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जर्मनी और ग्रेट ब्रिटेन ( इगलिस्तान ) सबसे वडे प्रतिद्वन्द्वी थे । रसायन उद्योग के अन्य आवश्यक पदार्थ ईधन और यन्त्र है । ईंधन सम्वन्ध परिस्थिति की परीक्षा पहले ही की जा चुकी है और यह दिखाया जा चुका है f भारत की कोयले की खानें किस भाँति असमान रूप से वितरित है । विद्युत् चालि धात्विक उद्योग और विद्युत् चालित रासायनिक उद्योग के विकास के लिए सस्ती विद्युत शक्ति की पूर्ति के विषय में प्रयत्न करना आवश्यक है । रसायन- उद्योग के लिए विशे यन्त्र का प्रायात १९१४ से पहले हुआ, किन्तु बहुत से सरल यन्त्रो का निर्मारण यह किया जा सकता है और इस दिशा में पहले ही से काम प्रारम्भ हो चुका है । २६. रसायन उद्योग पर युद्ध के प्रभाव - - द्वितीय महायुद्ध ने रसायन उद्योग को ए द्वितीय नवीन प्रोत्साहन दिया और आयात, जो बहुत कम किये जा चुके हैं, को स्थानापन्न कर के प्रश्न को इसने पुन प्रमुखता प्रदान की। रासायनिक एवं प्रौषधीय पदार्थो निर्माता, जो नवम्बर १९३९ में कलकत्ता में हुए एक सम्मेलन में मिल चुके थे, रासायनि पदार्थो को नई विधियों से उत्पादित करने की सम्भावनानो का पता लगा रहे है । भार सरकार ने हाल ही में भारी रसायनों के उत्पादन के लिए एक सरकारी यन्त्र स्थापि करने की स्वीकृति दे दी है। पहले आयात होने वाली बहुत अधिक संख्या में विभिन् दवाइयाँ अब देश में तैयार हो रही है। भारतीय कच्चे ( क्रूड) तैलो से उड्डयन स्पिरि (एविएशन स्पिरिट) का निर्माण हो रहा है, जबकि बाइक्रोमाइट का उत्पादन भी भलं भाँति हो रहा है । गन्धकीय अम्ल औौर प्रमोनियम सल्फेट का उत्पादन १५% गया है। जबकि सरकार ने श्वेतन-क्षोद ( ब्लीचिंग पाउडर ) के निर्माण की दिशा कदम उठाया है वैज्ञानिक एव औद्योगिक अनुसंधान परिषद् वनस्पति एव स (सिंथेटिक) रजक द्रव्यो के निर्माण की सम्भावनाओ पर विचार कर रही है । देखिए, रिपोर्ट आव दि टैरिफ वोर्ड आन दि हेवी केमिकल इण्डस्टी (१९२६), पैरा ७२ ।
जर्मनी और ग्रेट ब्रिटेन सबसे वडे प्रतिद्वन्द्वी थे । रसायन उद्योग के अन्य आवश्यक पदार्थ ईधन और यन्त्र है । ईंधन सम्वन्ध परिस्थिति की परीक्षा पहले ही की जा चुकी है और यह दिखाया जा चुका है f भारत की कोयले की खानें किस भाँति असमान रूप से वितरित है । विद्युत् चालि धात्विक उद्योग और विद्युत् चालित रासायनिक उद्योग के विकास के लिए सस्ती विद्युत शक्ति की पूर्ति के विषय में प्रयत्न करना आवश्यक है । रसायन- उद्योग के लिए विशे यन्त्र का प्रायात एक हज़ार नौ सौ चौदह से पहले हुआ, किन्तु बहुत से सरल यन्त्रो का निर्मारण यह किया जा सकता है और इस दिशा में पहले ही से काम प्रारम्भ हो चुका है । छब्बीस. रसायन उद्योग पर युद्ध के प्रभाव - - द्वितीय महायुद्ध ने रसायन उद्योग को ए द्वितीय नवीन प्रोत्साहन दिया और आयात, जो बहुत कम किये जा चुके हैं, को स्थानापन्न कर के प्रश्न को इसने पुन प्रमुखता प्रदान की। रासायनिक एवं प्रौषधीय पदार्थो निर्माता, जो नवम्बर एक हज़ार नौ सौ उनतालीस में कलकत्ता में हुए एक सम्मेलन में मिल चुके थे, रासायनि पदार्थो को नई विधियों से उत्पादित करने की सम्भावनानो का पता लगा रहे है । भार सरकार ने हाल ही में भारी रसायनों के उत्पादन के लिए एक सरकारी यन्त्र स्थापि करने की स्वीकृति दे दी है। पहले आयात होने वाली बहुत अधिक संख्या में विभिन् दवाइयाँ अब देश में तैयार हो रही है। भारतीय कच्चे तैलो से उड्डयन स्पिरि का निर्माण हो रहा है, जबकि बाइक्रोमाइट का उत्पादन भी भलं भाँति हो रहा है । गन्धकीय अम्ल औौर प्रमोनियम सल्फेट का उत्पादन पंद्रह% गया है। जबकि सरकार ने श्वेतन-क्षोद के निर्माण की दिशा कदम उठाया है वैज्ञानिक एव औद्योगिक अनुसंधान परिषद् वनस्पति एव स रजक द्रव्यो के निर्माण की सम्भावनाओ पर विचार कर रही है । देखिए, रिपोर्ट आव दि टैरिफ वोर्ड आन दि हेवी केमिकल इण्डस्टी , पैरा बहत्तर ।
Almox 250 Mg Capsule डॉक्टर के लिखे गए पर्चे पर मिलने वाली दवा है। यह दवाई कैप्सूल में मिलती है। इस दवा का उपयोग विशेष रूप से बैक्टीरियल संक्रमण, गले में इन्फेक्शन, ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण का इलाज करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा Almox 250 Mg Capsule का उपयोग कुछ दूसरी समस्याओं के लिए भी किया जा सकता है। इनके बारे में नीचे विस्तार से जानकारी दी गयी है। मरीज की उम्र, लिंग व स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी के आधार पर ही Almox 250 Mg Capsule की खुराक निर्धारित की जाती है। यह खुराक मरीज की परेशानी और दवा देने के तरीके पर निर्भर करती है। यह जानकारी विस्तार से खुराक वाले भाग में दी गई है। इन दुष्परिणामों के अलावा Almox 250 Mg Capsule के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Almox 250 Mg Capsule के दुष्प्रभाव जल्दी ही खत्म हो जाते हैं और इलाज के बाद जारी नहीं रहते। हालांकि अगर ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। यह भी जानना जरूरी है कि Almox 250 Mg Capsule का प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर हल्का है और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए गंभीर है। Almox 250 Mg Capsule से जुड़ी चेतावनी कि इसका लिवर, हार्ट और किडनी पर क्या असर होता है, इसके बारे में नीचे बताया गया है। अगर आपको पहले से कुछ चिकित्सीय समस्याएं हैं जैसे दमा, एक्जिमा तो Almox 250 Mg Capsule दवा की सलाह नहीं दी जाती है, इससे दुष्परिणाम हो सकते हैं। आगे ऐसी अन्य समस्याएं भी बताई गई हैं जिनमें Almox 250 Mg Capsule लेने से आपको दुष्प्रभाव अनुभव हो सकते हैं। साथ ही, Almox 250 Mg Capsule को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। पूरी जानकारी के लिए नीचे दी गई जानकारी देखें। इन सभी सावधानियों के अलावा याद रखें कि वाहन चलाते समय Almox 250 Mg Capsule को लेना सुरक्षित है, साथ ही इस की लत लगने की संभावना है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Almox 250 Mg Capsule की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Almox 250 Mg Capsule की खुराक अलग हो सकती है। ।शिशु(1 महीने से 2 वर्ष) ।बच्चे(2 से 12 वर्ष) ।किशोरावस्था(13 से 18 वर्ष) ।नवजात शिशु(0 से 1 महीने) क्या Almox 250 Mg Capsule का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? गर्भवती स्त्रियों को Almox खाने से मामूली साइड इफेक्ट होते हैं, जो समय के साथ अपने आप ठीक हो जाते हैं। क्या Almox 250 Mg Capsule का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? स्तनपान कराने वाली जो महिलाएं Almox का सेवन करती हैं, उनको डॉक्टर से पूछने के बाद ही इसको खाना चाहिए, नहीं तो इसके कई घातक परिणाम भी हो सकते हैं। Almox 250 Mg Capsule का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Almox का किडनी पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। Almox 250 Mg Capsule का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है? Almox से लीवर को किसी भी तरह की हानि नहीं पहुंचती है और आपके लीवर पर होने वाले इसके बुरे प्रभाव कम होते है। क्या ह्रदय पर Almox 250 Mg Capsule का प्रभाव पड़ता है? हृदय पर Almox का हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है, ऐसी कोई स्थिति होने पर आप दवा न लें और इस बारे में अपने डॉक्टर से अच्छे से पुष्टी करने के बाद ही यह दवा लें। क्या Almox 250 Mg Capsule आदत या लत बन सकती है? Almox 250 Mg Capsule की लत नहीं लगती, लेकिन फिर भी आपको इसे लेने से पहले सर्तकता बरतनी बेहद जरूरी है और इस विषय पर डॉक्टरी सलाह अवश्य लें। क्या Almox 250 Mg Capsule को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? वाहन चलाने के अलावा मशीनों के बीच काम करने में सतर्कता की जरूरत होती है, ऐसे में आप Almox 250 Mg Capsule का सेवन करके भी इन कामों को आसानी से कर सकते हैं। क्या Almox 250 Mg Capsule को लेना सुरखित है? हां, डॉक्टरी सलाह के बाद। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Almox 250 Mg Capsule इस्तेमाल की जा सकती है? नहीं, Almox 250 Mg Capsule किसी भी तरह के दिमागी विकार का इलाज नहीं कर पाती है। क्या Almox 250 Mg Capsule को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? Almox 250 Mg Capsule और खाने को साथ में लेने से कोई परेशानी नहीं होती है। जब Almox 250 Mg Capsule ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? Almox 250 Mg Capsule और शराब को एक समय पर लेना आपकी सेहत पर हल्के दुष्प्रभाव जरूर छोड़ती है। इन दुष्प्रभावों की तीव्रता कम होने पर भी आपको सावधानी रखनी जरूरी हो जाती है। जी हां, Almox के साथ पैरासिटामोल ले सकते हैं। इन दोनों दवाओं को एक साथ लेने पर अब तक कोई भी दुष्प्रभाव सामने नहीं आया है। हालांकि, अगर आपको Almox के साथ पैरासिटामोल लेने के बाद किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट नज़र आ रहा है तो तुरंत डॉक्टर को बताएं और उनके निर्देशों का पालन करें। Almox खाने की वजह से नींद या सुस्ती नहीं आती है। हालांकि, अगर आपको Almox लेने के बाद नींद या सुस्ती महसूस हो रही है तो तुरंत अपने डॉक्टर को बताएं। बैक्टीरिया के कारण हुए कान में इंफेक्शन का इलाज Almox द्वारा किया जा सकता है। हालांकि, कान में संक्रमण के उचित इलाज के लिए डॉक्टर से परामर्श करना बेहतर है। Almox एक प्रिस्किप्शन दवा है इसलिए डॉक्टरी परामर्श के बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना Almox खाना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। जी हां, Almox से साइनस इंफेक्शन का इलाज किया जा सकता है। हालांकि, साइनस इंफेक्शन के इलाज के लिए सबसे पहले Almox के साथ क्लैवुलेनिक एसिड की खुराक दी जाती है। साइनस इंफेक्शन के उचित इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह लें। US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Amoxil (amoxicillin)
Almox दो सौ पचास Mg Capsule डॉक्टर के लिखे गए पर्चे पर मिलने वाली दवा है। यह दवाई कैप्सूल में मिलती है। इस दवा का उपयोग विशेष रूप से बैक्टीरियल संक्रमण, गले में इन्फेक्शन, ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण का इलाज करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा Almox दो सौ पचास Mg Capsule का उपयोग कुछ दूसरी समस्याओं के लिए भी किया जा सकता है। इनके बारे में नीचे विस्तार से जानकारी दी गयी है। मरीज की उम्र, लिंग व स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी के आधार पर ही Almox दो सौ पचास Mg Capsule की खुराक निर्धारित की जाती है। यह खुराक मरीज की परेशानी और दवा देने के तरीके पर निर्भर करती है। यह जानकारी विस्तार से खुराक वाले भाग में दी गई है। इन दुष्परिणामों के अलावा Almox दो सौ पचास Mg Capsule के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Almox दो सौ पचास Mg Capsule के दुष्प्रभाव जल्दी ही खत्म हो जाते हैं और इलाज के बाद जारी नहीं रहते। हालांकि अगर ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। यह भी जानना जरूरी है कि Almox दो सौ पचास Mg Capsule का प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर हल्का है और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए गंभीर है। Almox दो सौ पचास Mg Capsule से जुड़ी चेतावनी कि इसका लिवर, हार्ट और किडनी पर क्या असर होता है, इसके बारे में नीचे बताया गया है। अगर आपको पहले से कुछ चिकित्सीय समस्याएं हैं जैसे दमा, एक्जिमा तो Almox दो सौ पचास Mg Capsule दवा की सलाह नहीं दी जाती है, इससे दुष्परिणाम हो सकते हैं। आगे ऐसी अन्य समस्याएं भी बताई गई हैं जिनमें Almox दो सौ पचास Mg Capsule लेने से आपको दुष्प्रभाव अनुभव हो सकते हैं। साथ ही, Almox दो सौ पचास Mg Capsule को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। पूरी जानकारी के लिए नीचे दी गई जानकारी देखें। इन सभी सावधानियों के अलावा याद रखें कि वाहन चलाते समय Almox दो सौ पचास Mg Capsule को लेना सुरक्षित है, साथ ही इस की लत लगने की संभावना है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Almox दो सौ पचास Mg Capsule की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Almox दो सौ पचास Mg Capsule की खुराक अलग हो सकती है। ।शिशु ।बच्चे ।किशोरावस्था ।नवजात शिशु क्या Almox दो सौ पचास Mg Capsule का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? गर्भवती स्त्रियों को Almox खाने से मामूली साइड इफेक्ट होते हैं, जो समय के साथ अपने आप ठीक हो जाते हैं। क्या Almox दो सौ पचास Mg Capsule का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? स्तनपान कराने वाली जो महिलाएं Almox का सेवन करती हैं, उनको डॉक्टर से पूछने के बाद ही इसको खाना चाहिए, नहीं तो इसके कई घातक परिणाम भी हो सकते हैं। Almox दो सौ पचास Mg Capsule का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Almox का किडनी पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। Almox दो सौ पचास Mg Capsule का जिगर पर क्या असर होता है? Almox से लीवर को किसी भी तरह की हानि नहीं पहुंचती है और आपके लीवर पर होने वाले इसके बुरे प्रभाव कम होते है। क्या ह्रदय पर Almox दो सौ पचास Mg Capsule का प्रभाव पड़ता है? हृदय पर Almox का हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है, ऐसी कोई स्थिति होने पर आप दवा न लें और इस बारे में अपने डॉक्टर से अच्छे से पुष्टी करने के बाद ही यह दवा लें। क्या Almox दो सौ पचास Mg Capsule आदत या लत बन सकती है? Almox दो सौ पचास Mg Capsule की लत नहीं लगती, लेकिन फिर भी आपको इसे लेने से पहले सर्तकता बरतनी बेहद जरूरी है और इस विषय पर डॉक्टरी सलाह अवश्य लें। क्या Almox दो सौ पचास Mg Capsule को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? वाहन चलाने के अलावा मशीनों के बीच काम करने में सतर्कता की जरूरत होती है, ऐसे में आप Almox दो सौ पचास Mg Capsule का सेवन करके भी इन कामों को आसानी से कर सकते हैं। क्या Almox दो सौ पचास Mg Capsule को लेना सुरखित है? हां, डॉक्टरी सलाह के बाद। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Almox दो सौ पचास Mg Capsule इस्तेमाल की जा सकती है? नहीं, Almox दो सौ पचास Mg Capsule किसी भी तरह के दिमागी विकार का इलाज नहीं कर पाती है। क्या Almox दो सौ पचास Mg Capsule को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? Almox दो सौ पचास Mg Capsule और खाने को साथ में लेने से कोई परेशानी नहीं होती है। जब Almox दो सौ पचास Mg Capsule ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? Almox दो सौ पचास Mg Capsule और शराब को एक समय पर लेना आपकी सेहत पर हल्के दुष्प्रभाव जरूर छोड़ती है। इन दुष्प्रभावों की तीव्रता कम होने पर भी आपको सावधानी रखनी जरूरी हो जाती है। जी हां, Almox के साथ पैरासिटामोल ले सकते हैं। इन दोनों दवाओं को एक साथ लेने पर अब तक कोई भी दुष्प्रभाव सामने नहीं आया है। हालांकि, अगर आपको Almox के साथ पैरासिटामोल लेने के बाद किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट नज़र आ रहा है तो तुरंत डॉक्टर को बताएं और उनके निर्देशों का पालन करें। Almox खाने की वजह से नींद या सुस्ती नहीं आती है। हालांकि, अगर आपको Almox लेने के बाद नींद या सुस्ती महसूस हो रही है तो तुरंत अपने डॉक्टर को बताएं। बैक्टीरिया के कारण हुए कान में इंफेक्शन का इलाज Almox द्वारा किया जा सकता है। हालांकि, कान में संक्रमण के उचित इलाज के लिए डॉक्टर से परामर्श करना बेहतर है। Almox एक प्रिस्किप्शन दवा है इसलिए डॉक्टरी परामर्श के बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना Almox खाना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। जी हां, Almox से साइनस इंफेक्शन का इलाज किया जा सकता है। हालांकि, साइनस इंफेक्शन के इलाज के लिए सबसे पहले Almox के साथ क्लैवुलेनिक एसिड की खुराक दी जाती है। साइनस इंफेक्शन के उचित इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह लें। US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Amoxil
आज के फीचर कार्टून में आलोक निरंतर स्वामी रामदेव के पतंजलि के द्वारा बनायीं गयी कोरोनिल दवा को दर्शाते हैं, जो कि एक दवा है जो दावा करती है कि कोरोनवायरस को ठीक कर सकती है. मंजुल फर्स्टपोस्ट में पतंजलि द्वारा फॉलो किये गए स्टेप को दर्शाते हैं. कथित रूप से, पतंजलि ने कोविड-19 के इलाज के लिए कोरोनिल के दावों के साथ आने से पहले पियर रिव्यु के लिए परीक्षण प्रस्तुत नहीं किया था. साजिथ कुमार डेक्कन हेराल्ड में नेपाली प्रधान मंत्री केपी शर्मा ओली की कठिन परिस्थिति को दर्शाते हैं. चीन ने नेपाल के साथ विश्वासघात किया और एक नेपाली गांव पर कब्जा कर लिया. सतीश आचार्य महामारी के दौरान छात्रों द्वारा बंक करने के नए बहाने को दर्शाते हैं. सतीश बताते हैं कि अब छात्र पासवर्ड भूलने कक बहाना बनाएंगे. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. संदीप अध्वर्यु दुनिया के सबसे निचले युद्धक्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा के बीच युद्ध को दर्शाते हैं. (लास्ट लाफ्स अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
आज के फीचर कार्टून में आलोक निरंतर स्वामी रामदेव के पतंजलि के द्वारा बनायीं गयी कोरोनिल दवा को दर्शाते हैं, जो कि एक दवा है जो दावा करती है कि कोरोनवायरस को ठीक कर सकती है. मंजुल फर्स्टपोस्ट में पतंजलि द्वारा फॉलो किये गए स्टेप को दर्शाते हैं. कथित रूप से, पतंजलि ने कोविड-उन्नीस के इलाज के लिए कोरोनिल के दावों के साथ आने से पहले पियर रिव्यु के लिए परीक्षण प्रस्तुत नहीं किया था. साजिथ कुमार डेक्कन हेराल्ड में नेपाली प्रधान मंत्री केपी शर्मा ओली की कठिन परिस्थिति को दर्शाते हैं. चीन ने नेपाल के साथ विश्वासघात किया और एक नेपाली गांव पर कब्जा कर लिया. सतीश आचार्य महामारी के दौरान छात्रों द्वारा बंक करने के नए बहाने को दर्शाते हैं. सतीश बताते हैं कि अब छात्र पासवर्ड भूलने कक बहाना बनाएंगे. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. संदीप अध्वर्यु दुनिया के सबसे निचले युद्धक्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा के बीच युद्ध को दर्शाते हैं.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। २०१३ ग्रेगोरियन कैलेंडर के मंगलवार को शुरू होने वाला एक वर्ष है। . 9 अप्रैल ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 99वॉ (लीप वर्ष में 100 वॉ) दिन है। साल में अभी और 266 दिन बाकी है। . २०१३ और ९ अप्रैल आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। २०१३ 9 संबंध है और ९ अप्रैल 20 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (9 + 20)। यह लेख २०१३ और ९ अप्रैल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। दो हज़ार तेरह ग्रेगोरियन कैलेंडर के मंगलवार को शुरू होने वाला एक वर्ष है। . नौ अप्रैल ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का निन्यानवेवॉ दिन है। साल में अभी और दो सौ छयासठ दिन बाकी है। . दो हज़ार तेरह और नौ अप्रैल आम में शून्य बातें हैं । दो हज़ार तेरह नौ संबंध है और नौ अप्रैल बीस है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख दो हज़ार तेरह और नौ अप्रैल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ईकाइनस इस्कुलेन्टस या सी आर्चिन एक एकलिंगी समुद्री प्राणी है जो प्रायः सर्वत्र पाया जाता है। इसका शरीर गोलाकार या हृदयाकार होता है जो कल्केरियस सेल के अन्दर बन्द रहता है। इसमें प्रचलन की क्रिया ट्यूब फीट के द्वारा सम्पन्न होती है। इनका प्रमुख भोजन शैवाल जातीय छोटे जलीय पौधे हैं इनके जीवन चक्र में जटिल लार्वा अवस्था पायी जाती है। श्रेणीःजलचर. जैव संरक्षण, प्रजातियां, उनके प्राकृतिक वास और पारिस्थितिक तंत्र को विलोपन से बचाने के उद्देश्य से प्रकृति और पृथ्वी की जैव विविधता के स्तरों का वैज्ञानिक अध्ययन है। यह विज्ञान, अर्थशास्त्र और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के व्यवहार से आहरित अंतरनियंत्रित विषय है। शब्द कन्सर्वेशन बॉयोलोजी को जीव-विज्ञानी ब्रूस विलकॉक्स और माइकल सूले द्वारा 1978 में ला जोला, कैलिफ़ोर्निया स्थित कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय में आयोजित सम्मेलन में शीर्षक के तौर पर प्रवर्तित किया गया। बैठक वैज्ञानिकों के बीच उष्णकटिबंधीय वनों की कटाई, लुप्त होने वाली प्रजातियों और प्रजातियों के भीतर क्षतिग्रस्त आनुवंशिक विविधता पर चिंता से उभरी. जलसाही और जैव संरक्षण आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): शैवाल। एक शैवाल लौरेंशिया शैवाल (Algae /एल्गी/एल्जी; एकवचनःएल्गै) सरल सजीव हैं। अधिकांश शैवाल पौधों के समान सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वंय बनाते हैं अर्थात् स्वपोषी होते हैं। ये एक कोशिकीय से लेकर बहु-कोशिकीय अनेक रूपों में हो सकते हैं, परन्तु पौधों के समान इसमें जड़, पत्तियां इत्यादि रचनाएं नहीं पाई जाती हैं। ये नम भूमि, अलवणीय एवं लवणीय जल, वृक्षों की छाल, नम दीवारों पर हरी, भूरी या कुछ काली परतों के रूप में मिलते हैं। . जलसाही 2 संबंध है और जैव संरक्षण 97 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 1.01% है = 1 / (2 + 97)। यह लेख जलसाही और जैव संरक्षण के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ईकाइनस इस्कुलेन्टस या सी आर्चिन एक एकलिंगी समुद्री प्राणी है जो प्रायः सर्वत्र पाया जाता है। इसका शरीर गोलाकार या हृदयाकार होता है जो कल्केरियस सेल के अन्दर बन्द रहता है। इसमें प्रचलन की क्रिया ट्यूब फीट के द्वारा सम्पन्न होती है। इनका प्रमुख भोजन शैवाल जातीय छोटे जलीय पौधे हैं इनके जीवन चक्र में जटिल लार्वा अवस्था पायी जाती है। श्रेणीःजलचर. जैव संरक्षण, प्रजातियां, उनके प्राकृतिक वास और पारिस्थितिक तंत्र को विलोपन से बचाने के उद्देश्य से प्रकृति और पृथ्वी की जैव विविधता के स्तरों का वैज्ञानिक अध्ययन है। यह विज्ञान, अर्थशास्त्र और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के व्यवहार से आहरित अंतरनियंत्रित विषय है। शब्द कन्सर्वेशन बॉयोलोजी को जीव-विज्ञानी ब्रूस विलकॉक्स और माइकल सूले द्वारा एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में ला जोला, कैलिफ़ोर्निया स्थित कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय में आयोजित सम्मेलन में शीर्षक के तौर पर प्रवर्तित किया गया। बैठक वैज्ञानिकों के बीच उष्णकटिबंधीय वनों की कटाई, लुप्त होने वाली प्रजातियों और प्रजातियों के भीतर क्षतिग्रस्त आनुवंशिक विविधता पर चिंता से उभरी. जलसाही और जैव संरक्षण आम में एक बात है : शैवाल। एक शैवाल लौरेंशिया शैवाल सरल सजीव हैं। अधिकांश शैवाल पौधों के समान सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वंय बनाते हैं अर्थात् स्वपोषी होते हैं। ये एक कोशिकीय से लेकर बहु-कोशिकीय अनेक रूपों में हो सकते हैं, परन्तु पौधों के समान इसमें जड़, पत्तियां इत्यादि रचनाएं नहीं पाई जाती हैं। ये नम भूमि, अलवणीय एवं लवणीय जल, वृक्षों की छाल, नम दीवारों पर हरी, भूरी या कुछ काली परतों के रूप में मिलते हैं। . जलसाही दो संबंध है और जैव संरक्षण सत्तानवे है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक एक.एक% है = एक / । यह लेख जलसाही और जैव संरक्षण के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
विषम जगत के घात और प्रतिघात सह लिए सारे, किंतु न विचलित हुए एक क्षण विश्व-वेदना धारे, मनमानी कर स्वय नियति भी बहुत-बहुत पछताई हारी, थकी, पराजित-सी वह बैठ गई मनमारे । स्वर्ण वर्ण युत चमक उठे तुम ओ साहसी-सयाने, छीन तुम्हारे दो लालो को विधि मन में पछताने, विश्व दंग है देख तुम्हारी निपट अटपटी मस्ती, जब-जब दुख बढने लगता है, तुम लगते हो गाने । आज तुम्हारे जन्मदिवस पर बाल-वृद्ध नर-नारी चढा रहे हैं श्रद्धाजलियाँ चरण-चरण पर वारी, सहस-सहस सॉसो से मिलकर निकल रहे है स्वर ये कवि ! तुम युग-युग जिश्रो, जिए यह चिर-साधना तुम्हारी।
विषम जगत के घात और प्रतिघात सह लिए सारे, किंतु न विचलित हुए एक क्षण विश्व-वेदना धारे, मनमानी कर स्वय नियति भी बहुत-बहुत पछताई हारी, थकी, पराजित-सी वह बैठ गई मनमारे । स्वर्ण वर्ण युत चमक उठे तुम ओ साहसी-सयाने, छीन तुम्हारे दो लालो को विधि मन में पछताने, विश्व दंग है देख तुम्हारी निपट अटपटी मस्ती, जब-जब दुख बढने लगता है, तुम लगते हो गाने । आज तुम्हारे जन्मदिवस पर बाल-वृद्ध नर-नारी चढा रहे हैं श्रद्धाजलियाँ चरण-चरण पर वारी, सहस-सहस सॉसो से मिलकर निकल रहे है स्वर ये कवि ! तुम युग-युग जिश्रो, जिए यह चिर-साधना तुम्हारी।
उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने प्रदेश की बीजेपी सरकार पर लूट करने वालों को छूट देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में लूट करने वालों को हौंसले इतने बुलंद हैं कि अब वे जिम कॉर्बेट पार्क के नाम पर भी लोगों को लूटने के प्रयास कर रहे हैं। वहीं, ऐसे लोगों के खिलाफ सरकारी की चुप्पी का मतलब उन्हें मौन समर्थन देना है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए) पत्रकारों से बातचीत में गरिमा ने कहा कि भाजपा जन युवा मोर्चा का राष्टीय सचिव एवं उत्तराखंड प्रभारी तेजेंद्र पाल सिंह बग्गा बीए प्रोपर्टी वाला कंपनी का फाउंडर भी है। बग्गा की कंपनी बीए प्रोपर्टी वाला ने ट्विटर पर जिम कार्वेट का एक विडियों डाला है। इसमे 18 कॉटेज बनाने के लिए एक प्रोजेक्ट लॉच करने की बात हो रही है। इसमे कंस्ट्रक्शन साईट जिम कॉर्बेट बताई जा रही है। साथ ही 2 bhk के कॉटेज का दाम 68 लाख रुपये बताए जा रहे हैं। एक कॉटेज का ऐरिया 1800 sq feet बताया जाा रहा है। इसमें निवेश करने के लिए लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए) दसौनी ने कहा कि धामी सरकार को निश्चित रूप से जांच करनी चाहिए कि भूमि प्राइवेट है या सरकारी। जिम कॉर्बेट के अंदर यह निर्माण कार्य किसकी संस्तुति और सहमति पर हो रहे हैं? क्योंकि इससे बड़े पैमाने पर जंगल, पर्यावरण और पशु पक्षियों को नुकसान होना तय है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए) दसौनी ने चिंता जताते हुए कहा कि आज राज्य को हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर एक बहुत ही सख्त कानून की जरूरत है। जो कि पहले राज्य में विद्यमान था, लेकिन भाजपा की प्रचंड बहुमत की 57 विधायकों वाली त्रिवेंद्र रावत सरकार ने 2018 में उत्तराखंड की भूमि को सभी बाहरी व्यक्तियों के लिए खोल दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए) उन्होंने कहा कि अब जब बाहर से आने वाले कोई भी धर्म जाति समुदाय वर्ग के लोग यहां जमीनें खरीद रहे हैं तो अपने राजनीतिक फायदे के लिए लैंड जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। दसौनी ने पूछा कि पहले उत्तराखंड की भूमि को गिरवी जब भाजपा ने ही रखा तो आज चीखने चिल्लाने का कोई नैतिक अधिकार भाजपा को नहीं है। इस छोटे से राज्य में जमीन की लूट मची हुई है। सककार की ओर से ना तो जमीनों की खरीद-फरोख्त की मॉनिटरिंग की जा रही है और ना ही यहां होने वाले निर्माण कार्य पर नजर रखी जा रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए) दसौनी ने बताया कि भाजपा का यह पदाधिकारी बीए प्रोपर्टी वाला हरिद्वार में भी 21 लाख में आवासीय प्लॉट बेचने की बात करता है। अयोध्या के राम मन्दिर से चार किलोमीटर दूर 5 सितारा होटल के लिए 80 हजार sq feet जमीन उपलब्ध होने की बात भी कहता है। अपने ट्विटर के जरिये निवेशकों को उसके लिए आमंत्रित करता है। दसौनी ने कहा कि तेजिंदर पाल सिंह बग्गा की संपत्ति की जांच भी होनी चाहिए कि कैसे इतने कम समय में जमीन खरीद-फरोख्त के इतने बड़े मामलों में तेजिंदर पाल सिंह बग्गा संलिप्त हैं। नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने प्रदेश की बीजेपी सरकार पर लूट करने वालों को छूट देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में लूट करने वालों को हौंसले इतने बुलंद हैं कि अब वे जिम कॉर्बेट पार्क के नाम पर भी लोगों को लूटने के प्रयास कर रहे हैं। वहीं, ऐसे लोगों के खिलाफ सरकारी की चुप्पी का मतलब उन्हें मौन समर्थन देना है। पत्रकारों से बातचीत में गरिमा ने कहा कि भाजपा जन युवा मोर्चा का राष्टीय सचिव एवं उत्तराखंड प्रभारी तेजेंद्र पाल सिंह बग्गा बीए प्रोपर्टी वाला कंपनी का फाउंडर भी है। बग्गा की कंपनी बीए प्रोपर्टी वाला ने ट्विटर पर जिम कार्वेट का एक विडियों डाला है। इसमे अट्ठारह कॉटेज बनाने के लिए एक प्रोजेक्ट लॉच करने की बात हो रही है। इसमे कंस्ट्रक्शन साईट जिम कॉर्बेट बताई जा रही है। साथ ही दो bhk के कॉटेज का दाम अड़सठ लाख रुपये बताए जा रहे हैं। एक कॉटेज का ऐरिया एक हज़ार आठ सौ sq feet बताया जाा रहा है। इसमें निवेश करने के लिए लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है। दसौनी ने कहा कि धामी सरकार को निश्चित रूप से जांच करनी चाहिए कि भूमि प्राइवेट है या सरकारी। जिम कॉर्बेट के अंदर यह निर्माण कार्य किसकी संस्तुति और सहमति पर हो रहे हैं? क्योंकि इससे बड़े पैमाने पर जंगल, पर्यावरण और पशु पक्षियों को नुकसान होना तय है। दसौनी ने चिंता जताते हुए कहा कि आज राज्य को हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर एक बहुत ही सख्त कानून की जरूरत है। जो कि पहले राज्य में विद्यमान था, लेकिन भाजपा की प्रचंड बहुमत की सत्तावन विधायकों वाली त्रिवेंद्र रावत सरकार ने दो हज़ार अट्ठारह में उत्तराखंड की भूमि को सभी बाहरी व्यक्तियों के लिए खोल दिया। उन्होंने कहा कि अब जब बाहर से आने वाले कोई भी धर्म जाति समुदाय वर्ग के लोग यहां जमीनें खरीद रहे हैं तो अपने राजनीतिक फायदे के लिए लैंड जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। दसौनी ने पूछा कि पहले उत्तराखंड की भूमि को गिरवी जब भाजपा ने ही रखा तो आज चीखने चिल्लाने का कोई नैतिक अधिकार भाजपा को नहीं है। इस छोटे से राज्य में जमीन की लूट मची हुई है। सककार की ओर से ना तो जमीनों की खरीद-फरोख्त की मॉनिटरिंग की जा रही है और ना ही यहां होने वाले निर्माण कार्य पर नजर रखी जा रही है। दसौनी ने बताया कि भाजपा का यह पदाधिकारी बीए प्रोपर्टी वाला हरिद्वार में भी इक्कीस लाख में आवासीय प्लॉट बेचने की बात करता है। अयोध्या के राम मन्दिर से चार किलोमीटर दूर पाँच सितारा होटल के लिए अस्सी हजार sq feet जमीन उपलब्ध होने की बात भी कहता है। अपने ट्विटर के जरिये निवेशकों को उसके लिए आमंत्रित करता है। दसौनी ने कहा कि तेजिंदर पाल सिंह बग्गा की संपत्ति की जांच भी होनी चाहिए कि कैसे इतने कम समय में जमीन खरीद-फरोख्त के इतने बड़े मामलों में तेजिंदर पाल सिंह बग्गा संलिप्त हैं। नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो द्वारा कश्मीर का राग अलापने और आर्टिकल 370 पर सवाल उठाने पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को बुरी तरह धो डाला। उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री को आतंकी इंडस्ट्री का प्रोमोटर और प्रवक्ता बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की विश्वसनीयता उसके फॉरेन एक्सचेंज से भी गिरती जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आतंकी पीडि़त और साजिशकर्ता एक साथ नहीं बैठ सकते हैं। उन्होंने बताया कि बिलावल के साथ बाकी के विदेश मंत्रियों की ही तरह बर्ताव हुआ। आतंकवाद के पीडि़त आतंकवाद पर चर्चा करने के लिए आतंकवाद के अपराधियों के साथ एक साथ नहीं बैठते हैं। आपको बता दें कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत दौरे पर आए थे। जयशंकर ने साफ तौर पर कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का था, है और आगे भी रहेगा। इसके साथ ही विदेश मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि जम्मू-कश्मीर में जी-20 की बैठक होगी। बता दें कि पाकिस्तान जम्मू- कश्मीर में जी-20 की बैठक को लेकर लगातार आपत्ति जता रहा था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को जी-20 और श्रीनगर से कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही साथ उन्होंने स्पष्ट रूप से यह भी कहा कि पाकिस्तान के साथ केवल पीओके बड़ा मुद्दा है। चीन को लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि सीमा पर असामान्य स्थिति है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सीमा पर हालात सुधरने तक चीन के साथ सामान्य स्थिति नहीं है। चीन से डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। हालांकि, चीन के विदेश मंत्री छिन कांग ने दोहराया था कि भारत-चीन सीमा पर स्थिति सामान्यतः स्थिर है और दोनों पक्षों को मौजूदा प्रयासों को मजबूत करना चाहिए तथा सीमा पर स्थायी शांति के लिए शर्तों को और सरल एवं सहज बनाने पर जोर देते हुए संबंधित समझौतों का कड़ाई से पालन करना चाहिए। इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने प्रेस से बातचीत के दौरान जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था। बिलावल ने आर्टिकल 370 खत्म करने के भारत के फैसले को गैर कानूनी बताया। उन्होंने कहा कि कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छीन कर भारत ने बातचीत के सारे रास्तों को बंद कर दिया है। भारत के आतंकवाद पर करारे वार की बात सीधे पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो को जा लगी। बिलावल भुट्टो ने सामूहिक रूप से आतंकवाद के खतरे को खत्म करने का आग्रह तो किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि हमें कूटनीतिक लाभ के लिए आतंकवाद को हथियार बनाने के चक्कर में नहीं पडऩा चाहिए। इसके बाद आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में बिलावल ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की तारीफ की। उन्होंने कहा कि मुलाकात के दौरान जयशंकर ने मुझे कभी भी यह अहसास नहीं दिलाया कि हमारे बीच एससीओ के उद्देश्यों और चार्टर के अनुरूप हमारे बीच द्विपक्षीय रूप से कोई मुद्दा है। मुलाकात के दौरान ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि हमारे बीच द्विपक्षीय संबधों को लेकर कोई प्रगति नहीं है। वहीं भारत और पाकिस्तान के रिश्ते पर बिलावल भुट्टो ने कहा कि स्पोट्र्सं को राजनीति और विदेश नीति से दूर रखना चाहिए। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो को बिल्कुल भी तवज्जो नहीं दी। जयशंकर ने भुट्टो से हाथ नहीं मिलाया और फिर आदाब को भुलाकर नमस्ते करने को मजबूर कर दिया। आम तौर पर पाकिस्तान के नेता भारत दौरे पर दुआ की मुद्रा में हाथ उठाते हैं। मीटिंग से पहले जब जयशंकर विदेश मंत्रियों का इंतजार कर रहे थे, तो दूर से आते बिलावल को देखते ही उन्होंने दूर से ही हाथ जोड़ा। ऐसा लग रहा था कि बिलावल हाथ मिलाने की मुद्रा में आगे बढ़ रहे थे, लेकिन जयशंकर के हाथ जोड़ते ही बिलावल को भी हाथ जोड़ पड़े। जब बिलावल ने हाथ जोड़ा, तो जयशंकर दूसरी तरफ देखने लगे।
शंघाई सहयोग संगठन देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो द्वारा कश्मीर का राग अलापने और आर्टिकल तीन सौ सत्तर पर सवाल उठाने पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को बुरी तरह धो डाला। उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री को आतंकी इंडस्ट्री का प्रोमोटर और प्रवक्ता बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की विश्वसनीयता उसके फॉरेन एक्सचेंज से भी गिरती जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आतंकी पीडि़त और साजिशकर्ता एक साथ नहीं बैठ सकते हैं। उन्होंने बताया कि बिलावल के साथ बाकी के विदेश मंत्रियों की ही तरह बर्ताव हुआ। आतंकवाद के पीडि़त आतंकवाद पर चर्चा करने के लिए आतंकवाद के अपराधियों के साथ एक साथ नहीं बैठते हैं। आपको बता दें कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत दौरे पर आए थे। जयशंकर ने साफ तौर पर कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का था, है और आगे भी रहेगा। इसके साथ ही विदेश मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि जम्मू-कश्मीर में जी-बीस की बैठक होगी। बता दें कि पाकिस्तान जम्मू- कश्मीर में जी-बीस की बैठक को लेकर लगातार आपत्ति जता रहा था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को जी-बीस और श्रीनगर से कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही साथ उन्होंने स्पष्ट रूप से यह भी कहा कि पाकिस्तान के साथ केवल पीओके बड़ा मुद्दा है। चीन को लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि सीमा पर असामान्य स्थिति है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सीमा पर हालात सुधरने तक चीन के साथ सामान्य स्थिति नहीं है। चीन से डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। हालांकि, चीन के विदेश मंत्री छिन कांग ने दोहराया था कि भारत-चीन सीमा पर स्थिति सामान्यतः स्थिर है और दोनों पक्षों को मौजूदा प्रयासों को मजबूत करना चाहिए तथा सीमा पर स्थायी शांति के लिए शर्तों को और सरल एवं सहज बनाने पर जोर देते हुए संबंधित समझौतों का कड़ाई से पालन करना चाहिए। इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने प्रेस से बातचीत के दौरान जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था। बिलावल ने आर्टिकल तीन सौ सत्तर खत्म करने के भारत के फैसले को गैर कानूनी बताया। उन्होंने कहा कि कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छीन कर भारत ने बातचीत के सारे रास्तों को बंद कर दिया है। भारत के आतंकवाद पर करारे वार की बात सीधे पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो को जा लगी। बिलावल भुट्टो ने सामूहिक रूप से आतंकवाद के खतरे को खत्म करने का आग्रह तो किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि हमें कूटनीतिक लाभ के लिए आतंकवाद को हथियार बनाने के चक्कर में नहीं पडऩा चाहिए। इसके बाद आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में बिलावल ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की तारीफ की। उन्होंने कहा कि मुलाकात के दौरान जयशंकर ने मुझे कभी भी यह अहसास नहीं दिलाया कि हमारे बीच एससीओ के उद्देश्यों और चार्टर के अनुरूप हमारे बीच द्विपक्षीय रूप से कोई मुद्दा है। मुलाकात के दौरान ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि हमारे बीच द्विपक्षीय संबधों को लेकर कोई प्रगति नहीं है। वहीं भारत और पाकिस्तान के रिश्ते पर बिलावल भुट्टो ने कहा कि स्पोट्र्सं को राजनीति और विदेश नीति से दूर रखना चाहिए। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो को बिल्कुल भी तवज्जो नहीं दी। जयशंकर ने भुट्टो से हाथ नहीं मिलाया और फिर आदाब को भुलाकर नमस्ते करने को मजबूर कर दिया। आम तौर पर पाकिस्तान के नेता भारत दौरे पर दुआ की मुद्रा में हाथ उठाते हैं। मीटिंग से पहले जब जयशंकर विदेश मंत्रियों का इंतजार कर रहे थे, तो दूर से आते बिलावल को देखते ही उन्होंने दूर से ही हाथ जोड़ा। ऐसा लग रहा था कि बिलावल हाथ मिलाने की मुद्रा में आगे बढ़ रहे थे, लेकिन जयशंकर के हाथ जोड़ते ही बिलावल को भी हाथ जोड़ पड़े। जब बिलावल ने हाथ जोड़ा, तो जयशंकर दूसरी तरफ देखने लगे।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। टाइटन (या Τῑτάν), या शनि शष्टम, शनि ग्रह का सबसे बड़ा चंद्रमा है। यह वातावरण सहित एकमात्र ज्ञातचंद्रमा है, और पृथ्वी के अलावा एकमात्र ऐसा खगोलीय पिंड है जिसके सतही तरल स्थानों, जैसे नहरों, सागरों आदि के ठोस प्रमाण उपलब्ध हों। यूरोपीय-अमेरिकी के कासीनी अंतरिक्ष यान के साथ गया उसका अवतरण यान हायगन्स, १६ जनवरी २००४ को, टाइटन के धरातल पर उतरा जहां उसने भूरे-नारंगी रंग में रंगे टाईटन के नदियों-पहाडों और झीलों-तालाबों वाले जो चित्र भेजे। टाइटन के बहुत ही घने वायुमंडल के कारण इससे पहले उसकी ऊपरी सतह को देख या उसके चित्र ले पाना संभव ही नहीं था। २००८ अगस्त के मध्य में ब्राज़ील की राजधानी रियो दी जनेरो में अंतरराष्ट्रीय खगोल विज्ञान संघ के सम्मेलन में ऐसे चित्र दिखाये गये और दो ऐसे शोधपत्र प्रस्तुत किये गये, जिनसे पृथ्वी के साथ टाइटन की समानता स्पष्ट होती है। ये चित्र और अध्ययन भी मुख्यतः कासीनी और होयगन्स से मिले आंकड़ों पर ही आधारित थे। . वायेजर द्वितीय एक अमरीकी मानव रहित अंतरग्रहीय शोध यान था जिसे वायेजर १ से पहले २० अगस्त १९७७ को अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा प्रक्षेपित किया गया था। यह काफी कुछ अपने पूर्व संस्करण यान वायेजर १ के समान ही था, किन्तु उससे अलग इसका यात्रा पथ कुछ धीमा है। इसे धीमा रखने का कारण था इसका पथ युरेनस और नेपचून तक पहुंचने के लिये अनुकूल बनाना। इसके पथ में जब शनि ग्रह आया, तब उसके गुरुत्वाकर्षण के कारण यह युरेनस की ओर अग्रसर हुआ था और इस कारण यह भी वायेजर १ के समान ही बृहस्पति के चन्द्रमा टाईटन का अवलोकन नहीं कर पाया था। किन्तु फिर भी यह युरेनस और नेपच्युन तक पहुंचने वाला प्रथम यान था। इसकी यात्रा में एक विशेष ग्रहीय परिस्थिति का लाभ उठाया गया था जिसमे सभी ग्रह एक सरल रेखा मे आ जाते है। यह विशेष स्थिति प्रत्येक १७६ वर्ष पश्चात ही आती है। इस कारण इसकी ऊर्जा में बड़ी बचत हुई और इसने ग्रहों के गुरुत्व का प्रयोग किया था। . टाइटन (चंद्रमा) और वॉयेजर द्वितीय आम में 4 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): नासा, शनि, संयुक्त राज्य, ज्वालामुखी। नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (हिन्दी अनुवादःराष्ट्रीय वैमानिकी और अन्तरिक्ष प्रबंधन; National Aeronautics and Space Administration) या जिसे संक्षेप में नासा (NASA) कहते हैं, संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार की शाखा है जो देश के सार्वजनिक अंतरिक्ष कार्यक्रमों व एरोनॉटिक्स व एरोस्पेस संशोधन के लिए जिम्मेदार है। फ़रवरी 2006 से नासा का लक्ष्य वाक्य "भविष्य में अंतरिक्ष अन्वेषण, वैज्ञानिक खोज और एरोनॉटिक्स संशोधन को बढ़ाना" है। 14 सितंबर 2011 में नासा ने घोषणा की कि उन्होंने एक नए स्पेस लॉन्च सिस्टम के डिज़ाइन का चुनाव किया है जिसके चलते संस्था के अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में और दूर तक सफर करने में सक्षम होंगे और अमेरिका द्वारा मानव अंतरिक्ष अन्वेषण में एक नया कदम साबित होंगे। नासा का गठन नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस अधिनियम के अंतर्गत 19 जुलाई 1948 में इसके पूर्वाधिकारी संस्था नैशनल एडवाइज़री कमिटी फॉर एरोनॉटिक्स (एनसीए) के स्थान पर किया गया था। इस संस्था ने 1 अक्टूबर 1948 से कार्य करना शुरू किया। तब से आज तक अमेरिकी अंतरिक्ष अन्वेषण के सारे कार्यक्रम नासा द्वारा संचालित किए गए हैं जिनमे अपोलो चन्द्रमा अभियान, स्कायलैब अंतरिक्ष स्टेशन और बाद में अंतरिक्ष शटल शामिल है। वर्तमान में नासा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को समर्थन दे रही है और ओरायन बहु-उपयोगी कर्मीदल वाहन व व्यापारिक कर्मीदल वाहन के निर्माण व विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। संस्था लॉन्च सेवा कार्यक्रम (एलएसपी) के लिए भी जिम्मेदार है जो लॉन्च कार्यों व नासा के मानवरहित लॉन्चों कि उलटी गिनती पर ध्यान रखता है। . कोई विवरण नहीं। संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) (यू एस ए), जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य (United States) (यू एस) या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। 48 संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। 38 लाख वर्ग मील (98 लाख किमी2)"", U.S. Census Bureau, database as of August 2010, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. तवुर्वुर का एक सक्रिय ज्वालामुखी फटते हुए, राबाउल, पापुआ न्यू गिनिया ज्वालामुखी पृथ्वी की सतह पर उपस्थित ऐसी दरार या मुख होता है जिससे पृथ्वी के भीतर का गर्म लावा, गैस, राख आदि बाहर आते हैं। वस्तुतः यह पृथ्वी की ऊपरी परत में एक विभंग (rupture) होता है जिसके द्वारा अन्दर के पदार्थ बाहर निकलते हैं। ज्वालामुखी द्वारा निःसृत इन पदार्थों के जमा हो जाने से निर्मित शंक्वाकार स्थलरूप को ज्वालामुखी पर्वत कहा जाता है। ज्वालामुखी का सम्बंध प्लेट विवर्तनिकी से है क्योंकि यह पाया गया है कि बहुधा ये प्लेटों की सीमाओं के सहारे पाए जाते हैं क्योंकि प्लेट सीमाएँ पृथ्वी की ऊपरी परत में विभंग उत्पन्न होने हेतु कमजोर स्थल उपलब्ध करा देती हैं। इसके अलावा कुछ अन्य स्थलों पर भी ज्वालामुखी पाए जाते हैं जिनकी उत्पत्ति मैंटल प्लूम से मानी जाती है और ऐसे स्थलों को हॉटस्पॉट की संज्ञा दी जाती है। भू-आकृति विज्ञान में ज्वालामुखी को आकस्मिक घटना के रूप में देखा जाता है और पृथ्वी की सतह पर परिवर्तन लाने वाले बलों में इसे रचनात्मक बल के रूप में वर्गीकृत किया जाता है क्योंकि इनसे कई स्थलरूपों का निर्माण होता है। वहीं, दूसरी ओर पर्यावरण भूगोल इनका अध्ययन एक प्राकृतिक आपदा के रूप में करता है क्योंकि इससे पारितंत्र और जान-माल का नुकसान होता है। . टाइटन (चंद्रमा) 21 संबंध है और वॉयेजर द्वितीय 40 है। वे आम 4 में है, समानता सूचकांक 6.56% है = 4 / (21 + 40)। यह लेख टाइटन (चंद्रमा) और वॉयेजर द्वितीय के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। टाइटन , या शनि शष्टम, शनि ग्रह का सबसे बड़ा चंद्रमा है। यह वातावरण सहित एकमात्र ज्ञातचंद्रमा है, और पृथ्वी के अलावा एकमात्र ऐसा खगोलीय पिंड है जिसके सतही तरल स्थानों, जैसे नहरों, सागरों आदि के ठोस प्रमाण उपलब्ध हों। यूरोपीय-अमेरिकी के कासीनी अंतरिक्ष यान के साथ गया उसका अवतरण यान हायगन्स, सोलह जनवरी दो हज़ार चार को, टाइटन के धरातल पर उतरा जहां उसने भूरे-नारंगी रंग में रंगे टाईटन के नदियों-पहाडों और झीलों-तालाबों वाले जो चित्र भेजे। टाइटन के बहुत ही घने वायुमंडल के कारण इससे पहले उसकी ऊपरी सतह को देख या उसके चित्र ले पाना संभव ही नहीं था। दो हज़ार आठ अगस्त के मध्य में ब्राज़ील की राजधानी रियो दी जनेरो में अंतरराष्ट्रीय खगोल विज्ञान संघ के सम्मेलन में ऐसे चित्र दिखाये गये और दो ऐसे शोधपत्र प्रस्तुत किये गये, जिनसे पृथ्वी के साथ टाइटन की समानता स्पष्ट होती है। ये चित्र और अध्ययन भी मुख्यतः कासीनी और होयगन्स से मिले आंकड़ों पर ही आधारित थे। . वायेजर द्वितीय एक अमरीकी मानव रहित अंतरग्रहीय शोध यान था जिसे वायेजर एक से पहले बीस अगस्त एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर को अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा प्रक्षेपित किया गया था। यह काफी कुछ अपने पूर्व संस्करण यान वायेजर एक के समान ही था, किन्तु उससे अलग इसका यात्रा पथ कुछ धीमा है। इसे धीमा रखने का कारण था इसका पथ युरेनस और नेपचून तक पहुंचने के लिये अनुकूल बनाना। इसके पथ में जब शनि ग्रह आया, तब उसके गुरुत्वाकर्षण के कारण यह युरेनस की ओर अग्रसर हुआ था और इस कारण यह भी वायेजर एक के समान ही बृहस्पति के चन्द्रमा टाईटन का अवलोकन नहीं कर पाया था। किन्तु फिर भी यह युरेनस और नेपच्युन तक पहुंचने वाला प्रथम यान था। इसकी यात्रा में एक विशेष ग्रहीय परिस्थिति का लाभ उठाया गया था जिसमे सभी ग्रह एक सरल रेखा मे आ जाते है। यह विशेष स्थिति प्रत्येक एक सौ छिहत्तर वर्ष पश्चात ही आती है। इस कारण इसकी ऊर्जा में बड़ी बचत हुई और इसने ग्रहों के गुरुत्व का प्रयोग किया था। . टाइटन और वॉयेजर द्वितीय आम में चार बातें हैं : नासा, शनि, संयुक्त राज्य, ज्वालामुखी। नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन या जिसे संक्षेप में नासा कहते हैं, संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार की शाखा है जो देश के सार्वजनिक अंतरिक्ष कार्यक्रमों व एरोनॉटिक्स व एरोस्पेस संशोधन के लिए जिम्मेदार है। फ़रवरी दो हज़ार छः से नासा का लक्ष्य वाक्य "भविष्य में अंतरिक्ष अन्वेषण, वैज्ञानिक खोज और एरोनॉटिक्स संशोधन को बढ़ाना" है। चौदह सितंबर दो हज़ार ग्यारह में नासा ने घोषणा की कि उन्होंने एक नए स्पेस लॉन्च सिस्टम के डिज़ाइन का चुनाव किया है जिसके चलते संस्था के अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में और दूर तक सफर करने में सक्षम होंगे और अमेरिका द्वारा मानव अंतरिक्ष अन्वेषण में एक नया कदम साबित होंगे। नासा का गठन नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस अधिनियम के अंतर्गत उन्नीस जुलाई एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में इसके पूर्वाधिकारी संस्था नैशनल एडवाइज़री कमिटी फॉर एरोनॉटिक्स के स्थान पर किया गया था। इस संस्था ने एक अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस से कार्य करना शुरू किया। तब से आज तक अमेरिकी अंतरिक्ष अन्वेषण के सारे कार्यक्रम नासा द्वारा संचालित किए गए हैं जिनमे अपोलो चन्द्रमा अभियान, स्कायलैब अंतरिक्ष स्टेशन और बाद में अंतरिक्ष शटल शामिल है। वर्तमान में नासा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को समर्थन दे रही है और ओरायन बहु-उपयोगी कर्मीदल वाहन व व्यापारिक कर्मीदल वाहन के निर्माण व विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। संस्था लॉन्च सेवा कार्यक्रम के लिए भी जिम्मेदार है जो लॉन्च कार्यों व नासा के मानवरहित लॉन्चों कि उलटी गिनती पर ध्यान रखता है। . कोई विवरण नहीं। संयुक्त राज्य अमेरिका , जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। अड़तालीस संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। अड़तीस लाख वर्ग मील "", U.S. Census Bureau, database as of August दो हज़ार दस, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. तवुर्वुर का एक सक्रिय ज्वालामुखी फटते हुए, राबाउल, पापुआ न्यू गिनिया ज्वालामुखी पृथ्वी की सतह पर उपस्थित ऐसी दरार या मुख होता है जिससे पृथ्वी के भीतर का गर्म लावा, गैस, राख आदि बाहर आते हैं। वस्तुतः यह पृथ्वी की ऊपरी परत में एक विभंग होता है जिसके द्वारा अन्दर के पदार्थ बाहर निकलते हैं। ज्वालामुखी द्वारा निःसृत इन पदार्थों के जमा हो जाने से निर्मित शंक्वाकार स्थलरूप को ज्वालामुखी पर्वत कहा जाता है। ज्वालामुखी का सम्बंध प्लेट विवर्तनिकी से है क्योंकि यह पाया गया है कि बहुधा ये प्लेटों की सीमाओं के सहारे पाए जाते हैं क्योंकि प्लेट सीमाएँ पृथ्वी की ऊपरी परत में विभंग उत्पन्न होने हेतु कमजोर स्थल उपलब्ध करा देती हैं। इसके अलावा कुछ अन्य स्थलों पर भी ज्वालामुखी पाए जाते हैं जिनकी उत्पत्ति मैंटल प्लूम से मानी जाती है और ऐसे स्थलों को हॉटस्पॉट की संज्ञा दी जाती है। भू-आकृति विज्ञान में ज्वालामुखी को आकस्मिक घटना के रूप में देखा जाता है और पृथ्वी की सतह पर परिवर्तन लाने वाले बलों में इसे रचनात्मक बल के रूप में वर्गीकृत किया जाता है क्योंकि इनसे कई स्थलरूपों का निर्माण होता है। वहीं, दूसरी ओर पर्यावरण भूगोल इनका अध्ययन एक प्राकृतिक आपदा के रूप में करता है क्योंकि इससे पारितंत्र और जान-माल का नुकसान होता है। . टाइटन इक्कीस संबंध है और वॉयेजर द्वितीय चालीस है। वे आम चार में है, समानता सूचकांक छः.छप्पन% है = चार / । यह लेख टाइटन और वॉयेजर द्वितीय के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
वर्ल्ड कप का वो नॉकआउट मैच मीरपुर में खेला गया था, जिसमें उस कप्तान का कमाल भी टीम को जीत नहीं दिला सका था. साउथ अफ्रीका (South Africa) के पूर्व कप्तान फाफ डु प्लेसी (Faf Du Plesis) ने पुराने मुर्दे उखाड़े हैं और ऐसा करते हुए उन्होंने एक बड़ा खुलासा किया है. डुप्लेसी ने कहा है कि उन्हें और उनकी पत्नी इमारी विजर को 2011 वर्ल्ड कप के नॉकआउट स्टेज पर मिली हार के बाद जान से मारने की धमकी मिली थी. ये धमकी उन्हें सोशल मीडिया पर मिली थी. 2011 वर्ल्ड कप के नॉकआउट स्टेज पर साउथ अफ्रीका को न्यूजीलैंड के हाथों 49 रन से हार का सामना करना पड़ा था. उस मैच में 222 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए साउथ अफ्रीका 170 रन पर ऑलआउट हो गई थी. 2011 वर्ल्ड कप का वो नॉकआउट मैच मीरपुर में खेला गया था, जिसमें डुप्लेसी ने नंबर 6 पर खेलते हुए 43 गेंद पर 36 रन बनाए थे. लेकिन उनकी ये पारी टीम को जीत नहीं दिला सकी. और उस मैच के बाद डुप्लेसी को जिस मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ा, उसका जिक्र उन्होंने अब किया है. 2011 वर्ल्ड कप के नॉकआउट मैच में डुप्लेसी उस वक्त बैटिंग पर आए जब प्रोटियाज टीम के 27.4 ओवर में 121 रन थे. नाथन मैक्कुलम ने जेपी ड्यूमनी को आउट कर दिया था, जिन्होंने 12 गेंदों पर 3 रन बनाए थे. लेकिन जिस ओवर में डुप्लेसी बल्लेबाजी पर आए, साउथ अफ्रीका की हालत और खराब हो गई. एबी डीविलियर्स, जिनकी आंखें क्रीज पर जम गई थी, वो रनआउट हो गए. डिविलियर्स ने 4 चौके के साथ 35 रन बनाए थे. एबी के आउट होने के बाद प्रोटियाज टीम का स्कोर 8 विकेट पर 146 रन हो गया. 43वें ओवर में जैकब ओरम के फाफ डुप्लेसी का विकेट लेते ही प्रोटियाज टीम हार के मुहाने पर आ खड़ी हो गई. नीचले क्रम के किसी बल्लेबाज ने डबल डिजिट का फीगर नहीं छुआ. और इस तरह साउथ अफ्रीका 2011 वर्ल्ड कप की खिताबी रेस से बाहर हो गया था.
वर्ल्ड कप का वो नॉकआउट मैच मीरपुर में खेला गया था, जिसमें उस कप्तान का कमाल भी टीम को जीत नहीं दिला सका था. साउथ अफ्रीका के पूर्व कप्तान फाफ डु प्लेसी ने पुराने मुर्दे उखाड़े हैं और ऐसा करते हुए उन्होंने एक बड़ा खुलासा किया है. डुप्लेसी ने कहा है कि उन्हें और उनकी पत्नी इमारी विजर को दो हज़ार ग्यारह वर्ल्ड कप के नॉकआउट स्टेज पर मिली हार के बाद जान से मारने की धमकी मिली थी. ये धमकी उन्हें सोशल मीडिया पर मिली थी. दो हज़ार ग्यारह वर्ल्ड कप के नॉकआउट स्टेज पर साउथ अफ्रीका को न्यूजीलैंड के हाथों उनचास रन से हार का सामना करना पड़ा था. उस मैच में दो सौ बाईस रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए साउथ अफ्रीका एक सौ सत्तर रन पर ऑलआउट हो गई थी. दो हज़ार ग्यारह वर्ल्ड कप का वो नॉकआउट मैच मीरपुर में खेला गया था, जिसमें डुप्लेसी ने नंबर छः पर खेलते हुए तैंतालीस गेंद पर छत्तीस रन बनाए थे. लेकिन उनकी ये पारी टीम को जीत नहीं दिला सकी. और उस मैच के बाद डुप्लेसी को जिस मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ा, उसका जिक्र उन्होंने अब किया है. दो हज़ार ग्यारह वर्ल्ड कप के नॉकआउट मैच में डुप्लेसी उस वक्त बैटिंग पर आए जब प्रोटियाज टीम के सत्ताईस.चार ओवर में एक सौ इक्कीस रन थे. नाथन मैक्कुलम ने जेपी ड्यूमनी को आउट कर दिया था, जिन्होंने बारह गेंदों पर तीन रन बनाए थे. लेकिन जिस ओवर में डुप्लेसी बल्लेबाजी पर आए, साउथ अफ्रीका की हालत और खराब हो गई. एबी डीविलियर्स, जिनकी आंखें क्रीज पर जम गई थी, वो रनआउट हो गए. डिविलियर्स ने चार चौके के साथ पैंतीस रन बनाए थे. एबी के आउट होने के बाद प्रोटियाज टीम का स्कोर आठ विकेट पर एक सौ छियालीस रन हो गया. तैंतालीसवें ओवर में जैकब ओरम के फाफ डुप्लेसी का विकेट लेते ही प्रोटियाज टीम हार के मुहाने पर आ खड़ी हो गई. नीचले क्रम के किसी बल्लेबाज ने डबल डिजिट का फीगर नहीं छुआ. और इस तरह साउथ अफ्रीका दो हज़ार ग्यारह वर्ल्ड कप की खिताबी रेस से बाहर हो गया था.
- फ़िल्टर करें : प्रश्न : उत्तर : • रोज़गारविहीन आर्थिक वृद्धि का युवाओं पर प्रभाव। • रोज़गारविहीन आर्थिक वृद्धि का कारण एवं इसके निवारण के उपाय। • रोज़गारविहीन आर्थिक वृद्धि को स्पष्ट करें। • रोज़गारविहीन आर्थिक वृद्धि के कारण एवं युवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव बताएँ। • रोज़गारविहीन आर्थिक वृद्धि को दूर करने के उपाय बताते हुए अंत में निष्कर्ष लिखें। रोज़गारविहीन आर्थिक वृद्धि का तात्पर्य सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि की तुलना में रोज़गार सृजन कम होना है। आर्थिक सिद्धांत यह मानता है कि जिस देश का सकल घरेलू उत्पाद तेज़ी से बढ़ता है वहाँ रोज़गार सृजन उसी अनुपात में तीव्रता से होता है। परंतु कई कारणों से भारत में यह संभव नहीं हुआ, जिसका दुष्परिणाम विशेषकर युवाओं पर पड़ता है। एनएसएसओ (NSSO) तथा लेबर ब्यूरो के आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि पिछले डेढ़ दशक में भारत की जीडीपी जिस गति से आगे बढ़ी है उस गति से रोज़गार में वृद्धि नहीं हुई है। रोज़गारविहीन इस विकास के निम्नलिखित कारण हैंः - भारतीय अर्थव्यवस्था का प्राथमिक क्षेत्र से सेवा क्षेत्र प्रधान अर्थव्यवस्था बन जाना, जबकि सामान्य तौर पर कोई अर्थव्यवस्था प्राथमिक क्षेत्र से द्वितीयक और तब सेवा क्षेत्र प्रधान अर्थव्यवस्था बनती है। - द्वितीयक क्षेत्र के अल्प विकास के कारण रोज़गार का सृजन आवश्यकतानुसार नहीं हो सका। - बुनियादी ढाँचे के अल्प विकास से उद्योगों का विकास प्रभावित होना। - शिक्षा प्रणाली में व्यावसायिक शिक्षा का अभाव। - श्रम कानूनों की जटिलता आदि। उपर्युक्त कारणों से भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड का बेहतर दोहन नहीं किया ज़ा सका। भारत की लगभग दो-तिहाई आबादी 35 वर्ष से कम की है। यह युवा ऊर्ज़ा बेहतर रोज़गार के अभाव में जड़ता एवं अवसाद की शिकार हो रही है, जिसके कारण वह आपराधिक गतिविधियों की तरफ ज़्यादा उन्मुख हो रही है। कश्मीर में युवाओं द्वारा पैसे लेकर पत्थर फेंकना इसका प्रमुख उदाहरण है। रोज़गारविहीन संवृद्धि के मुद्दों के समाधान के लिये कई प्रयास किये जाने चाहिये, जैसे- श्रम कानूनों का सरलीकरण, शिक्षा को रोज़गार उन्मुख बनाने पर बल, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के विकास पर बल, पूंजी प्रधान उद्योगों की बजाय श्रम प्रधान उद्योगों को ज़्यादा वरीयता प्रदान करना आदि। सरकार ने रोज़गार सृजन के लिये 'मेक इन इंडिया, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्किल इंडिया, स्टार्ट अप एवं स्टैंडअप जैसे कार्यकमों को शुरू किया है। वस्ततुः रोज़गारविहीन संवृद्धि देश के डेमोग्राफिक लाभांश के सदुपयोग में बाधा पहुँचाती है, जिससे युवाओं में निराशा पनपती है। अतः आवश्यक उपायों को अपनाकर आर्थिक संवृद्धि एवं रोज़गार सृजन के अनुपात को संतुलित करना चाहिये।
- फ़िल्टर करें : प्रश्न : उत्तर : • रोज़गारविहीन आर्थिक वृद्धि का युवाओं पर प्रभाव। • रोज़गारविहीन आर्थिक वृद्धि का कारण एवं इसके निवारण के उपाय। • रोज़गारविहीन आर्थिक वृद्धि को स्पष्ट करें। • रोज़गारविहीन आर्थिक वृद्धि के कारण एवं युवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव बताएँ। • रोज़गारविहीन आर्थिक वृद्धि को दूर करने के उपाय बताते हुए अंत में निष्कर्ष लिखें। रोज़गारविहीन आर्थिक वृद्धि का तात्पर्य सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि की तुलना में रोज़गार सृजन कम होना है। आर्थिक सिद्धांत यह मानता है कि जिस देश का सकल घरेलू उत्पाद तेज़ी से बढ़ता है वहाँ रोज़गार सृजन उसी अनुपात में तीव्रता से होता है। परंतु कई कारणों से भारत में यह संभव नहीं हुआ, जिसका दुष्परिणाम विशेषकर युवाओं पर पड़ता है। एनएसएसओ तथा लेबर ब्यूरो के आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि पिछले डेढ़ दशक में भारत की जीडीपी जिस गति से आगे बढ़ी है उस गति से रोज़गार में वृद्धि नहीं हुई है। रोज़गारविहीन इस विकास के निम्नलिखित कारण हैंः - भारतीय अर्थव्यवस्था का प्राथमिक क्षेत्र से सेवा क्षेत्र प्रधान अर्थव्यवस्था बन जाना, जबकि सामान्य तौर पर कोई अर्थव्यवस्था प्राथमिक क्षेत्र से द्वितीयक और तब सेवा क्षेत्र प्रधान अर्थव्यवस्था बनती है। - द्वितीयक क्षेत्र के अल्प विकास के कारण रोज़गार का सृजन आवश्यकतानुसार नहीं हो सका। - बुनियादी ढाँचे के अल्प विकास से उद्योगों का विकास प्रभावित होना। - शिक्षा प्रणाली में व्यावसायिक शिक्षा का अभाव। - श्रम कानूनों की जटिलता आदि। उपर्युक्त कारणों से भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड का बेहतर दोहन नहीं किया ज़ा सका। भारत की लगभग दो-तिहाई आबादी पैंतीस वर्ष से कम की है। यह युवा ऊर्ज़ा बेहतर रोज़गार के अभाव में जड़ता एवं अवसाद की शिकार हो रही है, जिसके कारण वह आपराधिक गतिविधियों की तरफ ज़्यादा उन्मुख हो रही है। कश्मीर में युवाओं द्वारा पैसे लेकर पत्थर फेंकना इसका प्रमुख उदाहरण है। रोज़गारविहीन संवृद्धि के मुद्दों के समाधान के लिये कई प्रयास किये जाने चाहिये, जैसे- श्रम कानूनों का सरलीकरण, शिक्षा को रोज़गार उन्मुख बनाने पर बल, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के विकास पर बल, पूंजी प्रधान उद्योगों की बजाय श्रम प्रधान उद्योगों को ज़्यादा वरीयता प्रदान करना आदि। सरकार ने रोज़गार सृजन के लिये 'मेक इन इंडिया, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्किल इंडिया, स्टार्ट अप एवं स्टैंडअप जैसे कार्यकमों को शुरू किया है। वस्ततुः रोज़गारविहीन संवृद्धि देश के डेमोग्राफिक लाभांश के सदुपयोग में बाधा पहुँचाती है, जिससे युवाओं में निराशा पनपती है। अतः आवश्यक उपायों को अपनाकर आर्थिक संवृद्धि एवं रोज़गार सृजन के अनुपात को संतुलित करना चाहिये।
नयी दिल्ली, 6 अप्रैल : भारत अगले साल एक जनवरी से शुरू होने वाले चार साल के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च सांख्यिकीय निकाय के लिए चुना गया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्विटर पर यह जानकारी साझा की. इस मामले के जानकार ने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग के चुनाव में 53 में से 46 वोट हासिल करके शानदार जीत हासिल की. उन्होंने कहा, "भारत एक जनवरी 2024 से शुरू होने वाले चार साल के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च सांख्यिकीय निकाय के लिए चुना गया! टीम को एक प्रतिस्पर्धी चुनाव में इतनी मजबूती से जीत हासिल करने के लिए बधाई. " जयशंकर ने कहा कि सांख्यिकी, विविधता और जनसांख्यिकी के क्षेत्र में भारत की विशेषज्ञता ने उसे संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग में स्थान दिलाया है.
नयी दिल्ली, छः अप्रैल : भारत अगले साल एक जनवरी से शुरू होने वाले चार साल के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च सांख्यिकीय निकाय के लिए चुना गया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्विटर पर यह जानकारी साझा की. इस मामले के जानकार ने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग के चुनाव में तिरेपन में से छियालीस वोट हासिल करके शानदार जीत हासिल की. उन्होंने कहा, "भारत एक जनवरी दो हज़ार चौबीस से शुरू होने वाले चार साल के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च सांख्यिकीय निकाय के लिए चुना गया! टीम को एक प्रतिस्पर्धी चुनाव में इतनी मजबूती से जीत हासिल करने के लिए बधाई. " जयशंकर ने कहा कि सांख्यिकी, विविधता और जनसांख्यिकी के क्षेत्र में भारत की विशेषज्ञता ने उसे संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग में स्थान दिलाया है.
हमीरपुर-राधाकृष्णन मेडिकल कालेज हमीरपुर के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. अनिल वर्मा ने कहा कि राधास्वामी चैरिटेबल अस्पताल भोटा में डाक्टर अपनी बेहतर सेवाएं दे रहे हैं। तथ्यहीन बातें कर डाक्टरों को हतोत्साहित न करें। व्यवस्थाओं को लेकर की जा रही बातें तथ्यहीन हैं। डा. अनिल वर्मा ने बताया कि राधास्वामी चैरिटेबल हास्पिटल भोटा को कोविड केयर सेंटर बनाया गया है। वहां पर 11 अप्रैल 2020 से लगातार डा. राधाकृष्णन गवर्नमेंट मेडिकल कालेज हमीरपुर का स्टाफ चौबिसों घंटे पूरी लगन के साथ सरकार द्वारा जारी निर्देशों व कोविड-19 के संबंध में जारी ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल के अनुसार उपचाराधीन मरीजों का इलाज कर रहा है। वहां पर उपचाराधीन मरीजों को एक 50 बिस्तरों के बड़े वार्ड में रखा गया है जिसमें वेंटिलेशन व ताजा हवा की पूरी व्यवस्था है। वार्ड की सेनेटाइजेशन व साफ-सफाई सरकार द्वारा जारी निर्देशों व तय मानकों के तहत की जाती है। कोविड सेंटर में उपचाराधीन मरीजों का इलाज भी सरकार द्वारा जारी ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल व निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है। सब उपचाराधीन मरीजों को मास्क प्रदान किए गए हैं व सभी को इलाज के साथ स्वास्थ्यवर्धक भोजन इत्यादि दिया जा रहा है ताकि वे शीघ्र स्वस्थ हों। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर का स्टाफ बैचवाइज कोविड केयर सेंटर भोटा में ड्यूटी कर रहा है व लगातार एक सप्ताह तक भोटा में ही रहता है। प्रत्येक बैच में 20 से 22 लोग ड्यूटी करते हैं, जिसमें चार डाक्टर, छह स्टाफ नर्स व अन्य श्रेणीयों के कर्मचारी होते है। ड्यूटी पर तैनात डाक्टर व अन्य स्टाफ कोविड केयर सेंटर भोटा में उपचाराधीन मरीजों के वार्ड के साथ ही दिन-रात ड्यूटी रूम में होते हैं। उपचाराधीन मरीजों के वार्ड में प्रतिदिन स्वास्थ्य जांच व उपचार के लिए राउंड होते है व उनके इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है। डा. अनिल वर्मा ने बताया कि कोविड केयर सेंटर भोटा के नोडल ऑफिसर का अतिरिक्त प्रभार उनके पास होने के नाते वह स्वयं प्रतिदिन वहां जाकर व्यवस्थाओं को जांचते है व अगर कोई कमी उनके ध्यान में आए तो उसे तुरंत दूर किया जाता है ताकि उपचाराधीन मरीजों व कठिन परिस्थतियों में ड्यूटी कर रहे स्टाफ को परेशानी न हो। डा. अनिल वर्मा ने बताया कि मेडिकल कालेज हमीरपुर में पल्मोनरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर भी कोविड केयर सेंटर भोटा के क्लीनिकल इंचार्ज बनाए गए हैं व वह भी उनके साथ भोटा में हर प्रकार के चिकित्सा सेवा व परामर्श हेतु उपलब्ध रहते हैं।
हमीरपुर-राधाकृष्णन मेडिकल कालेज हमीरपुर के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. अनिल वर्मा ने कहा कि राधास्वामी चैरिटेबल अस्पताल भोटा में डाक्टर अपनी बेहतर सेवाएं दे रहे हैं। तथ्यहीन बातें कर डाक्टरों को हतोत्साहित न करें। व्यवस्थाओं को लेकर की जा रही बातें तथ्यहीन हैं। डा. अनिल वर्मा ने बताया कि राधास्वामी चैरिटेबल हास्पिटल भोटा को कोविड केयर सेंटर बनाया गया है। वहां पर ग्यारह अप्रैल दो हज़ार बीस से लगातार डा. राधाकृष्णन गवर्नमेंट मेडिकल कालेज हमीरपुर का स्टाफ चौबिसों घंटे पूरी लगन के साथ सरकार द्वारा जारी निर्देशों व कोविड-उन्नीस के संबंध में जारी ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल के अनुसार उपचाराधीन मरीजों का इलाज कर रहा है। वहां पर उपचाराधीन मरीजों को एक पचास बिस्तरों के बड़े वार्ड में रखा गया है जिसमें वेंटिलेशन व ताजा हवा की पूरी व्यवस्था है। वार्ड की सेनेटाइजेशन व साफ-सफाई सरकार द्वारा जारी निर्देशों व तय मानकों के तहत की जाती है। कोविड सेंटर में उपचाराधीन मरीजों का इलाज भी सरकार द्वारा जारी ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल व निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है। सब उपचाराधीन मरीजों को मास्क प्रदान किए गए हैं व सभी को इलाज के साथ स्वास्थ्यवर्धक भोजन इत्यादि दिया जा रहा है ताकि वे शीघ्र स्वस्थ हों। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर का स्टाफ बैचवाइज कोविड केयर सेंटर भोटा में ड्यूटी कर रहा है व लगातार एक सप्ताह तक भोटा में ही रहता है। प्रत्येक बैच में बीस से बाईस लोग ड्यूटी करते हैं, जिसमें चार डाक्टर, छह स्टाफ नर्स व अन्य श्रेणीयों के कर्मचारी होते है। ड्यूटी पर तैनात डाक्टर व अन्य स्टाफ कोविड केयर सेंटर भोटा में उपचाराधीन मरीजों के वार्ड के साथ ही दिन-रात ड्यूटी रूम में होते हैं। उपचाराधीन मरीजों के वार्ड में प्रतिदिन स्वास्थ्य जांच व उपचार के लिए राउंड होते है व उनके इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है। डा. अनिल वर्मा ने बताया कि कोविड केयर सेंटर भोटा के नोडल ऑफिसर का अतिरिक्त प्रभार उनके पास होने के नाते वह स्वयं प्रतिदिन वहां जाकर व्यवस्थाओं को जांचते है व अगर कोई कमी उनके ध्यान में आए तो उसे तुरंत दूर किया जाता है ताकि उपचाराधीन मरीजों व कठिन परिस्थतियों में ड्यूटी कर रहे स्टाफ को परेशानी न हो। डा. अनिल वर्मा ने बताया कि मेडिकल कालेज हमीरपुर में पल्मोनरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर भी कोविड केयर सेंटर भोटा के क्लीनिकल इंचार्ज बनाए गए हैं व वह भी उनके साथ भोटा में हर प्रकार के चिकित्सा सेवा व परामर्श हेतु उपलब्ध रहते हैं।
राज एक्सप्रेस। दुनिया भर में हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस यानि इंटरनेशनल टाइगर डे के रूप में मनाया जाता है। आज के दिन लोगों को बाघों के संरक्षण के लिए जागरूक किया जाता है साथ में बाघों के आवास बचाने के लिए प्रेरित किया जाता है। क्योंकि बाघों का नाम दुनिया की उन प्रजातियों में शामिल है जिनकी आबादी तेजी से कम हो रही है। आज हम आपको अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस और देश के मशहूर बाघ अभ्यारण्य के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस : यह बात तो हम सभी जानते हैं कि देश ही नहीं बल्कि विश्व में बाघों की कम होती आबादी एक चिंता का विषय बन गई है। इनके संरक्षण के लिए दुनिया भर में सेव द टाइगर नाम से कुछ अभियान भी चलाए जा रहे हैं। लेकिन इसकी शुरुआत साल 2010 से हुई जब रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में एक सम्मेलन के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day) को मनाए जाने की घोषणा की गई थी। इसके अंतर्गत साल 2022 तक बाघों की संख्या को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत में कहां है बाघ अभ्यारण्य? भारत के राष्ट्रीय पशु बाघ को आप देश में कई जगहों पर देख सकते हैं। लेकिन इन्हें देखने के लिए भारत में सबसे मशहूर 5 बाघ अभ्यारण्य हैं जहां आप इन्हें बहुतायत में देख सकते हैं। बाघों को देखने के लिए आए दिन यहां लोग आते रहते हैं। जानते हैं इनके बारे में। 1. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व : यह बाघ अभ्यारण्य मध्य प्रदेश में बना हुआ है। देश में रॉयल बंगाल टाइगर्स इस जगह पर सबसे अधिक देखने को मिलते हैं। 2. पेरियार टाइगर रिजर्व : केरल में स्थित यह बाघ अभ्यारण्य आपको बाघों के साथ ही प्राकृतिक सुन्दरता के साथ रूबरू होने का भी मौका देता है। इस जगह आपको बंगाली बाघ, सफेद बाघ देखने को मिल जाएंगे। 3. सुंदरबन टाइगर रिजर्व : भारत के पश्चिम बंगाल में बना हुआ यह बाघ अभ्यारण्य रॉयल बंगाल टाइगर के लिए फेमस है। यहां घूमने के लिए आपको नाव का सहारा लेना पड़ता है। 4. जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व : उत्तराखंड में बना हुआ यह बाघ अभ्यारण्य 500 वर्ग किमी में फैला हुआ है। यहां आपको शानदार नजारा भी देखने को मिल सकता है। 5. रणथंभौर टाइगर रिजर्व : देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में बने बाघ अभ्यारण्य को देश के सबसे बड़े बाघ अभ्यारण्यों में से एक माना जाता है। यहां बाघ के साथ ही और भी जानवर देखने को मिल सकते हैं। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
राज एक्सप्रेस। दुनिया भर में हर साल उनतीस जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस यानि इंटरनेशनल टाइगर डे के रूप में मनाया जाता है। आज के दिन लोगों को बाघों के संरक्षण के लिए जागरूक किया जाता है साथ में बाघों के आवास बचाने के लिए प्रेरित किया जाता है। क्योंकि बाघों का नाम दुनिया की उन प्रजातियों में शामिल है जिनकी आबादी तेजी से कम हो रही है। आज हम आपको अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस और देश के मशहूर बाघ अभ्यारण्य के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस : यह बात तो हम सभी जानते हैं कि देश ही नहीं बल्कि विश्व में बाघों की कम होती आबादी एक चिंता का विषय बन गई है। इनके संरक्षण के लिए दुनिया भर में सेव द टाइगर नाम से कुछ अभियान भी चलाए जा रहे हैं। लेकिन इसकी शुरुआत साल दो हज़ार दस से हुई जब रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में एक सम्मेलन के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस को मनाए जाने की घोषणा की गई थी। इसके अंतर्गत साल दो हज़ार बाईस तक बाघों की संख्या को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत में कहां है बाघ अभ्यारण्य? भारत के राष्ट्रीय पशु बाघ को आप देश में कई जगहों पर देख सकते हैं। लेकिन इन्हें देखने के लिए भारत में सबसे मशहूर पाँच बाघ अभ्यारण्य हैं जहां आप इन्हें बहुतायत में देख सकते हैं। बाघों को देखने के लिए आए दिन यहां लोग आते रहते हैं। जानते हैं इनके बारे में। एक. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व : यह बाघ अभ्यारण्य मध्य प्रदेश में बना हुआ है। देश में रॉयल बंगाल टाइगर्स इस जगह पर सबसे अधिक देखने को मिलते हैं। दो. पेरियार टाइगर रिजर्व : केरल में स्थित यह बाघ अभ्यारण्य आपको बाघों के साथ ही प्राकृतिक सुन्दरता के साथ रूबरू होने का भी मौका देता है। इस जगह आपको बंगाली बाघ, सफेद बाघ देखने को मिल जाएंगे। तीन. सुंदरबन टाइगर रिजर्व : भारत के पश्चिम बंगाल में बना हुआ यह बाघ अभ्यारण्य रॉयल बंगाल टाइगर के लिए फेमस है। यहां घूमने के लिए आपको नाव का सहारा लेना पड़ता है। चार. जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व : उत्तराखंड में बना हुआ यह बाघ अभ्यारण्य पाँच सौ वर्ग किमी में फैला हुआ है। यहां आपको शानदार नजारा भी देखने को मिल सकता है। पाँच. रणथंभौर टाइगर रिजर्व : देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में बने बाघ अभ्यारण्य को देश के सबसे बड़े बाघ अभ्यारण्यों में से एक माना जाता है। यहां बाघ के साथ ही और भी जानवर देखने को मिल सकते हैं। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
साहेबगंजः बीएसके काॅलेज बरहरवा में विश्वविद्यालय स्थापना दिवस मनाया गया. आयोजन प्रभारी प्रधानाध्यापक डा. श्याम किशोर सिंह की अध्यक्षता में हुआ. मौके पर प्राणी विज्ञान के विभागाध्यक्ष डा. चंदन वोहरा ने विश्वविद्यालय में सत्र नियमित की चर्चा की. आज सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविधालय दुमका में CBCS पाठ्यक्रम के अंतर्गत पढ़ाई हो रही है एवं सत्र भी नियमित चल रहा है. यह विश्वविद्यालय के कुलपति डा. मनोरंजन सिन्हा की देन है. आज विश्वविद्यालय की एक अलग पहचान बन गयी है. कार्यक्रम को महाविद्यालय के वर्सर प्रो. विवेकानंद राय ने भी संबोधित किया. अंत में प्रभारी प्रधानाध्यापक डा. श्यामकिशोर सिंह ने विस्तार पुर्वक विश्वविद्यालय स्थापना पर चर्चा की एवं और कहा जब से विश्वविधालय अलग हुआ है तब से यह अपनी उन्नति के साथ शिखर पर है. संस्कृत विभाग के डा. अनिल कुमार सरकार ने भी अपने विचार को रखा. इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के NSS यूनिट के सभी पदाधिकारी मौजूद थे.
साहेबगंजः बीएसके काॅलेज बरहरवा में विश्वविद्यालय स्थापना दिवस मनाया गया. आयोजन प्रभारी प्रधानाध्यापक डा. श्याम किशोर सिंह की अध्यक्षता में हुआ. मौके पर प्राणी विज्ञान के विभागाध्यक्ष डा. चंदन वोहरा ने विश्वविद्यालय में सत्र नियमित की चर्चा की. आज सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविधालय दुमका में CBCS पाठ्यक्रम के अंतर्गत पढ़ाई हो रही है एवं सत्र भी नियमित चल रहा है. यह विश्वविद्यालय के कुलपति डा. मनोरंजन सिन्हा की देन है. आज विश्वविद्यालय की एक अलग पहचान बन गयी है. कार्यक्रम को महाविद्यालय के वर्सर प्रो. विवेकानंद राय ने भी संबोधित किया. अंत में प्रभारी प्रधानाध्यापक डा. श्यामकिशोर सिंह ने विस्तार पुर्वक विश्वविद्यालय स्थापना पर चर्चा की एवं और कहा जब से विश्वविधालय अलग हुआ है तब से यह अपनी उन्नति के साथ शिखर पर है. संस्कृत विभाग के डा. अनिल कुमार सरकार ने भी अपने विचार को रखा. इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के NSS यूनिट के सभी पदाधिकारी मौजूद थे.
नए साल से बिहार बोर्ड अपने कार्यप्रणाली में ढेर सारे बदलाव करने जा रहा है. जिसके तहत नए साल से अब बिहार बोर्ड में फाइलों का ट्रान्सफर माउस से किया जायेगा. जिससे की छात्रों के लिए अनेक विकल्पों का दरवाज़ा खुल जायेगा. ज्ञात हो इन दिनों बिहार बोर्ड अपने काम करने के अंदाज़ को बदलने में लगा हुआ है. जिसका असर पिछले एक साल में देखने को भी मिला है. आज बिहार बोर्ड दूसरों के लिए उदाहरण का श्रोत बने हुए है. आज हम बात करेंगे सौरभ सुनील तिवारी की. सौरभ सुनील तिवारी भारतीय क्रिकेट टीम के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक माने जाते है. सौरभ धोनी के बहुत बड़े फैन में से एक थे. धोनी की तरह ही उन्होंने अपने आप को एक समय में ढालना शुरू कर दिया था. सौरभ मूल रूप से बिहार के निवासी है. सौरभ का जन्म तो बिहार में हुआ था मगर सौरभ का परिवेश झारखण्ड के जमशेदपुर जिले में हुआ है. 14 साल की उम्र में सौरभ ने झारखण्ड के लिए खेलना शुरू कर दिया था. जहाँ से उनके क्रिकेट करियर का शुभारम्भ हो गया था. अपने करियर में उन्होंने कुल मिलाकर 3 odi खेले है जहाँ उन्होंने कुल मिलाकर 49 रन बनाए है. सभी whatsapp यूज़र्स को काफी लम्बे समय से डार्क मोड फीचर का इंतज़ार था. जिसका इंतज़ार अब ख़त्म हो चूका है. whatsapp ने सभी यूजर्स के लिए इस डार्क मोड फीचर को लांच कर दिया है. इस फीचर से अब सभी whatsapp यूजर का बैकग्राउंड स्क्रीन ब्लैक हो जायेगा और उसपर वाइट कलर का टेक्स्ट लिखा जायेगा. हालांकि अभी ये फीचर सिमित मोबाइल फ़ोन में ही उपलब्ध करवाया गया है. लेकिन एक बार टेस्टिंग के बाद इस फीचर को सभी यूजर के लिए उपलब्ध करवा दिया जायेगा. कपूर और मलाइका अरोड़ा का रिश्ता किसी से भी अब छुप्पा नहीं है. दोनो कई मौकों पर एक साथ नज़र आए है. चाहे वो कोई वर्लड टूर हो या फिर कोइ लंच डेट. कई जगहों पर दोनो को एक साथ स्पॉट किया गया है. एक बार फिर क्रिसमस के मौके पर दोनो सेलेब्रीटिज़ एक साथ नज़र आए. जहां पर ये दोनो मलाइका की मां के घर क्रिसमस मनाने एक साथ पहुंचे थे. बिहार सरकार के वादे के अनुसार राजधानी पटना में पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की प्रतिमा लगा दी गयी है. जिसका अनावरण 28 दिसंबर को किया जायेगा. आपको बता दे अरुण जेटली की यह प्रतिमा पटना के कंकडबाग स्थित पार्क नंबर-3 में लगायी गयी है. ज्ञात हो इसी वर्ष 24 अगस्त को अरुण जेटली ने दुनिया को अलविदा कह दिया था. जिसके पश्चात बिहार सरकार ने अरुण जेटली के बिहार राजनीती में योगदान को ध्यान में रखते हुए उनकी प्रतिमा को बनवाने का एलान किया था. जल जीवन हरियाली यात्रा के तहत अब मुख्यमंत्री नितीश कुमार बिहार के बेगुसराय जिले पहुंचेंगे. जहाँ वो बेगुसराय के साहबपुर कमाल प्रखंड के साद्पुर पूर्वी गाँव का भ्रमण करेंगे. जिसकी तैयारियां प्रशासिनिक स्तर पर शुरू की जा चुकी है. ख़बरों के अनुसार 4 जनवरी को मुख्यमंत्री नितीश कुमार का हेलीकाप्टर गंडक नदी के किनारे राजा जी के फ़ार्म हाउस पर उतरेगा. जहाँ से वो सड़क मार्ग होते हुए पंचायत भवन जायेंगे. और वहां लगभग 6 एकड़ में बने पोखर का भ्रमण करेंगे. जल जीवन हरियाली यात्रा के तहत लगातार मुख्यमंत्री नितीश कुमार बिहार के जिलों का भ्रमण कर जगह जगह जल जीवन हरियाली यात्रा के तहत शुरू की गयी योजनाओं का भी जायजा ले रहे है. इसी क्रम में अब मुख्यमंत्री नितीश कुमार बिहार के शेखपूरा जिले में पहुँचने वाले है. जहाँ पर वो मतस्य पालन और जल संचयन का अवलोकन करेंगे. आपको बता दे मुख्यमंत्री नितीश कुमार शेखपूरा भ्रमण के बाद उसी दिन राजगीर के लिए रवाना हो जायेंगे. ज्ञात हो मुख्यमंत्री नितीश के आगमन की तैयारियां प्रशासिनिक स्तर पर शुरू हो चुकी है. भाजपा के बड़बोले नेता गिरिराज सिंह ने एक बार फिर सरकार का पक्ष रखते हुए CAA के समर्थन में अपनी आवाज़ उठायी है. जिसके तहत हाल ही में CAA और NRC के मुद्दे पर बेगुसराई जिले में निकाले गए समर्थन रैली का हिस्सा बने गिरिराज सिंह अति प्रसन्न है. जिसकी तस्वीर उन्होंने खुद अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर की है और विपक्ष पर तंज कसते हुए यह लिखा है कि NRC और CAA के समर्थन में भाजपा ने इस रैली का आवाहन किया था. देशभक्ति दिल में है अगर हम बाहर निकल गए तो पकिस्तान परस्तों की खैर नहीं. CBSE की 12वी की परीक्षा साल 2019 के पैटर्न पर होगी. CBSE के सभी 12वी के प्राइवेट छात्रों के लिए अहम् सुचना. CBSE ने हाल ही में सभी छात्रों के लिए एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है जिसके तहत बोर्ड ने यह साफ कह दिया है कि आगामी इंटर की परीक्षा में प्राइवेट छात्रों को 6 सब्जेक्ट्स की परीक्षा,बोर्ड द्वारा जारी किया गए साल 2019 के पैटर्न पर ही होगी. आपकी जानकारी के लिए आपको बात दे CBSE ने इस साल सभी प्राइवेट और नियमित छात्रों का एकसाथ परीक्षा लेने का निर्देश जारी कर दिया है. राजद के मंत्री भाई वीरेन्द्र ने सुशिल मोदी के उस बयान पर तंज कसा है जिसमे उन्होंने कहा था कि झारखण्ड में अब भी 33. 4 फीसदी वोट के साथ भाजपा का जनाधार बाकी की पार्टियों से ज्यादा है. इसी पर भाई वीरेन्द्र ने कहा है कि यहाँ झारखण्ड में भाजपा चुनाव हार गयी और सुशिल मोदी जी कह रहे है कि झारखण्ड में भाजपा का वोट शेयर बढ़ा है. इससे यही पता चला है कि सुशिल मोदी कितने बड़े बयानवीर है. ठंढ के साथ साथ अब राजधानी पटना समेत कई जिलों में कोहरे का असर देखने को मिलने लगा है. कोहरे के बढ़ जाने से विसिबिलिटी कम हो जाती है जिसका सीधा असर वाहनों और ट्रेनों के परिचालन पर देखने को मिलता है. ऐसा ही कुछ रेलवे विभाग में भी देखने को मिल रहा है. कोहरे के कारण बिहार से संचालित होने वाली कई ट्रेनों के समय में फेर बदल किया गया है तो वहीं कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है. झारखण्ड के नव नियुक्त मुख्यमंत्री आधिकारिक तौर पर 29 दिसम्बर को शपथ ग्रहण करने वाले है. ऐसे में लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी के अटकले भी लगाये जाने लगे है. जिसपर उनके बेटे तेजस्वी यादव ने सफाई पेश की है और कहा है कि वह स्वस्थ नहीं है. इसिलिय वह हेमंत सोरेन जी के शपथ समारोह में शामिल नहीं हो पाएंगे. झारखण्ड विधानसभा चुनाव में गठबंधन सरकार को मिली जीत के बाद हर कोई खुशियाँ मना रहा है. जिसका श्रेय कहीं न कहीं लालू यादव को भी दिया जा रहा है. इसी क्रम में झारखण्ड के नवनियुक्त मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखण्ड में नयी सरकार के गठन को लेकर लालू यादव से मिलने पहुंचे. जहाँ दोनों नेताओं ने झारखण्ड में संभावित मंत्रिमंडल में मंत्रियों की भूमिका पर विचार विमर्श किया.
नए साल से बिहार बोर्ड अपने कार्यप्रणाली में ढेर सारे बदलाव करने जा रहा है. जिसके तहत नए साल से अब बिहार बोर्ड में फाइलों का ट्रान्सफर माउस से किया जायेगा. जिससे की छात्रों के लिए अनेक विकल्पों का दरवाज़ा खुल जायेगा. ज्ञात हो इन दिनों बिहार बोर्ड अपने काम करने के अंदाज़ को बदलने में लगा हुआ है. जिसका असर पिछले एक साल में देखने को भी मिला है. आज बिहार बोर्ड दूसरों के लिए उदाहरण का श्रोत बने हुए है. आज हम बात करेंगे सौरभ सुनील तिवारी की. सौरभ सुनील तिवारी भारतीय क्रिकेट टीम के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक माने जाते है. सौरभ धोनी के बहुत बड़े फैन में से एक थे. धोनी की तरह ही उन्होंने अपने आप को एक समय में ढालना शुरू कर दिया था. सौरभ मूल रूप से बिहार के निवासी है. सौरभ का जन्म तो बिहार में हुआ था मगर सौरभ का परिवेश झारखण्ड के जमशेदपुर जिले में हुआ है. चौदह साल की उम्र में सौरभ ने झारखण्ड के लिए खेलना शुरू कर दिया था. जहाँ से उनके क्रिकेट करियर का शुभारम्भ हो गया था. अपने करियर में उन्होंने कुल मिलाकर तीन odi खेले है जहाँ उन्होंने कुल मिलाकर उनचास रन बनाए है. सभी whatsapp यूज़र्स को काफी लम्बे समय से डार्क मोड फीचर का इंतज़ार था. जिसका इंतज़ार अब ख़त्म हो चूका है. whatsapp ने सभी यूजर्स के लिए इस डार्क मोड फीचर को लांच कर दिया है. इस फीचर से अब सभी whatsapp यूजर का बैकग्राउंड स्क्रीन ब्लैक हो जायेगा और उसपर वाइट कलर का टेक्स्ट लिखा जायेगा. हालांकि अभी ये फीचर सिमित मोबाइल फ़ोन में ही उपलब्ध करवाया गया है. लेकिन एक बार टेस्टिंग के बाद इस फीचर को सभी यूजर के लिए उपलब्ध करवा दिया जायेगा. कपूर और मलाइका अरोड़ा का रिश्ता किसी से भी अब छुप्पा नहीं है. दोनो कई मौकों पर एक साथ नज़र आए है. चाहे वो कोई वर्लड टूर हो या फिर कोइ लंच डेट. कई जगहों पर दोनो को एक साथ स्पॉट किया गया है. एक बार फिर क्रिसमस के मौके पर दोनो सेलेब्रीटिज़ एक साथ नज़र आए. जहां पर ये दोनो मलाइका की मां के घर क्रिसमस मनाने एक साथ पहुंचे थे. बिहार सरकार के वादे के अनुसार राजधानी पटना में पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की प्रतिमा लगा दी गयी है. जिसका अनावरण अट्ठाईस दिसंबर को किया जायेगा. आपको बता दे अरुण जेटली की यह प्रतिमा पटना के कंकडबाग स्थित पार्क नंबर-तीन में लगायी गयी है. ज्ञात हो इसी वर्ष चौबीस अगस्त को अरुण जेटली ने दुनिया को अलविदा कह दिया था. जिसके पश्चात बिहार सरकार ने अरुण जेटली के बिहार राजनीती में योगदान को ध्यान में रखते हुए उनकी प्रतिमा को बनवाने का एलान किया था. जल जीवन हरियाली यात्रा के तहत अब मुख्यमंत्री नितीश कुमार बिहार के बेगुसराय जिले पहुंचेंगे. जहाँ वो बेगुसराय के साहबपुर कमाल प्रखंड के साद्पुर पूर्वी गाँव का भ्रमण करेंगे. जिसकी तैयारियां प्रशासिनिक स्तर पर शुरू की जा चुकी है. ख़बरों के अनुसार चार जनवरी को मुख्यमंत्री नितीश कुमार का हेलीकाप्टर गंडक नदी के किनारे राजा जी के फ़ार्म हाउस पर उतरेगा. जहाँ से वो सड़क मार्ग होते हुए पंचायत भवन जायेंगे. और वहां लगभग छः एकड़ में बने पोखर का भ्रमण करेंगे. जल जीवन हरियाली यात्रा के तहत लगातार मुख्यमंत्री नितीश कुमार बिहार के जिलों का भ्रमण कर जगह जगह जल जीवन हरियाली यात्रा के तहत शुरू की गयी योजनाओं का भी जायजा ले रहे है. इसी क्रम में अब मुख्यमंत्री नितीश कुमार बिहार के शेखपूरा जिले में पहुँचने वाले है. जहाँ पर वो मतस्य पालन और जल संचयन का अवलोकन करेंगे. आपको बता दे मुख्यमंत्री नितीश कुमार शेखपूरा भ्रमण के बाद उसी दिन राजगीर के लिए रवाना हो जायेंगे. ज्ञात हो मुख्यमंत्री नितीश के आगमन की तैयारियां प्रशासिनिक स्तर पर शुरू हो चुकी है. भाजपा के बड़बोले नेता गिरिराज सिंह ने एक बार फिर सरकार का पक्ष रखते हुए CAA के समर्थन में अपनी आवाज़ उठायी है. जिसके तहत हाल ही में CAA और NRC के मुद्दे पर बेगुसराई जिले में निकाले गए समर्थन रैली का हिस्सा बने गिरिराज सिंह अति प्रसन्न है. जिसकी तस्वीर उन्होंने खुद अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर की है और विपक्ष पर तंज कसते हुए यह लिखा है कि NRC और CAA के समर्थन में भाजपा ने इस रैली का आवाहन किया था. देशभक्ति दिल में है अगर हम बाहर निकल गए तो पकिस्तान परस्तों की खैर नहीं. CBSE की बारहवी की परीक्षा साल दो हज़ार उन्नीस के पैटर्न पर होगी. CBSE के सभी बारहवी के प्राइवेट छात्रों के लिए अहम् सुचना. CBSE ने हाल ही में सभी छात्रों के लिए एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है जिसके तहत बोर्ड ने यह साफ कह दिया है कि आगामी इंटर की परीक्षा में प्राइवेट छात्रों को छः सब्जेक्ट्स की परीक्षा,बोर्ड द्वारा जारी किया गए साल दो हज़ार उन्नीस के पैटर्न पर ही होगी. आपकी जानकारी के लिए आपको बात दे CBSE ने इस साल सभी प्राइवेट और नियमित छात्रों का एकसाथ परीक्षा लेने का निर्देश जारी कर दिया है. राजद के मंत्री भाई वीरेन्द्र ने सुशिल मोदी के उस बयान पर तंज कसा है जिसमे उन्होंने कहा था कि झारखण्ड में अब भी तैंतीस. चार फीसदी वोट के साथ भाजपा का जनाधार बाकी की पार्टियों से ज्यादा है. इसी पर भाई वीरेन्द्र ने कहा है कि यहाँ झारखण्ड में भाजपा चुनाव हार गयी और सुशिल मोदी जी कह रहे है कि झारखण्ड में भाजपा का वोट शेयर बढ़ा है. इससे यही पता चला है कि सुशिल मोदी कितने बड़े बयानवीर है. ठंढ के साथ साथ अब राजधानी पटना समेत कई जिलों में कोहरे का असर देखने को मिलने लगा है. कोहरे के बढ़ जाने से विसिबिलिटी कम हो जाती है जिसका सीधा असर वाहनों और ट्रेनों के परिचालन पर देखने को मिलता है. ऐसा ही कुछ रेलवे विभाग में भी देखने को मिल रहा है. कोहरे के कारण बिहार से संचालित होने वाली कई ट्रेनों के समय में फेर बदल किया गया है तो वहीं कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है. झारखण्ड के नव नियुक्त मुख्यमंत्री आधिकारिक तौर पर उनतीस दिसम्बर को शपथ ग्रहण करने वाले है. ऐसे में लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी के अटकले भी लगाये जाने लगे है. जिसपर उनके बेटे तेजस्वी यादव ने सफाई पेश की है और कहा है कि वह स्वस्थ नहीं है. इसिलिय वह हेमंत सोरेन जी के शपथ समारोह में शामिल नहीं हो पाएंगे. झारखण्ड विधानसभा चुनाव में गठबंधन सरकार को मिली जीत के बाद हर कोई खुशियाँ मना रहा है. जिसका श्रेय कहीं न कहीं लालू यादव को भी दिया जा रहा है. इसी क्रम में झारखण्ड के नवनियुक्त मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखण्ड में नयी सरकार के गठन को लेकर लालू यादव से मिलने पहुंचे. जहाँ दोनों नेताओं ने झारखण्ड में संभावित मंत्रिमंडल में मंत्रियों की भूमिका पर विचार विमर्श किया.
भारत आयात के माध्यम से अपनी वार्षिक खाद्य तेल खपत का लगभग 56 प्रतिशत जरुरत को पूरा करता है। सालाना आयाात करीब 1. 3-1. 4 करोड़ टन है। मंदी की चपेट में जूझती दुनिया के बीच भारत में महंगाई पर लगाम लगाई जा रही है। सरकार के शानदार नीतियों और मजबूत इरादों के बदौलत आज महंगाई दर कम हुआ है। इस बीच सरकार ने खाने की चीजों से जुड़े प्रोडक्ट की खरीद में भी बढ़ोतरी की है। Edible Oil: बीते 2 महीने में कच्चा तेल ही नहीं बल्कि खाने के तेल (Oil) के दाम भी आम आदमी का तेल निकाल रहे हैं। अब गुजरात स्टेट एडिबल ऑयल एंड एडिबल ऑयल सीड्स एसोसिएशन (GSEOOSA) के अध्यक्ष ने आशंका व्यक्त की है कि देश में खाद्य तेल के दाम बढ़ेंगे। इंडोनेशिया और मलेशिया भारत को आरबीडी पामोलिन और कच्चे पाम तेल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। कच्चा सोयाबीन तेल मुख्य रूप से अर्जेंटीना और ब्राजील से आयात किया जाता है, जबकि कच्चा सूरजमुखी तेल मुख्य रूप से यूक्रेन, रूस और अर्जेंटीना से आयात किया जाता है। तेल वर्ष 2020-21 के पहले 10 महीनों के दौरान खाद्य तेल का आयात पिछले वर्ष की इसी अवधि में 1. 09 करोड़ टन से गिरकर 1. 03 करोड़ टन रह गया। सरकार ने आंकलन किया है कि देश का कुल लगभग 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल और अकेले उत्तर पूर्व में लगभग 9. 62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पाम ऑयल की खेती के लिए उपयुक्त है। मार्च के दौरान आरबीडी पामोलीन का आयात 90 प्रतिशत घटा है। पत्र में कहा गया है कि 9 नवंबर, 2011 को अधिसूचना क्रमांक 99/2011 के जरिये 5 अल्प विकसित सार्क देशों को भारत में बिना सीमा शुल्क के आयात की अनुमति प्रदान की गई है। एफएसएसएआई ने कहा है कि वह इस्तेमाल हो चुके खाना पकाने के तेल का संग्रह करने और उससे जैव-डीजल बनाने के लिए पारिस्थितिक तंत्र स्थापित करने के संबंध में भारतीय बायोडीजल एसोसिएशन के साथ बातचीत कर रहा है।
भारत आयात के माध्यम से अपनी वार्षिक खाद्य तेल खपत का लगभग छप्पन प्रतिशत जरुरत को पूरा करता है। सालाना आयाात करीब एक. तीन-एक. चार करोड़ टन है। मंदी की चपेट में जूझती दुनिया के बीच भारत में महंगाई पर लगाम लगाई जा रही है। सरकार के शानदार नीतियों और मजबूत इरादों के बदौलत आज महंगाई दर कम हुआ है। इस बीच सरकार ने खाने की चीजों से जुड़े प्रोडक्ट की खरीद में भी बढ़ोतरी की है। Edible Oil: बीते दो महीने में कच्चा तेल ही नहीं बल्कि खाने के तेल के दाम भी आम आदमी का तेल निकाल रहे हैं। अब गुजरात स्टेट एडिबल ऑयल एंड एडिबल ऑयल सीड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने आशंका व्यक्त की है कि देश में खाद्य तेल के दाम बढ़ेंगे। इंडोनेशिया और मलेशिया भारत को आरबीडी पामोलिन और कच्चे पाम तेल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। कच्चा सोयाबीन तेल मुख्य रूप से अर्जेंटीना और ब्राजील से आयात किया जाता है, जबकि कच्चा सूरजमुखी तेल मुख्य रूप से यूक्रेन, रूस और अर्जेंटीना से आयात किया जाता है। तेल वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस के पहले दस महीनों के दौरान खाद्य तेल का आयात पिछले वर्ष की इसी अवधि में एक. नौ करोड़ टन से गिरकर एक. तीन करोड़ टन रह गया। सरकार ने आंकलन किया है कि देश का कुल लगभग अट्ठाईस लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल और अकेले उत्तर पूर्व में लगभग नौ. बासठ लाख हेक्टेयर क्षेत्र पाम ऑयल की खेती के लिए उपयुक्त है। मार्च के दौरान आरबीडी पामोलीन का आयात नब्बे प्रतिशत घटा है। पत्र में कहा गया है कि नौ नवंबर, दो हज़ार ग्यारह को अधिसूचना क्रमांक निन्यानवे/दो हज़ार ग्यारह के जरिये पाँच अल्प विकसित सार्क देशों को भारत में बिना सीमा शुल्क के आयात की अनुमति प्रदान की गई है। एफएसएसएआई ने कहा है कि वह इस्तेमाल हो चुके खाना पकाने के तेल का संग्रह करने और उससे जैव-डीजल बनाने के लिए पारिस्थितिक तंत्र स्थापित करने के संबंध में भारतीय बायोडीजल एसोसिएशन के साथ बातचीत कर रहा है।
अगर परमतत्त्व अज्ञात रहा तो शास्त्राध्ययन निष्फल है; परमतत्त्व ज्ञात हो गया तो भी शास्त्राध्ययन निष्फल है क्योंकि लक्ष्य प्राप्त हो चुका है । आत्म-श्रद्धान, आत्मशान, और आत्म-सयंम सिर्फ़ यही तीन मिलकर जीवनको परम शक्तिकी ओर ले जाते हैं । वह परम आत्मा जो ब्रह्मांडके सिंहासन पर बैठा है न इस वक़्त जल्दीमें है, न पहिले कभी था, और न आइन्दा कभी होगा । -- जे० जी० हॉलेंड परमात्मा सिर्फ पवित्रा त्माका दूसरा नाम है । जब हम अपने परम्पराके ईश्वरसे सम्बन्ध तोड़ लेंगे, और अपने लफ़्फ़ाज़ीके खुदाको खत्म कर देंगे, तब परमात्मा हाज़िर होकर तुम्हारे हृदय में जीवन डाल देगा । जब हम परमात्माकी परिभाषा करने और उसका वर्णन करनेका प्रयास करते हैं, तो भाषा और विचार दोनों हमें छोड़ कर चले जाते हैं, और हम मूर्खो और जंगलियोंकी तरह लाचार हो जाते हैं। जिसने अपनी खुदीको जीत लिया ; जो शांत है; और जो सरदी - गरमी, सुख-दुख, मान अपमानमें एकसा रहता है, उसकी आत्मा ही परमात्मा है । मेरे लिये परमात्मा सत्य है, प्रेम है। परमात्मा के सिवा आत्मा किसी चीज़से संतोष नहीं मान सकती । जिन्हें दोनों वक़्त भूखे रहना पड़ता है उनसे मैं ईश्वरकी चर्चा कैसे करूँ ? उनके सामने तो परमात्मा केवल दाल-रोटीके ही रूपमें प्रकट हो सकते हैं। परमात्माकी झलक बिना नैतिक बुद्धि के विकासके सम्भव है। सिवाय परमात्माके किसी भी जीवसे वाह-वाही चाहना मूर्खता है । - -एडीसन परमात्मा सदैव कृपारूप है । जो शुद्ध अन्तःकरणसे उसकी मदद माँगता है, उसको वह अवश्य मिलती है । - विवेकानन्द क्या तुम पूछते हो परमात्मा कहाँ रहता है ? आत्मामें; और जब तक आत्मा शुद्ध और पवित्र न हो, उसमें परमात्माके लिये स्थान नहीं है ।
अगर परमतत्त्व अज्ञात रहा तो शास्त्राध्ययन निष्फल है; परमतत्त्व ज्ञात हो गया तो भी शास्त्राध्ययन निष्फल है क्योंकि लक्ष्य प्राप्त हो चुका है । आत्म-श्रद्धान, आत्मशान, और आत्म-सयंम सिर्फ़ यही तीन मिलकर जीवनको परम शक्तिकी ओर ले जाते हैं । वह परम आत्मा जो ब्रह्मांडके सिंहासन पर बैठा है न इस वक़्त जल्दीमें है, न पहिले कभी था, और न आइन्दा कभी होगा । -- जेशून्य जीशून्य हॉलेंड परमात्मा सिर्फ पवित्रा त्माका दूसरा नाम है । जब हम अपने परम्पराके ईश्वरसे सम्बन्ध तोड़ लेंगे, और अपने लफ़्फ़ाज़ीके खुदाको खत्म कर देंगे, तब परमात्मा हाज़िर होकर तुम्हारे हृदय में जीवन डाल देगा । जब हम परमात्माकी परिभाषा करने और उसका वर्णन करनेका प्रयास करते हैं, तो भाषा और विचार दोनों हमें छोड़ कर चले जाते हैं, और हम मूर्खो और जंगलियोंकी तरह लाचार हो जाते हैं। जिसने अपनी खुदीको जीत लिया ; जो शांत है; और जो सरदी - गरमी, सुख-दुख, मान अपमानमें एकसा रहता है, उसकी आत्मा ही परमात्मा है । मेरे लिये परमात्मा सत्य है, प्रेम है। परमात्मा के सिवा आत्मा किसी चीज़से संतोष नहीं मान सकती । जिन्हें दोनों वक़्त भूखे रहना पड़ता है उनसे मैं ईश्वरकी चर्चा कैसे करूँ ? उनके सामने तो परमात्मा केवल दाल-रोटीके ही रूपमें प्रकट हो सकते हैं। परमात्माकी झलक बिना नैतिक बुद्धि के विकासके सम्भव है। सिवाय परमात्माके किसी भी जीवसे वाह-वाही चाहना मूर्खता है । - -एडीसन परमात्मा सदैव कृपारूप है । जो शुद्ध अन्तःकरणसे उसकी मदद माँगता है, उसको वह अवश्य मिलती है । - विवेकानन्द क्या तुम पूछते हो परमात्मा कहाँ रहता है ? आत्मामें; और जब तक आत्मा शुद्ध और पवित्र न हो, उसमें परमात्माके लिये स्थान नहीं है ।
पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार की कई योजनाओं को लागू करने से दिल्ली सरकार ने मना कर दिया है. दिल्ली के गरीबों का क्या गुनाह है, जो उन्हें 5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज देने वाली आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिलता? उन्होंने कहा कि दिल्ली को उलझाने वाली नहीं, सुलझाने वाली राजनीति चाहिए. पीएम ने कहा कि दिल्ली को विकास की योजनाएं रोकने वाला नहीं, सबका साथ-सबका विकास पर विश्वास करने वाला नेतृत्व चाहिए. दिल्ली और देश के हित में इस बार एकजुट, एक स्वर, पूरी ताकत के साथ हमें खड़े होना है. दिल्ली को दोष देने वाली नहीं, दिशा देने वाली सरकार चाहिए. पीएम मोदी ने कहा कि दिल्ली को रोड़े अटकाने वाली और नफरत फैलाने वाली राजनीति से मुक्ति चाहिए. दिल्ली के ये चुनाव इस दशक का पहला चुनाव है. ये दशक, भारत का दशक होने वाला है और भारत की प्रगति उसके आज लिए गए फैसलों पर निर्भर करेगी. उन्होंने कहा कि वोटिंग से 4 दिन पहले भाजपा के पक्ष में ऐसा माहौल कई लोगों की नींद उड़ा रहा है.
पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार की कई योजनाओं को लागू करने से दिल्ली सरकार ने मना कर दिया है. दिल्ली के गरीबों का क्या गुनाह है, जो उन्हें पाँच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज देने वाली आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिलता? उन्होंने कहा कि दिल्ली को उलझाने वाली नहीं, सुलझाने वाली राजनीति चाहिए. पीएम ने कहा कि दिल्ली को विकास की योजनाएं रोकने वाला नहीं, सबका साथ-सबका विकास पर विश्वास करने वाला नेतृत्व चाहिए. दिल्ली और देश के हित में इस बार एकजुट, एक स्वर, पूरी ताकत के साथ हमें खड़े होना है. दिल्ली को दोष देने वाली नहीं, दिशा देने वाली सरकार चाहिए. पीएम मोदी ने कहा कि दिल्ली को रोड़े अटकाने वाली और नफरत फैलाने वाली राजनीति से मुक्ति चाहिए. दिल्ली के ये चुनाव इस दशक का पहला चुनाव है. ये दशक, भारत का दशक होने वाला है और भारत की प्रगति उसके आज लिए गए फैसलों पर निर्भर करेगी. उन्होंने कहा कि वोटिंग से चार दिन पहले भाजपा के पक्ष में ऐसा माहौल कई लोगों की नींद उड़ा रहा है.
निगम का अनुमान है कि करीब 30 लाख की आबादी के इस शहर में 50 से 70 हजार पालतू डॉगी हो सकते हैं। हालांकि, निगम के पास इसका सटीक डेटा नहीं है, लेकिन अभी तक केवल 1305 लोगों ने ही डॉगी का रजिस्ट्रेशन कराया है। शहर में कई हजार पालतू डॉगी हैं। रजिस्ट्रेशन केवल 1300 ने कराए हैं। अगले महीने से निगम विशेष अभियान चलाएगा। बिना रजिस्टर्ड डॉगी मिलने पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही हर महीने 100 रुपये अतिरिक्त फीस भी अधिक देनी होगी। निगम का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति अप्रैल में ही डॉगी का रजिस्ट्रेशन कराता तो उसे केवल 1 हजार रुपये ही देने पड़ते, लेकिन अब मई में 500 रुपये अधिक यानी 1500 रुपये देने होंगे। जून से लेकर अगले वर्ष मार्च तक हर महीने 100 रुपये लेट फीस जोड़कर शुल्क की वसूली की जाएगी। घर बैठे भी डॉगी का रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। इसके लिए गूगल प्लेट स्टोर पर गाजियाबाद नगर निगम डालें। फिर पेट रजिस्ट्रेशन पर लॉग इन कर आवेदन कर सकते हैं।
निगम का अनुमान है कि करीब तीस लाख की आबादी के इस शहर में पचास से सत्तर हजार पालतू डॉगी हो सकते हैं। हालांकि, निगम के पास इसका सटीक डेटा नहीं है, लेकिन अभी तक केवल एक हज़ार तीन सौ पाँच लोगों ने ही डॉगी का रजिस्ट्रेशन कराया है। शहर में कई हजार पालतू डॉगी हैं। रजिस्ट्रेशन केवल एक हज़ार तीन सौ ने कराए हैं। अगले महीने से निगम विशेष अभियान चलाएगा। बिना रजिस्टर्ड डॉगी मिलने पर पाँच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही हर महीने एक सौ रुपयापये अतिरिक्त फीस भी अधिक देनी होगी। निगम का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति अप्रैल में ही डॉगी का रजिस्ट्रेशन कराता तो उसे केवल एक हजार रुपये ही देने पड़ते, लेकिन अब मई में पाँच सौ रुपयापये अधिक यानी एक हज़ार पाँच सौ रुपयापये देने होंगे। जून से लेकर अगले वर्ष मार्च तक हर महीने एक सौ रुपयापये लेट फीस जोड़कर शुल्क की वसूली की जाएगी। घर बैठे भी डॉगी का रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। इसके लिए गूगल प्लेट स्टोर पर गाजियाबाद नगर निगम डालें। फिर पेट रजिस्ट्रेशन पर लॉग इन कर आवेदन कर सकते हैं।
- #Andhra Pradeshआंध्र प्रदेशः चंद्रबाबू नायडू का ऐलान, 'किसी भी समय चुनाव के लिए तैयार है टीडीपी' वाईएसआर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अल्ला अयोध्या रामी रेड्डी ने बुधवार को कहा कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी द्वारा आंध्र प्रदेश में सरकार बनाने के बाद, प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की संख्या साढ़े तीन साल के भीतर 37,956 से बढ़कर 60,800 इकाई हो गई है। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, उन्होंने विपक्षी तेलुगु देशम पार्टी के हमले पर जवाब देते हुए कहा कि अकेले एमएसएमई क्षेत्र ने 5,61,235 लोगों को रोजगार प्रदान किया है। रामी रेड्डी ने कहा, 'जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व में वाईएसआरसी सरकार के केवल साढ़े तीन साल के शासन में एमएसएमई का प्रतिशत 60 प्रतिशत बढ़ गया है और इस क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ' उन्होंने कहा कि यह एमएसएमई रिस्टार्ट, वाईएसआर जगन्ना बदुगा विकासम, डॉ. वाईएसआर नवोदयम, वाईएसआर चेयुथा और वाईएसआर आसरा पहल जैसी योजनाओं के माध्यम से सरकार द्वारा विभिन्न सब्सिडी की पेशकश के कारण संभव हुआ है। इसके अलावा कोविड महामारी के बावजूद एमएसएमई प्रदेश में समृद्ध हुए हैं। रामी रेड्डी ने कहा, 'तेलुगु देशम पार्टी के पास ऐसा कुछ भी दिखाने के लिए नहीं है, जो उसने प्रदेश की जनता के हित में किया हो। लेकिन, आज मेरे पास साक्ष्य हैं कि सीएम जगन ने आंध्र प्रदेश के लिए क्या किया है। आंकड़े अपनी गवाही खुद देते हैं। पिछले साढ़े तीन वर्षों में, इंफोसिस, एचसीएल, टेक्नोटास्क, आईजेन अमेरिकन सॉफ्टवेयर, टेकबुल, कॉम्प्लेक्स सिस्टम सहित अन्य आईटी कंपनियों ने विशाखापत्तनम और राज्य के टियर-2 शहरों में परिचालन शुरू कर दिया है। '
- #Andhra Pradeshआंध्र प्रदेशः चंद्रबाबू नायडू का ऐलान, 'किसी भी समय चुनाव के लिए तैयार है टीडीपी' वाईएसआर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अल्ला अयोध्या रामी रेड्डी ने बुधवार को कहा कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी द्वारा आंध्र प्रदेश में सरकार बनाने के बाद, प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की संख्या साढ़े तीन साल के भीतर सैंतीस,नौ सौ छप्पन से बढ़कर साठ,आठ सौ इकाई हो गई है। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, उन्होंने विपक्षी तेलुगु देशम पार्टी के हमले पर जवाब देते हुए कहा कि अकेले एमएसएमई क्षेत्र ने पाँच,इकसठ,दो सौ पैंतीस लोगों को रोजगार प्रदान किया है। रामी रेड्डी ने कहा, 'जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व में वाईएसआरसी सरकार के केवल साढ़े तीन साल के शासन में एमएसएमई का प्रतिशत साठ प्रतिशत बढ़ गया है और इस क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या में अड़तीस प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ' उन्होंने कहा कि यह एमएसएमई रिस्टार्ट, वाईएसआर जगन्ना बदुगा विकासम, डॉ. वाईएसआर नवोदयम, वाईएसआर चेयुथा और वाईएसआर आसरा पहल जैसी योजनाओं के माध्यम से सरकार द्वारा विभिन्न सब्सिडी की पेशकश के कारण संभव हुआ है। इसके अलावा कोविड महामारी के बावजूद एमएसएमई प्रदेश में समृद्ध हुए हैं। रामी रेड्डी ने कहा, 'तेलुगु देशम पार्टी के पास ऐसा कुछ भी दिखाने के लिए नहीं है, जो उसने प्रदेश की जनता के हित में किया हो। लेकिन, आज मेरे पास साक्ष्य हैं कि सीएम जगन ने आंध्र प्रदेश के लिए क्या किया है। आंकड़े अपनी गवाही खुद देते हैं। पिछले साढ़े तीन वर्षों में, इंफोसिस, एचसीएल, टेक्नोटास्क, आईजेन अमेरिकन सॉफ्टवेयर, टेकबुल, कॉम्प्लेक्स सिस्टम सहित अन्य आईटी कंपनियों ने विशाखापत्तनम और राज्य के टियर-दो शहरों में परिचालन शुरू कर दिया है। '
Faridabad/Alive News: पल्ला स्थित तरुण निकेतन पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को पौधरोपण और तीज महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अथिति के रूप में जिला उपायुक्त जितेंद्र यादव और डिप्टी डायरेक्टर एससीईआरटी रितु चौधरी पहुंची। मुख्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित का कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जिला उपायुक्त ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि पांचवी छठी कक्षा के प्रत्येक बच्चे एक पौधा जरूर लगाएं और बारहवीं कक्षा तक उसकी देखभाल करें। सभी के सहयोग से फरीदाबाद और देश क्लीन व ग्रीन बनेगा। डिप्टी डायरेक्टर एससीईआरटी रितु चौधरी ने तीज के त्योहार पर प्रकाश डालते हुए बच्चों द्वारा दी गई प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों को कठिन परिश्रम और मेहनत करनी चाहिए। मेहनत और कठिन परिश्रम के बल पर ही आप आगे बढ़ सकते हैं। स्कूल की वाइस प्रिंसिपल राधा सिंह तंवर ने स्कूल की अध्यापिकाओं और बच्चों के साथ झूला झूलकर तीज की बधाई दी। उन्होंने बच्चों को संदेश देते हुए कहा कि सभी को अपने जीवन के खास लम्हों पर पौधा अवश्य लगाना चाहिए। जिला उपायुक्त और डिप्टी डायरेक्टर एससीईआरटी ने इस अवसर पर पौधे लगाएं। तरुण स्कूल के डायरेक्टर कमल सिंह तंवर, चेयरमैन हिमांशु तंवर तथा स्कूल की प्रिंसिपल रंजना सोबती ने मुख्य अतिथियों को पौधे भेंट कर कार्यक्रम में पधारने पर आभार व्यक्त किया।
Faridabad/Alive News: पल्ला स्थित तरुण निकेतन पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को पौधरोपण और तीज महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अथिति के रूप में जिला उपायुक्त जितेंद्र यादव और डिप्टी डायरेक्टर एससीईआरटी रितु चौधरी पहुंची। मुख्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित का कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जिला उपायुक्त ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि पांचवी छठी कक्षा के प्रत्येक बच्चे एक पौधा जरूर लगाएं और बारहवीं कक्षा तक उसकी देखभाल करें। सभी के सहयोग से फरीदाबाद और देश क्लीन व ग्रीन बनेगा। डिप्टी डायरेक्टर एससीईआरटी रितु चौधरी ने तीज के त्योहार पर प्रकाश डालते हुए बच्चों द्वारा दी गई प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों को कठिन परिश्रम और मेहनत करनी चाहिए। मेहनत और कठिन परिश्रम के बल पर ही आप आगे बढ़ सकते हैं। स्कूल की वाइस प्रिंसिपल राधा सिंह तंवर ने स्कूल की अध्यापिकाओं और बच्चों के साथ झूला झूलकर तीज की बधाई दी। उन्होंने बच्चों को संदेश देते हुए कहा कि सभी को अपने जीवन के खास लम्हों पर पौधा अवश्य लगाना चाहिए। जिला उपायुक्त और डिप्टी डायरेक्टर एससीईआरटी ने इस अवसर पर पौधे लगाएं। तरुण स्कूल के डायरेक्टर कमल सिंह तंवर, चेयरमैन हिमांशु तंवर तथा स्कूल की प्रिंसिपल रंजना सोबती ने मुख्य अतिथियों को पौधे भेंट कर कार्यक्रम में पधारने पर आभार व्यक्त किया।
पहले कुछ नेताओं में से अमेरिका के खिलाफ बोलने वाली डीलमा रौसेफ्फ़ थी, जिन्होंने अमरीकी की जासूसी को "अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन" करार दिया। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है, कि ब्रिक्स के 6ठे शिखर सम्मेलन में अमरीका द्वारा "राज्य की और मानव अधिकारों की संप्रभुता की अवेहलना करते हुए बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और दुनिया भर में सभी व्यक्तियों के आंकड़े एकत्र करने, साथ ही, गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन करता है" बताया। शिखर सम्मेलन की संध्या पर जस्ट नेट कोयिलिशन जोकि उन कार्यकर्ताओं का वैश्विक नेटवर्क है जो खुले और न्यायसंगत इन्टरनेट के लिए लड़ रहे हैं, ने ब्रिकस राष्ट्रों को इन्टरनेट गवर्नेंस पर एक पत्र लिखा। पूरा ब्यान नीचे प्रकाशित किया जा रहा हैः ब्रिक्स राष्ट्र ऐसा नया ग्लोबल इन्टरनेट गवेर्नेंस मॉडल उपलब्ध कराएँ जो मानव अधिकार रक्षा को सुनिश्चित कर सके और साथ ही जो दुनियाभर के लोगो को निष्पक्षता और सामाजिक न्याय प्रदान कर सके। 1990 से एक ध्रुवीय दुनिया जबसे बनी है अमरीका निर्देशित इन्टरनेट गवर्नेंस के मॉडल ने बड़े पैमाने निगरानी, जन अधिकार का उलंघन, और आर्थिक शक्ति बड़े पैमाने पर अमरीका आधारित वैश्विक निगमों या कंपनियों के हाथ में इकठ्ठा हुयी हैं। यह मॉडल वैश्विक जनसंख्या के बड़े हिस्से को डिजिटल विकास के बढ़ते फायदों से और उसमे पूर्ण भागीदारी से दूर करता है, वर्तमान शासन संरचना, मानव अधिकारों के गंभीर उल्लंघन और समग्र आर्थिक समानता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने में विफल रहा है। आज इस बात को ध्यान में रखते हुए कि इन्टरनेट सामाजिक बदलाव में मुख्य संचालक बन रहा है, इसलिए इन्टरनेट गवनेंस के एक नए मॉडल की जरूरत है, जोकि विश्व में सबके लिए मानव अधिकार को बढ़ावा दे, और जो दुनिया के सभी वाशिंदों के लिए निष्पक्षता और सामाजिक न्याय को सुनिश्चित कर सके। ब्रिक्स देशो का समूह विश्व की 40 प्रतिशत आबादी, और विश्व सकल घरेलु उत्पाद का 30 प्रतिशत क्रय शक्ति समानता अवधि का प्रतिनिधित्व करता है, और विशिष्ट इंटरनेट गवर्नेंस का एक वैकल्पिक मॉडल तैयार करने के साथ ही नए इंटरनेट प्लेटफार्मों के विकास और डिजिटल टूल्स में नेतृत्व करने के लिए तैयार मॉडल है। इस तरह की विकसित गतिविधियाँ न केवल लोगों पर केंद्रित इंटरनेट मॉडल को सुनिश्चित करेगी बल्कि उन कुछ वैश्विक निगमों के एकाधिकार तोड़ेगी जो अपनी राष्ट्रीय सरकारों के साथ वाणिज्यिक और जनसाधारण के डाटा में एक-दुसरे के पार्टनर है और जो एकीकृत वैश्विक निगरानी राज्य बनाने के लिए योगदान दे रहे हैं। जस्ट नेट कोयीलेशन, एक वैश्विक नागरिक समाज गठबंधन ब्रिक्स देशों का आह्वाहन करता है जो ब्राज़ील के फोर्टालेज़ा में मिल रहे हैं कि वे दुनिया को अमरीका आधारित इन्टरनेट गवर्नेंस ढाँचे में सुधार के लिए न्रेतत्व प्रदान करें। हम ब्रिक्स देश का यह भी आह्वाहन करते हैं कि वे सब जगहों की तरह इन्टरनेट पर अभिव्यक्ति की आजादी और गोपनीयता के अधिकार की मान्यता के लिए अपना मत तय करें, और इसकी भी नितांत जरूरत है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के मुनाफों और इनामों को विश्व स्तर पर सामान रूप से बांटा जाए। खासकर हम निम्नलिखित की सिफारिश करते हैंः 1.इंटरनेट से संबंधित मानकों और (नाम और नंबर सहित) महत्वपूर्ण संसाधनों को इस तरह से विकसित किया जाना चाहिए ताकि वह एक खुले और अनवरत इंटरनेट वास्तुकला को सुनिश्चित कर सके, वैश्विक सार्वजनिक हित, लोगों के नागरिक राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की अनुरूपता को बरकरार रखते हुए, साथ ही विकास का अधिकार कायम रख सके। 2.यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि डिजिटल ऑफ़लाइन दायरे के भीतर वैध राजनीतिक अधिकार और न्यायालय के अधीन होना चाहिए न कि निजी कानून और पुलिस व्यवस्था के दायरे में जो आजकल काफी तेज़ी से बढ़ रहा है, मार्को सिविल कानून के माध्यम से जिसे ब्राजील में हासिल किया गया है, यह अधिकार आधारित और लोकतांत्रिक होना चाहिए। ब्रिक्स को एक इंटरनेट फ्रेमवर्क कन्वेंशन के लिए आह्वाहन करना चाहिए और वैश्विक इंटरनेट से संबंधित नीतियों को विकसित करने में नेतृत्व लेना चाहिये। 3.हम संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार संगठन कि उस पहलकदमी का स्वागत करते हैं जिसमे उसने ट्रांस राष्ट्रीय निगमों द्वारा मानव अधिकारों के दुरुपयोग में लगाम कसने के लिए एक संधी विकसित करने के लिए कहा है। ब्रिक्स न्रेतत्व को ऐसी सभी पहलकदमियों का मजबूती से स्वागत करना चाहिए। उन्हें उन नीतियों को भी बढ़ावा देना चाहिए जो इस बात का समर्थन करती हैं कि इन्टरनेट ज्ञान के आदान-प्रदान का वैश्विक मंच है और जो बौद्धिक सम्पदा अधिकार के सघन इन्टरनेट गवनेंस निजाम का विरोध करे जो अथाह एकाधिकार को सृजित कर रही है और जो अव्यवाह्रिक और अप्रभावी वैश्विक आर्थिक किरायों की वशूली कर रही है। 4.ब्रिक्स देशों को शोध, ऑपरेटिंग सिस्टम, डाटा संग्रहण और क्लाउड सर्विस के लिए नए खुले इन्टरनेट मंच को विकसित करने में न्रेतत्व प्रदान करना चाहिए, यह मानते हुए कि इनमे जरूरी कुशलता, बड़ी इन्टरनेट बाज़ार और राजनितिक प्रबुधता है जो बड़े स्तर पर जासूसी करने की प्रचलित व्यवस्था और किराया आधारित बिज़नस मॉडल को तोड़ने की क्षमता रखते है। इसे आम जन साधारण को उनकी भाषा में उपलब्ध करना चाहिए। इस ब्यान के परिशिष्ट में, हमने ब्रिक देशों को विस्तारपूर्वक सुझाव दिए हैं कि कैसे इसके मुताल्लिक ठोस कदम उठाने चाहिए। यह पत्र इस बात की सिफारिश करता है कि ब्रिक्स देश सामूहिक तौर पर ओपन सोर्स सोफ्टवेयर को विकसित करने के लिए निवेश करे जो इन्टरनेट पर प्रसार को सुरक्षित करे और जो अमरीकी उत्पाद और सर्विसेज जो कि हाल में पूरे स्पेस को प्रभावित कर रही है के मुकाबले समुचित विकल्प पेश कर सके। ब्रिक्स देश सबसे बेहतर स्थिति में हैं कि वे इन्टरनेट प्लेटफॉर्म्स और टूल्स के विकास में आगे आयें क्योंकि उनके पास जरूरी कुशलता है और आंतरिक बाज़ार उपलब्ध है और साथ ही बड़े स्तर पर जासूसी व्यापार मॉडल को तोड़ने की इनमे राजनितिक प्रबुधता है। स्नोडेन के खुलासे ने साफ़ तौर पर जाहिर कर दिया है कि एक सुरक्षित ईमेल, कलेंडरिंग, मेस्सजिंग, सर्च, फाइल शेयरिंग और भण्डारण विडियो सिस्टम की जरूरत है, जोकि ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक तथा नेताओं और नागरिकों को पांच आँखों की जासूसी से सुरक्षा प्रदान करेगा। 1. इस सिलसिले में ब्रिक्स देशों के विज्ञान व तकनीक विभाग के मंत्रियों के बीच एक एम्.ओ.यु. हस्तारक्षित किया जाना चाहिए जिसमें ठोस प्रतिबद्धता के आधार पर विज्ञान व तकनीक और आई.टी. क्षेत्र में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर और संप्रेषण हार्डवेयर के लिए सहयोग का रुख अपनाएँ। 2. ब्रिक्स देशों को ईमेल, इंस्टेंट मेस्सेज, विडियो कांफेरेंसस, फाइल शेयरिंग और भण्डारण तथा आज के इन्टरनेट को चलाने के लिए और उसके विकास के लिए ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर समाधान के लिए विकेन्द्रीकृत संप्रेषण स्टैक बनाने के लिए फण्ड स्थापित करना चाहिए। खातौर पर सिक्यूरिटी एन्क्रिप्टेड संचार के लिए टूल्स के इस्तेमाल को कम करना चाहिए। 3. ब्रिक्स को एक ऐसे अध्यन की शुरुवात करनी चाहिए जो कोलोबोरेशन या कम्युनिकेशन के अलग-अलग आयामों का अध्यन कर सके और जो सॉफ्टवेयर और कम्युनिकेशन हार्डवेयर को हासिल कर सके। 4. ब्रिक्स नए स्टैण्डर्ड, प्रोटोकॉल और तकनीक जोकि नयी पीढ़ी के इन्टरनेट का आधार बनेगी में पहले से ही चल रहे अध्यन को कमीशन करे। और इसमें जरूरी बदलावों के साथ खासतौर पर जिससे कि " कौन किसके साथ संचार करता है" की सुरक्षा को निश्चित किया जा सके। वैकल्पिक ऑनलाइन प्लेटफोर्म और टूल्स के विकास के लिए ऍफ़.ओ.ओ.एस. का इस्तेमाल क्यों जरूरी है। अमरीकी कंपनियों द्वारा विकसित किये गए टूल्स जैसे गूगल, फेसबुक, पेयपल, अमेज़न, ट्विटर, याहू और माइक्रोसॉफ्ट के इस्तेमाल से ९६७ प्रतिशत जासूसी का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि ये सभी टूल्स अमरीकन कानून के दायरे में आते हैं। जबकि अमरिकन नागरिक को चौथे संसोधन के आधार पर कुछ सुरक्षा है, लेकिन जो अमरीका के नागरिक नहीं हैं उन्हें इस क़ानून के तहत कोई सुरक्षा नहीं है। कोई भी डाटा जो अमरीका के क्लाउड में है या अमरीका की किसी भी कम्पनी चाहे वह दुनिया के किसी भी हिस्से में हो के सर्वर पर है उस पर भी अमरीकी कानून ही लागू होता है। कानून का यह रास्ता वैकल्पिक प्लेटफॉर्म्स को स्थापित करने के मुकाबले लोकल डाटा स्टोरेज को कम प्रभावी बनता है। गूगल, फेसबुक और याहू ने जो एकाधिकार स्थापित कर लिया है उसे तोड़ने के लिए इन विकल्पों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। गूगल, फेसबुक और याहू वैश्विक डिजिटल विज्ञापन राजस्व का 40 प्रतिशत बाज़ार पर कब्ज़ा है जो 117.6 बिलियन डॉलर (2013) बैठता है, इसमें से गूगल का अकेले 38.6 बिलियन डॉलर बैठता है। गूगल का 50 प्रतिशत राजस्व केवल सर्च इंजन बाज़ार में उसके व्यापक प्रसार के कारण से आता है, जहाँ उसका बाज़ार पर 70 प्रतिशत हिस्से पर कब्ज़ा है, जबकि बैडू दूर कहीं दुसरे स्थान पर आता है। इन्टरनेट गवर्नेंस में अमरीका की नीतियाँ इस तरह से बनायी गयी हैं ताकि इनकी कंपनियों के एकाधिकार को सुरक्षित किया जा सके। जैसे-जैसे इन कंपनियों की बढ़त होगी, वैसे-वैसे अमरीका का जासूसी तंत्र तेजी से बढेगा। अमरीकी इन्टरनेट कंपनियों के बाज़ार पर कब्जे से इन्टरनेट पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली भाषा अंग्रेजी हो गयी है; इस भाषा के बोलने वाले केवल 12.5% है, जबकि अंग्रेजी में दुनिया में 55% सामग्री है। इसलिए स्थानीय भाषाओँ, साहित्य और संस्कृति को बचाने के लालसा की भी यही मांग है कि इन कंपनियों के एकाधिकार को तोड़ा जाना जरूरी है। इन प्लेटफोर्म को इस्तेमाल करने की इच्छा से, एक सामान इंटरफ़ेस और प्लेटफोर्म को इस्तेमाल करते हुए बहुआयामी टूल्स को इस्तेमाल करने की योग्यता और उसके उत्पाद का निशुल्क इस्तेमाल करने से ही इनकी प्रसिद्धता बढ़ती है (इसकी मुख्य कीमत तो निजी डाटा है)। आर्थिक मामले में, यह स्केल और नेटवर्क प्रभाव की अर्थव्यवस्था का ही असर है कि ज्यादा से ज्यादा लोग ऑनलाइन प्लेटफोर्म में शामिल हो रहे हैं। स्नोडेन के खुलासे ने स्पष्ट कर दिया कि क्लाउड सर्विस और सोशल मीडिया को एन.एस.ए. और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों ने काफी हद इतेमाल किया है।यह केवल निजी डाटा ही नहीं है जो राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर डालता है बल्कि उस डाटा पर भी असर डालता है जो अंतर्राष्ट्रीय वार्ता और आर्थिक मुद्दों से जुड़ा है। बड़ी वैश्विक इन्टरनेट कम्पनियों की इच्छा है कि वे या तो अमरीकन के द्दय्रे में रहे या अमरीका के राष्ट्रीय कानूनी दायरे में रहें ताकि वह इन कानूनों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर निगरानी कर सकें। इसके अलावा, जब अमरीका की चन्द कंपनियों के पास ज्यादा-से ज्यादा डाटा इकठ्ठा हो जाएगा तो उन्हें उसकी निगरानी करने में आसानी होगी। उदहारण के तौर पर, जैसा हमने ऍफ़.आई.एस.ए. का वेरिज़ोन पर आदेश देखा, एक आदेश में लाखों यूजर्स का डाटा शामिल हो सकता है। अगर देश अपने नागरिकों को, आर्थिक और सांस्कृतिक दायरों को बचाना चाहती है तो उन्हें अपने नागरिकों के लिए वैकल्पिक टूल्स उपलब्ध कराने होंगें जो इनके इस्तेमाल में यूजर्स को वैसी ही सर्विस और आराम प्रदान करा सके। अगर हमारे पास इन कंपनियों के मुकाबले में बेहतर प्रोडक्ट नहीं होंगे तो लोग इन्ही मंचों को इस्तेमाल करते रहेंगें। इसका मतलब है की जीमेल, फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब, और सर्च इंजन के समानांतर ऐसे टूल विकसित हों जो यूजर्स को इसी तरह की सर्विस दे सकें जो गूगल उपलब्ध करता है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि फ्री और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर (FOSS) को विकसित करें ताकि इस तरह के मंचों को प्रदान किया जा सके। इस तरह के मंचों को विकसित करने के लिए हमें FOSS का ही इस्तेमाल क्यों करना चाहिए? आज वैकल्पिक इन्टरनेट टूल्स और प्लेटफोर्म सृजित करने का फायदा इसलिए है कि FOSS कम्युनिटी इसे पहले से सृजित कर चुकी हैः FOSS के प्रति समझ के लिए तीन महत्त्वपूर्ण मुख्य कारण है जोकि मालिकाना दृष्टिकोण से अलग है। पहला यह कि इसका कोड सार्वजनिक है, यह इस तरह के सॉफ्टवेयर में पिछले दरवाजे से एंट्री नहीं देता। यह इस तरह के प्लेटफोर्मस को दुनिया में जल्दी स्वीकृति प्रदान कराएगा; इसे ऐसा नहीं माना जाएगा कि यह अमरीकी निगरानी तंत्र के साथ प्रतियोगिता कर रहा है। दूसरा यह कि पहले से ही वैश्विक FOSS समुदाय मौजूद है जो पहले से ही ऐसे टूल्स को विकसित कर चुकी है या विकसित कर रही है जो आसानी से इन प्लेटफोर्मस में समाहित हो सकते हैं। तीसरा मुद्दा इसमें खर्च का है - जिस स्तर पर फ्री सॉफ्टवेयर टूल्स उपलब्ध हैं और इस तरह के पेकेज्स पर जो समूह कही भी काम कर रहे हैं अगर उनसे समझौता करें, तो इस तरह के प्लेटफोर्मस के सृजन करने में खर्चा अन्य मुकाबले में काफी कम होगा। पहले से ही ब्राज़ील और भारत ने अपने आप को प्रतिबद्ध किया है कि वे ओपन स्टैण्डर्डस FOSS को सरकारी गतिविधियों के लिए समर्थन किया है जहाँ भी यह उसे यह उपयुक्त लगा। FOSS के लये ब्रिक्स देशों का परियोजना आधारित समर्थन भी ओपन सिस्टम को बढ़ावा देगा - हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों में - और यह कदम अमरीका आधारित सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर कंपनियों के एकाधिकार को भी कम करेगा। ब्रिक्स/इब्सा देश इसके न्रेतत्व के लिए एकदम उपयुक स्थिति में। इनके पास स्किल-सेट हैं और बड़ा गृह बाज़ार है। ब्राज़ील, भारत और दक्षिण अफ्रीका की निति FOSS के समर्थन की नीति है। इन देशों की गैर अंग्रेजी सामग्री की भी जरूरत है। यहाँ तक कि भारत और दक्षिण अफ्रीका जहाँ ज्यादातर अंग्रेजी का इस्तेमाल होता है, अन्य भाषाओँ की जरूरत है ताकि लोगों की संस्कृति को बचाया जा सके और इन्टरनेट सेवाओं में इन भाषाओँ का भी स्थान बन सके। जबकि ई-गवनेंस महत्तवपूर्ण हो गया है, लोगों को सरकारी सेवाये प्राप्त कराने के लिए बड़े स्तर पर उसका स्थानीयकरण करना होगा जिसे की वैश्विक इन्टरनेट कम्पनियाँ नहीं करा पाएंगीं। ईमेल, तुरंत सन्देश, विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग और फाइल शेयरिंग और भण्डारण के लिए यह संभव है की ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर समाधान उपलब्ध कराया जाये। यह आज संभव है - अगर हम इसे एक गंभीर काम के रूप में लेते हैं - इन प्लेटफोर्म के सृजन के लिए। अगर हम फ्री और ओपन सोर्स इस्तेमाल करते हैं और ब्रिक्स देशों का इसे समर्थन मिलता है तो इस कोशिशों की कीमत ज्यादा नहीं होगी। मानव पूँजी में निवेश करने से इन समाधानों के सृजन की जरूरत जरूरत को बल मिलेगा तथा क्षमता के विकास और दक्षिण-से-दक्षिण नेटवर्क शुरुवाती कोशिशों से आगे फल प्रदान कराएगा। हम ब्रिक्स देशों से गुजारिश करते हैं कि वे स्नोडेन के बाद के हालातों को सामूहिक रूप से अपने में समाहित करें और फ्री और ओपन सोर्स समुदाय द्वारा जो टूल्स विकसित किये जा रहे हैं उनका फायदा उठायें और ब्रिक्स के मानव और आर्थिक संसाधनों को बढ़ाएं ताकि सुरक्षित सॉफ्टवेयर का समुचित समूह तैयार किया जा सके। जस्ट नेट गठबंधन (एक न्यायसंगत इंटरनेट के लिए) जस्ट नेट गठबंधन (JNC) एक खुला, स्वतंत्र, और न्यायसंगत इंटरनेट के लिए प्रतिबद्ध नागरिक समाजिक अभिनेताओं का एक वैश्विक नेटवर्क है। फ़रवरी 2014 में स्थापित, गठबंधन, इंटरनेट और उसके गवर्नेंस के विषयों में संलग्न, लोकतंत्र, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लक्ष्य को साथ लिए चलता है। हमारे संस्थापक सिद्धांत और उद्देश्य, दिल्ली घोषणा में निहित हैंः http://justnetcoalition।org/delhi-declaration । डिस्क्लेमरः- उपर्युक्त लेख मे व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक तौर पर न्यूज़क्लिक के विचारो को नहीं दर्शाते । अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
पहले कुछ नेताओं में से अमेरिका के खिलाफ बोलने वाली डीलमा रौसेफ्फ़ थी, जिन्होंने अमरीकी की जासूसी को "अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन" करार दिया। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है, कि ब्रिक्स के छःठे शिखर सम्मेलन में अमरीका द्वारा "राज्य की और मानव अधिकारों की संप्रभुता की अवेहलना करते हुए बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और दुनिया भर में सभी व्यक्तियों के आंकड़े एकत्र करने, साथ ही, गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन करता है" बताया। शिखर सम्मेलन की संध्या पर जस्ट नेट कोयिलिशन जोकि उन कार्यकर्ताओं का वैश्विक नेटवर्क है जो खुले और न्यायसंगत इन्टरनेट के लिए लड़ रहे हैं, ने ब्रिकस राष्ट्रों को इन्टरनेट गवर्नेंस पर एक पत्र लिखा। पूरा ब्यान नीचे प्रकाशित किया जा रहा हैः ब्रिक्स राष्ट्र ऐसा नया ग्लोबल इन्टरनेट गवेर्नेंस मॉडल उपलब्ध कराएँ जो मानव अधिकार रक्षा को सुनिश्चित कर सके और साथ ही जो दुनियाभर के लोगो को निष्पक्षता और सामाजिक न्याय प्रदान कर सके। एक हज़ार नौ सौ नब्बे से एक ध्रुवीय दुनिया जबसे बनी है अमरीका निर्देशित इन्टरनेट गवर्नेंस के मॉडल ने बड़े पैमाने निगरानी, जन अधिकार का उलंघन, और आर्थिक शक्ति बड़े पैमाने पर अमरीका आधारित वैश्विक निगमों या कंपनियों के हाथ में इकठ्ठा हुयी हैं। यह मॉडल वैश्विक जनसंख्या के बड़े हिस्से को डिजिटल विकास के बढ़ते फायदों से और उसमे पूर्ण भागीदारी से दूर करता है, वर्तमान शासन संरचना, मानव अधिकारों के गंभीर उल्लंघन और समग्र आर्थिक समानता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने में विफल रहा है। आज इस बात को ध्यान में रखते हुए कि इन्टरनेट सामाजिक बदलाव में मुख्य संचालक बन रहा है, इसलिए इन्टरनेट गवनेंस के एक नए मॉडल की जरूरत है, जोकि विश्व में सबके लिए मानव अधिकार को बढ़ावा दे, और जो दुनिया के सभी वाशिंदों के लिए निष्पक्षता और सामाजिक न्याय को सुनिश्चित कर सके। ब्रिक्स देशो का समूह विश्व की चालीस प्रतिशत आबादी, और विश्व सकल घरेलु उत्पाद का तीस प्रतिशत क्रय शक्ति समानता अवधि का प्रतिनिधित्व करता है, और विशिष्ट इंटरनेट गवर्नेंस का एक वैकल्पिक मॉडल तैयार करने के साथ ही नए इंटरनेट प्लेटफार्मों के विकास और डिजिटल टूल्स में नेतृत्व करने के लिए तैयार मॉडल है। इस तरह की विकसित गतिविधियाँ न केवल लोगों पर केंद्रित इंटरनेट मॉडल को सुनिश्चित करेगी बल्कि उन कुछ वैश्विक निगमों के एकाधिकार तोड़ेगी जो अपनी राष्ट्रीय सरकारों के साथ वाणिज्यिक और जनसाधारण के डाटा में एक-दुसरे के पार्टनर है और जो एकीकृत वैश्विक निगरानी राज्य बनाने के लिए योगदान दे रहे हैं। जस्ट नेट कोयीलेशन, एक वैश्विक नागरिक समाज गठबंधन ब्रिक्स देशों का आह्वाहन करता है जो ब्राज़ील के फोर्टालेज़ा में मिल रहे हैं कि वे दुनिया को अमरीका आधारित इन्टरनेट गवर्नेंस ढाँचे में सुधार के लिए न्रेतत्व प्रदान करें। हम ब्रिक्स देश का यह भी आह्वाहन करते हैं कि वे सब जगहों की तरह इन्टरनेट पर अभिव्यक्ति की आजादी और गोपनीयता के अधिकार की मान्यता के लिए अपना मत तय करें, और इसकी भी नितांत जरूरत है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के मुनाफों और इनामों को विश्व स्तर पर सामान रूप से बांटा जाए। खासकर हम निम्नलिखित की सिफारिश करते हैंः एक.इंटरनेट से संबंधित मानकों और महत्वपूर्ण संसाधनों को इस तरह से विकसित किया जाना चाहिए ताकि वह एक खुले और अनवरत इंटरनेट वास्तुकला को सुनिश्चित कर सके, वैश्विक सार्वजनिक हित, लोगों के नागरिक राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की अनुरूपता को बरकरार रखते हुए, साथ ही विकास का अधिकार कायम रख सके। दो.यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि डिजिटल ऑफ़लाइन दायरे के भीतर वैध राजनीतिक अधिकार और न्यायालय के अधीन होना चाहिए न कि निजी कानून और पुलिस व्यवस्था के दायरे में जो आजकल काफी तेज़ी से बढ़ रहा है, मार्को सिविल कानून के माध्यम से जिसे ब्राजील में हासिल किया गया है, यह अधिकार आधारित और लोकतांत्रिक होना चाहिए। ब्रिक्स को एक इंटरनेट फ्रेमवर्क कन्वेंशन के लिए आह्वाहन करना चाहिए और वैश्विक इंटरनेट से संबंधित नीतियों को विकसित करने में नेतृत्व लेना चाहिये। तीन.हम संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार संगठन कि उस पहलकदमी का स्वागत करते हैं जिसमे उसने ट्रांस राष्ट्रीय निगमों द्वारा मानव अधिकारों के दुरुपयोग में लगाम कसने के लिए एक संधी विकसित करने के लिए कहा है। ब्रिक्स न्रेतत्व को ऐसी सभी पहलकदमियों का मजबूती से स्वागत करना चाहिए। उन्हें उन नीतियों को भी बढ़ावा देना चाहिए जो इस बात का समर्थन करती हैं कि इन्टरनेट ज्ञान के आदान-प्रदान का वैश्विक मंच है और जो बौद्धिक सम्पदा अधिकार के सघन इन्टरनेट गवनेंस निजाम का विरोध करे जो अथाह एकाधिकार को सृजित कर रही है और जो अव्यवाह्रिक और अप्रभावी वैश्विक आर्थिक किरायों की वशूली कर रही है। चार.ब्रिक्स देशों को शोध, ऑपरेटिंग सिस्टम, डाटा संग्रहण और क्लाउड सर्विस के लिए नए खुले इन्टरनेट मंच को विकसित करने में न्रेतत्व प्रदान करना चाहिए, यह मानते हुए कि इनमे जरूरी कुशलता, बड़ी इन्टरनेट बाज़ार और राजनितिक प्रबुधता है जो बड़े स्तर पर जासूसी करने की प्रचलित व्यवस्था और किराया आधारित बिज़नस मॉडल को तोड़ने की क्षमता रखते है। इसे आम जन साधारण को उनकी भाषा में उपलब्ध करना चाहिए। इस ब्यान के परिशिष्ट में, हमने ब्रिक देशों को विस्तारपूर्वक सुझाव दिए हैं कि कैसे इसके मुताल्लिक ठोस कदम उठाने चाहिए। यह पत्र इस बात की सिफारिश करता है कि ब्रिक्स देश सामूहिक तौर पर ओपन सोर्स सोफ्टवेयर को विकसित करने के लिए निवेश करे जो इन्टरनेट पर प्रसार को सुरक्षित करे और जो अमरीकी उत्पाद और सर्विसेज जो कि हाल में पूरे स्पेस को प्रभावित कर रही है के मुकाबले समुचित विकल्प पेश कर सके। ब्रिक्स देश सबसे बेहतर स्थिति में हैं कि वे इन्टरनेट प्लेटफॉर्म्स और टूल्स के विकास में आगे आयें क्योंकि उनके पास जरूरी कुशलता है और आंतरिक बाज़ार उपलब्ध है और साथ ही बड़े स्तर पर जासूसी व्यापार मॉडल को तोड़ने की इनमे राजनितिक प्रबुधता है। स्नोडेन के खुलासे ने साफ़ तौर पर जाहिर कर दिया है कि एक सुरक्षित ईमेल, कलेंडरिंग, मेस्सजिंग, सर्च, फाइल शेयरिंग और भण्डारण विडियो सिस्टम की जरूरत है, जोकि ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक तथा नेताओं और नागरिकों को पांच आँखों की जासूसी से सुरक्षा प्रदान करेगा। एक. इस सिलसिले में ब्रिक्स देशों के विज्ञान व तकनीक विभाग के मंत्रियों के बीच एक एम्.ओ.यु. हस्तारक्षित किया जाना चाहिए जिसमें ठोस प्रतिबद्धता के आधार पर विज्ञान व तकनीक और आई.टी. क्षेत्र में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर और संप्रेषण हार्डवेयर के लिए सहयोग का रुख अपनाएँ। दो. ब्रिक्स देशों को ईमेल, इंस्टेंट मेस्सेज, विडियो कांफेरेंसस, फाइल शेयरिंग और भण्डारण तथा आज के इन्टरनेट को चलाने के लिए और उसके विकास के लिए ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर समाधान के लिए विकेन्द्रीकृत संप्रेषण स्टैक बनाने के लिए फण्ड स्थापित करना चाहिए। खातौर पर सिक्यूरिटी एन्क्रिप्टेड संचार के लिए टूल्स के इस्तेमाल को कम करना चाहिए। तीन. ब्रिक्स को एक ऐसे अध्यन की शुरुवात करनी चाहिए जो कोलोबोरेशन या कम्युनिकेशन के अलग-अलग आयामों का अध्यन कर सके और जो सॉफ्टवेयर और कम्युनिकेशन हार्डवेयर को हासिल कर सके। चार. ब्रिक्स नए स्टैण्डर्ड, प्रोटोकॉल और तकनीक जोकि नयी पीढ़ी के इन्टरनेट का आधार बनेगी में पहले से ही चल रहे अध्यन को कमीशन करे। और इसमें जरूरी बदलावों के साथ खासतौर पर जिससे कि " कौन किसके साथ संचार करता है" की सुरक्षा को निश्चित किया जा सके। वैकल्पिक ऑनलाइन प्लेटफोर्म और टूल्स के विकास के लिए ऍफ़.ओ.ओ.एस. का इस्तेमाल क्यों जरूरी है। अमरीकी कंपनियों द्वारा विकसित किये गए टूल्स जैसे गूगल, फेसबुक, पेयपल, अमेज़न, ट्विटर, याहू और माइक्रोसॉफ्ट के इस्तेमाल से नौ सौ सरसठ प्रतिशत जासूसी का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि ये सभी टूल्स अमरीकन कानून के दायरे में आते हैं। जबकि अमरिकन नागरिक को चौथे संसोधन के आधार पर कुछ सुरक्षा है, लेकिन जो अमरीका के नागरिक नहीं हैं उन्हें इस क़ानून के तहत कोई सुरक्षा नहीं है। कोई भी डाटा जो अमरीका के क्लाउड में है या अमरीका की किसी भी कम्पनी चाहे वह दुनिया के किसी भी हिस्से में हो के सर्वर पर है उस पर भी अमरीकी कानून ही लागू होता है। कानून का यह रास्ता वैकल्पिक प्लेटफॉर्म्स को स्थापित करने के मुकाबले लोकल डाटा स्टोरेज को कम प्रभावी बनता है। गूगल, फेसबुक और याहू ने जो एकाधिकार स्थापित कर लिया है उसे तोड़ने के लिए इन विकल्पों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। गूगल, फेसबुक और याहू वैश्विक डिजिटल विज्ञापन राजस्व का चालीस प्रतिशत बाज़ार पर कब्ज़ा है जो एक सौ सत्रह.छः बिलियन डॉलर बैठता है, इसमें से गूगल का अकेले अड़तीस.छः बिलियन डॉलर बैठता है। गूगल का पचास प्रतिशत राजस्व केवल सर्च इंजन बाज़ार में उसके व्यापक प्रसार के कारण से आता है, जहाँ उसका बाज़ार पर सत्तर प्रतिशत हिस्से पर कब्ज़ा है, जबकि बैडू दूर कहीं दुसरे स्थान पर आता है। इन्टरनेट गवर्नेंस में अमरीका की नीतियाँ इस तरह से बनायी गयी हैं ताकि इनकी कंपनियों के एकाधिकार को सुरक्षित किया जा सके। जैसे-जैसे इन कंपनियों की बढ़त होगी, वैसे-वैसे अमरीका का जासूसी तंत्र तेजी से बढेगा। अमरीकी इन्टरनेट कंपनियों के बाज़ार पर कब्जे से इन्टरनेट पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली भाषा अंग्रेजी हो गयी है; इस भाषा के बोलने वाले केवल बारह.पाँच% है, जबकि अंग्रेजी में दुनिया में पचपन% सामग्री है। इसलिए स्थानीय भाषाओँ, साहित्य और संस्कृति को बचाने के लालसा की भी यही मांग है कि इन कंपनियों के एकाधिकार को तोड़ा जाना जरूरी है। इन प्लेटफोर्म को इस्तेमाल करने की इच्छा से, एक सामान इंटरफ़ेस और प्लेटफोर्म को इस्तेमाल करते हुए बहुआयामी टूल्स को इस्तेमाल करने की योग्यता और उसके उत्पाद का निशुल्क इस्तेमाल करने से ही इनकी प्रसिद्धता बढ़ती है । आर्थिक मामले में, यह स्केल और नेटवर्क प्रभाव की अर्थव्यवस्था का ही असर है कि ज्यादा से ज्यादा लोग ऑनलाइन प्लेटफोर्म में शामिल हो रहे हैं। स्नोडेन के खुलासे ने स्पष्ट कर दिया कि क्लाउड सर्विस और सोशल मीडिया को एन.एस.ए. और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों ने काफी हद इतेमाल किया है।यह केवल निजी डाटा ही नहीं है जो राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर डालता है बल्कि उस डाटा पर भी असर डालता है जो अंतर्राष्ट्रीय वार्ता और आर्थिक मुद्दों से जुड़ा है। बड़ी वैश्विक इन्टरनेट कम्पनियों की इच्छा है कि वे या तो अमरीकन के द्दय्रे में रहे या अमरीका के राष्ट्रीय कानूनी दायरे में रहें ताकि वह इन कानूनों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर निगरानी कर सकें। इसके अलावा, जब अमरीका की चन्द कंपनियों के पास ज्यादा-से ज्यादा डाटा इकठ्ठा हो जाएगा तो उन्हें उसकी निगरानी करने में आसानी होगी। उदहारण के तौर पर, जैसा हमने ऍफ़.आई.एस.ए. का वेरिज़ोन पर आदेश देखा, एक आदेश में लाखों यूजर्स का डाटा शामिल हो सकता है। अगर देश अपने नागरिकों को, आर्थिक और सांस्कृतिक दायरों को बचाना चाहती है तो उन्हें अपने नागरिकों के लिए वैकल्पिक टूल्स उपलब्ध कराने होंगें जो इनके इस्तेमाल में यूजर्स को वैसी ही सर्विस और आराम प्रदान करा सके। अगर हमारे पास इन कंपनियों के मुकाबले में बेहतर प्रोडक्ट नहीं होंगे तो लोग इन्ही मंचों को इस्तेमाल करते रहेंगें। इसका मतलब है की जीमेल, फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब, और सर्च इंजन के समानांतर ऐसे टूल विकसित हों जो यूजर्स को इसी तरह की सर्विस दे सकें जो गूगल उपलब्ध करता है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि फ्री और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर को विकसित करें ताकि इस तरह के मंचों को प्रदान किया जा सके। इस तरह के मंचों को विकसित करने के लिए हमें FOSS का ही इस्तेमाल क्यों करना चाहिए? आज वैकल्पिक इन्टरनेट टूल्स और प्लेटफोर्म सृजित करने का फायदा इसलिए है कि FOSS कम्युनिटी इसे पहले से सृजित कर चुकी हैः FOSS के प्रति समझ के लिए तीन महत्त्वपूर्ण मुख्य कारण है जोकि मालिकाना दृष्टिकोण से अलग है। पहला यह कि इसका कोड सार्वजनिक है, यह इस तरह के सॉफ्टवेयर में पिछले दरवाजे से एंट्री नहीं देता। यह इस तरह के प्लेटफोर्मस को दुनिया में जल्दी स्वीकृति प्रदान कराएगा; इसे ऐसा नहीं माना जाएगा कि यह अमरीकी निगरानी तंत्र के साथ प्रतियोगिता कर रहा है। दूसरा यह कि पहले से ही वैश्विक FOSS समुदाय मौजूद है जो पहले से ही ऐसे टूल्स को विकसित कर चुकी है या विकसित कर रही है जो आसानी से इन प्लेटफोर्मस में समाहित हो सकते हैं। तीसरा मुद्दा इसमें खर्च का है - जिस स्तर पर फ्री सॉफ्टवेयर टूल्स उपलब्ध हैं और इस तरह के पेकेज्स पर जो समूह कही भी काम कर रहे हैं अगर उनसे समझौता करें, तो इस तरह के प्लेटफोर्मस के सृजन करने में खर्चा अन्य मुकाबले में काफी कम होगा। पहले से ही ब्राज़ील और भारत ने अपने आप को प्रतिबद्ध किया है कि वे ओपन स्टैण्डर्डस FOSS को सरकारी गतिविधियों के लिए समर्थन किया है जहाँ भी यह उसे यह उपयुक्त लगा। FOSS के लये ब्रिक्स देशों का परियोजना आधारित समर्थन भी ओपन सिस्टम को बढ़ावा देगा - हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों में - और यह कदम अमरीका आधारित सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर कंपनियों के एकाधिकार को भी कम करेगा। ब्रिक्स/इब्सा देश इसके न्रेतत्व के लिए एकदम उपयुक स्थिति में। इनके पास स्किल-सेट हैं और बड़ा गृह बाज़ार है। ब्राज़ील, भारत और दक्षिण अफ्रीका की निति FOSS के समर्थन की नीति है। इन देशों की गैर अंग्रेजी सामग्री की भी जरूरत है। यहाँ तक कि भारत और दक्षिण अफ्रीका जहाँ ज्यादातर अंग्रेजी का इस्तेमाल होता है, अन्य भाषाओँ की जरूरत है ताकि लोगों की संस्कृति को बचाया जा सके और इन्टरनेट सेवाओं में इन भाषाओँ का भी स्थान बन सके। जबकि ई-गवनेंस महत्तवपूर्ण हो गया है, लोगों को सरकारी सेवाये प्राप्त कराने के लिए बड़े स्तर पर उसका स्थानीयकरण करना होगा जिसे की वैश्विक इन्टरनेट कम्पनियाँ नहीं करा पाएंगीं। ईमेल, तुरंत सन्देश, विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग और फाइल शेयरिंग और भण्डारण के लिए यह संभव है की ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर समाधान उपलब्ध कराया जाये। यह आज संभव है - अगर हम इसे एक गंभीर काम के रूप में लेते हैं - इन प्लेटफोर्म के सृजन के लिए। अगर हम फ्री और ओपन सोर्स इस्तेमाल करते हैं और ब्रिक्स देशों का इसे समर्थन मिलता है तो इस कोशिशों की कीमत ज्यादा नहीं होगी। मानव पूँजी में निवेश करने से इन समाधानों के सृजन की जरूरत जरूरत को बल मिलेगा तथा क्षमता के विकास और दक्षिण-से-दक्षिण नेटवर्क शुरुवाती कोशिशों से आगे फल प्रदान कराएगा। हम ब्रिक्स देशों से गुजारिश करते हैं कि वे स्नोडेन के बाद के हालातों को सामूहिक रूप से अपने में समाहित करें और फ्री और ओपन सोर्स समुदाय द्वारा जो टूल्स विकसित किये जा रहे हैं उनका फायदा उठायें और ब्रिक्स के मानव और आर्थिक संसाधनों को बढ़ाएं ताकि सुरक्षित सॉफ्टवेयर का समुचित समूह तैयार किया जा सके। जस्ट नेट गठबंधन जस्ट नेट गठबंधन एक खुला, स्वतंत्र, और न्यायसंगत इंटरनेट के लिए प्रतिबद्ध नागरिक समाजिक अभिनेताओं का एक वैश्विक नेटवर्क है। फ़रवरी दो हज़ार चौदह में स्थापित, गठबंधन, इंटरनेट और उसके गवर्नेंस के विषयों में संलग्न, लोकतंत्र, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लक्ष्य को साथ लिए चलता है। हमारे संस्थापक सिद्धांत और उद्देश्य, दिल्ली घोषणा में निहित हैंः http://justnetcoalition।org/delhi-declaration । डिस्क्लेमरः- उपर्युक्त लेख मे व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक तौर पर न्यूज़क्लिक के विचारो को नहीं दर्शाते । अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
Bank Holidays List June 2023:भारत में, बैंक अवकाश दो श्रेणिया में बांटा गया है - राष्ट्रीय अवकाश और सरकारी अवकाश । Bank Holidays List June 2023: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अवकाश कैलेंडर के अनुसार, ईद उल अज़हा के लिए बैंक अवकाश 28 और 29 जून को मनाया जाएगा, जिसके कारण कुछ राज्यों में सार्वजनिक और निजी ऋणदाता बंद रहेंगे। जून में बैंक अवकाश 2023 पूरी सूचीः भारत में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक अगले महीने यानी जून 2023 में 10 से अधिक दिनों तक बंद रहेंगे। भारत में, बैंक अवकाशदो श्रेणियों में बांटा गया है - राष्ट्रीय अवकाश और सरकारी अवकाशा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अवकाश कैलेंडर के अनुसार, ईद उल अज़हा के लिए बैंक अवकाश 28 और 29 जून को मनाया जाएगा, जिसके कारण कुछ राज्यों में सार्वजनिक और निजी ऋणदाता बंद रहेंगे। इसके अलावा, ओडिशा में रथ यात्रा के मद्देनजर 20 जून को बैंकिंग परिचालन निलंबित रहेगा। • 10 जून 2023 : दूसरा शनिवार । • 15 जून 2023: राजा संक्रांति के मद्देनजर ओडिशा और मिजोरम और ओडिशा में बैंक बंद रहेंगे। • 18 जून 2023: रविवार • 20 जून 2023: रथ यात्रा के चलते ओडिशा में बैंक बंद रहेंगे। • 26 जून 2023: खर्ची पूजा के मद्देनजर त्रिपुरा में बैंक बंद रहेंगे। • 28 जून 2023: ईद उल अजहा के मद्देनजर केरल, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर में बैंक बंद रहेंगे। • 30 जून 2023: रीमा ईद उल अजहा के कारण मिजोरम और ओडिशा में बैंक बंद रहेंगे। RBI ने बैंकों के लिए पूरे एक साल के लिए अवकाश कैलेंडर जारी किया। आरबीआई कैलेंडर के अनुसार, छुट्टियों को तीन ब्रैकेट्स के तहत अधिसूचित किया गया जिसमें 'हॉलिडे अंडर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट और रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट हॉलीडे' और 'बैंक क्लोजिंग ऑफ अकाउंट्स' शामिल है। इन छुट्टियों के दिन, सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, विदेशी बैंकों, सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय बैंकों सहित बैंकों की सभी शाखाएं बंद रहती हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपनी शाखा में जाने से पहले छुट्टियों की सूची देख लें।
Bank Holidays List June दो हज़ार तेईस:भारत में, बैंक अवकाश दो श्रेणिया में बांटा गया है - राष्ट्रीय अवकाश और सरकारी अवकाश । Bank Holidays List June दो हज़ार तेईस: भारतीय रिज़र्व बैंक के अवकाश कैलेंडर के अनुसार, ईद उल अज़हा के लिए बैंक अवकाश अट्ठाईस और उनतीस जून को मनाया जाएगा, जिसके कारण कुछ राज्यों में सार्वजनिक और निजी ऋणदाता बंद रहेंगे। जून में बैंक अवकाश दो हज़ार तेईस पूरी सूचीः भारत में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक अगले महीने यानी जून दो हज़ार तेईस में दस से अधिक दिनों तक बंद रहेंगे। भारत में, बैंक अवकाशदो श्रेणियों में बांटा गया है - राष्ट्रीय अवकाश और सरकारी अवकाशा भारतीय रिज़र्व बैंक के अवकाश कैलेंडर के अनुसार, ईद उल अज़हा के लिए बैंक अवकाश अट्ठाईस और उनतीस जून को मनाया जाएगा, जिसके कारण कुछ राज्यों में सार्वजनिक और निजी ऋणदाता बंद रहेंगे। इसके अलावा, ओडिशा में रथ यात्रा के मद्देनजर बीस जून को बैंकिंग परिचालन निलंबित रहेगा। • दस जून दो हज़ार तेईस : दूसरा शनिवार । • पंद्रह जून दो हज़ार तेईस: राजा संक्रांति के मद्देनजर ओडिशा और मिजोरम और ओडिशा में बैंक बंद रहेंगे। • अट्ठारह जून दो हज़ार तेईस: रविवार • बीस जून दो हज़ार तेईस: रथ यात्रा के चलते ओडिशा में बैंक बंद रहेंगे। • छब्बीस जून दो हज़ार तेईस: खर्ची पूजा के मद्देनजर त्रिपुरा में बैंक बंद रहेंगे। • अट्ठाईस जून दो हज़ार तेईस: ईद उल अजहा के मद्देनजर केरल, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर में बैंक बंद रहेंगे। • तीस जून दो हज़ार तेईस: रीमा ईद उल अजहा के कारण मिजोरम और ओडिशा में बैंक बंद रहेंगे। RBI ने बैंकों के लिए पूरे एक साल के लिए अवकाश कैलेंडर जारी किया। आरबीआई कैलेंडर के अनुसार, छुट्टियों को तीन ब्रैकेट्स के तहत अधिसूचित किया गया जिसमें 'हॉलिडे अंडर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट और रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट हॉलीडे' और 'बैंक क्लोजिंग ऑफ अकाउंट्स' शामिल है। इन छुट्टियों के दिन, सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, विदेशी बैंकों, सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय बैंकों सहित बैंकों की सभी शाखाएं बंद रहती हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपनी शाखा में जाने से पहले छुट्टियों की सूची देख लें।
चंडीगढ़, 30 जनवरी (ब्यूरो) राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 74वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य पर गांधी स्मारक भवन सेक्टर 16 ए में गांधी स्मारक निधि व सांस्कृतिक विभाग चंडीगढ़ के सहयोग से विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इसके मुख्य अतिथि सत्यपाल जैन अपर सालीसिटर भारत सरकार, विशिष्ट अतिथि संजय कुमार, उप महाप्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक और अध्यक्षता संजय सिंह, अध्यक्ष्र गांधी स्मारक निधि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश ने की। सभी लोगों का स्वागत देवराज त्यागी निदेशक गांधी स्मारक भवन तथा धन्यवाद एमपी डोगरा ने किया। कार्यक्रम का संचालन पापिया चक्रवर्ती ने किया। कार्यक्रम में सबसे पहले दो मिनट का मौन रखा गया। इससे पूर्व गांधी जी की प्रतिमा पर फूल भेंट किए गए। साहित्यकार प्रेम विज की ओर से काव्यांजलि भेंट की गई। विद्या धाम की अध्यक्ष डॉ. सरिता मेहता ने गांधीजी को अपनी कविता से श्रद्धांजलि दी । पंडित मोहन लाल एसडी पब्लिक स्कूल सेक्टर 32 के बच्चों एवं म्यूजिक टीचर नीलम शर्मा ने गांधी जी के प्रिय भजनों को मधुर आवाज में प्रस्तुत किया। विशिष्ट अतिथि के तौर पर संजय कुमार उप महाप्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक ने गांधी स्मारक भवन के पुस्तकालय को फर्नीचर के लिऐ 522000 रुपए दान में दिए। खादी आश्रम सेक्टर 17 के सचिव संजय शर्मा, सतीश, गुगली, अमर सिंह, योग गुरु नरेश शर्मा, शोभा शर्मा, कवि प्रेम विज, कवयित्री सरिता आदि मौजूद रहे।
चंडीगढ़, तीस जनवरी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की चौहत्तरवीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य पर गांधी स्मारक भवन सेक्टर सोलह ए में गांधी स्मारक निधि व सांस्कृतिक विभाग चंडीगढ़ के सहयोग से विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इसके मुख्य अतिथि सत्यपाल जैन अपर सालीसिटर भारत सरकार, विशिष्ट अतिथि संजय कुमार, उप महाप्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक और अध्यक्षता संजय सिंह, अध्यक्ष्र गांधी स्मारक निधि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश ने की। सभी लोगों का स्वागत देवराज त्यागी निदेशक गांधी स्मारक भवन तथा धन्यवाद एमपी डोगरा ने किया। कार्यक्रम का संचालन पापिया चक्रवर्ती ने किया। कार्यक्रम में सबसे पहले दो मिनट का मौन रखा गया। इससे पूर्व गांधी जी की प्रतिमा पर फूल भेंट किए गए। साहित्यकार प्रेम विज की ओर से काव्यांजलि भेंट की गई। विद्या धाम की अध्यक्ष डॉ. सरिता मेहता ने गांधीजी को अपनी कविता से श्रद्धांजलि दी । पंडित मोहन लाल एसडी पब्लिक स्कूल सेक्टर बत्तीस के बच्चों एवं म्यूजिक टीचर नीलम शर्मा ने गांधी जी के प्रिय भजनों को मधुर आवाज में प्रस्तुत किया। विशिष्ट अतिथि के तौर पर संजय कुमार उप महाप्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक ने गांधी स्मारक भवन के पुस्तकालय को फर्नीचर के लिऐ पाँच लाख बाईस हज़ार रुपयापए दान में दिए। खादी आश्रम सेक्टर सत्रह के सचिव संजय शर्मा, सतीश, गुगली, अमर सिंह, योग गुरु नरेश शर्मा, शोभा शर्मा, कवि प्रेम विज, कवयित्री सरिता आदि मौजूद रहे।
पर साधु ने कहा - तुम लोग अपनी जान बचाओ मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा! "नहीं, मुझे तुम्हारी मदद की आवश्यकता नहीं है , मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा !! ", साधु ने उत्तर दिया. नाव वाला चुप-चाप वहां से चला गया. मरने के बाद साधु महाराज स्वर्ग पहुचे और भगवान से बोले -. हे प्रभु मैंने तुम्हारी पूरी लगन के साथ आराधना की... तपस्या की पर जब मै पानी में डूब कर मर रहा था तब तुम मुझे बचाने नहीं आये, ऐसा क्यों प्रभु ? मित्रों, इस जीवन में ईश्वर हमें कई अवसर देता है , इन अवसरों की प्रकृति कुछ ऐसी होती है कि वे किसी की प्रतीक्षा नहीं करते है , वे एक दौड़ते हुआ घोड़े के सामान होते हैं जो हमारे सामने से तेजी से गुजरते हैं , यदि हम उन्हें पहचान कर उनका लाभ उठा लेते है तो वे हमें हमारी मंजिल तक पंहुचा देते है, अन्यथा हमें बाद में पछताना ही पड़ता है !! यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id हैः:- kmsraj51@yahoo.in . पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!
पर साधु ने कहा - तुम लोग अपनी जान बचाओ मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा! "नहीं, मुझे तुम्हारी मदद की आवश्यकता नहीं है , मुझे तो मेरा भगवान बचाएगा !! ", साधु ने उत्तर दिया. नाव वाला चुप-चाप वहां से चला गया. मरने के बाद साधु महाराज स्वर्ग पहुचे और भगवान से बोले -. हे प्रभु मैंने तुम्हारी पूरी लगन के साथ आराधना की... तपस्या की पर जब मै पानी में डूब कर मर रहा था तब तुम मुझे बचाने नहीं आये, ऐसा क्यों प्रभु ? मित्रों, इस जीवन में ईश्वर हमें कई अवसर देता है , इन अवसरों की प्रकृति कुछ ऐसी होती है कि वे किसी की प्रतीक्षा नहीं करते है , वे एक दौड़ते हुआ घोड़े के सामान होते हैं जो हमारे सामने से तेजी से गुजरते हैं , यदि हम उन्हें पहचान कर उनका लाभ उठा लेते है तो वे हमें हमारी मंजिल तक पंहुचा देते है, अन्यथा हमें बाद में पछताना ही पड़ता है !! यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id हैः:- kmsrajइक्यावन@yahoo.in . पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!
शाहजहांपुर पुलिस ने तीन दिन पहले गोली मारकर हत्या करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पत्नी का युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। युवक आटा पीसने घर-घर जाता था। इस दौरान दोनों एक दूसरे से फोन पर बात करने लगे थे। आरोपी ने पत्नी को फोन पर बात करते देखा था। चुपके से पत्नी के मोबाइल से नंबर निकालकर आरोपी ने युवक को उसके मकान के बाहर फोन करके बुलाया था। आरोपी और उसके भाई ने युवक की तीन गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने महिला के पति को गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास से तमंचा, मृतक का मोबाइल, कारतूस और मृतक की पैंट बरामद की है। महिला के पति को गिरफ्तार कर लियाथाना गढ़िया रंगीन क्षेत्र के गांव बिरिया कलां निवासी सुरेंद्र सिंह का 22 साल का बेटा अजयपाल ट्रैक्टर में आटा की चक्की लगाकर घर घर जाकर आटा पीसता था। थाना मदनापुर क्षेत्र के गांव मकरंदपुर निवासी रविंद्र ने कई बार अजयपाल से आटा पिसाया था। इसी दौरान अजयपाल का रविंद्र की पत्नी से प्रेम प्रसंग हो गया। दोनों के बीच फोन पर बात होना शुरू हो गई थी। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को बताया कि करीब एक महीने पहले पत्नी को फोन पर बात करते देखा था। तब पत्नी ने गलत नंबर डायल होने की बात कही थी। इसलिए उसे नजरअंदाज कर दिया था। 6 से 7 दिन पहले फिर से बात करते देखा था। चुपके से पत्नी के मोबाइल से उसका नंबर निकाला। जिस नंबर पर पत्नी की बात होती थी। उसके बाद उस नंबर के बारे में पता लगाया तो वह आटा चक्की चलाने वाले अजयपाल का निकला था। तब आरोपी ने अपने भाई को घटना की जानकारी दी। तब दोनों ने अजयपाल को मारने का प्लान बनाया था। अजय पाल को चार जुलाई की रात आरोपी ने फोन पर आवाज बदलकर उसके घर के बाहर पेड़ के पास बुलाया था। तब अजयपाल पैंट नहीं पहना था। पैंट कंधे पर डालकर ला रहा था। हम लोगों को देखकर अजय पाल भागा। एक गोली चलाई तो अजयपाल की जांघ में लगी। फिर अजयपाल भागता रहा। तब हम लोगों ने अजयपाल को दौड़ाकर पकड़ा। उसके बाद अजयपाल के सीने पर दूसरी और तीसरी गोली उसकी जांघ पर मारी थी। उसके बाद अजयपाल का मोबाइल और पैंट लेकर भाग गए थे। पुलिस पूछताछ के बाद आरोपी को जेल भेजेगी। पुलिस ने आरोपी के भाई की तलाश शुरू कर दी है। बता दें कि चार जुलाई की रात अजयपाल अपने पिता सुरेंद्र के पास वाली चारपाई पर लेटा था। रात में आंख खुलने पर पिता को अजयपाल नहीं मिला। उन्होंने उसकी तलाश शुरू कर दी थी। पांच जुलाई की शाम अजयपाल का शव थाना मदनापुर क्षेत्र के मकरंदपुर गांव के खेत में मिला था। उसके शरीर पर तीन गोलियां मारी गई थी। पिता ने गोली मारकर हत्या करने की तहरीर पुलिस को दी थी। अजयपाल का मोबाइल और पैंट गायब था। पुलिस तभी घटना को प्रेम प्रसंग से जोड़कर देख रही थी। पुलिस ने अजयपाल का मोबाइल सर्विलांस पर लगाया तो कई सुराग मिले। जिसमें मकरंदपुर गांव के रहने वाले रविंद्र का नाम सामने आया। एसपी सिटी सुधीर जायसवाल ने बताया कि आरोपी रविंद्र को उसके गांव से गिरफ्तार किया गया है। उसके भाई की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
शाहजहांपुर पुलिस ने तीन दिन पहले गोली मारकर हत्या करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पत्नी का युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। युवक आटा पीसने घर-घर जाता था। इस दौरान दोनों एक दूसरे से फोन पर बात करने लगे थे। आरोपी ने पत्नी को फोन पर बात करते देखा था। चुपके से पत्नी के मोबाइल से नंबर निकालकर आरोपी ने युवक को उसके मकान के बाहर फोन करके बुलाया था। आरोपी और उसके भाई ने युवक की तीन गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने महिला के पति को गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास से तमंचा, मृतक का मोबाइल, कारतूस और मृतक की पैंट बरामद की है। महिला के पति को गिरफ्तार कर लियाथाना गढ़िया रंगीन क्षेत्र के गांव बिरिया कलां निवासी सुरेंद्र सिंह का बाईस साल का बेटा अजयपाल ट्रैक्टर में आटा की चक्की लगाकर घर घर जाकर आटा पीसता था। थाना मदनापुर क्षेत्र के गांव मकरंदपुर निवासी रविंद्र ने कई बार अजयपाल से आटा पिसाया था। इसी दौरान अजयपाल का रविंद्र की पत्नी से प्रेम प्रसंग हो गया। दोनों के बीच फोन पर बात होना शुरू हो गई थी। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को बताया कि करीब एक महीने पहले पत्नी को फोन पर बात करते देखा था। तब पत्नी ने गलत नंबर डायल होने की बात कही थी। इसलिए उसे नजरअंदाज कर दिया था। छः से सात दिन पहले फिर से बात करते देखा था। चुपके से पत्नी के मोबाइल से उसका नंबर निकाला। जिस नंबर पर पत्नी की बात होती थी। उसके बाद उस नंबर के बारे में पता लगाया तो वह आटा चक्की चलाने वाले अजयपाल का निकला था। तब आरोपी ने अपने भाई को घटना की जानकारी दी। तब दोनों ने अजयपाल को मारने का प्लान बनाया था। अजय पाल को चार जुलाई की रात आरोपी ने फोन पर आवाज बदलकर उसके घर के बाहर पेड़ के पास बुलाया था। तब अजयपाल पैंट नहीं पहना था। पैंट कंधे पर डालकर ला रहा था। हम लोगों को देखकर अजय पाल भागा। एक गोली चलाई तो अजयपाल की जांघ में लगी। फिर अजयपाल भागता रहा। तब हम लोगों ने अजयपाल को दौड़ाकर पकड़ा। उसके बाद अजयपाल के सीने पर दूसरी और तीसरी गोली उसकी जांघ पर मारी थी। उसके बाद अजयपाल का मोबाइल और पैंट लेकर भाग गए थे। पुलिस पूछताछ के बाद आरोपी को जेल भेजेगी। पुलिस ने आरोपी के भाई की तलाश शुरू कर दी है। बता दें कि चार जुलाई की रात अजयपाल अपने पिता सुरेंद्र के पास वाली चारपाई पर लेटा था। रात में आंख खुलने पर पिता को अजयपाल नहीं मिला। उन्होंने उसकी तलाश शुरू कर दी थी। पांच जुलाई की शाम अजयपाल का शव थाना मदनापुर क्षेत्र के मकरंदपुर गांव के खेत में मिला था। उसके शरीर पर तीन गोलियां मारी गई थी। पिता ने गोली मारकर हत्या करने की तहरीर पुलिस को दी थी। अजयपाल का मोबाइल और पैंट गायब था। पुलिस तभी घटना को प्रेम प्रसंग से जोड़कर देख रही थी। पुलिस ने अजयपाल का मोबाइल सर्विलांस पर लगाया तो कई सुराग मिले। जिसमें मकरंदपुर गांव के रहने वाले रविंद्र का नाम सामने आया। एसपी सिटी सुधीर जायसवाल ने बताया कि आरोपी रविंद्र को उसके गांव से गिरफ्तार किया गया है। उसके भाई की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
शिरजगांव कसबा/दि. 14 - शिरजगांव कसबा से परतवाडा मार्ग तक भारत पेूट्रोल पंप के नजृदीक मोड पर अकोला से आ रहे माल वाहक व दुपहिया की आमने सामने भिडंत हो गई. इस हादसे में शिरजगांव कसबा निवासी दुपहिया चालक की घटनास्थल पर ही मोैत हो गई. मृतक का नाम गोवर्धन नांदुरकर बताया गया है. मिली जानकारी के अनुसार गोवर्धन नांदुरकर अपनी दुपहिया नंबर एमएच 27/ बीएन- 9384 से खेत में काम के सिलसिले में जा रहा था. इस समय परतवाडा से शिरजगांव की दिशा में फार्मसी मेडिकल की दवाई लेकर जा रहा वाहन नंबर एमएच 30/ बीडी-2173 मोटरसाइकिल से जा टकराया. इस हादसे में दुपहिया सवार गोवर्धन नांदुरकर के सिर पर गंभीर चोट आयी. जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई. जबकि वाहन चालक घटनास्थल से भाग निकलने की फिराक में था. तभी नागरिकों ने उसे पकडकर पुलिस के हवाले किया. शिरजगांव के थानेदार दिपक वलवी ने घटनास्थल पहुंचकर मामला दर्ज किया.
शिरजगांव कसबा/दि. चौदह - शिरजगांव कसबा से परतवाडा मार्ग तक भारत पेूट्रोल पंप के नजृदीक मोड पर अकोला से आ रहे माल वाहक व दुपहिया की आमने सामने भिडंत हो गई. इस हादसे में शिरजगांव कसबा निवासी दुपहिया चालक की घटनास्थल पर ही मोैत हो गई. मृतक का नाम गोवर्धन नांदुरकर बताया गया है. मिली जानकारी के अनुसार गोवर्धन नांदुरकर अपनी दुपहिया नंबर एमएच सत्ताईस/ बीएन- नौ हज़ार तीन सौ चौरासी से खेत में काम के सिलसिले में जा रहा था. इस समय परतवाडा से शिरजगांव की दिशा में फार्मसी मेडिकल की दवाई लेकर जा रहा वाहन नंबर एमएच तीस/ बीडी-दो हज़ार एक सौ तिहत्तर मोटरसाइकिल से जा टकराया. इस हादसे में दुपहिया सवार गोवर्धन नांदुरकर के सिर पर गंभीर चोट आयी. जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई. जबकि वाहन चालक घटनास्थल से भाग निकलने की फिराक में था. तभी नागरिकों ने उसे पकडकर पुलिस के हवाले किया. शिरजगांव के थानेदार दिपक वलवी ने घटनास्थल पहुंचकर मामला दर्ज किया.
सुपरस्टार सलमान खान इन दिनों कटरीना कैफ के साथ अपनी अपकमिंग फिल्म 'टाइगर ज़िंदा है. ' कुछ देर पहले सलमान ने अपने फेसबुक पेज पर कटरीना और उनकी एक तस्वीर शेयर की है. जिसके साथ उन्होंने लिखा है की, 'BACK TOGETHER , IN TIGER ZINDA HAI' बता दे की इन दिनों फिल्म की शूटिंग विदेशी लोकेशन पर चल रही है. फिल्म में पहली बार सलमान अंडरवाटर सीन्स शूट करते नज़र आएंगे. इस फिल्म का डायरेक्शन अली अब्बास जफ्फर कर रहे है. 'टाइगर ज़िंदा है' 2012 में आयी फिल्म 'एक था टाइगर' का सीक्वेल है. एक था टाइगर बॉक्स ऑफिस पर काफी HIT रही थी. बता दे की रणबीर कपूर से ब्रेकअप के बाद कटरीना के पास ज्यादा फिल्में नहीं है. ऐसे में वह एक बार सलमान के पास पहुची है. जहाँ सलमान भी कटरीना का पूरा साथ देते नज़र आ रहे है.
सुपरस्टार सलमान खान इन दिनों कटरीना कैफ के साथ अपनी अपकमिंग फिल्म 'टाइगर ज़िंदा है. ' कुछ देर पहले सलमान ने अपने फेसबुक पेज पर कटरीना और उनकी एक तस्वीर शेयर की है. जिसके साथ उन्होंने लिखा है की, 'BACK TOGETHER , IN TIGER ZINDA HAI' बता दे की इन दिनों फिल्म की शूटिंग विदेशी लोकेशन पर चल रही है. फिल्म में पहली बार सलमान अंडरवाटर सीन्स शूट करते नज़र आएंगे. इस फिल्म का डायरेक्शन अली अब्बास जफ्फर कर रहे है. 'टाइगर ज़िंदा है' दो हज़ार बारह में आयी फिल्म 'एक था टाइगर' का सीक्वेल है. एक था टाइगर बॉक्स ऑफिस पर काफी HIT रही थी. बता दे की रणबीर कपूर से ब्रेकअप के बाद कटरीना के पास ज्यादा फिल्में नहीं है. ऐसे में वह एक बार सलमान के पास पहुची है. जहाँ सलमान भी कटरीना का पूरा साथ देते नज़र आ रहे है.
कि उसे वह आजादी और इन्साफ दिलाये, जिससे वह इतनी लवी मुद्दतसे महरूम रखा गया था। सरकार को नमक का जो एकाधिपत्य हासिल था, उसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए नमक-कानून तोडने मे हिदुस्तान का हर शहर और गाव गाधीजी के साथ हो गया । इलाहाबाद मे हमने वडा भारी जुलूस निकाला, जिसके प्रत मे एक सभा हुई, जहा जवाहर ने सबसे पहले कानून के खिलाफ नमक तैयार किया। आमतौर पर जो आशा थी, उसके खिलाफ, गाधीजी को दाडी मे गिरफ्तार नही किया गया। उन्हें आगे के गांव में जाने दिया गया, जहा आधी रात को वह गिरफ्तार कर लिये गये । यह एक अजीब बात है कि इतनी ताकत रखनेवाली सरकार भी चोरो की तरह रात के अधेरे मे यह काम करने पर मजबूर हुई, क्योकि वह डरती थी कि जिन लोगो को वह दमन से दवा सकती है, उनका गुस्सा इस बात से फट न पडे । इसके कुछ ही दिनो वाद जवाहर भी पकडे गये और अब हर शहर और गाव मे आजादी के लिए काम करने की लहर-सी दौड़ गई। अहिसा को माननेवाले, पर आजादी हासिल करने का निश्चय किए हुए लोगो के खिलाफ गिरफ्तारियो, गोलियो, लाठी के हमले और दूसरे भीषण दमन के तरीके शुरू हो गये। लोग इज्जत और अपने कीमती हको की हिफाजत के लिए सीना तानकर खडे हो गये और उन्होंने सरकारी अधिकारियों और पुलिस के हमलो का बहादुरी से मुकावला किया। माटेसरी स्कूल में अपनी जगह से इस्तीफा देकर में कांग्रेस के स्वयसेवक-दल में शामिल हो गई और विदेशी कपडे की दूकानो पर धरना देने, * स्वयसेवको की कवायद, जलूस निकालने और ऐसे ही और कामो मे, जो काग्रेस के नेता मुझे सौपते थे, मै अपना वक्त बिताने लगी। पिताजी को यह बात पसद न थी कि कमला, मेरी बहन स्वरूप और मै दिन भर झुलसा देनेवाली गर्मी मे मारे-मारे फिरें, पर उन्होंने इस बारे मे कभी हमसे सख्ती से बहस नही की और न हमे इस वात पर मजबूर किया कि हम जो काम कर रहे थे, उसे छोड़ दे । उनकी सेहत ठीक नही थी और वह चाहते थे कि उनके बच्चे उनके पास रहे । जवाहर जेल मे थे और पिताजी नही चाहते थे कि हममे से कोई जेल जाये । सेहत की खराबी के बावजूद वह आदोलन चलाने के काम को रोक नहीं सकते थे, पर आराम के विना सुबह से लेकर शाम तक काम करते रहने का वोझ ऐसा नही था, जो वह उठा सकते । डाक्टरो ने उन्हे सलाह दी कि वह आराम करे। पर हुकूमत ने डाक्टरों से भी पहले ३० जून १९३० को उन्हें गिरफ्तार कर लिया। नतीजा यह हुआ कि वह पहाड पर जाने की बजाय जमना के उस पार जाकर नैनी जेल में दाखिल हो गये । पिताजी ने जेल मे जो दस हफ्ते गुजारे, उनमे उनकी तबीयत खराब ही होती गई। जब उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि वह अस्थिपजर रह गये, तब जाकर ब्रिटिश हुकूमत को उन्हे छोडने का खयाल आया । उनके बाहर आते ही हम सव मसूरी गये, जहा पहाडी हवा और घर के आराम से उनकी हालत कुछ सभली और उनके कमजोर और थके हुए जिस्म मे कुछ ताकत आई। जवाहर भी इन्ही दिनो छोड दिये गये थे । वह इलाहाबाद ही रहते और कभी-कभी हमसे मिलने मसूरी आते थे । उनके आने से पिताजी को वडी मदद और राहत मिलती थी । पर जवाहर ज्यादा दिन आजाद नही रह सकते थे और बहुत जल्द उनके फिर एक बार पकडे जाने की अफवाहे फैलने लगी। पिताजी ने फैसला किया कि जिस कदर जल्द मुमकिन हो, इलाहावाद वापस जाये। उन्होने डाक्टरो का मशविरा भी नही माना । १८ अक्तूवर को हम सव मसूरी से रवाना हुए। जवाहर और कमला हमसे मिलने स्टेशन आये, पर गाडी देर मे आ रही थी, इसलिए जवाहर ज्यादा ठहर नही सके । उन्हें एक जलसे मे जाना था। हजारो किसान आस-पास के देहातो से इस सभा के लिए आये थे । सभा के वाद जवाहर और कमला घर आ रहे थे, तो उनकी गाडी हमारे घर के करीब ही रोक दी गई और जवाहर को गिरफ्तार करके फिर एक बार नैनी जेल भेज दिया गया। जवाहर अपने उस वीमार बाप से, जो उनकी वापसी की राह देख रहे थे, मिल भी न सके । जवाहर की गिरफ्तारी अचानक नही थी, फिर भी पिताजी को इससे वडा धक्का पहुचा । उन्हे प्राशा थी कि वह जवाहर से मिलकर राजनैतिक औौर कुटुव के बारे मे भी कुछ वाते कर सकेंगे। पर ऐसा न हो सका। पिताजी कुछ देर तो रज के मारे अपना सिर झुकाकर बैठे रहे, पर उनका शेरो जैसा वहादुर दिल ज्यादा देर किसी कमजोरी को बर्दाश्त नही कर सकता था । उन्होने अपना सिर उठाकर ऐलान किया कि मै अव काम शुरू करूंगा और डाक्टर मुझे बीमार समझकर काम से न रोके । यह वात वडी ही अजीव थी कि केवल अपनी आत्मशक्ति से काम लेकर उन्होंने उस खौफनाक वीमारी को कैसे दबा दिया, जो उन पर कब्जा कर चुकी थी। यह सब थोडे समय के लिए ही था । विना किसी झिझक के पिताजी ने काम शुरू कर दिया और कानून - भग के आदोलन में फिर एक वार नई जान डाल दी। धीरे-धीरे उनकी हालत और खराब होती गई । जवाहर ने उन्हे इस बात पर राजी किया कि वह आराम करे और समुद्र यात्रा पर जाये। मै उनके साथ जानेवाली थी, पर जब हम कलकत्ते पहुचे, तो उनकी हालत खराब हो गई और सफर का इरादा छोड देना पडा । मै कुछ हफ्ते पिताजी के साथ कलकत्ते मे रही । ये कुछ हफ्ते वडे ही दिल तोडनेवाले थे। पिताजी को यह पता चल चुका था कि अब वह ठीक न होगे और अब कोई इलाज काम नही दे सकता । फिर भी वह मायूस नही थे, बल्कि अपनी बीमारी का मजाक उडाते थे, पर अपने दिल मे वह जानते थे कि अव मामला कुछ ही महीनो का है । उनका साहस आखिर वक्त तक कमाल का था । एक रोज यह खवर आई कि कमला गिरफ्तार हो गई। इससे पिताजी को वडी तकलीफ हई; क्योकि कमला की सेहत ठीक न थी । अब पिताजी चाहते थे कि उसी वक्त इलाहावाद चले जाये । पर डाक्टरों ने उन्हे कुछ दिन और वही रहने पर राजी किया। उन्होने मुझे फौरन इलाहाबाद भेजा और कुछ दिनो बाद परिवार के और लोगो के साथ खुद भी चले आये । मेरी कलकत्ते से वापसी के बाद एक जीव घटना हुई । मेरे बहुत से दोस्त और साथी रोज गिरफ्तार हो रहे थे और उनके मुकदमे जेल ही मे चलते थे । इसमे से जो लोग इस मौके पर हाजिर रहना चाहते थे, उन्हे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट से इजाजत लेनी पडती थी। यह डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट बडे ही तग करनेवाले और धाधलेवाज आदमी थे । एक रोज मै उनके पास इजाजत लेने गई, क्योकि उस दिन यूथ लीग की एक पूरी टोली पर मुकदमा चलनेवाला था । शायद मुझे देखते ही उन्हें गुस्सा आ गया। कहने लगे, "यह क्या १ तुम फिर आ गई ? तुम लोग अपना काम क्यो नही करते और मुझे अपना काम क्यो नही करने देते ?" मैने खामोशी से जवाब दिया कि मै यूथ लीग की सेक्रेटरी हू, इसलिए इन लोगो के मुकदमे के वक्त हाजिर रहना मेरा काम है। पहले उन्होने इजाजत देने से इन्कार किया। मैने उनसे कहा कि जबतक आप इजाजत न देगे, मैं ठहरी रहूगी, चाहे मुझे दिन भर ही क्यो न ठहरना पडे । इस जवाव ने उन्हे लाजवाव कर दिया। उन्होंने एक पर्चे पर इजाजत लिख दी और वह पर्चा मेरी तरफ बढाते हुए कहा, "अब खुदा के लिए यहा न आना । तुम लोग मुझे पागल बना दोगे ।" मै मुकदमा सुनने गई। मुझे जरा भी खयाल न था कि हमारे दोस्त डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेटसाहब मुझे धोखा देगे, पर उन्होने धोखा दिया । जव में अपने दोस्तो से रुख्सत होने लगी और अपनी एक बहन के साथ बाहर जाने लगीं, तो हम दोनो को एक हफ्ता पहले किसी गैर कानूनी जमात में शामिल होने के इलजाम मे गिरफ्तारी का वारट वताकर पकड़ लिया गया। हम पहले तो कुछ झिझके, पर इसका कुछ भी इलाज न था। मेरी चचेरी बहन श्यामकुमारी नेहरू सियासी कामो मे सक्रिय भाग नही लेती थी । वह वकील थी और केवल एक वकील की हैसियत से मुकदमा देखने आई थी। पर उन दिनो किसीका नेहरू खानदान से होना ही उसकी गिरफ्तारी के लिए काफी था । हमे एक महीने की जेल या सौ रुपया जुर्माने की सजा दी गई। मुझे सिर्फ एक बात की वजह से दुख था। पिताजी बहुत वीमार थे और उन्होने बार-बार मुझसे कहा था कि मै उस वक्त जेल न जाऊ । मै नही चाहती थी कि वह यह समझे कि मैने जान-बूझकर उनकी मर्जी के खिलाफ ऐसा किया है, पर मैं उन्हें समझा भी किस तरह सकती थी ? जाडे का मौसम था । जेल मे हमारी कोठरी वडी ही ठडी और गदी थी और उसमे कीडे-मकोडे चारो तरफ फिर रहे थे । श्यामकुमारी ने और मैने थोडी देर एक-दूसरे का दिल बहलाने की कोशिश की और फिर हम खामोश हो रहे । मुझे पिताजी के खयाल से वडा दुख हो रहा था और में ही आशा करती थी कि सही बात वह समझेंगे । आखिर मै सो गई और कई घंटो के बाद जजीरो की झकार और दरवाजे खुलने की आवाज से मेरी ख खुली । वे आवाजे और रोशनी करीब आती गई और हमने देखा कि वे हमारी तरफ आ रही है। हमारी कोठरी का दरवाजा खुला और जेल की मेटून, जेलर और दो वार्डर दर दाखिल हुए । मेट्रन ने हमसे कहा कि हम छोड दिये गये हैं, क्योकि हमारा जुर्माना अदा कर दिया गया है। मै इसपर मुश्किल से विश्वास कर सकी, क्योंकि मैं जानती थी कि पिताजी किसी हालत मे भी जुर्माना न देगे । बहरहाल हमे छोड दिया गया था। इसलिए हमने अपने विस्तर वाघे और वाहर निकले । दफ्तर मे हमने देखा कि हमारे एक वकील दोस्त हमे घर ले जाने के लिए वैठे हुए है। हमने उनसे पूछा कि हमारा जुर्माना किसने अदा किया, पर उन्होने जवाव दिया कि मै बता नही सकता। जुर्माना मेरे पिताजी ने या व्यामकुमारी के पिताजी ने नहीं दिया था, बल्कि एक दोस्त ने दिया था, जो अपना नाम जाहिर नही करना चाहते थे । उस वक्त आधी रात गुजर चुकी थी और हमने कुल मिलाकर कोई वारह घंटे जेल में गुजारे थे । मैं घर पहुंची, तो देखा कि हर तरफ अधेरा है, क्योकि किसीको भी मेरे छूटने की खबर न थी । सिर्फ मेरी माताजी जाग रही थी और बैठी रामायण पढ रही थी । दूसरे दिन सुबह में पिताजी के कमरे मे गई । मुझे देखकर उन्हे माताजी से भी ज्यादा आश्चर्य हुआ । खुशी भी हुई, पर साथ ही इस बात से तकलीफ भी कि मेरा जुर्माना अदा किया गया था। दूसरे दिन सुबह मैने अखबारो मे उनका वह बयान पढा, जो उन्होंने पहले दिन मेरी गिरफ्तारी के बाद दिया था। उनके दोस्तो ने आकर उनसे कहा कि अगर आप जुर्माना अदा नही करना चाहते, तो हम ने जुर्माना दे दे। पिताजी इस पर बहुत विगडे और उन्होने कहा कि यह मामला उसूल का है और अगर किसीने यह जुर्माना अदा किया, तो मुझे बडी तकलीफ होगी और मै उसे अपने साथ दोस्ती नहीं, बल्कि दुश्मनी समभूगा । फिर भी पिताजी उस समय बहुत बीमार थे, इसलिए हमारे एक दोस्त ने यह फैसला किया कि वह इस वदनामी को अपने सिर लेगे और कई साल गुजर जाने के बाद हमे पता चला कि यह जुर्माना किसने दिया था। जेल से बाहर आने के बाद में यूथ लीग की तरफ से करीब देहातो के सक्षिप्त दौरे पर गई और जब वापस लौटी, तो मुझे जवाहर का एक छोटा-सा खत मिला, जो पिताजी के नाम खल के साथ आया था । उसमे जवाहर ने लिखा था, "मै सुनता हू कि तुम्हे जगह-जगह मानपत्र मिल रहे है। आखिर यह किन वडे कामो के लिए दिये जा रहे है ? जेल मे कुछ घंटे गुजारने पर तो मान पत्र नही होने चाहिए। बहरहाल इससे कही तुम्हारा दिमाग न चढ जाय । लेकिन शायद हिम्मत न होने से तो चढा हुआ दिमाग ही अच्छा है।" पिताजी की सेहत दिन पर दिन खराब होती गई, हालाकि वह यह समझते रहे कि वह अच्छे हो रहे है। उनका विचार मन मे आते ही अच्छी सेहत का खयाल हमारे दिलो मे आता था और उन्हे भुका हुआ, कमजोर, बीमार और उनके चेहरे की सूजन देखकर हमे ऐसी तकलीफ होती थी, जो बर्दाश्त नहीं की जा सकती थी । आखिर वह विस्तर पर ही लेट गये । फिर भी में यह न समझी कि वह मृत्यु के इतने करीव पहुच चुके है। यह बात किसी तरह मेरी समझ ही मे नही आती थी कि मृत्यु उन्हे हमसे जुदा कर सकती है। उन्होने हमेशा मुसीबतो का मुकाबला किया था और उनपर फतह पाई थी और मुझे पूरा विश्वास था कि वह फिर एक वार फतह पायेंगे, भले ही उन्हे मौत ही से क्यो न मुकाबला करना पडे । पर यह बात होनेवाली न थी । ~रोमा रोला २६ जनवरी, १९३१ को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जवाहर और मेरे वहनोई रणजीत को बिना शर्त छोड दिया गया, क्योकि पिताजी की हालत बहुत नाजुक हो गई थी। इस बात को पूरे बारह साल बीत गये, फिर भी उस दिन को याद मेरे मन मे ताजा है और मुझे दुख दे रही है। जवाहर आनंद भवन मे आये और सीधे पिताजी के कमरे मे चले गये। कमरे की दहलीज पर वह एक पल भर के लिए ठिठके, इसलिए कि पिताजी का बिलकुल बदला हुआ रूप और सजा हुआ चेहरा देखकर उन्हें सख्त चोट पहुची । पिताजी से गले मिलने आगे बढे और पिता-पुत्र बिना बात किये एक-दूसरे से लिपट गये । जवाहर जब पिताजी की बाहो से अलग हुए और विस्तर पर बैठ गये, तो उनकी आखो मे आँसू छलक रहे थे, जिन्हे दवाने की वह नाकाम कोशिश कर रहे थे । जो चमक जवाहर से मिलने पर पिताजी की आखो मे आगई थी या जो खुशी उनके चेहरे पर दिखाई दे रही थी, उसे मैं कभी भी न भूल सकूगी । और न मैं कभी उस दर्द और तकलीफ को भी भूलूगी, जो अपने स्नेह-भाजन पिता के करीब जाते हुए जवाहर की आखो मे दिखाई दे रही थी। उस पिता के करीव जाते हुए, जो हममे से हर एक के लिए केवल पिता ही नही, बल्कि सबसे अच्छे दोस्त भी थे । महापुरुष ऊचे शैल शिखरो के समान होते है । हवा उन पर जोर से प्रहार करती है, मेघ उनको ढक देता है, परंतु वही हम अधिक खुले तौर से व जोर से सांस ले सकते है । पिताजी की बीमारी के वे महीने केवल तकलीफ और चिंता के दिन ही न थे, बल्कि मेरे लिए जिदगी मे पहली बार दुख का तजुर्वा भी वही था। पिताजी की हालत दिन पर दिन खराब होती जाती थी, फिर भी मुझे किसी तरह इस बात का विश्वास ही नहीं प्राता था कि उनकी मौत इतनी करीव है । उस वक्त तक मौत हमारे छोटे से खानदान से दूर रही थी और मुझे तो उसका जरा भी अनुभव न था । जिस दिन जवाहर रिहा हुए, उसी दिन हिंदुस्तान भर मे और भी बहुत से लोग छूटे । गाधीजी सबसे पहले छूटनेवाले लोगो मे थे और पिताजी की बीमारी का हाल सुनकर वह पूना की जेल से सीधे इलाहावाद आ गये । पिताजी उन्हें देखकर बहुत खुश हुए और ऐसा मालूम हुआ कि गाधीजी की मौजूदगी से पिताजी के मन को गाति मिल रही है। बहुत से और दोस्त भी, जो उन्ही दिनो छूटे थे, आनंदभवन पिताजी को देखने पहुचे हुए थे, और शायद इसलिए भी कि उन्हे आखरी वार श्रद्धाजलि अर्पित करे । हमारा घर मेहमानो से भरा हुआ था, लेकिन हर तरेफ जहा पहले हसी खुशी का दौर रहता था, अव खामोगी और गम की छाया छाई हुई थी । लोग घर मे चुपके-चुपके फिरते रहते थे । कुछ लोग तो काम मे लगे रहते और कुछ विना मतलव इधर उधर घूमते रहते थे । सारे वातावरण मे तनाव और दुख हम सव, यानी माताजी, जवाहर, कमला, स्वरूप और मै, हर वक्त पिताजी के आस-पास रहते थे । रात को हम वारी-बारी उनके पास सोते थे, ताकि उन्हे जरूरत हो, तो हम पास ही मौजूद रहे। बहुत से मौको पर जब मै उनके पास होती थी और वह पानी चाहते थे, तो वह इस तरह नर्मी से पानी मागते थे, जिससे पता चलता था कि वह मुझे इसकी भी तकलीफ देना नही चाहते । मुझे इस बात से वडा दुख होता था, क्योकि वह औरो का इतना खयाल रखते थे कि मौत के मह मे होते हुए भी उन्हें अपने आराम का नही बल्कि दूसरो का खयाल रहता था । दिन-परदिन हुम देख रहे थे कि उनकी शक्ति घटती जा रही है और हम इस बात को रोकने के लिए कुछ नही कर सकते थे । आखिर दम तक पिताजी ने अपने हँस-मुख मिजाज को नही खोया । अक्सर गाधीजी से हँसी-मजाक की बाते किया करते थे या माताजी को यह कहकर छेडते कि मै तुमसे पहले दूसरी दुनिया मे जा रहा हू और वहा तुम्हारा इतजार करूंगा। पर वह कभी भी इस बात से परेशान नही दिखाई दिये, जिसके बारे मे वह जानते थे कि होकर ही रहेगी। पिताजी अपनी सारी उम्र लडाइया लडते रहे थे और ज्यादातर उनकी जीत ही हुई थी। वह मौत के सामने भी बिना लडे हथियार डालनेवाले नही थे, और कई दिन और कई राते वह अपनी क्षीण शक्ति से उसका मुकाबला करते रहे और यह कोशिश करते रहे कि अभी कुछ साल और जिये, इसलिए नही कि दुनिया के और सुख भोगे, वल्कि इसलिए कि उस काम का, जिसके लिए उन्होने अपना सारा जीवन अर्पित कर दिया था, कुछ अच्छा नतीजा निकलते देखे । पर उनकी सारी हिम्मत और बहादुरी कुछ काम न मौत ने फतह हासिल कर ही ली । एक दिन बापू से बाते करते हुए पिताजी ने यह इच्छा जाहिर की कि काग्रेस कार्यकारिणी समिति की बैठक स्वराज्य भवन मे की जाय, क्योकि ज्यादातर सदस्य वहा मौजूद ही थे । उनके आखिरी शब्द थे, "हिंदुस्तान की किस्मत का फैसला स्वराज्य भवन मे कीजिये । यह फैसला मेरी मौजूदगी मे कीजिये और अपनी मातृभूमि की किस्मत के आखरी सम्मानपूर्ण फैसले में मुझे शरीक होने दीजिये । जब मरना ही है, तो मुझे आजाद हिंद की गोद मे मरने दीजिये। मुझे अपनी आखिरी नीद एक गुलाम देश मे नही, वल्कि एक आजाद देश मे सोने दीजिये ।" जब पिताजी की हालत और ज्यादा खराब हुई, तो डाक्टरो ने सोचा कि अच्छी तरह एक्सरे लेने के लिए उन्हें लखनऊ ले जाये, पर पिताजी जाना नही चाहते थे । वह इस बात को डाक्टरों से भी अच्छी तरह जानते थे कि उनका आखिरी वक्त आ चुका है और वह उसी प्रानद-भवन मे मरना चाहते थे, जिसे उन्होने वडे परिश्रम से वनवाया था और जिसे वह बहुत पसंद करते थे। पर डाक्टरों ने अपनी बात पर जोर दिया और गाधीजी भी उनसे सहमत हो गय । पिताजी इतने कमजोर हो गये थे कि वह अब जोर से विरोध भी नही कर सकते थे । ४ फरवरी, १९३१ को उन्हे मोटर से लखनऊ ले जाया गया । इतने लबे सफर के बाद भी दूसरे दिन उनकी हालत कुछ ठीक मालूम हुई, पर शाम होते-होते हालत फिर बिगड गई । वह सास भी नही ले सकते थे और उन्हें आक्सिजन दिया जा रहा था। अतएव वह होश मे थे और उन्हें इस बात का पता था कि क्या हो रहा है। शाम को पाच बजे के करीब डाक्टर विधानचद्र राय ने, जो डाक्टर अन्सारी और डाक्टर जीवराज मेहता के साथ पिताजी का इलाज कर रहे थे, मुझे पिताजी के कमरे मे बुलाया और कहा कि उनके पीछे वैठकर उन्हे सहारा दू । मैने वैसा ही किया और डाक्टर हमे छोडकर कमरे से निकल गये । मुझे कभी इस बात का पता नही चला कि पिताजी ने मुझे बुला भेजा था या डाक्टरो ने अपनी तरफ से हो ऐसा किया था । कुछ मिनट वाद मुझे ऐसा मालूम हुआ कि पिताजी कोई चीज टूढ रहे है । मै आगे की तरफ झुकी और उनसे पूछा कि क्या चाहते है । वह मुश्किल से ही बात कर सकते थे । पर उन्होने वडो कोशिश से मेरा मुह अपने सूखे हुए हाथ मे ले लिया और अपने उन होठो से, जो इतने सूज गये थे कि पहचाने भी नही जाते थे, उन्होंने मेरे चेहरे को खूब चूमा । कुछ ऐसा मालूम हो रहा था कि वह मुझसे अतिम विदा ले रहे है । मैंने अपने दात भीच लिये और बेहद कोशिश की कि मेरे श्रम, जिनसे मेरी प्रा डवडवा रही थीं, उनके हाथो पर न गिरे और न मेरे मुह से चीख निकले । जव मं अपने पर काबू न पा सकी, तो मैने उनकी पकट से निकलने की कोशिश की। चतुर और भावुक पिताजी ने महसूस किया होगा कि मुझपर क्या गुजर रही थी। अव भी मुझे उसी तरह पकडे हुए उन्होंने लडखडाती हुई आवाज मे कहा, "मेरी वेटी को हमेशा वहादुर रहना चाहिए।" मैं इस चीजको और ज्यादा चर्दाश्त नही कर सकती थी। इसलिए मै उनके कमरे से निकल भागी और बाहर जाकर दिल खोलकर रोई । ज्योज्यो शाम होती गई, उनकी हालत और भी खराब होने लगी। मुझे फिर उनके कमरे मे जाने की हिम्मत न हुई । इसलिए कुछ और लोगो के साथ में रात भर कमरे के बाहर ही बैठी रही । दुख और थकान से चूर सुबह के होते-होते मैं सो गई और इसी तरह मेरी वहन, कमला और दूसरे कई रिश्तेदार भी, जो-जो उस वक्त वहा थे, सो गये । हम मुश्किल से घटा भर सोये होगे कि हमारी चाची ने आकर हमे जगाया और खवर दी कि पिताजी चले गये। उनकी आखिरी घडी मे सिर्फ जवाहर, माताजी और डाक्टर लोग उनके कमरे मे थे । एक के बाद एक हम लोग पिताजी के कमरे में दाखिल हुए। वह अपने विस्तरे पर लेटे थे और ऐसा मालूम होता था कि सो रहे हो। उनके चेहरे पर शाति थी और वह अपनी जीवित अवस्था से भी ज्यादा शानदार मालूम होते थे । मेरा मन इस वात को किसी तरह मानता ही न था कि मेरे पूज्य पिता का अत हो गया है । जवाहर उनके पीछे बैठे थे, उनका हाथ पिताजी के सिर पर था, गोया वह उनका सिर सहला रहे हो । जवाहर की आखो मे आँसू भरे हुए थे। मेरे आंसू निकल ही नही रहे थे, क्योकि जो कुछ हो चुका था, उस पर मुझे विश्वास ही नही भ्रा रहा था। फिर गाधीजी ने कमरे मे प्रवेश किया और पिताजी के बिस्तरे के पास गये । अपना सिर झुकाकर और आंखें बंद करके वह कुछ देर तक खडे रहे । ऐसा मालूम दे रहा था कि वह प्रार्थना कर रहे है और विदाई दे रहे हो। हम सव उनके आसपास खड़े थे। फिर वह माताजी के पास गये, जिन्होंने पहली चीख के बाद फिर आवाज नही निकाली थी और दुख से भरी हुई चुपचाप एक कोने मे बैठी थी । गाघीजी उनके करीव बैठ गये और उनके कधे पर अपना हाथ रखकर बोले, "मोतीलालजी मरे नही है । वह बहुत दिन जिंदा रहेगे।" गांधीजी के इन शब्दों ने मुझे महसूस करा दिया कि क्या बात हुई है और मेरे आँसू बहने लगे । पिताजी की मृत्यु की खबर विजली की तरह देश भर मे फैल गई। लखनऊ मे खवर ग्राम हो गई और हजारो आदमी अपने नेता के आखिरी दर्शन के लिए कालाकाकर महल पहुचे, जहा हम लोग ठहरे हुए थे । पिताजी की लाश फूलो से लदी हुई थी। देखनेवालो दोस्तो, और रिश्तेदारो का एक ऐसा ताता बध गया था, जो खत्म ही नही होता था। हर शख्स उनको श्रद्धाजलि अर्पित करता था । गाधीजी उनके विस्तरे के करीव चुपचाप बैठे थे । उनके करीव ही मेरी माताजी थी, जो दुख और गम की प्रतिमा बनी हुई अपने उस पति की लाश के करीब बैठी थी, जिनके साथ उन्होंने पूरी जिंदगी इज्जत, आवरू, सुख और दुख के साथ गुजारी थी । करीब ही थके हुए और मुझये हुए जवाहर खडे थे, जो ऐसा मालूम होता था कि एक रात मे ही बहुत बूढ हो गये है । फिर भी इस महान् दुख मे उनका चेहरा शात था । मकान के बाहर मजमा वरावर बढता जाता था। हर शख्स के चेहरे पर दुख और गम की छाया थी और कोई आख न थी, जो आँसू न बहा रही हो। चारो तरफ एक अजीव खामोशी छाई हुई थी और हम सबको जो दुख और सदमा हुआ, वह शब्दो मे वयान नही किया जा सकता । पिताजी को मोटर से इलाहाबाद लाया गया। उनकी लाश तिरंगे कौमी झडे मे लिपटी हुई थी । जवाहर उनके पास बैठे थे । कमला, स्वरूप और मै मोटर से पहले ही रवाना हुए थे, इसलिए कि और लोगो से पहले घर पहुचे। लखनऊ मे हमारे घर के बाहर बडी भारी भीड थी । जव हम इलाहाबाद के करीब पहुचे, तो हमने देखा कि मीलो तक हजारो आदमी जमा है और ज्योज्यो हम अपने घर के करीब पहुचते गये, लोगो की तादाद और भी बढती गई। आनद-भवन से चार मील के फासले पर मजमा बहुत ज्यादा था और ज्यो-ज्यो हमारी गाडी आगे वढी, मजमा वढता ही दिखाई दिया। जब हमारी गाडी लोगो के वीच से गुजरती थी, तो उनके हमदर्दी के शब्द हमारे कानो मे पडते थे । जब हमने देखा कि लोग इतनी वडी तादाद मे मीलो के फासले से पिताजी को अपनी श्राखरी श्रद्धांजलि अर्पित करने आये है, तो हम और ज्यादा दुखी हुए। आखिर हम अपने घर पहुचे, उसी घर मे, जो फिर कभी पहले की तरह न हो सकेगा, वही घर, जिसने एक ऐसी वडी चीज खोई थी, जो फिर मिल नही सकती थी। हमारे घर का पूरा अहाता भीड से खचाखच भरा था । वह तिरगा कौमी झडा, जो वहा हमेशा वडे शान से लहराया
कि उसे वह आजादी और इन्साफ दिलाये, जिससे वह इतनी लवी मुद्दतसे महरूम रखा गया था। सरकार को नमक का जो एकाधिपत्य हासिल था, उसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए नमक-कानून तोडने मे हिदुस्तान का हर शहर और गाव गाधीजी के साथ हो गया । इलाहाबाद मे हमने वडा भारी जुलूस निकाला, जिसके प्रत मे एक सभा हुई, जहा जवाहर ने सबसे पहले कानून के खिलाफ नमक तैयार किया। आमतौर पर जो आशा थी, उसके खिलाफ, गाधीजी को दाडी मे गिरफ्तार नही किया गया। उन्हें आगे के गांव में जाने दिया गया, जहा आधी रात को वह गिरफ्तार कर लिये गये । यह एक अजीब बात है कि इतनी ताकत रखनेवाली सरकार भी चोरो की तरह रात के अधेरे मे यह काम करने पर मजबूर हुई, क्योकि वह डरती थी कि जिन लोगो को वह दमन से दवा सकती है, उनका गुस्सा इस बात से फट न पडे । इसके कुछ ही दिनो वाद जवाहर भी पकडे गये और अब हर शहर और गाव मे आजादी के लिए काम करने की लहर-सी दौड़ गई। अहिसा को माननेवाले, पर आजादी हासिल करने का निश्चय किए हुए लोगो के खिलाफ गिरफ्तारियो, गोलियो, लाठी के हमले और दूसरे भीषण दमन के तरीके शुरू हो गये। लोग इज्जत और अपने कीमती हको की हिफाजत के लिए सीना तानकर खडे हो गये और उन्होंने सरकारी अधिकारियों और पुलिस के हमलो का बहादुरी से मुकावला किया। माटेसरी स्कूल में अपनी जगह से इस्तीफा देकर में कांग्रेस के स्वयसेवक-दल में शामिल हो गई और विदेशी कपडे की दूकानो पर धरना देने, * स्वयसेवको की कवायद, जलूस निकालने और ऐसे ही और कामो मे, जो काग्रेस के नेता मुझे सौपते थे, मै अपना वक्त बिताने लगी। पिताजी को यह बात पसद न थी कि कमला, मेरी बहन स्वरूप और मै दिन भर झुलसा देनेवाली गर्मी मे मारे-मारे फिरें, पर उन्होंने इस बारे मे कभी हमसे सख्ती से बहस नही की और न हमे इस वात पर मजबूर किया कि हम जो काम कर रहे थे, उसे छोड़ दे । उनकी सेहत ठीक नही थी और वह चाहते थे कि उनके बच्चे उनके पास रहे । जवाहर जेल मे थे और पिताजी नही चाहते थे कि हममे से कोई जेल जाये । सेहत की खराबी के बावजूद वह आदोलन चलाने के काम को रोक नहीं सकते थे, पर आराम के विना सुबह से लेकर शाम तक काम करते रहने का वोझ ऐसा नही था, जो वह उठा सकते । डाक्टरो ने उन्हे सलाह दी कि वह आराम करे। पर हुकूमत ने डाक्टरों से भी पहले तीस जून एक हज़ार नौ सौ तीस को उन्हें गिरफ्तार कर लिया। नतीजा यह हुआ कि वह पहाड पर जाने की बजाय जमना के उस पार जाकर नैनी जेल में दाखिल हो गये । पिताजी ने जेल मे जो दस हफ्ते गुजारे, उनमे उनकी तबीयत खराब ही होती गई। जब उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि वह अस्थिपजर रह गये, तब जाकर ब्रिटिश हुकूमत को उन्हे छोडने का खयाल आया । उनके बाहर आते ही हम सव मसूरी गये, जहा पहाडी हवा और घर के आराम से उनकी हालत कुछ सभली और उनके कमजोर और थके हुए जिस्म मे कुछ ताकत आई। जवाहर भी इन्ही दिनो छोड दिये गये थे । वह इलाहाबाद ही रहते और कभी-कभी हमसे मिलने मसूरी आते थे । उनके आने से पिताजी को वडी मदद और राहत मिलती थी । पर जवाहर ज्यादा दिन आजाद नही रह सकते थे और बहुत जल्द उनके फिर एक बार पकडे जाने की अफवाहे फैलने लगी। पिताजी ने फैसला किया कि जिस कदर जल्द मुमकिन हो, इलाहावाद वापस जाये। उन्होने डाक्टरो का मशविरा भी नही माना । अट्ठारह अक्तूवर को हम सव मसूरी से रवाना हुए। जवाहर और कमला हमसे मिलने स्टेशन आये, पर गाडी देर मे आ रही थी, इसलिए जवाहर ज्यादा ठहर नही सके । उन्हें एक जलसे मे जाना था। हजारो किसान आस-पास के देहातो से इस सभा के लिए आये थे । सभा के वाद जवाहर और कमला घर आ रहे थे, तो उनकी गाडी हमारे घर के करीब ही रोक दी गई और जवाहर को गिरफ्तार करके फिर एक बार नैनी जेल भेज दिया गया। जवाहर अपने उस वीमार बाप से, जो उनकी वापसी की राह देख रहे थे, मिल भी न सके । जवाहर की गिरफ्तारी अचानक नही थी, फिर भी पिताजी को इससे वडा धक्का पहुचा । उन्हे प्राशा थी कि वह जवाहर से मिलकर राजनैतिक औौर कुटुव के बारे मे भी कुछ वाते कर सकेंगे। पर ऐसा न हो सका। पिताजी कुछ देर तो रज के मारे अपना सिर झुकाकर बैठे रहे, पर उनका शेरो जैसा वहादुर दिल ज्यादा देर किसी कमजोरी को बर्दाश्त नही कर सकता था । उन्होने अपना सिर उठाकर ऐलान किया कि मै अव काम शुरू करूंगा और डाक्टर मुझे बीमार समझकर काम से न रोके । यह वात वडी ही अजीव थी कि केवल अपनी आत्मशक्ति से काम लेकर उन्होंने उस खौफनाक वीमारी को कैसे दबा दिया, जो उन पर कब्जा कर चुकी थी। यह सब थोडे समय के लिए ही था । विना किसी झिझक के पिताजी ने काम शुरू कर दिया और कानून - भग के आदोलन में फिर एक वार नई जान डाल दी। धीरे-धीरे उनकी हालत और खराब होती गई । जवाहर ने उन्हे इस बात पर राजी किया कि वह आराम करे और समुद्र यात्रा पर जाये। मै उनके साथ जानेवाली थी, पर जब हम कलकत्ते पहुचे, तो उनकी हालत खराब हो गई और सफर का इरादा छोड देना पडा । मै कुछ हफ्ते पिताजी के साथ कलकत्ते मे रही । ये कुछ हफ्ते वडे ही दिल तोडनेवाले थे। पिताजी को यह पता चल चुका था कि अब वह ठीक न होगे और अब कोई इलाज काम नही दे सकता । फिर भी वह मायूस नही थे, बल्कि अपनी बीमारी का मजाक उडाते थे, पर अपने दिल मे वह जानते थे कि अव मामला कुछ ही महीनो का है । उनका साहस आखिर वक्त तक कमाल का था । एक रोज यह खवर आई कि कमला गिरफ्तार हो गई। इससे पिताजी को वडी तकलीफ हई; क्योकि कमला की सेहत ठीक न थी । अब पिताजी चाहते थे कि उसी वक्त इलाहावाद चले जाये । पर डाक्टरों ने उन्हे कुछ दिन और वही रहने पर राजी किया। उन्होने मुझे फौरन इलाहाबाद भेजा और कुछ दिनो बाद परिवार के और लोगो के साथ खुद भी चले आये । मेरी कलकत्ते से वापसी के बाद एक जीव घटना हुई । मेरे बहुत से दोस्त और साथी रोज गिरफ्तार हो रहे थे और उनके मुकदमे जेल ही मे चलते थे । इसमे से जो लोग इस मौके पर हाजिर रहना चाहते थे, उन्हे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट से इजाजत लेनी पडती थी। यह डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट बडे ही तग करनेवाले और धाधलेवाज आदमी थे । एक रोज मै उनके पास इजाजत लेने गई, क्योकि उस दिन यूथ लीग की एक पूरी टोली पर मुकदमा चलनेवाला था । शायद मुझे देखते ही उन्हें गुस्सा आ गया। कहने लगे, "यह क्या एक तुम फिर आ गई ? तुम लोग अपना काम क्यो नही करते और मुझे अपना काम क्यो नही करने देते ?" मैने खामोशी से जवाब दिया कि मै यूथ लीग की सेक्रेटरी हू, इसलिए इन लोगो के मुकदमे के वक्त हाजिर रहना मेरा काम है। पहले उन्होने इजाजत देने से इन्कार किया। मैने उनसे कहा कि जबतक आप इजाजत न देगे, मैं ठहरी रहूगी, चाहे मुझे दिन भर ही क्यो न ठहरना पडे । इस जवाव ने उन्हे लाजवाव कर दिया। उन्होंने एक पर्चे पर इजाजत लिख दी और वह पर्चा मेरी तरफ बढाते हुए कहा, "अब खुदा के लिए यहा न आना । तुम लोग मुझे पागल बना दोगे ।" मै मुकदमा सुनने गई। मुझे जरा भी खयाल न था कि हमारे दोस्त डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेटसाहब मुझे धोखा देगे, पर उन्होने धोखा दिया । जव में अपने दोस्तो से रुख्सत होने लगी और अपनी एक बहन के साथ बाहर जाने लगीं, तो हम दोनो को एक हफ्ता पहले किसी गैर कानूनी जमात में शामिल होने के इलजाम मे गिरफ्तारी का वारट वताकर पकड़ लिया गया। हम पहले तो कुछ झिझके, पर इसका कुछ भी इलाज न था। मेरी चचेरी बहन श्यामकुमारी नेहरू सियासी कामो मे सक्रिय भाग नही लेती थी । वह वकील थी और केवल एक वकील की हैसियत से मुकदमा देखने आई थी। पर उन दिनो किसीका नेहरू खानदान से होना ही उसकी गिरफ्तारी के लिए काफी था । हमे एक महीने की जेल या सौ रुपया जुर्माने की सजा दी गई। मुझे सिर्फ एक बात की वजह से दुख था। पिताजी बहुत वीमार थे और उन्होने बार-बार मुझसे कहा था कि मै उस वक्त जेल न जाऊ । मै नही चाहती थी कि वह यह समझे कि मैने जान-बूझकर उनकी मर्जी के खिलाफ ऐसा किया है, पर मैं उन्हें समझा भी किस तरह सकती थी ? जाडे का मौसम था । जेल मे हमारी कोठरी वडी ही ठडी और गदी थी और उसमे कीडे-मकोडे चारो तरफ फिर रहे थे । श्यामकुमारी ने और मैने थोडी देर एक-दूसरे का दिल बहलाने की कोशिश की और फिर हम खामोश हो रहे । मुझे पिताजी के खयाल से वडा दुख हो रहा था और में ही आशा करती थी कि सही बात वह समझेंगे । आखिर मै सो गई और कई घंटो के बाद जजीरो की झकार और दरवाजे खुलने की आवाज से मेरी ख खुली । वे आवाजे और रोशनी करीब आती गई और हमने देखा कि वे हमारी तरफ आ रही है। हमारी कोठरी का दरवाजा खुला और जेल की मेटून, जेलर और दो वार्डर दर दाखिल हुए । मेट्रन ने हमसे कहा कि हम छोड दिये गये हैं, क्योकि हमारा जुर्माना अदा कर दिया गया है। मै इसपर मुश्किल से विश्वास कर सकी, क्योंकि मैं जानती थी कि पिताजी किसी हालत मे भी जुर्माना न देगे । बहरहाल हमे छोड दिया गया था। इसलिए हमने अपने विस्तर वाघे और वाहर निकले । दफ्तर मे हमने देखा कि हमारे एक वकील दोस्त हमे घर ले जाने के लिए वैठे हुए है। हमने उनसे पूछा कि हमारा जुर्माना किसने अदा किया, पर उन्होने जवाव दिया कि मै बता नही सकता। जुर्माना मेरे पिताजी ने या व्यामकुमारी के पिताजी ने नहीं दिया था, बल्कि एक दोस्त ने दिया था, जो अपना नाम जाहिर नही करना चाहते थे । उस वक्त आधी रात गुजर चुकी थी और हमने कुल मिलाकर कोई वारह घंटे जेल में गुजारे थे । मैं घर पहुंची, तो देखा कि हर तरफ अधेरा है, क्योकि किसीको भी मेरे छूटने की खबर न थी । सिर्फ मेरी माताजी जाग रही थी और बैठी रामायण पढ रही थी । दूसरे दिन सुबह में पिताजी के कमरे मे गई । मुझे देखकर उन्हे माताजी से भी ज्यादा आश्चर्य हुआ । खुशी भी हुई, पर साथ ही इस बात से तकलीफ भी कि मेरा जुर्माना अदा किया गया था। दूसरे दिन सुबह मैने अखबारो मे उनका वह बयान पढा, जो उन्होंने पहले दिन मेरी गिरफ्तारी के बाद दिया था। उनके दोस्तो ने आकर उनसे कहा कि अगर आप जुर्माना अदा नही करना चाहते, तो हम ने जुर्माना दे दे। पिताजी इस पर बहुत विगडे और उन्होने कहा कि यह मामला उसूल का है और अगर किसीने यह जुर्माना अदा किया, तो मुझे बडी तकलीफ होगी और मै उसे अपने साथ दोस्ती नहीं, बल्कि दुश्मनी समभूगा । फिर भी पिताजी उस समय बहुत बीमार थे, इसलिए हमारे एक दोस्त ने यह फैसला किया कि वह इस वदनामी को अपने सिर लेगे और कई साल गुजर जाने के बाद हमे पता चला कि यह जुर्माना किसने दिया था। जेल से बाहर आने के बाद में यूथ लीग की तरफ से करीब देहातो के सक्षिप्त दौरे पर गई और जब वापस लौटी, तो मुझे जवाहर का एक छोटा-सा खत मिला, जो पिताजी के नाम खल के साथ आया था । उसमे जवाहर ने लिखा था, "मै सुनता हू कि तुम्हे जगह-जगह मानपत्र मिल रहे है। आखिर यह किन वडे कामो के लिए दिये जा रहे है ? जेल मे कुछ घंटे गुजारने पर तो मान पत्र नही होने चाहिए। बहरहाल इससे कही तुम्हारा दिमाग न चढ जाय । लेकिन शायद हिम्मत न होने से तो चढा हुआ दिमाग ही अच्छा है।" पिताजी की सेहत दिन पर दिन खराब होती गई, हालाकि वह यह समझते रहे कि वह अच्छे हो रहे है। उनका विचार मन मे आते ही अच्छी सेहत का खयाल हमारे दिलो मे आता था और उन्हे भुका हुआ, कमजोर, बीमार और उनके चेहरे की सूजन देखकर हमे ऐसी तकलीफ होती थी, जो बर्दाश्त नहीं की जा सकती थी । आखिर वह विस्तर पर ही लेट गये । फिर भी में यह न समझी कि वह मृत्यु के इतने करीव पहुच चुके है। यह बात किसी तरह मेरी समझ ही मे नही आती थी कि मृत्यु उन्हे हमसे जुदा कर सकती है। उन्होने हमेशा मुसीबतो का मुकाबला किया था और उनपर फतह पाई थी और मुझे पूरा विश्वास था कि वह फिर एक वार फतह पायेंगे, भले ही उन्हे मौत ही से क्यो न मुकाबला करना पडे । पर यह बात होनेवाली न थी । ~रोमा रोला छब्बीस जनवरी, एक हज़ार नौ सौ इकतीस को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जवाहर और मेरे वहनोई रणजीत को बिना शर्त छोड दिया गया, क्योकि पिताजी की हालत बहुत नाजुक हो गई थी। इस बात को पूरे बारह साल बीत गये, फिर भी उस दिन को याद मेरे मन मे ताजा है और मुझे दुख दे रही है। जवाहर आनंद भवन मे आये और सीधे पिताजी के कमरे मे चले गये। कमरे की दहलीज पर वह एक पल भर के लिए ठिठके, इसलिए कि पिताजी का बिलकुल बदला हुआ रूप और सजा हुआ चेहरा देखकर उन्हें सख्त चोट पहुची । पिताजी से गले मिलने आगे बढे और पिता-पुत्र बिना बात किये एक-दूसरे से लिपट गये । जवाहर जब पिताजी की बाहो से अलग हुए और विस्तर पर बैठ गये, तो उनकी आखो मे आँसू छलक रहे थे, जिन्हे दवाने की वह नाकाम कोशिश कर रहे थे । जो चमक जवाहर से मिलने पर पिताजी की आखो मे आगई थी या जो खुशी उनके चेहरे पर दिखाई दे रही थी, उसे मैं कभी भी न भूल सकूगी । और न मैं कभी उस दर्द और तकलीफ को भी भूलूगी, जो अपने स्नेह-भाजन पिता के करीब जाते हुए जवाहर की आखो मे दिखाई दे रही थी। उस पिता के करीव जाते हुए, जो हममे से हर एक के लिए केवल पिता ही नही, बल्कि सबसे अच्छे दोस्त भी थे । महापुरुष ऊचे शैल शिखरो के समान होते है । हवा उन पर जोर से प्रहार करती है, मेघ उनको ढक देता है, परंतु वही हम अधिक खुले तौर से व जोर से सांस ले सकते है । पिताजी की बीमारी के वे महीने केवल तकलीफ और चिंता के दिन ही न थे, बल्कि मेरे लिए जिदगी मे पहली बार दुख का तजुर्वा भी वही था। पिताजी की हालत दिन पर दिन खराब होती जाती थी, फिर भी मुझे किसी तरह इस बात का विश्वास ही नहीं प्राता था कि उनकी मौत इतनी करीव है । उस वक्त तक मौत हमारे छोटे से खानदान से दूर रही थी और मुझे तो उसका जरा भी अनुभव न था । जिस दिन जवाहर रिहा हुए, उसी दिन हिंदुस्तान भर मे और भी बहुत से लोग छूटे । गाधीजी सबसे पहले छूटनेवाले लोगो मे थे और पिताजी की बीमारी का हाल सुनकर वह पूना की जेल से सीधे इलाहावाद आ गये । पिताजी उन्हें देखकर बहुत खुश हुए और ऐसा मालूम हुआ कि गाधीजी की मौजूदगी से पिताजी के मन को गाति मिल रही है। बहुत से और दोस्त भी, जो उन्ही दिनो छूटे थे, आनंदभवन पिताजी को देखने पहुचे हुए थे, और शायद इसलिए भी कि उन्हे आखरी वार श्रद्धाजलि अर्पित करे । हमारा घर मेहमानो से भरा हुआ था, लेकिन हर तरेफ जहा पहले हसी खुशी का दौर रहता था, अव खामोगी और गम की छाया छाई हुई थी । लोग घर मे चुपके-चुपके फिरते रहते थे । कुछ लोग तो काम मे लगे रहते और कुछ विना मतलव इधर उधर घूमते रहते थे । सारे वातावरण मे तनाव और दुख हम सव, यानी माताजी, जवाहर, कमला, स्वरूप और मै, हर वक्त पिताजी के आस-पास रहते थे । रात को हम वारी-बारी उनके पास सोते थे, ताकि उन्हे जरूरत हो, तो हम पास ही मौजूद रहे। बहुत से मौको पर जब मै उनके पास होती थी और वह पानी चाहते थे, तो वह इस तरह नर्मी से पानी मागते थे, जिससे पता चलता था कि वह मुझे इसकी भी तकलीफ देना नही चाहते । मुझे इस बात से वडा दुख होता था, क्योकि वह औरो का इतना खयाल रखते थे कि मौत के मह मे होते हुए भी उन्हें अपने आराम का नही बल्कि दूसरो का खयाल रहता था । दिन-परदिन हुम देख रहे थे कि उनकी शक्ति घटती जा रही है और हम इस बात को रोकने के लिए कुछ नही कर सकते थे । आखिर दम तक पिताजी ने अपने हँस-मुख मिजाज को नही खोया । अक्सर गाधीजी से हँसी-मजाक की बाते किया करते थे या माताजी को यह कहकर छेडते कि मै तुमसे पहले दूसरी दुनिया मे जा रहा हू और वहा तुम्हारा इतजार करूंगा। पर वह कभी भी इस बात से परेशान नही दिखाई दिये, जिसके बारे मे वह जानते थे कि होकर ही रहेगी। पिताजी अपनी सारी उम्र लडाइया लडते रहे थे और ज्यादातर उनकी जीत ही हुई थी। वह मौत के सामने भी बिना लडे हथियार डालनेवाले नही थे, और कई दिन और कई राते वह अपनी क्षीण शक्ति से उसका मुकाबला करते रहे और यह कोशिश करते रहे कि अभी कुछ साल और जिये, इसलिए नही कि दुनिया के और सुख भोगे, वल्कि इसलिए कि उस काम का, जिसके लिए उन्होने अपना सारा जीवन अर्पित कर दिया था, कुछ अच्छा नतीजा निकलते देखे । पर उनकी सारी हिम्मत और बहादुरी कुछ काम न मौत ने फतह हासिल कर ही ली । एक दिन बापू से बाते करते हुए पिताजी ने यह इच्छा जाहिर की कि काग्रेस कार्यकारिणी समिति की बैठक स्वराज्य भवन मे की जाय, क्योकि ज्यादातर सदस्य वहा मौजूद ही थे । उनके आखिरी शब्द थे, "हिंदुस्तान की किस्मत का फैसला स्वराज्य भवन मे कीजिये । यह फैसला मेरी मौजूदगी मे कीजिये और अपनी मातृभूमि की किस्मत के आखरी सम्मानपूर्ण फैसले में मुझे शरीक होने दीजिये । जब मरना ही है, तो मुझे आजाद हिंद की गोद मे मरने दीजिये। मुझे अपनी आखिरी नीद एक गुलाम देश मे नही, वल्कि एक आजाद देश मे सोने दीजिये ।" जब पिताजी की हालत और ज्यादा खराब हुई, तो डाक्टरो ने सोचा कि अच्छी तरह एक्सरे लेने के लिए उन्हें लखनऊ ले जाये, पर पिताजी जाना नही चाहते थे । वह इस बात को डाक्टरों से भी अच्छी तरह जानते थे कि उनका आखिरी वक्त आ चुका है और वह उसी प्रानद-भवन मे मरना चाहते थे, जिसे उन्होने वडे परिश्रम से वनवाया था और जिसे वह बहुत पसंद करते थे। पर डाक्टरों ने अपनी बात पर जोर दिया और गाधीजी भी उनसे सहमत हो गय । पिताजी इतने कमजोर हो गये थे कि वह अब जोर से विरोध भी नही कर सकते थे । चार फरवरी, एक हज़ार नौ सौ इकतीस को उन्हे मोटर से लखनऊ ले जाया गया । इतने लबे सफर के बाद भी दूसरे दिन उनकी हालत कुछ ठीक मालूम हुई, पर शाम होते-होते हालत फिर बिगड गई । वह सास भी नही ले सकते थे और उन्हें आक्सिजन दिया जा रहा था। अतएव वह होश मे थे और उन्हें इस बात का पता था कि क्या हो रहा है। शाम को पाच बजे के करीब डाक्टर विधानचद्र राय ने, जो डाक्टर अन्सारी और डाक्टर जीवराज मेहता के साथ पिताजी का इलाज कर रहे थे, मुझे पिताजी के कमरे मे बुलाया और कहा कि उनके पीछे वैठकर उन्हे सहारा दू । मैने वैसा ही किया और डाक्टर हमे छोडकर कमरे से निकल गये । मुझे कभी इस बात का पता नही चला कि पिताजी ने मुझे बुला भेजा था या डाक्टरो ने अपनी तरफ से हो ऐसा किया था । कुछ मिनट वाद मुझे ऐसा मालूम हुआ कि पिताजी कोई चीज टूढ रहे है । मै आगे की तरफ झुकी और उनसे पूछा कि क्या चाहते है । वह मुश्किल से ही बात कर सकते थे । पर उन्होने वडो कोशिश से मेरा मुह अपने सूखे हुए हाथ मे ले लिया और अपने उन होठो से, जो इतने सूज गये थे कि पहचाने भी नही जाते थे, उन्होंने मेरे चेहरे को खूब चूमा । कुछ ऐसा मालूम हो रहा था कि वह मुझसे अतिम विदा ले रहे है । मैंने अपने दात भीच लिये और बेहद कोशिश की कि मेरे श्रम, जिनसे मेरी प्रा डवडवा रही थीं, उनके हाथो पर न गिरे और न मेरे मुह से चीख निकले । जव मं अपने पर काबू न पा सकी, तो मैने उनकी पकट से निकलने की कोशिश की। चतुर और भावुक पिताजी ने महसूस किया होगा कि मुझपर क्या गुजर रही थी। अव भी मुझे उसी तरह पकडे हुए उन्होंने लडखडाती हुई आवाज मे कहा, "मेरी वेटी को हमेशा वहादुर रहना चाहिए।" मैं इस चीजको और ज्यादा चर्दाश्त नही कर सकती थी। इसलिए मै उनके कमरे से निकल भागी और बाहर जाकर दिल खोलकर रोई । ज्योज्यो शाम होती गई, उनकी हालत और भी खराब होने लगी। मुझे फिर उनके कमरे मे जाने की हिम्मत न हुई । इसलिए कुछ और लोगो के साथ में रात भर कमरे के बाहर ही बैठी रही । दुख और थकान से चूर सुबह के होते-होते मैं सो गई और इसी तरह मेरी वहन, कमला और दूसरे कई रिश्तेदार भी, जो-जो उस वक्त वहा थे, सो गये । हम मुश्किल से घटा भर सोये होगे कि हमारी चाची ने आकर हमे जगाया और खवर दी कि पिताजी चले गये। उनकी आखिरी घडी मे सिर्फ जवाहर, माताजी और डाक्टर लोग उनके कमरे मे थे । एक के बाद एक हम लोग पिताजी के कमरे में दाखिल हुए। वह अपने विस्तरे पर लेटे थे और ऐसा मालूम होता था कि सो रहे हो। उनके चेहरे पर शाति थी और वह अपनी जीवित अवस्था से भी ज्यादा शानदार मालूम होते थे । मेरा मन इस वात को किसी तरह मानता ही न था कि मेरे पूज्य पिता का अत हो गया है । जवाहर उनके पीछे बैठे थे, उनका हाथ पिताजी के सिर पर था, गोया वह उनका सिर सहला रहे हो । जवाहर की आखो मे आँसू भरे हुए थे। मेरे आंसू निकल ही नही रहे थे, क्योकि जो कुछ हो चुका था, उस पर मुझे विश्वास ही नही भ्रा रहा था। फिर गाधीजी ने कमरे मे प्रवेश किया और पिताजी के बिस्तरे के पास गये । अपना सिर झुकाकर और आंखें बंद करके वह कुछ देर तक खडे रहे । ऐसा मालूम दे रहा था कि वह प्रार्थना कर रहे है और विदाई दे रहे हो। हम सव उनके आसपास खड़े थे। फिर वह माताजी के पास गये, जिन्होंने पहली चीख के बाद फिर आवाज नही निकाली थी और दुख से भरी हुई चुपचाप एक कोने मे बैठी थी । गाघीजी उनके करीव बैठ गये और उनके कधे पर अपना हाथ रखकर बोले, "मोतीलालजी मरे नही है । वह बहुत दिन जिंदा रहेगे।" गांधीजी के इन शब्दों ने मुझे महसूस करा दिया कि क्या बात हुई है और मेरे आँसू बहने लगे । पिताजी की मृत्यु की खबर विजली की तरह देश भर मे फैल गई। लखनऊ मे खवर ग्राम हो गई और हजारो आदमी अपने नेता के आखिरी दर्शन के लिए कालाकाकर महल पहुचे, जहा हम लोग ठहरे हुए थे । पिताजी की लाश फूलो से लदी हुई थी। देखनेवालो दोस्तो, और रिश्तेदारो का एक ऐसा ताता बध गया था, जो खत्म ही नही होता था। हर शख्स उनको श्रद्धाजलि अर्पित करता था । गाधीजी उनके विस्तरे के करीव चुपचाप बैठे थे । उनके करीव ही मेरी माताजी थी, जो दुख और गम की प्रतिमा बनी हुई अपने उस पति की लाश के करीब बैठी थी, जिनके साथ उन्होंने पूरी जिंदगी इज्जत, आवरू, सुख और दुख के साथ गुजारी थी । करीब ही थके हुए और मुझये हुए जवाहर खडे थे, जो ऐसा मालूम होता था कि एक रात मे ही बहुत बूढ हो गये है । फिर भी इस महान् दुख मे उनका चेहरा शात था । मकान के बाहर मजमा वरावर बढता जाता था। हर शख्स के चेहरे पर दुख और गम की छाया थी और कोई आख न थी, जो आँसू न बहा रही हो। चारो तरफ एक अजीव खामोशी छाई हुई थी और हम सबको जो दुख और सदमा हुआ, वह शब्दो मे वयान नही किया जा सकता । पिताजी को मोटर से इलाहाबाद लाया गया। उनकी लाश तिरंगे कौमी झडे मे लिपटी हुई थी । जवाहर उनके पास बैठे थे । कमला, स्वरूप और मै मोटर से पहले ही रवाना हुए थे, इसलिए कि और लोगो से पहले घर पहुचे। लखनऊ मे हमारे घर के बाहर बडी भारी भीड थी । जव हम इलाहाबाद के करीब पहुचे, तो हमने देखा कि मीलो तक हजारो आदमी जमा है और ज्योज्यो हम अपने घर के करीब पहुचते गये, लोगो की तादाद और भी बढती गई। आनद-भवन से चार मील के फासले पर मजमा बहुत ज्यादा था और ज्यो-ज्यो हमारी गाडी आगे वढी, मजमा वढता ही दिखाई दिया। जब हमारी गाडी लोगो के वीच से गुजरती थी, तो उनके हमदर्दी के शब्द हमारे कानो मे पडते थे । जब हमने देखा कि लोग इतनी वडी तादाद मे मीलो के फासले से पिताजी को अपनी श्राखरी श्रद्धांजलि अर्पित करने आये है, तो हम और ज्यादा दुखी हुए। आखिर हम अपने घर पहुचे, उसी घर मे, जो फिर कभी पहले की तरह न हो सकेगा, वही घर, जिसने एक ऐसी वडी चीज खोई थी, जो फिर मिल नही सकती थी। हमारे घर का पूरा अहाता भीड से खचाखच भरा था । वह तिरगा कौमी झडा, जो वहा हमेशा वडे शान से लहराया
लकवा (Facial Paralysis) और सर का चकराना वगैरा । ग़िज़ाईयत की कमी की वजह से खून की कमी के मरीजों के लिए इफ्तार के वक्त फोलाद (Iron) की अशद ज़रूरत है और वह खजूर में कुदरती तोर पर मुयस्सर है । बाज़ लोगों को खुश्की होती है ऐसे लोग जब रोज़ा रखते हैं तो उनकी खुश्की बढ़ जाती है, इसके लिए खजूर चूँकि मोतदिल है इसलिए वह रोज़ादार के हक़ में मुफीद है। गर्मियों के रोज़े में रोज़ादार को चूँकि प्यास लगी होती है और वह इफ्तार के वक्त अगर फौरन ठंडा पानी पी ले तो मेअदे में गैस, तबखीर और जिगर की वरम (Liver Inflamation) का सख्त ख़तरा होता है, अगर यही रोज़ादार खजूर खा कर पानी पी ले तो बेशुमार खतरात से बच जाता है । ( हिस्सा अव्वल स. 186) इफ्तार के बाद की दुआ इफ्तार करने के बाद यह दुआ पढ़े 31 3g20 স gag ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा और तुझ पर ईमान लाया और तुझ पर भरोसा किया और तेरे दिए हुए से इफ्तार किया तो तू मुझ से इसको कुबूल फरमा । इफ्तार कराने की फज़ीलत निसाई व इब्ने खज़ीमा जैद बिन खालिद जहनी से रावी हैं कि फरमाया जो रोज़ादार का रोजा इफ्तार कराए या ग़ाज़ी का सामान कर दे तो उसे भी उतना ही सवाब मिलेगा । (निसाई शरीफ )
लकवा और सर का चकराना वगैरा । ग़िज़ाईयत की कमी की वजह से खून की कमी के मरीजों के लिए इफ्तार के वक्त फोलाद की अशद ज़रूरत है और वह खजूर में कुदरती तोर पर मुयस्सर है । बाज़ लोगों को खुश्की होती है ऐसे लोग जब रोज़ा रखते हैं तो उनकी खुश्की बढ़ जाती है, इसके लिए खजूर चूँकि मोतदिल है इसलिए वह रोज़ादार के हक़ में मुफीद है। गर्मियों के रोज़े में रोज़ादार को चूँकि प्यास लगी होती है और वह इफ्तार के वक्त अगर फौरन ठंडा पानी पी ले तो मेअदे में गैस, तबखीर और जिगर की वरम का सख्त ख़तरा होता है, अगर यही रोज़ादार खजूर खा कर पानी पी ले तो बेशुमार खतरात से बच जाता है । इफ्तार के बाद की दुआ इफ्तार करने के बाद यह दुआ पढ़े इकतीस तीनgबीस স gag ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा और तुझ पर ईमान लाया और तुझ पर भरोसा किया और तेरे दिए हुए से इफ्तार किया तो तू मुझ से इसको कुबूल फरमा । इफ्तार कराने की फज़ीलत निसाई व इब्ने खज़ीमा जैद बिन खालिद जहनी से रावी हैं कि फरमाया जो रोज़ादार का रोजा इफ्तार कराए या ग़ाज़ी का सामान कर दे तो उसे भी उतना ही सवाब मिलेगा ।
अमरावती/दि. 22 - राज्य में जहां एक ओर तापमान में उछाल का दौर जारी है, वहीं अगले तीन दिन तक विदर्भ क्षेत्र में कई स्थानों पर बिजली की तेज गडगडाहटों के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है. साथ ही यह अनुमान भी जताया गया है कि, इस दौरान तेज आंधी-तूफान वाली स्थिति भी रह सकती है. जहां एक ओर विदर्भ क्षेत्र में बेमौसम बारिश के तहत पानी की बौछारे बरस रही है. वहीं दूसरी ओर मुंबई सहित शेष महाराष्ट्र राज्य में लोगबाग भीषण गर्मी और इसकी वजह से निकलने वाले पसीने के धारों से परेशान है. जानकारी के मुताबिक यद्यपि मुंबई में इस समय अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सिअस के आसपास है, लेकिन वातावरण में आद्रता की अधिकतम सीमा पार हो जाने के चलते जमकर पसीना फूट रहा है. इसके साथ ही पश्चिम महाराष्ट्र व मराठवाडा परिसर में भी तापमान का लगातार उचा उठता स्तर तेज उमस व गर्मी पैदा कर रहा है. * राज्य के प्रमुख शहरों का तापमान (डि. से. )
अमरावती/दि. बाईस - राज्य में जहां एक ओर तापमान में उछाल का दौर जारी है, वहीं अगले तीन दिन तक विदर्भ क्षेत्र में कई स्थानों पर बिजली की तेज गडगडाहटों के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है. साथ ही यह अनुमान भी जताया गया है कि, इस दौरान तेज आंधी-तूफान वाली स्थिति भी रह सकती है. जहां एक ओर विदर्भ क्षेत्र में बेमौसम बारिश के तहत पानी की बौछारे बरस रही है. वहीं दूसरी ओर मुंबई सहित शेष महाराष्ट्र राज्य में लोगबाग भीषण गर्मी और इसकी वजह से निकलने वाले पसीने के धारों से परेशान है. जानकारी के मुताबिक यद्यपि मुंबई में इस समय अधिकतम तापमान तैंतीस डिग्री सेल्सिअस के आसपास है, लेकिन वातावरण में आद्रता की अधिकतम सीमा पार हो जाने के चलते जमकर पसीना फूट रहा है. इसके साथ ही पश्चिम महाराष्ट्र व मराठवाडा परिसर में भी तापमान का लगातार उचा उठता स्तर तेज उमस व गर्मी पैदा कर रहा है. * राज्य के प्रमुख शहरों का तापमान
हुई. मुझे केवल अरवी पढ़ने की जरूरत थी। मुझसे अच्छा व्याख्यान दे देनेवाले मेरे दूसरे साथी भी थे। लेकिन बहस-मुबाहसा तथा दूसरी बातों के कारण विद्यालय वालों को मुझसे बड़ी आशा थी । विद्यालय के संस्थापक पण्डित भोजदत्त चन्द्रा करके काम चला रहे थे। लेकिन मेरे यहाँ पहुँचते-पहुँचते वे तपदिक के शिकार हो गए और बहुत दिन नहीं हुआ, वे चल बसे । इसके बाद विद्यालय के प्रबन्ध का भार उनके दोनों लड़कों-- डॉ. लक्ष्मीदत्त और वकील तारादत्त के ऊपर पड़ा । आज दोनों भाई भी नहीं रह गए । खैर, उनको अफसोस हुआ, जब मैं उपदेशक बनने की जगह और आगे पढ़ने के लिए लाहौर जाने लगा। लाहौर में पढ़ने के साथ-साथ मैंने देखा कि अगर भाई साहब यहाँ ओरियण्टल कॉलेज में दाखिल होकर बाकायदा अरवी पढ़ते, तो समय की भी बहुत बचत होती और पढ़ने का सुभीता भी अधिक मिलता। पहले समय की अपेक्षा 1916-17 में खाने-पीने की चीजों का दाम बहुत बढ़ गया था; लेकिन आज की अपेक्षा उस समय भी वह सस्ता था । तो भी बिना पैसे के अपरिचित स्थान में जाना कम चिन्ता की बात नहीं थी। लेकिन मैंने लाहौर में अपना स्थान बना लिया था। मैंने यह भी देख लिया था कि भाई साहब वहाँ आकर भूखे नहीं रह सकते । कांई ट्यूशन या दूसरा काम मिल सकता है, जिससे गुजारा करके वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं। उनके आने पर ऐसा ही हुआ भी । सूखी रोटी और मोटे-झांटे कपड़े पर सन्तोष करनेवाले आदमी का खर्च ही कितना था ! दस रुपये मासिक के ट्यूशन से भी उनका काम चल सकता था । भाई साहब ओरियण्टन कॉलेज की मौलवी आलिम कक्षा में दाखिल हो गए। वे पहले हिन्दू थे, जिन्होंने मौलवी आलिम कक्षा में नाम लिखाया था। वे पहले हिन्दू थे, जिन्होंने अरबी की सर्वोच्च परीक्षा मौलवी फाजिल पंजाब विश्वविद्यालय से पास की। उस समय ओरियण्टल कॉलेज का कोई अपना अच्छा छात्रावास नहीं था । किले और शाही मस्जिद के बीच में कुछ कोठरियाँ थीं, जो न जाने किस मतलव से बनाई गई थीं। इसके निचले तल्ले में बहुत समय तक अंग्रेजों के घोड़े बँधते रहे। भाई साहव उसी छात्रावास में रहने लगे । अपने शास्त्रार्थों और खंडन-मंडन के कारण आर्यसमाज मुसलमानों में ज्यादा बदनाम था और भाई साहब कोई छिपकर अपनी पढ़ाई नहीं कर रहे थे। उनकी मांटी चुटिया हमेशा खुली रहती थी, क्योंकि वे टोपी नहीं पहनते थे । धांती और कुर्ता उनकी पांशाक में थे। लाहौर यद्यपि अभी भारत का पॅरिस नहीं बना था, तो भी हमारे प्रदेश से वहाँ शौकीनी अधिक थी, इसमें सन्दह नही । भाई साहब मांटे कुर्ते और धोती पर ही संतोष नहीं करते थं, बल्कि बुन्देलखंड के गाँवों में पहना जानेवाला चमरौधा जूता भी मँगाकर पहनते थे। बुन्देलखंड में रहते समय पीछे मुझे इसका लाभ मालूम हुआ था। पंजे के ऊपर अधिक निकला हुआ चमड़ा झाड़ियों के कॉटो से रक्षा करता था । भाई साहब का वर्ताव अपने मुसलमान अध्यापकों और सहपाठियों से इतना अच्छा था कि उस पर धार्मिक मतभेद का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा। भाई साहव एक जगह जमकर रहनेवालं जीव थे और मैं उड़नछू पंछी, जिसके लिए 6 महीना भी एक जगह रहना भारी आफत थी । भाई साहब अपने मौलवी आलिम फाजिल की पढ़ाई में लग गए और पैरों में चक्कर बाँधकर कभी भटकने और कभी वुन्देलखंड में अरबी संस्कृत पाठशाला खोलकर बैठने की व्यर्थ कोशिश करने लगा। मैं मद्रास या कुर्ग में था, जब कि असहयोग का आन्दोलन शुरू हुआ। तब तक भाई साहब मौलवी फाजिल हो चुके थे । हिन्दू मौलवी फाजिल पाकर हिन्दू विश्वविद्यालय ने उन्हें तुरन्त अपना लिया; लेकिन उनकी जो कदर होनी चाहिए थी, वह आखिर तक नहीं हुई। तो भी पढ़ाई समाप्त करने के बाद अपना सारा जीवन उन्होंने हिन्दू विश्वविद्यालय में विताया। जब वे काम पर लग गए, तो ब्याह के लिए चारों ओर से जोर पड़ने लगा। मैं उसके पक्ष में नहीं था, लेकिन भाई साहब का वैसा मत नहीं था। दक्षिण में रहते ही उनके ब्याह की बात भी मालूम हो गई। अपनी सहधर्मिणी के चुनने में भी उन्होंने अपनी अनोखी परख का पता दिया। कितनी ही अच्छी शिक्षिता लड़कियाँ मिल रही थीं, लेकिन उनका कहना था मुझे तो ऐसी लड़की चाहिए, जो चक्की भी पीस ले, खाना भी बना ले, घर के काम के लिए किसी की मोहताज न रहे। हाँ, तो भाई साहब को ऐसी ही पत्नी मिली। गाँधी-युग के पहले से ही वे स्वदेशी और सादगी के व्रती थे, गाँधी-युग ने उन पर और प्रभाव डाले, जिसमें कल की जगह हाथ के पीसे-कूटे दाल-चावल-आड़े की महिमा भी थी। 408 / राहुल-वाङ्मय 2.2: जीवनी और संस्मरण बेचारी पत्नी पति से बहुत पहले ही चल बसीं और लड़कियों के पालन-पोषण और शिक्षा-दीक्षा का भार भाई साहव के ऊपर दे गईं । भाई साहब स्थान में ही एक जगह जम कर बैठने की आदत नहीं रखते थे, बल्कि उनके विचारों में भी बहुत कम परिवर्तन की गुंजाइश थी। मैं आर्यसमाज से हटते हटते बौद्ध धर्म और मार्क्सवाद तक पहुँच गया लेकिन भाई साहब बड़ी लगन से आर्यसमाजी वने रहे। वे आर्यसमाजी सभाओं में उपदेश देने जाते, यद्यपि 'वं खंडन-मंडन और शास्त्रार्थी उपदेशक नहीं बन सके। उनके दिल में आग तो थी, लेकिन उसकी प्रचंडता बाहर मालूम नहीं होती थी । उनका अरबी भाषा का ज्ञान गंभीर था, लेकिन कम बोलने और कम लिखने की आदत ने उनसे आगे आनेवाली पीढ़ियों के लिए अधिक काम नहीं करवा पाया। शायद इसमें एक कारण यह भी था कि हिन्दू विश्वविद्यालय में जैसी कदरदानी होनी चाहिए थी, जैसा प्रोत्साहन मिलना चाहिए था, वैसा नहीं हुआ । अरवी - कविता पर उन्होंने एक छोटी-सी पुस्तक लिखी और अरवी-साहित्य के सम्बन्ध में कुछ फुटकर लंख भी। लेकिन वे अरवी साहित्य के सम्बन्ध में ज्ञातव्य बातों से पूर्ण कितने ही ग्रंथ दे सकते थे, जिसे अब दूसरों को देना होगा। मैं अपने से ही मिलाता हूँ। मैंने बौद्ध माहित्य का जब आलांड़न किया और हिन्दी की अवस्था देखी, तो तुरंत हाथ में आए ज्ञान को हिन्दी भाषा भाषियों के लिए कागज पर उतारने में वडी बंसत्री का परिचय दिया। शायद भाई साहब भी कुछ डमी तरह की भावना रखते थे, लेकिन पुस्तकों का प्रकाशन हिन्दी में आसान नहीं था। मेरी ही बौद्ध धर्म सम्बन्धी पुस्तकों को छापने के लिए निःस्वार्थ भाव से कुछ संस्थाएँ और व्यक्ति तैयार न हो गए होतं, तो क्या काम आगे बढ़ सकता था ? भाई साहव इसके लिए जद्दोजहद करते, तो हो सकता है आगे रास्ता निकल आता। पर साथ ही उन्हें एक बड़ी गृहस्थी भी तो चलानी थी । लाहौर या आगरे के ही वाद अधिक समय तक एक साथ रहने का मुझे मौका नहीं मिला; लेकिन भारत में रहते समय प्रायः हर साल एक-दो बार मुलाकात हो जाया करती थी। उस वक्त मुझे मालूम होता था कि मेर सामने वही भाई साहव बैठ हैं, जिन्हें आगरे में मैने छोड़ा था। उन्हें भी मैं वैसा ही दिखाई पड़ता था । वड़ी बेतकल्लुफी में वातं हांती। मैं अपनी यात्राओं का वर्णन करता, अपने सामने रखे कामों की चर्चा करता और वह संक्षेप में आपवीती सुनाते। उनके जीवन के पिछले बहुत से वर्षों के बारे में मुझसे अधिक साहित्य सम्मेलन के भूतपूर्व अध्यक्ष तथा मेरी ही जन्मभूमि के सप्त पं. चन्द्रवली पांडे अधिक अच्छी तरह बतला सकते हैं। दोनों की सीधी-सादी जिन्दगी में ही समानता नहीं थी. वल्कि दोनों की साहित्यिक सेवा में भी बहुत सादृश्य था । इसीलिए तो 'कुनद हर्माजन्स वा हमजिन्स परवाज' के अनुसार मौलवी साहब का निवासस्थान वंघर चन्द्रवली पांड का चिरनिवास बन गया था । पिछले दो-ढाई सालों से डायवीटीज के संयम के कारण मैं अब अव्याहतगति नहीं रह गया हूँ, इसलिए भाई साहब से मिलने का मौका भी इंढ़-दो साल से नहीं हुआ था। लेकिन मुझे कहाँ यह खयाल था कि मेरे भाई साहव और दूसरों के मौलवी महेशप्रसाद इतनी जल्दी हमें छोड़कर चले जायेंगे ! उनकी बीमारी का भी पता नहीं चला था कि एकाएक पढ़ा- भाई साहव का देहान्त हो गया !" पुत्री कला ने अपने पत्र में लिखा था--आपको पिताजी का फोटो भेज रही हूँ। यह पिछले वर्ष का (1951) का खींचा हुआ चित्र है। साथ ही यह न भूलूँगी कि अन्तिम दिनों में वे आपकी तथा अपने अन्य साथियों की प्रायः चर्चा किया करते थे ।" सचमुच ही वे स्नेह और सहानुभूति की मूर्ति थे। भला अपने पूर्व मित्रों की स्मृति को कैसे भुला सकते थे ? मृत बन्धुओं की स्मृति को चिरस्थायी रखने की लांग कोशिश करते हैं। इसे मैं बुरा नहीं मानताः किन्तु इसकी सफलता पर संदेह मुझे अवश्य है। हाल में ही कितने ही ऐसे पुरुष गुजरे हैं, जिनका नाम सालों हर रोज अखवारों में निकलता था, उनके नाम की धूम सी मची हुई थी, लेकिन अब कोई ही कोई याद करता है। भाई साहब ने अपने ज्ञान और सौहार्द से बहुतों का उपकार किया। अपने वारे में तो कह सकता हूँ कि मेरे जीवन को सबसे अधिक प्रेरणा जिस पुरुष से मिली, वह भाई महेशप्रसादजी थे । एक समय मैंने इस कृतज्ञता को प्रकट करने के लिए अपने 'कुरानसार' (इस्लाम धर्म की रूपरेखा) में मंगलाचरण के तौर पर एक दो अर्थोंवाला श्लोक रचा था। पीछे अनीश्वरवादी हो जाने पर ईश्वर की ध्वनि लानेवाले उस श्लोक को मैंने पुस्तक में नहीं अतीत से वर्तमान / 409 रखा और न अब वह सारा श्लोक ही याद है। उसके कुछ अंश थे : ".. शुष्कं पर्णं तदिव सततं खे पृथिव्यामटतं, प्रेणोत्थाय विदितविभवो "नौभि तं श्रीमहेशं । सचमुच भाई साहब से मिलने से पहले मैं सूखे पत्ते की तरह निरुद्देश्य भटकता था । पीछे भी यद्यपि भटकना बन्द नहीं हुआ, किन्तु मेरे जीवन को सोद्देश्य बनाने का श्रेय मौलवी महेशप्रसाद को है। अछूतोद्धारक स्वामी सत्यानन्द एक और घनिष्ठ मित्र अब स्मृति की वस्तु रह गए । स्वामी सत्यानंद मेरे अपने जिले आजमगढ़ में पैदा हुए, लेकिन उनका परिचय मुझे अपने जिले में प्राप्त करने का अवसर नहीं मिला। यह परिचय भी उस समय मिला, जब नहीं कहा जा सकता कि उनका जीवन पथ किस ओर जानेवाला था। प्रथम विश्वयुद्ध चलते एक ही साल हुआ था। सन् 1915 के दिसम्बर में स्वामी सत्यानन्द, उस समय के बलदेव चौवं, अपने एक तरुण मित्र के साथ वृन्दावन गुरुकुल का वार्षिकोत्सव देखकर आगरा आए। उस समय आर्यसमाज एक सजीव रास्था थी, जिससे तरुगों को बहुत प्रेरणा मिलती थी । तरुण वलदेव चौवं किसी तरह उसके सम्पर्क में आ गए, इसलिए दोनों मित्र आजमगढ़ से मथुरा वृन्दावन के तीर्थाटन और देशाटन के लिए ही नहीं, बल्कि आर्यसामाजिक संस्थाओं को देखने के लिए अपनी छुट्टियों को लगा रहे थे। उन्हें आगरे के अरबी-फारसी पढ़ाकर आर्य धर्मोपदेशक बनाने वाले आगरे के आर्य मुसाफिर विद्यालय का पता लग गया था, इसलिए वे यहाँ आए । विद्यालय के प्रधानाध्यापक स्वर्गीय मौलवी महंशप्रसाद थे और उनके विद्यार्थियों में हम आधे दर्जन के करीब तरुण थे। आगरे में अपने जिले के दूसरे तरुण को देखना हम दोनों के बीच साधारण परिचय से अधिक सम्बन्ध स्थापित करने के लिए पर्याप्त था । 1915 से 1953 ई. तक 38 वर्षों की हमारी मैत्री रही । हमारे विचार कितनी ही बातो में एक-दूसरे से विल्कुल उल्टे थे, लेकिन मुझे याद नहीं कि कभी एक बार भी उसके कारण हमारे वीच किमी तरह का मनमुटाव हुआ हो । उनका स्नेह मेरे ऊपर कितना था और वे मेरे ऊपर अपना कितना अधिकार समझते थे, यह इसी से मालूम होगा कि 1936-37 में जब कांग्रेस प्रादेशिक कौंसिलों का चुनाव लड़ रही थी, उस समय प्रान्तीय कमंटी में ये आजमगढ़ के एक चुनाव क्षेत्र से मेरा नाम देना तै करवा आये। लोगों ने जब पूछा कि वे खड़ा होना भी चाहेंगे, तो उन्होंने जवाब दिया- 'हाँ, जरूर अपने जिले से मेरा सम्बन्ध करीव करीव सन् 1910 से छूट गया था, जब कि मैंने घुमक्कड़ी की दीक्षा ली। उसके बाद जिस जिले को मैंने अपना अधिकांश कार्यक्षेत्र बनाया, वह था बिहार का छपरा। मुझे जब उन्होंने कौंसिल मेम्बरी के लिए खड़े होने को कहा और मैंने इन्कार में जवाब दिया, तो उसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया । प्रारंभिक जीवन 1915 ई. के अन्त में पहली बार हम दोनों का साक्षात्कार हुआ था । उस समय बलदेवजी हाई स्कूल की शायद नवीं क्लास के विद्यार्थी थे। 1916 ई. में जब मैं मुसाफिर विद्यालय की पढ़ाई खत्म करके अपनी संस्कृत की पढ़ाई को आगे बढ़ाने के खयाल से लाहौर पहुँचा तो देखा कि वलदेव जी भी वहाँ अनारकली के एक मन्दिर में डेरा डाले हुए हैं। अव तो लाहौर के समय में हम दो शरीर और एक प्राण हो गए। मैं विद्या या बुद्धि में अपने को उनसे बड़ा नहीं समझता था। आयु में चार वर्ष में बड़ा था। लेकिन हर एक बात में बलदेवजी मुझसे परामर्श लेते और मेरी बातों का आदर करते । बलदेव जी एक गरीब किसान के घर में पैदा हुए थे। 410 / राहुल-वाङ्मय 2.2: जीवनी और संस्मरण
हुई. मुझे केवल अरवी पढ़ने की जरूरत थी। मुझसे अच्छा व्याख्यान दे देनेवाले मेरे दूसरे साथी भी थे। लेकिन बहस-मुबाहसा तथा दूसरी बातों के कारण विद्यालय वालों को मुझसे बड़ी आशा थी । विद्यालय के संस्थापक पण्डित भोजदत्त चन्द्रा करके काम चला रहे थे। लेकिन मेरे यहाँ पहुँचते-पहुँचते वे तपदिक के शिकार हो गए और बहुत दिन नहीं हुआ, वे चल बसे । इसके बाद विद्यालय के प्रबन्ध का भार उनके दोनों लड़कों-- डॉ. लक्ष्मीदत्त और वकील तारादत्त के ऊपर पड़ा । आज दोनों भाई भी नहीं रह गए । खैर, उनको अफसोस हुआ, जब मैं उपदेशक बनने की जगह और आगे पढ़ने के लिए लाहौर जाने लगा। लाहौर में पढ़ने के साथ-साथ मैंने देखा कि अगर भाई साहब यहाँ ओरियण्टल कॉलेज में दाखिल होकर बाकायदा अरवी पढ़ते, तो समय की भी बहुत बचत होती और पढ़ने का सुभीता भी अधिक मिलता। पहले समय की अपेक्षा एक हज़ार नौ सौ सोलह-सत्रह में खाने-पीने की चीजों का दाम बहुत बढ़ गया था; लेकिन आज की अपेक्षा उस समय भी वह सस्ता था । तो भी बिना पैसे के अपरिचित स्थान में जाना कम चिन्ता की बात नहीं थी। लेकिन मैंने लाहौर में अपना स्थान बना लिया था। मैंने यह भी देख लिया था कि भाई साहब वहाँ आकर भूखे नहीं रह सकते । कांई ट्यूशन या दूसरा काम मिल सकता है, जिससे गुजारा करके वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं। उनके आने पर ऐसा ही हुआ भी । सूखी रोटी और मोटे-झांटे कपड़े पर सन्तोष करनेवाले आदमी का खर्च ही कितना था ! दस रुपये मासिक के ट्यूशन से भी उनका काम चल सकता था । भाई साहब ओरियण्टन कॉलेज की मौलवी आलिम कक्षा में दाखिल हो गए। वे पहले हिन्दू थे, जिन्होंने मौलवी आलिम कक्षा में नाम लिखाया था। वे पहले हिन्दू थे, जिन्होंने अरबी की सर्वोच्च परीक्षा मौलवी फाजिल पंजाब विश्वविद्यालय से पास की। उस समय ओरियण्टल कॉलेज का कोई अपना अच्छा छात्रावास नहीं था । किले और शाही मस्जिद के बीच में कुछ कोठरियाँ थीं, जो न जाने किस मतलव से बनाई गई थीं। इसके निचले तल्ले में बहुत समय तक अंग्रेजों के घोड़े बँधते रहे। भाई साहव उसी छात्रावास में रहने लगे । अपने शास्त्रार्थों और खंडन-मंडन के कारण आर्यसमाज मुसलमानों में ज्यादा बदनाम था और भाई साहब कोई छिपकर अपनी पढ़ाई नहीं कर रहे थे। उनकी मांटी चुटिया हमेशा खुली रहती थी, क्योंकि वे टोपी नहीं पहनते थे । धांती और कुर्ता उनकी पांशाक में थे। लाहौर यद्यपि अभी भारत का पॅरिस नहीं बना था, तो भी हमारे प्रदेश से वहाँ शौकीनी अधिक थी, इसमें सन्दह नही । भाई साहब मांटे कुर्ते और धोती पर ही संतोष नहीं करते थं, बल्कि बुन्देलखंड के गाँवों में पहना जानेवाला चमरौधा जूता भी मँगाकर पहनते थे। बुन्देलखंड में रहते समय पीछे मुझे इसका लाभ मालूम हुआ था। पंजे के ऊपर अधिक निकला हुआ चमड़ा झाड़ियों के कॉटो से रक्षा करता था । भाई साहब का वर्ताव अपने मुसलमान अध्यापकों और सहपाठियों से इतना अच्छा था कि उस पर धार्मिक मतभेद का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा। भाई साहव एक जगह जमकर रहनेवालं जीव थे और मैं उड़नछू पंछी, जिसके लिए छः महीना भी एक जगह रहना भारी आफत थी । भाई साहब अपने मौलवी आलिम फाजिल की पढ़ाई में लग गए और पैरों में चक्कर बाँधकर कभी भटकने और कभी वुन्देलखंड में अरबी संस्कृत पाठशाला खोलकर बैठने की व्यर्थ कोशिश करने लगा। मैं मद्रास या कुर्ग में था, जब कि असहयोग का आन्दोलन शुरू हुआ। तब तक भाई साहब मौलवी फाजिल हो चुके थे । हिन्दू मौलवी फाजिल पाकर हिन्दू विश्वविद्यालय ने उन्हें तुरन्त अपना लिया; लेकिन उनकी जो कदर होनी चाहिए थी, वह आखिर तक नहीं हुई। तो भी पढ़ाई समाप्त करने के बाद अपना सारा जीवन उन्होंने हिन्दू विश्वविद्यालय में विताया। जब वे काम पर लग गए, तो ब्याह के लिए चारों ओर से जोर पड़ने लगा। मैं उसके पक्ष में नहीं था, लेकिन भाई साहब का वैसा मत नहीं था। दक्षिण में रहते ही उनके ब्याह की बात भी मालूम हो गई। अपनी सहधर्मिणी के चुनने में भी उन्होंने अपनी अनोखी परख का पता दिया। कितनी ही अच्छी शिक्षिता लड़कियाँ मिल रही थीं, लेकिन उनका कहना था मुझे तो ऐसी लड़की चाहिए, जो चक्की भी पीस ले, खाना भी बना ले, घर के काम के लिए किसी की मोहताज न रहे। हाँ, तो भाई साहब को ऐसी ही पत्नी मिली। गाँधी-युग के पहले से ही वे स्वदेशी और सादगी के व्रती थे, गाँधी-युग ने उन पर और प्रभाव डाले, जिसमें कल की जगह हाथ के पीसे-कूटे दाल-चावल-आड़े की महिमा भी थी। चार सौ आठ / राहुल-वाङ्मय दो.दो: जीवनी और संस्मरण बेचारी पत्नी पति से बहुत पहले ही चल बसीं और लड़कियों के पालन-पोषण और शिक्षा-दीक्षा का भार भाई साहव के ऊपर दे गईं । भाई साहब स्थान में ही एक जगह जम कर बैठने की आदत नहीं रखते थे, बल्कि उनके विचारों में भी बहुत कम परिवर्तन की गुंजाइश थी। मैं आर्यसमाज से हटते हटते बौद्ध धर्म और मार्क्सवाद तक पहुँच गया लेकिन भाई साहब बड़ी लगन से आर्यसमाजी वने रहे। वे आर्यसमाजी सभाओं में उपदेश देने जाते, यद्यपि 'वं खंडन-मंडन और शास्त्रार्थी उपदेशक नहीं बन सके। उनके दिल में आग तो थी, लेकिन उसकी प्रचंडता बाहर मालूम नहीं होती थी । उनका अरबी भाषा का ज्ञान गंभीर था, लेकिन कम बोलने और कम लिखने की आदत ने उनसे आगे आनेवाली पीढ़ियों के लिए अधिक काम नहीं करवा पाया। शायद इसमें एक कारण यह भी था कि हिन्दू विश्वविद्यालय में जैसी कदरदानी होनी चाहिए थी, जैसा प्रोत्साहन मिलना चाहिए था, वैसा नहीं हुआ । अरवी - कविता पर उन्होंने एक छोटी-सी पुस्तक लिखी और अरवी-साहित्य के सम्बन्ध में कुछ फुटकर लंख भी। लेकिन वे अरवी साहित्य के सम्बन्ध में ज्ञातव्य बातों से पूर्ण कितने ही ग्रंथ दे सकते थे, जिसे अब दूसरों को देना होगा। मैं अपने से ही मिलाता हूँ। मैंने बौद्ध माहित्य का जब आलांड़न किया और हिन्दी की अवस्था देखी, तो तुरंत हाथ में आए ज्ञान को हिन्दी भाषा भाषियों के लिए कागज पर उतारने में वडी बंसत्री का परिचय दिया। शायद भाई साहब भी कुछ डमी तरह की भावना रखते थे, लेकिन पुस्तकों का प्रकाशन हिन्दी में आसान नहीं था। मेरी ही बौद्ध धर्म सम्बन्धी पुस्तकों को छापने के लिए निःस्वार्थ भाव से कुछ संस्थाएँ और व्यक्ति तैयार न हो गए होतं, तो क्या काम आगे बढ़ सकता था ? भाई साहव इसके लिए जद्दोजहद करते, तो हो सकता है आगे रास्ता निकल आता। पर साथ ही उन्हें एक बड़ी गृहस्थी भी तो चलानी थी । लाहौर या आगरे के ही वाद अधिक समय तक एक साथ रहने का मुझे मौका नहीं मिला; लेकिन भारत में रहते समय प्रायः हर साल एक-दो बार मुलाकात हो जाया करती थी। उस वक्त मुझे मालूम होता था कि मेर सामने वही भाई साहव बैठ हैं, जिन्हें आगरे में मैने छोड़ा था। उन्हें भी मैं वैसा ही दिखाई पड़ता था । वड़ी बेतकल्लुफी में वातं हांती। मैं अपनी यात्राओं का वर्णन करता, अपने सामने रखे कामों की चर्चा करता और वह संक्षेप में आपवीती सुनाते। उनके जीवन के पिछले बहुत से वर्षों के बारे में मुझसे अधिक साहित्य सम्मेलन के भूतपूर्व अध्यक्ष तथा मेरी ही जन्मभूमि के सप्त पं. चन्द्रवली पांडे अधिक अच्छी तरह बतला सकते हैं। दोनों की सीधी-सादी जिन्दगी में ही समानता नहीं थी. वल्कि दोनों की साहित्यिक सेवा में भी बहुत सादृश्य था । इसीलिए तो 'कुनद हर्माजन्स वा हमजिन्स परवाज' के अनुसार मौलवी साहब का निवासस्थान वंघर चन्द्रवली पांड का चिरनिवास बन गया था । पिछले दो-ढाई सालों से डायवीटीज के संयम के कारण मैं अब अव्याहतगति नहीं रह गया हूँ, इसलिए भाई साहब से मिलने का मौका भी इंढ़-दो साल से नहीं हुआ था। लेकिन मुझे कहाँ यह खयाल था कि मेरे भाई साहव और दूसरों के मौलवी महेशप्रसाद इतनी जल्दी हमें छोड़कर चले जायेंगे ! उनकी बीमारी का भी पता नहीं चला था कि एकाएक पढ़ा- भाई साहव का देहान्त हो गया !" पुत्री कला ने अपने पत्र में लिखा था--आपको पिताजी का फोटो भेज रही हूँ। यह पिछले वर्ष का का खींचा हुआ चित्र है। साथ ही यह न भूलूँगी कि अन्तिम दिनों में वे आपकी तथा अपने अन्य साथियों की प्रायः चर्चा किया करते थे ।" सचमुच ही वे स्नेह और सहानुभूति की मूर्ति थे। भला अपने पूर्व मित्रों की स्मृति को कैसे भुला सकते थे ? मृत बन्धुओं की स्मृति को चिरस्थायी रखने की लांग कोशिश करते हैं। इसे मैं बुरा नहीं मानताः किन्तु इसकी सफलता पर संदेह मुझे अवश्य है। हाल में ही कितने ही ऐसे पुरुष गुजरे हैं, जिनका नाम सालों हर रोज अखवारों में निकलता था, उनके नाम की धूम सी मची हुई थी, लेकिन अब कोई ही कोई याद करता है। भाई साहब ने अपने ज्ञान और सौहार्द से बहुतों का उपकार किया। अपने वारे में तो कह सकता हूँ कि मेरे जीवन को सबसे अधिक प्रेरणा जिस पुरुष से मिली, वह भाई महेशप्रसादजी थे । एक समय मैंने इस कृतज्ञता को प्रकट करने के लिए अपने 'कुरानसार' में मंगलाचरण के तौर पर एक दो अर्थोंवाला श्लोक रचा था। पीछे अनीश्वरवादी हो जाने पर ईश्वर की ध्वनि लानेवाले उस श्लोक को मैंने पुस्तक में नहीं अतीत से वर्तमान / चार सौ नौ रखा और न अब वह सारा श्लोक ही याद है। उसके कुछ अंश थे : ".. शुष्कं पर्णं तदिव सततं खे पृथिव्यामटतं, प्रेणोत्थाय विदितविभवो "नौभि तं श्रीमहेशं । सचमुच भाई साहब से मिलने से पहले मैं सूखे पत्ते की तरह निरुद्देश्य भटकता था । पीछे भी यद्यपि भटकना बन्द नहीं हुआ, किन्तु मेरे जीवन को सोद्देश्य बनाने का श्रेय मौलवी महेशप्रसाद को है। अछूतोद्धारक स्वामी सत्यानन्द एक और घनिष्ठ मित्र अब स्मृति की वस्तु रह गए । स्वामी सत्यानंद मेरे अपने जिले आजमगढ़ में पैदा हुए, लेकिन उनका परिचय मुझे अपने जिले में प्राप्त करने का अवसर नहीं मिला। यह परिचय भी उस समय मिला, जब नहीं कहा जा सकता कि उनका जीवन पथ किस ओर जानेवाला था। प्रथम विश्वयुद्ध चलते एक ही साल हुआ था। सन् एक हज़ार नौ सौ पंद्रह के दिसम्बर में स्वामी सत्यानन्द, उस समय के बलदेव चौवं, अपने एक तरुण मित्र के साथ वृन्दावन गुरुकुल का वार्षिकोत्सव देखकर आगरा आए। उस समय आर्यसमाज एक सजीव रास्था थी, जिससे तरुगों को बहुत प्रेरणा मिलती थी । तरुण वलदेव चौवं किसी तरह उसके सम्पर्क में आ गए, इसलिए दोनों मित्र आजमगढ़ से मथुरा वृन्दावन के तीर्थाटन और देशाटन के लिए ही नहीं, बल्कि आर्यसामाजिक संस्थाओं को देखने के लिए अपनी छुट्टियों को लगा रहे थे। उन्हें आगरे के अरबी-फारसी पढ़ाकर आर्य धर्मोपदेशक बनाने वाले आगरे के आर्य मुसाफिर विद्यालय का पता लग गया था, इसलिए वे यहाँ आए । विद्यालय के प्रधानाध्यापक स्वर्गीय मौलवी महंशप्रसाद थे और उनके विद्यार्थियों में हम आधे दर्जन के करीब तरुण थे। आगरे में अपने जिले के दूसरे तरुण को देखना हम दोनों के बीच साधारण परिचय से अधिक सम्बन्ध स्थापित करने के लिए पर्याप्त था । एक हज़ार नौ सौ पंद्रह से एक हज़ार नौ सौ तिरेपन ई. तक अड़तीस वर्षों की हमारी मैत्री रही । हमारे विचार कितनी ही बातो में एक-दूसरे से विल्कुल उल्टे थे, लेकिन मुझे याद नहीं कि कभी एक बार भी उसके कारण हमारे वीच किमी तरह का मनमुटाव हुआ हो । उनका स्नेह मेरे ऊपर कितना था और वे मेरे ऊपर अपना कितना अधिकार समझते थे, यह इसी से मालूम होगा कि एक हज़ार नौ सौ छत्तीस-सैंतीस में जब कांग्रेस प्रादेशिक कौंसिलों का चुनाव लड़ रही थी, उस समय प्रान्तीय कमंटी में ये आजमगढ़ के एक चुनाव क्षेत्र से मेरा नाम देना तै करवा आये। लोगों ने जब पूछा कि वे खड़ा होना भी चाहेंगे, तो उन्होंने जवाब दिया- 'हाँ, जरूर अपने जिले से मेरा सम्बन्ध करीव करीव सन् एक हज़ार नौ सौ दस से छूट गया था, जब कि मैंने घुमक्कड़ी की दीक्षा ली। उसके बाद जिस जिले को मैंने अपना अधिकांश कार्यक्षेत्र बनाया, वह था बिहार का छपरा। मुझे जब उन्होंने कौंसिल मेम्बरी के लिए खड़े होने को कहा और मैंने इन्कार में जवाब दिया, तो उसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया । प्रारंभिक जीवन एक हज़ार नौ सौ पंद्रह ई. के अन्त में पहली बार हम दोनों का साक्षात्कार हुआ था । उस समय बलदेवजी हाई स्कूल की शायद नवीं क्लास के विद्यार्थी थे। एक हज़ार नौ सौ सोलह ई. में जब मैं मुसाफिर विद्यालय की पढ़ाई खत्म करके अपनी संस्कृत की पढ़ाई को आगे बढ़ाने के खयाल से लाहौर पहुँचा तो देखा कि वलदेव जी भी वहाँ अनारकली के एक मन्दिर में डेरा डाले हुए हैं। अव तो लाहौर के समय में हम दो शरीर और एक प्राण हो गए। मैं विद्या या बुद्धि में अपने को उनसे बड़ा नहीं समझता था। आयु में चार वर्ष में बड़ा था। लेकिन हर एक बात में बलदेवजी मुझसे परामर्श लेते और मेरी बातों का आदर करते । बलदेव जी एक गरीब किसान के घर में पैदा हुए थे। चार सौ दस / राहुल-वाङ्मय दो.दो: जीवनी और संस्मरण
परतवाडा/दि. 20- स्थानीय गणेश नगर स्थित सिंधी धर्मशाला में 17 मई को स्व. रामचंद्र अटलानी की स्मृति में एम्बुलेंस का लोकार्पण किया गया. सर्वप्रथम इष्ट देवता झूलेलाल साईं को नमन कर कार्यक्रम की शुरूआत की गई. मंच पर पूज्य सेंट्रल पंचायत मुखी जीवत काका दौलतानी, गणेश नगर मुखी दादा मनोहरलाल गिदवानी, कंवर नगर मुखी अशोक कुमार डोडवानी, पूर्व मुखी दादा प्रताप रायजी वाधवानी, माता धनवंतीबाई अटलानी, डॉ. प्रेम सहजवानी, जीवतराम अटलानी, राजेश अटलानी, सुरेश अटलानी, सिंधी सखी मंडल से विनीता धर्मा, लक्ष्मी आहूजा, विद्या धावरानी, आशा छाबड़ा विराजमान थे. जुडवा नगरी सहित विदर्भ में विख्यात एकता ज्वेलर्स ने जहां अपनी जगह बनाई है वहीं समाज सेवा में भी उनके उल्लेखनीय कार्यों के चलते एक विशेष जगह बनाई है. इन्हीं समाजसेवी उपक्रमों की श्रृंखला में एम्बुलेंस लोकार्पण का उपक्रम लिया गया. वर्ग ने अपने शब्दों में सुरेश अटलानी परिवार का सत्कार किया. वहीं सिंधी सखी मंडल संस्थापक अध्यक्ष विनीता धर्मा ने अपने शब्दों में कहा कि, व्यापार में अपनी विशिष्ट पहचान अटलानी परिवार ने बनाई. परतवाड़ा से अमरावती, अकोला तक ही कारवां नहीं थमा, बल्कि यवतमाल में भी एकता ज्वैलर्स की शाखा खोली व साथ ही साथ अपने कर्तव्य को जानकर उन्होंने पिता की स्मृति में एम्बुलेंस का लोकार्पण कर शहर व समाज में सभी के दिलों में स्थान बनाया. उल्लेखनीय है कि, सुरेश अटलानी जहां शक्ति धाम मंदिर को समर्पित हैं, वही राजेश अटलानी निरंकारी मिशन को समर्पित हैं. समाज की कोई भी मदद हो, सेवा कार्य हो, वे हमेशा तत्पर रहते हैं. कार्यक्रम का संचालन बहुत ही खूबसूरत तरीके से रूपा शामदासानी ने किया. कार्यक्रम में समाज के सभी गणमान्य, पूर्व नगरसेवक, समाज सेवी, पूज्य पंचायत उपस्थित थे. पिता स्व. रामचंद्र अटलानी की स्मृति में अटलानी परिवार द्वारा एम्बुलेंस का लोकार्पण किया गया. उनके इस सराहनीय सेवाभावी उपक्रम के लिए माता धनवंती बाई का बालाजी मॉर्निंग ग्रुप, पूज्य सिंधी पंचायत, भारतीय सिंधु सभा, सिंधी सामाजिक सेवा समिति, सिंधी सखी मंडल व शहर के अनेकों गणमान्यों ने शॉल, श्रीफल देकर सत्कार किया. जीवतराम, सुरेश, राजेश अटलानी ने भी समाज के प्रति आभार व्यक्त किया.
परतवाडा/दि. बीस- स्थानीय गणेश नगर स्थित सिंधी धर्मशाला में सत्रह मई को स्व. रामचंद्र अटलानी की स्मृति में एम्बुलेंस का लोकार्पण किया गया. सर्वप्रथम इष्ट देवता झूलेलाल साईं को नमन कर कार्यक्रम की शुरूआत की गई. मंच पर पूज्य सेंट्रल पंचायत मुखी जीवत काका दौलतानी, गणेश नगर मुखी दादा मनोहरलाल गिदवानी, कंवर नगर मुखी अशोक कुमार डोडवानी, पूर्व मुखी दादा प्रताप रायजी वाधवानी, माता धनवंतीबाई अटलानी, डॉ. प्रेम सहजवानी, जीवतराम अटलानी, राजेश अटलानी, सुरेश अटलानी, सिंधी सखी मंडल से विनीता धर्मा, लक्ष्मी आहूजा, विद्या धावरानी, आशा छाबड़ा विराजमान थे. जुडवा नगरी सहित विदर्भ में विख्यात एकता ज्वेलर्स ने जहां अपनी जगह बनाई है वहीं समाज सेवा में भी उनके उल्लेखनीय कार्यों के चलते एक विशेष जगह बनाई है. इन्हीं समाजसेवी उपक्रमों की श्रृंखला में एम्बुलेंस लोकार्पण का उपक्रम लिया गया. वर्ग ने अपने शब्दों में सुरेश अटलानी परिवार का सत्कार किया. वहीं सिंधी सखी मंडल संस्थापक अध्यक्ष विनीता धर्मा ने अपने शब्दों में कहा कि, व्यापार में अपनी विशिष्ट पहचान अटलानी परिवार ने बनाई. परतवाड़ा से अमरावती, अकोला तक ही कारवां नहीं थमा, बल्कि यवतमाल में भी एकता ज्वैलर्स की शाखा खोली व साथ ही साथ अपने कर्तव्य को जानकर उन्होंने पिता की स्मृति में एम्बुलेंस का लोकार्पण कर शहर व समाज में सभी के दिलों में स्थान बनाया. उल्लेखनीय है कि, सुरेश अटलानी जहां शक्ति धाम मंदिर को समर्पित हैं, वही राजेश अटलानी निरंकारी मिशन को समर्पित हैं. समाज की कोई भी मदद हो, सेवा कार्य हो, वे हमेशा तत्पर रहते हैं. कार्यक्रम का संचालन बहुत ही खूबसूरत तरीके से रूपा शामदासानी ने किया. कार्यक्रम में समाज के सभी गणमान्य, पूर्व नगरसेवक, समाज सेवी, पूज्य पंचायत उपस्थित थे. पिता स्व. रामचंद्र अटलानी की स्मृति में अटलानी परिवार द्वारा एम्बुलेंस का लोकार्पण किया गया. उनके इस सराहनीय सेवाभावी उपक्रम के लिए माता धनवंती बाई का बालाजी मॉर्निंग ग्रुप, पूज्य सिंधी पंचायत, भारतीय सिंधु सभा, सिंधी सामाजिक सेवा समिति, सिंधी सखी मंडल व शहर के अनेकों गणमान्यों ने शॉल, श्रीफल देकर सत्कार किया. जीवतराम, सुरेश, राजेश अटलानी ने भी समाज के प्रति आभार व्यक्त किया.
उदयपुरवाटी ब्लॉक के दर्जनों राशन डीलरों ने सोमवार को अपनी विभिन्न मांगो को लेकर मुख्यमंत्री के नाम एसडीओ को ज्ञापन दिया है। जानकारी के अनुसार राजस्थान प्रदेश राशन डीलर्स संघर्ष समिति राजस्थान की उदयपुरवाटी इकाई के ब्लॉक अध्यक्ष कालूराम रैगर की अध्यक्षता में दर्जनों राशन डीलर्स ने ज्ञापन दिया है। उन्होंने पोस मशीन में छीजत का प्रावधान लागू करवाने, भारत सरकार द्वारा गठित वाघवा आयोग कमेटी की सिफारिशें लागू करवाने, मृतक उचित मूल्य दुकानदार की उम्र 60 वर्ष की बाध्यता समाप्त करवाने, मानदेय के साथ कमिशन देने सहित विभिन्न मांगो को लेकर राशन डीलर्स ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन दिया है। ज्ञापन देने वालों में हजारीलाल, घनश्याम अग्रवाल, प्रभूदयाल सैनी, राजेश कुमार, मांगीलाल, मूलचंद, महेश कुमार, कैलाश चंद्र, हंसराज, जगदीश प्रसाद, सुरेंद्र कुमार आदि शामिल थे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
उदयपुरवाटी ब्लॉक के दर्जनों राशन डीलरों ने सोमवार को अपनी विभिन्न मांगो को लेकर मुख्यमंत्री के नाम एसडीओ को ज्ञापन दिया है। जानकारी के अनुसार राजस्थान प्रदेश राशन डीलर्स संघर्ष समिति राजस्थान की उदयपुरवाटी इकाई के ब्लॉक अध्यक्ष कालूराम रैगर की अध्यक्षता में दर्जनों राशन डीलर्स ने ज्ञापन दिया है। उन्होंने पोस मशीन में छीजत का प्रावधान लागू करवाने, भारत सरकार द्वारा गठित वाघवा आयोग कमेटी की सिफारिशें लागू करवाने, मृतक उचित मूल्य दुकानदार की उम्र साठ वर्ष की बाध्यता समाप्त करवाने, मानदेय के साथ कमिशन देने सहित विभिन्न मांगो को लेकर राशन डीलर्स ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन दिया है। ज्ञापन देने वालों में हजारीलाल, घनश्याम अग्रवाल, प्रभूदयाल सैनी, राजेश कुमार, मांगीलाल, मूलचंद, महेश कुमार, कैलाश चंद्र, हंसराज, जगदीश प्रसाद, सुरेंद्र कुमार आदि शामिल थे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
धीरे-धीरे वह विषय वढकर त्रिविक्रमावतारके समान वामन रूपसे ऐसे विशालरूप को धारण करलेता है, कि तीनों लोकोंम कैल जाता है । मनुष्यको ऐसी विशाल तृष्णाकी पूर्तिकी चिन्ता घेरलेती है । भगवान् कहते हैं, कि इसी प्रकार विषयकी चिन्ता करते-करते उस विषयका सँग होजाता है त्व क्या दशा होती है ? सो हे अर्जुन सुन! [संगात संजायते कामः कामात्क्रोधोऽमिजायते]एवम् प्रकार उन विषयोंके संग होजानेसे उनमें कामना उत्पन्न होती है अर्थात् विशाल तृष्णाकी डालियां सब ओर फैल जाती हैं और मनुष्य उन तृप्याओं की पूर्ति लग पडता है। इसमकार जब इस विशाल तृष्णाकी पूर्तिमें किसी प्रकार की बाधा उपस्थित होजाती है तब उसे क्रोध उत्पन्न हो ाता है। फिरतो दडाही थन्धेर होपडता है। क्योंकि एवमप्रकार क्रोधके उत्पन्न होतेही सारा बनाबनाया घर बिगड जाता है ॥ ६२ ॥ जब सब कारों का नष्ट करनेवाला क्रोध हृदय में उपज याता है तब क्रोधात भवति संमोहः ] उस कोबसे मोह अर्थात् कार्य्याकार्थ्यका अविवेक उत्पन्न होजाता है । यह सुधि नहीं रहती, कि क्या करना चाहिये और क्या नहीं करना चाहिये। इस कार्य से अपने वा परायेकी हानि होगी वा लाभ होगा। इसी क्रोधके वशीभूत होकर कारागार, शूली, फांसी इत्यादि दण्डोंके दुःख भोगनेका भागी बनजाता है। अब भगवान कहते हैं, कि हे अर्जुन ! [ संमोहात्स्मृतिविभूमः ] उस संमोहसे स्मृतिका विभूम होजाता है । अर्थात यात्मविस्मृति होजाती है। यह नहीं स्मरण रहता, कि मैं कौन हूं ? कहां हूं ? बडे परिश्रम से सतगुरु और सच्छास्त्र द्वारा जो प्रात्मानन्द लाभ करने श्री उद्भगवद्धता लगगया था वह जाता रहता है, वहांतक कि पारलौकिक मार्गको छोड, माला वाला तोड, कमण्डल फोड, नदीमें वहा आता है और ""सतगुरुमाकोशति" अपने सतगुरुको भी दुवैचन कहने लगजाता है। "शास्त्रानुसंधानस्य विनंशरूपं चलनं भवति । शास्त्रों की भी सुधि नहीं रहती उनके अभिप्रायसे विरुद्ध चलने लगपडता है। एक्स प्रकार चलते-चलते " शास्त्राचार्योपदिष्टार्थ विचलनम् " शास्त्र और " आचार्य दोनोंके उपदेशसे चलायमान होकर चंचल होजाता है। इसी वो कहते हैं । तिससे क्या होता है सो भगवान कहते हैं, [स्मृतिभ्रंशाबुद्धिनाशः ] उस स्मृतिके भ्रष्ट होनेसे बुद्धिका नाश होजाता है । जब बुद्धिका नाश हुवा तब उस बुद्धिका अधिष्ठातृदेव विष्णु उस प्राणीको छोड़ देता है । जब विग्णु देवने त्यागदिया तो फिर कहां ठौर मिले? कौन कल्याण करे ? फिरतो भगवान कहते हैं [बुद्धिनाशात्मणश्यति ] तिस बुद्धि के नाश होनेसे प्राणी स्वयम् नाश होजाता है। संसार सागर में डूब यात्मानन्दरूप अमृतसे विमुख हो मृतकक तुल्य होजाता है। सब पुरुषार्थीसे हीन होजाता है। भगवान के इस वचन में श्रुतिका प्रमाण-ॐ पराचः कामाननुयन्ति वालास्ते मृत्योर्यन्ति वितवस्य पाशम् । अथ धीरा त्वं विदित्वा ध्रुवमनुषेष्विहन मार्ययन्ते ॥ ( कठोपनिषद अ २ वल्ली श्रुति २ ) हटाइटेषु भोगे तृ-या कभ्यामविधातृव्याभ्याम् मनिषद्धात्मनाः पराची बहिर्यतानेव । (शंकराचार्थः) [ चंच्या० २ ] दृष्टाऽदृप्ट जो सूक्ष्म औौर. स्थूल नाना प्रकारके भोगोंकी तृष्णा उससे प्रतिबद्ध होगया है आत्मदर्शन जिन प्राणियोंका, जो मारे तृष्णाके श्रात्मानन्दरूप अमृत को भूलगये हैं, उनको पराचः कहते हैं। ऐसे प्राणी अज्ञानी होनेके कारण वालकों के सदृश हैं और तृष्णाके वशीभूत हो नाना प्रकारकी कामनाओं व पड़जाते हैं । ऐसी विद्याके वशीभूत होजानेसे विद्याकृत जो काम्यकर्म उसके " विततपाशः" फंदे में फंसकर नष्टहोजाते हैं। इसीकारण स्थिती अर्थात जो धीर विवेकी हैं वे अमृतत्त्व प्रत्यगात्म-स्वरूप जो भगवत्रूप उसे " ध्रुव" निश्चय और अविनाशी जानकर इस अध्रुव " नाशवानं संसारके सुखोंको " न प्रार्थयन्ते " नहीं चाहते हैं । : इस श्रुतिसे भी सिद्ध होता है, कि जिसकी वाहय इन्द्रियां बशीभूत हों पर बालकोंके समान मनमें विषयों का ध्यान करता रहे तो. विशाल-तृष्णा में फंसकर नाश होजाता है । इसीकारण कहनेका अभिप्राय यह है, कि इन्द्रियों के वशीभूत करो ॥ ६२, ६३ ॥ यह सुनकर अर्जुनने पूछा भगवन् ! इसके प्रतिकूल यदि मन निग्रह हो अपने वशमें होने और इन्द्रियां अपने-अपने विषयकी ओर दौड़ा करें तो क्या हानि है ? इतना सुन भगवान कहते हैंसू० - रागद्वेषवियुक्तैस्तु विषयानिन्दियैश्चरन् । आत्मवश्यैविधेयात्मा प्रसादमधिगच्छति ॥ ६४ ॥ पदच्छेदः- विधेयात्मा (किंकरीकृतमनाः । वशीकृतान्तःकरणः । स्वाधीन चित्तः ) तु । रागद्वेष वियुक्तैः (प्रीत्युद्विग्नरहितैः ) आत्मवश्यैः ( मनोधनैः । स्वाधीनैः ) इन्द्रियैः ( श्रोत्रादिभिः ) विषयान ( रूपरसगन्धादीन् ) चरन् ( उपभुञ्जानःसन् । पश्यनसन् ) प्रसादम ( प्रसन्नताम् । सङ्कल्पविकल्पपंकलेपप्रक्षालनेन मनसः स्वाच्छ्यम् । परमात्मसाक्षात्कार योग्यताम् । स्वास्थ्यम् । शान्तिम् ) गच्छति ( प्राप्नोति ) ॥६४ ॥ पदार्थ :- ( विधेयात्मा ) वशीभूत किया है अपनेको जिसने वह (तु) तो (रागद्वेषवियुक्तैः) रागद्वेषसे रहित होकर (श्रात्मवश्यैः) अपने आत्माको अपने वश किये हुए (इन्द्रियैः) इन्द्रियोंसे (विषयान्). विषयोंको ( चरन् ) भोगता हुआ भी ( प्रसादम् ) परम प्रसन्नताको अर्थात् परमात्माके साक्षात्कार करलेने योग्य चित्तकी स्वच्छताको (छत) प्राप्त करलेता है ॥ ६४ ॥ भावार्थः--अर्जुनने भगवानसे " किंवजेत्" यह चौथा प्रश्न किया था तथा पूर्व श्लोक तक अपने तीसरे प्रश्नका उत्तर सुनकर यह पूछा था, कि यदि किसी प्राणीका मन अपने वश तो हो, पर इन्द्रियां विषयकी ओर आचरण करती रहें तो क्यां हानि है ?
धीरे-धीरे वह विषय वढकर त्रिविक्रमावतारके समान वामन रूपसे ऐसे विशालरूप को धारण करलेता है, कि तीनों लोकोंम कैल जाता है । मनुष्यको ऐसी विशाल तृष्णाकी पूर्तिकी चिन्ता घेरलेती है । भगवान् कहते हैं, कि इसी प्रकार विषयकी चिन्ता करते-करते उस विषयका सँग होजाता है त्व क्या दशा होती है ? सो हे अर्जुन सुन! [संगात संजायते कामः कामात्क्रोधोऽमिजायते]एवम् प्रकार उन विषयोंके संग होजानेसे उनमें कामना उत्पन्न होती है अर्थात् विशाल तृष्णाकी डालियां सब ओर फैल जाती हैं और मनुष्य उन तृप्याओं की पूर्ति लग पडता है। इसमकार जब इस विशाल तृष्णाकी पूर्तिमें किसी प्रकार की बाधा उपस्थित होजाती है तब उसे क्रोध उत्पन्न हो ाता है। फिरतो दडाही थन्धेर होपडता है। क्योंकि एवमप्रकार क्रोधके उत्पन्न होतेही सारा बनाबनाया घर बिगड जाता है ॥ बासठ ॥ जब सब कारों का नष्ट करनेवाला क्रोध हृदय में उपज याता है तब क्रोधात भवति संमोहः ] उस कोबसे मोह अर्थात् कार्य्याकार्थ्यका अविवेक उत्पन्न होजाता है । यह सुधि नहीं रहती, कि क्या करना चाहिये और क्या नहीं करना चाहिये। इस कार्य से अपने वा परायेकी हानि होगी वा लाभ होगा। इसी क्रोधके वशीभूत होकर कारागार, शूली, फांसी इत्यादि दण्डोंके दुःख भोगनेका भागी बनजाता है। अब भगवान कहते हैं, कि हे अर्जुन ! [ संमोहात्स्मृतिविभूमः ] उस संमोहसे स्मृतिका विभूम होजाता है । अर्थात यात्मविस्मृति होजाती है। यह नहीं स्मरण रहता, कि मैं कौन हूं ? कहां हूं ? बडे परिश्रम से सतगुरु और सच्छास्त्र द्वारा जो प्रात्मानन्द लाभ करने श्री उद्भगवद्धता लगगया था वह जाता रहता है, वहांतक कि पारलौकिक मार्गको छोड, माला वाला तोड, कमण्डल फोड, नदीमें वहा आता है और ""सतगुरुमाकोशति" अपने सतगुरुको भी दुवैचन कहने लगजाता है। "शास्त्रानुसंधानस्य विनंशरूपं चलनं भवति । शास्त्रों की भी सुधि नहीं रहती उनके अभिप्रायसे विरुद्ध चलने लगपडता है। एक्स प्रकार चलते-चलते " शास्त्राचार्योपदिष्टार्थ विचलनम् " शास्त्र और " आचार्य दोनोंके उपदेशसे चलायमान होकर चंचल होजाता है। इसी वो कहते हैं । तिससे क्या होता है सो भगवान कहते हैं, [स्मृतिभ्रंशाबुद्धिनाशः ] उस स्मृतिके भ्रष्ट होनेसे बुद्धिका नाश होजाता है । जब बुद्धिका नाश हुवा तब उस बुद्धिका अधिष्ठातृदेव विष्णु उस प्राणीको छोड़ देता है । जब विग्णु देवने त्यागदिया तो फिर कहां ठौर मिले? कौन कल्याण करे ? फिरतो भगवान कहते हैं [बुद्धिनाशात्मणश्यति ] तिस बुद्धि के नाश होनेसे प्राणी स्वयम् नाश होजाता है। संसार सागर में डूब यात्मानन्दरूप अमृतसे विमुख हो मृतकक तुल्य होजाता है। सब पुरुषार्थीसे हीन होजाता है। भगवान के इस वचन में श्रुतिका प्रमाण-ॐ पराचः कामाननुयन्ति वालास्ते मृत्योर्यन्ति वितवस्य पाशम् । अथ धीरा त्वं विदित्वा ध्रुवमनुषेष्विहन मार्ययन्ते ॥ हटाइटेषु भोगे तृ-या कभ्यामविधातृव्याभ्याम् मनिषद्धात्मनाः पराची बहिर्यतानेव । [ चंच्याशून्य दो ] दृष्टाऽदृप्ट जो सूक्ष्म औौर. स्थूल नाना प्रकारके भोगोंकी तृष्णा उससे प्रतिबद्ध होगया है आत्मदर्शन जिन प्राणियोंका, जो मारे तृष्णाके श्रात्मानन्दरूप अमृत को भूलगये हैं, उनको पराचः कहते हैं। ऐसे प्राणी अज्ञानी होनेके कारण वालकों के सदृश हैं और तृष्णाके वशीभूत हो नाना प्रकारकी कामनाओं व पड़जाते हैं । ऐसी विद्याके वशीभूत होजानेसे विद्याकृत जो काम्यकर्म उसके " विततपाशः" फंदे में फंसकर नष्टहोजाते हैं। इसीकारण स्थिती अर्थात जो धीर विवेकी हैं वे अमृतत्त्व प्रत्यगात्म-स्वरूप जो भगवत्रूप उसे " ध्रुव" निश्चय और अविनाशी जानकर इस अध्रुव " नाशवानं संसारके सुखोंको " न प्रार्थयन्ते " नहीं चाहते हैं । : इस श्रुतिसे भी सिद्ध होता है, कि जिसकी वाहय इन्द्रियां बशीभूत हों पर बालकोंके समान मनमें विषयों का ध्यान करता रहे तो. विशाल-तृष्णा में फंसकर नाश होजाता है । इसीकारण कहनेका अभिप्राय यह है, कि इन्द्रियों के वशीभूत करो ॥ बासठ, तिरेसठ ॥ यह सुनकर अर्जुनने पूछा भगवन् ! इसके प्रतिकूल यदि मन निग्रह हो अपने वशमें होने और इन्द्रियां अपने-अपने विषयकी ओर दौड़ा करें तो क्या हानि है ? इतना सुन भगवान कहते हैंसूशून्य - रागद्वेषवियुक्तैस्तु विषयानिन्दियैश्चरन् । आत्मवश्यैविधेयात्मा प्रसादमधिगच्छति ॥ चौंसठ ॥ पदच्छेदः- विधेयात्मा तु । रागद्वेष वियुक्तैः आत्मवश्यैः इन्द्रियैः विषयान चरन् प्रसादम गच्छति ॥चौंसठ ॥ पदार्थ :- वशीभूत किया है अपनेको जिसने वह तो रागद्वेषसे रहित होकर अपने आत्माको अपने वश किये हुए इन्द्रियोंसे . विषयोंको भोगता हुआ भी परम प्रसन्नताको अर्थात् परमात्माके साक्षात्कार करलेने योग्य चित्तकी स्वच्छताको प्राप्त करलेता है ॥ चौंसठ ॥ भावार्थः--अर्जुनने भगवानसे " किंवजेत्" यह चौथा प्रश्न किया था तथा पूर्व श्लोक तक अपने तीसरे प्रश्नका उत्तर सुनकर यह पूछा था, कि यदि किसी प्राणीका मन अपने वश तो हो, पर इन्द्रियां विषयकी ओर आचरण करती रहें तो क्यां हानि है ?
बॉलीवुड में #MeToo कैंपेन में कई कलाकार अपने साथ हुई ज्यादती को लेकर खुलासे कर रहे हैं. एक्टर सैफ अली खान ने इस कैंपेन का सपोर्ट किया है. यही नहीं, उन्होंने अपने साथ हुए 25 साल पहले उत्पीड़न का खुलासा किया है. हालांकि उनका ये हैरेसमेंट सैक्सुअली नहीं था. साजिद पर लगे आरोपों पर सैफ ने क्या कहा?
बॉलीवुड में #MeToo कैंपेन में कई कलाकार अपने साथ हुई ज्यादती को लेकर खुलासे कर रहे हैं. एक्टर सैफ अली खान ने इस कैंपेन का सपोर्ट किया है. यही नहीं, उन्होंने अपने साथ हुए पच्चीस साल पहले उत्पीड़न का खुलासा किया है. हालांकि उनका ये हैरेसमेंट सैक्सुअली नहीं था. साजिद पर लगे आरोपों पर सैफ ने क्या कहा?
Uncorrected/Not for publication गया है। यदि कोई झगड़ा है तो आपस में बैठकर, मध्यस्थता के कोर्ट किस प्रकार से काम करते हैं, मैं उसके विषय में कहने की जरूरत नहीं समझता हूं, मध्यस्थता के माध्यम से इसको सुलझाया जाएगा। ...( व्यवधान) इस प्रकार के फैसले पूरे तरीके से मान्य होंगे। कई बार यह भी हो सकता है कि मध्यस्थता हुई, लोग बैठे, सबने विचार-विमर्श किया, तय भी हुआ, लेकिन दुर्भावना से सहमति बताकर वह कोर्ट में जाए, वह रास्ता इसमें बंद किया गया है ताकि इन कोर्ट्स का महत्व, सम्मान बढ़े और इन कोर्ट्स को कोई हल्के में न ले । ... ( व्यवधान) साथ-साथ इससे कंज्यूमर कोर्ट्स के न ऊपर लोड भी कम हो जाएगा। माननीय सभापति जी, प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह बच्चा हो, शिशु हो, नौजवान हो, प्रौढ़ हो, स्त्री पुरुष हो, छात्र हो या समाज के किसी भी हिस्से का रहने वाला हो तथा किसी भी आयु वर्ग का हो, उसकी उस नाते अलग पहचान हो सकती है, परन्तु उपभोक्ता सभी हैं। प्रत्येक व्यक्ति कहीं न कहीं उपभोक्ता है। इसलिए यदि उपभोक्ता को संरक्षण नहीं मिलता है तो समाज के अंदर नाराजगी और निराशा का निर्माण करता है। हमारी सरकार इन विषयों को लेकर हमेशा से संवेदनशील रही है।... ( व्यवधान) हमने रेरा का जो कानून बनाया है या अनलॉफुल डिपोजिट्स स्कीम्स से संबंधित बिल, जिसको हमने पिछले सप्ताह पास किया है, ये भी इसी प्रकार के प्रयास हैं जो उपभोक्ता को राहत प्रदान करते हैं। मुझे कई बार लगता है कि हमारे कांग्रेस के मित्र वैल में हैं, हिन्दी में उसको कुआं कहते हैं, कुएं में हैं, मैं इनके विषय में क्या टिप्पणी करूं। ...(व्यवधान) कई बार मुझे ऐसा लगता है कि चुनाव के समय में जो नकली वायदे किए जाते हैं, जिनका कोई हिसाब नहीं बनाया जाता है। अभी हमारे एक माननीय सदस्य मध्य प्रदेश का जिक्र कर रहे थे। 30 हजार करोड़ रुपये की जरूरत है, उसमें से 4 या 5 हजार करोड़ रुपये निकाले हैं। राजस्थान में मुझे पता चला है कि 96 हजार करोड रुपये के वायदे किए गए हैं, खुद का अता-पता नहीं है। कांग्रेस के एक बड़े नेता ने 24 लाख नौकरियों की बात कही। सरकार नौकरियां दे रही है, नौकरियां मिल रही हैं। यदि इसका वार्षिक तौर पर हिसाब लगाएं तो ये नौकरियां करोड़ों में हैं।... ( व्यवधान) इन्होंने कोई हिसाब नहीं लगाया है। ये जीएसटी का विरोध करेंगे, नोटबंदी का विरोध करेंगे। आज देश की अर्थव्यवस्था में विस्तार हुआ है, कलेक्शन बढ़ी है, उसका एकमात्र कारण यह है कि हम सारे सैक्टर्स में ट्रांसपरेंसी लाए हैं। जो नकली वायदे किए जाते थे, अल्टीमेटरी मतदाता ही उपभोक्ता होते हैं, उनका शोषण होता था। उपभोक्ताओं के लिए बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। आदरणीय पासवान जी यदि कुछ कर सकते हैं, तो इस दिशा में जरूर करें। उपभोक्ता को पूर्ण संरक्षण प्रदान करना हमारी सरकार का प्रारम्भ से लक्ष्य है और हम निरंतर ट्रांसपरेंसी के साथ उसकी तरफ बढ़ रहे हैं.... ( व्यवधान) मुझे पूरा विश्वास है कि जो विधेयक प्रस्तुत किया गया है, यह उपभोक्ता संरक्षण के क्रम में माइलस्टोन सिद्ध होगा और इससे सामान्य उपभोक्ता को एक कवच प्राप्त होगा। मैं माननीय प्रधान मंत्री का और माननीय मंत्री का बहुत-बहुत अभिवादन करते हुए इस बिल का समर्थन करता हूं।...( व्यवधान)
Uncorrected/Not for publication गया है। यदि कोई झगड़ा है तो आपस में बैठकर, मध्यस्थता के कोर्ट किस प्रकार से काम करते हैं, मैं उसके विषय में कहने की जरूरत नहीं समझता हूं, मध्यस्थता के माध्यम से इसको सुलझाया जाएगा। ... इस प्रकार के फैसले पूरे तरीके से मान्य होंगे। कई बार यह भी हो सकता है कि मध्यस्थता हुई, लोग बैठे, सबने विचार-विमर्श किया, तय भी हुआ, लेकिन दुर्भावना से सहमति बताकर वह कोर्ट में जाए, वह रास्ता इसमें बंद किया गया है ताकि इन कोर्ट्स का महत्व, सम्मान बढ़े और इन कोर्ट्स को कोई हल्के में न ले । ... साथ-साथ इससे कंज्यूमर कोर्ट्स के न ऊपर लोड भी कम हो जाएगा। माननीय सभापति जी, प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह बच्चा हो, शिशु हो, नौजवान हो, प्रौढ़ हो, स्त्री पुरुष हो, छात्र हो या समाज के किसी भी हिस्से का रहने वाला हो तथा किसी भी आयु वर्ग का हो, उसकी उस नाते अलग पहचान हो सकती है, परन्तु उपभोक्ता सभी हैं। प्रत्येक व्यक्ति कहीं न कहीं उपभोक्ता है। इसलिए यदि उपभोक्ता को संरक्षण नहीं मिलता है तो समाज के अंदर नाराजगी और निराशा का निर्माण करता है। हमारी सरकार इन विषयों को लेकर हमेशा से संवेदनशील रही है।... हमने रेरा का जो कानून बनाया है या अनलॉफुल डिपोजिट्स स्कीम्स से संबंधित बिल, जिसको हमने पिछले सप्ताह पास किया है, ये भी इसी प्रकार के प्रयास हैं जो उपभोक्ता को राहत प्रदान करते हैं। मुझे कई बार लगता है कि हमारे कांग्रेस के मित्र वैल में हैं, हिन्दी में उसको कुआं कहते हैं, कुएं में हैं, मैं इनके विषय में क्या टिप्पणी करूं। ... कई बार मुझे ऐसा लगता है कि चुनाव के समय में जो नकली वायदे किए जाते हैं, जिनका कोई हिसाब नहीं बनाया जाता है। अभी हमारे एक माननीय सदस्य मध्य प्रदेश का जिक्र कर रहे थे। तीस हजार करोड़ रुपये की जरूरत है, उसमें से चार या पाँच हजार करोड़ रुपये निकाले हैं। राजस्थान में मुझे पता चला है कि छियानवे हजार करोड रुपये के वायदे किए गए हैं, खुद का अता-पता नहीं है। कांग्रेस के एक बड़े नेता ने चौबीस लाख नौकरियों की बात कही। सरकार नौकरियां दे रही है, नौकरियां मिल रही हैं। यदि इसका वार्षिक तौर पर हिसाब लगाएं तो ये नौकरियां करोड़ों में हैं।... इन्होंने कोई हिसाब नहीं लगाया है। ये जीएसटी का विरोध करेंगे, नोटबंदी का विरोध करेंगे। आज देश की अर्थव्यवस्था में विस्तार हुआ है, कलेक्शन बढ़ी है, उसका एकमात्र कारण यह है कि हम सारे सैक्टर्स में ट्रांसपरेंसी लाए हैं। जो नकली वायदे किए जाते थे, अल्टीमेटरी मतदाता ही उपभोक्ता होते हैं, उनका शोषण होता था। उपभोक्ताओं के लिए बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। आदरणीय पासवान जी यदि कुछ कर सकते हैं, तो इस दिशा में जरूर करें। उपभोक्ता को पूर्ण संरक्षण प्रदान करना हमारी सरकार का प्रारम्भ से लक्ष्य है और हम निरंतर ट्रांसपरेंसी के साथ उसकी तरफ बढ़ रहे हैं.... मुझे पूरा विश्वास है कि जो विधेयक प्रस्तुत किया गया है, यह उपभोक्ता संरक्षण के क्रम में माइलस्टोन सिद्ध होगा और इससे सामान्य उपभोक्ता को एक कवच प्राप्त होगा। मैं माननीय प्रधान मंत्री का और माननीय मंत्री का बहुत-बहुत अभिवादन करते हुए इस बिल का समर्थन करता हूं।...
सातराेड खुर्द के युवक काे कनाड़ा भेजने के नाम पर करीब 3. 55 लाख रुपये ठगी के आरोप का मामला सामने आया है। ठगी का पता चलने पर पीड़ित ने साइबर ठग से संपर्क किया मगर उसने रुपये देने से इनकार कर दिया। पीड़ित की शिकायत पर सदर थाने में काेलकाता के श्री संधु चक्रवर्ती के खिलाफ धाेखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। सातरोड़ खुर्द वासी संदीप ने पुलिस काे शिकायत देते हुए बताया कि उसे विदेश जाना था। इसके लिए उसने साेशल मीडिया फेसबुक पर एक विज्ञापन देखा। विज्ञापन पर दिए नंबर पर संपर्क किया। संपर्क करने वाले ने खुद काे काेलकाता निवासी श्रीसंधू बताया। परामर्श के ताैर पर खाते में 30 हजार रुपये डालने काे कहा। जिस पर मैंने उसके खाते में 30 हजार रुपये डाल दिए। इसके बाद ब्रिटिश काेलंबिया में एक कार्यक्रम में भाग लेने के बदले उससे 66 हजार रुपये डलवाए। इसके बाद मेडिकल आदि के बदले में भी रुपये डलवाए। बताया कि साइबर ठग ने उससे कुल 3. 55 लाख की ठगी कर ली। पुलिस का कहना है कि जल्द आराेपी काे दबाेचा जाएगा।
सातराेड खुर्द के युवक काे कनाड़ा भेजने के नाम पर करीब तीन. पचपन लाख रुपये ठगी के आरोप का मामला सामने आया है। ठगी का पता चलने पर पीड़ित ने साइबर ठग से संपर्क किया मगर उसने रुपये देने से इनकार कर दिया। पीड़ित की शिकायत पर सदर थाने में काेलकाता के श्री संधु चक्रवर्ती के खिलाफ धाेखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। सातरोड़ खुर्द वासी संदीप ने पुलिस काे शिकायत देते हुए बताया कि उसे विदेश जाना था। इसके लिए उसने साेशल मीडिया फेसबुक पर एक विज्ञापन देखा। विज्ञापन पर दिए नंबर पर संपर्क किया। संपर्क करने वाले ने खुद काे काेलकाता निवासी श्रीसंधू बताया। परामर्श के ताैर पर खाते में तीस हजार रुपये डालने काे कहा। जिस पर मैंने उसके खाते में तीस हजार रुपये डाल दिए। इसके बाद ब्रिटिश काेलंबिया में एक कार्यक्रम में भाग लेने के बदले उससे छयासठ हजार रुपये डलवाए। इसके बाद मेडिकल आदि के बदले में भी रुपये डलवाए। बताया कि साइबर ठग ने उससे कुल तीन. पचपन लाख की ठगी कर ली। पुलिस का कहना है कि जल्द आराेपी काे दबाेचा जाएगा।
Rajresults RBSE Rajasthan Board 10th Result 2023: माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान, अजमेर (आरबीएसई) की 12वीं बोर्ड परीक्षा 2023 का रिजल्ट आज या कल कभी भी जारी कर सकता है। इससे पहले 18 मई को साइंस और कॉमर्स 12वीं के परिणाम जारी कर दिए गए हैं, इसलिए अब स्टूडेंट्स 12वीं आर्ट्स के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। सबसे पहले बोर्ड ने 17 मई को आठवी का तो 18 को 12वीं का इसलिए अब राजस्थान शिक्षा निदेशालय की ओर से 19 मई 2023 को राजस्थान बोर्ड 12वीं आर्ट्स के रिजल्ट जारी किए जाने की संभावना है। राजस्थान बोर्ड 12वीं आर्ट्स और 10वीं परीक्षा परिणाम वेबसाइट rajeduboard. rajasthan. gov. in पर जारी किए जाएंगे। छात्रों की सुविधा के लिए यहां लाइव हिन्दुस्तान पर भी रिजल्ट का लिंक उपलब्ध कराया जाएगा। राजस्थान बोर्ड 12वीं आर्ट्स रिजल्ट के बाद स्टूडेंट्स को रीइवेल्यूएशन कराने का मौका दिया जाएगा। किसी स्टूडेंट को लगता है कि उसके नंबर उसकी उम्मीद से कम हैं, तो वह रीइवेल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकेगा। इसके अलावा जो स्टूडेंट एक या दो पेपर में फेल होंगे, उनके लिए राजस्थान बोर्ड सप्लीमेंट्री परीक्षा भी आयोजित करेगा। - आधिकारिक वेबसाइट rajeduboard. rajasthan. gov. in पर जाएं। - होम पेज पर, 'Examination Results - 2023' के लिंक पर क्लिक करें। - Senior Secondary ( Arts ) - 2023 Result के लिंक पर क्लिक करें। - रिजल्ट पेज खुलने पर अपना रोल नंबर डालें और सब्मिट के बटन पर क्लिक करें। आपका रिजल्ट सामने आ जाएगा। इसे डाउनलोड करें और इसका प्रिंट आउट निकाल लें। - RBSE की आधिकारिक वेबसाइट rajresults. nic. in या rajeduboard. rajasthan. gov. in पर जाएं। - होमपेज पर आरबीएसई 12वीं बोर्ड रिजल्ट 2023 या आरबीएसई 10वीं बोर्ड रिजल्ट 2023 लिंक पर क्लिक करें। - नए खुले टैब में, लॉगिन विवरण - रोल नंबर, डीओबी दर्ज करें। अपना आरबीएसई बोर्ड परिणाम 2023 डाउनलोड करें और भविष्य के संदर्भ के लिए प्रिंटआउट लें। पिछले साल आर्ट्स स्ट्रीम के परिणाम में लड़कियों ने लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया था। लड़कियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 97. 21 प्रतिशत दर्ज किया गया था, जबकि लड़कों का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 95. 44 प्रतिशत रहा था। पिछले साल 12th आर्ट्स में 3 लाख 39 हजार 474 ने फर्स्ट डिविजन, 2 लाख 42 हजार 582 की सेकेंड डिविजन, 34 हजार 654 की थर्ड डिविजन आई थी। केवल पासिंग मार्क्स वालों की संख्या 35 रही थी। पिछले साल राजस्थान बोर्ड 12वीं आर्टस स्ट्रीम की परीक्षा के लिए कुल 6 लाख 52 हजार 444 परीक्षार्थी रजिस्टर्ड किए गए थे। इनमें से 6 लाख 40 हजार 239 स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी। पिछले साल वरिष्ठ उपाध्याय में 94. 99 फीसदी स्टूडेंट्स पास हुए थे। इस साल के नतीजों का इंतजार है, 12वीं साइंस और कॉमर्स का रिजल्ट आ चुका है। पिछले साल राजस्थान बोर्ड 12वीं आर्ट्स में कुल 96. 33 फीसदी स्टूडेंट्स पास हुए थे। छात्राओं का रिजल्ट 97. 21 फीसदी और छात्रों का रिजल्ट 95. 44 फीसदी रहा था।
Rajresults RBSE Rajasthan Board दसth Result दो हज़ार तेईस: माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान, अजमेर की बारहवीं बोर्ड परीक्षा दो हज़ार तेईस का रिजल्ट आज या कल कभी भी जारी कर सकता है। इससे पहले अट्ठारह मई को साइंस और कॉमर्स बारहवीं के परिणाम जारी कर दिए गए हैं, इसलिए अब स्टूडेंट्स बारहवीं आर्ट्स के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। सबसे पहले बोर्ड ने सत्रह मई को आठवी का तो अट्ठारह को बारहवीं का इसलिए अब राजस्थान शिक्षा निदेशालय की ओर से उन्नीस मई दो हज़ार तेईस को राजस्थान बोर्ड बारहवीं आर्ट्स के रिजल्ट जारी किए जाने की संभावना है। राजस्थान बोर्ड बारहवीं आर्ट्स और दसवीं परीक्षा परिणाम वेबसाइट rajeduboard. rajasthan. gov. in पर जारी किए जाएंगे। छात्रों की सुविधा के लिए यहां लाइव हिन्दुस्तान पर भी रिजल्ट का लिंक उपलब्ध कराया जाएगा। राजस्थान बोर्ड बारहवीं आर्ट्स रिजल्ट के बाद स्टूडेंट्स को रीइवेल्यूएशन कराने का मौका दिया जाएगा। किसी स्टूडेंट को लगता है कि उसके नंबर उसकी उम्मीद से कम हैं, तो वह रीइवेल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकेगा। इसके अलावा जो स्टूडेंट एक या दो पेपर में फेल होंगे, उनके लिए राजस्थान बोर्ड सप्लीमेंट्री परीक्षा भी आयोजित करेगा। - आधिकारिक वेबसाइट rajeduboard. rajasthan. gov. in पर जाएं। - होम पेज पर, 'Examination Results - दो हज़ार तेईस' के लिंक पर क्लिक करें। - Senior Secondary - दो हज़ार तेईस Result के लिंक पर क्लिक करें। - रिजल्ट पेज खुलने पर अपना रोल नंबर डालें और सब्मिट के बटन पर क्लिक करें। आपका रिजल्ट सामने आ जाएगा। इसे डाउनलोड करें और इसका प्रिंट आउट निकाल लें। - RBSE की आधिकारिक वेबसाइट rajresults. nic. in या rajeduboard. rajasthan. gov. in पर जाएं। - होमपेज पर आरबीएसई बारहवीं बोर्ड रिजल्ट दो हज़ार तेईस या आरबीएसई दसवीं बोर्ड रिजल्ट दो हज़ार तेईस लिंक पर क्लिक करें। - नए खुले टैब में, लॉगिन विवरण - रोल नंबर, डीओबी दर्ज करें। अपना आरबीएसई बोर्ड परिणाम दो हज़ार तेईस डाउनलोड करें और भविष्य के संदर्भ के लिए प्रिंटआउट लें। पिछले साल आर्ट्स स्ट्रीम के परिणाम में लड़कियों ने लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया था। लड़कियों का उत्तीर्ण प्रतिशत सत्तानवे. इक्कीस प्रतिशत दर्ज किया गया था, जबकि लड़कों का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत पचानवे. चौंतालीस प्रतिशत रहा था। पिछले साल बारहth आर्ट्स में तीन लाख उनतालीस हजार चार सौ चौहत्तर ने फर्स्ट डिविजन, दो लाख बयालीस हजार पाँच सौ बयासी की सेकेंड डिविजन, चौंतीस हजार छः सौ चौवन की थर्ड डिविजन आई थी। केवल पासिंग मार्क्स वालों की संख्या पैंतीस रही थी। पिछले साल राजस्थान बोर्ड बारहवीं आर्टस स्ट्रीम की परीक्षा के लिए कुल छः लाख बावन हजार चार सौ चौंतालीस परीक्षार्थी रजिस्टर्ड किए गए थे। इनमें से छः लाख चालीस हजार दो सौ उनतालीस स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी। पिछले साल वरिष्ठ उपाध्याय में चौरानवे. निन्यानवे फीसदी स्टूडेंट्स पास हुए थे। इस साल के नतीजों का इंतजार है, बारहवीं साइंस और कॉमर्स का रिजल्ट आ चुका है। पिछले साल राजस्थान बोर्ड बारहवीं आर्ट्स में कुल छियानवे. तैंतीस फीसदी स्टूडेंट्स पास हुए थे। छात्राओं का रिजल्ट सत्तानवे. इक्कीस फीसदी और छात्रों का रिजल्ट पचानवे. चौंतालीस फीसदी रहा था।
आईपीएल 2022 (IPL 2022) का ऑक्शन फैंस के लिए काफी खास होने वाला है. ऑक्शन में इस बार 8 नहीं बल्कि 10 टीमें हिस्सा लेने वाली है. पुरानी 8 टीमों के अलावा इस सीजन में गुजरात टायटंस (Gujrat Titans) और अहमदाबाद सुपर जायंट्स की टीमें पहली बार ऑक्शन में हिस्सा लेंगी. सभी 10 फ्रेंचाइजी 590 खिलाड़ियों पर बोली लगाएंगी. इस बार ऑक्शन (IPL 2022 Auction) में शामिल 590 क्रिकेटरों में से 228 कैप्ड खिलाड़ी हैं, 355 अनकैप्ड खिलाड़ी शुमार हैं. ऑक्शन कराने की जिम्मेदारी लगातार चौथी बार ह्यूज एडमीड्स संभालेंगे. ऑक्शन में इस बार बेन स्टोक्स, जोफ्रा आर्चर, मिचेल स्टार्क और क्रिस गेल जैसे कई नाम गायब रहेंगे जिन्होंने अलग -अगल वजह से हिस्सा नहीं लिया है. करीब 50 खिलाड़ियों का बेस प्राइस 2 करोड़ रुपये रखा गया है. जबकि दो दर्जन से अधिक खिलाड़ियों का बेस प्राइस 1.5 करोड़, कई खिलाड़ियों का प्राइस 1 करोड़ रखा गया है. इनके अलावा 50 लाख, 30 लाख और 20 लाख रुपये वाले बेस प्राइस वाले खिलाड़ी भी शामिल हैं. खिलाड़ियों की मेगा नीलामी से पहले कुल 33 खिलाड़ियों को रिटेन/चुना गया था. 8 पुरानी आईपीएल फ्रेंचाइजी ने पहले 27 खिलाड़ियों को रिटेन किया. वहीं इसके बाद 2 नई आईपीएल टीमों ने नीलामी से पहले तीन-तीन खिलाड़ियों को चुना था. इस बार आईपीएल मेगा ऑक्शन के लिए रविचंद्रन अश्विन, श्रेयस अय्यर, शिखर धवन, डेविड वॉर्नर, दिनेश कार्तिक समेत कुछ अन्य प्लेयर्स को मार्की प्लेयर बनाया गया है. भारत के अंडर-19 सितारे, कप्तान यश धुल, विक्की ओस्तवाल और राजवर्धन हैंगरगेकर के साथ शानदार लय में चल रहे शाहरुख खान, दीपक हुड्डा और अवेश खान जैसे खिलाड़ी इस ऑक्शन के दौरान अपनी छाप छोड़ने और अपनी पहचान बनाने की कोशिश करेंगे. केएल राहुल को लखनऊ ने 17 करोड़ में अपनी टीम के साथ जोड़ा है. इसके साथ ही वह संयुक्त रूप से आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी भी बन गए. इससे पहले रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के पूर्व कप्तान विराट कोहली को 2021 सीजन में 17 करोड़ रुपये ही मिलते थे. कब होगा आईपीएल 2022 का ऑक्शन ? आईपीएल 2022 का ऑक्शन 12 और 13 फरवरी (शनिवार और रविवार) को होगा. कहां होगा आईपीएल 2022 का ऑक्शन? आईपीएल 2022 ऑक्शन बेंगलुरु में आयोजित होगा. कितने बजे शुरू होगी आईपीएल 2022 का ऑक्शन की नीलामी? आईपीएल 2022 की नीलामी का कार्यक्रम दोपहर 12 बजे शुरू होगा. कहां देख सकते हैं आईपीएल 2022 का ऑक्शन का लाइव टेलीकास्ट ? टीवी पर देखने वाले दर्शक नीलामी का लाइव टेलीकास्ट स्टार स्पोर्ट्स चैनल पर देख सकते हैं. कहां देख सकते हैं आईपीएल 2022 का ऑक्शन की लाइव स्ट्रीमिंग? सकी लाइव स्ट्रीमिंग OTT प्लेटफॉर्म हॉटस्टार (Hotstar) पर होगी. इसके अलावा आप सारी लाइव अपडेट्स और जानकारी हमारी वेबसाइट tv9hindi.com पर भी पढ़ सकते हैं.
आईपीएल दो हज़ार बाईस का ऑक्शन फैंस के लिए काफी खास होने वाला है. ऑक्शन में इस बार आठ नहीं बल्कि दस टीमें हिस्सा लेने वाली है. पुरानी आठ टीमों के अलावा इस सीजन में गुजरात टायटंस और अहमदाबाद सुपर जायंट्स की टीमें पहली बार ऑक्शन में हिस्सा लेंगी. सभी दस फ्रेंचाइजी पाँच सौ नब्बे खिलाड़ियों पर बोली लगाएंगी. इस बार ऑक्शन में शामिल पाँच सौ नब्बे क्रिकेटरों में से दो सौ अट्ठाईस कैप्ड खिलाड़ी हैं, तीन सौ पचपन अनकैप्ड खिलाड़ी शुमार हैं. ऑक्शन कराने की जिम्मेदारी लगातार चौथी बार ह्यूज एडमीड्स संभालेंगे. ऑक्शन में इस बार बेन स्टोक्स, जोफ्रा आर्चर, मिचेल स्टार्क और क्रिस गेल जैसे कई नाम गायब रहेंगे जिन्होंने अलग -अगल वजह से हिस्सा नहीं लिया है. करीब पचास खिलाड़ियों का बेस प्राइस दो करोड़ रुपये रखा गया है. जबकि दो दर्जन से अधिक खिलाड़ियों का बेस प्राइस एक.पाँच करोड़, कई खिलाड़ियों का प्राइस एक करोड़ रखा गया है. इनके अलावा पचास लाख, तीस लाख और बीस लाख रुपये वाले बेस प्राइस वाले खिलाड़ी भी शामिल हैं. खिलाड़ियों की मेगा नीलामी से पहले कुल तैंतीस खिलाड़ियों को रिटेन/चुना गया था. आठ पुरानी आईपीएल फ्रेंचाइजी ने पहले सत्ताईस खिलाड़ियों को रिटेन किया. वहीं इसके बाद दो नई आईपीएल टीमों ने नीलामी से पहले तीन-तीन खिलाड़ियों को चुना था. इस बार आईपीएल मेगा ऑक्शन के लिए रविचंद्रन अश्विन, श्रेयस अय्यर, शिखर धवन, डेविड वॉर्नर, दिनेश कार्तिक समेत कुछ अन्य प्लेयर्स को मार्की प्लेयर बनाया गया है. भारत के अंडर-उन्नीस सितारे, कप्तान यश धुल, विक्की ओस्तवाल और राजवर्धन हैंगरगेकर के साथ शानदार लय में चल रहे शाहरुख खान, दीपक हुड्डा और अवेश खान जैसे खिलाड़ी इस ऑक्शन के दौरान अपनी छाप छोड़ने और अपनी पहचान बनाने की कोशिश करेंगे. केएल राहुल को लखनऊ ने सत्रह करोड़ में अपनी टीम के साथ जोड़ा है. इसके साथ ही वह संयुक्त रूप से आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी भी बन गए. इससे पहले रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के पूर्व कप्तान विराट कोहली को दो हज़ार इक्कीस सीजन में सत्रह करोड़ रुपये ही मिलते थे. कब होगा आईपीएल दो हज़ार बाईस का ऑक्शन ? आईपीएल दो हज़ार बाईस का ऑक्शन बारह और तेरह फरवरी को होगा. कहां होगा आईपीएल दो हज़ार बाईस का ऑक्शन? आईपीएल दो हज़ार बाईस ऑक्शन बेंगलुरु में आयोजित होगा. कितने बजे शुरू होगी आईपीएल दो हज़ार बाईस का ऑक्शन की नीलामी? आईपीएल दो हज़ार बाईस की नीलामी का कार्यक्रम दोपहर बारह बजे शुरू होगा. कहां देख सकते हैं आईपीएल दो हज़ार बाईस का ऑक्शन का लाइव टेलीकास्ट ? टीवी पर देखने वाले दर्शक नीलामी का लाइव टेलीकास्ट स्टार स्पोर्ट्स चैनल पर देख सकते हैं. कहां देख सकते हैं आईपीएल दो हज़ार बाईस का ऑक्शन की लाइव स्ट्रीमिंग? सकी लाइव स्ट्रीमिंग OTT प्लेटफॉर्म हॉटस्टार पर होगी. इसके अलावा आप सारी लाइव अपडेट्स और जानकारी हमारी वेबसाइट tvनौhindi.com पर भी पढ़ सकते हैं.
पटना : रघुवंश प्रसाद के निधन के बाद अब रामा सिंह की एंट्री राबड़ी आवास में हो गई है. आज रामा सिंह राबड़ी आवास पहुंचे. जहां उन्होंने तेजस्वी यादव से करीब 2 घंटे तक मुलाकात की. तेजस्वी यादव से मुलाकात करने के बाद रामा सिंह ने आरजेडी में एंट्री को लेकर बड़ा बयान दिया है. रामा सिंह ने कहा है कि हम अपनी सहमति आरजेडी में आने की पहले ही दे चुके हैं. 1-2 दिनों में पार्टी का जो भी निर्णय होगा, वो आप लोगों को बता दिया जाएगा. आगे रामा सिंह ने कहा कि पूरे बिहार में आरजेडी की लहर है. बिहार विधानसभा चुनाव में शानदार जीत होगी. बहुमत के साथ सरकार बनेगी. और जब मीडिया ने सवाल किया कि आपके आरजेडी में एंट्री से अपने जीवन के आखिरी वक्त में रघुवंश प्रसाद सिंह नाराज थे. तो इस पर रामा सिंह ने कहा कि ये सब बाते नहीं है. पार्टी बड़ी होती है. व्यक्ति बड़ा नहीं होता है. हम काफी पहले से तय कर चुके हैं कि हम आरजेडी में शामिल होंगे. साथ ही रामा सिंह ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है. बता दें कि रामा सिंह ने आरजेडी में शामिल होने की तैयारी तो चार महीने पहले ही कर ली थी. उनके आरजेडी की सदस्यता लेने की 29 जून की तारीख भी तय हो गई थी, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके चलते तेजस्वी यादव ने रामा सिंह की एंट्री की तारीख को टाल दिया था, लेकिन अब जबकि रघुवंश बाबू का निधन हो गया है ऐसे में रामा सिंह को शामिल कराने की रणनीति का कोई नेता विरोध करने वाला नहीं है. रामा किशोर सिंह उर्फ रामा सिंह बिहार के बाहुबली नेता के तौर पर जाने जाते हैं. 90 के दशक में रामा सिंह का एक नाम तेजी से उभरा था. हाजीपुर से सटे वैशाली के महनार इलाके में उनकी तूती बोलती थी. रामा सिंह पांच बार विधायक रहे हैं और 2014 के मोदी लहर में राम विलास पासवान की एलजेपी से वैशाली से सांसद रह चुके हैं. रामा सिंह ने आरजेडी के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह को हराया था. इसी हार के बाद रघुवंश प्रसाद रामा सिंह का नाम तक नहीं सुनना चाहते हैं. रामा सिंह की इंट्री को लेकर जब रघुवंश प्रसाद सिंह ने विरोध किया था तो उन्होंने कहा था पार्टी किसी की जागीर नहीं होती है और पार्टी से ऊपर कोई नहीं होता है. कौन मेरे आने का विरोध करता है इसको लेकर मुझे कुछ ज्यादा नहीं कहना है. रघुवंश प्रसाद सिंह पर तंज कसते हुए रामा सिंह ने कहा था कि 1990 से जब भी रघुवंश प्रसाद सिंह उनके खिलाफ चुनाव लड़े हैं, उसमें उनकी हार हुई है.
पटना : रघुवंश प्रसाद के निधन के बाद अब रामा सिंह की एंट्री राबड़ी आवास में हो गई है. आज रामा सिंह राबड़ी आवास पहुंचे. जहां उन्होंने तेजस्वी यादव से करीब दो घंटाटे तक मुलाकात की. तेजस्वी यादव से मुलाकात करने के बाद रामा सिंह ने आरजेडी में एंट्री को लेकर बड़ा बयान दिया है. रामा सिंह ने कहा है कि हम अपनी सहमति आरजेडी में आने की पहले ही दे चुके हैं. एक-दो दिनों में पार्टी का जो भी निर्णय होगा, वो आप लोगों को बता दिया जाएगा. आगे रामा सिंह ने कहा कि पूरे बिहार में आरजेडी की लहर है. बिहार विधानसभा चुनाव में शानदार जीत होगी. बहुमत के साथ सरकार बनेगी. और जब मीडिया ने सवाल किया कि आपके आरजेडी में एंट्री से अपने जीवन के आखिरी वक्त में रघुवंश प्रसाद सिंह नाराज थे. तो इस पर रामा सिंह ने कहा कि ये सब बाते नहीं है. पार्टी बड़ी होती है. व्यक्ति बड़ा नहीं होता है. हम काफी पहले से तय कर चुके हैं कि हम आरजेडी में शामिल होंगे. साथ ही रामा सिंह ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है. बता दें कि रामा सिंह ने आरजेडी में शामिल होने की तैयारी तो चार महीने पहले ही कर ली थी. उनके आरजेडी की सदस्यता लेने की उनतीस जून की तारीख भी तय हो गई थी, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके चलते तेजस्वी यादव ने रामा सिंह की एंट्री की तारीख को टाल दिया था, लेकिन अब जबकि रघुवंश बाबू का निधन हो गया है ऐसे में रामा सिंह को शामिल कराने की रणनीति का कोई नेता विरोध करने वाला नहीं है. रामा किशोर सिंह उर्फ रामा सिंह बिहार के बाहुबली नेता के तौर पर जाने जाते हैं. नब्बे के दशक में रामा सिंह का एक नाम तेजी से उभरा था. हाजीपुर से सटे वैशाली के महनार इलाके में उनकी तूती बोलती थी. रामा सिंह पांच बार विधायक रहे हैं और दो हज़ार चौदह के मोदी लहर में राम विलास पासवान की एलजेपी से वैशाली से सांसद रह चुके हैं. रामा सिंह ने आरजेडी के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह को हराया था. इसी हार के बाद रघुवंश प्रसाद रामा सिंह का नाम तक नहीं सुनना चाहते हैं. रामा सिंह की इंट्री को लेकर जब रघुवंश प्रसाद सिंह ने विरोध किया था तो उन्होंने कहा था पार्टी किसी की जागीर नहीं होती है और पार्टी से ऊपर कोई नहीं होता है. कौन मेरे आने का विरोध करता है इसको लेकर मुझे कुछ ज्यादा नहीं कहना है. रघुवंश प्रसाद सिंह पर तंज कसते हुए रामा सिंह ने कहा था कि एक हज़ार नौ सौ नब्बे से जब भी रघुवंश प्रसाद सिंह उनके खिलाफ चुनाव लड़े हैं, उसमें उनकी हार हुई है.
Patna : राजधानी में देर रात को दो युवकों ने पिस्टल भिड़ाकर दो सगी बहनों के साथ रात भर रेप की घटना को अंजाम दिया. घटना पटना के फुलवारी शरीफ की है. बताया जाता है कि फुलवारी शरीफ थाना के कोरजी मोहम्मदपुर की दो सगी बहने सोमवार की देर रात अपने घर के बगल के खेत में शौच करने गयी थी. इसी दौरान बाइक पर सवार हथियार लेकर दो युवक वहां पहुंचे और दोनों बहनों को बंधक बना लिया. बंधक बनाने के बाद अपराधियों ने दोनों बहनों को हथियार के बल पर रात भर खेत में दुष्कर्म किया. दोनों बहनों ने जब शोर मचाने की कोशिश की तो पिस्तौल दोनों के मुंह में डालकर हत्या कर देने की धमकी दी गयी. अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने अपना नाम विकास कुमार और समीर कुमार बताते हुए यह धमकी दे डाला कि थाना भी उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता. वहां से उठते ही दोनों बहने खगोल थाना पहुंची. दोनों नाबालिग बहनों ने मामला खगोल थाने को बताया, खगोल थाने के पदाधिकारी ने दोनों बहनों को फुलवारी शरीफ थाना में सूचना देने की बात कही. दोनों बहन अपने परिजनों के साथ फुलवारी शरीफ थाना पहुंची और मामले की जानकारी दी. मामला प्रकाश में आते ही फुलवारी शरीफ थाना के पदाधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों नामजद अभियुक्त विकास कुमार और समीर कुमार को गिरफ्तार कर लिया है.
Patna : राजधानी में देर रात को दो युवकों ने पिस्टल भिड़ाकर दो सगी बहनों के साथ रात भर रेप की घटना को अंजाम दिया. घटना पटना के फुलवारी शरीफ की है. बताया जाता है कि फुलवारी शरीफ थाना के कोरजी मोहम्मदपुर की दो सगी बहने सोमवार की देर रात अपने घर के बगल के खेत में शौच करने गयी थी. इसी दौरान बाइक पर सवार हथियार लेकर दो युवक वहां पहुंचे और दोनों बहनों को बंधक बना लिया. बंधक बनाने के बाद अपराधियों ने दोनों बहनों को हथियार के बल पर रात भर खेत में दुष्कर्म किया. दोनों बहनों ने जब शोर मचाने की कोशिश की तो पिस्तौल दोनों के मुंह में डालकर हत्या कर देने की धमकी दी गयी. अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने अपना नाम विकास कुमार और समीर कुमार बताते हुए यह धमकी दे डाला कि थाना भी उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता. वहां से उठते ही दोनों बहने खगोल थाना पहुंची. दोनों नाबालिग बहनों ने मामला खगोल थाने को बताया, खगोल थाने के पदाधिकारी ने दोनों बहनों को फुलवारी शरीफ थाना में सूचना देने की बात कही. दोनों बहन अपने परिजनों के साथ फुलवारी शरीफ थाना पहुंची और मामले की जानकारी दी. मामला प्रकाश में आते ही फुलवारी शरीफ थाना के पदाधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों नामजद अभियुक्त विकास कुमार और समीर कुमार को गिरफ्तार कर लिया है.
रियो डी जेनेरियो। रियो ओलम्पिक की टेनिस स्पर्धा के पुरुष एकल वर्ग में सर्बिया के स्टार खिलाड़ी नोवाक जोकोविक को अर्जेंटीना के खिलाड़ी जुआन माट्रिन डेल पोट्रो के हाथों उलटफेर का शिकार होना पड़ा। पोट्रो के खिलाफ अपने पहले मुकाबले में हार झेलकर जोकोविक रियो ओलम्पिक से बाहर हो गए हैं। की खुशी से पोट्रो की आंखों में आंसू छलक आए। ओलम्पिक में उनका सफर शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया। पड़ा था। वीनस विलियम्स को 6-3, 6-4 से हराकर बाहर कर दिया। (IANS)
रियो डी जेनेरियो। रियो ओलम्पिक की टेनिस स्पर्धा के पुरुष एकल वर्ग में सर्बिया के स्टार खिलाड़ी नोवाक जोकोविक को अर्जेंटीना के खिलाड़ी जुआन माट्रिन डेल पोट्रो के हाथों उलटफेर का शिकार होना पड़ा। पोट्रो के खिलाफ अपने पहले मुकाबले में हार झेलकर जोकोविक रियो ओलम्पिक से बाहर हो गए हैं। की खुशी से पोट्रो की आंखों में आंसू छलक आए। ओलम्पिक में उनका सफर शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया। पड़ा था। वीनस विलियम्स को छः-तीन, छः-चार से हराकर बाहर कर दिया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सक्रियता जिस तरह अपने राज्य से बाहर तेजी से बढ़ी है, उससे कई तरह के सियासी समीकरण बनने बिगड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। दिल्ली के बाद ममता महाराष्ट्र गईं और अब उनकी नजर उत्तर प्रदेश चुनाव में अपनी पार्टी को पहचान दिलाने की तरफ है। कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में आए ललितेश पति त्रिपाठी इसके लिए पूरी तैयारी कर रहे हैं। बेशक अभी उत्तर प्रदेश में तृणमूल कांग्रेस कहीं नहीं है, लेकिन जो भी थोड़ी बहुत ताकत उसे वहां नजर आ रही है, उसका विस्तार करने का ये मौका वह चूकना नहीं चाहती। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल के सदस्य का कहना है कि उनकी पार्टी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के विजय अभियान को रोका है। तृममूल कांग्रेस उत्तर प्रदेश में भी भाजपा को झटका देगी। इसके लिए वहां के सबसे बड़े विपक्षी दल समाजवादी पार्टी को हम समर्थन दे सकते हैं। हालांकि इसकी औपचारिक घोषणा या इस बारे में कोई भी निर्णय हमारी नेता ममता बनर्जी को करना है। मुझे लग रहा है कि इस महीने के अंत तक इस बारे में वह कोई घोषणा कर सकती हैं। तृणमूल कांग्रेस की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जब दिल्ली दौरे पर आती हैं, तो वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मिलने की कोशिश जरूर करती हैं। नवंबर में भी जब वह दिल्ली आई थीं तो सोनिया गांधी से मिलने का समय मांगा था। बताते हैं सोनिया गांधी से उनकी भेंट हुई और इस दौरान कुछ समय के लिए राहुल गांधी भी वहां बैठे थे। बाद में 30 नवंबर को ममता बनर्जी जब महाराष्ट्र गईं, तो परोक्ष रूप से राहुल गांधी पर हमला बोल दिया। ममता बनर्जी के बाद उनके राजनीतिक सलाहकार प्रशांत किशोर ने भी ट्विटर पर मोर्चा खोल दिया था। कांग्रेस को ममता बनर्जी का यह राजनीतिक प्रयोग जरा कम समझ में आ रहा है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सक्रियता जिस तरह अपने राज्य से बाहर तेजी से बढ़ी है, उससे कई तरह के सियासी समीकरण बनने बिगड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। दिल्ली के बाद ममता महाराष्ट्र गईं और अब उनकी नजर उत्तर प्रदेश चुनाव में अपनी पार्टी को पहचान दिलाने की तरफ है। कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में आए ललितेश पति त्रिपाठी इसके लिए पूरी तैयारी कर रहे हैं। बेशक अभी उत्तर प्रदेश में तृणमूल कांग्रेस कहीं नहीं है, लेकिन जो भी थोड़ी बहुत ताकत उसे वहां नजर आ रही है, उसका विस्तार करने का ये मौका वह चूकना नहीं चाहती। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल के सदस्य का कहना है कि उनकी पार्टी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के विजय अभियान को रोका है। तृममूल कांग्रेस उत्तर प्रदेश में भी भाजपा को झटका देगी। इसके लिए वहां के सबसे बड़े विपक्षी दल समाजवादी पार्टी को हम समर्थन दे सकते हैं। हालांकि इसकी औपचारिक घोषणा या इस बारे में कोई भी निर्णय हमारी नेता ममता बनर्जी को करना है। मुझे लग रहा है कि इस महीने के अंत तक इस बारे में वह कोई घोषणा कर सकती हैं। तृणमूल कांग्रेस की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जब दिल्ली दौरे पर आती हैं, तो वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मिलने की कोशिश जरूर करती हैं। नवंबर में भी जब वह दिल्ली आई थीं तो सोनिया गांधी से मिलने का समय मांगा था। बताते हैं सोनिया गांधी से उनकी भेंट हुई और इस दौरान कुछ समय के लिए राहुल गांधी भी वहां बैठे थे। बाद में तीस नवंबर को ममता बनर्जी जब महाराष्ट्र गईं, तो परोक्ष रूप से राहुल गांधी पर हमला बोल दिया। ममता बनर्जी के बाद उनके राजनीतिक सलाहकार प्रशांत किशोर ने भी ट्विटर पर मोर्चा खोल दिया था। कांग्रेस को ममता बनर्जी का यह राजनीतिक प्रयोग जरा कम समझ में आ रहा है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
भारत और न्यूजीलैंड ने साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में करीबी सहयोग के साथ काम करने पर बुधवार को सहमति व्यक्त की। विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, बुधवार को संपन्न दो दिवसीय डिजिटल वार्ता में दोनों देशों के बीच साइबर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया गया। बयान में कहा गया है कि भारत-न्यूजीलैंड द्विपक्षीय साइबर वार्ता के दूसरे संस्करण में साइबर क्षेत्र में वर्तमान सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा की गई तथा इसे और आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई। भारत और न्यूजीलैंड ने ने साइबर सुरक्षा साइबर अपराध तथा क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में करीबी सहयोग के साथ काम करने पर सहमति व्यक्त की। साथ ही दोनों पक्षों ने आपसी हित से जुड़े विविध विषयों पर चर्चा की। बयान के मुताबिक, 'साइबर वार्ता के दौरान दोनों देशों ने साइबर क्षेत्र में वर्तमान द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा की और साइबर मुद्दे पर हालिया घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया तथा इस क्षेत्र में सहयोग और बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया। ' दोनों पक्षों ने साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध तथा क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में करीबी सहयोग के साथ काम करने पर सहमति व्यक्त की तथा आपसी हित से जुड़े विविध विषयों पर चर्चा की। भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में साइबर कूटनीति पर संयुक्त सचिव अतुल मल्हारी गोटसुर्वे ने किया, जबकि न्यूजीलैंड के शिष्टमंडल का नेतृत्व वहां की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के निदेशक डान एटान ने किया। उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) द्वारा 29 जून 2021 को शुरू किए गए वैश्विक साइबर सुरक्षा सूचकांक (जीसीआई) 2020 में भारत का 10वां स्थान रहा और उसके दर्जे में 37 स्थानों का सुधार हुआ। साइबर सुरक्षा के लिहाज से सूची में सबसे ऊपर अमेरिका है और उसके बाद ब्रिटेन तथा सऊदी अरब एक साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि सूचकांक में तीसरे स्थान पर एस्टोनिया है। भारत एक वैश्विक आईटी महाशक्ति के रूप में उभर रहा है और डेटा गोपनीयता तथा नागरिक के ऑनलाइन अधिकारों की सुरक्षा के लिए दृढ़ उपायों के साथ अपनी डिजिटल संप्रभुता का दावा करता है।
भारत और न्यूजीलैंड ने साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में करीबी सहयोग के साथ काम करने पर बुधवार को सहमति व्यक्त की। विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, बुधवार को संपन्न दो दिवसीय डिजिटल वार्ता में दोनों देशों के बीच साइबर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया गया। बयान में कहा गया है कि भारत-न्यूजीलैंड द्विपक्षीय साइबर वार्ता के दूसरे संस्करण में साइबर क्षेत्र में वर्तमान सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा की गई तथा इसे और आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई। भारत और न्यूजीलैंड ने ने साइबर सुरक्षा साइबर अपराध तथा क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में करीबी सहयोग के साथ काम करने पर सहमति व्यक्त की। साथ ही दोनों पक्षों ने आपसी हित से जुड़े विविध विषयों पर चर्चा की। बयान के मुताबिक, 'साइबर वार्ता के दौरान दोनों देशों ने साइबर क्षेत्र में वर्तमान द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा की और साइबर मुद्दे पर हालिया घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया तथा इस क्षेत्र में सहयोग और बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया। ' दोनों पक्षों ने साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध तथा क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में करीबी सहयोग के साथ काम करने पर सहमति व्यक्त की तथा आपसी हित से जुड़े विविध विषयों पर चर्चा की। भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में साइबर कूटनीति पर संयुक्त सचिव अतुल मल्हारी गोटसुर्वे ने किया, जबकि न्यूजीलैंड के शिष्टमंडल का नेतृत्व वहां की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के निदेशक डान एटान ने किया। उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ द्वारा उनतीस जून दो हज़ार इक्कीस को शुरू किए गए वैश्विक साइबर सुरक्षा सूचकांक दो हज़ार बीस में भारत का दसवां स्थान रहा और उसके दर्जे में सैंतीस स्थानों का सुधार हुआ। साइबर सुरक्षा के लिहाज से सूची में सबसे ऊपर अमेरिका है और उसके बाद ब्रिटेन तथा सऊदी अरब एक साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि सूचकांक में तीसरे स्थान पर एस्टोनिया है। भारत एक वैश्विक आईटी महाशक्ति के रूप में उभर रहा है और डेटा गोपनीयता तथा नागरिक के ऑनलाइन अधिकारों की सुरक्षा के लिए दृढ़ उपायों के साथ अपनी डिजिटल संप्रभुता का दावा करता है।
IBBI Research Associate के पद के लिए 10 नौकरी रिक्तियों को भरने के लिए उम्मीदवारों की तलाश कर रहा है। उम्मीदवार यहां नौकरी के पूरे विवरण और IBBI भर्ती 2022 के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया की जांच कर सकते हैं। नौकरी के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक योग्यता है। केवल पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले उम्मीदवार ही नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। IBBI LLB, M. A, PG Diploma उम्मीदवारों को भर्ती कर रहा है, और IBBI भर्ती 2022 के बारे में सभी संबंधित जानकारी कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। आधिकारिक IBBI वेबसाइट लिंक यहां प्राप्त करें। IBBI भर्ती 2022 रिक्ति गणना यहाँ दी गई है। Research Associate के लिए वैकेंसी 10 है। IBBI Research Associate भर्ती 2022 के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार रिक्ति गणना और अन्य नौकरी विवरण के लिए आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से जा सकते हैं। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें IBBI में Research Associate के रूप में रखा जाएगा। यदि आपको Research Associate की भूमिका के लिए IBBI में रखा गया है, तो आपका वेतनमान Rs. 40,000 - Rs. 60,000 Per Month होगा। IBBI 10 Research Associate रिक्तियों को New Delhi पर भरने के लिए उम्मीदवारों को काम पर रख रहा है। उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और अंतिम तिथि से पहले IBBI भर्ती 2022 के लिए आवेदन कर सकते हैं। How to apply for IBBI Recruitment 2022? IBBI Research Associate भर्ती 2022 के लिए आवेदन करने के चरण हैंः चरण 4: आवेदन पत्र को आवेदन के तरीके के अनुसार जमा करें।
IBBI Research Associate के पद के लिए दस नौकरी रिक्तियों को भरने के लिए उम्मीदवारों की तलाश कर रहा है। उम्मीदवार यहां नौकरी के पूरे विवरण और IBBI भर्ती दो हज़ार बाईस के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया की जांच कर सकते हैं। नौकरी के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक योग्यता है। केवल पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले उम्मीदवार ही नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। IBBI LLB, M. A, PG Diploma उम्मीदवारों को भर्ती कर रहा है, और IBBI भर्ती दो हज़ार बाईस के बारे में सभी संबंधित जानकारी कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। आधिकारिक IBBI वेबसाइट लिंक यहां प्राप्त करें। IBBI भर्ती दो हज़ार बाईस रिक्ति गणना यहाँ दी गई है। Research Associate के लिए वैकेंसी दस है। IBBI Research Associate भर्ती दो हज़ार बाईस के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार रिक्ति गणना और अन्य नौकरी विवरण के लिए आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से जा सकते हैं। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें IBBI में Research Associate के रूप में रखा जाएगा। यदि आपको Research Associate की भूमिका के लिए IBBI में रखा गया है, तो आपका वेतनमान Rs. चालीस,शून्य - Rs. साठ,शून्य Per Month होगा। IBBI दस Research Associate रिक्तियों को New Delhi पर भरने के लिए उम्मीदवारों को काम पर रख रहा है। उम्मीदवार आधिकारिक अधिसूचना की जांच कर सकते हैं और अंतिम तिथि से पहले IBBI भर्ती दो हज़ार बाईस के लिए आवेदन कर सकते हैं। How to apply for IBBI Recruitment दो हज़ार बाईस? IBBI Research Associate भर्ती दो हज़ार बाईस के लिए आवेदन करने के चरण हैंः चरण चार: आवेदन पत्र को आवेदन के तरीके के अनुसार जमा करें।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.) ।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद ) ।1क(क) - रिक्त ( नदारद ) ।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद ) ।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ( नदारद ) ।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद ) ।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद ) ।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद ) ।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद ) ।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद ) ।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद ) ।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद ) ।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद ) ।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद ) ।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद ) ।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद ) ।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को जेल में बंद दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा लगाए गए कानूनों के उल्लंघन के आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि रीढ़ की चोट के लिए उनके दो ऑपरेशन हुए और डॉक्टर ने उन्हें नियमित फिजियोथेरेपी निर्धारित की है। नई दिल्ली। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को जेल में बंद दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा लगाए गए कानूनों के उल्लंघन के आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि रीढ़ की चोट के लिए उनके दो ऑपरेशन हुए और डॉक्टर ने उन्हें नियमित फिजियोथेरेपी निर्धारित की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिसोदिया ने कहा कि सत्येंद्र जैन की रीढ़ की चोट के लिए दो ऑपरेशन हो चुके हैं। डॉक्टर ने उन्हें नियमित रूप से फिजियोथेरेपी कराने की सलाह दी है। कोविड के बाद उनके फेफड़ों में एक पैच है जो अभी तक ठीक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की बीमारी और उसके इलाज का मजाक उड़ाने का विचार ही घिनौना है। भाजपा द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर सीसीटीवी वीडियो को लेकर हमला करने के बाद यह मामला सामने आया है, जिसमें जेल में बंद मंत्री सत्येंद्र जैन को जेल के अंदर मालिश करते दिखाया गया है। सिसोदिया ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय को अदालत ने निर्देशित किया था कि वह वीडियो को लीक न करें, लेकिन फिर भी बीजेपी ने यह काम किया। उन्होंने कहा कि वीडियो को लीक करना अदालत के निर्देश का उल्लंघन है। सिसोदिया ने कहा कि उनके सहयोगी को एक झूठे मामले में दर्ज किया गया है और बीजेपी सत्येंद्र जैन की बीमारी का मजाक उड़ा रही है। बीजेपी एमसीडी और गुजरात चुनाव हार रहे हैं और इसलिए वे इस तरह के घटिया नाटकों का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को मुद्दों पर दिल्ली नगर निगम का चुनाव लड़ना चाहिए। वहीं वीडियो को लेकर भाजपा ने आप सुप्रीमो और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की इस मामले में चुप्पी पर सवाल उठाया। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी स्पा और मसाज पार्टी बन गई है।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को जेल में बंद दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा लगाए गए कानूनों के उल्लंघन के आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि रीढ़ की चोट के लिए उनके दो ऑपरेशन हुए और डॉक्टर ने उन्हें नियमित फिजियोथेरेपी निर्धारित की है। नई दिल्ली। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को जेल में बंद दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा लगाए गए कानूनों के उल्लंघन के आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि रीढ़ की चोट के लिए उनके दो ऑपरेशन हुए और डॉक्टर ने उन्हें नियमित फिजियोथेरेपी निर्धारित की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिसोदिया ने कहा कि सत्येंद्र जैन की रीढ़ की चोट के लिए दो ऑपरेशन हो चुके हैं। डॉक्टर ने उन्हें नियमित रूप से फिजियोथेरेपी कराने की सलाह दी है। कोविड के बाद उनके फेफड़ों में एक पैच है जो अभी तक ठीक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की बीमारी और उसके इलाज का मजाक उड़ाने का विचार ही घिनौना है। भाजपा द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर सीसीटीवी वीडियो को लेकर हमला करने के बाद यह मामला सामने आया है, जिसमें जेल में बंद मंत्री सत्येंद्र जैन को जेल के अंदर मालिश करते दिखाया गया है। सिसोदिया ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय को अदालत ने निर्देशित किया था कि वह वीडियो को लीक न करें, लेकिन फिर भी बीजेपी ने यह काम किया। उन्होंने कहा कि वीडियो को लीक करना अदालत के निर्देश का उल्लंघन है। सिसोदिया ने कहा कि उनके सहयोगी को एक झूठे मामले में दर्ज किया गया है और बीजेपी सत्येंद्र जैन की बीमारी का मजाक उड़ा रही है। बीजेपी एमसीडी और गुजरात चुनाव हार रहे हैं और इसलिए वे इस तरह के घटिया नाटकों का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को मुद्दों पर दिल्ली नगर निगम का चुनाव लड़ना चाहिए। वहीं वीडियो को लेकर भाजपा ने आप सुप्रीमो और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की इस मामले में चुप्पी पर सवाल उठाया। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी स्पा और मसाज पार्टी बन गई है।
ऑल इंडिया राहुल गांधी कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एन. के. पंडित ने केजरीवाल की आम आदमी पार्टी पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पहाड़ की ठंडी हवा में आम आदमी पार्टी की टोपी उड़ जाएगी। एन. के. पंडित ने केजरीवाल पर तीखी टिपणी करते हुए कहा कि पहाड़ के लोग जानते हैं कि केजरीवाल घटिया राजनीती करके केवल लोगों को गुमराह करते हैं। केवल पंजाब जीतने से AAP खुद को चैंपियन समझने कि भूल ना करें। उन्होंने कहा कि नई नई दुल्हन एक साल तक सबको अच्छी लगती है पर पंजाब में बढ़ती महंगाई पेट्रोल-डीज़ल, रसोई गैस खाद्यान पदार्थ कि बढ़ती कीमतों से लोग परेशान होकर अभी से भगवंत मान कि सरकार को कोसने लगे हैं। एन. के. पंडित ने राजनीतिक तंज कसते हुए कहा कि अभी तो पंजाब कि नई दुल्हन के हाथों कि मेहंदी भी नहीं उतरी और लोग अभी से भगवंत मान कि सरकार से हताश और परेशान हो गए हैं। उन्होंने कहा कि केजरीवाल और भगवंत मान जितने मर्जी रोड शो कर लें पर AAP के सभी प्रत्याशियों कि हिमाचल में जमानत जब्त होगी। उन्होंने मीडिया द्वारा हिमाचल के संदर्भ में पूछे गए एक अन्य सवाल का मुस्कराते हुए जवाब देते हुए कहा कि AAP का हिमाचल में अभी तक संगठन भी मजबूत नहीं हुआ ऐसे में केजरीवाल को यह पता होना चाहिए कि जिस घर कि नींव मजबूत ना हो या पिलर स्ट्रांग ना हो उस घर का स्लैब कैसे टिकेगा। उन्होंने केजरीवाल को नसीहत देते हुए केवल इतना कहा कि पहले संगठन बना लें हिमाचल में फिर चुनाव लड़ने का विचार करें अन्यथा AAP के सभी उम्मीदवारों कि जमानत जब्त होगी। पंडित ने केजरीवाल और सतिंद्र जैन को सलाह देते हुए उनको हिमाचल में नगर निगम चुनाव कि याद भी दिलाई और कहा कि हिमाचल में जो 4 नगर निगम के चुनाव संपन हुए उसमे आम आदमी पार्टी को 1-3-9-33-61 और सबसे ज्यादा 134 वोट मिले। अभी दिल्ली दूर नहीं AAP को हिमाचल के विधानसभा चुनावों से पहले शिमला नगर निगम के चुनावों में अपनी औकात का पता चल जायेगा। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जो AAP में कुछ लोग जा रहे हैं उनमें कोई बड़ा चेहरा नहीं बल्कि वो लोग हैं जिनका हिमाचल कि राजनीती में ना कोई जनाधार है और ना कोई राजनीतिक योगदान है। ऐसे में आम आदमी पार्टी को उत्साहित होने कि कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मुकाबल सिर्फ भाजपा से है कयोंकि AAP हिमाचल में जीरो है और जीरो ही रहेगी। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी क्योंकि हिमाचल के लोग कांग्रेस की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि चुनावों में कांग्रेस का मुख्य मुद्दा महंगाई और बेरोजगारी होगा।
ऑल इंडिया राहुल गांधी कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एन. के. पंडित ने केजरीवाल की आम आदमी पार्टी पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पहाड़ की ठंडी हवा में आम आदमी पार्टी की टोपी उड़ जाएगी। एन. के. पंडित ने केजरीवाल पर तीखी टिपणी करते हुए कहा कि पहाड़ के लोग जानते हैं कि केजरीवाल घटिया राजनीती करके केवल लोगों को गुमराह करते हैं। केवल पंजाब जीतने से AAP खुद को चैंपियन समझने कि भूल ना करें। उन्होंने कहा कि नई नई दुल्हन एक साल तक सबको अच्छी लगती है पर पंजाब में बढ़ती महंगाई पेट्रोल-डीज़ल, रसोई गैस खाद्यान पदार्थ कि बढ़ती कीमतों से लोग परेशान होकर अभी से भगवंत मान कि सरकार को कोसने लगे हैं। एन. के. पंडित ने राजनीतिक तंज कसते हुए कहा कि अभी तो पंजाब कि नई दुल्हन के हाथों कि मेहंदी भी नहीं उतरी और लोग अभी से भगवंत मान कि सरकार से हताश और परेशान हो गए हैं। उन्होंने कहा कि केजरीवाल और भगवंत मान जितने मर्जी रोड शो कर लें पर AAP के सभी प्रत्याशियों कि हिमाचल में जमानत जब्त होगी। उन्होंने मीडिया द्वारा हिमाचल के संदर्भ में पूछे गए एक अन्य सवाल का मुस्कराते हुए जवाब देते हुए कहा कि AAP का हिमाचल में अभी तक संगठन भी मजबूत नहीं हुआ ऐसे में केजरीवाल को यह पता होना चाहिए कि जिस घर कि नींव मजबूत ना हो या पिलर स्ट्रांग ना हो उस घर का स्लैब कैसे टिकेगा। उन्होंने केजरीवाल को नसीहत देते हुए केवल इतना कहा कि पहले संगठन बना लें हिमाचल में फिर चुनाव लड़ने का विचार करें अन्यथा AAP के सभी उम्मीदवारों कि जमानत जब्त होगी। पंडित ने केजरीवाल और सतिंद्र जैन को सलाह देते हुए उनको हिमाचल में नगर निगम चुनाव कि याद भी दिलाई और कहा कि हिमाचल में जो चार नगर निगम के चुनाव संपन हुए उसमे आम आदमी पार्टी को एक-तीन सितंबर तैंतीस-इकसठ और सबसे ज्यादा एक सौ चौंतीस वोट मिले। अभी दिल्ली दूर नहीं AAP को हिमाचल के विधानसभा चुनावों से पहले शिमला नगर निगम के चुनावों में अपनी औकात का पता चल जायेगा। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जो AAP में कुछ लोग जा रहे हैं उनमें कोई बड़ा चेहरा नहीं बल्कि वो लोग हैं जिनका हिमाचल कि राजनीती में ना कोई जनाधार है और ना कोई राजनीतिक योगदान है। ऐसे में आम आदमी पार्टी को उत्साहित होने कि कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मुकाबल सिर्फ भाजपा से है कयोंकि AAP हिमाचल में जीरो है और जीरो ही रहेगी। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी क्योंकि हिमाचल के लोग कांग्रेस की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि चुनावों में कांग्रेस का मुख्य मुद्दा महंगाई और बेरोजगारी होगा।
- 24 min ago हिंदू देवताओं पर तेल और दूध चढ़ाने को लेकर अक्षय कुमार ने कही थी ऐसी बात? अब हो रहा है बवाल! Don't Miss! अभिनेत्री काजोल की छोटी बहन तनीषा बालीवुड में कुछ खास नही कर पाई, लेकिन खबरों में हमेशा बनी रहती है। इस बार उनकी चर्चा एक एनआरआई के साथ संबंधो को लेकर हो रही है। सुनने में आ रहा है कि तनीषा एक एनआरआई के प्रेम में पागल है और युके में उसके साथ बहुत सारा समय बिता रही है। जब उदय चोपड़ा के साथ उनकी फिल्म नील एण्ड निकी आई थी तो उनका नाम उदय चोपड़ा के साथ जोड़ा जा रहा था। उनके जीजा अजय देवगन उनको अपनी फिल्म में काम देना चाह रहे थे लेकिन तनीषा ने कुछ कारणों से मना कर दिया। Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू ने तोड़े पुराने सारे रिकॉर्ड, रिलीज के 24 घंटों में ही बनाई टॉप पर जगह!
- चौबीस मिनट ago हिंदू देवताओं पर तेल और दूध चढ़ाने को लेकर अक्षय कुमार ने कही थी ऐसी बात? अब हो रहा है बवाल! Don't Miss! अभिनेत्री काजोल की छोटी बहन तनीषा बालीवुड में कुछ खास नही कर पाई, लेकिन खबरों में हमेशा बनी रहती है। इस बार उनकी चर्चा एक एनआरआई के साथ संबंधो को लेकर हो रही है। सुनने में आ रहा है कि तनीषा एक एनआरआई के प्रेम में पागल है और युके में उसके साथ बहुत सारा समय बिता रही है। जब उदय चोपड़ा के साथ उनकी फिल्म नील एण्ड निकी आई थी तो उनका नाम उदय चोपड़ा के साथ जोड़ा जा रहा था। उनके जीजा अजय देवगन उनको अपनी फिल्म में काम देना चाह रहे थे लेकिन तनीषा ने कुछ कारणों से मना कर दिया। Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू ने तोड़े पुराने सारे रिकॉर्ड, रिलीज के चौबीस घंटाटों में ही बनाई टॉप पर जगह!
न्यूज डेस्कः सीमा पर सैनिकों को पीछे हटाने और सीमा विवाद को वार्ता से सुलझाने पर सहमत होने के बाद भी चीन एलएसी पर अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाने की खुराफात में जुटा है। मीडिया रिपोट में आई खबर के अनुसार चीन सीमा पर अपनी सैन्य ताकत को बढ़ा रहा हैं तथा युद्ध की तैयारी कर रहा हैं। सेटेलाइट इमेज से खुलासा हुआ हैं की चीन एलएसी पर अपनी सैनिकों की संख्या को बढ़ा रहा हैं तथा विवादित छेत्र में निर्माण कार्य कर रहा हैं। हालांकि सेना और रक्षा मंत्रालय के स्तर पर एलएसी पर चीन सैनिकों की इस सक्रियता को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन इस खुलासे के बाद भारतीय सेना अलर्ट हो गई हैं। सीमा की निगरानी के लिए भारतीय वायु सेना अपने फाइटर जेट के साथ गश्त कर रही हैं। तो वहीं भारत ने भी चीन से लगे सभी इलाकों पर सैनिकों की संख्या को बढ़ा दिया हैं। साथ ही साथ छुट्टी पर घर गए सैनिकों को बापस बुला लिया गया जहां।
न्यूज डेस्कः सीमा पर सैनिकों को पीछे हटाने और सीमा विवाद को वार्ता से सुलझाने पर सहमत होने के बाद भी चीन एलएसी पर अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाने की खुराफात में जुटा है। मीडिया रिपोट में आई खबर के अनुसार चीन सीमा पर अपनी सैन्य ताकत को बढ़ा रहा हैं तथा युद्ध की तैयारी कर रहा हैं। सेटेलाइट इमेज से खुलासा हुआ हैं की चीन एलएसी पर अपनी सैनिकों की संख्या को बढ़ा रहा हैं तथा विवादित छेत्र में निर्माण कार्य कर रहा हैं। हालांकि सेना और रक्षा मंत्रालय के स्तर पर एलएसी पर चीन सैनिकों की इस सक्रियता को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन इस खुलासे के बाद भारतीय सेना अलर्ट हो गई हैं। सीमा की निगरानी के लिए भारतीय वायु सेना अपने फाइटर जेट के साथ गश्त कर रही हैं। तो वहीं भारत ने भी चीन से लगे सभी इलाकों पर सैनिकों की संख्या को बढ़ा दिया हैं। साथ ही साथ छुट्टी पर घर गए सैनिकों को बापस बुला लिया गया जहां।
- #Mumbaiजमीन खा गई या आसमान निगल गया, मुंबई में 6000 किलो वजनी और 90 फीट लंबा लोहे का पुल हुआ गायब! Agisilaos demetriades latest news: बॉलीवुड एक्टर अर्जुन रामपाल की गर्लफ्रेंड गैब्रिएला के भाई अगिसिलोस डेमेट्रियड्स को मुंबई पुलिस ने कुछ महीने पहले हिरासत में लिया था। वहीं, उससे पहले ड्रग्स केस में अगिसिलोस डेमेट्रियड्स को NCB ने भी गिरफ्तार किया था। अब अदालत ने अगिसिलोस डेमेट्रियड्स को रिहा करने के आदेश दिए हैं। दरअसल, इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस पीके चव्हाण की बेंच ने यह पाया कि, आरोपी अगिसिलोस डेमेट्रियड्स हिरासत में लेने के आधार हिंदी में थे, जिसे वो समझ नहीं पा रहा था। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की पीठ ने कहा, "जब आरोपी को हिरासत में लिया गया, तो हिंदी भाषा का प्रयोग किया गया था, जिसे वो समझ नहीं पा रहा था। और, रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह संकेत मिले कि उक्त विशेष दस्तावेज/कथन का अनुवाद और व्याख्या उस भाषा में की गई थी, जिसे वह समझता हो, " बता दें कि, अगिसिलाओस डेमेट्रियड्स को अप्रैल 2022 से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने हिरासत में लिया था। उन पर नारकोटिक एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (PITNPSA) में आरोप था। उससे पहले एनसीबी ने 2020 में आरोपी को 0. 8 ग्राम हशी/चरस के साथ गिरफ्तार किया था। उसके बाद जांच एजेंसी ने आरोपी के घर से 15 टेबल एल्प्रैक्स भी बरामद की। बाद में एक महीने के बाद उन्हें जमानत दे दी गई और सितंबर 2021 में राजस्व विभाग (PITNDPS Unit) द्वारा नजरबंदी के आदेश दिए गए। एडवोकेट कुशल मोर के माध्यम से हाईकोर्ट में इसे चुनौती देते हुए, आरोपी ने कहा कि विदेशी नागरिक होने के कारण उसे हिंदी का कोई ज्ञान नहीं था। इस वजह से, वह हिंदी पढ़-लिख या समझ नहीं सकता था और उसे हिरासत में लेने के लिए जिन दस्तावेजों पर भरोसा किया गया था, वे हिंदी में थे और इसका कोई अनुवाद उपलब्ध नहीं कराया गया था। उसके परिणामस्वरूप याचिकाकर्ता एक प्रभावी और पूर्ण प्रतिनिधित्व करने से अक्षम हो गया', यह तर्क दिया गया। वकील, था। वहीं, अदालत ने पंचनामा से नोट किया कि आरोपी ने पंचनामे के पन्नों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था, स्पष्ट रूप से यह कहते हुए कि 'मुझे 22/04/22 को इस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ' आरोपी के इस बयान ने एनसीबी के तर्क को गलत साबित कर दिया, और आखिर में हाईकोर्ट की बेंच ने यह निष्कर्ष निकाला कि "उपरोक्त दस्तावेज कहीं भी यह स्पष्ट नहीं करते हैं कि किसी विशेष भाषा से बंदी को उसकी सामग्री को समझने के लिए बनाया गया हो। यानी, जो विदेशी आरोपी को हिरासत में ले, तब उसकी ही भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए, जिसे वह समझता हो। ," उसके अगले दिन दायर एक अन्य पंचनामे में, अदालत ने कहा कि आरोपी ने दावा किया है कि उसने सभी दस्तावेज प्राप्त कर लिए हैं और सभी सामग्री को समझ लिया है, लेकिन उस पर विश्वास करना कठिन लग रहा था क्योंकि एक महत्वपूर्ण दस्तावेज हिंदी में था। महत्वपूर्ण दस्तावेज एक ड्रग पेडलर का बयान था, जिसने दो मौकों पर आरोपी को गांजा की आपूर्ति करने का दावा किया था। इस पर अदालत ने कहा, "यह कथन अनिवार्य रूप से हिंदी भाषा में है। रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह संकेत मिले कि इस विशेष दस्तावेज/कथन का अनुवाद और व्याख्या उस भाषा में की गई थी, जिसे वह समझता था," अदालत ने आगे कहा कि केवल यह कहना कि पंचनामा में ट्रांसलेशन था, एक अप्रमाणित कथन था और अधिकारियों को एक हलफनामे पर ऐसा ही कहना चाहिए था। ' ऐसी टिप्पणियों के साथ, अदालत ने सितंबर 2021 के नजरबंदी आदेश को रद्द करने का फैसला लिया और निर्देश दिया कि आरोपी को तुरंत रिहा किया जाए।
- #Mumbaiजमीन खा गई या आसमान निगल गया, मुंबई में छः हज़ार किलो वजनी और नब्बे फीट लंबा लोहे का पुल हुआ गायब! Agisilaos demetriades latest news: बॉलीवुड एक्टर अर्जुन रामपाल की गर्लफ्रेंड गैब्रिएला के भाई अगिसिलोस डेमेट्रियड्स को मुंबई पुलिस ने कुछ महीने पहले हिरासत में लिया था। वहीं, उससे पहले ड्रग्स केस में अगिसिलोस डेमेट्रियड्स को NCB ने भी गिरफ्तार किया था। अब अदालत ने अगिसिलोस डेमेट्रियड्स को रिहा करने के आदेश दिए हैं। दरअसल, इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस पीके चव्हाण की बेंच ने यह पाया कि, आरोपी अगिसिलोस डेमेट्रियड्स हिरासत में लेने के आधार हिंदी में थे, जिसे वो समझ नहीं पा रहा था। न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की पीठ ने कहा, "जब आरोपी को हिरासत में लिया गया, तो हिंदी भाषा का प्रयोग किया गया था, जिसे वो समझ नहीं पा रहा था। और, रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह संकेत मिले कि उक्त विशेष दस्तावेज/कथन का अनुवाद और व्याख्या उस भाषा में की गई थी, जिसे वह समझता हो, " बता दें कि, अगिसिलाओस डेमेट्रियड्स को अप्रैल दो हज़ार बाईस से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने हिरासत में लिया था। उन पर नारकोटिक एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट में आरोप था। उससे पहले एनसीबी ने दो हज़ार बीस में आरोपी को शून्य. आठ ग्राम हशी/चरस के साथ गिरफ्तार किया था। उसके बाद जांच एजेंसी ने आरोपी के घर से पंद्रह टेबल एल्प्रैक्स भी बरामद की। बाद में एक महीने के बाद उन्हें जमानत दे दी गई और सितंबर दो हज़ार इक्कीस में राजस्व विभाग द्वारा नजरबंदी के आदेश दिए गए। एडवोकेट कुशल मोर के माध्यम से हाईकोर्ट में इसे चुनौती देते हुए, आरोपी ने कहा कि विदेशी नागरिक होने के कारण उसे हिंदी का कोई ज्ञान नहीं था। इस वजह से, वह हिंदी पढ़-लिख या समझ नहीं सकता था और उसे हिरासत में लेने के लिए जिन दस्तावेजों पर भरोसा किया गया था, वे हिंदी में थे और इसका कोई अनुवाद उपलब्ध नहीं कराया गया था। उसके परिणामस्वरूप याचिकाकर्ता एक प्रभावी और पूर्ण प्रतिनिधित्व करने से अक्षम हो गया', यह तर्क दिया गया। वकील, था। वहीं, अदालत ने पंचनामा से नोट किया कि आरोपी ने पंचनामे के पन्नों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था, स्पष्ट रूप से यह कहते हुए कि 'मुझे बाईस अप्रैल बाईस को इस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ' आरोपी के इस बयान ने एनसीबी के तर्क को गलत साबित कर दिया, और आखिर में हाईकोर्ट की बेंच ने यह निष्कर्ष निकाला कि "उपरोक्त दस्तावेज कहीं भी यह स्पष्ट नहीं करते हैं कि किसी विशेष भाषा से बंदी को उसकी सामग्री को समझने के लिए बनाया गया हो। यानी, जो विदेशी आरोपी को हिरासत में ले, तब उसकी ही भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए, जिसे वह समझता हो। ," उसके अगले दिन दायर एक अन्य पंचनामे में, अदालत ने कहा कि आरोपी ने दावा किया है कि उसने सभी दस्तावेज प्राप्त कर लिए हैं और सभी सामग्री को समझ लिया है, लेकिन उस पर विश्वास करना कठिन लग रहा था क्योंकि एक महत्वपूर्ण दस्तावेज हिंदी में था। महत्वपूर्ण दस्तावेज एक ड्रग पेडलर का बयान था, जिसने दो मौकों पर आरोपी को गांजा की आपूर्ति करने का दावा किया था। इस पर अदालत ने कहा, "यह कथन अनिवार्य रूप से हिंदी भाषा में है। रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह संकेत मिले कि इस विशेष दस्तावेज/कथन का अनुवाद और व्याख्या उस भाषा में की गई थी, जिसे वह समझता था," अदालत ने आगे कहा कि केवल यह कहना कि पंचनामा में ट्रांसलेशन था, एक अप्रमाणित कथन था और अधिकारियों को एक हलफनामे पर ऐसा ही कहना चाहिए था। ' ऐसी टिप्पणियों के साथ, अदालत ने सितंबर दो हज़ार इक्कीस के नजरबंदी आदेश को रद्द करने का फैसला लिया और निर्देश दिया कि आरोपी को तुरंत रिहा किया जाए।
Don't Miss! क्या 'पीपली लाइव' से प्रभावित होंगे प्रधानमंत्री? नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रविवार को आमिर खान द्वारा निर्मित बहुचर्चित फिल्म 'पीपली लाइव' का एक विशेष प्रदर्शन देखेंगे। पीएम कार्यालय के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि आमिर खान भी फिल्म के प्रदर्शन के लिए सात रेस कोर्स स्थित प्रधानमंत्री आवास पर मौजूद रहेंगे। में पेश किया गया है। अब देखना यह है कि पीपली लाइव देख कर प्रधानमंत्री कितने प्रभावित होते हैं। इस फिल्म को देखने के बाद सरकार को किसानों के दद का अहसास होता है या नहीं। आमिर खान ने इसके पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता लालकृष्ण आडवाणी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे के लिए भी इसी तरह के विशेष प्रदर्शन का आयोज किया था। अनुषा रिजवी द्वारा निर्देशित इस फिल्म ने अपने शुरुआती सप्ताह में ही भारत में 24 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया है। जबकि फिल्म लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से बनी है। ब्लैक ब्रा पहनकर फिर पूल में उतरीं शेफाली जरीवाला, सुनहरी स्किन देख लोग बोले- 'हाय मेरी दूध मलाई'
Don't Miss! क्या 'पीपली लाइव' से प्रभावित होंगे प्रधानमंत्री? नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रविवार को आमिर खान द्वारा निर्मित बहुचर्चित फिल्म 'पीपली लाइव' का एक विशेष प्रदर्शन देखेंगे। पीएम कार्यालय के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि आमिर खान भी फिल्म के प्रदर्शन के लिए सात रेस कोर्स स्थित प्रधानमंत्री आवास पर मौजूद रहेंगे। में पेश किया गया है। अब देखना यह है कि पीपली लाइव देख कर प्रधानमंत्री कितने प्रभावित होते हैं। इस फिल्म को देखने के बाद सरकार को किसानों के दद का अहसास होता है या नहीं। आमिर खान ने इसके पहले भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के लिए भी इसी तरह के विशेष प्रदर्शन का आयोज किया था। अनुषा रिजवी द्वारा निर्देशित इस फिल्म ने अपने शुरुआती सप्ताह में ही भारत में चौबीस करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया है। जबकि फिल्म लगभग दस करोड़ रुपये की लागत से बनी है। ब्लैक ब्रा पहनकर फिर पूल में उतरीं शेफाली जरीवाला, सुनहरी स्किन देख लोग बोले- 'हाय मेरी दूध मलाई'
'यशवंत खा गया क्या?' वे पूछते. 'नहीं, 1 बजे आएंगे,' बहू उत्तर देती. 'बस, ला रहा हूं, बाबा. मैं अभी तो आया हूं,' बेटा प्यार से कहता. 'हांहां, अभी आया है. मैं सब समझता हूं. तुम मुझे भूखा मार डालोगे. अरे, मैं ने तुम लोगों के लिए न दिन देखा न रात, सबकुछ तुम्हारे लिए जुटाता रहा. आज तुम्हें मेरी दो रोटियां भारी पड़ रही हैं. मेरे किएकराए को तुम लोगों ने भुला दिया है. बीवियों के गुलाम हो गए हो.' फिर तो चुनचुन कर उन्हें ऐसी गालियां सुनाते कि सुनने वाले भी कानों में उंगली लगा लेते. बहूबेटे क्या, वे तो अपनी पत्नी को भी नहीं छोड़ते थे. उन के पांव दबातेदबाते बेचारी कभी ऊंघ जाती तो कयामत ही आ जाती. बच्चे कभी घर का सौदा लाने को पैसे देते तो अपने लिए सिगरेट की डब्बियां ही खरीद लाते. न जाने फिर मौका मिले कि नहीं. सिगरेट उन के लिए जहर थी. बच्चे मना करते तो तूफान आ जाता.
'यशवंत खा गया क्या?' वे पूछते. 'नहीं, एक बजे आएंगे,' बहू उत्तर देती. 'बस, ला रहा हूं, बाबा. मैं अभी तो आया हूं,' बेटा प्यार से कहता. 'हांहां, अभी आया है. मैं सब समझता हूं. तुम मुझे भूखा मार डालोगे. अरे, मैं ने तुम लोगों के लिए न दिन देखा न रात, सबकुछ तुम्हारे लिए जुटाता रहा. आज तुम्हें मेरी दो रोटियां भारी पड़ रही हैं. मेरे किएकराए को तुम लोगों ने भुला दिया है. बीवियों के गुलाम हो गए हो.' फिर तो चुनचुन कर उन्हें ऐसी गालियां सुनाते कि सुनने वाले भी कानों में उंगली लगा लेते. बहूबेटे क्या, वे तो अपनी पत्नी को भी नहीं छोड़ते थे. उन के पांव दबातेदबाते बेचारी कभी ऊंघ जाती तो कयामत ही आ जाती. बच्चे कभी घर का सौदा लाने को पैसे देते तो अपने लिए सिगरेट की डब्बियां ही खरीद लाते. न जाने फिर मौका मिले कि नहीं. सिगरेट उन के लिए जहर थी. बच्चे मना करते तो तूफान आ जाता.
लैपटॉप चार्ज करना बहुत आसान काम है, लेकिन उसे चार्ज करने का सही तरीका क्या है, यह कम ही लोग जानते हैं। अक्सर चार्जिंग के वक्त ऐसी गड़बड़ियां हो जाती हैं, जिससे लैपटॉप की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है या फिर लैपटॉप चार्ज होने में काफी समय लेता है। सही तरह से लैपटॉप चार्ज करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखेंः ऐसी जगह पर लैपटॉप चार्ज न करें, जहां ज्यादा गर्मी हो या ज्यादा नमी हो। ज्यादा गर्म जगह पर चार्ज करने से एडप्टर को नुकसान हो सकता है और नमी वाली जगह पर चार्जिंग से सामान्य से ज्यादा वक्त लगता है। लैपटॉप की स्क्रीन सबसे ज्यादा बैटरी लेती है। इससे लैपटॉप की चार्जिंग जल्द खत्म हो जाती है। स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखें, इससे पावर भी ज्यादा नहीं लगेगी और आपकी आंखों को भी कम नुकसान होगा। जब जरूरत न हो तो ब्लूटूथ या वाईफाई कनेक्शन बंद कर दें। माउस की जगह लैपटॉप पैड का इस्तेमाल भी ज्यादा बैटरी खर्च होने की समस्या से राहत दिलाता है। लैपटॉप का इस्तेमाल करते वक्त आसपास का वातावरण ठंडा होना चाहिए। कभी भी चार्जिंग के बीच में लैपटॉप से पावर डिस्कनेक्ट न करें। एक निश्चित समय के बाद पुरानी बैटरी को तुरंत बदल लें, इससे आपकी डिवाइस सुरक्षित रहेगी।
लैपटॉप चार्ज करना बहुत आसान काम है, लेकिन उसे चार्ज करने का सही तरीका क्या है, यह कम ही लोग जानते हैं। अक्सर चार्जिंग के वक्त ऐसी गड़बड़ियां हो जाती हैं, जिससे लैपटॉप की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है या फिर लैपटॉप चार्ज होने में काफी समय लेता है। सही तरह से लैपटॉप चार्ज करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखेंः ऐसी जगह पर लैपटॉप चार्ज न करें, जहां ज्यादा गर्मी हो या ज्यादा नमी हो। ज्यादा गर्म जगह पर चार्ज करने से एडप्टर को नुकसान हो सकता है और नमी वाली जगह पर चार्जिंग से सामान्य से ज्यादा वक्त लगता है। लैपटॉप की स्क्रीन सबसे ज्यादा बैटरी लेती है। इससे लैपटॉप की चार्जिंग जल्द खत्म हो जाती है। स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखें, इससे पावर भी ज्यादा नहीं लगेगी और आपकी आंखों को भी कम नुकसान होगा। जब जरूरत न हो तो ब्लूटूथ या वाईफाई कनेक्शन बंद कर दें। माउस की जगह लैपटॉप पैड का इस्तेमाल भी ज्यादा बैटरी खर्च होने की समस्या से राहत दिलाता है। लैपटॉप का इस्तेमाल करते वक्त आसपास का वातावरण ठंडा होना चाहिए। कभी भी चार्जिंग के बीच में लैपटॉप से पावर डिस्कनेक्ट न करें। एक निश्चित समय के बाद पुरानी बैटरी को तुरंत बदल लें, इससे आपकी डिवाइस सुरक्षित रहेगी।
'केजीएफः चैप्टर 2' ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया हुआ है। एक्टर यश की यह फिल्म प्रभास की 'बाहुबली 2' और आमिर खान की 'दंगल' के बाद तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बन गई है। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, 'केजीएफः चैप्टर 2' ने सलमान खान की 'टाइगर जिंदा है', आमिर खान की 'पीके' और रणबीर कपूर की 'संजू' की कमाई को पार कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभास की फिल्म 'बाहुबली 2' ने 510. 99 करोड़ रुपये की कमाई की थी, जबकि 'दंगल' ने बॉक्स ऑफिस पर 387. 38 करोड़ रुपये की कमाई की थी। वहीं 'केजीएफः चैप्टर 250 करोड़ रुपये के बेंचमार्क तक पहुंचने वाली तीसरी फिल्म बन गई है। केजीएफ 2 की हिंदी वर्जन से कुल कमाई 343. 13 करोड़ रुपये हो गई है। ये भी पढ़ेंः केजीएफ 2 ने 11वें दिन लगाई ट्रिपल सेंचुरी, क्या तोड़ेगी दंगल का ये रिकॉर्ड? 'केजीएफः चैप्टर 2' 14 अप्रैल को हिंदी, कन्नड़, मलयालम, तमिल और तेलुगू भाषा में रिलीज हुई है। इसमें संजय दत्त, रवीना टंडन, श्रीनिधि शेट्टी, प्रकाश राज और राव रमेश समेत कई बेहतरीन कलाकार लीड रोल में हैं। 'टाइगर जिंदा है' की लाइफटाइम कमाई 339. 16 करोड़ रुपये थी, जबकि 'पीके' ने 340. 80 करोड़ रुपये की कमाई की थी, वही 'संजू' ने 342. 53 करोड़ का कलेक्शन किया था। खास बात ये है कि केजीएफ 2 रिलीज होने के बाद शाहिद कपूर की जर्सी जैसी फिल्म भी रिलीज हुई जो साउथ की एक सुपरहिट फिल्म की रीमेक है लेकिन इसके आगे जर्सी ने भी घुटने टेक दिए। अब आज यानी 29 अप्रैल को टाइगर श्रॉफ की हीरोपंती और अजय देवगन स्टारर रनवे 34 रिलीज हो रही हैं। देखना होगा कि क्या ये दोनों फिल्में केजीएफ 2 की स्पीड पर ब्रेक लगा पाएंगी या खुद ढेर हो जाएंगी। Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
'केजीएफः चैप्टर दो' ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया हुआ है। एक्टर यश की यह फिल्म प्रभास की 'बाहुबली दो' और आमिर खान की 'दंगल' के बाद तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बन गई है। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, 'केजीएफः चैप्टर दो' ने सलमान खान की 'टाइगर जिंदा है', आमिर खान की 'पीके' और रणबीर कपूर की 'संजू' की कमाई को पार कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभास की फिल्म 'बाहुबली दो' ने पाँच सौ दस. निन्यानवे करोड़ रुपये की कमाई की थी, जबकि 'दंगल' ने बॉक्स ऑफिस पर तीन सौ सत्तासी. अड़तीस करोड़ रुपये की कमाई की थी। वहीं 'केजीएफः चैप्टर दो सौ पचास करोड़ रुपये के बेंचमार्क तक पहुंचने वाली तीसरी फिल्म बन गई है। केजीएफ दो की हिंदी वर्जन से कुल कमाई तीन सौ तैंतालीस. तेरह करोड़ रुपये हो गई है। ये भी पढ़ेंः केजीएफ दो ने ग्यारहवें दिन लगाई ट्रिपल सेंचुरी, क्या तोड़ेगी दंगल का ये रिकॉर्ड? 'केजीएफः चैप्टर दो' चौदह अप्रैल को हिंदी, कन्नड़, मलयालम, तमिल और तेलुगू भाषा में रिलीज हुई है। इसमें संजय दत्त, रवीना टंडन, श्रीनिधि शेट्टी, प्रकाश राज और राव रमेश समेत कई बेहतरीन कलाकार लीड रोल में हैं। 'टाइगर जिंदा है' की लाइफटाइम कमाई तीन सौ उनतालीस. सोलह करोड़ रुपये थी, जबकि 'पीके' ने तीन सौ चालीस. अस्सी करोड़ रुपये की कमाई की थी, वही 'संजू' ने तीन सौ बयालीस. तिरेपन करोड़ का कलेक्शन किया था। खास बात ये है कि केजीएफ दो रिलीज होने के बाद शाहिद कपूर की जर्सी जैसी फिल्म भी रिलीज हुई जो साउथ की एक सुपरहिट फिल्म की रीमेक है लेकिन इसके आगे जर्सी ने भी घुटने टेक दिए। अब आज यानी उनतीस अप्रैल को टाइगर श्रॉफ की हीरोपंती और अजय देवगन स्टारर रनवे चौंतीस रिलीज हो रही हैं। देखना होगा कि क्या ये दोनों फिल्में केजीएफ दो की स्पीड पर ब्रेक लगा पाएंगी या खुद ढेर हो जाएंगी। Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
मनावर विकासखंड में हर घर तिरंगा अभियान के तहत में 13 से 15 अगस्त 2022 के बीच नागरिकों द्वारा अपने घर पर तिरंगा फहराया जाएगा। मनावर एसडीएम भूपेन्द्र रावत ने कहा कि आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। साथ ही हर घर तिरंगा अभियान मनाने का निर्णय लिया गया है। जिसके तहत पूरे मनावर विकासखंड में 35 हजार तिरंगे हर घर गली मोहल्ले में लगाए जाएंगे। विकासखंड के नागरिक अपने घरों पर 13 से 15 अगस्त तक हमारे देश की आन-बान-शान हमारे तिरंगे को गर्व व पूरे सम्मान के साथ फहराए। एसडीएम रावत ने कहा हर घर तिरंगा लोगों को उपलब्ध हो इसके लिए विक्रय सेंटर बनाए जाएंगे और उनकी सूचना क्षेत्र के लोगों को उपलब्ध कराई जाएगी जिससे वे वहं जाकर झंडा क्रय कर सकेंगे। रावत ने कहा कि गांव, कस्बो, प्रतिष्ठानों में झंडे लगाए जाना है। इसके लिए सभी संगठनो, समाज के समूहो,धर्मगुरूओ, जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों अपने स्तर से भी इस महत्वपूर्ण अभियान में अपनी सहभागिता दे और लोगों को झंडे लागाने के लिए प्रेरित करें। साथ ही जिन ग्रामीण शहरी लोगों को इन अभियान के बारे में मालूम नहीं उन्हें भी इसके लिए प्रेरित करें। मनावर क्षेत्र में अभियान को सफल करने के लिए लोग बड़ी संख्या में आगे आ रहे हैं यह खुशी की बात है। नगर में इस अभियान को लेकर बहुत उत्साह दिखाई दे रहा है। रावत ने कहा क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधि भी इस अभियान में अपना पूरा सहयोग प्रदान करें। जयस राष्ट्रीय सरंक्षक विधायक डॉ हिरालाल अलावा ने कहा कि अभियान में मेरी ओर से पूरा सहयोग रहेगा। नगर पालिका सीएमओ प्रदीप शर्मा ने कहा हर घर तिरंगा अभियान को लेकर व्यापक प्रचार प्रसार किया जा रहा है नगर के 15 वार्डों में वाहन के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज की महत्व को आम जनता को समझाया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मनावर विकासखंड में हर घर तिरंगा अभियान के तहत में तेरह से पंद्रह अगस्त दो हज़ार बाईस के बीच नागरिकों द्वारा अपने घर पर तिरंगा फहराया जाएगा। मनावर एसडीएम भूपेन्द्र रावत ने कहा कि आजादी के पचहत्तर वर्ष पूरे होने पर अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। साथ ही हर घर तिरंगा अभियान मनाने का निर्णय लिया गया है। जिसके तहत पूरे मनावर विकासखंड में पैंतीस हजार तिरंगे हर घर गली मोहल्ले में लगाए जाएंगे। विकासखंड के नागरिक अपने घरों पर तेरह से पंद्रह अगस्त तक हमारे देश की आन-बान-शान हमारे तिरंगे को गर्व व पूरे सम्मान के साथ फहराए। एसडीएम रावत ने कहा हर घर तिरंगा लोगों को उपलब्ध हो इसके लिए विक्रय सेंटर बनाए जाएंगे और उनकी सूचना क्षेत्र के लोगों को उपलब्ध कराई जाएगी जिससे वे वहं जाकर झंडा क्रय कर सकेंगे। रावत ने कहा कि गांव, कस्बो, प्रतिष्ठानों में झंडे लगाए जाना है। इसके लिए सभी संगठनो, समाज के समूहो,धर्मगुरूओ, जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों अपने स्तर से भी इस महत्वपूर्ण अभियान में अपनी सहभागिता दे और लोगों को झंडे लागाने के लिए प्रेरित करें। साथ ही जिन ग्रामीण शहरी लोगों को इन अभियान के बारे में मालूम नहीं उन्हें भी इसके लिए प्रेरित करें। मनावर क्षेत्र में अभियान को सफल करने के लिए लोग बड़ी संख्या में आगे आ रहे हैं यह खुशी की बात है। नगर में इस अभियान को लेकर बहुत उत्साह दिखाई दे रहा है। रावत ने कहा क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधि भी इस अभियान में अपना पूरा सहयोग प्रदान करें। जयस राष्ट्रीय सरंक्षक विधायक डॉ हिरालाल अलावा ने कहा कि अभियान में मेरी ओर से पूरा सहयोग रहेगा। नगर पालिका सीएमओ प्रदीप शर्मा ने कहा हर घर तिरंगा अभियान को लेकर व्यापक प्रचार प्रसार किया जा रहा है नगर के पंद्रह वार्डों में वाहन के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज की महत्व को आम जनता को समझाया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
छतरपुर। Bageshwar Dham Prahlad Modi Visit: देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाई प्रह्लाद मोदी छतरपुर पहुंचे हैं. दरअसल बागेश्वर धाम सरकार के दर्शन करने के लिए प्रह्लाद मोदी पहुंचे हैं. ऐसा मन जा रहा है की 2024 में बीजेपी की जीत की कामना के साथ उनकी ये यात्रा शुरू हुई है. बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री दतिया पहुंचे हैं. जहां उन्होनें मां पीतांबरा देवी के दर्शन किए. इस दौरान उनके साथ प्रशासन के बड़े अधिकारी भी मौजूद रहे. उनके पहुंचने के पहले मंदिर में सुरक्षा का खास ख्याल रखा गया. इस मौके पर मौके पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, कि जो हिंदुत्व की बात करता है, एकता की बात करता है उसके विरोधी लोग हो ही जाते हैं.
छतरपुर। Bageshwar Dham Prahlad Modi Visit: देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाई प्रह्लाद मोदी छतरपुर पहुंचे हैं. दरअसल बागेश्वर धाम सरकार के दर्शन करने के लिए प्रह्लाद मोदी पहुंचे हैं. ऐसा मन जा रहा है की दो हज़ार चौबीस में बीजेपी की जीत की कामना के साथ उनकी ये यात्रा शुरू हुई है. बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री दतिया पहुंचे हैं. जहां उन्होनें मां पीतांबरा देवी के दर्शन किए. इस दौरान उनके साथ प्रशासन के बड़े अधिकारी भी मौजूद रहे. उनके पहुंचने के पहले मंदिर में सुरक्षा का खास ख्याल रखा गया. इस मौके पर मौके पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, कि जो हिंदुत्व की बात करता है, एकता की बात करता है उसके विरोधी लोग हो ही जाते हैं.
पशु भोजन की कमी दुबला आहार में प्रोटीन की कमी के समान नहीं है। सफेद मांस और अंडे का योग्य प्रतिस्थापन प्रोटीन फलियों में समृद्ध हो सकता है, जिसे लगभग किसी भी पकवान के लिए अनुकूलित किया जा सकता है। इस सामग्री का मुख्य नायक मटर सूप के लिए नुस्खा होगा, किसी भी मानक मांस सूप में इसकी विविधता की विविधता में कम नहीं है। सूप की मलाईदार स्थिरता के बारे में ऊब और एक ही स्वाद के लिए, यदि आप तेल की avocado लुगदी का एक पकवान जोड़ना नहीं है। अन्य चीजों के अलावा, यह ताजा मटर के साथ, एक आकर्षक उज्ज्वल हरे रंग के रंग के साथ पकवान प्रदान करेगा। सामग्रीः - जमे हुए हरी मटर - 320 ग्राम; - एवोकैडो (मध्यम) - 1 पीसी। - लहसुन - 1 दांत; - तुलसी के पत्ते - 3 टुकड़े; - पानी 115 मिलीलीटर; - सोया दूध - 115 मिलीलीटर। Defrost मटर, इसे नमकीन उबलते पानी में blanching। हड्डियों और छील से एवोकैडो लुगदी को अलग करना, इसे मटर के साथ एक ब्लेंडर में डाल दें। लहसुन काट, कुचल तुलसी के पत्तों से प्यूरी जोड़ें और तरल में डालें - पानी और सोया दूध का मिश्रण। सूप प्यूरी-जैसी स्थिरता प्राप्त होने तक सभी अवयवों को एक साथ मिलाएं। यदि आप चाहते हैं, तो आप अतिरिक्त तरल डालना कर सकते हैं। बहुत अंत में सूप नमक। ठंडा की सेवा करो। क्लासिक, बहुमत की समझ में, मटर सूप में सबसे उबले हुए और खुली मटर होते हैं जो उपलब्ध सब्ज़ियों, आमतौर पर प्याज और गाजर के भुना के साथ होते हैं। हम सुझाव देते हैं कि आप पुराने के आधार को छोड़ दें, लेकिन इसे थाइम और नींबू के रस के साधारण स्वाद के साथ विविधता दें। सामग्रीः - प्याज - 115 ग्राम; - अजवाइन के डंठल - 95 ग्राम; - लहसुन - 2 दांत; - थाइम शाखाएं - 3 पीसी। - सूखे कटा हुआ मटर - 1 9 0 ग्राम; - सब्जी शोरबा - 340 मिलीलीटर। कटा हुआ प्याज और अजवाइन के डंठल से सब्जी भुना तैयार करें। जब सब्जियां आधा पकाया जाता है, तो लहसुन के चाइव और थाइम पत्तियों का पेस्ट डाल दें। इसे धोने के बाद, कटा हुआ मटर डालो। पैन की सामग्री को एक गिलास पानी के साथ सब्जी शोरबा के साथ डालें और मटर को नरम होने तक 40-45 मिनट तक पकाएं। साइट्रस के रस के साथ सूप तैयार करें। आप मल्टीवार्केट में इस दुबला मटर सूप के लिए रेसिपी दोहरा सकते हैं, पहले "बेकिंग" पर सामग्री फ्राइंग कर सकते हैं, और फिर पानी डालना और बीप तक "सूप" मोड में खाना बनाना छोड़ सकते हैं। सामग्रीः - प्याज - 135 ग्राम; - लहसुन - 5 दांत; - फूलगोभी - 340 ग्राम; - गाजर - 160 ग्राम; - हरी मटर - 310 ग्राम; - कद्दू - 210 ग्राम; - चैंपियन - 180 ग्राम; - सब्जी शोरबा - 1. 2 लीटर। गाजर-प्याज भुना हुआ कुक और इसमें मशरूम जोड़ें। जब सभी मशरूम नमी वाष्पित हो जाती है, तो कई लहसुन के दांतों को निचोड़ें, कद्दू के क्यूब्स और गोभी की कलियों को तलना में डाल दें। इसके बाद, हरी मटर डालें और इसे शोरबा से भरें। सब्ज़ियों को नरम होने तक लगभग आधे घंटे तक सांस लेने दें, और फिर ब्लेंडर के साथ सूप को रगड़ें। सामग्रीः - हरी प्याज - 3 पंख; - सब्जी शोरबा - 1,1 एल; - जमे हुए मटर - 920 ग्राम; - ब्रोकोली का फूलना - 420 ग्राम; - हरी अजमोद और टकसाल का एक मुट्ठी भर; - प्याज - 140 ग्राम; - सोया दूध - 320 मिलीलीटर। प्याज के Spasseruyte टुकड़े और उन्हें शोरबा के साथ डालना। एक बुलबुले शोरबा में गोभी और मटर की inflorescences जगह। गोभी inflorescence नरम होने तक सब कुछ लपेटें, और फिर एक साथ रगड़ें। पकवान को एक मलाईदार स्वाद देने के लिए, आप सोया दूध के साथ सूप पूरक कर सकते हैं, लेकिन यह आवश्यक नहीं है। कटा हुआ साग तैयार तैयार सूप में जोड़ें और तुरंत सेवा करें।
पशु भोजन की कमी दुबला आहार में प्रोटीन की कमी के समान नहीं है। सफेद मांस और अंडे का योग्य प्रतिस्थापन प्रोटीन फलियों में समृद्ध हो सकता है, जिसे लगभग किसी भी पकवान के लिए अनुकूलित किया जा सकता है। इस सामग्री का मुख्य नायक मटर सूप के लिए नुस्खा होगा, किसी भी मानक मांस सूप में इसकी विविधता की विविधता में कम नहीं है। सूप की मलाईदार स्थिरता के बारे में ऊब और एक ही स्वाद के लिए, यदि आप तेल की avocado लुगदी का एक पकवान जोड़ना नहीं है। अन्य चीजों के अलावा, यह ताजा मटर के साथ, एक आकर्षक उज्ज्वल हरे रंग के रंग के साथ पकवान प्रदान करेगा। सामग्रीः - जमे हुए हरी मटर - तीन सौ बीस ग्राम; - एवोकैडो - एक पीसी। - लहसुन - एक दांत; - तुलसी के पत्ते - तीन टुकड़े; - पानी एक सौ पंद्रह मिलीलीटर; - सोया दूध - एक सौ पंद्रह मिलीलीटर। Defrost मटर, इसे नमकीन उबलते पानी में blanching। हड्डियों और छील से एवोकैडो लुगदी को अलग करना, इसे मटर के साथ एक ब्लेंडर में डाल दें। लहसुन काट, कुचल तुलसी के पत्तों से प्यूरी जोड़ें और तरल में डालें - पानी और सोया दूध का मिश्रण। सूप प्यूरी-जैसी स्थिरता प्राप्त होने तक सभी अवयवों को एक साथ मिलाएं। यदि आप चाहते हैं, तो आप अतिरिक्त तरल डालना कर सकते हैं। बहुत अंत में सूप नमक। ठंडा की सेवा करो। क्लासिक, बहुमत की समझ में, मटर सूप में सबसे उबले हुए और खुली मटर होते हैं जो उपलब्ध सब्ज़ियों, आमतौर पर प्याज और गाजर के भुना के साथ होते हैं। हम सुझाव देते हैं कि आप पुराने के आधार को छोड़ दें, लेकिन इसे थाइम और नींबू के रस के साधारण स्वाद के साथ विविधता दें। सामग्रीः - प्याज - एक सौ पंद्रह ग्राम; - अजवाइन के डंठल - पचानवे ग्राम; - लहसुन - दो दांत; - थाइम शाखाएं - तीन पीसी। - सूखे कटा हुआ मटर - एक नौ शून्य ग्राम; - सब्जी शोरबा - तीन सौ चालीस मिलीलीटर। कटा हुआ प्याज और अजवाइन के डंठल से सब्जी भुना तैयार करें। जब सब्जियां आधा पकाया जाता है, तो लहसुन के चाइव और थाइम पत्तियों का पेस्ट डाल दें। इसे धोने के बाद, कटा हुआ मटर डालो। पैन की सामग्री को एक गिलास पानी के साथ सब्जी शोरबा के साथ डालें और मटर को नरम होने तक चालीस-पैंतालीस मिनट तक पकाएं। साइट्रस के रस के साथ सूप तैयार करें। आप मल्टीवार्केट में इस दुबला मटर सूप के लिए रेसिपी दोहरा सकते हैं, पहले "बेकिंग" पर सामग्री फ्राइंग कर सकते हैं, और फिर पानी डालना और बीप तक "सूप" मोड में खाना बनाना छोड़ सकते हैं। सामग्रीः - प्याज - एक सौ पैंतीस ग्राम; - लहसुन - पाँच दांत; - फूलगोभी - तीन सौ चालीस ग्राम; - गाजर - एक सौ साठ ग्राम; - हरी मटर - तीन सौ दस ग्राम; - कद्दू - दो सौ दस ग्राम; - चैंपियन - एक सौ अस्सी ग्राम; - सब्जी शोरबा - एक. दो लीटरटर। गाजर-प्याज भुना हुआ कुक और इसमें मशरूम जोड़ें। जब सभी मशरूम नमी वाष्पित हो जाती है, तो कई लहसुन के दांतों को निचोड़ें, कद्दू के क्यूब्स और गोभी की कलियों को तलना में डाल दें। इसके बाद, हरी मटर डालें और इसे शोरबा से भरें। सब्ज़ियों को नरम होने तक लगभग आधे घंटे तक सांस लेने दें, और फिर ब्लेंडर के साथ सूप को रगड़ें। सामग्रीः - हरी प्याज - तीन पंख; - सब्जी शोरबा - एक,एक एल; - जमे हुए मटर - नौ सौ बीस ग्राम; - ब्रोकोली का फूलना - चार सौ बीस ग्राम; - हरी अजमोद और टकसाल का एक मुट्ठी भर; - प्याज - एक सौ चालीस ग्राम; - सोया दूध - तीन सौ बीस मिलीलीटर। प्याज के Spasseruyte टुकड़े और उन्हें शोरबा के साथ डालना। एक बुलबुले शोरबा में गोभी और मटर की inflorescences जगह। गोभी inflorescence नरम होने तक सब कुछ लपेटें, और फिर एक साथ रगड़ें। पकवान को एक मलाईदार स्वाद देने के लिए, आप सोया दूध के साथ सूप पूरक कर सकते हैं, लेकिन यह आवश्यक नहीं है। कटा हुआ साग तैयार तैयार सूप में जोड़ें और तुरंत सेवा करें।
मुंबई. अमिताभ बच्चन के साथ ही अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय और आराध्या मुंबई के नानावटी अस्पताल में कोरोना का इलाज करवा रहे हैं। जया बच्चन के अलावा पूरा परिवार कोविड-19 से संक्रमित है और चारों को अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। बताया जा रहा है कि बच्चन परिवार के सभी सदस्यों की तबीयत में अब सुधार हो रहा है। बता दें कि पहले अमिताभ और अभिषेक को अस्पताल में रखा गया था, लेकिन बाद में ऐश्वर्या और आराध्या को भी भर्ती करवाया गया। खबरों की मानें तो ऐश्वर्या सहित परिवार के बाकी सदस्यों का कोरोना टेस्ट दोबारा किया जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार बच्चन फैमिली का कोरोना टेस्ट बुधवार (22 जुलाई) को होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐश्वर्या राय की सीटी स्कैन रिपोर्ट में ठीक है और उनका फीवर और गले में हुए इंफेक्शन में भी सुधार है। ऐश की बेटी आराध्या बिल्कुल ठीक है और उन्हें अब फीवर भी नहीं हैं। हालांकि, डॉक्टर्स ने परिवार के सभी सदस्यों को लगातार चेक कर रहे हैं और वो बीएमसी से भी संपर्क हैं और उन्हें हेल्थ अपडेट दे रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार बच्चन परिवार का दूसरा कोरोना वायरस टेस्ट दोबारा किया जाना है। दूसरे टेस्ट के रिपोर्ट्स के आधार पर ही कोई फैसला लिया जाएगा। इसके बाद ही डॉक्टर अंसारी, डॉक्टर ब्रेव और उनकी टीम बच्चन परिवार के सदस्यों को डिस्चार्ज करने को लेकर कोई फैसला लेगी और देखेगी कि आखिर आगे कैसे इलाज किया जाना है। बता दें कि ऐश्वर्या और आराध्या बीते रविवार (12 जुलाई) को कोरोना संक्रमित मिली थीं। हालांकि, उस वक्त उनमें कोरोना के हल्के लक्षण थे और उन्होंने किसी भी तरह की दिक्कत नहीं थी। हालांकि बाद में 17 जुलाई को अचानक दोनों की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। बता दें कि इससे पहले 11 जुलाई की रात 11 बजे अमिताभ बच्चन ने ट्वीट कर बताया था कि वो कोरोना पॉजिटिव हैं। कुछ ही देर बाद अभिषेक की भी रिपोर्ट पॉजिटिव मिली थी। अमिताभ के घर में जया बच्चन, बेटी श्वेता, नाती अगस्त्य और नातिन नव्या नवेली की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। बता दें कि बच्चन के चारों बंगलों का सैनिटाइजेशन करके सील कर दिया गया है। बीएमसी की टीम ने चारों बंगलों में दो बार सैनिटाइजेशन का काम किया। अमिताभ आइसोलेशन वार्ड में होने के बावजूद अपना डेली रुटीन जारी रख रहे हैं। वे अब भी हर दिन की तरह फैन्स, कलीग्स, पत्रकारों और दोस्तों को जन्मदिन की शुभकामनाएं दे रहे हैं और अपने ब्लॉग को अपडेट कर रहे हैं।
मुंबई. अमिताभ बच्चन के साथ ही अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय और आराध्या मुंबई के नानावटी अस्पताल में कोरोना का इलाज करवा रहे हैं। जया बच्चन के अलावा पूरा परिवार कोविड-उन्नीस से संक्रमित है और चारों को अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। बताया जा रहा है कि बच्चन परिवार के सभी सदस्यों की तबीयत में अब सुधार हो रहा है। बता दें कि पहले अमिताभ और अभिषेक को अस्पताल में रखा गया था, लेकिन बाद में ऐश्वर्या और आराध्या को भी भर्ती करवाया गया। खबरों की मानें तो ऐश्वर्या सहित परिवार के बाकी सदस्यों का कोरोना टेस्ट दोबारा किया जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार बच्चन फैमिली का कोरोना टेस्ट बुधवार को होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐश्वर्या राय की सीटी स्कैन रिपोर्ट में ठीक है और उनका फीवर और गले में हुए इंफेक्शन में भी सुधार है। ऐश की बेटी आराध्या बिल्कुल ठीक है और उन्हें अब फीवर भी नहीं हैं। हालांकि, डॉक्टर्स ने परिवार के सभी सदस्यों को लगातार चेक कर रहे हैं और वो बीएमसी से भी संपर्क हैं और उन्हें हेल्थ अपडेट दे रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार बच्चन परिवार का दूसरा कोरोना वायरस टेस्ट दोबारा किया जाना है। दूसरे टेस्ट के रिपोर्ट्स के आधार पर ही कोई फैसला लिया जाएगा। इसके बाद ही डॉक्टर अंसारी, डॉक्टर ब्रेव और उनकी टीम बच्चन परिवार के सदस्यों को डिस्चार्ज करने को लेकर कोई फैसला लेगी और देखेगी कि आखिर आगे कैसे इलाज किया जाना है। बता दें कि ऐश्वर्या और आराध्या बीते रविवार को कोरोना संक्रमित मिली थीं। हालांकि, उस वक्त उनमें कोरोना के हल्के लक्षण थे और उन्होंने किसी भी तरह की दिक्कत नहीं थी। हालांकि बाद में सत्रह जुलाई को अचानक दोनों की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। बता दें कि इससे पहले ग्यारह जुलाई की रात ग्यारह बजे अमिताभ बच्चन ने ट्वीट कर बताया था कि वो कोरोना पॉजिटिव हैं। कुछ ही देर बाद अभिषेक की भी रिपोर्ट पॉजिटिव मिली थी। अमिताभ के घर में जया बच्चन, बेटी श्वेता, नाती अगस्त्य और नातिन नव्या नवेली की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। बता दें कि बच्चन के चारों बंगलों का सैनिटाइजेशन करके सील कर दिया गया है। बीएमसी की टीम ने चारों बंगलों में दो बार सैनिटाइजेशन का काम किया। अमिताभ आइसोलेशन वार्ड में होने के बावजूद अपना डेली रुटीन जारी रख रहे हैं। वे अब भी हर दिन की तरह फैन्स, कलीग्स, पत्रकारों और दोस्तों को जन्मदिन की शुभकामनाएं दे रहे हैं और अपने ब्लॉग को अपडेट कर रहे हैं।
फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में मोरक्को की फ्रांस से हार के बाद उनके फैंस ने ब्रसेल्स और पेरिस की सड़कों पर उत्पात मचाया। पुलिस से भी भिड़े। यही नहीं फ्रांस में कई जगहों पर मोरक्को और फ्रांस के समर्थकों के बीच झड़प हुई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मोरक्को फैन्स ब्रसेल्स के साउथ स्टेशन पर इकट्ठा हुए थे। यहां जमकर आगजनी भी की। कई जगह पुलिस को वाटर कैनन और टियर गैस का भी इस्तेमाल करना पड़ा। पुलिस ने कुछ मोरक्को फैंस को गिरफ्तार भी किया है। पेरिस में भी फ्रांस की जीत पर खुशी मना रहे समर्थकों और मोरक्को के फैंस के बीच झड़प हुई। बुधवार देर रात फ्रांस ने मोरक्को को 2-0 से हराया। फ्रांस वर्ल्ड कप में लगातार दूसरी बार फाइनल में पहुंच गया। टीम ने 2018 में वर्ल्ड कप जीता था। वहीं, वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचने में वाली पहली अफ्रीकी टीम मोरक्को का वर्ल्ड कप में सफर खत्म हो गया। इसके साथ ही अफ्रीकी देशों और अरब देशों की उम्मीदें खत्म हो गईं। बेल्जियम, स्पेन और पुर्तगाल जैसी बड़ी टीमों को हराने के बाद वे सेमीफाइनल में फ्रांस को नहीं हरा सके। फ्रांस की ओर से 5वें मिनट में थियो हर्नांडेज और 79वें मिनट में रैंडल कोलो मुआनी ने गोल दागे। मोरक्को एक भी गोल नहीं स्कोर कर सका। फ्रांस ने मैच के 5वें मिनट में ही गोल दाग दिया। गोल टीम के मिडफील्डर थियो हर्नांडेज ने किया। फ्रांस के प्लेयर ग्रीजमेन बॉल को अंदर लेकर आए। उन्होंने बॉल एम्बाप्पे को दी। इतने में मोरक्को के खिलाड़ियों ने बॉल को रोकने का प्रयास किया और बॉल टकराकर हर्नांडेज के पास आ गई। हर्नांडेज ने शॉट मारा और बॉल को नेट के अंदर पहुंचा दिया। फ्रांस के प्लेयर रैंडल कोलो मुआनी ने पिच पर आते ही गोल दाग दिया। मुआनी दूसरे हाफ के 79वें मिनट में ओस्मान डेम्बेले की जगह आए। उन्होंने पिच पर कदम रखते ही 79वें मिनट में एम्बाप्पे के पास पर गोल दाग दिया। इसी के साथ मुआनी ने अपना पहला इंटरनेशनल गोल स्कोर किया। मैच के 65वें मिनट में फ्रांस के खिलाड़ी ओलिवर जीरूड सब्स्टीट्यूट हो कर बाहर चले गए। उनकी जगह पीच पर मार्कस थुराम आए। जीरूड ने इस वर्ल्ड कप में 4 गोल दागे हैं। मैच में मोरक्को मौके ही बनाते रह गया। उसने मैच में एक भी गोल नहीं किया। लीड लेने के बाद फ्रांस ने मोरक्को को मौके तो दिए पर गोल नहीं करने दिया। पूरे मैच में मोरक्को ने गोल की तरफ 13 शॉट मारे। वहीं, फ्रांस ने दूसरे हाफ में अटैकिंग अप्रोच जारी रखी और मैच में गोल की तरफ 14 शॉट मारे। दोनों टीमों के 3 ही शार्ट टारगेट पर लगे। मोरक्को ने बॉल पजेशन 62% समय अपने पास रखा। वहीं, फ्रांस ने 38% समय बॉल को रखा। मोरक्को ने 11 और फ्रांस ने 10 फाउल किए। पहले हाफ में फ्रांस ने गेम को डोमिनेट किया। उसने 9 शॉट गोल की तरफ मारे, जबकि मोरक्को 5 ही मार सका। इनमें से फ्रांस ने एक पर गोल भी किया। पजेशन मोरक्को के पास ज्यादा थी। 58% समय बॉल को रखने के बावजूद वे बॉल को हाफ वे लाइन के आगे नहीं ले जा पाए। फ्रांस ने काउंटर अटैक कर के गोल करने का प्रयास किया। फ्रांस ने फर्स्ट हाफ में 7 फाउल किए और मोरक्को ने 3 फाउल किए। फ्रांस (4-2-3-1): ह्यूगो लाॅरिस (गोलकीपर), जूलियस कौंडे, राफेल वराने, इब्राहिमा कोनाटे,थियो हर्नांडेज, एंटोनी ग्रीजमैन,, ऑरेलियन टॉचमनी, यूसुफ फोफाना, ओस्मान डेम्बेले, ओलिवर जीरूड और कीलियन एम्बाप्पे। मोरक्को (5-3-1): यासीन बोनो (गोलकीपर), अशरफ हकीमी, जवाद एल यामीक, नायेफ एगुएर्ड, रोमेन सैस (कप्तान), नूस्सैर मोजरई, सोफियान अमरबात, हाकिम जिएच, एजेदीन औनाही, सौफियाने बौफाल और यूसुफ एन-नेसरी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में मोरक्को की फ्रांस से हार के बाद उनके फैंस ने ब्रसेल्स और पेरिस की सड़कों पर उत्पात मचाया। पुलिस से भी भिड़े। यही नहीं फ्रांस में कई जगहों पर मोरक्को और फ्रांस के समर्थकों के बीच झड़प हुई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मोरक्को फैन्स ब्रसेल्स के साउथ स्टेशन पर इकट्ठा हुए थे। यहां जमकर आगजनी भी की। कई जगह पुलिस को वाटर कैनन और टियर गैस का भी इस्तेमाल करना पड़ा। पुलिस ने कुछ मोरक्को फैंस को गिरफ्तार भी किया है। पेरिस में भी फ्रांस की जीत पर खुशी मना रहे समर्थकों और मोरक्को के फैंस के बीच झड़प हुई। बुधवार देर रात फ्रांस ने मोरक्को को दो-शून्य से हराया। फ्रांस वर्ल्ड कप में लगातार दूसरी बार फाइनल में पहुंच गया। टीम ने दो हज़ार अट्ठारह में वर्ल्ड कप जीता था। वहीं, वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचने में वाली पहली अफ्रीकी टीम मोरक्को का वर्ल्ड कप में सफर खत्म हो गया। इसके साथ ही अफ्रीकी देशों और अरब देशों की उम्मीदें खत्म हो गईं। बेल्जियम, स्पेन और पुर्तगाल जैसी बड़ी टीमों को हराने के बाद वे सेमीफाइनल में फ्रांस को नहीं हरा सके। फ्रांस की ओर से पाँचवें मिनट में थियो हर्नांडेज और उन्यासीवें मिनट में रैंडल कोलो मुआनी ने गोल दागे। मोरक्को एक भी गोल नहीं स्कोर कर सका। फ्रांस ने मैच के पाँचवें मिनट में ही गोल दाग दिया। गोल टीम के मिडफील्डर थियो हर्नांडेज ने किया। फ्रांस के प्लेयर ग्रीजमेन बॉल को अंदर लेकर आए। उन्होंने बॉल एम्बाप्पे को दी। इतने में मोरक्को के खिलाड़ियों ने बॉल को रोकने का प्रयास किया और बॉल टकराकर हर्नांडेज के पास आ गई। हर्नांडेज ने शॉट मारा और बॉल को नेट के अंदर पहुंचा दिया। फ्रांस के प्लेयर रैंडल कोलो मुआनी ने पिच पर आते ही गोल दाग दिया। मुआनी दूसरे हाफ के उन्यासीवें मिनट में ओस्मान डेम्बेले की जगह आए। उन्होंने पिच पर कदम रखते ही उन्यासीवें मिनट में एम्बाप्पे के पास पर गोल दाग दिया। इसी के साथ मुआनी ने अपना पहला इंटरनेशनल गोल स्कोर किया। मैच के पैंसठवें मिनट में फ्रांस के खिलाड़ी ओलिवर जीरूड सब्स्टीट्यूट हो कर बाहर चले गए। उनकी जगह पीच पर मार्कस थुराम आए। जीरूड ने इस वर्ल्ड कप में चार गोल दागे हैं। मैच में मोरक्को मौके ही बनाते रह गया। उसने मैच में एक भी गोल नहीं किया। लीड लेने के बाद फ्रांस ने मोरक्को को मौके तो दिए पर गोल नहीं करने दिया। पूरे मैच में मोरक्को ने गोल की तरफ तेरह शॉट मारे। वहीं, फ्रांस ने दूसरे हाफ में अटैकिंग अप्रोच जारी रखी और मैच में गोल की तरफ चौदह शॉट मारे। दोनों टीमों के तीन ही शार्ट टारगेट पर लगे। मोरक्को ने बॉल पजेशन बासठ% समय अपने पास रखा। वहीं, फ्रांस ने अड़तीस% समय बॉल को रखा। मोरक्को ने ग्यारह और फ्रांस ने दस फाउल किए। पहले हाफ में फ्रांस ने गेम को डोमिनेट किया। उसने नौ शॉट गोल की तरफ मारे, जबकि मोरक्को पाँच ही मार सका। इनमें से फ्रांस ने एक पर गोल भी किया। पजेशन मोरक्को के पास ज्यादा थी। अट्ठावन% समय बॉल को रखने के बावजूद वे बॉल को हाफ वे लाइन के आगे नहीं ले जा पाए। फ्रांस ने काउंटर अटैक कर के गोल करने का प्रयास किया। फ्रांस ने फर्स्ट हाफ में सात फाउल किए और मोरक्को ने तीन फाउल किए। फ्रांस : ह्यूगो लाॅरिस , जूलियस कौंडे, राफेल वराने, इब्राहिमा कोनाटे,थियो हर्नांडेज, एंटोनी ग्रीजमैन,, ऑरेलियन टॉचमनी, यूसुफ फोफाना, ओस्मान डेम्बेले, ओलिवर जीरूड और कीलियन एम्बाप्पे। मोरक्को : यासीन बोनो , अशरफ हकीमी, जवाद एल यामीक, नायेफ एगुएर्ड, रोमेन सैस , नूस्सैर मोजरई, सोफियान अमरबात, हाकिम जिएच, एजेदीन औनाही, सौफियाने बौफाल और यूसुफ एन-नेसरी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
इस बार 7 सितंबर शुक्रवार को वत्स द्वादशी है. हर मां अपनी संतान यानी बच्चों की रक्षा करना चाहती है और मां हर संतान की उन्नति चाहती है. हर मां संतान की पढ़ाई और नौकरी अच्छा करना चाहती है और ऐसी माताओं का बहुत बड़ा त्यौहार है वत्स द्वादशी. इसमें माँ व्रत करती है और विधि-विधान के साथ गाय-बछड़े की पूजा करती है. भादो महीने की त्रयोदशी तिथि को शुक्रवार यानी आज वत्स द्वादशी मनाई जाएगी. संतान देने वाला ग्रह शुक्र स्वराशि में और संतान का कारक ग्रह गुरु की तुला राशि में युति बना है. संतान देने वाले देव शिव जी की त्रयोदशी तिथि है. नक्षत्रों का राजा पुष्य नक्षत्र भी है. संतान के लिए जो भी मनोकामना मांगोगे जरूर पूरी होगी. - स्नान करके मां अपने बच्चों की कल्याण के लिए व्रत रखेंगी. - सफ़ेद या हलके रंग के वस्त्र धारण करेंगी. - एक गाय के बछड़े की मूर्ती या फोटो रखेंगी. - वरना मिट्टी के गाय का बछड़ा बनाकर भी पूजा कर सकते हैं. - गाय के बछड़े की पूजा करने से संतान की रक्षा होगी, संतान दीर्घायु होगी और संतान का करियर और पढ़ाई अच्छी होगी. बच्चों की अच्छी सेहत, दीर्घायु और पढ़ाई के लिए वत्स व्रत पूजा विधि क्या है? - माताएं व्रत का पालन कर के गाय के बछड़े की पूजा करेंगी. - गाय को फूलमाला चढ़ाएं. - केले या सेब का भोग लगाएं. - लड्डू का भोग लगाएं. - धूप और दीपक जलाएं. - गाय को कच्चा नारियल का भोग लगाएं. - इस दिन विशेष भोजन बनाकर गाय-बछड़े को भोग लगाएंगे और प्रसाद के रूप में खुद भी खाएं. - खास पकवान बनाए जाएंगे. - पकवान में पकोड़े की सब्ज़ी, चावल, मूंग की दाल, चने-चावल आदि बनाएं. - इस दिन चाकू का इस्तेमाल बिलकुल नहीं किया जाता है और ना ही चाकू से कोई फल या सब्जी काटी जाती है. - इस दिन कृष्णजी को केले का फल और लाड्डू का भोग लगाकर पूजा जरूर करें और गाय की सेवा करें. - इस दिन घर में दूध का इस्तेमाल बिलकुल नहीं करें. - घर का कोई भी व्यक्ति दूध नहीं पिए. - दूध से बनी मिठाई, मक्खन, दही, छाछ का इस्तेमाल नहीं करें. - इस दिन गाय का पूरा का पूरा दूध बछड़े के लिए छोड़ दिया जाता है. - इस दिन खट्टा, तीखा और मांसाहारी भोजन बिलकुल ना करें. - घर के सभी सदस्य नशे का सेवन ना करें.
इस बार सात सितंबर शुक्रवार को वत्स द्वादशी है. हर मां अपनी संतान यानी बच्चों की रक्षा करना चाहती है और मां हर संतान की उन्नति चाहती है. हर मां संतान की पढ़ाई और नौकरी अच्छा करना चाहती है और ऐसी माताओं का बहुत बड़ा त्यौहार है वत्स द्वादशी. इसमें माँ व्रत करती है और विधि-विधान के साथ गाय-बछड़े की पूजा करती है. भादो महीने की त्रयोदशी तिथि को शुक्रवार यानी आज वत्स द्वादशी मनाई जाएगी. संतान देने वाला ग्रह शुक्र स्वराशि में और संतान का कारक ग्रह गुरु की तुला राशि में युति बना है. संतान देने वाले देव शिव जी की त्रयोदशी तिथि है. नक्षत्रों का राजा पुष्य नक्षत्र भी है. संतान के लिए जो भी मनोकामना मांगोगे जरूर पूरी होगी. - स्नान करके मां अपने बच्चों की कल्याण के लिए व्रत रखेंगी. - सफ़ेद या हलके रंग के वस्त्र धारण करेंगी. - एक गाय के बछड़े की मूर्ती या फोटो रखेंगी. - वरना मिट्टी के गाय का बछड़ा बनाकर भी पूजा कर सकते हैं. - गाय के बछड़े की पूजा करने से संतान की रक्षा होगी, संतान दीर्घायु होगी और संतान का करियर और पढ़ाई अच्छी होगी. बच्चों की अच्छी सेहत, दीर्घायु और पढ़ाई के लिए वत्स व्रत पूजा विधि क्या है? - माताएं व्रत का पालन कर के गाय के बछड़े की पूजा करेंगी. - गाय को फूलमाला चढ़ाएं. - केले या सेब का भोग लगाएं. - लड्डू का भोग लगाएं. - धूप और दीपक जलाएं. - गाय को कच्चा नारियल का भोग लगाएं. - इस दिन विशेष भोजन बनाकर गाय-बछड़े को भोग लगाएंगे और प्रसाद के रूप में खुद भी खाएं. - खास पकवान बनाए जाएंगे. - पकवान में पकोड़े की सब्ज़ी, चावल, मूंग की दाल, चने-चावल आदि बनाएं. - इस दिन चाकू का इस्तेमाल बिलकुल नहीं किया जाता है और ना ही चाकू से कोई फल या सब्जी काटी जाती है. - इस दिन कृष्णजी को केले का फल और लाड्डू का भोग लगाकर पूजा जरूर करें और गाय की सेवा करें. - इस दिन घर में दूध का इस्तेमाल बिलकुल नहीं करें. - घर का कोई भी व्यक्ति दूध नहीं पिए. - दूध से बनी मिठाई, मक्खन, दही, छाछ का इस्तेमाल नहीं करें. - इस दिन गाय का पूरा का पूरा दूध बछड़े के लिए छोड़ दिया जाता है. - इस दिन खट्टा, तीखा और मांसाहारी भोजन बिलकुल ना करें. - घर के सभी सदस्य नशे का सेवन ना करें.
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सभी राजनीतिक दलों से कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए लगी पाबंदियों को हटाए जाने के नाम पर नागरिकों की जान से खिलवाड़ न करने की अपील की है। ठाकरे ने किसी पार्टी के नाम का जिक्र किए बगैर कहा कि राजनीति करने के लिए तो पूरा जीवन पड़ा है, राजनीतिक दलों को अगर आंदोलन ही करना है तो कोरोना के विरुद्ध करें, ताकि राज्य कोरोना मुक्त हो सके। मुख्यमंत्री ठाकरे रविवार को कोरोना टास्क फोर्स की ओर से आयोजित आनलाइन कार्यक्रम 'हमारा डॉक्टर' को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर अभी खत्म नहीं हुई है। कोरोना की तीसरी लहर की संभावना भी केंद्र सरकार की तरफ से व्यक्त की गई है। यह लहर हम तक न पहुंचे, इसके लिए सभी को सावधान रहना जरूरी है। महाराष्ट्र सरकार ने तीसरी लहर की रोकथाम के लिए हर तरह की व्यवस्था की है और आगे भी इसकी तैयारी की जा रही है। राज्य में अगर तीसरी लहर आए तो उससे कम से कम नुकसान हो, राज्य सरकार इसका हर स्तर पर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की इस तैयारी में आम लोगों का भी सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि कोरोना की पहली लहर में राज्य में आक्सीजन की कमी महसूस की गई थी। अन्य राज्यों से आक्सीजन मंगाना पड़ा था। दूसरी लहरी के बाद तीसरी लहर में आक्सीजन की कमी न होने पाए, इसलिए प्रशासन को अभी से तैयार रहना चाहिए। साथ ही सूबे में वर्षाजनित बीमारियां ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग को इन सब पर ध्यान देना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय यह शुरु करो, वह शुरु करो जैसी मांगें जोरदार तरीके से की जा रही हैं। कई राजनीतिक दल इसे लेकर जोरदार आंदोलन भी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति करने से हमारा फायदा होता है, लेकिन कोरोना के समय इस तरह के आंदोलन से लोगों की जान जा सकती है। इसलिए सभी राजनीतिक दलों को अगर आंदोलन करना ही है तो वे कोरोना के विरुद्ध करें, ताकि कोरोना से मुक्ति मिल सके।
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सभी राजनीतिक दलों से कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए लगी पाबंदियों को हटाए जाने के नाम पर नागरिकों की जान से खिलवाड़ न करने की अपील की है। ठाकरे ने किसी पार्टी के नाम का जिक्र किए बगैर कहा कि राजनीति करने के लिए तो पूरा जीवन पड़ा है, राजनीतिक दलों को अगर आंदोलन ही करना है तो कोरोना के विरुद्ध करें, ताकि राज्य कोरोना मुक्त हो सके। मुख्यमंत्री ठाकरे रविवार को कोरोना टास्क फोर्स की ओर से आयोजित आनलाइन कार्यक्रम 'हमारा डॉक्टर' को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर अभी खत्म नहीं हुई है। कोरोना की तीसरी लहर की संभावना भी केंद्र सरकार की तरफ से व्यक्त की गई है। यह लहर हम तक न पहुंचे, इसके लिए सभी को सावधान रहना जरूरी है। महाराष्ट्र सरकार ने तीसरी लहर की रोकथाम के लिए हर तरह की व्यवस्था की है और आगे भी इसकी तैयारी की जा रही है। राज्य में अगर तीसरी लहर आए तो उससे कम से कम नुकसान हो, राज्य सरकार इसका हर स्तर पर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की इस तैयारी में आम लोगों का भी सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि कोरोना की पहली लहर में राज्य में आक्सीजन की कमी महसूस की गई थी। अन्य राज्यों से आक्सीजन मंगाना पड़ा था। दूसरी लहरी के बाद तीसरी लहर में आक्सीजन की कमी न होने पाए, इसलिए प्रशासन को अभी से तैयार रहना चाहिए। साथ ही सूबे में वर्षाजनित बीमारियां ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग को इन सब पर ध्यान देना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय यह शुरु करो, वह शुरु करो जैसी मांगें जोरदार तरीके से की जा रही हैं। कई राजनीतिक दल इसे लेकर जोरदार आंदोलन भी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति करने से हमारा फायदा होता है, लेकिन कोरोना के समय इस तरह के आंदोलन से लोगों की जान जा सकती है। इसलिए सभी राजनीतिक दलों को अगर आंदोलन करना ही है तो वे कोरोना के विरुद्ध करें, ताकि कोरोना से मुक्ति मिल सके।
गोरखपुर (ब्यूरो). अभी तक कंपीटेंसी आधारित सवाल केवल दीर्घ उत्तरीय ही पूछे जाते थे। अब मल्टीपल च्वाइस, केस स्टडी, लघु उत्तरीय प्रश्न में भी क्षमता आधारित प्रश्न को शामिल किया गया है। कोरोना संक्रमण के कारण दसवीं और 12वीं बोर्ड एग्जाम दो पार्ट में टर्म-1 और टर्म-2 के आधार पर लिया गया, लेकिन साल 2023 में फिर एक ही बार बोर्ड एग्जाम ऑर्गनाइज होगा। इसके लिए बोर्ड ने नौंवी-दसवीं और 11वीं-12वीं का क्वेश्चन पेपर पैटर्न जारी किया है। बोर्ड द्वारा मल्टीपल च्वाइस वाले क्वेश्चन को रखा गया है। टर्म-1 एग्जाम में मल्टीपल च्वाइस के सवाल पूछे गये थे, जो विषयवार सिलेबस का 50 फीसदी था। अब 20 फीसदी ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन में ही मल्टीपल च्वाइस के रहेंगे। बोर्ड ने स्कूलों को नौवीं और 11वीं के एनुअल एग्जाम भी भी इसी पैटर्न पर लेने का निर्देश दिया है। इससे स्टूडेंट्स अपना आकलन कर पाएंगे। बोर्ड द्वारा आंतरिक मूल्यांकन में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। आंतरिक मूल्यांकन पहले जैसे ही 20 फीसदी रखा गया है। किताबी दुनिया से बच्चे अलग सोचें, इसके लिए कंपीटेंसी आधारित सवालों की संख्या बढ़ाई गई है। इसके तहत वास्तविक जीवन से जुड़े सवाल बोर्ड एग्जाम में पूछे जाएंगे। इससे स्टूडेंट्स को वास्तविक जीवन और दिनचर्या की जानकारी होगी। अभी तक किताबी दुनिया से जुड़े सवाल ही पूछे जाते थे। बोर्ड ने बहुत ही अच्छा डिसिजन लिया है। कम्पीटेंसी बेस्ड सवालों का आंसर देने के लिए स्टूडेंट्स को किताब को रटना नहीं बल्कि समझना जरूरी है। तभी वो ऐसे सवालों के आंसर दे पाएंगे। सीआईएससीई ने दसवीं और 12वीं का संशोधित सिलेबस जारी किया है। इसके साथ ही बोर्ड ने दसवीं और 12वीं का एक बोर्ड लेने की घोषणा भी की है। कोरोना संक्रमण के कारण सीआईएससीई ने 2022 का बोर्ड एग्जाम दो पार्ट सेमेस्टर-1 और सेमेस्टर-2 लिया था। इसके अलावा नौवीं से 12वीं तक के सिलेबस में भी कटौती की थी। अब फिर बोर्ड ने संशोधित सिलेबस जारी कर दिया है। कोआर्डिनेटर सुदर्शन चौधरी ने बताया कि अब साल 2023 में दसवीं और 12वीं का एक ही बोर्ड एग्जाम होगा। एग्जाम फरवरी और मार्च 2023 में होगा। बोर्ड द्वारा जुलाई 2022 में सभी विषयों का सैंपल पेपर जारी किया जाएगा। इस सत्र के लिए प्रश्न का पैटर्न जारी किया गया है। प्रश्न किस तरह का रहेगा, इसकी जानकारी दी गयी है। सैंपल पेपर जल्द जारी किया जाएगा। क्षमता आधारित प्रश्न अधिक पूछे जाएंगे।
गोरखपुर . अभी तक कंपीटेंसी आधारित सवाल केवल दीर्घ उत्तरीय ही पूछे जाते थे। अब मल्टीपल च्वाइस, केस स्टडी, लघु उत्तरीय प्रश्न में भी क्षमता आधारित प्रश्न को शामिल किया गया है। कोरोना संक्रमण के कारण दसवीं और बारहवीं बोर्ड एग्जाम दो पार्ट में टर्म-एक और टर्म-दो के आधार पर लिया गया, लेकिन साल दो हज़ार तेईस में फिर एक ही बार बोर्ड एग्जाम ऑर्गनाइज होगा। इसके लिए बोर्ड ने नौंवी-दसवीं और ग्यारहवीं-बारहवीं का क्वेश्चन पेपर पैटर्न जारी किया है। बोर्ड द्वारा मल्टीपल च्वाइस वाले क्वेश्चन को रखा गया है। टर्म-एक एग्जाम में मल्टीपल च्वाइस के सवाल पूछे गये थे, जो विषयवार सिलेबस का पचास फीसदी था। अब बीस फीसदी ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन में ही मल्टीपल च्वाइस के रहेंगे। बोर्ड ने स्कूलों को नौवीं और ग्यारहवीं के एनुअल एग्जाम भी भी इसी पैटर्न पर लेने का निर्देश दिया है। इससे स्टूडेंट्स अपना आकलन कर पाएंगे। बोर्ड द्वारा आंतरिक मूल्यांकन में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। आंतरिक मूल्यांकन पहले जैसे ही बीस फीसदी रखा गया है। किताबी दुनिया से बच्चे अलग सोचें, इसके लिए कंपीटेंसी आधारित सवालों की संख्या बढ़ाई गई है। इसके तहत वास्तविक जीवन से जुड़े सवाल बोर्ड एग्जाम में पूछे जाएंगे। इससे स्टूडेंट्स को वास्तविक जीवन और दिनचर्या की जानकारी होगी। अभी तक किताबी दुनिया से जुड़े सवाल ही पूछे जाते थे। बोर्ड ने बहुत ही अच्छा डिसिजन लिया है। कम्पीटेंसी बेस्ड सवालों का आंसर देने के लिए स्टूडेंट्स को किताब को रटना नहीं बल्कि समझना जरूरी है। तभी वो ऐसे सवालों के आंसर दे पाएंगे। सीआईएससीई ने दसवीं और बारहवीं का संशोधित सिलेबस जारी किया है। इसके साथ ही बोर्ड ने दसवीं और बारहवीं का एक बोर्ड लेने की घोषणा भी की है। कोरोना संक्रमण के कारण सीआईएससीई ने दो हज़ार बाईस का बोर्ड एग्जाम दो पार्ट सेमेस्टर-एक और सेमेस्टर-दो लिया था। इसके अलावा नौवीं से बारहवीं तक के सिलेबस में भी कटौती की थी। अब फिर बोर्ड ने संशोधित सिलेबस जारी कर दिया है। कोआर्डिनेटर सुदर्शन चौधरी ने बताया कि अब साल दो हज़ार तेईस में दसवीं और बारहवीं का एक ही बोर्ड एग्जाम होगा। एग्जाम फरवरी और मार्च दो हज़ार तेईस में होगा। बोर्ड द्वारा जुलाई दो हज़ार बाईस में सभी विषयों का सैंपल पेपर जारी किया जाएगा। इस सत्र के लिए प्रश्न का पैटर्न जारी किया गया है। प्रश्न किस तरह का रहेगा, इसकी जानकारी दी गयी है। सैंपल पेपर जल्द जारी किया जाएगा। क्षमता आधारित प्रश्न अधिक पूछे जाएंगे।
गेयटी थियेटर फेस्टीवल के तहत अनुकृति रंगमंडल कानपुर के कलाकारों ने भाषा एवं संस्कृति विभाग शिमला के तत्त्वावधान में दो नाटकों जहर और मुख्यमंत्री का मंचन किया। जीवन के जटिल सवालों का जवाब तलाशता-जहर और सत्ता की लालसा से चढ़ रही लोकतांत्रिक मूल्यों की बलि-मुख्यमंत्री दोनों नाटकों के माध्यम से कलाकारों ने समाज में फैली कुरीतियों पर तंज कसे। अनुकृति रंगमंडल कानपुर के कार्यकारी सचिव डा. ओमेंद्र कुमार और संकल्प रंगमंडल शिमला के अध्यक्ष केदार ठाकुर ने बताया कि जहर नाटक प्रेम विवाह करने वाले युगल के वास्तविक जीवन में आने वाली जटिलताओं को दिखाता है। इसमें महेंद्र धुरिया व प्रवीण अरोड़ा ने अभिनय किया। मंच व्यवस्था विजय भास्क, शिवेंद्र, दिलीप ने संभाली। निर्देशन सहयोग व संगीत शुभी मेहरोत्रा का था। लेखक पंकज सोनी, निर्देशक प्रवीण अरोड़ा एवं प्रकाश पलिकल्पना कृष्णा सक्सेना की रही। उधर, राजनीतिज्ञ के अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए किसी भी प्रकार के समझौते स न चूकने और लोकतांत्रिक मूल्यों की बलि तक देने को दर्शाता हुआ मुख्यमंत्री नाटक प्रस्तुत किया गया। इसमें प्रमुख भूमिकाओं में दीपक राज राही, आरती शुक्ला, विजय भास्कर, सुरेश श्रीवास्तव, जॉली घोष, शिवेंद्र त्रिवेदी, तुषार, महेंद्र धुरिया, दिलीप सिंह सेंगर, सुमित गुप्ता, दीपिका सिंह, श्रेया बनोदिया, महेश जायसवाल, शिवी वाजपेयी, नरेंद्र सिंह राजपूत, राजराम राही, आकाश शर्मा, विकास राय, कुशल गुप्ता, शिवम आर्या शामिल रहे। मंच व्यवस्था आकाश, अलख त्रिपाठी ने संभाली। सलाहकार निर्देशक प्रकाश, परिकल्पना कृष्णा सक्सेना और निर्देशन एवं संगीत डा. ओमेंद्र कुमार का रहा। दिल्ली से उस्ताद विस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार से सम्मानित केहर सिंह ठाकुर करेंगे।
गेयटी थियेटर फेस्टीवल के तहत अनुकृति रंगमंडल कानपुर के कलाकारों ने भाषा एवं संस्कृति विभाग शिमला के तत्त्वावधान में दो नाटकों जहर और मुख्यमंत्री का मंचन किया। जीवन के जटिल सवालों का जवाब तलाशता-जहर और सत्ता की लालसा से चढ़ रही लोकतांत्रिक मूल्यों की बलि-मुख्यमंत्री दोनों नाटकों के माध्यम से कलाकारों ने समाज में फैली कुरीतियों पर तंज कसे। अनुकृति रंगमंडल कानपुर के कार्यकारी सचिव डा. ओमेंद्र कुमार और संकल्प रंगमंडल शिमला के अध्यक्ष केदार ठाकुर ने बताया कि जहर नाटक प्रेम विवाह करने वाले युगल के वास्तविक जीवन में आने वाली जटिलताओं को दिखाता है। इसमें महेंद्र धुरिया व प्रवीण अरोड़ा ने अभिनय किया। मंच व्यवस्था विजय भास्क, शिवेंद्र, दिलीप ने संभाली। निर्देशन सहयोग व संगीत शुभी मेहरोत्रा का था। लेखक पंकज सोनी, निर्देशक प्रवीण अरोड़ा एवं प्रकाश पलिकल्पना कृष्णा सक्सेना की रही। उधर, राजनीतिज्ञ के अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए किसी भी प्रकार के समझौते स न चूकने और लोकतांत्रिक मूल्यों की बलि तक देने को दर्शाता हुआ मुख्यमंत्री नाटक प्रस्तुत किया गया। इसमें प्रमुख भूमिकाओं में दीपक राज राही, आरती शुक्ला, विजय भास्कर, सुरेश श्रीवास्तव, जॉली घोष, शिवेंद्र त्रिवेदी, तुषार, महेंद्र धुरिया, दिलीप सिंह सेंगर, सुमित गुप्ता, दीपिका सिंह, श्रेया बनोदिया, महेश जायसवाल, शिवी वाजपेयी, नरेंद्र सिंह राजपूत, राजराम राही, आकाश शर्मा, विकास राय, कुशल गुप्ता, शिवम आर्या शामिल रहे। मंच व्यवस्था आकाश, अलख त्रिपाठी ने संभाली। सलाहकार निर्देशक प्रकाश, परिकल्पना कृष्णा सक्सेना और निर्देशन एवं संगीत डा. ओमेंद्र कुमार का रहा। दिल्ली से उस्ताद विस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार से सम्मानित केहर सिंह ठाकुर करेंगे।
ऐसा देखा था मानो उत्सुक होकर चिताकी अग्निने ही उन्हें व्याप्त कर लिया हो ॥ ६० ॥ शत्रु राजारूपी मेघोंके द्वारा ऊपर उठाई हुई दुर्वार तलवारें ही जिनमें जलकी बड़ी-बड़ी लहरें उठ रहीं हैं ऐसी शत्रु राजाओकी सेनारूपी नदियां युद्ध भूमि में आ पहुॅची । सावार्थजिस प्रकार मेघोंसे दुधर जलकी वर्षा होनेके कारण बड़ी-बड़ी लहरोंसे भरी पहाड़ी नदियां थोड़ी ही देरमे भूमिपर आकर बहने लगती है इसीप्रकार शत्रू राजाओंकी सेनाएं तलवाररूपी वड़ी-घड़ी लहरोंके साथ युद्ध के मैदानमे आ निकली ॥ ६१ ।। जिसका उत्साह प्रशंसनीय था, तथा जो हर्प एवं कार सहित आकारको धारण कर रही थी ऐसी सारपूर्ण आरम्भ करनेवाले आपकी सेना उस समय बड़े वेगसे चल रही थी ॥ ६२ ।। उस समय धनुर्दण्डसे छूटे हुए बाणोंसे काश आच्छादित हो गया था और सूर्यका प्रकाश कम हो गया था जिससे ऐसा जान पड़ता था मानो सूर्यने तीव्र भय से ही अपने किरणोंका संकोच कर लिया हो ॥ ६३ ॥ सेनाके जोरदार शब्दोंसे भरे हुए युद्धके मैदानमें, जिनके दोनों गण्डस्थलोंसे एक सदश रेखाके आकारसे मदजलकी नदियां वह रही थीं ऐसे हाथी इसप्रकार इधर-उधर दौड़ रहे थे जिसप्रकार कि युद्धसे उद्धत हुए घोड़े इधर उधर दौड़ने लगते हैं ॥ ६४ ॥ रणरूपी सागरमें जहाँ-जहाँ छन्त्ररूपी सफेद कमल ऊँचे उठे हुए दिखाई देते थे वहीं - वहीं पर योद्धाओंके वाणरूपी भ्रमर जाकर पड़ते थे ।। ६५ ॥ हे भगवन् ! सेनापति से सहित आपकी सेनाने, नये-नये शब्द करनेवाले चाणोंके द्वारा, मानकी बाधाअन्धे, शीघ्रतासे भरे हुए एवं पराक्रमके पुञ्ज स्वरूप किन मनुष्योंको नष्ट नहीं कर दिया था ।। ६६ ॥ हे स्वामिन् ! शत्रुओंकी सेना वो सदा काल सूर्यकी दीप्तिको आच्छादित करनेवाले वारणों से भरी रहती थी और आपकी सेना
ऐसा देखा था मानो उत्सुक होकर चिताकी अग्निने ही उन्हें व्याप्त कर लिया हो ॥ साठ ॥ शत्रु राजारूपी मेघोंके द्वारा ऊपर उठाई हुई दुर्वार तलवारें ही जिनमें जलकी बड़ी-बड़ी लहरें उठ रहीं हैं ऐसी शत्रु राजाओकी सेनारूपी नदियां युद्ध भूमि में आ पहुॅची । सावार्थजिस प्रकार मेघोंसे दुधर जलकी वर्षा होनेके कारण बड़ी-बड़ी लहरोंसे भरी पहाड़ी नदियां थोड़ी ही देरमे भूमिपर आकर बहने लगती है इसीप्रकार शत्रू राजाओंकी सेनाएं तलवाररूपी वड़ी-घड़ी लहरोंके साथ युद्ध के मैदानमे आ निकली ॥ इकसठ ।। जिसका उत्साह प्रशंसनीय था, तथा जो हर्प एवं कार सहित आकारको धारण कर रही थी ऐसी सारपूर्ण आरम्भ करनेवाले आपकी सेना उस समय बड़े वेगसे चल रही थी ॥ बासठ ।। उस समय धनुर्दण्डसे छूटे हुए बाणोंसे काश आच्छादित हो गया था और सूर्यका प्रकाश कम हो गया था जिससे ऐसा जान पड़ता था मानो सूर्यने तीव्र भय से ही अपने किरणोंका संकोच कर लिया हो ॥ तिरेसठ ॥ सेनाके जोरदार शब्दोंसे भरे हुए युद्धके मैदानमें, जिनके दोनों गण्डस्थलोंसे एक सदश रेखाके आकारसे मदजलकी नदियां वह रही थीं ऐसे हाथी इसप्रकार इधर-उधर दौड़ रहे थे जिसप्रकार कि युद्धसे उद्धत हुए घोड़े इधर उधर दौड़ने लगते हैं ॥ चौंसठ ॥ रणरूपी सागरमें जहाँ-जहाँ छन्त्ररूपी सफेद कमल ऊँचे उठे हुए दिखाई देते थे वहीं - वहीं पर योद्धाओंके वाणरूपी भ्रमर जाकर पड़ते थे ।। पैंसठ ॥ हे भगवन् ! सेनापति से सहित आपकी सेनाने, नये-नये शब्द करनेवाले चाणोंके द्वारा, मानकी बाधाअन्धे, शीघ्रतासे भरे हुए एवं पराक्रमके पुञ्ज स्वरूप किन मनुष्योंको नष्ट नहीं कर दिया था ।। छयासठ ॥ हे स्वामिन् ! शत्रुओंकी सेना वो सदा काल सूर्यकी दीप्तिको आच्छादित करनेवाले वारणों से भरी रहती थी और आपकी सेना
दोनों देशों के बीच संबधों में इसलिए भी मजबूती आई है क्योंकि चीन होंडुरास में विशाल बांध बना रहा है. चीन की यह रणनीति रही है कि वह ताइवान के साथ संबंध तोड़ने वाले देशों में निवेश बढ़ाता रहा है. सेंट्रल अमेरिकी देश होंडुरास और चीन के बीच जल्द ही राजनयिक संबंध शुरू हो सकते हैं. होंडुरास (Honduras) की राष्ट्रपति शियोमारा कास्त्रो (Xiomara Castro) ने मंगलवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि उनकी सरकार चीन से राजनयिक संबंध स्थापित करना चाहती है. उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए उन्होंने विदेश मंत्री एडवर्डो रिएना को बातचीत शुरू करने का भी निर्देश दिया है. भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, शियोमारा कास्त्रो की इस घोषणा के बाद होंडुरास के ताइवान से संबंध टूटने की आशंका बढ़ गई है. होंडुरास की ओर से चीन के साथ राजनयिक संबंध शुरू करने के बाद ताइवान के पास केवल 13 देशों की मान्यता रह जाएगी. दूसरी ओर चीन है जो अक्सर ताइवान को अपना हिस्सा बताता है. होंडुरास और चीन के बीच संबंध स्थापित करने को लेकर कास्त्रो ने 2021 में राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि अगर वह चुनाव जीतती हैं तो चीन के साथ संबंधों पर ध्यान देंगी. हालांकि, चुनाव जीतने के बाद उनकी सरकार पर इस मसले पर पीछे हट गई थी, लेकिन अब एक बार फिर से उन्होंने संबंधों को शुरू करने के निर्देश दी हैं. जनवरी 2022 में होंडुरास की विदेश मंत्री ने कहा था कि उनका देश ताइवान के साथ संबंधों को मजबूत बनाने का सिलसिला जारी रखेगा. इसके साथ-साथ उन्होंने यह भी कहा था कि चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करना उनकी सरकार की प्रथामिकता नहीं है. यह भी पढ़ें- China News: बूढ़ी आबादी से परेशान चीन क्यों बढ़ाना चाहता है रिटायरमेंट की उम्र? ताइवान ने आगे कहा है कि वह इस मसले पर होंडुरास सरकार से सावधानी से विचार करने और चीन के जाल में न फंसने की अपील की है जिससे कि दोनों देशों के बीच मित्रता को कोई नुकसान न पहुंचे. होंडुरास के इस ऐलान पर चीन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
दोनों देशों के बीच संबधों में इसलिए भी मजबूती आई है क्योंकि चीन होंडुरास में विशाल बांध बना रहा है. चीन की यह रणनीति रही है कि वह ताइवान के साथ संबंध तोड़ने वाले देशों में निवेश बढ़ाता रहा है. सेंट्रल अमेरिकी देश होंडुरास और चीन के बीच जल्द ही राजनयिक संबंध शुरू हो सकते हैं. होंडुरास की राष्ट्रपति शियोमारा कास्त्रो ने मंगलवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि उनकी सरकार चीन से राजनयिक संबंध स्थापित करना चाहती है. उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए उन्होंने विदेश मंत्री एडवर्डो रिएना को बातचीत शुरू करने का भी निर्देश दिया है. भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, शियोमारा कास्त्रो की इस घोषणा के बाद होंडुरास के ताइवान से संबंध टूटने की आशंका बढ़ गई है. होंडुरास की ओर से चीन के साथ राजनयिक संबंध शुरू करने के बाद ताइवान के पास केवल तेरह देशों की मान्यता रह जाएगी. दूसरी ओर चीन है जो अक्सर ताइवान को अपना हिस्सा बताता है. होंडुरास और चीन के बीच संबंध स्थापित करने को लेकर कास्त्रो ने दो हज़ार इक्कीस में राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि अगर वह चुनाव जीतती हैं तो चीन के साथ संबंधों पर ध्यान देंगी. हालांकि, चुनाव जीतने के बाद उनकी सरकार पर इस मसले पर पीछे हट गई थी, लेकिन अब एक बार फिर से उन्होंने संबंधों को शुरू करने के निर्देश दी हैं. जनवरी दो हज़ार बाईस में होंडुरास की विदेश मंत्री ने कहा था कि उनका देश ताइवान के साथ संबंधों को मजबूत बनाने का सिलसिला जारी रखेगा. इसके साथ-साथ उन्होंने यह भी कहा था कि चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करना उनकी सरकार की प्रथामिकता नहीं है. यह भी पढ़ें- China News: बूढ़ी आबादी से परेशान चीन क्यों बढ़ाना चाहता है रिटायरमेंट की उम्र? ताइवान ने आगे कहा है कि वह इस मसले पर होंडुरास सरकार से सावधानी से विचार करने और चीन के जाल में न फंसने की अपील की है जिससे कि दोनों देशों के बीच मित्रता को कोई नुकसान न पहुंचे. होंडुरास के इस ऐलान पर चीन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
Moto G60s स्मार्टफोन की कीमत ब्राज़ील में 2,499 BRL यानी लगभग 35,522 रुपये रखी गई है। इस कीमत में 6GB रैम + 128GB स्टोरेज वेरिएंट मिलेगा। वहीं इस डिवाइस को ब्लू और ग्रीन कलर ऑप्शन में लॉन्च किया गया है। फिलहाल, यह जानकारी नहीं मिली है कि इस स्मार्टफोन को भारत समेत अन्य देशों में कब तक लॉन्च किया जाएगा। Moto G60s स्मार्टफोन में 6. 8 इंच का पंच-होल डिस्प्ले दिया गया है। प्रोसेसर के लिए स्मार्टफोन में MediaTek Helio G95 चिपसेट की दी गई है। जो 6GB रैम और 128GB की इंटरनल स्टोरेज के साथ आती है। यह डिवाइस एंड्राइड 11 (Android 11) आउट ऑफ द बॉक्स पर काम करता है। पावर बैकअप के लिए स्मार्टफोन में 5000mAh की जंबो बैटरी दी गई है। जो 50W turbocharging चार्जिंग सपोर्ट के साथ आती है। इसके अलावा इस स्मार्टफोन में सुरक्षा के लिए फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया गया है, वहीं कनेक्टिविटी के लिए वाई-फाई, जीपीएस, ब्लूटूथ और यूएसबी टाईप-सी पोर्ट जैसे फीचर्स दिए गए हैं। फोटोग्राफी के लिए Moto G60s स्मार्टफोन में क्वाड रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। जिसका पहला 64MP का प्राइमरी सेंसर है, जबकि दूसरा 8MP का अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस, तीसरा 5MP का मैक्रो लेंस और चौथा 2MP का डेप्थ सेंसर है। वहीं सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 16MP का कैमरा दिया गया है।
Moto Gसाठ सेकंड स्मार्टफोन की कीमत ब्राज़ील में दो,चार सौ निन्यानवे BRL यानी लगभग पैंतीस,पाँच सौ बाईस रुपयापये रखी गई है। इस कीमत में छःGB रैम + एक सौ अट्ठाईसGB स्टोरेज वेरिएंट मिलेगा। वहीं इस डिवाइस को ब्लू और ग्रीन कलर ऑप्शन में लॉन्च किया गया है। फिलहाल, यह जानकारी नहीं मिली है कि इस स्मार्टफोन को भारत समेत अन्य देशों में कब तक लॉन्च किया जाएगा। Moto Gसाठ सेकंड स्मार्टफोन में छः. आठ इंच का पंच-होल डिस्प्ले दिया गया है। प्रोसेसर के लिए स्मार्टफोन में MediaTek Helio Gपचानवे चिपसेट की दी गई है। जो छःGB रैम और एक सौ अट्ठाईसGB की इंटरनल स्टोरेज के साथ आती है। यह डिवाइस एंड्राइड ग्यारह आउट ऑफ द बॉक्स पर काम करता है। पावर बैकअप के लिए स्मार्टफोन में पाँच हज़ारmAh की जंबो बैटरी दी गई है। जो पचास वाट turbocharging चार्जिंग सपोर्ट के साथ आती है। इसके अलावा इस स्मार्टफोन में सुरक्षा के लिए फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया गया है, वहीं कनेक्टिविटी के लिए वाई-फाई, जीपीएस, ब्लूटूथ और यूएसबी टाईप-सी पोर्ट जैसे फीचर्स दिए गए हैं। फोटोग्राफी के लिए Moto Gसाठ सेकंड स्मार्टफोन में क्वाड रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। जिसका पहला चौंसठMP का प्राइमरी सेंसर है, जबकि दूसरा आठMP का अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस, तीसरा पाँचMP का मैक्रो लेंस और चौथा दोMP का डेप्थ सेंसर है। वहीं सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए सोलहMP का कैमरा दिया गया है।
15वीं सदी की इस चीनी कथा का लेखक अज्ञात है। इसे 'किन-कूकी-कुआन' से लिया गया है। सदियों पहले की बात है। शान्त ग्रामांचल में च्वांग नामक दार्शनिक रहता था। ग्राम-समाज में उसकी बड़ी प्रतिष्ठा थी। च्वांग की पहली पत्नी की मृत्यु हुई, दूसरी पत्नी को उसने तलाक दिया और अब तीसरी सुन्दरी पत्नी के साथ वह सुख से रहता था। च्वांग ने बड़ी जल्दी मिट्टी को सुखा दिया। उसके उपकार को चुकाने के लिए उस सुन्दरी ने एक नया पंखा तथा बालों में लगा चाँदी का हेयरपिन निकालकर उसकी ओर बढ़ाया। च्वांग ने पंखा तो ले लिया, पर हेयरपिन अपनी पत्नी के डर के कारण उसने नहीं लिया। च्वांग ने पूरी दास्तान बता दी। सुनते ही उसकी पत्नी थू-थू करने लगी, "ऐसी औरतें औरत जात पर कलंक हैं..." और उसने वह पंखा तोड़-ताड़ कर फेंक दिया। "अरे, सब यही करती हैं," च्वांग ने कहा। "खैर छोड़ो..." कहकर च्वांग दूसरे कमरे में चला गया। और यह सुनकर च्वांग बड़ी शान्तिपूर्वक मर गया। उसकी पत्नी गहरे दुख में डूब गयी। वह विलाप करने लगी। मातम मनाया जाने लगा। दुख प्रकट करने वालों का ताँता लग गया। च्वांग की विधवा पत्नी के दरवाजे पर एक बेहद सुन्दर सजीला-सलोना जवान आकर घोड़े से उतरा। वह वेशभूषा से राजकुमार लग रहा था। आते ही राजकुमार ने पश्चात्ताप प्रकट किया। वह बोला, "विद्वान च्वांग को गुरु बनाने आया था, पर मेरा दुर्भाग्य कि वे अब नहीं रहे..." इतना कहकर राजकुमार ने चार बार वहाँ की धरती को चूमा, जहाँ शव बक्से में बन्द रखा हुआ था। और जब च्वांग की पत्नी के पास राजकुमार संवेदना प्रकट करने पहुँचा, तो विधवा पत्नी अपने को उसे देखने से रोक नहीं पायी। वह राजकुमार पर मुग्ध हो गयी। उसने अनुरोध किया राजकुमार कुछ दिनों वहीं रहें और उसके पति के लिखे ग्रन्थ का अध्ययन करें। धीरे-धीरे च्वांग की विधवा राजकुमार के प्रति इतनी आकर्षित हो गयी कि उसने अपनी इच्छा प्रकट कर दी। राजकुमार भी आकर्षित हो चुका था। उसने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। जब विवाह सम्पन्न हो गया, तो च्वांग की पत्नी और राजकुमार सुहागरात मनाने कमरे में पहुँचे। वहाँ पहुँचते ही राजकुमार को दौरा पड़ा और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। च्वांग की पत्नी घबराकर नौकर के पास दौड़ी। नौकर ने बताया कि राजकुमार की इस बीमारी की एक ही दवा है कि किसी आदमी का भेजा निकालकर फौरन सुँघाया जाए। च्वांग की पत्नी ने तत्काल एक निर्णय लिया। उसने गँडासा उठाया, पति की शव पेटी को काटना शुरू किया। ऊपर की लकड़ी टूटते ही उसका पति च्यांग जीवित होकर उठ बैठा। "पर ये शादी के कपड़े कैसे?" च्वांग ने पूछा। "इसलिए कि मैं तुम्हारा स्वागत मातमी कपड़ों में कैसे करती..." कहते हुए वह वहीं ठिठकी खड़ी रही। च्वांग अपनी पत्नी को लेकर बड़े कमरे में आया, तो यह देखकर हैरान हुआ कि वहाँ सुहागसेज सजी हुई थी और च्वांग की पत्नी यह देखकर दंग रह गयी कि बेहोश राजकुमार का नामोनिशान नहीं था। च्वांग की पत्नी ने डरते-डरते उधर देखा - राजकुमार सेज के पास खड़ा था। घबराकर उसने पीछे अपने पति की ओर देखा, च्वांग वहाँ नहीं था।
पंद्रहवीं सदी की इस चीनी कथा का लेखक अज्ञात है। इसे 'किन-कूकी-कुआन' से लिया गया है। सदियों पहले की बात है। शान्त ग्रामांचल में च्वांग नामक दार्शनिक रहता था। ग्राम-समाज में उसकी बड़ी प्रतिष्ठा थी। च्वांग की पहली पत्नी की मृत्यु हुई, दूसरी पत्नी को उसने तलाक दिया और अब तीसरी सुन्दरी पत्नी के साथ वह सुख से रहता था। च्वांग ने बड़ी जल्दी मिट्टी को सुखा दिया। उसके उपकार को चुकाने के लिए उस सुन्दरी ने एक नया पंखा तथा बालों में लगा चाँदी का हेयरपिन निकालकर उसकी ओर बढ़ाया। च्वांग ने पंखा तो ले लिया, पर हेयरपिन अपनी पत्नी के डर के कारण उसने नहीं लिया। च्वांग ने पूरी दास्तान बता दी। सुनते ही उसकी पत्नी थू-थू करने लगी, "ऐसी औरतें औरत जात पर कलंक हैं..." और उसने वह पंखा तोड़-ताड़ कर फेंक दिया। "अरे, सब यही करती हैं," च्वांग ने कहा। "खैर छोड़ो..." कहकर च्वांग दूसरे कमरे में चला गया। और यह सुनकर च्वांग बड़ी शान्तिपूर्वक मर गया। उसकी पत्नी गहरे दुख में डूब गयी। वह विलाप करने लगी। मातम मनाया जाने लगा। दुख प्रकट करने वालों का ताँता लग गया। च्वांग की विधवा पत्नी के दरवाजे पर एक बेहद सुन्दर सजीला-सलोना जवान आकर घोड़े से उतरा। वह वेशभूषा से राजकुमार लग रहा था। आते ही राजकुमार ने पश्चात्ताप प्रकट किया। वह बोला, "विद्वान च्वांग को गुरु बनाने आया था, पर मेरा दुर्भाग्य कि वे अब नहीं रहे..." इतना कहकर राजकुमार ने चार बार वहाँ की धरती को चूमा, जहाँ शव बक्से में बन्द रखा हुआ था। और जब च्वांग की पत्नी के पास राजकुमार संवेदना प्रकट करने पहुँचा, तो विधवा पत्नी अपने को उसे देखने से रोक नहीं पायी। वह राजकुमार पर मुग्ध हो गयी। उसने अनुरोध किया राजकुमार कुछ दिनों वहीं रहें और उसके पति के लिखे ग्रन्थ का अध्ययन करें। धीरे-धीरे च्वांग की विधवा राजकुमार के प्रति इतनी आकर्षित हो गयी कि उसने अपनी इच्छा प्रकट कर दी। राजकुमार भी आकर्षित हो चुका था। उसने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। जब विवाह सम्पन्न हो गया, तो च्वांग की पत्नी और राजकुमार सुहागरात मनाने कमरे में पहुँचे। वहाँ पहुँचते ही राजकुमार को दौरा पड़ा और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। च्वांग की पत्नी घबराकर नौकर के पास दौड़ी। नौकर ने बताया कि राजकुमार की इस बीमारी की एक ही दवा है कि किसी आदमी का भेजा निकालकर फौरन सुँघाया जाए। च्वांग की पत्नी ने तत्काल एक निर्णय लिया। उसने गँडासा उठाया, पति की शव पेटी को काटना शुरू किया। ऊपर की लकड़ी टूटते ही उसका पति च्यांग जीवित होकर उठ बैठा। "पर ये शादी के कपड़े कैसे?" च्वांग ने पूछा। "इसलिए कि मैं तुम्हारा स्वागत मातमी कपड़ों में कैसे करती..." कहते हुए वह वहीं ठिठकी खड़ी रही। च्वांग अपनी पत्नी को लेकर बड़े कमरे में आया, तो यह देखकर हैरान हुआ कि वहाँ सुहागसेज सजी हुई थी और च्वांग की पत्नी यह देखकर दंग रह गयी कि बेहोश राजकुमार का नामोनिशान नहीं था। च्वांग की पत्नी ने डरते-डरते उधर देखा - राजकुमार सेज के पास खड़ा था। घबराकर उसने पीछे अपने पति की ओर देखा, च्वांग वहाँ नहीं था।
Video: वीडियो में वो वहां (पाकिस्तानी लोग) की आवाम से सवाल करते हुए नजर आ रही है कि पाकिस्तान की स्थिति क्या है, पाकिस्तान क्यों पीछे रह गया है साथ ही यूट्यूबर सना अमजद वीडियो में ये भी पूछती हैं कि क्या पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ भारत और नरेंद्र मोदी की तरक्की से घबरा गए हैं। Pakistan: इशाक डार के सुरक्षा गार्डों ने इस घटना के दौरान पत्रकार को धक्का दिया और उनके मोबाइल फोन को छीनने की कोशिश भी की। उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मियों को मोबाइल फोन जब्त करके फेंकने का आदेश दिया। हालांकि, वित्त मंत्री के सुरक्षाकर्मियों ने पत्रकार के विरुद्ध वापसी की और उन्हें पार्किंग स्थल में उनकी गाड़ी की ओर ले गए। यहां उनकी गाड़ी के पास, इशाक डार के सुरक्षा गार्डों ने पत्रकार को ठप्पड़ मारा और बदतमीजी की। इस घटना के सामने आने के बाद पाकिस्तान में इशाक डार के इस रवैये को लेकर आलोचना भी हो रही है। Imran Khan Arrest: इमरान खान की गिरफ्तारी की तस्वीरों में एक वीडियो भी जमकर वायरल हो रहा है जिमें कि देखा जा सकता है, इमरान खान को किस कदर धक्का देते हुए पाकिस्तानी रेंजर्स ले जा रहे हैं। इसके बाद इमरान खान के समर्थकों की भरी भीड़ इस्लामाबाद के हाइवे पर भी नजर आ रही है जहां से पीटीआई चीफ को NAB को सौंपने के लिए पाक रेंजर्स लेकर गए हैं। Pakistan Airlines: पाकिस्तानी विमान के पायलट ने विमान को अल्लामा इकबाल अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लैंड कराने की खूब कोशिश की, लेकिन जोरदार बारिश होने के चलते वो ऐसा कर पाने में कामयाब नहीं हुआ। इसके बाद मज़बूरी के हालात में पायलट को भारतीय वायु सीमा में प्रवेश करना पड़ा, इस बारे में अधिक जानकारी के मुताबिक, एटीसी के निर्देश पर पायलट ने गो-अराउंड अप्रोच शुरू किया लेकिन भारी बारिश और कम ऊंचाई के बीच विमान रास्ता भटक गया। नतीजन विमान रात 8. 11 बजे पंजाब के बधाना थाने के पास भारतीय वायु सीमा क्षेत्र में प्रवेश कर गया था। Pakistan : पाकिस्तान में आर्थिक हालात कितने अच्छे हैं इस बात का अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि हाल ही में, पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ ने घोषणा की कि सरकार समृद्ध उपभोक्ताओं से ईंधन के लिए अधिक शुल्क लेगी। जुटाए गए धन का उपयोग गरीबों के लिए कीमतों को सब्सिडी देने के लिए किया जाएगा, जो मुद्रास्फीति से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। आईएमएफ के आगे झुका पाक आईएमएफ का कहना है कि योजना की घोषणा करने से पहले उससे परामर्श नहीं किया गया था। Imran Khan: इमरान ने कहा कि मेरे पाकिस्तानी भाइयों पुलिस ने मुझे पकड़ने के लिए आ चुकी है और उनका यह ख्याल है कि इमरान अगर जेल में चला जाए, तो कौम सो जाएगी, लेकिन आपको इन लोगों को गलत साबित करना है। आपको यह साबित करना है कि आप लोग जिंदा कौम हैं। Pakistan : पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर और वकील मुस्तफा नवाज खोखर, हारून शरीफ अन्य लोगों पीएमएल-एन के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन पर आरोप लगाया कि वित्तीय संकट के बीच कैबिनेट का आकार लेना जनता के साथ धोखा है। Pakistan Economic Crisis : पकिस्तान की मदद को हाथ आगे बढाते हुए UAE ने 2 अरब डॉलर के कर्ज को दो किस्तों में देने का फैसला लिया है। पहली किस्त फरवरी में जारी की जाएगी, जबकि दूसरी किस्त मार्च में ट्रांसफर होगी। Pakistan Flood: अपने आर्थिक हालात और बाढ़ से पैदा हुई स्थिति पर विदेशी सरकारों से संपर्क करने के बारे में पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने जानकारी दी है। Pakistan: पीटीआई सरकार के बाहर निकलने के कुछ दिनों बाद, पाकिस्तान ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (ओगरा) ने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में 120 रुपये प्रति लीटर (83 प्रतिशत से अधिक) की अभूतपूर्व वृद्धि का सुझाव दिया, जो 16 अप्रैल से पूरी तरह से आयात की गई वसूली के लिए प्रभावी है।
Video: वीडियो में वो वहां की आवाम से सवाल करते हुए नजर आ रही है कि पाकिस्तान की स्थिति क्या है, पाकिस्तान क्यों पीछे रह गया है साथ ही यूट्यूबर सना अमजद वीडियो में ये भी पूछती हैं कि क्या पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ भारत और नरेंद्र मोदी की तरक्की से घबरा गए हैं। Pakistan: इशाक डार के सुरक्षा गार्डों ने इस घटना के दौरान पत्रकार को धक्का दिया और उनके मोबाइल फोन को छीनने की कोशिश भी की। उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मियों को मोबाइल फोन जब्त करके फेंकने का आदेश दिया। हालांकि, वित्त मंत्री के सुरक्षाकर्मियों ने पत्रकार के विरुद्ध वापसी की और उन्हें पार्किंग स्थल में उनकी गाड़ी की ओर ले गए। यहां उनकी गाड़ी के पास, इशाक डार के सुरक्षा गार्डों ने पत्रकार को ठप्पड़ मारा और बदतमीजी की। इस घटना के सामने आने के बाद पाकिस्तान में इशाक डार के इस रवैये को लेकर आलोचना भी हो रही है। Imran Khan Arrest: इमरान खान की गिरफ्तारी की तस्वीरों में एक वीडियो भी जमकर वायरल हो रहा है जिमें कि देखा जा सकता है, इमरान खान को किस कदर धक्का देते हुए पाकिस्तानी रेंजर्स ले जा रहे हैं। इसके बाद इमरान खान के समर्थकों की भरी भीड़ इस्लामाबाद के हाइवे पर भी नजर आ रही है जहां से पीटीआई चीफ को NAB को सौंपने के लिए पाक रेंजर्स लेकर गए हैं। Pakistan Airlines: पाकिस्तानी विमान के पायलट ने विमान को अल्लामा इकबाल अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लैंड कराने की खूब कोशिश की, लेकिन जोरदार बारिश होने के चलते वो ऐसा कर पाने में कामयाब नहीं हुआ। इसके बाद मज़बूरी के हालात में पायलट को भारतीय वायु सीमा में प्रवेश करना पड़ा, इस बारे में अधिक जानकारी के मुताबिक, एटीसी के निर्देश पर पायलट ने गो-अराउंड अप्रोच शुरू किया लेकिन भारी बारिश और कम ऊंचाई के बीच विमान रास्ता भटक गया। नतीजन विमान रात आठ. ग्यारह बजे पंजाब के बधाना थाने के पास भारतीय वायु सीमा क्षेत्र में प्रवेश कर गया था। Pakistan : पाकिस्तान में आर्थिक हालात कितने अच्छे हैं इस बात का अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि हाल ही में, पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ ने घोषणा की कि सरकार समृद्ध उपभोक्ताओं से ईंधन के लिए अधिक शुल्क लेगी। जुटाए गए धन का उपयोग गरीबों के लिए कीमतों को सब्सिडी देने के लिए किया जाएगा, जो मुद्रास्फीति से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। आईएमएफ के आगे झुका पाक आईएमएफ का कहना है कि योजना की घोषणा करने से पहले उससे परामर्श नहीं किया गया था। Imran Khan: इमरान ने कहा कि मेरे पाकिस्तानी भाइयों पुलिस ने मुझे पकड़ने के लिए आ चुकी है और उनका यह ख्याल है कि इमरान अगर जेल में चला जाए, तो कौम सो जाएगी, लेकिन आपको इन लोगों को गलत साबित करना है। आपको यह साबित करना है कि आप लोग जिंदा कौम हैं। Pakistan : पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर और वकील मुस्तफा नवाज खोखर, हारून शरीफ अन्य लोगों पीएमएल-एन के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन पर आरोप लगाया कि वित्तीय संकट के बीच कैबिनेट का आकार लेना जनता के साथ धोखा है। Pakistan Economic Crisis : पकिस्तान की मदद को हाथ आगे बढाते हुए UAE ने दो अरब डॉलर के कर्ज को दो किस्तों में देने का फैसला लिया है। पहली किस्त फरवरी में जारी की जाएगी, जबकि दूसरी किस्त मार्च में ट्रांसफर होगी। Pakistan Flood: अपने आर्थिक हालात और बाढ़ से पैदा हुई स्थिति पर विदेशी सरकारों से संपर्क करने के बारे में पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने जानकारी दी है। Pakistan: पीटीआई सरकार के बाहर निकलने के कुछ दिनों बाद, पाकिस्तान ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी ने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में एक सौ बीस रुपयापये प्रति लीटर की अभूतपूर्व वृद्धि का सुझाव दिया, जो सोलह अप्रैल से पूरी तरह से आयात की गई वसूली के लिए प्रभावी है।
मोहम्मद अमिल, शेख अमीन, नैंसी यादव, श्रेया, शौर्य मिश्रा, तूबा व मुनीम लईक खान को ट्रामा में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. बाराबंकीः उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जहरीली गैस की चपेट में आने से कई स्कूली छात्राएं बेहोश हो गईं. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया है. इस हादसे में जहरीली गैस की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल छात्राओं की संख्या अब 17 हो गई है. इनमें से 5 छात्रों को इलाज के लिए लखनऊ भेजा गया है. सीएमओ डॉ. अवधेश द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक जली हुई दवाओं से निकलने वाली घातक गैस कार्बन मोनोऑक्साइड के कारण यह हादसा हुआ है. यह जहरीली गैस शरीर के अन्य अंगों के साथ-साथ हृदय और मस्तिष्क को भी प्रभावित करती है। नगर कोतवाली क्षेत्र के कमरियाबाग स्थित किंग जॉर्ज इंटर कॉलेज में बुधवार सुबह करीब साढ़े दस बजे एक छात्रा क्लास के दौरान अचानक बेहोश हो गई. इनमें 5 छात्रों को पुलिस प्रशासन की मदद से बेहोशी की हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. उसके बाद घर पहुंचने पर कुछ छात्रों की हालत बिगड़ गई। इसकी भनक लगते ही देर शाम तक उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने का सिलसिला चल रहा था। ऐसे छात्रों की संख्या अब बढ़कर 17 हो गई है। इनमें गंभीर अफजा सिद्दीकी, नाजिया अंसारी, फलक सिद्दीकी, मानवी और इमरा को लखनऊ भेजा गया है। वहीं खुशी गुप्ता, असलान अली, अशिंका वर्मा, हुदा, इलाहाम, मोहम्मद अमिल, शेख अमीन, नैंसी यादव, श्रेया, शौर्य मिश्रा, तूबा व मुनीम लईक खान को ट्रामा में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया.
मोहम्मद अमिल, शेख अमीन, नैंसी यादव, श्रेया, शौर्य मिश्रा, तूबा व मुनीम लईक खान को ट्रामा में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. बाराबंकीः उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जहरीली गैस की चपेट में आने से कई स्कूली छात्राएं बेहोश हो गईं. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया है. इस हादसे में जहरीली गैस की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल छात्राओं की संख्या अब सत्रह हो गई है. इनमें से पाँच छात्रों को इलाज के लिए लखनऊ भेजा गया है. सीएमओ डॉ. अवधेश द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक जली हुई दवाओं से निकलने वाली घातक गैस कार्बन मोनोऑक्साइड के कारण यह हादसा हुआ है. यह जहरीली गैस शरीर के अन्य अंगों के साथ-साथ हृदय और मस्तिष्क को भी प्रभावित करती है। नगर कोतवाली क्षेत्र के कमरियाबाग स्थित किंग जॉर्ज इंटर कॉलेज में बुधवार सुबह करीब साढ़े दस बजे एक छात्रा क्लास के दौरान अचानक बेहोश हो गई. इनमें पाँच छात्रों को पुलिस प्रशासन की मदद से बेहोशी की हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. उसके बाद घर पहुंचने पर कुछ छात्रों की हालत बिगड़ गई। इसकी भनक लगते ही देर शाम तक उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने का सिलसिला चल रहा था। ऐसे छात्रों की संख्या अब बढ़कर सत्रह हो गई है। इनमें गंभीर अफजा सिद्दीकी, नाजिया अंसारी, फलक सिद्दीकी, मानवी और इमरा को लखनऊ भेजा गया है। वहीं खुशी गुप्ता, असलान अली, अशिंका वर्मा, हुदा, इलाहाम, मोहम्मद अमिल, शेख अमीन, नैंसी यादव, श्रेया, शौर्य मिश्रा, तूबा व मुनीम लईक खान को ट्रामा में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया.
कोयला खदानों की वाणिज्यिक खनन के लिए नीलामी से देश में अगले पांच से सात साल में 33,000 करोड़ रुपए के पूंजीगत निवेश की उम्मीद है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगी। उम्मीद की जा रही है कि वित्त मंत्री इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीन के साथ व्यापार को लेकर बड़े ऐलान कर सकती हैं। प्रधानमंत्री ने उदाहरण दिया कि बिजली और ईंधन की मांग बढ़ी है, यह अर्थव्यवस्था में सुधार के कई संकेतकों में से एक है। स्मार्टफोन क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 855 प्लस एसओसी प्रोसेसर और 12 इंच रैम, 120एचजेड रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ आ सकता है। दूरसंचार विभाग ने गेल जैसे गैर-संचार सार्वजनिक उपक्रमों से एजीआर से संबंधित बकाया चार लाख करोड़ रूपए की मांग में से 96 प्रतिशत मांग वापस लेने का फैसला किया है। इस स्मार्टफोन की खास बात यह है कि यह कई शानदार फीचर्स के साथ किफायती रेंज में उतारा गया है, जिसकी कीमत 9,999 रुपए रखी गई है। अन्य रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने भी भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को स्थिर परिदृश्य के साथ घटाकर बीबीबी नकारात्मक कर दिया है। 50 हजार करोड़ रुपए की लागत से शुरू की जा रही इस योजना के तहत कामगारों को 25 प्रकार के काम दिए जाएंगे। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर का यह अकेला संयंत्र है और यहां उसके सभी वाहनों का निर्माण किया जाता है। इस संयंत्र में 15,000 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। कोयला मंत्रालय गुरुवार को वाणिज्यिक खनन के लिये 41 कोयला ब्लाक की नीलामी के लिये प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि दूरसंचार मंत्रालय ने बीएसएनएल को निर्देश दिया है कि सुरक्षा मुद्दों के मद्देनजर 4जी अपग्रेडेशन में चीनी उपकरणों का इस्तेमाल न किया जाए। बारह दिनों में पेट्रोल के दामों में 6. 55 रुपए प्रति लीटर और डीजल की दर में 7. 04 रुपए लीटर की कुल वृद्धि हुई है।
कोयला खदानों की वाणिज्यिक खनन के लिए नीलामी से देश में अगले पांच से सात साल में तैंतीस,शून्य करोड़ रुपए के पूंजीगत निवेश की उम्मीद है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शाम चार बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगी। उम्मीद की जा रही है कि वित्त मंत्री इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीन के साथ व्यापार को लेकर बड़े ऐलान कर सकती हैं। प्रधानमंत्री ने उदाहरण दिया कि बिजली और ईंधन की मांग बढ़ी है, यह अर्थव्यवस्था में सुधार के कई संकेतकों में से एक है। स्मार्टफोन क्वालकॉम स्नैपड्रैगन आठ सौ पचपन प्लस एसओसी प्रोसेसर और बारह इंच रैम, एक सौ बीसएचजेड रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ आ सकता है। दूरसंचार विभाग ने गेल जैसे गैर-संचार सार्वजनिक उपक्रमों से एजीआर से संबंधित बकाया चार लाख करोड़ रूपए की मांग में से छियानवे प्रतिशत मांग वापस लेने का फैसला किया है। इस स्मार्टफोन की खास बात यह है कि यह कई शानदार फीचर्स के साथ किफायती रेंज में उतारा गया है, जिसकी कीमत नौ,नौ सौ निन्यानवे रुपयापए रखी गई है। अन्य रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने भी भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को स्थिर परिदृश्य के साथ घटाकर बीबीबी नकारात्मक कर दिया है। पचास हजार करोड़ रुपए की लागत से शुरू की जा रही इस योजना के तहत कामगारों को पच्चीस प्रकार के काम दिए जाएंगे। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर का यह अकेला संयंत्र है और यहां उसके सभी वाहनों का निर्माण किया जाता है। इस संयंत्र में पंद्रह,शून्य से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। कोयला मंत्रालय गुरुवार को वाणिज्यिक खनन के लिये इकतालीस कोयला ब्लाक की नीलामी के लिये प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि दूरसंचार मंत्रालय ने बीएसएनएल को निर्देश दिया है कि सुरक्षा मुद्दों के मद्देनजर चारजी अपग्रेडेशन में चीनी उपकरणों का इस्तेमाल न किया जाए। बारह दिनों में पेट्रोल के दामों में छः. पचपन रुपयापए प्रति लीटर और डीजल की दर में सात. चार रुपयापए लीटर की कुल वृद्धि हुई है।
पटनाः बिहार में हुए प्रकाश उत्सव के अंतिम दिन राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के मंच पर नहीं जमीन पर बैठने को लेकर बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने सफाई दी है. इस मसले पर बवाल के बीच उन्होंने पहली बार बयान दिया है. नीतीश कुमार ने एक संवाददाता सम्मेलन में इस मसले पर कहा कि कौन कहां बैठेगा यह फैसला तख्त हरमिंदर साहिब की समिति ने किया था. गुरुद्वारे में कोई कुर्सी पर नहीं बैठता, सब जमीन पर बैठते हैं. उन्होंने आगे कहा कि इस आयोजन से यह बात साफ हो गई है कि बिहार के ही कुछ लोग बिहार को बदनाम कर रहे हैं. इस मामले पर हुआ विवाद चंद लोगों का नजरिया दिखाता है. नीतीश ने ऐस लोगों को सुधरने की नसीहत भी दे डाली. नीतीश कुमार ने आयोजन की फंडिंग पर कहा कि सारा इंतजाम राज्य सरकार ने अपने सामर्थ्य से किया है. यह आयोजन अच्छी नीयत और मेहनत से करने के कारण ही सफल हो पाया है. ये भी पढ़ेंः शराबबंदी पर पीएम ने थपथपाई नीतीश की पीठ, क्या ये बिहार में सियासी समीकरण बदलने का संकेत है? बता दें कि प्रकाश उत्सव के दौरान जहां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत नरेंद्र मोदी एकसाथ मंच पर बैठे थे वहीं, आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव को जमीन पर सभी के साथ बैठने की जगह दी गई थी. उनके साथ दोनों बेटे उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव भी बैठे थे. लालू यादव के नीचे बैठने से नाराज आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद ने सवाल उठाते हुए कहा था, 'लालू यादव को नीचे क्यों बैठाया गया था. यह महागठबंधन है. क्या सबको मंच पर नहीं होना चाहिए था. ऐसा लगता है कि मानो कोई गठबंधन नहीं है. यह सिर्फ जेडीयू की ही सरकार है. हम लोग इससे बहुत दुखी हैं.
पटनाः बिहार में हुए प्रकाश उत्सव के अंतिम दिन राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के मंच पर नहीं जमीन पर बैठने को लेकर बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने सफाई दी है. इस मसले पर बवाल के बीच उन्होंने पहली बार बयान दिया है. नीतीश कुमार ने एक संवाददाता सम्मेलन में इस मसले पर कहा कि कौन कहां बैठेगा यह फैसला तख्त हरमिंदर साहिब की समिति ने किया था. गुरुद्वारे में कोई कुर्सी पर नहीं बैठता, सब जमीन पर बैठते हैं. उन्होंने आगे कहा कि इस आयोजन से यह बात साफ हो गई है कि बिहार के ही कुछ लोग बिहार को बदनाम कर रहे हैं. इस मामले पर हुआ विवाद चंद लोगों का नजरिया दिखाता है. नीतीश ने ऐस लोगों को सुधरने की नसीहत भी दे डाली. नीतीश कुमार ने आयोजन की फंडिंग पर कहा कि सारा इंतजाम राज्य सरकार ने अपने सामर्थ्य से किया है. यह आयोजन अच्छी नीयत और मेहनत से करने के कारण ही सफल हो पाया है. ये भी पढ़ेंः शराबबंदी पर पीएम ने थपथपाई नीतीश की पीठ, क्या ये बिहार में सियासी समीकरण बदलने का संकेत है? बता दें कि प्रकाश उत्सव के दौरान जहां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत नरेंद्र मोदी एकसाथ मंच पर बैठे थे वहीं, आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव को जमीन पर सभी के साथ बैठने की जगह दी गई थी. उनके साथ दोनों बेटे उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव भी बैठे थे. लालू यादव के नीचे बैठने से नाराज आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद ने सवाल उठाते हुए कहा था, 'लालू यादव को नीचे क्यों बैठाया गया था. यह महागठबंधन है. क्या सबको मंच पर नहीं होना चाहिए था. ऐसा लगता है कि मानो कोई गठबंधन नहीं है. यह सिर्फ जेडीयू की ही सरकार है. हम लोग इससे बहुत दुखी हैं.
DARBHANGA: दरभंगा के केवटी प्रखंड के गोपालपुर गुमटी, माधोपट्टी के बीच बना जमींदारी बांध देर रात टूट गया। जिसे बागमती नदी का पानी तेजी से कई गांवों में प्रवेश कर गया है। मौके पर बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीम बांध को बांधने में जुट गयी है। शुक्रवार की रात जब लोग सोए हुए थे तब किसी को यह पता नहीं चल सका की बांध टूटा है और जब सुबह आंख खुली तो अपने चारों ओर पानी ही पानी देखकर हैरान रह गये। लोगों को समझने में जरा भी वक्त नहीं लगा कही ना कही बांध टूटा है। जब लोग माधोपट्टी के बीच बने जमींदारी बांध के पास गये तब देखा की करीब बीस फीट बांध टूटा हुआ है और तेजी से नदी का पानी गांव की ओर प्रवेश कर रहा है। माधोपट्टी पंचायत के पूर्व मुखिया अरविंद कुमार पाठक ने बताया कि बीती रात बांध टूट गया है। यहां पहले से ही पानी का रिसाव हो रहा था। रिसाव ज्यादा होने के कारण अचानक जमींदारी बांध टूट गया। बांध टूटते ही बागमती नदी का पानी पूरे माधोपट्टी पंचायत में फैल गया है। धीरे-धीरे अन्य पंचायतों में भी यह अपना पांव पसारता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव के सभी लोग सोए हुए थे और सुबह देखा तो चारों ओर पानी ही पानी था। गांव के दुर्गा मंदिर में भी पानी प्रवेश कर चुका था। सुबह ग्रामीणों ने इसकी सूचना अधिकारियों को दी। जिसके बाद मौके पर पहुंचे बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीम फिलहाल बांध को बांधने में जुटी हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र माधोपट्टी पंचायत है जहां पूरे गांव में पानी प्रवेश कर चुका है। लोग ऊंची स्थानों का रूख कर रहे हैं।
DARBHANGA: दरभंगा के केवटी प्रखंड के गोपालपुर गुमटी, माधोपट्टी के बीच बना जमींदारी बांध देर रात टूट गया। जिसे बागमती नदी का पानी तेजी से कई गांवों में प्रवेश कर गया है। मौके पर बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीम बांध को बांधने में जुट गयी है। शुक्रवार की रात जब लोग सोए हुए थे तब किसी को यह पता नहीं चल सका की बांध टूटा है और जब सुबह आंख खुली तो अपने चारों ओर पानी ही पानी देखकर हैरान रह गये। लोगों को समझने में जरा भी वक्त नहीं लगा कही ना कही बांध टूटा है। जब लोग माधोपट्टी के बीच बने जमींदारी बांध के पास गये तब देखा की करीब बीस फीट बांध टूटा हुआ है और तेजी से नदी का पानी गांव की ओर प्रवेश कर रहा है। माधोपट्टी पंचायत के पूर्व मुखिया अरविंद कुमार पाठक ने बताया कि बीती रात बांध टूट गया है। यहां पहले से ही पानी का रिसाव हो रहा था। रिसाव ज्यादा होने के कारण अचानक जमींदारी बांध टूट गया। बांध टूटते ही बागमती नदी का पानी पूरे माधोपट्टी पंचायत में फैल गया है। धीरे-धीरे अन्य पंचायतों में भी यह अपना पांव पसारता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव के सभी लोग सोए हुए थे और सुबह देखा तो चारों ओर पानी ही पानी था। गांव के दुर्गा मंदिर में भी पानी प्रवेश कर चुका था। सुबह ग्रामीणों ने इसकी सूचना अधिकारियों को दी। जिसके बाद मौके पर पहुंचे बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीम फिलहाल बांध को बांधने में जुटी हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र माधोपट्टी पंचायत है जहां पूरे गांव में पानी प्रवेश कर चुका है। लोग ऊंची स्थानों का रूख कर रहे हैं।
मैनपुरीः गांव से रिश्तेदारी में बाइक पर सवार होकर निमंत्रण में जा रहे बाइक पर सवारों की मैजिक और बाइक में भिड़ंत हो गई जिससे एक बीटीसी के छात्र की घटनास्थल पर ही मौत हो गई जबकि बाइक पर सवार एक और गंभीर रूप से घायल हो , गया जिसे गंभीर अवस्था में आगरा उपचार के लिए भेजा है। पूरा मामला जनपद मैनपुरी के कस्बा बिछवा निवासी रंजीत अपने परिवार के ही भाई के साथ जनपद एटा के हिरौदी दावत मैं शामिल होने जा रहे थे जैसे ही वे कुरावली थाना क्षेत्र के ग्राम शरीफ पुर के समीप पहुंचे वैसे ही एटा की तरफ से आ रही मैजिक कार ने बाइक में जबरदस्त टक्कर मार दी। जिससे दोनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए टक्कर इतनी जबरदस्त थी के बीटीसी का छात्र रंजीत की मौके पर ही मृत हो गई जबकि अंकुर गंभीर रूप से घायल हो गया । घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने अंकुर को आनन-फानन में उपचार हेतु आगरा भेज दिया वही मृत रंजीत केशव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
मैनपुरीः गांव से रिश्तेदारी में बाइक पर सवार होकर निमंत्रण में जा रहे बाइक पर सवारों की मैजिक और बाइक में भिड़ंत हो गई जिससे एक बीटीसी के छात्र की घटनास्थल पर ही मौत हो गई जबकि बाइक पर सवार एक और गंभीर रूप से घायल हो , गया जिसे गंभीर अवस्था में आगरा उपचार के लिए भेजा है। पूरा मामला जनपद मैनपुरी के कस्बा बिछवा निवासी रंजीत अपने परिवार के ही भाई के साथ जनपद एटा के हिरौदी दावत मैं शामिल होने जा रहे थे जैसे ही वे कुरावली थाना क्षेत्र के ग्राम शरीफ पुर के समीप पहुंचे वैसे ही एटा की तरफ से आ रही मैजिक कार ने बाइक में जबरदस्त टक्कर मार दी। जिससे दोनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए टक्कर इतनी जबरदस्त थी के बीटीसी का छात्र रंजीत की मौके पर ही मृत हो गई जबकि अंकुर गंभीर रूप से घायल हो गया । घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने अंकुर को आनन-फानन में उपचार हेतु आगरा भेज दिया वही मृत रंजीत केशव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के साथ श्री राम ट्रस्ट के काम में भी तेजी आई है. 22 मई को श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए स्थाई कार्यालय का उद्घाटन होने जा रहा है. इस मौके पर साधु-संत शामिल होंगे. कार्यक्रम को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. बता दें कि अयोध्या के रामकोट में ट्रस्ट का दो मंजिला कार्यालय तैयार किया गया है. इसका गृह प्रवेश कार्यक्रम रखा गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के स्थाई कार्लालय में आवासीय ब्लॉक भी होगा. साथ ही हॉल में ट्रस्ट की बैठकें हो सकेंगी. 31 मई को राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक प्रस्तावित है. इस बैठक में गर्भगृह में स्थापित होने वाली रामलला की प्रतिमा के बारे में चर्चा होगी. ये प्रतिमा किस शिला से बनेगी, इसके लिए शिलाओं की रिपोर्ट पर चर्चा होगी. बैठक में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के दिन राम मंदिर की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा होगी. बताते चलें कि जनवरी 2024 में ग्राउंड फ्लोर में रामलला विराजमान होंगे. रामलला के भव्य अभिषेक के लिए भारत के अलावा यूक्रेन और रूस समेत 7 महाद्वीपों और 155 देशों से पवित्र जल इकट्ठा किया गया है. इससे पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने बताया था कि मंदिर का निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है. 'जनवरी 2024 के तीसरे सप्ताह में राम लला (बाल भगवान राम) की मूर्ति को मूल स्थान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों स्थापित किया जाएगा. ' उन्होंने आगे बताया था कि मूर्ति को उसके मूल स्थान पर विराजमान करने के बाद भी मंदिर का काम जारी रहेगा. हमारा लक्ष्य गर्भगृह, पहली मंजिल पर काम पूरा करना और जनवरी 2024 से पहले दर्शन की व्यवस्था करना है. भारत के लिए दुनिया का नजरिया अब बदल गया है. उन्होंने कहा, 'योग, आयुर्वेद और भारतीय संगीत दुनियाभर में पहुंच गया है और पूरी दुनिया में एक सांस्कृतिक क्रांति होगी. ' बताते चलें कि श्रीराम मंदिर का 50 फीसदी से ज्यादा निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. गर्भ गृह की दीवारें पूरी हो चुकी हैं. चंपत राय के मुताबिक अक्टूबर 2023 तक राम मंदिर का पहला फेज पूरा हो जाएगा. एक से 14 जनवरी 2024 के बीच कभी भी प्राण प्रतिष्ठा हो सकती है. उनका कहना है कि रामलला की मूर्ति 51 इंच की होगी, जो गर्भगृह में बने चबूतरे पर स्थापित होगी.
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के साथ श्री राम ट्रस्ट के काम में भी तेजी आई है. बाईस मई को श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए स्थाई कार्यालय का उद्घाटन होने जा रहा है. इस मौके पर साधु-संत शामिल होंगे. कार्यक्रम को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. बता दें कि अयोध्या के रामकोट में ट्रस्ट का दो मंजिला कार्यालय तैयार किया गया है. इसका गृह प्रवेश कार्यक्रम रखा गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के स्थाई कार्लालय में आवासीय ब्लॉक भी होगा. साथ ही हॉल में ट्रस्ट की बैठकें हो सकेंगी. इकतीस मई को राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक प्रस्तावित है. इस बैठक में गर्भगृह में स्थापित होने वाली रामलला की प्रतिमा के बारे में चर्चा होगी. ये प्रतिमा किस शिला से बनेगी, इसके लिए शिलाओं की रिपोर्ट पर चर्चा होगी. बैठक में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के दिन राम मंदिर की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा होगी. बताते चलें कि जनवरी दो हज़ार चौबीस में ग्राउंड फ्लोर में रामलला विराजमान होंगे. रामलला के भव्य अभिषेक के लिए भारत के अलावा यूक्रेन और रूस समेत सात महाद्वीपों और एक सौ पचपन देशों से पवित्र जल इकट्ठा किया गया है. इससे पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने बताया था कि मंदिर का निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है. 'जनवरी दो हज़ार चौबीस के तीसरे सप्ताह में राम लला की मूर्ति को मूल स्थान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों स्थापित किया जाएगा. ' उन्होंने आगे बताया था कि मूर्ति को उसके मूल स्थान पर विराजमान करने के बाद भी मंदिर का काम जारी रहेगा. हमारा लक्ष्य गर्भगृह, पहली मंजिल पर काम पूरा करना और जनवरी दो हज़ार चौबीस से पहले दर्शन की व्यवस्था करना है. भारत के लिए दुनिया का नजरिया अब बदल गया है. उन्होंने कहा, 'योग, आयुर्वेद और भारतीय संगीत दुनियाभर में पहुंच गया है और पूरी दुनिया में एक सांस्कृतिक क्रांति होगी. ' बताते चलें कि श्रीराम मंदिर का पचास फीसदी से ज्यादा निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. गर्भ गृह की दीवारें पूरी हो चुकी हैं. चंपत राय के मुताबिक अक्टूबर दो हज़ार तेईस तक राम मंदिर का पहला फेज पूरा हो जाएगा. एक से चौदह जनवरी दो हज़ार चौबीस के बीच कभी भी प्राण प्रतिष्ठा हो सकती है. उनका कहना है कि रामलला की मूर्ति इक्यावन इंच की होगी, जो गर्भगृह में बने चबूतरे पर स्थापित होगी.
घर खरीदने का फैसला लोगों की भावनाओं से जुड़ा होता है, क्योंकि आपके अपने घर से जुड़ी यादें जीवन भर आपके साथ रहती हैं. नई दिल्ली. रियल एस्टेट सेक्टर (Real Estate Sector) में कीमतें स्थिर रहने (Stable Prices) और ब्याज दरें काफी कम (Low Interest Rates) होने के कारण जुलाई-सितंबर 2021 के दौरान मकानों की बिक्री (Home Sales) में सालाना आधार पर 92 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. मकानों की बिक्री में ये वृद्धि देश के प्रमुख 8 शहरों में की गई है. इसी के साथ घरों की बिक्री ने कोविड से पहले के स्तर (Pre-Covid Level) को भी पार कर लिया है. असेट एडवायजर फर्म नाइट फ्रैंक इंडिया (Knight Frank India) ने अपनी रिपोर्ट 'इंडिया रियल एस्टेट अपडेट' में बताया है कि घरों की बिक्री बढ़कर इस दौरान 64,010 इकाई हो गई. ये आंकड़ा 2020 की इसी अवधि में 33,404 इकाई रही थी. वहीं, अप्रैल-जून 2020 तिमाही में 27,453 हाउसिंग यूनिट्स की बिक्री हुई थी. सल 2021 की तीसरी तिमाही के दौरान देश के प्रमुख आठ बाजारों में घरों की कुल बिक्री 2019 में तिमाही औसत के मुकाबले 104 फीसदी तक पहुंच गई है. नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक (CMD) शिशिर बैजल ने घरों की बिक्री में तेज सुधार के लिए स्थिर कीमतों, होम लोन पर ऐतिहासिक रूप से कम ब्याज दरों और अपना घर को लेकर ग्राहकों के बदलते रवैये को जिम्मेदार बताया है. उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट कंपनियों के लिए वित्तीय दबाव एक अहम कारण बना हुआ है. घर खरीदारों के ग्रेड ए कंपनियों को प्राथमिकता देने और सस्ते कर्ज की उपलब्धता ने उन्हें इस सुधरते बाजार में अच्छी स्थिति में ला दिया है. बैजल के मुकाबले, बाजार में पिछले साल के उलट पूर्ण लॉकडाउन की आशंका कम होने से बाजार को फायदा हुआ है. साल 2021 की तीसरी तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में घरों की बिक्री जुलाई-सितंबर की अवधि के दौरान पिछले साल की समान तिमाही की 7,635 इकाइयों से दोगुनी से ज्यादा बढ़कर 15,942 इकाई हो गई. वहीं, दिल्ली-एनसीआर में बिक्री 48 फीसदी बढ़कर 6,147 इकाइयों से 9,101 इकाई हो गई. इसी तरह चेन्नई, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद और कोलकाता में भी वृद्धि दर्ज की गई. वहीं, ऑफिस स्पेस के लिए लीज पर प्रॉपटी्र लेने में भी बढ़ोतरी हुई है. जुलाई-सितंबर 2021 में बढ़ी प्रॉपर्टी सेल्स में आईटी सेक्टर का बड़ा योगदान रहा. इस तेजी की वजह अर्थव्यवस्था का सामान्य स्थिति में लौटना और कॉरपोरेटे वर्कफोर्स का धीरे-धीरे ऑफिस लौटना है. पिछले साल इसी अवधि में कुल 47 लाख वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया गया था, जबकि अप्रैल-जून 2021 में यह 36 लाख वर्ग फुट था. इस तिमाही में आठ भारतीय बाजारों के कुल कार्यालय लेनदेन में सुधार हुआ है और यह 2019 के तिमाही औसत स्तर के 83 फीसदी तक पहुंच गया है. .
घर खरीदने का फैसला लोगों की भावनाओं से जुड़ा होता है, क्योंकि आपके अपने घर से जुड़ी यादें जीवन भर आपके साथ रहती हैं. नई दिल्ली. रियल एस्टेट सेक्टर में कीमतें स्थिर रहने और ब्याज दरें काफी कम होने के कारण जुलाई-सितंबर दो हज़ार इक्कीस के दौरान मकानों की बिक्री में सालाना आधार पर बानवे फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. मकानों की बिक्री में ये वृद्धि देश के प्रमुख आठ शहरों में की गई है. इसी के साथ घरों की बिक्री ने कोविड से पहले के स्तर को भी पार कर लिया है. असेट एडवायजर फर्म नाइट फ्रैंक इंडिया ने अपनी रिपोर्ट 'इंडिया रियल एस्टेट अपडेट' में बताया है कि घरों की बिक्री बढ़कर इस दौरान चौंसठ,दस इकाई हो गई. ये आंकड़ा दो हज़ार बीस की इसी अवधि में तैंतीस,चार सौ चार इकाई रही थी. वहीं, अप्रैल-जून दो हज़ार बीस तिमाही में सत्ताईस,चार सौ तिरेपन हाउसिंग यूनिट्स की बिक्री हुई थी. सल दो हज़ार इक्कीस की तीसरी तिमाही के दौरान देश के प्रमुख आठ बाजारों में घरों की कुल बिक्री दो हज़ार उन्नीस में तिमाही औसत के मुकाबले एक सौ चार फीसदी तक पहुंच गई है. नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने घरों की बिक्री में तेज सुधार के लिए स्थिर कीमतों, होम लोन पर ऐतिहासिक रूप से कम ब्याज दरों और अपना घर को लेकर ग्राहकों के बदलते रवैये को जिम्मेदार बताया है. उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट कंपनियों के लिए वित्तीय दबाव एक अहम कारण बना हुआ है. घर खरीदारों के ग्रेड ए कंपनियों को प्राथमिकता देने और सस्ते कर्ज की उपलब्धता ने उन्हें इस सुधरते बाजार में अच्छी स्थिति में ला दिया है. बैजल के मुकाबले, बाजार में पिछले साल के उलट पूर्ण लॉकडाउन की आशंका कम होने से बाजार को फायदा हुआ है. साल दो हज़ार इक्कीस की तीसरी तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में घरों की बिक्री जुलाई-सितंबर की अवधि के दौरान पिछले साल की समान तिमाही की सात,छः सौ पैंतीस इकाइयों से दोगुनी से ज्यादा बढ़कर पंद्रह,नौ सौ बयालीस इकाई हो गई. वहीं, दिल्ली-एनसीआर में बिक्री अड़तालीस फीसदी बढ़कर छः,एक सौ सैंतालीस इकाइयों से नौ,एक सौ एक इकाई हो गई. इसी तरह चेन्नई, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद और कोलकाता में भी वृद्धि दर्ज की गई. वहीं, ऑफिस स्पेस के लिए लीज पर प्रॉपटी्र लेने में भी बढ़ोतरी हुई है. जुलाई-सितंबर दो हज़ार इक्कीस में बढ़ी प्रॉपर्टी सेल्स में आईटी सेक्टर का बड़ा योगदान रहा. इस तेजी की वजह अर्थव्यवस्था का सामान्य स्थिति में लौटना और कॉरपोरेटे वर्कफोर्स का धीरे-धीरे ऑफिस लौटना है. पिछले साल इसी अवधि में कुल सैंतालीस लाख वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया गया था, जबकि अप्रैल-जून दो हज़ार इक्कीस में यह छत्तीस लाख वर्ग फुट था. इस तिमाही में आठ भारतीय बाजारों के कुल कार्यालय लेनदेन में सुधार हुआ है और यह दो हज़ार उन्नीस के तिमाही औसत स्तर के तिरासी फीसदी तक पहुंच गया है. .
You Searched For "pm" Rain-battered North India is on its knees. But, no lessons will be learnt by our authorities. जानिए प्राकृतिक आपदा से फ़सल ख़राब होने पर कैसे ले सकते हैं प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना से लाभ? क्या छोटे और सीमांत किसानों को लाभ पहुँचाए बिना भारत की सौर सिंचाई योजना सफल हो पाएगी? पीएम किसान सम्मान निधि का लोगो बना कर आप भी जीत सकते हैं इनाम, यहाँ जानिए कैसे?
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केन विलियमसन की चोट ने बढ़ाई गुजरात टाइटंस की टेंशन। इंडियन प्रीमियर लीग के 16 सीजन के पहले मैच में गुजरात टाइटंस और चेन्नई सुपर किंग्स का आमना-सामना हुआ। इस मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स को गुजरात ने 5 विकेट से हराया। हालांकि इस मैच में कैच लेने के दौरान गुजरात के दिग्गज खिलाड़ी केन विलियमसन चोटिल हो गए। जिसके बाद गुजरात की टेंशन बढ़ गई है। वहीं मैच खत्म होने के बाद गुजरात टाइटंस के कप्तान हार्दिक पांड्या ने उनकी चोट को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने कहा कि, विलियमसन की इंजरी कितनी गंभीर है इसका पता फिलहाल अभी नहीं लगा है। उनको घुटने की इंजरी जरूर हुई है लेकिन यह कितनी गंभीर है, फिलहाल मेरे पास इसे लेकर अभी कोई जानकारी नहीं है। मुझे नहीं पता है कि उनकी इंजरी कितनी गंभीर है या उन्हें ठीक होने में कितना समय लगेगा। उन्होंने अपनी बात को जारी रखते हुए आगे कहा कि, मैंने उन्हें (केन विलियमसन) मैसेज किया था। वह अभी स्कैन के लिए गए हैं। वह जब स्कैन कराकर डॉक्टर के पास से होकर आएंगे तब ही हमें पता लगेगा कि उनको सही मायने में उन्हें कैसे चोट लगी है और उनकी चोट कितनी गंभीर है। वहीं केन विलियमसन की चोट को लेकर न्यूजीलैंड की टेंशन भी बढ़ गई है। दरअसल न्यूजीलैंड के कोच गैरी स्टेड ने उनकी चोट को लेकर चिंता जाहिर की है। एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि, हमें उनके चोट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। फिलहाल हमें इतना पता है कि उनके दाहिने घुटने में चोट लगी है। उन्होंने कहा कि, दुर्भाग्य से मैं इससे ज्यादा जानकारी नहीं दे सकता है जब तक हमें और जानकारी नहीं मिल जाती है। कोई भी टीम अपने कप्तान को ऐसे नहीं देखना चाहेगी। यह उनके लिए बड़ा झटका है और यह हमारे लिए भी एक बड़ा झटका है।
केन विलियमसन की चोट ने बढ़ाई गुजरात टाइटंस की टेंशन। इंडियन प्रीमियर लीग के सोलह सीजन के पहले मैच में गुजरात टाइटंस और चेन्नई सुपर किंग्स का आमना-सामना हुआ। इस मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स को गुजरात ने पाँच विकेट से हराया। हालांकि इस मैच में कैच लेने के दौरान गुजरात के दिग्गज खिलाड़ी केन विलियमसन चोटिल हो गए। जिसके बाद गुजरात की टेंशन बढ़ गई है। वहीं मैच खत्म होने के बाद गुजरात टाइटंस के कप्तान हार्दिक पांड्या ने उनकी चोट को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने कहा कि, विलियमसन की इंजरी कितनी गंभीर है इसका पता फिलहाल अभी नहीं लगा है। उनको घुटने की इंजरी जरूर हुई है लेकिन यह कितनी गंभीर है, फिलहाल मेरे पास इसे लेकर अभी कोई जानकारी नहीं है। मुझे नहीं पता है कि उनकी इंजरी कितनी गंभीर है या उन्हें ठीक होने में कितना समय लगेगा। उन्होंने अपनी बात को जारी रखते हुए आगे कहा कि, मैंने उन्हें मैसेज किया था। वह अभी स्कैन के लिए गए हैं। वह जब स्कैन कराकर डॉक्टर के पास से होकर आएंगे तब ही हमें पता लगेगा कि उनको सही मायने में उन्हें कैसे चोट लगी है और उनकी चोट कितनी गंभीर है। वहीं केन विलियमसन की चोट को लेकर न्यूजीलैंड की टेंशन भी बढ़ गई है। दरअसल न्यूजीलैंड के कोच गैरी स्टेड ने उनकी चोट को लेकर चिंता जाहिर की है। एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि, हमें उनके चोट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। फिलहाल हमें इतना पता है कि उनके दाहिने घुटने में चोट लगी है। उन्होंने कहा कि, दुर्भाग्य से मैं इससे ज्यादा जानकारी नहीं दे सकता है जब तक हमें और जानकारी नहीं मिल जाती है। कोई भी टीम अपने कप्तान को ऐसे नहीं देखना चाहेगी। यह उनके लिए बड़ा झटका है और यह हमारे लिए भी एक बड़ा झटका है।
जब फरमी ऊर्जाणु कर्मण्यता के सिद्धान्त' ( कांटम थियरी ) को पूर्ण विस्तार और गहराई के साथ बताने लगे तो छात्रों के दल को उसका समझाना कठिन चिंतन के साधारण स्तर से परे जान पड़ा । यह कहना कि तत्त्व : ( मैटर ) और शक्ति ( एनर्जी) दोनों में तरंग-पुंज (बंडल आव वेन्स ) होता है, सत्य की अपेक्षा कारण ही है जो तर्क द्वारा सिद्ध नहीं किया जा सकता।" उन लोगों का कहना था - यह बात वस्तुतः है। और, जहाँ तक 'थ' का सम्बध है 'पोप' कभी गलत नहीं हो सकते । ऊर्जाणु कर्मण्यता के सिद्धान्त के सम्बन्ध में फरमी अचूक । अतः फरमी 'पोप' हैं - उसके बाद तो वे 'पोप' बन गये । जो छात्र नये आते, वे पहले तो इस नाम से चौंक पड़ते । पर, फरमी के इस मुकुटमरिण होने की बात नवयुवक भौतिक-शास्त्रियों के अन्ताराष्ट्रिय जगत में फैलते देर न लगी । रासेत्ती का यद्यपि कहना था कि वह 'ऊर्जाणु कर्मण्यता का सिद्धान्त ' पूरा-पूरा नहीं समझ सका है, तथापि वही फरमी की अनुपस्थिति में इस विषय के पढ़ाने में सक्षम था । उसे 'कार्डिनल विकार' की उपाधि मिली । काली आँखों वाला मेजोरना, जो स्पेनिश-सा लगता, गणित सम्बन्धी प्रथम प्रमाणों से कभी संतुष्ट नहीं होता, वरन् अपना अध्ययन जारी रखता। अपनी अन्तर्दृष्टि से गहराई में घुसता, ऊहापोह करता, प्रश्न पूछता और त्रुटियाँ पकड़ता । फलतः एत्तोरे मेजोरना का नाम पड़ा - 'महान् जिज्ञासु' ( ग्रेट इनक्कीजिटर ) । तभी एक दिन परसीको भौतिक विज्ञान भवन में आये । वे ट्यूरिन से आये थे और बुरी खबर लाये थे। उन्होंने बताया कि ट्यूरिन में कोई भी व्यक्ति ऊर्जाणु कर्मण्यता के सिद्धान्त में विश्वास नहीं करता । वहाँ सभी उसे प्रमाणित सत्य के विरुद्ध मानते हैं । 'पोप' चिन्तित हुए । तत्काल उन्होंने परसीको को 'प्रचार विभाग का पादरी' ( कार्डिनल फार प्रोपैगैण्डा फाइड ) का नाम दे डाला और नास्तिकों को 'प्रभु सन्देश ( गास्पल ) ' का प्रचार करने का आदेश दिया । परसीको अपने कार्य में बहुत कुछ सफल रहा। शीघ्र ही उसने 'पोप' के पास अपनी विस्तृत रिपोर्ट कविता में लिख भेजी । उसमें नास्तिकों के देश में अपने कार्य का विवरण दिया था और उसी रूप में समाप्त किया था । वे सत्य और गहरी आस्था से यह मानते हैं, जिसके सामने अब तर्क नतमस्तक है, कि प्रकाश स्वयं तरंग है और है तत्त्व ! तत्त्व 'इलेक्ट्रोन तरंग' है । अनेक सिद्धान्तो में यह भी है एक जिसे मैं नास्तिकों को सिखा रहा हूँ उनके तोष के लिए उदाहरण भी देता हूँ जिन्हें मैं 'होली गास्पेल' से लेता हूँ । 'होली गास्पेल' ऊर्जाणु कर्मण्यता की यांत्रिकता ( मेकैनिक्स ) पर परसीको की लिखी पुस्तक का नाम था, जो आगे चल कर अंग्रेजी में अनूदित हुई । "बेबी - प्यूगाट' सबसे छोटी मोटर थी जो मैंने देखी । वह फ्रांस में बनी थी और आस पार करके उसके जो एक-आध नमूने आ गये थे वे ही इटली में देखे जा सकते थे। उसमें मोटर साइकिल से कुछ ही अधिक तेल' खर्च होता और वह मोटर साइकिल की तरह ही शोर करती । उसमें 'डिफरेंशियल' न होने के कारण उसके सभी पहिये मोड़ पर एक ही गति से घूमते । फलतः, वह बच्चों की शक्ति-चालित गाड़ी की तरह हर मोड़ पर उछलती और कोरती थी। जिस ' बेबी-प्यूगाट' की चर्चा मैं करने जा रही हूँ, उसमें दो आदमी बैठ सकते थे और उसका रंग गहरा जर्द था । उसकी छत 'आयल क्लाथ' की बनी थी और चूती थी। उसके पीछे एक सीट थी जो खुलती-मुड़ती थी। जब वह अपनी बीस मील प्रति घंटा की पूरी चाल से चलती, तब उसके खुले 'एग्झास्ट' में से काले धुँएँ का गहरा बादल-सा छा जाता । विधिवत देखने का अवसर मिलने से कुछ दिनों पूर्व मैं उस गाड़ी के सम्बन्ध में सुन चुकी थी। सितम्बर १९२७ की बात है। मैं फ़ोरेंस के निकट अपने चाचा-चाची के मकान पर रह रही थी । उस मकान का कुछ भाग खलिहान था, और कुछ देहाती आवास था । उसके मेहराबदार फाटक से होकर बैलगाड़ियाँ तेल के कोल्हुओं के पास जाती थीं । नीचे की मंजिल कोठार के काम आती। पहली और दूसरी मंजिलें रहने के काम । नौकर पीछे की ओर रहते तथा मालिक और उनके अतिथि सामने की ओर । मेरा पूरा परिवार - पिताजी, माताजी, बहनें और भाई ऐसे अतिथि थे, जो हर साल वहाँ जाया करते । पिछले महायुद्ध से पहले ऐसा कोई साल न था जब हमने वहाँ एक-दो महीना न बिताया हो । दो शताब्दी से अधिक पुराना वह मकान इटालियन स्तर की दृष्टि से भी पुराना लगता था । वह एक पहाड़ी के किनारे सायेदार पेड़ों के झुण्ड के बीच स्थित था और उसके चारों ओर चबूतरा- सरीखा बगीचा था । उसके नीचे आ नदी की घाटी नजर आती थी, जिसमें खेत, जैतून के चमकीले हरे-हरे वृक्ष, परस्पर लिपटी हुई अंगूर बेलों की पाँत, बीच-बीच में साइप्रस ' के पेड़ और किसानों के सुन्दर मकान फैले हुए थे। घाटी के पार वेलम, ब्रोसा की पहाड़ियाँ थीं, जो शाम के समय अत्यन्त निकट और प्रातःकालीन कुहरे के बीच दूर और धूमिल दिखायी देतीं । अध्ययन एवं कल्पना की दृष्टि से वह पूर्णतः उपयुक्त स्थान था । सुबह होते ही मैं नित्य शहतूत के वृक्षों के बीच कंकरीले चबूतरे पर जाकर बैठती। पुराने चक्की के पत्थर की बनी भोंड़ी मेज के सामने मैं अपना मोढ़ा डाल लेती और उस पर अपनी किताबें फैला लेती । उस समय मैं प्रांगार-रसायन (आर्गेनिक केमेस्ट्री ) की एक नीरस परीक्षा की तैयारी कर रही थी । मेथेन, प्रोपेन, बूटेन.आह ! पत्थर की चोटी पर हाथ में हाथ मिलाये......माथेल, प्रोपिल, बूटिला दोपहर तक अन्य अतिथि भी शहतूत के पेड़ों के नीचे जमा हो जाते। तब मेरी दृष्टि तो किताब पर रहती; पर कान उनकी गप्पों की ओर लगे होते । मेरी बड़ी चाची सदा कुछ बुनायी का काम किया करतीं और बचकाने स्वेटर में अपने घर की भेड़ों के ऊन से कते धागों का फन्दा धीरे-धीरे डालतीं
जब फरमी ऊर्जाणु कर्मण्यता के सिद्धान्त' को पूर्ण विस्तार और गहराई के साथ बताने लगे तो छात्रों के दल को उसका समझाना कठिन चिंतन के साधारण स्तर से परे जान पड़ा । यह कहना कि तत्त्व : और शक्ति दोनों में तरंग-पुंज होता है, सत्य की अपेक्षा कारण ही है जो तर्क द्वारा सिद्ध नहीं किया जा सकता।" उन लोगों का कहना था - यह बात वस्तुतः है। और, जहाँ तक 'थ' का सम्बध है 'पोप' कभी गलत नहीं हो सकते । ऊर्जाणु कर्मण्यता के सिद्धान्त के सम्बन्ध में फरमी अचूक । अतः फरमी 'पोप' हैं - उसके बाद तो वे 'पोप' बन गये । जो छात्र नये आते, वे पहले तो इस नाम से चौंक पड़ते । पर, फरमी के इस मुकुटमरिण होने की बात नवयुवक भौतिक-शास्त्रियों के अन्ताराष्ट्रिय जगत में फैलते देर न लगी । रासेत्ती का यद्यपि कहना था कि वह 'ऊर्जाणु कर्मण्यता का सिद्धान्त ' पूरा-पूरा नहीं समझ सका है, तथापि वही फरमी की अनुपस्थिति में इस विषय के पढ़ाने में सक्षम था । उसे 'कार्डिनल विकार' की उपाधि मिली । काली आँखों वाला मेजोरना, जो स्पेनिश-सा लगता, गणित सम्बन्धी प्रथम प्रमाणों से कभी संतुष्ट नहीं होता, वरन् अपना अध्ययन जारी रखता। अपनी अन्तर्दृष्टि से गहराई में घुसता, ऊहापोह करता, प्रश्न पूछता और त्रुटियाँ पकड़ता । फलतः एत्तोरे मेजोरना का नाम पड़ा - 'महान् जिज्ञासु' । तभी एक दिन परसीको भौतिक विज्ञान भवन में आये । वे ट्यूरिन से आये थे और बुरी खबर लाये थे। उन्होंने बताया कि ट्यूरिन में कोई भी व्यक्ति ऊर्जाणु कर्मण्यता के सिद्धान्त में विश्वास नहीं करता । वहाँ सभी उसे प्रमाणित सत्य के विरुद्ध मानते हैं । 'पोप' चिन्तित हुए । तत्काल उन्होंने परसीको को 'प्रचार विभाग का पादरी' का नाम दे डाला और नास्तिकों को 'प्रभु सन्देश ' का प्रचार करने का आदेश दिया । परसीको अपने कार्य में बहुत कुछ सफल रहा। शीघ्र ही उसने 'पोप' के पास अपनी विस्तृत रिपोर्ट कविता में लिख भेजी । उसमें नास्तिकों के देश में अपने कार्य का विवरण दिया था और उसी रूप में समाप्त किया था । वे सत्य और गहरी आस्था से यह मानते हैं, जिसके सामने अब तर्क नतमस्तक है, कि प्रकाश स्वयं तरंग है और है तत्त्व ! तत्त्व 'इलेक्ट्रोन तरंग' है । अनेक सिद्धान्तो में यह भी है एक जिसे मैं नास्तिकों को सिखा रहा हूँ उनके तोष के लिए उदाहरण भी देता हूँ जिन्हें मैं 'होली गास्पेल' से लेता हूँ । 'होली गास्पेल' ऊर्जाणु कर्मण्यता की यांत्रिकता पर परसीको की लिखी पुस्तक का नाम था, जो आगे चल कर अंग्रेजी में अनूदित हुई । "बेबी - प्यूगाट' सबसे छोटी मोटर थी जो मैंने देखी । वह फ्रांस में बनी थी और आस पार करके उसके जो एक-आध नमूने आ गये थे वे ही इटली में देखे जा सकते थे। उसमें मोटर साइकिल से कुछ ही अधिक तेल' खर्च होता और वह मोटर साइकिल की तरह ही शोर करती । उसमें 'डिफरेंशियल' न होने के कारण उसके सभी पहिये मोड़ पर एक ही गति से घूमते । फलतः, वह बच्चों की शक्ति-चालित गाड़ी की तरह हर मोड़ पर उछलती और कोरती थी। जिस ' बेबी-प्यूगाट' की चर्चा मैं करने जा रही हूँ, उसमें दो आदमी बैठ सकते थे और उसका रंग गहरा जर्द था । उसकी छत 'आयल क्लाथ' की बनी थी और चूती थी। उसके पीछे एक सीट थी जो खुलती-मुड़ती थी। जब वह अपनी बीस मील प्रति घंटा की पूरी चाल से चलती, तब उसके खुले 'एग्झास्ट' में से काले धुँएँ का गहरा बादल-सा छा जाता । विधिवत देखने का अवसर मिलने से कुछ दिनों पूर्व मैं उस गाड़ी के सम्बन्ध में सुन चुकी थी। सितम्बर एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस की बात है। मैं फ़ोरेंस के निकट अपने चाचा-चाची के मकान पर रह रही थी । उस मकान का कुछ भाग खलिहान था, और कुछ देहाती आवास था । उसके मेहराबदार फाटक से होकर बैलगाड़ियाँ तेल के कोल्हुओं के पास जाती थीं । नीचे की मंजिल कोठार के काम आती। पहली और दूसरी मंजिलें रहने के काम । नौकर पीछे की ओर रहते तथा मालिक और उनके अतिथि सामने की ओर । मेरा पूरा परिवार - पिताजी, माताजी, बहनें और भाई ऐसे अतिथि थे, जो हर साल वहाँ जाया करते । पिछले महायुद्ध से पहले ऐसा कोई साल न था जब हमने वहाँ एक-दो महीना न बिताया हो । दो शताब्दी से अधिक पुराना वह मकान इटालियन स्तर की दृष्टि से भी पुराना लगता था । वह एक पहाड़ी के किनारे सायेदार पेड़ों के झुण्ड के बीच स्थित था और उसके चारों ओर चबूतरा- सरीखा बगीचा था । उसके नीचे आ नदी की घाटी नजर आती थी, जिसमें खेत, जैतून के चमकीले हरे-हरे वृक्ष, परस्पर लिपटी हुई अंगूर बेलों की पाँत, बीच-बीच में साइप्रस ' के पेड़ और किसानों के सुन्दर मकान फैले हुए थे। घाटी के पार वेलम, ब्रोसा की पहाड़ियाँ थीं, जो शाम के समय अत्यन्त निकट और प्रातःकालीन कुहरे के बीच दूर और धूमिल दिखायी देतीं । अध्ययन एवं कल्पना की दृष्टि से वह पूर्णतः उपयुक्त स्थान था । सुबह होते ही मैं नित्य शहतूत के वृक्षों के बीच कंकरीले चबूतरे पर जाकर बैठती। पुराने चक्की के पत्थर की बनी भोंड़ी मेज के सामने मैं अपना मोढ़ा डाल लेती और उस पर अपनी किताबें फैला लेती । उस समय मैं प्रांगार-रसायन की एक नीरस परीक्षा की तैयारी कर रही थी । मेथेन, प्रोपेन, बूटेन.आह ! पत्थर की चोटी पर हाथ में हाथ मिलाये......माथेल, प्रोपिल, बूटिला दोपहर तक अन्य अतिथि भी शहतूत के पेड़ों के नीचे जमा हो जाते। तब मेरी दृष्टि तो किताब पर रहती; पर कान उनकी गप्पों की ओर लगे होते । मेरी बड़ी चाची सदा कुछ बुनायी का काम किया करतीं और बचकाने स्वेटर में अपने घर की भेड़ों के ऊन से कते धागों का फन्दा धीरे-धीरे डालतीं
भारतीय नौसेना के 267 प्रशिक्षु तथा डायरेक्ट एंट्री इंजीनियरिंग मैकेनिक कोर्स (डीईएमई-60.941) के 27 भारतीय तटरक्षक प्रशिक्षुओं ने भा नौ पो शिवाजी में 07 सितंबर 2018 को आयोजित पासिंग आउट परेड में स्नातक कोर्स की उपाधि प्राप्त की। भा नौ पो शिवाजी के कमांडिंग ऑफिसर द्वारा समीक्षित पीओपी ने पेशेवर प्रारंभिक प्रशिक्षण के 26 सप्ताह पूर्ण होने के रूप में चिह्नित किया। शनी सारस्वत, डीईएमई समग्र योग्यता क्रम में प्रथम स्थान पर रहे तथा एफओसी-इन-सी (दक्षिण) रोलिंग ट्रॉफी तथा एक पुस्तक के पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। रजनीश सिंह, डीईएमई को कोर्स का "सर्वश्रेष्ठ स्पोर्ट्समैन" घोषित किया गया तथा कमाडोर की रोलिंग ट्रॉफी से सम्मानित किया गया।
भारतीय नौसेना के दो सौ सरसठ प्रशिक्षु तथा डायरेक्ट एंट्री इंजीनियरिंग मैकेनिक कोर्स के सत्ताईस भारतीय तटरक्षक प्रशिक्षुओं ने भा नौ पो शिवाजी में सात सितंबर दो हज़ार अट्ठारह को आयोजित पासिंग आउट परेड में स्नातक कोर्स की उपाधि प्राप्त की। भा नौ पो शिवाजी के कमांडिंग ऑफिसर द्वारा समीक्षित पीओपी ने पेशेवर प्रारंभिक प्रशिक्षण के छब्बीस सप्ताह पूर्ण होने के रूप में चिह्नित किया। शनी सारस्वत, डीईएमई समग्र योग्यता क्रम में प्रथम स्थान पर रहे तथा एफओसी-इन-सी रोलिंग ट्रॉफी तथा एक पुस्तक के पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। रजनीश सिंह, डीईएमई को कोर्स का "सर्वश्रेष्ठ स्पोर्ट्समैन" घोषित किया गया तथा कमाडोर की रोलिंग ट्रॉफी से सम्मानित किया गया।
घटना अमृतसर के जंडियाला गुरु इलाके में गैरी गांव के पास घटी, जिसमें से 7 लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। मरने वालों में दो बच्चे भी शामिल हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दशमेश नगर बोलेरो कार तेजी से आ रही थी। इसी दौरान कार ने एक रेहड़ी को टक्कर मार दी। इसके बाद उसने एक और कार को टक्कर मार दी और पास में खड़ं लोगों को कुचल दिया। हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना पर मौके पर पुलिस पहुंची और घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। मृतकों के परिजनों को जब हादसे की सूचना मिली तो वे भी मौके पर पहुंचे और विलाप करने लगे। मौके पर पुलिस के आलाधिकारी पहुंच चुके हैं।
घटना अमृतसर के जंडियाला गुरु इलाके में गैरी गांव के पास घटी, जिसमें से सात लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। मरने वालों में दो बच्चे भी शामिल हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दशमेश नगर बोलेरो कार तेजी से आ रही थी। इसी दौरान कार ने एक रेहड़ी को टक्कर मार दी। इसके बाद उसने एक और कार को टक्कर मार दी और पास में खड़ं लोगों को कुचल दिया। हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना पर मौके पर पुलिस पहुंची और घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। मृतकों के परिजनों को जब हादसे की सूचना मिली तो वे भी मौके पर पहुंचे और विलाप करने लगे। मौके पर पुलिस के आलाधिकारी पहुंच चुके हैं।
नाश्ता किया करता हूँ (टोकोजी उठाकर चायदानी को छूता है) चाय तो खूव गर्म है जीजाजी। राधू, और पानी अलग टी-पॉट में लाओ । तब तक एक-एक प्याला इसी में से हो जाये ! ( राधू जाता है, श्रीपत वकील साहब के प्याले में चाय ढालता है) आप दूध तो ज्यादा नहीं लेते ? ( दूध डालता है) और चीनी ? अंजली : (आगे बढ़कर क्रोध से) श्रीपत, तुम्हें टेबल मैनर्ज़ का भी ज्ञान नहीं । हटो, मैं बनाती हूँ चाय । श्रीपत : ना दीदी, चाय तो मैं अपनी सदा आप बनाता हूँ। तुम्हारी कसम, दूसरा कोई काम खुद नहीं करता, पर चाय - मैंने फ़ैसला कर रखा है कि या मेरी पत्नी आकर बनायेगी या फिर मैं ही... अंजली : (भाभी के आने की संभावना हो से जो प्रसन्न हो जाती है) तुम करो भी शादी, लड़कियाँ तो हज़ारों... श्रीपत : ( चाय की चुस्की लेकर) अरे दीदी !... शादी की कल्पना में जो मज़ा है, वह शादी में कहाँ ! (सहसा वकील साहब की ओर मुड़कर) जीजाजी से पूछ लो ! अंजली : क्यों, इन्हें क्या... इन्द्र० : नहीं भई, मैं तो... श्रीपत : वाह जीजाजी !... आपको अपनी कसम, भगवान को साक्षी जानकर कहिये, शादी की कल्पना में ज्यादा मज़ा है या शादी में ? याद है न, मैं अंजो दीदी की सगाई के सिलसिले में आपसे मिलने आया थाकितना हँसते थे आप उन दिनों; कितने ठहाके लगाते थे; कितनी बेपरवाही थी आपके स्वभाव में ! जो जी चाहे खाते थे, जो जी चाहे करते थे, जहाँ जी चाहे जाते थे । (हँसता है) और अब... इतनी देर से बैठे हैं और एक ठहाका भी तो आपने नहीं लगाया । आपकी कसम, आप तो हाई कोर्ट के जज दिखायी देते हैं... (हँसता और चाय की चुस्की लेता है) जबकि अभी आप एडवोकेट भी नहीं बने... जब एक वकील जज नज़र आने लगे तो समझिये कि वह बुड्ढा हो गया । वकील तो जवानी का प्रतीक है ( हँसता है) और जज बुढ़ापे का । कसम आपकी जीजाजी, शादी ने आपको बुड्ढा वना दिया है । स्वयं जोर से ठहाका लगाता और चाय पीता है) और क्यों जीजाजी, अपना वचन तो आप नहीं भूले न ! पिछली बार जब हम मिले थे तो आपने कहा था कि एक बार फिर दिलकुशा होटल में... इन्द्र० ( इस बात से घबराकर कि श्रीपत अपनी झोंक में कुछ और न वक : में दे, प्याला हाथ हो में लिये उठ खड़े होते हैं) लो भई, मुझे तो देर हो रही है। एक मामला है ज़रूरी । मैं लंच पर आने की कोशिश करूंगा उसे निवटाकर । मेरी प्रतीक्षा न करना ।
नाश्ता किया करता हूँ चाय तो खूव गर्म है जीजाजी। राधू, और पानी अलग टी-पॉट में लाओ । तब तक एक-एक प्याला इसी में से हो जाये ! आप दूध तो ज्यादा नहीं लेते ? और चीनी ? अंजली : श्रीपत, तुम्हें टेबल मैनर्ज़ का भी ज्ञान नहीं । हटो, मैं बनाती हूँ चाय । श्रीपत : ना दीदी, चाय तो मैं अपनी सदा आप बनाता हूँ। तुम्हारी कसम, दूसरा कोई काम खुद नहीं करता, पर चाय - मैंने फ़ैसला कर रखा है कि या मेरी पत्नी आकर बनायेगी या फिर मैं ही... अंजली : तुम करो भी शादी, लड़कियाँ तो हज़ारों... श्रीपत : अरे दीदी !... शादी की कल्पना में जो मज़ा है, वह शादी में कहाँ ! जीजाजी से पूछ लो ! अंजली : क्यों, इन्हें क्या... इन्द्रशून्य : नहीं भई, मैं तो... श्रीपत : वाह जीजाजी !... आपको अपनी कसम, भगवान को साक्षी जानकर कहिये, शादी की कल्पना में ज्यादा मज़ा है या शादी में ? याद है न, मैं अंजो दीदी की सगाई के सिलसिले में आपसे मिलने आया थाकितना हँसते थे आप उन दिनों; कितने ठहाके लगाते थे; कितनी बेपरवाही थी आपके स्वभाव में ! जो जी चाहे खाते थे, जो जी चाहे करते थे, जहाँ जी चाहे जाते थे । और अब... इतनी देर से बैठे हैं और एक ठहाका भी तो आपने नहीं लगाया । आपकी कसम, आप तो हाई कोर्ट के जज दिखायी देते हैं... जबकि अभी आप एडवोकेट भी नहीं बने... जब एक वकील जज नज़र आने लगे तो समझिये कि वह बुड्ढा हो गया । वकील तो जवानी का प्रतीक है और जज बुढ़ापे का । कसम आपकी जीजाजी, शादी ने आपको बुड्ढा वना दिया है । स्वयं जोर से ठहाका लगाता और चाय पीता है) और क्यों जीजाजी, अपना वचन तो आप नहीं भूले न ! पिछली बार जब हम मिले थे तो आपने कहा था कि एक बार फिर दिलकुशा होटल में... इन्द्रशून्य लो भई, मुझे तो देर हो रही है। एक मामला है ज़रूरी । मैं लंच पर आने की कोशिश करूंगा उसे निवटाकर । मेरी प्रतीक्षा न करना ।
Bihar Election 2020 \विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के बाद सरकार गठन की कवायद जारी है। इस सिलसिले में बीजेपी विधायक दल की बैठक 15 नवंबर को सुबह 10 बजे होगी। इसके बाद अगली सरकार के गठन को लेकर एनडीए की अहम बैठक होगी। पटना, स्टेट ब्यूरो। बिहार भाजपा विधानमंडल दल की बैठक रविवार को सुबह 10 बजे पार्टी प्रदेश मुख्यालय में होगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने बताया कि पार्टी कार्यालय से सभी विधायक और विधान पार्षद मुख्यमंत्री आवास 12. 30 में जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास पर एनडीए की बैठक होगी। इसमें एनडीए के चारों दलों के नेताओं की बैठक बुलाई गई है। नीतीश के आवास में बैठक के बाद एनडीए के शीर्ष नेता राजभवन सरकार बनाने के लिए दवा पेश करने जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दावा पेश करेंगे। नीतीश के साथ राजभवन जाने वाले नेताओं में उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी,कृषि मंत्री डॉ प्रेम कुमार, नंद किशोर यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के अलावा चारों दलों वरिष्ठ ने सरकार बनाने का समर्थक पत्र राज्यपाल फागू चौहान को सौपेंगे। बता दें कि एनडीए में भाजपा के 74, जेडीयू के 43, हम के 4 और वीआईपी को 4 सीटें मिली है।
Bihar Election दो हज़ार बीस \विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के बाद सरकार गठन की कवायद जारी है। इस सिलसिले में बीजेपी विधायक दल की बैठक पंद्रह नवंबर को सुबह दस बजे होगी। इसके बाद अगली सरकार के गठन को लेकर एनडीए की अहम बैठक होगी। पटना, स्टेट ब्यूरो। बिहार भाजपा विधानमंडल दल की बैठक रविवार को सुबह दस बजे पार्टी प्रदेश मुख्यालय में होगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने बताया कि पार्टी कार्यालय से सभी विधायक और विधान पार्षद मुख्यमंत्री आवास बारह. तीस में जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास पर एनडीए की बैठक होगी। इसमें एनडीए के चारों दलों के नेताओं की बैठक बुलाई गई है। नीतीश के आवास में बैठक के बाद एनडीए के शीर्ष नेता राजभवन सरकार बनाने के लिए दवा पेश करने जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दावा पेश करेंगे। नीतीश के साथ राजभवन जाने वाले नेताओं में उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी,कृषि मंत्री डॉ प्रेम कुमार, नंद किशोर यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के अलावा चारों दलों वरिष्ठ ने सरकार बनाने का समर्थक पत्र राज्यपाल फागू चौहान को सौपेंगे। बता दें कि एनडीए में भाजपा के चौहत्तर, जेडीयू के तैंतालीस, हम के चार और वीआईपी को चार सीटें मिली है।
DESK: देश के नक्सल प्रभावित राज्यों में नक्सलियों के खात्मे के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में पुलिस और सुरक्षाबलों को सफलता भी मिल रही है। इसी कड़ी में नक्सल समस्या से जूझ रहे मध्यप्रदेश के बालाघाट में सुरक्षा बलों को अहम कामयाबी मिली है। गढ़ी थाना क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान 14-14 लाख की इनामी दो महिला नक्सलियों को मार गिराया। जानकारी के मुताबिक, 22 अप्रैल की सुबह गढ़ी थाना के कदला के जंगलों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने 2 महिला नक्सलियों को ढेर कर दिया। दोनों की पहचान सुनीता और सरिता के रूप में हुई है। दोनों महिला नक्सली अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी थीं। दोनों ही महिला नक्सलियों पर सरकार ने 14-14 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। मारी गईं महिला नक्सलियों के पास से सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में हथियार, गोली समे अन्य सामानों को बरामद किया है। इस मुठभेड़ के बाद जंगल में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। बालाघाट जोन के पुलिस महानिरीक्षक संजय कुमार, पुलिस अधीक्षक समीर सौरभ और हॉकफोर्स सीओ ने दोनों इनामी नक्सलियों के मारे जाने के बाद मौके पर पहुंचकर हालात की जानकारी ली है।
DESK: देश के नक्सल प्रभावित राज्यों में नक्सलियों के खात्मे के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में पुलिस और सुरक्षाबलों को सफलता भी मिल रही है। इसी कड़ी में नक्सल समस्या से जूझ रहे मध्यप्रदेश के बालाघाट में सुरक्षा बलों को अहम कामयाबी मिली है। गढ़ी थाना क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान चौदह-चौदह लाख की इनामी दो महिला नक्सलियों को मार गिराया। जानकारी के मुताबिक, बाईस अप्रैल की सुबह गढ़ी थाना के कदला के जंगलों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने दो महिला नक्सलियों को ढेर कर दिया। दोनों की पहचान सुनीता और सरिता के रूप में हुई है। दोनों महिला नक्सली अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी थीं। दोनों ही महिला नक्सलियों पर सरकार ने चौदह-चौदह लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। मारी गईं महिला नक्सलियों के पास से सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में हथियार, गोली समे अन्य सामानों को बरामद किया है। इस मुठभेड़ के बाद जंगल में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। बालाघाट जोन के पुलिस महानिरीक्षक संजय कुमार, पुलिस अधीक्षक समीर सौरभ और हॉकफोर्स सीओ ने दोनों इनामी नक्सलियों के मारे जाने के बाद मौके पर पहुंचकर हालात की जानकारी ली है।
: विश्व काव्य सलिला - १ : भागवत प्रसाद मिश्रा 'नियाज' शीतकाल में हम वसंत को सदा बुलाते। जब वसंत आता निदाघ के गीत सुनाते। ग्रीष्म आगमन हुआ, झाडियाँ झूम रही हैं। शीतकाल है श्रेष्ठ यहीं अनुगूंज रही है। पर ऋतुराज नहीं आया है देखो अब तक। नहीं सुता है इस मन को कुछ भी तब तक। पर हम हैं अनभिज्ञ रुधिर क्यों स्थिर रहता? कब समाधि मिल जाए कामना करता रहता।
: विश्व काव्य सलिला - एक : भागवत प्रसाद मिश्रा 'नियाज' शीतकाल में हम वसंत को सदा बुलाते। जब वसंत आता निदाघ के गीत सुनाते। ग्रीष्म आगमन हुआ, झाडियाँ झूम रही हैं। शीतकाल है श्रेष्ठ यहीं अनुगूंज रही है। पर ऋतुराज नहीं आया है देखो अब तक। नहीं सुता है इस मन को कुछ भी तब तक। पर हम हैं अनभिज्ञ रुधिर क्यों स्थिर रहता? कब समाधि मिल जाए कामना करता रहता।
रतलाम जिला अस्पताल की लचर व्यवस्थाओं की पोल आज एक बार फिर खुल गई जब एडीएम ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देश पर जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंची एडीएम शालिनी श्रीवास्तव को मौके से कई डॉक्टर नदारद मिले। इसके बाद अपर कलेक्टर ने डॉक्टर उपस्थिति रजिस्टर जप्त किया। जिसमें डॉक्टरों ने कई दिनों से उपस्थिति दर्ज नहीं की थी । वही , जिला अस्पताल में नई एक्सरे मशीन उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं करने को लेकर एडीएम ने अस्पताल प्रबंधन से जवाब तलब किया है । आईसीयू वार्ड में भी बिजली के बोर्ड उखड़े हुए पाए गए। औचक निरीक्षण के लिए टीम के साथ पहुंची एडीएम ने मरीजों को दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता भी परखी। जिसमें खाने की गुणवत्ता को लेकर कैंटीन संचालक को फटकार भी लगाई। निरीक्षण के दौरान आरएमओ और सिविल सर्जन भी मौजूद रहे। जिला अस्पताल के साथ मातृ शिशु यूनिट का भी निरीक्षण एडीएम शालिनी श्रीवास्तव ने किया। ऑपरेशन कक्ष की हालत देखकर एडीएम ने नाराजगी व्यक्त की। ओटी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किए जाने को लेकर अपर कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए है। नवजात शिशु गहन चिकित्सा यूनिट में बेहद कम वजन के बच्चों को देखकर एडीएम ने स्वास्थ विभाग के जिम्मेदारों से पूछा कि नवजात शिशु की माताओं का स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक पोषण क्यों उपलब्ध नहीं करवाया गया । This website follows the DNPA Code of Ethics.
रतलाम जिला अस्पताल की लचर व्यवस्थाओं की पोल आज एक बार फिर खुल गई जब एडीएम ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देश पर जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंची एडीएम शालिनी श्रीवास्तव को मौके से कई डॉक्टर नदारद मिले। इसके बाद अपर कलेक्टर ने डॉक्टर उपस्थिति रजिस्टर जप्त किया। जिसमें डॉक्टरों ने कई दिनों से उपस्थिति दर्ज नहीं की थी । वही , जिला अस्पताल में नई एक्सरे मशीन उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं करने को लेकर एडीएम ने अस्पताल प्रबंधन से जवाब तलब किया है । आईसीयू वार्ड में भी बिजली के बोर्ड उखड़े हुए पाए गए। औचक निरीक्षण के लिए टीम के साथ पहुंची एडीएम ने मरीजों को दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता भी परखी। जिसमें खाने की गुणवत्ता को लेकर कैंटीन संचालक को फटकार भी लगाई। निरीक्षण के दौरान आरएमओ और सिविल सर्जन भी मौजूद रहे। जिला अस्पताल के साथ मातृ शिशु यूनिट का भी निरीक्षण एडीएम शालिनी श्रीवास्तव ने किया। ऑपरेशन कक्ष की हालत देखकर एडीएम ने नाराजगी व्यक्त की। ओटी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किए जाने को लेकर अपर कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए है। नवजात शिशु गहन चिकित्सा यूनिट में बेहद कम वजन के बच्चों को देखकर एडीएम ने स्वास्थ विभाग के जिम्मेदारों से पूछा कि नवजात शिशु की माताओं का स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक पोषण क्यों उपलब्ध नहीं करवाया गया । This website follows the DNPA Code of Ethics.
रतन ब्रान राम नाम अपि निर्मस होय । राम नाम अपि दुर्मति पोय ।। राम नाम जकि घटि वसभा । पम भावि ताहू मन यसमा ।। राम नाम महिमा को जाने । सत्य सविद साहू मन माने । साईदास राम चित धारि । भौ जलि विपम उतारे पार ।। ब्रह्म रूप होय पसरमा देपो मैन साईदास प्रतिर वारि निपयो भक्त हेवि मिति धारि ॥ गुसाई । राम रमझो है समनी भाई ॥ मिहार । साघ सगि मिस भ्रम भृग मार ॥ सचारी । रिदे प्रतीत होय जिन धारी ।। जो प्रतीति रिदे नहीं भावे । सुनो वेदि सुन भाप सुनाये । गुरि बनि वर्षानिसीयोनिग घारी । तो प्रतीत होय भन मारी ।। मौन वचन बहिके समय पूछो को को उत्तरि पायो । विना जोत क्या माटी बोसे । विना जोत कहू मार्ग सोसे ।। विना जोसि कह कहा पसारा । विनु जोते किठ कहा उजिभारा ।। ग्रह्मजोत सम ही जानो। जो दीसे सो साथ करि मानो । साइदास जिन ब्रह्म पछाना । बाका भूक भाविन जाना ॥ समो-सरि भरिमा भनिभ जले को जनि पी जाय । साईदास जावित जावन जाविही फिरि सुष रही निकाय ।। सरि भनिभ भरिमा सील्हाई। जो जाये बस सो अधिवाई ॥ भमिमें जस जिनने प्रचिवायो । भौ जसि तिनने मनि विसरामो ॥ विला त्याग दीनी विसवाही। ठाह मिकटि बिठा छु नाही ॥ सहज भयो जय ताप मिटाये। शिव नगिरो मासनि हि राये ॥ मानि महति सम दीयो विसारी। मटि पटि प्रपिनी जोत पसारी ॥ दूसरा भेद रि मिटि गर्यो । प्रपिता भापू पछाने लीयो ।। साम अनिम पुर माही। विषरति है ससा कछु माहीं ॥ सुलाई मानी संसा बीमोडार के मिहसस मनि होय । साईदामा सय पर जिस रिद वसिमा होय । ससा कहा जु हरिगुन गावे । नामि जपे दुभिवा मिटि जावे ।। जयगुन मनुभा सूत परोवे । स्वास संमान्ह पर नहीं पोये ।। एक स्वास हरि हरि गुनि गाये। स्वास प्रविर्या कोई नि जाने १ कहु साईबास सदा सुप हो । गुरि प्रसाद सपे जमि काम । समोक जिम के मनि मह उपजय मुक्त भयो फुति सोय । साईदास गुरपा सुप पाययो बुध वरिद्र भ्रम पोय ॥ जिनके मनि उपिजी परितीत । निर्मस होने ठोका श्री ।। माने पड़ेगुन गये । माने मनि मंडसि होय मागे ।। पाये । भागे सूपम भोमिन पाये ।। हटाये । मागे नागा मनि उठि भागे । राधे । मागे सो पछि सो माझे ॥ जाम । भावे भविगति भसिप सपाय जाने । सो सुप सागिर मांई गमठाने ।। सो पनि मय गमवान मनि भनिगति विसराम । साईबास ममता मिटी दुन गई सरि दीघ्र बताइ । सतिगुर जिनके मन मह भार्यो । पर्म पदार्थ सिमहू पायो । सतिपूरि जिन कोदीपो उपिदेसा। साहू का मिट गया प्रदेसा ॥ सतिर है दीपक की पाई। पति विमर छिनमै दूर जाई । मतिमुरिबमन भटति दुप गिर्मा। महाममंत रहे मह भयो । जीविन मूसि रिये मह भार्यो । जो बछ इसमा सोफस पायो । गुराम राम रिये माही। धपति ही ग्रुप सहिम समाझी । साईग सनिपुरि बम जायो । तिहि प्रमादि हरि के गुम गायो । ससोकप्रथम बुद्ध ध्यावत मई पौरि प्रकामयो भाय । साईदाम आदि पुष उरीमो मनि बिगरयो वाह ।। अनिम लीयो सागिर भ्रम प्रामो कस करारि सकल विसरायो ॥ जनिनी को पय जवि ही पीयो । भजिन गुपाल तविही तजि दीयो ।। ममता के गृह माही भायो । म म वचन मुप से सुनायो । सुम माता के प्रगिटि भाइ होमो । विसर गियो रस माता सोमो ।। त्रय गुनि माही पेसन लागा। गोविंद भजन रिव त भागा ।। दनिय कामनी हेत बघायो । प्रपिना मनि ताहू चितु लामो ।। ठोकारि को दीयो बिसारी । महा मलीनि मनि से चितधारी । साइपास जिस हरि विसरायो । मत समे बहुत दुप पामो ।। मनिहदि वाजे रे भमा निसवासरि पम छीन । साईदास सुत नित ताहू भई गुरि किरपा करि दीन । मनिहदि तार बजे मेरे भाई । निसमासरिताको सिवि लाई ।। जोनी लिव सागी फुन तांको । मनिहदि उपज रह्यो घटि वाको ।। त्रिगुटी मे रह्यो उरिमाई । उनिमनी म फुमि ध्यान लगाई ॥ वहां रचिति सोह पदि वोसे । इति उति मनुमा मूस न होते ।। सही रक्त सभ सूर्य पसारे । भनिदि सविद होत उजिभारे ।। भाषागवन से भमा निमारा । छाठि दायो सभ सक्स पसारा ॥ माइस गुरि मत्रि दिढायो । तिहि प्रसादि प्रम पदि पायो ।। सीन भविन म विघरते सूपम प्रति मस्तूल । माईदास जब जाम्या तरि निकट है पाभी जीविन मूल ।। मानो ध्यान की सुन याति । भरो ध्यानि बहु वेद घनात ।। भधिर ध्यान बेद मुप भापे । हरि रम माता प्रमृत चापे ॥ जा संमृति हरि माम बहीजे । सो प्रमृति मिस मापनि पाजे ।। मुप भ्रमृति हरिनामु कहावे । जति भागि सोई जनि पावे ॥ मिस माघ सगि करे मानवि । सदा बने पटि परिमान ॥ जाने रिद धार्मति हुया । मो नft मा मदा जुग जोयो । गुरि प्रसादि माईम बताइयों। पूर्न नाम रिदे में भायो । सतोर-परिम पदार्थ पाइयो हरि मेवा बितु साय । साईशम गुर प्रमादि भ्रम उतिग्यो निमर मिटाया जाय ॥ पम पुप का ध्यानि करीजे । गुरि मंतरि भतमेह दीजे ॥ गुर मार्ग छित मह विद्यमाने । ठोरि ठिकाणा निकटि बसावे ।। वर्पन म्याई ग्रुप उसिटि दिपाई। विष्ट पडो ममता मिटि बाई ।। जविते उसिटि परभो गृह माही। मुझे बुझे माप भाप छोड़ जाही ।। साईशस गोविंद गलतान को जनि को प्राविण जान ।। ठुमरी गति प्रपार है नयी न जाये माईदास भा काहू सो उपजयो बिसमर हो तिइ गाति । तू विपास भपार प्रभ होई । भपी निजाइभवगति पति सोई ।। युपिमंजन हरि दीनदमाम । कर्णामय गोबिंद मोपासं ॥ परिमानवि मदा सुपदावर । भक्ति वक्षम हरि सदा सहायक ।। गुनि मिभान मामो ममसूदन । सक्रम यमित पसरभो मभुसूदन ॥ मियम जोन उजिभारा पा । भटम गोठ प्रभु सदा अमृपा ।। गिरवर के नदन । सकल गत वाहू चित बघन ।। परिमानव मुत्र मुरारी । जामिन रूप बमोतिहारी ।। नारिमिष सुकर वपु मानें । भगित सभ काम समारत ।। त्रिभुरूप बम रहिराई । सकम सम रचना रचाई ।। मनि मोहनि हरि कुंजबिहारी । श्री गोपाल भगिवन हितकारी ।। पत्रित उभान मीनदिपासा । मादि मति मधि है रविबाला मटिकाटिनपनियारम । भमिठ हेन प्रम कप पसारन ।। मोहून मठ भागरथम भारी । पूर्ण पुप थी कुछ बिहारी ।। पोनियम जिवासि ठाकुम । गुमिन पान सभ के गुनि धामिर ।। मम भयि प्रम रह्यो समाई । कौसापति हरि त्रिभुवन राई ।। जोजोवाह के गुनि गाम । मुक्त सह पछि साति ममाने ।। मादाम भूपि नाम निमान । गुरि किरपा पायो मगिवान ।। १ यहा से प्रभु के काम महिमा वर्ष है। २ नापति कमलापति । रखन ज्ञान भारम भनि बुद्ध एक है मामे भेव नि कोय । साइदास जी माने माही । कर फुनि नामु सवाही ।। दृषि प्रकास परिमातम होई । भात्म मनि मिल दुमत पोई ।। सभ हो भीतिर ब्रह्म पाना । भपिना प्रापि देव पवीभ्राना ।। नैनन माही दोर्यो दिपाई। भौरि नहीं मछु नाम सुहाई ॥ एको राम रमयों सभ भाई । साईदास सुप मानदि माही ।। ससोक - जोग ध्यान पटि कोटि को मात जोगी होय । विम भाते घरि ना वस जतिन कर जा काय ॥ ५३ प्रथमे मूम द्वारि रोकाये । दुटिए लघ दुमार फुमि भाव ॥ नामि कविस बाठ घरि महे । वतत भविमुत सीमा बहे ।। उमिटि पविन जवि हिवें भावे । पानंदि होइ भनद समावे ।। जीवित ग्राइ बस्यो तिस मंदर । प्रतिमुसि रूप बन्यो प्रति मुदरि ।। विमर गियो जो काम कमावित । मरिडा बि सुप उपिजावत ॥ गुनि गियों प्रगम भरि भावे । जगित मोह सभ ही विसरावे ।। पचि दूति काकीनो पापु । पग सियो सोइ बरि जापु । अवि तो उनिमन माह समायो । भयो छू था जो जगि भायो । सीयो पचान परिमारमसुपजविही । उनिमनि में राता जनि सविही ।। मोहूं पदि सो रहयो उरिभाई। माईदास गुरि दोर्यो मलाई । पिल चक ना वग कछुदिप्ट पड़ो नहीं मीति । माइदास पपिना भापु पछानियो निमस हाइयो श्रोति ।। चिह्न पक्रबछु दिष्ट न भायो । मानि गयो प्रातिम मुप पायो । जोक या मोई बधु भर्यो । समा मोग रिदे मिटि गयो । मगिन होप पुरि माहि ममामा । अनिहरि तार बत्र मनि भायो । बाजित यजल वारि मिनाई। नित मत पा बद्द राममा ॥ १ साईराम जी का नियाम- पवबाद। पर्म पुर्व का भ्यानि करोजे । गुरि मतरि मंतर्मह दोजे ।। गुर मार्ग चिम मह विपसावे । ठौरि ठिकारण निमटि सतावे ।। वर्पन न्याई मुप उलिटि दिपाई। दिष्ट पडो ममता मिटि जाई । अमिते उमिटि परभो गृह माही। बूझे चूके भाप प्राप होइ जाही साईदास गोविंद गमतान। पूको जनि को माबिण जान ।। तुमरी गति प्रपार है मयो न जाने साईबास मा काहू सो उपनयो विसमर हो विह्न गावि । तू विमास प्रपार प्रम होई। सपी निआइभमराति गति सोई ।। बुधिमंजनि हरि दीनश्माम' । कामय गोविंद गोपार्स ।। परिमानदि सा सुपायक भमित वस हरि सदा सहायक है। गुमि निधाम मानो ममसूदनि । सकस यगिस पसरपो मभुमू म ॥ निमस जोत उगिभारा रूपा । पटस गोठ प्रभु सदा अनुपा ।। गिरवर भारो के मदन । सक्स जमत साहू पित गमन ।। परिमामय मुराये । बामिन रूप बम्पोधिकारी ।। मारिसिंग भूकर वपु धार्न । भगिताइव सभ काम समारन ।। बिभु रूप धर्मी ठहिराई सकस रूप रथमा रचाई ।। मनिमोहति हरि कुजविहारी । यो गोपाम भगितम हितकारी ।। पतिठ उभाने दीनदिमामा । भादि अति समि है रविनामा ॥ सकटिकाटित दूप निवारन । भगित हेत प्रभु रूप पसारन ।। मोहन मउ गोवरबन मारी। पूर्ण पुप श्री कुंज विहारी ।। वीमियम वृमियासि ठाकुरु । गुमिम पान सम के गुनि भागिर । म भगि प्रभ रह्यो समाई । कीनापति हरि त्रिभुवन राई ।। जोजो के मुनि गावे । मुक्त महे पछि साति समाय ।। माईदास मुपि नाम निमान । गुरि किरपा पायो भगिधाम ।। १ मा सै प्रभु के धकारों की महिमा का वर्णन है। २ौनापति कमलापति ।
रतन ब्रान राम नाम अपि निर्मस होय । राम नाम अपि दुर्मति पोय ।। राम नाम जकि घटि वसभा । पम भावि ताहू मन यसमा ।। राम नाम महिमा को जाने । सत्य सविद साहू मन माने । साईदास राम चित धारि । भौ जलि विपम उतारे पार ।। ब्रह्म रूप होय पसरमा देपो मैन साईदास प्रतिर वारि निपयो भक्त हेवि मिति धारि ॥ गुसाई । राम रमझो है समनी भाई ॥ मिहार । साघ सगि मिस भ्रम भृग मार ॥ सचारी । रिदे प्रतीत होय जिन धारी ।। जो प्रतीति रिदे नहीं भावे । सुनो वेदि सुन भाप सुनाये । गुरि बनि वर्षानिसीयोनिग घारी । तो प्रतीत होय भन मारी ।। मौन वचन बहिके समय पूछो को को उत्तरि पायो । विना जोत क्या माटी बोसे । विना जोत कहू मार्ग सोसे ।। विना जोसि कह कहा पसारा । विनु जोते किठ कहा उजिभारा ।। ग्रह्मजोत सम ही जानो। जो दीसे सो साथ करि मानो । साइदास जिन ब्रह्म पछाना । बाका भूक भाविन जाना ॥ समो-सरि भरिमा भनिभ जले को जनि पी जाय । साईदास जावित जावन जाविही फिरि सुष रही निकाय ।। सरि भनिभ भरिमा सील्हाई। जो जाये बस सो अधिवाई ॥ भमिमें जस जिनने प्रचिवायो । भौ जसि तिनने मनि विसरामो ॥ विला त्याग दीनी विसवाही। ठाह मिकटि बिठा छु नाही ॥ सहज भयो जय ताप मिटाये। शिव नगिरो मासनि हि राये ॥ मानि महति सम दीयो विसारी। मटि पटि प्रपिनी जोत पसारी ॥ दूसरा भेद रि मिटि गर्यो । प्रपिता भापू पछाने लीयो ।। साम अनिम पुर माही। विषरति है ससा कछु माहीं ॥ सुलाई मानी संसा बीमोडार के मिहसस मनि होय । साईदामा सय पर जिस रिद वसिमा होय । ससा कहा जु हरिगुन गावे । नामि जपे दुभिवा मिटि जावे ।। जयगुन मनुभा सूत परोवे । स्वास संमान्ह पर नहीं पोये ।। एक स्वास हरि हरि गुनि गाये। स्वास प्रविर्या कोई नि जाने एक कहु साईबास सदा सुप हो । गुरि प्रसाद सपे जमि काम । समोक जिम के मनि मह उपजय मुक्त भयो फुति सोय । साईदास गुरपा सुप पाययो बुध वरिद्र भ्रम पोय ॥ जिनके मनि उपिजी परितीत । निर्मस होने ठोका श्री ।। माने पड़ेगुन गये । माने मनि मंडसि होय मागे ।। पाये । भागे सूपम भोमिन पाये ।। हटाये । मागे नागा मनि उठि भागे । राधे । मागे सो पछि सो माझे ॥ जाम । भावे भविगति भसिप सपाय जाने । सो सुप सागिर मांई गमठाने ।। सो पनि मय गमवान मनि भनिगति विसराम । साईबास ममता मिटी दुन गई सरि दीघ्र बताइ । सतिगुर जिनके मन मह भार्यो । पर्म पदार्थ सिमहू पायो । सतिपूरि जिन कोदीपो उपिदेसा। साहू का मिट गया प्रदेसा ॥ सतिर है दीपक की पाई। पति विमर छिनमै दूर जाई । मतिमुरिबमन भटति दुप गिर्मा। महाममंत रहे मह भयो । जीविन मूसि रिये मह भार्यो । जो बछ इसमा सोफस पायो । गुराम राम रिये माही। धपति ही ग्रुप सहिम समाझी । साईग सनिपुरि बम जायो । तिहि प्रमादि हरि के गुम गायो । ससोकप्रथम बुद्ध ध्यावत मई पौरि प्रकामयो भाय । साईदाम आदि पुष उरीमो मनि बिगरयो वाह ।। अनिम लीयो सागिर भ्रम प्रामो कस करारि सकल विसरायो ॥ जनिनी को पय जवि ही पीयो । भजिन गुपाल तविही तजि दीयो ।। ममता के गृह माही भायो । म म वचन मुप से सुनायो । सुम माता के प्रगिटि भाइ होमो । विसर गियो रस माता सोमो ।। त्रय गुनि माही पेसन लागा। गोविंद भजन रिव त भागा ।। दनिय कामनी हेत बघायो । प्रपिना मनि ताहू चितु लामो ।। ठोकारि को दीयो बिसारी । महा मलीनि मनि से चितधारी । साइपास जिस हरि विसरायो । मत समे बहुत दुप पामो ।। मनिहदि वाजे रे भमा निसवासरि पम छीन । साईदास सुत नित ताहू भई गुरि किरपा करि दीन । मनिहदि तार बजे मेरे भाई । निसमासरिताको सिवि लाई ।। जोनी लिव सागी फुन तांको । मनिहदि उपज रह्यो घटि वाको ।। त्रिगुटी मे रह्यो उरिमाई । उनिमनी म फुमि ध्यान लगाई ॥ वहां रचिति सोह पदि वोसे । इति उति मनुमा मूस न होते ।। सही रक्त सभ सूर्य पसारे । भनिदि सविद होत उजिभारे ।। भाषागवन से भमा निमारा । छाठि दायो सभ सक्स पसारा ॥ माइस गुरि मत्रि दिढायो । तिहि प्रसादि प्रम पदि पायो ।। सीन भविन म विघरते सूपम प्रति मस्तूल । माईदास जब जाम्या तरि निकट है पाभी जीविन मूल ।। मानो ध्यान की सुन याति । भरो ध्यानि बहु वेद घनात ।। भधिर ध्यान बेद मुप भापे । हरि रम माता प्रमृत चापे ॥ जा संमृति हरि माम बहीजे । सो प्रमृति मिस मापनि पाजे ।। मुप भ्रमृति हरिनामु कहावे । जति भागि सोई जनि पावे ॥ मिस माघ सगि करे मानवि । सदा बने पटि परिमान ॥ जाने रिद धार्मति हुया । मो नft मा मदा जुग जोयो । गुरि प्रसादि माईम बताइयों। पूर्न नाम रिदे में भायो । सतोर-परिम पदार्थ पाइयो हरि मेवा बितु साय । साईशम गुर प्रमादि भ्रम उतिग्यो निमर मिटाया जाय ॥ पम पुप का ध्यानि करीजे । गुरि मंतरि भतमेह दीजे ॥ गुर मार्ग छित मह विद्यमाने । ठोरि ठिकाणा निकटि बसावे ।। वर्पन म्याई ग्रुप उसिटि दिपाई। विष्ट पडो ममता मिटि बाई ।। जविते उसिटि परभो गृह माही। मुझे बुझे माप भाप छोड़ जाही ।। साईशस गोविंद गलतान को जनि को प्राविण जान ।। ठुमरी गति प्रपार है नयी न जाये माईदास भा काहू सो उपजयो बिसमर हो तिइ गाति । तू विपास भपार प्रभ होई । भपी निजाइभवगति पति सोई ।। युपिमंजन हरि दीनदमाम । कर्णामय गोबिंद मोपासं ॥ परिमानवि मदा सुपदावर । भक्ति वक्षम हरि सदा सहायक ।। गुनि मिभान मामो ममसूदन । सक्रम यमित पसरभो मभुसूदन ॥ मियम जोन उजिभारा पा । भटम गोठ प्रभु सदा अमृपा ।। गिरवर के नदन । सकल गत वाहू चित बघन ।। परिमानव मुत्र मुरारी । जामिन रूप बमोतिहारी ।। नारिमिष सुकर वपु मानें । भगित सभ काम समारत ।। त्रिभुरूप बम रहिराई । सकम सम रचना रचाई ।। मनि मोहनि हरि कुंजबिहारी । श्री गोपाल भगिवन हितकारी ।। पत्रित उभान मीनदिपासा । मादि मति मधि है रविबाला मटिकाटिनपनियारम । भमिठ हेन प्रम कप पसारन ।। मोहून मठ भागरथम भारी । पूर्ण पुप थी कुछ बिहारी ।। पोनियम जिवासि ठाकुम । गुमिन पान सभ के गुनि धामिर ।। मम भयि प्रम रह्यो समाई । कौसापति हरि त्रिभुवन राई ।। जोजोवाह के गुनि गाम । मुक्त सह पछि साति ममाने ।। मादाम भूपि नाम निमान । गुरि किरपा पायो मगिवान ।। एक यहा से प्रभु के काम महिमा वर्ष है। दो नापति कमलापति । रखन ज्ञान भारम भनि बुद्ध एक है मामे भेव नि कोय । साइदास जी माने माही । कर फुनि नामु सवाही ।। दृषि प्रकास परिमातम होई । भात्म मनि मिल दुमत पोई ।। सभ हो भीतिर ब्रह्म पाना । भपिना प्रापि देव पवीभ्राना ।। नैनन माही दोर्यो दिपाई। भौरि नहीं मछु नाम सुहाई ॥ एको राम रमयों सभ भाई । साईदास सुप मानदि माही ।। ससोक - जोग ध्यान पटि कोटि को मात जोगी होय । विम भाते घरि ना वस जतिन कर जा काय ॥ तिरेपन प्रथमे मूम द्वारि रोकाये । दुटिए लघ दुमार फुमि भाव ॥ नामि कविस बाठ घरि महे । वतत भविमुत सीमा बहे ।। उमिटि पविन जवि हिवें भावे । पानंदि होइ भनद समावे ।। जीवित ग्राइ बस्यो तिस मंदर । प्रतिमुसि रूप बन्यो प्रति मुदरि ।। विमर गियो जो काम कमावित । मरिडा बि सुप उपिजावत ॥ गुनि गियों प्रगम भरि भावे । जगित मोह सभ ही विसरावे ।। पचि दूति काकीनो पापु । पग सियो सोइ बरि जापु । अवि तो उनिमन माह समायो । भयो छू था जो जगि भायो । सीयो पचान परिमारमसुपजविही । उनिमनि में राता जनि सविही ।। मोहूं पदि सो रहयो उरिभाई। माईदास गुरि दोर्यो मलाई । पिल चक ना वग कछुदिप्ट पड़ो नहीं मीति । माइदास पपिना भापु पछानियो निमस हाइयो श्रोति ।। चिह्न पक्रबछु दिष्ट न भायो । मानि गयो प्रातिम मुप पायो । जोक या मोई बधु भर्यो । समा मोग रिदे मिटि गयो । मगिन होप पुरि माहि ममामा । अनिहरि तार बत्र मनि भायो । बाजित यजल वारि मिनाई। नित मत पा बद्द राममा ॥ एक साईराम जी का नियाम- पवबाद। पर्म पुर्व का भ्यानि करोजे । गुरि मतरि मंतर्मह दोजे ।। गुर मार्ग चिम मह विपसावे । ठौरि ठिकारण निमटि सतावे ।। वर्पन न्याई मुप उलिटि दिपाई। दिष्ट पडो ममता मिटि जाई । अमिते उमिटि परभो गृह माही। बूझे चूके भाप प्राप होइ जाही साईदास गोविंद गमतान। पूको जनि को माबिण जान ।। तुमरी गति प्रपार है मयो न जाने साईबास मा काहू सो उपनयो विसमर हो विह्न गावि । तू विमास प्रपार प्रम होई। सपी निआइभमराति गति सोई ।। बुधिमंजनि हरि दीनश्माम' । कामय गोविंद गोपार्स ।। परिमानदि सा सुपायक भमित वस हरि सदा सहायक है। गुमि निधाम मानो ममसूदनि । सकस यगिस पसरपो मभुमू म ॥ निमस जोत उगिभारा रूपा । पटस गोठ प्रभु सदा अनुपा ।। गिरवर भारो के मदन । सक्स जमत साहू पित गमन ।। परिमामय मुराये । बामिन रूप बम्पोधिकारी ।। मारिसिंग भूकर वपु धार्न । भगिताइव सभ काम समारन ।। बिभु रूप धर्मी ठहिराई सकस रूप रथमा रचाई ।। मनिमोहति हरि कुजविहारी । यो गोपाम भगितम हितकारी ।। पतिठ उभाने दीनदिमामा । भादि अति समि है रविनामा ॥ सकटिकाटित दूप निवारन । भगित हेत प्रभु रूप पसारन ।। मोहन मउ गोवरबन मारी। पूर्ण पुप श्री कुंज विहारी ।। वीमियम वृमियासि ठाकुरु । गुमिम पान सम के गुनि भागिर । म भगि प्रभ रह्यो समाई । कीनापति हरि त्रिभुवन राई ।। जोजो के मुनि गावे । मुक्त महे पछि साति समाय ।। माईदास मुपि नाम निमान । गुरि किरपा पायो भगिधाम ।। एक मा सै प्रभु के धकारों की महिमा का वर्णन है। दोौनापति कमलापति ।
मनीला। चीन की दादागिरी के खिलाफ अब भारत को आॅस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान का साथ मिल गया है। जी हां, भारत चीन की वन बेल्ट वन रोड परियोजना से चिंतित है। भारत का मानना है कि यह सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है। मगर चीन ने वैश्विक मंदी के दौर में आर्थिक नियंत्रण स्थापित करने के लिए इस प्रोजेक्ट की शुरूआत की और वह चाहता है कि विश्व के सभी देश इस परियोजना को अपनाऐं और मानें। मगर चीन के बढ़ते प्रभाव से वैश्विक शक्तियां परेशान हैं। चीन के प्रभाव के बढ़ने के साथ अमेरिका का प्रभाव बेहद कम हुआ है। दुनिया परेशान है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस परियोजना का दुनिया के पास कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में भारत से मिलकर आॅस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान ने इसका विकल्प खोजने की तैयारी कर ली है। विश्व के कई देश चाहते हैं कि वैश्विक मंदी के दौर में उनकी अर्थव्यव्था मजबूत हो और चीन की अनावश्यक दखल समाप्त हो। हालांकि इस मामले में चीन ने अपनी अप्रसन्नता व्यक्त की है। चीन अभी तक द्वितीय विश्व युद्ध की कश्मकश से बाहर नहीं निकलता है साथ ही दोनों देशों के बीच तेजी से क्षेत्रीय विवाद भी बढ़ा है। अमेरिका कई बार चीन को दक्षिण चीन सागर में उत्तर कोरिया के प्रभाव को कम करने के लिए कह चुका है बावजूद इसके चीन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं ऐसे में अमेरिका भारत की ओर बढ़ रहा है।
मनीला। चीन की दादागिरी के खिलाफ अब भारत को आॅस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान का साथ मिल गया है। जी हां, भारत चीन की वन बेल्ट वन रोड परियोजना से चिंतित है। भारत का मानना है कि यह सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है। मगर चीन ने वैश्विक मंदी के दौर में आर्थिक नियंत्रण स्थापित करने के लिए इस प्रोजेक्ट की शुरूआत की और वह चाहता है कि विश्व के सभी देश इस परियोजना को अपनाऐं और मानें। मगर चीन के बढ़ते प्रभाव से वैश्विक शक्तियां परेशान हैं। चीन के प्रभाव के बढ़ने के साथ अमेरिका का प्रभाव बेहद कम हुआ है। दुनिया परेशान है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस परियोजना का दुनिया के पास कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में भारत से मिलकर आॅस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान ने इसका विकल्प खोजने की तैयारी कर ली है। विश्व के कई देश चाहते हैं कि वैश्विक मंदी के दौर में उनकी अर्थव्यव्था मजबूत हो और चीन की अनावश्यक दखल समाप्त हो। हालांकि इस मामले में चीन ने अपनी अप्रसन्नता व्यक्त की है। चीन अभी तक द्वितीय विश्व युद्ध की कश्मकश से बाहर नहीं निकलता है साथ ही दोनों देशों के बीच तेजी से क्षेत्रीय विवाद भी बढ़ा है। अमेरिका कई बार चीन को दक्षिण चीन सागर में उत्तर कोरिया के प्रभाव को कम करने के लिए कह चुका है बावजूद इसके चीन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं ऐसे में अमेरिका भारत की ओर बढ़ रहा है।
जातियों' के नामसे किया गया है, की व्याख्या के बारेमें ही अनिश्चित है, बल्कि अगर फैसला ठीक है तो, इस शब्दकी अभीतक कोई कानूनी परिभाषा ही नहीं बनी है। यदि यह ठीक है, तो यह समझना कुछ कठिन नहीं है कि इस परिभाषाके अभाव में हरिजनोंके प्रति घोर अन्याय हो सकता है और उससे दुःखदायी परिणाम निकल सकते हैं। इससे तो सवर्णों और हरिजनों, तथा हरिजनों और हरिजनों एवं हिन्दुओं और गैर-हिन्दुओंके बीच बहुत कटुता व लड़ाई-झगड़े पैदा हो सकते हैं। अगर कानून द्वारा अस्पृश्यताको स्थायी नहीं बनाना है, तो यह बहुत जरूरी है कि इस शब्दकी उचित व्याख्या निश्चित करनेकी ओर जनता अपना ध्यान एकाग्र करे । पाठक यदि उक्त मुन्सिफके फैसले के निम्न अंश' को ध्यानसे पढ़ डालें तो वे मेरे अभिप्रायको अधिक अच्छी तरह समझ सकेंगे । [ अंग्रेज़ी से ] हरिजन, ३०-९-१९३३ ४३. हरिजन छात्रावास एक हरिजन छात्रावासके संचालकने लिखा है : यह कोई नई बात नहीं है । हरएक छात्रावास में पाखानेकीसफाई तकका काम विद्यार्थियोंसे कराना चाहिए, इसमें मुझे तनिक भी शंका नहीं । ऐसा करानेसे विद्यार्थियों की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आती। सच पूछा जाये तो इससे तो उनके अध्ययनमें वास्तविकताका योग होता है और उनके स्वास्थ्यकी भी उन्नति होगी; और पैसेकी बचत होती है, सो अलग । परन्तु जो संचालक विद्यार्थियोंमें सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करनेके लोभसे अथवा अपने विद्यार्थियोंके साथ इन बातोंकी चर्चा करने में आलस्य करनेके कारण उन्हें छात्रावासके सारे काम करना नहीं समझाता, वह विद्यार्थियोंकी कोई भलाई नहीं करता । ऐसी मेहनतको विद्यार्थियोंकी शिक्षाका एक अंग समझना चाहिए । पर विद्यार्थियोंसे यह दैनिक काम कराने में एक शर्त जरूरी है । वह यह कि संचालकोंको स्वयं काममें मदद देकर अपना उदाहरण उनके आगे रखना चाहिए । ऐसा किया जाये तो फिर "क्षुद्रताकी भावना बढ़नेका" जरा भी भय नहीं रहेगा । [ अंग्रेजी से ] १. यहाँ नहीं दिया गया है। निर्णय में कहा गया था : "नगरपालिका अधिनियम में 'दलित वर्ग ' को कोई व्याख्या नहीं दी गई है। अदालतको यह पता नहीं है कि कानून द्वारा जो मान्य हो, ऐसी कोई कानूनी परिभाषा इस शब्दकी है।... २. इस अंग्रेजी लेखको यद्यपि ३०-९-१९३३ के हरिजन में प्रकाशित किया गया तथापि इसका गुजराती अनुवाद हरिजनबन्धु के २४-९-१९३३ के अंक में पहले ही छाप दिया गया था। ३. पत्र यहाँ नहीं दिया गया है। पत्र लेखकने गांधीजीसे पूछा था कि यदि छात्रावासों में छात्रोंसे बर्तन मंजबाये जायें तो क्या इसमें अनुचित होगा ?
जातियों' के नामसे किया गया है, की व्याख्या के बारेमें ही अनिश्चित है, बल्कि अगर फैसला ठीक है तो, इस शब्दकी अभीतक कोई कानूनी परिभाषा ही नहीं बनी है। यदि यह ठीक है, तो यह समझना कुछ कठिन नहीं है कि इस परिभाषाके अभाव में हरिजनोंके प्रति घोर अन्याय हो सकता है और उससे दुःखदायी परिणाम निकल सकते हैं। इससे तो सवर्णों और हरिजनों, तथा हरिजनों और हरिजनों एवं हिन्दुओं और गैर-हिन्दुओंके बीच बहुत कटुता व लड़ाई-झगड़े पैदा हो सकते हैं। अगर कानून द्वारा अस्पृश्यताको स्थायी नहीं बनाना है, तो यह बहुत जरूरी है कि इस शब्दकी उचित व्याख्या निश्चित करनेकी ओर जनता अपना ध्यान एकाग्र करे । पाठक यदि उक्त मुन्सिफके फैसले के निम्न अंश' को ध्यानसे पढ़ डालें तो वे मेरे अभिप्रायको अधिक अच्छी तरह समझ सकेंगे । [ अंग्रेज़ी से ] हरिजन, तीस सितंबर एक हज़ार नौ सौ तैंतीस तैंतालीस. हरिजन छात्रावास एक हरिजन छात्रावासके संचालकने लिखा है : यह कोई नई बात नहीं है । हरएक छात्रावास में पाखानेकीसफाई तकका काम विद्यार्थियोंसे कराना चाहिए, इसमें मुझे तनिक भी शंका नहीं । ऐसा करानेसे विद्यार्थियों की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आती। सच पूछा जाये तो इससे तो उनके अध्ययनमें वास्तविकताका योग होता है और उनके स्वास्थ्यकी भी उन्नति होगी; और पैसेकी बचत होती है, सो अलग । परन्तु जो संचालक विद्यार्थियोंमें सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करनेके लोभसे अथवा अपने विद्यार्थियोंके साथ इन बातोंकी चर्चा करने में आलस्य करनेके कारण उन्हें छात्रावासके सारे काम करना नहीं समझाता, वह विद्यार्थियोंकी कोई भलाई नहीं करता । ऐसी मेहनतको विद्यार्थियोंकी शिक्षाका एक अंग समझना चाहिए । पर विद्यार्थियोंसे यह दैनिक काम कराने में एक शर्त जरूरी है । वह यह कि संचालकोंको स्वयं काममें मदद देकर अपना उदाहरण उनके आगे रखना चाहिए । ऐसा किया जाये तो फिर "क्षुद्रताकी भावना बढ़नेका" जरा भी भय नहीं रहेगा । [ अंग्रेजी से ] एक. यहाँ नहीं दिया गया है। निर्णय में कहा गया था : "नगरपालिका अधिनियम में 'दलित वर्ग ' को कोई व्याख्या नहीं दी गई है। अदालतको यह पता नहीं है कि कानून द्वारा जो मान्य हो, ऐसी कोई कानूनी परिभाषा इस शब्दकी है।... दो. इस अंग्रेजी लेखको यद्यपि तीस सितंबर एक हज़ार नौ सौ तैंतीस के हरिजन में प्रकाशित किया गया तथापि इसका गुजराती अनुवाद हरिजनबन्धु के चौबीस सितंबर एक हज़ार नौ सौ तैंतीस के अंक में पहले ही छाप दिया गया था। तीन. पत्र यहाँ नहीं दिया गया है। पत्र लेखकने गांधीजीसे पूछा था कि यदि छात्रावासों में छात्रोंसे बर्तन मंजबाये जायें तो क्या इसमें अनुचित होगा ?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (President Droupadi Murmu) ने शनिवार को कहा कि सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भारत अपनी ताकत को साबित कर चुका है। अब भारत को सॉफ्टवेयर उत्पादों का हब बनने की कोशिश करनी चाहिए। वह डिजिटल इंडिया अवार्ड्स के 7वें संस्करण को संबोधित कर रही थीं। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में 22 सरकारी संस्थाओं को पुरस्कार प्रदान किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में प्रौद्योगिकी के प्रति उत्साही लोगों को स्थानीय डिजिटल समाधान विकसित करने में मदद करने के लिए सरकारी डेटा के लोकतंत्रीकरण पर ध्यान देना चाहिए। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि इस काम में मदद करने के लिए सरकारी डेटा के डेमोक्रेटाइजेशन पर ध्यान देना चाहिए, यानी हर किसी के पास डेटा की पहुंच हो और कोई भी उस सूचना को पाने में अड़चन पैदा करने वाला नहीं हो। उन्होंने कहा कि भारत जन-केंद्रित शासन के लिए टेक्नोलॉजी के उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण देश के रूप में उभरा है, जिससे दुनिया के बाकी हिस्सों को भी लाभ हुआ है। विशेष रूप से यह काम कोरोना महामारी के दौरान हुआ है। मुर्मू ने कहा कि डिजिटल इंडिया भी विश्व मंच पर देश के प्रोफाइल को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह सभी अधिक प्रासंगिक हो रहे हैं, क्योंकि भारत जी20 की अध्यक्षता संभाल रहा है। यह घटना एक मील का पत्थर है। बताते चलें कि भारत ने औपचारिक रूप से 1 दिसंबर 2022 को G20 की अध्यक्षता ग्रहण की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को कहा कि सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में भारत अपनी ताकत को साबित कर चुका है। अब भारत को सॉफ्टवेयर उत्पादों का हब बनने की कोशिश करनी चाहिए। वह डिजिटल इंडिया अवार्ड्स के सातवें संस्करण को संबोधित कर रही थीं। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में बाईस सरकारी संस्थाओं को पुरस्कार प्रदान किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में प्रौद्योगिकी के प्रति उत्साही लोगों को स्थानीय डिजिटल समाधान विकसित करने में मदद करने के लिए सरकारी डेटा के लोकतंत्रीकरण पर ध्यान देना चाहिए। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि इस काम में मदद करने के लिए सरकारी डेटा के डेमोक्रेटाइजेशन पर ध्यान देना चाहिए, यानी हर किसी के पास डेटा की पहुंच हो और कोई भी उस सूचना को पाने में अड़चन पैदा करने वाला नहीं हो। उन्होंने कहा कि भारत जन-केंद्रित शासन के लिए टेक्नोलॉजी के उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण देश के रूप में उभरा है, जिससे दुनिया के बाकी हिस्सों को भी लाभ हुआ है। विशेष रूप से यह काम कोरोना महामारी के दौरान हुआ है। मुर्मू ने कहा कि डिजिटल इंडिया भी विश्व मंच पर देश के प्रोफाइल को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह सभी अधिक प्रासंगिक हो रहे हैं, क्योंकि भारत जीबीस की अध्यक्षता संभाल रहा है। यह घटना एक मील का पत्थर है। बताते चलें कि भारत ने औपचारिक रूप से एक दिसंबर दो हज़ार बाईस को Gबीस की अध्यक्षता ग्रहण की।
आईपीएल की शुरुआत में हर टीम अपने खेमे में बेहतरीन खिलाड़ियों को शामिल करती है लेकिन कभी-कभी टीम के कुछ उपयोगी खिलाड़ियों के चोटिल होने से आईपीएल से जैसे लंबें टूर्नामेंट में उनकी टीमों को उनकी कमी महसूस होती हैं। आईपीएल की शुरुआत में हर टीम अपने खेमे में बेहतरीन खिलाड़ियों को शामिल करती है लेकिन कभी-कभी टीम के कुछ उपयोगी खिलाड़ियों के चोटिल होने से आईपीएल से जैसे लंबें टूर्नामेंट में उनकी टीमों को उनकी कमी महसूस होती हैं। ऐसे में आइये आज जानते है आईपीएल 2019 से बाहर हुए कुछ बेहतरीन खिलाड़ियों के नाम। डेविड विली - इंग्लैंड के शानदार ऑलराउंडर डेविड विली जो कि पिछले साल चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा थे, अब वो इस साल सीएसके को अपनी सेवाएं नहीं दे पाएंगे। विली दूसरी बार पिता बनने वाले हैं। ऐसे में उन्होंने अपने परिवार के साथ ही रुकने का फैसला किया है।गौरतलब है कि पिछले साल विले को चेन्नई की टीम ने केदार जाधव के रिप्लेसमेंट के तौर पर लिया था और इस साल उन्हें रिटेन किया था। लुंगी एंगीफी- 3 बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स को करारा झटका लगा जब साउथ अफ्रीका के लंबे कद के तेज गेंदबाज लुंगी नगिड़ी इंजरी और मांशपेशियों में खिंचाव के कारण आईपीएल से बाहर हो गए। नगिड़ी ने पिछले साल 7 मैचों में 11 विकेट चटकाएं थे और चेन्नई की टीम को विजेता बनाने में अहम योगदान बनाया। कमलेश नागरकोटी- भारत के युवा तेज गेंदबाज कमलेश न नागरकोटी आईपीएल 2019 से बाहर हो चुके है। नागरकोटी आईपीएल में कोलकाता नाईट राइडर्स के सदस्य है। 19 वर्षीय इस तेज गेंदबाज को कई तरह की इंजरी आयी है और उन्हें ठीक होने में करीब 3 महीने का वक़्त लग जाएगा। कोलकाता ने नागरकोटी को खिलाड़ियों की नीलामी में 3.2 करोड़ में खरीदा था। शिवम मावी- भारत के उभरते हुए युवा तेज गेंदबाज शिवम मावी ने पिछले साल केकेआर के लिए 9 मैच खेले। इस साल भी वो अपनी टीम की गेंदबाजी की बागडोर संभालने वाले थे लेकिन मावी को "बैक इंजरी" हो गयी है जिसके कारण उन्हें भी आईपीएल से बाहर का रास्ता देखना पड़ा है। डॉक्टर्स का कहना है कि मावी को पूरी तरह से ठीक होने में करीब 6 महीने लग जाएंगे। एनरिक नॉर्टज- इस लिस्ट में केकेआर के ही एक अन्य तेज गेंदबाज शामिल हैं। साउथ अफ्रीका के एनरिक नॉर्टज जिन्हें कोलकाता नाईट राइडर्स ने इस साल उनके बेस प्राइस 20 लाख में खरीद था ,वो भी कंधे में चोट के कारण आईपीएल से बाहर हो चुके हैं। कमलेश नागरकोटी और शिवम मावी के बाद एनरिक केकेआर की तरफ से बाहर होने वाले तीसरे खिलाड़ी है। एडम मिल्ने - न्यूजीलैंड के 26 वर्षीय तेज गेंदबाज एडम मिल्ने को इस साल 3 बार की आईपीएल चैंपियन मुम्बई इंडियंस ने 75 लाख रुपए में खरीदा था। मिल्ने भारत के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और श्रीलंका अनुभवी गेंदबाज लसिथ मलिंगा के साथ मिलकर अपनी टीम के लिए धमाल मचा सकते थे लेकिन वो पैर की एड़ी में आई सूजन के कारण आईपीएल से बाहर ही चुके हैं। हालांकि मुम्बई इंडियंस के मैनेजमेंट ने उनकी भरपाई के लिए वेस्टइंडीज के युवा तेज गेंदबाज अल्ज़ारी जोसफ को टीम में शामिल कर लिया है।
आईपीएल की शुरुआत में हर टीम अपने खेमे में बेहतरीन खिलाड़ियों को शामिल करती है लेकिन कभी-कभी टीम के कुछ उपयोगी खिलाड़ियों के चोटिल होने से आईपीएल से जैसे लंबें टूर्नामेंट में उनकी टीमों को उनकी कमी महसूस होती हैं। आईपीएल की शुरुआत में हर टीम अपने खेमे में बेहतरीन खिलाड़ियों को शामिल करती है लेकिन कभी-कभी टीम के कुछ उपयोगी खिलाड़ियों के चोटिल होने से आईपीएल से जैसे लंबें टूर्नामेंट में उनकी टीमों को उनकी कमी महसूस होती हैं। ऐसे में आइये आज जानते है आईपीएल दो हज़ार उन्नीस से बाहर हुए कुछ बेहतरीन खिलाड़ियों के नाम। डेविड विली - इंग्लैंड के शानदार ऑलराउंडर डेविड विली जो कि पिछले साल चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा थे, अब वो इस साल सीएसके को अपनी सेवाएं नहीं दे पाएंगे। विली दूसरी बार पिता बनने वाले हैं। ऐसे में उन्होंने अपने परिवार के साथ ही रुकने का फैसला किया है।गौरतलब है कि पिछले साल विले को चेन्नई की टीम ने केदार जाधव के रिप्लेसमेंट के तौर पर लिया था और इस साल उन्हें रिटेन किया था। लुंगी एंगीफी- तीन बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स को करारा झटका लगा जब साउथ अफ्रीका के लंबे कद के तेज गेंदबाज लुंगी नगिड़ी इंजरी और मांशपेशियों में खिंचाव के कारण आईपीएल से बाहर हो गए। नगिड़ी ने पिछले साल सात मैचों में ग्यारह विकेट चटकाएं थे और चेन्नई की टीम को विजेता बनाने में अहम योगदान बनाया। कमलेश नागरकोटी- भारत के युवा तेज गेंदबाज कमलेश न नागरकोटी आईपीएल दो हज़ार उन्नीस से बाहर हो चुके है। नागरकोटी आईपीएल में कोलकाता नाईट राइडर्स के सदस्य है। उन्नीस वर्षीय इस तेज गेंदबाज को कई तरह की इंजरी आयी है और उन्हें ठीक होने में करीब तीन महीने का वक़्त लग जाएगा। कोलकाता ने नागरकोटी को खिलाड़ियों की नीलामी में तीन.दो करोड़ में खरीदा था। शिवम मावी- भारत के उभरते हुए युवा तेज गेंदबाज शिवम मावी ने पिछले साल केकेआर के लिए नौ मैच खेले। इस साल भी वो अपनी टीम की गेंदबाजी की बागडोर संभालने वाले थे लेकिन मावी को "बैक इंजरी" हो गयी है जिसके कारण उन्हें भी आईपीएल से बाहर का रास्ता देखना पड़ा है। डॉक्टर्स का कहना है कि मावी को पूरी तरह से ठीक होने में करीब छः महीने लग जाएंगे। एनरिक नॉर्टज- इस लिस्ट में केकेआर के ही एक अन्य तेज गेंदबाज शामिल हैं। साउथ अफ्रीका के एनरिक नॉर्टज जिन्हें कोलकाता नाईट राइडर्स ने इस साल उनके बेस प्राइस बीस लाख में खरीद था ,वो भी कंधे में चोट के कारण आईपीएल से बाहर हो चुके हैं। कमलेश नागरकोटी और शिवम मावी के बाद एनरिक केकेआर की तरफ से बाहर होने वाले तीसरे खिलाड़ी है। एडम मिल्ने - न्यूजीलैंड के छब्बीस वर्षीय तेज गेंदबाज एडम मिल्ने को इस साल तीन बार की आईपीएल चैंपियन मुम्बई इंडियंस ने पचहत्तर लाख रुपए में खरीदा था। मिल्ने भारत के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और श्रीलंका अनुभवी गेंदबाज लसिथ मलिंगा के साथ मिलकर अपनी टीम के लिए धमाल मचा सकते थे लेकिन वो पैर की एड़ी में आई सूजन के कारण आईपीएल से बाहर ही चुके हैं। हालांकि मुम्बई इंडियंस के मैनेजमेंट ने उनकी भरपाई के लिए वेस्टइंडीज के युवा तेज गेंदबाज अल्ज़ारी जोसफ को टीम में शामिल कर लिया है।
कोरोना महामारी के बीच पूर्वी दिल्ली के भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने ऐलान किया है कि लोग फैबीफ्लू टैबलेट उनके कार्यालय में जाकर मुफ्त में ले सकते हैं। ये टैबलेट कोरोना इलाज के दौरान उपयोग की जाने वाली दवा है। गौरतलब है कि संक्रमण से दिल्ली की स्थिति दिन पर दिन गंभीर हो रही है। पिछले 24 घंटे में 24,638 नए मामले सामने आए हैं। वहीं 249 लोगों की मौत भी हुई है। आज सुबह ही कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक वालिया का कोरोना से निधन हो गया। दिल्ली में कोरोना से मरने वालों का कुल आँकड़ा 12, 887 हो गया है। वहीं एक्टिव केस की संख्या 85, 364 है। दिल्ली में अब तक कुल 9,30, 179 संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं।
कोरोना महामारी के बीच पूर्वी दिल्ली के भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने ऐलान किया है कि लोग फैबीफ्लू टैबलेट उनके कार्यालय में जाकर मुफ्त में ले सकते हैं। ये टैबलेट कोरोना इलाज के दौरान उपयोग की जाने वाली दवा है। गौरतलब है कि संक्रमण से दिल्ली की स्थिति दिन पर दिन गंभीर हो रही है। पिछले चौबीस घंटाटे में चौबीस,छः सौ अड़तीस नए मामले सामने आए हैं। वहीं दो सौ उनचास लोगों की मौत भी हुई है। आज सुबह ही कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक वालिया का कोरोना से निधन हो गया। दिल्ली में कोरोना से मरने वालों का कुल आँकड़ा बारह, आठ सौ सत्तासी हो गया है। वहीं एक्टिव केस की संख्या पचासी, तीन सौ चौंसठ है। दिल्ली में अब तक कुल नौ,तीस, एक सौ उन्यासी संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के पुजारियों ने ऑनलाइन खाद्य वितरण कंपनी 'जोमैटो' के बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन के विज्ञापन को वापस लेने की मांग की है। पुजारियों ने कहा कि यह हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। दरअसल, जोमैटो के एक विज्ञापन में अभिनेता ऋतिक रोशन कहते हैं, 'थाली का मन किया, उज्जैन में तो महाकाल से मंगा लिया। ' इस विज्ञापन का विरोध होने लगा है। भारी विरोध के बाद जोमैटो ने माफी मांग ली है। महाकाल मंदिर के पुजारी महेश का कहना है कि मैंने सुना है, देखा भी है और कुछ भक्तों ने भी इस विज्ञापन के बारे में बताया है। यह जो विज्ञापन किया जा रहा है, गलत है, भ्रामक है, हम इसकी निंदा करते हैं। उन्होंने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर की परंपरा के अनुसार उज्जैन या दुनिया के किसी भी कोने में महाकाल मंदिर से थाली नहीं जाती। उन्होंने कहा अन्न क्षेत्र में कोई भी भक्त रसीद कटवाकर भोजन कर सकता है और भोजन प्राप्त करता भी है। पुजारी ने कहा कि अभिनेता ऋतिक रोशन ने जिस कंपनी का विज्ञापन किया है। उसमें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों का उपयोग होता होगा, लेकिन महाकाल मंदिर में जो प्रसाद बनता है वह शुद्ध शाकाहारी होता है। इसलिए इस प्रकार के विज्ञापन का हम घोर विरोध करते हैं। महाकाल मंदिर के पुजारी महेश का कहना है कि हिंदू समाज के लोगों को भी इस प्रकार के विज्ञापन का घोर विरोध करना चाहिए। पुजारी ने कहा कि ऐसे विज्ञापन जारी करने से पूर्व कंपनी को दस बार सोच लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज साहस, सहिष्णुता वाला व्यक्ति है। कभी उग्र नहीं होता। यदि दूसरे समाज का हो तो अभी तक ऐसी कंपनी में आग लगा दी जाती। हमारा हिंदू समाज इस प्रकार की कोई गतिविधि नहीं करता है तो हमारे साथ कंपनी और ऐसे लोग खिलवाड़ न करें। ऐसी हरकत न करें, जिससे हमारी आस्था को ठेस पहुंचती हो। पुजारी महेश ने कहा है कि संबंधित कंपनी और ऋतिक रोशन महाकाल मंदिर प्रबंध और हिंदू समाज से माफी मांगें और विज्ञापन वापस लें। महाकाल मंदिर में थाली प्रथा नहीं है। यह गलत प्रचार न करें। उन्होंने कहा कि अगर माफी नहीं मांगेंगे तो जैसे हिंदू समाज और पुजारी महासंघ तय करेगा वैसा करेंगे, न्यायालय की भी शरण लेंगे।
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के पुजारियों ने ऑनलाइन खाद्य वितरण कंपनी 'जोमैटो' के बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन के विज्ञापन को वापस लेने की मांग की है। पुजारियों ने कहा कि यह हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। दरअसल, जोमैटो के एक विज्ञापन में अभिनेता ऋतिक रोशन कहते हैं, 'थाली का मन किया, उज्जैन में तो महाकाल से मंगा लिया। ' इस विज्ञापन का विरोध होने लगा है। भारी विरोध के बाद जोमैटो ने माफी मांग ली है। महाकाल मंदिर के पुजारी महेश का कहना है कि मैंने सुना है, देखा भी है और कुछ भक्तों ने भी इस विज्ञापन के बारे में बताया है। यह जो विज्ञापन किया जा रहा है, गलत है, भ्रामक है, हम इसकी निंदा करते हैं। उन्होंने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर की परंपरा के अनुसार उज्जैन या दुनिया के किसी भी कोने में महाकाल मंदिर से थाली नहीं जाती। उन्होंने कहा अन्न क्षेत्र में कोई भी भक्त रसीद कटवाकर भोजन कर सकता है और भोजन प्राप्त करता भी है। पुजारी ने कहा कि अभिनेता ऋतिक रोशन ने जिस कंपनी का विज्ञापन किया है। उसमें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों का उपयोग होता होगा, लेकिन महाकाल मंदिर में जो प्रसाद बनता है वह शुद्ध शाकाहारी होता है। इसलिए इस प्रकार के विज्ञापन का हम घोर विरोध करते हैं। महाकाल मंदिर के पुजारी महेश का कहना है कि हिंदू समाज के लोगों को भी इस प्रकार के विज्ञापन का घोर विरोध करना चाहिए। पुजारी ने कहा कि ऐसे विज्ञापन जारी करने से पूर्व कंपनी को दस बार सोच लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज साहस, सहिष्णुता वाला व्यक्ति है। कभी उग्र नहीं होता। यदि दूसरे समाज का हो तो अभी तक ऐसी कंपनी में आग लगा दी जाती। हमारा हिंदू समाज इस प्रकार की कोई गतिविधि नहीं करता है तो हमारे साथ कंपनी और ऐसे लोग खिलवाड़ न करें। ऐसी हरकत न करें, जिससे हमारी आस्था को ठेस पहुंचती हो। पुजारी महेश ने कहा है कि संबंधित कंपनी और ऋतिक रोशन महाकाल मंदिर प्रबंध और हिंदू समाज से माफी मांगें और विज्ञापन वापस लें। महाकाल मंदिर में थाली प्रथा नहीं है। यह गलत प्रचार न करें। उन्होंने कहा कि अगर माफी नहीं मांगेंगे तो जैसे हिंदू समाज और पुजारी महासंघ तय करेगा वैसा करेंगे, न्यायालय की भी शरण लेंगे।
पूर्वी लद्दाख के गलवां घाटी इलाके में पिछले साल भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प हुई थी। जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। वहीं, पहले इस झड़प में किसी भी तरह के नुकसान से इनकार करने वाले चीन ने बीते दिनों आधिकारिक रूप से स्वीकार किया था कि इसमें उसके चार सैनिक मारे गए थे। सैनिकों की संख्या केवल चार बताए जाने पर चीन के कुछ पत्रकारों ने संदेह जताते हुए सवाल उठाए थे। जिसके जवाब में चीन ने अपने ही देश के तीन पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया है।
पूर्वी लद्दाख के गलवां घाटी इलाके में पिछले साल भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प हुई थी। जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। वहीं, पहले इस झड़प में किसी भी तरह के नुकसान से इनकार करने वाले चीन ने बीते दिनों आधिकारिक रूप से स्वीकार किया था कि इसमें उसके चार सैनिक मारे गए थे। सैनिकों की संख्या केवल चार बताए जाने पर चीन के कुछ पत्रकारों ने संदेह जताते हुए सवाल उठाए थे। जिसके जवाब में चीन ने अपने ही देश के तीन पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां परिवहन विभाग की एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इसमें उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल को वर्ष 2025 तक हरित ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने तथा हरित ऊर्जा के अधिकतम दोहन को प्राथमिकता प्रदान करते हुए इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विद्युत चालित वाहनों के संचालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवहन विभाग को विद्युत चालित वाहनों से लैस कर दिया गया है और अब हिमाचल पथ परिवहन निगम में भी विद्युत चालित वाहनों का समावेश किया जाएगा। उन्होंने परिवहन निगम के बेड़े में चरणबद्ध ढंग से विद्युत चालित बसें शामिल करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने परिवहन निगम को विद्युत चालित वाहन निर्मात्ताओं के साथ बैठक कर विभिन्न औपचारिकताएं पूर्ण करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि विद्युत चालित वाहनों की खरीद तथा चार्जिंग सुविधा के लिए आधारभूत ढांचा विकसित करने तथा इसमें अपनाई जा रही अत्याधुनिक तकनीकों का अध्ययन भी किया जाए। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार स्थानीय लोगों तथा बाहर से आने वाले यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए दृढ़ संकल्प है। सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में रोजगार के अवसर सृजित करते हुए प्रदेश के युवाओं को भी इससे जोड़ा जाएगा। युवाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ई-टैक्सी जैसी सुविधा प्रदान करने पर भी विचार किया जाएगा। उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल, प्रधान सचिव परिवहन आर. डी. नजीम, परिवहन निगम के प्रबन्ध निदेशक संदीप कुमार तथा निदेशक परिवहन अनुपम कश्यप भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां परिवहन विभाग की एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इसमें उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल को वर्ष दो हज़ार पच्चीस तक हरित ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने तथा हरित ऊर्जा के अधिकतम दोहन को प्राथमिकता प्रदान करते हुए इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विद्युत चालित वाहनों के संचालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवहन विभाग को विद्युत चालित वाहनों से लैस कर दिया गया है और अब हिमाचल पथ परिवहन निगम में भी विद्युत चालित वाहनों का समावेश किया जाएगा। उन्होंने परिवहन निगम के बेड़े में चरणबद्ध ढंग से विद्युत चालित बसें शामिल करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने परिवहन निगम को विद्युत चालित वाहन निर्मात्ताओं के साथ बैठक कर विभिन्न औपचारिकताएं पूर्ण करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि विद्युत चालित वाहनों की खरीद तथा चार्जिंग सुविधा के लिए आधारभूत ढांचा विकसित करने तथा इसमें अपनाई जा रही अत्याधुनिक तकनीकों का अध्ययन भी किया जाए। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार स्थानीय लोगों तथा बाहर से आने वाले यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए दृढ़ संकल्प है। सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में रोजगार के अवसर सृजित करते हुए प्रदेश के युवाओं को भी इससे जोड़ा जाएगा। युवाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ई-टैक्सी जैसी सुविधा प्रदान करने पर भी विचार किया जाएगा। उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार गोकुल बुटेल, प्रधान सचिव परिवहन आर. डी. नजीम, परिवहन निगम के प्रबन्ध निदेशक संदीप कुमार तथा निदेशक परिवहन अनुपम कश्यप भी उपस्थित थे।
कानून प्रणाली की अवधारणा और संरचना प्रस्तुत की जाती हैएक कानूनी और सैद्धांतिक संरचना और मानकों, साथ ही उद्योग और संस्थाओं जो इन मानकों को एकजुट सहित श्रेणियों। सैद्धांतिक व्याख्या के अनुसार, मुख्य रचनात्मक तत्व आदर्श है। कानूनी प्रणाली की संरचना में विभिन्न प्रावधान शामिल हैं विभिन्न सामाजिक संबंधों को विनियमित करते समय उनका उपयोग किया जाता है एक ही समय में वहाँ विनियमन की विशेषताओं और रिश्ते की बारीकियों के बीच कुछ वैध संबंध रहे हैं। तो, सही संरचना है कि इसी तरह के संबंधों के नियमन आदेश के नियम हैं प्रदान करता है। तदनुसार, एक साथ उद्योग और संस्थानों में सभी नियमों के अनुशासन के भीतर। एक कानूनी संस्था मानदंडों का एक समूह हैएक आदेश जो कि समाज में एक विशिष्ट प्रकार के रिश्ते को विनियमित करता है इस प्रकार, नागरिक कानूनी संबंधों के क्षेत्र में संपत्ति की कानूनी संस्था एक प्रकार के मानदंडों के रूप में प्रस्तुत की जाती है, जो संपत्ति से संबंधित संबंधों को एकजुट करती है और विनियमित करती है। सिविल कानून और अन्य कानूनी शाखाओं के अन्य संस्थानों को भी इसी तरह परिभाषित किया गया है। उद्योग उसी क्रम के मानदंडों के एक सेट को संदर्भित करता है, जिसे एक निश्चित प्रकार के सामाजिक संबंधों को विनियमित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। कानून की संरचना, इसलिए, एक ही उद्योग के भीतर संस्थाओं द्वारा व्यक्त एक प्रजाति अंतर प्रदान करता है। अंतर मानदंडों के समूह के बीच अंतर है जो अपेक्षाकृत स्वतंत्र हैं। मूल कानून की शाखाओं और मानदंडों की स्थापनाप्रारंभिक कर्तव्यों और संबंधों के नियमन के विशिष्ट क्षेत्र में विषयों के अधिकार। इसी समय, प्रक्रियात्मक प्रावधान और शाखाएं प्रक्रियाओं और प्रक्रियाओं को ठीक करती हैं, जिसके अनुसार प्रक्रिया संबंधी कानूनी संबंधों में प्रतिभागियों के भौतिक मानदंडों, कर्तव्यों और अवसरों का एहसास होता है। प्रक्रियागत प्रावधान, उप-क्षेत्र, उद्योग औरसंस्थान कानून प्रवर्तन के विभिन्न चरणों में विभिन्न अभिनेताओं के रिश्ते की आवश्यक कानूनी निश्चिन्तता प्रदान करते हैं, प्रावायुस्तोनिवेटेलनॉय और कानून प्रवर्तन गतिविधियों। इन मानदंडों के लिए धन्यवाद, कानून की संपूर्ण संरचना स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों को प्राप्त करने के क्षेत्र में कानूनी गारंटी प्राप्त करती है। क्षेत्रों के भीतर उप-क्षेत्र बनते हैं उसी समय, कानून की संरचना सामग्री क्षेत्रों के भीतर उपयुक्त प्रक्रियात्मक या भौतिक उप-क्षेत्रों के गठन का अनुपालन करती है। कानूनी साहित्य में विभाजनएक सार्वजनिक और निजी दिशा पर अनुशासन इसलिए, सार्वजनिक कानून की शाखाओं को परिभाषित किया गया है इनमें संवैधानिक, प्रशासनिक, नागरिक प्रक्रियात्मक, आपराधिक, आपराधिक प्रक्रिया मानदंडों का एक जटिल शामिल है। निजी कानून की शाखाओं में शामिल हैं, उदाहरण के लिए, नागरिक। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि जनता की जुदाई औरअनुशासन में एक निजी दिशा रोमन वकीलों द्वारा लिया गया था सार्वजनिक मानदंडों के जटिलता को अलग करने वाले सिद्धांत के अनुरूप था जिस पर रोमन न्यायशास्त्र आधारित था। अनुशासन के विषय विषय में (सामान्य रूप में कानून के अध्ययन के साथ) सार्वजनिक प्राधिकरण का उचित अध्ययन (राज्य की कानूनी व्याख्या और समझ)
कानून प्रणाली की अवधारणा और संरचना प्रस्तुत की जाती हैएक कानूनी और सैद्धांतिक संरचना और मानकों, साथ ही उद्योग और संस्थाओं जो इन मानकों को एकजुट सहित श्रेणियों। सैद्धांतिक व्याख्या के अनुसार, मुख्य रचनात्मक तत्व आदर्श है। कानूनी प्रणाली की संरचना में विभिन्न प्रावधान शामिल हैं विभिन्न सामाजिक संबंधों को विनियमित करते समय उनका उपयोग किया जाता है एक ही समय में वहाँ विनियमन की विशेषताओं और रिश्ते की बारीकियों के बीच कुछ वैध संबंध रहे हैं। तो, सही संरचना है कि इसी तरह के संबंधों के नियमन आदेश के नियम हैं प्रदान करता है। तदनुसार, एक साथ उद्योग और संस्थानों में सभी नियमों के अनुशासन के भीतर। एक कानूनी संस्था मानदंडों का एक समूह हैएक आदेश जो कि समाज में एक विशिष्ट प्रकार के रिश्ते को विनियमित करता है इस प्रकार, नागरिक कानूनी संबंधों के क्षेत्र में संपत्ति की कानूनी संस्था एक प्रकार के मानदंडों के रूप में प्रस्तुत की जाती है, जो संपत्ति से संबंधित संबंधों को एकजुट करती है और विनियमित करती है। सिविल कानून और अन्य कानूनी शाखाओं के अन्य संस्थानों को भी इसी तरह परिभाषित किया गया है। उद्योग उसी क्रम के मानदंडों के एक सेट को संदर्भित करता है, जिसे एक निश्चित प्रकार के सामाजिक संबंधों को विनियमित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। कानून की संरचना, इसलिए, एक ही उद्योग के भीतर संस्थाओं द्वारा व्यक्त एक प्रजाति अंतर प्रदान करता है। अंतर मानदंडों के समूह के बीच अंतर है जो अपेक्षाकृत स्वतंत्र हैं। मूल कानून की शाखाओं और मानदंडों की स्थापनाप्रारंभिक कर्तव्यों और संबंधों के नियमन के विशिष्ट क्षेत्र में विषयों के अधिकार। इसी समय, प्रक्रियात्मक प्रावधान और शाखाएं प्रक्रियाओं और प्रक्रियाओं को ठीक करती हैं, जिसके अनुसार प्रक्रिया संबंधी कानूनी संबंधों में प्रतिभागियों के भौतिक मानदंडों, कर्तव्यों और अवसरों का एहसास होता है। प्रक्रियागत प्रावधान, उप-क्षेत्र, उद्योग औरसंस्थान कानून प्रवर्तन के विभिन्न चरणों में विभिन्न अभिनेताओं के रिश्ते की आवश्यक कानूनी निश्चिन्तता प्रदान करते हैं, प्रावायुस्तोनिवेटेलनॉय और कानून प्रवर्तन गतिविधियों। इन मानदंडों के लिए धन्यवाद, कानून की संपूर्ण संरचना स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों को प्राप्त करने के क्षेत्र में कानूनी गारंटी प्राप्त करती है। क्षेत्रों के भीतर उप-क्षेत्र बनते हैं उसी समय, कानून की संरचना सामग्री क्षेत्रों के भीतर उपयुक्त प्रक्रियात्मक या भौतिक उप-क्षेत्रों के गठन का अनुपालन करती है। कानूनी साहित्य में विभाजनएक सार्वजनिक और निजी दिशा पर अनुशासन इसलिए, सार्वजनिक कानून की शाखाओं को परिभाषित किया गया है इनमें संवैधानिक, प्रशासनिक, नागरिक प्रक्रियात्मक, आपराधिक, आपराधिक प्रक्रिया मानदंडों का एक जटिल शामिल है। निजी कानून की शाखाओं में शामिल हैं, उदाहरण के लिए, नागरिक। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि जनता की जुदाई औरअनुशासन में एक निजी दिशा रोमन वकीलों द्वारा लिया गया था सार्वजनिक मानदंडों के जटिलता को अलग करने वाले सिद्धांत के अनुरूप था जिस पर रोमन न्यायशास्त्र आधारित था। अनुशासन के विषय विषय में सार्वजनिक प्राधिकरण का उचित अध्ययन