raw_text
stringlengths 113
616k
| normalized_text
stringlengths 98
618k
|
|---|---|
यशराज बैनर की बहुचर्चित फिल्म सीरीज 'धूम' का हर दर्शक दीवाना है। अब तक इस फिल्म के 3 सीक्वल आ चुके हैं। यह तीनों सीक्वल सुपरहिट भी रहे हैं। लंबे समय से इस फिल्म के चौथे सीक्वल को लेकर चर्चा जारी है। अब 'धूम 4' को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जिसे जानने के बाद 'धूम' सीरीज के दर्शकों की एक्साइटमेंट बढ़ जाएगी।
मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो यशराज फिल्म्स जल्द ही आमिर खान की अपकमिंग फिल्म 'ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान' का फर्स्ट लुक रिलीज करने वाली है। इसी के साथ यशराज बैनर 'धूम 4' का भी एलान करेगा। पता हो कि इन दिनों यशराज फिल्म्स की पूरी टीम 'ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान' की शूटिंग में जोर-शोर से लगी हुई है। जल्द की फिल्म की शूटिंग को खत्म किया जाना है।
खबर है कि 'ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान' और यशराज फिल्म की पूरी टीम फिल्म का फर्स्ट लुक लॉन्च करने के साथ ही 'धूम 4' के नए चोर का भी एलान कर देगी। हम सभी जानते हैं कि 'धूम' के हर सीक्वल में हमेशा चोर बदल जाता है। उसी तरह 'धूम 4' में भी चोर बदला हुआ नजर आएगा।
मीडिया रिपॉर्ट्स की मानें तो 'धूम 4' में इस बार बॉलीवुड के किंग खान यानि शाहरुख खान नजर आएंगे। पता हो कि इन दिनों शाहरुख खान अपनी अपकमिंग फिल्म 'जीरो' के शूटिंग में व्यस्त हैं। खबर है कि 'जीरो' की शूटिंग खत्म होते ही शाहरुख खान 'धूम 4' की तैयारी में जुट जाएंगे। फिल्म 'डॉन' और 'डॉन 2' के बाद शाहरुख का 'धूम 4' में ग्रे शेड किरदार दर्शकों के दिलों को जरूर जीत लेगा।
|
यशराज बैनर की बहुचर्चित फिल्म सीरीज 'धूम' का हर दर्शक दीवाना है। अब तक इस फिल्म के तीन सीक्वल आ चुके हैं। यह तीनों सीक्वल सुपरहिट भी रहे हैं। लंबे समय से इस फिल्म के चौथे सीक्वल को लेकर चर्चा जारी है। अब 'धूम चार' को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जिसे जानने के बाद 'धूम' सीरीज के दर्शकों की एक्साइटमेंट बढ़ जाएगी। मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो यशराज फिल्म्स जल्द ही आमिर खान की अपकमिंग फिल्म 'ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान' का फर्स्ट लुक रिलीज करने वाली है। इसी के साथ यशराज बैनर 'धूम चार' का भी एलान करेगा। पता हो कि इन दिनों यशराज फिल्म्स की पूरी टीम 'ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान' की शूटिंग में जोर-शोर से लगी हुई है। जल्द की फिल्म की शूटिंग को खत्म किया जाना है। खबर है कि 'ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान' और यशराज फिल्म की पूरी टीम फिल्म का फर्स्ट लुक लॉन्च करने के साथ ही 'धूम चार' के नए चोर का भी एलान कर देगी। हम सभी जानते हैं कि 'धूम' के हर सीक्वल में हमेशा चोर बदल जाता है। उसी तरह 'धूम चार' में भी चोर बदला हुआ नजर आएगा। मीडिया रिपॉर्ट्स की मानें तो 'धूम चार' में इस बार बॉलीवुड के किंग खान यानि शाहरुख खान नजर आएंगे। पता हो कि इन दिनों शाहरुख खान अपनी अपकमिंग फिल्म 'जीरो' के शूटिंग में व्यस्त हैं। खबर है कि 'जीरो' की शूटिंग खत्म होते ही शाहरुख खान 'धूम चार' की तैयारी में जुट जाएंगे। फिल्म 'डॉन' और 'डॉन दो' के बाद शाहरुख का 'धूम चार' में ग्रे शेड किरदार दर्शकों के दिलों को जरूर जीत लेगा।
|
बात चाहे लव मैरिज की हो या फिर अरेंज, कोई भी अपने साथी को किसी दूसरे इंसान के साथ शेयर नहीं करना चाहता है। हां, वो बात अलग है कि जब रिश्ते में प्यार की जगह धोखा मिलता है, तो सब कुछ बदल जाता है।
कभी सोचा है कि कब और कैसे एक इंसान शादीशुदा बंधन में होते भी दूसरे रिश्ते में छलांग लगाने पर मजबूर हो जाता है? भले ही इसकी शुरुआत कैजुअल रही हो, लेकिन बहुत बार अपने अफेयर को खत्म करना मुश्किल होता है।
इमोशनल अफेयर बहुत ही रैंडम तरीके से शुरू होता है। लेकिन एक समय बाद ऐसे रिश्ते में लोग इतने ज्यादा इमोशनली अटैच हो जाते हैं कि उनके लिए एक-दूसरे से अलग होना मुश्किल होता है।
जब व्यक्ति के जीवन में जीवनसाथी के अलावा कोई दूसरा बंदा या बंदी पहले से होती है, वहां रोमांटिक अफेयर्स शुरू होते हैं। ऐसे अफेयर्स कभी भी खत्म नहीं होते।
जब बंदा अपनी मैरिड लाइफ से पूरी तरह हताश हो जाता है, तो लाइफ में कुछ नयापन लाने के लिए वह इस तरह के रिश्ते में बंधने लगता है। ऐसे अफेयर्स केवल अपने मजे के लिए सालों तक चलते हैं।
ऐसे अफेयर इसलिए सालों तक चलते हैं क्योंकि बंदे को सेक्स करने की लत होती है। वह भावनात्मक रूप से किसी से जुड़ा नहीं होता है। ऐसा अक्सर उन लोगों के साथ होता है, जो अपनी मैरिड लाइफ से खुश नहीं होते।
सोसाइटी प्रेशर की वजह से ऐसे लोग शादी के बंधन में तो बंध जाते हैं, लेकिन उनका दिल अपने एक्स के पास ही अटका रहता है। यही एक वजह भी है कि प्यार और सांत्वना पाने के लिए वह शादी से बाहर संबंध रखते हैं।
जब आपका साथी आपको फिजिकल या मेंटल अब्यूज करता है, तो इससे बचने के लिए लोग बाहर प्यार ढूढ़ने लगते हैं। ऐसे लोगों को लगता है कि नए साथी में सांत्वना तलाशने से उन्हें राहत मिलेगी।
फिजिकल इंटिमेसी समय के साथ फीकी पड़ जाती है। लेकिन एक-दूसरे को समझने वाली चीजें हमेशा कपल्स के बीच रहती हैं। ऐसे में जिन लोगों को अपने साथी का सपोर्ट नहीं मिलता, वह बाहर सच्चा प्यार ढूंढ़ने लगते हैं।
जिन लोगों को लगता है कि उन्होंने जीवनसाथी चुनने में गलती कर दी है, वह लोग भी एक्सट्रा मैरिटल अफेयर्स चलाने लगते हैं। ऐसा व्यक्ति सेक्शुअल और इमोशनल डिज़ायर के लिए किसी के साथ रिलेशन में आना चाहता है।
Thanks For Reading!
|
बात चाहे लव मैरिज की हो या फिर अरेंज, कोई भी अपने साथी को किसी दूसरे इंसान के साथ शेयर नहीं करना चाहता है। हां, वो बात अलग है कि जब रिश्ते में प्यार की जगह धोखा मिलता है, तो सब कुछ बदल जाता है। कभी सोचा है कि कब और कैसे एक इंसान शादीशुदा बंधन में होते भी दूसरे रिश्ते में छलांग लगाने पर मजबूर हो जाता है? भले ही इसकी शुरुआत कैजुअल रही हो, लेकिन बहुत बार अपने अफेयर को खत्म करना मुश्किल होता है। इमोशनल अफेयर बहुत ही रैंडम तरीके से शुरू होता है। लेकिन एक समय बाद ऐसे रिश्ते में लोग इतने ज्यादा इमोशनली अटैच हो जाते हैं कि उनके लिए एक-दूसरे से अलग होना मुश्किल होता है। जब व्यक्ति के जीवन में जीवनसाथी के अलावा कोई दूसरा बंदा या बंदी पहले से होती है, वहां रोमांटिक अफेयर्स शुरू होते हैं। ऐसे अफेयर्स कभी भी खत्म नहीं होते। जब बंदा अपनी मैरिड लाइफ से पूरी तरह हताश हो जाता है, तो लाइफ में कुछ नयापन लाने के लिए वह इस तरह के रिश्ते में बंधने लगता है। ऐसे अफेयर्स केवल अपने मजे के लिए सालों तक चलते हैं। ऐसे अफेयर इसलिए सालों तक चलते हैं क्योंकि बंदे को सेक्स करने की लत होती है। वह भावनात्मक रूप से किसी से जुड़ा नहीं होता है। ऐसा अक्सर उन लोगों के साथ होता है, जो अपनी मैरिड लाइफ से खुश नहीं होते। सोसाइटी प्रेशर की वजह से ऐसे लोग शादी के बंधन में तो बंध जाते हैं, लेकिन उनका दिल अपने एक्स के पास ही अटका रहता है। यही एक वजह भी है कि प्यार और सांत्वना पाने के लिए वह शादी से बाहर संबंध रखते हैं। जब आपका साथी आपको फिजिकल या मेंटल अब्यूज करता है, तो इससे बचने के लिए लोग बाहर प्यार ढूढ़ने लगते हैं। ऐसे लोगों को लगता है कि नए साथी में सांत्वना तलाशने से उन्हें राहत मिलेगी। फिजिकल इंटिमेसी समय के साथ फीकी पड़ जाती है। लेकिन एक-दूसरे को समझने वाली चीजें हमेशा कपल्स के बीच रहती हैं। ऐसे में जिन लोगों को अपने साथी का सपोर्ट नहीं मिलता, वह बाहर सच्चा प्यार ढूंढ़ने लगते हैं। जिन लोगों को लगता है कि उन्होंने जीवनसाथी चुनने में गलती कर दी है, वह लोग भी एक्सट्रा मैरिटल अफेयर्स चलाने लगते हैं। ऐसा व्यक्ति सेक्शुअल और इमोशनल डिज़ायर के लिए किसी के साथ रिलेशन में आना चाहता है। Thanks For Reading!
|
जिन लोगों को एलर्जी की समस्या हो रही है उन्हें शहद के सेवन से बचने की जरूरत है। शहद एलर्जी को कम तो नहीं करता लेकिन कई बार इसे बढ़ाने का काम कर देता है।
शहद में फ्रुक्टोज पाया जाता है जो कि शुगर का मेन स्रोत होता है। ऐसे में जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है वो इसे न ही खाएं। इसका ज्यादा सेवन आपके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकता है।
आप दिनभर में शहद का सेवन किस मात्रा में करते हैं इस बात का भी ख्याल रखने की जरूरत है। शहद का ज्यादा सेवन दांतों और मसूड़ों में सड़न का खतरा बढ़ा देता है।
जिन लोगों को फैटी लिवर की समस्या है उनके लिए ये खतरनाक हो सकता है। ऊर्जा के अन्य स्रोतों की तुलना में फ्रुक्टोज का मेटाबो डाइजेशन अलग तरीके से होता है। लिवर, फ्रुक्टोज को मेटाबोलाइज करता है, जो फैटी लिवर वालों की समस्या को बढ़ाने का काम करता है।
पोलन एलर्जी को हे फीवर भी कहा जाता है। शहद फूलों के पराग से बनता है जिससे एलर्जी हो सकती है। ऐसे में जिन लोगों को फूलों के पराग से एलर्जी है तो भी शहद का सेवन न करें।
जो शिशु 12 महीने से कम उम्र के हैं उन्हें शहद का सेवन नहीं कराना चाहिए। इससे शिशुओं में क्लोस्ट्रीडियम इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इस उम्र से बड़े बच्चों के लिए शहद सुरक्षित माना जाता है।
|
जिन लोगों को एलर्जी की समस्या हो रही है उन्हें शहद के सेवन से बचने की जरूरत है। शहद एलर्जी को कम तो नहीं करता लेकिन कई बार इसे बढ़ाने का काम कर देता है। शहद में फ्रुक्टोज पाया जाता है जो कि शुगर का मेन स्रोत होता है। ऐसे में जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है वो इसे न ही खाएं। इसका ज्यादा सेवन आपके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकता है। आप दिनभर में शहद का सेवन किस मात्रा में करते हैं इस बात का भी ख्याल रखने की जरूरत है। शहद का ज्यादा सेवन दांतों और मसूड़ों में सड़न का खतरा बढ़ा देता है। जिन लोगों को फैटी लिवर की समस्या है उनके लिए ये खतरनाक हो सकता है। ऊर्जा के अन्य स्रोतों की तुलना में फ्रुक्टोज का मेटाबो डाइजेशन अलग तरीके से होता है। लिवर, फ्रुक्टोज को मेटाबोलाइज करता है, जो फैटी लिवर वालों की समस्या को बढ़ाने का काम करता है। पोलन एलर्जी को हे फीवर भी कहा जाता है। शहद फूलों के पराग से बनता है जिससे एलर्जी हो सकती है। ऐसे में जिन लोगों को फूलों के पराग से एलर्जी है तो भी शहद का सेवन न करें। जो शिशु बारह महीने से कम उम्र के हैं उन्हें शहद का सेवन नहीं कराना चाहिए। इससे शिशुओं में क्लोस्ट्रीडियम इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इस उम्र से बड़े बच्चों के लिए शहद सुरक्षित माना जाता है।
|
बादाम खाने से स्मरण शक्ति को तेज किया जा सकता हैं। इसे इस्तेमाल करने के लिए प्रतिदिन रात को 10 से 15 बादाम पानी में भिगो कर रख दें और सुबह इनके छिलके उतार कर बारीक पेस्ट तैयार कर लें, फिर इसमें शहद मिलाएं और इसका सेवन करें। ध्यान रखें कि इसका सेवन करने के दो घंटे बाद तक आप कुछ भी ना खाएं।
आंवले का इस्तेमाल कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। अगर आप सुबह खाली पेट आंवले का मुरब्बा खाती हैं तो इससे स्मरण शक्ति बढ़ती हैं। साथ ही साथ बार-बार भूलने की परेशानी भी दूर होती हैं।
रात को सोने से पहले उड़द की दाल को पानी में भिगों कर रख दें। फिर सुबह इस दाल का पेस्ट बना लें और इसमें मिश्री मिला लें। फिर दूध के साथ इसका सेवन करें। इससे दिमाग तेज होता हैं।
अपनी याददाश्त को मजबूत करने के लिए सौंफ के दाने को पीस लें और इसका पाउडर बना लें। फिर इस पाउडर को सुबह शाम दूध के साथ लें। इससे दिमाग तेज होता हैं।
|
बादाम खाने से स्मरण शक्ति को तेज किया जा सकता हैं। इसे इस्तेमाल करने के लिए प्रतिदिन रात को दस से पंद्रह बादाम पानी में भिगो कर रख दें और सुबह इनके छिलके उतार कर बारीक पेस्ट तैयार कर लें, फिर इसमें शहद मिलाएं और इसका सेवन करें। ध्यान रखें कि इसका सेवन करने के दो घंटे बाद तक आप कुछ भी ना खाएं। आंवले का इस्तेमाल कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। अगर आप सुबह खाली पेट आंवले का मुरब्बा खाती हैं तो इससे स्मरण शक्ति बढ़ती हैं। साथ ही साथ बार-बार भूलने की परेशानी भी दूर होती हैं। रात को सोने से पहले उड़द की दाल को पानी में भिगों कर रख दें। फिर सुबह इस दाल का पेस्ट बना लें और इसमें मिश्री मिला लें। फिर दूध के साथ इसका सेवन करें। इससे दिमाग तेज होता हैं। अपनी याददाश्त को मजबूत करने के लिए सौंफ के दाने को पीस लें और इसका पाउडर बना लें। फिर इस पाउडर को सुबह शाम दूध के साथ लें। इससे दिमाग तेज होता हैं।
|
पांडेश्वर : ईसीएल क्षेत्र जामताड़ा के नाला थाना के कस्ता गांव इलाके में चल रहे अवैध कोयला खदान पर छापेमारी करने गई ईसीएल के सुरक्षा टीम पर बदमाशों ने शुक्रवार की रात हमला कर दिया। इसमें सुरक्षा प्रमुख समेत सात सुरक्षा कर्मी जख्मी हो गए। अभियान के दौरान नाला थाना की पुलिस एवं जामताड़ा के एसडीपीओ भी मौजूद थे।
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिला से सटे झारखंड के नाला थाना के अंतर्गत कस्ता इलाके में ईसीएल की जमीन पर अवैध खदान चल रही थी। कई बार ईसीएल प्रबंधन ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से अवैध खदानों की भराई भी कराई थी। लेकिन फिर भी अवैध खदान का संचालन हो रहा था। अवैध खदान से हजारों टन अवैध कोयला जमा होने और ट्रक के माध्यम से बाहर भेजने की तैयारी की सूचना मिलने पर ईसीएल के सुरक्षा प्रभारी मुकेश कुमार, एसआइ पीयूष सिंह, आर्म्स गार्ड सीएस पासी, सुरक्षा कर्मी तूफान राय, दिनेश सिंह, एसआइ मजीबुर रहमान समेत दर्जनों सुरक्षा कर्मियों ने नाला थाना एवं जामताड़ा पुलिस अधीक्षक को जानकारी देकर छापेमारी शुरू की। जहां एसडीपीओ भी पुलिस बल के साथ शामिल थे। उसी समय कस्ता गांव से सैकड़ों की संख्या में लोगों ने लाठी, डंडा समेत अन्य हथियार से ईसीएल सुरक्षा कर्मियों के ऊपर हमला कर दिया एवं उनकी पिटाई कर दी। वहां पुलिस भी थी, लेकिन बदमाशों ने केवल ईसीएल के सुरक्षा कर्मियों को ही निशाना बनाया। पुलिस देखती ही रही। पुलिस ने सभी का उपचार नाला स्वास्थ्य केंद्र में करवाया। ईसीएल के सुरक्षा प्रभारी ने नाले थाने में शिकायत दर्ज करवाई है।
|
पांडेश्वर : ईसीएल क्षेत्र जामताड़ा के नाला थाना के कस्ता गांव इलाके में चल रहे अवैध कोयला खदान पर छापेमारी करने गई ईसीएल के सुरक्षा टीम पर बदमाशों ने शुक्रवार की रात हमला कर दिया। इसमें सुरक्षा प्रमुख समेत सात सुरक्षा कर्मी जख्मी हो गए। अभियान के दौरान नाला थाना की पुलिस एवं जामताड़ा के एसडीपीओ भी मौजूद थे। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिला से सटे झारखंड के नाला थाना के अंतर्गत कस्ता इलाके में ईसीएल की जमीन पर अवैध खदान चल रही थी। कई बार ईसीएल प्रबंधन ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से अवैध खदानों की भराई भी कराई थी। लेकिन फिर भी अवैध खदान का संचालन हो रहा था। अवैध खदान से हजारों टन अवैध कोयला जमा होने और ट्रक के माध्यम से बाहर भेजने की तैयारी की सूचना मिलने पर ईसीएल के सुरक्षा प्रभारी मुकेश कुमार, एसआइ पीयूष सिंह, आर्म्स गार्ड सीएस पासी, सुरक्षा कर्मी तूफान राय, दिनेश सिंह, एसआइ मजीबुर रहमान समेत दर्जनों सुरक्षा कर्मियों ने नाला थाना एवं जामताड़ा पुलिस अधीक्षक को जानकारी देकर छापेमारी शुरू की। जहां एसडीपीओ भी पुलिस बल के साथ शामिल थे। उसी समय कस्ता गांव से सैकड़ों की संख्या में लोगों ने लाठी, डंडा समेत अन्य हथियार से ईसीएल सुरक्षा कर्मियों के ऊपर हमला कर दिया एवं उनकी पिटाई कर दी। वहां पुलिस भी थी, लेकिन बदमाशों ने केवल ईसीएल के सुरक्षा कर्मियों को ही निशाना बनाया। पुलिस देखती ही रही। पुलिस ने सभी का उपचार नाला स्वास्थ्य केंद्र में करवाया। ईसीएल के सुरक्षा प्रभारी ने नाले थाने में शिकायत दर्ज करवाई है।
|
नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। कोरोना महामारी ने लोगों की दिनचर्या में कई बदलाव कर दिए हैं। महामारी ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाला है। ऐसे में एक शोध में पाया गया है कि सड़कों पर जीवन गुजर-बसर करने वाले बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राजधानी में झुग्गी व सड़कों पर रहने वाले बच्चों में 56 प्रतिशत में हल्का व 13 प्रतिशत में मध्यम स्तर का मानसिक तनाव देखा पाया गया है।
यह शोध अध्ययन एक वर्ष तक किया गया। इसे गैर सरकारी संगठन चाइल्ड एनहेंसमेंट थ्रो ट्रेनिंग एंड एक्शन (चेतना), टायबास चैरिटी व फोर्टिस एस्कार्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ मनोचित्सक डा. भावना बर्मी की ओर से किया गया। इसमें आठ से 12 और 13 से 16 उम्र के बच्चों को दो समूह में बांटा गया था। शोध में कुल 178 बच्चे शामिल हुए। इसमें 123 बच्चों में 69 प्रतिशत बच्चों में अवसाद व चिंता के लक्षण पाए गए। डा. भावना ने कहा कि इसमें यह भी सामने आया कि 45 प्रतिशत बच्चे अपने भविष्य को लेकर सकारात्मक व 33 प्रतिशत नकारात्मक सोच रखते हैं।
उन्होंने कहा कि इनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़े बुरे असर के पीछे परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ना, घरों से बाहर न निकलना व खान-पान संबंधित परेशानी मुख्यता सामने आई है। वह कहती हैं कि काउंसलिंग में यह निकलकर आया कि इन बच्चों ने ऐसे मुश्किल समय में परिवार के बीच ही खुशी ढूंढ़ने का रास्ता निकाला है। चेतना के निदेशक संजय गुप्ता ने कहा कि महामारी की वजह से सभी लोगों के सामने चुनौतियां आई हैं, लेकिन झुग्गी व सड़कों पर रहने वाले बच्चों के ऊपर इसका असर काफी गहरा दिखता है।
इस शोध से पता चलता है कि महामारी ने इन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाला है। यह ऐसा मानसिक विकार है, जिसका इलाज भी काफी महंगा है और गरीब की जेब से बाहर है। अब कोरोना महामारी नियंत्रण में है और जो लर्निग केंद्र बंद पड़े थे, वे धीरे-धीरे खुलने लगे हैं। ऐसे में इन बच्चों के लिए व्यक्तिगत तौर से मदद करने के लिए सभी लोगों को आगे आना होगा।
|
नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। कोरोना महामारी ने लोगों की दिनचर्या में कई बदलाव कर दिए हैं। महामारी ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाला है। ऐसे में एक शोध में पाया गया है कि सड़कों पर जीवन गुजर-बसर करने वाले बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राजधानी में झुग्गी व सड़कों पर रहने वाले बच्चों में छप्पन प्रतिशत में हल्का व तेरह प्रतिशत में मध्यम स्तर का मानसिक तनाव देखा पाया गया है। यह शोध अध्ययन एक वर्ष तक किया गया। इसे गैर सरकारी संगठन चाइल्ड एनहेंसमेंट थ्रो ट्रेनिंग एंड एक्शन , टायबास चैरिटी व फोर्टिस एस्कार्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ मनोचित्सक डा. भावना बर्मी की ओर से किया गया। इसमें आठ से बारह और तेरह से सोलह उम्र के बच्चों को दो समूह में बांटा गया था। शोध में कुल एक सौ अठहत्तर बच्चे शामिल हुए। इसमें एक सौ तेईस बच्चों में उनहत्तर प्रतिशत बच्चों में अवसाद व चिंता के लक्षण पाए गए। डा. भावना ने कहा कि इसमें यह भी सामने आया कि पैंतालीस प्रतिशत बच्चे अपने भविष्य को लेकर सकारात्मक व तैंतीस प्रतिशत नकारात्मक सोच रखते हैं। उन्होंने कहा कि इनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़े बुरे असर के पीछे परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ना, घरों से बाहर न निकलना व खान-पान संबंधित परेशानी मुख्यता सामने आई है। वह कहती हैं कि काउंसलिंग में यह निकलकर आया कि इन बच्चों ने ऐसे मुश्किल समय में परिवार के बीच ही खुशी ढूंढ़ने का रास्ता निकाला है। चेतना के निदेशक संजय गुप्ता ने कहा कि महामारी की वजह से सभी लोगों के सामने चुनौतियां आई हैं, लेकिन झुग्गी व सड़कों पर रहने वाले बच्चों के ऊपर इसका असर काफी गहरा दिखता है। इस शोध से पता चलता है कि महामारी ने इन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाला है। यह ऐसा मानसिक विकार है, जिसका इलाज भी काफी महंगा है और गरीब की जेब से बाहर है। अब कोरोना महामारी नियंत्रण में है और जो लर्निग केंद्र बंद पड़े थे, वे धीरे-धीरे खुलने लगे हैं। ऐसे में इन बच्चों के लिए व्यक्तिगत तौर से मदद करने के लिए सभी लोगों को आगे आना होगा।
|
नई दिल्लीः अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड आयल की कमजोर मांग ने इसके भाव को और नीचे कर दिया है। इस वक़्त विश्वभर में कोरोना वायरस के नए मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। इसने ग्लोबल ऑइल मार्केट पर बहुत बुरा प्रभाव डाला है। इधर, घरेलू बाजार में देखें तो सरकारी तेल कंपनियों ने आज फिर डीजल के भाव में कटौती की है। हालांकि पेट्रोल के दाम स्थिर हैं।
पेट्रोल के दाम में बीते 10 दिनों से कोई फेरबदल नहीं हुआ है। शुक्रवार को दिल्ली में पेट्रोल 81. 06 रुपये पर स्थिर रहा, जबकि डीजल 7 पैसे सस्ता होकर 70. 46 रुपये प्रति लीटर तक कम हो गया। आज दिल्ली में पेट्रोल के भाव 81. 06 और डीज़ल की कीमत 70. 46 प्रति लीटर है। वहीं मायानगरी मुंबई में पेट्रोल 87. 74 और डीजल 76. 86 रुपए प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।
वहीं तमिल नाडु की राजधानी चेन्नई में पेट्रोल 84. 14 प्रति लीटर की दर से मिल रहा है, वहीं एक लीटर डीजल के लिए 75. 95 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं। जबकि कोलकाता में एक लीटर पेट्रोल 82. 59 रुपए में मिल रहा है और डीजल का दाम 73. 99 प्रति लीटर है। आपको बता दें कि तेल कंपनियां रोज़ाना समीक्षा करके पेट्रोल-डीज़ल के नए भाव जारी करती हैं, जो सुबह 6 बजे से लागू हो जाती हैं।
|
नई दिल्लीः अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड आयल की कमजोर मांग ने इसके भाव को और नीचे कर दिया है। इस वक़्त विश्वभर में कोरोना वायरस के नए मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। इसने ग्लोबल ऑइल मार्केट पर बहुत बुरा प्रभाव डाला है। इधर, घरेलू बाजार में देखें तो सरकारी तेल कंपनियों ने आज फिर डीजल के भाव में कटौती की है। हालांकि पेट्रोल के दाम स्थिर हैं। पेट्रोल के दाम में बीते दस दिनों से कोई फेरबदल नहीं हुआ है। शुक्रवार को दिल्ली में पेट्रोल इक्यासी. छः रुपयापये पर स्थिर रहा, जबकि डीजल सात पैसे सस्ता होकर सत्तर. छियालीस रुपयापये प्रति लीटर तक कम हो गया। आज दिल्ली में पेट्रोल के भाव इक्यासी. छः और डीज़ल की कीमत सत्तर. छियालीस प्रति लीटर है। वहीं मायानगरी मुंबई में पेट्रोल सत्तासी. चौहत्तर और डीजल छिहत्तर. छियासी रुपयापए प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। वहीं तमिल नाडु की राजधानी चेन्नई में पेट्रोल चौरासी. चौदह प्रति लीटर की दर से मिल रहा है, वहीं एक लीटर डीजल के लिए पचहत्तर. पचानवे रुपयापए चुकाने पड़ रहे हैं। जबकि कोलकाता में एक लीटर पेट्रोल बयासी. उनसठ रुपयापए में मिल रहा है और डीजल का दाम तिहत्तर. निन्यानवे प्रति लीटर है। आपको बता दें कि तेल कंपनियां रोज़ाना समीक्षा करके पेट्रोल-डीज़ल के नए भाव जारी करती हैं, जो सुबह छः बजे से लागू हो जाती हैं।
|
जैसलमेर के लखासर गांव में लगे ईडन सोलर प्लांट के पास चिंकारा हिरणों के शव के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। इससे वन्यजीव प्रेमी काफी गुस्से में है। लगातार 2 दिन में करीब 14 दुर्लभ चिंकारा के शव मिलने से वन्य जीव प्रेमियों को शक है कि सोलर कंपनी वालों ने ही इनकी हत्या की है। रविवार को 6 हिरण, 3 मृत बच्चों और मंगलवार को 5 और चिंकारा हिरणों के अवशेष मिलने से वन्य जीव प्रेमियों में रोष है। वन्य जीव प्रेमी अब सोलर कंपनी पर मुकदमा करवाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि रविवार को मिले हिरणों के शव को लेकर श्रीजंभेश्वर पर्यावरण एवं जीव रक्षा प्रदेश संस्था राजस्थान की टीम ने जिला कलेक्टर डॉ प्रतिभा सिंह से मिलकर मुकदमा दर्ज कराने व शिकारियों का पता लगाकर उन्हें दंडित कराने की मांग भी की है। अब एक बार फिर 5 मृत हिरणों के अवशेष ईडन सोलर प्लांट की चारदीवारी के आसपास मिलने से वन्य जीव प्रेमियों का शक हकीकत में बदल रहा है।
वन्य जीव प्रेमी राधेश्याम पेमानी ने बताया कि रविवार को 6 हिरणों के शव मिले थे। हमने जब पोस्टमार्टम करवाया तब उनमें से 3 हिरण गर्भवती थी तथा उनके पेट से 3 मृत बच्चे भी मिले। इस घटना से नाराज होकर हमने जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज करवाने की मांग की थी। मंगलवार को सभी वन्य जीव प्रेमियों ने सोलर कंपनी को चारदीवारी में जाकर हिरणों की जानकारी लेने की बात कही, लेकिन कंपनी ने उनको अंदर नहीं जाने दिया। तब हमने कंपनी की चारदीवारी के आस पास देखा वहां हमें 5 मृत हिरणों के अवशेष मिले। राधेश्याम पेमानी ने बताया कि हमें शक है कि इनकी हत्या में कंपनी के ही लोगों का हाथ है। हमने 5 मृत हिरणों के अवशेषों को इकट्ठा करके वन विभाग को सूचना दी है। इस घटना से सभी वन्य जीव प्रेमियों में रोष है और उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करेंगे।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
जैसलमेर के लखासर गांव में लगे ईडन सोलर प्लांट के पास चिंकारा हिरणों के शव के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। इससे वन्यजीव प्रेमी काफी गुस्से में है। लगातार दो दिन में करीब चौदह दुर्लभ चिंकारा के शव मिलने से वन्य जीव प्रेमियों को शक है कि सोलर कंपनी वालों ने ही इनकी हत्या की है। रविवार को छः हिरण, तीन मृत बच्चों और मंगलवार को पाँच और चिंकारा हिरणों के अवशेष मिलने से वन्य जीव प्रेमियों में रोष है। वन्य जीव प्रेमी अब सोलर कंपनी पर मुकदमा करवाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि रविवार को मिले हिरणों के शव को लेकर श्रीजंभेश्वर पर्यावरण एवं जीव रक्षा प्रदेश संस्था राजस्थान की टीम ने जिला कलेक्टर डॉ प्रतिभा सिंह से मिलकर मुकदमा दर्ज कराने व शिकारियों का पता लगाकर उन्हें दंडित कराने की मांग भी की है। अब एक बार फिर पाँच मृत हिरणों के अवशेष ईडन सोलर प्लांट की चारदीवारी के आसपास मिलने से वन्य जीव प्रेमियों का शक हकीकत में बदल रहा है। वन्य जीव प्रेमी राधेश्याम पेमानी ने बताया कि रविवार को छः हिरणों के शव मिले थे। हमने जब पोस्टमार्टम करवाया तब उनमें से तीन हिरण गर्भवती थी तथा उनके पेट से तीन मृत बच्चे भी मिले। इस घटना से नाराज होकर हमने जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज करवाने की मांग की थी। मंगलवार को सभी वन्य जीव प्रेमियों ने सोलर कंपनी को चारदीवारी में जाकर हिरणों की जानकारी लेने की बात कही, लेकिन कंपनी ने उनको अंदर नहीं जाने दिया। तब हमने कंपनी की चारदीवारी के आस पास देखा वहां हमें पाँच मृत हिरणों के अवशेष मिले। राधेश्याम पेमानी ने बताया कि हमें शक है कि इनकी हत्या में कंपनी के ही लोगों का हाथ है। हमने पाँच मृत हिरणों के अवशेषों को इकट्ठा करके वन विभाग को सूचना दी है। इस घटना से सभी वन्य जीव प्रेमियों में रोष है और उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करेंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
Lumpy Skin Disease एनआरडीडीएल लैब के डा. चरणजीत सिंह सारंगल ने बताया कि लंपी वायरस दक्षिण अफ्रीका में पहली बार मिला था। उसके बाद यूरोप से होते हुए एशिया में पहुंचा। पिछले साल केरल में मामले रिपोर्ट हुए थे। इसके बाद वायरस तेजी से विभिन्न राज्यों में फैल चुका है।
जासं, जालंधर। Lumpy Skin Disease: पंजाब में लंपी स्किन बीमारी का प्रकोप बढ़ने से बीमार पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पशुपालन विभाग बीमार पशुओं की सैंपल रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है। राज्य भर से सैंपल जांच के लिए एनआरडीडीएल लैब में आ रहे हैं। जहां से भोपाल भेजे जा रहे हैं। पशुओं में बीमारी के कारण दूध की कमी का संकट भी मंडराने लगा है। पशुपालन विभाग पंजाब के डायरेक्टर ने खतरे को टालने के लिए जिलों के डिप्टी डायरेक्टरों को पशुओं को गोट पाक्स वैक्सीन लगवाने की हिदायत जारी की है।
पशुओं में चल रही बीमारी पर नगर निगम की लापरवाही की कांग्रेस के पार्षद मिंटू जुनेजा ने कड़ी निंदा की है। मिंटू जुनेजा ने कहा कि शहर में सैकड़ों की गिनती में बेसहारा पशु घूम रहे हैं। इनके कारण बीमारी ज्यादा फैलने का खतरा बना हुआ है। इनकी जांच को लेकर भी कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। पार्षद ने कहा कि निगम के असिस्टेंट हेल्थ अफसर डा. राजकमल से बात की तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि वह इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते हैं। वह यह भी नहीं जानते कि इस काम को कौन देखेगा।
पशुपालन विभाग के नोडल अफसर डा. राम पाल मित्तल ने कहा कि अभी तक पंजाब में 31 हजार मामले सामने आए हैं। 672 के करीब मौतें हो चुकी हैं। 50 हजार के करीब वैक्सीन की डोज लग चुकी हैं। विभाग की टीमें पूरी चौकसी के साथ जुटी हुई है। सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।
एनआरडीडीएल लैब के डा. चरणजीत सिंह सारंगल ने बताया कि लंपी वायरस दक्षिण अफ्रीका में पहली बार मिला था। उसके बाद यूरोप से होते हुए एशिया में पहुंचा। पिछले साल केरल में मामले रिपोर्ट हुए थे। इसके बाद वायरस तेजी से विभिन्न राज्यों में फैल चुका है।
लंपी स्कीन बीमारी संक्रमित गाय के संपर्क में आने से दूसरी गायों में फैलती है। यह रोग मक्खी, मच्छर या फिर जूं द्वारा खून चूसने के दौरान फैल सकती है। यही नहीं दूषित गाय के सीधे संपर्क में आने से भी फैल सकती है। इस कारण अब तक कई गायों की मौत की खबर आ चुकी है।
पशु को तेज बुखार आना, त्वचा में सूजन और मोटी-मोटी गांठे, टांगों में सूजन, आहार खाने में परेशानी, कमजोरी और दूध उत्पादन में कमी इसके मुख्य लक्षण हैं।
|
Lumpy Skin Disease एनआरडीडीएल लैब के डा. चरणजीत सिंह सारंगल ने बताया कि लंपी वायरस दक्षिण अफ्रीका में पहली बार मिला था। उसके बाद यूरोप से होते हुए एशिया में पहुंचा। पिछले साल केरल में मामले रिपोर्ट हुए थे। इसके बाद वायरस तेजी से विभिन्न राज्यों में फैल चुका है। जासं, जालंधर। Lumpy Skin Disease: पंजाब में लंपी स्किन बीमारी का प्रकोप बढ़ने से बीमार पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पशुपालन विभाग बीमार पशुओं की सैंपल रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है। राज्य भर से सैंपल जांच के लिए एनआरडीडीएल लैब में आ रहे हैं। जहां से भोपाल भेजे जा रहे हैं। पशुओं में बीमारी के कारण दूध की कमी का संकट भी मंडराने लगा है। पशुपालन विभाग पंजाब के डायरेक्टर ने खतरे को टालने के लिए जिलों के डिप्टी डायरेक्टरों को पशुओं को गोट पाक्स वैक्सीन लगवाने की हिदायत जारी की है। पशुओं में चल रही बीमारी पर नगर निगम की लापरवाही की कांग्रेस के पार्षद मिंटू जुनेजा ने कड़ी निंदा की है। मिंटू जुनेजा ने कहा कि शहर में सैकड़ों की गिनती में बेसहारा पशु घूम रहे हैं। इनके कारण बीमारी ज्यादा फैलने का खतरा बना हुआ है। इनकी जांच को लेकर भी कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। पार्षद ने कहा कि निगम के असिस्टेंट हेल्थ अफसर डा. राजकमल से बात की तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि वह इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते हैं। वह यह भी नहीं जानते कि इस काम को कौन देखेगा। पशुपालन विभाग के नोडल अफसर डा. राम पाल मित्तल ने कहा कि अभी तक पंजाब में इकतीस हजार मामले सामने आए हैं। छः सौ बहत्तर के करीब मौतें हो चुकी हैं। पचास हजार के करीब वैक्सीन की डोज लग चुकी हैं। विभाग की टीमें पूरी चौकसी के साथ जुटी हुई है। सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। एनआरडीडीएल लैब के डा. चरणजीत सिंह सारंगल ने बताया कि लंपी वायरस दक्षिण अफ्रीका में पहली बार मिला था। उसके बाद यूरोप से होते हुए एशिया में पहुंचा। पिछले साल केरल में मामले रिपोर्ट हुए थे। इसके बाद वायरस तेजी से विभिन्न राज्यों में फैल चुका है। लंपी स्कीन बीमारी संक्रमित गाय के संपर्क में आने से दूसरी गायों में फैलती है। यह रोग मक्खी, मच्छर या फिर जूं द्वारा खून चूसने के दौरान फैल सकती है। यही नहीं दूषित गाय के सीधे संपर्क में आने से भी फैल सकती है। इस कारण अब तक कई गायों की मौत की खबर आ चुकी है। पशु को तेज बुखार आना, त्वचा में सूजन और मोटी-मोटी गांठे, टांगों में सूजन, आहार खाने में परेशानी, कमजोरी और दूध उत्पादन में कमी इसके मुख्य लक्षण हैं।
|
पिछले कुछ दिनों से दिल्ली-एनसीआर का क्षेत्र गर्मी की मार झेल रहा है। आने वाले दिनों में भी कोई मौसमी गतिविधियां नहीं होने वाली है। जिसके कारण राजधानी दिल्ली और एनसीआर (नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाज़ियाबाद) के इलाकों में शुष्क और गर्म मौसम की स्थिति बनी रहेगी। साथ ही, इस क्षेत्र में उत्तर-पश्चिमी हवाएं भी चलती रहेगी। जिसकी वजह से तापमान में भी वृद्धि देखी जाएगी।
स्काइमेट के मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अगले 3-4 दिनों के दौरान इन क्षेत्रों में तापमान का स्तर 45 डिग्री तक पहुंच सकता है। तापमान में इतना ज्यादा बढ़त के कारण दिल्ली और इसके आसपास के इलाके में लू जैसी स्थिति बनने की उम्मीद है।
दिल्ली में सोमवार यानि 27 मई को, 41.9 डिग्री के साथ मई महीने का अधिकतम तापमान रिकॉर्ड किया गया। जो कि सामान्य से लगभग 2 डिग्री ज्यादा था।
दिल्ली में 30 अप्रैल को अधिकतम तापमान 43.7 डिग्री दर्ज किया गया था। जिसके बाद मई में तापमान में कुछ अधिक बढ़त नहीं देखी गयी है। जबकि, आम तौर पर मई महीने में, एनसीआर का अधिकतम तापमान 45 डिग्री तक पहुंच जाता है।
राजधानी दिल्ली में भले ही मानसून जून के अंत में आता है, लेकिन मई के दूसरे पखवाड़े से ही, दिल्ली और एनसीआर में प्री-मॉनसून गतिविधियां शुरू हो जाती है।
हालांकि, इस बार मई के दौरान, हवा की गति के आधार पर प्री-मॉनसून गतिविधियाँ थोड़ा कम रही है। जिसके कारण अब तक दिल्ली-एनसीआर में धूल भरी आंधी का कोई भयंकर रूप देखने को नहीं मिला है।
कृपया ध्यान देंः स्काइमेट की वेबसाइट पर उपलब्ध किसी भी सूचना या लेख को प्रसारित या प्रकाशित करने पर साभारः skymetweather.com अवश्य लिखें।
|
पिछले कुछ दिनों से दिल्ली-एनसीआर का क्षेत्र गर्मी की मार झेल रहा है। आने वाले दिनों में भी कोई मौसमी गतिविधियां नहीं होने वाली है। जिसके कारण राजधानी दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में शुष्क और गर्म मौसम की स्थिति बनी रहेगी। साथ ही, इस क्षेत्र में उत्तर-पश्चिमी हवाएं भी चलती रहेगी। जिसकी वजह से तापमान में भी वृद्धि देखी जाएगी। स्काइमेट के मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अगले तीन-चार दिनों के दौरान इन क्षेत्रों में तापमान का स्तर पैंतालीस डिग्री तक पहुंच सकता है। तापमान में इतना ज्यादा बढ़त के कारण दिल्ली और इसके आसपास के इलाके में लू जैसी स्थिति बनने की उम्मीद है। दिल्ली में सोमवार यानि सत्ताईस मई को, इकतालीस.नौ डिग्री के साथ मई महीने का अधिकतम तापमान रिकॉर्ड किया गया। जो कि सामान्य से लगभग दो डिग्री ज्यादा था। दिल्ली में तीस अप्रैल को अधिकतम तापमान तैंतालीस.सात डिग्री दर्ज किया गया था। जिसके बाद मई में तापमान में कुछ अधिक बढ़त नहीं देखी गयी है। जबकि, आम तौर पर मई महीने में, एनसीआर का अधिकतम तापमान पैंतालीस डिग्री तक पहुंच जाता है। राजधानी दिल्ली में भले ही मानसून जून के अंत में आता है, लेकिन मई के दूसरे पखवाड़े से ही, दिल्ली और एनसीआर में प्री-मॉनसून गतिविधियां शुरू हो जाती है। हालांकि, इस बार मई के दौरान, हवा की गति के आधार पर प्री-मॉनसून गतिविधियाँ थोड़ा कम रही है। जिसके कारण अब तक दिल्ली-एनसीआर में धूल भरी आंधी का कोई भयंकर रूप देखने को नहीं मिला है। कृपया ध्यान देंः स्काइमेट की वेबसाइट पर उपलब्ध किसी भी सूचना या लेख को प्रसारित या प्रकाशित करने पर साभारः skymetweather.com अवश्य लिखें।
|
(यस्य) जिस राजा के ( मन्त्रम् ) गूढ़ विचार ( पृथक् जनाः समागम्य न जानन्ति ) अन्य जन मिलकर नहीं जान सकते अर्थात् जिसका विचार गम्भीर, शुद्ध, परोपकारार्थ सदा गुप्त रहे (सः कोशहीनः + पि पार्थिवः) वह धनहीन भो राजा ( कृत्स्नां पृथिवों भुङ्क्ते ) सब पृथिवी का राज्य करने में समर्थ होता है । १४८ । ( स० प्र० १५८ )
अनुशीलनः (१) मन्त्र शब्द का राजनीतिपरक अर्थ - 'मन्त्र' शब्द के अर्थ पर यहां विशेष विचार अपेक्षित है। राजनीति के प्रसंग में 'मन्त्र' गोपनीय विचार-विमर्श को कहा जाता है। जिसमें गुप्त बातों पर रहस्यमय विचार किया जाये वह मन्त्ररणा कहलाती है । मन्त्र शब्द 'मत्र - गुप्तभाषणे' = गुप्त विचार करना अर्थ में, इस धातु से घञ् प्रत्यय के योग से सिद्ध हुआ है । निरुक्त में 'मन्त्राः - नात्' कहकर निरुक्ति दी है। मनन करने के कारण राजनीति के रहस्यों को और वेदमन्त्रों को मन्त्र कहते हैं ।
(२) "कोशहीनोऽपि पार्थिवः" का प्रयोग मुहावरे के रूप में हुआ है । इसी प्रकार के भावों की अभिव्यक्ति ७ । ३३ में द्रष्टव्य है। धर्म, काम, अर्थ-सम्बन्धी बातों पर चिन्तन करेमध्यंदिनेऽधंरात्रे वा विश्रान्तो विगतकलमः ।
चिन्तयेद्धर्मकामार्थान्साधं तैरेक एव वा ॥ १५१ ॥ (११६) ( मध्यंदिने ) दोपहर के समय (वा) अथवा (विश्रान्तः विगतक्तमः) विश्राम करके थकान-प्रालस्यरहित होकर स्वस्थ व प्रसन्न शरीर और मन से (अर्धरात्रे ) रात के किसी समय (धर्म-काम-अर्थान्) धर्म, काम और अर्थसम्बन्धी बातों को (तैः सार्धम् ) उन मन्त्रियों के साथ मिलकर (वा) अथवा परिस्थिति विशेष में ( एक एव ) अकेले ही (चिन्तयेत् ) विचारे ॥ [चिन्तयेत् क्रिया का अन्वय १५८ तक चलता है] ।। १५१ ॥
अनुशीलन : (१) राजा द्वारा धर्म-काम- अर्थ पर चिन्तन - राजा को प्रसन्न मन से धर्म काम अर्थ सम्बन्धी बातों पर देश-काल कार्य को देख कर अकेले अथवा अन्य मन्त्रियों के साथ प्रतिदिन विचार करना चाहिए । कौटिल्य ने भी कहा"देश-काल-कार्यवशेन त्वेकेन सह द्वाभ्याम् एको वा यथासामर्थ्य मन्त्रयेत ।" [प्र० १० । ऋ० १४]
( २ ) धर्म, काम, अर्थ के स्वरूप पर विस्तृत विवेचन ७ । २६ पर द्रष्टव्य है। (३) 'अर्ध' शब्द का यहाँ 'एक भाग' अर्थ में प्रयोग है। संप्रविभाग अर्थ में
|
जिस राजा के गूढ़ विचार अन्य जन मिलकर नहीं जान सकते अर्थात् जिसका विचार गम्भीर, शुद्ध, परोपकारार्थ सदा गुप्त रहे वह धनहीन भो राजा सब पृथिवी का राज्य करने में समर्थ होता है । एक सौ अड़तालीस । अनुशीलनः मन्त्र शब्द का राजनीतिपरक अर्थ - 'मन्त्र' शब्द के अर्थ पर यहां विशेष विचार अपेक्षित है। राजनीति के प्रसंग में 'मन्त्र' गोपनीय विचार-विमर्श को कहा जाता है। जिसमें गुप्त बातों पर रहस्यमय विचार किया जाये वह मन्त्ररणा कहलाती है । मन्त्र शब्द 'मत्र - गुप्तभाषणे' = गुप्त विचार करना अर्थ में, इस धातु से घञ् प्रत्यय के योग से सिद्ध हुआ है । निरुक्त में 'मन्त्राः - नात्' कहकर निरुक्ति दी है। मनन करने के कारण राजनीति के रहस्यों को और वेदमन्त्रों को मन्त्र कहते हैं । "कोशहीनोऽपि पार्थिवः" का प्रयोग मुहावरे के रूप में हुआ है । इसी प्रकार के भावों की अभिव्यक्ति सात । तैंतीस में द्रष्टव्य है। धर्म, काम, अर्थ-सम्बन्धी बातों पर चिन्तन करेमध्यंदिनेऽधंरात्रे वा विश्रान्तो विगतकलमः । चिन्तयेद्धर्मकामार्थान्साधं तैरेक एव वा ॥ एक सौ इक्यावन ॥ दोपहर के समय अथवा विश्राम करके थकान-प्रालस्यरहित होकर स्वस्थ व प्रसन्न शरीर और मन से रात के किसी समय धर्म, काम और अर्थसम्बन्धी बातों को उन मन्त्रियों के साथ मिलकर अथवा परिस्थिति विशेष में अकेले ही विचारे ॥ [चिन्तयेत् क्रिया का अन्वय एक सौ अट्ठावन तक चलता है] ।। एक सौ इक्यावन ॥ अनुशीलन : राजा द्वारा धर्म-काम- अर्थ पर चिन्तन - राजा को प्रसन्न मन से धर्म काम अर्थ सम्बन्धी बातों पर देश-काल कार्य को देख कर अकेले अथवा अन्य मन्त्रियों के साथ प्रतिदिन विचार करना चाहिए । कौटिल्य ने भी कहा"देश-काल-कार्यवशेन त्वेकेन सह द्वाभ्याम् एको वा यथासामर्थ्य मन्त्रयेत ।" [प्रशून्य दस । ऋशून्य चौदह] धर्म, काम, अर्थ के स्वरूप पर विस्तृत विवेचन सात । छब्बीस पर द्रष्टव्य है। 'अर्ध' शब्द का यहाँ 'एक भाग' अर्थ में प्रयोग है। संप्रविभाग अर्थ में
|
धारण कर चुका है के प्रथम प्रबन्धक होने का गौरव उक महानुभाव को ही है किंतु हरिश्चन्द्र इस उत्तरदायित्वपूर्ण पद को अधिक देर तक नहीं सभात सके। इसका कारण उनकी अयोग्यता थी। स्वामी जी श्री हरिश्चन्द्र को बार २ लिखते थे कि वैदिक यन्त्रालय का कार्य सुचारू रूप से चलना चाहिए, माइकों के पास अक ठीक समय पर पहुँचने चाहिये, साथ ही स्वामी जी का यह आप्रह स्वामी जी का यह आग्रह था कि बेदभाष्य के लिफाफे के ऊपर देव नागरी में पता लिखा जाय । बाबू हरिश्चन्द्र देवनागरी नहीं जानते थे। स्वामी जी ने बाबू हरिश्चन्द्र से परेशान होकर जय श्री श्यामजी कृष्णवर्मा का बेदभाष्य की छपवाई का प्रवन्ध लेने के लिये कहा तो बा० हरिश्चन्द्र ने उन्हें मन्त्रालय का कार्य सौंपने में भी बड़ा आगा-पीछा और आना-कानी की। श्री श्याम जी के अधिकाश पत्रों का यही विषय हे और इन पत्रों की जबानी वैदिक यन्त्रालय के विकास की कहानी पर पर्याप्त प्रकाश पडता है
वेदमाध्य के पहले तीन अक बा० हरिश्चन्द्र के प्रबन्ध में निकले, किन्तु उनकी व्यवस्था इतनी रही थी कि दिल्ली से २ नव० १८७८८ के श्री गोपालराब हरि देश मुख को पत्र मे स्वामी जी ने यह लिखा कि "विदित हो जिस दिन से बा० हरिश्चन्द्र चिन्तामणि के प्रबन्ध में वेदभाष्य का काम गया है, तब से किसी प्राइक के पास भी अक यथार्थ नहीं पहुँ बते'। स्वामी जी इस देरी का जो कारण समझते थे यह भ्यान देने योग्य है। उनकी यह भाशा थी कि बा० हरिश्चन्द्र बेदभाष्य के लिफाफों पर पता अग्रेजी में लिखते हैं इसी लिये प्राहकों के पास वेदभाष्य नहीं पहुँचता । ऊपर
उद्धृत पत्र में ही उक्त वाक्यों के बाद वे यह लिखते हैं - 'वे (बा० हरिश्चन्द्र ) क्या करें । उनके पास कोई आदमी इस योग्य नहीं। यहाँ स्वामी जी का योग्य भादमी का अभिप्राय देवनागरी जानने वाला व्यक्ति है। यह बात स्वामीजी के अन्य पन्नों से स्पष्ट हो जाती है। १४ अक्टू० १८७८ के दिल्ली से श्री श्यामजी के नाम लिखे पत्र में स्वामी जी लिखते हैं किसी देवनागरी वाले को वहाँ रख दो क्योंकि बा० हरिश्चन्द्र चिन्ता मणि अमेजी में लिखते हैं।' २७ अक्टू० १८७८ के पत्र मे स्वामी जी श्री श्यामजी से पूछते हैं कि वेदभ घ्य के लिफाफों पर देवनागरी में पता के क्यों नहीं लिखा गया तथा यह अनुरोध करते है कि देवनागरी जानने वाले मुशी को एकदम नियुक्त करलें। पत्र के शब्द इस प्रकार हैं-"अब की बार वेदभाष्य के लिफाफे के ऊपर देवनागरी नहीं लिखो गई, जो कहीं प्रामों में अग्रेजी पढ़ा न होगा ता अक बहाँ कैसे पहुँचते होंगे और ग्रामों मे देवनागरी पढे बहुत होते हैं, इसलिये तुम बाबू हरिश्चन्द्र चिन्तामणि जी से कहो कि अभी इस पत्र के देखते ही देवनागर । जानने वाला मुशी रख लेवें कि जो काम ठीक २ हो, नहीं तो बेदभ ष्य के लिफाफों पर रजिस्टर के अनुसार प्राहकों का पता किसी देवनागरी वाले से नागरी में लिखा कर टपास लिया करें" ।
कहाँ स्वामी जी का यह देवनागरी का प्रेम और कहाँ ऋषि के अनुयायी कई आनेवालों में से अधिकाश उर्दू व अँग्रेजी का मोह आज से ६५ वर्ष पूर्व ऋषि ने देवनागरी में पते लिखने पर जो बल दिया था यदि हम उसका शवाश
भी क्रिया रूप में परिणत करते अँग्रेजी उर्दू के स्थान पर पते हिन्दी में ही लिखते तो यह शोच नीय स्थिति न उत्पन्न होती। पजाब आर्य प्रति निधि सभा के मुख पत्र 'आर्य' के नागरी में पते लिखे हुए, अक मृतपत्र कार्यालय की सैर न करते। स्वामी जी देवनागरी में पते लिखने पर इसलिये बल देते थे कि प्राहकों को वेद भाष्य के अक नियत स्थान पर पहुँच जाये और आज कल अॅग्रेजी मे पते इसलिये लिखे जाते हैं कि पत्र के पहुँचने मे विलम्ब न हो। देवनागरी का स्थान उर्दू व अप्रे जी ने ले लिया है और यह देवनागरी के प्रात हमारी घार उपेक्षा और अग्रेजी और उर्दू के प्रेम का परिणाम है। स्वामी जी के भक्त होने का मतलब उनके आदर्शों और उपदेशों का भक्त होना है। उनकी भक्ति की इतिश्री उनकी प्रशक्षा में व्याख्यान देने व सुनने से नहीं होती उसके लिये आवश्यक है कि हम उनके उपदेशों को क्रिया रूप में परिणत करे और अपने आचारों में ढालें। क्या यह गहरे दुख और सताप की बात नहीं कि ऋषि के भक्त देवनागरी और सस्कृत को क्लिष्ट समझकर घरबी जैसी नितान्त अवैज्ञानिक, और अनार्ष लिपि को अपनायें, उसमें सन्ध्या और हवन के मन्त्र पढ़ कर उनका भ्रष्ट उच्चारण करें १ महाभाष्यकार ने लिखा है कि इन्द्र के प्रतस्पर्धी वृत्र की हिसा, एक ही वर्ण के अशुद्ध उच्चारण से हो गयी ।
यह पौराणिक गाथा सही हो या न हो किन्तु हम लोगों ने तो पवित्र वैदिक मन्त्रों मित्रस्य हि चक्षुषा समीक्षामहे के मेहतर स्याही खामरे भादि विकृत एव दूषित व्यारण कर अपनी भाषा एव सस्कृति की स्वय अपने हाथों हिंसा की है और अपने प्रयत्नों से हम देवनागरी की कम खोद रहे हैं। पहले हम देख चुके हैं कि स्वामी जी ने वेद भाष्य मार्य भाषा और सस्कृत में किया और उर्दू आदि भाषाओं मे उसके अनुवाद का विरोध किया ताकि लोग देवनागरी सीखें । इन पत्रों से स्पष्ट है कि वे पता भी देवनागरी में लिखवाना चाहते थे। यदि हम स्वामी जी के आदेशों और उपदेशों के अनुसार चले होते तो हमे देवनागरी की आज यह दुर्दशा न देखनी पडती । अब भी देव नागरी के उद्धार का यही उपाय है कि हम उसे प्रयत्न पूर्वक सोखें और अपने सारे व्यवहार में, केवल मात्र उसी भाषा का प्रयोग करे तभी हमारी यह इच्छा पूरी होगीकि 'राष्ट्र भाषा भवेहेव सर्व श्रेष्ठहि नागरी' अन्यथा इस सर्वश्रेष्ठ नागरी को नितान्त अवैज्ञानिक अरबी और रोमन लिपियों के आगे अवश्यमेव झुकना पड़ेगा । सिन्धी लोग तो अपनी भाषा को नागरी लिपि छोड़कर भरबी लिपि में लिखते ही लगे हैं यदि हिन्दी के प्रति हमारी यही भोर उपेक्षा और उदासीनता जारी रही तो हमारे यहाँ भी धरबी लिपि का हो साम्राज्य स्थापित हो जायगा। अस्तु
*महा प्रथम आहिकदुष्ट शब्द स्वरतो वर्णतो वा, मिथ्या प्रयुक्तो न तमर्थमाह । स काग्वजो यबमान हिनस्ति यथेन्द्रशत्रु स्वरतोऽपराधात् ॥ .
स्वामी जी ने श्री श्याम जी कृष्ण वर्मा को बेद भाष्य के प्रकाशन का कार्य सौंप दिया। श्री श्याम जी का विचार इङ्गलैण्ड जाकर, शिक्षा ग्रहण करने का था । इङ्गलैण्ड क लिये प्रस्थान करने तक भी श्याम जी ही वेद माध्य के प्रकाशन की सारी व्यवस्था करते रहे। स्वामी जी ने कार्य सौंपते समय २२ अक्टूबर १८७८ के पत्र में आदेश दिया था - "बह पहिला पत्र व्यवहार का हमारा तुम्हारे पास पहुचता है। इस को रख लेना और आगे से सब रखते आना"। श्री श्याम जी ने इस आदेश का पूर्ण रूप से पालन किया और उसी का यह परिणाम है कि हमे यह पत्र समह सुरक्षित रूप में प्राप्त हुआ।
श्री श्याम जी को लिखे पत्रों में अधिकाश ता बेद भाष्य के प्रकाशन के सम्बन्ध में हैं और मा० हरिश्चन्द्र से सारी प्रकाशन व्यवस्था सॅभाल लेने के विषय में हैं। बा० हरिश्चन्द्र सार/ प्रबन्ध सौंपने में अनाकानी करता रहा और स्वामी जी बार २ श्री श्याम जी को वह प्रबन्ध सभालने के लिये लिखते रहे। इन पत्रों मे, स्वामी जी की छोटी २ बातों, कागज का प्रकार, टाइप आदि की
ओर पूरी सतर्कता देखी जाती है। इन पत्रों के अतिरिक्त दो पत्र विशेष महरू के हैं।
पहला पत्र भी श्याम जी के इङ्गलेण्ड जाने के सम्बन्ध में है। स्वामी जी को इससे प्रसन्नता है कि श्री श्याम जी सस्कृत के अध्ययन के लिये इङ्गलैण्ड जा रहे हैं किन्तु वे चाहते हैं कि श्री श्याम जी पहले स्वामी जी के पास रह कर वेद और शास्त्रों के मुख्य विषय देख ले और वहां जाकर उसी विषय में बात कर, जिसका उन्होंने अध्ययन किया हो । उनका 'काई काम ऐसा न हो जिस से अपने देश का हास ह' ।
दूसरा पत्र श्री श्याम जी का इङ्गलैण्ड चले जाने पर ८८० में स्वामी जी ने सत्कृत श्लोकों के रूप मे लिखा है। स्वामी जी का एक मात्र यही संस्कृत पत्र पद्यमय उपलब्ध हुआ है। शेष सब संस्कृत के पत्र गद्य में ही है। इस पत्र का विषय भी राजनैतिक है। अत इस पत्र का भाषा तथा विचार दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व है। इस पर से अक में विशेष विचार किया जायगा ।
(क्रमश )
सस्ता, ताज्रा, बढ़िया सन्जी व फूल फल का बीज और गाछ हम से मँगाइये ।
|
धारण कर चुका है के प्रथम प्रबन्धक होने का गौरव उक महानुभाव को ही है किंतु हरिश्चन्द्र इस उत्तरदायित्वपूर्ण पद को अधिक देर तक नहीं सभात सके। इसका कारण उनकी अयोग्यता थी। स्वामी जी श्री हरिश्चन्द्र को बार दो लिखते थे कि वैदिक यन्त्रालय का कार्य सुचारू रूप से चलना चाहिए, माइकों के पास अक ठीक समय पर पहुँचने चाहिये, साथ ही स्वामी जी का यह आप्रह स्वामी जी का यह आग्रह था कि बेदभाष्य के लिफाफे के ऊपर देव नागरी में पता लिखा जाय । बाबू हरिश्चन्द्र देवनागरी नहीं जानते थे। स्वामी जी ने बाबू हरिश्चन्द्र से परेशान होकर जय श्री श्यामजी कृष्णवर्मा का बेदभाष्य की छपवाई का प्रवन्ध लेने के लिये कहा तो बाशून्य हरिश्चन्द्र ने उन्हें मन्त्रालय का कार्य सौंपने में भी बड़ा आगा-पीछा और आना-कानी की। श्री श्याम जी के अधिकाश पत्रों का यही विषय हे और इन पत्रों की जबानी वैदिक यन्त्रालय के विकास की कहानी पर पर्याप्त प्रकाश पडता है वेदमाध्य के पहले तीन अक बाशून्य हरिश्चन्द्र के प्रबन्ध में निकले, किन्तु उनकी व्यवस्था इतनी रही थी कि दिल्ली से दो नवशून्य अट्ठारह हज़ार सात सौ अठासी के श्री गोपालराब हरि देश मुख को पत्र मे स्वामी जी ने यह लिखा कि "विदित हो जिस दिन से बाशून्य हरिश्चन्द्र चिन्तामणि के प्रबन्ध में वेदभाष्य का काम गया है, तब से किसी प्राइक के पास भी अक यथार्थ नहीं पहुँ बते'। स्वामी जी इस देरी का जो कारण समझते थे यह भ्यान देने योग्य है। उनकी यह भाशा थी कि बाशून्य हरिश्चन्द्र बेदभाष्य के लिफाफों पर पता अग्रेजी में लिखते हैं इसी लिये प्राहकों के पास वेदभाष्य नहीं पहुँचता । ऊपर उद्धृत पत्र में ही उक्त वाक्यों के बाद वे यह लिखते हैं - 'वे क्या करें । उनके पास कोई आदमी इस योग्य नहीं। यहाँ स्वामी जी का योग्य भादमी का अभिप्राय देवनागरी जानने वाला व्यक्ति है। यह बात स्वामीजी के अन्य पन्नों से स्पष्ट हो जाती है। चौदह अक्टूशून्य एक हज़ार आठ सौ अठहत्तर के दिल्ली से श्री श्यामजी के नाम लिखे पत्र में स्वामी जी लिखते हैं किसी देवनागरी वाले को वहाँ रख दो क्योंकि बाशून्य हरिश्चन्द्र चिन्ता मणि अमेजी में लिखते हैं।' सत्ताईस अक्टूशून्य एक हज़ार आठ सौ अठहत्तर के पत्र मे स्वामी जी श्री श्यामजी से पूछते हैं कि वेदभ घ्य के लिफाफों पर देवनागरी में पता के क्यों नहीं लिखा गया तथा यह अनुरोध करते है कि देवनागरी जानने वाले मुशी को एकदम नियुक्त करलें। पत्र के शब्द इस प्रकार हैं-"अब की बार वेदभाष्य के लिफाफे के ऊपर देवनागरी नहीं लिखो गई, जो कहीं प्रामों में अग्रेजी पढ़ा न होगा ता अक बहाँ कैसे पहुँचते होंगे और ग्रामों मे देवनागरी पढे बहुत होते हैं, इसलिये तुम बाबू हरिश्चन्द्र चिन्तामणि जी से कहो कि अभी इस पत्र के देखते ही देवनागर । जानने वाला मुशी रख लेवें कि जो काम ठीक दो हो, नहीं तो बेदभ ष्य के लिफाफों पर रजिस्टर के अनुसार प्राहकों का पता किसी देवनागरी वाले से नागरी में लिखा कर टपास लिया करें" । कहाँ स्वामी जी का यह देवनागरी का प्रेम और कहाँ ऋषि के अनुयायी कई आनेवालों में से अधिकाश उर्दू व अँग्रेजी का मोह आज से पैंसठ वर्ष पूर्व ऋषि ने देवनागरी में पते लिखने पर जो बल दिया था यदि हम उसका शवाश भी क्रिया रूप में परिणत करते अँग्रेजी उर्दू के स्थान पर पते हिन्दी में ही लिखते तो यह शोच नीय स्थिति न उत्पन्न होती। पजाब आर्य प्रति निधि सभा के मुख पत्र 'आर्य' के नागरी में पते लिखे हुए, अक मृतपत्र कार्यालय की सैर न करते। स्वामी जी देवनागरी में पते लिखने पर इसलिये बल देते थे कि प्राहकों को वेद भाष्य के अक नियत स्थान पर पहुँच जाये और आज कल अॅग्रेजी मे पते इसलिये लिखे जाते हैं कि पत्र के पहुँचने मे विलम्ब न हो। देवनागरी का स्थान उर्दू व अप्रे जी ने ले लिया है और यह देवनागरी के प्रात हमारी घार उपेक्षा और अग्रेजी और उर्दू के प्रेम का परिणाम है। स्वामी जी के भक्त होने का मतलब उनके आदर्शों और उपदेशों का भक्त होना है। उनकी भक्ति की इतिश्री उनकी प्रशक्षा में व्याख्यान देने व सुनने से नहीं होती उसके लिये आवश्यक है कि हम उनके उपदेशों को क्रिया रूप में परिणत करे और अपने आचारों में ढालें। क्या यह गहरे दुख और सताप की बात नहीं कि ऋषि के भक्त देवनागरी और सस्कृत को क्लिष्ट समझकर घरबी जैसी नितान्त अवैज्ञानिक, और अनार्ष लिपि को अपनायें, उसमें सन्ध्या और हवन के मन्त्र पढ़ कर उनका भ्रष्ट उच्चारण करें एक महाभाष्यकार ने लिखा है कि इन्द्र के प्रतस्पर्धी वृत्र की हिसा, एक ही वर्ण के अशुद्ध उच्चारण से हो गयी । यह पौराणिक गाथा सही हो या न हो किन्तु हम लोगों ने तो पवित्र वैदिक मन्त्रों मित्रस्य हि चक्षुषा समीक्षामहे के मेहतर स्याही खामरे भादि विकृत एव दूषित व्यारण कर अपनी भाषा एव सस्कृति की स्वय अपने हाथों हिंसा की है और अपने प्रयत्नों से हम देवनागरी की कम खोद रहे हैं। पहले हम देख चुके हैं कि स्वामी जी ने वेद भाष्य मार्य भाषा और सस्कृत में किया और उर्दू आदि भाषाओं मे उसके अनुवाद का विरोध किया ताकि लोग देवनागरी सीखें । इन पत्रों से स्पष्ट है कि वे पता भी देवनागरी में लिखवाना चाहते थे। यदि हम स्वामी जी के आदेशों और उपदेशों के अनुसार चले होते तो हमे देवनागरी की आज यह दुर्दशा न देखनी पडती । अब भी देव नागरी के उद्धार का यही उपाय है कि हम उसे प्रयत्न पूर्वक सोखें और अपने सारे व्यवहार में, केवल मात्र उसी भाषा का प्रयोग करे तभी हमारी यह इच्छा पूरी होगीकि 'राष्ट्र भाषा भवेहेव सर्व श्रेष्ठहि नागरी' अन्यथा इस सर्वश्रेष्ठ नागरी को नितान्त अवैज्ञानिक अरबी और रोमन लिपियों के आगे अवश्यमेव झुकना पड़ेगा । सिन्धी लोग तो अपनी भाषा को नागरी लिपि छोड़कर भरबी लिपि में लिखते ही लगे हैं यदि हिन्दी के प्रति हमारी यही भोर उपेक्षा और उदासीनता जारी रही तो हमारे यहाँ भी धरबी लिपि का हो साम्राज्य स्थापित हो जायगा। अस्तु *महा प्रथम आहिकदुष्ट शब्द स्वरतो वर्णतो वा, मिथ्या प्रयुक्तो न तमर्थमाह । स काग्वजो यबमान हिनस्ति यथेन्द्रशत्रु स्वरतोऽपराधात् ॥ . स्वामी जी ने श्री श्याम जी कृष्ण वर्मा को बेद भाष्य के प्रकाशन का कार्य सौंप दिया। श्री श्याम जी का विचार इङ्गलैण्ड जाकर, शिक्षा ग्रहण करने का था । इङ्गलैण्ड क लिये प्रस्थान करने तक भी श्याम जी ही वेद माध्य के प्रकाशन की सारी व्यवस्था करते रहे। स्वामी जी ने कार्य सौंपते समय बाईस अक्टूबर एक हज़ार आठ सौ अठहत्तर के पत्र में आदेश दिया था - "बह पहिला पत्र व्यवहार का हमारा तुम्हारे पास पहुचता है। इस को रख लेना और आगे से सब रखते आना"। श्री श्याम जी ने इस आदेश का पूर्ण रूप से पालन किया और उसी का यह परिणाम है कि हमे यह पत्र समह सुरक्षित रूप में प्राप्त हुआ। श्री श्याम जी को लिखे पत्रों में अधिकाश ता बेद भाष्य के प्रकाशन के सम्बन्ध में हैं और माशून्य हरिश्चन्द्र से सारी प्रकाशन व्यवस्था सॅभाल लेने के विषय में हैं। बाशून्य हरिश्चन्द्र सार/ प्रबन्ध सौंपने में अनाकानी करता रहा और स्वामी जी बार दो श्री श्याम जी को वह प्रबन्ध सभालने के लिये लिखते रहे। इन पत्रों मे, स्वामी जी की छोटी दो बातों, कागज का प्रकार, टाइप आदि की ओर पूरी सतर्कता देखी जाती है। इन पत्रों के अतिरिक्त दो पत्र विशेष महरू के हैं। पहला पत्र भी श्याम जी के इङ्गलेण्ड जाने के सम्बन्ध में है। स्वामी जी को इससे प्रसन्नता है कि श्री श्याम जी सस्कृत के अध्ययन के लिये इङ्गलैण्ड जा रहे हैं किन्तु वे चाहते हैं कि श्री श्याम जी पहले स्वामी जी के पास रह कर वेद और शास्त्रों के मुख्य विषय देख ले और वहां जाकर उसी विषय में बात कर, जिसका उन्होंने अध्ययन किया हो । उनका 'काई काम ऐसा न हो जिस से अपने देश का हास ह' । दूसरा पत्र श्री श्याम जी का इङ्गलैण्ड चले जाने पर आठ सौ अस्सी में स्वामी जी ने सत्कृत श्लोकों के रूप मे लिखा है। स्वामी जी का एक मात्र यही संस्कृत पत्र पद्यमय उपलब्ध हुआ है। शेष सब संस्कृत के पत्र गद्य में ही है। इस पत्र का विषय भी राजनैतिक है। अत इस पत्र का भाषा तथा विचार दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व है। इस पर से अक में विशेष विचार किया जायगा । सस्ता, ताज्रा, बढ़िया सन्जी व फूल फल का बीज और गाछ हम से मँगाइये ।
|
नौवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री मनसुख मंडाविया ने आज नई दिल्ली में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) की यमुना जल टैक्सी परियोजना के सोनिया विहार स्थित प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया। आईडब्ल्यूएआई ने पर्यटन के उद्देश्य से दिल्ली में यमुना नदी को विकसित करने का प्रस्ताव दिया है।
परियोजना स्थल पर बात करते हुए श्री मंडाविया ने कहा कि यमुना जल टैक्सी परियोजना शहरी परिवहन का एक नया साधन होगा। यह न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि शहर में यातायात की भीड़ को कम करने में भी मदद करेगा।
यमुना जल टैक्सी परियोजना की कल्पना एक एकीकृत विकास परियोजना के रूप में की गई है, जिसमें टर्मिनल विकास और जहाजों के संचालन जैसे कई कार्य शामिल हैं। परियोजना की कुल लंबाई 16 किमी है और इसमें दिल्ली में यमुना नदी के किनारे पांच स्थान शामिल हैं, जिनमें फतेपुर जाट, ट्रोनिका सिटी, जगतपुर, सोनिया विहार और वजीराबाद शामिल हैं। इसे दो चरणों में विकसित करने का प्रस्ताव है - पहला चरणः सोनिया विहार से ट्रोनिका सिटी और दूसरा चरणः वजीराबाद से सोनिया विहार तथा ट्रोनिका सिटी से फतेहपुर जाट तक।
परियोजना में यमुना में पर बहु-ईंधन स्रोतों पर जहाजों को संचालित करने का भी प्रस्ताव है, जो इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाता है।
स्थल निरीक्षण के दौरान, श्री मंडाविया के साथ आईडब्ल्यूएआई के अध्यक्ष, सदस्य (तकनीकी), आईडब्ल्यूएआई के मुख्य अभियंता दिल्ली पर्यटन और दिल्ली सरकार के सिंचाई विभाग के अधिकारी भी शामिल थे।
|
नौवहन राज्य मंत्री श्री मनसुख मंडाविया ने आज नई दिल्ली में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की यमुना जल टैक्सी परियोजना के सोनिया विहार स्थित प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया। आईडब्ल्यूएआई ने पर्यटन के उद्देश्य से दिल्ली में यमुना नदी को विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। परियोजना स्थल पर बात करते हुए श्री मंडाविया ने कहा कि यमुना जल टैक्सी परियोजना शहरी परिवहन का एक नया साधन होगा। यह न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि शहर में यातायात की भीड़ को कम करने में भी मदद करेगा। यमुना जल टैक्सी परियोजना की कल्पना एक एकीकृत विकास परियोजना के रूप में की गई है, जिसमें टर्मिनल विकास और जहाजों के संचालन जैसे कई कार्य शामिल हैं। परियोजना की कुल लंबाई सोलह किमी है और इसमें दिल्ली में यमुना नदी के किनारे पांच स्थान शामिल हैं, जिनमें फतेपुर जाट, ट्रोनिका सिटी, जगतपुर, सोनिया विहार और वजीराबाद शामिल हैं। इसे दो चरणों में विकसित करने का प्रस्ताव है - पहला चरणः सोनिया विहार से ट्रोनिका सिटी और दूसरा चरणः वजीराबाद से सोनिया विहार तथा ट्रोनिका सिटी से फतेहपुर जाट तक। परियोजना में यमुना में पर बहु-ईंधन स्रोतों पर जहाजों को संचालित करने का भी प्रस्ताव है, जो इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाता है। स्थल निरीक्षण के दौरान, श्री मंडाविया के साथ आईडब्ल्यूएआई के अध्यक्ष, सदस्य , आईडब्ल्यूएआई के मुख्य अभियंता दिल्ली पर्यटन और दिल्ली सरकार के सिंचाई विभाग के अधिकारी भी शामिल थे।
|
एस्कारियासिस एक बच्चे - आधुनिक चिकित्सा पद्धति में एक बहुत ही आम समस्या है। यह दिलचस्प है कि बच्चों को इस तरह के रोगों के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं। और, ज़ाहिर है, एक परजीवी संक्रमण विशेष और तत्काल उपचार की आवश्यकता है बीमार बच्चों के रूप में न केवल खुद को इसके लक्षणों से ग्रस्त हैं, लेकिन यह भी अपने स्रोत बन जाते हैं।
हाल के अध्ययनों से पता चला है कि वयस्क राउंडवॉर्म की जीवन प्रत्याशा 9 से 12 महीने से लेकर, और अंडे बिछाने पिछले दो से चार से अधिक जगह लेता है। Roundworm मादा अंडे, जो मल में उत्सर्जित कर रहे हैं, मिट्टी में आगे हो रही है का उत्पादन। इधर, उचित परिस्थितियों (गर्मी और नमी) के तहत उनके आगे विकास होता है। घरेलू सामान और लिनेन के माध्यम से - एस्कारियासिस संक्रमण मैला फलों और सब्जियों, कम से कम के उपयोग में होता है। सांख्यिकी संकेत मिलता है कि बच्चे, एस्कारियासिस उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में हैं और अधिक आम है, जबकि कम तापमान या सूखी जलवायु के क्षेत्र में केवल कुछ ही मामलों पंजीकृत।
वास्तव में, इस रोग के लक्षणों लार्वा विकास की अवस्था पर निर्भर करता है। एक बार शरीर में, परजीवी आंतों की दीवारों घुसना, जिगर के लिए और फिर फेफड़ों में चले जाते हैं। आंत तक पहुंच गया जब तक पाचन तंत्र के माध्यम से लार्वा चाल जहां उनके सिरों की परिपक्वता की प्रक्रिया - प्रकाश की वे आसानी से गले, जहां वे माध्यमिक घूस हैं में स्थानांतरित कर रहे हैं। लक्षण के रूप में, ज्यादातर मामलों में, बच्चों उच्च तापमान, कमजोरी, पेट दर्द, अपच, सूखी खाँसी से (फेफड़े के ऊतकों में परजीवी के कार्यकाल के दौरान) पीड़ित हैं। अक्सर रोग जीर्ण हो जाता है। इस मामले में, बच्चों थकान महसूस, कुछ मामलों में, एक विकासात्मक देरी अपनी भूख खो,। कभी-कभी एक बच्चे को सिर दर्द की शिकायत। एस्कारियासिस अक्सर बरामदगी की ओर जाता है, हिस्टीरिया, अनिद्रा के फिट बैठता है।
किसी भी मामले में, रोग केवल (विशेष रूप से छोटी आंत) कि छेद के ऊतकों के साथ जुड़े रहे खतरनाक परिणामों जब उन्हें लार्वा के माध्यम से पारित करने के लिए शरीर की कमी करने के लिए नेतृत्व नहीं कर सकते हैं, लेकिन यह भी। यह जो कुछ भी था, बच्चे सिर्फ चिकित्सा सहायता की जरूरत है।
शुरू करने के लिए, डॉक्टर आवश्यक परीक्षण लिख जाएगा, मल की विशेष प्रयोगशाला परीक्षण में एक रक्त परीक्षण है कि एक परजीवी संक्रमण की उपस्थिति की पुष्टि, साथ ही (कभी कभी यह पेट का कीड़ा अंडे का पता लगाने के लिए संभव है)। कभी कभी, लार्वा expectorated थूक में पाया जा सकता है। इलाज के लिए के रूप में, वहाँ कई उत्पादों आज कि इस तरह के रोगों से छुटकारा पा सकते हैं। आमतौर पर, क्रम में पर्याप्त एकल उपयोग परजीवी के शरीर स्पष्ट करने के लिए।
निवारक उपाय बच्चा व्यक्तिगत स्वच्छता के नियमों के आदी कम करने के लिए - हमेशा की तरह, खाने में फलों और सब्जियों की सफाई से पहले अपने हाथ धो लो। और, बेशक,, बच्चों के शिक्षण संस्थानों (स्कूलों, किंडरगार्टन) में नियमित जांच के बारे में भूल नहीं है के रूप में इस रोग के प्रसार को रोकने के लिए एक ही रास्ता है।
|
एस्कारियासिस एक बच्चे - आधुनिक चिकित्सा पद्धति में एक बहुत ही आम समस्या है। यह दिलचस्प है कि बच्चों को इस तरह के रोगों के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं। और, ज़ाहिर है, एक परजीवी संक्रमण विशेष और तत्काल उपचार की आवश्यकता है बीमार बच्चों के रूप में न केवल खुद को इसके लक्षणों से ग्रस्त हैं, लेकिन यह भी अपने स्रोत बन जाते हैं। हाल के अध्ययनों से पता चला है कि वयस्क राउंडवॉर्म की जीवन प्रत्याशा नौ से बारह महीने से लेकर, और अंडे बिछाने पिछले दो से चार से अधिक जगह लेता है। Roundworm मादा अंडे, जो मल में उत्सर्जित कर रहे हैं, मिट्टी में आगे हो रही है का उत्पादन। इधर, उचित परिस्थितियों के तहत उनके आगे विकास होता है। घरेलू सामान और लिनेन के माध्यम से - एस्कारियासिस संक्रमण मैला फलों और सब्जियों, कम से कम के उपयोग में होता है। सांख्यिकी संकेत मिलता है कि बच्चे, एस्कारियासिस उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में हैं और अधिक आम है, जबकि कम तापमान या सूखी जलवायु के क्षेत्र में केवल कुछ ही मामलों पंजीकृत। वास्तव में, इस रोग के लक्षणों लार्वा विकास की अवस्था पर निर्भर करता है। एक बार शरीर में, परजीवी आंतों की दीवारों घुसना, जिगर के लिए और फिर फेफड़ों में चले जाते हैं। आंत तक पहुंच गया जब तक पाचन तंत्र के माध्यम से लार्वा चाल जहां उनके सिरों की परिपक्वता की प्रक्रिया - प्रकाश की वे आसानी से गले, जहां वे माध्यमिक घूस हैं में स्थानांतरित कर रहे हैं। लक्षण के रूप में, ज्यादातर मामलों में, बच्चों उच्च तापमान, कमजोरी, पेट दर्द, अपच, सूखी खाँसी से पीड़ित हैं। अक्सर रोग जीर्ण हो जाता है। इस मामले में, बच्चों थकान महसूस, कुछ मामलों में, एक विकासात्मक देरी अपनी भूख खो,। कभी-कभी एक बच्चे को सिर दर्द की शिकायत। एस्कारियासिस अक्सर बरामदगी की ओर जाता है, हिस्टीरिया, अनिद्रा के फिट बैठता है। किसी भी मामले में, रोग केवल कि छेद के ऊतकों के साथ जुड़े रहे खतरनाक परिणामों जब उन्हें लार्वा के माध्यम से पारित करने के लिए शरीर की कमी करने के लिए नेतृत्व नहीं कर सकते हैं, लेकिन यह भी। यह जो कुछ भी था, बच्चे सिर्फ चिकित्सा सहायता की जरूरत है। शुरू करने के लिए, डॉक्टर आवश्यक परीक्षण लिख जाएगा, मल की विशेष प्रयोगशाला परीक्षण में एक रक्त परीक्षण है कि एक परजीवी संक्रमण की उपस्थिति की पुष्टि, साथ ही । कभी कभी, लार्वा expectorated थूक में पाया जा सकता है। इलाज के लिए के रूप में, वहाँ कई उत्पादों आज कि इस तरह के रोगों से छुटकारा पा सकते हैं। आमतौर पर, क्रम में पर्याप्त एकल उपयोग परजीवी के शरीर स्पष्ट करने के लिए। निवारक उपाय बच्चा व्यक्तिगत स्वच्छता के नियमों के आदी कम करने के लिए - हमेशा की तरह, खाने में फलों और सब्जियों की सफाई से पहले अपने हाथ धो लो। और, बेशक,, बच्चों के शिक्षण संस्थानों में नियमित जांच के बारे में भूल नहीं है के रूप में इस रोग के प्रसार को रोकने के लिए एक ही रास्ता है।
|
Bhopal News: मध्यप्रदेश के पुलिस मुख्यालय में एक अधिकारी अश्लील हरकत करते पकड़ा गया है। मामला सामने आने के बाद महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया कि अधिकारी उसके साथ छेड़खानी कर रहा था। पुलिस अधिकारी को निलंबित कर दिया गया गया है। वहीं, महिला कर्मचारी को छुट्टी पर भेजा गया है।
|
Bhopal News: मध्यप्रदेश के पुलिस मुख्यालय में एक अधिकारी अश्लील हरकत करते पकड़ा गया है। मामला सामने आने के बाद महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया कि अधिकारी उसके साथ छेड़खानी कर रहा था। पुलिस अधिकारी को निलंबित कर दिया गया गया है। वहीं, महिला कर्मचारी को छुट्टी पर भेजा गया है।
|
Ranchi : शिक्षाविद विष्णु चरण महतो की 36वीं पुण्यतिथि पर मंगलवार को देवेंद्रनाथ महतो लिखित पुस्तक कुरमाली भाषा, साहित्य एवं व्याकरण नामक पुस्तक का लोकार्पण किया गया. विष्णु चरण महतो की तस्वीर पर पुष्प माला अर्पित कर कार्यक्रम शुरू हुआ. मुख्य अतिथि रांची के सांसद संजय सेठ, श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ तपन शांडिल्य, रांची विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ मुकुन्द चन्द्र मेहता को बुके एवं शॉल देकर समानित किया गया.
इससे पहले कुरमी आंदोलन के नेता राजा राम महतो ने कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए कहा कि विष्णु चरण महतो के अधूरे काम को पूरा करने की हर कोशिश की जाएगी. 1920 में जन्मे विष्णु चरण महतो ने स्कूली शिक्षा के समय से ही सामाजिक व राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया था. उन्होंने समाज में शिक्षा का प्रचार- प्रसार किया. कहते थे कि मांड़- भात खाओ, लेकिन बेटा- बेटी को जरूर पढ़ाओ. संविधान की धाराएं और अनुच्छेद जुबानी याद रखते थे. रामगढ़ कुर्मी महासभा के दौरान प्रकाशित स्मारिका के संपादक रहे. कुरमाली भाषा में उनके शोध आज भी प्रासंगिक हैं. इस मौके पर डॉ संतोष कुमारी जैन, डॉ मंजय प्रामाणिक, भूतनाथ प्रामाणिक, सोहन मुखिया भी मौजूद थे.
|
Ranchi : शिक्षाविद विष्णु चरण महतो की छत्तीसवीं पुण्यतिथि पर मंगलवार को देवेंद्रनाथ महतो लिखित पुस्तक कुरमाली भाषा, साहित्य एवं व्याकरण नामक पुस्तक का लोकार्पण किया गया. विष्णु चरण महतो की तस्वीर पर पुष्प माला अर्पित कर कार्यक्रम शुरू हुआ. मुख्य अतिथि रांची के सांसद संजय सेठ, श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ तपन शांडिल्य, रांची विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ मुकुन्द चन्द्र मेहता को बुके एवं शॉल देकर समानित किया गया. इससे पहले कुरमी आंदोलन के नेता राजा राम महतो ने कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए कहा कि विष्णु चरण महतो के अधूरे काम को पूरा करने की हर कोशिश की जाएगी. एक हज़ार नौ सौ बीस में जन्मे विष्णु चरण महतो ने स्कूली शिक्षा के समय से ही सामाजिक व राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया था. उन्होंने समाज में शिक्षा का प्रचार- प्रसार किया. कहते थे कि मांड़- भात खाओ, लेकिन बेटा- बेटी को जरूर पढ़ाओ. संविधान की धाराएं और अनुच्छेद जुबानी याद रखते थे. रामगढ़ कुर्मी महासभा के दौरान प्रकाशित स्मारिका के संपादक रहे. कुरमाली भाषा में उनके शोध आज भी प्रासंगिक हैं. इस मौके पर डॉ संतोष कुमारी जैन, डॉ मंजय प्रामाणिक, भूतनाथ प्रामाणिक, सोहन मुखिया भी मौजूद थे.
|
इस निवेदन के साथ कि सिर्फ अपना विचार रखने तक ही इस मर्यादा को नहीं समझेंगे, अपना विचार रखने के बाद दूसरों के विचार सुनने, उसकी भी इज्जत, उसका भी आदर करने का धैर्य और सब्र रखना होगा । इसलिए इस परिस्थिति में जिन दलों के नेता अपने विचार रखना चाहते हैं कि सदन की मर्यादा किस ढंग से हमलोग अक्षुण्ण रखें जिससे कि जनता का विश्वास बरकरार रखें । अगर हमलोग आपस में उलझ कर सदन की मर्यादा ही नहीं बचायेंगे तब तो फिर जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ होगा । जनता सब कुछ देख रही है कि हमलोग क्या कर रहे हैं और आप सभी इतने जिम्मेवार हैं कि मुझे पूरी उम्मीद है, पूरा भरोसा है, कि आप सब मिलकर सदन का माहौल, सदन की परिस्थिति ऐसी बनायेंगे कि हम बिहार की जनता के हित के मुद्दों पर विमर्श कर सकेंगे, उनके सम्यक समाधान की दिशा में अग्रसर हो सकेंगे । इसलिए इस परिप्रेक्ष्य में सभी दल या किसी दल के नेता अगर कुछ कहना चाहते हैं तो मेरा अनुरोध होगा कि अपनी बात कह करके दूसरों की बात सुनेंगे और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करेंगे ।
श्री प्रेम कुमार, नेता विरोधी दल : अध्यक्ष महोदय, 28 तारीख को सदन जब चल रहा था तो हमलोग पूरा सहयोग किया और क्वेश्चन आवर, ध्यानाकर्षण, शून्यकाल और जो सरकारी काम थे, हमलोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से और हम इसके पक्ष में है कि सदन चले, सदन मर्यादित हो, लेकिन कल की घटना महोदय जो घटी है और उस घटना में साफ दिखा है कि पहली बार सत्ताधारी दल के जो लोग हैं, वेल में आने का उन्होंने काम किया और जिस तरह वहां पर आ करके टेबुल पर चढ़ करके और जिस तरह से हुड़दंगी हुआ । अध्यक्ष महोदय, मैं लम्बे समय से सदस्य रहा हूँ और मैं देखा हूँ कि ऐसी घटना पहली बार घटी है और जिस तरह से आर0जे0डी0 और कांग्रेस के लोगों ने माननीय प्रधानमंत्री के खिलाफ भद्दी-भद्दी टिप्पणियां की, गाली दे रहे थे लोग, क्या-क्या कह रहे थे, वह कहां नहीं जा सकता और हमलोग खड़े होकर अपनी बातों को रखना चाहते थे और जिस तरह से लोग दौड़ते हुए और मुझे आश्चर्य हुआ कि जिनकी सरकार है, जो लोग सत्ता में हैं, उनके माननीय सदस्य जिस तरह से यहां पर आये और जिस तरह की हरकतें जाकर हुई, अमर्यादित आचरण हुआ, वह अशोभनीय हुआ और असंसदीय भाषा का जिस तरह से माननीय सदस्यों ने इस्तेमाल किया, वह काफी दुःखद रहा है और हम चाहते हैं कि सदन चले, सदन की गरिमा बनी रहे और उसका उदाहरण दिया है कि 28 तारीख को किसी तरह की ऐसी बात नहीं हुई लेकिन जिस तरह से टेबुल पर चढ़ करके, रिपोर्टर टेबुल पर चढ़ करके उसपर माननीय सदस्य श्री रामदेव बाबू, माननीय सदस्य फातमी जी, माननीय सदस्य और कई लोगों ने झण्डा लेकर के, पार्टी का झण्डा लेकर जिस तरह का आचरण किया महोदय, इससे विधान सभा और लोकतंत्र शर्मसार हुआ है । जो सत्ता में बैठे हुए लोग हैं और साथ ही साथ महोदय, जब विधान सभा आपने थोड़े समय के
लिए स्थगित किया तो जिस तरह हमारे माननीय विधायिका गायत्री देवी जी के साथ आर० जे०डी० के श्री भोला यादव जी ने धमकी दिया, अभद्र व्यवहार करने का काम किया। इसलिए जो हालात पैदा हुए हैं, जो परिस्थितियों का निर्माण हुआ है और तब महोदय, आपसे आग्रह करने के लिए आपके दरवाजे पर गये, हमलोग शांतिपूर्ण तरीके से मांग कर रहे थे और आपने हमलोगों को बुलाया और हमलोग गये भी वहां पर और अपनी बातों को रखने का काम किया । लेकिन वहां पर भी आर० जे०डी०, कांग्रेस के लोग जिस तरह से महोदय आ करके, जिस तरह से हंगामा करने का काम किया और जो परिस्थिति उत्पन्न किया, उससे झगड़ा निश्चित था लेकिन एन०डी०ए० के लोगों ने संयम बरतने का काम किया और शांति बनी रही, नहीं तो झगड़ा निश्चित था, जिसकी आशंका आपने भी की थी महोदय । साथ ही साथ हम कहना चाहते हैं कि जो घटनायें कल घटी है, वह काफी दुःखद है और इस बिहार विधान सभा के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी घटना घटी है और झगड़ा होते-होते बचा है । इसलिए हमलोगों का स्पष्ट कहना है, हमलोग आपसे आग्रह करना चाहते हैं, आपसे निवेदन है, आपसे प्रार्थना है कि आप सदन चलाये लेकिन जिन माननीय सदस्यों ने रामदेव यादव जी हो, रामदेव राय जी हों, भोला यादव जी हों, शकील अहमद जी हों, फातमी जी हों, अमीत जी हों, समता देवी जी हों और ऐसे तमाम लोगों ने जिस तरह का आचरण किया महोदय, हम चाहेंगे कि आसन ऐसे माननीय सदस्यों को निलंबित करे ताकि भविष्य में ये लोग इस तरह का आचरण लोग नहीं करे और इस तरह की घटना की पुनरावृति इस विधान सभा में नहीं हो । आप भी चाहते हैं और साथ ही साथ एक निन्दा प्रस्ताव पारित हो कि सत्ताधारी लोग जो इस तरह से वेल में आकर के आचरण किया और साथ ही साथ माननीय मंत्री, जिनके बारे में हमारे विधायकों ने कहा है कि ललन बाबू ने प्रभोक किया, उकसाया लोगों को कि आप हंगामा करो जाकर के तो महोदय, यह लोकतंत्र में महोदय क्या हो रहा है ? जब मंत्री ही सत्ता में बैठे लोग माननीय मंत्री हैं और सत्ताधारी दल के लोग अगर इस तरह की हरकत करेंगे तो इस तरह से विधान सभा कैसे चलेगा, कौन इसके लिए जिम्मेवार है ? आपसे आग्रह है महोदय, ऐसी बातें जो हुई है, आप कार्रवाई करें और सदन चलाये, हम आपके साथ हैं ।
ठीक है । माननीय सदानन्द बाबू । आपलोग बैठिए, लीडर लोग बोल रहे हैं न । आप ही के दल के नेता लोग बोल रहे हैं ।
श्री सदानन्द सिंह : अध्यक्ष महादेय, कल जिस तरह की घटना घटी, उसके लिए हमें भी खेद है और हमारे विधायक दल के सभी साथियों को खेद है लेकिन यह परिस्थिति कैसे और क्यों हुई इसपर विचार करने की आवश्यकता है । क्या यह सत्य नहीं है कि हमारे नेतृत्व के खिलाफ अनावश्यक ढंग से टिप्पणियां की गई, किस तरह से अशोभनीय बातें की गई और सदन में कांग्रेस विधान मंडल के लोग जितने सदस्यगण हैं, काफी अनुशासित ढंग
|
इस निवेदन के साथ कि सिर्फ अपना विचार रखने तक ही इस मर्यादा को नहीं समझेंगे, अपना विचार रखने के बाद दूसरों के विचार सुनने, उसकी भी इज्जत, उसका भी आदर करने का धैर्य और सब्र रखना होगा । इसलिए इस परिस्थिति में जिन दलों के नेता अपने विचार रखना चाहते हैं कि सदन की मर्यादा किस ढंग से हमलोग अक्षुण्ण रखें जिससे कि जनता का विश्वास बरकरार रखें । अगर हमलोग आपस में उलझ कर सदन की मर्यादा ही नहीं बचायेंगे तब तो फिर जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ होगा । जनता सब कुछ देख रही है कि हमलोग क्या कर रहे हैं और आप सभी इतने जिम्मेवार हैं कि मुझे पूरी उम्मीद है, पूरा भरोसा है, कि आप सब मिलकर सदन का माहौल, सदन की परिस्थिति ऐसी बनायेंगे कि हम बिहार की जनता के हित के मुद्दों पर विमर्श कर सकेंगे, उनके सम्यक समाधान की दिशा में अग्रसर हो सकेंगे । इसलिए इस परिप्रेक्ष्य में सभी दल या किसी दल के नेता अगर कुछ कहना चाहते हैं तो मेरा अनुरोध होगा कि अपनी बात कह करके दूसरों की बात सुनेंगे और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करेंगे । श्री प्रेम कुमार, नेता विरोधी दल : अध्यक्ष महोदय, अट्ठाईस तारीख को सदन जब चल रहा था तो हमलोग पूरा सहयोग किया और क्वेश्चन आवर, ध्यानाकर्षण, शून्यकाल और जो सरकारी काम थे, हमलोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से और हम इसके पक्ष में है कि सदन चले, सदन मर्यादित हो, लेकिन कल की घटना महोदय जो घटी है और उस घटना में साफ दिखा है कि पहली बार सत्ताधारी दल के जो लोग हैं, वेल में आने का उन्होंने काम किया और जिस तरह वहां पर आ करके टेबुल पर चढ़ करके और जिस तरह से हुड़दंगी हुआ । अध्यक्ष महोदय, मैं लम्बे समय से सदस्य रहा हूँ और मैं देखा हूँ कि ऐसी घटना पहली बार घटी है और जिस तरह से आरशून्यजेशून्यडीशून्य और कांग्रेस के लोगों ने माननीय प्रधानमंत्री के खिलाफ भद्दी-भद्दी टिप्पणियां की, गाली दे रहे थे लोग, क्या-क्या कह रहे थे, वह कहां नहीं जा सकता और हमलोग खड़े होकर अपनी बातों को रखना चाहते थे और जिस तरह से लोग दौड़ते हुए और मुझे आश्चर्य हुआ कि जिनकी सरकार है, जो लोग सत्ता में हैं, उनके माननीय सदस्य जिस तरह से यहां पर आये और जिस तरह की हरकतें जाकर हुई, अमर्यादित आचरण हुआ, वह अशोभनीय हुआ और असंसदीय भाषा का जिस तरह से माननीय सदस्यों ने इस्तेमाल किया, वह काफी दुःखद रहा है और हम चाहते हैं कि सदन चले, सदन की गरिमा बनी रहे और उसका उदाहरण दिया है कि अट्ठाईस तारीख को किसी तरह की ऐसी बात नहीं हुई लेकिन जिस तरह से टेबुल पर चढ़ करके, रिपोर्टर टेबुल पर चढ़ करके उसपर माननीय सदस्य श्री रामदेव बाबू, माननीय सदस्य फातमी जी, माननीय सदस्य और कई लोगों ने झण्डा लेकर के, पार्टी का झण्डा लेकर जिस तरह का आचरण किया महोदय, इससे विधान सभा और लोकतंत्र शर्मसार हुआ है । जो सत्ता में बैठे हुए लोग हैं और साथ ही साथ महोदय, जब विधान सभा आपने थोड़े समय के लिए स्थगित किया तो जिस तरह हमारे माननीय विधायिका गायत्री देवी जी के साथ आरशून्य जेशून्यडीशून्य के श्री भोला यादव जी ने धमकी दिया, अभद्र व्यवहार करने का काम किया। इसलिए जो हालात पैदा हुए हैं, जो परिस्थितियों का निर्माण हुआ है और तब महोदय, आपसे आग्रह करने के लिए आपके दरवाजे पर गये, हमलोग शांतिपूर्ण तरीके से मांग कर रहे थे और आपने हमलोगों को बुलाया और हमलोग गये भी वहां पर और अपनी बातों को रखने का काम किया । लेकिन वहां पर भी आरशून्य जेशून्यडीशून्य, कांग्रेस के लोग जिस तरह से महोदय आ करके, जिस तरह से हंगामा करने का काम किया और जो परिस्थिति उत्पन्न किया, उससे झगड़ा निश्चित था लेकिन एनशून्यडीशून्यएशून्य के लोगों ने संयम बरतने का काम किया और शांति बनी रही, नहीं तो झगड़ा निश्चित था, जिसकी आशंका आपने भी की थी महोदय । साथ ही साथ हम कहना चाहते हैं कि जो घटनायें कल घटी है, वह काफी दुःखद है और इस बिहार विधान सभा के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी घटना घटी है और झगड़ा होते-होते बचा है । इसलिए हमलोगों का स्पष्ट कहना है, हमलोग आपसे आग्रह करना चाहते हैं, आपसे निवेदन है, आपसे प्रार्थना है कि आप सदन चलाये लेकिन जिन माननीय सदस्यों ने रामदेव यादव जी हो, रामदेव राय जी हों, भोला यादव जी हों, शकील अहमद जी हों, फातमी जी हों, अमीत जी हों, समता देवी जी हों और ऐसे तमाम लोगों ने जिस तरह का आचरण किया महोदय, हम चाहेंगे कि आसन ऐसे माननीय सदस्यों को निलंबित करे ताकि भविष्य में ये लोग इस तरह का आचरण लोग नहीं करे और इस तरह की घटना की पुनरावृति इस विधान सभा में नहीं हो । आप भी चाहते हैं और साथ ही साथ एक निन्दा प्रस्ताव पारित हो कि सत्ताधारी लोग जो इस तरह से वेल में आकर के आचरण किया और साथ ही साथ माननीय मंत्री, जिनके बारे में हमारे विधायकों ने कहा है कि ललन बाबू ने प्रभोक किया, उकसाया लोगों को कि आप हंगामा करो जाकर के तो महोदय, यह लोकतंत्र में महोदय क्या हो रहा है ? जब मंत्री ही सत्ता में बैठे लोग माननीय मंत्री हैं और सत्ताधारी दल के लोग अगर इस तरह की हरकत करेंगे तो इस तरह से विधान सभा कैसे चलेगा, कौन इसके लिए जिम्मेवार है ? आपसे आग्रह है महोदय, ऐसी बातें जो हुई है, आप कार्रवाई करें और सदन चलाये, हम आपके साथ हैं । ठीक है । माननीय सदानन्द बाबू । आपलोग बैठिए, लीडर लोग बोल रहे हैं न । आप ही के दल के नेता लोग बोल रहे हैं । श्री सदानन्द सिंह : अध्यक्ष महादेय, कल जिस तरह की घटना घटी, उसके लिए हमें भी खेद है और हमारे विधायक दल के सभी साथियों को खेद है लेकिन यह परिस्थिति कैसे और क्यों हुई इसपर विचार करने की आवश्यकता है । क्या यह सत्य नहीं है कि हमारे नेतृत्व के खिलाफ अनावश्यक ढंग से टिप्पणियां की गई, किस तरह से अशोभनीय बातें की गई और सदन में कांग्रेस विधान मंडल के लोग जितने सदस्यगण हैं, काफी अनुशासित ढंग
|
Gold Price Update: इंटरनेशनल मार्केट में बहुमूल्य धातुओं (Precious metals in the international market) की कीमतों में आजकल लगातार उतार- चढ़ाव देखे जा रहे हैं. जिसके चलते राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज सोने के भाव (Aaj Ka Sone Ka Bhav) में 110 रुपये की तेजी देखी गई. गुड्स रिटर्न से मिली जानकारी के मुताबिक आज आपको 22 कैरट वाले सोने के लिए (22 Carat Gold Price) 55,950 रुपए प्रति दस ग्राम जबकि 24 कैरट वाले सोने के लिए (24 Carat Gold Price) 61,040 रुपए प्रति दस ग्राम देने होंगे.
वहीं, ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच आज चांदी के भाव में गिरावट देखी गई है. गुड्स रिटर्न से मिली जानकारी के मुताबिक आज आपको 1 किलो चांदी (Aaj Ka Chandi Ka Bhav) खरीदने के लिए 76,500 रुपए चुकाने होंगे. बता दें कि कल चांदी का भाव ( Silver Price in Delhi) 76,700 रुपये था यानि की आज सिल्वर के रेट में 200 रुपये की गिरावट आई है. जानकारों का मानना है कि चांदी जल्द ही 80 हजार के स्कर को पार कर सकती है.
|
Gold Price Update: इंटरनेशनल मार्केट में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में आजकल लगातार उतार- चढ़ाव देखे जा रहे हैं. जिसके चलते राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज सोने के भाव में एक सौ दस रुपयापये की तेजी देखी गई. गुड्स रिटर्न से मिली जानकारी के मुताबिक आज आपको बाईस कैरट वाले सोने के लिए पचपन,नौ सौ पचास रुपयापए प्रति दस ग्राम जबकि चौबीस कैरट वाले सोने के लिए इकसठ,चालीस रुपयापए प्रति दस ग्राम देने होंगे. वहीं, ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच आज चांदी के भाव में गिरावट देखी गई है. गुड्स रिटर्न से मिली जानकारी के मुताबिक आज आपको एक किलो चांदी खरीदने के लिए छिहत्तर,पाँच सौ रुपयापए चुकाने होंगे. बता दें कि कल चांदी का भाव छिहत्तर,सात सौ रुपयापये था यानि की आज सिल्वर के रेट में दो सौ रुपयापये की गिरावट आई है. जानकारों का मानना है कि चांदी जल्द ही अस्सी हजार के स्कर को पार कर सकती है.
|
गुमलाः सोमवार को उपायुक्त गुमला सुशांत गौरव ने बाजार समिति में चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में पायी गयी कमियों को दूर करने हेतु उपायुक्त ने आवश्यक दिशा निर्देश दिये।
बाजार समिति के निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने सभी पुरानी संरचनाओं को आवश्यकता के अनुसार तोड़ने एवं मरम्मती करवाने का निर्देश दिया। 5 जनवरी से पूर्व पुराने भवनों की मरम्मती के कार्य हेतु टेंडर प्रक्रिया आरंभ करने का निर्देश दिया गया।
उपायुक्त ने बाजार समिति के बाउंड्री लाइन की पुनः मापी करते हुए बाउंड्री निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूर्ण करने का निर्देश दिया। बाउंड्री से लगे हुए कुएं एवं मंदिर को देखते हुए उपायुक्त ने कहा कि ये आम नागरिकों की संपत्ति है उसे किसी प्रकार के नुकसान पहुंचाए बिना इनको छोड़ते हुये बाउंड्री करने एवं उसके समीप किनारे में लगभग 6 फीट भूमि रास्ते के लिए छोड़ने का निर्देश दिया।
इस दौरान उपायुक्त ने बाजार समिति में श्रम सम्मान केंद्र का निर्माण करने का निर्देश दिया। श्रमिकों के रात को ठहरने की व्यवस्था एवं अन्य प्राथमिक सुविधा को देखते हुए केंद्र का निर्माण करने का निर्देश दिया।
बाजार समिति के निरीक्षण के क्रम में पीसीसी पथ निर्माण कार्य , धान अधिप्राप्ति हेतु गोडाउन के मरम्मती कार्य , रागी प्रोसेसिंग मशीन एवं केंद्र का भी निरीक्षण करते हुए आवश्यक बदलाव के लिए उपायुक्त ने दिशा निर्देश दिया।
उपायुक्त ने कहा कि बाजार समिति में हर प्रकार के लोग सुरक्षित रूप से अपना रोजगार कर सकें , इसके लिए हर संभव प्राथमिक सुविधा बाजार समिति में उपलब्ध हो इसका ध्यान रखा जाये। इस दौरान जिले के सभी संबंधित पदाधिकारी मौजूद थे।
|
गुमलाः सोमवार को उपायुक्त गुमला सुशांत गौरव ने बाजार समिति में चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में पायी गयी कमियों को दूर करने हेतु उपायुक्त ने आवश्यक दिशा निर्देश दिये। बाजार समिति के निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने सभी पुरानी संरचनाओं को आवश्यकता के अनुसार तोड़ने एवं मरम्मती करवाने का निर्देश दिया। पाँच जनवरी से पूर्व पुराने भवनों की मरम्मती के कार्य हेतु टेंडर प्रक्रिया आरंभ करने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने बाजार समिति के बाउंड्री लाइन की पुनः मापी करते हुए बाउंड्री निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूर्ण करने का निर्देश दिया। बाउंड्री से लगे हुए कुएं एवं मंदिर को देखते हुए उपायुक्त ने कहा कि ये आम नागरिकों की संपत्ति है उसे किसी प्रकार के नुकसान पहुंचाए बिना इनको छोड़ते हुये बाउंड्री करने एवं उसके समीप किनारे में लगभग छः फीट भूमि रास्ते के लिए छोड़ने का निर्देश दिया। इस दौरान उपायुक्त ने बाजार समिति में श्रम सम्मान केंद्र का निर्माण करने का निर्देश दिया। श्रमिकों के रात को ठहरने की व्यवस्था एवं अन्य प्राथमिक सुविधा को देखते हुए केंद्र का निर्माण करने का निर्देश दिया। बाजार समिति के निरीक्षण के क्रम में पीसीसी पथ निर्माण कार्य , धान अधिप्राप्ति हेतु गोडाउन के मरम्मती कार्य , रागी प्रोसेसिंग मशीन एवं केंद्र का भी निरीक्षण करते हुए आवश्यक बदलाव के लिए उपायुक्त ने दिशा निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि बाजार समिति में हर प्रकार के लोग सुरक्षित रूप से अपना रोजगार कर सकें , इसके लिए हर संभव प्राथमिक सुविधा बाजार समिति में उपलब्ध हो इसका ध्यान रखा जाये। इस दौरान जिले के सभी संबंधित पदाधिकारी मौजूद थे।
|
सत्यानन्द अस्पताल के डॉक्टर गौरव मिश्रा ने बताया कि हरदोई के थाना बेहटा गोकुल के ग्राम धुसेपुर के निवासी यासीन ने प्रसव पीड़ा होने पर अपनी गर्भवती पत्नी शाहीन (25) को उनके अस्पताल में भर्ती कराया था। जांच में जुड़वा बच्चे होने की पुष्टि हुई थी। उन्होंने बताया कि सोमवार को प्रसूता ने जुड़वा शीशु को जन्म दिया है जो कि पेट से जुड़े हुए है। शीशु के दो सिर, चार हांथ और दो पैर है।
डॉक्टर मिश्रा ने बताया कि अमूमन इस तरह के मामले बहुत ही कम देखने को मिलते हैं। उन्होंने बताया कि बच्चे के स्वास्थ्य के सम्बंध में उच्च स्तर के डॉक्टरों से परामर्श किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चूंकि परिवार बहुत ही गरीब है इसलिए महिला और उसके बच्चे का इलाज अस्पताल की ओर से निशुल्क किया जा रहा है।
|
सत्यानन्द अस्पताल के डॉक्टर गौरव मिश्रा ने बताया कि हरदोई के थाना बेहटा गोकुल के ग्राम धुसेपुर के निवासी यासीन ने प्रसव पीड़ा होने पर अपनी गर्भवती पत्नी शाहीन को उनके अस्पताल में भर्ती कराया था। जांच में जुड़वा बच्चे होने की पुष्टि हुई थी। उन्होंने बताया कि सोमवार को प्रसूता ने जुड़वा शीशु को जन्म दिया है जो कि पेट से जुड़े हुए है। शीशु के दो सिर, चार हांथ और दो पैर है। डॉक्टर मिश्रा ने बताया कि अमूमन इस तरह के मामले बहुत ही कम देखने को मिलते हैं। उन्होंने बताया कि बच्चे के स्वास्थ्य के सम्बंध में उच्च स्तर के डॉक्टरों से परामर्श किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चूंकि परिवार बहुत ही गरीब है इसलिए महिला और उसके बच्चे का इलाज अस्पताल की ओर से निशुल्क किया जा रहा है।
|
फेसबुक पर एक युवक से हुए प्यार में दिल्ली की 17 वर्षीय किशोरी मंगलवार को ट्रेन से कानपुर आ गई। उसके प्रेमी ने उसे वेलेेेंटाइन डे (14 फरवरी) से पहले मिलने के लिए यहां बुलाया था।
सेंट्रल स्टेशन पर वह बहुत देर तक प्रेमी का इंतजार करती रही, लेकिन वह नहीं आया। वह स्टेशन पर भटकती रही।
किशोरी ने जीआरपी को बताया कि फेसबुक पर उसकी दोस्ती कन्नौज के सचिन नाम के लड़के से हुई थी। काफी दिन चैटिंग होती रही। इसके बाद दोस्ती प्यार में बदल गई।
|
फेसबुक पर एक युवक से हुए प्यार में दिल्ली की सत्रह वर्षीय किशोरी मंगलवार को ट्रेन से कानपुर आ गई। उसके प्रेमी ने उसे वेलेेेंटाइन डे से पहले मिलने के लिए यहां बुलाया था। सेंट्रल स्टेशन पर वह बहुत देर तक प्रेमी का इंतजार करती रही, लेकिन वह नहीं आया। वह स्टेशन पर भटकती रही। किशोरी ने जीआरपी को बताया कि फेसबुक पर उसकी दोस्ती कन्नौज के सचिन नाम के लड़के से हुई थी। काफी दिन चैटिंग होती रही। इसके बाद दोस्ती प्यार में बदल गई।
|
मनोविज्ञान क्या है?
और अधिक जटिल और बहुआयामी जीवन, अधिक ब्याज हम अपने भीतर की दुनिया को दिखाने के लिए, समझने के लिए और व्यक्तित्व विकास और निर्माण और पर्यावरण के साथ बातचीत करने के तरीकों के सभी इसकी गहराई, पैटर्न, तो हमारे जीवन और अधिक सामंजस्यपूर्ण और सफल है कि पता करने के लिए कोशिश कर रहा। शायद यही वजह है कि के रूप में मनोविज्ञान में रुचि आदमी का विज्ञान, अपने व्यक्तिगत विशेषताओं, न केवल कम नहीं है, लेकिन इसके विपरीत, लगातार बढ़ रही है। मनोविज्ञान क्या है? विज्ञान किस तरह मानव आत्मा के रहस्य को सुलझाने की कोशिश कर रहा है?
मनोविज्ञान की पढ़ाई, कुछ लोगों को तो खुद को और दूसरों के बारे में अधिक जानने की कोशिश, "आत्मा के चिकित्सकों" की भूमिका पर रखा, तरीके और मानव जोखिम की तकनीक में महारत हासिल करने, उसे अपने जीवन की समस्याओं को सुलझाने में मदद करने की कोशिश कर। लेकिन इन चुनौतियों का सामना करने के लिए एक गहरा ज्ञान, व्यवहार के तंत्र, ज्ञान और इसके विकास और सुधार के लिए प्रोत्साहन के भीतर की दुनिया के वैज्ञानिक तरीकों के विकास के निरंतर और व्यवस्थित अध्ययन की आवश्यकता है। मनोविज्ञान क्या है? यह एक व्यापक सैद्धांतिक आधार, प्रयोगात्मक अध्ययन और अनुभवजन्य टिप्पणियों, जो वर्णित किया गया है और संक्षेप द्वारा विभिन्न स्कूलों और प्रवृत्तियों के वैज्ञानिकों-मनोवैज्ञानिकों के कई वर्षों से जमा है। मनोविज्ञान - यह व्यावहारिक कामः परामर्श कक्ष, सामाजिक बौद्धिक और भावनात्मक स्तर की समस्याओं के साथ लोगों के लिए उनकी सलाह मदद करने के लिए कोशिश कर रहा में एक मनोवैज्ञानिक, व्यवसायी। इसके अलावा, मनोवैज्ञानिकों चिकित्सकों कंपनियों और स्कूलों है कि श्रम, शिक्षा और के संगठन में शामिल कर रहे में तेजी से मौजूद हैं प्रशासनिक गतिविधि। इन विशेषज्ञों संचित और सामान्यीकृत सैद्धांतिक ज्ञान का उपयोग करें, व्यवहार में और उनके कमजोरियों के लोगों के साथ निकट सहयोग में पहचान।
सवाल है, प्रायोगिक मनोविज्ञान है क्या जवाब देने में, आप की पहचान करने और इस विज्ञान के सभी आवेदन क्षेत्रों विवरण देना होगा।
एक नैदानिक मनोवैज्ञानिक विभिन्न भय, neuroticism, चिंता का सामना लोगों को, कि उन्हें सामान्य रोजमर्रा की जिंदगी से रोकने के साथ काम करना। साक्षात्कार और मनोवैज्ञानिक तकनीक की मदद से विशेषज्ञ आदेश सही चिकित्सा का चयन करने में इन समस्याओं की पहचान करता है,।
मनोवैज्ञानिक-सलाहकार का मुख्य कार्य - पारस्परिक संबंधों, परिवार, वर्ग के लोगों को मदद करने के लिए, संघर्ष की स्थितियों में। इन पेशेवरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में काम संकट केन्द्रों में जो लोग अपने कठिन जीवन स्थितियों में सहायता कर सके। सलाहकार अत्यधिक कानूनी क्षेत्र में मांग में हैं,, कानूनी पेशे में, अपराधों को सुलझाने में मदद करने के लिए जब कैदियों के साथ काम कर।
सैन्य मनोविज्ञान तरीकों की कमान में सुधार पर केंद्रित है, समूह संबंधों को मजबूत बनाने। एक खास जगह से संबंधित अध्ययनों के कब्जे में है के बाद अभिघातजन्य तनाव सिंड्रोम व्यक्तियों युद्ध में भाग लेने का गंभीर मनोवैज्ञानिक राज्य -।
खेल मनोविज्ञान एथलीटों के लिए सिफारिशें उन्हें खेल में उच्च प्रदर्शन प्राप्त करने में मदद करने के लिए विकसित कर रहा है। यह ज्ञात है कि न केवल एक अच्छा शारीरिक तैयारी, लेकिन यह भी एक निश्चित मानसिक दृष्टिकोण खिलाड़ी जीतने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
प्रायोगिक मनोविज्ञान का एक अन्य महत्वपूर्ण शाखा विज्ञापन के मनोविज्ञान है। इसका मुख्य कार्य - मदद करने के लिए विज्ञापन विशेषज्ञों संवर्धन और माल और सेवाओं के बाजार में बिक्री के लिए सबसे प्रभावी तंत्र बनाने के लिए जहां एक महत्वपूर्ण भूमिका रंग, आकार और लगता है की धारणा के मनोविज्ञान द्वारा खेला जाता है।
मनोविज्ञान के आवेदन क्षेत्रों, वहाँ कई हैं। गतिशील विकासशील समाज, व्यापक मनोवैज्ञानिक गतिविधि के क्षेत्र। लेकिन आवेदन के अलावा, वहां अभी भी विज्ञान के सैद्धांतिक क्षेत्रों की एक महत्वपूर्ण संख्या, जिनमें से प्रत्येक की खोज और व्यक्तिगत और समाज, अपने सैद्धांतिक आधार और एक मॉडल पर अपनी विशेष नज़र के अध्ययन के लिए अपने स्वयं के तरीकों है कर रहे हैं मानव व्यवहार का। व्यवहारवाद, मनोविश्लेषण, गेस्टाल्ट मनोविज्ञान, संज्ञानात्मक, अस्तित्व और - उनमें से सबसे बुनियादी मानवीय मनोविज्ञान , आदि तो, मनोविज्ञान क्या है? इस सवाल का जवाब दें, काफी मुश्किल है क्योंकि सरल परिभाषा के लिए खुद को समझने की कोशिश कर लोगों की गतिविधियों का एक बहुत व्यापक परत और हमारे आसपास की दुनिया है।
|
मनोविज्ञान क्या है? और अधिक जटिल और बहुआयामी जीवन, अधिक ब्याज हम अपने भीतर की दुनिया को दिखाने के लिए, समझने के लिए और व्यक्तित्व विकास और निर्माण और पर्यावरण के साथ बातचीत करने के तरीकों के सभी इसकी गहराई, पैटर्न, तो हमारे जीवन और अधिक सामंजस्यपूर्ण और सफल है कि पता करने के लिए कोशिश कर रहा। शायद यही वजह है कि के रूप में मनोविज्ञान में रुचि आदमी का विज्ञान, अपने व्यक्तिगत विशेषताओं, न केवल कम नहीं है, लेकिन इसके विपरीत, लगातार बढ़ रही है। मनोविज्ञान क्या है? विज्ञान किस तरह मानव आत्मा के रहस्य को सुलझाने की कोशिश कर रहा है? मनोविज्ञान की पढ़ाई, कुछ लोगों को तो खुद को और दूसरों के बारे में अधिक जानने की कोशिश, "आत्मा के चिकित्सकों" की भूमिका पर रखा, तरीके और मानव जोखिम की तकनीक में महारत हासिल करने, उसे अपने जीवन की समस्याओं को सुलझाने में मदद करने की कोशिश कर। लेकिन इन चुनौतियों का सामना करने के लिए एक गहरा ज्ञान, व्यवहार के तंत्र, ज्ञान और इसके विकास और सुधार के लिए प्रोत्साहन के भीतर की दुनिया के वैज्ञानिक तरीकों के विकास के निरंतर और व्यवस्थित अध्ययन की आवश्यकता है। मनोविज्ञान क्या है? यह एक व्यापक सैद्धांतिक आधार, प्रयोगात्मक अध्ययन और अनुभवजन्य टिप्पणियों, जो वर्णित किया गया है और संक्षेप द्वारा विभिन्न स्कूलों और प्रवृत्तियों के वैज्ञानिकों-मनोवैज्ञानिकों के कई वर्षों से जमा है। मनोविज्ञान - यह व्यावहारिक कामः परामर्श कक्ष, सामाजिक बौद्धिक और भावनात्मक स्तर की समस्याओं के साथ लोगों के लिए उनकी सलाह मदद करने के लिए कोशिश कर रहा में एक मनोवैज्ञानिक, व्यवसायी। इसके अलावा, मनोवैज्ञानिकों चिकित्सकों कंपनियों और स्कूलों है कि श्रम, शिक्षा और के संगठन में शामिल कर रहे में तेजी से मौजूद हैं प्रशासनिक गतिविधि। इन विशेषज्ञों संचित और सामान्यीकृत सैद्धांतिक ज्ञान का उपयोग करें, व्यवहार में और उनके कमजोरियों के लोगों के साथ निकट सहयोग में पहचान। सवाल है, प्रायोगिक मनोविज्ञान है क्या जवाब देने में, आप की पहचान करने और इस विज्ञान के सभी आवेदन क्षेत्रों विवरण देना होगा। एक नैदानिक मनोवैज्ञानिक विभिन्न भय, neuroticism, चिंता का सामना लोगों को, कि उन्हें सामान्य रोजमर्रा की जिंदगी से रोकने के साथ काम करना। साक्षात्कार और मनोवैज्ञानिक तकनीक की मदद से विशेषज्ञ आदेश सही चिकित्सा का चयन करने में इन समस्याओं की पहचान करता है,। मनोवैज्ञानिक-सलाहकार का मुख्य कार्य - पारस्परिक संबंधों, परिवार, वर्ग के लोगों को मदद करने के लिए, संघर्ष की स्थितियों में। इन पेशेवरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में काम संकट केन्द्रों में जो लोग अपने कठिन जीवन स्थितियों में सहायता कर सके। सलाहकार अत्यधिक कानूनी क्षेत्र में मांग में हैं,, कानूनी पेशे में, अपराधों को सुलझाने में मदद करने के लिए जब कैदियों के साथ काम कर। सैन्य मनोविज्ञान तरीकों की कमान में सुधार पर केंद्रित है, समूह संबंधों को मजबूत बनाने। एक खास जगह से संबंधित अध्ययनों के कब्जे में है के बाद अभिघातजन्य तनाव सिंड्रोम व्यक्तियों युद्ध में भाग लेने का गंभीर मनोवैज्ञानिक राज्य -। खेल मनोविज्ञान एथलीटों के लिए सिफारिशें उन्हें खेल में उच्च प्रदर्शन प्राप्त करने में मदद करने के लिए विकसित कर रहा है। यह ज्ञात है कि न केवल एक अच्छा शारीरिक तैयारी, लेकिन यह भी एक निश्चित मानसिक दृष्टिकोण खिलाड़ी जीतने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। प्रायोगिक मनोविज्ञान का एक अन्य महत्वपूर्ण शाखा विज्ञापन के मनोविज्ञान है। इसका मुख्य कार्य - मदद करने के लिए विज्ञापन विशेषज्ञों संवर्धन और माल और सेवाओं के बाजार में बिक्री के लिए सबसे प्रभावी तंत्र बनाने के लिए जहां एक महत्वपूर्ण भूमिका रंग, आकार और लगता है की धारणा के मनोविज्ञान द्वारा खेला जाता है। मनोविज्ञान के आवेदन क्षेत्रों, वहाँ कई हैं। गतिशील विकासशील समाज, व्यापक मनोवैज्ञानिक गतिविधि के क्षेत्र। लेकिन आवेदन के अलावा, वहां अभी भी विज्ञान के सैद्धांतिक क्षेत्रों की एक महत्वपूर्ण संख्या, जिनमें से प्रत्येक की खोज और व्यक्तिगत और समाज, अपने सैद्धांतिक आधार और एक मॉडल पर अपनी विशेष नज़र के अध्ययन के लिए अपने स्वयं के तरीकों है कर रहे हैं मानव व्यवहार का। व्यवहारवाद, मनोविश्लेषण, गेस्टाल्ट मनोविज्ञान, संज्ञानात्मक, अस्तित्व और - उनमें से सबसे बुनियादी मानवीय मनोविज्ञान , आदि तो, मनोविज्ञान क्या है? इस सवाल का जवाब दें, काफी मुश्किल है क्योंकि सरल परिभाषा के लिए खुद को समझने की कोशिश कर लोगों की गतिविधियों का एक बहुत व्यापक परत और हमारे आसपास की दुनिया है।
|
नई दिल्ली,(भाषा)। एशिया में मजबूती के रुख के बीच सटोरियों ने ताजा सौदों की लिवाली की जिससे वायदा कारोबार में आज कच्चा तेल की कीमत 0. 27 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,872 रुपये प्रति बैरल हो गई। एमसीएक्स में कच्चा तेल के अक्तूबर डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 13 रुपये अथवा 0. 27 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,872 रुपये प्रति बैरल हो गई जिसमें 4,410 लॉट के लिए कारोबार हुआ। कच्चा तेल के नवंबर डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 12 रुपये अथवा 0. 25 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,909 रुपये प्रति बैरल हो गई जिसमें 904 लॉट के लिए कारोबार हुआ। बाजार सूत्रों ने कहा कि कच्चा तेल वायदा कीमतों में तेजी एशियाई बाजारों में मजबूती के रुख के कारण था। एशियाई बाजारों में मजबूती का कारण मूडी द्वारा स्पेन की ठ्ठण साख दर को कम नहीं करने का फैसला था। इस बीच न्यूयार्क मर्केन्टाइल एक्सचेंज में नवंबर डिलीवरी वाले कच्चा तेल की कीमत 35 सेन्ट की तेजी के साथ 92. 44 डालर प्रति बैरल हो गई।
|
नई दिल्ली,। एशिया में मजबूती के रुख के बीच सटोरियों ने ताजा सौदों की लिवाली की जिससे वायदा कारोबार में आज कच्चा तेल की कीमत शून्य. सत्ताईस प्रतिशत की तेजी के साथ चार,आठ सौ बहत्तर रुपयापये प्रति बैरल हो गई। एमसीएक्स में कच्चा तेल के अक्तूबर डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत तेरह रुपयापये अथवा शून्य. सत्ताईस प्रतिशत की तेजी के साथ चार,आठ सौ बहत्तर रुपयापये प्रति बैरल हो गई जिसमें चार,चार सौ दस लॉट के लिए कारोबार हुआ। कच्चा तेल के नवंबर डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत बारह रुपयापये अथवा शून्य. पच्चीस प्रतिशत की तेजी के साथ चार,नौ सौ नौ रुपयापये प्रति बैरल हो गई जिसमें नौ सौ चार लॉट के लिए कारोबार हुआ। बाजार सूत्रों ने कहा कि कच्चा तेल वायदा कीमतों में तेजी एशियाई बाजारों में मजबूती के रुख के कारण था। एशियाई बाजारों में मजबूती का कारण मूडी द्वारा स्पेन की ठ्ठण साख दर को कम नहीं करने का फैसला था। इस बीच न्यूयार्क मर्केन्टाइल एक्सचेंज में नवंबर डिलीवरी वाले कच्चा तेल की कीमत पैंतीस सेन्ट की तेजी के साथ बानवे. चौंतालीस डालर प्रति बैरल हो गई।
|
दनकौर कस्बे के बस अड्डा रोड से मंगलवार दोपहर दुकानदारों ने 4 चोरों को चोरी करते रंगे हाथ दबोच है। जिनकी लोगों जमकर धुनाई करते हुए बाद में मौके पर पहुंची पुलिस को सौंप दिया। पुलिस आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की बात कह रही है।
कस्बे के दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से दुकानों का सामान चोरी हो रहा था। जिसकी शिकायत भी कई बार पुलिस से की गई थी। लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। दुकानदारों ने बताया कि मंगलवार की दोपहर 4 चोर दुकानों के आसपास रखे सामान को चुरा रहे थे। उसी दौरान एक दुकानदार की नजर उन पर चली गई। जिसके बाद उसने अन्य दुकानदारों को बता दिया। जिसके बाद दुकानदारों ने घेरकर चारों को दबोच लिया। इस दौरान आरोपियों ने भागने का प्रयास किया।
लेकिन उनको एक दुकान में बंद कर दिया गया। बताया जाता है कि उनकी पिटाई भी दुकानदारों द्वारा की गई है। जिसके बाद सूचना दनकौर पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। आरोपियों के कब्जे से चोरी का सामान भी बरामद हुआ है।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। जांच के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में दनकौर कोतवाली प्रभारी सुधीर कुमार का कहना है कि आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जिसके बाद इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
दनकौर कस्बे के बस अड्डा रोड से मंगलवार दोपहर दुकानदारों ने चार चोरों को चोरी करते रंगे हाथ दबोच है। जिनकी लोगों जमकर धुनाई करते हुए बाद में मौके पर पहुंची पुलिस को सौंप दिया। पुलिस आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की बात कह रही है। कस्बे के दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से दुकानों का सामान चोरी हो रहा था। जिसकी शिकायत भी कई बार पुलिस से की गई थी। लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। दुकानदारों ने बताया कि मंगलवार की दोपहर चार चोर दुकानों के आसपास रखे सामान को चुरा रहे थे। उसी दौरान एक दुकानदार की नजर उन पर चली गई। जिसके बाद उसने अन्य दुकानदारों को बता दिया। जिसके बाद दुकानदारों ने घेरकर चारों को दबोच लिया। इस दौरान आरोपियों ने भागने का प्रयास किया। लेकिन उनको एक दुकान में बंद कर दिया गया। बताया जाता है कि उनकी पिटाई भी दुकानदारों द्वारा की गई है। जिसके बाद सूचना दनकौर पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। आरोपियों के कब्जे से चोरी का सामान भी बरामद हुआ है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। जांच के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में दनकौर कोतवाली प्रभारी सुधीर कुमार का कहना है कि आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जिसके बाद इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
1. अपने खून में प्लेटलेट्स की संख्या कम करने के लिए कच्चा लहसुन खाएंः
2. खून का गाढ़ापन कम करने के लिए जिन्को बाइलोबा ( ginko biloba) लेंः
3. थक्के बनने से रोकने के लिए अश्वगंधा (ginseng ) का इस्तेमाल करेंः
4. एंटी-प्लेटलेट इफ़ेक्ट के लिए अनार खाएंः
5. प्लेटलेट्स प्रोडक्शन रोकने के लिए ओमेगा-3 से भरपूर समुद्री भोजन (सीफूड्स) खाएंः
6. थक्का बनने के चांसेस कम करने के लिए रेड वाइन पियेंः
7. "सैलिसिलेट्स" वाले फल और सब्जियां खाएं जो खून को पतला रखने में मदद करते हैं और क्लोटिंग से बचाते हैंः
8. खाना पकाते समय दालचीनी मिलाएं जिससे प्लेटलेट्स का समूहन कम हो जाता हैः
9. खून के थक्कों से बचने के लिए स्मोकिंग की आदत छोड़ेंः
10. एंटी-प्लेटलेट इफ़ेक्ट के लिए कॉफ़ी पियेंः
11. डॉक्टर के द्वारा लिखी गयी खून पतला करने वाली दवाएं लेंः
कुछ विशेष परिस्थितियों में डॉक्टर आपको खून पतला करने वाली दवाएं लिखेंगे । ये दवाएं खून को गाढ़ा होने, प्लेटलेट्स के समूहन और खून के थक्के बनने से बचाएंगी । इनमे से डॉक्टर द्वारा लिखी जाने वाली कुछ सबसे कॉमन दवाएं हैंः
एस्पिरिन (Aspirin)
हाइड्रोक्सीयूरिया (Hydroxyurea)
एनाग्रेलिड (Anagrelide)
इंटरफेरॉन अल्फ़ा (Interferon alfa)
बुसुल्फान (Busulfan)
पिपोब्रोमन (Pipobroman)
12. प्लेटलेटफेरेसिस( plateletpheresis) नामक प्रोसीजर कराएंः
|
एक. अपने खून में प्लेटलेट्स की संख्या कम करने के लिए कच्चा लहसुन खाएंः दो. खून का गाढ़ापन कम करने के लिए जिन्को बाइलोबा लेंः तीन. थक्के बनने से रोकने के लिए अश्वगंधा का इस्तेमाल करेंः चार. एंटी-प्लेटलेट इफ़ेक्ट के लिए अनार खाएंः पाँच. प्लेटलेट्स प्रोडक्शन रोकने के लिए ओमेगा-तीन से भरपूर समुद्री भोजन खाएंः छः. थक्का बनने के चांसेस कम करने के लिए रेड वाइन पियेंः सात. "सैलिसिलेट्स" वाले फल और सब्जियां खाएं जो खून को पतला रखने में मदद करते हैं और क्लोटिंग से बचाते हैंः आठ. खाना पकाते समय दालचीनी मिलाएं जिससे प्लेटलेट्स का समूहन कम हो जाता हैः नौ. खून के थक्कों से बचने के लिए स्मोकिंग की आदत छोड़ेंः दस. एंटी-प्लेटलेट इफ़ेक्ट के लिए कॉफ़ी पियेंः ग्यारह. डॉक्टर के द्वारा लिखी गयी खून पतला करने वाली दवाएं लेंः कुछ विशेष परिस्थितियों में डॉक्टर आपको खून पतला करने वाली दवाएं लिखेंगे । ये दवाएं खून को गाढ़ा होने, प्लेटलेट्स के समूहन और खून के थक्के बनने से बचाएंगी । इनमे से डॉक्टर द्वारा लिखी जाने वाली कुछ सबसे कॉमन दवाएं हैंः एस्पिरिन हाइड्रोक्सीयूरिया एनाग्रेलिड इंटरफेरॉन अल्फ़ा बुसुल्फान पिपोब्रोमन बारह. प्लेटलेटफेरेसिस नामक प्रोसीजर कराएंः
|
Lucknow, 04 जुलाई . समाजवादी पार्टी (सपा) नेता व महासचिव शिवपाल यादव ने Tuesday को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बी टीम बताया. उनके इस बयान ने Uttar Pradesh का सियासी पारा हाई कर दिया है.
शिवपाल ने कहा कि भाजपा से मायावती को डर लगता है. समाजवादियों का इतिहास रहा है, हम डरते नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि एक बार हम लोग बसपा को तोड़ चुके हैं, जरूरत पड़ी तो दोबारा भी तोड़ेंगे.
शिवपाल यादव ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद पर भी जुबानी हमला बोला. उन्होंने कहा कि ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद बहुत हल्के लोग है. राजभर-संजय निषाद की बात का कोई भरोसा नहीं है. चुनाव आने पर इनकी दुकानें चलती हैं. हम ऐसे लोगों से मिलते भी नहीं है.
सपा महासचिव ने Lok Sabha चुनाव की तैयारियों के सवाल पर कहा कि सभी विपक्षी दल एक होकर चुनाव लड़ेंगे. Uttar Pradesh में 2024 की रणनीति अखिलेश यादव के साथ मिलकर बनायेंगे. भाजपा को Uttar Pradesh में हराने का काम करेंगे.
शिवपाल ने इस दौरान Maharashtra में हुए राजनीतिक समीकरण पर कहा कि शरद पवार नेताजी मुलायम सिंह यादव की जैसी राजनीति करते हैं. Maharashtra में वो वापसी करेंगे.
उल्लेखनीय है कि Lok Sabha 2024 चुनाव को लेकर सभी सियासी दल इन दिनों अपना दमखम और चुनावी तैयारियों को दिखाने में लगे हैं. उप्र में समाजवादी पार्टी की तैयारी भी जोरो-शोरो से चल रही है. लगातार समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता अपना दमखम दिखाने में लगे हुए है. ऐसे में एक बार फिर शिवपाल यादव ने अपने विरोधियों पर हमला बोला है. इससे पहले भी वो मायावती, ओपी राजभर और संजय निषाद पर हमला बोल चुके हैं.
|
Lucknow, चार जुलाई . समाजवादी पार्टी नेता व महासचिव शिवपाल यादव ने Tuesday को बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती को भारतीय जनता पार्टी की बी टीम बताया. उनके इस बयान ने Uttar Pradesh का सियासी पारा हाई कर दिया है. शिवपाल ने कहा कि भाजपा से मायावती को डर लगता है. समाजवादियों का इतिहास रहा है, हम डरते नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि एक बार हम लोग बसपा को तोड़ चुके हैं, जरूरत पड़ी तो दोबारा भी तोड़ेंगे. शिवपाल यादव ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद पर भी जुबानी हमला बोला. उन्होंने कहा कि ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद बहुत हल्के लोग है. राजभर-संजय निषाद की बात का कोई भरोसा नहीं है. चुनाव आने पर इनकी दुकानें चलती हैं. हम ऐसे लोगों से मिलते भी नहीं है. सपा महासचिव ने Lok Sabha चुनाव की तैयारियों के सवाल पर कहा कि सभी विपक्षी दल एक होकर चुनाव लड़ेंगे. Uttar Pradesh में दो हज़ार चौबीस की रणनीति अखिलेश यादव के साथ मिलकर बनायेंगे. भाजपा को Uttar Pradesh में हराने का काम करेंगे. शिवपाल ने इस दौरान Maharashtra में हुए राजनीतिक समीकरण पर कहा कि शरद पवार नेताजी मुलायम सिंह यादव की जैसी राजनीति करते हैं. Maharashtra में वो वापसी करेंगे. उल्लेखनीय है कि Lok Sabha दो हज़ार चौबीस चुनाव को लेकर सभी सियासी दल इन दिनों अपना दमखम और चुनावी तैयारियों को दिखाने में लगे हैं. उप्र में समाजवादी पार्टी की तैयारी भी जोरो-शोरो से चल रही है. लगातार समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता अपना दमखम दिखाने में लगे हुए है. ऐसे में एक बार फिर शिवपाल यादव ने अपने विरोधियों पर हमला बोला है. इससे पहले भी वो मायावती, ओपी राजभर और संजय निषाद पर हमला बोल चुके हैं.
|
लखनऊ : यूपी में अब गाय के लिए ग्लैमर का तड़का लगेगा। योगी आदित्यनाथ सरकार यूथ गौ सेवा की ब्रांड एंबेसडर के रूप में मथुरा की मौजूदा भाजपा सांसद और मथुरा से वर्तमान भाजपा सांसद, हेमामालिनी की भूमिका के लिए पूरी तरह तैयार है। स्वायत्त निकाय अयोग के लिए वो एक सलाहकार की भूमिका के साथ होंगी। गाय आयोग को एक छवि बनाने और गाय के उपोत्पादों को बढ़ावा देने के लिए यह कदम राज्य सरकार की नीति का हिस्सा है।
हेमा ने भी इस प्रस्ताव पर सहमति जताई और प्रस्तावित गाय अभियान का खाका मांगा। उसने अपना अनुमोदन पत्र भेजा है, जिसे गौ सेवायोग के तत्कालीन अध्यक्ष राजीव गुप्ता तक पहुँच गया है। हेमा के पत्र में कहा गया है कि "न केवल धार्मिक दृष्टिकोण में, बल्कि मवेशियों और उनके उपोत्पादों का भी बहुत महत्व है, लेकिन मैं आपके सार्वजनिक संबंध सामग्री में आवाज बनने की स्वीकृति देकर उनके जीवन में बदलाव लाने का प्रस्ताव स्वीकार करती हूं।
मई 2018 में गाय उत्पादों के स्वास्थ्य लाभों को प्रदर्शित करने और बढ़ावा देने के लिए एक ग्लैमर एज देने की योजना की परिकल्पना की गई थी। यह निर्णय लिया गया था कि एक ब्रांड एंबेसडर गाय संरक्षण पर आयोग की नीतियों के साथ लोगों तक पहुंचना आसान बना सकता है।
|
लखनऊ : यूपी में अब गाय के लिए ग्लैमर का तड़का लगेगा। योगी आदित्यनाथ सरकार यूथ गौ सेवा की ब्रांड एंबेसडर के रूप में मथुरा की मौजूदा भाजपा सांसद और मथुरा से वर्तमान भाजपा सांसद, हेमामालिनी की भूमिका के लिए पूरी तरह तैयार है। स्वायत्त निकाय अयोग के लिए वो एक सलाहकार की भूमिका के साथ होंगी। गाय आयोग को एक छवि बनाने और गाय के उपोत्पादों को बढ़ावा देने के लिए यह कदम राज्य सरकार की नीति का हिस्सा है। हेमा ने भी इस प्रस्ताव पर सहमति जताई और प्रस्तावित गाय अभियान का खाका मांगा। उसने अपना अनुमोदन पत्र भेजा है, जिसे गौ सेवायोग के तत्कालीन अध्यक्ष राजीव गुप्ता तक पहुँच गया है। हेमा के पत्र में कहा गया है कि "न केवल धार्मिक दृष्टिकोण में, बल्कि मवेशियों और उनके उपोत्पादों का भी बहुत महत्व है, लेकिन मैं आपके सार्वजनिक संबंध सामग्री में आवाज बनने की स्वीकृति देकर उनके जीवन में बदलाव लाने का प्रस्ताव स्वीकार करती हूं। मई दो हज़ार अट्ठारह में गाय उत्पादों के स्वास्थ्य लाभों को प्रदर्शित करने और बढ़ावा देने के लिए एक ग्लैमर एज देने की योजना की परिकल्पना की गई थी। यह निर्णय लिया गया था कि एक ब्रांड एंबेसडर गाय संरक्षण पर आयोग की नीतियों के साथ लोगों तक पहुंचना आसान बना सकता है।
|
यूपी शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी (Wasim Rizvi) ने सनातन यानी हिंदू धर्म (Hindu Dharma) अपना कर मजहबी दुनिया में बवाल मचा दिया है. वसीम रिजवी से जितेंद्र नारायण त्यागी बनने के बाद उनको गिरफ्तार करने के लिए ट्विटर पर कैंपेन चलाया जा रहा है. आरोप है कि जितेंद्र नारायण त्यागी ने मुसलमानों (Muslim) की मजहबी भावनाएं आहत की हैं.
यूपी शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी (Wasim Rizvi) ने सनातन यानी हिंदू धर्म अपना कर मजहबी दुनिया में बवाल मचा दिया है. वसीम रिजवी से जितेंद्र नारायण त्यागी बनने के बाद उनको गिरफ्तार करने के लिए ट्विटर पर कैंपेन चलाया जा रहा है. आरोप है कि जितेंद्र नारायण त्यागी ने मुसलमानों की मजहबी भावनाएं आहत की हैं. आसान शब्दों में कहा जाए, तो इस्लाम से जुड़ी भावनाओं को आहत करने के लिए नए-नए हिंदू बने जितेंद्र नारायण त्यागी (वसीम रिजवी) के खिलाफ ट्विटर पर लोगों ने 'हाउज द जोश' टाइप का माहौल बना दिया है. मजहब के खिलाफ बातों के लिए 'तहफ्फुज-ए-नामूस-ए-रिसालत' यानी पैगंबर मोहम्मद साहब के संदेश के सम्मान की सुरक्षा के लिए मुसलमानों से जितेंद्र त्यागी को लेकर उनकी बेदारी यानी जागरूकता का सबूत देने की मांग की जा रही है. वैसे, ये जागरूकता कहां तक पहुंचेगी, इसका अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल है. लेकिन, यहां चौंकाने वाली बात ये है कि देश का लिबरल समाज इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है.
वसीम रिजवी के मामले पर देश का लिबरल समाज चुप्पी साधे हुए है.
दरअसल, पूरा देश पूछ रहा है कि अभिव्यक्ति की आजादी के लिए लिबरल समाज क्या-क्या नहीं करता है. मतलब स्टैंड अप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी को ही ले लीजिए. अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर उनके शो कैंसिल होने पर उनके लिए सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर कई-कई बीघा की पोस्ट लिखी गईं. पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के महाराष्ट्र में लगाए गए 'दरबार' में फरियादी बनकर पहुंची एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने कहा था कि दक्षिणपंथियों यानी राइट विंग की ओर से जानबूझकर कर मुनव्वर फारूकी, अदिति मित्तल, अग्रिमा जोशुआ जैसे स्टैंडअप कॉमेडियन्स को निशाना बनाया जा रहा है. स्वरा भास्कर ने मुनव्वर फारूकी का दर्द साझा करते हुए कहा था कि उसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में एक महीना जेल में बिताना पड़ा. सिविल सोसाइटी के इस इवेंट में लिबरल समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए थे. लेकिन, मुनव्वर फारूकी के लिए गला फाड़ने वाले ये लिबरल समाज के लोग वसीम रिजवी के मामले पर संविधान से मिलने वाले अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार की बात करना भी गंवारा नहीं समझ रहे हैं.
एक बहुत छोटी सी बात है कि जिस संविधान ने मुनव्वर फारूकी को अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर भगवान राम और सीता से जुड़े अश्लील मजाक करने और गोधरा में जिंदा जला दिए गए कारसेवकों की मौत का माखौल उड़ाने की छूट दी है. उसी संविधान से वसीम रिजवी को भी वही अधिकार मिले हुए हैं. अब अगर देश का लिबरल समाज मुनव्वर फारूकी के लिए इतने पुरजोर तरीके से आवाज उठा रहा है, तो अभिव्यक्ति की आजादी के ये स्वर जितेंद्र नारायण त्यागी के लिए भी कमजोर नहीं होने चाहिए. क्योंकि, भारत का संविधान सभी लोगों के साथ समानता का व्यवहार करने के लिए भी बाध्य करता है. इसके अनुसार धर्म, जाति, पंथ, मजहब जैसी चीजों के आधार पर भेद नहीं किया जा सकता है. अगर लिबरल समाज मुनव्वर फारुकी को डिफेंड कर रहा है, तो उसे वसीम रिजवी को भी डिफेंड करना चाहिए. इससे देशभर में न केवल अभिव्यक्ति की आजादी, बल्कि समानता के अधिकार की लड़ाई को भी बल मिलेगा.
माना जा सकता है कि वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी ने अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर बहुत कुछ विवादास्पद किया और कहा है. लेकिन, उनकी इन बातों पर मजहब के कुछ कट्टरपंथी लोग ही इतने आक्रोशित तरीके से रिएक्शन दे रहे हैं. इस्लाम को मानने वाले एक बड़ा हिस्सा जो कट्टरपंथी विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है, वह वसीम रिजवी की बातों को इग्नोर कर रहा है. ठीक उसी तरह, जिस तरह स्टैंड अप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी की हिंदू देवी-देवताओं के नाम लेकर गाली-गलौज वाली भाषा के साथ 'जोक' क्रैक करने को बहुसंख्यक हिंदू वर्ग का एक बड़ा हिस्सा इग्नोर करता है. कुछ कट्टरपंथी हिंदुओं के लिए लोगों को तनाव नहीं लेना चाहिए. इस्लाम और हिंदू धर्म के कुछ कट्टरपंथियों की वजह से लिबरल समाज अगर अभिव्यक्ति की आजादी के लिए आवाज नहीं उठाएगा, तो कौन उठाएगा? वैसे, अगर वसीम रिजवी की बातों से ज्यादा तनाव हो, तो उन्हें मुनव्वर फारुकी समझकर भूलने की अपील की जा सकती है. इतना तो हक उनका भी बनता है.
वसीम रिजवी के अब तक के विवादों को देखकर इतना तो कहा ही जा सकता है कि उन्होंने कम से कम इस बात का ख्याल रखा कि उनकी बातों से किसी दूसरे धर्म की भावनाएं आहत न हों. वहीं, मुनव्वर फारूकी जैसे स्टैंड अप कॉमेडियन दूसरे धर्मों पर टिप्पणी कर ही खुद को फेमस करना चाहते हैं. दरअसल, भारत के बहुसंख्यक हिंदू वर्ग से हमेशा से ही ये आशा की जाती है कि वह अपने धर्म या देवी-देवताओं के मजाक पर बड़ा दिल दिखाते हुए सहिष्णुता का प्रदर्शन करे. लोगों को समझना चाहिए कि सहिष्णुता का वटवृक्ष केवल पानी देने से मजबूत नहीं होता है. उसे मजबूत करने के लिए खाद की भी जरूरत होती है. वैसे, हिंदू देवी-देवताओं के नाम लेकर गाली-गलौज वाली भाषा के साथ 'जोक' क्रैक करना बिल्कुल अभिव्यक्ति की आजादी मानी जा सकती है. अगर वसीम रिजवी की कही बातों को भी फारूकी वाले पलड़े पर ही तौला जाए. लेकिन, भारत में ऐसा हो नहीं सकता है. तो, अभिव्यक्ति की आजादी के ब्रांड एम्बेसेडर चुनने में सावधानी बरतें. क्योंकि, हर मुनव्वर फारुकी के बाद एक वसीम रिजवी का अवतार होता है.
|
यूपी शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने सनातन यानी हिंदू धर्म अपना कर मजहबी दुनिया में बवाल मचा दिया है. वसीम रिजवी से जितेंद्र नारायण त्यागी बनने के बाद उनको गिरफ्तार करने के लिए ट्विटर पर कैंपेन चलाया जा रहा है. आरोप है कि जितेंद्र नारायण त्यागी ने मुसलमानों की मजहबी भावनाएं आहत की हैं. यूपी शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने सनातन यानी हिंदू धर्म अपना कर मजहबी दुनिया में बवाल मचा दिया है. वसीम रिजवी से जितेंद्र नारायण त्यागी बनने के बाद उनको गिरफ्तार करने के लिए ट्विटर पर कैंपेन चलाया जा रहा है. आरोप है कि जितेंद्र नारायण त्यागी ने मुसलमानों की मजहबी भावनाएं आहत की हैं. आसान शब्दों में कहा जाए, तो इस्लाम से जुड़ी भावनाओं को आहत करने के लिए नए-नए हिंदू बने जितेंद्र नारायण त्यागी के खिलाफ ट्विटर पर लोगों ने 'हाउज द जोश' टाइप का माहौल बना दिया है. मजहब के खिलाफ बातों के लिए 'तहफ्फुज-ए-नामूस-ए-रिसालत' यानी पैगंबर मोहम्मद साहब के संदेश के सम्मान की सुरक्षा के लिए मुसलमानों से जितेंद्र त्यागी को लेकर उनकी बेदारी यानी जागरूकता का सबूत देने की मांग की जा रही है. वैसे, ये जागरूकता कहां तक पहुंचेगी, इसका अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल है. लेकिन, यहां चौंकाने वाली बात ये है कि देश का लिबरल समाज इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है. वसीम रिजवी के मामले पर देश का लिबरल समाज चुप्पी साधे हुए है. दरअसल, पूरा देश पूछ रहा है कि अभिव्यक्ति की आजादी के लिए लिबरल समाज क्या-क्या नहीं करता है. मतलब स्टैंड अप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी को ही ले लीजिए. अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर उनके शो कैंसिल होने पर उनके लिए सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर कई-कई बीघा की पोस्ट लिखी गईं. पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के महाराष्ट्र में लगाए गए 'दरबार' में फरियादी बनकर पहुंची एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने कहा था कि दक्षिणपंथियों यानी राइट विंग की ओर से जानबूझकर कर मुनव्वर फारूकी, अदिति मित्तल, अग्रिमा जोशुआ जैसे स्टैंडअप कॉमेडियन्स को निशाना बनाया जा रहा है. स्वरा भास्कर ने मुनव्वर फारूकी का दर्द साझा करते हुए कहा था कि उसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में एक महीना जेल में बिताना पड़ा. सिविल सोसाइटी के इस इवेंट में लिबरल समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए थे. लेकिन, मुनव्वर फारूकी के लिए गला फाड़ने वाले ये लिबरल समाज के लोग वसीम रिजवी के मामले पर संविधान से मिलने वाले अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार की बात करना भी गंवारा नहीं समझ रहे हैं. एक बहुत छोटी सी बात है कि जिस संविधान ने मुनव्वर फारूकी को अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर भगवान राम और सीता से जुड़े अश्लील मजाक करने और गोधरा में जिंदा जला दिए गए कारसेवकों की मौत का माखौल उड़ाने की छूट दी है. उसी संविधान से वसीम रिजवी को भी वही अधिकार मिले हुए हैं. अब अगर देश का लिबरल समाज मुनव्वर फारूकी के लिए इतने पुरजोर तरीके से आवाज उठा रहा है, तो अभिव्यक्ति की आजादी के ये स्वर जितेंद्र नारायण त्यागी के लिए भी कमजोर नहीं होने चाहिए. क्योंकि, भारत का संविधान सभी लोगों के साथ समानता का व्यवहार करने के लिए भी बाध्य करता है. इसके अनुसार धर्म, जाति, पंथ, मजहब जैसी चीजों के आधार पर भेद नहीं किया जा सकता है. अगर लिबरल समाज मुनव्वर फारुकी को डिफेंड कर रहा है, तो उसे वसीम रिजवी को भी डिफेंड करना चाहिए. इससे देशभर में न केवल अभिव्यक्ति की आजादी, बल्कि समानता के अधिकार की लड़ाई को भी बल मिलेगा. माना जा सकता है कि वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी ने अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर बहुत कुछ विवादास्पद किया और कहा है. लेकिन, उनकी इन बातों पर मजहब के कुछ कट्टरपंथी लोग ही इतने आक्रोशित तरीके से रिएक्शन दे रहे हैं. इस्लाम को मानने वाले एक बड़ा हिस्सा जो कट्टरपंथी विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है, वह वसीम रिजवी की बातों को इग्नोर कर रहा है. ठीक उसी तरह, जिस तरह स्टैंड अप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी की हिंदू देवी-देवताओं के नाम लेकर गाली-गलौज वाली भाषा के साथ 'जोक' क्रैक करने को बहुसंख्यक हिंदू वर्ग का एक बड़ा हिस्सा इग्नोर करता है. कुछ कट्टरपंथी हिंदुओं के लिए लोगों को तनाव नहीं लेना चाहिए. इस्लाम और हिंदू धर्म के कुछ कट्टरपंथियों की वजह से लिबरल समाज अगर अभिव्यक्ति की आजादी के लिए आवाज नहीं उठाएगा, तो कौन उठाएगा? वैसे, अगर वसीम रिजवी की बातों से ज्यादा तनाव हो, तो उन्हें मुनव्वर फारुकी समझकर भूलने की अपील की जा सकती है. इतना तो हक उनका भी बनता है. वसीम रिजवी के अब तक के विवादों को देखकर इतना तो कहा ही जा सकता है कि उन्होंने कम से कम इस बात का ख्याल रखा कि उनकी बातों से किसी दूसरे धर्म की भावनाएं आहत न हों. वहीं, मुनव्वर फारूकी जैसे स्टैंड अप कॉमेडियन दूसरे धर्मों पर टिप्पणी कर ही खुद को फेमस करना चाहते हैं. दरअसल, भारत के बहुसंख्यक हिंदू वर्ग से हमेशा से ही ये आशा की जाती है कि वह अपने धर्म या देवी-देवताओं के मजाक पर बड़ा दिल दिखाते हुए सहिष्णुता का प्रदर्शन करे. लोगों को समझना चाहिए कि सहिष्णुता का वटवृक्ष केवल पानी देने से मजबूत नहीं होता है. उसे मजबूत करने के लिए खाद की भी जरूरत होती है. वैसे, हिंदू देवी-देवताओं के नाम लेकर गाली-गलौज वाली भाषा के साथ 'जोक' क्रैक करना बिल्कुल अभिव्यक्ति की आजादी मानी जा सकती है. अगर वसीम रिजवी की कही बातों को भी फारूकी वाले पलड़े पर ही तौला जाए. लेकिन, भारत में ऐसा हो नहीं सकता है. तो, अभिव्यक्ति की आजादी के ब्रांड एम्बेसेडर चुनने में सावधानी बरतें. क्योंकि, हर मुनव्वर फारुकी के बाद एक वसीम रिजवी का अवतार होता है.
|
नई दिल्ली। टीम इंडिया के टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप 2021 से पहले ही घोषणा कर दी थी कि वह इस टूर्नामेंट के बाद टी-20 फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ देंगे, लेकिन वनडे और टेस्ट के कप्तान बने रहेंगे। दक्षिण अफ्रीका दौरे से पहले विराट की वनडे कप्तानी छिन गई। इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ और टीम इंडिया के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री ने इस पूरे किस्से पर अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया कि कैसे विराट की वनडे कप्तानी जाना इस खिलाड़ी के लिए भविष्य में फायदेमंद साबित हो सकता है।
टी-20 वर्ल्ड कप 2021 के खत्म होने के साथ ही रवि शास्त्री का भी बतौर हेड कोच कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया। शास्त्री ने कहा, 'यह सही तरीका था जाने का। यह विराट कोहली और रोहित शर्मा दोनों के लिए एक वरदान साबित हो सकता है। एक व्यक्ति के लिए तीनों फॉर्मेट की कप्तानी संभालना आसान नहीं होता है। खासकर जिस तरह के समय में हम जी रहे हैं, कोविड रिस्ट्रिक्शन और बायो बबल में। विराट अब पूरी तरह से रेड-बॉल क्रिकेट पर फोकस कर सकते हैं और जब तक चाहें इस फॉर्मेट की कप्तानी कर सकते हैं। ' शास्त्री ने कहा, 'इस तरह से उन्हें बैठकर अपने खेल के बारे में सोचने का भी मौका मिलेगा। अभी वह कम से कम 5-6 साल और क्रिकेट खेल सकते हैं। विराट ने इस मामले में अपनी बात रखी, अब बीसीसीआई अध्यक्ष को अपनी बात रखनी चाहिए। अगर बातचीत सही तरीके से की जाती तो इस मुद्दे को बेहतर तरीके से हैंडल किया जा सकता था। ' बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा था कि विराट को टी-20 कप्तानी नहीं छोड़ने के लिए कहा गया था, लेकिन वह नहीं माने। विराट ने इस बात से साफ इंकार कर दिया था कि गांगुली या बीसीसीआई में उन्हें किसी ने टी-20 कप्तानी छोड़ने से रोका था।
|
नई दिल्ली। टीम इंडिया के टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने आईसीसी टी-बीस वर्ल्ड कप दो हज़ार इक्कीस से पहले ही घोषणा कर दी थी कि वह इस टूर्नामेंट के बाद टी-बीस फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ देंगे, लेकिन वनडे और टेस्ट के कप्तान बने रहेंगे। दक्षिण अफ्रीका दौरे से पहले विराट की वनडे कप्तानी छिन गई। इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ और टीम इंडिया के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री ने इस पूरे किस्से पर अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया कि कैसे विराट की वनडे कप्तानी जाना इस खिलाड़ी के लिए भविष्य में फायदेमंद साबित हो सकता है। टी-बीस वर्ल्ड कप दो हज़ार इक्कीस के खत्म होने के साथ ही रवि शास्त्री का भी बतौर हेड कोच कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया। शास्त्री ने कहा, 'यह सही तरीका था जाने का। यह विराट कोहली और रोहित शर्मा दोनों के लिए एक वरदान साबित हो सकता है। एक व्यक्ति के लिए तीनों फॉर्मेट की कप्तानी संभालना आसान नहीं होता है। खासकर जिस तरह के समय में हम जी रहे हैं, कोविड रिस्ट्रिक्शन और बायो बबल में। विराट अब पूरी तरह से रेड-बॉल क्रिकेट पर फोकस कर सकते हैं और जब तक चाहें इस फॉर्मेट की कप्तानी कर सकते हैं। ' शास्त्री ने कहा, 'इस तरह से उन्हें बैठकर अपने खेल के बारे में सोचने का भी मौका मिलेगा। अभी वह कम से कम पाँच-छः साल और क्रिकेट खेल सकते हैं। विराट ने इस मामले में अपनी बात रखी, अब बीसीसीआई अध्यक्ष को अपनी बात रखनी चाहिए। अगर बातचीत सही तरीके से की जाती तो इस मुद्दे को बेहतर तरीके से हैंडल किया जा सकता था। ' बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा था कि विराट को टी-बीस कप्तानी नहीं छोड़ने के लिए कहा गया था, लेकिन वह नहीं माने। विराट ने इस बात से साफ इंकार कर दिया था कि गांगुली या बीसीसीआई में उन्हें किसी ने टी-बीस कप्तानी छोड़ने से रोका था।
|
एक्सीडेंट ऑन हिल रोड वर्ष 2009 में रिलीज हुई एक बॉलीवुड फिल्म है, जिसका निर्देशन महेश नायर ने किया है। फिल्म में फारुख शेख, अभिमन्यु सिंह, सेलीना जेटली मुख्य भूमिका में नजर आयेंगे। यह फिल्म 2007 में आई अमेरिकन फिल्म स्टक का रीमेक है।
Jawan- 50 करोड़ की ओपनिंग के साथ Shahrukh Khan? इस एक्टर ने की तगड़ी भविष्यवाणी!
|
एक्सीडेंट ऑन हिल रोड वर्ष दो हज़ार नौ में रिलीज हुई एक बॉलीवुड फिल्म है, जिसका निर्देशन महेश नायर ने किया है। फिल्म में फारुख शेख, अभिमन्यु सिंह, सेलीना जेटली मुख्य भूमिका में नजर आयेंगे। यह फिल्म दो हज़ार सात में आई अमेरिकन फिल्म स्टक का रीमेक है। Jawan- पचास करोड़ की ओपनिंग के साथ Shahrukh Khan? इस एक्टर ने की तगड़ी भविष्यवाणी!
|
माथो पटक-पटकर रोटी करतो करणाई म्हारी घर्भरण लगाई तो करणाई अळगे और दूजे मजुरा रा पेट म्हारै भाग-भाग फिरता रैवता... मैं साची गेलो हुयग्यो.. कूक-कूक र वाने हैला करतो वो पागलखानो कोई हो, म्हारै बापूजी रो म्हा मुकर र कड़ो यातना-गृह होहूं धंरगा रोळा करतो जद दो-दो दिन रोटी-पाणी न मिलेता घोळा कपड़ांभळा कमरे में आपने मन्न कूटर प्रोसळो कर देवता. अर एक दिन मन्नै लखायों के मैं सार्च ई पागल हयग्यो हू ई दरम्यान बार सूरंज कठौन ऊगतो घर कठीन बिसू जतो, मन्न ठा नी पड़ यो पर कँद""' मदजी क लाम्बो निसखारो लियो. "फेर मैं पागलखान सू निकाल दियो गयो, बाजित दुनिया रा रग ई बदलग्या. म्हारो दिमाग एकदम खतम हुयंग्यों हो, पण या मैं समझग्यो के मुलक रो फंटवाड़ी हुयग्यों है· म्हारा व ई पुराणा कंपड़ा जिका मैं पर्या आयो हो, मैं पाछा पैर र श्रयग्यो. कपड़ा म्हार डील पर भोळियों हुयग्या. उजास में में म्हारे शरीर न सावळ देख्यों, हाथ-- पंग तूळयां ज्यू हुयेग्या हा. मैं कठे जाऊ ? कोई मारग नीं दीखतो. मन्ने भौत बाद में ठा पड़ी के हूं बिहार से ई अक बोत. बड़े पागलखाने म्हारा बापूजी म्हारी इक़द व्यवस्थारी कांई ठा कित्ती कीमत चुकाई हुवैला- मंगतो हुवै ज्यू, मैं केई दिन ठोकरां खाई. फैर निठांसी मैं सागी ठिकाण पुग्यो. परणं हालात बदलग्या हा. फंटवार्ड में श्री गांव पाकिस्तान में आयग्यो हो ओर अ रा सगळा हिन्दुस्तांनी का तो छोड' र चला गया परा हा, का मार-काट में पूरा हुया. गांव ऊजड़ोड़ा पड्या हा. श्रादमी तो मादमी, बठे कोई भींत ई सागी हलात में ओळखीजणी मुश्किल हो. मैं पुराणों जारग- पिछारण र सारै को पतो लगायो म्हारै परिवार आळा रातो रात अँठ सू भांगरया हा घर मा ई. हालत दूजा परंवारा. री हुई हुवैला.
बतावरण आळं बातायो के माहौल बड़ो भयानक हुयग्यों हो ..... रात-दिन सांगें रवणश्राळा ई ओ क दूजै रै गळं कानी छुर्यो लैयार भाज्या, श्री माहोल सांत हो परग मन नां सती री खोज ही ना उपद्रव री •• मैं तो म्हारी गर्भरणों लुगाई रो पतोकरणों चांवतो .. जद फटवाड़ो हुयो ई हो, सींवा री व्यवस्था इत्ती मुस्तैद नी ही···मैं गयो ज्यू ई पाछो आयग्योः म्हारै श्राग मारग हो, मारग कुठे जावै, मन्ने कांई ठा नौ हो···म्हार जीव में अब अ क ई ठिकारणो हो, वो हो म्हारो सासरौ • पण वो ई तो कोई नड़ो नी हो.. कठै ह' बंगाल में भटकै हो पर कडे राजस्थान. खरसला, फोड़ा भुगत तो भुगततो पूग्यो तो म्हारी मुट्ठी भर - उबरयोड़ी छाती ई दरके गीः म्हार छोरो हुयां छैप, घरवाळी नं खासा दिनां सू म्हारे घरवाला लयग्या. सासरे आळा नै म्हारे बारे में तर-तरे री बातां सुरगन
अ कर फर बिसाई लेवरण लागग्या म्हारै डील में बैठे-बैठे रै सगीड़ा ऊपड़न लागग्या. सच्चाई र मोर्चे डटर आळो इत्तो वो आदमी आज रंग गत बैठ्या है ? अनेक सवाल म्हारै माय तीखे तीरा ज्यू उठण लागग्या. पण मदजीठ प्रायन ई अँ क सोरी-सुखी जिन्दगी क्यू नी' पाय सक्या ? ओ सवाल खासी उतावळ मंचाव हो. मदजी हा के बिसाई ने खासी लाबी खांचली.
"थं देश आयग्या, फॅर कांई हुयो ? मैं छवट पूछ्यो, तो मन्न लाग्यो के म्हारी वोली काप ही घर हूं गळगळो हुयग्यो हूं.
." सुरण बीरा !" मदजी जारंगै उदासी री कांटा ग्राळी बाड़ फांक र बोल्या, "म्हारौं छोरै नैयरमैंग्यो' 'मैं कोई दसक वरसा सू देश पूग्यो हो. अठै रा हालात ई खासा बदळ योडा हा. लोगां मन्नै श्रोळख्यो ई नी अर ओळखों का अचुभो कर-कर' र पूछयो के म्हारे बारे में तो वै की और सुरणी ही के मैं नदी में डूब'रपण, मोड़ा-बेगा वै मन्ने परोट लियो. मैं अटै अब कोई करु ? पेट भरण रो सुवाल हो. कन्नकराती पाई नीं ही, मर'र पाछै आवरण आळं पर लोग भरोसो कोई करें ? घरणी मुश्किल हुयी ऑपरो देश, आप रोई हुव. पास-पाड़ोसी केई दिन कटाया. छवट में थोड़ोंघरणो काम करणः लागग्यो वां दिनां में आज रोश्रो कस्बों गांव-सोई होः घरणी दुकाना न हो. राघरा नख परदेशां ई कमवता. वां ई दिना अठै छोगराजजी री एक दुकान ही जकी में वे दुकानदारी तोकडारणगत रो काम घरणो करता. केया-सुण्या वै मनपर मुनीम राख लियो. बापूजी रौं लिहाज रो बखरंग कर-कर' र हूँती मेहरबानी जताई, परण मैं जाण्यो कै आपां नै पेट पाळरणों है, इ सारू लागग्यो. श्रा हेली जद फूटोड़ी न ही" मैं अर म्हारो छोरो इस में वरण लागग्या. केई बरस निकळया भर · 'तद' ई सेठारी नौकरी में छोड़ दीनी. सेठ अडाणगत र धंधे में कसाई सूई बढ़'र हा. लुगायां रा घाघरिया तकात अंडारण मेल लेवता. कित्ता खेत र कित्ता घर सेठा रै गोडे हेठै हा इरण रो कोई दाज न हो. गामरा किरसारणा नै सेठ र आगे कळपता देख र म्हारी छाती भरीज जावती. किताई मिनख - लुगाई ब्याज में सेठी र हाळीपों करता. म्हारी रय-रैयन प्राय जावतो.
पाट रो गिध में दिन में सू सिया ताई माथों दियोड़ा वै मजूर अबै कठे है ? 'बाता याद करने हियो फोटरण लागतो- के साल काळ पड्यो. चौफेर भूख रा भतूलिया बाज हा भूखा-तिसा लोगों री सेठा र भीड़ लाग जावतो. वीं दिनळे रो नजारों मन्ने में कदम याद है. लुगाई पर टावर नै गोदी में लियां सेठां
|
माथो पटक-पटकर रोटी करतो करणाई म्हारी घर्भरण लगाई तो करणाई अळगे और दूजे मजुरा रा पेट म्हारै भाग-भाग फिरता रैवता... मैं साची गेलो हुयग्यो.. कूक-कूक र वाने हैला करतो वो पागलखानो कोई हो, म्हारै बापूजी रो म्हा मुकर र कड़ो यातना-गृह होहूं धंरगा रोळा करतो जद दो-दो दिन रोटी-पाणी न मिलेता घोळा कपड़ांभळा कमरे में आपने मन्न कूटर प्रोसळो कर देवता. अर एक दिन मन्नै लखायों के मैं सार्च ई पागल हयग्यो हू ई दरम्यान बार सूरंज कठौन ऊगतो घर कठीन बिसू जतो, मन्न ठा नी पड़ यो पर कँद""' मदजी क लाम्बो निसखारो लियो. "फेर मैं पागलखान सू निकाल दियो गयो, बाजित दुनिया रा रग ई बदलग्या. म्हारो दिमाग एकदम खतम हुयंग्यों हो, पण या मैं समझग्यो के मुलक रो फंटवाड़ी हुयग्यों है· म्हारा व ई पुराणा कंपड़ा जिका मैं पर्या आयो हो, मैं पाछा पैर र श्रयग्यो. कपड़ा म्हार डील पर भोळियों हुयग्या. उजास में में म्हारे शरीर न सावळ देख्यों, हाथ-- पंग तूळयां ज्यू हुयेग्या हा. मैं कठे जाऊ ? कोई मारग नीं दीखतो. मन्ने भौत बाद में ठा पड़ी के हूं बिहार से ई अक बोत. बड़े पागलखाने म्हारा बापूजी म्हारी इक़द व्यवस्थारी कांई ठा कित्ती कीमत चुकाई हुवैला- मंगतो हुवै ज्यू, मैं केई दिन ठोकरां खाई. फैर निठांसी मैं सागी ठिकाण पुग्यो. परणं हालात बदलग्या हा. फंटवार्ड में श्री गांव पाकिस्तान में आयग्यो हो ओर अ रा सगळा हिन्दुस्तांनी का तो छोड' र चला गया परा हा, का मार-काट में पूरा हुया. गांव ऊजड़ोड़ा पड्या हा. श्रादमी तो मादमी, बठे कोई भींत ई सागी हलात में ओळखीजणी मुश्किल हो. मैं पुराणों जारग- पिछारण र सारै को पतो लगायो म्हारै परिवार आळा रातो रात अँठ सू भांगरया हा घर मा ई. हालत दूजा परंवारा. री हुई हुवैला. बतावरण आळं बातायो के माहौल बड़ो भयानक हुयग्यों हो ..... रात-दिन सांगें रवणश्राळा ई ओ क दूजै रै गळं कानी छुर्यो लैयार भाज्या, श्री माहोल सांत हो परग मन नां सती री खोज ही ना उपद्रव री •• मैं तो म्हारी गर्भरणों लुगाई रो पतोकरणों चांवतो .. जद फटवाड़ो हुयो ई हो, सींवा री व्यवस्था इत्ती मुस्तैद नी ही···मैं गयो ज्यू ई पाछो आयग्योः म्हारै श्राग मारग हो, मारग कुठे जावै, मन्ने कांई ठा नौ हो···म्हार जीव में अब अ क ई ठिकारणो हो, वो हो म्हारो सासरौ • पण वो ई तो कोई नड़ो नी हो.. कठै ह' बंगाल में भटकै हो पर कडे राजस्थान. खरसला, फोड़ा भुगत तो भुगततो पूग्यो तो म्हारी मुट्ठी भर - उबरयोड़ी छाती ई दरके गीः म्हार छोरो हुयां छैप, घरवाळी नं खासा दिनां सू म्हारे घरवाला लयग्या. सासरे आळा नै म्हारे बारे में तर-तरे री बातां सुरगन अ कर फर बिसाई लेवरण लागग्या म्हारै डील में बैठे-बैठे रै सगीड़ा ऊपड़न लागग्या. सच्चाई र मोर्चे डटर आळो इत्तो वो आदमी आज रंग गत बैठ्या है ? अनेक सवाल म्हारै माय तीखे तीरा ज्यू उठण लागग्या. पण मदजीठ प्रायन ई अँ क सोरी-सुखी जिन्दगी क्यू नी' पाय सक्या ? ओ सवाल खासी उतावळ मंचाव हो. मदजी हा के बिसाई ने खासी लाबी खांचली. "थं देश आयग्या, फॅर कांई हुयो ? मैं छवट पूछ्यो, तो मन्न लाग्यो के म्हारी वोली काप ही घर हूं गळगळो हुयग्यो हूं. ." सुरण बीरा !" मदजी जारंगै उदासी री कांटा ग्राळी बाड़ फांक र बोल्या, "म्हारौं छोरै नैयरमैंग्यो' 'मैं कोई दसक वरसा सू देश पूग्यो हो. अठै रा हालात ई खासा बदळ योडा हा. लोगां मन्नै श्रोळख्यो ई नी अर ओळखों का अचुभो कर-कर' र पूछयो के म्हारे बारे में तो वै की और सुरणी ही के मैं नदी में डूब'रपण, मोड़ा-बेगा वै मन्ने परोट लियो. मैं अटै अब कोई करु ? पेट भरण रो सुवाल हो. कन्नकराती पाई नीं ही, मर'र पाछै आवरण आळं पर लोग भरोसो कोई करें ? घरणी मुश्किल हुयी ऑपरो देश, आप रोई हुव. पास-पाड़ोसी केई दिन कटाया. छवट में थोड़ोंघरणो काम करणः लागग्यो वां दिनां में आज रोश्रो कस्बों गांव-सोई होः घरणी दुकाना न हो. राघरा नख परदेशां ई कमवता. वां ई दिना अठै छोगराजजी री एक दुकान ही जकी में वे दुकानदारी तोकडारणगत रो काम घरणो करता. केया-सुण्या वै मनपर मुनीम राख लियो. बापूजी रौं लिहाज रो बखरंग कर-कर' र हूँती मेहरबानी जताई, परण मैं जाण्यो कै आपां नै पेट पाळरणों है, इ सारू लागग्यो. श्रा हेली जद फूटोड़ी न ही" मैं अर म्हारो छोरो इस में वरण लागग्या. केई बरस निकळया भर · 'तद' ई सेठारी नौकरी में छोड़ दीनी. सेठ अडाणगत र धंधे में कसाई सूई बढ़'र हा. लुगायां रा घाघरिया तकात अंडारण मेल लेवता. कित्ता खेत र कित्ता घर सेठा रै गोडे हेठै हा इरण रो कोई दाज न हो. गामरा किरसारणा नै सेठ र आगे कळपता देख र म्हारी छाती भरीज जावती. किताई मिनख - लुगाई ब्याज में सेठी र हाळीपों करता. म्हारी रय-रैयन प्राय जावतो. पाट रो गिध में दिन में सू सिया ताई माथों दियोड़ा वै मजूर अबै कठे है ? 'बाता याद करने हियो फोटरण लागतो- के साल काळ पड्यो. चौफेर भूख रा भतूलिया बाज हा भूखा-तिसा लोगों री सेठा र भीड़ लाग जावतो. वीं दिनळे रो नजारों मन्ने में कदम याद है. लुगाई पर टावर नै गोदी में लियां सेठां
|
इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर भारत में काफी तेजी से बढ़ रहा है जिसमें सबसे ज्यादा संख्या इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटर की है। जिसमें आज हम बात कर रहे हैं इलेक्ट्रिक बाइक की मौजूदा रेंज में कोमाकी रेंजर (Komaki Ranger) के बारे में जो न सिर्फ अपनी रेंज के लिए पसंद की जाती है बल्कि अपने क्रूजर डिजाइन के लिए भी पसंद की जाती है।
अगर आप इलेक्ट्रिक बाइक पसंद करते हैं या खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो बिना देर किए बतौर विकल्प यहां जान लीजिए कोमाकी रेंजर (Komaki Ranger) की कीमत से लेकर रेंज, टॉप स्पीड, फीचर्स और स्पेसिफिकेशन की कंप्लीट डिटेल।
कोमाकी रेंजर इलेक्ट्रिक बाइक में 72V, 50Ah कैपेसिटी वाला लिथियम आयन बैटरी पैक लगाया गया है। इस बैटरी के साथ 5000w वाली इलेक्ट्रिक मोटर को जोड़ा गया है जो BLDC तकनीक पर आधारित है। कंपनी दावा करती है नॉर्मल होम चार्जर से चार्ज करने पर ये बैटरी पैक 4 घंटे में 0 से 90 प्रतिशत तक चार्ज हो जाता है।
कोमाकी रेंज और टॉप स्पीड को लेकर दावा करती है कि एक बार फुल चार्ज होने के बाद ये इलेक्ट्रिक बाइक 200 से 250 किलोमीटर की रेंज देती है और इस रेंज के साथ 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा की टॉप स्पीड मिलती है।
ब्रेकिंग सिस्टम की बात करें तो कोमाकी रेंज के दोनों व्हील में कंपनी ने डिस्क ब्रेक लगाया है जिसके साथ अलॉय व्हील और ट्यूबलेस टायर को जोड़ा गया है। सस्पेंशन सिस्टम में इसके फ्रंट में टेलिस्कोपिक फ्रंट फोर्क्स और रियर में टेलीस्कोपिक शॉक एब्जॉर्बर को लगाया गया है।
फीचर्स की बात करें तो कंपनी ने कोमाकी रेंजर में कंपनी ने पुश बटन स्टार्ट, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, कॉल-एसएमएस अलर्ट, यूएसबी चार्जिंग पोर्ट, क्रूज कंट्रोल, एक्सटर्नल स्पीकर, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट कंसोल, डिजिटल स्पीडोमीटर, डिजिटल ट्रिप मीटर, डुअल साउंड पाइप विद फ्लेम इफेक्ट, फ्रंट बॉडी गार्ड, टर्बो मोड, रियर प्रोटेक्शन गार्ड, गियर मोड, एलईडी हेडलाइट, एलईडी टेल लाइट, एलईडी टर्न सिग्नल लैंप और लो बैटरी इंडिकेटर जैसे फीचर्स को दिया गया है।
कीमत की बात करें तो कंपनी ने कोमाकी रेंजर इलेक्ट्रिक बाइक को 1,85,505 रुपये की शुरुआती कीमत (एक्स शोरूम, दिल्ली) के साथ मार्केट में उतारा है।
|
इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर भारत में काफी तेजी से बढ़ रहा है जिसमें सबसे ज्यादा संख्या इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटर की है। जिसमें आज हम बात कर रहे हैं इलेक्ट्रिक बाइक की मौजूदा रेंज में कोमाकी रेंजर के बारे में जो न सिर्फ अपनी रेंज के लिए पसंद की जाती है बल्कि अपने क्रूजर डिजाइन के लिए भी पसंद की जाती है। अगर आप इलेक्ट्रिक बाइक पसंद करते हैं या खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो बिना देर किए बतौर विकल्प यहां जान लीजिए कोमाकी रेंजर की कीमत से लेकर रेंज, टॉप स्पीड, फीचर्स और स्पेसिफिकेशन की कंप्लीट डिटेल। कोमाकी रेंजर इलेक्ट्रिक बाइक में बहत्तर वोल्ट, पचासAh कैपेसिटी वाला लिथियम आयन बैटरी पैक लगाया गया है। इस बैटरी के साथ पाँच हज़ारw वाली इलेक्ट्रिक मोटर को जोड़ा गया है जो BLDC तकनीक पर आधारित है। कंपनी दावा करती है नॉर्मल होम चार्जर से चार्ज करने पर ये बैटरी पैक चार घंटाटे में शून्य से नब्बे प्रतिशत तक चार्ज हो जाता है। कोमाकी रेंज और टॉप स्पीड को लेकर दावा करती है कि एक बार फुल चार्ज होने के बाद ये इलेक्ट्रिक बाइक दो सौ से दो सौ पचास किलोग्राममीटर की रेंज देती है और इस रेंज के साथ सत्तर से अस्सी किलोग्राममीटर प्रति घंटा की टॉप स्पीड मिलती है। ब्रेकिंग सिस्टम की बात करें तो कोमाकी रेंज के दोनों व्हील में कंपनी ने डिस्क ब्रेक लगाया है जिसके साथ अलॉय व्हील और ट्यूबलेस टायर को जोड़ा गया है। सस्पेंशन सिस्टम में इसके फ्रंट में टेलिस्कोपिक फ्रंट फोर्क्स और रियर में टेलीस्कोपिक शॉक एब्जॉर्बर को लगाया गया है। फीचर्स की बात करें तो कंपनी ने कोमाकी रेंजर में कंपनी ने पुश बटन स्टार्ट, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, कॉल-एसएमएस अलर्ट, यूएसबी चार्जिंग पोर्ट, क्रूज कंट्रोल, एक्सटर्नल स्पीकर, डिजिटल इंस्ट्रूमेंट कंसोल, डिजिटल स्पीडोमीटर, डिजिटल ट्रिप मीटर, डुअल साउंड पाइप विद फ्लेम इफेक्ट, फ्रंट बॉडी गार्ड, टर्बो मोड, रियर प्रोटेक्शन गार्ड, गियर मोड, एलईडी हेडलाइट, एलईडी टेल लाइट, एलईडी टर्न सिग्नल लैंप और लो बैटरी इंडिकेटर जैसे फीचर्स को दिया गया है। कीमत की बात करें तो कंपनी ने कोमाकी रेंजर इलेक्ट्रिक बाइक को एक,पचासी,पाँच सौ पाँच रुपयापये की शुरुआती कीमत के साथ मार्केट में उतारा है।
|
खराब मौसम के चलते ट्रेनों का विलंब से अकबरपुर पहुंचने का सिलसिला जारी है। रविवार को भी एक तरफ जहां पटना-मथुरा अप एक्सप्रेस निरस्त होने की जानकारी यात्रियों को दी गई तो वहीं सात ट्रेनें घंटों विलंब से अकबरपुर पहुंची। पटना-मथुरा एक्सप्रेस के निरस्त होने से 11 यात्रियों को टिकट कैंसिल कराना पड़ा। गौरतलब है कि घने कोहरे के चलते ट्रेनों की रफ्तार भी धीमी हो गई है। इससे न सिर्फ ट्रेने निरस्त हो रही हैं बल्कि घंटों विलंब से अकबरपुर पहुंच रही हैं। इससे यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच शनिवार रात 10 बजे अकबरपुर पहुंचने वाली पटना-मथुरा अप एक्सप्रेस निरस्त होने की जानकारी यात्रियों को दी गई। इससे अकबरपुर स्टेशन पहुंचे यात्रियों को भारी समस्या उठानी पड़ी।
|
खराब मौसम के चलते ट्रेनों का विलंब से अकबरपुर पहुंचने का सिलसिला जारी है। रविवार को भी एक तरफ जहां पटना-मथुरा अप एक्सप्रेस निरस्त होने की जानकारी यात्रियों को दी गई तो वहीं सात ट्रेनें घंटों विलंब से अकबरपुर पहुंची। पटना-मथुरा एक्सप्रेस के निरस्त होने से ग्यारह यात्रियों को टिकट कैंसिल कराना पड़ा। गौरतलब है कि घने कोहरे के चलते ट्रेनों की रफ्तार भी धीमी हो गई है। इससे न सिर्फ ट्रेने निरस्त हो रही हैं बल्कि घंटों विलंब से अकबरपुर पहुंच रही हैं। इससे यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच शनिवार रात दस बजे अकबरपुर पहुंचने वाली पटना-मथुरा अप एक्सप्रेस निरस्त होने की जानकारी यात्रियों को दी गई। इससे अकबरपुर स्टेशन पहुंचे यात्रियों को भारी समस्या उठानी पड़ी।
|
आजकल ऑनलाइन पेमेंट का चलन काफी ज्यादा है. इससे आप एक जगह से दूसरी जगह पैसे मिनटों में भेज सकते है. ऑनलाइन पेमेंट हमारे जीवन और कामकाज करने के तरीके का अहम हिस्सा बन गया है. ऐसे में Google द्वार बदले हुए नियम जानने सभी के लिए बेहद जरूरी है. यह सभी बदलाव 1 जनवरी 2022 से किये जायेंगे. इन बदले हुए नियमों का प्रभाव Google Ads, Google Playstore, Youtube सहित GooglePay पर पड़ेगा.
अगर आप भी Google की एप द्वारा Online Payment करते है तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. तक कंपनी गूगल भारतीय रिजर्व बैंक(RBI) की गाइडलाइन्स के अनुसार Online Payment के नियमों में 1 जनवरी 2022 से बदलाव करने जा रही है. इन बदले हुए नियमों का असर करोड़ो यूजर्स पर पड़ सकता है.
नए नियमों के अनुसार 1 जनवरी 2022 से Google ग्राहकों की कार्ड डिटेल यानी की CVV नंबरऔर एक्सपायरी डेट को सेव नहीं करेगा. इस नियम के अनुसार GooglePay इस्तेमाल करने वाले लोगों को हर पैमेंट से पहले अपनी कार्ड डिटेल भरनी होगी. सुरक्षा के लिहाज से ये अच्छा नियम माना जा रहा है. आरबीआई द्वारा ऑनलाइन पेमेंट को लेकर समय-समय पर कई बदलाव किये जाते है. इसी कड़ी में आरबीआई की नई गाइडलाइन्स जारी की गई है.
Google द्वारा किये गए इन बदलावों के कारण करोड़ो यूजर्स प्रभावित होंगे, क्योंकि अब उन्हें मैन्युअली अपनी कार्ड डिटेल्स हर ट्रांसेक्शन से पहले भरनी होगी. ऐसे में लाजमी है कि बहुत से यूजर्स को यह नियम पसंद नहीं आये. लेकिन इस बदलाव से यूजर्स की संवेदनशील जानकारियां लीक होने से बच जाएगी.
|
आजकल ऑनलाइन पेमेंट का चलन काफी ज्यादा है. इससे आप एक जगह से दूसरी जगह पैसे मिनटों में भेज सकते है. ऑनलाइन पेमेंट हमारे जीवन और कामकाज करने के तरीके का अहम हिस्सा बन गया है. ऐसे में Google द्वार बदले हुए नियम जानने सभी के लिए बेहद जरूरी है. यह सभी बदलाव एक जनवरी दो हज़ार बाईस से किये जायेंगे. इन बदले हुए नियमों का प्रभाव Google Ads, Google Playstore, Youtube सहित GooglePay पर पड़ेगा. अगर आप भी Google की एप द्वारा Online Payment करते है तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. तक कंपनी गूगल भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन्स के अनुसार Online Payment के नियमों में एक जनवरी दो हज़ार बाईस से बदलाव करने जा रही है. इन बदले हुए नियमों का असर करोड़ो यूजर्स पर पड़ सकता है. नए नियमों के अनुसार एक जनवरी दो हज़ार बाईस से Google ग्राहकों की कार्ड डिटेल यानी की CVV नंबरऔर एक्सपायरी डेट को सेव नहीं करेगा. इस नियम के अनुसार GooglePay इस्तेमाल करने वाले लोगों को हर पैमेंट से पहले अपनी कार्ड डिटेल भरनी होगी. सुरक्षा के लिहाज से ये अच्छा नियम माना जा रहा है. आरबीआई द्वारा ऑनलाइन पेमेंट को लेकर समय-समय पर कई बदलाव किये जाते है. इसी कड़ी में आरबीआई की नई गाइडलाइन्स जारी की गई है. Google द्वारा किये गए इन बदलावों के कारण करोड़ो यूजर्स प्रभावित होंगे, क्योंकि अब उन्हें मैन्युअली अपनी कार्ड डिटेल्स हर ट्रांसेक्शन से पहले भरनी होगी. ऐसे में लाजमी है कि बहुत से यूजर्स को यह नियम पसंद नहीं आये. लेकिन इस बदलाव से यूजर्स की संवेदनशील जानकारियां लीक होने से बच जाएगी.
|
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
|
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
|
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः यूनेस्को ने कोलकाता की दुर्गा पूजा को सांस्कृतिक विरासत का दर्जा दिया है। यूनेस्को का आभार जताने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार को एक मेगा रैली का आयोजन किया। इस रैली में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। यूनेस्को ने दिसंबर 2021 में कोलकाता की दुर्गा पूजा को अपनी सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया था। दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार है। ममता बनर्जी ने इस बारे में कहा कि कोलकाता की दुर्गा पूजा को यूनेस्को द्वारा सांस्कृतिक विरासत का टैग दिया गया है, जो हम सभी के लिए गर्व का क्षण है। दुर्गा पूजा को मिले इस सम्मान का जश्न मनाने के लिए हम 1 सितंबर को एक बड़ी रैली का आयोजन कर रहे हैं। इस साल हमारा दुर्गा उत्सव एक महीने पहले शुरू हो रहा है। हम सब यूनेस्को को धन्यवाद देंगे।
|
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूजः यूनेस्को ने कोलकाता की दुर्गा पूजा को सांस्कृतिक विरासत का दर्जा दिया है। यूनेस्को का आभार जताने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार को एक मेगा रैली का आयोजन किया। इस रैली में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। यूनेस्को ने दिसंबर दो हज़ार इक्कीस में कोलकाता की दुर्गा पूजा को अपनी सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया था। दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार है। ममता बनर्जी ने इस बारे में कहा कि कोलकाता की दुर्गा पूजा को यूनेस्को द्वारा सांस्कृतिक विरासत का टैग दिया गया है, जो हम सभी के लिए गर्व का क्षण है। दुर्गा पूजा को मिले इस सम्मान का जश्न मनाने के लिए हम एक सितंबर को एक बड़ी रैली का आयोजन कर रहे हैं। इस साल हमारा दुर्गा उत्सव एक महीने पहले शुरू हो रहा है। हम सब यूनेस्को को धन्यवाद देंगे।
|
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने एक ऐसी मांग की है जिसके बाद सवाल खड़े हो गए हैं कि, कमलनाथ कहीं पार्टी की नीतियों को दरकिनार तो नहीं कर रहे।
दरअसल पिछली कई दिनों से कांग्रेस केंद्र की बीजेपी सरकार को नीट और जेईई परीक्षा कराने को लेकर घेर रही थी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं ने परीक्षा न कराने की मांग की। इस मामले को लेकर बड़े स्तर पर सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक कैंपेन चलाई गई लेकिन कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती नोटिफिकेशन जारी करने की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि प्रदेश में पुलिस भर्ती के लिये हमारी सरकार में प्रक्रिया शुरू हुई थी किन्तु हमारी सरकार बीच में ही गिरा दी गयी। प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
प्रदेश में पुलिस भर्ती के लिये हमारी सरकार में प्रक्रिया शुरू हुई थी किन्तु हमारी सरकार बीच में ही गिरा दी गयी।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि आज प्रदेश में युवा रोज़गार को लेकर दर- दर भटक रहा है, रोज़गार के अभाव में अपनी जान तक दे रहा है, फिर भी भाजपा सरकार इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही है और वो सिर्फ़ झूठी घोषणाओ से ही पेट भरने का काम कर रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि बेरोज़गार युवा निरंतर भर्ती शुरू करने की मांग कर रहे है लेकिन सरकार का रवैया इस मामले में उदासीन बना हुआ है। मैं सरकार से मांग करता हूं कि पुलिस भर्ती की प्रक्रिया तत्काल शुरू कर, इस संबंध में शीघ्र नोटिफ़िकेशन निकाला जाये।
कमलनाथ ने जो मांग की है उसमें छात्रों का हित है और कोई बुराई नहीं है लेकिन उनकी ये मांग करने की टाइमिंग थोड़ा गलत है क्योंकि एक ओर जब उनकी पार्टी कोरोना महामारी का हवाला देकर पहले से तय परीक्षाएं टालने की मांग कर रही है उस समय कमलनाथ का परीक्षा के लिए शीघ्र नोटिफिकेशन जारी करने की मांग पार्टी के एजेंडे पर सवालिया निशान खड़े करती है।
|
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने एक ऐसी मांग की है जिसके बाद सवाल खड़े हो गए हैं कि, कमलनाथ कहीं पार्टी की नीतियों को दरकिनार तो नहीं कर रहे। दरअसल पिछली कई दिनों से कांग्रेस केंद्र की बीजेपी सरकार को नीट और जेईई परीक्षा कराने को लेकर घेर रही थी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं ने परीक्षा न कराने की मांग की। इस मामले को लेकर बड़े स्तर पर सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक कैंपेन चलाई गई लेकिन कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती नोटिफिकेशन जारी करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि प्रदेश में पुलिस भर्ती के लिये हमारी सरकार में प्रक्रिया शुरू हुई थी किन्तु हमारी सरकार बीच में ही गिरा दी गयी। प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। प्रदेश में पुलिस भर्ती के लिये हमारी सरकार में प्रक्रिया शुरू हुई थी किन्तु हमारी सरकार बीच में ही गिरा दी गयी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि आज प्रदेश में युवा रोज़गार को लेकर दर- दर भटक रहा है, रोज़गार के अभाव में अपनी जान तक दे रहा है, फिर भी भाजपा सरकार इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही है और वो सिर्फ़ झूठी घोषणाओ से ही पेट भरने का काम कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि बेरोज़गार युवा निरंतर भर्ती शुरू करने की मांग कर रहे है लेकिन सरकार का रवैया इस मामले में उदासीन बना हुआ है। मैं सरकार से मांग करता हूं कि पुलिस भर्ती की प्रक्रिया तत्काल शुरू कर, इस संबंध में शीघ्र नोटिफ़िकेशन निकाला जाये। कमलनाथ ने जो मांग की है उसमें छात्रों का हित है और कोई बुराई नहीं है लेकिन उनकी ये मांग करने की टाइमिंग थोड़ा गलत है क्योंकि एक ओर जब उनकी पार्टी कोरोना महामारी का हवाला देकर पहले से तय परीक्षाएं टालने की मांग कर रही है उस समय कमलनाथ का परीक्षा के लिए शीघ्र नोटिफिकेशन जारी करने की मांग पार्टी के एजेंडे पर सवालिया निशान खड़े करती है।
|
फल उन सभी पोषक तत्वों का भंडार हैं, जो शरीर के बेहतर कामकाज के लिए जरूरी है। फलों में विटामिन्स, फाइबर, आयरन, कैल्शियम समेत तमाम तत्व पाए जाते हैं। फलों का नियमित रूप से सेवन करने से कैंसर सहित तमाम गंभीर बीमारियों से बचने और मुकाबला करने में मदद मिलती है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि फलों की तरह उनके बीज भी सेहत के लिए लाभदायक हैं। सभी फलों के तो नहीं लेकिन कुछ फलों के बीजों में वो सभी गुण होते हैं, जिनमें रोगों से लड़ने की क्षमता होती है। हम आपको अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए उन फलों के बीजों के बारे में बता रहे हैं जिनका आपको सेवन करना चाहिए।
तरबूज एक ऐसा मीठा और सुपर कूल फल है, जो गर्मियों में खाया जाता है। अधिकतर लोग इसे खाते समय इसके काले बीजों को हटा देते हैं। लेकिन क्या वास्तव में जानते हैं कि तरबूज के बीज विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होते हैं जिनका उपयोग मुख्य रूप से मुंहासों के इलाज के लिए किया जाता है और समग्र रूप से बेहतर त्वचा पाने में मदद करता है। तरबूज के बीज भून कर खा सकते हैं। इन्हें सीधे फल से खाने में कोई बुराई नहीं है क्योंकि ये पचाने में आसान होते हैं।
बढ़िया स्वाद के अलावा, पपीता एक पौष्टिक फल है। अन्य फलों की तरह, हम खाने से पहले बीजों को फेंक देते हैं। पपीते के बीज पपैन नामक एंजाइम से भरपूर होते हैं, जो पाचन क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।
पपीते के बीज खाना बिल्कुल ठीक है। वास्तव में, यह आपके पाचन तंत्र और समग्र स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। आप उन्हें फलों के साथ चबा सकते हैं और उनका ताजा स्वाद ले सकते हैं। आप इन्हें अपने सलाद के लिए मसाला के रूप में उपयोग कर सकते हैं।
अनार एक ऐसा फल है जो कई बीमारियां दूर करता है। इसका रस पीने से खून की कमी और पेशाब से जुड़े रोगों में आराम मिलता है। इस ठंडे फल में शरीर के लिए कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं। इसी तरह इसके बीज भी किसी माबम इसका पाउडर मिलाकर खा सकते हैं।
एवोकाडो सबसे स्वास्थ्यप्रद फलों में से एक है। हालांकि, कुछ शोधों ने साबित किया है कि एवोकैडो के बीज भी सेहत के मामले में कम नहीं हैं। यह हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हैं।
जब आप एक एवोकैडो में काटते हैं, तो भूरे रंग की त्वचा को सूखने से पहले छील लें, फिर अपने बीज को एक ब्लेंडर में तब तक रखें जब तक कि एक पाउडर न बन जाए। आप इसे स्मूदी में मिलाकर पी सकते हैं।
संतरा विटामिन सी का भंडार है और इसके सेवन से स्किन से लेकर कई अंगों ओ लाभ होता है। संतरे का रस पीने से ऊर्जा मिलती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि संतरे के बीज भी काफी लाभदायक होते हैं। संतरे के बीजों का सेवन संतरा खाते समय किया जा सकता है या ऊर्जा बढ़ाने के लिए भोजन और पेय के ऊपर डाला जा सकता है।
नाशपाती एक ऐसा फल है जिसमें विभिन्न प्रकार के औषधीय और जैविक गुण होते हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक फायदेमंद होते हैं। दूसरी ओर इसके बीज कैल्शियम सहित उच्च मात्रा में पोषक तत्वों से भरे होते हैं जो स्वस्थ दांतों के विकास में योगदान करते हैं। आप उन्हें स्वास्थ्य स्टोर से खरीद सकते हैं और उनका सेवन कर सकते हैं।
|
फल उन सभी पोषक तत्वों का भंडार हैं, जो शरीर के बेहतर कामकाज के लिए जरूरी है। फलों में विटामिन्स, फाइबर, आयरन, कैल्शियम समेत तमाम तत्व पाए जाते हैं। फलों का नियमित रूप से सेवन करने से कैंसर सहित तमाम गंभीर बीमारियों से बचने और मुकाबला करने में मदद मिलती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फलों की तरह उनके बीज भी सेहत के लिए लाभदायक हैं। सभी फलों के तो नहीं लेकिन कुछ फलों के बीजों में वो सभी गुण होते हैं, जिनमें रोगों से लड़ने की क्षमता होती है। हम आपको अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए उन फलों के बीजों के बारे में बता रहे हैं जिनका आपको सेवन करना चाहिए। तरबूज एक ऐसा मीठा और सुपर कूल फल है, जो गर्मियों में खाया जाता है। अधिकतर लोग इसे खाते समय इसके काले बीजों को हटा देते हैं। लेकिन क्या वास्तव में जानते हैं कि तरबूज के बीज विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होते हैं जिनका उपयोग मुख्य रूप से मुंहासों के इलाज के लिए किया जाता है और समग्र रूप से बेहतर त्वचा पाने में मदद करता है। तरबूज के बीज भून कर खा सकते हैं। इन्हें सीधे फल से खाने में कोई बुराई नहीं है क्योंकि ये पचाने में आसान होते हैं। बढ़िया स्वाद के अलावा, पपीता एक पौष्टिक फल है। अन्य फलों की तरह, हम खाने से पहले बीजों को फेंक देते हैं। पपीते के बीज पपैन नामक एंजाइम से भरपूर होते हैं, जो पाचन क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। पपीते के बीज खाना बिल्कुल ठीक है। वास्तव में, यह आपके पाचन तंत्र और समग्र स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। आप उन्हें फलों के साथ चबा सकते हैं और उनका ताजा स्वाद ले सकते हैं। आप इन्हें अपने सलाद के लिए मसाला के रूप में उपयोग कर सकते हैं। अनार एक ऐसा फल है जो कई बीमारियां दूर करता है। इसका रस पीने से खून की कमी और पेशाब से जुड़े रोगों में आराम मिलता है। इस ठंडे फल में शरीर के लिए कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं। इसी तरह इसके बीज भी किसी माबम इसका पाउडर मिलाकर खा सकते हैं। एवोकाडो सबसे स्वास्थ्यप्रद फलों में से एक है। हालांकि, कुछ शोधों ने साबित किया है कि एवोकैडो के बीज भी सेहत के मामले में कम नहीं हैं। यह हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हैं। जब आप एक एवोकैडो में काटते हैं, तो भूरे रंग की त्वचा को सूखने से पहले छील लें, फिर अपने बीज को एक ब्लेंडर में तब तक रखें जब तक कि एक पाउडर न बन जाए। आप इसे स्मूदी में मिलाकर पी सकते हैं। संतरा विटामिन सी का भंडार है और इसके सेवन से स्किन से लेकर कई अंगों ओ लाभ होता है। संतरे का रस पीने से ऊर्जा मिलती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि संतरे के बीज भी काफी लाभदायक होते हैं। संतरे के बीजों का सेवन संतरा खाते समय किया जा सकता है या ऊर्जा बढ़ाने के लिए भोजन और पेय के ऊपर डाला जा सकता है। नाशपाती एक ऐसा फल है जिसमें विभिन्न प्रकार के औषधीय और जैविक गुण होते हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक फायदेमंद होते हैं। दूसरी ओर इसके बीज कैल्शियम सहित उच्च मात्रा में पोषक तत्वों से भरे होते हैं जो स्वस्थ दांतों के विकास में योगदान करते हैं। आप उन्हें स्वास्थ्य स्टोर से खरीद सकते हैं और उनका सेवन कर सकते हैं।
|
राजेश आईसीसी चैंपियंस ट्राफी में शिखर धवन और रोहित शर्मा के ओपनिंग में शानदार प्रदर्शन के कारण दो दिग्गजों वीरेन्द्र सहवाग और गौतम गंभीर के लिए टीम इंडिया में वापसी काफी मुश्किल हो गई है। भारतीय टीम चैंपियंस ट्राफी के सेमीफाइनल में जगह बना चुकी है। महेन्द्र सिंह धोनी की युवा टीम ने वह कारनामा कर दिखाया जो कोई अन्य भारतीय टीम अब तक नहीं कर पाई थी। धोनी के धुरंधरों ने पहली बार पाकिस्तानी टीम को चैंपियंस ट्राफी में शिकस्त दी। धोनी की टीम ने यह कारनामा अपने कई दिग्गज खिलाड़ियों के बिना किया है। टीम में सहवाग, गंभीर, युवराज सिंह, जहीर खान और हरभजन सिंह जैसे धुरंधर नहीं हैं और सचिन तेंदुलकर वनडे से संन्यास ले चुके हैं। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के खिलाफ लगातार तीन मैच जीतना काबिले तारीफ प्रदर्शन कहा जा सकता है। तीनों ही मैचों में शिखर और रोहित ने भारत को शानदार शुरुआत दी जिसका असर बाद की बल्लेबाजी में दिखाई दिया। दोनों ओपनरों ने दो शतकीय और एक अर्धशतकीय साझेदारी निभाई है जिससे भारतीय बल्लेबाजी अचानक ही मजबूत नजर आने लगी है। सहवाग और गंभीर की लगातार खराब फार्म का असर भारतीय बल्लेबाजी पर पड़ता था जिससे टीम का प्रदर्शन प्रभावित हो रहा था। हालांकि सहवाग और गंभीर के लिए अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है लेकिन फिलहाल उनकी टीम में वापसी की कोई संभावना नहीं दिखाई देती है। टीम में तीसरे ओपनर के रूप में दिनेश कार्तिक भी मौजूद हैं जो इस समय मध्य क्रम में खेल रहे हैं और जरूरत पड़ने पर ओपनिंग की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। सहवाग और गंभीर का आईपीएल-6 में कोई बहुत उम्दा प्रदर्शन नहीं रहा था जबकि शिखर, रोहित और कार्तिक तीनों ने ही आईपीएल में बेहतरीन बल्लेबाजी की थी। भारत को चैंपियंस ट्राफी के बाद वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के दौरे पर जाना है और चयनकर्ता इन दौरों में युवा टीम भेजना ही पसंद करेंगे ताकि 2015 विश्व कप के लिए अभी से टीम तैयार की जा सके। लेकिन इन युवा खिलाड़ियों को टीम में अपनी जगह बनाए रखने के लिए प्रदर्शन में निरंतरता दिखानी होगी। सहवाग और गंभीर को प्रदर्शन में ढिलाई दिखाने का नतीजा अपना स्थान गंवाकर चुकाना पड़ा था। भारतीय टीम जब चैंपियंस ट्राफी में खेल रही है तो गंभीर दिल्ली में स्थानीय टूर्नामेंटों में अपने हाथ आजमा रहे थे। चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन ने शिखर को आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज और रोहित को चैंपियंस ट्राफी में ओपनिंग में उतारने का जो दाव खेला था उसका सकारात्मक परिणाम टीम इंडिया की कामयाबी के रूप में सामने आया है।
|
राजेश आईसीसी चैंपियंस ट्राफी में शिखर धवन और रोहित शर्मा के ओपनिंग में शानदार प्रदर्शन के कारण दो दिग्गजों वीरेन्द्र सहवाग और गौतम गंभीर के लिए टीम इंडिया में वापसी काफी मुश्किल हो गई है। भारतीय टीम चैंपियंस ट्राफी के सेमीफाइनल में जगह बना चुकी है। महेन्द्र सिंह धोनी की युवा टीम ने वह कारनामा कर दिखाया जो कोई अन्य भारतीय टीम अब तक नहीं कर पाई थी। धोनी के धुरंधरों ने पहली बार पाकिस्तानी टीम को चैंपियंस ट्राफी में शिकस्त दी। धोनी की टीम ने यह कारनामा अपने कई दिग्गज खिलाड़ियों के बिना किया है। टीम में सहवाग, गंभीर, युवराज सिंह, जहीर खान और हरभजन सिंह जैसे धुरंधर नहीं हैं और सचिन तेंदुलकर वनडे से संन्यास ले चुके हैं। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के खिलाफ लगातार तीन मैच जीतना काबिले तारीफ प्रदर्शन कहा जा सकता है। तीनों ही मैचों में शिखर और रोहित ने भारत को शानदार शुरुआत दी जिसका असर बाद की बल्लेबाजी में दिखाई दिया। दोनों ओपनरों ने दो शतकीय और एक अर्धशतकीय साझेदारी निभाई है जिससे भारतीय बल्लेबाजी अचानक ही मजबूत नजर आने लगी है। सहवाग और गंभीर की लगातार खराब फार्म का असर भारतीय बल्लेबाजी पर पड़ता था जिससे टीम का प्रदर्शन प्रभावित हो रहा था। हालांकि सहवाग और गंभीर के लिए अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है लेकिन फिलहाल उनकी टीम में वापसी की कोई संभावना नहीं दिखाई देती है। टीम में तीसरे ओपनर के रूप में दिनेश कार्तिक भी मौजूद हैं जो इस समय मध्य क्रम में खेल रहे हैं और जरूरत पड़ने पर ओपनिंग की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। सहवाग और गंभीर का आईपीएल-छः में कोई बहुत उम्दा प्रदर्शन नहीं रहा था जबकि शिखर, रोहित और कार्तिक तीनों ने ही आईपीएल में बेहतरीन बल्लेबाजी की थी। भारत को चैंपियंस ट्राफी के बाद वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के दौरे पर जाना है और चयनकर्ता इन दौरों में युवा टीम भेजना ही पसंद करेंगे ताकि दो हज़ार पंद्रह विश्व कप के लिए अभी से टीम तैयार की जा सके। लेकिन इन युवा खिलाड़ियों को टीम में अपनी जगह बनाए रखने के लिए प्रदर्शन में निरंतरता दिखानी होगी। सहवाग और गंभीर को प्रदर्शन में ढिलाई दिखाने का नतीजा अपना स्थान गंवाकर चुकाना पड़ा था। भारतीय टीम जब चैंपियंस ट्राफी में खेल रही है तो गंभीर दिल्ली में स्थानीय टूर्नामेंटों में अपने हाथ आजमा रहे थे। चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन ने शिखर को आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज और रोहित को चैंपियंस ट्राफी में ओपनिंग में उतारने का जो दाव खेला था उसका सकारात्मक परिणाम टीम इंडिया की कामयाबी के रूप में सामने आया है।
|
IMD के अनुसार, मैदानी भागों में न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने पर शीत लहर की घोषणा की जाती है। शीतलहर की घोषणा तब भी की जाती है जब न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस या उससे कम हो और सामान्य से 4. 5 डिग्री कम हो। न्यूनतम तापमान के दो डिग्री सेल्सियस रहने या सामान्य से 6. 4 डिग्री सेल्सियस से कम रहने पर 'भीषण' शीतलहर की घोषणा की जाती है।
|
IMD के अनुसार, मैदानी भागों में न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने पर शीत लहर की घोषणा की जाती है। शीतलहर की घोषणा तब भी की जाती है जब न्यूनतम तापमान दस डिग्री सेल्सियस या उससे कम हो और सामान्य से चार. पाँच डिग्री कम हो। न्यूनतम तापमान के दो डिग्री सेल्सियस रहने या सामान्य से छः. चार डिग्री सेल्सियस से कम रहने पर 'भीषण' शीतलहर की घोषणा की जाती है।
|
बेतिया . . . पुलिस ने अपराध की योजना बना रहे 10 बदमाशों को गिरफ्तार किया है। गुरुवार की रात्रि को पुलिस की टीम ने एस ड्राइव के दौरान मुफस्सिल थाना क्षेत्र से बदमाशों को गिरफ्तार किया. जिनसे पूछताछ की जा रही है. इनके पास से हथियार, सेलफोन, चाकू आदि बरामद किया गया है. पुलिस बरामद सेलफोन से कॉल का डिटेल्स खंगाल रही है. एसपी उपेंद्रनाथ वर्मा ने शुक्रवार को मुफस्सिल थाना परिसर में प्रेसवार्ता में बताया कि मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पर्वतीया टोला निवासी अजीत कुमार, नंदन कुमार, चरागाहा के मिथिलेश कुमार, विक्की कुमार, पूर्वी करगहिया के सिपाही कुमार, अनिल कुमार उर्फ सूखा, ओम प्रकाश कुमार, मनु राम, दीनानाथ कुमार तथा लौरिया थाना क्षेत्र के परोरहा निवासी गुड्डू यादव को गिरफ्तार किया गया है. उनके पास से 12 व 315 बोर का दो देसी तमंचा, पांच कारतूस, लोहे की दो चाकू व तीन बाइक जब्त किया गया है. बदमाशों के द्वारा झपट्टा मारकर छीने गए पांच मोबाइल को भी पुलिस ने बरामद किया है. एसपी ने बताया कि बदमाशों में से कई का आपराधिक इतिहास रहा है. वे पहले भी जेल जा चुके हैं. गिरफ्तार सिपाही कुमार व मिथिलेश कुमार को मुफस्सिल पुलिस पूर्व में चोरी के मामले में तथा अजीत कुमार को चाकूबाजी के मामले में जेल भेज चुकी है. जबकि पूर्वी चंपारण के रक्सौल में दर्ज शराब कांड के एक मामले में अनिल कुमार पूर्व में जेल जा चुका है. एसपी ने कहा कि शातिरों की गिरफ्तारी के बाद अपराध में कमी आएगी व नए वर्ष में अमन कायम करने में पुलिस को काफी मदद मिलेगी.
|
बेतिया . . . पुलिस ने अपराध की योजना बना रहे दस बदमाशों को गिरफ्तार किया है। गुरुवार की रात्रि को पुलिस की टीम ने एस ड्राइव के दौरान मुफस्सिल थाना क्षेत्र से बदमाशों को गिरफ्तार किया. जिनसे पूछताछ की जा रही है. इनके पास से हथियार, सेलफोन, चाकू आदि बरामद किया गया है. पुलिस बरामद सेलफोन से कॉल का डिटेल्स खंगाल रही है. एसपी उपेंद्रनाथ वर्मा ने शुक्रवार को मुफस्सिल थाना परिसर में प्रेसवार्ता में बताया कि मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पर्वतीया टोला निवासी अजीत कुमार, नंदन कुमार, चरागाहा के मिथिलेश कुमार, विक्की कुमार, पूर्वी करगहिया के सिपाही कुमार, अनिल कुमार उर्फ सूखा, ओम प्रकाश कुमार, मनु राम, दीनानाथ कुमार तथा लौरिया थाना क्षेत्र के परोरहा निवासी गुड्डू यादव को गिरफ्तार किया गया है. उनके पास से बारह व तीन सौ पंद्रह बोर का दो देसी तमंचा, पांच कारतूस, लोहे की दो चाकू व तीन बाइक जब्त किया गया है. बदमाशों के द्वारा झपट्टा मारकर छीने गए पांच मोबाइल को भी पुलिस ने बरामद किया है. एसपी ने बताया कि बदमाशों में से कई का आपराधिक इतिहास रहा है. वे पहले भी जेल जा चुके हैं. गिरफ्तार सिपाही कुमार व मिथिलेश कुमार को मुफस्सिल पुलिस पूर्व में चोरी के मामले में तथा अजीत कुमार को चाकूबाजी के मामले में जेल भेज चुकी है. जबकि पूर्वी चंपारण के रक्सौल में दर्ज शराब कांड के एक मामले में अनिल कुमार पूर्व में जेल जा चुका है. एसपी ने कहा कि शातिरों की गिरफ्तारी के बाद अपराध में कमी आएगी व नए वर्ष में अमन कायम करने में पुलिस को काफी मदद मिलेगी.
|
बिहार BJP के सबसे ज्यादा बोलनेवाले नेता सुशील मोदी गुरुवार को कुढ़नी में थे। उनकी सभा में 50 कुर्सियां थीं, जिनमें छह खाली रह गईं। इसका क्या अर्थ है बताइए?
पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुशील मोदी गुरुवार को कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करने पहुंचे थे। उनकी सभा के लिए आयोजकों ने 50 कुर्सियां रखी थीं। इससे लगता है कि खुद आयोजकों को भी अपने नेता सुशील मोदी की सभा का अंदाजा था। हद तो तब हो गई, जब 50 कुर्सियां भी भर नहीं पाईं। छह कुर्सियां खाली रह गईं। यह नौकरशाही डॉट कॉम नहीं कह रहा, बल्कि खुद बिहार भाजपा के बड़े नेता सुशील मोदी ने फोटो सोशल मीडिया में डाला है, जिसमें कोई भी गिन सकता है।
बिहार भाजपा के सबसे बड़े नेता की सभा में उपस्थित लोगों को कोई भी गिन सकता है। सौ से कम ही लोग सुनते दिख रहे हैं। इसका क्या अर्थ है बताइए?
भाजपा के सबसे ज्यादा बोलने वाले नेता सुशील मोदी हाल में गुजरात में भी चुनाव प्रचार करने गए थे। हालांकि उन्होंने वहां से अपनी किसी सभा का फोटो साझा नहीं किया, बल्कि कुछ लोगों के साथ मिलते हुए फोटो जारी किया था। गुजरात से ऐसे कई वीडियो वायरल हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सी सभा में खाली कुर्सियां दिख रही हैं। लेकिन कुढ़नी में तो हद हो गई। यहां उनकी पार्टी ने सिर्फ 50 कुर्सियां रखीं, वह भी नहीं भर पाईं।
50 कुर्सियां भी नहीं भर पाने का कारण क्या भाजपा की घटती लोकप्रियता का प्रमाण है या सुशील मोदी के प्रति कुढ़नी के मतदाताओं की उदासीनता है।
राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि भाजपा के सबसे बड़े नेता की सभा में जितने लोग हैं, उससे कई गुना ज्यादा लोग राजद के किसी भी नेता-विधायक के चाय दुकान पर खड़े होने पर जमा हो जाते हैं। तेजस्वी यादव सड़क किनारे कहीं खड़े हो जाएं, तो उसकी बात ही क्या!
|
बिहार BJP के सबसे ज्यादा बोलनेवाले नेता सुशील मोदी गुरुवार को कुढ़नी में थे। उनकी सभा में पचास कुर्सियां थीं, जिनमें छह खाली रह गईं। इसका क्या अर्थ है बताइए? पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुशील मोदी गुरुवार को कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करने पहुंचे थे। उनकी सभा के लिए आयोजकों ने पचास कुर्सियां रखी थीं। इससे लगता है कि खुद आयोजकों को भी अपने नेता सुशील मोदी की सभा का अंदाजा था। हद तो तब हो गई, जब पचास कुर्सियां भी भर नहीं पाईं। छह कुर्सियां खाली रह गईं। यह नौकरशाही डॉट कॉम नहीं कह रहा, बल्कि खुद बिहार भाजपा के बड़े नेता सुशील मोदी ने फोटो सोशल मीडिया में डाला है, जिसमें कोई भी गिन सकता है। बिहार भाजपा के सबसे बड़े नेता की सभा में उपस्थित लोगों को कोई भी गिन सकता है। सौ से कम ही लोग सुनते दिख रहे हैं। इसका क्या अर्थ है बताइए? भाजपा के सबसे ज्यादा बोलने वाले नेता सुशील मोदी हाल में गुजरात में भी चुनाव प्रचार करने गए थे। हालांकि उन्होंने वहां से अपनी किसी सभा का फोटो साझा नहीं किया, बल्कि कुछ लोगों के साथ मिलते हुए फोटो जारी किया था। गुजरात से ऐसे कई वीडियो वायरल हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सी सभा में खाली कुर्सियां दिख रही हैं। लेकिन कुढ़नी में तो हद हो गई। यहां उनकी पार्टी ने सिर्फ पचास कुर्सियां रखीं, वह भी नहीं भर पाईं। पचास कुर्सियां भी नहीं भर पाने का कारण क्या भाजपा की घटती लोकप्रियता का प्रमाण है या सुशील मोदी के प्रति कुढ़नी के मतदाताओं की उदासीनता है। राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि भाजपा के सबसे बड़े नेता की सभा में जितने लोग हैं, उससे कई गुना ज्यादा लोग राजद के किसी भी नेता-विधायक के चाय दुकान पर खड़े होने पर जमा हो जाते हैं। तेजस्वी यादव सड़क किनारे कहीं खड़े हो जाएं, तो उसकी बात ही क्या!
|
आख़िरकार सदर तहसील प्रशासन ने सीडीओ एसबी सिंह की नाराजगी के बाद सरकारी जमीन पर कब्जाधारकों द्वारा की गई धान बुवाई को जेसीबी मशीन से जुतवाकर उसको जल जीवन मिशन के अंतर्गत बनाई जाने वाली पानी टंकी निर्माण के लिए डीपीआरओ विभाग को सौंप दी है। मौके पर नायब तहसीलदार, राजस्व टीम व भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
रविवार को दोपहर बाद नायब तहसीलदार जमौर निवेदिता ठाकुर, नायब तहसीलदार सदर भानू प्रताप सिंह ने राजस्व टीम के साथ धन्यौरा गांव पहुंचकर जल जीवन मिशन के लिए चिन्हित लगभग डेढ़ बीघा सरकारी जमीन को जेसीबी मशीन की मदद से जुतवाते हुए अपने कब्जे में ले लिया। बता दें कि तहसील प्रशासन द्वारा इससे पहले भी उक्त जमीन को लेकर कई बार कार्यवाही की जा चुकी है, लेकिन टंकी निर्माण कार्य शुरू न होने से भू-माफियाओं ने पुनः जमीन पर कब्जा कर उसमें धान की फसल की बुवाई कर रखी थी। तहसील टीम ने सीडीओ एसबी के निर्देशन बाद उक्त जमीन में बोई गई लगभग डेढ़ बीघा धान की फसल को जुतवा दी। इस दौरान नायब तहसीलदार निवेदिता ठाकुर,भानू प्रताप सिंह, कानूनगो राजाराम मिश्रा, लेखपाल रामप्रवेश,अनूप, पुलिस प्रशासन मौजूद रहा।
|
आख़िरकार सदर तहसील प्रशासन ने सीडीओ एसबी सिंह की नाराजगी के बाद सरकारी जमीन पर कब्जाधारकों द्वारा की गई धान बुवाई को जेसीबी मशीन से जुतवाकर उसको जल जीवन मिशन के अंतर्गत बनाई जाने वाली पानी टंकी निर्माण के लिए डीपीआरओ विभाग को सौंप दी है। मौके पर नायब तहसीलदार, राजस्व टीम व भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। रविवार को दोपहर बाद नायब तहसीलदार जमौर निवेदिता ठाकुर, नायब तहसीलदार सदर भानू प्रताप सिंह ने राजस्व टीम के साथ धन्यौरा गांव पहुंचकर जल जीवन मिशन के लिए चिन्हित लगभग डेढ़ बीघा सरकारी जमीन को जेसीबी मशीन की मदद से जुतवाते हुए अपने कब्जे में ले लिया। बता दें कि तहसील प्रशासन द्वारा इससे पहले भी उक्त जमीन को लेकर कई बार कार्यवाही की जा चुकी है, लेकिन टंकी निर्माण कार्य शुरू न होने से भू-माफियाओं ने पुनः जमीन पर कब्जा कर उसमें धान की फसल की बुवाई कर रखी थी। तहसील टीम ने सीडीओ एसबी के निर्देशन बाद उक्त जमीन में बोई गई लगभग डेढ़ बीघा धान की फसल को जुतवा दी। इस दौरान नायब तहसीलदार निवेदिता ठाकुर,भानू प्रताप सिंह, कानूनगो राजाराम मिश्रा, लेखपाल रामप्रवेश,अनूप, पुलिस प्रशासन मौजूद रहा।
|
प्रतापगढ़. उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जंक्शन समेत दो और स्टेशन के नाम को बदल दिया गया है. प्रतापगढ़ जंक्शन अब मां बेल्हा देवी, अंतू स्टेशन मां चंद्रिका देवी धाम और विश्वनाथगंज शनिदेव धाम के नाम से जाना जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय से स्वीकृति मिलने के बाद इन तीनों स्टेशन के नाम को परिवर्तित करने के लिए पत्र जारी हो गया है. प्रतापगढ़ जंक्शन समेत दो स्टेशनों के नाम बदलने पर प्रतापगढ़ सांसद ने खुशी जाहिर की है.
प्रतापगढ़ सांसद संगम लाल गुप्ता ने प्रतापगढ़ जंक्शन, अंतू और विश्वनाथगंज रेलवे स्टेशन नाम बदलने का प्रस्ताव दो वर्ष पूर्व रेल मंत्रालय को भेजा था. उनके पत्र के आधार पर स्टेशन का नाम बदलने की पूरी कार्रवाई की गई. प्रतापगढ़, विश्वनाथगंज और अंतू स्टेशन का नाम बदल दिया गया है. जनपद में डेढ़ साल पहले रानीगंज के दांदूपुर स्टेशन का नाम मां बाराही धाम हो चुका है. अब गृह मंत्रालय ने तीन और स्टेशनों का नाम बदलने की अनुमति दी है. इसके लिए सांसद संगम लाल गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रेल मंत्रालय का आभार जताया है. उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशन का नाम परिवर्तन जन आस्था से जुड़ा है. यह जनपद के पौराणिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत वाले स्थल हैं. पर्यटन के विकास में मील के पत्थर साबित होंगे.
वहीं कौशांबी सांसद व भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव विनोद सोनकर ने वर्ष 2020 में जगद्गुरु कृपालुजी महाराज की जन्मस्थली मनगढ़ एवं कुंडा हरनामगंज रेलवे स्टेशन का बदलने का प्रस्ताव शासन को दिया था, उसके बाद रेल मंत्रालय और गृह मंत्रालय को भी पत्र भेजा था,अभी इसको लेकर प्रक्रिया चल रही है. सांसद संगम लाल गुप्ता का कहना है कि दो वर्ष पहले प्रतापगढ़ समेत तीन स्टेशन के नाम बदलकर धार्मिक स्थल पर रखने के लिए पत्र लिखा था. भारत सरकार के मिनिस्ट्री आफ होम अफेयर्स के अपर सचिव की ओर से प्रदेश सरकार के विशेष सचिव को भेजे पत्र में कहा गया है कि सांसद की ओर से जिले के तीन रेलवे स्टेशन के नाम परिवर्तित करने के प्रस्ताव पर भारत सरकार को कोई आपत्ति नहीं है. रेलवे स्टेशनों का नाम परिवर्तन करने का नोटिफिकेशन जारी करने और इसकी सूचना भारत सरकार को देने का निर्देश है. .
.
|
प्रतापगढ़. उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जंक्शन समेत दो और स्टेशन के नाम को बदल दिया गया है. प्रतापगढ़ जंक्शन अब मां बेल्हा देवी, अंतू स्टेशन मां चंद्रिका देवी धाम और विश्वनाथगंज शनिदेव धाम के नाम से जाना जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय से स्वीकृति मिलने के बाद इन तीनों स्टेशन के नाम को परिवर्तित करने के लिए पत्र जारी हो गया है. प्रतापगढ़ जंक्शन समेत दो स्टेशनों के नाम बदलने पर प्रतापगढ़ सांसद ने खुशी जाहिर की है. प्रतापगढ़ सांसद संगम लाल गुप्ता ने प्रतापगढ़ जंक्शन, अंतू और विश्वनाथगंज रेलवे स्टेशन नाम बदलने का प्रस्ताव दो वर्ष पूर्व रेल मंत्रालय को भेजा था. उनके पत्र के आधार पर स्टेशन का नाम बदलने की पूरी कार्रवाई की गई. प्रतापगढ़, विश्वनाथगंज और अंतू स्टेशन का नाम बदल दिया गया है. जनपद में डेढ़ साल पहले रानीगंज के दांदूपुर स्टेशन का नाम मां बाराही धाम हो चुका है. अब गृह मंत्रालय ने तीन और स्टेशनों का नाम बदलने की अनुमति दी है. इसके लिए सांसद संगम लाल गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रेल मंत्रालय का आभार जताया है. उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशन का नाम परिवर्तन जन आस्था से जुड़ा है. यह जनपद के पौराणिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत वाले स्थल हैं. पर्यटन के विकास में मील के पत्थर साबित होंगे. वहीं कौशांबी सांसद व भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव विनोद सोनकर ने वर्ष दो हज़ार बीस में जगद्गुरु कृपालुजी महाराज की जन्मस्थली मनगढ़ एवं कुंडा हरनामगंज रेलवे स्टेशन का बदलने का प्रस्ताव शासन को दिया था, उसके बाद रेल मंत्रालय और गृह मंत्रालय को भी पत्र भेजा था,अभी इसको लेकर प्रक्रिया चल रही है. सांसद संगम लाल गुप्ता का कहना है कि दो वर्ष पहले प्रतापगढ़ समेत तीन स्टेशन के नाम बदलकर धार्मिक स्थल पर रखने के लिए पत्र लिखा था. भारत सरकार के मिनिस्ट्री आफ होम अफेयर्स के अपर सचिव की ओर से प्रदेश सरकार के विशेष सचिव को भेजे पत्र में कहा गया है कि सांसद की ओर से जिले के तीन रेलवे स्टेशन के नाम परिवर्तित करने के प्रस्ताव पर भारत सरकार को कोई आपत्ति नहीं है. रेलवे स्टेशनों का नाम परिवर्तन करने का नोटिफिकेशन जारी करने और इसकी सूचना भारत सरकार को देने का निर्देश है. . .
|
मध्यप्रदेश। प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमितों की दौड़ लगातार जारी है, मध्यप्रदेश में तेजी से कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने से हड़कंप मचा हुआ है। संक्रमण की दौड़ में मध्यप्रदेश ने दस हजारी आंकड़ा पार कर लिया है। बता दें कि अनलॉक होने के बाद मध्यप्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या और बढ़ रही हैं। मिली जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस के नए मामले सामने आने से मची खलबली।
मध्यप्रदेश कोरोना के 192 नए मामले :
मध्यप्रदेश में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में बढ़त हो गई है, गुरुवार को कोरोना के 192 नए मामले सामने आए। इसके बाद राज्य में कोविड-19 से संक्रमितों की संख्या 10,241 तक पहुंच गयी। प्रदेश में पिछले 24 घंटें में इस बीमारी से चार की मौत की पुष्टि हुई है जिससे मध्यप्रदेश में मरने वालों की संख्या 431 हो गयी है। बता दे कि इंदौर में दो के अलावा बुरहानपुर और छिंदवाड़ा में एक-एक कोरोना संक्रमितों की जान गई है।
पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश में कोरोना के संक्रमण से इंदौर में दो और बुरहानपुर एवं छिन्दवाड़ा में एक-एक मरीज की मौत की पुष्टि हुई है।
भोपाल में एक साथ आये 85 नए पॉजिटिव :
भोपाल में कोरोना ने बढ़ाई चिंता :
भोपाल में कोरोना पॉजिटिव प्रकरण बढ़ने को लेकर चिंता जताई गई है इसी के चलते राजधानी में अब शनिवार और रविवार को लॉकडाउन रहेगा। इस दौरान बाजार नहीं खुलेंगे। सोमवार से शुक्रवार तक बाजार पूरी तरह खोलने की अनुमति रहेगी। यह फैसला मंत्रालय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई।
इंदौर में 41 आए नए मामले :
मध्यप्रदेश के इंदौर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में बढ़त हो गई है, बता दें कि जांच में यहां 41 नए कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आए। वही कोरोना से होने वाली मौतों का सिलसिला लगातार जारी है अब तक 163 की मौत हो चुकी है। इंदौर में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर महत्वपूर्ण कदम उठाये जा रहे हैं। इसके बावजूद भी इंदौर वायरस का गढ़ बनता जा रहा है।
मध्यप्रदेश में कोरोना संकट की स्थिति :
ताज़ा ख़बर पढ़ने के लिए आप हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। @rajexpresshindi के नाम से सर्च करें टेलीग्राम पर।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
|
मध्यप्रदेश। प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमितों की दौड़ लगातार जारी है, मध्यप्रदेश में तेजी से कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने से हड़कंप मचा हुआ है। संक्रमण की दौड़ में मध्यप्रदेश ने दस हजारी आंकड़ा पार कर लिया है। बता दें कि अनलॉक होने के बाद मध्यप्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या और बढ़ रही हैं। मिली जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस के नए मामले सामने आने से मची खलबली। मध्यप्रदेश कोरोना के एक सौ बानवे नए मामले : मध्यप्रदेश में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में बढ़त हो गई है, गुरुवार को कोरोना के एक सौ बानवे नए मामले सामने आए। इसके बाद राज्य में कोविड-उन्नीस से संक्रमितों की संख्या दस,दो सौ इकतालीस तक पहुंच गयी। प्रदेश में पिछले चौबीस घंटाटें में इस बीमारी से चार की मौत की पुष्टि हुई है जिससे मध्यप्रदेश में मरने वालों की संख्या चार सौ इकतीस हो गयी है। बता दे कि इंदौर में दो के अलावा बुरहानपुर और छिंदवाड़ा में एक-एक कोरोना संक्रमितों की जान गई है। पिछले चौबीस घंटाटे के दौरान प्रदेश में कोरोना के संक्रमण से इंदौर में दो और बुरहानपुर एवं छिन्दवाड़ा में एक-एक मरीज की मौत की पुष्टि हुई है। भोपाल में एक साथ आये पचासी नए पॉजिटिव : भोपाल में कोरोना ने बढ़ाई चिंता : भोपाल में कोरोना पॉजिटिव प्रकरण बढ़ने को लेकर चिंता जताई गई है इसी के चलते राजधानी में अब शनिवार और रविवार को लॉकडाउन रहेगा। इस दौरान बाजार नहीं खुलेंगे। सोमवार से शुक्रवार तक बाजार पूरी तरह खोलने की अनुमति रहेगी। यह फैसला मंत्रालय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई। इंदौर में इकतालीस आए नए मामले : मध्यप्रदेश के इंदौर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में बढ़त हो गई है, बता दें कि जांच में यहां इकतालीस नए कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आए। वही कोरोना से होने वाली मौतों का सिलसिला लगातार जारी है अब तक एक सौ तिरेसठ की मौत हो चुकी है। इंदौर में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर महत्वपूर्ण कदम उठाये जा रहे हैं। इसके बावजूद भी इंदौर वायरस का गढ़ बनता जा रहा है। मध्यप्रदेश में कोरोना संकट की स्थिति : ताज़ा ख़बर पढ़ने के लिए आप हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। @rajexpresshindi के नाम से सर्च करें टेलीग्राम पर। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
|
(मौलिक और अप्रकाशित)
सुंदर ग़ज़ल कही है आपने. मेरी तरफ से दाद हाजिर है..
आदरणीय कुल्लुवी जी एक अच्छी रचना के लिए बधाई .
|
सुंदर ग़ज़ल कही है आपने. मेरी तरफ से दाद हाजिर है.. आदरणीय कुल्लुवी जी एक अच्छी रचना के लिए बधाई .
|
लुधियाना/अमृतसर, 24 दिसंबर (निस/एजेंसी)
ब्रिटेन से आए 216 यात्रियों को संस्थागत आइसोलेशन में रखा जाएगा। सात यात्रियों और चालक दल के एक सदस्य में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उनके संपर्क में आए बाकी यात्रियों को पृथकवास में भेजने का फैसला किया गया है। यात्री अमृतसर समेत अलग-अलग जिलों के हैं। लंदन से एअर इंडिया की उड़ान मंगलवार को अमृतसर के श्री गुरु रामदासजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आयी थी। इसमें 250 यात्री और चालक दल के 22 सदस्य थे। जांच में आठ लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। मंगलवार को सभी लोगों की जांच की गयी और आठ लोग संक्रमित पाए गए। उधर, लुधियाना के एडीसी संदीप कुमार ने बताया कि ब्रिटेन से आया एक यात्री लुधियाना पहुंच गया और एक निजी अस्पताल में भर्ती हो गया। मरीज मूल रूप से अमृतसर का रहने वाला है। अब उसे दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में आइसोलेट कर दिया गया।
पंजाब में फिर एक दिन में कोरोना से 17 मरीजों की मौत हो गई जबकि 373 नये केस मिले। जालंधर, नवांशहर और गुरदासपुर में 3-3 मरीजों ने दम तोड़ दिया जबकि बठिंडा व कपूरथला में 2-2 और लुधियाना, मोहाली व होशियारपुर में एक-मरीज की जान चली गयी। मोहाली में 75, जालंधर में 57, पटियाला में 37, लुधियाना में 29, अमृतसर में 29, होशियारपुर में 16 नये मामले सामने आये।
|
लुधियाना/अमृतसर, चौबीस दिसंबर ब्रिटेन से आए दो सौ सोलह यात्रियों को संस्थागत आइसोलेशन में रखा जाएगा। सात यात्रियों और चालक दल के एक सदस्य में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उनके संपर्क में आए बाकी यात्रियों को पृथकवास में भेजने का फैसला किया गया है। यात्री अमृतसर समेत अलग-अलग जिलों के हैं। लंदन से एअर इंडिया की उड़ान मंगलवार को अमृतसर के श्री गुरु रामदासजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आयी थी। इसमें दो सौ पचास यात्री और चालक दल के बाईस सदस्य थे। जांच में आठ लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। मंगलवार को सभी लोगों की जांच की गयी और आठ लोग संक्रमित पाए गए। उधर, लुधियाना के एडीसी संदीप कुमार ने बताया कि ब्रिटेन से आया एक यात्री लुधियाना पहुंच गया और एक निजी अस्पताल में भर्ती हो गया। मरीज मूल रूप से अमृतसर का रहने वाला है। अब उसे दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में आइसोलेट कर दिया गया। पंजाब में फिर एक दिन में कोरोना से सत्रह मरीजों की मौत हो गई जबकि तीन सौ तिहत्तर नये केस मिले। जालंधर, नवांशहर और गुरदासपुर में तीन-तीन मरीजों ने दम तोड़ दिया जबकि बठिंडा व कपूरथला में दो-दो और लुधियाना, मोहाली व होशियारपुर में एक-मरीज की जान चली गयी। मोहाली में पचहत्तर, जालंधर में सत्तावन, पटियाला में सैंतीस, लुधियाना में उनतीस, अमृतसर में उनतीस, होशियारपुर में सोलह नये मामले सामने आये।
|
नये साल की शुरूआत होने वाली है, 2021 आने वाला है। साल 2020 कोरोना वायरस की वजह से काफी चुनौतियों भरा रहा। लेकिन, लोगों ने इससे नई सीख ली और आगे बढ़ रहे हैं। अब हर कोई ये जानने को बेताब है कि उसका नया साल कैसा बीतेगा? हम आपको बताते हैं अगर आप सिंह राशि के हैं तो आपका ये साल कैसा बीतने वाला है?
सिंह राशि वालों के लिए यह साल सामाजिक तौर पर बहुत अच्छा रहने वाला है। आप अपने कार्यों के जरिए समाज में नई पहचान बना सकते हैं वहीं इस राशि के कुछ लोग सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे। आपकी वाणी भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करेगी। आप नई योजनाएं बनाकर कार्यक्षेत्र और कारोबार में सफल हो सकते हैं वहीं इस राशि के कारोबारी जातकों को भी धन लाभ होने की पूरी संभावना है।
कैसा रहेगा सिंह राशि वालों का स्वास्थ्य?
सिंह राशि वालों को अपने स्वास्थ्य का इस साल बहुत ध्यान देना होगा, आपको ब्लड प्रेशर जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है। खासकर इस राशि के जो जातक 50 की उम्र पार कर चुके हैं उन्हें नियमित रूप से योग ध्यान करने की जरूरत होगी। साथ ही अपने खान-पान पर ध्यान देना होगा।
कैसा रहेगा निजी जीवन?
प्रेम संबंधों में इस राशि के जातकों को अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे आप अपने लवमेट को अच्छा महसूस कराने के लिए उनकी पसंद की चीजें उपहार दे सकते हैं। इस राशि के जातकों को उनके मित्रों का भी सहयोग प्राप्त होगा।
कैसा रहेगा पारिवारिक जीवन?
पारिवारिक जीवन पर दृष्टि डालें तो आपको धन संपत्ति मिलने के योग हैं। इस राशि के जो जातक तरल पदार्थों से जुड़े उद्योग में काम करते हैं उन्हें इस साल विशेष सफलता मिल सकती है। खुद को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए महान लोगों की जीवनी पढ़ सकते हैं।
|
नये साल की शुरूआत होने वाली है, दो हज़ार इक्कीस आने वाला है। साल दो हज़ार बीस कोरोना वायरस की वजह से काफी चुनौतियों भरा रहा। लेकिन, लोगों ने इससे नई सीख ली और आगे बढ़ रहे हैं। अब हर कोई ये जानने को बेताब है कि उसका नया साल कैसा बीतेगा? हम आपको बताते हैं अगर आप सिंह राशि के हैं तो आपका ये साल कैसा बीतने वाला है? सिंह राशि वालों के लिए यह साल सामाजिक तौर पर बहुत अच्छा रहने वाला है। आप अपने कार्यों के जरिए समाज में नई पहचान बना सकते हैं वहीं इस राशि के कुछ लोग सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे। आपकी वाणी भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करेगी। आप नई योजनाएं बनाकर कार्यक्षेत्र और कारोबार में सफल हो सकते हैं वहीं इस राशि के कारोबारी जातकों को भी धन लाभ होने की पूरी संभावना है। कैसा रहेगा सिंह राशि वालों का स्वास्थ्य? सिंह राशि वालों को अपने स्वास्थ्य का इस साल बहुत ध्यान देना होगा, आपको ब्लड प्रेशर जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है। खासकर इस राशि के जो जातक पचास की उम्र पार कर चुके हैं उन्हें नियमित रूप से योग ध्यान करने की जरूरत होगी। साथ ही अपने खान-पान पर ध्यान देना होगा। कैसा रहेगा निजी जीवन? प्रेम संबंधों में इस राशि के जातकों को अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे आप अपने लवमेट को अच्छा महसूस कराने के लिए उनकी पसंद की चीजें उपहार दे सकते हैं। इस राशि के जातकों को उनके मित्रों का भी सहयोग प्राप्त होगा। कैसा रहेगा पारिवारिक जीवन? पारिवारिक जीवन पर दृष्टि डालें तो आपको धन संपत्ति मिलने के योग हैं। इस राशि के जो जातक तरल पदार्थों से जुड़े उद्योग में काम करते हैं उन्हें इस साल विशेष सफलता मिल सकती है। खुद को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए महान लोगों की जीवनी पढ़ सकते हैं।
|
WTC Final में लगातार दूसरी हार से हैरान दिग्गजों की कतार में सचिन तेंदुलकर भी शामिल हैं। इंग्लैंड के द ओवल में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) फाइनल 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया की हार के बाद सचिन ने प्लेइंग इलेवन पर सवाल किया है।
सचिन ने ओवल में कैप्टन रोहित शर्मा की अगुवाई में उतरी इंडिया की प्लेइंग 11 से दुनिया के शीर्ष क्रम के टेस्ट गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन को बाहर करने पर हैरानी का इजहार किया।
बता दें कि पांच दिनों तक भारत पर हावी रहने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने रविवार को ओवल, लंदन में अपना पहला विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2023 का खिताब हासिल किया। भारत ने 63. 3 ओवरों में 234 रन बनाए और मोहम्मद शमी 13(8)* अंतिम खिलाड़ी के रूप में नाबाद रहे।
सचिन ने ट्विटर पर अश्विन को टैग कर लिखा, "मैं @ashwinravi99 को अंतिम एकादश में बाहर किए जाने का कारण समझने में विफल हूं। " उन्होंने कहा, अश्विन इस समय दुनिया का नंबर एक टेस्ट गेंदबाज हैं।
बकौल सचिन तेंदुलकर, "जैसा कि मैंने मैच से पहले उल्लेख किया था, कुशल स्पिनर हमेशा टर्निंग ट्रैक पर भरोसा नहीं करते हैं, वे हवा में ड्रिफ्ट का उपयोग करते हैं और अपनी विविधताओं को छिपाने के लिए पिच की सतह से उछाल हासिल करते हैं। "
सचिन ने कई अन्य दिग्गजों की तरह ऑस्ट्रेलियाई टीम में 5 बाएं हाथ के बल्लेबाजों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शीर्ष 8 बल्लेबाजों में कंगारुओं की प्लेइंग 11 में 5 लेप्टी बैटर थे। अश्विन इनके खिलाफ अधिक प्रभावी होते।
बता दें कि WTC Final की शुरुआत के बाद पहली पारी में ट्रैविस हेड और स्टीव स्मिथ ने शानदार शतक जड़े। इसी समय से ऑस्ट्रेलिया का टेस्ट में पलड़ा भारी हो गया। हालांकि, टीम इंडिया ने पांचवें दिन तक संघर्ष किया, लेकिन ऑस्ट्रेलियन अटैक के सामने टीम 234 के स्कोर पर ऑलआउट हो गई।
ट्रेविस हेड और स्टीव स्मिथ के शानदार 285 रनों की साझेदारी पर सचिन तेंदुलकर ने कहा, इस पार्टनरशिप से ऑस्ट्रेलिया की जीत की नींव रखी गई। उन्होंने कहा, टीम ऑस्ट्रेलिया को #WTCFinal जीतने पर बधाई।
सचिन ने कहा कि भारत को फाइनल मुकाबले में बने रहने के लिए पहली पारी में बड़ी बल्लेबाजी करनी थी, लेकिन वे नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि टीम इंडिया के लिए फाइनल मैच में कुछ चुनिंदा अच्छे पल आए।
टीम इंडिया की 201 रनों की इस हार के साथ भारत को पुरुषों की वैश्विक ट्रॉफी- वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप को जीतने का इंतजार और लंबा हो गया। इस चैंपियनशिप में पिछली बार भारत को न्यूजीलैंड के हाथों मात मिली थी।
|
WTC Final में लगातार दूसरी हार से हैरान दिग्गजों की कतार में सचिन तेंदुलकर भी शामिल हैं। इंग्लैंड के द ओवल में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल दो हज़ार तेईस में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया की हार के बाद सचिन ने प्लेइंग इलेवन पर सवाल किया है। सचिन ने ओवल में कैप्टन रोहित शर्मा की अगुवाई में उतरी इंडिया की प्लेइंग ग्यारह से दुनिया के शीर्ष क्रम के टेस्ट गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन को बाहर करने पर हैरानी का इजहार किया। बता दें कि पांच दिनों तक भारत पर हावी रहने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने रविवार को ओवल, लंदन में अपना पहला विश्व टेस्ट चैंपियनशिप दो हज़ार तेईस का खिताब हासिल किया। भारत ने तिरेसठ. तीन ओवरों में दो सौ चौंतीस रन बनाए और मोहम्मद शमी तेरह* अंतिम खिलाड़ी के रूप में नाबाद रहे। सचिन ने ट्विटर पर अश्विन को टैग कर लिखा, "मैं @ashwinraviनिन्यानवे को अंतिम एकादश में बाहर किए जाने का कारण समझने में विफल हूं। " उन्होंने कहा, अश्विन इस समय दुनिया का नंबर एक टेस्ट गेंदबाज हैं। बकौल सचिन तेंदुलकर, "जैसा कि मैंने मैच से पहले उल्लेख किया था, कुशल स्पिनर हमेशा टर्निंग ट्रैक पर भरोसा नहीं करते हैं, वे हवा में ड्रिफ्ट का उपयोग करते हैं और अपनी विविधताओं को छिपाने के लिए पिच की सतह से उछाल हासिल करते हैं। " सचिन ने कई अन्य दिग्गजों की तरह ऑस्ट्रेलियाई टीम में पाँच बाएं हाथ के बल्लेबाजों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शीर्ष आठ बल्लेबाजों में कंगारुओं की प्लेइंग ग्यारह में पाँच लेप्टी बैटर थे। अश्विन इनके खिलाफ अधिक प्रभावी होते। बता दें कि WTC Final की शुरुआत के बाद पहली पारी में ट्रैविस हेड और स्टीव स्मिथ ने शानदार शतक जड़े। इसी समय से ऑस्ट्रेलिया का टेस्ट में पलड़ा भारी हो गया। हालांकि, टीम इंडिया ने पांचवें दिन तक संघर्ष किया, लेकिन ऑस्ट्रेलियन अटैक के सामने टीम दो सौ चौंतीस के स्कोर पर ऑलआउट हो गई। ट्रेविस हेड और स्टीव स्मिथ के शानदार दो सौ पचासी रनों की साझेदारी पर सचिन तेंदुलकर ने कहा, इस पार्टनरशिप से ऑस्ट्रेलिया की जीत की नींव रखी गई। उन्होंने कहा, टीम ऑस्ट्रेलिया को #WTCFinal जीतने पर बधाई। सचिन ने कहा कि भारत को फाइनल मुकाबले में बने रहने के लिए पहली पारी में बड़ी बल्लेबाजी करनी थी, लेकिन वे नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि टीम इंडिया के लिए फाइनल मैच में कुछ चुनिंदा अच्छे पल आए। टीम इंडिया की दो सौ एक रनों की इस हार के साथ भारत को पुरुषों की वैश्विक ट्रॉफी- वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप को जीतने का इंतजार और लंबा हो गया। इस चैंपियनशिप में पिछली बार भारत को न्यूजीलैंड के हाथों मात मिली थी।
|
साउथ के जाने माने एक्टर विजय इस समय बहुत सुर्ख़ियों में बने हुए है वहीं टॉलीवुड फिल्म स्टार विजय, फिल्म फाइनैंसर अंबु चेलियन और एजीएस सिनेमा पर कथित टैक्स चोरी मामले में आयकर अधिकारियों की छानबीन का मामला सुर्खियों में छाया हुआ है. विजय ने अपने सारे कागजात जमा करा दिए हैं और उनके साथ आयकर अधिकारियों की जांच पूरी हो चुकी है. लेकिन सोशल मीडिया पर अभी भी यह मुद्दा गर्माया हुआ है. विजय को सपॉर्ट करने के लिए उनके फैन्स ट्विटर पर #WeStandwithThalapathyVijay नाम से ट्रेंड कर रहे हैं और सपॉर्ट में खड़े हैं.
आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि इसी बीच सुपरस्टार थाला अजीत के फैन्स ने सिलेब्रिटीज के घरों पर आईटी की छापेमारी को लेकर ऐक्टर द्वारा दिए गए बयान को सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया है. अजीत का यह बयान काफी पुराना है, जिसकी कुछ न्यूजपेपर क्लिपिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. इनमें से एक पेपर कटिंग में अजीत ने सरकार को टैरिफ और टैक्स ना बढ़ाने और सफल लोगों व अन्य हस्तियों के घरों की छानबीन न करने की सलाह दी थी उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि जनता का पैसा लूटने वाले नेताओं को इसे चुकाना चाहिए. इससे देश में सभी समस्याओं का समाधान होगा.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक अन्य वायरल कटिंग में अजीत ने मजाक में कहा था कि उन्होंने आईटी छापे के दौरान अपना बहुत सारा सामान खो दिया था और अधिकारियों ने उन्हें उसे ढूंढने में मदद की. हालांकि उन्होंने कोई टैक्स चोरी नहीं की थी और न ही उनके घर में छानबीन के दौरान ऐसा कुछ मिला था. वहीं ऐक्टर विजय आईटी अधिकारियों के साथ 24 घंटे की पूछताछ के बाद शूट पर वापस लौट आए हैं. फिल्म 'मास्टर' का शूट नेवेली कोल माइन में चल रहा है और वहां विजय का जोरदार स्वागत किया गया.
|
साउथ के जाने माने एक्टर विजय इस समय बहुत सुर्ख़ियों में बने हुए है वहीं टॉलीवुड फिल्म स्टार विजय, फिल्म फाइनैंसर अंबु चेलियन और एजीएस सिनेमा पर कथित टैक्स चोरी मामले में आयकर अधिकारियों की छानबीन का मामला सुर्खियों में छाया हुआ है. विजय ने अपने सारे कागजात जमा करा दिए हैं और उनके साथ आयकर अधिकारियों की जांच पूरी हो चुकी है. लेकिन सोशल मीडिया पर अभी भी यह मुद्दा गर्माया हुआ है. विजय को सपॉर्ट करने के लिए उनके फैन्स ट्विटर पर #WeStandwithThalapathyVijay नाम से ट्रेंड कर रहे हैं और सपॉर्ट में खड़े हैं. आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि इसी बीच सुपरस्टार थाला अजीत के फैन्स ने सिलेब्रिटीज के घरों पर आईटी की छापेमारी को लेकर ऐक्टर द्वारा दिए गए बयान को सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया है. अजीत का यह बयान काफी पुराना है, जिसकी कुछ न्यूजपेपर क्लिपिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. इनमें से एक पेपर कटिंग में अजीत ने सरकार को टैरिफ और टैक्स ना बढ़ाने और सफल लोगों व अन्य हस्तियों के घरों की छानबीन न करने की सलाह दी थी उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि जनता का पैसा लूटने वाले नेताओं को इसे चुकाना चाहिए. इससे देश में सभी समस्याओं का समाधान होगा. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक अन्य वायरल कटिंग में अजीत ने मजाक में कहा था कि उन्होंने आईटी छापे के दौरान अपना बहुत सारा सामान खो दिया था और अधिकारियों ने उन्हें उसे ढूंढने में मदद की. हालांकि उन्होंने कोई टैक्स चोरी नहीं की थी और न ही उनके घर में छानबीन के दौरान ऐसा कुछ मिला था. वहीं ऐक्टर विजय आईटी अधिकारियों के साथ चौबीस घंटाटे की पूछताछ के बाद शूट पर वापस लौट आए हैं. फिल्म 'मास्टर' का शूट नेवेली कोल माइन में चल रहा है और वहां विजय का जोरदार स्वागत किया गया.
|
कोविड-19 लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंधों की वजह से विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार ने सात मई से 'वंदे भारत मिशन' की शुरुआत की है, लेकिन इस मिशन की सूची में श्रीलंका का नाम न होने से वहां करीब दो महीनों से फंसे भारतीयों में नाराज़गी है.
नई दिल्लीः श्रीलंका में दो महीने से फंसे 2,400 से अधिक भारतीय कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग से लगातार संपर्क कर रहे हैं, क्योंकि अब तक उनकी वतन वापसी के लिए किसी उड़ान की घोषणा नहीं हुई है.
इस द्वीपीय देश में फंसे ये लोग पैसे की कमी होने से दुखी हैं. वे अपने परिवारों के पास लौटने को उत्सुक हैं, लेकिन उनकी वापसी के लिए किसी कार्यक्रम की अब तक घोषणा न होने से उन्हें अनिश्चितता की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.
भारत सरकार ने कोविड-19 लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंधों की वजह से विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए सात मई से 'वंदे भारत मिशन' शुरू किया है.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक श्रीलंका में फंसे कुछ भारतीय अपना धैर्य खो रहे हैं, अगर उन्हें वहां से नहीं निकाला जाता है तो कुछ लोगों ने तो जान देने की भी धमकी दी है.
उन्होंने कहा, 'मेरी तरह कई भारतीय सदमे में हैं. हमें पता नहीं कि क्या करना है, कहां जाना है और किससे संपर्क करना है. हम सब निराश हैं. सरकार तभी जागेगी जब कोई मर जाएगा.
मालूम हो कि अब तक जिन देशों के लिए उड़ानें निर्धारित की गई हैं, श्रीलंका उन देशों में शामिल नहीं है. श्रीलंका पर्यटन एवं विकास प्राधिकरण के अनुसार वैश्विक महामारी के चलते लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंधों की वजह से 2,400 से अधिक भारतीय श्रीलंका में फंसे हैं.
विजयपाल सिंह अपनी पत्नी के साथ व्यस्त दिनचर्या से समय निकाल कर छुट्टी मनाने के लिए श्रीलंका गए थे और बच्चों को दादा-दादी के पास छोड़ गए थे. उनकी छुट्टियां उनकी इच्छा के विपरीत काफी लंबी हो गईं.
'वंदे भारत मिशन' के प्रथम चरण के तहत खाड़ी क्षेत्र और अमेरिका, ब्रिटेन, फिलीपींस, बांग्लादेश, मलेशिया तथा मालदीव जैसे देशों से 6,527 भारतीयों को वापस लाया गया है.
दूसरे चरण में सरकार कनाडा, ओमान, कजाकिस्तान, यूक्रेन, फ्रांस, ताजिकिस्तान, सिंगापुर, अमेरिका, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, कतर, रूस, किर्गिस्तान, जापान, कुवैत और इटली से लोगों को वापस लाएगी.
सरकार ने नेपाल, नाइजीरिया, बेलारूस, आर्मीनिया, थाईलैंड, आयरलैंड, जर्मनी, जॉर्जिया और ब्रिटेन से भी लोगों को वापस लाने की घोषणा की है.
लोगों को वापस लाने की सरकार की नीति के अनुसार वापसी के लिए आवश्यक कारण रखने वालों- जैसे गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, छात्रों और उन लोगों को वापस लाया जा रहा है जो संबंधित देश से निकाले जाने के खतरे का सामना कर रहे हैं.
भारत में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए 25 मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन लागू है. इसके साथ ही सभी यातायात सेवाएं- सड़क, रेलवे, हवाई बंद हैं. देश में कोविड-19 के अब तक एक लाख से अधिक मामले सामने आए हैं और 3,163 लोगों की मौत हुई है.
(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)
|
कोविड-उन्नीस लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंधों की वजह से विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार ने सात मई से 'वंदे भारत मिशन' की शुरुआत की है, लेकिन इस मिशन की सूची में श्रीलंका का नाम न होने से वहां करीब दो महीनों से फंसे भारतीयों में नाराज़गी है. नई दिल्लीः श्रीलंका में दो महीने से फंसे दो,चार सौ से अधिक भारतीय कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग से लगातार संपर्क कर रहे हैं, क्योंकि अब तक उनकी वतन वापसी के लिए किसी उड़ान की घोषणा नहीं हुई है. इस द्वीपीय देश में फंसे ये लोग पैसे की कमी होने से दुखी हैं. वे अपने परिवारों के पास लौटने को उत्सुक हैं, लेकिन उनकी वापसी के लिए किसी कार्यक्रम की अब तक घोषणा न होने से उन्हें अनिश्चितता की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. भारत सरकार ने कोविड-उन्नीस लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंधों की वजह से विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए सात मई से 'वंदे भारत मिशन' शुरू किया है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक श्रीलंका में फंसे कुछ भारतीय अपना धैर्य खो रहे हैं, अगर उन्हें वहां से नहीं निकाला जाता है तो कुछ लोगों ने तो जान देने की भी धमकी दी है. उन्होंने कहा, 'मेरी तरह कई भारतीय सदमे में हैं. हमें पता नहीं कि क्या करना है, कहां जाना है और किससे संपर्क करना है. हम सब निराश हैं. सरकार तभी जागेगी जब कोई मर जाएगा. मालूम हो कि अब तक जिन देशों के लिए उड़ानें निर्धारित की गई हैं, श्रीलंका उन देशों में शामिल नहीं है. श्रीलंका पर्यटन एवं विकास प्राधिकरण के अनुसार वैश्विक महामारी के चलते लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंधों की वजह से दो,चार सौ से अधिक भारतीय श्रीलंका में फंसे हैं. विजयपाल सिंह अपनी पत्नी के साथ व्यस्त दिनचर्या से समय निकाल कर छुट्टी मनाने के लिए श्रीलंका गए थे और बच्चों को दादा-दादी के पास छोड़ गए थे. उनकी छुट्टियां उनकी इच्छा के विपरीत काफी लंबी हो गईं. 'वंदे भारत मिशन' के प्रथम चरण के तहत खाड़ी क्षेत्र और अमेरिका, ब्रिटेन, फिलीपींस, बांग्लादेश, मलेशिया तथा मालदीव जैसे देशों से छः,पाँच सौ सत्ताईस भारतीयों को वापस लाया गया है. दूसरे चरण में सरकार कनाडा, ओमान, कजाकिस्तान, यूक्रेन, फ्रांस, ताजिकिस्तान, सिंगापुर, अमेरिका, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, कतर, रूस, किर्गिस्तान, जापान, कुवैत और इटली से लोगों को वापस लाएगी. सरकार ने नेपाल, नाइजीरिया, बेलारूस, आर्मीनिया, थाईलैंड, आयरलैंड, जर्मनी, जॉर्जिया और ब्रिटेन से भी लोगों को वापस लाने की घोषणा की है. लोगों को वापस लाने की सरकार की नीति के अनुसार वापसी के लिए आवश्यक कारण रखने वालों- जैसे गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, छात्रों और उन लोगों को वापस लाया जा रहा है जो संबंधित देश से निकाले जाने के खतरे का सामना कर रहे हैं. भारत में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए पच्चीस मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन लागू है. इसके साथ ही सभी यातायात सेवाएं- सड़क, रेलवे, हवाई बंद हैं. देश में कोविड-उन्नीस के अब तक एक लाख से अधिक मामले सामने आए हैं और तीन,एक सौ तिरेसठ लोगों की मौत हुई है.
|
बिहार के सीतामढ़ी के इंदरवा गांव में बारात आई थी. घर में शादी का जश्न था. लड़की वाले बारात का स्वागत कर रहे थे. बाराती डीजे की धुन पर नाच रहे थे. बारातियों को चाय शरबत परोसा जा रहा था. फिर कुछ देर बाद दुल्हन स्टेज पर आई. दुल्हा दुल्हन ने एक दूसरे को वरमाला पहनाया. फिर लड़की और लड़के पक्ष के रिश्तेदार दुल्हा दुल्हन के साथ फोटो खिचाने लगे. इस बीच अचानक दुल्हा बेहोश होकर वहीं स्टेज पर गिर गया. इसके बाद उसे आनन फानन में अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. दुल्हे की मौत के बाद जिस घर में शादी का जश्न था वहां मातम पसर गया. कुछ देर पहले जहां शादी की चहल पहल थी वहां सन्नाटा पसर गया.
अब बताया जा रहा है कि डीजे की तेज आवाज से दूल्हे की हार्ट अटैक से मौत हो गई. DJ की कड़क और धमक भरी आवाज से दूल्हे को पहले घबराहट हुआ और फिर वह बैचैन होकर स्टेच पर गिर गया जिसके बाद उसकी मौत हो गई. मृतक की पहचान परिहार के मनिथर गांव के गुदर राय के बेटे सुरेंद्र कुमार के रूप में हुई है.
दरअसल सुरेंद्र कुमार को मंच पर चढ़ने से पहले से ही डीजे की आवास से परेशानी हो रही थी. वह डीजे की तेज आवाज से बैचैनी महसूस कर रहा था. इस दौरान उसने कई बार डीजे को दूर ले जाने के लिए भी कहा. लेकिन उसके सामने नाच रहे लोग नहीं माने जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और अचानक स्टेज पर बेहोश होकर गिर गया. लोगों का कहना है कि दुल्हे की मौत स्टेज पर गिरने के बाद ही हो गई थी. घटना के बारे में डॉक्टरों ने बताया कि युवक की मौत हार्ट अटैक आने की वजह से हुई है.
सुरेंद्र के मां बाप की मौत पहले ही हो गई थी. तीन भाइयों में वह सबसे छोटो था. गांव वालों ने बताया कि जयमाल की रस्म होने के बाद लड़का और लड़की दोनों पक्ष के लोग दुल्हा दुल्हन के साथ फोटो खिचवा रहे थे. तभी सुरेंद्र बेहोश होकर स्टेज पर ही गिर गया. इसके बाद उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया. जहां तबीयक बिगड़ने के बाद उसे सदर अस्पताल रेफर किया. इसके बाद उसे सदर अस्पताल ले जाया जा रहा था इस दौरान रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. सुरेंद्र रेलवे की ग्रुप डी की लिखित परीक्षा पास कर चुका था.
|
बिहार के सीतामढ़ी के इंदरवा गांव में बारात आई थी. घर में शादी का जश्न था. लड़की वाले बारात का स्वागत कर रहे थे. बाराती डीजे की धुन पर नाच रहे थे. बारातियों को चाय शरबत परोसा जा रहा था. फिर कुछ देर बाद दुल्हन स्टेज पर आई. दुल्हा दुल्हन ने एक दूसरे को वरमाला पहनाया. फिर लड़की और लड़के पक्ष के रिश्तेदार दुल्हा दुल्हन के साथ फोटो खिचाने लगे. इस बीच अचानक दुल्हा बेहोश होकर वहीं स्टेज पर गिर गया. इसके बाद उसे आनन फानन में अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. दुल्हे की मौत के बाद जिस घर में शादी का जश्न था वहां मातम पसर गया. कुछ देर पहले जहां शादी की चहल पहल थी वहां सन्नाटा पसर गया. अब बताया जा रहा है कि डीजे की तेज आवाज से दूल्हे की हार्ट अटैक से मौत हो गई. DJ की कड़क और धमक भरी आवाज से दूल्हे को पहले घबराहट हुआ और फिर वह बैचैन होकर स्टेच पर गिर गया जिसके बाद उसकी मौत हो गई. मृतक की पहचान परिहार के मनिथर गांव के गुदर राय के बेटे सुरेंद्र कुमार के रूप में हुई है. दरअसल सुरेंद्र कुमार को मंच पर चढ़ने से पहले से ही डीजे की आवास से परेशानी हो रही थी. वह डीजे की तेज आवाज से बैचैनी महसूस कर रहा था. इस दौरान उसने कई बार डीजे को दूर ले जाने के लिए भी कहा. लेकिन उसके सामने नाच रहे लोग नहीं माने जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और अचानक स्टेज पर बेहोश होकर गिर गया. लोगों का कहना है कि दुल्हे की मौत स्टेज पर गिरने के बाद ही हो गई थी. घटना के बारे में डॉक्टरों ने बताया कि युवक की मौत हार्ट अटैक आने की वजह से हुई है. सुरेंद्र के मां बाप की मौत पहले ही हो गई थी. तीन भाइयों में वह सबसे छोटो था. गांव वालों ने बताया कि जयमाल की रस्म होने के बाद लड़का और लड़की दोनों पक्ष के लोग दुल्हा दुल्हन के साथ फोटो खिचवा रहे थे. तभी सुरेंद्र बेहोश होकर स्टेज पर ही गिर गया. इसके बाद उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया. जहां तबीयक बिगड़ने के बाद उसे सदर अस्पताल रेफर किया. इसके बाद उसे सदर अस्पताल ले जाया जा रहा था इस दौरान रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. सुरेंद्र रेलवे की ग्रुप डी की लिखित परीक्षा पास कर चुका था.
|
8 संबंधोंः बिन्दू, राकेश रोशन, रंजीत, रेखा, शशि कपूर, श्रीराम लागू, जितेन्द्र द्वारा अभिनीत फ़िल्में, अनिल गाँगुली।
बिन्दू हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री हैं। .
राकेश रोशन एक हिन्दी फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक हैं। .
रंजीत हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता हैं। वह अपने खलनायक किरदारों के लिये विशेष रूप से जाने जाते हैं। .
भानुरेखा गणेशन उर्फ़ रेखा (जन्मः 10 अक्टूबर, 1954) हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री हैं। प्रतिभाशाली रेखा को हिन्दी फ़िल्मों की सबसे अच्छी अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है। वैसे तो रेखा ने अपने फ़िल्मी जीवन की शुरुआत बतौर एक बाल कलाकार तेलुगु फ़िल्म रंगुला रत्नम से कर दी थी, लेकिन हिन्दी सिनेमा में उनकी प्रविष्टि १९७० की फ़िल्म सावन भादों से हुई। 2010 में, उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। .
शशि कपूर (जन्मः 18 मार्च, 1938, निधनः 04 दिसम्बर 2017) हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता थे। शशि कपूर हिन्दी फ़िल्मों में लोकप्रिय कपूर परिवार के सदस्य थे। वर्ष २०११ में उनको भारत सरकार ने पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया। वर्ष २०१५ में उनको २०१४ के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया। इस तरह से वे अपने पिता पृथ्वीराज कपूर और बड़े भाई राजकपूर के बाद यह सम्मान पाने वाले कपूर परिवार के तीसरे सदस्य बन गये। .
श्रीराम लागू हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता हैं। .
जितेन्द्र एक भारतीय बॉलीवुड फिल्म अभिनेता है इनका जन्म ०७ अप्रैल १९४२ को पंजाब के अमृतसर जिले में हुआ था। इन्होंने अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत १९६४ में गीत गाया पत्थरों ने नामक फिल्म से की थी। इन्होंने हिन्दी भाषा में दर्जनों फिल्मों में अभिनय किया है। जितेन्द्र के पुत्र तुषार कपूर भी बॉलीवुड उद्योग में है। .
अनिल गाँगुली (1933 - 15 जनवरी 2016) हिन्दी फ़िल्मों के निर्देशक थे। .
|
आठ संबंधोंः बिन्दू, राकेश रोशन, रंजीत, रेखा, शशि कपूर, श्रीराम लागू, जितेन्द्र द्वारा अभिनीत फ़िल्में, अनिल गाँगुली। बिन्दू हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री हैं। . राकेश रोशन एक हिन्दी फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक हैं। . रंजीत हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता हैं। वह अपने खलनायक किरदारों के लिये विशेष रूप से जाने जाते हैं। . भानुरेखा गणेशन उर्फ़ रेखा हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री हैं। प्रतिभाशाली रेखा को हिन्दी फ़िल्मों की सबसे अच्छी अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है। वैसे तो रेखा ने अपने फ़िल्मी जीवन की शुरुआत बतौर एक बाल कलाकार तेलुगु फ़िल्म रंगुला रत्नम से कर दी थी, लेकिन हिन्दी सिनेमा में उनकी प्रविष्टि एक हज़ार नौ सौ सत्तर की फ़िल्म सावन भादों से हुई। दो हज़ार दस में, उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। . शशि कपूर हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता थे। शशि कपूर हिन्दी फ़िल्मों में लोकप्रिय कपूर परिवार के सदस्य थे। वर्ष दो हज़ार ग्यारह में उनको भारत सरकार ने पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया। वर्ष दो हज़ार पंद्रह में उनको दो हज़ार चौदह के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया। इस तरह से वे अपने पिता पृथ्वीराज कपूर और बड़े भाई राजकपूर के बाद यह सम्मान पाने वाले कपूर परिवार के तीसरे सदस्य बन गये। . श्रीराम लागू हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता हैं। . जितेन्द्र एक भारतीय बॉलीवुड फिल्म अभिनेता है इनका जन्म सात अप्रैल एक हज़ार नौ सौ बयालीस को पंजाब के अमृतसर जिले में हुआ था। इन्होंने अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत एक हज़ार नौ सौ चौंसठ में गीत गाया पत्थरों ने नामक फिल्म से की थी। इन्होंने हिन्दी भाषा में दर्जनों फिल्मों में अभिनय किया है। जितेन्द्र के पुत्र तुषार कपूर भी बॉलीवुड उद्योग में है। . अनिल गाँगुली हिन्दी फ़िल्मों के निर्देशक थे। .
|
बेयांड विजुअल रेंज (बीवीआर) मिसाइल दागने की क्षमता दर्शाई।
आईटीआर के सेंसर ने लक्ष्य और मिसाइल का पता लगाया। इस परीक्षण का उद्देश्य तेजस पर मौजूद प्रणालियों के साथ डर्बी को जोडे जाने का आकलन करना और इसके प्रदर्शन का सत्यापन करना था। इन प्रणालियों में एवियोनिक्स, अग्नि नियंत्रण राडार, लांचर और मिसाइल हथियार आपूर्ति प्रणाली शामिल है।
|
बेयांड विजुअल रेंज मिसाइल दागने की क्षमता दर्शाई। आईटीआर के सेंसर ने लक्ष्य और मिसाइल का पता लगाया। इस परीक्षण का उद्देश्य तेजस पर मौजूद प्रणालियों के साथ डर्बी को जोडे जाने का आकलन करना और इसके प्रदर्शन का सत्यापन करना था। इन प्रणालियों में एवियोनिक्स, अग्नि नियंत्रण राडार, लांचर और मिसाइल हथियार आपूर्ति प्रणाली शामिल है।
|
मुलायम सिंह यादव पर इतना भी बुढ़ापा हावी नहीं हुआ है कि वे समाजवादी पार्टी का भला-बुरा न सोच पाएं. अब अमर सिंह को कुछ सोचकर ही फिर सिर पर बैठाया है.
1. मुलायम सिंह ने अपने हस्तलिखित पत्र से अमर सिंह को सपा का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया. मुलायम सिंह ऐसे पहलवान हैं जिनका अगला दाव भगवान को भी मालूम नहीं होगा.
2. दुनिया को ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वे उस बेटे से जंग लड़ रहे हैं जिसे खुद उन्होंने CM बनाया था लेकिन व्यवहार वे ऐसे फेसबुकिया की तरह कर रहे है जो हर पोस्ट में आंशिक राष्ट्रवादी और आंशिक सेक्यूलर बनकर बैलेंस दिखाना चाहता है!
3. गैंग्स ऑफ वासेपुर जिसे याद हो, उसे 'बंगालन' याद होगी और 'डिफनिट' भी. कई बार लगता है नेताजी की बंगालन उन पर हावी है. कइयों को मुलायम सिंह, करुणानिधि के उत्तर भारतीय संस्करण लगते हैं.
4. भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का दावा कर अखिलेश, त्रेता वाले राम की छवि बना रहे हैं, जिसमें कैकई उनकी विमाता साधना गुप्ता हैं. दिक्कत ये है कि राम के पक्ष में भरत और लक्ष्मण आ गए थे, यहां पर अखिलेश के भरत खुद महात्वाकांक्षी हैं.
5. नेताजी को मालूम है कि शिवपाल यादव की सांगठनिक क्षमता वैसी ही है जैसे कांग्रेस में सरदार पटेल की थी. अमर सिंह नेटवर्कर हैं. धन का सु-निवेश करते हैं. मीडिया साथ लाते हैं. कुल मिलाकर नेताजी, बैलेंस बनाने के चक्कर में हैं.
6. जानकारों का मानना हैं कि नेताजी भले बोलने में लड़खड़ाने लगे हों लेकिन उनकी हालत अभी तक वाजपेयी या जॉर्ज जैसी नहीं हुई है. (ताजा उदाहरण तो हस्तलिखित पत्र द्वारा अमर नियुक्ति ही है! ) लेकिन नेताजी, ये भूल गए हैं सत्ता का चरित्र 'केंद्रवादी' होता है. एक हद तक उन्होंने अपने दौर में सत्ता को बांट कर रखा था, लेकिन वैसी उदारता,संयम और मजबूरी उनके बड़े पुत्र में नहीं है.
7. ऐसे में शक्ति-संतुलन का मामला नेताजी के लिए वैसा ही बन गया है जैसा पाकिस्तान की बदमाशी भारत के लिए बन गयी है. युद्ध करना पूर्ण समाधान नहीं है और युद्ध न करना आत्मघाती है.
8. आशंका है सपा की लड़ाई अभी बढ़ेगी. हो सकता है सपा में विखंडन ही हो जाए और एक खेमा BJP से डील कर ले. आखिर राजनेता तो इसलिए मशहूर रहे हैं कि वे किसी बात पर ताज्जुब नहीं करते!
(लेखक ने अखिलेश यादव की जीवनी विंड्स ऑफ चेंज का हिंदी अनुवाद भी किया है)
|
मुलायम सिंह यादव पर इतना भी बुढ़ापा हावी नहीं हुआ है कि वे समाजवादी पार्टी का भला-बुरा न सोच पाएं. अब अमर सिंह को कुछ सोचकर ही फिर सिर पर बैठाया है. एक. मुलायम सिंह ने अपने हस्तलिखित पत्र से अमर सिंह को सपा का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया. मुलायम सिंह ऐसे पहलवान हैं जिनका अगला दाव भगवान को भी मालूम नहीं होगा. दो. दुनिया को ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वे उस बेटे से जंग लड़ रहे हैं जिसे खुद उन्होंने CM बनाया था लेकिन व्यवहार वे ऐसे फेसबुकिया की तरह कर रहे है जो हर पोस्ट में आंशिक राष्ट्रवादी और आंशिक सेक्यूलर बनकर बैलेंस दिखाना चाहता है! तीन. गैंग्स ऑफ वासेपुर जिसे याद हो, उसे 'बंगालन' याद होगी और 'डिफनिट' भी. कई बार लगता है नेताजी की बंगालन उन पर हावी है. कइयों को मुलायम सिंह, करुणानिधि के उत्तर भारतीय संस्करण लगते हैं. चार. भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का दावा कर अखिलेश, त्रेता वाले राम की छवि बना रहे हैं, जिसमें कैकई उनकी विमाता साधना गुप्ता हैं. दिक्कत ये है कि राम के पक्ष में भरत और लक्ष्मण आ गए थे, यहां पर अखिलेश के भरत खुद महात्वाकांक्षी हैं. पाँच. नेताजी को मालूम है कि शिवपाल यादव की सांगठनिक क्षमता वैसी ही है जैसे कांग्रेस में सरदार पटेल की थी. अमर सिंह नेटवर्कर हैं. धन का सु-निवेश करते हैं. मीडिया साथ लाते हैं. कुल मिलाकर नेताजी, बैलेंस बनाने के चक्कर में हैं. छः. जानकारों का मानना हैं कि नेताजी भले बोलने में लड़खड़ाने लगे हों लेकिन उनकी हालत अभी तक वाजपेयी या जॉर्ज जैसी नहीं हुई है. लेकिन नेताजी, ये भूल गए हैं सत्ता का चरित्र 'केंद्रवादी' होता है. एक हद तक उन्होंने अपने दौर में सत्ता को बांट कर रखा था, लेकिन वैसी उदारता,संयम और मजबूरी उनके बड़े पुत्र में नहीं है. सात. ऐसे में शक्ति-संतुलन का मामला नेताजी के लिए वैसा ही बन गया है जैसा पाकिस्तान की बदमाशी भारत के लिए बन गयी है. युद्ध करना पूर्ण समाधान नहीं है और युद्ध न करना आत्मघाती है. आठ. आशंका है सपा की लड़ाई अभी बढ़ेगी. हो सकता है सपा में विखंडन ही हो जाए और एक खेमा BJP से डील कर ले. आखिर राजनेता तो इसलिए मशहूर रहे हैं कि वे किसी बात पर ताज्जुब नहीं करते!
|
तेजस्वी सूर्या (फाइल फोटो)
दक्षिण बंगलूरू के एक छोटे से घर में तेजस्वी सूर्या ने अपनी जिंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा बिताया है। एक बेडरूम को उन्होंने स्टूडियो में तब्दील किया जिसमें तमाम सुविधाएं मौजूद हैं। यहां से वह सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए फोटो और वीडियो को शूट करते हैं। इस कमरे के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा था, यह अकेला ऐसा कमरा है जिसका मैं वर्तमान में प्रयोग करता हूं, वरना मैं पूरे घर का इस्तेमाल अपने अस्थायी चुनाव अभियान कार्यालय के तौर पर करता हूं।
सांसद का चुनाव लड़ने से पहले उन्होंने पहला चुनाव असिस्टेंट हेड ब्वॉय के तौर पर स्कूल में सातवीं कक्षा के दौरान लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें जीत हासिल हुई थी क्योंकि वही अकेल उम्मीदवार थे जिसने अभियान को गंभीरता से लिया था।
स्कूल ब्वॉय से लेकर सांसद बनने तक सूर्या ने एक लंबी यात्रा तय की है लेकिन उनका हर चुनाव अभियान युवाओं की ओर उन्मुख रहा। वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् और युवा मोर्चा के पूर्व नेता रह चुके हैं। उन्होंने कई रैलियों में हिस्सा लिया- जैसे मंगलोर चलो बाइक रैली जो पिछले साल विधानसभा चुनाव के दौरान आयोजित हुई थी।
पेशे से वकील सूर्या ने कई भाजपा नेताओं का मुकदमा लड़ा है। उन्होंने पोस्टकार्ड न्यूज के संपादक महेश हेगड़े का साइबर अपराध मामले में बचाव किया। मैसूर सांसद प्रताप सिम्हा का भी कई मामलों में बचाव किया और कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों में अशोक हर्नाहल्ली के साथ मिलकर उनका बचाव किया था।
बंगलूरू दक्षिण सीट से पहले स्वर्गीय केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार की पत्नी तेजस्विनी अनंत कुमार का नाम सामने आया। यहां तक कि उन्होंने चुनाव अभियान की शुरुआत भी कर दी थी। लेकिन दो दिन बाद ही उनकी जगह पार्टी ने तेजस्वी सूर्या को यहां से टिकट दिया। यह सीट 1991 से भाजपा का गढ़ रही है। सूर्या को इस लोकसभा क्षेत्र के विधायकों से कोई खास समर्थन नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने जीत हासिल की।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
तेजस्वी सूर्या दक्षिण बंगलूरू के एक छोटे से घर में तेजस्वी सूर्या ने अपनी जिंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा बिताया है। एक बेडरूम को उन्होंने स्टूडियो में तब्दील किया जिसमें तमाम सुविधाएं मौजूद हैं। यहां से वह सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए फोटो और वीडियो को शूट करते हैं। इस कमरे के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा था, यह अकेला ऐसा कमरा है जिसका मैं वर्तमान में प्रयोग करता हूं, वरना मैं पूरे घर का इस्तेमाल अपने अस्थायी चुनाव अभियान कार्यालय के तौर पर करता हूं। सांसद का चुनाव लड़ने से पहले उन्होंने पहला चुनाव असिस्टेंट हेड ब्वॉय के तौर पर स्कूल में सातवीं कक्षा के दौरान लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें जीत हासिल हुई थी क्योंकि वही अकेल उम्मीदवार थे जिसने अभियान को गंभीरता से लिया था। स्कूल ब्वॉय से लेकर सांसद बनने तक सूर्या ने एक लंबी यात्रा तय की है लेकिन उनका हर चुनाव अभियान युवाओं की ओर उन्मुख रहा। वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् और युवा मोर्चा के पूर्व नेता रह चुके हैं। उन्होंने कई रैलियों में हिस्सा लिया- जैसे मंगलोर चलो बाइक रैली जो पिछले साल विधानसभा चुनाव के दौरान आयोजित हुई थी। पेशे से वकील सूर्या ने कई भाजपा नेताओं का मुकदमा लड़ा है। उन्होंने पोस्टकार्ड न्यूज के संपादक महेश हेगड़े का साइबर अपराध मामले में बचाव किया। मैसूर सांसद प्रताप सिम्हा का भी कई मामलों में बचाव किया और कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों में अशोक हर्नाहल्ली के साथ मिलकर उनका बचाव किया था। बंगलूरू दक्षिण सीट से पहले स्वर्गीय केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार की पत्नी तेजस्विनी अनंत कुमार का नाम सामने आया। यहां तक कि उन्होंने चुनाव अभियान की शुरुआत भी कर दी थी। लेकिन दो दिन बाद ही उनकी जगह पार्टी ने तेजस्वी सूर्या को यहां से टिकट दिया। यह सीट एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे से भाजपा का गढ़ रही है। सूर्या को इस लोकसभा क्षेत्र के विधायकों से कोई खास समर्थन नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने जीत हासिल की। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
बड़े पर्दे पर 90 के दशक की सुपरहिट जोड़ियां एक बार फिर रील लाइफ पर जबरदस्त कमबैक कर रही हैं। 'टोटल धमाल' फिल्म में अनिल कपूर-माधुरी दीक्षित की जोड़ी, आने वाली फिल्म 'तानाजी' में अजय देवगन-काजोल की जोड़ी और 'कलंक' फिल्म में संजय दत्त और माधुरी दीक्षित का साथ आना, दो बातों की ओर इशारा करता है, पहला- दर्शकों की डिमांड की वजह से फिल्ममेकर्स सुपरहिट जोड़ियों को कैश करवा रहे हैं और दूसरा यह कि एक अदद सुपरहिट फिल्म के लिए उस दशक के सितारों को अपनी जोड़ी बनाने की मजबूरी आन पड़ी है।
'टोटल धमाल' फिल्म में अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित, अजय देवगन समेत कई सितारे नजर आए थे। इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड 200 करोड़ रुपये की कमाई का आंकड़ा पार किया। दर्शकों ने फिल्म में अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित की जोड़ी को काफी पसंद किया। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस जोड़ी ने 19 साल बाद किसी फिल्म में साथ काम किया था। 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' फिल्म में अनिल कपूर के साथ जूही चावला नजर आई थीं।
यह जोड़ी इससे पहले 'अंदाज', 'दीवाना मस्ताना' और 'झूठ बोले कौवा काटे' फिल्म में नजर आ चुकी है। अनिल कपूर माधुरी दीक्षित और श्रीदेवी के साथ भी कई सुपरहिट फिल्में दे चुके हैं। आने वाले समय में आपको कई और सुपरहिट जोड़ियां एक बार फिर बड़े पर्दे पर देखने को मिलेंगी। इसकी शुरूआत हो रही है 17 अप्रैल को रिलीज होने वाली फिल्म 'कलंक' से। इस फिल्म में संजय दत्त और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिका में नजर आएंगे।
90 के दशक में संजय दत्त और माधुरी दीक्षित हर फिल्ममेकर्स की पसंद हुआ करते थे। इस सुपरहिट जोड़ी ने 'साजन', 'खतरों के खिलाड़ी' और 'खलनायक' जैसी कई सुपरहिट फिल्में दीं। रील लाइफ के अलावा रियल लाइफ में भी यह दोनों बेहद करीब हुआ करते थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों काफी लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहे थे। संजय के जेल जाने के बाद माधुरी ने उनसे दूरी बना ली। अब 21 साल बाद एक बार फिर दोनों 'कलंक' में साथ आ रहे हैं।
'कलंक' में माधुरी दीक्षित के साथ काम करने को लेकर संजय दत्त कहते हैं, 'बहुत अच्छा लगा और बहुत समय के बाद मैं इनके साथ काम कर रहा हूं और यही कोशिश करूंगा कि और ज्यादा काम करूं इनके साथ। ' इस फिल्म में संजय और माधुरी के अलावा आलिया भट्ट, वरुण धवन, सोनाक्षी सिन्हा, आदित्य रॉय कपूर और हितेन तेजवानी भी मुख्य किरदारों में नजर आएंगे। संजय और माधुरी के फैंस इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
साल 1991 में आई संजय दत्त और पूजा भट्ट की सुपरहिट फिल्म 'सड़क' का भी सीक्वल (सड़क 2) बनाने की तैयारी चल रही है। इस फिल्म में भी आपको संजय दत्त और पूजा भट्ट की सुपरहिट जोड़ी नजर आएगी। संजय और पूजा ने एक साथ बस इसी फिल्म में काम किया था। उनकी जोड़ी को काफी सराहा गया था। फिल्म का गाना 'तुम्हें अपना बनाने की कसम' आज भी उस जमाने के लोगों की प्लेलिस्ट में दिखाई दे सकता है। माना जा रहा है कि 'सड़क 2' में आलिया भट्ट और आदित्य रॉय कपूर भी नजर आएंगे। इस फिल्म को भी 'सड़क' के निर्देशक महेश भट्ट ही डायरेक्ट करेंगे।
मराठा साम्राज्य के वीर सेनापति तानाजी मालसुरे पर बन रही फिल्म 'तानाजी- द अनसंग वॉरियर' में अजय देवगन लीड रोल में हैं। इस फिल्म में काजोल तानाजी की पत्नी लक्ष्मीबाई के किरदार में नजर आएंगी। रियल लाइफ के पति-पत्नी को रील लाइफ में भी इसी रिश्ते में देखना बेहद सुकूनदेह होता है। 90 के दशक की यह हिट जोड़ी 'इश्क', 'राजू चाचा', 'हलचल', 'गुंडाराज', 'प्यार तो होना ही था', 'यू मी और हम' जैसी कई फिल्मों में नजर आ चुकी है। फिलहाल अजय देवगन और काजोल की हिट जोड़ी को बड़े पर्दे पर देखने के लिए उनके फैंस को 10 जनवरी, 2020 तक इंतजार करना होगा।
|
बड़े पर्दे पर नब्बे के दशक की सुपरहिट जोड़ियां एक बार फिर रील लाइफ पर जबरदस्त कमबैक कर रही हैं। 'टोटल धमाल' फिल्म में अनिल कपूर-माधुरी दीक्षित की जोड़ी, आने वाली फिल्म 'तानाजी' में अजय देवगन-काजोल की जोड़ी और 'कलंक' फिल्म में संजय दत्त और माधुरी दीक्षित का साथ आना, दो बातों की ओर इशारा करता है, पहला- दर्शकों की डिमांड की वजह से फिल्ममेकर्स सुपरहिट जोड़ियों को कैश करवा रहे हैं और दूसरा यह कि एक अदद सुपरहिट फिल्म के लिए उस दशक के सितारों को अपनी जोड़ी बनाने की मजबूरी आन पड़ी है। 'टोटल धमाल' फिल्म में अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित, अजय देवगन समेत कई सितारे नजर आए थे। इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड दो सौ करोड़ रुपये की कमाई का आंकड़ा पार किया। दर्शकों ने फिल्म में अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित की जोड़ी को काफी पसंद किया। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस जोड़ी ने उन्नीस साल बाद किसी फिल्म में साथ काम किया था। 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' फिल्म में अनिल कपूर के साथ जूही चावला नजर आई थीं। यह जोड़ी इससे पहले 'अंदाज', 'दीवाना मस्ताना' और 'झूठ बोले कौवा काटे' फिल्म में नजर आ चुकी है। अनिल कपूर माधुरी दीक्षित और श्रीदेवी के साथ भी कई सुपरहिट फिल्में दे चुके हैं। आने वाले समय में आपको कई और सुपरहिट जोड़ियां एक बार फिर बड़े पर्दे पर देखने को मिलेंगी। इसकी शुरूआत हो रही है सत्रह अप्रैल को रिलीज होने वाली फिल्म 'कलंक' से। इस फिल्म में संजय दत्त और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। नब्बे के दशक में संजय दत्त और माधुरी दीक्षित हर फिल्ममेकर्स की पसंद हुआ करते थे। इस सुपरहिट जोड़ी ने 'साजन', 'खतरों के खिलाड़ी' और 'खलनायक' जैसी कई सुपरहिट फिल्में दीं। रील लाइफ के अलावा रियल लाइफ में भी यह दोनों बेहद करीब हुआ करते थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों काफी लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहे थे। संजय के जेल जाने के बाद माधुरी ने उनसे दूरी बना ली। अब इक्कीस साल बाद एक बार फिर दोनों 'कलंक' में साथ आ रहे हैं। 'कलंक' में माधुरी दीक्षित के साथ काम करने को लेकर संजय दत्त कहते हैं, 'बहुत अच्छा लगा और बहुत समय के बाद मैं इनके साथ काम कर रहा हूं और यही कोशिश करूंगा कि और ज्यादा काम करूं इनके साथ। ' इस फिल्म में संजय और माधुरी के अलावा आलिया भट्ट, वरुण धवन, सोनाक्षी सिन्हा, आदित्य रॉय कपूर और हितेन तेजवानी भी मुख्य किरदारों में नजर आएंगे। संजय और माधुरी के फैंस इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। साल एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में आई संजय दत्त और पूजा भट्ट की सुपरहिट फिल्म 'सड़क' का भी सीक्वल बनाने की तैयारी चल रही है। इस फिल्म में भी आपको संजय दत्त और पूजा भट्ट की सुपरहिट जोड़ी नजर आएगी। संजय और पूजा ने एक साथ बस इसी फिल्म में काम किया था। उनकी जोड़ी को काफी सराहा गया था। फिल्म का गाना 'तुम्हें अपना बनाने की कसम' आज भी उस जमाने के लोगों की प्लेलिस्ट में दिखाई दे सकता है। माना जा रहा है कि 'सड़क दो' में आलिया भट्ट और आदित्य रॉय कपूर भी नजर आएंगे। इस फिल्म को भी 'सड़क' के निर्देशक महेश भट्ट ही डायरेक्ट करेंगे। मराठा साम्राज्य के वीर सेनापति तानाजी मालसुरे पर बन रही फिल्म 'तानाजी- द अनसंग वॉरियर' में अजय देवगन लीड रोल में हैं। इस फिल्म में काजोल तानाजी की पत्नी लक्ष्मीबाई के किरदार में नजर आएंगी। रियल लाइफ के पति-पत्नी को रील लाइफ में भी इसी रिश्ते में देखना बेहद सुकूनदेह होता है। नब्बे के दशक की यह हिट जोड़ी 'इश्क', 'राजू चाचा', 'हलचल', 'गुंडाराज', 'प्यार तो होना ही था', 'यू मी और हम' जैसी कई फिल्मों में नजर आ चुकी है। फिलहाल अजय देवगन और काजोल की हिट जोड़ी को बड़े पर्दे पर देखने के लिए उनके फैंस को दस जनवरी, दो हज़ार बीस तक इंतजार करना होगा।
|
बांसवारा पुलिस ने पीड़ित की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है. वहीं, पुलिस अधिकारी का कहना है कि मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है.
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां पर अपनी पत्नी को नया मोबाइल न दिला पाने के चलते नाराज पत्नी के भाइयों ने बेरहमी से मारपीट कर अधमरा कर दिया. इस दौरान पत्नी भी अपने भाइयों के साथ अपने मायके चली गई. वहीं, पीड़ित पति ने अपने ससुराल वालों से जान का खतरा होने की बात बताई है. हालांकि, इस मामले पर पुलिस का कहना है कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर हम मामले की जांच-पड़ताल कर रहे है.
दरअसल, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला बांसवाड़ा जिले के आनंदपुरी थाना इलाके का है. जहां घायल पति मारपीट के दर्द बिस्तर पर पड़ा हुआ है. वहीं, पीड़ित बापूलाल पारगी जोकिछायणा ओबला के रहने वाले हैं. पुलिस को दी शिकायत में पीड़ित बापूलाल ने बताया कि उबापाण ग्राम पंचायत टामटिया के रहने वाले उसके चचेरे साले ईश्वर व सगे साले दिलीप ने उसके साथ लाठी और लोहे की सरियों से मारपीट की है,जिसके चलते उसके कान और सिर गंभीर रूप से लहूलुहान हो गया है.
जानिए क्या है मामला?
वहीं, पीड़ित बापूलाल पारगी का कहना है कि उसकी पत्नी पिछले कई दिनों से नए मोबाइल खरीदने की मांग कर रही थी. इस पर पीड़ित ने बताया कि जल्द ही पत्नी को मोबाइल खऱीदने की बात कही थी. उसका कहना है कि अभी उसके पास रुपए नहीं है, इसके चलते मोबाइल नहीं खरीद पा रहा था, जिसके कारण दोनों दंपत्ति के बीच इस बात को लेकर कहासुनी भी हो गई थी.
ऐसे में झगड़ा बढ़ता देख पत्नी ने इसकी जानकारी अपने भाइयों को दी,जिसके बाद आरोपी सालों ने घर पहुंचकर अपने जीजा की बेरहमी से जमकर पिटाई कर दी. जहां पीड़ित का कहना है कि दोनों आरोपी साले शराब के नशे में धुत्त थे, ऐसे में बेहोश होने के चलते मारपीट कर पत्नी को अपने साथ लेकर घर चले गए. फिलहाल पीड़ित के तीन बच्चे है जोकि उसके पास ही रहते हैं.
बता दें कि, पीड़ित बापूलाल पारगी ने कहा कि वो अहमदाबाद में मजदूरी का काम करता है. जहां पर वो अपनी पत्नी औऱ बच्चों के साथ रहता है. हालांकि, दिवाली पर पत्नी और बच्चों के गांव आया था. उसके तीन बच्चे हैं.इस मामले में पुलिस ने पीड़ित की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है. वहीं, पुलिस अधिकारी का कहना है कि मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है.
|
बांसवारा पुलिस ने पीड़ित की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है. वहीं, पुलिस अधिकारी का कहना है कि मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है. राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां पर अपनी पत्नी को नया मोबाइल न दिला पाने के चलते नाराज पत्नी के भाइयों ने बेरहमी से मारपीट कर अधमरा कर दिया. इस दौरान पत्नी भी अपने भाइयों के साथ अपने मायके चली गई. वहीं, पीड़ित पति ने अपने ससुराल वालों से जान का खतरा होने की बात बताई है. हालांकि, इस मामले पर पुलिस का कहना है कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर हम मामले की जांच-पड़ताल कर रहे है. दरअसल, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला बांसवाड़ा जिले के आनंदपुरी थाना इलाके का है. जहां घायल पति मारपीट के दर्द बिस्तर पर पड़ा हुआ है. वहीं, पीड़ित बापूलाल पारगी जोकिछायणा ओबला के रहने वाले हैं. पुलिस को दी शिकायत में पीड़ित बापूलाल ने बताया कि उबापाण ग्राम पंचायत टामटिया के रहने वाले उसके चचेरे साले ईश्वर व सगे साले दिलीप ने उसके साथ लाठी और लोहे की सरियों से मारपीट की है,जिसके चलते उसके कान और सिर गंभीर रूप से लहूलुहान हो गया है. जानिए क्या है मामला? वहीं, पीड़ित बापूलाल पारगी का कहना है कि उसकी पत्नी पिछले कई दिनों से नए मोबाइल खरीदने की मांग कर रही थी. इस पर पीड़ित ने बताया कि जल्द ही पत्नी को मोबाइल खऱीदने की बात कही थी. उसका कहना है कि अभी उसके पास रुपए नहीं है, इसके चलते मोबाइल नहीं खरीद पा रहा था, जिसके कारण दोनों दंपत्ति के बीच इस बात को लेकर कहासुनी भी हो गई थी. ऐसे में झगड़ा बढ़ता देख पत्नी ने इसकी जानकारी अपने भाइयों को दी,जिसके बाद आरोपी सालों ने घर पहुंचकर अपने जीजा की बेरहमी से जमकर पिटाई कर दी. जहां पीड़ित का कहना है कि दोनों आरोपी साले शराब के नशे में धुत्त थे, ऐसे में बेहोश होने के चलते मारपीट कर पत्नी को अपने साथ लेकर घर चले गए. फिलहाल पीड़ित के तीन बच्चे है जोकि उसके पास ही रहते हैं. बता दें कि, पीड़ित बापूलाल पारगी ने कहा कि वो अहमदाबाद में मजदूरी का काम करता है. जहां पर वो अपनी पत्नी औऱ बच्चों के साथ रहता है. हालांकि, दिवाली पर पत्नी और बच्चों के गांव आया था. उसके तीन बच्चे हैं.इस मामले में पुलिस ने पीड़ित की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है. वहीं, पुलिस अधिकारी का कहना है कि मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है.
|
चेन्नई, 18 नवंबर अभिनेता सूर्या की नवीनतम फिल्म "जय भीम" में वन्नियार समुदाय के कथित विवादास्पद चित्रण के खिलाफ वन्नियार संगम ने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय और तमिलनाडु के सूचना और जनसंपर्क विभाग से संपर्क कर किसी प्रकार की मान्यता अथवा पुरस्कार के लिए "जय भीम" के नाम पर विचार नहीं करने का आग्रह किया है।
वन्नियार समुदाय के प्रदेश अध्यक्ष अरुलमोझी ने अधिवक्ता के बालू के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारों को सौंपे अपने ज्ञापन में किसी प्रकार की मान्यता, सराहना अथवा पुरस्कार के लिए "जय भीम" के नाम पर विचार नहीं करने का आग्रह किया है।
वन्नियार संगम के अधिवक्ता के बालू ने बृहस्पतिवार को एक वक्तव्य में कहा, "मेरे मुवक्किल का कहना है कि फिल्म के दृश्य भारतीय दंड संहिता की धारा 153, 153 ए, 499, 503, 504, 505 के तहत अपमानजनक हैं और फिल्म की टीम लगातार वन्नियार और अन्य समुदायों जैसे सबसे पिछड़े और दलित समुदायों को नीचा दिखाने और बदनाम करने की गतिविधियों में लिप्त है। इस हम केंद्र और राज्य सरकारों से किसी प्रकार की मान्यता अथवा पुरस्कार के लिए "जय भीम" के नाम पर विचार नहीं करने का आग्रह करते हैं।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
चेन्नई, अट्ठारह नवंबर अभिनेता सूर्या की नवीनतम फिल्म "जय भीम" में वन्नियार समुदाय के कथित विवादास्पद चित्रण के खिलाफ वन्नियार संगम ने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय और तमिलनाडु के सूचना और जनसंपर्क विभाग से संपर्क कर किसी प्रकार की मान्यता अथवा पुरस्कार के लिए "जय भीम" के नाम पर विचार नहीं करने का आग्रह किया है। वन्नियार समुदाय के प्रदेश अध्यक्ष अरुलमोझी ने अधिवक्ता के बालू के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारों को सौंपे अपने ज्ञापन में किसी प्रकार की मान्यता, सराहना अथवा पुरस्कार के लिए "जय भीम" के नाम पर विचार नहीं करने का आग्रह किया है। वन्नियार संगम के अधिवक्ता के बालू ने बृहस्पतिवार को एक वक्तव्य में कहा, "मेरे मुवक्किल का कहना है कि फिल्म के दृश्य भारतीय दंड संहिता की धारा एक सौ तिरेपन, एक सौ तिरेपन ए, चार सौ निन्यानवे, पाँच सौ तीन, पाँच सौ चार, पाँच सौ पाँच के तहत अपमानजनक हैं और फिल्म की टीम लगातार वन्नियार और अन्य समुदायों जैसे सबसे पिछड़े और दलित समुदायों को नीचा दिखाने और बदनाम करने की गतिविधियों में लिप्त है। इस हम केंद्र और राज्य सरकारों से किसी प्रकार की मान्यता अथवा पुरस्कार के लिए "जय भीम" के नाम पर विचार नहीं करने का आग्रह करते हैं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
हाथरस. कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण की रोकथाम के लिए पूरे देश में लॉकडाउन (Lockdown) है. एक तरफ सरकार पूरे प्रयास कर रही है कि इस बीमारी का संक्रमण न फैले और लोगों को भी असुविधा न हो, लेकिन लोगों की लापरवाही और अज्ञानता सभी के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है. ताजा वाकया थाना सादाबाद क्षेत्र के कस्बा बिसावर के प्राथमिक विद्यालय में बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटर (Quarantine Center) का है, जहां अन्य राज्यों से आए 35 लोगों को रखा गया था. लेकिन ये सभी लोग रात में चकमा देकर यहां से फरार हो गए. जब यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में आया, तब आनन-फानन में कार्रवाई शुरू की गई.
डीएम हाथरस ने क्वारेंटाइन सेंटर से भागने वाले सभी लोगों पर FIR कराने के आदेश दिए, जिसके बाद 6 लोग तो वापस आ गए, लेकिन 29 अब भी फरार हैं. हाथरस के थाना सादाबाद क्षेत्र के कस्बा बिसावर में अन्य राज्यों से आए लोगों को प्राथमिक विद्यालय में एहतियातन 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन किया गया था. जिलाधिकारी द्वारा इन लोगों के खाने-पीने की व अन्य व्यवस्थाओं के लिए पंचायत सचिव को ड्यूटी पर लगाया था. लेकिन रात में इन्हें खाना खिलाने के बाद पंचायत सचिव जैसे ही विद्यालय से अलग हुए तभी यह लोग मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए. जैसे ही पंचायत सचिव को इस मामले की जानकारी हुई तो उसके होश उड़ गए. उसने तुरंत इसकी सूचना आलाधिकारियों को दी.
News 18 संवाददाता ने जब इस मामले में जिलाधिकारी से बातचीत की तो डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने बताया कि फरार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया जा रहा है. वहीं काम में लापरवाही बरतने को लेकर पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. जिलाधिकारी का कहना है कि क्वारेंटाइन सेंटर में रखे गए लोग बाहरी राज्यों से आए थे, लेकिन गांव के आसपास के ही थे. वे मौके का फायदा उठाकर अपने घरों को चले गए, लेकिन कार्रवाई के डर से 6 लोग वापस आ गए.
.
|
हाथरस. कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए पूरे देश में लॉकडाउन है. एक तरफ सरकार पूरे प्रयास कर रही है कि इस बीमारी का संक्रमण न फैले और लोगों को भी असुविधा न हो, लेकिन लोगों की लापरवाही और अज्ञानता सभी के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है. ताजा वाकया थाना सादाबाद क्षेत्र के कस्बा बिसावर के प्राथमिक विद्यालय में बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटर का है, जहां अन्य राज्यों से आए पैंतीस लोगों को रखा गया था. लेकिन ये सभी लोग रात में चकमा देकर यहां से फरार हो गए. जब यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में आया, तब आनन-फानन में कार्रवाई शुरू की गई. डीएम हाथरस ने क्वारेंटाइन सेंटर से भागने वाले सभी लोगों पर FIR कराने के आदेश दिए, जिसके बाद छः लोग तो वापस आ गए, लेकिन उनतीस अब भी फरार हैं. हाथरस के थाना सादाबाद क्षेत्र के कस्बा बिसावर में अन्य राज्यों से आए लोगों को प्राथमिक विद्यालय में एहतियातन चौदह दिन के लिए क्वारेंटाइन किया गया था. जिलाधिकारी द्वारा इन लोगों के खाने-पीने की व अन्य व्यवस्थाओं के लिए पंचायत सचिव को ड्यूटी पर लगाया था. लेकिन रात में इन्हें खाना खिलाने के बाद पंचायत सचिव जैसे ही विद्यालय से अलग हुए तभी यह लोग मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए. जैसे ही पंचायत सचिव को इस मामले की जानकारी हुई तो उसके होश उड़ गए. उसने तुरंत इसकी सूचना आलाधिकारियों को दी. News अट्ठारह संवाददाता ने जब इस मामले में जिलाधिकारी से बातचीत की तो डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने बताया कि फरार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया जा रहा है. वहीं काम में लापरवाही बरतने को लेकर पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. जिलाधिकारी का कहना है कि क्वारेंटाइन सेंटर में रखे गए लोग बाहरी राज्यों से आए थे, लेकिन गांव के आसपास के ही थे. वे मौके का फायदा उठाकर अपने घरों को चले गए, लेकिन कार्रवाई के डर से छः लोग वापस आ गए. .
|
यह रिपब्लिक चैनल के ख़िलाफ़ चौथा मामला है. मुंबई पुलिस ने 22 अक्टूबर को रिपब्लिक टीवी पर मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को लेकर एक खबर प्रसारित की थी, जिसमें दावा किया गया था कि मुंबई पुलिस के कर्मचारी पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के ख़िलाफ़ विद्रोह कर रहे हैं और उनके आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं.
मुंबईः मुंबई पुलिस ने पुलिस विभाग को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक न्यूज कंटेंट प्रसारित करने को लेकर रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के कार्यकारी संपादक, एक एंकर, दो संवाददाता और अन्य संपादकीय स्टाफ के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
पुलिस एक्ट 1922 की धारा 3(1) और आईपीसी की धारा 500 और 34 के तहत रिपब्लिक टीवी की एंकर शिवानी गुप्ता, संवाददाता सागरिका मित्रा, संवाददाता शवन सेन, कार्यकारी संपादक निरंजन नारायणस्वामी और अन्य एडिटोरियल स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया लैब की विशेष शाखा-1 में तैनात सब इंस्पेक्टर शशिकांत पवार के एनएम जोशी मार्ग पुलिस थाने में शुक्रवार को शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि रिपब्लिक चैनल ने ऐसी खबरें प्रसारित की हैं, जिनसे मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ पुलिसकर्मियों में असहमति की भावना पैदा होगी.
पुलिस का कहना है कि चैनल का दावा है कि मुंबई पुलिसकर्मी परमबीर सिंह के खिलाफ विद्रोह कर रहे हैं और उनके आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं.
पुलिस की इस कार्रवाई पर चैनल ने बयान में कहा है कि एक समाचार चैनल संगठन के सभी पत्रकारों के खिलाफ मामला दर्ज करने से लोकतंत्र पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, विशेष रूप से महाराष्ट्र के भीतर.
बता दें कि यह रिपब्लिक चैनल के खिलाफ चौथा मामला है. चैनल के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी के खिलाफ सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के लिए दो एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें से एक पीडोहोनी और एक एनएम जोशी मार्ग पुलिस थाने में दर्ज की गई है.
एक मामला कथित तौर पर टीआरपी धोखाधड़ी को लेकर है, जिसकी जांच मुंबई पुलिस की अपराध शाखा कर रही है, जबकि गोस्वामी के खिलाफ अलग से एक मामले की जांच पुलिस कर रही है.
रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी का कहना है कि वे सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर फेक कंटेंट की पहचान करते हैं. इसके साथ ही ऐसे कंटेट की भी पहचान करते हैं, जो लोगों के बीच वैमनस्य पैदा करे और वे इसे रिकॉर्ड कर अपने वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष पेश करते हैं.
शिकायतकर्ता ने अपने बयान में कहा कि शो के एंकर और रिपोर्टर ने यह भी कहा कि पुलिस आयुक्त सिंह मुंबई पुलिस की छवि धूमिल कर रहे हैं और इस शो का कंटेंट बिना किसी वैध साक्ष्य के प्रसारित हुआ.
पुलिस का कहना है कि चैनल जान-बूझकर मुंबई पुलिस आयुक्त के खिलाफ मुंबई पुलिसकर्मियों में असहमति और नाराजगी की भावना भड़काने की कोशिश कर रहा है.
|
यह रिपब्लिक चैनल के ख़िलाफ़ चौथा मामला है. मुंबई पुलिस ने बाईस अक्टूबर को रिपब्लिक टीवी पर मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को लेकर एक खबर प्रसारित की थी, जिसमें दावा किया गया था कि मुंबई पुलिस के कर्मचारी पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के ख़िलाफ़ विद्रोह कर रहे हैं और उनके आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं. मुंबईः मुंबई पुलिस ने पुलिस विभाग को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक न्यूज कंटेंट प्रसारित करने को लेकर रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के कार्यकारी संपादक, एक एंकर, दो संवाददाता और अन्य संपादकीय स्टाफ के खिलाफ मामला दर्ज किया है. पुलिस एक्ट एक हज़ार नौ सौ बाईस की धारा तीन और आईपीसी की धारा पाँच सौ और चौंतीस के तहत रिपब्लिक टीवी की एंकर शिवानी गुप्ता, संवाददाता सागरिका मित्रा, संवाददाता शवन सेन, कार्यकारी संपादक निरंजन नारायणस्वामी और अन्य एडिटोरियल स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया लैब की विशेष शाखा-एक में तैनात सब इंस्पेक्टर शशिकांत पवार के एनएम जोशी मार्ग पुलिस थाने में शुक्रवार को शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि रिपब्लिक चैनल ने ऐसी खबरें प्रसारित की हैं, जिनसे मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ पुलिसकर्मियों में असहमति की भावना पैदा होगी. पुलिस का कहना है कि चैनल का दावा है कि मुंबई पुलिसकर्मी परमबीर सिंह के खिलाफ विद्रोह कर रहे हैं और उनके आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं. पुलिस की इस कार्रवाई पर चैनल ने बयान में कहा है कि एक समाचार चैनल संगठन के सभी पत्रकारों के खिलाफ मामला दर्ज करने से लोकतंत्र पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, विशेष रूप से महाराष्ट्र के भीतर. बता दें कि यह रिपब्लिक चैनल के खिलाफ चौथा मामला है. चैनल के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी के खिलाफ सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के लिए दो एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें से एक पीडोहोनी और एक एनएम जोशी मार्ग पुलिस थाने में दर्ज की गई है. एक मामला कथित तौर पर टीआरपी धोखाधड़ी को लेकर है, जिसकी जांच मुंबई पुलिस की अपराध शाखा कर रही है, जबकि गोस्वामी के खिलाफ अलग से एक मामले की जांच पुलिस कर रही है. रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी का कहना है कि वे सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर फेक कंटेंट की पहचान करते हैं. इसके साथ ही ऐसे कंटेट की भी पहचान करते हैं, जो लोगों के बीच वैमनस्य पैदा करे और वे इसे रिकॉर्ड कर अपने वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष पेश करते हैं. शिकायतकर्ता ने अपने बयान में कहा कि शो के एंकर और रिपोर्टर ने यह भी कहा कि पुलिस आयुक्त सिंह मुंबई पुलिस की छवि धूमिल कर रहे हैं और इस शो का कंटेंट बिना किसी वैध साक्ष्य के प्रसारित हुआ. पुलिस का कहना है कि चैनल जान-बूझकर मुंबई पुलिस आयुक्त के खिलाफ मुंबई पुलिसकर्मियों में असहमति और नाराजगी की भावना भड़काने की कोशिश कर रहा है.
|
यह तो एक पुरानी कल्पित कथा मात्र है । चुपचाप होकर रहो, और 'अहं ब्रह्मास्ति' यह अनुभव करो ।
केवल वर्तमान काल ही विद्यमान है । हम चिन्तन द्वारा भी भूत और भविष्यत् की धारणा नहीं कर सकते; क्योंकि चिन्तन करने के लिये उद्यत होते ही भूत और भविष्यत् को वर्तमान में खड़ा करना पड़ता है। सब कुछ छोड़ दो, उसे जहाँ जाना है, जाने दो । यह समग्र जगत् एक भ्रममात्र है, यह तुम्हें और फिर प्रतारित न कर पावे । तुम जगत् को जो वह नहीं है वही समझते हो, अवस्तु में वस्तु - ज्ञान करते हो, अब वह वास्तव में जो हैं केवल उसे ही जानो । यदि शरीर कहीं चला जाता है, तो जाने दो; शरीर कहीं भी क्यों न जाय, कुछ भी परवाह मत करो । कर्तव्य नामक कोई एक वस्तु है, और उसका पालन करना ही होगा इस प्रकार की धारणा भयंकर कालकूटस्वरूप है, इसने जगत् को नष्ट कर डाला है ।
पाऊँगा और उसे बजाकर यथासमय इस बात की अपेक्षा मत करो । इसी जगह एक वीणा लेकर क्यों न बजाना आरम्भ कर दो ? स्वर्ग के लिये राह देखने की क्या आवश्यकता है? इस लोक को ही स्वर्ग बना लो । तुम लोगों की पुस्तक में है, स्वर्ग में विवाह नहीं होता यदि ऐसा है, तो यहीं पर अभी से विवाह क्यों न बन्द कर दो ? संन्यासियों का गैरिक यस्त्र मुक्त पुरुषों का चिह्न है। संसारित्वरूपी भिक्षुकों का वेष छोड दो, मुक्ति की पताका गैरिक वस्त्र धारण करो।
४ अगस्त, रविवार
अज्ञ लोग बिना समझे जिनकी उपासना करते हैं, मैं तुम्हारे निकट उन्हींका प्रचार करता हूँ ।
यह एक अद्वितीय ब्रह्म ही सभी ज्ञात वस्तुओं की अपेक्षा हमारे लिये अधिक ज्ञात है । वही एक ऐसी वस्तु है, जिसे हम सर्वत्र देखते हैं । सभी अपनी आत्मा को जानते हैं, इतना ही नहीं, पशु भी जानता है कि मैं हूँ । हम जो कुछ जानते हैं, सब आत्मा का ही बहिः प्रसारण है, विस्तारस्वरूप है। छोटे छोटे बच्चों को यह तत्व सिखाओ, वे भी इस तत्व की धारणा कर सकते हैं। प्रत्येक धर्म ( किसी किसी स्थल में अज्ञात रूप से भी ) इसी आत्मा की उपासना करता आ रहा है, क्योंकि आत्मा के अतिरिक्त और कुछ है ही नहीं ।
हम लोग इस जीवन को यहाँ पर जिस भाव से जानते हैं, उसके प्रति ऐसे घृणित रूप से आसक्त होकर रहना ही समस्त अनिष्ट का मूल है । उसी से प्रतारणा, चोरी आदि सब कुछ होता है। उसीसे लोग रुपये को देवता का स्थान देते हैं, और उसी से ही समस्त पाप तथा भय की उत्पत्ति होती है। किसी जड़ वस्तु को मूल्यवान मत समझो और उसमें आसक्त मत होओ। तुम किसी भी वस्तु में, इतना ही नहीं, जीवन में भी आसक्त मत होओ, फिर कोई भी भय न रहेगा। 'मृत्योः स मृत्युमाप्नोति य इह नानेव पश्यति ।' जो इस जगत् में अनेकता देखता है, वह मृत्यु के बाद मृत्यु को प्राप्त होता है । हम जब सर्वत्र एकल का दर्शन करते हैं, तब हमारे शरीर की भी मृत्यु नहीं होती, और न मन की ही । जगत् के सभी शरीर हमारा शरीर हैं, अतएव हमारा शरीर भी नित्य है; क्योंकि पेड़-पत्ते, जीव-जन्तु,
चन्द्र-सूर्य, इतना ही नहीं, यह सम्पूर्ण जगत् ब्रह्माण्ड ही हमारा शरीर है -- तो फिर इस शरीर का नाश होगा ही कैसे ? प्रत्येक मन, प्रत्येक चिन्ता ही हमारी है फिर मृत्यु आएगी ही कैसे ? आत्मा न कभी जन्म लेती है, न उसकी कभी मृत्यु होती है - • जब हम यह प्रत्यक्ष उपलब्धि कर लेते हैं, तब हमारा सभी सन्देह नष्ट हो जाता है। मैं हूँ', 'मैं अनुभव करता हूँ', 'मैं सुखी होता हूँ' अस्ति, भाति,
इन सब बातों पर कभी भी संदेह नहीं किया जा सकता ।
मेरी क्षुवा' नाम की कोई वस्तु हो ही नहीं सकती, क्योंकि जगत में जो कोई जो कुछ खाता है, वह मैं ही खाता हूँ । यदि हमारे एक मुट्ठी बाल उखड जाते हैं, तो हम ऐसा नहीं सोचते कि हम मर गये । इसी प्रकार एक देह की यदि मृत्यु होती है, तो वह एक मुट्टी बाल उखड जाने के ही सदृश है ।
वह ज्ञानातीत वस्तु ही ईश्वर है वह वाक्यातीत, चिन्तातीत एवं ज्ञानातीत है ।... तीन अवस्थायें हैं, - पशुत्व (तम ) , मनुष्यत्व ( रज) और देवत्व ( सत्व ) । जो सर्वोच्च अवस्था प्राप्त करते हैं, वे अस्तिमात्र या सत्स्वरूपमात्र हो जाते हैं। उनका कोई भी कर्तव्य शेष नहीं रहता, वे मनुष्यों के प्रति केवल प्रेमान्चित रहते हैं और चुम्बक के समान दूसरों को अपनी ओर आकृष्ट करते हैं। इसी का नाम मुक्ति है । उस समय चेष्टापूर्वक कोई सत्कार्य नहीं करना होता, उस समय जो कुछ कार्य होते हैं वे सब सत्कार्य ही होते हैं । जो ब्रह्मविद् हैं, वे सभी देवताओं से बड़े हैं । ईसा मसीह ने जिस समय मोह को जीतकर यह कहा, 'शैतान, मेरे सामने से दूर हो' उसी समय देवता
उनकी पूजा करने के लिये आये । कोई भी व्यक्ति ब्रह्मविद् की कुछ भी सहायता करने में समर्थ नहीं हो सकता, समग्र जगत्प्रपञ्च ही उनके सामने प्रणत रहता है, उनकी सभी इच्छाएँ पूर्ण हो चुकती हैं, उनकी आत्मा दूसरों को पवित्र करती है । अतएव यदि ईश्वरलाभ की कामना करो, तो ब्रह्मविद् की पूजा करो । जब हम देवानुग्रहस्वरूप मनुष्यत्व, मुमुक्षुत्व और महापुरुष - संश्रय लाभ करते हैं, तभी समझना चाहिये कि मुक्ति हमारे करतलगत है ।
चिरकाल के लिये देह की मृत्यु का नाम ही निर्वाण है । यह निर्वाणतत्व की निषेधात्मक अर्थात् 'नेति नेति' दिशा है । इसमें केवल यही कहा जाता है 'मैं यह नहीं, मैं वह नहीं ।' वेदान्त कुछ और आगे बढ़कर उसकी स्वीकारात्मक अर्थात् ' इति इति' दिशा बतलाता है उसीका नाम है मुक्ति ।' मैं अनन्त सत्ता, अनन्त ज्ञान, अनन्त आनन्द हूँ, मैं वही हूँ' यह है वेदान्त वह मानो पूर्ण रूप से निर्दोष मेहराव का बीचवाला पत्थर है ।
बौद्ध धर्म के उत्तर विभागवाले बहुसंख्यक अनुयायी मुक्ति में विश्वास रखते हैं - वे यथार्थतः वैदान्तिक ही हैं । केवल सिंहलवासी लोग निर्वाण को विनाश के समानार्थक रूप में ग्रहण करते हैं ।
किसी प्रकार का विश्वास या अविश्वास 'मैं' का नाश नहीं कर सकता । जिसका अस्तित्व विश्वास के ऊपर निर्भर रहता है और जो अविश्वास से उड जाता है, वह भ्रममात्र है । आत्मा को कोई भी स्पर्श नहीं कर सकता । मैं अपनी आत्मा को नमस्कार करता हूँ। 'स्वयंज्योति मैं अपने को ही नमस्कार करता हूँ, मैं ब्रह्म हूँ ।' यह शरीर मानो एक
अंवेरा घर है; हम जब इस घर में प्रवेश करते हैं, तभी वह आलोकित हो उठता है, तभी वह जीवन्त होता है । आत्मा की इस स्वयंप्रकाश ज्योति को कोई भी स्पर्श नहीं कर सकता । इसे किसी भी प्रकार से नष्ट नहीं किया जा सकता । इसे आवृत किया जा सकता है, किन्तु नष्ट कभी भी नहीं किया जा सकता ।
वर्तमान युग में भगवान् की अनन्त शक्तिस्वरूपिणी जननी के रूप में उपासना करना कर्तव्य है। इसमें पवित्रता का उदय होगा और इस मातृपूजा से अमेरिका में महाशक्ति का विकास होगा । यहाँ पर ( अमेरिका में ) कोई मन्दिर ( पौरोहित्य शक्ति ) हमारा गला नहीं दबाता और अपेक्षाकृत गरीब देशों के समान यहाँ कोई कष्ट भी नहीं भोगता। स्त्रियों ने सैकड़ों युगों तक दुःख कष्ट सहन किये हैं, इसीसे उनके भीतर असीम धैर्य और अध्यवसाय का विकास हुआ है । वे किसी भी भाव को सहज ही छोड़ना नहीं चाहतीं। इसी हेतु कुसंस्कारपूर्ण धर्मसमूहों एवं सभी देशों के पुरोहितों का मानो आधारस्वरूप हो जाती हैं; यही बाद में उनकी स्वाधीनता का कारण होगा। हमें पैदान्तिक होकर वेदान्त के इस महान् भाव को जीवन में परिणत करना होगा । निम्न श्रेणी के मनुष्यों में भी यह भाव वितरित करना होगा • यह केवल स्वाधीन अमेरिका में ही कार्यरूप में परिणत किया जा सकता है। भारत में बुद्ध, शंकर तथा अन्यान्य महामनीषी व्यक्तियों ने इन सभी भावों का लोगों में प्रचार किया था, किन्तु निम्न श्रेणी के लोग उन भावों को धारण नहीं कर सके। इस नूतन युग में निम्न जाति
के लोग वेदान्त के आदर्शानुसार जीवन यापन करेंगे, और यह स्त्रियों के द्वारा ही कार्यरूप में परिणत होगा ।
हृदय में सहेज रखो आदरणीया श्यामा माँ को, हृदय ! उसे केवल तुम देखो, और मैं ।
कामादिकों को दूर कर, आओ माँ को एकान्त में देखें, रसना अपने साथ रहे, जिससे वह माँ कहकर पुकार सके । कुबुद्धि कुमन्त्री जितने हैं, उन्हें अपने पास न आने दो । ज्ञा ननयन को पहरेदार रखो, पर वह भी सावधान रहे । " "जितने प्राणी जीवनधारण करते हैं, तुम उन सब से परे हो । तुम मेरे जीवन के सुधाकरस्वरूप हो, मेरी आत्मा की भी आत्मा हो । " रविवार, अपराह
देह मानो मन के हाथ का एक यन्त्रविशेष है, मन भी उसी प्रकार आत्मा के हाथ का एक यन्त्रस्वरूप है । जड़ है बाहर की गति, मन है भीतर की गति । समस्त परिणाम का आरम्भ और समाप्ति 'काल' में ही होती है । आत्मा यदि अपरिणामी है, तो वह निश्चित
पूर्णस्वरूप है, तो अनन्तरवरूप है; और अनन्तस्वरूप होने से वह अवश्य ही द्वितीयरहित है; क्योंकि दो अनन्त तो हो नहीं सकते, अतएव आत्मा एकमात्र ही है । यद्यपि आत्मा अनेक प्रतीत होती है, तथापि वास्तव में वह एक है । यदि कोई व्यक्ति सूर्य की ओर चलता है, तो प्रति पदक्षेप में वह एक एक विभिन्न सूर्य को देखेगा, किन्तु वास्तव में सभी तो केवल वह एक ही सूर्य हैं ।
'अस्ति' ही सभी प्रकार के एकत्व की भित्तिस्वरूप है, और इसमें पहुँचने पर ही पूर्णता प्राप्त होती है। यदि सभी रङ्गों को एक रङ्ग में
परिणत करना सम्भव होता, तो चित्रविद्या ही लुप्त हो जाती । सम्पूर्ण एकत्ल है विश्राम या लयस्वरूप; सभी अभिव्यक्तियों को हम एक ईश्वर से ही निकली हुई कहते हैं । 'ताओ' वादी, * कम्फ्यूछ ( Confucius ) मतत्रादी, बौद्ध, हिन्दू, यहूदी, मुसलमान, ईसाई और जरथुस्त्र के शिष्यगणं ( Zoroastrians ) इन सभों ने प्रायः समान रूप से, " तुम दूसरों से जिस प्रकार का व्यवहार चाहते हो, ठीक उसी तरह का व्यवहार दूसरों के प्रति भी करो", इस अपूर्व नीति का प्रचार किया है । किन्तु केवल हिन्दुओं ने ही इस नीति की व्याख्या दी है, क्योंकि वे इसका कारण देख पाये थे । मनुष्य को अन्य सभों के प्रति प्रेम करना होगा; क्योंकि उसमें और उनमें कोई भेद नहीं है। एक ही अनेक हुए हैं ।
जगत् में जितने बड़े बड़े धर्माचार्य हुए हैं, उनमें केवल लाओ जे ( Laotze ), बुद्ध और ईसा ही उपरोक्त नीति के भी परे जाकर शिक्षा दे गये हैं, 'तुम लोग अपने शत्रुओं से भी प्रेम करो', 'जो तुमसे घृणा करते हैं, उनसे भी प्रेम करो।'
तत्वसमूह पहले से ही विद्यमान है; हम उसकी सृष्टि नहीं करते, केवल उसका आविष्कार करते हैं । . धर्म केवल प्रत्यक्षानुभूति मात्र है। विभिन्न मतवाद विभिन्न पथरवरूप - प्रणालीवरूप मात्र हैं, वे धर्म नहीं हैं। जगत् के जितने धर्म हैं, सभी विभिन्न जाति के विभिन्न प्रयोजनों के अनुसार एक ही धर्म के विभिन्न प्रकाश मात्र हैं। मतवाद
* ईसा के पूर्व छठी शताब्दि में लाओत्से द्वारा चीन देश में स्थापित धर्म-सम्प्रदाय । इस सम्प्रदाय का मत प्रायः वेदान्तसदृश है । 'ताओ' की धारणा अधिकांश बेदान्त के निर्गुण ब्रह्मसदृश है।
केवल विरोध का निर्माण करता है । देखो न, वास्तव में ईश्वर के नाम से लोगों को शान्ति मिलनी चाहिये, परन्तु ऐसा न होकर जगत् में जितना रक्तपात हुआ है, उसमें से आधा से अधिक ईश्वर के नाम पर ही हुआ है। बिलकुल मूल तक पहुँचो; स्वयं ईश्वर से ही पूछो कि उनका स्वरूप कैसा है । यदि वे उत्तर नहीं देते हैं, तो समझना होगा कि वे नहीं हैं। किन्तु जगत् के सभी धर्म कहते हैं कि उन्होंने उत्तर दिया है ।
तुम्हारे स्वयं के कुछ विचार चाहिये; यदि ऐसा नहीं होगा तो दूसरों ने क्या कहा है, उसकी किसी भी प्रकार की धारणा तुम कैसे कर सकोगे ? पुरातन कुसंस्कारों को लेकर मत पड़े रहो, सर्वदा नूतन सत्यसमूह के लिये प्रस्तुत रहो । मूर्ख वे हैं, जो अपने पूर्वपुरुषों के खुदे हुए कुएँ का पानी खारा होने पर भी पीते रहेंगे, किन्तु दूसरों के कुएँ का विशुद्ध जल भी पीने से इनकार करेंगे । " जब तक हम ईश्वर को प्रत्यक्ष नहीं करते, तब तक उनके सम्बन्ध में कुछ भी नहीं जान सकते । प्रत्येक व्यक्ति स्वभावतः पूर्णस्वरूप है । अवतारों ने अपने इस पूर्णस्वरूप को प्रकाशित किया है, और हमारे भीतर अभी भी वह अव्यक्त रूप में विद्यमान है । यदि हम भी ईश्वर को नहीं देख सकते तो कैसे जान सकेंगे कि मूसा ने ईश्वर का दर्शन किया था ? यदि ईश्वर कभी किसी के समीप आये हैं, तो हमारे समीप भी आयेंगे । मैं एकदम उनके पास जाऊँगा, वे मुझसे बातचीत करेंगे। विश्वास को भित्तिरूप में मै ग्रहण नहीं कर सकता यह नास्तिकता और घोर ईश्वर निन्दा मात्र है । यदि ईश्वर ने दो हजार वर्ष पहले अरब की मरुभूमि में किसी व्यक्ति के साथ वार्तालाप किया है, तो वे आज मेरे साथ भी वार्तालाप
कर सकते है । यदि वे न कर सकते हैं तो हम क्यों न कहें कि वे मर गये हैं ? जैसे भी हो ईश्वर के निकट आओ आना ही चाहिये । किन्तु आते समय किसी को ढकेलना मत ।
ज्ञानी व्यक्ति अज्ञानियों के प्रति करुणा रखेंगे । जो ज्ञानी हैं, वे एक चींटी के लिये भी अपना शरीर त्याग करने को प्रस्तुत रहते हैं, क्योंकि वे जानते हैं, देह कुछ नहीं है ।
५ अगस्त, सोमवार
प्रश्न यह है कि सर्वोच्च अवस्था लाभ करने के लिये क्या सभी निम्नतर सोपानों से होकर जाना होगा, या एकदम छलांग मारकर उस अवस्था में पहुँचा जा सकता है ? आधुनिक अमेरिका का बालक आज जिस विषय को पचीस वर्ष के भीतर सीख लेता है, उसके पूर्व पुरुषों को उस विषय के सीखने में सौ वर्ष लग जाते। एक आधुनिक हिन्दू अभी बीस वर्ष में उस अवस्था में पहुँच जाता है, जिसे पाने में उसके पूर्वपुरुषों को आठ हजार वर्ष लगे थे । जड़ दृष्टि द्वारा देखने पर पता चलता है कि गर्भ में भ्रूण (Embryo ) उस प्राथमिक जीवाणु -- कोष ( Amoeba ) की अवस्था में आरम्भ होकर अनेक अवस्थाओं में ( मे गुज़रकर अन्त में मनुष्य स्वरूप धारण करता है। यह हुई आधुनिक विज्ञान की शिक्षा । वेदान्त और भी आगे बढ़कर कहता है - हमारे लिये समग्र मानव जाति का केवल अतीत जीवन यापन करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि समग्र मानव जाति का भविष्यत् जीवन भी यापन करना होगा । जो प्रथमोक्त बात कर पाते हैं, वे शिक्षित व्यक्ति हैं; जो दूसरी बात कर पाते हैं, वे जीवन्मुक्त हैं ।
काल केवल हम लोगों की चिन्ता का परिमापक ( Measure )
मात्र है, और चिन्ता की गति अभावनीय रूप से द्रुत होने के कारण हम कितने शीघ्र भावी जीवन यापन कर सकते हैं, उसका कोई सीमानिर्देश नहीं किया जा सकता । अतएव मानव जाति के समग्र भविष्यत् - जीवन को अपने जीवन में अनुभव करने में कितने दिन लगेंगे, यह निर्दिष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता । किसी किसी को उस अवस्था का लाभ एक क्षण में भी हो सकता है, और किसी को पचास जन्म भी लग सकते हैं । यह इच्छा की तीव्रता के ऊपर निर्भर है। अतएव शिष्यों की आवश्यकतानुसार उपदेश भी विभिन्नरूप होना आवश्यक है। जलती हुई आग सभी के लिये है - वह केवल जल को ही नहीं, वरन् बरफ के टुकड़ों को भी नष्ट कर डालती है । बन्दूक में से सैकड़ों छर्रे छोड़ो, कम से कम एक छर्रा तो लगेगा ही। लोगों के लिये सत्य का भण्डार खोल दो, उनमें से जितना उनके लिये उपयोगी है, उतना वे ले लेंगे । अतीत अनेकानेक जन्म के फलस्वरूप जिसके हृदय में जैसा संस्कार गठित हुआ है, उसे तदनुसार उपदेश दो । ज्ञान, योग, भक्ति और कर्म - इनमें से चाहे जिस भाव को मूल भित्ति बनाओ, किन्तु अन्यान्य भावों की भी साथ ही साथ शिक्षा दो । ज्ञान के साथ भक्ति का सामञ्जस्य करना होगा, योगप्रवण प्रकृति का युक्ति विचार के साथ सामञ्जस्य करना होगा, और कर्म मानो सभी पथों का अङ्गस्वरूप है। जो जहाँ पर है, उसे वहाँ से ठेलकर आगे बढाओ । धर्मशिक्षा विनष्टकारी न होकर सर्वदा सृजनकारी ही होनी चाहिये ।
मनुष्य की प्रत्येक प्रवृत्ति उसकी अतीत कर्मसमष्टि की परिचायक है। यह मानो वह रेखा या व्यासार्ध है, जिसका अनुसरण कर उसे चलना ही होगा । इस प्रकार के सब व्यासार्थों का अनुसरण करके ही
हम केन्द्र में पहुँच सकते हैं। दूसरों की प्रवृत्ति को पलट देने का नाम तक मत लो, उससे गुरु और शिष्य दोनों को क्षति पहुँचती है। जब तुम ज्ञान की शिक्षा देते हो, तो तुम्हें ज्ञानी होना होगा, और जो अवस्था शिष्य की होती है, तुम्हें मन ही मन ठीक उसी अवस्था में पहुँचना होगा । अन्यान्य योगों में भी तुम्हें ठीक ऐसा ही करना होगा। प्रत्येक वृत्ति का विकास साधन इस रूप में करना होगा कि उस वृत्ति को छोड़ अन्य कोई वृत्ति मानो हमारे लिये है ही नहीं यह है तथाकथित सामञ्जस्यपूर्ण उन्नतिसाधन का यथार्थ रहस्य अर्थात् गम्भीरता के साथ उदारता का अर्जन करो, किन्तु उसे खो मत दो । हम अनन्तस्वरूप हैं - हम सभी किसी भी प्रकार की सीमा के अतीत हैं। अतएव हम सर्वापेक्षा निष्ठावान् आदर्श मुसलमान के समान गम्भीर, और फिर भी सर्वापेक्षा घोर नास्तिक के समान उदारभावापन्न हो सकते हैं । इसे कार्य में परिणत करने का उपाय है मन का किसी विषयविशेष में प्रयोग न करके यथार्थ मन का ही विकास करना और उसका संयम करना । ऐसा करने पर तुम उसे चाहे जिस ओर घुमा सकोगे। इससे तुम्हें गम्भीरता और उदारता दोनों ही प्राप्त होंगी । ज्ञान की उपलब्धि इस भाव से करो कि ज्ञान छोडकर मानो और कुछ ही नहीं; उसके बाद भक्तियोग, राजयोग और कर्मयोग को भी लेकर इसी भाव से साधना करो । तरङ्ग को छोड़कर समुद्र की ओर जाओ, तभी तुम स्वेच्छानुसार विभिन्न प्रकार की तरङ्गों का उत्पादन कर सकोगे । तुम अपने मनरूपी ह्रद को संयत रखो, ऐसा किए बिना तुम दूसरों के मनरूपी हद का तत्व कभी न जान सकोगे।
वे ही प्रकृत आचार्य हैं, जो अपने शिष्य की प्रवृत्ति या रुचि
के अनुसार अपनी समस्त शक्ति का प्रयोग कर सकते हैं। प्रकृत सहानुभूति के बिना हम कभी भी ठीक ठीक शिक्षा नहीं दे सकते । मनुष्य एक दायित्वपूर्ण प्राणी है, इस धारणा को छोड़ दो; केवल पूर्णताप्राप्त व्यक्ति को ही दायित्व-ज्ञान है । सब अज्ञानी व्यक्ति मोहमदिरा पीकर मत्त हुए हैं, उनकी स्वाभाविक अवस्था नहीं है। तुम लोगों ने ज्ञानलाभ किया है - तुम्हें उनके प्रति अनन्त - धैर्यसम्पन्न होना होगा। उनके प्रति प्रेमभाव छोड़कर अन्य किसी प्रकार का भाव मत रखो; वे जिस रोग से प्रसित होकर जगत् को भ्रान्त दृष्टि से देखते हैं, पहले उसी रोग का निर्णय करो, उसके बाद उनकी उस रीति से सहायता करो जिससे उनका वह रोग मिट सके और वे ठीक ठीक देख सकें । सर्वदा स्मरण रखो कि मुक्त या स्वाधीन पुरुषों की ही केवल खाधीन इच्छा होती हैशेष सभी बन्धन के भीतर रहते हैंअतएव वे जो कुछ करते हैं उसके लिए वे उत्तरदायी नहीं हैं। इच्छा जब इच्छारूप में रहती है, उस समय वह बद्ध है। जल जब हिमालय के शिखर पर पिघलता है, तब स्त्राधीन या उन्मुक्त रहता है, किन्तु नदी रूप धारण करते ही किनारे की भूमि द्वारा आबद्ध हो जाता है; तथापि उसका प्राथमिक वेग ही उसे अन्त में समुद्र में ले जाता है, और वहाँ यह जल फिर से उस पूर्वकालीन स्वाधीनता को प्राप्त करता है। प्रथम अवस्था अर्थात् नदी रूप में आबद्ध होने को ही बाइबिल ने मानव का पतन (Fall of Man) और द्वितीय को पुनरुत्थान ( Resurrection ) कहा है। एक परमाणु भी जब तक उस मुक्तावस्था का लाभ नहीं करता है तब तक वह स्थिर होकर नहीं रह सकता ।
बहुतसी कल्पनायें अन्य कल्पनाओं का बन्धन नष्ट करने में
|
यह तो एक पुरानी कल्पित कथा मात्र है । चुपचाप होकर रहो, और 'अहं ब्रह्मास्ति' यह अनुभव करो । केवल वर्तमान काल ही विद्यमान है । हम चिन्तन द्वारा भी भूत और भविष्यत् की धारणा नहीं कर सकते; क्योंकि चिन्तन करने के लिये उद्यत होते ही भूत और भविष्यत् को वर्तमान में खड़ा करना पड़ता है। सब कुछ छोड़ दो, उसे जहाँ जाना है, जाने दो । यह समग्र जगत् एक भ्रममात्र है, यह तुम्हें और फिर प्रतारित न कर पावे । तुम जगत् को जो वह नहीं है वही समझते हो, अवस्तु में वस्तु - ज्ञान करते हो, अब वह वास्तव में जो हैं केवल उसे ही जानो । यदि शरीर कहीं चला जाता है, तो जाने दो; शरीर कहीं भी क्यों न जाय, कुछ भी परवाह मत करो । कर्तव्य नामक कोई एक वस्तु है, और उसका पालन करना ही होगा इस प्रकार की धारणा भयंकर कालकूटस्वरूप है, इसने जगत् को नष्ट कर डाला है । पाऊँगा और उसे बजाकर यथासमय इस बात की अपेक्षा मत करो । इसी जगह एक वीणा लेकर क्यों न बजाना आरम्भ कर दो ? स्वर्ग के लिये राह देखने की क्या आवश्यकता है? इस लोक को ही स्वर्ग बना लो । तुम लोगों की पुस्तक में है, स्वर्ग में विवाह नहीं होता यदि ऐसा है, तो यहीं पर अभी से विवाह क्यों न बन्द कर दो ? संन्यासियों का गैरिक यस्त्र मुक्त पुरुषों का चिह्न है। संसारित्वरूपी भिक्षुकों का वेष छोड दो, मुक्ति की पताका गैरिक वस्त्र धारण करो। चार अगस्त, रविवार अज्ञ लोग बिना समझे जिनकी उपासना करते हैं, मैं तुम्हारे निकट उन्हींका प्रचार करता हूँ । यह एक अद्वितीय ब्रह्म ही सभी ज्ञात वस्तुओं की अपेक्षा हमारे लिये अधिक ज्ञात है । वही एक ऐसी वस्तु है, जिसे हम सर्वत्र देखते हैं । सभी अपनी आत्मा को जानते हैं, इतना ही नहीं, पशु भी जानता है कि मैं हूँ । हम जो कुछ जानते हैं, सब आत्मा का ही बहिः प्रसारण है, विस्तारस्वरूप है। छोटे छोटे बच्चों को यह तत्व सिखाओ, वे भी इस तत्व की धारणा कर सकते हैं। प्रत्येक धर्म इसी आत्मा की उपासना करता आ रहा है, क्योंकि आत्मा के अतिरिक्त और कुछ है ही नहीं । हम लोग इस जीवन को यहाँ पर जिस भाव से जानते हैं, उसके प्रति ऐसे घृणित रूप से आसक्त होकर रहना ही समस्त अनिष्ट का मूल है । उसी से प्रतारणा, चोरी आदि सब कुछ होता है। उसीसे लोग रुपये को देवता का स्थान देते हैं, और उसी से ही समस्त पाप तथा भय की उत्पत्ति होती है। किसी जड़ वस्तु को मूल्यवान मत समझो और उसमें आसक्त मत होओ। तुम किसी भी वस्तु में, इतना ही नहीं, जीवन में भी आसक्त मत होओ, फिर कोई भी भय न रहेगा। 'मृत्योः स मृत्युमाप्नोति य इह नानेव पश्यति ।' जो इस जगत् में अनेकता देखता है, वह मृत्यु के बाद मृत्यु को प्राप्त होता है । हम जब सर्वत्र एकल का दर्शन करते हैं, तब हमारे शरीर की भी मृत्यु नहीं होती, और न मन की ही । जगत् के सभी शरीर हमारा शरीर हैं, अतएव हमारा शरीर भी नित्य है; क्योंकि पेड़-पत्ते, जीव-जन्तु, चन्द्र-सूर्य, इतना ही नहीं, यह सम्पूर्ण जगत् ब्रह्माण्ड ही हमारा शरीर है -- तो फिर इस शरीर का नाश होगा ही कैसे ? प्रत्येक मन, प्रत्येक चिन्ता ही हमारी है फिर मृत्यु आएगी ही कैसे ? आत्मा न कभी जन्म लेती है, न उसकी कभी मृत्यु होती है - • जब हम यह प्रत्यक्ष उपलब्धि कर लेते हैं, तब हमारा सभी सन्देह नष्ट हो जाता है। मैं हूँ', 'मैं अनुभव करता हूँ', 'मैं सुखी होता हूँ' अस्ति, भाति, इन सब बातों पर कभी भी संदेह नहीं किया जा सकता । मेरी क्षुवा' नाम की कोई वस्तु हो ही नहीं सकती, क्योंकि जगत में जो कोई जो कुछ खाता है, वह मैं ही खाता हूँ । यदि हमारे एक मुट्ठी बाल उखड जाते हैं, तो हम ऐसा नहीं सोचते कि हम मर गये । इसी प्रकार एक देह की यदि मृत्यु होती है, तो वह एक मुट्टी बाल उखड जाने के ही सदृश है । वह ज्ञानातीत वस्तु ही ईश्वर है वह वाक्यातीत, चिन्तातीत एवं ज्ञानातीत है ।... तीन अवस्थायें हैं, - पशुत्व , मनुष्यत्व और देवत्व । जो सर्वोच्च अवस्था प्राप्त करते हैं, वे अस्तिमात्र या सत्स्वरूपमात्र हो जाते हैं। उनका कोई भी कर्तव्य शेष नहीं रहता, वे मनुष्यों के प्रति केवल प्रेमान्चित रहते हैं और चुम्बक के समान दूसरों को अपनी ओर आकृष्ट करते हैं। इसी का नाम मुक्ति है । उस समय चेष्टापूर्वक कोई सत्कार्य नहीं करना होता, उस समय जो कुछ कार्य होते हैं वे सब सत्कार्य ही होते हैं । जो ब्रह्मविद् हैं, वे सभी देवताओं से बड़े हैं । ईसा मसीह ने जिस समय मोह को जीतकर यह कहा, 'शैतान, मेरे सामने से दूर हो' उसी समय देवता उनकी पूजा करने के लिये आये । कोई भी व्यक्ति ब्रह्मविद् की कुछ भी सहायता करने में समर्थ नहीं हो सकता, समग्र जगत्प्रपञ्च ही उनके सामने प्रणत रहता है, उनकी सभी इच्छाएँ पूर्ण हो चुकती हैं, उनकी आत्मा दूसरों को पवित्र करती है । अतएव यदि ईश्वरलाभ की कामना करो, तो ब्रह्मविद् की पूजा करो । जब हम देवानुग्रहस्वरूप मनुष्यत्व, मुमुक्षुत्व और महापुरुष - संश्रय लाभ करते हैं, तभी समझना चाहिये कि मुक्ति हमारे करतलगत है । चिरकाल के लिये देह की मृत्यु का नाम ही निर्वाण है । यह निर्वाणतत्व की निषेधात्मक अर्थात् 'नेति नेति' दिशा है । इसमें केवल यही कहा जाता है 'मैं यह नहीं, मैं वह नहीं ।' वेदान्त कुछ और आगे बढ़कर उसकी स्वीकारात्मक अर्थात् ' इति इति' दिशा बतलाता है उसीका नाम है मुक्ति ।' मैं अनन्त सत्ता, अनन्त ज्ञान, अनन्त आनन्द हूँ, मैं वही हूँ' यह है वेदान्त वह मानो पूर्ण रूप से निर्दोष मेहराव का बीचवाला पत्थर है । बौद्ध धर्म के उत्तर विभागवाले बहुसंख्यक अनुयायी मुक्ति में विश्वास रखते हैं - वे यथार्थतः वैदान्तिक ही हैं । केवल सिंहलवासी लोग निर्वाण को विनाश के समानार्थक रूप में ग्रहण करते हैं । किसी प्रकार का विश्वास या अविश्वास 'मैं' का नाश नहीं कर सकता । जिसका अस्तित्व विश्वास के ऊपर निर्भर रहता है और जो अविश्वास से उड जाता है, वह भ्रममात्र है । आत्मा को कोई भी स्पर्श नहीं कर सकता । मैं अपनी आत्मा को नमस्कार करता हूँ। 'स्वयंज्योति मैं अपने को ही नमस्कार करता हूँ, मैं ब्रह्म हूँ ।' यह शरीर मानो एक अंवेरा घर है; हम जब इस घर में प्रवेश करते हैं, तभी वह आलोकित हो उठता है, तभी वह जीवन्त होता है । आत्मा की इस स्वयंप्रकाश ज्योति को कोई भी स्पर्श नहीं कर सकता । इसे किसी भी प्रकार से नष्ट नहीं किया जा सकता । इसे आवृत किया जा सकता है, किन्तु नष्ट कभी भी नहीं किया जा सकता । वर्तमान युग में भगवान् की अनन्त शक्तिस्वरूपिणी जननी के रूप में उपासना करना कर्तव्य है। इसमें पवित्रता का उदय होगा और इस मातृपूजा से अमेरिका में महाशक्ति का विकास होगा । यहाँ पर कोई मन्दिर हमारा गला नहीं दबाता और अपेक्षाकृत गरीब देशों के समान यहाँ कोई कष्ट भी नहीं भोगता। स्त्रियों ने सैकड़ों युगों तक दुःख कष्ट सहन किये हैं, इसीसे उनके भीतर असीम धैर्य और अध्यवसाय का विकास हुआ है । वे किसी भी भाव को सहज ही छोड़ना नहीं चाहतीं। इसी हेतु कुसंस्कारपूर्ण धर्मसमूहों एवं सभी देशों के पुरोहितों का मानो आधारस्वरूप हो जाती हैं; यही बाद में उनकी स्वाधीनता का कारण होगा। हमें पैदान्तिक होकर वेदान्त के इस महान् भाव को जीवन में परिणत करना होगा । निम्न श्रेणी के मनुष्यों में भी यह भाव वितरित करना होगा • यह केवल स्वाधीन अमेरिका में ही कार्यरूप में परिणत किया जा सकता है। भारत में बुद्ध, शंकर तथा अन्यान्य महामनीषी व्यक्तियों ने इन सभी भावों का लोगों में प्रचार किया था, किन्तु निम्न श्रेणी के लोग उन भावों को धारण नहीं कर सके। इस नूतन युग में निम्न जाति के लोग वेदान्त के आदर्शानुसार जीवन यापन करेंगे, और यह स्त्रियों के द्वारा ही कार्यरूप में परिणत होगा । हृदय में सहेज रखो आदरणीया श्यामा माँ को, हृदय ! उसे केवल तुम देखो, और मैं । कामादिकों को दूर कर, आओ माँ को एकान्त में देखें, रसना अपने साथ रहे, जिससे वह माँ कहकर पुकार सके । कुबुद्धि कुमन्त्री जितने हैं, उन्हें अपने पास न आने दो । ज्ञा ननयन को पहरेदार रखो, पर वह भी सावधान रहे । " "जितने प्राणी जीवनधारण करते हैं, तुम उन सब से परे हो । तुम मेरे जीवन के सुधाकरस्वरूप हो, मेरी आत्मा की भी आत्मा हो । " रविवार, अपराह देह मानो मन के हाथ का एक यन्त्रविशेष है, मन भी उसी प्रकार आत्मा के हाथ का एक यन्त्रस्वरूप है । जड़ है बाहर की गति, मन है भीतर की गति । समस्त परिणाम का आरम्भ और समाप्ति 'काल' में ही होती है । आत्मा यदि अपरिणामी है, तो वह निश्चित पूर्णस्वरूप है, तो अनन्तरवरूप है; और अनन्तस्वरूप होने से वह अवश्य ही द्वितीयरहित है; क्योंकि दो अनन्त तो हो नहीं सकते, अतएव आत्मा एकमात्र ही है । यद्यपि आत्मा अनेक प्रतीत होती है, तथापि वास्तव में वह एक है । यदि कोई व्यक्ति सूर्य की ओर चलता है, तो प्रति पदक्षेप में वह एक एक विभिन्न सूर्य को देखेगा, किन्तु वास्तव में सभी तो केवल वह एक ही सूर्य हैं । 'अस्ति' ही सभी प्रकार के एकत्व की भित्तिस्वरूप है, और इसमें पहुँचने पर ही पूर्णता प्राप्त होती है। यदि सभी रङ्गों को एक रङ्ग में परिणत करना सम्भव होता, तो चित्रविद्या ही लुप्त हो जाती । सम्पूर्ण एकत्ल है विश्राम या लयस्वरूप; सभी अभिव्यक्तियों को हम एक ईश्वर से ही निकली हुई कहते हैं । 'ताओ' वादी, * कम्फ्यूछ मतत्रादी, बौद्ध, हिन्दू, यहूदी, मुसलमान, ईसाई और जरथुस्त्र के शिष्यगणं इन सभों ने प्रायः समान रूप से, " तुम दूसरों से जिस प्रकार का व्यवहार चाहते हो, ठीक उसी तरह का व्यवहार दूसरों के प्रति भी करो", इस अपूर्व नीति का प्रचार किया है । किन्तु केवल हिन्दुओं ने ही इस नीति की व्याख्या दी है, क्योंकि वे इसका कारण देख पाये थे । मनुष्य को अन्य सभों के प्रति प्रेम करना होगा; क्योंकि उसमें और उनमें कोई भेद नहीं है। एक ही अनेक हुए हैं । जगत् में जितने बड़े बड़े धर्माचार्य हुए हैं, उनमें केवल लाओ जे , बुद्ध और ईसा ही उपरोक्त नीति के भी परे जाकर शिक्षा दे गये हैं, 'तुम लोग अपने शत्रुओं से भी प्रेम करो', 'जो तुमसे घृणा करते हैं, उनसे भी प्रेम करो।' तत्वसमूह पहले से ही विद्यमान है; हम उसकी सृष्टि नहीं करते, केवल उसका आविष्कार करते हैं । . धर्म केवल प्रत्यक्षानुभूति मात्र है। विभिन्न मतवाद विभिन्न पथरवरूप - प्रणालीवरूप मात्र हैं, वे धर्म नहीं हैं। जगत् के जितने धर्म हैं, सभी विभिन्न जाति के विभिन्न प्रयोजनों के अनुसार एक ही धर्म के विभिन्न प्रकाश मात्र हैं। मतवाद * ईसा के पूर्व छठी शताब्दि में लाओत्से द्वारा चीन देश में स्थापित धर्म-सम्प्रदाय । इस सम्प्रदाय का मत प्रायः वेदान्तसदृश है । 'ताओ' की धारणा अधिकांश बेदान्त के निर्गुण ब्रह्मसदृश है। केवल विरोध का निर्माण करता है । देखो न, वास्तव में ईश्वर के नाम से लोगों को शान्ति मिलनी चाहिये, परन्तु ऐसा न होकर जगत् में जितना रक्तपात हुआ है, उसमें से आधा से अधिक ईश्वर के नाम पर ही हुआ है। बिलकुल मूल तक पहुँचो; स्वयं ईश्वर से ही पूछो कि उनका स्वरूप कैसा है । यदि वे उत्तर नहीं देते हैं, तो समझना होगा कि वे नहीं हैं। किन्तु जगत् के सभी धर्म कहते हैं कि उन्होंने उत्तर दिया है । तुम्हारे स्वयं के कुछ विचार चाहिये; यदि ऐसा नहीं होगा तो दूसरों ने क्या कहा है, उसकी किसी भी प्रकार की धारणा तुम कैसे कर सकोगे ? पुरातन कुसंस्कारों को लेकर मत पड़े रहो, सर्वदा नूतन सत्यसमूह के लिये प्रस्तुत रहो । मूर्ख वे हैं, जो अपने पूर्वपुरुषों के खुदे हुए कुएँ का पानी खारा होने पर भी पीते रहेंगे, किन्तु दूसरों के कुएँ का विशुद्ध जल भी पीने से इनकार करेंगे । " जब तक हम ईश्वर को प्रत्यक्ष नहीं करते, तब तक उनके सम्बन्ध में कुछ भी नहीं जान सकते । प्रत्येक व्यक्ति स्वभावतः पूर्णस्वरूप है । अवतारों ने अपने इस पूर्णस्वरूप को प्रकाशित किया है, और हमारे भीतर अभी भी वह अव्यक्त रूप में विद्यमान है । यदि हम भी ईश्वर को नहीं देख सकते तो कैसे जान सकेंगे कि मूसा ने ईश्वर का दर्शन किया था ? यदि ईश्वर कभी किसी के समीप आये हैं, तो हमारे समीप भी आयेंगे । मैं एकदम उनके पास जाऊँगा, वे मुझसे बातचीत करेंगे। विश्वास को भित्तिरूप में मै ग्रहण नहीं कर सकता यह नास्तिकता और घोर ईश्वर निन्दा मात्र है । यदि ईश्वर ने दो हजार वर्ष पहले अरब की मरुभूमि में किसी व्यक्ति के साथ वार्तालाप किया है, तो वे आज मेरे साथ भी वार्तालाप कर सकते है । यदि वे न कर सकते हैं तो हम क्यों न कहें कि वे मर गये हैं ? जैसे भी हो ईश्वर के निकट आओ आना ही चाहिये । किन्तु आते समय किसी को ढकेलना मत । ज्ञानी व्यक्ति अज्ञानियों के प्रति करुणा रखेंगे । जो ज्ञानी हैं, वे एक चींटी के लिये भी अपना शरीर त्याग करने को प्रस्तुत रहते हैं, क्योंकि वे जानते हैं, देह कुछ नहीं है । पाँच अगस्त, सोमवार प्रश्न यह है कि सर्वोच्च अवस्था लाभ करने के लिये क्या सभी निम्नतर सोपानों से होकर जाना होगा, या एकदम छलांग मारकर उस अवस्था में पहुँचा जा सकता है ? आधुनिक अमेरिका का बालक आज जिस विषय को पचीस वर्ष के भीतर सीख लेता है, उसके पूर्व पुरुषों को उस विषय के सीखने में सौ वर्ष लग जाते। एक आधुनिक हिन्दू अभी बीस वर्ष में उस अवस्था में पहुँच जाता है, जिसे पाने में उसके पूर्वपुरुषों को आठ हजार वर्ष लगे थे । जड़ दृष्टि द्वारा देखने पर पता चलता है कि गर्भ में भ्रूण उस प्राथमिक जीवाणु -- कोष की अवस्था में आरम्भ होकर अनेक अवस्थाओं में मात्र है, और चिन्ता की गति अभावनीय रूप से द्रुत होने के कारण हम कितने शीघ्र भावी जीवन यापन कर सकते हैं, उसका कोई सीमानिर्देश नहीं किया जा सकता । अतएव मानव जाति के समग्र भविष्यत् - जीवन को अपने जीवन में अनुभव करने में कितने दिन लगेंगे, यह निर्दिष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता । किसी किसी को उस अवस्था का लाभ एक क्षण में भी हो सकता है, और किसी को पचास जन्म भी लग सकते हैं । यह इच्छा की तीव्रता के ऊपर निर्भर है। अतएव शिष्यों की आवश्यकतानुसार उपदेश भी विभिन्नरूप होना आवश्यक है। जलती हुई आग सभी के लिये है - वह केवल जल को ही नहीं, वरन् बरफ के टुकड़ों को भी नष्ट कर डालती है । बन्दूक में से सैकड़ों छर्रे छोड़ो, कम से कम एक छर्रा तो लगेगा ही। लोगों के लिये सत्य का भण्डार खोल दो, उनमें से जितना उनके लिये उपयोगी है, उतना वे ले लेंगे । अतीत अनेकानेक जन्म के फलस्वरूप जिसके हृदय में जैसा संस्कार गठित हुआ है, उसे तदनुसार उपदेश दो । ज्ञान, योग, भक्ति और कर्म - इनमें से चाहे जिस भाव को मूल भित्ति बनाओ, किन्तु अन्यान्य भावों की भी साथ ही साथ शिक्षा दो । ज्ञान के साथ भक्ति का सामञ्जस्य करना होगा, योगप्रवण प्रकृति का युक्ति विचार के साथ सामञ्जस्य करना होगा, और कर्म मानो सभी पथों का अङ्गस्वरूप है। जो जहाँ पर है, उसे वहाँ से ठेलकर आगे बढाओ । धर्मशिक्षा विनष्टकारी न होकर सर्वदा सृजनकारी ही होनी चाहिये । मनुष्य की प्रत्येक प्रवृत्ति उसकी अतीत कर्मसमष्टि की परिचायक है। यह मानो वह रेखा या व्यासार्ध है, जिसका अनुसरण कर उसे चलना ही होगा । इस प्रकार के सब व्यासार्थों का अनुसरण करके ही हम केन्द्र में पहुँच सकते हैं। दूसरों की प्रवृत्ति को पलट देने का नाम तक मत लो, उससे गुरु और शिष्य दोनों को क्षति पहुँचती है। जब तुम ज्ञान की शिक्षा देते हो, तो तुम्हें ज्ञानी होना होगा, और जो अवस्था शिष्य की होती है, तुम्हें मन ही मन ठीक उसी अवस्था में पहुँचना होगा । अन्यान्य योगों में भी तुम्हें ठीक ऐसा ही करना होगा। प्रत्येक वृत्ति का विकास साधन इस रूप में करना होगा कि उस वृत्ति को छोड़ अन्य कोई वृत्ति मानो हमारे लिये है ही नहीं यह है तथाकथित सामञ्जस्यपूर्ण उन्नतिसाधन का यथार्थ रहस्य अर्थात् गम्भीरता के साथ उदारता का अर्जन करो, किन्तु उसे खो मत दो । हम अनन्तस्वरूप हैं - हम सभी किसी भी प्रकार की सीमा के अतीत हैं। अतएव हम सर्वापेक्षा निष्ठावान् आदर्श मुसलमान के समान गम्भीर, और फिर भी सर्वापेक्षा घोर नास्तिक के समान उदारभावापन्न हो सकते हैं । इसे कार्य में परिणत करने का उपाय है मन का किसी विषयविशेष में प्रयोग न करके यथार्थ मन का ही विकास करना और उसका संयम करना । ऐसा करने पर तुम उसे चाहे जिस ओर घुमा सकोगे। इससे तुम्हें गम्भीरता और उदारता दोनों ही प्राप्त होंगी । ज्ञान की उपलब्धि इस भाव से करो कि ज्ञान छोडकर मानो और कुछ ही नहीं; उसके बाद भक्तियोग, राजयोग और कर्मयोग को भी लेकर इसी भाव से साधना करो । तरङ्ग को छोड़कर समुद्र की ओर जाओ, तभी तुम स्वेच्छानुसार विभिन्न प्रकार की तरङ्गों का उत्पादन कर सकोगे । तुम अपने मनरूपी ह्रद को संयत रखो, ऐसा किए बिना तुम दूसरों के मनरूपी हद का तत्व कभी न जान सकोगे। वे ही प्रकृत आचार्य हैं, जो अपने शिष्य की प्रवृत्ति या रुचि के अनुसार अपनी समस्त शक्ति का प्रयोग कर सकते हैं। प्रकृत सहानुभूति के बिना हम कभी भी ठीक ठीक शिक्षा नहीं दे सकते । मनुष्य एक दायित्वपूर्ण प्राणी है, इस धारणा को छोड़ दो; केवल पूर्णताप्राप्त व्यक्ति को ही दायित्व-ज्ञान है । सब अज्ञानी व्यक्ति मोहमदिरा पीकर मत्त हुए हैं, उनकी स्वाभाविक अवस्था नहीं है। तुम लोगों ने ज्ञानलाभ किया है - तुम्हें उनके प्रति अनन्त - धैर्यसम्पन्न होना होगा। उनके प्रति प्रेमभाव छोड़कर अन्य किसी प्रकार का भाव मत रखो; वे जिस रोग से प्रसित होकर जगत् को भ्रान्त दृष्टि से देखते हैं, पहले उसी रोग का निर्णय करो, उसके बाद उनकी उस रीति से सहायता करो जिससे उनका वह रोग मिट सके और वे ठीक ठीक देख सकें । सर्वदा स्मरण रखो कि मुक्त या स्वाधीन पुरुषों की ही केवल खाधीन इच्छा होती हैशेष सभी बन्धन के भीतर रहते हैंअतएव वे जो कुछ करते हैं उसके लिए वे उत्तरदायी नहीं हैं। इच्छा जब इच्छारूप में रहती है, उस समय वह बद्ध है। जल जब हिमालय के शिखर पर पिघलता है, तब स्त्राधीन या उन्मुक्त रहता है, किन्तु नदी रूप धारण करते ही किनारे की भूमि द्वारा आबद्ध हो जाता है; तथापि उसका प्राथमिक वेग ही उसे अन्त में समुद्र में ले जाता है, और वहाँ यह जल फिर से उस पूर्वकालीन स्वाधीनता को प्राप्त करता है। प्रथम अवस्था अर्थात् नदी रूप में आबद्ध होने को ही बाइबिल ने मानव का पतन और द्वितीय को पुनरुत्थान कहा है। एक परमाणु भी जब तक उस मुक्तावस्था का लाभ नहीं करता है तब तक वह स्थिर होकर नहीं रह सकता । बहुतसी कल्पनायें अन्य कल्पनाओं का बन्धन नष्ट करने में
|
Andhra Pradesh के पूर्व मुख्यमंत्री K Rosaiah का शनिवार को निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे। कोनिजेती रोसैया, जिन्होंने तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में भी कार्य किया, ने आज सुबह हैदराबाद में अंतिम सांस ली। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि कोनिजेती रोसैया को आज सुबह हैदराबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया। सुबह 8. 20 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
|
Andhra Pradesh के पूर्व मुख्यमंत्री K Rosaiah का शनिवार को निधन हो गया। वह अठासी वर्ष के थे। कोनिजेती रोसैया, जिन्होंने तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में भी कार्य किया, ने आज सुबह हैदराबाद में अंतिम सांस ली। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि कोनिजेती रोसैया को आज सुबह हैदराबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया। सुबह आठ. बीस बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
|
योनि स्राव योनि संक्रमण की उपस्थिति का संकेत बन सकता है।
से संबंधित बीमारियों के एक समूह का संदर्भ लेंयोनि में संक्रमण या सूजन, शब्द "vaginitis" का उपयोग करें वुल्वोवाजिनाइटिस को योनि और योनि की सूजन कहा जाता है। रोगों के विकास से बैक्टीरिया, वायरस या खमीर कवक पैदा हो सकता है। रोग भी लागू स्प्रे या क्रीम के घटकों के कारण जलन का नतीजा है।
योनि स्राव के साथ योनि स्राव अलग हैएक अप्रिय गंध रोग के लक्षणों में पेशाब के दौरान जलन, सेक्स के दौरान असुविधा, योनि प्रवेश द्वार के क्षेत्र में खुजली होती है।
यौन संपर्क के माध्यम से कई संक्रमण संचरित होते हैं।
कुछ मामलों में, योनि स्राव,असुविधा और जलन के साथ, गैर-संक्रामक प्रकृति में हैं ऐसे लक्षण स्प्रे, शुक्राणु संबंधी उत्पादों या सिरिंजिंग के प्रभावों से एलर्जी प्रतिक्रियाओं (विचलन) का परिणाम होते हैं। योनि क्षेत्र कपड़े धोने, सिंथेटिक उत्पादों, या सुगंधित साबुन के लिए कंडीशनर को संवेदनशीलता प्रदर्शित कर सकता है।
हार्मोन के स्तर में कमी भी हैगैर-संक्रामक योनिमाइटिस का कारण इस मामले में, एक नियम के रूप में, योनि में सूखापन और किसी भी छुट्टी का अभाव है। इस vaginitis एट्रोफिक्स के रूप में विशेषता है इस प्रकार की बीमारी के साथ, योनि में जलने से, महिलाओं को यौन संपर्क के साथ दर्द महसूस होता है।
कई मामलों में, रोगियों को सौंपा जाता हैयोनि suppositories। उनकी कार्रवाई संक्रामक कारण को समाप्त करने के उद्देश्य से है Suppositories रातोंरात प्रशासित कर रहे हैं। रात की अवधि के दौरान, दवा शरीर के तापमान के प्रभाव में घुल जाती है। आमतौर पर, खुराक प्रति दिन एक सपोसिटरी की मात्रा में निर्धारित होता है। हालांकि, कुछ मामलों में, डॉक्टर खुराक को दोहरा कर सकते हैं। इस मामले में, योनि सुबह और शाम में suppositories डाला जाता है यह सुनिश्चित करने के लिए कि मोमबत्तियों के बाद निर्वहन से असुविधा का कारण नहीं है, आपको डिस्पोजेबल पैड का उपयोग करना चाहिए।
|
योनि स्राव योनि संक्रमण की उपस्थिति का संकेत बन सकता है। से संबंधित बीमारियों के एक समूह का संदर्भ लेंयोनि में संक्रमण या सूजन, शब्द "vaginitis" का उपयोग करें वुल्वोवाजिनाइटिस को योनि और योनि की सूजन कहा जाता है। रोगों के विकास से बैक्टीरिया, वायरस या खमीर कवक पैदा हो सकता है। रोग भी लागू स्प्रे या क्रीम के घटकों के कारण जलन का नतीजा है। योनि स्राव के साथ योनि स्राव अलग हैएक अप्रिय गंध रोग के लक्षणों में पेशाब के दौरान जलन, सेक्स के दौरान असुविधा, योनि प्रवेश द्वार के क्षेत्र में खुजली होती है। यौन संपर्क के माध्यम से कई संक्रमण संचरित होते हैं। कुछ मामलों में, योनि स्राव,असुविधा और जलन के साथ, गैर-संक्रामक प्रकृति में हैं ऐसे लक्षण स्प्रे, शुक्राणु संबंधी उत्पादों या सिरिंजिंग के प्रभावों से एलर्जी प्रतिक्रियाओं का परिणाम होते हैं। योनि क्षेत्र कपड़े धोने, सिंथेटिक उत्पादों, या सुगंधित साबुन के लिए कंडीशनर को संवेदनशीलता प्रदर्शित कर सकता है। हार्मोन के स्तर में कमी भी हैगैर-संक्रामक योनिमाइटिस का कारण इस मामले में, एक नियम के रूप में, योनि में सूखापन और किसी भी छुट्टी का अभाव है। इस vaginitis एट्रोफिक्स के रूप में विशेषता है इस प्रकार की बीमारी के साथ, योनि में जलने से, महिलाओं को यौन संपर्क के साथ दर्द महसूस होता है। कई मामलों में, रोगियों को सौंपा जाता हैयोनि suppositories। उनकी कार्रवाई संक्रामक कारण को समाप्त करने के उद्देश्य से है Suppositories रातोंरात प्रशासित कर रहे हैं। रात की अवधि के दौरान, दवा शरीर के तापमान के प्रभाव में घुल जाती है। आमतौर पर, खुराक प्रति दिन एक सपोसिटरी की मात्रा में निर्धारित होता है। हालांकि, कुछ मामलों में, डॉक्टर खुराक को दोहरा कर सकते हैं। इस मामले में, योनि सुबह और शाम में suppositories डाला जाता है यह सुनिश्चित करने के लिए कि मोमबत्तियों के बाद निर्वहन से असुविधा का कारण नहीं है, आपको डिस्पोजेबल पैड का उपयोग करना चाहिए।
|
वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने बुधवार को दी बनारस बार एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में कहा कि किसी भी मामले का निर्णय करते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वादकारी को न्याय मिले। ज्यादातर मामलों में वकील को जानकारी होती है कि किस मामले में क्या निर्णय होना है। ऐसे में निर्णय को लेकर आक्रोश नहीं व्यक्त करना चाहिए। जब परिवार के लोग बैठेंगे तो समस्याओं और उसके निराकरण पर चर्चा होगी।
जिला जज ने कहा कि न्यायाधीश को अपना काम सत्यनिष्ठा और ईमानदारी से करना चाहिए। किसी भी निर्णय को करते समय इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। मैं यह नहीं कहता कि मैंने सभी निर्णय सही ही दिए हैं। मैं भी इंसान हूं और मुझसे भी गलतियां हो सकती हैं।
इससे पहले जनपद न्यायाधीश ने बनारस बार एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में बनारस बार एसोसिएशन की ओर से मुख्य अतिथि जनपद न्यायाधीश डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश और विशिष्ट अतिथियों बार काउंसिल ऑफ इंडिया के को-चेयरमैन श्रीनाथ त्रिपाठी, बार काउंसिल ऑफ यूपी के पूर्व चेयरमैन व सदस्य हरिशंकर सिंह व अरुण कुमार त्रिपाठी को अंगवस्त्रम व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
शपथ ग्रहण समारोह की अध्यक्षता बनारस बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष धीरेंद्र नाथ शर्मा और संचालन महामंत्री रत्नेश्वर पांडेय (रत्नेश) ने किया। समारोह में सेंट्रल बार एसोसएिशन के अध्यक्ष मोहन यादव, महामंत्री अश्वनी कुमार राय, दीनानाथ सिंह, राधेश्याम चौबे, सौरभ श्रीवास्तव, राधेश्याम सिंह, अशोक सिंह प्रिंस, अनुज यादव, विकास सिंह, विनोद कुमार पाण्डेय, विवेक सिंह समेत कई अधिवक्तागण मौजूद थे।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने बुधवार को दी बनारस बार एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में कहा कि किसी भी मामले का निर्णय करते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वादकारी को न्याय मिले। ज्यादातर मामलों में वकील को जानकारी होती है कि किस मामले में क्या निर्णय होना है। ऐसे में निर्णय को लेकर आक्रोश नहीं व्यक्त करना चाहिए। जब परिवार के लोग बैठेंगे तो समस्याओं और उसके निराकरण पर चर्चा होगी। जिला जज ने कहा कि न्यायाधीश को अपना काम सत्यनिष्ठा और ईमानदारी से करना चाहिए। किसी भी निर्णय को करते समय इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। मैं यह नहीं कहता कि मैंने सभी निर्णय सही ही दिए हैं। मैं भी इंसान हूं और मुझसे भी गलतियां हो सकती हैं। इससे पहले जनपद न्यायाधीश ने बनारस बार एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में बनारस बार एसोसिएशन की ओर से मुख्य अतिथि जनपद न्यायाधीश डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश और विशिष्ट अतिथियों बार काउंसिल ऑफ इंडिया के को-चेयरमैन श्रीनाथ त्रिपाठी, बार काउंसिल ऑफ यूपी के पूर्व चेयरमैन व सदस्य हरिशंकर सिंह व अरुण कुमार त्रिपाठी को अंगवस्त्रम व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। शपथ ग्रहण समारोह की अध्यक्षता बनारस बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष धीरेंद्र नाथ शर्मा और संचालन महामंत्री रत्नेश्वर पांडेय ने किया। समारोह में सेंट्रल बार एसोसएिशन के अध्यक्ष मोहन यादव, महामंत्री अश्वनी कुमार राय, दीनानाथ सिंह, राधेश्याम चौबे, सौरभ श्रीवास्तव, राधेश्याम सिंह, अशोक सिंह प्रिंस, अनुज यादव, विकास सिंह, विनोद कुमार पाण्डेय, विवेक सिंह समेत कई अधिवक्तागण मौजूद थे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
खबर के अनुसार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में छोटे उद्योग को शुरू करने और अपने बिजनेस के विस्तार के लिए सरकार के द्वारा 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता हैं। इसका लाभ लेकर आप बिजनेस शुरू कर सकते हैं।
बता दें की इस योजना के तहत लोन पर आपको 9 से 12 प्रतिशत प्रतिवर्ष का ब्याज देना होता है। वहीं अगर आप समय पर लोन चुकाते रहते हैं, तो कर्ज का इंटरेस्ट रेट भी माफ कर दिया जाता हैं। देशभर में कई लोग इस योजना के तहत लोन लेकर बिजनेस कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के तहत 8 साल में सरकार ने करीब 31 लाख करोड़ रुपये लोन के रूप में बांटे हैं। इससे कई लोगों ने अपना खुद का बिजनेस शुरू किया हैं। इस योजना के द्वारा 50 हजार से 10 लाख तक लोन प्राप्त कर सकते हैं।
नोट : प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत लोन मिलने में 7 से 10 दिन का समय लगता हैं।
|
खबर के अनुसार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में छोटे उद्योग को शुरू करने और अपने बिजनेस के विस्तार के लिए सरकार के द्वारा दस लाख रुपये तक का लोन दिया जाता हैं। इसका लाभ लेकर आप बिजनेस शुरू कर सकते हैं। बता दें की इस योजना के तहत लोन पर आपको नौ से बारह प्रतिशत प्रतिवर्ष का ब्याज देना होता है। वहीं अगर आप समय पर लोन चुकाते रहते हैं, तो कर्ज का इंटरेस्ट रेट भी माफ कर दिया जाता हैं। देशभर में कई लोग इस योजना के तहत लोन लेकर बिजनेस कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के तहत आठ साल में सरकार ने करीब इकतीस लाख करोड़ रुपये लोन के रूप में बांटे हैं। इससे कई लोगों ने अपना खुद का बिजनेस शुरू किया हैं। इस योजना के द्वारा पचास हजार से दस लाख तक लोन प्राप्त कर सकते हैं। नोट : प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत लोन मिलने में सात से दस दिन का समय लगता हैं।
|
टोयोटा ने लग्जरी एमपीवी कार वेलफायर की कीमत में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की है।
- इनोवा कार प्राइस 23,000 रुपये तक बढ़ी है। अब इसकी कीमत 18. 09 लाख से 26. 77 लाख रुपये के बीच है।
- फॉर्च्यूनर कार प्राइस 77,000 रुपये तक बढ़ी है। इसकी कीमत अब 32. 59 लाख से 50. 34 लाख रुपये के बीच है।
- कैमरी और वेलफायर की कीमत क्रमशः 90,000 रुपये और 1. 85 लाख रुपये बढ़ी है।
टोयोटा ने अपनी चार प्रीमियम कार इनोवा क्रिस्टा, फॉर्च्यूनर, कैमरी और वेलफायर की प्राइस में इजाफा किया है। कंपनी ने इनकी कीमत बढ़ाने की वजह अभी नहीं बताई है, हमारा मानना है कि कॉस्ट बढ़ने से प्राइस में इजाफा हुआ है।
- इनोवा कार प्राइस 23,000 रुपये तक बढ़ी है।
- पेट्रोल मॉडल में इसके बेस वेरिएंट जीएक्स की कीमत सबसे ज्यादा बढ़ी है।
- फॉर्च्यूनर के टू-व्हील-ड्राइव पेट्रोल और डीजल वेरिएंट की कीमत 19,000 रुपये तक बढ़ी है।
- इस टोयोटा कार के लेजेंडर और जीआरएस वेरिएंट की कीमत सबसे ज्यादा 77,000 रुपये तक बढ़ी है।
- टोयोटा कैमरी हाइब्रिड सेडान की प्राइस में 90,000 रुपये तक इजाफा हुआ है। इसकी कीमत अब 45 लाख रुपये से ज्यादा हो गई है।
- टोयोटा वेलफायर की कीमत सबसे ज्यादा 1. 85 लाख रुपये तक बढ़ी है।
टोयोटा ने ग्लैंजा और अर्बन क्रूजर की प्राइस में अभी कोई इजाफा नहीं किया है, हालांकि जल्द ही इनकी कीमत भी बढ़ सकती है।
सभी कीमतें एक्स-शोरूम दिल्ली के अनुसार है।
|
टोयोटा ने लग्जरी एमपीवी कार वेलफायर की कीमत में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की है। - इनोवा कार प्राइस तेईस,शून्य रुपयापये तक बढ़ी है। अब इसकी कीमत अट्ठारह. नौ लाख से छब्बीस. सतहत्तर लाख रुपये के बीच है। - फॉर्च्यूनर कार प्राइस सतहत्तर,शून्य रुपयापये तक बढ़ी है। इसकी कीमत अब बत्तीस. उनसठ लाख से पचास. चौंतीस लाख रुपये के बीच है। - कैमरी और वेलफायर की कीमत क्रमशः नब्बे,शून्य रुपयापये और एक. पचासी लाख रुपये बढ़ी है। टोयोटा ने अपनी चार प्रीमियम कार इनोवा क्रिस्टा, फॉर्च्यूनर, कैमरी और वेलफायर की प्राइस में इजाफा किया है। कंपनी ने इनकी कीमत बढ़ाने की वजह अभी नहीं बताई है, हमारा मानना है कि कॉस्ट बढ़ने से प्राइस में इजाफा हुआ है। - इनोवा कार प्राइस तेईस,शून्य रुपयापये तक बढ़ी है। - पेट्रोल मॉडल में इसके बेस वेरिएंट जीएक्स की कीमत सबसे ज्यादा बढ़ी है। - फॉर्च्यूनर के टू-व्हील-ड्राइव पेट्रोल और डीजल वेरिएंट की कीमत उन्नीस,शून्य रुपयापये तक बढ़ी है। - इस टोयोटा कार के लेजेंडर और जीआरएस वेरिएंट की कीमत सबसे ज्यादा सतहत्तर,शून्य रुपयापये तक बढ़ी है। - टोयोटा कैमरी हाइब्रिड सेडान की प्राइस में नब्बे,शून्य रुपयापये तक इजाफा हुआ है। इसकी कीमत अब पैंतालीस लाख रुपये से ज्यादा हो गई है। - टोयोटा वेलफायर की कीमत सबसे ज्यादा एक. पचासी लाख रुपये तक बढ़ी है। टोयोटा ने ग्लैंजा और अर्बन क्रूजर की प्राइस में अभी कोई इजाफा नहीं किया है, हालांकि जल्द ही इनकी कीमत भी बढ़ सकती है। सभी कीमतें एक्स-शोरूम दिल्ली के अनुसार है।
|
इस बात में कोई भी संदेह नहीं है कि पिछले 24 घंटे के अंदर क्रिकेट जगत में जो भी कुछ हुआ है उसके बाद सभी कि नजरें इस समय दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच में चल रही टेस्ट सीरिज के तीसरे टेस्ट मैच में जाकर टिक गयीं है. इस टेस्ट मैच के तीसरे दिन कैमरून बेनक्रॉफ्ट ने जो भी घटना कि उसके बाद ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम की हर जगह पर आलोचना हो रही है.
बेनक्रॉफ्ट ने जब इस बात को देख लिए कि उनको गेंद के साथ छेड़छाड़ करते हुए बड़ी स्क्रीन पर देख लिया गया तो वह पीले रंग के उस कपड़े को छुपाने लगे और उसके बाद जब अंपायर ने उनसे जाकर बात कि तो उन्होंने उस दौरान इस बात से साफ़ तौर पर इंकार कर दिया, लेकिन इसके बाद तीसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद स्मिथ ने प्रेस कांफ्रेंस में इस पूरी घटना को कबूल करते हुए खुद को दोषी बताया जिसके बाद उनकी हर जगह पर आलोचना हो रही थी और इसी कड़ी में पूर्व ऑस्ट्रेलिया कप्तान माइकल क्लार्क ने भी ट्विट कर काफी बड़ी बात लिख दी.
ऑस्ट्रेलिया टीम के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क को जब इस घटना का पता चला तो उन्होंने इस पर अपना काफी गुस्सा दिखाते हुयें ट्विट किया इसके अलावा क्लार्क अभी भी इस बात को मानते है कि स्मिथ को अभी भी टीम की कप्तानी को जारी रखना चाहिए क्योकिं इन सबके पीछे कई कारण है और इस पूरे विवाद से वह ही टीम को बाहर निकाल सकते है.
इसके अलावा क्लार्क ने इस बात को भी कहा कि यदि उन्हें दुबारा अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करनी पड़ी तो वह अपनी टीम को इस विवाद से निकालने के लिए वापस आ सकते है जिस पर क्लार्क ने अपने बयान में कहा कि "यदि मुझसे अभी भी पूछा जाएँ कि कप्तानी इस स्थिति में किसे देनी चाहिए तो मैं स्मिथ को ही कप्तान बने रहने देना चाहता हूँ. ऑस्ट्रेलिया मेरे दिल में है. मुझे ऐसा लगता है कि यह बहुत ही बड़ी गलती कि गयीं है मुझे लगता है कि अभी सब ठीक होना चाहिए कुछ समय के बाद. " क्लार्क ने ये सारी बातें चैनल नाइन से बात करते हुए कहीं.
|
इस बात में कोई भी संदेह नहीं है कि पिछले चौबीस घंटाटे के अंदर क्रिकेट जगत में जो भी कुछ हुआ है उसके बाद सभी कि नजरें इस समय दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच में चल रही टेस्ट सीरिज के तीसरे टेस्ट मैच में जाकर टिक गयीं है. इस टेस्ट मैच के तीसरे दिन कैमरून बेनक्रॉफ्ट ने जो भी घटना कि उसके बाद ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम की हर जगह पर आलोचना हो रही है. बेनक्रॉफ्ट ने जब इस बात को देख लिए कि उनको गेंद के साथ छेड़छाड़ करते हुए बड़ी स्क्रीन पर देख लिया गया तो वह पीले रंग के उस कपड़े को छुपाने लगे और उसके बाद जब अंपायर ने उनसे जाकर बात कि तो उन्होंने उस दौरान इस बात से साफ़ तौर पर इंकार कर दिया, लेकिन इसके बाद तीसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद स्मिथ ने प्रेस कांफ्रेंस में इस पूरी घटना को कबूल करते हुए खुद को दोषी बताया जिसके बाद उनकी हर जगह पर आलोचना हो रही थी और इसी कड़ी में पूर्व ऑस्ट्रेलिया कप्तान माइकल क्लार्क ने भी ट्विट कर काफी बड़ी बात लिख दी. ऑस्ट्रेलिया टीम के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क को जब इस घटना का पता चला तो उन्होंने इस पर अपना काफी गुस्सा दिखाते हुयें ट्विट किया इसके अलावा क्लार्क अभी भी इस बात को मानते है कि स्मिथ को अभी भी टीम की कप्तानी को जारी रखना चाहिए क्योकिं इन सबके पीछे कई कारण है और इस पूरे विवाद से वह ही टीम को बाहर निकाल सकते है. इसके अलावा क्लार्क ने इस बात को भी कहा कि यदि उन्हें दुबारा अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करनी पड़ी तो वह अपनी टीम को इस विवाद से निकालने के लिए वापस आ सकते है जिस पर क्लार्क ने अपने बयान में कहा कि "यदि मुझसे अभी भी पूछा जाएँ कि कप्तानी इस स्थिति में किसे देनी चाहिए तो मैं स्मिथ को ही कप्तान बने रहने देना चाहता हूँ. ऑस्ट्रेलिया मेरे दिल में है. मुझे ऐसा लगता है कि यह बहुत ही बड़ी गलती कि गयीं है मुझे लगता है कि अभी सब ठीक होना चाहिए कुछ समय के बाद. " क्लार्क ने ये सारी बातें चैनल नाइन से बात करते हुए कहीं.
|
'अरे परभी पूजैं सेठ साहूकार दुनिया और राजा मैंनि भानजी ऐ न्यौति जिमावैं, जोरा औरु तीहरि पहरावै जे करें गऊन के दॉन सौने में सींग मढ़ावैं ।
सो सिर पै टोपी, गाँड़ि लँगोटी, बूझन आए ए बाबाजी तुम दॉन तौ करोगे परमाधारी ।
सो कहा गंगा में तुम जौ बवौ
'गरब की बोली जी मति मारौ पंढवा, बचन करोगे यादि ऐ जा बोली कौ म्यानों दुगो बेटा, असलि गुरु कौ चेला परि छिमा खाइ औघरिया चाल्यौ आय गुरुन के पास ऐ जैलै बाबा कोरी पतुर नांइ सधै तेरौ जोगु ऐ परि जोग नांइ जोहर भयौ बाबा बिन खांड़े सँगरामु ऐ 'बेटा कै पंडन्ने मायौ, छेरथौ के पंडनु दई गारी 'अरे बाबा ना पंडनुनें मारथौ छेरयौ, ना पंडनु दई गारी अरे सबद की मार दई पंडन्ने लीया करेजा काढ़ि ऐ । बोलौ बागर के पीर की मदद
६ - मैं लई स्याम सरनि जमुना की तेरे चरन सिर लाग्या ध्यान अब जोगी जती सती संन्यासी मगन होते धरि तेरा ध्यान चारथौ पहर भजनों में रहते प्रात होत गंगा स्नान तीनि लोक से वारी न्यारी मथुरा बेदन गाई ऐ चौबीस घाट की कहा कहूँ महिमा बिच बिसरांति बनाई ऐ उज्जलि कुल चौबे गुजराती अपनी देह पुजाई ऐ । भूसेसुर कुतवाल सहर में केसवदेव ठकुराई ऐ अकस्म निरंजन तेरौ जस गामें
मथुरा जी की पद्म लटन में बह चली जमुना माई ऐ । 'अरे के पंडन के अगिनि लगाइ दऊँ कै कोढ़ी करि डारों । 'अग़िन न दैना, कोढ़ी न करना बढ़ा लगै अपराधु ऐ बड़ी जीम गंगा माई की हरि लै गंगा माइ ऐ । अरे सवरे चेला अरजी करो ले चीपी झोली में धरौ पंडवन के मारौ मान, गंगा जी हरौ । घरे बेटा सब तीरथ हरिलाओ मान पंडन के मारौ जी लै पत्तुर औघरिया चल्यौ । गाम नंगर पूछतु फिरयौ गंगा दगरौ कित में गयौ। अजी गाम पछाँई डूड़ा पीपरी
|
'अरे परभी पूजैं सेठ साहूकार दुनिया और राजा मैंनि भानजी ऐ न्यौति जिमावैं, जोरा औरु तीहरि पहरावै जे करें गऊन के दॉन सौने में सींग मढ़ावैं । सो सिर पै टोपी, गाँड़ि लँगोटी, बूझन आए ए बाबाजी तुम दॉन तौ करोगे परमाधारी । सो कहा गंगा में तुम जौ बवौ 'गरब की बोली जी मति मारौ पंढवा, बचन करोगे यादि ऐ जा बोली कौ म्यानों दुगो बेटा, असलि गुरु कौ चेला परि छिमा खाइ औघरिया चाल्यौ आय गुरुन के पास ऐ जैलै बाबा कोरी पतुर नांइ सधै तेरौ जोगु ऐ परि जोग नांइ जोहर भयौ बाबा बिन खांड़े सँगरामु ऐ 'बेटा कै पंडन्ने मायौ, छेरथौ के पंडनु दई गारी 'अरे बाबा ना पंडनुनें मारथौ छेरयौ, ना पंडनु दई गारी अरे सबद की मार दई पंडन्ने लीया करेजा काढ़ि ऐ । बोलौ बागर के पीर की मदद छः - मैं लई स्याम सरनि जमुना की तेरे चरन सिर लाग्या ध्यान अब जोगी जती सती संन्यासी मगन होते धरि तेरा ध्यान चारथौ पहर भजनों में रहते प्रात होत गंगा स्नान तीनि लोक से वारी न्यारी मथुरा बेदन गाई ऐ चौबीस घाट की कहा कहूँ महिमा बिच बिसरांति बनाई ऐ उज्जलि कुल चौबे गुजराती अपनी देह पुजाई ऐ । भूसेसुर कुतवाल सहर में केसवदेव ठकुराई ऐ अकस्म निरंजन तेरौ जस गामें मथुरा जी की पद्म लटन में बह चली जमुना माई ऐ । 'अरे के पंडन के अगिनि लगाइ दऊँ कै कोढ़ी करि डारों । 'अग़िन न दैना, कोढ़ी न करना बढ़ा लगै अपराधु ऐ बड़ी जीम गंगा माई की हरि लै गंगा माइ ऐ । अरे सवरे चेला अरजी करो ले चीपी झोली में धरौ पंडवन के मारौ मान, गंगा जी हरौ । घरे बेटा सब तीरथ हरिलाओ मान पंडन के मारौ जी लै पत्तुर औघरिया चल्यौ । गाम नंगर पूछतु फिरयौ गंगा दगरौ कित में गयौ। अजी गाम पछाँई डूड़ा पीपरी
|
इस मामले में 2018 में दायर किए आरोपपत्र के मुताबिक 4 अप्रैल 2018 को पीडि़ता के पिता और उसके साथी कर्मी अपने गांव लौट रहे थे और उसी दौरान उन्होंने रास्ते में शशि प्रताप सिंह से लिफ्ट मांगी थी, लेकिन उसने लिफ्ट देने से इंकार कर दिया था। इसी दौरान उनके बीच तकरार हो गई। इसके बाद शशि सिंह ने कुलदीप सेंगर के भाई अतुल और अन्यों को मौके पर बुलाया और पीडि़ता के पिता की बेहरमी से पिटाई।
उन्नाव। उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हत्या मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर समेत सात अन्य को दस साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले में सेंगर और उनके भाई अतुल सेंगर को पीड़िता के परिवार को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। कोर्ट ने इस मामले में सेंगर को दोषी करार देते हुए कहा था कि जिस तरीके से पीड़िता के पिता की हत्या की गई थी, वह जधन्य था। पुलिस कस्टडी में पीड़िता के पिता की नौ अप्रैल 2018 को हत्या हो गई थी। आपको बता दें कि अदालत में सजा पर जिरह के दौरान सेंगर ने कहा था कि अगर उन्होंने कुछ गलत किया है तो उन्हें फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए और उनकी आंखों में तेजाब डाल दिया जाना चाहिए।
कोर्ट ने इस मामले में सेंगर को दोषी करार देते हुए कहा था कि जिस तरीके से पीड़िता के पिता की हत्या की गई थी, वह जधन्य था। पुलिस कस्टडी में पीड़िता के पिता की नौ अप्रैल 2018 को हत्या हो गई थी। आपको बता दें कि अदालत में सजा पर जिरह के दौरान सेंगर ने कहा था कि अगर उन्होंने कुछ गलत किया है तो उन्हें फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए और उनकी आंखों में तेजाब डाल दिया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को आपराधिक साजिश का दोषी पाया था। फैसला सुनाते हुए तीस हजारी कोर्ट के जज ने कहा कि यह मेरी जिंदगी का सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रायल रहा। जज ने सीबीआई और पीड़ित के वकील की भी सराहना की। तीस हजारी कोर्ट ने इससे पहले 29 फरवरी को इस मामले पर सुनवाई की थी और फैसले के लिए चार मार्च की तिथि तय की थी।
सेंगर ने कहा कि उनकी दो बेटियां हैं और न्यायाधीश से आग्रह किया कि उन्हें छोड़ दिया जाए। न्यायाधीश ने कहा कि आपका परिवार है। हर किसी का है। आपको यह सब अपराध करते समय सोचना चाहिए था, लेकिन आपने सभी कानूनों को तोड़ा। अब आप हर चीज को ना कहेंगे? आप कब तक इनकार करते रहेंगे?
सीबीआई ने सेंगर एवं अन्य के लिए अधिकतम सजा की मांग की जिसमें मामले में दोषी करार दिए गए दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। इसमें माखी थाने के तत्कालीन प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया और तत्कालीन उपनिरीक्षक के.पी. सिंह शामिल हैं। सीबीआई के वकील ने कहा कि नौकरशाह होने के नाते इन दो पुलिस अधिकारियों का कर्तव्य था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखें, लेकिन उन्होंने अपनी ड्यूटी नहीं की और पीड़िता के पिता का समय पर इलाज नहीं कराया। सीबीआई के वकील ने अदालत से कहा कि ये पुलिस अधिकारी षड्यंत्र में शामिल थे और उन्हें कड़ा दंड मिलना चाहिए।
इस केस में पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, कामता प्रसाद (सब इंस्पेक्टर), अशोक सिंह भदौरिया (एसएचओ), विनीत मिश्रा उर्फ विनय मिश्रा, बीरेंद्र सिंह उर्फ बउवा सिंह, शशि प्रताप सिंह उर्फ सुमन सिंह और जयदीप सिंह उर्फ अतुल सिंह को कोर्ट ने दोषी करार दिया गया। शैलेंद्र सिंह उर्फ टिंकू सिंह, राम शरण सिंह उर्फ सोनू सिंह, अमीर खान, कॉन्स्टेबल और शरदवीर सिंह कोर्ट से बरी हो गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस केस को उत्तर प्रदेश के बाहर शिफ्ट कर दिया था। इसके बाद से तीस हजारी कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। इस केस में पीड़िता के पक्ष से कुल 55 लोगों ने गवाही दी। वहीं बचाव पक्ष की तरफ से नौ गवाह कोर्ट में पेश हुए।
भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन विधायक कुलदीप सेंगर को नाबालिग से दुष्कर्म करने के मामले में उम्रकैद की सजा हो चुकी है। 16 दिसंबर, 2019 को तीस हजारी कोर्ट ने इस मामले में सेंगर को दोषी ठहराया था और 20 दिसंबर को उम्रकैद की सजा हुई थी।
अभी कार एक्सीडेंट में पीड़िता के परिवार के लोगों की मौत से जुड़ी दो एफआईआर पर कोर्ट का फैसला आना बाकी है. इससे पहले रेप के आरोप में तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को दोषी माना था और 20 दिसंबर 2019 सजा का ऐलान करते हुए सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके साथ ही सेंगर पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था.
इस मामले में 2018 में दायर किए आरोपपत्र के मुताबिक 4 अप्रैल 2018 को पीडि़ता के पिता और उसके साथी कर्मी अपने गांव लौट रहे थे और उसी दौरान उन्होंने रास्ते में शशि प्रताप सिंह से लिफ्ट मांगी थी, लेकिन उसने लिफ्ट देने से इंकार कर दिया था। इसी दौरान उनके बीच तकरार हो गई। इसके बाद शशि सिंह ने कुलदीप सेंगर के भाई अतुल और अन्यों को मौके पर बुलाया और पीडि़ता के पिता की बेहरमी से पिटाई।
इस घटना में गंभीर रूप से घायल हुए पीड़िता के पिता को अस्पताल पहुंचाने के बजाए जेल में डाल दिया गया, जबकि उन्हें उपचार की जरूरत थी। उन्हें गहरी चोटें लगी थीं, जिस कारण 9 अप्रैल को उनकी न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी। इस घटना का एक वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल होता दिखा तो यह मामला प्रकाश में आया। इस वीडियो में पीडि़ता के पिता को बुरी तरह पीटता हुआ दिखाया गया।
उल्लेखनीय है कि उन्नाव में कुलदीप सेंगर और उसके साथियों ने 2017 में नाबालिग लड़की को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस मामले की जांच सीबीआई ने की। पीडि़ता की कार पर जानलेवा हमला होने की घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए इस केस से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई लखनऊ से दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में स्थानांतरित कर दी थी।
|
इस मामले में दो हज़ार अट्ठारह में दायर किए आरोपपत्र के मुताबिक चार अप्रैल दो हज़ार अट्ठारह को पीडि़ता के पिता और उसके साथी कर्मी अपने गांव लौट रहे थे और उसी दौरान उन्होंने रास्ते में शशि प्रताप सिंह से लिफ्ट मांगी थी, लेकिन उसने लिफ्ट देने से इंकार कर दिया था। इसी दौरान उनके बीच तकरार हो गई। इसके बाद शशि सिंह ने कुलदीप सेंगर के भाई अतुल और अन्यों को मौके पर बुलाया और पीडि़ता के पिता की बेहरमी से पिटाई। उन्नाव। उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हत्या मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर समेत सात अन्य को दस साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले में सेंगर और उनके भाई अतुल सेंगर को पीड़िता के परिवार को दस-दस लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। कोर्ट ने इस मामले में सेंगर को दोषी करार देते हुए कहा था कि जिस तरीके से पीड़िता के पिता की हत्या की गई थी, वह जधन्य था। पुलिस कस्टडी में पीड़िता के पिता की नौ अप्रैल दो हज़ार अट्ठारह को हत्या हो गई थी। आपको बता दें कि अदालत में सजा पर जिरह के दौरान सेंगर ने कहा था कि अगर उन्होंने कुछ गलत किया है तो उन्हें फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए और उनकी आंखों में तेजाब डाल दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस मामले में सेंगर को दोषी करार देते हुए कहा था कि जिस तरीके से पीड़िता के पिता की हत्या की गई थी, वह जधन्य था। पुलिस कस्टडी में पीड़िता के पिता की नौ अप्रैल दो हज़ार अट्ठारह को हत्या हो गई थी। आपको बता दें कि अदालत में सजा पर जिरह के दौरान सेंगर ने कहा था कि अगर उन्होंने कुछ गलत किया है तो उन्हें फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए और उनकी आंखों में तेजाब डाल दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को आपराधिक साजिश का दोषी पाया था। फैसला सुनाते हुए तीस हजारी कोर्ट के जज ने कहा कि यह मेरी जिंदगी का सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रायल रहा। जज ने सीबीआई और पीड़ित के वकील की भी सराहना की। तीस हजारी कोर्ट ने इससे पहले उनतीस फरवरी को इस मामले पर सुनवाई की थी और फैसले के लिए चार मार्च की तिथि तय की थी। सेंगर ने कहा कि उनकी दो बेटियां हैं और न्यायाधीश से आग्रह किया कि उन्हें छोड़ दिया जाए। न्यायाधीश ने कहा कि आपका परिवार है। हर किसी का है। आपको यह सब अपराध करते समय सोचना चाहिए था, लेकिन आपने सभी कानूनों को तोड़ा। अब आप हर चीज को ना कहेंगे? आप कब तक इनकार करते रहेंगे? सीबीआई ने सेंगर एवं अन्य के लिए अधिकतम सजा की मांग की जिसमें मामले में दोषी करार दिए गए दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। इसमें माखी थाने के तत्कालीन प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया और तत्कालीन उपनिरीक्षक के.पी. सिंह शामिल हैं। सीबीआई के वकील ने कहा कि नौकरशाह होने के नाते इन दो पुलिस अधिकारियों का कर्तव्य था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखें, लेकिन उन्होंने अपनी ड्यूटी नहीं की और पीड़िता के पिता का समय पर इलाज नहीं कराया। सीबीआई के वकील ने अदालत से कहा कि ये पुलिस अधिकारी षड्यंत्र में शामिल थे और उन्हें कड़ा दंड मिलना चाहिए। इस केस में पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, कामता प्रसाद , अशोक सिंह भदौरिया , विनीत मिश्रा उर्फ विनय मिश्रा, बीरेंद्र सिंह उर्फ बउवा सिंह, शशि प्रताप सिंह उर्फ सुमन सिंह और जयदीप सिंह उर्फ अतुल सिंह को कोर्ट ने दोषी करार दिया गया। शैलेंद्र सिंह उर्फ टिंकू सिंह, राम शरण सिंह उर्फ सोनू सिंह, अमीर खान, कॉन्स्टेबल और शरदवीर सिंह कोर्ट से बरी हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस केस को उत्तर प्रदेश के बाहर शिफ्ट कर दिया था। इसके बाद से तीस हजारी कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। इस केस में पीड़िता के पक्ष से कुल पचपन लोगों ने गवाही दी। वहीं बचाव पक्ष की तरफ से नौ गवाह कोर्ट में पेश हुए। भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन विधायक कुलदीप सेंगर को नाबालिग से दुष्कर्म करने के मामले में उम्रकैद की सजा हो चुकी है। सोलह दिसंबर, दो हज़ार उन्नीस को तीस हजारी कोर्ट ने इस मामले में सेंगर को दोषी ठहराया था और बीस दिसंबर को उम्रकैद की सजा हुई थी। अभी कार एक्सीडेंट में पीड़िता के परिवार के लोगों की मौत से जुड़ी दो एफआईआर पर कोर्ट का फैसला आना बाकी है. इससे पहले रेप के आरोप में तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को दोषी माना था और बीस दिसंबर दो हज़ार उन्नीस सजा का ऐलान करते हुए सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके साथ ही सेंगर पर पच्चीस लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था. इस मामले में दो हज़ार अट्ठारह में दायर किए आरोपपत्र के मुताबिक चार अप्रैल दो हज़ार अट्ठारह को पीडि़ता के पिता और उसके साथी कर्मी अपने गांव लौट रहे थे और उसी दौरान उन्होंने रास्ते में शशि प्रताप सिंह से लिफ्ट मांगी थी, लेकिन उसने लिफ्ट देने से इंकार कर दिया था। इसी दौरान उनके बीच तकरार हो गई। इसके बाद शशि सिंह ने कुलदीप सेंगर के भाई अतुल और अन्यों को मौके पर बुलाया और पीडि़ता के पिता की बेहरमी से पिटाई। इस घटना में गंभीर रूप से घायल हुए पीड़िता के पिता को अस्पताल पहुंचाने के बजाए जेल में डाल दिया गया, जबकि उन्हें उपचार की जरूरत थी। उन्हें गहरी चोटें लगी थीं, जिस कारण नौ अप्रैल को उनकी न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी। इस घटना का एक वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल होता दिखा तो यह मामला प्रकाश में आया। इस वीडियो में पीडि़ता के पिता को बुरी तरह पीटता हुआ दिखाया गया। उल्लेखनीय है कि उन्नाव में कुलदीप सेंगर और उसके साथियों ने दो हज़ार सत्रह में नाबालिग लड़की को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस मामले की जांच सीबीआई ने की। पीडि़ता की कार पर जानलेवा हमला होने की घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए इस केस से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई लखनऊ से दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में स्थानांतरित कर दी थी।
|
पूछताछ में आरोपितों ने स्वीकार किया कि वो युवती का अपहरण कर उसे मुंबई ले जा रहे थे। वहीं ये भी पता चला कि झारखंड के साहेबगंज थाने में युवती के अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ है।
तमिलनाडु में टीकों की बर्बादी 15. 5 फीसदी, जम्मू-कश्मीर में 10. 8 फीसदी और मध्य प्रदेश में 10. 7 फीसदी की बर्बादी दर्ज की गई। इन राज्यों ने राष्ट्रीय औसत 6. 3% से टीके की बर्बादी दर्ज की है।
हरियाणा के पानीपत में 22 गोवंश को तस्करों से बचाया गया है। वहीं झारखंड में प्रतिबंधित माँस के साथ 3 गिरफ्तार किए गए हैं।
झारखंड के पाकुड़ में पुलिस ने चावल की बोरियों के बीच में छिपाकर ले जाए जा रहे डेटोनेटर और जिलेटिन छड़ों को जब्त किया है।
यूनिवर्सिटी में कहा गया है कि कोई भी सरकारी निकाय केवल तीन साल कार्यरत रह सकता है, उसके बाद उसका फिर से चयन होगा। हालाँकि, इस केस में इस पूरे मामले की अनदेखी की गई है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी प्रधानमंत्री के साथ बैठक का गुपचुप लाइव कर इसी तरह की ओछी राजनीति कर चुके हैं।
देवेंद्र शर्मा पेशे से शिक्षक है। दोस्त के कोरोना संक्रमित होने और ऑक्सीजन की जरूरत की बात पता चलने पर वे सिलेंडर के साथ नोएडा पहुॅंच गए।
झारखंड देशभर में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित राज्यों में से एक है। लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि पीएम केयर्स फंड से मिले वेंटिलेटर वहाँ धूल फाँक रहे हैं।
|
पूछताछ में आरोपितों ने स्वीकार किया कि वो युवती का अपहरण कर उसे मुंबई ले जा रहे थे। वहीं ये भी पता चला कि झारखंड के साहेबगंज थाने में युवती के अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ है। तमिलनाडु में टीकों की बर्बादी पंद्रह. पाँच फीसदी, जम्मू-कश्मीर में दस. आठ फीसदी और मध्य प्रदेश में दस. सात फीसदी की बर्बादी दर्ज की गई। इन राज्यों ने राष्ट्रीय औसत छः. तीन% से टीके की बर्बादी दर्ज की है। हरियाणा के पानीपत में बाईस गोवंश को तस्करों से बचाया गया है। वहीं झारखंड में प्रतिबंधित माँस के साथ तीन गिरफ्तार किए गए हैं। झारखंड के पाकुड़ में पुलिस ने चावल की बोरियों के बीच में छिपाकर ले जाए जा रहे डेटोनेटर और जिलेटिन छड़ों को जब्त किया है। यूनिवर्सिटी में कहा गया है कि कोई भी सरकारी निकाय केवल तीन साल कार्यरत रह सकता है, उसके बाद उसका फिर से चयन होगा। हालाँकि, इस केस में इस पूरे मामले की अनदेखी की गई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी प्रधानमंत्री के साथ बैठक का गुपचुप लाइव कर इसी तरह की ओछी राजनीति कर चुके हैं। देवेंद्र शर्मा पेशे से शिक्षक है। दोस्त के कोरोना संक्रमित होने और ऑक्सीजन की जरूरत की बात पता चलने पर वे सिलेंडर के साथ नोएडा पहुॅंच गए। झारखंड देशभर में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित राज्यों में से एक है। लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि पीएम केयर्स फंड से मिले वेंटिलेटर वहाँ धूल फाँक रहे हैं।
|
हादसे में घायल हुए लोगों को पुट्टापर्थी के अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
दक्षिण पश्चिम रेलवे के प्रवक्ता सीएस गुप्ता ने बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा को बताया कि हादसा सुबह साढ़े तीन बजे हुआ. आग को पूरी तरह बुझा लिया गया है.
रेलवे प्रवक्ता के मुताबिक़ सुबह तीन बजकर 45 मिनट पर आग लगने के बारे में अधिकारियों को पहली जानकारी मिली. आग इंजन से चार कोच पीछे एयरकंडीशंड बी-1 कोच में लगी और बहुत तेज़ी से फ़ैली. कोच अटेंडेंट ने फायर एक्सट्विंगिशर से आग बुझाने की कोशिश की, पर वह नाकाम रहे.
'आग तेज़ी से फैली'
हादसा आंध्र प्रदेश में हुआ पर यह रेलवे के बंगलुरु डिवीज़न में आता है. ट्रेन सत्यसाईं बेंगलुरु मंडल के प्रशांति निलयम रेलवे स्टेशन से धर्मावरम की ओर दो किलोमीटर आगे थी.
आग की जानकारी मिलने के तुरंत बाद ट्रेन रोक दी गई.
रेलवे प्रवक्ता ने बताया कि बुरी तरह जले हुए शवों को निकाला गया है. उनका कहना है कि अधिकारी मौक़े पर पहुंच गए हैं और बचाव का काम जारी है. आग लगने के सही कारणों का अभी तक पता नहीं चला है.
हालांकि उनके मुताबिक़ हादसे के कारण रेलवे यातायात पर कोई असर नहीं हुआ है.
|
हादसे में घायल हुए लोगों को पुट्टापर्थी के अस्पताल में भर्ती कराया गया है. दक्षिण पश्चिम रेलवे के प्रवक्ता सीएस गुप्ता ने बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा को बताया कि हादसा सुबह साढ़े तीन बजे हुआ. आग को पूरी तरह बुझा लिया गया है. रेलवे प्रवक्ता के मुताबिक़ सुबह तीन बजकर पैंतालीस मिनट पर आग लगने के बारे में अधिकारियों को पहली जानकारी मिली. आग इंजन से चार कोच पीछे एयरकंडीशंड बी-एक कोच में लगी और बहुत तेज़ी से फ़ैली. कोच अटेंडेंट ने फायर एक्सट्विंगिशर से आग बुझाने की कोशिश की, पर वह नाकाम रहे. 'आग तेज़ी से फैली' हादसा आंध्र प्रदेश में हुआ पर यह रेलवे के बंगलुरु डिवीज़न में आता है. ट्रेन सत्यसाईं बेंगलुरु मंडल के प्रशांति निलयम रेलवे स्टेशन से धर्मावरम की ओर दो किलोमीटर आगे थी. आग की जानकारी मिलने के तुरंत बाद ट्रेन रोक दी गई. रेलवे प्रवक्ता ने बताया कि बुरी तरह जले हुए शवों को निकाला गया है. उनका कहना है कि अधिकारी मौक़े पर पहुंच गए हैं और बचाव का काम जारी है. आग लगने के सही कारणों का अभी तक पता नहीं चला है. हालांकि उनके मुताबिक़ हादसे के कारण रेलवे यातायात पर कोई असर नहीं हुआ है.
|
एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा इन दिनों अपनी अपकमिंग हॉरर फिल्म 'परी'
की वजह से चर्चा में हैं। वह इस फिल्म को लेकर काफी एक्साइटेड हैं। यही कारण है कि अनुष्का फिल्म 'परी' को लेकर धीरे-धीरे खुलासे कर रही हैं। फिल्म के ट्रेलर से पहले 'परी' का एक और टीजर रिलीज किया है।
अनुष्का नए टीजर में काफी डरी और सहमी हुई नजर आ रही हैं। खास बात यह है कि टीजर के साथ ही अनुष्का ने फिल्म के ट्रेलर रिलीज की भी अनाउंसमेंट कर दी है। उन्होंने 'परी' के इस टीजर को अपने इस्टांग्राम पेज पर शेयर करते हुए कैप्शन दिया है कि क्या तुम उसके वैलेंटाइन बनोगे. . ? ?
फिल्म 'परी' का ट्रेलर कल यानि 15 फरवरी को रिलीज होगा। बात करें टीजर की तो अनुष्का इसमें एक्टर परमब्रत चटर्जी के साथ सोफे पर बैठी हुई नजर आ रही हैं। वहीं टीजर में अनुष्का का दूसरा य डरावना रूप भी दिखाया गया है।
आपको बता दें कि फिल्म 'परी' अनुष्का शर्मा के एंटरटेनमेंट कंपनी क्लीन स्लेट फिल्म्स के बैनर तले प्रोड्यूस की गई है। क्लीन स्लेट फिल्मस के बैनर तले बनी यह तीसरी फिल्म है इससे पहले अनुष्का शर्मा 'एनएच-10' और 'फिल्लौरी' बना चुकी हैं। 'परी' 2 मार्च को रिलीज होगी।
|
एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा इन दिनों अपनी अपकमिंग हॉरर फिल्म 'परी' की वजह से चर्चा में हैं। वह इस फिल्म को लेकर काफी एक्साइटेड हैं। यही कारण है कि अनुष्का फिल्म 'परी' को लेकर धीरे-धीरे खुलासे कर रही हैं। फिल्म के ट्रेलर से पहले 'परी' का एक और टीजर रिलीज किया है। अनुष्का नए टीजर में काफी डरी और सहमी हुई नजर आ रही हैं। खास बात यह है कि टीजर के साथ ही अनुष्का ने फिल्म के ट्रेलर रिलीज की भी अनाउंसमेंट कर दी है। उन्होंने 'परी' के इस टीजर को अपने इस्टांग्राम पेज पर शेयर करते हुए कैप्शन दिया है कि क्या तुम उसके वैलेंटाइन बनोगे. . ? ? फिल्म 'परी' का ट्रेलर कल यानि पंद्रह फरवरी को रिलीज होगा। बात करें टीजर की तो अनुष्का इसमें एक्टर परमब्रत चटर्जी के साथ सोफे पर बैठी हुई नजर आ रही हैं। वहीं टीजर में अनुष्का का दूसरा य डरावना रूप भी दिखाया गया है। आपको बता दें कि फिल्म 'परी' अनुष्का शर्मा के एंटरटेनमेंट कंपनी क्लीन स्लेट फिल्म्स के बैनर तले प्रोड्यूस की गई है। क्लीन स्लेट फिल्मस के बैनर तले बनी यह तीसरी फिल्म है इससे पहले अनुष्का शर्मा 'एनएच-दस' और 'फिल्लौरी' बना चुकी हैं। 'परी' दो मार्च को रिलीज होगी।
|
गुरप (पश्चिम बंगाल), 27 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को अपने पार्टी नेताओं-कार्यकर्ताओं से पार्टी के नाम पर पैसा नहीं एकत्र करने का आग्रह किया और कहा कि किसी को भी राज्य सरकार के अधिकारियों या पुलिस को उनकी ड्यूटी करने के लिए भुगतान करने की जरूरत नहीं है।
तृणमूल कांग्रेस के जिलों के नेताओं के एक वर्ग द्वारा लोगों से धन लिए जाने का आरोप लगाते हुए बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी लोगों के धन पर निर्भर नहीं है।
बिना किसी का नाम लेते हुए तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने कहा कि उनका संदेश 'कुछ लोगों' के लिए है, जो नियमित तौर पर धन एकत्र करने के कदाचार में लिप्त हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व इस तरह के कार्य को मान्यता नहीं देता।
|
गुरप , सत्ताईस अगस्त । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को अपने पार्टी नेताओं-कार्यकर्ताओं से पार्टी के नाम पर पैसा नहीं एकत्र करने का आग्रह किया और कहा कि किसी को भी राज्य सरकार के अधिकारियों या पुलिस को उनकी ड्यूटी करने के लिए भुगतान करने की जरूरत नहीं है। तृणमूल कांग्रेस के जिलों के नेताओं के एक वर्ग द्वारा लोगों से धन लिए जाने का आरोप लगाते हुए बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी लोगों के धन पर निर्भर नहीं है। बिना किसी का नाम लेते हुए तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने कहा कि उनका संदेश 'कुछ लोगों' के लिए है, जो नियमित तौर पर धन एकत्र करने के कदाचार में लिप्त हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व इस तरह के कार्य को मान्यता नहीं देता।
|
चौदहवीं शताब्दी में बस्तर के राजा पुरुषोत्तम देव जब पुरी की तीर्थयात्रा से लौटे तो उनके साथ गए आदिवासी पवित्र घोषित कर दिए गए और उन्हें हिंदू समाज में शामिल कर लिया गया.
पिछले शनिवार को जब बस्तर के भाजपा सांसद दिनेश कश्यप कुनगुड़ा गांव में 33 आदिवासी परिवारों के पैर धोकर उनकी 'घर वापसी' कर रहे थे, तो पुरुषोत्तम देव की याद अनायास आ गई.
छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के कथित जबरन धर्म परिवर्तन और 'घर वापसी' को लेकर सड़क से लेकर संसद तक बहस लगातार जारी है. इस बहस में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और इससे जुड़े अन्य हिंदू संगठन कहां हैं?
दो शक्तियाँ आमने-सामने हैं जिनके बीच लंबे समय से आदिवासी खड़े हैं, एक ओर चर्च के पादरी उन्हें प्रभु यीशु की शरण में आने के लिए कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गांव की पंचायत, आमसभा करके इलाके में हिंदू धर्म के अलावा किसी भी अन्य धर्म के प्रचार को प्रतिबंधित करने का फ़ैसला सुना रही है.
कोंडागांव में ढलती हुई सांझ में बुजुर्ग मंसाराम सोरी याद करते हैं साठ का दशक, जब बस्तर के अंतिम राजा प्रवीर चंद भंजदेव की हत्या हुई थी.
प्रवीर की लोकप्रियता ऐसी थी कि आदिवासी घरों में उन्हें देवता की तरह पूजा जाता था.
इसके बाद जो कुछ हुआ, वह किसी फ़िल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है. बाबा बिहारीदास ऊर्फ कंठीवाले बाबा ने आदिवासियों को तुलसी की कंठीमाला पहनानी शुरू कर दी. मांसाहार और शराब से आदिवासियों को दूर रहने की सलाह दी. गांव के गांव बाबा बिहारीदास के अनुयायी बनने लगे.
आज के भारत जन आंदोलन के नेता ब्रह्मदेव शर्मा तब बस्तर के कलेक्टर थे.
बाबा बिहारीदास के इस 'सांस्कृतिक हस्तक्षेप' से नाराज़ ब्रह्मदेव शर्मा ने बिहारीदास को ज़िला बदर कर दिया लेकिन बिहारीदास ऊंची राजनीतिक पहुंच के बल पर बस्तर लौटे और ब्रह्मदेव शर्मा का बस्तर से तबादला हो गया.
बस्तर में बाबा बिहारीदास की तूती बोलने लगी. सात-सात रुपए में आदिवासियों को जनेऊ देकर उन्हें हिंदू यहां तक कि ब्राह्मण बनाने की शुरुआत भी हुई.
1972 के चुनाव में बिहारीदास ने बस्तर की सात सीटों पर कांग्रेस का प्रचार किया और सभी सीटें कांग्रेस को मिलीं. ये और बात है कि 1981 में एक आदिवासी युवती से बलात्कार के आरोप में बिहारीदास उलझे और फिर उनका आधार कमज़ोर पड़ता चला गया.
बिहारीदास के बाद आदिवासियों के उत्थान और उन्हें हिंदू समाज में शामिल करने का जिम्मा संघ परिवार ने संभाला.
गायत्री परिवार, सदाफल आश्रम और ऐसे ही कई संगठन इलाके में सक्रिय हो गए. आज की तारीख में आरएसएस और उससे जुड़े हुए कम से कम 27 संगठन बस्तर में सक्रिय हैं.
लेकिन छत्तीसगढ़ में आरएसएस के कई किस्म के प्रकल्पों में से एक निर्माण प्रकल्प चलाने वाले ब्रजेंद्र शुक्ला का मानना है कि आरएसएस ने मूल रुप से आदिवासियों की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिये काम किया है. इनमें धर्म कहीं मुद्दा ही नहीं है.
ब्रजेंद्र निर्माण प्रकल्प में लगभग 400 बच्चों की प्रतियोगी परीक्षा की पाठशाला चला रहे हैं. लेकिन क्या यह आदिवासियों के लिये संघ की पाठशाला तो नहीं है?
इस 'घर लाने' की पूरी प्रक्रिया का असर कोंटा से लेकर केशकाल तक देखा जा सकता है. आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद, गायत्री परिवार जैसे हिंदू संगठनों के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे सुबह से लेकर शाम तक आधा दर्जन बार हिंदू देवी-देवताओं की प्रार्थना करते हैं. उनके नाम अब संस्कृतनिष्ठ होने लगे हैं. गणेश पूजा से लेकर रक्षाबंधन तक का त्यौहार अब गांव-गांव में धूम-धाम से मनाया जाता है.
लेकिन सिरिसगुड़ा ग्राम पंचायत की सरपंच जमुना बघेल इससे सहमत नहीं हैं.
इससे बचने के लिए सिरिसगुड़ा पंचायत ने फ़ैसला किया कि गांव में हिंदू धर्म के अलावा दूसरे धर्मों का प्रचार, प्रार्थना सभा एवं धर्म उपदेश देना प्रतिबंधित रहेगा. इस फ़ैसले पर अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में बहस हो रही है.
लेकिन जब ईसाई धर्मावलंबी बस्तर में शिक्षा और स्वास्थ्य का काम कर रहे हैं तो भला आदिवासियों को ईसाई धर्म में शामिल करने की ज़रूरत क्यों पड़ी ?
हालाँकि आरएसएस के एक वरिष्ठ अधिकारी आदिवासियों के धर्म बदलने को सिरे से नकारते हैं. उनका दावा है कि वे तो उन्हें केवल अपने घर वापस ला रहे हैं. उनका घर यानी हिंदू धर्म.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
|
चौदहवीं शताब्दी में बस्तर के राजा पुरुषोत्तम देव जब पुरी की तीर्थयात्रा से लौटे तो उनके साथ गए आदिवासी पवित्र घोषित कर दिए गए और उन्हें हिंदू समाज में शामिल कर लिया गया. पिछले शनिवार को जब बस्तर के भाजपा सांसद दिनेश कश्यप कुनगुड़ा गांव में तैंतीस आदिवासी परिवारों के पैर धोकर उनकी 'घर वापसी' कर रहे थे, तो पुरुषोत्तम देव की याद अनायास आ गई. छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के कथित जबरन धर्म परिवर्तन और 'घर वापसी' को लेकर सड़क से लेकर संसद तक बहस लगातार जारी है. इस बहस में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और इससे जुड़े अन्य हिंदू संगठन कहां हैं? दो शक्तियाँ आमने-सामने हैं जिनके बीच लंबे समय से आदिवासी खड़े हैं, एक ओर चर्च के पादरी उन्हें प्रभु यीशु की शरण में आने के लिए कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गांव की पंचायत, आमसभा करके इलाके में हिंदू धर्म के अलावा किसी भी अन्य धर्म के प्रचार को प्रतिबंधित करने का फ़ैसला सुना रही है. कोंडागांव में ढलती हुई सांझ में बुजुर्ग मंसाराम सोरी याद करते हैं साठ का दशक, जब बस्तर के अंतिम राजा प्रवीर चंद भंजदेव की हत्या हुई थी. प्रवीर की लोकप्रियता ऐसी थी कि आदिवासी घरों में उन्हें देवता की तरह पूजा जाता था. इसके बाद जो कुछ हुआ, वह किसी फ़िल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है. बाबा बिहारीदास ऊर्फ कंठीवाले बाबा ने आदिवासियों को तुलसी की कंठीमाला पहनानी शुरू कर दी. मांसाहार और शराब से आदिवासियों को दूर रहने की सलाह दी. गांव के गांव बाबा बिहारीदास के अनुयायी बनने लगे. आज के भारत जन आंदोलन के नेता ब्रह्मदेव शर्मा तब बस्तर के कलेक्टर थे. बाबा बिहारीदास के इस 'सांस्कृतिक हस्तक्षेप' से नाराज़ ब्रह्मदेव शर्मा ने बिहारीदास को ज़िला बदर कर दिया लेकिन बिहारीदास ऊंची राजनीतिक पहुंच के बल पर बस्तर लौटे और ब्रह्मदेव शर्मा का बस्तर से तबादला हो गया. बस्तर में बाबा बिहारीदास की तूती बोलने लगी. सात-सात रुपए में आदिवासियों को जनेऊ देकर उन्हें हिंदू यहां तक कि ब्राह्मण बनाने की शुरुआत भी हुई. एक हज़ार नौ सौ बहत्तर के चुनाव में बिहारीदास ने बस्तर की सात सीटों पर कांग्रेस का प्रचार किया और सभी सीटें कांग्रेस को मिलीं. ये और बात है कि एक हज़ार नौ सौ इक्यासी में एक आदिवासी युवती से बलात्कार के आरोप में बिहारीदास उलझे और फिर उनका आधार कमज़ोर पड़ता चला गया. बिहारीदास के बाद आदिवासियों के उत्थान और उन्हें हिंदू समाज में शामिल करने का जिम्मा संघ परिवार ने संभाला. गायत्री परिवार, सदाफल आश्रम और ऐसे ही कई संगठन इलाके में सक्रिय हो गए. आज की तारीख में आरएसएस और उससे जुड़े हुए कम से कम सत्ताईस संगठन बस्तर में सक्रिय हैं. लेकिन छत्तीसगढ़ में आरएसएस के कई किस्म के प्रकल्पों में से एक निर्माण प्रकल्प चलाने वाले ब्रजेंद्र शुक्ला का मानना है कि आरएसएस ने मूल रुप से आदिवासियों की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिये काम किया है. इनमें धर्म कहीं मुद्दा ही नहीं है. ब्रजेंद्र निर्माण प्रकल्प में लगभग चार सौ बच्चों की प्रतियोगी परीक्षा की पाठशाला चला रहे हैं. लेकिन क्या यह आदिवासियों के लिये संघ की पाठशाला तो नहीं है? इस 'घर लाने' की पूरी प्रक्रिया का असर कोंटा से लेकर केशकाल तक देखा जा सकता है. आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद, गायत्री परिवार जैसे हिंदू संगठनों के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे सुबह से लेकर शाम तक आधा दर्जन बार हिंदू देवी-देवताओं की प्रार्थना करते हैं. उनके नाम अब संस्कृतनिष्ठ होने लगे हैं. गणेश पूजा से लेकर रक्षाबंधन तक का त्यौहार अब गांव-गांव में धूम-धाम से मनाया जाता है. लेकिन सिरिसगुड़ा ग्राम पंचायत की सरपंच जमुना बघेल इससे सहमत नहीं हैं. इससे बचने के लिए सिरिसगुड़ा पंचायत ने फ़ैसला किया कि गांव में हिंदू धर्म के अलावा दूसरे धर्मों का प्रचार, प्रार्थना सभा एवं धर्म उपदेश देना प्रतिबंधित रहेगा. इस फ़ैसले पर अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में बहस हो रही है. लेकिन जब ईसाई धर्मावलंबी बस्तर में शिक्षा और स्वास्थ्य का काम कर रहे हैं तो भला आदिवासियों को ईसाई धर्म में शामिल करने की ज़रूरत क्यों पड़ी ? हालाँकि आरएसएस के एक वरिष्ठ अधिकारी आदिवासियों के धर्म बदलने को सिरे से नकारते हैं. उनका दावा है कि वे तो उन्हें केवल अपने घर वापस ला रहे हैं. उनका घर यानी हिंदू धर्म.
|
वेल्स के प्रिंस विलियम आजग्रह पर शाही परिवारों के सबसे प्रसिद्ध सदस्यों में से एक है। लंबे समय तक वह आधिकारिक तौर पर अपने पिता प्रिंस चार्ल्स के बाद यूनाइटेड किंगडम के सिंहासन के लिए दूसरा उम्मीदवार था, लेकिन 2016 के वसंत में एलिजाबेथ द्वितीय ने घोषणा की कि वह केवल अपने सबसे बड़े पोते के पक्ष में सिंहासन को त्याग देगी। इसलिए, अब प्रिंस ऑफ वेल्स विलियम दुनिया भर के पत्रकारों, राजनेताओं और दुनिया भर के साधारण लोगों के बारे में भी ध्यान से आते हैं, जो कि ग्रेट ब्रिटेन के भविष्य के राजा और विश्व राजनीतिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं।
भविष्य के प्रिंस विलियम ऑफ वेल्स का जन्म 21 थाजून 1 9 82। उनकी मां, राजकुमारी डायना ने सेंट मैरी अस्पताल में लंदन में अपने पहले बच्चे को जन्म दिया। माता-पिता ने विलियम आर्थर फिलिप लुइस का नाम दिया और पहले दिन से उन्हें पता था कि वह अपने आनंद और विपत्तियों के साथ सिंहासन के उत्तराधिकारी के एक दिलचस्प और समृद्ध जीवन की प्रतीक्षा कर रहा था।
शाही खून के अन्य बच्चों के विपरीतविलियम बर्कशायर में एक बोर्डिंग स्कूल में अध्ययन किया, एक साथ अन्य बच्चों के साथ, कैसे तो उनके छोटे भाई हैरी। इस तरह के एक संगठन शिक्षण पर उसकी माँ, राजकुमारी डायना ने जोर देकर कहा, और विलियम बाद में बहुत आभारी था - अन्य लोगों, शिक्षकों और छात्रों के साथ है कि संचार, उसे जानने के लिए, समाज में व्यवहार करते हैं टीम खेल में संलग्न है, और दूसरों खुद के कार्यों के संबंध अर्जित करने के लिए मदद की, बल्कि सदस्यता से एक प्रसिद्ध नाम।
स्कूल से स्नातक होने के बाद, विलियम ऑफ वेल्स कॉलेज गएईटन एक शैक्षणिक संस्थान है कि समृद्ध और महान ब्रिटिश परिवारों के कई प्रतिनिधियों ने भविष्य के कलाकारों, कलाकारों और अन्य हस्तियों से स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। कॉलेज में, विलियम ने कई दोस्तों को अधिग्रहण किया और शिक्षकों के प्यार को उनकी विनम्रता और व्यवहार की भावना के लिए जीता, लेकिन प्रशिक्षण के पहले वर्ष उनके लिए दुखद रूप से समाप्त हुए - 1 99 6 की गर्मियों में, उनके माता-पिता ने तलाक के लिए दायर किया और आधिकारिक तौर पर विभाजित किया। यह घटना विलियम के लिए थी, जो अपनी मां, एक वास्तविक व्यक्तिगत आपदा से गहराई से समर्पित थी।
हालांकि, सबसे भयानक था - 31 अगस्त1 99 7 में, राजकुमारी डायना एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई। विलियम ने अपनी मां को खोने के गहरे झटके का अनुभव करते हुए अध्ययन करना बंद कर दिया, और सामान्य रूप से पापराज़ी और पत्रकारों के लिए एक मजबूत नापसंद महसूस करना शुरू किया, जिसे वह अभी भी हुई त्रासदी के दोषी मानते हैं।
सदमे से बचने के लिए, विलियम ऑफ वेल्स मनोचिकित्सा की मदद से सक्षम था। विशेषज्ञों की मदद से राजकुमार ने अपनी प्यारी मां की याददाश्त को सावधानीपूर्वक अध्ययन करने के लिए अध्ययन और सामान्य जीवन में लौटने की अनुमति दी।
कॉलेज से स्नातक होने के बाद, राजकुमार एक साल तक चला गयादुनिया भर में यात्रा, खराब विकासशील देशों में अधिकतर समय व्यतीत करना और उनकी मां, डायना के उदाहरण के बाद, जिनकी आवश्यकता है, उनके लिए भव्य दान कार्यक्रमों की व्यवस्था करना।
यूके, भविष्य के उत्तराधिकारी लौट रहे हैंसिंहासन स्कॉटलैंड गया, जहां उन्होंने सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय में अपनी शिक्षा जारी रखी। सामान्य आधार पर वहां नामांकित होने के बाद, विलियम ने कला का इतिहास सीखना शुरू किया, लेकिन तीसरे पाठ्यक्रम के बाद उन्होंने अपनी विशेषज्ञता को तेजी से बदल दिया और सम्मान के साथ एक शैक्षिक संस्थान से स्नातक होने के बाद भूगोल शुरू किया।
अध्ययन के बाद, राजकुमार ने राज्य उठायामामलों, उसकी दादी, दुनिया भर में और विभिन्न संस्थानों में रानी के समारोह का प्रतिनिधित्व। विलियम तो, रॉयल सैन्य अकादमी के एक कैडेट बन अपने पूर्वजों, पुरुषों के नक्शेकदम पर चले गए है, और घोड़े गार्ड में सेवा करने के लिए चला गया। सेकंड लेफ्टिनेंट सेवा रैंक के अंत में प्राप्त करना, राजकुमार उड़ान स्कूल गया था, जिसमें से कप्तान के पद में पहले से ही जारी की।
करियर विलियम बचाव सेवा में निर्माण करना शुरू कर दियाग्रेट ब्रिटेन, इंग्लैंड के आधार पर विमान के पायलटों में से एक बन गया। विलियम ने अपने साथी पायलटों के साथ लोगों के जीवन को बचाने, कई परिचालनों में भाग लिया।
प्रिंस ऑफ वेल्स विलियम और उनकी पत्नी, डचेसकैम्ब्रिज, और फिर - केट नाम की एक साधारण अंग्रेजी लड़की, सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय में पढ़ाई करते समय मिले। वे 4 साल तक मिले, लेकिन लगातार हमलों के कारण, प्रेस और पत्रकारों ने अलग-अलग तनावों के अधीन न होने के तरीकों का हिस्सा तय करने का फैसला किया। लेकिन सच्चा प्यार किसी भी बाधाओं को नहीं पहचानता है, और तीन साल बाद, 2010 में, विलियम और केट फिर से सहमत हुए। तब ग्रह इस खबर के चारों ओर उड़ गया कि सिंहासन के उत्तराधिकारी शादी करने की योजना बना रहे हैं।
2011 के वसंत में, 2 9 अप्रैल, विलियम और केटसेंट पीटर कैथेड्रल में विवाहित, देखा कि शादी दुनिया भर से दर्शकों की एक बड़ी संख्या थी, दोनों लंदन पहुंचे, और टेलीविजन पर प्रसारण कार्यक्रम देखा।
शादी के बाद एलिजाबेथ द्वितीय विलियम की इच्छा से बनाया गया थाऔर केट को कैम्ब्रिज के ड्यूक और डचेस के खिताब दिए गए, और एक स्थायी निवास के रूप में - केंसिंग्टन पैलेस, जहां एक बार विलियम डायना की मां रहते थे।
विवाह के पांच साल के लिए कैम्ब्रिज के ड्यूक और डचेसदो बार माता-पिता बन गए। उनके सबसे बड़े बेटे, जॉर्ज ने 22 जुलाई, 2013 को प्रकाश देखा, और सबसे छोटी बेटी शार्लोट का जन्म 2 मई, 2015 को हुआ था। अपने माता-पिता की तरह शाही जोड़े के बच्चे, ग्रेट ब्रिटेन के लोगों द्वारा बेहद प्यार करते हैं और उनकी निविदा उम्र में भी लोकप्रिय मीडिया व्यक्ति हैं।
|
वेल्स के प्रिंस विलियम आजग्रह पर शाही परिवारों के सबसे प्रसिद्ध सदस्यों में से एक है। लंबे समय तक वह आधिकारिक तौर पर अपने पिता प्रिंस चार्ल्स के बाद यूनाइटेड किंगडम के सिंहासन के लिए दूसरा उम्मीदवार था, लेकिन दो हज़ार सोलह के वसंत में एलिजाबेथ द्वितीय ने घोषणा की कि वह केवल अपने सबसे बड़े पोते के पक्ष में सिंहासन को त्याग देगी। इसलिए, अब प्रिंस ऑफ वेल्स विलियम दुनिया भर के पत्रकारों, राजनेताओं और दुनिया भर के साधारण लोगों के बारे में भी ध्यान से आते हैं, जो कि ग्रेट ब्रिटेन के भविष्य के राजा और विश्व राजनीतिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। भविष्य के प्रिंस विलियम ऑफ वेल्स का जन्म इक्कीस थाजून एक नौ बयासी। उनकी मां, राजकुमारी डायना ने सेंट मैरी अस्पताल में लंदन में अपने पहले बच्चे को जन्म दिया। माता-पिता ने विलियम आर्थर फिलिप लुइस का नाम दिया और पहले दिन से उन्हें पता था कि वह अपने आनंद और विपत्तियों के साथ सिंहासन के उत्तराधिकारी के एक दिलचस्प और समृद्ध जीवन की प्रतीक्षा कर रहा था। शाही खून के अन्य बच्चों के विपरीतविलियम बर्कशायर में एक बोर्डिंग स्कूल में अध्ययन किया, एक साथ अन्य बच्चों के साथ, कैसे तो उनके छोटे भाई हैरी। इस तरह के एक संगठन शिक्षण पर उसकी माँ, राजकुमारी डायना ने जोर देकर कहा, और विलियम बाद में बहुत आभारी था - अन्य लोगों, शिक्षकों और छात्रों के साथ है कि संचार, उसे जानने के लिए, समाज में व्यवहार करते हैं टीम खेल में संलग्न है, और दूसरों खुद के कार्यों के संबंध अर्जित करने के लिए मदद की, बल्कि सदस्यता से एक प्रसिद्ध नाम। स्कूल से स्नातक होने के बाद, विलियम ऑफ वेल्स कॉलेज गएईटन एक शैक्षणिक संस्थान है कि समृद्ध और महान ब्रिटिश परिवारों के कई प्रतिनिधियों ने भविष्य के कलाकारों, कलाकारों और अन्य हस्तियों से स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। कॉलेज में, विलियम ने कई दोस्तों को अधिग्रहण किया और शिक्षकों के प्यार को उनकी विनम्रता और व्यवहार की भावना के लिए जीता, लेकिन प्रशिक्षण के पहले वर्ष उनके लिए दुखद रूप से समाप्त हुए - एक निन्यानवे छः की गर्मियों में, उनके माता-पिता ने तलाक के लिए दायर किया और आधिकारिक तौर पर विभाजित किया। यह घटना विलियम के लिए थी, जो अपनी मां, एक वास्तविक व्यक्तिगत आपदा से गहराई से समर्पित थी। हालांकि, सबसे भयानक था - इकतीस अगस्तएक निन्यानवे सात में, राजकुमारी डायना एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई। विलियम ने अपनी मां को खोने के गहरे झटके का अनुभव करते हुए अध्ययन करना बंद कर दिया, और सामान्य रूप से पापराज़ी और पत्रकारों के लिए एक मजबूत नापसंद महसूस करना शुरू किया, जिसे वह अभी भी हुई त्रासदी के दोषी मानते हैं। सदमे से बचने के लिए, विलियम ऑफ वेल्स मनोचिकित्सा की मदद से सक्षम था। विशेषज्ञों की मदद से राजकुमार ने अपनी प्यारी मां की याददाश्त को सावधानीपूर्वक अध्ययन करने के लिए अध्ययन और सामान्य जीवन में लौटने की अनुमति दी। कॉलेज से स्नातक होने के बाद, राजकुमार एक साल तक चला गयादुनिया भर में यात्रा, खराब विकासशील देशों में अधिकतर समय व्यतीत करना और उनकी मां, डायना के उदाहरण के बाद, जिनकी आवश्यकता है, उनके लिए भव्य दान कार्यक्रमों की व्यवस्था करना। यूके, भविष्य के उत्तराधिकारी लौट रहे हैंसिंहासन स्कॉटलैंड गया, जहां उन्होंने सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय में अपनी शिक्षा जारी रखी। सामान्य आधार पर वहां नामांकित होने के बाद, विलियम ने कला का इतिहास सीखना शुरू किया, लेकिन तीसरे पाठ्यक्रम के बाद उन्होंने अपनी विशेषज्ञता को तेजी से बदल दिया और सम्मान के साथ एक शैक्षिक संस्थान से स्नातक होने के बाद भूगोल शुरू किया। अध्ययन के बाद, राजकुमार ने राज्य उठायामामलों, उसकी दादी, दुनिया भर में और विभिन्न संस्थानों में रानी के समारोह का प्रतिनिधित्व। विलियम तो, रॉयल सैन्य अकादमी के एक कैडेट बन अपने पूर्वजों, पुरुषों के नक्शेकदम पर चले गए है, और घोड़े गार्ड में सेवा करने के लिए चला गया। सेकंड लेफ्टिनेंट सेवा रैंक के अंत में प्राप्त करना, राजकुमार उड़ान स्कूल गया था, जिसमें से कप्तान के पद में पहले से ही जारी की। करियर विलियम बचाव सेवा में निर्माण करना शुरू कर दियाग्रेट ब्रिटेन, इंग्लैंड के आधार पर विमान के पायलटों में से एक बन गया। विलियम ने अपने साथी पायलटों के साथ लोगों के जीवन को बचाने, कई परिचालनों में भाग लिया। प्रिंस ऑफ वेल्स विलियम और उनकी पत्नी, डचेसकैम्ब्रिज, और फिर - केट नाम की एक साधारण अंग्रेजी लड़की, सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय में पढ़ाई करते समय मिले। वे चार साल तक मिले, लेकिन लगातार हमलों के कारण, प्रेस और पत्रकारों ने अलग-अलग तनावों के अधीन न होने के तरीकों का हिस्सा तय करने का फैसला किया। लेकिन सच्चा प्यार किसी भी बाधाओं को नहीं पहचानता है, और तीन साल बाद, दो हज़ार दस में, विलियम और केट फिर से सहमत हुए। तब ग्रह इस खबर के चारों ओर उड़ गया कि सिंहासन के उत्तराधिकारी शादी करने की योजना बना रहे हैं। दो हज़ार ग्यारह के वसंत में, दो नौ अप्रैल, विलियम और केटसेंट पीटर कैथेड्रल में विवाहित, देखा कि शादी दुनिया भर से दर्शकों की एक बड़ी संख्या थी, दोनों लंदन पहुंचे, और टेलीविजन पर प्रसारण कार्यक्रम देखा। शादी के बाद एलिजाबेथ द्वितीय विलियम की इच्छा से बनाया गया थाऔर केट को कैम्ब्रिज के ड्यूक और डचेस के खिताब दिए गए, और एक स्थायी निवास के रूप में - केंसिंग्टन पैलेस, जहां एक बार विलियम डायना की मां रहते थे। विवाह के पांच साल के लिए कैम्ब्रिज के ड्यूक और डचेसदो बार माता-पिता बन गए। उनके सबसे बड़े बेटे, जॉर्ज ने बाईस जुलाई, दो हज़ार तेरह को प्रकाश देखा, और सबसे छोटी बेटी शार्लोट का जन्म दो मई, दो हज़ार पंद्रह को हुआ था। अपने माता-पिता की तरह शाही जोड़े के बच्चे, ग्रेट ब्रिटेन के लोगों द्वारा बेहद प्यार करते हैं और उनकी निविदा उम्र में भी लोकप्रिय मीडिया व्यक्ति हैं।
|
हुआ । सं० १८१८ ( ई० सन् १७३२ ) मे मल्हारराव होलकर ने प्रतापगढ़ पर चढ़ाई की परन्तु तीन मास के बाद उसे निराश होकर घेरा उठाना पड़ा। ये अपने पिता की तरह बड़े चतुर थे और देश की राजनीतिक दशा को जानकर उससे लाभ उठाना चाहते थे । सं० १८१८ मे इन्दौर के तुकोजीराव होलकर भी तीन मास तक प्रतापगढ को घेर कर असफल वापिस गया । उसके दो वर्ष बाद मल्हारराव ( दूसरे ) ने महारावत से कुछ रकम लेकर सुलह कर ली ।
सं० १८२४ (ई० सन् १७७६) मे इन्होने इन्दौर पहुॅच कर होलकर से मुलाकात की । इसमे दोनो तरफ से समानता का व्यवहार किया गया था । उस समय मरहठो का सितारा खूब चमकना शुरू हो गया था फिर महारावत सालमसिंह भी मुसलमान वादशाहों की बादशाहत के फिर से चमक उठने की भी उम्मीद बाकी थी । इसी से सालमसिह ने सं० १८२४ मे दिल्ली जाकर बादशाह गरानी (दूसरे) से टकसाल खोलने की इजाजत ली । वास्तव मे इजाजत बादशाह फरु खसियर ने महारावत पृथ्वीसिह को वि० स० १७७० (ई० सन् १७१३) मे दे दी थी परन्तु उस समय उसका काम जारी नही हुआ था । सं० १८२५ ( ई० सन् १७६८) में जब सरदारों के पड़यंत्र से रतनसिंह ने महाराणा अरिसिह (अड़सी) के विरुद्ध राज्य पाने की लालसा से, बगावत का भंडा उठाया और माधवराव सेधिया को अपने पक्ष में बुलवाकर उदयपुर पर घेरा डलवाया तब सालमसिह ने अपनी सेना के साथ पहुॅचकर अरिसिहं की मदद की । इस कार्य से प्रसन्न होकर महाराणा अरिसिंह ने धर्यावद का परगना फिर से इन्हे जागीर में दे दिया और "रावतराव" की वह उपाधि जो बादशाह ने पृथ्वीसिंह को सं० १७७० में दे रक्खी थी, ( सं० १८२८ फाल्गुन सुदी ६ गुरुवार = ई० सन् १७७२ ता० १३ फरवरी ) को मजूर करली । साथ ही इस विषय का एक पर्वाना भी सालिम सिह के नाम लिखकर भेजा जो इस प्रकार हैः"
श्री रामो जयति
श्री गणेशप्रसादातु
( भाले का निशान )
श्री एकलिंग
स्वस्ती श्री बीजै कटकातु महाराजाधिराज महाराणा श्री० रिसिंघ जी आदेशान्तु देवल्या सुथाने रावत राव
|
हुआ । संशून्य एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह मे मल्हारराव होलकर ने प्रतापगढ़ पर चढ़ाई की परन्तु तीन मास के बाद उसे निराश होकर घेरा उठाना पड़ा। ये अपने पिता की तरह बड़े चतुर थे और देश की राजनीतिक दशा को जानकर उससे लाभ उठाना चाहते थे । संशून्य एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह मे इन्दौर के तुकोजीराव होलकर भी तीन मास तक प्रतापगढ को घेर कर असफल वापिस गया । उसके दो वर्ष बाद मल्हारराव ने महारावत से कुछ रकम लेकर सुलह कर ली । संशून्य एक हज़ार आठ सौ चौबीस मे इन्होने इन्दौर पहुॅच कर होलकर से मुलाकात की । इसमे दोनो तरफ से समानता का व्यवहार किया गया था । उस समय मरहठो का सितारा खूब चमकना शुरू हो गया था फिर महारावत सालमसिंह भी मुसलमान वादशाहों की बादशाहत के फिर से चमक उठने की भी उम्मीद बाकी थी । इसी से सालमसिह ने संशून्य एक हज़ार आठ सौ चौबीस मे दिल्ली जाकर बादशाह गरानी से टकसाल खोलने की इजाजत ली । वास्तव मे इजाजत बादशाह फरु खसियर ने महारावत पृथ्वीसिह को विशून्य सशून्य एक हज़ार सात सौ सत्तर मे दे दी थी परन्तु उस समय उसका काम जारी नही हुआ था । संशून्य एक हज़ार आठ सौ पच्चीस में जब सरदारों के पड़यंत्र से रतनसिंह ने महाराणा अरिसिह के विरुद्ध राज्य पाने की लालसा से, बगावत का भंडा उठाया और माधवराव सेधिया को अपने पक्ष में बुलवाकर उदयपुर पर घेरा डलवाया तब सालमसिह ने अपनी सेना के साथ पहुॅचकर अरिसिहं की मदद की । इस कार्य से प्रसन्न होकर महाराणा अरिसिंह ने धर्यावद का परगना फिर से इन्हे जागीर में दे दिया और "रावतराव" की वह उपाधि जो बादशाह ने पृथ्वीसिंह को संशून्य एक हज़ार सात सौ सत्तर में दे रक्खी थी, को मजूर करली । साथ ही इस विषय का एक पर्वाना भी सालिम सिह के नाम लिखकर भेजा जो इस प्रकार हैः" श्री रामो जयति श्री गणेशप्रसादातु श्री एकलिंग स्वस्ती श्री बीजै कटकातु महाराजाधिराज महाराणा श्रीशून्य रिसिंघ जी आदेशान्तु देवल्या सुथाने रावत राव
|
दत्तक ग्रहण (संशोधन) विनियम 2021 के अनुसार, अधिनियम के तहत गोद लेने वाले परिवार बच्चे को विदेश ले जाने के लिए सरकार के नोडल दत्तक निकाय केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त कर सकते हैं।
अभी तक सिर्फ एक अदालत ही एनओसी जारी करती थी। अब तक एचएएमए के तहत अंतर-देशीय गोद लेने के संबंध में सीएआरए के लिए कोई नियम नहीं थे। अधिनियम बच्चों को गोद लेने के नियमों से संबंधित है क्योंकि यह गोद लिए गए बच्चे को जैविक बच्चे द्वारा प्राप्त सभी अधिकार प्रदान करता है।
शुक्रवार देर रात जारी एक अधिसूचना में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कहा कि सीएआरए हेग-अनुमोदित देशों के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करेगी।
बच्चों के संरक्षण और सहयोग पर हेग कन्वेंशन एक अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन है जिस पर भारत द्वारा अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण के संबंध में हस्ताक्षर और पुष्टि की गई है।
सीएआरए देश में संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट से सत्यापन प्रमाण पत्र के आधार पर एनओसी जारी करेगा।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहले कहा था कि नये नियमों को लाया जा रहा है क्योंकि एचएएमए के तहत गोद लिए गए बच्चे को दूसरे देश में स्थानांतरित करने के संबंध में कई चुनौतियां हैं।
|
दत्तक ग्रहण विनियम दो हज़ार इक्कीस के अनुसार, अधिनियम के तहत गोद लेने वाले परिवार बच्चे को विदेश ले जाने के लिए सरकार के नोडल दत्तक निकाय केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। अभी तक सिर्फ एक अदालत ही एनओसी जारी करती थी। अब तक एचएएमए के तहत अंतर-देशीय गोद लेने के संबंध में सीएआरए के लिए कोई नियम नहीं थे। अधिनियम बच्चों को गोद लेने के नियमों से संबंधित है क्योंकि यह गोद लिए गए बच्चे को जैविक बच्चे द्वारा प्राप्त सभी अधिकार प्रदान करता है। शुक्रवार देर रात जारी एक अधिसूचना में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कहा कि सीएआरए हेग-अनुमोदित देशों के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करेगी। बच्चों के संरक्षण और सहयोग पर हेग कन्वेंशन एक अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन है जिस पर भारत द्वारा अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण के संबंध में हस्ताक्षर और पुष्टि की गई है। सीएआरए देश में संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट से सत्यापन प्रमाण पत्र के आधार पर एनओसी जारी करेगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहले कहा था कि नये नियमों को लाया जा रहा है क्योंकि एचएएमए के तहत गोद लिए गए बच्चे को दूसरे देश में स्थानांतरित करने के संबंध में कई चुनौतियां हैं।
|
मुंबई, 23 दिसंबर सोनालिका ट्रैक्टर ने बुधवार को देश का पहला इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर 'टाइगर' पेश किया, जो 25. 5 किलोवाट की बैटरी से चलता है और डीजल ट्रैक्टर की तुलना में इसकी संचालन लागत बहुत कम है।
इस ट्रैक्टर की शो रूम कीमत 5. 99 लाख रुपये है। कंपनी ने अपने ई-ट्रैक्टर की बुकिंग भी शुरू कर दी है।
कंपनी ने एक बयान में बताया कि यह ई-ट्रैक्टर 24. 93 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चल सकता है और दो टन की ट्रॉली के साथ चलते हुए आठ घंटे का बैटरी बैकअप देता है।
सोनालिका इसके साथ एक फास्ट चार्जिंग प्रणाली भी दे रही है, जिसकी मदद से इसे केवल चार घंटे में चार्ज किया जा सकता है।
सोनालिका समूह के कार्यकारी निदेशक रमन मित्तल ने कहा कि टाइगर इलेक्ट्रिक से भारतीय किसानों की पैदावार बढ़ने के साथ ही मुनाफा भी बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि टाइगर इलेक्ट्रिक के पास वही वैश्विक तकनीक है, जो यूरोपीय और अमेरिकी किसानों को मिलती है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
मुंबई, तेईस दिसंबर सोनालिका ट्रैक्टर ने बुधवार को देश का पहला इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर 'टाइगर' पेश किया, जो पच्चीस. पाँच किलोग्रामवाट की बैटरी से चलता है और डीजल ट्रैक्टर की तुलना में इसकी संचालन लागत बहुत कम है। इस ट्रैक्टर की शो रूम कीमत पाँच. निन्यानवे लाख रुपये है। कंपनी ने अपने ई-ट्रैक्टर की बुकिंग भी शुरू कर दी है। कंपनी ने एक बयान में बताया कि यह ई-ट्रैक्टर चौबीस. तिरानवे किलोग्राममीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चल सकता है और दो टन की ट्रॉली के साथ चलते हुए आठ घंटे का बैटरी बैकअप देता है। सोनालिका इसके साथ एक फास्ट चार्जिंग प्रणाली भी दे रही है, जिसकी मदद से इसे केवल चार घंटे में चार्ज किया जा सकता है। सोनालिका समूह के कार्यकारी निदेशक रमन मित्तल ने कहा कि टाइगर इलेक्ट्रिक से भारतीय किसानों की पैदावार बढ़ने के साथ ही मुनाफा भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि टाइगर इलेक्ट्रिक के पास वही वैश्विक तकनीक है, जो यूरोपीय और अमेरिकी किसानों को मिलती है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
|
जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर । बुधवार को धनुषा जिला के भटिहन बाजार के पास अनियंत्रण को टेम्पो पलट गयी। इस दुर्घटना में सबैला नगरपालिका 10का 44बर्षीय चालक राम सेवक पंडित की मृत्यु घटना स्थल पर ही हो गया है। वही दो छात्र सामान्य रूप से घायल हुए है। एक निजी बिद्यालय के छात्रो को छुट्टी के बि उनके घर बापस पहुंचा रहा था।
|
जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर । बुधवार को धनुषा जिला के भटिहन बाजार के पास अनियंत्रण को टेम्पो पलट गयी। इस दुर्घटना में सबैला नगरपालिका दसका चौंतालीसबर्षीय चालक राम सेवक पंडित की मृत्यु घटना स्थल पर ही हो गया है। वही दो छात्र सामान्य रूप से घायल हुए है। एक निजी बिद्यालय के छात्रो को छुट्टी के बि उनके घर बापस पहुंचा रहा था।
|
अहमदाबाद. लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस आलाकमान ने राज्यसभा सांसद शक्ति सिंह गोहिल को प्रदेश की कमान सौंपी है। गोहिल ने वर्ष 2020 में गुृजरात में हुए राज्यसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाई थी। वे पार्टी के बिहार के साथ-साथ दिल्ली के भी प्रभारी रह चुके हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में भी उन्होंने अपनी जिम्मेवारी निभाई है। गुजरात में कभी सबसे युवा विधायक रह चुके गोहिल पर कांग्रेस आलाकमान ने भरोसा करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी दी है। पत्रिका संवाददाता ओम प्रकाश शर्मा ने कांग्रेस नेता से इन्हीं सभी मुद्दों को लेकर बातचीत की। पेश है इस बातचीत के कुछ अंशः
|
अहमदाबाद. लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस आलाकमान ने राज्यसभा सांसद शक्ति सिंह गोहिल को प्रदेश की कमान सौंपी है। गोहिल ने वर्ष दो हज़ार बीस में गुृजरात में हुए राज्यसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाई थी। वे पार्टी के बिहार के साथ-साथ दिल्ली के भी प्रभारी रह चुके हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में भी उन्होंने अपनी जिम्मेवारी निभाई है। गुजरात में कभी सबसे युवा विधायक रह चुके गोहिल पर कांग्रेस आलाकमान ने भरोसा करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी दी है। पत्रिका संवाददाता ओम प्रकाश शर्मा ने कांग्रेस नेता से इन्हीं सभी मुद्दों को लेकर बातचीत की। पेश है इस बातचीत के कुछ अंशः
|
Quick links:
उन्होंने कहा कि यह (संबंध) उम्मीदों से काफी आगे निकल गए हैं, चाहे वह प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच व्यक्तिगत संबंध हो, चाहे वह सरकारों द्वारा किए गए व्यापक कार्य हों या चाहे वह लोगों, उद्योगपतियों, सांस्कृतिक नेताओं आदि के बीच के संबंध हों।
गार्सेटी ने कहा, " यह भविष्य के बारे में है। मुझे लगता है कि अमेरिका और भारत ही भविष्य हैं, जो एक साथ मजबूती से खड़े हैं और हम दुनिया को कैसे अधिक समृद्ध बना सकते हैं उसकी राह दिखा रहे हैं..." गार्सेटी ने कहा कि इस यात्रा में शांति, समृद्धि, ग्रह और लोग चार पहलू मुख्य रहे।
प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रथम महिला जिल बाइडन के निमंत्रण पर 21 से 24 जून तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर थे।
|
Quick links: उन्होंने कहा कि यह उम्मीदों से काफी आगे निकल गए हैं, चाहे वह प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच व्यक्तिगत संबंध हो, चाहे वह सरकारों द्वारा किए गए व्यापक कार्य हों या चाहे वह लोगों, उद्योगपतियों, सांस्कृतिक नेताओं आदि के बीच के संबंध हों। गार्सेटी ने कहा, " यह भविष्य के बारे में है। मुझे लगता है कि अमेरिका और भारत ही भविष्य हैं, जो एक साथ मजबूती से खड़े हैं और हम दुनिया को कैसे अधिक समृद्ध बना सकते हैं उसकी राह दिखा रहे हैं..." गार्सेटी ने कहा कि इस यात्रा में शांति, समृद्धि, ग्रह और लोग चार पहलू मुख्य रहे। प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रथम महिला जिल बाइडन के निमंत्रण पर इक्कीस से चौबीस जून तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर थे।
|
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गुरुवार सुबह तेज आंधी के साथ काले बादल घिर आए। कई स्थानों पर छिटपुट बारिश हुई तो कई जगह तेज बादल गड़गड़ा कर निकल गए। राजधानी लखनऊ में इतने काले बादल आसमान में छा गए कि लगा सुबह में ही रात हो गई। गोंडा में भी तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज कुछ ऐसा ही रहेगा।
देश के दो स्थानों पर बने ऊपरी हवाओं में चक्रवात के प्रभाव के साथ पश्चिम बंगाल और अरब सागर की ओर से नम हवाएं आ रही हैं। इस कारण से मौसम का रुख बदल गया है। मौसम के बदले रुख का एक कारण लॉकडाउन भी है।
मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि डेढ़ महीने से कारखाने, व्यवसायिक प्रतिष्ठान और 75 फीसदी से ज्यादा वाहनों का संचालन बंद है। इस कारण कार्बन उत्सर्जन 60 से 70 फीसदी तक कम हो गया है। वायुमंडल में कार्बन डाईआक्साइड की मात्रा घटने से ग्रीन हाउस प्रभाव भी घटा है और इसी कारण मौसम में बदलाव हो रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो प्रदूषण कम होने की वजह से पश्चिमी विक्षोभ का पैटर्न भी बदल रहा है। पहले जहां मार्च की महीने तक ही पश्चिमी विक्षोभ आता था, वहीं अब तक इस बार मई तक आ रहा है। मई का पहला हफ्ता भी बारिश-बदली और आंधी के बीच गुजरेगा। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक जेपी गुप्ता के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ के कारण शहर समेत प्रदेश भर में आंधी-बारिश के आसार हैं। शहर में आने वाले दिनों में भी बादल छाए रहेंगे। कई जगह बारिश भी हो सकती है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गुरुवार सुबह तेज आंधी के साथ काले बादल घिर आए। कई स्थानों पर छिटपुट बारिश हुई तो कई जगह तेज बादल गड़गड़ा कर निकल गए। राजधानी लखनऊ में इतने काले बादल आसमान में छा गए कि लगा सुबह में ही रात हो गई। गोंडा में भी तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज कुछ ऐसा ही रहेगा। देश के दो स्थानों पर बने ऊपरी हवाओं में चक्रवात के प्रभाव के साथ पश्चिम बंगाल और अरब सागर की ओर से नम हवाएं आ रही हैं। इस कारण से मौसम का रुख बदल गया है। मौसम के बदले रुख का एक कारण लॉकडाउन भी है। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि डेढ़ महीने से कारखाने, व्यवसायिक प्रतिष्ठान और पचहत्तर फीसदी से ज्यादा वाहनों का संचालन बंद है। इस कारण कार्बन उत्सर्जन साठ से सत्तर फीसदी तक कम हो गया है। वायुमंडल में कार्बन डाईआक्साइड की मात्रा घटने से ग्रीन हाउस प्रभाव भी घटा है और इसी कारण मौसम में बदलाव हो रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो प्रदूषण कम होने की वजह से पश्चिमी विक्षोभ का पैटर्न भी बदल रहा है। पहले जहां मार्च की महीने तक ही पश्चिमी विक्षोभ आता था, वहीं अब तक इस बार मई तक आ रहा है। मई का पहला हफ्ता भी बारिश-बदली और आंधी के बीच गुजरेगा। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक जेपी गुप्ता के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ के कारण शहर समेत प्रदेश भर में आंधी-बारिश के आसार हैं। शहर में आने वाले दिनों में भी बादल छाए रहेंगे। कई जगह बारिश भी हो सकती है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
अक्षय कुमार और साजिद नडियाडवाला दुनिया को बतायेंगे कि 42 साल की दोस्ती कैसी होती है ?
शो पर साजिद और अक्षय तो आ ही रहे हैं लेकिन हम आपको बता दें कि इस शो को होस्ट करने की जिम्मेदारी रीतेश और साजिद खान की है। जो कि इन दोनों के बहुत ही खास दोस्त माने जाते हैं। अब आप सोच लीजिए कि जब यह शो लाइव होगा तो लोगों को कितना कुछ जानने को मिलने वाला है और जहां चार खास दोस्त मिलने जा रहे हों तो वो शाम ही कुछ और होगी।
बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज,
ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
|
अक्षय कुमार और साजिद नडियाडवाला दुनिया को बतायेंगे कि बयालीस साल की दोस्ती कैसी होती है ? शो पर साजिद और अक्षय तो आ ही रहे हैं लेकिन हम आपको बता दें कि इस शो को होस्ट करने की जिम्मेदारी रीतेश और साजिद खान की है। जो कि इन दोनों के बहुत ही खास दोस्त माने जाते हैं। अब आप सोच लीजिए कि जब यह शो लाइव होगा तो लोगों को कितना कुछ जानने को मिलने वाला है और जहां चार खास दोस्त मिलने जा रहे हों तो वो शाम ही कुछ और होगी। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
|
फिरोजाबाद (एजेंसी/वार्ता): उत्तर प्रदेश में फिरोजाबाद के मंगल बाजार से महिलाओं के पर्स और रुपये चोरी करने के मामले में उत्तर थाना पुलिस ने बुधवार को दो महिलाओं को जेल भेज दिया और इनके साथियों की पुलिस तलाश कर रही है।
पुलिस ने बताया कि पकड़ी गई महिलाओं के नाम रुख़सार और परवीन है। जो रसूलपुर थाना क्षेत्र के मोहल्ला दुर्गेश नगर की रहने वाली है। ओवर ब्रिज के नीचे लगने वाले मंगल बाजार में खरीददारी करने आई लेबर कॉलोनी निवासी पायल वर्मा, करबला निवासी पिंकी और बाह निवासी सोनम, बेबी के महिलाओं ने पर्स से रुपये और मोबाइल फोन चोरी किए थे।
महिलाओं द्वारा शोरगुल किए जाने पर काफी संख्या में लोग एकत्रित हुए। लोगों ने दो महिलाओं को पकड़ लिया जबकि उनके साथ आई दो महिलाएं वहां से भाग गई। पकड़ी गई महिलाओं को पुलिस को सौंप दिया गया।
पुलिस ने महिलाओं से पूछताछ की। इस दौरान महिलाओं के पास से पुलिस ने चोरी किए तीन हजार रुपये बरामद किए। पुलिस ने बताया कि महिलाओं से पूछताछ की गई तो तब महिलाओं ने बताया कि चोरी किए गए मोबाइल उनके साथ की महिलाओं के पास है।
पुलिस ने बताया कि पकड़ी गयी महिलाओं ने अपनी साथी महिलाओं के नाम भी बताए हैं। उनके बारे में जानकारी करने के साथ ही गिरफ्तारी को प्रयास किए जा रहे है। फरार महिलाओं को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
-(एजेंसी/वार्ता)
यह भी पढ़ेंः- भुना चना सेहत के लिए बेहद गुणकारी, सेवन करने से स्वास्थ्य को मिलेंगे कई स्वास्थ्य संबंधी लाभ!
|
फिरोजाबाद : उत्तर प्रदेश में फिरोजाबाद के मंगल बाजार से महिलाओं के पर्स और रुपये चोरी करने के मामले में उत्तर थाना पुलिस ने बुधवार को दो महिलाओं को जेल भेज दिया और इनके साथियों की पुलिस तलाश कर रही है। पुलिस ने बताया कि पकड़ी गई महिलाओं के नाम रुख़सार और परवीन है। जो रसूलपुर थाना क्षेत्र के मोहल्ला दुर्गेश नगर की रहने वाली है। ओवर ब्रिज के नीचे लगने वाले मंगल बाजार में खरीददारी करने आई लेबर कॉलोनी निवासी पायल वर्मा, करबला निवासी पिंकी और बाह निवासी सोनम, बेबी के महिलाओं ने पर्स से रुपये और मोबाइल फोन चोरी किए थे। महिलाओं द्वारा शोरगुल किए जाने पर काफी संख्या में लोग एकत्रित हुए। लोगों ने दो महिलाओं को पकड़ लिया जबकि उनके साथ आई दो महिलाएं वहां से भाग गई। पकड़ी गई महिलाओं को पुलिस को सौंप दिया गया। पुलिस ने महिलाओं से पूछताछ की। इस दौरान महिलाओं के पास से पुलिस ने चोरी किए तीन हजार रुपये बरामद किए। पुलिस ने बताया कि महिलाओं से पूछताछ की गई तो तब महिलाओं ने बताया कि चोरी किए गए मोबाइल उनके साथ की महिलाओं के पास है। पुलिस ने बताया कि पकड़ी गयी महिलाओं ने अपनी साथी महिलाओं के नाम भी बताए हैं। उनके बारे में जानकारी करने के साथ ही गिरफ्तारी को प्रयास किए जा रहे है। फरार महिलाओं को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। - यह भी पढ़ेंः- भुना चना सेहत के लिए बेहद गुणकारी, सेवन करने से स्वास्थ्य को मिलेंगे कई स्वास्थ्य संबंधी लाभ!
|
जम्मू और कश्मीर लोक सेवा आयोग ने रेंज ऑफिसर के रिक्त पदो को भरने के लिए योग्य और अनुभवी उम्मीदवारों से आवेदन मांगे है. यदि आपके पास संबधित विषय में स्नातक डिग्री है और अनुभव है तो आप इन पदो के लिए आवेदन कर सकते है. अपना आवेदन जमा करने से पहले नौकरी से जुड़ी पूर्ण जानकारी आप नीचे विस्तार से जान सकते है.
आयु सीमा : उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष मान्य होगी और आरक्षित वर्ग को आयु सीमा में छूट दी जाएगी.
वेतन : जिन उम्मीदवारों का चयन इन पदों के लिए किया जाएगा उन्हें 9300-34800 4280/- वेतन दिया जाएगा.
योग्यता : उम्मीदवारों को किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से बीएससी वानिकी में डिग्री प्राप्त हो और अनुभव प्राप्त हो.
चयन प्रक्रिया : उम्मीदवार का लिखित परीक्षा के आधार पर चयन होगा.
कैसे करें आवेदन ?
योग्य और इच्छुक उम्मीदवार आवेदन के निर्धारित प्रारूप पर ऑनलाइन आवेदन करते हैं, साथ ही शिक्षा और अन्य योग्यता, जन्मतिथि की तारीख और अन्य आवश्यक जानकारी और दस्तावेजों को स्वयं की प्रतियां के साथ और नियत तारीख से पहले भेजने के बारे में पूरी जानकारी के साथ. योग्यता मानदंडों के आधार पर साक्षात्कार में भाग लेने के लिए लघु और सूचीबद्ध उम्मीदवारों को ईमेल और फोन के माध्यम से सूचित किया जाएगा और नियुक्ति विशुद्ध रूप से अस्थायी है.
जॉब और करियर से जुडी हर ख़बर न्यूज़ ट्रैक पर सिर्फ एक क्लिक में, पढिये कैसे करे जॉब पाने के लिए तैयारी और बहुत कुछ.
|
जम्मू और कश्मीर लोक सेवा आयोग ने रेंज ऑफिसर के रिक्त पदो को भरने के लिए योग्य और अनुभवी उम्मीदवारों से आवेदन मांगे है. यदि आपके पास संबधित विषय में स्नातक डिग्री है और अनुभव है तो आप इन पदो के लिए आवेदन कर सकते है. अपना आवेदन जमा करने से पहले नौकरी से जुड़ी पूर्ण जानकारी आप नीचे विस्तार से जान सकते है. आयु सीमा : उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु अट्ठारह वर्ष और अधिकतम आयु चालीस वर्ष मान्य होगी और आरक्षित वर्ग को आयु सीमा में छूट दी जाएगी. वेतन : जिन उम्मीदवारों का चयन इन पदों के लिए किया जाएगा उन्हें नौ हज़ार तीन सौ-चौंतीस हज़ार आठ सौ चार हज़ार दो सौ अस्सी/- वेतन दिया जाएगा. योग्यता : उम्मीदवारों को किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से बीएससी वानिकी में डिग्री प्राप्त हो और अनुभव प्राप्त हो. चयन प्रक्रिया : उम्मीदवार का लिखित परीक्षा के आधार पर चयन होगा. कैसे करें आवेदन ? योग्य और इच्छुक उम्मीदवार आवेदन के निर्धारित प्रारूप पर ऑनलाइन आवेदन करते हैं, साथ ही शिक्षा और अन्य योग्यता, जन्मतिथि की तारीख और अन्य आवश्यक जानकारी और दस्तावेजों को स्वयं की प्रतियां के साथ और नियत तारीख से पहले भेजने के बारे में पूरी जानकारी के साथ. योग्यता मानदंडों के आधार पर साक्षात्कार में भाग लेने के लिए लघु और सूचीबद्ध उम्मीदवारों को ईमेल और फोन के माध्यम से सूचित किया जाएगा और नियुक्ति विशुद्ध रूप से अस्थायी है. जॉब और करियर से जुडी हर ख़बर न्यूज़ ट्रैक पर सिर्फ एक क्लिक में, पढिये कैसे करे जॉब पाने के लिए तैयारी और बहुत कुछ.
|
एटम बनाने के ऐलान के कुछ समय बाद ही प्लेन क्रैश में डॉ होमी जहांगीर भाभा की मौत हो गई थी। बताया जाता है कि इसके पीछे अमेरिकी खुफिया एजेंसी की साजिश थी।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ही तरह भारत के महान वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा की मौत के बारे में भी कई बातें रहस्य ही हैं। उनकी मौत विमान हादसे में हो गई थी। हालांकि कई रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि यह हादसा नहीं बल्कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की साजिश थी। दरअसल अमेरिका नहीं चाहता था कि परमाणु हथियारों की श्रेणी में किसी और देश का नाम जुड़े। भारत इस दिशा में तेजी से काम कर रहा था और होमी जहांगीर भाभा के एक इंटरव्यू ने अमेरिका को और भी डरा दिया था।
1965 में डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने ऑल इंडिया रेडियो पर एक इंटरव्यू दिया। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें छूट मिल जाए तो 18 महीने में ही भारत के पास एटम बम होगा। इसी के तीन महीने बाद ही जब वह एअर इंडिया के बोइंग 707 विमान से लंदन जा र हे थे तभी रास्ते में विमान क्रैश हो गया। यूरोप के आल्प्स माउंटेन रेंज में विमान हादसे का शिकार हो गया। इसी में डॉ. भाभा की भी मौत हो गई। इस घटना को 24 जनवरी को 56 साल पूरे हो गए है।
डॉ. होमी जहांगीर भाभा एक पारसी परिवार से थे और उन्होंने इंजिनीयरिंग की पढ़ाई कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से की थी। वह जाने माने न्यूक्लियर फिजिसिस्ट थे। उनके काम के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाने लगा। हालांकि दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान 1939 में जब वह भारत आए तो यहीं के होकर रह गए। वह सीवी रमन लैब में काम करने लगे।
इसके बाद टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के डायरेक्टर के तौर पर काम करने लगे। वह भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश बनाना चाहते थे। 1948 में ही उन्होंने ऊर्जा आयोग की स्थापना की और फिर भाभा को परमाणु कार्यक्रमों का निदेशक बना दिया गया। 1963 में जब न्यूक्लियर प्लांट लगाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय समझौते पर हस्ताक्षरर हुए तो बेहद कड़े नियम बनाए गए थे। भाभा चाहते थे कि भारत जल्द ही अमेरिकिया, सोवियत यूनियन और चीन के बराबर खड़ा हो।
बताया जाता है कि उनकी फ्लाइट फ्रांस की सीमा के पास पहाड़ी से टकरा गी थी। बाद में बताया गया कि प्लेन का मलबा बर्फ में धंस गया है। इसका ब्लैक बॉक्स भी नहीं मिला था। जेनेवा कंट्रोल रूम की तरफ से बताया गया कि ऊंचाई नामपने वाला उपकरण भी विमान में खराब था। फ्रांस ने जो तर्क दिया उसे भारत ने भी स्वीकार कर लिया। हालांकि 1843 नाम की एक मैगजीन में छपी रिपोर्ट में कहा गया था कि जिस प्लैन का टुकड़ा वहां से मिला था वह उससे पहले ही क्रैश हुआ था। वह एयर इंडिया के विमान का नहीं था।
बाद में कहा गया कि फ्लाइट पहाड़ी से नहीं बल्कि किसी और फ्लाइट से टकराई थी। कन्वर्सेशन विद द क्रो नाम कि किताब में सीआईए एजेंट रॉबर्ड क्रॉली और अणेरिकी पत्रकार के बीच की बातचीत छापी गई थी जिसमें कहा गया था कि भारत के परमाणु कार्यक्रम को देखकर अमेरिका परेशान था। होमी भाभा के बारे में भी उन्होंने कहा, वो बहुत खतरनाक था। वह विएना जाकर और परेशानी खड़ी कर देता। उसके बोइंग 707 के कार्गो होल्ड में बम फटा था। यहां दो विमानों की टक्कर की थ्योरी भी काम करती है।
|
एटम बनाने के ऐलान के कुछ समय बाद ही प्लेन क्रैश में डॉ होमी जहांगीर भाभा की मौत हो गई थी। बताया जाता है कि इसके पीछे अमेरिकी खुफिया एजेंसी की साजिश थी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ही तरह भारत के महान वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा की मौत के बारे में भी कई बातें रहस्य ही हैं। उनकी मौत विमान हादसे में हो गई थी। हालांकि कई रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि यह हादसा नहीं बल्कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की साजिश थी। दरअसल अमेरिका नहीं चाहता था कि परमाणु हथियारों की श्रेणी में किसी और देश का नाम जुड़े। भारत इस दिशा में तेजी से काम कर रहा था और होमी जहांगीर भाभा के एक इंटरव्यू ने अमेरिका को और भी डरा दिया था। एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने ऑल इंडिया रेडियो पर एक इंटरव्यू दिया। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें छूट मिल जाए तो अट्ठारह महीने में ही भारत के पास एटम बम होगा। इसी के तीन महीने बाद ही जब वह एअर इंडिया के बोइंग सात सौ सात विमान से लंदन जा र हे थे तभी रास्ते में विमान क्रैश हो गया। यूरोप के आल्प्स माउंटेन रेंज में विमान हादसे का शिकार हो गया। इसी में डॉ. भाभा की भी मौत हो गई। इस घटना को चौबीस जनवरी को छप्पन साल पूरे हो गए है। डॉ. होमी जहांगीर भाभा एक पारसी परिवार से थे और उन्होंने इंजिनीयरिंग की पढ़ाई कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से की थी। वह जाने माने न्यूक्लियर फिजिसिस्ट थे। उनके काम के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाने लगा। हालांकि दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान एक हज़ार नौ सौ उनतालीस में जब वह भारत आए तो यहीं के होकर रह गए। वह सीवी रमन लैब में काम करने लगे। इसके बाद टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के डायरेक्टर के तौर पर काम करने लगे। वह भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश बनाना चाहते थे। एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस में ही उन्होंने ऊर्जा आयोग की स्थापना की और फिर भाभा को परमाणु कार्यक्रमों का निदेशक बना दिया गया। एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ में जब न्यूक्लियर प्लांट लगाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय समझौते पर हस्ताक्षरर हुए तो बेहद कड़े नियम बनाए गए थे। भाभा चाहते थे कि भारत जल्द ही अमेरिकिया, सोवियत यूनियन और चीन के बराबर खड़ा हो। बताया जाता है कि उनकी फ्लाइट फ्रांस की सीमा के पास पहाड़ी से टकरा गी थी। बाद में बताया गया कि प्लेन का मलबा बर्फ में धंस गया है। इसका ब्लैक बॉक्स भी नहीं मिला था। जेनेवा कंट्रोल रूम की तरफ से बताया गया कि ऊंचाई नामपने वाला उपकरण भी विमान में खराब था। फ्रांस ने जो तर्क दिया उसे भारत ने भी स्वीकार कर लिया। हालांकि एक हज़ार आठ सौ तैंतालीस नाम की एक मैगजीन में छपी रिपोर्ट में कहा गया था कि जिस प्लैन का टुकड़ा वहां से मिला था वह उससे पहले ही क्रैश हुआ था। वह एयर इंडिया के विमान का नहीं था। बाद में कहा गया कि फ्लाइट पहाड़ी से नहीं बल्कि किसी और फ्लाइट से टकराई थी। कन्वर्सेशन विद द क्रो नाम कि किताब में सीआईए एजेंट रॉबर्ड क्रॉली और अणेरिकी पत्रकार के बीच की बातचीत छापी गई थी जिसमें कहा गया था कि भारत के परमाणु कार्यक्रम को देखकर अमेरिका परेशान था। होमी भाभा के बारे में भी उन्होंने कहा, वो बहुत खतरनाक था। वह विएना जाकर और परेशानी खड़ी कर देता। उसके बोइंग सात सौ सात के कार्गो होल्ड में बम फटा था। यहां दो विमानों की टक्कर की थ्योरी भी काम करती है।
|
महिला वर्ग में पूर्व चैंपियन मारिया शारापोवा ने भी चौथे दौर में प्रवेश कर लिया। मारिया ने हाल ही में फ्रेंच ओपेन का टाइटल भी जीता है।
पांच बार की चैंपियन और शीर्ष वरीयता प्राप्त सेरेना विलियम्स पर बारिश के कारण लंबे समय तक रुके मुकाबले का बड़ा असर दिखाई दिया. 25वीं वरीयता प्राप्त फ्रांस की एलिजे कॉर्नेट ने एक सेट से पिछड़ने के बाद सेरेना को 1-6, 6-3, 6-4 से हराया।
सुबह से जारी बारिश के कारण शनिवार के मुकाबले प्रभावित हुए। स्थानीय समय के अनुसार दोपहर करीब डेढ़ बजे मुकाबले शुरू हुए। लेकिन 15 मिनट बाद फिर बारिश शुरू हो गई और बाहरी कोर्ट्स के अधिकतर मैच रद कर दिए गए।
गत चैंपियन एंडी मरे आसान जीत के साथ अगले दौर में पहुंच चुके हैं। उन्होंने रॉबर्टी बटिस्टा को एक घंटे 35 मिनट तक चले मुकाबले में 6-2, 6-3, 6-2 से पराजित किया।
क्रिकेट के 'भगवान' सचिन तेंदुलकर और फुटबॉल के जादूगर डेविड बेकहम भी विंबलडन का लुत्फ उठाते नजर आए।
क्रिकेट के अलावा टेनिस भी सचिन तेंदुलकर का पसंदीदा खेल है और वह कभी भी विंबलडन मिस नहीं करते हैं।
भले ही भारत और पाक के बीच विवाद जारी हो लेकिन इंडो-पाक एक्सप्रेस पूरी शान से एक बार फिर विबंलडन में दौड़ रही है। विंबलडन में एक बार फिर से भारत के रोहन बोपान्ना और पाकिस्तान के असलम कुरैशी अपने बेहतरीन खेल के साथ डबल्स में अपना जलवा बिखेर रहे हैं।
रोजर फेडरर जिनके रैकेट की धूम फ्रेंच ओपन में उनके फैंस को देखने को नहीं मिली थी, ग्रास कोर्ट पर अपना जादू बिखेर रहे हैं। रोजर पिछले वर्ष हारकर बाहर हो गए थे लेकिन इस बार वह इस टूर्नामेंट को जीतने के मकसद से उतरे हैं।
सर्बिया के नोवाक जोकोविच जो पिछले वर्ष विबंलडन के उपविजेता बने थे, तीसरे दौर में अपने कंधे की चोट से जूझते नजर आए। लेकिन इसके बावजूद जोकोविच चैपिंयन की तरह खेले और उन्होंने गिल्स सिमॉन को तीसरे दौर में हरा दिया।
सानिया मिर्जा एक बार फिर से विंबलडन के डबल्स में देश के लिए टूर्नामेंट जीतने के इरादे से उतरी हैं। सभी भारतीयों की नजरें सानिया पर टिकी हुई हैं। गौरतलब है कि सानिया मिर्जा ने जब विंबलडन के जूनियर वर्ग में खिताब जीता था तो उसके बाद ही उन्हें देश और विदेश में सुर्खियां हासिल हुई थीं।
पिछले वर्ष खिताब से चूक गए तो क्या हुआ लेकिन इस बार क्ले कोर्ट के बादशाह और स्पेन के राफेल नडाल ने विंबलडन को जीतने के लिए अपना पूरा दम लगा दिया है।
|
महिला वर्ग में पूर्व चैंपियन मारिया शारापोवा ने भी चौथे दौर में प्रवेश कर लिया। मारिया ने हाल ही में फ्रेंच ओपेन का टाइटल भी जीता है। पांच बार की चैंपियन और शीर्ष वरीयता प्राप्त सेरेना विलियम्स पर बारिश के कारण लंबे समय तक रुके मुकाबले का बड़ा असर दिखाई दिया. पच्चीसवीं वरीयता प्राप्त फ्रांस की एलिजे कॉर्नेट ने एक सेट से पिछड़ने के बाद सेरेना को एक-छः, छः-तीन, छः-चार से हराया। सुबह से जारी बारिश के कारण शनिवार के मुकाबले प्रभावित हुए। स्थानीय समय के अनुसार दोपहर करीब डेढ़ बजे मुकाबले शुरू हुए। लेकिन पंद्रह मिनट बाद फिर बारिश शुरू हो गई और बाहरी कोर्ट्स के अधिकतर मैच रद कर दिए गए। गत चैंपियन एंडी मरे आसान जीत के साथ अगले दौर में पहुंच चुके हैं। उन्होंने रॉबर्टी बटिस्टा को एक घंटे पैंतीस मिनट तक चले मुकाबले में छः-दो, छः-तीन, छः-दो से पराजित किया। क्रिकेट के 'भगवान' सचिन तेंदुलकर और फुटबॉल के जादूगर डेविड बेकहम भी विंबलडन का लुत्फ उठाते नजर आए। क्रिकेट के अलावा टेनिस भी सचिन तेंदुलकर का पसंदीदा खेल है और वह कभी भी विंबलडन मिस नहीं करते हैं। भले ही भारत और पाक के बीच विवाद जारी हो लेकिन इंडो-पाक एक्सप्रेस पूरी शान से एक बार फिर विबंलडन में दौड़ रही है। विंबलडन में एक बार फिर से भारत के रोहन बोपान्ना और पाकिस्तान के असलम कुरैशी अपने बेहतरीन खेल के साथ डबल्स में अपना जलवा बिखेर रहे हैं। रोजर फेडरर जिनके रैकेट की धूम फ्रेंच ओपन में उनके फैंस को देखने को नहीं मिली थी, ग्रास कोर्ट पर अपना जादू बिखेर रहे हैं। रोजर पिछले वर्ष हारकर बाहर हो गए थे लेकिन इस बार वह इस टूर्नामेंट को जीतने के मकसद से उतरे हैं। सर्बिया के नोवाक जोकोविच जो पिछले वर्ष विबंलडन के उपविजेता बने थे, तीसरे दौर में अपने कंधे की चोट से जूझते नजर आए। लेकिन इसके बावजूद जोकोविच चैपिंयन की तरह खेले और उन्होंने गिल्स सिमॉन को तीसरे दौर में हरा दिया। सानिया मिर्जा एक बार फिर से विंबलडन के डबल्स में देश के लिए टूर्नामेंट जीतने के इरादे से उतरी हैं। सभी भारतीयों की नजरें सानिया पर टिकी हुई हैं। गौरतलब है कि सानिया मिर्जा ने जब विंबलडन के जूनियर वर्ग में खिताब जीता था तो उसके बाद ही उन्हें देश और विदेश में सुर्खियां हासिल हुई थीं। पिछले वर्ष खिताब से चूक गए तो क्या हुआ लेकिन इस बार क्ले कोर्ट के बादशाह और स्पेन के राफेल नडाल ने विंबलडन को जीतने के लिए अपना पूरा दम लगा दिया है।
|
Highlightsपूरी तरह से फिट हो और ऊंगली की चोट का असर नहीं हो। बॉक्सिंग डे टेस्ट के दौरान उनकी ऊंगली की हड्डी टूट गई थी। ग्रीन के गेंदबाजी नहीं करने पर स्कॉट बोलैंड को मौका मिल सकता है।
Border-Gavaskar Trophy 2023: महान विकेटकीपर बल्लेबाज एडम गिलक्रिस्ट का मानना है कि आस्ट्रेलिया भारत के खिलाफ बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे पहले टेस्ट में हरफनमौला कैमरन ग्रीन बतौर बल्लेबाज उतर सकते हैं । तेईस वर्ष के ग्रीन दाहिने हाथ की ऊंगली की सर्जरी के बाद अब फिटनेस हासिल करने की राह पर हैं ।
उन्होंने कहा ," इस टीम को एक दूसरे पर काफी भरोसा है और हर हालत में एक दूसरे का साथ देने को तैयार है । " आस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क और जोश हेजलवुड भी चोटों के कारण पहला टेस्ट नहीं खेल सकेंगे । ग्रीन के गेंदबाजी नहीं करने पर स्कॉट बोलैंड को मौका मिल सकता है।
|
Highlightsपूरी तरह से फिट हो और ऊंगली की चोट का असर नहीं हो। बॉक्सिंग डे टेस्ट के दौरान उनकी ऊंगली की हड्डी टूट गई थी। ग्रीन के गेंदबाजी नहीं करने पर स्कॉट बोलैंड को मौका मिल सकता है। Border-Gavaskar Trophy दो हज़ार तेईस: महान विकेटकीपर बल्लेबाज एडम गिलक्रिस्ट का मानना है कि आस्ट्रेलिया भारत के खिलाफ बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे पहले टेस्ट में हरफनमौला कैमरन ग्रीन बतौर बल्लेबाज उतर सकते हैं । तेईस वर्ष के ग्रीन दाहिने हाथ की ऊंगली की सर्जरी के बाद अब फिटनेस हासिल करने की राह पर हैं । उन्होंने कहा ," इस टीम को एक दूसरे पर काफी भरोसा है और हर हालत में एक दूसरे का साथ देने को तैयार है । " आस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क और जोश हेजलवुड भी चोटों के कारण पहला टेस्ट नहीं खेल सकेंगे । ग्रीन के गेंदबाजी नहीं करने पर स्कॉट बोलैंड को मौका मिल सकता है।
|
ड्रमस्टिक या सहजन की फली के बारे में तो हम सभी अच्छे से जानते हैं। इसका वानस्पतिक नाम मोरिंग ओलिफेरा है। यह लगभग हर घर में बनती है। खाने में तो इसका स्वाद सबको खूब भाता है, लेनिक क्या आप जानते हैं कि इस फली के स्वास्थ्य के लिए कई लाभ है। सहजन के पौधे में जड से लेकर सहजन के फूल, पत्तियों तक सेहत के गुण भरे हुए हैं। इसके ताजे फूलों का इस्तेमाल हर्बल टॉनिक बनाने में किया जाता है, वही इसकी छाल का प्रयोग गोंद बनाने में किया जाता है।
|
ड्रमस्टिक या सहजन की फली के बारे में तो हम सभी अच्छे से जानते हैं। इसका वानस्पतिक नाम मोरिंग ओलिफेरा है। यह लगभग हर घर में बनती है। खाने में तो इसका स्वाद सबको खूब भाता है, लेनिक क्या आप जानते हैं कि इस फली के स्वास्थ्य के लिए कई लाभ है। सहजन के पौधे में जड से लेकर सहजन के फूल, पत्तियों तक सेहत के गुण भरे हुए हैं। इसके ताजे फूलों का इस्तेमाल हर्बल टॉनिक बनाने में किया जाता है, वही इसकी छाल का प्रयोग गोंद बनाने में किया जाता है।
|
साल 2019 से पहले, जम्मू और कश्मीर में राज्य विषयों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी की प्रतियां प्राप्त करने के लिए हफ्तों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे और आय प्रमाण पत्र या भूमि के कागजात भी देने पड़ते थे।
श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर) : साल 2019 से पहले, जम्मू और कश्मीर में राज्य विषयों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी की प्रतियां प्राप्त करने के लिए हफ्तों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे और आय प्रमाण पत्र या भूमि के कागजात भी देने पड़ते थे।
5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राज्य में कई प्रशासनिक सुधार लाए गए हैं, जिससे आम आदमी को काफी फायदा हुआ है। केंद्र शासित प्रदेश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए, पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी लाई गई है, जिसकी बदौलत 675 सेवाएं ऑनलाइन प्रदान की जा रही हैं।
आय प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र, आरबीए प्रमाण पत्र, अन्य श्रेणियों के प्रमाण पत्र, विकलांगता प्रमाण पत्र अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं। जन्मतिथि एवं मृत्यु प्रमाण पत्र, अधिवास प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, राशन कार्ड बनाने की सुविधा भी ऑनलाइन उपलब्ध है। इसका मतलब यह है कि इन सेवाओं के लिए न तो सरकारी दफ्तरों में जाने की जरूरत है और न ही किसी के चक्कर लगाने की। उन्हें जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन भरने होंगे और घर से ही आवेदन करना होगा।
पहले नौकरियों के लिए फॉर्म दफ्तरों में कतार में लगकर जमा करना पड़ता था, अब इन्हें घर बैठे ऑनलाइन भरा जा सकता है और बैंक खाते से पैसे भी काटे जा सकते हैं। विभिन्न योजनाओं का लाभ भी अब BEAMS प्रणाली के माध्यम से सीधे लाभार्थी के खाते में स्थानांतरित किया जाता है, जिसके लिए पहले लोगों को बैंक के बाहर कतार में खड़ा होना पड़ता था।
आप जमीन आप निसारी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जमीन के बारे में पूरी जानकारी जैसे खसरा नंबर, खाता नंबर, ख्योत नंबर घर बैठे ही जान सकते हैं। निविदा प्रणाली को ऑनलाइन कर दिया गया है जिससे काफी पारदर्शिता आई है। सभी वित्तीय लेनदेन और मामले BEAMS के माध्यम से निपटाए जाते हैं। 2019 से पहले शायद ही कोई G2C सेवाएं ऑनलाइन थीं और अब दो साल से भी कम समय में यह संख्या बढ़कर 675 हो गई है। केंद्र शासित प्रदेश ने पूरी की गई परियोजनाओं की संख्या के मामले में अभूतपूर्व प्रगति की है।
2019 में 35 ऑनलाइन सेवाओं से, यह संख्या अब 675 तक पहुंच गई है। रैपिड असेसमेंट सिस्टम (आरएएस) पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया काफी उत्साहजनक है क्योंकि इसमें से 86 प्रतिशत सकारात्मक है। जनता को उनकी प्रतिक्रिया के लिए लगभग चार मिलियन संदेश भेजे गए हैं और पोर्टल पर अब तक एक करोड़ से अधिक विजिट किए जा चुके हैं जो लोगों के भूमि रिकॉर्ड के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
पुंछ जिले के दूरदराज के सीमावर्ती गांव गुंटरियां शाहपुर के नजीर अहमद नाम के एक स्थानीय व्यक्ति ने मलाप न्यूज नेटवर्क से बात करते हुए कहा, "मनरेगा योजना के तहत काम करने के बाद कई महीनों तक कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ते, वेतन मिलता है राशि सीधे बैंक खाते में आती है। " उन्होंने कहा, "मुझे इंदिरा आवास योजना ग्रामीण के तहत एक घर भी मिला और इसकी किस्त भी सीधे खाते में आई और जब पैसा आता है तो उसके साथ एक मैसेज भी आता है, जिससे वे जब चाहें निकाल सकते हैं। " उन्होंने बताया कि इसके अलावा हर दो महीने बाद किसान योजना के तहत खाते में 2000 रुपए आते हैं।
|
साल दो हज़ार उन्नीस से पहले, जम्मू और कश्मीर में राज्य विषयों को अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति श्रेणी की प्रतियां प्राप्त करने के लिए हफ्तों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे और आय प्रमाण पत्र या भूमि के कागजात भी देने पड़ते थे। श्रीनगर : साल दो हज़ार उन्नीस से पहले, जम्मू और कश्मीर में राज्य विषयों को अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति श्रेणी की प्रतियां प्राप्त करने के लिए हफ्तों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे और आय प्रमाण पत्र या भूमि के कागजात भी देने पड़ते थे। पाँच अगस्त, दो हज़ार उन्नीस को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटाए जाने के बाद राज्य में कई प्रशासनिक सुधार लाए गए हैं, जिससे आम आदमी को काफी फायदा हुआ है। केंद्र शासित प्रदेश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए, पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी लाई गई है, जिसकी बदौलत छः सौ पचहत्तर सेवाएं ऑनलाइन प्रदान की जा रही हैं। आय प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र, आरबीए प्रमाण पत्र, अन्य श्रेणियों के प्रमाण पत्र, विकलांगता प्रमाण पत्र अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं। जन्मतिथि एवं मृत्यु प्रमाण पत्र, अधिवास प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, राशन कार्ड बनाने की सुविधा भी ऑनलाइन उपलब्ध है। इसका मतलब यह है कि इन सेवाओं के लिए न तो सरकारी दफ्तरों में जाने की जरूरत है और न ही किसी के चक्कर लगाने की। उन्हें जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन भरने होंगे और घर से ही आवेदन करना होगा। पहले नौकरियों के लिए फॉर्म दफ्तरों में कतार में लगकर जमा करना पड़ता था, अब इन्हें घर बैठे ऑनलाइन भरा जा सकता है और बैंक खाते से पैसे भी काटे जा सकते हैं। विभिन्न योजनाओं का लाभ भी अब BEAMS प्रणाली के माध्यम से सीधे लाभार्थी के खाते में स्थानांतरित किया जाता है, जिसके लिए पहले लोगों को बैंक के बाहर कतार में खड़ा होना पड़ता था। आप जमीन आप निसारी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जमीन के बारे में पूरी जानकारी जैसे खसरा नंबर, खाता नंबर, ख्योत नंबर घर बैठे ही जान सकते हैं। निविदा प्रणाली को ऑनलाइन कर दिया गया है जिससे काफी पारदर्शिता आई है। सभी वित्तीय लेनदेन और मामले BEAMS के माध्यम से निपटाए जाते हैं। दो हज़ार उन्नीस से पहले शायद ही कोई Gदो डिग्री सेल्सियस सेवाएं ऑनलाइन थीं और अब दो साल से भी कम समय में यह संख्या बढ़कर छः सौ पचहत्तर हो गई है। केंद्र शासित प्रदेश ने पूरी की गई परियोजनाओं की संख्या के मामले में अभूतपूर्व प्रगति की है। दो हज़ार उन्नीस में पैंतीस ऑनलाइन सेवाओं से, यह संख्या अब छः सौ पचहत्तर तक पहुंच गई है। रैपिड असेसमेंट सिस्टम पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया काफी उत्साहजनक है क्योंकि इसमें से छियासी प्रतिशत सकारात्मक है। जनता को उनकी प्रतिक्रिया के लिए लगभग चार मिलियन संदेश भेजे गए हैं और पोर्टल पर अब तक एक करोड़ से अधिक विजिट किए जा चुके हैं जो लोगों के भूमि रिकॉर्ड के बारे में जानकारी प्रदान करता है। पुंछ जिले के दूरदराज के सीमावर्ती गांव गुंटरियां शाहपुर के नजीर अहमद नाम के एक स्थानीय व्यक्ति ने मलाप न्यूज नेटवर्क से बात करते हुए कहा, "मनरेगा योजना के तहत काम करने के बाद कई महीनों तक कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ते, वेतन मिलता है राशि सीधे बैंक खाते में आती है। " उन्होंने कहा, "मुझे इंदिरा आवास योजना ग्रामीण के तहत एक घर भी मिला और इसकी किस्त भी सीधे खाते में आई और जब पैसा आता है तो उसके साथ एक मैसेज भी आता है, जिससे वे जब चाहें निकाल सकते हैं। " उन्होंने बताया कि इसके अलावा हर दो महीने बाद किसान योजना के तहत खाते में दो हज़ार रुपयापए आते हैं।
|
मध्यप्रदेश सरकार ने नर्मदापुरम जिले को 'एक जिला, एक उत्पाद' योजना से जोड़ा है। इसके अंतर्गत जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न गतिविधियां की जा रही हैं। इसी के अंतर्गत जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया।
मप्र के नर्मदापुरम जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन द्वारा विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी कड़ी में नर्मदापुरम शहर में 'एक जिला, एक उत्पाद' योजना के अंतर्गत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'हेरिटेज वॉक' का आयोजन किया गया।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
मध्यप्रदेश सरकार ने नर्मदापुरम जिले को 'एक जिला, एक उत्पाद' योजना से जोड़ा है। इसके अंतर्गत जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न गतिविधियां की जा रही हैं। इसी के अंतर्गत जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया। मप्र के नर्मदापुरम जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन द्वारा विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी कड़ी में नर्मदापुरम शहर में 'एक जिला, एक उत्पाद' योजना के अंतर्गत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'हेरिटेज वॉक' का आयोजन किया गया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
1. हाथ धोकर खाना - जी हां, अक्सर लोग बिना हाथ धोएं ही खाना खा लिया करते थे। लेकिन लॉकडाउन के बाद से यह आदत बन गई।
2. हेल्थ फ्रिकनेस - कोविड-19 के दौरान जिस तरह से मामले बढ़े उससे समझ आ गया था कि अब बहुत जल्दी घर से बाहर नहीं निकलने वाले हैं। ऐसे में घर पर ही फूड आयटम बनाकर खाने लगें।
3. एक्सरसाइज और योग के प्रति बढ़ा रूझान - पहले कुछ भी खाते थे लेकिन लॉकडाउन के दौरान अपनी सेहत को लेकर पहले से काफी सजग हो गए। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक में योग और एक्सरसाइज की आदत डल गई।
4. देर रात तक जागना - जी हां, अक्सर लोगों की आदत रही है। देर रात तकजागने की। लेकिन यह ऐसा वक्त था जब लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी था। और उसमें से एक था सोने की आदत में बदलाव। जी हां, सभी डॉक्टर द्वारा यह समझाया गया कि कम से कम 8 से 9 घंटे सोना जरूरी है।
5 पैसे को पानी की तरह बहाना - अक्सर देखा गया लोग पैसा अधिक होने पर पानी की तरह बहाते हैं। लेकिन इस वजह से यह समझ आ गया कि जरूरत के मुाताबिक पैसों को खर्च करना चाहिए और साथ ही सेविंग करना भी जरूरी है।
6. स्मोकिंग और डिंकिंग की आदत - लॉकडाउन के वक्त पर सभी को अपने परिवार के साथ रहना था। कोई विकल्प भी नहीं था कि घर से बाहर जा सकें। ऐसे कई लोगांे की स्मोकिंग और डिकिंग की आदत पर काफी असर पड़ा। इससे उनके फेफड़ों में भी सुधार देखा गया।
7. वर्क मैनेजमेंट - अक्सर यह शिकायत रहती थी कि अपने काम और परिवार को कैसे समय दें। उन दोनों के बीच कैसे तालमेल बिठाएं। ऐसे में कई लोगों से जब जाना तो कहा वक्त पर अपना काम करने बैठें और वक्त तक उसे खत्म कर दें।
8. इम्यून सिस्टम के बारे में जाना - शायद ही कोई जानता होगा कि इम्युन सिस्टम क्या होता है। लेकिन वह अगर कमजोर हो जाए तो आप जल्दी किसी भी बीमारी की चपेट में आ सकते हो।
9. मोबाइल से दूरी - जी हां, लॉकडाउन में मोबाइल का प्रयोग धड़ल्ले से किया गया। लेकिन जिन्होंने वक्त का फायदा उठाया उन्होंने अपना अधिक से अधिक समय किसी न किसी कार्य को सीखने में बिताया।
10. टाइम पास नहीं करें - जी हां, वक्त बहुत किमती होता है और यह लॉकडाउन में जरूर सीखा है। जिन्होंने टाइम पास किया उनके लॉकडाउन बहुत भारी नजर आ रहा था। लेकिन जिन्होंने समय का सद्ोपयोग किया उन्हें ये वक्त भी कम पड़ रहा था।
|
एक. हाथ धोकर खाना - जी हां, अक्सर लोग बिना हाथ धोएं ही खाना खा लिया करते थे। लेकिन लॉकडाउन के बाद से यह आदत बन गई। दो. हेल्थ फ्रिकनेस - कोविड-उन्नीस के दौरान जिस तरह से मामले बढ़े उससे समझ आ गया था कि अब बहुत जल्दी घर से बाहर नहीं निकलने वाले हैं। ऐसे में घर पर ही फूड आयटम बनाकर खाने लगें। तीन. एक्सरसाइज और योग के प्रति बढ़ा रूझान - पहले कुछ भी खाते थे लेकिन लॉकडाउन के दौरान अपनी सेहत को लेकर पहले से काफी सजग हो गए। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक में योग और एक्सरसाइज की आदत डल गई। चार. देर रात तक जागना - जी हां, अक्सर लोगों की आदत रही है। देर रात तकजागने की। लेकिन यह ऐसा वक्त था जब लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी था। और उसमें से एक था सोने की आदत में बदलाव। जी हां, सभी डॉक्टर द्वारा यह समझाया गया कि कम से कम आठ से नौ घंटाटे सोना जरूरी है। पाँच पैसे को पानी की तरह बहाना - अक्सर देखा गया लोग पैसा अधिक होने पर पानी की तरह बहाते हैं। लेकिन इस वजह से यह समझ आ गया कि जरूरत के मुाताबिक पैसों को खर्च करना चाहिए और साथ ही सेविंग करना भी जरूरी है। छः. स्मोकिंग और डिंकिंग की आदत - लॉकडाउन के वक्त पर सभी को अपने परिवार के साथ रहना था। कोई विकल्प भी नहीं था कि घर से बाहर जा सकें। ऐसे कई लोगांे की स्मोकिंग और डिकिंग की आदत पर काफी असर पड़ा। इससे उनके फेफड़ों में भी सुधार देखा गया। सात. वर्क मैनेजमेंट - अक्सर यह शिकायत रहती थी कि अपने काम और परिवार को कैसे समय दें। उन दोनों के बीच कैसे तालमेल बिठाएं। ऐसे में कई लोगों से जब जाना तो कहा वक्त पर अपना काम करने बैठें और वक्त तक उसे खत्म कर दें। आठ. इम्यून सिस्टम के बारे में जाना - शायद ही कोई जानता होगा कि इम्युन सिस्टम क्या होता है। लेकिन वह अगर कमजोर हो जाए तो आप जल्दी किसी भी बीमारी की चपेट में आ सकते हो। नौ. मोबाइल से दूरी - जी हां, लॉकडाउन में मोबाइल का प्रयोग धड़ल्ले से किया गया। लेकिन जिन्होंने वक्त का फायदा उठाया उन्होंने अपना अधिक से अधिक समय किसी न किसी कार्य को सीखने में बिताया। दस. टाइम पास नहीं करें - जी हां, वक्त बहुत किमती होता है और यह लॉकडाउन में जरूर सीखा है। जिन्होंने टाइम पास किया उनके लॉकडाउन बहुत भारी नजर आ रहा था। लेकिन जिन्होंने समय का सद्ोपयोग किया उन्हें ये वक्त भी कम पड़ रहा था।
|
वृश्चिक- वृश्चिक राशि वालों के लिए यह माह सामान्य रहेगा. व्यापार-कृषि सामान्य लाभ देंगे एवं नौकरी में अधिकारी नाराज हो सकते है. स्त्री पक्ष कमजोर होगा, शारीरिक एवं आर्थिक परेशानी रहेगी, किसी मित्र से सहयोग प्राप्त होगा. . . दिनांक 3,19 शुभ है, 17 अशुभ है. ॐ नमः शिवाय के जाप लाभदायक रहेंगे.
|
वृश्चिक- वृश्चिक राशि वालों के लिए यह माह सामान्य रहेगा. व्यापार-कृषि सामान्य लाभ देंगे एवं नौकरी में अधिकारी नाराज हो सकते है. स्त्री पक्ष कमजोर होगा, शारीरिक एवं आर्थिक परेशानी रहेगी, किसी मित्र से सहयोग प्राप्त होगा. . . दिनांक तीन,उन्नीस शुभ है, सत्रह अशुभ है. ॐ नमः शिवाय के जाप लाभदायक रहेंगे.
|
(एजेंसी)। भारत की महिला पहलवान साक्षी मलिक और संदीप तोमर यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग की ताजा जारी रैंकिंग में शीर्ष 10 खिलाड़ियों में शामिल किये गये हैं। रियो ओलिंपिक में महिलाओं के 58 किलो वर्ग में कांस्य पदक विजेता साक्षी इस रैंकिंग में 5वें स्थान पर हैं जबकि पुरुषों के 57 किग्रा वर्ग में संदीप तोमर को 7 वां स्थान मिला है। संदीप रियो में भाग लेने वाले सात भारतीय पहलवानों के दल में शामिल थे।
इस सूची में प्रो कुश्ती लीग (पीडब्ल्यूएल) में भाग लेने वाले कुल देसी-विदेशी 25 खिलाड़ी अलग-अलग वजन वर्गों में शीर्ष 10 में रहे। इनमें 11 पुरुष और 13 महिलाएं शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा 8 खिलाड़ी हरियाणा हैमर्स से हैं। पीडब्ल्यूएल के तीन खिलाड़ी अपने-अपने वजन में शीर्ष रैंकिंग पर हैं जिनमें ओलिंपिक और विश्व चैंपियन जॉर्जिया के व्लादीमिर खिनचेंगाशिवली 57 किग्रा में, विश्व चैंपियन रूस के मैगमोद कुर्बानालिऊ 70 किग्रा में और ओलिंपिक चैंपियन कनाडा की एरिका वीब महिलाओं के 75 किग्रा वर्ग में शामिल हैं।
|
। भारत की महिला पहलवान साक्षी मलिक और संदीप तोमर यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग की ताजा जारी रैंकिंग में शीर्ष दस खिलाड़ियों में शामिल किये गये हैं। रियो ओलिंपिक में महिलाओं के अट्ठावन किलो वर्ग में कांस्य पदक विजेता साक्षी इस रैंकिंग में पाँचवें स्थान पर हैं जबकि पुरुषों के सत्तावन किग्रा वर्ग में संदीप तोमर को सात वां स्थान मिला है। संदीप रियो में भाग लेने वाले सात भारतीय पहलवानों के दल में शामिल थे। इस सूची में प्रो कुश्ती लीग में भाग लेने वाले कुल देसी-विदेशी पच्चीस खिलाड़ी अलग-अलग वजन वर्गों में शीर्ष दस में रहे। इनमें ग्यारह पुरुष और तेरह महिलाएं शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा आठ खिलाड़ी हरियाणा हैमर्स से हैं। पीडब्ल्यूएल के तीन खिलाड़ी अपने-अपने वजन में शीर्ष रैंकिंग पर हैं जिनमें ओलिंपिक और विश्व चैंपियन जॉर्जिया के व्लादीमिर खिनचेंगाशिवली सत्तावन किग्रा में, विश्व चैंपियन रूस के मैगमोद कुर्बानालिऊ सत्तर किग्रा में और ओलिंपिक चैंपियन कनाडा की एरिका वीब महिलाओं के पचहत्तर किग्रा वर्ग में शामिल हैं।
|
राजस्थान के बाड़मेर में राष्ट्रीय राजमार्ग 925ए पर हाल ही में एक हवाई पट्टी का उद्घाटन किया गया है। देश की सामरिक आवश्यकताओं के हिसाब से यह नया प्रयोग रणनीतिक क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि देशभर में ऐसी लगभग 20 हवाई पट्टियां और बनाई जाएंगी।
चीन और पाकिस्तान की रणनीतिक चालों में बदलाव के कारण भारत की सामरिक तैयारी यही है कि युद्ध की स्थिति में वह दोनों मोर्चो पर निपट सके। इसके लिए वायु सेना उन हाईवे को रनवे के रूप में आजमा रही है जो युद्ध की स्थिति में काम आ सकें।
राष्ट्रीय राजमार्ग 925ए पर भारतीय वायु सेना के विमानों के लिए बनाया गया यह पहला इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड (ईएलएफ) है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने यहां पर कई विमानों के संचालन को देखा। उनके सामने सुखोई-30 एमकेआइ लड़ाकू विमान, सैन्य परिवहन विमान एएन-32 और एमआइ-17वी हेलीकाप्टर ने इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड पर आपातकालीन लैंडिंग की। यह ईएलएफ करीब तीन किमी लंबी है। आपात स्थिति में इसका उपयोग भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों को उतारने और टेक आफ करने के लिए किया जाएगा। इस राष्ट्रीय राजमार्ग के समानांतर ही तीन किमी लंबी एयरस्टिप तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य यह है कि यदि युद्ध के समय शत्रु हमारे एयरबेस पर हमला करता है अथवा आक्रमण करके उसे नष्ट कर देता है तो उस दौरान इस इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड का प्रयोग किया जा सकता है।
विदित हो कि यहां से पाकिस्तान की सीमा मात्र 40 किमी दूर है। ऐसे में किसी युद्ध के समय यहां से बड़े-बड़े अभियान संचालित किए जा सकेंगे। अभी तक हमारे पास पाक सीमा के नजदीक ऐसी कोई एयरस्टिप नहीं थी। अब इसके हो जाने से हमारी आक्रामक क्षमता बढ़ गई है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने भारतीय वायु सेना के लिए किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति में विमानों को उतारने के लिए इस इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड का निर्माण किया है। दरअसल बाड़मेर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग के समानांतर जिस एयरस्टिप का निर्माण किया गया है उसे एक छोटा सा एयरफोर्स स्टेशन भी समझा जा सकता है। इस एयरस्टिप की खास बात यह है कि इसके दोनों तरफ पार्किंग स्थल भी तैयार किए गए हैं ताकि लैंडिंग के बाद लड़ाकू विमानों को पार्क किया जा सके। यहां पर एक एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर का निर्माण भी किया गया है। इस एयरस्टिप के दोनों छोर पर आपात स्थिति में प्रयोग के लिए गेट की भी व्यवस्था की गई है। एयरस्टिप के बगल में साढ़े तीन किमी लंबी और सात मीटर चौड़ी सर्विस लेन भी बनाई गई है जो आपात स्थिति में विषेश भूमिका अदा करेगी। इस परियोजना में आपातकालीन लैंडिंग पट्टी के अलावा आसपास के गांवों में सेना की जरूरतों के हिसाब से तीन हेलीपैड का निर्माण भी किया गया है। यह कार्य देश की पश्चिमी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सेना और सुरक्षा नेटवर्क के लिए मजबूती का आधार होगा।
दूसरी ओर कश्मीर दशकों से बेहद संवेदनशील रहा है। भौगोलिक रूप से भी इसके एक ओर पाकिस्तान तो दूसरी ओर चीन है। ऐसे में इसकी सामरिक महत्ता भी अत्यधिक है। लिहाजा दक्षिण कश्मीर के श्रीनगर-जम्मू हाईवे-44 पर भी आपातकालीन परिस्थितियों में लड़ाकू विमानों के उतारने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसके लिए 3500 मीटर लंबी हवाई पट्टी का निर्माण किया जा रहा है। यह हवाई पट्टी बिजबिहाड़ा में बन रही है।
देखा जाए तो राष्ट्रीय राजमार्ग पर रनवे सबसे पहले द्वितीय विश्व युद्ध के समय जर्मनी में बनाया गया था। इसके बाद उत्तरी कोरिया, ताइवान, स्वीडन, फिनलैंड, स्विटजरलैंड, पोलैंड एवं चेकोस्लोवाकिया में बनाए गए। स्वीडन में पहला रनवे वर्ष 1949 में शुरू हो गया था। वर्ष 1967 में मिस्र के साथ युद्ध में जिस तरह इसका इस्तेमाल हुआ उससे इस व्यवस्था को और बढ़ावा मिला। संप्रति स्वीडन में घने जंगलों के बीच भी आपातकाल के दौरान विमानों की लैंडिंग और उड़ान भरने की व्यवस्था है। वहां पर लैंड होने वाले हेलीकाप्टरों के रखरखाव की भी सुविधा है। पोलैंड ने अपने यहां वर्ष 2003 में हाईवे स्टिप तैयार की थी। इस पर कई विमानों की लैंडिंग कराई जा सकती है। आस्ट्रेलिया में हाईवे के कई हिस्सों को रनवे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
दक्षिण कोरिया में भी हाईवे पर रनवे बनाए जा चुके हैं। यहां की सेना कई मौकों पर इनका इस्तेमाल भी कर चुकी है। अमेरिका और अन्य देशों के साथ युद्धाभ्यास के दौरान नियमित रूप से इनका इस्तेमाल किया जाता है। पाकिस्तान में भी दो हाईवे एयरस्टिप हैं जिनमें पहला पेशावर इस्लामाबाद हाईवे पर है और दूसरा लाहौर इस्लामाबाद हाईवे पर है। सैन्य इस्तेमाल में लाए जाने के उद्देश्य से पाकिस्तान ने इन दोनों हाईवे के दो-दो हिस्सों को इमरजेंसी रनवे घोषित कर रखा है जिससे वे युद्ध के समय काम आ सकें। इन रनवे का परीक्षण वर्ष 2010 में ही पाकिस्तान कर चुका है।
अब भारत भी इस श्रेणी में आ गया है। वायु सेना पाकिस्तान की सीमा से लगे राज्य गुजरात, राजस्थान और पंजाब के आठ हाईवे को रनवे लायक बनाना चाहती है। वायु सेना चाहती है कि इन सड़कों का हिस्सा बिल्कुल सपाट हो। उस पर कोई ढलान न हो और मोटाई सड़क के बाकी हिस्सों से ज्यादा हो। ऐसी सड़कों के दोनों किनारों पर बिजली के खंभे अथवा मोबाइल टावर आदि नहीं होने चाहिए तथा सड़क के डिवाइडर ऐसे हों कि उन्हें सरलता से शीघ्र हटाया जा सके। इसके अलावा सड़क के दोनों किनारों पर इतनी जगह होनी चाहिए कि वहां प्लेन को गाइड करने के लिए पोर्टेबल लाइटिंग सिस्टम लगाए जा सकें। अगर इस तरह से राजमार्गो का विकास हुआ तो इससे भारतीय वायु सेना की मारक क्षमता बढ़ने के साथ साथ युद्ध के समय गोला-बारूद एवं अन्य जरूरी हथियार पहुंचाने में भी आसानी होगी। स्पष्ट है कि इस तरह के रनवे बनने से भारतीय वायु सेना चीन और पाकिस्तान को युद्ध के समय मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम होगी।
|
राजस्थान के बाड़मेर में राष्ट्रीय राजमार्ग नौ सौ पच्चीसए पर हाल ही में एक हवाई पट्टी का उद्घाटन किया गया है। देश की सामरिक आवश्यकताओं के हिसाब से यह नया प्रयोग रणनीतिक क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि देशभर में ऐसी लगभग बीस हवाई पट्टियां और बनाई जाएंगी। चीन और पाकिस्तान की रणनीतिक चालों में बदलाव के कारण भारत की सामरिक तैयारी यही है कि युद्ध की स्थिति में वह दोनों मोर्चो पर निपट सके। इसके लिए वायु सेना उन हाईवे को रनवे के रूप में आजमा रही है जो युद्ध की स्थिति में काम आ सकें। राष्ट्रीय राजमार्ग नौ सौ पच्चीसए पर भारतीय वायु सेना के विमानों के लिए बनाया गया यह पहला इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने यहां पर कई विमानों के संचालन को देखा। उनके सामने सुखोई-तीस एमकेआइ लड़ाकू विमान, सैन्य परिवहन विमान एएन-बत्तीस और एमआइ-सत्रहवी हेलीकाप्टर ने इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड पर आपातकालीन लैंडिंग की। यह ईएलएफ करीब तीन किमी लंबी है। आपात स्थिति में इसका उपयोग भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों को उतारने और टेक आफ करने के लिए किया जाएगा। इस राष्ट्रीय राजमार्ग के समानांतर ही तीन किमी लंबी एयरस्टिप तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य यह है कि यदि युद्ध के समय शत्रु हमारे एयरबेस पर हमला करता है अथवा आक्रमण करके उसे नष्ट कर देता है तो उस दौरान इस इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड का प्रयोग किया जा सकता है। विदित हो कि यहां से पाकिस्तान की सीमा मात्र चालीस किमी दूर है। ऐसे में किसी युद्ध के समय यहां से बड़े-बड़े अभियान संचालित किए जा सकेंगे। अभी तक हमारे पास पाक सीमा के नजदीक ऐसी कोई एयरस्टिप नहीं थी। अब इसके हो जाने से हमारी आक्रामक क्षमता बढ़ गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने भारतीय वायु सेना के लिए किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति में विमानों को उतारने के लिए इस इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड का निर्माण किया है। दरअसल बाड़मेर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग के समानांतर जिस एयरस्टिप का निर्माण किया गया है उसे एक छोटा सा एयरफोर्स स्टेशन भी समझा जा सकता है। इस एयरस्टिप की खास बात यह है कि इसके दोनों तरफ पार्किंग स्थल भी तैयार किए गए हैं ताकि लैंडिंग के बाद लड़ाकू विमानों को पार्क किया जा सके। यहां पर एक एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर का निर्माण भी किया गया है। इस एयरस्टिप के दोनों छोर पर आपात स्थिति में प्रयोग के लिए गेट की भी व्यवस्था की गई है। एयरस्टिप के बगल में साढ़े तीन किमी लंबी और सात मीटर चौड़ी सर्विस लेन भी बनाई गई है जो आपात स्थिति में विषेश भूमिका अदा करेगी। इस परियोजना में आपातकालीन लैंडिंग पट्टी के अलावा आसपास के गांवों में सेना की जरूरतों के हिसाब से तीन हेलीपैड का निर्माण भी किया गया है। यह कार्य देश की पश्चिमी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सेना और सुरक्षा नेटवर्क के लिए मजबूती का आधार होगा। दूसरी ओर कश्मीर दशकों से बेहद संवेदनशील रहा है। भौगोलिक रूप से भी इसके एक ओर पाकिस्तान तो दूसरी ओर चीन है। ऐसे में इसकी सामरिक महत्ता भी अत्यधिक है। लिहाजा दक्षिण कश्मीर के श्रीनगर-जम्मू हाईवे-चौंतालीस पर भी आपातकालीन परिस्थितियों में लड़ाकू विमानों के उतारने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसके लिए तीन हज़ार पाँच सौ मीटर लंबी हवाई पट्टी का निर्माण किया जा रहा है। यह हवाई पट्टी बिजबिहाड़ा में बन रही है। देखा जाए तो राष्ट्रीय राजमार्ग पर रनवे सबसे पहले द्वितीय विश्व युद्ध के समय जर्मनी में बनाया गया था। इसके बाद उत्तरी कोरिया, ताइवान, स्वीडन, फिनलैंड, स्विटजरलैंड, पोलैंड एवं चेकोस्लोवाकिया में बनाए गए। स्वीडन में पहला रनवे वर्ष एक हज़ार नौ सौ उनचास में शुरू हो गया था। वर्ष एक हज़ार नौ सौ सरसठ में मिस्र के साथ युद्ध में जिस तरह इसका इस्तेमाल हुआ उससे इस व्यवस्था को और बढ़ावा मिला। संप्रति स्वीडन में घने जंगलों के बीच भी आपातकाल के दौरान विमानों की लैंडिंग और उड़ान भरने की व्यवस्था है। वहां पर लैंड होने वाले हेलीकाप्टरों के रखरखाव की भी सुविधा है। पोलैंड ने अपने यहां वर्ष दो हज़ार तीन में हाईवे स्टिप तैयार की थी। इस पर कई विमानों की लैंडिंग कराई जा सकती है। आस्ट्रेलिया में हाईवे के कई हिस्सों को रनवे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। दक्षिण कोरिया में भी हाईवे पर रनवे बनाए जा चुके हैं। यहां की सेना कई मौकों पर इनका इस्तेमाल भी कर चुकी है। अमेरिका और अन्य देशों के साथ युद्धाभ्यास के दौरान नियमित रूप से इनका इस्तेमाल किया जाता है। पाकिस्तान में भी दो हाईवे एयरस्टिप हैं जिनमें पहला पेशावर इस्लामाबाद हाईवे पर है और दूसरा लाहौर इस्लामाबाद हाईवे पर है। सैन्य इस्तेमाल में लाए जाने के उद्देश्य से पाकिस्तान ने इन दोनों हाईवे के दो-दो हिस्सों को इमरजेंसी रनवे घोषित कर रखा है जिससे वे युद्ध के समय काम आ सकें। इन रनवे का परीक्षण वर्ष दो हज़ार दस में ही पाकिस्तान कर चुका है। अब भारत भी इस श्रेणी में आ गया है। वायु सेना पाकिस्तान की सीमा से लगे राज्य गुजरात, राजस्थान और पंजाब के आठ हाईवे को रनवे लायक बनाना चाहती है। वायु सेना चाहती है कि इन सड़कों का हिस्सा बिल्कुल सपाट हो। उस पर कोई ढलान न हो और मोटाई सड़क के बाकी हिस्सों से ज्यादा हो। ऐसी सड़कों के दोनों किनारों पर बिजली के खंभे अथवा मोबाइल टावर आदि नहीं होने चाहिए तथा सड़क के डिवाइडर ऐसे हों कि उन्हें सरलता से शीघ्र हटाया जा सके। इसके अलावा सड़क के दोनों किनारों पर इतनी जगह होनी चाहिए कि वहां प्लेन को गाइड करने के लिए पोर्टेबल लाइटिंग सिस्टम लगाए जा सकें। अगर इस तरह से राजमार्गो का विकास हुआ तो इससे भारतीय वायु सेना की मारक क्षमता बढ़ने के साथ साथ युद्ध के समय गोला-बारूद एवं अन्य जरूरी हथियार पहुंचाने में भी आसानी होगी। स्पष्ट है कि इस तरह के रनवे बनने से भारतीय वायु सेना चीन और पाकिस्तान को युद्ध के समय मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम होगी।
|
जब किसी भी छुट्टी के लिए तैयारी कर रहा है,गृहिणी मांस के व्यंजन और ऐपेटाइज़र के साथ तालिका को अधिकतम रूप से सेट करने का प्रयास करते हैं। यह कुछ हद तक गलत दृष्टिकोण है। बेशक, मांस खाने वालों के बहुत सारे हैं, बहुत से मेहमान केवल इतना सम्मानित होंगे कि वे इतने सम्मानित सामग्री से तैयार किए गए व्यंजनों की इतनी प्रचुर मात्रा में हैं। हालांकि, उन लोगों में से हमेशा हमेशा आमंत्रित होते हैं जो मांस नहीं खाते हैं। या जो कम से कम इसे जितना संभव हो उतना खाने की कोशिश करते हैं। अंत में, वे आपके दावत की सराहना करने की संभावना नहीं है। इसके अलावा, इससे मांस और उत्पाद - आज काफी महंगा है, ताकि इस दृष्टिकोण के साथ उत्सव निश्चित रूप से एक प्रभावशाली राशि का परिणाम देगा। मुझे क्या करना चाहिए सभी मेहमानों को कैसे खुश करें और अभी भी खुद को गांठ में नहीं छोड़ा जाए? आय मूल सब्जी स्नैक्स से आएगी। उत्सव की मेज पर, खाना पकाने की प्रक्रिया के लिए एक रचनात्मक दृष्टिकोण के अधीन, ऐसे व्यंजन वितरित करने के लिए बिल्कुल शर्मिंदा नहीं होंगे। इसके अलावा, कई सब्जी स्नैक्स, जिनकी व्यंजन कभी-कभी अपनी मौलिकता से आश्चर्यचकित होती हैं, वे अपने मांस "भाइयों" को ग्रहण करने में काफी सक्षम हैं। और उत्सव की मेज की असली सजावट बनने के लिए।
इस तरह के व्यंजन तैयार करने के तरीके पर, हमचलो आगे बात करते हैं। हम आपको बहुत सारी रोचक व्यंजन पेश करेंगे, और आप अपने लिए सर्वश्रेष्ठ चुनने में सक्षम होंगे। उन पर पकाए जाने वाले सब्जी स्नैक्स, निश्चित रूप से आपके मेहमानों और रिश्तेदारों की आश्चर्य और प्रशंसा करेंगे।
प्रत्येक नुस्खा का वर्णन करने से पहले,मैं कुछ शब्दों को अलग-अलग शब्दों के रूप में कहना चाहूंगा। जैसा कि आप समझते हैं, किसी भी स्नैक्स - सब्जी या मांस, महत्वपूर्ण नहीं हैं, मेहमानों को संतुष्ट करने के लिए उन्हें जरूरी नहीं है। उन्हें भूख को थोड़ा सा मफल करने और मेज को सजाने के लिए बुलाया जाता है। और, खाली स्थान को जितना संभव हो सके कब्जा करने के लिए, छिपाने का पाप क्या है। बेशक, नमकीन खीरे और सैंडविच यह कर सकते हैं, हालांकि, आप सहमत होंगे, जब टेबल सुरुचिपूर्ण दिखता है तो यह अधिक सुखद होता है। और उस पर खड़े व्यंजन मेहमानों को खुश करें। और न केवल उपस्थिति, बल्कि उत्तम स्वाद। इस पर आधारित, और आपको खाना बनाना है। आखिरकार, जो भी आप कहते हैं, सब्जी सब्जी है। इसलिए, हमें इसे यथासंभव लाभदायक देने की कोशिश करनी चाहिए।
इस पर, शायद, सैद्धांतिक भाग को बंद करने का समय है। चलो अभ्यास करने के लिए आगे बढ़ें। हम आपको सबसे अच्छा उत्सव सब्जी स्नैक्स पेश करते हैं।
बैंगन सर्कल काट लें, थोड़ा छिड़केयह, फिर दोनों तरफ अच्छी तरह से तलना। महत्वपूर्णः एक प्लेट में नहीं फ्राइंग पैन से फैला है, लेकिन अतिरिक्त वसा से छुटकारा पाने के लिए एक पेपर तौलिया पर। मेयोनेज़ के दो चम्मच और बारीक कटा हुआ लहसुन के लौंग की एक जोड़ी मिलाएं। यदि आपको यह मसाला पसंद है तो आप थोड़ा डिल जोड़ सकते हैं। तला हुआ टुकड़ों के साथ सॉस छिड़कना। टमाटर, जिसका आकार नीले रंग के व्यास के बराबर होना चाहिए, सर्कल में काटा जाना चाहिए, उन्हें बैंगन के प्रत्येक टुकड़े पर रखें, जो हार्ड पनीर के उदार छिड़काव के साथ शीर्ष पर रखें। वैसे, अगर बैंगन के साथ गड़बड़ करने का कोई समय नहीं है, तो आप उनके बिना कर सकते हैं। टमाटर स्लाइस के साथ सभी पिछले जोड़ों को दोहराया जाना चाहिए।
हम एक मोर की पूंछ बनाते हैं!
उसी तरह दो बैंगन तैयार करेंयह ऊपर वर्णित है। टमाटर और दो ककड़ी के स्लाइस काट लें। पनीर में से एक सौ ग्राम रगड़ें, मेयोनेज़ और बारीक कटा हुआ लहसुन के साथ मिला। एक डिश पर बैंगन प्रसार, और हम उन्हें एक मोर की पूंछ के आकार देने के लिए कोशिश करनी चाहिए। प्रत्येक टुकड़ा के शीर्ष sinenkie टमाटर, पनीर और मेयोनेज़ के एक मिश्रण के साथ कोट स्टैक्स, तो ककड़ी, जो आधा जैतून सजाने डाल दिया। महत्वपूर्णः इस नाश्ते में कम से कम एक घंटे की सेवा फ्रिज में खड़े होने के लिए पहले किया जाना चाहिए।
बिल्कुल एक जीत-जीत विकल्प। इस तरह के ट्यूलिप टेबल पर सभी स्नैक्स ग्रहण कर सकते हैं - सब्जी या मांस। उपस्थिति में बस एक आलीशान, एक पकवान जो एक सभ्य स्वाद भी है।
नौ लंबे लम्बे टमाटर ले लो। आदर्श रूप से, ब्रांड "महिला उंगलियों" सूट होगा। कुछ सेंटीमीटर, क्रॉस-वार के लिए, अंत तक पहुंचने से पहले थोड़ा साफ कर दें। बेस को हटा दें, आधार पर एक छोटा छेद काट लें, बस डालें, डंठल से छुटकारा पाएं। 200 पनीर के ग्राम लें, इसे एक grater पर grate, बारीक कटा हुआ लहसुन और मोटी मेयोनेज़ के कुछ चम्मच के साथ मिश्रण। घने प्याज पंखों से "फूलों" के सिर भरें, एक गुलदस्ता के रूप में खूबसूरती से, कट छेद में डालें), एक सफेद पकवान पर व्यवस्थित करें।
पनीर के चार सौ ग्राम, हिरण का एक गुच्छा और एक छोटा साएक ब्लेंडर में लहसुन सिर काट लें। मिश्रण में मेयोनेज़ जोड़ें। इसे थोड़ा, इतना जोड़ना जरूरी होगा कि उत्पादन पर एक घना द्रव्यमान होगा। विभिन्न रंगों में कुछ बल्गेरियाई काली मिर्च ले लो। आप दो कर सकते हैं, और यदि आपको लगता है, तो यह बेहतर और तीन रंगों में है। काली मिर्च की पूंछ काट लें, बीज और सेप्टा प्राप्त करें, काफी मोटी छल्ले में काट लें। फिर मिश्रण के साथ प्रत्येक सामान। अगर वांछित है, तो आप उबले अंडे की सर्कल के साथ शीर्ष को सजाने के लिए कर सकते हैं।
इस पकवान को तैयार करने के लिए आपको इसकी आवश्यकता होगीछोटे युवा उबचिनी। हमने उन्हें आधे में काट दिया, फिर थोड़ा नीचे काट दिया ताकि आपकी "नाव" प्लेट पर अधिक आत्मविश्वास हो। हम एक चम्मच के साथ पूरे लुगदी बाहर ले जाते हैं। हमने छोटे प्याज, लाल बल्गेरियाई मिर्च के टुकड़े, फ्राई, थोड़ी देर के बाद उबचिनी के गूदे को काट दिया। नमक, काली मिर्च के साथ सीजन। हम शुरू करते हैं Grated पनीर के साथ छिड़काव के साथ शीर्ष और माइक्रोवेव में दस मिनट के लिए भेजा।
वैसे, उबचिनी के बजाय आप बैंगन ले सकते हैं। खुद को भरने के लिए, सामग्री की संरचना अलग-अलग हो सकती है। इसके अलावा, यह लहसुन-मेयोनेज़ सॉस के साथ इस तरह के एक स्नैक्स की सेवा करने की सिफारिश की जाती है, जो उपर्युक्त व्यंजनों से स्पष्ट है, पूरी तरह से सब्जियों के साथ संयुक्त है।
Zucchini आम तौर पर हाथों में आभारी सामग्रीकुशल मालकिन। इनमें से, आप बहुत सारे उत्कृष्ट स्नैक्स पका सकते हैं। चलिए अब मूल रोल बनाने की कोशिश करते हैं। पिघला हुआ पनीर के सौ ग्राम से, लहसुन और मेयोनेज़ के कुछ लौंग, हम पहले से ही सामान्य द्रव्यमान कर रहे हैं। स्क्वैश और रसीला खीरे पतली प्लेटों के साथ कटौती कर रहे हैं। फिर उन्हें फ्राइये, नैपकिन पर फैलाएं, जब तक तेल अवशोषित न हो जाए तब तक प्रतीक्षा करें। हम एक प्लेट पर बाहर निकलते हैं, हमारे पास शीर्ष पर एक ककड़ी परत है। एक तरफ हम पनीर द्रव्यमान फैलते हैं, इसमें टमाटर का टुकड़ा जोड़ते हैं, इसे रोल में बदल देते हैं।
वैसे, इस तथ्य के बावजूद कि हमने दोनों नावों और रोलों को पकाने के दौरान तापमान प्रभाव का उपयोग किया, यह सब ठंडा सब्जी स्नैक्स है। मेज पर वे ठंडा करने के बाद ही परोसा जाता है।
एक उत्सव भोजन के लिए तैयारी, यह आवश्यक नहीं हैपिटा ब्रेड में पकाया जाता है, हमारी मालकिन रोल द्वारा भूल जाते हैं और बहुत प्यारे। आप उन्हें सब्जियों समेत विभिन्न fillers के साथ शुरू कर सकते हैं। कई विकल्प हो सकते हैं, शायद हर मकान मालिक के पास एक विशेष नुस्खा है। उदाहरण के लिए, हम आपको हमारी पेशकश करेंगे - आपको बताएंगे कि कैसे कोरियाई गाजर के साथ एक बहुत ही सरल, लेकिन असाधारण रूप से सुंदर रोल तैयार करना है।
आयताकार पिटा ब्रेड की चादर लें और इसे याद करें।इसके मेयोनेज़ शीर्ष पर एक और परत रखो। किसी भी grated पनीर के साथ भरपूर मात्रा में डालो। कोरियाई गाजर की एक परत के साथ शीर्ष। फिर बारीक कटा हुआ जड़ी बूटी के साथ छिड़कना। एक शीट के साथ सबकुछ बंद करें। उपर्युक्त सभी प्रक्रियाओं को दोहराएं। तंग मोड़ें (लंबाई के साथ, चौड़ाई नहीं!) सभी रोल में और रेफ्रिजरेटर को भेजें। कुछ घंटों के बाद, सॉसेज टुकड़ों में काटा जा सकता है, अच्छी तरह से एक प्लेट पर रखा और मेज पर सेवा की।
जब सब्जियां तैयार की जाती हैं, तो यह इसके लायक नहीं हैसलाद के रूप में उनमें से इस तरह की विविधता खोने के लिए। बेशक, खीरे और टमाटर का एक साधारण मिश्रण किसी को भी आश्चर्य नहीं करेगा, लेकिन कई अन्य, अधिक आकर्षक व्यंजन हैं।
तैयारी और संरचना में सरल, यहसलाद फिर भी चमकदार और हंसमुख उपस्थिति के साथ खुश होगा। गोभी के गोभी लो और इसे काट लें, और जितना संभव हो उतना पतला। एक सलाद कटोरे में मोड़ो, थोड़ा नमक और थोड़ा दबाना जोड़ें। फिर डिब्बाबंद मकई और बारीक कटा हुआ प्याज जोड़ें। मकई के एक कण से रस जरूरी है सूखा जाना चाहिए! एक मोटी मिठाई मेयोनेज़ के साथ सब कुछ भरें और कटा हुआ अंडे कटा हुआ स्लाइस के साथ सजाने के लिए।
लाल सेम (300 ग्राम), रातोंरात सोखें, औरतो कुल्ला और एक घंटे के लिए उबाल। लंबे समय तक हो सकता है, यह विभिन्न प्रकार पर निर्भर करता है। मुख्य बात - पल को याद नहीं है जब यह अलग गिर शुरू होता है। सिद्धांत रूप में, आप ले और डिब्बाबंद जार कर सकते हैं। अपने पसंदीदा साग और मूली के पांच टुकड़े बल्ब (अनिवार्य लाल!), तीन डंठल seldreya, किरणः तो फिर, ठंडा होने के बाद, सेम एक सलाद कटोरा में बदलाव के लिए तैयार करने के लिए, जोड़ने के लिए यह कटा हुआ। भरने नींबू मेयोनेज़ के रूप में पूरी तरह से फिट।
सब्जी के स्नैक्स - व्यंजन जिन्हें पकाया जा सकता हैनुस्खा का ध्यानपूर्वक पालन किए बिना। यही है, अपनी कल्पना का उपयोग और मौजूदा पाक अनुभव के आधार पर। सौभाग्य से मिट्टी उपजाऊ है, और अवयव स्वयं एक दूसरे के साथ पूरी तरह से संयुक्त होते हैं।
|
जब किसी भी छुट्टी के लिए तैयारी कर रहा है,गृहिणी मांस के व्यंजन और ऐपेटाइज़र के साथ तालिका को अधिकतम रूप से सेट करने का प्रयास करते हैं। यह कुछ हद तक गलत दृष्टिकोण है। बेशक, मांस खाने वालों के बहुत सारे हैं, बहुत से मेहमान केवल इतना सम्मानित होंगे कि वे इतने सम्मानित सामग्री से तैयार किए गए व्यंजनों की इतनी प्रचुर मात्रा में हैं। हालांकि, उन लोगों में से हमेशा हमेशा आमंत्रित होते हैं जो मांस नहीं खाते हैं। या जो कम से कम इसे जितना संभव हो उतना खाने की कोशिश करते हैं। अंत में, वे आपके दावत की सराहना करने की संभावना नहीं है। इसके अलावा, इससे मांस और उत्पाद - आज काफी महंगा है, ताकि इस दृष्टिकोण के साथ उत्सव निश्चित रूप से एक प्रभावशाली राशि का परिणाम देगा। मुझे क्या करना चाहिए सभी मेहमानों को कैसे खुश करें और अभी भी खुद को गांठ में नहीं छोड़ा जाए? आय मूल सब्जी स्नैक्स से आएगी। उत्सव की मेज पर, खाना पकाने की प्रक्रिया के लिए एक रचनात्मक दृष्टिकोण के अधीन, ऐसे व्यंजन वितरित करने के लिए बिल्कुल शर्मिंदा नहीं होंगे। इसके अलावा, कई सब्जी स्नैक्स, जिनकी व्यंजन कभी-कभी अपनी मौलिकता से आश्चर्यचकित होती हैं, वे अपने मांस "भाइयों" को ग्रहण करने में काफी सक्षम हैं। और उत्सव की मेज की असली सजावट बनने के लिए। इस तरह के व्यंजन तैयार करने के तरीके पर, हमचलो आगे बात करते हैं। हम आपको बहुत सारी रोचक व्यंजन पेश करेंगे, और आप अपने लिए सर्वश्रेष्ठ चुनने में सक्षम होंगे। उन पर पकाए जाने वाले सब्जी स्नैक्स, निश्चित रूप से आपके मेहमानों और रिश्तेदारों की आश्चर्य और प्रशंसा करेंगे। प्रत्येक नुस्खा का वर्णन करने से पहले,मैं कुछ शब्दों को अलग-अलग शब्दों के रूप में कहना चाहूंगा। जैसा कि आप समझते हैं, किसी भी स्नैक्स - सब्जी या मांस, महत्वपूर्ण नहीं हैं, मेहमानों को संतुष्ट करने के लिए उन्हें जरूरी नहीं है। उन्हें भूख को थोड़ा सा मफल करने और मेज को सजाने के लिए बुलाया जाता है। और, खाली स्थान को जितना संभव हो सके कब्जा करने के लिए, छिपाने का पाप क्या है। बेशक, नमकीन खीरे और सैंडविच यह कर सकते हैं, हालांकि, आप सहमत होंगे, जब टेबल सुरुचिपूर्ण दिखता है तो यह अधिक सुखद होता है। और उस पर खड़े व्यंजन मेहमानों को खुश करें। और न केवल उपस्थिति, बल्कि उत्तम स्वाद। इस पर आधारित, और आपको खाना बनाना है। आखिरकार, जो भी आप कहते हैं, सब्जी सब्जी है। इसलिए, हमें इसे यथासंभव लाभदायक देने की कोशिश करनी चाहिए। इस पर, शायद, सैद्धांतिक भाग को बंद करने का समय है। चलो अभ्यास करने के लिए आगे बढ़ें। हम आपको सबसे अच्छा उत्सव सब्जी स्नैक्स पेश करते हैं। बैंगन सर्कल काट लें, थोड़ा छिड़केयह, फिर दोनों तरफ अच्छी तरह से तलना। महत्वपूर्णः एक प्लेट में नहीं फ्राइंग पैन से फैला है, लेकिन अतिरिक्त वसा से छुटकारा पाने के लिए एक पेपर तौलिया पर। मेयोनेज़ के दो चम्मच और बारीक कटा हुआ लहसुन के लौंग की एक जोड़ी मिलाएं। यदि आपको यह मसाला पसंद है तो आप थोड़ा डिल जोड़ सकते हैं। तला हुआ टुकड़ों के साथ सॉस छिड़कना। टमाटर, जिसका आकार नीले रंग के व्यास के बराबर होना चाहिए, सर्कल में काटा जाना चाहिए, उन्हें बैंगन के प्रत्येक टुकड़े पर रखें, जो हार्ड पनीर के उदार छिड़काव के साथ शीर्ष पर रखें। वैसे, अगर बैंगन के साथ गड़बड़ करने का कोई समय नहीं है, तो आप उनके बिना कर सकते हैं। टमाटर स्लाइस के साथ सभी पिछले जोड़ों को दोहराया जाना चाहिए। हम एक मोर की पूंछ बनाते हैं! उसी तरह दो बैंगन तैयार करेंयह ऊपर वर्णित है। टमाटर और दो ककड़ी के स्लाइस काट लें। पनीर में से एक सौ ग्राम रगड़ें, मेयोनेज़ और बारीक कटा हुआ लहसुन के साथ मिला। एक डिश पर बैंगन प्रसार, और हम उन्हें एक मोर की पूंछ के आकार देने के लिए कोशिश करनी चाहिए। प्रत्येक टुकड़ा के शीर्ष sinenkie टमाटर, पनीर और मेयोनेज़ के एक मिश्रण के साथ कोट स्टैक्स, तो ककड़ी, जो आधा जैतून सजाने डाल दिया। महत्वपूर्णः इस नाश्ते में कम से कम एक घंटे की सेवा फ्रिज में खड़े होने के लिए पहले किया जाना चाहिए। बिल्कुल एक जीत-जीत विकल्प। इस तरह के ट्यूलिप टेबल पर सभी स्नैक्स ग्रहण कर सकते हैं - सब्जी या मांस। उपस्थिति में बस एक आलीशान, एक पकवान जो एक सभ्य स्वाद भी है। नौ लंबे लम्बे टमाटर ले लो। आदर्श रूप से, ब्रांड "महिला उंगलियों" सूट होगा। कुछ सेंटीमीटर, क्रॉस-वार के लिए, अंत तक पहुंचने से पहले थोड़ा साफ कर दें। बेस को हटा दें, आधार पर एक छोटा छेद काट लें, बस डालें, डंठल से छुटकारा पाएं। दो सौ पनीर के ग्राम लें, इसे एक grater पर grate, बारीक कटा हुआ लहसुन और मोटी मेयोनेज़ के कुछ चम्मच के साथ मिश्रण। घने प्याज पंखों से "फूलों" के सिर भरें, एक गुलदस्ता के रूप में खूबसूरती से, कट छेद में डालें), एक सफेद पकवान पर व्यवस्थित करें। पनीर के चार सौ ग्राम, हिरण का एक गुच्छा और एक छोटा साएक ब्लेंडर में लहसुन सिर काट लें। मिश्रण में मेयोनेज़ जोड़ें। इसे थोड़ा, इतना जोड़ना जरूरी होगा कि उत्पादन पर एक घना द्रव्यमान होगा। विभिन्न रंगों में कुछ बल्गेरियाई काली मिर्च ले लो। आप दो कर सकते हैं, और यदि आपको लगता है, तो यह बेहतर और तीन रंगों में है। काली मिर्च की पूंछ काट लें, बीज और सेप्टा प्राप्त करें, काफी मोटी छल्ले में काट लें। फिर मिश्रण के साथ प्रत्येक सामान। अगर वांछित है, तो आप उबले अंडे की सर्कल के साथ शीर्ष को सजाने के लिए कर सकते हैं। इस पकवान को तैयार करने के लिए आपको इसकी आवश्यकता होगीछोटे युवा उबचिनी। हमने उन्हें आधे में काट दिया, फिर थोड़ा नीचे काट दिया ताकि आपकी "नाव" प्लेट पर अधिक आत्मविश्वास हो। हम एक चम्मच के साथ पूरे लुगदी बाहर ले जाते हैं। हमने छोटे प्याज, लाल बल्गेरियाई मिर्च के टुकड़े, फ्राई, थोड़ी देर के बाद उबचिनी के गूदे को काट दिया। नमक, काली मिर्च के साथ सीजन। हम शुरू करते हैं Grated पनीर के साथ छिड़काव के साथ शीर्ष और माइक्रोवेव में दस मिनट के लिए भेजा। वैसे, उबचिनी के बजाय आप बैंगन ले सकते हैं। खुद को भरने के लिए, सामग्री की संरचना अलग-अलग हो सकती है। इसके अलावा, यह लहसुन-मेयोनेज़ सॉस के साथ इस तरह के एक स्नैक्स की सेवा करने की सिफारिश की जाती है, जो उपर्युक्त व्यंजनों से स्पष्ट है, पूरी तरह से सब्जियों के साथ संयुक्त है। Zucchini आम तौर पर हाथों में आभारी सामग्रीकुशल मालकिन। इनमें से, आप बहुत सारे उत्कृष्ट स्नैक्स पका सकते हैं। चलिए अब मूल रोल बनाने की कोशिश करते हैं। पिघला हुआ पनीर के सौ ग्राम से, लहसुन और मेयोनेज़ के कुछ लौंग, हम पहले से ही सामान्य द्रव्यमान कर रहे हैं। स्क्वैश और रसीला खीरे पतली प्लेटों के साथ कटौती कर रहे हैं। फिर उन्हें फ्राइये, नैपकिन पर फैलाएं, जब तक तेल अवशोषित न हो जाए तब तक प्रतीक्षा करें। हम एक प्लेट पर बाहर निकलते हैं, हमारे पास शीर्ष पर एक ककड़ी परत है। एक तरफ हम पनीर द्रव्यमान फैलते हैं, इसमें टमाटर का टुकड़ा जोड़ते हैं, इसे रोल में बदल देते हैं। वैसे, इस तथ्य के बावजूद कि हमने दोनों नावों और रोलों को पकाने के दौरान तापमान प्रभाव का उपयोग किया, यह सब ठंडा सब्जी स्नैक्स है। मेज पर वे ठंडा करने के बाद ही परोसा जाता है। एक उत्सव भोजन के लिए तैयारी, यह आवश्यक नहीं हैपिटा ब्रेड में पकाया जाता है, हमारी मालकिन रोल द्वारा भूल जाते हैं और बहुत प्यारे। आप उन्हें सब्जियों समेत विभिन्न fillers के साथ शुरू कर सकते हैं। कई विकल्प हो सकते हैं, शायद हर मकान मालिक के पास एक विशेष नुस्खा है। उदाहरण के लिए, हम आपको हमारी पेशकश करेंगे - आपको बताएंगे कि कैसे कोरियाई गाजर के साथ एक बहुत ही सरल, लेकिन असाधारण रूप से सुंदर रोल तैयार करना है। आयताकार पिटा ब्रेड की चादर लें और इसे याद करें।इसके मेयोनेज़ शीर्ष पर एक और परत रखो। किसी भी grated पनीर के साथ भरपूर मात्रा में डालो। कोरियाई गाजर की एक परत के साथ शीर्ष। फिर बारीक कटा हुआ जड़ी बूटी के साथ छिड़कना। एक शीट के साथ सबकुछ बंद करें। उपर्युक्त सभी प्रक्रियाओं को दोहराएं। तंग मोड़ें सभी रोल में और रेफ्रिजरेटर को भेजें। कुछ घंटों के बाद, सॉसेज टुकड़ों में काटा जा सकता है, अच्छी तरह से एक प्लेट पर रखा और मेज पर सेवा की। जब सब्जियां तैयार की जाती हैं, तो यह इसके लायक नहीं हैसलाद के रूप में उनमें से इस तरह की विविधता खोने के लिए। बेशक, खीरे और टमाटर का एक साधारण मिश्रण किसी को भी आश्चर्य नहीं करेगा, लेकिन कई अन्य, अधिक आकर्षक व्यंजन हैं। तैयारी और संरचना में सरल, यहसलाद फिर भी चमकदार और हंसमुख उपस्थिति के साथ खुश होगा। गोभी के गोभी लो और इसे काट लें, और जितना संभव हो उतना पतला। एक सलाद कटोरे में मोड़ो, थोड़ा नमक और थोड़ा दबाना जोड़ें। फिर डिब्बाबंद मकई और बारीक कटा हुआ प्याज जोड़ें। मकई के एक कण से रस जरूरी है सूखा जाना चाहिए! एक मोटी मिठाई मेयोनेज़ के साथ सब कुछ भरें और कटा हुआ अंडे कटा हुआ स्लाइस के साथ सजाने के लिए। लाल सेम , रातोंरात सोखें, औरतो कुल्ला और एक घंटे के लिए उबाल। लंबे समय तक हो सकता है, यह विभिन्न प्रकार पर निर्भर करता है। मुख्य बात - पल को याद नहीं है जब यह अलग गिर शुरू होता है। सिद्धांत रूप में, आप ले और डिब्बाबंद जार कर सकते हैं। अपने पसंदीदा साग और मूली के पांच टुकड़े बल्ब , तीन डंठल seldreya, किरणः तो फिर, ठंडा होने के बाद, सेम एक सलाद कटोरा में बदलाव के लिए तैयार करने के लिए, जोड़ने के लिए यह कटा हुआ। भरने नींबू मेयोनेज़ के रूप में पूरी तरह से फिट। सब्जी के स्नैक्स - व्यंजन जिन्हें पकाया जा सकता हैनुस्खा का ध्यानपूर्वक पालन किए बिना। यही है, अपनी कल्पना का उपयोग और मौजूदा पाक अनुभव के आधार पर। सौभाग्य से मिट्टी उपजाऊ है, और अवयव स्वयं एक दूसरे के साथ पूरी तरह से संयुक्त होते हैं।
|
शोधक विवेकीका नहीं. २ अयुक्त, असंभव वा साध्य दृष्टांतोंका उपयोग करना - जेसे पंचदशीके ध्यानदीपमें गोदावरी आदि नदियोंके स्नानसे पापकी निवृत्तिका दृष्टांत दिया हे, - अजामेल ओर रावणादिको अन्यथा मोक्ष मिलना मानके उदाहरण दिया हे अथवा बाजीगरके बनाये हुये छुहारेके वृक्षको मिथ्या मानना कल्पितकी निवृत्ति अधि ष्ठानरूप मानना अर्थात् भगेर (दीपडे) में कुत्तेकी भ्रांति ओर उस कल्पित ( कुत्ते ) की निवृत्ति उसके शत्रु-अधिष्ठान [भ. गेर] के स्वरूप मानना किंवा पंचदशीमें लिखा है कि, 'इ क्षणासे प्रवेशतक ईश्वर कल्पित सृष्टेि, ओर जाग्रतसे मोक्ष प र्यंत जीव कल्पित सृष्टि " अक्रियसे आकाशादिकी त्पत्ति - इत्यादि अयुक्त असंभव वात न हों. ३ पंचदशी वगैरे कितनेक ग्रंथों में जिनको श्रुति वाक्य लिखा है, उनमें बहोत से ऐसे वाक्य हें कि चारों वेदोंमें नहीं. हे; परंतु श्रुतिपद लिखके वाचक वा श्रोतागणको दाबा है. वेसा नहीं हो. ४ युक्तिसे युक्तिका, बुद्धिसे बुद्धिका, विद्याका विद्यासे, अनुभवका अनुभवसे मुकाबला करना योग्य हे. अन्यथा नहीं. इत्यादि वातों का ध्यान रहेगा तो, लोक हितकारी हो पडेगा. निदान जो आपका वोह लेख प्रत्युत्तर, पक्ष रहित, यथार्थ ओर लोक हितकारी होगा, और उसमें अमुक एक दोषकाही निवारण [एक शंका का समाधान नहीं किंतु, सर्व
* वासना ज्ञान विना नहीं जाती वामनाके अभाव विना जन्म मरण नहीं टलता ( बेदांत पक्षको संमत्त हे ), वासना जाय ओर ज्ञान न हो वा ज्ञान हो ओर वासना रहे तो मोक्ष नहीं होता अर्थात् उभय हुये मोक्ष होना संभव हे. परंतु युवति भोगे सदा संन्यासी " इत्यादि वातें - वाक्य - प्रचलित हुई, इसको क्या समझें ? निदान एसेवा पु. कि. कु. इ. जै. के गप्पों समान लेख न हो.
दोषोंके निवारण पूर्वक सर्व रीतिसे योग्य प्रकार पूर्वक स्वप क्षका प्रतिपादन किया गया होगा; तथा जीवन हे तो, में स्वलेख खंडन- सत्पक्ष मंडन वांचके वा उस लेखकी प्रसि द्धि सुनकं प्रसन्न और उत्तर प्रदका आभारी हूंगा इति. सत्य शोधन जिज्ञामा उत्पादक पूर्वपक्ष समाप्त हुवा.
* [नोट] अपनी परीक्षा और शांति होने - इत्यादि कितनेक कारणोंको लेके में (स्त्रवेद्य लक्षणका अपरीक्षक) ने शिष्य समान कितनेक महाशयको पूर्वोक्त टीप सुना के उत्तर मिलने की जिज्ञासाकी; उन में से किसी महात्माने यह उत्तर दिया, "इसका भार वही उठावे कि जिसको भार है, हम नहीं उठा सकते. " एक महात्माने कहा कि " फिलोसोफी ओर खंडन मंडनमें कुछ हाथ नहीं लगता, उन्मत्त, उद्यमहीन, वा बडबाडयोंका काम हे. " दो तीन महापुरुषोंने यह कहा कि "जितना कुछ धर्म पंथ, खंडन मंडन, पक्षपात ओर कृति चलरहे हें, इनसे कुछ हाथ नहीं लगता. विवेक करके, वैराग्यवान होके मन वृत्तिका निग्रह करों, निरुद्ध हुये जो कुछ होगा सो ( अकथ विषय ) आपही मिलजायगा. बाकी सर्व, परमार्थ संबंधी प्रचलित वातें (गप्पे ) हें. ( में, उक्त उत्तरकी रमजों- लक्ष्यभावको नहीं समझा ). एक महाशयने उपनिषद्की स्वतः प्रमाणता, जीव ब्रह्मकी एकता वा भेद, माया अनादिसांत - इन तीन विषय पक्षको छोडके - इनसे उपराम होके शेष कितनीक वातोंका उत्तर दिया; परंतु मेरी बुद्धिमें संतोषकारक नहीं जानपडा, इसलिये नहीं लिखा; विश्वासी, दंभी, वाचाल, शुष्क ज्ञानीजनोंको, प्रसंगोपात प्रासंगिक विषय पूछे जानेपर, उलटा मुझ कुतर्कों मंदमतिके कल्पित (कर्तवी) संतोष- शांतिभी जातेथे. निदान अब सत्य शोधन वा शोधित प्राप्तिक उत्तेजनार्थ प्रसिद्धि में डालनेकी जिज्ञासा रखता हूँ. पूरी हो. इति.
|
शोधक विवेकीका नहीं. दो अयुक्त, असंभव वा साध्य दृष्टांतोंका उपयोग करना - जेसे पंचदशीके ध्यानदीपमें गोदावरी आदि नदियोंके स्नानसे पापकी निवृत्तिका दृष्टांत दिया हे, - अजामेल ओर रावणादिको अन्यथा मोक्ष मिलना मानके उदाहरण दिया हे अथवा बाजीगरके बनाये हुये छुहारेके वृक्षको मिथ्या मानना कल्पितकी निवृत्ति अधि ष्ठानरूप मानना अर्थात् भगेर में कुत्तेकी भ्रांति ओर उस कल्पित की निवृत्ति उसके शत्रु-अधिष्ठान [भ. गेर] के स्वरूप मानना किंवा पंचदशीमें लिखा है कि, 'इ क्षणासे प्रवेशतक ईश्वर कल्पित सृष्टेि, ओर जाग्रतसे मोक्ष प र्यंत जीव कल्पित सृष्टि " अक्रियसे आकाशादिकी त्पत्ति - इत्यादि अयुक्त असंभव वात न हों. तीन पंचदशी वगैरे कितनेक ग्रंथों में जिनको श्रुति वाक्य लिखा है, उनमें बहोत से ऐसे वाक्य हें कि चारों वेदोंमें नहीं. हे; परंतु श्रुतिपद लिखके वाचक वा श्रोतागणको दाबा है. वेसा नहीं हो. चार युक्तिसे युक्तिका, बुद्धिसे बुद्धिका, विद्याका विद्यासे, अनुभवका अनुभवसे मुकाबला करना योग्य हे. अन्यथा नहीं. इत्यादि वातों का ध्यान रहेगा तो, लोक हितकारी हो पडेगा. निदान जो आपका वोह लेख प्रत्युत्तर, पक्ष रहित, यथार्थ ओर लोक हितकारी होगा, और उसमें अमुक एक दोषकाही निवारण [एक शंका का समाधान नहीं किंतु, सर्व * वासना ज्ञान विना नहीं जाती वामनाके अभाव विना जन्म मरण नहीं टलता , वासना जाय ओर ज्ञान न हो वा ज्ञान हो ओर वासना रहे तो मोक्ष नहीं होता अर्थात् उभय हुये मोक्ष होना संभव हे. परंतु युवति भोगे सदा संन्यासी " इत्यादि वातें - वाक्य - प्रचलित हुई, इसको क्या समझें ? निदान एसेवा पु. कि. कु. इ. जै. के गप्पों समान लेख न हो. दोषोंके निवारण पूर्वक सर्व रीतिसे योग्य प्रकार पूर्वक स्वप क्षका प्रतिपादन किया गया होगा; तथा जीवन हे तो, में स्वलेख खंडन- सत्पक्ष मंडन वांचके वा उस लेखकी प्रसि द्धि सुनकं प्रसन्न और उत्तर प्रदका आभारी हूंगा इति. सत्य शोधन जिज्ञामा उत्पादक पूर्वपक्ष समाप्त हुवा. * [नोट] अपनी परीक्षा और शांति होने - इत्यादि कितनेक कारणोंको लेके में ने शिष्य समान कितनेक महाशयको पूर्वोक्त टीप सुना के उत्तर मिलने की जिज्ञासाकी; उन में से किसी महात्माने यह उत्तर दिया, "इसका भार वही उठावे कि जिसको भार है, हम नहीं उठा सकते. " एक महात्माने कहा कि " फिलोसोफी ओर खंडन मंडनमें कुछ हाथ नहीं लगता, उन्मत्त, उद्यमहीन, वा बडबाडयोंका काम हे. " दो तीन महापुरुषोंने यह कहा कि "जितना कुछ धर्म पंथ, खंडन मंडन, पक्षपात ओर कृति चलरहे हें, इनसे कुछ हाथ नहीं लगता. विवेक करके, वैराग्यवान होके मन वृत्तिका निग्रह करों, निरुद्ध हुये जो कुछ होगा सो आपही मिलजायगा. बाकी सर्व, परमार्थ संबंधी प्रचलित वातें हें. . एक महाशयने उपनिषद्की स्वतः प्रमाणता, जीव ब्रह्मकी एकता वा भेद, माया अनादिसांत - इन तीन विषय पक्षको छोडके - इनसे उपराम होके शेष कितनीक वातोंका उत्तर दिया; परंतु मेरी बुद्धिमें संतोषकारक नहीं जानपडा, इसलिये नहीं लिखा; विश्वासी, दंभी, वाचाल, शुष्क ज्ञानीजनोंको, प्रसंगोपात प्रासंगिक विषय पूछे जानेपर, उलटा मुझ कुतर्कों मंदमतिके कल्पित संतोष- शांतिभी जातेथे. निदान अब सत्य शोधन वा शोधित प्राप्तिक उत्तेजनार्थ प्रसिद्धि में डालनेकी जिज्ञासा रखता हूँ. पूरी हो. इति.
|
चंडीगढ़, 28 जुलाईः
पंजाब के आबकारी और कराधान, वित्त, योजना और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री स. हरपाल सिंह चीमा के सख़्त निर्देशों की पालना करते हुए आबकारी ड्यूटी की अदायगी किए बिना स्कॉच विस्की की तस्करी करने वाले शराब माफिया के खि़लाफ़ सख़्ती करते हुए आबकारी विभाग लुधियाना की टीम द्वारा भारत नगर चौक, लुधियाना में 2 कारों से 20 पेटियाँ प्रीमियम ब्रांड शराब बरामद की और 2 मुलजि़मों को भी काबू किया।
इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए आबकारी विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि अवैध शराब की तस्करी करने वाले मुलजि़मों को काबू करने के लिए गुप्त सूचना के आधार पर स्थानीय भारत नगर चौक, लुधियाना में चैकिंग प्वाइंट लगाया गया था। उन्होंने बताया कि आबकारी टीम ने दो कारों को रोककर कारों से 20 पेटियाँ अवैध शराब और 83 नकली होलोग्राम (एक्साईज लेबल) बरामद कर इनमें सवार व्यक्तियों जिनमें लुधियाना के विनीत कुमार और तनवीर सिंह चंडीगढ़ शामिल हैं, को काबू कर लिया। उन्होंने बताया कि मुलजि़मों में से एक चंडीगढ़ निवासी प्रिंस कुकरेजा मौके से फऱार होने में कामयाब हो गया। दोनों मुलजि़मों को थाना डिविजऩ नंबर 5 लुधियाना ले जाया गया और उनके खि़लाफ़ एफ.आई.आर. दर्ज की गई।
प्रवक्ता ने आगे बताया कि प्राथमिक जांच से पता लगा है कि मुलजि़म पंजाब में महँगी स्कॉच विस्की की तस्करी करने के एक बड़े रैकेट का हिस्सा हैं और टीमें शराब के स्रोत का पता लगाने के लिए काम कर रही हैं।
वित्त मंत्री स. हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार यह सुनिश्चित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है कि कोई भी आबकारी एक्ट का उल्लंघन न करे।
स. चीमा ने आगे कहा कि आने वाले दिनों में अवैध शराब के खि़लाफ़ शिकंजा और कसा जाएगा और इसमें शामिल पाए जाने वालों के खि़लाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी।
|
चंडीगढ़, अट्ठाईस जुलाईः पंजाब के आबकारी और कराधान, वित्त, योजना और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री स. हरपाल सिंह चीमा के सख़्त निर्देशों की पालना करते हुए आबकारी ड्यूटी की अदायगी किए बिना स्कॉच विस्की की तस्करी करने वाले शराब माफिया के खि़लाफ़ सख़्ती करते हुए आबकारी विभाग लुधियाना की टीम द्वारा भारत नगर चौक, लुधियाना में दो कारों से बीस पेटियाँ प्रीमियम ब्रांड शराब बरामद की और दो मुलजि़मों को भी काबू किया। इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए आबकारी विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि अवैध शराब की तस्करी करने वाले मुलजि़मों को काबू करने के लिए गुप्त सूचना के आधार पर स्थानीय भारत नगर चौक, लुधियाना में चैकिंग प्वाइंट लगाया गया था। उन्होंने बताया कि आबकारी टीम ने दो कारों को रोककर कारों से बीस पेटियाँ अवैध शराब और तिरासी नकली होलोग्राम बरामद कर इनमें सवार व्यक्तियों जिनमें लुधियाना के विनीत कुमार और तनवीर सिंह चंडीगढ़ शामिल हैं, को काबू कर लिया। उन्होंने बताया कि मुलजि़मों में से एक चंडीगढ़ निवासी प्रिंस कुकरेजा मौके से फऱार होने में कामयाब हो गया। दोनों मुलजि़मों को थाना डिविजऩ नंबर पाँच लुधियाना ले जाया गया और उनके खि़लाफ़ एफ.आई.आर. दर्ज की गई। प्रवक्ता ने आगे बताया कि प्राथमिक जांच से पता लगा है कि मुलजि़म पंजाब में महँगी स्कॉच विस्की की तस्करी करने के एक बड़े रैकेट का हिस्सा हैं और टीमें शराब के स्रोत का पता लगाने के लिए काम कर रही हैं। वित्त मंत्री स. हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार यह सुनिश्चित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है कि कोई भी आबकारी एक्ट का उल्लंघन न करे। स. चीमा ने आगे कहा कि आने वाले दिनों में अवैध शराब के खि़लाफ़ शिकंजा और कसा जाएगा और इसमें शामिल पाए जाने वालों के खि़लाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी।
|
भारत को लगातार दूसरी बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा है।
भारतीय क्रिकेट टीम को पिछले हफ्ते वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में, ऑस्ट्रेलिया के हाथों बुरी तरह 209 रनों से हार का सामना करना पड़ा था। बता दें कि टीम इंडिया को लगातार दूसरी बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा है।
तो वहीं इस हार के बाद राहुल द्रविड़ और रोहित शर्मा की अगुवाई वाले मैनेजेमेंट ने आलोचकों के सामने कई प्रकार सवाल खड़े कर दिए है। बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब रोहित-द्रविड़ की जोड़ी ने कोई बड़ा इवेंट गंवाया हो। इससे पहले टीम इंडिया को एशिया कप और टी-20 वर्ल्ड कप 2022 में भी हार का सामना करना पड़ा है।
हालांकि, अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड टीम (बीसीसीआई) टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ की भूमिकाओं की जांच करने के लिए कमर कस रहा है। भले ही टीम सपोर्ट स्टाफ में मौजूद सभी लोग जांच के दायरे में ना आएं, लेकिन बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर और गेंदबाजी कोच पारस म्हाम्ब्रे पर जांच की तलवार लटक सकती है।
बता दें कि इनसाइड स्पोर्ट्स की एक खबर के अनुसार भारतीय क्रिकेट बोर्ड के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा- ये सभी चीजें इतनी भी आसान नहीं है। हम ऐसा नहीं कह सकते कि सभी चीजें ठीक नहीं थी। हम भारत में जीतने में कामयाब रहे थे और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचना कोई मजाक नहीं है।
अधिकारी ने आगे कहा- लेकिन ये सच है कि विदेशी दौरों पर हमारा प्रदर्शन उम्मीद के अनुसार नहीं रहा है। तो वहीं इस समय हमें क्रिकेट वर्ल्ड कप को भी ध्यान में रखना चाहिए। अब सिर्फ चार महीने बचे हैं। हम बिना सोचे समझे कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकते, लेकिन एक आंतरिक चर्चा जरूर होगी।
फिल्हाल हमारी राहुल (हेड कोच) से कोई बात नहीं हुई है। लेकिन निश्चित रूप से वह वर्ल्ड कप तक मुख्य कोच रहेंगे। वह टीम में रहेंगे या नहीं यह वर्ल्ड कप के परिणाम पर काफी निर्भर करता है। फिल्हाल उनकी भूमिका को लेकर कोई सवाल नहीं है।
|
भारत को लगातार दूसरी बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा है। भारतीय क्रिकेट टीम को पिछले हफ्ते वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में, ऑस्ट्रेलिया के हाथों बुरी तरह दो सौ नौ रनों से हार का सामना करना पड़ा था। बता दें कि टीम इंडिया को लगातार दूसरी बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा है। तो वहीं इस हार के बाद राहुल द्रविड़ और रोहित शर्मा की अगुवाई वाले मैनेजेमेंट ने आलोचकों के सामने कई प्रकार सवाल खड़े कर दिए है। बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब रोहित-द्रविड़ की जोड़ी ने कोई बड़ा इवेंट गंवाया हो। इससे पहले टीम इंडिया को एशिया कप और टी-बीस वर्ल्ड कप दो हज़ार बाईस में भी हार का सामना करना पड़ा है। हालांकि, अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड टीम टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ की भूमिकाओं की जांच करने के लिए कमर कस रहा है। भले ही टीम सपोर्ट स्टाफ में मौजूद सभी लोग जांच के दायरे में ना आएं, लेकिन बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर और गेंदबाजी कोच पारस म्हाम्ब्रे पर जांच की तलवार लटक सकती है। बता दें कि इनसाइड स्पोर्ट्स की एक खबर के अनुसार भारतीय क्रिकेट बोर्ड के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा- ये सभी चीजें इतनी भी आसान नहीं है। हम ऐसा नहीं कह सकते कि सभी चीजें ठीक नहीं थी। हम भारत में जीतने में कामयाब रहे थे और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचना कोई मजाक नहीं है। अधिकारी ने आगे कहा- लेकिन ये सच है कि विदेशी दौरों पर हमारा प्रदर्शन उम्मीद के अनुसार नहीं रहा है। तो वहीं इस समय हमें क्रिकेट वर्ल्ड कप को भी ध्यान में रखना चाहिए। अब सिर्फ चार महीने बचे हैं। हम बिना सोचे समझे कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकते, लेकिन एक आंतरिक चर्चा जरूर होगी। फिल्हाल हमारी राहुल से कोई बात नहीं हुई है। लेकिन निश्चित रूप से वह वर्ल्ड कप तक मुख्य कोच रहेंगे। वह टीम में रहेंगे या नहीं यह वर्ल्ड कप के परिणाम पर काफी निर्भर करता है। फिल्हाल उनकी भूमिका को लेकर कोई सवाल नहीं है।
|
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.