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फिरोजपुर जिले के सीमावर्ती गांव कालूवाला में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। ये गांव पूरी तरह से पानी में डूब चुका है। गांव में बीते तीन दिनों से बिजली भी नहीं है। कालूवाला के निवासियों ने अब पलायन शुरू कर दिया है। लोगों ने बताया कि उन्हें अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है। उन्हें बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फिरोजपुर, तरूण जैन। सतलुज का उफान तेज होने के बाद देश का अंतिम गांव कालूवाला पूरी तरह से जलमग्न हो गया है और वहां के लोगो ने अपना सामान उठाकर सरकारी स्कूल में पलायन शुरू कर दिया है। गांव में 3 दिन से बिजली न होने तथा मेडिकल सुविधा न पहुंचने के कारण लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। गांव में पूजा नामक एक गर्भवती महिला है, जिसे अभी तक कोई भी स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिली है। गांव के कुछ घरों में चार फीट तक पानी है और लोगों ने सरकारी प्राइमरी स्कूल में शरण ली है, ताकि उनका नुकसान होने से बच सके। पलायन करने वालो में जीवन सिंह, चिमन सिंह, रतन सिंह और जंजीर सिंह का परिवार शामिल है, जिन्होंने अपने घर का सारा सामान स्कूल में रख लिया है। गांव में आने-जाने का कोई रास्ता न होने तथा सतलुज में बहाव तेज होने के कारण यहां का सरकारी स्कूल में भी चार दिन से बंद है और कोई भी प्रशासनिक सेवा इस गांव में नहीं पहुंच रही है। लोगों का जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। टेंडीवाला में सतलुज के साथ मिट्टी के बैग की नोच पर पानी आने के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पानी की टक्कर इन बैग को तेज बहाव में लगती है तो उनके खेत पानी से भर जाएंगे और उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि यहां पर तुरंत बैग लगवाए जाएं, ताकि तेज बहाव को गांव में आने से रोका जा सके। उधर, डिप्टी कमिश्नर राजेश धीमान ने कहा कि कहा कि प्रशासन द्वारा बचाव हेतू अनेकों प्रबंध किए जा रहे हैं और लोगों से अपील की जा रही है कि वह सतलुज क्रॉस करने की बजाय सुरक्षित स्थानो पर रहें।
फिरोजपुर जिले के सीमावर्ती गांव कालूवाला में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। ये गांव पूरी तरह से पानी में डूब चुका है। गांव में बीते तीन दिनों से बिजली भी नहीं है। कालूवाला के निवासियों ने अब पलायन शुरू कर दिया है। लोगों ने बताया कि उन्हें अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है। उन्हें बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फिरोजपुर, तरूण जैन। सतलुज का उफान तेज होने के बाद देश का अंतिम गांव कालूवाला पूरी तरह से जलमग्न हो गया है और वहां के लोगो ने अपना सामान उठाकर सरकारी स्कूल में पलायन शुरू कर दिया है। गांव में तीन दिन से बिजली न होने तथा मेडिकल सुविधा न पहुंचने के कारण लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। गांव में पूजा नामक एक गर्भवती महिला है, जिसे अभी तक कोई भी स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिली है। गांव के कुछ घरों में चार फीट तक पानी है और लोगों ने सरकारी प्राइमरी स्कूल में शरण ली है, ताकि उनका नुकसान होने से बच सके। पलायन करने वालो में जीवन सिंह, चिमन सिंह, रतन सिंह और जंजीर सिंह का परिवार शामिल है, जिन्होंने अपने घर का सारा सामान स्कूल में रख लिया है। गांव में आने-जाने का कोई रास्ता न होने तथा सतलुज में बहाव तेज होने के कारण यहां का सरकारी स्कूल में भी चार दिन से बंद है और कोई भी प्रशासनिक सेवा इस गांव में नहीं पहुंच रही है। लोगों का जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। टेंडीवाला में सतलुज के साथ मिट्टी के बैग की नोच पर पानी आने के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पानी की टक्कर इन बैग को तेज बहाव में लगती है तो उनके खेत पानी से भर जाएंगे और उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि यहां पर तुरंत बैग लगवाए जाएं, ताकि तेज बहाव को गांव में आने से रोका जा सके। उधर, डिप्टी कमिश्नर राजेश धीमान ने कहा कि कहा कि प्रशासन द्वारा बचाव हेतू अनेकों प्रबंध किए जा रहे हैं और लोगों से अपील की जा रही है कि वह सतलुज क्रॉस करने की बजाय सुरक्षित स्थानो पर रहें।
रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा इन दिनों अपनी फिल्म 'बर्फी' के प्रमोशन में लगे हुए हैं और विभिन्न चैनलों पर प्रसारित होने वाले शो के दौरान उन्हें देखा जा रहा है। ये दोनों स्टार्स डांस रियलिटी शो 'झलक दिखला जा' में भी पहुंचे, जिसमें करण जौहर, माधुरी दीक्षित और रैमो डिसूजा जज हैं। इस शो में आश्चर्यजनक तरीके से भारती अब तक बनी हुई हैं और लोगों का अपनी कॉमेडी से जमकर मनोरंजन कर रही हैं। भारी भरकम भारती अक्सर शो में आए मेहमानों को उठाती हैं या खुद को उठाने को कहती हैं। पिछले दिनों रणबीर कपूर कॉमेडी सर्कस में पहुंचे थे तो भारती ने उनके गाल पर इतना जोर से किस किया कि बेचारे रणबीर का दम ही निकल गया। उन्होंने संभलते हुए कहा कि ये किसी जोरदार मुक्के से कम नहीं था।
रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा इन दिनों अपनी फिल्म 'बर्फी' के प्रमोशन में लगे हुए हैं और विभिन्न चैनलों पर प्रसारित होने वाले शो के दौरान उन्हें देखा जा रहा है। ये दोनों स्टार्स डांस रियलिटी शो 'झलक दिखला जा' में भी पहुंचे, जिसमें करण जौहर, माधुरी दीक्षित और रैमो डिसूजा जज हैं। इस शो में आश्चर्यजनक तरीके से भारती अब तक बनी हुई हैं और लोगों का अपनी कॉमेडी से जमकर मनोरंजन कर रही हैं। भारी भरकम भारती अक्सर शो में आए मेहमानों को उठाती हैं या खुद को उठाने को कहती हैं। पिछले दिनों रणबीर कपूर कॉमेडी सर्कस में पहुंचे थे तो भारती ने उनके गाल पर इतना जोर से किस किया कि बेचारे रणबीर का दम ही निकल गया। उन्होंने संभलते हुए कहा कि ये किसी जोरदार मुक्के से कम नहीं था।
A short story can be as fantastic and its characters and situations as fanciful as the writer cares to make them-provided they have the ring of truth and a message" to cornmvey. दूसरी थ्योरी (theory) जो उन्होंने सुझाया है, वह यह है कि एक कहानी बहुत ही शानदार हो सकती है। यह जितना संभव हो उतनी शानदार हो सकती है, और इसके कैरेक्टरज़ (characters) और परिस्थितियां उतनी ही अवास्तविक हो सकती हैं जितना लेखक को यह पसंद है, लेकिन उनके पास रिंग ऑफ टूथ (ring of truth) और देने के लिए संदेश होना चाहिए। (Refer Slide Time: 03:52) Ashort story must have, ikleascarpionsing in tstal acoumiove which sumsupthe story. और अंतिम थेओरी (theory) जो उनके पास एक क्लासिक शॉर्ट स्टोरी (classic short story ) के बारे में है, वह यह है कि इसकी पूंछ में बिच्छू के डंक की तरह एक ट्विस्ट (twist) होना चाहिए, एक कर्लीक्यू (curlicue), एक कर्ल (curl) जो कहानी की प्रमुख चिंता को बताएगा। तो चलिए एक क्लासिक शॉर्ट स्टोरी ( classic short story) के बारे में खुशवंत सिंह की इन सभी प्रमुख बातों को रखते हैं और इसे 1892 से टैगोर (Tagore) की शॉर्ट फिक्शन काबुलीवाला (short fiction Kabuliwala) में लागू करते हैं। (Refer Slide Time: 04:13) UNITY OF CHARACTER AND THEME • MIN'S RELATIONSHIPS तो, यह कहानी मिनी (Mini) के रिश्तों के बारे में है, छोटी लड़की के अपने पिता के साथ, उसकी माँ के साथ, अजनबी रहमत (Rahmat) के साथ, काबुल के फ्रूट सेलर (fruit-seller) और नौकरों के साथ । तो, यह मिनी के बारे में है। इसलिए, इस कहानी में यूनिटी ऑफ कैरेक्टर (unity of character) है और यह क्लासिक शॉर्ट स्टोरी ( classic short story ) के बारे में खुशवंत सिंह
A short story can be as fantastic and its characters and situations as fanciful as the writer cares to make them-provided they have the ring of truth and a message" to cornmvey. दूसरी थ्योरी जो उन्होंने सुझाया है, वह यह है कि एक कहानी बहुत ही शानदार हो सकती है। यह जितना संभव हो उतनी शानदार हो सकती है, और इसके कैरेक्टरज़ और परिस्थितियां उतनी ही अवास्तविक हो सकती हैं जितना लेखक को यह पसंद है, लेकिन उनके पास रिंग ऑफ टूथ और देने के लिए संदेश होना चाहिए। Ashort story must have, ikleascarpionsing in tstal acoumiove which sumsupthe story. और अंतिम थेओरी जो उनके पास एक क्लासिक शॉर्ट स्टोरी के बारे में है, वह यह है कि इसकी पूंछ में बिच्छू के डंक की तरह एक ट्विस्ट होना चाहिए, एक कर्लीक्यू , एक कर्ल जो कहानी की प्रमुख चिंता को बताएगा। तो चलिए एक क्लासिक शॉर्ट स्टोरी के बारे में खुशवंत सिंह की इन सभी प्रमुख बातों को रखते हैं और इसे एक हज़ार आठ सौ बानवे से टैगोर की शॉर्ट फिक्शन काबुलीवाला में लागू करते हैं। UNITY OF CHARACTER AND THEME • MIN'S RELATIONSHIPS तो, यह कहानी मिनी के रिश्तों के बारे में है, छोटी लड़की के अपने पिता के साथ, उसकी माँ के साथ, अजनबी रहमत के साथ, काबुल के फ्रूट सेलर और नौकरों के साथ । तो, यह मिनी के बारे में है। इसलिए, इस कहानी में यूनिटी ऑफ कैरेक्टर है और यह क्लासिक शॉर्ट स्टोरी के बारे में खुशवंत सिंह
अंग्रेजी हुकूमत में तमाम बंदिशों के बीच हिंदी साहित्य के स्वर्णिम इतिहास की पठकथा लिखने वाली 'सरस्वती पत्रिका' के संपादक मंडल में कई बड़े बदलाव हुए हैं। राजनीतिक रिपोर्टिंग में गहरी रुचि रखने वाले युवा पत्रकार नवनीत मिश्रा ने 'राजस्थान पत्रिका' (Rajasthan Patrika) के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। पत्रकार विवेक मिश्रा ने 'दैनिक भास्कर' को अलविदा कह दिया है। वह इस अखबार के रोहतक एडिशन में करीब पांच साल से बतौर सीनियर रिपोर्टर कार्यरत थे। भारतीय जन संचार संस्थान के विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के विद्यार्थियों द्वारा प्रकाशित पत्रिका 'द बैटन' का विमोचन शनिवार को संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने किया। मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई मैगजीन 'न्यू इंडिया समाचार' (New India Samachar) ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं के साथ मैगजीन का ताजा अंक पब्लिश किया है। केरल से प्रकाशित होने वाले प्रमुख मलयालम समाचार पत्र 'केरल कौमुदी' ने एक महिला सहकर्मी को परेशान करने पर अपने एक एम्प्लॉयी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बहुमुखी प्रतिभा की धनी जानी-मानी चित्रकार, लेखक और कला समीक्षक अलका रघुवंशी का निधन हो गया है। कर्पूर चंद्र कुलिश (केसीके) इंटरनेशनल अवॉर्ड फॉर एक्सिलेंस इन जर्नलिज्म के लिए वर्ष 2018 व 2019 के विजेताओं की घोषणा कर दी गई है। शनिवार को मैगजीन ने जो कार्टून छापा है, उसमें इस बार ब्रिटिश राज परिवार पर तीखा प्रहार किया गया है। इंदिरा गांधी राष्ट्री य कला केंद्र की ओर से नोबेल शांति पुरस्कारर से सम्माानित कैलाश सत्यार्थी की पुस्तिक 'कोविड-19 सभ्याता का संकट और समाधान' पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। धीरेन्द्र सिंह करीब चार साल से आगरा में राजस्थान पत्रिका डाटकॉम के साथ जुड़े हुए थे। युवा पत्रकार सौरभ गुप्ता ने हिंदी दैनिक 'हिन्दुस्तान' में अपनी करीब छह साल पुरानी पारी को विराम दे दिया है। कोरोना ने हिन्दुस्तान टाइम्स की कादम्बिनी पत्रिका के प्रभारी संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा को भी अपनी जद में ले लिया, जिसकी चलते उनका निधन हो गया। 'इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी' की 81वीं वार्षिक आम सभा में यह घोषणा की गई। वह 'मिड-डे' (Mid-Day) के शैलेष गुप्ता की जगह यह पदभार संभालेंगे।
अंग्रेजी हुकूमत में तमाम बंदिशों के बीच हिंदी साहित्य के स्वर्णिम इतिहास की पठकथा लिखने वाली 'सरस्वती पत्रिका' के संपादक मंडल में कई बड़े बदलाव हुए हैं। राजनीतिक रिपोर्टिंग में गहरी रुचि रखने वाले युवा पत्रकार नवनीत मिश्रा ने 'राजस्थान पत्रिका' के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। पत्रकार विवेक मिश्रा ने 'दैनिक भास्कर' को अलविदा कह दिया है। वह इस अखबार के रोहतक एडिशन में करीब पांच साल से बतौर सीनियर रिपोर्टर कार्यरत थे। भारतीय जन संचार संस्थान के विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के विद्यार्थियों द्वारा प्रकाशित पत्रिका 'द बैटन' का विमोचन शनिवार को संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने किया। मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई मैगजीन 'न्यू इंडिया समाचार' ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं के साथ मैगजीन का ताजा अंक पब्लिश किया है। केरल से प्रकाशित होने वाले प्रमुख मलयालम समाचार पत्र 'केरल कौमुदी' ने एक महिला सहकर्मी को परेशान करने पर अपने एक एम्प्लॉयी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बहुमुखी प्रतिभा की धनी जानी-मानी चित्रकार, लेखक और कला समीक्षक अलका रघुवंशी का निधन हो गया है। कर्पूर चंद्र कुलिश इंटरनेशनल अवॉर्ड फॉर एक्सिलेंस इन जर्नलिज्म के लिए वर्ष दो हज़ार अट्ठारह व दो हज़ार उन्नीस के विजेताओं की घोषणा कर दी गई है। शनिवार को मैगजीन ने जो कार्टून छापा है, उसमें इस बार ब्रिटिश राज परिवार पर तीखा प्रहार किया गया है। इंदिरा गांधी राष्ट्री य कला केंद्र की ओर से नोबेल शांति पुरस्कारर से सम्माानित कैलाश सत्यार्थी की पुस्तिक 'कोविड-उन्नीस सभ्याता का संकट और समाधान' पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। धीरेन्द्र सिंह करीब चार साल से आगरा में राजस्थान पत्रिका डाटकॉम के साथ जुड़े हुए थे। युवा पत्रकार सौरभ गुप्ता ने हिंदी दैनिक 'हिन्दुस्तान' में अपनी करीब छह साल पुरानी पारी को विराम दे दिया है। कोरोना ने हिन्दुस्तान टाइम्स की कादम्बिनी पत्रिका के प्रभारी संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार राजीव कटारा को भी अपनी जद में ले लिया, जिसकी चलते उनका निधन हो गया। 'इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी' की इक्यासीवीं वार्षिक आम सभा में यह घोषणा की गई। वह 'मिड-डे' के शैलेष गुप्ता की जगह यह पदभार संभालेंगे।
नई दिल्लीः गणतंत्र दिवस (Republic Day) के मौके पर ट्रैक्टर परेड (Tractor Parade) के नाम पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) में प्रदर्शनकारी किसानों ने जमकर उत्पात मचाया. कृषि कानूनों (Agriculture Laws) का विरोध कर रहे किसानों का एक समूह ट्रैक्टर्स के साथ लाल किले पर पहुंच गया. लाल किले पर प्रदर्शनकारियों ने अपना धार्मिक झंडा लग दिया. इस पर अब बॉलीवुड सेलेब्स भी अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. कंगना से लोकर स्वरा भास्कर ने घटना को गलत करार दिया, लेकिन इस मुद्दे हमेशा बोलने वाले दिलजीत दोसांझा (Diljit Dosanjh) गायब है. दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) हमेशा ही इस मुद्दे पर खुलकर बोलते रहे हैं, लेकिन अब इस हिंसक घटना पर उनका कोई बयान नहीं आया, जबकि इस घटना से कुछ ही घंटे पहले उन्होंने गणतंत्र दिवस पर संदेश दिया था. लोगों को उम्मीद थी कि वे बोलेंगे, लेकिन घटना 24 घंटे बाद भी उनका कोई रिएक्शन सामने नहीं आया है. दिलजीत खामोश हैं और उनका इस बारे में एक भी ट्वीट नहीं आया है. अब तो सोशल मीडिया पर भी लोग दिलजीत से सवाल कर रहे हैं कि वे कहा है और इस मामले पर कुछ क्यों नहीं बोल रहे. एक यूजर ने दिलजीत के उस ट्वीट को रीट्वीट किया है जिसमें उन्होंने मासूम किसानों की तस्वीर शेयर करते हुए कहा था कि ये आपको टेररिस्ट लगते हैं. वहीं कई लोग दिलजीत की आलोचना कर रहे हैं. बता दें, बीते दिनों दिलजीत कैलिफोर्निया गए हुए थे. वहां से उन्होंने फोटोज भी अपडेट की हैं. उनकी वापसी की कोई अपडेट अभी नहीं है. इस बीच कंगना रनौत ने भी उन पर तंज कसते हुए ट्वीट किया है. अपने एक हालिया ट्वीट में कंगना (Kangana Ranaut) प्रियंका चोपड़ा और दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) पर भड़की नजर आईं. उन्होंने ने दोनों से सवाल करते हुए कहा, 'दिलजीत और प्रियंका (Priyanka Chopra) आप इस पर जवाब दें. पूरी दुनिया हमारे ऊपर हंस रही है. यही चाहिए था न तुम लोगों को...बधाई हो.' इसके साथ ही कंगना ने एक फोटो शेयर की है, जिसमें एक प्रदर्शनकारी पोल पर चढ़ कर झंडा फहरा रहा है. दूसरी ओर ऋचा चड्ढा (Richa Chadha) ने गालवान घाटी में एक सिख सिपाही के बारे में एक पोस्ट साझा किया, जिसमें निशान साब को फहराया गया था और लिखा था, 'द निशान साहिब.' उन्होंने आगे कई ट्वीट को रीट्वीट किया जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों से हिंसक प्रदर्शन नहीं करने का आग्रह किया. रणवीर शौरी (Ranvir Shorey) ने भी हिंसा की निंदा की. उन्होंने ट्विटर पर प्रदर्शनकारियों का वीडियो साझा किया है. ये भी पढ़ेंः गुरु की पूजा और भगवान की पूजा में क्या अंतर है पहले किसकी पूजा करनी चाहिए?
नई दिल्लीः गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर परेड के नाम पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदर्शनकारी किसानों ने जमकर उत्पात मचाया. कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों का एक समूह ट्रैक्टर्स के साथ लाल किले पर पहुंच गया. लाल किले पर प्रदर्शनकारियों ने अपना धार्मिक झंडा लग दिया. इस पर अब बॉलीवुड सेलेब्स भी अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. कंगना से लोकर स्वरा भास्कर ने घटना को गलत करार दिया, लेकिन इस मुद्दे हमेशा बोलने वाले दिलजीत दोसांझा गायब है. दिलजीत दोसांझ हमेशा ही इस मुद्दे पर खुलकर बोलते रहे हैं, लेकिन अब इस हिंसक घटना पर उनका कोई बयान नहीं आया, जबकि इस घटना से कुछ ही घंटे पहले उन्होंने गणतंत्र दिवस पर संदेश दिया था. लोगों को उम्मीद थी कि वे बोलेंगे, लेकिन घटना चौबीस घंटाटे बाद भी उनका कोई रिएक्शन सामने नहीं आया है. दिलजीत खामोश हैं और उनका इस बारे में एक भी ट्वीट नहीं आया है. अब तो सोशल मीडिया पर भी लोग दिलजीत से सवाल कर रहे हैं कि वे कहा है और इस मामले पर कुछ क्यों नहीं बोल रहे. एक यूजर ने दिलजीत के उस ट्वीट को रीट्वीट किया है जिसमें उन्होंने मासूम किसानों की तस्वीर शेयर करते हुए कहा था कि ये आपको टेररिस्ट लगते हैं. वहीं कई लोग दिलजीत की आलोचना कर रहे हैं. बता दें, बीते दिनों दिलजीत कैलिफोर्निया गए हुए थे. वहां से उन्होंने फोटोज भी अपडेट की हैं. उनकी वापसी की कोई अपडेट अभी नहीं है. इस बीच कंगना रनौत ने भी उन पर तंज कसते हुए ट्वीट किया है. अपने एक हालिया ट्वीट में कंगना प्रियंका चोपड़ा और दिलजीत दोसांझ पर भड़की नजर आईं. उन्होंने ने दोनों से सवाल करते हुए कहा, 'दिलजीत और प्रियंका आप इस पर जवाब दें. पूरी दुनिया हमारे ऊपर हंस रही है. यही चाहिए था न तुम लोगों को...बधाई हो.' इसके साथ ही कंगना ने एक फोटो शेयर की है, जिसमें एक प्रदर्शनकारी पोल पर चढ़ कर झंडा फहरा रहा है. दूसरी ओर ऋचा चड्ढा ने गालवान घाटी में एक सिख सिपाही के बारे में एक पोस्ट साझा किया, जिसमें निशान साब को फहराया गया था और लिखा था, 'द निशान साहिब.' उन्होंने आगे कई ट्वीट को रीट्वीट किया जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों से हिंसक प्रदर्शन नहीं करने का आग्रह किया. रणवीर शौरी ने भी हिंसा की निंदा की. उन्होंने ट्विटर पर प्रदर्शनकारियों का वीडियो साझा किया है. ये भी पढ़ेंः गुरु की पूजा और भगवान की पूजा में क्या अंतर है पहले किसकी पूजा करनी चाहिए?
[ & ] किसके तमपूर्ण प्रहर भागे ? किसके चिर सोए दिन जागे ? सुख-स्वर्ग हुआ किसके आगे ? होगी किसके कंपित कर से इन शुभ चरणों की अगवानी ? वह पगध्वनि मेरी पहचानी ! वढ़ता जाता घुँघरू का रवः क्या यह भी हो सकता संभव ? यह जीवन का अनुभव अभिनव, पदचाप शीघ्र, पग-राग तीव्र, स्वागत को उठ, रे कवि मानी ! वह पगध्वनि मेरी पहचानी ! ध्वनि पास चली मेरे नाती, व अंग शिथिल, पुलकित छाती, लो, गिरतीं पलकें मदमाती, पग को परिरंभण करने की, पर, इन युग बाहों ने ठानी । वह पगध्वनि मेरी पहचानी ! रव गूंजा भू पर, अंवर में, सर में, सरिता में, सागर में, प्रत्येक श्वास में, प्रति स्वर में, किस किसका आश्रय ले फैलें, की हैरानी । पगध्वनि मेरी पहचानी !
[ & ] किसके तमपूर्ण प्रहर भागे ? किसके चिर सोए दिन जागे ? सुख-स्वर्ग हुआ किसके आगे ? होगी किसके कंपित कर से इन शुभ चरणों की अगवानी ? वह पगध्वनि मेरी पहचानी ! वढ़ता जाता घुँघरू का रवः क्या यह भी हो सकता संभव ? यह जीवन का अनुभव अभिनव, पदचाप शीघ्र, पग-राग तीव्र, स्वागत को उठ, रे कवि मानी ! वह पगध्वनि मेरी पहचानी ! ध्वनि पास चली मेरे नाती, व अंग शिथिल, पुलकित छाती, लो, गिरतीं पलकें मदमाती, पग को परिरंभण करने की, पर, इन युग बाहों ने ठानी । वह पगध्वनि मेरी पहचानी ! रव गूंजा भू पर, अंवर में, सर में, सरिता में, सागर में, प्रत्येक श्वास में, प्रति स्वर में, किस किसका आश्रय ले फैलें, की हैरानी । पगध्वनि मेरी पहचानी !
Cricketer Turns Politician: टीम इंडिया में कई ऐसे खिलाड़ियों रहे जिनका करियर लंबा नहीं चल सका. एक पूर्व भारतीय क्रिकेटर की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही. उन्होंने भारत के लिए सिर्फ 22 मैच खेला. क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने राजनीति में एंट्री की ओर एमएलए (MLA) बन गए. टीम इंडिया में कई ऐसे खिलाड़ी आए जिनका करियर लंबा नहीं चल पाया. उन्हें कुछ ही मैचों में बाहर का रास्ता देखना पड़ा. टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर अशोक डिंडा की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी. उन्होंने टीम इंडिया के लिए सिर्फ 22 मैच खेलें लेकिन उनका करियर लंबा नहीं चल सका. (West bengal Cricket) अशोक डिंडा के क्रिकेट करियर की स्टोरी बेहद दिलचस्प है. वह कोलकाता के एक छोटे से गांव मोयना के रहने वाले थे. उन्होंने कोलकाता में ही साल 2004-2005 में ट्रायल दिया था. जहां कोच को उनकी बॉलिंग काफी पसंद आई थी. जल्द ही उन्होंने रणजी टीम में जगह बनाई और फिर उन्हें टीम इंडिया में भी मौका मिला. (PSG Social media) अशोक डिंडा ने अपना इंटरनेशनल डेब्यू टी20 मैच से किया था. उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ पहला मैच खेला था. इस मुकाबले में उन्हें 3 ओवर गेंदबाजी करने का मौका मिला था. वह 1 विकेट ले सके थे. जबकि कुल 34 रन दिए थे. (BCCI) 2013 के बाद से डिंडा को टीम इंडिया में कभी मौका नहीं मिला. साल 2021 में डिंडा ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया और राजनीति में एंट्री मारी. उन्होंने बंगाल विधानसभा 2021 में मोयना सीट से चुनाव लड़ा और भारी बहुमत से जीत दर्ज की. डिंडा बंगाल से अब मेंबर ऑफ लेजिस्लेटिव असेंबली के सदस्य है. (Instagram) टीम इंडिया में कई ऐसे खिलाड़ी आए जिनका करियर लंबा नहीं चल पाया. उन्हें कुछ ही मैचों में बाहर का रास्ता देखना पड़ा. टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर अशोक डिंडा की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी. उन्होंने टीम इंडिया के लिए सिर्फ 22 मैच खेलें लेकिन उनका करियर लंबा नहीं चल सका. (West bengal Cricket)
Cricketer Turns Politician: टीम इंडिया में कई ऐसे खिलाड़ियों रहे जिनका करियर लंबा नहीं चल सका. एक पूर्व भारतीय क्रिकेटर की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही. उन्होंने भारत के लिए सिर्फ बाईस मैच खेला. क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने राजनीति में एंट्री की ओर एमएलए बन गए. टीम इंडिया में कई ऐसे खिलाड़ी आए जिनका करियर लंबा नहीं चल पाया. उन्हें कुछ ही मैचों में बाहर का रास्ता देखना पड़ा. टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर अशोक डिंडा की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी. उन्होंने टीम इंडिया के लिए सिर्फ बाईस मैच खेलें लेकिन उनका करियर लंबा नहीं चल सका. अशोक डिंडा के क्रिकेट करियर की स्टोरी बेहद दिलचस्प है. वह कोलकाता के एक छोटे से गांव मोयना के रहने वाले थे. उन्होंने कोलकाता में ही साल दो हज़ार चार-दो हज़ार पाँच में ट्रायल दिया था. जहां कोच को उनकी बॉलिंग काफी पसंद आई थी. जल्द ही उन्होंने रणजी टीम में जगह बनाई और फिर उन्हें टीम इंडिया में भी मौका मिला. अशोक डिंडा ने अपना इंटरनेशनल डेब्यू टीबीस मैच से किया था. उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ पहला मैच खेला था. इस मुकाबले में उन्हें तीन ओवर गेंदबाजी करने का मौका मिला था. वह एक विकेट ले सके थे. जबकि कुल चौंतीस रन दिए थे. दो हज़ार तेरह के बाद से डिंडा को टीम इंडिया में कभी मौका नहीं मिला. साल दो हज़ार इक्कीस में डिंडा ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया और राजनीति में एंट्री मारी. उन्होंने बंगाल विधानसभा दो हज़ार इक्कीस में मोयना सीट से चुनाव लड़ा और भारी बहुमत से जीत दर्ज की. डिंडा बंगाल से अब मेंबर ऑफ लेजिस्लेटिव असेंबली के सदस्य है. टीम इंडिया में कई ऐसे खिलाड़ी आए जिनका करियर लंबा नहीं चल पाया. उन्हें कुछ ही मैचों में बाहर का रास्ता देखना पड़ा. टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर अशोक डिंडा की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी. उन्होंने टीम इंडिया के लिए सिर्फ बाईस मैच खेलें लेकिन उनका करियर लंबा नहीं चल सका.
VAISAKHA 11, (ग) क्या राज्य सरकार ने इस सम्बन्ध में केन्द्र से सहायता मांगी है ? खाद्य, कृषि, सामुदायिक विकास तथा सहकार मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अन्नासाहिब शिन्दे ) : (क) और ( ख ) . पूछी गयी जानकारी राज्य सरकार से एकत्रित की जा रही है और सभापटल पर रख दी जाएगी । (ग) जी नहीं । Introduction of Newly designed R. M.S. Compartment on Western Railway 8268. SHRI ONKAR LAL BERWA : Will the Minister of INFORMATION AND BROADCASTING AND COMMUNICATION be pleased to state : (a) whether it is a fact that newly modern R.M.S. Compartments on the Central and Southern Railways were introduced a number of years ago; (b) if so, the reasons for not introducing such compartments in the Western Railway also; and (c) the time by which these compartments are likely to be introduced in Western Railway ? THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF INFORMATION AND BROADCASTING, AND IN THE DEPARTMENT OF COMMUNICATIONS (SHRI SHER SINGH): (a) Yes. (b) Question does not arise as ten new type of R. M. S. vans have been supplied on Western Railway in 1968-69. (c) Question does not arise. टेलीविजन पर किसानों के लिए कार्यक्रम 8269. श्री ओंकार लाल बेरवा : श्री शिव चन्द्र झा : क्या सूचना तथा प्रसारण और संचार मन्त्री यह बताने की कृपा करेंगे कि : ( क ) क्या टेलीविजन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को शिक्षित करने का कार्यक्रम आरम्भ कर दिया गया है; और (ख) यदि हां, तो ये कार्यक्रम किन-किन स्थानों में आरम्भ किये गये हैं तथा इससे कितने किसानों को शिक्षित किया जा रहा है ? सूचना तथा प्रसारण मंत्रालय और संचार विभाग में राज्य मन्त्री ( श्री० इ० कु० गुजराल) : जी, हां । (ख) कार्य टेली-क्लबें दिल्ली के इर्द-गिर्द 80 गांवों में गठित की गई हैं। इन गांवों की सूची सभा पटल पर रखी जाती है । [पुस्तकालय में रख दी गई। देखिये संख्या LT983/69] अनुमान है कि इन केन्द्रों में लगभग 8,000 व्यक्ति कार्यक्रमों को देखते हैं जो सप्ताह में दो बार टेलीविजन पर दिखाए जाते है । औद्योगिक कर्मचारियों के लिए केन्द्रीय कल्याण मंत्रालय 8270. श्री ओंकार लाल बेरवा : श्री वि० नरसिम्हा राव : श्री देवराव पाटिल : क्या श्रम तथा पुनर्वास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि : ( क ) क्या यह सच है कि राष्ट्रीय श्रम आयोग के अध्ययन दल ने औद्योगिक कर्मचारियों के लिए एक केन्द्रीय कल्याण मंत्रालय बनाये जाने की सिफारिश की है; और (ख) यदि हां, तो इस बारे में सरकार का क्या कार्यवाही करने का प्रस्ताव है ? श्रम, रोजगार तथा पुनर्वास मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री भागवत का आजाद ) : (क) सरकारी क्षेत्र में श्रम समस्या सम्बन्धी अध्ययन दल के विचार-विमर्श (चर्चा) के दौरान सरकारी उपक्रमों के लिए केन्द्रीय स्तर पर कल्याण
VAISAKHA ग्यारह, क्या राज्य सरकार ने इस सम्बन्ध में केन्द्र से सहायता मांगी है ? खाद्य, कृषि, सामुदायिक विकास तथा सहकार मंत्रालय में राज्य मंत्री : और . पूछी गयी जानकारी राज्य सरकार से एकत्रित की जा रही है और सभापटल पर रख दी जाएगी । जी नहीं । Introduction of Newly designed R. M.S. Compartment on Western Railway आठ हज़ार दो सौ अड़सठ. SHRI ONKAR LAL BERWA : Will the Minister of INFORMATION AND BROADCASTING AND COMMUNICATION be pleased to state : whether it is a fact that newly modern R.M.S. Compartments on the Central and Southern Railways were introduced a number of years ago; if so, the reasons for not introducing such compartments in the Western Railway also; and the time by which these compartments are likely to be introduced in Western Railway ? THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF INFORMATION AND BROADCASTING, AND IN THE DEPARTMENT OF COMMUNICATIONS : Yes. Question does not arise as ten new type of R. M. S. vans have been supplied on Western Railway in एक हज़ार नौ सौ अड़सठ-उनहत्तर. Question does not arise. टेलीविजन पर किसानों के लिए कार्यक्रम आठ हज़ार दो सौ उनहत्तर. श्री ओंकार लाल बेरवा : श्री शिव चन्द्र झा : क्या सूचना तथा प्रसारण और संचार मन्त्री यह बताने की कृपा करेंगे कि : क्या टेलीविजन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को शिक्षित करने का कार्यक्रम आरम्भ कर दिया गया है; और यदि हां, तो ये कार्यक्रम किन-किन स्थानों में आरम्भ किये गये हैं तथा इससे कितने किसानों को शिक्षित किया जा रहा है ? सूचना तथा प्रसारण मंत्रालय और संचार विभाग में राज्य मन्त्री : जी, हां । कार्य टेली-क्लबें दिल्ली के इर्द-गिर्द अस्सी गांवों में गठित की गई हैं। इन गांवों की सूची सभा पटल पर रखी जाती है । [पुस्तकालय में रख दी गई। देखिये संख्या LTनौ सौ तिरासी/उनहत्तर] अनुमान है कि इन केन्द्रों में लगभग आठ,शून्य व्यक्ति कार्यक्रमों को देखते हैं जो सप्ताह में दो बार टेलीविजन पर दिखाए जाते है । औद्योगिक कर्मचारियों के लिए केन्द्रीय कल्याण मंत्रालय आठ हज़ार दो सौ सत्तर. श्री ओंकार लाल बेरवा : श्री विशून्य नरसिम्हा राव : श्री देवराव पाटिल : क्या श्रम तथा पुनर्वास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि : क्या यह सच है कि राष्ट्रीय श्रम आयोग के अध्ययन दल ने औद्योगिक कर्मचारियों के लिए एक केन्द्रीय कल्याण मंत्रालय बनाये जाने की सिफारिश की है; और यदि हां, तो इस बारे में सरकार का क्या कार्यवाही करने का प्रस्ताव है ? श्रम, रोजगार तथा पुनर्वास मंत्रालय में राज्य मंत्री : सरकारी क्षेत्र में श्रम समस्या सम्बन्धी अध्ययन दल के विचार-विमर्श के दौरान सरकारी उपक्रमों के लिए केन्द्रीय स्तर पर कल्याण
Agra. ताजगंज थाना क्षेत्र में स्थित एसआरएस वंडर पार्क स्विमिंग पूल में उस समय कोहराम मच गया जब स्विमिंग पूल में नहाते वक्त अचानक से एक युवक डूब गया और डूबने से उसकी मौत हो गई। आनन-फानन में लोगों ने इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने कानूनी कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम ग्रह भिजवाया और इस पूरे मामले की जांच पड़ताल में जुट गई। युवक की मौत का लाइव सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है जो सोशल मीडिया पर भी तेजी के साथ वायरल हो रहा है। यह पूरा मामला ताजगंज थाना क्षेत्र के एसआरएस वंडर पार्क का है। बताया जाता है कि युवक अपने दोस्तों के साथ स्विमिंग पूल में नहाने के लिए आया था। युवक काफी देर तक अपने दोस्तों के साथ स्विमिंग पूल में स्विमिंग का आनंद ले रहा था लेकिन अचानक से स्विमिंग पूल में डूबने से उसकी मौत हो गई। इस पूरी घटना के बाद पुलिस को भी सूचना दी गयी। जानकारी होते ही क्षेत्रीय पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की और युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया साथ ही मृतक के परिजनों को भी इसकी सूचना दी गई। मामला गंभीर होने पर सीसीटीवी फुटेज भी चेक किए गए। लगभग 2:30 मिनट के इस सीसीटीवी वीडियो में कई लोगों के साथ युवक नहाते हुए दिखाई दे रहा है लेकिन बाद में अचानक एक कोने पर चला जाता है और उसके बाद छटपटाने लगता है। युवक के पानी में डूबने के चलते किसी को आवाज भी नहीं दे पाया और इस बीच पानी में डूबने से उसकी मौत हो गई। युवक की मौत की पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हुई।
Agra. ताजगंज थाना क्षेत्र में स्थित एसआरएस वंडर पार्क स्विमिंग पूल में उस समय कोहराम मच गया जब स्विमिंग पूल में नहाते वक्त अचानक से एक युवक डूब गया और डूबने से उसकी मौत हो गई। आनन-फानन में लोगों ने इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने कानूनी कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम ग्रह भिजवाया और इस पूरे मामले की जांच पड़ताल में जुट गई। युवक की मौत का लाइव सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है जो सोशल मीडिया पर भी तेजी के साथ वायरल हो रहा है। यह पूरा मामला ताजगंज थाना क्षेत्र के एसआरएस वंडर पार्क का है। बताया जाता है कि युवक अपने दोस्तों के साथ स्विमिंग पूल में नहाने के लिए आया था। युवक काफी देर तक अपने दोस्तों के साथ स्विमिंग पूल में स्विमिंग का आनंद ले रहा था लेकिन अचानक से स्विमिंग पूल में डूबने से उसकी मौत हो गई। इस पूरी घटना के बाद पुलिस को भी सूचना दी गयी। जानकारी होते ही क्षेत्रीय पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की और युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया साथ ही मृतक के परिजनों को भी इसकी सूचना दी गई। मामला गंभीर होने पर सीसीटीवी फुटेज भी चेक किए गए। लगभग दो:तीस मिनट के इस सीसीटीवी वीडियो में कई लोगों के साथ युवक नहाते हुए दिखाई दे रहा है लेकिन बाद में अचानक एक कोने पर चला जाता है और उसके बाद छटपटाने लगता है। युवक के पानी में डूबने के चलते किसी को आवाज भी नहीं दे पाया और इस बीच पानी में डूबने से उसकी मौत हो गई। युवक की मौत की पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हुई।
मिथुन मंडल,पखांजुरः कांकेर जिले के पखांजुर SDM कार्यलय के सामने आदिवासी समाज द्वारा भूपेश सरकार के खिलाफ भाजपा सांसद के खिलाफ जोरदार किया नारेबाजी वही अपनी 14 मांगों को लेकर SDM के पास राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया। सियाराम पुडो (आदिवासी समाज के नेता)- का कहना है कि 14 बिंदुओं में हमारा मांग है और क्षेत्र के जल जंगल जमीन पर हमारा हक है इसकी लड़ाई हम लग रहे है। ये मांग पूरी नही हुई तो आने वाले समय मे पूरा देश के लोग इकट्ठा होकर लड़ेंगे। जिसपर पखांजुर SDM धनंजय नेताम 14 बिंदु में आदिवासी समाज द्वारा ज्ञापन महामहिम राज्यपाल के नाम दिया गया है,जिसको जल्दी वाह तक पहुचाया जाएगा जो भी निर्णय लिया जाएगा जल्द अवगत करवाया जाएगा।
मिथुन मंडल,पखांजुरः कांकेर जिले के पखांजुर SDM कार्यलय के सामने आदिवासी समाज द्वारा भूपेश सरकार के खिलाफ भाजपा सांसद के खिलाफ जोरदार किया नारेबाजी वही अपनी चौदह मांगों को लेकर SDM के पास राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया। सियाराम पुडो - का कहना है कि चौदह बिंदुओं में हमारा मांग है और क्षेत्र के जल जंगल जमीन पर हमारा हक है इसकी लड़ाई हम लग रहे है। ये मांग पूरी नही हुई तो आने वाले समय मे पूरा देश के लोग इकट्ठा होकर लड़ेंगे। जिसपर पखांजुर SDM धनंजय नेताम चौदह बिंदु में आदिवासी समाज द्वारा ज्ञापन महामहिम राज्यपाल के नाम दिया गया है,जिसको जल्दी वाह तक पहुचाया जाएगा जो भी निर्णय लिया जाएगा जल्द अवगत करवाया जाएगा।
कल्याणी करुणा ] जवाहर-किग्णावली प्रथम भाग [ १५६ महापुरुष के पास किसी को ले जाना तो उचित है पर ले जाने के बाद उसकी इच्छा के विरुद्ध उठा कर उसे ले आना उचित नहीं समझा जाता । इसी नियम का खयाल करके श्रीकृष्णजी ने गजसुकुमार से उठ चलने के लिए नहीं कहा । उस समय गनसुकुमार किसी दूसरी दुनिया में चक्कर लगा रहे थे । चे सोच रहे थे -- 'भैया श्रीकृष्णजी मेरा विवाह करना चाहते हैं 'लेकिन भगवान् नेमिनाथ ने अपना विवाह क्यों नहीं कराया १ जिस परम प्रयोजन की सिद्धि के लिये भगवान् ने विवाह करना स्वीकार कर दिया, उसी के लिए मुझे भी विवाह का त्याग क्यों नहीं कर देना चाहिए ? भगवान् समुद्रविजयजी के पुत्र है और में वसुदेव का पुत्र हूँ। दोनों एक ही कुल में उत्पन्न हुए हैं। विवाह में कोई तथ्य होता, तो भगवान् क्यों न करते ! मगवान् का उपदेश उचित ही है कि यह शरीर विवाह करके भोगोपभोग भोगने के लिए नहीं है किन्तु ऐसा कल्याण करने के लिए है जिसमें काका श्रश मात्र भी न हो और जिसके पश्चात् कल्याण की भावना तक न रहे ।' इस प्रकार मन ही मन सोच कर गजसुकुमार भगवान् के समक्ष खडे होकर कहने लगे - 'भगवान् ! में माता-पिता से श्राज्ञा लेकर आपसे दीक्षा ग्रहण करूंगा-आपके चरण-शरण में आऊँगा ।' भगवान् पूर्ण वीतराग थे । उनके अन्तर में किसी प्रकार की स्पृहा शेष नहीं रही थी । अव शिष्य के रूप में राजकुमार को पा लेने की उन्हें लेशमात्र भी उत्सुकता न थी । उन्होंने उसी गंभीर गिरा से कहा- 'देवानुप्रिय ! जिस प्रकार तुम्हें सुख हो, वही करो।" १६० ] जवाहर-किरणावली : प्रथम भाग ससार में कई लोग ऐसे होते हैं जो दीक्षा लेने वाले को घसीट कर, बलात्कार से या प्रलोभनों से ससार में ही रखते हैं, त कोई ऐसे व्यक्ति भी होते हैं जो ससार से विमुख करके उत्कृष्ट अवस्था में पहुॅचा देते हैं । गजसुकुमार भगवान् के पास से विदा होकर देवकी के पास आये । महारानी देवकीने गजसुकुमार को प्रेमपूर्वक पुचकारते हुए कहा -- 'बेटा ! प्रान अब तक कहाँ रहे ?? गजसुकुमार--'मातानी, में भगवान् नेमिनाथ के दर्शन करने गया था ।" देवकी - 'च्छा किया जो भगवान् के दर्शन किये । आज तेरे नेत्र सार्थक हो गये । गज॰--भगवान् का उपदेश सुनकर मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई है । मुझ पर उपदेश का खूब प्रभाव हुआ है । भगवान् से मुझे अनुपम प्रेम हो गया है। मैंने भगवान् को प्रणाम क्या किया, मानो अपना सर्वस्त्र उनके चरणों पर निछावर कर दिया है ।' देवकी- 'वत्स ! तू भगवान् का भक्त निकला, प्रतएव मेरा तुझे जन्म देना, नहलाना-धुलाना और पालन-पेप्सा करना सब सार्थक हुआ महारानी देवकी के इसे उत्तर से मनसुकुमार एनम गये कि नाता ने श्र्व तक मेरा अभिप्राय नहीं समझा । तत्र स्पष्ट कहने के उद्देश्य से गजनुकुमर बोले- 'माताजी, मेरी इच्छा है कल्याणी करुणा] जवाहर-किरणावली : प्रथम भाग कि अगर आप आज्ञा दें तो मैं भगवान् से मुनि दीक्षा ग्रहण कर ससार का त्याग कर आत्मा का शाश्वत श्रेय साधन करूं । देवकी, गजसुकुमार का कथन सुन कर गभीर विचार में डूब गई । उन्होंने सोचा - 'गनसुकुमार ने भगवान् से दीक्षा लेने का निश्चय कर लिया है तो इस निश्चय का बदलना सरल नहीं है। अब यह ढोक्षा रुक न सकेगी।' इस प्रकार विचार करने और पुत्रवियोग की कल्पना से देवकी को मूर्च्छा आ गई । तदनन्तर जब देवकी होश में थाई तो कहने लगी - 'वत्स ! तू मेरा इकलौता पुत्र है। यों तो मैंने तुझ सहित आठ पुत्रों को जन्म दिया है, परन्तु तुझ अकेले को ही पुत्र रूप से लालन-पालन करने का अवसर मुझे मिल सका है । इस दृष्टि से तू ही मेरा एकमात्र पुत्र है । तू ही मेरा प्राणाधार है। मेरे जीवन का तू ही सहारा है । मैं यह कैसे सहन कर सकती हू कि तू चढ़ती जवानी में साधु बनकर ससार के सुखों से सर्वथा विमुख हो जाय १ बेटा ! जब हम यह पर्याय त्याग कर परलोक की श्रोर प्रयाण करें तब तू भले ही दीक्षा अगीकार कर लेना । तब तक तू भुक्तभोगी भी हो जायगा । मैं इस समय दीक्षित होने की आज्ञा नहीं दे सकती ।' गजसुकुमार - 'माता ! आपका कथन सत्य है । आपके असाधारण एवं लोकोत्तर वात्सल्य का पात्र होने का सौभाग्य मुझे प्राप्त है मगर मेरी एक बात सुन लीजिए । आप वीर-माता है । कायरों की माता नहीं है । मै पूछता हू - हमारे राज्य पर कोई शत्रु आक्रमण कर दे और प्रजा को लूटकर उसकी सुख-शाति
कल्याणी करुणा ] जवाहर-किग्णावली प्रथम भाग [ एक सौ छप्पन महापुरुष के पास किसी को ले जाना तो उचित है पर ले जाने के बाद उसकी इच्छा के विरुद्ध उठा कर उसे ले आना उचित नहीं समझा जाता । इसी नियम का खयाल करके श्रीकृष्णजी ने गजसुकुमार से उठ चलने के लिए नहीं कहा । उस समय गनसुकुमार किसी दूसरी दुनिया में चक्कर लगा रहे थे । चे सोच रहे थे -- 'भैया श्रीकृष्णजी मेरा विवाह करना चाहते हैं 'लेकिन भगवान् नेमिनाथ ने अपना विवाह क्यों नहीं कराया एक जिस परम प्रयोजन की सिद्धि के लिये भगवान् ने विवाह करना स्वीकार कर दिया, उसी के लिए मुझे भी विवाह का त्याग क्यों नहीं कर देना चाहिए ? भगवान् समुद्रविजयजी के पुत्र है और में वसुदेव का पुत्र हूँ। दोनों एक ही कुल में उत्पन्न हुए हैं। विवाह में कोई तथ्य होता, तो भगवान् क्यों न करते ! मगवान् का उपदेश उचित ही है कि यह शरीर विवाह करके भोगोपभोग भोगने के लिए नहीं है किन्तु ऐसा कल्याण करने के लिए है जिसमें काका श्रश मात्र भी न हो और जिसके पश्चात् कल्याण की भावना तक न रहे ।' इस प्रकार मन ही मन सोच कर गजसुकुमार भगवान् के समक्ष खडे होकर कहने लगे - 'भगवान् ! में माता-पिता से श्राज्ञा लेकर आपसे दीक्षा ग्रहण करूंगा-आपके चरण-शरण में आऊँगा ।' भगवान् पूर्ण वीतराग थे । उनके अन्तर में किसी प्रकार की स्पृहा शेष नहीं रही थी । अव शिष्य के रूप में राजकुमार को पा लेने की उन्हें लेशमात्र भी उत्सुकता न थी । उन्होंने उसी गंभीर गिरा से कहा- 'देवानुप्रिय ! जिस प्रकार तुम्हें सुख हो, वही करो।" एक सौ साठ ] जवाहर-किरणावली : प्रथम भाग ससार में कई लोग ऐसे होते हैं जो दीक्षा लेने वाले को घसीट कर, बलात्कार से या प्रलोभनों से ससार में ही रखते हैं, त कोई ऐसे व्यक्ति भी होते हैं जो ससार से विमुख करके उत्कृष्ट अवस्था में पहुॅचा देते हैं । गजसुकुमार भगवान् के पास से विदा होकर देवकी के पास आये । महारानी देवकीने गजसुकुमार को प्रेमपूर्वक पुचकारते हुए कहा -- 'बेटा ! प्रान अब तक कहाँ रहे ?? गजसुकुमार--'मातानी, में भगवान् नेमिनाथ के दर्शन करने गया था ।" देवकी - 'च्छा किया जो भगवान् के दर्शन किये । आज तेरे नेत्र सार्थक हो गये । गज॰--भगवान् का उपदेश सुनकर मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई है । मुझ पर उपदेश का खूब प्रभाव हुआ है । भगवान् से मुझे अनुपम प्रेम हो गया है। मैंने भगवान् को प्रणाम क्या किया, मानो अपना सर्वस्त्र उनके चरणों पर निछावर कर दिया है ।' देवकी- 'वत्स ! तू भगवान् का भक्त निकला, प्रतएव मेरा तुझे जन्म देना, नहलाना-धुलाना और पालन-पेप्सा करना सब सार्थक हुआ महारानी देवकी के इसे उत्तर से मनसुकुमार एनम गये कि नाता ने श्र्व तक मेरा अभिप्राय नहीं समझा । तत्र स्पष्ट कहने के उद्देश्य से गजनुकुमर बोले- 'माताजी, मेरी इच्छा है कल्याणी करुणा] जवाहर-किरणावली : प्रथम भाग कि अगर आप आज्ञा दें तो मैं भगवान् से मुनि दीक्षा ग्रहण कर ससार का त्याग कर आत्मा का शाश्वत श्रेय साधन करूं । देवकी, गजसुकुमार का कथन सुन कर गभीर विचार में डूब गई । उन्होंने सोचा - 'गनसुकुमार ने भगवान् से दीक्षा लेने का निश्चय कर लिया है तो इस निश्चय का बदलना सरल नहीं है। अब यह ढोक्षा रुक न सकेगी।' इस प्रकार विचार करने और पुत्रवियोग की कल्पना से देवकी को मूर्च्छा आ गई । तदनन्तर जब देवकी होश में थाई तो कहने लगी - 'वत्स ! तू मेरा इकलौता पुत्र है। यों तो मैंने तुझ सहित आठ पुत्रों को जन्म दिया है, परन्तु तुझ अकेले को ही पुत्र रूप से लालन-पालन करने का अवसर मुझे मिल सका है । इस दृष्टि से तू ही मेरा एकमात्र पुत्र है । तू ही मेरा प्राणाधार है। मेरे जीवन का तू ही सहारा है । मैं यह कैसे सहन कर सकती हू कि तू चढ़ती जवानी में साधु बनकर ससार के सुखों से सर्वथा विमुख हो जाय एक बेटा ! जब हम यह पर्याय त्याग कर परलोक की श्रोर प्रयाण करें तब तू भले ही दीक्षा अगीकार कर लेना । तब तक तू भुक्तभोगी भी हो जायगा । मैं इस समय दीक्षित होने की आज्ञा नहीं दे सकती ।' गजसुकुमार - 'माता ! आपका कथन सत्य है । आपके असाधारण एवं लोकोत्तर वात्सल्य का पात्र होने का सौभाग्य मुझे प्राप्त है मगर मेरी एक बात सुन लीजिए । आप वीर-माता है । कायरों की माता नहीं है । मै पूछता हू - हमारे राज्य पर कोई शत्रु आक्रमण कर दे और प्रजा को लूटकर उसकी सुख-शाति
धनबादः झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के आह्वान पर धनबाद समेत पूरे राज्य में पेट्रोल पंपों की मंगलवार को हड़ताल रही। हड़ताल के दौरान धनबाद के सभी 171 पेट्रोल पंप सुबह से ही बंद रहे, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्राहक पेट्रोल के लिए पंपों पर पहुंचे लेकिन उन्हें घूम कर वापस लौटना पड़ा। हड़ताल एक दिवसीय थी। शाम छह बजे तक सभी पंप बंद रहे। इस दौरान पेट्रोलियम पदार्थों की खरीद-बिक्री पूरी तरह से ठप रही। जबकि झारखंड सरकार ने बंद को अवैध घोषित किया है। बावजूद इसके पेट्रोल पंप एसोसिएशन के पदाधिकारी अपनी मांग पर अड़े हुए रहे। झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने के अध्यक्ष अशोक सिंह ने कहा कि राज्य सरकार को समय दिया गया था, लेकिन सरकार ने हमारी मांगों पर विचार नहीं किया। उन्होंने कहा कि हमने सरकारी बकाया के भुगतान की भी मांग की थी, जिसपर वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि तीन दिसंबर को एसोसिएशन ने डीजल में वैट 22 फीसदी से 17 फीसदी घटाने की मांग की थी। एसोसिएशन ने अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अगर 10 दिनों के भीतर हमारी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो 21 पेट्रोल पंप बंद रखा जाएगा। लेकिन 17 दिन गुजर जाने के बाद भी अब तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। धनबाद जिले में प्रतिदिन 344 केएल (किलो लीटर) डीजल तथा 217 केएल पेट्रोल की खपत होती है।
धनबादः झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के आह्वान पर धनबाद समेत पूरे राज्य में पेट्रोल पंपों की मंगलवार को हड़ताल रही। हड़ताल के दौरान धनबाद के सभी एक सौ इकहत्तर पेट्रोल पंप सुबह से ही बंद रहे, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्राहक पेट्रोल के लिए पंपों पर पहुंचे लेकिन उन्हें घूम कर वापस लौटना पड़ा। हड़ताल एक दिवसीय थी। शाम छह बजे तक सभी पंप बंद रहे। इस दौरान पेट्रोलियम पदार्थों की खरीद-बिक्री पूरी तरह से ठप रही। जबकि झारखंड सरकार ने बंद को अवैध घोषित किया है। बावजूद इसके पेट्रोल पंप एसोसिएशन के पदाधिकारी अपनी मांग पर अड़े हुए रहे। झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने के अध्यक्ष अशोक सिंह ने कहा कि राज्य सरकार को समय दिया गया था, लेकिन सरकार ने हमारी मांगों पर विचार नहीं किया। उन्होंने कहा कि हमने सरकारी बकाया के भुगतान की भी मांग की थी, जिसपर वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि तीन दिसंबर को एसोसिएशन ने डीजल में वैट बाईस फीसदी से सत्रह फीसदी घटाने की मांग की थी। एसोसिएशन ने अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अगर दस दिनों के भीतर हमारी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो इक्कीस पेट्रोल पंप बंद रखा जाएगा। लेकिन सत्रह दिन गुजर जाने के बाद भी अब तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। धनबाद जिले में प्रतिदिन तीन सौ चौंतालीस केएल डीजल तथा दो सौ सत्रह केएल पेट्रोल की खपत होती है।
सनराइजर्स हैदराबाद के तेज गेंदबाद उमरान मलिक (Umran Malik) इन दिनों अपनी रफ्तार से आईपीएल 2022 में कहर ढाह रहे हैं. उनके इस कहर का शिकार कई दिग्गज बल्लेबाज भी हुए हैं. उमरान की प्रतिभा का आलम यह है कि उन्हें कई फैंस और दिग्गज टीम इंडिया (Indian Cricket Team) में देखने लगे हैं. लंबे समय बाद भारत में ऐसा तेज गेंदबाज देखने को मिला है जो कि अपनी रफ्तार से हैरान कर रहा है. हालांकि इसे लेकर सबकी सोच एक जैसी नहीं हैं. टीम इंडिया के लिए खेल रहे दिग्गज और स्टार गेंदबाज मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) उमरान मलिक की रफ्तार से प्रभावित नहीं है.
सनराइजर्स हैदराबाद के तेज गेंदबाद उमरान मलिक इन दिनों अपनी रफ्तार से आईपीएल दो हज़ार बाईस में कहर ढाह रहे हैं. उनके इस कहर का शिकार कई दिग्गज बल्लेबाज भी हुए हैं. उमरान की प्रतिभा का आलम यह है कि उन्हें कई फैंस और दिग्गज टीम इंडिया में देखने लगे हैं. लंबे समय बाद भारत में ऐसा तेज गेंदबाज देखने को मिला है जो कि अपनी रफ्तार से हैरान कर रहा है. हालांकि इसे लेकर सबकी सोच एक जैसी नहीं हैं. टीम इंडिया के लिए खेल रहे दिग्गज और स्टार गेंदबाज मोहम्मद शमी उमरान मलिक की रफ्तार से प्रभावित नहीं है.
चर्चा में क्यों? 14 दिसंबर, 2023 को मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को जेड प्लस सुरक्षा दी गई है। - जेड प्लस सुरक्षा के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सुरक्षा में 36 NSG कमांडो तैनात होंगे। इसके साथ ही 2 एसपी, 2 एएसपी और 4 डीएसपी, विशेष सुरक्षा बल के जवान और राज्य पुलिस के हथियारबंद जवान तैनात किये जाएंगे। - सीएम डॉ. मोहन यादव के लिये 15 से 18 गाड़ियों का काफिला होगा। इस काफिले में एक बुलेटप्रूफ कार भी शामिल हैं, जिसमें वह सवार रहेंगे। - गौरतलब है कि भारत में मुख्य रूप से 4 प्रकार की सुरक्षा श्रेणियाँ हैंः एक्स (X), वाई (Y), जेड (Z) और जेड प्लस (Z Plus)। इसके अतिरिक्त SPG सुरक्षा भी है, जो केवल प्रधानमंत्री और उसके परिवार के लिये होती है। अन्य सुरक्षा श्रेणियों के तहत किसी भी ऐसे व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान की जा सकती है, जिस पर खतरे की आशंका के संबंध में केंद्र या राज्य सरकारों के पास खतरे से जुड़ी कोई जानकारी हो।
चर्चा में क्यों? चौदह दिसंबर, दो हज़ार तेईस को मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को जेड प्लस सुरक्षा दी गई है। - जेड प्लस सुरक्षा के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सुरक्षा में छत्तीस NSG कमांडो तैनात होंगे। इसके साथ ही दो एसपी, दो एएसपी और चार डीएसपी, विशेष सुरक्षा बल के जवान और राज्य पुलिस के हथियारबंद जवान तैनात किये जाएंगे। - सीएम डॉ. मोहन यादव के लिये पंद्रह से अट्ठारह गाड़ियों का काफिला होगा। इस काफिले में एक बुलेटप्रूफ कार भी शामिल हैं, जिसमें वह सवार रहेंगे। - गौरतलब है कि भारत में मुख्य रूप से चार प्रकार की सुरक्षा श्रेणियाँ हैंः एक्स , वाई , जेड और जेड प्लस । इसके अतिरिक्त SPG सुरक्षा भी है, जो केवल प्रधानमंत्री और उसके परिवार के लिये होती है। अन्य सुरक्षा श्रेणियों के तहत किसी भी ऐसे व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान की जा सकती है, जिस पर खतरे की आशंका के संबंध में केंद्र या राज्य सरकारों के पास खतरे से जुड़ी कोई जानकारी हो।
पाकिस्तान सुपर लीग(पीएसएल) ट्वंटी 20 टूर्नामेंट की चार टीमों इस्लामाबाद, पेशावर, क्वेटा और कराची ने प्लेआफ में जगह पक्की कर ली है, हालांकि लाहौर में पांच मार्च को होने वाले फाइनल मुकाबले को लेकर सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति अभी भी साफ नहीं है। पीएसएल टूर्नामेंट को सुरक्षा कारणों से दुबई में खेला जाता है। लेकिन इस बार इसका फाइनल लाहौर में कराने की योजना है। टूर्नामेंट अपने आखिरी चरण में पहुंच गया है जहां कराची किंग्स ने इस्लामाबाद यूनाइटेड को छह विकेट से हराया। इस्लामाबाद की टीम पहले ही प्लेआफ में जगह बना चुकी है। इसके अलावा पेशावर जाल्मी और क्वेटा ने लीग चरण में पहला और दूसरा स्थान हासिल किया। ये दोनों टीमें शारजाह में प्लेऑफ खेलेंगी और विजेता टीम फाइनल में पहुंचेगी। टूर्नामेंट का दूसरा प्लेऑफ इस्लामाबाद और कराची में एक मार्च को होगा। इनमें विजेता टीम पहले प्लेऑफ की विजेता टीम से खेलेगी और जीतने वाली टीम फाइनल में जगह बनाएगी। हालांकि अभी तक लाहौर में इसके खिताबी मुकाबले को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। लाहौर में पिछले कुछ दिनों में दो बड़े बम धमाकों में 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं और कई की जानें गई हैं। लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड(पीसीबी) इसका फाइनल लाहौर में कराने को लेकर अड़ा हुआ है जबकि विदेशी खिलाड़ियों की ओर से पाकिस्तान में खेलने को लेकर स्थिति साफ नहीं की गई है। पाकिस्तान सरकार और सेना ने हालांकि फाइनल के लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था का भरोसा दिया है।
पाकिस्तान सुपर लीग ट्वंटी बीस टूर्नामेंट की चार टीमों इस्लामाबाद, पेशावर, क्वेटा और कराची ने प्लेआफ में जगह पक्की कर ली है, हालांकि लाहौर में पांच मार्च को होने वाले फाइनल मुकाबले को लेकर सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति अभी भी साफ नहीं है। पीएसएल टूर्नामेंट को सुरक्षा कारणों से दुबई में खेला जाता है। लेकिन इस बार इसका फाइनल लाहौर में कराने की योजना है। टूर्नामेंट अपने आखिरी चरण में पहुंच गया है जहां कराची किंग्स ने इस्लामाबाद यूनाइटेड को छह विकेट से हराया। इस्लामाबाद की टीम पहले ही प्लेआफ में जगह बना चुकी है। इसके अलावा पेशावर जाल्मी और क्वेटा ने लीग चरण में पहला और दूसरा स्थान हासिल किया। ये दोनों टीमें शारजाह में प्लेऑफ खेलेंगी और विजेता टीम फाइनल में पहुंचेगी। टूर्नामेंट का दूसरा प्लेऑफ इस्लामाबाद और कराची में एक मार्च को होगा। इनमें विजेता टीम पहले प्लेऑफ की विजेता टीम से खेलेगी और जीतने वाली टीम फाइनल में जगह बनाएगी। हालांकि अभी तक लाहौर में इसके खिताबी मुकाबले को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। लाहौर में पिछले कुछ दिनों में दो बड़े बम धमाकों में एक सौ से अधिक लोग घायल हुए हैं और कई की जानें गई हैं। लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इसका फाइनल लाहौर में कराने को लेकर अड़ा हुआ है जबकि विदेशी खिलाड़ियों की ओर से पाकिस्तान में खेलने को लेकर स्थिति साफ नहीं की गई है। पाकिस्तान सरकार और सेना ने हालांकि फाइनल के लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था का भरोसा दिया है।
कैटफ़िश के लिए पानी के नीचे का शिकार सुरक्षित नहीं है, लेकिनरोमांचक। और कैटफ़िश को पकड़ने वाले हर मछुआरे के पास इस आकर्षक घटना के बारे में अपनी निजी, निजी धारणा और राय है - इतने सारे पानी के नीचे के शिकार। बस ध्यान दें कि आपको कोई अनुमान या इच्छा नहीं करना चाहिएकैटफ़िश के कुछ आकार बेशक, पचास किलोग्राम कैटफ़िश एक दुर्लभ भाग्य है, लेकिन दस किलोग्राम जीवित वजन अब भी बहुत कुछ है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किस प्रकार मछली पकड़ी गई थी, इसलिए सोम को विशाल और "बच्चे" में विभाजित नहीं किया गया। यदि शिकार पानी के नीचे है, तो कैटफ़िश को पकड़ते समययह बहुत ही आपरेशन के लिए आगे बढ़ने से पहले कुछ बिंदुओं पर विचार करने योग्य है। सबसे पहले, यह समय के लिए महत्वपूर्ण है मछली की पकड़ नदी, मछली पकड़ने के समय (दिन हो या रात), कितने longline या नीचे मलबे, som है, जिनमें से इस खंड में के लिए है - गर्त या स्लॉट के लिए। लेकिन मछली मूल्यांकन किया जाना चाहिए और मछली पकड़ने की तकनीक की गुणवत्ता को पकड़ने के बाद - सिले कैटफ़िश जहां यह, एक भाला के लिए छिद्र किया है, तो त्वचा बरकरार है, चाहे पेट खराब हो गया है की तरह। इसके अलावा, प्रत्येक मछुआरे और अभी भी मछली पकड़ने के दौरान उनके कार्यों की सराहना करते हैं - गिल्स से अधिक पकड़ा कैटफ़िश या नहीं, और मछली के जबड़े से पकड़ा गया था (इस कहानी का मछुआरों की सबसे गर्व है, क्योंकि इस तरह के एक कदम, एक मछुआरे की मौत का सामना कर सकता है मछली काफी बड़ी है)। कैटफ़िश के लिए पानी के नीचे शिकार की कोई निश्चित रणनीति नहीं है - एक मछुआरे का व्यक्तिगत अनुभव, जो वर्षों से जमा हुआ है, यहां एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सब के बाद, नौसिखिया मछुआरों कैटफ़िश टूटा हाथ, उखड़ कलाई, Flay के साथ एक लड़ाई में कर सकते हैं - इस तरह के नुकसान नहीं इस मछली के साथ एक लड़ाई में असामान्य है। कैटफ़िश के लिए शिकार खतरों से भरा है। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने और जीवित और स्वस्थ रहने के लिए, कुछ बिंदुओं को याद रखना महत्वपूर्ण है। सबसे पहले - जब पानी के नीचे की मछली पकड़ने, कोई भी मामले में आप अपने हाथ पर दसव लपेट नहीं करना चाहिए हाँ, मछली आप चाहते हैं के साथ शीर्ष तैरना, लेकिन यह याद है कि मछली रीढ़ की हड्डी में मारा आक्षेप में ऐंठन हो सकता है या यहाँ तक कि लायक है "हिस्सेदारी हो जाते हैं।" इस मामले में, सबसे पहले उत्साहित नहीं हो, पहाड़-पनडुब्बी, खासकर अगर मछली बड़ी होती है दूसरा - पहले (और शायद निर्णायक) हड़ताल के समय, आपको मछली रखने की कोशिश नहीं करनी चाहिए खनन पर नियंत्रण संभव है जब इसे उथले पानी में साफ़ साफ़ पानी में निकाला जाता है। इस संबंध में, ज़ाहिर है, दोपहर में शिकार करना बेहतर होता है तीसरे नियम एक गोताखोरी है - एक शॉट। यह किसी भी पानी के नीचे शिकारी का लोहा नियम है। एड्रेनालाईन शिकारी बह निकला soberly स्थिति का आकलन, और मरने मछली असुरक्षित के करीब रहें रोकता है। चौथा नियम (यह पहली बार होना चाहिए) - गोते चाकू की उपस्थिति सत्यापित करने के बाद, और इस कार्रवाई स्वचालन के लिए लाया जाना चाहिए। पांचवां नियम है लाइन और कुंडली की जांच करना। चढ़ाई के बाद, कुंडली को जांचना आवश्यक है इसी समय, यह जांघ नहीं होना चाहिए, लिन को पार नहीं करना चाहिए, सिंक करना और जैसे आदर्श दूरी मध्यम-विस्तारित लाइन की कुल लंबाई है छठे नियम बिना किसी बेकार बेकार दे। मछली ही रूप में लंबे समय के रूप में आवश्यक खींच लेंगे, एक ही समय भले ही कैटफ़िश कुंडल झटका हुआ पर, उसे जहाँ तक संभव हो पालन करने के लिए है, जबकि टेंच में कुंडल आधार टिकी हुई है को नियंत्रित करने के लायक है ज्यादा के लायक नहीं है। आप न केवल कैटफ़िश निकालना चाहते हैं, लेकिन आप इसे से हापून भी निकाल सकते हैं। आमतौर पर, पांच मिनट के बाद, कैटफ़िश थका हुआ हो जाता है, हालांकि आधे घंटे के संघर्ष के मामले ज्ञात होते हैं। सातवां नियम हमारे क्षेत्र में खेल रहा है। निस्संदेह, कैटफ़िश जीवन के लिए लड़ेंगे कैटफ़िश एक गहरी मछली है, इसका तत्व नीचे है इस मामले में, मछली सतह के करीब होना चाहिए - यह इतना सबसे असहज, लेकिन अभी भी एक भाला के साथ। आपकी सामरिक श्रेष्ठता के मामले में, कैटफ़िश के लिए पानी के नीचे का शिकार अंतिम चरण में जाता है। आठवें नियम- जैसे ही कैटफ़िश शांत हो जाते हैं, हम हाथ पर दसवें को रील करते हैं, और हम खुद कैटफ़िश में जाते हैं। कैटफ़िश, इस मामले में, एक नई लड़ाई के लिए तैयार नहीं करते हैं, क्योंकि नए लोग सोचते हैं, मछली से संपर्क करने से डरते हैं। यहाँ हम याद रखना चाहिए कि मछली उसके शरीर में एक घातक घाव वितरित बाहर चिपके हुए लोहे भाला बलों इसे से बाहर चले जाते हैं। रील तक पहुंचें जब तक आप कैटफ़िश से अधिक न जाए। नौवें नियम, इस मामले में बहुत उपयुक्त - एक अतिरिक्त हापून और दस गुना या दूसरा मछुआरा सहायक दूसरा हापून अंत में पकड़ता है आम तौर पर कैटफ़िश इससे पहले दो या तीन रसीले बनाता है जिससे कि वह दूसरे हाथी का उपयोग कर सकते हैं दसवां नियम - चाकू को याद रखें इस मामले में इसकी जरुरत है, लेकिन चाकू से चिपकाना असुरक्षित है - कैटफ़िश झटका जा सकता है ताकि यह आपकी अंगुलियों को चाकू से काट दे, या दसवें को काट दे।
कैटफ़िश के लिए पानी के नीचे का शिकार सुरक्षित नहीं है, लेकिनरोमांचक। और कैटफ़िश को पकड़ने वाले हर मछुआरे के पास इस आकर्षक घटना के बारे में अपनी निजी, निजी धारणा और राय है - इतने सारे पानी के नीचे के शिकार। बस ध्यान दें कि आपको कोई अनुमान या इच्छा नहीं करना चाहिएकैटफ़िश के कुछ आकार बेशक, पचास किलोग्राम कैटफ़िश एक दुर्लभ भाग्य है, लेकिन दस किलोग्राम जीवित वजन अब भी बहुत कुछ है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किस प्रकार मछली पकड़ी गई थी, इसलिए सोम को विशाल और "बच्चे" में विभाजित नहीं किया गया। यदि शिकार पानी के नीचे है, तो कैटफ़िश को पकड़ते समययह बहुत ही आपरेशन के लिए आगे बढ़ने से पहले कुछ बिंदुओं पर विचार करने योग्य है। सबसे पहले, यह समय के लिए महत्वपूर्ण है मछली की पकड़ नदी, मछली पकड़ने के समय , कितने longline या नीचे मलबे, som है, जिनमें से इस खंड में के लिए है - गर्त या स्लॉट के लिए। लेकिन मछली मूल्यांकन किया जाना चाहिए और मछली पकड़ने की तकनीक की गुणवत्ता को पकड़ने के बाद - सिले कैटफ़िश जहां यह, एक भाला के लिए छिद्र किया है, तो त्वचा बरकरार है, चाहे पेट खराब हो गया है की तरह। इसके अलावा, प्रत्येक मछुआरे और अभी भी मछली पकड़ने के दौरान उनके कार्यों की सराहना करते हैं - गिल्स से अधिक पकड़ा कैटफ़िश या नहीं, और मछली के जबड़े से पकड़ा गया था । कैटफ़िश के लिए पानी के नीचे शिकार की कोई निश्चित रणनीति नहीं है - एक मछुआरे का व्यक्तिगत अनुभव, जो वर्षों से जमा हुआ है, यहां एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सब के बाद, नौसिखिया मछुआरों कैटफ़िश टूटा हाथ, उखड़ कलाई, Flay के साथ एक लड़ाई में कर सकते हैं - इस तरह के नुकसान नहीं इस मछली के साथ एक लड़ाई में असामान्य है। कैटफ़िश के लिए शिकार खतरों से भरा है। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने और जीवित और स्वस्थ रहने के लिए, कुछ बिंदुओं को याद रखना महत्वपूर्ण है। सबसे पहले - जब पानी के नीचे की मछली पकड़ने, कोई भी मामले में आप अपने हाथ पर दसव लपेट नहीं करना चाहिए हाँ, मछली आप चाहते हैं के साथ शीर्ष तैरना, लेकिन यह याद है कि मछली रीढ़ की हड्डी में मारा आक्षेप में ऐंठन हो सकता है या यहाँ तक कि लायक है "हिस्सेदारी हो जाते हैं।" इस मामले में, सबसे पहले उत्साहित नहीं हो, पहाड़-पनडुब्बी, खासकर अगर मछली बड़ी होती है दूसरा - पहले हड़ताल के समय, आपको मछली रखने की कोशिश नहीं करनी चाहिए खनन पर नियंत्रण संभव है जब इसे उथले पानी में साफ़ साफ़ पानी में निकाला जाता है। इस संबंध में, ज़ाहिर है, दोपहर में शिकार करना बेहतर होता है तीसरे नियम एक गोताखोरी है - एक शॉट। यह किसी भी पानी के नीचे शिकारी का लोहा नियम है। एड्रेनालाईन शिकारी बह निकला soberly स्थिति का आकलन, और मरने मछली असुरक्षित के करीब रहें रोकता है। चौथा नियम - गोते चाकू की उपस्थिति सत्यापित करने के बाद, और इस कार्रवाई स्वचालन के लिए लाया जाना चाहिए। पांचवां नियम है लाइन और कुंडली की जांच करना। चढ़ाई के बाद, कुंडली को जांचना आवश्यक है इसी समय, यह जांघ नहीं होना चाहिए, लिन को पार नहीं करना चाहिए, सिंक करना और जैसे आदर्श दूरी मध्यम-विस्तारित लाइन की कुल लंबाई है छठे नियम बिना किसी बेकार बेकार दे। मछली ही रूप में लंबे समय के रूप में आवश्यक खींच लेंगे, एक ही समय भले ही कैटफ़िश कुंडल झटका हुआ पर, उसे जहाँ तक संभव हो पालन करने के लिए है, जबकि टेंच में कुंडल आधार टिकी हुई है को नियंत्रित करने के लायक है ज्यादा के लायक नहीं है। आप न केवल कैटफ़िश निकालना चाहते हैं, लेकिन आप इसे से हापून भी निकाल सकते हैं। आमतौर पर, पांच मिनट के बाद, कैटफ़िश थका हुआ हो जाता है, हालांकि आधे घंटे के संघर्ष के मामले ज्ञात होते हैं। सातवां नियम हमारे क्षेत्र में खेल रहा है। निस्संदेह, कैटफ़िश जीवन के लिए लड़ेंगे कैटफ़िश एक गहरी मछली है, इसका तत्व नीचे है इस मामले में, मछली सतह के करीब होना चाहिए - यह इतना सबसे असहज, लेकिन अभी भी एक भाला के साथ। आपकी सामरिक श्रेष्ठता के मामले में, कैटफ़िश के लिए पानी के नीचे का शिकार अंतिम चरण में जाता है। आठवें नियम- जैसे ही कैटफ़िश शांत हो जाते हैं, हम हाथ पर दसवें को रील करते हैं, और हम खुद कैटफ़िश में जाते हैं। कैटफ़िश, इस मामले में, एक नई लड़ाई के लिए तैयार नहीं करते हैं, क्योंकि नए लोग सोचते हैं, मछली से संपर्क करने से डरते हैं। यहाँ हम याद रखना चाहिए कि मछली उसके शरीर में एक घातक घाव वितरित बाहर चिपके हुए लोहे भाला बलों इसे से बाहर चले जाते हैं। रील तक पहुंचें जब तक आप कैटफ़िश से अधिक न जाए। नौवें नियम, इस मामले में बहुत उपयुक्त - एक अतिरिक्त हापून और दस गुना या दूसरा मछुआरा सहायक दूसरा हापून अंत में पकड़ता है आम तौर पर कैटफ़िश इससे पहले दो या तीन रसीले बनाता है जिससे कि वह दूसरे हाथी का उपयोग कर सकते हैं दसवां नियम - चाकू को याद रखें इस मामले में इसकी जरुरत है, लेकिन चाकू से चिपकाना असुरक्षित है - कैटफ़िश झटका जा सकता है ताकि यह आपकी अंगुलियों को चाकू से काट दे, या दसवें को काट दे।
Kamal Nath's big announcement regarding electricity : पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि कांग्रेस की सरकार आने पर 100 यूनिट बिजली माफ की जाएगी और 200 यूनिट के लिए आधा बिल देना होगा। ये घोषणा उन्होने गुरुवार को बदनावर में एक आमसभा को संबोधित करते हुए की और कहा कि '100 यूनिट बिजली माफ, 200 यूनिट हाफ'। इस मौके पर उन्होने शिवराज सरकार पर जमकर आरोप जड़े और कहा कि बीजेपी राज में महंगाई आसमान पर पहुंच चुकी है। उन्होने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर सबसे कमजोर वर्ग को सबसे पहले ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाए जाएंगी। कमलनाथ ने कहा कि आज मध्यप्रदेश का नौजवान रोजगार के लिए भटक रहा है और प्रदेश का अन्नदाता खाद बीज और फसलों के उचित मूल्य के लिए भटक रहा है। प्रदेश में चौपट राज चल रहा है चौपट रोजगार, चौपट भर्ती व्यवस्था,चौपट शिक्षा व्यवस्था चौपट स्वास्थ्य व्यवस्था, चौपट नर्सिंग कॉलेज, उद्योग चौपट हैं। प्रदेश में आज हर क्षेत्र में व्यवस्थाएं चौपट हैं। उन्होने कहा कि हमें गर्व है कि पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र कांग्रेस की सरकार ने बनाया था, लेकिन आज पीथमपुर की हालत देखकर बेहद दुख होता है। भाजपा सरकार ने गलत नीतियों से औद्योगिक क्षेत्रों का सत्यानाश किया हुआ है। पीसीसी चीफ ने कहा कि पूरे मध्यप्रदेश से मांग उठ रही है इस बार विधानसभा चुनाव में स्थानीय उम्मीदवार दिया जाए जिससे मैं काफी हद तक सहमत भी हूं, हमारा स्थानीय संगठन इसमें अहम भूमिका निभाएगा। वहीं उन्होने बीजेपी पर धर्म को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि धर्म हमारी आस्था का विषय है और हम धर्म का राजनीतिक दुरुपयोग नहीं करते। मैं स्वयं पंडित प्रदीप मिश्रा के कार्यक्रम में इंदौर गया था, बागेश्वर महाराज से मिलने छतरपुर गया। परंतु वह हमारे लिए राजनीतिक विषय नहीं हैं। धर्म को स्वार्थ के लिए राजनीतिक मंच पर लाने का कार्य भाजपा करती है। इसी के साथ उन्होने कहा कि 'मुझे ईडी और सीबीआई से कतई डर नहीं लगता क्योंकि मेरा रास्ता सच्चाई का रास्ता है 44 साल के मेरे राजनीतिक जीवन पर कोई उंगली नहीं उठा सकता, 44 साल मुझे मेरे क्षेत्र की जनता ने वोट दिया है। कोई सांसद नहीं है देश में जो इतने चुनाव जीता हो जितने मैं जीता हूं। ' कमलनाथ ने कहा कि कर्नाटक में तो 40% कमीशन हुआ करता था, परंतु मध्य प्रदेश की जनता जानती है कि यहां पर पंचायत से लेकर मंत्रालय तक भ्रष्टाचार की व्यवस्था बनी हुई है। उन्होने लोगों से सच्चाई का साथ देने का आह्वान किया और कहा कि ये मध्य प्रदेश के भविष्य का चुनाव है और इसे सही दिशा देने का काम जनता ही कर सकती है।
Kamal Nath's big announcement regarding electricity : पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि कांग्रेस की सरकार आने पर एक सौ यूनिट बिजली माफ की जाएगी और दो सौ यूनिट के लिए आधा बिल देना होगा। ये घोषणा उन्होने गुरुवार को बदनावर में एक आमसभा को संबोधित करते हुए की और कहा कि 'एक सौ यूनिट बिजली माफ, दो सौ यूनिट हाफ'। इस मौके पर उन्होने शिवराज सरकार पर जमकर आरोप जड़े और कहा कि बीजेपी राज में महंगाई आसमान पर पहुंच चुकी है। उन्होने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर सबसे कमजोर वर्ग को सबसे पहले ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाए जाएंगी। कमलनाथ ने कहा कि आज मध्यप्रदेश का नौजवान रोजगार के लिए भटक रहा है और प्रदेश का अन्नदाता खाद बीज और फसलों के उचित मूल्य के लिए भटक रहा है। प्रदेश में चौपट राज चल रहा है चौपट रोजगार, चौपट भर्ती व्यवस्था,चौपट शिक्षा व्यवस्था चौपट स्वास्थ्य व्यवस्था, चौपट नर्सिंग कॉलेज, उद्योग चौपट हैं। प्रदेश में आज हर क्षेत्र में व्यवस्थाएं चौपट हैं। उन्होने कहा कि हमें गर्व है कि पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र कांग्रेस की सरकार ने बनाया था, लेकिन आज पीथमपुर की हालत देखकर बेहद दुख होता है। भाजपा सरकार ने गलत नीतियों से औद्योगिक क्षेत्रों का सत्यानाश किया हुआ है। पीसीसी चीफ ने कहा कि पूरे मध्यप्रदेश से मांग उठ रही है इस बार विधानसभा चुनाव में स्थानीय उम्मीदवार दिया जाए जिससे मैं काफी हद तक सहमत भी हूं, हमारा स्थानीय संगठन इसमें अहम भूमिका निभाएगा। वहीं उन्होने बीजेपी पर धर्म को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि धर्म हमारी आस्था का विषय है और हम धर्म का राजनीतिक दुरुपयोग नहीं करते। मैं स्वयं पंडित प्रदीप मिश्रा के कार्यक्रम में इंदौर गया था, बागेश्वर महाराज से मिलने छतरपुर गया। परंतु वह हमारे लिए राजनीतिक विषय नहीं हैं। धर्म को स्वार्थ के लिए राजनीतिक मंच पर लाने का कार्य भाजपा करती है। इसी के साथ उन्होने कहा कि 'मुझे ईडी और सीबीआई से कतई डर नहीं लगता क्योंकि मेरा रास्ता सच्चाई का रास्ता है चौंतालीस साल के मेरे राजनीतिक जीवन पर कोई उंगली नहीं उठा सकता, चौंतालीस साल मुझे मेरे क्षेत्र की जनता ने वोट दिया है। कोई सांसद नहीं है देश में जो इतने चुनाव जीता हो जितने मैं जीता हूं। ' कमलनाथ ने कहा कि कर्नाटक में तो चालीस% कमीशन हुआ करता था, परंतु मध्य प्रदेश की जनता जानती है कि यहां पर पंचायत से लेकर मंत्रालय तक भ्रष्टाचार की व्यवस्था बनी हुई है। उन्होने लोगों से सच्चाई का साथ देने का आह्वान किया और कहा कि ये मध्य प्रदेश के भविष्य का चुनाव है और इसे सही दिशा देने का काम जनता ही कर सकती है।
सिरसा - आम आदमी पार्टी (आप) का टिकट पाने के लिए इच्छुकों को लोकसभा क्षेत्र से पांच हजार लोगों के नाम, पते, मोबाइल नंबर व हस्ताक्षर जुटाने होंगे। पार्टी की सिरसा इकाई के जिलाअध्यक्ष वीरेंद्र कुमार एडवोकेट ने बताया कि आप ने हरियाणा की दस लोकसभा व 90 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया शुरू करते हुए आवेदन मंगाए हैं और एक प्रोफार्मा तैयार कर पार्टी पदाधिकारियों के पास भेजा है। उन्होंने बताया कि उम्मीदवार बनने के लिए कोई भी आम आदमी आवेदन कर सकता है और इसमें पूर्व सैनिकों, युवाओं, महिलाओं व पत्रकारों को प्राथमिकता दी जाएगी। एडवोकेट कुमार के अनुसार पार्टी दिल्ली मॉडल पर हरियाणा में चुनाव लड़ेगी। उन्होंने बताया कि लोकसभा चुनाव के आवेदक को अपने लोकसभा क्षेत्र से पांच हजार व विधानसभा क्षेत्र से एक हजार लोगों के नाम, पते, मोबाइल नंबर व हस्ताक्षर के साथ फॉर्म भरना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह ऐसे लोग होने चाहिए, जो उम्मीदवारों को 'तन, मन, धन' से सहयोग करने के लिए तैयार हों। जिलाध्यक्ष ने बताया कि अभी तक 250 से अधिक उम्मीदवारों ने लोकसभा व विधानसभा चुनाव के लिए आवेदन किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी देश का विकास चाहती है।
सिरसा - आम आदमी पार्टी का टिकट पाने के लिए इच्छुकों को लोकसभा क्षेत्र से पांच हजार लोगों के नाम, पते, मोबाइल नंबर व हस्ताक्षर जुटाने होंगे। पार्टी की सिरसा इकाई के जिलाअध्यक्ष वीरेंद्र कुमार एडवोकेट ने बताया कि आप ने हरियाणा की दस लोकसभा व नब्बे विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया शुरू करते हुए आवेदन मंगाए हैं और एक प्रोफार्मा तैयार कर पार्टी पदाधिकारियों के पास भेजा है। उन्होंने बताया कि उम्मीदवार बनने के लिए कोई भी आम आदमी आवेदन कर सकता है और इसमें पूर्व सैनिकों, युवाओं, महिलाओं व पत्रकारों को प्राथमिकता दी जाएगी। एडवोकेट कुमार के अनुसार पार्टी दिल्ली मॉडल पर हरियाणा में चुनाव लड़ेगी। उन्होंने बताया कि लोकसभा चुनाव के आवेदक को अपने लोकसभा क्षेत्र से पांच हजार व विधानसभा क्षेत्र से एक हजार लोगों के नाम, पते, मोबाइल नंबर व हस्ताक्षर के साथ फॉर्म भरना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह ऐसे लोग होने चाहिए, जो उम्मीदवारों को 'तन, मन, धन' से सहयोग करने के लिए तैयार हों। जिलाध्यक्ष ने बताया कि अभी तक दो सौ पचास से अधिक उम्मीदवारों ने लोकसभा व विधानसभा चुनाव के लिए आवेदन किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी देश का विकास चाहती है।
एक साल से पीने का पानी नहीं मिल रहा है, कोई सुनवाई किसी स्तर पर नहीं हो रही है, लोग पीने के पानी को तरस रहे है . . यह किसी पिछड़े इलाके के किसी गांव की गली या मोहल्ला नहीं है, बल्कि जिला मुख्यालय पर नगर पालिका क्षेत्र के नरसलघाट चौकी के निकट एक गली है, जहां लोगों को एक साल से पीने का पानी नहीं मिल पाया है। इसको लेकर लोगों ने एक बार फिर से नगर पालिका के ईओ से शिकायत की है। नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड संख्या 31 में नरसल घाट चौकी के निकट बर्फ वाली गली में लोग पीने के पानी का इंतजाम जैसे-तैसे कर रहे हैं। आरोप है कि नगर पालिका की ओर से सप्लाई होने वाला पेयजल उन्हें पिछले एक साल से नहीं मिला है। लोगों का कहना है कि कई बार नगर पालिका से शिकायत की गई। प्रशासनिक अधिकारियों से भी गुहार लगाई लेकिन उन्हें पानी नसीब नहीं हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि उन्हें पानी नहीं मिला तो वह आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। शनिवार को लोगों ने एक पत्र नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को भेजा है, जिसमें पीने की पानी की समस्या का समाधान करने की मांग की है। मांग करने वालों में जैगुल, अदनान, मोहम्मद शाहनवाज, शुमायला, मुसर्रत, मोहसिन, शानू, फैजान, फिरोज, जय शंभू सिंह, आशु, अमरीन, मुर्सलीन, मोम्मद समीर, अरशद, मुमताज आदि शामिल रहे।
एक साल से पीने का पानी नहीं मिल रहा है, कोई सुनवाई किसी स्तर पर नहीं हो रही है, लोग पीने के पानी को तरस रहे है . . यह किसी पिछड़े इलाके के किसी गांव की गली या मोहल्ला नहीं है, बल्कि जिला मुख्यालय पर नगर पालिका क्षेत्र के नरसलघाट चौकी के निकट एक गली है, जहां लोगों को एक साल से पीने का पानी नहीं मिल पाया है। इसको लेकर लोगों ने एक बार फिर से नगर पालिका के ईओ से शिकायत की है। नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड संख्या इकतीस में नरसल घाट चौकी के निकट बर्फ वाली गली में लोग पीने के पानी का इंतजाम जैसे-तैसे कर रहे हैं। आरोप है कि नगर पालिका की ओर से सप्लाई होने वाला पेयजल उन्हें पिछले एक साल से नहीं मिला है। लोगों का कहना है कि कई बार नगर पालिका से शिकायत की गई। प्रशासनिक अधिकारियों से भी गुहार लगाई लेकिन उन्हें पानी नसीब नहीं हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि उन्हें पानी नहीं मिला तो वह आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। शनिवार को लोगों ने एक पत्र नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को भेजा है, जिसमें पीने की पानी की समस्या का समाधान करने की मांग की है। मांग करने वालों में जैगुल, अदनान, मोहम्मद शाहनवाज, शुमायला, मुसर्रत, मोहसिन, शानू, फैजान, फिरोज, जय शंभू सिंह, आशु, अमरीन, मुर्सलीन, मोम्मद समीर, अरशद, मुमताज आदि शामिल रहे।
आईफोन बनाने वाली एप्पल कंपनी पर यूरोप में 14 अरब डॉलर का टैक्स केस दर्ज हुआ है । मंगलवार को लक्समबर्ग में यूरोपियन यूनियन के लोअर जनरल कोर्ट में ऐपल पर 14 अरब डॉलर की टैक्स देनदारी केस की सुनवाई शुरू हुई है। मामला यूरोपियन यूनियन कमिशन (EUC) के 2016 के उस ऑर्डर के खिलाफ है, जिसमें आयोग ने आयरलैंड को 14 अरब डॉलर के भुगतान का आदेश दिया था। यह एक ऐसा केस है जिसमें ऐपल और आयरलैंड, दोनों EUC के उस आदेश के खिलाफ हैं। दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी के वकील एक लक्समबर्ग अदालत में यूरोपीय यूनियन के अधिकारियों का सामना करेंगे, उस फैसले को चुनौती देंगे जिसको सीईओ टिम कुक ने उस समय "कुल राजनीतिक बकवास" कहा था। यूरोपीय आयोग के निष्कर्ष को अगस्त 2016 में कम्पटीशन कमिश्नर मार्ग्रेथ वेस्टेगर द्वारा दिया गया था जिसमें उनहोने एक चौंकाने वाला निर्णय लिया जिसने अमेरिका को बड़ी तकनीक की ताकत पर लगाम लगाने के लिए एक उभरते प्रयास में सबसे आगे रखा। मंगलवार और बुधवार को दो दिन की सुनवाई यूरोपीय संघ की निचली सामान्य अदालत में होगी, जहां न्यायाधीश 2020 से पहले अपना फैसला नहीं देंगे। कोई भी अपील यूरोपीय यूनियन के सुप्रीम कोर्ट, यूरोपीय न्यायालय के अंतिम निर्णय के लिए जाएगी, जो 2021 तक देर से उतर सकती है। यूरोपीय यूनियन ने आरोप लगाया कि आयरलैंड में यूरोप, अफ्रीका, मध्य पूर्व और भारत में अर्जित पार्किंग के बिना उपयोग के राजस्व में वृद्धि हुई है, जो कि बड़ी तकनीक और वैश्विक फार्मा दिग्गजों के लिए एक यूरोपीय केंद्र के रूप में उभरा है। ऐपल का दावा है कि एक बार वापस मुनाफा कमाने के बाद वह निश्चित तौर पर अमेरिका में 37 अरब डॉलर के टैक्स का भुगतान कर देगी। कंपनी का कहना है कि वह कॉफी चेन स्टारबक्स और कार निर्माता फिएट क्राइसलर के केस के नतीजे पर नजर टिकाए बैठी है, जो 24 सितंबर को आने वाला है। दोनों पर भी EUC में टैक्स-अवॉइडेंस का केस चल रहा है। यूरोपीय संघ ने एप्पल पर पार्किंग पर अघोषित राजस्व का आरोप लगाया जो आयरलैंड में यूरोप, अफ्रीका, मध्य पूर्व और भारत में कमाई गयी है, जो बड़ी तकनीक और वैश्विक बड़ी फार्मा के लिए एक यूरोपीय केंद्र के रूप में उभरा है। यूरोपीय यूनियन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनावपूर्ण व्यापार के संदर्भ में दो दिन की सुनवाई हो रही है जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोपीय लोगों पर अमेरिकी की बड़ी टेक्नोलॉजी पर जानबूझकर हमला करने का आरोप लगाया है। ऐपल का दावा है कि एक बार वापस मुनाफा कमाने के बाद वह निश्चित तौर पर अमेरिका में 37 अरब डॉलर के टैक्स का भुगतान कर देगी। कंपनी का कहना है कि वह कॉफी चेन स्टारबक्स और कार निर्माता फिएट क्राइसलर के केस के नतीजे पर नजर टिकाए बैठी है, जो 24 सितंबर को आने वाला है। दोनों पर भी EUC में टैक्स-अवॉइडेंस का केस चल रहा है।
आईफोन बनाने वाली एप्पल कंपनी पर यूरोप में चौदह अरब डॉलर का टैक्स केस दर्ज हुआ है । मंगलवार को लक्समबर्ग में यूरोपियन यूनियन के लोअर जनरल कोर्ट में ऐपल पर चौदह अरब डॉलर की टैक्स देनदारी केस की सुनवाई शुरू हुई है। मामला यूरोपियन यूनियन कमिशन के दो हज़ार सोलह के उस ऑर्डर के खिलाफ है, जिसमें आयोग ने आयरलैंड को चौदह अरब डॉलर के भुगतान का आदेश दिया था। यह एक ऐसा केस है जिसमें ऐपल और आयरलैंड, दोनों EUC के उस आदेश के खिलाफ हैं। दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी के वकील एक लक्समबर्ग अदालत में यूरोपीय यूनियन के अधिकारियों का सामना करेंगे, उस फैसले को चुनौती देंगे जिसको सीईओ टिम कुक ने उस समय "कुल राजनीतिक बकवास" कहा था। यूरोपीय आयोग के निष्कर्ष को अगस्त दो हज़ार सोलह में कम्पटीशन कमिश्नर मार्ग्रेथ वेस्टेगर द्वारा दिया गया था जिसमें उनहोने एक चौंकाने वाला निर्णय लिया जिसने अमेरिका को बड़ी तकनीक की ताकत पर लगाम लगाने के लिए एक उभरते प्रयास में सबसे आगे रखा। मंगलवार और बुधवार को दो दिन की सुनवाई यूरोपीय संघ की निचली सामान्य अदालत में होगी, जहां न्यायाधीश दो हज़ार बीस से पहले अपना फैसला नहीं देंगे। कोई भी अपील यूरोपीय यूनियन के सुप्रीम कोर्ट, यूरोपीय न्यायालय के अंतिम निर्णय के लिए जाएगी, जो दो हज़ार इक्कीस तक देर से उतर सकती है। यूरोपीय यूनियन ने आरोप लगाया कि आयरलैंड में यूरोप, अफ्रीका, मध्य पूर्व और भारत में अर्जित पार्किंग के बिना उपयोग के राजस्व में वृद्धि हुई है, जो कि बड़ी तकनीक और वैश्विक फार्मा दिग्गजों के लिए एक यूरोपीय केंद्र के रूप में उभरा है। ऐपल का दावा है कि एक बार वापस मुनाफा कमाने के बाद वह निश्चित तौर पर अमेरिका में सैंतीस अरब डॉलर के टैक्स का भुगतान कर देगी। कंपनी का कहना है कि वह कॉफी चेन स्टारबक्स और कार निर्माता फिएट क्राइसलर के केस के नतीजे पर नजर टिकाए बैठी है, जो चौबीस सितंबर को आने वाला है। दोनों पर भी EUC में टैक्स-अवॉइडेंस का केस चल रहा है। यूरोपीय संघ ने एप्पल पर पार्किंग पर अघोषित राजस्व का आरोप लगाया जो आयरलैंड में यूरोप, अफ्रीका, मध्य पूर्व और भारत में कमाई गयी है, जो बड़ी तकनीक और वैश्विक बड़ी फार्मा के लिए एक यूरोपीय केंद्र के रूप में उभरा है। यूरोपीय यूनियन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनावपूर्ण व्यापार के संदर्भ में दो दिन की सुनवाई हो रही है जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोपीय लोगों पर अमेरिकी की बड़ी टेक्नोलॉजी पर जानबूझकर हमला करने का आरोप लगाया है। ऐपल का दावा है कि एक बार वापस मुनाफा कमाने के बाद वह निश्चित तौर पर अमेरिका में सैंतीस अरब डॉलर के टैक्स का भुगतान कर देगी। कंपनी का कहना है कि वह कॉफी चेन स्टारबक्स और कार निर्माता फिएट क्राइसलर के केस के नतीजे पर नजर टिकाए बैठी है, जो चौबीस सितंबर को आने वाला है। दोनों पर भी EUC में टैक्स-अवॉइडेंस का केस चल रहा है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि कोई भी देश अनुसंधान एवं विकास और प्रौद्योगिकी को अपनाये बिना प्रगति नहीं कर सकता। मोदी सरकार के नौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुरू किये गए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं लोकसभा सदस्य शशि थरूर ने कहा है कि नगा शांति समझौते के समाधान का लंबे समय से इंतजार है और उनका दल इसका हल चाहता है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज (रिटायर्ड) जस्टिस ए. के. सीकरी ने कहा कि केवल पर्यावरण की खातिर विकास की बलि नहीं दी जा सकती। हालांकि वर्तमान और भावी पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता। देश में सरकार विकास और रोजगार के पीछे भाग रही है। अब कही देवभूमि को जोशीमठ न बना दे देवभूमि को जोशीमठ न बना दें यह चिंता मध्य प्रदेश में उज्जैन के साधु-संतो ने जताई है। उनका कहना है सरकार को जोशीमठ से सबक सिख लेना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि सरकार का ध्यान त्रिपुरा के सर्वांगीण विकास पर है और शुरू की गई परियोजनाओं से राज्य के विकास को गति मिलेगी।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि कोई भी देश अनुसंधान एवं विकास और प्रौद्योगिकी को अपनाये बिना प्रगति नहीं कर सकता। मोदी सरकार के नौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुरू किये गए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं लोकसभा सदस्य शशि थरूर ने कहा है कि नगा शांति समझौते के समाधान का लंबे समय से इंतजार है और उनका दल इसका हल चाहता है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस ए. के. सीकरी ने कहा कि केवल पर्यावरण की खातिर विकास की बलि नहीं दी जा सकती। हालांकि वर्तमान और भावी पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता। देश में सरकार विकास और रोजगार के पीछे भाग रही है। अब कही देवभूमि को जोशीमठ न बना दे देवभूमि को जोशीमठ न बना दें यह चिंता मध्य प्रदेश में उज्जैन के साधु-संतो ने जताई है। उनका कहना है सरकार को जोशीमठ से सबक सिख लेना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि सरकार का ध्यान त्रिपुरा के सर्वांगीण विकास पर है और शुरू की गई परियोजनाओं से राज्य के विकास को गति मिलेगी।
तेलंगाना में भी सियासी हलचले तेज होती दिखाई दे रही हैं. तेलंगाना बीजेपी प्रमुख बंदी संजय कुमार को उनके प्रस्तावित पैदल मार्च से कुछ घंटे पहले नजरबंद कर दिया गया है. बंदी संजय को रविवार रात जगतियाल जिले में पुलिस ने रोक लिया. तेलंगाना में भी सियासी हलचले तेज होती दिखाई दे रही हैं. तेलंगाना बीजेपी प्रमुख बंदी संजय कुमार को उनके प्रस्तावित पैदल मार्च से कुछ घंटे पहले नजरबंद कर दिया गया है. बंदी संजय को रविवार रात जगतियाल जिले में पुलिस ने रोक लिया. रविवार की रात अपनी 'प्रजा संग्राम यात्रा' के लिए निर्मल जिले की ओर जाते समय हिरासत में लिया गया और उसके कुछ घंटों बाद तेलंगाना के बीजेपी प्रमुख बंदी संजय कुमार को उनके करीमनगर आवास के बाहर भारी पुलिस तैनाती के साथ नजरबंद कर दिया गया है. बंदी संजय को "सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील स्थिति" का हवाला देते हुए निर्मल जिले के भैंसा शहर में उनकी यात्रा के पांचवें चरण और एक सार्वजनिक सभा के लिए अनुमति देने से इनकार करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया और करीमनगर वापस लाया गया. पैदल मार्च के लिए निर्मल जा रहे प्रदेश बीजेपी प्रमुख को पुलिस ने जगतियाल जिले में रोक दिया और वापस लौटने को कहा. बांदी संजय की नजरबंदी के विरूद्ध बीजेपी कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के बाद जगतियाल और निर्मल जिलों में तनाव व्याप्त हो गया. तेलंगाना बीजेपी ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें आईं. इसने राज्य गवर्नमेंट से मार्च और जनसभा के लिए तुरंत अनुमति देने की मांग की. बंदी संजय की यात्रा की अनुमति रद्द किए जाने के बाद तेलंगाना बीजेपी ने भी तुरन्त सुनवाई के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक ट्वीट में कहा, तेलंगाना में भाजपा का उदय. केसीआर के निर्देशों के अनुसार पुलिस द्वारा प्रजा संग्राम यात्रा की अनुमति देने से इनकार करने के बाद, बीजेपी तेलंगाना ने तुरन्त सुनवाई के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. पिछली रात, बीजेपी अध्यक्ष बंदी संजय और कैडरों को भैंसा जाने की अनुमति नहीं दी गई थी. केसीआर रोक नहीं सकते. भैंसा शहर में पिछले वर्ष और 2020 में विभिन्न समुदायों से संबंधित समूहों के बीच झड़पें हुईं.
तेलंगाना में भी सियासी हलचले तेज होती दिखाई दे रही हैं. तेलंगाना बीजेपी प्रमुख बंदी संजय कुमार को उनके प्रस्तावित पैदल मार्च से कुछ घंटे पहले नजरबंद कर दिया गया है. बंदी संजय को रविवार रात जगतियाल जिले में पुलिस ने रोक लिया. तेलंगाना में भी सियासी हलचले तेज होती दिखाई दे रही हैं. तेलंगाना बीजेपी प्रमुख बंदी संजय कुमार को उनके प्रस्तावित पैदल मार्च से कुछ घंटे पहले नजरबंद कर दिया गया है. बंदी संजय को रविवार रात जगतियाल जिले में पुलिस ने रोक लिया. रविवार की रात अपनी 'प्रजा संग्राम यात्रा' के लिए निर्मल जिले की ओर जाते समय हिरासत में लिया गया और उसके कुछ घंटों बाद तेलंगाना के बीजेपी प्रमुख बंदी संजय कुमार को उनके करीमनगर आवास के बाहर भारी पुलिस तैनाती के साथ नजरबंद कर दिया गया है. बंदी संजय को "सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील स्थिति" का हवाला देते हुए निर्मल जिले के भैंसा शहर में उनकी यात्रा के पांचवें चरण और एक सार्वजनिक सभा के लिए अनुमति देने से इनकार करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया और करीमनगर वापस लाया गया. पैदल मार्च के लिए निर्मल जा रहे प्रदेश बीजेपी प्रमुख को पुलिस ने जगतियाल जिले में रोक दिया और वापस लौटने को कहा. बांदी संजय की नजरबंदी के विरूद्ध बीजेपी कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के बाद जगतियाल और निर्मल जिलों में तनाव व्याप्त हो गया. तेलंगाना बीजेपी ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें आईं. इसने राज्य गवर्नमेंट से मार्च और जनसभा के लिए तुरंत अनुमति देने की मांग की. बंदी संजय की यात्रा की अनुमति रद्द किए जाने के बाद तेलंगाना बीजेपी ने भी तुरन्त सुनवाई के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक ट्वीट में कहा, तेलंगाना में भाजपा का उदय. केसीआर के निर्देशों के अनुसार पुलिस द्वारा प्रजा संग्राम यात्रा की अनुमति देने से इनकार करने के बाद, बीजेपी तेलंगाना ने तुरन्त सुनवाई के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. पिछली रात, बीजेपी अध्यक्ष बंदी संजय और कैडरों को भैंसा जाने की अनुमति नहीं दी गई थी. केसीआर रोक नहीं सकते. भैंसा शहर में पिछले वर्ष और दो हज़ार बीस में विभिन्न समुदायों से संबंधित समूहों के बीच झड़पें हुईं.
क्या निर्भया सिर्फ वही है जो मर गई? क्या हम सब हमेशा किसी निर्भया के मरने का ही इंतजार करेंगे? इंतजार करेंगे कि वो पहले मरे क्योंकि हमारा गुस्सा तभी तो जागेगा और जब गुस्सा जागेगा तभी तो फिर हम मोमबत्तियां जलाएंगे. तो फिर उन ज़िंदा निर्भया का क्या जो हमारे देश के हर कोने के किसी तारीक गली में हर रोज़ सिसक रही हैं? हमारे इसी देश के एक हिस्से में 16 साल की एक ऐसी नाबालिग है जिसे अब तो ठीक-ठीक ये गिनती भी याद नहीं कि उसकी आबरू को कितने लोगों ने नोचा-खसोटा है. पर फिर भी जेहन और जख्म पर ज़ोर डालने पर उसे लगता है कि शायद कम से कम 400 बार तो उसकी अस्मत लूटी ही गई होगी. वारदात के इस एपिसोड में देखिए पूरी कहानी. A 16-year-old girl was allegedly raped by 400 people over the last six months in Maharashtra's Beed district. She was also allegedly sexually exploited by a policeman when she tried to file a complaint. Watch this episode of Vardaat.
क्या निर्भया सिर्फ वही है जो मर गई? क्या हम सब हमेशा किसी निर्भया के मरने का ही इंतजार करेंगे? इंतजार करेंगे कि वो पहले मरे क्योंकि हमारा गुस्सा तभी तो जागेगा और जब गुस्सा जागेगा तभी तो फिर हम मोमबत्तियां जलाएंगे. तो फिर उन ज़िंदा निर्भया का क्या जो हमारे देश के हर कोने के किसी तारीक गली में हर रोज़ सिसक रही हैं? हमारे इसी देश के एक हिस्से में सोलह साल की एक ऐसी नाबालिग है जिसे अब तो ठीक-ठीक ये गिनती भी याद नहीं कि उसकी आबरू को कितने लोगों ने नोचा-खसोटा है. पर फिर भी जेहन और जख्म पर ज़ोर डालने पर उसे लगता है कि शायद कम से कम चार सौ बार तो उसकी अस्मत लूटी ही गई होगी. वारदात के इस एपिसोड में देखिए पूरी कहानी. A सोलह-year-old girl was allegedly raped by चार सौ people over the last six months in Maharashtra's Beed district. She was also allegedly sexually exploited by a policeman when she tried to file a complaint. Watch this episode of Vardaat.
कश्मीर में शहीद सेना के अफसर उमर फैयाज के कातिलों को पकड़ने की मुहिम तेज हो गई है. सेना ने फैयाज की शहादत के गुनहगारों के पोस्टर जारी किये हैं. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तीन स्थानीय आतंकियों के पोस्टर जारी किये हैं. इनमें से इशफाक अहमद ठाकोर गयास-उल-इस्लाम का ताल्लुक दक्षिणी कश्मीर के पडरपुरा इलाके से है. जबकि अब्बास अहमद भट्ट नाम का आतंकी मंत्रीबाग इलाके का रहने वाला है. तीनों का ताल्लुक आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन से है. पुलिस ने उन्हें पकड़वाने में मदद करने वालों को इनाम देने का भी ऐलान किया है. जांच एजेंसियों को शक है कि फैयाज को मारने की साजिश में में हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर ए तैयबा के 10 आतंकी शामिल थे. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस मामले में 3 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. फैयाज की शहादत के बाद शोपियां में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है. कश्मीर के आर्मी अफसर उमर फैयाज की शहादत के बाद सेना ने अब छुट्टियों से जुड़ी गाइडलाइन्स को सख्ती से लागू करवाने का ऐलान किया है. कश्मीर से ताल्लुक रखने वाले सभी अफसरों को कहा गया है कि वो छुट्टी पर जाने से पहले लोकल यूनिट्स को जरूर सूचित करें. पहले से मौजूद हैं गाइडलाइन्स सेना के सूत्रों के मुताबिक कश्मीर वादी से ताल्लुक रखने वाले सैन्यकर्मियों के लिए छुट्टियों की गाइडलाइन्स पहले से मौजूद हैं. इनके मुताबिक ऐसे हर सैनिक को छुट्टी में जाने से पहले अपने गृह क्षेत्र में तैनात सेना की यूनिट को जानकारी देनी होती है. ऐसा करना उनकी सुरक्षा के लिहाज से अहम है. सेना के एक सूत्र के मुताबिक 'सेना के सभी यूनिट्स के हेड्स को ये निर्देश हासिल हैं कि वो अपने जवानों और अफसरों को छुट्टी पर भेजने से पहले उनकी सुरक्षा का बंदोबस्त करें.
कश्मीर में शहीद सेना के अफसर उमर फैयाज के कातिलों को पकड़ने की मुहिम तेज हो गई है. सेना ने फैयाज की शहादत के गुनहगारों के पोस्टर जारी किये हैं. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तीन स्थानीय आतंकियों के पोस्टर जारी किये हैं. इनमें से इशफाक अहमद ठाकोर गयास-उल-इस्लाम का ताल्लुक दक्षिणी कश्मीर के पडरपुरा इलाके से है. जबकि अब्बास अहमद भट्ट नाम का आतंकी मंत्रीबाग इलाके का रहने वाला है. तीनों का ताल्लुक आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन से है. पुलिस ने उन्हें पकड़वाने में मदद करने वालों को इनाम देने का भी ऐलान किया है. जांच एजेंसियों को शक है कि फैयाज को मारने की साजिश में में हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर ए तैयबा के दस आतंकी शामिल थे. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस मामले में तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. फैयाज की शहादत के बाद शोपियां में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है. कश्मीर के आर्मी अफसर उमर फैयाज की शहादत के बाद सेना ने अब छुट्टियों से जुड़ी गाइडलाइन्स को सख्ती से लागू करवाने का ऐलान किया है. कश्मीर से ताल्लुक रखने वाले सभी अफसरों को कहा गया है कि वो छुट्टी पर जाने से पहले लोकल यूनिट्स को जरूर सूचित करें. पहले से मौजूद हैं गाइडलाइन्स सेना के सूत्रों के मुताबिक कश्मीर वादी से ताल्लुक रखने वाले सैन्यकर्मियों के लिए छुट्टियों की गाइडलाइन्स पहले से मौजूद हैं. इनके मुताबिक ऐसे हर सैनिक को छुट्टी में जाने से पहले अपने गृह क्षेत्र में तैनात सेना की यूनिट को जानकारी देनी होती है. ऐसा करना उनकी सुरक्षा के लिहाज से अहम है. सेना के एक सूत्र के मुताबिक 'सेना के सभी यूनिट्स के हेड्स को ये निर्देश हासिल हैं कि वो अपने जवानों और अफसरों को छुट्टी पर भेजने से पहले उनकी सुरक्षा का बंदोबस्त करें.
Posted On: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) ने आज जलवायु कार्यवाही एवं वित्तीय संग्रहण संवाद यानी "क्लाइमेट एक्शन एंड फाइनेंस मोबिलाइजेशन डायलॉग (सीएएफएमडी)" का शुभारम्भ किया। सीएएफएमडी अप्रैल, 2021 में जलवायु पर लीडर्स समिट में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति श्री जोसेफ बाइडेन द्वारा लॉन्च भारत-अमेरिका जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा एजेंडा 2030 भागीदारी के दो ट्रैक में से एक है। नई दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्री श्री भूपेंद्र यादव और अमेरिका के राष्ट्रपति के जलवायु पर विशेष दूत (एसपीईसी) श्री जॉन केरी ने इस संवाद का औपचारिक रूप से शुभारम्भ किया था। इस अवसर पर अपने संबोधन में, श्री यादव ने कहा कि संवाद से न सिर्फ भारत-अमेरिका की जलवायु और पर्यावरण पर द्विपक्षीय भागीदारी को मजबूती मिलेगी, बल्कि इससे यह प्रदर्शित करने में भी सहायता मिलेगी कि कैसे दुनिया राष्ट्रीय परिस्थितियों और सतत् विकास की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए समावेशी और लचीले आर्थिक विकास के साथ जलवायु पर तत्परता से एकजुट हो सकती है। "क्लाइमेट एक्शन एंड फाइनेंस मोबिलाइजेशन डायलॉग (सीएएफएमडी)" के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री केरी ने 2030 तक 450 गीगावॉट नवीनीकृत ऊर्जा हासिल करने का बड़ा लक्ष्य तय करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सराहना की और भारत को 100 गीगावॉट हासिल करने के लिए भारत को बधाई दी। अमेरिका के जलवायु दूत ने यह दिखाने के लिए भारत के नेतृत्व की भूमिका की सराहना की कि कैसे आर्थिक विकास और स्वच्छ ऊर्जा पर एक साथ काम किया जा सकता है और उन्होंने कहा कि ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन वक्त की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और अमेरिका स्वच्छ ऊर्जा को तेजी से लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं। शुभारम्भ से पहले एक द्विपक्षीय बैठक हुई, जहां दोनों पक्षों ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए), एग्रीकल्चर इनोवेटिव मिशन फॉर क्लाइमेट (एआईएम4सी) सहित सीओपी26, जलवायु महत्वाकांक्षा, जलवायु वित्त, वैश्विक जलवायु पहलों से संबंधित जलवायु मुद्दों पर व्यापक विमर्श किया।
Posted On: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने आज जलवायु कार्यवाही एवं वित्तीय संग्रहण संवाद यानी "क्लाइमेट एक्शन एंड फाइनेंस मोबिलाइजेशन डायलॉग " का शुभारम्भ किया। सीएएफएमडी अप्रैल, दो हज़ार इक्कीस में जलवायु पर लीडर्स समिट में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति श्री जोसेफ बाइडेन द्वारा लॉन्च भारत-अमेरिका जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा एजेंडा दो हज़ार तीस भागीदारी के दो ट्रैक में से एक है। नई दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्री श्री भूपेंद्र यादव और अमेरिका के राष्ट्रपति के जलवायु पर विशेष दूत श्री जॉन केरी ने इस संवाद का औपचारिक रूप से शुभारम्भ किया था। इस अवसर पर अपने संबोधन में, श्री यादव ने कहा कि संवाद से न सिर्फ भारत-अमेरिका की जलवायु और पर्यावरण पर द्विपक्षीय भागीदारी को मजबूती मिलेगी, बल्कि इससे यह प्रदर्शित करने में भी सहायता मिलेगी कि कैसे दुनिया राष्ट्रीय परिस्थितियों और सतत् विकास की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए समावेशी और लचीले आर्थिक विकास के साथ जलवायु पर तत्परता से एकजुट हो सकती है। "क्लाइमेट एक्शन एंड फाइनेंस मोबिलाइजेशन डायलॉग " के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री केरी ने दो हज़ार तीस तक चार सौ पचास गीगावॉट नवीनीकृत ऊर्जा हासिल करने का बड़ा लक्ष्य तय करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सराहना की और भारत को एक सौ गीगावॉट हासिल करने के लिए भारत को बधाई दी। अमेरिका के जलवायु दूत ने यह दिखाने के लिए भारत के नेतृत्व की भूमिका की सराहना की कि कैसे आर्थिक विकास और स्वच्छ ऊर्जा पर एक साथ काम किया जा सकता है और उन्होंने कहा कि ग्लोबल क्लाइमेट एक्शन वक्त की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और अमेरिका स्वच्छ ऊर्जा को तेजी से लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं। शुभारम्भ से पहले एक द्विपक्षीय बैठक हुई, जहां दोनों पक्षों ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस , एग्रीकल्चर इनोवेटिव मिशन फॉर क्लाइमेट सहित सीओपीछब्बीस, जलवायु महत्वाकांक्षा, जलवायु वित्त, वैश्विक जलवायु पहलों से संबंधित जलवायु मुद्दों पर व्यापक विमर्श किया।
ऑकलैंड के ईडन पार्क स्टेडियम में खेले गए दूसरे दूसरे टी-20 मुकाबले में न्यूजीलैंड को सात विकेट से करारी हार का सामना करना पड़ा। कीवी टीम की यह लगातार दूसरी हार है। पांच मैचों की टी-20 सीरीज में टीम इंडिया 2-0 से आगे हैं। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने पांच विकेट के नुकसान पर 132 रन बनाए। जवाब में भारत ने तीन विकेट खोकर ही 135 रन बनाकर यह मैच जीत लिया। ऐसे में आइए हम आपको बताते हैं कि लगातार दूसरी हार के बाद क्या बोले कीवी कप्तान केन विलियमसन? न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन ने मैच के बाद उन्होंने कहा, यह मुश्किल दिन था। विकेट पहले मैच की तुलना में काफी अलग था। मुझे लगता है कि मैच को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए बल्लेबाजी इकाई के रूप में हमें 15 से 20 रन और बनाने की जरूरत थी, लेकिन भारत ने जिस तरह गेंदबाजी की उन्हें श्रेय जाता है। विलियमसन ने टीम इंडिया को विश्वस्तरीय टीम करार दिया जिसने उन्हें लगातार दबाव में डाला। उन्होंने कहा, सभी विभागों में उनकी टीम स्तरीय है और बीच के ओवरों में उन्होंने हम पर दबाव बनाए रखा। उन्होंने आगे कहा, 'छोटे मैदान पर सिर्फ 130 (132) रन बनाने के बावजूद हमें पता था कि अगर हम शुरुआत में जल्दी विकेट हासिल करने और उनकी तरह दबाव बनाने में सफल रहे तो कुछ भी हो सकता है। मगर उन्होंने अपना अनुभव दिखाया और पहली पारी में हम जितने सक्षम थे, उससे कहीं ज्यादा गहराई से उन्होंने खेला। '
ऑकलैंड के ईडन पार्क स्टेडियम में खेले गए दूसरे दूसरे टी-बीस मुकाबले में न्यूजीलैंड को सात विकेट से करारी हार का सामना करना पड़ा। कीवी टीम की यह लगातार दूसरी हार है। पांच मैचों की टी-बीस सीरीज में टीम इंडिया दो-शून्य से आगे हैं। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने पांच विकेट के नुकसान पर एक सौ बत्तीस रन बनाए। जवाब में भारत ने तीन विकेट खोकर ही एक सौ पैंतीस रन बनाकर यह मैच जीत लिया। ऐसे में आइए हम आपको बताते हैं कि लगातार दूसरी हार के बाद क्या बोले कीवी कप्तान केन विलियमसन? न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन ने मैच के बाद उन्होंने कहा, यह मुश्किल दिन था। विकेट पहले मैच की तुलना में काफी अलग था। मुझे लगता है कि मैच को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए बल्लेबाजी इकाई के रूप में हमें पंद्रह से बीस रन और बनाने की जरूरत थी, लेकिन भारत ने जिस तरह गेंदबाजी की उन्हें श्रेय जाता है। विलियमसन ने टीम इंडिया को विश्वस्तरीय टीम करार दिया जिसने उन्हें लगातार दबाव में डाला। उन्होंने कहा, सभी विभागों में उनकी टीम स्तरीय है और बीच के ओवरों में उन्होंने हम पर दबाव बनाए रखा। उन्होंने आगे कहा, 'छोटे मैदान पर सिर्फ एक सौ तीस रन बनाने के बावजूद हमें पता था कि अगर हम शुरुआत में जल्दी विकेट हासिल करने और उनकी तरह दबाव बनाने में सफल रहे तो कुछ भी हो सकता है। मगर उन्होंने अपना अनुभव दिखाया और पहली पारी में हम जितने सक्षम थे, उससे कहीं ज्यादा गहराई से उन्होंने खेला। '
आधुनिक परियोजना 885M (यासेन-एम) "नोवोसिबिर्स्क" की पहली धारावाहिक बहुउद्देशीय परमाणु पनडुब्बी ने कारखाने के समुद्री परीक्षणों का पहला चरण पूरा किया, जो सोमवार, 2 अगस्त को सेवेरोडविंस्क लौट रहा था। जैसा TASS रूसी रक्षा उद्योग में एक स्रोत का हवाला देते हुए, पनडुब्बी एक समुद्री आउटलेट से सेवामाश में लौट आई। फ़ैक्टरी समुद्री परीक्षणों का पहला चरण व्हाइट सी में हुआ और एक महीने का समय लगा। ZHI के दौरान की गई विशिष्ट गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। परीक्षण के लिए आगे की योजनाओं का भी खुलासा नहीं किया गया था, हालांकि पहले यह बताया गया था कि कारखाने के समुद्री परीक्षण आसानी से राज्य परीक्षणों में जाएंगे, जिसके भीतर पनडुब्बी समुद्र से कई बाहर निकल जाएगी और कैलिबर और गोमेद क्रूज मिसाइलों को आग लगा देगी। नोवोसिबिर्स्क का स्थानांतरण बेड़ा इस वर्ष की चौथी तिमाही के लिए निर्धारित है। जैसा कि पहले बताया गया था, नोवोसिबिर्स्क परमाणु पनडुब्बी ने जुलाई 2021 की शुरुआत में सेवमाश को छोड़कर परीक्षण में प्रवेश किया। चालक दल और डिलीवरी टीम बोर्ड पर थी। परमाणु पनडुब्बी K-573 "नोवोसिबिर्स्क" श्रृंखला में दूसरी और "कज़ान" के नेतृत्व के बाद यासेन-एम परियोजना की पहली धारावाहिक पनडुब्बी है। 26 जुलाई, 2013 को सेवमाश में लेट गया, 25 दिसंबर, 2019 को लॉन्च किया गया। यासेन-एम पनडुब्बियों में 13800 टन का विस्थापन, 520 मीटर की गोताखोरी गहराई, 64 का दल, 100 दिनों की स्वायत्तता, 31 समुद्री मील की एक अंडरवाटर गति है। सेवा में, भविष्य में हाइपरसोनिक "जिरकोन" 533 मिमी, टॉरपीडो XNUMX मिमी, क्रूज मिसाइल "कैलिबर" और "ओनेक्स" हैं।
आधुनिक परियोजना आठ सौ पचासीM "नोवोसिबिर्स्क" की पहली धारावाहिक बहुउद्देशीय परमाणु पनडुब्बी ने कारखाने के समुद्री परीक्षणों का पहला चरण पूरा किया, जो सोमवार, दो अगस्त को सेवेरोडविंस्क लौट रहा था। जैसा TASS रूसी रक्षा उद्योग में एक स्रोत का हवाला देते हुए, पनडुब्बी एक समुद्री आउटलेट से सेवामाश में लौट आई। फ़ैक्टरी समुद्री परीक्षणों का पहला चरण व्हाइट सी में हुआ और एक महीने का समय लगा। ZHI के दौरान की गई विशिष्ट गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। परीक्षण के लिए आगे की योजनाओं का भी खुलासा नहीं किया गया था, हालांकि पहले यह बताया गया था कि कारखाने के समुद्री परीक्षण आसानी से राज्य परीक्षणों में जाएंगे, जिसके भीतर पनडुब्बी समुद्र से कई बाहर निकल जाएगी और कैलिबर और गोमेद क्रूज मिसाइलों को आग लगा देगी। नोवोसिबिर्स्क का स्थानांतरण बेड़ा इस वर्ष की चौथी तिमाही के लिए निर्धारित है। जैसा कि पहले बताया गया था, नोवोसिबिर्स्क परमाणु पनडुब्बी ने जुलाई दो हज़ार इक्कीस की शुरुआत में सेवमाश को छोड़कर परीक्षण में प्रवेश किया। चालक दल और डिलीवरी टीम बोर्ड पर थी। परमाणु पनडुब्बी K-पाँच सौ तिहत्तर "नोवोसिबिर्स्क" श्रृंखला में दूसरी और "कज़ान" के नेतृत्व के बाद यासेन-एम परियोजना की पहली धारावाहिक पनडुब्बी है। छब्बीस जुलाई, दो हज़ार तेरह को सेवमाश में लेट गया, पच्चीस दिसंबर, दो हज़ार उन्नीस को लॉन्च किया गया। यासेन-एम पनडुब्बियों में तेरह हज़ार आठ सौ टन का विस्थापन, पाँच सौ बीस मीटर की गोताखोरी गहराई, चौंसठ का दल, एक सौ दिनों की स्वायत्तता, इकतीस समुद्री मील की एक अंडरवाटर गति है। सेवा में, भविष्य में हाइपरसोनिक "जिरकोन" पाँच सौ तैंतीस मिमी, टॉरपीडो XNUMX मिमी, क्रूज मिसाइल "कैलिबर" और "ओनेक्स" हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय दौरे के लिए गुजरात पहुंच चुके हैं। गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले पीएम के इस दौरे को अहम माना जा रहा है। सूरत में पीएम मोदी ने एक रोडशो किया, जिसमें लोगों का हुजूम देखने को मिला। रोडशो के दौरान मोदी-मोदी के नारे लगते रहे। पीएम के दो दिन के इस कार्यक्रम में सूरत को 3400 करोड़ की सौगात मिल रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय दौरे के लिए गुजरात पहुंच चुके हैं। गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले पीएम के इस दौरे को अहम माना जा रहा है। सूरत में पीएम मोदी ने एक रोडशो किया, जिसमें लोगों का हुजूम देखने को मिला। रोडशो के दौरान मोदी-मोदी के नारे लगते रहे। पीएम के दो दिन के इस कार्यक्रम में सूरत को तीन हज़ार चार सौ करोड़ की सौगात मिल रही है।
बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त का अंदाज आज भी सबसे हटके और निराला है। अभिनेता ने जब से अपना फिल्मी सफर शुरू किया है, तब से हर कोई उनके इस अनोखे अंदाज का फैन रह चुका है। संजय दत्त की चाल से लेकर उनके बालों के स्टाइल तक सब कुछ उनकी तरह अनोखा है। चाहे उनकी कार और घड़ियों के कलेक्शन की बात करे या उनके हेयरस्टाइल की। संजय युवा दिनों से ही ट्रेंडसेटर रह चुके हैं, संजू बाबा के जूतों की बात हो या फिर उनकी लैदर जैकेट की, उनकी हर चीज ट्रेंडसेटर रह चुकी है। संजय दत्त पहले अभिनेता है, जिन्हीने बॉडी बिल्डिंग का ट्रेंड सेट किया। उन्होंने अपने करियर में तमाम लुक अपनाए हैं। संजय के इन तमाम लुक की झलक बायोपिक 'संजू' में भी देखने मिलेगी। राजकुमार हिरानी द्वारा निर्देशित फिल्म 29 जून 2018 को रिलीज हो गई है। 'संजू' को फैंस का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है।
बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त का अंदाज आज भी सबसे हटके और निराला है। अभिनेता ने जब से अपना फिल्मी सफर शुरू किया है, तब से हर कोई उनके इस अनोखे अंदाज का फैन रह चुका है। संजय दत्त की चाल से लेकर उनके बालों के स्टाइल तक सब कुछ उनकी तरह अनोखा है। चाहे उनकी कार और घड़ियों के कलेक्शन की बात करे या उनके हेयरस्टाइल की। संजय युवा दिनों से ही ट्रेंडसेटर रह चुके हैं, संजू बाबा के जूतों की बात हो या फिर उनकी लैदर जैकेट की, उनकी हर चीज ट्रेंडसेटर रह चुकी है। संजय दत्त पहले अभिनेता है, जिन्हीने बॉडी बिल्डिंग का ट्रेंड सेट किया। उन्होंने अपने करियर में तमाम लुक अपनाए हैं। संजय के इन तमाम लुक की झलक बायोपिक 'संजू' में भी देखने मिलेगी। राजकुमार हिरानी द्वारा निर्देशित फिल्म उनतीस जून दो हज़ार अट्ठारह को रिलीज हो गई है। 'संजू' को फैंस का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है।
लखनऊः कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बीजेपी के बीच इन दिनों राजनीतिक गर्मागर्मी जारी है। इस बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, आरोपों के विपरीत, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने देश में किसी की आवाज को कम नहीं किया, जैसा कि 1975 के आपातकाल के दौरान हुआ था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ उद्योग व्यापार मंडल द्वारा उनके लोकसभा क्षेत्र लखनऊ में आयोजित एक होली मिलन समारोह में यह टिपण्णी की। रक्षा मंत्री ने कहा, "अगर किसी को लगता है कि भारत का लोकतंत्र खतरे में है तो इस पर देश के सांसदों से बात करनी चाहिए। भारत जैसा लोकतंत्र दुनिया में कहीं नहीं है। बीजेपी किसी की आवाज नहीं रोक रही। 1975 में आपातकाल लगाकर आवाज को बंद कर दिया गया था।
लखनऊः कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बीजेपी के बीच इन दिनों राजनीतिक गर्मागर्मी जारी है। इस बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, आरोपों के विपरीत, भारतीय जनता पार्टी ने देश में किसी की आवाज को कम नहीं किया, जैसा कि एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर के आपातकाल के दौरान हुआ था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ उद्योग व्यापार मंडल द्वारा उनके लोकसभा क्षेत्र लखनऊ में आयोजित एक होली मिलन समारोह में यह टिपण्णी की। रक्षा मंत्री ने कहा, "अगर किसी को लगता है कि भारत का लोकतंत्र खतरे में है तो इस पर देश के सांसदों से बात करनी चाहिए। भारत जैसा लोकतंत्र दुनिया में कहीं नहीं है। बीजेपी किसी की आवाज नहीं रोक रही। एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में आपातकाल लगाकर आवाज को बंद कर दिया गया था।
(active tab) डर से यूपी चुनाव जीतेगी BJP ? राहुल : पेगासस देश के खिलाफ मोदी का हथियार । योगीराज में चीरहरण, हिंसा क्या 2022 का ट्रेलर है? कोरोना में कावड़ यात्रा, दो-बच्चे कानून का प्रस्ताव और यूपी में एकदलीय व्यवस्था की आहट! भारत एक मौज : तेल की बढ़ती क़ीमतों के बीच देश 'भक्ति' बेरोज़गारी का थप्पड़, योगी शासन की ज़्यादती ! आखिर मोदी किस भारत से बात कर रहे थे ? वायरस से ज्यादा सरकारी दिशाहीनता ने मारा!
डर से यूपी चुनाव जीतेगी BJP ? राहुल : पेगासस देश के खिलाफ मोदी का हथियार । योगीराज में चीरहरण, हिंसा क्या दो हज़ार बाईस का ट्रेलर है? कोरोना में कावड़ यात्रा, दो-बच्चे कानून का प्रस्ताव और यूपी में एकदलीय व्यवस्था की आहट! भारत एक मौज : तेल की बढ़ती क़ीमतों के बीच देश 'भक्ति' बेरोज़गारी का थप्पड़, योगी शासन की ज़्यादती ! आखिर मोदी किस भारत से बात कर रहे थे ? वायरस से ज्यादा सरकारी दिशाहीनता ने मारा!
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
शोएब अख्तर के खुलासे के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ी दानिश कनेरिया ने भी अपने साथ भेदभाव की बात स्वीकार की है। दनिश ने कहा "पाक खिलाड़ियों को कनेरिया के साथ खाने में समस्या होती थी क्योंकि वह टीम में एक हिंदू खिलाड़ी था। नई दिल्ली. शोएब अख्तर के खुलासे के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ी दानिश कनेरिया ने भी अपने साथ भेदभाव की बात स्वीकार की है। दनिश ने कहा "पाक खिलाड़ियों को कनेरिया के साथ खाने में समस्या होती थी क्योंकि वह टीम में एक हिंदू खिलाड़ी था। शोएब अख्तर ने सच कहा। मैं उन खिलाड़ियों के नाम बताऊंगा जो मुझसे बात करना भी पसंद नहीं करते थे क्योंकि मैं एक हिंदू था। उस समय इस पर बोलने की हिम्मत नहीं थी, लेकिन अब मैं बोलूंगा और उनके नाम बताऊंगा। " पाकिस्तान के एक टीवी चैनल में खुलासा करते हुए तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने बताया था कि हिंदू होने के कारण साथी खिलाड़ी दानिश कनेरिया के साथ भेदभाव करते थे। शोएब अख्तर ने चौकाने वाला खुलासा करते हुए कहा था कि कुछ खिलाड़ियों को इस बात से दिक्कत थी कि दानिश उनके साथ खाना क्यों खाता है। इस टीवी शो में शोएब अख्तर के अलावा पूर्व कप्तान राशिद लतीफ और पाकिस्तान के पूर्व मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज असिम कमाल भी शामिल थे। दनिश कनेरिया पर क्या बोले थे शोएब ? शोएब ने आगे बोलते हुए कहा था कि युसुफ में 12 हजार रन बनाने की क्षमता थी पर पाकिस्तान टीम मैनेजमेंट ने उन पर ध्यान नहीं दिया। इस बात को लेकर शोएब अख्तर की दो तीन खिलाड़ियों से लड़ाई भी हुई। शोएब ने कहा "अगर कोई हिंदू है तो भी वह खेलेगा, और उसी हिंदू ने हमें टेस्ट सीरीज जिताई। " शोएब की इस बात पर रियाज ने दानिश कनेरिया का नाम लिया। शोएब ने आगे कहा "बात खुल जाएगी लेकिन बता दूं कि कुछ प्लेयर्स ने मुझसे कहा यह यहां से खाना क्यों ले रहा है। मैने उनसे कहा मैं तुम्हें यहां से उठाकर बाहर फेंक दूंगा। कप्तान होगे तुम अपने घर के। वो तुम्हें 6-6 विकेट लेकर दे रहा है। इंग्लैंड में दानिश और शमी ने ही हमें सीरीज जिताई थी। "
शोएब अख्तर के खुलासे के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ी दानिश कनेरिया ने भी अपने साथ भेदभाव की बात स्वीकार की है। दनिश ने कहा "पाक खिलाड़ियों को कनेरिया के साथ खाने में समस्या होती थी क्योंकि वह टीम में एक हिंदू खिलाड़ी था। नई दिल्ली. शोएब अख्तर के खुलासे के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ी दानिश कनेरिया ने भी अपने साथ भेदभाव की बात स्वीकार की है। दनिश ने कहा "पाक खिलाड़ियों को कनेरिया के साथ खाने में समस्या होती थी क्योंकि वह टीम में एक हिंदू खिलाड़ी था। शोएब अख्तर ने सच कहा। मैं उन खिलाड़ियों के नाम बताऊंगा जो मुझसे बात करना भी पसंद नहीं करते थे क्योंकि मैं एक हिंदू था। उस समय इस पर बोलने की हिम्मत नहीं थी, लेकिन अब मैं बोलूंगा और उनके नाम बताऊंगा। " पाकिस्तान के एक टीवी चैनल में खुलासा करते हुए तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने बताया था कि हिंदू होने के कारण साथी खिलाड़ी दानिश कनेरिया के साथ भेदभाव करते थे। शोएब अख्तर ने चौकाने वाला खुलासा करते हुए कहा था कि कुछ खिलाड़ियों को इस बात से दिक्कत थी कि दानिश उनके साथ खाना क्यों खाता है। इस टीवी शो में शोएब अख्तर के अलावा पूर्व कप्तान राशिद लतीफ और पाकिस्तान के पूर्व मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज असिम कमाल भी शामिल थे। दनिश कनेरिया पर क्या बोले थे शोएब ? शोएब ने आगे बोलते हुए कहा था कि युसुफ में बारह हजार रन बनाने की क्षमता थी पर पाकिस्तान टीम मैनेजमेंट ने उन पर ध्यान नहीं दिया। इस बात को लेकर शोएब अख्तर की दो तीन खिलाड़ियों से लड़ाई भी हुई। शोएब ने कहा "अगर कोई हिंदू है तो भी वह खेलेगा, और उसी हिंदू ने हमें टेस्ट सीरीज जिताई। " शोएब की इस बात पर रियाज ने दानिश कनेरिया का नाम लिया। शोएब ने आगे कहा "बात खुल जाएगी लेकिन बता दूं कि कुछ प्लेयर्स ने मुझसे कहा यह यहां से खाना क्यों ले रहा है। मैने उनसे कहा मैं तुम्हें यहां से उठाकर बाहर फेंक दूंगा। कप्तान होगे तुम अपने घर के। वो तुम्हें छः-छः विकेट लेकर दे रहा है। इंग्लैंड में दानिश और शमी ने ही हमें सीरीज जिताई थी। "
नई दिल्लीः साउथ अफ्रीका और भारत के बीच टी20 सीरीज का दूसरा मैच आज गुवाहाटी में खेला जाएगा। पहला मैच जीतकर टीम इंडिया सीरीज में 1-0 से आगे है और दूसरा मैच जीतकर सीरीज को सील करना चाहेगी। पहले मैच में विराट कोहली का बल्ला शांत रहा था। कप्तान रोहित शर्मा भी नहीं चले। लेकिन आज के मैच में दोनों से बड़ी पारी की उम्मीद है। इस मैच में विराट कोहली अपने कप्तान को पीछे छोड़ सकते हैं। टी20 इंटरनेशल में रोहित शर्मा सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। विराट इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर हैं। हालांकि दोनों के बीच रनों का अंतर अब काफी कम रह गया है। रोहित से आगे निकलेंगे विराट? पूर्व कप्तान विराट कोहली ने भारत के लिए टी20 इंटरनेशनल में कुल 108 मैच खेल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 100 पारियों में 50. 18 की औसत से 3663 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और 33 अर्धशतक शामिल है। इस फॉर्मेट में उन्होंने हाल ही में एशिया कप के दौरान अफगानिस्तान के खिलाफ 122 रनों की पारी खेली थी। वहीं, रोहित शर्मा टी20 इंटरनेशनल में 3694 रन बना चुके हैं। वह टीम इंडिया से लिए अब तक कुल 140 मैच खेले हैं, जिसमें उनका औसत 32. 12 का रहा है। इसके अलावा उन्होंने भारत के लिए इस फॉर्मेट में चार शतक और 28 अर्धशतक भी लगाए हैं। विराट कोहली के पास साउथ अफ्रीका के खिलाफ गुवाहाटी में होने वाले मैच में मौका होगा कि वह 31 रन बनाकर रोहित शर्मा से आगे निकल जाएं। विराट कोहली का बल्ला ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खूब चला। आखिरी और निर्णायक मैच में विराट कोहली ने शानदार फिफ्टी ठोका था। भारतीय टीम द्विपक्षीय सीरीज में नहीं हारती। पिछली 8 द्विपक्षीय टी20 सीरीज में बेहतरीन रिकॉर्ड रहा है। टीम इंडिया इन सभी सीरीज में एक भी बार हारी नहीं है। इस दौरान टीम ने 7 सीरीज जीती हैं, जबकि एक ड्रॉ रहा। ऐसे में टीम इंडिया एक और सीरीज पर कब्जा करना चाहेगी। हालांकि भारत में साउथ अफ्रीका की टीम अभी तक एक भी टी20 सीरीज नहीं हारी है।
नई दिल्लीः साउथ अफ्रीका और भारत के बीच टीबीस सीरीज का दूसरा मैच आज गुवाहाटी में खेला जाएगा। पहला मैच जीतकर टीम इंडिया सीरीज में एक-शून्य से आगे है और दूसरा मैच जीतकर सीरीज को सील करना चाहेगी। पहले मैच में विराट कोहली का बल्ला शांत रहा था। कप्तान रोहित शर्मा भी नहीं चले। लेकिन आज के मैच में दोनों से बड़ी पारी की उम्मीद है। इस मैच में विराट कोहली अपने कप्तान को पीछे छोड़ सकते हैं। टीबीस इंटरनेशल में रोहित शर्मा सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। विराट इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर हैं। हालांकि दोनों के बीच रनों का अंतर अब काफी कम रह गया है। रोहित से आगे निकलेंगे विराट? पूर्व कप्तान विराट कोहली ने भारत के लिए टीबीस इंटरनेशनल में कुल एक सौ आठ मैच खेल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने एक सौ पारियों में पचास. अट्ठारह की औसत से तीन हज़ार छः सौ तिरेसठ रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और तैंतीस अर्धशतक शामिल है। इस फॉर्मेट में उन्होंने हाल ही में एशिया कप के दौरान अफगानिस्तान के खिलाफ एक सौ बाईस रनों की पारी खेली थी। वहीं, रोहित शर्मा टीबीस इंटरनेशनल में तीन हज़ार छः सौ चौरानवे रन बना चुके हैं। वह टीम इंडिया से लिए अब तक कुल एक सौ चालीस मैच खेले हैं, जिसमें उनका औसत बत्तीस. बारह का रहा है। इसके अलावा उन्होंने भारत के लिए इस फॉर्मेट में चार शतक और अट्ठाईस अर्धशतक भी लगाए हैं। विराट कोहली के पास साउथ अफ्रीका के खिलाफ गुवाहाटी में होने वाले मैच में मौका होगा कि वह इकतीस रन बनाकर रोहित शर्मा से आगे निकल जाएं। विराट कोहली का बल्ला ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खूब चला। आखिरी और निर्णायक मैच में विराट कोहली ने शानदार फिफ्टी ठोका था। भारतीय टीम द्विपक्षीय सीरीज में नहीं हारती। पिछली आठ द्विपक्षीय टीबीस सीरीज में बेहतरीन रिकॉर्ड रहा है। टीम इंडिया इन सभी सीरीज में एक भी बार हारी नहीं है। इस दौरान टीम ने सात सीरीज जीती हैं, जबकि एक ड्रॉ रहा। ऐसे में टीम इंडिया एक और सीरीज पर कब्जा करना चाहेगी। हालांकि भारत में साउथ अफ्रीका की टीम अभी तक एक भी टीबीस सीरीज नहीं हारी है।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। राजकुमार शब्द का तात्पर्य निम्न में से किसी के संदर्भ में हो सकता है. राजकुमार सन्तोषी फ़िल्मफेयर पुरस्कार विजेता हिन्दी फ़िल्मों के भारतीय फ़िल्म निर्देशक और निर्माता हैं। वो निर्माता-निर्देशक पी॰ एल॰ सन्तोषी के पुत्र हैं। . राजकुमार और राजकुमार सन्तोषी आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। राजकुमार 10 संबंध है और राजकुमार सन्तोषी 23 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (10 + 23)। यह लेख राजकुमार और राजकुमार सन्तोषी के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। राजकुमार शब्द का तात्पर्य निम्न में से किसी के संदर्भ में हो सकता है. राजकुमार सन्तोषी फ़िल्मफेयर पुरस्कार विजेता हिन्दी फ़िल्मों के भारतीय फ़िल्म निर्देशक और निर्माता हैं। वो निर्माता-निर्देशक पी॰ एल॰ सन्तोषी के पुत्र हैं। . राजकुमार और राजकुमार सन्तोषी आम में शून्य बातें हैं । राजकुमार दस संबंध है और राजकुमार सन्तोषी तेईस है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख राजकुमार और राजकुमार सन्तोषी के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के नेतृत्व में गठित महागठबंधन की सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार यथाशीघ्र होगा। गुरुवार को विधानसभा (Bihar Assembly) के समीप स्थित शहीद स्मारक परिसर में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत के क्रम में उन्होंने यह बात कही। संकेत यह है कि मंत्रिमंडल विस्तार 15 अगस्त के तुरंत बाद होगा। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के गिरने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तरफ से नीतीश कुमार पर किए जा रहे हमलों के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि जो मन में आता है, बोलते रहें; कोई फर्क नहीं पड़ता। मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। बीजेपी की तरफ से नीतीश कुमार पर की जा रही टिप्पणियों के बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जो मन में आता है, बोलते रहिए। बीजेपी नेता सुशील मोदी का नाम लिए बगैर कहा कि एक आदमी मेरे बारे में कह रहा था कि मैं उपराष्ट्रपति बनना चाहता हूं। यह बिल्कुल ही बोगस बात है। हमारी ऐसी कोई इच्छा नहीं थी। नीतीश कुमार ने कहा कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में उनकी पार्टी ने सहयोग किया। दोनों चुनावों के समाप्त होने के बाद ही हमलोगों ने बैठक की। सुशील मोदी को उनकी पार्टी ने कुछ नहीं बनाया तो वे इस तरह की बात बोल रहे हैं। मेरे खिलाफ वे इतना बोलते रहें कि उनको जगह मिल जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग मुझपर बोल रहे हैं, उनके विषय में कुछ नहीं बोलना है। हम तो 2020 विधानसभा चुनाव के बाद ही मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते थे। हमारे दल के लोग उनके (बीजेपी के) उम्मीदवारों को जिताने में तो वे लोग हमारी पार्टी के उम्मीदवारों को हराने में लगे थे। नीतीश कुमार ने कहा कि उनके दल के लोगों की बीजेपी के साथ रहने की इच्छा नहीं थी। इसी वजह से वे एनडीए से अलग होकर राष्ट्रीय जनता दल के साथ आ गए। अब वे मिलकर काम करेंगे। पूरी मजबूती के साथ विपक्ष के सभी लोग विपक्ष की एकजुटता को आगे बढ़ाएंगे। जो लोग पावर में हैं, जितना प्रचार करना हैं करते रहें। इससे कुछ नहीं होगा। विधानसभा अध्यक्ष के इस्तीफे के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिसके समर्थन से थे, वे लोग चले गए। यह देखना चाहिए कि नियम-कानून भी कोई चीज है। शहीद दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री के साथ रहे उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी संवाददाताओं से बातचीत के क्रम में कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन पूरी मजबूती के साथ खड़ा है। दरअसल, एनडीए की चिंता 2024 के लोकसभा चुनाव की है। तेजस्वी ने कहा कि देश में क्या हो रहा है, यह भी लोग देख रहे हैं। महाराष्ट्र और झारखंड में क्या हुआ इसे लोगों ने देखा है। साफ-सुथरी राजनीति होनी चाहिए। बीजेपी का चाल -चरित्र तो उजागर है। जो डर जाएगा उसे डराओ और ईडी-आईटी लगा दो। जो बिक जाए, उसे खरीदो।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठित महागठबंधन की सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार यथाशीघ्र होगा। गुरुवार को विधानसभा के समीप स्थित शहीद स्मारक परिसर में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत के क्रम में उन्होंने यह बात कही। संकेत यह है कि मंत्रिमंडल विस्तार पंद्रह अगस्त के तुरंत बाद होगा। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के गिरने को लेकर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से नीतीश कुमार पर किए जा रहे हमलों के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि जो मन में आता है, बोलते रहें; कोई फर्क नहीं पड़ता। मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। बीजेपी की तरफ से नीतीश कुमार पर की जा रही टिप्पणियों के बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जो मन में आता है, बोलते रहिए। बीजेपी नेता सुशील मोदी का नाम लिए बगैर कहा कि एक आदमी मेरे बारे में कह रहा था कि मैं उपराष्ट्रपति बनना चाहता हूं। यह बिल्कुल ही बोगस बात है। हमारी ऐसी कोई इच्छा नहीं थी। नीतीश कुमार ने कहा कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में उनकी पार्टी ने सहयोग किया। दोनों चुनावों के समाप्त होने के बाद ही हमलोगों ने बैठक की। सुशील मोदी को उनकी पार्टी ने कुछ नहीं बनाया तो वे इस तरह की बात बोल रहे हैं। मेरे खिलाफ वे इतना बोलते रहें कि उनको जगह मिल जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग मुझपर बोल रहे हैं, उनके विषय में कुछ नहीं बोलना है। हम तो दो हज़ार बीस विधानसभा चुनाव के बाद ही मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते थे। हमारे दल के लोग उनके उम्मीदवारों को जिताने में तो वे लोग हमारी पार्टी के उम्मीदवारों को हराने में लगे थे। नीतीश कुमार ने कहा कि उनके दल के लोगों की बीजेपी के साथ रहने की इच्छा नहीं थी। इसी वजह से वे एनडीए से अलग होकर राष्ट्रीय जनता दल के साथ आ गए। अब वे मिलकर काम करेंगे। पूरी मजबूती के साथ विपक्ष के सभी लोग विपक्ष की एकजुटता को आगे बढ़ाएंगे। जो लोग पावर में हैं, जितना प्रचार करना हैं करते रहें। इससे कुछ नहीं होगा। विधानसभा अध्यक्ष के इस्तीफे के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिसके समर्थन से थे, वे लोग चले गए। यह देखना चाहिए कि नियम-कानून भी कोई चीज है। शहीद दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री के साथ रहे उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी संवाददाताओं से बातचीत के क्रम में कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन पूरी मजबूती के साथ खड़ा है। दरअसल, एनडीए की चिंता दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव की है। तेजस्वी ने कहा कि देश में क्या हो रहा है, यह भी लोग देख रहे हैं। महाराष्ट्र और झारखंड में क्या हुआ इसे लोगों ने देखा है। साफ-सुथरी राजनीति होनी चाहिए। बीजेपी का चाल -चरित्र तो उजागर है। जो डर जाएगा उसे डराओ और ईडी-आईटी लगा दो। जो बिक जाए, उसे खरीदो।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
यहाँ नहीं होय हैं ऐसें हमारे दोय ज्ञानका निषेध अभिमंत है और प्रत्यक्षात्मक जे दोय ज्ञान ते तो हमारै अभिमत हैं तो हम पूछें : हैं कि अन्तकरणीज्यो वृत्ति से इदन्ताकूँ विषय करैगी तो रज्जु मैं वि करेगी सर्प में विषय नहीं करसकैगी काहेरौँ कि अनिर्वचनीय सर्प अन्तकरण की ज्यो वृत्ति ताका विषय नहीं है किन्तु विद्याकी यो वृत्ति ता का विषय है ऐसें तुम मानौँ हौं अव धर्मीजा प्रातिभासिक सर्प सो अन्त करणकी वृत्तिका विषय ही नहीं तो रज्जुकी इदन्ता सर्प मैं कैसैं प्रतीत हाय देखो तुमारे दृष्टान्तक स्मरण करो पुष्पकी ज्यो रक्तता तदाकार वृति नैं हीँ पुष्पसम्बन्धी स्फटिक कू विषय किया है यारौँ पुष्पकी रक्तता स्फटिक मैं प्रतीत होय है और यहाँ तो इदमाकार वृत्ति नैं दंशदका अर्थ ज्यो रज्जु उसके सम्बन्धी सर्पकूँ विषय किया नहीं यात रज्जुकी इदन्ता सर्प मैं कैसे प्रतीत होवे सो कहो १ प्रोर अयंसर्पः ॥ यहाँ ज्ञान एक ही प्रतीत होय हे दोय ज्ञान प्रतीत हे वें नहीं मोर तुम यहाँ दोय ज्ञान नानोँ हो तो अनुभव विरोध होय है इस विरोध का परिहार कहा है सो कहा २ ओर जब रज्जुज्ञान तैं सर्पकी निवृत्ति हाय है तहाँ रज्जुका ज्ञाता तुम प्रनाता मानौँ हो तो प्रमाताकूँ ज्ञान भयें साक्षीकै ज्ञात ज्या सर्प ताकी निवृत्ति कैसे होय सा कहा ज्यो अन्यक रज्जुका ज्ञान भयें अन्यके भ्रमकी निवृत्ति होय तो हमरिक ज्ञान भयें तुमारेकूँ वी भूमकी निवृत्ति होण चाहिये ३ ओर ज्यो सर्प प्रमाताके ज्ञानका विषय नहीं है और साक्षीका विषय है तो प्रमाता कूँ भय नहीं होणाँ चाहिये किन्तु साक्षीक भय होणाँ चाहिये सो साक्षी क भय होवै नहीं ये तुम वी मानौँ हो ४ ओर जैर्दै व्यावहारिक सर्पका ज्ञान परमाताकूँ हेावै है उस समय मैं ज्ञाता ज्ञान ज्ञेय रूपा ज्यो त्रिपुटी ताक साक्षी प्रकाश करता हुवा स्वप्रकाशता करिक प्रकाश करे है तेसैं हीँ प्रातिभासिक सर्पका जव ज्ञान होवे है तव वी साक्षी त्रिपुटीका ही प्रकाशक प्रतीत होय है ये तुमहीँ रज्जु सर्प भ्रम होय तव अनुभव तैं देखिलेवो अव ज्या यहाँ दोय ज्ञान मानौँगे और उनके विषय दोय मानौँ गेता च्यार तो थे भये और एक प्रनाता है एसैं पाँचक साक्षी प्रकाश करहै एझैँ अवश्य मानणाँ पहुँगा तो साक्षी पञ्चपुटी का प्रकाशक मानणाँ परैया सो हमनें तो आज पर्यन्त ऐसा लेख कोई ग्रन्थ में देखा नहीं ज्यो सङ्ग्रही नैं कोई ग्रन्थ में देखा है।य और लिखा हैग्य तो तुम ही कहो ५ जयो कहो कि प्रमाता जय अन्धकारात रज्जु इदन्ताका ज्ञान हुवा उस समय में इढ़नाकार वृत्युपहित साक्षी की वी विषयता इदन्ता में है तो जैसे रज्जुको इदन्ता प्रमाताकी विषय भई तैसे साक्षीकी वी विषय भई अनिर्वचनीय सर्प और उस ॐ विषय करखें वाला ज्ञान ये सनकाल में उत्पन्न भये उसकाल में वो हो कूँ साक्षी सर्प र ज्ञान दोनोँका प्रकाश कर है यात रज्जुकी इदन्ता सर्प मैं प्रतीत होय है जैसे प्रसाताको विषय पुष्पकी रक्तता स्फटिक मैं प्रतीत होय है ऐमैं इदन्ता मोर सर्प एकचिद्विषय होगें तैं अन्यथास्याति है हम प्रकार तैं अन्यथा ख्याति मानतें में स्फटिक में रक्तताको अ न्यघाख्याति वणँ जायगी काहे कि एक प्रसातृरूप ज्यो चित् तिसकी विषयत। रक्तता ओर स्फटिक देनूँ मैं है ऐसें तो प्रथम प्रश्नका समाधान हुवा.१ ओर द्वितीय प्रश्नका समाधान ये है कि ज्ञान में स्वरूप ते भेद है नहीं किन्तु विषय भेदतें भेद है तो यहाँ विषय हैं दोय एक तो रज्जु, को इदन्ता है और दूसरा प्रातिभासिक सर्प है ये दोनँ सीप यो ज्ञान तके विषय हैं या हमरो ज्ञान दोग कहे हैं घोर वस्तुगत्या साक्षीरूप ज्ञान एक ही है यार्तें एक ही ज्ञान प्रतीत होय है ओर तृतीय प्रश्नका समाधान ये है कि यद्यपि धरण भङ्ग हो करिक रज्जु का विशेष रूप करिकेँ ज्ञान प्रदाताकूँ हुवा है तथापि साक्षी त्रिपुटीका प्रकाशक है यातैं साक्षीका वी विषय रज्जु है तो जैसैं रज्जुका ज्ञान प्रभाताकूँ हुवा तैसैं साक्षीकूँ वो हुवा यात अन्य ज्ञान भयें अन्य के भूनको निवृत्ति नहीं भई किन्तु जिसकूँ ज्ञान हुवा उसके ही भूमकी निवृत्ति भई इस का रण तैं अन्यकूँ ज्ञान भयें अन्यके भूनको निवृत्ति की आपत्ति नहीं है ३ और चतुर्थ प्रश्नका समाधान ये है कि यद्यपि सर्प प्रमाता के ज्ञानका वि.. पय नहीं है साक्षीका हो विषय है तथापि अन्त करसकी उपादानभूत •जनो अविद्या ताका परिणाम सर्प ओर ताका ज्ञान है और अन्नपूर वी सही अविद्याका परिणाम है तो उपादान तैं भिन्न कार्य होवे नहीं. अनुभव सिद्ध है जैसैं घटकी उपादानं नृत्तिका हे तो घट जयो है से.. मृत्तिका ही है तैर्दै अन्तकरण और सर्पज्ञान ये वी के परिणाम.. है तो अविद्या इनकी उपादान भई जयो अविद्या इनकी उपादान भई तो ये अविद्यारूप भये तो ये प्रविद्यारूप भये तो अन्तकरणको वृत्ति उयो है तिसका उपादान अन्तकरण है तो अविद्या ही कृत्तिकी व पादान भई तो अविद्याकी वृत्ति का विषय सर्प है । अन्तकरणकी वृत्ति का ही विषय सर्प हुवा यातै प्रमाताहूँ भय हाय है ४ गोर पञ्चम प्रश्नका उत्तर ये है कि अधिद्याकी सर्पकूँ विषय करने वाली उयो वृत्ति सो तो सूक्ष्म हे यात प्रतीत होवे नहीं ओर रज्जुकी इदन्ता पूर्वोक्त प्रकार करिक सर्पका धर्म प्रतीत होय हे यात इस स्थलमै साक्षी पश्यपुटीप्रकाशक है तोयी त्रिपुटीप्रकाशकतात हीँ प्रकाशे हे ५ ये उत्तर मेनें मेरे अनुभवत किये हैं इस विषय में मैने विचारसागर में तथा वृत्तिप्रभाकर कुछ घी लेख देखा नहीं है । तो हम कहें हैं कि तुमारे सर्व उत्तर प्रशुद्ध हैं देखो तुमनें इदन्ता ओर अनियंचनीय सर्प इनकूँ एकचिद्विपय मानि करिफें प्रथम मनका उत्तर कहा है तहाँ तो हम मे पूछें हैं कि एक चिद्रपज्यो साक्षी सो न्यो विषयका प्रकाश करे है सो वृत्तिकी सहायता प्रकाश कर है अथवा वृत्ति की सहायता विना प्रकाश करे हे ज्यो कहा कि कृतिकी सहायता प्रकाश करे है तो हम पूछें हैं कि साक्षी जिस वृत्ति की सहायता जिस विषयका प्रकाशक हाय है उस ही वृत्तिकी सहायता उस विषयत अन्य विषयका वी प्रकाशक होय है अथवा नहीं क्यो कहो कि अन्य विषयका को प्रकाशक होय है तो हम कहें हैं कि जैसैं साक्षी प्रविद्याकी वृत्तित सर्पका प्रकाश करता हुवा इदन्ताका प्रकाशक है ऐरौं मानि करि तुम अन्यथाख्याति वणावोगे तैसे जीव साक्षो में सर्वज्ञताकी प्रापत्ति वी मानण पहुॅगी काहेरौँ कि जैसें सर्पत भिन्न इदन्ता है तैसें अन्य सारे पदार्थ सर्पत भिन्न हैं तो उन का प्रकाशक वी जीव साक्षीकूँ मानणाँ हीँ पड़ेगा ऐसैं जीव साक्षी में 'सर्वज्ञताकी आपत्ति होगी ॥ जयो कहा कि ऐसैं मानरों में छापत्ति है तो 'ऐमैं मानेंगे कि साक्षी जिस वृत्ति मैं जिस विषयका प्रकाशंक होय है उस वृत्ति अन्य विषयका प्रकाशक हावै नहीं यार्तें जीव साक्षी मैं सर्वज्ञताकी आपत्ति नहीं है तो हम कहें हैं कि इदन्ता ज्यो है सो अविद्याकी वृत्ति करिक सर्पका प्रकाशक ज्यो साक्षी ताकी विषय नहीं होगी तो सर्प में इदन्ताकी प्रतीति प्रसिद्ध होगी तो अन्यथाख्यातिका मानखाँ प्रसङ्गत हुवा ।। ज्यो कहो कि साक्षी वृत्ति की सहायता बिना हीँ विषय का प्र काश करै है तो हम कहें हैं कि शुद्धचिद्रपज्यो झाला तार्ने साक्षि भाव उयो है सो वृत्ति दृष्टित कल्पित है ओर वृत्तिनिरपेक्ष ज्यो आत्मा ताम साक्षिभाव नहीं है यात वृत्ति की सहायता विना साक्षी विषयका प्र काशक मानणाँ असङ्गत है । ओर ज्यो मौढिवाद वृत्तिनिरपेक्ष शुद्धालाकूँ विषयका प्रकाशक मानि लेवो तो वृत्ति निरपेक्ष शुद्धात्मा हीँ ब्रह्म है मो ब्रह्म समस्त ब्रह्माण्डका प्रकाशक है तो ये ब्रह्मरूप शुद्धात्मा जैसे रज्जुको हृदन्ताकूँ विषय करता हुवा रज्जुसर्प कूँ विषय करैगा यातै अन्ययाख्याति सिद्ध होगी तेसैं हम ऐसें कहेंगे कि ये ब्रह्मरूप शुद्धात्मा वल्मीकादि. स्थान में स्थित ज्या सर्प ताकूँ विषय करता हुवा रज्जुकूँ विषय करें है यातैं रज्जु सर्प भ्रमस्थल में वी अन्यथाख्याति ही मानौं अनिर्वचनीय ख्यातिका उच्छेद ही होगा ।। ज्यो कहो कि रज्जु और सर्प एक देशस्थ नहीं यारौँ रज्जु सर्पस्थन मैं अन्यथाख्याति सम्भवै नहीं तो हम पू हैं कि जहाँ एक देशस्थित दोय पदार्थ प्रतीयमान होय हैं सो वी एक के विषय होय हैं तहाँ अन्यथाख्याति मानौँ हो अथवा भिन्न विषय होय हैं तहाँ वी अन्यथाख्याति मानोँ हो तो तुम ये ही कहोगे कि एक के विषय हाय हैं तहाँ हाँ अन्यथाख्याति होय है कारौँ कि स्फटिक में रक्तताकी प्रतीति होय है तहाँ पुष्पको रक्तता और स्फटिक एक कृति विषय होय हैं यात हीँ स्फटिक मैं रक्तताको अन्यघाख्याति है तो हम पूछें हैं कि जहाँ जपा पुष्पसम्वन्धी पापाय है तहाँ पायाण में रक्तताको प्रतीति होबे नहीं इसमें कारण कहा है सो कहा तो तुम ये कहोगे कि पायाण मलिन है यार्तें पाषाण मैं पुष्पकी छाया हावै नहीं तो हम कह कि अन्यथाख्यातिके मानणें मैं छाया वी निमित्त सिद्ध भई अब हम पूछें हैं कि शुद्ध वस्तु मैं छाया होय है ये तो तुमारे अनुभव सिद्ध है तो जहाँ पुष्पका सम्बन्ध तो स्फटिक मैं नहीं है ओर पुष्पकी छाया स्फटिक में है तहाँ पुष्प ओर स्फटिक एक देशस्थ नहीं हैं तो वी रक्तताकी प्रतीति स्फटिक मैं हाय है यारौँ एक देशस्थत्व क्या है सो अन्यथा ख्याति में निमित्त नहीं है किन्तु छाया क्यो है सो ही निमित्त है ऐसें मानताँ हाँ पडैगा तो जहाँ रज्जु सर्प भूम होय है तहाँ बी रज्जु ओर सर्प ये दोनू एक देशस्थ नहीं हैं तो बी जैसे स्फटिक मैं रक्तताकी छाया तेसैं रज्जु में सर्पका सादृश्य है या अन्यथाख्याति ही मानौं अनिर्वच - है नीय सर्पकी उत्पत्ति मानरों में गौरव दोप है इस कारणत अनिर्वचनीय ख्यातिका उच्छेद ही होगा से। तुमारे अभिमत नहीं है ऐमैं तो प्रथम प्रश्नका समाधान प्रसङ्गत है १ ओर द्वितीय प्रश्नका उत्तर तुमने ये कहा है कि आरोपदीय ज्ञान कहे हैं और वस्तुगत्या साक्षिरूप ज्ञान एक है या ज्ञान एक ही प्रतीत होय है तो हम कहें हैं कि जैसे ये रज्जु है इस ज्ञानकूँ तुम अन्त प्रकरण की ज्यो वृत्ति तद्र प ज्ञान मानौँ हो मोर इसकूँ साक्षिभास्य मानोँ हो काहेतैं कि ये वृत्तिरूप ज्ञान घटकी तरह स्पष्ट प्रतीत हे तैसे ये सर्प है ये ज्ञान वी अन्तकरण की ज्यो वृत्ति ताकी तरँहँ साक्षीका विषय है। करिक प्रतीत हेग्य है या इसकूँ साक्षिरूप मानणाँ अनुभषविरुद्ध ही है । ओोर ज्यो मौढिवादतैं इसकूँ हीँ साक्षि रूप ज्ञान मानोगे तो वृत्तिरूप न्यो ज्ञान ताका उच्छेद ही होगा का हेत कि विषय भेदते हों ज्ञानमै भेद सिद्ध होजायगा तो वृत्तिज्ञान मानणाँ व्यर्थ ही है यात द्वितीय प्रश्नका समाधान की प्रसङ्गत हो है २ ओर तृतीय प्रश्नका समाधान तुमने ये कहा है कि जैसें रज्जु जयो है सो विशेष रूप करके प्रमाताका विषय है तैसे साक्षीका वी विषय है या अन्य के ज्ञान अन्यके भूमको निवृत्तिकी आपत्ति नहीं है तो हम पूछें हैं. कि उपाधि भेद तुम उपहित भेद मानों हो अथवा नहीं जो कहो कि उपाधिमेत उपहित में भेद मानें हैं काहेत कि विचारसागर के द्वितीय तरङ्ग में लिखा है कि अन्तकरणरूप उपाधियोंके भेदसैं जीव साक्षी नाना हैं या अन्य के सुखदु खौँका अन्यकें भान होवे नहीं ओर वो साक्षी जो सुखदुखौँकूँ प्रकाश है सो यी वृतिकी सहायतास हीँ प्रकाशे है यातैं जब अन्तकरण मैं सुख दुख पैदा होय हैं उस काल मैं अन्तकरण की सुखाकार दुखाकार वृत्ति है।य हैं उन वृत्तियाँ सैं साक्षी सुख दुःखाँका प्रकाश करै है ॥ तो हम कहैंहैं कि उपाधि भेदत उपहितमैं भेद है तो अन्यके ज्ञान अन्यके भुमकी निवृत्तिको प्रापति दूर होवे ही नहीं काहेरौँकि अन्तकरण वत्युपहित साक्षीकूँ तो विशेषरूप करि का ज्ञान होगा ओर अविद्यावृत्युपहित साक्षीका भ्रम निवृत्त होगा उपाधि भेद तैं साक्षी मैं भेद है ये तुमारे कथन तैं सिद्ध है यात तृतीय प्रध्यका उत्तर वी असङ्गत ही है ३ ओर चतुर्थ प्रयण के समाधान मैं तुमने ऐसें कही है कि
यहाँ नहीं होय हैं ऐसें हमारे दोय ज्ञानका निषेध अभिमंत है और प्रत्यक्षात्मक जे दोय ज्ञान ते तो हमारै अभिमत हैं तो हम पूछें : हैं कि अन्तकरणीज्यो वृत्ति से इदन्ताकूँ विषय करैगी तो रज्जु मैं वि करेगी सर्प में विषय नहीं करसकैगी काहेरौँ कि अनिर्वचनीय सर्प अन्तकरण की ज्यो वृत्ति ताका विषय नहीं है किन्तु विद्याकी यो वृत्ति ता का विषय है ऐसें तुम मानौँ हौं अव धर्मीजा प्रातिभासिक सर्प सो अन्त करणकी वृत्तिका विषय ही नहीं तो रज्जुकी इदन्ता सर्प मैं कैसैं प्रतीत हाय देखो तुमारे दृष्टान्तक स्मरण करो पुष्पकी ज्यो रक्तता तदाकार वृति नैं हीँ पुष्पसम्बन्धी स्फटिक कू विषय किया है यारौँ पुष्पकी रक्तता स्फटिक मैं प्रतीत होय है और यहाँ तो इदमाकार वृत्ति नैं दंशदका अर्थ ज्यो रज्जु उसके सम्बन्धी सर्पकूँ विषय किया नहीं यात रज्जुकी इदन्ता सर्प मैं कैसे प्रतीत होवे सो कहो एक प्रोर अयंसर्पः ॥ यहाँ ज्ञान एक ही प्रतीत होय हे दोय ज्ञान प्रतीत हे वें नहीं मोर तुम यहाँ दोय ज्ञान नानोँ हो तो अनुभव विरोध होय है इस विरोध का परिहार कहा है सो कहा दो ओर जब रज्जुज्ञान तैं सर्पकी निवृत्ति हाय है तहाँ रज्जुका ज्ञाता तुम प्रनाता मानौँ हो तो प्रमाताकूँ ज्ञान भयें साक्षीकै ज्ञात ज्या सर्प ताकी निवृत्ति कैसे होय सा कहा ज्यो अन्यक रज्जुका ज्ञान भयें अन्यके भ्रमकी निवृत्ति होय तो हमरिक ज्ञान भयें तुमारेकूँ वी भूमकी निवृत्ति होण चाहिये तीन ओर ज्यो सर्प प्रमाताके ज्ञानका विषय नहीं है और साक्षीका विषय है तो प्रमाता कूँ भय नहीं होणाँ चाहिये किन्तु साक्षीक भय होणाँ चाहिये सो साक्षी क भय होवै नहीं ये तुम वी मानौँ हो चार ओर जैर्दै व्यावहारिक सर्पका ज्ञान परमाताकूँ हेावै है उस समय मैं ज्ञाता ज्ञान ज्ञेय रूपा ज्यो त्रिपुटी ताक साक्षी प्रकाश करता हुवा स्वप्रकाशता करिक प्रकाश करे है तेसैं हीँ प्रातिभासिक सर्पका जव ज्ञान होवे है तव वी साक्षी त्रिपुटीका ही प्रकाशक प्रतीत होय है ये तुमहीँ रज्जु सर्प भ्रम होय तव अनुभव तैं देखिलेवो अव ज्या यहाँ दोय ज्ञान मानौँगे और उनके विषय दोय मानौँ गेता च्यार तो थे भये और एक प्रनाता है एसैं पाँचक साक्षी प्रकाश करहै एझैँ अवश्य मानणाँ पहुँगा तो साक्षी पञ्चपुटी का प्रकाशक मानणाँ परैया सो हमनें तो आज पर्यन्त ऐसा लेख कोई ग्रन्थ में देखा नहीं ज्यो सङ्ग्रही नैं कोई ग्रन्थ में देखा है।य और लिखा हैग्य तो तुम ही कहो पाँच जयो कहो कि प्रमाता जय अन्धकारात रज्जु इदन्ताका ज्ञान हुवा उस समय में इढ़नाकार वृत्युपहित साक्षी की वी विषयता इदन्ता में है तो जैसे रज्जुको इदन्ता प्रमाताकी विषय भई तैसे साक्षीकी वी विषय भई अनिर्वचनीय सर्प और उस ॐ विषय करखें वाला ज्ञान ये सनकाल में उत्पन्न भये उसकाल में वो हो कूँ साक्षी सर्प र ज्ञान दोनोँका प्रकाश कर है यात रज्जुकी इदन्ता सर्प मैं प्रतीत होय है जैसे प्रसाताको विषय पुष्पकी रक्तता स्फटिक मैं प्रतीत होय है ऐमैं इदन्ता मोर सर्प एकचिद्विषय होगें तैं अन्यथास्याति है हम प्रकार तैं अन्यथा ख्याति मानतें में स्फटिक में रक्तताको अ न्यघाख्याति वणँ जायगी काहे कि एक प्रसातृरूप ज्यो चित् तिसकी विषयत। रक्तता ओर स्फटिक देनूँ मैं है ऐसें तो प्रथम प्रश्नका समाधान हुवा.एक ओर द्वितीय प्रश्नका समाधान ये है कि ज्ञान में स्वरूप ते भेद है नहीं किन्तु विषय भेदतें भेद है तो यहाँ विषय हैं दोय एक तो रज्जु, को इदन्ता है और दूसरा प्रातिभासिक सर्प है ये दोनँ सीप यो ज्ञान तके विषय हैं या हमरो ज्ञान दोग कहे हैं घोर वस्तुगत्या साक्षीरूप ज्ञान एक ही है यार्तें एक ही ज्ञान प्रतीत होय है ओर तृतीय प्रश्नका समाधान ये है कि यद्यपि धरण भङ्ग हो करिक रज्जु का विशेष रूप करिकेँ ज्ञान प्रदाताकूँ हुवा है तथापि साक्षी त्रिपुटीका प्रकाशक है यातैं साक्षीका वी विषय रज्जु है तो जैसैं रज्जुका ज्ञान प्रभाताकूँ हुवा तैसैं साक्षीकूँ वो हुवा यात अन्य ज्ञान भयें अन्य के भूनको निवृत्ति नहीं भई किन्तु जिसकूँ ज्ञान हुवा उसके ही भूमकी निवृत्ति भई इस का रण तैं अन्यकूँ ज्ञान भयें अन्यके भूनको निवृत्ति की आपत्ति नहीं है तीन और चतुर्थ प्रश्नका समाधान ये है कि यद्यपि सर्प प्रमाता के ज्ञानका वि.. पय नहीं है साक्षीका हो विषय है तथापि अन्त करसकी उपादानभूत •जनो अविद्या ताका परिणाम सर्प ओर ताका ज्ञान है और अन्नपूर वी सही अविद्याका परिणाम है तो उपादान तैं भिन्न कार्य होवे नहीं. अनुभव सिद्ध है जैसैं घटकी उपादानं नृत्तिका हे तो घट जयो है से.. मृत्तिका ही है तैर्दै अन्तकरण और सर्पज्ञान ये वी के परिणाम.. है तो अविद्या इनकी उपादान भई जयो अविद्या इनकी उपादान भई तो ये अविद्यारूप भये तो ये प्रविद्यारूप भये तो अन्तकरणको वृत्ति उयो है तिसका उपादान अन्तकरण है तो अविद्या ही कृत्तिकी व पादान भई तो अविद्याकी वृत्ति का विषय सर्प है । अन्तकरणकी वृत्ति का ही विषय सर्प हुवा यातै प्रमाताहूँ भय हाय है चार गोर पञ्चम प्रश्नका उत्तर ये है कि अधिद्याकी सर्पकूँ विषय करने वाली उयो वृत्ति सो तो सूक्ष्म हे यात प्रतीत होवे नहीं ओर रज्जुकी इदन्ता पूर्वोक्त प्रकार करिक सर्पका धर्म प्रतीत होय हे यात इस स्थलमै साक्षी पश्यपुटीप्रकाशक है तोयी त्रिपुटीप्रकाशकतात हीँ प्रकाशे हे पाँच ये उत्तर मेनें मेरे अनुभवत किये हैं इस विषय में मैने विचारसागर में तथा वृत्तिप्रभाकर कुछ घी लेख देखा नहीं है । तो हम कहें हैं कि तुमारे सर्व उत्तर प्रशुद्ध हैं देखो तुमनें इदन्ता ओर अनियंचनीय सर्प इनकूँ एकचिद्विपय मानि करिफें प्रथम मनका उत्तर कहा है तहाँ तो हम मे पूछें हैं कि एक चिद्रपज्यो साक्षी सो न्यो विषयका प्रकाश करे है सो वृत्तिकी सहायता प्रकाश कर है अथवा वृत्ति की सहायता विना प्रकाश करे हे ज्यो कहा कि कृतिकी सहायता प्रकाश करे है तो हम पूछें हैं कि साक्षी जिस वृत्ति की सहायता जिस विषयका प्रकाशक हाय है उस ही वृत्तिकी सहायता उस विषयत अन्य विषयका वी प्रकाशक होय है अथवा नहीं क्यो कहो कि अन्य विषयका को प्रकाशक होय है तो हम कहें हैं कि जैसैं साक्षी प्रविद्याकी वृत्तित सर्पका प्रकाश करता हुवा इदन्ताका प्रकाशक है ऐरौं मानि करि तुम अन्यथाख्याति वणावोगे तैसे जीव साक्षो में सर्वज्ञताकी प्रापत्ति वी मानण पहुॅगी काहेरौँ कि जैसें सर्पत भिन्न इदन्ता है तैसें अन्य सारे पदार्थ सर्पत भिन्न हैं तो उन का प्रकाशक वी जीव साक्षीकूँ मानणाँ हीँ पड़ेगा ऐसैं जीव साक्षी में 'सर्वज्ञताकी आपत्ति होगी ॥ जयो कहा कि ऐसैं मानरों में छापत्ति है तो 'ऐमैं मानेंगे कि साक्षी जिस वृत्ति मैं जिस विषयका प्रकाशंक होय है उस वृत्ति अन्य विषयका प्रकाशक हावै नहीं यार्तें जीव साक्षी मैं सर्वज्ञताकी आपत्ति नहीं है तो हम कहें हैं कि इदन्ता ज्यो है सो अविद्याकी वृत्ति करिक सर्पका प्रकाशक ज्यो साक्षी ताकी विषय नहीं होगी तो सर्प में इदन्ताकी प्रतीति प्रसिद्ध होगी तो अन्यथाख्यातिका मानखाँ प्रसङ्गत हुवा ।। ज्यो कहो कि साक्षी वृत्ति की सहायता बिना हीँ विषय का प्र काश करै है तो हम कहें हैं कि शुद्धचिद्रपज्यो झाला तार्ने साक्षि भाव उयो है सो वृत्ति दृष्टित कल्पित है ओर वृत्तिनिरपेक्ष ज्यो आत्मा ताम साक्षिभाव नहीं है यात वृत्ति की सहायता विना साक्षी विषयका प्र काशक मानणाँ असङ्गत है । ओर ज्यो मौढिवाद वृत्तिनिरपेक्ष शुद्धालाकूँ विषयका प्रकाशक मानि लेवो तो वृत्ति निरपेक्ष शुद्धात्मा हीँ ब्रह्म है मो ब्रह्म समस्त ब्रह्माण्डका प्रकाशक है तो ये ब्रह्मरूप शुद्धात्मा जैसे रज्जुको हृदन्ताकूँ विषय करता हुवा रज्जुसर्प कूँ विषय करैगा यातै अन्ययाख्याति सिद्ध होगी तेसैं हम ऐसें कहेंगे कि ये ब्रह्मरूप शुद्धात्मा वल्मीकादि. स्थान में स्थित ज्या सर्प ताकूँ विषय करता हुवा रज्जुकूँ विषय करें है यातैं रज्जु सर्प भ्रमस्थल में वी अन्यथाख्याति ही मानौं अनिर्वचनीय ख्यातिका उच्छेद ही होगा ।। ज्यो कहो कि रज्जु और सर्प एक देशस्थ नहीं यारौँ रज्जु सर्पस्थन मैं अन्यथाख्याति सम्भवै नहीं तो हम पू हैं कि जहाँ एक देशस्थित दोय पदार्थ प्रतीयमान होय हैं सो वी एक के विषय होय हैं तहाँ अन्यथाख्याति मानौँ हो अथवा भिन्न विषय होय हैं तहाँ वी अन्यथाख्याति मानोँ हो तो तुम ये ही कहोगे कि एक के विषय हाय हैं तहाँ हाँ अन्यथाख्याति होय है कारौँ कि स्फटिक में रक्तताकी प्रतीति होय है तहाँ पुष्पको रक्तता और स्फटिक एक कृति विषय होय हैं यात हीँ स्फटिक मैं रक्तताको अन्यघाख्याति है तो हम पूछें हैं कि जहाँ जपा पुष्पसम्वन्धी पापाय है तहाँ पायाण में रक्तताको प्रतीति होबे नहीं इसमें कारण कहा है सो कहा तो तुम ये कहोगे कि पायाण मलिन है यार्तें पाषाण मैं पुष्पकी छाया हावै नहीं तो हम कह कि अन्यथाख्यातिके मानणें मैं छाया वी निमित्त सिद्ध भई अब हम पूछें हैं कि शुद्ध वस्तु मैं छाया होय है ये तो तुमारे अनुभव सिद्ध है तो जहाँ पुष्पका सम्बन्ध तो स्फटिक मैं नहीं है ओर पुष्पकी छाया स्फटिक में है तहाँ पुष्प ओर स्फटिक एक देशस्थ नहीं हैं तो वी रक्तताकी प्रतीति स्फटिक मैं हाय है यारौँ एक देशस्थत्व क्या है सो अन्यथा ख्याति में निमित्त नहीं है किन्तु छाया क्यो है सो ही निमित्त है ऐसें मानताँ हाँ पडैगा तो जहाँ रज्जु सर्प भूम होय है तहाँ बी रज्जु ओर सर्प ये दोनू एक देशस्थ नहीं हैं तो बी जैसे स्फटिक मैं रक्तताकी छाया तेसैं रज्जु में सर्पका सादृश्य है या अन्यथाख्याति ही मानौं अनिर्वच - है नीय सर्पकी उत्पत्ति मानरों में गौरव दोप है इस कारणत अनिर्वचनीय ख्यातिका उच्छेद ही होगा से। तुमारे अभिमत नहीं है ऐमैं तो प्रथम प्रश्नका समाधान प्रसङ्गत है एक ओर द्वितीय प्रश्नका उत्तर तुमने ये कहा है कि आरोपदीय ज्ञान कहे हैं और वस्तुगत्या साक्षिरूप ज्ञान एक है या ज्ञान एक ही प्रतीत होय है तो हम कहें हैं कि जैसे ये रज्जु है इस ज्ञानकूँ तुम अन्त प्रकरण की ज्यो वृत्ति तद्र प ज्ञान मानौँ हो मोर इसकूँ साक्षिभास्य मानोँ हो काहेतैं कि ये वृत्तिरूप ज्ञान घटकी तरह स्पष्ट प्रतीत हे तैसे ये सर्प है ये ज्ञान वी अन्तकरण की ज्यो वृत्ति ताकी तरँहँ साक्षीका विषय है। करिक प्रतीत हेग्य है या इसकूँ साक्षिरूप मानणाँ अनुभषविरुद्ध ही है । ओोर ज्यो मौढिवादतैं इसकूँ हीँ साक्षि रूप ज्ञान मानोगे तो वृत्तिरूप न्यो ज्ञान ताका उच्छेद ही होगा का हेत कि विषय भेदते हों ज्ञानमै भेद सिद्ध होजायगा तो वृत्तिज्ञान मानणाँ व्यर्थ ही है यात द्वितीय प्रश्नका समाधान की प्रसङ्गत हो है दो ओर तृतीय प्रश्नका समाधान तुमने ये कहा है कि जैसें रज्जु जयो है सो विशेष रूप करके प्रमाताका विषय है तैसे साक्षीका वी विषय है या अन्य के ज्ञान अन्यके भूमको निवृत्तिकी आपत्ति नहीं है तो हम पूछें हैं. कि उपाधि भेद तुम उपहित भेद मानों हो अथवा नहीं जो कहो कि उपाधिमेत उपहित में भेद मानें हैं काहेत कि विचारसागर के द्वितीय तरङ्ग में लिखा है कि अन्तकरणरूप उपाधियोंके भेदसैं जीव साक्षी नाना हैं या अन्य के सुखदु खौँका अन्यकें भान होवे नहीं ओर वो साक्षी जो सुखदुखौँकूँ प्रकाश है सो यी वृतिकी सहायतास हीँ प्रकाशे है यातैं जब अन्तकरण मैं सुख दुख पैदा होय हैं उस काल मैं अन्तकरण की सुखाकार दुखाकार वृत्ति है।य हैं उन वृत्तियाँ सैं साक्षी सुख दुःखाँका प्रकाश करै है ॥ तो हम कहैंहैं कि उपाधि भेदत उपहितमैं भेद है तो अन्यके ज्ञान अन्यके भुमकी निवृत्तिको प्रापति दूर होवे ही नहीं काहेरौँकि अन्तकरण वत्युपहित साक्षीकूँ तो विशेषरूप करि का ज्ञान होगा ओर अविद्यावृत्युपहित साक्षीका भ्रम निवृत्त होगा उपाधि भेद तैं साक्षी मैं भेद है ये तुमारे कथन तैं सिद्ध है यात तृतीय प्रध्यका उत्तर वी असङ्गत ही है तीन ओर चतुर्थ प्रयण के समाधान मैं तुमने ऐसें कही है कि
कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली की विशेष अदालत ने राठी स्टील एंड पावर लि. के तीन अधिकारियों को तीन साल की सजा सुनाई है। कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में सुनवाई कर रही दिल्ली की विशेष अदालत ने राठी स्टील एंड पावर लि. (आरएसपीएल) और उसके तीन अधिकारियों को दोषी ठहराया है।
कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली की विशेष अदालत ने राठी स्टील एंड पावर लि. के तीन अधिकारियों को तीन साल की सजा सुनाई है। कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में सुनवाई कर रही दिल्ली की विशेष अदालत ने राठी स्टील एंड पावर लि. और उसके तीन अधिकारियों को दोषी ठहराया है।
कार्यशाला में सेप्टेज मैनेजमेंट पर बताया गया कि प्रदेश के जिन शहरों में सीवरेज लाना संभव नहीं है, ऐसे शहरों में सेप्टेज मैनेजमेंट लागू किया जायेगा। यह एक साधारण तकनीक है। इसके तहत मल का निस्तारण किया जाता है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरी क्षेत्रों में मल गादध्सेप्टिक प्रबंधक के महत्व को मानते हुए, राजस्थान के 100 से अधिक छोटे शहरांे की सेप्टेजध्मल गाद स्थिति का अध्ययन शहरी विकास मंत्रालय, भारत सरकार की संस्था राष्ट्रीय नगर कार्य संस्थान (एनआईयूए) द्वारा किया गया है। कार्यशाला में फीकल स्लज एवं सेप्टेज मैनेजमेंट (एफएसएसएम) की नीति एंव नियामक ढ़ांचा, प्रोद्योगिकी, अपशिष्ठ जल प्रक्रिया का विकेन्द्री दृष्टिकोण, सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों में समुदाय की सहभागिता विषयों पर विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जानकारी दी गई। कार्यशाला में मुख्य अभियन्ता स्वायत्त शासन विभाग भूपेन्द्र माथुर, आॅल इण्डिया इंस्टीट्यूट आॅफ लोकल सेल्फ गर्वनमेंट की निदेशक उत्कर्षा कावेदी, सीडीडी सोसायटी के क्षेत्रीय प्रबंधक नोगेश भारद्वाज, सेप्ट विश्वविद्यालय अहमदाबाद के वरिष्ठ प्रोफेसर ध्रुव भावसर, राष्ट्रीय नगर कार्य संस्थान (एनआईयूए) सेनिटेशन प्रोग्राम के टीम लीडर दीपेन्द्र कपूर तथा 18 नगरीय निकायों के प्रशासनिक एवं तकनीकी अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यशाला में सेप्टेज मैनेजमेंट पर बताया गया कि प्रदेश के जिन शहरों में सीवरेज लाना संभव नहीं है, ऐसे शहरों में सेप्टेज मैनेजमेंट लागू किया जायेगा। यह एक साधारण तकनीक है। इसके तहत मल का निस्तारण किया जाता है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरी क्षेत्रों में मल गादध्सेप्टिक प्रबंधक के महत्व को मानते हुए, राजस्थान के एक सौ से अधिक छोटे शहरांे की सेप्टेजध्मल गाद स्थिति का अध्ययन शहरी विकास मंत्रालय, भारत सरकार की संस्था राष्ट्रीय नगर कार्य संस्थान द्वारा किया गया है। कार्यशाला में फीकल स्लज एवं सेप्टेज मैनेजमेंट की नीति एंव नियामक ढ़ांचा, प्रोद्योगिकी, अपशिष्ठ जल प्रक्रिया का विकेन्द्री दृष्टिकोण, सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों में समुदाय की सहभागिता विषयों पर विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जानकारी दी गई। कार्यशाला में मुख्य अभियन्ता स्वायत्त शासन विभाग भूपेन्द्र माथुर, आॅल इण्डिया इंस्टीट्यूट आॅफ लोकल सेल्फ गर्वनमेंट की निदेशक उत्कर्षा कावेदी, सीडीडी सोसायटी के क्षेत्रीय प्रबंधक नोगेश भारद्वाज, सेप्ट विश्वविद्यालय अहमदाबाद के वरिष्ठ प्रोफेसर ध्रुव भावसर, राष्ट्रीय नगर कार्य संस्थान सेनिटेशन प्रोग्राम के टीम लीडर दीपेन्द्र कपूर तथा अट्ठारह नगरीय निकायों के प्रशासनिक एवं तकनीकी अधिकारी मौजूद रहे।
अगर लफंगों के वैचारिक ढाल बनकर आप सोच रहे हैं कि आप हिंदुत्व की रक्षा कर रहे हैं तो आपमें और जाहिल जिहादियों में बस प्रतीकात्मक रंग का अंतर है। वे हरे हैं आप गेरुए। एक बात और है कि हर कथित बाबा को दैवीय आभामंडल प्रदान करने के दोषी अप्रत्यक्ष रूप से हमारे सनातन धर्म के स्थापित पीठ भी हैं। क्यों एक टुच्चा सा धूर्त अनपढ़ भीड़ में लोकप्रिय हो रहा है और परंपरा से स्थापित आचार्यों के बारे में कोई रुचि नहीं है? ? ? शंकराचार्य मठ हों या अन्य कोई भी परंपरा जनसाधारण के बीच इनकी संवादहीनता विदित ही है। ये लोग अपने ही घेरे में रसूखदार लोगों के बीच बैठकर संस्कृति के आधार बनाते रह जाते हैं और धर्म में उत्सुक सामान्य व्यक्ति को कपटी बाबा झपट जाते हैं। पाखंडी बाबाओं की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है इनका सामान्य व्यक्ति के साथ जीवंत संवाद। हमारे 13 अखाड़े के नागा साधु और बैरागी साधुओं की संवाद की क्षमता फिर भी ठीक है। किंतु विद्वान कोटि के संन्यासियों के लक्षण इतराई हुई नारी जैसे लगते हैं। मुझे कम ही विद्वान संन्यासी मिले हैं जिनमें सरलता पाई गई है। और मैं 20/25 वर्षों से इस क्षेत्र के लोगों के संपर्क में हूं। हमारे सनातन धर्म में शैवमत के 7 अखाड़े हैं, वैष्णव मत के 6 अखाड़े हैं। इसके अलावा नाथ संप्रदाय के साधु हैं और उदासीन संप्रदाय के साधु हैं। फिर कबीर इत्यादि के संप्रदाय हैं। किंतु सनातन धर्म के वैचारिक प्रतिनिधि वेदांत मत के शांकर परंपरा से दीक्षित दंडी स्वामी और संन्यासी हैं। ऐसे ही वैष्णव संप्रदाय के निंबार्काचार्य, माध्वाचार्य और रामानुजाचार्य की समृद्ध बौद्धिक परंपरा है। फिर क्या कारण है कि कोई भी लफंगा संत घोषित हो जाता है और इन सबकी नाक के नीचे बढ़ कर अपरिहार्य हो जाता है? ? ? ? ? इंदौर में ही देख लीजिए संघ और विहिप का उपयोग कर राधे राधे बाबा ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया क्या दुर्गति हुई उसकी यह बताने की आवश्यकता नहीं है। इसी प्रकार इंदौर में दत्त संप्रदाय के नाम पर कई तथाकथित महाराज अपने आपको संत कहलवाने लगे उनके बड़े-बड़े आश्रम मंदिर पलसीकर, सुकलिया क्षेत्रों में बन गए। इन सब परिस्थितियों के लिए मुझे लगता है की संवादहीनता सबसे बड़ा कारण है वर्षों से जो संस्थाएं धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र में कार्य कर रही थी उनका जनसामान्य से संवाद कम हो गया है और इसी का परिणाम इस तरह के कुकुरमुत्तों के रूप में पाखंडी संतों का उद्भव हो गया है। मैं बहुत छोटा व्यक्ति हूं कोई बड़ी बात नहीं कर सकता, किंतु आचार्यगण अवधान दें कि ऐसे नासूर पनपने के पहले ही समाप्त हो जाएं। एक समय था जब किसी भी गांव में कोई धूर्त दूकानदारी जमाने आता तो 24 घंटे में नागाओं के दल उसे पकड़ लेते और परंपरा की पूछताछ में गड़बड़ी पाए जाने पर तगड़ी सुताई के साथ रवाना किया जाता था। आज स्थिति यह है कि खुद अखाड़े 15/20 लाख रुपए में महामंडलेश्वर जैसे पद गुंडों, छिनालों और लफंगों को बेच रहे हैं। आचार्य बैठे हैं बस चिंतन शिविर चल रहे हैं एयरकंडीशन मठों में। ये हाल रहा तो वो समय दूर नहीं जब सारे स्थापित मठ इतिहास के शोधकर्ताओं के लिए ही रह जाएंगे। परशुराम और दुर्वासा जैसे लोगों की समृद्ध परंपराएं इन्हीं दुर्गुणों की भेंट चढ़ गई हैं। मित्रों आज हजारो वर्षो से मछिन्द्र नाथ , गोरख नाथ , सन्त ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, संत एकनाथ, संत जलारामबापा , रामकृष्ण परमहंस, संत रैदास, तुलसी दास, सूरदास , आदी शंकराचार्य , बाबा कीनाराम , तेलंग स्वामी , देवरहा बाबा, स्वामी करपात्री , त्रिदंडी स्वामी आदि ऐसे अनगिनत महान और सिद्ध महात्मा इस देश में पैदा हुए! चमत्कारिक शक्तियों से सभी भरे हुए थे सब ने देश को नयी दिशा दी सबके लाखो करोडो अनुयायी थे गुरु के संस्कार से युक्त परम् देशभक्त! उपरोक्त सभी संतो की तस्वीर देखे सब का पहनावा सादगी भरा था! तेलंग स्वामी तो काशी में नंग धडंग रहते थे! करपात्री जी एक बार दोनों हाथ को जोड़ कर जो भिक्षा में मिलता उसी से गुजरा कर लेते थे! इनमे से सभी संत सादगी में जिए सादगी में मरे किसी ने अपना कोई आर्थिक साम्राज्य नहीं बनाया! अब आईये निर्मल बाबा, रामपाल , जय गुरुदेव , धीरेन्द्र ब्रह्मचारी, चंद्रास्वामी , राधे माँ , आसाराम, राम रहीम, राधे राधे, जैसे बाबाओं के पास किसी के पास मच्छर मारने की भी सिद्धि नहीं है! लेकिन सबके सब अथाह सम्पति के मालिक बने हैं! किसी ने समाज देश को सही दिशा नहीं दी! बेवकूफ लालची गरीब,अमीर लोगो को गुमराह कर अपना उल्लू सिद्ध किया! लालची जनता इन ढोंगियों के पास केवल धन , वैभव, की लालसा में जाते रहे! और ये कालनेमि किसी सड़क छाप जादूगर की तरह इनको सम्मोहित कर उल्लू बनाते रहे! जैसी प्रजा होगी वैसे ही समाज की स्थापना होगी! प्रजा यदि चाहेगी "घूँघट नहीं खोलूंगी सैया तोरे आगे" को लोकप्रिय करना तो फ़िल्मकार मदर इंडिया बनाएगा! प्रजा यदि सुनना चाहेगी "हम तो पहले से घूँघट उठाये बैठी " तो फ़िल्मकार मर्द बनाएगा! मलेंच्छ जाकिर नाईक, बरकाती , अंसार राजा , इमाम बुखारी जिनके पाक है या नापाक उनको झेलने दो! तुम राम की संतान हो! अगस्त्य, भारद्वाज, अत्रि , विश्वामित्र , वसिष्ठ की खोज करो! आज भी बहुतेरे सिद्ध है जो आशीर्वाद नहीं बांटते, झोपडी और कंदराओ में है! अर्ध नंग और पूरे नंग है! लेकिन तुम तो चटनी से कृपा खोज रहे खोजो! आज रहीम बाबा है कल अंसारी बाबा तुम्हे डरायेगा! और तुम जैसे संस्कार को खो चुके हिन्दुओ की बेटियाँ लवजेहाद में फँसती रहेगी। अब भी है कोई शक....... . ! ! ! (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)
अगर लफंगों के वैचारिक ढाल बनकर आप सोच रहे हैं कि आप हिंदुत्व की रक्षा कर रहे हैं तो आपमें और जाहिल जिहादियों में बस प्रतीकात्मक रंग का अंतर है। वे हरे हैं आप गेरुए। एक बात और है कि हर कथित बाबा को दैवीय आभामंडल प्रदान करने के दोषी अप्रत्यक्ष रूप से हमारे सनातन धर्म के स्थापित पीठ भी हैं। क्यों एक टुच्चा सा धूर्त अनपढ़ भीड़ में लोकप्रिय हो रहा है और परंपरा से स्थापित आचार्यों के बारे में कोई रुचि नहीं है? ? ? शंकराचार्य मठ हों या अन्य कोई भी परंपरा जनसाधारण के बीच इनकी संवादहीनता विदित ही है। ये लोग अपने ही घेरे में रसूखदार लोगों के बीच बैठकर संस्कृति के आधार बनाते रह जाते हैं और धर्म में उत्सुक सामान्य व्यक्ति को कपटी बाबा झपट जाते हैं। पाखंडी बाबाओं की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है इनका सामान्य व्यक्ति के साथ जीवंत संवाद। हमारे तेरह अखाड़े के नागा साधु और बैरागी साधुओं की संवाद की क्षमता फिर भी ठीक है। किंतु विद्वान कोटि के संन्यासियों के लक्षण इतराई हुई नारी जैसे लगते हैं। मुझे कम ही विद्वान संन्यासी मिले हैं जिनमें सरलता पाई गई है। और मैं बीस/पच्चीस वर्षों से इस क्षेत्र के लोगों के संपर्क में हूं। हमारे सनातन धर्म में शैवमत के सात अखाड़े हैं, वैष्णव मत के छः अखाड़े हैं। इसके अलावा नाथ संप्रदाय के साधु हैं और उदासीन संप्रदाय के साधु हैं। फिर कबीर इत्यादि के संप्रदाय हैं। किंतु सनातन धर्म के वैचारिक प्रतिनिधि वेदांत मत के शांकर परंपरा से दीक्षित दंडी स्वामी और संन्यासी हैं। ऐसे ही वैष्णव संप्रदाय के निंबार्काचार्य, माध्वाचार्य और रामानुजाचार्य की समृद्ध बौद्धिक परंपरा है। फिर क्या कारण है कि कोई भी लफंगा संत घोषित हो जाता है और इन सबकी नाक के नीचे बढ़ कर अपरिहार्य हो जाता है? ? ? ? ? इंदौर में ही देख लीजिए संघ और विहिप का उपयोग कर राधे राधे बाबा ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया क्या दुर्गति हुई उसकी यह बताने की आवश्यकता नहीं है। इसी प्रकार इंदौर में दत्त संप्रदाय के नाम पर कई तथाकथित महाराज अपने आपको संत कहलवाने लगे उनके बड़े-बड़े आश्रम मंदिर पलसीकर, सुकलिया क्षेत्रों में बन गए। इन सब परिस्थितियों के लिए मुझे लगता है की संवादहीनता सबसे बड़ा कारण है वर्षों से जो संस्थाएं धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र में कार्य कर रही थी उनका जनसामान्य से संवाद कम हो गया है और इसी का परिणाम इस तरह के कुकुरमुत्तों के रूप में पाखंडी संतों का उद्भव हो गया है। मैं बहुत छोटा व्यक्ति हूं कोई बड़ी बात नहीं कर सकता, किंतु आचार्यगण अवधान दें कि ऐसे नासूर पनपने के पहले ही समाप्त हो जाएं। एक समय था जब किसी भी गांव में कोई धूर्त दूकानदारी जमाने आता तो चौबीस घंटाटे में नागाओं के दल उसे पकड़ लेते और परंपरा की पूछताछ में गड़बड़ी पाए जाने पर तगड़ी सुताई के साथ रवाना किया जाता था। आज स्थिति यह है कि खुद अखाड़े पंद्रह/बीस लाख रुपए में महामंडलेश्वर जैसे पद गुंडों, छिनालों और लफंगों को बेच रहे हैं। आचार्य बैठे हैं बस चिंतन शिविर चल रहे हैं एयरकंडीशन मठों में। ये हाल रहा तो वो समय दूर नहीं जब सारे स्थापित मठ इतिहास के शोधकर्ताओं के लिए ही रह जाएंगे। परशुराम और दुर्वासा जैसे लोगों की समृद्ध परंपराएं इन्हीं दुर्गुणों की भेंट चढ़ गई हैं। मित्रों आज हजारो वर्षो से मछिन्द्र नाथ , गोरख नाथ , सन्त ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, संत एकनाथ, संत जलारामबापा , रामकृष्ण परमहंस, संत रैदास, तुलसी दास, सूरदास , आदी शंकराचार्य , बाबा कीनाराम , तेलंग स्वामी , देवरहा बाबा, स्वामी करपात्री , त्रिदंडी स्वामी आदि ऐसे अनगिनत महान और सिद्ध महात्मा इस देश में पैदा हुए! चमत्कारिक शक्तियों से सभी भरे हुए थे सब ने देश को नयी दिशा दी सबके लाखो करोडो अनुयायी थे गुरु के संस्कार से युक्त परम् देशभक्त! उपरोक्त सभी संतो की तस्वीर देखे सब का पहनावा सादगी भरा था! तेलंग स्वामी तो काशी में नंग धडंग रहते थे! करपात्री जी एक बार दोनों हाथ को जोड़ कर जो भिक्षा में मिलता उसी से गुजरा कर लेते थे! इनमे से सभी संत सादगी में जिए सादगी में मरे किसी ने अपना कोई आर्थिक साम्राज्य नहीं बनाया! अब आईये निर्मल बाबा, रामपाल , जय गुरुदेव , धीरेन्द्र ब्रह्मचारी, चंद्रास्वामी , राधे माँ , आसाराम, राम रहीम, राधे राधे, जैसे बाबाओं के पास किसी के पास मच्छर मारने की भी सिद्धि नहीं है! लेकिन सबके सब अथाह सम्पति के मालिक बने हैं! किसी ने समाज देश को सही दिशा नहीं दी! बेवकूफ लालची गरीब,अमीर लोगो को गुमराह कर अपना उल्लू सिद्ध किया! लालची जनता इन ढोंगियों के पास केवल धन , वैभव, की लालसा में जाते रहे! और ये कालनेमि किसी सड़क छाप जादूगर की तरह इनको सम्मोहित कर उल्लू बनाते रहे! जैसी प्रजा होगी वैसे ही समाज की स्थापना होगी! प्रजा यदि चाहेगी "घूँघट नहीं खोलूंगी सैया तोरे आगे" को लोकप्रिय करना तो फ़िल्मकार मदर इंडिया बनाएगा! प्रजा यदि सुनना चाहेगी "हम तो पहले से घूँघट उठाये बैठी " तो फ़िल्मकार मर्द बनाएगा! मलेंच्छ जाकिर नाईक, बरकाती , अंसार राजा , इमाम बुखारी जिनके पाक है या नापाक उनको झेलने दो! तुम राम की संतान हो! अगस्त्य, भारद्वाज, अत्रि , विश्वामित्र , वसिष्ठ की खोज करो! आज भी बहुतेरे सिद्ध है जो आशीर्वाद नहीं बांटते, झोपडी और कंदराओ में है! अर्ध नंग और पूरे नंग है! लेकिन तुम तो चटनी से कृपा खोज रहे खोजो! आज रहीम बाबा है कल अंसारी बाबा तुम्हे डरायेगा! और तुम जैसे संस्कार को खो चुके हिन्दुओ की बेटियाँ लवजेहाद में फँसती रहेगी। अब भी है कोई शक....... . ! ! !
70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में 'आम आदमी पार्टी' के 62 विधायक हैं, जबकि भाजपा के सिर्फ आठ हैं, इसमें भी सत्येंद्र जैन अभी जेल में हैं और स्पीकर रामनिवास गोयल देश से बाहर बताए जा रहे हैं. ऐसे में आप की ओर से सदन में सोमवार को 60 विधायक मौजूद रह सकते हैं, जो कि बहुमत के आंकड़े से बहुत ज्यादा है. इस लिहाज से देखा जाए तो ना तो सरकार पर कोई संकट है, वहीं राजनीतिक जानकारों की मानें तो केजरीवाल विश्वास मत के जरिए अपनी सरकार की मजबूती का संदेश देना चाहते हैं. भाजपा पर ऑपरेशन लोटस का आरोप लगा रही आप यह दिखाना चाहती है कि उपमुख्यमंत्री पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद विधायकों का भरोसा केजरीवाल पर कायम है.
सत्तर सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में 'आम आदमी पार्टी' के बासठ विधायक हैं, जबकि भाजपा के सिर्फ आठ हैं, इसमें भी सत्येंद्र जैन अभी जेल में हैं और स्पीकर रामनिवास गोयल देश से बाहर बताए जा रहे हैं. ऐसे में आप की ओर से सदन में सोमवार को साठ विधायक मौजूद रह सकते हैं, जो कि बहुमत के आंकड़े से बहुत ज्यादा है. इस लिहाज से देखा जाए तो ना तो सरकार पर कोई संकट है, वहीं राजनीतिक जानकारों की मानें तो केजरीवाल विश्वास मत के जरिए अपनी सरकार की मजबूती का संदेश देना चाहते हैं. भाजपा पर ऑपरेशन लोटस का आरोप लगा रही आप यह दिखाना चाहती है कि उपमुख्यमंत्री पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद विधायकों का भरोसा केजरीवाल पर कायम है.
एकांकियों में कलात्मक निपुणता की ओर विशेष ध्यान दिया है। भट्ट जी के एकांकियों का मुख्य स्वर दुखात्मक रहा है। उपेन्द्रनाथ 'अश्क' एकांकी-लेखन में अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। परिमाण और गुण दोनों ही दृष्टियों से उन्होंने प्रचुर और प्रभावशाली एकांकी लिखे हैं। इन्होंने समाज के निम्न मध्यवर्ग की समस्याओं के चित्रण पर बल दिया है। 'देवताओं की छाया में', 'पर्दा उठाओ, पर्दा गिराओ', 'पक्का गाना', 'चरवाहे', 'साहब को जुकाम है', 'अंधी गली', 'तूफान से पहले' आदि इनके एकांकी-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। इन एकांकियों के कथानक मध्य वर्गीय पारिवारिक जीवन से चुने गए हैं। सेठ गोविन्द दास ने नाटक की भाँति एकांकी भी बहुत लिखे हैं। 'स्पर्धा', 'पंचभूत', 'एकादशी', 'कंगाल नहीं' आदि इनके प्रमुख एकांकी संग्रह हैं । लक्ष्मीनारायण मिश्र समस्या नाटककार के रूप में जितन। प्रसिद्ध और चर्चित रहे हैं उतना एकांकीकार के रूप में नहीं। पर इन्होंने भी बहुत से एकांकी लिखे हैं । जगदीशचंद्र माथुर अश्क की भाँति ही नाटक एवं एकांकी- लेखन प्रायः दोनों में समान रूप से सफल रहे हैं । यद्यपि माथुर के दो ही एकांकी-संग्रह प्रकाशित हुए हैं - 'भोर का तारा' और 'मो मेरे सपने तथापि उनकी गिनती हिन्दी के श्रेष्ठ एकांकीकारों में होती है। विष्णु प्रभाकर भी एकांकी लेखन में बहुत सफल रहे हैं। उन्होंने विभिन्न स्तर के लगभग डेढ़ सौ एकांकी लिखे हैं। इन्होंने ऐतिहासिक, पौराणिक कथानकों पर भी एकांकियों की सृष्टि की है। किन्तु उनका प्रकृत क्षेत्र सामाजिक एकांकियों का है। विनोद रस्तोगी के एकांकी रंगमंचीयता से भरपूर हैं, क्योंकि वे रंगमंच से संबद्ध रहे हैं । उन्होंने जो एकांकी रेडियो के लिए लिखे हैं उनमें रेडियो-शिल्प विद्यमान है। आजादी के बाद, और 'पुरुष के पाप' उनके दो एकांकी-संग्रह हैं। धर्मवीर भारती का केवल एक एकांकी-संग्रह प्रकाशित है - 'नदी प्यासी थी' । किन्तु उनके सभी एकांकी काफी सफल रहे हैं। नए एकांकोकारों में डा० लक्ष्मीनारायण लाल ने बहुत से एकांकी लिखे हैं और उनमें शिल्पगत नए प्रयोग भी किए हैं। उनके एकांकियों में रंगमंचीयता विद्यमान है और इनका सफल अभिनय हुआ है । 'ताजमहल के आँसू, 'पर्वत के पीछे', 'नाटक बहुरंगी आदि उनके एकांकी संग्रह हैं। भारतभूषण अग्रवाल की एकांकीसंग्रह है 'मोर खाई बढ़ती गई' । नरेश मेहता के 'सनोवर के फूल' तथा 'पिछली रात की बरफ़' रेडियो एकांकी-संग्रह है। हिन्दी-एकांकी-साहित्य के संवर्धन में बहुत से नए एकांकीकार प्रयत्नशील हैं।
एकांकियों में कलात्मक निपुणता की ओर विशेष ध्यान दिया है। भट्ट जी के एकांकियों का मुख्य स्वर दुखात्मक रहा है। उपेन्द्रनाथ 'अश्क' एकांकी-लेखन में अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। परिमाण और गुण दोनों ही दृष्टियों से उन्होंने प्रचुर और प्रभावशाली एकांकी लिखे हैं। इन्होंने समाज के निम्न मध्यवर्ग की समस्याओं के चित्रण पर बल दिया है। 'देवताओं की छाया में', 'पर्दा उठाओ, पर्दा गिराओ', 'पक्का गाना', 'चरवाहे', 'साहब को जुकाम है', 'अंधी गली', 'तूफान से पहले' आदि इनके एकांकी-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। इन एकांकियों के कथानक मध्य वर्गीय पारिवारिक जीवन से चुने गए हैं। सेठ गोविन्द दास ने नाटक की भाँति एकांकी भी बहुत लिखे हैं। 'स्पर्धा', 'पंचभूत', 'एकादशी', 'कंगाल नहीं' आदि इनके प्रमुख एकांकी संग्रह हैं । लक्ष्मीनारायण मिश्र समस्या नाटककार के रूप में जितन। प्रसिद्ध और चर्चित रहे हैं उतना एकांकीकार के रूप में नहीं। पर इन्होंने भी बहुत से एकांकी लिखे हैं । जगदीशचंद्र माथुर अश्क की भाँति ही नाटक एवं एकांकी- लेखन प्रायः दोनों में समान रूप से सफल रहे हैं । यद्यपि माथुर के दो ही एकांकी-संग्रह प्रकाशित हुए हैं - 'भोर का तारा' और 'मो मेरे सपने तथापि उनकी गिनती हिन्दी के श्रेष्ठ एकांकीकारों में होती है। विष्णु प्रभाकर भी एकांकी लेखन में बहुत सफल रहे हैं। उन्होंने विभिन्न स्तर के लगभग डेढ़ सौ एकांकी लिखे हैं। इन्होंने ऐतिहासिक, पौराणिक कथानकों पर भी एकांकियों की सृष्टि की है। किन्तु उनका प्रकृत क्षेत्र सामाजिक एकांकियों का है। विनोद रस्तोगी के एकांकी रंगमंचीयता से भरपूर हैं, क्योंकि वे रंगमंच से संबद्ध रहे हैं । उन्होंने जो एकांकी रेडियो के लिए लिखे हैं उनमें रेडियो-शिल्प विद्यमान है। आजादी के बाद, और 'पुरुष के पाप' उनके दो एकांकी-संग्रह हैं। धर्मवीर भारती का केवल एक एकांकी-संग्रह प्रकाशित है - 'नदी प्यासी थी' । किन्तु उनके सभी एकांकी काफी सफल रहे हैं। नए एकांकोकारों में डाशून्य लक्ष्मीनारायण लाल ने बहुत से एकांकी लिखे हैं और उनमें शिल्पगत नए प्रयोग भी किए हैं। उनके एकांकियों में रंगमंचीयता विद्यमान है और इनका सफल अभिनय हुआ है । 'ताजमहल के आँसू, 'पर्वत के पीछे', 'नाटक बहुरंगी आदि उनके एकांकी संग्रह हैं। भारतभूषण अग्रवाल की एकांकीसंग्रह है 'मोर खाई बढ़ती गई' । नरेश मेहता के 'सनोवर के फूल' तथा 'पिछली रात की बरफ़' रेडियो एकांकी-संग्रह है। हिन्दी-एकांकी-साहित्य के संवर्धन में बहुत से नए एकांकीकार प्रयत्नशील हैं।
India News (इंडिया न्यूज),Odisha Train Accident: ओडिशा के बालासोर में हुए ट्रेन हादसे में मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक अब तक इस हादसे के कारण से 238 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 1000 से ज्यादा लोग इस घटना में घायल बताए जा रहे हैं। घायल लोगों को राज्या के विभिन्न अस्पतालों में एडमिट कराया गया है। इस दर्दनाक हादसे के बाद राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और राज्य के सीएम नवीन पटनायक के अलावा और भी कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने अपना दुख व्यक्त किया है। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी इस घटना पर दुख जताया है और मृतक परिवारों के के प्रति शोक-संवेदना व्यक्त किया है। साथ ही घायलों को जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। इसके सरकार से आर्थिक मदद और इस घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। 1. दक्षिण भारत की चेन्नई सेन्ट्रल कोरोमण्डल सहित तीन ट्रेनों की ओडिसा के बालासोर ज़िले में कल हुई भीषण दुर्घटना व उसमें काफी लोगों के हताहत होने की खबर अति-दुःखद। उन सबके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदना। कुदरत उन सबको इस गहरे दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। मायावती ने ट्वीट कर कहा कि दक्षिण भारत की चेन्नई सेन्ट्रल कोरोमण्डल सहित तीन ट्रेनों की ओडिसा के बालासोर ज़िले में कल हुई भीषण दुर्घटना व उसमें काफी लोगों के हताहत होने की खबर अति-दुःखद। उन सबके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदना। कुदरत उन सबको इस गहरे दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। बसपा मुखिया ने अपने एक और ट्वीट में कहा केन्द्र सरकार इस भीषण दुर्घटना को पूरी गंभीरता से लेते हुए इसकी तत्काल उच्च-स्तरीय समयबद्ध जाँच कराने के साथ ही सभी मृतक के परिवारों को शीघ्र समुचित आर्थिक सहायता देने तथा घायलों के लिए बेहतर इलाज की व्यवस्था करके उनकी ज़िन्दगी बहाल करने में पूरी मदद करेे, बीएसपी की यह माँग। बता दें ओडिशा में हुई ट्रेन दुर्घटना में एक नहीं दे नहीं बल्कि तीन-तीन ट्रेने एक साथ दुर्घटना की शिकार हुई। इस हादसे में 233 की मौत हो गई है । जबकि अभी तक 900 लोगों के घायल होने की जानकारी आई है। फिलहाल राहत एवं बचाव कार्य जारी है। बेंगलुरु से हावड़ा जा रही एक्सप्रेस के साथ कोरोमंडल एक्सप्रेस की टक्कर हुई। खड़गपुर डीआरएम ने इसकी जानकारी दी है। पहले कोरोमंडल एक्सप्रेस पटरी से बेपटरी हुई। इसके बाद दूसरे लाइन से आ रही बेंगलुरु हावड़ा एक्सप्रेस से टक्कर हुई। इस दूसरे ट्रेन की कुछ बोगियां अन्य पटरी पर गि गई इससे उस पटरी पर आ रही ट्रेन भी पटरी से बेपटरी हो गई। इस दुर्घटना में दोनों ट्रेन के 12 कोच बेपटरी हो गए। Odisha Train Accident: बालासोर ट्रेन हादसे पर सपा पार्टी ने जताया, साथ ही केंद्र सरकार पर साधा निशाना, जानिए क्या कहा?
India News ,Odisha Train Accident: ओडिशा के बालासोर में हुए ट्रेन हादसे में मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक अब तक इस हादसे के कारण से दो सौ अड़तीस लोगों की मौत हो चुकी है जबकि एक हज़ार से ज्यादा लोग इस घटना में घायल बताए जा रहे हैं। घायल लोगों को राज्या के विभिन्न अस्पतालों में एडमिट कराया गया है। इस दर्दनाक हादसे के बाद राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और राज्य के सीएम नवीन पटनायक के अलावा और भी कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने अपना दुख व्यक्त किया है। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी इस घटना पर दुख जताया है और मृतक परिवारों के के प्रति शोक-संवेदना व्यक्त किया है। साथ ही घायलों को जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। इसके सरकार से आर्थिक मदद और इस घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। एक. दक्षिण भारत की चेन्नई सेन्ट्रल कोरोमण्डल सहित तीन ट्रेनों की ओडिसा के बालासोर ज़िले में कल हुई भीषण दुर्घटना व उसमें काफी लोगों के हताहत होने की खबर अति-दुःखद। उन सबके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदना। कुदरत उन सबको इस गहरे दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। मायावती ने ट्वीट कर कहा कि दक्षिण भारत की चेन्नई सेन्ट्रल कोरोमण्डल सहित तीन ट्रेनों की ओडिसा के बालासोर ज़िले में कल हुई भीषण दुर्घटना व उसमें काफी लोगों के हताहत होने की खबर अति-दुःखद। उन सबके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदना। कुदरत उन सबको इस गहरे दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। बसपा मुखिया ने अपने एक और ट्वीट में कहा केन्द्र सरकार इस भीषण दुर्घटना को पूरी गंभीरता से लेते हुए इसकी तत्काल उच्च-स्तरीय समयबद्ध जाँच कराने के साथ ही सभी मृतक के परिवारों को शीघ्र समुचित आर्थिक सहायता देने तथा घायलों के लिए बेहतर इलाज की व्यवस्था करके उनकी ज़िन्दगी बहाल करने में पूरी मदद करेे, बीएसपी की यह माँग। बता दें ओडिशा में हुई ट्रेन दुर्घटना में एक नहीं दे नहीं बल्कि तीन-तीन ट्रेने एक साथ दुर्घटना की शिकार हुई। इस हादसे में दो सौ तैंतीस की मौत हो गई है । जबकि अभी तक नौ सौ लोगों के घायल होने की जानकारी आई है। फिलहाल राहत एवं बचाव कार्य जारी है। बेंगलुरु से हावड़ा जा रही एक्सप्रेस के साथ कोरोमंडल एक्सप्रेस की टक्कर हुई। खड़गपुर डीआरएम ने इसकी जानकारी दी है। पहले कोरोमंडल एक्सप्रेस पटरी से बेपटरी हुई। इसके बाद दूसरे लाइन से आ रही बेंगलुरु हावड़ा एक्सप्रेस से टक्कर हुई। इस दूसरे ट्रेन की कुछ बोगियां अन्य पटरी पर गि गई इससे उस पटरी पर आ रही ट्रेन भी पटरी से बेपटरी हो गई। इस दुर्घटना में दोनों ट्रेन के बारह कोच बेपटरी हो गए। Odisha Train Accident: बालासोर ट्रेन हादसे पर सपा पार्टी ने जताया, साथ ही केंद्र सरकार पर साधा निशाना, जानिए क्या कहा?
दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को आप नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Former Deputy Chief Minister of Delhi Manish Sisodia) को सरकार की आबकारी नीति से जुड़े धन शोधन के एक मामले में 17 मार्च तक ईडी की हिरासत में भेज दिया। विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल (Judge MK Nagpal) आदेश पढ़ने नहीं पहुंचे। इसकी जानकारी कोर्ट स्टाफ के माध्यम से वकीलों तक पहुंचाई गई, सूत्रों ने कहा। ईडी ने सिसोदिया को गुरुवार को तिहाड़ जेल में गिरफ्तार किया, सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में उनकी जमानत की सुनवाई से ठीक एक दिन पहले, जो 2021-22 के लिए अब रद्द की जा चुकी दिल्ली आबकारी नीति में भ्रष्टाचार के कोण की जांच कर रही है। सीबीआई मामले में जमानत याचिका पर अब 21 मार्च को सुनवाई होगी। सिसोदिया की 10 दिनों की हिरासत की मांग करते हुए ईडी ने कहा कि कथित घोटाले में आप नेता की सीधी भूमिका थी और कार्यप्रणाली की पहचान करने और समन किए गए अन्य लोगों का सामना करने के लिए उनसे पूछताछ करने की जरूरत है। संघीय एजेंसी ने आरोप लगाया कि सिसोदिया जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे, एक तर्क जिसके आधार पर सीबीआई ने पहले आप नेता की हिरासत की मांग की थी। ईडी के वकील ज़ोहेब हुसैन (ED's lawyer Zoheb Hussain) ने यह भी दावा किया कि सिसोदिया ने अपना फोन नष्ट कर दिया, जो जांच में एक महत्वपूर्ण सबूत है। ईडी ने अदालत से कहा कि कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए विशेषज्ञ समिति के विचारों को स्वीकार किए बिना नीति तैयार की गई। ईडी के वकील ने कहा कि उसके पास इस मामले में आप के वरिष्ठ नेता के खिलाफ सबूत हैं। एजेंसी ने कहा कि नीति को इस तरह से तैयार किया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चुनिंदा थोक विक्रेताओं को 12 फीसदी का लाभ मार्जिन मिले, जो कि जितना होना चाहिए था, उससे छह फीसदी अधिक था। "हमारे पास सामग्री है कि यह गिरफ्तार आरोपी (सिसोदिया) के इशारे पर किया गया था। शराब की बिक्री के लिए लाइसेंस देने के लिए तय प्रणाली का भी उल्लंघन किया गया था। कार्टेल बनाए गए थे। कुछ चुनिंदा लोगों को इसका फायदा हुआ। " ईडी ने कहा। ईडी ने अदालत को बताया कि सिसोदिया के सहयोगी विजय नायर ने 'साउथ ग्रुप' के साथ 'पूरी साजिश का समन्वय' किया, जिसमें तेलंगाना एमएलसी के कविता शामिल हैं, जबकि व्यवसायी दिनेश अरोड़ा रिश्वत का समन्वय कर रहे थे। एजेंसी ने कहा कि 'साउथ ग्रुप' दिल्ली में उत्पाद शुल्क कारोबार में एक गंभीर हितधारक बन गया है। ईडी के वकील के दावों को सिसोदिया का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों - वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन, मोहित माथुर और सिद्धार्थ अग्रवाल द्वारा चुनौती दी गई थी। सिसोदिया के वकीलों ने कहा कि आबकारी नीति उपराज्यपाल द्वारा स्वीकार की गई थी, जिन्होंने अपनी स्वीकृति देने से पहले इसकी जांच की होगी। सिसोदिया के वकील ने कहा कि ईडी का दावा "दुर्भावनापूर्ण इरादे" से किया गया था और मामला "सुनवाई" पर आधारित था। उन्होंने कहा कि मामले में अधिकतम सजा केवल सात साल थी और इसलिए जमानत दी जानी चाहिए न कि हिरासत में।
दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को आप नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सरकार की आबकारी नीति से जुड़े धन शोधन के एक मामले में सत्रह मार्च तक ईडी की हिरासत में भेज दिया। विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल आदेश पढ़ने नहीं पहुंचे। इसकी जानकारी कोर्ट स्टाफ के माध्यम से वकीलों तक पहुंचाई गई, सूत्रों ने कहा। ईडी ने सिसोदिया को गुरुवार को तिहाड़ जेल में गिरफ्तार किया, सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में उनकी जमानत की सुनवाई से ठीक एक दिन पहले, जो दो हज़ार इक्कीस-बाईस के लिए अब रद्द की जा चुकी दिल्ली आबकारी नीति में भ्रष्टाचार के कोण की जांच कर रही है। सीबीआई मामले में जमानत याचिका पर अब इक्कीस मार्च को सुनवाई होगी। सिसोदिया की दस दिनों की हिरासत की मांग करते हुए ईडी ने कहा कि कथित घोटाले में आप नेता की सीधी भूमिका थी और कार्यप्रणाली की पहचान करने और समन किए गए अन्य लोगों का सामना करने के लिए उनसे पूछताछ करने की जरूरत है। संघीय एजेंसी ने आरोप लगाया कि सिसोदिया जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे, एक तर्क जिसके आधार पर सीबीआई ने पहले आप नेता की हिरासत की मांग की थी। ईडी के वकील ज़ोहेब हुसैन ने यह भी दावा किया कि सिसोदिया ने अपना फोन नष्ट कर दिया, जो जांच में एक महत्वपूर्ण सबूत है। ईडी ने अदालत से कहा कि कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए विशेषज्ञ समिति के विचारों को स्वीकार किए बिना नीति तैयार की गई। ईडी के वकील ने कहा कि उसके पास इस मामले में आप के वरिष्ठ नेता के खिलाफ सबूत हैं। एजेंसी ने कहा कि नीति को इस तरह से तैयार किया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चुनिंदा थोक विक्रेताओं को बारह फीसदी का लाभ मार्जिन मिले, जो कि जितना होना चाहिए था, उससे छह फीसदी अधिक था। "हमारे पास सामग्री है कि यह गिरफ्तार आरोपी के इशारे पर किया गया था। शराब की बिक्री के लिए लाइसेंस देने के लिए तय प्रणाली का भी उल्लंघन किया गया था। कार्टेल बनाए गए थे। कुछ चुनिंदा लोगों को इसका फायदा हुआ। " ईडी ने कहा। ईडी ने अदालत को बताया कि सिसोदिया के सहयोगी विजय नायर ने 'साउथ ग्रुप' के साथ 'पूरी साजिश का समन्वय' किया, जिसमें तेलंगाना एमएलसी के कविता शामिल हैं, जबकि व्यवसायी दिनेश अरोड़ा रिश्वत का समन्वय कर रहे थे। एजेंसी ने कहा कि 'साउथ ग्रुप' दिल्ली में उत्पाद शुल्क कारोबार में एक गंभीर हितधारक बन गया है। ईडी के वकील के दावों को सिसोदिया का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों - वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन, मोहित माथुर और सिद्धार्थ अग्रवाल द्वारा चुनौती दी गई थी। सिसोदिया के वकीलों ने कहा कि आबकारी नीति उपराज्यपाल द्वारा स्वीकार की गई थी, जिन्होंने अपनी स्वीकृति देने से पहले इसकी जांच की होगी। सिसोदिया के वकील ने कहा कि ईडी का दावा "दुर्भावनापूर्ण इरादे" से किया गया था और मामला "सुनवाई" पर आधारित था। उन्होंने कहा कि मामले में अधिकतम सजा केवल सात साल थी और इसलिए जमानत दी जानी चाहिए न कि हिरासत में।
ऑक्सीजन सप्लाई सुधर जाए तो सब कुछ ठीक हो जाएगा। एक टैंकर भिलाई से आ गया है। एक पीथमपुर से मिल गया। नागदा के लिए गुजरात से टैंकर लाया गया है। कल तक की व्यवस्था हो गई है। अब ठेकेदार ने भरोसा दिया है कि रोज सप्लाई करेगा। देखते हैं, आगे फिर मशक्कत करेंगे. . . कल रात 11 बजे सो जाने की तैयारी थी। सब कुछ ठीक था। पीथमपुर से ऑक्सीजन का टैंकर शाम को चल दिया था, इसलिए कोई चिंता नहीं थी। सोने जाते वक्त अपडेट के लिए मोबाइल लगाया तो पता चला टैंकर तो आया ही नहीं। सुनते ही नींद उड़ गई। टैंकर गया कहां? आरआई को ढूंढने भेजा। और जगह से भी पता करते रहे। आरआई ने पीथमपुर से करीब 25 किमी दूर पुल के पास टैंकर देखा। चालक साइड में लगाकर सो रहा था। मोबाइल भी बंद था। उसे जगाया। नाम-नंबर चेक किया। कंफर्म हुआ वही टैंकर है। फिर उसे लेकर आए। रात खराब हो गई। एक टैंकर भिलाई से मिला है। नागदा वाले का एक टैंकर गुजरात में फंसा था। क्या करें। शहर के एक सीनियर साथी की मदद मिली। भोपाल की लिंक निकाली और वहां से गुजरात की। वहां चर्चा की, तब जाकर टैंकर आ पाया। इससे नागदा की व्यवस्था हो गई। अब ऑक्सीजन की स्थिति यह है कि पहले घंटों में ऑक्सीजन की व्यवस्था करना पड़ रही थी, अब एक दिन पर बात आ गई है। सप्लायर ने कहा है कि वह अब नियमित सप्लाई करेगा। अभी तो सुकून है। कंसंट्रेटर मशीनें मिल रही हैं, लेकिन यह केवल ऐसे मरीजों के लिए हैं, जिन्हें कुछ देर के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है। जैसे ओपीडी में कोई पेशेंट आया तो उसे मशीन लगा कर राहत दे सकते हैं, तब तक उसे भर्ती करने की प्रक्रिया पूरी होती रहती है। पीटीएस में जनभागीदारी वाला सेंटर बना रहे हैं, उसमें यह मशीनों का उपयोग होगा। चरक में 36 बेड बढ़ गए हैं, 20-30 और बढ़ जाएंगे। आरडी गार्डी में भी बेड ले रहे हैं। बस ऑक्सीजन के कारण मात खा रहे हैं। बेड तो हो जाएंगे, ऑक्सीजन की व्यवस्था भी करना पड़ेगी। बिड़ला में भी बेड मिल रहे हैं। (जैसा कलेक्टर आशीष सिंह ने दैनिक भास्कर को चर्चा के दौरान बताया। ) This website follows the DNPA Code of Ethics.
ऑक्सीजन सप्लाई सुधर जाए तो सब कुछ ठीक हो जाएगा। एक टैंकर भिलाई से आ गया है। एक पीथमपुर से मिल गया। नागदा के लिए गुजरात से टैंकर लाया गया है। कल तक की व्यवस्था हो गई है। अब ठेकेदार ने भरोसा दिया है कि रोज सप्लाई करेगा। देखते हैं, आगे फिर मशक्कत करेंगे. . . कल रात ग्यारह बजे सो जाने की तैयारी थी। सब कुछ ठीक था। पीथमपुर से ऑक्सीजन का टैंकर शाम को चल दिया था, इसलिए कोई चिंता नहीं थी। सोने जाते वक्त अपडेट के लिए मोबाइल लगाया तो पता चला टैंकर तो आया ही नहीं। सुनते ही नींद उड़ गई। टैंकर गया कहां? आरआई को ढूंढने भेजा। और जगह से भी पता करते रहे। आरआई ने पीथमपुर से करीब पच्चीस किमी दूर पुल के पास टैंकर देखा। चालक साइड में लगाकर सो रहा था। मोबाइल भी बंद था। उसे जगाया। नाम-नंबर चेक किया। कंफर्म हुआ वही टैंकर है। फिर उसे लेकर आए। रात खराब हो गई। एक टैंकर भिलाई से मिला है। नागदा वाले का एक टैंकर गुजरात में फंसा था। क्या करें। शहर के एक सीनियर साथी की मदद मिली। भोपाल की लिंक निकाली और वहां से गुजरात की। वहां चर्चा की, तब जाकर टैंकर आ पाया। इससे नागदा की व्यवस्था हो गई। अब ऑक्सीजन की स्थिति यह है कि पहले घंटों में ऑक्सीजन की व्यवस्था करना पड़ रही थी, अब एक दिन पर बात आ गई है। सप्लायर ने कहा है कि वह अब नियमित सप्लाई करेगा। अभी तो सुकून है। कंसंट्रेटर मशीनें मिल रही हैं, लेकिन यह केवल ऐसे मरीजों के लिए हैं, जिन्हें कुछ देर के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है। जैसे ओपीडी में कोई पेशेंट आया तो उसे मशीन लगा कर राहत दे सकते हैं, तब तक उसे भर्ती करने की प्रक्रिया पूरी होती रहती है। पीटीएस में जनभागीदारी वाला सेंटर बना रहे हैं, उसमें यह मशीनों का उपयोग होगा। चरक में छत्तीस बेड बढ़ गए हैं, बीस-तीस और बढ़ जाएंगे। आरडी गार्डी में भी बेड ले रहे हैं। बस ऑक्सीजन के कारण मात खा रहे हैं। बेड तो हो जाएंगे, ऑक्सीजन की व्यवस्था भी करना पड़ेगी। बिड़ला में भी बेड मिल रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भोपाल। कर्नाटक (Karnataka) साल मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी जीत हासिल करना चाहती है। यही कारण है कि कांग्रेस (Congress) राज्य में आक्रामक रुख अपनाने का मन बना चुकी है। राज्य में इसी साल विधानसभा के चुनाव हैं और यह पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा कशमकश भरे रहने वाले हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि जनता के मुद्दों के साथ आक्रामक रुख अपनाना उसके लिए फायदेमंद हो सकता है। वर्ष 2018 की तरह वह सत्ता पर काबिज हो सकती है। लिहाजा पार्टी अपने प्रवक्ताओं और मीडिया विभाग से जुड़े पदाधिकारियों को साफ तौर पर यह निर्देश दे चुकी है कि वह अपनी बात को पूरी दमदार इसे रखें साथ ही आक्रामक तरीका भी अपनाएं। बीते रोज पार्टी के मीडिया विभाग के प्रचार प्रभारी पवन खेड़ा और पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत (Supriya Shrinate) का भोपाल प्रवास हुआ. इस दौरान उन्होंने मीडिया विभाग के कुछ पदाधिकारियों से एक-एक कर बातचीत की तो वही प्रवक्ताओं की सामूहिक बैठक ली। इस बैठक में दोनों नेताओं ने कुछ गुरु मंत्र दिए साथ ही इस बात पर जोर दिया कि वह राज्य की जनता से जुड़े मुद्दों को पूरी क्षमता से उठाएं और ऐसे मुद्दों से बचें जिन से भाजपा को लाभ हो सकता है। अभा कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के प्रचार प्रभारी पवन खेड़ा ने कहा कि व्यापमं हो, नौजवानां की बेरोजगारी का आलम हो, महंगाई, गैस सिलेण्डर हो, महिला सुरक्षा हो, पेट्रोल, डीजल, स्वास्थ्य हो, राजनीति में हम लोग इन्हीं मुद्दों पर काम करने के लिए आए हैं। भाजपा सरकार में है, तो भाजपा का इन मुद्दों पर दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं दिखता, लचर सेवाएं भी हमने देखी, कोविड़ के दौरान देखी। पवन खेड़ा (Pawan Khera) ने मीडिया टीम को हिदायत दी है कि वे उन मुद्दों से बचें जो जनता के नहीं है और भाजपा उन्हें उलझाना चाहती है। भाजपा कभी भी जनता के मुद्दों की बात नहीं करती, इसलिए कांग्रेस के जनता के मुद्दों पर ही केंद्रित रहना है। राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत (Supriya Shrinate) ने कहा कि कर्नाटक की जीत ने कुछ चीजें साफ कर दी। जनता बिना संशय के राजनीतिज्ञों से, राजनैतिक पार्टियों, प्रधानमंत्री, विपक्ष से साफ कह रही है कि हमारे मुद्दां की बात करेगें तो वोट देकर सरकार में बिठायेंगे, इधर-उधर की बात करेंगे तो विपक्ष में बैठायेंगे। कुल मिलाकर राज्य के विधानसभा चुनाव (Assembly Election) में कांग्रेस का रुख पूरी तरह आक्रामक रहे, इसके अभी से प्रयास तेज हो गए हैं। पार्टी जहां अपनी मीडिया टीम को और प्रशिक्षित करेगी वहीं उन मुद्दों पर जोर देगी जिससे भाजपा की राज्य और केंद्र सरकार को घेरा जा सके। (आईएएनएस)
भोपाल। कर्नाटक साल मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी जीत हासिल करना चाहती है। यही कारण है कि कांग्रेस राज्य में आक्रामक रुख अपनाने का मन बना चुकी है। राज्य में इसी साल विधानसभा के चुनाव हैं और यह पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा कशमकश भरे रहने वाले हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि जनता के मुद्दों के साथ आक्रामक रुख अपनाना उसके लिए फायदेमंद हो सकता है। वर्ष दो हज़ार अट्ठारह की तरह वह सत्ता पर काबिज हो सकती है। लिहाजा पार्टी अपने प्रवक्ताओं और मीडिया विभाग से जुड़े पदाधिकारियों को साफ तौर पर यह निर्देश दे चुकी है कि वह अपनी बात को पूरी दमदार इसे रखें साथ ही आक्रामक तरीका भी अपनाएं। बीते रोज पार्टी के मीडिया विभाग के प्रचार प्रभारी पवन खेड़ा और पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत का भोपाल प्रवास हुआ. इस दौरान उन्होंने मीडिया विभाग के कुछ पदाधिकारियों से एक-एक कर बातचीत की तो वही प्रवक्ताओं की सामूहिक बैठक ली। इस बैठक में दोनों नेताओं ने कुछ गुरु मंत्र दिए साथ ही इस बात पर जोर दिया कि वह राज्य की जनता से जुड़े मुद्दों को पूरी क्षमता से उठाएं और ऐसे मुद्दों से बचें जिन से भाजपा को लाभ हो सकता है। अभा कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के प्रचार प्रभारी पवन खेड़ा ने कहा कि व्यापमं हो, नौजवानां की बेरोजगारी का आलम हो, महंगाई, गैस सिलेण्डर हो, महिला सुरक्षा हो, पेट्रोल, डीजल, स्वास्थ्य हो, राजनीति में हम लोग इन्हीं मुद्दों पर काम करने के लिए आए हैं। भाजपा सरकार में है, तो भाजपा का इन मुद्दों पर दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं दिखता, लचर सेवाएं भी हमने देखी, कोविड़ के दौरान देखी। पवन खेड़ा ने मीडिया टीम को हिदायत दी है कि वे उन मुद्दों से बचें जो जनता के नहीं है और भाजपा उन्हें उलझाना चाहती है। भाजपा कभी भी जनता के मुद्दों की बात नहीं करती, इसलिए कांग्रेस के जनता के मुद्दों पर ही केंद्रित रहना है। राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि कर्नाटक की जीत ने कुछ चीजें साफ कर दी। जनता बिना संशय के राजनीतिज्ञों से, राजनैतिक पार्टियों, प्रधानमंत्री, विपक्ष से साफ कह रही है कि हमारे मुद्दां की बात करेगें तो वोट देकर सरकार में बिठायेंगे, इधर-उधर की बात करेंगे तो विपक्ष में बैठायेंगे। कुल मिलाकर राज्य के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का रुख पूरी तरह आक्रामक रहे, इसके अभी से प्रयास तेज हो गए हैं। पार्टी जहां अपनी मीडिया टीम को और प्रशिक्षित करेगी वहीं उन मुद्दों पर जोर देगी जिससे भाजपा की राज्य और केंद्र सरकार को घेरा जा सके।
अमरावती/दि. 29- पुलिस आयुक्त डॉ. आरती सिंह की विशेष टीम ने वरली मटका चलाने वालों सहित अवैध शराब का यातायात करने वालों पर छापा मारकर 10 लोगों को गिरफ्तार किया. पुलिस आयुक्त डॉ. आरती सिंह के विशेष पथक को बडनेरा पुलिस थाने के तहत मलकापुर पांढरी गांव के पुनर्वसन परिसर में एक युवक द्वारा वरली मटका चलाने की जानकारी मिली. जिसके अनुसार पुलिस ने छापा मारकर दिनेश भीमराव बघेल (35, पांढरी निवासी) को गिरफ्तार कर नकद 3 हजार 500 रुपए जप्त किये. वहीं मलकापुर मार्ग से शराब का अवैध यातायात करने वाले मनोहर नानाजी तायडे (70, मलकापुर निवासी) को गिरफ्तार कर उसके पास से दारु की दो पेटियां ऐसा कुल 3 हजार 920 रुपए का मुद्देमाल जप्त किया. इसके साथ ही फ्रेजरपुरा पुलिस थाने के तहत फ्रेजरपुरा में शुरु एक्का बादशा जुआ अड्डे पर छापा मारकर पुलिस ने आठ जुआरियों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार किए गए जुआरियों में धर्मेन्द्र दौलत विजयकर (48), नितीन कृष्ण पाखरे (30), नितेश अरुण पवार (31),राजेन्द्र तारसिंग जाधव (60),सुनील रामजी सावलकर (35), राहुल नरेश जुमले (28), श्याम महादेव मिश्रा (72), विजय मंडले यह गिरफ्तार किए गए जुआरियों के नाम है. उनके पास से कुल 38 हजार 700 रुपए का मुद्देमाल जप्त कर पुलिस थाने के सुपुर्द किया गया.
अमरावती/दि. उनतीस- पुलिस आयुक्त डॉ. आरती सिंह की विशेष टीम ने वरली मटका चलाने वालों सहित अवैध शराब का यातायात करने वालों पर छापा मारकर दस लोगों को गिरफ्तार किया. पुलिस आयुक्त डॉ. आरती सिंह के विशेष पथक को बडनेरा पुलिस थाने के तहत मलकापुर पांढरी गांव के पुनर्वसन परिसर में एक युवक द्वारा वरली मटका चलाने की जानकारी मिली. जिसके अनुसार पुलिस ने छापा मारकर दिनेश भीमराव बघेल को गिरफ्तार कर नकद तीन हजार पाँच सौ रुपयापए जप्त किये. वहीं मलकापुर मार्ग से शराब का अवैध यातायात करने वाले मनोहर नानाजी तायडे को गिरफ्तार कर उसके पास से दारु की दो पेटियां ऐसा कुल तीन हजार नौ सौ बीस रुपयापए का मुद्देमाल जप्त किया. इसके साथ ही फ्रेजरपुरा पुलिस थाने के तहत फ्रेजरपुरा में शुरु एक्का बादशा जुआ अड्डे पर छापा मारकर पुलिस ने आठ जुआरियों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार किए गए जुआरियों में धर्मेन्द्र दौलत विजयकर , नितीन कृष्ण पाखरे , नितेश अरुण पवार ,राजेन्द्र तारसिंग जाधव ,सुनील रामजी सावलकर , राहुल नरेश जुमले , श्याम महादेव मिश्रा , विजय मंडले यह गिरफ्तार किए गए जुआरियों के नाम है. उनके पास से कुल अड़तीस हजार सात सौ रुपयापए का मुद्देमाल जप्त कर पुलिस थाने के सुपुर्द किया गया.
नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन हो रहा है। कल उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कर्नाटक के मंगलुरू, गुजरात के अहमदाबाद, मुंबई और राजधानी दिल्ली समेत देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। मैंगलोर में स्कूल-कॉलेजो में छुट्टी घोषित कर दी गई है। इस कथित विरोध प्रदर्शन के पीछे की मुख्य वजह ये है कि उन लोगों को नागरिकता संशोधन कानून के बारे में सही से पता नहीं है और इसके पीछे कुछ मीडिया संस्थानों का भी हाथ है, जो कि इनके बीच भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं और झूठ फैलाते हैं। इसमें मीडिया संस्थान 'द वायर' भी शामिल है। ये लोग बस मुस्लिमों को भड़का रहे हैं और इनमें डर पैदा कर रहे हैं कि सभी मुस्लिमों को देश से बाहर कर दिया जाएगा। चार्ट में बताया गया है कि CAA लागू होने के बाद जब पूरे देश में NRC लागू होगा तो खुद को भारत का नागरिक साबित करने के लिए धर्म का प्रमाण पत्र दिखाना होगा। इसमें जो हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी पाए जाएँगे, उनके लिए देखा जाएगा कि वो किस देश से हैं? अगर वो पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश या फिर भारत से होंगे तो उन्हें वैध नागरिक माना जाएगा और नागरिकता दी जाएगी। वहीं इस चार्ट के अनुसार जो मुस्लिम होंगे, वो अवैध नागरिक होंगे। उन्हें वोट करने का अधिकार नहीं होगा, उन्हें डिटेंशन सेंटर भेज दिया जाएगा, उन्हें देश से निकाल दिया जाएगा। इसमें बताया गया है ये सारी योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने बनाई है। द वायर ने इसमें दिखाने की कोशिश की है कि किस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह CAA और NRC के जरिए मुस्लिमों को नागरिकता से वंचित करना चाहती है। हालाँकि उन्होंने यह नहीं बताया है कि ये चार्ट उन्होंने कहाँ से लिया है। उन्होंने जो चार्ट पेश किया है, वो किसी भी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है, क्योंकि सरकार ने तो इस तरह का कोई चार्ट जारी नहीं किया है। द वायर ने ये भी नहीं बताया कि उसने किस आधार पर यह तय किया कि पूरे देश में NRC लागू होने का यही तरीका होगा। क्या इसके लिए सिर्फ धर्म ही एकमात्र आधार होगा। क्या इसके लिए आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र वगैरह जैसे किसी अन्य दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी? पूरे देश में NRC लागू होने का क्या प्रोसेस होगा, इसके बारे में फिलहाल कोई नहीं जानता। खुद सरकार ने ऐसा कोई आधिकारिक डॉक्यूमेंट भी नहीं जारी किया है। लेकिन द वायर के बकलोल पत्रकार AC कमरे में बैठकर मनगढ़ंत रिपोर्ट लिखकर देश में बवाल करवाने पर उतारू है। असम में भी जिस प्रोसेस से NRC लागू हुआ है, वो प्रोसेस भी सुप्रीम कोर्ट का था। सुप्रीम कोर्ट ने जैसा कहा, वैसा ही वहाँ किया गया। ये पीएम मोदी और अमित शाह का तरीका नहीं था और अमित शाह ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा भी है कि NRC लागू करने में धर्म का कोई आधार नहीं होगा। जो घुसपैठिए हैं, उन्हें देश से बाहर निकाला जाएगा। इसे आप यहाँ पर सुन सकते हैं। नागरिकता कानून को NRC से जोड़कर देखने और फिर इसके नतीजे के बारे में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि NRC में धर्म के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं होगी और जो कोई भी एनआरसी के तहत इस देश का नागरिक नहीं पाया जाएगा, सबको निकालकर देश से बाहर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ मुस्लिमों के लिए NRC नहीं है। उन्होंने कहा कि इस कानून से देश के अल्पसंख्यकों को रत्ती भर भी नुकसान नहीं होने वाला है। उनकी सुविधा का खास ख्याल रखा जाएगा।
नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन हो रहा है। कल उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कर्नाटक के मंगलुरू, गुजरात के अहमदाबाद, मुंबई और राजधानी दिल्ली समेत देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। मैंगलोर में स्कूल-कॉलेजो में छुट्टी घोषित कर दी गई है। इस कथित विरोध प्रदर्शन के पीछे की मुख्य वजह ये है कि उन लोगों को नागरिकता संशोधन कानून के बारे में सही से पता नहीं है और इसके पीछे कुछ मीडिया संस्थानों का भी हाथ है, जो कि इनके बीच भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं और झूठ फैलाते हैं। इसमें मीडिया संस्थान 'द वायर' भी शामिल है। ये लोग बस मुस्लिमों को भड़का रहे हैं और इनमें डर पैदा कर रहे हैं कि सभी मुस्लिमों को देश से बाहर कर दिया जाएगा। चार्ट में बताया गया है कि CAA लागू होने के बाद जब पूरे देश में NRC लागू होगा तो खुद को भारत का नागरिक साबित करने के लिए धर्म का प्रमाण पत्र दिखाना होगा। इसमें जो हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी पाए जाएँगे, उनके लिए देखा जाएगा कि वो किस देश से हैं? अगर वो पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश या फिर भारत से होंगे तो उन्हें वैध नागरिक माना जाएगा और नागरिकता दी जाएगी। वहीं इस चार्ट के अनुसार जो मुस्लिम होंगे, वो अवैध नागरिक होंगे। उन्हें वोट करने का अधिकार नहीं होगा, उन्हें डिटेंशन सेंटर भेज दिया जाएगा, उन्हें देश से निकाल दिया जाएगा। इसमें बताया गया है ये सारी योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने बनाई है। द वायर ने इसमें दिखाने की कोशिश की है कि किस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह CAA और NRC के जरिए मुस्लिमों को नागरिकता से वंचित करना चाहती है। हालाँकि उन्होंने यह नहीं बताया है कि ये चार्ट उन्होंने कहाँ से लिया है। उन्होंने जो चार्ट पेश किया है, वो किसी भी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है, क्योंकि सरकार ने तो इस तरह का कोई चार्ट जारी नहीं किया है। द वायर ने ये भी नहीं बताया कि उसने किस आधार पर यह तय किया कि पूरे देश में NRC लागू होने का यही तरीका होगा। क्या इसके लिए सिर्फ धर्म ही एकमात्र आधार होगा। क्या इसके लिए आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र वगैरह जैसे किसी अन्य दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी? पूरे देश में NRC लागू होने का क्या प्रोसेस होगा, इसके बारे में फिलहाल कोई नहीं जानता। खुद सरकार ने ऐसा कोई आधिकारिक डॉक्यूमेंट भी नहीं जारी किया है। लेकिन द वायर के बकलोल पत्रकार AC कमरे में बैठकर मनगढ़ंत रिपोर्ट लिखकर देश में बवाल करवाने पर उतारू है। असम में भी जिस प्रोसेस से NRC लागू हुआ है, वो प्रोसेस भी सुप्रीम कोर्ट का था। सुप्रीम कोर्ट ने जैसा कहा, वैसा ही वहाँ किया गया। ये पीएम मोदी और अमित शाह का तरीका नहीं था और अमित शाह ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा भी है कि NRC लागू करने में धर्म का कोई आधार नहीं होगा। जो घुसपैठिए हैं, उन्हें देश से बाहर निकाला जाएगा। इसे आप यहाँ पर सुन सकते हैं। नागरिकता कानून को NRC से जोड़कर देखने और फिर इसके नतीजे के बारे में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि NRC में धर्म के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं होगी और जो कोई भी एनआरसी के तहत इस देश का नागरिक नहीं पाया जाएगा, सबको निकालकर देश से बाहर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ मुस्लिमों के लिए NRC नहीं है। उन्होंने कहा कि इस कानून से देश के अल्पसंख्यकों को रत्ती भर भी नुकसान नहीं होने वाला है। उनकी सुविधा का खास ख्याल रखा जाएगा।
प्रकाशकीय निवेदन आज हमें हिन्दी पाठकों के सम्मुख संयुत्त निकाय के हिन्दी अनुवाद को लेकर उपस्थित होने में बड़ी प्रसन्नता हो रही है। अगले वर्ष के लिए 'विसुद्धिसग्ग' का अनुवाद तैयार है। उसके पश्चात् 'अंगुत्तर निकाय' में हाथ लगाया जायेगा । इनके अतिरिक्त हम और भी कितने ही प्रसिद्ध बौद्ध-मन्थों के हिन्दी अनुवाद प्रकाशित करना चाहते हैं। हमारे काम में जिस प्रकार से कितने ही सज्जनों ने आर्थिक सहायता और उत्साह प्रदान किया है, उससे हम बहुत उत्साहित हुए हैं। आर्थिक कठिनाइयों एवं अनेक अन्य अड़चनों के कारण इस ग्रन्थ के प्रकाशित होने में जो अनपेक्षित विलम्ब हुआ है, उसके लिए हमें स्वयं दुःख है । भविष्य में इतना विलम्ब न होगा - ऐसा प्रयत्न किया जायेगा । हम अपने सभी दाताओं एवं सहायकों के कृतज्ञ है, जिन्होंने कि सहायता देकर हमें इस महत्वपूर्ण कार्य को सम्पादित करने में सफल बनाया भिक्षु एम० संघरत्न मन्त्री, महाबोधि सभा संयुत्त निकाय सुत्त-पिटक का तृतीय ग्रन्थ है। यह आकार में दोध निकाय और मतिम निकाय से बड़ा है । इसमें पाँच बड़े-बड़े वर्ग है- सगाया वर्ग, निदान वर्ग, खन्ध वर्ग, सळायतन वर्ग और महावर्ग । इन वर्गों का विभाजन नियमानुसार हुआ है। संयुक्त निकाय में ५४ संयुक्त हैं, जिनमें देवता, देवपुत्र, कोसल, भार, प्रह्म, ब्राह्मण, सक्क, अभिसमय, धातु, अनमतग्ग, लाभसक्कार, राहुल, लक्खण, खन्ध, राध, दिहि, सळायतन, वेदना, मानुगाम, असंखत, मय्ग, योजझङ्ग, सतिपहान, इन्द्रिय, सम्मप्पधान, चल, इद्धिपाद, अनुरुद्ध, ज्ञान, आनापान, सोतापत्ति और सच्च--यह ३२ संयुक्त वर्गों में विभक्त हैं, जिनकी कुल संख्या १७३ है। शेष संयुत्त वर्गों में विभक्त नहीं हैं। संयुत्त निकाय में सौ भागवार और संयुत्त निकाय का हिन्दी अनुवाद पूज्य भदन्त जगदीश काश्यप जी ने आज से किया था, किन्तु अनेक बाधाओं के कारण यह अभीतक प्रकाशित न हो सका था। श्री अनुवाद की पाण्डुलिपि के बहुत से पन्ने कुछ पूरे संयुस तक खो गये थे। अनेक प्रेसों को दी गई और वापस ली गई थी। उन्नीस वर्ष पूर्व इस दीर्घकाल के इसकी पाण्डुलिपि गत वर्ष पूज्य काश्यप जी ने संयुत्त निकाय का भार मुझे सौंप दिया। मैं प्रारम्भ से अन्त तक इसकी पाण्डुलिपि को दुहरा गया और अपेक्षित सुधार कर डाला । मुझे ध्यान संयुक्त, अनुरुद्ध संयुत्त आदि कई संयुत्तों का स्वतन्त्र अनुवाद करना पड़ा, क्योंकि अनुवाद के वे भाग पाण्डुलिपि में न थे । मैंने देखा कि पूज्य काश्यप जी ने म तो सुन्तों की संख्या दी थी और न सुत्तों का नाम ही लिखा था। मैंने इन दोनों बातों को आवश्यक समझा और प्रारम्भ से अन्त तक सुन्तों का नाम तथा सुत-संख्या को लिख दिया। मैंने प्रत्येक सुत्त के प्रारम्भ में अपनी ओर से विषयानुसार शीर्षक लिख दिये हैं, जिनसे पाठक को इस ग्रन्थ को पढ़ने में विशेष अभिरुचि होगी । ग्रन्थ में आये हुए स्थानों, नदियों, विहारों आदि का परिचय पाइटिप्पणियों में यथासम्भव कम दिया गया है, इसके लिए अलग से 'बुद्धकालीन भारत का भौगोलिक परिचय' लिख दिया गया है। इसके साथ ही एक नक्शा भी दे दिया गया है। आशा है, इनसे पाठकों को विशेष लाभ होगा। पूरे ग्रन्थ के छप ज्ञाने के पश्चात् इसके दीर्घकाय को देखकर विचार किया गया कि इसकी जिल्दबन्दी दो भागों में कराई आय : अतः पहले भाग में सगाथा वर्ग, निदान वर्ग और स्कन्ध वर्ग तथा दूसरे भाग में सळायतन वर्ग और महावर्ग विभक्त करके जिल्दबन्दी करा दी गई है। प्रत्येक भाग के साथ विषय-सूची, उपमा-सूची, नाम- अनुक्रमणी और शब्द-धनुक्रमणी दे दी गई है। सुत्त-पिटक के पाँचों निकायों में से दीन, मज्झिम और संयुक्त के प्रकाशित हो जाने के पश्चात् अंगुसर निकाय तथा खुड़क निकाय अवशेष रहते हैं। खुद्दक निकाय के भी खुद्दक पाठ, धम्मपद, उदान, सुत निपात, थेरी गाथा और आतक के हिन्दी अनुवाद प्रकाशित हो चुके हैं। इत्तियुत्तक, बुद्धवंस और परियाषिक के भी अनुवाद मैंने कर दिये हैं और ये ग्रन्थ प्रेस में हैं। अंगुप्तर निकाय का मेरा हिन्दी अनुवाद भी प्रायः समाप्त-सा ही है । संयुत्त निकाय के पश्चात् क्रमशः विशुद्धि और अंगुत्तर निकाय को प्रकाशित करने का कार्यक्रम बनाया गया है। आशा है, कुछ वर्षों के भीतर पूरा सुत्तपिटक और अभिधम्म- पिटक के कुछ ग्रंथ हिन्दी में अनूदित होकर प्रकाशित हो जायेंगे । भारतीय महाबोधि सभा ने इस ग्रन्थ को प्रकाशित करके बुद्ध-शासन एवं हिन्दी-जगत् का बहुत किया है । इस महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए सभा के प्रधान मन्त्री श्री देवप्रिय चलिसिंह तथा भदन्त संघरत्नजी का प्रयास स्तुत्य है। ज्ञानमण्डल यन्त्रालय, काशी के व्यवस्थापक । कपूर की तत्परता से ही यह ग्रन्थ पूर्णरूप से शुद्ध और शीघ्र मुद्रित हो सका है। महाबोधि सभा, सारनाथ, बनारस भिक्षु धर्मरक्षित संयुत्त निकाय सुप्त-पिटक का तीसरा ग्रन्थ है। दीघ निकाय में उन सूत्रों का संग्रह है जो आकार में बड़े हैं। उसी तरह, प्रायः मझोले आकार के सूत्रों का संग्रह मज्झिम निकाय में है। संयुत्त निकाय में छोटे-बड़े सभी प्रकार के सूत्रों का 'संयुक्त' संग्रह है। इस निकाय के सूत्रों की कुल संख्या ७७६२ है । पिटक के इन ग्रन्थों के संग्रह में सूत्रों के छोटे-बड़े आकार की दृष्टि रक्खी गई है, यह सचमुच जँचने वाली बात नहीं लगती है। प्रायः इन ग्रन्थों में एक अत्यन्त दार्शनिक सूत्र के बाद ही दूसरा सूत्र जातिवाद के खण्डन का आता है और उसके बाद ही हिंसामय यज्ञ के खण्डन का, और बाद में और कुछ दूसरा स्पष्टतः विषयों के इस अव्यवस्थित सिलसिले में साधारण विद्यार्थी ऊब-सा जाता है। ठीक-ठीक यह कहना कठिन मालूम होता है कि सूत्रों का यह क्रम किस प्रकार हुआ। चाहे जो भी हो, यहाँ संयुक्त निकाय को देखते इसके व्यवस्थित विषयों के अनुकूल वर्गीकरण से इसका अपना महत्व स्पष्ट हो जाता है। संयुत्त निकाय के पहले वर्ग -- सगाथा वर्ग को पढ़कर महाभारत में स्थान-स्थान पर आये प्रश्नोत्तर की शैली से सुन्दर गाथाओं में गम्भीर से गम्भीर विषयों के विवेचन को देखकर इस निकाय के दार्शनिक तथा साहित्यिक दोनों पहलुओं का आभास मिलता है । साथ-साथ तत्कालीन राजनीति और समाज के भी स्पष्ट चित्र उपस्थित होते हैं । दूसरा वर्ग-निदान वर्ग बौद्ध सिद्धान्त 'प्रतीत्य समुत्पाद' पर भगवान् बुद्ध के अत्यन्त महत्वपूर्ण सूत्रों का संग्रह है। तीसरा और चौथा वर्ग स्कन्धबाद और आयतनवाद का विवेचन कर भगवान् बुद्ध के अनात्म सिद्धान्त की स्थापना करते हैं। पाँचवाँ-- महावर्ग 'मार्ग', 'बोध्यंग', 'स्मृति प्रस्थान', 'इन्द्रिय आदि महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डालता है। सन् १९३५ में पेनांग (मलाया) के विख्यात चीनी महाविहार 'चांग ह्वा तास्ज' में रह मैंने, 'मिलिन्द प्रश्न' के अनुवाद करने के बाद ही संयुक्त निकाय का अनुवाद प्रारम्भ किया था। दूसरे वर्ष लंका जा सलगल अरण्य के योगाश्रम में इस ग्रन्थ का अनुवाद पूर्ण किया। तब से न जाने कितनी बार इसके छपने की व्यवस्था भी हुई, पाण्डुलिपि प्रेस में भी दे दी गई और फिर वापस चली आई। मैंने तो ऐसा समझ लिया था कि कदाचित् इस ग्रन्थ के भाग्य में प्रकाशन लिखा ही नहीं है, और इस ओर से उदासीन-सा हो गया था। अब पूरे उन्नीस वर्षों के बाद यह ग्रन्थ प्रकाशित हो सका है। भाई त्रिपिटकाचार्य भिक्षु धर्मरक्षित जी ने सारी पाण्डुलिपि को दुहरा कर शुद्ध कर दिया है। संयुत्त निकाय आज इतना अच्छा प्रकाशित न हो सकता, यदि भिक्षु धर्मरक्षित जी इतनी तत्परता से इसके प्रूफ देखने और इसकी अन्य व्यवस्था करने की कृपा न करते मैं महाबोधि सभा सारनाथ तथा उसके मन्त्री श्री भिक्षु संघरल जी की भी अनेक धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने पुस्तक के प्रकाशन में इतना उत्साह दिखाया । नव नालन्दा महाविहार भिक्षु जगदीश काश्यप
प्रकाशकीय निवेदन आज हमें हिन्दी पाठकों के सम्मुख संयुत्त निकाय के हिन्दी अनुवाद को लेकर उपस्थित होने में बड़ी प्रसन्नता हो रही है। अगले वर्ष के लिए 'विसुद्धिसग्ग' का अनुवाद तैयार है। उसके पश्चात् 'अंगुत्तर निकाय' में हाथ लगाया जायेगा । इनके अतिरिक्त हम और भी कितने ही प्रसिद्ध बौद्ध-मन्थों के हिन्दी अनुवाद प्रकाशित करना चाहते हैं। हमारे काम में जिस प्रकार से कितने ही सज्जनों ने आर्थिक सहायता और उत्साह प्रदान किया है, उससे हम बहुत उत्साहित हुए हैं। आर्थिक कठिनाइयों एवं अनेक अन्य अड़चनों के कारण इस ग्रन्थ के प्रकाशित होने में जो अनपेक्षित विलम्ब हुआ है, उसके लिए हमें स्वयं दुःख है । भविष्य में इतना विलम्ब न होगा - ऐसा प्रयत्न किया जायेगा । हम अपने सभी दाताओं एवं सहायकों के कृतज्ञ है, जिन्होंने कि सहायता देकर हमें इस महत्वपूर्ण कार्य को सम्पादित करने में सफल बनाया भिक्षु एमशून्य संघरत्न मन्त्री, महाबोधि सभा संयुत्त निकाय सुत्त-पिटक का तृतीय ग्रन्थ है। यह आकार में दोध निकाय और मतिम निकाय से बड़ा है । इसमें पाँच बड़े-बड़े वर्ग है- सगाया वर्ग, निदान वर्ग, खन्ध वर्ग, सळायतन वर्ग और महावर्ग । इन वर्गों का विभाजन नियमानुसार हुआ है। संयुक्त निकाय में चौवन संयुक्त हैं, जिनमें देवता, देवपुत्र, कोसल, भार, प्रह्म, ब्राह्मण, सक्क, अभिसमय, धातु, अनमतग्ग, लाभसक्कार, राहुल, लक्खण, खन्ध, राध, दिहि, सळायतन, वेदना, मानुगाम, असंखत, मय्ग, योजझङ्ग, सतिपहान, इन्द्रिय, सम्मप्पधान, चल, इद्धिपाद, अनुरुद्ध, ज्ञान, आनापान, सोतापत्ति और सच्च--यह बत्तीस संयुक्त वर्गों में विभक्त हैं, जिनकी कुल संख्या एक सौ तिहत्तर है। शेष संयुत्त वर्गों में विभक्त नहीं हैं। संयुत्त निकाय में सौ भागवार और संयुत्त निकाय का हिन्दी अनुवाद पूज्य भदन्त जगदीश काश्यप जी ने आज से किया था, किन्तु अनेक बाधाओं के कारण यह अभीतक प्रकाशित न हो सका था। श्री अनुवाद की पाण्डुलिपि के बहुत से पन्ने कुछ पूरे संयुस तक खो गये थे। अनेक प्रेसों को दी गई और वापस ली गई थी। उन्नीस वर्ष पूर्व इस दीर्घकाल के इसकी पाण्डुलिपि गत वर्ष पूज्य काश्यप जी ने संयुत्त निकाय का भार मुझे सौंप दिया। मैं प्रारम्भ से अन्त तक इसकी पाण्डुलिपि को दुहरा गया और अपेक्षित सुधार कर डाला । मुझे ध्यान संयुक्त, अनुरुद्ध संयुत्त आदि कई संयुत्तों का स्वतन्त्र अनुवाद करना पड़ा, क्योंकि अनुवाद के वे भाग पाण्डुलिपि में न थे । मैंने देखा कि पूज्य काश्यप जी ने म तो सुन्तों की संख्या दी थी और न सुत्तों का नाम ही लिखा था। मैंने इन दोनों बातों को आवश्यक समझा और प्रारम्भ से अन्त तक सुन्तों का नाम तथा सुत-संख्या को लिख दिया। मैंने प्रत्येक सुत्त के प्रारम्भ में अपनी ओर से विषयानुसार शीर्षक लिख दिये हैं, जिनसे पाठक को इस ग्रन्थ को पढ़ने में विशेष अभिरुचि होगी । ग्रन्थ में आये हुए स्थानों, नदियों, विहारों आदि का परिचय पाइटिप्पणियों में यथासम्भव कम दिया गया है, इसके लिए अलग से 'बुद्धकालीन भारत का भौगोलिक परिचय' लिख दिया गया है। इसके साथ ही एक नक्शा भी दे दिया गया है। आशा है, इनसे पाठकों को विशेष लाभ होगा। पूरे ग्रन्थ के छप ज्ञाने के पश्चात् इसके दीर्घकाय को देखकर विचार किया गया कि इसकी जिल्दबन्दी दो भागों में कराई आय : अतः पहले भाग में सगाथा वर्ग, निदान वर्ग और स्कन्ध वर्ग तथा दूसरे भाग में सळायतन वर्ग और महावर्ग विभक्त करके जिल्दबन्दी करा दी गई है। प्रत्येक भाग के साथ विषय-सूची, उपमा-सूची, नाम- अनुक्रमणी और शब्द-धनुक्रमणी दे दी गई है। सुत्त-पिटक के पाँचों निकायों में से दीन, मज्झिम और संयुक्त के प्रकाशित हो जाने के पश्चात् अंगुसर निकाय तथा खुड़क निकाय अवशेष रहते हैं। खुद्दक निकाय के भी खुद्दक पाठ, धम्मपद, उदान, सुत निपात, थेरी गाथा और आतक के हिन्दी अनुवाद प्रकाशित हो चुके हैं। इत्तियुत्तक, बुद्धवंस और परियाषिक के भी अनुवाद मैंने कर दिये हैं और ये ग्रन्थ प्रेस में हैं। अंगुप्तर निकाय का मेरा हिन्दी अनुवाद भी प्रायः समाप्त-सा ही है । संयुत्त निकाय के पश्चात् क्रमशः विशुद्धि और अंगुत्तर निकाय को प्रकाशित करने का कार्यक्रम बनाया गया है। आशा है, कुछ वर्षों के भीतर पूरा सुत्तपिटक और अभिधम्म- पिटक के कुछ ग्रंथ हिन्दी में अनूदित होकर प्रकाशित हो जायेंगे । भारतीय महाबोधि सभा ने इस ग्रन्थ को प्रकाशित करके बुद्ध-शासन एवं हिन्दी-जगत् का बहुत किया है । इस महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए सभा के प्रधान मन्त्री श्री देवप्रिय चलिसिंह तथा भदन्त संघरत्नजी का प्रयास स्तुत्य है। ज्ञानमण्डल यन्त्रालय, काशी के व्यवस्थापक । कपूर की तत्परता से ही यह ग्रन्थ पूर्णरूप से शुद्ध और शीघ्र मुद्रित हो सका है। महाबोधि सभा, सारनाथ, बनारस भिक्षु धर्मरक्षित संयुत्त निकाय सुप्त-पिटक का तीसरा ग्रन्थ है। दीघ निकाय में उन सूत्रों का संग्रह है जो आकार में बड़े हैं। उसी तरह, प्रायः मझोले आकार के सूत्रों का संग्रह मज्झिम निकाय में है। संयुत्त निकाय में छोटे-बड़े सभी प्रकार के सूत्रों का 'संयुक्त' संग्रह है। इस निकाय के सूत्रों की कुल संख्या सात हज़ार सात सौ बासठ है । पिटक के इन ग्रन्थों के संग्रह में सूत्रों के छोटे-बड़े आकार की दृष्टि रक्खी गई है, यह सचमुच जँचने वाली बात नहीं लगती है। प्रायः इन ग्रन्थों में एक अत्यन्त दार्शनिक सूत्र के बाद ही दूसरा सूत्र जातिवाद के खण्डन का आता है और उसके बाद ही हिंसामय यज्ञ के खण्डन का, और बाद में और कुछ दूसरा स्पष्टतः विषयों के इस अव्यवस्थित सिलसिले में साधारण विद्यार्थी ऊब-सा जाता है। ठीक-ठीक यह कहना कठिन मालूम होता है कि सूत्रों का यह क्रम किस प्रकार हुआ। चाहे जो भी हो, यहाँ संयुक्त निकाय को देखते इसके व्यवस्थित विषयों के अनुकूल वर्गीकरण से इसका अपना महत्व स्पष्ट हो जाता है। संयुत्त निकाय के पहले वर्ग -- सगाथा वर्ग को पढ़कर महाभारत में स्थान-स्थान पर आये प्रश्नोत्तर की शैली से सुन्दर गाथाओं में गम्भीर से गम्भीर विषयों के विवेचन को देखकर इस निकाय के दार्शनिक तथा साहित्यिक दोनों पहलुओं का आभास मिलता है । साथ-साथ तत्कालीन राजनीति और समाज के भी स्पष्ट चित्र उपस्थित होते हैं । दूसरा वर्ग-निदान वर्ग बौद्ध सिद्धान्त 'प्रतीत्य समुत्पाद' पर भगवान् बुद्ध के अत्यन्त महत्वपूर्ण सूत्रों का संग्रह है। तीसरा और चौथा वर्ग स्कन्धबाद और आयतनवाद का विवेचन कर भगवान् बुद्ध के अनात्म सिद्धान्त की स्थापना करते हैं। पाँचवाँ-- महावर्ग 'मार्ग', 'बोध्यंग', 'स्मृति प्रस्थान', 'इन्द्रिय आदि महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डालता है। सन् एक हज़ार नौ सौ पैंतीस में पेनांग के विख्यात चीनी महाविहार 'चांग ह्वा तास्ज' में रह मैंने, 'मिलिन्द प्रश्न' के अनुवाद करने के बाद ही संयुक्त निकाय का अनुवाद प्रारम्भ किया था। दूसरे वर्ष लंका जा सलगल अरण्य के योगाश्रम में इस ग्रन्थ का अनुवाद पूर्ण किया। तब से न जाने कितनी बार इसके छपने की व्यवस्था भी हुई, पाण्डुलिपि प्रेस में भी दे दी गई और फिर वापस चली आई। मैंने तो ऐसा समझ लिया था कि कदाचित् इस ग्रन्थ के भाग्य में प्रकाशन लिखा ही नहीं है, और इस ओर से उदासीन-सा हो गया था। अब पूरे उन्नीस वर्षों के बाद यह ग्रन्थ प्रकाशित हो सका है। भाई त्रिपिटकाचार्य भिक्षु धर्मरक्षित जी ने सारी पाण्डुलिपि को दुहरा कर शुद्ध कर दिया है। संयुत्त निकाय आज इतना अच्छा प्रकाशित न हो सकता, यदि भिक्षु धर्मरक्षित जी इतनी तत्परता से इसके प्रूफ देखने और इसकी अन्य व्यवस्था करने की कृपा न करते मैं महाबोधि सभा सारनाथ तथा उसके मन्त्री श्री भिक्षु संघरल जी की भी अनेक धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने पुस्तक के प्रकाशन में इतना उत्साह दिखाया । नव नालन्दा महाविहार भिक्षु जगदीश काश्यप
गन्नौर (निस) : कृृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से हरी खाद को बढ़ावा देने के लिए ढैंचा बीज वितरित करने का निर्णय लिया गया है। कृृषि अधिकारी डाॅ. आनंद श्योराण ने बताया कि इच्छुक किसान मेरी फसल- मेरा ब्योरा पोर्टल पर 25 मार्च तक पंजीकरण करके यह बीज हरियाणा बीज विकास निगम के सभी केन्द्रों पर प्राप्त कर सकते हैं। डाॅ आनंद श्योराण ने बताया कि ढैंचा की बिजाई करने वाले किसान अपने खेत में यूरिया की कमी को पूरे कर सकते हैं।
गन्नौर : कृृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से हरी खाद को बढ़ावा देने के लिए ढैंचा बीज वितरित करने का निर्णय लिया गया है। कृृषि अधिकारी डाॅ. आनंद श्योराण ने बताया कि इच्छुक किसान मेरी फसल- मेरा ब्योरा पोर्टल पर पच्चीस मार्च तक पंजीकरण करके यह बीज हरियाणा बीज विकास निगम के सभी केन्द्रों पर प्राप्त कर सकते हैं। डाॅ आनंद श्योराण ने बताया कि ढैंचा की बिजाई करने वाले किसान अपने खेत में यूरिया की कमी को पूरे कर सकते हैं।
बिहार की महिलाएं ( श्रीरामेन्द्र अनिन्दन-मन्थ) छपे बेटे और बेटियों थी, एक बेटा मो० गुलेगान रिस्टर थे। उनकी एक बेटी मा मीर मिरी (पटना) पे रोपे वेंट मीर रजा वरी में हुआ था, जिनकी बेटी रोडीशी इमाम है। मीरी परीकुमरी (पटना) के ज़मीन्दार थे, जिन्होने सन् १८५७६० मे बापू पर बिंद के साथ मिलवर अँगरेजों से सदाई पी थी। मारी जमीन्दारी श्रंगरेजों ने जत पर सी थी। खुद मीर असो परीम कई साल तक छुपे मारे-गारे फिरते रहे । बापू पर गि उन्हें भाई और अपनी बह-याजू पहते थे । श्रोसोताराम शरण रघुनाथ प्रसाद 'प्रेमक्मत र पम् ए पटना श्रीमती पार्वती देवी श्राप विहार के रवनामधन्यन्त श्रीमीताराम शरण भगवानप्रमाद 'रूपवत' की थी माता थी। मुबारकपुर (सारन ) ये मुशी तपम्बीलालजी की आप दूसरी महधर्मियी थी। पति-पत्नी दोनों ही भगवद्भक्ति में लीन रहते थे। श्राप नियमित रूप से प्रति दिन शिवपाकी विधिवत् पूजा और अपने पतिदेव की सेवा अपने ही हाथों दिया परती थीं। आप जैसी रूपवती थी, वैसी ही धर्मपराया और पतिव्रता भी। आपके अनुरोध से आपके पति ने पुष्टि यज्ञ यही धूमधाम से किया। प्रसिद्ध है कि यश येत में एक विद्वान् ब्राह्मण-दम्पती अचानक था पहुँचे। उन्हें वाय वेश में देख पति पत्नी ने उन्हें सादर भोजन कराया। चलते समय निमदेव ने यह का उद्देश्य पूछा। पदोनो प्राणी अपना मनोरथ प्रकट कर उनसे ग्राशीर्वाद मांगा। विम दम्पती ने कहा कि तुम दोनों हम लोगों की पत्तलों से प्रसादस्वरूप बुद्ध श्रवण ले लो। आप दोनों व्यक्तियों ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। रात में मुन्शीजी ने सपने में रामजानकी के दिव्य रूप की फाँकी देखी। वे भक्ति-विह्वल हो जाग उठे । आप भी उठकर पतिदेव से भाव विभोर होने का कारण पूछने लगीं। उन्होंने आप से ज्योतिदर्शन को बात कही। दोनों ने आँखें बंद करके ध्यानस्थ मान से हाथ जोड 'रामचरितमानस की यह चौपाई पढ़ी- 'जानहु मोर मनोरथ नौबे, बगहु मदर घर पुर महोवे ।' रसी समय आपके कानो मे सीताजी की वाणी या यह स्वर गूंज उठा कि मैं ही भक्ति रूपिणी सन्तान होकर पुन के रूप म तेरी गोद भरूंगी । इसी अनुभूति से दोनों आनन्द मग्न हो गये। दोनों को यह भी आभाम मिल गया कि दिन में जो विन दम्पती प्राये थ, वे 'युगलसरकार श्रीसीतारामजी' ही थे । भगवत्कृपा से सन् १८४० ई० में श्रावण कृष्ण नवमी को श्रीरूपकलाजी का शुभ जन्म हुआ। माता-पिता की भक्ति भावना ही सावार होकर मट हुई। 'पुनवती जुबती जग सोई, रघुवरभक्त जासु भुत होई ।' महात्मा तुलमीदास १ मीर अली रोम के विशेष परिथ्य के लिए देखिए 'कु' बरसिंह अमर सिंह ' (हिन्दी), प्र० बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना पृ० १२६ ।
बिहार की महिलाएं छपे बेटे और बेटियों थी, एक बेटा मोशून्य गुलेगान रिस्टर थे। उनकी एक बेटी मा मीर मिरी पे रोपे वेंट मीर रजा वरी में हुआ था, जिनकी बेटी रोडीशी इमाम है। मीरी परीकुमरी के ज़मीन्दार थे, जिन्होने सन् एक लाख पचासी हज़ार सात सौ साठ मे बापू पर बिंद के साथ मिलवर अँगरेजों से सदाई पी थी। मारी जमीन्दारी श्रंगरेजों ने जत पर सी थी। खुद मीर असो परीम कई साल तक छुपे मारे-गारे फिरते रहे । बापू पर गि उन्हें भाई और अपनी बह-याजू पहते थे । श्रोसोताराम शरण रघुनाथ प्रसाद 'प्रेमक्मत र पम् ए पटना श्रीमती पार्वती देवी श्राप विहार के रवनामधन्यन्त श्रीमीताराम शरण भगवानप्रमाद 'रूपवत' की थी माता थी। मुबारकपुर ये मुशी तपम्बीलालजी की आप दूसरी महधर्मियी थी। पति-पत्नी दोनों ही भगवद्भक्ति में लीन रहते थे। श्राप नियमित रूप से प्रति दिन शिवपाकी विधिवत् पूजा और अपने पतिदेव की सेवा अपने ही हाथों दिया परती थीं। आप जैसी रूपवती थी, वैसी ही धर्मपराया और पतिव्रता भी। आपके अनुरोध से आपके पति ने पुष्टि यज्ञ यही धूमधाम से किया। प्रसिद्ध है कि यश येत में एक विद्वान् ब्राह्मण-दम्पती अचानक था पहुँचे। उन्हें वाय वेश में देख पति पत्नी ने उन्हें सादर भोजन कराया। चलते समय निमदेव ने यह का उद्देश्य पूछा। पदोनो प्राणी अपना मनोरथ प्रकट कर उनसे ग्राशीर्वाद मांगा। विम दम्पती ने कहा कि तुम दोनों हम लोगों की पत्तलों से प्रसादस्वरूप बुद्ध श्रवण ले लो। आप दोनों व्यक्तियों ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। रात में मुन्शीजी ने सपने में रामजानकी के दिव्य रूप की फाँकी देखी। वे भक्ति-विह्वल हो जाग उठे । आप भी उठकर पतिदेव से भाव विभोर होने का कारण पूछने लगीं। उन्होंने आप से ज्योतिदर्शन को बात कही। दोनों ने आँखें बंद करके ध्यानस्थ मान से हाथ जोड 'रामचरितमानस की यह चौपाई पढ़ी- 'जानहु मोर मनोरथ नौबे, बगहु मदर घर पुर महोवे ।' रसी समय आपके कानो मे सीताजी की वाणी या यह स्वर गूंज उठा कि मैं ही भक्ति रूपिणी सन्तान होकर पुन के रूप म तेरी गोद भरूंगी । इसी अनुभूति से दोनों आनन्द मग्न हो गये। दोनों को यह भी आभाम मिल गया कि दिन में जो विन दम्पती प्राये थ, वे 'युगलसरकार श्रीसीतारामजी' ही थे । भगवत्कृपा से सन् एक हज़ार आठ सौ चालीस ईशून्य में श्रावण कृष्ण नवमी को श्रीरूपकलाजी का शुभ जन्म हुआ। माता-पिता की भक्ति भावना ही सावार होकर मट हुई। 'पुनवती जुबती जग सोई, रघुवरभक्त जासु भुत होई ।' महात्मा तुलमीदास एक मीर अली रोम के विशेष परिथ्य के लिए देखिए 'कु' बरसिंह अमर सिंह ' , प्रशून्य बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना पृशून्य एक सौ छब्बीस ।
बिहार में बन रही सूखे की संभावनाओं के मद्देनजर बिहार सरकार अलर्ट मोड में आ गई है. इस संबंध में मुख्य सचिव आमिर सुबहानी की अध्यक्षता में आपदा प्रबंंधन समूह ने बीते दिनों एक समीक्षा बैठक बुलाई थी. देश में धान की खेती मानसून आधारित है. मसलन देश के कई राज्यों में मानसून की बारिश से ही धान की खेती होती है. लेकिन, इस मानसून सीजन में बारिश बादलों से रूठी हुई नजर आ रही है. आलम यह है कि मानसून के बादल देशभर में छाए हुए हैं. लेकिन, कई जगहों पर बारिश नहीं हो रही है. जिसमें बिहार भी शामिल है. आलम यह है कि अब मानसून की जहां विदाई होने को है. तो वहीं बिहार के कई जिलों में सामान्य से भी 60 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. जिसके चलते बिहार में सूखे के आसार बन रहे हैं. जिसको लेकर राज्य सरकार अलर्ट मोड में आ गई है. कम बारिश की वजह से बिहार में बन रही सूखे की संभावनाओं के मद्देनजर बिहार सरकार अलर्ट मोड में आ गई है. इस संबंध में मुख्य सचिव आमिर सुबहानी की अध्यक्षता में आपदा प्रबंंधन समूह ने बीते दिनों एक समीक्षा बैठक बुलाई थी. जिसमें कृषि, आपदा प्रबंधन, पशुपालन समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए. बैठक में संभावित सूखे की निगरानी करने का फैसला लिया गया है. इस मानसून सीजन में बिहार गंभीर सूखे का सामना कर रहा है. मसलन इस मानसून सीजन अभी तक बिहार में सामान्य बारिश की तुलना में तकरीबन 60 फीसदी बारिश ही दर्ज की गई है. जिसकी जानकारी समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने मुख्य सचिव को दी है. अधिकारियों ने बताया है कि जून से अब तक राज्य में औसतन 602 मिमी बारिश होनी चाहिये थी. लेकिन, सिर्फ 378 मिमी बारिश ही अभी तक हुई है. मानसून सीजन में जून से लेकर अगस्त तक बिहार के पूरे राज्य में औसतन 60 फीसदी ही बारिश दर्ज की गई है. लेकिन, राज्य में ऐसे कई जिले हैं, जहां बारिश का औसतन अनुपात 40 फीसदी ही रहा है. मसलन इन जिलों में अभी तक सामान्य से 60 फीसदी बारिश दर्ज की गई है. इन जिलों में लखीसराय और भागलपुर शामिल हैं. वहीं कम बारिश की वजह से राज्य के कई जिलों में धान रोपाई भी प्रभावित है. हालांकि किसान भूमिगत जल के सहारे धान की रोपाई कर रहे हैं. लेकिन इस वजह से भूमिगत जल के नीचे जाने की स्थिति बनी हुई है. मानसून सीजन में कम बारिश का सामना बिहार ही नहीं कर रहा है. इस सूची में पूर्वोत्तर के कई अन्य राज्य भी हैं. इस वजह से इस खरीफ सीजन में देश के अंदर धान की बुवाई का रकबा 13 फीसदी तक घट गया है. इस संबंध की जानकारी बीते दिनों कृषि मंत्रालय की तरफ से दी गई है.
बिहार में बन रही सूखे की संभावनाओं के मद्देनजर बिहार सरकार अलर्ट मोड में आ गई है. इस संबंध में मुख्य सचिव आमिर सुबहानी की अध्यक्षता में आपदा प्रबंंधन समूह ने बीते दिनों एक समीक्षा बैठक बुलाई थी. देश में धान की खेती मानसून आधारित है. मसलन देश के कई राज्यों में मानसून की बारिश से ही धान की खेती होती है. लेकिन, इस मानसून सीजन में बारिश बादलों से रूठी हुई नजर आ रही है. आलम यह है कि मानसून के बादल देशभर में छाए हुए हैं. लेकिन, कई जगहों पर बारिश नहीं हो रही है. जिसमें बिहार भी शामिल है. आलम यह है कि अब मानसून की जहां विदाई होने को है. तो वहीं बिहार के कई जिलों में सामान्य से भी साठ फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. जिसके चलते बिहार में सूखे के आसार बन रहे हैं. जिसको लेकर राज्य सरकार अलर्ट मोड में आ गई है. कम बारिश की वजह से बिहार में बन रही सूखे की संभावनाओं के मद्देनजर बिहार सरकार अलर्ट मोड में आ गई है. इस संबंध में मुख्य सचिव आमिर सुबहानी की अध्यक्षता में आपदा प्रबंंधन समूह ने बीते दिनों एक समीक्षा बैठक बुलाई थी. जिसमें कृषि, आपदा प्रबंधन, पशुपालन समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए. बैठक में संभावित सूखे की निगरानी करने का फैसला लिया गया है. इस मानसून सीजन में बिहार गंभीर सूखे का सामना कर रहा है. मसलन इस मानसून सीजन अभी तक बिहार में सामान्य बारिश की तुलना में तकरीबन साठ फीसदी बारिश ही दर्ज की गई है. जिसकी जानकारी समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने मुख्य सचिव को दी है. अधिकारियों ने बताया है कि जून से अब तक राज्य में औसतन छः सौ दो मिमी बारिश होनी चाहिये थी. लेकिन, सिर्फ तीन सौ अठहत्तर मिमी बारिश ही अभी तक हुई है. मानसून सीजन में जून से लेकर अगस्त तक बिहार के पूरे राज्य में औसतन साठ फीसदी ही बारिश दर्ज की गई है. लेकिन, राज्य में ऐसे कई जिले हैं, जहां बारिश का औसतन अनुपात चालीस फीसदी ही रहा है. मसलन इन जिलों में अभी तक सामान्य से साठ फीसदी बारिश दर्ज की गई है. इन जिलों में लखीसराय और भागलपुर शामिल हैं. वहीं कम बारिश की वजह से राज्य के कई जिलों में धान रोपाई भी प्रभावित है. हालांकि किसान भूमिगत जल के सहारे धान की रोपाई कर रहे हैं. लेकिन इस वजह से भूमिगत जल के नीचे जाने की स्थिति बनी हुई है. मानसून सीजन में कम बारिश का सामना बिहार ही नहीं कर रहा है. इस सूची में पूर्वोत्तर के कई अन्य राज्य भी हैं. इस वजह से इस खरीफ सीजन में देश के अंदर धान की बुवाई का रकबा तेरह फीसदी तक घट गया है. इस संबंध की जानकारी बीते दिनों कृषि मंत्रालय की तरफ से दी गई है.
पुरुषों की प्रजनन प्रणाली में मौजूद ग्रंथि पौरुष ग्रंथि यानी प्रोस्टेट में विकसित होने वाले कैंसर को प्रोस्टेट कैंसर कहा जाता है। यह 60 साल से अधिक उम्र वाले लोगों में कैंसर का सबसे प्रमुख प्रकार है। ज्यादातर मामलों में प्रोस्टेट कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है और यहां तक कि कई बार तो इससे किसी प्रकार के लक्षण व अन्य परेशानियां भी नहीं होती हैं। हालांकि, कुछ मामलों में कैंसर आक्रामक होकर गंभीर रूप से बढ़ने लगता है और शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल जाता है। अगर प्रोस्टेट कैंसर से लक्षण हो रहे हैं, तो उनमें आमतौर पर पेशाब में दर्द व अन्य परेशानी होना, पेशाब में खून आना और यौन क्रियाएं सामान्य रूप से न कर पाना आदि शामिल हैं। प्रोस्टेट कैंसर के गंभीर मामलों में प्रोस्टेट से संबंधित हड्डी में भी दर्द हो सकता है। हालांकि 40 साल से कम उम्र वाले लोगों में प्रोस्टेट कैंसर काफी कम देखा जाता है और बढ़ती उम्र के अनुसार इसके विकसित होने के जोखिम भी बढ़ने लगते हैं। इसके ज्यादातर मामले 60 साल से अधिक उम्र वाले लोगों में ही देखे जाते हैं। एसिनर एडीनोकार्सिनोमा - यह प्रोस्टेट कैंसर का सबसे आम प्रकार है, जैसे प्रोस्टेट ग्लैंड में विकसित होने वाला कैंसर। डक्टल एडीनोकार्सिनोमा - यह नलिकाओं (डक्ट) की कोशिकाओं में विकसित होने वाला प्रोस्टेट कैंसर है। यह एसिनर एडीनोकार्सिनोमा की तुलना में तेजी से फैलता है। स्क्वैमस सेल कैंसर - यह प्रोस्टेट ग्लैंड को कवर करने वाली फ्लैट सेल में होता है, यह कैंसर एडीनोकार्सिनोमा से तेजी से फैलता है। ट्रांज़िशनल सेल कैंसर - इसे यूरोथेलियल कैंसर भी कहा जाता है। प्रोस्टेट कैंसर का यह प्रकार उन नलिकाओं में होता है, जो पेशाब को मूत्राशय से बाहर की तरफ ले जाती हैं। ज्यादातर मामलों में यह कैंसर आमतौर पर मूत्राशय में शुरू होता है और धीरे-धीरे प्रोस्टेट तक फैल जाता है। स्मॉल सेल प्रोस्टेट कैंसर - यह पौरुष ग्रंथि के कैंसर का सबसे दुर्लभ और सबसे आक्रामक प्रकार के कैंसरों में से एक है। यह आमतौर पर न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर की श्रेणी में आता है। हड्डी में दर्द (गंभीर मामलों में) ज्यादातर मामलों में प्रोस्टेट कैंसर की शुरूआत में किसी प्रकार के लक्षण नहीं होते हैं और अक्सर किसी और समस्या का निदान के दौरान किए गए रेक्टल एग्जाम, ब्लड टेस्ट, स्कैन या बायोप्सी से इस समस्या का पता लगता है। हालांकि, जब प्रोस्टेट कैंसर काफी गंभीर हो जाता है, तो इससे हड्डी में दर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। डॉक्टर को कब दिखाएं? प्रोस्टेट कैंसर से कई बार किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस नहीं होते हैं, इसलिए नियमित रूप से अपनी स्वास्थ्य जांच कराते रहना चाहिए। इसके अलावा अगर आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए। अफ्रीकी-अमेरिकी पुरुष (एशियाई पुरुषों की तुलना में) इसके अलावा इस पर किए गए कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि धूम्रपान करना, शराब का सेवन करना और यौन संचारित रोग (STD) आदि भी प्रोस्टेट कैंसर होने के खतरे को बढ़ा सकते हैं। अगर प्रोस्टेट कैंसर से किसी प्रकार के लक्षण महसूस नहीं हो रहे हैं, तो कई बार उसका पता लगाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, प्रोस्टेट कैंसर का निदान करने के लिए रेक्टल एग्जाम, प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन (Serum PSA) और ट्यूमर मार्कर आदि प्रोस्टेट कैंसर होने के खतरे को बढ़ा सकती हैं। इन टेस्टों के अलावा प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि करने के लिए प्रोस्टेट की बायोप्सी की जा सकती है, जिसें ग्रंथि के प्रभावित ऊतकों से सैंपल लिया जाता है और लैब में उसकी जांच की जाती है। प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने के लिए बायोप्सी आमतौर पर गुदा के माध्यम से और अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग की मदद से की जाती है। अगर प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि हो जाती है तो एमआरआई भी की जा सकती है, जिसकी मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि कैंसर कहां तक फैल चुका है। इसके अलावा कुछ मामलों में चेस्ट एक्स रे, अल्ट्रासाउंड और बोन स्कैन इमेजिंग स्कैन भी किए जा सकते हैं, ताकि कैंसर के फैलाव का पता लगाया जा सके। सर्जरी - प्रोस्टेट ग्लैंड में मौजूद कैंसर से प्रभावित ऊतकों को निकालने के लिए सर्जरी प्रोसीजर शुरू की जाती है। प्रोस्टेट कैंसर के लिए की जाने वाली सर्जरी पेट में बड़े चीरे से लेकर रोबोटिक मेथड से की जा सकती है। सर्जरी से प्रोस्टेट कैंसर का सफलतापूर्वक इलाज होने की दर काफी अधिक है, लेकिन कुछ मामलों में इससे साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं जैसे यौन क्रियाएं प्रभावित होना और पेशाब संबंधी समस्याएं आदि। रेडियोथेरेपी - प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करने के लिए रेडियोथेरेपी का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। हालांकि, कई बार सामान्य सर्जरी होने के बाद अगर कैंसरयुक्त ऊतक शरीर के अंदर रह गए हैं, तो उन्हें निकालने के लिए भी रेडियोथेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है। हार्मोन थेरेपी - दवाएं जो टेस्टोस्टेरोन लेवल को कम करने का काम करती हैं, उन्हें भी प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करने के लिए एक प्रमुख विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। कीमोथेरेपी - प्रोस्टेट कैंसर के गंभीर मामलों में जब किसी दवा या हार्मोन थेरेपी से रोग को नियंत्रित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसे में कीमोथेरेपी करनी पड़ सकती है। इसमें मरीज को कुछ शक्तिशाली दवाएं दी जाती हैं, जो कैंसर को नष्ट करने और कैंसर को फैलने से रोकने का काम करती हैं।
पुरुषों की प्रजनन प्रणाली में मौजूद ग्रंथि पौरुष ग्रंथि यानी प्रोस्टेट में विकसित होने वाले कैंसर को प्रोस्टेट कैंसर कहा जाता है। यह साठ साल से अधिक उम्र वाले लोगों में कैंसर का सबसे प्रमुख प्रकार है। ज्यादातर मामलों में प्रोस्टेट कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है और यहां तक कि कई बार तो इससे किसी प्रकार के लक्षण व अन्य परेशानियां भी नहीं होती हैं। हालांकि, कुछ मामलों में कैंसर आक्रामक होकर गंभीर रूप से बढ़ने लगता है और शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल जाता है। अगर प्रोस्टेट कैंसर से लक्षण हो रहे हैं, तो उनमें आमतौर पर पेशाब में दर्द व अन्य परेशानी होना, पेशाब में खून आना और यौन क्रियाएं सामान्य रूप से न कर पाना आदि शामिल हैं। प्रोस्टेट कैंसर के गंभीर मामलों में प्रोस्टेट से संबंधित हड्डी में भी दर्द हो सकता है। हालांकि चालीस साल से कम उम्र वाले लोगों में प्रोस्टेट कैंसर काफी कम देखा जाता है और बढ़ती उम्र के अनुसार इसके विकसित होने के जोखिम भी बढ़ने लगते हैं। इसके ज्यादातर मामले साठ साल से अधिक उम्र वाले लोगों में ही देखे जाते हैं। एसिनर एडीनोकार्सिनोमा - यह प्रोस्टेट कैंसर का सबसे आम प्रकार है, जैसे प्रोस्टेट ग्लैंड में विकसित होने वाला कैंसर। डक्टल एडीनोकार्सिनोमा - यह नलिकाओं की कोशिकाओं में विकसित होने वाला प्रोस्टेट कैंसर है। यह एसिनर एडीनोकार्सिनोमा की तुलना में तेजी से फैलता है। स्क्वैमस सेल कैंसर - यह प्रोस्टेट ग्लैंड को कवर करने वाली फ्लैट सेल में होता है, यह कैंसर एडीनोकार्सिनोमा से तेजी से फैलता है। ट्रांज़िशनल सेल कैंसर - इसे यूरोथेलियल कैंसर भी कहा जाता है। प्रोस्टेट कैंसर का यह प्रकार उन नलिकाओं में होता है, जो पेशाब को मूत्राशय से बाहर की तरफ ले जाती हैं। ज्यादातर मामलों में यह कैंसर आमतौर पर मूत्राशय में शुरू होता है और धीरे-धीरे प्रोस्टेट तक फैल जाता है। स्मॉल सेल प्रोस्टेट कैंसर - यह पौरुष ग्रंथि के कैंसर का सबसे दुर्लभ और सबसे आक्रामक प्रकार के कैंसरों में से एक है। यह आमतौर पर न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर की श्रेणी में आता है। हड्डी में दर्द ज्यादातर मामलों में प्रोस्टेट कैंसर की शुरूआत में किसी प्रकार के लक्षण नहीं होते हैं और अक्सर किसी और समस्या का निदान के दौरान किए गए रेक्टल एग्जाम, ब्लड टेस्ट, स्कैन या बायोप्सी से इस समस्या का पता लगता है। हालांकि, जब प्रोस्टेट कैंसर काफी गंभीर हो जाता है, तो इससे हड्डी में दर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। डॉक्टर को कब दिखाएं? प्रोस्टेट कैंसर से कई बार किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस नहीं होते हैं, इसलिए नियमित रूप से अपनी स्वास्थ्य जांच कराते रहना चाहिए। इसके अलावा अगर आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए। अफ्रीकी-अमेरिकी पुरुष इसके अलावा इस पर किए गए कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि धूम्रपान करना, शराब का सेवन करना और यौन संचारित रोग आदि भी प्रोस्टेट कैंसर होने के खतरे को बढ़ा सकते हैं। अगर प्रोस्टेट कैंसर से किसी प्रकार के लक्षण महसूस नहीं हो रहे हैं, तो कई बार उसका पता लगाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, प्रोस्टेट कैंसर का निदान करने के लिए रेक्टल एग्जाम, प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन और ट्यूमर मार्कर आदि प्रोस्टेट कैंसर होने के खतरे को बढ़ा सकती हैं। इन टेस्टों के अलावा प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि करने के लिए प्रोस्टेट की बायोप्सी की जा सकती है, जिसें ग्रंथि के प्रभावित ऊतकों से सैंपल लिया जाता है और लैब में उसकी जांच की जाती है। प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने के लिए बायोप्सी आमतौर पर गुदा के माध्यम से और अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग की मदद से की जाती है। अगर प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि हो जाती है तो एमआरआई भी की जा सकती है, जिसकी मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि कैंसर कहां तक फैल चुका है। इसके अलावा कुछ मामलों में चेस्ट एक्स रे, अल्ट्रासाउंड और बोन स्कैन इमेजिंग स्कैन भी किए जा सकते हैं, ताकि कैंसर के फैलाव का पता लगाया जा सके। सर्जरी - प्रोस्टेट ग्लैंड में मौजूद कैंसर से प्रभावित ऊतकों को निकालने के लिए सर्जरी प्रोसीजर शुरू की जाती है। प्रोस्टेट कैंसर के लिए की जाने वाली सर्जरी पेट में बड़े चीरे से लेकर रोबोटिक मेथड से की जा सकती है। सर्जरी से प्रोस्टेट कैंसर का सफलतापूर्वक इलाज होने की दर काफी अधिक है, लेकिन कुछ मामलों में इससे साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं जैसे यौन क्रियाएं प्रभावित होना और पेशाब संबंधी समस्याएं आदि। रेडियोथेरेपी - प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करने के लिए रेडियोथेरेपी का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। हालांकि, कई बार सामान्य सर्जरी होने के बाद अगर कैंसरयुक्त ऊतक शरीर के अंदर रह गए हैं, तो उन्हें निकालने के लिए भी रेडियोथेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है। हार्मोन थेरेपी - दवाएं जो टेस्टोस्टेरोन लेवल को कम करने का काम करती हैं, उन्हें भी प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करने के लिए एक प्रमुख विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। कीमोथेरेपी - प्रोस्टेट कैंसर के गंभीर मामलों में जब किसी दवा या हार्मोन थेरेपी से रोग को नियंत्रित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसे में कीमोथेरेपी करनी पड़ सकती है। इसमें मरीज को कुछ शक्तिशाली दवाएं दी जाती हैं, जो कैंसर को नष्ट करने और कैंसर को फैलने से रोकने का काम करती हैं।
दरअसल अक्षय कुमार कपिल के शो पर पहुंच चुके हैं और फिल्म का प्रमोशन भी हो रहा है। अक्षय कुमार ने कपिल के शो पर प्रमोशन वाला वीडियो भी शेयर किया है। इस वीडियो में कपिल शर्मा और अक्षय कुमार बातों ही बातों में एक-दूसरे को बेवफा कहने का एक भी मौका नहीं छोड़ते, जिसे सुनकर आपकी हंसी भी छूट जाएगी। लेकिन अंत में वे मुद्दे पर आते हैं और अपने फैन्स से 'बच्चन पांडे' के 'बेवफा' सॉन्ग पर रील्स बनाकर शेयर करने की बातें कह रहे हैं। अक्षय कुमार ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, 'बेवफा. . . यानी धोखेबाज़, सबकी लाइफ में होता है। अभी मेरी लाइफ में धोखेबाज है - कपिल शर्मा। और आपकी? SaareBoloBewafa के साथ रील बनाएं। ज़ोर से बोलो बेवफ़ा ! ' वीडियो के अंत में दोनों 'सारे बोलो बेवफा' बोलते हुए कपिल के स्टेज पर डांस भी करते दिख रहे हैं। अक्षय कुमार की यह फिल्म होली के दिन 18 मार्च को रिलीज़ हो रही है, जिसमें कृति सेनन और जैकलीन फर्नांडिस भी हैं। हाल ही में चर्चा थी कि अक्षय कुमार कपिल से नाराज चल रहे हैं। इसके पीछे की वजह भी सामने आई थी। बताया जा रहा था कि अक्षय अपनी फिल्म 'अतरंगी रे' के प्रमोशन के लिए कपिल के शो पर गए थे, जहां बातों ही बातों में कपिल ने अक्षय की नरेन्द्र मोदी के इंटरव्यू को लेकर खिंचाई की थी। इसके बाद अक्षय ने शो मेकर्स और कपिल से इस वीडियो क्लिप को हटाने की मांग की थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं और बताया जा रहा था कि अक्षय इसी वजह से नाराज चल रहे थे।
दरअसल अक्षय कुमार कपिल के शो पर पहुंच चुके हैं और फिल्म का प्रमोशन भी हो रहा है। अक्षय कुमार ने कपिल के शो पर प्रमोशन वाला वीडियो भी शेयर किया है। इस वीडियो में कपिल शर्मा और अक्षय कुमार बातों ही बातों में एक-दूसरे को बेवफा कहने का एक भी मौका नहीं छोड़ते, जिसे सुनकर आपकी हंसी भी छूट जाएगी। लेकिन अंत में वे मुद्दे पर आते हैं और अपने फैन्स से 'बच्चन पांडे' के 'बेवफा' सॉन्ग पर रील्स बनाकर शेयर करने की बातें कह रहे हैं। अक्षय कुमार ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, 'बेवफा. . . यानी धोखेबाज़, सबकी लाइफ में होता है। अभी मेरी लाइफ में धोखेबाज है - कपिल शर्मा। और आपकी? SaareBoloBewafa के साथ रील बनाएं। ज़ोर से बोलो बेवफ़ा ! ' वीडियो के अंत में दोनों 'सारे बोलो बेवफा' बोलते हुए कपिल के स्टेज पर डांस भी करते दिख रहे हैं। अक्षय कुमार की यह फिल्म होली के दिन अट्ठारह मार्च को रिलीज़ हो रही है, जिसमें कृति सेनन और जैकलीन फर्नांडिस भी हैं। हाल ही में चर्चा थी कि अक्षय कुमार कपिल से नाराज चल रहे हैं। इसके पीछे की वजह भी सामने आई थी। बताया जा रहा था कि अक्षय अपनी फिल्म 'अतरंगी रे' के प्रमोशन के लिए कपिल के शो पर गए थे, जहां बातों ही बातों में कपिल ने अक्षय की नरेन्द्र मोदी के इंटरव्यू को लेकर खिंचाई की थी। इसके बाद अक्षय ने शो मेकर्स और कपिल से इस वीडियो क्लिप को हटाने की मांग की थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं और बताया जा रहा था कि अक्षय इसी वजह से नाराज चल रहे थे।
Don't Miss! बॉक्स ऑफिस पर आमिर खान की फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुई। लंबे अरसे बाद आयी मिस्टर परफेक्शनिस्ट की फिल्म को लेकर काफी उम्मीदें थी लेकिन कई तरह की विवादों से घिरी इस फिल्म को लेकर दर्शकों के समूह ने सोशल मीडिया पर बॉयकट ट्रेंड किया जिसका असर फिल्म के प्रदर्शन पर पड़ा। रिपोर्ट्स की माने तो करीब ढाई साल में बनी आमिर खान की फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' के नुकसान की कुछ हद तक भरपाई करने की जिम्मेदारी आमिर खान ने खुद उठाया है। बताया जाता है कि फिल्म के सह-निर्माता होने के कारण आमिर खान ने डिस्ट्रिब्यूटर्स को मुआवजा देने के बारे में सोच रहे हैं। आमिर खान के अलावा कई और बॉलीवुड स्टार्स ने फिल्म के फ्लॉप होने पर डिस्ट्रिब्यूटर्स के नुकसान की भरपाई करते हुए रुपये वापस लौटाये हैं। आमिर खान से पहले शाहरुख खान ने भी यह काम किया था। बादशाह खान ने अपनी फिल्म 'दिलवाले' की नुकसान की भरपाई करते हुए डिस्ट्रीब्यूटर्स को 50 प्रतिशत रुपये वापस लौटाये थे। लंबे समय बाद एसआरके और काजोल की जोड़ी इस फिल्म में एक साथ नजर आयी थी। लेकिन फिल्म ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया। फिल्म में शाहरुख खान और काजोल के अलावा वरुण धवन और कृति सैनन की जोड़ी भी नजर आयी थी। फिल्म 'दिलवाले' से पहले शाहरुख खान ने फिल्म 'जब हैरी मेट सेजल' के समय भी डिस्ट्रीब्यूटर्स को रुपये वापस लौटाये थे। 'रब ने बना दी जोड़ी' और 'जब तक है जान' के बाद शाहरुख के साथ अनुष्का शर्मा की यह तीसरी फिल्म थी। इम्तियाज अली की यह फिल्म रोमांटिक कॉमेडी थी। सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म 'बाबा' 15 अगस्त 2002 को रिलीज हुई थी। यह फिल्म थिएटर में कब आयी और कब गयी, किसी को पता भी नहीं चल पाया था। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म के धराशायी होने के बाद रजनीकांत ने डिस्ट्रीब्यूटर्स को रुपये वापस लौटाये थे। यह बात अक्षय कुमार ने सबके सामने लाया था। साउथ के सुपरस्टार पिता-पुत्र की जोड़ी चिरंजीवी-रामचरण ने भी अपनी फिल्म के फ्लॉप होने पर ऐसा किया था। फिल्म 'आचार्य' में पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने साथ में काम किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म के फ्लॉप होने पर उसकी जिम्मेदारी खुद पर लेते हुए इस सुपरस्टार जोड़ी ने डिस्ट्रीब्यूटर्स को रुपये वापस लौटा दिये थे। रामचरण की मल्टीस्टारर फिल्म आरआरआर के बाद ही यह फिल्म रिलीज हुई थी लेकिन इसने सफलता का स्वाद नहीं चखा। बॉलीवुड के भाईजान सलमान खान की दरियादिली के कई किस्से हमेशा सुनने को मिलते रहते हैं। रिपोर्ट की मानें तो अपनी फिल्म 'ट्यूबलाइट' के फ्लॉप होने के बाद डिस्ट्रीब्यूटर्स को रुपये वापस लौटा दिये थे। कबीर खान निर्देशित यह फिल्म साल 2017 में रिलीज हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर पायी थी। हालांकि समीक्षकों ने फिल्म की तारीफ की थी।
Don't Miss! बॉक्स ऑफिस पर आमिर खान की फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुई। लंबे अरसे बाद आयी मिस्टर परफेक्शनिस्ट की फिल्म को लेकर काफी उम्मीदें थी लेकिन कई तरह की विवादों से घिरी इस फिल्म को लेकर दर्शकों के समूह ने सोशल मीडिया पर बॉयकट ट्रेंड किया जिसका असर फिल्म के प्रदर्शन पर पड़ा। रिपोर्ट्स की माने तो करीब ढाई साल में बनी आमिर खान की फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' के नुकसान की कुछ हद तक भरपाई करने की जिम्मेदारी आमिर खान ने खुद उठाया है। बताया जाता है कि फिल्म के सह-निर्माता होने के कारण आमिर खान ने डिस्ट्रिब्यूटर्स को मुआवजा देने के बारे में सोच रहे हैं। आमिर खान के अलावा कई और बॉलीवुड स्टार्स ने फिल्म के फ्लॉप होने पर डिस्ट्रिब्यूटर्स के नुकसान की भरपाई करते हुए रुपये वापस लौटाये हैं। आमिर खान से पहले शाहरुख खान ने भी यह काम किया था। बादशाह खान ने अपनी फिल्म 'दिलवाले' की नुकसान की भरपाई करते हुए डिस्ट्रीब्यूटर्स को पचास प्रतिशत रुपये वापस लौटाये थे। लंबे समय बाद एसआरके और काजोल की जोड़ी इस फिल्म में एक साथ नजर आयी थी। लेकिन फिल्म ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया। फिल्म में शाहरुख खान और काजोल के अलावा वरुण धवन और कृति सैनन की जोड़ी भी नजर आयी थी। फिल्म 'दिलवाले' से पहले शाहरुख खान ने फिल्म 'जब हैरी मेट सेजल' के समय भी डिस्ट्रीब्यूटर्स को रुपये वापस लौटाये थे। 'रब ने बना दी जोड़ी' और 'जब तक है जान' के बाद शाहरुख के साथ अनुष्का शर्मा की यह तीसरी फिल्म थी। इम्तियाज अली की यह फिल्म रोमांटिक कॉमेडी थी। सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म 'बाबा' पंद्रह अगस्त दो हज़ार दो को रिलीज हुई थी। यह फिल्म थिएटर में कब आयी और कब गयी, किसी को पता भी नहीं चल पाया था। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म के धराशायी होने के बाद रजनीकांत ने डिस्ट्रीब्यूटर्स को रुपये वापस लौटाये थे। यह बात अक्षय कुमार ने सबके सामने लाया था। साउथ के सुपरस्टार पिता-पुत्र की जोड़ी चिरंजीवी-रामचरण ने भी अपनी फिल्म के फ्लॉप होने पर ऐसा किया था। फिल्म 'आचार्य' में पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने साथ में काम किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म के फ्लॉप होने पर उसकी जिम्मेदारी खुद पर लेते हुए इस सुपरस्टार जोड़ी ने डिस्ट्रीब्यूटर्स को रुपये वापस लौटा दिये थे। रामचरण की मल्टीस्टारर फिल्म आरआरआर के बाद ही यह फिल्म रिलीज हुई थी लेकिन इसने सफलता का स्वाद नहीं चखा। बॉलीवुड के भाईजान सलमान खान की दरियादिली के कई किस्से हमेशा सुनने को मिलते रहते हैं। रिपोर्ट की मानें तो अपनी फिल्म 'ट्यूबलाइट' के फ्लॉप होने के बाद डिस्ट्रीब्यूटर्स को रुपये वापस लौटा दिये थे। कबीर खान निर्देशित यह फिल्म साल दो हज़ार सत्रह में रिलीज हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर पायी थी। हालांकि समीक्षकों ने फिल्म की तारीफ की थी।
बर्फबारी के दौरान राजधानी वासियों और पर्यटकों को असुविधा न हो इसके लिए निगम प्रशासन ने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी हैं. नगर निगम प्रशासन ने इस बार अक्टूबर में ही बर्फबारी से निपटने के लिए मशीनरी, लेबर और क्रैशर सेंड के लिए टैंडर जारी कर दिए हैं, ताकि समय रहते सभी तैयारियां पूरी हो सके. निगम ने 14 लाख रुपए के टैंडर निकाले हैं, इनमें 5 लाख रुपए बर्फबारी को हटाने के लिए मशीनरी को हायर करने, साढ़े चार लाख रुपए लेबर और चार लाख रुपए की क्रैशर सैंड खरीदने के लिए खर्च किए जाएंगे. निगम प्रशासन ने फिलहाल इन्हें तीन माह के लिए हायर किया है, लेकिन बर्फबारी अधिक समय रहने की सूरत में इनकी सेवाओं को आगे भी जारी रखा जा सकता है. अभी निगम के पास अपनी लेबर और जेसीबी मशीनों के साथ दो छोटे रोबोट भी हैं. जिनकी सहायता से छोटी सड़कों से बर्फ हटाने में बहुत सुविधा होती है. निगम की ओर से निकाले गए टैंडर को भरने के लिए 2 नवंबर तक का समय रखा गया है. नगर निगम मेयर कुसुम सदरेट ने बताया कि बर्फबारी से निपटने और लोगों को दिक्कतों से बचाने के लिए प्रशासन की ओर से वार्ड स्तर नोडल अधिकारियों की तैनाती की जाएगी. बर्फबारी से निपटने के लिए निगम प्रशासन हर बार जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, आईपीएच और लोक निर्माण विभाग के साथ भी रणनीति तैयार करता है. इसको लेकर भी चारों विभागों के बीच में जल्द ही बैठक की जाएगी. इस बैठक में बर्फबारी से किस तरह निपटा जा सके इसके बारे में अधिकारियों की राय और तैयारियों के बारे में चर्चा की जाएगी. .
बर्फबारी के दौरान राजधानी वासियों और पर्यटकों को असुविधा न हो इसके लिए निगम प्रशासन ने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी हैं. नगर निगम प्रशासन ने इस बार अक्टूबर में ही बर्फबारी से निपटने के लिए मशीनरी, लेबर और क्रैशर सेंड के लिए टैंडर जारी कर दिए हैं, ताकि समय रहते सभी तैयारियां पूरी हो सके. निगम ने चौदह लाख रुपए के टैंडर निकाले हैं, इनमें पाँच लाख रुपए बर्फबारी को हटाने के लिए मशीनरी को हायर करने, साढ़े चार लाख रुपए लेबर और चार लाख रुपए की क्रैशर सैंड खरीदने के लिए खर्च किए जाएंगे. निगम प्रशासन ने फिलहाल इन्हें तीन माह के लिए हायर किया है, लेकिन बर्फबारी अधिक समय रहने की सूरत में इनकी सेवाओं को आगे भी जारी रखा जा सकता है. अभी निगम के पास अपनी लेबर और जेसीबी मशीनों के साथ दो छोटे रोबोट भी हैं. जिनकी सहायता से छोटी सड़कों से बर्फ हटाने में बहुत सुविधा होती है. निगम की ओर से निकाले गए टैंडर को भरने के लिए दो नवंबर तक का समय रखा गया है. नगर निगम मेयर कुसुम सदरेट ने बताया कि बर्फबारी से निपटने और लोगों को दिक्कतों से बचाने के लिए प्रशासन की ओर से वार्ड स्तर नोडल अधिकारियों की तैनाती की जाएगी. बर्फबारी से निपटने के लिए निगम प्रशासन हर बार जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, आईपीएच और लोक निर्माण विभाग के साथ भी रणनीति तैयार करता है. इसको लेकर भी चारों विभागों के बीच में जल्द ही बैठक की जाएगी. इस बैठक में बर्फबारी से किस तरह निपटा जा सके इसके बारे में अधिकारियों की राय और तैयारियों के बारे में चर्चा की जाएगी. .
टीवी एक्टर करण ओबेरॉय (Karan Oberoi) पर रेप का आरोप लगा था। इस आरोप के बाद करण को जेल भी जाना पड़ा था लेकिन अब करण ओबेरॉय को बेल मिल गई है। बेल मिलते ही करण ओबेरॉय का इंटरव्यू वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने जेल की आपबीती लोगों के साथ शेयर की। साथ ही बताया कि जेल में उन्हें किस तरह से रहना पड़ा और उनका एक-एक दिन कैसे गुजरा। टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए करण ओबेरॉय ने अपनी आपबीती बताई। करण ने कहा- 'जेल में रहना आसान नहीं है, लेकिन मुझे जो सपोर्ट मिला वह बड़ी ताकत है। पहले दिन वहां गया तो हालात देखकर हैरान रह गया। मैंने 3 दिन पानी पीकर गुजारे। बस बिस्किट खा लेता था। ऐसा इसलिए क्योंकि जो खाना मिल रहा था वो खाना मुश्किल था। मैं इतना परेशान था कि रातभर जागता रहता। ' करण ने आगे कहा- '92 लोगों के लिए एक बाथरूम वो भी कमरे के साथ में बना था। उसकी सफाई हमें ही करनी थी। पानी पर्याप्त नहीं मिलता है। बाथरूम की जगह गटर कहना ही ठीक है। जेल में कुछ चीजें मेरे साथ दिल छू लेने वाली भी हुईं। हमें सोने के लिए बस एक शीट मिलती थी। मेरे लिए सोना मुश्किल था। मेरे सात बंद कैदी अच्छे थे। वो जानते थे कि मैं एक स्टार हूं। वो अपनी चादर का तकिया मेरे लिए बना देते थे। वहां मौजूद लोगों ने बहुद मदद की। यह देखकर दिल भर आया। ' जेल में बिताए समय के बारे में बात करते हुए करण ओबेरॉय ने कहा- 'जैसे फिल्मों में दिखाते हैं, वैसा अंदर नहीं है। कई लोग गलत तरीकों से फंसाए गए हैं। वो पढ़े-लिखे नहीं है। इसलिए उनका केस वैसे ही चल रहा है। जानकारी के मुताबिक इंटरव्यू के दौरान करण भावुक भी हो गए और उनकी आंखों से आंसू निकल आए। इससे पहले भी करण के कई बयान सामने आए थे। आपको बता दें, करण ओबेरॉय पर लड़की ने शादी का झांसा देकर रेप का आरोप लगाया था। लड़की की शिकायत के बाद करण को पुलिस ने कस्टडी में लिया था। पुलिस ने करण को 6 मई को गिरफ्तार किया था। इस मामले के सामने आते ही करण के दोस्तों और परिवारवालों का कहना है कि लड़की झूठ बोल रही है। महिला की शिकायत में अभिनेता पर रेप, वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप है। ओशिवारा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी।
टीवी एक्टर करण ओबेरॉय पर रेप का आरोप लगा था। इस आरोप के बाद करण को जेल भी जाना पड़ा था लेकिन अब करण ओबेरॉय को बेल मिल गई है। बेल मिलते ही करण ओबेरॉय का इंटरव्यू वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने जेल की आपबीती लोगों के साथ शेयर की। साथ ही बताया कि जेल में उन्हें किस तरह से रहना पड़ा और उनका एक-एक दिन कैसे गुजरा। टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए करण ओबेरॉय ने अपनी आपबीती बताई। करण ने कहा- 'जेल में रहना आसान नहीं है, लेकिन मुझे जो सपोर्ट मिला वह बड़ी ताकत है। पहले दिन वहां गया तो हालात देखकर हैरान रह गया। मैंने तीन दिन पानी पीकर गुजारे। बस बिस्किट खा लेता था। ऐसा इसलिए क्योंकि जो खाना मिल रहा था वो खाना मुश्किल था। मैं इतना परेशान था कि रातभर जागता रहता। ' करण ने आगे कहा- 'बानवे लोगों के लिए एक बाथरूम वो भी कमरे के साथ में बना था। उसकी सफाई हमें ही करनी थी। पानी पर्याप्त नहीं मिलता है। बाथरूम की जगह गटर कहना ही ठीक है। जेल में कुछ चीजें मेरे साथ दिल छू लेने वाली भी हुईं। हमें सोने के लिए बस एक शीट मिलती थी। मेरे लिए सोना मुश्किल था। मेरे सात बंद कैदी अच्छे थे। वो जानते थे कि मैं एक स्टार हूं। वो अपनी चादर का तकिया मेरे लिए बना देते थे। वहां मौजूद लोगों ने बहुद मदद की। यह देखकर दिल भर आया। ' जेल में बिताए समय के बारे में बात करते हुए करण ओबेरॉय ने कहा- 'जैसे फिल्मों में दिखाते हैं, वैसा अंदर नहीं है। कई लोग गलत तरीकों से फंसाए गए हैं। वो पढ़े-लिखे नहीं है। इसलिए उनका केस वैसे ही चल रहा है। जानकारी के मुताबिक इंटरव्यू के दौरान करण भावुक भी हो गए और उनकी आंखों से आंसू निकल आए। इससे पहले भी करण के कई बयान सामने आए थे। आपको बता दें, करण ओबेरॉय पर लड़की ने शादी का झांसा देकर रेप का आरोप लगाया था। लड़की की शिकायत के बाद करण को पुलिस ने कस्टडी में लिया था। पुलिस ने करण को छः मई को गिरफ्तार किया था। इस मामले के सामने आते ही करण के दोस्तों और परिवारवालों का कहना है कि लड़की झूठ बोल रही है। महिला की शिकायत में अभिनेता पर रेप, वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप है। ओशिवारा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी।
त्यूणी- मोरी पुरोला मार्ग के कई डेंजर प्वाइंटों पर क्रश बैरियर नहीं हैं। कई स्थान ऐसे हैं, जहां पर क्रश बैरियर न होने से हादसे हो चुके हैं। ग्रामीणों ने लोनिवि के ईई को पत्र भेजकर डेंजर प्वाइंटों पर क्रेश बैरियर लगाने की मांग की है। पत्र भेजने वालों में ग्रामीण रामलाल सेमवाल, सोनू नायक, रोशन, सुरेन्द्र, रमेश, नारायण चंद, अमित डोभाल, मुन्ना डोभाल आदि शामिल रहे।
त्यूणी- मोरी पुरोला मार्ग के कई डेंजर प्वाइंटों पर क्रश बैरियर नहीं हैं। कई स्थान ऐसे हैं, जहां पर क्रश बैरियर न होने से हादसे हो चुके हैं। ग्रामीणों ने लोनिवि के ईई को पत्र भेजकर डेंजर प्वाइंटों पर क्रेश बैरियर लगाने की मांग की है। पत्र भेजने वालों में ग्रामीण रामलाल सेमवाल, सोनू नायक, रोशन, सुरेन्द्र, रमेश, नारायण चंद, अमित डोभाल, मुन्ना डोभाल आदि शामिल रहे।
लॉस एंजिल्स में नृत्य "ऑस्कर" समारोह के बाद, कई प्रसिद्ध अभिनेता विभिन्न परियोजनाओं में अपना काम जारी रखने के लिए सेट पर गए। अलग नहीं रहे और 50 वर्षीय निकोल किडमैन, जो वर्तमान में टेप "गोल्डफिंच" टेप करने में लगे हुए हैं। पेंटिंग पर काम न्यूयॉर्क के दिल में होता है और यह आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि फिल्म के कार्य वहां प्रकट हो रहे हैं। कैमरे से पहले, साथ ही साथ पापराज़ी जो शूटिंग प्रक्रिया के पास कर्तव्य पर थे, निकोल किडमैन बहुत नाजुक तरीके से दिखाई दिए। अभिनेत्री पर आप घुटनों के लिए एक हल्की फिट पोशाक, फास्टनर और बिना भूरे रंग के भूरे रंग के जूते के बिना एक भूरे रंग के कोट को देख सकते थे। इस तस्वीर में, एक 50 वर्षीय फिल्म स्टार श्रीमती बारबोर द्वारा खेला जाता है - एंडी की मां, नायक थिओडोर डेकर का सबसे अच्छा दोस्त। किडमैन के अलावा, संवाददाताओं ने एक और बहुत ही रोचक अभिनेत्री पर ध्यान आकर्षित किया। सारा पॉलसन, जो शेंगल को ज़ेंडर की प्रेमिका के रूप में निभाते हैं, ने भी इस फिल्म में अभिनय किया। लड़की पर कपड़े से नीली जींस, एक काला स्वेटर और ऑबर्जिन रंग का एक विशाल जैकेट देखना संभव था। 2013 में "गोल्डफिंच" का काम दिखाई दिया, जब लेखक डोना टार्ट ने इसे प्रकाशन के लिए प्रकाशन घर में प्रस्तुत किया। लगभग तुरंत इस पुस्तक ने प्रशंसकों की एक बड़ी संख्या जीती, और आलोचकों ने शेलग्लो को उच्च सम्मान में रखा। अगर हम साजिश के बारे में बात करते हैं, तो पुस्तक से फिल्म लगभग समान है। वह 20 वीं शताब्दी में दर्शक को विसर्जित करता है, जब थियोडोर डेकर नामक एक 13 वर्षीय किशोरी को एक भयानक त्रासदी का सामना करना पड़ रहा है। न्यू यॉर्क के मेट्रोपॉलिटन संग्रहालय में वह अपनी मां के साथ है, जब एक आतंकवादी हमला होता है। वहां, सदमे की स्थिति में, लड़के पुराने आदमी को मलबे के नीचे नोटिस करता है, जो "गोल्डफिनच" नामक करेल फैब्रिकियस द्वारा सबसे महंगी और प्रसिद्ध चित्रों में से एक को बचाने के लिए कहता है। थियोडोर कला के इस टुकड़े को उसके साथ ले जाता है और फिर अपनी कहानी "खजाना" के साथ शुरू करता है कि वह अपने पूरे जीवन को पूरा करेगा। लड़का एक पुराने न्यूयॉर्क प्राचीन वस्तु विशेषज्ञ से मिलने शुरू होता है जो उसे इस व्यवसाय की भूमिगत दुनिया में पेश करता है। इसके अलावा, दर्शक थियोडोर का पहला प्यार, पहला विश्वासघात और बहुत कुछ देखेंगे।
लॉस एंजिल्स में नृत्य "ऑस्कर" समारोह के बाद, कई प्रसिद्ध अभिनेता विभिन्न परियोजनाओं में अपना काम जारी रखने के लिए सेट पर गए। अलग नहीं रहे और पचास वर्षीय निकोल किडमैन, जो वर्तमान में टेप "गोल्डफिंच" टेप करने में लगे हुए हैं। पेंटिंग पर काम न्यूयॉर्क के दिल में होता है और यह आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि फिल्म के कार्य वहां प्रकट हो रहे हैं। कैमरे से पहले, साथ ही साथ पापराज़ी जो शूटिंग प्रक्रिया के पास कर्तव्य पर थे, निकोल किडमैन बहुत नाजुक तरीके से दिखाई दिए। अभिनेत्री पर आप घुटनों के लिए एक हल्की फिट पोशाक, फास्टनर और बिना भूरे रंग के भूरे रंग के जूते के बिना एक भूरे रंग के कोट को देख सकते थे। इस तस्वीर में, एक पचास वर्षीय फिल्म स्टार श्रीमती बारबोर द्वारा खेला जाता है - एंडी की मां, नायक थिओडोर डेकर का सबसे अच्छा दोस्त। किडमैन के अलावा, संवाददाताओं ने एक और बहुत ही रोचक अभिनेत्री पर ध्यान आकर्षित किया। सारा पॉलसन, जो शेंगल को ज़ेंडर की प्रेमिका के रूप में निभाते हैं, ने भी इस फिल्म में अभिनय किया। लड़की पर कपड़े से नीली जींस, एक काला स्वेटर और ऑबर्जिन रंग का एक विशाल जैकेट देखना संभव था। दो हज़ार तेरह में "गोल्डफिंच" का काम दिखाई दिया, जब लेखक डोना टार्ट ने इसे प्रकाशन के लिए प्रकाशन घर में प्रस्तुत किया। लगभग तुरंत इस पुस्तक ने प्रशंसकों की एक बड़ी संख्या जीती, और आलोचकों ने शेलग्लो को उच्च सम्मान में रखा। अगर हम साजिश के बारे में बात करते हैं, तो पुस्तक से फिल्म लगभग समान है। वह बीस वीं शताब्दी में दर्शक को विसर्जित करता है, जब थियोडोर डेकर नामक एक तेरह वर्षीय किशोरी को एक भयानक त्रासदी का सामना करना पड़ रहा है। न्यू यॉर्क के मेट्रोपॉलिटन संग्रहालय में वह अपनी मां के साथ है, जब एक आतंकवादी हमला होता है। वहां, सदमे की स्थिति में, लड़के पुराने आदमी को मलबे के नीचे नोटिस करता है, जो "गोल्डफिनच" नामक करेल फैब्रिकियस द्वारा सबसे महंगी और प्रसिद्ध चित्रों में से एक को बचाने के लिए कहता है। थियोडोर कला के इस टुकड़े को उसके साथ ले जाता है और फिर अपनी कहानी "खजाना" के साथ शुरू करता है कि वह अपने पूरे जीवन को पूरा करेगा। लड़का एक पुराने न्यूयॉर्क प्राचीन वस्तु विशेषज्ञ से मिलने शुरू होता है जो उसे इस व्यवसाय की भूमिगत दुनिया में पेश करता है। इसके अलावा, दर्शक थियोडोर का पहला प्यार, पहला विश्वासघात और बहुत कुछ देखेंगे।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
एपिसोड 6 ( खुनी की तलाश ) जहाँ एक तरफ माया कूद को बचाने के रस्ते पर थी , वहीँ यहाँ ऑफिस मैं शौर्य को उस इन्सान का स्केच मिल गया था , जिसने पार्सल ऑफिस मैं पहुंचाया था । शौर्य , राजीव से कहता है ,, शौर्य : इस सकत वो वहां मिलेगा । इसका कपि एड्रेस ? या फ़ोन नम्बर । कुछ है क्या ? हमारे पास ? पूरी घर की दीवारें लाल थी । खून की बु पुरे घर मे फेली हुए थी । शौर्य बहुत ध्यान से घर को देख रहा था । वो इमागिन कर रहा था की यहाँ क्या क्या हुआ होगा । बच्चों की तस्वीरें , दीवारों पर लगी थी । वो बोला : सीन 3 ( ऑफिस मैं ) शौर्य : तो तुम्हारे बाद , किसकी शिफ्ट थी ? क्या उसने माया का पिचा किया ? उदय : पतानी सर । मैंने बहुत देर वेट किया था । पर मुझे ब्यूरो मैं रिपोर्ट करना था । तो मुझे जाना पड़ा । पर इ थिंक । तब तक माया की शिफ्ट भी खत्म हो चुकी थी । उसके बाद , वो घर ही गईं होंगी न ? शौर्य : ( घम्भीर आवाज़ मैं ) माया कहाँ है ? राजीव : देख , हमे तेरे सारे काले कारनामों के बारे मैं पता है । हमे पता है , की तुम पहले भी जेल जा चूका है । किसी के कत्ल के जुर्म मैं । तो ज्यादा मासूम बन्ने की जरूरत नहीं है । चुपचाप बता दे , की माया कहाँ है ? शौर्य : देखो , उदय । क्या ये व्ही आदमी है । जिसके साथ माया , उस घर मैं गई थी ?
एपिसोड छः जहाँ एक तरफ माया कूद को बचाने के रस्ते पर थी , वहीँ यहाँ ऑफिस मैं शौर्य को उस इन्सान का स्केच मिल गया था , जिसने पार्सल ऑफिस मैं पहुंचाया था । शौर्य , राजीव से कहता है ,, शौर्य : इस सकत वो वहां मिलेगा । इसका कपि एड्रेस ? या फ़ोन नम्बर । कुछ है क्या ? हमारे पास ? पूरी घर की दीवारें लाल थी । खून की बु पुरे घर मे फेली हुए थी । शौर्य बहुत ध्यान से घर को देख रहा था । वो इमागिन कर रहा था की यहाँ क्या क्या हुआ होगा । बच्चों की तस्वीरें , दीवारों पर लगी थी । वो बोला : सीन तीन शौर्य : तो तुम्हारे बाद , किसकी शिफ्ट थी ? क्या उसने माया का पिचा किया ? उदय : पतानी सर । मैंने बहुत देर वेट किया था । पर मुझे ब्यूरो मैं रिपोर्ट करना था । तो मुझे जाना पड़ा । पर इ थिंक । तब तक माया की शिफ्ट भी खत्म हो चुकी थी । उसके बाद , वो घर ही गईं होंगी न ? शौर्य : माया कहाँ है ? राजीव : देख , हमे तेरे सारे काले कारनामों के बारे मैं पता है । हमे पता है , की तुम पहले भी जेल जा चूका है । किसी के कत्ल के जुर्म मैं । तो ज्यादा मासूम बन्ने की जरूरत नहीं है । चुपचाप बता दे , की माया कहाँ है ? शौर्य : देखो , उदय । क्या ये व्ही आदमी है । जिसके साथ माया , उस घर मैं गई थी ?
women wrestlers writes to PM Modi राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई चैंपियनशिप की पदक विजेताओं सहित कई महिला पहलवानों ने प्रदर्शन करने वाले छह पहलवानों को छूट दिए जाने की खबरों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारतीय ओलंपिक संघ (आइओए) और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआइ) को पत्र लिखा है। उन्होंने एशियाई खेलों के लिए निष्पक्ष ट्रायल्स कराने की मांग की है। नई दिल्ली, प्रिंटः राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई चैंपियनशिप की पदक विजेताओं सहित कई महिला पहलवानों ने प्रदर्शन करने वाले छह पहलवानों को छूट दिए जाने की खबरों के बीच गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भारतीय ओलंपिक संघ (आइओए) और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआइ) को चलाने वाली तदर्थ समिति को पत्र लिखकर एशियाई खेलों के लिए निष्पक्ष ट्रायल्स कराने की मांग की। रोहतक के सर छोटूराम अखाड़े की 24 महिला पहलवानों ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के महानिदेशक संदीप प्रधान को भी पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने कहा है कि वह दो चरण के ट्रायल या प्रदर्शनकारी पहलवानों को मिलने वाली छूट को स्वीकार नहीं करेंगे। आइओए द्वारा नियुक्त तदर्थ समिति ने 22 और 23 जुलाई को एशियाई खेलों के लिए ट्रायल्स कराने की घोषणा की है लेकिन इसके लिए क्या मानदंड अपनाए जाएंगे इसका रहस्योद्घाटन नहीं किया।
women wrestlers writes to PM Modi राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई चैंपियनशिप की पदक विजेताओं सहित कई महिला पहलवानों ने प्रदर्शन करने वाले छह पहलवानों को छूट दिए जाने की खबरों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारतीय ओलंपिक संघ और भारतीय कुश्ती महासंघ को पत्र लिखा है। उन्होंने एशियाई खेलों के लिए निष्पक्ष ट्रायल्स कराने की मांग की है। नई दिल्ली, प्रिंटः राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई चैंपियनशिप की पदक विजेताओं सहित कई महिला पहलवानों ने प्रदर्शन करने वाले छह पहलवानों को छूट दिए जाने की खबरों के बीच गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भारतीय ओलंपिक संघ और भारतीय कुश्ती महासंघ को चलाने वाली तदर्थ समिति को पत्र लिखकर एशियाई खेलों के लिए निष्पक्ष ट्रायल्स कराने की मांग की। रोहतक के सर छोटूराम अखाड़े की चौबीस महिला पहलवानों ने भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक संदीप प्रधान को भी पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने कहा है कि वह दो चरण के ट्रायल या प्रदर्शनकारी पहलवानों को मिलने वाली छूट को स्वीकार नहीं करेंगे। आइओए द्वारा नियुक्त तदर्थ समिति ने बाईस और तेईस जुलाई को एशियाई खेलों के लिए ट्रायल्स कराने की घोषणा की है लेकिन इसके लिए क्या मानदंड अपनाए जाएंगे इसका रहस्योद्घाटन नहीं किया।
स्वतन्त्रता पूर्व से ही प्रान्त में महिला षिक्षा के प्रति उदासीनता रही है, जिसको ध्यान में रखते हुए सरकार की �"र से महिला महाविद्यालयों की स्थापना समय-समय पर की जाती रही है। मात्र 6 वर्ष पहले शुरू हुए कॉलेज को सरवाड़ में होना ही इस क्षेत्र के लिए किसी वरदान से कम नही है। जरूरत है राज्य सरकार की इस पहल का भरपूर लाभ उठाने की। सामान्य तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावक इस कारण भी अपनी बेटियों को उच्च षिक्षा से वंचित कर देते है कि लड़कियों के लिए अलग से कॉलेज नही है। सरवाड़ क्षेत्र के पहले महिला कॉलेज की स्थापना इसलिए भी अहम है कि राज्य सरकार ने महिला षिक्षा को बढ़ावा देने की इच्छा से बहुत सी सुविधाए दे रखी हैं। परिणामस्वरूप बहुत कम शुल्क में बेहतर सुविधाएँ �"र प्रषिक्षित स्टाफ द्वारा प्रदत्त षिक्षण छात्रा�"ं की समझ �"र व्यक्तित्व को तराषने का काम करेगा। इस महाविद्यालय में षिक्षण के साथ-साथ छात्रा�"ं के सर्वांगीण विकास के लिए षिक्षणेतर गतिविधियों का संचालन भी किया जाता है। महिला-प्रकोष्ठ, युवा विकास केंद्र, सांस्कृतिक गतिविधियाँ, खेलकूद, विषय विषेषज्ञों के व्याख्यान,रोजगारसलाह संबंधी व्याख्यान (कुटीर उद्योग) आदि द्वारा छात्रा�"ं के चहुॅमुखी विकास के अनेक अवसर प्रदान किए जाते है। महाविद्यालय परिवार में अनुषासन एवं सौहार्द्र पूर्ण वातावरण के लिए हम सभी प्रतिबद्ध हैं।
स्वतन्त्रता पूर्व से ही प्रान्त में महिला षिक्षा के प्रति उदासीनता रही है, जिसको ध्यान में रखते हुए सरकार की �"र से महिला महाविद्यालयों की स्थापना समय-समय पर की जाती रही है। मात्र छः वर्ष पहले शुरू हुए कॉलेज को सरवाड़ में होना ही इस क्षेत्र के लिए किसी वरदान से कम नही है। जरूरत है राज्य सरकार की इस पहल का भरपूर लाभ उठाने की। सामान्य तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावक इस कारण भी अपनी बेटियों को उच्च षिक्षा से वंचित कर देते है कि लड़कियों के लिए अलग से कॉलेज नही है। सरवाड़ क्षेत्र के पहले महिला कॉलेज की स्थापना इसलिए भी अहम है कि राज्य सरकार ने महिला षिक्षा को बढ़ावा देने की इच्छा से बहुत सी सुविधाए दे रखी हैं। परिणामस्वरूप बहुत कम शुल्क में बेहतर सुविधाएँ �"र प्रषिक्षित स्टाफ द्वारा प्रदत्त षिक्षण छात्रा�"ं की समझ �"र व्यक्तित्व को तराषने का काम करेगा। इस महाविद्यालय में षिक्षण के साथ-साथ छात्रा�"ं के सर्वांगीण विकास के लिए षिक्षणेतर गतिविधियों का संचालन भी किया जाता है। महिला-प्रकोष्ठ, युवा विकास केंद्र, सांस्कृतिक गतिविधियाँ, खेलकूद, विषय विषेषज्ञों के व्याख्यान,रोजगारसलाह संबंधी व्याख्यान आदि द्वारा छात्रा�"ं के चहुॅमुखी विकास के अनेक अवसर प्रदान किए जाते है। महाविद्यालय परिवार में अनुषासन एवं सौहार्द्र पूर्ण वातावरण के लिए हम सभी प्रतिबद्ध हैं।
मुंबई। दीपिका पादुकोण और शाहरुख खान 'पठान' फिल्म का पहला गाना 'बेशरम रंग' रिलीज इस समय सुर्खियों में बना हुआ है. इस गाने में दीपिका ने भगवा बिकिनी पहनकर बवाल कर दिया है. धार्मिक संगठनों के अलावा राजनीतिक और बॉलीवुड के कुछ हस्तियों ने भी गाने को लेकर खूब शोर मचाया है. संगठनों ने इस फिल्म के मेकर्स और दीपिका पर भगवा रंग का अपमान करने का आरोप लगाया है. अब सेंसर बोर्ड ने गाने में बदलाव करने का निर्देश दिया है. इन्हीं सब के बीच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और बिग बॉस ओटीटी की फेम उर्फी जावेद ने भगवा रंग की हॉट ड्रेस पहनकर वीडियो शूट करके इंस्टाग्राम पर डाला है. इस नए वीडियो में उर्फी भगवा रंग की मिनी स्कर्ट और रिवीलिंग क्रॉप टॉप पहन कर मुबंई की सड़क पर चलती हुई दिखाई दे रही हैं. वी़डियो के बैक ग्राउंड में 'बेशरम रंग' का गाना बजते हुए सुना जा सकता है. उर्फी ने अपने इस लुक को भगवा रंग की हिल पहन कर अपने लुक को पूरा किया है. उर्फी का यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है. नेटिजेन्स उनके आउटफिट के साथ-साथ उनके लुक को लेकर भड़क उठे हैं. लोगों को कहना है कि उर्फी बस विवाद खड़ा करने और अटेंशन पाने के लिए ये सब कर ही हैं. उर्फी के वीडियो पोस्ट पर एक यूजर ने उन्होंने ट्रोल करते हुए लिखा- 'अरे कोई और रंग नहीं था क्या. . कम से कम भगवा रंग का लिहाज रख लेती. ' एक दूसरे ने लिखा- 'बस कंट्रोवर्सी के लिए भगवा रंग कपड़े पहने हैं. . अटेंशन चाहिए बस'. तीसरे ने लिखा- 'तुम्हें तो कूट दिया पुलिस वालों ने. . ये जान बूझ के ऑरेंज रंग पहनना इसने'.
मुंबई। दीपिका पादुकोण और शाहरुख खान 'पठान' फिल्म का पहला गाना 'बेशरम रंग' रिलीज इस समय सुर्खियों में बना हुआ है. इस गाने में दीपिका ने भगवा बिकिनी पहनकर बवाल कर दिया है. धार्मिक संगठनों के अलावा राजनीतिक और बॉलीवुड के कुछ हस्तियों ने भी गाने को लेकर खूब शोर मचाया है. संगठनों ने इस फिल्म के मेकर्स और दीपिका पर भगवा रंग का अपमान करने का आरोप लगाया है. अब सेंसर बोर्ड ने गाने में बदलाव करने का निर्देश दिया है. इन्हीं सब के बीच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और बिग बॉस ओटीटी की फेम उर्फी जावेद ने भगवा रंग की हॉट ड्रेस पहनकर वीडियो शूट करके इंस्टाग्राम पर डाला है. इस नए वीडियो में उर्फी भगवा रंग की मिनी स्कर्ट और रिवीलिंग क्रॉप टॉप पहन कर मुबंई की सड़क पर चलती हुई दिखाई दे रही हैं. वी़डियो के बैक ग्राउंड में 'बेशरम रंग' का गाना बजते हुए सुना जा सकता है. उर्फी ने अपने इस लुक को भगवा रंग की हिल पहन कर अपने लुक को पूरा किया है. उर्फी का यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है. नेटिजेन्स उनके आउटफिट के साथ-साथ उनके लुक को लेकर भड़क उठे हैं. लोगों को कहना है कि उर्फी बस विवाद खड़ा करने और अटेंशन पाने के लिए ये सब कर ही हैं. उर्फी के वीडियो पोस्ट पर एक यूजर ने उन्होंने ट्रोल करते हुए लिखा- 'अरे कोई और रंग नहीं था क्या. . कम से कम भगवा रंग का लिहाज रख लेती. ' एक दूसरे ने लिखा- 'बस कंट्रोवर्सी के लिए भगवा रंग कपड़े पहने हैं. . अटेंशन चाहिए बस'. तीसरे ने लिखा- 'तुम्हें तो कूट दिया पुलिस वालों ने. . ये जान बूझ के ऑरेंज रंग पहनना इसने'.
गणेश चतुर्थी का पवित्र पर्व 2 सितंबर यानी आज से शुरू हो गया है. इस मौके पर बॉलीवुड सितारों समेत टीवी एक्टर्स भी भक्ति और जश्न में नजर आ रहे हैं. गणेश पर्व के मौके पर सेलेब्स अपने घर गणपति बप्पा की मूर्तियां स्थापित कर रहे हैं. इन्हीं में से एक टीवी एक्ट्रेस निया शर्मा भी हैं. निया की प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो उन्हें एक हजारों में मेरी बहना से पॉपुलैरिटी मिली थी. इसके बाद निया जमाई राजा में भी नजर आई थीं. निया शर्मा को खतरों के खिलाड़ी शो में मुश्किल स्टंट करते भी देखा गया था.
गणेश चतुर्थी का पवित्र पर्व दो सितंबर यानी आज से शुरू हो गया है. इस मौके पर बॉलीवुड सितारों समेत टीवी एक्टर्स भी भक्ति और जश्न में नजर आ रहे हैं. गणेश पर्व के मौके पर सेलेब्स अपने घर गणपति बप्पा की मूर्तियां स्थापित कर रहे हैं. इन्हीं में से एक टीवी एक्ट्रेस निया शर्मा भी हैं. निया की प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो उन्हें एक हजारों में मेरी बहना से पॉपुलैरिटी मिली थी. इसके बाद निया जमाई राजा में भी नजर आई थीं. निया शर्मा को खतरों के खिलाड़ी शो में मुश्किल स्टंट करते भी देखा गया था.
हाँ, क्या नहीं किया इसके लिए मैंने, कि जिसका हो मुझको अफसोस, जानते हैं वो लोग भी, कि मैं भूल गया था तब अपनों को भी, और मुझको धुन थी रणजीत बनने की। हाँ, क्या नहीं किया इसके लिए मैंने, अपने पसीने से बुझाई थी मैंने, इस जमीं की प्यास, तब महके हैं ये फूल, और अपने आँसुओं से जलाये थे मैंने, ये सारे चिराग जो बुझे हुए थे। हाँ, क्या नहीं किया इसके लिए मैंने, लिखी थी मैंने अपने खून से शपथ, कि अबकी बार मेरी जीत होगी, अब सभी को हैरानी है, यह कौन सा शौक है मेरा, क्यों मैं भूल गया हूँ , अपने सारे रिश्तों को, और मिल रहा है मुझको सुकून, सिर्फ इन्हीं का दिल जीतकर, किस- किससे लड़ा था मैं, जी.आज़ाद होने के लिए। हाँ, क्या नहीं किया इसके लिए मैंने---------------।।
हाँ, क्या नहीं किया इसके लिए मैंने, कि जिसका हो मुझको अफसोस, जानते हैं वो लोग भी, कि मैं भूल गया था तब अपनों को भी, और मुझको धुन थी रणजीत बनने की। हाँ, क्या नहीं किया इसके लिए मैंने, अपने पसीने से बुझाई थी मैंने, इस जमीं की प्यास, तब महके हैं ये फूल, और अपने आँसुओं से जलाये थे मैंने, ये सारे चिराग जो बुझे हुए थे। हाँ, क्या नहीं किया इसके लिए मैंने, लिखी थी मैंने अपने खून से शपथ, कि अबकी बार मेरी जीत होगी, अब सभी को हैरानी है, यह कौन सा शौक है मेरा, क्यों मैं भूल गया हूँ , अपने सारे रिश्तों को, और मिल रहा है मुझको सुकून, सिर्फ इन्हीं का दिल जीतकर, किस- किससे लड़ा था मैं, जी.आज़ाद होने के लिए। हाँ, क्या नहीं किया इसके लिए मैंने---------------।।
Criminals: सनकी आशिक, कुकर में माशूका ! मोबाइल में कैद मौत का राज़! ? । Crime News । Crime StoryNews 18 देश और प्रदेश के लिए न्यूज 18 की खास पेशकश Criminals Show. इस कार्यक्रम में हम देश और प्रदेश के में घटने वाली हर जुल्म की कहानी और ताजा घटना आपतक पहुंचाते हैं ताकि आप सतर्क रहे और अपने आसपास के हो रहे अपराध को रोक सकें. आज के इस खास कार्यक्रम में देखिए क्राइम की सबसे ताजा खबरें. Anju Nasrullah Love Story । बेटी के पाकिस्तान पहुंचकर शादी करने की खबरों पर क्या बोले अंजू के पिता ? PM Modi Bharat Mandapam : पीएम मोदी की गारंटी, 'मेरे तीसरे टर्म में 3rd नंबर पर होगी देश की इकोनॉमी' Anju Nasrullah Love Story । बेटी के पाकिस्तान पहुंचकर शादी करने की खबरों पर क्या बोले अंजू के पिता ? PM Modi Bharat Mandapam : पीएम मोदी की गारंटी, 'मेरे तीसरे टर्म में 3rd नंबर पर होगी देश की इकोनॉमी'
Criminals: सनकी आशिक, कुकर में माशूका ! मोबाइल में कैद मौत का राज़! ? । Crime News । Crime StoryNews अट्ठारह देश और प्रदेश के लिए न्यूज अट्ठारह की खास पेशकश Criminals Show. इस कार्यक्रम में हम देश और प्रदेश के में घटने वाली हर जुल्म की कहानी और ताजा घटना आपतक पहुंचाते हैं ताकि आप सतर्क रहे और अपने आसपास के हो रहे अपराध को रोक सकें. आज के इस खास कार्यक्रम में देखिए क्राइम की सबसे ताजा खबरें. Anju Nasrullah Love Story । बेटी के पाकिस्तान पहुंचकर शादी करने की खबरों पर क्या बोले अंजू के पिता ? PM Modi Bharat Mandapam : पीएम मोदी की गारंटी, 'मेरे तीसरे टर्म में तीनrd नंबर पर होगी देश की इकोनॉमी' Anju Nasrullah Love Story । बेटी के पाकिस्तान पहुंचकर शादी करने की खबरों पर क्या बोले अंजू के पिता ? PM Modi Bharat Mandapam : पीएम मोदी की गारंटी, 'मेरे तीसरे टर्म में तीनrd नंबर पर होगी देश की इकोनॉमी'
दीपचन्द्र ने भी इस छन्द को पर्याप्त परिवर्तन के साथ अपनी पूजा काव्यकृतियों में व्यवहार किया है। इन सभी पूजारचयिताओं ने इस छंद को शांतरस के परिपाक में प्रयोग किया है । चौपाईचौपाई साविक महत्व का एक है। अपभ्रंश में पहरिया पुद मैं चौपाईका आदिन रूप विद्यमान है। अपभ्रंश को कड़क शैली जब हिन्दी में अवतरित हुई तो पद्धरिया छंद के स्थान पर चौपाई छंद गृहीत हुआ है। चौपाई छंद सामान्यतः वर्णनात्मक है अतः इस छंद में सभी रसों का निर्वाह महज रूप में हो जाता है । कयाकाव्यों में इस घंद को लोकप्रियता का मुख्य कारण यही है । जैन - हिन्दी-पूजा-काव्य में इस छंद के दर्शन अठारहवीं शती से होते हैं। अगरवीं शती के कविवर धानतराव ने 'श्री निर्वाणक्षेत्र पूजा' नामक कृति में इस छंद का व्यवहार सफलतापूर्वक किया है। १. श्री बाहुबलि पूजा, दीपचन्द, संगृहीतग्रंथ - नित्य नियन विशेष पूजन संग्रहः सम्पा० व प्रकाशिका०पासवाई जैन, गया (बिहार), संवत २४०७, पृष्ठ ६२ । हिन्दी साहित्य को प्रथम मार्ग, वर्ना आदि प्रकाशकज्ञानमहल लिमिटेड, बनारस, संस्क० संवत् २०१५, पृष्ठ २२० काऊंश के महाकाव्य, अपभ्रंश भाषा और साहित्य डा० हीरालाल, लेख प्रकाशित नागरी प्रचारिणी पत्रिका, हिन्दी जैन भक्तिकार और कवि, डा०प्रेम सागर जी जैन, प्रकाशन भारतीय ज्ञानीठ, दुर्गाकुण्ड रोड, वाराणसी-५, पृष्ठ ४६६। ४. जैन साहित्य को हिन्दी साहित्य को देन, डा० रामसिंह तोमर, प्रेमी अभिनंदन ग्रंथ प्रकाशक यशपाल जैन मंत्री, प्रेमी अभिनंदन ग्रंय समिति, टीकमगढ़ ( डी० आई० ), संस्कृत अक्टूबर १९४६, पृ० ४६८ । ५. नमों कृपसर्कलास पहारं, नेमिनाथ गिरनार निहारं । वासुपूज्य चंपापुर बंदो, उन्नति पावापुर अभिनंदी ॥ श्री निर्माण क्षेत्र पूजा, ध्यानतराय, संगृहीतप्रय - राजेश नित्य पूजा पाठ संग्रह प्रकाशक - राजेन्द्र मैटिल वर्क्स, हरिनगर, अलीगढ़, संस्करण १९७६, पृष्ठ ३७३ । उन्नीसवीं शती में रामचन्द्र, वख्तावररत्न , कमलनयन और मल्लजो विरचित पूजा कृतियों में भी यह छंद व्यवहत है। चीसवीं शती के रविमल, हीराचंद, नेम, रघुसुत, १. श्री सम्मेदशिखर पूजा, रामचन्द्र, सगृहीतग्रंथ - जैन पूजापाठ संग्रह, प्रकाशक - भागचन्द्र पाटनी, न० ६२, नलिनी सेठ रोड, कलकत्ता-७, पृष्ठ १२५ । २. भ्रमर सावन दशमी गाइयो, कृप मात श्रीकांता आइयो । धन्द देव आय वरपा करी, हम जजें धन मान वही घरी ॥ - श्री कुंथुनाथ जिनपूजा, वख्तावररत्न, संगृहीतग्रंथ - ज्ञानपीठ पूजांजलि, प्रकाशक - अयोध्याप्रसाद गौयलीय, मत्री, भारतीय ज्ञानपीठ, दुर्गाकुण्ड रोड, वनारस, संस्करण १६५७ ई०, पृष्ठ ५४४ १ श्री पंचकल्याणक पूजापाठ, कमलनयन, हस्तलिखित । श्री क्षमावाणी पूजा, मल्लजी, सगृहीतग्रंथ - ज्ञानपीठ पूजांजलि, दुर्गाकुण्ड रोड, वनारस, संस्करण १६५ ई०, पृष्ठ ४०२ । खण्डधातु गिरि अचल जू मेरु, दक्षिण तास भरत बहु घेरु । तामें चौबीसी त्रय जान, आगत नागत अरु वर्तमान ।। श्री तीसचोवीसी पूजा, रविमल, संगृहीतग्रंथ जैन पूजापाठ संग्रह, प्रकाशक भागचन्द्र पाटनी, न० ६२, नलिनी सेठ रोड, कलकत्ता-७, पृष्ठ २४७ । ६. श्री चतुर्विंशति तीर्थंकर समुच्चय पूजा, हीराचंद, संगृहीतग्रंथ - नित्य नियम विशेष पूजन संग्रह, सम्पा० व प्रकाशिका व्र० पतासीवाई जैन, गया ( विहार ), पृष्ठ ७१ । ७. श्री अकृत्रिम चैत्यालय पूजा, नेम, संगृहीतग्रंथ जैन पूजा पाठ संग्रह, प्रकाशक भागचन्द्र पाटनी, नं० ६२, नलिनी सेठ रोड, कलकत्ता-७, पृष्ठ २५१ : ८. श्री विष्णु कुमार महाराज पूजा, रघुसुत, संगृहीतग्रंथ - राजेश नित्य पूजा पाठ संग्रह, राजेन्द्र मेटिल वर्क्स, हरिनगर, अलीगढ़, संस्क० १९७६, पृष्ठ ३६७ ।
दीपचन्द्र ने भी इस छन्द को पर्याप्त परिवर्तन के साथ अपनी पूजा काव्यकृतियों में व्यवहार किया है। इन सभी पूजारचयिताओं ने इस छंद को शांतरस के परिपाक में प्रयोग किया है । चौपाईचौपाई साविक महत्व का एक है। अपभ्रंश में पहरिया पुद मैं चौपाईका आदिन रूप विद्यमान है। अपभ्रंश को कड़क शैली जब हिन्दी में अवतरित हुई तो पद्धरिया छंद के स्थान पर चौपाई छंद गृहीत हुआ है। चौपाई छंद सामान्यतः वर्णनात्मक है अतः इस छंद में सभी रसों का निर्वाह महज रूप में हो जाता है । कयाकाव्यों में इस घंद को लोकप्रियता का मुख्य कारण यही है । जैन - हिन्दी-पूजा-काव्य में इस छंद के दर्शन अठारहवीं शती से होते हैं। अगरवीं शती के कविवर धानतराव ने 'श्री निर्वाणक्षेत्र पूजा' नामक कृति में इस छंद का व्यवहार सफलतापूर्वक किया है। एक. श्री बाहुबलि पूजा, दीपचन्द, संगृहीतग्रंथ - नित्य नियन विशेष पूजन संग्रहः सम्पाशून्य व प्रकाशिकाशून्यपासवाई जैन, गया , संवत दो हज़ार चार सौ सात, पृष्ठ बासठ । हिन्दी साहित्य को प्रथम मार्ग, वर्ना आदि प्रकाशकज्ञानमहल लिमिटेड, बनारस, संस्कशून्य संवत् दो हज़ार पंद्रह, पृष्ठ दो सौ बीस काऊंश के महाकाव्य, अपभ्रंश भाषा और साहित्य डाशून्य हीरालाल, लेख प्रकाशित नागरी प्रचारिणी पत्रिका, हिन्दी जैन भक्तिकार और कवि, डाशून्यप्रेम सागर जी जैन, प्रकाशन भारतीय ज्ञानीठ, दुर्गाकुण्ड रोड, वाराणसी-पाँच, पृष्ठ चार सौ छयासठ। चार. जैन साहित्य को हिन्दी साहित्य को देन, डाशून्य रामसिंह तोमर, प्रेमी अभिनंदन ग्रंथ प्रकाशक यशपाल जैन मंत्री, प्रेमी अभिनंदन ग्रंय समिति, टीकमगढ़ , संस्कृत अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ छियालीस, पृशून्य चार सौ अड़सठ । पाँच. नमों कृपसर्कलास पहारं, नेमिनाथ गिरनार निहारं । वासुपूज्य चंपापुर बंदो, उन्नति पावापुर अभिनंदी ॥ श्री निर्माण क्षेत्र पूजा, ध्यानतराय, संगृहीतप्रय - राजेश नित्य पूजा पाठ संग्रह प्रकाशक - राजेन्द्र मैटिल वर्क्स, हरिनगर, अलीगढ़, संस्करण एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर, पृष्ठ तीन सौ तिहत्तर । उन्नीसवीं शती में रामचन्द्र, वख्तावररत्न , कमलनयन और मल्लजो विरचित पूजा कृतियों में भी यह छंद व्यवहत है। चीसवीं शती के रविमल, हीराचंद, नेम, रघुसुत, एक. श्री सम्मेदशिखर पूजा, रामचन्द्र, सगृहीतग्रंथ - जैन पूजापाठ संग्रह, प्रकाशक - भागचन्द्र पाटनी, नशून्य बासठ, नलिनी सेठ रोड, कलकत्ता-सात, पृष्ठ एक सौ पच्चीस । दो. भ्रमर सावन दशमी गाइयो, कृप मात श्रीकांता आइयो । धन्द देव आय वरपा करी, हम जजें धन मान वही घरी ॥ - श्री कुंथुनाथ जिनपूजा, वख्तावररत्न, संगृहीतग्रंथ - ज्ञानपीठ पूजांजलि, प्रकाशक - अयोध्याप्रसाद गौयलीय, मत्री, भारतीय ज्ञानपीठ, दुर्गाकुण्ड रोड, वनारस, संस्करण एक हज़ार छः सौ सत्तावन ईशून्य, पृष्ठ पाँच सौ चौंतालीस एक श्री पंचकल्याणक पूजापाठ, कमलनयन, हस्तलिखित । श्री क्षमावाणी पूजा, मल्लजी, सगृहीतग्रंथ - ज्ञानपीठ पूजांजलि, दुर्गाकुण्ड रोड, वनारस, संस्करण एक सौ पैंसठ ईशून्य, पृष्ठ चार सौ दो । खण्डधातु गिरि अचल जू मेरु, दक्षिण तास भरत बहु घेरु । तामें चौबीसी त्रय जान, आगत नागत अरु वर्तमान ।। श्री तीसचोवीसी पूजा, रविमल, संगृहीतग्रंथ जैन पूजापाठ संग्रह, प्रकाशक भागचन्द्र पाटनी, नशून्य बासठ, नलिनी सेठ रोड, कलकत्ता-सात, पृष्ठ दो सौ सैंतालीस । छः. श्री चतुर्विंशति तीर्थंकर समुच्चय पूजा, हीराचंद, संगृहीतग्रंथ - नित्य नियम विशेष पूजन संग्रह, सम्पाशून्य व प्रकाशिका व्रशून्य पतासीवाई जैन, गया , पृष्ठ इकहत्तर । सात. श्री अकृत्रिम चैत्यालय पूजा, नेम, संगृहीतग्रंथ जैन पूजा पाठ संग्रह, प्रकाशक भागचन्द्र पाटनी, नंशून्य बासठ, नलिनी सेठ रोड, कलकत्ता-सात, पृष्ठ दो सौ इक्यावन : आठ. श्री विष्णु कुमार महाराज पूजा, रघुसुत, संगृहीतग्रंथ - राजेश नित्य पूजा पाठ संग्रह, राजेन्द्र मेटिल वर्क्स, हरिनगर, अलीगढ़, संस्कशून्य एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर, पृष्ठ तीन सौ सरसठ ।
अधिकतर मामलों में ये बैक्टीरिया गले में ही रहता है और इसके लक्षण बहुत सामान्य होते हैं। डिप्थीरिया के लक्षण विषाक्त पदार्थों के कारण पैदा होते हैं और ये रक्त वाहिकाओं के जरिए पूरे शरीर में फैल जाते हैं। डिप्थीरिया से ग्रस्त होने पर श्वसन मार्ग बुरी तरह से प्रभावित हो जाता है। इसकी वजह से बुखार, भूख कम लगना, गले में खराश, सिरदर्द और गर्दन में सूजन रहती है। आप घरेलू नुस्खों से भी इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। अनानास का ताजा रस पीने से गले में जो कुछ भी जमा होता है, वो निकल जाता है जिससे संक्रमण के लक्षणों में सुधार आता है। चूंकि, अनानास के जूस में बीटा-कैरोटीन होता है इसलिए ये डिप्थीरिया का असरकारी उपाय है। तुलसी की पत्तियां भी स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं। इसके एंटीबैक्टीरियल गुण श्वसन मार्ग से जुड़े संक्रमणों के इलाज में मदद करती हैं। एक गिलास पानी में आप तुलसी की पत्तियों को डालें और इस पानी को पी लें। इस उपाय से डिप्थीरिया से काफी राहत मिलती है। इनमें एंटी-इंंफ्लामेट्री और एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं जो कि डिप्थीरिया की स्थिति का इलाज करने में असरकारी रूप से मदद कर सकते हैं। कुछ अरंडी की पत्तियां लें और उन्हें पीस लें। आप चाहें तो इसमें कुछ सहजन की पत्तियां भी डाल सकते हैं। अब इसमें लहसुन का रस डालकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को सूंघने से नासिका मार्ग साफ हो जाता है और डिप्थीरिया के मरीजों को राहत मिलती है। गले में खराश के लिए नमक बहुत बढिया उपाय है। एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच नमक डालकर गरारे करें। ये नुस्खा शरीर में नमक की कमी के कारण होने वाली सांस से जुड़ी समस्याओं के इलाज में भी मददगार है। डिप्थीरिया से ग्रस्त व्यक्ति को कुछ अच्छी आदतें अपनानी चाहिए, जैसे कि : - खूब पानी पिएं। - पर्याप्त आराम करें। - हाथ ठीक तरह से धोएं। - अपने आहार में मुलायम चीजों और तरल पदार्थों को शामिल करें। इस प्रकार इन घरेलू नुस्खों की मदद से आप काफी हद तक डिप्थीरिया से छुटकारा पा सकते हैं और सबसे खास बात है कि उपरोक्त प्राकृतिक चीजों का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है।
अधिकतर मामलों में ये बैक्टीरिया गले में ही रहता है और इसके लक्षण बहुत सामान्य होते हैं। डिप्थीरिया के लक्षण विषाक्त पदार्थों के कारण पैदा होते हैं और ये रक्त वाहिकाओं के जरिए पूरे शरीर में फैल जाते हैं। डिप्थीरिया से ग्रस्त होने पर श्वसन मार्ग बुरी तरह से प्रभावित हो जाता है। इसकी वजह से बुखार, भूख कम लगना, गले में खराश, सिरदर्द और गर्दन में सूजन रहती है। आप घरेलू नुस्खों से भी इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। अनानास का ताजा रस पीने से गले में जो कुछ भी जमा होता है, वो निकल जाता है जिससे संक्रमण के लक्षणों में सुधार आता है। चूंकि, अनानास के जूस में बीटा-कैरोटीन होता है इसलिए ये डिप्थीरिया का असरकारी उपाय है। तुलसी की पत्तियां भी स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं। इसके एंटीबैक्टीरियल गुण श्वसन मार्ग से जुड़े संक्रमणों के इलाज में मदद करती हैं। एक गिलास पानी में आप तुलसी की पत्तियों को डालें और इस पानी को पी लें। इस उपाय से डिप्थीरिया से काफी राहत मिलती है। इनमें एंटी-इंंफ्लामेट्री और एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं जो कि डिप्थीरिया की स्थिति का इलाज करने में असरकारी रूप से मदद कर सकते हैं। कुछ अरंडी की पत्तियां लें और उन्हें पीस लें। आप चाहें तो इसमें कुछ सहजन की पत्तियां भी डाल सकते हैं। अब इसमें लहसुन का रस डालकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को सूंघने से नासिका मार्ग साफ हो जाता है और डिप्थीरिया के मरीजों को राहत मिलती है। गले में खराश के लिए नमक बहुत बढिया उपाय है। एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच नमक डालकर गरारे करें। ये नुस्खा शरीर में नमक की कमी के कारण होने वाली सांस से जुड़ी समस्याओं के इलाज में भी मददगार है। डिप्थीरिया से ग्रस्त व्यक्ति को कुछ अच्छी आदतें अपनानी चाहिए, जैसे कि : - खूब पानी पिएं। - पर्याप्त आराम करें। - हाथ ठीक तरह से धोएं। - अपने आहार में मुलायम चीजों और तरल पदार्थों को शामिल करें। इस प्रकार इन घरेलू नुस्खों की मदद से आप काफी हद तक डिप्थीरिया से छुटकारा पा सकते हैं और सबसे खास बात है कि उपरोक्त प्राकृतिक चीजों का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है।
अक्सर देखा गया है कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं की पहली पसंद सरकारी बैंक में नौकरी होती है। अच्छी सैलरी, स्थायित्व व अन्य सुविधाएं इसे बेहतरीन नौकरियों में से एक बनाते हैं। इसीलिए हर साल लाखों छात्र सरकारी बैंक में नौकरी के लिए आवेदन करते हैं। अगर आप भी सरकारी बैंक में नौकरी करने का सपना देख रहे हैं तो आपके पास भी एक सुनहरा मौका है। भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक में पीओ पद के लिए रिक्तियां जारी की गई हैं। एसबीआईपीओ के 2000 पदों के लिएअधिसूचना 13 नवंबर 2020 को जारी की गई थी। जिसके आवेदन की अंतिम तिथि 4 दिसंबर है। इसकी प्रीपरीक्षा 31 दिसम्बर और 2, 4, व 5 जनवरी को होगी। जिसका परिणाम जनवरी के तीसरे सप्ताह में घोषित किया जाएगा। मेन्स परीक्षा 29 जनवरी 2021 को होगी। एसबीआई में पीओ की नौकरी अन्य बैंको की अपेक्षा काफी बेहतरीन होती है। इसे एक प्रीमियम नौकरी माना जाता है। एसबीआई एक बैंक से बढ़कर एक ब्रांड बन चुका है। इसमें नौकरी करने वाले हर व्यक्ति को काफी सम्मान प्राप्त होता है। एसबीआई पीओ की परीक्षा काफी अच्छे स्तर की होती है। परीक्षा में लगभग 1 महीने का ही समय शेष है, ऐसे में तैयारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। आखिरी समय में एक्सपर्ट्स के मार्गदर्शन में की गई पढ़ाई अच्छे परिणाम लेकर आती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए safalta. com ने 21 दिनों का खास SBI PO 2020 सुपरबैच लॉन्च किया है। रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
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जोडा है आगरा केेलिये बैराज की आवाज से । स्ट्रोक 'पड गया और उन्हें उपचार के लिये दिल्ली के 'मैक्स अस्पताल' में भर्ती करवाया गया है। शीत लहर के दौर में भी डाक्टरों की हिदायत को दरकिनार कर 'जल प्रबंधन के प्रति जनजागरण' अभियान को लेकर सक्रिय थे। श्री उपाध्याय को पहले आगरा में ही उपाध्याय नर्सिग होम में भर्ती करवाया गया फिर बैहतर सुविधाओं की संभावना को दृष्टिगत दिल्ली ले जाया गया।
जोडा है आगरा केेलिये बैराज की आवाज से । स्ट्रोक 'पड गया और उन्हें उपचार के लिये दिल्ली के 'मैक्स अस्पताल' में भर्ती करवाया गया है। शीत लहर के दौर में भी डाक्टरों की हिदायत को दरकिनार कर 'जल प्रबंधन के प्रति जनजागरण' अभियान को लेकर सक्रिय थे। श्री उपाध्याय को पहले आगरा में ही उपाध्याय नर्सिग होम में भर्ती करवाया गया फिर बैहतर सुविधाओं की संभावना को दृष्टिगत दिल्ली ले जाया गया।
मोहाली, (भाषा)। आखिरी दस ओवरों में तूफानी बल्लेबाजी और फिर कसी हुई गेंदबाजी के दम पर किंग्स इलेवन पंजाब ने आज यहां कोलकाता नाइटराइडर्स को 14 रन से हराकर आईपीएल दस के प्लेआफ में पहुंचने की अपनी उम्मीदों को जीवंत बनाये रखा। किंग्स इलेवन ने धीमी शुरूआत के बावजूद कप्तान ग्लेन मैक्सवेल ः 25 गेंदों पर 44 ः और विकेटकीपर बल्लेबाज रिद्विमान साहा ः 33 गेंदों पर 38 रन ः की पारियों से छह विकेट पर 167 रन बनाये। उसने आखिरी दस ओवरों में 104 रन "ाsके। केकेआर की तरफ से क्रिस वोक्स ने चार ओवर में 20 रन देकर दो विकेट जबकि स्पिनर कुलदीप यादव ने तीन ओवर में 34 रन देकर दो विकेट हासिल किये। क्रिस लिन ने 52 गेंदों पर आ" चौकों और तीन छक्कों की मदद से 84 रन बनाये लेकिन किंग्स इलेवन के गेंदबाजों की तारीफ करनी होगी जिन्होंने कसी हुई गेंदबाजी करके केकेआर के अन्य बल्लेबाजों को खुलकर नहीं खेलने दिया। यहां तक कि बीच में उन्होंने लिन पर भी लगाम कसे रखी जिससे केकेआर आखिर में छह विकेट पर 153 रन तक पही पहुंच पाया। किंग्स इलेवन की यह केकेआर के खिलाफ लगातार चार हार के बाद पहली जीत है। उसकी तरफ से लेग स्पिनर राहुल तेवतिया ने चार ओवर में 18 रन देकर दो और तेज गेंदबाज मोहित शर्मा ने 24 रन देकर दो विकेट लिये। यह किंग्स इलेवन की 12वें मैच में छ"ाr जीत है जिससे उसके 12 अंक हो गये हैं। उसे प्लेआफ में पहुंचने के अभी अपने अगले दोनों मैच भी जीतने होंगे और बाकी मैचों में भी अनुकूल परिणाम की उम्मीद रखनी होगी। केकेआर की यह 13 मैचों में पांचवीं हार है हालांकि वह 16 अंकों के साथ अब भी अंकतालिका में दूसरे स्थान पर बना हुआ है। इस हार से केकेआर की शीर्ष दो में जगह बनाने की राह थोड़ा क"िन हो गयी है। यही नहीं तीन प्लेआफ स्थानों के लिये चार टीमों केकेआर, किंग्स इलेवन, राइजिंग पुणे सुपरजाइंट और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मुकाबला पहले की तरह बना हुआ है। सुनील नारायण ः 18 ः ने हमेशा की तरह शुरू में ही बड़े शाट खेलने शुरू किये। उन्होंने संदीप शर्मा की पहली दो गेंदों पर चौके लगाये लेकिन मोहित शर्मा ने पारी के चौथे ओवर में आफ कटर पर उनका विकेट थर्रा दिया। दूसरे छोर से हालांकि लिन ने ताबड़तोड़ रन बनाने शुरू कर दिये थे। अक्षर पटेल पर दो चौके तथा मैट हेनरी पर चौका और छक्का लगाकर वह पावरप्ले में टीम का स्कोर 61 रन तक ले गये। इसके बाद अगले छह ओवर तक गेंद सीमा रेखा तक नहीं पहुंची। इस बीच केवल 25 रन बने जबकि लेग स्पिनर तेवतिया के एक ओवर में कप्तान गौतम गंभीर और रोबिन उथप्पा ः शून्य ः पवेलियन लौटे। गंभीर ने 18 गेंदों पर सिर्फ आ" रन बनाये। लिन ने 29 गेंदों पर अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने ही स्वप्निल सिंह की पारी के 13वें ओवर की पांचवीं गेंद छक्के के लिये भेजकर बल्लेबाजों की चुप्पी तोड़ी। लिन ने इसके बाद पटेल की गेंद भी छह रन के लिये भेजी। मनीष पांडे ः 23 गेंदों पर 18 रनः के साथ उन्होंने चौथे विकेट के लिये 52 रन जोड़े। इसके तुरंत बाद वह रन आउट हो गये जिससे केकेआर की उम्मीदों को करारा झटका लगा। केकेआर को आखिरी दो ओवर में 29 रन की दरकार थी, लेकिन यूसुफ प"ान ः दो ः फिर से उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। वोक्स ने छक्का जड़कर कुछ उम्मीद जगायी लेकिन तब भी अंतिम ओवर में 20 रन चाहिए थे। संदीप शर्मा ने इस ओवर में केवल पांच रन दिये। इससे पहले किंग्स इलेवन ने टास गंवाने के बाद पहले बल्लेबाजी का न्यौता मिलने पर अपेक्षाकृत धीमी शुरूआत की और इसके बाद उसने 17 रन के अंदर मनन वोहरा ः 25 ः, मार्टिन गुप्टिल ः 12 ः और शान मार्श ः 11 ः के विकेट गंवा दिये। मैक्सवेल और साहा ने चौथे विकेट के लिये सात ओवरों में 71 रन की साझेदारी की। वोहरा ने पावरप्ले में रन बनाने की बीड़ा उ"ाया लेकिन उमेश यादव ः 26 रन देकर एक ः पर दो चौके जड़ने के बाद वह इसी गेंदबाज की उ"ती गेंद पर विकेट के पीछे कैच दे बै"s। सुनील नारायण ः 27 रन देकर एक ः ने गुप्टिल के संघर्ष का अंत किया जबकि वोक्स ने गुडलेंथ गेंद पर मार्श की गिल्लियां बिखेरी। पहले दस ओवर के बाद स्कोर तीन विकेट पर 63 रन था। मैक्सवेल ने अगले ओवर में कोलिन डि ग्रैंडहोम पर दो छक्के जड़कर किंग्स इलेवन के समर्थकों में कुछ जान भरी। इसके बाद उन्होंने चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप की गेंदों पर मिडविकेट क्षेत्र में दो गगनदायी छक्के लगाये लेकिन तीसरी गेंद गुगली थी जिसे वह हवा में लहरा गये और लांग आफ पर वोक्स ने उसे बड़ी खूबसूरती से कैच में बदल दिया। कुलदीप ने अगले ओवर में साहा को भी छक्का जड़ने का मजा चखाया। इस बार भी गेंद गुगली थी जिसे साहा नहीं समझ पाये और रोबिन उथप्पा ने उन्हें स्टंप आउट करने में देर नहीं लगायी। साहा ने दो चौके और एक छक्का लगाया। वोक्स ने स्वप्निल सिंह ः दो ः को आते ही पवेलियन की राह दिखायी। तेवतिया 15 और अक्षर पटेल आ" रन बनाकर नाबाद रहे।
मोहाली, । आखिरी दस ओवरों में तूफानी बल्लेबाजी और फिर कसी हुई गेंदबाजी के दम पर किंग्स इलेवन पंजाब ने आज यहां कोलकाता नाइटराइडर्स को चौदह रन से हराकर आईपीएल दस के प्लेआफ में पहुंचने की अपनी उम्मीदों को जीवंत बनाये रखा। किंग्स इलेवन ने धीमी शुरूआत के बावजूद कप्तान ग्लेन मैक्सवेल ः पच्चीस गेंदों पर चौंतालीस ः और विकेटकीपर बल्लेबाज रिद्विमान साहा ः तैंतीस गेंदों पर अड़तीस रन ः की पारियों से छह विकेट पर एक सौ सरसठ रन बनाये। उसने आखिरी दस ओवरों में एक सौ चार रन "ाsके। केकेआर की तरफ से क्रिस वोक्स ने चार ओवर में बीस रन देकर दो विकेट जबकि स्पिनर कुलदीप यादव ने तीन ओवर में चौंतीस रन देकर दो विकेट हासिल किये। क्रिस लिन ने बावन गेंदों पर आ" चौकों और तीन छक्कों की मदद से चौरासी रन बनाये लेकिन किंग्स इलेवन के गेंदबाजों की तारीफ करनी होगी जिन्होंने कसी हुई गेंदबाजी करके केकेआर के अन्य बल्लेबाजों को खुलकर नहीं खेलने दिया। यहां तक कि बीच में उन्होंने लिन पर भी लगाम कसे रखी जिससे केकेआर आखिर में छह विकेट पर एक सौ तिरेपन रन तक पही पहुंच पाया। किंग्स इलेवन की यह केकेआर के खिलाफ लगातार चार हार के बाद पहली जीत है। उसकी तरफ से लेग स्पिनर राहुल तेवतिया ने चार ओवर में अट्ठारह रन देकर दो और तेज गेंदबाज मोहित शर्मा ने चौबीस रन देकर दो विकेट लिये। यह किंग्स इलेवन की बारहवें मैच में छ"ाr जीत है जिससे उसके बारह अंक हो गये हैं। उसे प्लेआफ में पहुंचने के अभी अपने अगले दोनों मैच भी जीतने होंगे और बाकी मैचों में भी अनुकूल परिणाम की उम्मीद रखनी होगी। केकेआर की यह तेरह मैचों में पांचवीं हार है हालांकि वह सोलह अंकों के साथ अब भी अंकतालिका में दूसरे स्थान पर बना हुआ है। इस हार से केकेआर की शीर्ष दो में जगह बनाने की राह थोड़ा क"िन हो गयी है। यही नहीं तीन प्लेआफ स्थानों के लिये चार टीमों केकेआर, किंग्स इलेवन, राइजिंग पुणे सुपरजाइंट और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मुकाबला पहले की तरह बना हुआ है। सुनील नारायण ः अट्ठारह ः ने हमेशा की तरह शुरू में ही बड़े शाट खेलने शुरू किये। उन्होंने संदीप शर्मा की पहली दो गेंदों पर चौके लगाये लेकिन मोहित शर्मा ने पारी के चौथे ओवर में आफ कटर पर उनका विकेट थर्रा दिया। दूसरे छोर से हालांकि लिन ने ताबड़तोड़ रन बनाने शुरू कर दिये थे। अक्षर पटेल पर दो चौके तथा मैट हेनरी पर चौका और छक्का लगाकर वह पावरप्ले में टीम का स्कोर इकसठ रन तक ले गये। इसके बाद अगले छह ओवर तक गेंद सीमा रेखा तक नहीं पहुंची। इस बीच केवल पच्चीस रन बने जबकि लेग स्पिनर तेवतिया के एक ओवर में कप्तान गौतम गंभीर और रोबिन उथप्पा ः शून्य ः पवेलियन लौटे। गंभीर ने अट्ठारह गेंदों पर सिर्फ आ" रन बनाये। लिन ने उनतीस गेंदों पर अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने ही स्वप्निल सिंह की पारी के तेरहवें ओवर की पांचवीं गेंद छक्के के लिये भेजकर बल्लेबाजों की चुप्पी तोड़ी। लिन ने इसके बाद पटेल की गेंद भी छह रन के लिये भेजी। मनीष पांडे ः तेईस गेंदों पर अट्ठारह रनः के साथ उन्होंने चौथे विकेट के लिये बावन रन जोड़े। इसके तुरंत बाद वह रन आउट हो गये जिससे केकेआर की उम्मीदों को करारा झटका लगा। केकेआर को आखिरी दो ओवर में उनतीस रन की दरकार थी, लेकिन यूसुफ प"ान ः दो ः फिर से उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। वोक्स ने छक्का जड़कर कुछ उम्मीद जगायी लेकिन तब भी अंतिम ओवर में बीस रन चाहिए थे। संदीप शर्मा ने इस ओवर में केवल पांच रन दिये। इससे पहले किंग्स इलेवन ने टास गंवाने के बाद पहले बल्लेबाजी का न्यौता मिलने पर अपेक्षाकृत धीमी शुरूआत की और इसके बाद उसने सत्रह रन के अंदर मनन वोहरा ः पच्चीस ः, मार्टिन गुप्टिल ः बारह ः और शान मार्श ः ग्यारह ः के विकेट गंवा दिये। मैक्सवेल और साहा ने चौथे विकेट के लिये सात ओवरों में इकहत्तर रन की साझेदारी की। वोहरा ने पावरप्ले में रन बनाने की बीड़ा उ"ाया लेकिन उमेश यादव ः छब्बीस रन देकर एक ः पर दो चौके जड़ने के बाद वह इसी गेंदबाज की उ"ती गेंद पर विकेट के पीछे कैच दे बै"s। सुनील नारायण ः सत्ताईस रन देकर एक ः ने गुप्टिल के संघर्ष का अंत किया जबकि वोक्स ने गुडलेंथ गेंद पर मार्श की गिल्लियां बिखेरी। पहले दस ओवर के बाद स्कोर तीन विकेट पर तिरेसठ रन था। मैक्सवेल ने अगले ओवर में कोलिन डि ग्रैंडहोम पर दो छक्के जड़कर किंग्स इलेवन के समर्थकों में कुछ जान भरी। इसके बाद उन्होंने चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप की गेंदों पर मिडविकेट क्षेत्र में दो गगनदायी छक्के लगाये लेकिन तीसरी गेंद गुगली थी जिसे वह हवा में लहरा गये और लांग आफ पर वोक्स ने उसे बड़ी खूबसूरती से कैच में बदल दिया। कुलदीप ने अगले ओवर में साहा को भी छक्का जड़ने का मजा चखाया। इस बार भी गेंद गुगली थी जिसे साहा नहीं समझ पाये और रोबिन उथप्पा ने उन्हें स्टंप आउट करने में देर नहीं लगायी। साहा ने दो चौके और एक छक्का लगाया। वोक्स ने स्वप्निल सिंह ः दो ः को आते ही पवेलियन की राह दिखायी। तेवतिया पंद्रह और अक्षर पटेल आ" रन बनाकर नाबाद रहे।
BAREILLY: इसी तेजी से नाथ नगरी एयरपोर्ट का निर्माण होता रहा तो उम्मीद है कि सितंबर माह तक विमान उड़ान भरने लगें। बारिश के सीजन में निर्माण कार्य रुक सकता है लेकिन इसके बावजूद भी जल्द से जल्द निर्माण पूरा कराने की कोशिश चल रही है। मंडे को कलेक्ट्रेट में डीएम की अध्यक्षता में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों की मौजूदगी में संबंधित सभी विभागों के साथ कोऑर्डिनेशन मीटिंग की गई। मीटिंग में सभी विभागों से उनकी सुविधाओं और काम की रिपोर्ट मांगी गई, जिसमें लगभग सभी सुविधाओं की उपलब्धता मिली है। सिक्योरिटी और पोल शिफ्टिंग का काम भी जल्द पूरा हो जाएगा। -एयरपोर्ट के निर्माण में हाईटेंशन लाइन के पोल शिफ्ट कर अंडर ग्राउंड लाइन बिछायी जानी है। इसके लिए बिजली विभाग ने 1 करोड़ का इस्टीमेट तैयार कर प्रस्ताव भेज दिया है। उसके बाद शिफ्टिंग का काम शुरू कर दिया जाएगा। -शुरुआत में एयरपोर्ट की सिक्योरिटी पुलिस करेगी। इसके लिए 40 जवानों को ट्रेनिंग दी जा रही है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की सिक्योरिटी की ओर से आगरा में 28 पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। बचे हुए 12 पुलिसकर्मियों को जल्द ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। -सिक्योरिटी को लेकर बरेली में पहले से ही डॉग स्क्वॉड और बम स्कवॉड पहले से ही मौजूद है। -एयरपोर्ट का ही एप्रिन और पाथ वे का इस्तेमाल किया जाएगा। सिर्फ रनवे ही त्रिशूल हवाई अड्डे का इस्तेमाल किया जाएगा। -बरेली में डाक, हॉस्पिटल और इंटरनेट के लिए बीएसएनएल की सुविधा पहले ही उपलब्ध है। इसकी जानकारी भी मीटिंग में दी गई। -मीटिंग में नगर निगम को कूड़ा डालने से रोकने के बारे में कहा गया है। बर्ड हिटिंग के खतरे से बचाने की बात कही गई है।
BAREILLY: इसी तेजी से नाथ नगरी एयरपोर्ट का निर्माण होता रहा तो उम्मीद है कि सितंबर माह तक विमान उड़ान भरने लगें। बारिश के सीजन में निर्माण कार्य रुक सकता है लेकिन इसके बावजूद भी जल्द से जल्द निर्माण पूरा कराने की कोशिश चल रही है। मंडे को कलेक्ट्रेट में डीएम की अध्यक्षता में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों की मौजूदगी में संबंधित सभी विभागों के साथ कोऑर्डिनेशन मीटिंग की गई। मीटिंग में सभी विभागों से उनकी सुविधाओं और काम की रिपोर्ट मांगी गई, जिसमें लगभग सभी सुविधाओं की उपलब्धता मिली है। सिक्योरिटी और पोल शिफ्टिंग का काम भी जल्द पूरा हो जाएगा। -एयरपोर्ट के निर्माण में हाईटेंशन लाइन के पोल शिफ्ट कर अंडर ग्राउंड लाइन बिछायी जानी है। इसके लिए बिजली विभाग ने एक करोड़ का इस्टीमेट तैयार कर प्रस्ताव भेज दिया है। उसके बाद शिफ्टिंग का काम शुरू कर दिया जाएगा। -शुरुआत में एयरपोर्ट की सिक्योरिटी पुलिस करेगी। इसके लिए चालीस जवानों को ट्रेनिंग दी जा रही है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की सिक्योरिटी की ओर से आगरा में अट्ठाईस पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। बचे हुए बारह पुलिसकर्मियों को जल्द ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। -सिक्योरिटी को लेकर बरेली में पहले से ही डॉग स्क्वॉड और बम स्कवॉड पहले से ही मौजूद है। -एयरपोर्ट का ही एप्रिन और पाथ वे का इस्तेमाल किया जाएगा। सिर्फ रनवे ही त्रिशूल हवाई अड्डे का इस्तेमाल किया जाएगा। -बरेली में डाक, हॉस्पिटल और इंटरनेट के लिए बीएसएनएल की सुविधा पहले ही उपलब्ध है। इसकी जानकारी भी मीटिंग में दी गई। -मीटिंग में नगर निगम को कूड़ा डालने से रोकने के बारे में कहा गया है। बर्ड हिटिंग के खतरे से बचाने की बात कही गई है।
वीर अर्जुन संवाददाता नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की दरभा घाटी में कांग्रेस नेताओं पर हुए नक्सली हमले में कांग्रेस के नेता ही फंसते दिख रहे हैं। कांग्रेस के तीन प्रमुख नेताओं नंद कुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और उदय मुदलियार समेत 30 लोग इस हमले में मारे गए थे। इस मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की शुरुआती रिपोर्ट आ गई है। इसमें कहा गया है कि कांग्रेस के चार नेता हमले वाले दिन 25 मई को दिनभर नक्सलियों के सम्पर्प में थे और उन्हें पल-पल की जानकारी दे रहे थे। सुकमा नक्सली हमले पर एनआईए ने 14 पेज की शुरुआती रिपोर्ट तैयार की है। इसके मुताबिक एनआईए के अधिकारियों ने जगदलपुर के सेलफोन टावर्स से मिले उस दिन के सारे कॉल डिटेल्स खंगाले हैं। इसी के आधार पर दावा किया जा रहा है कि हमले में कांग्रेस के नेता शामिल थे। जांच एजेंसी का कहना है कि काफिले में शामिल भेदियों ने नक्सलियों को न केवल रूट की जानकारी समय-समय पर दी बल्कि यह भी बताया कि किस गाड़ी में कौन बैठा है। जिन नम्बरों पर कांग्रेस के नेता बात कर रहे थे, वे नम्बर अब बन्द हैं। एनआईए की छानबीन में पता चला है कि सारे नम्बर फर्जी पतों और फर्जी आईडी के जरिए लिए गए थे। हमले के बाद से ही कहा जा रहा था कि इसमें किसी घर के भेदी का ही हाथ है। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से कहा भी गया था कि कांग्रेस नेताओं की रैली का रूट बदल गया था। कहा गया था कि किसी स्थानीय नेता ने यह रूट बदलवाया था। हालांकि कांग्रेस ने इसका खंडन करते हुए कहा था कि राज्य सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए गलत बातों को प्रचारित कर रही है। महेंद्र कर्मा के बेटे दीपक कर्मा भी नक्सली हमले को बड़ी राजनीतिक साजिश करार दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि पूरी घटना को साजिश के तहत अंजाम दिया गया है और नक्सलियों को पूरे काफिले की सटीक जानकारी देने वाला कोई न कोई भेदिया कांग्रेस नेताओं के बीच मौजूद था। दीपक का कहना है कि कर्मा को दरभा वाले रूट से वापस नहीं लौटना था। वह जिस रास्ते से जाते, वहां से लौटकर कभी नहीं आते थे। उन्हें तयशुदा रूट से आने के लिए किसने विवश किया, इसकी जांच होनी चाहिए। दीपक ने कहा कि पिताजी के आने-जाने का कार्यक्रम, उनकी गाड़ी और सुरक्षाकर्मियों की संख्या का किसी को पता नहीं रहता था। यह सब कैसे लीक हुआ, बड़ा सवाल है। एनआईए के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक शुरुआती जांच में पता चला है कि कांग्रेसी नेताओं के काफिले में शामिल लोगों से मिली जानकारी के बूते ही नक्सली दिनदहाड़े इतना बड़ा हमला करने में कामयाब रहे। सूत्रों का कहना है कि इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि हमले में घर के ही भेदी ने अहम भूमका निभाई है। सूत्रों के मुताबिक इस हमले में नक्सलियों द्वारा छोड़े गए कोंटा के विधायक कबासी लखमा सहित चार कांग्रेसी नेता संदेह के दायरे में हैं। इनमें एक नेता ने काफिले को बीच में ही छोड़ दिया था। एक को पांव में गोली लगी है और एक ने हमले के दौरान छिपकर अपनी जान बचा ली। सूत्रों का कहना है कि हमले में विधायक कबासी लखमा एक `महत्वपूर्ण कड़ी' हैं। उनसे भी पूछताछ की जाएगी। एनआईए आफिसरों का मानना है कि कबासी लखमा की सुरक्षा मजबूत की जानी चाहिए। संदेह है कि जांच को प्रभावित करने के लिए उनकी भी हत्या की जा सकती है। प्राथमिक जांच में एनआईए को सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी खामियों के बारे में भी पता लगा है। एनआईए के आफिसर इस तर्प से सहमत नहीं हैं कि राज्य खुफिया ब्यूरो ने 25 को ही अलर्ट जारी किया था। एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक स्थानीय पुलिस के स्तर पर भयंकर लापरवाही बरती गई है। स्थानीय प्रशासन ने न तो अलर्ट को गंभीरता से लिया और न ही नेताओं को आगाह किया। इस मामले में इंटेलीजेंस ब्यूरो और एनटीआरओ पर भी अंगुलियां उठ रही हैं। अगर राज्य सरकार के खुफिया तंत्र ने सही कदम नहीं उठाए तो राज्य में मौजूद इंटेलीजेंस ब्यूरो के आफिसर तो नेताओं को आगाह कर सकते थे। सूत्रों के मुताबिक इस इलाके में टोही विमानों द्वारा हवाई निगरानी कराने वाली संस्था की भूमिका पर भी सवाल उठा है।
वीर अर्जुन संवाददाता नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की दरभा घाटी में कांग्रेस नेताओं पर हुए नक्सली हमले में कांग्रेस के नेता ही फंसते दिख रहे हैं। कांग्रेस के तीन प्रमुख नेताओं नंद कुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और उदय मुदलियार समेत तीस लोग इस हमले में मारे गए थे। इस मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी की शुरुआती रिपोर्ट आ गई है। इसमें कहा गया है कि कांग्रेस के चार नेता हमले वाले दिन पच्चीस मई को दिनभर नक्सलियों के सम्पर्प में थे और उन्हें पल-पल की जानकारी दे रहे थे। सुकमा नक्सली हमले पर एनआईए ने चौदह पेज की शुरुआती रिपोर्ट तैयार की है। इसके मुताबिक एनआईए के अधिकारियों ने जगदलपुर के सेलफोन टावर्स से मिले उस दिन के सारे कॉल डिटेल्स खंगाले हैं। इसी के आधार पर दावा किया जा रहा है कि हमले में कांग्रेस के नेता शामिल थे। जांच एजेंसी का कहना है कि काफिले में शामिल भेदियों ने नक्सलियों को न केवल रूट की जानकारी समय-समय पर दी बल्कि यह भी बताया कि किस गाड़ी में कौन बैठा है। जिन नम्बरों पर कांग्रेस के नेता बात कर रहे थे, वे नम्बर अब बन्द हैं। एनआईए की छानबीन में पता चला है कि सारे नम्बर फर्जी पतों और फर्जी आईडी के जरिए लिए गए थे। हमले के बाद से ही कहा जा रहा था कि इसमें किसी घर के भेदी का ही हाथ है। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से कहा भी गया था कि कांग्रेस नेताओं की रैली का रूट बदल गया था। कहा गया था कि किसी स्थानीय नेता ने यह रूट बदलवाया था। हालांकि कांग्रेस ने इसका खंडन करते हुए कहा था कि राज्य सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए गलत बातों को प्रचारित कर रही है। महेंद्र कर्मा के बेटे दीपक कर्मा भी नक्सली हमले को बड़ी राजनीतिक साजिश करार दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि पूरी घटना को साजिश के तहत अंजाम दिया गया है और नक्सलियों को पूरे काफिले की सटीक जानकारी देने वाला कोई न कोई भेदिया कांग्रेस नेताओं के बीच मौजूद था। दीपक का कहना है कि कर्मा को दरभा वाले रूट से वापस नहीं लौटना था। वह जिस रास्ते से जाते, वहां से लौटकर कभी नहीं आते थे। उन्हें तयशुदा रूट से आने के लिए किसने विवश किया, इसकी जांच होनी चाहिए। दीपक ने कहा कि पिताजी के आने-जाने का कार्यक्रम, उनकी गाड़ी और सुरक्षाकर्मियों की संख्या का किसी को पता नहीं रहता था। यह सब कैसे लीक हुआ, बड़ा सवाल है। एनआईए के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक शुरुआती जांच में पता चला है कि कांग्रेसी नेताओं के काफिले में शामिल लोगों से मिली जानकारी के बूते ही नक्सली दिनदहाड़े इतना बड़ा हमला करने में कामयाब रहे। सूत्रों का कहना है कि इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि हमले में घर के ही भेदी ने अहम भूमका निभाई है। सूत्रों के मुताबिक इस हमले में नक्सलियों द्वारा छोड़े गए कोंटा के विधायक कबासी लखमा सहित चार कांग्रेसी नेता संदेह के दायरे में हैं। इनमें एक नेता ने काफिले को बीच में ही छोड़ दिया था। एक को पांव में गोली लगी है और एक ने हमले के दौरान छिपकर अपनी जान बचा ली। सूत्रों का कहना है कि हमले में विधायक कबासी लखमा एक `महत्वपूर्ण कड़ी' हैं। उनसे भी पूछताछ की जाएगी। एनआईए आफिसरों का मानना है कि कबासी लखमा की सुरक्षा मजबूत की जानी चाहिए। संदेह है कि जांच को प्रभावित करने के लिए उनकी भी हत्या की जा सकती है। प्राथमिक जांच में एनआईए को सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी खामियों के बारे में भी पता लगा है। एनआईए के आफिसर इस तर्प से सहमत नहीं हैं कि राज्य खुफिया ब्यूरो ने पच्चीस को ही अलर्ट जारी किया था। एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक स्थानीय पुलिस के स्तर पर भयंकर लापरवाही बरती गई है। स्थानीय प्रशासन ने न तो अलर्ट को गंभीरता से लिया और न ही नेताओं को आगाह किया। इस मामले में इंटेलीजेंस ब्यूरो और एनटीआरओ पर भी अंगुलियां उठ रही हैं। अगर राज्य सरकार के खुफिया तंत्र ने सही कदम नहीं उठाए तो राज्य में मौजूद इंटेलीजेंस ब्यूरो के आफिसर तो नेताओं को आगाह कर सकते थे। सूत्रों के मुताबिक इस इलाके में टोही विमानों द्वारा हवाई निगरानी कराने वाली संस्था की भूमिका पर भी सवाल उठा है।
आईसीसी के मुताबिक आरोपी खिलाड़ी ने अपनी गलती को स्वीकार किया और बिना किसी सुनवाई के ही सजा के लिए तैयार हो गया. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने जिम्बाब्वे के पूर्व कप्तान और धाकड़ बल्लेबाज ब्रेंडन टेलर (Brendan Taylor) पर भ्रष्टाचार के आरोप में साढ़े तीन साल का प्रतिबंध लगाया है. ICC ने टेलर को अपनी एंटी करप्शन कोड के उल्लंघन का दोषी पाते हुए ये सजा दी है. टेलर एक भारतीय सट्टेबाज से स्पॉट फिक्सिंग के लिए रकम लेने के दोषी पाए गए थे. टेलर ने खुद ही कुछ दिन पहले इस बात का खुलासा कर सबको चौंका दिया था. टेलर ने हालांकि, ये साफ किया था कि उन्होंने कभी भी फिक्सिंग नहीं की और ICC को जानकारी दी थी. हालांकि, टेलर ने माना था कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्था को इसकी जानकारी थोड़ी देरी से दी थी, क्योंकि वह अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर डरे हुए थे. इसके अलावा डोपिंग के एक अलग मामले में भी टेलर पर एक महीने का बैन लगाया गया है. टेलर ने अपने खुलासे में बताया था कि आईसीसी उनके खिलाफ कार्रवाई करने वाली है और उन पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. शुक्रवार 28 जनवरी को आईसीसी ने एक आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी कर इसकी पुष्टि की और साढ़े तीन साल के लिए टेलर पर हर तरह के क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया. आईसीसी ने अपने बयान में बताया कि टेलर ने भ्रष्टाचार के चार आरोपों और इसके अलावा डोपिंग से जुड़े एक आरोप स्वीकार किए. डोपिंग के मामले में भी टेलर पर एक महीने का प्रतिबंध लगा है, जो भ्रष्टाचार के मामले से अलग है. हालांकि, दोनों की सजा साथ ही चलेगी. आईसीसी ने बताया है कि टेलर 28 जुलाई 2025 के बाद फिर से क्रिकेट खेलना शुरू कर सकते हैं. आईसीसी के मुताबिक, टेलर के खिलाफ भ्रष्टाचार के लिए संपर्क की रिपोर्ट करने में देरी से जुड़े चार आरोप लगे, जिन्हें जिम्बाब्वे के पूर्व ओपनर ने स्वीकार किया. इसके मुताबिक, टेलर को ACU की आर्टिकल 2.4.2 का दोषी पाया गया. इसके तहत टेलर ने भ्रष्टाचार से जुड़े प्रयासों के तहत मिले उपहार, भुगतान या अन्य सुविधाओं की रिपोर्ट करने में देरी की. इसके अलावा 2.4.3 के तहत, टेलर 750 अमेरिकी डॉलर या उससे ज्यादा की कीमत के उपहारों की सही वक्त पर जानकारी देने में नाकाम रहे. साथ ही 2.4.4 के तहत, टेलर श्रीलंका और बांग्लादेश के खिलाफ जिम्बाब्वे के मैचों में भ्रष्टाचार में शामिल होने के लिए किए गए संपर्क की बिना किसी देरी के रिपोर्ट करने में नाकाम रहे. इसके अलावा, 2.4.7 के तहत, टेलर ने तथ्यों, दस्तावेजों को छुपाकर या उनसे छेड़छाड़ कर जांच में देरी या बाधा पहुंचाने की कोशिश की. टेलर ने बीती 24 जनवरी को एक ट्विटर पोस्ट में 4 पेज का लंबा बयान जारी किया था और उसमें खुलासा किया था कि 2019 में उन्हें एक भारतीय 'बिजनेसमैन' ने उनसे संपर्क किया था और 15 हजार डॉलर का भुगतान कर भारत बुलाया था. उस कारोबारी ने तब झांसा दिया था कि वह जिम्बाब्वे में एक क्रिकेट लीग शुरू करना चाहते हैं, जिसको लेकर चर्चा के लिए उन्हें भारत बुलाया गया था. ब्रेंडन ने आगे लिखा कि मैं एक पल के लिए हैरान तो हुआ था. लेकिन उस वक्त हालात ऐसे थे कि मैं भारत आने के लिए तैयार हो गया. टेलर ने लिखा कि कारोबारी ने होटल में मेरे लिए डिनर की व्यवस्था की. हमने साथ में शराब पी और फिर मुझे खुलेआम कोकेन भी ऑफर किया गया. वो सभी कोकेन ले रहे थे और मुझे भी लालच आ गया. फिर अगली सुबह वो मेरे कमरे में आए और वो वीडियो दिखाया जो उन्होंने रात में बनाई थी. उन्होंने मुझे वो वीडियो दिखाकर कहा कि अगर मैंने उनके लिए मैच फिक्स नहीं किए तो वो मेरे कोकेन लेते उस वीडियो को वायरल कर देंगे. टेलर ने अपने बयान में आगे बताया था कि उस वक्त वह इसके लिए राजी हो गए थे क्योंकि वह किसी भी तरह देश वापस लौटना चाहते थे, लेकिन उन्होंने कभी भी फिक्सिंग नहीं की. हालांकि, टेलर ने बताया कि उन्होंने आईसीसी को करीब 4 महीने बाद इसके बारे में बताया क्योंकि तब वह अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे. टेलर ने साथ ही बताया था कि उन्हें इसके बाद नशे की लत लग गई और वह लगातार 2 साल तक सबसे बुरे दौर से गुजरे थे. इस खुलासे के बाद एक इंटरव्यू में टेलर ने ये भी खुलासा किया था कि वह पिछले साल आयरलैंड के खिलाफ एक मुकाबले के दौरान वह डोप टेस्ट में भी पकड़े गए थे. आईसीसी ने इसके लिए भी उन्हें एक महीने की सजा दी है. हालांकि, आईसीसी ने साफ किया है कि उन्हें सिर्फ एक महीने का बैन इसलिए दिया गया है क्योंकि उन्होंने मैच से पहले इसका सेवन नहीं किया और ये प्रदर्शन बढ़ाने वाला ड्रग्स नहीं था और वह उस वक्त अपने रिहैबिलिटेशन से गुजर रहे थे. हालांकि ये बैन भी साढ़े तीन साल के प्रतिबंध के साथ जारी रहेगा. टेलर ने पिछले साल ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था.
आईसीसी के मुताबिक आरोपी खिलाड़ी ने अपनी गलती को स्वीकार किया और बिना किसी सुनवाई के ही सजा के लिए तैयार हो गया. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने जिम्बाब्वे के पूर्व कप्तान और धाकड़ बल्लेबाज ब्रेंडन टेलर पर भ्रष्टाचार के आरोप में साढ़े तीन साल का प्रतिबंध लगाया है. ICC ने टेलर को अपनी एंटी करप्शन कोड के उल्लंघन का दोषी पाते हुए ये सजा दी है. टेलर एक भारतीय सट्टेबाज से स्पॉट फिक्सिंग के लिए रकम लेने के दोषी पाए गए थे. टेलर ने खुद ही कुछ दिन पहले इस बात का खुलासा कर सबको चौंका दिया था. टेलर ने हालांकि, ये साफ किया था कि उन्होंने कभी भी फिक्सिंग नहीं की और ICC को जानकारी दी थी. हालांकि, टेलर ने माना था कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्था को इसकी जानकारी थोड़ी देरी से दी थी, क्योंकि वह अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर डरे हुए थे. इसके अलावा डोपिंग के एक अलग मामले में भी टेलर पर एक महीने का बैन लगाया गया है. टेलर ने अपने खुलासे में बताया था कि आईसीसी उनके खिलाफ कार्रवाई करने वाली है और उन पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. शुक्रवार अट्ठाईस जनवरी को आईसीसी ने एक आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी कर इसकी पुष्टि की और साढ़े तीन साल के लिए टेलर पर हर तरह के क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया. आईसीसी ने अपने बयान में बताया कि टेलर ने भ्रष्टाचार के चार आरोपों और इसके अलावा डोपिंग से जुड़े एक आरोप स्वीकार किए. डोपिंग के मामले में भी टेलर पर एक महीने का प्रतिबंध लगा है, जो भ्रष्टाचार के मामले से अलग है. हालांकि, दोनों की सजा साथ ही चलेगी. आईसीसी ने बताया है कि टेलर अट्ठाईस जुलाई दो हज़ार पच्चीस के बाद फिर से क्रिकेट खेलना शुरू कर सकते हैं. आईसीसी के मुताबिक, टेलर के खिलाफ भ्रष्टाचार के लिए संपर्क की रिपोर्ट करने में देरी से जुड़े चार आरोप लगे, जिन्हें जिम्बाब्वे के पूर्व ओपनर ने स्वीकार किया. इसके मुताबिक, टेलर को ACU की आर्टिकल दो.चार.दो का दोषी पाया गया. इसके तहत टेलर ने भ्रष्टाचार से जुड़े प्रयासों के तहत मिले उपहार, भुगतान या अन्य सुविधाओं की रिपोर्ट करने में देरी की. इसके अलावा दो.चार.तीन के तहत, टेलर सात सौ पचास अमेरिकी डॉलर या उससे ज्यादा की कीमत के उपहारों की सही वक्त पर जानकारी देने में नाकाम रहे. साथ ही दो.चार.चार के तहत, टेलर श्रीलंका और बांग्लादेश के खिलाफ जिम्बाब्वे के मैचों में भ्रष्टाचार में शामिल होने के लिए किए गए संपर्क की बिना किसी देरी के रिपोर्ट करने में नाकाम रहे. इसके अलावा, दो.चार.सात के तहत, टेलर ने तथ्यों, दस्तावेजों को छुपाकर या उनसे छेड़छाड़ कर जांच में देरी या बाधा पहुंचाने की कोशिश की. टेलर ने बीती चौबीस जनवरी को एक ट्विटर पोस्ट में चार पेज का लंबा बयान जारी किया था और उसमें खुलासा किया था कि दो हज़ार उन्नीस में उन्हें एक भारतीय 'बिजनेसमैन' ने उनसे संपर्क किया था और पंद्रह हजार डॉलर का भुगतान कर भारत बुलाया था. उस कारोबारी ने तब झांसा दिया था कि वह जिम्बाब्वे में एक क्रिकेट लीग शुरू करना चाहते हैं, जिसको लेकर चर्चा के लिए उन्हें भारत बुलाया गया था. ब्रेंडन ने आगे लिखा कि मैं एक पल के लिए हैरान तो हुआ था. लेकिन उस वक्त हालात ऐसे थे कि मैं भारत आने के लिए तैयार हो गया. टेलर ने लिखा कि कारोबारी ने होटल में मेरे लिए डिनर की व्यवस्था की. हमने साथ में शराब पी और फिर मुझे खुलेआम कोकेन भी ऑफर किया गया. वो सभी कोकेन ले रहे थे और मुझे भी लालच आ गया. फिर अगली सुबह वो मेरे कमरे में आए और वो वीडियो दिखाया जो उन्होंने रात में बनाई थी. उन्होंने मुझे वो वीडियो दिखाकर कहा कि अगर मैंने उनके लिए मैच फिक्स नहीं किए तो वो मेरे कोकेन लेते उस वीडियो को वायरल कर देंगे. टेलर ने अपने बयान में आगे बताया था कि उस वक्त वह इसके लिए राजी हो गए थे क्योंकि वह किसी भी तरह देश वापस लौटना चाहते थे, लेकिन उन्होंने कभी भी फिक्सिंग नहीं की. हालांकि, टेलर ने बताया कि उन्होंने आईसीसी को करीब चार महीने बाद इसके बारे में बताया क्योंकि तब वह अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे. टेलर ने साथ ही बताया था कि उन्हें इसके बाद नशे की लत लग गई और वह लगातार दो साल तक सबसे बुरे दौर से गुजरे थे. इस खुलासे के बाद एक इंटरव्यू में टेलर ने ये भी खुलासा किया था कि वह पिछले साल आयरलैंड के खिलाफ एक मुकाबले के दौरान वह डोप टेस्ट में भी पकड़े गए थे. आईसीसी ने इसके लिए भी उन्हें एक महीने की सजा दी है. हालांकि, आईसीसी ने साफ किया है कि उन्हें सिर्फ एक महीने का बैन इसलिए दिया गया है क्योंकि उन्होंने मैच से पहले इसका सेवन नहीं किया और ये प्रदर्शन बढ़ाने वाला ड्रग्स नहीं था और वह उस वक्त अपने रिहैबिलिटेशन से गुजर रहे थे. हालांकि ये बैन भी साढ़े तीन साल के प्रतिबंध के साथ जारी रहेगा. टेलर ने पिछले साल ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था.
राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ की ओर से विराटनगर विरोध प्रदर्शन किया गया। राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ प्रदेश अध्यक्ष उपेन यादव की अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान उपेन यादव ने कहा कि राजस्थान सरकार द्वारा पारदर्शिता के साथ भर्ती नहीं की गई और पेपर लीक जैसी घटना होने से युवा बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसके बाद पेपर लीक माफिया को खत्म करवाने, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लागू करने के साथ पेपर लीक में दोषियों को उम्रकैद की सजा और पेपर लीक मामले की सीबीआई से जांच करवाने सहित अन्य मामलों को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ की ओर से विराटनगर विरोध प्रदर्शन किया गया। राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ प्रदेश अध्यक्ष उपेन यादव की अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान उपेन यादव ने कहा कि राजस्थान सरकार द्वारा पारदर्शिता के साथ भर्ती नहीं की गई और पेपर लीक जैसी घटना होने से युवा बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसके बाद पेपर लीक माफिया को खत्म करवाने, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करने के साथ पेपर लीक में दोषियों को उम्रकैद की सजा और पेपर लीक मामले की सीबीआई से जांच करवाने सहित अन्य मामलों को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बांजा लुकाः नोवाक जोकोविच स्पष्ट थे कि वह पिछले हफ्ते मोंटे-कार्लो मास्टर्स में लोरेंजो मुसेटी के खिलाफ तीसरे दौर की हार से जल्दी से आगे बढ़ना चाहते थे। वर्ल्ड नंबर 1 के पास बंजा लुका में ऐसा करने का मौका होगा और वह टूर्नामेंट के लिए उत्साहित हैं। सर्बियाई सुपरस्टार बंजा लुका ओपन में इस सप्ताह शीर्ष वरीयता प्राप्त है। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि उन्होंने बोस्निया और हर्ज़ेगोविना में माहौल का आनंद लिया है क्योंकि उन्होंने पहली बार एक दशक से अधिक समय पहले देश का दौरा किया था। "यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। मैं अतीत में कई बार बंजा लुका गया हूं, एक बार राष्ट्रपति से मिलने और सम्मान का पदक प्राप्त करने के लिए और फिर दूसरी बार 2009 में, मैंने एक प्रदर्शनी में विक्टर ट्रॉकी के साथ खेला था। यहां एक इनडोर सुविधा में मैच करें," जोकोविच ने कहा। उन्होंने कहा, "तो मैं उन दो यात्राओं को बहुत प्यार से याद करता हूं। " सोमवार को अभ्यास के दौरान, यह स्पष्ट था कि जोकोविच को देखने के लिए स्थानीय प्रशंसक कितने रोमांचित थे। एटीपी 250 के लिए सर्बियाई तैयारी को देखने के लिए बैरिकेड्स के पीछे प्रशंसकों की एक बड़ी भीड़ थी। "लोग बड़े स्वागत और इतने प्यार और समर्थन के साथ पूरे दिल से मेरा स्वागत करते हैं। इसलिए मैं यहां आने के लिए बहुत उत्साहित हूं क्योंकि मुझे लगता है कि यह सर्बियाई टेनिस खिलाड़ियों और एथलीटों के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है जहां हम प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। जोकोविच ने कहा, स्थानीय लोगों से बहुत प्यार और समर्थन मिला है। मुसेटी से हारने के बावजूद जोकोविच ने सीजन की अच्छी शुरुआत की है। 35 वर्षीय 2023 में 16-2 है, जिसमें एडिलेड और ऑस्ट्रेलियन ओपन में खिताब शामिल हैं। जोकोविच, 93 बार के टूर-लेवल टाइटलिस्ट, इस सप्ताह टूर-लेवल मैच जीत के 1,050 तक पहुंच जाएंगे, अगर वह फाइनल में पहुंच जाते हैं। ओपन एरा में केवल चार अन्य पुरुषों ने वह मील का पत्थर बनाया हैः जिमी कोनर्स (1,274), रोजर फेडरर (1,251), राफेल नडाल (1,068) और इवान लेंडल (1,068)। 35 वर्षीय, बंजा लुका में अपने टूर्नामेंट की शुरुआत 'नेक्स्टजेनएटीपी' फ्रेंचमैन लुका वान असशे के खिलाफ करेंगे, जिन्होंने वर्ल्ड नंबर 3 स्टेन वावरिंका को 1-6, 7-6(4), 6-4 से हराया था।
बांजा लुकाः नोवाक जोकोविच स्पष्ट थे कि वह पिछले हफ्ते मोंटे-कार्लो मास्टर्स में लोरेंजो मुसेटी के खिलाफ तीसरे दौर की हार से जल्दी से आगे बढ़ना चाहते थे। वर्ल्ड नंबर एक के पास बंजा लुका में ऐसा करने का मौका होगा और वह टूर्नामेंट के लिए उत्साहित हैं। सर्बियाई सुपरस्टार बंजा लुका ओपन में इस सप्ताह शीर्ष वरीयता प्राप्त है। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि उन्होंने बोस्निया और हर्ज़ेगोविना में माहौल का आनंद लिया है क्योंकि उन्होंने पहली बार एक दशक से अधिक समय पहले देश का दौरा किया था। "यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। मैं अतीत में कई बार बंजा लुका गया हूं, एक बार राष्ट्रपति से मिलने और सम्मान का पदक प्राप्त करने के लिए और फिर दूसरी बार दो हज़ार नौ में, मैंने एक प्रदर्शनी में विक्टर ट्रॉकी के साथ खेला था। यहां एक इनडोर सुविधा में मैच करें," जोकोविच ने कहा। उन्होंने कहा, "तो मैं उन दो यात्राओं को बहुत प्यार से याद करता हूं। " सोमवार को अभ्यास के दौरान, यह स्पष्ट था कि जोकोविच को देखने के लिए स्थानीय प्रशंसक कितने रोमांचित थे। एटीपी दो सौ पचास के लिए सर्बियाई तैयारी को देखने के लिए बैरिकेड्स के पीछे प्रशंसकों की एक बड़ी भीड़ थी। "लोग बड़े स्वागत और इतने प्यार और समर्थन के साथ पूरे दिल से मेरा स्वागत करते हैं। इसलिए मैं यहां आने के लिए बहुत उत्साहित हूं क्योंकि मुझे लगता है कि यह सर्बियाई टेनिस खिलाड़ियों और एथलीटों के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है जहां हम प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। जोकोविच ने कहा, स्थानीय लोगों से बहुत प्यार और समर्थन मिला है। मुसेटी से हारने के बावजूद जोकोविच ने सीजन की अच्छी शुरुआत की है। पैंतीस वर्षीय दो हज़ार तेईस में सोलह-दो है, जिसमें एडिलेड और ऑस्ट्रेलियन ओपन में खिताब शामिल हैं। जोकोविच, तिरानवे बार के टूर-लेवल टाइटलिस्ट, इस सप्ताह टूर-लेवल मैच जीत के एक,पचास तक पहुंच जाएंगे, अगर वह फाइनल में पहुंच जाते हैं। ओपन एरा में केवल चार अन्य पुरुषों ने वह मील का पत्थर बनाया हैः जिमी कोनर्स , रोजर फेडरर , राफेल नडाल और इवान लेंडल । पैंतीस वर्षीय, बंजा लुका में अपने टूर्नामेंट की शुरुआत 'नेक्स्टजेनएटीपी' फ्रेंचमैन लुका वान असशे के खिलाफ करेंगे, जिन्होंने वर्ल्ड नंबर तीन स्टेन वावरिंका को एक-छः, सात-छः, छः-चार से हराया था।
बिलासपुर के सिम्स (CIMS) अस्पताल से गुरुवार को लापता हुए 7 महीने के मासूम हमराज का 24 घंटे बाद भी कोई सुराग नहीं मिला है, लेकिन पुलिस को अस्पताल से CCTV फुटेज मिले हैं, जिसमें आरोपी महिला बच्चे को ले जाते हुए दिख रही है। जिस गाड़ी (एक्टिवा) से महिला बच्चे और उसकी मां को लेकर अस्पताल पहुंची थी उस गाड़ी का नंबर भी मिला है, जो मध्यप्रदेश का है। इसी आधार पर पुलिस अब मध्यप्रदेश के कई इलाकों में छापा मार रही है। इस संबंध में CSP निमेश बरैया ने बताया कि मामले में जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। सिम्स से गुरुवार की दोपहर मासूम हमराज के चोरी होने का मामला सामने आया था। शादी के करीब 3 साल बाद जन्मे इस बच्चे के चोरी होने की रिपोर्ट कारगीकला निवासी सफर शाह और विशाखा (पति-पत्नी) ने कोतवाली थाने में दर्ज करवाई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी। इसके बाद जब पुलिस ने अस्पताल में लगे CCTV फुटेज की जांच की तो उनके हाथ पुख्ता सबूत लगा है। जानकारी के अनुसार बच्चा चोरी करने वालों का लिंक मध्यप्रदेश के एक शहर से जुड़ रहा है। CSP निमेश बरैया व उनकी टीम के हाथ एक मोबाइल नंबर भी लगा है, जिसे साइबर की टीम ट्रेस कर रही है। इसके अलावा पुलिस को आरोपी महिला के गाड़ी का नंबर भी फुटेज से मिल गया है। गाड़ी का नंबर मध्यप्रदेश का है। लेकिन गाड़ी के नंबर फुटेज में क्लियर नहीं दिखने की वजह से पुलिस टीम उलझी हुई है। पुलिस ने अभी इस संबंध में कोई और जानकारी नहीं दी है। बताया गया है कि सफर शाह और विशाखा ने बिलासपुर जिले के ही लूथरा शरीफ में बच्चा होने की मन्नत मांगी थी। मन्नत के 3 साल बाद हमराज पैदा हुआ था, वो अभी 7 महीना का ही था। मन्नत पूरी होने के बाद ही पति-पत्नी गुरुवार को लूथरा शरीफ में चादर चढ़ाने गए था। इसके बाद दोनों अपने बच्चे हमराज के साथ घर लौट रहे थे और बिलासपुर स्टेशन पर करीब 1 बजे दोपहर को उतरे थे। इसी बीच स्टेशन में ही एक अज्ञात महिला से उनकी मुलाकत हो गई। चूंकि हमराज को लेकर उसके मां-बाप सिम्स अस्पताल जाने वाले थे। इसी का फायदा उठाकर महिला ने उन्हें अपनी बातों में फंसा लिया और कहा कि मैं भी अस्पताल जा रही हूं आप मेरे साथ ही चलिए। जिस पर हमराज की मां विशाखा, हमराज को लेकर उस महिला को साथ अस्पताल चली गई। वहीं हमराज के पिता सफर शाह कुछ देर बाद अस्पताल पहुंचने वाले थे। अस्पताल आने के बाद बच्चे की मां जैसे ही बाथरूम गई, अज्ञात महिला मासूम को लेकर फरार हो गई। महिला ने देखा कि वहां उसका बच्चा और महिला नहीं है, वो चीखने चिल्लाने लगी। फिर बाद में कोतवाली थाने में बच्चे के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। हमराज के माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। अब बच्चे के लापता होने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बिलासपुर के सिम्स अस्पताल से गुरुवार को लापता हुए सात महीने के मासूम हमराज का चौबीस घंटाटे बाद भी कोई सुराग नहीं मिला है, लेकिन पुलिस को अस्पताल से CCTV फुटेज मिले हैं, जिसमें आरोपी महिला बच्चे को ले जाते हुए दिख रही है। जिस गाड़ी से महिला बच्चे और उसकी मां को लेकर अस्पताल पहुंची थी उस गाड़ी का नंबर भी मिला है, जो मध्यप्रदेश का है। इसी आधार पर पुलिस अब मध्यप्रदेश के कई इलाकों में छापा मार रही है। इस संबंध में CSP निमेश बरैया ने बताया कि मामले में जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। सिम्स से गुरुवार की दोपहर मासूम हमराज के चोरी होने का मामला सामने आया था। शादी के करीब तीन साल बाद जन्मे इस बच्चे के चोरी होने की रिपोर्ट कारगीकला निवासी सफर शाह और विशाखा ने कोतवाली थाने में दर्ज करवाई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी। इसके बाद जब पुलिस ने अस्पताल में लगे CCTV फुटेज की जांच की तो उनके हाथ पुख्ता सबूत लगा है। जानकारी के अनुसार बच्चा चोरी करने वालों का लिंक मध्यप्रदेश के एक शहर से जुड़ रहा है। CSP निमेश बरैया व उनकी टीम के हाथ एक मोबाइल नंबर भी लगा है, जिसे साइबर की टीम ट्रेस कर रही है। इसके अलावा पुलिस को आरोपी महिला के गाड़ी का नंबर भी फुटेज से मिल गया है। गाड़ी का नंबर मध्यप्रदेश का है। लेकिन गाड़ी के नंबर फुटेज में क्लियर नहीं दिखने की वजह से पुलिस टीम उलझी हुई है। पुलिस ने अभी इस संबंध में कोई और जानकारी नहीं दी है। बताया गया है कि सफर शाह और विशाखा ने बिलासपुर जिले के ही लूथरा शरीफ में बच्चा होने की मन्नत मांगी थी। मन्नत के तीन साल बाद हमराज पैदा हुआ था, वो अभी सात महीना का ही था। मन्नत पूरी होने के बाद ही पति-पत्नी गुरुवार को लूथरा शरीफ में चादर चढ़ाने गए था। इसके बाद दोनों अपने बच्चे हमराज के साथ घर लौट रहे थे और बिलासपुर स्टेशन पर करीब एक बजे दोपहर को उतरे थे। इसी बीच स्टेशन में ही एक अज्ञात महिला से उनकी मुलाकत हो गई। चूंकि हमराज को लेकर उसके मां-बाप सिम्स अस्पताल जाने वाले थे। इसी का फायदा उठाकर महिला ने उन्हें अपनी बातों में फंसा लिया और कहा कि मैं भी अस्पताल जा रही हूं आप मेरे साथ ही चलिए। जिस पर हमराज की मां विशाखा, हमराज को लेकर उस महिला को साथ अस्पताल चली गई। वहीं हमराज के पिता सफर शाह कुछ देर बाद अस्पताल पहुंचने वाले थे। अस्पताल आने के बाद बच्चे की मां जैसे ही बाथरूम गई, अज्ञात महिला मासूम को लेकर फरार हो गई। महिला ने देखा कि वहां उसका बच्चा और महिला नहीं है, वो चीखने चिल्लाने लगी। फिर बाद में कोतवाली थाने में बच्चे के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। हमराज के माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। अब बच्चे के लापता होने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आखिरकार वही हुआ, जिसकी आशंका थी। आंदोलनजीवी चाहते ही नहीं कि विवाद का हल निकले। पहले कथित किसान नेता राकेश टिकैत दावा करते रहे कि पुलिस ने बॉर्डर बंद कर रखे हैं। अब जब पुलिस रास्ता खोल रही है तो वे इसका विरोध कर रहे हैं। शुक्रवार देर रात टिकरी बॉर्डर पर जो हुआ, वह आंदोलनजीवियों को बेनकाब करने के लिए काफी है। हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार अपनी ओर से पूरी शांति बरत रही है। लेकिन बॉर्डर पर जमा तत्व ऐसा नहीं चाह रहे हैं। वह गड़बड़ी फैलाने की फिराक में नजर आ रहे हैं। बॉर्डर खोलने को लेकर दिल्ली पुलिस, हरियाणा पुलिस और खुद को किसान कहने वाले लोगों से शुक्रवार शाम को बातचीत की गई। इसके लिए किसान संगठनों, दिल्ली पुलिस और हरियाणा के प्रशासनिक अधिकारियों की बहादुरगढ़ में बैठक हुई थी। लेकिन 2 घंटे चली बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकला। हरियाणा के अधिकारी राष्ट्रीय राजमार्ग-9 को दोनों तरफ से खोलने की बात कर रहे थे, लेकिन आंदोलनकारी केवल 5 फीट रास्ता खोलने पर अड़े रहे। गतिरोध को देखते हुए शनिवार सुबह फिर बैठक होने वाली थी, लेकिन रात को ही प्रदर्शनकारी हंगामा करने लगे। हालांकि शनिवार को टिकरी बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों के साथ दिल्ली और हरियाणा पुलिस के अधिकारियों की बैठक के बाद कुछ सहमति बनी। यह बैठक इसके तहत, टिकरी बॉर्डर सुबह 7 बजे से शाम 8 बजे तक दोपहिया, एंबुलेंस और पैदल यात्रियों के लिए खुला रहेगा। इसके लिए सड़क के एक ओर करीब 5 फीट जगह रहेगी। इस बैठक से पूर्व कथित किसानों ने अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा की 6 नवंबर को होने वाली बैठक से पहले 5 फीट रास्ता खोलने पर विचार हुआ। उधर, उत्तर प्रदेश से सटे गाजीपुर बॉर्डर को पुलिस ने बैरिकेडिंग हटा दी है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे को दिल्ली पुलिस की ओर से आज खाली कर दिया जाएगा। हालांकि लेन-6 में उत्तर प्रदेश से दिल्ली आने वाले रास्ते में बैरिकेड्स लगे हुए हैं, इनके बारे में उत्तर प्रदेश पुलिस फैसला लेगी। इससे पहले शुक्रवार को जब दिल्ली पुलिस बॉर्डर से बैरिकेड्स हटाने का काम कर रही थी तो राकेश टिकैत ने कहा था कि यदि रास्ता खुल गया तो वह अपनी धान दिल्ली लेकर आएंगे। युवा किसान संघ हरियाणा के उपप्रधान प्रदीप चौहान कहना है कि राकेश टिकैत किसानों को भड़काने का काम करतेे हैं। बाद में बहुत ही चालाकी से खुद को बचाने में जुट जाते हैं। इस बार भी वह ऐसा ही कर रहे हैं। उनकी भूमिका बहुत ही विवादास्पद है। टिकैत किसान नहीं हैं। रात में जिस तरह से वे सोशल मीडिया पर लोगों का उकसा रहे थे, इसकी जांच होनी चाहिए। चौहान ने कहा कि तीन कृषि कानून तो बहाना है, असली मकसद तो हरियाणा और केंद्र सरकार को अस्थिर करना है। इसलिए कभी 26 जनवरी जैसी घटना होती है, कभी सरेआम किसी को काट दिया जाता है और कभी जिंदा जला दिया जाता है। यह डर और दहशत का माहौल बनाने की कोशिश है। इसे आंदोलन कहना पूरी तरह से गलत है। टिकरी और कुंडली बॉर्डर के नजदीक पड़ने वाले गांवों के लोग लंबे समय से सड़क खोलने की मांग कर रहे हैं। बॉर्डर बंद होने के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सोनीपत के व्यापारी सत्यवान चोपड़ा ने बताया कि रास्ता बंद होने से उन्हें लगातार नुकसान हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसी को नुकसान पहुंचा कर कैसे कोई आंदोलन कर सकता है? यह लोग तो पूरी तरह से अराजक तत्वों की तरह काम कर रहे हैं। जिससे आम आदमी बुरी तरह से त्रस्त हो रहा है। क्या हुआ रात को? पुलिस ने शुक्रवार शाम तक टिकरी बॉर्डर से 6 परतों की बैरिकेडिंग हटा दी थी। पुलिस देर रात को शांतिपूर्ण तरीके से एक तरफ का रास्ता खोल रही थी, लेकिन तथाकथित किसान नेताओं से यह बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने रात में ही कुछ लोगों को बहका कर रास्ता खोल रही मशीनों के सामने लेटने को बोल दिया। पुलिस ने जो रास्ते खोले थे, वह भी इन तत्वों ने बंद कर दिए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पुलिस ने आपात स्थिति के लिए 10 फीट रास्ता खोलने की बात कही थी, लेकिन वह 40 फीट रास्ता खोलने की कोशिश कर रही है। वे पुलिस बैरिकेडिंग के सामने आकर बैठ गए। यही नहीं, रात को मंच सज गया और वहीं से भाषण भी दिया जाने लगा। कथित किसानों से एकजुट होने का आह्वान किया जाने लगा। इधर, हरियाणा पुलिस के प्रवक्ता ने कहा किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। पुलिस की पहली प्राथमिकता शांति और अमन चैन है। जिसे किसी भी हालत में खराब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कोई कानून को अपने हाथ में न लें। यदि लिया तो उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्यवाही होगी।
आखिरकार वही हुआ, जिसकी आशंका थी। आंदोलनजीवी चाहते ही नहीं कि विवाद का हल निकले। पहले कथित किसान नेता राकेश टिकैत दावा करते रहे कि पुलिस ने बॉर्डर बंद कर रखे हैं। अब जब पुलिस रास्ता खोल रही है तो वे इसका विरोध कर रहे हैं। शुक्रवार देर रात टिकरी बॉर्डर पर जो हुआ, वह आंदोलनजीवियों को बेनकाब करने के लिए काफी है। हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार अपनी ओर से पूरी शांति बरत रही है। लेकिन बॉर्डर पर जमा तत्व ऐसा नहीं चाह रहे हैं। वह गड़बड़ी फैलाने की फिराक में नजर आ रहे हैं। बॉर्डर खोलने को लेकर दिल्ली पुलिस, हरियाणा पुलिस और खुद को किसान कहने वाले लोगों से शुक्रवार शाम को बातचीत की गई। इसके लिए किसान संगठनों, दिल्ली पुलिस और हरियाणा के प्रशासनिक अधिकारियों की बहादुरगढ़ में बैठक हुई थी। लेकिन दो घंटाटे चली बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकला। हरियाणा के अधिकारी राष्ट्रीय राजमार्ग-नौ को दोनों तरफ से खोलने की बात कर रहे थे, लेकिन आंदोलनकारी केवल पाँच फीट रास्ता खोलने पर अड़े रहे। गतिरोध को देखते हुए शनिवार सुबह फिर बैठक होने वाली थी, लेकिन रात को ही प्रदर्शनकारी हंगामा करने लगे। हालांकि शनिवार को टिकरी बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों के साथ दिल्ली और हरियाणा पुलिस के अधिकारियों की बैठक के बाद कुछ सहमति बनी। यह बैठक इसके तहत, टिकरी बॉर्डर सुबह सात बजे से शाम आठ बजे तक दोपहिया, एंबुलेंस और पैदल यात्रियों के लिए खुला रहेगा। इसके लिए सड़क के एक ओर करीब पाँच फीट जगह रहेगी। इस बैठक से पूर्व कथित किसानों ने अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा की छः नवंबर को होने वाली बैठक से पहले पाँच फीट रास्ता खोलने पर विचार हुआ। उधर, उत्तर प्रदेश से सटे गाजीपुर बॉर्डर को पुलिस ने बैरिकेडिंग हटा दी है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे को दिल्ली पुलिस की ओर से आज खाली कर दिया जाएगा। हालांकि लेन-छः में उत्तर प्रदेश से दिल्ली आने वाले रास्ते में बैरिकेड्स लगे हुए हैं, इनके बारे में उत्तर प्रदेश पुलिस फैसला लेगी। इससे पहले शुक्रवार को जब दिल्ली पुलिस बॉर्डर से बैरिकेड्स हटाने का काम कर रही थी तो राकेश टिकैत ने कहा था कि यदि रास्ता खुल गया तो वह अपनी धान दिल्ली लेकर आएंगे। युवा किसान संघ हरियाणा के उपप्रधान प्रदीप चौहान कहना है कि राकेश टिकैत किसानों को भड़काने का काम करतेे हैं। बाद में बहुत ही चालाकी से खुद को बचाने में जुट जाते हैं। इस बार भी वह ऐसा ही कर रहे हैं। उनकी भूमिका बहुत ही विवादास्पद है। टिकैत किसान नहीं हैं। रात में जिस तरह से वे सोशल मीडिया पर लोगों का उकसा रहे थे, इसकी जांच होनी चाहिए। चौहान ने कहा कि तीन कृषि कानून तो बहाना है, असली मकसद तो हरियाणा और केंद्र सरकार को अस्थिर करना है। इसलिए कभी छब्बीस जनवरी जैसी घटना होती है, कभी सरेआम किसी को काट दिया जाता है और कभी जिंदा जला दिया जाता है। यह डर और दहशत का माहौल बनाने की कोशिश है। इसे आंदोलन कहना पूरी तरह से गलत है। टिकरी और कुंडली बॉर्डर के नजदीक पड़ने वाले गांवों के लोग लंबे समय से सड़क खोलने की मांग कर रहे हैं। बॉर्डर बंद होने के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सोनीपत के व्यापारी सत्यवान चोपड़ा ने बताया कि रास्ता बंद होने से उन्हें लगातार नुकसान हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसी को नुकसान पहुंचा कर कैसे कोई आंदोलन कर सकता है? यह लोग तो पूरी तरह से अराजक तत्वों की तरह काम कर रहे हैं। जिससे आम आदमी बुरी तरह से त्रस्त हो रहा है। क्या हुआ रात को? पुलिस ने शुक्रवार शाम तक टिकरी बॉर्डर से छः परतों की बैरिकेडिंग हटा दी थी। पुलिस देर रात को शांतिपूर्ण तरीके से एक तरफ का रास्ता खोल रही थी, लेकिन तथाकथित किसान नेताओं से यह बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने रात में ही कुछ लोगों को बहका कर रास्ता खोल रही मशीनों के सामने लेटने को बोल दिया। पुलिस ने जो रास्ते खोले थे, वह भी इन तत्वों ने बंद कर दिए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पुलिस ने आपात स्थिति के लिए दस फीट रास्ता खोलने की बात कही थी, लेकिन वह चालीस फीट रास्ता खोलने की कोशिश कर रही है। वे पुलिस बैरिकेडिंग के सामने आकर बैठ गए। यही नहीं, रात को मंच सज गया और वहीं से भाषण भी दिया जाने लगा। कथित किसानों से एकजुट होने का आह्वान किया जाने लगा। इधर, हरियाणा पुलिस के प्रवक्ता ने कहा किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। पुलिस की पहली प्राथमिकता शांति और अमन चैन है। जिसे किसी भी हालत में खराब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कोई कानून को अपने हाथ में न लें। यदि लिया तो उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्यवाही होगी।
Petrol Price: केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹5 की कटौती और डीजल में ₹10 की कटौती के बाद अब भाजपा शासित राज्य सरकारों ने पेट्रोल और डीजल के भाव में बड़ी कटौती की है। भाजपा शासित राज्यों ने पेट्रोल के भाव में ₹8 और डीजल के भाव में ₹9 की कटौती की है। उम्मीद की जा रही है कि इस कटौती के बाद त्योहारी सीजन में लोगों की जेब को कुछ राहत मिल सकती है। भारतीय जनता पार्टी के शासन वाले लद्दाख से लेकर पुडुचेरी तक में पेट्रोल-डीजल के भाव में बड़ी कटौती की गई है। पेट्रोल के भाव में 8. 75 पैसे प्रति लीटर तक की कटौती की गई है जबकि डीजल के भाव में ₹9. 52 तक की कटौती की गई है। केंद्र सरकार ने दीवाली से ठीक पहले देश भर के लोगों को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती करने की घोषणा की थी₹ केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यों से अनुरोध किया था कि वे भी लोकल सेल टैक्स कम कर लोगों को राहत देने की कोशिश करें₹ देशभर में ईंधन की खुदरा कीमत बढ़ने की वजह से त्योहारी सीजन में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। दिलचस्प तथ्य यह है कि हाल में ही देश के कई राज्यों में हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को कड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस वजह से केंद्र सरकार ने बढ़ती महंगाई से राहत देने के लिए लोगों को पेट्रोल डीजल के खुदरा भाव में कटौती का तोहफा दिया है। इस समय महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों की तुलना में भाजपा शासित राज्यों में पेट्रोल डीजल के भाव में काफी कमी दर्ज की गई है। अगर केंद्र सरकार के एक्साइज ड्यूटी कम करने के बाद की बात करें तो पेट्रोल डीजल के भाव में उत्तराखंड में सबसे कम गिरावट दर्ज की गई है जबकि लद्दाख में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है। उत्तराखंड सरकार ने पेट्रोल के भाव में अपनी तरफ से करीब ₹2 प्रति लीटर की कटौती की है जबकि लद्दाख में 8. 70 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। अगर डीजल की बात करें तो उत्तराखंड सरकार ने लोकल सेल्स टैक्स में करीब दो रुपये प्रति लीटर जबकि लद्दाख में ₹9. 52 प्रति लीटर की कटौती की है। किस राज्य में कितनी राहत? केंद्र सरकार की राहत के बाद कर्नाटक सरकार ने लोकल सेल टैक्स में पेट्रोल में ₹8. 62 की राहत दी है, इसी तरह डीजल के भाव में 9. 40 रुपये की राहत दी गई है। मध्यप्रदेश में पेट्रोल के भाव ₹6. 89 कम हुए जबकि डीजल के भाव में ₹6. 96 की कमी आई है। उत्तर प्रदेश में पेट्रोल के भाव ₹6. 96 और डीजल के भाव ₹2. 0 4 प्रति लीटर घटा दिए हैं। यह भी पढ़ेंः सालभर में दोगुने हुए खाद्य तेल के भाव, 5 रुपये की राहत से कितनी मिलेगी मदद?
Petrol Price: केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में पाँच रुपया की कटौती और डीजल में दस रुपया की कटौती के बाद अब भाजपा शासित राज्य सरकारों ने पेट्रोल और डीजल के भाव में बड़ी कटौती की है। भाजपा शासित राज्यों ने पेट्रोल के भाव में आठ रुपया और डीजल के भाव में नौ रुपया की कटौती की है। उम्मीद की जा रही है कि इस कटौती के बाद त्योहारी सीजन में लोगों की जेब को कुछ राहत मिल सकती है। भारतीय जनता पार्टी के शासन वाले लद्दाख से लेकर पुडुचेरी तक में पेट्रोल-डीजल के भाव में बड़ी कटौती की गई है। पेट्रोल के भाव में आठ. पचहत्तर पैसे प्रति लीटर तक की कटौती की गई है जबकि डीजल के भाव में नौ रुपया. बावन तक की कटौती की गई है। केंद्र सरकार ने दीवाली से ठीक पहले देश भर के लोगों को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती करने की घोषणा की थी₹ केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यों से अनुरोध किया था कि वे भी लोकल सेल टैक्स कम कर लोगों को राहत देने की कोशिश करें₹ देशभर में ईंधन की खुदरा कीमत बढ़ने की वजह से त्योहारी सीजन में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। दिलचस्प तथ्य यह है कि हाल में ही देश के कई राज्यों में हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को कड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस वजह से केंद्र सरकार ने बढ़ती महंगाई से राहत देने के लिए लोगों को पेट्रोल डीजल के खुदरा भाव में कटौती का तोहफा दिया है। इस समय महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों की तुलना में भाजपा शासित राज्यों में पेट्रोल डीजल के भाव में काफी कमी दर्ज की गई है। अगर केंद्र सरकार के एक्साइज ड्यूटी कम करने के बाद की बात करें तो पेट्रोल डीजल के भाव में उत्तराखंड में सबसे कम गिरावट दर्ज की गई है जबकि लद्दाख में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है। उत्तराखंड सरकार ने पेट्रोल के भाव में अपनी तरफ से करीब दो रुपया प्रति लीटर की कटौती की है जबकि लद्दाख में आठ. सत्तर रुपयापये प्रति लीटर की कटौती की गई है। अगर डीजल की बात करें तो उत्तराखंड सरकार ने लोकल सेल्स टैक्स में करीब दो रुपये प्रति लीटर जबकि लद्दाख में नौ रुपया. बावन प्रति लीटर की कटौती की है। किस राज्य में कितनी राहत? केंद्र सरकार की राहत के बाद कर्नाटक सरकार ने लोकल सेल टैक्स में पेट्रोल में आठ रुपया. बासठ की राहत दी है, इसी तरह डीजल के भाव में नौ. चालीस रुपयापये की राहत दी गई है। मध्यप्रदेश में पेट्रोल के भाव छः रुपया. नवासी कम हुए जबकि डीजल के भाव में छः रुपया. छियानवे की कमी आई है। उत्तर प्रदेश में पेट्रोल के भाव छः रुपया. छियानवे और डीजल के भाव दो रुपया. शून्य चार प्रति लीटर घटा दिए हैं। यह भी पढ़ेंः सालभर में दोगुने हुए खाद्य तेल के भाव, पाँच रुपयापये की राहत से कितनी मिलेगी मदद?
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक बार फिर इजाफा हुआ है। गुरुवार को पेट्रोल की कीमतों में 13 पैसे की बढ़ोतरी हुई है, जबकि डीजल 11 पैसे बढ़े हैं। अब दिल्ली में पेट्रोल 81 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डीजल 73. 08 रुपये प्रति लीटर है। हालांकि बुधवार को तेल की कीमतों नहीं बढ़ी थीं। दिल्ली में बुधवार को पेट्रोल 80. 87 रुपये प्रति लीटर बिका था, जबकि डीजल 72. 97 रुपये प्रति लीटर था। वहीं, मुंबई में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्रमशः 13 पैसे और 11 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। यहां अब पेट्रोल की कीमत 88. 39 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल की कीमत 77. 58 रुपये प्रति लीटर है। बुधवार को यहां पेट्रोल 88. 26 रुपये प्रति लीटर बिका था, जबकि डीजल का दाम 77. 47 रुपये प्रति लीटर था। माना जा रहा है कि आने वाले समय में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी और बढ़ने वाली हैं। हालांकि यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि 4 राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सरकार बाद में तेल की कीमतों पर लगाम लगा सकती है। तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण डॉलर की मुकाबले रुपये का गिरना है। चूंकि रुपये में लगातार गिरावट आ रही है, इसकी वजह से तेल कंपनियां भी लगातार कीमतों में बदलाव कर रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि तेल कंपनियों को कीमतों का भुगतान डॉलर में करना पड़ता है, जिसकी वजह से उन्हें अपना मार्जिन पूरा करने के लिए तेल की कीमतों में इजाफा करना पड़ रहा है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक बार फिर इजाफा हुआ है। गुरुवार को पेट्रोल की कीमतों में तेरह पैसे की बढ़ोतरी हुई है, जबकि डीजल ग्यारह पैसे बढ़े हैं। अब दिल्ली में पेट्रोल इक्यासी रुपयापये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डीजल तिहत्तर. आठ रुपयापये प्रति लीटर है। हालांकि बुधवार को तेल की कीमतों नहीं बढ़ी थीं। दिल्ली में बुधवार को पेट्रोल अस्सी. सत्तासी रुपयापये प्रति लीटर बिका था, जबकि डीजल बहत्तर. सत्तानवे रुपयापये प्रति लीटर था। वहीं, मुंबई में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्रमशः तेरह पैसे और ग्यारह पैसे की बढ़ोतरी हुई है। यहां अब पेट्रोल की कीमत अठासी. उनतालीस रुपयापये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल की कीमत सतहत्तर. अट्ठावन रुपयापये प्रति लीटर है। बुधवार को यहां पेट्रोल अठासी. छब्बीस रुपयापये प्रति लीटर बिका था, जबकि डीजल का दाम सतहत्तर. सैंतालीस रुपयापये प्रति लीटर था। माना जा रहा है कि आने वाले समय में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी और बढ़ने वाली हैं। हालांकि यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि चार राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सरकार बाद में तेल की कीमतों पर लगाम लगा सकती है। तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण डॉलर की मुकाबले रुपये का गिरना है। चूंकि रुपये में लगातार गिरावट आ रही है, इसकी वजह से तेल कंपनियां भी लगातार कीमतों में बदलाव कर रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि तेल कंपनियों को कीमतों का भुगतान डॉलर में करना पड़ता है, जिसकी वजह से उन्हें अपना मार्जिन पूरा करने के लिए तेल की कीमतों में इजाफा करना पड़ रहा है।
नहीं खुलतींचस हे । लाचारी से बँधे हुए है । क्यों ? इसके केवल दो उत्तर हैं । एक शिक्षा और दूसरा फट । किसान भाई वेपढे लिखे है - इस बात को तो वे जानते है । लेकिन उनमे फूट बड़ा भारी घर बनाये बैठी है - इसका उन्हें पता नहीं है । यदि आप लोगों में एकता होती तो आज हमारे देश के किसान अन्य देशों के किसानों की तुलना निरे वेवस न होते । मेरे शब्द कडवे होते जा रहे हैं। शायद आपने मेरे मुँह से बड़े ही मीठे शब्दों की आशा की होगी। और मेरे इस मुँहफटपने पर आप में से बहुत से नाराज भी हो रहे होंगे। लेकिन लाचारी है- कोई भी भला विचारवान आदमी किसानों की ऐसी दुर्दशा को नहीं देख सकता। मुझ मे भी यही घात है। जब से मैने सुना है कि ठाकुर निजय शमशेर ने काका की रिहाई मॉगने वाली जनता पर घुड सवार छोड दिये है, तब से मेरा नून गौल रहा है । इस जननी जन्म भूमि की धूल को प्ररणाम करने के पहले मैने यह प्ररण कर लिया है कि जब तक मै यहाँ से अत्याचार को जड को खोद कर नहीं फेक दूँगा तब तक इस गाँव से नहीं हटूंगा। यहीं मर जाऊँगा । आज हम शपथ खाएँ कि हम एक है और सदा एक ही रहेंगे। हम कभी आपस मे फूट नहीं पड़ने देंगे। और हमारे अन्दराज जो फूट बैठी हुई है। उसे सदा के लिए निकाल देते हैं। मेरे बन्धुओ । हममें एकता स्थापित होने के बाद एक ठाकुर तो क्या ससार के समस्त ठाकुरों के महाराजाधिराज भी हमारा बाल बॉका नहीं सकेंगे । हमे थर-थर कंपाने वाले तब हमारे सामने ar-ar फॉपने लगेंगे। हमे इस ग्रान्त में ही नहीं, बल्कि सारे देश और सारे ससार के किसानों और श्रमिकों से एक्ता स्थापित करनी है । याद रहे जनता के लिए एकता वह महा मंत्र है -- जिसके सिद्ध हो जाने पर जनता का राज होगा, जनता की अपनी सरकार होगी, जनता अपना निवदाग आप करेगी, जनता अपने लिए अपनी पसन्द के विधान आप बनावेगी । और सोचिए तथ जनता कितनी मुसो होगी 1 आज यदि हमारे देश के सात लाम गॉवों के किसान मिल कर हो जॉय तो विदेशियों की सत्ता हमारे देश में आज जो मनमानी कर रही है वह दसी क्षरण समाप्त हो गया। फूट डालो और राज करो के कूटनीतिज्ञों का इस देश से आज ही जनाजा निकल जाय कायेको आरम्भ परने के पहले में अपने किसान भाइयों की एक बहुत बड़ी सभा करना चाहता हू ~~-जिसमे आस पास के सैक्ड़ों गाँवों के हजारों किसानों की उपस्थिति हो। और जिसमे मैं अपने उद्देश्यों पर पूरा प्रकाश डालकर सब से पूर्ण सहयोग की प्रार्थना का सर्वे । इस तरह यह काम जल्दी हो सकेगा। इस सभा के प्रचार में मुझे फल ही आप लोगों की सहायता की आवश्यकता पड़ेगी। क्या मैं इस समय यह पूछने की इच्छा कर सकता हूँ कि - फल कौन फोन भाई इस काम के लिए मेरे साथ आने को तैयार है ?" इस पर गांव के उपस्थित सभी किसानों ने एक स्वर से कहा-'हम सभी इस काम में हाथ बटाने के लिए तैयार है । आप हमे रास्ता दिसाइये। जरूरत पड़ने पर हम अपनी जाने की भी परवाह नहीं करेंगे । रमेश भाई ? हमे रास्ता दिखाओ ।" + "शरीर तवे की तरह गग्म हो रहा है डाक्टर, आज न जाओ, रास्ते में नहीं बुसार जोर पकड लेगा तो क्या होगा ?" नना ने चिन्तापूर्ण शब्दों मे कहा । गले मे कुर्ता डालते हुये रमेश बोला- "जाना कैसे स्क सकेगा मामी । मैं न जाऊँगा तो इन अनपढ लोगों में उत्साह कैसे जागेगा ? ठाकुर तो अपनी करनी पर पूरी तरह से उतर आया है। जहाँ देखा वहा उसके आदमी मौजूद । कार्य्य कर्ताआ को भडकाते है, लालच देते है - फुसलाते है, निरत्साहित करते हैं, और मारते भी है । देसा न, मनोहर को कैसा मारा । चेचारे का हाथ ही तोड दिया । उधर ही से जाऊँगा - उसकी मरहम-पट्टी भी तो करनी है। जरा वह दवाई का देना । मेरी अच्छी मामी ।" तनसुना सुबह ही सुबह नदी से नहाकर आया था। अपनी चोती को सूसने के लिए फैलाते-फैलाते बोला- "जा रहे हो डाक्टर'? किशनपुरा मे ठाकुर के आदमियों ने चार कार्य कर्ताओं को मारा - एक की हालत बडी सराव है। लोग घडे भयभीत हो गए है।" "स्थिति इतनी बिगड़ी हुई है कि यह घटनाएँ तो कुछ भी नहीं है मामा । अभी तो ऐसी कितनी ही बुरी घटनाएँ सुनने
नहीं खुलतींचस हे । लाचारी से बँधे हुए है । क्यों ? इसके केवल दो उत्तर हैं । एक शिक्षा और दूसरा फट । किसान भाई वेपढे लिखे है - इस बात को तो वे जानते है । लेकिन उनमे फूट बड़ा भारी घर बनाये बैठी है - इसका उन्हें पता नहीं है । यदि आप लोगों में एकता होती तो आज हमारे देश के किसान अन्य देशों के किसानों की तुलना निरे वेवस न होते । मेरे शब्द कडवे होते जा रहे हैं। शायद आपने मेरे मुँह से बड़े ही मीठे शब्दों की आशा की होगी। और मेरे इस मुँहफटपने पर आप में से बहुत से नाराज भी हो रहे होंगे। लेकिन लाचारी है- कोई भी भला विचारवान आदमी किसानों की ऐसी दुर्दशा को नहीं देख सकता। मुझ मे भी यही घात है। जब से मैने सुना है कि ठाकुर निजय शमशेर ने काका की रिहाई मॉगने वाली जनता पर घुड सवार छोड दिये है, तब से मेरा नून गौल रहा है । इस जननी जन्म भूमि की धूल को प्ररणाम करने के पहले मैने यह प्ररण कर लिया है कि जब तक मै यहाँ से अत्याचार को जड को खोद कर नहीं फेक दूँगा तब तक इस गाँव से नहीं हटूंगा। यहीं मर जाऊँगा । आज हम शपथ खाएँ कि हम एक है और सदा एक ही रहेंगे। हम कभी आपस मे फूट नहीं पड़ने देंगे। और हमारे अन्दराज जो फूट बैठी हुई है। उसे सदा के लिए निकाल देते हैं। मेरे बन्धुओ । हममें एकता स्थापित होने के बाद एक ठाकुर तो क्या ससार के समस्त ठाकुरों के महाराजाधिराज भी हमारा बाल बॉका नहीं सकेंगे । हमे थर-थर कंपाने वाले तब हमारे सामने ar-ar फॉपने लगेंगे। हमे इस ग्रान्त में ही नहीं, बल्कि सारे देश और सारे ससार के किसानों और श्रमिकों से एक्ता स्थापित करनी है । याद रहे जनता के लिए एकता वह महा मंत्र है -- जिसके सिद्ध हो जाने पर जनता का राज होगा, जनता की अपनी सरकार होगी, जनता अपना निवदाग आप करेगी, जनता अपने लिए अपनी पसन्द के विधान आप बनावेगी । और सोचिए तथ जनता कितनी मुसो होगी एक आज यदि हमारे देश के सात लाम गॉवों के किसान मिल कर हो जॉय तो विदेशियों की सत्ता हमारे देश में आज जो मनमानी कर रही है वह दसी क्षरण समाप्त हो गया। फूट डालो और राज करो के कूटनीतिज्ञों का इस देश से आज ही जनाजा निकल जाय कायेको आरम्भ परने के पहले में अपने किसान भाइयों की एक बहुत बड़ी सभा करना चाहता हू ~~-जिसमे आस पास के सैक्ड़ों गाँवों के हजारों किसानों की उपस्थिति हो। और जिसमे मैं अपने उद्देश्यों पर पूरा प्रकाश डालकर सब से पूर्ण सहयोग की प्रार्थना का सर्वे । इस तरह यह काम जल्दी हो सकेगा। इस सभा के प्रचार में मुझे फल ही आप लोगों की सहायता की आवश्यकता पड़ेगी। क्या मैं इस समय यह पूछने की इच्छा कर सकता हूँ कि - फल कौन फोन भाई इस काम के लिए मेरे साथ आने को तैयार है ?" इस पर गांव के उपस्थित सभी किसानों ने एक स्वर से कहा-'हम सभी इस काम में हाथ बटाने के लिए तैयार है । आप हमे रास्ता दिसाइये। जरूरत पड़ने पर हम अपनी जाने की भी परवाह नहीं करेंगे । रमेश भाई ? हमे रास्ता दिखाओ ।" + "शरीर तवे की तरह गग्म हो रहा है डाक्टर, आज न जाओ, रास्ते में नहीं बुसार जोर पकड लेगा तो क्या होगा ?" नना ने चिन्तापूर्ण शब्दों मे कहा । गले मे कुर्ता डालते हुये रमेश बोला- "जाना कैसे स्क सकेगा मामी । मैं न जाऊँगा तो इन अनपढ लोगों में उत्साह कैसे जागेगा ? ठाकुर तो अपनी करनी पर पूरी तरह से उतर आया है। जहाँ देखा वहा उसके आदमी मौजूद । कार्य्य कर्ताआ को भडकाते है, लालच देते है - फुसलाते है, निरत्साहित करते हैं, और मारते भी है । देसा न, मनोहर को कैसा मारा । चेचारे का हाथ ही तोड दिया । उधर ही से जाऊँगा - उसकी मरहम-पट्टी भी तो करनी है। जरा वह दवाई का देना । मेरी अच्छी मामी ।" तनसुना सुबह ही सुबह नदी से नहाकर आया था। अपनी चोती को सूसने के लिए फैलाते-फैलाते बोला- "जा रहे हो डाक्टर'? किशनपुरा मे ठाकुर के आदमियों ने चार कार्य कर्ताओं को मारा - एक की हालत बडी सराव है। लोग घडे भयभीत हो गए है।" "स्थिति इतनी बिगड़ी हुई है कि यह घटनाएँ तो कुछ भी नहीं है मामा । अभी तो ऐसी कितनी ही बुरी घटनाएँ सुनने
शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) के फैन्स उनकी अगली फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. 'जीरो' (Zero) की असफलता के बाद दर्शकों को अब किंग खान से एक सुपरहिट फिल्म की उम्मीद है मगर अभी तक उन्होंने अपनी अगली फिल्म की घोषणा नहीं की है. पहले यह खबर सामने आई थी कि किंग खान राकेश शर्मा की बायोपिक में नजर आएंगे मगर बाद में उन्होंने इस फिल्म से अपना नाम वापस ले लिया था. अब बताया जा रहा है कि शाहरुख खान डॉन-3 (Don 3) में भी नजर नहीं आएंगे. मुंबई मिरर की एक खबर के मुताबिक, "शाहरुख खान ने निजी कारणों की वजह से 'डॉन 3' से अपना नाम वापस ले लिया है. जोया अख्तर का प्रोडक्शन हाउस फिल्म पर अभी भी काम कर रहा है मगर अब जब किंग खान इस फिल्म का हिस्सा नहीं है. . इसलिए जोया अख्तर (Zoya Akhtar) के पास कोई मेल लीड नहीं है. हमने सुना है कि जोया अख्तर ने रणवीर सिंह (Ranveer Singh) को इस रोल के लिए अप्रोच किया है और अभी दोनों के बीच बातचीत चल रही है. " Should I just let the hair grow for another few months? ? ! आपको बता दें कि फिल्म 'डॉन 3' साल 2006 में रिलीज हुई फिल्म 'डॉन' का तीसरा पार्ट है. साल 2012 में फिल्म का दूसरा पार्ट 'डॉन 2' रिलीज हुआ था. दोनों पार्ट्स में शाहरुख खान, प्रियंका चोपड़ा और बोमन ईरानी जैसे सितारें अहम भूमिका में थे.
शाहरुख खान के फैन्स उनकी अगली फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. 'जीरो' की असफलता के बाद दर्शकों को अब किंग खान से एक सुपरहिट फिल्म की उम्मीद है मगर अभी तक उन्होंने अपनी अगली फिल्म की घोषणा नहीं की है. पहले यह खबर सामने आई थी कि किंग खान राकेश शर्मा की बायोपिक में नजर आएंगे मगर बाद में उन्होंने इस फिल्म से अपना नाम वापस ले लिया था. अब बताया जा रहा है कि शाहरुख खान डॉन-तीन में भी नजर नहीं आएंगे. मुंबई मिरर की एक खबर के मुताबिक, "शाहरुख खान ने निजी कारणों की वजह से 'डॉन तीन' से अपना नाम वापस ले लिया है. जोया अख्तर का प्रोडक्शन हाउस फिल्म पर अभी भी काम कर रहा है मगर अब जब किंग खान इस फिल्म का हिस्सा नहीं है. . इसलिए जोया अख्तर के पास कोई मेल लीड नहीं है. हमने सुना है कि जोया अख्तर ने रणवीर सिंह को इस रोल के लिए अप्रोच किया है और अभी दोनों के बीच बातचीत चल रही है. " Should I just let the hair grow for another few months? ? ! आपको बता दें कि फिल्म 'डॉन तीन' साल दो हज़ार छः में रिलीज हुई फिल्म 'डॉन' का तीसरा पार्ट है. साल दो हज़ार बारह में फिल्म का दूसरा पार्ट 'डॉन दो' रिलीज हुआ था. दोनों पार्ट्स में शाहरुख खान, प्रियंका चोपड़ा और बोमन ईरानी जैसे सितारें अहम भूमिका में थे.
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने दुनिया की 10 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में तुर्की को शामिल करने के लिए अपनी सरकार के 2023 के लक्ष्य को दोहराया है। नए साल को चिह्नित करने के लिए एक संदेश में, तुर्की नेता ने कहा कि तुर्की ने सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी संकटों के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करने में अपने "सफल" प्रदर्शन के साथ खुद को "सकारात्मक रूप से प्रतिष्ठित" किया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, एर्दोगन ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था ने निवेश, रोजगार, उत्पादन, निर्यात आदि से प्रेरित एक ऐतिहासिक परिवर्तन शुरू किया है। तुर्की की अर्थव्यवस्था ने 2021 में मजबूत वृद्धि देखी है क्योंकि वित्तीय संस्थान देश के सकल घरेलू उत्पाद में 9 प्रतिशत की वृद्धि की भविष्यवाणी कर रहे हैं। उच्च मुद्रास्फीति और विदेशी मुद्रा अस्थिरता ने 2022 में विकास पर एक छाया डाली है।
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने दुनिया की दस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में तुर्की को शामिल करने के लिए अपनी सरकार के दो हज़ार तेईस के लक्ष्य को दोहराया है। नए साल को चिह्नित करने के लिए एक संदेश में, तुर्की नेता ने कहा कि तुर्की ने सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी संकटों के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करने में अपने "सफल" प्रदर्शन के साथ खुद को "सकारात्मक रूप से प्रतिष्ठित" किया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, एर्दोगन ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था ने निवेश, रोजगार, उत्पादन, निर्यात आदि से प्रेरित एक ऐतिहासिक परिवर्तन शुरू किया है। तुर्की की अर्थव्यवस्था ने दो हज़ार इक्कीस में मजबूत वृद्धि देखी है क्योंकि वित्तीय संस्थान देश के सकल घरेलू उत्पाद में नौ प्रतिशत की वृद्धि की भविष्यवाणी कर रहे हैं। उच्च मुद्रास्फीति और विदेशी मुद्रा अस्थिरता ने दो हज़ार बाईस में विकास पर एक छाया डाली है।
भाग III~~-~खण्ड 1] प्ररूप प्राई०टी० एन. एस मायकर अधिनियम, 1961 ( 1961 का 43 ) की धारा 269-घ ( 1 ) के प्रधीन सूचना कार्यालय सहायक प्रायकर भायुक्त (निरीक्षण) अर्जन रेंज-I प्रहमदाबाद अहमदाबाद, दिनांक 7 अप्रैल 1980 निदेश सं० पी० भार० नं० 1001 एसीक्यू 23-1/79-80-प्रतः मुझे एस० सी० पारीख प्रायकर अधिनियम, 1961 ( 1961का 43 ) ( जिसे इसमें इसके पश्चात् 'उक्त प्रधिनियम' कहा गया है ), की धारा 269 ख के प्रधीन सक्षम प्राधिकारी को, यह विश्वास करने का कारण है कि स्थावर संपत्ति जिसका उचित बाजार मूल्य 25,000/- रु० से अधिक है भौर जिसकी प्रार० एस० नं० 211 से 215 प्लाट नं० 11बी है तथा जो सारु सेक्शन रोड जामनगर में स्थित है (और इससे उपाबद्ध अनुसूची में मोर पूर्ण रूप से वर्णित है), रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के कार्यालय जामनगर में रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 ( 1908 का 16 ) के अधीन को पूर्वोक्त सम्पत्ति के उचित बाजार मूल्य से कम के दृश्यमान प्रतिफल के लिए अन्तरित की गई है और मुझे यह विश्वास करने का कारण है कि यथापूर्वोक्त सम्पत्ति का उचित बाजार मूल्य, उसके दृश्यमान प्रतिफल से, ऐसे दृश्यमान प्रतिफल के पन्द्रह प्रतिशत से अधिक है घोर अन्तरक (अन्तरकों) भौर अन्तरिती (अन्तरितियों) के बीच ऐसे अन्तरण के लिए, तय पाया गया प्रतिफल निम्नलिखित उद्देश्य से उक्त अन्तरण लिखित में वास्तविक रूप से कथित नहीं किया गया है (क) प्रस्तरण से हुई किसी प्राय की बाबत उक्त प्रधिनियम के अधीन कर देने के प्रन्तरक के दायित्व में कमी करने या उससे बचने में सुविधा के लिए; और / या ( ख ) ऐसी किसी प्राय या किसी धन या अन्य प्रास्तियों को, जिन्हें भारतीय आयकर अधिनियम, (1922 का 11 ) या उक्त अधिनियम, या धन कर अधिनियम, 1957 के प्रयोजनार्थ प्रन्तरिती गया था या किया जाना सुविधा के लिए; प्रतः, अब, उक्त अधिनियम की धारा 269 - ग के अनुसरण में, मैं, उक्त अधिनियम की धारा 269 घ की उपधारा (1) के मधीन निम्नलिखित व्यक्तियों अर्थात :1. बीजा वालवे द्वारा सोल प्रोपराईटर नाथूभाई शाह 2. वडगाम भाईओं के द्वारा मनसुखलाल ( अन्तरक ) ( 1 ) गिरधर लाल माघवजी (2) रमणीकलाल माधवजी इन्जीनियर्स श्र/फिसर के पास जामनगर (अन्तरिती) को यह सूचना जारी करके पूर्वोक्त सम्पत्ति के वर्जन के लिए कार्यवाहियां शुरू करता हूँ । उक्त सम्पत्ति के मर्जन के सम्बन्ध में कोई भी प्रक्षेप : ( क ) इस सूचना के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 45 दिन की अवधि या तत्सम्बन्धी व्यक्तियों पर सूचना की तामील से 30 दिन की अवधि, जो भी अवधि बाद में समाप्त होती हो, के भीतर पूर्वोक्त व्यक्तियों में से किसी व्यक्ति द्वारा; ( ख ) इस सूचना के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 45 दिन के भीतर उक्त स्थावर सम्पत्ति में हितबद्ध किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रधोहस्ताक्षरी के पास लिखित में किए जा सकेंगे । तारीख 7-4-80 मोहर : स्पष्टीकरण :- इसमें प्रयुक्त शब्दों और पदों का, जो उक्त अधिनियम के अध्याय 20-क में परिभाषित है, वही अर्थ होगा, जो उस अध्याय में दिया गया है । जमीन और मकान प्रार० एस० नं० 211 से 215 प्लाट नं० 11 - बी है जो सारू सेक्शन जामनगर में स्थित है और रजिट्रीकरण अधिकारी के कार्यालय जामनगर मे नं० 1876 से दिनांक 1-8-1979 के रोज रजिस्टर्ड की गई है । एस० सी० पारीख सहायक आयकर प्रायुक्त ( निरीक्षण ) प्रर्जन रेंज-I ग्रहमदाबाद
भाग III~~-~खण्ड एक] प्ररूप प्राईशून्यटीशून्य एन. एस मायकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ की धारा दो सौ उनहत्तर-घ के प्रधीन सूचना कार्यालय सहायक प्रायकर भायुक्त अर्जन रेंज-I प्रहमदाबाद अहमदाबाद, दिनांक सात अप्रैल एक हज़ार नौ सौ अस्सी निदेश संशून्य पीशून्य भारशून्य नंशून्य एक हज़ार एक एसीक्यू तेईस जनवरी उन्यासी-अस्सी-प्रतः मुझे एसशून्य सीशून्य पारीख प्रायकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ , की धारा दो सौ उनहत्तर ख के प्रधीन सक्षम प्राधिकारी को, यह विश्वास करने का कारण है कि स्थावर संपत्ति जिसका उचित बाजार मूल्य पच्चीस,शून्य/- शून्य रुपया से अधिक है भौर जिसकी प्रारशून्य एसशून्य नंशून्य दो सौ ग्यारह से दो सौ पंद्रह प्लाट नंशून्य ग्यारहबी है तथा जो सारु सेक्शन रोड जामनगर में स्थित है , रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के कार्यालय जामनगर में रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ आठ के अधीन को पूर्वोक्त सम्पत्ति के उचित बाजार मूल्य से कम के दृश्यमान प्रतिफल के लिए अन्तरित की गई है और मुझे यह विश्वास करने का कारण है कि यथापूर्वोक्त सम्पत्ति का उचित बाजार मूल्य, उसके दृश्यमान प्रतिफल से, ऐसे दृश्यमान प्रतिफल के पन्द्रह प्रतिशत से अधिक है घोर अन्तरक भौर अन्तरिती के बीच ऐसे अन्तरण के लिए, तय पाया गया प्रतिफल निम्नलिखित उद्देश्य से उक्त अन्तरण लिखित में वास्तविक रूप से कथित नहीं किया गया है प्रस्तरण से हुई किसी प्राय की बाबत उक्त प्रधिनियम के अधीन कर देने के प्रन्तरक के दायित्व में कमी करने या उससे बचने में सुविधा के लिए; और / या ऐसी किसी प्राय या किसी धन या अन्य प्रास्तियों को, जिन्हें भारतीय आयकर अधिनियम, या उक्त अधिनियम, या धन कर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन के प्रयोजनार्थ प्रन्तरिती गया था या किया जाना सुविधा के लिए; प्रतः, अब, उक्त अधिनियम की धारा दो सौ उनहत्तर - ग के अनुसरण में, मैं, उक्त अधिनियम की धारा दो सौ उनहत्तर घ की उपधारा के मधीन निम्नलिखित व्यक्तियों अर्थात :एक. बीजा वालवे द्वारा सोल प्रोपराईटर नाथूभाई शाह दो. वडगाम भाईओं के द्वारा मनसुखलाल गिरधर लाल माघवजी रमणीकलाल माधवजी इन्जीनियर्स श्र/फिसर के पास जामनगर को यह सूचना जारी करके पूर्वोक्त सम्पत्ति के वर्जन के लिए कार्यवाहियां शुरू करता हूँ । उक्त सम्पत्ति के मर्जन के सम्बन्ध में कोई भी प्रक्षेप : इस सूचना के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से पैंतालीस दिन की अवधि या तत्सम्बन्धी व्यक्तियों पर सूचना की तामील से तीस दिन की अवधि, जो भी अवधि बाद में समाप्त होती हो, के भीतर पूर्वोक्त व्यक्तियों में से किसी व्यक्ति द्वारा; इस सूचना के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से पैंतालीस दिन के भीतर उक्त स्थावर सम्पत्ति में हितबद्ध किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रधोहस्ताक्षरी के पास लिखित में किए जा सकेंगे । तारीख सात अप्रैल अस्सी मोहर : स्पष्टीकरण :- इसमें प्रयुक्त शब्दों और पदों का, जो उक्त अधिनियम के अध्याय बीस-क में परिभाषित है, वही अर्थ होगा, जो उस अध्याय में दिया गया है । जमीन और मकान प्रारशून्य एसशून्य नंशून्य दो सौ ग्यारह से दो सौ पंद्रह प्लाट नंशून्य ग्यारह - बी है जो सारू सेक्शन जामनगर में स्थित है और रजिट्रीकरण अधिकारी के कार्यालय जामनगर मे नंशून्य एक हज़ार आठ सौ छिहत्तर से दिनांक एक अगस्त एक हज़ार नौ सौ उन्यासी के रोज रजिस्टर्ड की गई है । एसशून्य सीशून्य पारीख सहायक आयकर प्रायुक्त प्रर्जन रेंज-I ग्रहमदाबाद
विश्व के नंबर एक खिलाड़ी सर्बिया के नोवाक जोकोविच ने पूर्व चैंपियन जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव को लगातार सेटों में 6-3, 7-6 (4) से हराकर 9वीं बार साल के आखिरी टूर्नामेंट एटीपी वर्ल्ड टूर फाइनल्स में ग्रुप टोक्यो 1970 से सेमीफाइनल में जगह बना ली है। जोकोविच 13वीं बार इस टूर्नामेंट में खेल रहे हैं और 9वीं बार सेमीफाइनल में पहुंचे हैं। टॉप सीड जोकोविच इस टूर्नामेंट में रिकार्ड छठे खिताब की बराबरी करने से दो जीत दूर रह गए हैं। सर्बियाई खिलाड़ी ने इस जीत से ज्वेरेव से 2018 में इस टूर्नामेंट के फाइनल में मिली हार का बदला चुका लिया है। विश्व के नंबर एक खिलाड़ी का सेमीफाइनल में आस्ट्रिया के डोमिनिक थिएम से मुकाबला होगा, जिनसे वह पिछले साल ग्रुप मैच में हारे थे। जोकोविच पहले ही छठी बार साल का समापन नंबर एक के रूप में करना सुनिश्चित कर चुके हैं। ग्रुप टोक्यो 1970 के एक अन्य मैच में रूस के डेनिल मेदवेदेव ने अपने अंतिम मुकाबले में अर्जेंटीना के डिएगो श्वार्ट्जमैन को लगातार सेटों में 6-3, 6-3 से पराजित किया।
विश्व के नंबर एक खिलाड़ी सर्बिया के नोवाक जोकोविच ने पूर्व चैंपियन जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरेव को लगातार सेटों में छः-तीन, सात-छः से हराकर नौवीं बार साल के आखिरी टूर्नामेंट एटीपी वर्ल्ड टूर फाइनल्स में ग्रुप टोक्यो एक हज़ार नौ सौ सत्तर से सेमीफाइनल में जगह बना ली है। जोकोविच तेरहवीं बार इस टूर्नामेंट में खेल रहे हैं और नौवीं बार सेमीफाइनल में पहुंचे हैं। टॉप सीड जोकोविच इस टूर्नामेंट में रिकार्ड छठे खिताब की बराबरी करने से दो जीत दूर रह गए हैं। सर्बियाई खिलाड़ी ने इस जीत से ज्वेरेव से दो हज़ार अट्ठारह में इस टूर्नामेंट के फाइनल में मिली हार का बदला चुका लिया है। विश्व के नंबर एक खिलाड़ी का सेमीफाइनल में आस्ट्रिया के डोमिनिक थिएम से मुकाबला होगा, जिनसे वह पिछले साल ग्रुप मैच में हारे थे। जोकोविच पहले ही छठी बार साल का समापन नंबर एक के रूप में करना सुनिश्चित कर चुके हैं। ग्रुप टोक्यो एक हज़ार नौ सौ सत्तर के एक अन्य मैच में रूस के डेनिल मेदवेदेव ने अपने अंतिम मुकाबले में अर्जेंटीना के डिएगो श्वार्ट्जमैन को लगातार सेटों में छः-तीन, छः-तीन से पराजित किया।
IndiGo की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, Vaxi Fare का फायदा केवल उन यात्रियों को मिलेगा जो वैक्सीन की कम से कम पहली डोज ले चुके हों. IndiGo Special offer: इस समय देश में Corona Vaccination प्रोग्राम जोर-शोर से चल रहा है. वैक्सिनेशन के प्रति लोगों को प्रेरित करने के मकसद से सर्विस सेक्टर की कंपनियां स्पेशल प्रोग्राम लेकर आई हैं. इसी कड़ी में IndiGo ने आज से Vaxi Fare स्कीम की शुरुआत की है. इस स्कीम के तहत अगर कोई फ्लायर वैक्सिनेटेड है तो उसे हर रूट पर किराए में 10 फीसदी तक छूट मिलेगी. IndiGo की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, Vaxi Fare का फायदा केवल उन यात्रियों को मिलेगा जो वैक्सीन की कम से कम पहली डोज ले चुके हों. इसके अलावा बुकिंग के समय पैसेंजर का भारत में होना जरूरी है. एयरपोर्ट के चेक-इन काउंटर पर ऐसे यात्रियों को कोविड-19 वैक्सिनेशन सर्टिफिकेट दिखाना होगा या फिर Aarogya Setu मोबाइल ऐप की मदद से वैक्सिनेशन को लेकर अपनी स्टेटस दिखानी होगी. अगर किसी ने झूठ बोलकर इस स्कीम का फायदा लिया है तो चेक-इन काउंटर पर पकड़े जाने पर उसे बकाया किराया और चेंज फीस जमा करना पड़ सकता है. टिकट की बुकिंग इंडिगो की वेबसाइट से जरूरी है. टिकट बुकिंग के समय इंडिगो की वेबसाइट पर 'Vaccinated' का विकल्प दिया गया है जिसका चयन करना है. उसके बाद वैक्सिनेशन स्टेटस का पेज खुलता है. वहां तीन विकल्प दिए गए हैं. पहला डोज लेने वाले यात्रियों के लिए 10 फीसदी तक ऑफ, दूसरा डोज लेने वाले यात्रियों के लिए भी 10 फीसद तक का ऑफ और वैक्सिनेटेड नहीं होने पर कोई डिस्काउंट नहीं है. इस समय देश के 29 करोड़ 97 हजार लोगों को वैक्सीन की पहली डोज लग चुकी है. इनमें से 23 करोड़ 88 लाख लोगों को केवल एक डोज लगी है जबकि 5 करोड़ 12 लाख लोगों को दोनों डोज लग चुकी है. वैक्सिनेशन के लिए अब तक 31 करोड़ 72 लाख रजिस्ट्रेशन किया गया है. इनमें से 18-44 साल वालों की संख्या 14 करोड़ 20 लाख और 45 प्लस वालों की संख्या 17 करोड़ 51 लाख है. देश के 50 हजार 26 सेंटर्स पर वैक्सिनेशन प्रोग्राम चलाया जा रहा है जिसमें सरकारी और प्राइवेट सेंटर दोनों शामिल हैं. इन सेंटर्स में सरकारी सेंटर्स 48 हजार 426 हैं जबकि प्राइवेट सेंटर की संख्या 1600 है.
IndiGo की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, Vaxi Fare का फायदा केवल उन यात्रियों को मिलेगा जो वैक्सीन की कम से कम पहली डोज ले चुके हों. IndiGo Special offer: इस समय देश में Corona Vaccination प्रोग्राम जोर-शोर से चल रहा है. वैक्सिनेशन के प्रति लोगों को प्रेरित करने के मकसद से सर्विस सेक्टर की कंपनियां स्पेशल प्रोग्राम लेकर आई हैं. इसी कड़ी में IndiGo ने आज से Vaxi Fare स्कीम की शुरुआत की है. इस स्कीम के तहत अगर कोई फ्लायर वैक्सिनेटेड है तो उसे हर रूट पर किराए में दस फीसदी तक छूट मिलेगी. IndiGo की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, Vaxi Fare का फायदा केवल उन यात्रियों को मिलेगा जो वैक्सीन की कम से कम पहली डोज ले चुके हों. इसके अलावा बुकिंग के समय पैसेंजर का भारत में होना जरूरी है. एयरपोर्ट के चेक-इन काउंटर पर ऐसे यात्रियों को कोविड-उन्नीस वैक्सिनेशन सर्टिफिकेट दिखाना होगा या फिर Aarogya Setu मोबाइल ऐप की मदद से वैक्सिनेशन को लेकर अपनी स्टेटस दिखानी होगी. अगर किसी ने झूठ बोलकर इस स्कीम का फायदा लिया है तो चेक-इन काउंटर पर पकड़े जाने पर उसे बकाया किराया और चेंज फीस जमा करना पड़ सकता है. टिकट की बुकिंग इंडिगो की वेबसाइट से जरूरी है. टिकट बुकिंग के समय इंडिगो की वेबसाइट पर 'Vaccinated' का विकल्प दिया गया है जिसका चयन करना है. उसके बाद वैक्सिनेशन स्टेटस का पेज खुलता है. वहां तीन विकल्प दिए गए हैं. पहला डोज लेने वाले यात्रियों के लिए दस फीसदी तक ऑफ, दूसरा डोज लेने वाले यात्रियों के लिए भी दस फीसद तक का ऑफ और वैक्सिनेटेड नहीं होने पर कोई डिस्काउंट नहीं है. इस समय देश के उनतीस करोड़ सत्तानवे हजार लोगों को वैक्सीन की पहली डोज लग चुकी है. इनमें से तेईस करोड़ अठासी लाख लोगों को केवल एक डोज लगी है जबकि पाँच करोड़ बारह लाख लोगों को दोनों डोज लग चुकी है. वैक्सिनेशन के लिए अब तक इकतीस करोड़ बहत्तर लाख रजिस्ट्रेशन किया गया है. इनमें से अट्ठारह-चौंतालीस साल वालों की संख्या चौदह करोड़ बीस लाख और पैंतालीस प्लस वालों की संख्या सत्रह करोड़ इक्यावन लाख है. देश के पचास हजार छब्बीस सेंटर्स पर वैक्सिनेशन प्रोग्राम चलाया जा रहा है जिसमें सरकारी और प्राइवेट सेंटर दोनों शामिल हैं. इन सेंटर्स में सरकारी सेंटर्स अड़तालीस हजार चार सौ छब्बीस हैं जबकि प्राइवेट सेंटर की संख्या एक हज़ार छः सौ है.
RRR Movie: मचअवेटेड फिल्म RRR के रिलीज के लिए बस कुछ ही दिन बाकी हैं और ऐसा लग रहा है कि डायरेक्टर और ऐक्टर्स अपनी फिल्म का प्रचार करने का एक भी मौका छोड़ना नहीं चाहते हैं। फिल्म 25 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। मेकर्स भारत के कोने-कोने में अपनी फिल्म का प्रचार करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। मेकर्स दिल्ली, अमृतसर, जयपुर, और कोलकाता के बाद 22 मार्च को वाराणसी पहुंचे हैं। 22 मार्च को टीम आरआरआर (RRR), जिसमें निर्देशक एसएस राजामौली (Ss Rajamouli) और ऐक्टर्स जूनियर एनटीआर (Junior Ntr) और राम चरण (Ram Charan) वाराणसी पहुंचे। वाराणसी में सभी ने मिलकर पवित्र गंगा आरती में हिस्सा लिया। इतना ही नहीं, कलाकारों ने स्थानीय मीडिया के साथ बातचीत भी की और कुछ स्थानीय व्यंजनों का लुत्फ भी उठाया। दिलचस्प बात यह है कि भारत की सबसे बड़ी एक्शन ड्रामा, एसएस राजामौली की 'आरआरआर' फिल्म डॉल्बी सिनेमा (Dolby Cinema) और 3डी फॉर्मेट में रिलीज होने वाली पहली भारतीय फिल्म है। साउथ सुपरस्टार राम चरण (Ram Charan) की फिल्म आरआरआर (RRR) को लेकर दर्शकों के बीच खासा एक्साइटमेंट है। ताजा चर्चा इस बात की है कि फिल्म पहले दिन ही आराम से 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगी। द कश्मीर फाइल्स की वेव के बावजूद दावा किया जा रहा है कि राम चरण, जूनियर एनटीआर, आलिया भट्ट और अजय देवगन जैसे जबरदस्त सितारों से सजी फिल्म आरआरआर थियेटर्स पर धमाकेदार एंट्री करेगी। निर्माताओं ने फिल्म के लिए एडवांस बुकिंग भी शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म ने अकेले हैदराबाद में सबसे ज्यादा एडवांस टिकट बुकिंग कर ली है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह फिल्म करीब 400 करोड़ रुपये की बड़ी लागत से बनाई गई है। इसलिए मेकर्स फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड्स तोड़ आंकड़े बनाने की उम्मीद लगा रहे हैं। संबंधित खबरेंः
RRR Movie: मचअवेटेड फिल्म RRR के रिलीज के लिए बस कुछ ही दिन बाकी हैं और ऐसा लग रहा है कि डायरेक्टर और ऐक्टर्स अपनी फिल्म का प्रचार करने का एक भी मौका छोड़ना नहीं चाहते हैं। फिल्म पच्चीस मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। मेकर्स भारत के कोने-कोने में अपनी फिल्म का प्रचार करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। मेकर्स दिल्ली, अमृतसर, जयपुर, और कोलकाता के बाद बाईस मार्च को वाराणसी पहुंचे हैं। बाईस मार्च को टीम आरआरआर , जिसमें निर्देशक एसएस राजामौली और ऐक्टर्स जूनियर एनटीआर और राम चरण वाराणसी पहुंचे। वाराणसी में सभी ने मिलकर पवित्र गंगा आरती में हिस्सा लिया। इतना ही नहीं, कलाकारों ने स्थानीय मीडिया के साथ बातचीत भी की और कुछ स्थानीय व्यंजनों का लुत्फ भी उठाया। दिलचस्प बात यह है कि भारत की सबसे बड़ी एक्शन ड्रामा, एसएस राजामौली की 'आरआरआर' फिल्म डॉल्बी सिनेमा और तीनडी फॉर्मेट में रिलीज होने वाली पहली भारतीय फिल्म है। साउथ सुपरस्टार राम चरण की फिल्म आरआरआर को लेकर दर्शकों के बीच खासा एक्साइटमेंट है। ताजा चर्चा इस बात की है कि फिल्म पहले दिन ही आराम से एक सौ करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगी। द कश्मीर फाइल्स की वेव के बावजूद दावा किया जा रहा है कि राम चरण, जूनियर एनटीआर, आलिया भट्ट और अजय देवगन जैसे जबरदस्त सितारों से सजी फिल्म आरआरआर थियेटर्स पर धमाकेदार एंट्री करेगी। निर्माताओं ने फिल्म के लिए एडवांस बुकिंग भी शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म ने अकेले हैदराबाद में सबसे ज्यादा एडवांस टिकट बुकिंग कर ली है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह फिल्म करीब चार सौ करोड़ रुपये की बड़ी लागत से बनाई गई है। इसलिए मेकर्स फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड्स तोड़ आंकड़े बनाने की उम्मीद लगा रहे हैं। संबंधित खबरेंः
साहिबगंजः प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान साहिबगंज नगर थाना (Sahibganj Nagar Police Station) क्षेत्र के कुलीपाड़ा स्थित बड़ी दुर्गा स्थान में पहली अप्रैल को पथराव (Stone Pelting) हुआ था। इसके बाद दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प (Violent Clash) के कारण तनाव हो गया। फिलहाल इलाके में शांतिपूर्ण स्थिति है। शांति बनाए रखने के लिए कुलीपाड़ा से लेकर बरतल्ला मछली मार्केट तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवान तैनात हैं। बता दें कि पथराव में एक पुलिस समेत 6 लोग घायल हो गए थे। घायलों में एक पुलिस अधिकारी के अलावा दो पुलिस जवान भी है। इसके अलावा तीन आम लोग हैं। पथराव में घायल हुए सदर SDPO का नाम राजेंद्र दुबे है। सभी घायलों को रात में ही इलाज के लिए सदर अस्पताल साहिबगंज में भर्ती कराया गया। झ़ड़प की जानकारी पाकर DC राम निवास यादव व SP अनुरंजन किस्पोट्टा घटनास्थल पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझाकर जुलूस को आगे बढ़ाया। DC ने कहा कि कुछ शरारती तत्वों ने जुलूस पर पत्थरबाजी (Stone Pelting) की। मामले की जांच कर दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
साहिबगंजः प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान साहिबगंज नगर थाना क्षेत्र के कुलीपाड़ा स्थित बड़ी दुर्गा स्थान में पहली अप्रैल को पथराव हुआ था। इसके बाद दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प के कारण तनाव हो गया। फिलहाल इलाके में शांतिपूर्ण स्थिति है। शांति बनाए रखने के लिए कुलीपाड़ा से लेकर बरतल्ला मछली मार्केट तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवान तैनात हैं। बता दें कि पथराव में एक पुलिस समेत छः लोग घायल हो गए थे। घायलों में एक पुलिस अधिकारी के अलावा दो पुलिस जवान भी है। इसके अलावा तीन आम लोग हैं। पथराव में घायल हुए सदर SDPO का नाम राजेंद्र दुबे है। सभी घायलों को रात में ही इलाज के लिए सदर अस्पताल साहिबगंज में भर्ती कराया गया। झ़ड़प की जानकारी पाकर DC राम निवास यादव व SP अनुरंजन किस्पोट्टा घटनास्थल पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझाकर जुलूस को आगे बढ़ाया। DC ने कहा कि कुछ शरारती तत्वों ने जुलूस पर पत्थरबाजी की। मामले की जांच कर दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
भोपालः मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार शाम राजधानी भोपाल के कोलार इलाके में रोड शो किया। शिवराज ने कलियासोत नदी पर छह करोड़ रुपये की लागत से बने ब्रिज का लोकार्पण किया। इसके साथ उन्होंने करीब 230 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया। इनमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सनखेड़ी, मंदाकिनी चौराहे से दानिशकुंज तक स्ट्रीट लाइट, सीएनजी प्लांट, निगम ऑफिस आदि शामिल हैं।
भोपालः मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार शाम राजधानी भोपाल के कोलार इलाके में रोड शो किया। शिवराज ने कलियासोत नदी पर छह करोड़ रुपये की लागत से बने ब्रिज का लोकार्पण किया। इसके साथ उन्होंने करीब दो सौ तीस करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया। इनमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सनखेड़ी, मंदाकिनी चौराहे से दानिशकुंज तक स्ट्रीट लाइट, सीएनजी प्लांट, निगम ऑफिस आदि शामिल हैं।
बरेली : ट्रैफिक पुलिस लगभग एक मंथ से बरेलियंस को गुमराह कर रही थी। ट्रैफिक पुलिस के शहर के ट्रैफिक का ट्विटर पर गलत अपडेट देने से बरेलियंस जाम में फंस रहे थे। जिससे वे इंपॉर्टेट वर्क के लिए भी टाइम से नहीं पहुंच पा रहे थे। दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने वेडनसडे को जब इसका खुलासा किया तो थर्सडे से ट्रैफिक पुलिस ने ट्विटर पर ट्रैफिक की सही पोस्ट अपलोड की। साथ ही पुलिस काफी अलर्ट दिखी जिससे जाम कम लगा और बरेलियंस को काफी राहत मिली। वहीं डीजे आईनेक्स्ट की न्यूज 'दिल्ली पुलिस से सीखें' को बखूबी फॉलो किया और बरेलियंस को जाम से बचाने के लिए वैकल्पिक रास्तों का यूज करने की अपील की। ट्रैफिक पुलिस ट्विटर पर शहर के कुछ चुनिंदा एरियाज की फोटो अपलोड कर रही थी, वो भी उस टाइम की जिस समय ट्रैफिक नॉर्मल होता था। वहीं पुरानी फोटो भी अपलोड कर रहे थे। लेकिन थर्सडे को बारिश होने पर सड़कें गीली थी और टैफिक पुलिस ने जो फोटो अपलोड की वह सूखी सड़क की थी जिससे सारी पोल खुल गई। न्यूज पब्लिश होने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने थर्सडे को अपने ट्विटर हैंडल पर सुबह 10:30 बजे सिटी सब्जी मंडी पुल निर्माण के पास ट्रक खराब होने के कारण ट्रैफिक की रफ्तार धीमी होने की पोस्ट शेयर की। जिसके बाद दैनिक जागरण आईनेक्स्ट टीम ने मौके पर जाकर रियलिटी चेक किया, तो ट्विटर हैंडल पर साझा की गई जानकारी सही मिली। वहीं ट्रैफिक पुलिस जाम खत्म करने में जुटी हुई थी। सुबह लगभग 11 बजे चौपुला चौराहा पर जाम लग गया। गाडि़यां धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थीं तभी ट्रैफिक पुलिस के दो सिपाही ने एंबुलेंस को रास्ता देने के लिए वाहनों को जल्दी से आगे बढ़ाना शुरू कराया जिससे 15 मिनट में एंबुलेंस निकल गई। वहीं शाम तक सिपाही वाहनों को बारी-बारी से निकालते रहे जिससे लोगों को जाम से ज्यादा जूझना नहीं पड़ा। ट्रैफिक पुलिस ने 12 बजे बीसलपुर चौराहा पर ट्रैफिक नॉर्मल होने का ट्वीट किया। टीम ने मौके पर जाकर देखा तो पोस्ट में दी गई जानकारी सही थी। जिससे बरेलियंस स्मूथली निकलते रहे। शाम 05:24 पर ट्रैफिक पुलिस ने अपने हैंडल पर चौपुला चौराहे पर बढ़ते ट्रैफिक का जिक्र करते हुए दूसरी पोस्ट शेयर की। हालांकि देर शाम तक पुलिस ने कड़ी मशक्कत कर सड़क को जाम खत्म किया। साथ ही इस दौरान दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की तर्ज पर बरेलियंस को दूसरे रास्ते से जाने की अपील भी की गई। जिससे जाम खत्म करने को ट्रैफिक पुलिस को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। ट्रैफिक डिपार्टमेंट ने जाम से बचाने के लिए शहर को दो सेक्टरों में बांटा हैं। जो खास तौर पर ऑटो और टेंपो के लिए बनाए गए हैं, लेकिन काफी समय बीत जाने पर भी अभी तक नहीं हो सका है। इस तरह से डिवाइड हैं सेक्टर।
बरेली : ट्रैफिक पुलिस लगभग एक मंथ से बरेलियंस को गुमराह कर रही थी। ट्रैफिक पुलिस के शहर के ट्रैफिक का ट्विटर पर गलत अपडेट देने से बरेलियंस जाम में फंस रहे थे। जिससे वे इंपॉर्टेट वर्क के लिए भी टाइम से नहीं पहुंच पा रहे थे। दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने वेडनसडे को जब इसका खुलासा किया तो थर्सडे से ट्रैफिक पुलिस ने ट्विटर पर ट्रैफिक की सही पोस्ट अपलोड की। साथ ही पुलिस काफी अलर्ट दिखी जिससे जाम कम लगा और बरेलियंस को काफी राहत मिली। वहीं डीजे आईनेक्स्ट की न्यूज 'दिल्ली पुलिस से सीखें' को बखूबी फॉलो किया और बरेलियंस को जाम से बचाने के लिए वैकल्पिक रास्तों का यूज करने की अपील की। ट्रैफिक पुलिस ट्विटर पर शहर के कुछ चुनिंदा एरियाज की फोटो अपलोड कर रही थी, वो भी उस टाइम की जिस समय ट्रैफिक नॉर्मल होता था। वहीं पुरानी फोटो भी अपलोड कर रहे थे। लेकिन थर्सडे को बारिश होने पर सड़कें गीली थी और टैफिक पुलिस ने जो फोटो अपलोड की वह सूखी सड़क की थी जिससे सारी पोल खुल गई। न्यूज पब्लिश होने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने थर्सडे को अपने ट्विटर हैंडल पर सुबह दस:तीस बजे सिटी सब्जी मंडी पुल निर्माण के पास ट्रक खराब होने के कारण ट्रैफिक की रफ्तार धीमी होने की पोस्ट शेयर की। जिसके बाद दैनिक जागरण आईनेक्स्ट टीम ने मौके पर जाकर रियलिटी चेक किया, तो ट्विटर हैंडल पर साझा की गई जानकारी सही मिली। वहीं ट्रैफिक पुलिस जाम खत्म करने में जुटी हुई थी। सुबह लगभग ग्यारह बजे चौपुला चौराहा पर जाम लग गया। गाडि़यां धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थीं तभी ट्रैफिक पुलिस के दो सिपाही ने एंबुलेंस को रास्ता देने के लिए वाहनों को जल्दी से आगे बढ़ाना शुरू कराया जिससे पंद्रह मिनट में एंबुलेंस निकल गई। वहीं शाम तक सिपाही वाहनों को बारी-बारी से निकालते रहे जिससे लोगों को जाम से ज्यादा जूझना नहीं पड़ा। ट्रैफिक पुलिस ने बारह बजे बीसलपुर चौराहा पर ट्रैफिक नॉर्मल होने का ट्वीट किया। टीम ने मौके पर जाकर देखा तो पोस्ट में दी गई जानकारी सही थी। जिससे बरेलियंस स्मूथली निकलते रहे। शाम पाँच:चौबीस पर ट्रैफिक पुलिस ने अपने हैंडल पर चौपुला चौराहे पर बढ़ते ट्रैफिक का जिक्र करते हुए दूसरी पोस्ट शेयर की। हालांकि देर शाम तक पुलिस ने कड़ी मशक्कत कर सड़क को जाम खत्म किया। साथ ही इस दौरान दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की तर्ज पर बरेलियंस को दूसरे रास्ते से जाने की अपील भी की गई। जिससे जाम खत्म करने को ट्रैफिक पुलिस को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। ट्रैफिक डिपार्टमेंट ने जाम से बचाने के लिए शहर को दो सेक्टरों में बांटा हैं। जो खास तौर पर ऑटो और टेंपो के लिए बनाए गए हैं, लेकिन काफी समय बीत जाने पर भी अभी तक नहीं हो सका है। इस तरह से डिवाइड हैं सेक्टर।
ट्रैफिक पुलिस ने 1 नवंबर से चार पहिया वाहनों में सीट बेल्ट ( SEAT BELT) लगाना अनिवार्य कर दिया है। हालांकी अब इस फैसले का मुंबई टैक्सीमेन यूनियन ने विरोध किया है। मुंबई टैक्सीमैन यूनियन ( Mumbai Taximan Union) ने मुंबई के संयुक्त पुलिस आयुक्त को एक पत्र लिखकर कहा है कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम के इस आदेश को लागू कर पाना काफी मुश्किल होगा। इसके साथ ही टैक्सी युनियन का कहना है की सीटबेल्ट नीति को काली और पीली टैक्सियों मे आसानी से लागू नही किया जा सकता । इसे लागू करने में कई तरह की कठिनाईयो का सामना करना पड़ सकता है। मुंबई टैक्सीमैन यूनियन ने मुंबई पुलिस आयुक्त को भेजे पत्र में कहा है कि केंद्रीय नीति की तुलना निजी टैक्सियों से नहीं की जानी चाहिए। मुंबई महानगर में टैक्सी दुर्घटना दर शून्य है। शहर में एक वाहन की औसत गति 12 किमी प्रति घंटे से कम होती है। इन मुद्दों को ध्यान में रखते हुए पत्र में अनुरोध किया गया है कि पिछली सीट के यात्रियों के लिए सीट बेल्ट अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए और यह केंद्रीय मोटर वाहन नियम काली और पीली टैक्सियों पर लागू नहीं होना चाहिए। मुंबई में काली और पीली टैक्सियाँ अधिक हैं। इससे यात्रा करने वाला यात्री कम दूरी का होता है। टैक्सी में चार यात्री सफर करते हैं। पीछे की सीट के यात्रियों के लिए दो सीटबेल्ट दिए गए हैं। पीछे बैठे तीन यात्रियों में से बीच की सीटों पर बैठे यात्री को भी सीट बेल्ट बांधना अनिवार्य कर दिया गया है।
ट्रैफिक पुलिस ने एक नवंबर से चार पहिया वाहनों में सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य कर दिया है। हालांकी अब इस फैसले का मुंबई टैक्सीमेन यूनियन ने विरोध किया है। मुंबई टैक्सीमैन यूनियन ने मुंबई के संयुक्त पुलिस आयुक्त को एक पत्र लिखकर कहा है कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम के इस आदेश को लागू कर पाना काफी मुश्किल होगा। इसके साथ ही टैक्सी युनियन का कहना है की सीटबेल्ट नीति को काली और पीली टैक्सियों मे आसानी से लागू नही किया जा सकता । इसे लागू करने में कई तरह की कठिनाईयो का सामना करना पड़ सकता है। मुंबई टैक्सीमैन यूनियन ने मुंबई पुलिस आयुक्त को भेजे पत्र में कहा है कि केंद्रीय नीति की तुलना निजी टैक्सियों से नहीं की जानी चाहिए। मुंबई महानगर में टैक्सी दुर्घटना दर शून्य है। शहर में एक वाहन की औसत गति बारह किमी प्रति घंटे से कम होती है। इन मुद्दों को ध्यान में रखते हुए पत्र में अनुरोध किया गया है कि पिछली सीट के यात्रियों के लिए सीट बेल्ट अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए और यह केंद्रीय मोटर वाहन नियम काली और पीली टैक्सियों पर लागू नहीं होना चाहिए। मुंबई में काली और पीली टैक्सियाँ अधिक हैं। इससे यात्रा करने वाला यात्री कम दूरी का होता है। टैक्सी में चार यात्री सफर करते हैं। पीछे की सीट के यात्रियों के लिए दो सीटबेल्ट दिए गए हैं। पीछे बैठे तीन यात्रियों में से बीच की सीटों पर बैठे यात्री को भी सीट बेल्ट बांधना अनिवार्य कर दिया गया है।
स्थायी था तो इसका केवल यही अर्थ था कि 1873 से पूर्व सोने-चांदी का विनिमय का अनुपात 1:15½ था और 1873 के बाद रुपये - स्टर्लिंग के अनुपात में अव्यवस्था आ गयी जिसका अर्थ यह था कि सोने-चांदी के विनिमय ने अपने पुराने बंधनों को खो दिया। इसलिए प्रश्न उठता है कि 1873 के बाद सोने और चांदी के बीच विनिमय के अनुपात में इतनी उथल-पुथल क्यों हुई जितनी उस वर्ष से पूर्व नहीं थी? उस समय ऐसा विचित्र कार्य लगा कि उसकी पर्याप्त व्याख्या के लिए दो पहलुओं की अपील की गई। उनमें से एक पहलु विश्व के प्रमुख देशों द्वारा मानक मुद्रा माध्यम के रूप में चांदी का विमुद्रीकरण था। चांदी के विमुद्रीकरण के पक्ष में यह आंदोलन भार, माप और सिक्कों की एकरूपता के लिए भोलेभाले विद्रोह का परिणाम था। जहाँ तक विद्रोह का उद्देश्य ऐसी एकरूपता के स्थापित करने से था, यह प्रत्येक प्रकार से उपयोगी था परन्तु इससे यह उदाहरण मिलता है कि उच्च उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में अग्रसर होते हुए यदा-कदा अपने पीछे बुराइयों की परम्परा भी छूट जाती है। 1851 में लंदन में एक विशाल प्रदर्शनी के आयोजन के अवसर पर विभिन्न प्रदर्शित वस्तुओं की तुलना करने में बहुत बड़ी कठिनाई उत्पन्न हुई इसका मुख्य कारण था विभिन्न देशों द्वारा लाए गए तोल, माप और सिक्कों के अंतर के कारण प्रदर्शित वस्तुओं को उस प्रदर्शनी में एकत्रित अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से देखा।' भार, माप और सिक्कों की अंतर्राष्ट्रीय एकता के प्रश्न पर इस प्रदर्शनी में एकत्रित विभिन्न वैज्ञानिक सम्मेलनों द्वारा चर्चा की गई और यद्यपि इसका कोई ठोस परिणाम न निकल पाया फिर भी इस प्रश्न को कार्य-सूची से अलग नहीं किया गया। दो वर्ष बाद आयोजित ब्रूसेल्स इंटरनेशनल इस्टैटिस्टिकल कांग्रेस (ब्रूसेल्स स्थित अंतर्राष्ट्रीय सांख्यिकीय कांग्रेस) में यह प्रश्न फिर से उठाया गया। इस सम्बन्ध में जनमत आगे बढ़ चुका था कि पेरिस में आयोजित अगली सांख्यिकीय कांग्रेस ने एक घोषणा जारी की जो 1859 में आयोजित वियाना स्थित सांख्यिकीय कांग्रेस द्वारा पुष्ट की गई और इसमें इस बात की आवश्यकता पर अधिक बल दिया गया कि अलग-अलग देशों के भार, माप और सिक्कों की वांछित एकरूपता लाई जाए। इंगलैंड की उस कार्रवाई से प्रोत्साहित होकर जिसमें उसने 1862 में भार और माप को मीट्रिक पद्धति में ऐच्छिक बना दिया था, बर्लिन की 1863 की अंतर्राष्ट्रीय सांख्यिकीय कांग्रेस ने विभिन्न सरकारों को आमंत्रित करने का निश्चय किया कि वे अपने प्राधिकृत विशेष कांग्रेस प्रतिनिधियों को इसमें भेजें ताकि वे इस बात पर विचार करें और रिपोर्ट भेंजे कि सोने और चांदी के सिक्कों में तुलनात्मक भार क्या होना चाहिए और ऐसे विवरण तैयार करें जिनके द्वारा अलग-अलग देशों में मुद्रा पद्धतियां नियत की जाएं और जिनके 1. रिपोर्ट ऑफ दि रायल कमीशन आन इंटरनेशनल कायनेज, 1868 पृष्ठ V 2. देखिए रसल एच बी इन्टरनेशनल मानेटरी कॉन्फरेंसिस 1898 पृष्ठ 18-25 आधार पर दशमलव प्रणाली के अनुसार एकाकी युनिट का उपविभाजन किया जा सके ।। इस कांग्रेस के महत्व की अनदेखी नहीं की जा सकती है। इसने हटकर एक नई दिशा दी। इससे पूर्व कांग्रेस के अधिवेशनों में भार और माप की एकरूपता के बारे में अधिकांशतया में विचार-विमर्श किया जाता था परन्तु इस कांग्रेस में वह पहलू सिक्कों की एकरूपता के अधीन ही नहीं वरन अलग-अलग कर दिया। यद्यपि यह प्रस्ताव भिन्न प्रकार का था फिर भी इसके गम्भीर परिणामों को झेलना नहीं पड़ता यदि सिक्कों की एकता के प्रश्न तक ही सीमित रखा जाता। लेकिन एक ऐसी परिस्थिति आई जिसने मुद्रा के प्रश्न को भी अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया। जब समान सिक्कों का विद्रोह आगे बढ़ा तो फ्रांस की सरकार ने स्वाभाविक रूप से यह इच्छ व्यक्त की कि उनके सिक्कों की पद्धति को एकरूपता के हित में यूनियन से बाहर अन्य देशों में भी आदर्श के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए क्योंकि उनकी सिक्का-पद्धति पहले ही लेटिन यूनियन द्वारा समेकित क्षेत्र में लागू हो चुकी थी। इस उद्देश्य की दृष्टि से फ्रांसिसी सरकार ने उस समय की ब्रिटिश सरकार से इस बारे में निवेदन किया परन्तु इसके उत्तर में यह कहा गया कि ब्रिटिश सरकार इस प्रस्ताव पर तब तक विचार नहीं कर सकेगी जब तक कि फ्रांस एकल सोने के मानक को स्वीकार न कर ले। इस प्रस्ताव पर हतप्रभ होने के स्थान पर उस समय फ्रांस सरकार इंग्लैंड की सद्भावना प्राप्त करने के लिए इतनी अधिक आतुर थी कि उसने पूर्ण आत्म तुष्टि से ब्रिटिश की उस पूर्वापेक्षा को स्वीकार करने में जरा भी हिचकिचाहट महसूस नहीं की और वास्तव में उसने निर्धारित मार्ग से हट कर 1867 में जब पेरिस में सम्मेलन आयोजित किया गया तो उसने वास्तव में सभा में यह प्रयत्न किया कि ऐसा प्रस्ताव पारित किया जाए जिसका संबंध "समरूप अंतर्राष्ट्रीय सिक्का के लिए यह आवश्यक था कि केवल सोने को ही विश्व की प्रमुख मुद्रा होना चाहिए।" सिक्के की समरूपता के प्रश्न को इतना अधिक महत्व दिया गया कि जिन लोगों ने प्रस्ताव पारित किया था, उन लोगों ने वह ध्यान नहीं दिया कि उन्हें इसकी उपलब्धि के लिए कितना त्याग देना पड़ेगा। शायद यह कहना अधिक ठीक होगा कि उन्हें यह पता नहीं था कि वे अपने निर्णय से विश्व की मुद्रा पद्धति को प्रभावित कर रहे हैं। उन सभी ने यह विचार किया कि वे सिक्के की समरूपता को प्रोन्नत कर रहे थे और उससे अधिक नहीं परन्तु इस निर्णय की मजबूरी के कारण कुछ भी क्यों न हों, परिणाम हानिकारक था क्योंकि विभिन्न एकत्रित देशों द्वारा प्रस्ताव को कार्यान्वित किया जाना था तो सिक्के की समरूपता 2. रसल उद्धरण। 3. देखिए- प्रोफेसर फॉक्सवेल का साक्ष्य प्रश्न 23, 976 रायल कमीशन आन एग्रीकल्चरल डिप्रेशन इन इंग्लैंड 1892 इसके लिए देखिए-रसल, सामने का पृष्ठ 46 हॉलैंड के प्रतिनिधि डॉक्टरमीज के संबंध में माननीय विकला बनाया जाना चाहिए जिन्होंने इस प्रस्ताव से होने वाली हानि की ओर ध्यान आकर्षित किया। रसल द्वारा उद्धृत सामने का उद्धरण पृष्ठ 25 के बारे में सम्मेलन का वास्तविक अंत पूर्णतया ओझल हो गया और प्रस्तावित क्रियान्वयन अन्ततः वास्तविक रूप से समाप्त हो गए। जैसे ही यह कार्य अग्रसर हुआ, वैसे ही चांदी के विमुद्रीकरण के कार्य में तीव्र गति आती गई । इस क्षेत्र में जर्मनी का प्रथम स्थान था। 1870 के युद्ध में फ्रांस को परास्त करने के बाद उस देश ने युनाइटेड एम्पायर ऑफ जर्मनी के लिए सोने की मुद्रा को अपनाने की जल्दबाजी कर अपनी अव्यवस्थित मुद्रा' के सुधार में युद्ध की क्षतिपूर्ति का उपयोग किया। 4 दिसंबर, 1871 के कानून ने मुद्रा की यूनिट के रूप में मार्क के साथ इस परिवर्तन को प्राधिकृत किया। इस अधिनियम द्वारा चांदी का विमुद्रीकरण किया गया, परन्तु मौजूदा चांदी के सिक्के विधिमान्य चलार्थ बने रहे यद्यपि उनके मापी सिक्के ढालने पर रोक लग गई और इसके साथ ही साथ 15 से 1½ से 1 तक अनुपात में सोने के नये सिक्कों के ढालने पर भी रोक लगा दी गई। चांदी के सिक्कों की पूर्ण विधिमान्य चलार्थ स्वरूप 9 जून, 1873 के कानून द्वारा उनसे छीन ली गई। जिसके फलस्वरूप उनकी स्थिति सहायक मुद्रा' तक कर दी गई । शीघ्र ही इस नीति को जर्मन संस्कृति के प्रभावित देशों ने भी अपना लिया। 1872 में नार्वे, स्वीडन और डेनमार्क ने स्केडेनेवियाई मुद्रा संघ बनाया जो लेटिन मुद्रा संघ के सदृश्य था। इसके द्वारा उन्होंने चांदी के विमुद्रीकरण पर सहमति की जैसा कि जर्मनी द्वारा सहमति की गई थी। इस समझौते में सोने के मानक की स्थापना की गई और वर्तमान चांदी मुद्रा को सहायक प्रतिष्ठा के रूप में ढाल दिया गया तथा 1873 में स्वीडन और डेनमार्क और 1875 में नार्वे द्वारा इसकी अभिपुष्टि की गई। हालैंड ने भी इसी मार्ग की अनुसरण किया। 1872 तक इसका विशुद्ध चांदी मानक था। उस वर्ष हालैंड ने स्वतंत्र रूप से सिक्का ढालने के लिए अपनी टकसाल बंद कर दी यद्यपि पुरानी चांदी की मुद्रा किसी भी राशि तक विधिमान्य चलार्थ बनी रहीं। 1875 में हालैंड ने एक कदम आगे बढाया और अपनी टकसालों में स्वतंत्र रूप से स्वर्ण मुद्रा ढालने का काम किया। हालैंड की नीति जर्मनवादी देशों से कहीं अलग थी। उस नीति के अनुसार हालैंड ने चांदी के स्वतंत्र रूप से सिक्के ढालने का काम आस्थगित कर दिया जबकि जर्मनवादी देशों ने इसका विमुद्रीकरण कर दिया। यहां तक कि लेटिन संघ चांदी के विरुद्ध इस ज्वार का सामना करने के लिए असमर्थ था। चांदी के इस अपवर्जन के फलस्वरूप लेटिन संघ में अतिरिक्त सदस्यों के साथ संघ के सदस्यों की संख्या बढ़ा दी गई, जिन्होंने स्वाभाविक 1870 से पूर्व जर्मन मुद्रा के एकीकरण के लिए इस आन्दोलन के लिए देखिए एच.पी.विलीस"दि वियाना मोनेटरीट्रीटी ऑफ 1857 दि जर्नल ऑफ पालिटिकल इकोनॉमी खण्ड IV, पृष्ठ 187, और नीचे दिया हुआ। कानून के पाठ के लिए देखिए प्रोफेसर जे. एल. लांघलिन द्वारा लिखित पुस्तक "हिस्ट्री ऑफ बायमेटेलिज्म का अनुलग्नक, न्यूयार्क, 1886 3. देखिए रिपोर्ट ऑफ दि कमेटी ऑन दि डेप्रिसियेशन ऑफ सिल्वर, 1876ए पृ. XXIX
स्थायी था तो इसका केवल यही अर्थ था कि एक हज़ार आठ सौ तिहत्तर से पूर्व सोने-चांदी का विनिमय का अनुपात एक:पंद्रह½ था और एक हज़ार आठ सौ तिहत्तर के बाद रुपये - स्टर्लिंग के अनुपात में अव्यवस्था आ गयी जिसका अर्थ यह था कि सोने-चांदी के विनिमय ने अपने पुराने बंधनों को खो दिया। इसलिए प्रश्न उठता है कि एक हज़ार आठ सौ तिहत्तर के बाद सोने और चांदी के बीच विनिमय के अनुपात में इतनी उथल-पुथल क्यों हुई जितनी उस वर्ष से पूर्व नहीं थी? उस समय ऐसा विचित्र कार्य लगा कि उसकी पर्याप्त व्याख्या के लिए दो पहलुओं की अपील की गई। उनमें से एक पहलु विश्व के प्रमुख देशों द्वारा मानक मुद्रा माध्यम के रूप में चांदी का विमुद्रीकरण था। चांदी के विमुद्रीकरण के पक्ष में यह आंदोलन भार, माप और सिक्कों की एकरूपता के लिए भोलेभाले विद्रोह का परिणाम था। जहाँ तक विद्रोह का उद्देश्य ऐसी एकरूपता के स्थापित करने से था, यह प्रत्येक प्रकार से उपयोगी था परन्तु इससे यह उदाहरण मिलता है कि उच्च उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में अग्रसर होते हुए यदा-कदा अपने पीछे बुराइयों की परम्परा भी छूट जाती है। एक हज़ार आठ सौ इक्यावन में लंदन में एक विशाल प्रदर्शनी के आयोजन के अवसर पर विभिन्न प्रदर्शित वस्तुओं की तुलना करने में बहुत बड़ी कठिनाई उत्पन्न हुई इसका मुख्य कारण था विभिन्न देशों द्वारा लाए गए तोल, माप और सिक्कों के अंतर के कारण प्रदर्शित वस्तुओं को उस प्रदर्शनी में एकत्रित अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से देखा।' भार, माप और सिक्कों की अंतर्राष्ट्रीय एकता के प्रश्न पर इस प्रदर्शनी में एकत्रित विभिन्न वैज्ञानिक सम्मेलनों द्वारा चर्चा की गई और यद्यपि इसका कोई ठोस परिणाम न निकल पाया फिर भी इस प्रश्न को कार्य-सूची से अलग नहीं किया गया। दो वर्ष बाद आयोजित ब्रूसेल्स इंटरनेशनल इस्टैटिस्टिकल कांग्रेस में यह प्रश्न फिर से उठाया गया। इस सम्बन्ध में जनमत आगे बढ़ चुका था कि पेरिस में आयोजित अगली सांख्यिकीय कांग्रेस ने एक घोषणा जारी की जो एक हज़ार आठ सौ उनसठ में आयोजित वियाना स्थित सांख्यिकीय कांग्रेस द्वारा पुष्ट की गई और इसमें इस बात की आवश्यकता पर अधिक बल दिया गया कि अलग-अलग देशों के भार, माप और सिक्कों की वांछित एकरूपता लाई जाए। इंगलैंड की उस कार्रवाई से प्रोत्साहित होकर जिसमें उसने एक हज़ार आठ सौ बासठ में भार और माप को मीट्रिक पद्धति में ऐच्छिक बना दिया था, बर्लिन की एक हज़ार आठ सौ तिरेसठ की अंतर्राष्ट्रीय सांख्यिकीय कांग्रेस ने विभिन्न सरकारों को आमंत्रित करने का निश्चय किया कि वे अपने प्राधिकृत विशेष कांग्रेस प्रतिनिधियों को इसमें भेजें ताकि वे इस बात पर विचार करें और रिपोर्ट भेंजे कि सोने और चांदी के सिक्कों में तुलनात्मक भार क्या होना चाहिए और ऐसे विवरण तैयार करें जिनके द्वारा अलग-अलग देशों में मुद्रा पद्धतियां नियत की जाएं और जिनके एक. रिपोर्ट ऑफ दि रायल कमीशन आन इंटरनेशनल कायनेज, एक हज़ार आठ सौ अड़सठ पृष्ठ V दो. देखिए रसल एच बी इन्टरनेशनल मानेटरी कॉन्फरेंसिस एक हज़ार आठ सौ अट्ठानवे पृष्ठ अट्ठारह-पच्चीस आधार पर दशमलव प्रणाली के अनुसार एकाकी युनिट का उपविभाजन किया जा सके ।। इस कांग्रेस के महत्व की अनदेखी नहीं की जा सकती है। इसने हटकर एक नई दिशा दी। इससे पूर्व कांग्रेस के अधिवेशनों में भार और माप की एकरूपता के बारे में अधिकांशतया में विचार-विमर्श किया जाता था परन्तु इस कांग्रेस में वह पहलू सिक्कों की एकरूपता के अधीन ही नहीं वरन अलग-अलग कर दिया। यद्यपि यह प्रस्ताव भिन्न प्रकार का था फिर भी इसके गम्भीर परिणामों को झेलना नहीं पड़ता यदि सिक्कों की एकता के प्रश्न तक ही सीमित रखा जाता। लेकिन एक ऐसी परिस्थिति आई जिसने मुद्रा के प्रश्न को भी अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया। जब समान सिक्कों का विद्रोह आगे बढ़ा तो फ्रांस की सरकार ने स्वाभाविक रूप से यह इच्छ व्यक्त की कि उनके सिक्कों की पद्धति को एकरूपता के हित में यूनियन से बाहर अन्य देशों में भी आदर्श के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए क्योंकि उनकी सिक्का-पद्धति पहले ही लेटिन यूनियन द्वारा समेकित क्षेत्र में लागू हो चुकी थी। इस उद्देश्य की दृष्टि से फ्रांसिसी सरकार ने उस समय की ब्रिटिश सरकार से इस बारे में निवेदन किया परन्तु इसके उत्तर में यह कहा गया कि ब्रिटिश सरकार इस प्रस्ताव पर तब तक विचार नहीं कर सकेगी जब तक कि फ्रांस एकल सोने के मानक को स्वीकार न कर ले। इस प्रस्ताव पर हतप्रभ होने के स्थान पर उस समय फ्रांस सरकार इंग्लैंड की सद्भावना प्राप्त करने के लिए इतनी अधिक आतुर थी कि उसने पूर्ण आत्म तुष्टि से ब्रिटिश की उस पूर्वापेक्षा को स्वीकार करने में जरा भी हिचकिचाहट महसूस नहीं की और वास्तव में उसने निर्धारित मार्ग से हट कर एक हज़ार आठ सौ सरसठ में जब पेरिस में सम्मेलन आयोजित किया गया तो उसने वास्तव में सभा में यह प्रयत्न किया कि ऐसा प्रस्ताव पारित किया जाए जिसका संबंध "समरूप अंतर्राष्ट्रीय सिक्का के लिए यह आवश्यक था कि केवल सोने को ही विश्व की प्रमुख मुद्रा होना चाहिए।" सिक्के की समरूपता के प्रश्न को इतना अधिक महत्व दिया गया कि जिन लोगों ने प्रस्ताव पारित किया था, उन लोगों ने वह ध्यान नहीं दिया कि उन्हें इसकी उपलब्धि के लिए कितना त्याग देना पड़ेगा। शायद यह कहना अधिक ठीक होगा कि उन्हें यह पता नहीं था कि वे अपने निर्णय से विश्व की मुद्रा पद्धति को प्रभावित कर रहे हैं। उन सभी ने यह विचार किया कि वे सिक्के की समरूपता को प्रोन्नत कर रहे थे और उससे अधिक नहीं परन्तु इस निर्णय की मजबूरी के कारण कुछ भी क्यों न हों, परिणाम हानिकारक था क्योंकि विभिन्न एकत्रित देशों द्वारा प्रस्ताव को कार्यान्वित किया जाना था तो सिक्के की समरूपता दो. रसल उद्धरण। तीन. देखिए- प्रोफेसर फॉक्सवेल का साक्ष्य प्रश्न तेईस, नौ सौ छिहत्तर रायल कमीशन आन एग्रीकल्चरल डिप्रेशन इन इंग्लैंड एक हज़ार आठ सौ बानवे इसके लिए देखिए-रसल, सामने का पृष्ठ छियालीस हॉलैंड के प्रतिनिधि डॉक्टरमीज के संबंध में माननीय विकला बनाया जाना चाहिए जिन्होंने इस प्रस्ताव से होने वाली हानि की ओर ध्यान आकर्षित किया। रसल द्वारा उद्धृत सामने का उद्धरण पृष्ठ पच्चीस के बारे में सम्मेलन का वास्तविक अंत पूर्णतया ओझल हो गया और प्रस्तावित क्रियान्वयन अन्ततः वास्तविक रूप से समाप्त हो गए। जैसे ही यह कार्य अग्रसर हुआ, वैसे ही चांदी के विमुद्रीकरण के कार्य में तीव्र गति आती गई । इस क्षेत्र में जर्मनी का प्रथम स्थान था। एक हज़ार आठ सौ सत्तर के युद्ध में फ्रांस को परास्त करने के बाद उस देश ने युनाइटेड एम्पायर ऑफ जर्मनी के लिए सोने की मुद्रा को अपनाने की जल्दबाजी कर अपनी अव्यवस्थित मुद्रा' के सुधार में युद्ध की क्षतिपूर्ति का उपयोग किया। चार दिसंबर, एक हज़ार आठ सौ इकहत्तर के कानून ने मुद्रा की यूनिट के रूप में मार्क के साथ इस परिवर्तन को प्राधिकृत किया। इस अधिनियम द्वारा चांदी का विमुद्रीकरण किया गया, परन्तु मौजूदा चांदी के सिक्के विधिमान्य चलार्थ बने रहे यद्यपि उनके मापी सिक्के ढालने पर रोक लग गई और इसके साथ ही साथ पंद्रह से एक½ से एक तक अनुपात में सोने के नये सिक्कों के ढालने पर भी रोक लगा दी गई। चांदी के सिक्कों की पूर्ण विधिमान्य चलार्थ स्वरूप नौ जून, एक हज़ार आठ सौ तिहत्तर के कानून द्वारा उनसे छीन ली गई। जिसके फलस्वरूप उनकी स्थिति सहायक मुद्रा' तक कर दी गई । शीघ्र ही इस नीति को जर्मन संस्कृति के प्रभावित देशों ने भी अपना लिया। एक हज़ार आठ सौ बहत्तर में नार्वे, स्वीडन और डेनमार्क ने स्केडेनेवियाई मुद्रा संघ बनाया जो लेटिन मुद्रा संघ के सदृश्य था। इसके द्वारा उन्होंने चांदी के विमुद्रीकरण पर सहमति की जैसा कि जर्मनी द्वारा सहमति की गई थी। इस समझौते में सोने के मानक की स्थापना की गई और वर्तमान चांदी मुद्रा को सहायक प्रतिष्ठा के रूप में ढाल दिया गया तथा एक हज़ार आठ सौ तिहत्तर में स्वीडन और डेनमार्क और एक हज़ार आठ सौ पचहत्तर में नार्वे द्वारा इसकी अभिपुष्टि की गई। हालैंड ने भी इसी मार्ग की अनुसरण किया। एक हज़ार आठ सौ बहत्तर तक इसका विशुद्ध चांदी मानक था। उस वर्ष हालैंड ने स्वतंत्र रूप से सिक्का ढालने के लिए अपनी टकसाल बंद कर दी यद्यपि पुरानी चांदी की मुद्रा किसी भी राशि तक विधिमान्य चलार्थ बनी रहीं। एक हज़ार आठ सौ पचहत्तर में हालैंड ने एक कदम आगे बढाया और अपनी टकसालों में स्वतंत्र रूप से स्वर्ण मुद्रा ढालने का काम किया। हालैंड की नीति जर्मनवादी देशों से कहीं अलग थी। उस नीति के अनुसार हालैंड ने चांदी के स्वतंत्र रूप से सिक्के ढालने का काम आस्थगित कर दिया जबकि जर्मनवादी देशों ने इसका विमुद्रीकरण कर दिया। यहां तक कि लेटिन संघ चांदी के विरुद्ध इस ज्वार का सामना करने के लिए असमर्थ था। चांदी के इस अपवर्जन के फलस्वरूप लेटिन संघ में अतिरिक्त सदस्यों के साथ संघ के सदस्यों की संख्या बढ़ा दी गई, जिन्होंने स्वाभाविक एक हज़ार आठ सौ सत्तर से पूर्व जर्मन मुद्रा के एकीकरण के लिए इस आन्दोलन के लिए देखिए एच.पी.विलीस"दि वियाना मोनेटरीट्रीटी ऑफ एक हज़ार आठ सौ सत्तावन दि जर्नल ऑफ पालिटिकल इकोनॉमी खण्ड IV, पृष्ठ एक सौ सत्तासी, और नीचे दिया हुआ। कानून के पाठ के लिए देखिए प्रोफेसर जे. एल. लांघलिन द्वारा लिखित पुस्तक "हिस्ट्री ऑफ बायमेटेलिज्म का अनुलग्नक, न्यूयार्क, एक हज़ार आठ सौ छियासी तीन. देखिए रिपोर्ट ऑफ दि कमेटी ऑन दि डेप्रिसियेशन ऑफ सिल्वर, एक हज़ार आठ सौ छिहत्तरए पृ. XXIX
मनोरंजन और मछली पकड़ने के लिए एक बहुत अच्छा स्थान - पाईक झील (Komarovo) करेलियन संयोग भूमि गुप्त अद्भुत के एक शांत नुक्कड़ में पाईक झील (Komarovo)। मानचित्र, जो स्थित है नीचे से पता चलता है अपने स्थान से जो लोग पहले इन अद्भुत स्थानों की यात्रा करना चाहते हैं के लिए उपयोगी हो सकता है। यह ध्यान रखें कि एक ही नाम की झील में कुछ महत्वपूर्ण है। वे बुर्यातिया, रूस और कजाखस्तान की स्वर्डर्लोव्स्क क्षेत्र में कर रहे हैं। हमारे तालाब है स्थित में गांव की Komarovo लेनिनग्राद क्षेत्र। इलाके यहाँ कि यह बस जो लोग शहर के जीवन से थक गए हैं आकर्षित करती है और शरीर और आत्मा को आराम करने के लिए करना चाहता है बहुत सुंदर है। Hydronym और इतिहास (संक्षिप्त) (- पाइक, jarvi - झील hauki) इसके असामान्य नाम जलाशय से फिनिश "Hauck Jarvi» प्राप्त किया। प्रसिद्ध पाईक झील (Komarovo) कई सदियों पहले था। स्वीडन, पानी पार्क आसपास के भूमि हॉक-Jarvi का हिस्सा है और खेल खनन शिकार था, शाही परिवारों परोसें। तो यहां तक कि उन प्राचीन समय में, इस क्षेत्र में अपनी वनस्पति और जीव के लिए प्रसिद्ध था। पर स्पष्ट दिन, सभी अच्छी तरह से - खिलता दलदल घास, प्रसार बाहर के नीचे अपने पैरों पन्ना कालीन की काई, घास और रन चुस्त छिपकली। यह कुंवारी प्रकृति। क्रिस्टलीय पानी एक सुंदर परिदृश्य है, जो एक ग्लेशियर और जंगलों द्वारा बनाई गई है से घिरा हुआ सतह जामुन और स्वादिष्ट मशरूम में अमीर हैं। झील के किनारे रेतीले या पीट रहे हैं। तालाब सदियों पुराने चीड़ के पेड़ों से घिरा हुआ है। नीचे रेतीले और बहुत साफ है, वहाँ एक अंतर्धारा है, लेकिन मजबूत नहीं है। Shchuchye में झील (Komarovo) उन क्षेत्रों जो विशेष सुरक्षा के तहत कर रहे करने के लिए सौंपा। यह प्रकृति का एक स्मारक है। 2011 में, आरक्षित आदेश अद्वितीय परिदृश्य और पौधों और जानवरों की लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण करने के लिए "झील Shchuchye में" स्थापित किया गया था। बुनियादी सुविधाओं के सुधार हुआ है, और आसपास के क्षेत्र जलाशय वाहन से मुक्त। पिकनिक और मनोरंजन के लिए क्षेत्रों के बहुत सारे हैं आउटडोर गेम्स। साइकिल चालन के प्रशंसकों के लिए पटरियों से लैस। पाइक - और, ज़ाहिर है, वहाँ मछली की एक बहुत कुछ कर रहे हैं succinic, ट्राउट, रोच। संक्षेप में, मछली पकड़ने के प्रति उत्साही के लिए एक स्वर्ग। ठंडे पानी में केवल एक डुबकी, मुलायम हरी घास पर कदम रखा, श्वास गहरा ताजी हवा, तो आप इस खूबसूरत प्रकृति का हिस्सा महसूस कर सकते हैं। इस परिदृश्य - एक परिवार की छुट्टी के लिए सही जगह। और जो लोग प्रकृति के साथ अकेला रहना चाहता हूँ के लिए, तुम जंगल जंगल को रिटायर कर सकते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि पाईक झील (Komarovo) - विभिन्न इच्छाओं के साथ लोगों के लिए एक स्वर्ग। यहाँ हर कोई अपने खुद के लिए कुछ मिल जाएगा। वन्यजीव उसकी विशिष्टता में हड़ताली है। यहाँ आप खतरे में जीव और वनस्पति में लाल किताब सूचीबद्ध के प्रतिनिधियों से मिल सकते हैं। करेलियन संयोग भूमि मामलों के लिए विशेष Kozelec कम और Carex Pilulifera शामिल हैं। आप को पूरा करने और जैसे ओक और cherenchaty के रूप में इस क्षेत्र पौधों, के लिए असामान्य सकते हैं आम हेज़ेल। दलदल में साधारण झाड़ियों और घास प्रजाति के अलावा एक प्रकार का पौधा अंग्रेजी प्रतीक्षा सूची और सफेद पाया। अक्सर आप देख सकते हैं नाजुक सफेद लिली। क्षेत्रीय Shchuchye में झील पक्षियों के सत्तर से अधिक प्रजातियों का निवास। यहां मौजूद रहती वन प्रकार की बिल्ली, लोमड़ी, खरगोश खरगोश, एमिन, आप को पूरा करने और नेवला कर सकते हैं। कभी-कभी स्थानीय परिदृश्य और सदियों पुराने देवदार के पेड़ मूस घूमना। झील Shchuchye (Komarovo) - कैसे प्राप्त करें? सेंट पीटर्सबर्ग से कोमारोवा 52 किलोमीटर (मोटर रास्ता) के लिए। Shchuchye में इससे पहले कि झील कला के साथ ट्रेन से पहुंचा जा सकता है। स्टेशन के लिए विशिष्ट या फिनिश स्टेशन। Komarovo। चार किलोमीटर की दूरी पर समुद्र तट के लिए गांव से। लगभग 40 मिनट की पैदल दूरी, ब्लूबेरी के साथ स्प्रूस जंगलों के विशाल विस्तार का आनंद ले। आप स्वतंत्रता में सांस लेने के लिए और अद्भुत अदूषित प्रकृति का आनंद लें, नियमित और रोजमर्रा की समस्याओं से दूर होने, और प्राप्त एक सकारात्मक चार्ज चाहते हैं, तो आप पहले से ही पता है, जहां आप जाना चाहते हैं। जादू पाईक झील (Komarovo) ने अपने प्रिय मेहमानों के लिए इंतज़ार कर रहा है!
मनोरंजन और मछली पकड़ने के लिए एक बहुत अच्छा स्थान - पाईक झील करेलियन संयोग भूमि गुप्त अद्भुत के एक शांत नुक्कड़ में पाईक झील । मानचित्र, जो स्थित है नीचे से पता चलता है अपने स्थान से जो लोग पहले इन अद्भुत स्थानों की यात्रा करना चाहते हैं के लिए उपयोगी हो सकता है। यह ध्यान रखें कि एक ही नाम की झील में कुछ महत्वपूर्ण है। वे बुर्यातिया, रूस और कजाखस्तान की स्वर्डर्लोव्स्क क्षेत्र में कर रहे हैं। हमारे तालाब है स्थित में गांव की Komarovo लेनिनग्राद क्षेत्र। इलाके यहाँ कि यह बस जो लोग शहर के जीवन से थक गए हैं आकर्षित करती है और शरीर और आत्मा को आराम करने के लिए करना चाहता है बहुत सुंदर है। Hydronym और इतिहास इसके असामान्य नाम जलाशय से फिनिश "Hauck Jarvi» प्राप्त किया। प्रसिद्ध पाईक झील कई सदियों पहले था। स्वीडन, पानी पार्क आसपास के भूमि हॉक-Jarvi का हिस्सा है और खेल खनन शिकार था, शाही परिवारों परोसें। तो यहां तक कि उन प्राचीन समय में, इस क्षेत्र में अपनी वनस्पति और जीव के लिए प्रसिद्ध था। पर स्पष्ट दिन, सभी अच्छी तरह से - खिलता दलदल घास, प्रसार बाहर के नीचे अपने पैरों पन्ना कालीन की काई, घास और रन चुस्त छिपकली। यह कुंवारी प्रकृति। क्रिस्टलीय पानी एक सुंदर परिदृश्य है, जो एक ग्लेशियर और जंगलों द्वारा बनाई गई है से घिरा हुआ सतह जामुन और स्वादिष्ट मशरूम में अमीर हैं। झील के किनारे रेतीले या पीट रहे हैं। तालाब सदियों पुराने चीड़ के पेड़ों से घिरा हुआ है। नीचे रेतीले और बहुत साफ है, वहाँ एक अंतर्धारा है, लेकिन मजबूत नहीं है। Shchuchye में झील उन क्षेत्रों जो विशेष सुरक्षा के तहत कर रहे करने के लिए सौंपा। यह प्रकृति का एक स्मारक है। दो हज़ार ग्यारह में, आरक्षित आदेश अद्वितीय परिदृश्य और पौधों और जानवरों की लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण करने के लिए "झील Shchuchye में" स्थापित किया गया था। बुनियादी सुविधाओं के सुधार हुआ है, और आसपास के क्षेत्र जलाशय वाहन से मुक्त। पिकनिक और मनोरंजन के लिए क्षेत्रों के बहुत सारे हैं आउटडोर गेम्स। साइकिल चालन के प्रशंसकों के लिए पटरियों से लैस। पाइक - और, ज़ाहिर है, वहाँ मछली की एक बहुत कुछ कर रहे हैं succinic, ट्राउट, रोच। संक्षेप में, मछली पकड़ने के प्रति उत्साही के लिए एक स्वर्ग। ठंडे पानी में केवल एक डुबकी, मुलायम हरी घास पर कदम रखा, श्वास गहरा ताजी हवा, तो आप इस खूबसूरत प्रकृति का हिस्सा महसूस कर सकते हैं। इस परिदृश्य - एक परिवार की छुट्टी के लिए सही जगह। और जो लोग प्रकृति के साथ अकेला रहना चाहता हूँ के लिए, तुम जंगल जंगल को रिटायर कर सकते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि पाईक झील - विभिन्न इच्छाओं के साथ लोगों के लिए एक स्वर्ग। यहाँ हर कोई अपने खुद के लिए कुछ मिल जाएगा। वन्यजीव उसकी विशिष्टता में हड़ताली है। यहाँ आप खतरे में जीव और वनस्पति में लाल किताब सूचीबद्ध के प्रतिनिधियों से मिल सकते हैं। करेलियन संयोग भूमि मामलों के लिए विशेष Kozelec कम और Carex Pilulifera शामिल हैं। आप को पूरा करने और जैसे ओक और cherenchaty के रूप में इस क्षेत्र पौधों, के लिए असामान्य सकते हैं आम हेज़ेल। दलदल में साधारण झाड़ियों और घास प्रजाति के अलावा एक प्रकार का पौधा अंग्रेजी प्रतीक्षा सूची और सफेद पाया। अक्सर आप देख सकते हैं नाजुक सफेद लिली। क्षेत्रीय Shchuchye में झील पक्षियों के सत्तर से अधिक प्रजातियों का निवास। यहां मौजूद रहती वन प्रकार की बिल्ली, लोमड़ी, खरगोश खरगोश, एमिन, आप को पूरा करने और नेवला कर सकते हैं। कभी-कभी स्थानीय परिदृश्य और सदियों पुराने देवदार के पेड़ मूस घूमना। झील Shchuchye - कैसे प्राप्त करें? सेंट पीटर्सबर्ग से कोमारोवा बावन किलोग्राममीटर के लिए। Shchuchye में इससे पहले कि झील कला के साथ ट्रेन से पहुंचा जा सकता है। स्टेशन के लिए विशिष्ट या फिनिश स्टेशन। Komarovo। चार किलोमीटर की दूरी पर समुद्र तट के लिए गांव से। लगभग चालीस मिनट की पैदल दूरी, ब्लूबेरी के साथ स्प्रूस जंगलों के विशाल विस्तार का आनंद ले। आप स्वतंत्रता में सांस लेने के लिए और अद्भुत अदूषित प्रकृति का आनंद लें, नियमित और रोजमर्रा की समस्याओं से दूर होने, और प्राप्त एक सकारात्मक चार्ज चाहते हैं, तो आप पहले से ही पता है, जहां आप जाना चाहते हैं। जादू पाईक झील ने अपने प्रिय मेहमानों के लिए इंतज़ार कर रहा है!
तिरुवनंतपुरम : उम्मीद के अनुसार जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को कम्युनिस्ट पार्टी माक्र्ससिस्ट अपने चुनाव प्रचार में लगाने जा रही है। दरअसल छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार केरल विधानसभा चुनाव के तहत अपने मित्र और सीपीएम के केंडिडेट मोहम्मद मोहसिन को पालक्कड़ की पट्टाम्बी सीट से सपोर्ट करेंगे। इस दौरान वे अपने मित्र के समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे। उल्लेखनीय है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के परिसर में 9 फरवरी को आतंकी अफजल गुरू की बरसी पर आयोजित हुए कार्यक्रम में देशद्रोही नारेबाजी हुई थी। इस नारेबाजी को लेकर कन्हैया को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। हालांकि जब वे जेल से बाहर आए तो उन्होंने यही कहा कि उनका चुनाव प्रचार का कोई इरादा नहीं हैं। कन्हैया ने कहा कि मुश्किल के दौर में मोहसिन उनके साथ थे जिसके चलते अब वे मोहसिन के प्रचार में जुट गए हैं।
तिरुवनंतपुरम : उम्मीद के अनुसार जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को कम्युनिस्ट पार्टी माक्र्ससिस्ट अपने चुनाव प्रचार में लगाने जा रही है। दरअसल छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार केरल विधानसभा चुनाव के तहत अपने मित्र और सीपीएम के केंडिडेट मोहम्मद मोहसिन को पालक्कड़ की पट्टाम्बी सीट से सपोर्ट करेंगे। इस दौरान वे अपने मित्र के समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे। उल्लेखनीय है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के परिसर में नौ फरवरी को आतंकी अफजल गुरू की बरसी पर आयोजित हुए कार्यक्रम में देशद्रोही नारेबाजी हुई थी। इस नारेबाजी को लेकर कन्हैया को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। हालांकि जब वे जेल से बाहर आए तो उन्होंने यही कहा कि उनका चुनाव प्रचार का कोई इरादा नहीं हैं। कन्हैया ने कहा कि मुश्किल के दौर में मोहसिन उनके साथ थे जिसके चलते अब वे मोहसिन के प्रचार में जुट गए हैं।
ऐसी शक्ति नही है कि प्रात्माका कुछ करे । श्रात्मामें ऐसी कमंशक्ति है कि वह अपने सम्यग्दर्शनसे लेकर सिद्धपद तकके भावोंको प्राप्त करके तन्मयरूपसे परिणमित होता है, अर्थात् अपने कर्मरूप स्वय ही होता है । जो जीव आत्माकी ऐसी कर्मशक्तिकी प्रतीति करे उसे जडकर्म के सम्बन्धका अभाव हुए बिना न रहे । कर्म सम्बन्धमे चार प्रकार हैं(१) जडरूप ज्ञानावरणादि द्रव्यकर्म । (२) राग-द्वेष- मोहादि विकाररूप भावकर्म । (३) सम्यग्दर्शनादि निर्मल पर्यायरूप कर्म । (४) श्रात्माके त्रिकाल स्वभावरूप कमंशक्ति । ( १ ) द्रव्यकर्म वह पर है, (२) भावकर्म वह विभाव है, (३) निर्मल पर्यायरूप कर्म वह क्षणिक स्वभाव है और (४) कर्मशक्ति वह त्रिकाल शुद्ध स्वभावसे है । उस त्रिकाली स्वभावके आधार से वर्तमान निर्मल पर्यायरूप कर्म प्रगट होता है और भावकर्म तथा द्रव्यकमं छूट जाते हैं । सम्यग्दर्शनादि धर्मरूप निर्मल कर्म कही बाहरसे नही प्राता, किंतु श्रात्मामे ही उसरूप होनेकी शक्ति है, श्रात्माके स्वभावका अवलम्बन करनेसे श्रात्मा स्वय ही वैसे निर्मल कार्यरूपसे प्रसिद्ध होता है । देखो, यह श्रात्माको कार्यशक्ति ! आत्माकी कार्यशक्ति ऐसी नहीं है कि जडका कुछ करे; विकार करे वह भी वास्तव में आत्माकी शक्तिका कार्य नहीं है, किंतु शुद्ध ज्ञान - दर्शन - आनन्दादि भाव प्रात्माका सच्चा कर्म है । शरीर-कर्म-भाषा आदि परमाणुकी अवस्था है वह परमाणुका कार्य है, क्योकि वह उनमे तन्मय है । राग-द्वेष-पुण्य-पापादि विकारी भावरूप अवस्था वह मिथ्यादृष्टिका कार्य है, क्योंकि वह उनमें तन्मय है । सम्यक्त्वी तो अपने सम्यकदा वान-मानम्वरूप भावनि सन्मय होता है और वही मारमाका वास्तविक काम है तथा बड़ी भारमा द्वारा प्राप्त किया जाता है। मारमा द्वारा कर्मरूपसे प्राप्त किया धानेवासा ऐसा वो सिद्धरूप सामकमाव ( उस उस समय प्रसिद्ध हुआ साभकभाव ) वही धर्मात्माका कर्म है, उसके द्वारा बारमाकी कर्मशक्ति पहिचानी जाती है। राग वास्तव में प्रात्माका स्वाभाविक कर्म नहीं है इसमिमे उसके द्वारा कर्मसक्तिबाले आत्माकी पहिचान नहीं होती। क्या आठ पड़कर्म वह मात्माका कर्म है ? नहीं । क्या रागादि भाषकर्म वह भारमाका कर्म है ? नहीं। वे रागादि भाग बारमाकी पर्याय होते हैं तथापि आत्माका स्वभाग उनमें तम्मम होकर परिणमित नहीं होता इसलिये स्वभावदृष्टिमें बह मात्माका कर्म नहीं है। तो मारमाका सभ्या कर्म क्या ? -मात्मा स्वयं सम्मम होकर जिसे प्राप्त करे बह पात्माका सच्चा कर्म है। अपनी निर्मण पर्याय तन्मय होकर बारमा उन्हें प्राप्त करता है तन न पर्या तक पहुँच जाता है इसलिये वे निमम पर्याय ही मारमाका कर्म है और बही धर्म है । भाई ! परके कार्य तेरे मारमार्गे नहीं है और राग-द्वेष-सोह के कार्य भी धेरे स्वभाव नहीं है किंतु प्रपती वक्ति से निर्मम पर्यायको प्राप्त कर बही तेरा कार्य है। सम्पम्पर्धन से लेकर सिद्धपद तके पद प्राप्त करमेकी शक्ति तेरे प्रात्मा है और बही तेरे कार्य है इसके सिवा बाह्यमें महान राजपद पा इन्द्रपद आदिकी प्राप्ति हो वह कहीं तेरे धारमाका कार्य नहीं है। धर्मात्मा बानता है कि मैं तो अपने ज्ञान भागम्य स्वमानमय हूँ और उससे प्राप्त होनेपाली अवस्था ही मेरा कार्य है, इसके अतिरिक्त रागादि विकार भी मेरा भास्मप्रसिद्धि : कार्य नही है तो फिर उस विकारके फलरूप बाह्य संयोगोमें तो मेरा कार्य कैसे होगा ? मेरे स्वभावमेसे सिद्धपद प्रगट हो वही मेरा प्रिय कार्य है । " कर्ताका इष्ट सो कर्म; " धर्मी कर्ताका इष्ट तो उसकी अपनी निर्मल परिणति ही है; रागादि वह धर्मीका इष्ट नही है इसलिये वह उसका कर्म नही है । श्रद्धामे परमशुद्ध ऐसे चिदानन्द स्वभावको ही इष्ट करके उसमेसे सम्यग्दर्शनादि निर्मलदशा प्राप्त करके सिद्धपदकी ओर कदम बढाये हैं वही धर्मात्माका इष्ट कार्य है । देखो, यह सिद्धपदका मार्गे यह मोक्षका पथ ! आत्माके स्वभावको इष्ट-प्रिय करके उसके आश्रयसे निर्मल पर्यायरूप कार्य करना वह सिद्धपदका मार्ग है । ग्रहो ! ऐसे श्रात्माको तो इष्ट न करे ओर अन्य कार्यों को इष्ट माने वह तो सत्के मार्ग पर भी नही है, तो फिर उसे सत्के फलरूप मोक्ष की प्राप्ति कहाँसे होगी ? रागादि होने पर भी जिसने अन्तर्मुख होकर अपने चिदानन्द स्वभावको ही इष्ट किया है वह तो सत्के मार्ग पर लगा हुआ साधक है और वह सत्के फलरूप सिद्धपदको अल्पकालमे अवश्य प्राप्त करेगा । अहो । अपना सम्यग्दर्शनादि निर्मल कार्य मुझे बाहरसे नही लाना पडेगा; मेरे आत्मामें ही ऐसी शक्ति है कि मैं स्वयं उस कार्यरूप परिणमित हो जाऊँ ।-- ऐसा स्वशक्तिका निर्णय किया वहीं निजकार्यके लिये बाह्य साधनोकी चिंता नहीं रहती। इसप्रकार निश्चित पुरुषो द्वारा इस आत्माकी साधना होती है, क्योकि आत्माको साधनेके लिये कोई बाह्य साधन है ही नही; अतरमे आत्मा स्वय ही सर्व साधन-सम्पन्न है, इसलिये बाह्य साधनोंकी चिन्ता व्यर्थ है । स्वयं अपने स्वभावके चिंतनसे ही यह आत्मा सघता है, बाह्यकी चिन्ता द्वारा नही सघता; इसलिये निश्चित पुरुषो द्वारा ही आत्मा सघता है । निमित्तादि वाह्य साधनोकी चिन्ता छोड़कर अन्तर्मुख होकर आत्म स्वभावमे एकाग्र होने पर प्रात्मा स्वयं अपने
ऐसी शक्ति नही है कि प्रात्माका कुछ करे । श्रात्मामें ऐसी कमंशक्ति है कि वह अपने सम्यग्दर्शनसे लेकर सिद्धपद तकके भावोंको प्राप्त करके तन्मयरूपसे परिणमित होता है, अर्थात् अपने कर्मरूप स्वय ही होता है । जो जीव आत्माकी ऐसी कर्मशक्तिकी प्रतीति करे उसे जडकर्म के सम्बन्धका अभाव हुए बिना न रहे । कर्म सम्बन्धमे चार प्रकार हैं जडरूप ज्ञानावरणादि द्रव्यकर्म । राग-द्वेष- मोहादि विकाररूप भावकर्म । सम्यग्दर्शनादि निर्मल पर्यायरूप कर्म । श्रात्माके त्रिकाल स्वभावरूप कमंशक्ति । द्रव्यकर्म वह पर है, भावकर्म वह विभाव है, निर्मल पर्यायरूप कर्म वह क्षणिक स्वभाव है और कर्मशक्ति वह त्रिकाल शुद्ध स्वभावसे है । उस त्रिकाली स्वभावके आधार से वर्तमान निर्मल पर्यायरूप कर्म प्रगट होता है और भावकर्म तथा द्रव्यकमं छूट जाते हैं । सम्यग्दर्शनादि धर्मरूप निर्मल कर्म कही बाहरसे नही प्राता, किंतु श्रात्मामे ही उसरूप होनेकी शक्ति है, श्रात्माके स्वभावका अवलम्बन करनेसे श्रात्मा स्वय ही वैसे निर्मल कार्यरूपसे प्रसिद्ध होता है । देखो, यह श्रात्माको कार्यशक्ति ! आत्माकी कार्यशक्ति ऐसी नहीं है कि जडका कुछ करे; विकार करे वह भी वास्तव में आत्माकी शक्तिका कार्य नहीं है, किंतु शुद्ध ज्ञान - दर्शन - आनन्दादि भाव प्रात्माका सच्चा कर्म है । शरीर-कर्म-भाषा आदि परमाणुकी अवस्था है वह परमाणुका कार्य है, क्योकि वह उनमे तन्मय है । राग-द्वेष-पुण्य-पापादि विकारी भावरूप अवस्था वह मिथ्यादृष्टिका कार्य है, क्योंकि वह उनमें तन्मय है । सम्यक्त्वी तो अपने सम्यकदा वान-मानम्वरूप भावनि सन्मय होता है और वही मारमाका वास्तविक काम है तथा बड़ी भारमा द्वारा प्राप्त किया जाता है। मारमा द्वारा कर्मरूपसे प्राप्त किया धानेवासा ऐसा वो सिद्धरूप सामकमाव वही धर्मात्माका कर्म है, उसके द्वारा बारमाकी कर्मशक्ति पहिचानी जाती है। राग वास्तव में प्रात्माका स्वाभाविक कर्म नहीं है इसमिमे उसके द्वारा कर्मसक्तिबाले आत्माकी पहिचान नहीं होती। क्या आठ पड़कर्म वह मात्माका कर्म है ? नहीं । क्या रागादि भाषकर्म वह भारमाका कर्म है ? नहीं। वे रागादि भाग बारमाकी पर्याय होते हैं तथापि आत्माका स्वभाग उनमें तम्मम होकर परिणमित नहीं होता इसलिये स्वभावदृष्टिमें बह मात्माका कर्म नहीं है। तो मारमाका सभ्या कर्म क्या ? -मात्मा स्वयं सम्मम होकर जिसे प्राप्त करे बह पात्माका सच्चा कर्म है। अपनी निर्मण पर्याय तन्मय होकर बारमा उन्हें प्राप्त करता है तन न पर्या तक पहुँच जाता है इसलिये वे निमम पर्याय ही मारमाका कर्म है और बही धर्म है । भाई ! परके कार्य तेरे मारमार्गे नहीं है और राग-द्वेष-सोह के कार्य भी धेरे स्वभाव नहीं है किंतु प्रपती वक्ति से निर्मम पर्यायको प्राप्त कर बही तेरा कार्य है। सम्पम्पर्धन से लेकर सिद्धपद तके पद प्राप्त करमेकी शक्ति तेरे प्रात्मा है और बही तेरे कार्य है इसके सिवा बाह्यमें महान राजपद पा इन्द्रपद आदिकी प्राप्ति हो वह कहीं तेरे धारमाका कार्य नहीं है। धर्मात्मा बानता है कि मैं तो अपने ज्ञान भागम्य स्वमानमय हूँ और उससे प्राप्त होनेपाली अवस्था ही मेरा कार्य है, इसके अतिरिक्त रागादि विकार भी मेरा भास्मप्रसिद्धि : कार्य नही है तो फिर उस विकारके फलरूप बाह्य संयोगोमें तो मेरा कार्य कैसे होगा ? मेरे स्वभावमेसे सिद्धपद प्रगट हो वही मेरा प्रिय कार्य है । " कर्ताका इष्ट सो कर्म; " धर्मी कर्ताका इष्ट तो उसकी अपनी निर्मल परिणति ही है; रागादि वह धर्मीका इष्ट नही है इसलिये वह उसका कर्म नही है । श्रद्धामे परमशुद्ध ऐसे चिदानन्द स्वभावको ही इष्ट करके उसमेसे सम्यग्दर्शनादि निर्मलदशा प्राप्त करके सिद्धपदकी ओर कदम बढाये हैं वही धर्मात्माका इष्ट कार्य है । देखो, यह सिद्धपदका मार्गे यह मोक्षका पथ ! आत्माके स्वभावको इष्ट-प्रिय करके उसके आश्रयसे निर्मल पर्यायरूप कार्य करना वह सिद्धपदका मार्ग है । ग्रहो ! ऐसे श्रात्माको तो इष्ट न करे ओर अन्य कार्यों को इष्ट माने वह तो सत्के मार्ग पर भी नही है, तो फिर उसे सत्के फलरूप मोक्ष की प्राप्ति कहाँसे होगी ? रागादि होने पर भी जिसने अन्तर्मुख होकर अपने चिदानन्द स्वभावको ही इष्ट किया है वह तो सत्के मार्ग पर लगा हुआ साधक है और वह सत्के फलरूप सिद्धपदको अल्पकालमे अवश्य प्राप्त करेगा । अहो । अपना सम्यग्दर्शनादि निर्मल कार्य मुझे बाहरसे नही लाना पडेगा; मेरे आत्मामें ही ऐसी शक्ति है कि मैं स्वयं उस कार्यरूप परिणमित हो जाऊँ ।-- ऐसा स्वशक्तिका निर्णय किया वहीं निजकार्यके लिये बाह्य साधनोकी चिंता नहीं रहती। इसप्रकार निश्चित पुरुषो द्वारा इस आत्माकी साधना होती है, क्योकि आत्माको साधनेके लिये कोई बाह्य साधन है ही नही; अतरमे आत्मा स्वय ही सर्व साधन-सम्पन्न है, इसलिये बाह्य साधनोंकी चिन्ता व्यर्थ है । स्वयं अपने स्वभावके चिंतनसे ही यह आत्मा सघता है, बाह्यकी चिन्ता द्वारा नही सघता; इसलिये निश्चित पुरुषो द्वारा ही आत्मा सघता है । निमित्तादि वाह्य साधनोकी चिन्ता छोड़कर अन्तर्मुख होकर आत्म स्वभावमे एकाग्र होने पर प्रात्मा स्वयं अपने
करमडीह पंचायत के वभन्डी गांव में मृत बच्चे को जिंदा करने का तंत्र-मंत्र और जादू टोना असफल हो गया। उसके बाद तंत्र-मंत्र जादू टोना में लगे महिलाओं का पुरुषों का समूह अपने-अपने घर चले गए। असंभव को संभव बनाने का नुस्खा तैयार करने वाले महिला समूह आखिरकार भाग पड़ी। संवाद सहयोगी, शेरघाटीः आमस थाना के करमडीह पंचायत के वभन्डी गांव में मृत बच्चे को जिंदा करने का तंत्र-मंत्र और जादू टोना असफल हो गया। उसके बाद तंत्र-मंत्र जादू टोना में लगे महिलाओं का पुरुषों का समूह अपने-अपने घर चले गए। असंभव को संभव बनाने का नुस्खा तैयार करने वाले महिला समूह आखिरकार भाग पड़ी। महिलाओं द्वारा किए जा रहे तंत्र मंत्र की खबर जैसे-जैसे क्षेत्र में फैली बुद्धिजीवियों और जानकारों में इस बात को लेकर चर्चा होने लगी। आखिरकार वह महिलाएं चली गईं। उल्लेखनीय हो कि वभनडी गांव के कोलेश्वर यादव का 12 वर्षीय एकलौते पुत्र की मौत पेड़ से गिरने के कारण हो गई थी। जिसके बाद तंत्र मंत्र करने वाली महिलाओं ने उसे जिंदा करने के लिए उसके अभिभावक को मनाया और तंत्रमंत्र करने लगीं। लेकिन सब फेल हो गया। मृत बच्चे को कुछ महिलाएं एक बंद कमरे में जिंदा करने के लिए कुछ लोगों द्वारा बच्चे का शव रख कर पुनः जिंदा करने के लिए घंटों मंत्र जाप व भजन किए। रात भर मंत्र जाप व भजन की खूब चर्चा होती रही । विज्ञान के इस युग में लोग इसे झूठ का ढोंग बता रहे हैं। इसे लेकर स्थानीय लोग हतप्रभ भी हैं। तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है। कम पढ़े-लिखे कुछ ग्रामीण उनका साथ भी देते रहे। उल्लेखनीय हो कि डॉक्टर ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद एक धार्मिक संस्थान की महिला समूह द्वारा जिंदा किए जाने का खेल खेला गया। मजे की बात यह रही कि इसका कोई फायदा नहीं हुआ। हालांकि स्वजन भी उनका साथ दे रहे। चर्चा है कि दूसरे दिन सोमवार को भी मंत्र जाप चलता रहा। इसके बाद कुछ बुद्धिजीवियों की सलाह पर स्वजन शव को दफना दिए। लेकिन इसके बाद दर्जन भर महिलाएं उसके कब्र पर पहुंच गई और फिर भजन शुरू कर दीं। फिलहाल स्थिति सामान्य है। तंत्र मंत्र जादू टोना करने वाली महिलाएं गायब हो गए हैं। मृतक के स्वजन भी इसे ढकोसला करार दे रहे हैं।
करमडीह पंचायत के वभन्डी गांव में मृत बच्चे को जिंदा करने का तंत्र-मंत्र और जादू टोना असफल हो गया। उसके बाद तंत्र-मंत्र जादू टोना में लगे महिलाओं का पुरुषों का समूह अपने-अपने घर चले गए। असंभव को संभव बनाने का नुस्खा तैयार करने वाले महिला समूह आखिरकार भाग पड़ी। संवाद सहयोगी, शेरघाटीः आमस थाना के करमडीह पंचायत के वभन्डी गांव में मृत बच्चे को जिंदा करने का तंत्र-मंत्र और जादू टोना असफल हो गया। उसके बाद तंत्र-मंत्र जादू टोना में लगे महिलाओं का पुरुषों का समूह अपने-अपने घर चले गए। असंभव को संभव बनाने का नुस्खा तैयार करने वाले महिला समूह आखिरकार भाग पड़ी। महिलाओं द्वारा किए जा रहे तंत्र मंत्र की खबर जैसे-जैसे क्षेत्र में फैली बुद्धिजीवियों और जानकारों में इस बात को लेकर चर्चा होने लगी। आखिरकार वह महिलाएं चली गईं। उल्लेखनीय हो कि वभनडी गांव के कोलेश्वर यादव का बारह वर्षीय एकलौते पुत्र की मौत पेड़ से गिरने के कारण हो गई थी। जिसके बाद तंत्र मंत्र करने वाली महिलाओं ने उसे जिंदा करने के लिए उसके अभिभावक को मनाया और तंत्रमंत्र करने लगीं। लेकिन सब फेल हो गया। मृत बच्चे को कुछ महिलाएं एक बंद कमरे में जिंदा करने के लिए कुछ लोगों द्वारा बच्चे का शव रख कर पुनः जिंदा करने के लिए घंटों मंत्र जाप व भजन किए। रात भर मंत्र जाप व भजन की खूब चर्चा होती रही । विज्ञान के इस युग में लोग इसे झूठ का ढोंग बता रहे हैं। इसे लेकर स्थानीय लोग हतप्रभ भी हैं। तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है। कम पढ़े-लिखे कुछ ग्रामीण उनका साथ भी देते रहे। उल्लेखनीय हो कि डॉक्टर ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद एक धार्मिक संस्थान की महिला समूह द्वारा जिंदा किए जाने का खेल खेला गया। मजे की बात यह रही कि इसका कोई फायदा नहीं हुआ। हालांकि स्वजन भी उनका साथ दे रहे। चर्चा है कि दूसरे दिन सोमवार को भी मंत्र जाप चलता रहा। इसके बाद कुछ बुद्धिजीवियों की सलाह पर स्वजन शव को दफना दिए। लेकिन इसके बाद दर्जन भर महिलाएं उसके कब्र पर पहुंच गई और फिर भजन शुरू कर दीं। फिलहाल स्थिति सामान्य है। तंत्र मंत्र जादू टोना करने वाली महिलाएं गायब हो गए हैं। मृतक के स्वजन भी इसे ढकोसला करार दे रहे हैं।
के लिए जानकार असत्य भाषण में आगम-आज्ञा कैसे सकती है ? यह विचारणीय है। इस प्रकार आगम में अनेक स्थलों पर असत्य व मित्र भाषण का निषेध किया गया है और इनके बोलने वालों को असमाधि और शवल दोष के भागी माने गए हैं। वे विभिन्न प्रायश्चित्त के भागी बताए गए है । और संकट के प्रसंगों पर असत्य तथा मिश्र भाषी को भी प्रायश्चित्त किए बिना विरा माना है, तो फिर किसी भी दशा में असत्य व मिश्र का प्रयोग शास्त्र सम्मत्त कैसे माना जा सकता है ? आंधाकर्मादि दोप युक्त आहारादि का आगम में सर्वत्र निषेध है और सकारण अवस्था में भी लेने की आज्ञा नहीं है, प्रासंगिक शास्त्रीय विषय का संक्षिप्त निरूपण यही सिद्ध) करता है - आचारांग श्रुतस्कंध २ में यह वर्णन है कि साधु-साध्वी के लिए बनाया हुआ, सरोदा हुआ आदि दोप युक्त अशन, पनि, सादिम, स्वादिम, वस्त्र - पात्रादि साधारणतया तथा पुरिनंतर कडं (दूसरे के सुपुर्द किया हुआ) आदि किसी भी प्रकार का लेना पूर्ण निषिद्ध है । सूत्रकृतांग अ. ९ गाथा १४, अ. ११ गाथा १३, १४, १५ तथा अ. १७, १८ में विशद रूप से सदोप आहारादि लेने का खंडन किया गया है। इसी सूत्र में उल्लेख करते हुए न. १ उ. ३ गाथा १ के वर्णन से यह सिद्ध है कि पूर्तिकर्म दो सेवन करने वाला दो पक्षों (गृहस्य व साघु पदा) का सेवन करता
के लिए जानकार असत्य भाषण में आगम-आज्ञा कैसे सकती है ? यह विचारणीय है। इस प्रकार आगम में अनेक स्थलों पर असत्य व मित्र भाषण का निषेध किया गया है और इनके बोलने वालों को असमाधि और शवल दोष के भागी माने गए हैं। वे विभिन्न प्रायश्चित्त के भागी बताए गए है । और संकट के प्रसंगों पर असत्य तथा मिश्र भाषी को भी प्रायश्चित्त किए बिना विरा माना है, तो फिर किसी भी दशा में असत्य व मिश्र का प्रयोग शास्त्र सम्मत्त कैसे माना जा सकता है ? आंधाकर्मादि दोप युक्त आहारादि का आगम में सर्वत्र निषेध है और सकारण अवस्था में भी लेने की आज्ञा नहीं है, प्रासंगिक शास्त्रीय विषय का संक्षिप्त निरूपण यही सिद्ध) करता है - आचारांग श्रुतस्कंध दो में यह वर्णन है कि साधु-साध्वी के लिए बनाया हुआ, सरोदा हुआ आदि दोप युक्त अशन, पनि, सादिम, स्वादिम, वस्त्र - पात्रादि साधारणतया तथा पुरिनंतर कडं आदि किसी भी प्रकार का लेना पूर्ण निषिद्ध है । सूत्रकृतांग अ. नौ गाथा चौदह, अ. ग्यारह गाथा तेरह, चौदह, पंद्रह तथा अ. सत्रह, अट्ठारह में विशद रूप से सदोप आहारादि लेने का खंडन किया गया है। इसी सूत्र में उल्लेख करते हुए न. एक उ. तीन गाथा एक के वर्णन से यह सिद्ध है कि पूर्तिकर्म दो सेवन करने वाला दो पक्षों का सेवन करता
How to Make Heart and Mind Healthy : स्ट्रोक होना एक जीवन बदलने वाला अनुभव हो सकता है, लेकिन इसे अक्सर रोका जा सकता है। कुछ स्वास्थ्य स्थितियां और जीवनशैली कारक - रक्तचाप सहित, चाहे आप धूम्रपान करते हों या नहीं, मधुमेह और आपका आहार - आपके स्ट्रोक के जोखिम में एक बड़ी भूमिका निभाते हैं। वही खाद्य पदार्थ जो हमें स्वस्थ वजन बनाए रखने और मधुमेह और हृदय रोग को रोकने में मदद करते हैं, स्ट्रोक को रोकने में भी मदद कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि हृदय स्वास्थ्य और स्ट्रोक बारीकी से जुड़े हुए हैं। पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने पर ध्यान केंद्रित करना जो आपके दिल के लिए अच्छा है, आपके स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। 1. फल और सब्जियां (How to Make Heart and Mind Healthy) यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि फल और सब्जियां, जो वजन को नियंत्रित करने और आपके दिल को अच्छे आकार में रखने के लिए एक स्मार्ट आहार विकल्प हैं, स्ट्रोक को रोकने में भी मदद कर सकते हैं। वे स्वाभाविक रूप से वसा और कैलोरी में कम होते हैं, लेकिन फाइबर में समृद्ध होते हैं, जो आपको पूर्ण महसूस करने में मदद करते हैं। फल और सब्जियां भी पोटेशियम, फाइबर, फोलेट, विटामिन ए और विटामिन सी जैसे पोषक तत्वों से भरी हुई हैं। पोटेशियम में उच्च खाद्य पदार्थ, जैसे कि मीठे और सफेद आलू, केले, टमाटर, प्रून, तरबूज और सोयाबीन, आपको स्वस्थ रक्तचाप बनाए रखने में मदद कर सकते हैं - स्ट्रोक का प्रमुख जोखिम कारक। पालक जैसे मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थ भी स्ट्रोक के कम जोखिम से जुड़े होते हैं। आपका दिल स्वस्थ रहता है और आम तौर पर आपका वजन स्वस्थ रहता है। 2. मछली (How to Make Heart and Mind Healthy) 3. साबुत अनाज(How to Make Heart and Mind Healthy) अपनी अगली किराने की यात्रा पर, परिष्कृत सफेद रोटी के बजाय पूरे अनाज की रोटी तक पहुंचें। जब सफेद ब्रेड, अंग्रेजी मफिन और सफेद चावल बनाने के लिए अनाज को परिष्कृत किया जाता है, तो कई स्वस्थ पोषक तत्व छीन लिए जाते हैं, इसलिए हम इसके बजाय साबुत अनाज की रोटी और अनाज, दलिया और ब्राउन राइस चुनने की सलाह देते हैं। साबुत अनाज फाइबर, बी विटामिन (फोलेट और थियामिन सहित), मैग्नीशियम और आयरन में उच्च होते हैं - ये सभी हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं, जो स्ट्रोक को रोकने में मदद कर सकते हैं। 4. कम वसा वाली डेयरी (How to Make Heart and Mind Healthy) पनीर, दूध, दही और अन्य डेयरी उत्पाद कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन डी और पोटेशियम प्रदान करते हैं। लेकिन पूर्ण वसा वाले डेयरी उत्पादों में संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल भी होते हैं, जो आपके हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसके बजाय, कम वसा वाले और बिना वसा वाले दूध, दही और पनीर उत्पादों का विकल्प चुनें, जो स्वस्थ पोषक तत्व प्रदान करते हैं जो आपके हृदय रोग, टाइप 2 मधुमेह और उच्च रक्तचाप के जोखिम को कम कर सकते हैं - स्ट्रोक के सभी जोखिम कारक। आम तौर पर, हृदय-स्वस्थ खाद्य पदार्थों से भरपूर आहार खाने से स्ट्रोक को रोकने में मदद मिलेगी। व्यायाम करना और स्वस्थ वजन बनाए रखना, जो कि स्वस्थ आहार खाने से भी आसान होता है, आपको स्ट्रोक से बचने में भी मदद करेगा।
How to Make Heart and Mind Healthy : स्ट्रोक होना एक जीवन बदलने वाला अनुभव हो सकता है, लेकिन इसे अक्सर रोका जा सकता है। कुछ स्वास्थ्य स्थितियां और जीवनशैली कारक - रक्तचाप सहित, चाहे आप धूम्रपान करते हों या नहीं, मधुमेह और आपका आहार - आपके स्ट्रोक के जोखिम में एक बड़ी भूमिका निभाते हैं। वही खाद्य पदार्थ जो हमें स्वस्थ वजन बनाए रखने और मधुमेह और हृदय रोग को रोकने में मदद करते हैं, स्ट्रोक को रोकने में भी मदद कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि हृदय स्वास्थ्य और स्ट्रोक बारीकी से जुड़े हुए हैं। पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने पर ध्यान केंद्रित करना जो आपके दिल के लिए अच्छा है, आपके स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। एक. फल और सब्जियां यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि फल और सब्जियां, जो वजन को नियंत्रित करने और आपके दिल को अच्छे आकार में रखने के लिए एक स्मार्ट आहार विकल्प हैं, स्ट्रोक को रोकने में भी मदद कर सकते हैं। वे स्वाभाविक रूप से वसा और कैलोरी में कम होते हैं, लेकिन फाइबर में समृद्ध होते हैं, जो आपको पूर्ण महसूस करने में मदद करते हैं। फल और सब्जियां भी पोटेशियम, फाइबर, फोलेट, विटामिन ए और विटामिन सी जैसे पोषक तत्वों से भरी हुई हैं। पोटेशियम में उच्च खाद्य पदार्थ, जैसे कि मीठे और सफेद आलू, केले, टमाटर, प्रून, तरबूज और सोयाबीन, आपको स्वस्थ रक्तचाप बनाए रखने में मदद कर सकते हैं - स्ट्रोक का प्रमुख जोखिम कारक। पालक जैसे मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थ भी स्ट्रोक के कम जोखिम से जुड़े होते हैं। आपका दिल स्वस्थ रहता है और आम तौर पर आपका वजन स्वस्थ रहता है। दो. मछली तीन. साबुत अनाज अपनी अगली किराने की यात्रा पर, परिष्कृत सफेद रोटी के बजाय पूरे अनाज की रोटी तक पहुंचें। जब सफेद ब्रेड, अंग्रेजी मफिन और सफेद चावल बनाने के लिए अनाज को परिष्कृत किया जाता है, तो कई स्वस्थ पोषक तत्व छीन लिए जाते हैं, इसलिए हम इसके बजाय साबुत अनाज की रोटी और अनाज, दलिया और ब्राउन राइस चुनने की सलाह देते हैं। साबुत अनाज फाइबर, बी विटामिन , मैग्नीशियम और आयरन में उच्च होते हैं - ये सभी हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं, जो स्ट्रोक को रोकने में मदद कर सकते हैं। चार. कम वसा वाली डेयरी पनीर, दूध, दही और अन्य डेयरी उत्पाद कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन डी और पोटेशियम प्रदान करते हैं। लेकिन पूर्ण वसा वाले डेयरी उत्पादों में संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल भी होते हैं, जो आपके हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसके बजाय, कम वसा वाले और बिना वसा वाले दूध, दही और पनीर उत्पादों का विकल्प चुनें, जो स्वस्थ पोषक तत्व प्रदान करते हैं जो आपके हृदय रोग, टाइप दो मधुमेह और उच्च रक्तचाप के जोखिम को कम कर सकते हैं - स्ट्रोक के सभी जोखिम कारक। आम तौर पर, हृदय-स्वस्थ खाद्य पदार्थों से भरपूर आहार खाने से स्ट्रोक को रोकने में मदद मिलेगी। व्यायाम करना और स्वस्थ वजन बनाए रखना, जो कि स्वस्थ आहार खाने से भी आसान होता है, आपको स्ट्रोक से बचने में भी मदद करेगा।