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नई दिल्लीः सरकार ने आधार कार्डधारकों के लिए अब एक ऐसी सुविधा शुरू कर दी है, जिससे हर किसी के चेहरे पर काफी खुशी दिख रही है। अगर आपके पास दस साल पुराना आधार कार्ड रखा है तो फिर यह खबर बड़े ही काम की साबित होने जा रही है। आप आराम से 10 साल पुराने आधार कार्ड को अपडेट करा सकते हैं, जिसके लिए सरकार ने तगड़ी सहूलियत शुरू की है।
आपने आधार कार्ड अपडेट नहीं कराया तो फिर जल्द करा लें। नए नियमों के अनुसार आप अपना आधार कार्ड बिल्कुल मुफ्त में अपडेट कराने का काम कर सकते हैं, जिसके लिए कोई भी पैसा नहीं देना होगा। यह सुविधा अभी दो महीने तक जारी रहने वाली है, जिससे जन सुविधा केद्रों पर भीड़ देखी जा रही है।
आयकर विभाग के मुताबिक, आधार कार्ड अपडेट कराने पर अब कोई रुपया नहीं देना पड़ रहा है। आप आराम से 14 जून 2023 तक अपना 10 साल पुराना आधार कार्ड आराम से अपडेट करवा सकते हैं, जिसके लिए कई शर्तें तय की गई हैं। यह सुविधा 15 मार्च से चल रही है, जो 14 जून तक जारी रहेगी।
इससे पहले 10 साल पुराना आधार कार्ड अपडेट कराने पर 25 रुपये का चार्ज लग रहा था, जिसे सरकार ने खत्म करने का फैसला लिया है। अगर आप तय तारीख तक यह काम नहीं करवाते हैं तो फिर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। सरकार इस काम के लिए चार्ज लगा सकती है, जिससे लोगों की जेब डीली होगी। इससे बेहतर है कि आप जल्द ही यह काम करवा लें।
अगर आपका आधार कार्ड अपडेट नहीं तो फिर कई काम बीच में लटक जाएंगे, जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बिना आधार कार्ड के आप किसी बैंक में अपना अकाउंट भी ओपन नहीं करवा सकते हैं। इतना ही नहीं आपको किसी सरकारी सुविधा का फायदा भी नहीं दिया जाएगा, जिससे लोगों को मुसीबतों का सामना करना होगा। इसलिए आप घरों से निकले और जन सुविधा केंद्र जाकर यह काम तुरंत करवा लें।
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नई दिल्लीः सरकार ने आधार कार्डधारकों के लिए अब एक ऐसी सुविधा शुरू कर दी है, जिससे हर किसी के चेहरे पर काफी खुशी दिख रही है। अगर आपके पास दस साल पुराना आधार कार्ड रखा है तो फिर यह खबर बड़े ही काम की साबित होने जा रही है। आप आराम से दस साल पुराने आधार कार्ड को अपडेट करा सकते हैं, जिसके लिए सरकार ने तगड़ी सहूलियत शुरू की है। आपने आधार कार्ड अपडेट नहीं कराया तो फिर जल्द करा लें। नए नियमों के अनुसार आप अपना आधार कार्ड बिल्कुल मुफ्त में अपडेट कराने का काम कर सकते हैं, जिसके लिए कोई भी पैसा नहीं देना होगा। यह सुविधा अभी दो महीने तक जारी रहने वाली है, जिससे जन सुविधा केद्रों पर भीड़ देखी जा रही है। आयकर विभाग के मुताबिक, आधार कार्ड अपडेट कराने पर अब कोई रुपया नहीं देना पड़ रहा है। आप आराम से चौदह जून दो हज़ार तेईस तक अपना दस साल पुराना आधार कार्ड आराम से अपडेट करवा सकते हैं, जिसके लिए कई शर्तें तय की गई हैं। यह सुविधा पंद्रह मार्च से चल रही है, जो चौदह जून तक जारी रहेगी। इससे पहले दस साल पुराना आधार कार्ड अपडेट कराने पर पच्चीस रुपयापये का चार्ज लग रहा था, जिसे सरकार ने खत्म करने का फैसला लिया है। अगर आप तय तारीख तक यह काम नहीं करवाते हैं तो फिर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। सरकार इस काम के लिए चार्ज लगा सकती है, जिससे लोगों की जेब डीली होगी। इससे बेहतर है कि आप जल्द ही यह काम करवा लें। अगर आपका आधार कार्ड अपडेट नहीं तो फिर कई काम बीच में लटक जाएंगे, जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बिना आधार कार्ड के आप किसी बैंक में अपना अकाउंट भी ओपन नहीं करवा सकते हैं। इतना ही नहीं आपको किसी सरकारी सुविधा का फायदा भी नहीं दिया जाएगा, जिससे लोगों को मुसीबतों का सामना करना होगा। इसलिए आप घरों से निकले और जन सुविधा केंद्र जाकर यह काम तुरंत करवा लें।
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पंजाब की जेलों में लगातार मोबाइल बरामद हो रहे हैं, लेकिन मोबाइल जेल के अंदर जा कैसे रहे हैं, यह बड़ा सवाल है। फिरोजपुर की केन्द्रीय जेल में सर्च अभियान के दौरान पुलिस को 12 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।
जेल में बंद-A कैटेगरी के गैंगस्टर मनप्रीत सिंह उर्फ मन्ना निवासी तलवंडी साबो से जेल अधिकारियों ने फोन छीना तो वह बौखला गया। इसके बाद गैंगस्टर मन्ना ने जेल में जम कर बवाल काटा।
मन्ना ने खुद का सिर जेल की दीवारों से मारना शुरू कर दिया। मन्ना ने खुद को घायल कर लिया। मोबाइल पकड़े जाने के बाद गुस्साए गैंगस्टर को रोकने की जेल अधिकारियों ने कोशिश की तो उसने अधिकारियों को मारने की कोशिश की।
मन्ना अधिकारियों को जान से मारने की धमकियां देने लगा। कार्रवाई करते हुए जेल प्रशासन ने मन्ना पर IPC की धारा 506/186 और 52-A एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं जो बाकी के कैदी हैं, जिनसे मोबाइल बरामद हुए उन पर भी मामला दर्ज किया गया है।
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पंजाब की जेलों में लगातार मोबाइल बरामद हो रहे हैं, लेकिन मोबाइल जेल के अंदर जा कैसे रहे हैं, यह बड़ा सवाल है। फिरोजपुर की केन्द्रीय जेल में सर्च अभियान के दौरान पुलिस को बारह मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। जेल में बंद-A कैटेगरी के गैंगस्टर मनप्रीत सिंह उर्फ मन्ना निवासी तलवंडी साबो से जेल अधिकारियों ने फोन छीना तो वह बौखला गया। इसके बाद गैंगस्टर मन्ना ने जेल में जम कर बवाल काटा। मन्ना ने खुद का सिर जेल की दीवारों से मारना शुरू कर दिया। मन्ना ने खुद को घायल कर लिया। मोबाइल पकड़े जाने के बाद गुस्साए गैंगस्टर को रोकने की जेल अधिकारियों ने कोशिश की तो उसने अधिकारियों को मारने की कोशिश की। मन्ना अधिकारियों को जान से मारने की धमकियां देने लगा। कार्रवाई करते हुए जेल प्रशासन ने मन्ना पर IPC की धारा पाँच सौ छः/एक सौ छियासी और बावन-A एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं जो बाकी के कैदी हैं, जिनसे मोबाइल बरामद हुए उन पर भी मामला दर्ज किया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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Reliance Jio के कुछ मंथली प्लान्स बाजार में दूसरी टेलीकॉम कंपनियों के मुकाबले सस्ते हैं। कंपनी अपने ग्राहकों को अलग-अलग तरह के प्रीपेड प्लान्स उपलब्ध कराती है। कंपनी एक 349 रुपये वाला प्लान भी ऑफर करती है। इस प्लान में जियो रोज 3GB डेटा अपने ग्राहकों को देता है।
जियो के 349 रुपये वाले प्लान के बारे में विस्तार से बात करें तो इस प्लान में ग्राहकों को 28 दिन की वैलिडिटी दी जाती है। इस वैलिडिटी के दौरान ग्राहकों को इस प्लान में रोज 3GB डेटा, फ्री ऑन-नेट कॉलिंग, ऑफ-नेट कॉलिंग के लिए 1,000 मिनट्स, रोज 100SMS और जियो ऐप्स का फ्री सब्सक्रिप्शन दिया जाता है।
जियो द्वारा इस प्लान में दिया जा रहा 3GB डेटा बहुत सारे यूजर्स के लिए काफी होता है। इतना डेटा उन यूजर्स के लिए भी काफी है जो फोन में रेगुलर तौर पर थोड़ा बहुत वीडियो देखते ही हैं। एयरटेल और Vi द्वारा इस प्लान के कंपटीशन में ऐसा प्लान लाया जाना बाकी है।
हालांकि, एयरटेल जियो के 349 रुपये वाले प्लान के मुकाबले में एक ऐसा ही 398 रुपये वाला प्लान ऑफर करता है। एयरटेल और Vi फिलहाल पोस्टपेड प्लान्स पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
जियो अपने ग्राहकों को 3GB डेली डेटा वाले दो और प्लान्स भी ऑफर करता है। ये प्लान्स 401 रुपये और 999 रुपये वाले हैं। 401 रुपये वाले प्लान के बारे में बात करें तो इस प्लान में भी 28 दिन की वैलिडिटी दी जाती है। इस दौरान ग्राहकों को रोज 3GB डेटा (एडिशनल 6GB डेटा भी), फ्री ऑन-नेट कॉलिंग और ऑफ-नेट कॉलिंग के लिए 1,000 मिनट्स और रोज 100SMS दिए जाते हैं। साथ ही इस प्लान में जियो ऐप्स का फ्री सब्सक्रिप्शन भी ग्राहकों को दिया जाता है। खास बात ये है कि इस प्लान में 1 साल के लिए डिज्नी प्लस हॉटस्टार का सब्सक्रिप्शन भी दिया जाता है।
अंत में 999 रुपये वाले प्लान के बारे में बात करें तो इसमें रोज 3GB डेटा, ऑन-नेट फ्री कॉलिंग, ऑफ-नेट कॉलिंग के लिए 3,000 मिनट्स और रोज 100SMS दिए जाते हैं। साथ ही इस प्लान में भी जियो ऐप्स का फ्री सब्सक्रिप्शन ग्राहकों को मिलता है।
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Reliance Jio के कुछ मंथली प्लान्स बाजार में दूसरी टेलीकॉम कंपनियों के मुकाबले सस्ते हैं। कंपनी अपने ग्राहकों को अलग-अलग तरह के प्रीपेड प्लान्स उपलब्ध कराती है। कंपनी एक तीन सौ उनचास रुपयापये वाला प्लान भी ऑफर करती है। इस प्लान में जियो रोज तीनGB डेटा अपने ग्राहकों को देता है। जियो के तीन सौ उनचास रुपयापये वाले प्लान के बारे में विस्तार से बात करें तो इस प्लान में ग्राहकों को अट्ठाईस दिन की वैलिडिटी दी जाती है। इस वैलिडिटी के दौरान ग्राहकों को इस प्लान में रोज तीनGB डेटा, फ्री ऑन-नेट कॉलिंग, ऑफ-नेट कॉलिंग के लिए एक,शून्य मिनट्स, रोज एक सौSMS और जियो ऐप्स का फ्री सब्सक्रिप्शन दिया जाता है। जियो द्वारा इस प्लान में दिया जा रहा तीनGB डेटा बहुत सारे यूजर्स के लिए काफी होता है। इतना डेटा उन यूजर्स के लिए भी काफी है जो फोन में रेगुलर तौर पर थोड़ा बहुत वीडियो देखते ही हैं। एयरटेल और Vi द्वारा इस प्लान के कंपटीशन में ऐसा प्लान लाया जाना बाकी है। हालांकि, एयरटेल जियो के तीन सौ उनचास रुपयापये वाले प्लान के मुकाबले में एक ऐसा ही तीन सौ अट्ठानवे रुपयापये वाला प्लान ऑफर करता है। एयरटेल और Vi फिलहाल पोस्टपेड प्लान्स पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। जियो अपने ग्राहकों को तीनGB डेली डेटा वाले दो और प्लान्स भी ऑफर करता है। ये प्लान्स चार सौ एक रुपयापये और नौ सौ निन्यानवे रुपयापये वाले हैं। चार सौ एक रुपयापये वाले प्लान के बारे में बात करें तो इस प्लान में भी अट्ठाईस दिन की वैलिडिटी दी जाती है। इस दौरान ग्राहकों को रोज तीनGB डेटा , फ्री ऑन-नेट कॉलिंग और ऑफ-नेट कॉलिंग के लिए एक,शून्य मिनट्स और रोज एक सौSMS दिए जाते हैं। साथ ही इस प्लान में जियो ऐप्स का फ्री सब्सक्रिप्शन भी ग्राहकों को दिया जाता है। खास बात ये है कि इस प्लान में एक साल के लिए डिज्नी प्लस हॉटस्टार का सब्सक्रिप्शन भी दिया जाता है। अंत में नौ सौ निन्यानवे रुपयापये वाले प्लान के बारे में बात करें तो इसमें रोज तीनGB डेटा, ऑन-नेट फ्री कॉलिंग, ऑफ-नेट कॉलिंग के लिए तीन,शून्य मिनट्स और रोज एक सौSMS दिए जाते हैं। साथ ही इस प्लान में भी जियो ऐप्स का फ्री सब्सक्रिप्शन ग्राहकों को मिलता है।
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ऑटो डेस्क. विटेंज वाहनों के नियमों में जल्द ही बदलाव होने वाले हैं। पुराने विंटेज वाहनों के नियमन और रजिस्ट्रेशन को आसान बनाने के लिए रोड ट्रांसपोर्ट और हाइवे मंत्रालय ने इस संबंध में एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन तैयार किया है। ड्राफ्ट के तहत 50 साल से अधिक पुराने विंटेज वाहनों को स्क्रैपेज से छूट दिलाने के लिए के लिए खास नंबर प्लेट लागू हो सकती है, जिसपर वीए 'VA' लिखा होगा। नंबर प्लेट पर लिखे गए वीए में से 'वी' का मतलब होगा विंटेज।
2019 के विंटेज मोटर व्हीकल रेगुलेशन ऑर्डर के मुताबिक, इन वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट लगानी होगी जिसमें "XXVAYY" अक्षरों से मिलकर रजिस्ट्रेशन मार्क तैयार होगा। इस रजिस्ट्रेशन मार्क में VA होगा विंटेज के लिए, XX होगा राज्य का कोड और YY होगी राज्य की रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी द्वारा दी गई 01 से लेकर 09 तक के बीच की दो नंबरों की सीरीज। इस नई प्रस्तावित नीति के लिए स्टेकहोल्डर्स और लोगों से उनकी राय मांगी गई है ताकि विंटेज वाहनों की पहचान करने और उनको रेगुलेट करने में मदद मिल सके, जिससे उन्हें स्क्रैपेज से छूट दी जा सके।
इस नियम का एक और लक्ष्य यह है कि विंटेज वाहनों को जमा करने के शौकीनों को इंफोर्समेंट एजेंसियों की तरफ से परेशान न किया जाए। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इस खास रजिस्ट्रेशन के बाद विंटेज वाहनों को कई प्रकार की परिस्थितियों में सरकारी सड़कों पर उतरने की अनुमति दी जाएगी। बस इनका इस्तेमाल कमर्शियल तौर पर नहीं किया जा सकेगा। इस ड्राफ्ट में यह भी प्रस्तावित किया गया है कि ऐसे वाहनों के रजिस्ट्रेशन के समय 20 हजार रुपए की वन-टाइम फीस जमा करनी पड़ेगी, जो दस साल तक के लिए मान्य होगी।
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ऑटो डेस्क. विटेंज वाहनों के नियमों में जल्द ही बदलाव होने वाले हैं। पुराने विंटेज वाहनों के नियमन और रजिस्ट्रेशन को आसान बनाने के लिए रोड ट्रांसपोर्ट और हाइवे मंत्रालय ने इस संबंध में एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन तैयार किया है। ड्राफ्ट के तहत पचास साल से अधिक पुराने विंटेज वाहनों को स्क्रैपेज से छूट दिलाने के लिए के लिए खास नंबर प्लेट लागू हो सकती है, जिसपर वीए 'VA' लिखा होगा। नंबर प्लेट पर लिखे गए वीए में से 'वी' का मतलब होगा विंटेज। दो हज़ार उन्नीस के विंटेज मोटर व्हीकल रेगुलेशन ऑर्डर के मुताबिक, इन वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट लगानी होगी जिसमें "XXVAYY" अक्षरों से मिलकर रजिस्ट्रेशन मार्क तैयार होगा। इस रजिस्ट्रेशन मार्क में VA होगा विंटेज के लिए, XX होगा राज्य का कोड और YY होगी राज्य की रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी द्वारा दी गई एक से लेकर नौ तक के बीच की दो नंबरों की सीरीज। इस नई प्रस्तावित नीति के लिए स्टेकहोल्डर्स और लोगों से उनकी राय मांगी गई है ताकि विंटेज वाहनों की पहचान करने और उनको रेगुलेट करने में मदद मिल सके, जिससे उन्हें स्क्रैपेज से छूट दी जा सके। इस नियम का एक और लक्ष्य यह है कि विंटेज वाहनों को जमा करने के शौकीनों को इंफोर्समेंट एजेंसियों की तरफ से परेशान न किया जाए। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इस खास रजिस्ट्रेशन के बाद विंटेज वाहनों को कई प्रकार की परिस्थितियों में सरकारी सड़कों पर उतरने की अनुमति दी जाएगी। बस इनका इस्तेमाल कमर्शियल तौर पर नहीं किया जा सकेगा। इस ड्राफ्ट में यह भी प्रस्तावित किया गया है कि ऐसे वाहनों के रजिस्ट्रेशन के समय बीस हजार रुपए की वन-टाइम फीस जमा करनी पड़ेगी, जो दस साल तक के लिए मान्य होगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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Sushant Singh Rajput की छोटी मगर मोटी बातें, जिन्हें फैंस को जरूर पढ़ना चाहिए!
दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) अपने एक नोट के कारण चर्चा में हैं. जिसे उनकी बहन Shweta Singh Kriti ने शेयर किया है. इस नोट में ऐसा बहुत कुछ है जिसे जनता को जरूर पढ़ना चाहिए साथ ही उससे सीख भी लेनी चाहिए.
सुशांत की ज़िंदगी और मौत पर बन रही इन फ़िल्मों पर बवाल तो होना ही था!
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के रहस्यों (Sushant Singh Rajput Death Mystery) और उनकी फ़िल्मी ज़िंदगी के साथ ही नेपोटिज्म (Nepotism), बॉलीवुड गैंग (Bollywood Gang), इनसाइडर-आउटसाइडर बहस को लेकर 2 फ़िल्में बन रही हैं, जिनका नाम है- 'शशांक (Shashank)' और 'सुसाइड ऑर मर्डर' (Suicide or Murder).
Rhea Chakraborty का 'विक्टिम कार्ड' और सुशांत सिंह राजपूत की फैमिली कठघरे में!
रिया चक्रवर्ती के इंटरव्यू (Rhea Chakraborty Interview) ने बवाल मचा दिया है. खुद को बेकसूर बताते हुए रिया ने सुशांत सिंह राजपूत की फैमिली (Sushant Singh Rajput family) पर ही कई आरोप लगा डाले. अब जहां सुशांत की फैमिली कठघरे में आ गई है, वहीं सोशल मीडिया पर लोग रिया पर विक्टिम कार्ड खेलने का आरोप लगा रहे हैं.
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You agree to our privacy and cookie policy while login to our website. You agree to our privacy and cookie policy while login to our website. Sushant Singh Rajput की छोटी मगर मोटी बातें, जिन्हें फैंस को जरूर पढ़ना चाहिए! दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत अपने एक नोट के कारण चर्चा में हैं. जिसे उनकी बहन Shweta Singh Kriti ने शेयर किया है. इस नोट में ऐसा बहुत कुछ है जिसे जनता को जरूर पढ़ना चाहिए साथ ही उससे सीख भी लेनी चाहिए. सुशांत की ज़िंदगी और मौत पर बन रही इन फ़िल्मों पर बवाल तो होना ही था! सुशांत सिंह राजपूत की मौत के रहस्यों और उनकी फ़िल्मी ज़िंदगी के साथ ही नेपोटिज्म , बॉलीवुड गैंग , इनसाइडर-आउटसाइडर बहस को लेकर दो फ़िल्में बन रही हैं, जिनका नाम है- 'शशांक ' और 'सुसाइड ऑर मर्डर' . Rhea Chakraborty का 'विक्टिम कार्ड' और सुशांत सिंह राजपूत की फैमिली कठघरे में! रिया चक्रवर्ती के इंटरव्यू ने बवाल मचा दिया है. खुद को बेकसूर बताते हुए रिया ने सुशांत सिंह राजपूत की फैमिली पर ही कई आरोप लगा डाले. अब जहां सुशांत की फैमिली कठघरे में आ गई है, वहीं सोशल मीडिया पर लोग रिया पर विक्टिम कार्ड खेलने का आरोप लगा रहे हैं.
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उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज, नागरिक उड्डयन, राजनैतिक पेंशन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' की अध्यक्षता में व माननीय राज्यमंत्री लोक निर्माण विभाग उत्तर प्रदेश सरकार चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, चंद्र प्रकाश खरे की उपस्थिति में कानून व्यवस्था एवं विकास प्राथमिकता कार्यक्रमों, नीति आयोग, जिला योजना समिति आदि विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा बैठक चित्रकूट के तहसील सभागार राजापुर में संपन्न हुई।
श्री नंदी ने कहा कि देश की बागडोर परम तपस्वी नरेंद्र मोदी के हाथ में है जो देश के करोड़ों लोगों की चिंता करते हैं वही प्रदेश की भी सौभाग्य की बात है कि कर्म योगी के रूप में प्रदेश के अंतिम गांव के व्यक्ति के प्रति समर्पित प्रदेश की जनता के क्षण क्षण के लिए समर्पित रहने वाले माननीय मुख्यमंत्री जी के हाथ प्रदेश की बागडोर है जो निरंतर विकास को लेकर चिंतित रहते हैं। उन्होंने कहा कि इसके पूर्व आप लोगों ने सरकारों को देखा है और इस सरकार में भी कार्य कर रहे हैं यह सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास लेकर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने जनपद के प्रभारी मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि जो सरकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं वह सुदूर क्षेत्र के अंतिम पायदान के खड़े व्यक्ति को मिले यह हम आप लोगों को सुनिश्चित करना है जिन विभागों को जो समस्या हो वह बताएं उसका समाधान कराया जाएगा ।
प्रभारी मंत्री नंदी ने कानून व्यवस्था के संबंध में पुलिस अधीक्षक धवल जायसवाल से विभिन्न बिंदुओं की जानकारी ली और कहा कि संबंधित पुलिस अधिकारियों को क्षेत्र में भ्रमण कराकर अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित कराई जाए, महिला उत्पीड़न के जो मामले हैं उनको तत्काल निस्तारण कराएं, उसमें जो दोषी हो उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि जिन विभागों को विकास कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है वह अपने विभाग के कार्यों की पूर्ण तैयारी के साथ बैठक में रहकर स्पष्ट योजनाओं के बारे में जानकारी दें।
श्री नंदी ने जल जीवन मिशन, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, हवाई पट्टी का निर्माण, कर करेत्तर, कानून व्यवस्था, सामुदायिक शौचालय निर्माण, पंचायत भवन निर्माण, सड़कों के निर्माण, सेतुओ का निर्माण, सोलर सिंचाई पंप, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, खाद्यान्न वितरण, अपशिष्ट प्रबंधन, कन्या सुमंगला योजना, पशुओं का टीकाकरण, मत्स्य पालन, औद्मानीकरण, ईयर टैगिंग, चिकित्सकों की उपलब्धता, आयुष्मान भारत योजना, मातृ वंदना योजना, परिवार नियोजन, हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर, टेलीमेडिसिन, बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, जननी सुरक्षा योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, टीकाकरण, संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम, प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी तथा ग्रामीण, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, पेंशन योजनाएं शादी अनुदान, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, पोषण अभियान, आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण, वनीकरण, कौशल विकास, स्वरोजगार योजना, श्रम योगी मानधन योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, आजीविका मिशन, उर्वरक उपलब्ध आदि विभिन्न योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ भूपेश द्विवेदी, समस्त उपजिलाधिकारी, परियोजना निदेशक ऋषि मुनि उपाध्याय, जिला पंचायत राज अधिकारी तुलसीराम सहित संबंधित अधिकारी व जन प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज, नागरिक उड्डयन, राजनैतिक पेंशन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' की अध्यक्षता में व माननीय राज्यमंत्री लोक निर्माण विभाग उत्तर प्रदेश सरकार चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, चंद्र प्रकाश खरे की उपस्थिति में कानून व्यवस्था एवं विकास प्राथमिकता कार्यक्रमों, नीति आयोग, जिला योजना समिति आदि विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा बैठक चित्रकूट के तहसील सभागार राजापुर में संपन्न हुई। श्री नंदी ने कहा कि देश की बागडोर परम तपस्वी नरेंद्र मोदी के हाथ में है जो देश के करोड़ों लोगों की चिंता करते हैं वही प्रदेश की भी सौभाग्य की बात है कि कर्म योगी के रूप में प्रदेश के अंतिम गांव के व्यक्ति के प्रति समर्पित प्रदेश की जनता के क्षण क्षण के लिए समर्पित रहने वाले माननीय मुख्यमंत्री जी के हाथ प्रदेश की बागडोर है जो निरंतर विकास को लेकर चिंतित रहते हैं। उन्होंने कहा कि इसके पूर्व आप लोगों ने सरकारों को देखा है और इस सरकार में भी कार्य कर रहे हैं यह सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास लेकर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने जनपद के प्रभारी मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि जो सरकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं वह सुदूर क्षेत्र के अंतिम पायदान के खड़े व्यक्ति को मिले यह हम आप लोगों को सुनिश्चित करना है जिन विभागों को जो समस्या हो वह बताएं उसका समाधान कराया जाएगा । प्रभारी मंत्री नंदी ने कानून व्यवस्था के संबंध में पुलिस अधीक्षक धवल जायसवाल से विभिन्न बिंदुओं की जानकारी ली और कहा कि संबंधित पुलिस अधिकारियों को क्षेत्र में भ्रमण कराकर अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित कराई जाए, महिला उत्पीड़न के जो मामले हैं उनको तत्काल निस्तारण कराएं, उसमें जो दोषी हो उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि जिन विभागों को विकास कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है वह अपने विभाग के कार्यों की पूर्ण तैयारी के साथ बैठक में रहकर स्पष्ट योजनाओं के बारे में जानकारी दें। श्री नंदी ने जल जीवन मिशन, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, हवाई पट्टी का निर्माण, कर करेत्तर, कानून व्यवस्था, सामुदायिक शौचालय निर्माण, पंचायत भवन निर्माण, सड़कों के निर्माण, सेतुओ का निर्माण, सोलर सिंचाई पंप, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, खाद्यान्न वितरण, अपशिष्ट प्रबंधन, कन्या सुमंगला योजना, पशुओं का टीकाकरण, मत्स्य पालन, औद्मानीकरण, ईयर टैगिंग, चिकित्सकों की उपलब्धता, आयुष्मान भारत योजना, मातृ वंदना योजना, परिवार नियोजन, हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर, टेलीमेडिसिन, बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, जननी सुरक्षा योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, टीकाकरण, संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम, प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी तथा ग्रामीण, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, पेंशन योजनाएं शादी अनुदान, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, पोषण अभियान, आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण, वनीकरण, कौशल विकास, स्वरोजगार योजना, श्रम योगी मानधन योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, आजीविका मिशन, उर्वरक उपलब्ध आदि विभिन्न योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ भूपेश द्विवेदी, समस्त उपजिलाधिकारी, परियोजना निदेशक ऋषि मुनि उपाध्याय, जिला पंचायत राज अधिकारी तुलसीराम सहित संबंधित अधिकारी व जन प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. रोजाना संक्रमितों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. जबकि दिल्ली में बुधवार को अब 125 नये मामले सामने आए हैं, जिसके बाद यह आंकड़ा 3439 तक पहुंच गया है. यह जानकारी दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने दी.
यही नहीं, दिल्ली में कोरोना वायरस के कारण होने वाली मौतों की संख्या अब 56 हो गई है. आपको बता दें कि मंगलवार तक संक्रमण के मामलों की संख्या 3,314 थी.
वहीं, दूसरी तरफ दिल्ली सरकार ने बताया कि बुधवार को कंटेनमेंट जोन (Containment Zones) में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. मंगलवार को बढ़कर इनकी संख्या 100 तक पहुंच गई थी.
कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूर, पर्यटक, छात्रों और अन्य लोगों को लेकर गृह मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है. गृह मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी नई गाइडलाइन के अनुसार ये लोग कुछ शर्तों के साथ अब अपने घर लौट सकेंगे. गृह मंत्रालय की ओर से जारी नई गाइडलाइन के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, 'केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा प्रवासियों के संबंध में आज (बुधवार) आदेश पारित किया गया. इस संबंध में हम अन्य राज्य सरकारों से बात कर रहे हैं. सभी प्लानिंग कर के आपको एक दो दिन में सूचित करेंगे. तब तक आप घर पर ही रहें और लॉकडाउन का पालन करें. '
उल्लेखनीय है कि देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय की ताजा जानकारी के मुताबिक, कोरोना मरीजों की संख्या 31 हजार 332 हो गई है. पिछले 24 घंटों में 1674 नए मामले सामने आए और 73 लोगों की जान गई है. अबतक कुल 1007 की मौत हो चुकी है. वहीं 7 हजार से ज्यादा मरीजों का सफल इलाज हुआ है. महाराष्ट्र में बीमारों की संख्या 9 हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है तो वहीं गुजरात में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या 4 हजार के करीब है.
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नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. रोजाना संक्रमितों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. जबकि दिल्ली में बुधवार को अब एक सौ पच्चीस नये मामले सामने आए हैं, जिसके बाद यह आंकड़ा तीन हज़ार चार सौ उनतालीस तक पहुंच गया है. यह जानकारी दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने दी. यही नहीं, दिल्ली में कोरोना वायरस के कारण होने वाली मौतों की संख्या अब छप्पन हो गई है. आपको बता दें कि मंगलवार तक संक्रमण के मामलों की संख्या तीन,तीन सौ चौदह थी. वहीं, दूसरी तरफ दिल्ली सरकार ने बताया कि बुधवार को कंटेनमेंट जोन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. मंगलवार को बढ़कर इनकी संख्या एक सौ तक पहुंच गई थी. कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूर, पर्यटक, छात्रों और अन्य लोगों को लेकर गृह मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है. गृह मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी नई गाइडलाइन के अनुसार ये लोग कुछ शर्तों के साथ अब अपने घर लौट सकेंगे. गृह मंत्रालय की ओर से जारी नई गाइडलाइन के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, 'केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा प्रवासियों के संबंध में आज आदेश पारित किया गया. इस संबंध में हम अन्य राज्य सरकारों से बात कर रहे हैं. सभी प्लानिंग कर के आपको एक दो दिन में सूचित करेंगे. तब तक आप घर पर ही रहें और लॉकडाउन का पालन करें. ' उल्लेखनीय है कि देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय की ताजा जानकारी के मुताबिक, कोरोना मरीजों की संख्या इकतीस हजार तीन सौ बत्तीस हो गई है. पिछले चौबीस घंटाटों में एक हज़ार छः सौ चौहत्तर नए मामले सामने आए और तिहत्तर लोगों की जान गई है. अबतक कुल एक हज़ार सात की मौत हो चुकी है. वहीं सात हजार से ज्यादा मरीजों का सफल इलाज हुआ है. महाराष्ट्र में बीमारों की संख्या नौ हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है तो वहीं गुजरात में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या चार हजार के करीब है. .
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कोरोना की विपरीत परिस्थितियों ने सभी को एक बात स्पष्ट रूप से समझा दिया है- सेहत है संग तो जीत सकते हैं हर जंग। विशेषज्ञों की मानें तो स्वास्थ्य को एक झटके में ठीक नहीं किया जा सकता है, इसके लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है। आयुर्वेद वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं के निवारण और लोगों की प्रतिरोधक क्षमता को ठीक करने की दिशा में काम कर रहा है। कोरोना के समय में वैकल्पिक उपचार पद्धति के रूप में लोगों ने आयुर्वेद को सहारा बनाकर लाभ प्राप्त किया है।
आयुर्वेद को सिर्फ भारत तक में ही सीमित करके देखना न्यायसंगत नहीं है। दुनिया के कई देशों ने भी आयुर्वेद की शक्ति को स्वीकार कर इसे प्रयोग में लाना शुरू कर दिया है। आयुर्वेद के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए अमर उजाला ने आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेदिक विद्यापीठ के साथ मिलकर एक पहल की है। इसी क्रम में गुरुवार को आयोजित वेबिनार में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने आयुर्वेद और सेहत से जुड़े तमाम विषयों पर प्रकाश डाला।
स्वास्थ्य के बारे में बताते हुए प्रो. संजीव कहते हैं कि सिर्फ बीमारी न होने का मतलब यह नहीं है कि हम स्वस्थ हैं। स्वस्थ उसे माना जाता है जिसका शरीर, मन और सामाजिक सरोकार स्वस्थ हो। आयुर्वेद में इसी तरह की स्वास्थ्य की कल्पना की गई है। हमारे स्वास्थ्य के खराब होने का मुख्य कारण प्रज्ञापराध माना जाता है। प्रज्ञापराध ऐसे कार्यों को कहा जाता है जिन्हें हम जानते हैं कि गलत हैं, फिर भी करते हैं। ऐसी चीजें शरीर को अस्वस्थ कर सकती हैं।
आयुर्वेद में स्वस्थ रहने के कुछ मूल सिद्धांत हैं जिनका सभी लोगों को पालन करना चाहिए। आयुर्वेद में आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य को स्वास्थ्य का आधार बताया गया है। आहार में भोजन को स्वस्थ और पौष्टिक रखने, पूरी नींद लेने या नींद के समय के सही होने पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया गया है। भोजन या नींद में किसी प्रकार की कमी स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है। इसी तरह आयुर्वेद में ब्रह्मचर्य पर भी जोर दिया गया है। ब्रह्मचर्य का मतलब सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से सकारात्मक बर्ताव कर स्वास्थ्य को सही रखना होता है।
प्रो. संजीव कहते हैं कोरोना से भयभीत होने की जरूरत नहीं है, लोगों को सिर्फ सावधान रहना चाहिए। कोरोना के संबंध में आयुष मंत्रालय समय-समय पर दिशानिर्देश जारी करता रहा है, इनका पालन करके संक्रमण से आसानी से सुरक्षित रह सकते हैं। माइल्ड कोरोना के लक्षणों के साथ पोस्ट कोविड की समस्याओं को ठीक करने में आयुर्वेद काफी मददगार साबित हो सकता है। कोरोना के लक्षणों के अलावा पोस्ट कोविड को ठीक करने के लिए आयुर्वेद में कई सारी औषधियां हैं जिनसे लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
नोटः यह लेख राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. संजीव कुमार शर्मा से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। ।
अस्वीकरणः अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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कोरोना की विपरीत परिस्थितियों ने सभी को एक बात स्पष्ट रूप से समझा दिया है- सेहत है संग तो जीत सकते हैं हर जंग। विशेषज्ञों की मानें तो स्वास्थ्य को एक झटके में ठीक नहीं किया जा सकता है, इसके लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है। आयुर्वेद वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं के निवारण और लोगों की प्रतिरोधक क्षमता को ठीक करने की दिशा में काम कर रहा है। कोरोना के समय में वैकल्पिक उपचार पद्धति के रूप में लोगों ने आयुर्वेद को सहारा बनाकर लाभ प्राप्त किया है। आयुर्वेद को सिर्फ भारत तक में ही सीमित करके देखना न्यायसंगत नहीं है। दुनिया के कई देशों ने भी आयुर्वेद की शक्ति को स्वीकार कर इसे प्रयोग में लाना शुरू कर दिया है। आयुर्वेद के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए अमर उजाला ने आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेदिक विद्यापीठ के साथ मिलकर एक पहल की है। इसी क्रम में गुरुवार को आयोजित वेबिनार में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने आयुर्वेद और सेहत से जुड़े तमाम विषयों पर प्रकाश डाला। स्वास्थ्य के बारे में बताते हुए प्रो. संजीव कहते हैं कि सिर्फ बीमारी न होने का मतलब यह नहीं है कि हम स्वस्थ हैं। स्वस्थ उसे माना जाता है जिसका शरीर, मन और सामाजिक सरोकार स्वस्थ हो। आयुर्वेद में इसी तरह की स्वास्थ्य की कल्पना की गई है। हमारे स्वास्थ्य के खराब होने का मुख्य कारण प्रज्ञापराध माना जाता है। प्रज्ञापराध ऐसे कार्यों को कहा जाता है जिन्हें हम जानते हैं कि गलत हैं, फिर भी करते हैं। ऐसी चीजें शरीर को अस्वस्थ कर सकती हैं। आयुर्वेद में स्वस्थ रहने के कुछ मूल सिद्धांत हैं जिनका सभी लोगों को पालन करना चाहिए। आयुर्वेद में आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य को स्वास्थ्य का आधार बताया गया है। आहार में भोजन को स्वस्थ और पौष्टिक रखने, पूरी नींद लेने या नींद के समय के सही होने पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया गया है। भोजन या नींद में किसी प्रकार की कमी स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है। इसी तरह आयुर्वेद में ब्रह्मचर्य पर भी जोर दिया गया है। ब्रह्मचर्य का मतलब सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से सकारात्मक बर्ताव कर स्वास्थ्य को सही रखना होता है। प्रो. संजीव कहते हैं कोरोना से भयभीत होने की जरूरत नहीं है, लोगों को सिर्फ सावधान रहना चाहिए। कोरोना के संबंध में आयुष मंत्रालय समय-समय पर दिशानिर्देश जारी करता रहा है, इनका पालन करके संक्रमण से आसानी से सुरक्षित रह सकते हैं। माइल्ड कोरोना के लक्षणों के साथ पोस्ट कोविड की समस्याओं को ठीक करने में आयुर्वेद काफी मददगार साबित हो सकता है। कोरोना के लक्षणों के अलावा पोस्ट कोविड को ठीक करने के लिए आयुर्वेद में कई सारी औषधियां हैं जिनसे लाभ प्राप्त किया जा सकता है। नोटः यह लेख राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. संजीव कुमार शर्मा से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। । अस्वीकरणः अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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नई दिल्ली, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के प्रति बढ़ती हिंसा और पिछले दिनों दो सिख भाइयों की हत्या पर चिंता व्यक्त की है। आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा ने भारत सरकार से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की अपील की हैं।
आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा ने कहा है कि पेशावर में 2 व्यापारियों रंजीत सिंह (42 वर्षीय) और कुलजीत सिंह (38 वर्षीय) की हत्या की खबर सुनकर बेहद दुख हुआ है। उनका कहना है कि विदेश मंत्रालय को चाहिए कि वह इस मामले को पाकिस्तान के सामने उठाए। उनका कहना है कि भारतीय सिख समुदाय पाकिस्तान में बहुत ही थोड़ी तादाद में रह रहे सिखों की सुरक्षा के प्रति काफी चिंतित है। उनका कहना है कि पाकिस्तान में धर्म परिवर्तन के लिए सिखों का कत्ल और सिख लड़कियों के अपहरण की घटना बर्दाश्त से बाहर हैं।
आयोग के अध्यक्ष सरदार इकबाल सिंह लालपुरा ने कहा है कि पाकिस्तान में सिखों की सुरक्षा के बारे में आयोग ने विदेश मंत्रालय से अपनी चिंता और सुझाव को साझा किया है। उनका कहना है कि हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि सरकार पाकिस्तान से कहे कि वह वहां के सिखों की सुरक्षा की फुलप्रूफ व्यवस्था करे। आयोग को इस बात की चिंता है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग बहुत ही छोटी तादाद में हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा के प्रति पाकिस्तान सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए। दो सिख भाइयों की हत्या करने वाले पेशावर के रहने वाले थे और वह मसाला व्यापारी हैं।
अल्पसंख्यक आयोग ने इस मामले पर भारत सरकार के जरिए आवाज बुलंद किए जाने की प्रशंसा की है। उनका कहना है कि भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस मामले को मीडिया में उठाया है। उन्होंने यह भी बताया है कि पाकिस्तान में सिख बंधुओं की हत्या के बाद सिख समुदाय की तरफ से धरना-प्रदर्शन करके पुलिस पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। पाकिस्तान की गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी भी इस मामले में अपनी भूमिका अदा कर रही है।
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नई दिल्ली, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के प्रति बढ़ती हिंसा और पिछले दिनों दो सिख भाइयों की हत्या पर चिंता व्यक्त की है। आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा ने भारत सरकार से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की अपील की हैं। आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा ने कहा है कि पेशावर में दो व्यापारियों रंजीत सिंह और कुलजीत सिंह की हत्या की खबर सुनकर बेहद दुख हुआ है। उनका कहना है कि विदेश मंत्रालय को चाहिए कि वह इस मामले को पाकिस्तान के सामने उठाए। उनका कहना है कि भारतीय सिख समुदाय पाकिस्तान में बहुत ही थोड़ी तादाद में रह रहे सिखों की सुरक्षा के प्रति काफी चिंतित है। उनका कहना है कि पाकिस्तान में धर्म परिवर्तन के लिए सिखों का कत्ल और सिख लड़कियों के अपहरण की घटना बर्दाश्त से बाहर हैं। आयोग के अध्यक्ष सरदार इकबाल सिंह लालपुरा ने कहा है कि पाकिस्तान में सिखों की सुरक्षा के बारे में आयोग ने विदेश मंत्रालय से अपनी चिंता और सुझाव को साझा किया है। उनका कहना है कि हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि सरकार पाकिस्तान से कहे कि वह वहां के सिखों की सुरक्षा की फुलप्रूफ व्यवस्था करे। आयोग को इस बात की चिंता है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग बहुत ही छोटी तादाद में हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा के प्रति पाकिस्तान सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए। दो सिख भाइयों की हत्या करने वाले पेशावर के रहने वाले थे और वह मसाला व्यापारी हैं। अल्पसंख्यक आयोग ने इस मामले पर भारत सरकार के जरिए आवाज बुलंद किए जाने की प्रशंसा की है। उनका कहना है कि भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस मामले को मीडिया में उठाया है। उन्होंने यह भी बताया है कि पाकिस्तान में सिख बंधुओं की हत्या के बाद सिख समुदाय की तरफ से धरना-प्रदर्शन करके पुलिस पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। पाकिस्तान की गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी भी इस मामले में अपनी भूमिका अदा कर रही है।
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लखनऊ, 31 मार्च (आईएएनएस). अमेठी के आरिफ के बाद अब यूपी के सुल्तानपुर के अफरोज पर सारस रखने का मामला दर्ज किया गया है.
27 वर्ष के मोहम्मद अफरोज का एक सारस से गहरा नाता है, जो उड़कर उनके गांव के मछली तालाब में आया और पिछले वर्ष सितंबर से उनके साथ रहने लगा.
अफरोज पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है.
यह कार्रवाई एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद हुई. इस पोस्ट में सुल्तानपुर में एक क्षेत्रीय आदमी और सारस के बीच अनोखे बंधन को साझा किया गया.
इस पोस्ट के बाद मोहम्मद आरिफ के विरूद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अनुसार मामला दर्ज किया गया और सारस को वन विभाग द्वारा ले जाया गया.
सुल्तानपुर में लंभुआ तहसील में एक मोबाइल हैंडसेट स्टोर के मालिक मोहम्मद अफरोज के अनुसार, उन्हें सितंबर 2022 में गांव के मछली पकड़ने के तालाब के पास सारस मिला था.
उन्होंने कहा, मैंने सारस को अकेला पाया और उसे वैसा ही खाना दिया जैसा कोई अन्य आदमी करता है. मैं दंग था कि जब मैंने घर जाना प्रारम्भ किया, तो सारस मेरा पीछा करने लगा और मेरे घर पहुंच गया.
उन्होंने कहा, हम पहले से ही एक सारस के साथ रहने के आदी थे, क्योंकि मेरे पिता मोहम्मद शफीक के पास 2019 से एक सारस पक्षी था. उन्होंने इसे एक खेत में पाया था और बाद में पक्षी उनके साथ रहने लगा और पूरे परिवार के साथ घुलमिल गया. हम प्यार से उसे स्वीटी कहते थे.
उन्होंने बताया कि मार्च 2022 में सोनबरसा गांव में करंट लगने से स्वीटी की मृत्यु हो गई.
अफरोज ने कहा, सारस की मृत्यु से मेरे पिता सदमे में थे, उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ने लगा था. जब हमने इस सारस को देखा, तो इसका नाम भी स्वीटी रख दिया, इसके आने से मेरे पिता के स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ है.
सुल्तानपुर के डीएफओ आर। के। त्रिपाठी ने बोला कि कानून के मुताबिक सारस वन्य जीव अधिनियम के अनुसार संरक्षित पक्षी है और इसे घर/निवास में नहीं रखा जा सकता है.
उन्होंने कहा, हमने पक्षी को अपने कब्जे में ले लिया है और अफरोज के विरूद्ध मामला दर्ज किया है. उसके बयान दर्ज किए गए हैं और एक टीम मुद्दे की जांच कर रही है.
इस बीच, पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इण्डिया ने यूपी के वन, वन्य जीवन के प्रधान मुख्य संरक्षक ममता संजीव दुबे को एक निवेदन भेजा है, जिसमें उनका पुनर्वास करने और तुरंत कानपुर चिड़ियाघर से सारस को पक्षी के प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने का निवेदन किया गया है.
पेटा इण्डिया क्रुएल्टी रिस्पांस कोऑर्डिनेटर सलोनी सकारिया ने एक अपील में कहा, एक चिड़ियाघर में रह रहे जानवर, जिन्होंने कोई अन्य जीवन के बारे में नहीं जाना है, अपने जेल में विक्षिप्त और उदास रहते है.
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लखनऊ, इकतीस मार्च . अमेठी के आरिफ के बाद अब यूपी के सुल्तानपुर के अफरोज पर सारस रखने का मामला दर्ज किया गया है. सत्ताईस वर्ष के मोहम्मद अफरोज का एक सारस से गहरा नाता है, जो उड़कर उनके गांव के मछली तालाब में आया और पिछले वर्ष सितंबर से उनके साथ रहने लगा. अफरोज पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है. यह कार्रवाई एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद हुई. इस पोस्ट में सुल्तानपुर में एक क्षेत्रीय आदमी और सारस के बीच अनोखे बंधन को साझा किया गया. इस पोस्ट के बाद मोहम्मद आरिफ के विरूद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अनुसार मामला दर्ज किया गया और सारस को वन विभाग द्वारा ले जाया गया. सुल्तानपुर में लंभुआ तहसील में एक मोबाइल हैंडसेट स्टोर के मालिक मोहम्मद अफरोज के अनुसार, उन्हें सितंबर दो हज़ार बाईस में गांव के मछली पकड़ने के तालाब के पास सारस मिला था. उन्होंने कहा, मैंने सारस को अकेला पाया और उसे वैसा ही खाना दिया जैसा कोई अन्य आदमी करता है. मैं दंग था कि जब मैंने घर जाना प्रारम्भ किया, तो सारस मेरा पीछा करने लगा और मेरे घर पहुंच गया. उन्होंने कहा, हम पहले से ही एक सारस के साथ रहने के आदी थे, क्योंकि मेरे पिता मोहम्मद शफीक के पास दो हज़ार उन्नीस से एक सारस पक्षी था. उन्होंने इसे एक खेत में पाया था और बाद में पक्षी उनके साथ रहने लगा और पूरे परिवार के साथ घुलमिल गया. हम प्यार से उसे स्वीटी कहते थे. उन्होंने बताया कि मार्च दो हज़ार बाईस में सोनबरसा गांव में करंट लगने से स्वीटी की मृत्यु हो गई. अफरोज ने कहा, सारस की मृत्यु से मेरे पिता सदमे में थे, उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ने लगा था. जब हमने इस सारस को देखा, तो इसका नाम भी स्वीटी रख दिया, इसके आने से मेरे पिता के स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ है. सुल्तानपुर के डीएफओ आर। के। त्रिपाठी ने बोला कि कानून के मुताबिक सारस वन्य जीव अधिनियम के अनुसार संरक्षित पक्षी है और इसे घर/निवास में नहीं रखा जा सकता है. उन्होंने कहा, हमने पक्षी को अपने कब्जे में ले लिया है और अफरोज के विरूद्ध मामला दर्ज किया है. उसके बयान दर्ज किए गए हैं और एक टीम मुद्दे की जांच कर रही है. इस बीच, पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इण्डिया ने यूपी के वन, वन्य जीवन के प्रधान मुख्य संरक्षक ममता संजीव दुबे को एक निवेदन भेजा है, जिसमें उनका पुनर्वास करने और तुरंत कानपुर चिड़ियाघर से सारस को पक्षी के प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने का निवेदन किया गया है. पेटा इण्डिया क्रुएल्टी रिस्पांस कोऑर्डिनेटर सलोनी सकारिया ने एक अपील में कहा, एक चिड़ियाघर में रह रहे जानवर, जिन्होंने कोई अन्य जीवन के बारे में नहीं जाना है, अपने जेल में विक्षिप्त और उदास रहते है.
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इत्थि० - अरदि-सोग -भय- दु० णिय० । तं तु० । एवमेदाओ एकमेकस्स 1 तं तु० । । पुरिस०-हस्स-रदि ओघं । तिरिक्खग० उ० वं० वामण० खीलि०- अप्पसत्थ०४ - तिरिक्खाणु० - उप०- अप्पसत्य-अथिरादि० णि० । तं तु० । पंचिदियादि० णिय० अनंतगु० । उज्जोवं सिया० अणंतगु० । सेसं ओघं । असण्णी० तिरिक्खोघं । णवरि मोह.. मणुसअपज्जत्तभंगो । अणाहार० कम्मइगभंगो ।
.एवं डक्कस्सओ सण्णियासो समत्तो ।
६३. जहण्णए पगदं । दुवै० ओघे० आदे० । ओघे० आभिणिवोधियणाणावरणस्स जहण्णयं अणुभागं बंधंतो चदुणाणाव० णिय० वं० । णिय० जह० । एव-. मण्णमण्णस्स जहण्णा । एवं पंचणं अंतराइयाणं । णिद्दाणिद्दा० जह० अणु० वं० पचलापचला थीणगि० णिय० वं० । तं तु० छहाणप० । अतभागव्यहि०५ । छदसणा०
क्रोधके उत्कृष्ट अनुभागका वन्ध करनेवाला जीव पन्द्रह कपाय, स्त्रीवेद, अरति, शोक, भय और जुगुप्साका नियमसे बन्ध करता है। किन्तु वह उत्कृष्ट अनुभागका भी वन्ध करता है और अनुत्कृष्ट अनुभागका भी बन्ध करता है । यदि अनुत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करता है तो वह छह स्थान पतित हानिको लिये हुए होता है। इसी प्रकार इन सब प्रकृतियोंका परस्पर सन्निकर्ष जानना चाहिए । किन्तु इनमें से किसी एक प्रकृतिके उत्कृष्ट अनुभागका वन्ध करनेवाला जीव शेष प्रकृतियों का उत्कृष्ट अनुभागवन्ध भी करता है और अनुत्कृष्ट अनुभागवन्ध भी करता है । यदि अनुत्कृष्ट अनु. भागबन्ध करता है तो वह छह स्थान पतित हानिको लिये हुए होता हैं । पुरुषवेद, हास्य और रतिका भङ्ग ओघके समान है । तिर्यञ्चगतिके उत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करनेवाला जीव वामन संस्थान, कीलक संहनन, प्रशस्त वर्णचतुष्क, तिर्यञ्चगत्यानुपूर्वी, उपघात, अप्रशस्त विहायोगति और अस्थिर आदि छहका नियमसे बन्ध करता है। किन्तु वह उत्कृष्ट अनुभागका भी बन्ध करता है और अनुत्कृष्ट अनुभागका भी वन्ध करता है। यदि अनुत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करता है तो वह छह स्थान पतित हानिको लिये हुए होता है । पेन्द्रिय जाति आदिका नियमसे बन्ध करता है जो अनन्तगुणे हीन अनुभागको लिये हुए होता है। उद्योतका कदाचित् बन्ध करता है जो अनन्तगुणे हीन अनुभागको लिये हुए होता है। शेष भङ्ग ओघ के समान है। असंज्ञी जीवोंमें "सामान्य तिर्यञ्चों के समान भङ्ग है । इतनी विशेषता है कि मोहनीय कर्मका भङ्ग मनुष्य अपर्याप्तकों के समान है। अनाहारक जीवोंमें कार्मरणकाययोगी जीवोंके समान भङ्ग है ।
इस प्रकार उत्कृष्ट सन्निकर्ष समाप्त हुआ ।
६३. जघन्यका प्रकरण है। उसकी अपेक्षा निर्देश दो प्रकारका है - ओघऔर देश । की अपेक्षा अभिनिवोधिक ज्ञानावर के जघन्य अनुभागका बन्ध करनेवाला जीव चार ज्ञानावरणका नियमसे वन्ध करता है जो नियमसे जघन्य अनुभागको लिये हुए होता है। इसी प्रकार इन सब प्रकृतियोंका जवन्य अनुभागवन्धके साथ सन्निकर्ष जानना चाहिए। इसी प्रकार पाँच अन्तरायका सन्निकर्प जानना चाहिए। निद्रानिद्राके जघन्य अनुभागका बन्ध करनेवाला जीव प्रचलाप्रचला और स्त्यानमृद्धिका नियमसे बन्ध करता है जो जघन्य भी होता है और अजघन्य भी होता है। यदि अजघन्य होता है तो छह स्थान पतित वृद्धिको लिये हुए होता है । या तो अनन्तभागवृद्धिरूप होता है या असंख्यातभागवृद्धि आदि पाँच वृद्धिरूप होता है। छह दर्शनावरणका नियमसे बन्ध
१. ता• प्रतौ जह० दुवि० इति पाठः ।
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इत्थिशून्य - अरदि-सोग -भय- दुशून्य णियशून्य । तं तुशून्य । एवमेदाओ एकमेकस्स एक तं तुशून्य । । पुरिसशून्य-हस्स-रदि ओघं । तिरिक्खगशून्य उशून्य वंशून्य वामणशून्य खीलिशून्य- अप्पसत्थचार - तिरिक्खाणुशून्य - उपशून्य- अप्पसत्य-अथिरादिशून्य णिशून्य । तं तुशून्य । पंचिदियादिशून्य णियशून्य अनंतगुशून्य । उज्जोवं सियाशून्य अणंतगुशून्य । सेसं ओघं । असण्णीशून्य तिरिक्खोघं । णवरि मोह.. मणुसअपज्जत्तभंगो । अणाहारशून्य कम्मइगभंगो । .एवं डक्कस्सओ सण्णियासो समत्तो । तिरेसठ. जहण्णए पगदं । दुवैशून्य ओघेशून्य आदेशून्य । ओघेशून्य आभिणिवोधियणाणावरणस्स जहण्णयं अणुभागं बंधंतो चदुणाणावशून्य णियशून्य वंशून्य । णियशून्य जहशून्य । एव-. मण्णमण्णस्स जहण्णा । एवं पंचणं अंतराइयाणं । णिद्दाणिद्दाशून्य जहशून्य अणुशून्य वंशून्य पचलापचला थीणगिशून्य णियशून्य वंशून्य । तं तुशून्य छहाणपशून्य । अतभागव्यहिपाँच । छदसणाशून्य क्रोधके उत्कृष्ट अनुभागका वन्ध करनेवाला जीव पन्द्रह कपाय, स्त्रीवेद, अरति, शोक, भय और जुगुप्साका नियमसे बन्ध करता है। किन्तु वह उत्कृष्ट अनुभागका भी वन्ध करता है और अनुत्कृष्ट अनुभागका भी बन्ध करता है । यदि अनुत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करता है तो वह छह स्थान पतित हानिको लिये हुए होता है। इसी प्रकार इन सब प्रकृतियोंका परस्पर सन्निकर्ष जानना चाहिए । किन्तु इनमें से किसी एक प्रकृतिके उत्कृष्ट अनुभागका वन्ध करनेवाला जीव शेष प्रकृतियों का उत्कृष्ट अनुभागवन्ध भी करता है और अनुत्कृष्ट अनुभागवन्ध भी करता है । यदि अनुत्कृष्ट अनु. भागबन्ध करता है तो वह छह स्थान पतित हानिको लिये हुए होता हैं । पुरुषवेद, हास्य और रतिका भङ्ग ओघके समान है । तिर्यञ्चगतिके उत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करनेवाला जीव वामन संस्थान, कीलक संहनन, प्रशस्त वर्णचतुष्क, तिर्यञ्चगत्यानुपूर्वी, उपघात, अप्रशस्त विहायोगति और अस्थिर आदि छहका नियमसे बन्ध करता है। किन्तु वह उत्कृष्ट अनुभागका भी बन्ध करता है और अनुत्कृष्ट अनुभागका भी वन्ध करता है। यदि अनुत्कृष्ट अनुभागका बन्ध करता है तो वह छह स्थान पतित हानिको लिये हुए होता है । पेन्द्रिय जाति आदिका नियमसे बन्ध करता है जो अनन्तगुणे हीन अनुभागको लिये हुए होता है। उद्योतका कदाचित् बन्ध करता है जो अनन्तगुणे हीन अनुभागको लिये हुए होता है। शेष भङ्ग ओघ के समान है। असंज्ञी जीवोंमें "सामान्य तिर्यञ्चों के समान भङ्ग है । इतनी विशेषता है कि मोहनीय कर्मका भङ्ग मनुष्य अपर्याप्तकों के समान है। अनाहारक जीवोंमें कार्मरणकाययोगी जीवोंके समान भङ्ग है । इस प्रकार उत्कृष्ट सन्निकर्ष समाप्त हुआ । तिरेसठ. जघन्यका प्रकरण है। उसकी अपेक्षा निर्देश दो प्रकारका है - ओघऔर देश । की अपेक्षा अभिनिवोधिक ज्ञानावर के जघन्य अनुभागका बन्ध करनेवाला जीव चार ज्ञानावरणका नियमसे वन्ध करता है जो नियमसे जघन्य अनुभागको लिये हुए होता है। इसी प्रकार इन सब प्रकृतियोंका जवन्य अनुभागवन्धके साथ सन्निकर्ष जानना चाहिए। इसी प्रकार पाँच अन्तरायका सन्निकर्प जानना चाहिए। निद्रानिद्राके जघन्य अनुभागका बन्ध करनेवाला जीव प्रचलाप्रचला और स्त्यानमृद्धिका नियमसे बन्ध करता है जो जघन्य भी होता है और अजघन्य भी होता है। यदि अजघन्य होता है तो छह स्थान पतित वृद्धिको लिये हुए होता है । या तो अनन्तभागवृद्धिरूप होता है या असंख्यातभागवृद्धि आदि पाँच वृद्धिरूप होता है। छह दर्शनावरणका नियमसे बन्ध एक. ता• प्रतौ जहशून्य दुविशून्य इति पाठः ।
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काठमांडूः भारत शिक्षा क्षेत्र में निर्माण कराने के लिए नेपाल को कुल 51. 37 करोड़ भारतीय रुपये की सहायता दे चुका है। यह जानकारी काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने दी है। दूतावास के उप प्रमुख नामाग्या खांपा ने बुधवार को नेपाल पुनर्निर्माण अभिकरण के सीईओ सुशील ज्ञावली को नई अनुदान राशि का चेक सौंपा।
इस धनराशि से गोरखा, नुवाकोट, रामेछाप, डोलखा, कावरे, ढाडिंग और सिंधुपाल चौक जिलों में शिक्षण संस्थाओं और त्रिभुवन विश्वविद्यालय में पुस्तकालय भवन का निर्माण होगा। भारत ने नेपाल की शिक्षण संस्थाओं के पुनर्निर्माण के लिए कुल पांच करोड़ डॉलर (करीब 370 करोड़ भारतीय रुपये) की मदद का एलान किया है।
नेपाल में 2015 में 7. 8 की तीव्रता वाले भूकंप से नौ हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे और संपत्ति का बड़ा नुकसान हुआ था। भारत समय-समय पर नेपाल को पुनर्निर्माण के लिए मदद करता रहता है।
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काठमांडूः भारत शिक्षा क्षेत्र में निर्माण कराने के लिए नेपाल को कुल इक्यावन. सैंतीस करोड़ भारतीय रुपये की सहायता दे चुका है। यह जानकारी काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने दी है। दूतावास के उप प्रमुख नामाग्या खांपा ने बुधवार को नेपाल पुनर्निर्माण अभिकरण के सीईओ सुशील ज्ञावली को नई अनुदान राशि का चेक सौंपा। इस धनराशि से गोरखा, नुवाकोट, रामेछाप, डोलखा, कावरे, ढाडिंग और सिंधुपाल चौक जिलों में शिक्षण संस्थाओं और त्रिभुवन विश्वविद्यालय में पुस्तकालय भवन का निर्माण होगा। भारत ने नेपाल की शिक्षण संस्थाओं के पुनर्निर्माण के लिए कुल पांच करोड़ डॉलर की मदद का एलान किया है। नेपाल में दो हज़ार पंद्रह में सात. आठ की तीव्रता वाले भूकंप से नौ हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे और संपत्ति का बड़ा नुकसान हुआ था। भारत समय-समय पर नेपाल को पुनर्निर्माण के लिए मदद करता रहता है।
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रविचंद्रन अश्विन और अक्षर पटेल ने इंग्लैंड के स्वीप शॉट पर लगाया 'बैन' (PIC : AP)
नई दिल्ली. भारत और ऑस्ट्रेलिया (India vs Australia) के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में खेले जा रहे बॉक्सिंग डे टेस्ट में रविचंद्रन अश्विन (Ravichandra Ashwin) और अजिंक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) ने मिलकर मार्नस लाबुशेन (Marnus Labuschagne) को पवेलियन की राह दिखाई. इसी के साथ यह दोनों खिलाड़ी फील्डर-बॉलर के खास क्लब में शामिल हो गए हैं. इस क्लब में उन भारतीय खिलाड़ियों के नाम शामिल हैं, जिनमें गेंदबाज और फील्डर दोनों ने मिलकर सबसे ज्यादा विकेट हासिल किए हैं.
बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी (Border Gavaskar Trophy) के दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई पारी के 17. 5 ओवर में रविचंद्रन अश्विन की गेंद पर कप्तान अजिंक्य रहाणे ने मार्नस लाबुशेन का शानदार कैच लपका. लाबुशेन 49 गेंदों में 1 चौके के साथ 28 रन की पारी खेलकर पवेलियन लौटे. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 57. 14 का रहा. रहाणे और अश्विन के इस तरह एक साथ विकेट लेने का यह 27वां मौका था. गेंदबाज और फील्डर के कॉम्बिनेशन के साथ सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में अनिल कुंबले और राहुल द्रविड़ टॉप पर हैं.
IND VS AUS: उमेश यादव को अस्पताल ले जाया गया, टीम इंडिया के लिए आई बुरी खबर!
एक फील्डर-गेंदबाज के संयोजन के लिए सबसे अधिक विकेट (भारत)
IND VS AUS: स्टीव स्मिथ ने किया था खोई ताकत वापस पाने का दावा, बुमराह ने बोल्ड कर उड़ा दी हवा!
इसी के साथ अश्विन ने मार्नस लाबुशेन को आउट कर पाकिस्तान के वकार यूनुस (Waqar Younis) का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया. लाबुशेन को आउट कर उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अपने विकेटों की संख्या 374 पहुंचा दी और वकार यूनुस को पीछे छोड़ दिया. वकार ने टेस्ट क्रिकेट में 373 विकेट झटके हैं. अश्विन का यह 73वां टेस्ट मैच है. वकार ने 87 मैचों में 373 विकेट लिए हैं.
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रविचंद्रन अश्विन और अक्षर पटेल ने इंग्लैंड के स्वीप शॉट पर लगाया 'बैन' नई दिल्ली. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेले जा रहे बॉक्सिंग डे टेस्ट में रविचंद्रन अश्विन और अजिंक्य रहाणे ने मिलकर मार्नस लाबुशेन को पवेलियन की राह दिखाई. इसी के साथ यह दोनों खिलाड़ी फील्डर-बॉलर के खास क्लब में शामिल हो गए हैं. इस क्लब में उन भारतीय खिलाड़ियों के नाम शामिल हैं, जिनमें गेंदबाज और फील्डर दोनों ने मिलकर सबसे ज्यादा विकेट हासिल किए हैं. बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई पारी के सत्रह. पाँच ओवर में रविचंद्रन अश्विन की गेंद पर कप्तान अजिंक्य रहाणे ने मार्नस लाबुशेन का शानदार कैच लपका. लाबुशेन उनचास गेंदों में एक चौके के साथ अट्ठाईस रन की पारी खेलकर पवेलियन लौटे. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट सत्तावन. चौदह का रहा. रहाणे और अश्विन के इस तरह एक साथ विकेट लेने का यह सत्ताईसवां मौका था. गेंदबाज और फील्डर के कॉम्बिनेशन के साथ सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में अनिल कुंबले और राहुल द्रविड़ टॉप पर हैं. IND VS AUS: उमेश यादव को अस्पताल ले जाया गया, टीम इंडिया के लिए आई बुरी खबर! एक फील्डर-गेंदबाज के संयोजन के लिए सबसे अधिक विकेट IND VS AUS: स्टीव स्मिथ ने किया था खोई ताकत वापस पाने का दावा, बुमराह ने बोल्ड कर उड़ा दी हवा! इसी के साथ अश्विन ने मार्नस लाबुशेन को आउट कर पाकिस्तान के वकार यूनुस का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया. लाबुशेन को आउट कर उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अपने विकेटों की संख्या तीन सौ चौहत्तर पहुंचा दी और वकार यूनुस को पीछे छोड़ दिया. वकार ने टेस्ट क्रिकेट में तीन सौ तिहत्तर विकेट झटके हैं. अश्विन का यह तिहत्तरवां टेस्ट मैच है. वकार ने सत्तासी मैचों में तीन सौ तिहत्तर विकेट लिए हैं. .
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बॉलीवुड एक्टर सनी देओल जल्द ही ससुर बनने जा रहे हैं। उनके बेटे करण देओल इसी महीने शादी के बंधन में बंधने वाले हैं।
वायरल वीडियो में एक्टर मीडिया से पूछते नजर आ रहें हैं कि क्या उन्होंने कुछ खाया-पिया है या नहीं।
"गंदी बात" फेम एक्ट्रेस गहना वशिष्ठ ने फैजान अंसारी के साथ निकाह कर लिया है। शादी की तस्वीरें तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के कैनाइन (स्वान) दस्ता के तीन कैनाइन वीरवार को सेवानिवृत हो गए।
विपक्ष के 19 दलों ने संसद के नए भवन के उद्घाटन समारोह का बुधवार को सामूहिक रूप से बहिष्कार करने का ऐलान किया और आरोप लगाया कि इस सरकार के कार्यकाल में संसद से लोकतंत्र की आत्मा को निकाल दिया गया है तथा समारोह से राष्ट्रपति को दूर रखना "अशोभनीय कृत्य" एवं लोकतंत्र पर सीधा हमला है।
राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा की सगाई में मीका सिंह ने अपने गानों से समां बांध दिया। इस दौरान कपल जमकर सिंगर के गानों पर थिरकता हुआ नजर आया।
सेवा कामना ट्रस्ट के द्वारा मातृ दिवस के अवसर पर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बहुत से गायक कलाकारों ने अपने गीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर लिया। स्कूली बच्चों ने अपनी अनोखी नृत्य से सबका दिल जीत लिया। बच्चों को ट्रॉफी, सर्टिफिकेट और कैश प्राइज देकर सम्मानित किया गया।
रुबीना ने बहन रोहिनी की हल्दी पर पिंक कलर का लहंगा पहना। एक्ट्रेस इस आउटफिट्स में बेहद खूबसूरत लग रहीं हैं।
पैन-इंडिया स्टार तमन्ना भाटिया आईपीएल 2023 के उद्घाटन समारोह में परफॉर्म करेगी।
सोशल मीडिया पर लगातार दलजीत कौर की दूसरी शादी की फोटोज और वीडियोज वायरल होती नज़र आ रही हैं। वेडिंग फंक्शंस में दलजीत कौर हैप्पी ब्राइड की तरह की खिलखिलाती दिख रही हैं।
अनन्या पांडे की कजिन बहन अलाना पांडे की शादी की तैयारियां बड़े ही जोर शोर से चल रही हैं। पिछले दो दिन से उनकी प्री-वेडिंग फंक्शन से बॉलीवुड सेलिब्रिटीज में खूब धूम मची हुई है।
ऑस्कर सेरेमनी से पहले दीपिका पादुकोण ने हार्ड वर्कआउट किया, जिसका वीडियो खूब वायरल हो रहा है।
वुमेन्स प्रीमियर लीग 2023 की ओपनिंग सेरेमनी में बॉलीवुड एक्ट्रेस कियारा आडवाणी कृति सेनन ने धमाकेदार परफॉरमेंस दी। सोशल मीडिया अब इनका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।
सांस्कृतिक सेवा समिति द्वारा होली मिलन समारोह एवं श्याम बाबा का कीर्तन बलबीर नगर शाहदरा दिल्ली में हुआ। इसमें मुख्य रूप से दिल्ली नगर निगम शाहदरा उत्तरी क्षेत्र के पूर्व उपायुक्त एवं वर्तमान में सेंट्रल जोन के उपायुक्त अमित शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी ने अपनी शादी से हल्दी सेरेमनी की फोटोज शेयर की है।
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बॉलीवुड एक्टर सनी देओल जल्द ही ससुर बनने जा रहे हैं। उनके बेटे करण देओल इसी महीने शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। वायरल वीडियो में एक्टर मीडिया से पूछते नजर आ रहें हैं कि क्या उन्होंने कुछ खाया-पिया है या नहीं। "गंदी बात" फेम एक्ट्रेस गहना वशिष्ठ ने फैजान अंसारी के साथ निकाह कर लिया है। शादी की तस्वीरें तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के कैनाइन दस्ता के तीन कैनाइन वीरवार को सेवानिवृत हो गए। विपक्ष के उन्नीस दलों ने संसद के नए भवन के उद्घाटन समारोह का बुधवार को सामूहिक रूप से बहिष्कार करने का ऐलान किया और आरोप लगाया कि इस सरकार के कार्यकाल में संसद से लोकतंत्र की आत्मा को निकाल दिया गया है तथा समारोह से राष्ट्रपति को दूर रखना "अशोभनीय कृत्य" एवं लोकतंत्र पर सीधा हमला है। राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा की सगाई में मीका सिंह ने अपने गानों से समां बांध दिया। इस दौरान कपल जमकर सिंगर के गानों पर थिरकता हुआ नजर आया। सेवा कामना ट्रस्ट के द्वारा मातृ दिवस के अवसर पर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बहुत से गायक कलाकारों ने अपने गीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर लिया। स्कूली बच्चों ने अपनी अनोखी नृत्य से सबका दिल जीत लिया। बच्चों को ट्रॉफी, सर्टिफिकेट और कैश प्राइज देकर सम्मानित किया गया। रुबीना ने बहन रोहिनी की हल्दी पर पिंक कलर का लहंगा पहना। एक्ट्रेस इस आउटफिट्स में बेहद खूबसूरत लग रहीं हैं। पैन-इंडिया स्टार तमन्ना भाटिया आईपीएल दो हज़ार तेईस के उद्घाटन समारोह में परफॉर्म करेगी। सोशल मीडिया पर लगातार दलजीत कौर की दूसरी शादी की फोटोज और वीडियोज वायरल होती नज़र आ रही हैं। वेडिंग फंक्शंस में दलजीत कौर हैप्पी ब्राइड की तरह की खिलखिलाती दिख रही हैं। अनन्या पांडे की कजिन बहन अलाना पांडे की शादी की तैयारियां बड़े ही जोर शोर से चल रही हैं। पिछले दो दिन से उनकी प्री-वेडिंग फंक्शन से बॉलीवुड सेलिब्रिटीज में खूब धूम मची हुई है। ऑस्कर सेरेमनी से पहले दीपिका पादुकोण ने हार्ड वर्कआउट किया, जिसका वीडियो खूब वायरल हो रहा है। वुमेन्स प्रीमियर लीग दो हज़ार तेईस की ओपनिंग सेरेमनी में बॉलीवुड एक्ट्रेस कियारा आडवाणी कृति सेनन ने धमाकेदार परफॉरमेंस दी। सोशल मीडिया अब इनका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। सांस्कृतिक सेवा समिति द्वारा होली मिलन समारोह एवं श्याम बाबा का कीर्तन बलबीर नगर शाहदरा दिल्ली में हुआ। इसमें मुख्य रूप से दिल्ली नगर निगम शाहदरा उत्तरी क्षेत्र के पूर्व उपायुक्त एवं वर्तमान में सेंट्रल जोन के उपायुक्त अमित शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी ने अपनी शादी से हल्दी सेरेमनी की फोटोज शेयर की है।
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सिगरेट पीते समय पेंटर की सिगरेट पड़ोसी की छत पर गिर गई। वह उठाने के लिये छत पर कूदा तो पड़ोसियों की आंख खुल गई। चोर का शोर मचाकर पेंटर को प्रेमनगर पुलिस में पकड़वा दिया। प्रेमनगर के बानखाना निवासी अशोक के मुताबिक उनका पड़ोसी छत पर कूदा तो देर रात उनकी आंख खुल गई। पड़ोसी पेंटर की हरकते संदिग्ध लगने पर उन्होंने पुलिस में फोन कर मौके पर बुला लिया। पुलिस आरोपी को पकड़कर थाने ले आई। पूछताछ में पेंटर ने बताया कि उसको नींद नहीं आ रही थी। वह छत पर सिगरेट पीने लगा। हवा तेज चलने पर उसके हाथ से सिगरेट उड़कर पड़ोसी की छत पर गिर गई। वह उठाने के लिये छत पर गया तो चोर का शोर मच गया। चौकी इंचार्ज ने बताया कि चोर के इरादे से कूदने की पुष्टि नहीं हुई है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है।
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सिगरेट पीते समय पेंटर की सिगरेट पड़ोसी की छत पर गिर गई। वह उठाने के लिये छत पर कूदा तो पड़ोसियों की आंख खुल गई। चोर का शोर मचाकर पेंटर को प्रेमनगर पुलिस में पकड़वा दिया। प्रेमनगर के बानखाना निवासी अशोक के मुताबिक उनका पड़ोसी छत पर कूदा तो देर रात उनकी आंख खुल गई। पड़ोसी पेंटर की हरकते संदिग्ध लगने पर उन्होंने पुलिस में फोन कर मौके पर बुला लिया। पुलिस आरोपी को पकड़कर थाने ले आई। पूछताछ में पेंटर ने बताया कि उसको नींद नहीं आ रही थी। वह छत पर सिगरेट पीने लगा। हवा तेज चलने पर उसके हाथ से सिगरेट उड़कर पड़ोसी की छत पर गिर गई। वह उठाने के लिये छत पर गया तो चोर का शोर मच गया। चौकी इंचार्ज ने बताया कि चोर के इरादे से कूदने की पुष्टि नहीं हुई है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है।
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भावार्थः- वनचर सिंह की गर्जना तो क्षण भर में विलीन हो जाती है। लेकिन कवि वर केसरीसिंह की अमर गर्जना करोड़ यत्न करने पर भी नष्ट नहीं होगी।
चारण केहरि चल बसा, रहिगे नकली रूप । जैसे वारिधि नाम के वाजत पय विन कृप ॥ ६ ॥
भावार्थः -- केसरीसिंह तो चल बसा, अब तो ( नाम मात्र ) नकली स्वरूप रह गये हैं। जिस प्रकार बिना पानी के कुओं के नाम भी कहीं २ लोग 'अमुक' सागर दे दिया करते हैं ।
के हरि माहि विलीन व्हे, केहरि रहहु सदैव । (इयो, हरन प्रजा दुर व ॥ ७ ॥
भावार्थः-हे केसरीसिंह ! या तो हमेशा के लिये ईश्वर में लीन हो कर रहना और या यदि जन्म लेना है तो जनता की दुर्दशा मिटाने के लिये यहीं ( भारत में ) आना ।
धरा धामधन गयो, गई सह सुख री घड़ियां । सुत प्रताप गो छोड़ पड़ण लगी दुग्ख झड़ियां ॥ माणिक सी मणि-महल गई दधि-विपता डारे । कुल रौं दीप किसोर, गयो वृध बन्धु बिसारे ॥ सह मांत बेह प्रतिकूल व्हे, कीधो सदा रुआड़तो । तोड़ कृष्ण देह वालो कवी, केहर रह्यो दहाड़तो ॥ ८ ॥
भावार्थः- जागीर, निवासस्थान और सम्पति सब बनी गई । सुखानन्द के भूत कालीन वे सु दिन चले गये, वीरात्मजा प्रताप छोड़ कर चल बसा, ( चहुँ ओर से दुःख ) विपत्ति की वृष्टि होने लगी। 'माणिक' जैसी नारी कुल भूषण धर्म पत्नी भी दुःख सागर में छोड़ कर चली गई और वंश - उजागर किशोरसिंह जैसा सहोदर वृद्ध ( भाई ) भूल कर चला गया। अरे विधाता ने सब प्रकार से प्रतिकूल हो कर हमेशा के लिये उसे रोता हुआ कर दिया, लेकिन फिर भी वह दुबली पतली देह वाला कवि केसरीसिंह गर्जता ही रहा - अर्थात् कभी भी निर्बलता नहीं दिखाई ।
दिन दुगा निसि चाँगुणा,
सहिया कष्ट अनेक ।
सहि न गई पण सिंघ थी, पराधीनता एक ॥ ६ ॥ ।।६॥
भावार्थः - अनेक तरह के दिन दूने, रात चौगुने कष्ट सहन कर लिये, लेकिन ( उस ) केसरीसिंह से एकमात्र दासता ( परतंत्रता )
कभी सहन न की गई।
[ रचयिता :- रूपसिंह बारहठ, बरवाड़ा ]
ठाकुर केसरीसिंहजी बारहट (कोटा)
चारण, छत्र्यां रॉ चतुर, उपदंसक अणमोल । बारठ "केहर" बीछड्यौ, तिण दुख रौ नहँ तोल ॥ १ ॥
भावार्थः- चारण और क्षत्रियों को जो अमूल्य उपदेश करने वाला था, उस बारहठ केसरीसिंह के चिर-वियोग का जो हमें दुःख है उस की कोई सीमा नहीं है।
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भावार्थः- वनचर सिंह की गर्जना तो क्षण भर में विलीन हो जाती है। लेकिन कवि वर केसरीसिंह की अमर गर्जना करोड़ यत्न करने पर भी नष्ट नहीं होगी। चारण केहरि चल बसा, रहिगे नकली रूप । जैसे वारिधि नाम के वाजत पय विन कृप ॥ छः ॥ भावार्थः -- केसरीसिंह तो चल बसा, अब तो नकली स्वरूप रह गये हैं। जिस प्रकार बिना पानी के कुओं के नाम भी कहीं दो लोग 'अमुक' सागर दे दिया करते हैं । के हरि माहि विलीन व्हे, केहरि रहहु सदैव । आना । धरा धामधन गयो, गई सह सुख री घड़ियां । सुत प्रताप गो छोड़ पड़ण लगी दुग्ख झड़ियां ॥ माणिक सी मणि-महल गई दधि-विपता डारे । कुल रौं दीप किसोर, गयो वृध बन्धु बिसारे ॥ सह मांत बेह प्रतिकूल व्हे, कीधो सदा रुआड़तो । तोड़ कृष्ण देह वालो कवी, केहर रह्यो दहाड़तो ॥ आठ ॥ भावार्थः- जागीर, निवासस्थान और सम्पति सब बनी गई । सुखानन्द के भूत कालीन वे सु दिन चले गये, वीरात्मजा प्रताप छोड़ कर चल बसा, विपत्ति की वृष्टि होने लगी। 'माणिक' जैसी नारी कुल भूषण धर्म पत्नी भी दुःख सागर में छोड़ कर चली गई और वंश - उजागर किशोरसिंह जैसा सहोदर वृद्ध भूल कर चला गया। अरे विधाता ने सब प्रकार से प्रतिकूल हो कर हमेशा के लिये उसे रोता हुआ कर दिया, लेकिन फिर भी वह दुबली पतली देह वाला कवि केसरीसिंह गर्जता ही रहा - अर्थात् कभी भी निर्बलता नहीं दिखाई । दिन दुगा निसि चाँगुणा, सहिया कष्ट अनेक । सहि न गई पण सिंघ थी, पराधीनता एक ॥ छः ॥ ।।छः॥ भावार्थः - अनेक तरह के दिन दूने, रात चौगुने कष्ट सहन कर लिये, लेकिन केसरीसिंह से एकमात्र दासता कभी सहन न की गई। [ रचयिता :- रूपसिंह बारहठ, बरवाड़ा ] ठाकुर केसरीसिंहजी बारहट चारण, छत्र्यां रॉ चतुर, उपदंसक अणमोल । बारठ "केहर" बीछड्यौ, तिण दुख रौ नहँ तोल ॥ एक ॥ भावार्थः- चारण और क्षत्रियों को जो अमूल्य उपदेश करने वाला था, उस बारहठ केसरीसिंह के चिर-वियोग का जो हमें दुःख है उस की कोई सीमा नहीं है।
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धारित खलु धम्मो धम्मो को समोत्ति विडियो । मोह-सोहविडोयो परिणामो चप्पयो हु समो ॥
यमी वर्षो
अर्थात् स्वरूपम श्राचरण का नाम चारित्र है। इसी का अर्थ स्वसमयप्रवृत्ति है और यही वस्तु स्वभारपनेसे धर्म है। इसीका नाम शुद्धचैतन्य का प्रकाश है और यथावस्थित आत्मगुरणपने से साम्यशादसे कहा जाता है। और यही दशन चारिन, मोहनीयके यसे जायमान समस्त मोह और क्षोभके
निर्विकार जो जीवका परिणाम है, साम्यश दसे कहने में आता है, अत दश-लक्षण पर्वमें जिन गुणोंकी हम पूजा करते हैं इसीके अतर्गत है। यह धर्म मुख्यरूपसे निर्मोहर जीनका परिणाम है और फिर इसकी मध्यम वृत्ति, निरीह वृत्ति दिगम्बर साधुओंके होती है। उससे नीचे दर्जे पश्चम गुणस्थानत्रालोंके होती है। चतुर्थ गुरणस्थानवालोंके उसकी श्रद्धा है। प्रवृत्तिम वह धर्म नहीं । मिथ्यादृष्टियोंके तो उसकी गध ही नहीं। अत यह बात अपनी आत्मा से पूछते हैं कि हमारे कौनसा भाव है केवल बाह्य मन वचन कायके व्यापारसे उसका समय नहीं । यह तो उसके अनुमापक हैं। वह वस्तु तो निर्मल आत्मामें उदय होती है। जिन्हे आत्मकल्याण करना है यह इन प्रोधादिक क्पायोंको कम करने की चेष्टा करें। आप लोग ससारसे भयभीत हैं। परंतु अभी निमित्त कारणों की योजनामें ही मुग्ध हो रहे हैं। अस्तु, कल्याण तो अपनी श्रात्माके ऊपरका भार उतारनेसे ही होगा। यह भार फेवल शदा द्वारा दशधा धर्मके स्तवनादिसे नहीं उतरेगा किन्तु आत्मामें जो विकृत औदायिक भार हैं उन्हें अनात्मीय जान् त्यागनेसे होगा। विशेष हमारा स्वास्थ्य गत १८ माससे इतना दुर्बल हो गया है जो उपदेश करता है, अपरमेष्ठी काही १६
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धारित खलु धम्मो धम्मो को समोत्ति विडियो । मोह-सोहविडोयो परिणामो चप्पयो हु समो ॥ यमी वर्षो अर्थात् स्वरूपम श्राचरण का नाम चारित्र है। इसी का अर्थ स्वसमयप्रवृत्ति है और यही वस्तु स्वभारपनेसे धर्म है। इसीका नाम शुद्धचैतन्य का प्रकाश है और यथावस्थित आत्मगुरणपने से साम्यशादसे कहा जाता है। और यही दशन चारिन, मोहनीयके यसे जायमान समस्त मोह और क्षोभके निर्विकार जो जीवका परिणाम है, साम्यश दसे कहने में आता है, अत दश-लक्षण पर्वमें जिन गुणोंकी हम पूजा करते हैं इसीके अतर्गत है। यह धर्म मुख्यरूपसे निर्मोहर जीनका परिणाम है और फिर इसकी मध्यम वृत्ति, निरीह वृत्ति दिगम्बर साधुओंके होती है। उससे नीचे दर्जे पश्चम गुणस्थानत्रालोंके होती है। चतुर्थ गुरणस्थानवालोंके उसकी श्रद्धा है। प्रवृत्तिम वह धर्म नहीं । मिथ्यादृष्टियोंके तो उसकी गध ही नहीं। अत यह बात अपनी आत्मा से पूछते हैं कि हमारे कौनसा भाव है केवल बाह्य मन वचन कायके व्यापारसे उसका समय नहीं । यह तो उसके अनुमापक हैं। वह वस्तु तो निर्मल आत्मामें उदय होती है। जिन्हे आत्मकल्याण करना है यह इन प्रोधादिक क्पायोंको कम करने की चेष्टा करें। आप लोग ससारसे भयभीत हैं। परंतु अभी निमित्त कारणों की योजनामें ही मुग्ध हो रहे हैं। अस्तु, कल्याण तो अपनी श्रात्माके ऊपरका भार उतारनेसे ही होगा। यह भार फेवल शदा द्वारा दशधा धर्मके स्तवनादिसे नहीं उतरेगा किन्तु आत्मामें जो विकृत औदायिक भार हैं उन्हें अनात्मीय जान् त्यागनेसे होगा। विशेष हमारा स्वास्थ्य गत अट्ठारह माससे इतना दुर्बल हो गया है जो उपदेश करता है, अपरमेष्ठी काही सोलह
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लखनऊ। बख्शी का तालाब में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये भाजपा कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को डॉक्टरों व नर्स को 1000 कोविड केयर किट वितरित की। इस मौके पर फ्रंट लाइन वर्कर्स के रूप में कार्य कर रहे डॉक्टर व अन्य स्टाफ की सराहना की गई। कोविड केयर किट बीकेटी के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय सिंह ने अपनी टीम के साथ बांटी। इस वितरण कार्यक्रम में सांसद कौशल किशोर, जिला अध्यक्ष श्रीकृष्ण लोधी समेत कई लोग मौजूद रहे।
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लखनऊ। बख्शी का तालाब में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये भाजपा कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को डॉक्टरों व नर्स को एक हज़ार कोविड केयर किट वितरित की। इस मौके पर फ्रंट लाइन वर्कर्स के रूप में कार्य कर रहे डॉक्टर व अन्य स्टाफ की सराहना की गई। कोविड केयर किट बीकेटी के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय सिंह ने अपनी टीम के साथ बांटी। इस वितरण कार्यक्रम में सांसद कौशल किशोर, जिला अध्यक्ष श्रीकृष्ण लोधी समेत कई लोग मौजूद रहे।
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इस आर्टिकल में हम Garena Free Fire में Mr. Waggor पेट को सिर्फ 25 डायमंड्स में कैसे प्राप्त कर सकते हैं। यहां दी गई डिटेल्स को ध्यान पूर्वक फॉलो करें।
Garena Free Fire में पेट्स का काफी महत्व होता है। यह मैदान पर एक सहयोगी की तरफ कार्य करते हैं। प्रत्येक प्लेयर्स कैरेक्टर का इस्तेमाल करते हैं। गेम के अंदर इस समय कुल 44 मेल और फीमेल कैरेक्टर्स है। इन सभी पात्रों में अलग-अलग प्रकार की ताकत है। हालांकि, प्रोफेशनल प्लेयर्स मैदान पर बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए कैरेक्टर के साथ में ताकतवर पेट का कॉम्बिनेशन इस्तेमाल करते हैं।
दरअसल, इन-गेम पेट्स को खरीदने के लिए अनेक डायमंड्स खर्च करना पड़ता है। वर्तमान समय में गेम के भीतर Mr. Waggor को काफी कम कीमत में प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, प्लेयर्स कुछ डायमंड्स खर्च करके क्रेट को प्राप्त करें। उसके बाद क्रेट को ओपन करके Mr. Waggor को प्राप्त कर सकते हैं। यहां दी गई डिटेल्स को फॉलो करें। Also Read:- Free Fire में Rising Day से मुफ्त ग्लू वॉल और कटाना स्किन कैसे प्राप्त करें?
Free Fire में Mr. Waggor पेट को सिर्फ 25 डायमंड्स में कैसे पाएं?
Free Fire में Mr. Waggor एक सहयोगी पात्र माना जाता है। क्योंकि, इसमें Smooth Gloo नाम की ताकत का इस्तेमाल करके मैदान पर खिलाड़ियों को ग्लू वॉल प्रदान करता है। फ्री फायर ग्राउंड पर दुश्मनों से बचने के लिए ग्लू वॉल का उपयोग कर सकते हैं। स्टोर सेक्शन में इस पेट की कुल कीमत 699 डायमंड्स है। हालांकि, यहां दी गई डिटेल्स को फॉलो करके कम डायमंड्स खर्च करके पेट को प्राप्त कर सकते हैं।
#1 - अपने गेमिंग डिवाइस में खिलाड़ियों को Garena Free Fire ओपन करना पड़ेगा।
#2 - लॉबी स्क्रीन खुलने के बाद खिलाड़ियों को लेफ्ट साइड Store बटन पर क्लिक करें।
#3 - उसके बाद Craters पर टच करें। स्क्रीन पर सभी क्रेटस ओपन हो जाएगी।
#4 - Mr. Waggor क्रेट पर क्लिक करें। नीचे Purchase बटन पर क्लिक करें।
#5 - उसके बाद खिलाड़ियों को क्रेट में पेट प्राप्त हो जाएगा।
Also Read:- Free Fire Max में Dreki पेट को कैसे खरीदें?
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इस आर्टिकल में हम Garena Free Fire में Mr. Waggor पेट को सिर्फ पच्चीस डायमंड्स में कैसे प्राप्त कर सकते हैं। यहां दी गई डिटेल्स को ध्यान पूर्वक फॉलो करें। Garena Free Fire में पेट्स का काफी महत्व होता है। यह मैदान पर एक सहयोगी की तरफ कार्य करते हैं। प्रत्येक प्लेयर्स कैरेक्टर का इस्तेमाल करते हैं। गेम के अंदर इस समय कुल चौंतालीस मेल और फीमेल कैरेक्टर्स है। इन सभी पात्रों में अलग-अलग प्रकार की ताकत है। हालांकि, प्रोफेशनल प्लेयर्स मैदान पर बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए कैरेक्टर के साथ में ताकतवर पेट का कॉम्बिनेशन इस्तेमाल करते हैं। दरअसल, इन-गेम पेट्स को खरीदने के लिए अनेक डायमंड्स खर्च करना पड़ता है। वर्तमान समय में गेम के भीतर Mr. Waggor को काफी कम कीमत में प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, प्लेयर्स कुछ डायमंड्स खर्च करके क्रेट को प्राप्त करें। उसके बाद क्रेट को ओपन करके Mr. Waggor को प्राप्त कर सकते हैं। यहां दी गई डिटेल्स को फॉलो करें। Also Read:- Free Fire में Rising Day से मुफ्त ग्लू वॉल और कटाना स्किन कैसे प्राप्त करें? Free Fire में Mr. Waggor पेट को सिर्फ पच्चीस डायमंड्स में कैसे पाएं? Free Fire में Mr. Waggor एक सहयोगी पात्र माना जाता है। क्योंकि, इसमें Smooth Gloo नाम की ताकत का इस्तेमाल करके मैदान पर खिलाड़ियों को ग्लू वॉल प्रदान करता है। फ्री फायर ग्राउंड पर दुश्मनों से बचने के लिए ग्लू वॉल का उपयोग कर सकते हैं। स्टोर सेक्शन में इस पेट की कुल कीमत छः सौ निन्यानवे डायमंड्स है। हालांकि, यहां दी गई डिटेल्स को फॉलो करके कम डायमंड्स खर्च करके पेट को प्राप्त कर सकते हैं। #एक - अपने गेमिंग डिवाइस में खिलाड़ियों को Garena Free Fire ओपन करना पड़ेगा। #दो - लॉबी स्क्रीन खुलने के बाद खिलाड़ियों को लेफ्ट साइड Store बटन पर क्लिक करें। #तीन - उसके बाद Craters पर टच करें। स्क्रीन पर सभी क्रेटस ओपन हो जाएगी। #चार - Mr. Waggor क्रेट पर क्लिक करें। नीचे Purchase बटन पर क्लिक करें। #पाँच - उसके बाद खिलाड़ियों को क्रेट में पेट प्राप्त हो जाएगा। Also Read:- Free Fire Max में Dreki पेट को कैसे खरीदें?
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आजमगढ़ जिले के अतरौलिया थाना क्षेत्र में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से 2 बच्चियां गंभीर रूप से घायल हो गई। अतरौलिया थाना क्षेत्र के भोराजपुर निवासी धर्मेन्द्र के मकान में दिलीप बिल्डकॉम लिमिटेड में कार्यरत ग्वालियर निवासी रिंकू अपने परिवार सहित रहता था। रिंकू की दोनो बेटियां 11 वर्षीय नन्दिनी व 4 वर्षीय दिव्या खेल-खेल में छत पर चली गई। इसी दौरान खेलते समय पड़ोस के छत पर चली गई, जिसके ऊपर 33 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही थी। इस दौरान दोनों बच्चियां हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गई और बुरी तरह से झुलस गई। बच्ची के झुलसने की सूचना पर आस-पास के लोगों ने बच्ची को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों से नीचे से जा रहे बिजली के तारों को ऊपर किए जाने की बात की शिकायत की पर अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं हुआ।
दोनों घायल बच्चियों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां से गंभीर हालत देखते जिला अस्पताल रेफर कर दिया जहां घायल दोनो बच्चियों का इलाज चल रहा है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि बच्चियों की हालत खतरे से बाहर है। जल्द ही बच्चियों को राहत मिल जाएगी।
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आजमगढ़ जिले के अतरौलिया थाना क्षेत्र में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से दो बच्चियां गंभीर रूप से घायल हो गई। अतरौलिया थाना क्षेत्र के भोराजपुर निवासी धर्मेन्द्र के मकान में दिलीप बिल्डकॉम लिमिटेड में कार्यरत ग्वालियर निवासी रिंकू अपने परिवार सहित रहता था। रिंकू की दोनो बेटियां ग्यारह वर्षीय नन्दिनी व चार वर्षीय दिव्या खेल-खेल में छत पर चली गई। इसी दौरान खेलते समय पड़ोस के छत पर चली गई, जिसके ऊपर तैंतीस हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही थी। इस दौरान दोनों बच्चियां हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गई और बुरी तरह से झुलस गई। बच्ची के झुलसने की सूचना पर आस-पास के लोगों ने बच्ची को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों से नीचे से जा रहे बिजली के तारों को ऊपर किए जाने की बात की शिकायत की पर अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं हुआ। दोनों घायल बच्चियों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां से गंभीर हालत देखते जिला अस्पताल रेफर कर दिया जहां घायल दोनो बच्चियों का इलाज चल रहा है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि बच्चियों की हालत खतरे से बाहर है। जल्द ही बच्चियों को राहत मिल जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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सरकार को हालांकि लगा कि किसानों द्वारा प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के दौरान राजधानी में भड़की हिंसा के बाद उसे इस मुद्दे पर कुछ जन समर्थन जरूर प्राप्त हुआ है.
मगर राकेश टिकैत की ओर से दिए गए भावुक बयान के बाद से किसानों के प्रति एकजुटता दिखाने आंदोलन में शामिल होने वालों की भी कमी नहीं है. यही वजह है कि अब सरकार के लिए स्थिति सिर दर्द बन चुकी है.
कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों का आंदोलन आज 72वें दिन में प्रवेश कर गया है. किसानों का विरोध प्रदर्शन वर्तमान सरकार के लिए एक 'अन्ना हजारे' आंदोलन के रूप में बदल रहा है. सरकार अभी तक किसानों को शांत करने में विफल रही है दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद भी समाधान नहीं निकल पाया है.
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सरकार को हालांकि लगा कि किसानों द्वारा प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के दौरान राजधानी में भड़की हिंसा के बाद उसे इस मुद्दे पर कुछ जन समर्थन जरूर प्राप्त हुआ है. मगर राकेश टिकैत की ओर से दिए गए भावुक बयान के बाद से किसानों के प्रति एकजुटता दिखाने आंदोलन में शामिल होने वालों की भी कमी नहीं है. यही वजह है कि अब सरकार के लिए स्थिति सिर दर्द बन चुकी है. कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों का आंदोलन आज बहत्तरवें दिन में प्रवेश कर गया है. किसानों का विरोध प्रदर्शन वर्तमान सरकार के लिए एक 'अन्ना हजारे' आंदोलन के रूप में बदल रहा है. सरकार अभी तक किसानों को शांत करने में विफल रही है दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद भी समाधान नहीं निकल पाया है.
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सर्दी के इस सीजन में फतेहपुर विधानसभा के रामगढ़ शेखावाटी और फतेहपुर दोनों ही जगह तापमान माइनस डिग्री रहने की वजह से फसलों को भारी नुकसान हुआ था। जिसके चलते रात दिन मेहनत करके किसानों द्वारा खेतों में खराब हुई फसलों को सर्दी की मार झेलनी पड़ी थी। ऐसे में किसान सरकार द्वारा दिए जाने वाली राहत के इंतजार में था।
खराब फसलों के मुआवजे के लिए रामगढ़ शेखावाटी में किसानों ने कुछ दिन पहले ही विरोध प्रदर्शन करके उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देकर किसानों की खराब हुई फसलों की समय पर गिरदावरी करवाकर, उन्हें मुआवजा दिलाने के लिए आग्रह किया था। ऐसे में रामगढ़ तहसील कार्यालय द्वारा रामगढ़ तहसील के खेतों में पहुंचकर खराब हुई फसलों की गिरदावरी कर ली है। जिसमें फसलों को भारी नुकसान होना पाया गया है।
तहसील कार्यालय के अनुसार सबसे ज्यादा सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। सरसों की फसल को 70 फीसदी नुकसान हुआ है, तो वहीं गेहूं की फसल को 40 फीसदी नुकसान हुआ है। इसके अलावा चने की फसल को भी 40 फीसदी नुकसान हुआ है, तो वहीं जों की फसल को भी 40 फीसदी का नुकसान हुआ है। खराब हुई फसलों की रिपोर्ट तहसील कार्यालय मैं तैयार की जा रही है। ऐसे में गिरदावरी रिपोर्ट तैयार होने के बाद मायूस किसानों को भी जल्द थोड़ी राहत जरूर मिलेगी।
रामगढ़ शेखावाटी तहसीलदार जयसिंह ने कहा कि निश्चित तौर पर सर्दी के इस सीजन में पाले की वजह से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। कलेक्टर के आदेश पर खराब हुई फसलों की गिरदावरी तैयार कर ली गई है। जिसमें सबसे ज्यादा सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। सरसों की फसल को 70 फीसदी नुकसान हुआ, तो वहीं गेहूं की फसल को 40 फीसदी, चने को 40 फीसदी और जों को भी 40 फीसदी का नुकसान हुआ है। गिरदावरी पूरी कर ली गई है। जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दे दिए है। जल्द ही किसानों को खराब हुई फसलों का मुआवजा मिलेगा।
फतेहपुर के पूर्व विधायक नंदकिशोर महरिया ने कबा कि भीषण सर्दी से पाला पड़ने की वजह से फतेहपुर और रामगढ़ दोनों ही तहसील में खेतों में खड़ी किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ था। ऐसे में सरकार द्वारा गिरदावरी समय पर नहीं करने के खिलाफ 24 जनवरी को रामगढ़ तहसील मुख्यालय पर क्षेत्र के किसानों द्वारा विशाल प्रदर्शन कर एसडीएम को ज्ञापन दिया गया था। जिसके बाद प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए गिरदावरी लगभग पूरी कर ली है, लेकिन फतेहपुर क्षेत्र के खेतों की अभी तक गिरदावरी पूरी नहीं हो पाई है। प्रशासन से निवेदन है कि जल्द से जल्द फतेहपुर क्षेत्र के किसानों की भी गिरदावरी पूरी करें, अन्यथा फतेहपुर और रामगढ़ के किसान मिलकर एक विशाल प्रदर्शन करेंगे।
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सर्दी के इस सीजन में फतेहपुर विधानसभा के रामगढ़ शेखावाटी और फतेहपुर दोनों ही जगह तापमान माइनस डिग्री रहने की वजह से फसलों को भारी नुकसान हुआ था। जिसके चलते रात दिन मेहनत करके किसानों द्वारा खेतों में खराब हुई फसलों को सर्दी की मार झेलनी पड़ी थी। ऐसे में किसान सरकार द्वारा दिए जाने वाली राहत के इंतजार में था। खराब फसलों के मुआवजे के लिए रामगढ़ शेखावाटी में किसानों ने कुछ दिन पहले ही विरोध प्रदर्शन करके उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देकर किसानों की खराब हुई फसलों की समय पर गिरदावरी करवाकर, उन्हें मुआवजा दिलाने के लिए आग्रह किया था। ऐसे में रामगढ़ तहसील कार्यालय द्वारा रामगढ़ तहसील के खेतों में पहुंचकर खराब हुई फसलों की गिरदावरी कर ली है। जिसमें फसलों को भारी नुकसान होना पाया गया है। तहसील कार्यालय के अनुसार सबसे ज्यादा सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। सरसों की फसल को सत्तर फीसदी नुकसान हुआ है, तो वहीं गेहूं की फसल को चालीस फीसदी नुकसान हुआ है। इसके अलावा चने की फसल को भी चालीस फीसदी नुकसान हुआ है, तो वहीं जों की फसल को भी चालीस फीसदी का नुकसान हुआ है। खराब हुई फसलों की रिपोर्ट तहसील कार्यालय मैं तैयार की जा रही है। ऐसे में गिरदावरी रिपोर्ट तैयार होने के बाद मायूस किसानों को भी जल्द थोड़ी राहत जरूर मिलेगी। रामगढ़ शेखावाटी तहसीलदार जयसिंह ने कहा कि निश्चित तौर पर सर्दी के इस सीजन में पाले की वजह से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। कलेक्टर के आदेश पर खराब हुई फसलों की गिरदावरी तैयार कर ली गई है। जिसमें सबसे ज्यादा सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। सरसों की फसल को सत्तर फीसदी नुकसान हुआ, तो वहीं गेहूं की फसल को चालीस फीसदी, चने को चालीस फीसदी और जों को भी चालीस फीसदी का नुकसान हुआ है। गिरदावरी पूरी कर ली गई है। जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दे दिए है। जल्द ही किसानों को खराब हुई फसलों का मुआवजा मिलेगा। फतेहपुर के पूर्व विधायक नंदकिशोर महरिया ने कबा कि भीषण सर्दी से पाला पड़ने की वजह से फतेहपुर और रामगढ़ दोनों ही तहसील में खेतों में खड़ी किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ था। ऐसे में सरकार द्वारा गिरदावरी समय पर नहीं करने के खिलाफ चौबीस जनवरी को रामगढ़ तहसील मुख्यालय पर क्षेत्र के किसानों द्वारा विशाल प्रदर्शन कर एसडीएम को ज्ञापन दिया गया था। जिसके बाद प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए गिरदावरी लगभग पूरी कर ली है, लेकिन फतेहपुर क्षेत्र के खेतों की अभी तक गिरदावरी पूरी नहीं हो पाई है। प्रशासन से निवेदन है कि जल्द से जल्द फतेहपुर क्षेत्र के किसानों की भी गिरदावरी पूरी करें, अन्यथा फतेहपुर और रामगढ़ के किसान मिलकर एक विशाल प्रदर्शन करेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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निकाह से पहले सना खान को दीदी बुलाते थे उनके शौहर, बताया- 'बाजी को कैसे किया निकाह के लिए राजी'
बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपनी अदाकारी से हर किसी को दीवाना बना देने वाली एक्ट्रेस सना खान ने मौलाना मुफ्ती अनस के साथ में निकाह किया और हर किसी को हैरान कर दिया. हालांकि आपको बता दें कि वह अपनी निजी जिंदगी के बारे में ज्यादा कुछ जगजाहिर नहीं करती हैं. साथ ही साथ उन दोनों की शादी की खबर सुनकर हर कोई हैरान हो गया था. पूरी इंडस्ट्री में किसी को ऐसा नहीं लगा था कि एक्ट्रेस ऐसा कुछ करेंगी.
लेकिन आपको बता दें कि सना खान और मौलाना मुफ्ती अनस दोनों ही अपनी जिंदगी काफी सुखद तरीके से जी रहे हैं. साथ ही साथ जल्दी ही वह दोनों माता-पिता भी बनने वाले हैं और कुछ ही वक्त पहले दोनों ने इस बात का खुलासा किया है. लेकिन आज हम सना खान और मौलाना मुफ्ती अनस की लव स्टोरी की बात करने वाले हैं जो कि बेहद ही अलग है. साथ ही साथ काफी दिलचस्प भी है.
जानकारी के लिए आपको बता दें कि दीनी चैनल ऑफिशियल नाम के एक यूट्यूब चैनल को मौलाना मुफ्ती अनस ने एक इंटरव्यू दिया जिसमें उन्होंने अपनी लव स्टोरी के बारे में बातचीत की थी. इस इंटरव्यू के दौरान वह बताते हैं कि उन्होंने सना खान को पहली मुलाकात पर बाजी यानी कि बहन कह कर पुकारा था. यह 2017 की बात है जब उनकी मुलाकात हुई और उन्होंने उन्हें कहा कि बाजी क्या हाल है? लेकिन वह इंटरव्यू में बताते हैं कि मुझे इस बात का कोई भी अंदाजा नहीं था कि जिन्हें मैं बाजी बोल रहा हूं वह आगे चलकर मेरी पत्नी बन जाएंगी.
इसी के आगे मौलाना मुफ्ती अनस इस इंटरव्यू में बताते हैं कि 2017 में उनकी मुलाकात मक्का में हुई और दोनों ने कुछ खास बातचीत नहीं की थी. लेकिन बाद में मौलाना मुफ्ती अनस, सना खान के प्यार में पड़ जाते हैं और उनके ही एक कॉमन फ्रेंड से उनका नंबर उनका नंबर ले लेते हैं और उन्हें मैसेज करना शुरू कर देते हैं. हालांकि एक्ट्रेस ने 3 दिन तक उस मैसेज का रिप्लाई नहीं करती है. जिस पर मौलाना मुफ्ती अनस बताते हैं कि सना खान ने उन्हें कुछ पूछने के लिए मैसेज किया और उसके बाद में उन्हें ब्लॉक कर दिया. अनस ने इंटरव्यू के दौरान यह भी बताया कि जब भी उन्हें कुछ पूछना होता था तो वह अनब्लॉक कर देती थी और उसके बाद में फिर पूछ कर मुझे ब्लॉक कर देती थी.
इसी इंटरव्यू में अनस ने काफी कुछ खुलासे किए और बताया कि सना खान उनसे बात करने में काफी झिझकती थी और वह उन्हें अच्छा इंसान नहीं माना करती थी. जिसके बाद अनस ने मौलाना से उन्हें समझाने को कहा. जिस पर मौलाना नहीं सना खान को समझाया और वह मान भी गई. जिसके बाद उनकी बात आगे बढ़ी और अनस ने उन्हें शादी के लिए मना लिया. आखिरकार 2020 में सना उनसे शादी करने को तैयार हो जाती है और आज वह दोनों अपनी जिंदगी में काफी खुश हैं.
हाथ में गिलास लेकर नाइट क्लब में मचलती हसीना का वीडियो वायरल, सेक्सी मूव्स देख डोल जाएगा ईमान!
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Don't Miss! निकाह से पहले सना खान को दीदी बुलाते थे उनके शौहर, बताया- 'बाजी को कैसे किया निकाह के लिए राजी' बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपनी अदाकारी से हर किसी को दीवाना बना देने वाली एक्ट्रेस सना खान ने मौलाना मुफ्ती अनस के साथ में निकाह किया और हर किसी को हैरान कर दिया. हालांकि आपको बता दें कि वह अपनी निजी जिंदगी के बारे में ज्यादा कुछ जगजाहिर नहीं करती हैं. साथ ही साथ उन दोनों की शादी की खबर सुनकर हर कोई हैरान हो गया था. पूरी इंडस्ट्री में किसी को ऐसा नहीं लगा था कि एक्ट्रेस ऐसा कुछ करेंगी. लेकिन आपको बता दें कि सना खान और मौलाना मुफ्ती अनस दोनों ही अपनी जिंदगी काफी सुखद तरीके से जी रहे हैं. साथ ही साथ जल्दी ही वह दोनों माता-पिता भी बनने वाले हैं और कुछ ही वक्त पहले दोनों ने इस बात का खुलासा किया है. लेकिन आज हम सना खान और मौलाना मुफ्ती अनस की लव स्टोरी की बात करने वाले हैं जो कि बेहद ही अलग है. साथ ही साथ काफी दिलचस्प भी है. जानकारी के लिए आपको बता दें कि दीनी चैनल ऑफिशियल नाम के एक यूट्यूब चैनल को मौलाना मुफ्ती अनस ने एक इंटरव्यू दिया जिसमें उन्होंने अपनी लव स्टोरी के बारे में बातचीत की थी. इस इंटरव्यू के दौरान वह बताते हैं कि उन्होंने सना खान को पहली मुलाकात पर बाजी यानी कि बहन कह कर पुकारा था. यह दो हज़ार सत्रह की बात है जब उनकी मुलाकात हुई और उन्होंने उन्हें कहा कि बाजी क्या हाल है? लेकिन वह इंटरव्यू में बताते हैं कि मुझे इस बात का कोई भी अंदाजा नहीं था कि जिन्हें मैं बाजी बोल रहा हूं वह आगे चलकर मेरी पत्नी बन जाएंगी. इसी के आगे मौलाना मुफ्ती अनस इस इंटरव्यू में बताते हैं कि दो हज़ार सत्रह में उनकी मुलाकात मक्का में हुई और दोनों ने कुछ खास बातचीत नहीं की थी. लेकिन बाद में मौलाना मुफ्ती अनस, सना खान के प्यार में पड़ जाते हैं और उनके ही एक कॉमन फ्रेंड से उनका नंबर उनका नंबर ले लेते हैं और उन्हें मैसेज करना शुरू कर देते हैं. हालांकि एक्ट्रेस ने तीन दिन तक उस मैसेज का रिप्लाई नहीं करती है. जिस पर मौलाना मुफ्ती अनस बताते हैं कि सना खान ने उन्हें कुछ पूछने के लिए मैसेज किया और उसके बाद में उन्हें ब्लॉक कर दिया. अनस ने इंटरव्यू के दौरान यह भी बताया कि जब भी उन्हें कुछ पूछना होता था तो वह अनब्लॉक कर देती थी और उसके बाद में फिर पूछ कर मुझे ब्लॉक कर देती थी. इसी इंटरव्यू में अनस ने काफी कुछ खुलासे किए और बताया कि सना खान उनसे बात करने में काफी झिझकती थी और वह उन्हें अच्छा इंसान नहीं माना करती थी. जिसके बाद अनस ने मौलाना से उन्हें समझाने को कहा. जिस पर मौलाना नहीं सना खान को समझाया और वह मान भी गई. जिसके बाद उनकी बात आगे बढ़ी और अनस ने उन्हें शादी के लिए मना लिया. आखिरकार दो हज़ार बीस में सना उनसे शादी करने को तैयार हो जाती है और आज वह दोनों अपनी जिंदगी में काफी खुश हैं. हाथ में गिलास लेकर नाइट क्लब में मचलती हसीना का वीडियो वायरल, सेक्सी मूव्स देख डोल जाएगा ईमान!
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राजधानी शिमला के नगर निगम में चुनाव का बिगुल बज गया है। सभी दलों की चुनाव को लेकर तैयारियां जोरो पर है। वहीँ प्रदेश की सत्ता में काबिज कांग्रेस पार्टी ने शिमला नगर निगम का चुनाव लड़ने के लिये उम्मीदवारों से आठ अप्रैल तक आवेदन मांगे हैं। पार्टी के उन नेताओं व कार्यकर्ताओं से आवेदन आमंत्रित किये गए हैं, जो शिमला नगर निगम चुनावों में पार्टी प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ना चाहते हो।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सांसद प्रतिभा सिंह ने पार्टी के इच्छुक उम्मीदवारों से शिमला नगर निगम चुनाव के लिए सादे कागज पर अपने पूरे बायोडाटा के साथ आवदेन करने को कहा है। उन्होंने ने कहा है कि उनके यह आवेदन आठ अप्रैल को सांय पांच बजे तक प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में अवश्य पहुंचे जाने चाहिए, आवेदन मेल hpccmcelections2023@gmail. com के माध्यम से भी कर सकते हैं। इसके बाद किसी भी किसी भी आवदेन पर कोई विचार नहीं होगा।
उल्लेखनीय है कि शिमला नगर निगम चुनाव में नामांकन की प्रक्रिया 13, 17 और 18 अप्रैल को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक रहेगी। नामांकन पत्रों की जांच 19 अप्रैल को होगी। उम्मीदवार 21 अप्रैल तक अपने नामांकन वापस ले सकते हैं। मतदान 2 मई को प्रातः 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। मतगणना 4 मई को सुबह 10 बजे निगम मुख्यालय में होगी।
बता दें कि शिमला नगर निगम चुनाव में 34 में से 17 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित रखे गए हैं। उपायुक्त शिमला कार्यालय से जारी आरक्षण रोस्टर के मुताबिक 14 वार्ड महिलाओं,तीन वार्ड अनुसूचित जाति, तीन वार्ड अनुसूचित जाति महिला और 14 वार्ड अनारक्षित रखे गए हैं। पे नाऊ पर क्लिक करे।
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राजधानी शिमला के नगर निगम में चुनाव का बिगुल बज गया है। सभी दलों की चुनाव को लेकर तैयारियां जोरो पर है। वहीँ प्रदेश की सत्ता में काबिज कांग्रेस पार्टी ने शिमला नगर निगम का चुनाव लड़ने के लिये उम्मीदवारों से आठ अप्रैल तक आवेदन मांगे हैं। पार्टी के उन नेताओं व कार्यकर्ताओं से आवेदन आमंत्रित किये गए हैं, जो शिमला नगर निगम चुनावों में पार्टी प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ना चाहते हो। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सांसद प्रतिभा सिंह ने पार्टी के इच्छुक उम्मीदवारों से शिमला नगर निगम चुनाव के लिए सादे कागज पर अपने पूरे बायोडाटा के साथ आवदेन करने को कहा है। उन्होंने ने कहा है कि उनके यह आवेदन आठ अप्रैल को सांय पांच बजे तक प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में अवश्य पहुंचे जाने चाहिए, आवेदन मेल hpccmcelectionsदो हज़ार तेईस@gmail. com के माध्यम से भी कर सकते हैं। इसके बाद किसी भी किसी भी आवदेन पर कोई विचार नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि शिमला नगर निगम चुनाव में नामांकन की प्रक्रिया तेरह, सत्रह और अट्ठारह अप्रैल को सुबह ग्यारह बजे से दोपहर तीन बजे तक रहेगी। नामांकन पत्रों की जांच उन्नीस अप्रैल को होगी। उम्मीदवार इक्कीस अप्रैल तक अपने नामांकन वापस ले सकते हैं। मतदान दो मई को प्रातः आठ बजे से शाम चार बजे तक होगा। मतगणना चार मई को सुबह दस बजे निगम मुख्यालय में होगी। बता दें कि शिमला नगर निगम चुनाव में चौंतीस में से सत्रह वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित रखे गए हैं। उपायुक्त शिमला कार्यालय से जारी आरक्षण रोस्टर के मुताबिक चौदह वार्ड महिलाओं,तीन वार्ड अनुसूचित जाति, तीन वार्ड अनुसूचित जाति महिला और चौदह वार्ड अनारक्षित रखे गए हैं। पे नाऊ पर क्लिक करे।
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कर्नाटक के भाजपा विधायक बासनगौड़ा ने शुक्रवार को सोनिया गांधी को विषकन्या कह दिया। उन्हें चीन और पाकिस्तान का एजेंट बताया। बीजेपी नेता ने यह बयान पीएम नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जहरीले सांप वाली टिप्पणी पर दिया है।
बासनगौड़ा ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, 'अब खड़गे पीएम की तुलना कोबरा सांप से कर रहे हैं और कह रहे हैं कि वे जहर उगलेंगे, लेकिन जिस पार्टी में आप नाच रहे हैं, क्या सोनिया गांधी विषकन्या हैं? '
बाद में खड़गे ने सफाई देते हुए कहा, 'मैंने उन्हें (मोदी को) ऐसा नहीं कहा। मैंने पहले भी कहा है कि मैं व्यक्तिगत हमले नहीं करता। मैंने जो कहा वह यह था कि (भाजपा की) विचारधारा जहरीली थी। यदि आप विचारधारा का समर्थन करते हैं और इसका स्वाद चखना चाहते हैं, तो मृत्यु निश्चित है। अगर मेरी बातों से किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं दिल से खेद व्यक्त करता हूं। '
भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को इलेक्शन कमीशन ने खड़गे के बयान को लेकर शिकायत की। भाजपा नेताओं ने खड़गे के खिलाफ मानहानि का आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि खड़गे की टिप्पणी केवल जुबान फिसलने वाली नहीं थी, बल्कि यह उनकी गंदी राजनीति का हिस्सा है।
सीएम बोम्मई बोले- खड़गे के मन में जहर; स्मृति ने कहा- ये विष गांधी खानदान का है कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि खड़गे के मन में जहर है। यह पीएम मोदी और बीजेपी के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित दिमाग है। यह सोच हताशा के कारण आती है, क्योंकि वे पीएम से राजनीतिक रूप से लड़ने में असमर्थ हैं। यही नहीं केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी कहा कि कांग्रेस के लोग पहले भी इस तरह की बयानबाजी करते आए हैं।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, 'ये शब्द भले ही खड़गे जी के हों, लेकिन ये आस्था, ये विष गांधी खानदान का है जो उगला जा रहा है। यह पहली बार नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी पर कांग्रेस के किसी नेता ने अभद्र टिप्पणी की हो। ऐसी टिप्पणी से उन्होंने यह सुनिश्चित कर दिया है कि कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस की हार पक्की है। '
चुनावी साल में भाजपा-कांग्रेस नेताओं के बयान में तल्खी बढ़ती जा रही है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह ने सीएम गहलोत को राजस्थान की राजनीति का रावण बता दिया तो गहलोत भी पलटवार करने से नहीं चूके और कहा- 'संजीवनी घोटाले में वह जल्दी जेल जा सकता है। ' पूरी खबर पढ़ें. .
3. कर्नाटक में BJP जीती तो MP में बेटा-बेटी तैयार!
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कर्नाटक के भाजपा विधायक बासनगौड़ा ने शुक्रवार को सोनिया गांधी को विषकन्या कह दिया। उन्हें चीन और पाकिस्तान का एजेंट बताया। बीजेपी नेता ने यह बयान पीएम नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जहरीले सांप वाली टिप्पणी पर दिया है। बासनगौड़ा ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, 'अब खड़गे पीएम की तुलना कोबरा सांप से कर रहे हैं और कह रहे हैं कि वे जहर उगलेंगे, लेकिन जिस पार्टी में आप नाच रहे हैं, क्या सोनिया गांधी विषकन्या हैं? ' बाद में खड़गे ने सफाई देते हुए कहा, 'मैंने उन्हें ऐसा नहीं कहा। मैंने पहले भी कहा है कि मैं व्यक्तिगत हमले नहीं करता। मैंने जो कहा वह यह था कि विचारधारा जहरीली थी। यदि आप विचारधारा का समर्थन करते हैं और इसका स्वाद चखना चाहते हैं, तो मृत्यु निश्चित है। अगर मेरी बातों से किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं दिल से खेद व्यक्त करता हूं। ' भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को इलेक्शन कमीशन ने खड़गे के बयान को लेकर शिकायत की। भाजपा नेताओं ने खड़गे के खिलाफ मानहानि का आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि खड़गे की टिप्पणी केवल जुबान फिसलने वाली नहीं थी, बल्कि यह उनकी गंदी राजनीति का हिस्सा है। सीएम बोम्मई बोले- खड़गे के मन में जहर; स्मृति ने कहा- ये विष गांधी खानदान का है कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि खड़गे के मन में जहर है। यह पीएम मोदी और बीजेपी के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित दिमाग है। यह सोच हताशा के कारण आती है, क्योंकि वे पीएम से राजनीतिक रूप से लड़ने में असमर्थ हैं। यही नहीं केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी कहा कि कांग्रेस के लोग पहले भी इस तरह की बयानबाजी करते आए हैं। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, 'ये शब्द भले ही खड़गे जी के हों, लेकिन ये आस्था, ये विष गांधी खानदान का है जो उगला जा रहा है। यह पहली बार नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी पर कांग्रेस के किसी नेता ने अभद्र टिप्पणी की हो। ऐसी टिप्पणी से उन्होंने यह सुनिश्चित कर दिया है कि कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस की हार पक्की है। ' चुनावी साल में भाजपा-कांग्रेस नेताओं के बयान में तल्खी बढ़ती जा रही है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह ने सीएम गहलोत को राजस्थान की राजनीति का रावण बता दिया तो गहलोत भी पलटवार करने से नहीं चूके और कहा- 'संजीवनी घोटाले में वह जल्दी जेल जा सकता है। ' पूरी खबर पढ़ें. . तीन. कर्नाटक में BJP जीती तो MP में बेटा-बेटी तैयार! This website follows the DNPA Code of Ethics.
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- 4 hrs ago ये क्या, 3. 3 लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद!
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नवरात्रि पर भक्ति के साथ-साथ उत्सव के जश्न में भी सभी सराबोर हैं। साल का यह ऐसा समय होता है जब लोग रात जागकर गरबा और डांडिया की धुन पर नाचते-गाते और इस सेलिब्रेशन का भरपूर लुत्फ उठाते हैं। गरबा-डांडिया नाइट्स पर पहनने के लिए आमतौर पर लड़कियां चनिया-चोली को ही चुनती हैं लेकिन आप अगर इस मौके पर कुछ अलग पहनना चाहती हैं तो फिल्मी स्टार्स से इंस्पिरेशन ले सकती हैं। बॉलीवुड स्टार आलिया भट्ट और मृणाल ठाकुर से लेकर अनन्या पांडे और जाह्नवी कपूर तक आपको डांडिया नाइट्स पर कुछ अलग पहनने के आईडियाज दे सकती हैं।
जाह्नवी कपूर का मलमल ड्रेस :
इस समय मलमल इंडिगो प्रिंट फैशन ट्रेंड बना हुआ है और इसी ट्रेंड को फॉलो करते हुए जाह्नवी कपूर ने भी क्रॉप-टॉप ड्रेस को चुना है। इस तरह के ड्रेस में आपको डांडिया और गरबा खेलने में भी परेशानी नहीं होगी। जह्नावी ने इंडिगो प्रिंट का क्रॉप-टॉप और पलाजो के साथ लॉन्ग ब्लु कलर का श्रग पेय किया है। जाह्नवी ने नेचुरल ग्लैम लुक के साथ अपने बालों को खोल रखा हुआ है। जाह्नवी मिनीमल एक्सेसरीज के साथ गई हैं और उन्होंने सिर्फ स्टेटमेंट इयररिंग्स ही डाले हैं। इस लुक में जाह्नवी के मेसी कर्ली बाल और उनके लिपस्टिक को नोटिस करना ना भूलें।
मृणाल ठाकुर का इंडो-वेस्टर्न लुक :
मृणाल ठाकुर इस इंडो-वेस्टर्न ड्रेस में बेहद खूबसूरत लग रही हैं। इस फेस्टिव सीजन में आप मृणाल ठाकुर इंस्पायर इस ड्रेस को चुन सकती हैं। इस तरह के ड्रेस काफी ट्रेंडी भी हैं। मृणाल ने अपने लिए पीले रंग का टर्टल नेक ड्रेस चुना है जिसे उन्होंने वाइड प्लाजो के साथ पेयर किया है। इस लुक को कम्प्लीट करने के लिए मृणाल ने शियर लॉन्ग श्रग डाला है जिस पर गोटा-पट्टी का काम किया हुआ है। इसके साथ मृणाल ने अपना मेकअप एकदम लाइट रखते हुए एक मेसी लो बन बनाया है जिसके साथ उन्होंने लाइट कलर का लिपस्टिक लगाया है। डांडिया-गरबा खेलते समय हजारों की भीड़ में यह ड्रेस आपको एकदम अलग पहचान देगी।
कंगना रनौत की ब्राउन सिल्क साड़ी :
अगर आप चनिया-चोली से बोर हो गयी हैं तो कंगना रनौत की इस ब्राउन हेवी सिल्क साड़ी से इंस्पायर हो सकती हैं। इस ब्राउन कलर की साड़ी में हेवी गोल्डन बॉर्डन बनाया हुआ है जो इसे काफी गॉर्जस लुक देता है। कंगना ने मोनोटोनी को तोड़ते हुए इस साड़ी को फ्लोरल प्रिंट के फुल स्लीव्स ब्लाउज के साथ पेयर किया है। ब्लाउज का गला डीप नहीं बल्कि क्लोज्ड राउंड नेक का है जो साड़ी को और भी खूबसूरती के साथ उभार रहा है। अपने लुक को कम्प्लीट करने के लिए कंगना ने पारंपरिक सोने के बड़े झुमके और ब्राउन लिपस्टिक लगाया है।
अनन्या पांडे की रेड अनारकली :
लाल रंग कभी भी आउट ऑफ फैशन नहीं होता है और हर तरह के त्योहार में आप रेड आउटफिट चुन सकती हैं। अनन्या पांडे की इस रेड अनारकली में मिनिमम वर्क किया हुआ है। जिन युवतियों को हैवी कपड़े पहनना ज्यादा पसंद नहीं हैं, उनके लिए अनारकली आइडियल है। यह ज्यादा हैवी नहीं है लेकिन नवरात्रि के समय यह स्टाइल स्टेटमेंट भी बनेगी। अनन्या ने इस अनारकली कुर्ता को वाइड स्ट्रेट पैंट्स और सफेद रंग की जूत्ती के साथ पेयर किया है। इस अनारकली में सफेद रंग का खादी का काम किया हुआ है। अपने लुक को कम्प्लीट करने के लिए अनन्या ने कानों में बड़े स्टेटमेंट इयररिंग और माथे पर बिंदी को चुना है।
आलिया भट्ट की ब्रोकेड बनारसी साड़ी :
ब्रोकेड बनारसी सिल्क साड़ी अभी फैशन में हैं। आलिया भट्ट ने फिरोजी रंग की साड़ी के साथ स्लीवलेस ब्लाउज को पेयर किया है। अपने लुक को ज्यादा हेवी ना बनाते हुए आलिया ने केवल सोने के झुमके पहने हैं। इस साड़ी के रंग को खूबसूरती से उभारने के लिए आलिया ने अपना मेकअप भी एकदम लाइट रखा है और होठों पर हल्के पिंक शेड का लिपस्टिक लगाया है। ट्रेडिशनल लुक को बनाए रखते हुए आलिया ने सिंपल बन के साथ बालों को गजरे से सजाया हुआ है। इसके साथ ही आलिया के माथे पर सजी काली छोटी बिन्दी को नोटिस करना बिल्कुल ना भूलें।
बॉलीवुड पर राज करती थी ये हसीना, बहन ने भी एक्टिंग में बनाया करियर, इमरान हाशमी से है खास कनेक्शन, पहचाना?
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- चार hrs ago ये क्या, तीन. तीन लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! नवरात्रि पर भक्ति के साथ-साथ उत्सव के जश्न में भी सभी सराबोर हैं। साल का यह ऐसा समय होता है जब लोग रात जागकर गरबा और डांडिया की धुन पर नाचते-गाते और इस सेलिब्रेशन का भरपूर लुत्फ उठाते हैं। गरबा-डांडिया नाइट्स पर पहनने के लिए आमतौर पर लड़कियां चनिया-चोली को ही चुनती हैं लेकिन आप अगर इस मौके पर कुछ अलग पहनना चाहती हैं तो फिल्मी स्टार्स से इंस्पिरेशन ले सकती हैं। बॉलीवुड स्टार आलिया भट्ट और मृणाल ठाकुर से लेकर अनन्या पांडे और जाह्नवी कपूर तक आपको डांडिया नाइट्स पर कुछ अलग पहनने के आईडियाज दे सकती हैं। जाह्नवी कपूर का मलमल ड्रेस : इस समय मलमल इंडिगो प्रिंट फैशन ट्रेंड बना हुआ है और इसी ट्रेंड को फॉलो करते हुए जाह्नवी कपूर ने भी क्रॉप-टॉप ड्रेस को चुना है। इस तरह के ड्रेस में आपको डांडिया और गरबा खेलने में भी परेशानी नहीं होगी। जह्नावी ने इंडिगो प्रिंट का क्रॉप-टॉप और पलाजो के साथ लॉन्ग ब्लु कलर का श्रग पेय किया है। जाह्नवी ने नेचुरल ग्लैम लुक के साथ अपने बालों को खोल रखा हुआ है। जाह्नवी मिनीमल एक्सेसरीज के साथ गई हैं और उन्होंने सिर्फ स्टेटमेंट इयररिंग्स ही डाले हैं। इस लुक में जाह्नवी के मेसी कर्ली बाल और उनके लिपस्टिक को नोटिस करना ना भूलें। मृणाल ठाकुर का इंडो-वेस्टर्न लुक : मृणाल ठाकुर इस इंडो-वेस्टर्न ड्रेस में बेहद खूबसूरत लग रही हैं। इस फेस्टिव सीजन में आप मृणाल ठाकुर इंस्पायर इस ड्रेस को चुन सकती हैं। इस तरह के ड्रेस काफी ट्रेंडी भी हैं। मृणाल ने अपने लिए पीले रंग का टर्टल नेक ड्रेस चुना है जिसे उन्होंने वाइड प्लाजो के साथ पेयर किया है। इस लुक को कम्प्लीट करने के लिए मृणाल ने शियर लॉन्ग श्रग डाला है जिस पर गोटा-पट्टी का काम किया हुआ है। इसके साथ मृणाल ने अपना मेकअप एकदम लाइट रखते हुए एक मेसी लो बन बनाया है जिसके साथ उन्होंने लाइट कलर का लिपस्टिक लगाया है। डांडिया-गरबा खेलते समय हजारों की भीड़ में यह ड्रेस आपको एकदम अलग पहचान देगी। कंगना रनौत की ब्राउन सिल्क साड़ी : अगर आप चनिया-चोली से बोर हो गयी हैं तो कंगना रनौत की इस ब्राउन हेवी सिल्क साड़ी से इंस्पायर हो सकती हैं। इस ब्राउन कलर की साड़ी में हेवी गोल्डन बॉर्डन बनाया हुआ है जो इसे काफी गॉर्जस लुक देता है। कंगना ने मोनोटोनी को तोड़ते हुए इस साड़ी को फ्लोरल प्रिंट के फुल स्लीव्स ब्लाउज के साथ पेयर किया है। ब्लाउज का गला डीप नहीं बल्कि क्लोज्ड राउंड नेक का है जो साड़ी को और भी खूबसूरती के साथ उभार रहा है। अपने लुक को कम्प्लीट करने के लिए कंगना ने पारंपरिक सोने के बड़े झुमके और ब्राउन लिपस्टिक लगाया है। अनन्या पांडे की रेड अनारकली : लाल रंग कभी भी आउट ऑफ फैशन नहीं होता है और हर तरह के त्योहार में आप रेड आउटफिट चुन सकती हैं। अनन्या पांडे की इस रेड अनारकली में मिनिमम वर्क किया हुआ है। जिन युवतियों को हैवी कपड़े पहनना ज्यादा पसंद नहीं हैं, उनके लिए अनारकली आइडियल है। यह ज्यादा हैवी नहीं है लेकिन नवरात्रि के समय यह स्टाइल स्टेटमेंट भी बनेगी। अनन्या ने इस अनारकली कुर्ता को वाइड स्ट्रेट पैंट्स और सफेद रंग की जूत्ती के साथ पेयर किया है। इस अनारकली में सफेद रंग का खादी का काम किया हुआ है। अपने लुक को कम्प्लीट करने के लिए अनन्या ने कानों में बड़े स्टेटमेंट इयररिंग और माथे पर बिंदी को चुना है। आलिया भट्ट की ब्रोकेड बनारसी साड़ी : ब्रोकेड बनारसी सिल्क साड़ी अभी फैशन में हैं। आलिया भट्ट ने फिरोजी रंग की साड़ी के साथ स्लीवलेस ब्लाउज को पेयर किया है। अपने लुक को ज्यादा हेवी ना बनाते हुए आलिया ने केवल सोने के झुमके पहने हैं। इस साड़ी के रंग को खूबसूरती से उभारने के लिए आलिया ने अपना मेकअप भी एकदम लाइट रखा है और होठों पर हल्के पिंक शेड का लिपस्टिक लगाया है। ट्रेडिशनल लुक को बनाए रखते हुए आलिया ने सिंपल बन के साथ बालों को गजरे से सजाया हुआ है। इसके साथ ही आलिया के माथे पर सजी काली छोटी बिन्दी को नोटिस करना बिल्कुल ना भूलें। बॉलीवुड पर राज करती थी ये हसीना, बहन ने भी एक्टिंग में बनाया करियर, इमरान हाशमी से है खास कनेक्शन, पहचाना?
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Ranchi: झारखंड के मेदांता अब्दुर रज्जाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स अस्पताल, रांची में ड्रग इंस्पेक्टरों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को आयोजित किया गया. इसका विषय "Safe Blood Transfusion" था.
संयुक्त निदेशक (ड्रग्स) सुरेन्द्र प्रसाद प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल थे. उन्होंने इस आयोजन की सराहना की. ब्लड बैंक के चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ. नम्रता शरण ने "रक्त घटकों के लाभ" और तकनीकी पर्यवेक्षक ने "रोगियों की सुरक्षा के लिए जेल प्रौद्योगिकी और रसायन विज्ञान प्रौद्योगिकी के लाभ" पर प्रस्तुति दी.
इस दौरान सभी ड्रग इंस्पेक्टरों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया. अस्पताल के केंद्र प्रमुख डॉ. मो. मुख्तार सईद ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य "सुरक्षित रक्त संक्रमण" पर जोर दिया.
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Ranchi: झारखंड के मेदांता अब्दुर रज्जाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स अस्पताल, रांची में ड्रग इंस्पेक्टरों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को आयोजित किया गया. इसका विषय "Safe Blood Transfusion" था. संयुक्त निदेशक सुरेन्द्र प्रसाद प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल थे. उन्होंने इस आयोजन की सराहना की. ब्लड बैंक के चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ. नम्रता शरण ने "रक्त घटकों के लाभ" और तकनीकी पर्यवेक्षक ने "रोगियों की सुरक्षा के लिए जेल प्रौद्योगिकी और रसायन विज्ञान प्रौद्योगिकी के लाभ" पर प्रस्तुति दी. इस दौरान सभी ड्रग इंस्पेक्टरों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया. अस्पताल के केंद्र प्रमुख डॉ. मो. मुख्तार सईद ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य "सुरक्षित रक्त संक्रमण" पर जोर दिया.
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चिल्लाकर -रोकर इसका विरोध करता। एक बार इस प्रकार चिल्लाते हुए उसकी रक्षा के निमित्त दौड़कर पिता के बीच में पड़ने पर बालक को पिता के हाथों सिर में चोट भी खानी पड़ी। उस दिन पिता कुत्ते की किसी बदतमीज़ी पर भल्लाकर उस पर कुछ फेंक कर मार रहा था। तब से घर के लोग जरा सावधानी से काम लेने लगे। एक बात और थी, कुत्ता भी अधिक चालाक हो गया था। वह अपने ऊपर फेंकी हुई चीज़ों और ठोकरों से बचना सीख गया था । वह उस छोटे से कमरे में कुर्सी, मेज, पलंग, संदूक आदि के नीचे छिपना, दुबकना, सिकुड़कर निकलना आदि बड़ी फुर्ती और सफ़ाई से करने लगा । वह तीन-चार आदमियों के झाड़, ईंट, पत्थर, डंडे आदि के प्रहार को एक साथ रोक लेता था । मजाल क्या थी कि कोई कामयाब हो सके । और अगर कभी उन्हें सफलता भी हुई तो बस नाम मात्र की । उसका शरीर सदा अछूता रहता ।
बालक की उपस्थिति में ये सब बातें न होतीं । लोग समझ चके थे कि अगर कुत्त को किसी ने दिक किया तो लड़का आसमान सिर पर उठा लेगा और उसे चुप कराना असंभव सा हो जायगा। इस उपद्रव के डर से कुत्तों की जान बची रहती थी। परन्तु लड़का उसके साथ रहकर कब तक उसकी
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चिल्लाकर -रोकर इसका विरोध करता। एक बार इस प्रकार चिल्लाते हुए उसकी रक्षा के निमित्त दौड़कर पिता के बीच में पड़ने पर बालक को पिता के हाथों सिर में चोट भी खानी पड़ी। उस दिन पिता कुत्ते की किसी बदतमीज़ी पर भल्लाकर उस पर कुछ फेंक कर मार रहा था। तब से घर के लोग जरा सावधानी से काम लेने लगे। एक बात और थी, कुत्ता भी अधिक चालाक हो गया था। वह अपने ऊपर फेंकी हुई चीज़ों और ठोकरों से बचना सीख गया था । वह उस छोटे से कमरे में कुर्सी, मेज, पलंग, संदूक आदि के नीचे छिपना, दुबकना, सिकुड़कर निकलना आदि बड़ी फुर्ती और सफ़ाई से करने लगा । वह तीन-चार आदमियों के झाड़, ईंट, पत्थर, डंडे आदि के प्रहार को एक साथ रोक लेता था । मजाल क्या थी कि कोई कामयाब हो सके । और अगर कभी उन्हें सफलता भी हुई तो बस नाम मात्र की । उसका शरीर सदा अछूता रहता । बालक की उपस्थिति में ये सब बातें न होतीं । लोग समझ चके थे कि अगर कुत्त को किसी ने दिक किया तो लड़का आसमान सिर पर उठा लेगा और उसे चुप कराना असंभव सा हो जायगा। इस उपद्रव के डर से कुत्तों की जान बची रहती थी। परन्तु लड़का उसके साथ रहकर कब तक उसकी
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दिल्ली में शाम 6 बजे तक 45-59 आयु वर्ग के 3,079 लाभार्थियों को कोविड-19 के टीके लगे हैं। 15,639 वरिष्ठ नागरिकों को टीके की खुराक दी गई है।
नयी दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार शाम छह बजे तक 33,000 से ज्यादा लोगों को कोविड-19 के टीके लगाए गए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि शहर में टीकाकरण केंद्र सोमवार सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक संचालित हो रहे हैं। यहां शाम छह बजे तक 45-59 आयु वर्ग के 3,079 लाभार्थियों को कोविड-19 के टीके लगे हैं। 15,639 वरिष्ठ नागरिकों को टीके की खुराक दी गई है।
9 बजे सुबह से लेकर 9 बजे रात तक दी जा रही है वैक्सीन उन्होंने बताया कि 10,217 लोगों को टीके की दूसरी खुराक दी गई। वहीं अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले 2,778 कर्मियों और 1,764 स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड-19 की पहली खुराक दी गई। अधिकारी ने बताया कि शहर में टीकाकरण केंद्र सोमवार सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक संचालित हो रहे हैं। यहां शाम छह बजे तक 45-59 आयु वर्ग के 3,079 लाभार्थियों को कोविड-19 के टीके लगे हैं। 15,639 वरिष्ठ नागरिकों को टीके की खुराक दी गई है।
चार से आठ सप्ताह के बीच दूसरी डोज लेने के बेहतर नतीजे मिल सकते हैं केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद लोगों से वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराने और टीका लगवाने की अपील की। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने यह भी फैसला लिया है कि टीके की दूसरी डोज डॉक्टरों की सलाह पर चार से आठ सप्ताह के बीच ली जा सकती है। पहले वैक्सीन की दूसरी डोज चार से छह सप्ताह के बीच लेने की अनुमति दी गई थी, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने कहा है कि चार से आठ सप्ताह के बीच दूसरी डोज लेने के बेहतर नतीजे मिल सकते हैं।
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दिल्ली में शाम छः बजे तक पैंतालीस-उनसठ आयु वर्ग के तीन,उन्यासी लाभार्थियों को कोविड-उन्नीस के टीके लगे हैं। पंद्रह,छः सौ उनतालीस वरिष्ठ नागरिकों को टीके की खुराक दी गई है। नयी दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार शाम छह बजे तक तैंतीस,शून्य से ज्यादा लोगों को कोविड-उन्नीस के टीके लगाए गए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि शहर में टीकाकरण केंद्र सोमवार सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक संचालित हो रहे हैं। यहां शाम छह बजे तक पैंतालीस-उनसठ आयु वर्ग के तीन,उन्यासी लाभार्थियों को कोविड-उन्नीस के टीके लगे हैं। पंद्रह,छः सौ उनतालीस वरिष्ठ नागरिकों को टीके की खुराक दी गई है। नौ बजे सुबह से लेकर नौ बजे रात तक दी जा रही है वैक्सीन उन्होंने बताया कि दस,दो सौ सत्रह लोगों को टीके की दूसरी खुराक दी गई। वहीं अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले दो,सात सौ अठहत्तर कर्मियों और एक,सात सौ चौंसठ स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड-उन्नीस की पहली खुराक दी गई। अधिकारी ने बताया कि शहर में टीकाकरण केंद्र सोमवार सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक संचालित हो रहे हैं। यहां शाम छह बजे तक पैंतालीस-उनसठ आयु वर्ग के तीन,उन्यासी लाभार्थियों को कोविड-उन्नीस के टीके लगे हैं। पंद्रह,छः सौ उनतालीस वरिष्ठ नागरिकों को टीके की खुराक दी गई है। चार से आठ सप्ताह के बीच दूसरी डोज लेने के बेहतर नतीजे मिल सकते हैं केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद लोगों से वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराने और टीका लगवाने की अपील की। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने यह भी फैसला लिया है कि टीके की दूसरी डोज डॉक्टरों की सलाह पर चार से आठ सप्ताह के बीच ली जा सकती है। पहले वैक्सीन की दूसरी डोज चार से छह सप्ताह के बीच लेने की अनुमति दी गई थी, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने कहा है कि चार से आठ सप्ताह के बीच दूसरी डोज लेने के बेहतर नतीजे मिल सकते हैं।
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बिखरी होगी और जो अपने बुढ़ापे और सफ़ेद बालों के बावजूद शायद उस समय तक अपने मर्दाना ताक़त से भरपूर होगा, और साथ ही एक पैगंबराना तबीयत भी रखता होगा, गंभीर और शानदार शब्दों में इनके बारे में गीत गायेगा। और उनकी महानता तमाम दुनिया में फैल जायेगी और आनेवाली पीढियां उनकी चर्चा किया करेंगी, क्योंकि ऐसी घंटी के पीतल की झंकार की तरह एक जोरदार शब्द बहुत दूर तक पहुंचता है जिस घंटी में कारीगर ने शुद्ध और कीमती चांदी की बहुत काफ़ी मिलावट कर रखी हो ताँकि उसकी मधुर खनखनाहट बहुत दूर-दूर तक, शहरों और गांवों में, महलों और झोपड़ों में, यहां तक कि हर तरफ़ फैलकर सब लोगों को एक ही तरह प्रार्थना के लिए पुकारे ।
शहर में किसी को मालूम नहीं था कि आधे ज़ापोरोजी तातारों का पीछा करने जा चुके हैं। शहर की मीनारों से संतरियों ने इतना जरूर देखा था कि कुछ गाडियां जंगलों की तरफ़ ले जायी गयी हैं लेकिन यह समझा गया कि कज़ाक घात में बैठने की तैयारियां कर रहे हैं। फ्रांसीसी इंजीनियर का भी यही विचार था। इस बीच कोशेवोई की बात ठीक साबित होने लगी, शहर को फिर खाने की कमी का सामना करना पड़ा। जैसा कि पिछली सदियों में आमतौर पर होता था, फ़ौजों ने अपनी जरूरतों का सही अंदाज़ा नहीं लगाया था। उन्होंने एक बार धावा करने की कोशिश की लेकिन जिन मनचलों ने इसमें हिस्सा लिया था उनमें से आधों को कज़ाकों ने फ़ौरन ही मार गिराया था और आधों का पीछा करके उन्हें खाली हाथ वापस शहर में खदेड़ दिया था। लेकिन यहूदियों ने इस धावे का फ़ायदा उठाया और सारी बातों का पता लगा लियाः ज़ापोरोजी कहां और क्यों गये थे, उनके साथ कौन-कौन से सरदार थे, कौन-कौन से कुरेन गये थे, कितने लोग गये थे, कितने बाक़ी रह गये थे और उनके क्या इरादे थे- मतलब यह कि कुछ ही मिनटों के अंदर-अंदर शहर में सब कुछ मालूम हो चुका था। कर्नलों की हिम्मत बन गई और वे लड़ने की तैयारी करने लगे। तारास ने शहर के शोर और दौड़-धूप से इसका अंदाजा लगा लिया और फ़ौरन ही जरूरी कार्रवाई करने लगा। उसने हिदायतें और हुक्म जारी कर दिये, कुरेनों को तीन पड़ावों में बांट दिया और उनके चारों ओर गाड़ियों का घेरा डालकर मोर्चेबंदी-सी कर दी। यह एक ऐसी लड़ाई की चाल थी जो अक्सर ज़ापोरोजियों को अजेय बना चुकी थी- उसने दो कुरेनों को घात में बैठने का हुक्म दिया और मैदान के उस हिस्से में नुकीली बल्लियां, टूटी बंदूकें, तलवारों और भाले के टुकड़े गड़वा दिये जहाँ वह चाहता था कि अगर हो सके तो दुश्मन की घुड़सवार फ़ौज को खदेड़ दिया जाये। जब सारी तैयारियां उसकी इच्छा के अनुसार पूरी हो गयी तो वह कज़ाकों के सामने बोला। इससे उसका इरादा, उनका दिल बढ़ाना और उन्हें हिम्मत दिलाना नहीं था। वह जानता था कि इसके बग़ैर भी कज़ाक काफ़ी जोश में हैं। वह सिर्फ़ अपने दिल का बोझ हल्का करना चाहता था।
"भाइयो! मैं आप लोगों को बताना चाहता हूँ कि हमारा भाईचारा क्या चीज़ है। आप अपने बाप-दादा से सुनते आये हैं कि हमारा देश सब लोगों की आंखों में कितना ऊंचा और सम्मानित स्थान रखता आया है, उस यूनानियों को अपने आप से परिचित कराया, उसने कुस्तुनतूनिया से कर वसूल किया, हमारे शहर दौलत से भरपूर थे और हमारे अपने गिरजे थे, हमारे अपने राजकुमार थे- असली रूसी नस्ल के राजकुमार, कैथोलिक अधर्मी नहीं। यह सब कुछ हमसे छिन गया है, सब कुछ ख़त्म हो गया है। सिर्फ़ हम, बेचारे गरीब अनाथ बाक़ी रह गये हैं, हम और हमारा दुखी देश, जो किसी बलवान पति कि विधवा की तरह है। ऐसे समय में, भाइयो, हमने भाईचारे के नाते एक-दूसरे के हाथ थाम लिये है! यह है वह चीज़ जिसकी बुनियाद पर हम एक-दूसरे के साथी हैं! साथी होने के रिश्ते से ज़्यादा पवित्र और कोई रिश्ता नहीं होता! बाप अपने बच्चे से प्यार करता है, माँ अपने बच्चे से प्यार और बच्चा अपने माँ-बाप से प्यार करता है, मगर यह एक दूसरी ही बात है। जंगली जानवर भी अपने बच्चे से प्यार करता है। लेकिन ख़ून के रिश्ते की वजह से नहीं बल्कि आत्मा के रिश्ते से गैरों से रिश्ता जोड़ना सिर्फ़ इंसान ही जानता है। दूसरे देशों में भी भाईचारे की मिसालें मिलती हैं। लेकिन उनमें कोई ऐसा नहीं है जैसी हमारी रूसी धरती पर मिलती हैं। आप में से बहुतों ने कई-कई साल विदेशों में गुज़ारे हैं, आप वहां लोगों से मिले हैं- जो खुद आप ही लोगों की तरह ख़ुदा के बंदे हैं और आपने उनसे अपने देश के लोगों की तरह बातचीत की है, लेकिन जब दिल की बात कहने का मौक़ा आया तो आपने देख लिया कि वे अक्लमंद आदमी जरूर थे मगर आप लोगों की तरह बिल्कुल नहीं थे, वे आपकी तरह थे भी और नहीं भी थे! नहीं, भाइयो, जिस तरह एक रूसी आत्मा प्यार करती है उस तरह प्यार करना- सिर्फ दिमाग़ से या किसी और तरह से नहीं बल्कि हर उस चीज़ से जो खुदा ने इंसान को दी है- अपने तन, मन, धन से प्यार करना और..."यहां तारास ने हाथ हिलाया, अपने सिर को घुमाया और अपनी मूंछों को फड़काया और फिर आगे कहाः "नहीं, और कोई इस तरह प्यार नहीं कर सकता ! मैं जानता हूँ कि हमारी धरती में शैतानी रिवाजों ने जड़ पकड़ ली हैः हमारे यहां ऐसे लोग पाये जाते हैं जो बस अपने गेहूं और सूखी घास के ढेरों के और अपने घोड़ों के गल्लों
के बारे में ही सोचते है, जिन्हें बस अपने तहखानों में रखे मुंहबंद शहद की शराब के पीपों की रखवाली की फिक्र रहती है। वे न जाने कैसे-कैसे विधर्मियों के तौर-तरीक़ों की नक़ल करते हैं। अपनी मातृभाष से घृणा करतें हैं, एक हमवतन दूसरे हमवतन से बात नहीं करता, एक हमवतन दूसरे हमवतन को ऐसे बेच डालता है जैसे बिना आत्मा के दरिंदे मंडी में बेचे जाते हैं। एक विदेशी राजा की- बल्कि राजा भी नहीं किसी पोलिस्तान रईस ही की, जो अपने पीले बूट से उनके थोबड़ों पर ठोकरें मारता है - ज़रा-सी मेहरबानी की नज़र उनको भाईचारे से ज्यादा प्यारी है। लेकिन इनमें से सबसे ज़्यादा कमीने बदमाश में भी, चाहे वह अपनी खुशामदखोरी और जूतियां चाटने की वजह से कितना ही नीच और पतित क्यों न हो गया हो, मगर, भाइयो, उसमें भी रूसी भावनाओं की चिंगारियां पायी जाती हैं। और एक दिन यह चिंगारी भड़क उठेगी तब वह नीच आदमी अपने बाल नोचेगा और हाथ मलेगा, अपनी कमीनेपन की जिंदगी को ज़ोर-ज़ोर से कोसेगा और तकलीफ़ और कठिनाइयां उठाकर अपनी नीचता का पश्चाताप करने के लिए तौयार हो जायेगा। दुनियावालों को दिखा दीजिये कि हमारी रूसी धरती पर साथी होने का क्या मतलब है ! रही मौत- सो और कोई भी ऐसा आदमी नहीं हैं जो उस तरह मर सके जिस तरह हम मरने को तैयार हैं! कोई भी नहीं !... उनका कायर स्वभाव उनको करने नहीं देगा!" आतामान ने इस तरह भाषण दिया और चुप हो जाने के बाद भी वह अपना सिर हिलाता रहा, जिसके बाल कज़ाकी बहादुरी के कारनामे दिखाते-दिखाते चांदी की तरह सफ़ेद हो गये थे। जो लोग वहां खड़े थे उन सब पर उसके शब्दों को बहुत असर हुआ, वे सीधे उनके दिल में उतर गये। कज़ाकी पांतों के सबसे बुजुर्ग आदमी अपने सफ़ेद बालोंवाले सिर झुकायें चुपचाप खड़े रहे। उनकी बूढ़ी आंखों में आंसू भर आये जिन्हें उन्होंने धीरे से अपनी आस्तीनों से पोंछ डाला। फिर सब लोगों ने एक साथ अपने हाथों और अपने बुद्धिमान सिरों को हिलाया। साफ़ पता चलता था कि बूढ़े तारास ने उसके अंदर की ऐसी बहुत-सी चिरपोषित और सबसे ज़्यादा प्यारी भावनाओं को झकझोर दिया था जो दुख, मेहनत और बहादुरी की जिंदगी बसर करने और जिंदगी की कठिनाइयों को झेलने के दौरान बुद्धिमान बनने वाले आदमी के दिल में समायी रहती है, या फिर जो ऐसे निष्कलंक नौजवान दिल में भी पायी जाती हैं जो इन सब चीज़ों को न जानने पर भी जवानी के पूरे जोश के साथ उनकी लालसा करता है, और उनकी यह चीज़ उनके बूढ़े बाप को बेहद खुशी देती है।
इसी बीच दुश्मन की फ़ौजें शहर से बाहर आनी शुरू हो गयी थीं। नगाड़े बज रहे थे, बिगुल गूंज रहे थे अमीर और लोग चारों तरफ़ अपने नौकर-चाकरों से घिरे हुए, हाथ कमर पर रखे, घोड़ों पर सवार आगे बढ़ रहे थे। हट्टे-कट्टे कर्नल ने अपने हुक्म दिये और वे लोग एक गठी हुई भीड़ की शक्ल में कज़ाक पड़ाव की ओर बढ़ने लगे। उनकी बांहें धमकी देते हुए ऊपर उठी हुई थीं, वे अपनी बंदूकों से निशाना बांधे थे। उनके पीतल के कवच जगमगा रहे थे और उनकी आँखें चमक रहीं थीं। जब कज़ाकों ने देखा कि वे गोली के पर आ चुके हैं तो उनकी लंबी नालवाली बदंकों की गरजदार बौछारें शुरू गईं और वे बराबर गोलियां दाग़ते रहे। यह ज़ोरदार गरज मैदानों और चरागाहों में दूर-दूर तक गूंजने लगी और बढ़कर एक निरंतर दहाड़ बन गयी। सारे मैदान पर धुएं के बादल छा गये। मगर ज़ापोरोजी बिना सांस लिये बराबर गोलियां चलाते रहे । पीछे वाले लोग आगे वालों के लिए बंदूकें भरते रहे और इस तरह उन्होंने दुश्मनों को हक्का-बक्का कर दिया, जिसकी समझ में नहीं आ रहा था कि कज़ाक को फिर से भरे बिना कैसे गोलियां चलाते जा रहे है। धुंआ, जिसने दोनों फौजों को अपने लपेट में ले रखा था, इतना घना हो चुका था कि कोई चीज़ दिखाई नहीं दे रही थी। किसी को दिखाई नहीं दे रहा था कि पांतों में किस तरह लोग एक के बाद गिरते जा रहे थे। लेकिन पोलिस्तानी अच्छी तरह महसूस कर रहे थे कि गोलियों की बौछार कितनी ज़ोरदार थी और लड़ाई कितनी गरमा-गरम हो गयी थी और जब वे धुंए से बचने के लिए पीछे हटे और उन्होंने इधर-उधर नज़र डाली तो अपनी पांतों में बहुत से आदमी नहीं पाये मगर् दूसरी तरफ़ कज़ाकों के सौ आदमियों में से बस दो या तीन ही मारे गये थे। और अब तक कज़ाक एक क्षण रुके बिना अपनी बंदूकों से गोलियां चलाये जा रहे थे। विदेशी इंजीनियर भी उनके इस दांव-पेंच पर हैरान रह गया क्योंकि ऐसे दांव-पेंच उसने पहले कभी नहीं देखे थे। उसने वहीं उसी वक़्त सबके सामने कहाः "ये ज़ापोरोजी बहुत बहादुर लोग हैं! इसी तरह दूसरे देशों में लड़ाई लड़नी चाहिये ! उसने सलाह दी कि तोप का मुंह फ़ौरन उनके पड़ाव की ओर मोड़ दिया जाना चाहिये। ढले हुए लोहे की तोपें अपने चौड़े दहानों से गरजने लगीं, धरती दूर-दूर तक कांप उठी और गूंजने लगी, और धुंआ पहले से दुगुना घना होकर पूरे मैदान पर छा गया। बारूद की दूर और पास के शहरों की सड़कों और चौकों तक फैल गयी। लेकिन तोप चलानेवालों ने निशाना बहुत ऊंचा लगाया था और अंगारों जैसे दहकते गोलों की मार बहुत लंबी हो गयी थी। एक भयंकर चीख के साथ कज़ाकों के सिरों के ऊपर तेजी से गुज़रकर काली मिट्टी को तोड़ते-फोड़ते और हवा में ऊंचा उछालते हुए ज़मीन में बहुत गहरे धंसते चले गये। फ्रांसीसी इंजीनियर ने हुनर की इस कमी पर अपने बाल नोच लिये और कज़ाकों की दहकती हुई गोलियों की परवाह किये बिना, जो उसके चारों ओर लगातार बरस रही थीं, उसने खुद ही तोपे
चलाने का काम संभाल लिया।
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बिखरी होगी और जो अपने बुढ़ापे और सफ़ेद बालों के बावजूद शायद उस समय तक अपने मर्दाना ताक़त से भरपूर होगा, और साथ ही एक पैगंबराना तबीयत भी रखता होगा, गंभीर और शानदार शब्दों में इनके बारे में गीत गायेगा। और उनकी महानता तमाम दुनिया में फैल जायेगी और आनेवाली पीढियां उनकी चर्चा किया करेंगी, क्योंकि ऐसी घंटी के पीतल की झंकार की तरह एक जोरदार शब्द बहुत दूर तक पहुंचता है जिस घंटी में कारीगर ने शुद्ध और कीमती चांदी की बहुत काफ़ी मिलावट कर रखी हो ताँकि उसकी मधुर खनखनाहट बहुत दूर-दूर तक, शहरों और गांवों में, महलों और झोपड़ों में, यहां तक कि हर तरफ़ फैलकर सब लोगों को एक ही तरह प्रार्थना के लिए पुकारे । शहर में किसी को मालूम नहीं था कि आधे ज़ापोरोजी तातारों का पीछा करने जा चुके हैं। शहर की मीनारों से संतरियों ने इतना जरूर देखा था कि कुछ गाडियां जंगलों की तरफ़ ले जायी गयी हैं लेकिन यह समझा गया कि कज़ाक घात में बैठने की तैयारियां कर रहे हैं। फ्रांसीसी इंजीनियर का भी यही विचार था। इस बीच कोशेवोई की बात ठीक साबित होने लगी, शहर को फिर खाने की कमी का सामना करना पड़ा। जैसा कि पिछली सदियों में आमतौर पर होता था, फ़ौजों ने अपनी जरूरतों का सही अंदाज़ा नहीं लगाया था। उन्होंने एक बार धावा करने की कोशिश की लेकिन जिन मनचलों ने इसमें हिस्सा लिया था उनमें से आधों को कज़ाकों ने फ़ौरन ही मार गिराया था और आधों का पीछा करके उन्हें खाली हाथ वापस शहर में खदेड़ दिया था। लेकिन यहूदियों ने इस धावे का फ़ायदा उठाया और सारी बातों का पता लगा लियाः ज़ापोरोजी कहां और क्यों गये थे, उनके साथ कौन-कौन से सरदार थे, कौन-कौन से कुरेन गये थे, कितने लोग गये थे, कितने बाक़ी रह गये थे और उनके क्या इरादे थे- मतलब यह कि कुछ ही मिनटों के अंदर-अंदर शहर में सब कुछ मालूम हो चुका था। कर्नलों की हिम्मत बन गई और वे लड़ने की तैयारी करने लगे। तारास ने शहर के शोर और दौड़-धूप से इसका अंदाजा लगा लिया और फ़ौरन ही जरूरी कार्रवाई करने लगा। उसने हिदायतें और हुक्म जारी कर दिये, कुरेनों को तीन पड़ावों में बांट दिया और उनके चारों ओर गाड़ियों का घेरा डालकर मोर्चेबंदी-सी कर दी। यह एक ऐसी लड़ाई की चाल थी जो अक्सर ज़ापोरोजियों को अजेय बना चुकी थी- उसने दो कुरेनों को घात में बैठने का हुक्म दिया और मैदान के उस हिस्से में नुकीली बल्लियां, टूटी बंदूकें, तलवारों और भाले के टुकड़े गड़वा दिये जहाँ वह चाहता था कि अगर हो सके तो दुश्मन की घुड़सवार फ़ौज को खदेड़ दिया जाये। जब सारी तैयारियां उसकी इच्छा के अनुसार पूरी हो गयी तो वह कज़ाकों के सामने बोला। इससे उसका इरादा, उनका दिल बढ़ाना और उन्हें हिम्मत दिलाना नहीं था। वह जानता था कि इसके बग़ैर भी कज़ाक काफ़ी जोश में हैं। वह सिर्फ़ अपने दिल का बोझ हल्का करना चाहता था। "भाइयो! मैं आप लोगों को बताना चाहता हूँ कि हमारा भाईचारा क्या चीज़ है। आप अपने बाप-दादा से सुनते आये हैं कि हमारा देश सब लोगों की आंखों में कितना ऊंचा और सम्मानित स्थान रखता आया है, उस यूनानियों को अपने आप से परिचित कराया, उसने कुस्तुनतूनिया से कर वसूल किया, हमारे शहर दौलत से भरपूर थे और हमारे अपने गिरजे थे, हमारे अपने राजकुमार थे- असली रूसी नस्ल के राजकुमार, कैथोलिक अधर्मी नहीं। यह सब कुछ हमसे छिन गया है, सब कुछ ख़त्म हो गया है। सिर्फ़ हम, बेचारे गरीब अनाथ बाक़ी रह गये हैं, हम और हमारा दुखी देश, जो किसी बलवान पति कि विधवा की तरह है। ऐसे समय में, भाइयो, हमने भाईचारे के नाते एक-दूसरे के हाथ थाम लिये है! यह है वह चीज़ जिसकी बुनियाद पर हम एक-दूसरे के साथी हैं! साथी होने के रिश्ते से ज़्यादा पवित्र और कोई रिश्ता नहीं होता! बाप अपने बच्चे से प्यार करता है, माँ अपने बच्चे से प्यार और बच्चा अपने माँ-बाप से प्यार करता है, मगर यह एक दूसरी ही बात है। जंगली जानवर भी अपने बच्चे से प्यार करता है। लेकिन ख़ून के रिश्ते की वजह से नहीं बल्कि आत्मा के रिश्ते से गैरों से रिश्ता जोड़ना सिर्फ़ इंसान ही जानता है। दूसरे देशों में भी भाईचारे की मिसालें मिलती हैं। लेकिन उनमें कोई ऐसा नहीं है जैसी हमारी रूसी धरती पर मिलती हैं। आप में से बहुतों ने कई-कई साल विदेशों में गुज़ारे हैं, आप वहां लोगों से मिले हैं- जो खुद आप ही लोगों की तरह ख़ुदा के बंदे हैं और आपने उनसे अपने देश के लोगों की तरह बातचीत की है, लेकिन जब दिल की बात कहने का मौक़ा आया तो आपने देख लिया कि वे अक्लमंद आदमी जरूर थे मगर आप लोगों की तरह बिल्कुल नहीं थे, वे आपकी तरह थे भी और नहीं भी थे! नहीं, भाइयो, जिस तरह एक रूसी आत्मा प्यार करती है उस तरह प्यार करना- सिर्फ दिमाग़ से या किसी और तरह से नहीं बल्कि हर उस चीज़ से जो खुदा ने इंसान को दी है- अपने तन, मन, धन से प्यार करना और..."यहां तारास ने हाथ हिलाया, अपने सिर को घुमाया और अपनी मूंछों को फड़काया और फिर आगे कहाः "नहीं, और कोई इस तरह प्यार नहीं कर सकता ! मैं जानता हूँ कि हमारी धरती में शैतानी रिवाजों ने जड़ पकड़ ली हैः हमारे यहां ऐसे लोग पाये जाते हैं जो बस अपने गेहूं और सूखी घास के ढेरों के और अपने घोड़ों के गल्लों के बारे में ही सोचते है, जिन्हें बस अपने तहखानों में रखे मुंहबंद शहद की शराब के पीपों की रखवाली की फिक्र रहती है। वे न जाने कैसे-कैसे विधर्मियों के तौर-तरीक़ों की नक़ल करते हैं। अपनी मातृभाष से घृणा करतें हैं, एक हमवतन दूसरे हमवतन से बात नहीं करता, एक हमवतन दूसरे हमवतन को ऐसे बेच डालता है जैसे बिना आत्मा के दरिंदे मंडी में बेचे जाते हैं। एक विदेशी राजा की- बल्कि राजा भी नहीं किसी पोलिस्तान रईस ही की, जो अपने पीले बूट से उनके थोबड़ों पर ठोकरें मारता है - ज़रा-सी मेहरबानी की नज़र उनको भाईचारे से ज्यादा प्यारी है। लेकिन इनमें से सबसे ज़्यादा कमीने बदमाश में भी, चाहे वह अपनी खुशामदखोरी और जूतियां चाटने की वजह से कितना ही नीच और पतित क्यों न हो गया हो, मगर, भाइयो, उसमें भी रूसी भावनाओं की चिंगारियां पायी जाती हैं। और एक दिन यह चिंगारी भड़क उठेगी तब वह नीच आदमी अपने बाल नोचेगा और हाथ मलेगा, अपनी कमीनेपन की जिंदगी को ज़ोर-ज़ोर से कोसेगा और तकलीफ़ और कठिनाइयां उठाकर अपनी नीचता का पश्चाताप करने के लिए तौयार हो जायेगा। दुनियावालों को दिखा दीजिये कि हमारी रूसी धरती पर साथी होने का क्या मतलब है ! रही मौत- सो और कोई भी ऐसा आदमी नहीं हैं जो उस तरह मर सके जिस तरह हम मरने को तैयार हैं! कोई भी नहीं !... उनका कायर स्वभाव उनको करने नहीं देगा!" आतामान ने इस तरह भाषण दिया और चुप हो जाने के बाद भी वह अपना सिर हिलाता रहा, जिसके बाल कज़ाकी बहादुरी के कारनामे दिखाते-दिखाते चांदी की तरह सफ़ेद हो गये थे। जो लोग वहां खड़े थे उन सब पर उसके शब्दों को बहुत असर हुआ, वे सीधे उनके दिल में उतर गये। कज़ाकी पांतों के सबसे बुजुर्ग आदमी अपने सफ़ेद बालोंवाले सिर झुकायें चुपचाप खड़े रहे। उनकी बूढ़ी आंखों में आंसू भर आये जिन्हें उन्होंने धीरे से अपनी आस्तीनों से पोंछ डाला। फिर सब लोगों ने एक साथ अपने हाथों और अपने बुद्धिमान सिरों को हिलाया। साफ़ पता चलता था कि बूढ़े तारास ने उसके अंदर की ऐसी बहुत-सी चिरपोषित और सबसे ज़्यादा प्यारी भावनाओं को झकझोर दिया था जो दुख, मेहनत और बहादुरी की जिंदगी बसर करने और जिंदगी की कठिनाइयों को झेलने के दौरान बुद्धिमान बनने वाले आदमी के दिल में समायी रहती है, या फिर जो ऐसे निष्कलंक नौजवान दिल में भी पायी जाती हैं जो इन सब चीज़ों को न जानने पर भी जवानी के पूरे जोश के साथ उनकी लालसा करता है, और उनकी यह चीज़ उनके बूढ़े बाप को बेहद खुशी देती है। इसी बीच दुश्मन की फ़ौजें शहर से बाहर आनी शुरू हो गयी थीं। नगाड़े बज रहे थे, बिगुल गूंज रहे थे अमीर और लोग चारों तरफ़ अपने नौकर-चाकरों से घिरे हुए, हाथ कमर पर रखे, घोड़ों पर सवार आगे बढ़ रहे थे। हट्टे-कट्टे कर्नल ने अपने हुक्म दिये और वे लोग एक गठी हुई भीड़ की शक्ल में कज़ाक पड़ाव की ओर बढ़ने लगे। उनकी बांहें धमकी देते हुए ऊपर उठी हुई थीं, वे अपनी बंदूकों से निशाना बांधे थे। उनके पीतल के कवच जगमगा रहे थे और उनकी आँखें चमक रहीं थीं। जब कज़ाकों ने देखा कि वे गोली के पर आ चुके हैं तो उनकी लंबी नालवाली बदंकों की गरजदार बौछारें शुरू गईं और वे बराबर गोलियां दाग़ते रहे। यह ज़ोरदार गरज मैदानों और चरागाहों में दूर-दूर तक गूंजने लगी और बढ़कर एक निरंतर दहाड़ बन गयी। सारे मैदान पर धुएं के बादल छा गये। मगर ज़ापोरोजी बिना सांस लिये बराबर गोलियां चलाते रहे । पीछे वाले लोग आगे वालों के लिए बंदूकें भरते रहे और इस तरह उन्होंने दुश्मनों को हक्का-बक्का कर दिया, जिसकी समझ में नहीं आ रहा था कि कज़ाक को फिर से भरे बिना कैसे गोलियां चलाते जा रहे है। धुंआ, जिसने दोनों फौजों को अपने लपेट में ले रखा था, इतना घना हो चुका था कि कोई चीज़ दिखाई नहीं दे रही थी। किसी को दिखाई नहीं दे रहा था कि पांतों में किस तरह लोग एक के बाद गिरते जा रहे थे। लेकिन पोलिस्तानी अच्छी तरह महसूस कर रहे थे कि गोलियों की बौछार कितनी ज़ोरदार थी और लड़ाई कितनी गरमा-गरम हो गयी थी और जब वे धुंए से बचने के लिए पीछे हटे और उन्होंने इधर-उधर नज़र डाली तो अपनी पांतों में बहुत से आदमी नहीं पाये मगर् दूसरी तरफ़ कज़ाकों के सौ आदमियों में से बस दो या तीन ही मारे गये थे। और अब तक कज़ाक एक क्षण रुके बिना अपनी बंदूकों से गोलियां चलाये जा रहे थे। विदेशी इंजीनियर भी उनके इस दांव-पेंच पर हैरान रह गया क्योंकि ऐसे दांव-पेंच उसने पहले कभी नहीं देखे थे। उसने वहीं उसी वक़्त सबके सामने कहाः "ये ज़ापोरोजी बहुत बहादुर लोग हैं! इसी तरह दूसरे देशों में लड़ाई लड़नी चाहिये ! उसने सलाह दी कि तोप का मुंह फ़ौरन उनके पड़ाव की ओर मोड़ दिया जाना चाहिये। ढले हुए लोहे की तोपें अपने चौड़े दहानों से गरजने लगीं, धरती दूर-दूर तक कांप उठी और गूंजने लगी, और धुंआ पहले से दुगुना घना होकर पूरे मैदान पर छा गया। बारूद की दूर और पास के शहरों की सड़कों और चौकों तक फैल गयी। लेकिन तोप चलानेवालों ने निशाना बहुत ऊंचा लगाया था और अंगारों जैसे दहकते गोलों की मार बहुत लंबी हो गयी थी। एक भयंकर चीख के साथ कज़ाकों के सिरों के ऊपर तेजी से गुज़रकर काली मिट्टी को तोड़ते-फोड़ते और हवा में ऊंचा उछालते हुए ज़मीन में बहुत गहरे धंसते चले गये। फ्रांसीसी इंजीनियर ने हुनर की इस कमी पर अपने बाल नोच लिये और कज़ाकों की दहकती हुई गोलियों की परवाह किये बिना, जो उसके चारों ओर लगातार बरस रही थीं, उसने खुद ही तोपे चलाने का काम संभाल लिया।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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Mahindra Scorpio भारत में सबसे प्रसिद्ध एसयूवी में से एक है। यह अपने बीहड़पन, बुच दिखता है, उच्च जमीनी निकासी और विश्वसनीयता के लिए जाना जाता है। Mahindra Scorpio मुख्य रूप से एक रियर-व्हील ड्राइव एसयूवी है जबकि निर्माता भी 4×4 ड्राइवट्रेन की पेशकश करते थे जो अब बंद हो गया है। जबकि स्कॉर्पियो एक बहुत अच्छा और सक्षम ऑफ-रोडर है, कभी-कभी हर एसयूवी फंस जाती है। यहां एक Mahindra Scorpio का वीडियो रेत में फंसता हुआ दिखाई दे रहा है और एक Force Gurkha बचाव के लिए आता है। वीडियो को SHRI Vlogs ने अपने YouTube चैनल पर अपलोड किया है।
वीडियो में, हम देख सकते हैं कि Scorpio चालक ने रिवर्स गियर लगा दिया है और टो रस्सी को Scorpio और Force Gurkha के पीछे के छोर से बांध दिया गया है। Gurkha का ड्राइवर पहले कोमल के पास जाने की कोशिश करता है और स्कॉर्पियो को खींचने की कोशिश करता है, लेकिन एसयूवी चलती नहीं है। फिर Gurkha का ड्राइवर पलट जाता है और स्कॉर्पियो को एक झटके से खींचने की कोशिश करता है और इस बार एसयूवी चलती है लेकिन फिर से अटक जाती है। तीसरी बार, Gurkha Scorpio के करीब आता है, ताकि यह अधिक गति प्राप्त कर सके और स्कॉर्पियो चालक रिवर्स गियर भी संलग्न करता है। एक बार जब स्कॉर्पियो चलना शुरू होता है, Gurkha चालक नहीं रुकता है और स्कॉर्पियो को तब तक खींचता रहता है जब तक कि रेत थोड़ी सख्त नहीं हो जाती।
Gurkha 2.6-लीटर, चार-सिलेंडर डीजल इंजन के साथ आता है जो अधिकतम 85 बीएचपी का पावर और 230 एनएम का पीक टॉर्क आउटपुट देता है। यह केवल 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के साथ 4×4 सिस्टम और कम-अनुपात हस्तांतरण मामले के साथ पेश किया गया था। वर्तमान में, Gurkha को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया है क्योंकि BS6 डीजल इंजन के साथ एक फेसलिफ्ट आ रही है। Gurkha के 2.2-लीटर डीजल इंजन के साथ आने की भी उम्मीद है जो 140 पीएस अधिकतम शक्ति और 321 एनएम का पीक टॉर्क आउटपुट देगा। इंजन को 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के लिए रखा गया है।
दूसरी ओर, Scorpio अपने 2.2-लीटर डीजल इंजन के साथ अधिक शक्तिशाली है जो 120 पीएस या 140 पीएस अधिकतम शक्ति और 320 एनएम के 280 एनएम के पीक टॉर्क आउटपुट का उत्पादन करता है। इंजन 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स या 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के लिए आता है। Scorpio 11.99 लाख रुपये एक्स-शोरूम से शुरू होता है 16.52 लाख रुपये एक्स-शोरूम तक जाता है । Scorpio हाल ही में लॉन्च हुए S3 + वैरिएंट के जुड़ने के कारण 69,000 रुपये से अधिक सस्ती हो गई। इससे पहले स्कॉर्पियो का बेस वेरिएंट S5 था और यह 12.67 लाख रुपये एक्स-शोरूम से शुरू हुआ था। आप S3 + वैरिएंट के बारे में और अधिक पढ़ सकते हैं और यहां क्लिक करके यह सब क्या प्रदान करता है या याद करता है। Mahindra Scorpio की एक नई पीढ़ी पर भी काम कर रहा है, जिसे 2021 की दूसरी छमाही में लॉन्च किया जाएगा। नई Scorpio मौजूदा एक से अधिक आयामों में बड़ी होगी और यह भी एक रेवेरेड लैडर फ्रेम चेसिस पर आधारित होगी। Mahindra Scorpio को 2.0-लीटर पेट्रोल इंजन या 2.2-लीटर डीजल इंजन के साथ पेश करेगी। दोनों इंजनों को 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स या 6-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ पेश किया जाएगा।
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Mahindra Scorpio भारत में सबसे प्रसिद्ध एसयूवी में से एक है। यह अपने बीहड़पन, बुच दिखता है, उच्च जमीनी निकासी और विश्वसनीयता के लिए जाना जाता है। Mahindra Scorpio मुख्य रूप से एक रियर-व्हील ड्राइव एसयूवी है जबकि निर्माता भी चार×चार ड्राइवट्रेन की पेशकश करते थे जो अब बंद हो गया है। जबकि स्कॉर्पियो एक बहुत अच्छा और सक्षम ऑफ-रोडर है, कभी-कभी हर एसयूवी फंस जाती है। यहां एक Mahindra Scorpio का वीडियो रेत में फंसता हुआ दिखाई दे रहा है और एक Force Gurkha बचाव के लिए आता है। वीडियो को SHRI Vlogs ने अपने YouTube चैनल पर अपलोड किया है। वीडियो में, हम देख सकते हैं कि Scorpio चालक ने रिवर्स गियर लगा दिया है और टो रस्सी को Scorpio और Force Gurkha के पीछे के छोर से बांध दिया गया है। Gurkha का ड्राइवर पहले कोमल के पास जाने की कोशिश करता है और स्कॉर्पियो को खींचने की कोशिश करता है, लेकिन एसयूवी चलती नहीं है। फिर Gurkha का ड्राइवर पलट जाता है और स्कॉर्पियो को एक झटके से खींचने की कोशिश करता है और इस बार एसयूवी चलती है लेकिन फिर से अटक जाती है। तीसरी बार, Gurkha Scorpio के करीब आता है, ताकि यह अधिक गति प्राप्त कर सके और स्कॉर्पियो चालक रिवर्स गियर भी संलग्न करता है। एक बार जब स्कॉर्पियो चलना शुरू होता है, Gurkha चालक नहीं रुकता है और स्कॉर्पियो को तब तक खींचता रहता है जब तक कि रेत थोड़ी सख्त नहीं हो जाती। Gurkha दो.छः-लीटर, चार-सिलेंडर डीजल इंजन के साथ आता है जो अधिकतम पचासी बीएचपी का पावर और दो सौ तीस एनएम का पीक टॉर्क आउटपुट देता है। यह केवल पाँच-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के साथ चार×चार सिस्टम और कम-अनुपात हस्तांतरण मामले के साथ पेश किया गया था। वर्तमान में, Gurkha को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया है क्योंकि BSछः डीजल इंजन के साथ एक फेसलिफ्ट आ रही है। Gurkha के दो.दो-लीटर डीजल इंजन के साथ आने की भी उम्मीद है जो एक सौ चालीस पीएस अधिकतम शक्ति और तीन सौ इक्कीस एनएम का पीक टॉर्क आउटपुट देगा। इंजन को पाँच-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के लिए रखा गया है। दूसरी ओर, Scorpio अपने दो.दो-लीटर डीजल इंजन के साथ अधिक शक्तिशाली है जो एक सौ बीस पीएस या एक सौ चालीस पीएस अधिकतम शक्ति और तीन सौ बीस एनएम के दो सौ अस्सी एनएम के पीक टॉर्क आउटपुट का उत्पादन करता है। इंजन पाँच-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स या छः-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के लिए आता है। Scorpio ग्यारह.निन्यानवे लाख रुपये एक्स-शोरूम से शुरू होता है सोलह.बावन लाख रुपये एक्स-शोरूम तक जाता है । Scorpio हाल ही में लॉन्च हुए Sतीन + वैरिएंट के जुड़ने के कारण उनहत्तर,शून्य रुपयापये से अधिक सस्ती हो गई। इससे पहले स्कॉर्पियो का बेस वेरिएंट Sपाँच था और यह बारह.सरसठ लाख रुपये एक्स-शोरूम से शुरू हुआ था। आप Sतीन + वैरिएंट के बारे में और अधिक पढ़ सकते हैं और यहां क्लिक करके यह सब क्या प्रदान करता है या याद करता है। Mahindra Scorpio की एक नई पीढ़ी पर भी काम कर रहा है, जिसे दो हज़ार इक्कीस की दूसरी छमाही में लॉन्च किया जाएगा। नई Scorpio मौजूदा एक से अधिक आयामों में बड़ी होगी और यह भी एक रेवेरेड लैडर फ्रेम चेसिस पर आधारित होगी। Mahindra Scorpio को दो.शून्य-लीटर पेट्रोल इंजन या दो.दो-लीटर डीजल इंजन के साथ पेश करेगी। दोनों इंजनों को छः-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स या छः-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ पेश किया जाएगा।
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और निःश्रेयसका मार्ग सरल होगा, यह जानना लौकिक अगम्य है। इस कारण ज्ञानमय वेद ही इसमें प्रमाण हैं। यथा स्मृतिमें३०६
बुद्धि से
प्रत्यक्षेणानुमित्या वा यस्तूपायो न बुध्यते । एनं विदन्ति वेदेन तस्माद् वेदस्य वेदता ।। प्रत्यक्ष और अनुमानके अतीत अलौकिक विषय वेदके द्वारा जाना जाता है, यहाँ वेदका वेदत्व है । वेद तथा वेदसम्मत शौस्त्र सम्रान्त होने से उनके शाशाधीन होकर संस्कार संग्रह करते रहने पर अवश्य हो कल्याण की प्राप्ति होती है ॥ १८३ ॥
प्रकृत विषयको और भी दृढ़ कर रहे हैंः -
अज्ञानीक वेद से श्रेय होता है ।। १८६ ॥ अधिकारी तीन श्रेणी के होते हैं; यथा उत्तम, मध्यम और अधम । उत्तम अधिकारी योगानुशासनके अधीन स्वतः ही रहते हैं, इस कारण वे सदा श्रात्मायें युक्त होने से उनके संस्कार प्रथम तो शुद्ध ही घनते हैं और दूसरे उनको बाहर के परामर्शकी आय. श्यकता नहीं रहती है। परन्तु मध्यम राजसिफ अधिकारीमै सन्देह रहने के कारण और प्रथम अधिकारी में प्रमाद रहने के कारण उनके लिये वेदकी आज्ञा ही प्रधान डावलम्बनीय है। इसी कारण यात्रार और कर्ममें युक्ति और विचाररहित हो कर वेद और स्मृतिकी आश मानना उचित है। भगवान मनुने भी कहा हैःश्रुतिस्मृत्युदितं धर्ममनुतिष्ठन् हि मानवः । इह कीर्तिमवाप्नोति प्रेत्य चानुत्तमं सुखम् ॥ श्रुतिस्तु वेदो विज्ञेयो धर्मशास्त्रं तु वै स्मृतिः । ते सर्वार्थेमीमांस्ये ताभ्यां धर्मो हि निर्वभौ ॥ अज्ञानपिहितस्य तदाश्रयाच्छ्रयः ॥ १८६ ।।
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और निःश्रेयसका मार्ग सरल होगा, यह जानना लौकिक अगम्य है। इस कारण ज्ञानमय वेद ही इसमें प्रमाण हैं। यथा स्मृतिमेंतीन सौ छः बुद्धि से प्रत्यक्षेणानुमित्या वा यस्तूपायो न बुध्यते । एनं विदन्ति वेदेन तस्माद् वेदस्य वेदता ।। प्रत्यक्ष और अनुमानके अतीत अलौकिक विषय वेदके द्वारा जाना जाता है, यहाँ वेदका वेदत्व है । वेद तथा वेदसम्मत शौस्त्र सम्रान्त होने से उनके शाशाधीन होकर संस्कार संग्रह करते रहने पर अवश्य हो कल्याण की प्राप्ति होती है ॥ एक सौ तिरासी ॥ प्रकृत विषयको और भी दृढ़ कर रहे हैंः - अज्ञानीक वेद से श्रेय होता है ।। एक सौ छियासी ॥ अधिकारी तीन श्रेणी के होते हैं; यथा उत्तम, मध्यम और अधम । उत्तम अधिकारी योगानुशासनके अधीन स्वतः ही रहते हैं, इस कारण वे सदा श्रात्मायें युक्त होने से उनके संस्कार प्रथम तो शुद्ध ही घनते हैं और दूसरे उनको बाहर के परामर्शकी आय. श्यकता नहीं रहती है। परन्तु मध्यम राजसिफ अधिकारीमै सन्देह रहने के कारण और प्रथम अधिकारी में प्रमाद रहने के कारण उनके लिये वेदकी आज्ञा ही प्रधान डावलम्बनीय है। इसी कारण यात्रार और कर्ममें युक्ति और विचाररहित हो कर वेद और स्मृतिकी आश मानना उचित है। भगवान मनुने भी कहा हैःश्रुतिस्मृत्युदितं धर्ममनुतिष्ठन् हि मानवः । इह कीर्तिमवाप्नोति प्रेत्य चानुत्तमं सुखम् ॥ श्रुतिस्तु वेदो विज्ञेयो धर्मशास्त्रं तु वै स्मृतिः । ते सर्वार्थेमीमांस्ये ताभ्यां धर्मो हि निर्वभौ ॥ अज्ञानपिहितस्य तदाश्रयाच्छ्रयः ॥ एक सौ छियासी ।।
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छाछ भूख बढाती है और पाचन शक्ति ठीक करती है, यह शरीर और ह्रदय जो बल देने वाली तथा तर्प्तिकर है, कफ़रोग, वायुविक्रति एवं अग्निमांध में इसका सेवन हितकर है, वातजन्य विकारों में छाछ में पीपर (पिप्ली चूर्ण) व सेंधा नमक मिलाकर कफ़-विक्रति में आजवायन, सौंठ, काली मिर्च, पीपर व सेंधा नमक मिलाकर तथा पित्तज विकारों में जीरा व मिश्री मिलाकर छाछ का सेवन करना लाभदायी है, संग्रहणी व अर्श में सोंठ, काली मिर्च और पीपर समभाग लेकर बनाये गये 1 ग्राम चूर्ण को 200 मि.लि. छाछ के साथ ले ।
जो भोरहि माठा पियत है, जीरा नमक मिलाय !
बल बुद्धि तीसे बढत है, सबै रोग जरि जाय !!
आइये जाने छाछ के लाभ।
भोजनान्ते पिबेत त्क्रं वैद्यस्य किं प्रयोजनम !!
भोजन के उपरान्त छाछ पीने पर वैद्द की कया आवश्यकता है ?
जिन लोगों को खाना ठीक से न पचने की शिकायत होती है। उन्हें रोजाना छाछ में भुने जीरे का चूर्ण, काली मिर्च का चूर्ण और सेंधा नमक का चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर धीरे-धीरे पीना चाहिए। इससे पाचक अग्रि तेज हो जाएगी।
गर्मी के कारण अगर दस्त हो रही हो तो बरगद की जटा को पीसकर और छानकर छाछ में मिलाकर पीएं।
छाछ में मिश्री, काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर रोजाना पीने से एसीडिटी जड़ से साफ हो जाती है।
अगर कब्ज की शिकायत बनी रहती हो तो अजवाइन मिलाकर छाछा पीएं। पेट की सफाई के लिए गर्मियों में पुदीना मिलाकर लस्सी बनाकर पीएं।
मट्ठे को रखने के लिए पीतल, तांबे व कांसे के बर्तन का प्रयोग न करें। इन धातु से बनने बर्तनों में रखने से मट्ठा जहर समान हो जाएगा। सदैव कांच या मिट्टी के बर्तन का प्रयोग करें।
दही को जमाने में मिट्टी से बने बर्तन का प्रयोग करना उत्तम रहता है।
वर्षा काल में दही या मट्ठे का प्रयोग न करें।
भोजन के बाद दही सेवन बिल्कुल न करें, बल्कि मट्ठे का सेवन अवश्य करें।
तेज बुखार या बदन दर्द, जुकाम अथवा जोड़ों के दर्द में मट्ठा नहीं लेना चाहिए।
क्षय रोगी को मट्ठा नहीं लेना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति बाहर से ज्यादा थक कर आया हो, तो तुरंत दही या मट्ठा न लें।
दही या मट्ठा कभी बासी नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसकी खटास आंतो को नुकसान पहुंचाती है। इसके कारण से खांसी आने लगती है।
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छाछ भूख बढाती है और पाचन शक्ति ठीक करती है, यह शरीर और ह्रदय जो बल देने वाली तथा तर्प्तिकर है, कफ़रोग, वायुविक्रति एवं अग्निमांध में इसका सेवन हितकर है, वातजन्य विकारों में छाछ में पीपर व सेंधा नमक मिलाकर कफ़-विक्रति में आजवायन, सौंठ, काली मिर्च, पीपर व सेंधा नमक मिलाकर तथा पित्तज विकारों में जीरा व मिश्री मिलाकर छाछ का सेवन करना लाभदायी है, संग्रहणी व अर्श में सोंठ, काली मिर्च और पीपर समभाग लेकर बनाये गये एक ग्राम चूर्ण को दो सौ मि.लि. छाछ के साथ ले । जो भोरहि माठा पियत है, जीरा नमक मिलाय ! बल बुद्धि तीसे बढत है, सबै रोग जरि जाय !! आइये जाने छाछ के लाभ। भोजनान्ते पिबेत त्क्रं वैद्यस्य किं प्रयोजनम !! भोजन के उपरान्त छाछ पीने पर वैद्द की कया आवश्यकता है ? जिन लोगों को खाना ठीक से न पचने की शिकायत होती है। उन्हें रोजाना छाछ में भुने जीरे का चूर्ण, काली मिर्च का चूर्ण और सेंधा नमक का चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर धीरे-धीरे पीना चाहिए। इससे पाचक अग्रि तेज हो जाएगी। गर्मी के कारण अगर दस्त हो रही हो तो बरगद की जटा को पीसकर और छानकर छाछ में मिलाकर पीएं। छाछ में मिश्री, काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर रोजाना पीने से एसीडिटी जड़ से साफ हो जाती है। अगर कब्ज की शिकायत बनी रहती हो तो अजवाइन मिलाकर छाछा पीएं। पेट की सफाई के लिए गर्मियों में पुदीना मिलाकर लस्सी बनाकर पीएं। मट्ठे को रखने के लिए पीतल, तांबे व कांसे के बर्तन का प्रयोग न करें। इन धातु से बनने बर्तनों में रखने से मट्ठा जहर समान हो जाएगा। सदैव कांच या मिट्टी के बर्तन का प्रयोग करें। दही को जमाने में मिट्टी से बने बर्तन का प्रयोग करना उत्तम रहता है। वर्षा काल में दही या मट्ठे का प्रयोग न करें। भोजन के बाद दही सेवन बिल्कुल न करें, बल्कि मट्ठे का सेवन अवश्य करें। तेज बुखार या बदन दर्द, जुकाम अथवा जोड़ों के दर्द में मट्ठा नहीं लेना चाहिए। क्षय रोगी को मट्ठा नहीं लेना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बाहर से ज्यादा थक कर आया हो, तो तुरंत दही या मट्ठा न लें। दही या मट्ठा कभी बासी नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसकी खटास आंतो को नुकसान पहुंचाती है। इसके कारण से खांसी आने लगती है।
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भारत ने रक्षा के क्षेत्र में एक और अहम पड़ाव को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। भारतीय रक्षा अनुसंधान संस्थान (DRDO) ने अपने एक नए टेस्ट में सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम (QRSAM) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। यह मिसाइल सिस्टम हर मानकों पर खरा उतरा है।
मिली जानकारी के अनुसार इस टेस्ट को डीआरडीओ और भारतीय सेना ने मिलकर किया था। इस मिसाइल सिस्टम को ओडिशा में स्थित चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से लॉन्च किया गया था। इस दौरान सतह से हवा में मार करने वाली त्वरित प्रतिक्रिया मिसाइल (QRSAM) सिस्टम के 6 फायर किए गए। जिसमें यह मिसाइल पूरी तरह से सफल रही है।
परीक्षण के बाद डीआरडीओ ने कहा- "हाई स्पीड वाले हवाई लक्ष्यों के खिलाफ परीक्षण किए गए थे। इसमें लंबी दूरी की मध्यम ऊंचाई, कम दूरी की उच्च ऊंचाई, युद्धाभ्यास लक्ष्य और दो मिसाइलों के साथ सैल्वो लॉन्च शामिल था। "
इसके साथ ही मिसाइल सिस्टम को दिन और रात दोनों ही समयों में लॉन्च करने का टेस्ट भी किया गया। जिसमें यह सफल रहा। डीआरडीओ ने कहा कि परीक्षण सफल रहे और मिशन के सभी उद्देश्यों को पूरा किया गया।
डीआरडीओ और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इस मिसाइल सिस्टम का परीक्षण किया गया। इस टेस्ट में स्वदेशी आरएफ, मोबाइल लांचर, पूरी तरह से स्वचालित कमांड और नियंत्रण प्रणाली, निगरानी और बहु-कार्य रडार के साथ मिसाइल को लॉन्च किया गया था।
बता दें कि यह मिसाइल सिस्टम दुश्मन और हथियारों दोनों को खोजकर मारने की क्षमता रखता है। इसमें लगे स्वदेशी उपकरण इसे एक अलग ही पहचान देते हैं। जिस मोबाइल लॉन्चर से इसे लॉन्च किया जाता है, वो फायर करने के बाद अपनी जगह को तुरंत बदलने की भी क्षमता रखता है, जिससे दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाते हैं।
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भारत ने रक्षा के क्षेत्र में एक और अहम पड़ाव को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। भारतीय रक्षा अनुसंधान संस्थान ने अपने एक नए टेस्ट में सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। यह मिसाइल सिस्टम हर मानकों पर खरा उतरा है। मिली जानकारी के अनुसार इस टेस्ट को डीआरडीओ और भारतीय सेना ने मिलकर किया था। इस मिसाइल सिस्टम को ओडिशा में स्थित चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज से लॉन्च किया गया था। इस दौरान सतह से हवा में मार करने वाली त्वरित प्रतिक्रिया मिसाइल सिस्टम के छः फायर किए गए। जिसमें यह मिसाइल पूरी तरह से सफल रही है। परीक्षण के बाद डीआरडीओ ने कहा- "हाई स्पीड वाले हवाई लक्ष्यों के खिलाफ परीक्षण किए गए थे। इसमें लंबी दूरी की मध्यम ऊंचाई, कम दूरी की उच्च ऊंचाई, युद्धाभ्यास लक्ष्य और दो मिसाइलों के साथ सैल्वो लॉन्च शामिल था। " इसके साथ ही मिसाइल सिस्टम को दिन और रात दोनों ही समयों में लॉन्च करने का टेस्ट भी किया गया। जिसमें यह सफल रहा। डीआरडीओ ने कहा कि परीक्षण सफल रहे और मिशन के सभी उद्देश्यों को पूरा किया गया। डीआरडीओ और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इस मिसाइल सिस्टम का परीक्षण किया गया। इस टेस्ट में स्वदेशी आरएफ, मोबाइल लांचर, पूरी तरह से स्वचालित कमांड और नियंत्रण प्रणाली, निगरानी और बहु-कार्य रडार के साथ मिसाइल को लॉन्च किया गया था। बता दें कि यह मिसाइल सिस्टम दुश्मन और हथियारों दोनों को खोजकर मारने की क्षमता रखता है। इसमें लगे स्वदेशी उपकरण इसे एक अलग ही पहचान देते हैं। जिस मोबाइल लॉन्चर से इसे लॉन्च किया जाता है, वो फायर करने के बाद अपनी जगह को तुरंत बदलने की भी क्षमता रखता है, जिससे दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाते हैं।
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क्या आरई / मैक्स आपके लिए सही है? 1 9 73 में स्थापित, आरई / मैक्स® फ़्रैंचाइज़ी के पास अब 100 से अधिक क्षेत्रों और देशों में 115,000 से अधिक एजेंट हैं। 2016 के फ्रेंचाइजी टाइम्स सर्वेक्षण में इसे नंबर एक रियल एस्टेट फ़्रैंचाइज़ी और 8 वें सर्वश्रेष्ठ फ्रेंचाइजी का नाम दिया गया था। उस साल कुल बिक्री वॉल्यूम वृद्धि में यह नंबर दो था।
क्या आरई / मैक्स इतना सफल बनाता है? मूल आरई / मैक्स आधार एजेंटों को अपने व्यवसाय को चलाने की स्वतंत्रता और उन्हें अपने कमीशन का 100 प्रतिशत भुगतान करने की अनुमति देना था।
एजेंट अपने कार्यालय के खर्चों के लिए "डेस्क शुल्क" के माध्यम से भुगतान करेंगे और अपने स्वयं के विपणन खर्च का भुगतान करेंगे। तब से चीजें थोड़ी-थोड़ी बदल गई हैं, लेकिन फ्रेंचाइजी स्पष्ट रूप से अभी भी संपन्न है।
एक पूरी तरह से स्वायत्त व्यवसाय के करीब एक मॉडल बनाकर, आरई / MAX अधिक अनुभवी एजेंट को आकर्षित करना चाहता था। कार्यालय की जगह, फोन, प्रतियां, विपणन, आदि के लिए व्यय एजेंट की सभी ज़िम्मेदारी है, इसलिए स्थापित ट्रैक रिकॉर्ड और वित्तीय स्थिरता वाले लोग इस फ्रेंचाइजी में शामिल होने की अधिक संभावना रखते हैं। अपने एजेंटों से बात करते हुए, यह स्पष्ट है कि वे अपनी आजादी और सभी अर्जित कमीशन को बनाए रखने की क्षमता को महत्व देते हैं।
एजेंट के लिए शुल्क क्या हैं?
नए एजेंटों को अब उनके कमीशन का 100 प्रतिशत नहीं मिलता है। अब यह 5 प्रतिशत कॉर्पोरेट विपणन शुल्क शीर्ष पर आने वाला 95 प्रतिशत है। यह राष्ट्रीय विज्ञापन और राष्ट्रीय आईडीएक्स खोज लिंकअप सिस्टम के लिए भुगतान करता है जो राष्ट्रीय कॉर्पोरेट वेबसाइट पर उपलब्ध देश में सभी लिस्टिंग करने का अधिकार रखता है।
अन्य फीस में प्रति सहयोगी $ 138 प्रति माह के प्रबंधन शुल्क, 400 डॉलर प्रति सहयोगी की वार्षिक देनदारी, प्रति सहयोगी $ 131 प्रति माह का एक प्रचार शुल्क, नवीनीकरण शुल्क और गर्म हवा के गुब्बारे फंड तक सीमित नहीं है।
शुरुआती फ़्रैंचाइज़ी निवेश का अनुमान $ 37,500 से $ 225,000 तक कहीं भी किया जाता है जिसमें कार्यालय सेटअप, सूची और आपूर्ति, साइनेज और विविध उद्घाटन लागतों की लागत शामिल है, जिनमें से अधिकांश फ़्रैंचाइजी द्वारा निर्धारित और नियंत्रित किया जा सकता है।
मताधिकार में 35,000 डॉलर की तरल नकद आवश्यकता है, लेकिन यह प्रारंभिक फ़्रैंचाइज़ी शुल्क के लिए इन-हाउस वित्तपोषण प्रदान करता है जो $ 10,000 से $ 25,000 डॉलर तक चला सकता है।
कार्यालय और सेवाओं के लिए शुल्क जो एजेंट और ब्रोकर अंतरिक्ष और सेवा आवश्यकताओं के आधार पर निर्धारित करते हैं, पर बातचीत की जा सकती है।
कई आरई / मैक्स ब्रोकर अधिक एजेंटों को आकर्षित करने के प्रयास में विभाजित सेटअप प्रदान करते हैं, जिनमें से कई स्थापित होने से पहले मासिक ओवरहेड व्यय से डर सकते हैं। कम उदाहरण वाले नए एजेंटों के लिए एक उदाहरण 70/30 है।
स्वतंत्र लेखाकारों या वकीलों के एक समूह को विज़ुअलाइज़ करें जो वित्तीय कारणों, ग्राहक पहुंच और विपणन उद्देश्यों के लिए कार्यालय परिसर में स्थान साझा करते हैं। उनके सामान्य कार्यालय संरचना के अलावा, वे प्रतिस्पर्धी हैं और सामाजिक या साझा कार्यालय संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं।
आरई / मैक्स कार्यालय में निश्चित रूप से व्यापारिक लोगों के एक समूह के अपने तरीके से अलग-अलग अनुभव है, लेकिन फ्रेंचाइजी और एक समग्र सहकारी दृष्टिकोण के साथ एक निश्चित पहचान भी है। उदाहरण के लिए, आपको विशेष रूप से निजी कार्यालयों के मामले में सामान और शैलियों की महान व्यक्तित्व मिल जाएगी।
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क्या आरई / मैक्स आपके लिए सही है? एक नौ तिहत्तर में स्थापित, आरई / मैक्स® फ़्रैंचाइज़ी के पास अब एक सौ से अधिक क्षेत्रों और देशों में एक सौ पंद्रह,शून्य से अधिक एजेंट हैं। दो हज़ार सोलह के फ्रेंचाइजी टाइम्स सर्वेक्षण में इसे नंबर एक रियल एस्टेट फ़्रैंचाइज़ी और आठ वें सर्वश्रेष्ठ फ्रेंचाइजी का नाम दिया गया था। उस साल कुल बिक्री वॉल्यूम वृद्धि में यह नंबर दो था। क्या आरई / मैक्स इतना सफल बनाता है? मूल आरई / मैक्स आधार एजेंटों को अपने व्यवसाय को चलाने की स्वतंत्रता और उन्हें अपने कमीशन का एक सौ प्रतिशत भुगतान करने की अनुमति देना था। एजेंट अपने कार्यालय के खर्चों के लिए "डेस्क शुल्क" के माध्यम से भुगतान करेंगे और अपने स्वयं के विपणन खर्च का भुगतान करेंगे। तब से चीजें थोड़ी-थोड़ी बदल गई हैं, लेकिन फ्रेंचाइजी स्पष्ट रूप से अभी भी संपन्न है। एक पूरी तरह से स्वायत्त व्यवसाय के करीब एक मॉडल बनाकर, आरई / MAX अधिक अनुभवी एजेंट को आकर्षित करना चाहता था। कार्यालय की जगह, फोन, प्रतियां, विपणन, आदि के लिए व्यय एजेंट की सभी ज़िम्मेदारी है, इसलिए स्थापित ट्रैक रिकॉर्ड और वित्तीय स्थिरता वाले लोग इस फ्रेंचाइजी में शामिल होने की अधिक संभावना रखते हैं। अपने एजेंटों से बात करते हुए, यह स्पष्ट है कि वे अपनी आजादी और सभी अर्जित कमीशन को बनाए रखने की क्षमता को महत्व देते हैं। एजेंट के लिए शुल्क क्या हैं? नए एजेंटों को अब उनके कमीशन का एक सौ प्रतिशत नहीं मिलता है। अब यह पाँच प्रतिशत कॉर्पोरेट विपणन शुल्क शीर्ष पर आने वाला पचानवे प्रतिशत है। यह राष्ट्रीय विज्ञापन और राष्ट्रीय आईडीएक्स खोज लिंकअप सिस्टम के लिए भुगतान करता है जो राष्ट्रीय कॉर्पोरेट वेबसाइट पर उपलब्ध देश में सभी लिस्टिंग करने का अधिकार रखता है। अन्य फीस में प्रति सहयोगी एक सौ अड़तीस डॉलर प्रति माह के प्रबंधन शुल्क, चार सौ डॉलर प्रति सहयोगी की वार्षिक देनदारी, प्रति सहयोगी एक सौ इकतीस डॉलर प्रति माह का एक प्रचार शुल्क, नवीनीकरण शुल्क और गर्म हवा के गुब्बारे फंड तक सीमित नहीं है। शुरुआती फ़्रैंचाइज़ी निवेश का अनुमान सैंतीस डॉलर,पाँच सौ से दो सौ पच्चीस डॉलर,शून्य तक कहीं भी किया जाता है जिसमें कार्यालय सेटअप, सूची और आपूर्ति, साइनेज और विविध उद्घाटन लागतों की लागत शामिल है, जिनमें से अधिकांश फ़्रैंचाइजी द्वारा निर्धारित और नियंत्रित किया जा सकता है। मताधिकार में पैंतीस,शून्य डॉलर की तरल नकद आवश्यकता है, लेकिन यह प्रारंभिक फ़्रैंचाइज़ी शुल्क के लिए इन-हाउस वित्तपोषण प्रदान करता है जो दस डॉलर,शून्य से पच्चीस डॉलर,शून्य डॉलर तक चला सकता है। कार्यालय और सेवाओं के लिए शुल्क जो एजेंट और ब्रोकर अंतरिक्ष और सेवा आवश्यकताओं के आधार पर निर्धारित करते हैं, पर बातचीत की जा सकती है। कई आरई / मैक्स ब्रोकर अधिक एजेंटों को आकर्षित करने के प्रयास में विभाजित सेटअप प्रदान करते हैं, जिनमें से कई स्थापित होने से पहले मासिक ओवरहेड व्यय से डर सकते हैं। कम उदाहरण वाले नए एजेंटों के लिए एक उदाहरण सत्तर/तीस है। स्वतंत्र लेखाकारों या वकीलों के एक समूह को विज़ुअलाइज़ करें जो वित्तीय कारणों, ग्राहक पहुंच और विपणन उद्देश्यों के लिए कार्यालय परिसर में स्थान साझा करते हैं। उनके सामान्य कार्यालय संरचना के अलावा, वे प्रतिस्पर्धी हैं और सामाजिक या साझा कार्यालय संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं। आरई / मैक्स कार्यालय में निश्चित रूप से व्यापारिक लोगों के एक समूह के अपने तरीके से अलग-अलग अनुभव है, लेकिन फ्रेंचाइजी और एक समग्र सहकारी दृष्टिकोण के साथ एक निश्चित पहचान भी है। उदाहरण के लिए, आपको विशेष रूप से निजी कार्यालयों के मामले में सामान और शैलियों की महान व्यक्तित्व मिल जाएगी।
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गर्मियों में नमी कम होती है और तापमान बढ़ जाता है इसलिए कोई भी चीज आसानी से आग पकड़ लेती है। इस मौसम में इलेक्ट्रिक वायर भी जल्दी गर्म हो जाती हैं और जरा-सा ज्यादा लोड पड़ने पर स्पार्क होने से आग लग जाती है। घर में ऐसी कई चीजें होती हैं, जो आग लगने की वजह बन सकती हैं। इनका ध्यान रखना जरूरी है।
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गर्मियों में नमी कम होती है और तापमान बढ़ जाता है इसलिए कोई भी चीज आसानी से आग पकड़ लेती है। इस मौसम में इलेक्ट्रिक वायर भी जल्दी गर्म हो जाती हैं और जरा-सा ज्यादा लोड पड़ने पर स्पार्क होने से आग लग जाती है। घर में ऐसी कई चीजें होती हैं, जो आग लगने की वजह बन सकती हैं। इनका ध्यान रखना जरूरी है।
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ये हैं इस वक्त की 5 बड़ी खबरें।
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28 बीजेपी सांसदों का कटेगा टिकट!
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गाजियाबाद के लोनी में दर्दनाक हादसा, पंपिंग स्टेशन के टैंक में 2 कर्मचारी डूबे, बचाने गया एक और कर्मचारी जहरीली गैस का शिकार,
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ये हैं इस वक्त की पाँच बड़ी खबरें। एक. अट्ठाईस बीजेपी सांसदों का कटेगा टिकट! दो. तीन. चार. गाजियाबाद के लोनी में दर्दनाक हादसा, पंपिंग स्टेशन के टैंक में दो कर्मचारी डूबे, बचाने गया एक और कर्मचारी जहरीली गैस का शिकार, पाँच.
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जॉर्जिया ने पहली बार ओलंपिक खेलों को 1994 में एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भाग लिया और तब से एथलीटों को हर ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों और शीतकालीन ओलंपिक खेलों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए भेजा है। इससे पहले, जॉर्जियाई एथलीटों ने 1952 से 1988 तक ओलंपिक में सोवियत संघ के हिस्से के रूप में भाग लिया था और सोवियत संघ के विघटन के बाद, जॉर्जिया 1992 में एकीकृत टीम का हिस्सा था। जॉर्जियाई एथलीटों ने कुल 33 पदक जीते हैं, ज्यादातर कुश्ती, जूडो और वेटलिफ्टिंग में। 1989 में जॉर्जियाई नेशनल ओलंपिक समिति बनाई गई थी और 1993 में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा मान्यता प्राप्त थी। .
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जॉर्जिया ने पहली बार ओलंपिक खेलों को एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भाग लिया और तब से एथलीटों को हर ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों और शीतकालीन ओलंपिक खेलों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए भेजा है। इससे पहले, जॉर्जियाई एथलीटों ने एक हज़ार नौ सौ बावन से एक हज़ार नौ सौ अठासी तक ओलंपिक में सोवियत संघ के हिस्से के रूप में भाग लिया था और सोवियत संघ के विघटन के बाद, जॉर्जिया एक हज़ार नौ सौ बानवे में एकीकृत टीम का हिस्सा था। जॉर्जियाई एथलीटों ने कुल तैंतीस पदक जीते हैं, ज्यादातर कुश्ती, जूडो और वेटलिफ्टिंग में। एक हज़ार नौ सौ नवासी में जॉर्जियाई नेशनल ओलंपिक समिति बनाई गई थी और एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा मान्यता प्राप्त थी। . शून्य संबंधों।
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Publish Date: Tue, 19 Apr 2022 20:16:37 (IST)
बेजुबान परिंदों की खातिर बाजार में आए नारियल के जूट से तैयार शानदार Birds Home। लकड़ी के बने बर्ड्स होम की अपेक्षा ये नए Bird House परिंदों के लिए सुरक्षित और सुकून दायक हैं। गर्मियों के मौसम में ये खूबसूरत बर्ड्स होम गिफ्ट भी किए जा सकते हैं। ये नए बर्ड्स होम लखनऊ ही नहीं सभी शहरों में लोगों को पसंद आ रहे हैं। बता दें कि लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में नारियल के जूट से बने इन बर्ड्स होम का कारोबार काफी तेजी से बढ़ रहा है।
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Publish Date: Tue, उन्नीस अप्रैल दो हज़ार बाईस बीस:सोलह:सैंतीस बेजुबान परिंदों की खातिर बाजार में आए नारियल के जूट से तैयार शानदार Birds Home। लकड़ी के बने बर्ड्स होम की अपेक्षा ये नए Bird House परिंदों के लिए सुरक्षित और सुकून दायक हैं। गर्मियों के मौसम में ये खूबसूरत बर्ड्स होम गिफ्ट भी किए जा सकते हैं। ये नए बर्ड्स होम लखनऊ ही नहीं सभी शहरों में लोगों को पसंद आ रहे हैं। बता दें कि लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में नारियल के जूट से बने इन बर्ड्स होम का कारोबार काफी तेजी से बढ़ रहा है। .
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एसएसबी के आईजी संजय कुमार ने कहा कि शीघ्र ही इंडो-नेपाल सीमांकन विवाद सुलझ जाएगा। उन्होंने बताया कि सीमा विवाद खत्म करने के लिए पिलर लगाने का कार्य शुरू कर दिया है। एसएसबी पंचम वाहिनी के निरीक्षण के दौरान पत्रकार वार्ता में उन्होंने ये जानकारी दी। शनिवार को एसएसबी के आईजी संजय कुमार ने वाहिनी का निरीक्षण किया। यहां हुई वार्ता में उन्होंने कहा कि सीमा पर मादक पदार्थों की तस्करी, वन्य जीवों को शिकार रोकने और अन्य आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए सीसीटीवी, नाइट विजन उपकरण और थर्मल इमेजिंग आदि लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमा पर राजस्व, पुलिस और एसएसबी बेहतर तालमेल से कार्य कर रही हैं। बताया कि सीमा क्षेत्र में संचार और सड़क मार्गों को बेहतर किया जा रहा है। वार्ता के दौरान कमांडेंट प्रमोद देवरानी समेत एसएसबी के कई अधिकारी मौजूद रहे।
हालांकि एसएसबी के आईजी ने जल्द ही भारत-नेपाल सीमा विवाद सुलझाने की बात कही है। वहीं दूसरी ओर कोरोना के कारण फिलहाल इस साल सीमांकन की संभावना बेहद कम है। उधर, नेपाल में भी राजनीतिक उथल पुथल से हालात सही नहीं है। सीमांकन शुरू होने से पहले दोनों देशों के अधिकारियों के बीच अलग-अलग स्तर पर कई बैठकें होती हैं। उधर, सर्वे ऑफ इंडिया के अफसरों के मुताबिक फिलहाल जल्द ही सीमांकन के आसार कम हैं।
चम्पावत। आईजी ने पंचम वाहिनी का निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने 22. 65 करोड़ रुपये से आवासीय भवन का शुभारंभ किया। उन्होंने एसएसबी जवानों की समस्याओं को भी सुना। इससे पूर्व उन्होंने बीते शुक्रवार को सीमांत पंचेश्वर में दस बेड के कोविड अस्पताल का उद्घाटन किया। अस्पताल में ऑक्सीजन कंसनट्रेक्ट भी लगाया गया है। कार्यक्रम के दौरान कमांडेंट प्रमोद देवरानी, सेकेंड कमांडर हरीश चंद्र जोशी, डिप्टी कमांउेंट हरेंद्र सिंह व संतोष पंडित, असिस्टेंट कमांडेंट घनश्याम पटेल व डॉ. शिवानी, निरीक्षक संचार संदीप कुमार, एसआई देवराम जाट, एएसआई संजीव के नाथ, अरुण कुमार और चंदन सिंह आदि मौजूद रहे।
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एसएसबी के आईजी संजय कुमार ने कहा कि शीघ्र ही इंडो-नेपाल सीमांकन विवाद सुलझ जाएगा। उन्होंने बताया कि सीमा विवाद खत्म करने के लिए पिलर लगाने का कार्य शुरू कर दिया है। एसएसबी पंचम वाहिनी के निरीक्षण के दौरान पत्रकार वार्ता में उन्होंने ये जानकारी दी। शनिवार को एसएसबी के आईजी संजय कुमार ने वाहिनी का निरीक्षण किया। यहां हुई वार्ता में उन्होंने कहा कि सीमा पर मादक पदार्थों की तस्करी, वन्य जीवों को शिकार रोकने और अन्य आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए सीसीटीवी, नाइट विजन उपकरण और थर्मल इमेजिंग आदि लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमा पर राजस्व, पुलिस और एसएसबी बेहतर तालमेल से कार्य कर रही हैं। बताया कि सीमा क्षेत्र में संचार और सड़क मार्गों को बेहतर किया जा रहा है। वार्ता के दौरान कमांडेंट प्रमोद देवरानी समेत एसएसबी के कई अधिकारी मौजूद रहे। हालांकि एसएसबी के आईजी ने जल्द ही भारत-नेपाल सीमा विवाद सुलझाने की बात कही है। वहीं दूसरी ओर कोरोना के कारण फिलहाल इस साल सीमांकन की संभावना बेहद कम है। उधर, नेपाल में भी राजनीतिक उथल पुथल से हालात सही नहीं है। सीमांकन शुरू होने से पहले दोनों देशों के अधिकारियों के बीच अलग-अलग स्तर पर कई बैठकें होती हैं। उधर, सर्वे ऑफ इंडिया के अफसरों के मुताबिक फिलहाल जल्द ही सीमांकन के आसार कम हैं। चम्पावत। आईजी ने पंचम वाहिनी का निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने बाईस. पैंसठ करोड़ रुपये से आवासीय भवन का शुभारंभ किया। उन्होंने एसएसबी जवानों की समस्याओं को भी सुना। इससे पूर्व उन्होंने बीते शुक्रवार को सीमांत पंचेश्वर में दस बेड के कोविड अस्पताल का उद्घाटन किया। अस्पताल में ऑक्सीजन कंसनट्रेक्ट भी लगाया गया है। कार्यक्रम के दौरान कमांडेंट प्रमोद देवरानी, सेकेंड कमांडर हरीश चंद्र जोशी, डिप्टी कमांउेंट हरेंद्र सिंह व संतोष पंडित, असिस्टेंट कमांडेंट घनश्याम पटेल व डॉ. शिवानी, निरीक्षक संचार संदीप कुमार, एसआई देवराम जाट, एएसआई संजीव के नाथ, अरुण कुमार और चंदन सिंह आदि मौजूद रहे।
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लखनऊः उत्तर प्रदेश के आगरा में बेरोजगारी के कारण एक परिवार ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में बेरोजगारी की बात लिखी है। आवास विकास सेक्टर 10 में रहने वाले सोनू शर्मा ने पत्नी गीता शर्मा और अपनी बेटी सृष्टि शर्मा के साथ गले में फांसी का फंदा डालकर ख़ुदकुशी कर ली। मामले की जानकारी तब हुई, जब छोटे बेटे ने अपनी बुआ को बताया कि 'कमरे में सब लटके हुए हैं, मुझे डर लग रहा है। '
पुलिस को मौके से सुसाइड नोट से मिला है, मगर पुलिस ने अभी उसे उजागर नहीं किया है। फ़िलहाल, पुलिस मामले की जाँच कर रही है और सुसाइड नोट की हैंड राइटिंग की मिलान मृतक सोनू के हैंड राइटिंग से कराई जा रही है। EWS के मकान नंबर 1046 में 38 साल के सोनू शर्मा अपनी 35 वर्षीय पत्नी मिथलेश, 9 वर्षीय बेटी सृष्टि और 9 साल के बेटे संग घर के ऊपरी हिस्से में रहते थे। मंगलवार रात को पूरा परिवार एक ही कमरे में साथ सो रहा था। सोनू का बेटा श्याम सुबह लगभग सात बजे नीचे आया और खेलने लग गया।
सोनू से पड़ोस में रहने वाली उसकी बुआ ने उसे घर से आटा लाने को कहा। सोनू अपने घर आटा लेने गया और लौटकर उसने बताया कि उसके पिता, मां और बहन कमरे में लटके हुए हैं। मृतक सोनू के जीजा विजय कश्यप और अन्य लोग जब घर पहुंचे, तो देखा कि तीनों की लाशें फंदे से लटकी हुईं हैं। जिसके बाद उन्होंने आनन फानन पुलिस को सूचना दी। इस मामले में SSP प्रभाकर चौधरी ने कहा कि घटनास्थल से एक बहुत भावुक तरीके से लिखा हुआ सुसाइड नोट बरामद हुआ है, मृतक बीते काफी दिनों से बेरोजगार था, तीनों (पति-पत्नी और बेटी) ने आपस में बात की और यह कदम उठाया। मृतक सोनू के बेटे ने कहा कि मैं सुबह नीचे खेलने आया था, ऊपर आटा लेने आया तो देखा तीनों लटके हुए थे।
मुस्लिमों और ईसाईयों तक कैसे पकड़ बनाएंगी भाजपा ? PM मोदी ने बताया 'गुरु मंत्र'
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लखनऊः उत्तर प्रदेश के आगरा में बेरोजगारी के कारण एक परिवार ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में बेरोजगारी की बात लिखी है। आवास विकास सेक्टर दस में रहने वाले सोनू शर्मा ने पत्नी गीता शर्मा और अपनी बेटी सृष्टि शर्मा के साथ गले में फांसी का फंदा डालकर ख़ुदकुशी कर ली। मामले की जानकारी तब हुई, जब छोटे बेटे ने अपनी बुआ को बताया कि 'कमरे में सब लटके हुए हैं, मुझे डर लग रहा है। ' पुलिस को मौके से सुसाइड नोट से मिला है, मगर पुलिस ने अभी उसे उजागर नहीं किया है। फ़िलहाल, पुलिस मामले की जाँच कर रही है और सुसाइड नोट की हैंड राइटिंग की मिलान मृतक सोनू के हैंड राइटिंग से कराई जा रही है। EWS के मकान नंबर एक हज़ार छियालीस में अड़तीस साल के सोनू शर्मा अपनी पैंतीस वर्षीय पत्नी मिथलेश, नौ वर्षीय बेटी सृष्टि और नौ साल के बेटे संग घर के ऊपरी हिस्से में रहते थे। मंगलवार रात को पूरा परिवार एक ही कमरे में साथ सो रहा था। सोनू का बेटा श्याम सुबह लगभग सात बजे नीचे आया और खेलने लग गया। सोनू से पड़ोस में रहने वाली उसकी बुआ ने उसे घर से आटा लाने को कहा। सोनू अपने घर आटा लेने गया और लौटकर उसने बताया कि उसके पिता, मां और बहन कमरे में लटके हुए हैं। मृतक सोनू के जीजा विजय कश्यप और अन्य लोग जब घर पहुंचे, तो देखा कि तीनों की लाशें फंदे से लटकी हुईं हैं। जिसके बाद उन्होंने आनन फानन पुलिस को सूचना दी। इस मामले में SSP प्रभाकर चौधरी ने कहा कि घटनास्थल से एक बहुत भावुक तरीके से लिखा हुआ सुसाइड नोट बरामद हुआ है, मृतक बीते काफी दिनों से बेरोजगार था, तीनों ने आपस में बात की और यह कदम उठाया। मृतक सोनू के बेटे ने कहा कि मैं सुबह नीचे खेलने आया था, ऊपर आटा लेने आया तो देखा तीनों लटके हुए थे। मुस्लिमों और ईसाईयों तक कैसे पकड़ बनाएंगी भाजपा ? PM मोदी ने बताया 'गुरु मंत्र'
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टीवी शो 'उतरन' से फेम हुई श्रीजिता डे इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बंटोर रही हैं। 'उतरन' श्रीजिता डे ने मुक्ता का रोल निभाकर घर-घर में अपनी पहचान बनाई थीं। श्रीजिता डे सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं अक्सर अपनी हॉट एंड बोल्ड लुक उनके सोशल मीडिया पर शेयर करती हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ।
इन दिनों श्रीजिता डे कश्मीर की वादियों में घूम रही हैं लेकिन श्रीजिता डे यहां कुछ ऐसा कर डाला। जिससे देखकर हर कोई चौंक रहा है। माइनस 10 डिग्री टेंप्रेचर में श्रीजिता ने अपना बिकिनी फोटोशूट करवाया है। इन तस्वीरों में श्रीजिता गोल्डन कलर की बिकिनी पहने नजर आ रही हैं। गोल्डन बिकनी में श्रीजिता डे बेहद ही सेक्सी और हॉट लग रही हैं।
श्रीजिता डे ने अपने करियर की शुरुआत एकता कपूर की सीरियल से की थी। एकता कपूर फिर एक बार अपने अगने सीरियल 'कर्म अपना-अपना' के लिए साइन किया था। सीरियल और टीवी शो के अलावा श्रीजिता डे फिल्मों में भी दिख चुकी हैं। वो फिल्म टशन में पार्वती का किरदार निभाती दिखाई दी थीं। श्रीजिता डे ने कई एड भी किए है। साथ ही कई डिजाइनर के लिए रैंप शो करते हुए भी दिखी हैं।
श्रीजिता अक्सर अपने सोशल हैंडल पर बोल्ड फोटोशूट की पिक्चर्स पोस्ट करती रहती हैं।
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टीवी शो 'उतरन' से फेम हुई श्रीजिता डे इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बंटोर रही हैं। 'उतरन' श्रीजिता डे ने मुक्ता का रोल निभाकर घर-घर में अपनी पहचान बनाई थीं। श्रीजिता डे सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं अक्सर अपनी हॉट एंड बोल्ड लुक उनके सोशल मीडिया पर शेयर करती हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। इन दिनों श्रीजिता डे कश्मीर की वादियों में घूम रही हैं लेकिन श्रीजिता डे यहां कुछ ऐसा कर डाला। जिससे देखकर हर कोई चौंक रहा है। माइनस दस डिग्री टेंप्रेचर में श्रीजिता ने अपना बिकिनी फोटोशूट करवाया है। इन तस्वीरों में श्रीजिता गोल्डन कलर की बिकिनी पहने नजर आ रही हैं। गोल्डन बिकनी में श्रीजिता डे बेहद ही सेक्सी और हॉट लग रही हैं। श्रीजिता डे ने अपने करियर की शुरुआत एकता कपूर की सीरियल से की थी। एकता कपूर फिर एक बार अपने अगने सीरियल 'कर्म अपना-अपना' के लिए साइन किया था। सीरियल और टीवी शो के अलावा श्रीजिता डे फिल्मों में भी दिख चुकी हैं। वो फिल्म टशन में पार्वती का किरदार निभाती दिखाई दी थीं। श्रीजिता डे ने कई एड भी किए है। साथ ही कई डिजाइनर के लिए रैंप शो करते हुए भी दिखी हैं। श्रीजिता अक्सर अपने सोशल हैंडल पर बोल्ड फोटोशूट की पिक्चर्स पोस्ट करती रहती हैं।
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देशभर में कोरोनावायरस (Coronavirus) का कहर एक बार फिर जारी है. शुक्रवार को दिल्ली एम्स (AIIMS) के 35 डॉक्टर कोरोना संक्रमित पाए गए हैं. वहीं बताया जा रहा है कि ये सभी डॉक्टर कोरोना वैक्सीन की दोनों डॉज लगवा चुके थे. वहीं बता दें कि इससे पहले गुरुवार को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल (Sir Ganga Ram Hospital) के 37 डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. इनमें 32 डॉक्टर होम क्वारंटाइन हैं, जबकि 5 को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पिछले 24 घंटे में दिल्ली में 7,437 नए मामले सामने आए. 139 दिनों के बाद दिल्ली में एक दिन में मामले की संख्या 7 हजार के पार पहुंची है.
गौरतलब है कि दिल्ली में बढ़ते कोरोना के मामले को देखते हुए एम्ल ओपीडी को बंद रखने का फैसला किया गया है. हालांकि ऑनलाइन माध्यम से रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है. एम्स के स्पेशियेलिटी क्लीनिक सभी सेंटर्स भी गुरुवार से अस्थायी तौर पर बंद कर दिए गए हैं. कोविड के लगातार बढ़ते मामलों के बाद एम्स प्रशासन की ओर से यह फैसला लिया गया है.
दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों के सरकार ने नाइट कर्फ्यू का ऐलान किया है. नाइट कर्फ्यू रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक लागू रहेगा, हालांकि इस दौरान आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों को नाइट कर्फ्यू से छूट रहेगी.
देश में कोरोनावायरस को लेकर स्थिति हर गुजरते दिन के साथ बिगड़ती जा रही है. यहां पिछले 24 घंटों में संक्रमण के 1,31,968 नए मामले 780 मौतें दर्ज हुई हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि देश में सक्रिय मामलों की संख्या 9,79,608 हो गई है भारत कोरोना से बुरी तरह प्रभावित देशों में दुनिया में चौथे नंबर पर आ गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 1,67,642 हो गई है.
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देशभर में कोरोनावायरस का कहर एक बार फिर जारी है. शुक्रवार को दिल्ली एम्स के पैंतीस डॉक्टर कोरोना संक्रमित पाए गए हैं. वहीं बताया जा रहा है कि ये सभी डॉक्टर कोरोना वैक्सीन की दोनों डॉज लगवा चुके थे. वहीं बता दें कि इससे पहले गुरुवार को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के सैंतीस डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. इनमें बत्तीस डॉक्टर होम क्वारंटाइन हैं, जबकि पाँच को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पिछले चौबीस घंटाटे में दिल्ली में सात,चार सौ सैंतीस नए मामले सामने आए. एक सौ उनतालीस दिनों के बाद दिल्ली में एक दिन में मामले की संख्या सात हजार के पार पहुंची है. गौरतलब है कि दिल्ली में बढ़ते कोरोना के मामले को देखते हुए एम्ल ओपीडी को बंद रखने का फैसला किया गया है. हालांकि ऑनलाइन माध्यम से रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है. एम्स के स्पेशियेलिटी क्लीनिक सभी सेंटर्स भी गुरुवार से अस्थायी तौर पर बंद कर दिए गए हैं. कोविड के लगातार बढ़ते मामलों के बाद एम्स प्रशासन की ओर से यह फैसला लिया गया है. दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों के सरकार ने नाइट कर्फ्यू का ऐलान किया है. नाइट कर्फ्यू रात दस बजे से सुबह पाँच बजे तक लागू रहेगा, हालांकि इस दौरान आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों को नाइट कर्फ्यू से छूट रहेगी. देश में कोरोनावायरस को लेकर स्थिति हर गुजरते दिन के साथ बिगड़ती जा रही है. यहां पिछले चौबीस घंटाटों में संक्रमण के एक,इकतीस,नौ सौ अड़सठ नए मामले सात सौ अस्सी मौतें दर्ज हुई हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि देश में सक्रिय मामलों की संख्या नौ,उन्यासी,छः सौ आठ हो गई है भारत कोरोना से बुरी तरह प्रभावित देशों में दुनिया में चौथे नंबर पर आ गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर एक,सरसठ,छः सौ बयालीस हो गई है.
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- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण?
जिम जाकर अक्सर हम अपने अपर बॉडी को टोन करने और मजबूती देने पर फोकस करते हैं। लोगों को लगता है कि पैरों को मजबूत बनाने के लिए सिर्फ रनिंग या जॉगिंग करना काफी होता है। लेकिन ऐसा नहीं है पैरों की मसल्स से आपकी स्ट्रेन्थ बढ़ती है, इतना ही नहीं आपके लेग्स दिखने में काफी अट्रेक्टिव भी लगते हैं। अगर आप जिम जाते हैं, तो वहां आप अपने लेग्स मसल्स को स्ट्रॉन्ग करने के लिए कुछ ऐसी एक्सरसाइज कर सकते हैं, जो आपके लेग्स को शेप देने और मजबूत करने में काफी मदद करेंगे।
बारबेल स्क्वाट सबसे कॉमन स्क्वाट एक्सरसाइज है, इस एक्सरसाइज के लिए जिम में मशीनें भी मौजूद होती हैं। इस वार्कआउट को लेग्स के लिए सबसे अच्छा एक्सरसाइज माना जाता है। स्क्वाट एक्सरसाइज तो आपने भी की होगी। लेकिन हाथों में वेट लेकर इस एक्सरसाइज को करने से आपके पैरों को अच्छी शेप और मजबूती मिलती है।
कैसे करें बारबेल स्क्वाट?
* इस एक्सरसाइज को करने के लिए सबसे पहले आप अपने दोनों पैरों को एक साथ थोड़ा स्पेस करके रखें। ताकि आप सही पोजिशन में बने रहे।
*अपने लेग्स मसल्स को स्ट्रॉन्ग करने के लिए सबसे पहले अपने सेट में हल्के वजन की चीजें शामिल करें।
* फिर इस वार्कआउट के लिए अपनी पीठ पर बारबेल रखकर स्क्वाट करें।
* अगर आपको ये एक्सरसाइज करने में मुश्किल हो रही है, तो आप किसी पार्टनर की मदद भी ले सकते हैं।
अपने पैरों को मजबूत करने और सही शेप देने के लिए लेग प्रेस एक्सरसाइज बेस्ट ऑप्शन है। जिम में इस एक्सरसाइज के लिए दो तरह की मशीनें उपलब्ध होती हैं, जिसमें एक मशीन पर आप बैठकर एक्सरसाइज करते हैं, दूसरे मशीन पर आप लेटकर एक्सरसाइज करते हैं।
लेग प्रेस एक्सरसाइज करने का तरीका?
* लेग प्रेस एक्सरसाइज करने के लिए आपको सबसे पहले जिम में लगी मशीन की सीट पर बैठना है।
* इसके बाद आप अपने दोनों पैरों को सामने लगी प्लेट पर सही से रख दें।
* इसके बाद पैरों की मदद से उस प्लेट को ऊपर नीचे करें।
* इस एक्सरसाइज को करते समय धीरे-धीरे अपने मशीन पर वेट बढ़ाए।
लेग एक्सटेंशन में आप अपने पैरों पर भार रखकर एक्सरसाइज करते हैं। ऐसा करने से आपके पैरों को मजबूती के साथ सही शेप मिलती है। इस एक्सरसाइज को करने के लिए जिम में लेग एक्सटेंशन मशीन मौजूद होती है। इस एक्सरसाइज की मदद से आपके पैरों के मसल्स यानि- ग्लूट्स, हैमस्ट्रिंग, क्वाड्स पर दबाव पड़ेगा।
कैसे करें लेग एक्सटेंशन एक्सरसाइज?
* लेग एक्सटेंशन एक्सरसाइज करने के लिए आपको सीट पर बैठकर अपने पैरों पर वेट रखना होता है।
* इसके बाद आपको उस वेट को अपने पैरों की मदद से ऊपर तक लेकर आना है, फिर धीरे-धीरे अपने पैरों को नीचे ले जाएं।
* इस एक्सरसाइज के 20-20 रेप्स के 2 सेट करें।
* लेकिन इस दौरान आपके एक्सरसाइज करने की स्पीड धीमी होनी चाहिए।
लंजेस एक्सरसाइज आपके बॉडी के लोवर पार्ट को मजबूत बनाने का काम करता है। इससे आपके पैरों की मसल्स काफी मजबूत होती है। ये एक्सरसाइज स्क्वॉट्स करने से ज्यादा मुश्किल होता है। इसमें आपके कोर मसल्स पर भी दबाव पड़ता है। आपके लेग्स को टोन करने के लिए भी लंजेस एक्सरसाइज बहुत फायदेमंद होता है।
कैसे करें लंजेस एक्सरसाइज ?
* लंजेस एक्सरसाइज करने के लिए आप जिम में रखे डंबल और प्लेट्स को अपने हाथों में लें।
* इसके बाद पहले अपने राइट लेग को पीछे लेकर जाएं और घुटने को जमीन से टच करते हुए दोबारा सीधे खड़े हो जाएं।
* अब अपने लेफ्ट लेग के साथ यहीं प्रोसेस दोहराएं।
* इस एक्सरसाइज को करने के लिए पहले आप 20 रेप्स के तीन से चार सेट करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार बढ़ा सकते हैं।
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- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? जिम जाकर अक्सर हम अपने अपर बॉडी को टोन करने और मजबूती देने पर फोकस करते हैं। लोगों को लगता है कि पैरों को मजबूत बनाने के लिए सिर्फ रनिंग या जॉगिंग करना काफी होता है। लेकिन ऐसा नहीं है पैरों की मसल्स से आपकी स्ट्रेन्थ बढ़ती है, इतना ही नहीं आपके लेग्स दिखने में काफी अट्रेक्टिव भी लगते हैं। अगर आप जिम जाते हैं, तो वहां आप अपने लेग्स मसल्स को स्ट्रॉन्ग करने के लिए कुछ ऐसी एक्सरसाइज कर सकते हैं, जो आपके लेग्स को शेप देने और मजबूत करने में काफी मदद करेंगे। बारबेल स्क्वाट सबसे कॉमन स्क्वाट एक्सरसाइज है, इस एक्सरसाइज के लिए जिम में मशीनें भी मौजूद होती हैं। इस वार्कआउट को लेग्स के लिए सबसे अच्छा एक्सरसाइज माना जाता है। स्क्वाट एक्सरसाइज तो आपने भी की होगी। लेकिन हाथों में वेट लेकर इस एक्सरसाइज को करने से आपके पैरों को अच्छी शेप और मजबूती मिलती है। कैसे करें बारबेल स्क्वाट? * इस एक्सरसाइज को करने के लिए सबसे पहले आप अपने दोनों पैरों को एक साथ थोड़ा स्पेस करके रखें। ताकि आप सही पोजिशन में बने रहे। *अपने लेग्स मसल्स को स्ट्रॉन्ग करने के लिए सबसे पहले अपने सेट में हल्के वजन की चीजें शामिल करें। * फिर इस वार्कआउट के लिए अपनी पीठ पर बारबेल रखकर स्क्वाट करें। * अगर आपको ये एक्सरसाइज करने में मुश्किल हो रही है, तो आप किसी पार्टनर की मदद भी ले सकते हैं। अपने पैरों को मजबूत करने और सही शेप देने के लिए लेग प्रेस एक्सरसाइज बेस्ट ऑप्शन है। जिम में इस एक्सरसाइज के लिए दो तरह की मशीनें उपलब्ध होती हैं, जिसमें एक मशीन पर आप बैठकर एक्सरसाइज करते हैं, दूसरे मशीन पर आप लेटकर एक्सरसाइज करते हैं। लेग प्रेस एक्सरसाइज करने का तरीका? * लेग प्रेस एक्सरसाइज करने के लिए आपको सबसे पहले जिम में लगी मशीन की सीट पर बैठना है। * इसके बाद आप अपने दोनों पैरों को सामने लगी प्लेट पर सही से रख दें। * इसके बाद पैरों की मदद से उस प्लेट को ऊपर नीचे करें। * इस एक्सरसाइज को करते समय धीरे-धीरे अपने मशीन पर वेट बढ़ाए। लेग एक्सटेंशन में आप अपने पैरों पर भार रखकर एक्सरसाइज करते हैं। ऐसा करने से आपके पैरों को मजबूती के साथ सही शेप मिलती है। इस एक्सरसाइज को करने के लिए जिम में लेग एक्सटेंशन मशीन मौजूद होती है। इस एक्सरसाइज की मदद से आपके पैरों के मसल्स यानि- ग्लूट्स, हैमस्ट्रिंग, क्वाड्स पर दबाव पड़ेगा। कैसे करें लेग एक्सटेंशन एक्सरसाइज? * लेग एक्सटेंशन एक्सरसाइज करने के लिए आपको सीट पर बैठकर अपने पैरों पर वेट रखना होता है। * इसके बाद आपको उस वेट को अपने पैरों की मदद से ऊपर तक लेकर आना है, फिर धीरे-धीरे अपने पैरों को नीचे ले जाएं। * इस एक्सरसाइज के बीस-बीस रेप्स के दो सेट करें। * लेकिन इस दौरान आपके एक्सरसाइज करने की स्पीड धीमी होनी चाहिए। लंजेस एक्सरसाइज आपके बॉडी के लोवर पार्ट को मजबूत बनाने का काम करता है। इससे आपके पैरों की मसल्स काफी मजबूत होती है। ये एक्सरसाइज स्क्वॉट्स करने से ज्यादा मुश्किल होता है। इसमें आपके कोर मसल्स पर भी दबाव पड़ता है। आपके लेग्स को टोन करने के लिए भी लंजेस एक्सरसाइज बहुत फायदेमंद होता है। कैसे करें लंजेस एक्सरसाइज ? * लंजेस एक्सरसाइज करने के लिए आप जिम में रखे डंबल और प्लेट्स को अपने हाथों में लें। * इसके बाद पहले अपने राइट लेग को पीछे लेकर जाएं और घुटने को जमीन से टच करते हुए दोबारा सीधे खड़े हो जाएं। * अब अपने लेफ्ट लेग के साथ यहीं प्रोसेस दोहराएं। * इस एक्सरसाइज को करने के लिए पहले आप बीस रेप्स के तीन से चार सेट करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार बढ़ा सकते हैं।
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पैसे कमाने के तरीके - अगर आपको लगता है कि पैसा कमाना आजके ज़माने में बहुत मुश्किल है, तो अप बिलकुल गलत सोच रहे हैं.
आजकल पैसा कमाना बहुत ही आसान हो गया है. आजकल के युवा मेहनत की बजाय स्मार्ट तरीके से पैसा कमाते हैं. आपको ये जानकर हैरानी होगी कि पैसे कमाने के तरीके भी होते हैं. आपने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा.
ऑफिस जाकर 8 घंटे की नौकरी करने का ज़माना गया. अब लोग घर बैठे पैसे कमाना चाहते हैं.
आजकल के लोग नौकरी के लिए कोई डोनेशन भी नहीं देना चाहते. अगर आप भी 8 घंटे की नौकरी से तंग आ गए हैं और पैसा कमाना चाहते हैं, वो भी घर बैठे तो आपके लिए ये जॉब बेहतर होंगे.
तो चलिए सोच क्या रहे हैं आप भी जान लीजिये पैसे कमाने के तरीके और जमकर कमाइए वो भी बिना ज्यादा मेहनत किये.
जिस तरह से आपको पैसे कमाने का शौक है उसी तरह से कुछ कम्पनियाँ ऐसी होती हैं जो आप जैसे लोगों को खोजती हैं और उन्हें मुफ्त में टी शर्ट देती हैं.
उस पर उनके ब्रांड का नाम छपा होता है. इससे आपको मुफ्त में टी शर्ट मिल जाती है और उनके ब्रांड की ब्रांडिंग हो जाती है. इसके लिए आपको काफी पैसे मिलते हैं.
जी हाँ, इसे देखकर चौंकिए मत.
ऐसी बहुत सी कम्पनियाँ हैं जो अपने नए ब्रांड की टेस्टिंग करती हैं. कंडोम बनाने वाली कंपनी कुछ लोगों को हायर करती है और उन्हें कंडोम को टेस्ट करने के लिए कहती है.
ऐसा करने पर वो पैसे देती है.
फिल्मों में कई बार हीरोइन अपने बाल बेचकर अपना घर चलाती है.
ये सही है. अगर आपके बाल अच्छे हैं तो आप भी उन्हें काटकर मार्किट में बेच सकती हैं. इन बालों से विग बनती है जो काफी महँगी बिकती है. इसी के साथ आपको भी खूब पैसे मिलते हैं.
आजकल लोगों के पास समय की बहुत कमी है. वो लोगों से मिल नहीं पाते. ऐसे में उनका सोशल सर्कल न के बराबर रहता है. ऐसे लोगों को कुछ कम्पनियाँ दोस्त मुहैया करवाती हैं. आप वो दोस्त बनकर पैसा कमा सकते हैं.
इसे देखते ही आपको याद आ गया होगा की कैसे विकी डोनर में ये हीरो अपने स्पर्म बेचकर पैसा कमाता है. आप भी ऐसा कर सकते हैं. स्ट्रेस के चलते आज लोग पेरेंट्स होने का सुख नहीं भोग पाते. आप उन्हें ये ख़ुशी दे सकते हैं और पैसा कमा सकते हैं.
ये है पैसे कमाने के तरीके - तो सोच क्या रहे हैं. जल्दी से इन तरीकों को अपनाइए और घर बैठे पैसे कमाइए. ऊपर दिए किसी भी तरीके में आपका पैसा नहीं लगेगा, बल्कि बिना एक चवन्नी खर्च किये आपको पैसे ही मिलेंगे.
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पैसे कमाने के तरीके - अगर आपको लगता है कि पैसा कमाना आजके ज़माने में बहुत मुश्किल है, तो अप बिलकुल गलत सोच रहे हैं. आजकल पैसा कमाना बहुत ही आसान हो गया है. आजकल के युवा मेहनत की बजाय स्मार्ट तरीके से पैसा कमाते हैं. आपको ये जानकर हैरानी होगी कि पैसे कमाने के तरीके भी होते हैं. आपने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा. ऑफिस जाकर आठ घंटाटे की नौकरी करने का ज़माना गया. अब लोग घर बैठे पैसे कमाना चाहते हैं. आजकल के लोग नौकरी के लिए कोई डोनेशन भी नहीं देना चाहते. अगर आप भी आठ घंटाटे की नौकरी से तंग आ गए हैं और पैसा कमाना चाहते हैं, वो भी घर बैठे तो आपके लिए ये जॉब बेहतर होंगे. तो चलिए सोच क्या रहे हैं आप भी जान लीजिये पैसे कमाने के तरीके और जमकर कमाइए वो भी बिना ज्यादा मेहनत किये. जिस तरह से आपको पैसे कमाने का शौक है उसी तरह से कुछ कम्पनियाँ ऐसी होती हैं जो आप जैसे लोगों को खोजती हैं और उन्हें मुफ्त में टी शर्ट देती हैं. उस पर उनके ब्रांड का नाम छपा होता है. इससे आपको मुफ्त में टी शर्ट मिल जाती है और उनके ब्रांड की ब्रांडिंग हो जाती है. इसके लिए आपको काफी पैसे मिलते हैं. जी हाँ, इसे देखकर चौंकिए मत. ऐसी बहुत सी कम्पनियाँ हैं जो अपने नए ब्रांड की टेस्टिंग करती हैं. कंडोम बनाने वाली कंपनी कुछ लोगों को हायर करती है और उन्हें कंडोम को टेस्ट करने के लिए कहती है. ऐसा करने पर वो पैसे देती है. फिल्मों में कई बार हीरोइन अपने बाल बेचकर अपना घर चलाती है. ये सही है. अगर आपके बाल अच्छे हैं तो आप भी उन्हें काटकर मार्किट में बेच सकती हैं. इन बालों से विग बनती है जो काफी महँगी बिकती है. इसी के साथ आपको भी खूब पैसे मिलते हैं. आजकल लोगों के पास समय की बहुत कमी है. वो लोगों से मिल नहीं पाते. ऐसे में उनका सोशल सर्कल न के बराबर रहता है. ऐसे लोगों को कुछ कम्पनियाँ दोस्त मुहैया करवाती हैं. आप वो दोस्त बनकर पैसा कमा सकते हैं. इसे देखते ही आपको याद आ गया होगा की कैसे विकी डोनर में ये हीरो अपने स्पर्म बेचकर पैसा कमाता है. आप भी ऐसा कर सकते हैं. स्ट्रेस के चलते आज लोग पेरेंट्स होने का सुख नहीं भोग पाते. आप उन्हें ये ख़ुशी दे सकते हैं और पैसा कमा सकते हैं. ये है पैसे कमाने के तरीके - तो सोच क्या रहे हैं. जल्दी से इन तरीकों को अपनाइए और घर बैठे पैसे कमाइए. ऊपर दिए किसी भी तरीके में आपका पैसा नहीं लगेगा, बल्कि बिना एक चवन्नी खर्च किये आपको पैसे ही मिलेंगे.
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रायपुर। ट्रेन रद्द के बाद रेल रोको आंदोलन ने यात्रियों की समस्या बढ़ा दी है। आंदोलन के चलते गुरुवार को दर्जन ट्रेन आउटर में ही घंटो रुके रही। गर्मी के परेशान यात्रियों की तबियत भी खराब होने लगी। ट्रेन में भीड़ और गर्मी से घंटो यात्री झुझते रहे। बिलासपुर रेलवे मंडल के अंतर्गत आने वाले ब्रजराज नगर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव सहित कई मांगों को लेकर रेल रोको आंदोलन किया जा रहा है। रेल रोको आंदोलन की वजह से गुरुवार को मुंबई-हावड़ा मार्ग पर चलने वाली ट्रेनें को घंटों विलंब के बाद टिटलागढ़ रूट से झारसुगुड़ा के लिए रवाना किया।
गर्मी में ट्रेन के घंटों आउटर में खड़ी होने से यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं दूसरी तरफ भाटापारा, बिलासपुर और रायगढ़ जाने वाले यात्रियों को रायपुर स्टेशन से दूसरी ट्रेन से उनके गंतव्य तक भेजा गया। रेलवे के अधिकारी का कहना है कि शाम को आंदोलन समाप्त हो गया है। गाड़ियों का परिचालन शुरू कर दिया गया है।
ज्ञात हो कि मुंबई हावड़ा मार्ग से भाटापारा, बिलासपुर और रायगढ़ जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक रहती है। लेकिन रेल रोको आंदोलन के चलते इस रूट की गाड़ियों के मार्ग को परिवर्तित कर टिटलागढ़ से झारसुगुड़ा के लिए रवाना किया गया। इस कारण भाटापारा, बिलासपुर और रायगढ़ जाने वाले यात्रियों को मजबूरी में रायपुर स्टेशन उतरना पड़ा। रायपुर स्टेशन प्रबंधन द्वारा बिलासपुर जाने वाली दूसरी ट्रेन में उनको बिठाकर भेजा गया है, लेकिन यात्री ट्रेन के इंतजार में घंटों स्टेशन पर बैठे रहे।
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रायपुर। ट्रेन रद्द के बाद रेल रोको आंदोलन ने यात्रियों की समस्या बढ़ा दी है। आंदोलन के चलते गुरुवार को दर्जन ट्रेन आउटर में ही घंटो रुके रही। गर्मी के परेशान यात्रियों की तबियत भी खराब होने लगी। ट्रेन में भीड़ और गर्मी से घंटो यात्री झुझते रहे। बिलासपुर रेलवे मंडल के अंतर्गत आने वाले ब्रजराज नगर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव सहित कई मांगों को लेकर रेल रोको आंदोलन किया जा रहा है। रेल रोको आंदोलन की वजह से गुरुवार को मुंबई-हावड़ा मार्ग पर चलने वाली ट्रेनें को घंटों विलंब के बाद टिटलागढ़ रूट से झारसुगुड़ा के लिए रवाना किया। गर्मी में ट्रेन के घंटों आउटर में खड़ी होने से यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं दूसरी तरफ भाटापारा, बिलासपुर और रायगढ़ जाने वाले यात्रियों को रायपुर स्टेशन से दूसरी ट्रेन से उनके गंतव्य तक भेजा गया। रेलवे के अधिकारी का कहना है कि शाम को आंदोलन समाप्त हो गया है। गाड़ियों का परिचालन शुरू कर दिया गया है। ज्ञात हो कि मुंबई हावड़ा मार्ग से भाटापारा, बिलासपुर और रायगढ़ जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक रहती है। लेकिन रेल रोको आंदोलन के चलते इस रूट की गाड़ियों के मार्ग को परिवर्तित कर टिटलागढ़ से झारसुगुड़ा के लिए रवाना किया गया। इस कारण भाटापारा, बिलासपुर और रायगढ़ जाने वाले यात्रियों को मजबूरी में रायपुर स्टेशन उतरना पड़ा। रायपुर स्टेशन प्रबंधन द्वारा बिलासपुर जाने वाली दूसरी ट्रेन में उनको बिठाकर भेजा गया है, लेकिन यात्री ट्रेन के इंतजार में घंटों स्टेशन पर बैठे रहे।
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वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान टेक्नोलॉजी की दुनिया में कितने ही बदलाव हुए हैं। बच्चे पढ़ाई के लिए टैबलेट का इस्तेमाल करने लगे हैं, इसका एक कारण ये है कि टैबलेट में फोन की तुलना में बड़ी स्क्रीन होती है जिसमें चीजों को आसानी से समझा और देखा जा सकता है।
वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान टेक्नोलॉजी की दुनिया में कितने ही बदलाव हुए हैं। बच्चे पढ़ाई के लिए टैबलेट का इस्तेमाल करने लगे हैं, इसका एक कारण ये है कि टैबलेट में फोन की तुलना में बड़ी स्क्रीन होती है जिसमें चीजों को आसानी से समझा और देखा जा सकता है। आप टैबलेट पर नोट्स भी बना सकते हैं। इस बीच लेनोवो ने अपना 5G टैबलेट Lenovo Tab 11भारत में लॉन्च कर दिया है जिसे कंपनी ने दो स्टोरेज ऑप्शन में पेश किया है।
अगर इस टैब की कीमत की बात करें तो 29,999रुपये है जबकि दूसरा 256GB है जो 34,999रुपये में पेश किया गया है। Lenovo Tab P11 5Gको ई-कॉमर्स वेबसाइट Amazon और Lenovo के ऑफिशियल स्टोर से खरीदा जा सकता है।
• लेनोवो टैब पी11 5G में ग्राहकों को 11इंच की 2K IPS टच स्क्रीन मिलेगी जो 60hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगी।
• टी टैबलेट एंड्रॉयड 11पर काम करेगा।
• इसमें Android 12का सपोर्ट दिये जाने की उम्मीद है।
• Lenovo Tab P11 5G कंपनी के इन-हाउस गैजेट्स Lenovo Precision Pen 2स्टाइलस और कीबोर्ड को भी सपोर्ट करता है।
• Lenovo Tab P11 5G में 7780एमएएच की बैटरी 20W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ मिलती है जिसे लेकर कंपनी का दावा है कि एक बार फुल चार्ज करने पर 12घंटे तक वीडियो प्लेबैक दे सकता है।
दरअसल लेनोवो टैब पी11 5G का मुकाबला मार्केट में पहले से मौजूद Xiaomi Pad 5और Realme Pad X से होगा। अगर इनकी कीमत की बात करें तो Xiaomi Pad 5के 128GB वेरिएंट की कीमत 26,999रुपये और Realme Pad X के 64GB स्टोरेज वाले पैड की कीमत 25,999रुपये है। Xiaomi के पैड में आपको 8720एमएएच की बैटरी मिलती है जो 33W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।
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वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान टेक्नोलॉजी की दुनिया में कितने ही बदलाव हुए हैं। बच्चे पढ़ाई के लिए टैबलेट का इस्तेमाल करने लगे हैं, इसका एक कारण ये है कि टैबलेट में फोन की तुलना में बड़ी स्क्रीन होती है जिसमें चीजों को आसानी से समझा और देखा जा सकता है। वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान टेक्नोलॉजी की दुनिया में कितने ही बदलाव हुए हैं। बच्चे पढ़ाई के लिए टैबलेट का इस्तेमाल करने लगे हैं, इसका एक कारण ये है कि टैबलेट में फोन की तुलना में बड़ी स्क्रीन होती है जिसमें चीजों को आसानी से समझा और देखा जा सकता है। आप टैबलेट पर नोट्स भी बना सकते हैं। इस बीच लेनोवो ने अपना पाँचG टैबलेट Lenovo Tab ग्यारहभारत में लॉन्च कर दिया है जिसे कंपनी ने दो स्टोरेज ऑप्शन में पेश किया है। अगर इस टैब की कीमत की बात करें तो उनतीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है जबकि दूसरा दो सौ छप्पनGB है जो चौंतीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये में पेश किया गया है। Lenovo Tab Pग्यारह पाँचGको ई-कॉमर्स वेबसाइट Amazon और Lenovo के ऑफिशियल स्टोर से खरीदा जा सकता है। • लेनोवो टैब पीग्यारह पाँचG में ग्राहकों को ग्यारहइंच की दो केल्विन IPS टच स्क्रीन मिलेगी जो साठhz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगी। • टी टैबलेट एंड्रॉयड ग्यारहपर काम करेगा। • इसमें Android बारहका सपोर्ट दिये जाने की उम्मीद है। • Lenovo Tab Pग्यारह पाँचG कंपनी के इन-हाउस गैजेट्स Lenovo Precision Pen दोस्टाइलस और कीबोर्ड को भी सपोर्ट करता है। • Lenovo Tab Pग्यारह पाँचG में सात हज़ार सात सौ अस्सीएमएएच की बैटरी बीस वाट फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ मिलती है जिसे लेकर कंपनी का दावा है कि एक बार फुल चार्ज करने पर बारह घंटाटे तक वीडियो प्लेबैक दे सकता है। दरअसल लेनोवो टैब पीग्यारह पाँचG का मुकाबला मार्केट में पहले से मौजूद Xiaomi Pad पाँचऔर Realme Pad X से होगा। अगर इनकी कीमत की बात करें तो Xiaomi Pad पाँचके एक सौ अट्ठाईसGB वेरिएंट की कीमत छब्बीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये और Realme Pad X के चौंसठGB स्टोरेज वाले पैड की कीमत पच्चीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है। Xiaomi के पैड में आपको आठ हज़ार सात सौ बीसएमएएच की बैटरी मिलती है जो तैंतीस वाट फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।
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मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में हत्या का मामला सामने आया है। यहां पर एक शख्स ने अपने ही दोस्त की हत्या कर दी। क्योंकि हत्यारे को सिर्फ यह बात अखर गई कि मृतक उसके बिस्तर पर सो गया था।
(सांकेतिक तस्वीर)
खंडवा जिले में एक शख्स को अपने बिस्तर पर दूसरे व्यक्ति का सोना इतना अखर गया कि उसने उसकी हत्या ही कर दी। दरअसल, रविवार को पुलिस को सूचना मिली थी कि खंडवा के नए बस स्टैंड के पास एक अज्ञात शव पड़ा हुआ मिला है। पुलिस ने तत्काल शव को अपने कब्जे में लेकर मामले की छानबीन की तो खुलासा हुआ कि कचरा बीनने वाले उसी के दोस्त ने इस बात पर उसकी जान ले ली कि वह उसके बिस्तर पर सो गया था। खंडवा पुलिस ने इस मामले में तुरंत एक्शन लेते हुए आरोपी दोस्त को गिरफ्तार कर लिया है।
खंडवा पुलिस ने एक अंधे कत्ल का खुलासा किया है। रविवार को खंडवा के नए स्टेंड के पास एक अज्ञात व्यक्ति को मृत अवस्था में पड़े होने के सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना मिलने पर पदमनगर पुलिस तत्काल घटना स्थल पहुंची और मृतक के शव व घटना स्थल का निरीक्षण किया गया। मृतक के सिर में गंभीर चोट के निशान मिले थे। मृतक की जेब में मिले आधार कार्ड के अनुसार उसकी पहचान जगदीश पिता भीमा निवासी जामन्या खुर्द के रूप में हुई थी। पहली ही नजर में मामला हत्या का होना प्रतीत होते ही पुलिस में मामला दर्जकर हत्यारे की तलाश शुरू कर दी।
पूरे मामले को गंभीरता दिखाते हुए घटना स्थल निरीक्षण और आसपास के लोगों से पूछताछ की गई और सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए। पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक, मृतक जगदीश और उसका दोस्त मनोज दोनों साथ में पन्नी बीनने का काम करते थे। दोनों ही शराब पीने के भी आदी थे। दोनों के शराब पीकर आपसी विवाद की बात भी सामने आई। मनोज की तलाश करने पर वह फरार हो गया। पुलिस में मनोज को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की तो उसने सारा राज उगल दिया।
अपने बिस्तर पर मृतका जगदीश को रात्रि में सोता हुआ देख मनोज ने उसे उठाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं उठा तो गुस्से में आकर पास पड़े पत्थर को उठाकर उसके सिर पर पटक दिया, जिससे जगदीश के सिर में चोट लगने से उसकी मौत हो गई।
एडिशनल एसपी सिमा अलावा ने बताया, आरोपी मनोज ने अपने बिस्तर पर मृतक जगदीश को रात में सोता हुआ देख उसे उठाने के प्रयास किया, लेकिन वह नहीं उठा तो आकस्मिक रूप से गुस्से में आकर पास पड़े पत्थर को उठाकर उसके सिर पर पटक दिया, जिससे जगदीश को मौत हो गई। आरोपी को गिरफ्तार कर खून लगा शर्ट और अन्य साक्ष्य जप्त किए गए हैं। आरोपी आदतन अपराधी होकर पहले भी रेल में लूट और चोरी के अपराधों में गिरफ्तार हो चुका है।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में हत्या का मामला सामने आया है। यहां पर एक शख्स ने अपने ही दोस्त की हत्या कर दी। क्योंकि हत्यारे को सिर्फ यह बात अखर गई कि मृतक उसके बिस्तर पर सो गया था। खंडवा जिले में एक शख्स को अपने बिस्तर पर दूसरे व्यक्ति का सोना इतना अखर गया कि उसने उसकी हत्या ही कर दी। दरअसल, रविवार को पुलिस को सूचना मिली थी कि खंडवा के नए बस स्टैंड के पास एक अज्ञात शव पड़ा हुआ मिला है। पुलिस ने तत्काल शव को अपने कब्जे में लेकर मामले की छानबीन की तो खुलासा हुआ कि कचरा बीनने वाले उसी के दोस्त ने इस बात पर उसकी जान ले ली कि वह उसके बिस्तर पर सो गया था। खंडवा पुलिस ने इस मामले में तुरंत एक्शन लेते हुए आरोपी दोस्त को गिरफ्तार कर लिया है। खंडवा पुलिस ने एक अंधे कत्ल का खुलासा किया है। रविवार को खंडवा के नए स्टेंड के पास एक अज्ञात व्यक्ति को मृत अवस्था में पड़े होने के सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना मिलने पर पदमनगर पुलिस तत्काल घटना स्थल पहुंची और मृतक के शव व घटना स्थल का निरीक्षण किया गया। मृतक के सिर में गंभीर चोट के निशान मिले थे। मृतक की जेब में मिले आधार कार्ड के अनुसार उसकी पहचान जगदीश पिता भीमा निवासी जामन्या खुर्द के रूप में हुई थी। पहली ही नजर में मामला हत्या का होना प्रतीत होते ही पुलिस में मामला दर्जकर हत्यारे की तलाश शुरू कर दी। पूरे मामले को गंभीरता दिखाते हुए घटना स्थल निरीक्षण और आसपास के लोगों से पूछताछ की गई और सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए। पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक, मृतक जगदीश और उसका दोस्त मनोज दोनों साथ में पन्नी बीनने का काम करते थे। दोनों ही शराब पीने के भी आदी थे। दोनों के शराब पीकर आपसी विवाद की बात भी सामने आई। मनोज की तलाश करने पर वह फरार हो गया। पुलिस में मनोज को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की तो उसने सारा राज उगल दिया। अपने बिस्तर पर मृतका जगदीश को रात्रि में सोता हुआ देख मनोज ने उसे उठाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं उठा तो गुस्से में आकर पास पड़े पत्थर को उठाकर उसके सिर पर पटक दिया, जिससे जगदीश के सिर में चोट लगने से उसकी मौत हो गई। एडिशनल एसपी सिमा अलावा ने बताया, आरोपी मनोज ने अपने बिस्तर पर मृतक जगदीश को रात में सोता हुआ देख उसे उठाने के प्रयास किया, लेकिन वह नहीं उठा तो आकस्मिक रूप से गुस्से में आकर पास पड़े पत्थर को उठाकर उसके सिर पर पटक दिया, जिससे जगदीश को मौत हो गई। आरोपी को गिरफ्तार कर खून लगा शर्ट और अन्य साक्ष्य जप्त किए गए हैं। आरोपी आदतन अपराधी होकर पहले भी रेल में लूट और चोरी के अपराधों में गिरफ्तार हो चुका है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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भारत के लिए अंडर-19 क्रिकेट खेलने वाले राजस्थान के 20 साल के तेज गेंदबाज आकाश सिंह को ऑक्शन में किसी भी टीम ने नहीं खरीदा था लेकिन मुकेश चौधरी के चोट के चलते बाहर होने के कारण CSK ने उन्हें रिप्लेसमेंट के तौर पर शामिल किया.
चेन्नईः आईपीएल को दुनिया की सबसे बेहतरीन क्रिकेट लीग बनाने वाले कई कारण है. इसमें एक टीम से खेलकर फिर कुछ सीजन बाद उसके खिलाफ खेलना भी एक अहम वजह है. कुछ खिलाड़ी ऐसे भी होते हैं जिन्हें एक टीम से ज्यादा मौके नहीं मिलते लेकिन दूसरी टीम में जाकर वो अपनी पुरानी टीम के खिलाफ कमाल करते हैं. आईपीएल 2023 की कहानी भी इससे अलग नहीं है. खास तौर पर बाएं हाथ के तेज गेंदबाज आकाश सिंह के लिए ये तो और भी खास है, जिन्हें एमएस धोनी ने चेन्नई सुपर किंग्स की प्लेइंग इलेवन में मौका दिया है.
चेपॉक मैदान में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ चेन्नई के कप्तान एमएस धोनी ने 20 साल के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज आकाश सिंह को टीम में शामिल किया. इसके साथ ही आकाश सिंह ने चेन्नई के लिए आईपीएल में अपना डेब्यू किया. आईपीएल में ये उनका दूसरा ही मैच है. संयोग से उन्होंने अपना आईपीएल डेब्यू राजस्थान के लिए ही 2021 में किया था और तब उनके सामने चेन्नई ही थी.
राजस्थान के लिए आकाश को सिर्फ एक ही मैच खेलने का मौका मिला था, जिसमें चेन्नई ने उन पर 39 रन कूटे थे. फिर राजस्थान ने उन्हें रिलीज कर दिया था. आकाश सिंह की इस आईपीएल में एंट्री भी किस्मत के सहारे हुई है. आकाश सिंह को इस बार की नीलामी में कोई भी खरीदार नहीं मिला था.
फिर सीजन शुरू होने से ठीक पहले जब चेन्नई के बाएं हाथ के पेसर मुकेश चौधरी फिट नहीं हो सके तो उनके रिप्लेसमेंट के तौर पर आकाश सिंह को चुना गया. उन्हें 20 लाख रुपये के बेस प्राइस पर लाया गया है.
चेन्नई की टीम में आकाश सिंह को स्टार पेसर दीपक चाहर की जगह शामिल किया गया था. चाहर को मेगा ऑक्शन में चेन्नई ने 14 करोड़ रुपये में खरीदा था. हालांकि इस सीजन में उनकी वापसी अच्छी नहीं रही और तीन मैचों में उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला, जबकि उनकी पिटाई भी खूब हुई. पिछले मैच में सिर्फ 1 ओवर के बाद हैमस्ट्रिंग खिंचने के कारण चाहर बाहर हो गए थे. अब ये साफ नहीं है कि क्या फिटनेस के कारण वह बाहर हैं या उन्हें ड्रॉप किया गया है.
राजस्थान में जन्मे आकाश सिंह भारत के लिए अंडर-19 क्रिकेट खेल चुके हैं. वह राजस्थान के लिए खेलने के बाद फिलहाल नागालैंड के लिए घरेलू क्रिकेट में खेलते हैं. 5 फर्स्ट क्लास मैचों में उनके नाम 10 विकेट हैं, जबकि 9 टी20 मैचों में 7 और 9 लिस्ट ए मैचों में 14 विकेट हैं.
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भारत के लिए अंडर-उन्नीस क्रिकेट खेलने वाले राजस्थान के बीस साल के तेज गेंदबाज आकाश सिंह को ऑक्शन में किसी भी टीम ने नहीं खरीदा था लेकिन मुकेश चौधरी के चोट के चलते बाहर होने के कारण CSK ने उन्हें रिप्लेसमेंट के तौर पर शामिल किया. चेन्नईः आईपीएल को दुनिया की सबसे बेहतरीन क्रिकेट लीग बनाने वाले कई कारण है. इसमें एक टीम से खेलकर फिर कुछ सीजन बाद उसके खिलाफ खेलना भी एक अहम वजह है. कुछ खिलाड़ी ऐसे भी होते हैं जिन्हें एक टीम से ज्यादा मौके नहीं मिलते लेकिन दूसरी टीम में जाकर वो अपनी पुरानी टीम के खिलाफ कमाल करते हैं. आईपीएल दो हज़ार तेईस की कहानी भी इससे अलग नहीं है. खास तौर पर बाएं हाथ के तेज गेंदबाज आकाश सिंह के लिए ये तो और भी खास है, जिन्हें एमएस धोनी ने चेन्नई सुपर किंग्स की प्लेइंग इलेवन में मौका दिया है. चेपॉक मैदान में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ चेन्नई के कप्तान एमएस धोनी ने बीस साल के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज आकाश सिंह को टीम में शामिल किया. इसके साथ ही आकाश सिंह ने चेन्नई के लिए आईपीएल में अपना डेब्यू किया. आईपीएल में ये उनका दूसरा ही मैच है. संयोग से उन्होंने अपना आईपीएल डेब्यू राजस्थान के लिए ही दो हज़ार इक्कीस में किया था और तब उनके सामने चेन्नई ही थी. राजस्थान के लिए आकाश को सिर्फ एक ही मैच खेलने का मौका मिला था, जिसमें चेन्नई ने उन पर उनतालीस रन कूटे थे. फिर राजस्थान ने उन्हें रिलीज कर दिया था. आकाश सिंह की इस आईपीएल में एंट्री भी किस्मत के सहारे हुई है. आकाश सिंह को इस बार की नीलामी में कोई भी खरीदार नहीं मिला था. फिर सीजन शुरू होने से ठीक पहले जब चेन्नई के बाएं हाथ के पेसर मुकेश चौधरी फिट नहीं हो सके तो उनके रिप्लेसमेंट के तौर पर आकाश सिंह को चुना गया. उन्हें बीस लाख रुपये के बेस प्राइस पर लाया गया है. चेन्नई की टीम में आकाश सिंह को स्टार पेसर दीपक चाहर की जगह शामिल किया गया था. चाहर को मेगा ऑक्शन में चेन्नई ने चौदह करोड़ रुपये में खरीदा था. हालांकि इस सीजन में उनकी वापसी अच्छी नहीं रही और तीन मैचों में उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला, जबकि उनकी पिटाई भी खूब हुई. पिछले मैच में सिर्फ एक ओवर के बाद हैमस्ट्रिंग खिंचने के कारण चाहर बाहर हो गए थे. अब ये साफ नहीं है कि क्या फिटनेस के कारण वह बाहर हैं या उन्हें ड्रॉप किया गया है. राजस्थान में जन्मे आकाश सिंह भारत के लिए अंडर-उन्नीस क्रिकेट खेल चुके हैं. वह राजस्थान के लिए खेलने के बाद फिलहाल नागालैंड के लिए घरेलू क्रिकेट में खेलते हैं. पाँच फर्स्ट क्लास मैचों में उनके नाम दस विकेट हैं, जबकि नौ टीबीस मैचों में सात और नौ लिस्ट ए मैचों में चौदह विकेट हैं.
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नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ शिवकुमार डहरिया एवं विधायक अनिता योगेंद्र शर्मा के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने थामा कांग्रेस का हाथ. .
रायपुर । आज ग्राम मूरा में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का दामन थामा जिसमें मुख्य रूप से नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ शिव डहरिया और क्षेत्रीय विधायक अनिता योगेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में गमछा पहनाकर कार्यकर्ताओं का स्वागत किया जिसमें विधायक अनिता योगेंद्र शर्मा ने कहां प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री के कार्यों से प्रभावित होकर यहां के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस प्रवेश किया जिसमें मैं सभी का स्वागत करती हूं और इनके उज्जवल भविष्य की कामना करती हूं और आशा करती हूं कि आगे पार्टी को अपनी नई ऊर्जा के साथ नए मुकाम तक पहुंचाएंगे।
और प्रमुख रूप ये शामिल हुए रोशन लाल नायक, मिथुन निर्मलकर ,कौशल वर्मा, रोशन लाल यादव ,सुखदेव वर्मा, सोनू राम वर्मा, लीलाधर वर्मा, वसंत यादव, अनिल निषाद, बलराम यादव, नरसिंह यादव, लिली टंडन, सरिता जांगड़े, नीरा पूर्णिमा बंजारे, सावित्री रात्रे, शीतल बघेल, अंजनी, अमित उइके, मनोज ,विजय कुमार ,पंकज, दीपक ,कल्लू डहरिया, संजय वर्मा नेतराम राजेंद्र नायक, दिनेश नायक, पुनाराम यादव, विष्णु वर्मा, गेंद राम वर्मा ,वीरेंद्र यादव, मोहित वर्मा ,सुखराम यादव ,राजेंद्र साहू, राम प्रसाद विश्वकर्मा, मंतूराम साहू, दौलत पाल, समेत सैकड़ों लोगो ने कांग्रेस हाथ थामा ।
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नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ शिवकुमार डहरिया एवं विधायक अनिता योगेंद्र शर्मा के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने थामा कांग्रेस का हाथ. . रायपुर । आज ग्राम मूरा में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का दामन थामा जिसमें मुख्य रूप से नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ शिव डहरिया और क्षेत्रीय विधायक अनिता योगेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में गमछा पहनाकर कार्यकर्ताओं का स्वागत किया जिसमें विधायक अनिता योगेंद्र शर्मा ने कहां प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री के कार्यों से प्रभावित होकर यहां के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस प्रवेश किया जिसमें मैं सभी का स्वागत करती हूं और इनके उज्जवल भविष्य की कामना करती हूं और आशा करती हूं कि आगे पार्टी को अपनी नई ऊर्जा के साथ नए मुकाम तक पहुंचाएंगे। और प्रमुख रूप ये शामिल हुए रोशन लाल नायक, मिथुन निर्मलकर ,कौशल वर्मा, रोशन लाल यादव ,सुखदेव वर्मा, सोनू राम वर्मा, लीलाधर वर्मा, वसंत यादव, अनिल निषाद, बलराम यादव, नरसिंह यादव, लिली टंडन, सरिता जांगड़े, नीरा पूर्णिमा बंजारे, सावित्री रात्रे, शीतल बघेल, अंजनी, अमित उइके, मनोज ,विजय कुमार ,पंकज, दीपक ,कल्लू डहरिया, संजय वर्मा नेतराम राजेंद्र नायक, दिनेश नायक, पुनाराम यादव, विष्णु वर्मा, गेंद राम वर्मा ,वीरेंद्र यादव, मोहित वर्मा ,सुखराम यादव ,राजेंद्र साहू, राम प्रसाद विश्वकर्मा, मंतूराम साहू, दौलत पाल, समेत सैकड़ों लोगो ने कांग्रेस हाथ थामा ।
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जाने-माने पर्यावरणविद् डॉ. आरके पचौरी का गुरुवार को निधन हो गया। वह 79 साल के थे। डॉ. पचौरी The Energy and Resources Institute (TERI) के संस्थापक निदेशक और पूर्व चीफ थे। और, लंबे समय से वह दिल की बीमारी से जूझ रहे थे।
मंगलवार को ही उन्हें दिल्ली स्थित Escorts Heart Institute अस्पताल में लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। सूत्रों ने बताया कि वहां उनकी ओपन हर्ट सर्जरी भी हुई थी।
टेरी के मौजूदा महानिदेशक अजय माथुर के हवाले से समाचार एजेसी PTI की रिपोर्ट में कहा गया कि लंबे समय से कार्डिएक एलमेंट (दिल की बीमारी) से पीड़ित होने के चलते वह नहीं रहे।
TERI के बयान में माथुर की तरफ से कहा गया- बड़े दुख के साथ हमें बताना पड़ रहा है कि आरके पचौरी अब नहीं रहे। पूरा टेरी परिवार उनके घरवालों के साथ इस दुख की घड़ी में साथ खड़ा है।
साल 2015 में डॉ. पचौरी पर सहकर्मी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, जिसके बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
इससे पहले, वर्ष 2007 में डॉ. पचौरी की अध्यक्षता में Intergovernmental Panel on Climate Change (IPCC) को Nobel Peace Prize मिला था।
थोड़ा करीब से जानें डॉ. पचौरी कोः 20 अगस्त, 1940 को नैनीताल (अब उत्तराखंड में) जन्में डॉ. पचौरी ने लखनऊ के La Martiniere College से पढ़ाई की थी। आगे उन्होंने Indian Railways Institute of Mechanical and Electrical Engineering में भी शिक्षा ली।
यही नहीं, उन्होंने अमेरिका की North California State University से बाद में Industrial Engineering में मास्टर ऑफ साइंस की उपाधि भी ली। फिर इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग और इकनॉमिक्स में उन्होंने पीएचडी हासिल की।
पचौरी साहब विभिन्न अमेरिकी विश्वविद्यालयों में प्रोफसर रहे। फिर 1982 में वह टेरी के निदेशक बने। वह इसके अलावा 1990 में विश्व बैंक में विजिटिंग रिसर्च फेलो भी रहे, जबकि वर्ष 2002 में उन्हें यूएन पैनल आईपीसीसी का चेयरमैन चुना गया था।
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जाने-माने पर्यावरणविद् डॉ. आरके पचौरी का गुरुवार को निधन हो गया। वह उन्यासी साल के थे। डॉ. पचौरी The Energy and Resources Institute के संस्थापक निदेशक और पूर्व चीफ थे। और, लंबे समय से वह दिल की बीमारी से जूझ रहे थे। मंगलवार को ही उन्हें दिल्ली स्थित Escorts Heart Institute अस्पताल में लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। सूत्रों ने बताया कि वहां उनकी ओपन हर्ट सर्जरी भी हुई थी। टेरी के मौजूदा महानिदेशक अजय माथुर के हवाले से समाचार एजेसी PTI की रिपोर्ट में कहा गया कि लंबे समय से कार्डिएक एलमेंट से पीड़ित होने के चलते वह नहीं रहे। TERI के बयान में माथुर की तरफ से कहा गया- बड़े दुख के साथ हमें बताना पड़ रहा है कि आरके पचौरी अब नहीं रहे। पूरा टेरी परिवार उनके घरवालों के साथ इस दुख की घड़ी में साथ खड़ा है। साल दो हज़ार पंद्रह में डॉ. पचौरी पर सहकर्मी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, जिसके बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इससे पहले, वर्ष दो हज़ार सात में डॉ. पचौरी की अध्यक्षता में Intergovernmental Panel on Climate Change को Nobel Peace Prize मिला था। थोड़ा करीब से जानें डॉ. पचौरी कोः बीस अगस्त, एक हज़ार नौ सौ चालीस को नैनीताल जन्में डॉ. पचौरी ने लखनऊ के La Martiniere College से पढ़ाई की थी। आगे उन्होंने Indian Railways Institute of Mechanical and Electrical Engineering में भी शिक्षा ली। यही नहीं, उन्होंने अमेरिका की North California State University से बाद में Industrial Engineering में मास्टर ऑफ साइंस की उपाधि भी ली। फिर इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग और इकनॉमिक्स में उन्होंने पीएचडी हासिल की। पचौरी साहब विभिन्न अमेरिकी विश्वविद्यालयों में प्रोफसर रहे। फिर एक हज़ार नौ सौ बयासी में वह टेरी के निदेशक बने। वह इसके अलावा एक हज़ार नौ सौ नब्बे में विश्व बैंक में विजिटिंग रिसर्च फेलो भी रहे, जबकि वर्ष दो हज़ार दो में उन्हें यूएन पैनल आईपीसीसी का चेयरमैन चुना गया था।
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IGNOU January Admission 2021: इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी ने 4 फरवरी, 2021 को IGNOU January Admission 2021 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है। जो उम्मीदवार किसी भी यूजी और पीजी कोर्स के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे IGNOU की आधिकारिक वेबसाइट ignou. ac. in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
प्रवेश प्रक्रिया के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 28 फरवरी, 2021 तक है। एससी / एसटी छात्रों के लिए उपलब्ध शुल्क छूट की सुविधा केवल एक कार्यक्रम के लिए की जा सकती है। यदि कोई आवेदक शुल्क छूट का दावा करने वाले एक से अधिक आवेदन जमा करता है, तो सभी आवेदन आधिकारिक साइट के अनुसार अस्वीकार कर दिए जाएंगे।
छात्र डिफरेंट पोस्ट ग्रेजुएट और ग्रेजुएट , पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट (पीजी सर्टिफिकेट), पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (पीजीडी), सर्टिफिकेट, डिप्लोमा आदि में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं। शामिल कार्यक्रम में अंग्रेजी में एमए, हिंदी में बीए, रूरल डेवलपमेंट में पीजीडी, एडल्ट एजुकेशन में पीजी प्रमाणपत्र सहिक कई प्रोग्राम में प्रेवेश ले सकते हैं।
इस बीच, इग्नू टीईई दिसंबर 2021 परीक्षा के लिए फॉर्म जमा करने की आज अंतिम तिथि है। दिसंबर के लिए टर्म एंड एग्जामिनेशन के लिए परीक्षा फॉर्म उम्मीदवारों द्वारा 1000 रुपये की लेट फीस देकर जमा किया जा सकता है। यूनिवर्सिटी ने एडमिट कार्ड भी जारी कर दिया है, जिसे इग्नू की आधिकारिक साइट के माध्यम से डाउनलोड किया जा सकता है। अधिक संबंधित विवरणों के लिए उम्मीदवार IGNOU की आधिकारिक साइट पर जा सकते हैं।
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IGNOU January Admission दो हज़ार इक्कीस: इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी ने चार फरवरी, दो हज़ार इक्कीस को IGNOU January Admission दो हज़ार इक्कीस के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है। जो उम्मीदवार किसी भी यूजी और पीजी कोर्स के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे IGNOU की आधिकारिक वेबसाइट ignou. ac. in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। प्रवेश प्रक्रिया के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि अट्ठाईस फरवरी, दो हज़ार इक्कीस तक है। एससी / एसटी छात्रों के लिए उपलब्ध शुल्क छूट की सुविधा केवल एक कार्यक्रम के लिए की जा सकती है। यदि कोई आवेदक शुल्क छूट का दावा करने वाले एक से अधिक आवेदन जमा करता है, तो सभी आवेदन आधिकारिक साइट के अनुसार अस्वीकार कर दिए जाएंगे। छात्र डिफरेंट पोस्ट ग्रेजुएट और ग्रेजुएट , पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट , पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा , सर्टिफिकेट, डिप्लोमा आदि में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं। शामिल कार्यक्रम में अंग्रेजी में एमए, हिंदी में बीए, रूरल डेवलपमेंट में पीजीडी, एडल्ट एजुकेशन में पीजी प्रमाणपत्र सहिक कई प्रोग्राम में प्रेवेश ले सकते हैं। इस बीच, इग्नू टीईई दिसंबर दो हज़ार इक्कीस परीक्षा के लिए फॉर्म जमा करने की आज अंतिम तिथि है। दिसंबर के लिए टर्म एंड एग्जामिनेशन के लिए परीक्षा फॉर्म उम्मीदवारों द्वारा एक हज़ार रुपयापये की लेट फीस देकर जमा किया जा सकता है। यूनिवर्सिटी ने एडमिट कार्ड भी जारी कर दिया है, जिसे इग्नू की आधिकारिक साइट के माध्यम से डाउनलोड किया जा सकता है। अधिक संबंधित विवरणों के लिए उम्मीदवार IGNOU की आधिकारिक साइट पर जा सकते हैं।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
प्रमात्रा यान्त्रिकी (Quantum mechanics) कुछ वैज्ञानिक सिद्धान्तों का एक समुच्चय है जो परमाणवीय पैमाने पर उर्जा एवं पदार्थ के ज्ञात गुणधर्मों की व्याख्या करते हैं। इसमें उप-परमाणु पैमाने पर जो प्रकाश और उप-परमाण्वीय कणों में तरंग-कण द्विरूप देखा जाता है, उसका गणित आधार सम्मिलित है। क्वाण्टम यान्त्रिकी में उर्जा और पदार्थ के गहरे सम्बन्ध का भी गणित आधार सम्मिलित है। . हार्मोनिक विश्लेषण गणित की वह शाखा है जो फलनों या संकेतों को मौलिक तरंगों योग (superposition) के रूप में व्यक्त करने की विधियों एवं अन्य पक्षों का अध्ययन करती है। चूंकि भौतिकी में मौलिक सरल तरंगोंको हर्मोनिक कहा जाता है इसलिये इस विषय का नाम हार्मोनिक विश्लेषण पडा। पिछली दो शताब्दियों में एक विस्तृत विषय बनकर उभरा है। संकेत प्रसंस्करण, क्वांटम यांत्रिकी एवं तंत्रिकाविज्ञान आदि विविध विषयों में इसका उपयोग होता है। हार्मोनिक विश्लेषण, फुरिअर विश्लेषण का अधिक व्यापक रूप है। .
प्रमात्रा यान्त्रिकी और हार्मोनिक विश्लेषण आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
प्रमात्रा यान्त्रिकी 8 संबंध है और हार्मोनिक विश्लेषण 9 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (8 + 9)।
यह लेख प्रमात्रा यान्त्रिकी और हार्मोनिक विश्लेषण के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। प्रमात्रा यान्त्रिकी कुछ वैज्ञानिक सिद्धान्तों का एक समुच्चय है जो परमाणवीय पैमाने पर उर्जा एवं पदार्थ के ज्ञात गुणधर्मों की व्याख्या करते हैं। इसमें उप-परमाणु पैमाने पर जो प्रकाश और उप-परमाण्वीय कणों में तरंग-कण द्विरूप देखा जाता है, उसका गणित आधार सम्मिलित है। क्वाण्टम यान्त्रिकी में उर्जा और पदार्थ के गहरे सम्बन्ध का भी गणित आधार सम्मिलित है। . हार्मोनिक विश्लेषण गणित की वह शाखा है जो फलनों या संकेतों को मौलिक तरंगों योग के रूप में व्यक्त करने की विधियों एवं अन्य पक्षों का अध्ययन करती है। चूंकि भौतिकी में मौलिक सरल तरंगोंको हर्मोनिक कहा जाता है इसलिये इस विषय का नाम हार्मोनिक विश्लेषण पडा। पिछली दो शताब्दियों में एक विस्तृत विषय बनकर उभरा है। संकेत प्रसंस्करण, क्वांटम यांत्रिकी एवं तंत्रिकाविज्ञान आदि विविध विषयों में इसका उपयोग होता है। हार्मोनिक विश्लेषण, फुरिअर विश्लेषण का अधिक व्यापक रूप है। . प्रमात्रा यान्त्रिकी और हार्मोनिक विश्लेषण आम में शून्य बातें हैं । प्रमात्रा यान्त्रिकी आठ संबंध है और हार्मोनिक विश्लेषण नौ है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख प्रमात्रा यान्त्रिकी और हार्मोनिक विश्लेषण के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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प्रधानमंत्री Narendra Modi ने त्रिपुरा की अपनी एकदिवसीय यात्रा के दौरान महाराजा बीर बिक्रम (एमबीबी) हवाई अड्डे के नए एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया।
प्रधानमंत्री Narendra Modi आज उत्तराखंड को 17547 करोड़ रुपये की सौगात दी। इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी आज हल्द्वानी के दौरे पर पहुंचे।
Narendra Modi Visit Mandi: प्रधानमंत्री आज हिमाचल प्रदेश के मंडी में हैं। यहां पीएम नरेंद्र मोदी ने 11,000 करोड़ रुपये की पनबिजली परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में 36,230 करोड़ की लागत से बनने वाले यूपी के सबसे बड़े लम्बे Ganga Expressway का शिलान्यास किया। जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि संयोग से कल ही पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह का बलिदान दिवस है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए Kashi में आयोजित अखिल भारतीय Mayors Conference का उद्घाटन किया। महापौरों के साथ 'न्यू अर्बन इंडिया' विषय पर आयोजित बैठक में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे देश में ज्यादातर शहर पारंपरिक शहर ही हैं, पारंपरिक तरीके से ही विकसित हुए हैं।
Supreme Court ने 2002 के दंगों के मामले में Zakia Jafri द्वारा दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कांग्रेस के पूर्व सांसद और दंगों में मारे गये एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी ने गुलबर्गा सोसाइटी दंगे मामले में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को SIT द्वारा क्लीन चिट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
UP Election 2022 की बयार में बह रहे सियासी दलों के नेता एक-दूसरे पर धड़ल्ले से जुबानी हमला कर रहे हैं। सियासत में भाषा की स्तरहीनता लगातार नये प्रतिमान गढ़ रही है। सत्तापक्ष हो या विपक्ष, सभी की जुबान में वही तीखापन या पैनापन है, जिसे हम अक्सर गली-चौराहे के नुक्कड़ पर होने वाले दो-चार लोगों के वाद-विवाद में देखते हैं।
देश की राजधानी Delhi में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बैठक मंगलवार 7 दिसंबर को हुई। बीजेपी संसदीय दल की इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित पार्टी के तमाम वरिष्ठ सदस्यों ने भाग लिया।
प्रधानमंत्री Narendra Modi आगामी 15 नवंबर को आदिवासी सम्मेलन 'जनजातीय गौरव दिवस' में भाग लेने के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल जाएंगे। इस मौके पर Shivraj government ने भोपाल आने-जाने वाली गाड़ियों को टोल टैक्स में छूट दे दी है।
G-20 Summit 2021 में इटली की यात्रा पर गये प्रधानमंत्री Narendra Modi शनिवार सुबह ईसाई धर्म के सर्वोच्च गुरु Pope Francis से मिले। प्रधानमंत्री मोदी की पोप फ्रांसिस से यह मुलाकात वेटिकन सिटी में हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुलाकात दौरान पोप को भारत यात्रा का निमंत्रण दिया।
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प्रधानमंत्री Narendra Modi ने त्रिपुरा की अपनी एकदिवसीय यात्रा के दौरान महाराजा बीर बिक्रम हवाई अड्डे के नए एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री Narendra Modi आज उत्तराखंड को सत्रह हज़ार पाँच सौ सैंतालीस करोड़ रुपये की सौगात दी। इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी आज हल्द्वानी के दौरे पर पहुंचे। Narendra Modi Visit Mandi: प्रधानमंत्री आज हिमाचल प्रदेश के मंडी में हैं। यहां पीएम नरेंद्र मोदी ने ग्यारह,शून्य करोड़ रुपये की पनबिजली परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में छत्तीस,दो सौ तीस करोड़ की लागत से बनने वाले यूपी के सबसे बड़े लम्बे Ganga Expressway का शिलान्यास किया। जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि संयोग से कल ही पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह का बलिदान दिवस है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए Kashi में आयोजित अखिल भारतीय Mayors Conference का उद्घाटन किया। महापौरों के साथ 'न्यू अर्बन इंडिया' विषय पर आयोजित बैठक में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे देश में ज्यादातर शहर पारंपरिक शहर ही हैं, पारंपरिक तरीके से ही विकसित हुए हैं। Supreme Court ने दो हज़ार दो के दंगों के मामले में Zakia Jafri द्वारा दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कांग्रेस के पूर्व सांसद और दंगों में मारे गये एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी ने गुलबर्गा सोसाइटी दंगे मामले में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को SIT द्वारा क्लीन चिट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। UP Election दो हज़ार बाईस की बयार में बह रहे सियासी दलों के नेता एक-दूसरे पर धड़ल्ले से जुबानी हमला कर रहे हैं। सियासत में भाषा की स्तरहीनता लगातार नये प्रतिमान गढ़ रही है। सत्तापक्ष हो या विपक्ष, सभी की जुबान में वही तीखापन या पैनापन है, जिसे हम अक्सर गली-चौराहे के नुक्कड़ पर होने वाले दो-चार लोगों के वाद-विवाद में देखते हैं। देश की राजधानी Delhi में भारतीय जनता पार्टी की बैठक मंगलवार सात दिसंबर को हुई। बीजेपी संसदीय दल की इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित पार्टी के तमाम वरिष्ठ सदस्यों ने भाग लिया। प्रधानमंत्री Narendra Modi आगामी पंद्रह नवंबर को आदिवासी सम्मेलन 'जनजातीय गौरव दिवस' में भाग लेने के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल जाएंगे। इस मौके पर Shivraj government ने भोपाल आने-जाने वाली गाड़ियों को टोल टैक्स में छूट दे दी है। G-बीस Summit दो हज़ार इक्कीस में इटली की यात्रा पर गये प्रधानमंत्री Narendra Modi शनिवार सुबह ईसाई धर्म के सर्वोच्च गुरु Pope Francis से मिले। प्रधानमंत्री मोदी की पोप फ्रांसिस से यह मुलाकात वेटिकन सिटी में हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुलाकात दौरान पोप को भारत यात्रा का निमंत्रण दिया।
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जबलपुर, यशभारत। कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन ने लगातार बढ़ रही ठंड को देखते हुए कक्षा 1 से लेकर 5वीं तक के स्कूलों में 3 दिन का अवकाश घोषित कर दिया है। कलेक्टर ने इसके आदेश जारी करते हुए शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं। हालांकि शिक्षकों को नियमित रूप से स्कूलों में उपस्थित रहना होगा।
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जबलपुर, यशभारत। कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन ने लगातार बढ़ रही ठंड को देखते हुए कक्षा एक से लेकर पाँचवीं तक के स्कूलों में तीन दिन का अवकाश घोषित कर दिया है। कलेक्टर ने इसके आदेश जारी करते हुए शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं। हालांकि शिक्षकों को नियमित रूप से स्कूलों में उपस्थित रहना होगा।
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आचार्य हरिभद्रने अपने 'अनेकांत-जयपताका नामक ग्रंथमें वादिमुख्य मल्लवादिकृत ' सन्मति- टीका' के कई अवतरण दिये हैं और श्रद्धेय मुनि जिनविजयजीने अनेकानेक प्रमाणोंसे हरिभद्रसूरिका समय वि० स० ७५७ से ८२७ तक सिद्ध किया है। अतः आचार्य मलेवादि विक्रमकी आठवीं शताब्दिके पहलेके विद्वान् हैं, यह निश्चय है और विद्यानन्दस्वामी विक्रमकी नवीं शताब्दिमें हुए हैं, यह भी प्रायः निश्चित-सा है ।
उक्त मलवादिका भी एक 'नयचक्र' नामका संस्कृत ग्रंथ है जिसका पूरा नाम ' द्वादशार नयचक्र' है। जिसतरह चक्रमें आरे होते हैं, उसी तरह इसमें बारह आरे अर्थात् अध्याय हैं। मूल ग्रन्थ तो उपलब्ध नहीं है पर उसकी सिंह क्षमाश्रमणकृत टीका मिलती है। आचार्य यशोविजयने नष्टभ्रष्ट और खंडित प्रतियोंपरसे नयचक्रका उद्धार किया था परन्तु अब उसकी भी कोई शुद्ध प्रति उपलब्ध नहीं है। संभव है कि विद्यानन्दस्वामीने इसी नयचक्रको लक्ष्य करके पूर्वोक्त Stay सूचना की हो। जिस तरह हरिवंशपुराण और आदिपुराणके कर्त्ता दिगम्बर जैनाचार्योंने सिद्धसेनसूरिकी प्रशंसा की है --- जो कि श्वेताम्बराचार्य समझे जाते हैंउसी तरह विद्यानन्दस्वामीने भी श्वेताम्बराचार्य मलवादिके ग्रन्थको पढ़नेकी सिफारिश की हो, तो कोई आश्चर्यकी बात नहीं है। जिस तरह सिद्धसेन सूरि तार्किक थे उसी तरह मलवादि भी थे और जब दिगम्बर और श्वेताम्बर संप्रदायके तार्किक सिद्धान्तों में विशेष महत्त्वका मत-भेद नहीं है, तब नयसंबंधीं एक श्वेताम्बर तर्क-ग्रन्थका उल्लेख एक दिगम्बराचार्यद्वारा किया जाना कुछ असम्भव नहीं मालूम होता । अनेक श्वेताम्बर ग्रन्थकर्ताओं ने भी इसी तरह दिगम्बर ग्रन्थकारोंकी प्रशंसा की है और उनके ग्रन्थोंके हवाले दिये हैं ।
यह भी सम्भव है कि देवसेनके अतिरिक्त अन्य किसी दिगम्बराचार्यका भी कोई नयचक्र हो और विद्यानन्दस्वामीने उसका उल्लेख किया हो। माइल धवलके बृहत् नयचक्र के अन्तकी गाथा ( जो केवल बम्बईवाली प्रतिमें है, मोरनाकी प्रतिमें नहीं है ) यदि ठीक हो तो उससे इस बात की पुष्टि होती है। वह गाथा इस प्रकार है१ देखो, जैनसाहित्यसंशोधकका पहला अंक । २ श्वेताम्बर-परम्परा के अनुसार वीर संवत ८८४ में मलवादिने बौद्धोंको पराजित किया था ।
दुसमीरणेण पोयं पेरियसंतं जहा ति ( चि ) रं नहं । सिरिदेवसेनमुणिणा तह णयचक्कं पुणो रइयं ॥
इसका अभिप्राय यह है कि दुःषमकालरूपी आँधीसे पोतके ( जहाजक) समान जो नयचक्र चिरकालसे नष्ट हो गया था उसे देवसेन मुनिने फिरसे रचा । इससे मालूम होता है कि देवसेनके नयचक्रसे पहले भी कोई नयचक्र था जो नष्ट हो गया था और बहुत सम्भव है कि देवसेनने यह उसीका संक्षिप्त उद्धार किया हो ।
उपलब्ध ग्रन्थों में नयचक्र नामके तीन ग्रन्थ प्रसिद्ध हैं - १ आलाप पद्धति, २ लघु नयचक्र, और ३ बृहत् नयचक्र । इनमेंसे पहला ग्रन्थ आलापपद्धति संस्कृत में है और शेष दो प्राकृतमें।
१ आलापपद्धति - इसके कर्त्ता भी देवसेन ही हैं। भाण्डारकर रिसर्च इन्स्टिटयूट पूनामें इस ग्रन्थकी एक प्रति है, उसके अन्त में प्रति लेखकने लिखा है - " इति सुखबोधार्थमालापपद्धतिः श्रीदेवसेनविरचिता समाप्ता । इति श्रीनयचक्र सम्पूर्णम् । उक्त पुस्तकालयेकी सूचीमें भी यह नयचक्र नामसे ही दर्ज है । बासोदाके भंडारकी सूचीमें भी --जो बम्बईके दिगम्बर जैन मन्दिर के सरस्वतीभण्डारमें है - इसे 'नयचक्र संस्कृत गद्य' के नामसे दर्ज किया है। पं० शिवजीलालकृत दर्शनसार-वचनिकामें देवसेनके संस्कृत नयचक्रका जो उल्लेख है वह भी जान पड़ता है, इसी आलाप पद्धतिको लक्ष्य करके किया गया है । यद्यपि आलाप पद्धति में नयचक्रका ही गद्यरूप सारांश है और वह नयचक्रके ऊपर ही लिखी गई है, इस लिए कुछ लोगों द्वारा दिया गया उसका यह ' नयचक्र' नाम एक सीमातक क्षम्य भी हो सकता है, परन्तु वास्तव में इसका नाम ' आलाप-पद्धति ही है, नयचक्र नहीं ।
आलापपद्धतिके प्रारम्भ में ही लिखा है - " आलापपद्धतिर्वचनरचनानुक्रमेण नयचक्रस्योपरि उच्यते। " इससे मालूम होता है कि आलापपद्धति प्राकृत नयचक्रपर संस्कृतमें प्रश्नोत्तररूपसे लिखी गई है। आलाप अर्थात् बोलचाल की
१ कारंजाकी प्रतिमें भी यह गाथा है ।
२ सन् १८८४-८६ की रिपोर्टके ५१९ वे नम्बरका ग्रन्थ ।
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आचार्य हरिभद्रने अपने 'अनेकांत-जयपताका नामक ग्रंथमें वादिमुख्य मल्लवादिकृत ' सन्मति- टीका' के कई अवतरण दिये हैं और श्रद्धेय मुनि जिनविजयजीने अनेकानेक प्रमाणोंसे हरिभद्रसूरिका समय विशून्य सशून्य सात सौ सत्तावन से आठ सौ सत्ताईस तक सिद्ध किया है। अतः आचार्य मलेवादि विक्रमकी आठवीं शताब्दिके पहलेके विद्वान् हैं, यह निश्चय है और विद्यानन्दस्वामी विक्रमकी नवीं शताब्दिमें हुए हैं, यह भी प्रायः निश्चित-सा है । उक्त मलवादिका भी एक 'नयचक्र' नामका संस्कृत ग्रंथ है जिसका पूरा नाम ' द्वादशार नयचक्र' है। जिसतरह चक्रमें आरे होते हैं, उसी तरह इसमें बारह आरे अर्थात् अध्याय हैं। मूल ग्रन्थ तो उपलब्ध नहीं है पर उसकी सिंह क्षमाश्रमणकृत टीका मिलती है। आचार्य यशोविजयने नष्टभ्रष्ट और खंडित प्रतियोंपरसे नयचक्रका उद्धार किया था परन्तु अब उसकी भी कोई शुद्ध प्रति उपलब्ध नहीं है। संभव है कि विद्यानन्दस्वामीने इसी नयचक्रको लक्ष्य करके पूर्वोक्त Stay सूचना की हो। जिस तरह हरिवंशपुराण और आदिपुराणके कर्त्ता दिगम्बर जैनाचार्योंने सिद्धसेनसूरिकी प्रशंसा की है --- जो कि श्वेताम्बराचार्य समझे जाते हैंउसी तरह विद्यानन्दस्वामीने भी श्वेताम्बराचार्य मलवादिके ग्रन्थको पढ़नेकी सिफारिश की हो, तो कोई आश्चर्यकी बात नहीं है। जिस तरह सिद्धसेन सूरि तार्किक थे उसी तरह मलवादि भी थे और जब दिगम्बर और श्वेताम्बर संप्रदायके तार्किक सिद्धान्तों में विशेष महत्त्वका मत-भेद नहीं है, तब नयसंबंधीं एक श्वेताम्बर तर्क-ग्रन्थका उल्लेख एक दिगम्बराचार्यद्वारा किया जाना कुछ असम्भव नहीं मालूम होता । अनेक श्वेताम्बर ग्रन्थकर्ताओं ने भी इसी तरह दिगम्बर ग्रन्थकारोंकी प्रशंसा की है और उनके ग्रन्थोंके हवाले दिये हैं । यह भी सम्भव है कि देवसेनके अतिरिक्त अन्य किसी दिगम्बराचार्यका भी कोई नयचक्र हो और विद्यानन्दस्वामीने उसका उल्लेख किया हो। माइल धवलके बृहत् नयचक्र के अन्तकी गाथा यदि ठीक हो तो उससे इस बात की पुष्टि होती है। वह गाथा इस प्रकार हैएक देखो, जैनसाहित्यसंशोधकका पहला अंक । दो श्वेताम्बर-परम्परा के अनुसार वीर संवत आठ सौ चौरासी में मलवादिने बौद्धोंको पराजित किया था । दुसमीरणेण पोयं पेरियसंतं जहा ति रं नहं । सिरिदेवसेनमुणिणा तह णयचक्कं पुणो रइयं ॥ इसका अभिप्राय यह है कि दुःषमकालरूपी आँधीसे पोतके समान जो नयचक्र चिरकालसे नष्ट हो गया था उसे देवसेन मुनिने फिरसे रचा । इससे मालूम होता है कि देवसेनके नयचक्रसे पहले भी कोई नयचक्र था जो नष्ट हो गया था और बहुत सम्भव है कि देवसेनने यह उसीका संक्षिप्त उद्धार किया हो । उपलब्ध ग्रन्थों में नयचक्र नामके तीन ग्रन्थ प्रसिद्ध हैं - एक आलाप पद्धति, दो लघु नयचक्र, और तीन बृहत् नयचक्र । इनमेंसे पहला ग्रन्थ आलापपद्धति संस्कृत में है और शेष दो प्राकृतमें। एक आलापपद्धति - इसके कर्त्ता भी देवसेन ही हैं। भाण्डारकर रिसर्च इन्स्टिटयूट पूनामें इस ग्रन्थकी एक प्रति है, उसके अन्त में प्रति लेखकने लिखा है - " इति सुखबोधार्थमालापपद्धतिः श्रीदेवसेनविरचिता समाप्ता । इति श्रीनयचक्र सम्पूर्णम् । उक्त पुस्तकालयेकी सूचीमें भी यह नयचक्र नामसे ही दर्ज है । बासोदाके भंडारकी सूचीमें भी --जो बम्बईके दिगम्बर जैन मन्दिर के सरस्वतीभण्डारमें है - इसे 'नयचक्र संस्कृत गद्य' के नामसे दर्ज किया है। पंशून्य शिवजीलालकृत दर्शनसार-वचनिकामें देवसेनके संस्कृत नयचक्रका जो उल्लेख है वह भी जान पड़ता है, इसी आलाप पद्धतिको लक्ष्य करके किया गया है । यद्यपि आलाप पद्धति में नयचक्रका ही गद्यरूप सारांश है और वह नयचक्रके ऊपर ही लिखी गई है, इस लिए कुछ लोगों द्वारा दिया गया उसका यह ' नयचक्र' नाम एक सीमातक क्षम्य भी हो सकता है, परन्तु वास्तव में इसका नाम ' आलाप-पद्धति ही है, नयचक्र नहीं । आलापपद्धतिके प्रारम्भ में ही लिखा है - " आलापपद्धतिर्वचनरचनानुक्रमेण नयचक्रस्योपरि उच्यते। " इससे मालूम होता है कि आलापपद्धति प्राकृत नयचक्रपर संस्कृतमें प्रश्नोत्तररूपसे लिखी गई है। आलाप अर्थात् बोलचाल की एक कारंजाकी प्रतिमें भी यह गाथा है । दो सन् एक हज़ार आठ सौ चौरासी-छियासी की रिपोर्टके पाँच सौ उन्नीस वे नम्बरका ग्रन्थ ।
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जलभराव से दुकानदारों का धैर्य जवाब दे गया और गुस्साए दुकानदारों ने अनोखे अंदाज में सरकार का विरोध किया.
देहरा. कहते हैं जब सिर से ऊपर पानी निकल जाए है तो सब्र का बांध टूट जाता है. कुछ ऐसा ही देखने को मिला हिमाचल प्रदेश के कागंड़ा जिले में. कांगडा के जसवां प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र के डाडासीबा बाजार में बारिश से सड़क तालाब बन गई. इससे लोगों और दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. भारी बारिश से बरसाती पानी दुकानों के अंदर घुस गया, जिससे दुकानदारों का सामान भी पानी से खराब हो गया. सड़क पर पैदल चलने वाले राहगीरों के साथ-साथ वाहन चालक भी पानी से परेशान नजर आए. लेकिन प्रशासन ने कुछ नहीं किया.
नतीजा यह निकला कि जलभराव से दुकानदारों का धैर्य जवाब दे गया और गुस्साए दुकानदारों ने अनोखे अंदाज में सरकार का विरोध किया. दुकानदारों ने नाव चलाकर लोक निर्माण विंभाग के खिलाफ विरोध प्रकट किया, जिसके बाद सड़क पर नाव चलाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
डाडासीबा से तलवाड़ा जाने वाले इस मुख्य सड़क मार्ग पर दोनों तरफ दुकानें बनी हुई हैं और पानी की समुचित निकासी नहीं होने पर भारी बारिश में यह सड़क तालाब का रूप ले लेती है. पानी की ढंग से निकासी न होने की वजह से दुकानदारों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं. दुकानदार वीरेंद्र कुमार, सोहन लाल, राकेश और अजय ने बताया कि बारिश के कारण हर बार बाजार में पानी भर जाता है और दुकानों में घुस जाता है, जिसकी शिकायत कई बार लोक निर्माण विभाग डाडासीबा के अधिकारियों और नेताओं से की गई है. बावजूद अधिकारी इस समस्या का समाधान करने में असफल साबित हुए हैं.
नतीजन स्थानीय दुकानदारों के साथ-साथ लोगों में भी अधिकारियों व नेताओं के प्रति भारी रोष है. इन दुकानदारों ने लोक निर्माण विभाग से मांग उठाई है कि इस पानी की निकासी का कोई स्थाई हल निकाला जाए. लोक निर्माण विभाग डाडासीबा के एसडीओ राजन कुमार ने बताया कि पानी की निकासी के लिए विभाग कई बार स्थानीय लोगों को निकासी पाइप डालने को कह चुका है, लेकिन लोग निकासी के लिए अपनी जमीन देने से मना कर देते हैं. शीघ्र ही इस समस्या का स्थायी हल निकला जाएगा.
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Apple का फोन चलाने की मनोकामना सबकी होगी पूरी, iPhone 14 मिलेगा इतने सस्ते में, बस कुछ दिन का है इंतजार!
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जलभराव से दुकानदारों का धैर्य जवाब दे गया और गुस्साए दुकानदारों ने अनोखे अंदाज में सरकार का विरोध किया. देहरा. कहते हैं जब सिर से ऊपर पानी निकल जाए है तो सब्र का बांध टूट जाता है. कुछ ऐसा ही देखने को मिला हिमाचल प्रदेश के कागंड़ा जिले में. कांगडा के जसवां प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र के डाडासीबा बाजार में बारिश से सड़क तालाब बन गई. इससे लोगों और दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. भारी बारिश से बरसाती पानी दुकानों के अंदर घुस गया, जिससे दुकानदारों का सामान भी पानी से खराब हो गया. सड़क पर पैदल चलने वाले राहगीरों के साथ-साथ वाहन चालक भी पानी से परेशान नजर आए. लेकिन प्रशासन ने कुछ नहीं किया. नतीजा यह निकला कि जलभराव से दुकानदारों का धैर्य जवाब दे गया और गुस्साए दुकानदारों ने अनोखे अंदाज में सरकार का विरोध किया. दुकानदारों ने नाव चलाकर लोक निर्माण विंभाग के खिलाफ विरोध प्रकट किया, जिसके बाद सड़क पर नाव चलाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. डाडासीबा से तलवाड़ा जाने वाले इस मुख्य सड़क मार्ग पर दोनों तरफ दुकानें बनी हुई हैं और पानी की समुचित निकासी नहीं होने पर भारी बारिश में यह सड़क तालाब का रूप ले लेती है. पानी की ढंग से निकासी न होने की वजह से दुकानदारों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं. दुकानदार वीरेंद्र कुमार, सोहन लाल, राकेश और अजय ने बताया कि बारिश के कारण हर बार बाजार में पानी भर जाता है और दुकानों में घुस जाता है, जिसकी शिकायत कई बार लोक निर्माण विभाग डाडासीबा के अधिकारियों और नेताओं से की गई है. बावजूद अधिकारी इस समस्या का समाधान करने में असफल साबित हुए हैं. नतीजन स्थानीय दुकानदारों के साथ-साथ लोगों में भी अधिकारियों व नेताओं के प्रति भारी रोष है. इन दुकानदारों ने लोक निर्माण विभाग से मांग उठाई है कि इस पानी की निकासी का कोई स्थाई हल निकाला जाए. लोक निर्माण विभाग डाडासीबा के एसडीओ राजन कुमार ने बताया कि पानी की निकासी के लिए विभाग कई बार स्थानीय लोगों को निकासी पाइप डालने को कह चुका है, लेकिन लोग निकासी के लिए अपनी जमीन देने से मना कर देते हैं. शीघ्र ही इस समस्या का स्थायी हल निकला जाएगा. . Apple का फोन चलाने की मनोकामना सबकी होगी पूरी, iPhone चौदह मिलेगा इतने सस्ते में, बस कुछ दिन का है इंतजार!
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भारतीय क्रिकेट इतिहास में सबसे सफलतम कप्तान की बात करें तो महेन्द्र सिंह धोनी का नाम हर किसी की जुबां पर आ ही जाएगा। महेन्द्र सिंह धोनी ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए एक कप्तान, एक बल्लेबाज और विकेटकीपर के तौर पर जबरदस्त योगदान दिया है। धोनी का करियर वैसे भारतीय टीम के लिए इतना आसान नहीं रहा और उन्होंने कई मुश्किलों को पार करते हुए टीम में जगह बनायी।
धोनी को इसके लिए अपनी पढ़ाई को भी त्याग करना पड़ा। धोनी ने सेंट जेवियर कॉलेज से कॉर्मस की पढ़ाई शुरू की लेकिन वो क्रिकेट के कारण इसे पूरा नहीं कर सके।
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भारतीय क्रिकेट इतिहास में सबसे सफलतम कप्तान की बात करें तो महेन्द्र सिंह धोनी का नाम हर किसी की जुबां पर आ ही जाएगा। महेन्द्र सिंह धोनी ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए एक कप्तान, एक बल्लेबाज और विकेटकीपर के तौर पर जबरदस्त योगदान दिया है। धोनी का करियर वैसे भारतीय टीम के लिए इतना आसान नहीं रहा और उन्होंने कई मुश्किलों को पार करते हुए टीम में जगह बनायी। धोनी को इसके लिए अपनी पढ़ाई को भी त्याग करना पड़ा। धोनी ने सेंट जेवियर कॉलेज से कॉर्मस की पढ़ाई शुरू की लेकिन वो क्रिकेट के कारण इसे पूरा नहीं कर सके।
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और मजेसे गाते हुए उन्हें पकाकर उन्होंने मुझे अचरजमे डाल दिया । ऐसे सूझ-चूभवाले लोग कभी लाचारी कैसे महसूस कर सकते है ? यह सच है कि हम सब मजदूर थे। और ईमानदारी से काम करनेमे ही हमारी मुक्ति और हमारी सभी आवश्यक जरूरकी पूर्ति भरी है ।
पुण्यदिवस, ३० जनवरी १९४८
आज नायकाल ५ वजकर १० मिनटपर प्रार्थना के लिए प्राते समय प्रार्थना-स्वलपर एक व्यक्ति विस्तीजने गावीजीके तीन गोलिया मारी और वही उनका स्वर्गवास हो गया। गिरने से पहले उन्होंने नमस्कार करनेके लिए हाथ उठाये और उनके मुहसे निकला
"हे राम"
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और मजेसे गाते हुए उन्हें पकाकर उन्होंने मुझे अचरजमे डाल दिया । ऐसे सूझ-चूभवाले लोग कभी लाचारी कैसे महसूस कर सकते है ? यह सच है कि हम सब मजदूर थे। और ईमानदारी से काम करनेमे ही हमारी मुक्ति और हमारी सभी आवश्यक जरूरकी पूर्ति भरी है । पुण्यदिवस, तीस जनवरी एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस आज नायकाल पाँच वजकर दस मिनटपर प्रार्थना के लिए प्राते समय प्रार्थना-स्वलपर एक व्यक्ति विस्तीजने गावीजीके तीन गोलिया मारी और वही उनका स्वर्गवास हो गया। गिरने से पहले उन्होंने नमस्कार करनेके लिए हाथ उठाये और उनके मुहसे निकला "हे राम"
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कर चुका था और इसके विपरीत तैल तृतीय की शक्ति उसके सामन्तो की दुरभिसन्धि के परिणामस्वरूप क्षीण हो चुकी थी । ऐसी स्थिति मे अनुमकोण्डा पर प्राक्रमरण करते ही प्रोल अपनी शक्तिशाली सेना के साथ तैल तृतीय को परास्त कर उसे रगागरण मे ही बन्दी बना लिया। परन्तु प्रोल ने चालुक्य साम्राज्य के साथ अपने परम्परागत सम्बन्धो को दृष्टिगत रखते हुए तैल तृतीय को मुक्त कर उसे सकुशल उसकी राजधानी की ओर लौटने का समुचित प्रबन्ध कर दिया । प्रोल के पश्चात् उसके पुत्र रुद्र और तैल तृतीय के बीच शत्रुता चलती रही और रुद्र के आतक से तैल तृतीय सग्रहरणी रोग का रोगी बन ई० सन् १९६२ मे पञ्चत्व को प्राप्त हुआ । तैल तृतीय की मृत्यु के पश्चात् बिज्जल विशाल साम्राज्य का स्वामी बन बैठा ।
चालुक्य साम्राज्य के अवशेषो पर कलचूरी राज्य की स्थापना करते ही बिज्जल ने होय्सल राज्यान्तर्गत वनवासी प्रदेश पर आक्रमरण कर उस पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया ।'
"बाम्बे गजट Vol 1 Pt II P 474
समन्वय का एक ऐतिहासिक पर असफल प्रयास
पिछले प्रकरणो मे चैत्यवासी परम्परा, भट्टारक परम्परा, यापनीय परम्परा आदि विभिन्न परम्पराओ के उद्भव, विकास, प्रचार-प्रसार एव उनके कार्य-कलापो पर जो प्रकाश डाला गया है उससे सहज ही यह प्रकट हो जाता है कि देवद्धिगरिण क्षमाश्रमरण के स्वर्गस्थ होने के उत्तरवर्ती काल मे जैन धर्म की अध्यात्मपरक मूल परम्परा के स्थान पर द्रव्य परम्पराओं का प्रायश सर्वत्र वर्चस्व स्थापित हो गया था और लोक प्रवाह भाव अर्चना को भूल कर द्रव्यार्चना को ही धर्म और धर्म के स्वरूप का मूल समझने लगा था ।
द्रव्य परम्परा, द्रव्याचंना अथवा द्रव्य पूजा के वर्चस्व काल मे जो मूल भाव परम्परा मे शिथिलाचार का प्राबल्य उत्तरोत्तर बढता गया उससे मुमुक्षु साधुओ को बडी चिन्ता हुई ।
मूल परम्परा के वर्चस्व को पुन स्थापित करने के लिये अनेक प्रात्मार्थी मुमुक्षु आचार्यों एव श्रमणो आदि ने अनेक बार प्रयास किये । पर उनके परिणाम आशानुकूल नही मिकले। इस सम्बन्ध में विस्तृत रूप से आगे यथास्थान विचार किया जायेगा। ऐसे प्रयत्नो के असफल होने पर भी वे महापुरुप निराश नही हुए। उनके प्रयत्न निरन्तर जारी रहे । इसका प्रमाण है समय-समय पर चैत्यवासी परम्परा के अन्दर से ही प्रकट हुए क्रियोद्धारक सन्त ।
जैन परम्परा का देवद्धिगणि क्षमाश्रमण से उत्तरवर्ती काल का साहित्य इस बात का साक्षी है कि इन द्रव्य परम्पराओ के वार्द्धक्य काल मे भी समय-समय पर अनेक आत्मार्थी श्रमणो ने आगमो से धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझ कर इन द्रव्य परम्पराओं के विरुद्ध विद्रोह किया। उन्होने अपनी द्रव्य परम्पराओं से पूर्णत वचकर भाव परम्परा के प्रचार-प्रसार के लिये जीवन भर अथक प्रयास किये । उनके प्रयास आशिक रूप में ही सफल हुए । यदि यह कह दिया जाय कि उन क्रियोद्धारको मे से अधिकाश को अपने प्रयास मे वस्तुत असफलता का ही
मुह देखना पडा तो अतिशयोक्ति नही होगी। उनकी असफलता का मूल कारण यह था कि द्रव्य परम्पराओ के समर्थको ने न केवल सत्ताधीशो को ही अपितु जन मानस को भी पूर्ण रूपेण प्रभावित कर अपनी ओर कर लिया था । द्रव्य परम्पराओं के सचालको द्वारा प्रचचन मे लाये हुए चित्ताकर्षक धार्मिक आयोजनो के परिणामस्वरूप इन परम्पराओ द्वारा प्रचलित की गई सभी मान्यताए लोक मे धर्म के नाम पर रूढ हो गई थी। इसके साथ ही उन क्रियोद्धारको के असफल होने का दूसरा प्रमुख कारण यह था कि इन शक्तिशाली बनी हुई द्रव्य परम्पराओ के अनुयायी राजाओ, सामन्तो, कोट्याधीशो, व्यापारियो आदि के द्वारा जन साधारण को जो प्रलोभन उस समय प्राप्त थे, उस प्रकार के प्रलोभन देने की स्थिति में ये नये क्रियोद्धारक पूर्णत अक्षम थे ।
भाव परम्परा की पुन स्थापना के लिये समय-समय पर मुमुक्षुत्रो द्वारा किये गये प्रयासो के पुनः पुन सफल हो जाने के उपरान्त भी भाव परम्परा के पक्षघर साधु साध्वी श्रावक श्राविका वर्ग हतोत्साहित नही हुआ । भाव परम्परा को पुन स्थापित करने औौर द्रव्य परम्परा को निसत्व एव निर्बल करने के प्रयास अध्यात्मपरक आत्मार्थी मुमुक्षुओ द्वारा समय-समय पर किये ही जाते रहे ।
"महानिशीथ सूत्र" के अथ से इति तक अध्ययन व पर्यालोचन से यह प्रकट होता है कि भगवान् महावीर द्वारा प्ररूपित जैन धर्म के मूल स्वरूप मे आस्था रखने वाला श्रमण वर्ग एव साधक वर्ग वस्तुत जैन धर्म के स्वरूप मे और श्रमणाचार मे द्रव्य परम्पराओं द्वारा लाई गई विकृतियो से बडा चिन्तित रहा । धर्म के मूल स्वरूप मे उत्तरोत्तर बढती गई विकृतियो और श्रमण वर्ग मे उत्तरोत्तर बढता हुआ शिथिलाचार यह सब कुछ उन प्राचार्यो श्रमणो और साधुओ के हृदय मे शल्य की तरह खटकता रहा।
महानिशीथ के पर्यालोचन से ऐसा प्रतीत होता है कि विभिन्न इकाइयो मे विभक्त धर्म सघ मे उत्तरोत्तर बढते हुए मान्यता भेदो पर यदि किसी प्रकार का अकुश लगाकर जैन सघ को एकता के सूत्र मे आबद्ध नही किया गया तो इसके दूरगामी परिणाम बडे भयावह सिद्ध होगे इस आशका से चिन्तित होकर विभिन्न परम्पराओ के नायको ने भाव परम्परा और अनेक गरगो, गच्छो, सम्प्रदायो एव धर्म सघो मे विभक्त हुई द्रव्य परम्पराम्रो के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया ।
महानिशीथ की रचना किसके द्वारा और किस समय में की गई इस सम्बन्ध मे तो, प्रमाणाभाव मे निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता, परन्तु महानिशीथ मे ही विद्यमान उल्लेख से यह निश्चित रूपेरण कहा जा सकता है कि विक्रम
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कर चुका था और इसके विपरीत तैल तृतीय की शक्ति उसके सामन्तो की दुरभिसन्धि के परिणामस्वरूप क्षीण हो चुकी थी । ऐसी स्थिति मे अनुमकोण्डा पर प्राक्रमरण करते ही प्रोल अपनी शक्तिशाली सेना के साथ तैल तृतीय को परास्त कर उसे रगागरण मे ही बन्दी बना लिया। परन्तु प्रोल ने चालुक्य साम्राज्य के साथ अपने परम्परागत सम्बन्धो को दृष्टिगत रखते हुए तैल तृतीय को मुक्त कर उसे सकुशल उसकी राजधानी की ओर लौटने का समुचित प्रबन्ध कर दिया । प्रोल के पश्चात् उसके पुत्र रुद्र और तैल तृतीय के बीच शत्रुता चलती रही और रुद्र के आतक से तैल तृतीय सग्रहरणी रोग का रोगी बन ईशून्य सन् एक हज़ार नौ सौ बासठ मे पञ्चत्व को प्राप्त हुआ । तैल तृतीय की मृत्यु के पश्चात् बिज्जल विशाल साम्राज्य का स्वामी बन बैठा । चालुक्य साम्राज्य के अवशेषो पर कलचूरी राज्य की स्थापना करते ही बिज्जल ने होय्सल राज्यान्तर्गत वनवासी प्रदेश पर आक्रमरण कर उस पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया ।' "बाम्बे गजट Vol एक Pt II P चार सौ चौहत्तर समन्वय का एक ऐतिहासिक पर असफल प्रयास पिछले प्रकरणो मे चैत्यवासी परम्परा, भट्टारक परम्परा, यापनीय परम्परा आदि विभिन्न परम्पराओ के उद्भव, विकास, प्रचार-प्रसार एव उनके कार्य-कलापो पर जो प्रकाश डाला गया है उससे सहज ही यह प्रकट हो जाता है कि देवद्धिगरिण क्षमाश्रमरण के स्वर्गस्थ होने के उत्तरवर्ती काल मे जैन धर्म की अध्यात्मपरक मूल परम्परा के स्थान पर द्रव्य परम्पराओं का प्रायश सर्वत्र वर्चस्व स्थापित हो गया था और लोक प्रवाह भाव अर्चना को भूल कर द्रव्यार्चना को ही धर्म और धर्म के स्वरूप का मूल समझने लगा था । द्रव्य परम्परा, द्रव्याचंना अथवा द्रव्य पूजा के वर्चस्व काल मे जो मूल भाव परम्परा मे शिथिलाचार का प्राबल्य उत्तरोत्तर बढता गया उससे मुमुक्षु साधुओ को बडी चिन्ता हुई । मूल परम्परा के वर्चस्व को पुन स्थापित करने के लिये अनेक प्रात्मार्थी मुमुक्षु आचार्यों एव श्रमणो आदि ने अनेक बार प्रयास किये । पर उनके परिणाम आशानुकूल नही मिकले। इस सम्बन्ध में विस्तृत रूप से आगे यथास्थान विचार किया जायेगा। ऐसे प्रयत्नो के असफल होने पर भी वे महापुरुप निराश नही हुए। उनके प्रयत्न निरन्तर जारी रहे । इसका प्रमाण है समय-समय पर चैत्यवासी परम्परा के अन्दर से ही प्रकट हुए क्रियोद्धारक सन्त । जैन परम्परा का देवद्धिगणि क्षमाश्रमण से उत्तरवर्ती काल का साहित्य इस बात का साक्षी है कि इन द्रव्य परम्पराओ के वार्द्धक्य काल मे भी समय-समय पर अनेक आत्मार्थी श्रमणो ने आगमो से धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझ कर इन द्रव्य परम्पराओं के विरुद्ध विद्रोह किया। उन्होने अपनी द्रव्य परम्पराओं से पूर्णत वचकर भाव परम्परा के प्रचार-प्रसार के लिये जीवन भर अथक प्रयास किये । उनके प्रयास आशिक रूप में ही सफल हुए । यदि यह कह दिया जाय कि उन क्रियोद्धारको मे से अधिकाश को अपने प्रयास मे वस्तुत असफलता का ही मुह देखना पडा तो अतिशयोक्ति नही होगी। उनकी असफलता का मूल कारण यह था कि द्रव्य परम्पराओ के समर्थको ने न केवल सत्ताधीशो को ही अपितु जन मानस को भी पूर्ण रूपेण प्रभावित कर अपनी ओर कर लिया था । द्रव्य परम्पराओं के सचालको द्वारा प्रचचन मे लाये हुए चित्ताकर्षक धार्मिक आयोजनो के परिणामस्वरूप इन परम्पराओ द्वारा प्रचलित की गई सभी मान्यताए लोक मे धर्म के नाम पर रूढ हो गई थी। इसके साथ ही उन क्रियोद्धारको के असफल होने का दूसरा प्रमुख कारण यह था कि इन शक्तिशाली बनी हुई द्रव्य परम्पराओ के अनुयायी राजाओ, सामन्तो, कोट्याधीशो, व्यापारियो आदि के द्वारा जन साधारण को जो प्रलोभन उस समय प्राप्त थे, उस प्रकार के प्रलोभन देने की स्थिति में ये नये क्रियोद्धारक पूर्णत अक्षम थे । भाव परम्परा की पुन स्थापना के लिये समय-समय पर मुमुक्षुत्रो द्वारा किये गये प्रयासो के पुनः पुन सफल हो जाने के उपरान्त भी भाव परम्परा के पक्षघर साधु साध्वी श्रावक श्राविका वर्ग हतोत्साहित नही हुआ । भाव परम्परा को पुन स्थापित करने औौर द्रव्य परम्परा को निसत्व एव निर्बल करने के प्रयास अध्यात्मपरक आत्मार्थी मुमुक्षुओ द्वारा समय-समय पर किये ही जाते रहे । "महानिशीथ सूत्र" के अथ से इति तक अध्ययन व पर्यालोचन से यह प्रकट होता है कि भगवान् महावीर द्वारा प्ररूपित जैन धर्म के मूल स्वरूप मे आस्था रखने वाला श्रमण वर्ग एव साधक वर्ग वस्तुत जैन धर्म के स्वरूप मे और श्रमणाचार मे द्रव्य परम्पराओं द्वारा लाई गई विकृतियो से बडा चिन्तित रहा । धर्म के मूल स्वरूप मे उत्तरोत्तर बढती गई विकृतियो और श्रमण वर्ग मे उत्तरोत्तर बढता हुआ शिथिलाचार यह सब कुछ उन प्राचार्यो श्रमणो और साधुओ के हृदय मे शल्य की तरह खटकता रहा। महानिशीथ के पर्यालोचन से ऐसा प्रतीत होता है कि विभिन्न इकाइयो मे विभक्त धर्म सघ मे उत्तरोत्तर बढते हुए मान्यता भेदो पर यदि किसी प्रकार का अकुश लगाकर जैन सघ को एकता के सूत्र मे आबद्ध नही किया गया तो इसके दूरगामी परिणाम बडे भयावह सिद्ध होगे इस आशका से चिन्तित होकर विभिन्न परम्पराओ के नायको ने भाव परम्परा और अनेक गरगो, गच्छो, सम्प्रदायो एव धर्म सघो मे विभक्त हुई द्रव्य परम्पराम्रो के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया । महानिशीथ की रचना किसके द्वारा और किस समय में की गई इस सम्बन्ध मे तो, प्रमाणाभाव मे निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता, परन्तु महानिशीथ मे ही विद्यमान उल्लेख से यह निश्चित रूपेरण कहा जा सकता है कि विक्रम
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बाल विवाह रोकने के लिए असम सरकार का सख्त कानून, सही कदम ( Image Source : PTI )
असम सरकार ने राज्य में बाल विवाह रोकने के लिए जो सख्त कानूनी कदम उठाया है, वह स्वागतयोग्य है. यह कदम एक ऐसे अपराध(बाल विवाह) के खिलाफ कानूनी हल देगा, जो कि बच्चों को अशक्त बनाता है और जिस अपराध की सामाजिक मान्यता भी है. सरकार ने अपने रुख से एक कठोर संदेश दिया है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कानूनों का सख्ती से पालन किया जाएगा. मीडिया में आई खबरों के मुताबिक अभी तक राज्य में बाल विवाह के मामलों में 3,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और चार हजार से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गई हैं. सरकार ने बाल विवाह के पीडि़तों के लिए पुनर्वास नीति लाने के लिए कैबिनेट की उपसमिति का भी गठन किया है, जो कि अपनी रिपोर्ट जल्द देगी.
असम सरकार ने बाल विवाह रोकने के लिए सभी 2,197 ग्राम पंचायत सचिवों को बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत बाल विवाह रोकथाम अधिकारी के रूप में नामित किया है. ये अधिकारी ही बाल विवाह के मामलों में बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत केस करवाएंगे. ये सभी सकारात्मक कदम सही दिशा में उठाए गए हैं, इनसे जवाबदेही तय होगी और कानून निवारक माहौल बनेगा, जिससे राज्य में बाल विवाह उन्मूलन में सहायता मिलेगी.
भारत सरकार ने बाल विवाह रोकने के लिए बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 बनाया था. हालांकि किसी राज्य सरकार ने इस कानून को अमलीजामा पहनाने के लिए पहल नहीं की. बाल विवाह एक अपराध है और यह कई दूसरे गंभीर अपराधों जैसे-बाल यौन शोषण, बाल दुर्व्यापार, घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न को भी जन्म देता है. इसके अतिरिक्त यह बच्चों को अशक्त बनाता है और उन्हें उनके मौलिक अधिकारों जैसे-जीने का अधिकार, व्यक्तिगत आजादी, शिक्षा का अधिकार और पसंद के अधिकार से भी वंचित करता है. इस तरह असम सरकार का यह कदम पूर्णतः उचित है. सरकार के इस रुख का अन्य राज्यों को भी अनुकरण करना चाहिए ताकि देशभर में कानून को लागू करने में एकरूपता आए और देश को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सके.
असम सरकार को बाल विवाह जैसी विकराल समस्या को खत्म करने के लिए सख्त कदम क्यों उठाना पड़ा? इसे जानने के लिए कुछ आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है. राज्य में बाल विवाह, मातृ मृत्यु दर और नाबालिग उम्र में गभर्वती होने की दर कहीं ज्यादा है. पिछले साल आई राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कुछ जिलों में बाल विवाह और मातृ मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से भी दोगुनी है. एनएफएचएस-5 के अनुसार राज्य के धुबरी जिले में 20-24 साल की 50. 8 प्रतिशत लड़कियां ऐसी हैं, जिनका विवाह 18 साल की उम्र से पहले हो गया. दक्षिण शालमारा मानकाचर में 44. 7 प्रतिशत, दरंग में 42. 8 प्रतिशत, गोलपारा में 41. 8 प्रतिशत और बरपेटा में 40. 1 प्रतिशत लड़कियां हैं जिनका विवाह 18 साल की उम्र से पहले हो गया. अगर इसी मामले में देश की बात करें तो यह आंकड़ा 23. 3 प्रतिशत है जबकि असम में यह 31. 8 प्रतिशत है. यहां तक कि मातृ मृत्यु दर के मामले में भी असम की स्थिति दयनीय है. इस मामले में प्रति एक लाख पर देश में जहां 97 मौतें होती हैं, वहीं असम में यह आंकड़ा 195 है.
एनएफएचएस-5 सर्वे के अनुसार 15-19 साल की उम्र की लड़कियों के गर्भवती होने या मां बनने के मामले में भी राज्य का कछाड़ जिला शीर्ष पर है. यहां पर ऐसी लड़कियों की संख्या 29. 9 प्रतिशत है, जबकि धुबरी में यह 22. 4 प्रतिशत, दरंग में 16. 1 प्रतिशत, कामरूप में यह 15. 7 प्रतिशत है.
उपरोक्त आंकड़े अपने आप में स्थिति की भयावहता को दर्शाते हैं और इनके चलते ही राज्य सरकार को सख्त कदम उठाना पड़ा है. सरकार सख्त कानून के जरिए बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहती है, जो कि सराहनीय है. इससे बच्चों के प्रति होने वाले अन्य अपराधों पर भी लगाम लगाई जा सकेगी. यह भी जरूरी है कि बाल विवाह के पीडि़तों के पुनर्वास के लिए कैबिनेट की उपसमिति समय से रिपोर्ट दे ताकि उनका पुनर्वास जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जा सके. यह उनकी पीड़ा को कम करने का काम करेगा. बाल विवाह एकाकी अपराध नहीं है बल्कि उनके प्रति होने वाले कई गंभीर अपराधों का जन्मदाता है. ये अपराध बच्चों को शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक रूप से हानि पहुंचाते हैं और उनके सामाजिक विकास को भी रोकते हैं.
असम सरकार का यह सख्त कदम उसी श्रंखला की कड़ी है जब नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने पिछले साल 'बाल विवाह मुक्त भारत'आंदोलन की शुरुआत 16 अक्टूबर को राजस्थान से की थी. बाल विवाह के खिलाफ दुनिया के सबसे बड़े इस जमीनी और देशव्यापी आंदोलन में देश के 10,000 से ज्यादा गांवों में 75,000 से अधिक महिलाओं और बच्चों ने मार्च निकाला था. आंदोलन से दो करोड़ से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े थे.
कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन असम सरकार के साथ मिलकर राज्य में बाल सुरक्षा तंत्र बनाने पर सक्रियता के साथ काम कर रही है. असम कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन के केंद्र बिंदू में है. यह एक सकारात्मक संदेश है कि 'बाल विवाह मुक्त भारत'अभियान के चंद महीनों बाद ही सरकार ने बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को सजा दिलाने के लिए सख्त कानून का प्रावधान किया है.
सरकार के इस कदम से जवाबदेही तय होगी, कानून निवारक माहौल बनेगा और बाल विवाह के खिलाफ लड़ने वाले सभी साझेदारों को मजबूती मिलेगी. इस सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर लोगों में बाल विवाह के खिलाफ, इसके दुष्परिणामों और बाल विवाह रोकने के कानून को लेकर जागरूकता फैलानी होगी. साथ ही 18 साल की उम्र तक मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध करवानी होगी ताकि बाल विवाह रूपी इस राक्षस का अंत किया जा सके.
लेखक- रविकांत, एडवोकेट, कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन के एक्सेस टू जस्टिस कार्यक्रम के कंट्री हेड हैं.
(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है. )
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बाल विवाह रोकने के लिए असम सरकार का सख्त कानून, सही कदम असम सरकार ने राज्य में बाल विवाह रोकने के लिए जो सख्त कानूनी कदम उठाया है, वह स्वागतयोग्य है. यह कदम एक ऐसे अपराध के खिलाफ कानूनी हल देगा, जो कि बच्चों को अशक्त बनाता है और जिस अपराध की सामाजिक मान्यता भी है. सरकार ने अपने रुख से एक कठोर संदेश दिया है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कानूनों का सख्ती से पालन किया जाएगा. मीडिया में आई खबरों के मुताबिक अभी तक राज्य में बाल विवाह के मामलों में तीन,शून्य से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और चार हजार से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गई हैं. सरकार ने बाल विवाह के पीडि़तों के लिए पुनर्वास नीति लाने के लिए कैबिनेट की उपसमिति का भी गठन किया है, जो कि अपनी रिपोर्ट जल्द देगी. असम सरकार ने बाल विवाह रोकने के लिए सभी दो,एक सौ सत्तानवे ग्राम पंचायत सचिवों को बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत बाल विवाह रोकथाम अधिकारी के रूप में नामित किया है. ये अधिकारी ही बाल विवाह के मामलों में बाल विवाह निषेध अधिनियम दो हज़ार छः के तहत केस करवाएंगे. ये सभी सकारात्मक कदम सही दिशा में उठाए गए हैं, इनसे जवाबदेही तय होगी और कानून निवारक माहौल बनेगा, जिससे राज्य में बाल विवाह उन्मूलन में सहायता मिलेगी. भारत सरकार ने बाल विवाह रोकने के लिए बाल विवाह निषेध अधिनियम दो हज़ार छः बनाया था. हालांकि किसी राज्य सरकार ने इस कानून को अमलीजामा पहनाने के लिए पहल नहीं की. बाल विवाह एक अपराध है और यह कई दूसरे गंभीर अपराधों जैसे-बाल यौन शोषण, बाल दुर्व्यापार, घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न को भी जन्म देता है. इसके अतिरिक्त यह बच्चों को अशक्त बनाता है और उन्हें उनके मौलिक अधिकारों जैसे-जीने का अधिकार, व्यक्तिगत आजादी, शिक्षा का अधिकार और पसंद के अधिकार से भी वंचित करता है. इस तरह असम सरकार का यह कदम पूर्णतः उचित है. सरकार के इस रुख का अन्य राज्यों को भी अनुकरण करना चाहिए ताकि देशभर में कानून को लागू करने में एकरूपता आए और देश को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सके. असम सरकार को बाल विवाह जैसी विकराल समस्या को खत्म करने के लिए सख्त कदम क्यों उठाना पड़ा? इसे जानने के लिए कुछ आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है. राज्य में बाल विवाह, मातृ मृत्यु दर और नाबालिग उम्र में गभर्वती होने की दर कहीं ज्यादा है. पिछले साल आई राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कुछ जिलों में बाल विवाह और मातृ मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से भी दोगुनी है. एनएफएचएस-पाँच के अनुसार राज्य के धुबरी जिले में बीस-चौबीस साल की पचास. आठ प्रतिशत लड़कियां ऐसी हैं, जिनका विवाह अट्ठारह साल की उम्र से पहले हो गया. दक्षिण शालमारा मानकाचर में चौंतालीस. सात प्रतिशत, दरंग में बयालीस. आठ प्रतिशत, गोलपारा में इकतालीस. आठ प्रतिशत और बरपेटा में चालीस. एक प्रतिशत लड़कियां हैं जिनका विवाह अट्ठारह साल की उम्र से पहले हो गया. अगर इसी मामले में देश की बात करें तो यह आंकड़ा तेईस. तीन प्रतिशत है जबकि असम में यह इकतीस. आठ प्रतिशत है. यहां तक कि मातृ मृत्यु दर के मामले में भी असम की स्थिति दयनीय है. इस मामले में प्रति एक लाख पर देश में जहां सत्तानवे मौतें होती हैं, वहीं असम में यह आंकड़ा एक सौ पचानवे है. एनएफएचएस-पाँच सर्वे के अनुसार पंद्रह-उन्नीस साल की उम्र की लड़कियों के गर्भवती होने या मां बनने के मामले में भी राज्य का कछाड़ जिला शीर्ष पर है. यहां पर ऐसी लड़कियों की संख्या उनतीस. नौ प्रतिशत है, जबकि धुबरी में यह बाईस. चार प्रतिशत, दरंग में सोलह. एक प्रतिशत, कामरूप में यह पंद्रह. सात प्रतिशत है. उपरोक्त आंकड़े अपने आप में स्थिति की भयावहता को दर्शाते हैं और इनके चलते ही राज्य सरकार को सख्त कदम उठाना पड़ा है. सरकार सख्त कानून के जरिए बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहती है, जो कि सराहनीय है. इससे बच्चों के प्रति होने वाले अन्य अपराधों पर भी लगाम लगाई जा सकेगी. यह भी जरूरी है कि बाल विवाह के पीडि़तों के पुनर्वास के लिए कैबिनेट की उपसमिति समय से रिपोर्ट दे ताकि उनका पुनर्वास जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जा सके. यह उनकी पीड़ा को कम करने का काम करेगा. बाल विवाह एकाकी अपराध नहीं है बल्कि उनके प्रति होने वाले कई गंभीर अपराधों का जन्मदाता है. ये अपराध बच्चों को शारीरिक, भावनात्मक, मानसिक रूप से हानि पहुंचाते हैं और उनके सामाजिक विकास को भी रोकते हैं. असम सरकार का यह सख्त कदम उसी श्रंखला की कड़ी है जब नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने पिछले साल 'बाल विवाह मुक्त भारत'आंदोलन की शुरुआत सोलह अक्टूबर को राजस्थान से की थी. बाल विवाह के खिलाफ दुनिया के सबसे बड़े इस जमीनी और देशव्यापी आंदोलन में देश के दस,शून्य से ज्यादा गांवों में पचहत्तर,शून्य से अधिक महिलाओं और बच्चों ने मार्च निकाला था. आंदोलन से दो करोड़ से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े थे. कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन असम सरकार के साथ मिलकर राज्य में बाल सुरक्षा तंत्र बनाने पर सक्रियता के साथ काम कर रही है. असम कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन के केंद्र बिंदू में है. यह एक सकारात्मक संदेश है कि 'बाल विवाह मुक्त भारत'अभियान के चंद महीनों बाद ही सरकार ने बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को सजा दिलाने के लिए सख्त कानून का प्रावधान किया है. सरकार के इस कदम से जवाबदेही तय होगी, कानून निवारक माहौल बनेगा और बाल विवाह के खिलाफ लड़ने वाले सभी साझेदारों को मजबूती मिलेगी. इस सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर लोगों में बाल विवाह के खिलाफ, इसके दुष्परिणामों और बाल विवाह रोकने के कानून को लेकर जागरूकता फैलानी होगी. साथ ही अट्ठारह साल की उम्र तक मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध करवानी होगी ताकि बाल विवाह रूपी इस राक्षस का अंत किया जा सके. लेखक- रविकांत, एडवोकेट, कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन के एक्सेस टू जस्टिस कार्यक्रम के कंट्री हेड हैं.
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सत्तर, अस्सी और नब्बे के दशक में दुनिया ने कई तानाशाह देखे हैं ... खासकर लैटिन अमेरिकी, अफ्रीकी और मिडिल ईस्ट के देशों में ऐसी शख्सियतों ने सत्ता संभाली जिन्होंने लगभग एक जैसी नीतियां बनाईं ... लगभग एक जैसे नारे दिए और इन सभी देशों का हाल लगभग एक जैसा ही हुआ ... ज्यादातर देशों की अर्थव्यवस्था खोखली हो गई और आम लोगों का जीवन तहस नहस हो गया.... . ऐसा ही एक नाम था मेनगिस्तु हाइले मरियम का ... इथियोपिया फर्स्ट जैसे नारों के साथ सत्ता संभालने वाले मेनगिस्तो ना सिर्फ इथियोपिया बल्कि पूरे अफ्रीका के इतिहास में सबसे क्रूर शासकों में एक साबित हुआ ... इथियोपिया के लिए ये एक ऐसा शासक साबित हुआ जिस पर नरसंहार के आरोप में मुकदमा चला ... और सज़ा-ए-मौत का फरमान सुनाया गया .... मेनगिस्तु हाइले मरियम का नाम भले ही आज आम लोग नहीं जानते हों लेकिन इथियोपिया में लोग इसे कभी नहीं भुला पाएंगे . .
मेनगिस्तु एक तरफ आर्मी में पावरफुल होता जा रहा था दूसरी तरफ देश में राजशाही के खिलाफ माहौल बनता जा रहा था . . इथियोपिया में सूखा पड़ा था .... अनाज की कमी हो गई थी . . भुखमरी बढ़ती जा रही थी... बादशाह हेली सेलसई की सरकार से जनता का भरोसा टूट चुका था ... इथियोपिया में एक क्रांति का माहौल तैयार हो चुका था ... उस वक्त कोई नहीं जानता था कि आने वाले वक्त मे क्या होने वाला है . ,. .
मेनगिस्तु पर सम्राट रहे हेली सेलसई की हत्या के आरोप लगत रहे लेकिन मेनगिस्तु ने कभी भी इस अपराध को confess नहीं किया... उस वक्त इथियोपिया में कई तरह के समूह बने हुए थे ... सब अपने अपने स्तर पर सम्राट हेली सेलसई के खिलाफ काम करते रहे थे लेकिन सत्ता डर्ग यानि मिलिट्री के हाथ में आ गई थी ... डर्ग को सोवियत संघ का समर्थन मिला हुआ था लिहाजा इथियोपिया की सत्ता पर अब कम्युनिस्ट काबिज हो चुके थे . . डर्ग के सत्ता में आते ही मेनगिस्तु ने विरोधियों के खिलाफ काम करना शुरू किया ... कहते हैं 1974 में मेनगिस्तु ने सम्राट के शासनकाल में अधिकारी रहे 61 लोगों की हत्या करा दी थी ...इतना ही नहीं आने वाले सालों में मेनगिस्तु ने डर्ग के सहारे कई अधिकारियों और विरोधियों के मौत के घाट उतरवाया .... डर्ग के सैनिकों ने बाद में इस नरसंहार का खुलासा करते वक्त कहा था कि मेनगिस्तु हाइले मरियम ने पूरी प्लानिंग के साथ ये हत्याएं कराईं थीं . हालांकि मेनगिस्तु ने कभी भी ये कबूल नहीं किया. .
1989 में एरित्रियन वॉर ऑफ इनडिपेंडेंस शुरू हो गया... इस युद्ध में मेनगिस्तु की सेना हार गई . . 15 हज़ार लोग मारे गए ... एक साल बाद एक और युद्ध हुआ इसमें मेनगिस्तु को हार मिली . . आंतरिक तौर पर मेनगिस्तु काफी कमजोर हो चुका था 1989 में इथियोपिया में तख्तापलट की असफल कोशिश हुई .... . आखिरकार दो साल बाद Ethiopian People's revolutionary Front ने मेनगिस्तु को देश छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया ... इथियोपिया फर्स्ट का नारा देकर देश में तख्तापलट के जरिए सत्ता में आए मेनगिस्तु हाइले मरियम को तख्तापलट के जरिए देशनिकाला मिल गया . . जिम्बाब्वे ने मेनगिस्तु को शरण दे दी ... जहां उसे मारने की असफल कोशिश भी हुई ... इथियोपिया की नई सरकार ने मेनगिस्तु को नरसंहार का दोषी माना. . उसपर मुकदमा भी चलाया गया . . 2006 में उसे दोषी मानते हुए इथियोपिया की अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई लेकिन जिम्बाब्वे से प्रत्यर्पण नहीं होने की वजह से बूढा हो चुका मेनगिस्तो हाइले मरियम अभी भी ज़िंदा है . .
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सत्तर, अस्सी और नब्बे के दशक में दुनिया ने कई तानाशाह देखे हैं ... खासकर लैटिन अमेरिकी, अफ्रीकी और मिडिल ईस्ट के देशों में ऐसी शख्सियतों ने सत्ता संभाली जिन्होंने लगभग एक जैसी नीतियां बनाईं ... लगभग एक जैसे नारे दिए और इन सभी देशों का हाल लगभग एक जैसा ही हुआ ... ज्यादातर देशों की अर्थव्यवस्था खोखली हो गई और आम लोगों का जीवन तहस नहस हो गया.... . ऐसा ही एक नाम था मेनगिस्तु हाइले मरियम का ... इथियोपिया फर्स्ट जैसे नारों के साथ सत्ता संभालने वाले मेनगिस्तो ना सिर्फ इथियोपिया बल्कि पूरे अफ्रीका के इतिहास में सबसे क्रूर शासकों में एक साबित हुआ ... इथियोपिया के लिए ये एक ऐसा शासक साबित हुआ जिस पर नरसंहार के आरोप में मुकदमा चला ... और सज़ा-ए-मौत का फरमान सुनाया गया .... मेनगिस्तु हाइले मरियम का नाम भले ही आज आम लोग नहीं जानते हों लेकिन इथियोपिया में लोग इसे कभी नहीं भुला पाएंगे . . मेनगिस्तु एक तरफ आर्मी में पावरफुल होता जा रहा था दूसरी तरफ देश में राजशाही के खिलाफ माहौल बनता जा रहा था . . इथियोपिया में सूखा पड़ा था .... अनाज की कमी हो गई थी . . भुखमरी बढ़ती जा रही थी... बादशाह हेली सेलसई की सरकार से जनता का भरोसा टूट चुका था ... इथियोपिया में एक क्रांति का माहौल तैयार हो चुका था ... उस वक्त कोई नहीं जानता था कि आने वाले वक्त मे क्या होने वाला है . ,. . मेनगिस्तु पर सम्राट रहे हेली सेलसई की हत्या के आरोप लगत रहे लेकिन मेनगिस्तु ने कभी भी इस अपराध को confess नहीं किया... उस वक्त इथियोपिया में कई तरह के समूह बने हुए थे ... सब अपने अपने स्तर पर सम्राट हेली सेलसई के खिलाफ काम करते रहे थे लेकिन सत्ता डर्ग यानि मिलिट्री के हाथ में आ गई थी ... डर्ग को सोवियत संघ का समर्थन मिला हुआ था लिहाजा इथियोपिया की सत्ता पर अब कम्युनिस्ट काबिज हो चुके थे . . डर्ग के सत्ता में आते ही मेनगिस्तु ने विरोधियों के खिलाफ काम करना शुरू किया ... कहते हैं एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर में मेनगिस्तु ने सम्राट के शासनकाल में अधिकारी रहे इकसठ लोगों की हत्या करा दी थी ...इतना ही नहीं आने वाले सालों में मेनगिस्तु ने डर्ग के सहारे कई अधिकारियों और विरोधियों के मौत के घाट उतरवाया .... डर्ग के सैनिकों ने बाद में इस नरसंहार का खुलासा करते वक्त कहा था कि मेनगिस्तु हाइले मरियम ने पूरी प्लानिंग के साथ ये हत्याएं कराईं थीं . हालांकि मेनगिस्तु ने कभी भी ये कबूल नहीं किया. . एक हज़ार नौ सौ नवासी में एरित्रियन वॉर ऑफ इनडिपेंडेंस शुरू हो गया... इस युद्ध में मेनगिस्तु की सेना हार गई . . पंद्रह हज़ार लोग मारे गए ... एक साल बाद एक और युद्ध हुआ इसमें मेनगिस्तु को हार मिली . . आंतरिक तौर पर मेनगिस्तु काफी कमजोर हो चुका था एक हज़ार नौ सौ नवासी में इथियोपिया में तख्तापलट की असफल कोशिश हुई .... . आखिरकार दो साल बाद Ethiopian People's revolutionary Front ने मेनगिस्तु को देश छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया ... इथियोपिया फर्स्ट का नारा देकर देश में तख्तापलट के जरिए सत्ता में आए मेनगिस्तु हाइले मरियम को तख्तापलट के जरिए देशनिकाला मिल गया . . जिम्बाब्वे ने मेनगिस्तु को शरण दे दी ... जहां उसे मारने की असफल कोशिश भी हुई ... इथियोपिया की नई सरकार ने मेनगिस्तु को नरसंहार का दोषी माना. . उसपर मुकदमा भी चलाया गया . . दो हज़ार छः में उसे दोषी मानते हुए इथियोपिया की अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई लेकिन जिम्बाब्वे से प्रत्यर्पण नहीं होने की वजह से बूढा हो चुका मेनगिस्तो हाइले मरियम अभी भी ज़िंदा है . .
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अटारी की व्युत्पत्ति जड़ में पाया जाता है, जो एक लैटिन शब्द है, जिसका अनुवाद "चकित" के रूप में किया जा सकता है। इस अनुवाद से परे, अवधारणा का उपयोग सामान्य रूप से कपड़े और कपड़ों के नाम के लिए किया जाता है।
पोशाक के विचार में विभिन्न वस्त्र और सामान शामिल हैं । जूते, मोज़ा, पैंट, शर्ट, शर्ट, कोट और टोपी, कई अन्य वस्तुओं में से, उन संगठनों का हिस्सा हैं जिन्हें लोग पहन सकते हैं।
सामान्य तौर पर, पोशाक की अवधारणा का उपयोग तब किया जाता है जब पोशाक सामान्य से बच जाती है या जब यह एक समान होती है। अन्यथा, बोलचाल की भाषा में, कपड़े या कपड़े जैसे शब्द अक्सर उपयोग किए जाते हैं।
गायक, एक मामले का नाम देने के लिए, आमतौर पर अपने संगीत समारोहों के लिए विशेष संगठनों का चयन करते हैं। कई बार ये वस्त्र प्रश्न में कलाकार के सौंदर्यशास्त्र के विकास में महत्वपूर्ण होते हैं, और यहां तक कि कुछ वैचारिक विचारों के साथ संबंध भी हो सकते हैं। लेडी गागा उन आंकड़ों में से एक हैं, जो उनके द्वारा देखे गए आउटफिट पर ध्यान देती हैं।
एथलीट कुछ विशेष संगठनों का चयन भी कर सकते हैं जब उन्हें किसी कार्यक्रम में भाग लेना चाहिए। उनमें से कई प्रसिद्ध ब्रांडों द्वारा तैयार किए गए हैं जो विज्ञापन देना चाहते हैं। इस फ्रेम में फुटबॉलर लियोनेल मेसी ने बैलून डे ओरो गलास में पहने जाने वाले आउटफिट के साथ हैरानी जताई।कला, पेशेवर खेल और मनोरंजन की दुनिया में विभिन्न क्षेत्रों में शामिल लोगों और कलाकारों और निर्देशकों से लेकर कलाकारों और स्वयं कलाकारों और खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता के मामले में हाल के दिनों में काफी गिरावट आई है। यह देखते हुए कि हम भौतिक रूप की प्रबलता के कारण एक युग में हैं, पोशाक का महत्व मशहूर हस्तियों के दायरे में लगभग महत्वपूर्ण हो गया है, और कई मामलों में यह अपनी कमियों को छिपाने के लिए घूंघट के रूप में काम करता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि कला के लिए पोशाक महत्वपूर्ण नहीं है; इसके विपरीत, साहित्य, सिनेमा और वीडियो गेम अनुशासन के तीन उदाहरण हैं जिसमें पात्रों के कपड़े उनके होने के तरीके, उनकी संस्कृति और उनकी आर्थिक स्थिति की उपेक्षा किए बिना उनके मूलभूत पहलुओं की एक श्रृंखला को दर्शाते हैं। जिस युग से वे संबंधित हैं।
वीडियोगेम में, कंपनियों के लिए खिलाड़ियों को उनके पात्रों की पोशाक बदलने की संभावना देना बहुत आम है, और इसके लिए अलग-अलग तरीके और व्यावसायिक रणनीति हैं। एक ओर, ऐसे शीर्षक होते हैं, जिनमें माइक्रोट्रांसक्यूशन की एक प्रणाली होती है, जो उपयोगकर्ताओं को वास्तविक धन के साथ सभी प्रकार की सामग्री खरीदने की अनुमति देती है, और इसमें अनुभव का विस्तार करने के लिए नए परिदृश्य, चरित्र और कहानियां शामिल होती हैं। कुछ डेवलपर्स असली पैसे के लिए पूछना नहीं चुनते हैं, लेकिन उन वस्तुओं के बदले में विस्तार की पेशकश करते हैं जो खेल में ही पाए जा सकते हैं, जैसे कि कीमती पत्थर, सिक्के, और इसी तरह।
वीडियो गेम में पोशाक का परिवर्तन अपेक्षाकृत हाल ही में हुआ है, क्योंकि पहली पीढ़ी के कंसोल्स और कंप्यूटर की तकनीकी सीमाओं के कारण अतीत में यह संभव नहीं था। पात्रों के पहले मॉडल में इतने निचले स्तर के विवरण होते थे कि कभी-कभी वे अपने कपड़ों को अपने शरीर से अलग नहीं कर सकते थे, और उनके पास आँखें या बाल भी नहीं थे। वर्तमान में, चूंकि वे 3 डी में बने हैं, इसलिए डिजाइनर बिना कपड़ों के चरित्र का निर्माण कर सकते हैं और जितने चाहें उतने वस्त्र जोड़ सकते हैं, जो प्रोसेसर के लिए एक महत्वपूर्ण बोझ लादे बिना नहीं चाहते।
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अटारी की व्युत्पत्ति जड़ में पाया जाता है, जो एक लैटिन शब्द है, जिसका अनुवाद "चकित" के रूप में किया जा सकता है। इस अनुवाद से परे, अवधारणा का उपयोग सामान्य रूप से कपड़े और कपड़ों के नाम के लिए किया जाता है। पोशाक के विचार में विभिन्न वस्त्र और सामान शामिल हैं । जूते, मोज़ा, पैंट, शर्ट, शर्ट, कोट और टोपी, कई अन्य वस्तुओं में से, उन संगठनों का हिस्सा हैं जिन्हें लोग पहन सकते हैं। सामान्य तौर पर, पोशाक की अवधारणा का उपयोग तब किया जाता है जब पोशाक सामान्य से बच जाती है या जब यह एक समान होती है। अन्यथा, बोलचाल की भाषा में, कपड़े या कपड़े जैसे शब्द अक्सर उपयोग किए जाते हैं। गायक, एक मामले का नाम देने के लिए, आमतौर पर अपने संगीत समारोहों के लिए विशेष संगठनों का चयन करते हैं। कई बार ये वस्त्र प्रश्न में कलाकार के सौंदर्यशास्त्र के विकास में महत्वपूर्ण होते हैं, और यहां तक कि कुछ वैचारिक विचारों के साथ संबंध भी हो सकते हैं। लेडी गागा उन आंकड़ों में से एक हैं, जो उनके द्वारा देखे गए आउटफिट पर ध्यान देती हैं। एथलीट कुछ विशेष संगठनों का चयन भी कर सकते हैं जब उन्हें किसी कार्यक्रम में भाग लेना चाहिए। उनमें से कई प्रसिद्ध ब्रांडों द्वारा तैयार किए गए हैं जो विज्ञापन देना चाहते हैं। इस फ्रेम में फुटबॉलर लियोनेल मेसी ने बैलून डे ओरो गलास में पहने जाने वाले आउटफिट के साथ हैरानी जताई।कला, पेशेवर खेल और मनोरंजन की दुनिया में विभिन्न क्षेत्रों में शामिल लोगों और कलाकारों और निर्देशकों से लेकर कलाकारों और स्वयं कलाकारों और खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता के मामले में हाल के दिनों में काफी गिरावट आई है। यह देखते हुए कि हम भौतिक रूप की प्रबलता के कारण एक युग में हैं, पोशाक का महत्व मशहूर हस्तियों के दायरे में लगभग महत्वपूर्ण हो गया है, और कई मामलों में यह अपनी कमियों को छिपाने के लिए घूंघट के रूप में काम करता है। इसका मतलब यह नहीं है कि कला के लिए पोशाक महत्वपूर्ण नहीं है; इसके विपरीत, साहित्य, सिनेमा और वीडियो गेम अनुशासन के तीन उदाहरण हैं जिसमें पात्रों के कपड़े उनके होने के तरीके, उनकी संस्कृति और उनकी आर्थिक स्थिति की उपेक्षा किए बिना उनके मूलभूत पहलुओं की एक श्रृंखला को दर्शाते हैं। जिस युग से वे संबंधित हैं। वीडियोगेम में, कंपनियों के लिए खिलाड़ियों को उनके पात्रों की पोशाक बदलने की संभावना देना बहुत आम है, और इसके लिए अलग-अलग तरीके और व्यावसायिक रणनीति हैं। एक ओर, ऐसे शीर्षक होते हैं, जिनमें माइक्रोट्रांसक्यूशन की एक प्रणाली होती है, जो उपयोगकर्ताओं को वास्तविक धन के साथ सभी प्रकार की सामग्री खरीदने की अनुमति देती है, और इसमें अनुभव का विस्तार करने के लिए नए परिदृश्य, चरित्र और कहानियां शामिल होती हैं। कुछ डेवलपर्स असली पैसे के लिए पूछना नहीं चुनते हैं, लेकिन उन वस्तुओं के बदले में विस्तार की पेशकश करते हैं जो खेल में ही पाए जा सकते हैं, जैसे कि कीमती पत्थर, सिक्के, और इसी तरह। वीडियो गेम में पोशाक का परिवर्तन अपेक्षाकृत हाल ही में हुआ है, क्योंकि पहली पीढ़ी के कंसोल्स और कंप्यूटर की तकनीकी सीमाओं के कारण अतीत में यह संभव नहीं था। पात्रों के पहले मॉडल में इतने निचले स्तर के विवरण होते थे कि कभी-कभी वे अपने कपड़ों को अपने शरीर से अलग नहीं कर सकते थे, और उनके पास आँखें या बाल भी नहीं थे। वर्तमान में, चूंकि वे तीन डी में बने हैं, इसलिए डिजाइनर बिना कपड़ों के चरित्र का निर्माण कर सकते हैं और जितने चाहें उतने वस्त्र जोड़ सकते हैं, जो प्रोसेसर के लिए एक महत्वपूर्ण बोझ लादे बिना नहीं चाहते।
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कि इसका सबसे छोटा टुकड़ा मौ होगा। वहीं परमाणु है। कोई गुण नया नहीं पेग होता इसलियों ( परमाणु-पिण्ड) में जिसने गुण पाये जाते हैं उतने हम परमाणुओंमें मी मानते हैं। मग
कि स्कमें हम जितने गुण साबित कर सकते है उससे एक गुण भी अधिक परमाणुमें महीं कह सकते। जब परमाणु है तब किसी गुणकी सचा पहिले स्कोंमें ही साबित करना चाहिये परमाणुके गुणोंसे हम स्कभर्मे गुण साबित नहीं कर सकते किन्तु स्कषके गुप्मोसे परमाणु गुण साबित किये जाते हैं। साधारण स्कने पैतन्य सिद्ध नहीं होता इस परमाणुओं तप कैसे माना जा सकता है। मिम स्कर्षो ( शरीर मस्तिष्क यादि ) में चैतम्प मालूम होता है उनके विषय में तो यहाँ हि ही चढ़ रहा है कि यह उन है अपना उनसे विभिन्न किसी दूसरे इम्पका मस्तिष्कमे पैतम्प तभी साबित हो सकता है जब परमाणु बैतन्य साबित हो जाय और परमाणुओंमें चैवम्य सभी साबित हो सकता है जब कि मस्तिष्क यादि साबित हा जाय । अब तक यह अन्योन्पामयदोष दूर न हो जाम तब तक * गुणके भेदसे गुणीमें भेद होता है इस नियम अनुसार चैतम्प बाके पदार्थको एक मिन इम्प की मानना पड़ेगा ।
प्रश्न- यदि दूसरे स्कोंमे चैतन्य म होनेसे बाप परमाणुमे चैतम्प न मानेंगे और परमाणु वैत सिद्ध न होनेसे मस्तिष्क आदिमे चैत न मानेंगे और इस तरह एक मये इम्पकी सिद्धि करेंगे तो मशीनोंमें भी एक नये इष्पकी कल्पना करना पयेगा, क्योंकि एक मन्त्र ( मशीन ) से मो काम होता है यह पन्जेवर
वही आत्मा है । वह हमारे लिये अदृश्य या अवक्तव्य भले ही हो परन्तु विद्युत्की तरह अनुमेय अवश्य है । दो पदार्थोके सघर्षण या सम्मिश्रणसे विद्युत् पैदा होती है परन्तु हम सघर्षण और सम्मिश्रणको विद्युत् नहीं कह सकते । सघर्षण और सम्मिश्रण तो सिर्फ उसका निमित्त कारण है । इसी प्रकार स्नायु, मस्तिष्क आदिकी क्रियाको हम चैतन्य नहीं कह सकते, वह तो सिर्फ उसका निमित्त कारण है ।
प्रश्न - रूप, रस, गन्ध, स्पर्श, आकार, गति आदिका विकार चैतन्य नहीं है, वह पृथक् गुण है, यह बात ठीक है । परन्तु जिस प्रकार पुद्गलमे रूपादि गुण हैं उसी प्रकार उसमें एक चैतन्य गुण भी मान लिया जाय तो क्या आपत्ति है ? पुद्गलका प्रत्येक परमाणु चेतन है किन्तु जिस प्रकार परमाणु सूक्ष्म होनेसे उसके रूपादि गुण अदृश्य रहते हैं उसी प्रकार परमाणुमें रहनेवाले चैतन्यकी मात्रा भी इतनी अल्प होती है कि हमें मालूम नहीं होती । किन्तु जब वे परमाणु मस्तिष्क आदिके रूप में बहुतसे एकत्रित हो जाते हैं तब उनका चैतन्य विशाल रूपमें मालूम होने लगता है । इस प्रकार चैतन्य एक अलग गुण होनेपर भी वह पुद्गलसे भिन्न आत्म-द्रव्यको सिद्ध नहीं कर सकता ।
उत्तर - गुणके भेदसे ही गुणीमे भेद होता है । इसलिये जब तक पुद्गल परमाणुओंमें चैतन्य साबित न हो जाय तब तक चैतन्य - वाला द्रव्य एक नया द्रव्य ही मानना पड़ेगा । परमाणुको हम किसी भी इन्द्रियसे ग्रहण नहीं कर सकते । जो पिण्ड इन्द्रियों से ग्रहण होते हैं उनके टुकडे होते हम देखते है इसलिये हम अनुमान करते हैं
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कि इसका सबसे छोटा टुकड़ा मौ होगा। वहीं परमाणु है। कोई गुण नया नहीं पेग होता इसलियों में जिसने गुण पाये जाते हैं उतने हम परमाणुओंमें मी मानते हैं। मग कि स्कमें हम जितने गुण साबित कर सकते है उससे एक गुण भी अधिक परमाणुमें महीं कह सकते। जब परमाणु है तब किसी गुणकी सचा पहिले स्कोंमें ही साबित करना चाहिये परमाणुके गुणोंसे हम स्कभर्मे गुण साबित नहीं कर सकते किन्तु स्कषके गुप्मोसे परमाणु गुण साबित किये जाते हैं। साधारण स्कने पैतन्य सिद्ध नहीं होता इस परमाणुओं तप कैसे माना जा सकता है। मिम स्कर्षो में चैतम्प मालूम होता है उनके विषय में तो यहाँ हि ही चढ़ रहा है कि यह उन है अपना उनसे विभिन्न किसी दूसरे इम्पका मस्तिष्कमे पैतम्प तभी साबित हो सकता है जब परमाणु बैतन्य साबित हो जाय और परमाणुओंमें चैवम्य सभी साबित हो सकता है जब कि मस्तिष्क यादि साबित हा जाय । अब तक यह अन्योन्पामयदोष दूर न हो जाम तब तक * गुणके भेदसे गुणीमें भेद होता है इस नियम अनुसार चैतम्प बाके पदार्थको एक मिन इम्प की मानना पड़ेगा । प्रश्न- यदि दूसरे स्कोंमे चैतन्य म होनेसे बाप परमाणुमे चैतम्प न मानेंगे और परमाणु वैत सिद्ध न होनेसे मस्तिष्क आदिमे चैत न मानेंगे और इस तरह एक मये इम्पकी सिद्धि करेंगे तो मशीनोंमें भी एक नये इष्पकी कल्पना करना पयेगा, क्योंकि एक मन्त्र से मो काम होता है यह पन्जेवर वही आत्मा है । वह हमारे लिये अदृश्य या अवक्तव्य भले ही हो परन्तु विद्युत्की तरह अनुमेय अवश्य है । दो पदार्थोके सघर्षण या सम्मिश्रणसे विद्युत् पैदा होती है परन्तु हम सघर्षण और सम्मिश्रणको विद्युत् नहीं कह सकते । सघर्षण और सम्मिश्रण तो सिर्फ उसका निमित्त कारण है । इसी प्रकार स्नायु, मस्तिष्क आदिकी क्रियाको हम चैतन्य नहीं कह सकते, वह तो सिर्फ उसका निमित्त कारण है । प्रश्न - रूप, रस, गन्ध, स्पर्श, आकार, गति आदिका विकार चैतन्य नहीं है, वह पृथक् गुण है, यह बात ठीक है । परन्तु जिस प्रकार पुद्गलमे रूपादि गुण हैं उसी प्रकार उसमें एक चैतन्य गुण भी मान लिया जाय तो क्या आपत्ति है ? पुद्गलका प्रत्येक परमाणु चेतन है किन्तु जिस प्रकार परमाणु सूक्ष्म होनेसे उसके रूपादि गुण अदृश्य रहते हैं उसी प्रकार परमाणुमें रहनेवाले चैतन्यकी मात्रा भी इतनी अल्प होती है कि हमें मालूम नहीं होती । किन्तु जब वे परमाणु मस्तिष्क आदिके रूप में बहुतसे एकत्रित हो जाते हैं तब उनका चैतन्य विशाल रूपमें मालूम होने लगता है । इस प्रकार चैतन्य एक अलग गुण होनेपर भी वह पुद्गलसे भिन्न आत्म-द्रव्यको सिद्ध नहीं कर सकता । उत्तर - गुणके भेदसे ही गुणीमे भेद होता है । इसलिये जब तक पुद्गल परमाणुओंमें चैतन्य साबित न हो जाय तब तक चैतन्य - वाला द्रव्य एक नया द्रव्य ही मानना पड़ेगा । परमाणुको हम किसी भी इन्द्रियसे ग्रहण नहीं कर सकते । जो पिण्ड इन्द्रियों से ग्रहण होते हैं उनके टुकडे होते हम देखते है इसलिये हम अनुमान करते हैं
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कोलकाता :करोड़ों रुपये के रोज वैली चिटफंड घोटाले में चल रही जांच के सिलसिले में सीबीआई अधिकारियों ने बुधवार को पश्चिम बंगाल सचिवालय का दौरा किया। यह पहला मौका है जब रोज वैली घोटाले के सिलसिले में जांच एजेंसी के कर्मचारी राज्य सचिवालय पहुंचे। सूत्रों ने कहा कि सीबीआई कर्मचारी सुबह सचिवालय पहुंचे और दो पत्र सौंपे। पहला पत्र मुख्य सचिव राजीव सिन्हा के लिये था और दूसरा पत्र भूमि विभाग के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) के लिये था। जांच एजेंसी ने राज्य सरकार से कहा कि वह रोज वैली घोटाले से जुड़ी सभी फाइलें जमा कराए और भूमि विभाग के ओएसडी को 18 अक्टूबर को एजेंसी के समक्ष पेश होने के लिये समन किया गया है। सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, "सीबीआई राज्य सरकार और रोज वैली समूह के बीच हुए भूमि सौदे के बारे में जानकारी चाहती है। " सीबीआई सूत्रों ने कहा, "जांच के उद्देश्य से यह राज्य सचिवालय का नियमित दौरा था। " उन्होंने राज्य सरकार से सहयोग की मांग की। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने राज्य सरकार से पोंजी योजना वाली कंपनी के साथ हुए सौदे की प्रकृति और जमीन की जगह के बारे में भी जानकारी मांगी है। रोज वैली चिटफंड घोटाले में हजारों आम आदमी की मेहनत की कमाई डूब गई। रोज वैली ने अवैध योजनाओं के जरिये जनता से करीब 10 हजार करोड़ रुपये की रकम जुटाई।
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कोलकाता :करोड़ों रुपये के रोज वैली चिटफंड घोटाले में चल रही जांच के सिलसिले में सीबीआई अधिकारियों ने बुधवार को पश्चिम बंगाल सचिवालय का दौरा किया। यह पहला मौका है जब रोज वैली घोटाले के सिलसिले में जांच एजेंसी के कर्मचारी राज्य सचिवालय पहुंचे। सूत्रों ने कहा कि सीबीआई कर्मचारी सुबह सचिवालय पहुंचे और दो पत्र सौंपे। पहला पत्र मुख्य सचिव राजीव सिन्हा के लिये था और दूसरा पत्र भूमि विभाग के विशेष कार्याधिकारी के लिये था। जांच एजेंसी ने राज्य सरकार से कहा कि वह रोज वैली घोटाले से जुड़ी सभी फाइलें जमा कराए और भूमि विभाग के ओएसडी को अट्ठारह अक्टूबर को एजेंसी के समक्ष पेश होने के लिये समन किया गया है। सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, "सीबीआई राज्य सरकार और रोज वैली समूह के बीच हुए भूमि सौदे के बारे में जानकारी चाहती है। " सीबीआई सूत्रों ने कहा, "जांच के उद्देश्य से यह राज्य सचिवालय का नियमित दौरा था। " उन्होंने राज्य सरकार से सहयोग की मांग की। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने राज्य सरकार से पोंजी योजना वाली कंपनी के साथ हुए सौदे की प्रकृति और जमीन की जगह के बारे में भी जानकारी मांगी है। रोज वैली चिटफंड घोटाले में हजारों आम आदमी की मेहनत की कमाई डूब गई। रोज वैली ने अवैध योजनाओं के जरिये जनता से करीब दस हजार करोड़ रुपये की रकम जुटाई।
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कुछ दिनों पहले गूगल ने एंड्रॉयड और iOS दोनों के लिए जीमेल में मीट वीडियो कॉन्फ्रेंस प्लेटफॉर्म को जोड़ा था। अब वीडियो कॉलिंग करने के लिए आप जीमेल में गूगल मीट का उपयोग कर सकते हैं और अपने साथियों को इनवाइट भेज सकते हैं। गूगल मीट का ऑप्शन जीमेल ऐप ओपन करते ही राइट साइड में आता है। अगर आप इसका उपयोग नहीं करना चाहते हैं तो इसे डिसेबल कर सकते हैं। आइए इसका तरीका जानते हैं।
अगर एंड्रॉयड यूजर्स को जीमेल ऐप में से गूगल मीट को डिसेबल करना है तो इसके लिए उन्हें जीमेल में जाकर सबसे ऊपर दिए जा रहे तीन बिंदुओं यानी हैमबर्ग आयकन पर टैप करना होगा। अब स्क्रॉल डाउन कर नीचे आना होगा और सेटिंग के लिए दिए जा रहे आयकन पर टैप करना होगा। फिर अकाउंट पर टैप करना होगा। इसके बाद आपको मीट सब सेक्शन का ऑप्शन दिखाई देगा।
इसके अंदर जाकर शो द मीट टैब फॉर वीडियो कॉलिंग का ऑप्शन मिलेगा। इसे सिलेक्ट कर इसे डिसेबल करना होगा। अब जीमेल ऐप में आपको केवल मेल्स का ऑप्शन दिखाई देगा। गूगल मीट डिसेबल हो जाएगा।
आईफोन का उपयोग करने वालों को भी गूगल मीट डिसेबल करने के लिए कई स्टेप्स फॉलो करने हैं। यूजर्स सबसे पहले जीमेल में जाकर हैमबर्ग आयकन पर टैप कर सेटिंग में जाएं। उसके बाद अकाउंट सिलेक्ट करें। अब जनरल का ऑप्शन दिखेगा। उसमें जाकर सब सेक्शन डिसेबल का ऑप्शन आपके सामने आएगा। इसको सिलेक्ट कर डिसेबल कर लें। ऐसा करने के बाद अब आपको जीमले ऐप में सबसे नीचे राइट साइड में गूगल मीट का ऑप्शन नहीं दिखेगा।
गूगल मीट के बाद अब जीमेल अपने प्लेटफॉर्म पर एक नया फीचर Authentication logos की सुविधा जोड़ने की योजना बना रही है। ईमेल के जरिये होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए तकनीकी डेवलप करने के लिए गूगल ने पिछले साल मैसेज आइडेंटिफिकेशन या BIMI के लिए ब्रांड इंडिकेटर शामिल किए थे। अब कंपनी GSuite में Authentication logos फीचर जोड़ने की सोच रही है। इससे यूजर्स को काफी फायदा होगा और उनका अकाउंट सुरक्षित रहेगा।
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कुछ दिनों पहले गूगल ने एंड्रॉयड और iOS दोनों के लिए जीमेल में मीट वीडियो कॉन्फ्रेंस प्लेटफॉर्म को जोड़ा था। अब वीडियो कॉलिंग करने के लिए आप जीमेल में गूगल मीट का उपयोग कर सकते हैं और अपने साथियों को इनवाइट भेज सकते हैं। गूगल मीट का ऑप्शन जीमेल ऐप ओपन करते ही राइट साइड में आता है। अगर आप इसका उपयोग नहीं करना चाहते हैं तो इसे डिसेबल कर सकते हैं। आइए इसका तरीका जानते हैं। अगर एंड्रॉयड यूजर्स को जीमेल ऐप में से गूगल मीट को डिसेबल करना है तो इसके लिए उन्हें जीमेल में जाकर सबसे ऊपर दिए जा रहे तीन बिंदुओं यानी हैमबर्ग आयकन पर टैप करना होगा। अब स्क्रॉल डाउन कर नीचे आना होगा और सेटिंग के लिए दिए जा रहे आयकन पर टैप करना होगा। फिर अकाउंट पर टैप करना होगा। इसके बाद आपको मीट सब सेक्शन का ऑप्शन दिखाई देगा। इसके अंदर जाकर शो द मीट टैब फॉर वीडियो कॉलिंग का ऑप्शन मिलेगा। इसे सिलेक्ट कर इसे डिसेबल करना होगा। अब जीमेल ऐप में आपको केवल मेल्स का ऑप्शन दिखाई देगा। गूगल मीट डिसेबल हो जाएगा। आईफोन का उपयोग करने वालों को भी गूगल मीट डिसेबल करने के लिए कई स्टेप्स फॉलो करने हैं। यूजर्स सबसे पहले जीमेल में जाकर हैमबर्ग आयकन पर टैप कर सेटिंग में जाएं। उसके बाद अकाउंट सिलेक्ट करें। अब जनरल का ऑप्शन दिखेगा। उसमें जाकर सब सेक्शन डिसेबल का ऑप्शन आपके सामने आएगा। इसको सिलेक्ट कर डिसेबल कर लें। ऐसा करने के बाद अब आपको जीमले ऐप में सबसे नीचे राइट साइड में गूगल मीट का ऑप्शन नहीं दिखेगा। गूगल मीट के बाद अब जीमेल अपने प्लेटफॉर्म पर एक नया फीचर Authentication logos की सुविधा जोड़ने की योजना बना रही है। ईमेल के जरिये होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए तकनीकी डेवलप करने के लिए गूगल ने पिछले साल मैसेज आइडेंटिफिकेशन या BIMI के लिए ब्रांड इंडिकेटर शामिल किए थे। अब कंपनी GSuite में Authentication logos फीचर जोड़ने की सोच रही है। इससे यूजर्स को काफी फायदा होगा और उनका अकाउंट सुरक्षित रहेगा।
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टीकमगढ़ : तहसील बड़ागांव के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचयात हैदरपुर के रहने वाले किसान की पूरी फसल 30 मार्च 2022 की सुबह जलकर राख हो गयी। किसान शोभरन यादव के अनुसार, घटना दोपहर 12 बजे की है। आग बुझाने के लिए बोरी और फ़ायरब्रिगडे की भी मदद ली गयी। जब तक गाड़ी आयी सारी फसल जल चुकी थी।
आग में किसान की तीन से चार एकड़ में लगी गेहूं की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गयी। 10 से 15 लोगों के परिवार के भरण-पोषण की चिंता अब किसान को सता रही है। वही चाहता है कि उसे सहायता दी जाए।
ग्राम पंचायत हैदरपुर हलका पटवारी गुलाब आदिवासी कहते हैं, जो भी नुकसान हुआ है उसका पंचनामा बनाकर तैयार हो गया है। जो भी शासन का नियम है उसी के अनुसार किसान को सहायता राशि दी जायेगी।
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टीकमगढ़ : तहसील बड़ागांव के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचयात हैदरपुर के रहने वाले किसान की पूरी फसल तीस मार्च दो हज़ार बाईस की सुबह जलकर राख हो गयी। किसान शोभरन यादव के अनुसार, घटना दोपहर बारह बजे की है। आग बुझाने के लिए बोरी और फ़ायरब्रिगडे की भी मदद ली गयी। जब तक गाड़ी आयी सारी फसल जल चुकी थी। आग में किसान की तीन से चार एकड़ में लगी गेहूं की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गयी। दस से पंद्रह लोगों के परिवार के भरण-पोषण की चिंता अब किसान को सता रही है। वही चाहता है कि उसे सहायता दी जाए। ग्राम पंचायत हैदरपुर हलका पटवारी गुलाब आदिवासी कहते हैं, जो भी नुकसान हुआ है उसका पंचनामा बनाकर तैयार हो गया है। जो भी शासन का नियम है उसी के अनुसार किसान को सहायता राशि दी जायेगी।
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उत्तर प्रदेश में गन्ना कीमत मसले पर जारी विभिन्न आदेशों के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) और अपीलों पर अब 12 मई को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा।
इस बीच गन्ना किसानों को मिल मालिकों द्वारा देय राज्य सरकार की ओर से निर्धारित मूल्य मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 9 मई को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। दूसरी ओर, इसी से जुड़े मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में भी 12 मई को जारी रहेगी।
गौरतलब है कि गन्ना के मूल्य को लेकर विभिन्न आदेश और याचिकाएं दायर की गई हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को पिछले साल के लिए गन्ना के देय मूल्य पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है।
यही वजह है कि इस बार राज्य में गन्ना की खेती में तकरीबन 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। 15 नबंवर, 2007 को र्हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार की ओर से गन्ना के लिए निर्धारित मूल्य 125 रुपये प्रति क्विंटल के खिलाफ अपना आदेश सुनाया था।
उसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 17 जनवरी और 31 मार्च 2008 को बजाज हिंदुस्तान ग्रुप को आदेश दिया कि वह सांविधिक न्यूनतम मूल्य का भुगतान करे, जोकि राज्य की ओर निर्धारित मूल्य से काफी कम है।
राज्य की ओर से निर्धारित मूल्य के मामले में 19 दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से पारित आदेश के विरूद्ध प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की।
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उत्तर प्रदेश में गन्ना कीमत मसले पर जारी विभिन्न आदेशों के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका और अपीलों पर अब बारह मई को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। इस बीच गन्ना किसानों को मिल मालिकों द्वारा देय राज्य सरकार की ओर से निर्धारित मूल्य मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नौ मई को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। दूसरी ओर, इसी से जुड़े मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में भी बारह मई को जारी रहेगी। गौरतलब है कि गन्ना के मूल्य को लेकर विभिन्न आदेश और याचिकाएं दायर की गई हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को पिछले साल के लिए गन्ना के देय मूल्य पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। यही वजह है कि इस बार राज्य में गन्ना की खेती में तकरीबन बीस फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। पंद्रह नबंवर, दो हज़ार सात को र्हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार की ओर से गन्ना के लिए निर्धारित मूल्य एक सौ पच्चीस रुपयापये प्रति क्विंटल के खिलाफ अपना आदेश सुनाया था। उसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सत्रह जनवरी और इकतीस मार्च दो हज़ार आठ को बजाज हिंदुस्तान ग्रुप को आदेश दिया कि वह सांविधिक न्यूनतम मूल्य का भुगतान करे, जोकि राज्य की ओर निर्धारित मूल्य से काफी कम है। राज्य की ओर से निर्धारित मूल्य के मामले में उन्नीस दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से पारित आदेश के विरूद्ध प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की।
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- #IndiaSeema Haider Sachin Meena Story: 'मुझे और बच्चों को पीटता था गुलाम, मुंह पर फेंकता था मिर्ची'
India on Libya issues at UNSC: यूएनएससी की बैठक में सोमवार को भारत ने लीबिया के मुद्दों पर यूएनएससी की बैठक में अपना रुख स्पष्ट किया। बैठक मं संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि लीबिया के मुद्दों का कोई सैन्य या सशस्त्र समाधान नहीं है। इस विषय यूएनएससी समेत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को जोर देने की आवश्यकता है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में काम्बोज ने कहा कि लीबिया की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि, "सुरक्षा परिषद ने अतीत में त्रिपोली में हिंसक झड़पों की निंदा की। पिछले महीने, हमने लीबिया में सशस्त्र समूहों के बीच और अधिक संघर्ष देखा, जिससे नागरिक हताहत हुए थे। " कंबोज ने आगे कहा कि राजनीतिक गतिरोध और उसके बाद लीबिया में सशस्त्र समूहों की लामबंदी में अक्टूबर 2020 में युद्धविराम समझौते की शुरुआत के बाद से हासिल किए गए लाभ को कमजोर करने की क्षमता है। तत्काल प्राथमिकता राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव कराने के लिए एक संविधान पर पहुंचने में सभी बकाया मुद्दों को हल करना है।
बैठक रुचिका कंबोज ने कहा, "स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराना एक अत्यावश्यक अनिवार्यता है। सशस्त्र समूहों के बीच हिंसक झड़पें एक बार फिर से लीबिया में विदेशी बलों और भाड़े के सैनिकों की मौजूदगी से खतरा है। ये 2020 के लीबियाई युद्धविराम समझौता और सुरक्षा परिषद की घोषणाओं के खिलाफ है।
लीबिया में 2011 के बाद से हिंसा और अशांति चरम पर पहुंच रही है। 2011 में दिवंगत नेता मुअम्मर गद्दाफी के शासन के पतन के बाद से वहां लगातार हिंसा फैली है। लीबिया के दलों के बीच चुनाव कानूनों पर असहमति के कारण लीबिया दिसंबर 2021 में आम चुनाव कराने में विफल रहा था।
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- #IndiaSeema Haider Sachin Meena Story: 'मुझे और बच्चों को पीटता था गुलाम, मुंह पर फेंकता था मिर्ची' India on Libya issues at UNSC: यूएनएससी की बैठक में सोमवार को भारत ने लीबिया के मुद्दों पर यूएनएससी की बैठक में अपना रुख स्पष्ट किया। बैठक मं संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि लीबिया के मुद्दों का कोई सैन्य या सशस्त्र समाधान नहीं है। इस विषय यूएनएससी समेत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को जोर देने की आवश्यकता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में काम्बोज ने कहा कि लीबिया की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि, "सुरक्षा परिषद ने अतीत में त्रिपोली में हिंसक झड़पों की निंदा की। पिछले महीने, हमने लीबिया में सशस्त्र समूहों के बीच और अधिक संघर्ष देखा, जिससे नागरिक हताहत हुए थे। " कंबोज ने आगे कहा कि राजनीतिक गतिरोध और उसके बाद लीबिया में सशस्त्र समूहों की लामबंदी में अक्टूबर दो हज़ार बीस में युद्धविराम समझौते की शुरुआत के बाद से हासिल किए गए लाभ को कमजोर करने की क्षमता है। तत्काल प्राथमिकता राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव कराने के लिए एक संविधान पर पहुंचने में सभी बकाया मुद्दों को हल करना है। बैठक रुचिका कंबोज ने कहा, "स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराना एक अत्यावश्यक अनिवार्यता है। सशस्त्र समूहों के बीच हिंसक झड़पें एक बार फिर से लीबिया में विदेशी बलों और भाड़े के सैनिकों की मौजूदगी से खतरा है। ये दो हज़ार बीस के लीबियाई युद्धविराम समझौता और सुरक्षा परिषद की घोषणाओं के खिलाफ है। लीबिया में दो हज़ार ग्यारह के बाद से हिंसा और अशांति चरम पर पहुंच रही है। दो हज़ार ग्यारह में दिवंगत नेता मुअम्मर गद्दाफी के शासन के पतन के बाद से वहां लगातार हिंसा फैली है। लीबिया के दलों के बीच चुनाव कानूनों पर असहमति के कारण लीबिया दिसंबर दो हज़ार इक्कीस में आम चुनाव कराने में विफल रहा था।
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फरीदाबाद : सैक्टर-59, झाडसैतली बल्लभगढ़ स्थित स्वामी धर्मानन्द सी. सै. स्कूल में पेटिंग कम्पटीशन का आयोजन किया गया। इस कम्पटीशन में शहर के 12 स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और अपनी कला का प्रदर्शन किया। स्कूल के चेयरमैन के. के. चांदना और वाईस प्रस्डिेंट नन्दराम पाहिल, दिनेश और जनकरावत ने सभी स्कूलों से आए हुए प्रिंसिपलों और अध्यापकों का स्वागत किया।
कम्पटीशन में समाजसेवी देवेन्द्र जज के रूप में मौजूद थे। पेटिंग कम्पटीशन को आयु के अनुसार तीन वर्गो में बांटा गया, जिसमें पहले वर्ग में कक्षा पहली से तीसरी तक के छात्रों को शामिल किया गया। वहीं दूसरे वर्ग में कक्षा चौथी से छठी तक के छात्रों को शामिल किया गया और तीसरे वर्ग में कक्षा सातवी से नौवीं तक के छात्रों को शामिल किया गया।
कम्पटीशन में तीनों वर्गो को अलग-अलग विषय दिए गए जिसमें पहले वर्ग के लिए माई फेवरेट एनिमल, सेव ट्री, सेव अर्थ, वेन आई ग्रो वॉन्ट टू बी टॉपिक दिया गया। वहीं दूसरे वर्ग के लिए माई फेवरेट फेस्टिवल, पिक्चर स्टोरी, सीन्स फ्रॉम रामायण एंड महाभारता और तीसरे वर्ग को क्लीन एंड ग्रीन इंडिया, माई ड्रीम इन्वेंशन, माई फेवरेट पर्सन फ्रॉम हिस्ट्री टॉपिक दिया गया।
पेटिंग कम्पटीशन में छात्रों को उपरोक्त टॉपिक पर लिमिटेड टाईम में अपनी कला का परिचय देना था। पेटिंग कम्पटीशन में पहले वर्ग में प्रिंस स्कूल की ममता प्रथम, फौगाट स्कूल का लोकेश द्वितीय और प्रिंस स्कूल का विशाल तृतीय स्थान पर रहा। वहीं दूसरे वर्ग में प्रिंस स्कूल की ज्योति प्रथम, प्रिंस स्कूल की प्राची द्वितीय और प्रिंस स्कूल की शिया अग्रवाल तृतीय स्थान पर रहे। तीसरे वर्ग में प्रिंस स्कूल की रिंकी प्रथम, स्वामी धर्मानन्द स्कूल का हर्षित द्वितीय और कर्मभूमि का विक्रान्त तृतीय स्थान पर रहा।
इस कम्पटीशन में स्वामी धर्मानंद सी. सै. स्कूल, फौगाट सी. सै. स्कूल, प्रिंस स्कूल, आशा ज्योति स्कूल, शिवा पब्लिक स्कूल(सीकरी), आशा कॉन्वेट स्कूल, शिव पब्लिक स्कूल (राजीव कालोनी), कंचन विद्या मन्दिर, कर्मभूमि, कला मन्दिर साहुपूरा स्कूलों ने भाग लिया। स्कूल के चेयरमैन के. के. चांदना ने विजयी छात्रों को बधाई देते हुए उन्हे पुरूस्कार से सम्मानित किया।
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फरीदाबाद : सैक्टर-उनसठ, झाडसैतली बल्लभगढ़ स्थित स्वामी धर्मानन्द सी. सै. स्कूल में पेटिंग कम्पटीशन का आयोजन किया गया। इस कम्पटीशन में शहर के बारह स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और अपनी कला का प्रदर्शन किया। स्कूल के चेयरमैन के. के. चांदना और वाईस प्रस्डिेंट नन्दराम पाहिल, दिनेश और जनकरावत ने सभी स्कूलों से आए हुए प्रिंसिपलों और अध्यापकों का स्वागत किया। कम्पटीशन में समाजसेवी देवेन्द्र जज के रूप में मौजूद थे। पेटिंग कम्पटीशन को आयु के अनुसार तीन वर्गो में बांटा गया, जिसमें पहले वर्ग में कक्षा पहली से तीसरी तक के छात्रों को शामिल किया गया। वहीं दूसरे वर्ग में कक्षा चौथी से छठी तक के छात्रों को शामिल किया गया और तीसरे वर्ग में कक्षा सातवी से नौवीं तक के छात्रों को शामिल किया गया। कम्पटीशन में तीनों वर्गो को अलग-अलग विषय दिए गए जिसमें पहले वर्ग के लिए माई फेवरेट एनिमल, सेव ट्री, सेव अर्थ, वेन आई ग्रो वॉन्ट टू बी टॉपिक दिया गया। वहीं दूसरे वर्ग के लिए माई फेवरेट फेस्टिवल, पिक्चर स्टोरी, सीन्स फ्रॉम रामायण एंड महाभारता और तीसरे वर्ग को क्लीन एंड ग्रीन इंडिया, माई ड्रीम इन्वेंशन, माई फेवरेट पर्सन फ्रॉम हिस्ट्री टॉपिक दिया गया। पेटिंग कम्पटीशन में छात्रों को उपरोक्त टॉपिक पर लिमिटेड टाईम में अपनी कला का परिचय देना था। पेटिंग कम्पटीशन में पहले वर्ग में प्रिंस स्कूल की ममता प्रथम, फौगाट स्कूल का लोकेश द्वितीय और प्रिंस स्कूल का विशाल तृतीय स्थान पर रहा। वहीं दूसरे वर्ग में प्रिंस स्कूल की ज्योति प्रथम, प्रिंस स्कूल की प्राची द्वितीय और प्रिंस स्कूल की शिया अग्रवाल तृतीय स्थान पर रहे। तीसरे वर्ग में प्रिंस स्कूल की रिंकी प्रथम, स्वामी धर्मानन्द स्कूल का हर्षित द्वितीय और कर्मभूमि का विक्रान्त तृतीय स्थान पर रहा। इस कम्पटीशन में स्वामी धर्मानंद सी. सै. स्कूल, फौगाट सी. सै. स्कूल, प्रिंस स्कूल, आशा ज्योति स्कूल, शिवा पब्लिक स्कूल, आशा कॉन्वेट स्कूल, शिव पब्लिक स्कूल , कंचन विद्या मन्दिर, कर्मभूमि, कला मन्दिर साहुपूरा स्कूलों ने भाग लिया। स्कूल के चेयरमैन के. के. चांदना ने विजयी छात्रों को बधाई देते हुए उन्हे पुरूस्कार से सम्मानित किया।
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PM Modi in Mumbai (Photo Credit: Twitter)
मुंबईः
PM Modi in Mumbai : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मुंबई (PM Modi in Mumbai) को दो नई मेट्रो लाइन की सौगात दी है. पीएम मोदी ने लगभग 12,600 करोड़ रुपये लागत वाली मुंबई मेट्रो रेल लाइन 2ए और 7 का उद्घाटन किया है. इसके बाद उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज मुंबई के विकास से जुड़े 40 हजार करोड़ के विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है. ये सब मुंबई शहर को बेहतर बनाने वाले सिद्ध होंगे. मैं सभी लाभार्थियों और मुंबईकरों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद आज सपने देखने और उसे पूरा करने का दम रखता है. उन्होंने आगे कहा कि पिछली सदी का एक लंबा कालखंड हमारे यहां सिर्फ और सिर्फ गरीबी की चर्चा करने और दुनिया से मदद मांगने. . . जैसे तैसे गुजरा करने में ही बीत गया. दुनिया को भी आज भारत के बड़े-बड़े संकल्पों पर पूरा भरोसा है.
उन्होंने आगे कहा कि दुनिया में भारत को लेकर इतनी सकारात्मकता इसलिए है, क्योंकि आज सभी को लगता है कि भारत बहुत ही उत्तम तरीके से अपने सामर्थ्य का सदुपयोग कर रहा है. भारत आज अभूतपूर्व आत्मविश्वास से भरा हुआ है. पीएम मोदी ने कहा कि हमारे शहरों की भूमिका विकसित भारत के निर्माण में सबसे अहम है. साल 2014 तक मुंबई में सिर्फ 10-11 किलोमीटर तक मेट्रो चलती थी, लेकिन हमारी डबल इंजन की सरकार ने मेट्रो के काम को अभूतपूर्व गति प्रदान की है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में मुंबई का पूरी तरह से कायाकल्प होने जा रहा है. सब कुछ आज ट्रैक पर आ रहा है और इसके लिए मैं सीएम शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र को बधाई देता हूं. मुंबई के विकास में स्थानीय निकाय की भूमिका काफी अहम है. बजट की कोई कमी नहीं है बस सही जगह पर मुंबई के विकास का पैसा लगना चाहिए. अगर वो पैसा भ्रष्टाचार में लगेगा तो कैसे मुंबई का भविष्य उज्जवल होगा? यह शहर विकास के लिए तरसता रहे. . . ये स्थिति 21वीं सदी में स्वीकार्य नहीं है.
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PM Modi in Mumbai मुंबईः PM Modi in Mumbai : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मुंबई को दो नई मेट्रो लाइन की सौगात दी है. पीएम मोदी ने लगभग बारह,छः सौ करोड़ रुपये लागत वाली मुंबई मेट्रो रेल लाइन दोए और सात का उद्घाटन किया है. इसके बाद उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज मुंबई के विकास से जुड़े चालीस हजार करोड़ के विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है. ये सब मुंबई शहर को बेहतर बनाने वाले सिद्ध होंगे. मैं सभी लाभार्थियों और मुंबईकरों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद आज सपने देखने और उसे पूरा करने का दम रखता है. उन्होंने आगे कहा कि पिछली सदी का एक लंबा कालखंड हमारे यहां सिर्फ और सिर्फ गरीबी की चर्चा करने और दुनिया से मदद मांगने. . . जैसे तैसे गुजरा करने में ही बीत गया. दुनिया को भी आज भारत के बड़े-बड़े संकल्पों पर पूरा भरोसा है. उन्होंने आगे कहा कि दुनिया में भारत को लेकर इतनी सकारात्मकता इसलिए है, क्योंकि आज सभी को लगता है कि भारत बहुत ही उत्तम तरीके से अपने सामर्थ्य का सदुपयोग कर रहा है. भारत आज अभूतपूर्व आत्मविश्वास से भरा हुआ है. पीएम मोदी ने कहा कि हमारे शहरों की भूमिका विकसित भारत के निर्माण में सबसे अहम है. साल दो हज़ार चौदह तक मुंबई में सिर्फ दस-ग्यारह किलोग्राममीटर तक मेट्रो चलती थी, लेकिन हमारी डबल इंजन की सरकार ने मेट्रो के काम को अभूतपूर्व गति प्रदान की है. प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में मुंबई का पूरी तरह से कायाकल्प होने जा रहा है. सब कुछ आज ट्रैक पर आ रहा है और इसके लिए मैं सीएम शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र को बधाई देता हूं. मुंबई के विकास में स्थानीय निकाय की भूमिका काफी अहम है. बजट की कोई कमी नहीं है बस सही जगह पर मुंबई के विकास का पैसा लगना चाहिए. अगर वो पैसा भ्रष्टाचार में लगेगा तो कैसे मुंबई का भविष्य उज्जवल होगा? यह शहर विकास के लिए तरसता रहे. . . ये स्थिति इक्कीसवीं सदी में स्वीकार्य नहीं है.
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- #Bollywood Newsजब Abhishek Bachchan को फीमेल फैन ने जड़ा था जोरदार तमाचा, बोली- 'छोड़ दो एक्टिंग वरना. . . '
Parineeti Chopra Raghav Chadha Love Story: बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा और आप नेता राघव चड्ढा इन दिनों अपने अफेयर को लेकर चर्चा में हैं। खबरों के मुताबिक, कपल इस साल शादी के बंधन में बंध सकता है।
राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा पहली बार मुंबई में डिनर डेट पर स्पॉट हुए। जिसके बाद से दोनों की शादी के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन अब तक कपल की तरफ से इस पर आधिकारिक बयान नहीं दिया गया। ऐसे में चलिए जानते हैं कि आखिर दोनों की पहली मुलाकात कहां हुई थी।
डेट?
ई-टाइम्स की खबर के मुताबिक, परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा की पहली मुलाकात पंजाब में हुई थी। एक्ट्रेस अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए पंजाब गई थी। हालांकि दोनों ने एक दूसरे को कब से डेट करना शुरू किया इसको लेकर कोई जानकारी नहीं है। कहा जाता है कि, पिछले 6 महीने से दोनों एक दूसरे के काफी करीब आ गए।
ऐसा माना जा रहा है कि, दोनों इस साल शादी करने वाले हैं। भले ही कपल की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया लेकिन इस अफेयर की खबरों पर संजीव अरोड़ा और फिर हार्डी सुंधु ने बधाई देते हुए मुहर लगा दी थी। बता दें कि, दोनों को इन दिनों कई बार एयरपोर्ट पर स्पॉट किया जा चुका है।
हाल ही में राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा को दिल्ली एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया था। ई-टाइम्स की खबर के मुताबिक, 10 अप्रैल 2023 को दोनों की सगाई होगी। जिसमें दोनों के करीबी दोस्त और परिवार वाले शामिल होंगे। सगाई सेरेमनी की तैयारी फिलहाल पूरी हो चुकी है अब फैंस को इंतजार है कि कब ये कपल अपने रिश्ता ऐलान करेगा।
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- #Bollywood Newsजब Abhishek Bachchan को फीमेल फैन ने जड़ा था जोरदार तमाचा, बोली- 'छोड़ दो एक्टिंग वरना. . . ' Parineeti Chopra Raghav Chadha Love Story: बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा और आप नेता राघव चड्ढा इन दिनों अपने अफेयर को लेकर चर्चा में हैं। खबरों के मुताबिक, कपल इस साल शादी के बंधन में बंध सकता है। राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा पहली बार मुंबई में डिनर डेट पर स्पॉट हुए। जिसके बाद से दोनों की शादी के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन अब तक कपल की तरफ से इस पर आधिकारिक बयान नहीं दिया गया। ऐसे में चलिए जानते हैं कि आखिर दोनों की पहली मुलाकात कहां हुई थी। डेट? ई-टाइम्स की खबर के मुताबिक, परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा की पहली मुलाकात पंजाब में हुई थी। एक्ट्रेस अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए पंजाब गई थी। हालांकि दोनों ने एक दूसरे को कब से डेट करना शुरू किया इसको लेकर कोई जानकारी नहीं है। कहा जाता है कि, पिछले छः महीने से दोनों एक दूसरे के काफी करीब आ गए। ऐसा माना जा रहा है कि, दोनों इस साल शादी करने वाले हैं। भले ही कपल की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया लेकिन इस अफेयर की खबरों पर संजीव अरोड़ा और फिर हार्डी सुंधु ने बधाई देते हुए मुहर लगा दी थी। बता दें कि, दोनों को इन दिनों कई बार एयरपोर्ट पर स्पॉट किया जा चुका है। हाल ही में राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा को दिल्ली एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया था। ई-टाइम्स की खबर के मुताबिक, दस अप्रैल दो हज़ार तेईस को दोनों की सगाई होगी। जिसमें दोनों के करीबी दोस्त और परिवार वाले शामिल होंगे। सगाई सेरेमनी की तैयारी फिलहाल पूरी हो चुकी है अब फैंस को इंतजार है कि कब ये कपल अपने रिश्ता ऐलान करेगा।
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मुंबई : कोटक महिन्द्रा बैंक लिमिटेड (केएमबीएल) ने आज अपने ग्राहकों के लिए ऐपल उत्पादों पर सुपर ऑफर्स पेश करने की घोषणा की है। केएमबीएल डेबिट और क्रेडिट कार्ड धारक आईफोन आईपैड मैकबुक ऐपल वाॅच एयरपाॅड और होमपाॅड पर कैशबैक और ईएमआई ऑफर्स का लाभ उठा सकते हैं।
केएमबीएल डेबिट और क्रेडिट कार्डधारक ऐपल उत्पादों पर अधिकतम 10000 रुपये का कैशबैक प्राप्त कर सकेंगे तथा चुनिंदा उत्पादों पर 12 महीनों तक के लिए नो काॅस्ट ईएमआई का विकल्प उपलब्ध है'। कैशबैक फुल कार्ड स्वाइप और कार्ड ईएमआई पर ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों की माध्यमों से ऐपल ऑथोराइज़्ड रिसैलर स्टोर्स और ऐमज़ाॅन व टाटा क्लिक जैसी ईकाॅमर्स वैबसाइट्स पर 1 जनवरी से 31 मार्च 2022 तक उपलब्ध है।
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मुंबई : कोटक महिन्द्रा बैंक लिमिटेड ने आज अपने ग्राहकों के लिए ऐपल उत्पादों पर सुपर ऑफर्स पेश करने की घोषणा की है। केएमबीएल डेबिट और क्रेडिट कार्ड धारक आईफोन आईपैड मैकबुक ऐपल वाॅच एयरपाॅड और होमपाॅड पर कैशबैक और ईएमआई ऑफर्स का लाभ उठा सकते हैं। केएमबीएल डेबिट और क्रेडिट कार्डधारक ऐपल उत्पादों पर अधिकतम दस हज़ार रुपयापये का कैशबैक प्राप्त कर सकेंगे तथा चुनिंदा उत्पादों पर बारह महीनों तक के लिए नो काॅस्ट ईएमआई का विकल्प उपलब्ध है'। कैशबैक फुल कार्ड स्वाइप और कार्ड ईएमआई पर ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों की माध्यमों से ऐपल ऑथोराइज़्ड रिसैलर स्टोर्स और ऐमज़ाॅन व टाटा क्लिक जैसी ईकाॅमर्स वैबसाइट्स पर एक जनवरी से इकतीस मार्च दो हज़ार बाईस तक उपलब्ध है।
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मैहतपुर - विस क्षेत्र ऊना के गांव बहडाला में कांगड़ा बैंक के निदेशक राजीव गौतम ने ग्रामीणों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उन्हें जल्द ही हल करवाने का आश्वासन भी दिया। राजीव गौतम ने कहा कि जहां हिमाचल के लोकप्रिय मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह समाज के हर वर्ग को राहत प्रदान करने के लिए कार्य कर रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार द्वारा समाज के हर वर्ग को परेशान करने के कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने स्थानीय विधायक पर पिछड़ा वर्ग व दलितों के हितों का ध्यान न रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधायक कभी भी इन लोगों के हितों की आवाज को विधानसभा में नहीं उठाते न ही किसी केंद्रीय परियोजना को ऊना के लिए ला सके हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के झूठे वादों से अब जनता हताहत है और जनता अब प्रदेश की सत्ता को भी भाजपा सरकार के हाथों में सौंपने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार रिपीट होगी। इस अवसर पर पूर्व प्रधान योगराज, दीनानाथ, अश्वनी कुमार, कुलदीप सिंह, दिलदार सिंह, चमन सिंह, जगदीश, राकेश, पंकज, कमलदेव, गगन, प्रेम चंद व सुखदेव सहित अन्य उपस्थित थे।
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मैहतपुर - विस क्षेत्र ऊना के गांव बहडाला में कांगड़ा बैंक के निदेशक राजीव गौतम ने ग्रामीणों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उन्हें जल्द ही हल करवाने का आश्वासन भी दिया। राजीव गौतम ने कहा कि जहां हिमाचल के लोकप्रिय मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह समाज के हर वर्ग को राहत प्रदान करने के लिए कार्य कर रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार द्वारा समाज के हर वर्ग को परेशान करने के कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने स्थानीय विधायक पर पिछड़ा वर्ग व दलितों के हितों का ध्यान न रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधायक कभी भी इन लोगों के हितों की आवाज को विधानसभा में नहीं उठाते न ही किसी केंद्रीय परियोजना को ऊना के लिए ला सके हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के झूठे वादों से अब जनता हताहत है और जनता अब प्रदेश की सत्ता को भी भाजपा सरकार के हाथों में सौंपने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार रिपीट होगी। इस अवसर पर पूर्व प्रधान योगराज, दीनानाथ, अश्वनी कुमार, कुलदीप सिंह, दिलदार सिंह, चमन सिंह, जगदीश, राकेश, पंकज, कमलदेव, गगन, प्रेम चंद व सुखदेव सहित अन्य उपस्थित थे।
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मध्य भाग मे राम लखन, पहरा नंगी तलवारों का। पहरा होगा दरवाजों पर भी, महा योद्धा बलधारों का ॥ दोहा
शीघ्र वीर सुग्रीव ने किया सभी यह काम । मध्य भाग ले लखन को, बैठ गये श्रीराम ।। सात कोट कर विद्या के, फिर वीर किये सव शीघ्र खडे । दरवाज पर थे अतुल बली, विमान व्योम में सभी अड़े ॥ ।। गव - गवाक्ष सुग्रीव हनुमत, तारक स्कन्ध दधि मुख थे। अस्त्र शस्त्र सब लगा वीर, सातों पूर्व के सन्मुख थे । दोहा
श्री महेन्द्र कुरम, विहंग सुशैन । चन्द्ररश्मि उत्तर तरफ, तने खड़े थे ऐन ।
समरशील दुर्धर मन्मथ, जयविजय वीर संभव भारी । पश्चिम दरवाजे सावधान हा, खडे नील थे बलवारी ॥ वीर विराध गज भुवनजीत, नल मेंद विभीषण भामडल । नृप राज कुमार सब चुस्त खड़े, कान मे शोभ रहे कुण्डल ! दोहा
योग्य स्थानों पर खड़े, वीर तान सममेर । लक्ष्मण की करने लगे, वैद्य औषधि फेर ।।
देव रमण उद्यान से, बैठी थी वेचैन । सीता को जा त्रिजटा, लगी इस तरह कहन ॥ दुःख मे दु.ख देने के लिये, आई तेरे पास । जनक किशोरी क्या कहूँ, अपने मुख से भाप ।।
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मध्य भाग मे राम लखन, पहरा नंगी तलवारों का। पहरा होगा दरवाजों पर भी, महा योद्धा बलधारों का ॥ दोहा शीघ्र वीर सुग्रीव ने किया सभी यह काम । मध्य भाग ले लखन को, बैठ गये श्रीराम ।। सात कोट कर विद्या के, फिर वीर किये सव शीघ्र खडे । दरवाज पर थे अतुल बली, विमान व्योम में सभी अड़े ॥ ।। गव - गवाक्ष सुग्रीव हनुमत, तारक स्कन्ध दधि मुख थे। अस्त्र शस्त्र सब लगा वीर, सातों पूर्व के सन्मुख थे । दोहा श्री महेन्द्र कुरम, विहंग सुशैन । चन्द्ररश्मि उत्तर तरफ, तने खड़े थे ऐन । समरशील दुर्धर मन्मथ, जयविजय वीर संभव भारी । पश्चिम दरवाजे सावधान हा, खडे नील थे बलवारी ॥ वीर विराध गज भुवनजीत, नल मेंद विभीषण भामडल । नृप राज कुमार सब चुस्त खड़े, कान मे शोभ रहे कुण्डल ! दोहा योग्य स्थानों पर खड़े, वीर तान सममेर । लक्ष्मण की करने लगे, वैद्य औषधि फेर ।। देव रमण उद्यान से, बैठी थी वेचैन । सीता को जा त्रिजटा, लगी इस तरह कहन ॥ दुःख मे दु.ख देने के लिये, आई तेरे पास । जनक किशोरी क्या कहूँ, अपने मुख से भाप ।।
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रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के 20 दिन बीत चुके हैं। मीडिया से प्राप्त, अब तक के ताजे अपटेड के अनुसार, यूक्रेन का दावा है कि दक्षिणी शहर मारियुपोल पर रूसी बमबारी से 2,500 से ज्यादा मौतें हुई हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की के सलाहकार ओलेक्सी एरेस्टोविच ने कहा कि, "मारियुपोल में हमारी सेना को कामयाबी मिल रही है। हमने कल यहां पर रूसी सेना को हराकर अपने युद्ध बंदियों को आजाद करा लिया है।" दोनों देशों की युद्ध-तकरार से यूरोप के देशों पर कोरोना का खतरा बढ़ गया है।
अब तक 20 लाख से ज्यादा यूक्रेनी शरणार्थी यूरोपीय देशों में पहुंचे हैं। इनमें से ज्यादातर का वैक्सीनेशन नहीं हुआ। विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि "यूक्रेन और आस-पास के देशों में 3 से 9 मार्च के बीच कोरोना के कुल 7,91,021 नए मामले सामने आये हैं।" रूसी हमले की वजह से यूक्रेनी इंफ्रास्ट्रक्चर को अब तक 119 बिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
एएफपी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, 'मॉस्को में यूक्रेन पर हमले के खिलाफ रविवार को बहुत बड़ा प्रदर्शन किया गया। रूसी पुलिस ने इसमें शामिल 800 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव ने रविवार को कहा कि विदेशी प्रतिबंधों से करीब 2.30 लाख करोड़ रुपए का फंड फ्रीज हो गया है। यह फंड रूसी सरकार के 4.91 लाख करोड़ रुपए के रेनी-डे फंड का हिस्सा था।' अब यूक्रेन के पश्चिमी इलाके में भी लड़ाई तेज हो गई है, जो अब तक 'सेफ हैवन' बना हुआ था। रूसी सेना ने रविवार को नाटो (NATO) के सदस्य देश पोलैंड सीमा से महज 12 मील दूर यावोरिव में एक मिलिट्री ट्रेनिंग बेस पर क्रूज मिसाइलें दागकर 35 लोगों को मार दिया, जबकि 134 लोग घायल हैं। रूस ने हमले में 180 विदेशी लड़ाकों को मारने का भी दावा किया है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने यूक्रेन में अपनी लड़ाई तेज करने के लिए चीन से मिलिट्री उपकरण मांगे हैं। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अतिरिक्त आर्थिक सहयोग भी मांगा है ताकि अमेरिका, यूरोप व एशियाई देशों की तरफ से लगाए प्रतिबंधों से वह अपनी इकोनॉमी को बचा सके। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कीव शहर के करीब हमले का शिकार हुआ मिलिट्री बेस इंटरनेशनल पीस कीपिंग सेंटर था, जहां अमेरिकी सेना एक महीने पहले तक यूक्रेन के सैनिकों को ट्रेनिंग दे रही थी।
रूस ने यहां 30 से ज्यादा क्रूज मिसाइल दागी है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने भी हमले की पुष्टि की है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने 180 विदेशी लड़ाके मारे हैं, जो यूक्रेन की तरफ से लड़ने आए थे। रूसी सेना ने यह हमला अपनी उस चेतावनी के एक दिन बाद किया है, जिसमें उसने यूक्रेन को अमेरिका व अन्य देशों से मिलने वाले हथियारों को निशाना बनाने की बात कही है।
रेड क्रॉस ने चेतावनी दी है कि मारियुपोल शहर में फंसे करीब 4 लाख लोगों की हालत बेहद खराब है और उनके लिए समय तेजी से भाग रहा है। रेड क्रॉस ने इन्हें निकालने के लिए ग्रीन कॉरिडोर की दोबारा बहाली की अपील की है। पूर्वी यूक्रेन में एक इवेक्यूएशन ट्रेन में आग लगने से कंडक्टर की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हैं। नेशनल रेलरोड कंपनी ने रविवार को बताया कि दोनस्क रीजन में ब्रूसिन स्टेशन के करीब आग का शिकार हुई ट्रेन में 100 बच्चों समेत सैकड़ों लोग सवार थे। पूर्वी यूक्रेन में रविवार को रूसी आर्टिलरी अटैक ने 16वीं सदी के एक चर्च और गुफा कॉम्पलेक्स को भारी नुकसान पहुंचाया है। आर्थोडॉक्स क्रिश्चियन समुदाय के होली डोरमिशन सिव्यातोगोर्स्क लावरा चर्च में सैकड़ों लोगों ने शरण ले रखी थी। हमले में इनमें से बहुत सारे घायल हो गए हैं। बता दें कि इस चर्च को मानने वाले यूक्रेन के अलावा रूस में भी हैं।
उपरोक्त खबरें, अखबार और मीडिया एजेंसियां, लगातार दे रही हैं। युद्ध अपटेड निरन्तर बदल रहे हैं। यह खबरें, लोगों को डरा रही हैं और दुनिया क्या फिर से एक महायुद्ध की तरफ जाने या अनजाने बढ़ने लगी है, इस पर दुनियाभर के बौद्धिक समाज में चर्चा शुरू हो गयी है। शुरुआत में, यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद जैसा कि माना जा रहा था, कि नाटो देश और उनका सरपरस्त यूएस, यूक्रेन की तरफ से मोर्चा संभाल लेगा, खुद ही युद्ध नियंत्रित करने लगेगा और यूरोप फिर द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के सबसे कठिन युद्धों के दौर में आ जायेगा। और जब युद्ध बढ़ेगा तो कई समीकरण बनेंगे, बिगड़ेंगे और फिर विश्व चौधराहट के लिये जो जंग छिड़ेगी वह चीन, ईरान और भारत को भी समेट लेगी।
पर अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। पर यह 'अभी तक', अभी तक ही है। युद्ध भी एक उन्माद की तरह होता है। और उन्माद किस दशा या दिशा में जायेगा, इसका अनुमान लगाया जाना कठिन होता है। हर युद्ध के कारण होते हैं, और तत्काल युद्ध छिड़ जाय तो उसके तात्कालिक कारण भी होते हैं। मानव सभ्यता का इतिहास ही युद्धों का इतिहास रहा है। यदि ज्ञात इतिहास का सिलसिलेवार अध्ययन किया जाय तो, आप पाएंगे कि, मानव सभ्यता का सारा इतिहास युद्ध और युद्ध की तैयारियों से भरा पड़ा है। दो युद्धों के बीच का शांतिकाल भी एक कूलिंग काल की तरह नज़र आता है। तभी तो साम्राज्य बनते, विकसित और बिगड़ते रहे हैं। रूस यूक्रेन युद्ध के बहाने बीसवीं सदी के दो बड़े और विनाशकारी युद्धों पर टिप्पणी के साथ-साथ इस लेख में प्रसिद्ध बुद्धिजीवी नोआम चोम्स्की के एक इंटरव्यू की भी चर्चा की जा रही है।
आज दुनियाभर में, नोआम चॉम्स्की को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीवित सबसे महत्वपूर्ण बुद्धिजीवियों में से एक माना जाता है। अक्सर उनके बौद्धिक कद और मेधा की तुलना गैलीलियो, न्यूटन और डेसकार्टेस से की जाती है, क्योंकि उनका अध्ययन और उपलब्धियों का विस्तार, भाषा विज्ञान, तर्क और गणित, कंप्यूटर विज्ञान, मनोविज्ञान, मीडिया अध्ययन, दर्शन सहित विद्वानों और वैज्ञानिक जांच के विभिन्न क्षेत्रों तक है। उन्होंने अपने विचारों से इन सभी विषयों पर अपनी जबरदस्त छाप छोड़ी है। लगभग 150 पुस्तकें, उनके द्वारा लिखी गयी हैं। वे सिडनी शांति पुरस्कार और क्योटो पुरस्कार (जापान के नोबेल पुरस्कार के समकक्ष) और दुनिया के सबसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों से दर्जनों मानद डॉक्टरेट की उपाधि सहित अत्यधिक प्रतिष्ठित पुरस्कारों के सम्मानित हैं। चॉम्स्की, अमेरिका के एमआईटी संस्थान के प्रोफेसर एमेरिटस हैं और वर्तमान में एरिज़ोना विश्वविद्यालय में पुरस्कार विजेता प्रोफेसर हैं।
"यूक्रेन पर रूस के आक्रमण ने पूरी दुनिया को चकित कर दिया। यह एक अकारण और अनुचित हमला है जो इतिहास में 21 वीं सदी के प्रमुख युद्ध अपराधों में से एक के रूप में, याद रखा जाएगा।" यह तात्कालिक प्रतिक्रिया है, नोआम चोम्स्की की, जब वे ट्रुथआउट वेबसाइट के लिए एक विशेष साक्षात्कार में अपनी बात कह रहे थे।
पर चोम्स्की के इस तर्क और विचार को जानने के पहले बीसवीं सदी के दो प्रमुख महायुद्धों और उनके बाद की स्थितियों की संक्षिप्त चर्चा करनी ज़रूरी है। दोनों ही महायुद्धों में जर्मन राष्ट्रवाद की एक प्रमुख भूमिका रही है। प्रथम विश्वयुद्ध का तात्कालिक कारण, भले ही, 28 जून 1914 को, सेराजोवा में ऑस्ट्रिया के सिंहासन के उत्तराधिकारी आर्चड्युक फर्डिनेंड और उनकी पत्नी की हत्या रही हो, और इस घटना के बाद, ऑस्ट्रिया द्वारा सर्बिया पर युद्ध कर देना रहा हो, पर यह एक तात्कालिक कारण था, युद्ध के साजो सामान में एक इग्नीशन की तरह था। पर साजो सामान को यूरोपीय साम्राज्यवादी उपनिवेशवादी देशों ने इसके पहले से इकट्ठा करना शुरू कर दिया था।
युद्ध की पीठिका शांतिकाल में ही आकार लेती है और जब सब, तहस-नहस हो जाता है तो फिर अफसोस किये जाते हैं, बर्बादी की दास्तान सुनाई जाती है, युद्ध विरोधी हृदयविदारक साहित्य रचे जाते हैं, और शांति के लिये लीग ऑफ नेशन्स और यूनाइटेड नेशंस ऑर्गनाइजेशन जैसी अंतरराष्ट्रीय पंचायतें आकार लेने लगती हैं। पर, दुर्भाग्य से फिर कोई वैश्विक युद्धोन्माद उभरता है तो यह संस्थायें अक्सर बेबस नज़र आती हैं। रूस यूक्रेन युद्ध में, आज यूएनओ की भूमिका और उसके दखल से उसकी हैसियत क्या है, इसे आप प्रत्यक्ष देख रहे हैं।
ऑस्ट्रिया ने सर्बिया के विरुद्ध युद्ध जब घोषित किया तो, रूस, फ़्रांस और ब्रिटेन ने सर्बिया की सहायता की और जर्मनी ने आस्ट्रिया की और इस तरह यूरोप का यह पहला विश्वयुद्ध था। 1919 में भयंकर तबाही के बाद, यह युद्ध समाप्त हुआ, जर्मनी पराजित हुआ पर जर्मन राष्ट्रवाद ने खुद को आहत महसूस किया और वह अंदर ही अंदर उद्वेलित होता रहा, उफनता रहा। इसी बीच तमाम उथल-पुथल के बाद जर्मनी में हिटलर आया और हिटलर का एक ही उद्देश्य था प्रथम विश्वयुद्ध में पराजित जर्मनी का प्रतिशोध लेना। प्रतिशोध के लिये सैन्य तैयारियां तो हो ही रही थीं, पर जनता को भी युद्ध की ज़रूरत, प्रतिशोध की आवश्यकता, जर्मनी की प्रतिष्ठा स्थापित करने का औचित्य आदि बातें समझानी थीं और उसे मानसिक रूप से तैयार भी करना था।
जनमानस में, हिटलर की अजेयता और उसकी विकल्पहीनता सिद्ध करने के लिये जर्मनी में जो कुछ किया गया वह एक ऐसी विचारधारा बनी, जिसका आधार ही घृणा, झूठ, फरेब और उन्माद था। जिस आक्रामक और घृणा आधारित राष्ट्रवाद की नींव हिटलर और उसके लोग रख रहे थे, अंततः वही उसके विनाश का कारण बनी। पर जब युद्ध होता है, तो बर्बाद, आम जन होते हैं, देश की अर्थव्यवस्था होती है, समाज का तानाबाना मसकता है, विकास और जनिहित के कार्य नष्ट हो जाते हैं, भुखमरी, बेरोजगारी और अन्य मुसीबतें सर उठा लेती हैं और हवा में बारूद की गंध लम्बे समय के लिये फैल जाती है। यह बात भी कुछ हद तक सही है कि राष्ट्र नायक, इस विनाश के बाद, राष्ट्र खलनायक के रूप में देखा जाने लगता है, और जनता ठगी हुयी उन कारणों के पड़ताल में लग जाती है कि, क्या वह प्रतिशोध के उन्माद में अपना विवेक खो कर एक रोबोट संचालित भीड़ बन गयी थी ?
अब आते हैं, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की स्थितियों पर। युद्ध में कोई नहीं जीतता है खास कर ऐसे विनाशकारी युद्धों के बाद। ऐसे ही युद्धों के लिए अंग्रेजी में एक शब्द है( pyrrhic victory) पिरिक विक्ट्री, जिसका अर्थ है, विनाशकारी विजय। एक ऐसी विजय जो जीत का आह्लाद तक नहीं खुलकर लेने देती और जीत एक मनोवैज्ञानिक युद्धोन्माद की संतुष्टि जैसी रह जाती है। यही हाल ब्रिटेन का हुआ। उसके उपनिवेश बिखरने लगे। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद फिर एक अंतरराष्ट्रीय पंचायत यूएनओ के रूप में सामने आयी। पर युद्ध की समाप्ति के चार साल बाद ही अंतरराष्ट्रीय गोलबंदी और सैन्य समझौते होने लगे। दरअसल, सोवियत रूस और अमेरिका भले ही द्वितीय विश्वयुद्ध में धुरी राष्ट्रों के खिलाफ एक रहे हों, पर वह समझौता एक साझे शत्रु से निपटने तक के लिये ही था।
वह साझा शत्रु हिटलर था, मुसोलिनी था, उनकी संकीर्ण फासिस्ट सोच थी और उनका खतरनाक स्तर तक बढ़ा हुआ युद्धोन्माद था। जब वह कॉमन शत्रु निपट गया तो तो जो यूएस सोवियत रूस का मूल वैचारिक विरोध था, वह फिर दोनों के बीच सतह पर, आ गया। अब तकनीक बदल गयी थी। युद्ध के तब तक के सबसे विनाशकारी हथियार का दुखद परीक्षण हो चुका था, तो युद्ध की एक नई शैली सामने आई, जिसे कोल्ड वार यानी शीत युद्ध कहा गया। इस काल में दुनिया दो ध्रुवों में बंटी और भारत के नेतृत्व में नवस्वतंत्र एशियाई और अफ्रीकी मुल्कों ने इन गुटों से अलग हट कर एक नया समूह बनाया जो सफलतापूर्वक लम्बे समय तक चला और अपनी हैसियत भी समय समय पर प्रदर्शित की। यह समूह था, गुट निरपेक्ष संगठन।
1990 तक सोवियत रूस बिखरने लगा। उसके बहुत से कारण हैं, उनमें जाना विषयांतर हो सकता है। पर जब सोवियत टूटा तो यूक्रेन और अन्य बहुत से देश जो स्टालिन के समय में सोवियत रूस में थे वे अलग हो गए। रूस आर्थिक रूप से कमजोर भी हो गया था। अमेरिका के नेतृत्व में एक ध्रुवीय विश्व बन रहा था। सन्तुलन की अब आवश्यकता ही नहीं रही तो गुट निरपेक्ष संगठन भी धीरे-धीरे अप्रासंगिक होने लगे। अमेरिका ने रूस के चारों तरफ अपना अधिकार बढ़ाना शुरू कर दिया। उसी क्रम में जब उसकी महत्वाकांक्षा यूक्रेन तक आयी तो रूस जो धीरे धीरे सम्भल चुका था और अमेरिका को समझ भी गया था, इस पर सशंकित हुआ और यूरोप में युद्ध की एक नयी पीठिका बनने लगी। फिर अचानक यह युद्ध छिड़ गया।
अमेरिका को लगता था कि रूस यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा पर यह हमला हुआ, यूक्रेन को लगता था, उस पर हमला होगा तो नाटो देश उसके पक्ष में बम बरसाने लगेंगे पर ऐसा बिल्कुल अभी तक तो नहीं हुआ चीन को लगा कि युद्ध तो मज़बूत से मज़बूत देश को भी कमजोर कर देता है, अमेरिका इससे कमज़ोर ही होगा, उस शून्य को भरने के लिये वह मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार हो ही रहा था, साथ ही रूसी राष्ट्रवाद के विस्तार की नज़ीर में वह ताइवान और दक्षिण एशिया में अपने एजेंडे को पूरा करने के मंसूबे बांधने लगा, अभी यह होगा या नहीं यह भविष्य में ही तय होगा और भारत क्या कर रहा है, यह सबको पता ही है। हमने इस युद्ध में किसी की तरफ न रहने का निर्णय लिया, यह निर्णय अच्छा है या बुरा इसका निर्णय कूटनीतिक विशेषज्ञ ही कर सकते हैं।
अब एक नज़र रूस यूक्रेन के वर्तमान विवाद पर भी ज़रा विस्तार से डालते हैं। क्या रूस-यूक्रेन युद्ध अब तीसरे विश्व युद्ध की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है ? अभी इस पर कोई स्वीकारात्मक टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। रूस ने अपने और यूक्रेन के बीच हो रहे इस युद्ध में बीच में पड़ने वालों को धमकी दी है तो वहीं अमेरिका ने भी सख्त चेतावनी के साथ कहा है कि इस युद्ध का परिणाम बहुत बुरा होगा और रूस को इसकी कीमत चुकानी होगी।
ब्रिटेन और दूसरे देश भी रूस के खिलाफ खड़े हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जंग के पीछे की वजह इस बार नाटो को माना जा रहा है।नाटो (NATO) यानी नार्थ एटलांटिक ट्रीटी आर्गेनाईजेशन( North Atlantic Treaty Organization) जिसे साल 1949 में शुरू किया गया था। यूक्रेन नाटो( NATO) में शामिल होना चाहता है लेकिन रूस ऐसा नहीं होने देना चाहता था। यह जानना जरूरी है कि आखिर इस विवाद की जड़ क्या है? सोवियत संघ के जमाने में कभी मित्र रहे ये प्रांत दो देश बनने के बाद एक दूसरे के खिलाफ क्यों हो गए ?
अब इसके इतिहास में जाकर कुछ पुरानी घटनाओं को देखते हैं। यूक्रेन की सीमा पश्चिम में यूरोप और पूर्व में रूस से जुड़ी है। 1991 तक यूक्रेन पूर्ववर्ती सोवियत संघ (USSR) का हिस्सा था। अलग होने के बाद भी यूक्रेन में रूस का प्रभाव काफी हद तक दिखाई देता था। यूक्रेन की सरकार भी रूसी शासन के आदेश पर ही काम करती थी। लेकिन, बिगड़ती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और अल्पसंख्यक रूसी भाषी लोगों के बहुसंख्यक यूक्रेनी लोगों पर शासन ने विद्रोह की चिंगारी सुलगा दी।
अब यह क्रोनोलॉजी देखें,
● 1991 यूक्रेन ने रूस से आजादी का ऐलान किया। यह वह समय था, जब सोवियत रूस का विखराव शुरू हो गया था। यूक्रेन में जनमत संग्रह हुआ लियोनिद क्रावचुक वहां के राष्ट्रपति बने।
● 1994 में फिर वहां चुनाव हुआ और लियोनिद कुचमा ने लियोनिद क्रावचुक को चुनाव में हरा दिया।
● 1999 के चुनाव में, कुचमा एक बार फिर से राष्ट्रपति चुने गए। लेकिन इस चुनाव में उनकी सरकार पर अनियमितता और धांधली के कई आरोप लगे।
● 2004 के चुनाव में, रूस के पक्षधर विक्टर यानूकोविच विजयी हुए और वे नए राष्ट्रपति बने। उन पर चुनाव में धांधली का आरोप लगा और इस व्यापक अनियमितता पर यूक्रेन में देश भर में प्रदर्शन हुए। इस व्यापक जनप्रदर्शन को यूक्रेन के इतिहास में ऑरेंज रिवोल्यूशन के नाम से जाना जाता है। विक्टर यूस्चेन्को को पश्चिमी देशों यानी अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस का पक्षधर कहा जाता था। विक्टर यूनोकोविच यूक्रेन के राष्ट्रपति तो बन गए थे, पर यह दुनिया का पहला देश रहा होगा जहां पर किसी देश के राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक कैंडिडेट के प्रचार में राजधानी कीव में अमेरिका और यूरोप के नेता वोट मांग रहे थे, तो दूसरी तरफ़ दूसरे कैंडिडेट के लिए रूस के राष्ट्रपति पुतिन वोट मांग रहे थे। चुनाव हारने के बाद विक्टर को चुनावी धांधली का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव रद्द कर दिया। इस बीच विपक्षी राष्ट्रपति उम्मीदवार यूसचें को को डॉक्सिन ज़हर देकर मार डालने की कोशिशों का आरोप रूस पर लगा जिसे रूस ने पश्चिम देशों का प्रोपोगांडा बताया। 2005 से लेकर 2010 लाख यूक्रेन रूसी विरोधी अमेरिका और यूरोप की नीतियों का केन्द्र रहा।
● 2005 में यूस्चेन्को ने रूस का दबदबा कम करने का संकल्प लिया और खुल कर, यूक्रेन को नाटो और यूरोपीय यूनियन में शामिल करने की बात अमेरिकी लॉबी में चलाई। वे रूस से दूर हट रहे थे और उनके इस कदम ने रूस को यूक्रेन के प्रति बेहद सन्देहास्पद बना दिया था।
● 2008 में नाटो ने यूक्रेन को आश्वासन दिया कि वह यूक्रेन को नाटो संगठन में शामिल कर लेगा।
● 2010 में जब चुनाव हुआ तो यानूकोविच ने राष्ट्रपति चुनाव में यूलिया टिमशेंको को हराया। यह रूस समर्थित खेमा था।
● 2013 में, यानूकोविच ने अमेरिका के साथ पहले से चल रही व्यापार वार्ता को स्थगित कर दिया। उन्होंने रूस के साथ आपसी व्यापार समझौते किए। इसे लेकर कीव में एक बड़ा प्रदर्शन भी हुआ।
● 2014 में 14 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत कानून व्यवस्था के कारण हुयी। संसद ने यानूकोविच को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पारित किया। यानूकोविच यह प्रबल जनविरोध झेल नहीं पाए और वह यूक्रेन छोड़ कर रूस भाग गए। रूसी समर्थक लड़ाकों ने यूक्रेन के क्रीमिया में संसद पर रूसी झंडा फहराया। 16 मार्च को रूस ने इसे एक जनमतसंग्रह के माध्यम से रूस में शामिल कर लिया।
● 2017 में यूक्रेन और यूरोपीय यूनियन के बीच मुक्त बाजार संधि हुयी।
● 2019 में, यूक्रेन के ऑर्थोडॉक्स चर्च को आधिकारिक मान्यता मिली। रूस ऑर्थोडॉक्स चर्च की मान्यता नहीं चाहता था, वह नाराज हुआ। उसका विरोध और बढ़ा।
● जून 2020 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आईएमएफ ने 5 बिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता यूक्रेन को दी।
● जनवरी 2021 में यूक्रेन ने अमेरिका से नाटो में शामिल होने की अपील की।
● अक्टूबर 2021 में यूक्रेन ने बेरेक्टर टीबी 2 ड्रोन का इस्तेमाल किया। रूस ने इससे उत्तेजित करने वाली कार्यवाही बतायी। ड्रोन के इस्तेमाल से रूस नाराज हुआ।
● नवंबर 2021 में, रूस ने यूक्रेन की सीमा पर अपनी सेनाओं की तैनाती बढ़ाई। अब एक खतरनाक स्थिति बन रही थीं।
● 7 दिसंबर 2021 को सीमा पर, रूसी सैनिकों की संख्या बढ़ाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की रूस को चेतावनी दी और कहा कि, रूस ने यूक्रेन पर यदि हमला किया तो, उस पर आर्थिक पाबंदियां लगेंगी।
● 10 जनवरी 2022, यूक्रेन-रूस तनाव के बीच यूएस और रूस के राजनयिकों की वार्ता हुयी जी विफल हो गयी। इसे विफल होना ही था।
● 17 जनवरी 2022 को, रूस की सेना बेलारूस पहुंचनी शुरू हुई।
● 24 जनवरी 2022 को, नाटो ने अपनी सेना को स्टैंडबाई यानी तैयारी की हालत में रखा।
● 28 जनवरी 2022 को, रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने कहा- रूस की मुख्य मांग है, उसकी सुरक्षा, जो पश्चिमी देशों द्वारा स्वीकार नहीं की गई।
● 2 फरवरी 2022 को, अमेरिका ने 3000 अतिरिक्त सैनिकों को पोलैंड, रोमानिया भेजने के लिये कहा।
● 4 फरवरी 2022 को, पुतिन को चीन का समर्थन मिला। चीन ने रूस के पक्ष में बयान जारी किया कि यूक्रेन को नाटो का हिस्सा नहीं होना चाहिए।
● 9 फरवरी 2022 को, जो बाइडेन ने कहा, 'यूक्रेन पर रूस कभी भी हमला कर सकता है।' इसके बाद, अमेरिका ने अमेरिकी लोगों से यूक्रेन छोड़ कर वापस आने की बात कही।
● 15 फरवरी 2022 को, रूस ने कहा कि वह अपनी कुछ सेना वापस बुला रहा है। यह पीछे लौटना नहीं था, बल्कि एक सामरिक रणनीति थी।
● 19 फरवरी 2022 को, रूस की सेना ने परमाणु हथियारों का एक युद्धपूर्व पूर्वाभ्यास किया।
● 21 फरवरी 2022 को, रूस ने यूक्रेन के दो हिस्सों- लोहान्स्क-दोनेत्स्क को मान्यता दे दी। यह रूसी बहुल इलाके थे।
● 24 फरवरी 2022 रूस ने यूक्रेन पर सैन्य ऑपरेशन का ऐलान किया और फिर जंग शुरू हो गई।
(विजय शंकर सिंह रिटायर्ड आईपीएस अफसर हैं और आजकल कानपुर में रहते हैं।)
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रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के बीस दिन बीत चुके हैं। मीडिया से प्राप्त, अब तक के ताजे अपटेड के अनुसार, यूक्रेन का दावा है कि दक्षिणी शहर मारियुपोल पर रूसी बमबारी से दो,पाँच सौ से ज्यादा मौतें हुई हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की के सलाहकार ओलेक्सी एरेस्टोविच ने कहा कि, "मारियुपोल में हमारी सेना को कामयाबी मिल रही है। हमने कल यहां पर रूसी सेना को हराकर अपने युद्ध बंदियों को आजाद करा लिया है।" दोनों देशों की युद्ध-तकरार से यूरोप के देशों पर कोरोना का खतरा बढ़ गया है। अब तक बीस लाख से ज्यादा यूक्रेनी शरणार्थी यूरोपीय देशों में पहुंचे हैं। इनमें से ज्यादातर का वैक्सीनेशन नहीं हुआ। विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि "यूक्रेन और आस-पास के देशों में तीन से नौ मार्च के बीच कोरोना के कुल सात,इक्यानवे,इक्कीस नए मामले सामने आये हैं।" रूसी हमले की वजह से यूक्रेनी इंफ्रास्ट्रक्चर को अब तक एक सौ उन्नीस बिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। एएफपी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, 'मॉस्को में यूक्रेन पर हमले के खिलाफ रविवार को बहुत बड़ा प्रदर्शन किया गया। रूसी पुलिस ने इसमें शामिल आठ सौ से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव ने रविवार को कहा कि विदेशी प्रतिबंधों से करीब दो.तीस लाख करोड़ रुपए का फंड फ्रीज हो गया है। यह फंड रूसी सरकार के चार.इक्यानवे लाख करोड़ रुपए के रेनी-डे फंड का हिस्सा था।' अब यूक्रेन के पश्चिमी इलाके में भी लड़ाई तेज हो गई है, जो अब तक 'सेफ हैवन' बना हुआ था। रूसी सेना ने रविवार को नाटो के सदस्य देश पोलैंड सीमा से महज बारह मील दूर यावोरिव में एक मिलिट्री ट्रेनिंग बेस पर क्रूज मिसाइलें दागकर पैंतीस लोगों को मार दिया, जबकि एक सौ चौंतीस लोग घायल हैं। रूस ने हमले में एक सौ अस्सी विदेशी लड़ाकों को मारने का भी दावा किया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने यूक्रेन में अपनी लड़ाई तेज करने के लिए चीन से मिलिट्री उपकरण मांगे हैं। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अतिरिक्त आर्थिक सहयोग भी मांगा है ताकि अमेरिका, यूरोप व एशियाई देशों की तरफ से लगाए प्रतिबंधों से वह अपनी इकोनॉमी को बचा सके। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कीव शहर के करीब हमले का शिकार हुआ मिलिट्री बेस इंटरनेशनल पीस कीपिंग सेंटर था, जहां अमेरिकी सेना एक महीने पहले तक यूक्रेन के सैनिकों को ट्रेनिंग दे रही थी। रूस ने यहां तीस से ज्यादा क्रूज मिसाइल दागी है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने भी हमले की पुष्टि की है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने एक सौ अस्सी विदेशी लड़ाके मारे हैं, जो यूक्रेन की तरफ से लड़ने आए थे। रूसी सेना ने यह हमला अपनी उस चेतावनी के एक दिन बाद किया है, जिसमें उसने यूक्रेन को अमेरिका व अन्य देशों से मिलने वाले हथियारों को निशाना बनाने की बात कही है। रेड क्रॉस ने चेतावनी दी है कि मारियुपोल शहर में फंसे करीब चार लाख लोगों की हालत बेहद खराब है और उनके लिए समय तेजी से भाग रहा है। रेड क्रॉस ने इन्हें निकालने के लिए ग्रीन कॉरिडोर की दोबारा बहाली की अपील की है। पूर्वी यूक्रेन में एक इवेक्यूएशन ट्रेन में आग लगने से कंडक्टर की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हैं। नेशनल रेलरोड कंपनी ने रविवार को बताया कि दोनस्क रीजन में ब्रूसिन स्टेशन के करीब आग का शिकार हुई ट्रेन में एक सौ बच्चों समेत सैकड़ों लोग सवार थे। पूर्वी यूक्रेन में रविवार को रूसी आर्टिलरी अटैक ने सोलहवीं सदी के एक चर्च और गुफा कॉम्पलेक्स को भारी नुकसान पहुंचाया है। आर्थोडॉक्स क्रिश्चियन समुदाय के होली डोरमिशन सिव्यातोगोर्स्क लावरा चर्च में सैकड़ों लोगों ने शरण ले रखी थी। हमले में इनमें से बहुत सारे घायल हो गए हैं। बता दें कि इस चर्च को मानने वाले यूक्रेन के अलावा रूस में भी हैं। उपरोक्त खबरें, अखबार और मीडिया एजेंसियां, लगातार दे रही हैं। युद्ध अपटेड निरन्तर बदल रहे हैं। यह खबरें, लोगों को डरा रही हैं और दुनिया क्या फिर से एक महायुद्ध की तरफ जाने या अनजाने बढ़ने लगी है, इस पर दुनियाभर के बौद्धिक समाज में चर्चा शुरू हो गयी है। शुरुआत में, यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद जैसा कि माना जा रहा था, कि नाटो देश और उनका सरपरस्त यूएस, यूक्रेन की तरफ से मोर्चा संभाल लेगा, खुद ही युद्ध नियंत्रित करने लगेगा और यूरोप फिर द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के सबसे कठिन युद्धों के दौर में आ जायेगा। और जब युद्ध बढ़ेगा तो कई समीकरण बनेंगे, बिगड़ेंगे और फिर विश्व चौधराहट के लिये जो जंग छिड़ेगी वह चीन, ईरान और भारत को भी समेट लेगी। पर अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। पर यह 'अभी तक', अभी तक ही है। युद्ध भी एक उन्माद की तरह होता है। और उन्माद किस दशा या दिशा में जायेगा, इसका अनुमान लगाया जाना कठिन होता है। हर युद्ध के कारण होते हैं, और तत्काल युद्ध छिड़ जाय तो उसके तात्कालिक कारण भी होते हैं। मानव सभ्यता का इतिहास ही युद्धों का इतिहास रहा है। यदि ज्ञात इतिहास का सिलसिलेवार अध्ययन किया जाय तो, आप पाएंगे कि, मानव सभ्यता का सारा इतिहास युद्ध और युद्ध की तैयारियों से भरा पड़ा है। दो युद्धों के बीच का शांतिकाल भी एक कूलिंग काल की तरह नज़र आता है। तभी तो साम्राज्य बनते, विकसित और बिगड़ते रहे हैं। रूस यूक्रेन युद्ध के बहाने बीसवीं सदी के दो बड़े और विनाशकारी युद्धों पर टिप्पणी के साथ-साथ इस लेख में प्रसिद्ध बुद्धिजीवी नोआम चोम्स्की के एक इंटरव्यू की भी चर्चा की जा रही है। आज दुनियाभर में, नोआम चॉम्स्की को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीवित सबसे महत्वपूर्ण बुद्धिजीवियों में से एक माना जाता है। अक्सर उनके बौद्धिक कद और मेधा की तुलना गैलीलियो, न्यूटन और डेसकार्टेस से की जाती है, क्योंकि उनका अध्ययन और उपलब्धियों का विस्तार, भाषा विज्ञान, तर्क और गणित, कंप्यूटर विज्ञान, मनोविज्ञान, मीडिया अध्ययन, दर्शन सहित विद्वानों और वैज्ञानिक जांच के विभिन्न क्षेत्रों तक है। उन्होंने अपने विचारों से इन सभी विषयों पर अपनी जबरदस्त छाप छोड़ी है। लगभग एक सौ पचास पुस्तकें, उनके द्वारा लिखी गयी हैं। वे सिडनी शांति पुरस्कार और क्योटो पुरस्कार और दुनिया के सबसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों से दर्जनों मानद डॉक्टरेट की उपाधि सहित अत्यधिक प्रतिष्ठित पुरस्कारों के सम्मानित हैं। चॉम्स्की, अमेरिका के एमआईटी संस्थान के प्रोफेसर एमेरिटस हैं और वर्तमान में एरिज़ोना विश्वविद्यालय में पुरस्कार विजेता प्रोफेसर हैं। "यूक्रेन पर रूस के आक्रमण ने पूरी दुनिया को चकित कर दिया। यह एक अकारण और अनुचित हमला है जो इतिहास में इक्कीस वीं सदी के प्रमुख युद्ध अपराधों में से एक के रूप में, याद रखा जाएगा।" यह तात्कालिक प्रतिक्रिया है, नोआम चोम्स्की की, जब वे ट्रुथआउट वेबसाइट के लिए एक विशेष साक्षात्कार में अपनी बात कह रहे थे। पर चोम्स्की के इस तर्क और विचार को जानने के पहले बीसवीं सदी के दो प्रमुख महायुद्धों और उनके बाद की स्थितियों की संक्षिप्त चर्चा करनी ज़रूरी है। दोनों ही महायुद्धों में जर्मन राष्ट्रवाद की एक प्रमुख भूमिका रही है। प्रथम विश्वयुद्ध का तात्कालिक कारण, भले ही, अट्ठाईस जून एक हज़ार नौ सौ चौदह को, सेराजोवा में ऑस्ट्रिया के सिंहासन के उत्तराधिकारी आर्चड्युक फर्डिनेंड और उनकी पत्नी की हत्या रही हो, और इस घटना के बाद, ऑस्ट्रिया द्वारा सर्बिया पर युद्ध कर देना रहा हो, पर यह एक तात्कालिक कारण था, युद्ध के साजो सामान में एक इग्नीशन की तरह था। पर साजो सामान को यूरोपीय साम्राज्यवादी उपनिवेशवादी देशों ने इसके पहले से इकट्ठा करना शुरू कर दिया था। युद्ध की पीठिका शांतिकाल में ही आकार लेती है और जब सब, तहस-नहस हो जाता है तो फिर अफसोस किये जाते हैं, बर्बादी की दास्तान सुनाई जाती है, युद्ध विरोधी हृदयविदारक साहित्य रचे जाते हैं, और शांति के लिये लीग ऑफ नेशन्स और यूनाइटेड नेशंस ऑर्गनाइजेशन जैसी अंतरराष्ट्रीय पंचायतें आकार लेने लगती हैं। पर, दुर्भाग्य से फिर कोई वैश्विक युद्धोन्माद उभरता है तो यह संस्थायें अक्सर बेबस नज़र आती हैं। रूस यूक्रेन युद्ध में, आज यूएनओ की भूमिका और उसके दखल से उसकी हैसियत क्या है, इसे आप प्रत्यक्ष देख रहे हैं। ऑस्ट्रिया ने सर्बिया के विरुद्ध युद्ध जब घोषित किया तो, रूस, फ़्रांस और ब्रिटेन ने सर्बिया की सहायता की और जर्मनी ने आस्ट्रिया की और इस तरह यूरोप का यह पहला विश्वयुद्ध था। एक हज़ार नौ सौ उन्नीस में भयंकर तबाही के बाद, यह युद्ध समाप्त हुआ, जर्मनी पराजित हुआ पर जर्मन राष्ट्रवाद ने खुद को आहत महसूस किया और वह अंदर ही अंदर उद्वेलित होता रहा, उफनता रहा। इसी बीच तमाम उथल-पुथल के बाद जर्मनी में हिटलर आया और हिटलर का एक ही उद्देश्य था प्रथम विश्वयुद्ध में पराजित जर्मनी का प्रतिशोध लेना। प्रतिशोध के लिये सैन्य तैयारियां तो हो ही रही थीं, पर जनता को भी युद्ध की ज़रूरत, प्रतिशोध की आवश्यकता, जर्मनी की प्रतिष्ठा स्थापित करने का औचित्य आदि बातें समझानी थीं और उसे मानसिक रूप से तैयार भी करना था। जनमानस में, हिटलर की अजेयता और उसकी विकल्पहीनता सिद्ध करने के लिये जर्मनी में जो कुछ किया गया वह एक ऐसी विचारधारा बनी, जिसका आधार ही घृणा, झूठ, फरेब और उन्माद था। जिस आक्रामक और घृणा आधारित राष्ट्रवाद की नींव हिटलर और उसके लोग रख रहे थे, अंततः वही उसके विनाश का कारण बनी। पर जब युद्ध होता है, तो बर्बाद, आम जन होते हैं, देश की अर्थव्यवस्था होती है, समाज का तानाबाना मसकता है, विकास और जनिहित के कार्य नष्ट हो जाते हैं, भुखमरी, बेरोजगारी और अन्य मुसीबतें सर उठा लेती हैं और हवा में बारूद की गंध लम्बे समय के लिये फैल जाती है। यह बात भी कुछ हद तक सही है कि राष्ट्र नायक, इस विनाश के बाद, राष्ट्र खलनायक के रूप में देखा जाने लगता है, और जनता ठगी हुयी उन कारणों के पड़ताल में लग जाती है कि, क्या वह प्रतिशोध के उन्माद में अपना विवेक खो कर एक रोबोट संचालित भीड़ बन गयी थी ? अब आते हैं, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की स्थितियों पर। युद्ध में कोई नहीं जीतता है खास कर ऐसे विनाशकारी युद्धों के बाद। ऐसे ही युद्धों के लिए अंग्रेजी में एक शब्द है पिरिक विक्ट्री, जिसका अर्थ है, विनाशकारी विजय। एक ऐसी विजय जो जीत का आह्लाद तक नहीं खुलकर लेने देती और जीत एक मनोवैज्ञानिक युद्धोन्माद की संतुष्टि जैसी रह जाती है। यही हाल ब्रिटेन का हुआ। उसके उपनिवेश बिखरने लगे। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद फिर एक अंतरराष्ट्रीय पंचायत यूएनओ के रूप में सामने आयी। पर युद्ध की समाप्ति के चार साल बाद ही अंतरराष्ट्रीय गोलबंदी और सैन्य समझौते होने लगे। दरअसल, सोवियत रूस और अमेरिका भले ही द्वितीय विश्वयुद्ध में धुरी राष्ट्रों के खिलाफ एक रहे हों, पर वह समझौता एक साझे शत्रु से निपटने तक के लिये ही था। वह साझा शत्रु हिटलर था, मुसोलिनी था, उनकी संकीर्ण फासिस्ट सोच थी और उनका खतरनाक स्तर तक बढ़ा हुआ युद्धोन्माद था। जब वह कॉमन शत्रु निपट गया तो तो जो यूएस सोवियत रूस का मूल वैचारिक विरोध था, वह फिर दोनों के बीच सतह पर, आ गया। अब तकनीक बदल गयी थी। युद्ध के तब तक के सबसे विनाशकारी हथियार का दुखद परीक्षण हो चुका था, तो युद्ध की एक नई शैली सामने आई, जिसे कोल्ड वार यानी शीत युद्ध कहा गया। इस काल में दुनिया दो ध्रुवों में बंटी और भारत के नेतृत्व में नवस्वतंत्र एशियाई और अफ्रीकी मुल्कों ने इन गुटों से अलग हट कर एक नया समूह बनाया जो सफलतापूर्वक लम्बे समय तक चला और अपनी हैसियत भी समय समय पर प्रदर्शित की। यह समूह था, गुट निरपेक्ष संगठन। एक हज़ार नौ सौ नब्बे तक सोवियत रूस बिखरने लगा। उसके बहुत से कारण हैं, उनमें जाना विषयांतर हो सकता है। पर जब सोवियत टूटा तो यूक्रेन और अन्य बहुत से देश जो स्टालिन के समय में सोवियत रूस में थे वे अलग हो गए। रूस आर्थिक रूप से कमजोर भी हो गया था। अमेरिका के नेतृत्व में एक ध्रुवीय विश्व बन रहा था। सन्तुलन की अब आवश्यकता ही नहीं रही तो गुट निरपेक्ष संगठन भी धीरे-धीरे अप्रासंगिक होने लगे। अमेरिका ने रूस के चारों तरफ अपना अधिकार बढ़ाना शुरू कर दिया। उसी क्रम में जब उसकी महत्वाकांक्षा यूक्रेन तक आयी तो रूस जो धीरे धीरे सम्भल चुका था और अमेरिका को समझ भी गया था, इस पर सशंकित हुआ और यूरोप में युद्ध की एक नयी पीठिका बनने लगी। फिर अचानक यह युद्ध छिड़ गया। अमेरिका को लगता था कि रूस यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा पर यह हमला हुआ, यूक्रेन को लगता था, उस पर हमला होगा तो नाटो देश उसके पक्ष में बम बरसाने लगेंगे पर ऐसा बिल्कुल अभी तक तो नहीं हुआ चीन को लगा कि युद्ध तो मज़बूत से मज़बूत देश को भी कमजोर कर देता है, अमेरिका इससे कमज़ोर ही होगा, उस शून्य को भरने के लिये वह मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार हो ही रहा था, साथ ही रूसी राष्ट्रवाद के विस्तार की नज़ीर में वह ताइवान और दक्षिण एशिया में अपने एजेंडे को पूरा करने के मंसूबे बांधने लगा, अभी यह होगा या नहीं यह भविष्य में ही तय होगा और भारत क्या कर रहा है, यह सबको पता ही है। हमने इस युद्ध में किसी की तरफ न रहने का निर्णय लिया, यह निर्णय अच्छा है या बुरा इसका निर्णय कूटनीतिक विशेषज्ञ ही कर सकते हैं। अब एक नज़र रूस यूक्रेन के वर्तमान विवाद पर भी ज़रा विस्तार से डालते हैं। क्या रूस-यूक्रेन युद्ध अब तीसरे विश्व युद्ध की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है ? अभी इस पर कोई स्वीकारात्मक टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। रूस ने अपने और यूक्रेन के बीच हो रहे इस युद्ध में बीच में पड़ने वालों को धमकी दी है तो वहीं अमेरिका ने भी सख्त चेतावनी के साथ कहा है कि इस युद्ध का परिणाम बहुत बुरा होगा और रूस को इसकी कीमत चुकानी होगी। ब्रिटेन और दूसरे देश भी रूस के खिलाफ खड़े हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जंग के पीछे की वजह इस बार नाटो को माना जा रहा है।नाटो यानी नार्थ एटलांटिक ट्रीटी आर्गेनाईजेशन जिसे साल एक हज़ार नौ सौ उनचास में शुरू किया गया था। यूक्रेन नाटो में शामिल होना चाहता है लेकिन रूस ऐसा नहीं होने देना चाहता था। यह जानना जरूरी है कि आखिर इस विवाद की जड़ क्या है? सोवियत संघ के जमाने में कभी मित्र रहे ये प्रांत दो देश बनने के बाद एक दूसरे के खिलाफ क्यों हो गए ? अब इसके इतिहास में जाकर कुछ पुरानी घटनाओं को देखते हैं। यूक्रेन की सीमा पश्चिम में यूरोप और पूर्व में रूस से जुड़ी है। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे तक यूक्रेन पूर्ववर्ती सोवियत संघ का हिस्सा था। अलग होने के बाद भी यूक्रेन में रूस का प्रभाव काफी हद तक दिखाई देता था। यूक्रेन की सरकार भी रूसी शासन के आदेश पर ही काम करती थी। लेकिन, बिगड़ती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और अल्पसंख्यक रूसी भाषी लोगों के बहुसंख्यक यूक्रेनी लोगों पर शासन ने विद्रोह की चिंगारी सुलगा दी। अब यह क्रोनोलॉजी देखें, ● एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे यूक्रेन ने रूस से आजादी का ऐलान किया। यह वह समय था, जब सोवियत रूस का विखराव शुरू हो गया था। यूक्रेन में जनमत संग्रह हुआ लियोनिद क्रावचुक वहां के राष्ट्रपति बने। ● एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में फिर वहां चुनाव हुआ और लियोनिद कुचमा ने लियोनिद क्रावचुक को चुनाव में हरा दिया। ● एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे के चुनाव में, कुचमा एक बार फिर से राष्ट्रपति चुने गए। लेकिन इस चुनाव में उनकी सरकार पर अनियमितता और धांधली के कई आरोप लगे। ● दो हज़ार चार के चुनाव में, रूस के पक्षधर विक्टर यानूकोविच विजयी हुए और वे नए राष्ट्रपति बने। उन पर चुनाव में धांधली का आरोप लगा और इस व्यापक अनियमितता पर यूक्रेन में देश भर में प्रदर्शन हुए। इस व्यापक जनप्रदर्शन को यूक्रेन के इतिहास में ऑरेंज रिवोल्यूशन के नाम से जाना जाता है। विक्टर यूस्चेन्को को पश्चिमी देशों यानी अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस का पक्षधर कहा जाता था। विक्टर यूनोकोविच यूक्रेन के राष्ट्रपति तो बन गए थे, पर यह दुनिया का पहला देश रहा होगा जहां पर किसी देश के राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक कैंडिडेट के प्रचार में राजधानी कीव में अमेरिका और यूरोप के नेता वोट मांग रहे थे, तो दूसरी तरफ़ दूसरे कैंडिडेट के लिए रूस के राष्ट्रपति पुतिन वोट मांग रहे थे। चुनाव हारने के बाद विक्टर को चुनावी धांधली का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव रद्द कर दिया। इस बीच विपक्षी राष्ट्रपति उम्मीदवार यूसचें को को डॉक्सिन ज़हर देकर मार डालने की कोशिशों का आरोप रूस पर लगा जिसे रूस ने पश्चिम देशों का प्रोपोगांडा बताया। दो हज़ार पाँच से लेकर दो हज़ार दस लाख यूक्रेन रूसी विरोधी अमेरिका और यूरोप की नीतियों का केन्द्र रहा। ● दो हज़ार पाँच में यूस्चेन्को ने रूस का दबदबा कम करने का संकल्प लिया और खुल कर, यूक्रेन को नाटो और यूरोपीय यूनियन में शामिल करने की बात अमेरिकी लॉबी में चलाई। वे रूस से दूर हट रहे थे और उनके इस कदम ने रूस को यूक्रेन के प्रति बेहद सन्देहास्पद बना दिया था। ● दो हज़ार आठ में नाटो ने यूक्रेन को आश्वासन दिया कि वह यूक्रेन को नाटो संगठन में शामिल कर लेगा। ● दो हज़ार दस में जब चुनाव हुआ तो यानूकोविच ने राष्ट्रपति चुनाव में यूलिया टिमशेंको को हराया। यह रूस समर्थित खेमा था। ● दो हज़ार तेरह में, यानूकोविच ने अमेरिका के साथ पहले से चल रही व्यापार वार्ता को स्थगित कर दिया। उन्होंने रूस के साथ आपसी व्यापार समझौते किए। इसे लेकर कीव में एक बड़ा प्रदर्शन भी हुआ। ● दो हज़ार चौदह में चौदह हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत कानून व्यवस्था के कारण हुयी। संसद ने यानूकोविच को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पारित किया। यानूकोविच यह प्रबल जनविरोध झेल नहीं पाए और वह यूक्रेन छोड़ कर रूस भाग गए। रूसी समर्थक लड़ाकों ने यूक्रेन के क्रीमिया में संसद पर रूसी झंडा फहराया। सोलह मार्च को रूस ने इसे एक जनमतसंग्रह के माध्यम से रूस में शामिल कर लिया। ● दो हज़ार सत्रह में यूक्रेन और यूरोपीय यूनियन के बीच मुक्त बाजार संधि हुयी। ● दो हज़ार उन्नीस में, यूक्रेन के ऑर्थोडॉक्स चर्च को आधिकारिक मान्यता मिली। रूस ऑर्थोडॉक्स चर्च की मान्यता नहीं चाहता था, वह नाराज हुआ। उसका विरोध और बढ़ा। ● जून दो हज़ार बीस में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आईएमएफ ने पाँच बिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता यूक्रेन को दी। ● जनवरी दो हज़ार इक्कीस में यूक्रेन ने अमेरिका से नाटो में शामिल होने की अपील की। ● अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस में यूक्रेन ने बेरेक्टर टीबी दो ड्रोन का इस्तेमाल किया। रूस ने इससे उत्तेजित करने वाली कार्यवाही बतायी। ड्रोन के इस्तेमाल से रूस नाराज हुआ। ● नवंबर दो हज़ार इक्कीस में, रूस ने यूक्रेन की सीमा पर अपनी सेनाओं की तैनाती बढ़ाई। अब एक खतरनाक स्थिति बन रही थीं। ● सात दिसंबर दो हज़ार इक्कीस को सीमा पर, रूसी सैनिकों की संख्या बढ़ाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की रूस को चेतावनी दी और कहा कि, रूस ने यूक्रेन पर यदि हमला किया तो, उस पर आर्थिक पाबंदियां लगेंगी। ● दस जनवरी दो हज़ार बाईस, यूक्रेन-रूस तनाव के बीच यूएस और रूस के राजनयिकों की वार्ता हुयी जी विफल हो गयी। इसे विफल होना ही था। ● सत्रह जनवरी दो हज़ार बाईस को, रूस की सेना बेलारूस पहुंचनी शुरू हुई। ● चौबीस जनवरी दो हज़ार बाईस को, नाटो ने अपनी सेना को स्टैंडबाई यानी तैयारी की हालत में रखा। ● अट्ठाईस जनवरी दो हज़ार बाईस को, रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने कहा- रूस की मुख्य मांग है, उसकी सुरक्षा, जो पश्चिमी देशों द्वारा स्वीकार नहीं की गई। ● दो फरवरी दो हज़ार बाईस को, अमेरिका ने तीन हज़ार अतिरिक्त सैनिकों को पोलैंड, रोमानिया भेजने के लिये कहा। ● चार फरवरी दो हज़ार बाईस को, पुतिन को चीन का समर्थन मिला। चीन ने रूस के पक्ष में बयान जारी किया कि यूक्रेन को नाटो का हिस्सा नहीं होना चाहिए। ● नौ फरवरी दो हज़ार बाईस को, जो बाइडेन ने कहा, 'यूक्रेन पर रूस कभी भी हमला कर सकता है।' इसके बाद, अमेरिका ने अमेरिकी लोगों से यूक्रेन छोड़ कर वापस आने की बात कही। ● पंद्रह फरवरी दो हज़ार बाईस को, रूस ने कहा कि वह अपनी कुछ सेना वापस बुला रहा है। यह पीछे लौटना नहीं था, बल्कि एक सामरिक रणनीति थी। ● उन्नीस फरवरी दो हज़ार बाईस को, रूस की सेना ने परमाणु हथियारों का एक युद्धपूर्व पूर्वाभ्यास किया। ● इक्कीस फरवरी दो हज़ार बाईस को, रूस ने यूक्रेन के दो हिस्सों- लोहान्स्क-दोनेत्स्क को मान्यता दे दी। यह रूसी बहुल इलाके थे। ● चौबीस फरवरी दो हज़ार बाईस रूस ने यूक्रेन पर सैन्य ऑपरेशन का ऐलान किया और फिर जंग शुरू हो गई।
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मुजफ्फरनगर। जनपद में शीतलहर और सर्दी के प्रकोप को दृष्टिगत रखते हुए जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे. ने स्कूलों में चल रहे आवकाश को बढ़ाया है। अब जनपद के स्कूलों में ५ जनवरी तक अवकाश रहेगा।
जिलाधिकारी के आदेशानुसार जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्कूलों को इससे अवगत कराया है। जिला विद्यालय निरीक्षक गजेन्द्र सिंह ने बताया कि जनपद में कक्षा १ से कक्षा ८ तक का शिक्षण कार्य ५ जनवरी तक बन्द रहेगा।
इसके लिए कक्षा ८ तक के बच्चों का अवकाश घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि कक्षा ९ से १२ और सभी डिग्री कॉलेज व अन्य उच्च शिक्षण संस्थान ३ जनवरी से यथावत खुलेंगे। उन्होंने कहा कि इन आदेशों का उल्लंघन करने पर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी।
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मुजफ्फरनगर। जनपद में शीतलहर और सर्दी के प्रकोप को दृष्टिगत रखते हुए जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे. ने स्कूलों में चल रहे आवकाश को बढ़ाया है। अब जनपद के स्कूलों में पाँच जनवरी तक अवकाश रहेगा। जिलाधिकारी के आदेशानुसार जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्कूलों को इससे अवगत कराया है। जिला विद्यालय निरीक्षक गजेन्द्र सिंह ने बताया कि जनपद में कक्षा एक से कक्षा आठ तक का शिक्षण कार्य पाँच जनवरी तक बन्द रहेगा। इसके लिए कक्षा आठ तक के बच्चों का अवकाश घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि कक्षा नौ से बारह और सभी डिग्री कॉलेज व अन्य उच्च शिक्षण संस्थान तीन जनवरी से यथावत खुलेंगे। उन्होंने कहा कि इन आदेशों का उल्लंघन करने पर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी।
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नेरचौक - हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में किंग जॉर्ज रॉयल पब्लिक स्कूल नेरचौक का परिणाम शानदार रहा। स्कूल के कुल 121 छात्रों ने परीक्षा दी। जिसमें 116 छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण की। स्कूल के तानिया ठाकुर ने 476 अंक लेकर स्कूल में प्रथम स्थान हासिल कर प्रदेश भर में 22वां स्थान हासिल कर स्कूल तथा अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है। वहीं तनिशा ने 469 अंक लेकर द्वितीय स्थान तथा हिमाचल में 29वां स्थान व शौर्य गौतम ने 466 अंक लेकर स्कूल में तृतीय स्थान तथा हिमाचल में 32वां स्थान हासिल कर स्कूल एवं अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है। वहीं कंचन शर्मा ने 463 अंक लेकर चतुर्थ तथा हिमांक ठाकुर ने 452 अंक लेकर पांचवा स्थान हासिल किया है। स्कूल प्रबंधक एवं प्रिंसीपल डा. केपी शर्मा ने बताया की मार्च 2020 में हुई बाहरवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा का स्कूल परीक्षा परिणाम 96 प्रतिशत रहा। जिसमें पांच छात्रों ने 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक लिए। वहीं 31 छात्रों ने 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक लिए व 98 छात्रों ने प्रथम श्रेणी में आकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने छात्रों, अध्यापकों और अभिभावकों को बधाई दी है तथा छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
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नेरचौक - हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में किंग जॉर्ज रॉयल पब्लिक स्कूल नेरचौक का परिणाम शानदार रहा। स्कूल के कुल एक सौ इक्कीस छात्रों ने परीक्षा दी। जिसमें एक सौ सोलह छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण की। स्कूल के तानिया ठाकुर ने चार सौ छिहत्तर अंक लेकर स्कूल में प्रथम स्थान हासिल कर प्रदेश भर में बाईसवां स्थान हासिल कर स्कूल तथा अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है। वहीं तनिशा ने चार सौ उनहत्तर अंक लेकर द्वितीय स्थान तथा हिमाचल में उनतीसवां स्थान व शौर्य गौतम ने चार सौ छयासठ अंक लेकर स्कूल में तृतीय स्थान तथा हिमाचल में बत्तीसवां स्थान हासिल कर स्कूल एवं अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है। वहीं कंचन शर्मा ने चार सौ तिरेसठ अंक लेकर चतुर्थ तथा हिमांक ठाकुर ने चार सौ बावन अंक लेकर पांचवा स्थान हासिल किया है। स्कूल प्रबंधक एवं प्रिंसीपल डा. केपी शर्मा ने बताया की मार्च दो हज़ार बीस में हुई बाहरवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा का स्कूल परीक्षा परिणाम छियानवे प्रतिशत रहा। जिसमें पांच छात्रों ने नब्बे प्रतिशत से ज्यादा अंक लिए। वहीं इकतीस छात्रों ने अस्सी प्रतिशत से ज्यादा अंक लिए व अट्ठानवे छात्रों ने प्रथम श्रेणी में आकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने छात्रों, अध्यापकों और अभिभावकों को बधाई दी है तथा छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
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समूचे विश्व को सकते में डाल देने वाले पनामा पेपर्स लीक मामले में दुनिया भर के देशों में तहलका मचा हुआ है. इसे लेकर कई राष्ट्राध्यक्षों समेत भ्रष्ट शख्सीयतों में बेचैनी है तो ईमानदारी से टैक्स चुकाने वाले लोग स्तब्ध हैं. पिछले 10 सालों में नेताओं, कारपोरेट, अपराधियों, बिचौलियों और दूसरे नामीगिरामी लोगों द्वारा काली कमाई छिपाने वाले नापाक गठजोड़ का यह सब से बड़ा खुलासा है. पनामा पेपर्स में भ्रष्ट नेताओं, कारपोरेट्स और ला फर्म का ऐसा बेनाम गठबंधन सामने आया है जिस ने दुनिया के प्रभावशाली लोगों ने बेनामी शैल कंपनियों के माध्यम से अकूत दौलत छुपाने का काम किया है.
पनामा पेपर्स लीक मामला आर्थिक अपराध की दुनिया का अब तक का सब से बड़ा पर्दाफाश है. इस खुलासे ने दुनिया के आर्थिक तंत्र के पीछे छिपी खामियों को उजागर किया है. यह दुनिया भर के मीडिया की सामूहिक ताकत का इतिहास का सब से बड़ा उदाहरण है जिस ने एक साथ विश्व के भ्रष्ट नेताओं, उद्योगपतियों, खिलाडि़यों, अभिनेताओं, कुख्यात अपराधियों और नामीगिरामी शख्सीयतों की कमाई के काले कारनामों को उजागर किया है.
मामले के खुलासे के बाद शासकों के इस्तीफे हो रहे हैं. सरकारों के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं पर भारत में खामोशी है. पनामा पेपर्स में भारत के भी 500 लोगों के नाम उजागर हुए हैं पर इस राष्ट्रद्रोह पर कोई अंगुली नहीं उठा रहा है. भारत के मीडिया में भी चुप्पी है.
दुनिया भर के रसूखदार लोगों के नाम सामने आने के बाद यह बातें कही जा रही है कि ये सभी गुप्त बैंक खाते और औफशोर कंपनियां गैरकानूनी नहीं हैं पर माना जा रहा है कि जिन लोगों के नाम आए हैं उन्होंने मनी लौंड्रिंग करते हुए रकम यहां लगाई और अपने देशों में टैक्स चोरी की है.
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समूचे विश्व को सकते में डाल देने वाले पनामा पेपर्स लीक मामले में दुनिया भर के देशों में तहलका मचा हुआ है. इसे लेकर कई राष्ट्राध्यक्षों समेत भ्रष्ट शख्सीयतों में बेचैनी है तो ईमानदारी से टैक्स चुकाने वाले लोग स्तब्ध हैं. पिछले दस सालों में नेताओं, कारपोरेट, अपराधियों, बिचौलियों और दूसरे नामीगिरामी लोगों द्वारा काली कमाई छिपाने वाले नापाक गठजोड़ का यह सब से बड़ा खुलासा है. पनामा पेपर्स में भ्रष्ट नेताओं, कारपोरेट्स और ला फर्म का ऐसा बेनाम गठबंधन सामने आया है जिस ने दुनिया के प्रभावशाली लोगों ने बेनामी शैल कंपनियों के माध्यम से अकूत दौलत छुपाने का काम किया है. पनामा पेपर्स लीक मामला आर्थिक अपराध की दुनिया का अब तक का सब से बड़ा पर्दाफाश है. इस खुलासे ने दुनिया के आर्थिक तंत्र के पीछे छिपी खामियों को उजागर किया है. यह दुनिया भर के मीडिया की सामूहिक ताकत का इतिहास का सब से बड़ा उदाहरण है जिस ने एक साथ विश्व के भ्रष्ट नेताओं, उद्योगपतियों, खिलाडि़यों, अभिनेताओं, कुख्यात अपराधियों और नामीगिरामी शख्सीयतों की कमाई के काले कारनामों को उजागर किया है. मामले के खुलासे के बाद शासकों के इस्तीफे हो रहे हैं. सरकारों के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं पर भारत में खामोशी है. पनामा पेपर्स में भारत के भी पाँच सौ लोगों के नाम उजागर हुए हैं पर इस राष्ट्रद्रोह पर कोई अंगुली नहीं उठा रहा है. भारत के मीडिया में भी चुप्पी है. दुनिया भर के रसूखदार लोगों के नाम सामने आने के बाद यह बातें कही जा रही है कि ये सभी गुप्त बैंक खाते और औफशोर कंपनियां गैरकानूनी नहीं हैं पर माना जा रहा है कि जिन लोगों के नाम आए हैं उन्होंने मनी लौंड्रिंग करते हुए रकम यहां लगाई और अपने देशों में टैक्स चोरी की है.
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- 32 min ago Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...'
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Vijayakanth last ride: साउथ सुपरस्टार और राजनेता विजयकांत ने गुरुवार को दुनिया को अलविदा कह दिया है। फैंस से लेकर सेलेब्स तक सभी एक्टर के ऐसे जाने से काफी दुखी हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है जिसमें देखा जा सकता है कि विजयकांत को आखिरी विदाई देने भारी संख्या में भीड़ उमड़ी और नम आखों से उन्होंने एक्टर को अलविदा कहा।
पत्नी के साथ मारपीट करने वाले विवेक बिंद्रा के बारें में जानें सब कुछ, कैसे बने मोटिवेशनल स्पीकर?
साउथ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और राजनेता विजयकांत का गुरुवार को निधन हो गया। अपने चहेते सितारे के निधन से पूरा साउथ सिनेमा शोक में डूबा हुआ है। वहीं, इस दौरान बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंच रहे हैं।
उनके निधन की खबर से सिनेमा और राजनीतिक जगत शोक की लहर में डूब गई। शुक्रवार को विजयकांत के अंतिम संस्कार में साउथ के कई दिग्गज हस्तियां और स्टार्स उनके आखिरी दर्शन के लिए पहुंचे। रजनीकांत, कमल हासन समेत कई एक्टर्स ने विजयकांत को नम आंखों से विदाई दी।
अभिनेता के पार्थव शरीर का अंतिम संस्कार अन्ना सलाई के आइलैंड ग्राउंड में किया जाएगा, जहां कैप्टन के आखिरी सफर में बड़ी संख्या में प्रशंसक अपने चहेते स्टार्स के आखिरी दर्शन के लिए मौजूद हैं। गौरतलब जयकांत की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें चेन्नई के एक हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था। गुरुवार सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर उन्होंने आखिरी सांस ली।
साउथ सुपरस्टार के करियर की बात करें तो, विजयकांत का फिल्मी करियर शानदार रहा। उन्होंने एक के बाद एक कई हिट फिल्में दीं और करीब 150 से अधिक मूवी में काम किया। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। साल 2005 में उन्होंने डीएमडीके की स्थापना की था। वे विरुधाचलम और ऋषिवंडियम सीट से विधायक भी रहे थें।
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हे सुजान ! सुनो, घोर अँधेरी रात है, जंगल घना है, रास्ता नहीं है, ऐसा जानकर तुम आज यहीं ठहर जाओ, सवेरा होते ही चले जाना हुआ ।।१५९ (क)।।
Listen and be discreet; the night is dark, the forest dense and the path not easy to find; then stay here tonight and start tomorrow at dawn."
तुलसी जसि भवतब्यता तैसी मिलै सहाइ ।
आपुनु आवै ताहि पहि ताहि तहाँ ले जाइ ॥१५९ (ख) ॥ तुलसीदासजी कहते हैं कि जैसी भावी ( होनहार, हरिइच्छारूपी प्रारब्ध) होती है, वैसी ही सहायता मिल जाती है। चाहे तो वह आप ही उसके पास आती है या उसको वहाँ ले जाती है ॥१५९ ( ख ) ।।
As destiny decrees, says Tulasi, so help appears; either it comes to a man or it leads him away to the cause of his doom.
चौ. अलेहि नाथ आयसु घरि सीसा । बाँधि तुरग तरु बैठ महीसा ॥
नृप बहु भाँति प्रसंसेउ ताही । चरन बंदि निज भाग्य सराही । बहुत अच्छा, नाथ ! ऐसा कहकर और उसकी आज्ञा को सिर पर धारणकर राजा ने घोड़े को वृक्ष से बाँध दिया और वह बैठ गया। राजा ने उसकी बहुत प्रकार से प्रशंसा की और उसके चरणों की वन्दना करके अपने भाग्य की सराहना की ॥१॥
"Very well, my lord," the king replied; and, bowing to the hermit's command, he tied up his horse to a tree and took his seat. The king extolled him in many ways, and doing homage to his feet, congratulated himself on his own good fortune.
पुनि बोलेउ मृदु गिरा सुहाई। जानि पिता प्रभु करौं ढिठाई ॥ मोहि मुनीस सुत सेवक जानी। नाथ नाम निज कहहु बखानी ॥ और फिर विनीत, सुहावनी वाणी में कहा - हे प्रभो ! आपको पिता जानकर ही मैं ढिठाई करता हूँ। हे मुनीश्वर ! मुझे अपना पुत्र और सेवक जान अपना नाम-धाम विस्तार से बतलाइए ।।२।।
He then addressed him in soft and winning terms: "Lord, I am being presumptuous, as to a father; treat me, great sage, as your son and servant and tell me, lord, your name and all about yourself in deail. "
तेहि न जान नृप नृपहि सो जाना। भूप सुहृद सो कपट सयाना ॥ बैरी पुनि छत्री पुनि राजा । छल बल कीन्ह चहै निज काजा ॥ राजा ने उसे नहीं पहचाना, पर उसने राजा को पहचान लिया था । राजा तो शुद्ध-हृदय था और वह कपट करने में निपुण था। एक तो वैरी, फिर जाति का क्षत्रिय, फिर राजा ! वह छल-बल से अपना काम बनाना चाहता था ।।३।।
Although the king did not recognize the hermit, the latter recognized the king. The king had a guileless heart, but the hermit was a master of deceit. Being the king's enemy in the first instance, and then of the warrior caste and a prince, he sought to accomplish his own ends by force or fraud.
समुझि राजसुख दुखित अराती । अवा अनल इव सुलगै छाती । सरल बचन नृप के सुनि काना। बयर सँभारि हृदय हरषाना ॥ वह शत्रु अपने (पूर्व के) राज्य-सुख को समझकर (स्मरणकर) दुःखी था । उसकी छाती (कुम्हार के) आँवे की आग की तरह (भीतर ही भीतर) सुलग रही थी । प्रतापभानु के सरल वचन कान से सुनकर और अपने वैर का स्मरण कर उसका हृदय हर्षित हो उठा ॥४॥
The enemy remembered the pleasures of royalty and was sad; the fire of jealousy smouldered within his heart like that of a furnace. On hearing the artless words of ratapabhanu and recalling the grudge he had nursed against him, the hermit was glad at heart.
दो. -कपट बोरि बानी मृदुल बोलेउ जुगुति समेत ।
नाम हमार भिखारि अब निर्धन रहित निकेत ॥१६०॥ कपट में डुबोकर बड़ी युक्ति के साथ वह कोमल वाणी बोला अब हमारा नाम भिखारी है, क्योंकि हम निर्धन और अनिकेत (घर-द्वार से रहित) हैं ॥१६०॥
He uttered yet another string of smooth but scheming and guileful words: "My name now is Bhikhari, for I am a homeless beggar."
चौ. -कह नृप जे बिज्ञाननिधाना । तुम्ह सारिखे गलित अभिमाना ॥
सदा रहहिं अपनपी दुराएँ। सब बिधि कुसल कुबेष बनाएँ ॥ (तब) राजा ने कहा - जो आपके समान विज्ञान के स्थान और सर्वथा अहंकारशून्य होते हैं, वे अपने स्वरूप को सदा छिपाये रहते हैं, क्योंकि कुवेष बनाकर रहने में ही वे सब भाँति अपना कुशल-क्षेम मानते हैं (प्रकट संतवेष में मान होने की सम्भावना रहती है और मान से पतन की) ॥१॥ The king replied, "Those who are repositories of wisdom and free from pride like yourself always conceal their own personality; they find their highest good in the adoption of a wretched outer garb.
तेहि तें कहहिं संत श्रुति टेरें । परम अकिंचन प्रिय हरि करें ॥ तुम्ह सम अधन भिखारि अगेहा । होत बिरंचि सिवहि संदेहा ॥ इसीसे तो संत और वेद पुकार-पुकारकर कहते हैं कि परम अकिञ्चन ही हरि को प्यारे होते हैं। आप सरीखे निर्धन, भिखारी और गृहहीनों को
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हे सुजान ! सुनो, घोर अँधेरी रात है, जंगल घना है, रास्ता नहीं है, ऐसा जानकर तुम आज यहीं ठहर जाओ, सवेरा होते ही चले जाना हुआ ।।एक सौ उनसठ ।। Listen and be discreet; the night is dark, the forest dense and the path not easy to find; then stay here tonight and start tomorrow at dawn." तुलसी जसि भवतब्यता तैसी मिलै सहाइ । आपुनु आवै ताहि पहि ताहि तहाँ ले जाइ ॥एक सौ उनसठ ॥ तुलसीदासजी कहते हैं कि जैसी भावी होती है, वैसी ही सहायता मिल जाती है। चाहे तो वह आप ही उसके पास आती है या उसको वहाँ ले जाती है ॥एक सौ उनसठ ।। As destiny decrees, says Tulasi, so help appears; either it comes to a man or it leads him away to the cause of his doom. चौ. अलेहि नाथ आयसु घरि सीसा । बाँधि तुरग तरु बैठ महीसा ॥ नृप बहु भाँति प्रसंसेउ ताही । चरन बंदि निज भाग्य सराही । बहुत अच्छा, नाथ ! ऐसा कहकर और उसकी आज्ञा को सिर पर धारणकर राजा ने घोड़े को वृक्ष से बाँध दिया और वह बैठ गया। राजा ने उसकी बहुत प्रकार से प्रशंसा की और उसके चरणों की वन्दना करके अपने भाग्य की सराहना की ॥एक॥ "Very well, my lord," the king replied; and, bowing to the hermit's command, he tied up his horse to a tree and took his seat. The king extolled him in many ways, and doing homage to his feet, congratulated himself on his own good fortune. पुनि बोलेउ मृदु गिरा सुहाई। जानि पिता प्रभु करौं ढिठाई ॥ मोहि मुनीस सुत सेवक जानी। नाथ नाम निज कहहु बखानी ॥ और फिर विनीत, सुहावनी वाणी में कहा - हे प्रभो ! आपको पिता जानकर ही मैं ढिठाई करता हूँ। हे मुनीश्वर ! मुझे अपना पुत्र और सेवक जान अपना नाम-धाम विस्तार से बतलाइए ।।दो।। He then addressed him in soft and winning terms: "Lord, I am being presumptuous, as to a father; treat me, great sage, as your son and servant and tell me, lord, your name and all about yourself in deail. " तेहि न जान नृप नृपहि सो जाना। भूप सुहृद सो कपट सयाना ॥ बैरी पुनि छत्री पुनि राजा । छल बल कीन्ह चहै निज काजा ॥ राजा ने उसे नहीं पहचाना, पर उसने राजा को पहचान लिया था । राजा तो शुद्ध-हृदय था और वह कपट करने में निपुण था। एक तो वैरी, फिर जाति का क्षत्रिय, फिर राजा ! वह छल-बल से अपना काम बनाना चाहता था ।।तीन।। Although the king did not recognize the hermit, the latter recognized the king. The king had a guileless heart, but the hermit was a master of deceit. Being the king's enemy in the first instance, and then of the warrior caste and a prince, he sought to accomplish his own ends by force or fraud. समुझि राजसुख दुखित अराती । अवा अनल इव सुलगै छाती । सरल बचन नृप के सुनि काना। बयर सँभारि हृदय हरषाना ॥ वह शत्रु अपने राज्य-सुख को समझकर दुःखी था । उसकी छाती आँवे की आग की तरह सुलग रही थी । प्रतापभानु के सरल वचन कान से सुनकर और अपने वैर का स्मरण कर उसका हृदय हर्षित हो उठा ॥चार॥ The enemy remembered the pleasures of royalty and was sad; the fire of jealousy smouldered within his heart like that of a furnace. On hearing the artless words of ratapabhanu and recalling the grudge he had nursed against him, the hermit was glad at heart. दो. -कपट बोरि बानी मृदुल बोलेउ जुगुति समेत । नाम हमार भिखारि अब निर्धन रहित निकेत ॥एक सौ साठ॥ कपट में डुबोकर बड़ी युक्ति के साथ वह कोमल वाणी बोला अब हमारा नाम भिखारी है, क्योंकि हम निर्धन और अनिकेत हैं ॥एक सौ साठ॥ He uttered yet another string of smooth but scheming and guileful words: "My name now is Bhikhari, for I am a homeless beggar." चौ. -कह नृप जे बिज्ञाननिधाना । तुम्ह सारिखे गलित अभिमाना ॥ सदा रहहिं अपनपी दुराएँ। सब बिधि कुसल कुबेष बनाएँ ॥ राजा ने कहा - जो आपके समान विज्ञान के स्थान और सर्वथा अहंकारशून्य होते हैं, वे अपने स्वरूप को सदा छिपाये रहते हैं, क्योंकि कुवेष बनाकर रहने में ही वे सब भाँति अपना कुशल-क्षेम मानते हैं ॥एक॥ The king replied, "Those who are repositories of wisdom and free from pride like yourself always conceal their own personality; they find their highest good in the adoption of a wretched outer garb. तेहि तें कहहिं संत श्रुति टेरें । परम अकिंचन प्रिय हरि करें ॥ तुम्ह सम अधन भिखारि अगेहा । होत बिरंचि सिवहि संदेहा ॥ इसीसे तो संत और वेद पुकार-पुकारकर कहते हैं कि परम अकिञ्चन ही हरि को प्यारे होते हैं। आप सरीखे निर्धन, भिखारी और गृहहीनों को
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Jabalpur: मध्य प्रदेश के जबलपुर में रात के वक्त एक महिला पर एक युवक ने फायरिंग कर दी। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की खबर लगते ही मौके पर पुलिस पहुंची है और छानबीन की जा रही है। जानकारी के मुताबिक हमलावर ने घर के अंदर घुसकर वारदात को अंजाम दिया।
यह वारदात शहर के शारदा चौक क्षेत्र में हुई। सरस्वती चौबे का की हत्या करने वाल शख्स परिचित ही बताया जा रहा है। पीली बिल्डिंग इलाके में रहने वाली मृतका जब घर पर अकेली थी तभी युवक किसी बहाने घर के अंदर दाखिल हुआ और घटना को अंजाम देकर वह फरार हो गया।
घटना की खबर लगते ही मौके पर गोरखपुर संभाग के सीएसपी अखिलेश गौर, गढ़ा टीआई समेत पुलिस टीम पहुंची हुई। शव को पीएम के लिए भिजवाया जा रहा है। वहीं आरोपी की तलाश में पुलिस टीम भी एक्टिव हो गई है। सीएसपी का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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Jabalpur: मध्य प्रदेश के जबलपुर में रात के वक्त एक महिला पर एक युवक ने फायरिंग कर दी। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की खबर लगते ही मौके पर पुलिस पहुंची है और छानबीन की जा रही है। जानकारी के मुताबिक हमलावर ने घर के अंदर घुसकर वारदात को अंजाम दिया। यह वारदात शहर के शारदा चौक क्षेत्र में हुई। सरस्वती चौबे का की हत्या करने वाल शख्स परिचित ही बताया जा रहा है। पीली बिल्डिंग इलाके में रहने वाली मृतका जब घर पर अकेली थी तभी युवक किसी बहाने घर के अंदर दाखिल हुआ और घटना को अंजाम देकर वह फरार हो गया। घटना की खबर लगते ही मौके पर गोरखपुर संभाग के सीएसपी अखिलेश गौर, गढ़ा टीआई समेत पुलिस टीम पहुंची हुई। शव को पीएम के लिए भिजवाया जा रहा है। वहीं आरोपी की तलाश में पुलिस टीम भी एक्टिव हो गई है। सीएसपी का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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मोबिलिटी के भविष्य में एक कदम आगे रहने की दृष्टि के साथ, करसन युग की जरूरतों के लिए उपयुक्त सार्वजनिक परिवहन समाधान प्रदान करता है, और यूरोपीय बाजार में अपने विद्युत उत्पादों के साथ बढ़ना जारी रखता है। अपने व्यापक बिक्री-सेवा नेटवर्क के साथ यूरोपीय शहरों की पसंद बने रहने के लिए, कार्सन ने रोमानिया में जन्मजात इलेक्ट्रिक ई-एटीए मॉडल की पहली डिलीवरी की।
शहरों को पेश किए जाने वाले आधुनिक सार्वजनिक परिवहन समाधानों के साथ, करसन स्लेटीना शहर की सेवा में कुल 10 ई-एटीए लगाएगा। स्लेटिना की नगर पालिका को 10 मीटर लंबी पैंटोग्राफ ई-एटीए की पहली डिलीवरी का मूल्यांकन करते हुए, करसन के सीईओ ओकन बास ने कहा, "हम अपने करसन विद्युत उत्पादों के साथ सार्वजनिक परिवहन में परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं, जिसे हम प्रदान करते हैं। कई यूरोपीय देशों में 6 मी से 18 मी. हम भीड़-भाड़ वाले शहरों में बड़े आकार के इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन की बढ़ती आवश्यकता के लिए लचीले और पर्यावरण के अनुकूल समाधान प्रदान करते हैं। हमने रोमानिया को अपना पहला ई-एटीए निर्यात किया, जहां हमने अपने वाहन बेड़े और बिक्री के बाद के ढांचे के साथ अपनी उपस्थिति को मजबूत किया। हमारा लक्ष्य 250 से अधिक करसन इलेक्ट्रिक वाहनों के अपने बेड़े का विस्तार करना है, जो आज पूरी दुनिया में घूम रहे हैं, अपने नए मॉडलों के साथ जिन्हें हम अगले साल यूरोप के कई शहरों में वितरित करेंगे। हमें यूरोप में बढ़ने और हमारे 10 मीटर ई-एटीए उत्पाद के साथ हमारे देश के निर्यात में योगदान करने पर गर्व है, जिसे हमने रोमानियाई शहर स्लेटिना में पहली डिलीवरी की।
अपनी पर्यावरणीय पहचान, आराम, उच्च प्रदर्शन और आदर्श आयामों के साथ, कारसन के इलेक्ट्रिक वाहनों को यूरोपीय शहरों में एक प्रभावी डीलर और सेवा संरचना के साथ पेश किया जाना जारी है। यूरोप में मजबूती जारी रखते हुए, करसन ने रोमानिया को अपने जन्मजात इलेक्ट्रिक ई-एटीए मॉडल का पहला निर्यात किया।
अपनी सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के साथ शहरों के लिए आधुनिक परिवहन समाधान पेश करते हुए, करसन ने स्लेटिना शहर की सेवा में कुल 10 10-मीटर ई-एटीए बसें लगाई हैं। इसके अलावा, करसन ने तुर्की के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक बस निर्यात समझौते को साकार किया,
इसने रोमानिया के साथ कुल 56 ई-एटीए समझौतों पर हस्ताक्षर किए। 2 मिलियन किलोमीटर से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन अनुभव के साथ, कार्सन का लक्ष्य 2022 में रोमानिया के दो अलग-अलग शहरों में इन बसों को पहुंचाना है। इस प्रकार, जहां कार्सन ने अपने पर्यावरण के अनुकूल, शून्य-उत्सर्जन और अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहनों के साथ कई शहरों के परिवहन बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण किया, वहीं यूरोप में ब्रांड के इलेक्ट्रिक वाहन बेड़े 250 से अधिक हो गए।
रोमानियाई शहर स्लेटिना में पहली डिलीवरी का मूल्यांकन करते हुए, करसन के सीईओ ओकन बास ने कहा, "हम अपने करसन विद्युत उत्पादों के साथ सार्वजनिक परिवहन में परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं, जिसे हम कई यूरोपीय देशों में 6 मीटर से 18 मीटर तक की पेशकश करते हैं। हम भीड़-भाड़ वाले शहरों में बड़े आकार के इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन की बढ़ती आवश्यकता के लिए लचीले और पर्यावरण के अनुकूल समाधान प्रदान करते हैं। हमने रोमानिया को अपना पहला ई-एटीए निर्यात किया, जहां हमने अपने वाहन बेड़े और बिक्री के बाद के ढांचे के साथ अपनी उपस्थिति को मजबूत किया। हमारा लक्ष्य 250 से अधिक करसन इलेक्ट्रिक वाहनों के अपने बेड़े का विस्तार करना है, जो आज पूरी दुनिया में घूम रहे हैं, अपने नए मॉडलों के साथ जिन्हें हम अगले साल यूरोप के कई शहरों में वितरित करेंगे। हमें यूरोप में बढ़ने और हमारे 10 मीटर ई-एटीए उत्पाद के साथ हमारे देश के निर्यात में योगदान करने पर गर्व है, जिसे हमने रोमानियाई शहर स्लेटिना में पहली डिलीवरी की है। कहा।
इसका नाम एटा से लिया गया है, जिसका अर्थ तुर्की में परिवार के बुजुर्ग हैं, ई-एटीए में करसन की इलेक्ट्रिक उत्पाद श्रृंखला में सबसे बड़े बस मॉडल शामिल हैं। स्वाभाविक रूप से इलेक्ट्रिक ई-एटीए बैटरी प्रौद्योगिकियों से लेकर वहन क्षमता तक कई क्षेत्रों में एक बहुत ही लचीली संरचना प्रदान करता है और जरूरतों को जल्दी से प्रतिक्रिया दे सकता है। ई-एटीए मॉडल परिवार, जिसे 150 kWh से 600 kWh तक 7 अलग-अलग बैटरी पैक के साथ पसंद किया जा सकता है, एक सामान्य बस मार्ग पर यात्रियों से भरे होने पर, यात्री लोडिंग-अनलोडिंग, वास्तविक ड्राइविंग परिस्थितियों में 12 मीटर लंबी दूरी पर स्टॉप-स्टार्ट प्रदान करता है। उन परिस्थितियों से समझौता किए बिना जहां एयर कंडीशनर पूरे दिन काम करता है। यह आकार में 450 किलोमीटर तक की सीमा प्रदान करता है। इसके अलावा, इसकी फास्ट चार्जिंग तकनीक के साथ, इसे बैटरी पैक के आकार के आधार पर 1 से 4 घंटे में चार्ज किया जा सकता है।
यह अपने शक्तिशाली इंजन के साथ सभी सड़क स्थितियों को संभाल सकती है।
10 मीटर वर्ग में अधिकतम बैटरी क्षमता को 300 मीटर के लिए 12 kWh, 450 मीटर के लिए 18 kWh और मॉडल के लिए 600 kWh तक बढ़ाया जा सकता है। कार्सन ई-एटीए के इलेक्ट्रिक हब मोटर्स पहियों पर स्थित 10 किलोवाट अधिकतम शक्ति और 12 और 250 मीटर पर 22.000 एनएम टोक़ प्रदान करते हैं, जिससे ई-एटीए बिना किसी समस्या के सबसे तेज ढलान पर चढ़ने की इजाजत देता है। 18 मीटर पर, 500 kW की अधिकतम शक्ति पूर्ण क्षमता पर भी पूर्ण प्रदर्शन दिखाती है। ई-एटीए उत्पाद श्रृंखला, जो यूरोप के विभिन्न शहरों की विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल है, अपने भविष्य के बाहरी डिजाइन से प्रभावित करती है। यह यात्रियों को गति की एक अबाधित सीमा का वादा करते हुए, इंटीरियर में एक पूर्ण निचली मंजिल प्रदान करता है। इसकी उच्च श्रेणी के बावजूद, ई-एटीए यात्री क्षमता से समझौता नहीं करता है। पसंदीदा बैटरी क्षमता के आधार पर, ई-एटीए 10 यात्रियों को 79 मीटर, 12 से अधिक 89 मीटर और 18 से अधिक 135 मीटर पर ले जा सकता है।
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मोबिलिटी के भविष्य में एक कदम आगे रहने की दृष्टि के साथ, करसन युग की जरूरतों के लिए उपयुक्त सार्वजनिक परिवहन समाधान प्रदान करता है, और यूरोपीय बाजार में अपने विद्युत उत्पादों के साथ बढ़ना जारी रखता है। अपने व्यापक बिक्री-सेवा नेटवर्क के साथ यूरोपीय शहरों की पसंद बने रहने के लिए, कार्सन ने रोमानिया में जन्मजात इलेक्ट्रिक ई-एटीए मॉडल की पहली डिलीवरी की। शहरों को पेश किए जाने वाले आधुनिक सार्वजनिक परिवहन समाधानों के साथ, करसन स्लेटीना शहर की सेवा में कुल दस ई-एटीए लगाएगा। स्लेटिना की नगर पालिका को दस मीटर लंबी पैंटोग्राफ ई-एटीए की पहली डिलीवरी का मूल्यांकन करते हुए, करसन के सीईओ ओकन बास ने कहा, "हम अपने करसन विद्युत उत्पादों के साथ सार्वजनिक परिवहन में परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं, जिसे हम प्रदान करते हैं। कई यूरोपीय देशों में छः मी से अट्ठारह मी. हम भीड़-भाड़ वाले शहरों में बड़े आकार के इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन की बढ़ती आवश्यकता के लिए लचीले और पर्यावरण के अनुकूल समाधान प्रदान करते हैं। हमने रोमानिया को अपना पहला ई-एटीए निर्यात किया, जहां हमने अपने वाहन बेड़े और बिक्री के बाद के ढांचे के साथ अपनी उपस्थिति को मजबूत किया। हमारा लक्ष्य दो सौ पचास से अधिक करसन इलेक्ट्रिक वाहनों के अपने बेड़े का विस्तार करना है, जो आज पूरी दुनिया में घूम रहे हैं, अपने नए मॉडलों के साथ जिन्हें हम अगले साल यूरोप के कई शहरों में वितरित करेंगे। हमें यूरोप में बढ़ने और हमारे दस मीटर ई-एटीए उत्पाद के साथ हमारे देश के निर्यात में योगदान करने पर गर्व है, जिसे हमने रोमानियाई शहर स्लेटिना में पहली डिलीवरी की। अपनी पर्यावरणीय पहचान, आराम, उच्च प्रदर्शन और आदर्श आयामों के साथ, कारसन के इलेक्ट्रिक वाहनों को यूरोपीय शहरों में एक प्रभावी डीलर और सेवा संरचना के साथ पेश किया जाना जारी है। यूरोप में मजबूती जारी रखते हुए, करसन ने रोमानिया को अपने जन्मजात इलेक्ट्रिक ई-एटीए मॉडल का पहला निर्यात किया। अपनी सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के साथ शहरों के लिए आधुनिक परिवहन समाधान पेश करते हुए, करसन ने स्लेटिना शहर की सेवा में कुल दस दस-मीटर ई-एटीए बसें लगाई हैं। इसके अलावा, करसन ने तुर्की के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक बस निर्यात समझौते को साकार किया, इसने रोमानिया के साथ कुल छप्पन ई-एटीए समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दो मिलियन किलोमीटर से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन अनुभव के साथ, कार्सन का लक्ष्य दो हज़ार बाईस में रोमानिया के दो अलग-अलग शहरों में इन बसों को पहुंचाना है। इस प्रकार, जहां कार्सन ने अपने पर्यावरण के अनुकूल, शून्य-उत्सर्जन और अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहनों के साथ कई शहरों के परिवहन बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण किया, वहीं यूरोप में ब्रांड के इलेक्ट्रिक वाहन बेड़े दो सौ पचास से अधिक हो गए। रोमानियाई शहर स्लेटिना में पहली डिलीवरी का मूल्यांकन करते हुए, करसन के सीईओ ओकन बास ने कहा, "हम अपने करसन विद्युत उत्पादों के साथ सार्वजनिक परिवहन में परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं, जिसे हम कई यूरोपीय देशों में छः मीटर से अट्ठारह मीटर तक की पेशकश करते हैं। हम भीड़-भाड़ वाले शहरों में बड़े आकार के इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन की बढ़ती आवश्यकता के लिए लचीले और पर्यावरण के अनुकूल समाधान प्रदान करते हैं। हमने रोमानिया को अपना पहला ई-एटीए निर्यात किया, जहां हमने अपने वाहन बेड़े और बिक्री के बाद के ढांचे के साथ अपनी उपस्थिति को मजबूत किया। हमारा लक्ष्य दो सौ पचास से अधिक करसन इलेक्ट्रिक वाहनों के अपने बेड़े का विस्तार करना है, जो आज पूरी दुनिया में घूम रहे हैं, अपने नए मॉडलों के साथ जिन्हें हम अगले साल यूरोप के कई शहरों में वितरित करेंगे। हमें यूरोप में बढ़ने और हमारे दस मीटर ई-एटीए उत्पाद के साथ हमारे देश के निर्यात में योगदान करने पर गर्व है, जिसे हमने रोमानियाई शहर स्लेटिना में पहली डिलीवरी की है। कहा। इसका नाम एटा से लिया गया है, जिसका अर्थ तुर्की में परिवार के बुजुर्ग हैं, ई-एटीए में करसन की इलेक्ट्रिक उत्पाद श्रृंखला में सबसे बड़े बस मॉडल शामिल हैं। स्वाभाविक रूप से इलेक्ट्रिक ई-एटीए बैटरी प्रौद्योगिकियों से लेकर वहन क्षमता तक कई क्षेत्रों में एक बहुत ही लचीली संरचना प्रदान करता है और जरूरतों को जल्दी से प्रतिक्रिया दे सकता है। ई-एटीए मॉडल परिवार, जिसे एक सौ पचास किलोवाट-घंटा से छः सौ किलोवाट-घंटा तक सात अलग-अलग बैटरी पैक के साथ पसंद किया जा सकता है, एक सामान्य बस मार्ग पर यात्रियों से भरे होने पर, यात्री लोडिंग-अनलोडिंग, वास्तविक ड्राइविंग परिस्थितियों में बारह मीटर लंबी दूरी पर स्टॉप-स्टार्ट प्रदान करता है। उन परिस्थितियों से समझौता किए बिना जहां एयर कंडीशनर पूरे दिन काम करता है। यह आकार में चार सौ पचास किलोग्राममीटर तक की सीमा प्रदान करता है। इसके अलावा, इसकी फास्ट चार्जिंग तकनीक के साथ, इसे बैटरी पैक के आकार के आधार पर एक से चार घंटाटे में चार्ज किया जा सकता है। यह अपने शक्तिशाली इंजन के साथ सभी सड़क स्थितियों को संभाल सकती है। दस मीटर वर्ग में अधिकतम बैटरी क्षमता को तीन सौ मीटर के लिए बारह किलोवाट-घंटा, चार सौ पचास मीटर के लिए अट्ठारह किलोवाट-घंटा और मॉडल के लिए छः सौ किलोवाट-घंटा तक बढ़ाया जा सकता है। कार्सन ई-एटीए के इलेक्ट्रिक हब मोटर्स पहियों पर स्थित दस किलोग्रामवाट अधिकतम शक्ति और बारह और दो सौ पचास मीटर पर बाईस.शून्य एनएम टोक़ प्रदान करते हैं, जिससे ई-एटीए बिना किसी समस्या के सबसे तेज ढलान पर चढ़ने की इजाजत देता है। अट्ठारह मीटर पर, पाँच सौ किलोवाट की अधिकतम शक्ति पूर्ण क्षमता पर भी पूर्ण प्रदर्शन दिखाती है। ई-एटीए उत्पाद श्रृंखला, जो यूरोप के विभिन्न शहरों की विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल है, अपने भविष्य के बाहरी डिजाइन से प्रभावित करती है। यह यात्रियों को गति की एक अबाधित सीमा का वादा करते हुए, इंटीरियर में एक पूर्ण निचली मंजिल प्रदान करता है। इसकी उच्च श्रेणी के बावजूद, ई-एटीए यात्री क्षमता से समझौता नहीं करता है। पसंदीदा बैटरी क्षमता के आधार पर, ई-एटीए दस यात्रियों को उन्यासी मीटर, बारह से अधिक नवासी मीटर और अट्ठारह से अधिक एक सौ पैंतीस मीटर पर ले जा सकता है।
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जिले में कोरोना संक्रमण की रफ्तार काफी धीमी हो गई है। बगैर किसी मौत के शनिवार को सिर्फ 25 नए लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 7224 हो गई है। इसमें से 6131 लोग कोरोना से अब तक ठीक हो चुके हैं। 213 लोग शनिवार को भी उपचार के दौरान स्वस्थ हुए हैं। कोरोना संक्रमण से अब तक 123 लोगों की मौत हो गई है। जिले में कोरोना के सक्रिय केस घटकर 950 हो गए हैं।
जिले में कोरोना संक्रमण का फैलाव अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। संक्रमण से होने वाली मौतों का दायरा भी कम होता जा रहा है। इसे लेकर आम जनमानस में खुशी का माहौल है। अच्छी बात यह है कि शनिवार को संक्रमण से किसी की मौत नहीं हुई है। राहत की बात यह है कि कोरोना संक्रमित की संख्या भी बेहद कम है। सीएमओ डा. विजय बहादुर सिंह ने बताया कि शनिवार को 17 जगहों पर सिर्फ 25 नए लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि पंडितडीह श्रीदत्तगंज में चार, कोतवाली उतरौला में एक, छितरपारा उतरौला में दो, थाना गौरा में एक, लौककला हर्रैया में तीन, सीएचसी सादुल्लाहनगर रेहराबाजार में एक, पिपरहवा पचपेड़वा में दो तथा बढ़नी में दो नए लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इस प्रकार कुल 17 जगहों पर 25 नए लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। सीएमओ ने बताया कि सभी संक्रमित मरीजों को कोविड प्रोटोकॉल के तहत इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
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जिले में कोरोना संक्रमण की रफ्तार काफी धीमी हो गई है। बगैर किसी मौत के शनिवार को सिर्फ पच्चीस नए लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर सात हज़ार दो सौ चौबीस हो गई है। इसमें से छः हज़ार एक सौ इकतीस लोग कोरोना से अब तक ठीक हो चुके हैं। दो सौ तेरह लोग शनिवार को भी उपचार के दौरान स्वस्थ हुए हैं। कोरोना संक्रमण से अब तक एक सौ तेईस लोगों की मौत हो गई है। जिले में कोरोना के सक्रिय केस घटकर नौ सौ पचास हो गए हैं। जिले में कोरोना संक्रमण का फैलाव अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। संक्रमण से होने वाली मौतों का दायरा भी कम होता जा रहा है। इसे लेकर आम जनमानस में खुशी का माहौल है। अच्छी बात यह है कि शनिवार को संक्रमण से किसी की मौत नहीं हुई है। राहत की बात यह है कि कोरोना संक्रमित की संख्या भी बेहद कम है। सीएमओ डा. विजय बहादुर सिंह ने बताया कि शनिवार को सत्रह जगहों पर सिर्फ पच्चीस नए लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि पंडितडीह श्रीदत्तगंज में चार, कोतवाली उतरौला में एक, छितरपारा उतरौला में दो, थाना गौरा में एक, लौककला हर्रैया में तीन, सीएचसी सादुल्लाहनगर रेहराबाजार में एक, पिपरहवा पचपेड़वा में दो तथा बढ़नी में दो नए लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इस प्रकार कुल सत्रह जगहों पर पच्चीस नए लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। सीएमओ ने बताया कि सभी संक्रमित मरीजों को कोविड प्रोटोकॉल के तहत इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
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इस वीकेंड दिल्ली से 100 किलोमीटर की दूर पर मौजूद कुछ ऐसे स्थानों पर जाएं जहां आप अपने वीकेंड को यूटिलाइज भी कर सकती हैं।
देश की राजधानी दिल्ली अपने इतिहास और खान-पान के लिए पूरे विश्व में मशहूर है। देश के कोने-कोने से लोग यहां आते हैं और बस जाते हैं। वीकेंड्स पर तो दिल्ली में कुछ ज्यादा ही भीड़ हो जाती है क्योंकी आस-पास के शहरों और कसबों से लोग यहां घूमने आते हैं। अगर आप इस भीड़-भाड़ से हट कुछ समय शांत और रोचक जगह बिताना चाहती हैं तो इस वीकेंड दिल्ली से 100 किलोमीटर की दूर पर मौजूद कुछ ऐसे स्थानों पर जाएं जहां आप अपने वीकेंड को यूटिलाइज भी कर सकती हैं। चलिए आज हम आपको दिल्ली के नजदिक कुछ ऐसे ही वीकेंड गेटवेज के बारे में बताते हैं।
दिल्ली बहुत बड़ा शहर है और इसलिए यहां पर बहुत ज्यादा भीड़-भाड़ और शोर गुल रहता है। अगर आप इससे परेशान हो गई हैं तो आप दिल्ली से 58 किलोमीटर दूर प्रतापगढ़ फार्म्स पर जाकर गांव के शांत जीवन का अनुभव कर सकती हैं। यहां आकर आप अपनी फैमिली के साथ घोड़े और ऊंट की सवारी कर सकती हैं और आउटडोर ऐक्टिविटीज जैसे पेंटिंग और पॉटरी में भी हाथ आजमा सकती हैं।
बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर और एक्टर सैफ अली खान पटौदी के नवाब और बेगम हैं यह बात तो सभी जानते हैं मगर पटौदी असल में कहां है और यहां पर क्या देखने लायक है यह बहुत कम लोगों को पता है। दरअसल दिल्ली से महज 87 किलोमीटर दूर गुरुग्राम के नजदीक एक गांव है जिसका नाम पटौदी है। यहां पटौदी पैलेस है। इस पैलेस का एक हिस्सा अब होटल बन चुका है और दूसरे हिस्से में आज भी सैफ और करीना छुट्टियां बिताने आते हैं।
दिल्ली की भीड़ भाड़ से दूर शांति में वीकेंड गुजारना है तो आप के पास एक ऑप्शन सोहना का भी है। दिल्ली से महज 64 किलोमीटर दूर गुरुग्राम से अलवर के बीच जो रोड जाती है वहां एक छोटा सा कसबा है जिसका नाम सोहना है। यह कसबा अरावली की पहाडि़यों की तलहटी में स्थित है। यहां खूबसूरत झील, हॉट वॉअर स्प्रिंग और भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर है। यहां आस-पास बहुत हरियाली है और भीड़-भाड़ कम होने की वजह से यहां पर बहुत शांति भी है।
यह दिल्ली से महज 70 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। फरीदाबाद के नजदीक मांगर गांव में क धौज हे। यहां पर एडवेंचर स्पोर्ट्स का मजा लिया जा सकता है। अगर आप पिकनिक मनाना चाहती हैं तो उस लिहाज से भी यह जग बहुत अच्छी है। यहां आपको चारों ओर अरावली की पहाडि़यां नजर आएंगी, जो इस जगह को प्राकृतिक तौर पर भी खूबसूरत बनाती हैं। यहां आकर आप रॉक क्लाइम्बिंग, रैपलिंग, रिवर क्रॉसिंग, साइक्लिंग जैसी ऐक्टिविटीज का मजा ले सकती हैं।
अगर आप वाइल्ड लाइफ लवर है तो आपको दिल्ली से कुछ दूर असोला भट्टी बर्ड सैंच्युरी आकर बहुत अच्छा लगेगा। यहां कई लेक्स हैं। इसके अलावा यहां आप देश विदेश की कई बर्ड्स को देख सकती हैं और नेचर फोटोग्राफी भी कर सकती हैं।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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इस वीकेंड दिल्ली से एक सौ किलोग्राममीटर की दूर पर मौजूद कुछ ऐसे स्थानों पर जाएं जहां आप अपने वीकेंड को यूटिलाइज भी कर सकती हैं। देश की राजधानी दिल्ली अपने इतिहास और खान-पान के लिए पूरे विश्व में मशहूर है। देश के कोने-कोने से लोग यहां आते हैं और बस जाते हैं। वीकेंड्स पर तो दिल्ली में कुछ ज्यादा ही भीड़ हो जाती है क्योंकी आस-पास के शहरों और कसबों से लोग यहां घूमने आते हैं। अगर आप इस भीड़-भाड़ से हट कुछ समय शांत और रोचक जगह बिताना चाहती हैं तो इस वीकेंड दिल्ली से एक सौ किलोग्राममीटर की दूर पर मौजूद कुछ ऐसे स्थानों पर जाएं जहां आप अपने वीकेंड को यूटिलाइज भी कर सकती हैं। चलिए आज हम आपको दिल्ली के नजदिक कुछ ऐसे ही वीकेंड गेटवेज के बारे में बताते हैं। दिल्ली बहुत बड़ा शहर है और इसलिए यहां पर बहुत ज्यादा भीड़-भाड़ और शोर गुल रहता है। अगर आप इससे परेशान हो गई हैं तो आप दिल्ली से अट्ठावन किलोग्राममीटर दूर प्रतापगढ़ फार्म्स पर जाकर गांव के शांत जीवन का अनुभव कर सकती हैं। यहां आकर आप अपनी फैमिली के साथ घोड़े और ऊंट की सवारी कर सकती हैं और आउटडोर ऐक्टिविटीज जैसे पेंटिंग और पॉटरी में भी हाथ आजमा सकती हैं। बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर और एक्टर सैफ अली खान पटौदी के नवाब और बेगम हैं यह बात तो सभी जानते हैं मगर पटौदी असल में कहां है और यहां पर क्या देखने लायक है यह बहुत कम लोगों को पता है। दरअसल दिल्ली से महज सत्तासी किलोग्राममीटर दूर गुरुग्राम के नजदीक एक गांव है जिसका नाम पटौदी है। यहां पटौदी पैलेस है। इस पैलेस का एक हिस्सा अब होटल बन चुका है और दूसरे हिस्से में आज भी सैफ और करीना छुट्टियां बिताने आते हैं। दिल्ली की भीड़ भाड़ से दूर शांति में वीकेंड गुजारना है तो आप के पास एक ऑप्शन सोहना का भी है। दिल्ली से महज चौंसठ किलोग्राममीटर दूर गुरुग्राम से अलवर के बीच जो रोड जाती है वहां एक छोटा सा कसबा है जिसका नाम सोहना है। यह कसबा अरावली की पहाडि़यों की तलहटी में स्थित है। यहां खूबसूरत झील, हॉट वॉअर स्प्रिंग और भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर है। यहां आस-पास बहुत हरियाली है और भीड़-भाड़ कम होने की वजह से यहां पर बहुत शांति भी है। यह दिल्ली से महज सत्तर किलोग्राममीटर की दूरी पर मौजूद है। फरीदाबाद के नजदीक मांगर गांव में क धौज हे। यहां पर एडवेंचर स्पोर्ट्स का मजा लिया जा सकता है। अगर आप पिकनिक मनाना चाहती हैं तो उस लिहाज से भी यह जग बहुत अच्छी है। यहां आपको चारों ओर अरावली की पहाडि़यां नजर आएंगी, जो इस जगह को प्राकृतिक तौर पर भी खूबसूरत बनाती हैं। यहां आकर आप रॉक क्लाइम्बिंग, रैपलिंग, रिवर क्रॉसिंग, साइक्लिंग जैसी ऐक्टिविटीज का मजा ले सकती हैं। अगर आप वाइल्ड लाइफ लवर है तो आपको दिल्ली से कुछ दूर असोला भट्टी बर्ड सैंच्युरी आकर बहुत अच्छा लगेगा। यहां कई लेक्स हैं। इसके अलावा यहां आप देश विदेश की कई बर्ड्स को देख सकती हैं और नेचर फोटोग्राफी भी कर सकती हैं। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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हैदराबादः तेलंगाना में विधानसभा चुनाव को लेकर हर दल मतदाताओं को लुभाने के लिए हर दांवपेंच चल रहा है लेकिन सिरसिला का बुनकर समुदाय राज्य सरकार की मुफ्त साड़ी वितरण योजना के भविष्य को लेकर चिंतित है। जानकारी के अनुसार बता दें कि यह योजना राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने शुरू की थी। अब ऐसे में अगर उनकी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति टीआरएस सत्ता में नहीं आती है तो योजना चालू रहेगी या नहीं, इसे लेकर बुनकर काफी परेशान हैं।
यहां बता दें कि इस योजना ने इन बुनकरों को आजीविका के संकट से बाहर निकाला और आय बढ़ाने में काफी मदद की। वहीं ऐसे में यह योजना टीआरएस के लिए चुनाव में गेम चेंजर भी साबित हो सकती है। इसके साथ ही सिरसिला के बुनकरों को टीआरएस की सत्ता में वापसी की उम्मीद भी बताई गई है। बता दें कि सिरसिला सीट से राव के पुत्र केटी रामाराव मैदान में हैं और टीआरएस की मुफ्त साड़ी की योजना ने इस इलाके में साड़ी बनाने के काम को काफी बढ़ावा दिया है।
गौरतलब है कि माइंड केयर और काउंसिलिंग सेंटर के पुन्नम चंद्र ने बताया कि 2013 तक यहां एक साल में करीब 90-100 बुनकर आत्महत्या कर लेते थे, लेकिन जागरूकता शिविरों, परामर्श प्रयासों और सरकार की योजनाओं की वजह से परिवर्तन आया है। वहीं उन्होंने बताया कि पावरलूम बुनकरों ने ज्यादा कमाई के मकसद से अपने शुरुआती दो करघों को बढ़ाकर 16 करघे तक कर लिया था। इससे साड़ियों का उत्पादन तो बढ़ा लेकिन उन्हें कोई बाजार नहीं मिला और वे कर्ज जाल में फंस गए।
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हैदराबादः तेलंगाना में विधानसभा चुनाव को लेकर हर दल मतदाताओं को लुभाने के लिए हर दांवपेंच चल रहा है लेकिन सिरसिला का बुनकर समुदाय राज्य सरकार की मुफ्त साड़ी वितरण योजना के भविष्य को लेकर चिंतित है। जानकारी के अनुसार बता दें कि यह योजना राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने शुरू की थी। अब ऐसे में अगर उनकी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति टीआरएस सत्ता में नहीं आती है तो योजना चालू रहेगी या नहीं, इसे लेकर बुनकर काफी परेशान हैं। यहां बता दें कि इस योजना ने इन बुनकरों को आजीविका के संकट से बाहर निकाला और आय बढ़ाने में काफी मदद की। वहीं ऐसे में यह योजना टीआरएस के लिए चुनाव में गेम चेंजर भी साबित हो सकती है। इसके साथ ही सिरसिला के बुनकरों को टीआरएस की सत्ता में वापसी की उम्मीद भी बताई गई है। बता दें कि सिरसिला सीट से राव के पुत्र केटी रामाराव मैदान में हैं और टीआरएस की मुफ्त साड़ी की योजना ने इस इलाके में साड़ी बनाने के काम को काफी बढ़ावा दिया है। गौरतलब है कि माइंड केयर और काउंसिलिंग सेंटर के पुन्नम चंद्र ने बताया कि दो हज़ार तेरह तक यहां एक साल में करीब नब्बे-एक सौ बुनकर आत्महत्या कर लेते थे, लेकिन जागरूकता शिविरों, परामर्श प्रयासों और सरकार की योजनाओं की वजह से परिवर्तन आया है। वहीं उन्होंने बताया कि पावरलूम बुनकरों ने ज्यादा कमाई के मकसद से अपने शुरुआती दो करघों को बढ़ाकर सोलह करघे तक कर लिया था। इससे साड़ियों का उत्पादन तो बढ़ा लेकिन उन्हें कोई बाजार नहीं मिला और वे कर्ज जाल में फंस गए।
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द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम के प्रमुख एम के स्टालिन को सर्जरी के सिलसिले में चेन्नई के अपोलो अस्पताल में कल रात को भर्ती करवाया गया है. सूत्रों के मुताबिक ये पता चला है कि आज उनकी सर्जरी होगी.
इसके साथ ही अस्पताल ने डीएमके प्रमुख के बारे में आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि आज दोपहर तक उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी.
अस्पताल प्रशासन जब उनके स्वास्थ्य को लेकर मीडिया से मुखातिब हुए तो उन्होंने कहा कि अब उनके स्वास्थ्य में सुधार आ रहा है बस उनकी एक छोटी सी सर्जरी करनी होगी.
गौरतलब है कि डीएम प्रमुख एम के स्टालिन ने अभी कुछ दिनों पहले ही अपने पिता एम करुणानिधि की जगह ली है. मालूम हो कि बीते दिनों डीएमके के पूर्व प्रमुख एम करुणानिधि का निधन हो गया था.
करुणानिधि के निधन के बाद उनके बेटे को पार्टी की सारी जिम्मेदारी सौंपी गई और जिसके बाद वे पार्टी के प्रमुख बन गए हैं, जिसे लेकर उनके छोटे भाई ने बीते दिनों अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी.
फिलहाल अस्पताल ने अपने आधिकारिक बयान में उनके स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक खबर साझा की है. उनके स्वास्थ्य को लेकर उनके प्रशंसकों के बीच में थोड़ी सी चिंता हो गई थी जो कि अब अस्पताल के बयान के बाद पूरे तरीके से चिंता मुक्त हैं.
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द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम के प्रमुख एम के स्टालिन को सर्जरी के सिलसिले में चेन्नई के अपोलो अस्पताल में कल रात को भर्ती करवाया गया है. सूत्रों के मुताबिक ये पता चला है कि आज उनकी सर्जरी होगी. इसके साथ ही अस्पताल ने डीएमके प्रमुख के बारे में आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि आज दोपहर तक उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी. अस्पताल प्रशासन जब उनके स्वास्थ्य को लेकर मीडिया से मुखातिब हुए तो उन्होंने कहा कि अब उनके स्वास्थ्य में सुधार आ रहा है बस उनकी एक छोटी सी सर्जरी करनी होगी. गौरतलब है कि डीएम प्रमुख एम के स्टालिन ने अभी कुछ दिनों पहले ही अपने पिता एम करुणानिधि की जगह ली है. मालूम हो कि बीते दिनों डीएमके के पूर्व प्रमुख एम करुणानिधि का निधन हो गया था. करुणानिधि के निधन के बाद उनके बेटे को पार्टी की सारी जिम्मेदारी सौंपी गई और जिसके बाद वे पार्टी के प्रमुख बन गए हैं, जिसे लेकर उनके छोटे भाई ने बीते दिनों अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी. फिलहाल अस्पताल ने अपने आधिकारिक बयान में उनके स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक खबर साझा की है. उनके स्वास्थ्य को लेकर उनके प्रशंसकों के बीच में थोड़ी सी चिंता हो गई थी जो कि अब अस्पताल के बयान के बाद पूरे तरीके से चिंता मुक्त हैं.
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इसी समय, यह एक ही बार में कहा जाना चाहिए कि यह प्रश्न भविष्य के युद्ध की प्रकृति, पैमाने और अवधि पर महत्वपूर्ण रूप से निर्भर करता है। क्या यह छोटा और स्थानीय होगा, या कई लाख सेनाओं को शामिल करने वाला एक प्रचलित विश्व नरसंहार होगा, यह सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि सेना में किस प्रकार के जूते होंगे।
युद्ध के लिए, अपेक्षाकृत छोटा और स्थानीय है, सिद्धांत रूप में, कोई अंतर नहीं है कि विरोधी दलों द्वारा किस प्रकार के जूते का उपयोग किया जाता है। सैन्य-आर्थिक अर्थों में, स्थानीय युद्ध के लिए सैनिकों को लैस करना उन जूतों का उपयोग करता है जो उपलब्ध हैं, या जो प्राप्त किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, इंडोचाइना युद्ध में, अमेरिकी सेना को बाल्टी के साथ ढाल दिया गया था, और उन्हें सहयोगियों - दक्षिण वियतनाम की सेनाओं और लोनोल कम्पुचिया की आपूर्ति की गई थी। उनके विरोधीः उत्तरी वियतनामी सेना और खमेर रूज ज्यादातर चप्पल में लड़े, और केवल युद्ध के अंत में, ट्रॉफियों को पकड़कर, अमेरिकी जूते पहनना शुरू कर दिया। फिर, पहले से ही आपस में भिड़ते हुए, वियतनामी और लाल खमर्स ने अमेरिकी जूते पहने और फिर से रबर की चप्पल पर स्विच किया। केवल खमेर रूज के खिलाफ कंबोडिया में एक लंबे युद्ध के अंत में, वियतनामी सेना के पास सैन्य जूतों की एक दिलचस्प नज़र थी, "सैन्य स्नीकर्स," कैनवास स्नीकर्स जैसे लेसिंग, जिनमें से एकमात्र रबर वुल्फाइस्ड कोटिंग से बनाया गया था। जाहिर है स्थानीय, वियतनामी उत्पादन।
स्थानीय युद्धों में, 4-5 हज़ार से 200-250 हज़ार लोगों तक, अपेक्षाकृत छोटे दल शामिल हैं। अफगानिस्तान में युद्ध की तरह छोटे और सुस्त युद्ध, आमतौर पर हर तरफ 20-30 हजारों लोग शामिल होते हैं। बड़े क्षेत्रीय युद्ध, जैसे यूगोस्लाविया में युद्ध या सीरिया में युद्ध, प्रत्येक पक्ष के हजारों लोगों में 200 के बारे में शामिल हैं। यह संभावना नहीं है कि प्रत्येक मामले में सटीक आंकड़े स्थापित करना संभव होगा, लेकिन यहां विशेष सटीकता की आवश्यकता नहीं है, और संख्याओं का क्रम महत्वपूर्ण है।
इसलिए, एक छोटे से स्थानीय युद्ध में औसत आकस्मिक 60 प्रति वर्ष हजारों जोड़े जूते पहनेंगे (यदि हम वर्ष में दो बार डिलीवरी स्वीकार करते हैं; ट्रॉफी और डकैती को ध्यान में रखे बिना, जिसे ध्यान में नहीं रखा जा सकता है), और एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में एक औसत टुकड़ी बाहर पहन लेगी। 400 हजार जोड़ी जूते। यह दुनिया में जूता उत्पादन के पैमाने की तुलना में बहुत कम है। 2016 में, 22 अरबों जूते का उत्पादन किया गया (चीन में 14,6 अरबों सहित)। इस राशि में से, चीन में 2,7 बिलियन को ध्वस्त कर दिया गया, US में 1,9 बिलियन (यह दुनिया का सबसे शॉड देश है - प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति 7 जोड़े), भारत में 1,6 बिलियन और यूरोपीय संघ में 1,6 बिलियन। यह स्पष्ट रूप से देखा जाता है कि, ऐसी क्षमताओं के साथ, स्थानीय और क्षेत्रीय संघर्षों में शामिल शॉड सेनाएं विशेष रूप से मुश्किल नहीं हैं।
औसत जूता कारखाना 2-3 मिलियन जोड़ी जूते प्रति वर्ष तक उत्पादन करने में सक्षम है। जूता कारखाने अक्सर खरीदार की आवश्यकताओं के अनुसार 50-100 जोड़े के हजारों के लिए बहुत सारे अनुबंध करते हैं। चीन, भारत और पाकिस्तान में, छोटे बैचों में और नकदी में छोटे, अर्द्ध-हस्तकला उत्पादन बहुत अच्छी तरह से विकसित है। इसलिए, स्थानीय युद्धों के प्रतिभागियों को जूते की आपूर्ति करने की व्यापक संभावनाएं हैं। जूतों की वित्तीय संभावनाओं के आधार पर आप सस्ते और सरल और महंगे दोनों तरह के ऑर्डर दे सकते हैं।
जब चुनने के लिए बहुत कुछ होता है, तो, निश्चित रूप से, पहली जगह में व्यक्तिगत रूप से आरामदायक जूते, साथ ही साथ अधिक फैशनेबल जूते होंगे। बेशक, फैशन का सैन्य उपकरणों पर प्रभाव पड़ता है, जैसा कि लेख के पहले भाग में चर्चा की गई है। एक स्थानीय युद्ध में युद्धरत दलों के लिए, सैन्य फैशन की उपेक्षा करना बहुत खतरनाक है, क्योंकि "अप्रयुक्त" सेना अपनी प्रतिष्ठा खो सकती है, समर्थन खो सकती है और लंबे समय में हार का सामना कर सकती है। ऐसा लगता है कि यह अंतिम विचार नहीं है, जिसके साथ विभिन्न स्थानीय युद्धों में सेना और सेना के जूते या जूते पहनते हैं। इतना क्रूर, इतना सख्त, और इतना पर।
लेकिन फिर भी, मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि भविष्य में हम छोटे और स्थानीय संघर्षों की एक श्रृंखला की प्रतीक्षा नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक बड़े युद्ध, वैश्विक स्तर पर, जिसमें प्रमुख सैन्य शक्तियां शामिल होंगी, निश्चित रूप से, रूस। इसके कई कारण हैं, लेकिन मैं उन्हें अब विस्तार से नहीं बताऊंगा ताकि अंतरिक्ष पर कब्जा न हो। मैं केवल एक थीसिस का हवाला दूंगा, न कि बहुत सारे सबूत जैसे कि प्रॉपर्टीज। छोटे युद्धों के जंजीरों, एक तरह से या किसी अन्य, ने एक बड़े विश्व युद्ध का नेतृत्व किया। युद्ध तीव्र विरोधाभासों का परिणाम है, और मामूली झड़पें हमेशा इन विरोधाभासों को हल नहीं कर सकती हैं।
किसी भी बड़े युद्ध, जैसा कि प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के उदाहरण से देखा जा सकता है, अनिवार्य रूप से निम्नलिखित आर्थिक परिणामों की ओर जाता है। सबसे पहले, घरेलू उत्पादन में पूर्ण गिरावट। दूसरे, विदेशी व्यापार में तेज कमी, लगभग पूर्ण समाप्ति के बिंदु तक (लेकिन ऐसे मामलों में शायद ही कभी थे; मूल रूप से, युद्ध व्यापार का समय है)। कटौती के अलावा, विदेशी व्यापार खंडित है, अर्थात, दुश्मन के साथ व्यापार संबंध पूरी तरह से टूट गए हैं। इन दो कारकों से माल की कमी और आबादी की हानि होती है, दोनों युद्धरत और तटस्थ देशों में।
युद्ध की स्थितियों में रूस के लिए, यह सबसे अधिक संभावना है कि जूते के आयात में तेज कमी आएगी। अब, 300 मिलियन जोड़े की सालाना खपत के क्रम में, केवल 50-80 मिलियन जोड़े का उत्पादन घरेलू रूप से किया जाता है (जिसमें 16,5 मिलियन जोड़े सैन्य जूते शामिल हैं, जो कि 8 मिलियन सुरक्षा बलों के लिए पर्याप्त है)। चीन - संभावित बड़े युद्ध में मुख्य प्रतिभागियों में से एक - निश्चित रूप से, कच्चे माल को आयात किए बिना पहली बात है। नौसेना की नाकाबंदी चीन के खिलाफ शत्रुता की स्थिति में सभी प्रसिद्ध अमेरिकी योजनाओं में पहला आइटम है। एक युद्ध में, चीन को न केवल अपनी अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सैन्य उत्पादन में स्थानांतरित करना होगा, बल्कि जूते सहित माल के निर्यात को भी कम करना होगा।
बड़े युद्ध के लिए, अब हम विभिन्न परिदृश्यों की पेशकश कर सकते हैं (नाटो के खिलाफ रूस के युद्ध के परिदृश्य सहित, नाटो के खिलाफ मेरी पुस्तक में वर्णित है। संभावित युद्ध का विश्लेषण), हालांकि, सामान्य स्थिति, ऐसा लगता है, रूस बिना जूते के रहेगा और युद्ध शुरू होने (सर्दियों में सबसे अधिक संभावना) के बाद छह महीनों में कहीं न कहीं, नागरिक क्षेत्र के लिए जूते की तीव्र और बेहद असहनीय कमी होगी। हमारे पास अधिक या कम स्थापित सैन्य जूते का उत्पादन है, और हमें यह मान लेना चाहिए कि इसके पास एक साल या डेढ़ साल के युद्ध के लिए आरक्षित रखने के लिए है, और कुछ जुटाना भी होना चाहिए। लेकिन जनसंख्या किसी भी चीज़ में नहीं जाएगी! यह सिर्फ एक जर्सी बूट है - यह सिर्फ नागरिक जूते की इस तीव्र कमी का समाधान है। बेशक, एक वर्ष में किर्जाच के एक्सएनएक्सएक्स मिलियन जोड़े के आदेश के उत्पादन को प्राप्त करना बहुत मुश्किल काम है, लेकिन यह आवश्यक हो सकता है। आबादी को युद्ध के लिए काम करना चाहिए, और जूते के बिना काम करना मुश्किल है।
अगला। सबसे अधिक संभावना है, सैन्य अभियान यूक्रेन के बाल्टिक राज्यों में, उत्तरी काकेशस में, साथ ही सुदूर पूर्व में और, शायद, मध्य एशिया में आयोजित किया जाएगा। यह संभावना नहीं है कि हमारी सेना रेगिस्तान में या पहाड़ों में बड़े पैमाने पर लड़ाई का आयोजन करेगी, और इन थिएटरों में किर्ज़ैक ने एक बार फिर से बूट पर अपना फायदा साबित किया है।
इसके अलावा, जूते को गर्मियों और सर्दियों में अछूता की आवश्यकता होती है, जबकि एक किर्ज़ैक शीतकालीन जूते भी हो सकता है, यदि आप जूते को बड़े आकार के, हवा के मोटे पैरों के जूते लेते हैं। तकनीकी रूप से, यह जूते के उत्पादन और कृत्रिम ऊन की खपत में कमी के लिए एक महत्वपूर्ण राहत है, जिसका उपयोग अभी भी कपड़े बनाने के लिए किया जाता है।
एक बड़े युद्ध में, ऑटोमोबिलाइजेशन का एक कारक भी होगा, जो इसके पैमाने में द्वितीय विश्व युद्ध के ऑटोमोबिलाइजेशन से अधिक है। मुझे लगता है कि न केवल सेना में, बल्कि अर्थव्यवस्था में भी, और साथ ही सेना के हितों में परिवहन के लिए, दसियों लाख कारें जुटाई जाएंगी। अब यह बहुत संभव हो गया है।
लेकिन साथ ही, द्वितीय विश्व युद्ध का अनुभव और कुछ आधुनिक उदाहरण, जैसे कि लंबे समय से पीड़ित मार्ग नेवर-याकुतस्क, बताते हैं कि बड़े पैमाने पर पहिएदार और ट्रैक किए गए वाहनों का मार्ग लगभग किसी भी सड़क को गंदगी के एक झटके में बदल देता है, जिसमें एटीवी भी डूब जाते हैं। जूते में ऐसी सड़कों पर विशेष रूप से कुछ नहीं है और आप गुजरेंगे, हमें जूते की जरूरत है, कम से कम तिरपाल। ऐसे मामले जिनमें गंदे कीचड़ में फंसे सैनिक पिछले महान युद्ध में असामान्य नहीं थे, और निश्चित रूप से भविष्य के बड़े युद्ध में असामान्य नहीं होंगे।
अंत में, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कोई भी बड़ा युद्ध कई भारी काम के प्रदर्शन के साथ निकटता से जुड़ा हुआ हैः सैपर, निर्माण, सड़क, जो दोनों सेनाओं और नागरिक संगठनों या अर्धसैनिक संरचनाओं, जैसे कि काम करने वाली बटालियनों द्वारा उत्पादित किए जाते हैं। भारी काम के लिए, जूते की आवश्यकता होती है, और एक kirzach से बेहतर कुछ भी नहीं है, खासकर आयातित जूते की अनुपस्थिति में।
यह एक संभावित बड़े युद्ध का विश्लेषण हैः kirzacs में चुनाव। केवल इस प्रकार के जूते इस संभावित बड़े युद्ध के सबसे संभावित सिनेमाघरों की स्थितियों के लिए, सेना के लिए उपयुक्त, काम करने वाली बटालियनों के लिए और आबादी के व्यापक क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं। जैसे ही एक बड़ा युद्ध होगा, एक kirzach के लिए एक बड़े पैमाने पर संक्रमण अपरिहार्य होगा।
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इसी समय, यह एक ही बार में कहा जाना चाहिए कि यह प्रश्न भविष्य के युद्ध की प्रकृति, पैमाने और अवधि पर महत्वपूर्ण रूप से निर्भर करता है। क्या यह छोटा और स्थानीय होगा, या कई लाख सेनाओं को शामिल करने वाला एक प्रचलित विश्व नरसंहार होगा, यह सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि सेना में किस प्रकार के जूते होंगे। युद्ध के लिए, अपेक्षाकृत छोटा और स्थानीय है, सिद्धांत रूप में, कोई अंतर नहीं है कि विरोधी दलों द्वारा किस प्रकार के जूते का उपयोग किया जाता है। सैन्य-आर्थिक अर्थों में, स्थानीय युद्ध के लिए सैनिकों को लैस करना उन जूतों का उपयोग करता है जो उपलब्ध हैं, या जो प्राप्त किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, इंडोचाइना युद्ध में, अमेरिकी सेना को बाल्टी के साथ ढाल दिया गया था, और उन्हें सहयोगियों - दक्षिण वियतनाम की सेनाओं और लोनोल कम्पुचिया की आपूर्ति की गई थी। उनके विरोधीः उत्तरी वियतनामी सेना और खमेर रूज ज्यादातर चप्पल में लड़े, और केवल युद्ध के अंत में, ट्रॉफियों को पकड़कर, अमेरिकी जूते पहनना शुरू कर दिया। फिर, पहले से ही आपस में भिड़ते हुए, वियतनामी और लाल खमर्स ने अमेरिकी जूते पहने और फिर से रबर की चप्पल पर स्विच किया। केवल खमेर रूज के खिलाफ कंबोडिया में एक लंबे युद्ध के अंत में, वियतनामी सेना के पास सैन्य जूतों की एक दिलचस्प नज़र थी, "सैन्य स्नीकर्स," कैनवास स्नीकर्स जैसे लेसिंग, जिनमें से एकमात्र रबर वुल्फाइस्ड कोटिंग से बनाया गया था। जाहिर है स्थानीय, वियतनामी उत्पादन। स्थानीय युद्धों में, चार-पाँच हज़ार से दो सौ-दो सौ पचास हज़ार लोगों तक, अपेक्षाकृत छोटे दल शामिल हैं। अफगानिस्तान में युद्ध की तरह छोटे और सुस्त युद्ध, आमतौर पर हर तरफ बीस-तीस हजारों लोग शामिल होते हैं। बड़े क्षेत्रीय युद्ध, जैसे यूगोस्लाविया में युद्ध या सीरिया में युद्ध, प्रत्येक पक्ष के हजारों लोगों में दो सौ के बारे में शामिल हैं। यह संभावना नहीं है कि प्रत्येक मामले में सटीक आंकड़े स्थापित करना संभव होगा, लेकिन यहां विशेष सटीकता की आवश्यकता नहीं है, और संख्याओं का क्रम महत्वपूर्ण है। इसलिए, एक छोटे से स्थानीय युद्ध में औसत आकस्मिक साठ प्रति वर्ष हजारों जोड़े जूते पहनेंगे , और एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में एक औसत टुकड़ी बाहर पहन लेगी। चार सौ हजार जोड़ी जूते। यह दुनिया में जूता उत्पादन के पैमाने की तुलना में बहुत कम है। दो हज़ार सोलह में, बाईस अरबों जूते का उत्पादन किया गया । इस राशि में से, चीन में दो,सात बिलियन को ध्वस्त कर दिया गया, US में एक,नौ बिलियन , भारत में एक,छः बिलियन और यूरोपीय संघ में एक,छः बिलियन। यह स्पष्ट रूप से देखा जाता है कि, ऐसी क्षमताओं के साथ, स्थानीय और क्षेत्रीय संघर्षों में शामिल शॉड सेनाएं विशेष रूप से मुश्किल नहीं हैं। औसत जूता कारखाना दो-तीन मिलियन जोड़ी जूते प्रति वर्ष तक उत्पादन करने में सक्षम है। जूता कारखाने अक्सर खरीदार की आवश्यकताओं के अनुसार पचास-एक सौ जोड़े के हजारों के लिए बहुत सारे अनुबंध करते हैं। चीन, भारत और पाकिस्तान में, छोटे बैचों में और नकदी में छोटे, अर्द्ध-हस्तकला उत्पादन बहुत अच्छी तरह से विकसित है। इसलिए, स्थानीय युद्धों के प्रतिभागियों को जूते की आपूर्ति करने की व्यापक संभावनाएं हैं। जूतों की वित्तीय संभावनाओं के आधार पर आप सस्ते और सरल और महंगे दोनों तरह के ऑर्डर दे सकते हैं। जब चुनने के लिए बहुत कुछ होता है, तो, निश्चित रूप से, पहली जगह में व्यक्तिगत रूप से आरामदायक जूते, साथ ही साथ अधिक फैशनेबल जूते होंगे। बेशक, फैशन का सैन्य उपकरणों पर प्रभाव पड़ता है, जैसा कि लेख के पहले भाग में चर्चा की गई है। एक स्थानीय युद्ध में युद्धरत दलों के लिए, सैन्य फैशन की उपेक्षा करना बहुत खतरनाक है, क्योंकि "अप्रयुक्त" सेना अपनी प्रतिष्ठा खो सकती है, समर्थन खो सकती है और लंबे समय में हार का सामना कर सकती है। ऐसा लगता है कि यह अंतिम विचार नहीं है, जिसके साथ विभिन्न स्थानीय युद्धों में सेना और सेना के जूते या जूते पहनते हैं। इतना क्रूर, इतना सख्त, और इतना पर। लेकिन फिर भी, मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि भविष्य में हम छोटे और स्थानीय संघर्षों की एक श्रृंखला की प्रतीक्षा नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक बड़े युद्ध, वैश्विक स्तर पर, जिसमें प्रमुख सैन्य शक्तियां शामिल होंगी, निश्चित रूप से, रूस। इसके कई कारण हैं, लेकिन मैं उन्हें अब विस्तार से नहीं बताऊंगा ताकि अंतरिक्ष पर कब्जा न हो। मैं केवल एक थीसिस का हवाला दूंगा, न कि बहुत सारे सबूत जैसे कि प्रॉपर्टीज। छोटे युद्धों के जंजीरों, एक तरह से या किसी अन्य, ने एक बड़े विश्व युद्ध का नेतृत्व किया। युद्ध तीव्र विरोधाभासों का परिणाम है, और मामूली झड़पें हमेशा इन विरोधाभासों को हल नहीं कर सकती हैं। किसी भी बड़े युद्ध, जैसा कि प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के उदाहरण से देखा जा सकता है, अनिवार्य रूप से निम्नलिखित आर्थिक परिणामों की ओर जाता है। सबसे पहले, घरेलू उत्पादन में पूर्ण गिरावट। दूसरे, विदेशी व्यापार में तेज कमी, लगभग पूर्ण समाप्ति के बिंदु तक । कटौती के अलावा, विदेशी व्यापार खंडित है, अर्थात, दुश्मन के साथ व्यापार संबंध पूरी तरह से टूट गए हैं। इन दो कारकों से माल की कमी और आबादी की हानि होती है, दोनों युद्धरत और तटस्थ देशों में। युद्ध की स्थितियों में रूस के लिए, यह सबसे अधिक संभावना है कि जूते के आयात में तेज कमी आएगी। अब, तीन सौ मिलियन जोड़े की सालाना खपत के क्रम में, केवल पचास-अस्सी मिलियन जोड़े का उत्पादन घरेलू रूप से किया जाता है । चीन - संभावित बड़े युद्ध में मुख्य प्रतिभागियों में से एक - निश्चित रूप से, कच्चे माल को आयात किए बिना पहली बात है। नौसेना की नाकाबंदी चीन के खिलाफ शत्रुता की स्थिति में सभी प्रसिद्ध अमेरिकी योजनाओं में पहला आइटम है। एक युद्ध में, चीन को न केवल अपनी अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सैन्य उत्पादन में स्थानांतरित करना होगा, बल्कि जूते सहित माल के निर्यात को भी कम करना होगा। बड़े युद्ध के लिए, अब हम विभिन्न परिदृश्यों की पेशकश कर सकते हैं , हालांकि, सामान्य स्थिति, ऐसा लगता है, रूस बिना जूते के रहेगा और युद्ध शुरू होने के बाद छह महीनों में कहीं न कहीं, नागरिक क्षेत्र के लिए जूते की तीव्र और बेहद असहनीय कमी होगी। हमारे पास अधिक या कम स्थापित सैन्य जूते का उत्पादन है, और हमें यह मान लेना चाहिए कि इसके पास एक साल या डेढ़ साल के युद्ध के लिए आरक्षित रखने के लिए है, और कुछ जुटाना भी होना चाहिए। लेकिन जनसंख्या किसी भी चीज़ में नहीं जाएगी! यह सिर्फ एक जर्सी बूट है - यह सिर्फ नागरिक जूते की इस तीव्र कमी का समाधान है। बेशक, एक वर्ष में किर्जाच के एक्सएनएक्सएक्स मिलियन जोड़े के आदेश के उत्पादन को प्राप्त करना बहुत मुश्किल काम है, लेकिन यह आवश्यक हो सकता है। आबादी को युद्ध के लिए काम करना चाहिए, और जूते के बिना काम करना मुश्किल है। अगला। सबसे अधिक संभावना है, सैन्य अभियान यूक्रेन के बाल्टिक राज्यों में, उत्तरी काकेशस में, साथ ही सुदूर पूर्व में और, शायद, मध्य एशिया में आयोजित किया जाएगा। यह संभावना नहीं है कि हमारी सेना रेगिस्तान में या पहाड़ों में बड़े पैमाने पर लड़ाई का आयोजन करेगी, और इन थिएटरों में किर्ज़ैक ने एक बार फिर से बूट पर अपना फायदा साबित किया है। इसके अलावा, जूते को गर्मियों और सर्दियों में अछूता की आवश्यकता होती है, जबकि एक किर्ज़ैक शीतकालीन जूते भी हो सकता है, यदि आप जूते को बड़े आकार के, हवा के मोटे पैरों के जूते लेते हैं। तकनीकी रूप से, यह जूते के उत्पादन और कृत्रिम ऊन की खपत में कमी के लिए एक महत्वपूर्ण राहत है, जिसका उपयोग अभी भी कपड़े बनाने के लिए किया जाता है। एक बड़े युद्ध में, ऑटोमोबिलाइजेशन का एक कारक भी होगा, जो इसके पैमाने में द्वितीय विश्व युद्ध के ऑटोमोबिलाइजेशन से अधिक है। मुझे लगता है कि न केवल सेना में, बल्कि अर्थव्यवस्था में भी, और साथ ही सेना के हितों में परिवहन के लिए, दसियों लाख कारें जुटाई जाएंगी। अब यह बहुत संभव हो गया है। लेकिन साथ ही, द्वितीय विश्व युद्ध का अनुभव और कुछ आधुनिक उदाहरण, जैसे कि लंबे समय से पीड़ित मार्ग नेवर-याकुतस्क, बताते हैं कि बड़े पैमाने पर पहिएदार और ट्रैक किए गए वाहनों का मार्ग लगभग किसी भी सड़क को गंदगी के एक झटके में बदल देता है, जिसमें एटीवी भी डूब जाते हैं। जूते में ऐसी सड़कों पर विशेष रूप से कुछ नहीं है और आप गुजरेंगे, हमें जूते की जरूरत है, कम से कम तिरपाल। ऐसे मामले जिनमें गंदे कीचड़ में फंसे सैनिक पिछले महान युद्ध में असामान्य नहीं थे, और निश्चित रूप से भविष्य के बड़े युद्ध में असामान्य नहीं होंगे। अंत में, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कोई भी बड़ा युद्ध कई भारी काम के प्रदर्शन के साथ निकटता से जुड़ा हुआ हैः सैपर, निर्माण, सड़क, जो दोनों सेनाओं और नागरिक संगठनों या अर्धसैनिक संरचनाओं, जैसे कि काम करने वाली बटालियनों द्वारा उत्पादित किए जाते हैं। भारी काम के लिए, जूते की आवश्यकता होती है, और एक kirzach से बेहतर कुछ भी नहीं है, खासकर आयातित जूते की अनुपस्थिति में। यह एक संभावित बड़े युद्ध का विश्लेषण हैः kirzacs में चुनाव। केवल इस प्रकार के जूते इस संभावित बड़े युद्ध के सबसे संभावित सिनेमाघरों की स्थितियों के लिए, सेना के लिए उपयुक्त, काम करने वाली बटालियनों के लिए और आबादी के व्यापक क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं। जैसे ही एक बड़ा युद्ध होगा, एक kirzach के लिए एक बड़े पैमाने पर संक्रमण अपरिहार्य होगा।
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अगर आप आशियाना खरीदने की सोच रहे हैं तो आपको थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। रीयल एस्टेट के काम में इस्पात और सीमेंट जैसी बुनियादी चीजों के दाम आसमान छूने से इस क्षेत्र की कंपनियां कीमत बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।
रीयल एस्टेट कंपनियां इस समय पसोपेश के माहौल में हैं। एक ओर तो इस समय घरों की मांग में तेजी आई हुई है वहीं दूसरी तरफ बुनियादी चीजों के दामों में भारी उछाल आने की वजह से भवन निर्माता कंपनियों को कीमतों में इजाफा करना ही पड़ेगा।
बजट में वित्त मंत्री ने बल्क सीमेंट पर उत्पाद शुल्क को भी बढ़ा दिया है। इसके बाद से सीमेंट की कीमतों का बढ़ना तय था।
बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में इस उद्योग के ज्यादातर खिलाड़ियों का यही मानना है कि आने वाले दिनों में निर्माण क्षेत्र में लागत में बढाेतरी होनी तय है।
ऐसे में खरीरददारों का गणित भी जरूर बिगड़ेगा। उपल समूह के प्रबंध निदेशक मनीश उपल कहते हैं कि स्टील की कीमतें बढ़ने से निर्माण क्षेत्र में स्वाभाविक रूप से लागत बढ़ जाएगी।
इससे कंपनियों को भी दाम बढ़ाना पड़ेगा। इसमें आवासीय परियोजनाओं की बनिस्बत व्यावसायिक और ढांचागत परियोजनाओं की कीमतों में ज्यादा तेजी आएगी। वैसे अधिकतर कंपनियां कीमतों में इजाफे को तैयार नहीं हैं क्योंकि इस क्षेत्र में प्रतियोगिता बहुत तेज है और कोई भी बाजार की तेजी को मंद नहीं करना चाहता।
ये कंपनियां ग्राहकों की बजाय महंगाई का झटका खुद खाने को तैयार हैं। एपी श्रेष्ठ कॉलोनियर्स के विपणन प्रबंधक पवन खरे कहते हैं कि उत्पाद शुल्क में जो मामूली सी वृद्धि है, उसको कंपनियां खुद झेल सकती हैं।
खरे का यह भी मानना है कि चंडीगढ़ में पहले ही रियल एस्टेट के क्षेत्र मे बहुत कड़ी प्रतिस्पद्र्धा है। ऐसे मे कोई भी दाम बढ़ाने की शायद ही सोचे।
सीएचडी डेवलपर्स लिमिटेड के विपणन और बिक्री प्रबंधक मनोज बिष्ट कहते हैं कि तात्कालिक इजाफे को तो टाला जाएगा लेकिन इससे निर्माताओं को 10 से 15 फीसदी के नुकसान को झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि आगे शुरू होने वाली परियोजनाओं में कीमतें बढ़ाकर कंपनियां घाटे की भरपाई कर सकती हैं। आज नहीं तो कल दाम तो इन कंपनियों को बढ़ाना ही पड़ेगा।
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अगर आप आशियाना खरीदने की सोच रहे हैं तो आपको थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। रीयल एस्टेट के काम में इस्पात और सीमेंट जैसी बुनियादी चीजों के दाम आसमान छूने से इस क्षेत्र की कंपनियां कीमत बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। रीयल एस्टेट कंपनियां इस समय पसोपेश के माहौल में हैं। एक ओर तो इस समय घरों की मांग में तेजी आई हुई है वहीं दूसरी तरफ बुनियादी चीजों के दामों में भारी उछाल आने की वजह से भवन निर्माता कंपनियों को कीमतों में इजाफा करना ही पड़ेगा। बजट में वित्त मंत्री ने बल्क सीमेंट पर उत्पाद शुल्क को भी बढ़ा दिया है। इसके बाद से सीमेंट की कीमतों का बढ़ना तय था। बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में इस उद्योग के ज्यादातर खिलाड़ियों का यही मानना है कि आने वाले दिनों में निर्माण क्षेत्र में लागत में बढाेतरी होनी तय है। ऐसे में खरीरददारों का गणित भी जरूर बिगड़ेगा। उपल समूह के प्रबंध निदेशक मनीश उपल कहते हैं कि स्टील की कीमतें बढ़ने से निर्माण क्षेत्र में स्वाभाविक रूप से लागत बढ़ जाएगी। इससे कंपनियों को भी दाम बढ़ाना पड़ेगा। इसमें आवासीय परियोजनाओं की बनिस्बत व्यावसायिक और ढांचागत परियोजनाओं की कीमतों में ज्यादा तेजी आएगी। वैसे अधिकतर कंपनियां कीमतों में इजाफे को तैयार नहीं हैं क्योंकि इस क्षेत्र में प्रतियोगिता बहुत तेज है और कोई भी बाजार की तेजी को मंद नहीं करना चाहता। ये कंपनियां ग्राहकों की बजाय महंगाई का झटका खुद खाने को तैयार हैं। एपी श्रेष्ठ कॉलोनियर्स के विपणन प्रबंधक पवन खरे कहते हैं कि उत्पाद शुल्क में जो मामूली सी वृद्धि है, उसको कंपनियां खुद झेल सकती हैं। खरे का यह भी मानना है कि चंडीगढ़ में पहले ही रियल एस्टेट के क्षेत्र मे बहुत कड़ी प्रतिस्पद्र्धा है। ऐसे मे कोई भी दाम बढ़ाने की शायद ही सोचे। सीएचडी डेवलपर्स लिमिटेड के विपणन और बिक्री प्रबंधक मनोज बिष्ट कहते हैं कि तात्कालिक इजाफे को तो टाला जाएगा लेकिन इससे निर्माताओं को दस से पंद्रह फीसदी के नुकसान को झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आगे शुरू होने वाली परियोजनाओं में कीमतें बढ़ाकर कंपनियां घाटे की भरपाई कर सकती हैं। आज नहीं तो कल दाम तो इन कंपनियों को बढ़ाना ही पड़ेगा।
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जून 24 और 27 के बीच वियना में संपर्क केंद्र विश्व प्रतियोगिता में Renault MAIS को 4 अवार्ड मिला।
संपर्क केंद्र विश्व प्रतियोगिता भविष्य के ग्राहक अनुभव के मुख्य दर्शन के ढांचे के भीतर आयोजित की जाती है। रेनॉल्ट MAIS ने 4 श्रेणी में प्रतियोगिता में भाग लिया और यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका के फाइनल में 4 से सम्मानित किया गया।
Renault MA ,S, 3 स्वर्ण और 1 रजत श्रेणी में डायलॉग में प्रदान की गई सेवाओं के साथ 4 पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
Renault MA RenaS A.Ş की सेवाओं में सर्वश्रेष्ठ ग्राहक सेवा, सर्वश्रेष्ठ सामाजिक मीडिया प्रबंधन और सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी / नवाचार की श्रेणियों में एक्सएनयूएमएक्स स्वर्ण पदक शामिल हैं; उन्हें सर्वश्रेष्ठ संचार केंद्र (मध्यम) श्रेणी में रजत पदक से सम्मानित किया गया।
प्रतियोगिता का विश्व फाइनल दिसंबर में एशिया प्रशांत और अमेरिका के फाइनल के बाद बार्सिलोना में होगा।
ग्राहक संतुष्टि के ओईएके के दृष्टिकोण के अनुरूप, रेनॉल्ट एमएİएस ने डिजिटल परिवर्तन के लिए बहुत महत्व दिया है कि उसने 2,5 साल पहले नींव रखी थी। इस दिशा में, यह अपने ग्राहकों को एक व्यक्तिगत, आसान और अनोखा अनुभव प्रदान करता है, जिसमें वॉइस सेवाओं से लेकर सामाजिक और डिजिटल चैनलों तक, Diyalog प्लेटफॉर्म शामिल है। डायलॉग कम्युनिकेशन लाइन, दुर्घटना और खराबी जैसी स्थितियों में तत्काल हस्तक्षेप सेवाएं प्रदान करते हुए, Renault Yardım अपनी सोशल मीडिया और डिजिटल चैनल टीम के साथ-साथ Renault लिस्टिंग के साथ निर्बाध सेवा प्रदान करता है, जहां सभी अनुप्रयोगों और अनुरोधों का मूल्यांकन किया जाता है, और गुणवत्ता और संतुष्टि नियंत्रण खोजों।
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जून चौबीस और सत्ताईस के बीच वियना में संपर्क केंद्र विश्व प्रतियोगिता में Renault MAIS को चार अवार्ड मिला। संपर्क केंद्र विश्व प्रतियोगिता भविष्य के ग्राहक अनुभव के मुख्य दर्शन के ढांचे के भीतर आयोजित की जाती है। रेनॉल्ट MAIS ने चार श्रेणी में प्रतियोगिता में भाग लिया और यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका के फाइनल में चार से सम्मानित किया गया। Renault MA ,S, तीन स्वर्ण और एक रजत श्रेणी में डायलॉग में प्रदान की गई सेवाओं के साथ चार पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। Renault MA RenaS A.Ş की सेवाओं में सर्वश्रेष्ठ ग्राहक सेवा, सर्वश्रेष्ठ सामाजिक मीडिया प्रबंधन और सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी / नवाचार की श्रेणियों में एक्सएनयूएमएक्स स्वर्ण पदक शामिल हैं; उन्हें सर्वश्रेष्ठ संचार केंद्र श्रेणी में रजत पदक से सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता का विश्व फाइनल दिसंबर में एशिया प्रशांत और अमेरिका के फाइनल के बाद बार्सिलोना में होगा। ग्राहक संतुष्टि के ओईएके के दृष्टिकोण के अनुरूप, रेनॉल्ट एमएİएस ने डिजिटल परिवर्तन के लिए बहुत महत्व दिया है कि उसने दो,पाँच साल पहले नींव रखी थी। इस दिशा में, यह अपने ग्राहकों को एक व्यक्तिगत, आसान और अनोखा अनुभव प्रदान करता है, जिसमें वॉइस सेवाओं से लेकर सामाजिक और डिजिटल चैनलों तक, Diyalog प्लेटफॉर्म शामिल है। डायलॉग कम्युनिकेशन लाइन, दुर्घटना और खराबी जैसी स्थितियों में तत्काल हस्तक्षेप सेवाएं प्रदान करते हुए, Renault Yardım अपनी सोशल मीडिया और डिजिटल चैनल टीम के साथ-साथ Renault लिस्टिंग के साथ निर्बाध सेवा प्रदान करता है, जहां सभी अनुप्रयोगों और अनुरोधों का मूल्यांकन किया जाता है, और गुणवत्ता और संतुष्टि नियंत्रण खोजों।
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बॉलीवुडः पोर्न इंडस्ट्री की सबसे मशहूर मॉडल मिया खलीफा ने हाल ही में एक बार फिर अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने पति रोबर्ट सैंडबर्ग की एक फोटो शेयर की है, जिसमें दोनों साथ-साथ बेड पर लेटे हुए नज़र आ रहे हैं. वायरल हो रही तस्वीर में मिया रेड एंड ब्लैक कलर की बिकिनी में काफी सेक्सी नजर आ रही हैं. वहीं उनके बॉयफ्रेंड रोबर्ट सैंडबर्ग वाइट कलर के शर्ट और ब्लैक पैंट में नजर आ रहे हैं. फोटो को उनके तमाम फैन्स द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है. इसके साथ ही फोटो पर अब तक काफी संख्या में लाइक और कमेंट्स आच चुके हैं.
मिया खलीफा ने जो फोटो शेयर की है इसमें मिया और रोबर्ट दोनों ही कुछ खाते दिखाई दे रहें हैं. इसके साथ-साथ मिया ने कैप्शन भी लिखा है की जब वो कहता है कि वो नहीं खाएगा और वो आपके खाने का आधा हिस्सा खा जाए. मिया खलीफा अक्सर ही अपने बॉयफ्रेंड रोबर्ट के साथ अपनी हॉट एंड सेक्सी अंदाज में फोटो और वीडियो शेयर करती रहती हैं. इससे पहले भी मिया खलीफा ने अपने बॉयफ्रेंड रोबर्ट के साथ एक फोटो शेयर की थी, जिसमें रोबर्ट ने उनकी फोटो वाली टी शर्ट पहनी हुई थी और मिया मिरर में देखकर सेल्फी ले रही थी.
वहीं कुछ समय पहले मिया खलीफा ने अपनी बेहद सेक्सी फोटो शेयर की थी, जिसमें मिया ट्रांसपेरेंट बिकिनी पहने हुए नजर आ रही हैं. इसके साथ ही फोटो में मिया खलीफा सेमी न्यूड नजर आ रही हैं. मिया खलीफा के इस फोटो को करीब 17 लाख लोगों ने लाइक किया है, जबकि हजारों फैन्स ने फोटो पर नॉटी कमेंट्स किए हैं. इसके साथ ही मिया खलीफा के सेक्सी फोटोशूट की वीडियो भी सोशल मीडिया पर तहलका मचा चुकी है.
इसके साथ ही बता दें कि मिया खलीफा ने अपने करियर की शुरुआत बतौर मॉडल शुरु की थी. उसके कुछ समय बाद जब उन्हें पोर्न फिल्मों का ऑफर आया, जिसके बाद वो कुछ ही दिनों में पोर्न की दुनिया की स्टार बन गईं. इसी दौरान मिया विवादों में भी आ गई थीं, जब उन्होंने मुस्लिम हिजाब पहनकर एक पोर्न फिल्म में काम किया था. उस दौरान आतंकी संगठनों ने मिया खलीफा को जान से मारने की भी धमकी दी थी.
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बॉलीवुडः पोर्न इंडस्ट्री की सबसे मशहूर मॉडल मिया खलीफा ने हाल ही में एक बार फिर अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने पति रोबर्ट सैंडबर्ग की एक फोटो शेयर की है, जिसमें दोनों साथ-साथ बेड पर लेटे हुए नज़र आ रहे हैं. वायरल हो रही तस्वीर में मिया रेड एंड ब्लैक कलर की बिकिनी में काफी सेक्सी नजर आ रही हैं. वहीं उनके बॉयफ्रेंड रोबर्ट सैंडबर्ग वाइट कलर के शर्ट और ब्लैक पैंट में नजर आ रहे हैं. फोटो को उनके तमाम फैन्स द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है. इसके साथ ही फोटो पर अब तक काफी संख्या में लाइक और कमेंट्स आच चुके हैं. मिया खलीफा ने जो फोटो शेयर की है इसमें मिया और रोबर्ट दोनों ही कुछ खाते दिखाई दे रहें हैं. इसके साथ-साथ मिया ने कैप्शन भी लिखा है की जब वो कहता है कि वो नहीं खाएगा और वो आपके खाने का आधा हिस्सा खा जाए. मिया खलीफा अक्सर ही अपने बॉयफ्रेंड रोबर्ट के साथ अपनी हॉट एंड सेक्सी अंदाज में फोटो और वीडियो शेयर करती रहती हैं. इससे पहले भी मिया खलीफा ने अपने बॉयफ्रेंड रोबर्ट के साथ एक फोटो शेयर की थी, जिसमें रोबर्ट ने उनकी फोटो वाली टी शर्ट पहनी हुई थी और मिया मिरर में देखकर सेल्फी ले रही थी. वहीं कुछ समय पहले मिया खलीफा ने अपनी बेहद सेक्सी फोटो शेयर की थी, जिसमें मिया ट्रांसपेरेंट बिकिनी पहने हुए नजर आ रही हैं. इसके साथ ही फोटो में मिया खलीफा सेमी न्यूड नजर आ रही हैं. मिया खलीफा के इस फोटो को करीब सत्रह लाख लोगों ने लाइक किया है, जबकि हजारों फैन्स ने फोटो पर नॉटी कमेंट्स किए हैं. इसके साथ ही मिया खलीफा के सेक्सी फोटोशूट की वीडियो भी सोशल मीडिया पर तहलका मचा चुकी है. इसके साथ ही बता दें कि मिया खलीफा ने अपने करियर की शुरुआत बतौर मॉडल शुरु की थी. उसके कुछ समय बाद जब उन्हें पोर्न फिल्मों का ऑफर आया, जिसके बाद वो कुछ ही दिनों में पोर्न की दुनिया की स्टार बन गईं. इसी दौरान मिया विवादों में भी आ गई थीं, जब उन्होंने मुस्लिम हिजाब पहनकर एक पोर्न फिल्म में काम किया था. उस दौरान आतंकी संगठनों ने मिया खलीफा को जान से मारने की भी धमकी दी थी.
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अमरीकी मतदाता घंटों क़तारों में खड़े होकर वोट डाल रहे हैं. पूर्वी तटीय राज्यों में वोटिंग का काम पूरा हो चुका है.
राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने टेक्सास में अपना वोट डाला, जबकि जॉन केरी ने बोस्टन में मतदान किया.
जनमत सर्वेक्षणों ने जॉर्ज बुश और जॉन केरी के बीच कांटे की टक्कर का संकेत दिया है.
विश्लेषकों ने पिछले चालीस वर्षों में सबसे ज़्यादा मतदान की भविष्यवाणी की है.
इस बार दोनों उम्मीदवार परंपरा तोड़ कर मतदान के दिन भी प्रचार किया. आम तौर पर अमरीका में मतदान के दिन प्रचार नहीं किया जाता है.
राष्ट्रपति बुश ने रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि सभी लोग अपने परिचितों से वोट देने के लिए कहें.
बुश ने उन लोगों से भी अपने पक्ष में मतदान करने की अपील की जिनके बारे में कहा जाता है कि वो डेमोक्रेट है पर डेमोक्रेट पार्टी की नीतियों से खुश नहीं.
दूसरी तरफ जॉन कैरी ने कहा कि अब समय आ गया है कि जॉर्ज बुश को आर्थिक समस्याओ और विश्व भर में अमरीका के घटते प्रभाव के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाए.
दोनों ही नेताओं की आवाज़ अत्यधिक चुनाव प्रचार के कारण भर्रा गई हैं लेकिन वो कोई रिस्क लेना नहीं चाह रहे हैं.
सोमवार को बुश छह राज्यों में सात स्थानों पर गए. कई बार तो ऐसा हुआ कि हवाई अड्डों पर दोनों उम्मीदवार एक दूसरे से थोड़ी दूर पर ही रहते थे.
दोनों उम्मीवारों ने अंतिम समय में अपनी सारी शक्ति उन राज्यों में झोंक दी जहाँ जीत-हार का अंतर काफ़ी कम रहने की उम्मीद है.
राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने सोमवार को अपने दिन की शुरुआत ओहालो, पेंसिलवेनिया, विस्कोंसिन, आयोवा और न्यू मैक्सिको में रैली से की.
जबकि जॉन कैरी ने फ़्लोरिडा, विस्कोंसिन, मिशिगन और ओहायो में जम पर चुनाव प्रचार किया.
ताज़ा जनमत सर्वेक्षणों में बताया गया है कि दोनों उम्मीदवारों में कड़ी टक्कर की संभावना है और चुनाव प्रचार के आख़िरी दिन उम्मीदवारों ने मतदाताओं को रिझाने की अपनी ओर से हरसंभव कोशिश की.
हार-जीत की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाने वाले ओहायो के दो जजों ने अपने एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में कहा है कि राजनीतिक दलों के पर्यवेक्षकों को मंगलवार के मतदान के दौरान मतदाताओं की योग्यता को चुनौती देने की अनुमति शायद न दी जाए.
एक अफ़्रीकी-अमरीकी ने यह मामला अदालत में दर्ज किया था और अपने तर्क में कहा था कि जॉर्ज बुश की रिपब्लिकन पार्टी राज्य के काले बहुल इलाक़े में ऐसे पर्यवेक्षकों की तैनाती की योजना बना रही है जो लोगों को डराने की तरह है.
रिपब्लिकन पार्टी का कहना है कि उन्होंने मतदाताओं की योग्यता पर सवाल उठाने की अनुमति होनी चाहिए ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके. पार्टी ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील भी की है.
जानकारों का कहना है कि ओहायो अमरीकी राष्ट्रपति के चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है.
कम अंतर से भी मिली जीत विजेता को राज्य के सभी 20 इलेक्टॉरल कॉलेज का मत दिला सकती है.
1964 से ही इस राज्य से विजयी उम्मीदवार हमेशा राष्ट्रपति पद तक पहुँचा है. रिपब्लिकन पार्टी का तो कोई भी उम्मीदवार इस राज्य को जीते बिना व्हाइट हाउस नहीं पहुँच पाया है.
राष्ट्रपति बुश ने चुनाव प्रचार के आख़िरी दिन की शुरुआत इसी राज्य से की. विलमिंगटन में लोगों को संबोधित करते हुए बुश ने कहा, "हमें मिलने वाले एक भी मत सुरक्षित अमरीका, मज़बूत अमरीका और बेहतर अमरीका के लिए होगा. "
पेंसिलवेनिया के पिट्सबर्ग में राष्ट्रपति बुश ने कहा कि उन्हें जीत दिखाई दे रही है. मिलवाउकी में उन्होंने हरेक नागरिक के लिए एक ऐसे अमरीका का वादा किया जो बेहतर और आशावादी देश होगा.
दूसरी ओर सीनेटर जॉन केरी ने अपने दिन की शुरुआत फ़्लोरिडा से की. वर्ष 2000 में इसी राज्य के नतीजे को लेकर विवाद उठा था और बाद में बहुत कम अंतर से बुश को विजयी घोषित किया गया था.
डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार केरी ने अपने समर्थकों से कहा कि अब समय आ गया है कि वे अपने काम को सही तरीक़े से अंज़ाम दें.
पिछली बार के विवाद को देखते हुए इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी अपनी ओर से यहाँ कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती.
पार्टी ने हज़ारों कार्यकर्ताओं के अलावा फ़्लोरिडा में दो हज़ार वकीलों को भी मतदान की निगरानी के लिए तैनात किया है.
हमारे संवाददाता का कहना है कि दोनों उम्मीदवारों का चुनाव प्रचार काफ़ी ख़र्चीला रहा है. उत्साह से भरे चुनाव प्रचार में उम्मीदवारों ने कभी-कभी आक्रमक रवैया भी अपनाया तो कभी नकारात्मक प्रचार भी देखा गया.
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अमरीकी मतदाता घंटों क़तारों में खड़े होकर वोट डाल रहे हैं. पूर्वी तटीय राज्यों में वोटिंग का काम पूरा हो चुका है. राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने टेक्सास में अपना वोट डाला, जबकि जॉन केरी ने बोस्टन में मतदान किया. जनमत सर्वेक्षणों ने जॉर्ज बुश और जॉन केरी के बीच कांटे की टक्कर का संकेत दिया है. विश्लेषकों ने पिछले चालीस वर्षों में सबसे ज़्यादा मतदान की भविष्यवाणी की है. इस बार दोनों उम्मीदवार परंपरा तोड़ कर मतदान के दिन भी प्रचार किया. आम तौर पर अमरीका में मतदान के दिन प्रचार नहीं किया जाता है. राष्ट्रपति बुश ने रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि सभी लोग अपने परिचितों से वोट देने के लिए कहें. बुश ने उन लोगों से भी अपने पक्ष में मतदान करने की अपील की जिनके बारे में कहा जाता है कि वो डेमोक्रेट है पर डेमोक्रेट पार्टी की नीतियों से खुश नहीं. दूसरी तरफ जॉन कैरी ने कहा कि अब समय आ गया है कि जॉर्ज बुश को आर्थिक समस्याओ और विश्व भर में अमरीका के घटते प्रभाव के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाए. दोनों ही नेताओं की आवाज़ अत्यधिक चुनाव प्रचार के कारण भर्रा गई हैं लेकिन वो कोई रिस्क लेना नहीं चाह रहे हैं. सोमवार को बुश छह राज्यों में सात स्थानों पर गए. कई बार तो ऐसा हुआ कि हवाई अड्डों पर दोनों उम्मीदवार एक दूसरे से थोड़ी दूर पर ही रहते थे. दोनों उम्मीवारों ने अंतिम समय में अपनी सारी शक्ति उन राज्यों में झोंक दी जहाँ जीत-हार का अंतर काफ़ी कम रहने की उम्मीद है. राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने सोमवार को अपने दिन की शुरुआत ओहालो, पेंसिलवेनिया, विस्कोंसिन, आयोवा और न्यू मैक्सिको में रैली से की. जबकि जॉन कैरी ने फ़्लोरिडा, विस्कोंसिन, मिशिगन और ओहायो में जम पर चुनाव प्रचार किया. ताज़ा जनमत सर्वेक्षणों में बताया गया है कि दोनों उम्मीदवारों में कड़ी टक्कर की संभावना है और चुनाव प्रचार के आख़िरी दिन उम्मीदवारों ने मतदाताओं को रिझाने की अपनी ओर से हरसंभव कोशिश की. हार-जीत की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाने वाले ओहायो के दो जजों ने अपने एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में कहा है कि राजनीतिक दलों के पर्यवेक्षकों को मंगलवार के मतदान के दौरान मतदाताओं की योग्यता को चुनौती देने की अनुमति शायद न दी जाए. एक अफ़्रीकी-अमरीकी ने यह मामला अदालत में दर्ज किया था और अपने तर्क में कहा था कि जॉर्ज बुश की रिपब्लिकन पार्टी राज्य के काले बहुल इलाक़े में ऐसे पर्यवेक्षकों की तैनाती की योजना बना रही है जो लोगों को डराने की तरह है. रिपब्लिकन पार्टी का कहना है कि उन्होंने मतदाताओं की योग्यता पर सवाल उठाने की अनुमति होनी चाहिए ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके. पार्टी ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील भी की है. जानकारों का कहना है कि ओहायो अमरीकी राष्ट्रपति के चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है. कम अंतर से भी मिली जीत विजेता को राज्य के सभी बीस इलेक्टॉरल कॉलेज का मत दिला सकती है. एक हज़ार नौ सौ चौंसठ से ही इस राज्य से विजयी उम्मीदवार हमेशा राष्ट्रपति पद तक पहुँचा है. रिपब्लिकन पार्टी का तो कोई भी उम्मीदवार इस राज्य को जीते बिना व्हाइट हाउस नहीं पहुँच पाया है. राष्ट्रपति बुश ने चुनाव प्रचार के आख़िरी दिन की शुरुआत इसी राज्य से की. विलमिंगटन में लोगों को संबोधित करते हुए बुश ने कहा, "हमें मिलने वाले एक भी मत सुरक्षित अमरीका, मज़बूत अमरीका और बेहतर अमरीका के लिए होगा. " पेंसिलवेनिया के पिट्सबर्ग में राष्ट्रपति बुश ने कहा कि उन्हें जीत दिखाई दे रही है. मिलवाउकी में उन्होंने हरेक नागरिक के लिए एक ऐसे अमरीका का वादा किया जो बेहतर और आशावादी देश होगा. दूसरी ओर सीनेटर जॉन केरी ने अपने दिन की शुरुआत फ़्लोरिडा से की. वर्ष दो हज़ार में इसी राज्य के नतीजे को लेकर विवाद उठा था और बाद में बहुत कम अंतर से बुश को विजयी घोषित किया गया था. डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार केरी ने अपने समर्थकों से कहा कि अब समय आ गया है कि वे अपने काम को सही तरीक़े से अंज़ाम दें. पिछली बार के विवाद को देखते हुए इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी अपनी ओर से यहाँ कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती. पार्टी ने हज़ारों कार्यकर्ताओं के अलावा फ़्लोरिडा में दो हज़ार वकीलों को भी मतदान की निगरानी के लिए तैनात किया है. हमारे संवाददाता का कहना है कि दोनों उम्मीदवारों का चुनाव प्रचार काफ़ी ख़र्चीला रहा है. उत्साह से भरे चुनाव प्रचार में उम्मीदवारों ने कभी-कभी आक्रमक रवैया भी अपनाया तो कभी नकारात्मक प्रचार भी देखा गया.
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स्टेट डेस्कः कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में 26 अप्रैल को सुनवाई होगी। शुक्रवार को राहुल गांधी की ओर से अपना पक्ष रखने के लिए समय देने का आग्रह किया गया, जिसे जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने स्वीकार कर लिया। साथ ही सुनवाई के लिए 26 अप्रैल की तारीख निर्धारित की गयी। अदालत ने राहुल गांधी को दी गयी पूर्व में राहत की अवधि भी 26 अप्रैल तक बढ़ा दी है।
राहुल गांधी पर मोदी नाम वालों के खिलाफ की गयी अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में रांची की निचली अदालत में अधिवक्ता प्रदीप मोदी ने शिकायतवाद दर्ज करायी है। इस पर संज्ञान लेते हुए निचली अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी करते हुए अदालत में हाजिर होने को कहा था। इसके बाद राहुल गांधी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालत में चल रही कार्यवाही को निरस्त करने का आग्रह किया गया है।
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स्टेट डेस्कः कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में छब्बीस अप्रैल को सुनवाई होगी। शुक्रवार को राहुल गांधी की ओर से अपना पक्ष रखने के लिए समय देने का आग्रह किया गया, जिसे जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने स्वीकार कर लिया। साथ ही सुनवाई के लिए छब्बीस अप्रैल की तारीख निर्धारित की गयी। अदालत ने राहुल गांधी को दी गयी पूर्व में राहत की अवधि भी छब्बीस अप्रैल तक बढ़ा दी है। राहुल गांधी पर मोदी नाम वालों के खिलाफ की गयी अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में रांची की निचली अदालत में अधिवक्ता प्रदीप मोदी ने शिकायतवाद दर्ज करायी है। इस पर संज्ञान लेते हुए निचली अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी करते हुए अदालत में हाजिर होने को कहा था। इसके बाद राहुल गांधी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालत में चल रही कार्यवाही को निरस्त करने का आग्रह किया गया है।
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हों । अक बार मैने जुनकी छोटी पेटी (अटैचीकेस) मेसे कुछ निकाला । असे बन्द करनेकी अक स्प्रिंग कुछ बिगडी हुआ थी । अिसलिये मैंने असे अक तरफसे ही बन्द करके दूसरीको खुला छोड दिया । बा ने देखा, और चुपचाप असे बन्द कर दिया । जब दुबारा असमेसे कुछ निकालनेका मौका आया, तो बा कहने लगींः " ज़रा यहाँ लाओ, मैं बन्द कर दूँ।" मैंने कहा : " मैं करती हूँ।" बा की ऑखे हॅस रही थीं - मानो कहती हों : " कहीं भूल तो न जाओगी ?"
बा की तबियत अच्छी नहीं रहती थी। बरसोंसे खॉसी और दमेके कारण अनका हृदय और फेफडे कमज़ोर पड़ गये थे। लेकिन अनको अपने शरीरकी कोओ परवाह नही थी । अनकी स्फूर्ति अद्भुत थी । धीमे-धीमे काम करना या चलना वे जानती ही न थीं ।
बा सुबह चार बजे प्रार्थनाके लिओ अठनेका आग्रह रखती थीं । प्रार्थनाके बाद बापूजी आधा-पौना घटा फिर सो लेते, मगर बा अनके अठनेसे पहले अनके लिओ नाश्ता तैयार करने या करवानेको चली जातीं । आश्रमवासियोंमे बाजीकी सेवा करनेकी लालसा तो हमेशा रहती ही थी । अिसलिओ बा अकसर अनकी सेवाके कामोंको बॉट दिया करतीं। लेकिन किसीको कोअी काम सौपनेके बाद भी वे खुद सामने खड़ी होकर देखतीं कि सारा काम बराबर हो रहा है या नहीं। सफाओ बरावर रखी जा रही है या नहीं । नाश्ता तैयार करके वे असे बापूजीके कमरेमे ले जातीं और खुद पास बैठकर उन्हें खिलातीं। जिसके बाद वे अिस बातका खयाल रखतीं कि वरतन वरौरा भलीभाँति साफ होते हैं या नहीं। अकसर मैंने देखा है कि किसी लडकीके साफ किये हुझे बरतनोंको वा ने अपने हाथों फिर साफ किया है। उनके बरतन हमेशा चमकते रहते थे ।
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हों । अक बार मैने जुनकी छोटी पेटी मेसे कुछ निकाला । असे बन्द करनेकी अक स्प्रिंग कुछ बिगडी हुआ थी । अिसलिये मैंने असे अक तरफसे ही बन्द करके दूसरीको खुला छोड दिया । बा ने देखा, और चुपचाप असे बन्द कर दिया । जब दुबारा असमेसे कुछ निकालनेका मौका आया, तो बा कहने लगींः " ज़रा यहाँ लाओ, मैं बन्द कर दूँ।" मैंने कहा : " मैं करती हूँ।" बा की ऑखे हॅस रही थीं - मानो कहती हों : " कहीं भूल तो न जाओगी ?" बा की तबियत अच्छी नहीं रहती थी। बरसोंसे खॉसी और दमेके कारण अनका हृदय और फेफडे कमज़ोर पड़ गये थे। लेकिन अनको अपने शरीरकी कोओ परवाह नही थी । अनकी स्फूर्ति अद्भुत थी । धीमे-धीमे काम करना या चलना वे जानती ही न थीं । बा सुबह चार बजे प्रार्थनाके लिओ अठनेका आग्रह रखती थीं । प्रार्थनाके बाद बापूजी आधा-पौना घटा फिर सो लेते, मगर बा अनके अठनेसे पहले अनके लिओ नाश्ता तैयार करने या करवानेको चली जातीं । आश्रमवासियोंमे बाजीकी सेवा करनेकी लालसा तो हमेशा रहती ही थी । अिसलिओ बा अकसर अनकी सेवाके कामोंको बॉट दिया करतीं। लेकिन किसीको कोअी काम सौपनेके बाद भी वे खुद सामने खड़ी होकर देखतीं कि सारा काम बराबर हो रहा है या नहीं। सफाओ बरावर रखी जा रही है या नहीं । नाश्ता तैयार करके वे असे बापूजीके कमरेमे ले जातीं और खुद पास बैठकर उन्हें खिलातीं। जिसके बाद वे अिस बातका खयाल रखतीं कि वरतन वरौरा भलीभाँति साफ होते हैं या नहीं। अकसर मैंने देखा है कि किसी लडकीके साफ किये हुझे बरतनोंको वा ने अपने हाथों फिर साफ किया है। उनके बरतन हमेशा चमकते रहते थे ।
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एर्दोआन ने शुक्रवार को उज्बेकिस्तान के शहर समरकंद में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी.
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने एकबार फिर कश्मीर राग अलापा है. मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया. पाकिस्तान के करीबी एर्दोआन ने महासभा परिचर्चा के दौरान कहा, भारत और पाकिस्तान 75 साल पहले अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता स्थापित करने के बाद भी अब तक एक-दूसरे के बीच शांति और एकजुटता कायम नहीं कर पाए हैं.
राष्ट्रपति एर्दोआन ने पहले भी कई बार कश्मीर के बारे बयान दिया था. भारत की ओर से पुरजोर तरीके से इसका विरोध करते हुए साफ किया था कि ये भारत का आंतरिक मामला है. किसी भी देश को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. एर्दोआन ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. हम कश्मीर में स्थायी शांति और समृद्धि कायम होने की आशा और कामना करते हैं.
एर्दोआन ने शुक्रवार को उज्बेकिस्तान के शहर समरकंद में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी, जिसके बाद उन्होंने यह टिप्पणी की है. समरकंद में हुई मुलाकात के दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को प्रगाढ़ बनाने के तरीकों पर चर्चा की थी.
हाल के वर्षों में, एर्दोआन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्रों में संबोधन के दौरान कश्मीर मुद्दे का उल्लेख किया है, जिससे भारत और तुर्की के बीच संबंधों में तनाव पैदा हुआ है. भारत अतीत में उनकी टिप्पणी को पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दे चुका है. भारत कहता रहा है कि तुर्की को अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करना सीखना चाहिए और इसे अपनी नीतियों में अधिक गहराई से प्रतिबिंबित करना चाहिए.
तर्की बार-बार कश्मीर मामले पर बयान देता रहा है. पाकिस्तान से नजदीकी रखने वाले इस देश को कई बार भारत हिदायत भी दे चुका है. इससे भारत और तुर्की के बीच संबंधों में तनाव पैदा हुआ है. भारत अतीत में एर्दोआन के बयानबाजियों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दे चुका है. भारत कहता रहा है कि तुर्की को अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करना सीखना चाहिए और इसे अपनी नीतियों में अधिक गहराई से प्रतिबिंबित करना चाहिए. पीएम मोदी ने आज तक तुर्की की यात्रा नहीं की है. इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि यहां की सरकार बार-बार उकसाने वाले बयान दे रही है.
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एर्दोआन ने शुक्रवार को उज्बेकिस्तान के शहर समरकंद में हुए शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने एकबार फिर कश्मीर राग अलापा है. मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया. पाकिस्तान के करीबी एर्दोआन ने महासभा परिचर्चा के दौरान कहा, भारत और पाकिस्तान पचहत्तर साल पहले अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता स्थापित करने के बाद भी अब तक एक-दूसरे के बीच शांति और एकजुटता कायम नहीं कर पाए हैं. राष्ट्रपति एर्दोआन ने पहले भी कई बार कश्मीर के बारे बयान दिया था. भारत की ओर से पुरजोर तरीके से इसका विरोध करते हुए साफ किया था कि ये भारत का आंतरिक मामला है. किसी भी देश को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. एर्दोआन ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. हम कश्मीर में स्थायी शांति और समृद्धि कायम होने की आशा और कामना करते हैं. एर्दोआन ने शुक्रवार को उज्बेकिस्तान के शहर समरकंद में हुए शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी, जिसके बाद उन्होंने यह टिप्पणी की है. समरकंद में हुई मुलाकात के दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को प्रगाढ़ बनाने के तरीकों पर चर्चा की थी. हाल के वर्षों में, एर्दोआन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्रों में संबोधन के दौरान कश्मीर मुद्दे का उल्लेख किया है, जिससे भारत और तुर्की के बीच संबंधों में तनाव पैदा हुआ है. भारत अतीत में उनकी टिप्पणी को पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दे चुका है. भारत कहता रहा है कि तुर्की को अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करना सीखना चाहिए और इसे अपनी नीतियों में अधिक गहराई से प्रतिबिंबित करना चाहिए. तर्की बार-बार कश्मीर मामले पर बयान देता रहा है. पाकिस्तान से नजदीकी रखने वाले इस देश को कई बार भारत हिदायत भी दे चुका है. इससे भारत और तुर्की के बीच संबंधों में तनाव पैदा हुआ है. भारत अतीत में एर्दोआन के बयानबाजियों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दे चुका है. भारत कहता रहा है कि तुर्की को अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करना सीखना चाहिए और इसे अपनी नीतियों में अधिक गहराई से प्रतिबिंबित करना चाहिए. पीएम मोदी ने आज तक तुर्की की यात्रा नहीं की है. इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि यहां की सरकार बार-बार उकसाने वाले बयान दे रही है.
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बीबीसी के अनुसार, पुर्तगाल के रोनाल्डो और अर्जेंटीना के मेसी भी अपने करियर में 500 गोल दाग चुके हैं। 36 वर्षीय इब्राहिमोविक 500 गोल करने वाले तीसरे ऐसे फुटबॉल खिलाड़ी हैं जो अभी खेल रहे हैं। एमएलएस के एक मुकाबले में एलए गैलेक्सी के लिए खेलने वाले इब्राहिमोविक ने टोरंटो एफसी के खिलाफ कलात्मक तरीके से गेंद को गोल में डालते हुए यह उपलब्धि हासिल की।
हालांकि, उनके दमदार गोल के बावजूद टोरंटो इस मैच को 5-3 से जीतने में सफल रही। इब्राहिमोविक ने अपने क्लब करियर के 747 मैचों में 438 गोल किए हैं जबकि वे अपने देश के लिए 114 मैचों में 62 गोल दागने में सफल रहे हैं। उन्होंने गैलेक्सी के लिए अभी तक 18 मैचों में 17 गोल किए हैं।
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बीबीसी के अनुसार, पुर्तगाल के रोनाल्डो और अर्जेंटीना के मेसी भी अपने करियर में पाँच सौ गोल दाग चुके हैं। छत्तीस वर्षीय इब्राहिमोविक पाँच सौ गोल करने वाले तीसरे ऐसे फुटबॉल खिलाड़ी हैं जो अभी खेल रहे हैं। एमएलएस के एक मुकाबले में एलए गैलेक्सी के लिए खेलने वाले इब्राहिमोविक ने टोरंटो एफसी के खिलाफ कलात्मक तरीके से गेंद को गोल में डालते हुए यह उपलब्धि हासिल की। हालांकि, उनके दमदार गोल के बावजूद टोरंटो इस मैच को पाँच-तीन से जीतने में सफल रही। इब्राहिमोविक ने अपने क्लब करियर के सात सौ सैंतालीस मैचों में चार सौ अड़तीस गोल किए हैं जबकि वे अपने देश के लिए एक सौ चौदह मैचों में बासठ गोल दागने में सफल रहे हैं। उन्होंने गैलेक्सी के लिए अभी तक अट्ठारह मैचों में सत्रह गोल किए हैं।
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रेलवे ने यात्रियो से अपील की है कि सोमवार तक ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से पटरी पर आएगा। इसलिए इस दौरान किसी को यात्रा करनी हो तो रेलवे के एप से ट्रेनों की लोकेशन पता कर घर से निकलें।
कानुपर के रूरा-अंबियापुर के बीच शुक्रवार सुबह चार बजे मालगाड़ी के 24 डिब्बों के बेपटरी होने से 27 घंटे बंद रहा कानपुर-दिल्ली रेलमार्ग का असर अभी तक ट्रेनों पर पड़ रहा है। रविवार को भी कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर श्रमशक्ति एक्सप्रेस समेत 87 ट्रेनें देरी से आईं और गईं।
ट्रेनें सात घंटे तक लेट रहीं। चार हजार से अधिक यात्रियों ने अपनी यात्रा रद कर टिकट निरस्त करा दिए। जबकि करीब 1100 यात्रियों को दूसरी ट्रेनों से वैकल्पिक यात्रा की सुविधा का लाभ उठाया। रेलवे ने यात्रियो से अपील की है कि सोमवार तक ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से पटरी पर आएगा।
इसलिए इस दौरान किसी को यात्रा करनी हो तो रेलवे के एप से ट्रेनों की लोकेशन पता कर घर से निकलें। टोल फ्री नंबर 139 पर भी कॉल कर जानकारी हासिल की जा सकती है। रविवार को 02819 उड़ीसा संपर्क क्रांति, 01819-1820 बीना एक्सप्रेस, 01811-01812 झांसी इंटरसिटी, 04191-04192 कानपुर सेंट्रल फफूंद इंटरसिटी और 04187-04188 कानपुर टूंडला मेमू एक्सप्रेस ट्रेनें अपने मूल स्टेशनों से नहीं चलेंगी।
इसमें से कुछ ट्रेनें तो सोमवार को कानपुर सेंट्रल आकर जाएंगी। इसके अलावा 02825 भुवनेश्वर नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस सोमवार को चार घंटे विलंब से आकर दिल्ली जाएगी। इसकी वजह यह है कि यह ट्रेन रविवार को भुवनेश्वर से सुबह 10. 35 के स्थान पर दोपहर दो बजे चलेगी। रेलवे अफसरों का कहना है कि सब कुछ ठीकठाक रहा तो सोमवार की रात तक लेट चल रही ट्रेनें समय पर चलने लगेंगी।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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रेलवे ने यात्रियो से अपील की है कि सोमवार तक ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से पटरी पर आएगा। इसलिए इस दौरान किसी को यात्रा करनी हो तो रेलवे के एप से ट्रेनों की लोकेशन पता कर घर से निकलें। कानुपर के रूरा-अंबियापुर के बीच शुक्रवार सुबह चार बजे मालगाड़ी के चौबीस डिब्बों के बेपटरी होने से सत्ताईस घंटाटे बंद रहा कानपुर-दिल्ली रेलमार्ग का असर अभी तक ट्रेनों पर पड़ रहा है। रविवार को भी कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर श्रमशक्ति एक्सप्रेस समेत सत्तासी ट्रेनें देरी से आईं और गईं। ट्रेनें सात घंटे तक लेट रहीं। चार हजार से अधिक यात्रियों ने अपनी यात्रा रद कर टिकट निरस्त करा दिए। जबकि करीब एक हज़ार एक सौ यात्रियों को दूसरी ट्रेनों से वैकल्पिक यात्रा की सुविधा का लाभ उठाया। रेलवे ने यात्रियो से अपील की है कि सोमवार तक ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से पटरी पर आएगा। इसलिए इस दौरान किसी को यात्रा करनी हो तो रेलवे के एप से ट्रेनों की लोकेशन पता कर घर से निकलें। टोल फ्री नंबर एक सौ उनतालीस पर भी कॉल कर जानकारी हासिल की जा सकती है। रविवार को दो हज़ार आठ सौ उन्नीस उड़ीसा संपर्क क्रांति, एक हज़ार आठ सौ उन्नीस-एक हज़ार आठ सौ बीस बीना एक्सप्रेस, एक हज़ार आठ सौ ग्यारह-एक हज़ार आठ सौ बारह झांसी इंटरसिटी, चार हज़ार एक सौ इक्यानवे-चार हज़ार एक सौ बानवे कानपुर सेंट्रल फफूंद इंटरसिटी और चार हज़ार एक सौ सत्तासी-चार हज़ार एक सौ अठासी कानपुर टूंडला मेमू एक्सप्रेस ट्रेनें अपने मूल स्टेशनों से नहीं चलेंगी। इसमें से कुछ ट्रेनें तो सोमवार को कानपुर सेंट्रल आकर जाएंगी। इसके अलावा दो हज़ार आठ सौ पच्चीस भुवनेश्वर नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस सोमवार को चार घंटे विलंब से आकर दिल्ली जाएगी। इसकी वजह यह है कि यह ट्रेन रविवार को भुवनेश्वर से सुबह दस. पैंतीस के स्थान पर दोपहर दो बजे चलेगी। रेलवे अफसरों का कहना है कि सब कुछ ठीकठाक रहा तो सोमवार की रात तक लेट चल रही ट्रेनें समय पर चलने लगेंगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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देशभर में कोरोना की रोकथाम के लिए टीकाकरण अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है, फिलहाल देश में सबसे ज्यादा कोवैक्सीन और कोविशील्ड का टीका लोगों को लगाया जा रहा है। इस बीच ICMR ने का दावा है कि कोविशील्ड पहली ही डोज में तेजी से एंटीबॉडीज बनाने लगती है, यही वजह है कि कोवैक्सीन की बजाय कोविशील्ड की पहली और दूसरी डोज के बीच के 12 हफ्ते तक का गैप बढ़ाया गया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 50 फीसदी लोग मास्क नहीं पहनते, 7 फीसदी लोग ही प्रॉपर मॉस्क पहनते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि एक अध्ययन के मुताबिक, 50 फीसदी लोग अभी भी मास्क नहीं पहनते हैं और 50 प्रतिशत लोग जो मॉस्क पहनते हैं उनमें से 64 फीसदी वैसे हैं जो सिर्फ अपना मुंह ढकते हैं लेकिन नाक नहीं, कुछ लोग गले पर मास्क रखते हैं। 50 प्रतिशत जो मॉस्क पहनते हैं उनमें से सिर्फ 14 प्रतिशत ठीक से मॉस्क पहनते हैं। यानि कि सिर्फ 7 फीसदी लोग ही सही तरीके से मॉस्क पहनते हैं।,25 शहरों में 2000 लोगों पर स्टडी किया गया।
पुणे की एक फार्मा कंपनी Mylab ने एक सेल्फ टेस्टिंग किट लॉन्च की है, जिसके जरिये आप घर बैठे कोरोना की जांच कर सकते हैं और पता लगा सकते हैं कि क्या आप कोरोना पॉजिटिव हैं या नहीं, दरअसल इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR ने कोविड-19 के संदिग्ध मरीजों के लिए देश की पहली सेल्फ-टेस्टिंग किट को मंजूरी दे दी है। मतलब ये कि आब आपको कोरोना टेस्ट कराने के लिए किसी लैब के चक्कर लगाने या फिर रिपोर्ट का इंतेज़ार करने की जरूरत नहीं है।
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देशभर में कोरोना की रोकथाम के लिए टीकाकरण अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है, फिलहाल देश में सबसे ज्यादा कोवैक्सीन और कोविशील्ड का टीका लोगों को लगाया जा रहा है। इस बीच ICMR ने का दावा है कि कोविशील्ड पहली ही डोज में तेजी से एंटीबॉडीज बनाने लगती है, यही वजह है कि कोवैक्सीन की बजाय कोविशील्ड की पहली और दूसरी डोज के बीच के बारह हफ्ते तक का गैप बढ़ाया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक पचास फीसदी लोग मास्क नहीं पहनते, सात फीसदी लोग ही प्रॉपर मॉस्क पहनते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि एक अध्ययन के मुताबिक, पचास फीसदी लोग अभी भी मास्क नहीं पहनते हैं और पचास प्रतिशत लोग जो मॉस्क पहनते हैं उनमें से चौंसठ फीसदी वैसे हैं जो सिर्फ अपना मुंह ढकते हैं लेकिन नाक नहीं, कुछ लोग गले पर मास्क रखते हैं। पचास प्रतिशत जो मॉस्क पहनते हैं उनमें से सिर्फ चौदह प्रतिशत ठीक से मॉस्क पहनते हैं। यानि कि सिर्फ सात फीसदी लोग ही सही तरीके से मॉस्क पहनते हैं।,पच्चीस शहरों में दो हज़ार लोगों पर स्टडी किया गया। पुणे की एक फार्मा कंपनी Mylab ने एक सेल्फ टेस्टिंग किट लॉन्च की है, जिसके जरिये आप घर बैठे कोरोना की जांच कर सकते हैं और पता लगा सकते हैं कि क्या आप कोरोना पॉजिटिव हैं या नहीं, दरअसल इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR ने कोविड-उन्नीस के संदिग्ध मरीजों के लिए देश की पहली सेल्फ-टेस्टिंग किट को मंजूरी दे दी है। मतलब ये कि आब आपको कोरोना टेस्ट कराने के लिए किसी लैब के चक्कर लगाने या फिर रिपोर्ट का इंतेज़ार करने की जरूरत नहीं है।
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देश में कोरोना से हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। दिन पर दिन संक्रमण विकराल रूप लेता जा रहा है जिसके कारण लोग बेहाल होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी के चालीस साल पुराने निजी सचिव मार्कण्डेय मेहता (85) का बीते दिनों निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वह कोरोना संक्रमित थे जिसके चलते उनकी अचानक तबियत बिगड़ने से मौत हो गई। इस बात की जानकारी खुद हेमा मालिनी ने अपने ट्वीट के माध्यम से लोगों के साथ साझा की। अपने सचिव की तस्वीर को साझ करते हुए हेमा मालिनी ने उन्हें याद किया और श्रद्धांजलि दी।
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देश में कोरोना से हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। दिन पर दिन संक्रमण विकराल रूप लेता जा रहा है जिसके कारण लोग बेहाल होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी के चालीस साल पुराने निजी सचिव मार्कण्डेय मेहता का बीते दिनों निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वह कोरोना संक्रमित थे जिसके चलते उनकी अचानक तबियत बिगड़ने से मौत हो गई। इस बात की जानकारी खुद हेमा मालिनी ने अपने ट्वीट के माध्यम से लोगों के साथ साझा की। अपने सचिव की तस्वीर को साझ करते हुए हेमा मालिनी ने उन्हें याद किया और श्रद्धांजलि दी।
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