' इस उक्ति से परममङ्गलमय परमात्मा को, (कर्णेभिः शृणुयाम कानों से सुनें अर्थात् उनके दिव्य गुण, कर्म और चरित्र को सुनें । तात्पर्य यह है कि हमारी श्रोत्रेन्द्रियाँ निरन्तर हरिकथा - श्रवण में संलग्न रहें । ( यजत्राः) भगवान् के अर्चक हम भक्त, (स्थिरैः अङ्गैः) कर-पदादि अंगों से, तथा (तनूभिः) अवयवी शरीरों से संयुक्त होकर, (तुष्टुवांसः) भगवत्कीर्तन करते हुए, (देवहितम्) देव के, भगवान् के हितार्थ, भगवत्प्रीत्यर्थ, ( यत्, इण्र, गतौ शतरि रूपम्, आयुः) प्रवहमान जीवन को, (व्यशेम ) प्राप्त हों अर्थात् हमारे जीवन का लक्ष्य लौकिक स्वार्थसिद्धि नहीं अपितु भगवान् की सेवा द्वारा उनकी प्रसन्नता प्राप्त करना हो । इस प्रकार श्रवण आदि साधनों से भक्ति के अनुष्ठान के फलस्वरूप नैसर्गिक प्रेम का उदय होने पर, (अक्षभिः) नेत्रों से, (पश्येम) अपने आराध्यदेव भगवान् श्रीकृष्ण का दर्शन करें ।
इस मन्त्र में प्रयुक्त 'श्रृणुयाम' पढ़ से श्रवण का, 'तुष्टुवांस : ' से कीर्तन का, 'देवहितम्' और 'आयु' से आत्मनिवेदन का तथा 'यजत्रा : ' से अर्चन भक्ति का प्रतिपादन हुआ है । इसी प्रकार 'स्थिरैरङ्गैः' पदों से परमात्मा की स्थावर मूर्तियों, मन्दिरों में स्थापित प्रतिमाओं तथा जंगममूर्ति महात्माओं की पादसेवा सूचित की गयी है । भाव यह है कि भगवान् की स्थावर जंगम द्विविध मूर्तियों की पाद-सेवा में ही हाथों की सार्थकता है । मस्तक भगवान् के निवासाश्रय सम्पूर्ण प्राणियों की वन्दना करके अपने को सार्थक करें और यह शरीर प्रभु के दास्य एवं सख्य भाव का साधन हो । 'शरीर' पद मन का भी उपलक्षक है, अतः इससे मानस स्मरण भक्ति भी प्रतिपादित होती है । इस प्रकार भक्ति के सभी प्रकारों का निर्देश इस मन्त्र में
इसी प्रकार शुक्ल यजुर्वेद का एक मन्त्र देखिये जिसमें भक्ति के श्रवणकीर्तनादि सभी भेद एक साथ दृष्टिगोचर होते हैं -
तच्चक्षुर्देवहितं पुरस्ताच्छुकमुच्चरत् । पश्येम शरदः शतं जीवेम शरदः शतं शृणुयाम शरदः शतं प्रब्रवाम शरदः शतमदीनाः स्याम शरदः शतं भूयश्च शरदः शतात् ॥ - - शु० यजु० ३६ - २४
प्रकाशदाता सूर्य प्रभु की प्रत्यक्ष ज्योतिर्मय मूर्ति है, अतः इस मन्त्र में साधक उसी रूप में अपने इष्टदेव की प्रार्थना कर रहा है कि - हे भास्करात्मक प्रभो ! (तत् । पूर्वमन्त्रों से प्रतिपादित, (देवहितम्) देवताओं के प्रिय, (शुक्रम्) शुद्ध पापरहित अथवा तेजोमय (चक्षुः ) समस्त विश्व के प्रकाशक, नेत्रस्थानीय आप, (पुरस्तात् ) पूर्वदिशा में, (उच्चरत् उच्चरति ) विश्वकल्याण के लिए उदित होते हैं । ( शतं शरदः जीवेम) हम आपकी सेवा के उद्देश्य से सौ शरद् ऋतुओं तक अर्थात् सौ वर्ष जीवन धारण करें, ( शतं शरदः श्रृणुयाम ) सौ वर्षों तक आपकी गुणगाथा का श्रवण करते रहें, ( शतं शरदः प्रब्रवाम) सौ वर्षों तक आपके पराक्रमों का प्रवचन, पुनः पुनः वर्णन या कीर्तन करें तथा अन्त में, (शतं शरदः पश्येम) श्रवण, कीर्तन आत्मनिवेदन आदि की महिमा से नैसर्गिक प्रेमदशा में सौ वर्षों तक आपका दर्शन करें, श्रवणादि साधनों से साध्य भगवदर्शन हेतु सहजानुरक्ति चिरकालस्थायिनी हो । इसके पश्चात् भक्त अपनी पूर्ण शरणागति अनन्य निष्ठा का परिचय दे रहा है - ( शतं शरदः अदीनाः स्याम) सौ वर्षों तक हम किसी के सम्मुख दीनता न दिखावें । जब एकमात्र प्रभु ही दाता हैं, विश्वम्भर हैं, विश्व के बड़े से बड़े राजा-महाराजा, सेठ - साहूकार सब उसी के द्वार के भिखारी है, तो एक भिक्षुक से क्या माँगे, क्यों माँगे ? अतः हम एक उसी प्रभु से मनोरथ पूर्ति की प्रार्थना करें, अन्य से नहीं । 'शतं शरदः' अर्थात् सौ वर्ष, ये पद सुदीर्घकाल के ही द्योतक हैं। किन्तु भक्त की प्रार्थना है कि (भूयश्च शरदः शतात् । सौ वर्षों से भी अधिक काल तक यह अनन्य शरणागति, साध्य - साधन भावापन्न भक्ति की धारा हमारे हृदय में प्रवाहित होती रहे ।
ईश्वर प्रेरित प्रारब्ध के अनुरूप जीवन आदि क्रियाएँ स्वतः सिद्ध हैं, उनके लिए प्रार्थना का विशेष महत्त्व नहीं है । अतः श्रवण - कीर्तनादि भक्ति की सतत स्थिति के लिए प्रभु से प्रार्थना ही इस मन्त्र का प्रतिपाद्य है। प्राचीन भाष्यकारों ने उपर्युक्त दोनों मन्त्रों की अन्धत्व -वधिरत्वादि - दोष - निवारण - परक जो व्याख्याएँ को हैं, वे चमत्कृतिशून्य होने से विशेष आदरणीय नहीं जान पड़तीं। अतलस्पर्श वेदरत्नाकर में गहराई तक डुबकी लगाने पर ही आत्मनिवेदनादि बहुमूल्य चमत्कृतिपूर्ण भावरत्न अधिगत होते हैं ।
एक ही मन्त्र द्वारा नवविध भक्ति का निरूपण करनेवाले दो वेदमन्त्र ऊपर उद्धृत किये गये । अब भक्ति के नौ भेदों में से कमयः श्रवण आदि प्रत्येक भेद के दिग्दर्शक वेदवाक्य प्रस्तुत किये जा रहे हैं ।
इन्द्रस्य तु वीर्याणि प्रवोत्रम् । ( ऋ० १.३२.१) अर्थात् मैं मन्त्रद्रष्टा ऋषि इन्द्र के पराक्रमों का प्रवचन वर्णन करता हूँ । विष्णोनु कं वीर्याणि प्रवोचम् । (ऋ० १.१५४.१ ) अर्थात् भगवान् विष्णु के पराक्रमों का प्रवचन करता हूँ ।
इन दोनों वेदवाक्यों में 'नु' और 'कम्' पादपूरक निपात हैं। प्रवचन सदा श्रवण - सापेक्ष ही होता है । श्रोता के उपस्थित रहने पर ही प्रवक्ता प्रवचन के लिए उत्साहित होता है । कोई सुननेवाला न हो तो प्रवचन निरर्थक, अरण्यरोदन
होगा । अतः जहाँ-जहाँ 'वोचम्' 'वोचेम्' आदि वक्तृत्वमूलक क्रियापद आये हो, वहाँ - वहाँ' 'श्रृणु' 'श्रृणुयाः ' आदि श्रवणार्थक क्रियापदों का अध्याहार करना ही होगा । इस प्रकार उपर्युक्त दोनों वाक्यों का अर्थ यह हुआ कि 'मैं मन्त्रद्रष्टा ऋषि इन्द्र तथा विष्णु के पराक्रमों का प्रवचन करता हूँ, साधकगण सुनें ।' यदि लिङर्थ विवक्षित होगा तब यह अर्थ मानना होगा कि 'यदि आप लोग श्रवण करना चाहें तो मुझे अनुमति दें । मैं इन्द्रादि के पराक्रमों का प्रवचन आरम्भ करूँ ।'
ज्ञातव्य है कि पूरे ऋग्वेद में 'वोचम' पद का १९ बार तथा 'वोचेम' पद का ६ बार जहाँ-जहाँ प्रयोग हुआ है वे सब मन्त्र वचोभङ्गी से नवधा भक्ति के प्रथम भेद श्रवण के ही प्रतिपादक हैं, क्योंकि प्रवचन का क्योंकि प्रवचन का श्रवण से नियत साहचर्य है ।
प्रवचन में किसी के गुण कर्मादि का अनेक प्रकार से कथन ही अभिप्रेत होता है, अतः कीर्तन को प्रवचन का पर्याय माना जाय, तो अर्थ की दृष्टि से कोई अंतर नहीं पड़ता । इस दृष्टि से उपर्युक्त श्रवण - सम्बन्धी सभी वेद वाक्य कीर्तन के सहज ही प्रतिपादक हो जाते हैं ।
कोर्तन शब्द का अन्य अर्थ है गुणगान । इस अर्थ में कोर्तन भक्ति के निर्देशक कतिपय वेद-वचन निम्नलिखित हैं-१७२
गायन्ति त्वा गायत्रिणः । (ऋ० १.१०.१)
सुष्टुतिमीरयामि । (ऋ० २.३३.८)
बृहदिन्द्राय गायत । (ऋ० ८.८९.१ )
इन्द्रिमभि प्र गायत । (ऋ०
प्र गायत्रेण गायत । ( ऋ०
प्र गायताभ्यर्चाम । (ऋ० ९.९७.४ )
उपर्युक्त सभी वेदवचनों का अर्थ सुस्पष्ट ही है । अर्थ का विचार करते समय यह अवश्य ध्यान में रखना चाहिए कि अग्नि, इन्द्र आदि देवताओं के नाम से सर्वत्र ईश्वर का ही ग्रहण अभिप्रेत है । इसका विशेष विवरण वेदोपदेश - चन्द्रिका के 'देवता - विचार' शीर्षक लेख ( पृ० ३७६) में दिया गया है
इस प्रसङ्ग में अथवंवेद का निम्नलिखित मन्त्र विशेष महत्त्वपूर्ण है, जो प्रहनिंश भगवत्कीर्तन का सुस्पष्ट आदेश दे रहा हैदोषो गाय वृहद् गाय धुमद्धेहि । आथर्वण स्तुहि देवं सवितारम् ।।
(आथर्वण - थर्वतिश्चरतिकर्मा तत्प्रतिषेधः अथर्वन्नित्यतः स्वार्थिकाऽणू । अथर्वै वाथर्वणः तत्सम्बुद्धौ आथर्वणेति) । हे एकाग्रचित्त साधक ! (दोषा उ गाय ) रात्रि में भी भगवान् के गुणों का गान करो अर्थात् दिन-रात भगवत्कीर्तन का अनुष्ठान करते रहो । ( बृहत् गाय ) विशाल गान करो अर्थात् अकेले ही नहीं, अपितु संकीर्तन- सम्मेलन आदि की भी योजना बनाकर कोर्तन-मण्डलियों के साथ मिलकर विराट्र कोर्तन करो, जिसकी ध्वनि से धरती - आकाश गूँज उठे । (धुमत् ) तेजोमय सात्त्विक चित्तको, (धेहि) भगवान् में स्थापित करो अर्थात् जिहूवा से कीर्तन करते समय अपना चित्त भी भगवच्चरणारविन्द में लगाये रहो। ( सवितारम्) जगत् के उत्पादक अथवा प्रेरक, ( देवम् ) परमात्मा की, ( स्तुहि) स्तुति करो । इस मन्त्र में 'गाय' और 'स्तुहि' क्रियापदों से भगवद् - यशोगान और भगवद्गुणानुकथन उभयविध कीर्तन का निर्देश किया गया है ।
काष्णिकलापाचार्य श्रीस्वामी गोपालदासजी महाराज ने भक्तिप्रकाश में कोर्तन का लक्षण लिखा है - 'भगवतो यशोगानं रटनं बा मुहुर्मुहुः' अर्थात् भगवान् के यश का गाना अथवा पुनः पुनः रटना यानी गुणानुकथन ही कोर्तन है।
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घियो विश्वा विराजति । -ऋ. वे. एक - तीन-बारह इति कर्तव्य है कि स्वसंपत्ति का यथायोग्य विनिमय करने के बाद दान के रूप में अन्य से संविभाग करना चाहिये । आपका वेद - प्रचार-प्रसार कार्य की अविरत धारा विश्व के कोने-कोने में बहती भूमि को पावन करती रहती है । कलकत्ता के मारा विश्वनाथ मंदिर में भगवान् वेद का पारायण काशीजी के विद्वानों द्वारा प्रारंभ हुआ । यह पारायण क्या, यह तो वेद कल्लोलिनी गंगा का सुमधुर घोष, या द्विज - मधुरों के गुंजारव में विश्व वाटिका में वसंत का संदेश, या विरही प्रणयिनी को पियु- मिलन की आशा देती कोयल की कुहुक है ! कि या फिर अपने प्रियतम का उद्गार । इस ऋचा रूपी सुरभित सुमनावली से सम्मानित, सत्कारित करती देवांनना की यह प्रशस्ति है, क्या उपमाएं दी जाय । वस्तुतः श्री कृष्ण मुखारविन्द से निर्झरित वेद, विश्व संगीत स्वरूप ही हैं, क्योंकि वे स्वयं 'राग' या संगीत ही हैं। दूसरे अर्थ में राग या प्रेम स्वरूप होने से भी, समस्त विश्व उनकी प्रेम - परिमल से, प्रेम - रंग-तरंग से ही आप्लावित है । ता. चौदह फरवरी को महाशिवरात्रि का उत्सव खूब धूमधाम से मनाया गया । ता. सोलह फरवरी को सूर्यग्रहण था । उसका असर वैज्ञानिक दृष्टि से इतना खतरनाक था, कि बहुत दिन पहले से ही, वर्तमान पत्रों तथा डॉक्टरों ने जनता को सूचना दे रखी थी कि ग्रहण के समय कोई भी व्यक्ति उसकी ओर दृष्टि न करे, क्योंकि ऐसा करने से दृष्टि चली जाने की संभावना थी। उस समय दरम्यान खाना-पीना तो प्रथम भी वर्ज्य ही होता है । ता. पंद्रह को आप देहली से मोटर में वृंदावन गये । भाई भूरामल अग्रवाल की ओर से, श्रौत - मुनि निवास में वेद - पारायण शुरू किया गया । उसकी पूर्णाहुति ता. पच्चीस फरवरी को हुई । उसी दिन संस्कृत विद्यालय का शिलान्यास भाई भूरामलजी द्वारा हुआ । दूसरे दिन अखंड कीर्तन तथा होलो उत्सव प्रारंभ हो गया । स्वामी रामानंदजी की जन्मजयन्ती फाल्गुन शुल्क त्रयोदशी को मेरे दादागुरु ब्रह्मलीन स्वामी रामानंदजी महाराज की जन्म जयंति थी । उस दिन प्रतिवर्षानुसार, भक्त - संत- मंडल ने उनके चित्र का अर्चन पूजन कर, भावपूर्ण कीर्तन किया । प्रसिद्ध कीर्तनकार कृष्णप्रेमी श्री दलीलीजी खलीली राम पञ्चषानी, गंगारामजी के कीर्तन तो ब्रजभूमि की श्रीकृष्ण लीलाओं को मूर्तिमान कर देता है । आपने कईबार 'कीर्तन' शब्द को अति सरल सुंदर सारपूर्ण भाव बताया कि कीर्तन शब्द को उलटा करने से 'नर्तकी' बनता है, जिसका अर्थ है माया । अतः कीर्तन करने से माया नर्तकी की चूड में फँसा हुआ जीव, भगवद्रस में डूब कर लाख चौरासी के चक्कर से छूट जाता है, क्योंकि भगवान के चरण कमल में प्रविष्ट सुभागी जीव को माया कदापि स्पर्श नहीं कर सकती, यह नितान्त सत्य है । एक बार आपने गुरु का महत्व दर्शाया था कि गुरु का महत्त्व गुरु शब्द सांसारिक प्रक्रिया में आज रूढ़ हुआ है। जो पढ़ाता है वह हमारा शिक्षक याने गुरु है । शाला में शिक्षक गुरु, संगीतशाला में उस्ताद । उसी प्रकार सब लोग गुरु का अर्थ मानकर चलते हैं। गुरु सांसारिक बातें सिखायें और उनके द्वारा उदरपूर्ति हो ऐसा एक भाव संस्कारवश समाज में दृढ हो रहा है । लेकिन यह तो पानी से भी पतला अर्थ है । गुरु वास्तव में सांसारिक बातें नहीं, किन्तु पारमार्थिक रहस्यों के उद्घाटन के लिये होता है । संसार की जाल से माया एवं ममता से, आवागमन के चक्कर से जो हमें छुड़ाये वही सच्चा गुरु है । हम तो अपनी अहंकार ग्रंथि के साथ संत या गुरु के पास जाते हैं। कभी कभी आर्थिक या सांसारिक बातों से महापुरुष को तंग करते हैं । यह उचित नहीं है । सच कहा जाय तो आत्मार्थी शिष्य के अभाव में महान गुरु के जीवन में रिक्तता बनी रहती है । जब आत्मजिज्ञासु आता है, तब सहस्रसूर्य की भाँति ज्ञानप्रकाश फैला कर जन्म जन्म के अज्ञान - अन्धकार को नष्ट करने में गुरु अपना सच्चा सामर्थ्य दिखलाते हैं । कमी हमारी है । हम आत्मकेन्द्री एवं स्वार्थी बनकर जाते हैं और परिणामतः सच्चा ज्ञान नहीं पा सकते । उल्लू को सूर्य नहीं दिखाई दे, उसमें सूर्य का क्या कसूर ? यहाँ तो उल्लू आंखें बन्द कर लेता है। हम भी उल्लू की भाँति सद्गुरु पाकर भी मुक्ति के दर्शन नहीं कर पाते हैं । होली उत्सव : 'सजना' की होली ता. दो मार्च को होली - उत्सव सानंद मनाया गया। उस दिन मुख्यतया व्रज में एवं अन्य स्थानों में भी सब नर - नारी, रंग की पीचकारियाँ भरभर, एक दूसरे पर छाँट कर, बहुत ही मस्ती में साग दिन झूमते रहते हैं । बड़ा आनंदोत्सव होता है यह । सजन कसाई परमात्मा के परम भक्त थे । श्रीकृष्ण के साथ उनकी हार्दिक श्रीति थी। परंतु वे होली खेलने नहीं जाते थे । एक दिन प्रभु ने उससे पूछा, 'सजना' क्या आज मेरे साथ होरी नहीं खेलोगे ? तो सजना ने क्या ही सुंदर भावपूर्ण प्रत्युत्तर दिया; कहा, 'मेरे जीवनधन ! आपके साथ अवश्य खेलूँगा । और इन क्षुल्लक बनावटी रंगों से क्या होली खेलूँगा ! मैं तो अपने रक्त की एक एक बूँद से आपके साथ अवश्य खेलूँगा और एक दिन सचमुच ही अकस्मात् एक घर की दीवार उनके सिर पर टूट पड़ी और सजना का सिर फूट जाने से उनके प्राणपखेरू प्रभु की अनंत ज्योति में मिल गये । धन्य है ऐसे अद्भुत प्रेमी ! वृन्दावन में नेत्र यज्ञ ता. नौ मार्च को श्रौत मुनि आश्रम में नेत्र - शिविर लगाया । भिवानी हरियाणा आदर्श नेत्र अस्पताल के डॉ. मदन मोहन गुप्ता को दस दिन के लिए आश्रम में नेत्र रोगियों की चिकित्सा तथा इलाज के हेतु बुलाया गया । दरम्यान एक सौ तीस नेत्र ओपरेशन, सात सौ को चश्मा, सबको दूध भोजन तथा औषधि निःशुल्क दिये गये । इतना ही नहीं, उनको वापस जाने का किराया तक दिया गया । वृन्दावन निवासी श्री नानकचंद द्वारा यह अति श्लाघनीय परमार्थ कार्य नियोजित था एवं श्री परसराम गुप्ता ने इसमें पूरी तरह सहायक बन, उसको सफल बनाया । आजकल ऐसे अनेक मानवतापूर्ण कार्य, भारत में विभिन्न स्थानों पर दानी सज्जनों एवं परोपकार-रत डॉक्टरों के साथ अनेक सेवाधारी व्यक्तियों के सहयोग से हो रहे हैं। यह बड़े आनंद का विषय है । दूसरे दिन ता. दस मार्च को गुरु गंगेश्वर देवकी भोजराज महाविद्यालय का उद्घाटन, मथुरा जिल्लाधीश श्री वी. डी. माहेश्वर द्वारा, पूज्य स्वामी श्री अखंडानंदजी की अध्यक्षता में किया गया, जब वहाँ के सभी प्रतिष्ठित संत - विद्वान उपस्थित थे । श्रीमती देवकी बहन भोजराज आपके परम पुराने भक्तों में से एक थीं। उनकी इच्छा के अनुसार, इस कन्या महाविद्यालय तथा होमयोपैथिक औषधालय की स्थापना की गई । साथ साथ, ता. चौदह मार्च को उपर्युक्त औषधालय में एलोपैथिक दवाखाना भी शुरू किया गया, ताकि उभय प्रकार के चिकित्सक प्रयाग हो सके । इस प्रकार तीन सप्ताह श्री वृन्दावन में रहकर, ता. सत्रह मार्च को रामनवमी उत्सव के लिये आप दिल्ली पधारे । चैत्रो नवरात्र प्रारंभ रामनवमी उत्सव निमित, गंगेश्वर - घाम आश्रम में एक सौ आठ रामायण नवाह पारायण एवं साथ ही भगवान् - वेद का पारायण भी प्रारंभ हो गया । सायंकाल श्रीमती रामादेवी एवं कृष्णदासजी के प्रवचन हुए । ता. तेईस मार्च को पटेल नगर शक्तिबाग से भगवगन् - त्रेइ तथा भगवान राम की शोभा यात्रा खूब धूमधाम से निकलकर, गंगेश्वर धाम में पूर्ण की गई । ता. चौबीस मार्च, रामनवमी के दिन, रामायण नवाह तथा वेद पारायण की पूर्णाहुति की गई । उस उत्सव के साथ, ब्रह्मलीन स्वामी सर्वांनंदजी महाराज को जन्म जयंति मनाई गई । दूसरे दिन, यज्ञ तथा यमुना स्नान हुआ । ता. सत्ताईस मार्च को कश्मीर के डॉ. करणसिंहजी आश्रम में आपके दर्शनार्थ पधारे एवं वेद में नवधा भक्ति इस विषय पर प्रव चन किया । वेद में नवधा भक्ति भगवान् से भक्ति की याचना करते हुए वेद कहता है : 'तस्य ते भक्तिवांसः स्याम' अर्थात् हम सदा पूर्वोक्तगुण विशिष्ट आपकी अतिशय भक्ति से युक्त रहें । भगवान् श्रीकृष्ण ने भी गीता में भगवत्प्राप्ति के लिए भक्ति की साधना का अनेक प्रकार से उपदेश दिया है - सर्वभूतस्थितं यो मां भजत्येकत्वमास्थितः , श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः , चतुर्विधा भजन्ते माम् , भजन्ते मां दृढव्रताः , भक्त्या युक्तो योगबलेन चैव , भक्त्या लभ्यस्त्वनन्यया , भजन्त्यनन्यमनसः , नमस्यन्तश्च मां भक्त्या , पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति , ये भजन्ति तु मां भक्त्या , भजते मामनन्यभाक् न मे भक्तः प्रणश्यति , अनित्यममुखं लोकमिमं प्राप्य भजस्व माम् , इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः , तेषां सततयुक्तनां भजतां प्रीतिपूर्वकम् , भक्त्या त्वनन्यया शक्यः , मद्भक्तः सङ्गवर्जितः , यो मद्भक्तः स मे प्रियः , भक्तिमान् यः स मे प्रियः , भक्तिमान् मे प्रियो नरः , भक्तास्तेऽतीव मे प्रियाः , भक्तिरव्यभिचारिणी , भक्तियोगेन सेवते , स सर्वविद् भजति माम् , मद्भक्तिं लभते पराम् , भक्त्या मामभिजानाति । श्रीमद्भागवत आदि पुराणों में भक्ति के नौ भेद बताये गये हैं - श्रवण कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम् । अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यमात्मनिवेदनम् ॥ एक ही मन्त्र में नवधा भक्ति वेद में भी विभिन्न स्थलों पर भक्ति के इन नौ भेदों का पृथक्-पृथक् वर्णन तो है ही, जिसका दिग्दर्शन आगे किया जायेगा, यहाँ भगवान् वेद का वह प्राचीन मन्त्र उद्धृत किया जाता है जिसमें भक्ति के उपर्युक्त सभी प्रकारों का अद्भुत कौशल के साथ एकत्र ही समावेश किया गया हैभद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः ॥ अर्थात् हे देवगण ! हम, भजनीय, सेवनीय, आराधनीय, विद्वानों की 'कल्याणानां निधानम्' इस उक्ति से कल्याणमय तथा 'मङ्गलं मङ्गलानाम्' इस उक्ति से परममङ्गलमय परमात्मा को, भगवान् के अर्चक हम भक्त, कर-पदादि अंगों से, तथा अवयवी शरीरों से संयुक्त होकर, भगवत्कीर्तन करते हुए, देव के, भगवान् के हितार्थ, भगवत्प्रीत्यर्थ, प्रवहमान जीवन को, प्राप्त हों अर्थात् हमारे जीवन का लक्ष्य लौकिक स्वार्थसिद्धि नहीं अपितु भगवान् की सेवा द्वारा उनकी प्रसन्नता प्राप्त करना हो । इस प्रकार श्रवण आदि साधनों से भक्ति के अनुष्ठान के फलस्वरूप नैसर्गिक प्रेम का उदय होने पर, नेत्रों से, अपने आराध्यदेव भगवान् श्रीकृष्ण का दर्शन करें । इस मन्त्र में प्रयुक्त 'श्रृणुयाम' पढ़ से श्रवण का, 'तुष्टुवांस : ' से कीर्तन का, 'देवहितम्' और 'आयु' से आत्मनिवेदन का तथा 'यजत्रा : ' से अर्चन भक्ति का प्रतिपादन हुआ है । इसी प्रकार 'स्थिरैरङ्गैः' पदों से परमात्मा की स्थावर मूर्तियों, मन्दिरों में स्थापित प्रतिमाओं तथा जंगममूर्ति महात्माओं की पादसेवा सूचित की गयी है । भाव यह है कि भगवान् की स्थावर जंगम द्विविध मूर्तियों की पाद-सेवा में ही हाथों की सार्थकता है । मस्तक भगवान् के निवासाश्रय सम्पूर्ण प्राणियों की वन्दना करके अपने को सार्थक करें और यह शरीर प्रभु के दास्य एवं सख्य भाव का साधन हो । 'शरीर' पद मन का भी उपलक्षक है, अतः इससे मानस स्मरण भक्ति भी प्रतिपादित होती है । इस प्रकार भक्ति के सभी प्रकारों का निर्देश इस मन्त्र में इसी प्रकार शुक्ल यजुर्वेद का एक मन्त्र देखिये जिसमें भक्ति के श्रवणकीर्तनादि सभी भेद एक साथ दृष्टिगोचर होते हैं - तच्चक्षुर्देवहितं पुरस्ताच्छुकमुच्चरत् । पश्येम शरदः शतं जीवेम शरदः शतं शृणुयाम शरदः शतं प्रब्रवाम शरदः शतमदीनाः स्याम शरदः शतं भूयश्च शरदः शतात् ॥ - - शुशून्य यजुशून्य छत्तीस - चौबीस प्रकाशदाता सूर्य प्रभु की प्रत्यक्ष ज्योतिर्मय मूर्ति है, अतः इस मन्त्र में साधक उसी रूप में अपने इष्टदेव की प्रार्थना कर रहा है कि - हे भास्करात्मक प्रभो ! देवताओं के प्रिय, शुद्ध पापरहित अथवा तेजोमय समस्त विश्व के प्रकाशक, नेत्रस्थानीय आप, पूर्वदिशा में, विश्वकल्याण के लिए उदित होते हैं । हम आपकी सेवा के उद्देश्य से सौ शरद् ऋतुओं तक अर्थात् सौ वर्ष जीवन धारण करें, सौ वर्षों तक आपकी गुणगाथा का श्रवण करते रहें, सौ वर्षों तक आपके पराक्रमों का प्रवचन, पुनः पुनः वर्णन या कीर्तन करें तथा अन्त में, श्रवण, कीर्तन आत्मनिवेदन आदि की महिमा से नैसर्गिक प्रेमदशा में सौ वर्षों तक आपका दर्शन करें, श्रवणादि साधनों से साध्य भगवदर्शन हेतु सहजानुरक्ति चिरकालस्थायिनी हो । इसके पश्चात् भक्त अपनी पूर्ण शरणागति अनन्य निष्ठा का परिचय दे रहा है - सौ वर्षों तक हम किसी के सम्मुख दीनता न दिखावें । जब एकमात्र प्रभु ही दाता हैं, विश्वम्भर हैं, विश्व के बड़े से बड़े राजा-महाराजा, सेठ - साहूकार सब उसी के द्वार के भिखारी है, तो एक भिक्षुक से क्या माँगे, क्यों माँगे ? अतः हम एक उसी प्रभु से मनोरथ पूर्ति की प्रार्थना करें, अन्य से नहीं । 'शतं शरदः' अर्थात् सौ वर्ष, ये पद सुदीर्घकाल के ही द्योतक हैं। किन्तु भक्त की प्रार्थना है कि अर्थात् मैं मन्त्रद्रष्टा ऋषि इन्द्र के पराक्रमों का प्रवचन वर्णन करता हूँ । विष्णोनु कं वीर्याणि प्रवोचम् । अर्थात् भगवान् विष्णु के पराक्रमों का प्रवचन करता हूँ । इन दोनों वेदवाक्यों में 'नु' और 'कम्' पादपूरक निपात हैं। प्रवचन सदा श्रवण - सापेक्ष ही होता है । श्रोता के उपस्थित रहने पर ही प्रवक्ता प्रवचन के लिए उत्साहित होता है । कोई सुननेवाला न हो तो प्रवचन निरर्थक, अरण्यरोदन होगा । अतः जहाँ-जहाँ 'वोचम्' 'वोचेम्' आदि वक्तृत्वमूलक क्रियापद आये हो, वहाँ - वहाँ' 'श्रृणु' 'श्रृणुयाः ' आदि श्रवणार्थक क्रियापदों का अध्याहार करना ही होगा । इस प्रकार उपर्युक्त दोनों वाक्यों का अर्थ यह हुआ कि 'मैं मन्त्रद्रष्टा ऋषि इन्द्र तथा विष्णु के पराक्रमों का प्रवचन करता हूँ, साधकगण सुनें ।' यदि लिङर्थ विवक्षित होगा तब यह अर्थ मानना होगा कि 'यदि आप लोग श्रवण करना चाहें तो मुझे अनुमति दें । मैं इन्द्रादि के पराक्रमों का प्रवचन आरम्भ करूँ ।' ज्ञातव्य है कि पूरे ऋग्वेद में 'वोचम' पद का उन्नीस बार तथा 'वोचेम' पद का छः बार जहाँ-जहाँ प्रयोग हुआ है वे सब मन्त्र वचोभङ्गी से नवधा भक्ति के प्रथम भेद श्रवण के ही प्रतिपादक हैं, क्योंकि प्रवचन का क्योंकि प्रवचन का श्रवण से नियत साहचर्य है । प्रवचन में किसी के गुण कर्मादि का अनेक प्रकार से कथन ही अभिप्रेत होता है, अतः कीर्तन को प्रवचन का पर्याय माना जाय, तो अर्थ की दृष्टि से कोई अंतर नहीं पड़ता । इस दृष्टि से उपर्युक्त श्रवण - सम्बन्धी सभी वेद वाक्य कीर्तन के सहज ही प्रतिपादक हो जाते हैं । कोर्तन शब्द का अन्य अर्थ है गुणगान । इस अर्थ में कोर्तन भक्ति के निर्देशक कतिपय वेद-वचन निम्नलिखित हैं-एक सौ बहत्तर गायन्ति त्वा गायत्रिणः । सुष्टुतिमीरयामि । बृहदिन्द्राय गायत । इन्द्रिमभि प्र गायत । उपर्युक्त सभी वेदवचनों का अर्थ सुस्पष्ट ही है । अर्थ का विचार करते समय यह अवश्य ध्यान में रखना चाहिए कि अग्नि, इन्द्र आदि देवताओं के नाम से सर्वत्र ईश्वर का ही ग्रहण अभिप्रेत है । इसका विशेष विवरण वेदोपदेश - चन्द्रिका के 'देवता - विचार' शीर्षक लेख में दिया गया है इस प्रसङ्ग में अथवंवेद का निम्नलिखित मन्त्र विशेष महत्त्वपूर्ण है, जो प्रहनिंश भगवत्कीर्तन का सुस्पष्ट आदेश दे रहा हैदोषो गाय वृहद् गाय धुमद्धेहि । आथर्वण स्तुहि देवं सवितारम् ।। । हे एकाग्रचित्त साधक ! रात्रि में भी भगवान् के गुणों का गान करो अर्थात् दिन-रात भगवत्कीर्तन का अनुष्ठान करते रहो । विशाल गान करो अर्थात् अकेले ही नहीं, अपितु संकीर्तन- सम्मेलन आदि की भी योजना बनाकर कोर्तन-मण्डलियों के साथ मिलकर विराट्र कोर्तन करो, जिसकी ध्वनि से धरती - आकाश गूँज उठे । तेजोमय सात्त्विक चित्तको, भगवान् में स्थापित करो अर्थात् जिहूवा से कीर्तन करते समय अपना चित्त भी भगवच्चरणारविन्द में लगाये रहो। जगत् के उत्पादक अथवा प्रेरक, परमात्मा की, स्तुति करो । इस मन्त्र में 'गाय' और 'स्तुहि' क्रियापदों से भगवद् - यशोगान और भगवद्गुणानुकथन उभयविध कीर्तन का निर्देश किया गया है । काष्णिकलापाचार्य श्रीस्वामी गोपालदासजी महाराज ने भक्तिप्रकाश में कोर्तन का लक्षण लिखा है - 'भगवतो यशोगानं रटनं बा मुहुर्मुहुः' अर्थात् भगवान् के यश का गाना अथवा पुनः पुनः रटना यानी गुणानुकथन ही कोर्तन है।
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इसमें 1 करोड़ रुपये तक का एयर एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर भी मिलता है. इसके साथ एयरपोर्ट लॉन्ज का एक्सेस और पार्टनर रेस्टोरेंट पर 20 फीसदी बचत का फायदा मौजूद है. आप एयरलाइन के खर्च पर प्रति 100 रुपये खर्च पर 10 माइल और प्रति 100 रुपये खर्च पर 4 माइल कमा सकते हैं. आप 100 होटलों और एयरलाइन पार्टनर्स पर माइल को रिडीम कर सकते हैं और ये कभी एक्सपायर नहीं होते हैं. इसकी सालाना फीस आवेदन के समय बताई जाती है.
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बाजार में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों सफर के लिए ट्रैवल क्रेडिट कार्ड्स मौजूद हैं, जिनमें से आप अपने हिसाब से चुन सकते हैं. आइए इनके बारे में जानते हैं. Best Travel Credit Cards: छुट्टियों का सीजन शुरू होने वाला है और सभी लोग इस समय का फायदा उठाने के लिए तैयारी कर रहे हैं. महामारी के बीच यह समय खास हो जाता है. आपकी ट्रैवल बुकिंग पर बचत में मदद करने के लिए, आप कुछ क्रेडिट कार्ड्स की मदद ले सकते हैं. बाजार में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों सफर के लिए ट्रैवल क्रेडिट कार्ड्स मौजूद हैं, जिनमें से आप अपने हिसाब से चुन सकते हैं. आइए इनके बारे में जानते हैं. HDFC Regalia क्रेडिट कार्ड में एक करोड़ रुपये तक का एयर एक्सीडेंटल डेथ कवर मिलता है. इसमें पंद्रह लाख रुपये तक का इमरजेंसी ओवरसीज हॉस्पिटलाइजेशन बेनेफिट भी मौजूद है. इसमें दो फीसदी की फॉरेन करेंसी मार्कअप फीस भी लगती है. इसमें कॉन्पलिमेंटरी एयरपोर्ट लॉन्ज एक्सेस का बेनेफिट भी शामिल है. इसमें भारत और छह दूसरे देशों में बारह एयरपोर्ट लॉन्ज शामिल हैं. इस कार्ड पर सालाना फीस दो,पाँच सौ रुपयापये की है. इसमें ग्राहको को विस्तारा मेंबरशिप का फायदा मिलता है. इसके साथ भारत के अंदर मौजूद विस्तारा लॉन्ज का एक्सेस भी शामिल हैं. इसमें ग्राहकों को दो.पाँच करोड़ रुपये तक का एयर एक्सिडेंट कवर भी मिलता है. इसमें बोनस क्लब विस्तारा प्वॉइंट्स और प्रीमियम इकोनॉमी टिकट और दूसरे बेनेफिट्स भी शामिल हैं. इस कार्ड पर सालाना फीस तीन,शून्य रुपयापये की है. इसमें एयर इंडिया पोर्टल के जरिए बुक की गई एयर इंडिया की टिकटों पर हर एक सौ रुपयापये खर्च करने पर तीस रिवॉर्ड प्वॉइंट्स तक मिलते हैं. इसके साथ एयर इंडिया फ्रिक्वेंट फ्लायर प्रोग्राम फ्लाइंग रिटर्न की मेंबरशिप, छः सौ से ज्यादा एयरपोर्ट लॉन्ज का एक्सेस के साथ प्रायोरिटी पास प्रोग्राम आदि का बेनेफिट भी शामिल है. इसमें Trident Privilege मेंबरशिप के साथ क्लब विस्तारा मेंबरशिप और एक अपग्रेड वाउचर का फायदा मिलता है. इसमें एक.निन्यानवे फीसदी की फॉरेन करेंसी मार्कअप फीस भी है. इस कार्ड के तहत, छह कॉम्पलिमेंटरी इंटरनेशनल एयरपोर्ट लॉन्ज का एक्सेस मिलता है. इसके साथ दो कॉम्पलिमेंटरी घरेलू लॉन्ज और दूसरे बेनेफिट्स भी मिलते हैं. इस कार्ड पर सालाना फीस चार,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है. इसमें एक करोड़ रुपये तक का एयर एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर भी मिलता है. इसके साथ एयरपोर्ट लॉन्ज का एक्सेस और पार्टनर रेस्टोरेंट पर बीस फीसदी बचत का फायदा मौजूद है. आप एयरलाइन के खर्च पर प्रति एक सौ रुपयापये खर्च पर दस माइल और प्रति एक सौ रुपयापये खर्च पर चार माइल कमा सकते हैं. आप एक सौ होटलों और एयरलाइन पार्टनर्स पर माइल को रिडीम कर सकते हैं और ये कभी एक्सपायर नहीं होते हैं. इसकी सालाना फीस आवेदन के समय बताई जाती है.
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देहरादून। वयोवृद्ध कांग्रेस नेता एनडी तिवारी ने उत्तराखंड के मौजूदा सियासी संकट पर गहरी चिंता जताते हुए इस गतिरोध को सुलझाने की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के सभी विधायक आज भी उनके संपर्क में हैं और प्रदेश की राजनीति में आए इस गतिरोध को समाप्त करने में यदि उनके सहयोग की जरूरत है, तो वे इसके लिए सबसे मिलने के लिए भी तैयार हैं।
प्रेस को जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड की राजनीति में गत कुछ दिनों से अस्थिरता का जो वातावरण बना है, वह गंभीर चिंता का विषय है। जनता द्वारा चुनी गई कांग्रेस की सरकार अपना कार्यकाल पूरा करे और चुनाव तय समय पर ही हों, यही एकमात्र हल है, जो प्रजातंत्र के सिद्धांतों के अनुरूप है।
राज्य की समस्याओं का निराकरण व विकास तभी हो सकता है, जब प्रदेश में एक स्थिर सरकार हो। उन्होंने अपने अंदाज में राज्य के मुखिया, सभी विधायकों के साथ ही कांग्रेस नेतृत्व को नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि स्थिरता भी तभी बनी रह सकती है, जब सभी विधायक व्यक्तिगत स्तर पर किसी भी कारण बने भेदभाव से ऊपर उठकर और एकजुट होकर राज्य की समस्याओं का समाधान व विकास पर ध्यान केंद्रित करें। सरकार के मुखिया का भी दायित्व बनता है कि वह हर विधायक के क्षेत्र की समस्या के समाधान व विकास को लेकर बिना भेदभाव किए समान दृष्टि से रखते हुए आगे बढ़े।
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देहरादून। वयोवृद्ध कांग्रेस नेता एनडी तिवारी ने उत्तराखंड के मौजूदा सियासी संकट पर गहरी चिंता जताते हुए इस गतिरोध को सुलझाने की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के सभी विधायक आज भी उनके संपर्क में हैं और प्रदेश की राजनीति में आए इस गतिरोध को समाप्त करने में यदि उनके सहयोग की जरूरत है, तो वे इसके लिए सबसे मिलने के लिए भी तैयार हैं। प्रेस को जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड की राजनीति में गत कुछ दिनों से अस्थिरता का जो वातावरण बना है, वह गंभीर चिंता का विषय है। जनता द्वारा चुनी गई कांग्रेस की सरकार अपना कार्यकाल पूरा करे और चुनाव तय समय पर ही हों, यही एकमात्र हल है, जो प्रजातंत्र के सिद्धांतों के अनुरूप है। राज्य की समस्याओं का निराकरण व विकास तभी हो सकता है, जब प्रदेश में एक स्थिर सरकार हो। उन्होंने अपने अंदाज में राज्य के मुखिया, सभी विधायकों के साथ ही कांग्रेस नेतृत्व को नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि स्थिरता भी तभी बनी रह सकती है, जब सभी विधायक व्यक्तिगत स्तर पर किसी भी कारण बने भेदभाव से ऊपर उठकर और एकजुट होकर राज्य की समस्याओं का समाधान व विकास पर ध्यान केंद्रित करें। सरकार के मुखिया का भी दायित्व बनता है कि वह हर विधायक के क्षेत्र की समस्या के समाधान व विकास को लेकर बिना भेदभाव किए समान दृष्टि से रखते हुए आगे बढ़े।
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बॉक्स ऑफिस पर 18 मई को फिल्म-When Obama Loved osama रिलीज़ होगी. यह फिल्म मुख्यतः एक अमन ओसामा नाम के लड़के और मैग्गी ओबामा नाम की एक लड़की की प्रेम कहानी पर बनी कॉमेडी लव स्टोरी फिल्म है. फिल्म का विषय असाधारण रूप से दिलचस्प है. फिल्म में लड़का उस लड़की से प्यार करने लगता है और अपने प्यार को पाने के रास्ते पर कुछ बाधाओं को पार करने की दिलचस्प कहानी है.
यह फिल्म एक मुसलमान लड़के और एक ईसाई लड़की की प्रेम कहानी है. फिल्म में मुख्य किरदार के रूप में मौसम शर्मा, स्वाति बक्शी, राहुल अवाना, अमृता आचार्य,मोहित बघेल, विकास गिरी, कीमती आनंद,मुश्ताक़ खान,मनोज बक्शी,हीना पांचाल,हेमंत पांडेय,हिमानी शिवपुरी आदि अभिनय करते दिखाई देंगे. फिल्म का निर्देशन सुधीर कुमार शर्मा के द्वारा किया गया है.
फिल्म को जयविन्दर सिंह भाटी और चमन गुप्ता ने प्रोड्यूस किया है और इस फिल्म की स्क्रीनप्ले और पटकथा वैभव बिष्ट और सुधीर कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से किया है. फिल्म की पोस्ट प्रोडक्शन और एडिटिंग का कार्य अनिल रे के द्वारा किया गया है. फिल्म में कोई बड़ा बॉलीवुड चेहरा ना होने के कारण अभी तक कुछ खास रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा है. बॉक्स ऑफिस पर दर्शको की तरफ से इसे कैसा रिस्पॉन्स मिलेगा यह तो 18 मई को ही पता चल पायेगा.
30 साल बाद फिर सिनेमाघरों में लगेगी फिल्म 'क़यामत से क़यामत'
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बॉक्स ऑफिस पर अट्ठारह मई को फिल्म-When Obama Loved osama रिलीज़ होगी. यह फिल्म मुख्यतः एक अमन ओसामा नाम के लड़के और मैग्गी ओबामा नाम की एक लड़की की प्रेम कहानी पर बनी कॉमेडी लव स्टोरी फिल्म है. फिल्म का विषय असाधारण रूप से दिलचस्प है. फिल्म में लड़का उस लड़की से प्यार करने लगता है और अपने प्यार को पाने के रास्ते पर कुछ बाधाओं को पार करने की दिलचस्प कहानी है. यह फिल्म एक मुसलमान लड़के और एक ईसाई लड़की की प्रेम कहानी है. फिल्म में मुख्य किरदार के रूप में मौसम शर्मा, स्वाति बक्शी, राहुल अवाना, अमृता आचार्य,मोहित बघेल, विकास गिरी, कीमती आनंद,मुश्ताक़ खान,मनोज बक्शी,हीना पांचाल,हेमंत पांडेय,हिमानी शिवपुरी आदि अभिनय करते दिखाई देंगे. फिल्म का निर्देशन सुधीर कुमार शर्मा के द्वारा किया गया है. फिल्म को जयविन्दर सिंह भाटी और चमन गुप्ता ने प्रोड्यूस किया है और इस फिल्म की स्क्रीनप्ले और पटकथा वैभव बिष्ट और सुधीर कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से किया है. फिल्म की पोस्ट प्रोडक्शन और एडिटिंग का कार्य अनिल रे के द्वारा किया गया है. फिल्म में कोई बड़ा बॉलीवुड चेहरा ना होने के कारण अभी तक कुछ खास रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा है. बॉक्स ऑफिस पर दर्शको की तरफ से इसे कैसा रिस्पॉन्स मिलेगा यह तो अट्ठारह मई को ही पता चल पायेगा. तीस साल बाद फिर सिनेमाघरों में लगेगी फिल्म 'क़यामत से क़यामत'
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सरकारी रेडियो पाक ने रविवार को बताया कि जम्मू और कश्मीर के अधिकांश हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे व बारिश की आसार है।
इसके साथ ही श्रीनगर, पुलवामा, जम्मू व लद्दाख के अधिकतम व न्यूनतम तापमान की भी जानकारी दी गई है। बताते चलें कि रेडियो पाक कश्मीर की खबरों को विशेष जगह देता है व उसकी वेबसाइट जम्मू और कश्मीर की खबरों को समर्पित है।
सरकारी पाक टेलीविजन भी जम्मू और कश्मीर की खबरों को लेकर विशेष बुलेटिन प्रसारित करता है। माना जा रहा है कि भारतीय मीडिया में पाक के कब्जे वाले कश्मीर के मौसम की जानकारी देने के बाद पाकिस्तानी मीडिया में कश्मीर को लेकर व अधिक खबरें प्रसारित की जाएगी।
पाकिस्तान ने शुक्रवार को हिंदुस्तान द्वारा मीरपुर, मुजफ्फराबाद व गिलगित-बाल्टिस्तान के मौसम की जानकारी देने के कदम को खारिज करते हुए बोला कि इसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है .
यह क्षेत्र की स्थिति बदलने की प्रयास है। पाक के विदेश विभाग ने अपने बयान में बोला कि पिछले वर्ष हिंदुस्तान द्वारा जारी ' सियासी मानचित्र' की तरह इस कदम की भी कोई कानूनी मान्यता नहीं है व यह वास्तविकता के उल्टा व संयुक्त देश सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्ताव का उल्लंघन है।
गौरतलब है कि हिंदुस्तान ने पिछले वर्ष नवंबर में नया मानचित्र जारी किया था जिसमें पाक के कब्जे वाली कश्मीर घाटी को नवगठित जम्मू और कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश का भाग जबकि गिलगित-बाल्टिस्तान को केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख के हिस्से के तौर पर दिखाया गया है।
हिंदुस्तान के एक्शन से पाक घबरा गया है। घबराहट का आलम ये है कि पाक की सरकारी मीडिया ने रविवार को जम्मू और कश्मीर के मौसम की विस्तृत जानकारी देने की आरंभ कर दी।
यह कदम हिंदुस्तान द्वारा पाक के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मौसम का पूर्वानुमान जारी करने की आरंभ के कुछ दिन बाद उठाया गया है।
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सरकारी रेडियो पाक ने रविवार को बताया कि जम्मू और कश्मीर के अधिकांश हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे व बारिश की आसार है। इसके साथ ही श्रीनगर, पुलवामा, जम्मू व लद्दाख के अधिकतम व न्यूनतम तापमान की भी जानकारी दी गई है। बताते चलें कि रेडियो पाक कश्मीर की खबरों को विशेष जगह देता है व उसकी वेबसाइट जम्मू और कश्मीर की खबरों को समर्पित है। सरकारी पाक टेलीविजन भी जम्मू और कश्मीर की खबरों को लेकर विशेष बुलेटिन प्रसारित करता है। माना जा रहा है कि भारतीय मीडिया में पाक के कब्जे वाले कश्मीर के मौसम की जानकारी देने के बाद पाकिस्तानी मीडिया में कश्मीर को लेकर व अधिक खबरें प्रसारित की जाएगी। पाकिस्तान ने शुक्रवार को हिंदुस्तान द्वारा मीरपुर, मुजफ्फराबाद व गिलगित-बाल्टिस्तान के मौसम की जानकारी देने के कदम को खारिज करते हुए बोला कि इसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है . यह क्षेत्र की स्थिति बदलने की प्रयास है। पाक के विदेश विभाग ने अपने बयान में बोला कि पिछले वर्ष हिंदुस्तान द्वारा जारी ' सियासी मानचित्र' की तरह इस कदम की भी कोई कानूनी मान्यता नहीं है व यह वास्तविकता के उल्टा व संयुक्त देश सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्ताव का उल्लंघन है। गौरतलब है कि हिंदुस्तान ने पिछले वर्ष नवंबर में नया मानचित्र जारी किया था जिसमें पाक के कब्जे वाली कश्मीर घाटी को नवगठित जम्मू और कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश का भाग जबकि गिलगित-बाल्टिस्तान को केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख के हिस्से के तौर पर दिखाया गया है। हिंदुस्तान के एक्शन से पाक घबरा गया है। घबराहट का आलम ये है कि पाक की सरकारी मीडिया ने रविवार को जम्मू और कश्मीर के मौसम की विस्तृत जानकारी देने की आरंभ कर दी। यह कदम हिंदुस्तान द्वारा पाक के कब्जे वाले कश्मीर के मौसम का पूर्वानुमान जारी करने की आरंभ के कुछ दिन बाद उठाया गया है।
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नई दिल्ली। सैमसंग अपनी गैलेक्सी A सीरीज (Samsung Galaxy M Series) को आगे बढ़ाने जा रहा है। वैसे तो भारतीय मार्केट में सैमसंग कंपनी के कई स्मार्टफोन्स आपको अपने बजट में देखने को मिल जायेंगे। सैमसंग के फोन को लोगों द्वारा खूब पसंद किया जा जाता है। लोगों का सैमसंग कंपनी पर भरोसा बना हुआ है।
अब इसी कड़ी में सैमसंग एक नए गैलेक्सी ए14 5जी स्मार्टफोन मॉडल पर काम कर रहा है। ऐसी खबरें सामने आ रही है कि इसे बहुत जल्द मार्केट में उतार सकता है। क्योंकि इसे लॉन्चिंग से पहले कई वेबसाइटों पर देखा गया है। दक्षिण कोरियाई टेक दिग्गज के गैलेक्सी ए14 5जी मॉडल को दो सर्टिफिकेशन डेटाबेस में देखा गया था। NBTC लिस्टिंग में Galaxy A14 5G का मॉडल नंबर SM-A146P/DSN है।
दूसरी तरफ, BIS डेटाबेस डिवाइस को SM-A146B/DS मॉडल नंबर के साथ लिस्ट किया गया था। पिछली रिपोर्ट्स में इसके कुछ प्रमुख स्पेसिफिकेशंस का खुलासा किया गया था। लीक रिपोर्ट्स की मानें तो सैमसंग के इस नए स्मार्टफोन को दो SoC एडिशन में लॉन्च होने की उम्मीद है, जिसमें अमेरिकी बाजार में डाइमेंशन 700 चिपसेट के साथ लॉन्च किया जायेगा, जबकि बाकी देशों में एक मिड रेंज Exynos प्रोसेसर के साथ पेश किया जा सकता है।
इसके अलावा स्मार्टफोन में पावर बैकअप के लिए 5,000mAh की बैटरी दी जा सकती है। गैलेक्सी ए14 5जी कथित तौर पर 6.8 इंच डिस्प्ले को स्पोर्ट करेगा जिसमें फुल एचडी+ रेजोल्यूशन है। स्मार्टफोन में फोटोग्राफी के लिए ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया जा सकता है, जिसमें 50 मेगापिक्सल का प्राथमिक कैमरा दिया जा सकता है। जबकि सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 13 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया जा सकता है।
हालांकि, कंपनी ने इस आगामी स्मार्टफोन के बारे में कोई जानकारी शेयर नहीं की है। इसे कब तक लॉन्च किया जायेगा इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
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नई दिल्ली। सैमसंग अपनी गैलेक्सी A सीरीज को आगे बढ़ाने जा रहा है। वैसे तो भारतीय मार्केट में सैमसंग कंपनी के कई स्मार्टफोन्स आपको अपने बजट में देखने को मिल जायेंगे। सैमसंग के फोन को लोगों द्वारा खूब पसंद किया जा जाता है। लोगों का सैमसंग कंपनी पर भरोसा बना हुआ है। अब इसी कड़ी में सैमसंग एक नए गैलेक्सी एचौदह पाँचजी स्मार्टफोन मॉडल पर काम कर रहा है। ऐसी खबरें सामने आ रही है कि इसे बहुत जल्द मार्केट में उतार सकता है। क्योंकि इसे लॉन्चिंग से पहले कई वेबसाइटों पर देखा गया है। दक्षिण कोरियाई टेक दिग्गज के गैलेक्सी एचौदह पाँचजी मॉडल को दो सर्टिफिकेशन डेटाबेस में देखा गया था। NBTC लिस्टिंग में Galaxy Aचौदह पाँचG का मॉडल नंबर SM-Aएक सौ छियालीसP/DSN है। दूसरी तरफ, BIS डेटाबेस डिवाइस को SM-Aएक सौ छियालीसB/DS मॉडल नंबर के साथ लिस्ट किया गया था। पिछली रिपोर्ट्स में इसके कुछ प्रमुख स्पेसिफिकेशंस का खुलासा किया गया था। लीक रिपोर्ट्स की मानें तो सैमसंग के इस नए स्मार्टफोन को दो SoC एडिशन में लॉन्च होने की उम्मीद है, जिसमें अमेरिकी बाजार में डाइमेंशन सात सौ चिपसेट के साथ लॉन्च किया जायेगा, जबकि बाकी देशों में एक मिड रेंज Exynos प्रोसेसर के साथ पेश किया जा सकता है। इसके अलावा स्मार्टफोन में पावर बैकअप के लिए पाँच,शून्यmAh की बैटरी दी जा सकती है। गैलेक्सी एचौदह पाँचजी कथित तौर पर छः.आठ इंच डिस्प्ले को स्पोर्ट करेगा जिसमें फुल एचडी+ रेजोल्यूशन है। स्मार्टफोन में फोटोग्राफी के लिए ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया जा सकता है, जिसमें पचास मेगापिक्सल का प्राथमिक कैमरा दिया जा सकता है। जबकि सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए तेरह मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया जा सकता है। हालांकि, कंपनी ने इस आगामी स्मार्टफोन के बारे में कोई जानकारी शेयर नहीं की है। इसे कब तक लॉन्च किया जायेगा इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
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राज्य में पहले से ज्यादा महंगा मिलेगा बालू, सरकार ने बंदोबस्ती राशि 50 फीसदी महंगी की : पहले से ही महंगे हो चुके बालू की कीमतें अब और ज्यादा बढ़ने वाली है. बिहार में बालू की कीमतों में इजाफा होना तय है. सरकार ने बालू घाटों की बंदोबस्ती राशि में 50 फ़ीसदी का इजाफा किया है.
आज हुई नीतीश कैबिनेट की बैठक में सरकार ने बालू बंदोबस्त धारियों की बंदोबस्ती अवधि को 31 मार्च 2021 तक के विस्तार दे दिया लेकिन कैलेंडर वर्ष 2020 के बाद बंदोबस्ती की राशि में 50 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा भी कर दिया है. अब 1 जनवरी 2021 से बंदोबस्ती की राशि 50 फ़ीसदी महंगी होगी और इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा.
राजस्व वृद्धि के लिए नीतीश सरकार ने यह अहम फैसला लिया है. बिहार खनिज नियमावली 2019 के नियम का हवाला देते हुए 31 दिसंबर 2020 को खत्म हो रहे. बालू बंदोबस्त धारियों की बंदोबस्ती को अब विस्तार दिया गया है. अब सरकार आगामी वित्तीय वर्ष में बंदोबस्ती को लेकर नए सिरे से फैसला करेगी लेकिन 2021 में बंदोबस्ती राशि बढ़ी हुई वसूली जाएगी.
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राज्य में पहले से ज्यादा महंगा मिलेगा बालू, सरकार ने बंदोबस्ती राशि पचास फीसदी महंगी की : पहले से ही महंगे हो चुके बालू की कीमतें अब और ज्यादा बढ़ने वाली है. बिहार में बालू की कीमतों में इजाफा होना तय है. सरकार ने बालू घाटों की बंदोबस्ती राशि में पचास फ़ीसदी का इजाफा किया है. आज हुई नीतीश कैबिनेट की बैठक में सरकार ने बालू बंदोबस्त धारियों की बंदोबस्ती अवधि को इकतीस मार्च दो हज़ार इक्कीस तक के विस्तार दे दिया लेकिन कैलेंडर वर्ष दो हज़ार बीस के बाद बंदोबस्ती की राशि में पचास फ़ीसदी का इज़ाफ़ा भी कर दिया है. अब एक जनवरी दो हज़ार इक्कीस से बंदोबस्ती की राशि पचास फ़ीसदी महंगी होगी और इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. राजस्व वृद्धि के लिए नीतीश सरकार ने यह अहम फैसला लिया है. बिहार खनिज नियमावली दो हज़ार उन्नीस के नियम का हवाला देते हुए इकतीस दिसंबर दो हज़ार बीस को खत्म हो रहे. बालू बंदोबस्त धारियों की बंदोबस्ती को अब विस्तार दिया गया है. अब सरकार आगामी वित्तीय वर्ष में बंदोबस्ती को लेकर नए सिरे से फैसला करेगी लेकिन दो हज़ार इक्कीस में बंदोबस्ती राशि बढ़ी हुई वसूली जाएगी.
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) जब भी विवादों या मुश्किलों में फंसे, वजह उनकी खुद की जुबान रही। उनके शब्दवाण विरोधियों से ज्यादा, उन पर ही भारी पड़े और इसी का नतीजा ये है कि राहुल गांधी को 2 साल की सजा हो चुकी है। इतना ही नहीं, वो अपनी लोकसभा (Lok Sabha) की सदस्यता तक गंवा चुके हैं। इन सबके लिए सिर्फ और सिर्फ खुद राहुल गांधी जिम्मेदार रहे हैं। ऐसा इसलिए भी राहुल गांधी को मोदी सरनेम मामले (Modi Surname Case) में दोषी ठहराया गया था और इसी मामले में कांग्रेस नेता (Congress Leader) अपने शब्दों को वापस लेते हुए माफी मांग लेते तो शायद वो मौजूदा वक्त में भी लोकसभा के सदस्य होते।
खबर में आगे पढ़ेंः
राहुल गांधी को फिलहाल मोदी सरनेम मामले में गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने 2019 के आपराधिक मानहानि मामले में सूरत कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी है। कांग्रेस नेता ने सूरत कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दोषी ठहराए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सजा पर रोक लगाने का कोई उचित आधार नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने "सनसनी फैलाने" के लिए और 2019 के लोकसभा चुनाव के "परिणाम को प्रभावित करने" के इरादे से अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया। मामला राहुल गांधी की उस टिप्पणी से संबंधित था, जिसमें कांग्रेस नेता ने कहा था- 'सभी चोरों का एक ही उपनाम मोदी क्यों होता है" कर्नाटक के कोलार में 13 अप्रैल 2019 को राहुल गांधी ने यह टिप्पणी की थी।
यह भी पढे़ंः प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना को दी 6100 करोड़ की सौगात, कहा- "विकास के रास्ते पर सरकार"
वैसे याद होगा कि मोदी सरनेम मामले से पहले राहुल गांधी को अपने एक और बयान के चलते बड़े विवाद में उलझना पड़ा था। बात 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले की थी। आम चुनावों को लेकर माहौल गर्म था और राहुल गांधी ने ठीक उसी समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक बयान दिया था।
चुनावों से पहले राफेल डील का मुद्दा हवा में उछालते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए कहा था- 'चौकीदार चोर है।' चुनावों के दौरान कांग्रेस और राहुल गांधी ने 'चौकीदार चोर है' को अपना नारा तक बना लिया था। राहुल की हर सभा से लेकर मीटिंग-मीडिया ब्रीफिंग तक 'चौकीदार चोर है' की गूंज सुनाई देने लगी थी।
बाद में ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। बीजेपी की नेता मीनाक्षी लेखी ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना का केस दायर किया था और बाद में अदालत के अंदर राहुल गांधी को मुंह की खानी पड़ी थी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला राहुल गांधी के खिलाफ रहा। राफेल मामले को लेकर मोदी सरकार पर भ्रष्टचार का आरोप लगाने और 'चौकीदार चोर है' के नारे को लेकर राहुल गांधी को बिना शर्त माफी तक मांगनी पड़ी थी। कांग्रेस नेता ने मामले में पहले अलग अलग दो हलफनामों में सिर्फ खेद व्यक्त किया था, लेकिन बाद में जब अदालत ने डांट लगाई तो उन्होंने मौखिक रूप से माफी मांगी।
'चौकीदार चोर है' के मामले में राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट के अंदर माफी मांगकर सजा से बच गए थे, लेकिन 'मोदी सरनेम' मामले में राहुल गांधी ने अदालत में भी अपने विवादित बयान को लेकर माफी नहीं मांगी। मसलन, राहुल गांधी के खिलाफ अदालत ने फैसला सुनाया और उन्हें दोषी ठहराया। बीजेपी की तरफ से भी कई बार राहुल गांधी से माफी मांगने की बात कही गई थी, बावजूद इसके राहुल गांधी पीछे नहीं हटे थे। इतना ही नहीं, अदालत के फैसले के बाद भी राहुल ने कहा था कि 'मैं गांधी हूं और गांधी माफी नहीं मांगता।'
यह भी पढे़ंः 4 चुनावी राज्यों में BJP ने इन पर जताया भरोसा, भूपेंद्र यादव के जरिए OBC वोट पर दांव, जानिए बाकी 3 का क्या है अचीवमेंट'
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी जब भी विवादों या मुश्किलों में फंसे, वजह उनकी खुद की जुबान रही। उनके शब्दवाण विरोधियों से ज्यादा, उन पर ही भारी पड़े और इसी का नतीजा ये है कि राहुल गांधी को दो साल की सजा हो चुकी है। इतना ही नहीं, वो अपनी लोकसभा की सदस्यता तक गंवा चुके हैं। इन सबके लिए सिर्फ और सिर्फ खुद राहुल गांधी जिम्मेदार रहे हैं। ऐसा इसलिए भी राहुल गांधी को मोदी सरनेम मामले में दोषी ठहराया गया था और इसी मामले में कांग्रेस नेता अपने शब्दों को वापस लेते हुए माफी मांग लेते तो शायद वो मौजूदा वक्त में भी लोकसभा के सदस्य होते। खबर में आगे पढ़ेंः राहुल गांधी को फिलहाल मोदी सरनेम मामले में गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने दो हज़ार उन्नीस के आपराधिक मानहानि मामले में सूरत कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी है। कांग्रेस नेता ने सूरत कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दोषी ठहराए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सजा पर रोक लगाने का कोई उचित आधार नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने "सनसनी फैलाने" के लिए और दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव के "परिणाम को प्रभावित करने" के इरादे से अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया। मामला राहुल गांधी की उस टिप्पणी से संबंधित था, जिसमें कांग्रेस नेता ने कहा था- 'सभी चोरों का एक ही उपनाम मोदी क्यों होता है" कर्नाटक के कोलार में तेरह अप्रैल दो हज़ार उन्नीस को राहुल गांधी ने यह टिप्पणी की थी। यह भी पढे़ंः प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना को दी छः हज़ार एक सौ करोड़ की सौगात, कहा- "विकास के रास्ते पर सरकार" वैसे याद होगा कि मोदी सरनेम मामले से पहले राहुल गांधी को अपने एक और बयान के चलते बड़े विवाद में उलझना पड़ा था। बात दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनावों से पहले की थी। आम चुनावों को लेकर माहौल गर्म था और राहुल गांधी ने ठीक उसी समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक बयान दिया था। चुनावों से पहले राफेल डील का मुद्दा हवा में उछालते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए कहा था- 'चौकीदार चोर है।' चुनावों के दौरान कांग्रेस और राहुल गांधी ने 'चौकीदार चोर है' को अपना नारा तक बना लिया था। राहुल की हर सभा से लेकर मीटिंग-मीडिया ब्रीफिंग तक 'चौकीदार चोर है' की गूंज सुनाई देने लगी थी। बाद में ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। बीजेपी की नेता मीनाक्षी लेखी ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना का केस दायर किया था और बाद में अदालत के अंदर राहुल गांधी को मुंह की खानी पड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला राहुल गांधी के खिलाफ रहा। राफेल मामले को लेकर मोदी सरकार पर भ्रष्टचार का आरोप लगाने और 'चौकीदार चोर है' के नारे को लेकर राहुल गांधी को बिना शर्त माफी तक मांगनी पड़ी थी। कांग्रेस नेता ने मामले में पहले अलग अलग दो हलफनामों में सिर्फ खेद व्यक्त किया था, लेकिन बाद में जब अदालत ने डांट लगाई तो उन्होंने मौखिक रूप से माफी मांगी। 'चौकीदार चोर है' के मामले में राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट के अंदर माफी मांगकर सजा से बच गए थे, लेकिन 'मोदी सरनेम' मामले में राहुल गांधी ने अदालत में भी अपने विवादित बयान को लेकर माफी नहीं मांगी। मसलन, राहुल गांधी के खिलाफ अदालत ने फैसला सुनाया और उन्हें दोषी ठहराया। बीजेपी की तरफ से भी कई बार राहुल गांधी से माफी मांगने की बात कही गई थी, बावजूद इसके राहुल गांधी पीछे नहीं हटे थे। इतना ही नहीं, अदालत के फैसले के बाद भी राहुल ने कहा था कि 'मैं गांधी हूं और गांधी माफी नहीं मांगता।' यह भी पढे़ंः चार चुनावी राज्यों में BJP ने इन पर जताया भरोसा, भूपेंद्र यादव के जरिए OBC वोट पर दांव, जानिए बाकी तीन का क्या है अचीवमेंट'
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शिलाई -बीते तीन दिन से हो रही मूसलाधार बारिश से क्षेत्र में जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। अत्याधिक हो रही बारिश से किसानों की पकी फसल सड़ने के कगार पर है। यदि बारिश बंद नहीं हुई तो किसानों को काफी नुकसान होगा। जाते-जाते मानसून किसानों को रास नहीं आ रहा है। उपमंडल शिलाई के प्रगतिशील किसान गुलाब सिंह नौटियाल, कंवर सिंह शर्मा, गुमान सिंह, अमर सिंह, सुंदर सिंह, बिशन सिंह, मदन सिंह नेगी सहित 29 पंचायतों के किसानों का कहना है कि बीते तीन दिन से हो रही मूसलाधार बारिश से उनकी फसल खराब हो रही है। किसानों का कहना है कि उन्होंने मक्की की फसल काटकर ढेर लगा दिए हैं। उधर, कृषि विभाग के कृषि विकास अधिकारी डा. अश्वनी कुमार ने बताया कि किसानों को चाहिए कि वह फसलों को भीगने न दे। जब धूप खिलेगी फसलों को अच्छी तरह सुखा लें। लगातार हो रही बारिश से किसानों को परेशानी अवश्य हो रही है, लेकिन अदरक, लहसुन, हल्दी आदि फसल के लिए बारिश अच्छी है तथा प्राकृतिक जल स्रोतों में भी जल स्तर अच्छा रहेगा।
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शिलाई -बीते तीन दिन से हो रही मूसलाधार बारिश से क्षेत्र में जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। अत्याधिक हो रही बारिश से किसानों की पकी फसल सड़ने के कगार पर है। यदि बारिश बंद नहीं हुई तो किसानों को काफी नुकसान होगा। जाते-जाते मानसून किसानों को रास नहीं आ रहा है। उपमंडल शिलाई के प्रगतिशील किसान गुलाब सिंह नौटियाल, कंवर सिंह शर्मा, गुमान सिंह, अमर सिंह, सुंदर सिंह, बिशन सिंह, मदन सिंह नेगी सहित उनतीस पंचायतों के किसानों का कहना है कि बीते तीन दिन से हो रही मूसलाधार बारिश से उनकी फसल खराब हो रही है। किसानों का कहना है कि उन्होंने मक्की की फसल काटकर ढेर लगा दिए हैं। उधर, कृषि विभाग के कृषि विकास अधिकारी डा. अश्वनी कुमार ने बताया कि किसानों को चाहिए कि वह फसलों को भीगने न दे। जब धूप खिलेगी फसलों को अच्छी तरह सुखा लें। लगातार हो रही बारिश से किसानों को परेशानी अवश्य हो रही है, लेकिन अदरक, लहसुन, हल्दी आदि फसल के लिए बारिश अच्छी है तथा प्राकृतिक जल स्रोतों में भी जल स्तर अच्छा रहेगा।
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अमरीका की विवादास्पद मिसाइल सुरक्षा प्रणाणी को पोलैंड की जमीन पर लगाने के लिए अमरीका और पोलैंड ने एक समझौते पर दस्तख़त किए हैं.
अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस इन दिनों पोलैंड की राजधानी वॉरसॉ की यात्रा पर हैं. इस समझौते के लिए पिछले 18 महीने से बातचीत चल रही थी.
इस समझौते से रूस नाराज़ है, उसने चेतावनी दी है कि यह ठिकाना परमाणु युद्ध का निशाना बन सकता है.
उधर अमरीका का कहना है कि यह मिसाइल रक्षा प्रणाली अमरीका और यूरोप के अधिकतर हिस्से को मध्य-पूर्व के ईरान जैसे देशों के किसी मिसाइल हमले से बचाएगी.
समझौते पर अमरीका और पोलैंड के विदेश मंत्रियों ने दस्तख़त किए. समझौते को अभी पोलैंड की संसद से मंजूरी मिलनी बाकी है.
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनॉल्ड टस्क ने कहा कि समझौता दोस्ताना है. यह अमरीका और पोलैंड को और अधिक सुरक्षित बनाएगा.
अमरीकी विदेश मंत्री ने समझौते को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि यह नैटो की मदद करेगा. उन्होंने कहा कि पोलैंड और अमरीका ने 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए समझौता किया है.
वॉरसॉ स्थित राष्ट्रपति भवन में समझौते पर दस्तख़त करने के लिए आयोजित समारोह में राइस ने कहा कि मिसाइल प्रणाली सुरक्षात्मक है और किसी के ख़िलाफ़ नहीं है.
अमरीका पोलैंड के बाल्टिक सागर के पास एक पुराने सैनिक इलाक़े में 10 इंटरसेप्टर मिसाइल तैनात करना चाहता है, जो नैटो को लंबी दूरी की मिसाइलों के संभावित हमले से बचाएगा.
कोंडोलीज़ा राइस के साथ चल रहे बीबीसी संवाददाता के अनुसार जॉर्जिया संकट के बाद समझौते में तेजी आई.
अमरीका और पोलैंड दोनों ने कहा है कि उनका समझौता रूस के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन समझौते से रूस नाराज़ जरूर हो गया है.
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अमरीका की विवादास्पद मिसाइल सुरक्षा प्रणाणी को पोलैंड की जमीन पर लगाने के लिए अमरीका और पोलैंड ने एक समझौते पर दस्तख़त किए हैं. अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस इन दिनों पोलैंड की राजधानी वॉरसॉ की यात्रा पर हैं. इस समझौते के लिए पिछले अट्ठारह महीने से बातचीत चल रही थी. इस समझौते से रूस नाराज़ है, उसने चेतावनी दी है कि यह ठिकाना परमाणु युद्ध का निशाना बन सकता है. उधर अमरीका का कहना है कि यह मिसाइल रक्षा प्रणाली अमरीका और यूरोप के अधिकतर हिस्से को मध्य-पूर्व के ईरान जैसे देशों के किसी मिसाइल हमले से बचाएगी. समझौते पर अमरीका और पोलैंड के विदेश मंत्रियों ने दस्तख़त किए. समझौते को अभी पोलैंड की संसद से मंजूरी मिलनी बाकी है. पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनॉल्ड टस्क ने कहा कि समझौता दोस्ताना है. यह अमरीका और पोलैंड को और अधिक सुरक्षित बनाएगा. अमरीकी विदेश मंत्री ने समझौते को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि यह नैटो की मदद करेगा. उन्होंने कहा कि पोलैंड और अमरीका ने इक्कीसवीं सदी की चुनौतियों के लिए समझौता किया है. वॉरसॉ स्थित राष्ट्रपति भवन में समझौते पर दस्तख़त करने के लिए आयोजित समारोह में राइस ने कहा कि मिसाइल प्रणाली सुरक्षात्मक है और किसी के ख़िलाफ़ नहीं है. अमरीका पोलैंड के बाल्टिक सागर के पास एक पुराने सैनिक इलाक़े में दस इंटरसेप्टर मिसाइल तैनात करना चाहता है, जो नैटो को लंबी दूरी की मिसाइलों के संभावित हमले से बचाएगा. कोंडोलीज़ा राइस के साथ चल रहे बीबीसी संवाददाता के अनुसार जॉर्जिया संकट के बाद समझौते में तेजी आई. अमरीका और पोलैंड दोनों ने कहा है कि उनका समझौता रूस के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन समझौते से रूस नाराज़ जरूर हो गया है.
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राज्य में बाघों की संख्या में कमी आई है।
भुवनेश्वरः टाइगर्स की स्थिति रिपोर्ट ओडिशा के लिए कड़वी-मीठी खबर लेकर आई है। इसके दो बाघ अभयारण्यों (TRs) ने अपने प्रबंधन अभ्यासों के लिए अच्छा प्रदर्शन किया है। यह तो शुभ समाचार है। हालांकि, कहानी का नकारात्मक पक्ष यह है कि राज्य में बाघों की संख्या में कमी आई है।
इस बार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने केवल बाघों के परिदृश्य-वार अनुमानों की घोषणा की है। बड़ी बिल्लियों की घोषणा के राज्य और टीआर-वार नंबर एक महीने बाद आ सकते हैं। 2018 के अनुमान में, राज्य में बाघों की संख्या 28 थी, जो 2014 से अपरिवर्तित है।
रिपोर्ट के अनुसार, 90. 15 प्रतिशत के प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन (MEE) स्कोर के साथ 2,750 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व (TR) को MEE के पांचवें चक्र में भारत के 12 उत्कृष्ट TRs में से एक के रूप में रखा गया है। -TR 2022 में। 2018 में, इसे 72. 66 पीसी स्कोर के साथ अच्छा वर्गीकृत किया गया था।
इसी तरह, सतकोसिया ने एमईई-टीआर के मौजूदा चक्र में चौथे चक्र में अच्छे (67. 97 पीसी) से बहुत अच्छे (75 पीसी) तक अपनी स्थिति में सुधार किया। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि पर्याप्त सुधारों से पता चला है कि बाघ संरक्षण योजनाओं में प्रस्तावित नुस्खों के अनुपालन के मामले में पिछले कुछ वर्षों में सिमिलिपल सहित टीआर में प्रबंधन दक्षता में वृद्धि हुई है।
इसमें कहा गया है कि 29 टीआर ने अपनी कैटेगरी रेटिंग में सुधार किया, जबकि असम, बिहार और छत्तीसगढ़ में तीन की रेटिंग घट गई। रिपोर्ट में कहा गया है, "महाराष्ट्र में बोर टाइगर रिजर्व, कर्नाटक में बीआरटी हिल्स टाइगर रिजर्व और ओडिशा में सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व ने एमईई रेटिंग में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है। "
दूसरी ओर, रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य और पूर्वी घाट परिदृश्य में झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में बाघों की संख्या में कमी आई है।
इससे पता चला कि सतकोसिया और तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ संरक्षित क्षेत्रों से बाघों की आबादी स्थानीय रूप से समाप्त हो गई है। मध्य और पूर्वी घाट क्षेत्र में वन्यजीव आवास, संरक्षित क्षेत्र और गलियारे, निवास स्थान के अतिक्रमण, अवैध शिकार, मानव-वन्यजीव संघर्ष के अलावा खतरों का सामना करते हैं। खनन और रैखिक बुनियादी ढांचे का विस्तार।
इसने सुझाव दिया कि इस क्षेत्र में कई खदानें हैं और न्यून खनन प्रभाव तकनीकों और साइटों के पुनर्वास जैसे शमन उपायों को प्राथमिकता पर किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है, "सिमिलिपाल में बाघों की आनुवंशिक रूप से अनूठी और छोटी आबादी भी परिदृश्य में उच्च संरक्षण प्राथमिकता है। "
रिपोर्ट में कहा गया है कि शिकार वृद्धि, आवास बहाली और संरक्षण से इन राज्यों में बाघों की आबादी की वसूली में मदद मिल सकती है। भारतीय और ईस्टर घाट परिदृश्य - 2018 में 1,033 से 1,161 तक।
"जैसा कि संख्या में वृद्धि हुई है, हम उम्मीद करते हैं कि बाघों का कब्जा भी बढ़ेगा। राज्यवार रिपोर्ट प्राप्त होने तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। ' संरक्षित क्षेत्र।
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राज्य में बाघों की संख्या में कमी आई है। भुवनेश्वरः टाइगर्स की स्थिति रिपोर्ट ओडिशा के लिए कड़वी-मीठी खबर लेकर आई है। इसके दो बाघ अभयारण्यों ने अपने प्रबंधन अभ्यासों के लिए अच्छा प्रदर्शन किया है। यह तो शुभ समाचार है। हालांकि, कहानी का नकारात्मक पक्ष यह है कि राज्य में बाघों की संख्या में कमी आई है। इस बार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने केवल बाघों के परिदृश्य-वार अनुमानों की घोषणा की है। बड़ी बिल्लियों की घोषणा के राज्य और टीआर-वार नंबर एक महीने बाद आ सकते हैं। दो हज़ार अट्ठारह के अनुमान में, राज्य में बाघों की संख्या अट्ठाईस थी, जो दो हज़ार चौदह से अपरिवर्तित है। रिपोर्ट के अनुसार, नब्बे. पंद्रह प्रतिशत के प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन स्कोर के साथ दो,सात सौ पचास वर्ग किमी क्षेत्र में फैले सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व को MEE के पांचवें चक्र में भारत के बारह उत्कृष्ट TRs में से एक के रूप में रखा गया है। -TR दो हज़ार बाईस में। दो हज़ार अट्ठारह में, इसे बहत्तर. छयासठ पीसी स्कोर के साथ अच्छा वर्गीकृत किया गया था। इसी तरह, सतकोसिया ने एमईई-टीआर के मौजूदा चक्र में चौथे चक्र में अच्छे से बहुत अच्छे तक अपनी स्थिति में सुधार किया। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि पर्याप्त सुधारों से पता चला है कि बाघ संरक्षण योजनाओं में प्रस्तावित नुस्खों के अनुपालन के मामले में पिछले कुछ वर्षों में सिमिलिपल सहित टीआर में प्रबंधन दक्षता में वृद्धि हुई है। इसमें कहा गया है कि उनतीस टीआर ने अपनी कैटेगरी रेटिंग में सुधार किया, जबकि असम, बिहार और छत्तीसगढ़ में तीन की रेटिंग घट गई। रिपोर्ट में कहा गया है, "महाराष्ट्र में बोर टाइगर रिजर्व, कर्नाटक में बीआरटी हिल्स टाइगर रिजर्व और ओडिशा में सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व ने एमईई रेटिंग में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है। " दूसरी ओर, रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य और पूर्वी घाट परिदृश्य में झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में बाघों की संख्या में कमी आई है। इससे पता चला कि सतकोसिया और तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ संरक्षित क्षेत्रों से बाघों की आबादी स्थानीय रूप से समाप्त हो गई है। मध्य और पूर्वी घाट क्षेत्र में वन्यजीव आवास, संरक्षित क्षेत्र और गलियारे, निवास स्थान के अतिक्रमण, अवैध शिकार, मानव-वन्यजीव संघर्ष के अलावा खतरों का सामना करते हैं। खनन और रैखिक बुनियादी ढांचे का विस्तार। इसने सुझाव दिया कि इस क्षेत्र में कई खदानें हैं और न्यून खनन प्रभाव तकनीकों और साइटों के पुनर्वास जैसे शमन उपायों को प्राथमिकता पर किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है, "सिमिलिपाल में बाघों की आनुवंशिक रूप से अनूठी और छोटी आबादी भी परिदृश्य में उच्च संरक्षण प्राथमिकता है। " रिपोर्ट में कहा गया है कि शिकार वृद्धि, आवास बहाली और संरक्षण से इन राज्यों में बाघों की आबादी की वसूली में मदद मिल सकती है। भारतीय और ईस्टर घाट परिदृश्य - दो हज़ार अट्ठारह में एक,तैंतीस से एक,एक सौ इकसठ तक। "जैसा कि संख्या में वृद्धि हुई है, हम उम्मीद करते हैं कि बाघों का कब्जा भी बढ़ेगा। राज्यवार रिपोर्ट प्राप्त होने तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। ' संरक्षित क्षेत्र।
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सीरियाई-तुर्की सीमा पर, लड़ाई तुर्की सशस्त्र बलों और कुर्दों के बीच हुई। दक्षिणी दमिश्क में आतंकवादियों ने SAA के सहयोगियों पर हमला किया। बताया गया है प्रशंसक सीरियाई स्रोतों के संदर्भ में।
दक्षिण-पश्चिमी दमिश्क में, सरकारी बलों और सशस्त्र विपक्षी समूहों के बीच संघर्ष कम नहीं हुआ है। मुग़र अल-मीर शहर के पास भयंकर युद्ध हुआ, जहाँ एसएए तेल अल-अहमर, तेल अल-मजन और तेल अल-खातजान की पहाड़ियों को मुक्त करने में कामयाब रहा। इस प्रकार, एसएआर सैनिकों ने गांव को व्यवस्थित रूप से घेर लिया, जो कि उग्रवादियों द्वारा नियंत्रित अन्य क्षेत्रों से इसे काटने की कोशिश कर रहा था।
सीरियाई-तुर्की सीमा के पास कोबानी (अलेप्पो प्रांत) शहर के पास, शाम को तुर्की सेना और आत्मरक्षा बलों (वाईपीजी) के बीच भयंकर संघर्ष शुरू हुआ। सर्जक तुर्की पक्ष था। कुर्द इकाइयों ने हमले को दोहरा दिया, लेकिन मारे गए और घायल हुए कई सैनिकों को खो दिया। बाद में, कुर्दों ने तुर्की के दक्षिणी बाहरी इलाके में आग लगा दी, जिससे एक नागरिक की मौत हो गई।
सीरियाई रेड क्रिसेंट ने सीमावर्ती शहर अबू केमल (दीर एज़-ज़ोर प्रांत) में मानवीय सहायता पहुंचाई। कार्गो में भोजन और दवा के साथ किट होते थे। इसके अलावा, शहर में, सीरियाई इंजीनियरिंग इकाइयों और रूसी केंद्र के युद्धरत दलों के पुनर्निर्माण के लिए, गांव के बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने और बहाल करने के लिए, अपने काम को जारी रखा। सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेस (एसडीएफ) और आईएस इकाइयों के बीच झड़पें फिर से शुरू हुईं, जो कुर्दों द्वारा नियंत्रित क्षेत्रों की ओर एसएए और रूसी एयरोस्पेस बलों के हमले के तहत भाग गईं। टकराव के परिणामस्वरूप, कुर्द बलों ने युफ्रेट्स के पूर्वी तट पर हसियत, जेयशी, जादलेह, अल-बहरा और गार्नी के गांवों पर कब्जा करने में कामयाब रहे।
पिछले दिनों, रक्का में एक बार विस्फोट के दौरान आतंकवादियों द्वारा विस्फोट किए गए दो विस्फोटक उपकरण। इस तथ्य के कारण कि कुर्द प्रांतीय राजधानी की मंजूरी पूरी नहीं करते थे, रक्का में विस्फोट लगभग दैनिक होते हैं। हालांकि, स्थानीय आबादी शहर में वापस आ रही है, जिससे उनकी जान जोखिम में है। कुर्दों या पश्चिमी गठबंधन की ताकतों से मदद की उम्मीद नहीं करते हुए, नागरिकों ने स्वतंत्र रूप से रामला क्वार्टर में मलबे को सॉर्ट करना शुरू कर दिया।
दिन भर सीरियाई इकाइयों ने हमा प्रांत के उत्तरी भाग में आक्रामक विकास जारी रखा। लड़ाई के दौरान, SAA के नियंत्रण में कई सामरिक ऊंचाइयां गुजरीं। एसएआर बलों और समर्थक असद समूहों का समर्थन रूसी वायु सेनाओं द्वारा प्रदान किया गया था।
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सीरियाई-तुर्की सीमा पर, लड़ाई तुर्की सशस्त्र बलों और कुर्दों के बीच हुई। दक्षिणी दमिश्क में आतंकवादियों ने SAA के सहयोगियों पर हमला किया। बताया गया है प्रशंसक सीरियाई स्रोतों के संदर्भ में। दक्षिण-पश्चिमी दमिश्क में, सरकारी बलों और सशस्त्र विपक्षी समूहों के बीच संघर्ष कम नहीं हुआ है। मुग़र अल-मीर शहर के पास भयंकर युद्ध हुआ, जहाँ एसएए तेल अल-अहमर, तेल अल-मजन और तेल अल-खातजान की पहाड़ियों को मुक्त करने में कामयाब रहा। इस प्रकार, एसएआर सैनिकों ने गांव को व्यवस्थित रूप से घेर लिया, जो कि उग्रवादियों द्वारा नियंत्रित अन्य क्षेत्रों से इसे काटने की कोशिश कर रहा था। सीरियाई-तुर्की सीमा के पास कोबानी शहर के पास, शाम को तुर्की सेना और आत्मरक्षा बलों के बीच भयंकर संघर्ष शुरू हुआ। सर्जक तुर्की पक्ष था। कुर्द इकाइयों ने हमले को दोहरा दिया, लेकिन मारे गए और घायल हुए कई सैनिकों को खो दिया। बाद में, कुर्दों ने तुर्की के दक्षिणी बाहरी इलाके में आग लगा दी, जिससे एक नागरिक की मौत हो गई। सीरियाई रेड क्रिसेंट ने सीमावर्ती शहर अबू केमल में मानवीय सहायता पहुंचाई। कार्गो में भोजन और दवा के साथ किट होते थे। इसके अलावा, शहर में, सीरियाई इंजीनियरिंग इकाइयों और रूसी केंद्र के युद्धरत दलों के पुनर्निर्माण के लिए, गांव के बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने और बहाल करने के लिए, अपने काम को जारी रखा। सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेस और आईएस इकाइयों के बीच झड़पें फिर से शुरू हुईं, जो कुर्दों द्वारा नियंत्रित क्षेत्रों की ओर एसएए और रूसी एयरोस्पेस बलों के हमले के तहत भाग गईं। टकराव के परिणामस्वरूप, कुर्द बलों ने युफ्रेट्स के पूर्वी तट पर हसियत, जेयशी, जादलेह, अल-बहरा और गार्नी के गांवों पर कब्जा करने में कामयाब रहे। पिछले दिनों, रक्का में एक बार विस्फोट के दौरान आतंकवादियों द्वारा विस्फोट किए गए दो विस्फोटक उपकरण। इस तथ्य के कारण कि कुर्द प्रांतीय राजधानी की मंजूरी पूरी नहीं करते थे, रक्का में विस्फोट लगभग दैनिक होते हैं। हालांकि, स्थानीय आबादी शहर में वापस आ रही है, जिससे उनकी जान जोखिम में है। कुर्दों या पश्चिमी गठबंधन की ताकतों से मदद की उम्मीद नहीं करते हुए, नागरिकों ने स्वतंत्र रूप से रामला क्वार्टर में मलबे को सॉर्ट करना शुरू कर दिया। दिन भर सीरियाई इकाइयों ने हमा प्रांत के उत्तरी भाग में आक्रामक विकास जारी रखा। लड़ाई के दौरान, SAA के नियंत्रण में कई सामरिक ऊंचाइयां गुजरीं। एसएआर बलों और समर्थक असद समूहों का समर्थन रूसी वायु सेनाओं द्वारा प्रदान किया गया था।
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बोर - सुनिये, सुनिये,
तासा भाई ढोल है माय नागारा बाप । ऐसी अच्छी जाति के हैं सेनापति प्राप ।। चन्द -- ( क्रोध से ) प्रच्छा हम चमार हैं देखो भाई । बीर - श्रोबे बहलीवाले, फेर बहलो
(बर्द्धमानक बहली फेरता है )
( बीरक बहली पर चढ़ना चाहता है, चन्दनक उसका पट्टा पकड़ कर गिरा देता है और लात मारता है )
बीर- ( क्रोध से उठकर ) पच्छा, तुम ने राजकाज करते हुये पट्टा पकड़ कर खींचा और लात मारी ! रह तुझे हम कचहरी चौरङ्ग न करावें तो बीरक नहीं।
चन्द्र - भबे ? कचहरी जाचाहै दरबार जा, तू कुत्ता क्या कर सकता है ?
( बाहर जाता है। चन्द - ( चारों ओर देख कर ) जाबे बहलीवाले जा । जो कोई पूछे तो कह देना कि चन्दनक और बोरक ने देख लिया है। बसंत सेना बाई ! यह चिन्ह भी लेती जाओ (तलवार देता है )
आर्य - ( तलवार लेकर हर्ष से )
लग्यो हाथ हथियार, फरकति है दाहिनी भुजा । विधि अनुकूल हमार, अब हम बचे सँदेह विन ।। चंद - बाई जी,
चंदन को जनि भूलिया विनय करौं कर जेरि । कहौं नहीं कळु लोभ से प्रीति हिये महँ तोरि ॥ आर्य - बन गये हित संयोग बस चंदन चन्द समान ।
सुधि करि हैं। सच कीन्ह जे। सिद्ध बचन भगवान । चन्द्र- अभय करें त्रिपुरारि ; ब्रह्मा रवि हरि चंद तोहि । राजिय निज रिपु मारि, शुंभ निशुंभहि देवि जिमि ॥ (बर्द्धमानक बहली लेकर बाहर जाता है )
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बोर - सुनिये, सुनिये, तासा भाई ढोल है माय नागारा बाप । ऐसी अच्छी जाति के हैं सेनापति प्राप ।। चन्द -- प्रच्छा हम चमार हैं देखो भाई । बीर - श्रोबे बहलीवाले, फेर बहलो बीर- पच्छा, तुम ने राजकाज करते हुये पट्टा पकड़ कर खींचा और लात मारी ! रह तुझे हम कचहरी चौरङ्ग न करावें तो बीरक नहीं। चन्द्र - भबे ? कचहरी जाचाहै दरबार जा, तू कुत्ता क्या कर सकता है ? जाबे बहलीवाले जा । जो कोई पूछे तो कह देना कि चन्दनक और बोरक ने देख लिया है। बसंत सेना बाई ! यह चिन्ह भी लेती जाओ आर्य - लग्यो हाथ हथियार, फरकति है दाहिनी भुजा । विधि अनुकूल हमार, अब हम बचे सँदेह विन ।। चंद - बाई जी, चंदन को जनि भूलिया विनय करौं कर जेरि । कहौं नहीं कळु लोभ से प्रीति हिये महँ तोरि ॥ आर्य - बन गये हित संयोग बस चंदन चन्द समान । सुधि करि हैं। सच कीन्ह जे। सिद्ध बचन भगवान । चन्द्र- अभय करें त्रिपुरारि ; ब्रह्मा रवि हरि चंद तोहि । राजिय निज रिपु मारि, शुंभ निशुंभहि देवि जिमि ॥
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पश्चिम बंगाल के सियालदह में रामपुरहट-सियालदह मां तारा एक्सप्रेस का एक डिब्बा रविवार को पटरी से उतर गया जिस कारण दार्जीलिंग मेल सहित कई ट्रेन की सेवाओं में दो से तीन घंटे तक विलंब हुआ।
रेल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मां तारा एक्सप्रेस सियालदेह पर पहुंची और फिर ट्रेन को दूसरी तरफ ले जाया जा रहा था। उस दौरान एक डिब्बा पटरी से उतर गया।
घटना में कोई घायल नहीं हुआ। अधिकारियों ने कहा कि डिब्बे के पटरी से उतरने के कारण दार्जीलिंग मेल, गौर एक्सप्रेस तथा कई दूसरी ट्रेन की सेवाएं बाधित हुईं। डिब्बे को पटरी से हटाए जाने के बाद ट्रेन सेवा बहाल कर दी जाएगी।
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पश्चिम बंगाल के सियालदह में रामपुरहट-सियालदह मां तारा एक्सप्रेस का एक डिब्बा रविवार को पटरी से उतर गया जिस कारण दार्जीलिंग मेल सहित कई ट्रेन की सेवाओं में दो से तीन घंटे तक विलंब हुआ। रेल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मां तारा एक्सप्रेस सियालदेह पर पहुंची और फिर ट्रेन को दूसरी तरफ ले जाया जा रहा था। उस दौरान एक डिब्बा पटरी से उतर गया। घटना में कोई घायल नहीं हुआ। अधिकारियों ने कहा कि डिब्बे के पटरी से उतरने के कारण दार्जीलिंग मेल, गौर एक्सप्रेस तथा कई दूसरी ट्रेन की सेवाएं बाधित हुईं। डिब्बे को पटरी से हटाए जाने के बाद ट्रेन सेवा बहाल कर दी जाएगी।
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बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक में अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरने वाली अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) इन दिनों सुर्खियों में बनी हुई हैं। प्रियंका चोपड़ा हर मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय भी रख रही है। हाल ही में तुर्की और सीरिया में आए भूकंप ने हर किसी को कंपाकर रख दिया। दोनों ही देशों में हजारों लोगों की जान जा चुकी है। इंडिया समते कई देश लगातार तुर्की और सीरिया की मदद कर रहे है। इस मुद्दे पर अब वर्ल्ड आइकन बन चुकीं एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने इस हादसे पर दुख भी व्यक्त किया है।
प्रियंका चोपड़ा ने शेयर किया वीडियोः दरअसल, प्रियंका चोपड़ा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा कर दिया है । यह क्लिप तुर्की और सीरिया के रेस्क्यू ऑपरेशन का है। वीडियो में टीम एक बच्चे को मलबे से निकलाती हुई दिखाई दे रही है। इस क्लिप को देखने के बाद लोग भावुक हो चुके है।
प्रियंका ने इस वीडियो को साझा करते हुए एक नोट भी लिखा है, एक सप्ताह विनाशकारी भूकंप के उपरांत तुर्की और सीरिया के लोगों के लिए दर्द और पीड़ा जारी है। रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है, इसकी वजह कुछ ऐसे ही उम्मीद भरे पल आए, जहां एक 3 माह के बच्चे को मलबे से निकाला जा चुका है। ऐसे बहुत से लोग हैं जो अभी भी फंसे हुए हैं, प्रतीक्षा कर रहे हैं और बचने का अनुमान भी लगा रहे है, उनके परिवार वाले किसी चमत्कार की प्रार्थना कर रहे हैं। यह दिल तोड़ने वाला है।
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बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक में अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरने वाली अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा इन दिनों सुर्खियों में बनी हुई हैं। प्रियंका चोपड़ा हर मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय भी रख रही है। हाल ही में तुर्की और सीरिया में आए भूकंप ने हर किसी को कंपाकर रख दिया। दोनों ही देशों में हजारों लोगों की जान जा चुकी है। इंडिया समते कई देश लगातार तुर्की और सीरिया की मदद कर रहे है। इस मुद्दे पर अब वर्ल्ड आइकन बन चुकीं एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने इस हादसे पर दुख भी व्यक्त किया है। प्रियंका चोपड़ा ने शेयर किया वीडियोः दरअसल, प्रियंका चोपड़ा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा कर दिया है । यह क्लिप तुर्की और सीरिया के रेस्क्यू ऑपरेशन का है। वीडियो में टीम एक बच्चे को मलबे से निकलाती हुई दिखाई दे रही है। इस क्लिप को देखने के बाद लोग भावुक हो चुके है। प्रियंका ने इस वीडियो को साझा करते हुए एक नोट भी लिखा है, एक सप्ताह विनाशकारी भूकंप के उपरांत तुर्की और सीरिया के लोगों के लिए दर्द और पीड़ा जारी है। रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है, इसकी वजह कुछ ऐसे ही उम्मीद भरे पल आए, जहां एक तीन माह के बच्चे को मलबे से निकाला जा चुका है। ऐसे बहुत से लोग हैं जो अभी भी फंसे हुए हैं, प्रतीक्षा कर रहे हैं और बचने का अनुमान भी लगा रहे है, उनके परिवार वाले किसी चमत्कार की प्रार्थना कर रहे हैं। यह दिल तोड़ने वाला है।
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मध्यप्रदेश के नीमच में एक व्यक्ति को अपनी आठ वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि लड़की को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया। जिसके बाद इस बात की पुष्टि हुई है कि लड़की के साथ दुष्कर्म हुआ है।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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मध्यप्रदेश के नीमच में एक व्यक्ति को अपनी आठ वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि लड़की को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया। जिसके बाद इस बात की पुष्टि हुई है कि लड़की के साथ दुष्कर्म हुआ है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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रायपुर : विधानसभा चुनाव के पहले चरण में आज छत्तीसगढ़ में 10 सीटों पर सुबह सात बजे तो 8 सीटों पर सुबह आठ बजे से मतदान शुरू हो चुका है। सोमवार को जिन 18 सीटों पर मतदान हो रहा है, वे सभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हैं। नक्सलियों ने इन क्षेत्रों में मतदान न करने की चेतावनी भी दी थी। इसके बावजूद मतदाता अपने घरों से निकल रहे हैं और उत्साहपूर्वक वोट डाल रहे हैं, साथ ही नक्सलियों को करारा जवाब दे रहे हैं। सुकमा के भेज्जी में जहां पिछली बार एक ही वोट पड़ा था, वहीं इस बार सुबह 9 बजे तक यहां 100 से अधिक वोट पड़े। इसी तरह गोरखा गांव के मतदान केंद्रों में भी इस बार 20 वोट पड़े हैं, इससे पहले यहां कभी वोटिंग ही नहीं हुई थी। छत्तीसगढ़ में मतदाता किस तरह से नक्सलियों के इरादों पर पानी फेर रहे हैं, इसकी ताजा तस्वीर दंतेवाड़ा के किडरीरास में देखने को मिली। दंतेवाड़ा सर्वाधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र है, यहां के किडरीरास में नक्सलियों ने चुनाव का बहिष्कार किया था और लोगों से वोट न डालने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद सोमवार सुबह गांव के वार्ड पंच पाकलू ने अकेले वोट डाला। उनका कहना है कि उन्होंने गांव वालों की जान बचाने के लिए वोट डाला है, वह गांव वालों के लिए अपने प्राण तक दे सकते हैं। गौरतलब है कि नक्सलियों ने यहां लोगों को वोट डालने पर जान से मारने की धमकी दी थी। हालांकि गांव में सभी मतदाता मौजूद हैं लेकिन नक्सलियों की धमकी के कारण सिर्फ पाकलू ने ही वोट डाला।
वहीं नक्सल प्रभावित अन्य इलाकों में भी मतदाताओं के बीच उत्साह देखने को मिल रहा है। कुन्ना, कुन्दनपाल, आरगट्टा जैसे इलाकों में मतदान केंद्र में मतदाताओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं, यहां प्रशासन की ओर से नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे स्वीप अभियान का असर बड़े स्तर पर देखने को मिल रहा है। नक्सल प्रभावित सुकमा के दोरनापल के एक मतदान केंद्र में 100 वर्षीय बुजुर्ग महिला भी खुद चलकर मतदान करने आईं, इससे वहां मौजूद अन्य मतदाताओं में भी उत्साह बढ़ गया। छत्तीसगढ़ की 18 विधानसभा सीटों पर सोमवार को हो रहे मतदान में सुबह 10 बजे तक 10. 7 फीसदी वोट पड़े। सुबह नौ बजे तक नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में 10 फीसदी तो कांकेर में 13 फीसदी मतदान हुआ। वहीं सुकमा के भेज्जी में पहली बार 100 से अधिक वोट पड़े। 18 सीटों के लिए होने वाले चुनावों में मोहल्ला मानपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, कांकेर, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, बीजापुर, कोंटा क्षेत्र सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित है, इसलिए यहां पर सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए हैं और दोपहर 3 बजे तक ही मतदान होगा. छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण के लिए 20 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। वहीं चुनाव आयोग ने जानकारी दी है कि छत्तीसगढ़ के कुल 4336 मतदान केंद्रों में से 53 पर तकनीकी खामी के चलते वोटिंग देर से शुरू हुई। हालांकि सभी 100 फीसदी मतदान केंद्रों पर सामान्य रूप से मतदान हो रहा है। इनके बाहर लोगों की लंबी कतारें लगी हैं। कोंडागांव जिले के दो विधानसभा कोंडागांव केशकाल से लगभग 40 ईवीएम मशीन में तकनीकी खराबी के चलते कई जगह मतदान में देरी हुई।
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रायपुर : विधानसभा चुनाव के पहले चरण में आज छत्तीसगढ़ में दस सीटों पर सुबह सात बजे तो आठ सीटों पर सुबह आठ बजे से मतदान शुरू हो चुका है। सोमवार को जिन अट्ठारह सीटों पर मतदान हो रहा है, वे सभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हैं। नक्सलियों ने इन क्षेत्रों में मतदान न करने की चेतावनी भी दी थी। इसके बावजूद मतदाता अपने घरों से निकल रहे हैं और उत्साहपूर्वक वोट डाल रहे हैं, साथ ही नक्सलियों को करारा जवाब दे रहे हैं। सुकमा के भेज्जी में जहां पिछली बार एक ही वोट पड़ा था, वहीं इस बार सुबह नौ बजे तक यहां एक सौ से अधिक वोट पड़े। इसी तरह गोरखा गांव के मतदान केंद्रों में भी इस बार बीस वोट पड़े हैं, इससे पहले यहां कभी वोटिंग ही नहीं हुई थी। छत्तीसगढ़ में मतदाता किस तरह से नक्सलियों के इरादों पर पानी फेर रहे हैं, इसकी ताजा तस्वीर दंतेवाड़ा के किडरीरास में देखने को मिली। दंतेवाड़ा सर्वाधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र है, यहां के किडरीरास में नक्सलियों ने चुनाव का बहिष्कार किया था और लोगों से वोट न डालने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद सोमवार सुबह गांव के वार्ड पंच पाकलू ने अकेले वोट डाला। उनका कहना है कि उन्होंने गांव वालों की जान बचाने के लिए वोट डाला है, वह गांव वालों के लिए अपने प्राण तक दे सकते हैं। गौरतलब है कि नक्सलियों ने यहां लोगों को वोट डालने पर जान से मारने की धमकी दी थी। हालांकि गांव में सभी मतदाता मौजूद हैं लेकिन नक्सलियों की धमकी के कारण सिर्फ पाकलू ने ही वोट डाला। वहीं नक्सल प्रभावित अन्य इलाकों में भी मतदाताओं के बीच उत्साह देखने को मिल रहा है। कुन्ना, कुन्दनपाल, आरगट्टा जैसे इलाकों में मतदान केंद्र में मतदाताओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं, यहां प्रशासन की ओर से नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे स्वीप अभियान का असर बड़े स्तर पर देखने को मिल रहा है। नक्सल प्रभावित सुकमा के दोरनापल के एक मतदान केंद्र में एक सौ वर्षीय बुजुर्ग महिला भी खुद चलकर मतदान करने आईं, इससे वहां मौजूद अन्य मतदाताओं में भी उत्साह बढ़ गया। छत्तीसगढ़ की अट्ठारह विधानसभा सीटों पर सोमवार को हो रहे मतदान में सुबह दस बजे तक दस. सात फीसदी वोट पड़े। सुबह नौ बजे तक नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में दस फीसदी तो कांकेर में तेरह फीसदी मतदान हुआ। वहीं सुकमा के भेज्जी में पहली बार एक सौ से अधिक वोट पड़े। अट्ठारह सीटों के लिए होने वाले चुनावों में मोहल्ला मानपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, कांकेर, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, बीजापुर, कोंटा क्षेत्र सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित है, इसलिए यहां पर सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए हैं और दोपहर तीन बजे तक ही मतदान होगा. छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण के लिए बीस नवंबर को वोट डाले जाएंगे। वहीं चुनाव आयोग ने जानकारी दी है कि छत्तीसगढ़ के कुल चार हज़ार तीन सौ छत्तीस मतदान केंद्रों में से तिरेपन पर तकनीकी खामी के चलते वोटिंग देर से शुरू हुई। हालांकि सभी एक सौ फीसदी मतदान केंद्रों पर सामान्य रूप से मतदान हो रहा है। इनके बाहर लोगों की लंबी कतारें लगी हैं। कोंडागांव जिले के दो विधानसभा कोंडागांव केशकाल से लगभग चालीस ईवीएम मशीन में तकनीकी खराबी के चलते कई जगह मतदान में देरी हुई।
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आज कहानी दिल्ली के केशव राय की। दो बार स्टार्टअप शुरू किया लेकिन फेल हो गए। पिताजी से जो पैसे उधार लिए थे, वो भी डूब गए। तीसरी बार एक ऐसा आइडिया लाए, जो मार्केट में था ही नहीं। इस बार सक्सेस भी मिली और पैसा भी। अब महीने का दस से बारह लाख रुपए कमाते हैं। केशव की पूरी जर्नी, उनसे ही जानिए।
कहते हैं, 'लोगों की प्रॉब्लम के सॉल्यूशन दीजिए, आपका बिजनेस अपने आप खड़ा हो जाएगा। ' कुछ यही काम केशव ने भी किया। जब इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया तो पढ़ाई में मन नहीं लगा। कहते हैं, 'मैंने मैकेनिकल ब्रांच में एडमिशन ले लिया लेकिन कॉलेज जाकर पता चला कि जैसा मैं इंजीनियरिंग के बारे में सोच रहा था, वैसा नहीं है। मैं कुछ इनोवेशन करना चाहता था और कॉलेज में वही थ्योरी पढ़ाई जा रही थी जो मैं स्कूल में पढ़कर आया था। इसलिए मेरा दिमाग पहले दिन से ही बिजनेस की तरफ सोचने लगा। मैं हमेशा बहुत डरता था कि कुछ कर पाऊंगा या नहीं। इसी डर की वजह से मैं आगे बढ़ पाया। '
कहते हैं, 'सेकंड ईयर में मैंने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाने का सोचा। आइडिया ये था कि, एक ऐसी वेबसाइट हो जहां स्टूडेंट्स से जुड़ी हर चीज हो। नोट्स से लेकर लेक्चर्स तक अपलोड हों। मैंने इसमें 15 हजार रुपए लगाए। कुछ दोस्तों से भी पैसे उधार लिए। ये सोचा था कि, वेबसाइट को जो भी एक्सेस करेगा, उससे सौ रुपए चार्ज लेंगे। इससे वेबसाइट मेंटेन भी कर पाएंगे और कुछ प्रॉफिट भी होगा। लेकिन ये आइडिया फेल हो गया। किसी ने सपोर्ट नहीं किया। '
केशव के मुताबिक, 'मेरा आइडिया तो फेल हो गया था लेकिन मुझे अंदर से ये सब करके लगा बहुत अच्छा था। ऐसी फीलिंग्स आईं थी कि कुछ न कुछ तो मैं कर ही सकता हूं। जब थर्ड ईयर में पहुंचा तो फिर एक आइडिया दिमाग में आया। मैं अक्सर नोटिस करता था कि, लोगों को कहीं घूमने-फिरने जाना है और ग्रुप में जाने का प्लान बना है तो कई मेम्बर्स टाइम पर उठ नहीं पाते। कोई उठता है तो फिर सो जाता है। इसलिए मैंने एक ऐसी ऐप बनाने का सोचा जो पूरे ग्रुप से कनेक्ट हो। कॉन्सेप्ट ये था कि, ऐप सभी को टाइम पर उठाएगी भी और अगले दस मिनट तक उनकी मॉनिटरिंग भी करेगी और ये भी बताएगी कि अभी कौन क्या कर रहा है। '
'पिताजी को ये कॉन्सेप्ट बताया तो वो पैसे इंवेस्ट करने को तैयार हो गए। करीब ढाई लाख रुपए इंवेस्ट किए लेकिन ये ऐप हम लॉन्च ही नहीं कर पाए। कुछ न कुछ प्रॉब्लम आते गईं। इसके बाद मैं बहुत ज्यादा दुखी हो गया। दो प्रोजेक्ट फेल हो गए थे। दूसरे में फाइनेंशियल लॉस भी हुआ था। मैं कॉलेज में भी पढ़ नहीं पा रहा था। सारे दोस्त अच्छी जगह इंटर्नशिप करने लगे थे। मैं इतना डिस्टर्ब हो गया कि घर से चार दिन के लिए भाग गया। मैं अकेले घूमकर खुद को जानना चाहता था। चार दिन तक दिल्ली स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, लोटस टेंपल, इस्कॉन टेंपल पर गुजारे। '
'मेट्रो स्टेशन के बाहर बैठा था तब देखा कि एक आदमी पार्किंग में घूम रहा है और खुद की बाइक साफ करने के लिए डस्टर ढूंढ रहा है। उसे एक बाइक में डस्टर मिल गया। उसने उससे अपनी बाइक साफ की और डस्टर वहीं छोड़कर चला गया। ये देखकर मुझे हंसी आई लेकिन मेरे दिमाग में ये आइडिया भी आया कि, इस दिक्कत से हर रोज कितने लोग परेशान होते होंगे। क्या मैं कुछ ऐसा बना सकता हूं जिससे गाड़ी साफ भी रहे और वो सामान वाहन चालक को साथ में कैरी न करना पड़े। '
'मैंने घर आकर पापा को ये पूरा आइडिया बताया तो उन्हें भी अच्छा लगा। हमने इस बारे में रिसर्च शुरू कर दी। गूगल पर भी सर्च किया और बाइक ब्लेजर बनाने का सोचा। एक ऐसा बॉडी बाइक कवर जो बाइक के साथ ही रहे और बाइक को साफ रखे। बहुत रिसर्च के बाद एक प्रोटोटाइप तैयार हुआ। एक हैंडल को घुमाकर इस कवर को बाहर निकाला जा सकता है और उसी तरह से अंदर किया जा सकता है। पहले यह कवर सिर्फ बाइक के पेट्रोल टैंक और सीट कवर को ढंकता था लेकिन बाद में हम इसे अपडेट करते गए और अब जो कवर दे रहे हैं, उससे पूरी गाड़ी कवर हो जाती है। '
'मैंने अपने प्रोडक्ट को सबसे पहले दिल्ली में ही लगे ट्रेड फेयर में लॉन्च किया था। जहां से हमें काफी पब्लिसिटी मिली। इसके बाद सोशल मीडिया के जरिए लोगों को हमारे प्रोडक्ट के बारे में पता चला। फिर जो लोग कवर लगवाकर जाते थे, उनकी गाड़ी को देखकर कई लोग आने लगे। 2018 में हमने कंपनी बना ली थी। अब दिल्ली के साथ ही गाजियाबाद में भी ब्रांच है। सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपए से ज्यादा है। मां भी कंपनी में अहम रोल निभा रही हैं। अगले तीन से चार महीने में फोर व्हीलर के लिए भी ऐसा कवर लॉन्च करने जा रहे हैं, जो उसे पूरा कवर करेगा और उसी में फिट रहेगा। '
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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आज कहानी दिल्ली के केशव राय की। दो बार स्टार्टअप शुरू किया लेकिन फेल हो गए। पिताजी से जो पैसे उधार लिए थे, वो भी डूब गए। तीसरी बार एक ऐसा आइडिया लाए, जो मार्केट में था ही नहीं। इस बार सक्सेस भी मिली और पैसा भी। अब महीने का दस से बारह लाख रुपए कमाते हैं। केशव की पूरी जर्नी, उनसे ही जानिए। कहते हैं, 'लोगों की प्रॉब्लम के सॉल्यूशन दीजिए, आपका बिजनेस अपने आप खड़ा हो जाएगा। ' कुछ यही काम केशव ने भी किया। जब इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया तो पढ़ाई में मन नहीं लगा। कहते हैं, 'मैंने मैकेनिकल ब्रांच में एडमिशन ले लिया लेकिन कॉलेज जाकर पता चला कि जैसा मैं इंजीनियरिंग के बारे में सोच रहा था, वैसा नहीं है। मैं कुछ इनोवेशन करना चाहता था और कॉलेज में वही थ्योरी पढ़ाई जा रही थी जो मैं स्कूल में पढ़कर आया था। इसलिए मेरा दिमाग पहले दिन से ही बिजनेस की तरफ सोचने लगा। मैं हमेशा बहुत डरता था कि कुछ कर पाऊंगा या नहीं। इसी डर की वजह से मैं आगे बढ़ पाया। ' कहते हैं, 'सेकंड ईयर में मैंने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाने का सोचा। आइडिया ये था कि, एक ऐसी वेबसाइट हो जहां स्टूडेंट्स से जुड़ी हर चीज हो। नोट्स से लेकर लेक्चर्स तक अपलोड हों। मैंने इसमें पंद्रह हजार रुपए लगाए। कुछ दोस्तों से भी पैसे उधार लिए। ये सोचा था कि, वेबसाइट को जो भी एक्सेस करेगा, उससे सौ रुपए चार्ज लेंगे। इससे वेबसाइट मेंटेन भी कर पाएंगे और कुछ प्रॉफिट भी होगा। लेकिन ये आइडिया फेल हो गया। किसी ने सपोर्ट नहीं किया। ' केशव के मुताबिक, 'मेरा आइडिया तो फेल हो गया था लेकिन मुझे अंदर से ये सब करके लगा बहुत अच्छा था। ऐसी फीलिंग्स आईं थी कि कुछ न कुछ तो मैं कर ही सकता हूं। जब थर्ड ईयर में पहुंचा तो फिर एक आइडिया दिमाग में आया। मैं अक्सर नोटिस करता था कि, लोगों को कहीं घूमने-फिरने जाना है और ग्रुप में जाने का प्लान बना है तो कई मेम्बर्स टाइम पर उठ नहीं पाते। कोई उठता है तो फिर सो जाता है। इसलिए मैंने एक ऐसी ऐप बनाने का सोचा जो पूरे ग्रुप से कनेक्ट हो। कॉन्सेप्ट ये था कि, ऐप सभी को टाइम पर उठाएगी भी और अगले दस मिनट तक उनकी मॉनिटरिंग भी करेगी और ये भी बताएगी कि अभी कौन क्या कर रहा है। ' 'पिताजी को ये कॉन्सेप्ट बताया तो वो पैसे इंवेस्ट करने को तैयार हो गए। करीब ढाई लाख रुपए इंवेस्ट किए लेकिन ये ऐप हम लॉन्च ही नहीं कर पाए। कुछ न कुछ प्रॉब्लम आते गईं। इसके बाद मैं बहुत ज्यादा दुखी हो गया। दो प्रोजेक्ट फेल हो गए थे। दूसरे में फाइनेंशियल लॉस भी हुआ था। मैं कॉलेज में भी पढ़ नहीं पा रहा था। सारे दोस्त अच्छी जगह इंटर्नशिप करने लगे थे। मैं इतना डिस्टर्ब हो गया कि घर से चार दिन के लिए भाग गया। मैं अकेले घूमकर खुद को जानना चाहता था। चार दिन तक दिल्ली स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, लोटस टेंपल, इस्कॉन टेंपल पर गुजारे। ' 'मेट्रो स्टेशन के बाहर बैठा था तब देखा कि एक आदमी पार्किंग में घूम रहा है और खुद की बाइक साफ करने के लिए डस्टर ढूंढ रहा है। उसे एक बाइक में डस्टर मिल गया। उसने उससे अपनी बाइक साफ की और डस्टर वहीं छोड़कर चला गया। ये देखकर मुझे हंसी आई लेकिन मेरे दिमाग में ये आइडिया भी आया कि, इस दिक्कत से हर रोज कितने लोग परेशान होते होंगे। क्या मैं कुछ ऐसा बना सकता हूं जिससे गाड़ी साफ भी रहे और वो सामान वाहन चालक को साथ में कैरी न करना पड़े। ' 'मैंने घर आकर पापा को ये पूरा आइडिया बताया तो उन्हें भी अच्छा लगा। हमने इस बारे में रिसर्च शुरू कर दी। गूगल पर भी सर्च किया और बाइक ब्लेजर बनाने का सोचा। एक ऐसा बॉडी बाइक कवर जो बाइक के साथ ही रहे और बाइक को साफ रखे। बहुत रिसर्च के बाद एक प्रोटोटाइप तैयार हुआ। एक हैंडल को घुमाकर इस कवर को बाहर निकाला जा सकता है और उसी तरह से अंदर किया जा सकता है। पहले यह कवर सिर्फ बाइक के पेट्रोल टैंक और सीट कवर को ढंकता था लेकिन बाद में हम इसे अपडेट करते गए और अब जो कवर दे रहे हैं, उससे पूरी गाड़ी कवर हो जाती है। ' 'मैंने अपने प्रोडक्ट को सबसे पहले दिल्ली में ही लगे ट्रेड फेयर में लॉन्च किया था। जहां से हमें काफी पब्लिसिटी मिली। इसके बाद सोशल मीडिया के जरिए लोगों को हमारे प्रोडक्ट के बारे में पता चला। फिर जो लोग कवर लगवाकर जाते थे, उनकी गाड़ी को देखकर कई लोग आने लगे। दो हज़ार अट्ठारह में हमने कंपनी बना ली थी। अब दिल्ली के साथ ही गाजियाबाद में भी ब्रांच है। सालाना टर्नओवर एक करोड़ रुपए से ज्यादा है। मां भी कंपनी में अहम रोल निभा रही हैं। अगले तीन से चार महीने में फोर व्हीलर के लिए भी ऐसा कवर लॉन्च करने जा रहे हैं, जो उसे पूरा कवर करेगा और उसी में फिट रहेगा। ' This website follows the DNPA Code of Ethics.
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interim budget 2019: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल आज मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल का अंतिम बजट पेश करेंगे। हालांकि, सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि यह वित्तवर्ष 2019-20 का पूर्ण बजट नहीं होगा। इसके बावजूद चुनावी साल होने की वजह से विभिन्न वर्ग सौगातों की उम्मीद कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की अनुपस्थिति में वित्तमंत्रालय का प्रभार संभाल रहे पीयूष गोयल संसद में बजट पेश कर रहे हैं।
interim budget 2019 live updates:
अप्रत्यक्ष कर संग्रह 2013-14 के 6. 38 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर इस साल 12 लाख करोड़ रुपये हुआ।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, लोकसभा चुनाव को देखते हुए यह बजट लोकलुभावन योजनाओं वाला बजट होगा। उन्होंने अभी तक जो बजट पेश किए हैं उनसे जनता को क्या लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि आज सिर्फ 'जुमले' ही आएंगे। उनके पास योजनाओं को लागू करने के लिए सिर्फ महीने है?
वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने कहा, मोदी सरकार एक लोकप्रिय सरकार है। यह स्वाभाविक है कि हम सभी चीजों का ध्यान रखेंगे। हम लोगों के लिए जो संभव होगा वह करेंगे। हमने हमेशा एक अच्छा बजट पेश किया है।
- 1948 में देश का पहला अंतरिम बजट आरके षणमुखम चेट्टी ने पेश किया।
- 1951 का अंतरिम बजट सीडी देशमुख ने पेश किया। देशमुख आरबीआई के गवर्नर भी थे।
- 1967 में एक बार फिर मोरारजी देसाई ने अंतरिम बजट पेश किया।
- 1998 में यशवंत सिन्हा ने अंतरिम बजट पेश किया।
- 2009 में प्रणब मुखर्जी ने अंतरिम बजट पेश किया।
अंतरिम बजट के भाषण के दौरान हालांकि सरकार आगे के अपने इरादों को जाहिर कर सकती है। वह बता सकती है कि जब पूर्ण बजट पेश होगा, तो वह किन-किन योजनाओं को लेकर आएगी, हालांकि, इस दौरान वह किसी नई योजना की घोषणा भी नहीं कर सकती है।
इस बजट में कोई भी ऐसा फैसला नहीं किया जाता है जिसमें ऐसे नीतिगत फैसले हों जिसके लिए संसद की मंजूरी लेनी पड़े या फिर कानून में संशोधन की जरूरत हो। अंतरिम बजट की परंपरा है कि इसमें डायरेक्ट टैक्स, जिसमें इनकम टैक्स शामिल है, उसमें बदलाव नहीं किया जाता।
तकनीकी रूप से अंतरिम बजट चुनावी साल में कुछ महीनों तक देश को चलाने के लिए खर्चों का इंतजाम करने की औपचारिकता है। नई सरकार बनाने के लिए जो समय होता है, उस अवधि के लिए अंतरिम बजट संसद में पेश किया जाता है। इसमें सरकारी योजनाएं आदि का इंतजाम का बजट होता है।
अंतरिम बजट को वोट ऑन अकाउंट कहा जाता है। इसे लेखानुदान मांग और मिनी बजट कहा जाता है। वोट ऑन अकाउंट के जरिए सीमित अवधि के लिए सरकार के जरूरी खर्च को मंजूरी मिलती है। जिस साल लोकसभा चुनाव होता है, उस साल सरकार अंतरिम बजट पेश करती है। चुनाव के बाद नई सरकार पूर्ण बजट पेश करती है।
चालू वित्त वर्ष में यह तीसरी बार है जब जीएसटी संग्रह का आंकड़ा एक लाख करोड़ के स्तर को पार कर गया। इससे पहले अप्रैल और अक्टूबर में कर संग्रह इस स्तर पर था।
महिला और बाल विकास मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से खास सिफारिश की है कि मातृत्व अवकाश के दौरान महिलाओं की आमदनी कर मुक्त की जाए। ऐसा हुआ तो महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी। रोजगार के क्षेत्र पर पहले से आलोचना झेल रही सरकार अंतरिम बजट में इस मोर्चे को साधने के लिए स्टार्टअप को और मजबूत करेगी।
केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के बनने के बाद पहला मौका होगा, जब अरुण जेटली केंद्रीय बजट पेश नहीं करेंगे। वह बीमार हैं और इलाज के लिए इस समय अमेरिका में हैं। इसलिए उनकी जगह वित्तमंत्रालय का प्रभार देख रहे गोयल बजट भाषण देंगे।
पूर्ण बजट पूरे साल के लिए होता है। लेकिन सिद्धांतः अंतरिम बजट चुनाव होने तक देश के खर्च के लिए लेखानुदान होता है। दरअसल भारत का वित्तीयवर्ष 31 मार्च को समाप्त होता है और संसद बजट में इसी अवधि के लिए राशि खर्च करने की अनुमति देती है। ऐसे में चुनाव होने तक खर्च के लिए अंतरिम बजट के जरिये धन आवंटित किया जाता है।
1991 में चंद्रशेखर सरकार में वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने पहली विनिवेश नीति की घोषणा की।
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interim budget दो हज़ार उन्नीस: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल आज मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल का अंतिम बजट पेश करेंगे। हालांकि, सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि यह वित्तवर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस का पूर्ण बजट नहीं होगा। इसके बावजूद चुनावी साल होने की वजह से विभिन्न वर्ग सौगातों की उम्मीद कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की अनुपस्थिति में वित्तमंत्रालय का प्रभार संभाल रहे पीयूष गोयल संसद में बजट पेश कर रहे हैं। interim budget दो हज़ार उन्नीस live updates: अप्रत्यक्ष कर संग्रह दो हज़ार तेरह-चौदह के छः. अड़तीस लाख करोड़ रुपये से बढ़कर इस साल बारह लाख करोड़ रुपये हुआ। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, लोकसभा चुनाव को देखते हुए यह बजट लोकलुभावन योजनाओं वाला बजट होगा। उन्होंने अभी तक जो बजट पेश किए हैं उनसे जनता को क्या लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि आज सिर्फ 'जुमले' ही आएंगे। उनके पास योजनाओं को लागू करने के लिए सिर्फ महीने है? वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने कहा, मोदी सरकार एक लोकप्रिय सरकार है। यह स्वाभाविक है कि हम सभी चीजों का ध्यान रखेंगे। हम लोगों के लिए जो संभव होगा वह करेंगे। हमने हमेशा एक अच्छा बजट पेश किया है। - एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में देश का पहला अंतरिम बजट आरके षणमुखम चेट्टी ने पेश किया। - एक हज़ार नौ सौ इक्यावन का अंतरिम बजट सीडी देशमुख ने पेश किया। देशमुख आरबीआई के गवर्नर भी थे। - एक हज़ार नौ सौ सरसठ में एक बार फिर मोरारजी देसाई ने अंतरिम बजट पेश किया। - एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में यशवंत सिन्हा ने अंतरिम बजट पेश किया। - दो हज़ार नौ में प्रणब मुखर्जी ने अंतरिम बजट पेश किया। अंतरिम बजट के भाषण के दौरान हालांकि सरकार आगे के अपने इरादों को जाहिर कर सकती है। वह बता सकती है कि जब पूर्ण बजट पेश होगा, तो वह किन-किन योजनाओं को लेकर आएगी, हालांकि, इस दौरान वह किसी नई योजना की घोषणा भी नहीं कर सकती है। इस बजट में कोई भी ऐसा फैसला नहीं किया जाता है जिसमें ऐसे नीतिगत फैसले हों जिसके लिए संसद की मंजूरी लेनी पड़े या फिर कानून में संशोधन की जरूरत हो। अंतरिम बजट की परंपरा है कि इसमें डायरेक्ट टैक्स, जिसमें इनकम टैक्स शामिल है, उसमें बदलाव नहीं किया जाता। तकनीकी रूप से अंतरिम बजट चुनावी साल में कुछ महीनों तक देश को चलाने के लिए खर्चों का इंतजाम करने की औपचारिकता है। नई सरकार बनाने के लिए जो समय होता है, उस अवधि के लिए अंतरिम बजट संसद में पेश किया जाता है। इसमें सरकारी योजनाएं आदि का इंतजाम का बजट होता है। अंतरिम बजट को वोट ऑन अकाउंट कहा जाता है। इसे लेखानुदान मांग और मिनी बजट कहा जाता है। वोट ऑन अकाउंट के जरिए सीमित अवधि के लिए सरकार के जरूरी खर्च को मंजूरी मिलती है। जिस साल लोकसभा चुनाव होता है, उस साल सरकार अंतरिम बजट पेश करती है। चुनाव के बाद नई सरकार पूर्ण बजट पेश करती है। चालू वित्त वर्ष में यह तीसरी बार है जब जीएसटी संग्रह का आंकड़ा एक लाख करोड़ के स्तर को पार कर गया। इससे पहले अप्रैल और अक्टूबर में कर संग्रह इस स्तर पर था। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से खास सिफारिश की है कि मातृत्व अवकाश के दौरान महिलाओं की आमदनी कर मुक्त की जाए। ऐसा हुआ तो महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी। रोजगार के क्षेत्र पर पहले से आलोचना झेल रही सरकार अंतरिम बजट में इस मोर्चे को साधने के लिए स्टार्टअप को और मजबूत करेगी। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के बनने के बाद पहला मौका होगा, जब अरुण जेटली केंद्रीय बजट पेश नहीं करेंगे। वह बीमार हैं और इलाज के लिए इस समय अमेरिका में हैं। इसलिए उनकी जगह वित्तमंत्रालय का प्रभार देख रहे गोयल बजट भाषण देंगे। पूर्ण बजट पूरे साल के लिए होता है। लेकिन सिद्धांतः अंतरिम बजट चुनाव होने तक देश के खर्च के लिए लेखानुदान होता है। दरअसल भारत का वित्तीयवर्ष इकतीस मार्च को समाप्त होता है और संसद बजट में इसी अवधि के लिए राशि खर्च करने की अनुमति देती है। ऐसे में चुनाव होने तक खर्च के लिए अंतरिम बजट के जरिये धन आवंटित किया जाता है। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में चंद्रशेखर सरकार में वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने पहली विनिवेश नीति की घोषणा की।
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अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन हमेशा ही बुरके में नजर आई थी. (फोटो- News18)
नई दिल्ली. माफिया अतीक अहमद (Atiq Ahmad) और उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन (Atiq Ahmed wife Shaista) की तस्वीर पहली बार सामने आई है. शाइस्ता परवीन उमेश पाल हत्याकांड में आरोपी है और उस पर 50 हजार रुपए का इनाम है. उसकी तलाश में प्रयागराज पुलिस और यूपी एसटीएफ लगातार छापेमारी कर रही है. दरअसल यह पहली तस्वीर है जिसमें शाइस्ता ओर अतीक अहमद साथ में हैं. अभी तक शाइस्ता जब भी सामने आई थी, वह नकाब में होती थी और उसका चेहरा सामने नहीं आया था. ऐसे आरोप हैं कि शाइस्ता परवीन ने उमेश पाल हत्याकांड में इनामी साबिर के साथ मुलाकात की थी. साबिर ने ही उमेश पाल के गनर को गोली मारी थी.
पुलिस की मानें तो प्रयागरात के धूमनगंज इलाके में 24 फरवरी को उमेश पाल और उसके 2 सुरक्षाकर्मी संदीप निषाद और राघवेंद्र की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. इस केस में उमेश पाल की पत्नी जया ने अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ, पत्नी शाइस्ता परवीन, 2 बेटों और कुछ नामजद लोगों और 9 अन्य लोगों पर केस दर्ज कराया था.
शाइस्ता को लेकर यूपी पुलिस ने उत्तर प्रदेश के कई स्थानों पर छापेमारी की है. इसके साथ ही दिल्ली, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में भी पुलिस ने लोगों से पूछताछ की है और ऐसा माना जा रहा है कि शाइस्ता यहां भी छिप सकती है. पुलिस को ऐसी आशंका थी कि वह अपने पति के अंतिम दर्शन करने के लिए जरूर आएगी, लेकिन वह नहीं आई.
बहरहाल यूपी पुलिस अभी भी शाइस्ता परवीन के ठिकाने के बारे में पता नहीं लगा पाई है. एक पुलिस कांस्टेबल के परिवार में जन्मी और पली-बढ़ी परवीन को अब भगोड़ा घोषित किया गया है, जिसके सिर पर नकद इनाम है. बताया जा रहा है कि परवीन अपने वकीलों के साथ संपर्क में हैं. वह खुद को और अपने परिवार को पुलिस कार्रवाई से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न अदालतों में याचिकाएं दायर करवा रही है. ऐसी आशंका है कि वह विदेश भाग गई हो.
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अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन हमेशा ही बुरके में नजर आई थी. नई दिल्ली. माफिया अतीक अहमद और उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन की तस्वीर पहली बार सामने आई है. शाइस्ता परवीन उमेश पाल हत्याकांड में आरोपी है और उस पर पचास हजार रुपए का इनाम है. उसकी तलाश में प्रयागराज पुलिस और यूपी एसटीएफ लगातार छापेमारी कर रही है. दरअसल यह पहली तस्वीर है जिसमें शाइस्ता ओर अतीक अहमद साथ में हैं. अभी तक शाइस्ता जब भी सामने आई थी, वह नकाब में होती थी और उसका चेहरा सामने नहीं आया था. ऐसे आरोप हैं कि शाइस्ता परवीन ने उमेश पाल हत्याकांड में इनामी साबिर के साथ मुलाकात की थी. साबिर ने ही उमेश पाल के गनर को गोली मारी थी. पुलिस की मानें तो प्रयागरात के धूमनगंज इलाके में चौबीस फरवरी को उमेश पाल और उसके दो सुरक्षाकर्मी संदीप निषाद और राघवेंद्र की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. इस केस में उमेश पाल की पत्नी जया ने अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ, पत्नी शाइस्ता परवीन, दो बेटों और कुछ नामजद लोगों और नौ अन्य लोगों पर केस दर्ज कराया था. शाइस्ता को लेकर यूपी पुलिस ने उत्तर प्रदेश के कई स्थानों पर छापेमारी की है. इसके साथ ही दिल्ली, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में भी पुलिस ने लोगों से पूछताछ की है और ऐसा माना जा रहा है कि शाइस्ता यहां भी छिप सकती है. पुलिस को ऐसी आशंका थी कि वह अपने पति के अंतिम दर्शन करने के लिए जरूर आएगी, लेकिन वह नहीं आई. बहरहाल यूपी पुलिस अभी भी शाइस्ता परवीन के ठिकाने के बारे में पता नहीं लगा पाई है. एक पुलिस कांस्टेबल के परिवार में जन्मी और पली-बढ़ी परवीन को अब भगोड़ा घोषित किया गया है, जिसके सिर पर नकद इनाम है. बताया जा रहा है कि परवीन अपने वकीलों के साथ संपर्क में हैं. वह खुद को और अपने परिवार को पुलिस कार्रवाई से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न अदालतों में याचिकाएं दायर करवा रही है. ऐसी आशंका है कि वह विदेश भाग गई हो. .
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पणजी। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने शनिवार को चार मंत्रियों को मंत्रिमंडल में फेरबदल से पहले हटा दिया और इनके स्थान पर नए मंत्रियों को शामिल कर लिया।
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया कि राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने चार मंत्री विजय सरदेसाई, रोहन खौंटे, विंदा पालयेनकर और जयेश सालगांवकर को मंत्रिमंडल से हटाए जाने संबंधी मुख्यमंत्री की अनुशंसा को स्वीकार कर लिया है और यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
सरदेसाई, पालयेनकर और सालगांवकर गोवा फारवर्ड पार्टी विधायक हैं जबकि खौंटे निर्दलीय विधायक हैं।
इस बीच गोवा विधानसभा के उपाध्यक्ष माइकल लोबो ने इस्तीफा दे दिया है। कलंगुट से निर्वाचित भाजपा विधायक लोबो ने पुष्टि की है कि वह सावंत सरकार में मंत्री के रूप में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि तेलेईगाव से निर्वाचित विधायक जेनिफर मोसेरटे भी मंत्रिपद की शपथ लेंगे।
सूत्रों के मुताबिक दो अन्य विधायक चंद्रकांत कावलेकर और फिलिप रोड्रिग्स भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। गोवा विधानसभा अध्यक्ष राजेश पाटनेकर ने कहा है कि लोबो का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने चारों मंत्रियों को इस्तीफा देने के लिए कहा था लेकिन उनके इन्कार कर देने पर उन्होंने उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने का फैसला किया।
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पणजी। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने शनिवार को चार मंत्रियों को मंत्रिमंडल में फेरबदल से पहले हटा दिया और इनके स्थान पर नए मंत्रियों को शामिल कर लिया। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया कि राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने चार मंत्री विजय सरदेसाई, रोहन खौंटे, विंदा पालयेनकर और जयेश सालगांवकर को मंत्रिमंडल से हटाए जाने संबंधी मुख्यमंत्री की अनुशंसा को स्वीकार कर लिया है और यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा। सरदेसाई, पालयेनकर और सालगांवकर गोवा फारवर्ड पार्टी विधायक हैं जबकि खौंटे निर्दलीय विधायक हैं। इस बीच गोवा विधानसभा के उपाध्यक्ष माइकल लोबो ने इस्तीफा दे दिया है। कलंगुट से निर्वाचित भाजपा विधायक लोबो ने पुष्टि की है कि वह सावंत सरकार में मंत्री के रूप में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि तेलेईगाव से निर्वाचित विधायक जेनिफर मोसेरटे भी मंत्रिपद की शपथ लेंगे। सूत्रों के मुताबिक दो अन्य विधायक चंद्रकांत कावलेकर और फिलिप रोड्रिग्स भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। गोवा विधानसभा अध्यक्ष राजेश पाटनेकर ने कहा है कि लोबो का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने चारों मंत्रियों को इस्तीफा देने के लिए कहा था लेकिन उनके इन्कार कर देने पर उन्होंने उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने का फैसला किया।
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अमरावती/दि. 18 - चूंकि अब कोविड संक्रमण का असर काफी हद तक कम हो गया है और इन दिनों शालाओं को शुरू करने की मांग जोर पकड रही है. इसी दौरान जानकारी सामने आयी है कि, राज्य में अब भी 1 लाख 49 हजार 705 शिक्षकोें का टीकाकरण नहीं हुआ है. वहीं पहला डोज लगवाने के बाद 1 लाख 84 हजार 982 शिक्षक दूसरे डोज की प्रतीक्षा में है. ऐसी स्थिति में सबसे बडा सवाल यह है कि, शालाओें को कैसे शुरू किया जाये और अभिभावक अपने पाल्यों को शालाओं में कैसे भेजे.
बता दें कि, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा शिक्षक दिवस से पहले देश के सभी शिक्षकों का टीकाकरण पूर्ण करने का निर्देश दिया गया था. किंतु राज्य के शिक्षा विभाग द्वारा 14 सितंबर को राज्य के सभी पर्यवेक्षकिय प्रशासन को आदेश जारी करते हुए विशेष लिंक तैयार की गई. जिसमें केंद्र प्रमुखों को तमाम जानकारी तत्काल ऑनलाईन तरीके से उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये. संकलित की गई इस जानकारी के आधार पर पता चला कि, राज्य में अब तक केवल 4 लाख 52 हजार शिक्षकोें को ही कोविड वैक्सीन के दोनों डोज लगाये जा चुके है. वहीं अब भी कई शिक्षक टीकाकरण से वंचित है.
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अमरावती/दि. अट्ठारह - चूंकि अब कोविड संक्रमण का असर काफी हद तक कम हो गया है और इन दिनों शालाओं को शुरू करने की मांग जोर पकड रही है. इसी दौरान जानकारी सामने आयी है कि, राज्य में अब भी एक लाख उनचास हजार सात सौ पाँच शिक्षकोें का टीकाकरण नहीं हुआ है. वहीं पहला डोज लगवाने के बाद एक लाख चौरासी हजार नौ सौ बयासी शिक्षक दूसरे डोज की प्रतीक्षा में है. ऐसी स्थिति में सबसे बडा सवाल यह है कि, शालाओें को कैसे शुरू किया जाये और अभिभावक अपने पाल्यों को शालाओं में कैसे भेजे. बता दें कि, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा शिक्षक दिवस से पहले देश के सभी शिक्षकों का टीकाकरण पूर्ण करने का निर्देश दिया गया था. किंतु राज्य के शिक्षा विभाग द्वारा चौदह सितंबर को राज्य के सभी पर्यवेक्षकिय प्रशासन को आदेश जारी करते हुए विशेष लिंक तैयार की गई. जिसमें केंद्र प्रमुखों को तमाम जानकारी तत्काल ऑनलाईन तरीके से उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये. संकलित की गई इस जानकारी के आधार पर पता चला कि, राज्य में अब तक केवल चार लाख बावन हजार शिक्षकोें को ही कोविड वैक्सीन के दोनों डोज लगाये जा चुके है. वहीं अब भी कई शिक्षक टीकाकरण से वंचित है.
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संख्या १९४. कवित्त संग्रह, कागज - देशी, पत्र- ३२, आकार -८४५ इंच, पंक्ति ( प्रतिपृष्ठ ) - १६, परिमाण ( अनुष्टुप् ) - १५३६, खंडित रूप- प्राचीन, पद्य, लिपि-नागरी, प्राप्तिस्थान - मुं० वच्चनलाल जी, स्थान- चकवाखुर्द, डा०-वसरेहर, जि० - इटावा ।
• तात को सोच न मातु को सोच न सोच पिता सुरधाम
गये को। सोय हरे को तो सोच नहीं नहिं सोच हमैं वनमाहिं रहे को । वन्धु विछोह को सोच नहीं नहिं सोच जटायु के पंख जरे को । केवल सोच वही तुलसी एक दास विभीषण वाँह गहे को । सुगंध लगाय के ऊवि मरौ प्रिय जानत हौ तन की सुकुमारी । हार चमेली को नीक लगे प्रिय लाज करो पहिरौं तन सारी। और अभूषण का वरनों प्रिय लागत पाँय महावर भारी । मेरे सुभाव को जानो नहीं रसखान कपूर मुलायम ताड़ी । एक सुंदरि नारि रचे विधना पियके हिय से कहूँ निसरैना। तात सुभाव बड़ा हँसना बलदेव सनेह से चित्त मिलैना । चित्त मिलै मन हूँ न मिलै देहिया न छुवो कोउ लोग हँसैना । चातुर यार चलाक बड़े यह कारन नारि हँसे तो फँसैना ।
अंत - नाम बड़ौ धनधाम बड़ौ जस कीरति हू जग में प्रगटी है । द्वार अनेक गयन्द झुमैं उपमा कछु इन्द्र से नाहिं घटी है। सुख साज अनेकन पाय मनोहर फूले रहें मन ही मन में है । तुलसी जग जीवन भक्ति बिना जस सुन्दरि नारि की नाक कटी है । जोवन में रस भींजि गये मग में तुम जात चली रेउतानी । अंचल से मुख ढाँकि चलो नहिं लोग हँसै विगढ़ कुलकानी। देखत जात चली मग मैं कुछ नैनन से हँस अंग जवानी । मुख से कछु बोलि दिये जबहीं तबहीं हमरो जियरा है विकानी । मगमें मुसकात चली सजनी हँसि नैनन से कछु घूँघट टारी । सारि सँवारि भली विधि से अँचरा पट से उर जोवन टारी । देखि के छैल गिरे गलियाँ विच जोवन की यह सुन्दर नारी। गौरी शंकर... ( अपूर्ण )
विषय- विविध विषय सम्पन्न विविध कवियों की कविताओं का संग्रह ।
विशेष ज्ञातव्य - प्रस्तुत संग्रह ग्रंथ में तुलसी, दास, रसखान, बलदेव, गौरीशंकर, धीर, तोष, मतिराम और जगन्नाथ आदि कई कवियों की कविताएँ हैं। संग्रह कर्ता के विषय में कुछ ज्ञात नहीं है । ग्रंथ का अंतिम भाग लुप्त हो गया है ।
संख्या १९५. कवित्त संग्रह, कागज- देश, पत्र -४८, आकार - ६३ x ६ ३ इंच, पंक्ति ( प्रतिष्पृष्ठ) - १६, परिमाण ( अनुष्टुप् ) - २३०४, खंडित, रूप- प्राचीन, पथ, लिपि - नागरी, लिपिकाल - सं० १९०७, प्राप्तिस्थान - श्री रघुवरदास जी, स्थान- सूरजनगर, डा० - नोगवाँ, जि०.
आदि -॥ श्री गणेशाय नमः ॥ अथ कवित्त संग्रह करत हैं । सुन्दर सदन सो सलिल में विराजमान, ससि की उगनि उत सोभा झिलमिल हैं। चमक रुपैरी तारु, मोती हीरा हारु दोऊ देषौ एक दिल हैं। रूप के
तारे प्यारे । प्रीतम पियारी सो पधारे दोउ मिल हैं। चौसर चमेली चारु सेज में सुगंध सारु देषि ब्रज चंद जू कौं चंद रह्यो पिल हैं ॥ १ ॥ काँच की नहरि किती दर्पन के हौज करे, कोटि हैं फुहारे सवै छूटति गुलाब हैं । तास के सिमांनां तहाँ मोतिन की झालर हैं, हीरन के जरे बाँस कलसों की जान हैं। चौसर चमेली चारु चाँदनी विहार चित, दोऊ रिझवार रीझे सषी त्यौं बेताव हैं । त्रिविध समीर तहाँ छोर सौं विमल नीर, न्योंते ब्रजराज जू कौं मानौं महताव है ॥ २ ॥
अंत - एरे मनलोभी सुनि दौरि दौरि जातौ हुतौ रूप को लुभायौ समुझायो हो दरद मैं । देत हौन चैन मैंन आपवस करथौ नैंन, परधौ आनि अधिक विधि मयन मद मैं । अव फल पायौ मुसिक्यानि मैं फँसायो भौंह, कसनि कसायौ लै मिलायौ रे गरद मैं । मारिकै कटाछिन सौं वेधि तीषे कोइन सौं, चूरि करि लोइन सौं डारयो नेह नद मैं ॥ २५ ॥ किधौं उन देसनि घुमड़ि घन वरसत किधौं मकरंद पथ नदी नद भरिगे । किधौं पिक चातिक चतुर चकवाक उड़, किधौं मत्त दादुर मधुप मोर मरिगे । तूतौ कहै आवत हैं आए न अजौलों आली, किधौं कामसर काम करतें निकरिगे। किधौं पंचसर हर फेरिकेँ भसम कीन्हों, किधौं पंचसरहू के पाँचों सर सरिगे ॥ २६ ॥ इति ॥ मिती वैसाष सुदी एकादशी
सम्वत् १९०७ ॥
विषय - विविध कवियों की विविध विषय सम्पन्न कविताओं का संग्रह ।
विशेष ज्ञातव्य - प्रस्तुत संग्रह ग्रंथ में देव, पद्माकर, मतिराम, सुन्दर, रसखान, चतुर, आलम, कालिदास, सुजान, घनानंद, सूरति, रघुनाथ, परसराम तथा रिझवार आदि कवियों की कविताओं का संग्रह है। अधिकतर इसमें शृंगार रस की रचनाएँ हैं।
संख्या १९६. कवित्त संग्रह, कागज - देशी, पत्र - ४८, आकार - ८ x ५ ३ इंच, पंक्ति ( प्रतिष्पृष्ठ ) - ११, परिमाण ( अनुष्टुप् ) - १०५६, खंडित, रूप - प्राचीन, पद्य, लिपि - नागरी, प्राप्तिस्थान - पं० रामदत्त शर्मा, स्थान- वम्हनीपुर, जि० - इटावा ।
आदि - ॥ कवित्त ॥ पैसा विनु माय कहै मेरे तो कपूत पूत, पैसा विनु चाप कहै कैसो दुखदाई है। पैसा विनु ससुर कहै विहाता को छोड़ि जाउ, पैसा विनु सासु कहै कौन को जमाई है । पैसा विनु कार वार चलत न कहूँ कौ, देहरी पे बैठि जात जो लुगाई है । कहत गंगा दास तेरी साहिवी अपार देखी, जाके घर पैसा आज ताही की बड़ाई है ॥ १ ॥ माँगत माँगत मान घंटे और प्रीति घटै नित के घर जायें। ओछे की संगति बुद्धि घटे और क्रोध घटै मन के समझायें । बैरी घटै वल वाहन सौं परिवार घटै कुल ओछति आयें । कोटि उपाय करो सजनी अब काल घंटै नहिं ओषदि षायें ॥ २ ॥
अंत - हुआ क्रीट को मुकट यहाँ मोर की लटक, हुआँ हाथ में धनुष यहाँ मुरली वजाई है । उहाँ अवध को वास इहाँ वृन्दावन रहस, उहाँ सरजू सुहाई यहाँ जमुना वहाई है । उहाँ रावन को मारो यहाँ कंस को पछारो, ऊहाँ श्याम रामचन्द्र यहाँ सामरे कन्हाई है। कई लछिमन ध्याई इन्हें देत है बढ़ाई, सुइन्हें स्याम राम रूप की इकट्ठी लूटि
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संख्या एक सौ चौरानवे. कवित्त संग्रह, कागज - देशी, पत्र- बत्तीस, आकार -आठ सौ पैंतालीस इंच, पंक्ति - सोलह, परिमाण - एक हज़ार पाँच सौ छत्तीस, खंडित रूप- प्राचीन, पद्य, लिपि-नागरी, प्राप्तिस्थान - मुंशून्य वच्चनलाल जी, स्थान- चकवाखुर्द, डाशून्य-वसरेहर, जिशून्य - इटावा । • तात को सोच न मातु को सोच न सोच पिता सुरधाम गये को। सोय हरे को तो सोच नहीं नहिं सोच हमैं वनमाहिं रहे को । वन्धु विछोह को सोच नहीं नहिं सोच जटायु के पंख जरे को । केवल सोच वही तुलसी एक दास विभीषण वाँह गहे को । सुगंध लगाय के ऊवि मरौ प्रिय जानत हौ तन की सुकुमारी । हार चमेली को नीक लगे प्रिय लाज करो पहिरौं तन सारी। और अभूषण का वरनों प्रिय लागत पाँय महावर भारी । मेरे सुभाव को जानो नहीं रसखान कपूर मुलायम ताड़ी । एक सुंदरि नारि रचे विधना पियके हिय से कहूँ निसरैना। तात सुभाव बड़ा हँसना बलदेव सनेह से चित्त मिलैना । चित्त मिलै मन हूँ न मिलै देहिया न छुवो कोउ लोग हँसैना । चातुर यार चलाक बड़े यह कारन नारि हँसे तो फँसैना । अंत - नाम बड़ौ धनधाम बड़ौ जस कीरति हू जग में प्रगटी है । द्वार अनेक गयन्द झुमैं उपमा कछु इन्द्र से नाहिं घटी है। सुख साज अनेकन पाय मनोहर फूले रहें मन ही मन में है । तुलसी जग जीवन भक्ति बिना जस सुन्दरि नारि की नाक कटी है । जोवन में रस भींजि गये मग में तुम जात चली रेउतानी । अंचल से मुख ढाँकि चलो नहिं लोग हँसै विगढ़ कुलकानी। देखत जात चली मग मैं कुछ नैनन से हँस अंग जवानी । मुख से कछु बोलि दिये जबहीं तबहीं हमरो जियरा है विकानी । मगमें मुसकात चली सजनी हँसि नैनन से कछु घूँघट टारी । सारि सँवारि भली विधि से अँचरा पट से उर जोवन टारी । देखि के छैल गिरे गलियाँ विच जोवन की यह सुन्दर नारी। गौरी शंकर... विषय- विविध विषय सम्पन्न विविध कवियों की कविताओं का संग्रह । विशेष ज्ञातव्य - प्रस्तुत संग्रह ग्रंथ में तुलसी, दास, रसखान, बलदेव, गौरीशंकर, धीर, तोष, मतिराम और जगन्नाथ आदि कई कवियों की कविताएँ हैं। संग्रह कर्ता के विषय में कुछ ज्ञात नहीं है । ग्रंथ का अंतिम भाग लुप्त हो गया है । संख्या एक सौ पचानवे. कवित्त संग्रह, कागज- देश, पत्र -अड़तालीस, आकार - तिरेसठ x छः तीन इंच, पंक्ति - सोलह, परिमाण - दो हज़ार तीन सौ चार, खंडित, रूप- प्राचीन, पथ, लिपि - नागरी, लिपिकाल - संशून्य एक हज़ार नौ सौ सात, प्राप्तिस्थान - श्री रघुवरदास जी, स्थान- सूरजनगर, डाशून्य - नोगवाँ, जिशून्य. आदि -॥ श्री गणेशाय नमः ॥ अथ कवित्त संग्रह करत हैं । सुन्दर सदन सो सलिल में विराजमान, ससि की उगनि उत सोभा झिलमिल हैं। चमक रुपैरी तारु, मोती हीरा हारु दोऊ देषौ एक दिल हैं। रूप के तारे प्यारे । प्रीतम पियारी सो पधारे दोउ मिल हैं। चौसर चमेली चारु सेज में सुगंध सारु देषि ब्रज चंद जू कौं चंद रह्यो पिल हैं ॥ एक ॥ काँच की नहरि किती दर्पन के हौज करे, कोटि हैं फुहारे सवै छूटति गुलाब हैं । तास के सिमांनां तहाँ मोतिन की झालर हैं, हीरन के जरे बाँस कलसों की जान हैं। चौसर चमेली चारु चाँदनी विहार चित, दोऊ रिझवार रीझे सषी त्यौं बेताव हैं । त्रिविध समीर तहाँ छोर सौं विमल नीर, न्योंते ब्रजराज जू कौं मानौं महताव है ॥ दो ॥ अंत - एरे मनलोभी सुनि दौरि दौरि जातौ हुतौ रूप को लुभायौ समुझायो हो दरद मैं । देत हौन चैन मैंन आपवस करथौ नैंन, परधौ आनि अधिक विधि मयन मद मैं । अव फल पायौ मुसिक्यानि मैं फँसायो भौंह, कसनि कसायौ लै मिलायौ रे गरद मैं । मारिकै कटाछिन सौं वेधि तीषे कोइन सौं, चूरि करि लोइन सौं डारयो नेह नद मैं ॥ पच्चीस ॥ किधौं उन देसनि घुमड़ि घन वरसत किधौं मकरंद पथ नदी नद भरिगे । किधौं पिक चातिक चतुर चकवाक उड़, किधौं मत्त दादुर मधुप मोर मरिगे । तूतौ कहै आवत हैं आए न अजौलों आली, किधौं कामसर काम करतें निकरिगे। किधौं पंचसर हर फेरिकेँ भसम कीन्हों, किधौं पंचसरहू के पाँचों सर सरिगे ॥ छब्बीस ॥ इति ॥ मिती वैसाष सुदी एकादशी सम्वत् एक हज़ार नौ सौ सात ॥ विषय - विविध कवियों की विविध विषय सम्पन्न कविताओं का संग्रह । विशेष ज्ञातव्य - प्रस्तुत संग्रह ग्रंथ में देव, पद्माकर, मतिराम, सुन्दर, रसखान, चतुर, आलम, कालिदास, सुजान, घनानंद, सूरति, रघुनाथ, परसराम तथा रिझवार आदि कवियों की कविताओं का संग्रह है। अधिकतर इसमें शृंगार रस की रचनाएँ हैं। संख्या एक सौ छियानवे. कवित्त संग्रह, कागज - देशी, पत्र - अड़तालीस, आकार - आठ x पाँच तीन इंच, पंक्ति - ग्यारह, परिमाण - एक हज़ार छप्पन, खंडित, रूप - प्राचीन, पद्य, लिपि - नागरी, प्राप्तिस्थान - पंशून्य रामदत्त शर्मा, स्थान- वम्हनीपुर, जिशून्य - इटावा । आदि - ॥ कवित्त ॥ पैसा विनु माय कहै मेरे तो कपूत पूत, पैसा विनु चाप कहै कैसो दुखदाई है। पैसा विनु ससुर कहै विहाता को छोड़ि जाउ, पैसा विनु सासु कहै कौन को जमाई है । पैसा विनु कार वार चलत न कहूँ कौ, देहरी पे बैठि जात जो लुगाई है । कहत गंगा दास तेरी साहिवी अपार देखी, जाके घर पैसा आज ताही की बड़ाई है ॥ एक ॥ माँगत माँगत मान घंटे और प्रीति घटै नित के घर जायें। ओछे की संगति बुद्धि घटे और क्रोध घटै मन के समझायें । बैरी घटै वल वाहन सौं परिवार घटै कुल ओछति आयें । कोटि उपाय करो सजनी अब काल घंटै नहिं ओषदि षायें ॥ दो ॥ अंत - हुआ क्रीट को मुकट यहाँ मोर की लटक, हुआँ हाथ में धनुष यहाँ मुरली वजाई है । उहाँ अवध को वास इहाँ वृन्दावन रहस, उहाँ सरजू सुहाई यहाँ जमुना वहाई है । उहाँ रावन को मारो यहाँ कंस को पछारो, ऊहाँ श्याम रामचन्द्र यहाँ सामरे कन्हाई है। कई लछिमन ध्याई इन्हें देत है बढ़ाई, सुइन्हें स्याम राम रूप की इकट्ठी लूटि
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
आम आदमी पार्टी, संक्षेप में आप, सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल एवं अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन से जुड़े बहुत से सहयोगियों द्वारा गठित एक भारतीय राजनीतिक दल है। इसके गठन की आधिकारिक घोषणा २६ नवम्बर २०१२ को भारतीय संविधान अधिनियम की ६३ वीं वर्षगाँठ के अवसर पर जंतर मंतर, दिल्ली में की गयी थी। सन् २०११ में इंडिया अगेंस्ट करपशन नामक संगठन ने अन्ना हजारे के नेतृत्व में हुए जन लोकपाल आंदोलन के दौरान भारतीय राजनीतिक दलों द्वारा जनहित की उपेक्षा के खिलाफ़ आवाज़ उठाई। अन्ना भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल आंदोलन को राजनीति से अलग रखना चाहते थे, जबकि अरविन्द केजरीवाल और उनके सहयोगियों की यह राय थी कि पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा जाये। इसी उद्देश्य के तहत पार्टी पहली बार दिसम्बर २०१३ में दिल्ली विधानसभा चुनाव में झाड़ू चुनाव चिन्ह के साथ चुनावी मैदान में उतरी। पार्टी ने चुनाव में २८ सीटों पर जीत दर्ज की और कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बनायी। अरविन्द केजरीवाल ने २८ दिसम्बर २०१३ को दिल्ली के ७वें मुख्य मन्त्री पद की शपथ ली। ४९ दिनों के बाद १४ फ़रवरी २०१४ को विधान सभा द्वारा जन लोकपाल विधेयक प्रस्तुत करने के प्रस्ताव को समर्थन न मिल पाने के कारण अरविंद केजरीवाल की सरकार ने त्यागपत्र दे दिया। . जंतर मंतर, दिल्ली के हृदय, कनॉट प्लेस में स्थित है जंतर मंतर, दिल्ली, c1858 दिल्ली का जन्तर मन्तर एक खगोलीय वेधशाला है। अन्य चार जन्तर मन्तर सहित इसका निर्माण महाराजा जयसिंह द्वितीय ने 1724 में करवाया था। यह इमारत प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उन्नति की मिसाल है। जय सिंह ने ऐसी वेधशालाओं का निर्माण जयपुर, उज्जैन, मथुरा और वाराणसी में भी किया था। दिल्ली का जंतर-मंतर समरकंद की वेधशाला से प्रेरित है। मोहम्मद शाह के शासन काल में हिन्दु और मुस्लिम खगोलशास्त्रियों में ग्रहों की स्थिति को लेकर बहस छिड़ गई थी। इसे खत्म करने के लिए सवाई जय सिंह ने जंतर-मंतर का निर्माण करवाया। ग्रहों की गति नापने के लिए यहां विभिन्न प्रकार के उपकरण लगाए गए हैं। सम्राट यंत्र सूर्य की सहायता से वक्त और ग्रहों की स्थिति की जानकारी देता है। मिस्र यंत्र वर्ष के सबसे छोटे ओर सबसे बड़े दिन को नाप सकता है। राम यंत्र और जय प्रकाश यंत्र खगोलीय पिंडों की गति के बारे में बताता है। .
आम आदमी पार्टी और जंतर मंतर, दिल्ली आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
आम आदमी पार्टी 38 संबंध है और जंतर मंतर, दिल्ली 14 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (38 + 14)।
यह लेख आम आदमी पार्टी और जंतर मंतर, दिल्ली के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। आम आदमी पार्टी, संक्षेप में आप, सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल एवं अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन से जुड़े बहुत से सहयोगियों द्वारा गठित एक भारतीय राजनीतिक दल है। इसके गठन की आधिकारिक घोषणा छब्बीस नवम्बर दो हज़ार बारह को भारतीय संविधान अधिनियम की तिरेसठ वीं वर्षगाँठ के अवसर पर जंतर मंतर, दिल्ली में की गयी थी। सन् दो हज़ार ग्यारह में इंडिया अगेंस्ट करपशन नामक संगठन ने अन्ना हजारे के नेतृत्व में हुए जन लोकपाल आंदोलन के दौरान भारतीय राजनीतिक दलों द्वारा जनहित की उपेक्षा के खिलाफ़ आवाज़ उठाई। अन्ना भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल आंदोलन को राजनीति से अलग रखना चाहते थे, जबकि अरविन्द केजरीवाल और उनके सहयोगियों की यह राय थी कि पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा जाये। इसी उद्देश्य के तहत पार्टी पहली बार दिसम्बर दो हज़ार तेरह में दिल्ली विधानसभा चुनाव में झाड़ू चुनाव चिन्ह के साथ चुनावी मैदान में उतरी। पार्टी ने चुनाव में अट्ठाईस सीटों पर जीत दर्ज की और कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बनायी। अरविन्द केजरीवाल ने अट्ठाईस दिसम्बर दो हज़ार तेरह को दिल्ली के सातवें मुख्य मन्त्री पद की शपथ ली। उनचास दिनों के बाद चौदह फ़रवरी दो हज़ार चौदह को विधान सभा द्वारा जन लोकपाल विधेयक प्रस्तुत करने के प्रस्ताव को समर्थन न मिल पाने के कारण अरविंद केजरीवाल की सरकार ने त्यागपत्र दे दिया। . जंतर मंतर, दिल्ली के हृदय, कनॉट प्लेस में स्थित है जंतर मंतर, दिल्ली, cएक हज़ार आठ सौ अट्ठावन दिल्ली का जन्तर मन्तर एक खगोलीय वेधशाला है। अन्य चार जन्तर मन्तर सहित इसका निर्माण महाराजा जयसिंह द्वितीय ने एक हज़ार सात सौ चौबीस में करवाया था। यह इमारत प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उन्नति की मिसाल है। जय सिंह ने ऐसी वेधशालाओं का निर्माण जयपुर, उज्जैन, मथुरा और वाराणसी में भी किया था। दिल्ली का जंतर-मंतर समरकंद की वेधशाला से प्रेरित है। मोहम्मद शाह के शासन काल में हिन्दु और मुस्लिम खगोलशास्त्रियों में ग्रहों की स्थिति को लेकर बहस छिड़ गई थी। इसे खत्म करने के लिए सवाई जय सिंह ने जंतर-मंतर का निर्माण करवाया। ग्रहों की गति नापने के लिए यहां विभिन्न प्रकार के उपकरण लगाए गए हैं। सम्राट यंत्र सूर्य की सहायता से वक्त और ग्रहों की स्थिति की जानकारी देता है। मिस्र यंत्र वर्ष के सबसे छोटे ओर सबसे बड़े दिन को नाप सकता है। राम यंत्र और जय प्रकाश यंत्र खगोलीय पिंडों की गति के बारे में बताता है। . आम आदमी पार्टी और जंतर मंतर, दिल्ली आम में शून्य बातें हैं । आम आदमी पार्टी अड़तीस संबंध है और जंतर मंतर, दिल्ली चौदह है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख आम आदमी पार्टी और जंतर मंतर, दिल्ली के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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कपड़ों का चयन, हम कार्बनिक कपास के लेबलिंग के साथ तेजी से सामना कर रहे हैं, जो कार्बनिक सूती है। ऐसे कपड़ों के निर्माताओं के मुताबिक, यह मनुष्यों के लिए बिल्कुल सुरक्षित है, इसमें हाइपोलेर्जेनिक गुण हैं और जीव के लिए इष्टतम सूक्ष्मजीव बनाता है। ऐसे उत्पादों की तुलना सामान्य कपास से की जाती है। "कार्बनिक सूती" का क्या अर्थ है, और क्या इससे बने कपड़े और कपड़ों के लिए भुगतान करना उचित है?
कार्बनिक कपास से बने वस्त्र, जो मांग बढ़ता है, केवल कार्बनिक चिह्नित लेबल के हकदार है यदि उसके उत्पादन के लिए कच्चे माल को पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना उगाया गया है। इस तरह की सूती खेतों में उगाई जाती है जो पारिस्थितिकीय स्वच्छ क्षेत्रों में स्थित होती हैं, और उनकी गतिविधियों में कीटनाशकों, कीटनाशकों, जड़ी-बूटियों का उपयोग नहीं करते हैं। कीटों, कीट परजीवी, खरपतवारों की संख्या बढ़ रही है, जैसा मौजूदा कपास बागानों से वापसी है। बस सोचेंः पिछले 9 0 वर्षों में, जिन क्षेत्रों पर यह संस्कृति उगाई गई है, वे अपरिवर्तित बनी हुई हैं, और उनसे प्राप्त कच्चे माल की मात्रा में तीस गुना वृद्धि हुई है! उसी समय, कीटनाशकों से जहर की संख्या में वृद्धि हुई। कार्बनिक उत्पादों को विकसित करने वाले खेतों में, प्राकृतिक प्राकृतिक पदार्थों (साबुन, मिर्च, लहसुन, आदि) का उपयोग करके कीट नियंत्रण आयोजित किया जाता है। उर्वरकों का भी कार्बनिक (खाद, खाद) का उपयोग किया जाता है, और कच्चे माल की मात्रा में वृद्धि करने के लिए, कृषिविद फसल रोटेशन के सिद्धांतों का पालन करते हैं।
अमेरिकी कार्बनिक सूती हाथ से एकत्र की जाती है। इसके कारण, पत्ते, कैप्सूल के कणों और कपास के रूप में ऐसी कोई अशुद्धता नहीं है। कार्बनिक खेतों ने आनुवंशिक रूप से संशोधित बीज छोड़ दिए हैं, लेकिन ऊर्जा की बचत प्रौद्योगिकियों के परिचय के लिए खुले हैं। यह फायदे हैं जो छोटे बिरोचर्स के पीछे खड़े हैं जिन पर कार्बनिक सूती लिखी जाती है।
अंडरवियर, शर्ट, टी-शर्ट और अन्य कार्बनिक सूती उत्पाद सभी के लिए उपयुक्त हैं, लेकिन संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए, ऐसे कपड़े कपड़े कीटनाशकों, भारी धातुओं, हानिकारक रंगों और कपड़े में ब्लीच ब्लीच की कमी के कारण आदर्श हैं।
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कपड़ों का चयन, हम कार्बनिक कपास के लेबलिंग के साथ तेजी से सामना कर रहे हैं, जो कार्बनिक सूती है। ऐसे कपड़ों के निर्माताओं के मुताबिक, यह मनुष्यों के लिए बिल्कुल सुरक्षित है, इसमें हाइपोलेर्जेनिक गुण हैं और जीव के लिए इष्टतम सूक्ष्मजीव बनाता है। ऐसे उत्पादों की तुलना सामान्य कपास से की जाती है। "कार्बनिक सूती" का क्या अर्थ है, और क्या इससे बने कपड़े और कपड़ों के लिए भुगतान करना उचित है? कार्बनिक कपास से बने वस्त्र, जो मांग बढ़ता है, केवल कार्बनिक चिह्नित लेबल के हकदार है यदि उसके उत्पादन के लिए कच्चे माल को पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना उगाया गया है। इस तरह की सूती खेतों में उगाई जाती है जो पारिस्थितिकीय स्वच्छ क्षेत्रों में स्थित होती हैं, और उनकी गतिविधियों में कीटनाशकों, कीटनाशकों, जड़ी-बूटियों का उपयोग नहीं करते हैं। कीटों, कीट परजीवी, खरपतवारों की संख्या बढ़ रही है, जैसा मौजूदा कपास बागानों से वापसी है। बस सोचेंः पिछले नौ शून्य वर्षों में, जिन क्षेत्रों पर यह संस्कृति उगाई गई है, वे अपरिवर्तित बनी हुई हैं, और उनसे प्राप्त कच्चे माल की मात्रा में तीस गुना वृद्धि हुई है! उसी समय, कीटनाशकों से जहर की संख्या में वृद्धि हुई। कार्बनिक उत्पादों को विकसित करने वाले खेतों में, प्राकृतिक प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग करके कीट नियंत्रण आयोजित किया जाता है। उर्वरकों का भी कार्बनिक का उपयोग किया जाता है, और कच्चे माल की मात्रा में वृद्धि करने के लिए, कृषिविद फसल रोटेशन के सिद्धांतों का पालन करते हैं। अमेरिकी कार्बनिक सूती हाथ से एकत्र की जाती है। इसके कारण, पत्ते, कैप्सूल के कणों और कपास के रूप में ऐसी कोई अशुद्धता नहीं है। कार्बनिक खेतों ने आनुवंशिक रूप से संशोधित बीज छोड़ दिए हैं, लेकिन ऊर्जा की बचत प्रौद्योगिकियों के परिचय के लिए खुले हैं। यह फायदे हैं जो छोटे बिरोचर्स के पीछे खड़े हैं जिन पर कार्बनिक सूती लिखी जाती है। अंडरवियर, शर्ट, टी-शर्ट और अन्य कार्बनिक सूती उत्पाद सभी के लिए उपयुक्त हैं, लेकिन संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए, ऐसे कपड़े कपड़े कीटनाशकों, भारी धातुओं, हानिकारक रंगों और कपड़े में ब्लीच ब्लीच की कमी के कारण आदर्श हैं।
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अमरावती / दि. 25- मलकापुर स्थित ग्राप अंतर्गत जूनी पानी की टाकी शिकस्त होने की वजह से नई टाकी का प्रस्ताव जिला परिषद में आया है. जिसमें नई पानी की टाकी निर्माण मामर्डे के लेआउट के ओपन स्पेस में किया जाए तथा जूनी टाकी की जगह पर सांस्कृतिक भवन का निर्माण किया जाए ऐसी मांग लहुजी शक्ति सेना व्दारा जि. प. प्रशासन से की गई थी. 30 सितंबर को मलकापुर के समस्त मातंग समाज महिला व पुरुषों व्दारा अनशन किया गया था. आश्वासन देने के पश्चात अनशन समाप्त कर दिया गया था. किंतु मांग पूरी नहीं किए जाने पर आज से मातंग व आदिवासी समाज की महिला व पुरुषों ने पुनः अनशन की शुरुआत की है. आज दोपहर 1. 30 बजे से अनशन की शुरुआत कर दी गई है अनशनकर्ताओं में पवन वानखडे, माला तायडे, जया गाडे, राहुल भालेराव का समावेश है.
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अमरावती / दि. पच्चीस- मलकापुर स्थित ग्राप अंतर्गत जूनी पानी की टाकी शिकस्त होने की वजह से नई टाकी का प्रस्ताव जिला परिषद में आया है. जिसमें नई पानी की टाकी निर्माण मामर्डे के लेआउट के ओपन स्पेस में किया जाए तथा जूनी टाकी की जगह पर सांस्कृतिक भवन का निर्माण किया जाए ऐसी मांग लहुजी शक्ति सेना व्दारा जि. प. प्रशासन से की गई थी. तीस सितंबर को मलकापुर के समस्त मातंग समाज महिला व पुरुषों व्दारा अनशन किया गया था. आश्वासन देने के पश्चात अनशन समाप्त कर दिया गया था. किंतु मांग पूरी नहीं किए जाने पर आज से मातंग व आदिवासी समाज की महिला व पुरुषों ने पुनः अनशन की शुरुआत की है. आज दोपहर एक. तीस बजे से अनशन की शुरुआत कर दी गई है अनशनकर्ताओं में पवन वानखडे, माला तायडे, जया गाडे, राहुल भालेराव का समावेश है.
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चुवाड़ी -पुलिस थाना चुवाड़ी के तहत आने वाले चुवाड़ी-होवार मार्ग पर कुड़ी गांव के पास एक वाहन के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से उसमें सवार सात लोग घायल हो गए। जिनमें तीन गंभीर घायलों को प्राथम उपचार के बाद टांडा रेफर किया गया है। वहीं चार अन्य लोगांे को मामूली चोटें आई हैं, जिनका उपचार चुवाड़ी अस्पताल में किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार बीती रात गाड़ी अनियंत्रित होकर ढांक से गिर गई। जांच के बाद पुलिस ने हादसे का कारण गाड़ी चालक की तेज रफ्तारी औऱ लापरवाही बताकर चालक गगन सिंह के खिलाफ पुलिस थाना चुवाड़ी में मामला दर्ज कर लिया लिया है। हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस थाना चुवाड़ी का दल मौके पर पहुंच गया। उधर, चुवाड़ी अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डा श्याम शर्मा ने बताया हादसे गंभीर तीन घायलों को टांडा रेफर कर दिया गया है, जबकि अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया है।
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चुवाड़ी -पुलिस थाना चुवाड़ी के तहत आने वाले चुवाड़ी-होवार मार्ग पर कुड़ी गांव के पास एक वाहन के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से उसमें सवार सात लोग घायल हो गए। जिनमें तीन गंभीर घायलों को प्राथम उपचार के बाद टांडा रेफर किया गया है। वहीं चार अन्य लोगांे को मामूली चोटें आई हैं, जिनका उपचार चुवाड़ी अस्पताल में किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार बीती रात गाड़ी अनियंत्रित होकर ढांक से गिर गई। जांच के बाद पुलिस ने हादसे का कारण गाड़ी चालक की तेज रफ्तारी औऱ लापरवाही बताकर चालक गगन सिंह के खिलाफ पुलिस थाना चुवाड़ी में मामला दर्ज कर लिया लिया है। हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस थाना चुवाड़ी का दल मौके पर पहुंच गया। उधर, चुवाड़ी अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डा श्याम शर्मा ने बताया हादसे गंभीर तीन घायलों को टांडा रेफर कर दिया गया है, जबकि अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया है।
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नई दिल्ली। राज्यसभा में सोमवार को भी नोटबंदी के मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बाधित हुई। विपक्षी पार्टियों ने लोगों का पैसा उन्हें वापस दिए जाने की मांग करते हुए भारी हंगामा किया।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि लोगों को नकदी की कमी के कारण बेहद परेशानी हो रही है और स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। आजाद ने सरकार के नोटबंदी के कदम की आलोचना करते हुए कहा कि अन्य स्थानों को तो छोड़िए संसद परिसर के एटीएम भी काम नहीं कर रहे।
कुरियन ने जोर देकर कहा कि वह सदन की कार्यवाही स्थगित नहीं करेंगे। लेकिन विपक्षी सदस्यों ने लोगों, खासतौर पर पेंशनधारकों को उनका पैसा न मिलने को लेकर नाराजगी व्यक्त की। शोरशराबे के बीच सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
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नई दिल्ली। राज्यसभा में सोमवार को भी नोटबंदी के मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बाधित हुई। विपक्षी पार्टियों ने लोगों का पैसा उन्हें वापस दिए जाने की मांग करते हुए भारी हंगामा किया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि लोगों को नकदी की कमी के कारण बेहद परेशानी हो रही है और स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। आजाद ने सरकार के नोटबंदी के कदम की आलोचना करते हुए कहा कि अन्य स्थानों को तो छोड़िए संसद परिसर के एटीएम भी काम नहीं कर रहे। कुरियन ने जोर देकर कहा कि वह सदन की कार्यवाही स्थगित नहीं करेंगे। लेकिन विपक्षी सदस्यों ने लोगों, खासतौर पर पेंशनधारकों को उनका पैसा न मिलने को लेकर नाराजगी व्यक्त की। शोरशराबे के बीच सदन की कार्यवाही दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
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इंटरनेट सर्च इंजिन गूगल ने कहा है कि वह अमरीकी न्याय मंत्रालय के उन प्रयासों का विरोध कर रहा है जिनमें इस बारे में विवरण माँगा गया है कि वेबसाइट पर लोग क्या तलाश करते हैं.
अमरीकी सरकार ने कहा है कि संघीय न्यायालय गूगल को इस तरह का डाटा मुहैया कराने पर मजबूर करे कि लोग सर्च इंजिन पर किस तरह की सामग्री ज़्यादा तलाश करते हैं और गूगल के इंडेक्स में क्या-क्या वेबसाइटें हैं उसकी सूची भी मुहैया कराए.
न्याय मंत्रालय का कहना है कि गूगल से डाटा मुहैया कराने का अनुरोध इंटरनेट पर अश्लील तस्वीरें देखने पर निगरानी रखने के प्रयासों का हिस्सा है और इससे इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों के गोपनीयता अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता है.
गूगल का कहना है कि यह आदेश बहुत विस्तृत है और इससे व्यापार की ज़रूरतों के लिए ख़तरा पैदा हो सकता है.
उधर गोपनीयता के हिमातयी संगठनों का कहना है कि इससे गूगल का इस्तेमाल करने वाले लोगों के बारे में जानकारी लीक हो सकती है.
इन संगठनों ने अपराध और आतंकवाद से लड़ने में इंटरनेट डाटा के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई है.
अलबत्ता न्याय मंत्रालय ने कहा है कि गूगल की प्रतिस्पर्धी अनेक कंपनियों ने पहले ही इस तरह का विवरण मुहैया करा दिया है.
न्याया मंत्रालय ने इस तरह का विवरण मुहैया कराने के लिए अगस्त 2005 में अनुरोध किया था.
लेकिन गूगल ने जब यह विवरण मुहैया कराने से इनकार कर दिया तो अमरीका के अटॉर्नी जनरल अलबर्टो गोंज़ालेज़ को इस रिकॉर्ड के वास्ते कैलीफ़ोर्निया के संघीय जज से अनुरोध करना पड़ा.
लेकिन गूगल के वकीलों ने कहा है कि वे इस आदेश के ख़िलाफ़ अपील करेंगे.
गूगल के एक वकील निकोल वोंग ने एक लिखित बयान में कहा, "गूगल इस आदेश और सूचना मुहैया कराने के प्रयासों का हिस्सा नहीं बन सकता. "
गूगल के वकीलों ने कहा, "हमने इस मामले को सुलझाने के लिए अधिकारियों के साथ लंबी बातचीत की है लेकिन मसला हल नहीं हो सका है और हम उनके आदेश का डटकर विरोध करने का इरादा रखते हैं. "
गूगल ने यह भी कहा है कि इस तरह का विवरण सरकार को मुहैया कराने से इसके इस्तेमाल करने वालों में यह संदेश जाएगा कि वह निजी जानकारी देने के लिए तैयार है.
उधर माइक्रोसॉफ़्ट ने कहा है कि वह "जब भी ज़रूरत पड़ती है वह क़ानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ निकट सहयोग करता है. "
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इंटरनेट सर्च इंजिन गूगल ने कहा है कि वह अमरीकी न्याय मंत्रालय के उन प्रयासों का विरोध कर रहा है जिनमें इस बारे में विवरण माँगा गया है कि वेबसाइट पर लोग क्या तलाश करते हैं. अमरीकी सरकार ने कहा है कि संघीय न्यायालय गूगल को इस तरह का डाटा मुहैया कराने पर मजबूर करे कि लोग सर्च इंजिन पर किस तरह की सामग्री ज़्यादा तलाश करते हैं और गूगल के इंडेक्स में क्या-क्या वेबसाइटें हैं उसकी सूची भी मुहैया कराए. न्याय मंत्रालय का कहना है कि गूगल से डाटा मुहैया कराने का अनुरोध इंटरनेट पर अश्लील तस्वीरें देखने पर निगरानी रखने के प्रयासों का हिस्सा है और इससे इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों के गोपनीयता अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता है. गूगल का कहना है कि यह आदेश बहुत विस्तृत है और इससे व्यापार की ज़रूरतों के लिए ख़तरा पैदा हो सकता है. उधर गोपनीयता के हिमातयी संगठनों का कहना है कि इससे गूगल का इस्तेमाल करने वाले लोगों के बारे में जानकारी लीक हो सकती है. इन संगठनों ने अपराध और आतंकवाद से लड़ने में इंटरनेट डाटा के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई है. अलबत्ता न्याय मंत्रालय ने कहा है कि गूगल की प्रतिस्पर्धी अनेक कंपनियों ने पहले ही इस तरह का विवरण मुहैया करा दिया है. न्याया मंत्रालय ने इस तरह का विवरण मुहैया कराने के लिए अगस्त दो हज़ार पाँच में अनुरोध किया था. लेकिन गूगल ने जब यह विवरण मुहैया कराने से इनकार कर दिया तो अमरीका के अटॉर्नी जनरल अलबर्टो गोंज़ालेज़ को इस रिकॉर्ड के वास्ते कैलीफ़ोर्निया के संघीय जज से अनुरोध करना पड़ा. लेकिन गूगल के वकीलों ने कहा है कि वे इस आदेश के ख़िलाफ़ अपील करेंगे. गूगल के एक वकील निकोल वोंग ने एक लिखित बयान में कहा, "गूगल इस आदेश और सूचना मुहैया कराने के प्रयासों का हिस्सा नहीं बन सकता. " गूगल के वकीलों ने कहा, "हमने इस मामले को सुलझाने के लिए अधिकारियों के साथ लंबी बातचीत की है लेकिन मसला हल नहीं हो सका है और हम उनके आदेश का डटकर विरोध करने का इरादा रखते हैं. " गूगल ने यह भी कहा है कि इस तरह का विवरण सरकार को मुहैया कराने से इसके इस्तेमाल करने वालों में यह संदेश जाएगा कि वह निजी जानकारी देने के लिए तैयार है. उधर माइक्रोसॉफ़्ट ने कहा है कि वह "जब भी ज़रूरत पड़ती है वह क़ानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ निकट सहयोग करता है. "
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मुंबई. दुनियाभर में लोग कोरोना की मार झेल रहे हैं। ये महामारी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। जहां रोज लोग इस वायरस की चपेट में आ रहे हैं वहीं कई लोग मौत के मुंह में भी जा रहे हैं। भारत के हालात भी बहुत अच्छे नहीं है। यहां भी इस वायरस की वजह से रोज लोग संक्रामित हो रहे हैं। ये बात और है कि सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए लॉकडाउन के बाद अनलॉक की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बावजूद इसके आमजनों की तरह ही बॉलीवुड सेलेब्स भी जरूरत के हिसाब से ही घर से बाहर निकल रहे हैं। वहीं, कुछ स्टार्स ने थोड़ा बहुत काम शुरू भी कर दिया है। वहीं, सेलेब्स से जुड़े कई कहानी-किस्से, फोटोज और वीडियोज सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं। इसी बीच करीना कपूर और तैमूर अली खान मुंबई की सड़कों पर घूमते नजर आए। मां-बेटे की कुछ फोटोज सामने आई है, जिसमें तैमूर बेहद क्यूट नजर आ रहे हैं।
तैमूर ने इस दौरान लाइट ब्लू कलर की टी-शर्ट और जीन्स पहन रखी थी। बेटे की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हुए करीना ने तैमूर के मुंह पर मास्क भी लगा रखा था।
बड़े दिनों बाद कैमरामैन को अपनी फोटो क्लिक करता देख तैमूर थोड़ा आश्चर्य में पड़ा गया। वो देर तक फोटोग्राफर्स को टकटकी लगाए देखता रहा।
इस दौरान करीना ने ब्लैक प्रिंटेड फ्रॉक पहन रखी थी। उनके बाल खुले थे और गॉगल भी लगा रखा था।
करीना इस दौरान बेटे का पूरा ध्यान रख रही है।
बता दें कि करीना कभी-कभार बेटे को घूमाने घर से बाहर निकलती है।
बात करीना के वर्कफ्रंट की करें तो वे जल्दी दी फिल्म लालसिंह चड्ढा की शूटिंग शुरू करेंगी।
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मुंबई. दुनियाभर में लोग कोरोना की मार झेल रहे हैं। ये महामारी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। जहां रोज लोग इस वायरस की चपेट में आ रहे हैं वहीं कई लोग मौत के मुंह में भी जा रहे हैं। भारत के हालात भी बहुत अच्छे नहीं है। यहां भी इस वायरस की वजह से रोज लोग संक्रामित हो रहे हैं। ये बात और है कि सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए लॉकडाउन के बाद अनलॉक की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बावजूद इसके आमजनों की तरह ही बॉलीवुड सेलेब्स भी जरूरत के हिसाब से ही घर से बाहर निकल रहे हैं। वहीं, कुछ स्टार्स ने थोड़ा बहुत काम शुरू भी कर दिया है। वहीं, सेलेब्स से जुड़े कई कहानी-किस्से, फोटोज और वीडियोज सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं। इसी बीच करीना कपूर और तैमूर अली खान मुंबई की सड़कों पर घूमते नजर आए। मां-बेटे की कुछ फोटोज सामने आई है, जिसमें तैमूर बेहद क्यूट नजर आ रहे हैं। तैमूर ने इस दौरान लाइट ब्लू कलर की टी-शर्ट और जीन्स पहन रखी थी। बेटे की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हुए करीना ने तैमूर के मुंह पर मास्क भी लगा रखा था। बड़े दिनों बाद कैमरामैन को अपनी फोटो क्लिक करता देख तैमूर थोड़ा आश्चर्य में पड़ा गया। वो देर तक फोटोग्राफर्स को टकटकी लगाए देखता रहा। इस दौरान करीना ने ब्लैक प्रिंटेड फ्रॉक पहन रखी थी। उनके बाल खुले थे और गॉगल भी लगा रखा था। करीना इस दौरान बेटे का पूरा ध्यान रख रही है। बता दें कि करीना कभी-कभार बेटे को घूमाने घर से बाहर निकलती है। बात करीना के वर्कफ्रंट की करें तो वे जल्दी दी फिल्म लालसिंह चड्ढा की शूटिंग शुरू करेंगी।
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कानपुर में जन्मे 2 वर्षीय लेफ्ट आर्म चाइनामैन कुलदीप यादव ने आईपीएल से आगे बढ़ कर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक आग लगा दी है, अश्विन के बाद चहल और कुलदीप ने टीम को बखूबी सम्भाला है और उनकी अंगुली की स्पिन से सामने का बल्लेबाज भी घूम जाता है.
इस विश्व कप में कुलदीप को 7 मैच खलेने का मौका मिला और उसमे 6 विकेट झटके हैं. इसी के साथ उन्होंने अपना पहला टी 20 मुकाबला 2017 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था. अभी इनकी उम्र महज 24 वर्ष है ऐसे में अगला विश्व कप तो खेलने का इनके पास पूरा मौका है.
यह तीनो फॉर्म में खेलने वाली गेंदबाज है, इन्होने टेस्ट, टी 20 और एकदिवसीय सबमे अपना हाथ अजमाया है. एकदिवसीय में इन्होने 51 मैच खेले हैं और उसमे 23. 97 के औसत से 93 विकेट झटके हैं और 12 मेडेन ओवर भी डाले हैं. वहीं टेस्ट में कुलदीप ने 6 मैच खेले हैं और 24 के औसत से 24 विकेट झटके हैं.
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कानपुर में जन्मे दो वर्षीय लेफ्ट आर्म चाइनामैन कुलदीप यादव ने आईपीएल से आगे बढ़ कर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक आग लगा दी है, अश्विन के बाद चहल और कुलदीप ने टीम को बखूबी सम्भाला है और उनकी अंगुली की स्पिन से सामने का बल्लेबाज भी घूम जाता है. इस विश्व कप में कुलदीप को सात मैच खलेने का मौका मिला और उसमे छः विकेट झटके हैं. इसी के साथ उन्होंने अपना पहला टी बीस मुकाबला दो हज़ार सत्रह में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था. अभी इनकी उम्र महज चौबीस वर्ष है ऐसे में अगला विश्व कप तो खेलने का इनके पास पूरा मौका है. यह तीनो फॉर्म में खेलने वाली गेंदबाज है, इन्होने टेस्ट, टी बीस और एकदिवसीय सबमे अपना हाथ अजमाया है. एकदिवसीय में इन्होने इक्यावन मैच खेले हैं और उसमे तेईस. सत्तानवे के औसत से तिरानवे विकेट झटके हैं और बारह मेडेन ओवर भी डाले हैं. वहीं टेस्ट में कुलदीप ने छः मैच खेले हैं और चौबीस के औसत से चौबीस विकेट झटके हैं.
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(भाजपा कार्यकर्ता राजन महाराज ने दी आत्मदाह की चेतावनी)
UP Election 2022 : उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव (UP Election 2022) के लिए बेहद कम दिन बचे हैं ऐसे में सभी पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों की सूची फाइनल करने के दौर में हैं। उन्नाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विधानसभा 164 से विधायक ब्रजेश रावत को फिर से उम्मीदवार बनाया है। ब्रजेश रावत (Brajesh Rawat) को दोबारा टिकट मिलने पर अब उनकी ही पार्टी के कार्यकर्ता विरोध पर उतर आए हैं। उसी विधानसभा क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ता राजन महाराज ने इन प र सपा की मानसिकता का आरोप लगाकर पार्टी से टिकट काटने की अपील की है।
भाजपा कार्यकर्ता (BJP Worker) का कहना है कि यदि विधायक ब्रजेश रावत का टिकट न कटा तो 26 जनवरी को विधानसभा के सामने आत्मदाह कर लूंगा। आत्मदाह की चेतावनी का वीडियो भी वायरल हो रहा है। राजन महाराज ने आरोप ल गाया कि विधायक ने पिछले चार साल से समाजवादी पार्टी की मानसिकता से कार्य किया। भाजपा के जितने भी कार्यकर्ता हैं, वह इनसे उपेक्षित रहे हैं।
राजन महाराज ने कहा, मैं भाजपा का वरिष्ठ कार्यकर्ता हूं। अगर विधायक ब्रजेश रावत का टिकट राष्ट्रीय अध्यक्ष ने नहीं चेंज किया तो आने वाली 26 जनवरी को मैं विधानसभा के सामने आत्मदाह करूंगा। मैं वरिष्ठ कार्यकर्ता होने के नाते राष्ट्रीय अध्यक्ष से अनुरोध करता हूं कि हम कार्यकर्ताओं की अपेक्षा को ध्यान में रखते हुए यहां का टिकट किसी और को दे दिया जाए। मोहन विधानसभा के कार्यकर्ता उसे जिताने का काम करेंगे।
वहीं दूसरी ओर संभल की चंदौसी विधानसभा क्षेत्र के सपा नेता सतीश प्रेमी टिकट न मिलने पर फफक-फफक कर रो पड़े। उनका वीडियो भी वायरल हो रहा है। उन्होंने अपनी पार्टी पर आरोप लगाए कि मैं जिस पार्टी में ईमानदारी से रहा, उसमें पैसे की कदर थी और अय्याशी के संसाधनों की कदर थी लेकिन मैंने जीवनभर न ही अय्याशी के संसाधन इकट्ठा किए और न ही पैसा कमाया। इसलिए मेरा टिकट काट दिया गया।
सतीश प्रेमी चंदौसी सीट से टिकट की दावेदारी काफी लंबे समय से कर रहे थे। चंदौसी सीट से विमलेश कुमारी, सतीश प्रेमी और बलवंत सिंह तीनों टिकट लेने को लेकर अपनी-अपनी दावेदारी करने लगे थे। रविवार को सपा ने चंदौसी सीट से विमलेश कुमारी को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
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UP Election दो हज़ार बाईस : उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिए बेहद कम दिन बचे हैं ऐसे में सभी पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों की सूची फाइनल करने के दौर में हैं। उन्नाव में भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा एक सौ चौंसठ से विधायक ब्रजेश रावत को फिर से उम्मीदवार बनाया है। ब्रजेश रावत को दोबारा टिकट मिलने पर अब उनकी ही पार्टी के कार्यकर्ता विरोध पर उतर आए हैं। उसी विधानसभा क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ता राजन महाराज ने इन प र सपा की मानसिकता का आरोप लगाकर पार्टी से टिकट काटने की अपील की है। भाजपा कार्यकर्ता का कहना है कि यदि विधायक ब्रजेश रावत का टिकट न कटा तो छब्बीस जनवरी को विधानसभा के सामने आत्मदाह कर लूंगा। आत्मदाह की चेतावनी का वीडियो भी वायरल हो रहा है। राजन महाराज ने आरोप ल गाया कि विधायक ने पिछले चार साल से समाजवादी पार्टी की मानसिकता से कार्य किया। भाजपा के जितने भी कार्यकर्ता हैं, वह इनसे उपेक्षित रहे हैं। राजन महाराज ने कहा, मैं भाजपा का वरिष्ठ कार्यकर्ता हूं। अगर विधायक ब्रजेश रावत का टिकट राष्ट्रीय अध्यक्ष ने नहीं चेंज किया तो आने वाली छब्बीस जनवरी को मैं विधानसभा के सामने आत्मदाह करूंगा। मैं वरिष्ठ कार्यकर्ता होने के नाते राष्ट्रीय अध्यक्ष से अनुरोध करता हूं कि हम कार्यकर्ताओं की अपेक्षा को ध्यान में रखते हुए यहां का टिकट किसी और को दे दिया जाए। मोहन विधानसभा के कार्यकर्ता उसे जिताने का काम करेंगे। वहीं दूसरी ओर संभल की चंदौसी विधानसभा क्षेत्र के सपा नेता सतीश प्रेमी टिकट न मिलने पर फफक-फफक कर रो पड़े। उनका वीडियो भी वायरल हो रहा है। उन्होंने अपनी पार्टी पर आरोप लगाए कि मैं जिस पार्टी में ईमानदारी से रहा, उसमें पैसे की कदर थी और अय्याशी के संसाधनों की कदर थी लेकिन मैंने जीवनभर न ही अय्याशी के संसाधन इकट्ठा किए और न ही पैसा कमाया। इसलिए मेरा टिकट काट दिया गया। सतीश प्रेमी चंदौसी सीट से टिकट की दावेदारी काफी लंबे समय से कर रहे थे। चंदौसी सीट से विमलेश कुमारी, सतीश प्रेमी और बलवंत सिंह तीनों टिकट लेने को लेकर अपनी-अपनी दावेदारी करने लगे थे। रविवार को सपा ने चंदौसी सीट से विमलेश कुमारी को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
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इन दिनों भी रमजान का पाक महीना चल रहा है। 23 अप्रैल को शुरू होने वाले रमजान का अंत ईद के चांद से होगा।
मुस्लिम समुदाय का सबसे पसंदीदा और महत्वपूर्ण त्योहार ईद इस महीने मनाया जाना है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नवां महीना सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में लोग दिन भर रोजे रखते हैं और शाम को नमाज के बाद इसे खोलते हैं। इस पूरे महीने के बाद जो चांद नजर आता है उसे ही ईद का चांद कहते हैं।
इस साल रमजान 23 अप्रैल से शुरू हुआ था तो इस हिसाब से 23 मई को ईद पड़ेगी। अगर 25 मई को ईद का चांद दिखता है तब 26 मई को देश भर में ईद मनाई जाएगी। वहीं अगर 24 मई को चांद दिख गया तो 25 मई को ईद मनायी जाएगी। चांद के दिदार करने के बाद ईद पर लोग अपने अल्लाह की ईबादत करते हैं और एक-दूसरे संग मिलकर खुशियां बांटते हैं।
मुस्लिम लोग इस पूरे महीने के बेहद पाक मानते हैं। साथ ही इस महीने में खुदा का शुक्रिया करते हैं। ईद के दिन वो अल्लाह को महीने भर रोजे रखने की ताकर देने के लिए शुक्रिया कहते हैं। कहा ये भी जाता है कि पवित्र महीने में दान करने से उसका फल दोगुना मिलता है। ऐसे में लोग गरीब और जरूरतमंदों के लिए कुछ रकम दान कर देते हैं।
बताया जाता है कि पहली बार ईद मुहम्मद पैगंबर ने साल 624 में जंग जीतने की खुशी में मनाई थी। पैगंबर हजरत बद्र के युद्ध में विजयी प्राप्त की थी। ईस के दिन सुबह नमाज अदा करने के बाद कुछ दान दिया जाता है। इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं और सारे गिले-शिकवे मिटाकर एक-दूसरे के गले मिलते हैं।
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इन दिनों भी रमजान का पाक महीना चल रहा है। तेईस अप्रैल को शुरू होने वाले रमजान का अंत ईद के चांद से होगा। मुस्लिम समुदाय का सबसे पसंदीदा और महत्वपूर्ण त्योहार ईद इस महीने मनाया जाना है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नवां महीना सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में लोग दिन भर रोजे रखते हैं और शाम को नमाज के बाद इसे खोलते हैं। इस पूरे महीने के बाद जो चांद नजर आता है उसे ही ईद का चांद कहते हैं। इस साल रमजान तेईस अप्रैल से शुरू हुआ था तो इस हिसाब से तेईस मई को ईद पड़ेगी। अगर पच्चीस मई को ईद का चांद दिखता है तब छब्बीस मई को देश भर में ईद मनाई जाएगी। वहीं अगर चौबीस मई को चांद दिख गया तो पच्चीस मई को ईद मनायी जाएगी। चांद के दिदार करने के बाद ईद पर लोग अपने अल्लाह की ईबादत करते हैं और एक-दूसरे संग मिलकर खुशियां बांटते हैं। मुस्लिम लोग इस पूरे महीने के बेहद पाक मानते हैं। साथ ही इस महीने में खुदा का शुक्रिया करते हैं। ईद के दिन वो अल्लाह को महीने भर रोजे रखने की ताकर देने के लिए शुक्रिया कहते हैं। कहा ये भी जाता है कि पवित्र महीने में दान करने से उसका फल दोगुना मिलता है। ऐसे में लोग गरीब और जरूरतमंदों के लिए कुछ रकम दान कर देते हैं। बताया जाता है कि पहली बार ईद मुहम्मद पैगंबर ने साल छः सौ चौबीस में जंग जीतने की खुशी में मनाई थी। पैगंबर हजरत बद्र के युद्ध में विजयी प्राप्त की थी। ईस के दिन सुबह नमाज अदा करने के बाद कुछ दान दिया जाता है। इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं और सारे गिले-शिकवे मिटाकर एक-दूसरे के गले मिलते हैं।
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Flashback 2020 : नई दिल्ली। वर्ष 2020, जो दुनिया के लिए निराशाजनक रहा है, समाप्त होने से बस कुछ ही दिन दूर है। इसलिए, अब हर कोई जानने के लिए उत्सुक है कि किस खिलाड़ी ने क्या किया, क्या खोया। शीर्ष खेल वेबसाइट ईएसपीएन क्रिकइन्फो ने पिछले दशक के सबसे व्यस्त खिलाड़ियों की सूची जारी की है। इंग्लैंड के दिग्गज तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन (James Anderson) 2010 से इस सूची में सबसे व्यस्त गेंदबाज हैं।
ईएसपीएन क्रिकइन्फो, जो क्रिकेट की दुनिया की अग्रणी वेबसाइटों में से एक है, ने 2010 से 2020 के बीच सबसे व्यस्त गेंदबाजों की सूची जारी की है। इंग्लैंड के शीर्ष तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन गेंदबाजों की सूची में सबसे ऊपर गेंदबाज रहे। पिछले दस वर्षों में, एंडरसन सबसे अधिक गेंदें फेंकने में कामयाब रहे। उल्लेखनीय रूप से, पिछले एक दशक में शीर्ष पांच में इंग्लैंड के दो गेंदबाज हैं, इसके बाद भारत, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका का गेंदबाज हैं। 2010 से 2020 तक, जेम्स एंडरसन ने अंतरराष्ट्रीय टेस्ट, वनडे और टी 20 में कुल 27,308 गेंदें फेंकी हैं।
इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड पिछले एक दशक में अगले प्रमुख गेंदबाज हैं। ब्रॉड ने पिछले एक दशक में इंग्लैंड के लिए 26,890 गेंदें फेंकी हैं। भारत के प्रमुख स्पिनर आर अश्विन इस सूची में तीसरे स्थान पर हैं। अश्विन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एंडरसन और ब्रॉड की जोड़ी के बाद 26,459 गेंदें फेंकी। इस बाद चाैथे स्थान पर आस्ट्रेलिया के स्पिन गेंदबाज नाथ लियोन हैं। नाथन लियोन ने 2010 से 2020 के बीच 25,939 गेंदें फेंकी हैं, जबकि सेवानिवृत्त श्रीलंकाई स्पिनर रंगना हेराथ पिछले दशक में सर्वाधिक गेंदें फेकने वाले पांचवें सबसे बड़े गेंदबाज हैं। इस दौरान हेराथ ने 24,253 गेंद फेंकी हैं।
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Flashback दो हज़ार बीस : नई दिल्ली। वर्ष दो हज़ार बीस, जो दुनिया के लिए निराशाजनक रहा है, समाप्त होने से बस कुछ ही दिन दूर है। इसलिए, अब हर कोई जानने के लिए उत्सुक है कि किस खिलाड़ी ने क्या किया, क्या खोया। शीर्ष खेल वेबसाइट ईएसपीएन क्रिकइन्फो ने पिछले दशक के सबसे व्यस्त खिलाड़ियों की सूची जारी की है। इंग्लैंड के दिग्गज तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन दो हज़ार दस से इस सूची में सबसे व्यस्त गेंदबाज हैं। ईएसपीएन क्रिकइन्फो, जो क्रिकेट की दुनिया की अग्रणी वेबसाइटों में से एक है, ने दो हज़ार दस से दो हज़ार बीस के बीच सबसे व्यस्त गेंदबाजों की सूची जारी की है। इंग्लैंड के शीर्ष तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन गेंदबाजों की सूची में सबसे ऊपर गेंदबाज रहे। पिछले दस वर्षों में, एंडरसन सबसे अधिक गेंदें फेंकने में कामयाब रहे। उल्लेखनीय रूप से, पिछले एक दशक में शीर्ष पांच में इंग्लैंड के दो गेंदबाज हैं, इसके बाद भारत, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका का गेंदबाज हैं। दो हज़ार दस से दो हज़ार बीस तक, जेम्स एंडरसन ने अंतरराष्ट्रीय टेस्ट, वनडे और टी बीस में कुल सत्ताईस,तीन सौ आठ गेंदें फेंकी हैं। इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड पिछले एक दशक में अगले प्रमुख गेंदबाज हैं। ब्रॉड ने पिछले एक दशक में इंग्लैंड के लिए छब्बीस,आठ सौ नब्बे गेंदें फेंकी हैं। भारत के प्रमुख स्पिनर आर अश्विन इस सूची में तीसरे स्थान पर हैं। अश्विन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एंडरसन और ब्रॉड की जोड़ी के बाद छब्बीस,चार सौ उनसठ गेंदें फेंकी। इस बाद चाैथे स्थान पर आस्ट्रेलिया के स्पिन गेंदबाज नाथ लियोन हैं। नाथन लियोन ने दो हज़ार दस से दो हज़ार बीस के बीच पच्चीस,नौ सौ उनतालीस गेंदें फेंकी हैं, जबकि सेवानिवृत्त श्रीलंकाई स्पिनर रंगना हेराथ पिछले दशक में सर्वाधिक गेंदें फेकने वाले पांचवें सबसे बड़े गेंदबाज हैं। इस दौरान हेराथ ने चौबीस,दो सौ तिरेपन गेंद फेंकी हैं।
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लोकायुक्त के मुद्दे पर भाजपा सरकार घिर गई है। सत्तारूढ़ भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव के दृष्टि पत्र में 100 दिन में राज्य को मजबूत लोकायुक्त देने का वादा किया था। सरकार साढ़े चार साल बाद भी लोकायुक्त नहीं बना सकी। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर अब विधानसभा चुनाव में जा रही है। चुनाव में भजापा के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के खिलाफ यह उसका मजबूत चुनावी हथियार बनेगा।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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लोकायुक्त के मुद्दे पर भाजपा सरकार घिर गई है। सत्तारूढ़ भाजपा ने दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव के दृष्टि पत्र में एक सौ दिन में राज्य को मजबूत लोकायुक्त देने का वादा किया था। सरकार साढ़े चार साल बाद भी लोकायुक्त नहीं बना सकी। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर अब विधानसभा चुनाव में जा रही है। चुनाव में भजापा के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के खिलाफ यह उसका मजबूत चुनावी हथियार बनेगा। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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जिले के सुरयावा थाना क्षेत्र में बुधवार देर शाम प्रेम-प्रसंग के कारण कोचिंग से घर लौट रही लड़की को एक युवक ने कथित रूप से गोली मार दी जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी।
घटना के बाद साथ जा रही बहन की सूचना पर वहां पहुंचे परिजन उसे पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए जहाँ डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, कांतीराम पुर गाँव निवासी सुनील बिन्द की पंद्रह साल की बेटी अनुराधा बिन्द अपनी चचेरी बहन निशा बिन्द के साथ कोचिंग से रात करीब आठ बजे लौट रही थी, तभी रास्ते में सुनसान जगह पर पहले से घात लगाकर बैठे ऊंज थाना क्षेत्र के मीनापुर गाँव निवासी अरविन्द विश्वकर्मा (22) ने अचानक अनुराधा की कनपटी पर गोली मार दी। उन्होंने बताया कि गोली लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
सूचना पाकर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया प्रारंभिक जांच में सामने आया है की अनुराधा बिन्द उर्फ़ अन्नू को पास के ही अरविन्द विश्वकर्मा ने बुलाया था, वह एक तरफ़ा उससे प्रेम करता था और अनुराधा ने इससे इंकार कर दिया। इसी वजह से अरविन्द ने गोली मार कर उसकी हत्या कर दी है और फरार हो गया है।
उन्होंने बताया पुलिस की टीम उसकी गिरफ्तारी का प्रयास कर रही है।
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जिले के सुरयावा थाना क्षेत्र में बुधवार देर शाम प्रेम-प्रसंग के कारण कोचिंग से घर लौट रही लड़की को एक युवक ने कथित रूप से गोली मार दी जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। घटना के बाद साथ जा रही बहन की सूचना पर वहां पहुंचे परिजन उसे पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए जहाँ डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक, कांतीराम पुर गाँव निवासी सुनील बिन्द की पंद्रह साल की बेटी अनुराधा बिन्द अपनी चचेरी बहन निशा बिन्द के साथ कोचिंग से रात करीब आठ बजे लौट रही थी, तभी रास्ते में सुनसान जगह पर पहले से घात लगाकर बैठे ऊंज थाना क्षेत्र के मीनापुर गाँव निवासी अरविन्द विश्वकर्मा ने अचानक अनुराधा की कनपटी पर गोली मार दी। उन्होंने बताया कि गोली लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पाकर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया प्रारंभिक जांच में सामने आया है की अनुराधा बिन्द उर्फ़ अन्नू को पास के ही अरविन्द विश्वकर्मा ने बुलाया था, वह एक तरफ़ा उससे प्रेम करता था और अनुराधा ने इससे इंकार कर दिया। इसी वजह से अरविन्द ने गोली मार कर उसकी हत्या कर दी है और फरार हो गया है। उन्होंने बताया पुलिस की टीम उसकी गिरफ्तारी का प्रयास कर रही है।
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पाकिस्तान के न्यायिक आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के लिए जस्टिस आयशा मलिक के नाम को मंजूरी दे दी। ऐसे में अब वो देश की पहली महिला सुप्रीम कोर्ट जज बनने जा रही हैं।
इस्लामाबाद पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट को पहली महिला जज मिलने की उम्मीदें बढ़ गई है। न्यायिक आयोग ने आयशा मलिक के नाम की सिफारिश कर दी है। देश के इतिहास में पहली बार कोई महिला सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त होने जा रही है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से आयशा की पढ़ाई न्यायमूर्ति आयशा मलिक ने हार्वर्ड लॉ स्कूल से एलएलएम की पढ़ाई की है। 2012 में लाहौर हाई कोर्ट में जज के तौर पर इनकी नियुक्ति हुई। उससे पहले एक प्रमुख कॉर्पोरेट और वाणिज्यिक कानून फर्म में काम कर रहीं थीं। अपने प्रमोशन के दौरान वो पिछले 20 वर्षों में लाहौर उच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश थीं।
संवैधानिक मुद्दों पर अहम फैसले दिए आयशा मलिक अपने अनुशासन और अखंडता के लिए जानी जाती हैं। इन्होंने कई प्रमुख संवैधानिक मुद्दों पर फैसला सुनाया है। जिसमें चुनावों में संपत्ति की घोषणा, गन्ना उत्पादकों को भुगतान और पाकिस्तान में अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता को लागू करना शामिल है। लाहौर हाई कोर्ट की जज आयशा मलिक पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला न्यायाधीश बन सकती हैं। एक उच्चाधिकार समिति ने उनकी पदोन्नति की मंजूरी दे दी है। इसके बाद पाकिस्तान, उच्चतम न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश की नियुक्ति के करीब पहुंच गया।
इतिहास बनने में सिर्फ औपचारिकता बाकी डॉन अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि प्रधान न्यायाधीश गुलजार अहमद की अध्यक्षता में पाकिस्तान के न्यायिक आयोग (जेसीपी) ने न्यायमूर्ति आयशा मलिक के प्रमोशन को चार के मुकाबले पांच मतों के बहुमत से मंजूरी दी। अब जेसीपी से परमिशन मिलने के बाद उनके नाम पर संसदीय समिति में विचार किया जाएगा। जो अमूमन जेसीपी की सिफारिश के खिलाफ नहीं जाती है। ये दूसरी बार है, जब जेसीपी ने न्यायमूर्ति मलिक की पदोन्नति पर फैसला करने के लिए बैठक की। इनका नाम पहली बार पिछले साल नौ सितंबर को आया था। तब उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों में आयशा मलिक के वरिष्ठता क्रम को लेकर उनकी उच्चतम न्यायालय में पदोन्नति का विरोध हुआ था।
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पाकिस्तान के न्यायिक आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के लिए जस्टिस आयशा मलिक के नाम को मंजूरी दे दी। ऐसे में अब वो देश की पहली महिला सुप्रीम कोर्ट जज बनने जा रही हैं। इस्लामाबाद पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट को पहली महिला जज मिलने की उम्मीदें बढ़ गई है। न्यायिक आयोग ने आयशा मलिक के नाम की सिफारिश कर दी है। देश के इतिहास में पहली बार कोई महिला सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त होने जा रही है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से आयशा की पढ़ाई न्यायमूर्ति आयशा मलिक ने हार्वर्ड लॉ स्कूल से एलएलएम की पढ़ाई की है। दो हज़ार बारह में लाहौर हाई कोर्ट में जज के तौर पर इनकी नियुक्ति हुई। उससे पहले एक प्रमुख कॉर्पोरेट और वाणिज्यिक कानून फर्म में काम कर रहीं थीं। अपने प्रमोशन के दौरान वो पिछले बीस वर्षों में लाहौर उच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश थीं। संवैधानिक मुद्दों पर अहम फैसले दिए आयशा मलिक अपने अनुशासन और अखंडता के लिए जानी जाती हैं। इन्होंने कई प्रमुख संवैधानिक मुद्दों पर फैसला सुनाया है। जिसमें चुनावों में संपत्ति की घोषणा, गन्ना उत्पादकों को भुगतान और पाकिस्तान में अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता को लागू करना शामिल है। लाहौर हाई कोर्ट की जज आयशा मलिक पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला न्यायाधीश बन सकती हैं। एक उच्चाधिकार समिति ने उनकी पदोन्नति की मंजूरी दे दी है। इसके बाद पाकिस्तान, उच्चतम न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश की नियुक्ति के करीब पहुंच गया। इतिहास बनने में सिर्फ औपचारिकता बाकी डॉन अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि प्रधान न्यायाधीश गुलजार अहमद की अध्यक्षता में पाकिस्तान के न्यायिक आयोग ने न्यायमूर्ति आयशा मलिक के प्रमोशन को चार के मुकाबले पांच मतों के बहुमत से मंजूरी दी। अब जेसीपी से परमिशन मिलने के बाद उनके नाम पर संसदीय समिति में विचार किया जाएगा। जो अमूमन जेसीपी की सिफारिश के खिलाफ नहीं जाती है। ये दूसरी बार है, जब जेसीपी ने न्यायमूर्ति मलिक की पदोन्नति पर फैसला करने के लिए बैठक की। इनका नाम पहली बार पिछले साल नौ सितंबर को आया था। तब उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों में आयशा मलिक के वरिष्ठता क्रम को लेकर उनकी उच्चतम न्यायालय में पदोन्नति का विरोध हुआ था।
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एकाधिकार के अन्तर्गत मूल्य
(IV) ॐ ताम्र के मंघों का निर्माणः- एकाधिकारी के अनुचित कार्य कलापों से अपनी रक्षा करने के लिए क्रेता लोग मिलकर एक संघ बना सकते हैं इससे उन्हें एकाधिकारी की अत्यधिक लाभ कमाने की शक्ति का विरोध करने मे सुविधा हो जाती है। किन्तु पीगू का कहना है कि क्रेताओं के संघ अधिकतर सफल नहीं हो पाते। क्योकि क्रोताओं की संख्या बहुत बड़ी होती है और वे एक विस्तृत क्षेत्र में फैले हुए होते हैं ।
(V) एकाधिकार सम्बन्धी सूचना का प्रकाशन :- एकाधिकारी की विनाशकारी प्रवृत्तियो पर प्रचार द्वारा नियंत्रण लगाया जा सकता है। यदि एकाधिकारी को समय-समय पर अपनी उत्पादन और मूल्य नीति सम्बन्धी रिपोर्ट प्रकाशित करनी पडे, तो जनता को उसकी चालों का ज्ञान होने लगेगा। कोई भी एकाधिकारी उपभोक्ताभो की सहानुभूति को सहसा ठुकरा नहीं सकता, क्योंकि वह जानता है कि यदि वह अपनी वस्तु का बहुत ऊंचा मूल्य लेगा, तो उपभोक्ता उसके विरुद्ध हो जायेंगे और उसको वस्तु का बहिष्कार कर सकते हैं। अमेरिका में फेडरल ट्रेड कमीशन एकाधिकारों का निरीक्षण करके अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करता है ।
( 1V ) सहकारी उत्पादन एवं वितरण को प्रोत्साहन :- सहकारी समितियों के निर्माण को प्रोत्याहन देकर एकाधिकारी के प्रभाव को जनता से दूर रखने का प्रयास किया जा सकता है। इनके द्वारा उपभोक्ता अपने पैरों पर खड़े हो मक्ते मोर मस्ते मूल्य पर वस्तुयें प्राप्त कर सकते हैं ।
निष्कर्ष-उपरोत एक या अधिक उपाय एक साथ ही एकाधिकारी को नियंत्रित करने के लिए अपनाये जा सकते हैं। जार्ज डब्लू स्टाकिंग ने एकाधिकार पर नियंत्रण रखने के लिए निम्न तरीके बननाये है
(१) ऐसे नियमो की रचना जिनमें पूजी को अधिक प्रोत्साहन मिले ।
(२) छोटे-छोटे फर्मों को एक दूसरे से मिलने से रोकना, जिसमे उनकी संख्या अधिक रहे तथा प्राकार में वृद्धि न होने पाये ।
(३) एन्टी ट्रस्ट को गागू कराने के लिए अधिक उपयुक्त धन राशि को पूर्ति करना ।
(४) श्रमिक एकाधिकार की स्थापना वरना, जिनसे समाप्त हो जाय । सोदे बाजी करने की इकाई एक फर्म होनी चाहिये जिसका भाकार नं० २ के समान हो शोमित हो ।
(५) कम तथा थोड़े कर लगाना ।
(६) यद्यपि मौद्रिक नीतियों में सामान्य मूल्य में स्थिरता पाती है तथापि व्यक्तिगत मास में प्रतियोगिता करने के लिये स्वतन्त्र छोड़ देना चाहिये जिससे वे अपना कार्य स्वयं पूरा कर सके, साधनों का उपयुक्त प्रयोग कर सके तथा भायमा वितरण कर सकें ।
संक्षेप में, स्वतन्त्र अर्थ-व्यवस्था के लिये उचित वातावरण तैयार करना अति आवश्यक है । इसके द्वारा प्रौद्योगिक स्थिरता की समस्या को हल करने में सुविधा होगी तथा प्रतियोगिता के लिए आवश्यक साधनों का इस्तेमाल ग्रासानी से हो सकेगा ।
Q. "The prima facie interest of the owner of a monopoly is clearly to adjust the supply to the demand, not in such a way that the price at which he can sell his commodity shall just cover its expenses of productioa, bat in such a way as to afford him the greatest possible net revenue."
Explain fully the above statement.
प्रश्न -- " एक एकाधिकार के स्वामी का मुख्य उद्देश्य पूर्ति का मांग से समायोजन इस प्रकार न करना होता है कि उत्पादन के व्यय वस्तु को बेचकर प्राप्त किये जा सकें, वरन् इस प्रकार कि, उसे अधिकतम सम्भावित शुद्ध श्राय प्राप्त हो सके ।" (मार्शल)
उपरोक्त कथन को पूरणतः समझाइये ।
( आगरा, एम० ए० १९४६, ५४, ५७, प्रागरा, एम० काम० १६५८, ६३ विक्रम, एम० काम० १६५८ राजस्थान, एम० काम० १९५८ ६० ) उत्तर - - प्रो० वोल्डिंग के शब्दों में 'शुद्ध एकाधिकारी' इसलिये वह फर्म हैं जो कि ऐसी उपज को उत्पन्न कर रही है जिसका कि अन्य फर्मों की उपज में कोई कार्य साधक स्थानापन्न नहीं है, "कार्य-साधक : इस अर्थ में कि, भले ही एकाधिकार अनियमित लाभ प्राप्त कर रहा हो, अन्य फर्मे उसके इस लाभ पर अतिक्रमरण स्थानापन्न वस्तुओं को उत्पन्न करके ही नहीं कर सकती जो कि क़ताओं को एकाधिकारी की वस्तुओं के प्रकरण से दूर कर सके ।"
अतः यह स्पष्ट है कि एकाधिकार की स्थिति में बाजार में एक ही विक्रेता होता है और यह विक्रेता ऐसी वस्तु का उत्पादक एवं विक्रेता होता है जिसका स्थानापन्न ग्रन्य उत्पन्न नहीं करतीं । यह उत्पादक अथवा विक्रेता वस्तु की पूर्ति पर नियंत्रण रखकर वस्तु के मूल्य को इच्छानुसार प्रभावित किया करता है, कारण कि उसका कोई अन्य प्रतियोगी उत्पादक प्रथवा विक्रेता नहीं होता । पूर्ण प्रतियोगिता के उत्पादक तथा एकाधिकारी में यही प्रमुख ग्रन्तर है कि प्रथम के लिये तो वस्तु का मूल्य मांग तथा पूर्ति की शक्तियों द्वारा निर्धारित होता है । जिन पर (मांग और पूर्ति) उसका कोई नियंत्रण नहीं होता। जबकि एकाधिकार में वस्तु का मूल्य पूर्ति पर नियंत्रण रखकर स्वयं निर्धारित करता है ।
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एकाधिकार के अन्तर्गत मूल्य ॐ ताम्र के मंघों का निर्माणः- एकाधिकारी के अनुचित कार्य कलापों से अपनी रक्षा करने के लिए क्रेता लोग मिलकर एक संघ बना सकते हैं इससे उन्हें एकाधिकारी की अत्यधिक लाभ कमाने की शक्ति का विरोध करने मे सुविधा हो जाती है। किन्तु पीगू का कहना है कि क्रेताओं के संघ अधिकतर सफल नहीं हो पाते। क्योकि क्रोताओं की संख्या बहुत बड़ी होती है और वे एक विस्तृत क्षेत्र में फैले हुए होते हैं । एकाधिकार सम्बन्धी सूचना का प्रकाशन :- एकाधिकारी की विनाशकारी प्रवृत्तियो पर प्रचार द्वारा नियंत्रण लगाया जा सकता है। यदि एकाधिकारी को समय-समय पर अपनी उत्पादन और मूल्य नीति सम्बन्धी रिपोर्ट प्रकाशित करनी पडे, तो जनता को उसकी चालों का ज्ञान होने लगेगा। कोई भी एकाधिकारी उपभोक्ताभो की सहानुभूति को सहसा ठुकरा नहीं सकता, क्योंकि वह जानता है कि यदि वह अपनी वस्तु का बहुत ऊंचा मूल्य लेगा, तो उपभोक्ता उसके विरुद्ध हो जायेंगे और उसको वस्तु का बहिष्कार कर सकते हैं। अमेरिका में फेडरल ट्रेड कमीशन एकाधिकारों का निरीक्षण करके अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करता है । सहकारी उत्पादन एवं वितरण को प्रोत्साहन :- सहकारी समितियों के निर्माण को प्रोत्याहन देकर एकाधिकारी के प्रभाव को जनता से दूर रखने का प्रयास किया जा सकता है। इनके द्वारा उपभोक्ता अपने पैरों पर खड़े हो मक्ते मोर मस्ते मूल्य पर वस्तुयें प्राप्त कर सकते हैं । निष्कर्ष-उपरोत एक या अधिक उपाय एक साथ ही एकाधिकारी को नियंत्रित करने के लिए अपनाये जा सकते हैं। जार्ज डब्लू स्टाकिंग ने एकाधिकार पर नियंत्रण रखने के लिए निम्न तरीके बननाये है ऐसे नियमो की रचना जिनमें पूजी को अधिक प्रोत्साहन मिले । छोटे-छोटे फर्मों को एक दूसरे से मिलने से रोकना, जिसमे उनकी संख्या अधिक रहे तथा प्राकार में वृद्धि न होने पाये । एन्टी ट्रस्ट को गागू कराने के लिए अधिक उपयुक्त धन राशि को पूर्ति करना । श्रमिक एकाधिकार की स्थापना वरना, जिनसे समाप्त हो जाय । सोदे बाजी करने की इकाई एक फर्म होनी चाहिये जिसका भाकार नंशून्य दो के समान हो शोमित हो । कम तथा थोड़े कर लगाना । यद्यपि मौद्रिक नीतियों में सामान्य मूल्य में स्थिरता पाती है तथापि व्यक्तिगत मास में प्रतियोगिता करने के लिये स्वतन्त्र छोड़ देना चाहिये जिससे वे अपना कार्य स्वयं पूरा कर सके, साधनों का उपयुक्त प्रयोग कर सके तथा भायमा वितरण कर सकें । संक्षेप में, स्वतन्त्र अर्थ-व्यवस्था के लिये उचित वातावरण तैयार करना अति आवश्यक है । इसके द्वारा प्रौद्योगिक स्थिरता की समस्या को हल करने में सुविधा होगी तथा प्रतियोगिता के लिए आवश्यक साधनों का इस्तेमाल ग्रासानी से हो सकेगा । Q. "The prima facie interest of the owner of a monopoly is clearly to adjust the supply to the demand, not in such a way that the price at which he can sell his commodity shall just cover its expenses of productioa, bat in such a way as to afford him the greatest possible net revenue." Explain fully the above statement. प्रश्न -- " एक एकाधिकार के स्वामी का मुख्य उद्देश्य पूर्ति का मांग से समायोजन इस प्रकार न करना होता है कि उत्पादन के व्यय वस्तु को बेचकर प्राप्त किये जा सकें, वरन् इस प्रकार कि, उसे अधिकतम सम्भावित शुद्ध श्राय प्राप्त हो सके ।" उपरोक्त कथन को पूरणतः समझाइये । उत्तर - - प्रोशून्य वोल्डिंग के शब्दों में 'शुद्ध एकाधिकारी' इसलिये वह फर्म हैं जो कि ऐसी उपज को उत्पन्न कर रही है जिसका कि अन्य फर्मों की उपज में कोई कार्य साधक स्थानापन्न नहीं है, "कार्य-साधक : इस अर्थ में कि, भले ही एकाधिकार अनियमित लाभ प्राप्त कर रहा हो, अन्य फर्मे उसके इस लाभ पर अतिक्रमरण स्थानापन्न वस्तुओं को उत्पन्न करके ही नहीं कर सकती जो कि क़ताओं को एकाधिकारी की वस्तुओं के प्रकरण से दूर कर सके ।" अतः यह स्पष्ट है कि एकाधिकार की स्थिति में बाजार में एक ही विक्रेता होता है और यह विक्रेता ऐसी वस्तु का उत्पादक एवं विक्रेता होता है जिसका स्थानापन्न ग्रन्य उत्पन्न नहीं करतीं । यह उत्पादक अथवा विक्रेता वस्तु की पूर्ति पर नियंत्रण रखकर वस्तु के मूल्य को इच्छानुसार प्रभावित किया करता है, कारण कि उसका कोई अन्य प्रतियोगी उत्पादक प्रथवा विक्रेता नहीं होता । पूर्ण प्रतियोगिता के उत्पादक तथा एकाधिकारी में यही प्रमुख ग्रन्तर है कि प्रथम के लिये तो वस्तु का मूल्य मांग तथा पूर्ति की शक्तियों द्वारा निर्धारित होता है । जिन पर उसका कोई नियंत्रण नहीं होता। जबकि एकाधिकार में वस्तु का मूल्य पूर्ति पर नियंत्रण रखकर स्वयं निर्धारित करता है ।
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बिहार, भारत। बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुए 5 साल से अधिक समय होने के बाद भी इस राज्य में अवैध शराब की तस्करी के धंधे का खुलासा हुआ है, जिसपर अब विपक्ष नेता राज्य की सरकार पर हमला बोल रही है। हाल ही में बिहार प्रतिपक्ष व RJD नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया है।
पत्र भी हो रहा वायरल :
बता दें कि, इस मामले पर एसपी मद्य निषेध ने बिहार सभी जिले के एसपी और एसएसपी को एक पत्र भी लिखा, जो काफी वायरल भी हो रहा है। मद्य निषेध के एसपी द्वारा इस पत्र में ये बताया गया- साथ ही उन्होंने उत्पाद विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि, "उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर, दारोगा और सिपाही के संपत्ति की जांच होनी चाहिए, उनके साथ ही उनके रिश्तेदारों के संपत्ति की भी जांच होनी चाहिए। " हालांकि, प्रदेश के डीजीपी एसके सिंघल ने मद्य निषेध के एसपी के पत्र को निरस्त कर दिया है।
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बिहार, भारत। बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुए पाँच साल से अधिक समय होने के बाद भी इस राज्य में अवैध शराब की तस्करी के धंधे का खुलासा हुआ है, जिसपर अब विपक्ष नेता राज्य की सरकार पर हमला बोल रही है। हाल ही में बिहार प्रतिपक्ष व RJD नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया है। पत्र भी हो रहा वायरल : बता दें कि, इस मामले पर एसपी मद्य निषेध ने बिहार सभी जिले के एसपी और एसएसपी को एक पत्र भी लिखा, जो काफी वायरल भी हो रहा है। मद्य निषेध के एसपी द्वारा इस पत्र में ये बताया गया- साथ ही उन्होंने उत्पाद विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि, "उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर, दारोगा और सिपाही के संपत्ति की जांच होनी चाहिए, उनके साथ ही उनके रिश्तेदारों के संपत्ति की भी जांच होनी चाहिए। " हालांकि, प्रदेश के डीजीपी एसके सिंघल ने मद्य निषेध के एसपी के पत्र को निरस्त कर दिया है। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
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Quick links:
Wrestlers Protest: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ देश के नामी पहलवानों का प्रदर्शन लगातार जारी है। बृजभूषण के खिलाफ 7 महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को लेकर WFI के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने सफाई दी है। रिपब्लिक भारत से खास बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह (brij bhushan sharan singh) ने कहा कि उनके ऊपर लगे आरोपों की जांच दिल्ली पुलिस (Delhi Police) कर रही है, सभी को जांच रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच की रिपोर्ट आ जाए तो फांसी पर लटका देना, मगर खेल को रोका ना जाए, टूर्नामेंट होते रहने चाहिए।
रिपब्लिक भारत ने पूरे विवाद पर बृजभूषण शरण सिंह से कई सवाल किए। एक्सक्लूसिव बातचीत में बृजभूषण ने सवालों का जवाब देते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस की जांच का इंतजार आपको भी करना चाहिए। जो धरना पर बैठे हैं, उनको भी इंतजार करना चाहिए। WFI अध्यक्ष ने बताया कि उन्हें अभी तक दिल्ली पुलिस से कोई कॉल नहीं आई है और जब आएगी तो वो जरूर जांच में शामिल होंगे।
बृजभूषण शरण सिंह ने बताया कि "मेरे पास सभी आए थे। बजरंग पुनिया अपनी पत्नी के साथ, साक्षी मल्लिक और विनेश फोगाट अपने पतियों के साथ आई थीं। वो चाहते थे कि कैंप में चयन हो। SAI के साथ बैठक थी। ये ना तो नेशनल लड़े और ना तो चोट की जानकारी दी। लेकिन मैंने कहा कि ये टॉप के खिलाड़ी हैं। हमने कहा कि टॉप स्किल से इनका नाम डाल दीजिए। ये 16 जनवरी की बात है। मैं अपने घर चला आया और 18 जनवरी को धरना शुरू हो गया।" उन्होंने कहा, "जब ये लोग सुप्रीम कोर्ट चले गए और कोर्ट के निर्देशानुसार पुलिस में एफआईआर हो गयी तो पुलिस के निर्देशानुसार इनको जांच का वेट करना चाहिए था।"
बृजभूषण ने सवाल पूछा कि कपिल सिब्बल जैसे 50 लाख फीस वाला वकील कहां से आया। उन्होंने आगे कहा, "जो पहलवान पहले बैठे थे, वो कहां गए? दीपक पूनिया, रवि दहिया, सोनम मलिक और अंशु जैसे खिलाड़ी अब क्या इनके समर्थन में हैं।"
WFI अध्यक्ष ने रिपब्लिक भारत से बातचीत में कहा, "मैं अपनी बात पर कायम हूं। इन लोगों को जांच का इंतजार करना चाहिए। इन लोगों के प्रदर्शन की वजह से काफी नुकसान हुआ है। ये कहते हैं कि इनका धरना कुश्ती को बचाने के लिए है, मगर इनकी वजह से जूनियर एशियन चैंपियनशिप भारत से चली गई और कजाकिस्तान में हुई। इनकी वजह से चलता हुआ एक नेशनल टूर्नामेंट रोक दिया गया और लड़कियों का कैंप जो लखनऊ में चल रहा था, उन्हें वापस जाना पड़ा। इनके कारण कैंप बंद है। खेल की गतिविधि 4 महीने से बंद हैं। इसके बाद एक कमेटी बनी। 3 महीने में जांच पूरी होने के बाद कमेठी भंग हो गई। कुश्ती से भी मैंने अपने आप को अलग कर लिया।"
बृजभूषण शरण सिंह ने बताया, "WFI की कमेटी ने आगे के टूर्नामेंटों को देखते हुए एक मीटिंग की थी और फिर से खेल की गतिविधि को शुरू किया था। ये लोग इसका विरोध कर रहे हैं।" बृजभूषण ने कहा कि जांच की रिपोर्ट आ जाए तो भले फांसी पर लटका दो। आपसे हाथ जोड़ता हूं कि मुझे फांसी दे दीजिए, लेकिन खेल होने दीजिए। चाहे कोई भी आयोजन कराए, लेकिन बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ मत कीजिए।
बताते चलें कि टोक्यो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता पहलवान बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक जैसे स्टार पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने दे रहे हैं। पहलवानों का कहना है कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ तब तक अपना विरोध जारी रखेंगे, जब तक कि उन्हें सलाखों के पीछे नहीं भेज दिया जाता। इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है।
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Quick links: Wrestlers Protest: भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ देश के नामी पहलवानों का प्रदर्शन लगातार जारी है। बृजभूषण के खिलाफ सात महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को लेकर WFI के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने सफाई दी है। रिपब्लिक भारत से खास बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उनके ऊपर लगे आरोपों की जांच दिल्ली पुलिस कर रही है, सभी को जांच रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच की रिपोर्ट आ जाए तो फांसी पर लटका देना, मगर खेल को रोका ना जाए, टूर्नामेंट होते रहने चाहिए। रिपब्लिक भारत ने पूरे विवाद पर बृजभूषण शरण सिंह से कई सवाल किए। एक्सक्लूसिव बातचीत में बृजभूषण ने सवालों का जवाब देते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस की जांच का इंतजार आपको भी करना चाहिए। जो धरना पर बैठे हैं, उनको भी इंतजार करना चाहिए। WFI अध्यक्ष ने बताया कि उन्हें अभी तक दिल्ली पुलिस से कोई कॉल नहीं आई है और जब आएगी तो वो जरूर जांच में शामिल होंगे। बृजभूषण शरण सिंह ने बताया कि "मेरे पास सभी आए थे। बजरंग पुनिया अपनी पत्नी के साथ, साक्षी मल्लिक और विनेश फोगाट अपने पतियों के साथ आई थीं। वो चाहते थे कि कैंप में चयन हो। SAI के साथ बैठक थी। ये ना तो नेशनल लड़े और ना तो चोट की जानकारी दी। लेकिन मैंने कहा कि ये टॉप के खिलाड़ी हैं। हमने कहा कि टॉप स्किल से इनका नाम डाल दीजिए। ये सोलह जनवरी की बात है। मैं अपने घर चला आया और अट्ठारह जनवरी को धरना शुरू हो गया।" उन्होंने कहा, "जब ये लोग सुप्रीम कोर्ट चले गए और कोर्ट के निर्देशानुसार पुलिस में एफआईआर हो गयी तो पुलिस के निर्देशानुसार इनको जांच का वेट करना चाहिए था।" बृजभूषण ने सवाल पूछा कि कपिल सिब्बल जैसे पचास लाख फीस वाला वकील कहां से आया। उन्होंने आगे कहा, "जो पहलवान पहले बैठे थे, वो कहां गए? दीपक पूनिया, रवि दहिया, सोनम मलिक और अंशु जैसे खिलाड़ी अब क्या इनके समर्थन में हैं।" WFI अध्यक्ष ने रिपब्लिक भारत से बातचीत में कहा, "मैं अपनी बात पर कायम हूं। इन लोगों को जांच का इंतजार करना चाहिए। इन लोगों के प्रदर्शन की वजह से काफी नुकसान हुआ है। ये कहते हैं कि इनका धरना कुश्ती को बचाने के लिए है, मगर इनकी वजह से जूनियर एशियन चैंपियनशिप भारत से चली गई और कजाकिस्तान में हुई। इनकी वजह से चलता हुआ एक नेशनल टूर्नामेंट रोक दिया गया और लड़कियों का कैंप जो लखनऊ में चल रहा था, उन्हें वापस जाना पड़ा। इनके कारण कैंप बंद है। खेल की गतिविधि चार महीने से बंद हैं। इसके बाद एक कमेटी बनी। तीन महीने में जांच पूरी होने के बाद कमेठी भंग हो गई। कुश्ती से भी मैंने अपने आप को अलग कर लिया।" बृजभूषण शरण सिंह ने बताया, "WFI की कमेटी ने आगे के टूर्नामेंटों को देखते हुए एक मीटिंग की थी और फिर से खेल की गतिविधि को शुरू किया था। ये लोग इसका विरोध कर रहे हैं।" बृजभूषण ने कहा कि जांच की रिपोर्ट आ जाए तो भले फांसी पर लटका दो। आपसे हाथ जोड़ता हूं कि मुझे फांसी दे दीजिए, लेकिन खेल होने दीजिए। चाहे कोई भी आयोजन कराए, लेकिन बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ मत कीजिए। बताते चलें कि टोक्यो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता पहलवान बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक जैसे स्टार पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने दे रहे हैं। पहलवानों का कहना है कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ तब तक अपना विरोध जारी रखेंगे, जब तक कि उन्हें सलाखों के पीछे नहीं भेज दिया जाता। इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है।
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प्रश्न :
उत्तर :
उत्तर की रूपरेखाः
- उक्त कथन की संक्षेप में संबंधित विषय के आलोक में चर्चा करें।
- भारतीय भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देनज़र सौर ऊर्जा महत्त्व पर चर्चा करें।
ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से सौर ऊर्जा सभी स्रोतों में सबसे सुरक्षित स्रोत है। यह प्रचुरता में उपलब्ध है। सैद्धांतिक दृष्टि से, कुल आपतित सौर ऊर्जा का छोटा सा अंश भी समूचे देश की ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है।
यद्यपि, आज की स्थिति में कोयला आधारित विद्युत उत्पादन बिजली का सबसे सस्ता स्रोत है। भविष्य का परिदृश्य बताता है कि यह स्थिति बदल सकती है क्योंकि ऊर्जा की मांग में वृद्धि के कारण देश अब आयातित कोयले की ओर बढ़ रहा है। बिजली की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कोयले की उपलब्धता और आयात संबंधी संरचना के विकास की लागत पर भी निर्भर करेगी। साथ ही पर्यावरणीय क्षरण की लागत कोयले के खनन को भी प्रभावित करती है और इससे कच्चे माल के मूल्य में वृद्धि होगी। जहाँ तक डीजल आधारित विद्युत उपयोग का प्रश्न है, उसकी कीमत 15 रुपये प्रति यूनिट तक है और प्रदूषणकारी भी है।
इस परिस्थिति में सौर ऊर्जा का उपयोग आवश्यक भी है और व्यावहारिक रूप से संभव भी। भारत एक ऊष्णकटिबंधीय देश है, जहां सूर्य का प्रकाश प्रतिदिन अधिक समय तक और ज्यादा तीव्रता के साथ उपलब्ध रहता है। अतः भावी ऊर्जा स्रोत के रूप में सौर ऊर्जा की व्यापक संभावनाएँ हैं। प्रतिवर्ष करीब 5000 ट्रिलियन के.डब्ल्यू.एच. (किलोवाट प्रति घंटा) सौर ऊर्जा भारत के भू-क्षेत्र को प्राप्त होती है। भारत में सौर ऊर्जा की क्षमता वाले राज्य- आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु हैं। भारत के अधिकांश भाग में एक वर्ष में 250-300 धूप निकलने वाले दिनों सहित प्रतिदिन प्रति वर्गमीटर 4-7 किलोवाट/घंटे का सौर विकिरण प्राप्त होता है। देश में 30-50 मेगावाट/ प्रतिवर्ग किलोमीटर छायारहित खुला क्षेत्र होने के बावजूद उपलब्ध क्षमता की तुलना में देश में सौर ऊर्जा का दोहन काफी कम (31-5-2014 की स्थिति के अनुसार 2647 मेगावाट) है।
अतः जैविक ईंधनों के प्रदूषणकारी चरित्र एवं स्वच्छ ऊर्जा तकनीक के प्रोत्साहन की वैश्विक पहल के संदर्भ में सरकार ने 2022 तक एक लाख मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अलावा भारत की पहल पर सौर उर्जा की दृष्टि से अनुकूल कर्क रेखा तथा मकर रेखा के मध्य के देशों के द्वारा सौर उर्जा के क्षेत्र में अनुसंधान के लिये अंतराष्ट्रीय सौर गठबंधन का निर्माण भी किया गया है।
स्पष्ट है कि भारत की भगौलिक स्थिति सौर उर्जा के अत्यंत अनुकूल है और भारत की उर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सौर उर्जा महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर सकती है।
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- फ़िल्टर करें : प्रश्न : उत्तर : उत्तर की रूपरेखाः - उक्त कथन की संक्षेप में संबंधित विषय के आलोक में चर्चा करें। - भारतीय भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देनज़र सौर ऊर्जा महत्त्व पर चर्चा करें। ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से सौर ऊर्जा सभी स्रोतों में सबसे सुरक्षित स्रोत है। यह प्रचुरता में उपलब्ध है। सैद्धांतिक दृष्टि से, कुल आपतित सौर ऊर्जा का छोटा सा अंश भी समूचे देश की ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। यद्यपि, आज की स्थिति में कोयला आधारित विद्युत उत्पादन बिजली का सबसे सस्ता स्रोत है। भविष्य का परिदृश्य बताता है कि यह स्थिति बदल सकती है क्योंकि ऊर्जा की मांग में वृद्धि के कारण देश अब आयातित कोयले की ओर बढ़ रहा है। बिजली की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कोयले की उपलब्धता और आयात संबंधी संरचना के विकास की लागत पर भी निर्भर करेगी। साथ ही पर्यावरणीय क्षरण की लागत कोयले के खनन को भी प्रभावित करती है और इससे कच्चे माल के मूल्य में वृद्धि होगी। जहाँ तक डीजल आधारित विद्युत उपयोग का प्रश्न है, उसकी कीमत पंद्रह रुपयापये प्रति यूनिट तक है और प्रदूषणकारी भी है। इस परिस्थिति में सौर ऊर्जा का उपयोग आवश्यक भी है और व्यावहारिक रूप से संभव भी। भारत एक ऊष्णकटिबंधीय देश है, जहां सूर्य का प्रकाश प्रतिदिन अधिक समय तक और ज्यादा तीव्रता के साथ उपलब्ध रहता है। अतः भावी ऊर्जा स्रोत के रूप में सौर ऊर्जा की व्यापक संभावनाएँ हैं। प्रतिवर्ष करीब पाँच हज़ार ट्रिलियन के.डब्ल्यू.एच. सौर ऊर्जा भारत के भू-क्षेत्र को प्राप्त होती है। भारत में सौर ऊर्जा की क्षमता वाले राज्य- आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु हैं। भारत के अधिकांश भाग में एक वर्ष में दो सौ पचास-तीन सौ धूप निकलने वाले दिनों सहित प्रतिदिन प्रति वर्गमीटर चार-सात किलोग्रामवाट/घंटे का सौर विकिरण प्राप्त होता है। देश में तीस-पचास मेगावाट/ प्रतिवर्ग किलोमीटर छायारहित खुला क्षेत्र होने के बावजूद उपलब्ध क्षमता की तुलना में देश में सौर ऊर्जा का दोहन काफी कम है। अतः जैविक ईंधनों के प्रदूषणकारी चरित्र एवं स्वच्छ ऊर्जा तकनीक के प्रोत्साहन की वैश्विक पहल के संदर्भ में सरकार ने दो हज़ार बाईस तक एक लाख मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अलावा भारत की पहल पर सौर उर्जा की दृष्टि से अनुकूल कर्क रेखा तथा मकर रेखा के मध्य के देशों के द्वारा सौर उर्जा के क्षेत्र में अनुसंधान के लिये अंतराष्ट्रीय सौर गठबंधन का निर्माण भी किया गया है। स्पष्ट है कि भारत की भगौलिक स्थिति सौर उर्जा के अत्यंत अनुकूल है और भारत की उर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सौर उर्जा महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर सकती है।
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श्री पञ्चदशी मीमांसा ( . ६१६ )
ननु वेद्यत्वं ब्रह्मणो वास्तवं न भवतीत्याशङ्कयोपास्यत्वमपि तथेत्याहअवास्तवी वैद्यता चेदुपास्यत्वं तथा न किम् ।
वृत्तिव्याप्तिर्वेद्यता चेदुपास्यत्वेऽपि तत्समम् ।।६१॥
अन्वय :--वेद्यता अवास्तवी चेत् उपास्यत्वं तथा किम् न, वेद्यता वृत्तिव्याप्तिः चेत् उपास्यत्वेऽपि तत् समम् ।
'अवास्तवीति' । ननु वेदनपक्षे वृत्तेर्ब्रह्माकारत्वमस्ति, नोगसने इत्याशङ्क्य, शब्दबलात्तदाकारत्व मुभयत्र समानमित्याह - 'वृत्तीति' ॥६१॥
युक्तिशून्य उपालम्भस्तु त्वत्पक्षेsपि समान इत्याह -
न वाच्यः ।
का ते भक्तिरुपास्ती चेत्कस्ते द्वेषस्तदीरय ।
मानाभावो न वाच्योऽस्यां बहुश्रुतिषु दर्शनात् ।।६२॥
अन्वय : उपास्तौ ते भक्तिः का चेत् ते द्वेषः कः तदीरय अस्यां मानाभावः बहुश्रुतिषु दर्शनात्
'का त इति' । ननु निर्गुणोपासने प्रमाणं नास्तीत्याशङ्कयानेकासु श्रुतिषूपलभ्यमानत्वान्मैवमित्याह - मानाभाव इति ६२॥
यदि कहो कि ब्रह्म की वेद्यता वास्तव नहीं है तो उपासना को भी अवास्तवी क्यों न मानो । यदि कहो कि ब्रह्म में वेद्यता अवास्तव है तो हम पूंछते हैं कि उसमें वैसे ही उपास्यता भी क्यों नहीं है फिर यदि कहो कि वेद्यता वृत्ति की विषय है --तो वेदनपक्ष में भी वृत्ति ब्रह्माकार हो सकती है तो हम कहेंगे कि उपास्य पक्ष में भी वृत्ति ब्रह्माकार हो सकती है ॥६१॥
युक्ति रहित उपलम्भ तो तुम्हारे पक्ष में समान ही है । इस पर कहते हैं -
यदि कहो कि ब्रह्म की उपासना में आपकी क्या भक्ति है क्यों मानते हो तो यह बतानो उपासना में तुम्हारा इतना द्वेष क्यों है । उपासना में कोई प्रमाण नहीं है सो भी ठीक नहीं, बहुत सी श्रुतियों में उपासना का विधान देखते हैं। इसलिए यह भी नहीं कह सकते कि निर्गुण उपासना में प्रमाण वहीं है ॥६२ ।।
ध्यान दीपप्रकरणम्
'बहुश्रुतिषु दर्शनादित्युक्तमर्थं विवृणोति -
उत्तरस्मिस्तापनीये शैव्यप्रश्नेऽथ काठके ।
माण्डक्यादौ च सर्वत्र निर्गुणोपास्तिरीरिता ।। ६३ ।।
अन्वय :- उत्तरस्मिन् तापनीये शैव्य प्रश्ने अथ काठके माण्डूक्यादौ च निर्गुणोपास्तिः * सर्वत्र ईरिता ।
'उत्तरस्मिन्निति' । तापनीयोपनिषदि तावत् 'देवा ह वै प्रजापतिमब्रुवन्नणोरणीयांसमिममात्मानमोंकारं नो व्याचक्ष्व' ( नृ० ता० उ० १।१ ) इत्यादिना बहुधा निर्गुणोपासनमभिधीयते । शैव्यप्रश्ने प्रश्नोपनिषदि पञ्चमे प्रश्ने - यः पुनरेतं त्रिमात्रेणोमित्यनेनैवाक्षरेण परं पुरुष मभिघ्यायीत ( प्र० ५१५) इति काठके कठवल्लयां - 'सवै वेदा यत्पदमामनन्ति' इत्युपक्रम्य 'एतद्धयेवाक्षरं ब्रह्म (कठ० २।१६) 'एतदालम्बनं श्रेष्ठ ( कठ० २११७ ) इत्यादिना प्रणवोपासनमुच्यते, 'माण्डूक्योपनिषदि' 'ओमित्येतदक्षरमिदं सर्वं ( माण्डूक्य० १ ) इत्यादिनाऽवस्थात्रयातीततुरीयोपासनमेवाभिधीयत इत्यर्थंः । 'आदि' शब्देन 'तैत्तिरीयमुण्डकादयो' गृह्यन्ते ॥६३॥
बहुत श्रुतियों में उपासना को दिखाते हैं उक्त अर्थ का विस्तार करते हैंउत्तर तापनीय शैव्य प्रश्न और कठवल्ली माण्डूक्य आदि सम्पूर्ण उपनिषदों में निर्गुण ब्रह्म की • उपासना कही है ।। ६३॥
प्रथम देवता प्रजापति को बाले सूक्ष्म से भी सूक्ष्म इस ओंकार रूप आत्मा को हमारे प्रति कहो । इत्यादि से अनेक प्रकार के निर्गुण उपासना कही है और वैसे ही शैव्य के प्रश्न करने पर प्रश्न उपनिषद् में पञ्चम प्रश्न पर कहा है जो उपासक त्रिमात्रा, "ऊँ" इस अक्षरात्मक प्रतीक रूप से इस परम पुरुष की उपासना करता है। इस कठवल्ली में सारे वेद जिस पद का वर्णन करते हैं । यह आरम्भ करके यह अक्षर : ही अपर ब्रह्म है अक्षर ही परब्रह्म है यह अक्षर दोनों का प्रतीक है यह ( ओंकार रूप आलम्बन ब्रह्म प्राप्ति के गायत्री आदि सभी) आलम्बनों से श्रेष्ठ है इत्यादि ओंकार की उपासना कही है और उपनिषद् में भी, ओम् यह अक्षर ही सम्पूर्ण जगत् रूप है, इत्यादि से तीन अवस्थाओं से अतीत ब्रह्म की "उपासना कही है आदि पद से तैत्तिरीय, मुण्डक आदि उपनिषदों में निर्गुण उपासना कही है ॥६३॥
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श्री पञ्चदशी मीमांसा ननु वेद्यत्वं ब्रह्मणो वास्तवं न भवतीत्याशङ्कयोपास्यत्वमपि तथेत्याहअवास्तवी वैद्यता चेदुपास्यत्वं तथा न किम् । वृत्तिव्याप्तिर्वेद्यता चेदुपास्यत्वेऽपि तत्समम् ।।इकसठ॥ अन्वय :--वेद्यता अवास्तवी चेत् उपास्यत्वं तथा किम् न, वेद्यता वृत्तिव्याप्तिः चेत् उपास्यत्वेऽपि तत् समम् । 'अवास्तवीति' । ननु वेदनपक्षे वृत्तेर्ब्रह्माकारत्वमस्ति, नोगसने इत्याशङ्क्य, शब्दबलात्तदाकारत्व मुभयत्र समानमित्याह - 'वृत्तीति' ॥इकसठ॥ युक्तिशून्य उपालम्भस्तु त्वत्पक्षेsपि समान इत्याह - न वाच्यः । का ते भक्तिरुपास्ती चेत्कस्ते द्वेषस्तदीरय । मानाभावो न वाच्योऽस्यां बहुश्रुतिषु दर्शनात् ।।बासठ॥ अन्वय : उपास्तौ ते भक्तिः का चेत् ते द्वेषः कः तदीरय अस्यां मानाभावः बहुश्रुतिषु दर्शनात् 'का त इति' । ननु निर्गुणोपासने प्रमाणं नास्तीत्याशङ्कयानेकासु श्रुतिषूपलभ्यमानत्वान्मैवमित्याह - मानाभाव इति बासठ॥ यदि कहो कि ब्रह्म की वेद्यता वास्तव नहीं है तो उपासना को भी अवास्तवी क्यों न मानो । यदि कहो कि ब्रह्म में वेद्यता अवास्तव है तो हम पूंछते हैं कि उसमें वैसे ही उपास्यता भी क्यों नहीं है फिर यदि कहो कि वेद्यता वृत्ति की विषय है --तो वेदनपक्ष में भी वृत्ति ब्रह्माकार हो सकती है तो हम कहेंगे कि उपास्य पक्ष में भी वृत्ति ब्रह्माकार हो सकती है ॥इकसठ॥ युक्ति रहित उपलम्भ तो तुम्हारे पक्ष में समान ही है । इस पर कहते हैं - यदि कहो कि ब्रह्म की उपासना में आपकी क्या भक्ति है क्यों मानते हो तो यह बतानो उपासना में तुम्हारा इतना द्वेष क्यों है । उपासना में कोई प्रमाण नहीं है सो भी ठीक नहीं, बहुत सी श्रुतियों में उपासना का विधान देखते हैं। इसलिए यह भी नहीं कह सकते कि निर्गुण उपासना में प्रमाण वहीं है ॥बासठ ।। ध्यान दीपप्रकरणम् 'बहुश्रुतिषु दर्शनादित्युक्तमर्थं विवृणोति - उत्तरस्मिस्तापनीये शैव्यप्रश्नेऽथ काठके । माण्डक्यादौ च सर्वत्र निर्गुणोपास्तिरीरिता ।। तिरेसठ ।। अन्वय :- उत्तरस्मिन् तापनीये शैव्य प्रश्ने अथ काठके माण्डूक्यादौ च निर्गुणोपास्तिः * सर्वत्र ईरिता । 'उत्तरस्मिन्निति' । तापनीयोपनिषदि तावत् 'देवा ह वै प्रजापतिमब्रुवन्नणोरणीयांसमिममात्मानमोंकारं नो व्याचक्ष्व' इत्यादिना बहुधा निर्गुणोपासनमभिधीयते । शैव्यप्रश्ने प्रश्नोपनिषदि पञ्चमे प्रश्ने - यः पुनरेतं त्रिमात्रेणोमित्यनेनैवाक्षरेण परं पुरुष मभिघ्यायीत इति काठके कठवल्लयां - 'सवै वेदा यत्पदमामनन्ति' इत्युपक्रम्य 'एतद्धयेवाक्षरं ब्रह्म 'एतदालम्बनं श्रेष्ठ इत्यादिना प्रणवोपासनमुच्यते, 'माण्डूक्योपनिषदि' 'ओमित्येतदक्षरमिदं सर्वं इत्यादिनाऽवस्थात्रयातीततुरीयोपासनमेवाभिधीयत इत्यर्थंः । 'आदि' शब्देन 'तैत्तिरीयमुण्डकादयो' गृह्यन्ते ॥तिरेसठ॥ बहुत श्रुतियों में उपासना को दिखाते हैं उक्त अर्थ का विस्तार करते हैंउत्तर तापनीय शैव्य प्रश्न और कठवल्ली माण्डूक्य आदि सम्पूर्ण उपनिषदों में निर्गुण ब्रह्म की • उपासना कही है ।। तिरेसठ॥ प्रथम देवता प्रजापति को बाले सूक्ष्म से भी सूक्ष्म इस ओंकार रूप आत्मा को हमारे प्रति कहो । इत्यादि से अनेक प्रकार के निर्गुण उपासना कही है और वैसे ही शैव्य के प्रश्न करने पर प्रश्न उपनिषद् में पञ्चम प्रश्न पर कहा है जो उपासक त्रिमात्रा, "ऊँ" इस अक्षरात्मक प्रतीक रूप से इस परम पुरुष की उपासना करता है। इस कठवल्ली में सारे वेद जिस पद का वर्णन करते हैं । यह आरम्भ करके यह अक्षर : ही अपर ब्रह्म है अक्षर ही परब्रह्म है यह अक्षर दोनों का प्रतीक है यह आलम्बनों से श्रेष्ठ है इत्यादि ओंकार की उपासना कही है और उपनिषद् में भी, ओम् यह अक्षर ही सम्पूर्ण जगत् रूप है, इत्यादि से तीन अवस्थाओं से अतीत ब्रह्म की "उपासना कही है आदि पद से तैत्तिरीय, मुण्डक आदि उपनिषदों में निर्गुण उपासना कही है ॥तिरेसठ॥
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नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर केजरीवाल सरकार ने 2019 में विमान रखरखाव मिशन के दौरान जान गंवाने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुनील मोहंती के परिवार को एक करोड़ रूपये की सम्मान राशि प्रदान की।
एक सरकारी बयान के अनुसार द्वारका में मोहंती के माता-पिता को उनके निवास पर पालम की विधायक भावना गौड़ ने यह राशि सौंपी।
मोहंती वायुसेना में लेफ्टिनेंट के रूप में काम करते थे और 24 जून, 2016 को 43 स्क्वाड्रन एयर फोर्स में तैनात थे।
उन्हें अरूणाचल प्रदेश में मेहकुका एयरफील्ड पर एयर रखरखाव मिशन के तहत तीन जून, 2019 को एएन-32 केए 2752 विमान उड़ाने दिया गया था जिस दौरान उनका विमान गायब हो गया। बाद में सिंयाग में पारी हिल्स के मार्ग में मेचुका में 12 जून, 2019 को उस विमान का मलबा मिला था।
उस हादसे में जिन लोगों की मौत हुई थी, उनमें मोहंती भी थे।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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नयी दिल्ली, ग्यारह अक्टूबर केजरीवाल सरकार ने दो हज़ार उन्नीस में विमान रखरखाव मिशन के दौरान जान गंवाने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुनील मोहंती के परिवार को एक करोड़ रूपये की सम्मान राशि प्रदान की। एक सरकारी बयान के अनुसार द्वारका में मोहंती के माता-पिता को उनके निवास पर पालम की विधायक भावना गौड़ ने यह राशि सौंपी। मोहंती वायुसेना में लेफ्टिनेंट के रूप में काम करते थे और चौबीस जून, दो हज़ार सोलह को तैंतालीस स्क्वाड्रन एयर फोर्स में तैनात थे। उन्हें अरूणाचल प्रदेश में मेहकुका एयरफील्ड पर एयर रखरखाव मिशन के तहत तीन जून, दो हज़ार उन्नीस को एएन-बत्तीस केए दो हज़ार सात सौ बावन विमान उड़ाने दिया गया था जिस दौरान उनका विमान गायब हो गया। बाद में सिंयाग में पारी हिल्स के मार्ग में मेचुका में बारह जून, दो हज़ार उन्नीस को उस विमान का मलबा मिला था। उस हादसे में जिन लोगों की मौत हुई थी, उनमें मोहंती भी थे। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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जैसा की हम सभी जानते हैं कि कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में लॉकडाउन चल रहा था। दो महीने बाद सरकार ने लॉकडाउन खत्म करके अब अनलॉक शुरू कर दिया हैं यानी कि धीरे-धीरे करके जिंदगी को वापस पटरी पर लाने की कोशिश होने लगी हैं। पूरे देश के साथ-साथ लॉकडाउन का काफा ज्यादा असर एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री पर पड़ा हैं। लॉकडाउन के कारण शो की शूटिंग रुक गयी और आर्थिक तंगी के कारण शो को बंद करना पड़ा। 8 जून के बाद काफी दिशा निर्देशों के बाद शूटिंग करने की परमिशन मिल चुकी हैं।
टीवी के मशहूर शो भाभी जी घर पर हैं कि भी शूटिंग शुरुकर दी गयी हैं। शो फेकर्स की तरफ से कास्ट को शूटिंग पर लौटने की जानकारी दे दी गयी है। धीरे-धीरे करके शो की कास्ट मुंबई वापसी कर रही हैं। शो की लीड एक्ट्रेस सौम्या टंगन ने एक न्यूज चैनल से खाल-बात चीत में बताया कि टीवी इंडस्ट्री का काफी बुरा हाल हो गया हैं। शो की पेमेंट भी अभी नहीं मिली हैं। पेमेंट में काफी देरी हो रही हैं।
सौम्या टंडन ने बताया उन्हें पेमेंट मिलने से देरी हुई है। वैसे तो 90 दिनों के क्रेडिट पीरियड पर पेमेंट हो जाती है। लेकिन इस बार पेमेंट लेट हो गई है। अभी तक कोई जानकारी नहीं है लेकिन जल्द ही पैसो को ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। शो से जुड़े सभी लोगों को शो की शूटिंग शुरू होने की जानकारी दे दी गयी हैं।
आपको बता दें कि टीवी इंडस्ट्री और बॉलीवुड में पैसे की सबसे ज्यादा किल्लत देखी गयी। छोटे-मोटे रोल करने वालों के पास लॉकडाउन में खाने के लाले भी पड़ गये थे। डेली वर्कर्स पाई-पाई को मोहताज हो गये थे। पैसे की किल्लत की वजह से कई टीवी के एक्टर की सुसाइड करने की भी खबरें आयी थी। ससुराल सिमर का जैसे सीरीयल में काम कर चुके एक्टर आषिश के पास अपनी बीमारी का इलाज कराने के पैसे नहीं थे।
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जैसा की हम सभी जानते हैं कि कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में लॉकडाउन चल रहा था। दो महीने बाद सरकार ने लॉकडाउन खत्म करके अब अनलॉक शुरू कर दिया हैं यानी कि धीरे-धीरे करके जिंदगी को वापस पटरी पर लाने की कोशिश होने लगी हैं। पूरे देश के साथ-साथ लॉकडाउन का काफा ज्यादा असर एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री पर पड़ा हैं। लॉकडाउन के कारण शो की शूटिंग रुक गयी और आर्थिक तंगी के कारण शो को बंद करना पड़ा। आठ जून के बाद काफी दिशा निर्देशों के बाद शूटिंग करने की परमिशन मिल चुकी हैं। टीवी के मशहूर शो भाभी जी घर पर हैं कि भी शूटिंग शुरुकर दी गयी हैं। शो फेकर्स की तरफ से कास्ट को शूटिंग पर लौटने की जानकारी दे दी गयी है। धीरे-धीरे करके शो की कास्ट मुंबई वापसी कर रही हैं। शो की लीड एक्ट्रेस सौम्या टंगन ने एक न्यूज चैनल से खाल-बात चीत में बताया कि टीवी इंडस्ट्री का काफी बुरा हाल हो गया हैं। शो की पेमेंट भी अभी नहीं मिली हैं। पेमेंट में काफी देरी हो रही हैं। सौम्या टंडन ने बताया उन्हें पेमेंट मिलने से देरी हुई है। वैसे तो नब्बे दिनों के क्रेडिट पीरियड पर पेमेंट हो जाती है। लेकिन इस बार पेमेंट लेट हो गई है। अभी तक कोई जानकारी नहीं है लेकिन जल्द ही पैसो को ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। शो से जुड़े सभी लोगों को शो की शूटिंग शुरू होने की जानकारी दे दी गयी हैं। आपको बता दें कि टीवी इंडस्ट्री और बॉलीवुड में पैसे की सबसे ज्यादा किल्लत देखी गयी। छोटे-मोटे रोल करने वालों के पास लॉकडाउन में खाने के लाले भी पड़ गये थे। डेली वर्कर्स पाई-पाई को मोहताज हो गये थे। पैसे की किल्लत की वजह से कई टीवी के एक्टर की सुसाइड करने की भी खबरें आयी थी। ससुराल सिमर का जैसे सीरीयल में काम कर चुके एक्टर आषिश के पास अपनी बीमारी का इलाज कराने के पैसे नहीं थे।
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मरणकण्डिका - ९८५
रूप - गन्ध - रस- स्पर्श-शब्दानां मा स्म भूर्वशः । कषायाणां विधेहि त्वं, शत्रूणामिव निग्रहम् ॥५४७ ॥
अर्थ- भो क्षपक । तुम पंचेन्द्रियों के स्पर्श, रस, गन्ध, रूप और मनोज्ञ शब्द रूप विषयों के आधीन कभी मत होना। जैसे शस्त्रों द्वारा शत्रुओ का निग्रह करते हैं वैसे ही तुम क्षमादि गुणों के द्वारा कषायों का निग्रह करने का उद्यम करो ॥५४७ ॥
रागद्वेष-कषायाक्ष-संज्ञाभिर्गौरवादिकम् ।
विहायालोचनां शुद्धां, त्वं विधेहि विशुद्धधीः ॥ ५४८ ।।
अर्थ- हे विशुद्धबुद्धिधारी क्षपकराज / तुम राग, द्वेष, कषाय, इन्द्रियों को एव ऋद्धि, रस एव सात, इन तीन भेद वाले गारव को छोड़कर विशुद्ध आलोचना करो ॥५४८ ॥
प्रश्न- आलोचना के पूर्व राग-द्वेषादि छोड़ने की प्ररणा क्यो दी जा रही है ?
उत्तर - यह मानव-मन रागवश दोषो को नहीं देखता और द्वेषवश गुणों को नहीं देखता तथा ये रागद्वेष ही असत्य बोलने के मूल कारण हैं, अत इनका निराकरण किये बिना शुद्ध आलोचना कर लेना सम्भव नहीं है। जैसे तालाब का कर्दम निकले बिना जल स्वच्छ नहीं हो सकता, वैसे ही रागद्वेष, कषाय एव गारवादि दोषों के विद्यमान रहते शुद्ध आलोचना नहीं हो सकती, अत. सर्व प्रथम इन्हे छोड़ने की प्रेरणा दी गई है। निरतिचारव्रत होते हुए अन्याचार्य के समक्ष आलोचना करना आवश्यक है
स षट्त्रिंशद्-गुणेनापि, व्यवहार पटीयसा ।
कर्तव्यैषा महाशुद्धिरवश्यं पर-साक्षिका ॥५४९ ।।
अर्थ - छत्तीस गुण समन्वित एव व्यवहार मे अर्थात् प्रायश्चित्त देने मे कुशल क्षपक को अन्य आचार्य की साक्षी मे ही अपने अतिचारो की शुद्धि करना आवश्यक है ॥५४९ ॥
छत्तीस गुण निरूपण
अष्टाचारादयो ज्ञेयाः, स्थितिकल्पा गुणादश।
तपो द्वादशधा षोढावश्यकं षट्- षडाहतम् ।।५५० ।।
अर्थ - आचारवत्व आदि आठ गुण, दश प्रकार का स्थितिकल्प, बारह तप और छह आवश्यक ये छत्तीस गुण हैं। अथवा आठ ज्ञानाचार, आठ दर्शनाचार, बारह तप, पाँच समिति और तीन गुप्ति इस प्रकार से भी छत्तीस गुण हैं ॥ ५५० ॥
सर्वे तीर्थकृतोऽनन्तजिनाः केवलिनो यतः । छद्मस्थस्य महाशुद्धिं, वदन्ति गुरु सन्निधौ ॥५५१ ॥
अर्थ- अतीतकाल में जितने तीर्थकर हुए हैं एव अनन्त केवली जिन हुए हैं वे सब ही 'छद्यस्थ जीवो की महाशुद्धि गुरु के निकट होती है' ऐसा कहते हैं ॥ ५५१ ॥
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मरणकण्डिका - नौ सौ पचासी रूप - गन्ध - रस- स्पर्श-शब्दानां मा स्म भूर्वशः । कषायाणां विधेहि त्वं, शत्रूणामिव निग्रहम् ॥पाँच सौ सैंतालीस ॥ अर्थ- भो क्षपक । तुम पंचेन्द्रियों के स्पर्श, रस, गन्ध, रूप और मनोज्ञ शब्द रूप विषयों के आधीन कभी मत होना। जैसे शस्त्रों द्वारा शत्रुओ का निग्रह करते हैं वैसे ही तुम क्षमादि गुणों के द्वारा कषायों का निग्रह करने का उद्यम करो ॥पाँच सौ सैंतालीस ॥ रागद्वेष-कषायाक्ष-संज्ञाभिर्गौरवादिकम् । विहायालोचनां शुद्धां, त्वं विधेहि विशुद्धधीः ॥ पाँच सौ अड़तालीस ।। अर्थ- हे विशुद्धबुद्धिधारी क्षपकराज / तुम राग, द्वेष, कषाय, इन्द्रियों को एव ऋद्धि, रस एव सात, इन तीन भेद वाले गारव को छोड़कर विशुद्ध आलोचना करो ॥पाँच सौ अड़तालीस ॥ प्रश्न- आलोचना के पूर्व राग-द्वेषादि छोड़ने की प्ररणा क्यो दी जा रही है ? उत्तर - यह मानव-मन रागवश दोषो को नहीं देखता और द्वेषवश गुणों को नहीं देखता तथा ये रागद्वेष ही असत्य बोलने के मूल कारण हैं, अत इनका निराकरण किये बिना शुद्ध आलोचना कर लेना सम्भव नहीं है। जैसे तालाब का कर्दम निकले बिना जल स्वच्छ नहीं हो सकता, वैसे ही रागद्वेष, कषाय एव गारवादि दोषों के विद्यमान रहते शुद्ध आलोचना नहीं हो सकती, अत. सर्व प्रथम इन्हे छोड़ने की प्रेरणा दी गई है। निरतिचारव्रत होते हुए अन्याचार्य के समक्ष आलोचना करना आवश्यक है स षट्त्रिंशद्-गुणेनापि, व्यवहार पटीयसा । कर्तव्यैषा महाशुद्धिरवश्यं पर-साक्षिका ॥पाँच सौ उनचास ।। अर्थ - छत्तीस गुण समन्वित एव व्यवहार मे अर्थात् प्रायश्चित्त देने मे कुशल क्षपक को अन्य आचार्य की साक्षी मे ही अपने अतिचारो की शुद्धि करना आवश्यक है ॥पाँच सौ उनचास ॥ छत्तीस गुण निरूपण अष्टाचारादयो ज्ञेयाः, स्थितिकल्पा गुणादश। तपो द्वादशधा षोढावश्यकं षट्- षडाहतम् ।।पाँच सौ पचास ।। अर्थ - आचारवत्व आदि आठ गुण, दश प्रकार का स्थितिकल्प, बारह तप और छह आवश्यक ये छत्तीस गुण हैं। अथवा आठ ज्ञानाचार, आठ दर्शनाचार, बारह तप, पाँच समिति और तीन गुप्ति इस प्रकार से भी छत्तीस गुण हैं ॥ पाँच सौ पचास ॥ सर्वे तीर्थकृतोऽनन्तजिनाः केवलिनो यतः । छद्मस्थस्य महाशुद्धिं, वदन्ति गुरु सन्निधौ ॥पाँच सौ इक्यावन ॥ अर्थ- अतीतकाल में जितने तीर्थकर हुए हैं एव अनन्त केवली जिन हुए हैं वे सब ही 'छद्यस्थ जीवो की महाशुद्धि गुरु के निकट होती है' ऐसा कहते हैं ॥ पाँच सौ इक्यावन ॥
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RR vs CSK: (Rajasthan Royals beat Chennai Super Kings by 32 runs) आइपीएल के 16वें सीजन का 37वां मुकाबला में राजस्थान रॉयल्स (RR) ने चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) को 32 रनों से हरा दिया है। बता दे मैच जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में हो रहा था। राजस्थान रॉयल्स (RR) ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया था। पहले बल्लेबाजी करते हुए राजस्थान ने 20 ओवर में 5 विकेट पर 202 रन बनाया है। जवाब में चेन्नई 6 विकेट के नुकसान पर 20 ओवर में 170 रन ही बना सकी। चेन्नई के तरफ से शिवम दूबे ने 52 रन की पारी खेली, लेकिन शिवम की यह पारी चेन्नई को जीत दिलाने केे लिए काफी नहीं थी।
चेन्नई के लिए शिवम दूबे ने सबसे ज्यादा 52 रन, ऋतुराज गायकवाड ने 47, डेवोन कॉन्वे ने 8, अजिंक्य रहाणे ने 8, अंबाती रायडु ने 0, मोईन अली ने 23 और रवींद्र जडेजा ने 21 रन बनाए। राजस्थान से एडम जम्पा ने 3 और रविचंद्रन अश्विन ने 2 विकेट लिए। कुलदिप यादव को एक विकेट मिला।
- पहलाः छठे ओवर की आखिरी गेंद एडम जम्पा ने फुलर लेंथ फेंकी। डेवोन कॉन्वे मिड-ऑफ पर कैच आउट हो गए। उन्होंने 16 गेंद पर 8 नर बनाए।
- दूसराः 10वें ओवर की दूसरी गेंद जम्पा ने मिडिल स्टंप पर फ्लाइटेड फेंकी। ऋतुराज गायकवाड बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में सामने की ओर कैच हो गए। उन्होंने 29 गेंद पर 47 रन बनाए।
- तीसराः 11वें ओवर की दूसरी बॉल रविचंद्रन अश्विन ने लेग स्टंप पर फ्लाइटेड फेंकी। अजिंक्य रहाणे लॉन्ग ऑन पर कैच आउट हो गए। उन्होंने 13 गेंद पर 15 रन बनाए।
- चौथाः 11वें ओवर की चौथी बॉल अश्विन ने गुड लेंथ पर फेंकी। अंबाती रायडु ने स्लॉग स्वीप किया, लेकिन डीप मिड-विकेट पर कैच हो गए। वह अपना खाता भी नहीं खोल सके।
- पांचवांः 15वें ओवर की पांचवीं बॉल जम्पा ने ऑफ स्टंप पर फुलर गुड लेंथ फेंकी। मोईन अली कट शॉट खेलने की कोशिश में कैच आउट हो गए। उन्होंने 12 गेंद पर 23 रन बनाए।
- छठाः 20वें ओवर की पांचवीं बॉल कुलदिप यादव ने फुलर लेंथ फेंकी। शिवम दुबे लॉन्ग ऑन पर कैच हो गए। उन्होंने 52 रन बनाए।
टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी राजस्थान को यशस्वी जायसवाल ने तेज शुरुआत दिलाई। पावरप्ले में टीम ने बगैर नुकसान के 64 रन बनाए। जोस बटलर ने 21 गेंदो पर 27 रन बनाए। ध्रुव जुरेल ने 15 गेंदो पर 34 रन की शानदार पारी खेली। वहीं देवदत्त पड्डीकल ने 13 गेंदो पर 27 रन की पारी खेली जिसमें 5 चौके शामिल हैं। लेकिन सबसे बेहतर प्रर्दशन यशस्वी का रहा उन्होने 43 गेंदो में चार छक्के और आठ चौके के मदद से 77 रन बनाए। कप्तान संजू सैमसन आज कमाल नहीं दिखा सकें और 17 गेंद पर 17 रन बना कर तुषार देशपांडे के हाथों अपना विकेट खो दिया। शिमरोन हेटमायर ने 8, रविचंद्रन अश्विन ने 1 रन टीम के खाते में जोड़ा। चेन्नई से तुषार देशपांडे ने 2 विकेट लिए। महीश तीक्षणा और रवींद्र जडेजा को 1-1 विकेट मिला। एक बैटर रनआउट हुआ।
- पहला विकेटः 9वें ओवर की दूसरी बॉल पर रवींद्र जडेजा के बॉल पर जोस बटलर लॉन्ग ऑफ पर कैच हो गए। बल्लेबाज ने 27 रन बनाए।
- दूसरा विकेटः 14वें ओवर की पहली बॉल पर तुषार देशपांडे के स्लोअर शॉर्ट बॉल पर संजू सैमसन लॉन्ग ऑन पर कैच हो गए। उन्होंने 17 रन बनाए।
- तीसरा विकेटः 14वें ओवर की पांचवीं बॉल तुषार देशपांडे ने ऑफ स्टंप पर शॉर्ट पिच फेंकी। यशस्वी जायसवाल पॉइंट पर कैच आउट हो गए। उन्होंने 77 रन बनाए।
- चौथा विकेटः 17वें ओवर की पहली बॉल महीश तीक्षणा ने गुड लेंथ पर कैरम बॉल फेंकी। शिमरोन हेटमायर बोल्ड हो गए। उन्होंने 8 रन बनाए।
राजस्थान रॉयल्स : संजू सैमसन (कप्तान और विकेटकीपर), जोस बटलर, यशस्वी जायसवाल, देवदत्त पड्डीकल, शिमरोन हेटमायर, रविचंद्रन अश्विन, ध्रुव जुरेल, एडम जम्पा, युजवेंद्र चहल, संदीप शर्मा और जेसन होल्डर।
इम्पैक्ट प्लेयर्स : रियान पराग, कुलदिप सेन, डोनोवन फरेरा, एम अश्विन, केएम आसिफ।
चेन्नई सुपर किंग्सः महेंद्र सिंह धोनी (कप्तान), ऋतुराज गायकवाड, डेवोन कॉन्वे, अजिंक्य रहाणे, मोईन अली, शिवम दूबे, रवींद्र जडेजा, मथीशा पथिराना, तुषार देशपांडे, आकाश सिंह और महीश तीक्षणा।
इम्पैक्ट प्लेयर्स : अंबाती रायडु, ड्वेन प्रीटोरियस, सुभ्रांशु सेनापति, शेख रशीद, राजवर्धन हंगरगेकर।
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RR vs CSK: आइपीएल के सोलहवें सीजन का सैंतीसवां मुकाबला में राजस्थान रॉयल्स ने चेन्नई सुपर किंग्स को बत्तीस रनों से हरा दिया है। बता दे मैच जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में हो रहा था। राजस्थान रॉयल्स ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया था। पहले बल्लेबाजी करते हुए राजस्थान ने बीस ओवर में पाँच विकेट पर दो सौ दो रन बनाया है। जवाब में चेन्नई छः विकेट के नुकसान पर बीस ओवर में एक सौ सत्तर रन ही बना सकी। चेन्नई के तरफ से शिवम दूबे ने बावन रन की पारी खेली, लेकिन शिवम की यह पारी चेन्नई को जीत दिलाने केे लिए काफी नहीं थी। चेन्नई के लिए शिवम दूबे ने सबसे ज्यादा बावन रन, ऋतुराज गायकवाड ने सैंतालीस, डेवोन कॉन्वे ने आठ, अजिंक्य रहाणे ने आठ, अंबाती रायडु ने शून्य, मोईन अली ने तेईस और रवींद्र जडेजा ने इक्कीस रन बनाए। राजस्थान से एडम जम्पा ने तीन और रविचंद्रन अश्विन ने दो विकेट लिए। कुलदिप यादव को एक विकेट मिला। - पहलाः छठे ओवर की आखिरी गेंद एडम जम्पा ने फुलर लेंथ फेंकी। डेवोन कॉन्वे मिड-ऑफ पर कैच आउट हो गए। उन्होंने सोलह गेंद पर आठ नर बनाए। - दूसराः दसवें ओवर की दूसरी गेंद जम्पा ने मिडिल स्टंप पर फ्लाइटेड फेंकी। ऋतुराज गायकवाड बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में सामने की ओर कैच हो गए। उन्होंने उनतीस गेंद पर सैंतालीस रन बनाए। - तीसराः ग्यारहवें ओवर की दूसरी बॉल रविचंद्रन अश्विन ने लेग स्टंप पर फ्लाइटेड फेंकी। अजिंक्य रहाणे लॉन्ग ऑन पर कैच आउट हो गए। उन्होंने तेरह गेंद पर पंद्रह रन बनाए। - चौथाः ग्यारहवें ओवर की चौथी बॉल अश्विन ने गुड लेंथ पर फेंकी। अंबाती रायडु ने स्लॉग स्वीप किया, लेकिन डीप मिड-विकेट पर कैच हो गए। वह अपना खाता भी नहीं खोल सके। - पांचवांः पंद्रहवें ओवर की पांचवीं बॉल जम्पा ने ऑफ स्टंप पर फुलर गुड लेंथ फेंकी। मोईन अली कट शॉट खेलने की कोशिश में कैच आउट हो गए। उन्होंने बारह गेंद पर तेईस रन बनाए। - छठाः बीसवें ओवर की पांचवीं बॉल कुलदिप यादव ने फुलर लेंथ फेंकी। शिवम दुबे लॉन्ग ऑन पर कैच हो गए। उन्होंने बावन रन बनाए। टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी राजस्थान को यशस्वी जायसवाल ने तेज शुरुआत दिलाई। पावरप्ले में टीम ने बगैर नुकसान के चौंसठ रन बनाए। जोस बटलर ने इक्कीस गेंदो पर सत्ताईस रन बनाए। ध्रुव जुरेल ने पंद्रह गेंदो पर चौंतीस रन की शानदार पारी खेली। वहीं देवदत्त पड्डीकल ने तेरह गेंदो पर सत्ताईस रन की पारी खेली जिसमें पाँच चौके शामिल हैं। लेकिन सबसे बेहतर प्रर्दशन यशस्वी का रहा उन्होने तैंतालीस गेंदो में चार छक्के और आठ चौके के मदद से सतहत्तर रन बनाए। कप्तान संजू सैमसन आज कमाल नहीं दिखा सकें और सत्रह गेंद पर सत्रह रन बना कर तुषार देशपांडे के हाथों अपना विकेट खो दिया। शिमरोन हेटमायर ने आठ, रविचंद्रन अश्विन ने एक रन टीम के खाते में जोड़ा। चेन्नई से तुषार देशपांडे ने दो विकेट लिए। महीश तीक्षणा और रवींद्र जडेजा को एक-एक विकेट मिला। एक बैटर रनआउट हुआ। - पहला विकेटः नौवें ओवर की दूसरी बॉल पर रवींद्र जडेजा के बॉल पर जोस बटलर लॉन्ग ऑफ पर कैच हो गए। बल्लेबाज ने सत्ताईस रन बनाए। - दूसरा विकेटः चौदहवें ओवर की पहली बॉल पर तुषार देशपांडे के स्लोअर शॉर्ट बॉल पर संजू सैमसन लॉन्ग ऑन पर कैच हो गए। उन्होंने सत्रह रन बनाए। - तीसरा विकेटः चौदहवें ओवर की पांचवीं बॉल तुषार देशपांडे ने ऑफ स्टंप पर शॉर्ट पिच फेंकी। यशस्वी जायसवाल पॉइंट पर कैच आउट हो गए। उन्होंने सतहत्तर रन बनाए। - चौथा विकेटः सत्रहवें ओवर की पहली बॉल महीश तीक्षणा ने गुड लेंथ पर कैरम बॉल फेंकी। शिमरोन हेटमायर बोल्ड हो गए। उन्होंने आठ रन बनाए। राजस्थान रॉयल्स : संजू सैमसन , जोस बटलर, यशस्वी जायसवाल, देवदत्त पड्डीकल, शिमरोन हेटमायर, रविचंद्रन अश्विन, ध्रुव जुरेल, एडम जम्पा, युजवेंद्र चहल, संदीप शर्मा और जेसन होल्डर। इम्पैक्ट प्लेयर्स : रियान पराग, कुलदिप सेन, डोनोवन फरेरा, एम अश्विन, केएम आसिफ। चेन्नई सुपर किंग्सः महेंद्र सिंह धोनी , ऋतुराज गायकवाड, डेवोन कॉन्वे, अजिंक्य रहाणे, मोईन अली, शिवम दूबे, रवींद्र जडेजा, मथीशा पथिराना, तुषार देशपांडे, आकाश सिंह और महीश तीक्षणा। इम्पैक्ट प्लेयर्स : अंबाती रायडु, ड्वेन प्रीटोरियस, सुभ्रांशु सेनापति, शेख रशीद, राजवर्धन हंगरगेकर।
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प्रिलिम्स के लियेः
मेन्स के लियेः
चर्चा में क्यों?
हाल ही में संसद में एक प्रश्न के जवाब में सरकार ने खुलासा किया कि 1 अप्रैल से 30 नवंबर, 2015 के बीच पुलिस श्रेणी के तहत 25,357 मामले दर्ज किये गए, जिनमें पुलिस हिरासत में मौत के 111 मामले, हिरासत में यातना के 330 मामले और अन्य 24,916 मामले शामिल हैं।
- ये आँकड़े फिर से पुलिस को जवाबदेह बनाने और पुलिस सुधारों को लागू करने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हैं।
प्रमुख बिंदुः
पुलिस सुधार (अर्थ):
- पुलिस सुधारों का उद्देश्य पुलिस संगठनों के मूल्यों, संस्कृति, नीतियों और प्रथाओं को बदलना है।
- यह पुलिस को लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवाधिकारों और कानून के शासन के सम्मान के साथ कर्तव्यों का पालन करने की परिकल्पना करता है।
- इसका उद्देश्य पुलिस सुरक्षा क्षेत्र के अन्य हिस्सों, जैसे कि अदालतों और संबंधित विभागों, कार्यकारी, संसदीय या स्वतंत्र अधिकारियों के साथ प्रबंधन या निरीक्षण ज़िम्मेदारियों में सुधार करना भी है।
- पुलिस व्यवस्था भारतीय संविधान की अनुसूची 7 की राज्य सूची के अंतर्गत आती है।
पुलिस सुधार पर समितियाँ/आयोगः
पुलिस बलों से संबंधित मुद्देः
- औपनिवेशिक विरासतः देश में पुलिस प्रशासन की व्यवस्था और भविष्य के किसी भी विद्रोह को रोकने के लिये वर्ष 1857 के विद्रोह के पश्चात् अंग्रेज़ों द्वारा वर्ष 1861 का पुलिस अधिनियम लागू किया गया था।
- इसका मतलब यह था कि पुलिस को सदैव सत्ता में मौजूद लोगों द्वारा स्थापित नियमों का पालन करना था।
- राजनीतिक अधिकारियों के प्रति जवाबदेही बनाम परिचालन स्वतंत्रताः द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2007) ने उल्लेख किया है कि राजनीतिक कार्यपालिका द्वारा अतीत में राजनीतिक नियंत्रण का दुरुपयोग पुलिसकर्मियों को अनुचित रूप से प्रभावित करने और व्यक्तिगत या राजनीतिक हितों की सेवा करने के लिये किया गया है।
- मनोवैज्ञानिक दबावः यद्यपि वेतनमान और पदोन्नति में सुधार पुलिस सुधार के आवश्यक पहलू हैं, किंतु मनोवैज्ञानिक स्तर पर आवश्यक सुधार के विषय में बहुत कम बात की गई है।
- भारतीय पुलिस बल में निचले रैंक के पुलिसकर्मियों को प्रायः उनके वरिष्ठों द्वारा अपनामित किया जाता है या वे अमानवीय परिस्थितियों में काम करते हैं।
- इस प्रकार की गैर-सामंजस्यपूर्ण कार्य परिस्थितियों का प्रभाव अंततः जनता के साथ उनके संबंधों पर पड़ता है।
- जनधारणाः द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग के मुताबिक, वर्तमान में पुलिस-जनसंपर्क एक असंतोषजनक स्थिति में है, क्योंकि लोग पुलिस को भ्रष्ट, अक्षम, राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण और अनुत्तरदायी मानते हैं।
- इसके अलावा नागरिक आमतौर पर पुलिस स्टेशन जाने में भी डर महसूस करते हैं।
- अतिभारित बलः वर्ष 2016 में स्वीकृत पुलिस बल अनुपात प्रति लाख व्यक्तियों पर 181 पुलिसकर्मी था, जबकि वास्तविक संख्या 137 थी।
- संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रति लाख व्यक्तियों पर 222 पुलिस के अनुशंसित मानक की तुलना में यह बहुत कम है।
- इसके अलावा पुलिस बलों में रिक्तियों का एक उच्च प्रतिशत अतिभारित पुलिसकर्मियों की मौजूदा समस्या को बढ़ा देता है।
- कांस्टेबुलरी से संबंधित मुद्देः राज्य पुलिस बलों में कांस्टेबुलरी का गठन 86% है और इसकी व्यापक ज़िम्मेदारियाँ हैं।
- अवसंरचनात्मक मुद्देः आधुनिक पुलिस व्यवस्था के लिये मज़बूत संचार सहायता, अत्याधुनिक या आधुनिक हथियारों और उच्च स्तर की गतिशीलता आवश्यक है।
- हालाँकि वर्ष 2015-16 की CAG ऑडिट रिपोर्ट में राज्य पुलिस बलों के पास हथियारों की कमी पाई गई है।
- उदाहरण के लिये राजस्थान और पश्चिम बंगाल में राज्य पुलिस के पास आवश्यक हथियारों में क्रमशः 75% और 71% की कमी थी।
- साथ ही 'पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो' ने भी राज्य बलों के पास आवश्यक वाहनों के स्टॉक में 30.5% की कमी का उल्लेख किया है।
- पुलिस बलों का आधुनिकीकरणः पुलिस बलों के आधुनिकीकरण (MPF) की योजना 1969-70 में शुरू की गई थी और पिछले कुछ वर्षों में इसमें कई संशोधन हुए हैं।
- हालाँकि सरकार द्वारा स्वीकृत वित्त का पूरी तरह से उपयोग करने की आवश्यकता है।
- MPF योजना की परिकल्पना में शामिल हैंः
- राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकताः सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक प्रकाश सिंह मामले (2006) में सात निर्देश दिये जहाँ पुलिस सुधारों में अभी भी काफी काम करने की ज़रूरत है।
- हालाँकि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण इन निर्देशों को कई राज्यों में अक्षरशः लागू नहीं किया गया।
- आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधारः पुलिस सुधारों के साथ-साथ आपराधिक न्याय प्रणाली में भी सुधार की आवश्यकता है। इस संदर्भ में मेनन और मलीमथ समितियों (Menon and Malimath Committees) की सिफारिशों को लागू किया जा सकता है। कुछ प्रमुख सिफारिशें इस प्रकार हैंः
- दोषियों के दबाव के कारण मुकर जाने वाले पीड़ितों को मुआवज़ा देने के लिये एक कोष का निर्माण करना।
- देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले अपराधियों से निपटने के लिये राष्ट्रीय स्तर पर अलग प्राधिकरण की स्थापना।
- संपूर्ण आपराधिक प्रक्रिया प्रणाली में पूर्ण सुधार।
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प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में संसद में एक प्रश्न के जवाब में सरकार ने खुलासा किया कि एक अप्रैल से तीस नवंबर, दो हज़ार पंद्रह के बीच पुलिस श्रेणी के तहत पच्चीस,तीन सौ सत्तावन मामले दर्ज किये गए, जिनमें पुलिस हिरासत में मौत के एक सौ ग्यारह मामले, हिरासत में यातना के तीन सौ तीस मामले और अन्य चौबीस,नौ सौ सोलह मामले शामिल हैं। - ये आँकड़े फिर से पुलिस को जवाबदेह बनाने और पुलिस सुधारों को लागू करने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हैं। प्रमुख बिंदुः पुलिस सुधार : - पुलिस सुधारों का उद्देश्य पुलिस संगठनों के मूल्यों, संस्कृति, नीतियों और प्रथाओं को बदलना है। - यह पुलिस को लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवाधिकारों और कानून के शासन के सम्मान के साथ कर्तव्यों का पालन करने की परिकल्पना करता है। - इसका उद्देश्य पुलिस सुरक्षा क्षेत्र के अन्य हिस्सों, जैसे कि अदालतों और संबंधित विभागों, कार्यकारी, संसदीय या स्वतंत्र अधिकारियों के साथ प्रबंधन या निरीक्षण ज़िम्मेदारियों में सुधार करना भी है। - पुलिस व्यवस्था भारतीय संविधान की अनुसूची सात की राज्य सूची के अंतर्गत आती है। पुलिस सुधार पर समितियाँ/आयोगः पुलिस बलों से संबंधित मुद्देः - औपनिवेशिक विरासतः देश में पुलिस प्रशासन की व्यवस्था और भविष्य के किसी भी विद्रोह को रोकने के लिये वर्ष एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के विद्रोह के पश्चात् अंग्रेज़ों द्वारा वर्ष एक हज़ार आठ सौ इकसठ का पुलिस अधिनियम लागू किया गया था। - इसका मतलब यह था कि पुलिस को सदैव सत्ता में मौजूद लोगों द्वारा स्थापित नियमों का पालन करना था। - राजनीतिक अधिकारियों के प्रति जवाबदेही बनाम परिचालन स्वतंत्रताः द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने उल्लेख किया है कि राजनीतिक कार्यपालिका द्वारा अतीत में राजनीतिक नियंत्रण का दुरुपयोग पुलिसकर्मियों को अनुचित रूप से प्रभावित करने और व्यक्तिगत या राजनीतिक हितों की सेवा करने के लिये किया गया है। - मनोवैज्ञानिक दबावः यद्यपि वेतनमान और पदोन्नति में सुधार पुलिस सुधार के आवश्यक पहलू हैं, किंतु मनोवैज्ञानिक स्तर पर आवश्यक सुधार के विषय में बहुत कम बात की गई है। - भारतीय पुलिस बल में निचले रैंक के पुलिसकर्मियों को प्रायः उनके वरिष्ठों द्वारा अपनामित किया जाता है या वे अमानवीय परिस्थितियों में काम करते हैं। - इस प्रकार की गैर-सामंजस्यपूर्ण कार्य परिस्थितियों का प्रभाव अंततः जनता के साथ उनके संबंधों पर पड़ता है। - जनधारणाः द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग के मुताबिक, वर्तमान में पुलिस-जनसंपर्क एक असंतोषजनक स्थिति में है, क्योंकि लोग पुलिस को भ्रष्ट, अक्षम, राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण और अनुत्तरदायी मानते हैं। - इसके अलावा नागरिक आमतौर पर पुलिस स्टेशन जाने में भी डर महसूस करते हैं। - अतिभारित बलः वर्ष दो हज़ार सोलह में स्वीकृत पुलिस बल अनुपात प्रति लाख व्यक्तियों पर एक सौ इक्यासी पुलिसकर्मी था, जबकि वास्तविक संख्या एक सौ सैंतीस थी। - संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रति लाख व्यक्तियों पर दो सौ बाईस पुलिस के अनुशंसित मानक की तुलना में यह बहुत कम है। - इसके अलावा पुलिस बलों में रिक्तियों का एक उच्च प्रतिशत अतिभारित पुलिसकर्मियों की मौजूदा समस्या को बढ़ा देता है। - कांस्टेबुलरी से संबंधित मुद्देः राज्य पुलिस बलों में कांस्टेबुलरी का गठन छियासी% है और इसकी व्यापक ज़िम्मेदारियाँ हैं। - अवसंरचनात्मक मुद्देः आधुनिक पुलिस व्यवस्था के लिये मज़बूत संचार सहायता, अत्याधुनिक या आधुनिक हथियारों और उच्च स्तर की गतिशीलता आवश्यक है। - हालाँकि वर्ष दो हज़ार पंद्रह-सोलह की CAG ऑडिट रिपोर्ट में राज्य पुलिस बलों के पास हथियारों की कमी पाई गई है। - उदाहरण के लिये राजस्थान और पश्चिम बंगाल में राज्य पुलिस के पास आवश्यक हथियारों में क्रमशः पचहत्तर% और इकहत्तर% की कमी थी। - साथ ही 'पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो' ने भी राज्य बलों के पास आवश्यक वाहनों के स्टॉक में तीस.पाँच% की कमी का उल्लेख किया है। - पुलिस बलों का आधुनिकीकरणः पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की योजना एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर-सत्तर में शुरू की गई थी और पिछले कुछ वर्षों में इसमें कई संशोधन हुए हैं। - हालाँकि सरकार द्वारा स्वीकृत वित्त का पूरी तरह से उपयोग करने की आवश्यकता है। - MPF योजना की परिकल्पना में शामिल हैंः - राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकताः सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक प्रकाश सिंह मामले में सात निर्देश दिये जहाँ पुलिस सुधारों में अभी भी काफी काम करने की ज़रूरत है। - हालाँकि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण इन निर्देशों को कई राज्यों में अक्षरशः लागू नहीं किया गया। - आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधारः पुलिस सुधारों के साथ-साथ आपराधिक न्याय प्रणाली में भी सुधार की आवश्यकता है। इस संदर्भ में मेनन और मलीमथ समितियों की सिफारिशों को लागू किया जा सकता है। कुछ प्रमुख सिफारिशें इस प्रकार हैंः - दोषियों के दबाव के कारण मुकर जाने वाले पीड़ितों को मुआवज़ा देने के लिये एक कोष का निर्माण करना। - देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले अपराधियों से निपटने के लिये राष्ट्रीय स्तर पर अलग प्राधिकरण की स्थापना। - संपूर्ण आपराधिक प्रक्रिया प्रणाली में पूर्ण सुधार।
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सीएम के निर्देश के बाद सड़कों को लेकर काम मे तेजी आई है, वही इस पर सियासत भी तेज हुई है। ग्वालियर से दो केंद्रीय मंत्री, प्रदेश सरकार में भी मंत्री होने के बावजूद सड़कों की बदहाली प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुकी है।
ग्वालियर में ज्वेलरी शॉप में ग्राहक बनकर पहुंची दो महिलाएं दस ग्राम वजनी सोने की चेन चोरी कर ले गई। चोरी की सारी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। ज्वैलर्स ने चोर महिलाओं के खिलाफ शिकायत की है।
इस बार दिवाली महापर्व के 5 दिनों के दौरान साल का आखिरी सूर्य ग्रह भी लगेगा। यह ग्रहण 25 अक्टूबर को होगा।
डबरा शहर में 2 गुटों में हुई गोलीबारी में एक युवक की मौत हो गई। जबकि एक राहगीर समेत 3 लोग घायल हो गए।
एबीवीपी विजयपुर इकाई के कार्यकर्ता जनजातीय समूह के गांव पहुंचे। यहांं उन्होंने बच्चों को कपड़े, मिठाइयां और पटाखे बांटकर उनके साथ दीपावली का त्यौहार सेलिब्रेट किया।
ऊर्जा मंत्री के जूते त्यागे वाले बयान पर कांग्रेस का कहना है कि मध्यप्रदेश में अधिकारियों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि काम करवाने के लिए प्रदेश के मंत्रियों को जूते चप्पल का त्याग करना पड़ रहा है।
ग्वालियर में बर्थ-डे पार्टी में भुगतान वसूलने पहुंचे व्यवसायी से 60 हजार रुपए लूट का मामला सामने आया है।
जनसुनवाई में पहुंची महिला ने आरोप लगाते हुए पुलिस को बताया कि पति और अन्य रिश्तेदार दहेज के लिए परेशान कर रहे हैं।
मेष राशि वालों आज आपको कार्यक्षेत्र में उच्च पद की प्राप्ति हो सकती है। धर्म-कर्म के कामों में आपका मन लगेगा।
मिथुन राशि वाले जो पारिवारिक बिजनेस से जुड़े हैं उन्हें सफलता मिलने की पूरी संभावना है।
सिंह राशि वालों व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए दिन मुनाफा कमाने वाला रहेगा। आपकी आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत होगी।
कन्या राशि वालों ऑफिस में आपके प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। कार्यक्षेत्र में व्यस्तता अधिक रहेगी।
तुला राशि वालों आपके दिन की शुरुआत बेहद सुखद रहेगी। काफी समय से रुका हुआ काम आज संपन्न हो सकता है।
वृश्चिक राशि वालों आज घर की सुख सुविधा संबंधी चीजों पर खर्च हो सकता है। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है।
मकर राशि वालों आय के स्त्रोत बढ़ने से रुके हुए कार्यों में गति आएगी। युवा वर्ग भविष्य को लेकर ज्यादा फोकस रहेंगे।
कुंभ राशि वालों आज का दिन शानदार रहेगा। बिजनेस संबंधित निवेश करना आपके लिए उत्तम रहेगा।
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सीएम के निर्देश के बाद सड़कों को लेकर काम मे तेजी आई है, वही इस पर सियासत भी तेज हुई है। ग्वालियर से दो केंद्रीय मंत्री, प्रदेश सरकार में भी मंत्री होने के बावजूद सड़कों की बदहाली प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुकी है। ग्वालियर में ज्वेलरी शॉप में ग्राहक बनकर पहुंची दो महिलाएं दस ग्राम वजनी सोने की चेन चोरी कर ले गई। चोरी की सारी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। ज्वैलर्स ने चोर महिलाओं के खिलाफ शिकायत की है। इस बार दिवाली महापर्व के पाँच दिनों के दौरान साल का आखिरी सूर्य ग्रह भी लगेगा। यह ग्रहण पच्चीस अक्टूबर को होगा। डबरा शहर में दो गुटों में हुई गोलीबारी में एक युवक की मौत हो गई। जबकि एक राहगीर समेत तीन लोग घायल हो गए। एबीवीपी विजयपुर इकाई के कार्यकर्ता जनजातीय समूह के गांव पहुंचे। यहांं उन्होंने बच्चों को कपड़े, मिठाइयां और पटाखे बांटकर उनके साथ दीपावली का त्यौहार सेलिब्रेट किया। ऊर्जा मंत्री के जूते त्यागे वाले बयान पर कांग्रेस का कहना है कि मध्यप्रदेश में अधिकारियों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि काम करवाने के लिए प्रदेश के मंत्रियों को जूते चप्पल का त्याग करना पड़ रहा है। ग्वालियर में बर्थ-डे पार्टी में भुगतान वसूलने पहुंचे व्यवसायी से साठ हजार रुपए लूट का मामला सामने आया है। जनसुनवाई में पहुंची महिला ने आरोप लगाते हुए पुलिस को बताया कि पति और अन्य रिश्तेदार दहेज के लिए परेशान कर रहे हैं। मेष राशि वालों आज आपको कार्यक्षेत्र में उच्च पद की प्राप्ति हो सकती है। धर्म-कर्म के कामों में आपका मन लगेगा। मिथुन राशि वाले जो पारिवारिक बिजनेस से जुड़े हैं उन्हें सफलता मिलने की पूरी संभावना है। सिंह राशि वालों व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए दिन मुनाफा कमाने वाला रहेगा। आपकी आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत होगी। कन्या राशि वालों ऑफिस में आपके प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। कार्यक्षेत्र में व्यस्तता अधिक रहेगी। तुला राशि वालों आपके दिन की शुरुआत बेहद सुखद रहेगी। काफी समय से रुका हुआ काम आज संपन्न हो सकता है। वृश्चिक राशि वालों आज घर की सुख सुविधा संबंधी चीजों पर खर्च हो सकता है। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। मकर राशि वालों आय के स्त्रोत बढ़ने से रुके हुए कार्यों में गति आएगी। युवा वर्ग भविष्य को लेकर ज्यादा फोकस रहेंगे। कुंभ राशि वालों आज का दिन शानदार रहेगा। बिजनेस संबंधित निवेश करना आपके लिए उत्तम रहेगा। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
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५६ / छायावाद की प्रासंगिता
इनका प्रोचित्य सामान्य है। ये एक प्रकार की काहदि में से शब्द है। एक सामान बोध में से-जिसे मुक्तिबोध ने 'जड़ीमत मौन्दर्या है । मार दे रहे हैं कि निराला को अपना विम्य सृजित करने के लिए ए संत पर्याप्त हो गया जबकि पंतजी को पाँच विशेषणों की जरूरत पड़ी के प्रयोग में पंतजी सिद्धहस्त है किन्तु केवल उन्हीं कविताओं में जो उ जमीन है-- प्रकृति-वर्णन की ।
इसी क्रम में हम महादेवी की कविता पढ़े तो लगता है कि उनकी स्वाद और बनायट कुछ-कुछ पंत जी जैसी ही है। इतना जरूर मानना महादेवी के छन्द की लयगति उनके शब्दों के अर्थ के साथ घुली हुई जान १ किन्तु यह लयगति गीत की है। हमें ऐसा नहीं लगता कि वास्तविक मं (fafte) के fafe और जटिल अनुभव-संवेदनों से इस प्रकार की लयात्म निपट सकती है। निराला की तुलना में यह संवेदना निश्चय ही कम स्व सचीती है; यात्रिक चाहे उसे न कहें क्योंकि उसमें भावयना, एक प्रकार की तो है हो -
धीरे-धीरे उत्तर क्षितिज से
श्रा घसन्त रजनरे
तारकमय नव
शीशफूल कर शशि का नूतन रश्मि चलय सित धन-प्रवगुंठन मुक्ताहल अभिराम विद्या दे चितवन
वसन्त रजनी
महादेवी की कविता सामान्यतः पंतजी की कविता की अपेक्षा कानों को प्रच्छी लगती है। किन्तु दो-चार हल्के स्पर्शो से किसी वस्तु के चाक्षुप सौन्द से मूर्तिमान कर देने की जो शक्ति पंत में है, वह उनमें नहीं है। ऊपर की पंकि जो चित्र है, उसे क्या आप बिम्व कह सकते हैं ? यह माधुनिक कविता का सौन्दर है, या संस्कृत के झालंकारिक कवियों का ? विशेषणो की यहाँ भी भरमार रम्यता उत्पन्न करने का जिम्मा भी उन्ही का है। चमत्कार वेणीवन्धन के ता होने मे है; घन अवगुष्ठन के 'रश्मिवलय' होने में है। इससे अगली पंक्ति का सं जरूर भिन्न है और विशिष्ट है; किन्तु वस उतना ही ; भागे प्रसाधन के ब्योरे शुरू हो जाते हैं। नूपुर-ध्वनि 'मर्भर' की है जो हमारे कानों को मनाश्वस्त जाती है। वह 'सुमधुर' भी है किन्तु यह 'सुमधुर' निराला के 'मधुर-मथुर की निश्चित प्रयव्यंजक नहीं है। यह केवल छन्द की यांत्रिक गति में निरीह ढंग से हुआ है । 'नुपुर के अलावा विकिणि' भी है जो 'अलि-गुजित पत्रों' की है। ये जा और विशेषण एक कवि-समय के अंग हैं। वास्तविक संवेदन के नहीं। इन
पाहे किसी
ह कुल
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छप्पन / छायावाद की प्रासंगिता इनका प्रोचित्य सामान्य है। ये एक प्रकार की काहदि में से शब्द है। एक सामान बोध में से-जिसे मुक्तिबोध ने 'जड़ीमत मौन्दर्या है । मार दे रहे हैं कि निराला को अपना विम्य सृजित करने के लिए ए संत पर्याप्त हो गया जबकि पंतजी को पाँच विशेषणों की जरूरत पड़ी के प्रयोग में पंतजी सिद्धहस्त है किन्तु केवल उन्हीं कविताओं में जो उ जमीन है-- प्रकृति-वर्णन की । इसी क्रम में हम महादेवी की कविता पढ़े तो लगता है कि उनकी स्वाद और बनायट कुछ-कुछ पंत जी जैसी ही है। इतना जरूर मानना महादेवी के छन्द की लयगति उनके शब्दों के अर्थ के साथ घुली हुई जान एक किन्तु यह लयगति गीत की है। हमें ऐसा नहीं लगता कि वास्तविक मं के fafe और जटिल अनुभव-संवेदनों से इस प्रकार की लयात्म निपट सकती है। निराला की तुलना में यह संवेदना निश्चय ही कम स्व सचीती है; यात्रिक चाहे उसे न कहें क्योंकि उसमें भावयना, एक प्रकार की तो है हो - धीरे-धीरे उत्तर क्षितिज से श्रा घसन्त रजनरे तारकमय नव शीशफूल कर शशि का नूतन रश्मि चलय सित धन-प्रवगुंठन मुक्ताहल अभिराम विद्या दे चितवन वसन्त रजनी महादेवी की कविता सामान्यतः पंतजी की कविता की अपेक्षा कानों को प्रच्छी लगती है। किन्तु दो-चार हल्के स्पर्शो से किसी वस्तु के चाक्षुप सौन्द से मूर्तिमान कर देने की जो शक्ति पंत में है, वह उनमें नहीं है। ऊपर की पंकि जो चित्र है, उसे क्या आप बिम्व कह सकते हैं ? यह माधुनिक कविता का सौन्दर है, या संस्कृत के झालंकारिक कवियों का ? विशेषणो की यहाँ भी भरमार रम्यता उत्पन्न करने का जिम्मा भी उन्ही का है। चमत्कार वेणीवन्धन के ता होने मे है; घन अवगुष्ठन के 'रश्मिवलय' होने में है। इससे अगली पंक्ति का सं जरूर भिन्न है और विशिष्ट है; किन्तु वस उतना ही ; भागे प्रसाधन के ब्योरे शुरू हो जाते हैं। नूपुर-ध्वनि 'मर्भर' की है जो हमारे कानों को मनाश्वस्त जाती है। वह 'सुमधुर' भी है किन्तु यह 'सुमधुर' निराला के 'मधुर-मथुर की निश्चित प्रयव्यंजक नहीं है। यह केवल छन्द की यांत्रिक गति में निरीह ढंग से हुआ है । 'नुपुर के अलावा विकिणि' भी है जो 'अलि-गुजित पत्रों' की है। ये जा और विशेषण एक कवि-समय के अंग हैं। वास्तविक संवेदन के नहीं। इन पाहे किसी ह कुल
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मुंबई. पूर्व क्रिकेटर और सांसद गौतम गंभीर एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार वे अपने विवादों को लेकर नहीं बल्कि अपने एक नेक काम को लेकर सुर्खियों में है.
दरअसल, गौतम गंभीर की एक हाउस हेल्प का हाल ही निधन हो गया. वह मूलतः ओडिशा की रहने वाली थी. गंभीर ने उनका अंतिम संस्कार किया. बता दें कि यह हाउस हेल्प उनकी दोनों बेटियों-अनाइजा और आजीन की देखभाल किया करती थीं. गंभीर उन्हें भी अपने परिवार की सदस्य मानते थे. गौतम गंभीर के इस दिल छू लेने वाले कदम की हर कोई सराहना कर रहा है.
वैसे गंभीर अपने सरनाम के मुताबिक समाज के लिए काफी गंभीर रहते है. कोरोना महामारी से प्रभावित लोगों की मदद के लिए भी आगे आए हैं. उन्होंने अपना दो साल का वेतन पीएम केयर्स फंड में दान किया है. इसके अलावा पूर्वी दिल्ली में उन्होंने गरीबों को भोजन के पैकेट्स भी वितरित करते भी नजर आए थे.
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मुंबई. पूर्व क्रिकेटर और सांसद गौतम गंभीर एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार वे अपने विवादों को लेकर नहीं बल्कि अपने एक नेक काम को लेकर सुर्खियों में है. दरअसल, गौतम गंभीर की एक हाउस हेल्प का हाल ही निधन हो गया. वह मूलतः ओडिशा की रहने वाली थी. गंभीर ने उनका अंतिम संस्कार किया. बता दें कि यह हाउस हेल्प उनकी दोनों बेटियों-अनाइजा और आजीन की देखभाल किया करती थीं. गंभीर उन्हें भी अपने परिवार की सदस्य मानते थे. गौतम गंभीर के इस दिल छू लेने वाले कदम की हर कोई सराहना कर रहा है. वैसे गंभीर अपने सरनाम के मुताबिक समाज के लिए काफी गंभीर रहते है. कोरोना महामारी से प्रभावित लोगों की मदद के लिए भी आगे आए हैं. उन्होंने अपना दो साल का वेतन पीएम केयर्स फंड में दान किया है. इसके अलावा पूर्वी दिल्ली में उन्होंने गरीबों को भोजन के पैकेट्स भी वितरित करते भी नजर आए थे.
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हृदय रोगियों को डॉक्टर भारी व्यायाम न करने की सलाह देते हैं। ऐसे में उनके लिए खुद को चुस्त-दुरुस्त रखना उतना आसान नहीं है। आज हम आपको बता रहे हैं कुछ कार्डियो एक्सरसाइज जिसकी मदद से आप शरीर के साथ अपने दिल को भी दुरुस्त रख सकेंगे।
दोनों पैरों को खोल कर सीधे खड़े हो जाएं। अब एक पैर को थोड़ा आगे बढ़ाकर रखें। दोनों हाथों को सिर के पीछे ले जाएं। अब आगे की ओर झुकें। इस दौरान अपने कूल्हे को पीछे की ओर खींचने की कोशिश करें। इस प्रक्रिया को 20 बार दोहराएं। ध्यान रहे कि इस पूरी प्रक्रिया में शरीर की मांसपेशियां बिल्कुल ढीली नहीं पड़नी चाहिए वरना फायदे की जगह नुकसान ज्यादा होगा।
एक्सरसाइज सीधे खड़े हो जाएं और बायां पैर आगे बढ़ाएं। पैर को सीने की ऊंचाई तक ऊपर ले आएं और दाएं हाथ से उसे छूने की कोशिश करें। थोड़ी देर बाद पुरानी स्थिति में लौट जाएं। यही प्रक्रिया दाएं पैर और बाएं हाथ से करें। ध्यान रखें कि इस प्रक्रिया में आपका या सिर शरीर बिल्कुल भी नहीं झुकना चाहिए। हर चरण के बाद 30 सेकेंड का आराम जरूर करें। यह प्रक्रिया आप अपनी सुविधा के अनुसार दस से 12 बार कर सकते हैं।
सीधे खड़े हो जाएं और दोनों हाथों को सीने की ऊंचाई तक सीधे आगे की ओर ले जाएं। इसके बाद घुटनों को थोड़ा झुकाएं। अब इसी मुद्रा में खड़े होकर कूदें। अब सीने को घुटनों तक लाइए और हाथों को सीने के सामने ही रखें। जमीन तक धीरे-धीरे जाएं और हाथों को भी ले जाएं। इस स्थिति में कूदें। करीब 30 सेकेंड तक कूदने के बाद 30 सेकेंड का आराम जरूर करें। इसे चार से पांच बार किया जा सकता है। इस व्यायाम से हृदयगति कई गुना बढ़ जाती है। इस अभ्यास से हृदय की गति कई गुना बढ़ जाती है।
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हृदय रोगियों को डॉक्टर भारी व्यायाम न करने की सलाह देते हैं। ऐसे में उनके लिए खुद को चुस्त-दुरुस्त रखना उतना आसान नहीं है। आज हम आपको बता रहे हैं कुछ कार्डियो एक्सरसाइज जिसकी मदद से आप शरीर के साथ अपने दिल को भी दुरुस्त रख सकेंगे। दोनों पैरों को खोल कर सीधे खड़े हो जाएं। अब एक पैर को थोड़ा आगे बढ़ाकर रखें। दोनों हाथों को सिर के पीछे ले जाएं। अब आगे की ओर झुकें। इस दौरान अपने कूल्हे को पीछे की ओर खींचने की कोशिश करें। इस प्रक्रिया को बीस बार दोहराएं। ध्यान रहे कि इस पूरी प्रक्रिया में शरीर की मांसपेशियां बिल्कुल ढीली नहीं पड़नी चाहिए वरना फायदे की जगह नुकसान ज्यादा होगा। एक्सरसाइज सीधे खड़े हो जाएं और बायां पैर आगे बढ़ाएं। पैर को सीने की ऊंचाई तक ऊपर ले आएं और दाएं हाथ से उसे छूने की कोशिश करें। थोड़ी देर बाद पुरानी स्थिति में लौट जाएं। यही प्रक्रिया दाएं पैर और बाएं हाथ से करें। ध्यान रखें कि इस प्रक्रिया में आपका या सिर शरीर बिल्कुल भी नहीं झुकना चाहिए। हर चरण के बाद तीस सेकेंड का आराम जरूर करें। यह प्रक्रिया आप अपनी सुविधा के अनुसार दस से बारह बार कर सकते हैं। सीधे खड़े हो जाएं और दोनों हाथों को सीने की ऊंचाई तक सीधे आगे की ओर ले जाएं। इसके बाद घुटनों को थोड़ा झुकाएं। अब इसी मुद्रा में खड़े होकर कूदें। अब सीने को घुटनों तक लाइए और हाथों को सीने के सामने ही रखें। जमीन तक धीरे-धीरे जाएं और हाथों को भी ले जाएं। इस स्थिति में कूदें। करीब तीस सेकेंड तक कूदने के बाद तीस सेकेंड का आराम जरूर करें। इसे चार से पांच बार किया जा सकता है। इस व्यायाम से हृदयगति कई गुना बढ़ जाती है। इस अभ्यास से हृदय की गति कई गुना बढ़ जाती है।
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प्राचीन काल में कथा, कीर्तन और नाटकों आदि के द्वारा समाज को संस्कारित करने का कार्य किया जाता था । वर्तमान समय में विज्ञान के विकास के साथ-साथ शिक्षण विधियों का भी विकसित स्वरूप हमारे सामने उपस्थित हुआ है । पत्र-पत्रिकाओं से लेकर रेडियो, सिनेमा और टेलीविजन तक का प्रयोग शिक्षण कार्य के लिए किया जाने लगा है । एडीसन के शब्दों में
"चलचित्र अनिवार्य रूप से शिक्षा का एक मात्र रचनात्मक साधन है ।"
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ने भी दृश्य श्रव्य साधनों के प्रयोग को प्राचीनकाल
से चली आने वाली शिक्षण पद्धति के रूप में स्वीकार किया है । इसके साथ ही साथ दृश्य श्रव्य साधनों के अधुनातम् स्वरूप को भी स्वीकार करते हुए शिक्षण कार्य को सुगम बनाने का सफल प्रयास किया है ।
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ने कहा है
1. शिक्षा के सिद्धान्त
दृश्य श्रव्य साधनों को शिक्षण के सशक्त माध्यम के रूप में स्वीकार करते हुए
"प्राचीन काल के कथा और कीर्तन तथा आज के रेडियो सिनेमा समाचार पत्र आदि सभी इस सीमा में आते हैं । "
शिक्षा के अभिकरण 'चलचित्र'
पृष्ठ 95
सुबोध अदावाल
पृष्ठ राष्ट्र धर्म पुस्तक प्रकाशन लखनऊ
11. समीक्षात्मक विचार
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय की उपरोक्त शिक्षण पद्धति की समीक्षा करने पर शोधकर्ता ने अनुभव किया है कि उपाध्याय जी ने अपनी शिक्षण पद्धति' में प्राचीन एवं अर्वाचीन दोनों ही शिक्षण विधियों का समन्वय स्थापित किया है । एक ओर जहां उन्होंने आगमन, निगमन और स्वाध्याय एवं व्याख्यान जैसी प्राचीन शिक्षण विधियों को अपनी शिक्षण पद्धति में स्थान दिया है वहीं दूसरी ओर मनोवैज्ञानिक, वैज्ञानिक, रचनात्मक क्रियात्मक एवं दृश्य श्रव्य जैसी अधुनातम् शिक्षण विधियों का प्रयोग करने में किसी भी प्रकार का संकोच नहीं किया ।
उनकी शिक्षण विधियों के अध्ययन के उपरान्त शोधकर्ता यह कह सकता है कि उपाध्याय जी किसी एक शिक्षण विधि के अनुयायी या पिछलग्गू नहीं थे वरन् अपनी शिक्षा प्रणाली के अनुरूप अपनी सूझबूझ के अनुसार उपयुक्त शिक्षण विधियों को ग्रहण किया ।
मानव को संस्कारित करने की दृष्टि से उन्होंने रचनात्मक शिक्षण विधि तथा साहित्य एवं ललितकलाओं के शिक्षण की व्यवस्था की तथा आधुनिक प्रगति की दौड़ में प्रतिष्ठापूर्ण स्थान प्राप्त कराने में सक्षम वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक शिक्षण विधियों का प्रयोग किया । इस प्रकार शोधकर्ता का स्पष्ट मत है कि शिक्षण पद्धति की दृष्टि से पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ने अपनी शिक्षा में शिक्षण विधियों का कुशल समन्वय एवं समायोजन किया है । अतः उनकी 'शिक्षण पद्धति' वर्तमान शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक सिद्ध हो सकती है ।
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प्राचीन काल में कथा, कीर्तन और नाटकों आदि के द्वारा समाज को संस्कारित करने का कार्य किया जाता था । वर्तमान समय में विज्ञान के विकास के साथ-साथ शिक्षण विधियों का भी विकसित स्वरूप हमारे सामने उपस्थित हुआ है । पत्र-पत्रिकाओं से लेकर रेडियो, सिनेमा और टेलीविजन तक का प्रयोग शिक्षण कार्य के लिए किया जाने लगा है । एडीसन के शब्दों में "चलचित्र अनिवार्य रूप से शिक्षा का एक मात्र रचनात्मक साधन है ।" पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ने भी दृश्य श्रव्य साधनों के प्रयोग को प्राचीनकाल से चली आने वाली शिक्षण पद्धति के रूप में स्वीकार किया है । इसके साथ ही साथ दृश्य श्रव्य साधनों के अधुनातम् स्वरूप को भी स्वीकार करते हुए शिक्षण कार्य को सुगम बनाने का सफल प्रयास किया है । पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ने कहा है एक. शिक्षा के सिद्धान्त दृश्य श्रव्य साधनों को शिक्षण के सशक्त माध्यम के रूप में स्वीकार करते हुए "प्राचीन काल के कथा और कीर्तन तथा आज के रेडियो सिनेमा समाचार पत्र आदि सभी इस सीमा में आते हैं । " शिक्षा के अभिकरण 'चलचित्र' पृष्ठ पचानवे सुबोध अदावाल पृष्ठ राष्ट्र धर्म पुस्तक प्रकाशन लखनऊ ग्यारह. समीक्षात्मक विचार पण्डित दीनदयाल उपाध्याय की उपरोक्त शिक्षण पद्धति की समीक्षा करने पर शोधकर्ता ने अनुभव किया है कि उपाध्याय जी ने अपनी शिक्षण पद्धति' में प्राचीन एवं अर्वाचीन दोनों ही शिक्षण विधियों का समन्वय स्थापित किया है । एक ओर जहां उन्होंने आगमन, निगमन और स्वाध्याय एवं व्याख्यान जैसी प्राचीन शिक्षण विधियों को अपनी शिक्षण पद्धति में स्थान दिया है वहीं दूसरी ओर मनोवैज्ञानिक, वैज्ञानिक, रचनात्मक क्रियात्मक एवं दृश्य श्रव्य जैसी अधुनातम् शिक्षण विधियों का प्रयोग करने में किसी भी प्रकार का संकोच नहीं किया । उनकी शिक्षण विधियों के अध्ययन के उपरान्त शोधकर्ता यह कह सकता है कि उपाध्याय जी किसी एक शिक्षण विधि के अनुयायी या पिछलग्गू नहीं थे वरन् अपनी शिक्षा प्रणाली के अनुरूप अपनी सूझबूझ के अनुसार उपयुक्त शिक्षण विधियों को ग्रहण किया । मानव को संस्कारित करने की दृष्टि से उन्होंने रचनात्मक शिक्षण विधि तथा साहित्य एवं ललितकलाओं के शिक्षण की व्यवस्था की तथा आधुनिक प्रगति की दौड़ में प्रतिष्ठापूर्ण स्थान प्राप्त कराने में सक्षम वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक शिक्षण विधियों का प्रयोग किया । इस प्रकार शोधकर्ता का स्पष्ट मत है कि शिक्षण पद्धति की दृष्टि से पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ने अपनी शिक्षा में शिक्षण विधियों का कुशल समन्वय एवं समायोजन किया है । अतः उनकी 'शिक्षण पद्धति' वर्तमान शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक सिद्ध हो सकती है ।
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भुवनेश्वर। प्रतिष्ठित कैपिटल फाउंडेशन लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के भुवनेश्वर आगमन पर उनका भव्य स्वागत किया जायेगा। इसमें लगभग 50,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के भव्य स्वागत समारोह को लेकर कमिश्नरेट पुलिस ने ट्रैफिक को लेकर विस्तृत व्यवस्था की है और साथ ही यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी नागरिक को असुविधा न हो। मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए बीजू पटनायक हवाई अड्डे पर एक बड़ी सभा होगी। यहां सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक लोगों की इकट्ठा होगी। उस समय के दौरान यात्रा करने वाले हवाई यात्रियों को अपने समय से कम से कम 3 घंटे पहले पहुंचने का प्रयास करना होगा।
भुवनेश्वर के डीसीपी प्रतीक सिंह ने आज यहां एक संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्राप्त करने के बाद यहां भुवनेश्वर पहुंचेंगे और उनके स्वागत के लिए हवाई अड्डे पर विभिन्न जिलों से लगभग 50,000 लोगों के आने की उम्मीद है। इसे देखते हुए हमने विस्तृत व्यवस्था की है।
सिंह ने कहा कि जिन रास्तों से लोग आयेंगे उनके लिए रूट लाइनिंग की व्यवस्था की गई है और वाहनों और यातायात को निर्देशित करने के लिए सभी महत्वपूर्ण चौकों पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि विभिन्न जिलों से आने वाले लोगों के लिए बसों और अन्य वाहनों के लिए पार्किंग स्थलों की पहचान की गई है और उन्हें चिह्नित किया गया है।
डीसीपी ने कहा कि कार्यक्रम के बाद लौटने वाले लोगों के लिए व्यवस्था की गई है। हवाईअड्डे पर फ्लाइट पकड़ने जाने वाले यात्रियों को असुविधा न हो इसके लिए भी इंतजाम किये गये हैं।
डीसीपी ने कहा कि हमने सभी एयरलाइनों से कहा है कि वे कल अपने यात्रियों से कहें कि वे कम से कम तीन घंटे पहले हवाई अड्डे पर पहुंचने की कोशिश करें, क्योंकि भारी भीड़ होगी। यात्री थोड़ा जल्दी पहुंच जाएं तो बेहतर होगा। अपनी ओर से हमने व्यवस्था की है कि उनका मार्ग सुगम हो और साथ ही एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं के पारित होने में कोई समस्या न हो। उन्होंने बताया कि साथ ही पैदल चलने वालों के लिए भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि कोई चूक न हो इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, क्योंकि काफी संख्या में लोग गांवों से आ रहे हैं। कार्यक्रम लगभग एक घंटे का होगा। कार्यक्रम के दौरान हालात पर नजर रखने के लिए 8 एडीसीपी, 16 एसीपी रैंक के अधिकारी, लगभग 25 इंस्पेक्टर, ट्रैफिक एसीपी, ट्रैफिक स्टाफ, 90 सब-इंस्पेक्टर और असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर संयुक्त और 30 प्लाटून फोर्स को तैनात किया जाएगा। पहले से ही बैरिकेड्स लगाना शुरू हो गया है, ट्रैफिक डायवर्जन योजनाओं पर काम किया गया है। डीसीपी ने आगे बताया कि कार्यक्रम में शामिल होने आने वाले लोगों के लिए वाहनों की पार्किंग के लिए तीन स्थान निर्धारित किए गए हैं।
यूनिट-VI में कैपिटल हॉस्पिटल के पीछे एक ग्राउंड, पलाशपल्ली क्षेत्र में चिलिका डेवलपमेंट अथॉरिटी के पास खुर्दा से आने वाले वाहनों के लिए एक ग्राउंड और पुरी की ओर आने वाले वाहनों के लिए शिशु भवन चौक से कैपिटल हॉस्पिटल के बीच का क्षेत्र पार्किंग के लिए होगा।
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भुवनेश्वर। प्रतिष्ठित कैपिटल फाउंडेशन लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के भुवनेश्वर आगमन पर उनका भव्य स्वागत किया जायेगा। इसमें लगभग पचास,शून्य लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के भव्य स्वागत समारोह को लेकर कमिश्नरेट पुलिस ने ट्रैफिक को लेकर विस्तृत व्यवस्था की है और साथ ही यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी नागरिक को असुविधा न हो। मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए बीजू पटनायक हवाई अड्डे पर एक बड़ी सभा होगी। यहां सुबह आठ बजे से दोपहर एक बजे तक लोगों की इकट्ठा होगी। उस समय के दौरान यात्रा करने वाले हवाई यात्रियों को अपने समय से कम से कम तीन घंटाटे पहले पहुंचने का प्रयास करना होगा। भुवनेश्वर के डीसीपी प्रतीक सिंह ने आज यहां एक संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्राप्त करने के बाद यहां भुवनेश्वर पहुंचेंगे और उनके स्वागत के लिए हवाई अड्डे पर विभिन्न जिलों से लगभग पचास,शून्य लोगों के आने की उम्मीद है। इसे देखते हुए हमने विस्तृत व्यवस्था की है। सिंह ने कहा कि जिन रास्तों से लोग आयेंगे उनके लिए रूट लाइनिंग की व्यवस्था की गई है और वाहनों और यातायात को निर्देशित करने के लिए सभी महत्वपूर्ण चौकों पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया जायेगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न जिलों से आने वाले लोगों के लिए बसों और अन्य वाहनों के लिए पार्किंग स्थलों की पहचान की गई है और उन्हें चिह्नित किया गया है। डीसीपी ने कहा कि कार्यक्रम के बाद लौटने वाले लोगों के लिए व्यवस्था की गई है। हवाईअड्डे पर फ्लाइट पकड़ने जाने वाले यात्रियों को असुविधा न हो इसके लिए भी इंतजाम किये गये हैं। डीसीपी ने कहा कि हमने सभी एयरलाइनों से कहा है कि वे कल अपने यात्रियों से कहें कि वे कम से कम तीन घंटे पहले हवाई अड्डे पर पहुंचने की कोशिश करें, क्योंकि भारी भीड़ होगी। यात्री थोड़ा जल्दी पहुंच जाएं तो बेहतर होगा। अपनी ओर से हमने व्यवस्था की है कि उनका मार्ग सुगम हो और साथ ही एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं के पारित होने में कोई समस्या न हो। उन्होंने बताया कि साथ ही पैदल चलने वालों के लिए भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि कोई चूक न हो इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, क्योंकि काफी संख्या में लोग गांवों से आ रहे हैं। कार्यक्रम लगभग एक घंटे का होगा। कार्यक्रम के दौरान हालात पर नजर रखने के लिए आठ एडीसीपी, सोलह एसीपी रैंक के अधिकारी, लगभग पच्चीस इंस्पेक्टर, ट्रैफिक एसीपी, ट्रैफिक स्टाफ, नब्बे सब-इंस्पेक्टर और असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर संयुक्त और तीस प्लाटून फोर्स को तैनात किया जाएगा। पहले से ही बैरिकेड्स लगाना शुरू हो गया है, ट्रैफिक डायवर्जन योजनाओं पर काम किया गया है। डीसीपी ने आगे बताया कि कार्यक्रम में शामिल होने आने वाले लोगों के लिए वाहनों की पार्किंग के लिए तीन स्थान निर्धारित किए गए हैं। यूनिट-VI में कैपिटल हॉस्पिटल के पीछे एक ग्राउंड, पलाशपल्ली क्षेत्र में चिलिका डेवलपमेंट अथॉरिटी के पास खुर्दा से आने वाले वाहनों के लिए एक ग्राउंड और पुरी की ओर आने वाले वाहनों के लिए शिशु भवन चौक से कैपिटल हॉस्पिटल के बीच का क्षेत्र पार्किंग के लिए होगा।
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बेहतरीन ऑलराउंडरों में से एक सलीम दुरानी का रविवार को कैंसर से निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पूर्व क्रिकेटर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर सलीम दुरानी (फाइल फोटो)
अफगानिस्तान में पैदा हुए, दुरानी पश्तून मूल के थे और अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी कौशल के लिए जाने जाते थे।
दुर्रानी का रविवार को निधन हो गया। क्रिकेटर का निधन गुजरात के जामनगर में हुआ। वह 88 वर्ष के थे। आक्रामक बाएं हाथ के बल्लेबाज और बाएं हाथ के स्पिनर दुर्रानी ने 29 टेस्ट खेले, जिसमें 1,202 रन बनाए और 75 विकेट लिए।
सलीम दुरानी काफी समय से वे कैंसर से पीड़ित थे।
उन्हें उस जादुई स्पेल के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है जिसने भारत को 1971 में वेस्टइंडीज में पहली टेस्ट जीत दिलाने में मदद की। इस टेस्ट मैच को सुनील गावस्कर के टेस्ट डेब्यू के लिए भी याद किया जाता है।
वह दर्शकों की मांग पर भी छक्के मारने के अपने जुनून के लिए जाने जाते थे।
मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, सलीम दुर्रानी जी क्रिकेट के दिग्गज थे, अपने आप में एक संस्था थे। उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में भारत के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मैदान पर और बाहर, वह अपनी शैली के लिए जाने जाते थे। उनके निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति संवेदना। उनकी आत्मा को शांति मिले।
प्रधान मंत्री ने कहा कि सलीम दुर्रानी जी का गुजरात के साथ बहुत पुराना और मजबूत संबंध था। वह कुछ वर्षों तक सौराष्ट्र और गुजरात के लिए खेले। उन्होंने गुजरात को अपना घर भी बनाया। मुझे उनसे बातचीत करने का अवसर मिला और मैं उनके बहुमुखी व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुआ। वो हमेशा याद किए जाएंगे।
मुंबई में उनके एक पारिवारिक मित्र ने उनको याद करते हुए कहा उन्हें हमेशा दर्शकों की मांग पर छक्के मारने के लिए याद किया जाएगा। उस दौर में छक्के मारना दुर्लभ था।
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बेहतरीन ऑलराउंडरों में से एक सलीम दुरानी का रविवार को कैंसर से निधन हो गया। वह अठासी वर्ष के थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पूर्व क्रिकेटर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर सलीम दुरानी अफगानिस्तान में पैदा हुए, दुरानी पश्तून मूल के थे और अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी कौशल के लिए जाने जाते थे। दुर्रानी का रविवार को निधन हो गया। क्रिकेटर का निधन गुजरात के जामनगर में हुआ। वह अठासी वर्ष के थे। आक्रामक बाएं हाथ के बल्लेबाज और बाएं हाथ के स्पिनर दुर्रानी ने उनतीस टेस्ट खेले, जिसमें एक,दो सौ दो रन बनाए और पचहत्तर विकेट लिए। सलीम दुरानी काफी समय से वे कैंसर से पीड़ित थे। उन्हें उस जादुई स्पेल के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है जिसने भारत को एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में वेस्टइंडीज में पहली टेस्ट जीत दिलाने में मदद की। इस टेस्ट मैच को सुनील गावस्कर के टेस्ट डेब्यू के लिए भी याद किया जाता है। वह दर्शकों की मांग पर भी छक्के मारने के अपने जुनून के लिए जाने जाते थे। मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, सलीम दुर्रानी जी क्रिकेट के दिग्गज थे, अपने आप में एक संस्था थे। उन्होंने क्रिकेट की दुनिया में भारत के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मैदान पर और बाहर, वह अपनी शैली के लिए जाने जाते थे। उनके निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति संवेदना। उनकी आत्मा को शांति मिले। प्रधान मंत्री ने कहा कि सलीम दुर्रानी जी का गुजरात के साथ बहुत पुराना और मजबूत संबंध था। वह कुछ वर्षों तक सौराष्ट्र और गुजरात के लिए खेले। उन्होंने गुजरात को अपना घर भी बनाया। मुझे उनसे बातचीत करने का अवसर मिला और मैं उनके बहुमुखी व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुआ। वो हमेशा याद किए जाएंगे। मुंबई में उनके एक पारिवारिक मित्र ने उनको याद करते हुए कहा उन्हें हमेशा दर्शकों की मांग पर छक्के मारने के लिए याद किया जाएगा। उस दौर में छक्के मारना दुर्लभ था।
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यूपी पंचायत चुनाव : जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की सूची जारी, जानें- आपके जिले में क्या है सीट?
योगी सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की सूची जारी कर दी है.
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनाव के लिए योगी सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की सूची जारी कर दी है. पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष के 27 पद अनारक्षित हैं. वहीं 12 सीट महिला और 27 सीटें ओबीसी के खाते में गई हैं. इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष की 16 सीटें एससी में आरक्षित की गई हैं.
वहीँ ब्लॉक प्रमुखों के 826 पदों में से 314 अनारक्षित,113 महिला,223 ओबीसी और 171 एससी जबकि पहली बार 5 पद एसटी कैटेगरी के लिए रखे गए हैं.
ग्राम प्रधानों के लिए 20268 पद अनारक्षित, 9739 महिला सीट,15712 ओबीसी और 12045 एससी जबकि 330 एसटी के लिए रिज़र्व हुए हैं.
देखिये- सूची, आपके जिले की क्या रही सीट?
पूरे प्रदेश में 2 जिला पंचायत ऐसी हैं जो आज तक एससी और ओबीसी के लिए आरक्षित ही नहीं हुईं. वहीं, 7 जिला पंचायतें ऐसी हैं, जो कभी भी महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं हुईं. ऐसी जिला पंचायतों को वरीयता मिलेगी.
पंचायतीराज विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा कि पंचायत चुनाव में 2015 में जो आरक्षण की स्थिति थी, वह इस चुनाव में नहीं होगी. जो पद या सीटें एससी-एससी या महिला के आरक्षित थे, वे इस बार अनारक्षित और ओबीसी के हो सकते हैं. कोई भी ऐसा पद जो आज तक एससी के लिए आरक्षित नहीं हुआ, वह एससी के लिए आरक्षित हो सकता है. ऐसा ही ओबीसी और महिला सीटों और पदों के लिए भी होगा.
इससे पहले गुरुवार को शासन ने आरक्षण नीति जारी कर दी थी। नीति में साफ है कि वर्ष 2015 में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के लिए आरक्षण की जो स्थिति थी, वह इस बार बदलेगी। आरक्षण नीति में वर्ष 1995 से 2015 तक तय आरक्षण को संज्ञान में रखा जाएगा। उधर, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मद्देनजर परिसीमन को पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका है।
मनोज कुमार सिंह ने बताया कि 826 ब्लॉकों में जिलेवार किस श्रेणी में आरक्षण होगा, यह राज्य स्तर पर जारी किया जाएगा. जिला पंचायतों की आरक्षण प्रक्रिया भी राज्य स्तर पर जारी होगी. डीएम 2 से 3 मार्च के बीच प्रधानों, ग्राम पंचायत, क्षेत्र और जिला पंचायत के आरक्षित प्रदेशिक आरक्षण निर्वाचन क्षेत्र के आवंटन की प्रस्तावित सूची का प्रकाशन करके आपत्तियां मांगेंगे. 4 मार्च से 8 मार्च तक लिखित आपत्ति दर्ज करवाई जा सकती हैं. 10 से 12 मार्च के बीच आपत्तियों को निपटाते हुए फाइनल सूची तैयार की जाएगी. 15 मार्च तक जिला अधिकारी को निदेशालय को आरक्षण की अंतिम सूची उपलब्ध करवाने को कहा गया है.
सिंह ने बताया कि 826 क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों में से पांच अनुसूचित जनजाति के होंगे, जबकि 171 अनुसूचित जाति के और पिछड़ा वर्ग के 223 होंगे. ग्राम प्रधानों 330 अनुसूचित जनजाति से, 12,045 अनुसूचित जाति से और 15,712 पिछड़ी जाति से होंगे.
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यूपी पंचायत चुनाव : जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की सूची जारी, जानें- आपके जिले में क्या है सीट? योगी सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की सूची जारी कर दी है. लखनऊ : उत्तर प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनाव के लिए योगी सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की सूची जारी कर दी है. पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष के सत्ताईस पद अनारक्षित हैं. वहीं बारह सीट महिला और सत्ताईस सीटें ओबीसी के खाते में गई हैं. इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष की सोलह सीटें एससी में आरक्षित की गई हैं. वहीँ ब्लॉक प्रमुखों के आठ सौ छब्बीस पदों में से तीन सौ चौदह अनारक्षित,एक सौ तेरह महिला,दो सौ तेईस ओबीसी और एक सौ इकहत्तर एससी जबकि पहली बार पाँच पद एसटी कैटेगरी के लिए रखे गए हैं. ग्राम प्रधानों के लिए बीस हज़ार दो सौ अड़सठ पद अनारक्षित, नौ हज़ार सात सौ उनतालीस महिला सीट,पंद्रह हज़ार सात सौ बारह ओबीसी और बारह हज़ार पैंतालीस एससी जबकि तीन सौ तीस एसटी के लिए रिज़र्व हुए हैं. देखिये- सूची, आपके जिले की क्या रही सीट? पूरे प्रदेश में दो जिला पंचायत ऐसी हैं जो आज तक एससी और ओबीसी के लिए आरक्षित ही नहीं हुईं. वहीं, सात जिला पंचायतें ऐसी हैं, जो कभी भी महिलाओं के लिए आरक्षित नहीं हुईं. ऐसी जिला पंचायतों को वरीयता मिलेगी. पंचायतीराज विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा कि पंचायत चुनाव में दो हज़ार पंद्रह में जो आरक्षण की स्थिति थी, वह इस चुनाव में नहीं होगी. जो पद या सीटें एससी-एससी या महिला के आरक्षित थे, वे इस बार अनारक्षित और ओबीसी के हो सकते हैं. कोई भी ऐसा पद जो आज तक एससी के लिए आरक्षित नहीं हुआ, वह एससी के लिए आरक्षित हो सकता है. ऐसा ही ओबीसी और महिला सीटों और पदों के लिए भी होगा. इससे पहले गुरुवार को शासन ने आरक्षण नीति जारी कर दी थी। नीति में साफ है कि वर्ष दो हज़ार पंद्रह में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के लिए आरक्षण की जो स्थिति थी, वह इस बार बदलेगी। आरक्षण नीति में वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचानवे से दो हज़ार पंद्रह तक तय आरक्षण को संज्ञान में रखा जाएगा। उधर, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मद्देनजर परिसीमन को पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका है। मनोज कुमार सिंह ने बताया कि आठ सौ छब्बीस ब्लॉकों में जिलेवार किस श्रेणी में आरक्षण होगा, यह राज्य स्तर पर जारी किया जाएगा. जिला पंचायतों की आरक्षण प्रक्रिया भी राज्य स्तर पर जारी होगी. डीएम दो से तीन मार्च के बीच प्रधानों, ग्राम पंचायत, क्षेत्र और जिला पंचायत के आरक्षित प्रदेशिक आरक्षण निर्वाचन क्षेत्र के आवंटन की प्रस्तावित सूची का प्रकाशन करके आपत्तियां मांगेंगे. चार मार्च से आठ मार्च तक लिखित आपत्ति दर्ज करवाई जा सकती हैं. दस से बारह मार्च के बीच आपत्तियों को निपटाते हुए फाइनल सूची तैयार की जाएगी. पंद्रह मार्च तक जिला अधिकारी को निदेशालय को आरक्षण की अंतिम सूची उपलब्ध करवाने को कहा गया है. सिंह ने बताया कि आठ सौ छब्बीस क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों में से पांच अनुसूचित जनजाति के होंगे, जबकि एक सौ इकहत्तर अनुसूचित जाति के और पिछड़ा वर्ग के दो सौ तेईस होंगे. ग्राम प्रधानों तीन सौ तीस अनुसूचित जनजाति से, बारह,पैंतालीस अनुसूचित जाति से और पंद्रह,सात सौ बारह पिछड़ी जाति से होंगे.
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कोरोना वायरस की वजह से सीबीएसई समेत कई राज्यों ने कक्षा 12वीं की परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला ले लिया है। यूपी सरकार यूपी बोर्ड की कक्षा 12वीं की परीक्षाओं पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी जिलाधिकारियों से अपने-अपने जिलों में कोविड 19 की स्थिति की विस्तृत जानकारी प्राप्त करेगा।
सीबीएसई और सीआईएससीई कक्षा 12वीं की परीक्षा रद्द करने की घोषणा के एक दिन बाद उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा कि, "डीएम द्वारा रिपोर्ट का आकलन करने के बाद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बैठक में कक्षा 12वीं की परीक्षा पर निर्णय लिया जाएगा। "
उपमुख्यमंत्री का कहना है कि जिलाधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद ही हम स्थिति का बेहतर आकलन कर पाएंगे और यूपी बोर्ड की 12वीं की इंटरमीडिएट की परीक्षा पर फैसला ले पाएंगे। अंतिम निर्णय लेने में 2 से 3 दिन का समय लग सकता है।
शर्मा का कहना है कि सीबीएसई मिड टर्म एग्जामिनेशन के आधार पर रिजल्ट तैयार कर सकता है, लेकिन हमारे पास ऐसा कोई विकल्प नहीं है। यूपी बोर्ड 12 वीं परीक्षा में बैठने के लिए लगभग 2. 6 मिलियन छात्र पंजीकृत हैं। इससे पहले यूपी बोर्ड ने शनिवार को 10वीं की हाईस्कूल की परीक्षा को रद्द करने का फैसला ले लिया था।
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कोरोना वायरस की वजह से सीबीएसई समेत कई राज्यों ने कक्षा बारहवीं की परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला ले लिया है। यूपी सरकार यूपी बोर्ड की कक्षा बारहवीं की परीक्षाओं पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी जिलाधिकारियों से अपने-अपने जिलों में कोविड उन्नीस की स्थिति की विस्तृत जानकारी प्राप्त करेगा। सीबीएसई और सीआईएससीई कक्षा बारहवीं की परीक्षा रद्द करने की घोषणा के एक दिन बाद उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा कि, "डीएम द्वारा रिपोर्ट का आकलन करने के बाद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बैठक में कक्षा बारहवीं की परीक्षा पर निर्णय लिया जाएगा। " उपमुख्यमंत्री का कहना है कि जिलाधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद ही हम स्थिति का बेहतर आकलन कर पाएंगे और यूपी बोर्ड की बारहवीं की इंटरमीडिएट की परीक्षा पर फैसला ले पाएंगे। अंतिम निर्णय लेने में दो से तीन दिन का समय लग सकता है। शर्मा का कहना है कि सीबीएसई मिड टर्म एग्जामिनेशन के आधार पर रिजल्ट तैयार कर सकता है, लेकिन हमारे पास ऐसा कोई विकल्प नहीं है। यूपी बोर्ड बारह वीं परीक्षा में बैठने के लिए लगभग दो. छः मिलियन छात्र पंजीकृत हैं। इससे पहले यूपी बोर्ड ने शनिवार को दसवीं की हाईस्कूल की परीक्षा को रद्द करने का फैसला ले लिया था।
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मॉस्को , (एएफपी)। ब्राजील ने यहां फुटबॉल विश्व् कप के ग्रुप ई के एक लीग मैच में सर्बिया को 2-0 से हराकर अंतिम 16 में जगह बना ली। प्री - द्रार्टर फाइनल में टीम मैक्सिको से भिड़ेगी।
मैच के पहले हाफ में 35 वें मिनट में कोटिन्हो ने सर्बिया के डिफेंस के ऊपर से फुटबॉल पास किया जिसके बाद मिडफील्डर पॉलिन्हो गोल पोस्ट के करीब पहुंच गए और इसके बाद विश्व् कप का अपना पहला गोल दागा।
सर्बिया ने हालांकि आक्रामकता दिखाते हुए जवाबी हमले करने की पूरी कोशिश की और दूसरे हाफ में उसके पास गोल करने के कई मौके भी आए लेकिन वह उन्हें भुना नहीं पाया।
दूसरे हाफ में मैच के 68 वें मिनट में नेमार कॉर्नर किक लगाते हुए फुटबॉल गोल पोस्ट के पास भेजा और थिएगो सिल्वा ने छह यार्ड की दूरी से फुटबॉल नेट में पहुंचा दिया।
सेंट पीटर्सबर्ग में भावुक होने के बाद नेमार इस जीत के बाद खुश दिखे और दर्शकों को फ्लाइंग किस दिए।
पांच बार की विश्व् विजेता ब्राजील ग्रुप में सात अंकों के साथ शीर्ष पर रहने के साथ अब अगले चरण में सोमवार को मैक्सिको से भिड़ेगी। जबकि ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहे स्विट्जरलैंड का सामना मंगलवार को स्वीडन से होगा।
सर्बिया दो हार और एक ड्रॉ के साथ तीन अंक हासिल करते हुए ग्रुप में तीसरे स्थान पर रहा।
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मॉस्को , । ब्राजील ने यहां फुटबॉल विश्व् कप के ग्रुप ई के एक लीग मैच में सर्बिया को दो-शून्य से हराकर अंतिम सोलह में जगह बना ली। प्री - द्रार्टर फाइनल में टीम मैक्सिको से भिड़ेगी। मैच के पहले हाफ में पैंतीस वें मिनट में कोटिन्हो ने सर्बिया के डिफेंस के ऊपर से फुटबॉल पास किया जिसके बाद मिडफील्डर पॉलिन्हो गोल पोस्ट के करीब पहुंच गए और इसके बाद विश्व् कप का अपना पहला गोल दागा। सर्बिया ने हालांकि आक्रामकता दिखाते हुए जवाबी हमले करने की पूरी कोशिश की और दूसरे हाफ में उसके पास गोल करने के कई मौके भी आए लेकिन वह उन्हें भुना नहीं पाया। दूसरे हाफ में मैच के अड़सठ वें मिनट में नेमार कॉर्नर किक लगाते हुए फुटबॉल गोल पोस्ट के पास भेजा और थिएगो सिल्वा ने छह यार्ड की दूरी से फुटबॉल नेट में पहुंचा दिया। सेंट पीटर्सबर्ग में भावुक होने के बाद नेमार इस जीत के बाद खुश दिखे और दर्शकों को फ्लाइंग किस दिए। पांच बार की विश्व् विजेता ब्राजील ग्रुप में सात अंकों के साथ शीर्ष पर रहने के साथ अब अगले चरण में सोमवार को मैक्सिको से भिड़ेगी। जबकि ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहे स्विट्जरलैंड का सामना मंगलवार को स्वीडन से होगा। सर्बिया दो हार और एक ड्रॉ के साथ तीन अंक हासिल करते हुए ग्रुप में तीसरे स्थान पर रहा।
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बढ़ते चरण
पठन-पाठन के क्रम में ज्यो-ज्यो चरण आगे बढे, त्यों-त्यो 'सारस्वत' तथा 'सिद्धान्त चन्द्रिका' के कतिपय स्थल अपूर्ण प्रतीत होने लगे । किसी बड़े व्याकरण का आधार लेने की बात सोची जाने लगी । उसी समय यतियों के प्राचीन भडार मे से उन्हें एक व्याकरण की प्रति प्राप्त हुई । वह किसी प्राचीन जैनाचार्य द्वारा निर्मित थी । 'सारकौमुदी' नाम से वह प्रक्रिया रूप में बनाई हुई थी । उसका अध्ययन किया गया और उसके कतिपय सूत्रो को छाटकर 'सिद्धान्तचद्रिका' के समास आदि कुछ अपूर्ण स्थलों की पूर्ति करने का प्रयास किया गया । परन्तु दो व्याकरणो को मिलाकर पढना, स्वयं ही अपने आप में एक झट का कार्य था । उससे जिज्ञासा की यथेष्ट तृप्ति नही हो पाई ।
अष्टाध्यायी की खोज
कालूगणी ने एक बार अध्ययन प्रसग में फरमाया- "पाणिनीय के समान यदि 'सारकौमुदी' की अष्टाध्यायी मिल जाये, तो कितना अच्छा हो । उस क्रम से अध्ययन करने पर अधिक विकास होने की सम्भावना है ।" कालूगणी ।" कालूगणी का वह चिंतन बहुत स्वल्प समय में ही पूर्ण हो गया । भादरा के श्रावक रावतमलजी पारख के पास यतियों के प्राचीन पुस्तक-भडारों में से सगृहीत कुछ पुस्तकें थी । मुनि चम्पालालजी 'मीठिया' जब भादरा गये, तब उन्होंने उनका निरीक्षण किया । उसमें विशालकीर्ति गणी द्वारा विरचित 'विशाल-शब्दानुशासन' (अष्टाध्यायी) की एक प्रति थी । उन्होंने सोचा कि कहीं यह ग्रथ वही तो नहीं है, जिसके लिए गुरुदेव फरमा रहे थे । उन्होने उस प्रति को लाकर गुरुदेव को भेंट किया। उन्होने उसे देखा तो वे बड़े प्रसन्न हुए । वह वही ग्रथ था जिसकी प्राप्ति के लिए गवेषणा की जा रही थी। उन्होने शिष्यवर्ग को उसका अध्ययन प्रारम्भ करवा दिया ।
नये मार्ग दर्शन की आवश्यकता
कालूगणी के जीवन की अनेक महत्ताओं में से एक महत्ता जन-मानस को बहुत ही प्रभावित करने वाली थी कि उनको जब किसी बात की आवश्यकता होती थी, प्रकृति उससे पूर्व ही उसकी पूर्ति का सामान जुटाकर तैयार रखा करती थी । वह सदा उनके अनुकूल रही थी। उनके जीवन के वे स्वप्न, जिन्हें उन्होंने स्वय एक स्वप्न मात्र ही समझा था, सहज रूप से पूर्ण होते देखे गये । संस्कृत के विषय मे भी उन्होंने जो स्वप्न देखा था, जो कल्पना की थी, उसकी पूर्ति सहज भाव से होती गई और सघ में संस्कृत भाषा का प्रवाह आगे-से-आगे गतिशील बनता चला गया ।
साधुओं को प्राथमिक व्याकरण-ज्ञान हो चुका था । आगे का कदम तभी उठ सकता था, जब कि कोई विशिष्ट व्याकरणश अपना समय दे । साहित्य क्षेत्र में प्रवेश पाने के लिये भी प्रयास किया जाने लगा था। कालूगणी ने शिष्य वर्ग को उस विषय मे प्रेरित करना प्रारम्भ कर
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बढ़ते चरण पठन-पाठन के क्रम में ज्यो-ज्यो चरण आगे बढे, त्यों-त्यो 'सारस्वत' तथा 'सिद्धान्त चन्द्रिका' के कतिपय स्थल अपूर्ण प्रतीत होने लगे । किसी बड़े व्याकरण का आधार लेने की बात सोची जाने लगी । उसी समय यतियों के प्राचीन भडार मे से उन्हें एक व्याकरण की प्रति प्राप्त हुई । वह किसी प्राचीन जैनाचार्य द्वारा निर्मित थी । 'सारकौमुदी' नाम से वह प्रक्रिया रूप में बनाई हुई थी । उसका अध्ययन किया गया और उसके कतिपय सूत्रो को छाटकर 'सिद्धान्तचद्रिका' के समास आदि कुछ अपूर्ण स्थलों की पूर्ति करने का प्रयास किया गया । परन्तु दो व्याकरणो को मिलाकर पढना, स्वयं ही अपने आप में एक झट का कार्य था । उससे जिज्ञासा की यथेष्ट तृप्ति नही हो पाई । अष्टाध्यायी की खोज कालूगणी ने एक बार अध्ययन प्रसग में फरमाया- "पाणिनीय के समान यदि 'सारकौमुदी' की अष्टाध्यायी मिल जाये, तो कितना अच्छा हो । उस क्रम से अध्ययन करने पर अधिक विकास होने की सम्भावना है ।" कालूगणी ।" कालूगणी का वह चिंतन बहुत स्वल्प समय में ही पूर्ण हो गया । भादरा के श्रावक रावतमलजी पारख के पास यतियों के प्राचीन पुस्तक-भडारों में से सगृहीत कुछ पुस्तकें थी । मुनि चम्पालालजी 'मीठिया' जब भादरा गये, तब उन्होंने उनका निरीक्षण किया । उसमें विशालकीर्ति गणी द्वारा विरचित 'विशाल-शब्दानुशासन' की एक प्रति थी । उन्होंने सोचा कि कहीं यह ग्रथ वही तो नहीं है, जिसके लिए गुरुदेव फरमा रहे थे । उन्होने उस प्रति को लाकर गुरुदेव को भेंट किया। उन्होने उसे देखा तो वे बड़े प्रसन्न हुए । वह वही ग्रथ था जिसकी प्राप्ति के लिए गवेषणा की जा रही थी। उन्होने शिष्यवर्ग को उसका अध्ययन प्रारम्भ करवा दिया । नये मार्ग दर्शन की आवश्यकता कालूगणी के जीवन की अनेक महत्ताओं में से एक महत्ता जन-मानस को बहुत ही प्रभावित करने वाली थी कि उनको जब किसी बात की आवश्यकता होती थी, प्रकृति उससे पूर्व ही उसकी पूर्ति का सामान जुटाकर तैयार रखा करती थी । वह सदा उनके अनुकूल रही थी। उनके जीवन के वे स्वप्न, जिन्हें उन्होंने स्वय एक स्वप्न मात्र ही समझा था, सहज रूप से पूर्ण होते देखे गये । संस्कृत के विषय मे भी उन्होंने जो स्वप्न देखा था, जो कल्पना की थी, उसकी पूर्ति सहज भाव से होती गई और सघ में संस्कृत भाषा का प्रवाह आगे-से-आगे गतिशील बनता चला गया । साधुओं को प्राथमिक व्याकरण-ज्ञान हो चुका था । आगे का कदम तभी उठ सकता था, जब कि कोई विशिष्ट व्याकरणश अपना समय दे । साहित्य क्षेत्र में प्रवेश पाने के लिये भी प्रयास किया जाने लगा था। कालूगणी ने शिष्य वर्ग को उस विषय मे प्रेरित करना प्रारम्भ कर
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पंजाब से फरार अमृतपाल की तलाश में प्रादेशिक खुफिया एजेंसियों के साथ अब आईबी भी सक्रिय हो गई है। इस मामले में खुफिया तरीके से उन लोगों की निगरानी की जा रही है जो पूर्व में पंजाब में फैले आतंकवाद के दौरान संदिग्ध पाए गए थे।
लखीमपुर, जागरण टीमः पंजाब से फरार अमृतपाल की तलाश में प्रादेशिक खुफिया एजेंसियों के साथ अब आईबी भी सक्रिय हो गई है। इस मामले में खुफिया तरीके से उन लोगों की निगरानी की जा रही है, जो पूर्व में पंजाब में फैले आतंकवाद के दौरान संदिग्ध पाए गए थे। इसके लिए पुरानी फाइलों से भी धूल साफ की जा रही है। उधर नेपाल बार्डर पर अलर्ट जारी है और आने- जाने वाले लोगों की सघन तलाशी ली जा रही है तथा आईडी देखने के बाद ही नेपाल जाने दिया जा रहा है।
नब्बे के दशक में पंजाब में फैले आतंकवाद के समय कई दुर्दांत आतंकवादियों ने इस क्षेत्र में शरण ले रखी थी। पुलिस की नजरों में उस समय यहां के कुछ फार्मर संदिग्ध भी थे। उनकी सूची भी बनी थी, लेकिन कालांतर में पंजाब में आतंकवाद खत्म हुआ तो उस सूची की उपयोगिता भी समाप्त हो गई थी, लेकिन अमृतपाल के फरार होने व उसके लखीमपुर होकर नेपाल जाने की संभावना तथा जालंधर पुलिस को उसकी लोकेशन लखीमपुर में मिलने के लेकर प्रादेशिक खुफिया एजेंसियों के साथ आईबी भी सक्रिय हो गई है।
आईबी के साथ अन्य केंद्रीय एजेंसियां भी आतंकवाद पनपने की आशंका को लेकर जांच में जुट गई हैं। इसके लिए नब्बे के दशक में संदिग्ध माने गए लोगों की खुफिया तरीके से निगरानी की जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि उस समय आतंकवादियों के प्रति साॅफ्ट कार्नर रखने वाले लोग अमृतपाल को भी शरण दे सकते हैं और उसके छिपे रहने में सहयोग प्रदान कर सकते हैं। इसलिए खुफिया एजेंसियां उन्हें संदिग्ध मानकर उन पर नजर रख रही हैं।
उधर नेपाल बार्डर पर अभी अलर्ट है। बार्डर पर तैनात एसएसबी व गौरीफंटा पुलिस के साथ पंजाब पुलिस के जवान बेहद सक्रिय हैं। यह जवान नेपाल से आने व जाने वालों की गहन तलाशी ले रहे हैं और उनके पहचान पत्र देखने के बाद ही उन्हें इधर या उधर जाने दे रहे हैं।
बार्डर को जाने वाले रास्तों पर अभी भी पिकेट लगाकर चेकिंग की जा रही है। चौपहिया गाड़ियों में आने वाले लोगों की शक्ल को अमृतपाल के पोस्टरों से मिलाकर ही उन्हें आगे जाने दिया जा रहा है।
इस संबंध में सीओ आदित्य कुमार का कहना है कि शासन के निर्देशों के मुताबिक काम किया जा रहा है। केंद्रीय जांच एजेंसियों के यहां आने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। बॉर्डर पर जरूर सख्ती से तलाशी अभियान चल रहा है।
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पंजाब से फरार अमृतपाल की तलाश में प्रादेशिक खुफिया एजेंसियों के साथ अब आईबी भी सक्रिय हो गई है। इस मामले में खुफिया तरीके से उन लोगों की निगरानी की जा रही है जो पूर्व में पंजाब में फैले आतंकवाद के दौरान संदिग्ध पाए गए थे। लखीमपुर, जागरण टीमः पंजाब से फरार अमृतपाल की तलाश में प्रादेशिक खुफिया एजेंसियों के साथ अब आईबी भी सक्रिय हो गई है। इस मामले में खुफिया तरीके से उन लोगों की निगरानी की जा रही है, जो पूर्व में पंजाब में फैले आतंकवाद के दौरान संदिग्ध पाए गए थे। इसके लिए पुरानी फाइलों से भी धूल साफ की जा रही है। उधर नेपाल बार्डर पर अलर्ट जारी है और आने- जाने वाले लोगों की सघन तलाशी ली जा रही है तथा आईडी देखने के बाद ही नेपाल जाने दिया जा रहा है। नब्बे के दशक में पंजाब में फैले आतंकवाद के समय कई दुर्दांत आतंकवादियों ने इस क्षेत्र में शरण ले रखी थी। पुलिस की नजरों में उस समय यहां के कुछ फार्मर संदिग्ध भी थे। उनकी सूची भी बनी थी, लेकिन कालांतर में पंजाब में आतंकवाद खत्म हुआ तो उस सूची की उपयोगिता भी समाप्त हो गई थी, लेकिन अमृतपाल के फरार होने व उसके लखीमपुर होकर नेपाल जाने की संभावना तथा जालंधर पुलिस को उसकी लोकेशन लखीमपुर में मिलने के लेकर प्रादेशिक खुफिया एजेंसियों के साथ आईबी भी सक्रिय हो गई है। आईबी के साथ अन्य केंद्रीय एजेंसियां भी आतंकवाद पनपने की आशंका को लेकर जांच में जुट गई हैं। इसके लिए नब्बे के दशक में संदिग्ध माने गए लोगों की खुफिया तरीके से निगरानी की जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि उस समय आतंकवादियों के प्रति साॅफ्ट कार्नर रखने वाले लोग अमृतपाल को भी शरण दे सकते हैं और उसके छिपे रहने में सहयोग प्रदान कर सकते हैं। इसलिए खुफिया एजेंसियां उन्हें संदिग्ध मानकर उन पर नजर रख रही हैं। उधर नेपाल बार्डर पर अभी अलर्ट है। बार्डर पर तैनात एसएसबी व गौरीफंटा पुलिस के साथ पंजाब पुलिस के जवान बेहद सक्रिय हैं। यह जवान नेपाल से आने व जाने वालों की गहन तलाशी ले रहे हैं और उनके पहचान पत्र देखने के बाद ही उन्हें इधर या उधर जाने दे रहे हैं। बार्डर को जाने वाले रास्तों पर अभी भी पिकेट लगाकर चेकिंग की जा रही है। चौपहिया गाड़ियों में आने वाले लोगों की शक्ल को अमृतपाल के पोस्टरों से मिलाकर ही उन्हें आगे जाने दिया जा रहा है। इस संबंध में सीओ आदित्य कुमार का कहना है कि शासन के निर्देशों के मुताबिक काम किया जा रहा है। केंद्रीय जांच एजेंसियों के यहां आने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। बॉर्डर पर जरूर सख्ती से तलाशी अभियान चल रहा है।
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फिर मिलेंगे अक्षरा और अभिमन्यु?
कुछ दिनों पहले ये रिश्ता क्या कहलाता है ने एक साल का लीप लिया गया था। इससे अभिमन्यु और अक्षरा के प्रशंसकों का दिल टूट गया था। अब, ये रिश्ता क्या कहलाता है के अपकमिंग एपिसोड में, हम मंजरी को अक्षरा के बारे में अपनी भावनाओं को शेयर करते हुए देखेंगे। वह कहती है कि अक्षु ने जिस तरह अभिमन्यु को छोड़ा, वह उससे नाराज नहीं हुई बल्कि वह उससे नफरत करने लगी है। इधर अक्षरा को कायरव की चिंता है और वह उसे अकेला छोड़कर जयपुर नहीं जाना चाहती। हालांकि, कायरव कहता है कि यह उसकी किस्मत में है और उसे जाने के लिए कहता है। इधर इंडिया में अभिमन्यु भी जयपुर की यात्रा के लिए तैयार है। क्या यह जयपुर होगा जहां दोनों का आमना-सामना होगा?
रूपाली गांगुली, गौरव खन्ना और सुधांशु पांडे स्टारर अनुपमा में अब तक हमने अनु को ठीक होने में अनुज की मदद करते देखा था। अब अनुपमा के आगामी एपिसोड में, हम कपाड़िया परिवार को गणेश चतुर्थी समारोह के लिए गणपति की मूर्ति घर लाते हुए देखेंगे। शाह परिवार, कपाड़िया परिवार में आता है और जाहिर तौर पर उनके बीच कुछ तनाव है। वहीं पूजा के दौरान किंजल उर्फ निधि शाह बीमार पड़ने लगती हैं। उसे अब प्रसव पीड़ा होगी और इसी के साथ कहानी में एक बच्चे का जन्म होगा।
गुम है किसी के प्यार में हमने देखा कि सई और विराट अलग हो चुके हैं। घर से निकलने के बाद, सई और विनायक का एक्सीडेंट हो गया है। जिसके बाद आयशा सिंह उर्फ सई को मृत मान लिया गया है। लीप के बाद विराट और विनायक, पाखी के साथ चव्हाण हाउस के साथ रहते हैं। वहीं, सई अपनी बेटी सावी के साथ कंकौली में रह रही हैं। गुम है किसी के प्यार में के आने वाले एपिसोड में, हम देखेंगे कि अश्विनी आई ने विराट को आगे बढ़ने के लिए कहा क्योंकि सई का निधन हो गया है। विराट का कहना है कि वह अभी भी सईं की यादों से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। दूसरी ओर, सई ने उषा मौशी को विराट के बारे में सच्चाई बताने के लिए फटकार लगाई है। सई के मन में विराट के प्रति कड़वाहट है क्योंकि उसे लगता है कि उसने उसे कभी खोजा ही नहीं। तभी सावी सुनती है और पूछती है कि विराट कौन है?
इमली सबसे लोकप्रिय टीवी शो में से एक है। इसमें आर्यन सिंह राठौर और इमली के रूप में फहमान खान और सुंबुल तौकीर मुख्य भूमिका में हैं। कुछ हफ्ते पहले, इमली शो में एक लीप लिया गया है जिससे प्रशंसक परेशान हो गए। अब, जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ रही है, ऐसा लगता है कि आर्यन और इमली का पुनर्मिलन होगा। इमली कबूल करेगी कि उसे याद करते हुए उसने कभी उससे नफरत नहीं की। वह कबूल करती है कि वह अब भी उससे बहुत प्यार करती है। इसके बाद बड़ा ट्विस्ट आता है। ऐसा लगता है कि सब कुछ एक सपना था। आर्यन उलझन में है कि वास्तव में क्या हुआ था। क्या यह आर्यन-इमली का अंत और नए अध्याय की शुरुआत है जैसा कि रिपोर्ट में दावा किया गया है?
गणेश चतुर्थी समारोह में शामिल होंगे अर्जुन?
श्रद्धा आर्या, मनित जौरा और शक्ति अरोड़ा स्टारर टीवी शो कुंडली भाग्य के अपकमिंग एपिसोड में एक दिलचस्प ट्विस्ट देखने को मिलेगा। राखी, अर्जुन को अपने साथ गणेश चतुर्थी मनाने के लिए आमंत्रित करेंगी। लगता है प्रीता इससे खुश नहीं है। अर्जुन मना कर देता है लेकिन राखी कहती है कि वह उसके साथ अपने सारे रिश्ते खत्म कर देगी। अर्जुन मान जाएगा और गणेश चतुर्थी समारोह में उनके साथ शामिल होने के लिए सहमत हो जाएगा।
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फिर मिलेंगे अक्षरा और अभिमन्यु? कुछ दिनों पहले ये रिश्ता क्या कहलाता है ने एक साल का लीप लिया गया था। इससे अभिमन्यु और अक्षरा के प्रशंसकों का दिल टूट गया था। अब, ये रिश्ता क्या कहलाता है के अपकमिंग एपिसोड में, हम मंजरी को अक्षरा के बारे में अपनी भावनाओं को शेयर करते हुए देखेंगे। वह कहती है कि अक्षु ने जिस तरह अभिमन्यु को छोड़ा, वह उससे नाराज नहीं हुई बल्कि वह उससे नफरत करने लगी है। इधर अक्षरा को कायरव की चिंता है और वह उसे अकेला छोड़कर जयपुर नहीं जाना चाहती। हालांकि, कायरव कहता है कि यह उसकी किस्मत में है और उसे जाने के लिए कहता है। इधर इंडिया में अभिमन्यु भी जयपुर की यात्रा के लिए तैयार है। क्या यह जयपुर होगा जहां दोनों का आमना-सामना होगा? रूपाली गांगुली, गौरव खन्ना और सुधांशु पांडे स्टारर अनुपमा में अब तक हमने अनु को ठीक होने में अनुज की मदद करते देखा था। अब अनुपमा के आगामी एपिसोड में, हम कपाड़िया परिवार को गणेश चतुर्थी समारोह के लिए गणपति की मूर्ति घर लाते हुए देखेंगे। शाह परिवार, कपाड़िया परिवार में आता है और जाहिर तौर पर उनके बीच कुछ तनाव है। वहीं पूजा के दौरान किंजल उर्फ निधि शाह बीमार पड़ने लगती हैं। उसे अब प्रसव पीड़ा होगी और इसी के साथ कहानी में एक बच्चे का जन्म होगा। गुम है किसी के प्यार में हमने देखा कि सई और विराट अलग हो चुके हैं। घर से निकलने के बाद, सई और विनायक का एक्सीडेंट हो गया है। जिसके बाद आयशा सिंह उर्फ सई को मृत मान लिया गया है। लीप के बाद विराट और विनायक, पाखी के साथ चव्हाण हाउस के साथ रहते हैं। वहीं, सई अपनी बेटी सावी के साथ कंकौली में रह रही हैं। गुम है किसी के प्यार में के आने वाले एपिसोड में, हम देखेंगे कि अश्विनी आई ने विराट को आगे बढ़ने के लिए कहा क्योंकि सई का निधन हो गया है। विराट का कहना है कि वह अभी भी सईं की यादों से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। दूसरी ओर, सई ने उषा मौशी को विराट के बारे में सच्चाई बताने के लिए फटकार लगाई है। सई के मन में विराट के प्रति कड़वाहट है क्योंकि उसे लगता है कि उसने उसे कभी खोजा ही नहीं। तभी सावी सुनती है और पूछती है कि विराट कौन है? इमली सबसे लोकप्रिय टीवी शो में से एक है। इसमें आर्यन सिंह राठौर और इमली के रूप में फहमान खान और सुंबुल तौकीर मुख्य भूमिका में हैं। कुछ हफ्ते पहले, इमली शो में एक लीप लिया गया है जिससे प्रशंसक परेशान हो गए। अब, जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ रही है, ऐसा लगता है कि आर्यन और इमली का पुनर्मिलन होगा। इमली कबूल करेगी कि उसे याद करते हुए उसने कभी उससे नफरत नहीं की। वह कबूल करती है कि वह अब भी उससे बहुत प्यार करती है। इसके बाद बड़ा ट्विस्ट आता है। ऐसा लगता है कि सब कुछ एक सपना था। आर्यन उलझन में है कि वास्तव में क्या हुआ था। क्या यह आर्यन-इमली का अंत और नए अध्याय की शुरुआत है जैसा कि रिपोर्ट में दावा किया गया है? गणेश चतुर्थी समारोह में शामिल होंगे अर्जुन? श्रद्धा आर्या, मनित जौरा और शक्ति अरोड़ा स्टारर टीवी शो कुंडली भाग्य के अपकमिंग एपिसोड में एक दिलचस्प ट्विस्ट देखने को मिलेगा। राखी, अर्जुन को अपने साथ गणेश चतुर्थी मनाने के लिए आमंत्रित करेंगी। लगता है प्रीता इससे खुश नहीं है। अर्जुन मना कर देता है लेकिन राखी कहती है कि वह उसके साथ अपने सारे रिश्ते खत्म कर देगी। अर्जुन मान जाएगा और गणेश चतुर्थी समारोह में उनके साथ शामिल होने के लिए सहमत हो जाएगा। Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
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भारत के अभिषेक वर्मा ने अमेरिका के क्रिष स्काफ को शनिवार को टाई ब्रेक में पराजित कर पेरिस तीरंदाजी विश्व कप में पुरुष कम्पाउंड वर्ग का गोल्ड मेडल जीत लिया। अभिषेक और स्काफ दोनों का निर्धारित समय में में स्कोर 148-148 से बराबर रहा था, जिसके बाद टाई ब्रेक का सहारा लिया गया जिसमें अभिषेक ने 10 पर निशाना साध कर गोल्ड अपने नाम कर लिया।
यहां अमेरिकी तीरंदाज नौ पर ही निशाना लगा पाए और उन्हें हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। अभिषेक ने इससे पहले सेमीफाइनल में रूस के एंटोन बुलेव को 146-138 से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई थी, जबकि स्काफ ने भारत के अमन सैनी को नजदीकी मुकाबले में 150-149 से पराजित कर फ़ाइनल में प्रवेश किया था।
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भारत के अभिषेक वर्मा ने अमेरिका के क्रिष स्काफ को शनिवार को टाई ब्रेक में पराजित कर पेरिस तीरंदाजी विश्व कप में पुरुष कम्पाउंड वर्ग का गोल्ड मेडल जीत लिया। अभिषेक और स्काफ दोनों का निर्धारित समय में में स्कोर एक सौ अड़तालीस-एक सौ अड़तालीस से बराबर रहा था, जिसके बाद टाई ब्रेक का सहारा लिया गया जिसमें अभिषेक ने दस पर निशाना साध कर गोल्ड अपने नाम कर लिया। यहां अमेरिकी तीरंदाज नौ पर ही निशाना लगा पाए और उन्हें हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। अभिषेक ने इससे पहले सेमीफाइनल में रूस के एंटोन बुलेव को एक सौ छियालीस-एक सौ अड़तीस से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई थी, जबकि स्काफ ने भारत के अमन सैनी को नजदीकी मुकाबले में एक सौ पचास-एक सौ उनचास से पराजित कर फ़ाइनल में प्रवेश किया था।
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छतरपुर में पहली महिला पुलिस को महिला दिवस पर सम्मानित किया गया। जहां यह सम्मान छतरपुर की सावित्री देवी सोनी (जो अब रिटायर्ड हो चुकी हैं) को पुलिस लाइन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम में दिया गया।
इस दौरान छतरपुर रेंज के डीआईजी विवेक राज सिंह, जिला कलेक्टर संदीप जी आर, पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह साहिल टाइल के अजेल अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे। इस गरिमामय कार्यक्रम में जिले की फर्स्ट लेडी पुलिस से मिलकर डीआईजी विवेक राज सिंह बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने सोनी से उनकी शिक्षा के बारे में जानकारी ली। कार्यक्रम में अन्य महिला पुलिस कर्मचारियों और अधिकारियों को भी सम्मानित किया।
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छतरपुर में पहली महिला पुलिस को महिला दिवस पर सम्मानित किया गया। जहां यह सम्मान छतरपुर की सावित्री देवी सोनी को पुलिस लाइन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम में दिया गया। इस दौरान छतरपुर रेंज के डीआईजी विवेक राज सिंह, जिला कलेक्टर संदीप जी आर, पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह साहिल टाइल के अजेल अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे। इस गरिमामय कार्यक्रम में जिले की फर्स्ट लेडी पुलिस से मिलकर डीआईजी विवेक राज सिंह बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने सोनी से उनकी शिक्षा के बारे में जानकारी ली। कार्यक्रम में अन्य महिला पुलिस कर्मचारियों और अधिकारियों को भी सम्मानित किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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Quick links:
दोनों के बीच खेले गए आखिरी मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings) की जीत हुई थी। चेन्नई सुपर किंग्स ने फाइनल की सीट पक्की करने के लिए क्वालिफायर 1 में गुजरात टाइटंस (Gujarat Titans) को हराया था। गुजरात टाइटंस ने शुक्रवार को क्वालिफायर 2 में मुंबई इंडियंस को मात देकर फाइनल में जगह बनाई है।
चेन्नई के लिए इस सीजन में कॉन्वे 625 रन, ऋतुराज गायकवाड 564 रन और अजिंक्य रहाणे 13 मैचों में 299 रन बना चुके हैं जबकि शिवम दुबे ने 386 रन बनाए हैं। इस IPL में दुबे 33 छक्के लगा चुके हैं। गेंदबाजी में पथिराना ने 17 और देशपांडे ने 21 विकेट लिए हैं। हेड टू हेड की बात करें तो दोनों टीमों के बीच अब तक कुल चार मुकाबले खेले जा चुके हैं, जिसमें तीन बार गुजरात को और एक बार चेन्नई को जीत मिली है। हेड टू हेड की बात करें तो दोनों टीमों के बीच अब तक कुल चार मुकाबले खेले जा चुके हैं, जिसमें तीन बार गुजरात को और एक बार चेन्नई को जीत मिली है।
चेन्नई सुपर किंग्स ने लीग चरण के अपने 14 में से 8 मुकाबले जीते हैं। वह अंक तालिका में दूसरे स्थान पर रही थी। दूसरी ओर गुजरात टाइटंस ने लीग चरण में अपने 14 में से 10 मैच में जीते थे। वह अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर रही थी। आईपीएल 2023 के फाइनल में चेन्नई और गुजरात अपनी-अपनी प्लेइंग इलेवन में एक-एक बदलाव कर सकती हैं।
ये भी पढ़ें- CSK Vs GT Head To Head: 5वीं बार मुकाबला जीतना चाहेगी चेन्नई, हेड टू हेड रिकॉर्ड में किसका पलड़ा भारी?
गुजरात टाइटंस : हार्दिक पंड्या (कप्तान), शुभमन गिल, ऋद्धिमान साहा (विकेटकीपर), डेविड मिलर, राहुल तेवतिया, विजय शंकर, राशिद खान, नूर अहमद, मोहम्मद शमी, मोहित शर्मा और जोशुआ लिटिल।
चेन्नई सुपर किंग्स : महेंद्र सिंह धोनी (कप्तान), डेवोन कॉन्वे, ऋतुराज गायकवाड, अजिंक्य रहाणे, शिवम दुबे, मोईन अली, रवींद्र जडेजा, दीपक चाहर, महीश तीक्षणा, मथीश पथिराना और तुषार देशपांडे।
ये भी पढ़ें- CSK Vs GT Final Live Score: धोनी लगाएंगे 'पंच' या हार्दिक की गुजरात बनेगी चैंपियन?
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Quick links: दोनों के बीच खेले गए आखिरी मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स की जीत हुई थी। चेन्नई सुपर किंग्स ने फाइनल की सीट पक्की करने के लिए क्वालिफायर एक में गुजरात टाइटंस को हराया था। गुजरात टाइटंस ने शुक्रवार को क्वालिफायर दो में मुंबई इंडियंस को मात देकर फाइनल में जगह बनाई है। चेन्नई के लिए इस सीजन में कॉन्वे छः सौ पच्चीस रन, ऋतुराज गायकवाड पाँच सौ चौंसठ रन और अजिंक्य रहाणे तेरह मैचों में दो सौ निन्यानवे रन बना चुके हैं जबकि शिवम दुबे ने तीन सौ छियासी रन बनाए हैं। इस IPL में दुबे तैंतीस छक्के लगा चुके हैं। गेंदबाजी में पथिराना ने सत्रह और देशपांडे ने इक्कीस विकेट लिए हैं। हेड टू हेड की बात करें तो दोनों टीमों के बीच अब तक कुल चार मुकाबले खेले जा चुके हैं, जिसमें तीन बार गुजरात को और एक बार चेन्नई को जीत मिली है। हेड टू हेड की बात करें तो दोनों टीमों के बीच अब तक कुल चार मुकाबले खेले जा चुके हैं, जिसमें तीन बार गुजरात को और एक बार चेन्नई को जीत मिली है। चेन्नई सुपर किंग्स ने लीग चरण के अपने चौदह में से आठ मुकाबले जीते हैं। वह अंक तालिका में दूसरे स्थान पर रही थी। दूसरी ओर गुजरात टाइटंस ने लीग चरण में अपने चौदह में से दस मैच में जीते थे। वह अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर रही थी। आईपीएल दो हज़ार तेईस के फाइनल में चेन्नई और गुजरात अपनी-अपनी प्लेइंग इलेवन में एक-एक बदलाव कर सकती हैं। ये भी पढ़ें- CSK Vs GT Head To Head: पाँचवीं बार मुकाबला जीतना चाहेगी चेन्नई, हेड टू हेड रिकॉर्ड में किसका पलड़ा भारी? गुजरात टाइटंस : हार्दिक पंड्या , शुभमन गिल, ऋद्धिमान साहा , डेविड मिलर, राहुल तेवतिया, विजय शंकर, राशिद खान, नूर अहमद, मोहम्मद शमी, मोहित शर्मा और जोशुआ लिटिल। चेन्नई सुपर किंग्स : महेंद्र सिंह धोनी , डेवोन कॉन्वे, ऋतुराज गायकवाड, अजिंक्य रहाणे, शिवम दुबे, मोईन अली, रवींद्र जडेजा, दीपक चाहर, महीश तीक्षणा, मथीश पथिराना और तुषार देशपांडे। ये भी पढ़ें- CSK Vs GT Final Live Score: धोनी लगाएंगे 'पंच' या हार्दिक की गुजरात बनेगी चैंपियन?
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दुकान में घुसकर पति-पत्नी से मारपीट करने के मामले में रैगर समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। चित्तौड़गढ़ प्रधान और डगला का खेड़ा सरपंच के बेटे सहित 30 जनों पर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। समाज के लोगों का कहना है कि विकलांग आदमी पर झूठे आरोप लगाकर जेल भेज दिया और मारपीट भी की। ग्रामीणों ने एसपी और कलेक्टर के सामने अपनी बात रखी।
मेवाड़ रेगर समाज सुधार समिति के जिलाध्यक्ष अंबालाल ने बताया कि 12 अप्रैल महीने को विकलांग नारूलाल की किराने की दुकान पर 9 साल की एक बच्ची सामान खरीदने गई थी। उसने बच्ची को उधार सामान देने से मना कर दिया था।
इस बात पर प्रधान देवेंद्र कवर और सरपंच रणजीत सिंह भाटी के बेटे इंद्रजीत सिंह भाटी ने अपने 30 साथियों के साथ नारूलाल रेगर की दुकान में तोड़फोड़ की थी। नगदी भी चुराकर ले गए थे। नारूलाल पर पॉक्सो का फर्जी मामला भी दर्ज कर जेल भेज दिया। जैसे इस बात की जानकारी गांव वालों को हुई तो सभी भड़क गए।
नारूलाल रेगर की पत्नी रमाबाई ने भी कहा कि नारूलाल पर गलत केस लगाया गया। उस दिन घर पर आकर मारपीट और लूटपाट की गई थी। गुस्साए ग्रामीण और रेगर समाज के लोग सोमवार को कलेक्ट्रेट में एकत्रित हुए और जमकर नारेबाजी की। कलेक्ट्रेट में मानव श्रंखला बनाकर जमकर प्रदर्शन किया।
कलेक्टर अरविंद कुमार पोसवाल और एसपी राजन दुष्यंत के सामने अपनी बात रखी और निष्पक्ष जांच करने की मांग की। रमाबाई ने दोनों से ही उनके पति के साथ मारपीट करने वाले और लूटपाट करने वाले के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।
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दुकान में घुसकर पति-पत्नी से मारपीट करने के मामले में रैगर समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। चित्तौड़गढ़ प्रधान और डगला का खेड़ा सरपंच के बेटे सहित तीस जनों पर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। समाज के लोगों का कहना है कि विकलांग आदमी पर झूठे आरोप लगाकर जेल भेज दिया और मारपीट भी की। ग्रामीणों ने एसपी और कलेक्टर के सामने अपनी बात रखी। मेवाड़ रेगर समाज सुधार समिति के जिलाध्यक्ष अंबालाल ने बताया कि बारह अप्रैल महीने को विकलांग नारूलाल की किराने की दुकान पर नौ साल की एक बच्ची सामान खरीदने गई थी। उसने बच्ची को उधार सामान देने से मना कर दिया था। इस बात पर प्रधान देवेंद्र कवर और सरपंच रणजीत सिंह भाटी के बेटे इंद्रजीत सिंह भाटी ने अपने तीस साथियों के साथ नारूलाल रेगर की दुकान में तोड़फोड़ की थी। नगदी भी चुराकर ले गए थे। नारूलाल पर पॉक्सो का फर्जी मामला भी दर्ज कर जेल भेज दिया। जैसे इस बात की जानकारी गांव वालों को हुई तो सभी भड़क गए। नारूलाल रेगर की पत्नी रमाबाई ने भी कहा कि नारूलाल पर गलत केस लगाया गया। उस दिन घर पर आकर मारपीट और लूटपाट की गई थी। गुस्साए ग्रामीण और रेगर समाज के लोग सोमवार को कलेक्ट्रेट में एकत्रित हुए और जमकर नारेबाजी की। कलेक्ट्रेट में मानव श्रंखला बनाकर जमकर प्रदर्शन किया। कलेक्टर अरविंद कुमार पोसवाल और एसपी राजन दुष्यंत के सामने अपनी बात रखी और निष्पक्ष जांच करने की मांग की। रमाबाई ने दोनों से ही उनके पति के साथ मारपीट करने वाले और लूटपाट करने वाले के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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। निजी
।। सरकारी
। नवीन परती
। कृष्णावती पत्नी स्व0 रामसेवक नि0
। समरहदा, श्रीमती सुनाथा पत्नी
। देवताप्रसाद नि0डीह, श्रीमती शान्तीदेवी
। पत्नी सन्तप्रसाद नि0ग्राम, राजदेई पत्नी
। शम्भू नि0बलईमउ, मो0सईद खां पुत्र
। हसनरजा नि०ग्राम, श्रीमती रामकुमारी
। पत्नी पिताम्बर नि0 किशनपुर, श्रीमती
। प्रियंका सिंह पत्नी अखिलेश सिंह नि०दुसौती, श्रीमती अमरावती सिंह पत्नी
[PART II - SEC. 3 (ii)]
गोकरन सिंह नि0दुसौती, ईश्वरदेई पत्नी
। रामकेतार निOताजपुर, श्रीमती राजेश्वरी पत्नी छेदीलाल नि०पूरे तकिया (1211)
। मुन्नाखां, रियाजअहमद, इम्तियाज
।अहमद, इसरार अहमद, इजहार अहमद
। पुत्रगण स्व0 मो0 सगीर खां नि0
। रूकुनपुर, अकबरीबेगम पत्नी
। स्व0सगीरखां नि0 रूकुनपुर, संग्रामसिंह
पुत्र राजकरनसिंह नि0 दुसौती, शिवमोहन
। सिंह पुत्र राजकरन सिंह नि0दुसौती,
। शहीदुननिशा पत्नी मो0 वशीमखां ।नि0सिधौना, गयाप्रसाद, राजबहादुर, अखिलेशकुमार, अरविन्दकुमार पुत्रगण सुन्दरलाल नि0खसपरी, श्रीमती विशुना पत्नी गुरूप्रसाद नि0रसूलपुर, भगतराम । पुत्र महादेव नि० पूरे छेदाखां, रामरती
। पत्नी रामअवध नि0थरूइया,
। कमलेशकुमार पुत्र रामनाथ
नि0समरहदा, अनिलकुमार मौर्य पुत्र ।दुर्जनप्रसाद मौर्य नि0खदरी
संगमलाल पुत्र शिवनरायन निOताजपुर, । नियाजअहमद पुत्र खदीन खां नि0ग्राम, ।सफीकखां उर्फ सप्फू पुत्र मो0 उमर नि0रूकुनपुर
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। निजी ।। सरकारी । नवीन परती । कृष्णावती पत्नी स्वशून्य रामसेवक निशून्य । समरहदा, श्रीमती सुनाथा पत्नी । देवताप्रसाद निशून्यडीह, श्रीमती शान्तीदेवी । पत्नी सन्तप्रसाद निशून्य ग्राम, राजदेई पत्नी । शम्भू निशून्यबलईमउ, मोशून्यसईद खां पुत्र । हसनरजा निशून्य ग्राम, श्रीमती रामकुमारी । पत्नी पिताम्बर निशून्य किशनपुर, श्रीमती । प्रियंका सिंह पत्नी अखिलेश सिंह निशून्यदुसौती, श्रीमती अमरावती सिंह पत्नी [PART II - SEC. तीन ] गोकरन सिंह निशून्यदुसौती, ईश्वरदेई पत्नी । रामकेतार निOताजपुर, श्रीमती राजेश्वरी पत्नी छेदीलाल निशून्यपूरे तकिया । मुन्नाखां, रियाजअहमद, इम्तियाज ।अहमद, इसरार अहमद, इजहार अहमद । पुत्रगण स्वशून्य मोशून्य सगीर खां निशून्य । रूकुनपुर, अकबरीबेगम पत्नी । स्वशून्यसगीरखां निशून्य रूकुनपुर, संग्रामसिंह पुत्र राजकरनसिंह निशून्य दुसौती, शिवमोहन । सिंह पुत्र राजकरन सिंह निशून्यदुसौती, । शहीदुननिशा पत्नी मोशून्य वशीमखां ।निशून्यसिधौना, गयाप्रसाद, राजबहादुर, अखिलेशकुमार, अरविन्दकुमार पुत्रगण सुन्दरलाल निशून्यखसपरी, श्रीमती विशुना पत्नी गुरूप्रसाद निशून्यरसूलपुर, भगतराम । पुत्र महादेव निशून्य पूरे छेदाखां, रामरती । पत्नी रामअवध निशून्यथरूइया, । कमलेशकुमार पुत्र रामनाथ निशून्यसमरहदा, अनिलकुमार मौर्य पुत्र ।दुर्जनप्रसाद मौर्य निशून्यखदरी संगमलाल पुत्र शिवनरायन निOताजपुर, । नियाजअहमद पुत्र खदीन खां निशून्य ग्राम, ।सफीकखां उर्फ सप्फू पुत्र मोशून्य उमर निशून्यरूकुनपुर
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वर्ष 2014-15 का आम बजट पेश कर दिया. बतौर वित्त मंत्री यह उनका और उनकी सरकार का पहला बजट है. लोगों ने भाजपा या नरेंद्र मोदी को इस उम्मीद के साथ लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दिलाई थी कि सरकार उनकी मूलभूत समस्याएं हल करने की पहल करेगी. आम लोगों को सरकार से अच्छी एवं सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की अपेक्षा थी. अब सवाल यह उठता है कि अरुण जेटली ने अपने बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए जो घोषणाएं की हैं, क्या वे लोगों की ज़रूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त हैं? क्या अब देश के ग़रीब से ग़रीब शख्स को सस्ता और सही इलाज मिल सकेगा? क्या देश के निजी सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में ग़रीबों का इलाज हो सकेगा? 2013-14 के आर्थिक सर्वेक्षण में देश में स्वास्थ्य कर्मियों की कमी की बात कही गई है, क्या उस कमी को दूर करने के लिए सरकार कोई ठोस क़दम उठाएगी?
भाजपा ने चुनाव के दौरान किए गए सबके लिए स्वास्थ्य के अपने वादे को पूरा करते हुए इस बजट में सबके लिए स्वास्थ्य अभियान की शुरुआत की घोषणा की है, जिसके तहत मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर निःशुल्क दवाएं देने और निःशुल्क जांच की बात कही गई है. ज़ाहिर है कि यह एक बहुत अच्छी घोषणा है, इसका सीधा लाभ देश के ग़रीब एवं वंचित वर्ग के लोगों को मिलेगा. हालांकि, इस योजना के लिए अलग से कोई राशि आवंटित नहीं की गई है. जो आवंटन स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए किया गया है, वह इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने के लिए नाकाफी है. यूपीए सरकार ने वर्ष 2012 में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त औषधि वितरण की घोषणा की थी, लेकिन उसके लिए अलग से धन आवंटित न किए जाने से योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका. जेटली ने बजट भाषण में यह बात भी स्पष्ट नहीं की कि महंगी लाइफ सेविंग ड्रग्स (ज़िंदगी बचाने वाली दवाएं) मुफ्त बांटी जाने वाली दवाओं की सूची में शामिल हैं अथवा नहीं.
वित्त मंत्री ने अपने बजट में टीबी के मरीजों की शीघ्र गुणवत्ता पूर्ण डाइग्नोसिस एवं इलाज के लिए एम्स, नई दिल्ली और मद्रास मेडिकल कॉलेज, चेन्नई में दो नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एजिंग स्थपित करने की घोषणा की है. साथ ही हायर डेंटल स्टडीज के लिए राष्ट्रीय स्तर का एक अनुसंधान एवं रेफरल संस्थान बनाने की भी घोषणा की गई है. डब्ल्यूएचओ की वर्ष 2011 की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व में टीबी के मरीज़ों की संख्या 87 लाख है, जिनमें से 20-25 लाख मरीज़ भारत में हैं. टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में टीबी की वजह से हर मिनट एक मौत हो जाती है. ऐसा नहीं है कि टीबी कोई लाइलाज मर्ज़ है, लेकिन समय पर जांच के अभाव और दवा का कोर्स पूरा न हो पाने के चलते अधिकांश मौतें होती हैं. इस लिहाज़ से बजट में टीबी के इलाज और जांच को प्राथमिकता देना एक अच्छा क़दम है.
वर्ष 2013-14 के आर्थिक सर्वेक्षण में स्वास्थ्य कर्मियों की कमी दूर करने के लिए उपायों पर अमल करने की बात कही गई थी. साथ ही देश के सुदूर क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण इलाज का अभाव दूर करने के लिए प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत स्थापित जोधपुर, भोपाल, पटना, ऋषिकेश, भुवनेश्वर एवं रायपुर स्थित छह नए एम्स ने काम करना शुरू कर दिया है. इसी योजना के क्रम में आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र के विदर्भ एवं उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में एम्स जैसे चार और संस्थान स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके लिए 500 करोड़ रुपये की धनराशि अलग से आवंटित करने की बात कही गई है (यह अलग बात है कि उक्त रकम ऐसे संस्थान स्थापित करने के लिए बहुत कम है). हाल में 58 सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है. इस बजट में 12 और सरकारी मेडिकल कॉलेज बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया है. ज़ाहिर है, इससे न स़िर्फ देश में चिकित्सकों की कमी दूर की जा सकेगी, बल्कि दिल्ली के एम्स जैसे अस्पतालों का बोझ भी कम किया जा सकेगा. लेकिन, साथ ही इस बात का भी ख्याल रखना ज़रूरी है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पास होने वाले चिकित्सकों द्वारा एक खास अवधि तक देश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में अपनी सेवाएं देने को अनिवार्य बनाया जाए.
नई जांच प्रयोगशालाओं की स्थापना और पहले से मौजूद 31 राज्य प्रयोगशालाओं को मज़बूत बनाकर स्टेट ड्रग्स एंड फूड रेगुलेटरी सिस्टम मज़बूत करने के लिए इस बजट में पहली बार केंद्रीय सहायता देने का प्रावधान रखा गया है. इससे दवाओं की खपत में बढ़ोतरी होगी, साथ ही देश में दवा कंपनियों की पहुंच भी बढ़ेगी. और, इस प्रावधान से जो दवा कंपनियां जेनेरिक दवाएं (जो पेटेंट के दायरे से बाहर हैं) मनमाने ढंग से बेचती हैं, उन पर भी किसी हद तक शिकंजा कसा जा सकेगा. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी दूर करने के लिए मौजूदा बजट में विशेष जोर दिया गया है. यहां मर्ज़ का पता चलते-चलते अधिकांश मामलों में बहुत देर हो चुकी होती है और मरीज़ की मौत हो जाती है. इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सुधारने एवं बेहतर हेेल्थ केयर सुविधाओं के लिए सरकार प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण पर विशेष जोर देगी, जिसके तहत पंद्रह आदर्श ग्रामीण स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान स्थापित किए जाएंगे, जो ग्रामीण आबादी से संबंधित स्थानीय स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर अनुसंधान करेंगे. यह घोषणा इस लिहाज़ से महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रामक बीमारियां फैल जाती हैं, जिससे कई लोगों की जान चली जाती है. मसलन, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में फैलने वाली इंसेफलाइटिस जैसी बीमारियों पर इस अनुसंधान के जरिये काबू पाया जा सकता है.
आयुर्वेद, योग, यूनानी एवं होम्योपैथी के मद में भी पिछले साल की तुलना में 36 फ़ीसद अधिक बजट आवंटित किया गया है, जो इन पद्धतियों के विकास के लिए एक अच्छा क़दम है. प्राइवेट हेल्थ केयर इंडस्ट्री के लिए भी सरकार ने बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान में निवेश के कुछ प्रावधान करने की घोषणा की है, जिसके तहत फरीदाबाद एवं बंगलुरू में बायोटेक क्लस्टर विकसित करने की योजना है. इसके अलावा, बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 26 फ़ीसद से बढ़ाकर 49 फ़ीसद करना भी एक अच्छी ख़बर है. इस बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र में आम लोगों (विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों) के लिए कुछ अच्छी घोषणाएं की गई हैं. यदि इन घोषणाओं पर अमल होता है, तो इसका लाभ निश्चित रूप से देश की आम जनता को होगा. लेकिन, बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटित की गई धनराशि कोई बहुत ही खुशनुमा तस्वीर पेश नहीं कर रही है, क्योंकि इस वर्ष स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के मद में कुल 37,330 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो वर्ष 2013-14 में यूपीए सरकार द्वारा इस मद में आवंटित की गई धनराशि की तुलना में केवल 4. 8 फ़ीसद अधिक है. यह बजट नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (एनआरएचएम) जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर खामोश है. इसमें यह भी नहीं बताया गया है कि जीडीपी का कितना फ़ीसद इस क्षेत्र को दिया जाएगा (वर्ष 2013-14 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए जीडीपी का केवल 1. 4 फ़ीसद खर्च किया गया था). इसमें यह भी साफ़ नहीं किया गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं को सबके लिए कैसे सुलभ बनाया जाएगा. अब देखना यह है कि सरकार ने देश की जनता से जो वादा किया है, उसे वह निभाएगी या पिछली सरकार की बहुत सारी घोषणाओं की तरह मोदी सरकार की घोषणाएं भी कागज़ी साबित होंगी.
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वर्ष 2014-15 का आम बजट पेश कर दिया. बतौर वित्त मंत्री यह उनका और उनकी सरकार का पहला बजट है. लोगों ने भाजपा या नरेंद्र मोदी को इस उम्मीद के साथ लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दिलाई थी कि सरकार उनकी मूलभूत समस्याएं हल करने की पहल करेगी. आम लोगों को सरकार से अच्छी एवं सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की अपेक्षा थी. अब सवाल यह उठता है कि अरुण जेटली ने अपने बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए जो घोषणाएं की हैं, क्या वे लोगों की ज़रूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त हैं? क्या अब देश के ग़रीब से ग़रीब शख्स को सस्ता और सही इलाज मिल सकेगा? क्या देश के निजी सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में ग़रीबों का इलाज हो सकेगा? 2013-14 के आर्थिक सर्वेक्षण में देश में स्वास्थ्य कर्मियों की कमी की बात कही गई है, क्या उस कमी को दूर करने के लिए सरकार कोई ठोस क़दम उठाएगी?
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वर्ष दो हज़ार चौदह-पंद्रह का आम बजट पेश कर दिया. बतौर वित्त मंत्री यह उनका और उनकी सरकार का पहला बजट है. लोगों ने भाजपा या नरेंद्र मोदी को इस उम्मीद के साथ लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दिलाई थी कि सरकार उनकी मूलभूत समस्याएं हल करने की पहल करेगी. आम लोगों को सरकार से अच्छी एवं सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की अपेक्षा थी. अब सवाल यह उठता है कि अरुण जेटली ने अपने बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए जो घोषणाएं की हैं, क्या वे लोगों की ज़रूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त हैं? क्या अब देश के ग़रीब से ग़रीब शख्स को सस्ता और सही इलाज मिल सकेगा? क्या देश के निजी सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में ग़रीबों का इलाज हो सकेगा? दो हज़ार तेरह-चौदह के आर्थिक सर्वेक्षण में देश में स्वास्थ्य कर्मियों की कमी की बात कही गई है, क्या उस कमी को दूर करने के लिए सरकार कोई ठोस क़दम उठाएगी? भाजपा ने चुनाव के दौरान किए गए सबके लिए स्वास्थ्य के अपने वादे को पूरा करते हुए इस बजट में सबके लिए स्वास्थ्य अभियान की शुरुआत की घोषणा की है, जिसके तहत मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर निःशुल्क दवाएं देने और निःशुल्क जांच की बात कही गई है. ज़ाहिर है कि यह एक बहुत अच्छी घोषणा है, इसका सीधा लाभ देश के ग़रीब एवं वंचित वर्ग के लोगों को मिलेगा. हालांकि, इस योजना के लिए अलग से कोई राशि आवंटित नहीं की गई है. जो आवंटन स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए किया गया है, वह इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने के लिए नाकाफी है. यूपीए सरकार ने वर्ष दो हज़ार बारह में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त औषधि वितरण की घोषणा की थी, लेकिन उसके लिए अलग से धन आवंटित न किए जाने से योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका. जेटली ने बजट भाषण में यह बात भी स्पष्ट नहीं की कि महंगी लाइफ सेविंग ड्रग्स मुफ्त बांटी जाने वाली दवाओं की सूची में शामिल हैं अथवा नहीं. वित्त मंत्री ने अपने बजट में टीबी के मरीजों की शीघ्र गुणवत्ता पूर्ण डाइग्नोसिस एवं इलाज के लिए एम्स, नई दिल्ली और मद्रास मेडिकल कॉलेज, चेन्नई में दो नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एजिंग स्थपित करने की घोषणा की है. साथ ही हायर डेंटल स्टडीज के लिए राष्ट्रीय स्तर का एक अनुसंधान एवं रेफरल संस्थान बनाने की भी घोषणा की गई है. डब्ल्यूएचओ की वर्ष दो हज़ार ग्यारह की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व में टीबी के मरीज़ों की संख्या सत्तासी लाख है, जिनमें से बीस-पच्चीस लाख मरीज़ भारत में हैं. टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में टीबी की वजह से हर मिनट एक मौत हो जाती है. ऐसा नहीं है कि टीबी कोई लाइलाज मर्ज़ है, लेकिन समय पर जांच के अभाव और दवा का कोर्स पूरा न हो पाने के चलते अधिकांश मौतें होती हैं. इस लिहाज़ से बजट में टीबी के इलाज और जांच को प्राथमिकता देना एक अच्छा क़दम है. वर्ष दो हज़ार तेरह-चौदह के आर्थिक सर्वेक्षण में स्वास्थ्य कर्मियों की कमी दूर करने के लिए उपायों पर अमल करने की बात कही गई थी. साथ ही देश के सुदूर क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण इलाज का अभाव दूर करने के लिए प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत स्थापित जोधपुर, भोपाल, पटना, ऋषिकेश, भुवनेश्वर एवं रायपुर स्थित छह नए एम्स ने काम करना शुरू कर दिया है. इसी योजना के क्रम में आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र के विदर्भ एवं उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में एम्स जैसे चार और संस्थान स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके लिए पाँच सौ करोड़ रुपये की धनराशि अलग से आवंटित करने की बात कही गई है . हाल में अट्ठावन सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है. इस बजट में बारह और सरकारी मेडिकल कॉलेज बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया है. ज़ाहिर है, इससे न स़िर्फ देश में चिकित्सकों की कमी दूर की जा सकेगी, बल्कि दिल्ली के एम्स जैसे अस्पतालों का बोझ भी कम किया जा सकेगा. लेकिन, साथ ही इस बात का भी ख्याल रखना ज़रूरी है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पास होने वाले चिकित्सकों द्वारा एक खास अवधि तक देश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में अपनी सेवाएं देने को अनिवार्य बनाया जाए. नई जांच प्रयोगशालाओं की स्थापना और पहले से मौजूद इकतीस राज्य प्रयोगशालाओं को मज़बूत बनाकर स्टेट ड्रग्स एंड फूड रेगुलेटरी सिस्टम मज़बूत करने के लिए इस बजट में पहली बार केंद्रीय सहायता देने का प्रावधान रखा गया है. इससे दवाओं की खपत में बढ़ोतरी होगी, साथ ही देश में दवा कंपनियों की पहुंच भी बढ़ेगी. और, इस प्रावधान से जो दवा कंपनियां जेनेरिक दवाएं मनमाने ढंग से बेचती हैं, उन पर भी किसी हद तक शिकंजा कसा जा सकेगा. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी दूर करने के लिए मौजूदा बजट में विशेष जोर दिया गया है. यहां मर्ज़ का पता चलते-चलते अधिकांश मामलों में बहुत देर हो चुकी होती है और मरीज़ की मौत हो जाती है. इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सुधारने एवं बेहतर हेेल्थ केयर सुविधाओं के लिए सरकार प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण पर विशेष जोर देगी, जिसके तहत पंद्रह आदर्श ग्रामीण स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान स्थापित किए जाएंगे, जो ग्रामीण आबादी से संबंधित स्थानीय स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर अनुसंधान करेंगे. यह घोषणा इस लिहाज़ से महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रामक बीमारियां फैल जाती हैं, जिससे कई लोगों की जान चली जाती है. मसलन, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में फैलने वाली इंसेफलाइटिस जैसी बीमारियों पर इस अनुसंधान के जरिये काबू पाया जा सकता है. आयुर्वेद, योग, यूनानी एवं होम्योपैथी के मद में भी पिछले साल की तुलना में छत्तीस फ़ीसद अधिक बजट आवंटित किया गया है, जो इन पद्धतियों के विकास के लिए एक अच्छा क़दम है. प्राइवेट हेल्थ केयर इंडस्ट्री के लिए भी सरकार ने बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान में निवेश के कुछ प्रावधान करने की घोषणा की है, जिसके तहत फरीदाबाद एवं बंगलुरू में बायोटेक क्लस्टर विकसित करने की योजना है. इसके अलावा, बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा छब्बीस फ़ीसद से बढ़ाकर उनचास फ़ीसद करना भी एक अच्छी ख़बर है. इस बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र में आम लोगों के लिए कुछ अच्छी घोषणाएं की गई हैं. यदि इन घोषणाओं पर अमल होता है, तो इसका लाभ निश्चित रूप से देश की आम जनता को होगा. लेकिन, बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवंटित की गई धनराशि कोई बहुत ही खुशनुमा तस्वीर पेश नहीं कर रही है, क्योंकि इस वर्ष स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के मद में कुल सैंतीस,तीन सौ तीस करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो वर्ष दो हज़ार तेरह-चौदह में यूपीए सरकार द्वारा इस मद में आवंटित की गई धनराशि की तुलना में केवल चार. आठ फ़ीसद अधिक है. यह बजट नेशनल रूरल हेल्थ मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर खामोश है. इसमें यह भी नहीं बताया गया है कि जीडीपी का कितना फ़ीसद इस क्षेत्र को दिया जाएगा . इसमें यह भी साफ़ नहीं किया गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं को सबके लिए कैसे सुलभ बनाया जाएगा. अब देखना यह है कि सरकार ने देश की जनता से जो वादा किया है, उसे वह निभाएगी या पिछली सरकार की बहुत सारी घोषणाओं की तरह मोदी सरकार की घोषणाएं भी कागज़ी साबित होंगी. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वर्ष दो हज़ार चौदह-पंद्रह का आम बजट पेश कर दिया. बतौर वित्त मंत्री यह उनका और उनकी सरकार का पहला बजट है. लोगों ने भाजपा या नरेंद्र मोदी को इस उम्मीद के साथ लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दिलाई थी कि सरकार उनकी मूलभूत समस्याएं हल करने की पहल करेगी. आम लोगों को सरकार से अच्छी एवं सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की अपेक्षा थी. अब सवाल यह उठता है कि अरुण जेटली ने अपने बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए जो घोषणाएं की हैं, क्या वे लोगों की ज़रूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त हैं? क्या अब देश के ग़रीब से ग़रीब शख्स को सस्ता और सही इलाज मिल सकेगा? क्या देश के निजी सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में ग़रीबों का इलाज हो सकेगा? दो हज़ार तेरह-चौदह के आर्थिक सर्वेक्षण में देश में स्वास्थ्य कर्मियों की कमी की बात कही गई है, क्या उस कमी को दूर करने के लिए सरकार कोई ठोस क़दम उठाएगी?
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न्यूयॉर्क। न्यूयॉर्क में 54 वर्षीय एक व्यक्ति को एक सबवे में भारतीय मूल की एक महिला पर द्वेषपूर्ण हमले और समलैंगिक फब्तियां कसने के कारण गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने कहा कि मैनहट्टन के पूर्वी हरलेम के रहने वाले अल्लाशीद अल्लाह को गुरुवार को गिरफ्तार किया गया और उस पर न्यूयॉर्क शहर के क्वींस बोरोह में 30 नवंबर को 20 वर्षीय अवनीत कौर पर द्वेषपूर्ण अपराध व हिंसक हमला करने का आरोप है।
एनबीसी न्यूज की शुक्रवार की रिपोर्ट के मुताबिक, अल्लाह पर आरोप है कि उसने महिला पर हमला करने से पहले उस पर समलैंगिक फब्तियां भी कसी। हमले में महिला की रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर आया है। आरोपी को 15 साल तक की जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है। अदालत में उसकी अगली पेशी 27 दिसंबर को है।
घटना के दौरान पीड़िता एक अन्य महिला के साथ क्वींस में शाम के वक्त मैनहट्टन की ओर जाने वाली ट्रेन में यात्रा कर रही थी।
पुलिस के मुताबिक, कौर ने कहा कि स्नैपचैट करते वक्त उसकी महिला मित्र ने उसके गाल पर पर किस किया। यह देखकर अल्लाह को गुस्सा आ गया और वह उनसे झगड़ने लगा।
पुलिस ने कहा कि महिला ने वहां से निकलने का प्रयास किया, लेकिन अल्लाह ने उसका पीछा किया। उसने कौर को पीछे से पकड़ा और उसके सिर के नीचे घूंसा मारा, जिससे वह जमीन पर गिर गई और गिरने से पहले उसका सिर व गला एक खंभे से टकरा गया।
पीड़िता को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने बताया कि उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई है।
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न्यूयॉर्क। न्यूयॉर्क में चौवन वर्षीय एक व्यक्ति को एक सबवे में भारतीय मूल की एक महिला पर द्वेषपूर्ण हमले और समलैंगिक फब्तियां कसने के कारण गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने कहा कि मैनहट्टन के पूर्वी हरलेम के रहने वाले अल्लाशीद अल्लाह को गुरुवार को गिरफ्तार किया गया और उस पर न्यूयॉर्क शहर के क्वींस बोरोह में तीस नवंबर को बीस वर्षीय अवनीत कौर पर द्वेषपूर्ण अपराध व हिंसक हमला करने का आरोप है। एनबीसी न्यूज की शुक्रवार की रिपोर्ट के मुताबिक, अल्लाह पर आरोप है कि उसने महिला पर हमला करने से पहले उस पर समलैंगिक फब्तियां भी कसी। हमले में महिला की रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर आया है। आरोपी को पंद्रह साल तक की जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है। अदालत में उसकी अगली पेशी सत्ताईस दिसंबर को है। घटना के दौरान पीड़िता एक अन्य महिला के साथ क्वींस में शाम के वक्त मैनहट्टन की ओर जाने वाली ट्रेन में यात्रा कर रही थी। पुलिस के मुताबिक, कौर ने कहा कि स्नैपचैट करते वक्त उसकी महिला मित्र ने उसके गाल पर पर किस किया। यह देखकर अल्लाह को गुस्सा आ गया और वह उनसे झगड़ने लगा। पुलिस ने कहा कि महिला ने वहां से निकलने का प्रयास किया, लेकिन अल्लाह ने उसका पीछा किया। उसने कौर को पीछे से पकड़ा और उसके सिर के नीचे घूंसा मारा, जिससे वह जमीन पर गिर गई और गिरने से पहले उसका सिर व गला एक खंभे से टकरा गया। पीड़िता को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने बताया कि उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई है।
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लखनऊ। ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ में स्थापना दिवस के उपलक्ष में मनाए जा रहे तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन विश्विद्यालय कुलपति प्रो. एनबी सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रो एनबी सिंह ने सभी विद्यार्थियों से कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। मंच का संचालन डा. रूचिता सुजॉय चौधरी ने किया।
पहले दिन डिबेट, ऐड मैड, बैत बाज़ी, माइम तथा स्पोर्ट्स में टेबल टेनिस और शॉर्ट पुट प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें विश्वविद्यालय तथा अन्य विश्विद्यालय और डिग्री कॉलेज के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर प्रतिभाग किया। इस क्रम में पहली प्रतियोगिता वाद विवाद की हुई जिसमें 30 से ज्यादा विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया एवं उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. फखरे आलम तथा यूनिटी डिग्री कॉलेज से प्रो. सैयद सिब्ते हसन नकवी निर्णायक रहे।
ऐड मैड प्रतियोगिता में कुल पांच टीमों ने तथा माइम प्रतियोगिता में कुल छह टीमों ने प्रतिभाग किया। जिसके निर्णयक मंडल में शिक्षा शास्त्र विभाग से प्रो. नलिनी मिश्रा तथा एनएससीबी गर्ल्स डिग्री कॉलेज से लेफ्टिनेंट डा. प्रतिमा शर्मा रहीं साथ ही इस प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. नीरज शुक्ल भी उपस्थित रहे। बैत बाज़ी प्रतियोगिता में कुल छह टीमों ने प्रतिभाग किया।
कोजैक के अंतरगत खेल कूद प्रतियोगिताएं भी आयोजित हुई जिसमें विश्वविद्यालय के कुलपति ने स्वयं टेबल टेनिस खेल कर विद्यार्थियों को फिट रहने का संदेश दिया। टेबल टेनिस में 26 और शॉर्ट पुट में 13 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। इन प्रतियोगिताओं में लखनऊ विश्वविद्यालय इंटीग्रेल विश्वविद्यालय, इस्लामिया इंटर कॉलेज, एरा विश्विद्यालय, सिटी विमेन्स कॉलेज एवं अन्य कॉलेजों के विद्यार्थियों हिस्सा लिया।
कल मेहंदी, फोटोग्राफी, शॉर्ट वीडियो आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
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लखनऊ। ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ में स्थापना दिवस के उपलक्ष में मनाए जा रहे तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन विश्विद्यालय कुलपति प्रो. एनबी सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रो एनबी सिंह ने सभी विद्यार्थियों से कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। मंच का संचालन डा. रूचिता सुजॉय चौधरी ने किया। पहले दिन डिबेट, ऐड मैड, बैत बाज़ी, माइम तथा स्पोर्ट्स में टेबल टेनिस और शॉर्ट पुट प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें विश्वविद्यालय तथा अन्य विश्विद्यालय और डिग्री कॉलेज के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर प्रतिभाग किया। इस क्रम में पहली प्रतियोगिता वाद विवाद की हुई जिसमें तीस से ज्यादा विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया एवं उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. फखरे आलम तथा यूनिटी डिग्री कॉलेज से प्रो. सैयद सिब्ते हसन नकवी निर्णायक रहे। ऐड मैड प्रतियोगिता में कुल पांच टीमों ने तथा माइम प्रतियोगिता में कुल छह टीमों ने प्रतिभाग किया। जिसके निर्णयक मंडल में शिक्षा शास्त्र विभाग से प्रो. नलिनी मिश्रा तथा एनएससीबी गर्ल्स डिग्री कॉलेज से लेफ्टिनेंट डा. प्रतिमा शर्मा रहीं साथ ही इस प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. नीरज शुक्ल भी उपस्थित रहे। बैत बाज़ी प्रतियोगिता में कुल छह टीमों ने प्रतिभाग किया। कोजैक के अंतरगत खेल कूद प्रतियोगिताएं भी आयोजित हुई जिसमें विश्वविद्यालय के कुलपति ने स्वयं टेबल टेनिस खेल कर विद्यार्थियों को फिट रहने का संदेश दिया। टेबल टेनिस में छब्बीस और शॉर्ट पुट में तेरह विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। इन प्रतियोगिताओं में लखनऊ विश्वविद्यालय इंटीग्रेल विश्वविद्यालय, इस्लामिया इंटर कॉलेज, एरा विश्विद्यालय, सिटी विमेन्स कॉलेज एवं अन्य कॉलेजों के विद्यार्थियों हिस्सा लिया। कल मेहंदी, फोटोग्राफी, शॉर्ट वीडियो आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
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बिग बॅास 11 में अब लोगों का असली चेहरा सबके सामने दिखाई दे रहा है। इस सीजन को खत्म होने में महज चार वीक बचे हैं। ऐसे में हर कोई गेम में बने रहने के लिए प्लानिंग कर रहा है।
इसी प्लानिंग के कारण हितेन तेजवानी घर से बाहर हो गए। हितेन के बाहर होने का सबसे बड़ा असर शिल्पा शिंदे पर पड़ा है। सलमान खान से लेकर सोशल मीडिया तक हर कोई हितेन के घर से बाहर होने की खबर पर हैरान और दुखी है।
खासकर शिल्पा शिंदे के गेम में बने रहने के कारण हितेन को बाहर निकालने का फैसला अब नफरत में बदल चुका है। तभी तो सोशल मीडिया पर इस बार हिना नहीं शिल्पा के खिलाफ आवाज उठ रही है।
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जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
Rama Fights the Demons अरण्यकाण्ड वाल्मीकि कृत रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस का एक भाग (काण्ड या सोपान) है। कुछ काल के पश्चात राम ने चित्रकूट से प्रयाण किया तथा वे अत्रि ऋषि के आश्रम पहुँचे। अत्रि ने राम की स्तुति की और उनकी पत्नी अनसूया ने सीता को पातिव्रत धर्म के मर्म समझाये। वहाँ से फिर राम ने आगे प्रस्थान किया और शरभंग मुनि से भेंट की। शरभंग मुनि केवल राम के दर्शन की कामना से वहाँ निवास कर रहे थे अतः राम के दर्शनों की अपनी अभिलाषा पूर्ण हो जाने से योगाग्नि से अपने शरीर को जला डाला और ब्रह्मलोक को गमन किया। और आगे बढ़ने पर राम को स्थान स्थान पर हड्डियों के ढेर दिखाई पड़े जिनके विषय में मुनियों ने राम को बताया कि राक्षसों ने अनेक मुनियों को खा डाला है और उन्हीं मुनियों की हड्डियाँ हैं। इस पर राम ने प्रतिज्ञा की कि वे समस्त राक्षसों का वध करके पृथ्वी को राक्षस विहीन कर देंगे। राम और आगे बढ़े और पथ में सुतीक्ष्ण, अगस्त्य आदि ऋषियों से भेंट करते हुये दण्डक वन में प्रवेश किया जहाँ पर उनकी मुलाकात जटायु से हुई। राम ने पंचवटी को अपना निवास स्थान बनाया। सीता हरण (चित्रकारः रवि वर्मा) पंचवटी में रावण की बहन शूर्पणखा ने आकर राम से प्रणय निवेदन-किया। राम ने यह कह कर कि वे अपनी पत्नी के साथ हैं और उनका छोटा भाई अकेला है उसे लक्ष्मण के पास भेज दिया। लक्ष्मण ने उसके प्रणय-निवेदन को अस्वीकार करते हुये शत्रु की बहन जान कर उसके नाक और कान काट लिये। शूर्पणखा ने खर-दूषण से सहायता की मांग की और वह अपनी सेना के साथ लड़ने के लिये आ गया। लड़ाई में राम ने खर-दूषण और उसकी सेना का संहार कर डाला। शूर्पणखा ने जाकर अपने भाई रावण से शिकायत की। रावण ने बदला लेने के लिये मारीच को स्वर्णमृग बना कर भेजा जिसकी छाल की मांग सीता ने राम से की। लक्ष्मण को सीता के रक्षा की आज्ञा दे कर राम स्वर्णमृग रूपी मारीच को मारने के लिये उसके पीछे चले गये। मारीच के हाथों मारा गया पर मरते मरते मारीच ने राम की आवाज बना कर 'हा लक्ष्मण' का क्रन्दन किया जिसे सुन कर सीता ने आशंकावश होकर लक्ष्मण को राम के पास भेज दिया। लक्ष्मण के जाने के बाद अकेली सीता का रावण ने छलपूर्वक हरण कर लिया और अपने साथ लंका ले गया। रास्ते में जटायु ने सीता को बचाने के लिये रावण से युद्ध किया और रावण ने उसके पंख काटकर उसे अधमरा कर दिया। सीता को न पा कर राम अत्यंत दुखी हुये और विलाप करने लगे। रास्ते में जटायु से भेंट होने पर उसने राम को रावण के द्वारा अपनी दुर्दशा होने व सीता को हर कर दक्षिण दिशा की ओर ले जाने की बात बताई। ये सब बताने के बाद जटायु ने अपने प्राण त्याग दिये और राम उसका अंतिम संस्कार करके सीता की खोज में सघन वन के भीतर आगे बढ़े। रास्ते में राम ने दुर्वासा के शाप के कारण राक्षस बने गन्धर्व कबन्ध का वध करके उसका उद्धार किया और शबरी के आश्रम जा पहुँचे जहाँ पर कि उसके द्वारा दिये गये झूठे बेरों को उसके भक्ति के वश में होकर खाया। इस प्रकार राम सीता की खोज में सघन वन के अंदर आगे बढ़ते गये। . श्रीराम को फल अर्पण करते हुए शबरी शबरी एक भिलनी थी.
अरण्यकाण्ड और शबरी आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): रामायण, श्रीरामचरितमानस।
रामायण आदि कवि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया संस्कृत का एक अनुपम महाकाव्य है। इसके २४,००० श्लोक हैं। यह हिन्दू स्मृति का वह अंग हैं जिसके माध्यम से रघुवंश के राजा राम की गाथा कही गयी। इसे आदिकाव्य तथा इसके रचयिता महर्षि वाल्मीकि को 'आदिकवि' भी कहा जाता है। रामायण के सात अध्याय हैं जो काण्ड के नाम से जाने जाते हैं। .
गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीरामचरितमानस का आवरण श्री राम चरित मानस अवधी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा १६वीं सदी में रचित एक महाकाव्य है। इस ग्रन्थ को हिंदी साहित्य की एक महान कृति माना जाता है। इसे सामान्यतः 'तुलसी रामायण' या 'तुलसीकृत रामायण' भी कहा जाता है। रामचरितमानस भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है। उत्तर भारत में 'रामायण' के रूप में बहुत से लोगों द्वारा प्रतिदिन पढ़ा जाता है। शरद नवरात्रि में इसके सुन्दर काण्ड का पाठ पूरे नौ दिन किया जाता है। रामायण मण्डलों द्वारा शनिवार को इसके सुन्दरकाण्ड का पाठ किया जाता है। श्री रामचरित मानस के नायक राम हैं जिनको एक महाशक्ति के रूप में दर्शाया गया है जबकि महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण में श्री राम को एक मानव के रूप में दिखाया गया है। तुलसी के प्रभु राम सर्वशक्तिमान होते हुए भी मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। त्रेता युग में हुए ऐतिहासिक राम-रावण युद्ध पर आधारित और हिन्दी की ही एक लोकप्रिय भाषा अवधी में रचित रामचरितमानस को विश्व के १०० सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय काव्यों में ४६वाँ स्थान दिया गया। .
अरण्यकाण्ड 36 संबंध है और शबरी 6 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 4.76% है = 2 / (36 + 6)।
यह लेख अरण्यकाण्ड और शबरी के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। Rama Fights the Demons अरण्यकाण्ड वाल्मीकि कृत रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस का एक भाग है। कुछ काल के पश्चात राम ने चित्रकूट से प्रयाण किया तथा वे अत्रि ऋषि के आश्रम पहुँचे। अत्रि ने राम की स्तुति की और उनकी पत्नी अनसूया ने सीता को पातिव्रत धर्म के मर्म समझाये। वहाँ से फिर राम ने आगे प्रस्थान किया और शरभंग मुनि से भेंट की। शरभंग मुनि केवल राम के दर्शन की कामना से वहाँ निवास कर रहे थे अतः राम के दर्शनों की अपनी अभिलाषा पूर्ण हो जाने से योगाग्नि से अपने शरीर को जला डाला और ब्रह्मलोक को गमन किया। और आगे बढ़ने पर राम को स्थान स्थान पर हड्डियों के ढेर दिखाई पड़े जिनके विषय में मुनियों ने राम को बताया कि राक्षसों ने अनेक मुनियों को खा डाला है और उन्हीं मुनियों की हड्डियाँ हैं। इस पर राम ने प्रतिज्ञा की कि वे समस्त राक्षसों का वध करके पृथ्वी को राक्षस विहीन कर देंगे। राम और आगे बढ़े और पथ में सुतीक्ष्ण, अगस्त्य आदि ऋषियों से भेंट करते हुये दण्डक वन में प्रवेश किया जहाँ पर उनकी मुलाकात जटायु से हुई। राम ने पंचवटी को अपना निवास स्थान बनाया। सीता हरण पंचवटी में रावण की बहन शूर्पणखा ने आकर राम से प्रणय निवेदन-किया। राम ने यह कह कर कि वे अपनी पत्नी के साथ हैं और उनका छोटा भाई अकेला है उसे लक्ष्मण के पास भेज दिया। लक्ष्मण ने उसके प्रणय-निवेदन को अस्वीकार करते हुये शत्रु की बहन जान कर उसके नाक और कान काट लिये। शूर्पणखा ने खर-दूषण से सहायता की मांग की और वह अपनी सेना के साथ लड़ने के लिये आ गया। लड़ाई में राम ने खर-दूषण और उसकी सेना का संहार कर डाला। शूर्पणखा ने जाकर अपने भाई रावण से शिकायत की। रावण ने बदला लेने के लिये मारीच को स्वर्णमृग बना कर भेजा जिसकी छाल की मांग सीता ने राम से की। लक्ष्मण को सीता के रक्षा की आज्ञा दे कर राम स्वर्णमृग रूपी मारीच को मारने के लिये उसके पीछे चले गये। मारीच के हाथों मारा गया पर मरते मरते मारीच ने राम की आवाज बना कर 'हा लक्ष्मण' का क्रन्दन किया जिसे सुन कर सीता ने आशंकावश होकर लक्ष्मण को राम के पास भेज दिया। लक्ष्मण के जाने के बाद अकेली सीता का रावण ने छलपूर्वक हरण कर लिया और अपने साथ लंका ले गया। रास्ते में जटायु ने सीता को बचाने के लिये रावण से युद्ध किया और रावण ने उसके पंख काटकर उसे अधमरा कर दिया। सीता को न पा कर राम अत्यंत दुखी हुये और विलाप करने लगे। रास्ते में जटायु से भेंट होने पर उसने राम को रावण के द्वारा अपनी दुर्दशा होने व सीता को हर कर दक्षिण दिशा की ओर ले जाने की बात बताई। ये सब बताने के बाद जटायु ने अपने प्राण त्याग दिये और राम उसका अंतिम संस्कार करके सीता की खोज में सघन वन के भीतर आगे बढ़े। रास्ते में राम ने दुर्वासा के शाप के कारण राक्षस बने गन्धर्व कबन्ध का वध करके उसका उद्धार किया और शबरी के आश्रम जा पहुँचे जहाँ पर कि उसके द्वारा दिये गये झूठे बेरों को उसके भक्ति के वश में होकर खाया। इस प्रकार राम सीता की खोज में सघन वन के अंदर आगे बढ़ते गये। . श्रीराम को फल अर्पण करते हुए शबरी शबरी एक भिलनी थी. अरण्यकाण्ड और शबरी आम में दो बातें हैं : रामायण, श्रीरामचरितमानस। रामायण आदि कवि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया संस्कृत का एक अनुपम महाकाव्य है। इसके चौबीस,शून्य श्लोक हैं। यह हिन्दू स्मृति का वह अंग हैं जिसके माध्यम से रघुवंश के राजा राम की गाथा कही गयी। इसे आदिकाव्य तथा इसके रचयिता महर्षि वाल्मीकि को 'आदिकवि' भी कहा जाता है। रामायण के सात अध्याय हैं जो काण्ड के नाम से जाने जाते हैं। . गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीरामचरितमानस का आवरण श्री राम चरित मानस अवधी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा सोलहवीं सदी में रचित एक महाकाव्य है। इस ग्रन्थ को हिंदी साहित्य की एक महान कृति माना जाता है। इसे सामान्यतः 'तुलसी रामायण' या 'तुलसीकृत रामायण' भी कहा जाता है। रामचरितमानस भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है। उत्तर भारत में 'रामायण' के रूप में बहुत से लोगों द्वारा प्रतिदिन पढ़ा जाता है। शरद नवरात्रि में इसके सुन्दर काण्ड का पाठ पूरे नौ दिन किया जाता है। रामायण मण्डलों द्वारा शनिवार को इसके सुन्दरकाण्ड का पाठ किया जाता है। श्री रामचरित मानस के नायक राम हैं जिनको एक महाशक्ति के रूप में दर्शाया गया है जबकि महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण में श्री राम को एक मानव के रूप में दिखाया गया है। तुलसी के प्रभु राम सर्वशक्तिमान होते हुए भी मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। त्रेता युग में हुए ऐतिहासिक राम-रावण युद्ध पर आधारित और हिन्दी की ही एक लोकप्रिय भाषा अवधी में रचित रामचरितमानस को विश्व के एक सौ सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय काव्यों में छियालीसवाँ स्थान दिया गया। . अरण्यकाण्ड छत्तीस संबंध है और शबरी छः है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक चार.छिहत्तर% है = दो / । यह लेख अरण्यकाण्ड और शबरी के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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लखनऊ के पीजीआई थाना इलाके के वृंदावन कॉलोनी सेक्टर-14 में हिस्ट्रीशीटर प्रॉपर्टी डीलर दुर्गेश यादव की हत्या उसी के अवैध असलहे से की गई थी। यह दावा पुलिस ने किया है। लेकिन खुलासे पर सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी पिटाई के बाद जान बचाकर भाग रहे अर्धनग्न दुर्गेश ने . 32 बोर का रिवाल्वर कब और कैसे हासिल कर लिया।
इस सवाल पर पुलिस चुप है। कारतूस दुर्गेश के बैग से बरामद हुए हैं। वहीं, बृहस्पतिवार को हत्याकांड के एक और आरोपी संतोष को पुलिस ने दिल्ली बॉर्डर के पास से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पूछताछ की जा रही है। मालूम हो कि मुख्य आरोपी पलक ठाकुर और मनीष यादव को बुधवार को ही पकड़ लिया था।
वारदात सचिवालय में समीक्षा अधिकारी अजय यादव के मकान पर हुई थी। जहां दुर्गेश यादव, मानवेंद्र सिंह, अभय कुमार, सोवेंद्र यादव और संजीत कुमार किराए पर रहते थे। डीसीपी पूर्वी चारू निगम के मुताबिक, दुर्गेश यादव ने पलक व मनीष से एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम लेकर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया था।
दुर्गेश की तलाश में विधानभवन व सचिवालय के चक्कर लगाने के दौरान पलक व मनीष की मुलाकात हुई। दोनों ने फिर मिलकर दुर्गेश की तलाश शुरू की। पलक को जब बुधवार को दुर्गेश के वृंदावन कॉलोनी में होने की सूचना मिली तो वह वहां जा पहुंची।
इसके बाद मनीष को भी बुला लिया। जहां दोनों ने साथियों के साथ मिलकर ने दुर्गेश को जमकर पीटा। वीडियो भी बनाया। दुर्गेश भागने लगा तो खींचतान हुई। आरोपियों ने बताया कि दुर्गेश अवैध असलहे से पलक पर हमला करने की कोशिश कर रहा था। खींचतान में रिवॉल्वर मनीष के हाथ लगी और ट्रिगर दब गया। गोली सीधी दुर्गेश को जा लगी।
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लखनऊ के पीजीआई थाना इलाके के वृंदावन कॉलोनी सेक्टर-चौदह में हिस्ट्रीशीटर प्रॉपर्टी डीलर दुर्गेश यादव की हत्या उसी के अवैध असलहे से की गई थी। यह दावा पुलिस ने किया है। लेकिन खुलासे पर सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी पिटाई के बाद जान बचाकर भाग रहे अर्धनग्न दुर्गेश ने . बत्तीस बोर का रिवाल्वर कब और कैसे हासिल कर लिया। इस सवाल पर पुलिस चुप है। कारतूस दुर्गेश के बैग से बरामद हुए हैं। वहीं, बृहस्पतिवार को हत्याकांड के एक और आरोपी संतोष को पुलिस ने दिल्ली बॉर्डर के पास से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पूछताछ की जा रही है। मालूम हो कि मुख्य आरोपी पलक ठाकुर और मनीष यादव को बुधवार को ही पकड़ लिया था। वारदात सचिवालय में समीक्षा अधिकारी अजय यादव के मकान पर हुई थी। जहां दुर्गेश यादव, मानवेंद्र सिंह, अभय कुमार, सोवेंद्र यादव और संजीत कुमार किराए पर रहते थे। डीसीपी पूर्वी चारू निगम के मुताबिक, दुर्गेश यादव ने पलक व मनीष से एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम लेकर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया था। दुर्गेश की तलाश में विधानभवन व सचिवालय के चक्कर लगाने के दौरान पलक व मनीष की मुलाकात हुई। दोनों ने फिर मिलकर दुर्गेश की तलाश शुरू की। पलक को जब बुधवार को दुर्गेश के वृंदावन कॉलोनी में होने की सूचना मिली तो वह वहां जा पहुंची। इसके बाद मनीष को भी बुला लिया। जहां दोनों ने साथियों के साथ मिलकर ने दुर्गेश को जमकर पीटा। वीडियो भी बनाया। दुर्गेश भागने लगा तो खींचतान हुई। आरोपियों ने बताया कि दुर्गेश अवैध असलहे से पलक पर हमला करने की कोशिश कर रहा था। खींचतान में रिवॉल्वर मनीष के हाथ लगी और ट्रिगर दब गया। गोली सीधी दुर्गेश को जा लगी।
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भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने पहली बार पूरी तरह से स्वदेशी तरीके से विकसित विकसित न्यूमोकोकल पॉलीसैकराइड कंजुगेट टीके को बाजार में बेचने की मंजूरी दे दी है। यह टीका मेसर्स सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, पुणे द्वारा विकसित किया गया है। सीरम संस्थान ने देश में सबसे पहले न्यूमोकोकल पॉलीसैकराइड कंजुगेट वैक्सीन के चरण I, चरण II और चरण III के नैदानिक परीक्षणों के लिए डीसीजीआई से स्वीकृति प्राप्त की थी। स्वीकृति मिलने के बाद से ये परीक्षण देश के भीतर किए जा रहे हैं। कंपनी ने इस टीके का नैदानिक परीक्षण जांबिया में भी किया है।
परीक्षणों के बाद कंपनी ने इस टीके को बनाने की अनुमति के लिए आवेदन किया। अनुमति प्रदान करने से पहले एक विशेष विशेषज्ञ समिति (एसईसी) की मदद से भारतीय औषधि महानियंत्रक के कार्यालय द्वारा नैदानिक परीक्षणों के पूरे डेटा के साथ आवेदन की समीक्षा की गई। इसके बाद समिति ने टीके को बाजार में बेचने की अनुमति देने की सिफारिश की। मेसर्स सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को 14 जुलाई 2020 को घरेलू रूप से विकसित पहले न्यूमोकोकल पॉलीसैकराइड कंजुगेट टीके को बनाने की अनुमति दी गई। निमोनिया के इलाज के लिए स्वेदशी तकनीक से विकसित यह अपने किस्म का पहला टीका है। इससे पहले तक देश में ऐसे टीकों की मांग आयात के जरिए पूरी की जाती रही, क्योंकि ऐसा टीका बनाने वाली सभी कंपनियां विदेशों में थीं।
यह टीका शिशुओं में "स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया" के कारण होने वाले रोग और निमोनिया के खिलाफ सक्रिय टीकाकरण अभियान के लिए उपयोग किया जाता है। यह टीका इंजेक्शन के जरिए सीधे मांसपेशियों में दिया जाता है।
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भारतीय औषधि महानियंत्रक ने पहली बार पूरी तरह से स्वदेशी तरीके से विकसित विकसित न्यूमोकोकल पॉलीसैकराइड कंजुगेट टीके को बाजार में बेचने की मंजूरी दे दी है। यह टीका मेसर्स सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, पुणे द्वारा विकसित किया गया है। सीरम संस्थान ने देश में सबसे पहले न्यूमोकोकल पॉलीसैकराइड कंजुगेट वैक्सीन के चरण I, चरण II और चरण III के नैदानिक परीक्षणों के लिए डीसीजीआई से स्वीकृति प्राप्त की थी। स्वीकृति मिलने के बाद से ये परीक्षण देश के भीतर किए जा रहे हैं। कंपनी ने इस टीके का नैदानिक परीक्षण जांबिया में भी किया है। परीक्षणों के बाद कंपनी ने इस टीके को बनाने की अनुमति के लिए आवेदन किया। अनुमति प्रदान करने से पहले एक विशेष विशेषज्ञ समिति की मदद से भारतीय औषधि महानियंत्रक के कार्यालय द्वारा नैदानिक परीक्षणों के पूरे डेटा के साथ आवेदन की समीक्षा की गई। इसके बाद समिति ने टीके को बाजार में बेचने की अनुमति देने की सिफारिश की। मेसर्स सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को चौदह जुलाई दो हज़ार बीस को घरेलू रूप से विकसित पहले न्यूमोकोकल पॉलीसैकराइड कंजुगेट टीके को बनाने की अनुमति दी गई। निमोनिया के इलाज के लिए स्वेदशी तकनीक से विकसित यह अपने किस्म का पहला टीका है। इससे पहले तक देश में ऐसे टीकों की मांग आयात के जरिए पूरी की जाती रही, क्योंकि ऐसा टीका बनाने वाली सभी कंपनियां विदेशों में थीं। यह टीका शिशुओं में "स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया" के कारण होने वाले रोग और निमोनिया के खिलाफ सक्रिय टीकाकरण अभियान के लिए उपयोग किया जाता है। यह टीका इंजेक्शन के जरिए सीधे मांसपेशियों में दिया जाता है।
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जैसा कि आप पसंद करते हैं, प्यार का विषय नाटक के लिए केंद्र है, और लगभग हर दृश्य इसे एक या दूसरे तरीके से संदर्भित करता है।
शेक्सपियर अलग-अलग धारणाओं और प्यार की प्रस्तुतियों की एक श्रृंखला का उपयोग करता है जैसे आप इसे पसंद करते हैं ; निचले वर्ग के पात्रों के बेवकूफ प्यार से सबकुछ महारानी के सौहार्दपूर्ण प्यार के लिए।
जैसा कि आप इसे पसंद करते हैं प्यार के प्रकार :
यह Rosalind और ऑरलैंडो के बीच केंद्रीय संबंध में प्रदर्शित किया गया है। पात्र जल्दी प्यार में पड़ते हैं और उनका प्यार प्यार कविता और पेड़ों पर नक्काशी में व्यक्त किया जाता है। यह एक सज्जन प्रेम है लेकिन इसे दूर करने की आवश्यकता वाले बाधाओं से भरा हुआ है। इस प्रकार का प्यार टचस्टोन द्वारा कमजोर होता है जो इस प्रकार के प्यार को बेईमानी के रूप में वर्णित करता है; "सबसे कविता कविता सबसे ज्यादा चिंतित है"। (अधिनियम 3, दृश्य 2)।
शादी करने के लिए ऑरलैंडो को कई बाधाओं को दूर करना है; उसका प्यार रोज़लिंड द्वारा परीक्षण किया जाता है और यह वास्तविक साबित हुआ। हालांकि, रोज़लिंड और ऑरलैंडो ने गैनीमेड के छिपे बिना केवल दो बार मुलाकात की। इसलिए कहना मुश्किल है कि क्या वे वास्तव में एक-दूसरे को जानते हैं।
Rosalind अवास्तविक नहीं है, हालांकि, और वह रोमांटिक प्यार के लुभाने पक्ष का आनंद लेती है, वह जानता है कि यह जरूरी नहीं है, यही कारण है कि वह उसके लिए ऑरलैंडो के प्यार का परीक्षण करती है।
Rosalind के लिए रोमांटिक प्यार पर्याप्त नहीं है उसे पता होना चाहिए कि यह उससे गहरा है।
टचस्टोन और ऑड्रे रोज़लिंड और ऑरलैंडो के पात्रों के लिए एक पन्नी के रूप में कार्य करते हैं। वे रोमांटिक प्यार के बारे में क्रोधित हैं और उनका रिश्ता प्रेम के भौतिक पक्ष पर आधारित है; "बाद में आलसी आ सकती है" (अधिनियम 3, दृश्य 2)।
सबसे पहले, वे सीधे पेड़ के नीचे शादी करने में प्रसन्न हैं, जो उनकी प्राचीन इच्छाओं को दर्शाता है। उन्हें दूर करने के लिए कोई बाधा नहीं है, वे वहां और उसके साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। टचस्टोन भी कहता है कि इससे उसे छोड़ने का बहाना मिलेगा; ". . . अच्छी शादी नहीं हो रही है, इसके बाद मेरे लिए मेरी पत्नी छोड़ने के लिए यह एक अच्छा बहाना होगा" (अधिनियम 3, दृश्य 2)। ऑड्रे के दिखने के बारे में टचस्टोन अनिवार्य है लेकिन उसे अपनी ईमानदारी के लिए प्यार करता है।
दर्शकों को यह तय करने का मौका दिया जाता है कि किस तरह का प्यार अधिक ईमानदार है। सौहार्दपूर्ण प्यार को शिष्ट और आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो बेवकूफ प्यार के विरोध में शिष्टाचार और उपस्थिति के आधार पर सतही के रूप में देखा जा सकता है।
सेलीया और रोज़लिंड के बीच यह स्पष्ट रूप से स्पष्ट है क्योंकि सेलीया जंगल में रोज़लिंड में शामिल होने के लिए अपने घर और विशेषाधिकारों को छोड़ देता है। जोड़ी वास्तव में बहन नहीं है बल्कि बिना किसी शर्त के एक दूसरे का समर्थन करती है।
जैसा कि आप इसे पसंद करते हैं , वैसे ही भाई-बहन प्यार की गंभीर कमी है। ओलिवर अपने भाई ऑरलैंडो से नफरत करता है और उसे मरना चाहता है। ड्यूक फ्रेडरिक ने अपने भाई ड्यूक सीनियर को निर्वासित कर दिया है और अपने ड्यूकेडॉम (टेम्पेस्ट में एंटोनियो और प्रॉस्परो की याद दिलाते हुए) को उखाड़ फेंक दिया है।
हालांकि, कुछ हद तक, इस प्यार को बहाल किया गया है कि ओलिवर में दिल का चमत्कारी परिवर्तन होता है जब ऑरलैंडो बहादुरी से उसे शेर से गुस्सा होने से बचाता है और ड्यूक फ्रेडरिक एक पवित्र व्यक्ति से बात करने के बाद धर्म पर विचार करने के लिए गायब हो जाता है, जो ड्यूक सीनियर को अपने बहाल किए गए ड्यूकडॉम की पेशकश करता है ।
ऐसा प्रतीत होता है कि जंगल दोनों बुराई भाइयों (ओलिवर और ड्यूक फ्रेडरिक) में चरित्र के परिवर्तन के लिए ज़िम्मेदार है। जंगल में प्रवेश करने पर ड्यूक और ओलिवर दोनों में दिल का परिवर्तन होता है। संभवतया जंगल खुद को पुरुषों की जरूरतों को चुनौती देता है, जो उनकी मानवता को साबित करने के मामले में अदालत में स्पष्ट नहीं था (चार्ल्स कुश्ती के रूप में? )। जानवरों और शिकार की आवश्यकता संभवतः परिवार के सदस्यों पर हमला करने की आवश्यकता को बदल देती है?
ड्यूक फ्रेडरिक अपनी बेटी सेलीया से प्यार करता है और उसे इसमें शामिल कर दिया है कि उसने रोज़लिंद को रहने की इजाजत दी है। जब उसके दिल में परिवर्तन होता है और रोज़लिंड को खत्म करना चाहता है तो वह अपनी बेटी सेलीया के लिए ऐसा करता है, मानते हैं कि रोज़लिंद अपनी बेटी को ढकता है कि वह लम्बे और अधिक सुंदर है। वह यह भी मानते हैं कि लोग रोज़लिंद को खत्म करने के लिए उनके और उनकी बेटी पर प्रतिकूल रूप से देखेंगे।
सेलीया वफादारी पर अपने पिता के प्रयासों को खारिज कर देती है और उसे जंगल में रोज़लिंड में शामिल होने के लिए छोड़ देती है। उसका प्यार उसके गलत काम के कारण कुछ हद तक अनिश्चित है। ड्यूक सीन रोज़लिंड से प्यार करता है लेकिन जब वह गैनीमेड के रूप में छिपी हुई है तो उसे पहचानने में विफल रहता है - परिणामस्वरूप वे विशेष रूप से बंद नहीं हो सकते हैं। रोज़लिंड ने जेल में अपने पिता से जुड़ने की तुलना में सेलीया के साथ अदालत में रहना पसंद किया।
जैसा कि चर्चा की गई, ड्यूक फ्रेडरिक का बेटी अपनी बेटी के लिए प्यार कुछ हद तक अनिश्चित है। हालांकि, मुख्य पात्र जो इस श्रेणी के प्रेम का प्रतिनिधित्व करते हैं वे सिल्वियस और फोबे और फोबे और गैनीमेडे हैं।
सिल्वियस एक प्यार-बीमार पिल्ला की तरह फोबे का अनुसरण करता है और वह उसे घृणा करती है, जितना अधिक वह उससे ज्यादा घृणा करता है उतना ही वह उससे प्यार करता है।
ये पात्र रोज़लिंड और ऑरलैंडो के लिए एक पन्नी के रूप में भी काम करते हैं - अधिक ऑरलैंडो रोज़लिंड से प्यार से बोलता है जितना वह उससे प्यार करता है। नाटक के अंत में सिल्वियस और फोबे की जोड़ी शायद कम से कम संतोषजनक है कि फोबे केवल सिल्वियस से शादी कर रही है क्योंकि वह गैनीमेड को अस्वीकार करने पर सहमत हो गई है। इसलिए यह आवश्यक रूप से स्वर्ग में एक मैच नहीं है। (हालांकि यह किसी भी पात्र के बारे में कहा जा सकता है - टचस्टोन और ऑड्रे प्यार में हैं क्योंकि यह सुविधाजनक है, ओलिवर और सेलीया ने केवल थोड़ी देर से मुलाकात की है और वह किसी और के रूप में छिपी हुई थीं और रोज़लिंड और ऑरलैंडो के पास प्रत्येक को जानने का समय नहीं था अन्य गैनीमेड के छिपाने के बिना, उनकी कविता को भी झुकाव के रूप में वर्णित किया गया है)।
गैनीमेडे को फोबे से प्यार नहीं है क्योंकि वह एक महिला है और गैनीमेड की खोज करने पर एक महिला फोबे ने उसे यह सुझाव दिया कि वह केवल एक सतही स्तर पर गैनीमेडे से प्यार करती है।
सिल्वियस फोबे से शादी करने में खुश है लेकिन उसे उसके लिए भी नहीं कहा जा सकता है। ऑड्रे के लिए विलियम का प्यार भी अनिश्चित है।
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जैसा कि आप पसंद करते हैं, प्यार का विषय नाटक के लिए केंद्र है, और लगभग हर दृश्य इसे एक या दूसरे तरीके से संदर्भित करता है। शेक्सपियर अलग-अलग धारणाओं और प्यार की प्रस्तुतियों की एक श्रृंखला का उपयोग करता है जैसे आप इसे पसंद करते हैं ; निचले वर्ग के पात्रों के बेवकूफ प्यार से सबकुछ महारानी के सौहार्दपूर्ण प्यार के लिए। जैसा कि आप इसे पसंद करते हैं प्यार के प्रकार : यह Rosalind और ऑरलैंडो के बीच केंद्रीय संबंध में प्रदर्शित किया गया है। पात्र जल्दी प्यार में पड़ते हैं और उनका प्यार प्यार कविता और पेड़ों पर नक्काशी में व्यक्त किया जाता है। यह एक सज्जन प्रेम है लेकिन इसे दूर करने की आवश्यकता वाले बाधाओं से भरा हुआ है। इस प्रकार का प्यार टचस्टोन द्वारा कमजोर होता है जो इस प्रकार के प्यार को बेईमानी के रूप में वर्णित करता है; "सबसे कविता कविता सबसे ज्यादा चिंतित है"। । शादी करने के लिए ऑरलैंडो को कई बाधाओं को दूर करना है; उसका प्यार रोज़लिंड द्वारा परीक्षण किया जाता है और यह वास्तविक साबित हुआ। हालांकि, रोज़लिंड और ऑरलैंडो ने गैनीमेड के छिपे बिना केवल दो बार मुलाकात की। इसलिए कहना मुश्किल है कि क्या वे वास्तव में एक-दूसरे को जानते हैं। Rosalind अवास्तविक नहीं है, हालांकि, और वह रोमांटिक प्यार के लुभाने पक्ष का आनंद लेती है, वह जानता है कि यह जरूरी नहीं है, यही कारण है कि वह उसके लिए ऑरलैंडो के प्यार का परीक्षण करती है। Rosalind के लिए रोमांटिक प्यार पर्याप्त नहीं है उसे पता होना चाहिए कि यह उससे गहरा है। टचस्टोन और ऑड्रे रोज़लिंड और ऑरलैंडो के पात्रों के लिए एक पन्नी के रूप में कार्य करते हैं। वे रोमांटिक प्यार के बारे में क्रोधित हैं और उनका रिश्ता प्रेम के भौतिक पक्ष पर आधारित है; "बाद में आलसी आ सकती है" । सबसे पहले, वे सीधे पेड़ के नीचे शादी करने में प्रसन्न हैं, जो उनकी प्राचीन इच्छाओं को दर्शाता है। उन्हें दूर करने के लिए कोई बाधा नहीं है, वे वहां और उसके साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। टचस्टोन भी कहता है कि इससे उसे छोड़ने का बहाना मिलेगा; ". . . अच्छी शादी नहीं हो रही है, इसके बाद मेरे लिए मेरी पत्नी छोड़ने के लिए यह एक अच्छा बहाना होगा" । ऑड्रे के दिखने के बारे में टचस्टोन अनिवार्य है लेकिन उसे अपनी ईमानदारी के लिए प्यार करता है। दर्शकों को यह तय करने का मौका दिया जाता है कि किस तरह का प्यार अधिक ईमानदार है। सौहार्दपूर्ण प्यार को शिष्ट और आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो बेवकूफ प्यार के विरोध में शिष्टाचार और उपस्थिति के आधार पर सतही के रूप में देखा जा सकता है। सेलीया और रोज़लिंड के बीच यह स्पष्ट रूप से स्पष्ट है क्योंकि सेलीया जंगल में रोज़लिंड में शामिल होने के लिए अपने घर और विशेषाधिकारों को छोड़ देता है। जोड़ी वास्तव में बहन नहीं है बल्कि बिना किसी शर्त के एक दूसरे का समर्थन करती है। जैसा कि आप इसे पसंद करते हैं , वैसे ही भाई-बहन प्यार की गंभीर कमी है। ओलिवर अपने भाई ऑरलैंडो से नफरत करता है और उसे मरना चाहता है। ड्यूक फ्रेडरिक ने अपने भाई ड्यूक सीनियर को निर्वासित कर दिया है और अपने ड्यूकेडॉम को उखाड़ फेंक दिया है। हालांकि, कुछ हद तक, इस प्यार को बहाल किया गया है कि ओलिवर में दिल का चमत्कारी परिवर्तन होता है जब ऑरलैंडो बहादुरी से उसे शेर से गुस्सा होने से बचाता है और ड्यूक फ्रेडरिक एक पवित्र व्यक्ति से बात करने के बाद धर्म पर विचार करने के लिए गायब हो जाता है, जो ड्यूक सीनियर को अपने बहाल किए गए ड्यूकडॉम की पेशकश करता है । ऐसा प्रतीत होता है कि जंगल दोनों बुराई भाइयों में चरित्र के परिवर्तन के लिए ज़िम्मेदार है। जंगल में प्रवेश करने पर ड्यूक और ओलिवर दोनों में दिल का परिवर्तन होता है। संभवतया जंगल खुद को पुरुषों की जरूरतों को चुनौती देता है, जो उनकी मानवता को साबित करने के मामले में अदालत में स्पष्ट नहीं था । जानवरों और शिकार की आवश्यकता संभवतः परिवार के सदस्यों पर हमला करने की आवश्यकता को बदल देती है? ड्यूक फ्रेडरिक अपनी बेटी सेलीया से प्यार करता है और उसे इसमें शामिल कर दिया है कि उसने रोज़लिंद को रहने की इजाजत दी है। जब उसके दिल में परिवर्तन होता है और रोज़लिंड को खत्म करना चाहता है तो वह अपनी बेटी सेलीया के लिए ऐसा करता है, मानते हैं कि रोज़लिंद अपनी बेटी को ढकता है कि वह लम्बे और अधिक सुंदर है। वह यह भी मानते हैं कि लोग रोज़लिंद को खत्म करने के लिए उनके और उनकी बेटी पर प्रतिकूल रूप से देखेंगे। सेलीया वफादारी पर अपने पिता के प्रयासों को खारिज कर देती है और उसे जंगल में रोज़लिंड में शामिल होने के लिए छोड़ देती है। उसका प्यार उसके गलत काम के कारण कुछ हद तक अनिश्चित है। ड्यूक सीन रोज़लिंड से प्यार करता है लेकिन जब वह गैनीमेड के रूप में छिपी हुई है तो उसे पहचानने में विफल रहता है - परिणामस्वरूप वे विशेष रूप से बंद नहीं हो सकते हैं। रोज़लिंड ने जेल में अपने पिता से जुड़ने की तुलना में सेलीया के साथ अदालत में रहना पसंद किया। जैसा कि चर्चा की गई, ड्यूक फ्रेडरिक का बेटी अपनी बेटी के लिए प्यार कुछ हद तक अनिश्चित है। हालांकि, मुख्य पात्र जो इस श्रेणी के प्रेम का प्रतिनिधित्व करते हैं वे सिल्वियस और फोबे और फोबे और गैनीमेडे हैं। सिल्वियस एक प्यार-बीमार पिल्ला की तरह फोबे का अनुसरण करता है और वह उसे घृणा करती है, जितना अधिक वह उससे ज्यादा घृणा करता है उतना ही वह उससे प्यार करता है। ये पात्र रोज़लिंड और ऑरलैंडो के लिए एक पन्नी के रूप में भी काम करते हैं - अधिक ऑरलैंडो रोज़लिंड से प्यार से बोलता है जितना वह उससे प्यार करता है। नाटक के अंत में सिल्वियस और फोबे की जोड़ी शायद कम से कम संतोषजनक है कि फोबे केवल सिल्वियस से शादी कर रही है क्योंकि वह गैनीमेड को अस्वीकार करने पर सहमत हो गई है। इसलिए यह आवश्यक रूप से स्वर्ग में एक मैच नहीं है। । गैनीमेडे को फोबे से प्यार नहीं है क्योंकि वह एक महिला है और गैनीमेड की खोज करने पर एक महिला फोबे ने उसे यह सुझाव दिया कि वह केवल एक सतही स्तर पर गैनीमेडे से प्यार करती है। सिल्वियस फोबे से शादी करने में खुश है लेकिन उसे उसके लिए भी नहीं कहा जा सकता है। ऑड्रे के लिए विलियम का प्यार भी अनिश्चित है।
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जनमतम् ।
भासमानयोः सत्त्वासत्त्वयोः का नाम प्रमाणबाधा । न हि दृष्टेऽनुपपन्नं नाम, अन्यथा सर्वत्रापि तत्प्रसङ्गः । प्रमाणप्रसिद्धस्य च नाभावः कल्पयितुं शक्यः, अतिप्रसङ्गात्, प्रमाणादिव्यवहारविलोपश्च स्यादिति ।
६ ३७७. एतेन यदप्युच्यते 'अनेकान्ते प्रमाणमप्यप्रमाणं सर्वज्ञोऽप्यसर्वज्ञः सिद्धोऽप्यसिद्धः' इत्यादि, तदप्यक्षरगुणनिकामात्रमेव; यतः प्रमाणमपि स्वविषये प्रमाणं परविषये चाप्रमाणमिति स्याद्वादिभिर्मन्यत एव । सर्वज्ञोऽपि स्वकेवलज्ञानापेक्षया सर्वज्ञः सांसारिकजीवज्ञानापेक्षया त्वसर्वज्ञः । यदि त॑दपेक्षयापि सर्वज्ञः स्यात्; तदा सर्वजीवानां सर्वज्ञत्वप्रसङ्गः, सर्वज्ञत्वस्यापि छाद्मस्थिकज्ञानित्वप्रसङ्गो वा । सिद्धोऽपि स्वकर्मपरमाणुसंयोगक्षयापेक्षया सिद्धः परजीवकर्मसंयोगापेक्षया त्वसिद्धः । यदि तदपेक्षयापि सिद्धः स्यात् तदा सर्वजीवानां सिद्धत्वप्रसक्तिः
पर्यायकी अपेक्षा जलको भी अग्निरूप कह सकते हैं । गरम जलमें तो कथंचिद् अग्निरूपता मानी ही जाती है । अतः वर्तमान जल पर्यायसे चलने वाले लोक व्यवहारमें कोई विरोध नहीं आ सकता । जब सत्त्व और असत्त्व प्रत्यक्षबुद्धिमें स्पष्टरूपसे प्रतिभास होता है तब प्रमाणबाधाका प्रसंग हो कैसे आ सकता है ? प्रत्यक्षसिद्ध पदार्थमें अनुपपत्ति कैसी ? अन्यथा सभी पदार्थो में विवाद हो सकता है। प्रमाणसिद्ध वस्तुका अभाव भी कैसे किया जा सकता है ? अन्यथा संसारके समस्त पदार्थोका अभाव हो जायगा । और सभी व्यवहारोंका लोप हो जायगा ।
६ ३७७. इस विवेचनसे आपका यह कहना 'अनेकान्तवाद में प्रमाण भी अप्रमाण, सर्वज्ञ भी असर्वज्ञ तथा सिद्ध भी संसारी हो जायगा' भी केवल अर्थशून्य अक्षरोंकी गिनतीके समान ही • निरर्थक है। क्योंकि स्याद्वादी प्रमाणको भी अपने विषयमें ही प्रमाण रूप मानते हैं, पर विषयमें तो वह अप्रमाण रूप ही है। घटज्ञान घटविषय में प्रमाण है तथा पटादिविषयों में अप्रमाण । अतः एक ही ज्ञान विषयभेदसे प्रमाण भी है तथा अप्रमाण भी । सर्वज्ञ भी अपने केवलज्ञानकी अपेक्षा सर्वज्ञ है तथा संसारी जीवोंके अल्पज्ञानकी अपेक्षा असर्वज्ञ। यदि संसारियोंके ज्ञानकी अपेक्षा भी वह सर्वज्ञ हो जाय तो इसका अर्थ यह हुआ कि संसारके समस्त प्राणी सर्वज्ञ हैं। सर्वज्ञ अपने ज्ञानके द्वारा ही सबको जानता है। यदि वह हम लोगोंके ज्ञानके द्वारा भी पदार्थोका ज्ञान कर सके तो फिर उसको आत्मा और हमारी आत्मामें कोई अन्तर ही नहीं रहेगा । जिस तरह हम अपने ज्ञानसे जानते हैं उसी तरह सर्वज्ञ भी हमारे ही ज्ञानसे जानता है । अतः सर्वज्ञ और हमारी आत्मा में अभेद होनेसे या तो सर्वज्ञकी तरह हम सब लोग सर्वज्ञाता हो जायेंगे या हमारी तरह सर्वज्ञ भी अल्पज्ञ ही हो जायगा । सिद्ध-मुक्तजीव भी अपने साथ लगे हुए कर्मपरमाणुओंसे छूटकर सिद्ध हुए हैं अतः वे स्वसंयोगी कर्मपरमाणुओंको अपेक्षा मुक्त हुए हैं न कि अन्य आत्माओंसे संयुक्त कर्म परमाणुओंकी अपेक्षा। यदि वे अन्य आत्माओंसे संयुक्त कर्म परमाणुओंकी अपेक्षा भी सिद्ध माने जाँय, तो इसका यह अर्थ हुआ कि 'अन्य आत्माओंके धर्म भी सिद्धजीवके स्वपर्याय हैं तभी तो वह अन्य आत्माओंसे संयुक्त कर्म परमाणुओंको अपेक्षा भो सिद्ध माना जाता है । इस तरह अन्य संसारी आत्माएँ तथा सिद्ध आत्माओंमें सीधा स्वपर्यायका सम्बन्ध होनेसे अभेदरूपता हो जायगी और इससे या तो समस्त संसारी जीव सिद्ध हो जांयगे या फिर सिद्ध संसारी हो जाँयगे । अभेद
१. -नयोः का म० २ । २. "स्वर्गापवर्गयोश्च पक्षे भावः पक्षे चाभावस्तथा पक्षे नित्यता पक्ष चानित्यतेत्यनवधारणायां प्रवृत्त्यनुपपत्तिः । अनादिसिद्धजीवप्रभृतीनां च स्वशास्त्रावघृतस्वभावानामयथावघृतस्वभावत्वप्रसङ्गः।" - ब्रह्म० शां० मा० २।२।३३ । "तथा मुक्तावप्यनेकान्तोन यावर्तत इति मुक्तो न मुक्तश्चेति स्यात् । एवं च सति स एव मुक्तः संसारी चेति प्रसक्तेः ।" - प्रश० व्यो० पृ० २० च । ३. तदपि भ० २ ।
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जनमतम् । भासमानयोः सत्त्वासत्त्वयोः का नाम प्रमाणबाधा । न हि दृष्टेऽनुपपन्नं नाम, अन्यथा सर्वत्रापि तत्प्रसङ्गः । प्रमाणप्रसिद्धस्य च नाभावः कल्पयितुं शक्यः, अतिप्रसङ्गात्, प्रमाणादिव्यवहारविलोपश्च स्यादिति । छः तीन सौ सतहत्तर. एतेन यदप्युच्यते 'अनेकान्ते प्रमाणमप्यप्रमाणं सर्वज्ञोऽप्यसर्वज्ञः सिद्धोऽप्यसिद्धः' इत्यादि, तदप्यक्षरगुणनिकामात्रमेव; यतः प्रमाणमपि स्वविषये प्रमाणं परविषये चाप्रमाणमिति स्याद्वादिभिर्मन्यत एव । सर्वज्ञोऽपि स्वकेवलज्ञानापेक्षया सर्वज्ञः सांसारिकजीवज्ञानापेक्षया त्वसर्वज्ञः । यदि त॑दपेक्षयापि सर्वज्ञः स्यात्; तदा सर्वजीवानां सर्वज्ञत्वप्रसङ्गः, सर्वज्ञत्वस्यापि छाद्मस्थिकज्ञानित्वप्रसङ्गो वा । सिद्धोऽपि स्वकर्मपरमाणुसंयोगक्षयापेक्षया सिद्धः परजीवकर्मसंयोगापेक्षया त्वसिद्धः । यदि तदपेक्षयापि सिद्धः स्यात् तदा सर्वजीवानां सिद्धत्वप्रसक्तिः पर्यायकी अपेक्षा जलको भी अग्निरूप कह सकते हैं । गरम जलमें तो कथंचिद् अग्निरूपता मानी ही जाती है । अतः वर्तमान जल पर्यायसे चलने वाले लोक व्यवहारमें कोई विरोध नहीं आ सकता । जब सत्त्व और असत्त्व प्रत्यक्षबुद्धिमें स्पष्टरूपसे प्रतिभास होता है तब प्रमाणबाधाका प्रसंग हो कैसे आ सकता है ? प्रत्यक्षसिद्ध पदार्थमें अनुपपत्ति कैसी ? अन्यथा सभी पदार्थो में विवाद हो सकता है। प्रमाणसिद्ध वस्तुका अभाव भी कैसे किया जा सकता है ? अन्यथा संसारके समस्त पदार्थोका अभाव हो जायगा । और सभी व्यवहारोंका लोप हो जायगा । छः तीन सौ सतहत्तर. इस विवेचनसे आपका यह कहना 'अनेकान्तवाद में प्रमाण भी अप्रमाण, सर्वज्ञ भी असर्वज्ञ तथा सिद्ध भी संसारी हो जायगा' भी केवल अर्थशून्य अक्षरोंकी गिनतीके समान ही • निरर्थक है। क्योंकि स्याद्वादी प्रमाणको भी अपने विषयमें ही प्रमाण रूप मानते हैं, पर विषयमें तो वह अप्रमाण रूप ही है। घटज्ञान घटविषय में प्रमाण है तथा पटादिविषयों में अप्रमाण । अतः एक ही ज्ञान विषयभेदसे प्रमाण भी है तथा अप्रमाण भी । सर्वज्ञ भी अपने केवलज्ञानकी अपेक्षा सर्वज्ञ है तथा संसारी जीवोंके अल्पज्ञानकी अपेक्षा असर्वज्ञ। यदि संसारियोंके ज्ञानकी अपेक्षा भी वह सर्वज्ञ हो जाय तो इसका अर्थ यह हुआ कि संसारके समस्त प्राणी सर्वज्ञ हैं। सर्वज्ञ अपने ज्ञानके द्वारा ही सबको जानता है। यदि वह हम लोगोंके ज्ञानके द्वारा भी पदार्थोका ज्ञान कर सके तो फिर उसको आत्मा और हमारी आत्मामें कोई अन्तर ही नहीं रहेगा । जिस तरह हम अपने ज्ञानसे जानते हैं उसी तरह सर्वज्ञ भी हमारे ही ज्ञानसे जानता है । अतः सर्वज्ञ और हमारी आत्मा में अभेद होनेसे या तो सर्वज्ञकी तरह हम सब लोग सर्वज्ञाता हो जायेंगे या हमारी तरह सर्वज्ञ भी अल्पज्ञ ही हो जायगा । सिद्ध-मुक्तजीव भी अपने साथ लगे हुए कर्मपरमाणुओंसे छूटकर सिद्ध हुए हैं अतः वे स्वसंयोगी कर्मपरमाणुओंको अपेक्षा मुक्त हुए हैं न कि अन्य आत्माओंसे संयुक्त कर्म परमाणुओंकी अपेक्षा। यदि वे अन्य आत्माओंसे संयुक्त कर्म परमाणुओंकी अपेक्षा भी सिद्ध माने जाँय, तो इसका यह अर्थ हुआ कि 'अन्य आत्माओंके धर्म भी सिद्धजीवके स्वपर्याय हैं तभी तो वह अन्य आत्माओंसे संयुक्त कर्म परमाणुओंको अपेक्षा भो सिद्ध माना जाता है । इस तरह अन्य संसारी आत्माएँ तथा सिद्ध आत्माओंमें सीधा स्वपर्यायका सम्बन्ध होनेसे अभेदरूपता हो जायगी और इससे या तो समस्त संसारी जीव सिद्ध हो जांयगे या फिर सिद्ध संसारी हो जाँयगे । अभेद एक. -नयोः का मशून्य दो । दो. "स्वर्गापवर्गयोश्च पक्षे भावः पक्षे चाभावस्तथा पक्षे नित्यता पक्ष चानित्यतेत्यनवधारणायां प्रवृत्त्यनुपपत्तिः । अनादिसिद्धजीवप्रभृतीनां च स्वशास्त्रावघृतस्वभावानामयथावघृतस्वभावत्वप्रसङ्गः।" - ब्रह्मशून्य शांशून्य माशून्य दो।दो।तैंतीस । "तथा मुक्तावप्यनेकान्तोन यावर्तत इति मुक्तो न मुक्तश्चेति स्यात् । एवं च सति स एव मुक्तः संसारी चेति प्रसक्तेः ।" - प्रशशून्य व्योशून्य पृशून्य बीस च । तीन. तदपि भशून्य दो ।
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रणजी ट्राफी में इस सत्र में सर्वाधिक विकेट लेने वाले ऋषि धवन (बेस प्राइज 20 लाख रूपये) को पंजाब ने 'राइट टू मैच' प्रावधान के जरिये तीन करोड़ रूपये में खरीदा . पहले सनराइजर्स हैदराबाद उसे खरीद चुका था. धवन तेज गेंदबाज होने के साथ मध्यक्रम के बल्लेबाज भी हैं . वह 2008 आईपीएल में पंजाब के लिये खेले थे और पिछले सत्र में मुंबई इंडियंस ने उनके साथ करार किया था .
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रणजी ट्राफी में इस सत्र में सर्वाधिक विकेट लेने वाले ऋषि धवन को पंजाब ने 'राइट टू मैच' प्रावधान के जरिये तीन करोड़ रूपये में खरीदा . पहले सनराइजर्स हैदराबाद उसे खरीद चुका था. धवन तेज गेंदबाज होने के साथ मध्यक्रम के बल्लेबाज भी हैं . वह दो हज़ार आठ आईपीएल में पंजाब के लिये खेले थे और पिछले सत्र में मुंबई इंडियंस ने उनके साथ करार किया था .
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केंद्र की मोदी सरकार (Modi Govt) के बजट-2023 पर अब राजनीति शुरू हो गई है। बीजेपी (BJP) और उनके सहयोगी दल बजट की खूब तारीफ कर रहे है, मगर विपक्षियों ने इसे 'निल बट्टा सन्नाटा' बताते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के नेता और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा (TMC Leader Shatrughan Sinha) ने सरकार का तंज कसते हुए कहा कि संसद में पेश किए गए बजट (Budget 2023) में 'हम दो हमारे दो' पर एक बड़ा फोकस था और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए कुछ खास नहीं था।
एएनआई से बातचीत में टीएमसी नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि यह बजट आगामी लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पेश किया गया था। इसमें मध्यम वर्ग के लोगों के लिए कुछ भी विशेष उल्लेख नहीं था। उन्होंने आगे कहा, "बजट को देखकर ऐसा लगता है जैसे इसे 'हम दो हमारे दो' का विशेष ख्याल रखने के लिए बनाया गया है, यह आयकरदाताओं के लिए काफी कम उच्चतम स्लैब से स्पष्ट है।" शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, 'लोग इसे अच्छी तरह समझते हैं कि उन्होंने ऐसा किसके लिए किया है।' टीएमसी नेता ने आगे कहा,
डीजल, पेट्रोल, आम आदमी, महिलाओं और किसानों के विषयों को बमुश्किल छुआ गया है। मेरा मानना है कि बजट में अभी बहुत कुछ अध्ययन किया जाना बाकी है।
बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज बजट सत्र के दौरान आयकर छूट की सीमा को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये करने की घोषणा की। वित्त मंत्री ने टैक्स स्लैब की संख्या को घटाकर 5 और टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये करके इस व्यवस्था में टैक्स स्ट्रक्चर को बदलने का भी प्रस्ताव दिया। वित्त मंत्री ने घोषणा की कि,
व्यक्तिगत आयकर की नई टैक्स दर 0 से 3 लाख रुपये तक शून्य, 3 से 6 लाख रुपये तक 5%, 6 से 9 लाख रुपये 10%, 9 से 12 लाख रुपये 15%, 12 से 15 लाख रुपये तक 20% और 15 लाख से ऊपर 30% रहेगी।
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विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर CM योगी ने ट्वीट कर दी बधाई और शुभकामनाएं। विश्व साक्षरता दिवस का उद्देश्य है कि सक्षरता के महत्व को फैलाया जाए। साक्षरता आपका एक अधिकार होता है, इसी को और अच्छे तरीके से बताने के लिए 8 सितंबर को बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है।
लखनऊः बुधवार 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है, प्रत्येक साल 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाता है। 8 सितंबर को मनाए जाने वाले विश्व साक्षरता दिवस का उद्देश्य होता है कि सक्षरता के महत्व को फैलाया जाए। साक्षरता आपका एक अधिकार होता है, इसी को और अच्छे तरीके से बताने के लिए 8 सितंबर को बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व साक्षरता दिवस की बधाई दी है। इस साल साक्षरता दिवस की थीम 'डिजिटल विश्व में साक्षरता' है। इसको आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि भारत का सर्व शिक्षा अभियान इस दिशा में एक सराहनीय कदम है।
'विश्व साक्षरता दिवस' की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
आइए, आज इस अवसर पर हम सभी समाज के कोने-कोने को साक्षरता के आलोक से आलोकित करने का संकल्प लें, ताकि 'सभी पढ़ें-सभी बढ़ें' की संकल्पना साकार हो सके।
CM योगी ने ट्वीट कर कहा 'विश्व साक्षरता दिवस' की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आइए, आज इस अवसर पर हम सभी समाज के कोने-कोने को साक्षरता के आलोक से आलोकित करने का संकल्प लें, ताकि 'सभी पढ़ें-सभी बढ़ें' की संकल्पना साकार हो सके।
आपको बता दें कि विश्व साक्षरता दिवस के लिए इस साल की थीम "ह्यूमन सेंटर्ड रिकवरी के लिए साक्षरताः डिजिटल डिवाइड को कम करना" है। इसके साथ ही ILD 2021 की थीम डिजिटल साक्षरता के बारे में लोगों में अधिक जागरूकता पैदा करने के लिए निर्धारित है। कोरोना महामारी के कारण बच्चों, युवाओं और वयस्कों की शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हुई।
सबसे पहले यूनेस्को ने 7 नवम्बर 1965 में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का फैसला लिया था। इसके लिए एक दिन निर्धारित किया गया। जिसके बाद हर साल 8 सितम्बर को विश्व साक्षरता दिवस को मनाया जाने लगा। यूनेस्को के इस फैसले के अगले साल से ही यानी 1966 से पहली बार साक्षरता दिवस मनाने की शुरुआत की गई।
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विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर CM योगी ने ट्वीट कर दी बधाई और शुभकामनाएं। विश्व साक्षरता दिवस का उद्देश्य है कि सक्षरता के महत्व को फैलाया जाए। साक्षरता आपका एक अधिकार होता है, इसी को और अच्छे तरीके से बताने के लिए आठ सितंबर को बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। लखनऊः बुधवार आठ सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है, प्रत्येक साल आठ सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाता है। आठ सितंबर को मनाए जाने वाले विश्व साक्षरता दिवस का उद्देश्य होता है कि सक्षरता के महत्व को फैलाया जाए। साक्षरता आपका एक अधिकार होता है, इसी को और अच्छे तरीके से बताने के लिए आठ सितंबर को बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व साक्षरता दिवस की बधाई दी है। इस साल साक्षरता दिवस की थीम 'डिजिटल विश्व में साक्षरता' है। इसको आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि भारत का सर्व शिक्षा अभियान इस दिशा में एक सराहनीय कदम है। 'विश्व साक्षरता दिवस' की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आइए, आज इस अवसर पर हम सभी समाज के कोने-कोने को साक्षरता के आलोक से आलोकित करने का संकल्प लें, ताकि 'सभी पढ़ें-सभी बढ़ें' की संकल्पना साकार हो सके। CM योगी ने ट्वीट कर कहा 'विश्व साक्षरता दिवस' की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आइए, आज इस अवसर पर हम सभी समाज के कोने-कोने को साक्षरता के आलोक से आलोकित करने का संकल्प लें, ताकि 'सभी पढ़ें-सभी बढ़ें' की संकल्पना साकार हो सके। आपको बता दें कि विश्व साक्षरता दिवस के लिए इस साल की थीम "ह्यूमन सेंटर्ड रिकवरी के लिए साक्षरताः डिजिटल डिवाइड को कम करना" है। इसके साथ ही ILD दो हज़ार इक्कीस की थीम डिजिटल साक्षरता के बारे में लोगों में अधिक जागरूकता पैदा करने के लिए निर्धारित है। कोरोना महामारी के कारण बच्चों, युवाओं और वयस्कों की शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हुई। सबसे पहले यूनेस्को ने सात नवम्बर एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का फैसला लिया था। इसके लिए एक दिन निर्धारित किया गया। जिसके बाद हर साल आठ सितम्बर को विश्व साक्षरता दिवस को मनाया जाने लगा। यूनेस्को के इस फैसले के अगले साल से ही यानी एक हज़ार नौ सौ छयासठ से पहली बार साक्षरता दिवस मनाने की शुरुआत की गई।
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लोकसभा चुनाव 2019 में बिहार में जेडीयू, बीजेपी और लोजपा ने साथ मिलकर 40 में से 39 सीटों पर जीत हासिल की थी। बीजेपी ने 17, जेडीयू ने 16और लोजपा ने छह सीटों पर जीत हासिल की है।
नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू मोदी सरकार का हिस्सा नहीं होगी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि उनकी पार्टी सरकार में शामिल नहीं होगी लेकिन एनडीए का हिस्सा बनी रहेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जेडीयू के वरिष्ठ नेता वशिष्ठ नारायण सिंह ने मोदी कैबिनेट में सिर्फ एक सीट मिलने से नाराजगी जताई है।
नीतीश कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे लोग कैबिनेट में सिर्फ एक सीट देना चाहते है। यह सिर्फ प्रतीकात्मक बात होती। हमने कहा कि कोई बात नहीं, हमें इसकी जरूरत नहीं है। ये कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। हम एनडीए में है और इससे परेशान नहीं है। हमलोग साथ काम करते रहेंगे।
लोकसभा चुनाव 2019 में बिहार में जेडीयू, बीजेपी और लोजपा ने साथ मिलकर 40 में से 39 सीटों पर जीत हासिल की थी। बीजेपी ने 17, जेडीयू ने 16और लोजपा ने छह सीटों पर जीत हासिल की है।
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लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस में बिहार में जेडीयू, बीजेपी और लोजपा ने साथ मिलकर चालीस में से उनतालीस सीटों पर जीत हासिल की थी। बीजेपी ने सत्रह, जेडीयू ने सोलहऔर लोजपा ने छह सीटों पर जीत हासिल की है। नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू मोदी सरकार का हिस्सा नहीं होगी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि उनकी पार्टी सरकार में शामिल नहीं होगी लेकिन एनडीए का हिस्सा बनी रहेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जेडीयू के वरिष्ठ नेता वशिष्ठ नारायण सिंह ने मोदी कैबिनेट में सिर्फ एक सीट मिलने से नाराजगी जताई है। नीतीश कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे लोग कैबिनेट में सिर्फ एक सीट देना चाहते है। यह सिर्फ प्रतीकात्मक बात होती। हमने कहा कि कोई बात नहीं, हमें इसकी जरूरत नहीं है। ये कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। हम एनडीए में है और इससे परेशान नहीं है। हमलोग साथ काम करते रहेंगे। लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस में बिहार में जेडीयू, बीजेपी और लोजपा ने साथ मिलकर चालीस में से उनतालीस सीटों पर जीत हासिल की थी। बीजेपी ने सत्रह, जेडीयू ने सोलहऔर लोजपा ने छह सीटों पर जीत हासिल की है।
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नीरज कुमार/बेगूसराय. शिक्षित बेरोजगार अब सरकारी नौकरी की बजाय प्राइवेट सेक्टर में भी रोजगार की गुंजाइश तलाश रहे हैं. ऐसे में इंटर पास बेरोजगार युवाओं के लिए सुनहरा मौका है. बेगूसराय नियोजनालय में 12 मई को रोजगार कैंप का आयोजन किया जा रहा है. इसमें क्रेडिट एक्सेस ग्रामीण (Credit Access Grameen ) केंद्र मैनेजर के 100 पदों पर बहाली की जाएगी. चयनित उम्मीदवारों को बिहार में ही काम करने का मौका मिलेगा.
जॉब कैंप सुबह 10:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक जिला नियोजनालय संयुक्त श्रम भवन आईटीआई कैंपस में आयोजित होगा. नियोजन पदाधिकारी श्वेता वशिष्ट ने बताया कि अभ्यर्थी अपने साथ बायोडाटा, आधार कार्ड, पैन कार्ड, संबंधित शैक्षणिक प्रमाण, पत्र अंकपत्र,पासपोर्ट साइज के दो रंगीन फोटो के साथ इस जॉब कैंप में भाग ले सकते हैं.
जिला नियोजनालय कार्यालय के सांख्यिकी सहायक राहुल कुमार ने News 18 से बताया 12 मई को निजी क्षेत्र की कंपनी क्रेडिट एक्सेस ग्रामीण (Credit Access Grameen ) कंपनी के द्वारा केन्द्र मैनेजर का चयन किया जाना है. इसके लिए आवेदन वही अभ्यर्थी कर सकते हैं जो नियोजन कार्यालय में अपना रजिस्ट्रेशन पहले से करवा चुके हैं. वहीं आगे उन्होनें बताया अभ्यर्थी की उम्र सीमा 19 से 29 वर्ष होनी चाहिए और शैक्षणिक योग्यता इंटर पास होना अनिवार्य है. जबकि अभ्यर्थियों के पास अनिवार्य रूप से मोटरसाइकिल और ड्राइविंग लाइसेंस या लर्निंग लाइसेंस होनी चाहिए. चयनित अभ्यर्थी को बिहार में ही काम करने का मौका दिया जाएगा. वही वेतन या भत्ते की बात करें तो 1,38,300 सालाना पैकेज के साथ ही इंसेंटिव और आवास रहने के लिए भी मुफ्त में मिलेगा.
राज्य के किसी भी जिले से बेगूसराय या फिर बरौनी जंक्शन के लिए ट्रेन उपल्ब्ध सेवा उपल्ब्ध है. ऐसे में यहां पहुंचने के लिए इन स्टेशन या फिर बस स्टैंड बेगूसराय से जिला नियोजनालय कार्यालय पहुंचने के लिए अभ्यर्थी पन्हास चौक के लिए कोई भी सवारी ले सकते हैं. पन्हास चौक पहुंचने के बाद वीर कुंवर सिंह प्रतिमा के पूर्व दिशा में स्थित आईटीआई कैंपस में जाने के बाद संयुक्त श्रम भवन में जिला नियोजनालय के कार्यालय पहुंचकर अभ्यर्थी इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं.
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नीरज कुमार/बेगूसराय. शिक्षित बेरोजगार अब सरकारी नौकरी की बजाय प्राइवेट सेक्टर में भी रोजगार की गुंजाइश तलाश रहे हैं. ऐसे में इंटर पास बेरोजगार युवाओं के लिए सुनहरा मौका है. बेगूसराय नियोजनालय में बारह मई को रोजगार कैंप का आयोजन किया जा रहा है. इसमें क्रेडिट एक्सेस ग्रामीण केंद्र मैनेजर के एक सौ पदों पर बहाली की जाएगी. चयनित उम्मीदवारों को बिहार में ही काम करने का मौका मिलेगा. जॉब कैंप सुबह दस:तीस बजे से शाम चार:शून्य बजे तक जिला नियोजनालय संयुक्त श्रम भवन आईटीआई कैंपस में आयोजित होगा. नियोजन पदाधिकारी श्वेता वशिष्ट ने बताया कि अभ्यर्थी अपने साथ बायोडाटा, आधार कार्ड, पैन कार्ड, संबंधित शैक्षणिक प्रमाण, पत्र अंकपत्र,पासपोर्ट साइज के दो रंगीन फोटो के साथ इस जॉब कैंप में भाग ले सकते हैं. जिला नियोजनालय कार्यालय के सांख्यिकी सहायक राहुल कुमार ने News अट्ठारह से बताया बारह मई को निजी क्षेत्र की कंपनी क्रेडिट एक्सेस ग्रामीण कंपनी के द्वारा केन्द्र मैनेजर का चयन किया जाना है. इसके लिए आवेदन वही अभ्यर्थी कर सकते हैं जो नियोजन कार्यालय में अपना रजिस्ट्रेशन पहले से करवा चुके हैं. वहीं आगे उन्होनें बताया अभ्यर्थी की उम्र सीमा उन्नीस से उनतीस वर्ष होनी चाहिए और शैक्षणिक योग्यता इंटर पास होना अनिवार्य है. जबकि अभ्यर्थियों के पास अनिवार्य रूप से मोटरसाइकिल और ड्राइविंग लाइसेंस या लर्निंग लाइसेंस होनी चाहिए. चयनित अभ्यर्थी को बिहार में ही काम करने का मौका दिया जाएगा. वही वेतन या भत्ते की बात करें तो एक,अड़तीस,तीन सौ सालाना पैकेज के साथ ही इंसेंटिव और आवास रहने के लिए भी मुफ्त में मिलेगा. राज्य के किसी भी जिले से बेगूसराय या फिर बरौनी जंक्शन के लिए ट्रेन उपल्ब्ध सेवा उपल्ब्ध है. ऐसे में यहां पहुंचने के लिए इन स्टेशन या फिर बस स्टैंड बेगूसराय से जिला नियोजनालय कार्यालय पहुंचने के लिए अभ्यर्थी पन्हास चौक के लिए कोई भी सवारी ले सकते हैं. पन्हास चौक पहुंचने के बाद वीर कुंवर सिंह प्रतिमा के पूर्व दिशा में स्थित आईटीआई कैंपस में जाने के बाद संयुक्त श्रम भवन में जिला नियोजनालय के कार्यालय पहुंचकर अभ्यर्थी इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं. .
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