raw_text
stringlengths
113
616k
normalized_text
stringlengths
98
618k
एएनसी पंजीकरण के समय ही गर्भवती से उसके भामाशाह व बैंक खाता संख्या लेकर पीसीटीएस ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में इन्द्राज कर दिया जाए तो प्रसव पश्चात उसे देय वित्तीय लाभ यथा जननी सुरक्षा योजना के 1000 या 1400 रूपए राजश्री योजना के 2500 रूपए व अन्य लाभ अविलम्ब सीधे उसके खाते में मिल जाएंगे। इसलिए शहरी क्षेत्र की समस्त गर्भवतियों का पीसीटीएस में इन्द्राज सुनिश्चित किया जाए। गुरुवार को स्वास्थ्य भवन में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के अकाउंटेंट कम ऑपरेटर की बैठक लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने कहा कि शहरी क्षेत्र की प्रसूताओं जिनकी शुभलक्ष्मी योजना के तहत प्रथम किश्त का भुगतान हुआ है किन्तु दूसरी बकाया है उनका जल्द से जल्द सत्यापन करवाकर भुगतान करवाया जाए। उन्होंने शहरी क्षेत्र में गठित महिला आरोग्य समितियों को जारी बजट का क्षेत्र की स्वच्छता, आपातकाल में गर्भवती के परिवहन, संवाद-सम्मेलनों तथा स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रम आयोजित कर अधिकाधिक लाभ देने के निर्देश दिए। बैठक में एनयूएचएम की सलाहकार डॉ. रिशमजोत कौर व नेहा शेखावत द्वारा राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के तहत चल रही गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की गई। डीएनओ मनीष गोस्वामी ने पीसीटीएस, ओजस व आशा सॉफ्ट से सम्बंधित समस्याओं का निराकरण किया। जिला लेखा प्रबंधक राजेश सिंगोदिया द्वारा यूपीएचसी की वित्तीय प्रगति की समीक्षा की गई। जिला आशा समन्वयक रेणू बिस्सा ने आशा ज्योति कार्यक्रम के तहत आगे पढ़ाई करने की इच्छुक आशा सहयोगिनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए।
एएनसी पंजीकरण के समय ही गर्भवती से उसके भामाशाह व बैंक खाता संख्या लेकर पीसीटीएस ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में इन्द्राज कर दिया जाए तो प्रसव पश्चात उसे देय वित्तीय लाभ यथा जननी सुरक्षा योजना के एक हज़ार या एक हज़ार चार सौ रूपए राजश्री योजना के दो हज़ार पाँच सौ रूपए व अन्य लाभ अविलम्ब सीधे उसके खाते में मिल जाएंगे। इसलिए शहरी क्षेत्र की समस्त गर्भवतियों का पीसीटीएस में इन्द्राज सुनिश्चित किया जाए। गुरुवार को स्वास्थ्य भवन में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के अकाउंटेंट कम ऑपरेटर की बैठक लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने कहा कि शहरी क्षेत्र की प्रसूताओं जिनकी शुभलक्ष्मी योजना के तहत प्रथम किश्त का भुगतान हुआ है किन्तु दूसरी बकाया है उनका जल्द से जल्द सत्यापन करवाकर भुगतान करवाया जाए। उन्होंने शहरी क्षेत्र में गठित महिला आरोग्य समितियों को जारी बजट का क्षेत्र की स्वच्छता, आपातकाल में गर्भवती के परिवहन, संवाद-सम्मेलनों तथा स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रम आयोजित कर अधिकाधिक लाभ देने के निर्देश दिए। बैठक में एनयूएचएम की सलाहकार डॉ. रिशमजोत कौर व नेहा शेखावत द्वारा राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के तहत चल रही गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की गई। डीएनओ मनीष गोस्वामी ने पीसीटीएस, ओजस व आशा सॉफ्ट से सम्बंधित समस्याओं का निराकरण किया। जिला लेखा प्रबंधक राजेश सिंगोदिया द्वारा यूपीएचसी की वित्तीय प्रगति की समीक्षा की गई। जिला आशा समन्वयक रेणू बिस्सा ने आशा ज्योति कार्यक्रम के तहत आगे पढ़ाई करने की इच्छुक आशा सहयोगिनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए।
नई दिल्लीः सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश की वयस्क आबादी में से 69 प्रतिशत को कोविड-19 टीके की कम से कम एक खुराक, जबकि 25 प्रतिशत को दोनों खुराक लग चुकी है. इसने यह भी कहा जनसंख्या के बढ़ते घनत्व ने भी कोविड-19 के प्रसार की गुंजाइश बढ़ाई है और अनावश्यक यात्रा टालना तथा त्योहार छोटे स्तर पर मनाना विवेकपूर्ण होगा. सरकार ने कहा कि कोविड-19 टीके की 64. 1 प्रतिशत खुराक ग्रामीण इलाकों में दी गई, जबकि 35 प्रतिशत शहरी इलाकों में दी गई है. इसने कहा कि कुल 67. 4 लाख खुराक (करीब 0. 88 प्रतिशत) उन टीकाकरण केंद्रों पर दी गई, जो ग्रामीण/शहरी के रूप में सूचीबद्ध नहीं किये गये हैं. सरकार ने कहा कि पिछले हफ्ते सामने आए कोविड के कुल मामलों में 59. 66 प्रतशित केरल से थे और राज्य में उपचाराधीन मरीजों की संख्या एक लाख से अधिक है. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. इसने यह भी कहा कि कोविड-19 जांच की संख्या नहीं घटी है और देश में प्रतिदिन 15-16 लाख जांच की जा रही है. सरकार ने कहा कि 15 जिलों में कोरोनावायरस संक्रमण की साप्ताहिक संक्रमण दर पांच से 10 प्रतिशत के बीच है जबकि 30 जिलों में यह 10 प्रतिशत से अधिक है. जायडस कैडिला के कोविड-19 टीके पर सरकार ने कहा कि 'जायकोव-डी' तीन खुराक वाला बगैर सुई वाला टीका है और इसकी कीमत वर्तमान में लगाये जा रहे टीकों से अलग निर्धारित की जाएगी. इसने कहा कि इसकी कीमत निर्धारित करने पर विनिर्माता के साथ बातचीत की जा रही है.
नई दिल्लीः सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश की वयस्क आबादी में से उनहत्तर प्रतिशत को कोविड-उन्नीस टीके की कम से कम एक खुराक, जबकि पच्चीस प्रतिशत को दोनों खुराक लग चुकी है. इसने यह भी कहा जनसंख्या के बढ़ते घनत्व ने भी कोविड-उन्नीस के प्रसार की गुंजाइश बढ़ाई है और अनावश्यक यात्रा टालना तथा त्योहार छोटे स्तर पर मनाना विवेकपूर्ण होगा. सरकार ने कहा कि कोविड-उन्नीस टीके की चौंसठ. एक प्रतिशत खुराक ग्रामीण इलाकों में दी गई, जबकि पैंतीस प्रतिशत शहरी इलाकों में दी गई है. इसने कहा कि कुल सरसठ. चार लाख खुराक उन टीकाकरण केंद्रों पर दी गई, जो ग्रामीण/शहरी के रूप में सूचीबद्ध नहीं किये गये हैं. सरकार ने कहा कि पिछले हफ्ते सामने आए कोविड के कुल मामलों में उनसठ. छयासठ प्रतशित केरल से थे और राज्य में उपचाराधीन मरीजों की संख्या एक लाख से अधिक है. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. इसने यह भी कहा कि कोविड-उन्नीस जांच की संख्या नहीं घटी है और देश में प्रतिदिन पंद्रह-सोलह लाख जांच की जा रही है. सरकार ने कहा कि पंद्रह जिलों में कोरोनावायरस संक्रमण की साप्ताहिक संक्रमण दर पांच से दस प्रतिशत के बीच है जबकि तीस जिलों में यह दस प्रतिशत से अधिक है. जायडस कैडिला के कोविड-उन्नीस टीके पर सरकार ने कहा कि 'जायकोव-डी' तीन खुराक वाला बगैर सुई वाला टीका है और इसकी कीमत वर्तमान में लगाये जा रहे टीकों से अलग निर्धारित की जाएगी. इसने कहा कि इसकी कीमत निर्धारित करने पर विनिर्माता के साथ बातचीत की जा रही है.
यामिनी फिल्म्स ने आज म्यूजिकल स्कूल की घोषणा की। इलैयाराजा द्वारा संगीतबद्ध किए गए इस म्यूज़िकल को ब्रॉडवे के कोरियोग्राफर एडम मरी कोरियोग्राफ करेंगे। पापा राव बियाला द्वारा लिखित और निर्देशित, इस म्यूजिकल में शरमन जोशी, श्रिया सरन, सुहासिनी मुले, बेंजामिन गिलानी, प्रकाश राज, तेलुगु कॉमेडियन ब्रह्मानंदम, विनय वर्मा, ग्रेसी गोस्वामी और ओज़ू बरुआ नज़र आयेंगे। फिल्म जोधा अकबर में अपने काम के लिए मशहूर सिनेमैटोग्राफर किरण देवहंस पापा राव बियाला के निर्देशन में बनने वाली इस फिल्म में शामिल हैं। इस म्यूजिकल का मुहूर्त 15 अक्टूबर को किया जायेगा। 12 गानों की ये लड़ी हमारी उस अकल्पनीय शिक्षा प्रणाली के दबाव के बारे में है जिसमें बच्चों को समीकरण रटवा कर उन्हें केवल डॉक्टर और इंजिनियर बनने का लक्ष्य सौंपा जाता है और इसमें खेल और कला के लिए पर्याप्त समय तक नहीं दिया जाता। हैदराबाद में स्थापित यह हास्य संगीत यात्रा निश्चित रूप से उन लोगों को पसंद आएगी जो प्यार करने, सपने देखने, हंसने और गाने की इच्छा रखते हैं। यह अपने खूबसूरत खुले आसमान और विशाल समुद्र तटों के साथ गोवा के भावों का भी जश्न मनाएगा। अभिनेता शरमन जोशी कहते हैं कि,' मुझे पापा राव की म्यूजिकल स्कूल का हिस्सा बनकर बेहद खुशी हो रही है। यह मेरी पहली बहुभाषी फिल्म है। इलैयाराजा के साथ पहली बार काम करने के लिए मैं उत्साहित हूं। मैं इस परियोजना का हिस्सा बनने के लिए उत्साहित और खुश हूं। मैं श्रिया के साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं, जिन्हें मैं व्यक्तिगतरूप से जानता हूं। मुझे इस शानदार सफर के शुरू होने का इंतजार है। यह बहुत सारी भावनाओं के साथ एक अनूठा म्यूज़िकल है। ' अभिनेत्री श्रिया सरन कहती हैं, 'यह एक सपना सच होने समान है। इलैयाराजा हमेशा से हम सभी के प्रेरणास्रोत रहे हैं। लंदन के इतने बड़े कोरियोग्राफर के साथ काम करना फिर से एक सपना साकार होने जैसा है। मैं जब भी लंदन जाती हूं मैं सबसे पाले सारे म्यूजिकल्स देखती हूं। मेरी दुआ कुबूल हुई। मैं एक कथक डांसर हूं और एक नया डांस फॉर्म सीखना रोमांचकारी होगा। मैं सचमुच इसके लिए तत्पर हूं। ऐसा लगता है जैसे मैं अपना सपना जी रही हूं। मैं बहुत धन्य और आभारी हूं।' पापा राव बियाला कहते हैं, 'एक फिल्म निर्माता के रूप में, मैस्ट्रो इलैयाराजा, ब्रॉडवे कोरियोग्राफर एडम मरे और छायाकार किरण देवहंस के साथ काम करना किसी सम्मान से कम नहीं है। म्यूज़िक स्कूल इस तथ्य को सेलिब्रेट करता है कि हम में से कई लोगों ने संगीत में सुकून पाया है। इसके गाने प्रेम और संगीत की खोज की एक रोमांचक कहानी को दर्शाते हैं। हम बेहद उत्साहित हैं कि इस दिल को छू जाने वाले म्यूजिकल के जरिए हम दर्शकों को थिएटर में मिलेंगे।' न्यूयॉर्क फिल्म अकादमी से पढ़ाई कर चुके पापा राव बियाला अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'विलिंग टू सैक्रिफाइस' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार और दो अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं। श्री राव कहते हैं कि इलैयाराजा द्वारा इस फिल्म के लिए म्यूज़िक तैयार करना हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है। उनका मानना है कि इलैयाराजा के गीतों और संगीत में इतनी क्षमता है कि उसने हॉलीवुड कोरियोग्राफर एडम मरी को इस परियोजना पर काम करने के लिए प्रभावित किया। फिल्म में साउंड ऑफ़ म्यूज़िक के तीन गाने भी होंगे जिनका उपयोग स्थितिजन्य रूप से किया जायेगा।
यामिनी फिल्म्स ने आज म्यूजिकल स्कूल की घोषणा की। इलैयाराजा द्वारा संगीतबद्ध किए गए इस म्यूज़िकल को ब्रॉडवे के कोरियोग्राफर एडम मरी कोरियोग्राफ करेंगे। पापा राव बियाला द्वारा लिखित और निर्देशित, इस म्यूजिकल में शरमन जोशी, श्रिया सरन, सुहासिनी मुले, बेंजामिन गिलानी, प्रकाश राज, तेलुगु कॉमेडियन ब्रह्मानंदम, विनय वर्मा, ग्रेसी गोस्वामी और ओज़ू बरुआ नज़र आयेंगे। फिल्म जोधा अकबर में अपने काम के लिए मशहूर सिनेमैटोग्राफर किरण देवहंस पापा राव बियाला के निर्देशन में बनने वाली इस फिल्म में शामिल हैं। इस म्यूजिकल का मुहूर्त पंद्रह अक्टूबर को किया जायेगा। बारह गानों की ये लड़ी हमारी उस अकल्पनीय शिक्षा प्रणाली के दबाव के बारे में है जिसमें बच्चों को समीकरण रटवा कर उन्हें केवल डॉक्टर और इंजिनियर बनने का लक्ष्य सौंपा जाता है और इसमें खेल और कला के लिए पर्याप्त समय तक नहीं दिया जाता। हैदराबाद में स्थापित यह हास्य संगीत यात्रा निश्चित रूप से उन लोगों को पसंद आएगी जो प्यार करने, सपने देखने, हंसने और गाने की इच्छा रखते हैं। यह अपने खूबसूरत खुले आसमान और विशाल समुद्र तटों के साथ गोवा के भावों का भी जश्न मनाएगा। अभिनेता शरमन जोशी कहते हैं कि,' मुझे पापा राव की म्यूजिकल स्कूल का हिस्सा बनकर बेहद खुशी हो रही है। यह मेरी पहली बहुभाषी फिल्म है। इलैयाराजा के साथ पहली बार काम करने के लिए मैं उत्साहित हूं। मैं इस परियोजना का हिस्सा बनने के लिए उत्साहित और खुश हूं। मैं श्रिया के साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं, जिन्हें मैं व्यक्तिगतरूप से जानता हूं। मुझे इस शानदार सफर के शुरू होने का इंतजार है। यह बहुत सारी भावनाओं के साथ एक अनूठा म्यूज़िकल है। ' अभिनेत्री श्रिया सरन कहती हैं, 'यह एक सपना सच होने समान है। इलैयाराजा हमेशा से हम सभी के प्रेरणास्रोत रहे हैं। लंदन के इतने बड़े कोरियोग्राफर के साथ काम करना फिर से एक सपना साकार होने जैसा है। मैं जब भी लंदन जाती हूं मैं सबसे पाले सारे म्यूजिकल्स देखती हूं। मेरी दुआ कुबूल हुई। मैं एक कथक डांसर हूं और एक नया डांस फॉर्म सीखना रोमांचकारी होगा। मैं सचमुच इसके लिए तत्पर हूं। ऐसा लगता है जैसे मैं अपना सपना जी रही हूं। मैं बहुत धन्य और आभारी हूं।' पापा राव बियाला कहते हैं, 'एक फिल्म निर्माता के रूप में, मैस्ट्रो इलैयाराजा, ब्रॉडवे कोरियोग्राफर एडम मरे और छायाकार किरण देवहंस के साथ काम करना किसी सम्मान से कम नहीं है। म्यूज़िक स्कूल इस तथ्य को सेलिब्रेट करता है कि हम में से कई लोगों ने संगीत में सुकून पाया है। इसके गाने प्रेम और संगीत की खोज की एक रोमांचक कहानी को दर्शाते हैं। हम बेहद उत्साहित हैं कि इस दिल को छू जाने वाले म्यूजिकल के जरिए हम दर्शकों को थिएटर में मिलेंगे।' न्यूयॉर्क फिल्म अकादमी से पढ़ाई कर चुके पापा राव बियाला अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'विलिंग टू सैक्रिफाइस' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार और दो अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं। श्री राव कहते हैं कि इलैयाराजा द्वारा इस फिल्म के लिए म्यूज़िक तैयार करना हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है। उनका मानना है कि इलैयाराजा के गीतों और संगीत में इतनी क्षमता है कि उसने हॉलीवुड कोरियोग्राफर एडम मरी को इस परियोजना पर काम करने के लिए प्रभावित किया। फिल्म में साउंड ऑफ़ म्यूज़िक के तीन गाने भी होंगे जिनका उपयोग स्थितिजन्य रूप से किया जायेगा।
गोरखपुर के कैम्पियरगंज क्षेत्र के रावतगंज रामलीला मैदान के समीप सोनौली हाइवे पर कार की ठोकर से बाइक सवार फार्मासिस्ट की दर्दनाक मौत हो गई। जबकि दूसरा साथ गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे की सूचना पर पहुंची पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम भेज दी। कैम्पियरगंज क्षेत्र के ही मछलीगांव बरगदही गांव निवासी मोहम्मद शमीम के पुत्र 35 वर्षीय मोहम्मद हसन गोरखपुर शहर में एक पीएचसी पर संविदा पर फार्मासिस्ट पद पर तैनात थे। गुरुवार की शाम तकरीबन 6 बजे वह घर के लिए निकले। उनके साथ एक अन्य युवक सत्यम सिंह भी थे। वह अभी सोनौली हाइवे पर रावतगंज रामलीला मैदान के पास पहुंचे थे कि पीछे से आ रही तेज रफ्तार बोलेरो के चालक ने दरवाजा खोल दिया। दरवाजा की चपेट में आने से बाइक सवार मोहम्मद हसन सड़क पर गिर पड़े। जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। उनका साथी सत्यम सिंह भी गंभीर रूप से चोटिल हो गया। हादसे की सूचना पर पहुंची पुलिस घायल को उपचार के लिए सीएचसी पर पहुंचाने के साथ शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दी।
गोरखपुर के कैम्पियरगंज क्षेत्र के रावतगंज रामलीला मैदान के समीप सोनौली हाइवे पर कार की ठोकर से बाइक सवार फार्मासिस्ट की दर्दनाक मौत हो गई। जबकि दूसरा साथ गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे की सूचना पर पहुंची पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम भेज दी। कैम्पियरगंज क्षेत्र के ही मछलीगांव बरगदही गांव निवासी मोहम्मद शमीम के पुत्र पैंतीस वर्षीय मोहम्मद हसन गोरखपुर शहर में एक पीएचसी पर संविदा पर फार्मासिस्ट पद पर तैनात थे। गुरुवार की शाम तकरीबन छः बजे वह घर के लिए निकले। उनके साथ एक अन्य युवक सत्यम सिंह भी थे। वह अभी सोनौली हाइवे पर रावतगंज रामलीला मैदान के पास पहुंचे थे कि पीछे से आ रही तेज रफ्तार बोलेरो के चालक ने दरवाजा खोल दिया। दरवाजा की चपेट में आने से बाइक सवार मोहम्मद हसन सड़क पर गिर पड़े। जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। उनका साथी सत्यम सिंह भी गंभीर रूप से चोटिल हो गया। हादसे की सूचना पर पहुंची पुलिस घायल को उपचार के लिए सीएचसी पर पहुंचाने के साथ शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दी।
You Searched For "Bhagwant Mann" भगवंत मान भगवंत मान गुरुवार शाम को अरविंद केजरीवाल से भी मुलाकात करेंगे. पंजाब में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान एक के बाद एक कर कई बड़े फैसले कर रहे हैं. हम शिक्षा,स्वास्थ्य और विकास की बात करेगेंः भगवंत मान। 'हम पंजाब में स्कूल और अस्पताल ऐसे बनाएंगे कि विदेशों से लोग यहां स्कूल और अस्पताल देखने आएंगे.'
You Searched For "Bhagwant Mann" भगवंत मान भगवंत मान गुरुवार शाम को अरविंद केजरीवाल से भी मुलाकात करेंगे. पंजाब में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान एक के बाद एक कर कई बड़े फैसले कर रहे हैं. हम शिक्षा,स्वास्थ्य और विकास की बात करेगेंः भगवंत मान। 'हम पंजाब में स्कूल और अस्पताल ऐसे बनाएंगे कि विदेशों से लोग यहां स्कूल और अस्पताल देखने आएंगे.'
पटना(ब्यूरो)। अगर आप दिन भर ड्यूटी करते हैैं या किसी तरह के व्यवसाय में बिजी रहते हैैं तो जाहिर तौर पर आपका क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस या इस तरह के दूसरे खेल खेलने का शौक पूरा नहीं हो पाता होगा। दूसरी बात आपके आसपास ऐसा कोई मैदान नहीं है जहां आप खेल सकें। अमूमन हर मैदान की हालत खस्ता है। तो चिंता की करने की बात नहीं है। राजधानी में कई ऐसे पार्क, स्टेडियम या क्लब हैैं जो शुल्क लेकर आपको शाम से लेकर रात तक खेलने की सुविधा देते हैैं। यदि ऑफिस व कारोबार के बाद खेलने का मन है तो कहां जाएं यह सोच कर हम टीवी का रिमोट या मोबाइल थाम लेते हंै। जिसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। वजह यह भी कि हम जाएं कहां। जहां देर रात को भी खेलने का मौका मिलता हो। तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। पटना में ऐसी कई एकेडमी संचालित हो रही हैं जो देर रात तक आपको खेलने की सर्विस प्रोवाइड करा रही हैैं। यदि आपका भी मन कर रहा है क्रिकेट या फुटबॉल खेलने का तो पढि़ए यह रिपोर्ट। पटना में हाल में कुछ ऐसी एकेडमी आधुनिक सुविधाओं के साथ संचालित हो रही हंै जहां क्रिकेट व फुटबॉल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अटल पथ पर टर्फ एरिना नामक एकेडमी संचालित हो रही है। यहां फुटबॉल के अलावा क्रिकेट सिखाने की भी व्यवस्था है। ग्राउंड सेवन ए साइड है, फुल मैदान नहीं है, लेकिन यहां स्पेन से एस्ट्रो टर्फ मंगाया गया है, जिस पर मौजूदा नेशनल-इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के अनुरूप बच्चों के लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था है। कोच उद्भव सिंह व सूर्यकांत हैं। उद्भव सिंह स्पेन में फुटबॉल खेलते थे, लेकिन कोरोना काल में वापस वतन लौटकर उन्होंने यहां फुटबॉल एकेडमी खोल ली। टर्फ एरिना में नाइट प्रैक्टिस की सुविधा है। एकेडमी के मुख्य प्रशिक्षक हसनैन अख्तर ने बताया कि हमारे यहां 24 घंटे एकेडमी में प्रैक्टिस की सुविधा है। यदि आप देर रात क्रिकेट का मजा लेना चाहते हैं तो बॉलिंग मशीन लगी है। आप 350 रुपये घंटे के हिसाब से भुगतान कर यहां खेल सकते हैं। एक घंटे के लिए आपको 3 बास्केट गेंदों के मिलेंगे। एक बास्केट में 30 गेंद होती है। वहीं एकेडमी से आप परमानेंट जुड़कर भी प्रशिक्षण ले सकते हैं। दानापुर के समीप जगजीवन स्टेडियम में बच्चों को क्रिकेट की ट्रेनिंग दी जाती है। यहां फुल साइज मेंटेन स्टेडियम के अलावा मैच के लिए तीन टर्फ विकेट और नेट प्रैक्टिस के लिए नौ विकेट हंै। इसमें चार टर्फ व पांच सिमेंटेड विकेट हैं। साथ ही इंडोर फैसलिटी भी है। इंडोर में दो बॉलिंग मशीन और तीन इंडोर नेट्स लगी हैं। यहां कभी भी खिलाड़ी प्रैक्टिस कर सकते हैं। सेलेक्शन प्रॉसेस नॉर्मल है। हर बच्चे की फीस 3500 रुपये महीने है, जबकि लड़कियों के लिए 1500 रुपये फीस है। एकेडमी के ऑनर उज्जवल ने बताया कि रात आठ बजे से प्रतिदिन प्रैक्टिस कर सकते हैं। इसके लिए आपको 500 रुपये प्रति घंटा देना होगा। संडे को पूरा दिन आप खेल में पसीना बहा सकते हैं। कैंब्रिज क्रिकेट एकेडमी एम्स से आगे वास्तु बिहार के पास नहरपुरा कोरियावां में चलता है। अपना ग्राउंड है। यहां हॉस्टल की भी व्यवस्था है। सुविधाओं में दो बॉलिंग मशीनें हंै। इंडोर में चार एस्ट्रो विकेट हैं और बाहर में नौ टर्फ विकेट हंै। यहां भी देर रात तक खेलने की व्यवस्था है। इस ग्राउंड पर कई डे-नाईट मैच भी खेले जाते हैं।
पटना। अगर आप दिन भर ड्यूटी करते हैैं या किसी तरह के व्यवसाय में बिजी रहते हैैं तो जाहिर तौर पर आपका क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस या इस तरह के दूसरे खेल खेलने का शौक पूरा नहीं हो पाता होगा। दूसरी बात आपके आसपास ऐसा कोई मैदान नहीं है जहां आप खेल सकें। अमूमन हर मैदान की हालत खस्ता है। तो चिंता की करने की बात नहीं है। राजधानी में कई ऐसे पार्क, स्टेडियम या क्लब हैैं जो शुल्क लेकर आपको शाम से लेकर रात तक खेलने की सुविधा देते हैैं। यदि ऑफिस व कारोबार के बाद खेलने का मन है तो कहां जाएं यह सोच कर हम टीवी का रिमोट या मोबाइल थाम लेते हंै। जिसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। वजह यह भी कि हम जाएं कहां। जहां देर रात को भी खेलने का मौका मिलता हो। तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। पटना में ऐसी कई एकेडमी संचालित हो रही हैं जो देर रात तक आपको खेलने की सर्विस प्रोवाइड करा रही हैैं। यदि आपका भी मन कर रहा है क्रिकेट या फुटबॉल खेलने का तो पढि़ए यह रिपोर्ट। पटना में हाल में कुछ ऐसी एकेडमी आधुनिक सुविधाओं के साथ संचालित हो रही हंै जहां क्रिकेट व फुटबॉल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अटल पथ पर टर्फ एरिना नामक एकेडमी संचालित हो रही है। यहां फुटबॉल के अलावा क्रिकेट सिखाने की भी व्यवस्था है। ग्राउंड सेवन ए साइड है, फुल मैदान नहीं है, लेकिन यहां स्पेन से एस्ट्रो टर्फ मंगाया गया है, जिस पर मौजूदा नेशनल-इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के अनुरूप बच्चों के लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था है। कोच उद्भव सिंह व सूर्यकांत हैं। उद्भव सिंह स्पेन में फुटबॉल खेलते थे, लेकिन कोरोना काल में वापस वतन लौटकर उन्होंने यहां फुटबॉल एकेडमी खोल ली। टर्फ एरिना में नाइट प्रैक्टिस की सुविधा है। एकेडमी के मुख्य प्रशिक्षक हसनैन अख्तर ने बताया कि हमारे यहां चौबीस घंटाटे एकेडमी में प्रैक्टिस की सुविधा है। यदि आप देर रात क्रिकेट का मजा लेना चाहते हैं तो बॉलिंग मशीन लगी है। आप तीन सौ पचास रुपयापये घंटे के हिसाब से भुगतान कर यहां खेल सकते हैं। एक घंटे के लिए आपको तीन बास्केट गेंदों के मिलेंगे। एक बास्केट में तीस गेंद होती है। वहीं एकेडमी से आप परमानेंट जुड़कर भी प्रशिक्षण ले सकते हैं। दानापुर के समीप जगजीवन स्टेडियम में बच्चों को क्रिकेट की ट्रेनिंग दी जाती है। यहां फुल साइज मेंटेन स्टेडियम के अलावा मैच के लिए तीन टर्फ विकेट और नेट प्रैक्टिस के लिए नौ विकेट हंै। इसमें चार टर्फ व पांच सिमेंटेड विकेट हैं। साथ ही इंडोर फैसलिटी भी है। इंडोर में दो बॉलिंग मशीन और तीन इंडोर नेट्स लगी हैं। यहां कभी भी खिलाड़ी प्रैक्टिस कर सकते हैं। सेलेक्शन प्रॉसेस नॉर्मल है। हर बच्चे की फीस तीन हज़ार पाँच सौ रुपयापये महीने है, जबकि लड़कियों के लिए एक हज़ार पाँच सौ रुपयापये फीस है। एकेडमी के ऑनर उज्जवल ने बताया कि रात आठ बजे से प्रतिदिन प्रैक्टिस कर सकते हैं। इसके लिए आपको पाँच सौ रुपयापये प्रति घंटा देना होगा। संडे को पूरा दिन आप खेल में पसीना बहा सकते हैं। कैंब्रिज क्रिकेट एकेडमी एम्स से आगे वास्तु बिहार के पास नहरपुरा कोरियावां में चलता है। अपना ग्राउंड है। यहां हॉस्टल की भी व्यवस्था है। सुविधाओं में दो बॉलिंग मशीनें हंै। इंडोर में चार एस्ट्रो विकेट हैं और बाहर में नौ टर्फ विकेट हंै। यहां भी देर रात तक खेलने की व्यवस्था है। इस ग्राउंड पर कई डे-नाईट मैच भी खेले जाते हैं।
27 सितंबर को कोरोना टीकाकरण का चौथा महा अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन चाहता है कि सोमवार को होने वाले इस महाअभियान में पहला डोज शत प्रतिशत हो जाए। जिले में अभी 2. 35 लाख लोगों को पहला डोज लगना बाकी है। जबकि 6. 20 लाख लोगों को दूसरा डोज लगाया जा चुका है। जिले में कुल 16 लाख 21 हजार 401 व्यक्तियों को फर्स्ट एवं सेकंड दोनों डोज लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कलेक्टर आशीषसिंह ने शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों की मीटिंग में कहा कि सोमवार को होने वाले महाअभियान में जिले के शत प्रतिशत लोगों को पहला डोज लग जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में शनिवार को जिले के सभी एसडीएम के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग भी की। बैठक में जिला पंचायत सीईओ अंकिता धाकरे, नगर निगम अपर आयुक्त मनोज पाठक, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. केसी परमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे। टारगेट पूरा करने के लिए प्रशासन ने मंदिरों, बस स्टैंड और शॉपिंग मॉल में भी वैक्सीनेशन के इंतजाम किए हैं। लेकिन इन जगहों पर बाहर से आने वाले यात्री व श्रद्धालु भी रहते हैं, ऐसे में यह चिन्हित करना चुनौती है कि जिन्हें इन जगहों पर वैक्सीन लग रहा है, वे जिले के ही हैं। जिले में 45 से अधिक उम्र के व्यक्तियों में टीकाकरण के लिए उत्साह ज्यादा है। इस आयु वर्ग के 4 लाख 90 हजार 644 व्यक्तियों ने कोरोना टीके का फर्स्ट डोज ले लिया है। इसी तरह 18 वर्ष से 44 वर्ष की आयु वर्ग के कुल 8 लाख 44 हजार 217 लोगों ने फर्स्ट डोज का टीका लगवा लिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सत्ताईस सितंबर को कोरोना टीकाकरण का चौथा महा अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन चाहता है कि सोमवार को होने वाले इस महाअभियान में पहला डोज शत प्रतिशत हो जाए। जिले में अभी दो. पैंतीस लाख लोगों को पहला डोज लगना बाकी है। जबकि छः. बीस लाख लोगों को दूसरा डोज लगाया जा चुका है। जिले में कुल सोलह लाख इक्कीस हजार चार सौ एक व्यक्तियों को फर्स्ट एवं सेकंड दोनों डोज लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कलेक्टर आशीषसिंह ने शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों की मीटिंग में कहा कि सोमवार को होने वाले महाअभियान में जिले के शत प्रतिशत लोगों को पहला डोज लग जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में शनिवार को जिले के सभी एसडीएम के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग भी की। बैठक में जिला पंचायत सीईओ अंकिता धाकरे, नगर निगम अपर आयुक्त मनोज पाठक, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. केसी परमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे। टारगेट पूरा करने के लिए प्रशासन ने मंदिरों, बस स्टैंड और शॉपिंग मॉल में भी वैक्सीनेशन के इंतजाम किए हैं। लेकिन इन जगहों पर बाहर से आने वाले यात्री व श्रद्धालु भी रहते हैं, ऐसे में यह चिन्हित करना चुनौती है कि जिन्हें इन जगहों पर वैक्सीन लग रहा है, वे जिले के ही हैं। जिले में पैंतालीस से अधिक उम्र के व्यक्तियों में टीकाकरण के लिए उत्साह ज्यादा है। इस आयु वर्ग के चार लाख नब्बे हजार छः सौ चौंतालीस व्यक्तियों ने कोरोना टीके का फर्स्ट डोज ले लिया है। इसी तरह अट्ठारह वर्ष से चौंतालीस वर्ष की आयु वर्ग के कुल आठ लाख चौंतालीस हजार दो सौ सत्रह लोगों ने फर्स्ट डोज का टीका लगवा लिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के निकले Asst Engineers AA AAO Specialist- 2020 पदों के लिए आपने अभी आवेदन नहीं किया है, तो जल्द ही आवेदन कर दीजिए। एलआईसी में निकले असिस्टेंट इंजीनियर (एई), असिस्टेंट आर्किटेक्ट (एए), असिस्टेंट एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर (एएओ) के पदों पर आवेदन की प्रक्रिया खत्म होने वाली है। इन पदों के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 15 मार्च है। इन पदों के लिए उम्मीदवारों का सेलेक्शन प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के जरिए किया जाएगा। यही नहीं, इन पदों के लिए एक साल का प्रोबेशन पीरियड होगा। सिविल, पद : 29 (अनारक्षित : 18) योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से बीटेक/बीई (सिविल) डिग्री प्राप्त होना चाहिए। इस पद के लिए संबंधित विषय में तीन साल का अनुभव होना चाहिए। इलेक्ट्रिकल, पद : 10 (अनारक्षित : 05) योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से बीटेक/बीई (इलेक्ट्रिकल) डिग्री प्राप्त होना चाहिए। इस पद के लिए संबंधित विषय में तीन साल का अनुभव होना चाहिए। आर्किटेक्ट, पद : 04 (अनारक्षित : 00) योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से बीआर्क डिग्री प्राप्त होना चाहिए। इस पद के लिए संबंधित विषय में तीन साल का अनुभव होना चाहिए। स्ट्रक्चल, पद : 04 (अनारक्षित : 02) योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से एमई/एमटेक (स्ट्रक्चल) डिग्री प्राप्त होना चाहिए। इस पद के लिए संबंधित विषय में एक साल का अनुभव भी होना चाहिए। इलेक्ट्रिकल/मेकैनिकल-एमईपी इंजीनियर्स, पद : 03 (अनारक्षित : 01) योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से बीटेक/बीई (मैकेनिकल/इलेक्ट्रकल) डिग्री प्राप्त होना चाहिए। इस पद के लिए संबंधित विषय में तीन साल का अनुभव भी होना चाहिए। सीए, पद : 40 (अनारक्षित : 16) योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से किसी भी विषय में बैचलर डिग्री पास हो। इसके साथ ही अभ्यर्थी को सीए की परीक्षा भी पास होनी चाहिए। एक्चुरियल, पद : 30 (अनारक्षित : 12) योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से किसी भी विषय में बैचलर डिग्री पास हो। इसके साथ में इस्टीट्यूट ऑफ एक्चुरियल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित परीक्षा भी पास होना चाहिए। लीगल, पद : 40 (अनारक्षित : 16) योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से एलएलबी या एलएलएम की डिग्री प्राप्त होनी चाहिए। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्र में तीन साल का अनुभव होना चाहिए। राजभाषा, पद : 08 (अनारक्षित : 04) योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से हिन्दी/अंग्रेजी/संस्कृत में बैचलर और मास्टर डिग्री प्राप्त होना चाहिए। आईटी, पद : 50 (अनारक्षित : 20) योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से कंप्यूटर साइंस/आईटी या इलेक्ट्रॉनिक्स में बीटेक डिग्री होनी चाहिए। या फिर एमसीए/एमएससी डिग्री प्राप्त होना चाहिए। 3. इन पदों के लिए वेतनमान : 57,000 रुपये प्रति माह। 4. आयु सीमा (उपरोक्त सभी पद) : न्यूनतम 21 और अधिकतम 30 वर्ष। 5. आवेदन शुल्क : इन पदों के लिए सामान्य/ईडब्ल्यूएस सभी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 700 रुपये। - इस पद के लिए एससी/एसटी/दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए 85 रुपये। - इसका भुगतान ऑनलाइन माध्यम से क्रेडिट कार्ड/डेबिट कार्ड अथवा नेट बैंकिंग के जरिए कर सकते हैं। 6. महत्वपूर्ण तिथि :
भारतीय जीवन बीमा निगम के निकले Asst Engineers AA AAO Specialist- दो हज़ार बीस पदों के लिए आपने अभी आवेदन नहीं किया है, तो जल्द ही आवेदन कर दीजिए। एलआईसी में निकले असिस्टेंट इंजीनियर , असिस्टेंट आर्किटेक्ट , असिस्टेंट एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर के पदों पर आवेदन की प्रक्रिया खत्म होने वाली है। इन पदों के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख पंद्रह मार्च है। इन पदों के लिए उम्मीदवारों का सेलेक्शन प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के जरिए किया जाएगा। यही नहीं, इन पदों के लिए एक साल का प्रोबेशन पीरियड होगा। सिविल, पद : उनतीस योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से बीटेक/बीई डिग्री प्राप्त होना चाहिए। इस पद के लिए संबंधित विषय में तीन साल का अनुभव होना चाहिए। इलेक्ट्रिकल, पद : दस योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से बीटेक/बीई डिग्री प्राप्त होना चाहिए। इस पद के लिए संबंधित विषय में तीन साल का अनुभव होना चाहिए। आर्किटेक्ट, पद : चार योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से बीआर्क डिग्री प्राप्त होना चाहिए। इस पद के लिए संबंधित विषय में तीन साल का अनुभव होना चाहिए। स्ट्रक्चल, पद : चार योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से एमई/एमटेक डिग्री प्राप्त होना चाहिए। इस पद के लिए संबंधित विषय में एक साल का अनुभव भी होना चाहिए। इलेक्ट्रिकल/मेकैनिकल-एमईपी इंजीनियर्स, पद : तीन योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से बीटेक/बीई डिग्री प्राप्त होना चाहिए। इस पद के लिए संबंधित विषय में तीन साल का अनुभव भी होना चाहिए। सीए, पद : चालीस योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से किसी भी विषय में बैचलर डिग्री पास हो। इसके साथ ही अभ्यर्थी को सीए की परीक्षा भी पास होनी चाहिए। एक्चुरियल, पद : तीस योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से किसी भी विषय में बैचलर डिग्री पास हो। इसके साथ में इस्टीट्यूट ऑफ एक्चुरियल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित परीक्षा भी पास होना चाहिए। लीगल, पद : चालीस योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से एलएलबी या एलएलएम की डिग्री प्राप्त होनी चाहिए। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्र में तीन साल का अनुभव होना चाहिए। राजभाषा, पद : आठ योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से हिन्दी/अंग्रेजी/संस्कृत में बैचलर और मास्टर डिग्री प्राप्त होना चाहिए। आईटी, पद : पचास योग्यता : किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से कंप्यूटर साइंस/आईटी या इलेक्ट्रॉनिक्स में बीटेक डिग्री होनी चाहिए। या फिर एमसीए/एमएससी डिग्री प्राप्त होना चाहिए। तीन. इन पदों के लिए वेतनमान : सत्तावन,शून्य रुपयापये प्रति माह। चार. आयु सीमा : न्यूनतम इक्कीस और अधिकतम तीस वर्ष। पाँच. आवेदन शुल्क : इन पदों के लिए सामान्य/ईडब्ल्यूएस सभी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए सात सौ रुपयापये। - इस पद के लिए एससी/एसटी/दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए पचासी रुपयापये। - इसका भुगतान ऑनलाइन माध्यम से क्रेडिट कार्ड/डेबिट कार्ड अथवा नेट बैंकिंग के जरिए कर सकते हैं। छः. महत्वपूर्ण तिथि :
एक नए शोध में पता चला है। शोध के अनुसार बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों में प्रतिरोधक क्षमता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले माइक्रो आरएनए (रिबो न्यूक्लिक एसिड) की कमी होती है। इसी कारण कोरोना के खतरे बढ़ जाते हैं। अध्ययन में यह भी पता चला कि जो बुजुर्ग और डायबिटीज मरीज शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं, उनमें माइक्रो आरएनए बढ़ने लगता है। ऐसे लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कोरोना वायरस से आसानी से मुकाबला कर सकती है। शोधकर्ताओं ने बताया कि उनका यह अध्ययन कोरोना वायरस रोकने, निगरानी और इलाज के लिए कारगर हो सकता है। कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों को होता है। महामारी में यह बात सबको मालूम है। अध्ययन से यह भी पता चला है कि नियमित रूप से व्यायाम करके माइक्रो आरएनए को बढ़ाया जा सकता है। एक स्वस्थ शरीर में व्यायाम से आठ सप्ताह में इनकी वृद्धि देखी गई है। चीन स्थित नानजिंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस पर अध्ययन किया है। इन शोधकर्ताओं ने चार तरह के माइक्रो आरएनए की पहचान की है, जिनका प्रतिरोधक क्षमता से सीधा संबंध है। इन माइक्रो आरएनए का स्वस्थ शरीर में उच्च स्तर देखा गया, जबकि बुजुर्ग और डायबिटीज के मरीजों में इसकी कमी थी। शोध कर्ताओं का नेतृत्व करने वाले डाक्टर चेन यू झांग ने बताया कि ये माइक्रो आरएनए युवाओं में उच्च स्तर पर होने के कारण ही कोरोना वायरस को प्रभावी रूप से रोकने में कारगर होते हैं।
एक नए शोध में पता चला है। शोध के अनुसार बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों में प्रतिरोधक क्षमता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले माइक्रो आरएनए की कमी होती है। इसी कारण कोरोना के खतरे बढ़ जाते हैं। अध्ययन में यह भी पता चला कि जो बुजुर्ग और डायबिटीज मरीज शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं, उनमें माइक्रो आरएनए बढ़ने लगता है। ऐसे लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कोरोना वायरस से आसानी से मुकाबला कर सकती है। शोधकर्ताओं ने बताया कि उनका यह अध्ययन कोरोना वायरस रोकने, निगरानी और इलाज के लिए कारगर हो सकता है। कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों को होता है। महामारी में यह बात सबको मालूम है। अध्ययन से यह भी पता चला है कि नियमित रूप से व्यायाम करके माइक्रो आरएनए को बढ़ाया जा सकता है। एक स्वस्थ शरीर में व्यायाम से आठ सप्ताह में इनकी वृद्धि देखी गई है। चीन स्थित नानजिंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस पर अध्ययन किया है। इन शोधकर्ताओं ने चार तरह के माइक्रो आरएनए की पहचान की है, जिनका प्रतिरोधक क्षमता से सीधा संबंध है। इन माइक्रो आरएनए का स्वस्थ शरीर में उच्च स्तर देखा गया, जबकि बुजुर्ग और डायबिटीज के मरीजों में इसकी कमी थी। शोध कर्ताओं का नेतृत्व करने वाले डाक्टर चेन यू झांग ने बताया कि ये माइक्रो आरएनए युवाओं में उच्च स्तर पर होने के कारण ही कोरोना वायरस को प्रभावी रूप से रोकने में कारगर होते हैं।
लखनऊ। यूपी सरकार में लगातार प्रशासनिक फेरबदल हो रहे है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बार आबकारी विभाग के अफसरों के तबादले के आदेश जारी करते हुए सूची जारी की है. उत्तर प्रदेश सरकार की जारी सूची में बदायूं के सहायक आबकारी आयुक्त/जिला आबकारी अधिकारी सुशील कुमार मिश्र को लखनऊ का सहायक आबकारी आयुक्त/सहायक जिला आबकारी आयुक्त बनाया गया है। प्रयागराज के आबकारी आयुक्त मुख्यालय में तैनात सहायक आबकारी आयुक्त अवधेश कुमार अब फिरोजाबाद के सहायक आबकारी आयुक्त/ जिला आबकारी अधिकारी होंगे. इसके साथ सम्भल की असमौली डिस्टलरी में तैनात सहायक आबकारी आयुक्त अतुल चन्द्र द्विवेदी को अयोध्या का सहायक आबकारी आयुक्त/जिला आबकारी आयुक्त बनाया गया है.
लखनऊ। यूपी सरकार में लगातार प्रशासनिक फेरबदल हो रहे है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बार आबकारी विभाग के अफसरों के तबादले के आदेश जारी करते हुए सूची जारी की है. उत्तर प्रदेश सरकार की जारी सूची में बदायूं के सहायक आबकारी आयुक्त/जिला आबकारी अधिकारी सुशील कुमार मिश्र को लखनऊ का सहायक आबकारी आयुक्त/सहायक जिला आबकारी आयुक्त बनाया गया है। प्रयागराज के आबकारी आयुक्त मुख्यालय में तैनात सहायक आबकारी आयुक्त अवधेश कुमार अब फिरोजाबाद के सहायक आबकारी आयुक्त/ जिला आबकारी अधिकारी होंगे. इसके साथ सम्भल की असमौली डिस्टलरी में तैनात सहायक आबकारी आयुक्त अतुल चन्द्र द्विवेदी को अयोध्या का सहायक आबकारी आयुक्त/जिला आबकारी आयुक्त बनाया गया है.
Karnataka Elections की तारीखों का ऐलान के सभी दलों ने प्रचार का काम तेज कर दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार (10. 4. 23) शाम तक बीजेपी भी राज्य में अपने प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी कर सकती है। इस बीच सूत्रों का दावा है कि कर्नाटक बीजेपी ने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में कई सीटिंग विधायकों को ड्राप किया है और कांग्रेस पार्टी के दलबलुओं को जगह दी गई है। अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि बीजेपी ने 140 सीटों के लिए प्रत्याशियों का चयन कर लिया है। उम्मीद है कि आज 40 और प्रत्याशियों का चयन किया जाएगा। सूत्रों ने दावा किया कि साल 2019 में कुमारस्वामी की सरकार गिराने में जिन कांग्रेस विधायकों ने बीजेपी की मदद की थी, उन्हें फिर से टिकट दिया गया है। अगर वास्तव में ऐसा कोई निर्णय बीजेपी की तरफ से होता है तो पार्टी के अंदर से कुछ धड़ों की तरफ से विरोध देखने को मिल सकता है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री बसवराज एस बोम्मई के शिगगांव विधानसभा सीट से ही चुनाव लड़ने की उम्मीदें जता जा रही हैं। वह साल 2008 से इस सीट पर काबिज हैं। पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के बेटे बीवाई विजयेंद्र शिकारीपुरा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। इस सीट से बीएस येदियुरप्पा चुनाव लड़ते थे। वह पिछली बार इसी सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इससे पहेल बीएस येदियुरप्पा ने दावा किया था कि उनके बेटे कांग्रेसी दिग्गज सिद्दारमैया के खिलाफ सियासी रण में उतर सकते हैं। हालांकि उन्होंने बाद में कहा कि विजयेंद्र शिकारीपुरा से ही चुनाव लड़ेंगे। पिछले हफ्ते मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि विजयेंद्र पर वरुणा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का प्रेशर था लेकिन मैंने तय किया कि वो शिकारीपुरा से चुनाव लडेंगे क्योंकि इस सीट से मुझे राजनीतिक जीवन, मान्यता और सम्मान मिला। कर्नाटक में बीजेपी के दिग्गज नेता बीएस येदियुरप्पा आठ बार शिकारीपुरा विधानसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने इस साल की शुरुआत में सियासी सन्यास की घोषणा की। सीएम बोम्मई भी यह कंफर्म कर चुके हैं कि वो शिगगांव विधानसभा सीट से ही चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि बीजेपी प्रत्याशियों की घोषणा एक-दो दिनों में कर दी जाएगी।
Karnataka Elections की तारीखों का ऐलान के सभी दलों ने प्रचार का काम तेज कर दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार शाम तक बीजेपी भी राज्य में अपने प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी कर सकती है। इस बीच सूत्रों का दावा है कि कर्नाटक बीजेपी ने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में कई सीटिंग विधायकों को ड्राप किया है और कांग्रेस पार्टी के दलबलुओं को जगह दी गई है। अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि बीजेपी ने एक सौ चालीस सीटों के लिए प्रत्याशियों का चयन कर लिया है। उम्मीद है कि आज चालीस और प्रत्याशियों का चयन किया जाएगा। सूत्रों ने दावा किया कि साल दो हज़ार उन्नीस में कुमारस्वामी की सरकार गिराने में जिन कांग्रेस विधायकों ने बीजेपी की मदद की थी, उन्हें फिर से टिकट दिया गया है। अगर वास्तव में ऐसा कोई निर्णय बीजेपी की तरफ से होता है तो पार्टी के अंदर से कुछ धड़ों की तरफ से विरोध देखने को मिल सकता है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री बसवराज एस बोम्मई के शिगगांव विधानसभा सीट से ही चुनाव लड़ने की उम्मीदें जता जा रही हैं। वह साल दो हज़ार आठ से इस सीट पर काबिज हैं। पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के बेटे बीवाई विजयेंद्र शिकारीपुरा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। इस सीट से बीएस येदियुरप्पा चुनाव लड़ते थे। वह पिछली बार इसी सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इससे पहेल बीएस येदियुरप्पा ने दावा किया था कि उनके बेटे कांग्रेसी दिग्गज सिद्दारमैया के खिलाफ सियासी रण में उतर सकते हैं। हालांकि उन्होंने बाद में कहा कि विजयेंद्र शिकारीपुरा से ही चुनाव लड़ेंगे। पिछले हफ्ते मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि विजयेंद्र पर वरुणा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का प्रेशर था लेकिन मैंने तय किया कि वो शिकारीपुरा से चुनाव लडेंगे क्योंकि इस सीट से मुझे राजनीतिक जीवन, मान्यता और सम्मान मिला। कर्नाटक में बीजेपी के दिग्गज नेता बीएस येदियुरप्पा आठ बार शिकारीपुरा विधानसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने इस साल की शुरुआत में सियासी सन्यास की घोषणा की। सीएम बोम्मई भी यह कंफर्म कर चुके हैं कि वो शिगगांव विधानसभा सीट से ही चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि बीजेपी प्रत्याशियों की घोषणा एक-दो दिनों में कर दी जाएगी।
शांति और व्यवस्था के प्रतिकूल कार्य ३०३ शांति और व्यवस्था के प्रतिकूल कार्य- । शाब्दिक अर्थ-literal meaning act prejudicial to law and order शाब्दिक परिवर्तन - verbal alteration शामक पु० [सं] - extinguisher शांतिकाम विं० [सं] - one who desires । शामत स्त्री० [अ] -ill-luck शांतिपूर्वक अव्य० [सं] - peacefully शांतिप्रद वि० [सं] - peace-giving शांतिप्रिय वि० [सं.] -peace-loving शांतिभंग पु० [सं] - breach of peace शांतिभंग करना - to break peace, to disturb peace शांतिभंग की आशंका -apprehension of breach of peace शांतिमय वि० [सं] - peaceful शांतिवाद पु० [सं] - pacifism शांतिवादी पु० [सं] - pacifist शांतिवार्ता स्त्री० [सं] - peace talk शांतिस्थापन पु० [सं] - establishing peace, bringing about peace शाइस्तगी स्त्री० [फा] - politeness शाइस्ता वि० [फा]-polite शाक पु० [सं] - vegetable शाकाहार पु० [सं] - vegetarian meal शाकाहारी वि० [सं] - vegetarian शाखा स्त्री० [सं] - branch शागिर्द पु० [फा] - disciple, pupil शाठ्य पु० [सं] - देखिये 'शठता' शान स्त्री० [फा] - magnificence, dignity, splendour शानदार वि० [फा] - magnificent, splendid शाप पु० [सं ] - curse शाब्दिक वि० [सं] - wordy, literal, शामियाना पु० [फा] -canopy शामिल वि० [अ] - joint, included शामिल करना - to include, to incorporate शामिल होना - to join, to partake शायिका स्त्री० [सं] - berth शायिका-आरक्षण (रेलवे) - reservation of berth शारदीय वि० [सं] - autumnal शारीर वि० [सं ] - relating to body or physique; पुo-anatomy शारीरिक वि० [सं] - bodily, physical, corporal, personal शारीरिक गठन-physique, physical शारीरिक चोट-bodily injury शारीरिक दोष-physical defect. शारीरिक श्रम-physical labour शालिहोत्र पु० [सं.] - vaterinary science शालिहोत्री पु०[सं] - veterinary doctor शालीन वि० [सं] - modest शालीनता स्त्री० [सं] - modesty शाश्वत वि० [सं] - eternal, perpetual, शाश्वतता स्त्री० [सं] - eternity, perpetuity शास- पत्र-charter शासक पु० [सं] - governor, ruler शासकीय वि० [सं]-relating to government शासन पु० [सं ] - rule, government शासन करना - to rule, to govern शासनकला स्त्री० [सं] -statecraft शासनकाल पुo-regime शासन को संसदीय प्रणाली- parliament. ary system of government शासनतंत्र पु० [सं] - governmental machinery शासनप्रणाली स्त्री० [सं] - system of government शासनीय वि० [सं] - relating to शासी वि० [सं] -governing शासी निकाय-governing body शास्त्र पु० [सं ] - philosophy, school of thought शास्त्रीय वि० [सं] -classical, academic शास्त्रीय संगीत-classical music शाहबलूत पु०- oak शाही विo-royal शिकंजा पु० [फा] -clamp, clutch शिकंजे में जकड़ना क्रि० स० - to clamp शिकन स्त्री०-crease, wrinkle शिकमी स्त्री० [फा] - under-tenancy शिकमी काश्त-under-tenancy ( of land) शिकमी काश्तकार-under-tenant, (of land) शिकमी पट्टा/उपपट्टा - sub-lease शिकमी पट्टेवार-sub-lease holder शिकमी पट्टे पर देना - to sub-let शिकायत स्त्री० [सं] - complaint, grouse, grievance शिकायत करना - to complain, to शिकायत करनेवाला- complaintant शिकायत की किताब-complaints book शिकायत दायर करना - to file a com - plaint शिकायती वि०-relating to complaint शिकायतों को दूर करना - to redress शिकार पु० [अ] - (1) game, hunting; (2) victim शिकारी पु० [अ] - hunter शिक्षक पु० [सं] = अध्यापक-teacher, शिक्षा स्त्री० [सं] - education, instruction, teaching, lesson शिक्षा-अनुवान-education grant. शिक्षा का माध्यम-medium of education शिक्षा-दीक्षा स्त्री० [सं]-schooling. शिक्षापद्धति = शिक्षाप्रणाली-system of शिक्षाप्रद वि० [सं] - educative, शिक्षावर्ष- academic year शिक्षा-विज्ञान/शिक्षाशास्त्र - pedology शिक्षाविद्/शिक्षाशास्त्री - educationist शिक्षु पु० [सं] - apprentice, learner शिक्षुता स्त्री० [सं] - apprenticeship शिक्ष्यमाण पु० [सं] - learner, apprentice शिखर पु० [सं] - peak, summit
शांति और व्यवस्था के प्रतिकूल कार्य तीन सौ तीन शांति और व्यवस्था के प्रतिकूल कार्य- । शाब्दिक अर्थ-literal meaning act prejudicial to law and order शाब्दिक परिवर्तन - verbal alteration शामक पुशून्य [सं] - extinguisher शांतिकाम विंशून्य [सं] - one who desires । शामत स्त्रीशून्य [अ] -ill-luck शांतिपूर्वक अव्यशून्य [सं] - peacefully शांतिप्रद विशून्य [सं] - peace-giving शांतिप्रिय विशून्य [सं.] -peace-loving शांतिभंग पुशून्य [सं] - breach of peace शांतिभंग करना - to break peace, to disturb peace शांतिभंग की आशंका -apprehension of breach of peace शांतिमय विशून्य [सं] - peaceful शांतिवाद पुशून्य [सं] - pacifism शांतिवादी पुशून्य [सं] - pacifist शांतिवार्ता स्त्रीशून्य [सं] - peace talk शांतिस्थापन पुशून्य [सं] - establishing peace, bringing about peace शाइस्तगी स्त्रीशून्य [फा] - politeness शाइस्ता विशून्य [फा]-polite शाक पुशून्य [सं] - vegetable शाकाहार पुशून्य [सं] - vegetarian meal शाकाहारी विशून्य [सं] - vegetarian शाखा स्त्रीशून्य [सं] - branch शागिर्द पुशून्य [फा] - disciple, pupil शाठ्य पुशून्य [सं] - देखिये 'शठता' शान स्त्रीशून्य [फा] - magnificence, dignity, splendour शानदार विशून्य [फा] - magnificent, splendid शाप पुशून्य [सं ] - curse शाब्दिक विशून्य [सं] - wordy, literal, शामियाना पुशून्य [फा] -canopy शामिल विशून्य [अ] - joint, included शामिल करना - to include, to incorporate शामिल होना - to join, to partake शायिका स्त्रीशून्य [सं] - berth शायिका-आरक्षण - reservation of berth शारदीय विशून्य [सं] - autumnal शारीर विशून्य [सं ] - relating to body or physique; पुo-anatomy शारीरिक विशून्य [सं] - bodily, physical, corporal, personal शारीरिक गठन-physique, physical शारीरिक चोट-bodily injury शारीरिक दोष-physical defect. शारीरिक श्रम-physical labour शालिहोत्र पुशून्य [सं.] - vaterinary science शालिहोत्री पुशून्य[सं] - veterinary doctor शालीन विशून्य [सं] - modest शालीनता स्त्रीशून्य [सं] - modesty शाश्वत विशून्य [सं] - eternal, perpetual, शाश्वतता स्त्रीशून्य [सं] - eternity, perpetuity शास- पत्र-charter शासक पुशून्य [सं] - governor, ruler शासकीय विशून्य [सं]-relating to government शासन पुशून्य [सं ] - rule, government शासन करना - to rule, to govern शासनकला स्त्रीशून्य [सं] -statecraft शासनकाल पुo-regime शासन को संसदीय प्रणाली- parliament. ary system of government शासनतंत्र पुशून्य [सं] - governmental machinery शासनप्रणाली स्त्रीशून्य [सं] - system of government शासनीय विशून्य [सं] - relating to शासी विशून्य [सं] -governing शासी निकाय-governing body शास्त्र पुशून्य [सं ] - philosophy, school of thought शास्त्रीय विशून्य [सं] -classical, academic शास्त्रीय संगीत-classical music शाहबलूत पुशून्य- oak शाही विo-royal शिकंजा पुशून्य [फा] -clamp, clutch शिकंजे में जकड़ना क्रिशून्य सशून्य - to clamp शिकन स्त्रीशून्य-crease, wrinkle शिकमी स्त्रीशून्य [फा] - under-tenancy शिकमी काश्त-under-tenancy शिकमी काश्तकार-under-tenant, शिकमी पट्टा/उपपट्टा - sub-lease शिकमी पट्टेवार-sub-lease holder शिकमी पट्टे पर देना - to sub-let शिकायत स्त्रीशून्य [सं] - complaint, grouse, grievance शिकायत करना - to complain, to शिकायत करनेवाला- complaintant शिकायत की किताब-complaints book शिकायत दायर करना - to file a com - plaint शिकायती विशून्य-relating to complaint शिकायतों को दूर करना - to redress शिकार पुशून्य [अ] - game, hunting; victim शिकारी पुशून्य [अ] - hunter शिक्षक पुशून्य [सं] = अध्यापक-teacher, शिक्षा स्त्रीशून्य [सं] - education, instruction, teaching, lesson शिक्षा-अनुवान-education grant. शिक्षा का माध्यम-medium of education शिक्षा-दीक्षा स्त्रीशून्य [सं]-schooling. शिक्षापद्धति = शिक्षाप्रणाली-system of शिक्षाप्रद विशून्य [सं] - educative, शिक्षावर्ष- academic year शिक्षा-विज्ञान/शिक्षाशास्त्र - pedology शिक्षाविद्/शिक्षाशास्त्री - educationist शिक्षु पुशून्य [सं] - apprentice, learner शिक्षुता स्त्रीशून्य [सं] - apprenticeship शिक्ष्यमाण पुशून्य [सं] - learner, apprentice शिखर पुशून्य [सं] - peak, summit
समाप्त हो चुका तो विमला ने जेत्र से भाटी दरवाज़े वाले मकान की चाबी निकाल वहां मेज़ पर रखते हुए कहा, "क्या मैं जा सकती हूँ ?" " फिर कत्र भेंट होगी ?" "जब आप उचित समझेंगे । " विमला जाने से पूर्व बहुत ही सहिष्णुता से नरगिस से मिली । विमला ने कहा, "बहिन नरगिस, मैं दिल से चाहती हूँ कि जो सुख मेरे भाग्य में नहीं था वह तुम्हें मिले ।" जब विमला चली गयी तो नरगिस ने बिहारीलाल से कहा, "आपकी यह बीवी दूसरे ढंग की है। ऐसा मालूम होता है कि इसके दिल में इस और कीना नहीं है।" "यह तुमने बाहरी पॉलिशमात्र देखा है। भीतर से वह कुछ और है ।" "जब तक वह मेरे साथ ऐसा हमदर्दी से पुर सलूक रखती है, मन में वह चाहे कैसी हो मुझे उससे क्या ? " ! " [ १२ ] चौधरी सलीमुल्लाखां और रज़िया की मां जो शायें रज़िया के विवाह से बावे हुए थे वे सब कुटाली में ही रह गयीं । सेठ धन्नाराम ने रामलाल को अपनी जायदाद से पृथक कर उनके मनसूत्रों को ज्यों का त्यों थरा रहने दिया । जब रामलाल मैनेजरी से पृथक हो घर या बैठा तब तो वैरिस्टर साहब के क्रोध का वारापार ही न रहा । वह नित्य अपनी लड़की से कर लद जाते थे । रज़िया कहती, "अनाजान, इसमें मेरा क्या कसूर है ? हालात ही बदल गये हैं। और अगर आपने मुझे पहले बताया होता कि आप इस किस्म की उम्मीद लगाये बैठे हैं तो मैं उनसे इसके मुतल्लिक पुगीड़ लेती।" पर रड़िया की मां ने एक दिन कह ही डाला, "काफिर से शादी भी की, अपना ईमान गंवाया और कुछ फायदा भो न हुआ । जाननी हो, मैंने अपने समभूषण तुम्हें दे वाले थे।" रहिया नित्य के उत्पादने हुन सुनकर थक गयी थी। उसने श्राज
समाप्त हो चुका तो विमला ने जेत्र से भाटी दरवाज़े वाले मकान की चाबी निकाल वहां मेज़ पर रखते हुए कहा, "क्या मैं जा सकती हूँ ?" " फिर कत्र भेंट होगी ?" "जब आप उचित समझेंगे । " विमला जाने से पूर्व बहुत ही सहिष्णुता से नरगिस से मिली । विमला ने कहा, "बहिन नरगिस, मैं दिल से चाहती हूँ कि जो सुख मेरे भाग्य में नहीं था वह तुम्हें मिले ।" जब विमला चली गयी तो नरगिस ने बिहारीलाल से कहा, "आपकी यह बीवी दूसरे ढंग की है। ऐसा मालूम होता है कि इसके दिल में इस और कीना नहीं है।" "यह तुमने बाहरी पॉलिशमात्र देखा है। भीतर से वह कुछ और है ।" "जब तक वह मेरे साथ ऐसा हमदर्दी से पुर सलूक रखती है, मन में वह चाहे कैसी हो मुझे उससे क्या ? " ! " [ बारह ] चौधरी सलीमुल्लाखां और रज़िया की मां जो शायें रज़िया के विवाह से बावे हुए थे वे सब कुटाली में ही रह गयीं । सेठ धन्नाराम ने रामलाल को अपनी जायदाद से पृथक कर उनके मनसूत्रों को ज्यों का त्यों थरा रहने दिया । जब रामलाल मैनेजरी से पृथक हो घर या बैठा तब तो वैरिस्टर साहब के क्रोध का वारापार ही न रहा । वह नित्य अपनी लड़की से कर लद जाते थे । रज़िया कहती, "अनाजान, इसमें मेरा क्या कसूर है ? हालात ही बदल गये हैं। और अगर आपने मुझे पहले बताया होता कि आप इस किस्म की उम्मीद लगाये बैठे हैं तो मैं उनसे इसके मुतल्लिक पुगीड़ लेती।" पर रड़िया की मां ने एक दिन कह ही डाला, "काफिर से शादी भी की, अपना ईमान गंवाया और कुछ फायदा भो न हुआ । जाननी हो, मैंने अपने समभूषण तुम्हें दे वाले थे।" रहिया नित्य के उत्पादने हुन सुनकर थक गयी थी। उसने श्राज
21 सितंबर को कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव दुनिया छोड़कर चले गए. राजू पिछले 42 दिनों से एम्स में एडमिट थे. हर कोई उम्मीद कर रहा था कि राजू सर्वाइव कर जाएंगे. मगर इसके उलट हुआ. राजू ने 42 दिनों बाद जिदंगी से हार मान ली और आखिरी सांस ली. राजू के निधन से अमिताभ बच्चन भी दुखी हैं. राजू को कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव बनाने में बिग बी का अहम योगदान है. अमिताभ ने अपने ब्लॉग में राजू के लिए इमोशनल नोट लिखा है. बिग बी कॉमेडियन की याद में लिखते हैं- एक और सहयोगी दोस्त, क्रिएटिव आर्टिस्ट ने हमारा साथ छोड़ दिया. अचानक से बीमार हुए और अपनी क्रिएटिविटी पूरी किए बिना समय से पहले चले गए. अमिताभ ने ब्लॉग में बताया कि कॉमेडियन के परिजनों के कहने पर वे हर रोज सुबह राजू श्रीवास्तव को होश में लाने के लिए वॉयस नोट्स भेजते थे. उन वायस नोट्स को राजू श्रीवास्तव के कानों के पास प्ले किया जाता था, उन्हें अमिताभ की आवाज सुनाई जाती थी. एक बार तो राजू ने आवाज सुनने के बाद अपनी आंख थोड़ी सी खोली भी थी. मगर फिर राजू ने हमेशा के लिए अपनी आंखें बंद कर ली. अमिताभ बच्चन ने लिखा कि राजू श्रीवास्तव को उनकी कॉमिक टाइमिंग और ह्यूमर के लिए हमेशा याद किया जाएगा. बिग बी लिखते हैं- राजू का ह्यूमर यूनीक था, ओपन फ्रैंक और मजाक से भरा हुआ था. वे अब स्वर्ग से मुस्कुरा रहे होंगे और भगवान को भी हंसने की वजह मिल गई होगी. अमिताभ बच्चन का ये पोस्ट दिल छूने वाला है. बिग बी ने अपनी तरफ से राजू की सेहत में सुधार लाने की पूरी कोशिश की थी. मगर राजू को तब भी नहीं बचाया जा सका. पिछले महीने रिपोर्ट्स आई थीं कि अमिताभ ने राजू के परिवार को वॉयस नोट्स भेजे हैं. तब राजू कोमा में थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वॉयस नोट में अमिताभ बोल रहे थे- बहुत हुआ राजू, उठो राजू उठो, हम सभी को हंसना सिखाते रहो. राजू को होश में लाने की डॉक्टर्स और परिवार ने भरपूर कोशिश की थी. 10 अगस्त को जिम में वर्कआउट करते हुए राजू को कार्डियक अरेस्ट आया था. जिसके बाद वे 42 दिनों तक एम्स में एडमिट रहे थे. परिवार को आस थी कि राजू बच जाएंगे, मगर सबको रुलाकर कॉमेडियन हमेशा के लिए अलविदा कह गए. राजू अमिताभ के बहुत बड़े फैन थे. वे अमिताभ की मिमिक्री करते थे. अमिताभ की मिमिक्री ने ही राजू को स्टार बनाया. राजू ने अमिताभ के स्टाइल, लहजे और एक्सप्रेशंस को बारीकी से पकड़ लिया था. मुंबई आने पर जब राजू दर दर भटक रहे थे तब अमिताभ की मिमिक्री कर उनकी किस्मत बदली थी. राजू ने कहा भी था कि बच्चन साहब की वजह से उन्हें रोजी रोटी मिली थी. राजू ने कई दफा अपने आइडल अमिताभ बच्चन के सामने परफॉर्म किया था. अमिताभ भी राजू की मिमिक्री और कॉमेडी से इंप्रेस थे.
इक्कीस सितंबर को कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव दुनिया छोड़कर चले गए. राजू पिछले बयालीस दिनों से एम्स में एडमिट थे. हर कोई उम्मीद कर रहा था कि राजू सर्वाइव कर जाएंगे. मगर इसके उलट हुआ. राजू ने बयालीस दिनों बाद जिदंगी से हार मान ली और आखिरी सांस ली. राजू के निधन से अमिताभ बच्चन भी दुखी हैं. राजू को कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव बनाने में बिग बी का अहम योगदान है. अमिताभ ने अपने ब्लॉग में राजू के लिए इमोशनल नोट लिखा है. बिग बी कॉमेडियन की याद में लिखते हैं- एक और सहयोगी दोस्त, क्रिएटिव आर्टिस्ट ने हमारा साथ छोड़ दिया. अचानक से बीमार हुए और अपनी क्रिएटिविटी पूरी किए बिना समय से पहले चले गए. अमिताभ ने ब्लॉग में बताया कि कॉमेडियन के परिजनों के कहने पर वे हर रोज सुबह राजू श्रीवास्तव को होश में लाने के लिए वॉयस नोट्स भेजते थे. उन वायस नोट्स को राजू श्रीवास्तव के कानों के पास प्ले किया जाता था, उन्हें अमिताभ की आवाज सुनाई जाती थी. एक बार तो राजू ने आवाज सुनने के बाद अपनी आंख थोड़ी सी खोली भी थी. मगर फिर राजू ने हमेशा के लिए अपनी आंखें बंद कर ली. अमिताभ बच्चन ने लिखा कि राजू श्रीवास्तव को उनकी कॉमिक टाइमिंग और ह्यूमर के लिए हमेशा याद किया जाएगा. बिग बी लिखते हैं- राजू का ह्यूमर यूनीक था, ओपन फ्रैंक और मजाक से भरा हुआ था. वे अब स्वर्ग से मुस्कुरा रहे होंगे और भगवान को भी हंसने की वजह मिल गई होगी. अमिताभ बच्चन का ये पोस्ट दिल छूने वाला है. बिग बी ने अपनी तरफ से राजू की सेहत में सुधार लाने की पूरी कोशिश की थी. मगर राजू को तब भी नहीं बचाया जा सका. पिछले महीने रिपोर्ट्स आई थीं कि अमिताभ ने राजू के परिवार को वॉयस नोट्स भेजे हैं. तब राजू कोमा में थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वॉयस नोट में अमिताभ बोल रहे थे- बहुत हुआ राजू, उठो राजू उठो, हम सभी को हंसना सिखाते रहो. राजू को होश में लाने की डॉक्टर्स और परिवार ने भरपूर कोशिश की थी. दस अगस्त को जिम में वर्कआउट करते हुए राजू को कार्डियक अरेस्ट आया था. जिसके बाद वे बयालीस दिनों तक एम्स में एडमिट रहे थे. परिवार को आस थी कि राजू बच जाएंगे, मगर सबको रुलाकर कॉमेडियन हमेशा के लिए अलविदा कह गए. राजू अमिताभ के बहुत बड़े फैन थे. वे अमिताभ की मिमिक्री करते थे. अमिताभ की मिमिक्री ने ही राजू को स्टार बनाया. राजू ने अमिताभ के स्टाइल, लहजे और एक्सप्रेशंस को बारीकी से पकड़ लिया था. मुंबई आने पर जब राजू दर दर भटक रहे थे तब अमिताभ की मिमिक्री कर उनकी किस्मत बदली थी. राजू ने कहा भी था कि बच्चन साहब की वजह से उन्हें रोजी रोटी मिली थी. राजू ने कई दफा अपने आइडल अमिताभ बच्चन के सामने परफॉर्म किया था. अमिताभ भी राजू की मिमिक्री और कॉमेडी से इंप्रेस थे.
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) बैठक में रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोत्तरी को मंजूरी दी है. इसके तहत गेंहू की एमएसपी में प्रति क्विंटल 85 रुपए की वृद्धि की गई है, जबकि चना में प्रति क्विंटल 255 रुपए की और मसूर में 325 रुपए की बढ़ोत्तरी की गई है. यह बढ़ोत्तरी वर्ष 2019-20 के लिए तय एमएसपी को आधार मानते हुए की गई है. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) बैठक में इस बढ़ोत्तरी को मंजूरी दी गई. केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार की यह पहल 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में उठाया गया एक कदम है. इसके साथ ही किसानों को किसान सम्मान निधि के तहत प्रति वर्ष छह हजार रुपए दिए जा रहे है. इसके तहत ज्यादातर किसानों को अब तक दो से तीन किश्तें मिल प्राप्त हो चुकी है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सीसीईए ने विपणन सत्र 2020-21 के लिए रबी सीजन की कुल पांच फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी को मंजूरी दी है. इसके तहत गेंहू और जौ में 85 रुपए की बढ़ोत्तरी की गई है. इसके तहत गेंहू का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल 1840 रुपए से बढ़ाकर 1925 कर दिया है. इसी तरह जौ की एमएसपी को भी प्रति क्विंटल 1440 रुपए से बढ़ाकर 1525 रुपए कर दिया गया है.
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति बैठक में रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी को मंजूरी दी है. इसके तहत गेंहू की एमएसपी में प्रति क्विंटल पचासी रुपयापए की वृद्धि की गई है, जबकि चना में प्रति क्विंटल दो सौ पचपन रुपयापए की और मसूर में तीन सौ पच्चीस रुपयापए की बढ़ोत्तरी की गई है. यह बढ़ोत्तरी वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस के लिए तय एमएसपी को आधार मानते हुए की गई है. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति बैठक में इस बढ़ोत्तरी को मंजूरी दी गई. केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार की यह पहल दो हज़ार बाईस तक किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में उठाया गया एक कदम है. इसके साथ ही किसानों को किसान सम्मान निधि के तहत प्रति वर्ष छह हजार रुपए दिए जा रहे है. इसके तहत ज्यादातर किसानों को अब तक दो से तीन किश्तें मिल प्राप्त हो चुकी है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सीसीईए ने विपणन सत्र दो हज़ार बीस-इक्कीस के लिए रबी सीजन की कुल पांच फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी को मंजूरी दी है. इसके तहत गेंहू और जौ में पचासी रुपयापए की बढ़ोत्तरी की गई है. इसके तहत गेंहू का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल एक हज़ार आठ सौ चालीस रुपयापए से बढ़ाकर एक हज़ार नौ सौ पच्चीस कर दिया है. इसी तरह जौ की एमएसपी को भी प्रति क्विंटल एक हज़ार चार सौ चालीस रुपयापए से बढ़ाकर एक हज़ार पाँच सौ पच्चीस रुपयापए कर दिया गया है.
जयपुर । कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी की एक टीवी डिबेट के बाद हार्टअटैक से मौत हो गई थी। अब यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसे लेकर राजस्थान में यवा कांग्रेस की ओर से संबित पात्रा पर अमर्यादित, जातिगत और धार्मिक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही राजस्थान प्रदेश युवा कांग्रेस के नेताओं ने उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कराया है। बताया जा रहा है कि भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा के खिलाफ 33 जिलों में 39 जगह पर एफआईआर दर्ज करवाई गई है। एफआईआर में कहा गया है कि एक टीवी डिबेट के संबित पात्रा ने राजीव त्यागी को इंगित करते हुए अमर्यादित, जातिगत एवं धार्मिक टिप्पणी की। इससे त्यागी पर बेहद गहरा असर पड़ा। उस डिबेट के कुछ वक्त बाद ही हार्टअटैक होने से उनकी मृत्यु हो गई। यह रिपोर्ट संबंधित जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष और विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष द्वारा करवाई गई है। राजस्थान प्रदेश युवा कांग्रेस द्वारा ये मामला गैरइरादतन हत्या का माना गया है। बता दें कि कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी का बुधवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। अटैक से कुछ देर पहले ही वे एक टीवी चैनल पर डिबेट में शामिल हुए थे। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें गाजियाबाद के एक अस्पताल ले जाया गया था। टीवी डिबेट में शामिल होने की जानकारी राजीव त्यागी ने खुद अपने ट्विटर हैंडल पर दी थी।
जयपुर । कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी की एक टीवी डिबेट के बाद हार्टअटैक से मौत हो गई थी। अब यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसे लेकर राजस्थान में यवा कांग्रेस की ओर से संबित पात्रा पर अमर्यादित, जातिगत और धार्मिक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही राजस्थान प्रदेश युवा कांग्रेस के नेताओं ने उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कराया है। बताया जा रहा है कि भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा के खिलाफ तैंतीस जिलों में उनतालीस जगह पर एफआईआर दर्ज करवाई गई है। एफआईआर में कहा गया है कि एक टीवी डिबेट के संबित पात्रा ने राजीव त्यागी को इंगित करते हुए अमर्यादित, जातिगत एवं धार्मिक टिप्पणी की। इससे त्यागी पर बेहद गहरा असर पड़ा। उस डिबेट के कुछ वक्त बाद ही हार्टअटैक होने से उनकी मृत्यु हो गई। यह रिपोर्ट संबंधित जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष और विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष द्वारा करवाई गई है। राजस्थान प्रदेश युवा कांग्रेस द्वारा ये मामला गैरइरादतन हत्या का माना गया है। बता दें कि कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी का बुधवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। अटैक से कुछ देर पहले ही वे एक टीवी चैनल पर डिबेट में शामिल हुए थे। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें गाजियाबाद के एक अस्पताल ले जाया गया था। टीवी डिबेट में शामिल होने की जानकारी राजीव त्यागी ने खुद अपने ट्विटर हैंडल पर दी थी।
बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने अपने पुराने पार्टनर सुशील मोदी की बातों को हंसी में उड़ा दिया. सुशील मोदी ने बोचहां में हार के लिए एनडीए में तालमेल नहीं होने की बात कही थी जिसे सीएम ने कोई तवज्जो नहीं दी. बोचहां चुनाव (Bochaha by election) में एनडीए में तालमेल नहीं होने की वजह से बीजेपी हारी. बोचहां में बीजेपी का आधार वोट खिसक गया बीजेपी इसपर समीक्षा करेगी. बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद सुशील (Sushil modi) मोदी के इस बयान को सीएम नीतीश कुमार ने हंसी में टाल दिया है. नीतीश कुमार से जब बिहार में भूमिहारों की नाराजगी पर सवाल किया तो सीएम नीतीश ने सवाल को टाल दिया. उनसे पूछा गया कि सुशील मोदी ने सवर्णों के एक वर्ग के एनडीए से नाराज होने की बात कही है. सीएम नीतीश ने सवाल पर मुस्कुराते हुए कहा कि अब वही न बताएंगे. दरअसल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बिहार दौरे से पहले बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ एक के बाद एक चार ट्वीट कर कहा था कि बिहार विधान परिषद की 24 सीटों पर हुए चुनाव में एनडीए को दस सीटों का नुकसान और फिर विधानसभा के बोचहा उपचुनाव में एनडीए उम्मीदवार का 36 हजार मतों के अंतर से पराजित होना हमारे लिए गहन आत्मचिंतन का विषय है. इसके साथ उन्होंने तीन और ट्वीट किए-बोचहा विधानसभा क्षेत्र की एक-एक पंचायत में एनडीए विधायकों-मंत्रियों ने जनता से सम्पर्क किया था। पूरी ताकत लगायी गई थी. सरकार ने भी सभी वर्गों के विकास के लिए काम किये और सबका विश्वास जीतने की कोशिश की.इसके बाद भी एनडीए के मजबूत जनाधार अतिपिछड़ा वर्ग और सवर्ण समाज के एक वर्ग का वोट खिसक जाना अप्रत्याशित था. इसके बाद सुशील मोदी ने फिर ट्वीट कियाइसके पीछे क्या नाराजगी थी, इस पर एनडीए अवश्य मंथन करेगा. बिहार विधान परिषद की 24 सीटों पर चुनाव और विधानसभा की बोचहा सीट पर उपचुनाव में एनडीए के घटक दलों के बीच 2019 जैसा तालमेल क्यों नहीं रहा, इसकी भी समीक्षा होगी. इसके बाद उन्होंने एक ओर ट्वीट कर कहा कि वर्ष 2019 के संसदीय चुनाव में एनडीए के घटक दलों ने पूरे तालमेल से एक-दूसरे को जिताने के लिए मेहनत की थी, जिससे हमारा स्ट्राइक रेट अधिकतम था. गठबंधन के खाते में राज्य की 40 में से 39 सीटें आयी थीं, जबकि आरजेडी सीटें हार गई थी. इसके बाद 23 अप्रैल को अमित शाह ने भोजपुर में बाबू वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव कार्यक्रम में सुशील मोदी की तारीफ की थी और कहा था कि नीतीश कुमार और सुशील मोदी की जोड़ी बिहार को बीमारू राज्य से विकसीत राज्य की तरफ ले गए.
बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने अपने पुराने पार्टनर सुशील मोदी की बातों को हंसी में उड़ा दिया. सुशील मोदी ने बोचहां में हार के लिए एनडीए में तालमेल नहीं होने की बात कही थी जिसे सीएम ने कोई तवज्जो नहीं दी. बोचहां चुनाव में एनडीए में तालमेल नहीं होने की वजह से बीजेपी हारी. बोचहां में बीजेपी का आधार वोट खिसक गया बीजेपी इसपर समीक्षा करेगी. बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद सुशील मोदी के इस बयान को सीएम नीतीश कुमार ने हंसी में टाल दिया है. नीतीश कुमार से जब बिहार में भूमिहारों की नाराजगी पर सवाल किया तो सीएम नीतीश ने सवाल को टाल दिया. उनसे पूछा गया कि सुशील मोदी ने सवर्णों के एक वर्ग के एनडीए से नाराज होने की बात कही है. सीएम नीतीश ने सवाल पर मुस्कुराते हुए कहा कि अब वही न बताएंगे. दरअसल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बिहार दौरे से पहले बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ एक के बाद एक चार ट्वीट कर कहा था कि बिहार विधान परिषद की चौबीस सीटों पर हुए चुनाव में एनडीए को दस सीटों का नुकसान और फिर विधानसभा के बोचहा उपचुनाव में एनडीए उम्मीदवार का छत्तीस हजार मतों के अंतर से पराजित होना हमारे लिए गहन आत्मचिंतन का विषय है. इसके साथ उन्होंने तीन और ट्वीट किए-बोचहा विधानसभा क्षेत्र की एक-एक पंचायत में एनडीए विधायकों-मंत्रियों ने जनता से सम्पर्क किया था। पूरी ताकत लगायी गई थी. सरकार ने भी सभी वर्गों के विकास के लिए काम किये और सबका विश्वास जीतने की कोशिश की.इसके बाद भी एनडीए के मजबूत जनाधार अतिपिछड़ा वर्ग और सवर्ण समाज के एक वर्ग का वोट खिसक जाना अप्रत्याशित था. इसके बाद सुशील मोदी ने फिर ट्वीट कियाइसके पीछे क्या नाराजगी थी, इस पर एनडीए अवश्य मंथन करेगा. बिहार विधान परिषद की चौबीस सीटों पर चुनाव और विधानसभा की बोचहा सीट पर उपचुनाव में एनडीए के घटक दलों के बीच दो हज़ार उन्नीस जैसा तालमेल क्यों नहीं रहा, इसकी भी समीक्षा होगी. इसके बाद उन्होंने एक ओर ट्वीट कर कहा कि वर्ष दो हज़ार उन्नीस के संसदीय चुनाव में एनडीए के घटक दलों ने पूरे तालमेल से एक-दूसरे को जिताने के लिए मेहनत की थी, जिससे हमारा स्ट्राइक रेट अधिकतम था. गठबंधन के खाते में राज्य की चालीस में से उनतालीस सीटें आयी थीं, जबकि आरजेडी सीटें हार गई थी. इसके बाद तेईस अप्रैल को अमित शाह ने भोजपुर में बाबू वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव कार्यक्रम में सुशील मोदी की तारीफ की थी और कहा था कि नीतीश कुमार और सुशील मोदी की जोड़ी बिहार को बीमारू राज्य से विकसीत राज्य की तरफ ले गए.
भूजल का गिरता स्तर पर्यावरणविदों के साथ समाज के सभी लोगों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। बहते पानी के स्रोतों का उपयोग सब नहीं कर सकते, ऐसे में भूजल की महत्ता और भी बढ़ जाती है। मौसम और भू-जल का संबंध लगभग प्रतिकूल होता है क्योंकि गर्मी के दिनों में जमीन के अंदर का पानी ठंडा और ठंड के मौसम में गर्म होता है। भूजल सस्ता और सुविधाजनक भी है। सतही पानी की तरह इसके प्रदूषित होने का डर भी नहीं होता है। भूजल, प्राकृतिक बरसात और नदियों के जल का जमीन के नीचे रिसाव होने से एकत्र होता है। इसकी अपनी एक पारिस्थितिकी होती है। समुद्री क्षेत्रों में जलस्तर गिरने से खारे जल का रिसाव जमीन में शुरू हो जाता है जिससे वहां का पानी नमकीन हो सकता है। जल के प्रदूषित होने का एक बड़ा कारण खेती में प्रयुक्त हो रहे कीटनाशक भी हैं जो पानी के साथ भूगर्भ जल में मिलकर उसे प्रदूषित करते हैं। ऐसे में लगातार गिरते जल स्तर और पानी की बढ़ती हुई मांग के बीच आवाज उठ रही है कि नदियों को आपस में जोड़ा जाए लेकिन पर्यावरणविदों के अनुसार 'नदी जोड़ो परियोजना' हितकारी नहीं है। इसका दूसरा पहलू यह है कि इससे मानव विस्थापन की प्रचंड समस्या भी सामने आएगी। भारत में वैसे भी पुनर्वास की स्थिति बहुत बदतर है। हम अपनी जीवनशैली और थोड़ी आवश्यकताओं को संतुलित करके जल का संरक्षण कर सकते हैं। गांव का गरीब आदमी जहां पसीने से सनी हुई कमीज दो-तीन दिन पहनता है वहीं शहरों और महानगरों में लोग अपने बगीचे में लगी विदेशी घास को सींचने और लग्जरी गाड़ियों की धुलाई में सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद कर देते हैं। वाशिंग मशीनों में हजारों लीटर पानी रोज बर्बाद हो जाता है। यदि छोटे-छोटे रोजमर्रा के कामों में हम थोड़ी-सी सावधानी बरत लें तो जल संरक्षण हो सकता है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यदि जल नहीं होगा तो हमारा कल भी नहीं होगा।
भूजल का गिरता स्तर पर्यावरणविदों के साथ समाज के सभी लोगों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। बहते पानी के स्रोतों का उपयोग सब नहीं कर सकते, ऐसे में भूजल की महत्ता और भी बढ़ जाती है। मौसम और भू-जल का संबंध लगभग प्रतिकूल होता है क्योंकि गर्मी के दिनों में जमीन के अंदर का पानी ठंडा और ठंड के मौसम में गर्म होता है। भूजल सस्ता और सुविधाजनक भी है। सतही पानी की तरह इसके प्रदूषित होने का डर भी नहीं होता है। भूजल, प्राकृतिक बरसात और नदियों के जल का जमीन के नीचे रिसाव होने से एकत्र होता है। इसकी अपनी एक पारिस्थितिकी होती है। समुद्री क्षेत्रों में जलस्तर गिरने से खारे जल का रिसाव जमीन में शुरू हो जाता है जिससे वहां का पानी नमकीन हो सकता है। जल के प्रदूषित होने का एक बड़ा कारण खेती में प्रयुक्त हो रहे कीटनाशक भी हैं जो पानी के साथ भूगर्भ जल में मिलकर उसे प्रदूषित करते हैं। ऐसे में लगातार गिरते जल स्तर और पानी की बढ़ती हुई मांग के बीच आवाज उठ रही है कि नदियों को आपस में जोड़ा जाए लेकिन पर्यावरणविदों के अनुसार 'नदी जोड़ो परियोजना' हितकारी नहीं है। इसका दूसरा पहलू यह है कि इससे मानव विस्थापन की प्रचंड समस्या भी सामने आएगी। भारत में वैसे भी पुनर्वास की स्थिति बहुत बदतर है। हम अपनी जीवनशैली और थोड़ी आवश्यकताओं को संतुलित करके जल का संरक्षण कर सकते हैं। गांव का गरीब आदमी जहां पसीने से सनी हुई कमीज दो-तीन दिन पहनता है वहीं शहरों और महानगरों में लोग अपने बगीचे में लगी विदेशी घास को सींचने और लग्जरी गाड़ियों की धुलाई में सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद कर देते हैं। वाशिंग मशीनों में हजारों लीटर पानी रोज बर्बाद हो जाता है। यदि छोटे-छोटे रोजमर्रा के कामों में हम थोड़ी-सी सावधानी बरत लें तो जल संरक्षण हो सकता है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यदि जल नहीं होगा तो हमारा कल भी नहीं होगा।
कार्यालय में आग सुरक्षा के लिए निर्देशकाम के परिसर में आग या धुआं के जोखिम के दौरान कर्मियों की कार्रवाई को नियंत्रित करता है निर्देश की सामग्री कर्मचारियों की निकासी और कंपनी की भौतिक संपत्तियों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के कर्तव्यों को नियुक्त करती है। आग सुरक्षा मैनुअल कहता है,अगर कारक हैं जो आग की उपस्थिति (धुएं की धुंध, जल, धुआं, कमरे में बढ़ते तापमान, कालिख का पता लगाने और खुली आग का पता लगाने) विशेषताएँ हैं, संगठन के कर्मियों को चाहिएः - बिना किसी देरी के आग विभाग को बुलाओफोन "01" या "112" (मोबाइल ऑपरेटरों के साथ) पर संरक्षण, उनके निर्देशांक (पता, कंपनी का नाम, स्थान और आग का पता लगाने के साथ-साथ अपने व्यक्तिगत डेटा और टेलीफोन नंबर) संवाद; - बिजली ग्रिड से परिचालन करने वाले सभी उपकरणों को डिस्कनेक्ट करें; - आग की परिसमापन शुरू करने के लिए; - कर्मचारियों और उच्च अधिकारियों की आग के बारे में सूचित करने के लिए; - अगर खतरे का संकेत है, तो उद्यम में निकासी योजना के अनुसार तत्काल परिसर को छोड़ दें। अग्नि सुरक्षा पर मानक निर्देश संगठन के प्रमुख के कार्यों को नियंत्रित करता है। संगठन की इकाई का प्रमुख, जो आग के बारे में सीखा है, उसे बाध्य किया गया हैः - "01" या "मोबाइल" ऑपरेटर को फोन करके फायर ब्रिगेड को बुलाओ; - घटना के बारे में सभी कामगारों और उद्यम के प्रबंधन को सूचित करने के लिए; - व्यक्ति को अग्नि सुरक्षा के लिए साइट पर (संगठन में) जिम्मेदार व्यक्ति को आग की रिपोर्ट करें; - अग्निशामकों के आने से पहले, स्वतंत्र रूप से आग के स्रोत को खत्म करने, कर्मचारियों के निकास, मूल्यवान संपत्ति और दस्तावेज़ीकरण को समाप्त करने के लिए संभवतः कदम उठाने के लिए आवश्यक है। अग्नि सुरक्षा के लिए विशिष्ट निर्देश इस सुविधा पर अग्नि सुरक्षा के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को निर्धारित करते हैं, जो दुर्घटना के दृश्य के आगमन पर बाध्य हैः आग की घटना के बारे में आग विभाग को सूचित करने के लिए, और घटना के बारे में संगठन के प्रमुख (संस्थापक) को सूचित करने के लिए; - लोगों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए खतरे के मामले में, उन्हें बचाने के लिए उपाय करें और सभी उपलब्ध साधनों से उन्हें निकालना; - आग को नष्ट करने के उद्देश्य से, इमारत में किसी भी काम को तत्काल रोक देना; - एक बिजली आउटेज बनाने और परिसर में आग और धुआं रोकने; - खतरे के क्षेत्र से निकाल सभी कर्मियों और अन्य व्यक्ति जो आग के उन्मूलन में भाग नहीं लेते हैं; - आग सेवा की गणना के आगमन से पहले आग को खत्म करने के उपायों का प्रबंधन करने के लिए; - एक साथ आग के परिसमापन के साथ, उद्यम से कर्मचारी और भौतिक संपत्ति को खाली करने के लिए आपातकालीन उपाय करें; - सुनिश्चित करें कि अग्नि सुरक्षा आवश्यकताओं को उन कर्मचारियों द्वारा पूरा किया जाता है जो आग के उन्मूलन में भाग लेते हैं; - साइट पर पहुंचने वाले अग्निशामकों से मिलें, और आग के प्रवेश द्वार का सबसे छोटा रास्ता बताएं।
कार्यालय में आग सुरक्षा के लिए निर्देशकाम के परिसर में आग या धुआं के जोखिम के दौरान कर्मियों की कार्रवाई को नियंत्रित करता है निर्देश की सामग्री कर्मचारियों की निकासी और कंपनी की भौतिक संपत्तियों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के कर्तव्यों को नियुक्त करती है। आग सुरक्षा मैनुअल कहता है,अगर कारक हैं जो आग की उपस्थिति विशेषताएँ हैं, संगठन के कर्मियों को चाहिएः - बिना किसी देरी के आग विभाग को बुलाओफोन "एक" या "एक सौ बारह" पर संरक्षण, उनके निर्देशांक संवाद; - बिजली ग्रिड से परिचालन करने वाले सभी उपकरणों को डिस्कनेक्ट करें; - आग की परिसमापन शुरू करने के लिए; - कर्मचारियों और उच्च अधिकारियों की आग के बारे में सूचित करने के लिए; - अगर खतरे का संकेत है, तो उद्यम में निकासी योजना के अनुसार तत्काल परिसर को छोड़ दें। अग्नि सुरक्षा पर मानक निर्देश संगठन के प्रमुख के कार्यों को नियंत्रित करता है। संगठन की इकाई का प्रमुख, जो आग के बारे में सीखा है, उसे बाध्य किया गया हैः - "एक" या "मोबाइल" ऑपरेटर को फोन करके फायर ब्रिगेड को बुलाओ; - घटना के बारे में सभी कामगारों और उद्यम के प्रबंधन को सूचित करने के लिए; - व्यक्ति को अग्नि सुरक्षा के लिए साइट पर जिम्मेदार व्यक्ति को आग की रिपोर्ट करें; - अग्निशामकों के आने से पहले, स्वतंत्र रूप से आग के स्रोत को खत्म करने, कर्मचारियों के निकास, मूल्यवान संपत्ति और दस्तावेज़ीकरण को समाप्त करने के लिए संभवतः कदम उठाने के लिए आवश्यक है। अग्नि सुरक्षा के लिए विशिष्ट निर्देश इस सुविधा पर अग्नि सुरक्षा के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को निर्धारित करते हैं, जो दुर्घटना के दृश्य के आगमन पर बाध्य हैः आग की घटना के बारे में आग विभाग को सूचित करने के लिए, और घटना के बारे में संगठन के प्रमुख को सूचित करने के लिए; - लोगों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए खतरे के मामले में, उन्हें बचाने के लिए उपाय करें और सभी उपलब्ध साधनों से उन्हें निकालना; - आग को नष्ट करने के उद्देश्य से, इमारत में किसी भी काम को तत्काल रोक देना; - एक बिजली आउटेज बनाने और परिसर में आग और धुआं रोकने; - खतरे के क्षेत्र से निकाल सभी कर्मियों और अन्य व्यक्ति जो आग के उन्मूलन में भाग नहीं लेते हैं; - आग सेवा की गणना के आगमन से पहले आग को खत्म करने के उपायों का प्रबंधन करने के लिए; - एक साथ आग के परिसमापन के साथ, उद्यम से कर्मचारी और भौतिक संपत्ति को खाली करने के लिए आपातकालीन उपाय करें; - सुनिश्चित करें कि अग्नि सुरक्षा आवश्यकताओं को उन कर्मचारियों द्वारा पूरा किया जाता है जो आग के उन्मूलन में भाग लेते हैं; - साइट पर पहुंचने वाले अग्निशामकों से मिलें, और आग के प्रवेश द्वार का सबसे छोटा रास्ता बताएं।
माना है । जो सर्वमान्य है और भाई वीर सिंह भी इस मत के हैं । कुछ विद्वानों के अनुसार इनके पिता का नाम दातार चन्द न होकर ईशर दास था । इतना तो निश्चित ही है कि वे गुरु अमरदास जी के भतीजे थे । जो सिख धर्म की गुरु परम्परा के तीसरे गुरु बने । गुरु जी के चाचा भानु के घर दो बालक दातार चन्द और ईशर दाम पैदा हुए। इसी ईशर दास के इकलौते पुत्र भाई गुरदास जी हैं । । भले ही गुरदास जी के माता पिता का नाम निश्चित तौर पर नहीं मिलता, तो भी इतना तो स्पष्ट ही है कि भाई गुरदास जी के पूर्वज भल्ले खत्री थे जो जिला अमृतसर के 'बासर की' गांव के निवासी थे इन्हीं की वंश परंपरा में गुरु अमरदा हुए और ईशर दास और दातार चन्द इनके चाचा की सन्तान थे । भाई गुरदास में से किसी एक की सन्तान थे । इस प्रकार भाई गुरदास गुरु अमर दास जी के भतीजे थे । 2. शैशव : अभी आप तीन ही वर्ष के हुए थे कि आपके पिता जी चलाना कर गए... ... पिता के गुरुपुरी सिधारने से सोए सिद्ध ही पालना, सम्भालना, पढ़ाना, लिखवाना गुरु जी की सरपरस्ती के नीचे होना था 17 गुरु जी का आपसे जन्म से ही अपार स्नेह था । आपके माता-पिता भी गुरुघर के अनन्य सेवक थे । भाई गुरदास का जन्म भी उन्हीं के वरदान से हुआ ऐसा कहा जाता है। सो आपका बचपन गुरु जी के चरणों में बीता। आप बचपन से ही योग्य प्रतिभाशाली व श्रेष्ठ कवि थे। बचपन में ही आपने अपनी माता जी के साथ कई तीर्थ स्थलों की यात्रा कर ली थी। जब गुरु जी संवत् 1615 बि. (सन् 1558) में अभिजित नक्षत्र के समय तीर्थो पर गई । 'तीर्थ उधम सतगुर किया लोक उधरन अरबा' तो उस समय गुरदास जी अपनी माता जी के साथ छोटी सी आयु में थे । छोटे बहुत छोटे गुरदास जी पांच वर्ष की अवस्था में भी भाव पूरित कविता रच लेते थे । आप में देवी प्रतिभा थी । 8 सरस्वती के वरद पुत्र भाई गुरदास अपनी प्रतिभा को प्रमाण बचपन में ही देने लगे थे। आप को छोटी अवस्था में ही गुरु 6. रणधीर सिंह, भाई गुरदास भल्ले दा जीवन, पंजाबी दुनियां, सं० लाल सिंह, भाई गुरदास विशेषांक, 1968, पृ. 2 7. सरदूल सिंह, भाई गुरदास (पटियाला भाषा विभाग, पंजाब, 1961), पृ. 6 8. वही पृ. 6 घर के कई कार्य सौंपे गए जिनका निर्वाह सफलता पूर्व गुरु अमरदास जी ने गुरु अंगद (1504-1552 ) की आज्ञा से नगर की स्थापना की तो सारा गुरु परिवार गोइंदवाल में आकर रहने लगा । अतः भाई गुरदास के बचपन के दिन गोई दवाल में ही बीते। वहां के सम्पूर्ण आध्यात्मिक वातावरण का प्रभाव भाई गुरदास पर भी पड़ना स्वाभाविक ही थाः । सो यहां यह होनहार विश्वा फूटती मसू भेदी उमर में गुरमुखी, हिन्दी, संस्कृत और फारसी आदि विद्या से हरियाला हो गया और शास्त्रों उपनिषदों, पुराणों की प्रत्यन्त वाक्फीयत से प्रफुल्लित हो गया। आप गुरु घर के वातावरण में पूरी तरह से रंग गये। आप हरमन प्यारे हो गये । आपकी विद्वता की धाक चारों ओर फैल गई। 3. यौवन : आपका व्यक्तित्व महान था और विचार उच्च थे। गुरु जी के बताए मार्ग पर दृढ़भाव से चलना आपका स्वभाव बन चुका था। आप में एक अच्छे सेवक प्रदर्शभक्त और आज्ञाकारी शिष्य के सभी गुण भौजूद थे। आप विद्यार्थी काल में भी प्रत्येक बात को गहराई से सोचते थे और उसकी अपने ही ढंग से व्याख्या करते थे। आप संस्कृत का गहन अध्ययन करने हेतु काशी भी गए तीव्र बुद्धि के कारण आप शीघ्र ही प्रकाण्ड विद्वान हो गये। आप ने आध्यात्मिक विषयों को लेकर अनेक पण्डितों से तर्क-वितर्क भी किए लेकिन विजय आप ही की हुई । गुरु जी की आप पर अपार कृपा थी । आप सतगुरु जी के निर्वाचित और निकटवर्ती सिक्खों में से एक थे। पालन-पोषण औौर पढ़ाई लिखाई ही गुरु जी के हाथों हुई थी। घर एक ही था। कोई भिन्न भेद नहीं था। अब तो आठों पहर ही हजूरी में रहते थे जो आप ने आंखों देखा, केवल देखा ही नहीं, सतगुरु जी से तद्रूप हुए ।" बादशाह अकबर की गुरु अमरदास के प्रति असीम श्रद्धा थी । गुरु जी के निकट होने के कारण उसे धाप से भी प्रेम हो गया। इस लिए कईकई दिन वह गुरु जी से आज्ञा लेकर आगरा या दिल्ली बुला लिया करता था । अकबर विद्वानों को उचित सम्मान देता था । वह भाई गुरदास से गुरुबाणी सुन कर प्रानन्दमग्न होता था और भाई गुरदास इस तरह से गुरुवाणी का प्रचार करने में गौरव का अनुभव करते थे । जब गुरु अमरदास जी ज्योति ज्योत 9. भाई वीर सिंह, कवित्त, भाई गुरदास ( दूसरा स्कंध, अमृतसर खालसा 10, सरदूल सिंह, भाई गुरदास (पटियालाः भाषा विभाग, पंजाब ), 1961, पृ. 8 समाए तब आप आगरा में थे। पता तो चल गया था पर श्रागरे से गोईं दवाल आदेर लग गई । भाई जेठा को गुरु गद्दी का अधिकारी मान कर उन्हें गुरु अमरदास का स्वरूप जान लिया गया और वे भाई जेठा से चतुर्थ गुरु रामदास होकर गुरु गद्दी पर सुशोभित हुए। भाई गुरदास जी ने अपने सिक्खी प्रचार के कर्त्तव्य को पहले से भी अधिक विकसित किया। चतुर्थ गुरु रामदास जी के आदेश पर प ने सिक्ख धर्म के प्रचार के साथ साथ गुरुबाणी को भी एकत्र करना भी आरम्भ किया। आप लोगों की संशय निवृत्ति भी करते और कीर्तन द्वारा उन्हें मुग्ध भी । श्री गुरु रामदास जी के गुरुग्राई के सात वर्षो में भाई साहिब जी की छोटी बड़ी कई उदासिया थीं। आप को दिन रात सेवा और गुरबाणी एकत्र करने की लग्न थी। इतना ही नहीं आप बाहर रहते हुए भी गुरु घर के प्रत्येक कार्य में आप तन्मयता से भाग लेते थे। भाई साहिब ने आगरा केन्द्र बना कर चारों कोनों में सच-धर्म के बीजमन्त्र का छींटा दिया। बड़े-बड़े नगरों में संगतों और धर्म- शालाओं की स्थापनाएं कीं । 12 सिक्ख धर्म सम्बन्धी भवनों का निर्माण कार्य भी आपकी देख रेख में ही होता था । गुरुओं द्वारा अनेक गांव और नगर बसाए जाने में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान है। इतना ही नहीं कि आप ने निर्माण कार्य की देख रेख ही की अपितु इनके बनाने में भी हाथ बटाया। अतः इन्हें भवन निर्माण कला का पूर्ण ज्ञान था। 1606 ई. में 'अकाल तख्त भवन के निर्माण हेतु गुरु हर गोबिन्द साहिब ने महान गुरसिक्खों की सेवा प्राप्त की थी और वे थे भाई गुरदास जी श्रीर बाबा बुड्डा जी 13 भाई गुरदास की योग्यता और प्रतिभा के बल पर ही इन्हें गुरु घर के प्रत्येक कार्य की पूर्णतया जिम्मेदारी लगन, परिश्रम और योग्यता से निभाते । पिता गुरु रामदास की आज्ञानुसार गुरु अर्जुन देव जी ने 'अमृत सरोवर' को पक्का करने और उसमें हरमन्दिर का निर्माण करने की जिम्मेदारी भाई गुरदास और बाबा बुड्डा जी को सोंपी 114 भाई गुरदास ने दिन रात परिश्रम करकेकार्य इसको सम्पन्न कराया। गुरु 11. सरदूल सिंह, भाई गुरदास, (पटियालाः भाषा विभाग, पंजाब, 1961), पृ. 10-11 12. रणधीर सिंह, भाई गुरदास भल्ले दा संखेप जीवन, पंजाबी दुनियां, भाई गुरदास विशेषांक (पटियाला भाषा विभाग पंजाब, 1568), पृ. 5 (पटियाला, भाषा विभाग पंजाब, 1981 ) 13. दलीप सिंह दीप, भाई गुरदास पृ. 13 14. वही, पृ. 8
माना है । जो सर्वमान्य है और भाई वीर सिंह भी इस मत के हैं । कुछ विद्वानों के अनुसार इनके पिता का नाम दातार चन्द न होकर ईशर दास था । इतना तो निश्चित ही है कि वे गुरु अमरदास जी के भतीजे थे । जो सिख धर्म की गुरु परम्परा के तीसरे गुरु बने । गुरु जी के चाचा भानु के घर दो बालक दातार चन्द और ईशर दाम पैदा हुए। इसी ईशर दास के इकलौते पुत्र भाई गुरदास जी हैं । । भले ही गुरदास जी के माता पिता का नाम निश्चित तौर पर नहीं मिलता, तो भी इतना तो स्पष्ट ही है कि भाई गुरदास जी के पूर्वज भल्ले खत्री थे जो जिला अमृतसर के 'बासर की' गांव के निवासी थे इन्हीं की वंश परंपरा में गुरु अमरदा हुए और ईशर दास और दातार चन्द इनके चाचा की सन्तान थे । भाई गुरदास में से किसी एक की सन्तान थे । इस प्रकार भाई गुरदास गुरु अमर दास जी के भतीजे थे । दो. शैशव : अभी आप तीन ही वर्ष के हुए थे कि आपके पिता जी चलाना कर गए... ... पिता के गुरुपुरी सिधारने से सोए सिद्ध ही पालना, सम्भालना, पढ़ाना, लिखवाना गुरु जी की सरपरस्ती के नीचे होना था सत्रह गुरु जी का आपसे जन्म से ही अपार स्नेह था । आपके माता-पिता भी गुरुघर के अनन्य सेवक थे । भाई गुरदास का जन्म भी उन्हीं के वरदान से हुआ ऐसा कहा जाता है। सो आपका बचपन गुरु जी के चरणों में बीता। आप बचपन से ही योग्य प्रतिभाशाली व श्रेष्ठ कवि थे। बचपन में ही आपने अपनी माता जी के साथ कई तीर्थ स्थलों की यात्रा कर ली थी। जब गुरु जी संवत् एक हज़ार छः सौ पंद्रह बि. में अभिजित नक्षत्र के समय तीर्थो पर गई । 'तीर्थ उधम सतगुर किया लोक उधरन अरबा' तो उस समय गुरदास जी अपनी माता जी के साथ छोटी सी आयु में थे । छोटे बहुत छोटे गुरदास जी पांच वर्ष की अवस्था में भी भाव पूरित कविता रच लेते थे । आप में देवी प्रतिभा थी । आठ सरस्वती के वरद पुत्र भाई गुरदास अपनी प्रतिभा को प्रमाण बचपन में ही देने लगे थे। आप को छोटी अवस्था में ही गुछः रुपया. रणधीर सिंह, भाई गुरदास भल्ले दा जीवन, पंजाबी दुनियां, संशून्य लाल सिंह, भाई गुरदास विशेषांक, एक हज़ार नौ सौ अड़सठ, पृ. दो सात. सरदूल सिंह, भाई गुरदास , पृ. छः आठ. वही पृ. छः घर के कई कार्य सौंपे गए जिनका निर्वाह सफलता पूर्व गुरु अमरदास जी ने गुरु अंगद की आज्ञा से नगर की स्थापना की तो सारा गुरु परिवार गोइंदवाल में आकर रहने लगा । अतः भाई गुरदास के बचपन के दिन गोई दवाल में ही बीते। वहां के सम्पूर्ण आध्यात्मिक वातावरण का प्रभाव भाई गुरदास पर भी पड़ना स्वाभाविक ही थाः । सो यहां यह होनहार विश्वा फूटती मसू भेदी उमर में गुरमुखी, हिन्दी, संस्कृत और फारसी आदि विद्या से हरियाला हो गया और शास्त्रों उपनिषदों, पुराणों की प्रत्यन्त वाक्फीयत से प्रफुल्लित हो गया। आप गुरु घर के वातावरण में पूरी तरह से रंग गये। आप हरमन प्यारे हो गये । आपकी विद्वता की धाक चारों ओर फैल गई। तीन. यौवन : आपका व्यक्तित्व महान था और विचार उच्च थे। गुरु जी के बताए मार्ग पर दृढ़भाव से चलना आपका स्वभाव बन चुका था। आप में एक अच्छे सेवक प्रदर्शभक्त और आज्ञाकारी शिष्य के सभी गुण भौजूद थे। आप विद्यार्थी काल में भी प्रत्येक बात को गहराई से सोचते थे और उसकी अपने ही ढंग से व्याख्या करते थे। आप संस्कृत का गहन अध्ययन करने हेतु काशी भी गए तीव्र बुद्धि के कारण आप शीघ्र ही प्रकाण्ड विद्वान हो गये। आप ने आध्यात्मिक विषयों को लेकर अनेक पण्डितों से तर्क-वितर्क भी किए लेकिन विजय आप ही की हुई । गुरु जी की आप पर अपार कृपा थी । आप सतगुरु जी के निर्वाचित और निकटवर्ती सिक्खों में से एक थे। पालन-पोषण औौर पढ़ाई लिखाई ही गुरु जी के हाथों हुई थी। घर एक ही था। कोई भिन्न भेद नहीं था। अब तो आठों पहर ही हजूरी में रहते थे जो आप ने आंखों देखा, केवल देखा ही नहीं, सतगुरु जी से तद्रूप हुए ।" बादशाह अकबर की गुरु अमरदास के प्रति असीम श्रद्धा थी । गुरु जी के निकट होने के कारण उसे धाप से भी प्रेम हो गया। इस लिए कईकई दिन वह गुरु जी से आज्ञा लेकर आगरा या दिल्ली बुला लिया करता था । अकबर विद्वानों को उचित सम्मान देता था । वह भाई गुरदास से गुरुबाणी सुन कर प्रानन्दमग्न होता था और भाई गुरदास इस तरह से गुरुवाणी का प्रचार करने में गौरव का अनुभव करते थे । जब गुरु अमरदास जी ज्योति ज्योत नौ. भाई वीर सिंह, कवित्त, भाई गुरदास , एक हज़ार नौ सौ इकसठ, पृ. आठ समाए तब आप आगरा में थे। पता तो चल गया था पर श्रागरे से गोईं दवाल आदेर लग गई । भाई जेठा को गुरु गद्दी का अधिकारी मान कर उन्हें गुरु अमरदास का स्वरूप जान लिया गया और वे भाई जेठा से चतुर्थ गुरु रामदास होकर गुरु गद्दी पर सुशोभित हुए। भाई गुरदास जी ने अपने सिक्खी प्रचार के कर्त्तव्य को पहले से भी अधिक विकसित किया। चतुर्थ गुरु रामदास जी के आदेश पर प ने सिक्ख धर्म के प्रचार के साथ साथ गुरुबाणी को भी एकत्र करना भी आरम्भ किया। आप लोगों की संशय निवृत्ति भी करते और कीर्तन द्वारा उन्हें मुग्ध भी । श्री गुरु रामदास जी के गुरुग्राई के सात वर्षो में भाई साहिब जी की छोटी बड़ी कई उदासिया थीं। आप को दिन रात सेवा और गुरबाणी एकत्र करने की लग्न थी। इतना ही नहीं आप बाहर रहते हुए भी गुरु घर के प्रत्येक कार्य में आप तन्मयता से भाग लेते थे। भाई साहिब ने आगरा केन्द्र बना कर चारों कोनों में सच-धर्म के बीजमन्त्र का छींटा दिया। बड़े-बड़े नगरों में संगतों और धर्म- शालाओं की स्थापनाएं कीं । बारह सिक्ख धर्म सम्बन्धी भवनों का निर्माण कार्य भी आपकी देख रेख में ही होता था । गुरुओं द्वारा अनेक गांव और नगर बसाए जाने में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान है। इतना ही नहीं कि आप ने निर्माण कार्य की देख रेख ही की अपितु इनके बनाने में भी हाथ बटाया। अतः इन्हें भवन निर्माण कला का पूर्ण ज्ञान था। एक हज़ार छः सौ छः ई. में 'अकाल तख्त भवन के निर्माण हेतु गुरु हर गोबिन्द साहिब ने महान गुरसिक्खों की सेवा प्राप्त की थी और वे थे भाई गुरदास जी श्रीर बाबा बुड्डा जी तेरह भाई गुरदास की योग्यता और प्रतिभा के बल पर ही इन्हें गुरु घर के प्रत्येक कार्य की पूर्णतया जिम्मेदारी लगन, परिश्रम और योग्यता से निभाते । पिता गुरु रामदास की आज्ञानुसार गुरु अर्जुन देव जी ने 'अमृत सरोवर' को पक्का करने और उसमें हरमन्दिर का निर्माण करने की जिम्मेदारी भाई गुरदास और बाबा बुड्डा जी को सोंपी एक सौ चौदह भाई गुरदास ने दिन रात परिश्रम करकेकार्य इसको सम्पन्न कराया। गुग्यारह रुपया. सरदूल सिंह, भाई गुरदास, , पृ. दस-ग्यारह बारह. रणधीर सिंह, भाई गुरदास भल्ले दा संखेप जीवन, पंजाबी दुनियां, भाई गुरदास विशेषांक , पृ. पाँच तेरह. दलीप सिंह दीप, भाई गुरदास पृ. तेरह चौदह. वही, पृ. आठ
की रचना ही है। उदाहरण के लिए, यहाँ h1, h2, h3 ये सभी इस समुच्चय के तत्व हैं जो मूलतः व्यक्तिगत रूप से हिंदू आबादी वाली कुछ विशेषताओं को संतुष्ट करते हैं। हिंदू आबादी की तरह मान लेते हैं की हम सभी मुस्लिम आबादी के एक समुच्चय को परिभाषित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए सभी ये समुच्चय सभी मुस्लिम व्यक्तियों का समूह है। तो, ये स्पष्ट समुच्चय का उदाहरण हैं और हम जानते हैं कि किसी भी स्पष्ट समुच्चय का बेहतर वर्णन रेखांकन के रूप में या एक आरेख चित्र से किया जा सकता है है। इसलिए, हमने यहाँ एक वेंन आरेख दिखाया है । इसके लिए H, M और एक्स (X) सभी को मूल रूप से यहां दिखाया गया हैं और हम देख सकते हैं कि दो सीमाएं हैं। दोनो सीमा अनिवार्य रूप से अंतर या मूल रूप से दो क्षेत्रों को अच्छी तरह से परिभाषित करें। एक क्षेत्र H से संबंधित है और दूसरा क्षेत्र M से संबंधित है और ये दोनों क्षेत्र मूल रूप से दूसरे बड़े क्षेत्र से सम्बंधित हैं। तो, इस बड़े क्षेत्र को मूल रूप से इस मामले में प्रवचन की संसृति कहा जाता है। तो जो भी क्षेत्र हैं उनकी एक एक ठोस सीमा है और यही कारण है कि उन्हें स्पष्ट समुच्चय कहा जाता है। (14:47 समय की स्लाइड देखें)
की रचना ही है। उदाहरण के लिए, यहाँ hएक, hदो, hतीन ये सभी इस समुच्चय के तत्व हैं जो मूलतः व्यक्तिगत रूप से हिंदू आबादी वाली कुछ विशेषताओं को संतुष्ट करते हैं। हिंदू आबादी की तरह मान लेते हैं की हम सभी मुस्लिम आबादी के एक समुच्चय को परिभाषित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए सभी ये समुच्चय सभी मुस्लिम व्यक्तियों का समूह है। तो, ये स्पष्ट समुच्चय का उदाहरण हैं और हम जानते हैं कि किसी भी स्पष्ट समुच्चय का बेहतर वर्णन रेखांकन के रूप में या एक आरेख चित्र से किया जा सकता है है। इसलिए, हमने यहाँ एक वेंन आरेख दिखाया है । इसके लिए H, M और एक्स सभी को मूल रूप से यहां दिखाया गया हैं और हम देख सकते हैं कि दो सीमाएं हैं। दोनो सीमा अनिवार्य रूप से अंतर या मूल रूप से दो क्षेत्रों को अच्छी तरह से परिभाषित करें। एक क्षेत्र H से संबंधित है और दूसरा क्षेत्र M से संबंधित है और ये दोनों क्षेत्र मूल रूप से दूसरे बड़े क्षेत्र से सम्बंधित हैं। तो, इस बड़े क्षेत्र को मूल रूप से इस मामले में प्रवचन की संसृति कहा जाता है। तो जो भी क्षेत्र हैं उनकी एक एक ठोस सीमा है और यही कारण है कि उन्हें स्पष्ट समुच्चय कहा जाता है।
सम्पत्ति सम्बन्धी स्वत्व और कर्तव्य । प्राचीनकालसे ही यह माना गया है कि राजोंको सम्पत्ति रखनेका अधिकार है । जिस समुदायका किसी भूमिविशेषपर कब्जा न हो उसे राज ही नहीं कहते। पर राजकी सम्पत्ति भूमिके अतिरिक्त अन्य प्रकारकी भी होती उनके पास घर, मकान, मशीन, रुपया पैसा, पशु, शस्त्र, पुस्तकें, कुर्सियां, इत्यादि, अनेक वस्तुए होती हैं। इनका क्रयविक्रय प्रत्येक देश के घरेलू कानूनके अनुसार होता है जिससे अन्ताराष्ट्रिय विधानसे कोई सम्बन्ध नहीं है पर यदि युद्ध के समय शत्रुसेना इनपर कृब्जा कर लेती है तो अलबत्ता अन्ताराष्ट्रिय विधान उनके उपयोग और उपभोगके नियम बताता है । इन फुटकर वस्तुओं के अतिरिक्त राजकी सम्पत्तिमे भूमि, जल और वायु सम्मिलित हो सकते हैं । इन तीनोपर पृथक् पृथक विचार करना होगा, फिर अन्तमे यह निश्चय हो सकेगा कि राजकी सम्पत्तिकी क्या सीमा हो सकती है । भूमिपर अधिकार । सबसे पहिले यह देखना है कि राजोंकी भौम सम्पत्ति किस प्रकार बढ़ती है। इसके दो प्रकार हैं, प्राथमिक और गौण * । प्राथमिकके भी दो भेद हैं, अधिकृति और प्राकृतिक वृद्धि + * Original, derivative + Occupation, accretion. और गौणके तीन भेद हैं हस्तान्तर, विजय और उपभोग। दोनों में भेद यह है कि जो भूमि किसी अन्य सभ्य राजके कब्जे में नहीं थी या यदि कभी बहुत पहिले थी भी तो अब उसपर किसी सभ्य राजका न तो कब्जा है न स्वत्व, उसपर अधिकार प्राप्त करने के प्रकारको प्राथमिक कहते है और किसी अन्य सभ्राजके कब्जेकी भूमिपर कब्जा करने के प्रकारोको गौण कहते हैं । अधिकृति । जो भूमिखण्ड किसी अन्य सभ्य राजके अधिकारमें न हो उसे अपने हाथ में लेने को अधिकृति कहते हैं। यह आवश्यक नहीं कि वह निर्जन हो। इतना ही पर्याप्त है कि उसके निवासी किसी ऐसे राजकी प्रजा न हों जो अन्ताराष्ट्रिय विधानका पात्र हो । जब पहिले पहिले अमेरिका महाद्वीपत पता लगा तो यूरोपके राजोंके सामने यह प्रश्न उपस्थित हुआ कि इसपर किसका और किस नियमके अनुसार अधिकार हो । अन्तमे प्राचीन रोमन विधानकी शरण ली गयी । उसमें एक नियम था कि यदि सडकपर कोई लावारिस चीज पडी हो तो जिसके हाथ वह पहिले लगे वह उसे ले सकता था । इस नियमका विचार इस प्रकार किया गया कि जो पहिले अमेरिका पहुचा अर्थात् जिस राजके जहाजने अमेरिकाका पहिले पता लगाया वही उसका स्वामी होगा। पर इससे काम न चला । स्पेनवाले कहते थे कि १५५५ में अमेरिगो वेस्पूची जो स्पेन-वासी था उत्तरी अमेरिकाके तटपर सबसे पहिले उतरा था इसलिये उत्तरी अमेरिका हमारा है। अग्रेज कहते थे जान केबट यहा १५५४ में ही आ चुका था। § Cession, conquest, preseiption Amerigo Vespuce फ्रांस और पुर्तगाल भी इसी प्रकारकी बातें कहते थे । तत्कालीन पोप षष्ठ सिकन्दरने सारे अमेरिकाको स्पेन और पुर्तगाल में बांटना चाहा पर उनकी बात कौन सुनता । क्रोनरेशने स्पेनके पञ्चम चार्ल्स से इस प्रयत्नकी इसी उडाते हुए पूछा था "आप और पुर्तगालके नरेश किस अधिकारसे सारी पृथ्वी के स्वामी बनना चाहते हैं ? क्या बाबा आदमने आपको ही अपना एकमात्र उत्तराधिकारी बनाया है ? यदि ऐसा है तो वसीयतनामेकी प्रतिलिपि तो दिखलाइये । कहनेका तात्पर्य यह है कि किसी स्थान विशेषका पहिले पहिले पता लगा लेना पर्याप्त नहीं है । केवल इतनेसे ही उसपर स्वाम्य नहीं होता, हाँ पहिले पता लगाना एक गौण प्रमाण नि सन्देह है। आजकल केवल इतने से अधिकार नहीं मिलता पर प्रचलित प्रथा यह है कि यदि किसी राजका जहाज किसी नये भूखण्डका पता लगाता है तो अन्य राज थोडे दिन ठहर कर देखते हैं कि वह उसपर कब्जा करता है या नहीं। उसको ऐसा करनेका पर्याप्त अवकाश दिया जाता है। अस्तु, तो पता लगाना ही कब्जा नहीं है। जिस राजका जहाज पता लगाये या जो अन्य राज कब्जा करना चाहे उसे चाहिये कि यह स्पष्ट प्रकट कर दे कि इस स्थानपर कब्जा करनेकी हमारी इच्छा है । इसका साधारण नियम यह है कि वहांपर राजका झण्डा गाड दिया जाय और कब्जेकी घोषणा कर दी जाय । पर यह घोषणा उस राजकी सर्कारकी ओरसे ही होनी चाहिये । कोई अन्य व्यक्ति, चाहे वह राजका उच्च कर्मचारी ही क्यों न हो, घोषणा नहीं कर सकता। इसलिये ऐसे अवसरपर एक कर्म्मचारी, विशेष अधिकार देकर, इसी कामके लिये भेजा जाता है । १७५६ में डैम्पियर नामक एक ब्रिटिश नाविकने entre, Horty worth the way for your vous am Band m आस्ट्रेलिया के निक्ट न्यूब्रिटेन और न्यूआयरलैण्ड नामक दो नये द्वीपोका पता लगाया । १८२४ में कप्तान कोर्टरेटने ब्रिटेनके नामपर इनमें कब्जेकी घोषणा कर दी । वह ब्रिटिश जल-सेनाके ऊँचे दर्जेके अफसर थे पर उन्हें ब्रिटिश सर्कारकी कोई विशेष आज्ञा नथी अत उनकी घोषणा अन्य राजोके लिये मान्य नथी । १९४१ में जर्मनीने इन द्वीपोंपर अपना अधिकार जमा लिया । कभी कभी ऐसा होता है कि अधीन संस्थाए या कर्म्मचारी विना आज्ञाके ही किसी प्रदेश विशेषपर कब्जेकी घोषणा कर देते हैं पर ऐसी अवस्थामे यथासम्भव शीघ्र ही उनकी सर्कार उनके ऐसा करनेका स्वय समर्थन करती है। यदि वह ऐसा न करे तो घोषणा निरर्थक होती है । पर केवल घोषणासे ही काम नहीं चलता। जिस प्रकार माधारण कानूनमें दाखिल खारिज अर्थात् सम्पत्तिपर नाम चढनेके लिये यह देखा जाता है कि वस्तुतः उस सम्पत्तिका उपभोग कौन करता रहा है उसी प्रकार अन्ताराष्ट्रिय विधान भी यह देखता है कि वस्तुतः उस भूखण्डका कोई उपभोग भी हुआ है या नहीं। इसलिये अब घोषणाके बाद ही थोडी बहुत बस्ती बसानी पटती है। यदि जगह छोटी हो तो कुछ सर्कारी कर्मचारी ही रख दिये जाते है नहीं तो शीघ्र ही कृषकों और व्यापारियोंको बसानेकी चेष्टा की जाती है। बस्ती भी निरन्तर होनी चाहिये । थोडे दिनोंके लिये हट जाना दूसरी बात है पर यदि कुछ काल तक बस्ती इस प्रकार हटा ली जाय कि इस बातका कोई प्रमाण न रह जाय कि फिर आकर बसना है तो दूसरे राजोको वहा कब्जा करनेका पूर्ण अधिकार है । यह स्मरण रखना चाहिये कि बस्तीमे कुछ सर्कारी कर्मचारियोंका, जो वहींके लिये नियुक्त हुए हों, रहना परमावश्यक है। केवल व्यापारियों या ताराष्ट्रिय विधान बसनेगे सकारी कब्जा नहीं होता। बहुधा पहिले सर्कार कब्जा जमा लेती है फिर बस्ती बसाती है, पर कभी कभी इसके विपरीत भी होता है। दक्षिणी अफ्रीकाके नेटाल प्रदेश में १८८१ में ही कुछ अंग्रेज बस गये थे पर सर्कारी घोषणा १९०० में हुई। इसमें ढर यही रहता है कि यदि बीचमें कोई और राज उसे अधिकृत करना चाहता तो अंग्रेज सर्कार उसे वैध रूपसे नहीं रोक सकती थी । अत. यह निश्चय हुआ कि किसी लावारिस भूमिपर पूर्ण अधिकार जमाने के लिये यह आवश्यक है कि अधिकार जमानेकी घोषणा करके उसके शासनके लिये कुछ सर्कारी कर्मचारी नियुक्त किये जाय जो वहीं रहें। इस समय यह प्रश्न, बड़े महत्व का इस लिये नहीं प्रतीत होता कि पृथ्वी इस प्रकार छान डाली गयी है कि स्नात कोई ऐस देश ही नहीं बच गया है जिसपर किसी अधिकृत भूमिका किसी सभ्य राजका अधिकार न हो। कभी कभी क्षेत्रफल भूकम्प आदिके कारण प्रशान्त महासागरमें एकाध छोटासा द्वीप भले ही उत्पन्न हो जाय पर किसी बडे द्वीप या देशके मिलनेकी आशा नहीं है । पर दो बातें ध्यान रखने योग्य हैं। एक तो अब भी अफ्रीका के बहुत बड़े भागपर किसी सभ्य राजका कब्जा नहीं है, दूसरे यह असम्भव नहीं है कि जिन देशोपर आज सभ्य राज अधिकार जमाये बैठे हैं वहासे भविष्यत् में उनका अधिकार उठ जाय। किसी समय ब्रिटेनपर रोमका अधिकार था पर जब रोमके पतनका समय आया तो वह इतना दुर्बल हो गया कि उसे ब्रिटेनसे हाथ खींचना पड़ा और ब्रिटेन लावारिस हो गया। यह कौन कह सकता है कि यदि फिर कोई भीषण महायुद्ध हुआ तो ब्रिटेन, फ्रांस हालैण्ड इत्यादि एशिया और आस्ट्रेलिया के पासके द्वीपोंपर अपना अधिकार स्थिर रख सकेंगे। यदि यह द्वीप एक बार इनके हाथसे निकल गये तो फिर लावारिस हो जायेंगे और अन्य सभ्य राजोको उनपर कब्जा करने में कोई रुकावट न होगी। उस समय यह नियम काम देंगे। एक बडे महत्त्वका प्रश्न यह है कि एक बार घोषणा करने और कुछ कर्मचारी नियुक्त कर देनेसे कितनी भूमिपर अधिकार हो जाता है। इसमें तो सन्देह नहीं कि छोटे द्वीप या द्वीपसमूहपर एक साथ ही कब्जा हो जाता है पर समूचे महाद्वीपपर इस प्रकार कब्जा नहीं हो सकता । फ्रांस या स्पेन चाहते थे कि सारा अमेरिका ही उन्हें मिल जाय पर उनकी बात किसीने न मानी । एक दो नहीं दस पांच बस्तियां बसानेसे भी महाद्वीप या बडा देश नहीं अपनाया जा सकता । आज आस्ट्रेलियाका द्वीप, जो एक महाद्वीप कहा जा सकता है, ब्रिटेनका हो गया है। कारण यह है कि उसके चारोओर समुद्रतटपर ब्रिटिश बस्तिया हैं और किसी अन्य राजने उसमे अपना उपनिवेश बसाया ही नहीं। पर यह अवस्था बहुतोको अच्छी नहीं लग रही है। देश बहुत बड़ा है और अग्रज बहुत थोड़े हैं। भारतीय, चीनी, जापानी अभी उसमें घुसने नहीं पाते हैं यद्यपि आस्ट्रेलिया एशियाके निकट है और एशियावासियोंके लिये सर्वथा उपयुक्त है । सम्भवत. एक दिन उसमें भारत, चीन और जापानके ही उपनिवेश होंगे । विधान शास्त्रका यह एक सिद्धान्त है कि स्थलसे संलग्न जल होता है, जलमे सलग्न स्थल नहीं । स्थलपर स्वाम्य होनेसे जलपर स्वाम्य हो जाता है परन्तु जलपर स्वाम्य होनेसे स्थलपर स्वाम्य नहीं होता। यदि किसी नदीके मुहानेपर कब्जा कर कर सक लिया जाय तो उस सारे भूखण्डपर कब्जा नहीं माना जायगा जिसमें से वह नदी या उसकी सहायक नदिया बहती है पर यदि समुद्र तट के पासके बड़े भूखण्डपर कब्जा हो जाय तो उस ऊँची भूमि या पहाडी तक कब्जा माना जाता है जहांसे नदिया इस तटकी ओर झुकती है। यदि दो राजोकी बस्तियोके बीचमेसे नदी बहती है तो दोनोंका नदीक अपने अपने तट तक कब्जा माना जाता है और नदीके जिस भागसे नाव चल सकती हैं उसके मध्यकी कल्पित रेखा दोनो बस्तियोकी सीमा मानी जाती । जहां नदी, पहाड इत्यादि प्राकृतिक सीमाए नहीं मिलती वहां कल्पित और कृत्रिम सीमाए बनानी पड़ती है। बहुधा यह करते हैं कि दोनो ओरकी अन्तिम इमारतोके बीचकी भूमिके बीचो बीचकी कल्पित रेखाको सीमा मान लेते हैं । इन नियमोंका पालन करनेसे झगडे बहुत कम हो जाते है पर उनके लिये अवकाश निकल ही आते है । इमोको बचाने के लिये अफ्रीका के विषय में ब्रिटेन जर्मनी, फ्रांस, पुर्तगाल इत्यादिने आपसमें समझौता कर यह निश्चय कर लिया कि कौन देश कहां तक कब्जा करेगा । आजकल तो यह नियम हो गया कि कब्जा करने वाला राज स्वयं पहिलेसे ही कह दे कि वह कहां तक कब्जा करना चाहता है 1 १९४५ में लोसानमे अन्ताराष्ट्रिय विधान परिषद्ने पहिले पहिले यह परामर्श दिया था। यह कहना अनावश्यक है कि यदि वह राज बहुत बड़े भूखण्डको दबाना चाहेगा तो अन्य राज उसकी एक न सुनेंगे । साथ ही यह भी शर्त है कि वह जितनी भूमिपर कब्जा करे उसमें ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न न होने दे जिससे सभ्य मनुष्य उसमें बस ही न सकें या वहाँ व्यापार, कृषि आदि करना असम्भव हो जाय । हम देख चुके है कि जिन देशोंपर किसी सभ्य राजका शासन न हो उनपर कब्जा हो सकता है । यदि वह देश निर्जन हो तो कोई अडचन नहीं होती पर यदि वहाँ आदिम निवासी कुछ मनुष्य पहिलेसे बसे हो तो एक प्रश्न उठता है। माना कि यह लोग असभ्य है पर हैं तो मनुष्य । क्या इनका इस भूमिपर कोई अधिकार नहीं है ? आजसे सौ दो सौ वर्ष पूर्व तो यह प्रश्न किमीको नहीं सनाता था पर आजकल लोगोकी विवेक- बुद्धि कुछ तीक्ष्ण हो गयी है अत यह बात खटकती हैं। पहिलेके लोगोका तो यह भाव था कि आदिम निवासियोंदा कोई अधिकार नहीं है। आजकल ऐसा नहीं कहा जाता । उत्तरी अमेरिकामे अग्रेजोने जो वस्तियां स्थापित कीं उनके सम्बन्धमे फिलिमोर कहत है-'उत्तरी अमेरिकाक आदिम निवासियों को यह अधिकार था कि अपनी आखेट-भूमियोमे अंग्रेज व्यापारियोको न बसने देत, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया । इसलिये यह समझना चाहिये कि भूमिके स्वाभ्यमे अग्रेज भी सम्मिलित कर लिये गये । फिलिमार इस बातको छिपाते हैं कि उन जंगलियोंने प्रेमवश होकर अग्रेजोंको अपना हिस्सेदार (!) नहीं बनाया वरनू तोप बन्दूक और शराबके आगे उनकी एक न चली। अस्तु, आजकल बहुधा यह मत है --कोई विधान हो वह अपने पात्रोंका ही नियंत्रण कर सकता है, उन्हींके अधिकारों और कर्तव्योंका निर्णय कर सकता है । सभ्य राज अन्ताराष्ट्रिय विधानके पात्र हैं अत वह विधान उनके ही लिये नियम बना सकता है। उसने कब्जा करने के सम्बन्धमे कुछ नियम बनाये हैं। यदि उसके पात्र अर्थात् सभ्य राज उन नियमोंका पालन करते हैं और उनके अनुसार कब्जा करते हैं तो वह सन्तुष्ट है । असभ्य या अर्द्ध-सभ्य समुदाय उसके पात्र नहीं हैं इसलिये वह न तो उनके अधिकारोंको जानता है न कर्तव्योंको । इसलिये यदि सभ्य राज इस प्रकारके देशोंपर कब्जा कर लेते है तो उनका ऐसा करना पूर्णतया वैध है। परन्तु विधानके अतिरिक्त धर्म्म भी एक वस्तु है और न्याय धर्मका एक प्रधान अग है। धर्मं यह कहता है कि जो समुदाय, चाहे वह कैसा ही जगली हो, किसी भूखण्डपर बस गया है उसका उसपर अधिकार हो गया है । अतः सभ्य राजोंपर वैध नहीं तो नैतिक दबाव अवश्य है। इसलिये आजकल यह चाल चल पडी है कि एक बार अन्ताराष्ट्रिय विधानके अनुसार कब्जा करके फिर तत्रस्थ जगली सर्दारोंसे सन्धियां की जाती हैं। इन सन्धियोंक अनुसार उस भूखण्डका कुछ भाग तो आदिम निवासियोंके लिये छोड़ दिया जाता है, कुछ उनसे ले लिया जाता है। जो भाग लिया जाता है उसका मूल्य भी उन्हें दिया जाता है। इस युक्तिसे यूरोपकी सभ्यता अपनी धर्म्मपरताका परिचय देती है। पर यह स्मरण रखना चाहिये कि यह सर्दार जंगली होते हैं। यह बेचारे लिखित सन्धियोंके ढंगसे अपरिचित होते है, कानूनी शब्दोके दावपेचसे सर्वथा अनभिज्ञ होते है, धनके महत्वको समझते नहीं, पाश्चात्य सभ्यताकी शक्तिसे घबराते है और उसके प्रलोभनोंमें फँस जाते है । अत उन्हें बहकाकर ऐसी सन्धियां लिखवायी जाती हैं कि थोड़ेसे ही कालमे सारा देश यूरोपियनोंका हो जाता है और वह बेचारे या तो अन्नादिके कष्टसे प्रायः सारे नष्ट हो जाते हैं या गुलामोंसे भी बुरी दशामें जा गिरते हैं। दक्षिणी और पूर्वीय अफ्रीका तथा उत्तरी अमेरिकाका इतिहास ऐसी घटनाओंसे परिपूर्ण है। आजकल जिन राजोंको राष्ट्रसंघने शासनादेश दिये है उनसे यह शर्त की है कि इन देशोंका शासन इस प्रकार करो कि आदिम निवासी सभ्य हो जायं और उनको किसी सरक्षककी आवश्यकता ही न रहे । देखा चाहिये सरा अध्याय क्या होता है। अभी तो सर्वत्र ऐसा ही शासन रहा है कि यदि कल यूरोपियन सभ्यता उन देशोंसे उठ जाय तो वहां के निवासी हर्षोत्फुल्ल होकर परमात्माकी वन्दना करेंगे और मनायेंगे कि हे भगवन्, अब हमें इन सभ्य मूर्तियों के दर्शन न दीजिये । यूरोपियन राज कहते अवश्य हैं कि हम जब कहीं कब्जा करते हैं तो केवल अपने बलवैभवकी वृद्धि या उपनिवेश स्थापित' करने के उद्देश्यले नहीं प्रत्युत आदिम निवासियों को सुसभ्य बनाना भी हमारा एक प्रधान लक्ष्य रहता है, पर आजतक ऐसी बातें देखनेमे नहीं आयीं जिनसे इस कथनकी सत्यतापर विश्वास हो । प्राकृतिक वृद्धि । यह कोई बहुत महत्त्वका विषय नहीं है क्योकि इस प्रकार राज्यवृद्धि बहुत कम होती है और यदि कभी होती है तो उसके विषय में प्राय मतभेद और विवाद भी नहीं होता । प्राकृतिक वृद्धि समुद्र या नदी तटपर ही सम्भव है । कमी को पानी हट जाता है और इस प्रकार कुछ नयी भूमि बढ़ जाती है। ग्रह उसी राजकी सम्पत्ति होती है जिससे मिली होती है । यदि पानी में कुछ नये द्वीप बन जाये तो वह भी उसी राजकी सम्पत्ति माने जाते हैं जिसके राज्य के निकट होते हैं। यदि दो राजोंके बीचमें पानी पंड़ता हो और ठीक बीच धारमे ही गयी भूमि निकल आये तो वह बीच धारकी उस कल्पित रेखा द्वारा, जो दोनों राजकी सीमा मानी जाती है, दी भागोमे बांट दी जाती है । पर यदि दो राजके बीच कोई नदी या झील हो और वह किसी दैवी दुर्घटनाके कारण यकायक अपना मार्ग ही छोड़ दे या विलुप्त हो जाय तो दोनों राजोंके राज्यों में कुछ भी वृद्धि हासन होगा प्रत्युत उनकी सोमा पुरानी अदृष्ट धाराकी कल्पित मध्यरेखा हो मानी जायगी और इसीके अनुसार पानी के हट जानेसे जो नयी भूमि निकल आयेगी वह आपसमें बांट ली जायगी। प्राय. इसी प्रकारके नियम सभी देशो में खेतों और उन जमोनदारियोंके लिये प्रचलित है जो नदीके किनारे होती है हस्तान्तर । एक सभ्य राजसे दूसरे सभ्य राजके हाथमे बहुधा हस्तान्तरित होकर ही भूखण्ड जाया करते हैं। इसका अर्थ तो यह है कि भूखण्ड अपनी इच्छासे दिया जाय पर कभी कभी ऐसा होता है कि भूखण्ड लिया तो जाता है बलात् ही पर दिखलानेको, ताकि देनेवालेकी अप्रतिष्ठा न हो, हस्तान्तरका स्वरूप दिया जाता है। हस्तान्तर सन्धि द्वारा होता है। सन्धिपत्रमे यह लिखा जाता है कि नये अधिकारीको पुराने अधिकारीके ऋणका कौनसा भाग अपने ऊपर लेना होगा, हस्तान्तरित प्रदेशकी प्रजाके किन किन स्वत्वोकी विशेष रक्षा की जायगी, इत्यादि । हस्तान्तर कई प्रकारोसे होता है। उनमें विक्रय, भेंट और विनिमय मुख्य है। आजकल विक्रय कम होता है क्योंकि राजोंके पास ऐसी परती भूमि ही नहीं है जिसे अनावश्यक समझ कर बेच डाला जाय। पर कभी कभी अब भी विक्रय होता है। १९२४ में संयुक्त राजने रूससे उत्तरी अमेरिकाके वायव्य कोणका अलास्का प्रान्त ७२,००,००० डालर ( अर्थात् लगभग २,४०,००,००० रुपये ) में सोल ले लिया । भेट आपसके सौहार्द की द्योतक है। इस प्रकारकी भेंट स्यात् ही कभी होती है । पहिले होती थी । १८१९ मे फ्रांसने स्पेनको लूइजीआनाका उपनिवेश भेंट कर दिया था । बम्बईका द्वीप : ब्रिटिश नरेश प्रथम चार्ल्सको पुर्तगालसे अपने विवाहके उपलक्ष्य में मिला था। जबरदस्तीकी भेंट अब भी होती है। यदि दो राजोंमें युद्ध होकर एक हार जाता है और उसे कुछ भूखण्ड विजेताको देना पडता है तो इसे भी भेंट ही कहते हैं । १९२८ में फ्रांसको जर्मनीने हराया । परिणाम यह हुआ कि फ्रांसने अल्सास और लारेन दो प्रान्त जर्मनीको भेंट किये। यह भेंट फ्रांसको कभी न भूली । उसीका प्रतिकार वह जर्मनीसे अब ले रहा है। कभी कभी भेंट और विक्रयको मिला कर हस्तान्तर होता है। १९५५ में संयुक्त राजने स्पेनको हराया और उसे फिलिपाइन द्वीपसमूह भेंट करनेपर विवश किया पर स्वत द्वीपके लिये २,००,००,००० डालर ( ७,००,००,००० रुपये ) स्वीकार किया । इसे जबरदस्तीका विक्रय कह सकते हैं। कभी कभी आपस में विनिमय भी होता है । १९४७ में जर्मनीने व्रिटेनको अपने पूर्वीय अफ्रीका के राज्यका एक भाग दे दिया जिसके स्थानमे ब्रिटेनने जर्मनीको हेलिगोलैण्ड दे दिया। विजय । जब किसी राजके राज्यके किसी भागमें किसी दूसरे राजकी सेना उसकी सेनाओंको हरा कर अपना अधिकार जमा लेती है तो वह राज जिसकी सेना जीत गयी होती है उस प्रदेशका विजेता कहलाता है अर्थात् यह कहा जाता है कि उस प्रदेशमे उसकी विजय हुई है। पर यह सैनिक विजय मात्र है, इससे वह विजेता उस प्रदेशका स्वामी नहीं हो जाता । गत युद्ध में तीन चार वर्ष तक बेल्जियम तथा फ्राँसका बहुत बडा भाग जर्मन सेनाओं के अधीन था पर जर्मनी उन भूखण्डोंका स्वामी नहीं हुआ। ऐसे प्रान्तोंमें विजेताकी सेना तो रहती है पर शासन पुरानी सर्कार के कर्मचारी ही करते हैं। उसीके बनाये कानून बरते जाते हैं, उमीके न्यायालय होते हैं, उसीका सिक्का चलता है। यह अवश्य होता है कि विजेता सर्कारी कोषका स्वत्र उपयोग कर लेता है और सैनिक सुविधा के लिये कुछ नियमोपनियम बना देता है पर वह
सम्पत्ति सम्बन्धी स्वत्व और कर्तव्य । प्राचीनकालसे ही यह माना गया है कि राजोंको सम्पत्ति रखनेका अधिकार है । जिस समुदायका किसी भूमिविशेषपर कब्जा न हो उसे राज ही नहीं कहते। पर राजकी सम्पत्ति भूमिके अतिरिक्त अन्य प्रकारकी भी होती उनके पास घर, मकान, मशीन, रुपया पैसा, पशु, शस्त्र, पुस्तकें, कुर्सियां, इत्यादि, अनेक वस्तुए होती हैं। इनका क्रयविक्रय प्रत्येक देश के घरेलू कानूनके अनुसार होता है जिससे अन्ताराष्ट्रिय विधानसे कोई सम्बन्ध नहीं है पर यदि युद्ध के समय शत्रुसेना इनपर कृब्जा कर लेती है तो अलबत्ता अन्ताराष्ट्रिय विधान उनके उपयोग और उपभोगके नियम बताता है । इन फुटकर वस्तुओं के अतिरिक्त राजकी सम्पत्तिमे भूमि, जल और वायु सम्मिलित हो सकते हैं । इन तीनोपर पृथक् पृथक विचार करना होगा, फिर अन्तमे यह निश्चय हो सकेगा कि राजकी सम्पत्तिकी क्या सीमा हो सकती है । भूमिपर अधिकार । सबसे पहिले यह देखना है कि राजोंकी भौम सम्पत्ति किस प्रकार बढ़ती है। इसके दो प्रकार हैं, प्राथमिक और गौण * । प्राथमिकके भी दो भेद हैं, अधिकृति और प्राकृतिक वृद्धि + * Original, derivative + Occupation, accretion. और गौणके तीन भेद हैं हस्तान्तर, विजय और उपभोग। दोनों में भेद यह है कि जो भूमि किसी अन्य सभ्य राजके कब्जे में नहीं थी या यदि कभी बहुत पहिले थी भी तो अब उसपर किसी सभ्य राजका न तो कब्जा है न स्वत्व, उसपर अधिकार प्राप्त करने के प्रकारको प्राथमिक कहते है और किसी अन्य सभ्राजके कब्जेकी भूमिपर कब्जा करने के प्रकारोको गौण कहते हैं । अधिकृति । जो भूमिखण्ड किसी अन्य सभ्य राजके अधिकारमें न हो उसे अपने हाथ में लेने को अधिकृति कहते हैं। यह आवश्यक नहीं कि वह निर्जन हो। इतना ही पर्याप्त है कि उसके निवासी किसी ऐसे राजकी प्रजा न हों जो अन्ताराष्ट्रिय विधानका पात्र हो । जब पहिले पहिले अमेरिका महाद्वीपत पता लगा तो यूरोपके राजोंके सामने यह प्रश्न उपस्थित हुआ कि इसपर किसका और किस नियमके अनुसार अधिकार हो । अन्तमे प्राचीन रोमन विधानकी शरण ली गयी । उसमें एक नियम था कि यदि सडकपर कोई लावारिस चीज पडी हो तो जिसके हाथ वह पहिले लगे वह उसे ले सकता था । इस नियमका विचार इस प्रकार किया गया कि जो पहिले अमेरिका पहुचा अर्थात् जिस राजके जहाजने अमेरिकाका पहिले पता लगाया वही उसका स्वामी होगा। पर इससे काम न चला । स्पेनवाले कहते थे कि एक हज़ार पाँच सौ पचपन में अमेरिगो वेस्पूची जो स्पेन-वासी था उत्तरी अमेरिकाके तटपर सबसे पहिले उतरा था इसलिये उत्तरी अमेरिका हमारा है। अग्रेज कहते थे जान केबट यहा एक हज़ार पाँच सौ चौवन में ही आ चुका था। § Cession, conquest, preseiption Amerigo Vespuce फ्रांस और पुर्तगाल भी इसी प्रकारकी बातें कहते थे । तत्कालीन पोप षष्ठ सिकन्दरने सारे अमेरिकाको स्पेन और पुर्तगाल में बांटना चाहा पर उनकी बात कौन सुनता । क्रोनरेशने स्पेनके पञ्चम चार्ल्स से इस प्रयत्नकी इसी उडाते हुए पूछा था "आप और पुर्तगालके नरेश किस अधिकारसे सारी पृथ्वी के स्वामी बनना चाहते हैं ? क्या बाबा आदमने आपको ही अपना एकमात्र उत्तराधिकारी बनाया है ? यदि ऐसा है तो वसीयतनामेकी प्रतिलिपि तो दिखलाइये । कहनेका तात्पर्य यह है कि किसी स्थान विशेषका पहिले पहिले पता लगा लेना पर्याप्त नहीं है । केवल इतनेसे ही उसपर स्वाम्य नहीं होता, हाँ पहिले पता लगाना एक गौण प्रमाण नि सन्देह है। आजकल केवल इतने से अधिकार नहीं मिलता पर प्रचलित प्रथा यह है कि यदि किसी राजका जहाज किसी नये भूखण्डका पता लगाता है तो अन्य राज थोडे दिन ठहर कर देखते हैं कि वह उसपर कब्जा करता है या नहीं। उसको ऐसा करनेका पर्याप्त अवकाश दिया जाता है। अस्तु, तो पता लगाना ही कब्जा नहीं है। जिस राजका जहाज पता लगाये या जो अन्य राज कब्जा करना चाहे उसे चाहिये कि यह स्पष्ट प्रकट कर दे कि इस स्थानपर कब्जा करनेकी हमारी इच्छा है । इसका साधारण नियम यह है कि वहांपर राजका झण्डा गाड दिया जाय और कब्जेकी घोषणा कर दी जाय । पर यह घोषणा उस राजकी सर्कारकी ओरसे ही होनी चाहिये । कोई अन्य व्यक्ति, चाहे वह राजका उच्च कर्मचारी ही क्यों न हो, घोषणा नहीं कर सकता। इसलिये ऐसे अवसरपर एक कर्म्मचारी, विशेष अधिकार देकर, इसी कामके लिये भेजा जाता है । एक हज़ार सात सौ छप्पन में डैम्पियर नामक एक ब्रिटिश नाविकने entre, Horty worth the way for your vous am Band m आस्ट्रेलिया के निक्ट न्यूब्रिटेन और न्यूआयरलैण्ड नामक दो नये द्वीपोका पता लगाया । एक हज़ार आठ सौ चौबीस में कप्तान कोर्टरेटने ब्रिटेनके नामपर इनमें कब्जेकी घोषणा कर दी । वह ब्रिटिश जल-सेनाके ऊँचे दर्जेके अफसर थे पर उन्हें ब्रिटिश सर्कारकी कोई विशेष आज्ञा नथी अत उनकी घोषणा अन्य राजोके लिये मान्य नथी । एक हज़ार नौ सौ इकतालीस में जर्मनीने इन द्वीपोंपर अपना अधिकार जमा लिया । कभी कभी ऐसा होता है कि अधीन संस्थाए या कर्म्मचारी विना आज्ञाके ही किसी प्रदेश विशेषपर कब्जेकी घोषणा कर देते हैं पर ऐसी अवस्थामे यथासम्भव शीघ्र ही उनकी सर्कार उनके ऐसा करनेका स्वय समर्थन करती है। यदि वह ऐसा न करे तो घोषणा निरर्थक होती है । पर केवल घोषणासे ही काम नहीं चलता। जिस प्रकार माधारण कानूनमें दाखिल खारिज अर्थात् सम्पत्तिपर नाम चढनेके लिये यह देखा जाता है कि वस्तुतः उस सम्पत्तिका उपभोग कौन करता रहा है उसी प्रकार अन्ताराष्ट्रिय विधान भी यह देखता है कि वस्तुतः उस भूखण्डका कोई उपभोग भी हुआ है या नहीं। इसलिये अब घोषणाके बाद ही थोडी बहुत बस्ती बसानी पटती है। यदि जगह छोटी हो तो कुछ सर्कारी कर्मचारी ही रख दिये जाते है नहीं तो शीघ्र ही कृषकों और व्यापारियोंको बसानेकी चेष्टा की जाती है। बस्ती भी निरन्तर होनी चाहिये । थोडे दिनोंके लिये हट जाना दूसरी बात है पर यदि कुछ काल तक बस्ती इस प्रकार हटा ली जाय कि इस बातका कोई प्रमाण न रह जाय कि फिर आकर बसना है तो दूसरे राजोको वहा कब्जा करनेका पूर्ण अधिकार है । यह स्मरण रखना चाहिये कि बस्तीमे कुछ सर्कारी कर्मचारियोंका, जो वहींके लिये नियुक्त हुए हों, रहना परमावश्यक है। केवल व्यापारियों या ताराष्ट्रिय विधान बसनेगे सकारी कब्जा नहीं होता। बहुधा पहिले सर्कार कब्जा जमा लेती है फिर बस्ती बसाती है, पर कभी कभी इसके विपरीत भी होता है। दक्षिणी अफ्रीकाके नेटाल प्रदेश में एक हज़ार आठ सौ इक्यासी में ही कुछ अंग्रेज बस गये थे पर सर्कारी घोषणा एक हज़ार नौ सौ में हुई। इसमें ढर यही रहता है कि यदि बीचमें कोई और राज उसे अधिकृत करना चाहता तो अंग्रेज सर्कार उसे वैध रूपसे नहीं रोक सकती थी । अत. यह निश्चय हुआ कि किसी लावारिस भूमिपर पूर्ण अधिकार जमाने के लिये यह आवश्यक है कि अधिकार जमानेकी घोषणा करके उसके शासनके लिये कुछ सर्कारी कर्मचारी नियुक्त किये जाय जो वहीं रहें। इस समय यह प्रश्न, बड़े महत्व का इस लिये नहीं प्रतीत होता कि पृथ्वी इस प्रकार छान डाली गयी है कि स्नात कोई ऐस देश ही नहीं बच गया है जिसपर किसी अधिकृत भूमिका किसी सभ्य राजका अधिकार न हो। कभी कभी क्षेत्रफल भूकम्प आदिके कारण प्रशान्त महासागरमें एकाध छोटासा द्वीप भले ही उत्पन्न हो जाय पर किसी बडे द्वीप या देशके मिलनेकी आशा नहीं है । पर दो बातें ध्यान रखने योग्य हैं। एक तो अब भी अफ्रीका के बहुत बड़े भागपर किसी सभ्य राजका कब्जा नहीं है, दूसरे यह असम्भव नहीं है कि जिन देशोपर आज सभ्य राज अधिकार जमाये बैठे हैं वहासे भविष्यत् में उनका अधिकार उठ जाय। किसी समय ब्रिटेनपर रोमका अधिकार था पर जब रोमके पतनका समय आया तो वह इतना दुर्बल हो गया कि उसे ब्रिटेनसे हाथ खींचना पड़ा और ब्रिटेन लावारिस हो गया। यह कौन कह सकता है कि यदि फिर कोई भीषण महायुद्ध हुआ तो ब्रिटेन, फ्रांस हालैण्ड इत्यादि एशिया और आस्ट्रेलिया के पासके द्वीपोंपर अपना अधिकार स्थिर रख सकेंगे। यदि यह द्वीप एक बार इनके हाथसे निकल गये तो फिर लावारिस हो जायेंगे और अन्य सभ्य राजोको उनपर कब्जा करने में कोई रुकावट न होगी। उस समय यह नियम काम देंगे। एक बडे महत्त्वका प्रश्न यह है कि एक बार घोषणा करने और कुछ कर्मचारी नियुक्त कर देनेसे कितनी भूमिपर अधिकार हो जाता है। इसमें तो सन्देह नहीं कि छोटे द्वीप या द्वीपसमूहपर एक साथ ही कब्जा हो जाता है पर समूचे महाद्वीपपर इस प्रकार कब्जा नहीं हो सकता । फ्रांस या स्पेन चाहते थे कि सारा अमेरिका ही उन्हें मिल जाय पर उनकी बात किसीने न मानी । एक दो नहीं दस पांच बस्तियां बसानेसे भी महाद्वीप या बडा देश नहीं अपनाया जा सकता । आज आस्ट्रेलियाका द्वीप, जो एक महाद्वीप कहा जा सकता है, ब्रिटेनका हो गया है। कारण यह है कि उसके चारोओर समुद्रतटपर ब्रिटिश बस्तिया हैं और किसी अन्य राजने उसमे अपना उपनिवेश बसाया ही नहीं। पर यह अवस्था बहुतोको अच्छी नहीं लग रही है। देश बहुत बड़ा है और अग्रज बहुत थोड़े हैं। भारतीय, चीनी, जापानी अभी उसमें घुसने नहीं पाते हैं यद्यपि आस्ट्रेलिया एशियाके निकट है और एशियावासियोंके लिये सर्वथा उपयुक्त है । सम्भवत. एक दिन उसमें भारत, चीन और जापानके ही उपनिवेश होंगे । विधान शास्त्रका यह एक सिद्धान्त है कि स्थलसे संलग्न जल होता है, जलमे सलग्न स्थल नहीं । स्थलपर स्वाम्य होनेसे जलपर स्वाम्य हो जाता है परन्तु जलपर स्वाम्य होनेसे स्थलपर स्वाम्य नहीं होता। यदि किसी नदीके मुहानेपर कब्जा कर कर सक लिया जाय तो उस सारे भूखण्डपर कब्जा नहीं माना जायगा जिसमें से वह नदी या उसकी सहायक नदिया बहती है पर यदि समुद्र तट के पासके बड़े भूखण्डपर कब्जा हो जाय तो उस ऊँची भूमि या पहाडी तक कब्जा माना जाता है जहांसे नदिया इस तटकी ओर झुकती है। यदि दो राजोकी बस्तियोके बीचमेसे नदी बहती है तो दोनोंका नदीक अपने अपने तट तक कब्जा माना जाता है और नदीके जिस भागसे नाव चल सकती हैं उसके मध्यकी कल्पित रेखा दोनो बस्तियोकी सीमा मानी जाती । जहां नदी, पहाड इत्यादि प्राकृतिक सीमाए नहीं मिलती वहां कल्पित और कृत्रिम सीमाए बनानी पड़ती है। बहुधा यह करते हैं कि दोनो ओरकी अन्तिम इमारतोके बीचकी भूमिके बीचो बीचकी कल्पित रेखाको सीमा मान लेते हैं । इन नियमोंका पालन करनेसे झगडे बहुत कम हो जाते है पर उनके लिये अवकाश निकल ही आते है । इमोको बचाने के लिये अफ्रीका के विषय में ब्रिटेन जर्मनी, फ्रांस, पुर्तगाल इत्यादिने आपसमें समझौता कर यह निश्चय कर लिया कि कौन देश कहां तक कब्जा करेगा । आजकल तो यह नियम हो गया कि कब्जा करने वाला राज स्वयं पहिलेसे ही कह दे कि वह कहां तक कब्जा करना चाहता है एक एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस में लोसानमे अन्ताराष्ट्रिय विधान परिषद्ने पहिले पहिले यह परामर्श दिया था। यह कहना अनावश्यक है कि यदि वह राज बहुत बड़े भूखण्डको दबाना चाहेगा तो अन्य राज उसकी एक न सुनेंगे । साथ ही यह भी शर्त है कि वह जितनी भूमिपर कब्जा करे उसमें ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न न होने दे जिससे सभ्य मनुष्य उसमें बस ही न सकें या वहाँ व्यापार, कृषि आदि करना असम्भव हो जाय । हम देख चुके है कि जिन देशोंपर किसी सभ्य राजका शासन न हो उनपर कब्जा हो सकता है । यदि वह देश निर्जन हो तो कोई अडचन नहीं होती पर यदि वहाँ आदिम निवासी कुछ मनुष्य पहिलेसे बसे हो तो एक प्रश्न उठता है। माना कि यह लोग असभ्य है पर हैं तो मनुष्य । क्या इनका इस भूमिपर कोई अधिकार नहीं है ? आजसे सौ दो सौ वर्ष पूर्व तो यह प्रश्न किमीको नहीं सनाता था पर आजकल लोगोकी विवेक- बुद्धि कुछ तीक्ष्ण हो गयी है अत यह बात खटकती हैं। पहिलेके लोगोका तो यह भाव था कि आदिम निवासियोंदा कोई अधिकार नहीं है। आजकल ऐसा नहीं कहा जाता । उत्तरी अमेरिकामे अग्रेजोने जो वस्तियां स्थापित कीं उनके सम्बन्धमे फिलिमोर कहत है-'उत्तरी अमेरिकाक आदिम निवासियों को यह अधिकार था कि अपनी आखेट-भूमियोमे अंग्रेज व्यापारियोको न बसने देत, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया । इसलिये यह समझना चाहिये कि भूमिके स्वाभ्यमे अग्रेज भी सम्मिलित कर लिये गये । फिलिमार इस बातको छिपाते हैं कि उन जंगलियोंने प्रेमवश होकर अग्रेजोंको अपना हिस्सेदार नहीं बनाया वरनू तोप बन्दूक और शराबके आगे उनकी एक न चली। अस्तु, आजकल बहुधा यह मत है --कोई विधान हो वह अपने पात्रोंका ही नियंत्रण कर सकता है, उन्हींके अधिकारों और कर्तव्योंका निर्णय कर सकता है । सभ्य राज अन्ताराष्ट्रिय विधानके पात्र हैं अत वह विधान उनके ही लिये नियम बना सकता है। उसने कब्जा करने के सम्बन्धमे कुछ नियम बनाये हैं। यदि उसके पात्र अर्थात् सभ्य राज उन नियमोंका पालन करते हैं और उनके अनुसार कब्जा करते हैं तो वह सन्तुष्ट है । असभ्य या अर्द्ध-सभ्य समुदाय उसके पात्र नहीं हैं इसलिये वह न तो उनके अधिकारोंको जानता है न कर्तव्योंको । इसलिये यदि सभ्य राज इस प्रकारके देशोंपर कब्जा कर लेते है तो उनका ऐसा करना पूर्णतया वैध है। परन्तु विधानके अतिरिक्त धर्म्म भी एक वस्तु है और न्याय धर्मका एक प्रधान अग है। धर्मं यह कहता है कि जो समुदाय, चाहे वह कैसा ही जगली हो, किसी भूखण्डपर बस गया है उसका उसपर अधिकार हो गया है । अतः सभ्य राजोंपर वैध नहीं तो नैतिक दबाव अवश्य है। इसलिये आजकल यह चाल चल पडी है कि एक बार अन्ताराष्ट्रिय विधानके अनुसार कब्जा करके फिर तत्रस्थ जगली सर्दारोंसे सन्धियां की जाती हैं। इन सन्धियोंक अनुसार उस भूखण्डका कुछ भाग तो आदिम निवासियोंके लिये छोड़ दिया जाता है, कुछ उनसे ले लिया जाता है। जो भाग लिया जाता है उसका मूल्य भी उन्हें दिया जाता है। इस युक्तिसे यूरोपकी सभ्यता अपनी धर्म्मपरताका परिचय देती है। पर यह स्मरण रखना चाहिये कि यह सर्दार जंगली होते हैं। यह बेचारे लिखित सन्धियोंके ढंगसे अपरिचित होते है, कानूनी शब्दोके दावपेचसे सर्वथा अनभिज्ञ होते है, धनके महत्वको समझते नहीं, पाश्चात्य सभ्यताकी शक्तिसे घबराते है और उसके प्रलोभनोंमें फँस जाते है । अत उन्हें बहकाकर ऐसी सन्धियां लिखवायी जाती हैं कि थोड़ेसे ही कालमे सारा देश यूरोपियनोंका हो जाता है और वह बेचारे या तो अन्नादिके कष्टसे प्रायः सारे नष्ट हो जाते हैं या गुलामोंसे भी बुरी दशामें जा गिरते हैं। दक्षिणी और पूर्वीय अफ्रीका तथा उत्तरी अमेरिकाका इतिहास ऐसी घटनाओंसे परिपूर्ण है। आजकल जिन राजोंको राष्ट्रसंघने शासनादेश दिये है उनसे यह शर्त की है कि इन देशोंका शासन इस प्रकार करो कि आदिम निवासी सभ्य हो जायं और उनको किसी सरक्षककी आवश्यकता ही न रहे । देखा चाहिये सरा अध्याय क्या होता है। अभी तो सर्वत्र ऐसा ही शासन रहा है कि यदि कल यूरोपियन सभ्यता उन देशोंसे उठ जाय तो वहां के निवासी हर्षोत्फुल्ल होकर परमात्माकी वन्दना करेंगे और मनायेंगे कि हे भगवन्, अब हमें इन सभ्य मूर्तियों के दर्शन न दीजिये । यूरोपियन राज कहते अवश्य हैं कि हम जब कहीं कब्जा करते हैं तो केवल अपने बलवैभवकी वृद्धि या उपनिवेश स्थापित' करने के उद्देश्यले नहीं प्रत्युत आदिम निवासियों को सुसभ्य बनाना भी हमारा एक प्रधान लक्ष्य रहता है, पर आजतक ऐसी बातें देखनेमे नहीं आयीं जिनसे इस कथनकी सत्यतापर विश्वास हो । प्राकृतिक वृद्धि । यह कोई बहुत महत्त्वका विषय नहीं है क्योकि इस प्रकार राज्यवृद्धि बहुत कम होती है और यदि कभी होती है तो उसके विषय में प्राय मतभेद और विवाद भी नहीं होता । प्राकृतिक वृद्धि समुद्र या नदी तटपर ही सम्भव है । कमी को पानी हट जाता है और इस प्रकार कुछ नयी भूमि बढ़ जाती है। ग्रह उसी राजकी सम्पत्ति होती है जिससे मिली होती है । यदि पानी में कुछ नये द्वीप बन जाये तो वह भी उसी राजकी सम्पत्ति माने जाते हैं जिसके राज्य के निकट होते हैं। यदि दो राजोंके बीचमें पानी पंड़ता हो और ठीक बीच धारमे ही गयी भूमि निकल आये तो वह बीच धारकी उस कल्पित रेखा द्वारा, जो दोनों राजकी सीमा मानी जाती है, दी भागोमे बांट दी जाती है । पर यदि दो राजके बीच कोई नदी या झील हो और वह किसी दैवी दुर्घटनाके कारण यकायक अपना मार्ग ही छोड़ दे या विलुप्त हो जाय तो दोनों राजोंके राज्यों में कुछ भी वृद्धि हासन होगा प्रत्युत उनकी सोमा पुरानी अदृष्ट धाराकी कल्पित मध्यरेखा हो मानी जायगी और इसीके अनुसार पानी के हट जानेसे जो नयी भूमि निकल आयेगी वह आपसमें बांट ली जायगी। प्राय. इसी प्रकारके नियम सभी देशो में खेतों और उन जमोनदारियोंके लिये प्रचलित है जो नदीके किनारे होती है हस्तान्तर । एक सभ्य राजसे दूसरे सभ्य राजके हाथमे बहुधा हस्तान्तरित होकर ही भूखण्ड जाया करते हैं। इसका अर्थ तो यह है कि भूखण्ड अपनी इच्छासे दिया जाय पर कभी कभी ऐसा होता है कि भूखण्ड लिया तो जाता है बलात् ही पर दिखलानेको, ताकि देनेवालेकी अप्रतिष्ठा न हो, हस्तान्तरका स्वरूप दिया जाता है। हस्तान्तर सन्धि द्वारा होता है। सन्धिपत्रमे यह लिखा जाता है कि नये अधिकारीको पुराने अधिकारीके ऋणका कौनसा भाग अपने ऊपर लेना होगा, हस्तान्तरित प्रदेशकी प्रजाके किन किन स्वत्वोकी विशेष रक्षा की जायगी, इत्यादि । हस्तान्तर कई प्रकारोसे होता है। उनमें विक्रय, भेंट और विनिमय मुख्य है। आजकल विक्रय कम होता है क्योंकि राजोंके पास ऐसी परती भूमि ही नहीं है जिसे अनावश्यक समझ कर बेच डाला जाय। पर कभी कभी अब भी विक्रय होता है। एक हज़ार नौ सौ चौबीस में संयुक्त राजने रूससे उत्तरी अमेरिकाके वायव्य कोणका अलास्का प्रान्त बहत्तर,शून्य,शून्य डालर में सोल ले लिया । भेट आपसके सौहार्द की द्योतक है। इस प्रकारकी भेंट स्यात् ही कभी होती है । पहिले होती थी । एक हज़ार आठ सौ उन्नीस मे फ्रांसने स्पेनको लूइजीआनाका उपनिवेश भेंट कर दिया था । बम्बईका द्वीप : ब्रिटिश नरेश प्रथम चार्ल्सको पुर्तगालसे अपने विवाहके उपलक्ष्य में मिला था। जबरदस्तीकी भेंट अब भी होती है। यदि दो राजोंमें युद्ध होकर एक हार जाता है और उसे कुछ भूखण्ड विजेताको देना पडता है तो इसे भी भेंट ही कहते हैं । एक हज़ार नौ सौ अट्ठाईस में फ्रांसको जर्मनीने हराया । परिणाम यह हुआ कि फ्रांसने अल्सास और लारेन दो प्रान्त जर्मनीको भेंट किये। यह भेंट फ्रांसको कभी न भूली । उसीका प्रतिकार वह जर्मनीसे अब ले रहा है। कभी कभी भेंट और विक्रयको मिला कर हस्तान्तर होता है। एक हज़ार नौ सौ पचपन में संयुक्त राजने स्पेनको हराया और उसे फिलिपाइन द्वीपसमूह भेंट करनेपर विवश किया पर स्वत द्वीपके लिये दो,शून्य,शून्य,शून्य डालर स्वीकार किया । इसे जबरदस्तीका विक्रय कह सकते हैं। कभी कभी आपस में विनिमय भी होता है । एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में जर्मनीने व्रिटेनको अपने पूर्वीय अफ्रीका के राज्यका एक भाग दे दिया जिसके स्थानमे ब्रिटेनने जर्मनीको हेलिगोलैण्ड दे दिया। विजय । जब किसी राजके राज्यके किसी भागमें किसी दूसरे राजकी सेना उसकी सेनाओंको हरा कर अपना अधिकार जमा लेती है तो वह राज जिसकी सेना जीत गयी होती है उस प्रदेशका विजेता कहलाता है अर्थात् यह कहा जाता है कि उस प्रदेशमे उसकी विजय हुई है। पर यह सैनिक विजय मात्र है, इससे वह विजेता उस प्रदेशका स्वामी नहीं हो जाता । गत युद्ध में तीन चार वर्ष तक बेल्जियम तथा फ्राँसका बहुत बडा भाग जर्मन सेनाओं के अधीन था पर जर्मनी उन भूखण्डोंका स्वामी नहीं हुआ। ऐसे प्रान्तोंमें विजेताकी सेना तो रहती है पर शासन पुरानी सर्कार के कर्मचारी ही करते हैं। उसीके बनाये कानून बरते जाते हैं, उमीके न्यायालय होते हैं, उसीका सिक्का चलता है। यह अवश्य होता है कि विजेता सर्कारी कोषका स्वत्र उपयोग कर लेता है और सैनिक सुविधा के लिये कुछ नियमोपनियम बना देता है पर वह
पिछले दिनों दिल्ली मे जब आध्यात्मिक गुरु रविशंकर कला के जरिये धर्म की नई परिभाषा गढ़ते कई विवादों से घिरे थे, ठीक तभी भोपाल में द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानन्द जी यह मांग करते नजर आए कि स्कूली पाठ्यक्रम मे श्रीमद भागवद गीता पढ़ाई जाए. मूल रूप से कांग्रेसी खेमे मे शुमार किए जाने वाले स्वरूपनन्द नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही बौखलाए हुये हैं और फसाद खड़े करने के लिए जाने जाने लगे हैं. पिछले साल साईं पुजा को सनातन धर्म के उसूलों के खिलाफ उन्होने बताया था तो साईं भक्तों ने खासा बवाल मचाया था क्योंकि स्वरूपानन्द ने साईं बाबा को मुसलमान कहते कई और अभद्र टिप्पणिया भी कीं थीं, मकसद साफ था कि शिर्डी की तरफ जाता चढ़ावा पंडे पुजारियों और ब्रांहनों को मिले. मकसद अब भी साफ है कि गीता स्कूली बच्चों को पढ़ाई जाएगी तो वे बचपन से ही महज जन्मना आधार पर ब्रांहनों को श्रेष्ठ मानते उन्हे मुफ्त की मलाई खिलाते रहेंगे, यानि पेट पालने इन श्रेष्ठियों को कोई मेहनत नहीं करना पड़ेगी और धर्म का कारोबार बेरोकटोक चलता रहेगा. गीता, हिन्दू जिसे स्वरूपानन्द सनातन धर्म कहते हैं, कर्मकांडो, यज्ञ हवनों और वर्णवाद से भरी पड़ी है, जिसमे पुनर्जन्म भी है और दान की महिमा ज़ोर देकर गाई गई है. यह वही धर्मग्रंथ है जिसने भाइयों को लड़वा कर एक पूरे खानदान का नामोनिशान मिटा दिया था. यानि जातिवाद, दान की महिमा और पाखंड सिखाने अब शिक्षक नियुक्त किए जाने की मांग की जा रही है, क्योंकि कन्हैया जैसे नास्तिक थोक मे पैदा होने लगे हैं जो मनुवाद का विरोध करने मे किसी का लिहाज नहीं करते और उन जैसों के पीछे पूरी एक पीढ़ी चलने लगती है जो धार्मिक पखण्डों शोषण और अंधविश्वाशों से आजादी चाहती है. इसे रोकने स्वरूपाननदों को गीता पढ़ाया जाना मुफीद लगता है तो बात कतई हैरत की नहीं पर दिक्कत यह है कि मनुस्मृति का नया संस्करन प्रकाशित हो चुका है जिसका अनौपचारिक विमोचन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 मार्च 2015 को यमुना किनारे किया.
पिछले दिनों दिल्ली मे जब आध्यात्मिक गुरु रविशंकर कला के जरिये धर्म की नई परिभाषा गढ़ते कई विवादों से घिरे थे, ठीक तभी भोपाल में द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानन्द जी यह मांग करते नजर आए कि स्कूली पाठ्यक्रम मे श्रीमद भागवद गीता पढ़ाई जाए. मूल रूप से कांग्रेसी खेमे मे शुमार किए जाने वाले स्वरूपनन्द नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही बौखलाए हुये हैं और फसाद खड़े करने के लिए जाने जाने लगे हैं. पिछले साल साईं पुजा को सनातन धर्म के उसूलों के खिलाफ उन्होने बताया था तो साईं भक्तों ने खासा बवाल मचाया था क्योंकि स्वरूपानन्द ने साईं बाबा को मुसलमान कहते कई और अभद्र टिप्पणिया भी कीं थीं, मकसद साफ था कि शिर्डी की तरफ जाता चढ़ावा पंडे पुजारियों और ब्रांहनों को मिले. मकसद अब भी साफ है कि गीता स्कूली बच्चों को पढ़ाई जाएगी तो वे बचपन से ही महज जन्मना आधार पर ब्रांहनों को श्रेष्ठ मानते उन्हे मुफ्त की मलाई खिलाते रहेंगे, यानि पेट पालने इन श्रेष्ठियों को कोई मेहनत नहीं करना पड़ेगी और धर्म का कारोबार बेरोकटोक चलता रहेगा. गीता, हिन्दू जिसे स्वरूपानन्द सनातन धर्म कहते हैं, कर्मकांडो, यज्ञ हवनों और वर्णवाद से भरी पड़ी है, जिसमे पुनर्जन्म भी है और दान की महिमा ज़ोर देकर गाई गई है. यह वही धर्मग्रंथ है जिसने भाइयों को लड़वा कर एक पूरे खानदान का नामोनिशान मिटा दिया था. यानि जातिवाद, दान की महिमा और पाखंड सिखाने अब शिक्षक नियुक्त किए जाने की मांग की जा रही है, क्योंकि कन्हैया जैसे नास्तिक थोक मे पैदा होने लगे हैं जो मनुवाद का विरोध करने मे किसी का लिहाज नहीं करते और उन जैसों के पीछे पूरी एक पीढ़ी चलने लगती है जो धार्मिक पखण्डों शोषण और अंधविश्वाशों से आजादी चाहती है. इसे रोकने स्वरूपाननदों को गीता पढ़ाया जाना मुफीद लगता है तो बात कतई हैरत की नहीं पर दिक्कत यह है कि मनुस्मृति का नया संस्करन प्रकाशित हो चुका है जिसका अनौपचारिक विमोचन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्यारह मार्च दो हज़ार पंद्रह को यमुना किनारे किया.
श्यामावती, भद्रावती नगर के एक श्रेष्ठि की सुन्दरी कन्था थीं । माता-पिता की एक ही पुत्री होने के कारण इनका लालन-पालन बड़े प्रेम एवं सुख के साथ हुआ था । स्वभाव से शान्त एवं भोली बालिका श्यामा माता-पिता का बड़ा आदर करती थीं और उनकी सेवा कर प्रसन्न होती थी। श्रेष्ठि ने उसकी शिक्षा-दीक्षा का भी उचित प्रबंध कर दिया था । उसने अल्प समय में अपनी तीव्र बुद्धि से बहुत कुछ शिक्षा प्राप्त कर लिया । एकाएक प्लेग की बिमारी से भद्रावती उजड़ने लगी। हाहाकार मच गया, जिस ओर दृष्टि जाती थी मृतक ही मृतक दिखाई पड़ते थे । संगालों, चीलों की चीखों और फड़फड़ाहट से जैसे मृत्यु की छाया धूम रही थी । श्यामा के परिवार के सभी लोग प्लेग की बीमारी के आहार बन गये, इसलिये सेठ अपनी लाड़ली पुत्री और पत्नी को लेकर • कोशाम्बी चले गये । वहाँ उसका एक मित्र रहता था। दोनों मित्रों की कभी आपस में भेंट नहीं हुई थी, केवल संदेशों द्वारा ही मैत्री हुई थी । कौशाम्बी पहुँच कर नगर के बाहर एक झोपड़ी में तीनों असहाय प्राणियों ने शरण ली। पारिवारिक व्यक्तियों के शोक में व्याकुल श्रेष्ठ दम्पति ने अपनी दयनीय स्थिति में मित्र का पता लगाना उचित न समझा । कई दिन बीत गये । समय के बीतने के साथ स्मृतियाँ भी धुँधली पड़ने लगी। कई दिनों के निरंतर भूख ने उन्हें नितान्त क्षीण बना दिया । उन्होंने अपनी प्यारी पुत्रों से कहा - "बेटी ! अव तो कुछ शेष नहीं है, भिक्षा का अन्न ही लेना होगा । किन्तु भिक्षा लाने की भी तो सामर्थ्य नहीं।"
श्यामावती, भद्रावती नगर के एक श्रेष्ठि की सुन्दरी कन्था थीं । माता-पिता की एक ही पुत्री होने के कारण इनका लालन-पालन बड़े प्रेम एवं सुख के साथ हुआ था । स्वभाव से शान्त एवं भोली बालिका श्यामा माता-पिता का बड़ा आदर करती थीं और उनकी सेवा कर प्रसन्न होती थी। श्रेष्ठि ने उसकी शिक्षा-दीक्षा का भी उचित प्रबंध कर दिया था । उसने अल्प समय में अपनी तीव्र बुद्धि से बहुत कुछ शिक्षा प्राप्त कर लिया । एकाएक प्लेग की बिमारी से भद्रावती उजड़ने लगी। हाहाकार मच गया, जिस ओर दृष्टि जाती थी मृतक ही मृतक दिखाई पड़ते थे । संगालों, चीलों की चीखों और फड़फड़ाहट से जैसे मृत्यु की छाया धूम रही थी । श्यामा के परिवार के सभी लोग प्लेग की बीमारी के आहार बन गये, इसलिये सेठ अपनी लाड़ली पुत्री और पत्नी को लेकर • कोशाम्बी चले गये । वहाँ उसका एक मित्र रहता था। दोनों मित्रों की कभी आपस में भेंट नहीं हुई थी, केवल संदेशों द्वारा ही मैत्री हुई थी । कौशाम्बी पहुँच कर नगर के बाहर एक झोपड़ी में तीनों असहाय प्राणियों ने शरण ली। पारिवारिक व्यक्तियों के शोक में व्याकुल श्रेष्ठ दम्पति ने अपनी दयनीय स्थिति में मित्र का पता लगाना उचित न समझा । कई दिन बीत गये । समय के बीतने के साथ स्मृतियाँ भी धुँधली पड़ने लगी। कई दिनों के निरंतर भूख ने उन्हें नितान्त क्षीण बना दिया । उन्होंने अपनी प्यारी पुत्रों से कहा - "बेटी ! अव तो कुछ शेष नहीं है, भिक्षा का अन्न ही लेना होगा । किन्तु भिक्षा लाने की भी तो सामर्थ्य नहीं।"
करके अरबी-फ़ारसी से भरी उर्दू की निन्दा की है : " इब्तदाय सन्ने सवा से ता वाले रैयान और वायल रैयान से एलएल श्रान इश्तेयाक माला येताक तक़त्रीले उत्वये आलिया न बहद्दे था के सिल के तहरीर और तक़रीर में मुन्तजम हो सके। लेहाजा वे वास्ता नो वमीला हाज़िर हुम्रा हूं।" जो बात पच्चीस बरस पहले मौलाना आज़ाद-जैसे सुलेखक के निकट निन्द्य थी, आज उर्दू लिखने वाले आँख मूंदकर उसी रास्ते पर भागे जा रहे है, और चाहते हैं कि इस तरह एक अलग ही चीज़ बन जाय । उदाहरण के लिए में यह अवतरण एक अखबार से, जिसका सर्वसाधारण में प्रचार अपेक्षित है, देता हूँ : "नवाब एमादुल मुल्क मरहूम मुल्क के मशहूर ओ क़ाबिलतरीन और माययेसद एफ़्तख़ार एमादुलमुल्क नवाब सैयद हुसैन बेलग्रामी मरहूम की वफ़ात न सिर्फ नदवये दारुल मुसन्नफ़ीन श्रो दायरतुल मभारिफ के लिए मातम-अंगेज है वल्कि हक़ीक़त यह है कि एक ऐसी बा कमाल श्रो जामये हस्ती का मुसलमानों से इस जमान-ए कहतुल रिजाल में उठ जाना जो मोख्तलिफ़ अलूम व फतून का माहिर हो मशरकी प्रो मग़रबी जवानों पर काफ़ी दस्तरस रखता हो क़ोमी मुसीबत नहीं तो और क्या है ?" -'अलमवरिशर', पटना ( ता० २ जुलाई १९२६) उर्दू के अच्छे लेखक अपनी भाषा को जटिल बनाने के पक्षपाती नहीं हैं। सभी भाषाओं के सुलेखक इस सम्बन्ध में एक ही मत रखते है कि साहित्य की उत्तमता सरलता और प्रसाद गुरण में है, और सहल लिखना मुश्किल है, और मुश्किल लिखना सहल है। आजकल अरबी-फारसी के मुल्ला और संस्कृत के पण्डित कलम उठाते ही अपनी विधा की झोंक में अरबी-फ़ारसी और संस्कृत की पण्डिताई बधारने लगते हैं । वे यह नहीं समझते कि जिनके लिए वे लिख रहे हैं, वे उसे समझ सकेंगे या नहीं। पर दुर्भाग्य से उर्दू की नाजुक जान प्राजकल मुल्लाओं की मुट्ठी में है। उन्होंने उसको एक खास बुर्का पहना रखा है कि उसकी प्रसलो सूरत नज़र नहीं प्राती, और उर्दू इस वक्त पर्दे में ऐसी छिप गई है कि कहीं-कहीं 'का, की, है, होता है' आदि अंग के बाहरी आकार का आभास मात्र दिखाई पड़ता है। ऊपर के उदाहरण इस कथन के पुष्ट प्रमाण हैं। उनमें इस बात का प्रमाण है कि जो पढ़े-लिखे मुसलमान मुल्ला नहीं है, उनके ऊपर मुल्लाओं की जबान का ऐसा गहरा रंग चढ़ गया है कि वे भी ऐसी जटिल भाषा लिखने लग गए हैं कि 'फ़रहंग ग्रासफ़िया - ऐसा बड़े से बड़ा कोष भी उनके शब्दों के अर्थ नहीं बता सकता, और मुल्लाओं की भाषा के लिए तो फरहंग' बना ही नहीं। अब बतलाइए कि इनकी भाषा समझने के लिए क्या अरबी के कोष खोले जायें ? फिर घरबी का ऐसा कोई कोष भी हमारे देखने में हिन्दी और उर्दू की एकरुपता नहीं आया, जो उर्दू या हिन्दी मानी बतलाता हो । उर्दू के ऊपर जैसा यह प्रक्षेप है, वैसा हिन्दी के ऊपर कोई झाक्षेप नहीं था सकता, हालांकि ५४ हजार शब्दों वाला कोष हिन्दी में अभी नहीं बना है । हिन्दी जटिल नहीं बनाई जा रही है हम यह दिखा चुके है कि हिन्दी उर्दू में भाषा के नाते रत्तो-भर अन्तर नहीं है । पर इसमें तनिक भी सन्देह नहीं कि दो लिपियों में दो भाषानों के होने का भ्रम डाल रखा है। पंजाब के 'श्रा-गजट' और 'प्रकाश' दोनों उर्दू के पर्चे है, पर जिस भाषा में लिखे जाते है अगर उसे नागरी पोशाक पहना है, तो कोई हिन्दी वाला भूलकर भी उसे उर्दू नहीं कहेगा । नयलकिशोर प्रेस की छपी 'योगवाशिष्ठ' पुस्तक दो भारी-भारी जिल्दों में फारसी अक्षरों में है। उसका भी ठीक यही हाल है। हिन्दी के दो प्रसिद्ध कवि पं० श्रीधर पाठक और पं० अयोध्यासिंह उपाध्याय की लिखी तीन पुस्तकें 'तिलस्माती सुन्दरी' 'ठेठ हिन्दी का ठाट' और 'अधखिला फूल' तथा नवल किशोर प्रेस की छपी हुई बीसों किस्से-कहानी की किताबे है, जो नागरी लिपि में छपी हैं। अगर उन्हें फारसी लिपि की पोशाक पहना दी जाय, तो उर्दू वाले उन्हें हिन्दी कभी नहीं कहगे । जो कुछ भ्रम का पर्दा लिपियों की पोशाक में डाल रखा है। इन्हीं के कारण जो लोग नागरी-प्रक्षर नहीं जानते, वे हिन्दी को होश्रा समझते हैं और जो फारसी लिपि नहीं जानते, ये उर्दू को मोलधियों की मिल्कियत मानते है । यही कारण है कि हिन्दी वाले यह समझते है कि उबू हमारी चीज नहीं है और उर्दू से हमको कोई मतलब नहीं है। जिन शब्दों को थे उर्दू फारसी और अरबी का समझते हैं, उनको चुन-चुनकर निकालने पर तुल जाते हैं। यह उनकी भारी भूल है । जो लोग नागरी अक्षर नहीं जानते, में हिन्दी के बदले अरबी और फारसी के शब्द बेकार सते जाते है, और अपना दोष हिन्दी बालों के लिए मढ़ते है और कहते हैं कि हिन्दी वाले अपनी भाषा को रोज-रोज मुश्किल से मुश्किल बनाते जाते है । यहाँ उन्हीं लोगों का भ्रम दूर करना चाहता हूँ । आइए हम लोग आज से ७०० वर्ष पहले को हिन्दी की कविता का नमूना देखें, और यह मालूम करें कि उस समय में हम कठिन भाषा व्यवहार में लाते थे या श्राजकल । सात सौ बरस हुए, दिल्ली में पृथ्वीराज राज करते थे। उनके दरबार के कवि 'चन्द' ने महाभारत-सी बड़ी पोथी 'पृथ्वीराज रासो' लिखी। इस पोथी में से नमूने की तरह एक छन्द देता हूँ : मनहु कला ससि भान कला सोलह सो बन्निय बाल वैस सरिता समीप अमृत रस पिन्निय ॥
करके अरबी-फ़ारसी से भरी उर्दू की निन्दा की है : " इब्तदाय सन्ने सवा से ता वाले रैयान और वायल रैयान से एलएल श्रान इश्तेयाक माला येताक तक़त्रीले उत्वये आलिया न बहद्दे था के सिल के तहरीर और तक़रीर में मुन्तजम हो सके। लेहाजा वे वास्ता नो वमीला हाज़िर हुम्रा हूं।" जो बात पच्चीस बरस पहले मौलाना आज़ाद-जैसे सुलेखक के निकट निन्द्य थी, आज उर्दू लिखने वाले आँख मूंदकर उसी रास्ते पर भागे जा रहे है, और चाहते हैं कि इस तरह एक अलग ही चीज़ बन जाय । उदाहरण के लिए में यह अवतरण एक अखबार से, जिसका सर्वसाधारण में प्रचार अपेक्षित है, देता हूँ : "नवाब एमादुल मुल्क मरहूम मुल्क के मशहूर ओ क़ाबिलतरीन और माययेसद एफ़्तख़ार एमादुलमुल्क नवाब सैयद हुसैन बेलग्रामी मरहूम की वफ़ात न सिर्फ नदवये दारुल मुसन्नफ़ीन श्रो दायरतुल मभारिफ के लिए मातम-अंगेज है वल्कि हक़ीक़त यह है कि एक ऐसी बा कमाल श्रो जामये हस्ती का मुसलमानों से इस जमान-ए कहतुल रिजाल में उठ जाना जो मोख्तलिफ़ अलूम व फतून का माहिर हो मशरकी प्रो मग़रबी जवानों पर काफ़ी दस्तरस रखता हो क़ोमी मुसीबत नहीं तो और क्या है ?" -'अलमवरिशर', पटना उर्दू के अच्छे लेखक अपनी भाषा को जटिल बनाने के पक्षपाती नहीं हैं। सभी भाषाओं के सुलेखक इस सम्बन्ध में एक ही मत रखते है कि साहित्य की उत्तमता सरलता और प्रसाद गुरण में है, और सहल लिखना मुश्किल है, और मुश्किल लिखना सहल है। आजकल अरबी-फारसी के मुल्ला और संस्कृत के पण्डित कलम उठाते ही अपनी विधा की झोंक में अरबी-फ़ारसी और संस्कृत की पण्डिताई बधारने लगते हैं । वे यह नहीं समझते कि जिनके लिए वे लिख रहे हैं, वे उसे समझ सकेंगे या नहीं। पर दुर्भाग्य से उर्दू की नाजुक जान प्राजकल मुल्लाओं की मुट्ठी में है। उन्होंने उसको एक खास बुर्का पहना रखा है कि उसकी प्रसलो सूरत नज़र नहीं प्राती, और उर्दू इस वक्त पर्दे में ऐसी छिप गई है कि कहीं-कहीं 'का, की, है, होता है' आदि अंग के बाहरी आकार का आभास मात्र दिखाई पड़ता है। ऊपर के उदाहरण इस कथन के पुष्ट प्रमाण हैं। उनमें इस बात का प्रमाण है कि जो पढ़े-लिखे मुसलमान मुल्ला नहीं है, उनके ऊपर मुल्लाओं की जबान का ऐसा गहरा रंग चढ़ गया है कि वे भी ऐसी जटिल भाषा लिखने लग गए हैं कि 'फ़रहंग ग्रासफ़िया - ऐसा बड़े से बड़ा कोष भी उनके शब्दों के अर्थ नहीं बता सकता, और मुल्लाओं की भाषा के लिए तो फरहंग' बना ही नहीं। अब बतलाइए कि इनकी भाषा समझने के लिए क्या अरबी के कोष खोले जायें ? फिर घरबी का ऐसा कोई कोष भी हमारे देखने में हिन्दी और उर्दू की एकरुपता नहीं आया, जो उर्दू या हिन्दी मानी बतलाता हो । उर्दू के ऊपर जैसा यह प्रक्षेप है, वैसा हिन्दी के ऊपर कोई झाक्षेप नहीं था सकता, हालांकि चौवन हजार शब्दों वाला कोष हिन्दी में अभी नहीं बना है । हिन्दी जटिल नहीं बनाई जा रही है हम यह दिखा चुके है कि हिन्दी उर्दू में भाषा के नाते रत्तो-भर अन्तर नहीं है । पर इसमें तनिक भी सन्देह नहीं कि दो लिपियों में दो भाषानों के होने का भ्रम डाल रखा है। पंजाब के 'श्रा-गजट' और 'प्रकाश' दोनों उर्दू के पर्चे है, पर जिस भाषा में लिखे जाते है अगर उसे नागरी पोशाक पहना है, तो कोई हिन्दी वाला भूलकर भी उसे उर्दू नहीं कहेगा । नयलकिशोर प्रेस की छपी 'योगवाशिष्ठ' पुस्तक दो भारी-भारी जिल्दों में फारसी अक्षरों में है। उसका भी ठीक यही हाल है। हिन्दी के दो प्रसिद्ध कवि पंशून्य श्रीधर पाठक और पंशून्य अयोध्यासिंह उपाध्याय की लिखी तीन पुस्तकें 'तिलस्माती सुन्दरी' 'ठेठ हिन्दी का ठाट' और 'अधखिला फूल' तथा नवल किशोर प्रेस की छपी हुई बीसों किस्से-कहानी की किताबे है, जो नागरी लिपि में छपी हैं। अगर उन्हें फारसी लिपि की पोशाक पहना दी जाय, तो उर्दू वाले उन्हें हिन्दी कभी नहीं कहगे । जो कुछ भ्रम का पर्दा लिपियों की पोशाक में डाल रखा है। इन्हीं के कारण जो लोग नागरी-प्रक्षर नहीं जानते, वे हिन्दी को होश्रा समझते हैं और जो फारसी लिपि नहीं जानते, ये उर्दू को मोलधियों की मिल्कियत मानते है । यही कारण है कि हिन्दी वाले यह समझते है कि उबू हमारी चीज नहीं है और उर्दू से हमको कोई मतलब नहीं है। जिन शब्दों को थे उर्दू फारसी और अरबी का समझते हैं, उनको चुन-चुनकर निकालने पर तुल जाते हैं। यह उनकी भारी भूल है । जो लोग नागरी अक्षर नहीं जानते, में हिन्दी के बदले अरबी और फारसी के शब्द बेकार सते जाते है, और अपना दोष हिन्दी बालों के लिए मढ़ते है और कहते हैं कि हिन्दी वाले अपनी भाषा को रोज-रोज मुश्किल से मुश्किल बनाते जाते है । यहाँ उन्हीं लोगों का भ्रम दूर करना चाहता हूँ । आइए हम लोग आज से सात सौ वर्ष पहले को हिन्दी की कविता का नमूना देखें, और यह मालूम करें कि उस समय में हम कठिन भाषा व्यवहार में लाते थे या श्राजकल । सात सौ बरस हुए, दिल्ली में पृथ्वीराज राज करते थे। उनके दरबार के कवि 'चन्द' ने महाभारत-सी बड़ी पोथी 'पृथ्वीराज रासो' लिखी। इस पोथी में से नमूने की तरह एक छन्द देता हूँ : मनहु कला ससि भान कला सोलह सो बन्निय बाल वैस सरिता समीप अमृत रस पिन्निय ॥
दिलेर समाचार, कोलकाता । कोलकाता की गलियों और पुरी के मंदिरों से लेकर ग्लोबल फूड के नक्शे पर भारत को एक पहचान देने वाला मिठास का पर्याय रसगुल्ला अब सिनेमाघरों की सिलवर स्क्रीन पर भी फिल्म की कहानी का हिस्सा बनकर दर्शकों के सामने आयेगा। विन्डो और शिवप्रसाद-नंदिता के बैनर तले बनने जा रही फीचर फिल्म ' कोलकाता ऑफ 1960 ' उन्नीसवीं शताब्दी के कोलकाता की पृष्ठभमि पर आधारित होगी तथा रसगुल्ले की खोज के इर्द गिर्द घूमती नजर आयेगी। फिल्म के निर्माता शिवप्रसाद मुखोपाध्याय हैं और इसका निर्देशन पावेल करेंगें। शिवप्रसाद के मुताबिक किशोरवय की प्रेम कहानी पर केंद्रित यह फिल्म रसगुल्ला की खोज के इर्द-गिर्द घूमती नजर आयेगी। जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रथम वर्ष के छात्र उज्जन गांगुली फिल्म में 'रसगुल्ला केे कोलंबस' के नाम से लोकप्रिय नवीन दास की भूमिका में नजर आयेंगे। बाबर नाम गांधी के जरिए खासी लोकप्रियता बटोरने वाले पावेल ने कहा कि रसगुल्ले की वास्तविक कहानी के संदर्भ में उन्होंने दो वर्ष तक शोध किया तथा प्रख्यात लेखक बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यासों 'हुतुमपचार नोकशा' और 'अलालेर घोरेर दुलाल' सहित 19वीं शताब्दी के बंगला साहित्य का भी अध्ययन किया है। ये भी पढ़ेः पूजा के समय इसलिए होता है धूप व अगरबत्ती का प्रयोग. . !
दिलेर समाचार, कोलकाता । कोलकाता की गलियों और पुरी के मंदिरों से लेकर ग्लोबल फूड के नक्शे पर भारत को एक पहचान देने वाला मिठास का पर्याय रसगुल्ला अब सिनेमाघरों की सिलवर स्क्रीन पर भी फिल्म की कहानी का हिस्सा बनकर दर्शकों के सामने आयेगा। विन्डो और शिवप्रसाद-नंदिता के बैनर तले बनने जा रही फीचर फिल्म ' कोलकाता ऑफ एक हज़ार नौ सौ साठ ' उन्नीसवीं शताब्दी के कोलकाता की पृष्ठभमि पर आधारित होगी तथा रसगुल्ले की खोज के इर्द गिर्द घूमती नजर आयेगी। फिल्म के निर्माता शिवप्रसाद मुखोपाध्याय हैं और इसका निर्देशन पावेल करेंगें। शिवप्रसाद के मुताबिक किशोरवय की प्रेम कहानी पर केंद्रित यह फिल्म रसगुल्ला की खोज के इर्द-गिर्द घूमती नजर आयेगी। जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रथम वर्ष के छात्र उज्जन गांगुली फिल्म में 'रसगुल्ला केे कोलंबस' के नाम से लोकप्रिय नवीन दास की भूमिका में नजर आयेंगे। बाबर नाम गांधी के जरिए खासी लोकप्रियता बटोरने वाले पावेल ने कहा कि रसगुल्ले की वास्तविक कहानी के संदर्भ में उन्होंने दो वर्ष तक शोध किया तथा प्रख्यात लेखक बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यासों 'हुतुमपचार नोकशा' और 'अलालेर घोरेर दुलाल' सहित उन्नीसवीं शताब्दी के बंगला साहित्य का भी अध्ययन किया है। ये भी पढ़ेः पूजा के समय इसलिए होता है धूप व अगरबत्ती का प्रयोग. . !
नई दिल्ली : उत्तराखण्ड कांग्रेस के प्रवक्ता प्रदीप भट्ट ने दिल्ली में बयान जारी करते हुऐ कहा कि उत्तराखण्ड की भाजपा सरकार ठेकेदारों की सरकार है। भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस के बीजेपी के दावे खोखले हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सरकार को आम जनता से कोई लेना देना नही है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार उत्तराखण्ड में महिलाओं एवं राज्य आंदोलनकारियों को अपमानित करने का काम कर रही है। चुनाव के समय बीजेपी ने जनता से बड़े बड़े वादे करते हुए उत्तराखण्ड में शराबबंदी की बात कही थी किंतु मुख्यमंत्री का पूरा ध्यान शराब कारोबारियों को लाभ पहुचाने पर है। उन्होंने कहा कि राज्य भर की महिलाएं सड़क पर शराब के विरोध में आंदोलन कर रही हैं और सरकार महिलाओं के शराबबिरोधी आंदोलन को कुचलने के लिए उन पर मुकदमा दर्ज करवा रही है। प्रदीप भट्ट ने कहा कि बीजेपी की राज्य सरकार उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों का कितना अपमान कर रही है उसकी बानगी सचिवालय में देखने को मिली जहाँ महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी श्रीमती शुशीला बलूनी जी को सचिवालय परिसर में नही घुसने दिया। राज्य सरकार चारधाम यात्रा को चलाने में नाकाम साबित हो रही है। आये दिन वाहन दुर्घटनाये हो रही हैं तथा घटना के कई दिनों बाद भी मृतकों के शव तक प्रशाशन नही खोज पा रहा जिससे सरकार के आपदा प्रबंधन तंत्र की लचर ब्यवस्था की पोल खुल रही है।
नई दिल्ली : उत्तराखण्ड कांग्रेस के प्रवक्ता प्रदीप भट्ट ने दिल्ली में बयान जारी करते हुऐ कहा कि उत्तराखण्ड की भाजपा सरकार ठेकेदारों की सरकार है। भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस के बीजेपी के दावे खोखले हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सरकार को आम जनता से कोई लेना देना नही है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार उत्तराखण्ड में महिलाओं एवं राज्य आंदोलनकारियों को अपमानित करने का काम कर रही है। चुनाव के समय बीजेपी ने जनता से बड़े बड़े वादे करते हुए उत्तराखण्ड में शराबबंदी की बात कही थी किंतु मुख्यमंत्री का पूरा ध्यान शराब कारोबारियों को लाभ पहुचाने पर है। उन्होंने कहा कि राज्य भर की महिलाएं सड़क पर शराब के विरोध में आंदोलन कर रही हैं और सरकार महिलाओं के शराबबिरोधी आंदोलन को कुचलने के लिए उन पर मुकदमा दर्ज करवा रही है। प्रदीप भट्ट ने कहा कि बीजेपी की राज्य सरकार उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों का कितना अपमान कर रही है उसकी बानगी सचिवालय में देखने को मिली जहाँ महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी श्रीमती शुशीला बलूनी जी को सचिवालय परिसर में नही घुसने दिया। राज्य सरकार चारधाम यात्रा को चलाने में नाकाम साबित हो रही है। आये दिन वाहन दुर्घटनाये हो रही हैं तथा घटना के कई दिनों बाद भी मृतकों के शव तक प्रशाशन नही खोज पा रहा जिससे सरकार के आपदा प्रबंधन तंत्र की लचर ब्यवस्था की पोल खुल रही है।
कार्तिक आर्यन (kartik aryan) और कृत सेनन (Kriti Sanon) की फिल्म 'शहजााद' का ट्रेलर रिलीज होते ही इंटरनेट पर छा गया. ये फिल्म एक्शन पैक्ड फैमिली एंटरटेनर होने वाली है जिसके ट्रेलर पर दर्शकों ने खूब प्यार लुटाया. हालांकि, 'शहजादा' भी साउथ की एक फिल्म का ही हिंदी रीमेक है. आपको बता दें कि ये अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) की पिछले साल रिलीज हुई फिल्म 'अला बैकुंठपुरमलो' (Ala Vaikunthapurramuloo) की ऑफिशियल हिंदी रीमेक है. लेकिन फिल्म हिंदी में डब नहीं है शायद इसी वजह से ज्यादातर लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं है. हां, मगर आप अल्लू अर्जुन की फिल्म 'अला बैकुंठपुरमलो' को नेटफ्लिक्स पर कभी भी देख सकते हैं. फिल्म से कई सीन हूबहू 'शहजादा' में कॉपी किए गए हैं. वहीं, फिल्म में अल्लू अर्जुन के अलावा तब्बु और पूजा हेगड़े ने भी अहम भूमिका निभाई थी. खैर, कार्तिक आर्यन और कृति सेनन (Kriti Senon) की जोड़ी एक बार फिर स्क्रीन पर जादू बिखेरने के लिए तैयार है. कार्तिक की फिल्म 'शहजादा' का ट्रेलर देखकर हर कोई उम्मीद कर रहा है कि ये फिल्म एक्शन और कॉमेडी से भरपूर होने वाली है. ट्रेलर में कार्तिक का डायलॉग फैमिली पर बात आए तो डिस्कशन नहीं एक्शन करते हैं, फैंस को बहुत पसंद आ रहा है. 'शहजादा' की खास बात ये भी है कि ये कार्तिक आर्यन के करियर की पहली एक्शन मूवी है. फिल्म के ट्रेलर के बाद लोग कार्तिक की 'शहजादा' को लेकर पहले से ज्यादा एक्साइटेड हो गए हैं. ये फिल्म अगले महीने यानी 10 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. फिल्म में कार्तिक और कृति सेनन के अलावा परेश रावल और राजपाल यादव भी अहम भूमिका में हैं. इसके अलावा जल्द ही कार्तिक डायरेक्टर समीर विध्वंस की अगली फिल्म 'सत्यप्रेम की कथा' में कियारा आडवाणी संग नजर आएंगे. इन दोनों फिल्मों के अलावा कार्तिक के पास इस वक्त 'कैप्टन अमेरिका' और 'आशिकी 3' जैसी फिल्में भी पाइपलाइन में हैं.
कार्तिक आर्यन और कृत सेनन की फिल्म 'शहजााद' का ट्रेलर रिलीज होते ही इंटरनेट पर छा गया. ये फिल्म एक्शन पैक्ड फैमिली एंटरटेनर होने वाली है जिसके ट्रेलर पर दर्शकों ने खूब प्यार लुटाया. हालांकि, 'शहजादा' भी साउथ की एक फिल्म का ही हिंदी रीमेक है. आपको बता दें कि ये अल्लू अर्जुन की पिछले साल रिलीज हुई फिल्म 'अला बैकुंठपुरमलो' की ऑफिशियल हिंदी रीमेक है. लेकिन फिल्म हिंदी में डब नहीं है शायद इसी वजह से ज्यादातर लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं है. हां, मगर आप अल्लू अर्जुन की फिल्म 'अला बैकुंठपुरमलो' को नेटफ्लिक्स पर कभी भी देख सकते हैं. फिल्म से कई सीन हूबहू 'शहजादा' में कॉपी किए गए हैं. वहीं, फिल्म में अल्लू अर्जुन के अलावा तब्बु और पूजा हेगड़े ने भी अहम भूमिका निभाई थी. खैर, कार्तिक आर्यन और कृति सेनन की जोड़ी एक बार फिर स्क्रीन पर जादू बिखेरने के लिए तैयार है. कार्तिक की फिल्म 'शहजादा' का ट्रेलर देखकर हर कोई उम्मीद कर रहा है कि ये फिल्म एक्शन और कॉमेडी से भरपूर होने वाली है. ट्रेलर में कार्तिक का डायलॉग फैमिली पर बात आए तो डिस्कशन नहीं एक्शन करते हैं, फैंस को बहुत पसंद आ रहा है. 'शहजादा' की खास बात ये भी है कि ये कार्तिक आर्यन के करियर की पहली एक्शन मूवी है. फिल्म के ट्रेलर के बाद लोग कार्तिक की 'शहजादा' को लेकर पहले से ज्यादा एक्साइटेड हो गए हैं. ये फिल्म अगले महीने यानी दस फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. फिल्म में कार्तिक और कृति सेनन के अलावा परेश रावल और राजपाल यादव भी अहम भूमिका में हैं. इसके अलावा जल्द ही कार्तिक डायरेक्टर समीर विध्वंस की अगली फिल्म 'सत्यप्रेम की कथा' में कियारा आडवाणी संग नजर आएंगे. इन दोनों फिल्मों के अलावा कार्तिक के पास इस वक्त 'कैप्टन अमेरिका' और 'आशिकी तीन' जैसी फिल्में भी पाइपलाइन में हैं.
[ 'ढोला मारु रा दूहा' को यदि राजस्थान के सर्वोत्तम जातीय काव्यों में से एक कहा जाय तो कोई असंगति नहीं । कविता की सफलता उसकी भाव प्रवरणता और मानस प्रक्षालन क्षमता में है, इस दृष्टि से यह एक श्रेष्ठ कृति मानी जा सकती है । ] प्रसिद्ध अमेरिकन विन्तक एमरसन का कथन है कि "महान व्यक्तियों का जीवन चरित्र प्रायः संक्षिप्त ही होता है । उनका वास्तविक जीवन तो उनकी कृतियों में निहित रहता है। " कितने आश्चर्य की बात है कि हम प्रायः संसार के सभी महापुरुषों के सम्बन्ध में बहुत सीमित ज्ञान रखते हैं। उनका सच्चा जीवन तो उनके कृतित्व में छिपा रहता है और वही विश्व का मार्ग प्रदर्शक बनता है। हमारे चरित नायक के सम्बन्ध में हम कुछ भी नहीं जानते। इसमें आश्चर्य क्या है ? एलोरा के कैलाश मन्दिर के शिल्पकार और अजन्ता के चित्रकार को भला कौन जानता है ? उनके जन्म-मरण और जीवन - इतिवृत्त को न जानते हुए भी वे हमारे लिये चिर परिचित हैं। भारतीय संस्कृति के अनन्य साधक वे कलाकार विस्मृत होने पर भी अतीत की गढ़ के नीचे से अपने व्यक्तित्व की झांकी दिखा देते हैं। इसी प्रकार राजस्थानी प्रेमाख्यान 'ढोलामारू रा दूहा' का रचयिता हम से पूर्ण अपरिचित होने पर हमारे बहुत निकट है। उसने राजस्थान की धड़कन को समझा है, जीवन की गहराइयों में डूबकर में हमें अपूर्व उल्लास प्रदान किया है, और 'लोकगाथा' का रचयिता बनकर 'लोकगीत' के स्थान पर 'क्लेसिक' दे गया है। राजस्थान की लोक-मनसा पर आज भी उसका आख्यान शासन करता है, युग युग से उसकी कथा चित्रकार को प्रेरणा देती आई है, वर्षों से जनकवि और जनग यक इसी कथानक को अपने ढंग से साधते रहे हैं। कुछ विद्वान 'ढोला मारू रा दोहा' नामक काव्य के रचयिता के रूप में 'कल्लोल' को ग्रहण करने के लिये तत्पर नहीं हैं। उनकी धारणा में 'कल्लोल' नामक कवि शायद ही हुआ हो। वहां दूसरी ओर डॉ० मोतीलाल मेनारिया १. ठा० रामसिंह, सूर्यकरण पारीक, नरोत्तम स्वामी - 'ढोला मारू रा दूहा' भूमिका, पृष्ठ २८ । [ राजस्थानी कवि मा । १ इस काव्य के रचयिता को 'कल्लोल' नाम से स्वीकार करते हैं । 'ढोला मारू रा दूहा' के सम्पादक तो यहां तक मानते हैं, कि यह किसी एक कवि की कृति • ह्रीं है - 'कल्लोल' की कवि रूप में कल्पना करना अनुचित है। किन्तु मेनारिया जी निम्न दोहे की साक्षी पर इस लोकप्रिय काव्य के कर्ता को 'कल्लोल' ठहराते हैं । गाहा गूढा गीत रस, कवित कथा कल्लौल । चतुर तथा मन रीझवै, कहिया कवि कल्लौल ॥ मेरी तो निश्चित मान्यता है; चाहे हम इस प्रन्थ को 'कल्लोल' रचित माने या न माने, किन्तु इसे किसी कवि की रचना ता मानना ही होगा । 'ढोला मारू रा दूहा' में अनेक लोकगीत - परम्पराओं और लोकवार्ता की विशेषताओं का पालन हुआ है, किन्तु केवल इसी आधार पर हम इसे किसी कवि की कृति होने से रोक नहीं सकते। यह आधार इतना लचर है कि इसे सही मान लेने पर हमें समूचे सूफी प्रेमाख्यानों को भी किसी कवि द्वारा रचित मानने से इन्कार करना पड़ेगा। ऐसा करना कितनी भयंकर भूल होगी, इसे समझा जा सकता है और फिर कालान्तर में ऐसी भूल का परिमार्जन होना भी दुष्कर हो जाता है । 'ढोला मारू रा दूहा' के विद्वान सम्पादकों के अनुसार 'ढोला मारू की प्रेम गाथा को किसी व्यक्ति विशेष की कृति न मान कर भी हमको यह कल्पना करने में कठिनाई नहीं होती कि यह काव्य मौखिक परम्परा के प्राचीन काव्ययुग की एक विशेष कृति है - और अन्त में मौखिक परम्परा से चला आता हुआ यह काव्य हमको किसी विशेष कवि की कृति के रूप में नहीं मिला, बल्कि जनता के काव्य के रूप में उपलब्ध हुआ है और अपनी मान्यता की उन्होंने बड़े सुन्दर ढंग से तर्क संगत व्याख्या की है । 'ढोला मारू रा दूहा' मौखिक २. मोतीलाल मेनारिया - राजस्थानी भाषा और साहित्य पृष्ठ १०५ । राजस्थाना कवि भाग १ । परम्परा में होने मात्र से लोकगोत परम्परा मैं नहीं जाते। जायसी के पद्मावत को फकीर गाते फिरते थे और नागमती के विरहवर्णन को एक भिखारी से सुन कर ही अमेठी के राजा ने जायसी को सम्मान दिया था । अतः वियोग वर्णन अथवा बारह मासा को आसानी से मौखिक परम्परा के अन्तर्गत माना जा सकता है । पर इससे कैसे इन्कार किया जा सकता है कि वह एक कवि विशेष की कृति नहीं है ? ठीक इसी प्रकार 'ढोला मारू रा दूहा' को किसी विशेष कवि की कृति न मानना सरासर अन्याय है। अतः हम इस प्रसिद्ध काव्य के रचयिता के रूप में 'कल्लोल' को ही सम्मान देंगे। कवि 'कल्लोल' स्वयं बड़ा गुणी था, वह साहित्य-शास्त्र को भली प्रकार समझता था और अपने समय से पहले की साहित्यिक रचनाओं से परिचित था। साहित्यिक परम्पराओं व अपभ्रंश-माकृत कविताधारा का उसने भली प्रकार व्अवगाहन किया था। उसकी रचनाओं में हमें कुछ ऐसी रूढ़ियाँ मिलती हैं, जो एक ओर कषि की साहित्यिक परम्परा- प्रवीणता की उद्घोषणा करती हैं और उसे अपभ्रंश-काव्य पद्धति से पूर्ण परिचित सिद्ध करती हैं, वहां दूसरी ओोर उसे लोकमानस में अप्रतिम स्थान दिलाने की योजना करती है। यही कारण है कि 'ढोला मारू रा दूहा' कुशल कवि के काव्य-कौशल से जहाँ एक ओर 'लोकवार्ता' से अभिन्नता स्थापित करने का यत्न करता है, वहां दूसरी ओर शास्त्रीय काव्यों की अनेक बातों में बराबरी करता है। जान पड़ता है कि कवि का साहित्यिक अभ्ययन गहरा था । उसने प्राकृत, संस्कृत, अपभ्रंश व देश्यभाषा साहित्य की भावना को भली प्रकार समझा था। कवि के अनेक उप माम मौलिक होते हुये भी परम्परा के तर्क संगत बिकास के रूप में किये जा सकते हैं। कवि ने अनेक स्थलों पर कवि समयों व काव्य प्रसिद्धियों का प्रयोग किया है, ओइस के सुशिक्षित व काव्य-कला प्रवीण होने का परिचायक है। मान्यता की दृष्टि में निम्न दोहे विचारार्थ प्रस्तुत कर रहा हूंमारवणी इम बीनवर, घनी भाजूणी रति । गाहा - गूढ़ा - गीत - गुण, लहि का नवली वति ।। गाहा - गीत-विनोद रस सगुणां दीह लियंति । कई निद्रा, कई कलह करि, मृरनि दीह गमंति ॥ 'मारवणी ढोला से यों विनय करती है कि आज की रात धन्य है । आज कोई गाथा या पहेली, गीत या गुरगोक्ति, या कोई नवीन कथा कहिये क्योंकि गुरगवान् मनुष्यों के दिन गाथा, गीत और विनोद के रस में बीतते हैं और मूर्ख या तो नींद में या कलह में दिन बिताते हैं । काव्य विनोदों से समय बिताने की कल्पना कोई नई नहीं है। कादम्बरी से लेकर अपभ्रंश-काव्यों तक इस परम्परा के दर्शन होते हैं । अतः कल्लोल द्वारा रचित ये दो दोहे उसको सुशिक्षित, कव्य शात्र का ज्ञानी और परम्पराओं का सजग प्रहरी सिद्ध कर देते हैं। कल्लोल मध्ययुगीन व्यवस्था का द्योतक है और इसीलिये जीवन के विस्तृत क्षेत्र को काव्य-विषय के रूप में चुनकर भी उसने थोड़े प्रसंगों पर लिखा। उसे वर्ण्य वस्तु को सरस बनाना आता था। अतः प्रसंगों को चित्रित करने पर भी वह जीवन और विषय वस्तु के साथ न्याय कर सका । 'ऋतुत्रर्णन ' की नई गई परिपाटी भी उसकी कविता को निष्प्राण नहीं बना सकी । 'कल्लोल' कविता के अभाव वधयों से परिचित था। अतः वह अनेक दोषों को बचा गया और अनेक विशेषताओं को अपनी कविता में गूंथ गया । उपने वर्णन के फेर में पड़ कर तत्कालीन कवियों की भांति वस्तुओं की दीर्घ सूचियों का प्ररणयन नहीं किया। मानव के दुख-सुख, प्रम-घृणा, व्यंग-विनोद, सह-योग-विरह, अनुराग-जलन, भावुकता कर्तव्य, रोष-दया, आदि अनेक भावनाओं की अभिव्यक्ति कवि की सबसे बड़ी विशेषता है। इसी लिये 'ढोला३. हजारी प्रसाद द्विवेदी-सा हत्य का मर्म पृष्ठ ११ ।
[ 'ढोला मारु रा दूहा' को यदि राजस्थान के सर्वोत्तम जातीय काव्यों में से एक कहा जाय तो कोई असंगति नहीं । कविता की सफलता उसकी भाव प्रवरणता और मानस प्रक्षालन क्षमता में है, इस दृष्टि से यह एक श्रेष्ठ कृति मानी जा सकती है । ] प्रसिद्ध अमेरिकन विन्तक एमरसन का कथन है कि "महान व्यक्तियों का जीवन चरित्र प्रायः संक्षिप्त ही होता है । उनका वास्तविक जीवन तो उनकी कृतियों में निहित रहता है। " कितने आश्चर्य की बात है कि हम प्रायः संसार के सभी महापुरुषों के सम्बन्ध में बहुत सीमित ज्ञान रखते हैं। उनका सच्चा जीवन तो उनके कृतित्व में छिपा रहता है और वही विश्व का मार्ग प्रदर्शक बनता है। हमारे चरित नायक के सम्बन्ध में हम कुछ भी नहीं जानते। इसमें आश्चर्य क्या है ? एलोरा के कैलाश मन्दिर के शिल्पकार और अजन्ता के चित्रकार को भला कौन जानता है ? उनके जन्म-मरण और जीवन - इतिवृत्त को न जानते हुए भी वे हमारे लिये चिर परिचित हैं। भारतीय संस्कृति के अनन्य साधक वे कलाकार विस्मृत होने पर भी अतीत की गढ़ के नीचे से अपने व्यक्तित्व की झांकी दिखा देते हैं। इसी प्रकार राजस्थानी प्रेमाख्यान 'ढोलामारू रा दूहा' का रचयिता हम से पूर्ण अपरिचित होने पर हमारे बहुत निकट है। उसने राजस्थान की धड़कन को समझा है, जीवन की गहराइयों में डूबकर में हमें अपूर्व उल्लास प्रदान किया है, और 'लोकगाथा' का रचयिता बनकर 'लोकगीत' के स्थान पर 'क्लेसिक' दे गया है। राजस्थान की लोक-मनसा पर आज भी उसका आख्यान शासन करता है, युग युग से उसकी कथा चित्रकार को प्रेरणा देती आई है, वर्षों से जनकवि और जनग यक इसी कथानक को अपने ढंग से साधते रहे हैं। कुछ विद्वान 'ढोला मारू रा दोहा' नामक काव्य के रचयिता के रूप में 'कल्लोल' को ग्रहण करने के लिये तत्पर नहीं हैं। उनकी धारणा में 'कल्लोल' नामक कवि शायद ही हुआ हो। वहां दूसरी ओर डॉशून्य मोतीलाल मेनारिया एक. ठाशून्य रामसिंह, सूर्यकरण पारीक, नरोत्तम स्वामी - 'ढोला मारू रा दूहा' भूमिका, पृष्ठ अट्ठाईस । [ राजस्थानी कवि मा । एक इस काव्य के रचयिता को 'कल्लोल' नाम से स्वीकार करते हैं । 'ढोला मारू रा दूहा' के सम्पादक तो यहां तक मानते हैं, कि यह किसी एक कवि की कृति • ह्रीं है - 'कल्लोल' की कवि रूप में कल्पना करना अनुचित है। किन्तु मेनारिया जी निम्न दोहे की साक्षी पर इस लोकप्रिय काव्य के कर्ता को 'कल्लोल' ठहराते हैं । गाहा गूढा गीत रस, कवित कथा कल्लौल । चतुर तथा मन रीझवै, कहिया कवि कल्लौल ॥ मेरी तो निश्चित मान्यता है; चाहे हम इस प्रन्थ को 'कल्लोल' रचित माने या न माने, किन्तु इसे किसी कवि की रचना ता मानना ही होगा । 'ढोला मारू रा दूहा' में अनेक लोकगीत - परम्पराओं और लोकवार्ता की विशेषताओं का पालन हुआ है, किन्तु केवल इसी आधार पर हम इसे किसी कवि की कृति होने से रोक नहीं सकते। यह आधार इतना लचर है कि इसे सही मान लेने पर हमें समूचे सूफी प्रेमाख्यानों को भी किसी कवि द्वारा रचित मानने से इन्कार करना पड़ेगा। ऐसा करना कितनी भयंकर भूल होगी, इसे समझा जा सकता है और फिर कालान्तर में ऐसी भूल का परिमार्जन होना भी दुष्कर हो जाता है । 'ढोला मारू रा दूहा' के विद्वान सम्पादकों के अनुसार 'ढोला मारू की प्रेम गाथा को किसी व्यक्ति विशेष की कृति न मान कर भी हमको यह कल्पना करने में कठिनाई नहीं होती कि यह काव्य मौखिक परम्परा के प्राचीन काव्ययुग की एक विशेष कृति है - और अन्त में मौखिक परम्परा से चला आता हुआ यह काव्य हमको किसी विशेष कवि की कृति के रूप में नहीं मिला, बल्कि जनता के काव्य के रूप में उपलब्ध हुआ है और अपनी मान्यता की उन्होंने बड़े सुन्दर ढंग से तर्क संगत व्याख्या की है । 'ढोला मारू रा दूहा' मौखिक दो. मोतीलाल मेनारिया - राजस्थानी भाषा और साहित्य पृष्ठ एक सौ पाँच । राजस्थाना कवि भाग एक । परम्परा में होने मात्र से लोकगोत परम्परा मैं नहीं जाते। जायसी के पद्मावत को फकीर गाते फिरते थे और नागमती के विरहवर्णन को एक भिखारी से सुन कर ही अमेठी के राजा ने जायसी को सम्मान दिया था । अतः वियोग वर्णन अथवा बारह मासा को आसानी से मौखिक परम्परा के अन्तर्गत माना जा सकता है । पर इससे कैसे इन्कार किया जा सकता है कि वह एक कवि विशेष की कृति नहीं है ? ठीक इसी प्रकार 'ढोला मारू रा दूहा' को किसी विशेष कवि की कृति न मानना सरासर अन्याय है। अतः हम इस प्रसिद्ध काव्य के रचयिता के रूप में 'कल्लोल' को ही सम्मान देंगे। कवि 'कल्लोल' स्वयं बड़ा गुणी था, वह साहित्य-शास्त्र को भली प्रकार समझता था और अपने समय से पहले की साहित्यिक रचनाओं से परिचित था। साहित्यिक परम्पराओं व अपभ्रंश-माकृत कविताधारा का उसने भली प्रकार व्अवगाहन किया था। उसकी रचनाओं में हमें कुछ ऐसी रूढ़ियाँ मिलती हैं, जो एक ओर कषि की साहित्यिक परम्परा- प्रवीणता की उद्घोषणा करती हैं और उसे अपभ्रंश-काव्य पद्धति से पूर्ण परिचित सिद्ध करती हैं, वहां दूसरी ओोर उसे लोकमानस में अप्रतिम स्थान दिलाने की योजना करती है। यही कारण है कि 'ढोला मारू रा दूहा' कुशल कवि के काव्य-कौशल से जहाँ एक ओर 'लोकवार्ता' से अभिन्नता स्थापित करने का यत्न करता है, वहां दूसरी ओर शास्त्रीय काव्यों की अनेक बातों में बराबरी करता है। जान पड़ता है कि कवि का साहित्यिक अभ्ययन गहरा था । उसने प्राकृत, संस्कृत, अपभ्रंश व देश्यभाषा साहित्य की भावना को भली प्रकार समझा था। कवि के अनेक उप माम मौलिक होते हुये भी परम्परा के तर्क संगत बिकास के रूप में किये जा सकते हैं। कवि ने अनेक स्थलों पर कवि समयों व काव्य प्रसिद्धियों का प्रयोग किया है, ओइस के सुशिक्षित व काव्य-कला प्रवीण होने का परिचायक है। मान्यता की दृष्टि में निम्न दोहे विचारार्थ प्रस्तुत कर रहा हूंमारवणी इम बीनवर, घनी भाजूणी रति । गाहा - गूढ़ा - गीत - गुण, लहि का नवली वति ।। गाहा - गीत-विनोद रस सगुणां दीह लियंति । कई निद्रा, कई कलह करि, मृरनि दीह गमंति ॥ 'मारवणी ढोला से यों विनय करती है कि आज की रात धन्य है । आज कोई गाथा या पहेली, गीत या गुरगोक्ति, या कोई नवीन कथा कहिये क्योंकि गुरगवान् मनुष्यों के दिन गाथा, गीत और विनोद के रस में बीतते हैं और मूर्ख या तो नींद में या कलह में दिन बिताते हैं । काव्य विनोदों से समय बिताने की कल्पना कोई नई नहीं है। कादम्बरी से लेकर अपभ्रंश-काव्यों तक इस परम्परा के दर्शन होते हैं । अतः कल्लोल द्वारा रचित ये दो दोहे उसको सुशिक्षित, कव्य शात्र का ज्ञानी और परम्पराओं का सजग प्रहरी सिद्ध कर देते हैं। कल्लोल मध्ययुगीन व्यवस्था का द्योतक है और इसीलिये जीवन के विस्तृत क्षेत्र को काव्य-विषय के रूप में चुनकर भी उसने थोड़े प्रसंगों पर लिखा। उसे वर्ण्य वस्तु को सरस बनाना आता था। अतः प्रसंगों को चित्रित करने पर भी वह जीवन और विषय वस्तु के साथ न्याय कर सका । 'ऋतुत्रर्णन ' की नई गई परिपाटी भी उसकी कविता को निष्प्राण नहीं बना सकी । 'कल्लोल' कविता के अभाव वधयों से परिचित था। अतः वह अनेक दोषों को बचा गया और अनेक विशेषताओं को अपनी कविता में गूंथ गया । उपने वर्णन के फेर में पड़ कर तत्कालीन कवियों की भांति वस्तुओं की दीर्घ सूचियों का प्ररणयन नहीं किया। मानव के दुख-सुख, प्रम-घृणा, व्यंग-विनोद, सह-योग-विरह, अनुराग-जलन, भावुकता कर्तव्य, रोष-दया, आदि अनेक भावनाओं की अभिव्यक्ति कवि की सबसे बड़ी विशेषता है। इसी लिये 'ढोलातीन. हजारी प्रसाद द्विवेदी-सा हत्य का मर्म पृष्ठ ग्यारह ।
बात है राजस्थान के ढोलपुर जिले के बल्दियापुर गांव की जहाँ स्थानीय पंचायत ने लड़कियों के जींस पहनने और मोबाइल रखने पर रोक लगा दी है। पंचायत का मानना है इन सबसे समाज की मान-मर्यादा को ठेस पहुंचती है। शुरू में पंचायत की यह सभा गांव में शराब की समस्या के बारे में चर्चा करने के लिए आयोजित की गई थी किन्तु चर्चा होते होते बात लड़कियों के जींस पहनने और मोबाइल रखने तक पहुँच गई । पंचायत ने गाओं में शराब पर पाबन्दी लगाने की घोषणा कर दी है। पंचायत का कहना है कि शराब सेवन से गाओं के बहुत से परिवार नष्ट हो गए हैं और यह क्रम जारी है। शराब पीने वालों पर 1100 रुपए जुर्माना लगेगा और शराब पीने वाले व्यक्ति के बारे में जानकारी देने पर 500 रुपए का इनाम देने की घोषणा की है । इस्लामाबाद ने कुलभूषण जाधव को कांसुलर पहुंच के लिए भारत के अनुरोध को फिर से खारिज कर दिया है। वर्तमान में जाधव पाकिस्तान में मौत की सजा का सामना कर रहे हैं। जाधव को जासूसी, आतंकवाद और विध्वंसक गतिविधियों के कथित आरोपों पर पाकिस्तान की सेना ने अपने कब्जे में किया हुआ है । भारत ने पाकिस्तान से से अनुरोध किया था कि पूर्व नौ सैनिक अधिकारी जाधव को पूर्ण और शीघ्र कांसुलर सहायता प्रदान करे, क्योंकि दोनों देशों ने एक-दूसरे की जेलों में दर्ज कैदियों की सूची आदान प्रदान है । पिछले साल बलूचिस्तान प्रांत से जाधव की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान कम से कम पांच ऐसे ही भारत अनुरोधों को खारिज कर चूका है। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने एक बयान में नागरिक कैदियों के साथ जाधव के मामले को जोड़ना तर्कहीन बताया। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में बगावत की भनक नजर आने लगी है। इसमें चर्चा है दो नामों की। भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष सुहेलदेव और प्रदेश के विकलांग कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर। बात यहाँ तक पहुंच गई है कि राजभर ने हजाज़ीपुर में चार जुलाई को मुख्यालय पर धरना देने की घोषणा कर दी है। उनका योगी सरकार पर अनदेखी का आरोप है। उनका कहना है कि मैं उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री पद पर हूँ किन्तु गाज़ीपुर जिले में सरकारी अफसर मेरी बात पर गौर तक नहीं करते हैं। जब अफसर मेरी बात तक नहीं सुनते तब वे पार्टी के कार्यकताओं की बात कैसे सुनेंगे। आगराः ताजसिटी की प्यास को बुझाने के लिये आगरा बैराज बनाये जाने का रास्ता एक बार पुनः साफ हो गया है। प्रमुख अभियंता (प्रोजैक्ट्सन) कुणाल कुलश्रेष्ठ ने बताया कि उन्होंने आगरा बैराज की फिजिविल्टीै रिपोर्ट और डी पी आर को अपडेट करने का आदेश अधीक्षक अभियंता आगरा को दे दिया है। यह बैराज पूर्व से ही यमुना नदी का वर्षा का लीन जल अधिकतम संचित करने की नीति के तहत स्वीकृत था। बस अब इसमें से दो नहरें और निकाली जायेंगी जिससे यमुना नदी क्षेत्र के आसपास के गांवों में खेती के लिये बना रहने वाला जलसंकट दूर हो सके। आगरा। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डा0 दिनेश शर्मा ने जिला योजना समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुये कहा कि पूरे प्रदेश में समग्र विकास की शुरूआत हो चुकी है जिसमें आगरा का भी समग्र विकास होगा। उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधि और अधिकारियों में समन्वय अच्छा होना चाहिए। अधिकारी भी कर्तव्य बोध के साथ विकास कार्याें में व्यक्तिगत रूचि लें, जिससे आगरा जैसे महत्वपूर्ण जनपद का और अधिक समग्र विकास कराया जाय। वर्ष-2017-18 की जिला योजना हेतु रू 43440 लाख का परिव्यय अनुमोदित किया गया है। बैठक में अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष सांसद प्रो0 रामशंकर कठेरिया, सांसद चौधरी बाबूलाल भी उपस्थित थे। 'आगरा का इंटरनेशनल एयरपोर्ट : खुला खेल फर्रखाबादी' ( राजीव सक्सेना ) आगरा। शरीर से अक्षम नैन्सी की आगरा जाकर ताज देखने की लालसा इतनी थी कि वह अपनी चाहत को पूरी करने के लिए उन्होंने जेट द्वारा आगरा पहुंचने के लिए विशेष व्यवस्था की,जोकि उनके लिए आसान नहीं था। वह दुनिया के आठवे वंडर होने वाले ताज की सुंदरता का अनुभव करना चाहती थीं । उन्होंने उस समय कहा था जो कुछ भी हो, इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता कि सौदर्यता के मामले में ताज उच्च स्थान पर है। उन्होंने आगरा में एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट की कमी को उस समय भी दोहराया था। उन्होंने कहा था सौदर्यता के मामले में ताज विश्व में उच्च स्थान रखते हुए भी यहाँ इंटरनेशनल एयरपोर्ट नहीं बना पाया है। इस पर उन्हें दुख था। आगरा। शरीर से अक्षम नैन्सी की आगरा जाकर ताज देखने की लालसा इतनी थी कि वह अपनी चाहत को पूरी करने के लिए उन्होंने जेट द्वारा आगरा पहुंचने के लिए विशेष व्यवस्था की,जोकि उनके लिए आसान नहीं था। वह दुनिया के आठवे वंडर होने वाले ताज की सुंदरता का अनुभव करना चाहती थीं । उन्होंने उस समय कहा था जो कुछ भी हो, इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता कि सौदर्यता के मामले में ताज उच्च स्थान पर है। उन्होंने आगरा में एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट की कमी को उस समय भी दोहराया था। उन्होंने कहा था सौदर्यता के मामले में ताज विश्व में उच्च स्थान रखते हुए भी यहाँ इंटरनेशनल एयरपोर्ट नहीं बना पाया है। इस पर उन्हें दुख था। यदि आगरा एयरपोर्ट के पुराने एतिहास पर नजर डालें,आगरा की एयर कनैक्टिविटी किंग जर्ज पंचम के समय से स्वीकारी गयी थी ,टाटा ने ही अपनी एयरमेल सेवा के लिये आगरा का हवाई अडडा बनवाया था। एयरफर्स स्टेशन आगरा पर टाटा गेट के नाम से शुरूआती दरवाजा अब भी मौजूद है। सैकिंड वर्ल्डवार शुरू हो जाने के बाद आगरा में टाटा की एयरस्ट्रिप मित्रदेशों की सेनाओं के नार्थईस्ट आप्रेशन के लिये ले ली गयी। भारत में एक देश, एक कर, एक बाजार का सपना वास्तविक हो गया है। 30 जून की रात 12 बजे देश में जीएसटी लागू हो गया। इसके लागू करने के लिए आधी रात में संसद में विशेष सत्र का आयोजन किया गया था । अब केंद्र और प्रदेश के करीब डेढ दर्जन टैक्स के बदले जीएसटी ही देना होगा। इस टैक्स के लागू होने पर सभी राज्यों में लगभग सभी चीजें और वस्तुएं एक ही कीमत पर मिलेंगे। अब तक एक ही चीज के लिए दो राज्यों में अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी को लागू करने के लिये सभी राजनीतिक दलों और प्रदेश सरकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कैसे राजनीतिक विरोधाभास के बाद भी देशहित में तमाम दलों ने मिलकर फैसला किया है। नई दिल्ली। रेल मंत्रालय ने यात्रा के दौरान मुद्रित आधार कार्ड के समान पहचान के निर्धारित प्रमाण के रूप में डाउनलोड किए गए आधार (ई-आधार) को भी शामिल करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही अब रेल के आरक्षित वर्ग में यात्रा करने के लिए निर्धारित पहचान के वैध प्रमाणों की पूरी सूची जारी की है। जिसमें भारतीय चुनाव आयोग द्वारा जारी मतदाता फोटो पहचान पत्र,पासपोर्ट,आयकर विभाग द्वारा जारी पैन कार्ड,आरटीओ द्वारा जारी ड्राइविंग लाइसेंस,केंद्रीय, राज्य सरकार द्वारा जारी सीरियल नंबर वाला फोटो पहचान पत्र,मान्यता प्राप्त स्कूल,कॉलेज द्वारा अपने छात्रों के लिए जारी किए गए छात्र के फोटोग्राफ वाला पहचान पत्र,फोटो के साथ सरकारी बैंक की पासबुक, बैंक द्वारा जारी लेमिनेट किया हुआ फोटो के साथ क्रेडिट कार्ड,मुद्रित विशिष्ट पहचान कार्ड "आधार" या डाउनलोड किया हुआ आधार (ई-आधार) कार्ड, यात्री की फोटो के साथ राशन कार्ड शामिल हैं। आगराः अगस्त को लालू यादव जी की बिहार रैली में शामिल रहूंगा इस रैली में मायावती भी रहेंगी, अगर वहां पर केन्द्र सरकार के खिलाफ कोई गठबंधन होता है तो इसका वहीं पर ही ऐलान किया जाएगा। ' है। राज्य सभा की एक सीट के लिये समर्थन मिलना तय होते ही बसपा भी आधिकारिक रूप से रैली में भाग लेनेकी आधिकारिक पुष्टि कर देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड पहुँचने पर वहां के प्रधानमंत्री मार्क रूट ने हिंदी में ट्वीट कर उनका स्वागत किया। दोनों प्रधान मंत्रियों ने ट्वीटों का आदान प्रदान किया। नरेंद्र मोदी ने भी डच भाषा में ट्वीट कर मार्क रूट को प्रसन्न कर दिया। नरेंद्र मोदी ट्वीट करने के बहुत शौकीन हैं। वह जहाँ भी जाते हैं उस देश की भाषा में अवश्य ट्वीट करते हैं। प्रधानमंत्री मार्क रूट ने हिंदी में लिखा था नीदरलैंड्स में आपका स्वागत है। अपने एक अन्य ट्वीट में नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने लिखा था कि भारत और नीदेरलैंड्स के 70 साल के द्विपक्षीय रिश्ते के साथ मैं हमारी बैठक के लिए बहुत उत्सुक हूं। नीदरलैंड्स में पधारने के लिए उन्होंने ट्वीट के जरिये हिंदी में धन्यवाद भी दिया। सदस्यता लें संदेश (Atom)
बात है राजस्थान के ढोलपुर जिले के बल्दियापुर गांव की जहाँ स्थानीय पंचायत ने लड़कियों के जींस पहनने और मोबाइल रखने पर रोक लगा दी है। पंचायत का मानना है इन सबसे समाज की मान-मर्यादा को ठेस पहुंचती है। शुरू में पंचायत की यह सभा गांव में शराब की समस्या के बारे में चर्चा करने के लिए आयोजित की गई थी किन्तु चर्चा होते होते बात लड़कियों के जींस पहनने और मोबाइल रखने तक पहुँच गई । पंचायत ने गाओं में शराब पर पाबन्दी लगाने की घोषणा कर दी है। पंचायत का कहना है कि शराब सेवन से गाओं के बहुत से परिवार नष्ट हो गए हैं और यह क्रम जारी है। शराब पीने वालों पर एक हज़ार एक सौ रुपयापए जुर्माना लगेगा और शराब पीने वाले व्यक्ति के बारे में जानकारी देने पर पाँच सौ रुपयापए का इनाम देने की घोषणा की है । इस्लामाबाद ने कुलभूषण जाधव को कांसुलर पहुंच के लिए भारत के अनुरोध को फिर से खारिज कर दिया है। वर्तमान में जाधव पाकिस्तान में मौत की सजा का सामना कर रहे हैं। जाधव को जासूसी, आतंकवाद और विध्वंसक गतिविधियों के कथित आरोपों पर पाकिस्तान की सेना ने अपने कब्जे में किया हुआ है । भारत ने पाकिस्तान से से अनुरोध किया था कि पूर्व नौ सैनिक अधिकारी जाधव को पूर्ण और शीघ्र कांसुलर सहायता प्रदान करे, क्योंकि दोनों देशों ने एक-दूसरे की जेलों में दर्ज कैदियों की सूची आदान प्रदान है । पिछले साल बलूचिस्तान प्रांत से जाधव की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान कम से कम पांच ऐसे ही भारत अनुरोधों को खारिज कर चूका है। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने एक बयान में नागरिक कैदियों के साथ जाधव के मामले को जोड़ना तर्कहीन बताया। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में बगावत की भनक नजर आने लगी है। इसमें चर्चा है दो नामों की। भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष सुहेलदेव और प्रदेश के विकलांग कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर। बात यहाँ तक पहुंच गई है कि राजभर ने हजाज़ीपुर में चार जुलाई को मुख्यालय पर धरना देने की घोषणा कर दी है। उनका योगी सरकार पर अनदेखी का आरोप है। उनका कहना है कि मैं उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री पद पर हूँ किन्तु गाज़ीपुर जिले में सरकारी अफसर मेरी बात पर गौर तक नहीं करते हैं। जब अफसर मेरी बात तक नहीं सुनते तब वे पार्टी के कार्यकताओं की बात कैसे सुनेंगे। आगराः ताजसिटी की प्यास को बुझाने के लिये आगरा बैराज बनाये जाने का रास्ता एक बार पुनः साफ हो गया है। प्रमुख अभियंता कुणाल कुलश्रेष्ठ ने बताया कि उन्होंने आगरा बैराज की फिजिविल्टीै रिपोर्ट और डी पी आर को अपडेट करने का आदेश अधीक्षक अभियंता आगरा को दे दिया है। यह बैराज पूर्व से ही यमुना नदी का वर्षा का लीन जल अधिकतम संचित करने की नीति के तहत स्वीकृत था। बस अब इसमें से दो नहरें और निकाली जायेंगी जिससे यमुना नदी क्षेत्र के आसपास के गांवों में खेती के लिये बना रहने वाला जलसंकट दूर हो सके। आगरा। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डाशून्य दिनेश शर्मा ने जिला योजना समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुये कहा कि पूरे प्रदेश में समग्र विकास की शुरूआत हो चुकी है जिसमें आगरा का भी समग्र विकास होगा। उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधि और अधिकारियों में समन्वय अच्छा होना चाहिए। अधिकारी भी कर्तव्य बोध के साथ विकास कार्याें में व्यक्तिगत रूचि लें, जिससे आगरा जैसे महत्वपूर्ण जनपद का और अधिक समग्र विकास कराया जाय। वर्ष-दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह की जिला योजना हेतु रू तैंतालीस हज़ार चार सौ चालीस लाख का परिव्यय अनुमोदित किया गया है। बैठक में अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष सांसद प्रोशून्य रामशंकर कठेरिया, सांसद चौधरी बाबूलाल भी उपस्थित थे। 'आगरा का इंटरनेशनल एयरपोर्ट : खुला खेल फर्रखाबादी' आगरा। शरीर से अक्षम नैन्सी की आगरा जाकर ताज देखने की लालसा इतनी थी कि वह अपनी चाहत को पूरी करने के लिए उन्होंने जेट द्वारा आगरा पहुंचने के लिए विशेष व्यवस्था की,जोकि उनके लिए आसान नहीं था। वह दुनिया के आठवे वंडर होने वाले ताज की सुंदरता का अनुभव करना चाहती थीं । उन्होंने उस समय कहा था जो कुछ भी हो, इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता कि सौदर्यता के मामले में ताज उच्च स्थान पर है। उन्होंने आगरा में एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट की कमी को उस समय भी दोहराया था। उन्होंने कहा था सौदर्यता के मामले में ताज विश्व में उच्च स्थान रखते हुए भी यहाँ इंटरनेशनल एयरपोर्ट नहीं बना पाया है। इस पर उन्हें दुख था। आगरा। शरीर से अक्षम नैन्सी की आगरा जाकर ताज देखने की लालसा इतनी थी कि वह अपनी चाहत को पूरी करने के लिए उन्होंने जेट द्वारा आगरा पहुंचने के लिए विशेष व्यवस्था की,जोकि उनके लिए आसान नहीं था। वह दुनिया के आठवे वंडर होने वाले ताज की सुंदरता का अनुभव करना चाहती थीं । उन्होंने उस समय कहा था जो कुछ भी हो, इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता कि सौदर्यता के मामले में ताज उच्च स्थान पर है। उन्होंने आगरा में एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट की कमी को उस समय भी दोहराया था। उन्होंने कहा था सौदर्यता के मामले में ताज विश्व में उच्च स्थान रखते हुए भी यहाँ इंटरनेशनल एयरपोर्ट नहीं बना पाया है। इस पर उन्हें दुख था। यदि आगरा एयरपोर्ट के पुराने एतिहास पर नजर डालें,आगरा की एयर कनैक्टिविटी किंग जर्ज पंचम के समय से स्वीकारी गयी थी ,टाटा ने ही अपनी एयरमेल सेवा के लिये आगरा का हवाई अडडा बनवाया था। एयरफर्स स्टेशन आगरा पर टाटा गेट के नाम से शुरूआती दरवाजा अब भी मौजूद है। सैकिंड वर्ल्डवार शुरू हो जाने के बाद आगरा में टाटा की एयरस्ट्रिप मित्रदेशों की सेनाओं के नार्थईस्ट आप्रेशन के लिये ले ली गयी। भारत में एक देश, एक कर, एक बाजार का सपना वास्तविक हो गया है। तीस जून की रात बारह बजे देश में जीएसटी लागू हो गया। इसके लागू करने के लिए आधी रात में संसद में विशेष सत्र का आयोजन किया गया था । अब केंद्र और प्रदेश के करीब डेढ दर्जन टैक्स के बदले जीएसटी ही देना होगा। इस टैक्स के लागू होने पर सभी राज्यों में लगभग सभी चीजें और वस्तुएं एक ही कीमत पर मिलेंगे। अब तक एक ही चीज के लिए दो राज्यों में अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी को लागू करने के लिये सभी राजनीतिक दलों और प्रदेश सरकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कैसे राजनीतिक विरोधाभास के बाद भी देशहित में तमाम दलों ने मिलकर फैसला किया है। नई दिल्ली। रेल मंत्रालय ने यात्रा के दौरान मुद्रित आधार कार्ड के समान पहचान के निर्धारित प्रमाण के रूप में डाउनलोड किए गए आधार को भी शामिल करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही अब रेल के आरक्षित वर्ग में यात्रा करने के लिए निर्धारित पहचान के वैध प्रमाणों की पूरी सूची जारी की है। जिसमें भारतीय चुनाव आयोग द्वारा जारी मतदाता फोटो पहचान पत्र,पासपोर्ट,आयकर विभाग द्वारा जारी पैन कार्ड,आरटीओ द्वारा जारी ड्राइविंग लाइसेंस,केंद्रीय, राज्य सरकार द्वारा जारी सीरियल नंबर वाला फोटो पहचान पत्र,मान्यता प्राप्त स्कूल,कॉलेज द्वारा अपने छात्रों के लिए जारी किए गए छात्र के फोटोग्राफ वाला पहचान पत्र,फोटो के साथ सरकारी बैंक की पासबुक, बैंक द्वारा जारी लेमिनेट किया हुआ फोटो के साथ क्रेडिट कार्ड,मुद्रित विशिष्ट पहचान कार्ड "आधार" या डाउनलोड किया हुआ आधार कार्ड, यात्री की फोटो के साथ राशन कार्ड शामिल हैं। आगराः अगस्त को लालू यादव जी की बिहार रैली में शामिल रहूंगा इस रैली में मायावती भी रहेंगी, अगर वहां पर केन्द्र सरकार के खिलाफ कोई गठबंधन होता है तो इसका वहीं पर ही ऐलान किया जाएगा। ' है। राज्य सभा की एक सीट के लिये समर्थन मिलना तय होते ही बसपा भी आधिकारिक रूप से रैली में भाग लेनेकी आधिकारिक पुष्टि कर देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड पहुँचने पर वहां के प्रधानमंत्री मार्क रूट ने हिंदी में ट्वीट कर उनका स्वागत किया। दोनों प्रधान मंत्रियों ने ट्वीटों का आदान प्रदान किया। नरेंद्र मोदी ने भी डच भाषा में ट्वीट कर मार्क रूट को प्रसन्न कर दिया। नरेंद्र मोदी ट्वीट करने के बहुत शौकीन हैं। वह जहाँ भी जाते हैं उस देश की भाषा में अवश्य ट्वीट करते हैं। प्रधानमंत्री मार्क रूट ने हिंदी में लिखा था नीदरलैंड्स में आपका स्वागत है। अपने एक अन्य ट्वीट में नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने लिखा था कि भारत और नीदेरलैंड्स के सत्तर साल के द्विपक्षीय रिश्ते के साथ मैं हमारी बैठक के लिए बहुत उत्सुक हूं। नीदरलैंड्स में पधारने के लिए उन्होंने ट्वीट के जरिये हिंदी में धन्यवाद भी दिया। सदस्यता लें संदेश
रियलिटी शो बिग बॉस की प्रतिभागी पूजा मिश्रा को सह प्रतिभागी सिद्धार्थ के साथ कथित तौर पर हिंसक सलूक करने के बाद शो से बाहर कर दिया गया. आठ सप्ताह तक बिग बॉस के घर पर रही पूजा को उनके अस्थिर व्यवहार के लिए कई बार चेतावनी दी गई. इस सप्ताह वह घर की कैप्टन भी चुनी गई थीं. एक अन्य प्रतिभागी सिद्धार्थ के साथ उनका झगड़ा हुआ और मॉडल ने सिद्धार्थ को कथित तौर पर धक्का दे दिया जिसके बाद उन्हें शो से बाहर कर दिया गया. पूजा के अलावा, बिग बॉस के घर से एक और सदस्य बाहर हो जाएगा. जो सदस्य 'डेंजर जोन' में हैं उनके नामक महक, पूजा बेदी, आकाशदीप सहगल और सिद्धार्थ हैं.
रियलिटी शो बिग बॉस की प्रतिभागी पूजा मिश्रा को सह प्रतिभागी सिद्धार्थ के साथ कथित तौर पर हिंसक सलूक करने के बाद शो से बाहर कर दिया गया. आठ सप्ताह तक बिग बॉस के घर पर रही पूजा को उनके अस्थिर व्यवहार के लिए कई बार चेतावनी दी गई. इस सप्ताह वह घर की कैप्टन भी चुनी गई थीं. एक अन्य प्रतिभागी सिद्धार्थ के साथ उनका झगड़ा हुआ और मॉडल ने सिद्धार्थ को कथित तौर पर धक्का दे दिया जिसके बाद उन्हें शो से बाहर कर दिया गया. पूजा के अलावा, बिग बॉस के घर से एक और सदस्य बाहर हो जाएगा. जो सदस्य 'डेंजर जोन' में हैं उनके नामक महक, पूजा बेदी, आकाशदीप सहगल और सिद्धार्थ हैं.
शादी के बाद लड़की एक नए घर में प्रवेश करती है, तब कई मामलों में आपको सोच समझ कर कदम रखना चाहिए. शादी के तुरंत बाद ससुरालवालों के साथ कुछ बातों पर चर्चा कभी न करे. जब कोई महिला शादी कर नए घर में जाती है तब वहां रहने वालों की प्रकृति के बारे में अनजान रहती है. ऐसी स्थिति में लड़की के लिए मुश्किल होता है कि वह ससुराल वालों से क्या छुपाएं क्या नहीं. यदि बीते समय में आपका किसी से खराब संबंध या ब्रेकअप हुआ तो इस बारे में ससुराल वालों से चर्चा न करे. अभी-अभी आपकी शादी हुई है, ऐसी स्थिति में पति-पत्नी के बीच उतार-चढ़ाव आते है. कुछ बातों को लेकर दोनों में मतभेद होते है, इन्हे ससुराल वालों के साथ शेयर न करे. पैसो को लेकर बातें अपने ससुराल वालों को बताने से पहले पति को बताएं. बंद कमरे में घटने वाली किसी भी बात का जिक्र ससुराल वालों से न करे. यदि ससुराल वाले आपसे दोनों घरो को लेकर बात करे और तुलना करे, तो आप इस तुलना से बचे, दोनों लोगों की अहमियत अलग होती है. इन बातों की वजह से हर लड़की सोचती है-'काश सिंगल ही होती तो अच्छा रहता'
शादी के बाद लड़की एक नए घर में प्रवेश करती है, तब कई मामलों में आपको सोच समझ कर कदम रखना चाहिए. शादी के तुरंत बाद ससुरालवालों के साथ कुछ बातों पर चर्चा कभी न करे. जब कोई महिला शादी कर नए घर में जाती है तब वहां रहने वालों की प्रकृति के बारे में अनजान रहती है. ऐसी स्थिति में लड़की के लिए मुश्किल होता है कि वह ससुराल वालों से क्या छुपाएं क्या नहीं. यदि बीते समय में आपका किसी से खराब संबंध या ब्रेकअप हुआ तो इस बारे में ससुराल वालों से चर्चा न करे. अभी-अभी आपकी शादी हुई है, ऐसी स्थिति में पति-पत्नी के बीच उतार-चढ़ाव आते है. कुछ बातों को लेकर दोनों में मतभेद होते है, इन्हे ससुराल वालों के साथ शेयर न करे. पैसो को लेकर बातें अपने ससुराल वालों को बताने से पहले पति को बताएं. बंद कमरे में घटने वाली किसी भी बात का जिक्र ससुराल वालों से न करे. यदि ससुराल वाले आपसे दोनों घरो को लेकर बात करे और तुलना करे, तो आप इस तुलना से बचे, दोनों लोगों की अहमियत अलग होती है. इन बातों की वजह से हर लड़की सोचती है-'काश सिंगल ही होती तो अच्छा रहता'
आरती सिंह की हुई सर्जरी ( Image Source : Arti Singh Instagram ) Arti Singh Injured: छोटे पर्दे की मशहूर अभिनेत्री आरती सिंह (Arti Singh) को लेकर एक बुरी खबर सामने आ रही है. हाल ही में, एक्ट्रेस को चोट लग गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और सर्जरी भी हुई. ये सब 23 अप्रैल 2023 को हुआ, जब एक रेस्तरां में अपने दोस्तों के साथ डिनर एंजॉय करने पहुंची आरती से गलती से एक ग्लास टूट गया था, जो उनके हाथ में चला गया था. इसकी वजह से उनकी सर्जरी भी हुई. फिलहाल, आरती सिंह को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया है. उन्होंने अपने टीवी शो 'श्रवनी' के लिए शूटिंग भी शुरू कर दी है. इसमें वह नेगेटिव रोल प्ले कर रही हैं. यह भी पढ़ें- GHKPM Spoiler Alert : सई को पाने के लिए अब कानूनी दाव पेंच खेलेगा विराट? मंडप तक पहुंची सत्या की बारात!
आरती सिंह की हुई सर्जरी Arti Singh Injured: छोटे पर्दे की मशहूर अभिनेत्री आरती सिंह को लेकर एक बुरी खबर सामने आ रही है. हाल ही में, एक्ट्रेस को चोट लग गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और सर्जरी भी हुई. ये सब तेईस अप्रैल दो हज़ार तेईस को हुआ, जब एक रेस्तरां में अपने दोस्तों के साथ डिनर एंजॉय करने पहुंची आरती से गलती से एक ग्लास टूट गया था, जो उनके हाथ में चला गया था. इसकी वजह से उनकी सर्जरी भी हुई. फिलहाल, आरती सिंह को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया है. उन्होंने अपने टीवी शो 'श्रवनी' के लिए शूटिंग भी शुरू कर दी है. इसमें वह नेगेटिव रोल प्ले कर रही हैं. यह भी पढ़ें- GHKPM Spoiler Alert : सई को पाने के लिए अब कानूनी दाव पेंच खेलेगा विराट? मंडप तक पहुंची सत्या की बारात!
प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना ने इस पर तीखा गुस्सा जताते हुए कहा है कि पाकिस्तान को अपने पापों की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में बीती रात भाजपा के तीन कार्यकर्ताओं की हत्या को लेकर पार्टी ने भारी गुस्सा है। प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना ने इस पर तीखा गुस्सा जताते हुए कहा है कि पाकिस्तान को अपने पापों की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। एक-एक को चुन-चुनकर मारा जाएगा। हत्याकांड को दुखद बताते हुए रैना ने कहा कि तीनों मृतक बहादुर भाजपा कार्यकर्ता थे। उन्होंने कहा कि भारत माता की सेवा के लिए उनकी शहादत बेकार नहीं जाएगी। कायर पाकिस्तानियों को अपने पापों की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। एक-एक अपराधी को मौत के घाट उतारा जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना ने इस पर तीखा गुस्सा जताते हुए कहा है कि पाकिस्तान को अपने पापों की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में बीती रात भाजपा के तीन कार्यकर्ताओं की हत्या को लेकर पार्टी ने भारी गुस्सा है। प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना ने इस पर तीखा गुस्सा जताते हुए कहा है कि पाकिस्तान को अपने पापों की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। एक-एक को चुन-चुनकर मारा जाएगा। हत्याकांड को दुखद बताते हुए रैना ने कहा कि तीनों मृतक बहादुर भाजपा कार्यकर्ता थे। उन्होंने कहा कि भारत माता की सेवा के लिए उनकी शहादत बेकार नहीं जाएगी। कायर पाकिस्तानियों को अपने पापों की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। एक-एक अपराधी को मौत के घाट उतारा जाएगा।
आज समाज डिजिटल, मुंबई : अमिताभ बच्चन ने इंस्टाग्राम पर अपनी एक तस्वीर शेयर की है। ग्रे शर्ट के साथ ब्लैक कलर की पैंट और ब्लैक जैकेट के साथ ब्लैक बूट्स पहने वह बेहद हैंडसम और स्टाइलिश लग रहे हैं। सदी के महानायक हाथ में पेशेवर कैमरा लिए पोज देते नजर आ रहे हैं। अमिताभ का स्वैग देखकर फैन्स बिग बी पर जमकर प्यार बरसा रहे हैं। अपने लाड़ले अभिनेता के प्रति सम्मान जताने के साथ ही वह उनसे सवाल भी पूछ रहे हैं। अमिताभ ने अपनी इस तस्वीर के साथ कैप्शन में लिखा 'हाथ में कैमरे की futility...दूसरे की सुविधा...दुनिया में उनमें से 7 अरब और इंडिया में अरबों से अधिक मोबाइल कैमरा'। फैंस अमिताभ के इस लुक की जमकर तारीफ करते हुए सवाल पूछ रहे हैं कि 'वाह अंकल कब से चालू किया है फोटोशूट का काम'। वहीं दूसरे ने पूछा कि 'आप बूढ़े होंगे या फिर ऐसे ही रहेंगे, एक्टिंग के भगवान श्री अमिताभ बच्चन जी से सवाल है आप बूढ़े कब होंगे'। (Amitabh Bachchan Swag) अमिताभ बच्चन के इस किलर लुक पर फैंस जमकर रिएक्शन दे रहे है। क्योकि बिग बी अपने पोस्ट के माध्यम से बताना चाहते हैं कि अब हर हाथ में कैमरा मौजूद है। सिर्फ प्रोफेशन फोटोग्राफी के लिए ही ऐसे कैमरे इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
आज समाज डिजिटल, मुंबई : अमिताभ बच्चन ने इंस्टाग्राम पर अपनी एक तस्वीर शेयर की है। ग्रे शर्ट के साथ ब्लैक कलर की पैंट और ब्लैक जैकेट के साथ ब्लैक बूट्स पहने वह बेहद हैंडसम और स्टाइलिश लग रहे हैं। सदी के महानायक हाथ में पेशेवर कैमरा लिए पोज देते नजर आ रहे हैं। अमिताभ का स्वैग देखकर फैन्स बिग बी पर जमकर प्यार बरसा रहे हैं। अपने लाड़ले अभिनेता के प्रति सम्मान जताने के साथ ही वह उनसे सवाल भी पूछ रहे हैं। अमिताभ ने अपनी इस तस्वीर के साथ कैप्शन में लिखा 'हाथ में कैमरे की futility...दूसरे की सुविधा...दुनिया में उनमें से सात अरब और इंडिया में अरबों से अधिक मोबाइल कैमरा'। फैंस अमिताभ के इस लुक की जमकर तारीफ करते हुए सवाल पूछ रहे हैं कि 'वाह अंकल कब से चालू किया है फोटोशूट का काम'। वहीं दूसरे ने पूछा कि 'आप बूढ़े होंगे या फिर ऐसे ही रहेंगे, एक्टिंग के भगवान श्री अमिताभ बच्चन जी से सवाल है आप बूढ़े कब होंगे'। अमिताभ बच्चन के इस किलर लुक पर फैंस जमकर रिएक्शन दे रहे है। क्योकि बिग बी अपने पोस्ट के माध्यम से बताना चाहते हैं कि अब हर हाथ में कैमरा मौजूद है। सिर्फ प्रोफेशन फोटोग्राफी के लिए ही ऐसे कैमरे इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
कोलकाता : कॉल सेंटर की आड़ मेंटेक सपोर्ट देने के नाम पर विदेशी नागरिकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने के आरोप में पुलिस ने एक जालसाज को गिरफ्तार किया है। अभियुक्त का नाम अमित जायसवाल उर्फ निखिल है। रविवार को अभियुक्त को अदालत में पेश किया गया जहां से उसे 7 जनवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार कोलकाता पुलिस के डीडी की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि अभियुक्त अमित जायसवाल महानगर के विभिन्न इलाके में अवैध कॉल सेंटर चलाता है। उक्त सूचना के आधार पर पुलिस की टीम ने उसे पकड़ा है। पुलिस के अनुसार अभियुक्त महानगर में अवैध कॉल सेंटर चलाने वालों में एक अन्यतम किंगपिन है। सूत्रों के अनुसार अभियुक्त महानगर में चलने वाले अवैध कॉल सेंटर के कर्मचारियों द्वारा विदेशी नागरिकों से की जाने वाली ठगी की रकम को कोलकाता लाता था। उसके पास कई कॉल सेंटर के रुपये आते थे। सूत्रों के अनुसार पुलिस की टीम को कई कॉल सेंटर के अभियुक्तों से पूछताछ के दौरान अमित के नाम के बारे में पता चला था । इससे पहले उसे हुक्का पार्लर चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल पुलिस अभियुक्त से पूछताछ कर उसके अन्य साथियों की तलाश कर रही है।
कोलकाता : कॉल सेंटर की आड़ मेंटेक सपोर्ट देने के नाम पर विदेशी नागरिकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने के आरोप में पुलिस ने एक जालसाज को गिरफ्तार किया है। अभियुक्त का नाम अमित जायसवाल उर्फ निखिल है। रविवार को अभियुक्त को अदालत में पेश किया गया जहां से उसे सात जनवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार कोलकाता पुलिस के डीडी की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि अभियुक्त अमित जायसवाल महानगर के विभिन्न इलाके में अवैध कॉल सेंटर चलाता है। उक्त सूचना के आधार पर पुलिस की टीम ने उसे पकड़ा है। पुलिस के अनुसार अभियुक्त महानगर में अवैध कॉल सेंटर चलाने वालों में एक अन्यतम किंगपिन है। सूत्रों के अनुसार अभियुक्त महानगर में चलने वाले अवैध कॉल सेंटर के कर्मचारियों द्वारा विदेशी नागरिकों से की जाने वाली ठगी की रकम को कोलकाता लाता था। उसके पास कई कॉल सेंटर के रुपये आते थे। सूत्रों के अनुसार पुलिस की टीम को कई कॉल सेंटर के अभियुक्तों से पूछताछ के दौरान अमित के नाम के बारे में पता चला था । इससे पहले उसे हुक्का पार्लर चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल पुलिस अभियुक्त से पूछताछ कर उसके अन्य साथियों की तलाश कर रही है।
पेगासस मामले पर सर्वोच्च न्यायालय की उलझन समझ में आने वाली है। हुक़ूमते हिन्द ने अपना उत्तर देने से इनकार कर दिया है। सॉलिसिटर जनरल का एक तर्क किसी के पल्ले नहीं पड़ा। पेगासस जासूसी मामले (pegasus spyware case) को लेकर अब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। दो बरस पहले नवंबर महीने में पेगासस के जरिये भारत में जासूसी पर चिंताएं प्रकट की गई थीं। यानी ठीक उन्हीं दिनों हमें पता लग गया था, जब यह असंवैधानिक और आपराधिक कृत्य किया जा रहा था। 'वॉशिंगटन पोस्ट' और 'द गार्जियन' के अनुसार 3 प्रमुख विपक्षी नेताओं, 2 मंत्रियों और एक जज की भी जासूसी की पुष्ट हो चुकी है, हालांकि इनके नाम नहीं बताए हैं।
पेगासस मामले पर सर्वोच्च न्यायालय की उलझन समझ में आने वाली है। हुक़ूमते हिन्द ने अपना उत्तर देने से इनकार कर दिया है। सॉलिसिटर जनरल का एक तर्क किसी के पल्ले नहीं पड़ा। पेगासस जासूसी मामले को लेकर अब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। दो बरस पहले नवंबर महीने में पेगासस के जरिये भारत में जासूसी पर चिंताएं प्रकट की गई थीं। यानी ठीक उन्हीं दिनों हमें पता लग गया था, जब यह असंवैधानिक और आपराधिक कृत्य किया जा रहा था। 'वॉशिंगटन पोस्ट' और 'द गार्जियन' के अनुसार तीन प्रमुख विपक्षी नेताओं, दो मंत्रियों और एक जज की भी जासूसी की पुष्ट हो चुकी है, हालांकि इनके नाम नहीं बताए हैं।
हैदराबादः तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव उर्फ़ KCR इन दिनों अपनी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं पर जोर दे रहे हैं. इस बीच उन्हें सीएम जगन मोहन रेड्डी की बहन वाईएस शर्मिला ने एक ऐसा तोहफा दिया है जिसे देख कर आप भी चौंक जाएंगे. दरअसल YSR Telangana Party की मुखिया वाईएस शर्मिला के इस तोहफे के पीछे एक ख़ास मकसद है. उन्होंने तेलंगाना सीएम को एक चुनौती भी दी है. क्या है पूरा मामला? YSR Telangana Party की मुखिया और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की बहन वाईएस शर्मिला ने तेलंगाना के सीएम केसीआर को जूते भेंट दिए हैं. इस भेंट के पीछे उन्होंने सीएम केसीआर को पदयात्रा की चुनौती दे डाली है. बता दें, इन दिनों वाईएस शर्मिला प्रस्थानम पदयात्रा (Praja Prasthanam padayatra) पर हैं. उनकी यह यात्रा जल्द ही पूरी होने वाली है. उनका कहना है कि उन्होंने ये पदयात्रा राज्य के लोगों की समस्याओं को जानने के लिए की है. इस बीच उनकी यात्रा पर तेलंगाना के सीएम KCR ने बयान दिया था कि उनके राज्य में समस्याएं नहीं हैं. इसी बात पर तंज करते हुए उन्होंने ये भेंट दी है. KCR के बयान के जवाब में शर्मिला ने तंज किया है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने कैमरे के सामने जूते का बॉक्स दिखाया है. इस दौरान उन्होंने इन जूतों को KCR के लिए गिफ्ट बताया है. उन्होंने मीडिया को बताया कि, 'सीएम को मैं चैलेंज देती हूं कि वह मेरे साथ एक पूरा दिन पदयात्रा करें. अगर आपने यह दिखा दिया कि राज्य में हर कोई खुश है और किसी को कोई समस्या नहीं है तो मैं राजनीति छोड़ दूंगी. ' वह आगे कहती हैं, 'मैं आपको नए जूतों का ये जोड़ा गिफ्ट करना चाहती हूं. यह आपके साइज का ही है जिसके साथ बिल भी है, यदि आपको ये जूते फिट नहीं हुए तो आप इसको वापस भी कर सकते हैं. ' वह आगे कहती हैं कि सीएम चाहें सिर्फ तीन किलोमीटर चलें लेकिन उन्हें लोगों की समस्याएं दिख जाएंगी. गौरतलब है की ये यात्रा शर्मिला ने पिछले साल के आखिर में शुरू की थी. तेलंगाना की 47 विधानसभाओं में घूम-घूमकर लोगों की तकलीफों को जानना इस यात्रा का मकसद था. यात्रा के लिए वह 10 किलोमीटर रोज़ चलती हैं. दिल्ली का अगला मेयर, गुजरात चुनाव और फ्री रेवड़ी, मनीष सिसोदिया ने बताए सारे राज!
हैदराबादः तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव उर्फ़ KCR इन दिनों अपनी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं पर जोर दे रहे हैं. इस बीच उन्हें सीएम जगन मोहन रेड्डी की बहन वाईएस शर्मिला ने एक ऐसा तोहफा दिया है जिसे देख कर आप भी चौंक जाएंगे. दरअसल YSR Telangana Party की मुखिया वाईएस शर्मिला के इस तोहफे के पीछे एक ख़ास मकसद है. उन्होंने तेलंगाना सीएम को एक चुनौती भी दी है. क्या है पूरा मामला? YSR Telangana Party की मुखिया और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की बहन वाईएस शर्मिला ने तेलंगाना के सीएम केसीआर को जूते भेंट दिए हैं. इस भेंट के पीछे उन्होंने सीएम केसीआर को पदयात्रा की चुनौती दे डाली है. बता दें, इन दिनों वाईएस शर्मिला प्रस्थानम पदयात्रा पर हैं. उनकी यह यात्रा जल्द ही पूरी होने वाली है. उनका कहना है कि उन्होंने ये पदयात्रा राज्य के लोगों की समस्याओं को जानने के लिए की है. इस बीच उनकी यात्रा पर तेलंगाना के सीएम KCR ने बयान दिया था कि उनके राज्य में समस्याएं नहीं हैं. इसी बात पर तंज करते हुए उन्होंने ये भेंट दी है. KCR के बयान के जवाब में शर्मिला ने तंज किया है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने कैमरे के सामने जूते का बॉक्स दिखाया है. इस दौरान उन्होंने इन जूतों को KCR के लिए गिफ्ट बताया है. उन्होंने मीडिया को बताया कि, 'सीएम को मैं चैलेंज देती हूं कि वह मेरे साथ एक पूरा दिन पदयात्रा करें. अगर आपने यह दिखा दिया कि राज्य में हर कोई खुश है और किसी को कोई समस्या नहीं है तो मैं राजनीति छोड़ दूंगी. ' वह आगे कहती हैं, 'मैं आपको नए जूतों का ये जोड़ा गिफ्ट करना चाहती हूं. यह आपके साइज का ही है जिसके साथ बिल भी है, यदि आपको ये जूते फिट नहीं हुए तो आप इसको वापस भी कर सकते हैं. ' वह आगे कहती हैं कि सीएम चाहें सिर्फ तीन किलोमीटर चलें लेकिन उन्हें लोगों की समस्याएं दिख जाएंगी. गौरतलब है की ये यात्रा शर्मिला ने पिछले साल के आखिर में शुरू की थी. तेलंगाना की सैंतालीस विधानसभाओं में घूम-घूमकर लोगों की तकलीफों को जानना इस यात्रा का मकसद था. यात्रा के लिए वह दस किलोग्राममीटर रोज़ चलती हैं. दिल्ली का अगला मेयर, गुजरात चुनाव और फ्री रेवड़ी, मनीष सिसोदिया ने बताए सारे राज!
ARA: पटना से पहुंची निगरानी की टीम ने गुरुवार की दोपहर भोजपुर के तरारी प्रखंड के बाल विकास परियोजना कार्यालय से सीडीपीओ मंजू कुमारी को 20 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। सीडीपीओ के साथ सहायिका रीता देवी को भी टीम अपने साथ ले गई है। सीडीपीओ आंगनबाड़ी केंद्र, इमादपुर की आंगनबाड़ी सेविका नीलम देवी की क्रय पंजी पर हस्ताक्षर के लिए सहायिका के माध्यम से रिश्वत ले रही थी। घूसखोरी में गिरफ्तारसीडीपीओ रोहतास के सूर्यपुरा थाना के गोसलडीह की निवासी हैं। पहले बक्सर के नावानगर में कार्यरत थी। भोजपुर जिले की इमादपुर निवासी आंगनबाड़ी सेविका नीलम देवी की क्रय पंजी पर आठ महीने से हस्ताक्षर नहीं हो रहा था। इसके चलते पोषाहार राशि का आवंटन नहीं मिल रहा था। आरोप है कि सीडीपीओ क्रय पंजी पर हस्ताक्षर करने के एवज में 20 हजार रुपए घूस मांगी थी। रिश्वत मांगने की शिकायत सेविका के बेटे विकास पांडेय ने पांच अगस्त को निगरानी विभाग, पटना में की थी। सूचना मिलने पर गुरुवार को निगरानी ब्यूरो की टीम महिला डीएसपी किरण पासवान के नेतृत्व में तरारी पहुंची और 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
ARA: पटना से पहुंची निगरानी की टीम ने गुरुवार की दोपहर भोजपुर के तरारी प्रखंड के बाल विकास परियोजना कार्यालय से सीडीपीओ मंजू कुमारी को बीस हजार रुपए रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। सीडीपीओ के साथ सहायिका रीता देवी को भी टीम अपने साथ ले गई है। सीडीपीओ आंगनबाड़ी केंद्र, इमादपुर की आंगनबाड़ी सेविका नीलम देवी की क्रय पंजी पर हस्ताक्षर के लिए सहायिका के माध्यम से रिश्वत ले रही थी। घूसखोरी में गिरफ्तारसीडीपीओ रोहतास के सूर्यपुरा थाना के गोसलडीह की निवासी हैं। पहले बक्सर के नावानगर में कार्यरत थी। भोजपुर जिले की इमादपुर निवासी आंगनबाड़ी सेविका नीलम देवी की क्रय पंजी पर आठ महीने से हस्ताक्षर नहीं हो रहा था। इसके चलते पोषाहार राशि का आवंटन नहीं मिल रहा था। आरोप है कि सीडीपीओ क्रय पंजी पर हस्ताक्षर करने के एवज में बीस हजार रुपए घूस मांगी थी। रिश्वत मांगने की शिकायत सेविका के बेटे विकास पांडेय ने पांच अगस्त को निगरानी विभाग, पटना में की थी। सूचना मिलने पर गुरुवार को निगरानी ब्यूरो की टीम महिला डीएसपी किरण पासवान के नेतृत्व में तरारी पहुंची और बीस हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद् रामायणे निगदितं कव्चिदन्यतोऽपि। स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति।। श्री रामचरितमानस में सात काण्ड हैं। प्रत्येक काण्ड का आरंभ महाकाव्य की रीति के अनुसार मंगलाचरण से किया गया हैं। गोस्वामी जी का मंगलाचरण भी अद्वितीय व विलक्षण हैं। वे रामकथा का अपने को रचनाकार नहीं मानते वे स्वयं कहते हैं " संभु प्रसाद सुमति हिय हुलसी। रामचरितमानस कवि तुलसी।।" बालकांड के आरंभ में बुद्धि की देवी मां सरस्वती, विघ्न विनाशक भगवान गणेश, मां भगवती पार्वती, भगवान शंकर, आदि कवि वाल्मीकि जी महाराज, हनुमानजी महाराज, रामबल्लभा मां सीता जी, ब्रम्हा, विष्णु, महेश, वानर, भालू, असुर और अंत में अनन्तकोटि ब्रम्हांड नायक सर्वशक्तिमान अकारण ही करूणा वरूणालय भगवान श्रीराम की स्तुति की गई है।इसके अनंतर भाषा में स्वान्तः सुखाय रघुनाथ गाथा लिखने की घोषणा की गई है। तत्पश्चात्, गुरूवंदना, ब्राम्हण संत वंदना, खल वंदना, रामसीयमय जगत की वंदना, रामभक्ति से प्रेरित कविता की महिमा, राम नाम की महिमा, मानस-माहात्म, याज्ञवल्क्य-भारद्वाज सम्वाद, सती का भ्रम, शिव द्वारा सती का त्याग, सतीदाह, पार्वती जन्म, शिव को पति रूप में पाने के लिए पार्वती का घोर तप, काम दहन, शिव पार्वती विवाह, नारद मोह, मनु शतरूपा की कथा, राम जन्म, विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, अहिल्या उद्धार, सीता स्वयंवर, धनुर्भन्ग, परशुराम संवाद, सीता राम विवाह जैसे प्रसंगों का आख्यान किया गया है। अंत में राम चरित्र की महिमा का गुणानुवाद करने और सुनने के महात्म्य को रेखांकित किया गया हैं। निज गिरा पावनि करन कारन राम जसु तुलसी कह्यो। रघुवीर चरित अपार बारिधि पारू कबि कौनें दह्यो।। उपवीन ब्याह उछाह मंगल सुनि जे सादर गावहीं। बैदेहि राम प्रसाद ते जन सर्वदा सुखु पावहीं।। सिय रघुवीर बिबाहु जे सप्रेम गावहिं सुनहिं। तिन्ह कहुं सदा उछाहु मंगलायतन राम जसु।।
नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद् रामायणे निगदितं कव्चिदन्यतोऽपि। स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा भाषानिबन्धमतिमञ्जुलमातनोति।। श्री रामचरितमानस में सात काण्ड हैं। प्रत्येक काण्ड का आरंभ महाकाव्य की रीति के अनुसार मंगलाचरण से किया गया हैं। गोस्वामी जी का मंगलाचरण भी अद्वितीय व विलक्षण हैं। वे रामकथा का अपने को रचनाकार नहीं मानते वे स्वयं कहते हैं " संभु प्रसाद सुमति हिय हुलसी। रामचरितमानस कवि तुलसी।।" बालकांड के आरंभ में बुद्धि की देवी मां सरस्वती, विघ्न विनाशक भगवान गणेश, मां भगवती पार्वती, भगवान शंकर, आदि कवि वाल्मीकि जी महाराज, हनुमानजी महाराज, रामबल्लभा मां सीता जी, ब्रम्हा, विष्णु, महेश, वानर, भालू, असुर और अंत में अनन्तकोटि ब्रम्हांड नायक सर्वशक्तिमान अकारण ही करूणा वरूणालय भगवान श्रीराम की स्तुति की गई है।इसके अनंतर भाषा में स्वान्तः सुखाय रघुनाथ गाथा लिखने की घोषणा की गई है। तत्पश्चात्, गुरूवंदना, ब्राम्हण संत वंदना, खल वंदना, रामसीयमय जगत की वंदना, रामभक्ति से प्रेरित कविता की महिमा, राम नाम की महिमा, मानस-माहात्म, याज्ञवल्क्य-भारद्वाज सम्वाद, सती का भ्रम, शिव द्वारा सती का त्याग, सतीदाह, पार्वती जन्म, शिव को पति रूप में पाने के लिए पार्वती का घोर तप, काम दहन, शिव पार्वती विवाह, नारद मोह, मनु शतरूपा की कथा, राम जन्म, विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, अहिल्या उद्धार, सीता स्वयंवर, धनुर्भन्ग, परशुराम संवाद, सीता राम विवाह जैसे प्रसंगों का आख्यान किया गया है। अंत में राम चरित्र की महिमा का गुणानुवाद करने और सुनने के महात्म्य को रेखांकित किया गया हैं। निज गिरा पावनि करन कारन राम जसु तुलसी कह्यो। रघुवीर चरित अपार बारिधि पारू कबि कौनें दह्यो।। उपवीन ब्याह उछाह मंगल सुनि जे सादर गावहीं। बैदेहि राम प्रसाद ते जन सर्वदा सुखु पावहीं।। सिय रघुवीर बिबाहु जे सप्रेम गावहिं सुनहिं। तिन्ह कहुं सदा उछाहु मंगलायतन राम जसु।।
Richa Chadha Tattoo: बॉलीवुड एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा और अली फजल ने हाल ही में एक दूसरे संग शादी रचाई. दोनों की शादी काफी धमाकेदार रही थी. उन्होंने मुंबई में एक ग्रैंड रिसेप्शन पार्टी भी दी थी, जिसमें कई बॉलीवुड सेलेब्स पहुंचे थे. अब शादी के बाद एक्ट्रेस ने अपने पति को एक क्यूट सा सरप्राइज दिया है. ऋचा ने अपने प्यारे हसबैंड अली फजल के नाम का टैटू अपनी कलाई पर बनवा लिया. इसकी झलक एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर शेयर की है. ऋचा ने हाल ही में अपने मेहंदी की कुछ तसवीरें शेयर की. इन फोटोज में एक्ट्रेस के हाथों में पति के नाम का टैटू दिखाई दे रहा है. उनका नया टैटू उर्दू में लिखा दिखाई दे रहा है. अभिनेत्री ने अली का नाम उनकी कलाई पर शादी के समय ही बनवाया था. बता दें कि ऋचा ने अपने दूसरी कलाई पर अपने माता-पिता का नाम लिखवाया हुआ है. कपल ने 2020 में कानूनी रूप से शादी कर ली, लेकिन कोरोना के कारण वह ग्रैंड शादी नहीं कर पाए थे. अली ने सात साल की डेटिंग के बाद 2019 में ऋचा चड्ढा को प्रपोज किया था, और उन्होंने 2020 में अपनी शादी का रेजिस्ट्रेशन कराया था. दोनों ने इस महीने की शुरुआत में, एक दूसरे के साथ निगाह किया. जीक्यू से बातचीत में अली फजल ने शादियों के बारे में अपने विचार साझा किए. शादी के बारे में सबसे बड़े मिथक के बारे में पूछे जाने पर, जिसे वह खारिज करने की उम्मीद करते है, अली ने कहा, "मैंने अपने जीवन में बहुत कम शादियां देखी हैं, इसलिए मैं इसका खंडन करना चाहूंगा. " अभिनेता ने कहा, "हमलोगों में कई कमी है, क्योंकि कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं हो सकता, लेकिन आप कोशिश कर सकते हैं और उस प्रवाह में आनंद ले सकते हैं.
Richa Chadha Tattoo: बॉलीवुड एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा और अली फजल ने हाल ही में एक दूसरे संग शादी रचाई. दोनों की शादी काफी धमाकेदार रही थी. उन्होंने मुंबई में एक ग्रैंड रिसेप्शन पार्टी भी दी थी, जिसमें कई बॉलीवुड सेलेब्स पहुंचे थे. अब शादी के बाद एक्ट्रेस ने अपने पति को एक क्यूट सा सरप्राइज दिया है. ऋचा ने अपने प्यारे हसबैंड अली फजल के नाम का टैटू अपनी कलाई पर बनवा लिया. इसकी झलक एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर शेयर की है. ऋचा ने हाल ही में अपने मेहंदी की कुछ तसवीरें शेयर की. इन फोटोज में एक्ट्रेस के हाथों में पति के नाम का टैटू दिखाई दे रहा है. उनका नया टैटू उर्दू में लिखा दिखाई दे रहा है. अभिनेत्री ने अली का नाम उनकी कलाई पर शादी के समय ही बनवाया था. बता दें कि ऋचा ने अपने दूसरी कलाई पर अपने माता-पिता का नाम लिखवाया हुआ है. कपल ने दो हज़ार बीस में कानूनी रूप से शादी कर ली, लेकिन कोरोना के कारण वह ग्रैंड शादी नहीं कर पाए थे. अली ने सात साल की डेटिंग के बाद दो हज़ार उन्नीस में ऋचा चड्ढा को प्रपोज किया था, और उन्होंने दो हज़ार बीस में अपनी शादी का रेजिस्ट्रेशन कराया था. दोनों ने इस महीने की शुरुआत में, एक दूसरे के साथ निगाह किया. जीक्यू से बातचीत में अली फजल ने शादियों के बारे में अपने विचार साझा किए. शादी के बारे में सबसे बड़े मिथक के बारे में पूछे जाने पर, जिसे वह खारिज करने की उम्मीद करते है, अली ने कहा, "मैंने अपने जीवन में बहुत कम शादियां देखी हैं, इसलिए मैं इसका खंडन करना चाहूंगा. " अभिनेता ने कहा, "हमलोगों में कई कमी है, क्योंकि कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं हो सकता, लेकिन आप कोशिश कर सकते हैं और उस प्रवाह में आनंद ले सकते हैं.
दिल्ली में मौजूदा हालात पर गृह मंत्री 24 घंटे के भीतर तीन बैठकें कर चुके हैं। आज सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक होगी। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी शामिल होंगे। दिल्ली में नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई झड़प में अब तक दिल्ली पुलिस के हेड कांसटेबल रतन लाल समेत 20 लोगों की मौत हो चुकी है। 20 लोगों की मौत की पुष्टि गुरु तेग बहादुर अस्पताल ने की है। वहीं, इस झड़प में दर्जनों लोग घयाल हैं, जिनका इलाज अस्पताल में जारी है। उधर, उत्तर पूर्वी दिल्ली में तनाव जारी है। तनाव को देखते हुए बड़ी संख्या में उत्तर पूर्वी दिल्ली में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। वहीं, आज सभी मेट्रो स्टेशन खुले हैं। तनाव को देखते हुए जाफराबाद और मौजपुर-बाबरपुर समेत कई मेट्रो स्टेशन तीन दिन तक बंद रखे गए थे। लेकिन आज सभी स्टेशनों को पूरी तरह से खोल दिया गया है। दिल्ली में मौजूदा हालात पर गृह मंत्री 24 घंटे के भीतर तीन बैठके कर चुके हैं। आज सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक होगी। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी शामिल होंगे। खबरों के मुताबिक, एनएसए अजीत डोभाल को दिल्ली हिंसा को नियंत्रण में लाने का प्रभार दिया गया है। वह स्थिति के बारे में पीएम और मंत्रिमंडल को आज जानकारी देंगे। एनएसए ने कल रात जाफराबाद, सीलमपुर और उत्तर पूर्वी दिल्ली के अन्य हिस्सों का दौरा किया जहां उन्होंने विभिन्न समुदायों के नेताओं के साथ बातचीत की। खबरों में कहा गया है कि एनएसए ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय राजधानी में अराजकता नहीं रहने दी जाएगी और पर्याप्त संख्या में पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को फ्री हैंड दिया गया है।
दिल्ली में मौजूदा हालात पर गृह मंत्री चौबीस घंटाटे के भीतर तीन बैठकें कर चुके हैं। आज सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक होगी। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी शामिल होंगे। दिल्ली में नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई झड़प में अब तक दिल्ली पुलिस के हेड कांसटेबल रतन लाल समेत बीस लोगों की मौत हो चुकी है। बीस लोगों की मौत की पुष्टि गुरु तेग बहादुर अस्पताल ने की है। वहीं, इस झड़प में दर्जनों लोग घयाल हैं, जिनका इलाज अस्पताल में जारी है। उधर, उत्तर पूर्वी दिल्ली में तनाव जारी है। तनाव को देखते हुए बड़ी संख्या में उत्तर पूर्वी दिल्ली में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। वहीं, आज सभी मेट्रो स्टेशन खुले हैं। तनाव को देखते हुए जाफराबाद और मौजपुर-बाबरपुर समेत कई मेट्रो स्टेशन तीन दिन तक बंद रखे गए थे। लेकिन आज सभी स्टेशनों को पूरी तरह से खोल दिया गया है। दिल्ली में मौजूदा हालात पर गृह मंत्री चौबीस घंटाटे के भीतर तीन बैठके कर चुके हैं। आज सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक होगी। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी शामिल होंगे। खबरों के मुताबिक, एनएसए अजीत डोभाल को दिल्ली हिंसा को नियंत्रण में लाने का प्रभार दिया गया है। वह स्थिति के बारे में पीएम और मंत्रिमंडल को आज जानकारी देंगे। एनएसए ने कल रात जाफराबाद, सीलमपुर और उत्तर पूर्वी दिल्ली के अन्य हिस्सों का दौरा किया जहां उन्होंने विभिन्न समुदायों के नेताओं के साथ बातचीत की। खबरों में कहा गया है कि एनएसए ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय राजधानी में अराजकता नहीं रहने दी जाएगी और पर्याप्त संख्या में पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को फ्री हैंड दिया गया है।
आमिर खान प्रोडक्शन और टी सीरिज की फिल्म गुलशन कुमार बॉयोपिक 2019 क्रिसमस पर होग�. . आमिर खान प्रोडक्शन और टी सीरिज की फिल्म गुलशन कुमार बॉयोपिक 2019 क्रिसमस पर होगी रिलीज़ । मैगजीन कवर के लिए धड़क स्टार्स जाह्नवी और ईशान ने दिया Hot पोज मणिकर्णिका की रिलीज से पहले कंगना रनौत मुंबई से दूर कोयंबटूर में आदिशक्ति आश्रम पहुंचीं आज होगा राजकुमार राव श्रद्धा कपूर की फिल्म स्त्री का ट्रेलर OUT।
आमिर खान प्रोडक्शन और टी सीरिज की फिल्म गुलशन कुमार बॉयोपिक दो हज़ार उन्नीस क्रिसमस पर होग�. . आमिर खान प्रोडक्शन और टी सीरिज की फिल्म गुलशन कुमार बॉयोपिक दो हज़ार उन्नीस क्रिसमस पर होगी रिलीज़ । मैगजीन कवर के लिए धड़क स्टार्स जाह्नवी और ईशान ने दिया Hot पोज मणिकर्णिका की रिलीज से पहले कंगना रनौत मुंबई से दूर कोयंबटूर में आदिशक्ति आश्रम पहुंचीं आज होगा राजकुमार राव श्रद्धा कपूर की फिल्म स्त्री का ट्रेलर OUT।
१४२ - दक्षिणाविभंग सुत्त दायक दुःशील, पाप-धर्मा हो, और प्रतिग्राहक भी दुःशील पाप धस हो । आनन्द ! कैसे दक्षिणा दायकसे भी शुद्ध होती है, और प्रतिग्राहकसे भी ? आनन्द ! ( जय ) दायक शीलवान कल्याणधर्मा हो ( और ) प्रतिग्राहक भी शीलवान कल्याण वर्मा हो, तो आनन्द ! यह चार दक्षिणा । की विशुद्धियाँ हैं । " ( १४ - इति विसंगवन्य ३. ४ )
एक सौ बयालीस - दक्षिणाविभंग सुत्त दायक दुःशील, पाप-धर्मा हो, और प्रतिग्राहक भी दुःशील पाप धस हो । आनन्द ! कैसे दक्षिणा दायकसे भी शुद्ध होती है, और प्रतिग्राहकसे भी ? आनन्द ! दायक शीलवान कल्याणधर्मा हो प्रतिग्राहक भी शीलवान कल्याण वर्मा हो, तो आनन्द ! यह चार दक्षिणा । की विशुद्धियाँ हैं । "
अतएव इन दोनों कारणों से उसने उदयभानु को दक्षिण में भेजा था। औरङ्गजेब शिवाजी पर इतना खार खाये बैठा था, कि यदि शिवाजी उसको मिल जाते, तो ईश्वर जाने वह उनकी क्या दुर्गति करता। शिवाजी का दिल्ली से निकल जाना उसे इतना बुरा लगा, कि यदि कोई उसकी दाढ़ी भी उखाड़ लेता तो कदाचित् उसे इतना बुरा न लगता; परन्तु इस समय वह कर क्या सकता था । वह सोचता होगा कि मैं इतना कुटिल-नीति-विशारद होकर भी ऐसा धोखा खा गया । इससे भी बढ़ कर मेरी फ़जीहत और बदनामी क्या हो सकती है ? अतएव अब उसने शिवाजी पर पुनः कुटिल नीति का पाश डालना चाहा; परन्तु शिवाजी की बुद्धि के आगे उसकी दाल न गली और शिवाजी फिर उसके विश्वास में कभी न आये । औरंगजेब को मृत्युकाल तक इस बात का पश्चात्ताप रहा। उसने उदयभानु को बुलाया और कहा - "तुम दक्षिण में जाओ, और सिंहगढ़ के क़िले में जाकर रहो। सिंहगढ़ का क़िला शिवाजी को हाथ में लाने की कुञ्जी है। जब तक वह हमारे अधिकार में है, शिवाजी एक प्रकार से हमारे हाथ में है। सिंहगढ़ की रक्षा अच्छी तरह से करना, क्योंकि शिवाजी इसी के लेने का यत्न करेगा। इसके साथ ही तुम यशवन्तसिंह और मोअज्जम पर भी खूब कड़ी नज़र रखना ।" उदयभानु सिंहगढ़ में आकर रहने लगा। सिंहगढ़ का हम कुछ वर्णन पीछे कर आये हैं, परन्तु प्रसंगवश यहाँ पर फिर कुछ लिखना उचित है। सिंहगढ़ सुन्दर प्राकृतिक स्थान में बना हुआ है। चतुर्दिक उच्च पर्वत श्रेणी खड़ी हैं। एक ओर सह्याद्र गगनस्पर्शी शिखरों द्वारा अपने गाम्भीर्य का परिचय दे रहा है। इसी के पूर्व में सिंहगढ़ का दुर्ग है। इसके उत्तर और दक्षिण में भी उच्चशृङ्ग हैं, जो इसको सहज ही में सुदृढ़ बनाते हैं। इन पहाड़ों पर चढ़ना अति कठिन है। आधे मील तक ऊपर चढ़ने पर छोटी दुर्गम पहाड़ियों को तै कर क़िले में पहुँचना होता है। दुरारोह पर्वतों से घिरा हुआ सिंहगढ़ त्रिभुजाकर बना हुआ है। इसके बीच में अनुमान से दो मील का मैदान है । प्राकृतिक कारणों से यह दुर्ग एक प्रकार से अभेद्य है। इस दुर्ग के चारों ओर मछली पकड़ने वाले कहार रहते थे । जब तक उदयभानु के क़दम-एशरीफ़ यहाँ पर नहीं आये थे, तब तक यह क़िला रायाजी के अधिकार में था। जब से उदयभानु यहाँ आये तब से इसमें . खूब चौकसी रहने लगी । इसने दुर्ग की रक्षा के लिये उत्तम प्रबंध कर डाला । संरक्षकों को बुलाकर उसने यह आज्ञा दी, कि कोई बाहरी आदमी इस किले में न आने पावे, और विना मेरी आज्ञा के कोई बाहर भी न जाने पावे। उसने चारों ओर कड़े पहरे बिठला दिये। किले के भीतर जितने बुर्ज और बुर्जियाँ थीं, उनपर भी पहरेदार नियुक्त कर दिये गये। पहरेदारों के लिये जो नियम बनाये गये थे, वे इतने कड़े थे कि विचारों को निद्रादेवी से भेंट करना कठिन हा गया था। इतना प्रबन्ध कर चुकने पर भी वह रात्रि को स्वयं निरीक्षण करता था, और जिनको वह 'ड्यटी' पर न पाता उनको बड़ा कठिन दण्ड देता था । उदयभानु के आने का पता मिल गया। अब के दुर्ग के विजय का भार तानाजी ने स्वयं अपने सिर पर लिया । माघ मास के अन्त में १००० मावलियों को लेकर तानाजी सिंहगढ़ को विजय करने चले। इनके साथ में इनके भाई सूर्य्यजी और दूर के नाते के मामा शेलार भी थे । इन सबों ने वहाँ पहुँच कर रायाजी को अपनी ओर मिला लिया । पाँच-छ रोज तक भेद लेने के पश्चात् रात्रि में दुर्ग पर चढ़ने के लिये जगह निकाली गई । स्थान निर्दिष्ट हो जाने पर यह प्रश्न उठा, कि ऊपर किस प्रकार चढ़ा जाय, और सब से पहले ऊपर कौन चढ़े ? वृद्ध शेलार ने इस काम का भार अपने ऊपर लिया, परन्तु तानाजी ने इस में आपत्ति की । तब तो वृद्ध कड़क उठा और कहने लगा 'तानाजी ! आज मैं इस बात को दिखला दूँगा कि इस ८० वर्ष के वृद्ध शरीर में कितना बल है ? जब यह वृद्ध कमन्द द्वारा सर-सर ऊपर पहुँच जावेगा, तब तुम्हें मालूम पड़ेगा कि वृद्ध कैसा है ?' तानाजी ने उनको धीरे-धीरे बोलने को कहा, परन्तु बूढ़े मामा ने उस ओर कुछ ध्यान न देकर अपना बड़बड़ाना जारी रक्खा, और अन्त में उन्होंने कमन्द निकाल ही ली। तानाजी ने उनको रोक कर यह निश्चित् किया, कि येसाकणेकर अपने ४८ मनुष्यों को लेकर संध्या होते द्रोणगिरि भा जावें । सूर्य्यजी कल्याण दरवाजे की ओर भेजे गये और शेलार तथा तानाजी ने दुर्ग पर चढ़ना विचारा। आज सारा दिन तानाजी ने अन्न-जल बिना बिताया था । जब शेलार ने यह जाना तो उसने कुछ खा लेने को कहा, परन्तु उन्होंने कहा कि 'आज जब तक दुर्ग हस्तगत न कर लूँगा, तब तक अन्न-जल नहीं करूँगा।' ऐसा कहकर वे अपने काम में लग गये । भगवान् भास्कर अस्ताचल की ओट हो गये। संध्या की कालिमा छा गई । अन्धकार ने समस्त संसार पर अपना पर्दा डाला। ऐसे ही समय में शेलार मामा ने कमन्द निकाली और ऊपर फेंकी । यथायोग्य स्थान पर कमन्द चिपट गई । शेलार और तानाजी आदि सब ऊपर चढ़ने के उद्योग में लगे । तानाजी अग्रसर हुए, और बात की बात में वे ऊपर जा पहुँचे । तानाजी के बाद एक-एक कर सब ऊपर चढ़ गये। रायाजी के प्रबन्ध से इस भावी दुर्घटना की ऊपर किसी को भी सम्भा वना नहीं हुई थी । प्रायः १२ मावली वीर योद्धा दुर्ग की प्राचीर पर पहुँच गये। अब मेख ठोक कर ऊपर से दो रस्से और लटका दिये गये । पहरेदारों को कुछ शङ्का हुई तो वे उस ओर बढ़े । एक पहरेदार को उस ओर देख तानाजी ने समझा कि अब मामला बिड़गता है, परन्तु घोर अन्धकार के कारण वह पहरेदार तानाजी को न देख सका था । तानाजी ने कुछ न सोच कर तीर द्वारा उसे बिद्ध कर भूतलशायी किया और थोड़ी देर के लिए विघ्न की सम्भावना दूर हुई। इतने में लटकाये हुए रस्सों द्वारा ५० वीर और ऊपर चढ़ आये । अब सब से पहले यह काम करना विचारा गया, कि किसी न अधिकार कर लिया जाय, और दुर्ग का द्वार खोल दिया जाय । इस काम के लिए थोड़े से वीर जुर्ज की ओर भेजे गये । चलते समय इन लोगों को समझा दिया गया, कि किसी प्रकार का शब्द न करें, क्योंकि ऐसा करने से विजय कठिन हो जायगी। बेचारे बुर्ज पर के लोग ऊँघ रहे थे । उनको क्या खबर थी कि उनका काल उनके सिरों पर नाच रहा है। ऐसी अवस्था में मावलियों ने उन पर आक्रमण किया । क्रमित होने पर बुर्ज के सिपाही घबड़ाहट में पड़ गये । वे हक्के-बक्के से खड़े रह गये । तत्काल मावलियों ने उन की पूरी सफ़ाई कर दी। वहाँ एक तोप पड़ी थी । उसमें भी कील ठोक दी गई। दूसरा दल द्वार खोलने को भेजा गया था, उसने भी अपना काम पूरा किया। इतने में दुर्ग में खलबली मच गई । उदयभानु अपने मकान से निकल पड़ा, और दुर्ग-द्वार की ओर झपटा। दुर्ग के द्वार पर तानाजी डटे थे । वे सूर्य्यजी के इन्तजार में थे, परन्तु सूर्य्यजी के आने में विलम्ब हुआ । अब दुर्ग में युद्ध होने लगा । मुसलमान सिपाही 'तोबा तोबा' कहते हुए इधर-उधर भागने लगे। विकट रण-ताण्डव होने लगा। तलवारों और तीरों की आवाज़ से दुर्ग कम्पायमान हो गया । भैरवनाद करता हुआ उदयभानु तानाजी पर टूट पड़ा। एक क्षरण ही में लड़ाई ने गहरा रंग पकड़ा। दोनों ही एक दूसरे को गिराने की चेष्टा में संलग्न थे। एक ओर शिवाजी के सुहृद वीर और दूसरी ओर मेवाड़ का कुलकलङ्क अपनी-अपनी उम्र वीरता का परिचय देने लगे । तानाजी थके हुए थे, परन्तु इतने पर भी वे सफ़ाई और फुर्ती से हाथ चला रहे थे। दोनों के मुखों से वीरोचित और उत्साहवर्द्धक वाक्य निकल रहे थे। थोड़ी ही देर के युद्ध में दोनों के शरीर व्रणों से परिपूरित हो गये। इतने में उदयभानु के खड्ग से तानाजी की ढाल फटगई। तब उन्होंने फुर्ती से बायें हाथ से कमर का पटुका खोल डाला और उसे लपेट कर एक नई ढाल तैयार करली, परन्तु पटुका से बचाव कब तक हो सकता था? ताना जी शिथिल होने लगे, और अन्त में उदयभानु के आघात से आहत होकर वे भूमि पर गिर पड़े। उदयभानु ने अपनी तलवार उनकी छाती में भोंक दी। हा ! शिवाजी के चिरकालीन मित्र इस संसार से चल बसे । एक महान् आत्मा ने इस नश्वर देह को त्याग कर वीर कीर्ति के साथ स्वर्गलोक को प्रस्थान किया । तत्काल ही तानाजी की मृत्यु का समाचार दुर्ग भर में फैल गया। शेलार दूसरी ओर युद्ध कर रहे थे। बात की सत्यता जानने के लिये वे इधर झपटे । आते ही उन्होंने देखा कि उदयभानु ज़ोरशोर से तलवार चला रहा है, और तानाजी के लिये अपशब्द भी कहता जा रहा है। शेलार का धैर्य जाता रहा। क्रोध के मारे उनकी खों से आग बरसने लगी । उन्होंने हठात् उदयभानु के ऊपर आक्रमण किया । अस्सी वर्ष के बुड्ढे को सामने देख कर उदयभानु दंग रह गया। शेलार के घोर आक्रमण से वह व्यथित हो गया और थोड़ी ही देर में वृद्ध की तलवार ने उसका काम तमाम कर दिया। तानाजी की मृत्यु के कारण मावलियों का धैय्यं छूटने लगा। उद्यभानु के सैनिकों ने जोर पकड़ा । मावलीगण हटने लगे। सूर्य्यजी ने देखा कि वे कमन्द रस्सों की ओर बढ़ रहे हैं। यह देख कर उन्होंने कमन्द तथा रस्सों को काट दिया और कहा 'कापुरुषो! जाओ, अपने प्राणों को कायरों की तरह गँवा दो । तानाजी को खोकर और अपने मुखों में कारिख पोत कर शिवाजी के सामने जाओ और साथ में यह भी देखते जाओ कि तानाजी की बोटी बोटी कैसे काटी जाती है, धिकार है तुम सबको सूर्य्यजी के इन मर्मबंधी शब्दों ने अपूर्व काम किया। महाराष्ट्र योद्धा ठहर गये। अब उन्होंने पीठ दिखाने की अपेक्षा समरक्षेत्र में प्राण देना ही उचित समझा, और वे पुनः उदयभानु के सैनिकों से भिड़ गये। एक बार वे युद्ध ने फिर रौद्ररूप धारण किया। उधर शेलार मामा ने उदयभानु को यमपुरी का रास्ता दिखला दिया था। उसकी मृत्यु से दुर्ग में हाहाकार मच गया। इतने में एक और ख़बर फैली कि एक नवीन सुसज्जित महाराष्ट्रीय सेना चढ़ी चली आ रही है। थोड़ी देर पूर्व जो महाराष्ट्र वीरों की अवस्था हो गई थी, ठीक वही हालत अब दुर्गस्थ सैनिकों की हो गई। वे चारों ओर भागने लगे। जिसने जिधर को मौका देखा वह उधर ही को भाग निकला। अब महाराष्ट्र वीरों ने दुर्ग में प्रलयकाल उपस्थित किया । हताश दुर्गस्थ सेना के पैर लटपटाने लगे। जब सूर्य्यजी ने देखा कि पूर्ण विजय प्राप्त हो गई, तो उन्होंने शिवाजी की दुहाई फिरवा दी, और घोषित किया कि 'जो हथियार रख देगा वह मारा नहीं जायगा' । घोषणा के सुनते ही हथियार रक्खे जाने लगे। सबों ने सूर्य्यजी को झुक कर प्रणाम किया । लड़ाई बन्द हुई। सूर्य्य जी ने सबको अभयदान देकर अपनेअपने स्थान पर जाने को कहा। उधर शिवाजी भी रायगढ़ को छोड़ कर सिंहगढ़ की ओर चले । सिंहगढ़ के निकट आने पर उनको खबर मिली कि क़िला फ़तह हो गया है, परन्तु खबर देने वाले ने तानाजी का कुछ हाल न कहा । विजय-वार्त्ता सुन कर शिवाजी ने सिंहगढ़ में प्रवेश किया । प्रवेश करने पर वीर मावलियों ने उनको प्रणाम किया, परन्तु किसी प्रकार का हर्ष न प्रकट किया। जो उनको देखता वही गर्दन झका लेता । शिवाजी ने सब ही ओर यही रङ्ग देखा, तब तो उनके हृदय में संदेह उत्पन्न हुआ। आगे बढ़े तो उनको शेलार मामा मिले। उनके सामने एक शव रक्खा हुआ था, जिसके ऊपर एक ज़री का डुपट्टा पड़ा था । शिवाजी को देखते ही शेलार रोने लगे । इस दृश्य के देखते ही शिवाजी का हृदय विदीर्ण हो गया । उनके मुख से कोई शब्द भी नहीं निकला । तब तो शेलार ने चिल्ला कर कहा "महाराज ! हाय ! महाराज ! हाय मेरा ताना ! आपका प्राणप्यारा ताना! हमारे हाथों से छीन लिया गया । हाय महाराज अब मैं क्या करूँ !" इन हृदय विदारक शब्दों को सुनते ही शिवाजी एक दम काँप उठे। उन्होंने अपने को बहुत ही रोका, पर करुणा-समुद्र की लहरों को वे न रोक सके। एक सामान्य बालक की तरह वे फूट-फूट कर रोने लगे। कभी तो वे शेलार मामा से लिपट जाते, और कभी तानाजी के शव से चिपट कर रोते । इस हृदयद्रावक दृश्य को देख कर उस समय ऐसा कौन था, जो नौ-नौ ऑसून रोया हो । सब ही रोते थे। शिवाजी का तो अजब हाल था। बेचारे शेलार अपना रोना भूल गये । वे शिवाजी को समझाने लगे । कुछ देर के बाद शिवाजी ने शान्ति ग्रहण की, और दुपट्टा उठाकर वे तानाजी का मुखावलोकन करने लगे । तानाजी की बड़ी-बड़ी आखें खुली हुई थीं। मुख पर एक प्रकार का सौन्दर्य दिखलाई पड़ता था । शिवाजी कुछ देर तक शव की ओर टकटकी लगाये देखते रहे, मानो उनको उनके मरने में अभी सन्देह था । थोड़ी देर के बाद उन्होंने शव को ढक दिया और आंसू पोंछते-पोंछते वे शेलार मामा से कहने लगे "गढ़ आया, परन्तु सिंह गया । भवानी तेरी इच्छा," "सूर्य्यजी ! तुम यही समझो कि शिवाजी मर गया, और तानाजी अभी जीवित है । जानकी माता से भी यही कहना कि जैसे मेरा पुत्र शम्भाजी है उसी प्रकार रायवाछ भी होगा । दुर्ग विजय कर शिवाजी ने उदयभानु की स्त्रियों को आदरपूर्वक दिल्ली भिजवा दिया। इसके पश्चात् उन्होंने गढ़ को ठीक कराने की आज्ञा दी । इस समय बालाजी बजी ने हाथ जोड़ कर प्रार्थना की, कि सब की ऐसी इच्छा है, कि जिस स्थान पर * जानकीजी तानाजी की माता का नाम था और रायवा उनके पुत्र का नाम था । तानाजी ने अपने प्राण त्यागे हैं, उस स्थान पर उनकी समाधि बनवा दी जाय । इस बात को सुनते ही शिवाजी ने कहा कि 'इस चूने पत्थर की समाधि से तानाजी का क्या होगा ? उनकी सच्ची समाधि तो मेरे हृदय में बनी है। अच्छा तुम्हारी मर्जी।' इस प्रकार तानाजी को सवदा के लिए खोकर शिवाजी ने फाल्गुन कृष्णा नवमी सन् १६७० ई० को पुनः सिंहगढ़ पर अपना अधिकार कर लिया । * * इस घटना का सार, 'सिंहगढ़ विजय' नामक पुस्तक से लिया गया है। जो महाशय इसका पूरा विवरण पढ़ना चाहें वे उपर्युक्त पुस्तक को अभ्युदय प्रेस से मँगवा कर पढ़ें ।
अतएव इन दोनों कारणों से उसने उदयभानु को दक्षिण में भेजा था। औरङ्गजेब शिवाजी पर इतना खार खाये बैठा था, कि यदि शिवाजी उसको मिल जाते, तो ईश्वर जाने वह उनकी क्या दुर्गति करता। शिवाजी का दिल्ली से निकल जाना उसे इतना बुरा लगा, कि यदि कोई उसकी दाढ़ी भी उखाड़ लेता तो कदाचित् उसे इतना बुरा न लगता; परन्तु इस समय वह कर क्या सकता था । वह सोचता होगा कि मैं इतना कुटिल-नीति-विशारद होकर भी ऐसा धोखा खा गया । इससे भी बढ़ कर मेरी फ़जीहत और बदनामी क्या हो सकती है ? अतएव अब उसने शिवाजी पर पुनः कुटिल नीति का पाश डालना चाहा; परन्तु शिवाजी की बुद्धि के आगे उसकी दाल न गली और शिवाजी फिर उसके विश्वास में कभी न आये । औरंगजेब को मृत्युकाल तक इस बात का पश्चात्ताप रहा। उसने उदयभानु को बुलाया और कहा - "तुम दक्षिण में जाओ, और सिंहगढ़ के क़िले में जाकर रहो। सिंहगढ़ का क़िला शिवाजी को हाथ में लाने की कुञ्जी है। जब तक वह हमारे अधिकार में है, शिवाजी एक प्रकार से हमारे हाथ में है। सिंहगढ़ की रक्षा अच्छी तरह से करना, क्योंकि शिवाजी इसी के लेने का यत्न करेगा। इसके साथ ही तुम यशवन्तसिंह और मोअज्जम पर भी खूब कड़ी नज़र रखना ।" उदयभानु सिंहगढ़ में आकर रहने लगा। सिंहगढ़ का हम कुछ वर्णन पीछे कर आये हैं, परन्तु प्रसंगवश यहाँ पर फिर कुछ लिखना उचित है। सिंहगढ़ सुन्दर प्राकृतिक स्थान में बना हुआ है। चतुर्दिक उच्च पर्वत श्रेणी खड़ी हैं। एक ओर सह्याद्र गगनस्पर्शी शिखरों द्वारा अपने गाम्भीर्य का परिचय दे रहा है। इसी के पूर्व में सिंहगढ़ का दुर्ग है। इसके उत्तर और दक्षिण में भी उच्चशृङ्ग हैं, जो इसको सहज ही में सुदृढ़ बनाते हैं। इन पहाड़ों पर चढ़ना अति कठिन है। आधे मील तक ऊपर चढ़ने पर छोटी दुर्गम पहाड़ियों को तै कर क़िले में पहुँचना होता है। दुरारोह पर्वतों से घिरा हुआ सिंहगढ़ त्रिभुजाकर बना हुआ है। इसके बीच में अनुमान से दो मील का मैदान है । प्राकृतिक कारणों से यह दुर्ग एक प्रकार से अभेद्य है। इस दुर्ग के चारों ओर मछली पकड़ने वाले कहार रहते थे । जब तक उदयभानु के क़दम-एशरीफ़ यहाँ पर नहीं आये थे, तब तक यह क़िला रायाजी के अधिकार में था। जब से उदयभानु यहाँ आये तब से इसमें . खूब चौकसी रहने लगी । इसने दुर्ग की रक्षा के लिये उत्तम प्रबंध कर डाला । संरक्षकों को बुलाकर उसने यह आज्ञा दी, कि कोई बाहरी आदमी इस किले में न आने पावे, और विना मेरी आज्ञा के कोई बाहर भी न जाने पावे। उसने चारों ओर कड़े पहरे बिठला दिये। किले के भीतर जितने बुर्ज और बुर्जियाँ थीं, उनपर भी पहरेदार नियुक्त कर दिये गये। पहरेदारों के लिये जो नियम बनाये गये थे, वे इतने कड़े थे कि विचारों को निद्रादेवी से भेंट करना कठिन हा गया था। इतना प्रबन्ध कर चुकने पर भी वह रात्रि को स्वयं निरीक्षण करता था, और जिनको वह 'ड्यटी' पर न पाता उनको बड़ा कठिन दण्ड देता था । उदयभानु के आने का पता मिल गया। अब के दुर्ग के विजय का भार तानाजी ने स्वयं अपने सिर पर लिया । माघ मास के अन्त में एक हज़ार मावलियों को लेकर तानाजी सिंहगढ़ को विजय करने चले। इनके साथ में इनके भाई सूर्य्यजी और दूर के नाते के मामा शेलार भी थे । इन सबों ने वहाँ पहुँच कर रायाजी को अपनी ओर मिला लिया । पाँच-छ रोज तक भेद लेने के पश्चात् रात्रि में दुर्ग पर चढ़ने के लिये जगह निकाली गई । स्थान निर्दिष्ट हो जाने पर यह प्रश्न उठा, कि ऊपर किस प्रकार चढ़ा जाय, और सब से पहले ऊपर कौन चढ़े ? वृद्ध शेलार ने इस काम का भार अपने ऊपर लिया, परन्तु तानाजी ने इस में आपत्ति की । तब तो वृद्ध कड़क उठा और कहने लगा 'तानाजी ! आज मैं इस बात को दिखला दूँगा कि इस अस्सी वर्ष के वृद्ध शरीर में कितना बल है ? जब यह वृद्ध कमन्द द्वारा सर-सर ऊपर पहुँच जावेगा, तब तुम्हें मालूम पड़ेगा कि वृद्ध कैसा है ?' तानाजी ने उनको धीरे-धीरे बोलने को कहा, परन्तु बूढ़े मामा ने उस ओर कुछ ध्यान न देकर अपना बड़बड़ाना जारी रक्खा, और अन्त में उन्होंने कमन्द निकाल ही ली। तानाजी ने उनको रोक कर यह निश्चित् किया, कि येसाकणेकर अपने अड़तालीस मनुष्यों को लेकर संध्या होते द्रोणगिरि भा जावें । सूर्य्यजी कल्याण दरवाजे की ओर भेजे गये और शेलार तथा तानाजी ने दुर्ग पर चढ़ना विचारा। आज सारा दिन तानाजी ने अन्न-जल बिना बिताया था । जब शेलार ने यह जाना तो उसने कुछ खा लेने को कहा, परन्तु उन्होंने कहा कि 'आज जब तक दुर्ग हस्तगत न कर लूँगा, तब तक अन्न-जल नहीं करूँगा।' ऐसा कहकर वे अपने काम में लग गये । भगवान् भास्कर अस्ताचल की ओट हो गये। संध्या की कालिमा छा गई । अन्धकार ने समस्त संसार पर अपना पर्दा डाला। ऐसे ही समय में शेलार मामा ने कमन्द निकाली और ऊपर फेंकी । यथायोग्य स्थान पर कमन्द चिपट गई । शेलार और तानाजी आदि सब ऊपर चढ़ने के उद्योग में लगे । तानाजी अग्रसर हुए, और बात की बात में वे ऊपर जा पहुँचे । तानाजी के बाद एक-एक कर सब ऊपर चढ़ गये। रायाजी के प्रबन्ध से इस भावी दुर्घटना की ऊपर किसी को भी सम्भा वना नहीं हुई थी । प्रायः बारह मावली वीर योद्धा दुर्ग की प्राचीर पर पहुँच गये। अब मेख ठोक कर ऊपर से दो रस्से और लटका दिये गये । पहरेदारों को कुछ शङ्का हुई तो वे उस ओर बढ़े । एक पहरेदार को उस ओर देख तानाजी ने समझा कि अब मामला बिड़गता है, परन्तु घोर अन्धकार के कारण वह पहरेदार तानाजी को न देख सका था । तानाजी ने कुछ न सोच कर तीर द्वारा उसे बिद्ध कर भूतलशायी किया और थोड़ी देर के लिए विघ्न की सम्भावना दूर हुई। इतने में लटकाये हुए रस्सों द्वारा पचास वीर और ऊपर चढ़ आये । अब सब से पहले यह काम करना विचारा गया, कि किसी न अधिकार कर लिया जाय, और दुर्ग का द्वार खोल दिया जाय । इस काम के लिए थोड़े से वीर जुर्ज की ओर भेजे गये । चलते समय इन लोगों को समझा दिया गया, कि किसी प्रकार का शब्द न करें, क्योंकि ऐसा करने से विजय कठिन हो जायगी। बेचारे बुर्ज पर के लोग ऊँघ रहे थे । उनको क्या खबर थी कि उनका काल उनके सिरों पर नाच रहा है। ऐसी अवस्था में मावलियों ने उन पर आक्रमण किया । क्रमित होने पर बुर्ज के सिपाही घबड़ाहट में पड़ गये । वे हक्के-बक्के से खड़े रह गये । तत्काल मावलियों ने उन की पूरी सफ़ाई कर दी। वहाँ एक तोप पड़ी थी । उसमें भी कील ठोक दी गई। दूसरा दल द्वार खोलने को भेजा गया था, उसने भी अपना काम पूरा किया। इतने में दुर्ग में खलबली मच गई । उदयभानु अपने मकान से निकल पड़ा, और दुर्ग-द्वार की ओर झपटा। दुर्ग के द्वार पर तानाजी डटे थे । वे सूर्य्यजी के इन्तजार में थे, परन्तु सूर्य्यजी के आने में विलम्ब हुआ । अब दुर्ग में युद्ध होने लगा । मुसलमान सिपाही 'तोबा तोबा' कहते हुए इधर-उधर भागने लगे। विकट रण-ताण्डव होने लगा। तलवारों और तीरों की आवाज़ से दुर्ग कम्पायमान हो गया । भैरवनाद करता हुआ उदयभानु तानाजी पर टूट पड़ा। एक क्षरण ही में लड़ाई ने गहरा रंग पकड़ा। दोनों ही एक दूसरे को गिराने की चेष्टा में संलग्न थे। एक ओर शिवाजी के सुहृद वीर और दूसरी ओर मेवाड़ का कुलकलङ्क अपनी-अपनी उम्र वीरता का परिचय देने लगे । तानाजी थके हुए थे, परन्तु इतने पर भी वे सफ़ाई और फुर्ती से हाथ चला रहे थे। दोनों के मुखों से वीरोचित और उत्साहवर्द्धक वाक्य निकल रहे थे। थोड़ी ही देर के युद्ध में दोनों के शरीर व्रणों से परिपूरित हो गये। इतने में उदयभानु के खड्ग से तानाजी की ढाल फटगई। तब उन्होंने फुर्ती से बायें हाथ से कमर का पटुका खोल डाला और उसे लपेट कर एक नई ढाल तैयार करली, परन्तु पटुका से बचाव कब तक हो सकता था? ताना जी शिथिल होने लगे, और अन्त में उदयभानु के आघात से आहत होकर वे भूमि पर गिर पड़े। उदयभानु ने अपनी तलवार उनकी छाती में भोंक दी। हा ! शिवाजी के चिरकालीन मित्र इस संसार से चल बसे । एक महान् आत्मा ने इस नश्वर देह को त्याग कर वीर कीर्ति के साथ स्वर्गलोक को प्रस्थान किया । तत्काल ही तानाजी की मृत्यु का समाचार दुर्ग भर में फैल गया। शेलार दूसरी ओर युद्ध कर रहे थे। बात की सत्यता जानने के लिये वे इधर झपटे । आते ही उन्होंने देखा कि उदयभानु ज़ोरशोर से तलवार चला रहा है, और तानाजी के लिये अपशब्द भी कहता जा रहा है। शेलार का धैर्य जाता रहा। क्रोध के मारे उनकी खों से आग बरसने लगी । उन्होंने हठात् उदयभानु के ऊपर आक्रमण किया । अस्सी वर्ष के बुड्ढे को सामने देख कर उदयभानु दंग रह गया। शेलार के घोर आक्रमण से वह व्यथित हो गया और थोड़ी ही देर में वृद्ध की तलवार ने उसका काम तमाम कर दिया। तानाजी की मृत्यु के कारण मावलियों का धैय्यं छूटने लगा। उद्यभानु के सैनिकों ने जोर पकड़ा । मावलीगण हटने लगे। सूर्य्यजी ने देखा कि वे कमन्द रस्सों की ओर बढ़ रहे हैं। यह देख कर उन्होंने कमन्द तथा रस्सों को काट दिया और कहा 'कापुरुषो! जाओ, अपने प्राणों को कायरों की तरह गँवा दो । तानाजी को खोकर और अपने मुखों में कारिख पोत कर शिवाजी के सामने जाओ और साथ में यह भी देखते जाओ कि तानाजी की बोटी बोटी कैसे काटी जाती है, धिकार है तुम सबको सूर्य्यजी के इन मर्मबंधी शब्दों ने अपूर्व काम किया। महाराष्ट्र योद्धा ठहर गये। अब उन्होंने पीठ दिखाने की अपेक्षा समरक्षेत्र में प्राण देना ही उचित समझा, और वे पुनः उदयभानु के सैनिकों से भिड़ गये। एक बार वे युद्ध ने फिर रौद्ररूप धारण किया। उधर शेलार मामा ने उदयभानु को यमपुरी का रास्ता दिखला दिया था। उसकी मृत्यु से दुर्ग में हाहाकार मच गया। इतने में एक और ख़बर फैली कि एक नवीन सुसज्जित महाराष्ट्रीय सेना चढ़ी चली आ रही है। थोड़ी देर पूर्व जो महाराष्ट्र वीरों की अवस्था हो गई थी, ठीक वही हालत अब दुर्गस्थ सैनिकों की हो गई। वे चारों ओर भागने लगे। जिसने जिधर को मौका देखा वह उधर ही को भाग निकला। अब महाराष्ट्र वीरों ने दुर्ग में प्रलयकाल उपस्थित किया । हताश दुर्गस्थ सेना के पैर लटपटाने लगे। जब सूर्य्यजी ने देखा कि पूर्ण विजय प्राप्त हो गई, तो उन्होंने शिवाजी की दुहाई फिरवा दी, और घोषित किया कि 'जो हथियार रख देगा वह मारा नहीं जायगा' । घोषणा के सुनते ही हथियार रक्खे जाने लगे। सबों ने सूर्य्यजी को झुक कर प्रणाम किया । लड़ाई बन्द हुई। सूर्य्य जी ने सबको अभयदान देकर अपनेअपने स्थान पर जाने को कहा। उधर शिवाजी भी रायगढ़ को छोड़ कर सिंहगढ़ की ओर चले । सिंहगढ़ के निकट आने पर उनको खबर मिली कि क़िला फ़तह हो गया है, परन्तु खबर देने वाले ने तानाजी का कुछ हाल न कहा । विजय-वार्त्ता सुन कर शिवाजी ने सिंहगढ़ में प्रवेश किया । प्रवेश करने पर वीर मावलियों ने उनको प्रणाम किया, परन्तु किसी प्रकार का हर्ष न प्रकट किया। जो उनको देखता वही गर्दन झका लेता । शिवाजी ने सब ही ओर यही रङ्ग देखा, तब तो उनके हृदय में संदेह उत्पन्न हुआ। आगे बढ़े तो उनको शेलार मामा मिले। उनके सामने एक शव रक्खा हुआ था, जिसके ऊपर एक ज़री का डुपट्टा पड़ा था । शिवाजी को देखते ही शेलार रोने लगे । इस दृश्य के देखते ही शिवाजी का हृदय विदीर्ण हो गया । उनके मुख से कोई शब्द भी नहीं निकला । तब तो शेलार ने चिल्ला कर कहा "महाराज ! हाय ! महाराज ! हाय मेरा ताना ! आपका प्राणप्यारा ताना! हमारे हाथों से छीन लिया गया । हाय महाराज अब मैं क्या करूँ !" इन हृदय विदारक शब्दों को सुनते ही शिवाजी एक दम काँप उठे। उन्होंने अपने को बहुत ही रोका, पर करुणा-समुद्र की लहरों को वे न रोक सके। एक सामान्य बालक की तरह वे फूट-फूट कर रोने लगे। कभी तो वे शेलार मामा से लिपट जाते, और कभी तानाजी के शव से चिपट कर रोते । इस हृदयद्रावक दृश्य को देख कर उस समय ऐसा कौन था, जो नौ-नौ ऑसून रोया हो । सब ही रोते थे। शिवाजी का तो अजब हाल था। बेचारे शेलार अपना रोना भूल गये । वे शिवाजी को समझाने लगे । कुछ देर के बाद शिवाजी ने शान्ति ग्रहण की, और दुपट्टा उठाकर वे तानाजी का मुखावलोकन करने लगे । तानाजी की बड़ी-बड़ी आखें खुली हुई थीं। मुख पर एक प्रकार का सौन्दर्य दिखलाई पड़ता था । शिवाजी कुछ देर तक शव की ओर टकटकी लगाये देखते रहे, मानो उनको उनके मरने में अभी सन्देह था । थोड़ी देर के बाद उन्होंने शव को ढक दिया और आंसू पोंछते-पोंछते वे शेलार मामा से कहने लगे "गढ़ आया, परन्तु सिंह गया । भवानी तेरी इच्छा," "सूर्य्यजी ! तुम यही समझो कि शिवाजी मर गया, और तानाजी अभी जीवित है । जानकी माता से भी यही कहना कि जैसे मेरा पुत्र शम्भाजी है उसी प्रकार रायवाछ भी होगा । दुर्ग विजय कर शिवाजी ने उदयभानु की स्त्रियों को आदरपूर्वक दिल्ली भिजवा दिया। इसके पश्चात् उन्होंने गढ़ को ठीक कराने की आज्ञा दी । इस समय बालाजी बजी ने हाथ जोड़ कर प्रार्थना की, कि सब की ऐसी इच्छा है, कि जिस स्थान पर * जानकीजी तानाजी की माता का नाम था और रायवा उनके पुत्र का नाम था । तानाजी ने अपने प्राण त्यागे हैं, उस स्थान पर उनकी समाधि बनवा दी जाय । इस बात को सुनते ही शिवाजी ने कहा कि 'इस चूने पत्थर की समाधि से तानाजी का क्या होगा ? उनकी सच्ची समाधि तो मेरे हृदय में बनी है। अच्छा तुम्हारी मर्जी।' इस प्रकार तानाजी को सवदा के लिए खोकर शिवाजी ने फाल्गुन कृष्णा नवमी सन् एक हज़ार छः सौ सत्तर ईशून्य को पुनः सिंहगढ़ पर अपना अधिकार कर लिया । * * इस घटना का सार, 'सिंहगढ़ विजय' नामक पुस्तक से लिया गया है। जो महाशय इसका पूरा विवरण पढ़ना चाहें वे उपर्युक्त पुस्तक को अभ्युदय प्रेस से मँगवा कर पढ़ें ।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। फरियादियों को न्याय मिले और उनकी समस्या का समाधान हो इसके लिए एसएसपी पवन कुमार का जनसुनवाई पर खासा जोर है। वह रोजाना अपने दफ्तर में बैठकर घंटों जनसुनवाई करते हैं। इसके बावजूद शुक्रवार को पुलिस कार्यालय का नजारा कुछ बदला. बदला सा नजर आया। पुलिस दफ्तर में फरियादियों की खासी भीड़ नजर आई। जिनकी सुनवाई करने के लिए एसएसपी को अपने दफ्तर से बाहर निकलकर फरियादियों के बीच पहुंचना पड़ा। शुक्रवार को पुलिस कार्यालय में बड़ी तादात में फरियादी पहुंचे। घंटों की सुनवाई के बाद भी जब फरियादियों की भीड़ वहां कम नहीं हुई तो एसएसपी पवन कुमार अपने मातहत अधिकारियों एसपी ग्रामीण डा. ईरज राजा और एसपी क्राइम डा. दीक्षा शर्मा के साथ दफ्तर से निकलकर फरियादियों के बीच पहुंच गए। तीनों अधिकारियों ने लोगों के पास जाकर खुद उनकी समस्या जानी और संबंधित थाना प्रभारी को दिशा निर्देश देकर उनकी समस्या का निस्तारण करने के निर्देश दिए। एसएसपी का कहना है कि जनसुनवाई उनकी प्राथमिकता में शामिल हैं। सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह थाना और चौकी पर आने वाले पीडि़तों की समस्या का समाधान अपने स्तर पर ही करें। जिस भी थानाक्षेत्र से अधिक शिकायतें उनके पास आएंगी उस थाना प्रभारी से जवाब तलब किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि कुछ लोग फर्जी शिकायतें और कुछ अपने बचाव को शिकायत लेकर पुलिस कप्तान के पास पहुंचे थे। जिन्हें पुलिस कप्तान की ओर से निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया गया।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। फरियादियों को न्याय मिले और उनकी समस्या का समाधान हो इसके लिए एसएसपी पवन कुमार का जनसुनवाई पर खासा जोर है। वह रोजाना अपने दफ्तर में बैठकर घंटों जनसुनवाई करते हैं। इसके बावजूद शुक्रवार को पुलिस कार्यालय का नजारा कुछ बदला. बदला सा नजर आया। पुलिस दफ्तर में फरियादियों की खासी भीड़ नजर आई। जिनकी सुनवाई करने के लिए एसएसपी को अपने दफ्तर से बाहर निकलकर फरियादियों के बीच पहुंचना पड़ा। शुक्रवार को पुलिस कार्यालय में बड़ी तादात में फरियादी पहुंचे। घंटों की सुनवाई के बाद भी जब फरियादियों की भीड़ वहां कम नहीं हुई तो एसएसपी पवन कुमार अपने मातहत अधिकारियों एसपी ग्रामीण डा. ईरज राजा और एसपी क्राइम डा. दीक्षा शर्मा के साथ दफ्तर से निकलकर फरियादियों के बीच पहुंच गए। तीनों अधिकारियों ने लोगों के पास जाकर खुद उनकी समस्या जानी और संबंधित थाना प्रभारी को दिशा निर्देश देकर उनकी समस्या का निस्तारण करने के निर्देश दिए। एसएसपी का कहना है कि जनसुनवाई उनकी प्राथमिकता में शामिल हैं। सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह थाना और चौकी पर आने वाले पीडि़तों की समस्या का समाधान अपने स्तर पर ही करें। जिस भी थानाक्षेत्र से अधिक शिकायतें उनके पास आएंगी उस थाना प्रभारी से जवाब तलब किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि कुछ लोग फर्जी शिकायतें और कुछ अपने बचाव को शिकायत लेकर पुलिस कप्तान के पास पहुंचे थे। जिन्हें पुलिस कप्तान की ओर से निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया गया।
घर पर एक टिक कैसे निकालना है? वसंत, गर्मी, शरद ऋतु - एक समय जब हम खींचे जाते हैंजंगल और पार्क में। लेकिन न केवल हम इस समय सक्रिय हैं। टिक्स भी जागते हैं और काफी गतिविधि दिखाते हैं। और चूंकि कीट काफी छोटी है, इसलिए इसे अपने शरीर पर ढूंढना काफी मुश्किल है। और आपको घर पर एक टिक को हटाने का तरीका पता होना चाहिए। तो, आपको शरीर की किसी भी हिस्से पर यह कीट मिल गई, घबराओ मत। अस्पताल जाने से पहले, इसे खींचने के लायक है। और यह सही कैसे करें? ये छोटी कीड़े काफी काटने नहीं कर सकते हैंकेवल आप ही, लेकिन आपका जानवर, जो चलने के लिए चला गया। हाँ, इतना अप्रिय एक तमाशा की नजर में पहली इच्छा - एक पुल और टिक फेंक देते हैं। लेकिन यह मत करो, वह सिर्फ काट नहीं कर सकते, लेकिन यह भी अपने छोटे से सिर की त्वचा के नीचे छीन छुट्टी में है, और यह सूजन और रक्त विषाक्तता के लिए नेतृत्व कर सकते हैं। तो, अगर टिक ऊन या बालों के नीचे स्थित है, वे नम और हाथ में कंघी की जरूरत है। अब आपको चिमटी, पहले कीटाणुशोधन, या एक नैपकिन लेने की जरूरत है। किसी भी मामले में अपने हाथों से टिक नहीं लेते, अचानक वह एन्सेफलाइटिस पीड़ित होता है। त्वचा के करीब के रूप में कीट पकड़ो और खींचो। केवल यह बहुत सावधानी से करना जरूरी है, ताकि टिक को कुचलने के लिए न हो। त्वचा बढ़ने तक धीरे-धीरे खींचें। कीट को लगभग दो मिनट तक पकड़ो। आप थोड़ा सा तरफ से इसे हिला सकते हैं। यदि यह मदद नहीं करता है, तो आपको त्वचा के प्रवेश द्वार में थोड़ा शराब छोड़ना होगा। यह इसे बहुत तेजी से प्राप्त करने में मदद करेगा। पहली और सबसे मशहूर विधि चिमटी लेने के लिए है,शराब, आयोडीन, धागा और सुई। संदंश सावधानीपूर्वक शरीर द्वारा पतंग लेते हैं और इसे धुरी पर बदलकर खींचते हैं। एक कीट खींचने के बाद, घाव को शराब और आयोडीन के साथ इलाज किया जाना चाहिए। चिमटी को भी संसाधित करने की आवश्यकता होती है, और साबुन से हाथ धोएं। वह लगभग हर किसी के लिए भी जाना जाता है। वसीलीन के साथ तेल या स्मीयर को ड्रिप करना जरूरी है जहां टिक टिक गई है। यह उसे ऑक्सीजन तक पहुंचने से रोक देगा, और कीट बाहर निकलना शुरू हो जाएगा। इस बिंदु पर, इसे चिमटी के साथ उठाया जाना चाहिए और त्वचा के नीचे कोई सिर नहीं छोड़कर अच्छी तरह से बाहर खींच लिया जाना चाहिए। इसके बाद, घाव का ज़ेब्राफिश या आयोडीन के साथ इलाज किया जाना चाहिए। यदि टिक टिकता है तो यह विकल्प आपके लिए उपयुक्त हैत्वचा में उथला धागे की अंगूठी बनाना और प्रोबोसिस के लिए जितना संभव हो सके कीट पर रखना आवश्यक है। गाँठ को कड़ा कर दिया जाना चाहिए, और फिर धीमी झूलते आंदोलनों के साथ टिक खींचें। अगर अचानक कीट का सिर त्वचा के नीचे रहता है, तो आपको एक सुई लेने की जरूरत होती है, इसे आग पर जला दिया जाता है और धीरे-धीरे इसे बाहर खींच लिया जाता है। घाव की सावधानीपूर्वक प्रक्रिया करें।
घर पर एक टिक कैसे निकालना है? वसंत, गर्मी, शरद ऋतु - एक समय जब हम खींचे जाते हैंजंगल और पार्क में। लेकिन न केवल हम इस समय सक्रिय हैं। टिक्स भी जागते हैं और काफी गतिविधि दिखाते हैं। और चूंकि कीट काफी छोटी है, इसलिए इसे अपने शरीर पर ढूंढना काफी मुश्किल है। और आपको घर पर एक टिक को हटाने का तरीका पता होना चाहिए। तो, आपको शरीर की किसी भी हिस्से पर यह कीट मिल गई, घबराओ मत। अस्पताल जाने से पहले, इसे खींचने के लायक है। और यह सही कैसे करें? ये छोटी कीड़े काफी काटने नहीं कर सकते हैंकेवल आप ही, लेकिन आपका जानवर, जो चलने के लिए चला गया। हाँ, इतना अप्रिय एक तमाशा की नजर में पहली इच्छा - एक पुल और टिक फेंक देते हैं। लेकिन यह मत करो, वह सिर्फ काट नहीं कर सकते, लेकिन यह भी अपने छोटे से सिर की त्वचा के नीचे छीन छुट्टी में है, और यह सूजन और रक्त विषाक्तता के लिए नेतृत्व कर सकते हैं। तो, अगर टिक ऊन या बालों के नीचे स्थित है, वे नम और हाथ में कंघी की जरूरत है। अब आपको चिमटी, पहले कीटाणुशोधन, या एक नैपकिन लेने की जरूरत है। किसी भी मामले में अपने हाथों से टिक नहीं लेते, अचानक वह एन्सेफलाइटिस पीड़ित होता है। त्वचा के करीब के रूप में कीट पकड़ो और खींचो। केवल यह बहुत सावधानी से करना जरूरी है, ताकि टिक को कुचलने के लिए न हो। त्वचा बढ़ने तक धीरे-धीरे खींचें। कीट को लगभग दो मिनट तक पकड़ो। आप थोड़ा सा तरफ से इसे हिला सकते हैं। यदि यह मदद नहीं करता है, तो आपको त्वचा के प्रवेश द्वार में थोड़ा शराब छोड़ना होगा। यह इसे बहुत तेजी से प्राप्त करने में मदद करेगा। पहली और सबसे मशहूर विधि चिमटी लेने के लिए है,शराब, आयोडीन, धागा और सुई। संदंश सावधानीपूर्वक शरीर द्वारा पतंग लेते हैं और इसे धुरी पर बदलकर खींचते हैं। एक कीट खींचने के बाद, घाव को शराब और आयोडीन के साथ इलाज किया जाना चाहिए। चिमटी को भी संसाधित करने की आवश्यकता होती है, और साबुन से हाथ धोएं। वह लगभग हर किसी के लिए भी जाना जाता है। वसीलीन के साथ तेल या स्मीयर को ड्रिप करना जरूरी है जहां टिक टिक गई है। यह उसे ऑक्सीजन तक पहुंचने से रोक देगा, और कीट बाहर निकलना शुरू हो जाएगा। इस बिंदु पर, इसे चिमटी के साथ उठाया जाना चाहिए और त्वचा के नीचे कोई सिर नहीं छोड़कर अच्छी तरह से बाहर खींच लिया जाना चाहिए। इसके बाद, घाव का ज़ेब्राफिश या आयोडीन के साथ इलाज किया जाना चाहिए। यदि टिक टिकता है तो यह विकल्प आपके लिए उपयुक्त हैत्वचा में उथला धागे की अंगूठी बनाना और प्रोबोसिस के लिए जितना संभव हो सके कीट पर रखना आवश्यक है। गाँठ को कड़ा कर दिया जाना चाहिए, और फिर धीमी झूलते आंदोलनों के साथ टिक खींचें। अगर अचानक कीट का सिर त्वचा के नीचे रहता है, तो आपको एक सुई लेने की जरूरत होती है, इसे आग पर जला दिया जाता है और धीरे-धीरे इसे बाहर खींच लिया जाता है। घाव की सावधानीपूर्वक प्रक्रिया करें।
ODI World Cup 2023 IND vs PAK : एशिया कप 2023 के आयोजन को लेकर अभी तक तस्वीर साफ नहीं है। वैसे तो पाकिस्तान को इस साल के एशिया कप की मेजबानी मिली है, लेकिन बीसीसीआई की ओर से टीम इंडिया को पाकिस्तान न भेजने को लेकर जिस तरह का रुख अब तक अपनाया गया है, उसके बाद संभावना जताई जा रही है कि एशिया कप श्रीलंका में आयोजित कराया जा सकता है। बीसीसीआई सचिव जय शाह बहुत पहले ही साफ कर चुके हैं कि सुरक्षा कारणों से टीम इंडिया पाकिस्तान में खेलने के लिए नहीं जा सकती। इसके बाद अब पता चला है कि श्रीलंका और बांग्लादेश के क्रिकेट बोर्ड भी बीसीसीआई के साथ खड़े हो गए हैं। श्रीलंका अचानक से इसके नए वेन्यू के तौर पर उभरा है, लेकिन अभी तक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी पीसीबी की ओर से इस बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है, इसलिए पक्के तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता। इस बीच अब पाकिस्तान वनडे विश्व कप में अड़ंगा डालने की कोशिश कर रहा है। वन डे विश्व कप भी इस साल भारत में खेला जाना है। वनडे विश्व कप 2023 भारत में होना है, इसका अभी तक शेड्यूल जारी नहीं किया गया है, लेकिन किन स्थानों पर मैच खेले जाएंगे, इसकी एक लिस्ट सामने आई है। इसके साथ ही पता ये भी चला है कि भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले की मेजबानी अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम को मिल सकती है। ये दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है। इस बीच अब इस तरह की खबरें सामने आ रही हैं कि पाकिस्तानी टीम अहमदाबाद में भारत से खेलने के लिए तैयार नहीं है। जियो न्यूज के सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कहा जा रहा है कि पाकिस्तान कुछ कारणों से नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत के लिए खिलाफ खेलने पर सहमत नहीं हो सकता है। टीम इंडिया भले एशिया कप के लिए पाकिस्तान न जाए, लेकिन पाकिस्तान को विश्व कप के लिए भारत आना ही होगा, क्योंकि विश्व कप आईसीसी का टूर्नामेंट है। इसके बाद पाकिस्तान ने एक और पैतरा चला है, बताया जाता है कि पीसीबी बीसीसीआई से ये लिखित आश्वासन चाहता है कि पाकिस्तानी टीम भारत जाएगी तो साल 2025 में होने वाले चैंपियंस ट्रॉफी के लिए टीम इंडिया भी भारत आएगी। आईसीसी की ओर से अभी तक विश्व कप के पूरे शेड्यूल का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन पता चला है कि आईपीएल 2023 के समापन के बाद शेड्यूल का ऐलान किया जाएगा। इस बार के एशिया कप की खास बात ये भी है कि ये वनडे फॉर्मेट पर खेला जाएगा। यानी 50 ओवर का होगा। पहले ही इस बात पर मोहर लग चुकी है कि जिस साल आईसीसी विश्व कप होगा, जिस फॉर्मेट का विश्व कप होगा, उसी पर एशिया कप भी खेला जाएगा। आयोजन स्थल तय न हो पाने के कारण ही अभी तक एशिया कप का शेड्यूल सामने नहीं आया है, जबकि इसको शुरू होने में बहुत ज्यादा वक्त नहीं बचा है। जानकारी मिली है कि इसी सप्ताह के आखिर तक वेन्यू तय कर लिया जाएगा, जो शायद श्रीलंका होगा और इसके बाद शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा ये भी किया जा रहा है कि अगर एशिया कप का वेन्यू बदला गया तो हो सकता है कि पाकिस्तान इससे अपना नाम वापस ले ले, लेकिन फिलहाल इसकी संभावना काफी कम नजर आ रही है। लेकिन आने वाले कुछ दिन एशिया कप और विश्व कप के लिहाज से काफी अहम होने वाले हैं।
ODI World Cup दो हज़ार तेईस IND vs PAK : एशिया कप दो हज़ार तेईस के आयोजन को लेकर अभी तक तस्वीर साफ नहीं है। वैसे तो पाकिस्तान को इस साल के एशिया कप की मेजबानी मिली है, लेकिन बीसीसीआई की ओर से टीम इंडिया को पाकिस्तान न भेजने को लेकर जिस तरह का रुख अब तक अपनाया गया है, उसके बाद संभावना जताई जा रही है कि एशिया कप श्रीलंका में आयोजित कराया जा सकता है। बीसीसीआई सचिव जय शाह बहुत पहले ही साफ कर चुके हैं कि सुरक्षा कारणों से टीम इंडिया पाकिस्तान में खेलने के लिए नहीं जा सकती। इसके बाद अब पता चला है कि श्रीलंका और बांग्लादेश के क्रिकेट बोर्ड भी बीसीसीआई के साथ खड़े हो गए हैं। श्रीलंका अचानक से इसके नए वेन्यू के तौर पर उभरा है, लेकिन अभी तक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी पीसीबी की ओर से इस बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है, इसलिए पक्के तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता। इस बीच अब पाकिस्तान वनडे विश्व कप में अड़ंगा डालने की कोशिश कर रहा है। वन डे विश्व कप भी इस साल भारत में खेला जाना है। वनडे विश्व कप दो हज़ार तेईस भारत में होना है, इसका अभी तक शेड्यूल जारी नहीं किया गया है, लेकिन किन स्थानों पर मैच खेले जाएंगे, इसकी एक लिस्ट सामने आई है। इसके साथ ही पता ये भी चला है कि भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले की मेजबानी अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम को मिल सकती है। ये दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है। इस बीच अब इस तरह की खबरें सामने आ रही हैं कि पाकिस्तानी टीम अहमदाबाद में भारत से खेलने के लिए तैयार नहीं है। जियो न्यूज के सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कहा जा रहा है कि पाकिस्तान कुछ कारणों से नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत के लिए खिलाफ खेलने पर सहमत नहीं हो सकता है। टीम इंडिया भले एशिया कप के लिए पाकिस्तान न जाए, लेकिन पाकिस्तान को विश्व कप के लिए भारत आना ही होगा, क्योंकि विश्व कप आईसीसी का टूर्नामेंट है। इसके बाद पाकिस्तान ने एक और पैतरा चला है, बताया जाता है कि पीसीबी बीसीसीआई से ये लिखित आश्वासन चाहता है कि पाकिस्तानी टीम भारत जाएगी तो साल दो हज़ार पच्चीस में होने वाले चैंपियंस ट्रॉफी के लिए टीम इंडिया भी भारत आएगी। आईसीसी की ओर से अभी तक विश्व कप के पूरे शेड्यूल का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन पता चला है कि आईपीएल दो हज़ार तेईस के समापन के बाद शेड्यूल का ऐलान किया जाएगा। इस बार के एशिया कप की खास बात ये भी है कि ये वनडे फॉर्मेट पर खेला जाएगा। यानी पचास ओवर का होगा। पहले ही इस बात पर मोहर लग चुकी है कि जिस साल आईसीसी विश्व कप होगा, जिस फॉर्मेट का विश्व कप होगा, उसी पर एशिया कप भी खेला जाएगा। आयोजन स्थल तय न हो पाने के कारण ही अभी तक एशिया कप का शेड्यूल सामने नहीं आया है, जबकि इसको शुरू होने में बहुत ज्यादा वक्त नहीं बचा है। जानकारी मिली है कि इसी सप्ताह के आखिर तक वेन्यू तय कर लिया जाएगा, जो शायद श्रीलंका होगा और इसके बाद शेड्यूल जारी कर दिया जाएगा। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा ये भी किया जा रहा है कि अगर एशिया कप का वेन्यू बदला गया तो हो सकता है कि पाकिस्तान इससे अपना नाम वापस ले ले, लेकिन फिलहाल इसकी संभावना काफी कम नजर आ रही है। लेकिन आने वाले कुछ दिन एशिया कप और विश्व कप के लिहाज से काफी अहम होने वाले हैं।
पॉपुलर टीवी शो 'नागिन 3' के नए एपिसोड में बेला और सुमित्रा का अकेले में सामना होता है। इस दौरान बेला को सुमित्रा की हकीकत का पता चलता है। बेला इस बात से बेखबर होती है। ऐसे में सुमित्रा अपनी सच्चाई खुद बेला को डराते हुए बताती है। शो के इस एपिसोड में सुमित्रा और बेला का आमना-सामना होता है। सुमित्रा जबरन उससे नागमणि छीनना चाहती है। लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाती। बेला हैरान होकर सुमित्रा की तरफ देखती है कि आखिर वह ये सब क्यों कर रही है। बेला सुमित्रा से कहती है कि वह इस सबमें माहिर को कोई हानि न पहुंचाए। लेकिन सुमित्रा बेला को बताती है कि माहिर उसका असली बेटा नहीं है। इसके बाद सुमित्रा माहिर की तरफ बढ़ती है लेकिन कोई शक्ति उसे रोक देती है, जिसके बाद वह बेहोश हो जाती है। इस बीच विक्रांत से कुछ गलतियों होती हैं। ऐसे में सुमित्रा विक्रांत को बुलाकर उसकी बेवकूफियों के लिए उसे डांटती है। सुमित्रा आगे विक्रांत से माहिर को मारने के लिए कहती है ताकि वह उसकी प्रॉपर्टी को हथिया सके। साथ ही वह बेला को भी फिर से इमोशनली फंसाने की बात विक्रांत से कहती है।
पॉपुलर टीवी शो 'नागिन तीन' के नए एपिसोड में बेला और सुमित्रा का अकेले में सामना होता है। इस दौरान बेला को सुमित्रा की हकीकत का पता चलता है। बेला इस बात से बेखबर होती है। ऐसे में सुमित्रा अपनी सच्चाई खुद बेला को डराते हुए बताती है। शो के इस एपिसोड में सुमित्रा और बेला का आमना-सामना होता है। सुमित्रा जबरन उससे नागमणि छीनना चाहती है। लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाती। बेला हैरान होकर सुमित्रा की तरफ देखती है कि आखिर वह ये सब क्यों कर रही है। बेला सुमित्रा से कहती है कि वह इस सबमें माहिर को कोई हानि न पहुंचाए। लेकिन सुमित्रा बेला को बताती है कि माहिर उसका असली बेटा नहीं है। इसके बाद सुमित्रा माहिर की तरफ बढ़ती है लेकिन कोई शक्ति उसे रोक देती है, जिसके बाद वह बेहोश हो जाती है। इस बीच विक्रांत से कुछ गलतियों होती हैं। ऐसे में सुमित्रा विक्रांत को बुलाकर उसकी बेवकूफियों के लिए उसे डांटती है। सुमित्रा आगे विक्रांत से माहिर को मारने के लिए कहती है ताकि वह उसकी प्रॉपर्टी को हथिया सके। साथ ही वह बेला को भी फिर से इमोशनली फंसाने की बात विक्रांत से कहती है।
का निरन्तर विचार किया करते हैं और दुख वा क्लेश के विषय में बात चीत किया करते हैं, कभी शिर के दर्द की शिकायत कभी बुखार की किया करते हैं नाड़ी कुछ कम चलती है, हाथ पैरों में गर्मी है। यहां तक कि धीरे धीरे वे एक दिन महा रोगों के शिकार बन जाते हैं। उस समय उन्हें सहानुभूति की ढंढ होती है और पूछा करते हैं, भाई क्या करें कुछ ईश्वर हमसे रुष्ट है, हम बड़े दुख में पड़े हैं। मित्रों से सहायता चाहने की इच्छा रखते हैं। उनके ऊपर दया और सहानुभूति दिखलाना हमारा कर्तव्य है उनके मन की बुरी स्थिति उनको दया का पात्र बनाती है । परन्तु मनुष्यों को कौन सचेत करे और उनको विचारवान बनावे । जो वक्ता या लेखक होते हैं उन्हें इस बात पर विचार करना चाहिए कि मनुष्य अपने पुराने रीति को क्यों तोड़ सकता है। उनके हृदयों को उदार और विशाल बना अनुभव देवें कि वे उस सत्य को ग्रहण करें जो कि अपने और अपने जीवन ने दिखाया है कि विचार में बड़ी शक्ति है । यह प्रत्येक बालक, युवा और वृद्ध मनुष्य में पाई जाती है और जो चाहे अभीष्ट के साधन में लगाई जा सकती है। प्रत्येक मनुष्य की विचार शक्ति उसी की है और उसका फल भी वही मनुष्य भोगता है उसको दूसरा व्यक्ति न रोक सकता है और न विगाड़ सकता है। मेरे प्रिय पाठको। चाहे तुम कोई हो और किसी स्थिति में भी हो, किन्तु पारस तुम्हारे पास है। तुम आज ही से अपने जीवन, मन, शरीर और परस्थिति को सुधारना प्रारम्भ
का निरन्तर विचार किया करते हैं और दुख वा क्लेश के विषय में बात चीत किया करते हैं, कभी शिर के दर्द की शिकायत कभी बुखार की किया करते हैं नाड़ी कुछ कम चलती है, हाथ पैरों में गर्मी है। यहां तक कि धीरे धीरे वे एक दिन महा रोगों के शिकार बन जाते हैं। उस समय उन्हें सहानुभूति की ढंढ होती है और पूछा करते हैं, भाई क्या करें कुछ ईश्वर हमसे रुष्ट है, हम बड़े दुख में पड़े हैं। मित्रों से सहायता चाहने की इच्छा रखते हैं। उनके ऊपर दया और सहानुभूति दिखलाना हमारा कर्तव्य है उनके मन की बुरी स्थिति उनको दया का पात्र बनाती है । परन्तु मनुष्यों को कौन सचेत करे और उनको विचारवान बनावे । जो वक्ता या लेखक होते हैं उन्हें इस बात पर विचार करना चाहिए कि मनुष्य अपने पुराने रीति को क्यों तोड़ सकता है। उनके हृदयों को उदार और विशाल बना अनुभव देवें कि वे उस सत्य को ग्रहण करें जो कि अपने और अपने जीवन ने दिखाया है कि विचार में बड़ी शक्ति है । यह प्रत्येक बालक, युवा और वृद्ध मनुष्य में पाई जाती है और जो चाहे अभीष्ट के साधन में लगाई जा सकती है। प्रत्येक मनुष्य की विचार शक्ति उसी की है और उसका फल भी वही मनुष्य भोगता है उसको दूसरा व्यक्ति न रोक सकता है और न विगाड़ सकता है। मेरे प्रिय पाठको। चाहे तुम कोई हो और किसी स्थिति में भी हो, किन्तु पारस तुम्हारे पास है। तुम आज ही से अपने जीवन, मन, शरीर और परस्थिति को सुधारना प्रारम्भ
गोवा विधानसभा में गुरुवार को हुए शक्ति परीक्षण में मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने जीत हासिल कर ली। पंजाब में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अमरिंदर सिंह ने राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने मणिपुर और गोवा में जनादेश पर कब्जा करने के लिए पैसे का उपयोग किया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में चली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की लहर के बीच मुख्तार अंसारी ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की लाज बचा ली। पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की जीत के बाद कांग्रेस विधायकों की रविवार को दोपहर 2 बजे बैठक होगी। जिसमें नये मंत्रिमंडल पर चर्चा होगी। नवजोत सिंह सिद्धू ने बादल परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने अहंकारियों का अहंकार तोड़ दिया क्योंकि एक परिवार पंजाब को लूट रहा था। विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को जारी मतगणना में कांग्रेस स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ रही है, जबकि आम आदमी पार्टी (आप) दूसरे स्थान पर है।
गोवा विधानसभा में गुरुवार को हुए शक्ति परीक्षण में मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने जीत हासिल कर ली। पंजाब में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अमरिंदर सिंह ने राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने मणिपुर और गोवा में जनादेश पर कब्जा करने के लिए पैसे का उपयोग किया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में चली भारतीय जनता पार्टी की लहर के बीच मुख्तार अंसारी ने बहुजन समाज पार्टी की लाज बचा ली। पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की जीत के बाद कांग्रेस विधायकों की रविवार को दोपहर दो बजे बैठक होगी। जिसमें नये मंत्रिमंडल पर चर्चा होगी। नवजोत सिंह सिद्धू ने बादल परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने अहंकारियों का अहंकार तोड़ दिया क्योंकि एक परिवार पंजाब को लूट रहा था। विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को जारी मतगणना में कांग्रेस स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ रही है, जबकि आम आदमी पार्टी दूसरे स्थान पर है।
कस्बा के मशहूर गढ़ वाले हनुमान मंदिर के सामने जलभराव की समस्या से लोगों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बावजूद कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है। प्रताप फुलवाड़ी के पश्चिम दिशा में राजशाही जमाने का ही गढ़ वाले हनुमान मंदिर स्थित है। जहां सुबह शाम को दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है इसी मंदिर के सामने होकर बनी हुई सड़क पर होकर सरकारी कार्यालयों को आने जाने का मार्ग है। जहां मंदिर के सामने जलभराव की समस्या बनी हुई है। बारिश होने पर हालात और भी बदतर हो जाते हैं। स्थानीय निवासी सौरभ ने बताया की उपखंड मुख्यालय पर पंचायत समिति, सरकारी अस्पताल, पुलिस थाना, वन विभाग कार्यालय नर्सरी, जलदाय विभाग सहित राजकीय बालिका व बॉयज विद्यालय में आवागमन के लिए यही एकमात्र रास्ता है। अधिकारियों सहित आमजन का भी इसी मार्ग पर होकर आवागमन होता है। जलभराव होने से पैदल राहगीर काफी परेशान रहते हैं। स्थानीय प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बावजूद कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है जिससे लोगों में रोष व्याप्त है। रायसीस से रैंकवार का नगला तक जाने वाला यह सड़क मार्ग कई वर्षों से नहीं बना, जिसकी वजह से रास्ते में जलभराव एवं कीचड़ से ग्रामीण कई सालों से परेशान है। ग्रामीणों ने बताया कि रास्ते पर जलभराव एवं कीचड़ से विद्यालय में पढ़ने आने वाले छात्र-छात्राओं सहित ग्रामीणों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि इस रास्ते पर हमेशा कीचड़ एवं जलभराव रहता है। बारिश के समय हालात और बदतर हो जाते हैं जिससे लोगों को परेशानी होती है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कस्बा के मशहूर गढ़ वाले हनुमान मंदिर के सामने जलभराव की समस्या से लोगों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बावजूद कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है। प्रताप फुलवाड़ी के पश्चिम दिशा में राजशाही जमाने का ही गढ़ वाले हनुमान मंदिर स्थित है। जहां सुबह शाम को दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है इसी मंदिर के सामने होकर बनी हुई सड़क पर होकर सरकारी कार्यालयों को आने जाने का मार्ग है। जहां मंदिर के सामने जलभराव की समस्या बनी हुई है। बारिश होने पर हालात और भी बदतर हो जाते हैं। स्थानीय निवासी सौरभ ने बताया की उपखंड मुख्यालय पर पंचायत समिति, सरकारी अस्पताल, पुलिस थाना, वन विभाग कार्यालय नर्सरी, जलदाय विभाग सहित राजकीय बालिका व बॉयज विद्यालय में आवागमन के लिए यही एकमात्र रास्ता है। अधिकारियों सहित आमजन का भी इसी मार्ग पर होकर आवागमन होता है। जलभराव होने से पैदल राहगीर काफी परेशान रहते हैं। स्थानीय प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बावजूद कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है जिससे लोगों में रोष व्याप्त है। रायसीस से रैंकवार का नगला तक जाने वाला यह सड़क मार्ग कई वर्षों से नहीं बना, जिसकी वजह से रास्ते में जलभराव एवं कीचड़ से ग्रामीण कई सालों से परेशान है। ग्रामीणों ने बताया कि रास्ते पर जलभराव एवं कीचड़ से विद्यालय में पढ़ने आने वाले छात्र-छात्राओं सहित ग्रामीणों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि इस रास्ते पर हमेशा कीचड़ एवं जलभराव रहता है। बारिश के समय हालात और बदतर हो जाते हैं जिससे लोगों को परेशानी होती है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जब स्वचालित की बात आती है हथियार, फिर कलाश्निकोव हमला राइफल को आमतौर पर सबसे पहले उठाया जाता है। लेकिन प्रथम विश्व युद्ध के दौरान क्या मशीनें थीं? - इस सवाल का हमेशा उस व्यक्ति द्वारा जवाब नहीं दिया जाता है जो गहराई से परिचित नहीं है इतिहास हथियार। इतिहासकार आंद्रेई उलानोव और ऐतिहासिक हथियारों के विशेषज्ञ निकोले सोबोलेव इस सवाल का जवाब देने में मदद करते हैं। यूट्यूब पर कलाश्निकोव चैनल एक दिलचस्प हथियार के बारे में बताता है जिसे सौ साल से भी पहले इस्तेमाल किया गया था। यह 1916 मॉडल के फेडोरोव सिस्टम की एक स्वचालित मशीन है। यह ध्यान दिया जाता है कि रूस में स्वचालित छोटे हथियारों का विकास XNUMX वीं शताब्दी के अंत से चल रहा है। प्रथम विश्व युद्ध से पहले - पिछली शताब्दी के पहले वर्षों में मशीनों के लगभग पांच विभिन्न संस्करणों का परीक्षण किया गया था। नतीजतन, यह पता चला कि स्वचालित हथियारों के लिए तथाकथित तीन-लाइन कारतूस एक उपयुक्त गोला-बारूद नहीं है। प्रवृत्ति को कैलिबर और कारतूस की समग्र शक्ति को कम करने के उद्देश्य से किया गया था। और यह चलन विदेश से आ रहा था। कलाशनिकोव चैनल पर वीडियो फेडोरोव प्रणाली के रूसी स्वचालित मशीन की सुविधाओं के बारे में बताता है, जिसके बारे में युद्ध के मोर्चों में युद्ध के मोर्चों का उपयोग किया गया था, इसके लिए कारतूस के निर्माताओं और अन्य दिलचस्प ऐतिहासिक और हथियार विवरणों के बारे में।
जब स्वचालित की बात आती है हथियार, फिर कलाश्निकोव हमला राइफल को आमतौर पर सबसे पहले उठाया जाता है। लेकिन प्रथम विश्व युद्ध के दौरान क्या मशीनें थीं? - इस सवाल का हमेशा उस व्यक्ति द्वारा जवाब नहीं दिया जाता है जो गहराई से परिचित नहीं है इतिहास हथियार। इतिहासकार आंद्रेई उलानोव और ऐतिहासिक हथियारों के विशेषज्ञ निकोले सोबोलेव इस सवाल का जवाब देने में मदद करते हैं। यूट्यूब पर कलाश्निकोव चैनल एक दिलचस्प हथियार के बारे में बताता है जिसे सौ साल से भी पहले इस्तेमाल किया गया था। यह एक हज़ार नौ सौ सोलह मॉडल के फेडोरोव सिस्टम की एक स्वचालित मशीन है। यह ध्यान दिया जाता है कि रूस में स्वचालित छोटे हथियारों का विकास XNUMX वीं शताब्दी के अंत से चल रहा है। प्रथम विश्व युद्ध से पहले - पिछली शताब्दी के पहले वर्षों में मशीनों के लगभग पांच विभिन्न संस्करणों का परीक्षण किया गया था। नतीजतन, यह पता चला कि स्वचालित हथियारों के लिए तथाकथित तीन-लाइन कारतूस एक उपयुक्त गोला-बारूद नहीं है। प्रवृत्ति को कैलिबर और कारतूस की समग्र शक्ति को कम करने के उद्देश्य से किया गया था। और यह चलन विदेश से आ रहा था। कलाशनिकोव चैनल पर वीडियो फेडोरोव प्रणाली के रूसी स्वचालित मशीन की सुविधाओं के बारे में बताता है, जिसके बारे में युद्ध के मोर्चों में युद्ध के मोर्चों का उपयोग किया गया था, इसके लिए कारतूस के निर्माताओं और अन्य दिलचस्प ऐतिहासिक और हथियार विवरणों के बारे में।
न्यूयाॅर्क। अमेरिका के न्यूयाॅर्क में एक सिख को फिर निशाना बनाया गया है। दरअसल यह सिख एक ड्राईवर है। इसकी पहचान हरकीरत सिंह के तौर पर हुई है। दरअसल सिख वाहन चालक से पैसेंजर द्वारा बदसलूकी किए जाने का मामला सामने आया है। यह जानकारी सामने आई है कि यात्री नशे में थे और ऐसे में इन लोगों ने सिख ड्राईवर की पगड़ी खींची और इसके साथ अभद्रता की। मिली जानकारी के अनुसार जब सिख ड्राइवर हरकीरत सिंह ने तीन पुरूषों और एक महिला को मैडिसन स्क्वेयर गार्डन से कैब में बैठाकर ब्रोंक्स पहुंचाया। इस दौरान ये लोग वाहन चालक से अभद्रता करने लगे। ये लोग आरोप लगाने लगे कि इस वाहन चालक ने इन लोगों को गलत पते पर पहुंचा दिया है। एक व्यक्ति ने सिख युवक से अभद्रता करते हुए इसके वाहन का मीटर तोड़ने का प्रयास किया और फिर आरोपियों में शामिल अन्य लोग इसके साथ मारपीट करने लगे। इन लोगों ने वाहन चालक की पगड़ी पकड़कर खींच दी। सिख युवक कुछ घबरा गया और उसने इन लोगों से ऐसा न करने के लिए कहा। सिख युवक हरकीरत ने संबंधित अथाॅरिटी द्वारा की गई पूछताछ के दौरान बताया कि ये लोग इसे मारने का प्रयास कर रहे थे। जब ये अभद्रता कर रहे थे तो मैंने इन लोगों से 41. 76 डाॅलर का किराया मांगा और दूसरी कैब हायर करने के लिए कहा। इसके बाद व्यक्ति ने वाहन के मीटर को तोड़ने का प्रयास किया। ये लोग मुझसे बदतमीजी करने लगे। हमे के बाद से ही 25 वर्षीय सिख युवक घबराया हुआ है। इसने कहा है कि मैं यहां पर कार्य नहीं करना चाहता। यहां पर मेरे धर्म का अपमान किया जा रहा है। इस मामले में न्यूयाॅर्क पुलिस ने जांच प्रारंभ कर दी है। इस घटना को हैट क्राइम के अंतर्गत माना जा रहा है।
न्यूयाॅर्क। अमेरिका के न्यूयाॅर्क में एक सिख को फिर निशाना बनाया गया है। दरअसल यह सिख एक ड्राईवर है। इसकी पहचान हरकीरत सिंह के तौर पर हुई है। दरअसल सिख वाहन चालक से पैसेंजर द्वारा बदसलूकी किए जाने का मामला सामने आया है। यह जानकारी सामने आई है कि यात्री नशे में थे और ऐसे में इन लोगों ने सिख ड्राईवर की पगड़ी खींची और इसके साथ अभद्रता की। मिली जानकारी के अनुसार जब सिख ड्राइवर हरकीरत सिंह ने तीन पुरूषों और एक महिला को मैडिसन स्क्वेयर गार्डन से कैब में बैठाकर ब्रोंक्स पहुंचाया। इस दौरान ये लोग वाहन चालक से अभद्रता करने लगे। ये लोग आरोप लगाने लगे कि इस वाहन चालक ने इन लोगों को गलत पते पर पहुंचा दिया है। एक व्यक्ति ने सिख युवक से अभद्रता करते हुए इसके वाहन का मीटर तोड़ने का प्रयास किया और फिर आरोपियों में शामिल अन्य लोग इसके साथ मारपीट करने लगे। इन लोगों ने वाहन चालक की पगड़ी पकड़कर खींच दी। सिख युवक कुछ घबरा गया और उसने इन लोगों से ऐसा न करने के लिए कहा। सिख युवक हरकीरत ने संबंधित अथाॅरिटी द्वारा की गई पूछताछ के दौरान बताया कि ये लोग इसे मारने का प्रयास कर रहे थे। जब ये अभद्रता कर रहे थे तो मैंने इन लोगों से इकतालीस. छिहत्तर डाॅलर का किराया मांगा और दूसरी कैब हायर करने के लिए कहा। इसके बाद व्यक्ति ने वाहन के मीटर को तोड़ने का प्रयास किया। ये लोग मुझसे बदतमीजी करने लगे। हमे के बाद से ही पच्चीस वर्षीय सिख युवक घबराया हुआ है। इसने कहा है कि मैं यहां पर कार्य नहीं करना चाहता। यहां पर मेरे धर्म का अपमान किया जा रहा है। इस मामले में न्यूयाॅर्क पुलिस ने जांच प्रारंभ कर दी है। इस घटना को हैट क्राइम के अंतर्गत माना जा रहा है।
● पारसमति • सुखा फस पड़ा देखा । मेरी हुई कि मैं इसे से लूँ, किन्तु मेरे मम यही संकल्पहुआ कि में इस दिन मूला रहा और भग मुझे यह सूखा फल मिला है, सो क्या यही मेरा प्रारम्भ या १ ब सम मैं उसे त्यागकर उसी मनपर आ बैठा। थोड़ी ही दर में यहाँ एक आदमी आमा और उसने बादाम मिश्री और पिरयों से भरा भगोवा मेरे सामने रख दिया और बोला कि मैं बहमें भा रहा था। रास्ते में बड़ा तूफान भामा। तब मैंने मगवान्का प्रसाद पोछा और निश्चय किया कि यो अतिथि मुझे सबसे पहले मिलेगा उसी को यह सामग्री दूंगा । सो यह वही प्रसाद है । सब मैंने उसमें से अपने आहारमात्र के लिये मे लिया और शेष खौटा दिया। फिर मैं विचारने लगा कि प्रमुने घेरे मारम्भ में ठो यह मेगा किसी भी। इसीसे समुद्र के बीच में तूफानको मेरी यह जीविका पहुँचाने की भाषा हुई और उसकी मेरणासे यह मनुष्य इसे यहाँ से आया। तू जो अम्पान्य वस्तुओंको ईडता जा बह देरी भूख ही भी। इस प्रकार ऐसी बातों पर ध्यान देनेसे विश्वासक पुति । ( गृहस्थ पुरुपका मगषदाभय ) गृहस्म पुरुषके लिये पश् चित नहीं है कि वह बनमें जम और व्यवहारका त्याग करें, क्योंकि गृहस्यके लिये भगवदाभव की तीसरी भूमिका है सो उसमें व्यवहार करने के लिये अवकाश है ही। एक सवे पुरुष का कमन है कि भगवामम के लिये दो बातोंकी आवश्यकता दे हुधा सहम करने का अभ्यास हो और जो कुछ मिल वाय-भक्षेदी बह भास हो- उसी से प्रसन्न रह । २. पेमा विश्वास रस्से कि परि मेरा प्रारम्भ भूखे रहने पा मरने का है तो हममें मेरा मा है। जिस व्यक्ति में ये दोनों गुम हो बड़ी पूर्ण भगवादामय का अधिकारी है। किन्तु मनुष्य अपने सम्बन्धियों को इस प्रकार नहीं रख सकता और यदि विचार कर देखा खाय तो इसका मन भी बच्चों के समान हड़वारहित दी है। अव जब देखे कि मुझ में भूख सहन करने की शक्ति नहीं है और इससे मेरे चिदमें म्या कुलता भा जाती है तो ऐसी स्थिति में व्यवहार को छोड़ना सचित नहीं है। यदि किसी गृहस्प पुरुष के सम्बन्धी मूख सहन कर भी सबसे तो भी ससे व्यवहार नहीं छोड़ना चाहिये । किन्तु यदि किसी को पूर्ण विश्वास हो और वह वैराग्य में लगा रहे व्यवहार न करे तो भी उसका मारम्भयनित भोग उसे प्राप्त हो ही जाता है। बालक मावाके उदमें किसी भी प्रकार काम्पसाय नहीं करता, वो भी मामि के द्वारा उसे आहार पहुँचता ही रहता है। और अब उदरसे बाहर निकलता है तो से माठा के स्तनों से दुग्भ प्राप्त हो जाता है। फिर जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है जैसे जैसे ही अन्य भाहार भी जाने लगता है और उसके पाँव भी निकल भाषे हैं। यदि माता-पिता की मृत्यु हो बाने से वह बालक अकेला रह जाता है वो भगषाम् दूसरे लोगों के हृदय में दमा उत्पन्न कर देते हैं। पहले तो मावा ही उस पर दया करती थी, तुम तो भनेको मनुष्य उस पर दया करने बगते हैं। जब वह बड़ा हो जाता है और अपना कार्य एर्य दी करने की इसमें योग्यता माजाती है तो भगवान् ऐसी अद्धा उसके इसमें पन्नकट है, जिससे वह स्वयं अपना पालन-पोपय्य करने लगता है। पहले पैसे माता उसकी खबर क्षेती पी जैसे ही अब स्वयं ही अपनी देखभाल करता है। और जब उसका वि अपने पावन पोषण की ओर से निरपेक्ष हो जाता है तो बह व्यवहार को छोड़ देता है और उसका हृदय श्रीभगवान्की मोर मनुष्य होने लगता है। वष भगवान् उसके प्रति जी के म में क्या पत्पन्न कर देते है फिर सब लोग यही समझते हैं कि यह भगवत्याप्त है, मत इसी को पीसे अस्तु बेनी चाहिये और हमें समासम्मण इसकी सेवा करनी चाहिये इस प्रकार पहले तो यह अकेला ही अपने ऊपर कृपा करता था, किन्तु अब सभी जीव इस पर कृपा करने लगते हैं। पर यदि यह प्रमाण करता है और समर्थ होनेपर मी व्यवहार नहीं करता तो इस पर किसी को दया नहीं आती, ऐसे मनुष्य को व्यवहार स्यागकर भगववामित नहीं होना चाहिये। अब तक मनुष्य अपने मनके साथ मिला हुआ है वन तक इसे अपनी जीविका की व्यवस्था मी स्वयं ही करनी चाहिये । अत अब यह जीव अपना हृदम सीमगवान् की ओर लगा देता है और अपना पालन-पोषण करने से उदासीन हो जाता है तब मी भगवाम् समी मीयों को इसके प्रति दयालु कर देते है। इसीसे भाग तक कोई भी विरक्त मूखा रहकर नहीं मरा । सो, जिसने यह बात विचार कर देसी है कि भगवान् ने इस बोक और परस्तोक में किस प्रकार सूत्र मिस्रा रखे हैं और वे किस प्रकार सबकी पूर्ति करते है उनका निश्चय ही प्रभु के इस वाक्य पर हद विश्वासको बाटापाखन-पोषण कर वाला मैं ही हूँ। बद यह बात स्पष्ट समझ क्षेता है कि प्रभुका ऐसा सुन्दर विधान है जिसमें किसी का भी नाश नहीं होता और यदि किसी को कोई हानि पा चवि पहुँचती भी है तो उसी में समधामक्ष छिपा रहता है, सो भी इसलिये नहीं कि बह बहार को त्याग देता है। क्योंकि कितने ही मनुष्यों के पास बहुत मन भी रहता है और वे व्यवहार भी करते है किन्तु फिर म धन रहता है और म मे ही बनते हैं। एक सन्स का है कि मुझे स्पष्ट अनुमन होती है कि यदि सारा मगर मेरा कुटुम्ब दो बाम और समाज का एक दामा एक सुहर में मिलने लगे तो मी मुझे किसी प्रकार का भय नहीं है। क्योंकि सबका पालन करनवाले सो श्रीमगवान् ही है। एक अम्य भगववाभिवने कहा है कि यदि आकाश कोईका और पृथ्वी सोने की हो जाय तो भी मुझे जीविका का कोई भय नहीं है। प्रभु जिस प्रकार चाहेंगे उस प्रकार जीविका पहुॅचायेंगे दी। इसी प्रकार एक अन्य प्रसंग मी है। एक छानी सन्त के पास कुछ लोग भाये और पूछने लगे कि इस अपनी बीमिका दे या न दूड़े । वे बोले, "यदि तुम्हें पता हो कि तुम्हारी जीमिका अमुक स्थान पर है वो यहाँ यूँद मो।" फिर उन्होंने पूछा, "तो क्या भगवानसे अपनी सन्य ने कहा, "यदि भगवान् भूख गये हो तो उन्हें स्मरण करा दो।" फिर पूछा, 'तो मरोसा करें और देखें कि ये किस प्रकार की व्यवस्था करते है ?"सम्म बोले, "परीक्षा की दृष्टि से भगवान का भरोसा करना उचित नहीं।"तबन्होंने पूछा, तो फिर क्या उपाय है ?" सम्सन उत्तर दिया, "उपायका स्याग करमा ही सध्या उपाय है।" तात्पर्य यह है कि एकमात्र श्रीभगवान् को ही सपा प्रतिपालक जानना चाहिये । (भगवदाय की दूसरी भूमिका संग्रह और संरचय फरना) जो मनुष्य एक वर्षसे अधिक समय लिये धनसमह करता है वह भगवामय से गिर जाता है। क्योंकि उसने प्रभु के गु रहस्यको नहीं समझ इसलिये इसकी स्थूलतापर ही दृष्ठि गयी। को प्रयोममात्रपर सन्तोष करे अर्थात् केवल पदपूर्तिके विमे भाहार करे और मम्नवानिबारण के लिये वस्त्र धारण करे उसे भगवामयपर समझना चाहिये। और यदि कोई चालीस दिनक लिये संमह करे वो इतनेसे मी भाभयता नष्ट नहीं होती। एक सवने कहा है कि साम करना मगरदाभयके मिथ्यात्वका सूचक है। तथा एक अन्य संसका कथन है कि बीस दिन से अधिक समयके लिये सम्राय करे तो भी भगवामय नष्ट नहीं पारसमस ● होता। किन्तु उसे उस समयका ही भरोसा नहीं होना चाहिये । एक अन्य भगवप्रेमीका कथन है कि में एक उत्तम विरक्त पुरुपके पास था। वहाँ एक सम्बनके दर्शनों के लिये आये तब बिरकने मुझसे कहा कि तुम इनके लिये उत्तम भोजन से मामो में मोन खाया और वे दोनों महारमा साथ-साथ भोजन करनेके लिय बैठे। मुझे यह देखकर कुछ विस्मय हुआ, क्योंकि उन्होंने पहले कभी किसी से भोजन माने के लिये नहीं कहा था और न वे किसी के साथ भोजन पावे ही थे। भोजन के पश्चात् जो प्रसाद बचा वह सब पन नवागत संतने से लिया और वहाँ से चले गये। इससे मुझे और भी आश्चर्य हुआ कि इस प्रकार बिना पूर्व ही भोम्म सामग्री से थामा कहाँ तक उचित है। तब म विरक्त महात्मामे कहा, "ये बड़े उत्तम संत है और तुमसे मिलने लिये बहुत दूरसे आये थे। इन्होंने हमें यही शिक्षा की है कि जिसमें भगषदामया भाष हद है उसक लिमे संचय करनेमें भी कोई हामि नहीं है।" सात्पर्य यह कि भगवदा भयका मूल तो नैरारप है। अपने किये कमी संचय म करे और t et तो ऐसा समझे कि ये धन और पदार्थ भीमगबास्के ही मण्डार में है। इस संचयपर कमी मरोसा न रखे। इससे उसका मगबदाभय नष्ट नहीं होवा । किन्तु यह नियम तो उसके लिये है दो अक्षा हो । को ह है उसका मगबदामम तो एक वर्षके लिये समा रजनेसे भी मही जाता। हाँ पछि एक बबसे अधिक के लिये संचय करे वो अवश्य मप्र हो जाता है। महापुरुप भी अपने कुटुम्बियोंके लिये एक बबकी सामग्री सति कर देते थे किन्तु अपने लिये दूसरी बेक्षा लिय भी कुछ नहीं रखते थे। वे यदि रख मी क्षेठे तो भी इनका कुछ पता नहीं क्योंकि उनके लिये भम-सम्पत्तिका होन्य म होना समान ही था। किन्तु और डोगोंके लिये आदर्श उपस्थित
● पारसमति • सुखा फस पड़ा देखा । मेरी हुई कि मैं इसे से लूँ, किन्तु मेरे मम यही संकल्पहुआ कि में इस दिन मूला रहा और भग मुझे यह सूखा फल मिला है, सो क्या यही मेरा प्रारम्भ या एक ब सम मैं उसे त्यागकर उसी मनपर आ बैठा। थोड़ी ही दर में यहाँ एक आदमी आमा और उसने बादाम मिश्री और पिरयों से भरा भगोवा मेरे सामने रख दिया और बोला कि मैं बहमें भा रहा था। रास्ते में बड़ा तूफान भामा। तब मैंने मगवान्का प्रसाद पोछा और निश्चय किया कि यो अतिथि मुझे सबसे पहले मिलेगा उसी को यह सामग्री दूंगा । सो यह वही प्रसाद है । सब मैंने उसमें से अपने आहारमात्र के लिये मे लिया और शेष खौटा दिया। फिर मैं विचारने लगा कि प्रमुने घेरे मारम्भ में ठो यह मेगा किसी भी। इसीसे समुद्र के बीच में तूफानको मेरी यह जीविका पहुँचाने की भाषा हुई और उसकी मेरणासे यह मनुष्य इसे यहाँ से आया। तू जो अम्पान्य वस्तुओंको ईडता जा बह देरी भूख ही भी। इस प्रकार ऐसी बातों पर ध्यान देनेसे विश्वासक पुति । गृहस्म पुरुषके लिये पश् चित नहीं है कि वह बनमें जम और व्यवहारका त्याग करें, क्योंकि गृहस्यके लिये भगवदाभव की तीसरी भूमिका है सो उसमें व्यवहार करने के लिये अवकाश है ही। एक सवे पुरुष का कमन है कि भगवामम के लिये दो बातोंकी आवश्यकता दे हुधा सहम करने का अभ्यास हो और जो कुछ मिल वाय-भक्षेदी बह भास हो- उसी से प्रसन्न रह । दो. पेमा विश्वास रस्से कि परि मेरा प्रारम्भ भूखे रहने पा मरने का है तो हममें मेरा मा है। जिस व्यक्ति में ये दोनों गुम हो बड़ी पूर्ण भगवादामय का अधिकारी है। किन्तु मनुष्य अपने सम्बन्धियों को इस प्रकार नहीं रख सकता और यदि विचार कर देखा खाय तो इसका मन भी बच्चों के समान हड़वारहित दी है। अव जब देखे कि मुझ में भूख सहन करने की शक्ति नहीं है और इससे मेरे चिदमें म्या कुलता भा जाती है तो ऐसी स्थिति में व्यवहार को छोड़ना सचित नहीं है। यदि किसी गृहस्प पुरुष के सम्बन्धी मूख सहन कर भी सबसे तो भी ससे व्यवहार नहीं छोड़ना चाहिये । किन्तु यदि किसी को पूर्ण विश्वास हो और वह वैराग्य में लगा रहे व्यवहार न करे तो भी उसका मारम्भयनित भोग उसे प्राप्त हो ही जाता है। बालक मावाके उदमें किसी भी प्रकार काम्पसाय नहीं करता, वो भी मामि के द्वारा उसे आहार पहुँचता ही रहता है। और अब उदरसे बाहर निकलता है तो से माठा के स्तनों से दुग्भ प्राप्त हो जाता है। फिर जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है जैसे जैसे ही अन्य भाहार भी जाने लगता है और उसके पाँव भी निकल भाषे हैं। यदि माता-पिता की मृत्यु हो बाने से वह बालक अकेला रह जाता है वो भगषाम् दूसरे लोगों के हृदय में दमा उत्पन्न कर देते हैं। पहले तो मावा ही उस पर दया करती थी, तुम तो भनेको मनुष्य उस पर दया करने बगते हैं। जब वह बड़ा हो जाता है और अपना कार्य एर्य दी करने की इसमें योग्यता माजाती है तो भगवान् ऐसी अद्धा उसके इसमें पन्नकट है, जिससे वह स्वयं अपना पालन-पोपय्य करने लगता है। पहले पैसे माता उसकी खबर क्षेती पी जैसे ही अब स्वयं ही अपनी देखभाल करता है। और जब उसका वि अपने पावन पोषण की ओर से निरपेक्ष हो जाता है तो बह व्यवहार को छोड़ देता है और उसका हृदय श्रीभगवान्की मोर मनुष्य होने लगता है। वष भगवान् उसके प्रति जी के म में क्या पत्पन्न कर देते है फिर सब लोग यही समझते हैं कि यह भगवत्याप्त है, मत इसी को पीसे अस्तु बेनी चाहिये और हमें समासम्मण इसकी सेवा करनी चाहिये इस प्रकार पहले तो यह अकेला ही अपने ऊपर कृपा करता था, किन्तु अब सभी जीव इस पर कृपा करने लगते हैं। पर यदि यह प्रमाण करता है और समर्थ होनेपर मी व्यवहार नहीं करता तो इस पर किसी को दया नहीं आती, ऐसे मनुष्य को व्यवहार स्यागकर भगववामित नहीं होना चाहिये। अब तक मनुष्य अपने मनके साथ मिला हुआ है वन तक इसे अपनी जीविका की व्यवस्था मी स्वयं ही करनी चाहिये । अत अब यह जीव अपना हृदम सीमगवान् की ओर लगा देता है और अपना पालन-पोषण करने से उदासीन हो जाता है तब मी भगवाम् समी मीयों को इसके प्रति दयालु कर देते है। इसीसे भाग तक कोई भी विरक्त मूखा रहकर नहीं मरा । सो, जिसने यह बात विचार कर देसी है कि भगवान् ने इस बोक और परस्तोक में किस प्रकार सूत्र मिस्रा रखे हैं और वे किस प्रकार सबकी पूर्ति करते है उनका निश्चय ही प्रभु के इस वाक्य पर हद विश्वासको बाटापाखन-पोषण कर वाला मैं ही हूँ। बद यह बात स्पष्ट समझ क्षेता है कि प्रभुका ऐसा सुन्दर विधान है जिसमें किसी का भी नाश नहीं होता और यदि किसी को कोई हानि पा चवि पहुँचती भी है तो उसी में समधामक्ष छिपा रहता है, सो भी इसलिये नहीं कि बह बहार को त्याग देता है। क्योंकि कितने ही मनुष्यों के पास बहुत मन भी रहता है और वे व्यवहार भी करते है किन्तु फिर म धन रहता है और म मे ही बनते हैं। एक सन्स का है कि मुझे स्पष्ट अनुमन होती है कि यदि सारा मगर मेरा कुटुम्ब दो बाम और समाज का एक दामा एक सुहर में मिलने लगे तो मी मुझे किसी प्रकार का भय नहीं है। क्योंकि सबका पालन करनवाले सो श्रीमगवान् ही है। एक अम्य भगववाभिवने कहा है कि यदि आकाश कोईका और पृथ्वी सोने की हो जाय तो भी मुझे जीविका का कोई भय नहीं है। प्रभु जिस प्रकार चाहेंगे उस प्रकार जीविका पहुॅचायेंगे दी। इसी प्रकार एक अन्य प्रसंग मी है। एक छानी सन्त के पास कुछ लोग भाये और पूछने लगे कि इस अपनी बीमिका दे या न दूड़े । वे बोले, "यदि तुम्हें पता हो कि तुम्हारी जीमिका अमुक स्थान पर है वो यहाँ यूँद मो।" फिर उन्होंने पूछा, "तो क्या भगवानसे अपनी सन्य ने कहा, "यदि भगवान् भूख गये हो तो उन्हें स्मरण करा दो।" फिर पूछा, 'तो मरोसा करें और देखें कि ये किस प्रकार की व्यवस्था करते है ?"सम्म बोले, "परीक्षा की दृष्टि से भगवान का भरोसा करना उचित नहीं।"तबन्होंने पूछा, तो फिर क्या उपाय है ?" सम्सन उत्तर दिया, "उपायका स्याग करमा ही सध्या उपाय है।" तात्पर्य यह है कि एकमात्र श्रीभगवान् को ही सपा प्रतिपालक जानना चाहिये । जो मनुष्य एक वर्षसे अधिक समय लिये धनसमह करता है वह भगवामय से गिर जाता है। क्योंकि उसने प्रभु के गु रहस्यको नहीं समझ इसलिये इसकी स्थूलतापर ही दृष्ठि गयी। को प्रयोममात्रपर सन्तोष करे अर्थात् केवल पदपूर्तिके विमे भाहार करे और मम्नवानिबारण के लिये वस्त्र धारण करे उसे भगवामयपर समझना चाहिये। और यदि कोई चालीस दिनक लिये संमह करे वो इतनेसे मी भाभयता नष्ट नहीं होती। एक सवने कहा है कि साम करना मगरदाभयके मिथ्यात्वका सूचक है। तथा एक अन्य संसका कथन है कि बीस दिन से अधिक समयके लिये सम्राय करे तो भी भगवामय नष्ट नहीं पारसमस ● होता। किन्तु उसे उस समयका ही भरोसा नहीं होना चाहिये । एक अन्य भगवप्रेमीका कथन है कि में एक उत्तम विरक्त पुरुपके पास था। वहाँ एक सम्बनके दर्शनों के लिये आये तब बिरकने मुझसे कहा कि तुम इनके लिये उत्तम भोजन से मामो में मोन खाया और वे दोनों महारमा साथ-साथ भोजन करनेके लिय बैठे। मुझे यह देखकर कुछ विस्मय हुआ, क्योंकि उन्होंने पहले कभी किसी से भोजन माने के लिये नहीं कहा था और न वे किसी के साथ भोजन पावे ही थे। भोजन के पश्चात् जो प्रसाद बचा वह सब पन नवागत संतने से लिया और वहाँ से चले गये। इससे मुझे और भी आश्चर्य हुआ कि इस प्रकार बिना पूर्व ही भोम्म सामग्री से थामा कहाँ तक उचित है। तब म विरक्त महात्मामे कहा, "ये बड़े उत्तम संत है और तुमसे मिलने लिये बहुत दूरसे आये थे। इन्होंने हमें यही शिक्षा की है कि जिसमें भगषदामया भाष हद है उसक लिमे संचय करनेमें भी कोई हामि नहीं है।" सात्पर्य यह कि भगवदा भयका मूल तो नैरारप है। अपने किये कमी संचय म करे और t et तो ऐसा समझे कि ये धन और पदार्थ भीमगबास्के ही मण्डार में है। इस संचयपर कमी मरोसा न रखे। इससे उसका मगबदाभय नष्ट नहीं होवा । किन्तु यह नियम तो उसके लिये है दो अक्षा हो । को ह है उसका मगबदामम तो एक वर्षके लिये समा रजनेसे भी मही जाता। हाँ पछि एक बबसे अधिक के लिये संचय करे वो अवश्य मप्र हो जाता है। महापुरुप भी अपने कुटुम्बियोंके लिये एक बबकी सामग्री सति कर देते थे किन्तु अपने लिये दूसरी बेक्षा लिय भी कुछ नहीं रखते थे। वे यदि रख मी क्षेठे तो भी इनका कुछ पता नहीं क्योंकि उनके लिये भम-सम्पत्तिका होन्य म होना समान ही था। किन्तु और डोगोंके लिये आदर्श उपस्थित
हास्यास्पद अंगरेज़ी भाषा / 77 बिन्दु था जहाँ विश्व के विभिन्न भागों से वैदिक देवी-देवताओं को भक्त श्रद्धालु यात्रियों द्वारा पालकियों में विराजमान कर, बारी-बारी से भार वहन कर, लाया जाता था । इसका केन्द्रीय पूजालय आजकल 'काबा' के नाम से प्रसिद्ध है जो संस्कृत शब्द 'गाभा' से व्युत्पन्न है जिसका अर्थ पवित्र 'गर्भ-गृह' है । वहाँ बचा हुआ श्रद्धा का एकमेव केन्द्रीय पदार्थ बेलनाकार शिवलिंग है जिसे स्थानीय रूप से 'संगे- अस्वद' अर्थात् काला (अश्वेत) पत्थर (प्रस्तर) कहते 'शेख' शब्द संस्कृत के शिष्य (दीक्षापाल, अनुयायी) उर्फ सिख का ही भिन्न रूप है । 'मौलाना' संस्कृत यौगिक मौला (अर्थात् प्रदान या सर्वोच्च) तथा नः (अर्थात् हम) है। इस प्रकार मौलाना शब्द एक आध्यात्मिक नेता का द्योतक है। 'कव्वाली' संस्कृत का 'काव्यवाली' शब्द अर्थात् पद्य की पंक्तियाँ हैं। 'निक्का' (निकाह)- शादी के लिए इस्लामी शब्द संस्कृत शब्द 'निकट' से - अर्थात् एक पुरुष और एक महिला को वर और वधू के रूप में निकट लाना । जुडेइज़्म (यहूदी धर्म, यहूदीवाद) 'जुडेइज़्म' येदुइज़्म का अशुद्ध, विकृत उच्चारण है क्योंकि कुछ भू-क्षेत्रों में 'वाई' (य) और 'जे' (ज) एक-दूसरे के स्थान पर प्रयोग में आते हैं । 'येदु' (यदु) लोग भगवान् कृष्ण के वंश, कुल के लोग थे । उनको अपनी मूल द्वारका राज-नगरी छोड़नी पड़ी थी और अन्य (सुरक्षित) निवास स्थान की खोज में पश्चिम की ओर जाना पड़ा था । उनका नवीनतम प्राप्त साम्राज्य 'इस्रायल' दो खण्डित संस्कृत शब्दों का मिश्रण, यौगिक शब्द है । 'इस्र' संस्कृत शब्द 'ईश्वर' है जो भगवान् का अर्थद्योतक है। 'आयल' संस्कृत 'आलय' का संक्षिप्त रूप है, जिसका अर्थ 'घर', 'निवास' होता है। इस प्रकार 'इस्रायल' शब्द एक देव-निवास स्थान का द्योतक है। यहूदी लोग स्वयं को 'ईश्वर के लाड़ले' प्राणी मानते हैं, क्योंकि वे भगवान् कृष्ण के यदु-कुल से संबंध रखते हैं। of CVISION PD
हास्यास्पद अंगरेज़ी भाषा / सतहत्तर बिन्दु था जहाँ विश्व के विभिन्न भागों से वैदिक देवी-देवताओं को भक्त श्रद्धालु यात्रियों द्वारा पालकियों में विराजमान कर, बारी-बारी से भार वहन कर, लाया जाता था । इसका केन्द्रीय पूजालय आजकल 'काबा' के नाम से प्रसिद्ध है जो संस्कृत शब्द 'गाभा' से व्युत्पन्न है जिसका अर्थ पवित्र 'गर्भ-गृह' है । वहाँ बचा हुआ श्रद्धा का एकमेव केन्द्रीय पदार्थ बेलनाकार शिवलिंग है जिसे स्थानीय रूप से 'संगे- अस्वद' अर्थात् काला पत्थर कहते 'शेख' शब्द संस्कृत के शिष्य उर्फ सिख का ही भिन्न रूप है । 'मौलाना' संस्कृत यौगिक मौला तथा नः है। इस प्रकार मौलाना शब्द एक आध्यात्मिक नेता का द्योतक है। 'कव्वाली' संस्कृत का 'काव्यवाली' शब्द अर्थात् पद्य की पंक्तियाँ हैं। 'निक्का' - शादी के लिए इस्लामी शब्द संस्कृत शब्द 'निकट' से - अर्थात् एक पुरुष और एक महिला को वर और वधू के रूप में निकट लाना । जुडेइज़्म 'जुडेइज़्म' येदुइज़्म का अशुद्ध, विकृत उच्चारण है क्योंकि कुछ भू-क्षेत्रों में 'वाई' और 'जे' एक-दूसरे के स्थान पर प्रयोग में आते हैं । 'येदु' लोग भगवान् कृष्ण के वंश, कुल के लोग थे । उनको अपनी मूल द्वारका राज-नगरी छोड़नी पड़ी थी और अन्य निवास स्थान की खोज में पश्चिम की ओर जाना पड़ा था । उनका नवीनतम प्राप्त साम्राज्य 'इस्रायल' दो खण्डित संस्कृत शब्दों का मिश्रण, यौगिक शब्द है । 'इस्र' संस्कृत शब्द 'ईश्वर' है जो भगवान् का अर्थद्योतक है। 'आयल' संस्कृत 'आलय' का संक्षिप्त रूप है, जिसका अर्थ 'घर', 'निवास' होता है। इस प्रकार 'इस्रायल' शब्द एक देव-निवास स्थान का द्योतक है। यहूदी लोग स्वयं को 'ईश्वर के लाड़ले' प्राणी मानते हैं, क्योंकि वे भगवान् कृष्ण के यदु-कुल से संबंध रखते हैं। of CVISION PD
कोरोना की दूसरी लहर में अजमेर की चिकित्सा व्यवस्था गड़बड़ा गई है। अजमेर सम्भाग के सबसे बडे़ जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय में सभी बेड फुल हो गए है। ऐसे में प्रशासन ने शुक्रवार शाम करीब 4 बजे एक गेट को छोड़कर पुलिस की मदद से गेट बंद कर दिए। बताया जाता है कि अब मरीजों के क्रिटीकल होने पर ही JLN अस्पताल में एन्ट्री मिलेगी। इससे पहले मरीज हाल ही में कोविड के लिए बनाए गए सेटेलाइट व पंचशील हॉस्पिटल में अपना उपचार कराएंगे। वहां से रैफर होकर आने वालों को ही यहां भर्ती आदि की सुविधाएं मिलेगी। हालांकि अस्पताल के गेट बंद करने को लेकर जिला कलक्टर प्रकाश राज पुरोहित ने कहा कि जेएलएन के डॉक्टर्स की कुछ दिनों से मांग रही कि मरीज ज्यादा आ रहे है और एडमिशन व डिस्चार्ज का प्रोटोकोल फोलो हो, एन्ट्री नियमित हो और कोई अनहोनी घटना नहीं हो, इसके लिए यह व्यवस्था की गई है। पुलिस ने सहयोग किया। अनावश्यक पैनिक होने की जरूरत नहीं। लोग अनावश्यक पैनिक होकर हॉस्पिटल पहुंच रहे है, यह भी कारण है कि कोई अनहोनी घटना नहीं हो। इसकी भी काउंसलिंग की जा रही है कि हर व्यक्ति को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं है। सभी प्राइवेट हॉस्पिटल को भी ऑिडट करने को कहा है कि नई गाइड लाइन के अनुरूप ही एडमिट व डिस्चार्ज करने के निर्देश दिए है, ताकि जरूरतमंदों को सुविधा मिल सके। जो घर पर ठीक हो सकते है, उनको बेड की जरूरत नहीं। कोरोना मरीजों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए पहले से ही तैयारी कर ली गई थी। अजमेर शहर के दोनो कोनों पर स्थित सैटेलाईट अस्पताल व पंचशील सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को बुधवार से डेडीकेटेड कोविड हॉस्पीटल के रूप में शुरू कर दिया। इन दोनों अस्पतालों में आउटडोर, इन्डोर तथा टेस्टिंग की सुविधा शुरू की गई। जेएलएन अस्पताल को विशुद्ध रूप से क्रिटिकल केयर हॉस्पीटल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी। इसकी पालना में ही आज से गेट बंद कर दिए गए। राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. अनिल जैन ने बताया था कि वर्तमान में कोविड के 80 प्रतिशत मरीज या तो बिना लक्षण हैं या माईल्ड सिम्प्टोमेटिक है, जिन्हें होम क्वेरेंटाईन किया जा रहा है तथा वे सभी ठीक हो रहे हैं। इन सभी 80 प्रतिशत मरीजों को सामान्यतया ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ रही है। इसी तरह 17 प्रतिशत मरीज मोडरेट बीमारी के होते हैं, जिनका लो फ्लो ऑक्सीजन पर घर पर या सामान्य चिकित्सालय में इलाज किया जा सकता है। शेष 3 प्रतिशत मरीजों को गंभीर किस्म के लक्षण होते हैं तथा कॉम्प्लीकेशन होने का डर रहता है। इन 3 प्रतिशत मरीजों का उपचार क्रिटिकल हॉस्पीटल में किया जाता है। जिसमें समस्त गंभीर रेफर्ड केसेस भी शामिल है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कोरोना की दूसरी लहर में अजमेर की चिकित्सा व्यवस्था गड़बड़ा गई है। अजमेर सम्भाग के सबसे बडे़ जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय में सभी बेड फुल हो गए है। ऐसे में प्रशासन ने शुक्रवार शाम करीब चार बजे एक गेट को छोड़कर पुलिस की मदद से गेट बंद कर दिए। बताया जाता है कि अब मरीजों के क्रिटीकल होने पर ही JLN अस्पताल में एन्ट्री मिलेगी। इससे पहले मरीज हाल ही में कोविड के लिए बनाए गए सेटेलाइट व पंचशील हॉस्पिटल में अपना उपचार कराएंगे। वहां से रैफर होकर आने वालों को ही यहां भर्ती आदि की सुविधाएं मिलेगी। हालांकि अस्पताल के गेट बंद करने को लेकर जिला कलक्टर प्रकाश राज पुरोहित ने कहा कि जेएलएन के डॉक्टर्स की कुछ दिनों से मांग रही कि मरीज ज्यादा आ रहे है और एडमिशन व डिस्चार्ज का प्रोटोकोल फोलो हो, एन्ट्री नियमित हो और कोई अनहोनी घटना नहीं हो, इसके लिए यह व्यवस्था की गई है। पुलिस ने सहयोग किया। अनावश्यक पैनिक होने की जरूरत नहीं। लोग अनावश्यक पैनिक होकर हॉस्पिटल पहुंच रहे है, यह भी कारण है कि कोई अनहोनी घटना नहीं हो। इसकी भी काउंसलिंग की जा रही है कि हर व्यक्ति को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं है। सभी प्राइवेट हॉस्पिटल को भी ऑिडट करने को कहा है कि नई गाइड लाइन के अनुरूप ही एडमिट व डिस्चार्ज करने के निर्देश दिए है, ताकि जरूरतमंदों को सुविधा मिल सके। जो घर पर ठीक हो सकते है, उनको बेड की जरूरत नहीं। कोरोना मरीजों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए पहले से ही तैयारी कर ली गई थी। अजमेर शहर के दोनो कोनों पर स्थित सैटेलाईट अस्पताल व पंचशील सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को बुधवार से डेडीकेटेड कोविड हॉस्पीटल के रूप में शुरू कर दिया। इन दोनों अस्पतालों में आउटडोर, इन्डोर तथा टेस्टिंग की सुविधा शुरू की गई। जेएलएन अस्पताल को विशुद्ध रूप से क्रिटिकल केयर हॉस्पीटल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी। इसकी पालना में ही आज से गेट बंद कर दिए गए। राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. अनिल जैन ने बताया था कि वर्तमान में कोविड के अस्सी प्रतिशत मरीज या तो बिना लक्षण हैं या माईल्ड सिम्प्टोमेटिक है, जिन्हें होम क्वेरेंटाईन किया जा रहा है तथा वे सभी ठीक हो रहे हैं। इन सभी अस्सी प्रतिशत मरीजों को सामान्यतया ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ रही है। इसी तरह सत्रह प्रतिशत मरीज मोडरेट बीमारी के होते हैं, जिनका लो फ्लो ऑक्सीजन पर घर पर या सामान्य चिकित्सालय में इलाज किया जा सकता है। शेष तीन प्रतिशत मरीजों को गंभीर किस्म के लक्षण होते हैं तथा कॉम्प्लीकेशन होने का डर रहता है। इन तीन प्रतिशत मरीजों का उपचार क्रिटिकल हॉस्पीटल में किया जाता है। जिसमें समस्त गंभीर रेफर्ड केसेस भी शामिल है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
दुनिया के हर इंसान की ख्वाहिश होती है कि अपना घर हो लेकिन सोचिए घर होते हुए भी छिन जाए तो कैसा महसूस होगा। इस वक्त विश्व में 4 करोड़ बेघर लोग ही इस दर्द को समझ सकते हैं। आपको बता दें कि विश्व में 57 प्रतिशत रिफ्यूजी यानी शरणार्थी हैं जो मुख्यता दक्षिण सूडान, अफगानिस्तान और सीरिया से आते हैं। प्रतिवर्ष 20 जून को विश्व शरणार्थी दिवस मनाया जाता है। युद्ध, उत्पीड़न या प्राकृतिक आपदा से सुरक्षित रहने के लिए हर साल लाखों लोग अपने घरों से भागने को मजबूर होते हैं। जिन लोगों को अपना देश छोड़ना पड़ता है, उन्हें शरणार्थी कहा जाता है और अंतर्राष्ट्रीय विश्व शरणार्थी दिवस का उद्देश्य इस मुद्दे के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। जिससे दुनिया भर के करोड़ों- लाखों लोग प्रभावित हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के आंकड़े बताते हैं कि हर मिनट, लगभग 25 लोगों को सुरक्षित जीवन की तलाश में सब कुछ पीछे छोड़ना पड़ता है। शरणार्थी वो लोग होते हैं जिन्हे युद्ध, उत्पीड़न या प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए अपने देश को छोड़ने के लिए मजबूर हैं। हर साल, दुनिया भर में लाखों नए जीवन की तलाश में कहीं सुरक्षित रहने के लिए दूसरे देश शरण कि तलाश में भागते हैं। इनमें से लाखों बच्चे भी हैं। यूएनआरए के अनुसार, दुनिया भर में 1 लाख 70 हजार से अधिक बच्चे बिना माता-पिता के हैं और बिना किसी गार्डियन के संरक्षण के बिना ही यात्रा कर रहे हैं। एक बार जब कई शरणार्थी कहीं सुरक्षित पहुंच जाते हैं, तो वे उस जगह के शरणार्थी बन सकते हैं या शरण लेने वाले देश में रहने के लिए विशेष अनुमति मांग सकते हैं। ऐसा करने से उन्हें शरण मिल जाती है। एक शरण लेने वाला एक व्यक्ति अपने देश से जान बचाकर दूसरे देश में प्रवेश करता है और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के अधिकार और उस देश में रहने के लिए आवेदन करता है। यूएनएचसीआर की वार्षिक ग्लोबल ट्रेंड्स रिपोर्ट 19 जून 2018 को जारी की गई जो ये बताती है कि 2017 के अंत में दुनिया भर में 6 करोड़ 85 लाख लोगों को जबरन विस्थापित किया गया था। उसी वर्ष के दौरान 1 करोड़ 62 लाख और लोग विस्थापित हुए थे। दिन के हर मिनट में 31 लोग विस्थापित होते हैं। दुनिया के 52 प्रतिशत शरणार्थी और विस्थापित बच्चे ही हैं। ज्यादातर विकासशील देश के लोग प्रभावित हैं।
दुनिया के हर इंसान की ख्वाहिश होती है कि अपना घर हो लेकिन सोचिए घर होते हुए भी छिन जाए तो कैसा महसूस होगा। इस वक्त विश्व में चार करोड़ बेघर लोग ही इस दर्द को समझ सकते हैं। आपको बता दें कि विश्व में सत्तावन प्रतिशत रिफ्यूजी यानी शरणार्थी हैं जो मुख्यता दक्षिण सूडान, अफगानिस्तान और सीरिया से आते हैं। प्रतिवर्ष बीस जून को विश्व शरणार्थी दिवस मनाया जाता है। युद्ध, उत्पीड़न या प्राकृतिक आपदा से सुरक्षित रहने के लिए हर साल लाखों लोग अपने घरों से भागने को मजबूर होते हैं। जिन लोगों को अपना देश छोड़ना पड़ता है, उन्हें शरणार्थी कहा जाता है और अंतर्राष्ट्रीय विश्व शरणार्थी दिवस का उद्देश्य इस मुद्दे के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। जिससे दुनिया भर के करोड़ों- लाखों लोग प्रभावित हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े बताते हैं कि हर मिनट, लगभग पच्चीस लोगों को सुरक्षित जीवन की तलाश में सब कुछ पीछे छोड़ना पड़ता है। शरणार्थी वो लोग होते हैं जिन्हे युद्ध, उत्पीड़न या प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए अपने देश को छोड़ने के लिए मजबूर हैं। हर साल, दुनिया भर में लाखों नए जीवन की तलाश में कहीं सुरक्षित रहने के लिए दूसरे देश शरण कि तलाश में भागते हैं। इनमें से लाखों बच्चे भी हैं। यूएनआरए के अनुसार, दुनिया भर में एक लाख सत्तर हजार से अधिक बच्चे बिना माता-पिता के हैं और बिना किसी गार्डियन के संरक्षण के बिना ही यात्रा कर रहे हैं। एक बार जब कई शरणार्थी कहीं सुरक्षित पहुंच जाते हैं, तो वे उस जगह के शरणार्थी बन सकते हैं या शरण लेने वाले देश में रहने के लिए विशेष अनुमति मांग सकते हैं। ऐसा करने से उन्हें शरण मिल जाती है। एक शरण लेने वाला एक व्यक्ति अपने देश से जान बचाकर दूसरे देश में प्रवेश करता है और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के अधिकार और उस देश में रहने के लिए आवेदन करता है। यूएनएचसीआर की वार्षिक ग्लोबल ट्रेंड्स रिपोर्ट उन्नीस जून दो हज़ार अट्ठारह को जारी की गई जो ये बताती है कि दो हज़ार सत्रह के अंत में दुनिया भर में छः करोड़ पचासी लाख लोगों को जबरन विस्थापित किया गया था। उसी वर्ष के दौरान एक करोड़ बासठ लाख और लोग विस्थापित हुए थे। दिन के हर मिनट में इकतीस लोग विस्थापित होते हैं। दुनिया के बावन प्रतिशत शरणार्थी और विस्थापित बच्चे ही हैं। ज्यादातर विकासशील देश के लोग प्रभावित हैं।
आदरणीय लघुकथा प्रेमियो, Replies are closed for this discussion. प्रस्तुति को अनुमोदन मिला, हार्दिक धन्यवाद आदरणीया राजेश कुमारी जी.. आदरणीया नयना जी आपकी सदाशयता के हम सदा से कायल रहे हैं. आदरणीय तस्दीक अहमद साहब, आपसे कॉपी-पेस्ट वाला अनुमोदन मिला. धन्यवाद. काश मोहतरमा से आ की मात्रा निकाल दिये होते. आदरणीया कान्ताजी, टिप्पणी की शुरुआत में ही आप इतना ज़ोर से हँसती हुई दिखी हैं कि मुझे लगा मैंने कोई अटपटी बात कह दी है. आदरणीया व्यंग्य की विधा हास्य के समकक्ष रखने की परिपाटी कितनी भयावह स्थिति पैदा कर सकती है ये अब 'साहित्य' को भी समझ में आने लगा है. :-)) लेकिन आगे की पंक्तियों में आपसे मिला अनुमोदन आश्वस्त कर गया कि रचना अपने उद्येश्य में सफल रही है. हँसनाय पर कत गप्प भेल ? गप्प ई नै अछि.. हँसनाय मुदा डाइवर्ट्ड कर बला नै हुऐ क चाही. आ हम सभ गोटा सँ एना कतऽ बाजै छियै ?
आदरणीय लघुकथा प्रेमियो, Replies are closed for this discussion. प्रस्तुति को अनुमोदन मिला, हार्दिक धन्यवाद आदरणीया राजेश कुमारी जी.. आदरणीया नयना जी आपकी सदाशयता के हम सदा से कायल रहे हैं. आदरणीय तस्दीक अहमद साहब, आपसे कॉपी-पेस्ट वाला अनुमोदन मिला. धन्यवाद. काश मोहतरमा से आ की मात्रा निकाल दिये होते. आदरणीया कान्ताजी, टिप्पणी की शुरुआत में ही आप इतना ज़ोर से हँसती हुई दिखी हैं कि मुझे लगा मैंने कोई अटपटी बात कह दी है. आदरणीया व्यंग्य की विधा हास्य के समकक्ष रखने की परिपाटी कितनी भयावह स्थिति पैदा कर सकती है ये अब 'साहित्य' को भी समझ में आने लगा है. :-)) लेकिन आगे की पंक्तियों में आपसे मिला अनुमोदन आश्वस्त कर गया कि रचना अपने उद्येश्य में सफल रही है. हँसनाय पर कत गप्प भेल ? गप्प ई नै अछि.. हँसनाय मुदा डाइवर्ट्ड कर बला नै हुऐ क चाही. आ हम सभ गोटा सँ एना कतऽ बाजै छियै ?
नेपाली एक्ट्रेस अदिति बुधाथोकी अपनी कातिलाना अदाओं से फैंस को दीवाना बनाती रहती हैं। ये एक्ट्रेस आए दिन चर्चा में रहती है। अदिति अपने सपनों को सच करने के लिए नेपाल को छोड़कर भारत की मायानगरी मुंबई में रह रही है और बॉलीवुड की दुनिया में अपनी किस्मत आजमां रही हैं। हर कोई इस मॉडल के किलर लुक का फैन बना हुआ हैं। बता दे कि, अदिति कई हिंदी और पंजाबी म्यूजिक वीडियो में भी नजर आ चुकी हैं। अदिति सिंगर मिलिंद गाबा के वीडियो सांग "मैं तेरी हो गई" से सुर्ख़ियों में आयी थी और फिर दर्शन रावल के नए एल्बम 'हवा बनके ' में उन्होंने सभीओ का ध्यान अपनी तरफ खींचा। नेपाली एक्ट्रेस अदिति ने कई नेपाली फिल्मों और गाने में अपने सेक्सी अंदाज से जलवे बिखेरे हैं। नेपाली एक्ट्रेस अदिति बुधाथोकी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वह आए दिन फैंस के साथ अपनी हॉट और सेक्सी फोटो वीडियो शेयर करती रहती हैं। इतना ही नहीं वह अपनी बिकनी और बोल्ड फोटो भी शेयर करती रहती हैं। नेपाली एक्ट्रेस अदिति का इंस्टाग्राम अकाउंट देखेंगे तो वह ढ़ेरों हॉट, सेक्सी और बिकनी फोटो से भरा पड़ा है। अदिति ने साल 2017 में नेपाली फिल्म से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके अलावा अदिति एमेजॉन और एक ज्वैलरी ब्रॉन्ड की मॉडलिंग कर चुकी हैं। फिल्मों के अलावा नेपाली एक्ट्रेस अदिति को उनके बेदाग फैशन सेंस के लिए भी जाना जाता है। वह मानती हैं, स्टाइल केवल कपड़ों तक ही सीमित नहीं है। यह खुद पर विश्वास करने के और कॉन्फिडेंट रहने के बारे में है है। यह मेरे स्टाइल मंत्रों में से एक है। नेपाल के धमक में जन्मीं अदिति बुधाथोकी के चाहने वालों की लंबी लिस्ट है। उनके फैंस इंस्टाग्राम पर उनकी फोटो और वीडियो का बेसब्री से इंतजार करते हैं। अदिति अपनी फिटनेस को लेकर काफी सजग रहती हैं। हफ्ते में चार दिन वो योगा और जुम्बा करती हैं तभी तो उनके स्कीन के साथ - साथ उनके सेक्सी फीगर के भी उनके फैंस दीवाने हैं। मनोरंजन की ताज़ातरीन खबरों के लिए Gossipganj के साथ जुड़ें रहें और इस खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें Twitter पर लेटेस्ट अपडेट के लिए फॉलो करें।
नेपाली एक्ट्रेस अदिति बुधाथोकी अपनी कातिलाना अदाओं से फैंस को दीवाना बनाती रहती हैं। ये एक्ट्रेस आए दिन चर्चा में रहती है। अदिति अपने सपनों को सच करने के लिए नेपाल को छोड़कर भारत की मायानगरी मुंबई में रह रही है और बॉलीवुड की दुनिया में अपनी किस्मत आजमां रही हैं। हर कोई इस मॉडल के किलर लुक का फैन बना हुआ हैं। बता दे कि, अदिति कई हिंदी और पंजाबी म्यूजिक वीडियो में भी नजर आ चुकी हैं। अदिति सिंगर मिलिंद गाबा के वीडियो सांग "मैं तेरी हो गई" से सुर्ख़ियों में आयी थी और फिर दर्शन रावल के नए एल्बम 'हवा बनके ' में उन्होंने सभीओ का ध्यान अपनी तरफ खींचा। नेपाली एक्ट्रेस अदिति ने कई नेपाली फिल्मों और गाने में अपने सेक्सी अंदाज से जलवे बिखेरे हैं। नेपाली एक्ट्रेस अदिति बुधाथोकी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। वह आए दिन फैंस के साथ अपनी हॉट और सेक्सी फोटो वीडियो शेयर करती रहती हैं। इतना ही नहीं वह अपनी बिकनी और बोल्ड फोटो भी शेयर करती रहती हैं। नेपाली एक्ट्रेस अदिति का इंस्टाग्राम अकाउंट देखेंगे तो वह ढ़ेरों हॉट, सेक्सी और बिकनी फोटो से भरा पड़ा है। अदिति ने साल दो हज़ार सत्रह में नेपाली फिल्म से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके अलावा अदिति एमेजॉन और एक ज्वैलरी ब्रॉन्ड की मॉडलिंग कर चुकी हैं। फिल्मों के अलावा नेपाली एक्ट्रेस अदिति को उनके बेदाग फैशन सेंस के लिए भी जाना जाता है। वह मानती हैं, स्टाइल केवल कपड़ों तक ही सीमित नहीं है। यह खुद पर विश्वास करने के और कॉन्फिडेंट रहने के बारे में है है। यह मेरे स्टाइल मंत्रों में से एक है। नेपाल के धमक में जन्मीं अदिति बुधाथोकी के चाहने वालों की लंबी लिस्ट है। उनके फैंस इंस्टाग्राम पर उनकी फोटो और वीडियो का बेसब्री से इंतजार करते हैं। अदिति अपनी फिटनेस को लेकर काफी सजग रहती हैं। हफ्ते में चार दिन वो योगा और जुम्बा करती हैं तभी तो उनके स्कीन के साथ - साथ उनके सेक्सी फीगर के भी उनके फैंस दीवाने हैं। मनोरंजन की ताज़ातरीन खबरों के लिए Gossipganj के साथ जुड़ें रहें और इस खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और हमें Twitter पर लेटेस्ट अपडेट के लिए फॉलो करें।
छायावाद-विषयक आलोचना-साहित्य छायावादी काव्य-धारा के प्रवहमान होते ही, संयोग की ही संयोग की ही बात समझिये, उसकी आलोचना का भी कार्य प्रारंभ हो गया। आरंभ में, उस प्रकार की कविताओं का, जिसे व्यंग्य मे 'छायावाद' का नाम दिया गया था, घोर विरोध हुआ और कोई भी दुर्बल व अशक्त काव्य प्रवृत्ति, सहज, समाप्त हो जा सकती थी। किंतु अनेक विरोधों के बावजूद, छायावाद - काव्य जिन्दा रह सका और यही उसके महत्त्व का प्रमाण है । छायावाद के विरुद्ध आरोपित आक्षेपों के उत्तर स्वयं उसके कवियों ने दिये और बाद में उसकी सम्यक आलोचना का भी अवसर आया । छायावाद-काव्य का अध्ययन व विवेचन किया गया और आज तो उस पर अनेक अच्छी समीक्षाएँ उपलब्ध हैं । छायावाद विषयक आलोचना - साहित्य को समझने के लिए उसके इतिहास को हम तीन स्पष्ट भागों में विभक्त कर सकते है । सबसे पहले उसके इतिहास का वह युग हमारे समक्ष आता है जिसे "विरोध-काल" कहना चाहिये । इस समय में छायावाद को समझने और समझाने की कोशिश नहीं की गई; उसका बिल्कुल विरोध किया गया । छायावाद के उपहास और निन्दा की भदी आलोचनाओं का आरंभ, निर्भीक होकर कहना पड़ता है, श्री महावीर प्रसाद द्विवेदी की रचनाओं से हुआ । उन्होने 'छायावाद के छोकड़ों की कटु निन्दा की और उन पर अनेक असभ्व ब असंस्कृत आक्षेप भी किये । लाला भगवान दीन, बनारसीदास चतुर्वेदी, ज्योतिप्रसाद 'निर्मल' भी छायावाद के प्रति कुरुचिपूर्ण आलोचना का कूड़ा-कर्कट जमा करते रहे । ज्वालाराम 'विलक्षण' ने भी छायावाद के विरोध में ही अपनी विलक्षणता का परिचय दिया। पद्मसिंह शर्मा का भी काम निरंतर व्यंग्य - विरोध से छायावाद का उपहास करना था । 'सुधा', 'माधुरी' और 'अभ्युदय' आदि अनेक पत्र पत्रिकाओं को अस्त्र बनाया गया और छायावाद का डँटकर विरोध किया गया । उस समय का साहित्यिक फैशन हो छायावाद की खिल्ली उड़ाना था। इतना ही नहीं, छायावाद के विरोध में काशी से "छायावाद" पत्रिका भी निकाली गई जिसके पृष्ठ छायावादी कवि व कविताओं के प्रति व्यंग्य-विनोद और कार्टूनों से भरे रहते थे। 'चाँद' और 'विशाल भारत' ने भी छायावाद का निरंतर विरोध किया। इस प्रकार ऐसा लगता है कि यह समय ही छायावाद की किस्मत में अच्छा नहीं बदा था । विद्वान् आलोचक श्री रामचंद्र शुक्ल भी छायावाद का निष्पक्ष विश्लेषण एवं मूल्यांकन नही कर सके और छायावाद-विषयक उसकी आलोचनाओं ने अन्य अनेक भ्रांतियाँ हीं उत्पन्न कीं। "हिंदी साहित्य का इतिहास" नामक उनके ग्रंथ के कतिपय पृष्ठ, इस दृष्टि से पठनीय हैं । छायावाद के इतने विरोध होने पर भी उसके कवि नहीं थे। उन्होंने विरोधों से डँटकर मोर्चा लिया और स्वयं १. विस्तार पूर्वक विवेचन के लिए पढ़िए"हिंदी काव्य में छायावाद" पृ० ६१ - ७८ मैदान छोड़कर भागने वाले अपनी व्याख्याएँ प्रस्तुत कीं । प्रसाद, पंत, निराला और महादेवी ने खुद लेखनी उठाई और छायावाद को समझाने का प्रयास किया । इस प्रसग में प्रसाद जी का "काव्य, कला व अन्य निबंध' तथा 'इन्दु' पत्रिका में प्रकाशित उनके लेख दृष्टव्य है । पंत के 'पल्लव' एन महादेयी की 'यामा' की भूमिकाएँ भी विशेष ध्यातव्य है। किंतु विरोधियों पर वज्र प्रहार किया निराला ने हिंदी कविता के इतिहास मे जिसकी कोई अन्य मिसाल नहीं है । 'मतवाला' मे निराला ने छायाबाद के विरोधियो को मुँह तोड़ उत्तर दिया । छायावादी कवियों के इस प्रकार समझाने व अपने विरोधियों को दो-टूक उत्तर देने की वजह से कुछ लोग अब इनकी ओर आकृष्ट होने लग गए थे । नई पीढ़ी के साहित्यकारी और विद्वान आलोचकों ने छायावाद का अध्ययन आरंभ किया और तब वे एक दूसरे ही निष्कर्ष पर पहुँचे। उन्हें छायावाद - काव्य की विशेषता और महत्ता का ज्ञान हुआ और अपने विचार उन्होंने खुलकर अभिब्यक्त किये । ऐसे लोगों में प्रमुख थे - श्री शिवाधार पाण्डेय, श्री रामनाथ सुमन, श्री शातिप्रिय द्विवेदी, प० नन्ददुलारे वाजपेयो इत्यादि । पं० कृष्णविहारी मिश्र, श्री अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' और पं० मातादीन शुक्ल ने भी छायावाद का पक्ष लिया। इस परिवर्तित द्वितीय-युग को छायावाद का पोषण-काल कहना चाहिये । श्री शिवावार पाण्डेय, श्री रामनाथ सुमन, प० नन्ददुलारे वाजपेयी, श्री अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' पं० कृष्णबिहारी मिश्र आदि आलोचकों ने छायावाद का पक्ष लेकर उसके आरिम्भक विकास मे पर्याप्त सहायता की। छायावाद-विषयक आलोचना-साहित्य के आरंभिक इतिहास में पं० नन्ददुलारे वाजपेयी को आलोचनाएँ विशेष महत्त्व की अधिकारिणी हैं, इसमें सन्देह नही । 'आधुनिक साहित्य,' और 'हिंदी साहित्य : बीसवी शताब्दी" शीर्षक उनके पुस्तकाकार ग्रंथों में छायावाद-विषयक सामग्री, इस दृष्टि से विशेष उल्लेखनीय है । छायावाद क्या है, उसकी मुख्य विशेषताएँ और उपलब्धियाँ कौन-सी है, उसका अभिव्यजना- सौन्दर्य और प्रधान जोवन-दर्शन के आकर्षण क्या हैं, इन सभी तथ्यों का मार्मिक उद्घाटन पहले-पहल प० नन्ददुलारे वाजपेयी की समीक्षाओं द्वारा हो संभव हुआ। किंतु इतना सब होते हुए भी वाजपेयी जी की आलोचना में कहीं भा सस्ती भावुकता और झूठी प्रशंसा के आलोचनोचित दोष नहीं हैं, यह एक श्रेय की बात है । श्री शांतिप्रिय द्विवेदी की छायावाद - विषयक आलोचनाएँ उसके "कवि और काव्य" तथा 'संचारिणी' आदि पुस्तकों में देखी जा सकती हैं। छायावाद विषयक उनको आलोचनाएँ प्रशंसाभिभूत गद्गद कंठ के उद्गार है; युक्तिसंगत व्याख्या एवं तटस्थ विश्लेषण का अभाव जिसकी सहज विशेषता है । फिर भी, उनको समीक्षा का ऐतिहासिक महत्त्व है, यह तो कहा ही जा सकता हैं और इसलिए उसे हम छायावाद के प्रेमी पाठकों से पढ़ने का अनुरोध कर सकते हैं । इसके उपरांत छायावाद के अलाचकों में प्रमुख हैं - डॉ० नगेन्द्र, डॉ० सुधीन्द्र, डॉ० केसरीनारायण शुक्ल, श्री शभूनाथ सिंह, श्री नामवर सिंह, प्रो० क्षेम, श्री विश्वंभर 'मानव', डॉ० इन्द्रनाथ मदान, पं० गंगाप्रसाद पाण्डेय, श्रीमती शचीरानी गुर्टू और डॉ० प्रेमशंकर तथा श्री नलिन विलोचन शर्मा । इन विद्वानों की पुस्तके और प्रबंध छाया बाद के प्रेमियों व पाठको के लिए विशेष उपयोगी है। डॉ० नगेन्द्र की पुस्तक है. 'आधुनिक हिंदी कविता की मुख्य प्रवृत्तियां ।" १२४ पृष्ठो की यह समीक्षा - पुस्तक गौतम बुक डिपो, दिल्ली से सन् १६५५ में प्रकाशित हुई । प्रारंभ में, इसमें दस पृष्ठो का छायावाद के आरंभ की पृष्ठभूमि, उसको विशेषताएँ, मूलदर्शन, व तत्सम्बन्धी भ्रातियों का निराकरण करते हुए विद्व न् आलोचक का निष्कर्ष है कि ' छायावाद एक विशेष प्रकार को भाव पद्धित है : जावन के प्रति एक विशेष भावात्मक दृष्टिकोण है । ७५ विवेचन गभोर व स्पष्ट है । डॉ० सुधोन्द्र ने भी "हिंदी कविता मे युगातर" शोपंक ५२२ पृष्ठों की अपनी विशाल पुस्तक मे छायावाद पर विचार किया है और बताया है कि आत्मानुभूति, अंतवेदना, लाक्षणिक भगिमा और चित्रभाषा व चित्रराग छायावाद की प्रधान विशेषताएं थी । रहस्यवाद ओर छायावाद, प्रेम और वासना, सर्व चेतनवाद या प्रकृति दर्शन पर भी विवेचन किया गया है और सामग्री अत्यंत उपयोगी है। विचार स्पष्ट और बोधगम्य हैं तथा विवेचन में गंभीरता की झाकी मिलती है। "आधुनिक काव्यधारा" और "आधुनिक काव्यधारा का सांस्कृतिक स्रोत" शीर्षक डॉ० केसरीनारायण शुक्ल की दो पुस्तकें भी छायावाद-विषयक आलोचना - साहित्य के अध्ययन - आकलन के प्रसंग में विशेष उल्लेख्य है। उनमें छायावाद का उद्भव व विकास, प्रमुख प्रवृत्तियाँ और रहस्यवाद से उसके अंतर आदि पर पर्याप्त प्रकाश डाला गया है । श्री शंभूनाथ सिंह की पुस्तक "छायावाद-युग" अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । लेखक का विचार है कि "छायावाद-युग के पीछे छूट जाने का अर्थ यह है कि हिन्दी कविता आगे बढ़ी है, एक ही जगह खड़ी होकर लेफ्ट राइट (मार्क टाइम) नही कर रही है। इस प्रगति को छायावाद का पतन नहीं कहा जा सकता। यह भी नहीं कह सकते कि छायावाद मर गया क्योंकि वह जी रहा है और रूप बदल कर जी रहा है, जैसे पाँच वर्ष का बच्चा पचीस वर्ष की उम्र में भी वही रहता है यद्यपि उसके रूप और ज्ञान कोश में आकाश पाताल का अंतर हो गया रहता है; बच्चा मर कर नही, जी कर जवान होता है । उसी तरह आज का स्वच्छंदतावादी यथार्थवाद हो या प्रगतिवाद, प्रतीकवाद ( प्रयोगवाद ) हो या नूतन रहस्यवाद, ये सभी छायावाद के ही विकसित रूप है । " 3 सन् १९५२ में प्रकाशित ३९२ पृष्ठों को इस पुस्तक में इतिहास के आलोक में छायावाद का अध्ययन व विवेचन प्रस्तुत हुआ है । पुस्तक के प्रथम खंड में ८८ पृष्ठ है जिनमें औद्योगिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक व साहित्यिक परिस्थितियों की पीठिका में छायावाद की विकसित काव्यधारा का सविस्तर आकलन किया गया है । छायावाद-युग की प्रधान प्रवृत्तियों, प्रेमभावना, सौंदर्य - भावना, प्रकृति, शैली या अभिव्यंजना प्रणाली आदि पर विस्तार से विचार ० हि० क० की मुख्य प्रवृत्तियाँ - डॉ० नगेन्द्र (१० १५) २. हिंदा कविता में युगांतर - डॉ० सुधीन्द्र ( पृ० ३७०) छायावाद-युग, पृष्ठ २
छायावाद-विषयक आलोचना-साहित्य छायावादी काव्य-धारा के प्रवहमान होते ही, संयोग की ही संयोग की ही बात समझिये, उसकी आलोचना का भी कार्य प्रारंभ हो गया। आरंभ में, उस प्रकार की कविताओं का, जिसे व्यंग्य मे 'छायावाद' का नाम दिया गया था, घोर विरोध हुआ और कोई भी दुर्बल व अशक्त काव्य प्रवृत्ति, सहज, समाप्त हो जा सकती थी। किंतु अनेक विरोधों के बावजूद, छायावाद - काव्य जिन्दा रह सका और यही उसके महत्त्व का प्रमाण है । छायावाद के विरुद्ध आरोपित आक्षेपों के उत्तर स्वयं उसके कवियों ने दिये और बाद में उसकी सम्यक आलोचना का भी अवसर आया । छायावाद-काव्य का अध्ययन व विवेचन किया गया और आज तो उस पर अनेक अच्छी समीक्षाएँ उपलब्ध हैं । छायावाद विषयक आलोचना - साहित्य को समझने के लिए उसके इतिहास को हम तीन स्पष्ट भागों में विभक्त कर सकते है । सबसे पहले उसके इतिहास का वह युग हमारे समक्ष आता है जिसे "विरोध-काल" कहना चाहिये । इस समय में छायावाद को समझने और समझाने की कोशिश नहीं की गई; उसका बिल्कुल विरोध किया गया । छायावाद के उपहास और निन्दा की भदी आलोचनाओं का आरंभ, निर्भीक होकर कहना पड़ता है, श्री महावीर प्रसाद द्विवेदी की रचनाओं से हुआ । उन्होने 'छायावाद के छोकड़ों की कटु निन्दा की और उन पर अनेक असभ्व ब असंस्कृत आक्षेप भी किये । लाला भगवान दीन, बनारसीदास चतुर्वेदी, ज्योतिप्रसाद 'निर्मल' भी छायावाद के प्रति कुरुचिपूर्ण आलोचना का कूड़ा-कर्कट जमा करते रहे । ज्वालाराम 'विलक्षण' ने भी छायावाद के विरोध में ही अपनी विलक्षणता का परिचय दिया। पद्मसिंह शर्मा का भी काम निरंतर व्यंग्य - विरोध से छायावाद का उपहास करना था । 'सुधा', 'माधुरी' और 'अभ्युदय' आदि अनेक पत्र पत्रिकाओं को अस्त्र बनाया गया और छायावाद का डँटकर विरोध किया गया । उस समय का साहित्यिक फैशन हो छायावाद की खिल्ली उड़ाना था। इतना ही नहीं, छायावाद के विरोध में काशी से "छायावाद" पत्रिका भी निकाली गई जिसके पृष्ठ छायावादी कवि व कविताओं के प्रति व्यंग्य-विनोद और कार्टूनों से भरे रहते थे। 'चाँद' और 'विशाल भारत' ने भी छायावाद का निरंतर विरोध किया। इस प्रकार ऐसा लगता है कि यह समय ही छायावाद की किस्मत में अच्छा नहीं बदा था । विद्वान् आलोचक श्री रामचंद्र शुक्ल भी छायावाद का निष्पक्ष विश्लेषण एवं मूल्यांकन नही कर सके और छायावाद-विषयक उसकी आलोचनाओं ने अन्य अनेक भ्रांतियाँ हीं उत्पन्न कीं। "हिंदी साहित्य का इतिहास" नामक उनके ग्रंथ के कतिपय पृष्ठ, इस दृष्टि से पठनीय हैं । छायावाद के इतने विरोध होने पर भी उसके कवि नहीं थे। उन्होंने विरोधों से डँटकर मोर्चा लिया और स्वयं एक. विस्तार पूर्वक विवेचन के लिए पढ़िए"हिंदी काव्य में छायावाद" पृशून्य इकसठ - अठहत्तर मैदान छोड़कर भागने वाले अपनी व्याख्याएँ प्रस्तुत कीं । प्रसाद, पंत, निराला और महादेवी ने खुद लेखनी उठाई और छायावाद को समझाने का प्रयास किया । इस प्रसग में प्रसाद जी का "काव्य, कला व अन्य निबंध' तथा 'इन्दु' पत्रिका में प्रकाशित उनके लेख दृष्टव्य है । पंत के 'पल्लव' एन महादेयी की 'यामा' की भूमिकाएँ भी विशेष ध्यातव्य है। किंतु विरोधियों पर वज्र प्रहार किया निराला ने हिंदी कविता के इतिहास मे जिसकी कोई अन्य मिसाल नहीं है । 'मतवाला' मे निराला ने छायाबाद के विरोधियो को मुँह तोड़ उत्तर दिया । छायावादी कवियों के इस प्रकार समझाने व अपने विरोधियों को दो-टूक उत्तर देने की वजह से कुछ लोग अब इनकी ओर आकृष्ट होने लग गए थे । नई पीढ़ी के साहित्यकारी और विद्वान आलोचकों ने छायावाद का अध्ययन आरंभ किया और तब वे एक दूसरे ही निष्कर्ष पर पहुँचे। उन्हें छायावाद - काव्य की विशेषता और महत्ता का ज्ञान हुआ और अपने विचार उन्होंने खुलकर अभिब्यक्त किये । ऐसे लोगों में प्रमुख थे - श्री शिवाधार पाण्डेय, श्री रामनाथ सुमन, श्री शातिप्रिय द्विवेदी, पशून्य नन्ददुलारे वाजपेयो इत्यादि । पंशून्य कृष्णविहारी मिश्र, श्री अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' और पंशून्य मातादीन शुक्ल ने भी छायावाद का पक्ष लिया। इस परिवर्तित द्वितीय-युग को छायावाद का पोषण-काल कहना चाहिये । श्री शिवावार पाण्डेय, श्री रामनाथ सुमन, पशून्य नन्ददुलारे वाजपेयी, श्री अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' पंशून्य कृष्णबिहारी मिश्र आदि आलोचकों ने छायावाद का पक्ष लेकर उसके आरिम्भक विकास मे पर्याप्त सहायता की। छायावाद-विषयक आलोचना-साहित्य के आरंभिक इतिहास में पंशून्य नन्ददुलारे वाजपेयी को आलोचनाएँ विशेष महत्त्व की अधिकारिणी हैं, इसमें सन्देह नही । 'आधुनिक साहित्य,' और 'हिंदी साहित्य : बीसवी शताब्दी" शीर्षक उनके पुस्तकाकार ग्रंथों में छायावाद-विषयक सामग्री, इस दृष्टि से विशेष उल्लेखनीय है । छायावाद क्या है, उसकी मुख्य विशेषताएँ और उपलब्धियाँ कौन-सी है, उसका अभिव्यजना- सौन्दर्य और प्रधान जोवन-दर्शन के आकर्षण क्या हैं, इन सभी तथ्यों का मार्मिक उद्घाटन पहले-पहल पशून्य नन्ददुलारे वाजपेयी की समीक्षाओं द्वारा हो संभव हुआ। किंतु इतना सब होते हुए भी वाजपेयी जी की आलोचना में कहीं भा सस्ती भावुकता और झूठी प्रशंसा के आलोचनोचित दोष नहीं हैं, यह एक श्रेय की बात है । श्री शांतिप्रिय द्विवेदी की छायावाद - विषयक आलोचनाएँ उसके "कवि और काव्य" तथा 'संचारिणी' आदि पुस्तकों में देखी जा सकती हैं। छायावाद विषयक उनको आलोचनाएँ प्रशंसाभिभूत गद्गद कंठ के उद्गार है; युक्तिसंगत व्याख्या एवं तटस्थ विश्लेषण का अभाव जिसकी सहज विशेषता है । फिर भी, उनको समीक्षा का ऐतिहासिक महत्त्व है, यह तो कहा ही जा सकता हैं और इसलिए उसे हम छायावाद के प्रेमी पाठकों से पढ़ने का अनुरोध कर सकते हैं । इसके उपरांत छायावाद के अलाचकों में प्रमुख हैं - डॉशून्य नगेन्द्र, डॉशून्य सुधीन्द्र, डॉशून्य केसरीनारायण शुक्ल, श्री शभूनाथ सिंह, श्री नामवर सिंह, प्रोशून्य क्षेम, श्री विश्वंभर 'मानव', डॉशून्य इन्द्रनाथ मदान, पंशून्य गंगाप्रसाद पाण्डेय, श्रीमती शचीरानी गुर्टू और डॉशून्य प्रेमशंकर तथा श्री नलिन विलोचन शर्मा । इन विद्वानों की पुस्तके और प्रबंध छाया बाद के प्रेमियों व पाठको के लिए विशेष उपयोगी है। डॉशून्य नगेन्द्र की पुस्तक है. 'आधुनिक हिंदी कविता की मुख्य प्रवृत्तियां ।" एक सौ चौबीस पृष्ठो की यह समीक्षा - पुस्तक गौतम बुक डिपो, दिल्ली से सन् एक हज़ार छः सौ पचपन में प्रकाशित हुई । प्रारंभ में, इसमें दस पृष्ठो का छायावाद के आरंभ की पृष्ठभूमि, उसको विशेषताएँ, मूलदर्शन, व तत्सम्बन्धी भ्रातियों का निराकरण करते हुए विद्व न् आलोचक का निष्कर्ष है कि ' छायावाद एक विशेष प्रकार को भाव पद्धित है : जावन के प्रति एक विशेष भावात्मक दृष्टिकोण है । पचहत्तर विवेचन गभोर व स्पष्ट है । डॉशून्य सुधोन्द्र ने भी "हिंदी कविता मे युगातर" शोपंक पाँच सौ बाईस पृष्ठों की अपनी विशाल पुस्तक मे छायावाद पर विचार किया है और बताया है कि आत्मानुभूति, अंतवेदना, लाक्षणिक भगिमा और चित्रभाषा व चित्रराग छायावाद की प्रधान विशेषताएं थी । रहस्यवाद ओर छायावाद, प्रेम और वासना, सर्व चेतनवाद या प्रकृति दर्शन पर भी विवेचन किया गया है और सामग्री अत्यंत उपयोगी है। विचार स्पष्ट और बोधगम्य हैं तथा विवेचन में गंभीरता की झाकी मिलती है। "आधुनिक काव्यधारा" और "आधुनिक काव्यधारा का सांस्कृतिक स्रोत" शीर्षक डॉशून्य केसरीनारायण शुक्ल की दो पुस्तकें भी छायावाद-विषयक आलोचना - साहित्य के अध्ययन - आकलन के प्रसंग में विशेष उल्लेख्य है। उनमें छायावाद का उद्भव व विकास, प्रमुख प्रवृत्तियाँ और रहस्यवाद से उसके अंतर आदि पर पर्याप्त प्रकाश डाला गया है । श्री शंभूनाथ सिंह की पुस्तक "छायावाद-युग" अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । लेखक का विचार है कि "छायावाद-युग के पीछे छूट जाने का अर्थ यह है कि हिन्दी कविता आगे बढ़ी है, एक ही जगह खड़ी होकर लेफ्ट राइट नही कर रही है। इस प्रगति को छायावाद का पतन नहीं कहा जा सकता। यह भी नहीं कह सकते कि छायावाद मर गया क्योंकि वह जी रहा है और रूप बदल कर जी रहा है, जैसे पाँच वर्ष का बच्चा पचीस वर्ष की उम्र में भी वही रहता है यद्यपि उसके रूप और ज्ञान कोश में आकाश पाताल का अंतर हो गया रहता है; बच्चा मर कर नही, जी कर जवान होता है । उसी तरह आज का स्वच्छंदतावादी यथार्थवाद हो या प्रगतिवाद, प्रतीकवाद हो या नूतन रहस्यवाद, ये सभी छायावाद के ही विकसित रूप है । " तीन सन् एक हज़ार नौ सौ बावन में प्रकाशित तीन सौ बानवे पृष्ठों को इस पुस्तक में इतिहास के आलोक में छायावाद का अध्ययन व विवेचन प्रस्तुत हुआ है । पुस्तक के प्रथम खंड में अठासी पृष्ठ है जिनमें औद्योगिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक व साहित्यिक परिस्थितियों की पीठिका में छायावाद की विकसित काव्यधारा का सविस्तर आकलन किया गया है । छायावाद-युग की प्रधान प्रवृत्तियों, प्रेमभावना, सौंदर्य - भावना, प्रकृति, शैली या अभिव्यंजना प्रणाली आदि पर विस्तार से विचार शून्य हिशून्य कशून्य की मुख्य प्रवृत्तियाँ - डॉशून्य नगेन्द्र दो. हिंदा कविता में युगांतर - डॉशून्य सुधीन्द्र छायावाद-युग, पृष्ठ दो
दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत कड़ाके की ठंड दस्तक दे चुकी है. सुबह शाम शीतलहर का प्रकोप जारी है, ऐसे में लोगों की आवाजाही व यातायात पर भी प्रभाव पड़ रहा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग की मानें तो हिमालय से आ रही सर्द हवाओं का दौर आने वाले 2 दिनों तक यूं ही बना रहेगा. राजधानी दिल्ली में मौसम की तीहरी मार देखने को मिल रही है. दिल्लीवासी पहले बढ़ते प्रदूषण से परेशान तो थे ही और अब शीतलहर व कोहरे ने परेशानियां और बढ़ा दी हैं. दिल्ली में बीती रात न्यूनतम तामपाम 4. 1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. भारत मौसम विभाग की मानें तो दिल्ली में शीतलहर का प्रकोप 2 दिनों तक चलेगा. घने कोहरे के चलते दिल्ली के पालम में सुबह दृश्यता 100 मीटर ही थी, जिससे सड़क दुर्घटना की अपार संभावना बढ़ रही हैं. तो वहीं राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक भी 342 दर्ज किया गया, जो कि बेहद खराब श्रेणी में आता है. पहाड़ी क्षेत्रों में जमकर बर्फबारी हो रही है, जिससे पर्यटक क्रिसमस के अवसर पर जमकर लुत्फ़ उठा रहे हैं. बीते 24 घंटों के दौरान हिमाचल के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ आ रहा है, जिससे कई जिलों में 29 दिसंबर तक बारिश व बर्फबारी की संभावना जारी है. यदि आने वाले दिनों में बर्फाबारी का दौर यूं ही बना रहेगा तो मैदानी इलाकों में ठंड और बढ़ेगी. साथ मौसम विभाग ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़, चमौली व उत्तरकाशी जिलों में बारिश व बर्फबारी की संभावना जाहिर की गई है. आने वाले 24 घंटों के दौरान पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कोल्ड डे से लेकर गंभीर कोल्ड डे की स्थिति रहने की संभावना है. इसके अलावा, पंजाब, हरियाणा और उत्तरी राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में 27 दिसंबर तक शीत लहर की स्थिति बनी रहेगी. आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल के कुछ क्षेत्रों में गरज के साथ बारिश होने की संभावना है. अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड और सिक्किम में छिटपुट बारिश या बर्फबारी हो सकती है. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में हिमपात की संभावना है. सुबह और रात के समय पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, दिल्ली और चंडीगढ़ में मध्यम से घना कोहरा छाया रहेगा. देश के बाकी हिस्सों में शुष्क मौसम की बहुत संभावना है.
दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत कड़ाके की ठंड दस्तक दे चुकी है. सुबह शाम शीतलहर का प्रकोप जारी है, ऐसे में लोगों की आवाजाही व यातायात पर भी प्रभाव पड़ रहा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग की मानें तो हिमालय से आ रही सर्द हवाओं का दौर आने वाले दो दिनों तक यूं ही बना रहेगा. राजधानी दिल्ली में मौसम की तीहरी मार देखने को मिल रही है. दिल्लीवासी पहले बढ़ते प्रदूषण से परेशान तो थे ही और अब शीतलहर व कोहरे ने परेशानियां और बढ़ा दी हैं. दिल्ली में बीती रात न्यूनतम तामपाम चार. एक डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. भारत मौसम विभाग की मानें तो दिल्ली में शीतलहर का प्रकोप दो दिनों तक चलेगा. घने कोहरे के चलते दिल्ली के पालम में सुबह दृश्यता एक सौ मीटर ही थी, जिससे सड़क दुर्घटना की अपार संभावना बढ़ रही हैं. तो वहीं राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक भी तीन सौ बयालीस दर्ज किया गया, जो कि बेहद खराब श्रेणी में आता है. पहाड़ी क्षेत्रों में जमकर बर्फबारी हो रही है, जिससे पर्यटक क्रिसमस के अवसर पर जमकर लुत्फ़ उठा रहे हैं. बीते चौबीस घंटाटों के दौरान हिमाचल के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ आ रहा है, जिससे कई जिलों में उनतीस दिसंबर तक बारिश व बर्फबारी की संभावना जारी है. यदि आने वाले दिनों में बर्फाबारी का दौर यूं ही बना रहेगा तो मैदानी इलाकों में ठंड और बढ़ेगी. साथ मौसम विभाग ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़, चमौली व उत्तरकाशी जिलों में बारिश व बर्फबारी की संभावना जाहिर की गई है. आने वाले चौबीस घंटाटों के दौरान पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कोल्ड डे से लेकर गंभीर कोल्ड डे की स्थिति रहने की संभावना है. इसके अलावा, पंजाब, हरियाणा और उत्तरी राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में सत्ताईस दिसंबर तक शीत लहर की स्थिति बनी रहेगी. आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल के कुछ क्षेत्रों में गरज के साथ बारिश होने की संभावना है. अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड और सिक्किम में छिटपुट बारिश या बर्फबारी हो सकती है. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में हिमपात की संभावना है. सुबह और रात के समय पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, दिल्ली और चंडीगढ़ में मध्यम से घना कोहरा छाया रहेगा. देश के बाकी हिस्सों में शुष्क मौसम की बहुत संभावना है.
इसमें रूट का बयान स्टम्प माइक में कैद हो गया था। रूट ने कहा था कि इसे लेकर बेइज्जती नहीं कीजिए। समलैंगिक होने में किसी तरह की बुराई नहीं है। वेबसाइट ईएसपीएनक्रिकइंफो की रिपोर्ट के मुताबिक, रूट के प्रतिक्रिया करने से पहले गेब्रिएल ने जो कहा था वो माइक में नहीं आया था। अंपायर ने हालांकि उनसे इस मसले पर बात की थी। रूट ने हालांकि कहा कि इस तरह की बातें मैदान पर होती रहती हैं और इन्हें मैदान पर ही रहना चाहिए। रूट इस वाकये की शिकायत करने के मूड में नहीं हैं। रूट ने कहा कि कई बार लोग मैदान पर कुछ ऐसा कह जाते हैं जिन पर उन्हें बाद में पछतावा होता है, लेकिन यह सब बातें मैदान पर ही रहनी चाहिए।
इसमें रूट का बयान स्टम्प माइक में कैद हो गया था। रूट ने कहा था कि इसे लेकर बेइज्जती नहीं कीजिए। समलैंगिक होने में किसी तरह की बुराई नहीं है। वेबसाइट ईएसपीएनक्रिकइंफो की रिपोर्ट के मुताबिक, रूट के प्रतिक्रिया करने से पहले गेब्रिएल ने जो कहा था वो माइक में नहीं आया था। अंपायर ने हालांकि उनसे इस मसले पर बात की थी। रूट ने हालांकि कहा कि इस तरह की बातें मैदान पर होती रहती हैं और इन्हें मैदान पर ही रहना चाहिए। रूट इस वाकये की शिकायत करने के मूड में नहीं हैं। रूट ने कहा कि कई बार लोग मैदान पर कुछ ऐसा कह जाते हैं जिन पर उन्हें बाद में पछतावा होता है, लेकिन यह सब बातें मैदान पर ही रहनी चाहिए।
Quick links: आईपीएल 2021 (IPL 2021) के खत्म होने के बाद दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमी की नजर अब यूएई और ओमान में शुरू होने जा रहे T20 वर्ल्ड कप (T20 World Cup) पर टिकी है। भारतीय टीम भी इस मेगा इवेंट में भाग लेने के लिए बेताब नजर आ रही है। विराट कोहली (Virat Kohli) की अगुआई में टीम इंडिया पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले बड़े मुकाबले से पहले इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया से वॉर्म-अप मैच खेलेगी। शनिवार को आखिरी बार किसी टूर्नामेंट में भारत के लिए टी 20 कप्तानी करने वाले विराट कोहली ने मीडिया के साथ बातचीत की। टी 20 वर्ल्ड कप से पहले हुए प्री- टूर्नामेंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में विराट कोहली ने टीम में प्रीमियम ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन (R Ashwin) के शामिल होने पर बातचीत की। कप्तान ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि अश्विन वर्ल्ड कप में टीम के लिए अहम कड़ी साबित होंगे। टीम इंडिया के सिलेक्टर्स ने टी 20 वर्ल्ड कप में रवि अश्विन का चयन कर भारतीय फैंस समेत कई क्रिकेट पंडित को हैरान कर दिया था। अश्विन पर बात करते हुए कप्तान कोहली ने कहा, "अश्विन ने जिस एक चीज में सुधार किया है, वह है साहस के साथ उनकी गेंदबाजी। आपने पिछले दो वर्षों में आईपीएल में देखा है कि उन्होंने सबसे बड़े हिटरों के खिलाफ कठिन ओवर फेंके हैं। वह गेंद को सही क्षेत्रों में डालने से नहीं कतराते, अश्विन को अपने कौशल पर विश्वास है और हमने महसूस किया कि जिस तरह से वह विविधता के साथ गेंदबाजी कर रहे हैं वो हमारे लिए अहम साबित हो सकते हैं। " भारतीय कप्तान ने आगे कहा कि अश्विन लंबे समय से टीम का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने लिमिटेड ओवर क्रिकेट में सफल होने के लिए अपनी गेंदबाजी पर मेहनत किया है। उनका अनुभव टी 20 वर्ल्ड कप में काम आने वाला है। बीसीसीआई के सबसे आश्चर्यजनक फैसलों में से एक लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल (Yujvendra Chahal) को टीम इंडिया की टी 20 विश्व कप टीम से बाहर करना था। सोशल मीडिया पर फैंस ने इस निर्णय की आलोचना भी की थी। RCB के लेग स्पिनर ने यूएई में हुए आईपीएल 2021 के दूसरे चरण में शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन, चयनकर्ताओं ने युजवेंद्र चहल की जगह राहुल चाहर को तरजीह दी। युजवेंद्र चहल को टीम से बाहर किए जाने पर कोहली ने कहा, "टीम के लिए ये एक चुनौतीपूर्ण कॉल था लेकिन हमने एक कारण से राहुल चाहर का समर्थन करने का फैसला किया। उन्होंने पिछले कुछ सालों में आईपीएल में शानदार गेंदबाजी की है।" बता दें कि आगामी टी 20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को ग्रुप बी में रखा गया है। इस ग्रुप में पाकिस्तान, न्यूजीलैंड और अफगानिस्तान भी शामिल है।
Quick links: आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के खत्म होने के बाद दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमी की नजर अब यूएई और ओमान में शुरू होने जा रहे Tबीस वर्ल्ड कप पर टिकी है। भारतीय टीम भी इस मेगा इवेंट में भाग लेने के लिए बेताब नजर आ रही है। विराट कोहली की अगुआई में टीम इंडिया पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले बड़े मुकाबले से पहले इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया से वॉर्म-अप मैच खेलेगी। शनिवार को आखिरी बार किसी टूर्नामेंट में भारत के लिए टी बीस कप्तानी करने वाले विराट कोहली ने मीडिया के साथ बातचीत की। टी बीस वर्ल्ड कप से पहले हुए प्री- टूर्नामेंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में विराट कोहली ने टीम में प्रीमियम ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के शामिल होने पर बातचीत की। कप्तान ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि अश्विन वर्ल्ड कप में टीम के लिए अहम कड़ी साबित होंगे। टीम इंडिया के सिलेक्टर्स ने टी बीस वर्ल्ड कप में रवि अश्विन का चयन कर भारतीय फैंस समेत कई क्रिकेट पंडित को हैरान कर दिया था। अश्विन पर बात करते हुए कप्तान कोहली ने कहा, "अश्विन ने जिस एक चीज में सुधार किया है, वह है साहस के साथ उनकी गेंदबाजी। आपने पिछले दो वर्षों में आईपीएल में देखा है कि उन्होंने सबसे बड़े हिटरों के खिलाफ कठिन ओवर फेंके हैं। वह गेंद को सही क्षेत्रों में डालने से नहीं कतराते, अश्विन को अपने कौशल पर विश्वास है और हमने महसूस किया कि जिस तरह से वह विविधता के साथ गेंदबाजी कर रहे हैं वो हमारे लिए अहम साबित हो सकते हैं। " भारतीय कप्तान ने आगे कहा कि अश्विन लंबे समय से टीम का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने लिमिटेड ओवर क्रिकेट में सफल होने के लिए अपनी गेंदबाजी पर मेहनत किया है। उनका अनुभव टी बीस वर्ल्ड कप में काम आने वाला है। बीसीसीआई के सबसे आश्चर्यजनक फैसलों में से एक लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल को टीम इंडिया की टी बीस विश्व कप टीम से बाहर करना था। सोशल मीडिया पर फैंस ने इस निर्णय की आलोचना भी की थी। RCB के लेग स्पिनर ने यूएई में हुए आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के दूसरे चरण में शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन, चयनकर्ताओं ने युजवेंद्र चहल की जगह राहुल चाहर को तरजीह दी। युजवेंद्र चहल को टीम से बाहर किए जाने पर कोहली ने कहा, "टीम के लिए ये एक चुनौतीपूर्ण कॉल था लेकिन हमने एक कारण से राहुल चाहर का समर्थन करने का फैसला किया। उन्होंने पिछले कुछ सालों में आईपीएल में शानदार गेंदबाजी की है।" बता दें कि आगामी टी बीस वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को ग्रुप बी में रखा गया है। इस ग्रुप में पाकिस्तान, न्यूजीलैंड और अफगानिस्तान भी शामिल है।
ऊठ कोडी सई अगमा, कोई चांपे समकाल । तिथी गर्भमा अठगुणी, सहे वेदना चाल उ. माता भूखी भृसीयो, सुसिणी सुख थाय । माता सूते ते सुवे, परवश दिन जाय उ. गर्भथकी दुःस लसगणु, जनमे जिय चार । जनम थये दु.स निसयु, धिक मोह विकार उ उपज्यो अशुचि पणे तिहाँ, मल मूत्र कलेश । पिंड अशुचि करी पूरियो, ननि शुचि लव लेश उ. तुरत रूदन करतो थको, जनमे जिगनार । माता पयोधरे सुस ठवे, पिये दूध तेनार उ. दीसे दिन दिन दीपतो, करे रग अपार । लाड कोड माता पिता, पूरे मुविचार उ. छिद्र नारह नारीने, नरना नव जाण । रात दिनस वर्हता रहे, चेतो चतुर सुजाण उ. मात धातु साते त्वचा, छे सातशे नाड । नवशे नारा छे पिंडमा, तिमत्रराशे हाई उ. संधि एकसो साठ छे, सत्तोत्तर सो मर्म । तीन दोप पेशी पांचशे, ढाक्यां ले चर्म उ. रुधिर सेर दश देहमां, पेशाव सरीप । सेर पांच चरवी तिहां, दोय सेर पुरीप उ पित्त टांक चौसट छे, वीरज बत्तीश । टांक बत्तीश सलेपमां जाणे जगदीश उ. इस परिमाण थकी जदा, थाय । व्यापे, रोग घरीर में, नवि चले तब काय उ. पोप्यो पहिले दशके, इम वाथ्यो अंग । खान पान सूपण भलां, करे नव नव रंग उ. हवे बीजे दशके भरणे, विद्या विविध प्रकार । श्रीजे दशके तेहने, जाग्यो काम विकार उ. जिग थानक तुउपन्यो, तिणसें मन जाय । चौथे दशके धनतणा, करे कोडि उपाय उ. पहोतो दशके पांचसे, मनमां सुसनेह । बेटा बेटी वे पोतरा, परणावे तेह् उ.. छटे दशके प्राणियो, वंसी परंश धाय । जरा आवी योजन गयु, तृष्णा तोध न जाय उ याव्यो दशके सातमे, हवे प्राणी तेह । पल भाग्यु बूढो थयो, नारी न धरे नेह उ दशके डोमलो, खुलिया सहु ढंत । कर कपावे शिर धुणे, करे फोकट खंत उ नमे दशके प्राणियो, तन शक्ति न करें। साले वचन सहु तणा, दिन क्रूरना जाये उ साट पढ्यो सू सू करे, मुगालो दह । हाल हुकम हाले नही, दिये परिजन छेह, उ, सगले वैपड मिले, पडे मुँहड लाल । बेटा वेटी ने नहू, न करे संभाल उ. दशमे दशके आरियो, तन पूरी याय । पुराय पाप फल भोगनी, मांगी पर भर जान उ. दश दृष्टाते दोहिलो, लही नग्भा जाय । श्री जिन धर्म समाचरे, ते पामे मनपार उ
ऊठ कोडी सई अगमा, कोई चांपे समकाल । तिथी गर्भमा अठगुणी, सहे वेदना चाल उ. माता भूखी भृसीयो, सुसिणी सुख थाय । माता सूते ते सुवे, परवश दिन जाय उ. गर्भथकी दुःस लसगणु, जनमे जिय चार । जनम थये दु.स निसयु, धिक मोह विकार उ उपज्यो अशुचि पणे तिहाँ, मल मूत्र कलेश । पिंड अशुचि करी पूरियो, ननि शुचि लव लेश उ. तुरत रूदन करतो थको, जनमे जिगनार । माता पयोधरे सुस ठवे, पिये दूध तेनार उ. दीसे दिन दिन दीपतो, करे रग अपार । लाड कोड माता पिता, पूरे मुविचार उ. छिद्र नारह नारीने, नरना नव जाण । रात दिनस वर्हता रहे, चेतो चतुर सुजाण उ. मात धातु साते त्वचा, छे सातशे नाड । नवशे नारा छे पिंडमा, तिमत्रराशे हाई उ. संधि एकसो साठ छे, सत्तोत्तर सो मर्म । तीन दोप पेशी पांचशे, ढाक्यां ले चर्म उ. रुधिर सेर दश देहमां, पेशाव सरीप । सेर पांच चरवी तिहां, दोय सेर पुरीप उ पित्त टांक चौसट छे, वीरज बत्तीश । टांक बत्तीश सलेपमां जाणे जगदीश उ. इस परिमाण थकी जदा, थाय । व्यापे, रोग घरीर में, नवि चले तब काय उ. पोप्यो पहिले दशके, इम वाथ्यो अंग । खान पान सूपण भलां, करे नव नव रंग उ. हवे बीजे दशके भरणे, विद्या विविध प्रकार । श्रीजे दशके तेहने, जाग्यो काम विकार उ. जिग थानक तुउपन्यो, तिणसें मन जाय । चौथे दशके धनतणा, करे कोडि उपाय उ. पहोतो दशके पांचसे, मनमां सुसनेह । बेटा बेटी वे पोतरा, परणावे तेह् उ.. छटे दशके प्राणियो, वंसी परंश धाय । जरा आवी योजन गयु, तृष्णा तोध न जाय उ याव्यो दशके सातमे, हवे प्राणी तेह । पल भाग्यु बूढो थयो, नारी न धरे नेह उ दशके डोमलो, खुलिया सहु ढंत । कर कपावे शिर धुणे, करे फोकट खंत उ नमे दशके प्राणियो, तन शक्ति न करें। साले वचन सहु तणा, दिन क्रूरना जाये उ साट पढ्यो सू सू करे, मुगालो दह । हाल हुकम हाले नही, दिये परिजन छेह, उ, सगले वैपड मिले, पडे मुँहड लाल । बेटा वेटी ने नहू, न करे संभाल उ. दशमे दशके आरियो, तन पूरी याय । पुराय पाप फल भोगनी, मांगी पर भर जान उ. दश दृष्टाते दोहिलो, लही नग्भा जाय । श्री जिन धर्म समाचरे, ते पामे मनपार उ
अज्ञान के कारण जीव की दृष्टि वर्तमान जन्म तक ही सीमित रहती है। वास्तव में हर जीव के करोड़ों जन्म बीत चुके होते हैं। आत्मज्ञान पाकर कर्मबंध को न तोडे तो उसे और जन्म लेना पड़ता है। पुण्य के फल से प्राणी को मानव जन्म मिला। यह मोक्षधाम के सोपान जैसा है। फिर भी वह आत्मज्ञान प्राप्त न कर, भोग विलास में डूबा रहे तो समझना चाहिए कि वह सचमुच अभागा है। इसलिए हर व्यक्ति को चाहिए कि भगवान श्रीकृष्ण के कहे अनुसार अपने पूर्व जन्मों का स्मरण करे, उन यमयातनाओं और गर्भनरक की याद करे। फिर वह उनसे मुक्ति पाने का प्रण करे। माता के गर्भ में जब जीव रहता है तब अपने सातवें मास की अवस्था में एक पल भर के लिए वह दिव्यदृष्टि पाता है। अपने जन्मों की याद करके वह डर जाता है। भगवान की शरण की मांग करता है। वादा करता है कि जन्मराहित्य के लिए इस जीवन में प्रयास करूंगा। परन्तु गर्भ से बाहर निकलने के बाद सब कुछ भूल जाता है। यह उचित नहीं है । अतः जीव को चाहिए कि वह भगवान की शरण में जावे और इसी जन्म में बन्धनों से मुक्ति पावे । जो मनुष्य तरक्की चाहता है उसे पूर्वजन्म को भूलना नहीं चाहिए । भगवान श्रीकृष्णने अर्जुन को पूर्व जन्मों का स्मरण कराया। अर्जुन की तरह हर मनुष्य कई जन्म ले चुका है। अतः मनुष्य का कर्तव्य है कि वह उनका स्मरण करे, आत्मानुभूति पावे, भव बंधन सब तोड दे और जन्म राहित्य की प्राप्ति के लिए प्रयास करे। ६. अजोऽपि सहन्याच्या भूतानामीश्वरोऽपि सन् । प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय संभवाम्यातममायया ॥ शब्दार्थ - ( अहम = मैं) अजः आपि सन् = जन्म रहित होकर भी । अव्ययात्मा = नाश रहित स्वरूप का होकर भी । भूतानाम् = प्राणियों का । ईश्वरः आपिसन् ईश्वर होकर भी। स्वाम् = अपनी । प्रकृतिम् = प्रकृति को । अधिष्ठाय अधीन करके। आत्म मायया = अपनी माया शक्ति से। संभवामि = प्रकट होता भावार्थ - मैं अजन्मा और अविनाशी स्वरूप होते हुए भी तथा समस्त प्राणियों का ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृतिको अधीन करके अपनी योगमायासे प्रकट होता हूँ। व्याख्या - पिछले श्लोक में श्रीकृष्ण भगवानने कहा कि मेरे भी कई जन्म बीत गये। इससे संदेह हो सकता है कि क्या भगवान भी सभी जीवों की तरह जन्म और कर्म के वशीभूत हैं ? इसका उत्तर तुरन्तु इस श्लोक में दिया गया है। ईश्वर का जन्म अलग है। सामान्य प्राणियों का जन्म अलग है। जीव प्रकृति के अधीन होकर कर्म के अनुसार जन्म लेरहे हैं। यहाँ ईश्वर के तीन लक्षण बताये गये हैं। (१) जन्मरहित (२) नाश रहित (३) प्राणि जगत् का नियामक । इस तरह स्वयं जन्मरहित होकर भी वह अपनी स्वशक्ति से लोकहित के लिए अवतार ले रहा है। इस अवतार तत्व से पता लगता है कि ईश्वर की प्राणियों के प्रति कितनी करुणा है। धर्म के उद्धार के प्रति उनके दिल में कितनी उत्सुकता है। इन वाक्यों से स्पष्ट है कि श्रीकृष्ण केवल वसुदेव के पुत्र ही नहीं बल्कि परमात्मा हैं। जगत् के नियामक हैं। प्रश्न - भगवान कैसा है ? उत्तर - (१) जन्म रहित है। (२) नाश रहित है। (३) जगत् के नियामक हैं। प्रश्न - ऐसे जन्मरहित ईश्वर फिर क्यों जन्म लेते हैं ? उत्तर - प्रकृति को वश में कर लोकहित के लिए ही ईश्वर जन्म लेते हैं। वे अज्ञानियों की तरह कर्मबद्ध नहीं हैं । सम्बन्ध - भगवान् दो श्लोकोंमें अपने अवतारके अवसर, हेतु और उद्देश्य बतलाते हैं - ७. यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजम्यहम् ॥ शब्दार्थ - भारत = हे अर्जुन । यदा यदा = जब जब धर्मस्य = धर्म की । ग्लानि = हानि। अधर्मस्य = अधर्म की । अभ्युत्थानम् = वृद्धि भवति = होती है। तदा = तब । आत्मानम् = अपना । अहम = मैं। सृजामि = सृजन करता हूँ। भावार्थ - हे भारत ! जब-जब धर्मकी हानि और अधर्मकी वृद्धि होती है, तब-तब ही मैं अपने रूपको रचता हूँ अर्थात् साकाररूपसे लोगोंके सम्मुख प्रकट होता हूँ। व्याख्या - भगवान के इन वाक्यों से स्पष्ट है कि धर्म कितना महान है। 'धर्मो रक्षति रक्षितः' के अनुसार धर्माचरण ही मनुष्य की रक्षा कर सकता है। जीव को शांति एवं शाश्वत सुख वही प्रदान करता है। इसीलिए भगवानने धर्म की रक्षा का प्रण किया। इससे धर्म की महानता स्पष्ट होती है। भगवान के संदेश से ज्ञात होता है कि अधर्म की वृद्धि को भगवान बर्दास्त नहीं कर सकते । अतः लोकहित को चाहनेवाले सभी का कर्तव्य है कि वे धर्म की रक्षा एवं अधर्म के नाश के लिए कमर कसें । तभी वे ईश्वर के कहे अनुसार चलने में समर्थ होंगे और अपने जन्म को धन्य बनाएंगे। प्रश्न- भगवान कब अवतरित होते हैं ? उत्तर- धर्म का जब ह्रास होता है, अधर्म का उत्थान होता है तब भगवान अवतरित होते हैं। शब्दार्थ- साधूनां = साधु संतों की परित्राणाय = रक्षा के लिए। दुष्कृताम् = दुष्टों के । विनाशाय च = विनाश के लिए । धर्म संस्थापनार्थाय = धर्म की स्थापना के लिए। युगे युगे = हर युग में । संभवामि = प्रकट होरहा हूँ। परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे । भावार्थ - साधु पुरुषों का उद्धार करनेके लिये, पाप-कर्म करनेवालोंका विनाश करनेके लिये और धर्म की अच्छी तरह से स्थापना करनेके लिये मैं युग-युग में प्रकट हुआ करता हूँ। व्याख्या सन्मार्ग पर चलनेवालों, सच्चरित्र जनों तथा साधु संतों की भगवान रक्षा करते हैं। जो भगवान से रक्षा चाहते हैं उनमें योग्यता होनी चाहिए। वह योग्यता जात-पांत, कुल गोत्र, वर्ग-वर्ण तथा धर्म-कर्म से संबंधित नहीं है । वह साधुता से संबंधित है। सन्मार्गगामी सभी, भगवान से रक्षा पाते हैं। भगवानने कहा कि ऐसे साधु संतों की रक्षा के लिए ही अवतरित होता हूँ। फिर उन्हेने कहा कि दुष्टों के नाश के लिए जन्म लेता हूँ। अतः लोगों को चाहिए कि वे दुष्कर्मों तथा पाप कार्यों से दूर रहें। सन्मार्ग पर चलें। लोकहित में लगे रहें । भगवान के अवतार का तीसरा लक्ष्य है धर्म की स्थापना । धर्म की रक्षा करने का प्रण भगवानने किया। अतः भगवान की इच्छा के अनुसार हर व्यक्ति चले और अपने जीवन को सार्थक बनाये, यही हमारी सलाह है। यहाँ 'साधु' कहा गया। साधु का मतलब सन्यासी या बैरागी नहीं है। साधु का मतलब है अच्छा या भला। अच्छे बर्ताववाले सब साधु ही हैं। वे गृहस्थ भी हो सकते हैं। ब्रह्मचारी भी हो सकते हैं । 'युगे युगे' का मतलब युग में एक बार अवतरित होना नहीं है। उसका मतलब है कभी कभी याने आवश्यकता पड़ने पर । इस श्लोक में त्राणाय के बदले परित्राणाय, नाशाय के बदले विनाशाय, स्थापनार्थाय के बदले संस्थापनार्थाय कहा गया। यह उल्लेखनीय प्रयोग है। कुछ लोग पूछ सकते हैं कि भगवान दयालु हैं तो दुष्टों को दण्ड क्यों देते हैं ? दया करनी हैन? वास्तव में दुष्टों को दण्ड देना भी उनपर अनुग्रह करना ही है। भगवान दण्ड दें तो दुष्टों के पाप धुल जाएंगे। अपराधियों को दण्ड न तो समाज में उनकी संख्या बढ़ जाएगी। अत्याचार बढ जाएंगे। सारा समाज खतरे में पड़ जाएगा। शरीर में फोडा हो तो उसका आपरेषन कर उसे हटा देना शरीर की रक्षा के लिए आवश्यक है। इसी प्रकार समाज की रक्षा एवं भलाई के लिए दुष्टों तथा अपराधियों को दण्ड देना बहुत जरूरी है। सम्बन्ध - इस प्रकार भगवान अपने दिव्य जन्मोंके अवसर, हेतु और उद्देश्यका वर्णन करके अब उन जन्मोंकी और उनमें किये जानेवाले कर्मोंकी दिव्यताको तत्त्वसे जाननेका फल बतलाते हैं - जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः । त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन ॥ शब्दार्थ- अर्जुन = हे अर्जुन ! यः = जो । एवम् = इस तरह मे = मेरे । दिव्यम् दिव्य । जन्म च = जन्म को । कर्म च = कार्यों को । तत्वतः = यथार्थ रूप से। वेत्ति : = जानता है। सः = वह । देहम् = शरीर को । त्यक्त्वा = छोड कर । पुनः फिर से । जन्म = जन्म । न एति = नहीं पाता। माम् = मुझको । एति = पाता है। भावार्थ - हे अर्जुन ! मेरे जन्म और कर्म दिव्य अर्थात् निर्मल और अलौकिक हैं- इस प्रकार जो मनुष्य तत्त्वसे जान लेता है, वह शरीर को त्यागकर फिर जन्मको प्राप्त नहीं होता, किंतु मुझे ही प्राप्त होता है। व्याख्या - "ब्रह्मविद्ब्रह्मैव भवति" यह उपनिषद्वाक्य है। इसका अर्थ है कि ब्रह्म को जाननेवाला ब्रह्म ही होता है। भगवान के दिव्य जन्म और कर्मों का जो यथार्थरूप से जानता है वह भक्ति से परिपूरित होकर उसी में लीन रहता है। भगवान के स्वरूप को अच्छी तरह जानना 'साधना' है। भगवान में लीन होना 'साध्य' है। साधना और साध्य के बारे में इस श्लोक में कहा गया है। परन्तु 'तत्वतः' कहा गया है। इससे स्पष्ट है कि भगवान के तत्व को अनुभव के द्वारा समझना चाहिए। भाषणों के द्वारा कोई ईश्वर तत्व जान नहीं सकता। 'दिव्यम्' कहा गया। इससे स्पष्ट होता है कि भगवान के जन्म, कर्म एवं उनकी लीलाएँ प्रकृतिजन्य नहीं हैं। क्यों कि प्रकृति भगवान के वश में है, अतः उनकी लीलाएँ सामान्य जनों की लीलाएँ जैसी नहीं होती। भगवानने कहा कि भगवान का तत्व जाननेवाला पुनर्जन्म नहीं पाता, तुरन्तु फिर कहा कि 'मुझे ही प्राप्त करेगा। इससे ज्ञात होता है कि जन्म राहित्यवाला पद शून्य नहीं है, वह सच्चिदानन्दघनवाले आत्मस्वरूप की ही स्थिति है। "देह त्याग कर मुझे प्राप्त करेगा" इस वाक्य का अर्थ यह नहीं है कि देह को त्यागने के बाद ही मोक्ष प्राप्त करेगा। वास्तविक बात यह है कि जिस क्षण जीव भगवान का तत्व अच्छी तरह जानता है उसी क्षण वह मोक्ष पाता है। यहाँ देहान्तर चर्चा का उल्लेख हुआ है। इससे स्पष्ट होता है कि देह त्यागने के बाद मुक्त पुरुष फिर देह नहीं पाता। प्रश्न - भगवान का सायुज्य कौन पासकते हैं? उत्तर - भगवान के अप्राकृत जन्म, कर्म एवं तत्व को जो मनुष्य अच्छी तरह समझता है, जानता है वह भगवान का सायुज्य पाता है। १०. वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः । बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्धावमागताः ॥ शब्दार्थ - वीतराग भयक्रोधाः = अनुराग, भय, क्रोध को जो छोड़ चुके हैं। मन्मयाः = मुझ ही में जिनका चित्त लगा हुआ है। माम् = मुझे। उपाश्रिताः जो आश्रित हैं। (ऐसे) बहवः = अनेक । ज्ञान तपसा = ज्ञान तप से । पूताः पवित्र बन कर । मद्भावम = मेरे स्वरूप को । आगताः = प्राप्त कर चुके हैं। भावार्थ - पहले भी, जिनके राग, भय और क्रोध सर्वथा नष्ट हो गये थे और जो मुझमें अनन्यप्रेमपूर्वक स्थित रहते थे, ऐसे मेरे आश्रित रहनेवाले बहुत से भक्त उपर्युक्त ज्ञानरूप तपसे पवित्र होकर मेरे स्वरूपको प्राप्त हो चुके हैं। व्याख्या - ज्ञानयोग शीर्षक इस अध्याय में गीताचार्य तप, यज्ञ, अग्नि, नाव, तथा खड्ग आदि विविध रूपों में ज्ञान का वर्णन किया। संसार में अनेक तप हैं। परन्तु ज्ञान का तप सर्वोपरि है। क्योंकि जिस तरह शरीर के मैल को जल धोदेता है उसी तरह जन्म जन्म से अर्जित पाप एवं वासनाओं के मैल को ज्ञान का तप धोदेता है। चित्त को शुद्ध बनाता है। (इसीलिए 'पूताः' शब्द का प्रयोग किया गया है)। मोक्ष की प्राप्ति के लिए चित्त की निर्मलता अत्यंत आवश्यक है। अब प्रश्न उठता है कि ज्ञान-तप माने क्या है ? इस श्लोक में कहा गया कि (१) जहाँ राग, क्रोध और भय न हों (२) जहाँ जीव भगवन्मय रहता हो (३) जहाँ जीव भगवान के आश्रित होकर रहता हो वहाँ ज्ञान-तप रहता है। फिर प्रश्न उठता है कि ऐसे ज्ञान-तप प्रयोजन क्या हैं ? प्रयोजन हैं (१) चित्त की शुद्धि (२) परमात्मा के स्वरूप की प्रप्ति । "वीतराग भयक्रोधाः" - ज्ञान - तप की प्रथम साधना है राग, भय एवं क्रोध का त्याग । यह दुष्टत्रय साधना के लिए बडे अवरोध हैं। इसलिए इन तीन दुर्गुणों को दूर करना चाहिए। अब प्रश्न उठता है कि कैसे दूर किया जाय ? भगवान बताते हैं कि "मन्मयाः मामुपाश्रिताः" अर्थात् निरंतर भगवान का चिंतन और भगवान का आश्रय लेने से दुष्टत्रय दूर होते हैं। ये दोनों एक दूसरे के सहायक हैं। अतः एक ही समय दोनों को अमल में लाना चाहिए। "बहवः" कहा गया है। इससे स्पष्ट होता है कि पहले इस तरह अमल करने से कई साधक ब्रह्मसायुज्य पा चुके हैं। अतः मुमुक्षुओं को चाहिए कि वे ये साधानाएँ करें और मोक्ष प्राप्त करें। इस श्लोक के द्वारा निम्न लिखित बातें स्पष्ट की गयी । (१) भगवत्स्वरूप पाने के लिए चित्त की निर्मलता आवश्यक है। (२) हृदय की निर्मलता की प्राप्ति के लिए ज्ञान-तप आवश्यक है। (३) ज्ञान-तप का मतलब है - (१) काम, क्रोध एवं भय का त्याग । (२) भगवान में तल्लीनता । (३) भगवान का आश्रय पाना । प्रश्न- हृदय की शुद्धि किससे होती है ? उत्तर - तप से (इसका विवरण ऊपर दिया गया ) । ११. ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् । मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥
अज्ञान के कारण जीव की दृष्टि वर्तमान जन्म तक ही सीमित रहती है। वास्तव में हर जीव के करोड़ों जन्म बीत चुके होते हैं। आत्मज्ञान पाकर कर्मबंध को न तोडे तो उसे और जन्म लेना पड़ता है। पुण्य के फल से प्राणी को मानव जन्म मिला। यह मोक्षधाम के सोपान जैसा है। फिर भी वह आत्मज्ञान प्राप्त न कर, भोग विलास में डूबा रहे तो समझना चाहिए कि वह सचमुच अभागा है। इसलिए हर व्यक्ति को चाहिए कि भगवान श्रीकृष्ण के कहे अनुसार अपने पूर्व जन्मों का स्मरण करे, उन यमयातनाओं और गर्भनरक की याद करे। फिर वह उनसे मुक्ति पाने का प्रण करे। माता के गर्भ में जब जीव रहता है तब अपने सातवें मास की अवस्था में एक पल भर के लिए वह दिव्यदृष्टि पाता है। अपने जन्मों की याद करके वह डर जाता है। भगवान की शरण की मांग करता है। वादा करता है कि जन्मराहित्य के लिए इस जीवन में प्रयास करूंगा। परन्तु गर्भ से बाहर निकलने के बाद सब कुछ भूल जाता है। यह उचित नहीं है । अतः जीव को चाहिए कि वह भगवान की शरण में जावे और इसी जन्म में बन्धनों से मुक्ति पावे । जो मनुष्य तरक्की चाहता है उसे पूर्वजन्म को भूलना नहीं चाहिए । भगवान श्रीकृष्णने अर्जुन को पूर्व जन्मों का स्मरण कराया। अर्जुन की तरह हर मनुष्य कई जन्म ले चुका है। अतः मनुष्य का कर्तव्य है कि वह उनका स्मरण करे, आत्मानुभूति पावे, भव बंधन सब तोड दे और जन्म राहित्य की प्राप्ति के लिए प्रयास करे। छः. अजोऽपि सहन्याच्या भूतानामीश्वरोऽपि सन् । प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय संभवाम्यातममायया ॥ शब्दार्थ - अजः आपि सन् = जन्म रहित होकर भी । अव्ययात्मा = नाश रहित स्वरूप का होकर भी । भूतानाम् = प्राणियों का । ईश्वरः आपिसन् ईश्वर होकर भी। स्वाम् = अपनी । प्रकृतिम् = प्रकृति को । अधिष्ठाय अधीन करके। आत्म मायया = अपनी माया शक्ति से। संभवामि = प्रकट होता भावार्थ - मैं अजन्मा और अविनाशी स्वरूप होते हुए भी तथा समस्त प्राणियों का ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृतिको अधीन करके अपनी योगमायासे प्रकट होता हूँ। व्याख्या - पिछले श्लोक में श्रीकृष्ण भगवानने कहा कि मेरे भी कई जन्म बीत गये। इससे संदेह हो सकता है कि क्या भगवान भी सभी जीवों की तरह जन्म और कर्म के वशीभूत हैं ? इसका उत्तर तुरन्तु इस श्लोक में दिया गया है। ईश्वर का जन्म अलग है। सामान्य प्राणियों का जन्म अलग है। जीव प्रकृति के अधीन होकर कर्म के अनुसार जन्म लेरहे हैं। यहाँ ईश्वर के तीन लक्षण बताये गये हैं। जन्मरहित नाश रहित प्राणि जगत् का नियामक । इस तरह स्वयं जन्मरहित होकर भी वह अपनी स्वशक्ति से लोकहित के लिए अवतार ले रहा है। इस अवतार तत्व से पता लगता है कि ईश्वर की प्राणियों के प्रति कितनी करुणा है। धर्म के उद्धार के प्रति उनके दिल में कितनी उत्सुकता है। इन वाक्यों से स्पष्ट है कि श्रीकृष्ण केवल वसुदेव के पुत्र ही नहीं बल्कि परमात्मा हैं। जगत् के नियामक हैं। प्रश्न - भगवान कैसा है ? उत्तर - जन्म रहित है। नाश रहित है। जगत् के नियामक हैं। प्रश्न - ऐसे जन्मरहित ईश्वर फिर क्यों जन्म लेते हैं ? उत्तर - प्रकृति को वश में कर लोकहित के लिए ही ईश्वर जन्म लेते हैं। वे अज्ञानियों की तरह कर्मबद्ध नहीं हैं । सम्बन्ध - भगवान् दो श्लोकोंमें अपने अवतारके अवसर, हेतु और उद्देश्य बतलाते हैं - सात. यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजम्यहम् ॥ शब्दार्थ - भारत = हे अर्जुन । यदा यदा = जब जब धर्मस्य = धर्म की । ग्लानि = हानि। अधर्मस्य = अधर्म की । अभ्युत्थानम् = वृद्धि भवति = होती है। तदा = तब । आत्मानम् = अपना । अहम = मैं। सृजामि = सृजन करता हूँ। भावार्थ - हे भारत ! जब-जब धर्मकी हानि और अधर्मकी वृद्धि होती है, तब-तब ही मैं अपने रूपको रचता हूँ अर्थात् साकाररूपसे लोगोंके सम्मुख प्रकट होता हूँ। व्याख्या - भगवान के इन वाक्यों से स्पष्ट है कि धर्म कितना महान है। 'धर्मो रक्षति रक्षितः' के अनुसार धर्माचरण ही मनुष्य की रक्षा कर सकता है। जीव को शांति एवं शाश्वत सुख वही प्रदान करता है। इसीलिए भगवानने धर्म की रक्षा का प्रण किया। इससे धर्म की महानता स्पष्ट होती है। भगवान के संदेश से ज्ञात होता है कि अधर्म की वृद्धि को भगवान बर्दास्त नहीं कर सकते । अतः लोकहित को चाहनेवाले सभी का कर्तव्य है कि वे धर्म की रक्षा एवं अधर्म के नाश के लिए कमर कसें । तभी वे ईश्वर के कहे अनुसार चलने में समर्थ होंगे और अपने जन्म को धन्य बनाएंगे। प्रश्न- भगवान कब अवतरित होते हैं ? उत्तर- धर्म का जब ह्रास होता है, अधर्म का उत्थान होता है तब भगवान अवतरित होते हैं। शब्दार्थ- साधूनां = साधु संतों की परित्राणाय = रक्षा के लिए। दुष्कृताम् = दुष्टों के । विनाशाय च = विनाश के लिए । धर्म संस्थापनार्थाय = धर्म की स्थापना के लिए। युगे युगे = हर युग में । संभवामि = प्रकट होरहा हूँ। परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे । भावार्थ - साधु पुरुषों का उद्धार करनेके लिये, पाप-कर्म करनेवालोंका विनाश करनेके लिये और धर्म की अच्छी तरह से स्थापना करनेके लिये मैं युग-युग में प्रकट हुआ करता हूँ। व्याख्या सन्मार्ग पर चलनेवालों, सच्चरित्र जनों तथा साधु संतों की भगवान रक्षा करते हैं। जो भगवान से रक्षा चाहते हैं उनमें योग्यता होनी चाहिए। वह योग्यता जात-पांत, कुल गोत्र, वर्ग-वर्ण तथा धर्म-कर्म से संबंधित नहीं है । वह साधुता से संबंधित है। सन्मार्गगामी सभी, भगवान से रक्षा पाते हैं। भगवानने कहा कि ऐसे साधु संतों की रक्षा के लिए ही अवतरित होता हूँ। फिर उन्हेने कहा कि दुष्टों के नाश के लिए जन्म लेता हूँ। अतः लोगों को चाहिए कि वे दुष्कर्मों तथा पाप कार्यों से दूर रहें। सन्मार्ग पर चलें। लोकहित में लगे रहें । भगवान के अवतार का तीसरा लक्ष्य है धर्म की स्थापना । धर्म की रक्षा करने का प्रण भगवानने किया। अतः भगवान की इच्छा के अनुसार हर व्यक्ति चले और अपने जीवन को सार्थक बनाये, यही हमारी सलाह है। यहाँ 'साधु' कहा गया। साधु का मतलब सन्यासी या बैरागी नहीं है। साधु का मतलब है अच्छा या भला। अच्छे बर्ताववाले सब साधु ही हैं। वे गृहस्थ भी हो सकते हैं। ब्रह्मचारी भी हो सकते हैं । 'युगे युगे' का मतलब युग में एक बार अवतरित होना नहीं है। उसका मतलब है कभी कभी याने आवश्यकता पड़ने पर । इस श्लोक में त्राणाय के बदले परित्राणाय, नाशाय के बदले विनाशाय, स्थापनार्थाय के बदले संस्थापनार्थाय कहा गया। यह उल्लेखनीय प्रयोग है। कुछ लोग पूछ सकते हैं कि भगवान दयालु हैं तो दुष्टों को दण्ड क्यों देते हैं ? दया करनी हैन? वास्तव में दुष्टों को दण्ड देना भी उनपर अनुग्रह करना ही है। भगवान दण्ड दें तो दुष्टों के पाप धुल जाएंगे। अपराधियों को दण्ड न तो समाज में उनकी संख्या बढ़ जाएगी। अत्याचार बढ जाएंगे। सारा समाज खतरे में पड़ जाएगा। शरीर में फोडा हो तो उसका आपरेषन कर उसे हटा देना शरीर की रक्षा के लिए आवश्यक है। इसी प्रकार समाज की रक्षा एवं भलाई के लिए दुष्टों तथा अपराधियों को दण्ड देना बहुत जरूरी है। सम्बन्ध - इस प्रकार भगवान अपने दिव्य जन्मोंके अवसर, हेतु और उद्देश्यका वर्णन करके अब उन जन्मोंकी और उनमें किये जानेवाले कर्मोंकी दिव्यताको तत्त्वसे जाननेका फल बतलाते हैं - जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः । त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन ॥ शब्दार्थ- अर्जुन = हे अर्जुन ! यः = जो । एवम् = इस तरह मे = मेरे । दिव्यम् दिव्य । जन्म च = जन्म को । कर्म च = कार्यों को । तत्वतः = यथार्थ रूप से। वेत्ति : = जानता है। सः = वह । देहम् = शरीर को । त्यक्त्वा = छोड कर । पुनः फिर से । जन्म = जन्म । न एति = नहीं पाता। माम् = मुझको । एति = पाता है। भावार्थ - हे अर्जुन ! मेरे जन्म और कर्म दिव्य अर्थात् निर्मल और अलौकिक हैं- इस प्रकार जो मनुष्य तत्त्वसे जान लेता है, वह शरीर को त्यागकर फिर जन्मको प्राप्त नहीं होता, किंतु मुझे ही प्राप्त होता है। व्याख्या - "ब्रह्मविद्ब्रह्मैव भवति" यह उपनिषद्वाक्य है। इसका अर्थ है कि ब्रह्म को जाननेवाला ब्रह्म ही होता है। भगवान के दिव्य जन्म और कर्मों का जो यथार्थरूप से जानता है वह भक्ति से परिपूरित होकर उसी में लीन रहता है। भगवान के स्वरूप को अच्छी तरह जानना 'साधना' है। भगवान में लीन होना 'साध्य' है। साधना और साध्य के बारे में इस श्लोक में कहा गया है। परन्तु 'तत्वतः' कहा गया है। इससे स्पष्ट है कि भगवान के तत्व को अनुभव के द्वारा समझना चाहिए। भाषणों के द्वारा कोई ईश्वर तत्व जान नहीं सकता। 'दिव्यम्' कहा गया। इससे स्पष्ट होता है कि भगवान के जन्म, कर्म एवं उनकी लीलाएँ प्रकृतिजन्य नहीं हैं। क्यों कि प्रकृति भगवान के वश में है, अतः उनकी लीलाएँ सामान्य जनों की लीलाएँ जैसी नहीं होती। भगवानने कहा कि भगवान का तत्व जाननेवाला पुनर्जन्म नहीं पाता, तुरन्तु फिर कहा कि 'मुझे ही प्राप्त करेगा। इससे ज्ञात होता है कि जन्म राहित्यवाला पद शून्य नहीं है, वह सच्चिदानन्दघनवाले आत्मस्वरूप की ही स्थिति है। "देह त्याग कर मुझे प्राप्त करेगा" इस वाक्य का अर्थ यह नहीं है कि देह को त्यागने के बाद ही मोक्ष प्राप्त करेगा। वास्तविक बात यह है कि जिस क्षण जीव भगवान का तत्व अच्छी तरह जानता है उसी क्षण वह मोक्ष पाता है। यहाँ देहान्तर चर्चा का उल्लेख हुआ है। इससे स्पष्ट होता है कि देह त्यागने के बाद मुक्त पुरुष फिर देह नहीं पाता। प्रश्न - भगवान का सायुज्य कौन पासकते हैं? उत्तर - भगवान के अप्राकृत जन्म, कर्म एवं तत्व को जो मनुष्य अच्छी तरह समझता है, जानता है वह भगवान का सायुज्य पाता है। दस. वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः । बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्धावमागताः ॥ शब्दार्थ - वीतराग भयक्रोधाः = अनुराग, भय, क्रोध को जो छोड़ चुके हैं। मन्मयाः = मुझ ही में जिनका चित्त लगा हुआ है। माम् = मुझे। उपाश्रिताः जो आश्रित हैं। बहवः = अनेक । ज्ञान तपसा = ज्ञान तप से । पूताः पवित्र बन कर । मद्भावम = मेरे स्वरूप को । आगताः = प्राप्त कर चुके हैं। भावार्थ - पहले भी, जिनके राग, भय और क्रोध सर्वथा नष्ट हो गये थे और जो मुझमें अनन्यप्रेमपूर्वक स्थित रहते थे, ऐसे मेरे आश्रित रहनेवाले बहुत से भक्त उपर्युक्त ज्ञानरूप तपसे पवित्र होकर मेरे स्वरूपको प्राप्त हो चुके हैं। व्याख्या - ज्ञानयोग शीर्षक इस अध्याय में गीताचार्य तप, यज्ञ, अग्नि, नाव, तथा खड्ग आदि विविध रूपों में ज्ञान का वर्णन किया। संसार में अनेक तप हैं। परन्तु ज्ञान का तप सर्वोपरि है। क्योंकि जिस तरह शरीर के मैल को जल धोदेता है उसी तरह जन्म जन्म से अर्जित पाप एवं वासनाओं के मैल को ज्ञान का तप धोदेता है। चित्त को शुद्ध बनाता है। । मोक्ष की प्राप्ति के लिए चित्त की निर्मलता अत्यंत आवश्यक है। अब प्रश्न उठता है कि ज्ञान-तप माने क्या है ? इस श्लोक में कहा गया कि जहाँ राग, क्रोध और भय न हों जहाँ जीव भगवन्मय रहता हो जहाँ जीव भगवान के आश्रित होकर रहता हो वहाँ ज्ञान-तप रहता है। फिर प्रश्न उठता है कि ऐसे ज्ञान-तप प्रयोजन क्या हैं ? प्रयोजन हैं चित्त की शुद्धि परमात्मा के स्वरूप की प्रप्ति । "वीतराग भयक्रोधाः" - ज्ञान - तप की प्रथम साधना है राग, भय एवं क्रोध का त्याग । यह दुष्टत्रय साधना के लिए बडे अवरोध हैं। इसलिए इन तीन दुर्गुणों को दूर करना चाहिए। अब प्रश्न उठता है कि कैसे दूर किया जाय ? भगवान बताते हैं कि "मन्मयाः मामुपाश्रिताः" अर्थात् निरंतर भगवान का चिंतन और भगवान का आश्रय लेने से दुष्टत्रय दूर होते हैं। ये दोनों एक दूसरे के सहायक हैं। अतः एक ही समय दोनों को अमल में लाना चाहिए। "बहवः" कहा गया है। इससे स्पष्ट होता है कि पहले इस तरह अमल करने से कई साधक ब्रह्मसायुज्य पा चुके हैं। अतः मुमुक्षुओं को चाहिए कि वे ये साधानाएँ करें और मोक्ष प्राप्त करें। इस श्लोक के द्वारा निम्न लिखित बातें स्पष्ट की गयी । भगवत्स्वरूप पाने के लिए चित्त की निर्मलता आवश्यक है। हृदय की निर्मलता की प्राप्ति के लिए ज्ञान-तप आवश्यक है। ज्ञान-तप का मतलब है - काम, क्रोध एवं भय का त्याग । भगवान में तल्लीनता । भगवान का आश्रय पाना । प्रश्न- हृदय की शुद्धि किससे होती है ? उत्तर - तप से । ग्यारह. ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् । मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥
पटौदी। निजी कंपनी के दो कर्मचारियों ने अन्य कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके कंपनी से लाखों रुपये की कीमत का इलेक्ट्रॉनिक सामान चोरी कर लिया। कंपनी के कार्यकारी अधिकारी की शिकायत पर पटौदी थाना पुलिस ने दो आरोपियों को नामजद करते हुए मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कंपनी अधिकारी दीपक कुमार ने पुलिस को बताया कि उनकी कंपनी फ्यूचर स्टाफिंग कंपनी फर्रुखनगर स्थित इंस्टाकार्ट सर्विस कंपनी को काम करने के लिए मैन पावर मुहैया कराती है। उन्होंने कंपनी में काम करने वाले महेंद्रगढ़ निवासी मुकेश कुमार व उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ निवासी अविनाश पर आरोप लगाते हुए कहा कि 28 अप्रैल की रात को कंपनी में से एक इलेक्ट्रॉनिक कार्टून एक बॉक्स में डालकर अपने साथ ले गए। उस सामान की कीमत करीब तीन लाख रुपये थी। उन्होंने बताया कि इसकी सूचना उन्हें शुक्रवार को ही मिली थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पटौदी। निजी कंपनी के दो कर्मचारियों ने अन्य कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके कंपनी से लाखों रुपये की कीमत का इलेक्ट्रॉनिक सामान चोरी कर लिया। कंपनी के कार्यकारी अधिकारी की शिकायत पर पटौदी थाना पुलिस ने दो आरोपियों को नामजद करते हुए मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कंपनी अधिकारी दीपक कुमार ने पुलिस को बताया कि उनकी कंपनी फ्यूचर स्टाफिंग कंपनी फर्रुखनगर स्थित इंस्टाकार्ट सर्विस कंपनी को काम करने के लिए मैन पावर मुहैया कराती है। उन्होंने कंपनी में काम करने वाले महेंद्रगढ़ निवासी मुकेश कुमार व उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ निवासी अविनाश पर आरोप लगाते हुए कहा कि अट्ठाईस अप्रैल की रात को कंपनी में से एक इलेक्ट्रॉनिक कार्टून एक बॉक्स में डालकर अपने साथ ले गए। उस सामान की कीमत करीब तीन लाख रुपये थी। उन्होंने बताया कि इसकी सूचना उन्हें शुक्रवार को ही मिली थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आईपीएल 2021 (IPL 2021) के वेन्यू को लेकर टूर्नामेंट की तीन प्रमुख टीमों ने आपत्ति जताई है। राजस्थान रॉयल्स, पंजाब किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद ने आईपीएल का आयोजन सिर्फ छह शहरों में कराने के बीसीसीआई के फैसले पर आपत्ति जताई है। इनका कहना है कि इन्हें अपने घरेलू मैचों का एडवांटेज नहीं मिल पाएगा। खबरों के मुताबिक बीसीसीआई ने कोरोना वायरस की वजह से इस बार आईपीएल का आयोजन सिर्फ छह ही शहर में कराने का फैसला किया है। ये शहर दिल्ली, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता और अहमदाबाद हैं। वहीं मुंबई को स्टैंडबाई के तौर पर रखा गया है। इससे बाकी तीन टीमें खुश नहीं हैं। एक फ्रेंचाइज से जुड़े अधिकारी ने कहा, हम तीन टीमों को इससे काफी ज्यादा नुकसान होगा। आईपीएल में वही टीमें अच्छा करती हैं जो अपने घरेलू मैदान में बेहतर खेल दिखाती हैं। अगर आप अपने होम ग्राउंड में पांच या छह मैच जीत लेते हैं और कुछ मुकाबले बाहर भी जीत गए तो प्लेऑफ में पहुंच जाएंगे। अगर सिर्फ इन्हीं मैदानों पर आईपीएल के मुकाबले हुए तो फिर रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, चेन्नई सुपर किंग्स, कोलकाता नाइट राइडर्स, दिल्ली कैपिटल्स और मुंबई इंडियंस को होम ग्राउंड का फायदा मिलेगा। जबकि दूसरी तरफ हम तीन टीमों को नुकसान उठाना पड़ेगा। क्रिकबज्ज के मुताबिक इन तीनों फ्रेंचाइजी ने इस मुद्दे को बीसीसीआई सीईओ हेमांग अमीन के सामने उठाया है। इसके अलावा लिखित शिकायत देने के बारे में भी ये टीमें विचार कर रही हैं। वहीं तेलंगाना चीफ मिनिस्टर के बेटे केटी रामा राव ने हैदराबाद में मैचों के आयोजन की पेशकश की है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, बीसीसीआई और आईपीएल के अधिकारियों से मेरी अपील है कि वो हैदराबाद में भी मैचों का आयोजन कराएं। हमने कोरोना को लेकर जो कदम उठाए हैं उसकी वजह से भारत के सभी मेट्रो शहरों के मुकाबले हमारे यहां काफी कम मामले सामने आ रहे हैं। हम सरकार की तरफ से मैचों के आयोजन में आपका पूरा सहयोग करेंगे।
आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के वेन्यू को लेकर टूर्नामेंट की तीन प्रमुख टीमों ने आपत्ति जताई है। राजस्थान रॉयल्स, पंजाब किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद ने आईपीएल का आयोजन सिर्फ छह शहरों में कराने के बीसीसीआई के फैसले पर आपत्ति जताई है। इनका कहना है कि इन्हें अपने घरेलू मैचों का एडवांटेज नहीं मिल पाएगा। खबरों के मुताबिक बीसीसीआई ने कोरोना वायरस की वजह से इस बार आईपीएल का आयोजन सिर्फ छह ही शहर में कराने का फैसला किया है। ये शहर दिल्ली, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता और अहमदाबाद हैं। वहीं मुंबई को स्टैंडबाई के तौर पर रखा गया है। इससे बाकी तीन टीमें खुश नहीं हैं। एक फ्रेंचाइज से जुड़े अधिकारी ने कहा, हम तीन टीमों को इससे काफी ज्यादा नुकसान होगा। आईपीएल में वही टीमें अच्छा करती हैं जो अपने घरेलू मैदान में बेहतर खेल दिखाती हैं। अगर आप अपने होम ग्राउंड में पांच या छह मैच जीत लेते हैं और कुछ मुकाबले बाहर भी जीत गए तो प्लेऑफ में पहुंच जाएंगे। अगर सिर्फ इन्हीं मैदानों पर आईपीएल के मुकाबले हुए तो फिर रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, चेन्नई सुपर किंग्स, कोलकाता नाइट राइडर्स, दिल्ली कैपिटल्स और मुंबई इंडियंस को होम ग्राउंड का फायदा मिलेगा। जबकि दूसरी तरफ हम तीन टीमों को नुकसान उठाना पड़ेगा। क्रिकबज्ज के मुताबिक इन तीनों फ्रेंचाइजी ने इस मुद्दे को बीसीसीआई सीईओ हेमांग अमीन के सामने उठाया है। इसके अलावा लिखित शिकायत देने के बारे में भी ये टीमें विचार कर रही हैं। वहीं तेलंगाना चीफ मिनिस्टर के बेटे केटी रामा राव ने हैदराबाद में मैचों के आयोजन की पेशकश की है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, बीसीसीआई और आईपीएल के अधिकारियों से मेरी अपील है कि वो हैदराबाद में भी मैचों का आयोजन कराएं। हमने कोरोना को लेकर जो कदम उठाए हैं उसकी वजह से भारत के सभी मेट्रो शहरों के मुकाबले हमारे यहां काफी कम मामले सामने आ रहे हैं। हम सरकार की तरफ से मैचों के आयोजन में आपका पूरा सहयोग करेंगे।
इंडिया न्यूज, वाराणसीः Gyanvapi Masjid Case: ज्ञानवापी मस्जिद केस में डिस्ट्रिक कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद का मामला सुनवाई के योग्य है। कोर्ट के इसी फैसले का लोगों को करीब एक वर्ष से इंतजार था। कोर्ट अब इस मामले में 22 को अगली सुनवाई करेगी। बाबरी मामले में पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने कहा है कि फैसला ऐसा होना चाहिए ताकि देश-विदेश के लोग जानें कि हिंदुस्तान में ऐसा फैसला हुआ। इस फैसले में हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सारे लोगों का ख्याल रखा जाए। अयोध्या की बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने कहा का ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर फैसले का दिन देश के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे देश की किसी भी अदालत के लिए हिंदू, मुस्लिम, सिख तथा ईसाई बराबर हैं। कोर्ट तो कानून के हिसाब से फैसला करता है। हमारा यही मानना है कि ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर फैसला ऐसा होना चाहिए ताकि देश-विदेश के लोग जानें कि हिंदुस्तान में ऐसा फैसला हुआ। फैसला वही होना चाहिए जिसमें हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सारे लोगों का ख्याल रखा जाए। अयोध्या निवासी इकबाल अंसारी ने कहा कि अदालत सबूत के आधार पर फैसला करती है। कोर्ट का जो भी फैसला होगा हम उसका सम्मान करेंगे कोर्ट का जो भी फैसला होगा हम उसका सम्मान करेंगे।
इंडिया न्यूज, वाराणसीः Gyanvapi Masjid Case: ज्ञानवापी मस्जिद केस में डिस्ट्रिक कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद का मामला सुनवाई के योग्य है। कोर्ट के इसी फैसले का लोगों को करीब एक वर्ष से इंतजार था। कोर्ट अब इस मामले में बाईस को अगली सुनवाई करेगी। बाबरी मामले में पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने कहा है कि फैसला ऐसा होना चाहिए ताकि देश-विदेश के लोग जानें कि हिंदुस्तान में ऐसा फैसला हुआ। इस फैसले में हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सारे लोगों का ख्याल रखा जाए। अयोध्या की बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने कहा का ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर फैसले का दिन देश के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे देश की किसी भी अदालत के लिए हिंदू, मुस्लिम, सिख तथा ईसाई बराबर हैं। कोर्ट तो कानून के हिसाब से फैसला करता है। हमारा यही मानना है कि ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर फैसला ऐसा होना चाहिए ताकि देश-विदेश के लोग जानें कि हिंदुस्तान में ऐसा फैसला हुआ। फैसला वही होना चाहिए जिसमें हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सारे लोगों का ख्याल रखा जाए। अयोध्या निवासी इकबाल अंसारी ने कहा कि अदालत सबूत के आधार पर फैसला करती है। कोर्ट का जो भी फैसला होगा हम उसका सम्मान करेंगे कोर्ट का जो भी फैसला होगा हम उसका सम्मान करेंगे।
पुलिस यह पता लगाने में भी जुटी है कि मरकज से कितने लोगों को दिल्ली की दूसरी मस्जिदों या फिर घरों में शिफ्ट किया गया। मरकज के मेंबर्स से यह भी पूछा गया है कि उनके संगठन के नाम से कर्फ्यू पास जारी किए गए थे और 12 मार्च के बाद कौन-कौन से सरकारी अधिकारी उनके यहां पहुंचे थे। पलवल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ब्रह्मदीप सिंह ने मीडिया से कहा, "जमात से आए कुल 88 लोगों के नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 13 के कोविड-19 से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। " प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से लाइट बंद कर दीया जलाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा," हम पांच अप्रैल रविवार को रात 9 बजे अपने घरों की लाइट बंद कर के नौ मिनट तक घर के दरवाजे पर या बालकनी में खड़े रहकर मोमबत्ती या मोबाइल की लाइट जलाए। दुनिया को प्रकाश की ओर जाना है। ऐसा करने से एहसास होगा कि हम अकेले नहीं हैं। " कोरोनावायरस की वजह से हुए लॉकडाउन की वजह से फिल्म इंडस्ट्री को काफी नुकसान से गुजरना पड़ रहा है, ऐसे में कई स्टार्स और संगठन इन मजदूरों की आर्थिक मदद के लिए आगे आए हैं। जिसमे अब यश चोपड़ा फाउंडेशन का नाम भी जुड़ गया है। लोगों को पेंशन समय से मिले इसके उप मुख्यमंत्री ने कहा कि, हम समय से वेतन और पेंशन का पैसा रिलीज कर देंगे। उन्होंने कहा कि किसी के वेतन से किसी तरह की कटौती नहीं की जायेगी, लेकिन हमारी कर्मचारियों से अपील होगी, वो कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में मदद करें। तबलीगी जमात में शामिल होने वालों पर पहले भी मेडिकल स्टाफ के साथ बदतमीजी करने के आरोप लगे हैं। इससे पहले गाजियाबाद के सरकारी अस्पताल में जमात के 6 लोगों पर कर्मचारियों और नर्सों के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा है। चीन ने 54 अफ्रीकी देशों के साथ तकनीकी सहयोग किया और उन्हें तकनीकी सहायता दी। दूसरी तरफ अफ्रीकी देशों में भेजे गये चीनी चिकित्सा दलों ने अफ्रीकी देशों में महामारी को रोकने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। देश में कोविड-19 के कारण 21 दिनों के लॉकडाउन के बीच अभिनेता पंकज त्रिपाठी को सूर्यास्त देखने का समय मिल रहा है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपने अंदर क्रिएटिव शौक जगाने और इस समय का आनंद लेने का आग्रह किया। पाकिस्तान की इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने देश में तीन और चार सितारा होटलों को क्वारंटाइन सेंटर बनाने को मंजूरी दे दी है। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी की योजना यहां कोरोनावायरस संक्रमण से संक्रमित लोगों को एकांतवास में रखने की है। टेलीविजन अभिनेता अर्जुन बिजलानी ने नाश्ते के लिए 'अंडे की भुर्जी' बनाने के लिए रसोई की कमान खुद थाम ली, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इसमें दूसरा मौका नहीं मिलता है।
पुलिस यह पता लगाने में भी जुटी है कि मरकज से कितने लोगों को दिल्ली की दूसरी मस्जिदों या फिर घरों में शिफ्ट किया गया। मरकज के मेंबर्स से यह भी पूछा गया है कि उनके संगठन के नाम से कर्फ्यू पास जारी किए गए थे और बारह मार्च के बाद कौन-कौन से सरकारी अधिकारी उनके यहां पहुंचे थे। पलवल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ब्रह्मदीप सिंह ने मीडिया से कहा, "जमात से आए कुल अठासी लोगों के नमूनों की जांच की गई, जिनमें से तेरह के कोविड-उन्नीस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। " प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से लाइट बंद कर दीया जलाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा," हम पांच अप्रैल रविवार को रात नौ बजे अपने घरों की लाइट बंद कर के नौ मिनट तक घर के दरवाजे पर या बालकनी में खड़े रहकर मोमबत्ती या मोबाइल की लाइट जलाए। दुनिया को प्रकाश की ओर जाना है। ऐसा करने से एहसास होगा कि हम अकेले नहीं हैं। " कोरोनावायरस की वजह से हुए लॉकडाउन की वजह से फिल्म इंडस्ट्री को काफी नुकसान से गुजरना पड़ रहा है, ऐसे में कई स्टार्स और संगठन इन मजदूरों की आर्थिक मदद के लिए आगे आए हैं। जिसमे अब यश चोपड़ा फाउंडेशन का नाम भी जुड़ गया है। लोगों को पेंशन समय से मिले इसके उप मुख्यमंत्री ने कहा कि, हम समय से वेतन और पेंशन का पैसा रिलीज कर देंगे। उन्होंने कहा कि किसी के वेतन से किसी तरह की कटौती नहीं की जायेगी, लेकिन हमारी कर्मचारियों से अपील होगी, वो कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में मदद करें। तबलीगी जमात में शामिल होने वालों पर पहले भी मेडिकल स्टाफ के साथ बदतमीजी करने के आरोप लगे हैं। इससे पहले गाजियाबाद के सरकारी अस्पताल में जमात के छः लोगों पर कर्मचारियों और नर्सों के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा है। चीन ने चौवन अफ्रीकी देशों के साथ तकनीकी सहयोग किया और उन्हें तकनीकी सहायता दी। दूसरी तरफ अफ्रीकी देशों में भेजे गये चीनी चिकित्सा दलों ने अफ्रीकी देशों में महामारी को रोकने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। देश में कोविड-उन्नीस के कारण इक्कीस दिनों के लॉकडाउन के बीच अभिनेता पंकज त्रिपाठी को सूर्यास्त देखने का समय मिल रहा है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपने अंदर क्रिएटिव शौक जगाने और इस समय का आनंद लेने का आग्रह किया। पाकिस्तान की इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने देश में तीन और चार सितारा होटलों को क्वारंटाइन सेंटर बनाने को मंजूरी दे दी है। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी की योजना यहां कोरोनावायरस संक्रमण से संक्रमित लोगों को एकांतवास में रखने की है। टेलीविजन अभिनेता अर्जुन बिजलानी ने नाश्ते के लिए 'अंडे की भुर्जी' बनाने के लिए रसोई की कमान खुद थाम ली, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इसमें दूसरा मौका नहीं मिलता है।
२ - रूम म कृषि की कौन सी व्यवस्था है और वह व्यवस्था भारत के लिए उतनी उपयुक्त क्या नहीं है ? --भारताय मामा की दुर्दशा के क्या कारण है और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है ? ४~~ सामूहिक सेती औौर सहकारीसेती म क्या अन्तर है? अध्ययनश्रथ ताना-सतुलित, क्षमता, बान्द्रत । रचना - गाग की उन्नति व सम्बन्ध में एक लेख लिखा । काखेतीको अवस्थाका अध्ययन करा और सहकारी सेतो का प्रचार करा । [ १४ ] . विजयादशमी का सन्देश [ साधारणतः लोग विजयादशमी को रावण पर राम की विजय का पर्व भ्रमझते हैं। परन्तु विद्वान लेखक ने यहाँ विजयादशमी के ऐतिहासिक विकासक्रम का अध्ययन प्रस्तुत किया है। मचमुच विजयादशमी में कई पर्य मिले हुए हैं, इनमें पाँच मुख्य हैं- कृषारम्भ, सीमोल्लंघन, रा कौत्समुनि कोदान, गम विजय, भगवान बुद्ध का जन्म दिने प्रस्तुत लेख में लेखक ने बड़े अच्छे ढंग से विजयादशमी संबंधी रीति-रिवाजों की व्याख्या की है और एक नया संदेश दिया है । ] मूर्तिमन्त, स्थिरतामूलक, परिचर्या, समुद्रवलयांकित, तपस्तेज आगरे में मुगलकाल को जो इमारतें है, उसमें एक विशेषता है कि उनके निचले खंड लाल पत्थर के हैं और ऊपर वाले सफेद पत्थर के । लाल पत्थर का काम जहाँगीर के समय का और सफेद पत्थर का शाहजहाँ के समय का । हर इमारत में इस तरह कालक्रम का इतिहास वर्णभेद से मूर्तिमन्त दिखलायी देता है। किसी भी पुराने बड़े शहरमें पुरानो घम्ती और नई यस्ती एक दूसरे से सटी हुई नजर आती हैं, या वस्तियों को तहाँ पर तहूँ जमी हुई दिखाई देती हैं। भाषा को कहावतों में भी भिन्न-भिन्न समय का इतिहास समाया हुआ है। नदी के किनारे हर साल जो कीचड़ की तहाँ पर तहूँ जम जाती है, अन्त में उन्हों से घरतो की भट्टी में एक पत्थर वन जाता है। दशहरे का त्योहर भी एक ही त्योहार होते हुये, भिन्न काल के भिन्न-भिन्न स्तरों का बना हुआ है। दशहरे के त्योहार के साथ असंख्य युगों के असंख्य प्रकार के आयें पुरुषों की विजय जुटी हुई है। मनुष्य-मनुष्य का संघर्ष जितना महत्व का है, उतना ही था
दो - रूम म कृषि की कौन सी व्यवस्था है और वह व्यवस्था भारत के लिए उतनी उपयुक्त क्या नहीं है ? --भारताय मामा की दुर्दशा के क्या कारण है और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है ? चार~~ सामूहिक सेती औौर सहकारीसेती म क्या अन्तर है? अध्ययनश्रथ ताना-सतुलित, क्षमता, बान्द्रत । रचना - गाग की उन्नति व सम्बन्ध में एक लेख लिखा । काखेतीको अवस्थाका अध्ययन करा और सहकारी सेतो का प्रचार करा । [ चौदह ] . विजयादशमी का सन्देश [ साधारणतः लोग विजयादशमी को रावण पर राम की विजय का पर्व भ्रमझते हैं। परन्तु विद्वान लेखक ने यहाँ विजयादशमी के ऐतिहासिक विकासक्रम का अध्ययन प्रस्तुत किया है। मचमुच विजयादशमी में कई पर्य मिले हुए हैं, इनमें पाँच मुख्य हैं- कृषारम्भ, सीमोल्लंघन, रा कौत्समुनि कोदान, गम विजय, भगवान बुद्ध का जन्म दिने प्रस्तुत लेख में लेखक ने बड़े अच्छे ढंग से विजयादशमी संबंधी रीति-रिवाजों की व्याख्या की है और एक नया संदेश दिया है । ] मूर्तिमन्त, स्थिरतामूलक, परिचर्या, समुद्रवलयांकित, तपस्तेज आगरे में मुगलकाल को जो इमारतें है, उसमें एक विशेषता है कि उनके निचले खंड लाल पत्थर के हैं और ऊपर वाले सफेद पत्थर के । लाल पत्थर का काम जहाँगीर के समय का और सफेद पत्थर का शाहजहाँ के समय का । हर इमारत में इस तरह कालक्रम का इतिहास वर्णभेद से मूर्तिमन्त दिखलायी देता है। किसी भी पुराने बड़े शहरमें पुरानो घम्ती और नई यस्ती एक दूसरे से सटी हुई नजर आती हैं, या वस्तियों को तहाँ पर तहूँ जमी हुई दिखाई देती हैं। भाषा को कहावतों में भी भिन्न-भिन्न समय का इतिहास समाया हुआ है। नदी के किनारे हर साल जो कीचड़ की तहाँ पर तहूँ जम जाती है, अन्त में उन्हों से घरतो की भट्टी में एक पत्थर वन जाता है। दशहरे का त्योहर भी एक ही त्योहार होते हुये, भिन्न काल के भिन्न-भिन्न स्तरों का बना हुआ है। दशहरे के त्योहार के साथ असंख्य युगों के असंख्य प्रकार के आयें पुरुषों की विजय जुटी हुई है। मनुष्य-मनुष्य का संघर्ष जितना महत्व का है, उतना ही था
Sawan Mangalwar: आज सावन माह का दूसरा मंगलवार और मंगला गौरी व्रत है। इस दिन माता पार्वती और महादेव की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। इसी के साथ मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने से जीवन के सब संकट कट जाते हैं। सच्चे मन से संकटमोचन कि की गई पूजा सारे विघ्नों को मिनटों में दूर कर देती है इसलिए सावन माह का दूसरा मंगलवार इन राशियों के लिए बहुत खास रहने वाला है। तो आइए जानते हैं, हनुमान जी की कृपा से कौन सी राशियों की किस्मत खुलने वाली है। मेष राशिः कोई नया काम खोलने का प्लान बना सकते हैं। जो लोग प्रॉपर्टी का काम कर रहे हैं, उनकी डील पक्की होने की संभावना है। वृष राशिः आज महादेव की कृपा से वृष राशि वालों को कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। सेहत को लेकर सावधान रहने की जरुरत है। माता के साथ किसी बात पर बहस हो सकती है, सोच-समझ कर बोलें। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को जल्दी ही मनचाही जॉब मिलेगी। मिथुन राशिः कारोबार के लिहाज से मिथुन राशि वालों की लॉटरी निकल आएगी। अधूरे सपने पूरे होंगे। बहुत समय बाद किसी रिश्तेदार से मिलना हो सकता है। सेहत की बात करें तो हाथ-पैर में थोड़ा दर्द रहेगा। कर्क राशिः अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए बहुत से अवसर प्राप्त होंगे। परिवार में भी सुख-शांति बनी रहेगी। कार्यक्षेत्र में जो काम खराब हो गया था, उसका समाधान मिल सकता है। आर्थिक दशा पहले से भी ज्यादा बेहतर रहेगी। सिंह राशिः आज आर्थिक पक्ष मजबूत होने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में अधिकारियों का भरपूर सहयोग मिलेगा। परिवार के साथ रिश्तों में मजबूती आएगी। अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें। कन्या राशिः आज व्यावसायिक काम को समय से निपटाने का प्रयास करेंगे। परिवार में किसी बात को लेकर मूड खराब रहेगा। छात्र परीक्षा में बढ़िया परिणाम लेकर आएंगे। तुला राशिः आज न चाहते हुए भी कार्यक्षेत्र में ओवरटाइम लगाना पड़ेगा। रचनात्मक कार्यों को करने का मन करेगा। युवा वर्ग अपने करियर को लेकर कोई बड़ा कदम उठाएंगे, जो सही साबित होगा। वृश्चिक राशिः आज किस्मत आपके साथ रहेगी। किसी ऐसे व्यक्ति से मुलाकात होगी, जो कारोबार के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होगा। मुश्किल समय में रिश्तेदार का भरपूर साथ मिलेगा। किसी दोस्त के घर जाकर मौज-मस्ती करने का मौका मिलेगा। धनु राशिः आज संतान की किसी बात को लेकर चिंतित हो सकते हैं। ऑफिस में अचानक से किसी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। युवाओं का लिया गया निर्णय कष्टदायी हो सकता है। मकर राशिः कारोबार के सिलसिले से किसी यात्रा पर जाना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में किसी बड़े प्रोजक्ट पर काम करने का मौका मिलेगा। किसी भी काम को करने से पहले उसका टाइम टेबल बना लें। सेहत के मामले में थोड़ा कमजोर महसूस करेंगे। कुम्भ राशिः आज आपका आत्मविश्वास सिर चढ़कर बोलेगा। करियर में आगे बढ़ने के बहुत से मौके मिलेंगे। रिश्तों को और मधुर बनाने के लिए कुछ समय परिवार के साथ बिताएंगे। मित्रों के साथ यात्रा पर जाने का प्रोग्राम बनेगा। मीन राशिः आज माता-पिता के सहयोग से कारोबार को आगे ले जाने में कामयाब रहेंगे। कोई दोस्त आपके काम की प्रशंसा करेगा। कुछ अलग और मनोरंजक कार्य करने का मौका मिलेगा। धन लाभ के भी योग बनेंगे।
Sawan Mangalwar: आज सावन माह का दूसरा मंगलवार और मंगला गौरी व्रत है। इस दिन माता पार्वती और महादेव की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। इसी के साथ मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने से जीवन के सब संकट कट जाते हैं। सच्चे मन से संकटमोचन कि की गई पूजा सारे विघ्नों को मिनटों में दूर कर देती है इसलिए सावन माह का दूसरा मंगलवार इन राशियों के लिए बहुत खास रहने वाला है। तो आइए जानते हैं, हनुमान जी की कृपा से कौन सी राशियों की किस्मत खुलने वाली है। मेष राशिः कोई नया काम खोलने का प्लान बना सकते हैं। जो लोग प्रॉपर्टी का काम कर रहे हैं, उनकी डील पक्की होने की संभावना है। वृष राशिः आज महादेव की कृपा से वृष राशि वालों को कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। सेहत को लेकर सावधान रहने की जरुरत है। माता के साथ किसी बात पर बहस हो सकती है, सोच-समझ कर बोलें। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को जल्दी ही मनचाही जॉब मिलेगी। मिथुन राशिः कारोबार के लिहाज से मिथुन राशि वालों की लॉटरी निकल आएगी। अधूरे सपने पूरे होंगे। बहुत समय बाद किसी रिश्तेदार से मिलना हो सकता है। सेहत की बात करें तो हाथ-पैर में थोड़ा दर्द रहेगा। कर्क राशिः अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए बहुत से अवसर प्राप्त होंगे। परिवार में भी सुख-शांति बनी रहेगी। कार्यक्षेत्र में जो काम खराब हो गया था, उसका समाधान मिल सकता है। आर्थिक दशा पहले से भी ज्यादा बेहतर रहेगी। सिंह राशिः आज आर्थिक पक्ष मजबूत होने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में अधिकारियों का भरपूर सहयोग मिलेगा। परिवार के साथ रिश्तों में मजबूती आएगी। अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें। कन्या राशिः आज व्यावसायिक काम को समय से निपटाने का प्रयास करेंगे। परिवार में किसी बात को लेकर मूड खराब रहेगा। छात्र परीक्षा में बढ़िया परिणाम लेकर आएंगे। तुला राशिः आज न चाहते हुए भी कार्यक्षेत्र में ओवरटाइम लगाना पड़ेगा। रचनात्मक कार्यों को करने का मन करेगा। युवा वर्ग अपने करियर को लेकर कोई बड़ा कदम उठाएंगे, जो सही साबित होगा। वृश्चिक राशिः आज किस्मत आपके साथ रहेगी। किसी ऐसे व्यक्ति से मुलाकात होगी, जो कारोबार के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होगा। मुश्किल समय में रिश्तेदार का भरपूर साथ मिलेगा। किसी दोस्त के घर जाकर मौज-मस्ती करने का मौका मिलेगा। धनु राशिः आज संतान की किसी बात को लेकर चिंतित हो सकते हैं। ऑफिस में अचानक से किसी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। युवाओं का लिया गया निर्णय कष्टदायी हो सकता है। मकर राशिः कारोबार के सिलसिले से किसी यात्रा पर जाना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में किसी बड़े प्रोजक्ट पर काम करने का मौका मिलेगा। किसी भी काम को करने से पहले उसका टाइम टेबल बना लें। सेहत के मामले में थोड़ा कमजोर महसूस करेंगे। कुम्भ राशिः आज आपका आत्मविश्वास सिर चढ़कर बोलेगा। करियर में आगे बढ़ने के बहुत से मौके मिलेंगे। रिश्तों को और मधुर बनाने के लिए कुछ समय परिवार के साथ बिताएंगे। मित्रों के साथ यात्रा पर जाने का प्रोग्राम बनेगा। मीन राशिः आज माता-पिता के सहयोग से कारोबार को आगे ले जाने में कामयाब रहेंगे। कोई दोस्त आपके काम की प्रशंसा करेगा। कुछ अलग और मनोरंजक कार्य करने का मौका मिलेगा। धन लाभ के भी योग बनेंगे।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर बयान देकर मुश्किलों में घिर गए हैं। राहुल ने राफेल मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री एक महिला (रक्षा मंत्री) के पीछे छिप रहे हैंं। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस बयान पर स्वतः संज्ञान लेेते हुए राहुल को नोटिस जारी किया है। राहुल के इस बयान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के बड़े नेताओं ने भी पलटवार किया था। आइये जानते हैं पूरा मामला। बुधवार को जयपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में बचाव के लिए एक महिला का सहारा लिया क्योंकि वे खुद का बचाव नहीं कर सकते थे। राहुल ने कहा, "प्रधानमंत्री जनता की अदालत से भाग गए और कहा कि सीतारमण जी मुझे बचाओ, मैं खुद को भी नहीं बचा सकता, आप हमें बचाओ। लेकिन वे भी अपने ढाई घंटों के भाषण में उन्हें नहीं बचा सकीं। " राहुल के इस बयान की राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि राहुल गांधी का यह बयान महिला विरोधी है। राहुल इतने बड़े लोकतांत्रिक देश की रक्षा मंत्री को कमजोर कह रहे हैं। क्या वे सोचते हैं कि एक महिला कमजोर है? इसके बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने ट्विटर पर जानकारी दी कि आयोग इस मामले में राहुल गांधी को नोटिस जारी करेगा। राहुल के इस बयान पर प्रधानमंत्री मोदी ने पलटवार करते हुए कहा कि यह गर्व की बात है देश की बेटी पहली बार देश की रक्षा मंत्री बनी हैं। उन्होंने कहा संसद में रक्षा मंत्री के तथ्यों से बौखलाए कुछ लोग नारी का अपमान करने पर तुले हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर कहा कि राहुल का यह बयान निचले स्तर का राजनीतिक बयान है। वहीं अमित शाह ने लिखा कि उन्हें महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी के पलटवार का जवाब देते हुए राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा कि बातों को घुमाइये मत और मेरे सवालों का जवाब दीजिए। उन्होंने लिखा, 'हमारी संस्कृति में महिलाओं की इज्जत करना घर से शुरू होता है। मर्द बनिए और मेरे सवालों का जवाब दीजिए। क्या वायुसेना और रक्षा मंत्रालय ने उस समय आपत्ति नहीं जताई थी जब आपने वास्तविक राफेल सौदे को बदला था? हां या ना? '
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर बयान देकर मुश्किलों में घिर गए हैं। राहुल ने राफेल मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री एक महिला के पीछे छिप रहे हैंं। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस बयान पर स्वतः संज्ञान लेेते हुए राहुल को नोटिस जारी किया है। राहुल के इस बयान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के बड़े नेताओं ने भी पलटवार किया था। आइये जानते हैं पूरा मामला। बुधवार को जयपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में बचाव के लिए एक महिला का सहारा लिया क्योंकि वे खुद का बचाव नहीं कर सकते थे। राहुल ने कहा, "प्रधानमंत्री जनता की अदालत से भाग गए और कहा कि सीतारमण जी मुझे बचाओ, मैं खुद को भी नहीं बचा सकता, आप हमें बचाओ। लेकिन वे भी अपने ढाई घंटों के भाषण में उन्हें नहीं बचा सकीं। " राहुल के इस बयान की राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि राहुल गांधी का यह बयान महिला विरोधी है। राहुल इतने बड़े लोकतांत्रिक देश की रक्षा मंत्री को कमजोर कह रहे हैं। क्या वे सोचते हैं कि एक महिला कमजोर है? इसके बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने ट्विटर पर जानकारी दी कि आयोग इस मामले में राहुल गांधी को नोटिस जारी करेगा। राहुल के इस बयान पर प्रधानमंत्री मोदी ने पलटवार करते हुए कहा कि यह गर्व की बात है देश की बेटी पहली बार देश की रक्षा मंत्री बनी हैं। उन्होंने कहा संसद में रक्षा मंत्री के तथ्यों से बौखलाए कुछ लोग नारी का अपमान करने पर तुले हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर कहा कि राहुल का यह बयान निचले स्तर का राजनीतिक बयान है। वहीं अमित शाह ने लिखा कि उन्हें महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी के पलटवार का जवाब देते हुए राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा कि बातों को घुमाइये मत और मेरे सवालों का जवाब दीजिए। उन्होंने लिखा, 'हमारी संस्कृति में महिलाओं की इज्जत करना घर से शुरू होता है। मर्द बनिए और मेरे सवालों का जवाब दीजिए। क्या वायुसेना और रक्षा मंत्रालय ने उस समय आपत्ति नहीं जताई थी जब आपने वास्तविक राफेल सौदे को बदला था? हां या ना? '
A subscription to JoVE is required to view this content. You will only be able to see the first 2 minutes. The JoVE video player is compatible with HTML5 and Adobe Flash. Older browsers that do not support HTML5 and the H.264 video codec will still use a Flash-based video player. We recommend downloading the newest version of Flash here, but we support all versions 10 and above. If that doesn't help, please let us know. Please note that all translations are automatically generated. हम एक खोपड़ी बेस ट्यूमर के लिए एंडोस्कोपिक एंडोनासल सर्जरी के लिए रोगी के काम में प्रसार एमआरआई ट्रैक्टोग्राफी को एकीकृत करने के लिए एक प्रोटोकॉल प्रस्तुत करते हैं। पूर्व और इंट्रा-ऑपरेटिव चरणों में इन न्यूरोइमेजिंग अध्ययनों को अपनाने के तरीके बताए गए हैं। एक एकीकृत न्यूरोइमेजिंग और न्यूरोसर्जरी प्रोटोकॉल का उपयोग करके, रोगी-विशिष्ट ट्यूमर रीसेक्शन सर्जरी को दर्जी करने के लिए एक सहसीशिक ढांचे में विभिन्न विशेषज्ञता को मर्ज करना संभव है। एमआरआई ट्रैक्टोग्राफी का उपयोग करके, सफेद पदार्थ पथ अव्यवस्था और ट्यूमर दूरी की कल्पना करना संभव है। ग्लियोमा सर्जरी में इसकी बहुमुखी प्रतिभा स्थापित की गई है और दवा प्रतिरोधी फोकल मिर्गी में भी लागू की जा सकती है। पीयूष, डाइएन्सेफेलिक और खोपड़ी आधारित ट्यूमर के लिए एंडोस्कोपिक एंडोनासल सर्जरी में उन्नत न्यूरोइमेजिंग तकनीकों का एकीकरण सर्जिकल सुरक्षा बढ़ाने, जटिलताओं को कम करने और रोगी परिणामों और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में प्रभावी है। कार्य एफएमआरआई के साथ संयुक्त एमआरआई ट्रैक्टोग्राफी सर्जरी के बाद मस्तिष्क संरचनात्मक और कार्यात्मक पुनर्गठन की निगरानी की अनुमति देता है। इसके अलावा, नैदानिक परिणामों के साथ संबंध नैदानिक और अनुसंधान प्रस्तावों के लिए उपयोगी हैं। एंडोस्कोपिक एंडोनासल सर्जरी और उन्नत न्यूरोइमेजिंग दोनों को लंबी प्रशिक्षण अवधि की आवश्यकता होती है। हम अकादमिक तृतीयक रेफरल केंद्रों में एक पर्यवेक्षक या फैलोशिप का सुझाव देते हैं जिस पर इन तकनीकों को लागू किया जा रहा है । दृश्यमान प्रदर्शन के माध्यम से, इस विधि के चरणों को बनाना संभव है जिन्हें अभी तक मानकीकृत नहीं किया गया है और यह स्पष्ट करना कि विभिन्न विशेषज्ञता को कैसे एकीकृत किया जाए। एक मानकीकृत मल्टीमॉडल एमआरआई प्रोटोकॉल उच्च क्षेत्र स्कैनर का उपयोग करना, टी 1-भारित पूर्व और पोस्ट-गाडोलिनियम कंट्रास्ट एजेंट प्रशासन और फ्लेयर टी 2-भारित इमेजिंग का उपयोग करके उच्च रिज़ॉल्यूशन और वॉल्यूमेट्रिक शारीरिक दृश्यों को प्राप्त करें। अनुक्रम प्रति अनुक्रम के बारे में पांच मिनट के एक घन मिलीमीटर स्कैनिंग समय के एक करके एक के एक के एक आइसोट्रोपिक संकल्प प्रदान करने के लिए निरंतर sagittal स्लाइस प्राप्त करें । कपाल तंत्रिका दृश्य के लिए ट्यूमर क्षेत्र को मात्रात्मक रचनात्मक हस्तक्षेप और 0.5 बाय 0.5 द्वारा 0.5 घन मिलीमीटर और लगभग नौ मिनट के स्कैनिंग समय के साथ कपाल तंत्रिका दृश्य के लिए ट्यूमर क्षेत्र को स्थानीयकृत करने के लिए एक उच्च-रिज़ॉल्यूशन टी 2-भारित अनुक्रम प्राप्त करें। एकल शॉट इको प्लानर छवियों का उपयोग करके प्रसार-भारित दृश्यों का अधिग्रहण करें, दो द्वारा दो घन मिलीमीटर स्वरल आयाम, 64 चुंबकीय ढाल दिशाओं के साथ 2, 000 सेकंड प्रति वर्ग मिलीमीटर बी मूल्य, 98 मिलीसेकंड इको टाइम, और 4, 300 मिलीसेकोंड विश्राम समय। पूर्वकाल-पीछे और पांच मिनट के स्कैनिंग समय के लिए निर्धारित चरण एन्कोडिंग दिशा के साथ प्रसार-भारित अधिग्रहण की शुरुआत में एक शून्य बी मूल्य के साथ पांच खंड प्राप्त करें। फिर एक शून्य बी मूल्य के साथ तीन संस्करणों का अधिग्रहण, लेकिन गूंज planar छवि अधिग्रहण और ४२ सेकंड के एक स्कैनिंग समय के कारण किसी भी इमेजिंग विकृतियों को सही करने के लिए पीछे पूर्वकाल चरण encoding दिशा उलट । अक्षीय स्लाइस के पास निरंतर अधिग्रहण किया जाएगा। ट्यूमर के विभाजन के लिए, आईटीके-स्नैप सॉफ्टवेयर में छवियों को लोड करें और टी1 में ट्यूमर का निरीक्षण करें। निई, स्वभाव। नी, और t1_contrast। नी छवियां। फिर घाव को आकर्षित करते समय पालन करने के लिए शारीरिक विमान का चयन करें। खंडित ट्यूमर के ट्रैक्टोग्राफिक विश्लेषण के लिए, विभिन्न स्थानिक दिशाओं में विसारकता को मॉडल करने के लिए एफएसएल-डीटिफिट फ़ंक्शन चलाएं और एफए एनआईआई, एमडी प्राप्त करें। ii, और v1. नी डिफ्यूजन टेनर मैप्स। किसी भी असामान्य प्रसार मूल्यों का आकलन करने के लिए प्रसार टेन्सर इमेजिंग मानचित्रों का मूल्यांकन करें जो ट्यूमर एडीमा या घुसपैठ की उपस्थिति में हो सकते हैं और seed_image का चयन करते हैं और बीज लक्ष्य दृष्टिकोण को अपनाने के लिए प्राथमिकताओं के शारीरिक ज्ञान के आधार पर विकल्प शामिल करते हैं। फिर मैन्युअल रूप से बीज या पथ विज्ञान के लिए लक्ष्य निर्धारित करने के लिए ब्याज के क्षेत्रों को आकर्षित। प्रसार टेंसर इमेजिंग मापदंडों के सटीक विवरण के लिए, लंबे ट्रैक्ट एल्गोरिदम जैसे मैटलैब-आधारित एल्गोरिदम का उपयोग करें जो लैलैकियन ऑपरेटर गुणों के साथ सतह पथ ज्यामिति को मॉडल करता है। सर्फ आइस सॉफ्टवेयर में 3डी वॉल्यूम रेंडरिंग की कल्पना करने के लिए फाइल पर क्लिक करें और कमांड पैनल में खुलें और ओबेज फाइल का चयन करें। प्रक्रिया को शेड्यूल करने से पहले, वजन बढ़ाने के बारे में एनाम्नेस्टिक जानकारी के संग्रह के साथ एक न्यूरोलॉजिकल शारीरिक परीक्षा करें, भूख की अनुभूति, 24 घंटे के लिए हर दो मिनट में गुदा के तापमान की निरंतर निगरानी, और 24 घंटे की नींद/वेक साइकिल रिकॉर्डिंग । ट्यूमर विभाजन के परिणामों और कार्यात्मक वाक्पटु तंत्रिका संरचनाओं के साथ संबंध के आधार पर, सबसे उपयुक्त शल्य चिकित्सा दृष्टिकोण निर्धारित करने के लिए एक कोलेजियम टीम की बैठक में सर्जरी के लिए रोगी उम्मीदवारी पर चर्चा करें। तंत्रिका संरचनाओं को चोट के सबसे कम जोखिम के साथ सर्जिकल गलियारे का चयन करने के बाद, प्रत्येक मामले के लिए सुरक्षित पुनर्सेक्शन क्षेत्र को परिभाषित करें, महत्वपूर्ण तंत्रिका संरचना का स्थानीयकरण करें जिसके तहत स्थायी क्षति से बचने के लिए रिसेक्शन को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। फिर सबसे प्रासंगिक एमआरआई दृश्यों को मर्ज करें और ट्रैकोग्राफी पुनर्निर्माण सहित दृश्यों को ऑपरेटिव चरण न्यूरो नेविगेशन सिस्टम में आयात करें। प्रक्रिया शुरू करने से पहले, मस्तिष्क सर्जरी विद्युत चुंबकीय पंजीकरण मोडलि मोडलि का चयन करें। रोगी पर न्यूरो नेविगेशन सिस्टम पंजीकृत करें, एक मुफ्त ट्रैकिंग तकनीक या बाहरी मार्कर अपनाएं और प्राप्त पंजीकरण की सटीकता को नियंत्रित करें, आयातित एमआरआई पर बाहरी मार्कर की स्थिति की जांच करें। जब रोगी तैयार हो जाए, तो नासोसेप्टल फ्लैप को काटने के लिए शून्य डिग्री एंडोस्कोप का उपयोग करें। इसके बाद, मध्य टर्बिनेट को यथासंभव संरक्षित करते हुए एक पूर्वकाल स्फेनोइडेक्टॉमी और एक पीछे के सेप्टोस्टोमी और एथ्मोइडेक्टॉमी का प्रदर्शन करें। तहखाने और ट्यूबरकुलम हड्डियों को खोलें। श्रेष्ठ इंट्राआवेणस साइनस के जमाव के बाद दउरा परत में एच के आकार का चीरा लगा लें। आरेक्नोडल विमान द्वारा ट्यूमर को छोड़ दें और ट्यूमर को केंद्रीय रूप से डी-बल्क करें। आसपास के डाइएंसेफेलिक तंत्रिका संरचनाओं से ट्यूमर कैप्सूल निकालें और ट्यूमर के किसी भी शेष टुकड़े के लिए सर्जिकल गुहा का पता लगाने के लिए कोण प्रकाशिकी का उपयोग करें। जब ट्यूमर के सभी हटा दिया गया है, ड्यूल विकल्प की एक इंट्राड्यूरल इंट्राक्रैनियल परत का उपयोग करने के लिए ऑस्टियो-मेनिंगियल खोलने बंद । फिर पेट की चर्बी और अंत में हड्डी के साथ ड्यूरल स्थानापन्न की एक अतिरिक्त इंट्राक्रैनियल परत रखें और नसोसेप्टल फ्लैप के साथ बंद होने को कवर करें। इस प्रतिनिधि रोगी में, मस्तिष्क एमआरआई एक सुप्रासेलर ट्यूमर ऑप्टोचियास्टिक सिस्टर्न पर कब्जा करने और एक अनियमित पॉलीसिस्टिक आकृति विज्ञान के साथ तीसरे वेंट्रिकल पर हमला करने का पता चला। ऑप्टिक पाथवे ट्रैक्टोग्राफी और द्विपक्षीय ऑप्टिक कपाल नसों को खंगाला गया, लेकिन मस्तिष्क की हड्डियों और रक्त वाहिकाओं के बीच इंटरफेस के भीतर संवेदनशीलता कलाकृतियों ने ऑप्टिक नसों को ऑप्टिक चियाम को जोड़ने वाले फाइबर के पूर्ण पुनर्निर्माण की अनुमति नहीं दी। पिरामिड ट्रैक्ट डिफ्यूजनिटी प्रोफाइल की जांच और एक लंबे ट्रैक्ट प्रसार टेन्सर इमेजिंग मानचित्र के आंकड़ों ने आंतरिक कैप्सूल के दाहिने पीछे के अंग के स्तर पर एक फोकल फ्लेयर टी 2-भारित हाइपरइंटेंसिटी की उपस्थिति दिखाई, जो बाईं ओर की तुलना में सही मतलब प्रसार उपाय की 5% वृद्धि के अनुरूप है। एंडोस्कोपिक एंडोनासल विस्तारित प्रत्यारोपण ट्रांसट्यूबरकुलम दृष्टिकोण का उपयोग करके, ट्यूमर को अपने सिस्टिक घटक के निकास के साथ-साथ केंद्रीय रूप से डी-बल्क किया गया था। क्रैनियोफेरिनियोमा तब एक दरार विमान के रूप में आरेक्नोइड को अपनाने के लिए तंत्रिका संरचनाओं से उत्तरोत्तर अलग होने में सक्षम था। सर्जरी के अंत में, हाइपोथैलेमिक शरीर रचना विज्ञान के संरक्षण के साथ पूर्ण ट्यूमर हटाने को प्राप्त किया गया था। इसके बाद पेट की चर्बी और नस्टोसेप्टल फ्लैप का इस्तेमाल कर ऑस्टियो ड्यूरल डिफेक्ट की मरम्मत की गई। सर्जरी के तीन महीने बाद, कोई अवशेष या पुनरावृत्ति के साथ एक पूर्ण ट्यूमर हटाने मनाया गया था । प्रीऑपरेटिव वर्कअप में, सबसे प्रासंगिक कदम हैंः एक सटीक प्रसार-भारित दृश्यों अधिग्रहण और ट्यूमर विभाजन। सर्जरी के दौरान, महत्वपूर्ण बिंदु तंत्रिका संरचनाओं की सटीक पहचान है। इस विधि द्वारा प्रदान की गई तंत्रिका संरचनाओं के दृश्य को सभी खोपड़ी-आधारित क्षेत्रों के लिए अपनाया जा सकता है, जिससे कई अन्य ट्यूमर के लिए स्थायी विकलांगता के जोखिम को कम किया जा सकता है। कपाल नसों और न्यूरो रास्तों के पथिक पुनर्निर्माण ट्यूमर और संरचनाओं के बीच संबंधों की हमारी समझ की सुविधा प्रदान कर सकते हैं, संभावित रोगी लक्षणों के लिए एक अभिनव परिणाम कारक प्रदान करते हैं ।
A subscription to JoVE is required to view this content. You will only be able to see the first दो minutes. The JoVE video player is compatible with HTMLपाँच and Adobe Flash. Older browsers that do not support HTMLपाँच and the H.दो सौ चौंसठ video codec will still use a Flash-based video player. We recommend downloading the newest version of Flash here, but we support all versions दस and above. If that doesn't help, please let us know. Please note that all translations are automatically generated. हम एक खोपड़ी बेस ट्यूमर के लिए एंडोस्कोपिक एंडोनासल सर्जरी के लिए रोगी के काम में प्रसार एमआरआई ट्रैक्टोग्राफी को एकीकृत करने के लिए एक प्रोटोकॉल प्रस्तुत करते हैं। पूर्व और इंट्रा-ऑपरेटिव चरणों में इन न्यूरोइमेजिंग अध्ययनों को अपनाने के तरीके बताए गए हैं। एक एकीकृत न्यूरोइमेजिंग और न्यूरोसर्जरी प्रोटोकॉल का उपयोग करके, रोगी-विशिष्ट ट्यूमर रीसेक्शन सर्जरी को दर्जी करने के लिए एक सहसीशिक ढांचे में विभिन्न विशेषज्ञता को मर्ज करना संभव है। एमआरआई ट्रैक्टोग्राफी का उपयोग करके, सफेद पदार्थ पथ अव्यवस्था और ट्यूमर दूरी की कल्पना करना संभव है। ग्लियोमा सर्जरी में इसकी बहुमुखी प्रतिभा स्थापित की गई है और दवा प्रतिरोधी फोकल मिर्गी में भी लागू की जा सकती है। पीयूष, डाइएन्सेफेलिक और खोपड़ी आधारित ट्यूमर के लिए एंडोस्कोपिक एंडोनासल सर्जरी में उन्नत न्यूरोइमेजिंग तकनीकों का एकीकरण सर्जिकल सुरक्षा बढ़ाने, जटिलताओं को कम करने और रोगी परिणामों और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में प्रभावी है। कार्य एफएमआरआई के साथ संयुक्त एमआरआई ट्रैक्टोग्राफी सर्जरी के बाद मस्तिष्क संरचनात्मक और कार्यात्मक पुनर्गठन की निगरानी की अनुमति देता है। इसके अलावा, नैदानिक परिणामों के साथ संबंध नैदानिक और अनुसंधान प्रस्तावों के लिए उपयोगी हैं। एंडोस्कोपिक एंडोनासल सर्जरी और उन्नत न्यूरोइमेजिंग दोनों को लंबी प्रशिक्षण अवधि की आवश्यकता होती है। हम अकादमिक तृतीयक रेफरल केंद्रों में एक पर्यवेक्षक या फैलोशिप का सुझाव देते हैं जिस पर इन तकनीकों को लागू किया जा रहा है । दृश्यमान प्रदर्शन के माध्यम से, इस विधि के चरणों को बनाना संभव है जिन्हें अभी तक मानकीकृत नहीं किया गया है और यह स्पष्ट करना कि विभिन्न विशेषज्ञता को कैसे एकीकृत किया जाए। एक मानकीकृत मल्टीमॉडल एमआरआई प्रोटोकॉल उच्च क्षेत्र स्कैनर का उपयोग करना, टी एक-भारित पूर्व और पोस्ट-गाडोलिनियम कंट्रास्ट एजेंट प्रशासन और फ्लेयर टी दो-भारित इमेजिंग का उपयोग करके उच्च रिज़ॉल्यूशन और वॉल्यूमेट्रिक शारीरिक दृश्यों को प्राप्त करें। अनुक्रम प्रति अनुक्रम के बारे में पांच मिनट के एक घन मिलीमीटर स्कैनिंग समय के एक करके एक के एक के एक आइसोट्रोपिक संकल्प प्रदान करने के लिए निरंतर sagittal स्लाइस प्राप्त करें । कपाल तंत्रिका दृश्य के लिए ट्यूमर क्षेत्र को मात्रात्मक रचनात्मक हस्तक्षेप और शून्य.पाँच बाय शून्य.पाँच द्वारा शून्य.पाँच घन मिलीमीटर और लगभग नौ मिनट के स्कैनिंग समय के साथ कपाल तंत्रिका दृश्य के लिए ट्यूमर क्षेत्र को स्थानीयकृत करने के लिए एक उच्च-रिज़ॉल्यूशन टी दो-भारित अनुक्रम प्राप्त करें। एकल शॉट इको प्लानर छवियों का उपयोग करके प्रसार-भारित दृश्यों का अधिग्रहण करें, दो द्वारा दो घन मिलीमीटर स्वरल आयाम, चौंसठ चुंबकीय ढाल दिशाओं के साथ दो, शून्य सेकंड प्रति वर्ग मिलीमीटर बी मूल्य, अट्ठानवे मिलीसेकंड इको टाइम, और चार, तीन सौ मिलीसेकोंड विश्राम समय। पूर्वकाल-पीछे और पांच मिनट के स्कैनिंग समय के लिए निर्धारित चरण एन्कोडिंग दिशा के साथ प्रसार-भारित अधिग्रहण की शुरुआत में एक शून्य बी मूल्य के साथ पांच खंड प्राप्त करें। फिर एक शून्य बी मूल्य के साथ तीन संस्करणों का अधिग्रहण, लेकिन गूंज planar छवि अधिग्रहण और बयालीस सेकंड के एक स्कैनिंग समय के कारण किसी भी इमेजिंग विकृतियों को सही करने के लिए पीछे पूर्वकाल चरण encoding दिशा उलट । अक्षीय स्लाइस के पास निरंतर अधिग्रहण किया जाएगा। ट्यूमर के विभाजन के लिए, आईटीके-स्नैप सॉफ्टवेयर में छवियों को लोड करें और टीएक में ट्यूमर का निरीक्षण करें। निई, स्वभाव। नी, और tएक_contrast। नी छवियां। फिर घाव को आकर्षित करते समय पालन करने के लिए शारीरिक विमान का चयन करें। खंडित ट्यूमर के ट्रैक्टोग्राफिक विश्लेषण के लिए, विभिन्न स्थानिक दिशाओं में विसारकता को मॉडल करने के लिए एफएसएल-डीटिफिट फ़ंक्शन चलाएं और एफए एनआईआई, एमडी प्राप्त करें। ii, और vएक. नी डिफ्यूजन टेनर मैप्स। किसी भी असामान्य प्रसार मूल्यों का आकलन करने के लिए प्रसार टेन्सर इमेजिंग मानचित्रों का मूल्यांकन करें जो ट्यूमर एडीमा या घुसपैठ की उपस्थिति में हो सकते हैं और seed_image का चयन करते हैं और बीज लक्ष्य दृष्टिकोण को अपनाने के लिए प्राथमिकताओं के शारीरिक ज्ञान के आधार पर विकल्प शामिल करते हैं। फिर मैन्युअल रूप से बीज या पथ विज्ञान के लिए लक्ष्य निर्धारित करने के लिए ब्याज के क्षेत्रों को आकर्षित। प्रसार टेंसर इमेजिंग मापदंडों के सटीक विवरण के लिए, लंबे ट्रैक्ट एल्गोरिदम जैसे मैटलैब-आधारित एल्गोरिदम का उपयोग करें जो लैलैकियन ऑपरेटर गुणों के साथ सतह पथ ज्यामिति को मॉडल करता है। सर्फ आइस सॉफ्टवेयर में तीनडी वॉल्यूम रेंडरिंग की कल्पना करने के लिए फाइल पर क्लिक करें और कमांड पैनल में खुलें और ओबेज फाइल का चयन करें। प्रक्रिया को शेड्यूल करने से पहले, वजन बढ़ाने के बारे में एनाम्नेस्टिक जानकारी के संग्रह के साथ एक न्यूरोलॉजिकल शारीरिक परीक्षा करें, भूख की अनुभूति, चौबीस घंटाटे के लिए हर दो मिनट में गुदा के तापमान की निरंतर निगरानी, और चौबीस घंटाटे की नींद/वेक साइकिल रिकॉर्डिंग । ट्यूमर विभाजन के परिणामों और कार्यात्मक वाक्पटु तंत्रिका संरचनाओं के साथ संबंध के आधार पर, सबसे उपयुक्त शल्य चिकित्सा दृष्टिकोण निर्धारित करने के लिए एक कोलेजियम टीम की बैठक में सर्जरी के लिए रोगी उम्मीदवारी पर चर्चा करें। तंत्रिका संरचनाओं को चोट के सबसे कम जोखिम के साथ सर्जिकल गलियारे का चयन करने के बाद, प्रत्येक मामले के लिए सुरक्षित पुनर्सेक्शन क्षेत्र को परिभाषित करें, महत्वपूर्ण तंत्रिका संरचना का स्थानीयकरण करें जिसके तहत स्थायी क्षति से बचने के लिए रिसेक्शन को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। फिर सबसे प्रासंगिक एमआरआई दृश्यों को मर्ज करें और ट्रैकोग्राफी पुनर्निर्माण सहित दृश्यों को ऑपरेटिव चरण न्यूरो नेविगेशन सिस्टम में आयात करें। प्रक्रिया शुरू करने से पहले, मस्तिष्क सर्जरी विद्युत चुंबकीय पंजीकरण मोडलि मोडलि का चयन करें। रोगी पर न्यूरो नेविगेशन सिस्टम पंजीकृत करें, एक मुफ्त ट्रैकिंग तकनीक या बाहरी मार्कर अपनाएं और प्राप्त पंजीकरण की सटीकता को नियंत्रित करें, आयातित एमआरआई पर बाहरी मार्कर की स्थिति की जांच करें। जब रोगी तैयार हो जाए, तो नासोसेप्टल फ्लैप को काटने के लिए शून्य डिग्री एंडोस्कोप का उपयोग करें। इसके बाद, मध्य टर्बिनेट को यथासंभव संरक्षित करते हुए एक पूर्वकाल स्फेनोइडेक्टॉमी और एक पीछे के सेप्टोस्टोमी और एथ्मोइडेक्टॉमी का प्रदर्शन करें। तहखाने और ट्यूबरकुलम हड्डियों को खोलें। श्रेष्ठ इंट्राआवेणस साइनस के जमाव के बाद दउरा परत में एच के आकार का चीरा लगा लें। आरेक्नोडल विमान द्वारा ट्यूमर को छोड़ दें और ट्यूमर को केंद्रीय रूप से डी-बल्क करें। आसपास के डाइएंसेफेलिक तंत्रिका संरचनाओं से ट्यूमर कैप्सूल निकालें और ट्यूमर के किसी भी शेष टुकड़े के लिए सर्जिकल गुहा का पता लगाने के लिए कोण प्रकाशिकी का उपयोग करें। जब ट्यूमर के सभी हटा दिया गया है, ड्यूल विकल्प की एक इंट्राड्यूरल इंट्राक्रैनियल परत का उपयोग करने के लिए ऑस्टियो-मेनिंगियल खोलने बंद । फिर पेट की चर्बी और अंत में हड्डी के साथ ड्यूरल स्थानापन्न की एक अतिरिक्त इंट्राक्रैनियल परत रखें और नसोसेप्टल फ्लैप के साथ बंद होने को कवर करें। इस प्रतिनिधि रोगी में, मस्तिष्क एमआरआई एक सुप्रासेलर ट्यूमर ऑप्टोचियास्टिक सिस्टर्न पर कब्जा करने और एक अनियमित पॉलीसिस्टिक आकृति विज्ञान के साथ तीसरे वेंट्रिकल पर हमला करने का पता चला। ऑप्टिक पाथवे ट्रैक्टोग्राफी और द्विपक्षीय ऑप्टिक कपाल नसों को खंगाला गया, लेकिन मस्तिष्क की हड्डियों और रक्त वाहिकाओं के बीच इंटरफेस के भीतर संवेदनशीलता कलाकृतियों ने ऑप्टिक नसों को ऑप्टिक चियाम को जोड़ने वाले फाइबर के पूर्ण पुनर्निर्माण की अनुमति नहीं दी। पिरामिड ट्रैक्ट डिफ्यूजनिटी प्रोफाइल की जांच और एक लंबे ट्रैक्ट प्रसार टेन्सर इमेजिंग मानचित्र के आंकड़ों ने आंतरिक कैप्सूल के दाहिने पीछे के अंग के स्तर पर एक फोकल फ्लेयर टी दो-भारित हाइपरइंटेंसिटी की उपस्थिति दिखाई, जो बाईं ओर की तुलना में सही मतलब प्रसार उपाय की पाँच% वृद्धि के अनुरूप है। एंडोस्कोपिक एंडोनासल विस्तारित प्रत्यारोपण ट्रांसट्यूबरकुलम दृष्टिकोण का उपयोग करके, ट्यूमर को अपने सिस्टिक घटक के निकास के साथ-साथ केंद्रीय रूप से डी-बल्क किया गया था। क्रैनियोफेरिनियोमा तब एक दरार विमान के रूप में आरेक्नोइड को अपनाने के लिए तंत्रिका संरचनाओं से उत्तरोत्तर अलग होने में सक्षम था। सर्जरी के अंत में, हाइपोथैलेमिक शरीर रचना विज्ञान के संरक्षण के साथ पूर्ण ट्यूमर हटाने को प्राप्त किया गया था। इसके बाद पेट की चर्बी और नस्टोसेप्टल फ्लैप का इस्तेमाल कर ऑस्टियो ड्यूरल डिफेक्ट की मरम्मत की गई। सर्जरी के तीन महीने बाद, कोई अवशेष या पुनरावृत्ति के साथ एक पूर्ण ट्यूमर हटाने मनाया गया था । प्रीऑपरेटिव वर्कअप में, सबसे प्रासंगिक कदम हैंः एक सटीक प्रसार-भारित दृश्यों अधिग्रहण और ट्यूमर विभाजन। सर्जरी के दौरान, महत्वपूर्ण बिंदु तंत्रिका संरचनाओं की सटीक पहचान है। इस विधि द्वारा प्रदान की गई तंत्रिका संरचनाओं के दृश्य को सभी खोपड़ी-आधारित क्षेत्रों के लिए अपनाया जा सकता है, जिससे कई अन्य ट्यूमर के लिए स्थायी विकलांगता के जोखिम को कम किया जा सकता है। कपाल नसों और न्यूरो रास्तों के पथिक पुनर्निर्माण ट्यूमर और संरचनाओं के बीच संबंधों की हमारी समझ की सुविधा प्रदान कर सकते हैं, संभावित रोगी लक्षणों के लिए एक अभिनव परिणाम कारक प्रदान करते हैं ।
नई दिल्लीः आप सांसद राघव चड्ढा ने सोमवार को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने अमेरिका में खुदकुशी करने वाली मनदीप कौर का शव जल्द से जल्द भारत लाने की अपील की। सांसद ने मंत्री को मृतक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। बता दें कि घरेलू हिंसा का सामना करने के बाद 3 अगस्त को मनदीप ने खुदकुशी कर ली थी। इससे पहले उसका एक भावनात्मक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें उसने आपबीती बताई थी। अपने ससुराल पक्ष के खिलाफ कई आरोप लगाए थे। आपे नेता ने विदेश मंत्री को सौंपे अपने पत्र में लिखा पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क में मनदीप कौर के दुर्भाग्यपूर्ण निधन से पूरा देश स्तब्ध है। पत्र में लिखा की मनदीप अपने पीछे शोक संतप्त परिवार और दो बच्चों को छोड़ गई है। लंबे समय तक उसे अपने रिश्तेदारों के हाथों दुर्व्यवहार और उत्पीड़न सहना पड़ा था। उसने दुर्व्यवहार से बचने के लिए कई प्रयास किए थे। ऐसी ही कितनी भारतीय महिलाएं संघर्ष कर रही हैं। और पढ़िए -7th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, इस दिन DA में बढ़ोतरी का होगा ऐलान! सांसद ने आगे लिखा कि विदेशों में घरेलू शोषण से जूझती इन महिलाओं को हम वापस नहीं ला सकते। उन्होंने कहा मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अपराधियों को न्याय के दायरे में लाया जाए और उनके शरीर को भारत वापस लाने के संबंध में उनके परिवार की मांगों को तुरंत पूरा किया जाए। मैं मंत्रालय से यह सुनिश्चित करने का भी आग्रह करता हूं कि इस तरह के अपराधों के अपराधियों द्वारा हिंसा और दुर्व्यवहार के चक्र से बचने के लिए विदेश में रहने वाली भारतीय महिलाओं के लिए तत्काल कदम उठाएं जाएं।
नई दिल्लीः आप सांसद राघव चड्ढा ने सोमवार को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने अमेरिका में खुदकुशी करने वाली मनदीप कौर का शव जल्द से जल्द भारत लाने की अपील की। सांसद ने मंत्री को मृतक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। बता दें कि घरेलू हिंसा का सामना करने के बाद तीन अगस्त को मनदीप ने खुदकुशी कर ली थी। इससे पहले उसका एक भावनात्मक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें उसने आपबीती बताई थी। अपने ससुराल पक्ष के खिलाफ कई आरोप लगाए थे। आपे नेता ने विदेश मंत्री को सौंपे अपने पत्र में लिखा पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क में मनदीप कौर के दुर्भाग्यपूर्ण निधन से पूरा देश स्तब्ध है। पत्र में लिखा की मनदीप अपने पीछे शोक संतप्त परिवार और दो बच्चों को छोड़ गई है। लंबे समय तक उसे अपने रिश्तेदारों के हाथों दुर्व्यवहार और उत्पीड़न सहना पड़ा था। उसने दुर्व्यवहार से बचने के लिए कई प्रयास किए थे। ऐसी ही कितनी भारतीय महिलाएं संघर्ष कर रही हैं। और पढ़िए -सातth Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, इस दिन DA में बढ़ोतरी का होगा ऐलान! सांसद ने आगे लिखा कि विदेशों में घरेलू शोषण से जूझती इन महिलाओं को हम वापस नहीं ला सकते। उन्होंने कहा मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अपराधियों को न्याय के दायरे में लाया जाए और उनके शरीर को भारत वापस लाने के संबंध में उनके परिवार की मांगों को तुरंत पूरा किया जाए। मैं मंत्रालय से यह सुनिश्चित करने का भी आग्रह करता हूं कि इस तरह के अपराधों के अपराधियों द्वारा हिंसा और दुर्व्यवहार के चक्र से बचने के लिए विदेश में रहने वाली भारतीय महिलाओं के लिए तत्काल कदम उठाएं जाएं।
अलैहिस्सलाम और तीसरे आसमान में हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम और चौथे आसमान में हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम और पांचवें आसमान में हज़रत उज़ैर और छठे आसमान में हज़रत मूसा अलैहिमस्सलाम से मुलाक़ात हुई और सबने मरहबा कहा और सातवें आसमान में हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम से मुलाक़ात हुई । उनके बारे में आपने बताया कि वह बैतुलमामूर से टेक लगाए हुए तशरीफ़ फ़रमा थे और यह भी बताया कि बैतुलमामूर में रोज़ाना सत्तर फ़रिश्ते दाख़िल होते हैं जो दोबारा उसमें लौट कर नहीं आते । फिर मुझे सिदरतुल मुन्तहा तक ले जाया गया । अचानक देखता हूं कि पत्ते बड़े-बड़े हैं जैसे हाथी के कान हों और उसके फल इतने बड़े-बड़े हैं जैसे मटके हों । जब सिदरतुल मुन्तहा को अल्लाह के हुक्म से ढांकने वाली चीज़ों ने लिया तो उसका हाल बदल गया । अल्लाह की किसी भी मख़्तर में इतनी ताक़त नहीं कि उसके हुस्न को बयान कर सके। उस वक़्त मुझ पर अल्लाह तआला ने उन चीज़ों की वय फ़रमाई जिसकी वय उस वक़्त फ़रमाना था और मुझ पर मैं रात-दिन में रोज़ाना पचास नमाज़ें पढ़ना फ़र्ज़ किया गया । मैं वापस उतरा और मूसा अलैहिस्सलाम पर गुज़र हुआ तो उन्होंने मालूम किया कि आपके रब ने आपकी उम्मत पर क्या फ़र्ज़ किया? मैंने कहा, पचास नमाज़ें फ़र्ज़ फ़रमाई हैं। उन्होंने कहा कि वापस जाइए, और अपने रब से कमी का सवाल कीजिए, क्योंकि आपकी उम्मत इसकी ताक़त नहीं रख सकती, मैं बनी इसराईल को आज़मा चुका हूं। हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रजि० की रिवायत में है कि सिदरतुल मुन्तहा को सोने के परवानों ने ढांक रखा था ।
अलैहिस्सलाम और तीसरे आसमान में हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम और चौथे आसमान में हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम और पांचवें आसमान में हज़रत उज़ैर और छठे आसमान में हज़रत मूसा अलैहिमस्सलाम से मुलाक़ात हुई और सबने मरहबा कहा और सातवें आसमान में हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम से मुलाक़ात हुई । उनके बारे में आपने बताया कि वह बैतुलमामूर से टेक लगाए हुए तशरीफ़ फ़रमा थे और यह भी बताया कि बैतुलमामूर में रोज़ाना सत्तर फ़रिश्ते दाख़िल होते हैं जो दोबारा उसमें लौट कर नहीं आते । फिर मुझे सिदरतुल मुन्तहा तक ले जाया गया । अचानक देखता हूं कि पत्ते बड़े-बड़े हैं जैसे हाथी के कान हों और उसके फल इतने बड़े-बड़े हैं जैसे मटके हों । जब सिदरतुल मुन्तहा को अल्लाह के हुक्म से ढांकने वाली चीज़ों ने लिया तो उसका हाल बदल गया । अल्लाह की किसी भी मख़्तर में इतनी ताक़त नहीं कि उसके हुस्न को बयान कर सके। उस वक़्त मुझ पर अल्लाह तआला ने उन चीज़ों की वय फ़रमाई जिसकी वय उस वक़्त फ़रमाना था और मुझ पर मैं रात-दिन में रोज़ाना पचास नमाज़ें पढ़ना फ़र्ज़ किया गया । मैं वापस उतरा और मूसा अलैहिस्सलाम पर गुज़र हुआ तो उन्होंने मालूम किया कि आपके रब ने आपकी उम्मत पर क्या फ़र्ज़ किया? मैंने कहा, पचास नमाज़ें फ़र्ज़ फ़रमाई हैं। उन्होंने कहा कि वापस जाइए, और अपने रब से कमी का सवाल कीजिए, क्योंकि आपकी उम्मत इसकी ताक़त नहीं रख सकती, मैं बनी इसराईल को आज़मा चुका हूं। हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रजिशून्य की रिवायत में है कि सिदरतुल मुन्तहा को सोने के परवानों ने ढांक रखा था ।
महिलाओं द्वारा अक्सर किटी पार्टी आयोजित कराई जाती हैं और इसके लिए विशेष आयोजन किए जाते है। खासतौर से कई तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं। ऐसे में महिलाओं के लिए 'मटर चाट' बनाना बेहतरीन रहेगा जो झटपट तैयार होती हैं और लजीज स्वाद देती हैं। तो आइये जानते हैं इस Recipe के बारे में। - मटर को कुकर में 2 सीटी आने तक उबाल लें। - अब एक बाउल में मटर डालें। - जितने लोगों के लिए चाट बनाना है उतने प्लेट में 4 से 5 चम्मच मटर डालें। - इसके ऊपर कटा प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, कद्दूकस किया अदरक, चाट मसाला, लाल मिर्च पाउडर, - भूना जीरा पाउडर और स्वादानुसार नमक डाल लें। - इसके ऊपर सेव भुजिया या कोई भी नमकीन डाल सकती हैं। - इमली की चटनी इसका स्वाद बढ़ाने के लिए डालें। - अब बस ऊपर से कटी हरी धनिया डालकर गरमा-गरम सर्व करें।
महिलाओं द्वारा अक्सर किटी पार्टी आयोजित कराई जाती हैं और इसके लिए विशेष आयोजन किए जाते है। खासतौर से कई तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं। ऐसे में महिलाओं के लिए 'मटर चाट' बनाना बेहतरीन रहेगा जो झटपट तैयार होती हैं और लजीज स्वाद देती हैं। तो आइये जानते हैं इस Recipe के बारे में। - मटर को कुकर में दो सीटी आने तक उबाल लें। - अब एक बाउल में मटर डालें। - जितने लोगों के लिए चाट बनाना है उतने प्लेट में चार से पाँच चम्मच मटर डालें। - इसके ऊपर कटा प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, कद्दूकस किया अदरक, चाट मसाला, लाल मिर्च पाउडर, - भूना जीरा पाउडर और स्वादानुसार नमक डाल लें। - इसके ऊपर सेव भुजिया या कोई भी नमकीन डाल सकती हैं। - इमली की चटनी इसका स्वाद बढ़ाने के लिए डालें। - अब बस ऊपर से कटी हरी धनिया डालकर गरमा-गरम सर्व करें।
भारत की पेस बैटरी जसप्रीत बुमराह, मोहम्मग शमी और इशांत शर्मा की तिकड़ी ने साल 2018 में अब तक कुल 134 विकेट हासिल करते हुए नया इतिहास रच दिया है। यह टेस्ट इतिहास में एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली तिकड़ी बन गई है। बुमराह, शमी और इशांत ने 34 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए इतिहास रचा। इससे पहले वेस्टइंडीज के जोल गार्नर, माइकल होल्डिंग और मैलकॉम मार्शल की तिकड़ी के नाम ये रिकॉर्ड था। इन गेंदबाजों ने 1984 में 130 विकेट झटके थे। वहीं, इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर दक्षिण अफ्रीका के तेज गदेंबाज हैं। दक्षिण अफ्रीका के मोर्ने मोर्कल, मखाया एंटिनी और डेल स्टेन ने 2008 में 123 विकेट झटकने का कारनामा किया था। बहरहाल, भारतीय तिकड़ी की बात करें तो बुमराह सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए हैं। इसी साल टेस्ट डेब्यू करने वाले बुमराह 9 टेस्ट में 47 विकेट अपने नाम कर चुके हैं। वहीं, शमी ने 12 टेस्ट से 47 विकेट जबकि इशांत शर्मा ने 11 टेस्ट से 40 विकेट चटकाये हैं। यह संख्य और बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि बॉक्सिंग टेस्ट का आखिरी दिन अभी बाकी है। भारतीय गेंदबाजों ने इस साल एक और कमाल किया है। भारतीय गेंदबाजों ने इस साल 14 टेस्ट मैचों में 260 विकेट झटके हैं जो एक नया रिकॉर्ड है। इससे पहले भारतीय बॉलर्स ने 1979 में 17 मैचों में 237 विकेट निकाले थे। मेलबर्न टेस्ट के तीसरे दिन ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में 6 विकेट चटकाने वाले बुमराह अब तक 8 विकेट ले चुके हैं और टेस्ट मैचों में ये उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। बुमराह ने मैच के तीसरे दिन दिलीप दोशी के डेब्यू साल में बतौर भारतीय सबसे ज्यादा विकेट (40) लेने के रिकॉर्ड को तोड़ा था। दिलीप ने ये रिकॉर्ड 1979 में बनाया था।
भारत की पेस बैटरी जसप्रीत बुमराह, मोहम्मग शमी और इशांत शर्मा की तिकड़ी ने साल दो हज़ार अट्ठारह में अब तक कुल एक सौ चौंतीस विकेट हासिल करते हुए नया इतिहास रच दिया है। यह टेस्ट इतिहास में एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली तिकड़ी बन गई है। बुमराह, शमी और इशांत ने चौंतीस साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए इतिहास रचा। इससे पहले वेस्टइंडीज के जोल गार्नर, माइकल होल्डिंग और मैलकॉम मार्शल की तिकड़ी के नाम ये रिकॉर्ड था। इन गेंदबाजों ने एक हज़ार नौ सौ चौरासी में एक सौ तीस विकेट झटके थे। वहीं, इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर दक्षिण अफ्रीका के तेज गदेंबाज हैं। दक्षिण अफ्रीका के मोर्ने मोर्कल, मखाया एंटिनी और डेल स्टेन ने दो हज़ार आठ में एक सौ तेईस विकेट झटकने का कारनामा किया था। बहरहाल, भारतीय तिकड़ी की बात करें तो बुमराह सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए हैं। इसी साल टेस्ट डेब्यू करने वाले बुमराह नौ टेस्ट में सैंतालीस विकेट अपने नाम कर चुके हैं। वहीं, शमी ने बारह टेस्ट से सैंतालीस विकेट जबकि इशांत शर्मा ने ग्यारह टेस्ट से चालीस विकेट चटकाये हैं। यह संख्य और बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि बॉक्सिंग टेस्ट का आखिरी दिन अभी बाकी है। भारतीय गेंदबाजों ने इस साल एक और कमाल किया है। भारतीय गेंदबाजों ने इस साल चौदह टेस्ट मैचों में दो सौ साठ विकेट झटके हैं जो एक नया रिकॉर्ड है। इससे पहले भारतीय बॉलर्स ने एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में सत्रह मैचों में दो सौ सैंतीस विकेट निकाले थे। मेलबर्न टेस्ट के तीसरे दिन ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी में छः विकेट चटकाने वाले बुमराह अब तक आठ विकेट ले चुके हैं और टेस्ट मैचों में ये उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। बुमराह ने मैच के तीसरे दिन दिलीप दोशी के डेब्यू साल में बतौर भारतीय सबसे ज्यादा विकेट लेने के रिकॉर्ड को तोड़ा था। दिलीप ने ये रिकॉर्ड एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में बनाया था।
इन दिनों नये कृषि क़ानूनों को लेकर आन्दोलन कर रहे किसानों के साथ कई तरह की ठगी वर्षों से हो रही है। बीज, खाद और कीटनाशकों के मामले में यह ठगी बड़े पैमाने पर होती है। किसान गोविन्द दास का कहना है कि कहने को तो हम कृषि प्रधान देश में रहते हैं। लेकिन मौज़ूदा वक़्त में अगर दुर्दशा किसी की है, तो वो है किसान। किसानों को केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारें सिर्फ़ वोट बैंक के तौर पर ही उपयोग करती है। गोविन्द दास का कहना है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच आपसी तालमेल न होने की वजह से किसानों को तमाम झंझावातों से जूझना पड़ता है। ये पीड़ा सिर्फ़ गोविन्द दास की नहीं है, बल्कि देश के उन किसानों की भी है, जो केवल किसानी करके अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं और अपने अधिकारों के लिए जूझ रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। किसानों को बेहतरीन कीटनाशकों और असली बीजों के नाम पर बहुत कुछ नक़ली बेचकर लूटा जा रहा है। और तो और किसानों को अलग-अलग राज्यों में खाद विक्रेता सीधे-साधे मेहनतकश किसानों को महँगे दामों पर खाद बेच रहे हैं। ऐसा नहीं है कि किसानों के ठगे जाने वाले खेल में सिर्फ़ खाद विक्रेता ही शामिल हैं। इसमें ज़िला स्तर से लेकर तहसील स्तर का प्रशासनिक तंत्र शामिल है। इन्हीं तमाम पहलुओं पर 'तहलका' ने देश के अलग-अलग राज्यों के किसानों से बात की, तो उन्होंने कहा कि कोरोना-काल में अगर सबसे कारोबार पनपा है, तो नक़ली बीज और नक़ली कीटनाशक दवा कम्पनियों वालों का। क्योंकि किसानों से जुड़े कारोबार पर बहुत ही कम लोगों की नज़र पड़ती है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय और राज्यों के कृषि मंत्रालय में आपसी ताममेल न होने की वजह तो राजनीति हो सकती है; लेकिन किसानों के हित में जो योजनाएँ सरकारी बनती हैं, उन पर अमल क्यों नहीं होता? नक़ली बीजों और नक़ली कीटनाशकों का जो खेल चल रहा है, उसमें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अधिकारियों का एक तबक़ा किसानों का जमकर दोहनकर रहा है। बतातें चलें नक़ली बीजों और नक़ली कीटनाशकों के कारोबार में किसानों को भ्रमित कर मल्टीनेशनल दवा कम्पनियों वाले अपने-अपने उत्पादों को बेबसाइट के ज़रिये बेच रहे हैं। इस कारोबार को अंजाम देने में देश के बड़े-बड़े सियासतदानों का हाथ होने से कोई कुछ नहीं कर पा रहा है। मध्य प्रदेश के ज़िला टीकमगढ़ के किसान राजेश का कहना है कि देश में अगर सरकारें किसानों के हित सही मायने सरकार सुधार लाना चाहती हैं, तो ज़िला स्तरीय बीज भण्डारण वालों पर कार्रवाई करें। नक़ली बीज, वो भी महँगे दामों पर बेच रहे हैं। ये लोग न सिर्फ़ किसानों की फ़सल से खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। क्योंकि नक़ली बीजों, नक़ली कीटनाशकों से जो फ़सल पैदा होती है। उस फ़सल से चाहे अन्न पैदा हो या फल उनका सेवन करने वालों को हृदय, लिवर, किडनी समेत कैंसर जैसी तमाम बीमारियाँ पनप रही हैं, जो जानलेवा साबित हो रही हैं। इसी वजह से देश दुनिया में भारतीय कृषि उत्पाद की बिक्री ही कम नहीं हो रही है, बल्कि छवि भी ख़राब हो रही है। लोगों में एक शंका पैदा होती है कि नक़ली खाद और नक़ली बीज से उपजी पैदावार का सेवन लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर सकता है। ज़हरीले खाद्य पदार्थों की पैदावार बढऩे के चलते भारतीय खाद्य पदार्थों का विदेशों में निर्यात भी कम हुआ है। कृषि विशेषज्ञ विमल कुमार ने बताया कि किसानों के साथ खिलवाड़ का खेल पुराना है, जो कोरोना-काल में और वर्तमान सरकार की अनदेखी के कारण एक भयंकर रूप ले चुका है। अगर सरकार इस नैक्सिस को तोडऩे लगे भी तो सालोंसाल लगेंगे और वे चेहरे सियासी सामने आएँगे, जो मौज़ूदा समय में किसानों के सबसे हिमायती बने हुए हैं। क्योंकि बीज और कीटनाशक अधिनियम जो बने हैं, वे सब देखने और दिखावे के लिए बने हुए हैं। अगर इन अधिनियमों में व्यापक सुधार व संशोधन न किया गया, तो किसानों को ठगने का सिलसिला जारी रहेगा। क्योंकि अधिनियमों में नक़ली बीज और कीटनाशक के कारोबार के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज होने का प्रावधान होना चाहिए, वो भी क़ानून के तहत। अन्यथा कुछ हासिल नहीं होगा। क्योंकि नक़ली कीटनाशकों के कारोबार में जो लोग संलिप्त हैं, उनकी कम्पनी कहीं है और दवा में पता कहीं का है। इस सारे खेल में दवा का अवैध कारोबार करने वाले सबसेज़्यादा उत्तर प्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ और गुजरात में हैं। चौंकाने वाली बात तो यह है कि जो किसानों को दवा के नाम भ्रमित करने वाले ब्राण्ड बेचे जा रहे हैं। उनमें पता कहीं का है तथा फोन नंबर कहीं और का। खाद्य कंट्रोलर ऑर्डर सबसे दिखावे के साबित हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ के किसानों का कहना है कि सरकार किसी राजनीतिक दल की हो, लेकिन किसानों की समस्या जस-की-तस है। किसानों के जीवन-यापन में रत्ती भर सुधार नहीं हुआ है। सरकारी योजनाएँ और मदद के आँकड़े भले ही सरकार समय-समय पर कुछ ही पेश करें, लेकिन उनसे किसानों का कोई भला नहीं हुआ है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. गजेन्द्र चंद्राकर का कहना है कि देश भर में अपराधियों द्वारा नक़ली कीटनाशकों की बढ़ती मात्रा का उत्पादन, विपणन और बिक्री की जा रही है, जो एक गम्भीर संगठित अपराध है। नक़ली कीटनाशक आपके स्वास्थ्य, आपकी जेब और पर्यावरण के लिए ख़तरा है। इसलिए किसानों को सावधान रहने की ज़रूरत है। जब भी किसान किसानी से सम्बन्धित कोई उत्पाद ख़रीदें, तो पैकेजिंग, लेबल और उत्पाद की जाँच कर लें। अगर कोई नक़ली उत्पाद बेचता दुकानदार पाया जाता है, तो उसकी शिकायत पुलिस व सम्बन्धित विभाग में करें।
इन दिनों नये कृषि क़ानूनों को लेकर आन्दोलन कर रहे किसानों के साथ कई तरह की ठगी वर्षों से हो रही है। बीज, खाद और कीटनाशकों के मामले में यह ठगी बड़े पैमाने पर होती है। किसान गोविन्द दास का कहना है कि कहने को तो हम कृषि प्रधान देश में रहते हैं। लेकिन मौज़ूदा वक़्त में अगर दुर्दशा किसी की है, तो वो है किसान। किसानों को केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारें सिर्फ़ वोट बैंक के तौर पर ही उपयोग करती है। गोविन्द दास का कहना है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच आपसी तालमेल न होने की वजह से किसानों को तमाम झंझावातों से जूझना पड़ता है। ये पीड़ा सिर्फ़ गोविन्द दास की नहीं है, बल्कि देश के उन किसानों की भी है, जो केवल किसानी करके अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं और अपने अधिकारों के लिए जूझ रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। किसानों को बेहतरीन कीटनाशकों और असली बीजों के नाम पर बहुत कुछ नक़ली बेचकर लूटा जा रहा है। और तो और किसानों को अलग-अलग राज्यों में खाद विक्रेता सीधे-साधे मेहनतकश किसानों को महँगे दामों पर खाद बेच रहे हैं। ऐसा नहीं है कि किसानों के ठगे जाने वाले खेल में सिर्फ़ खाद विक्रेता ही शामिल हैं। इसमें ज़िला स्तर से लेकर तहसील स्तर का प्रशासनिक तंत्र शामिल है। इन्हीं तमाम पहलुओं पर 'तहलका' ने देश के अलग-अलग राज्यों के किसानों से बात की, तो उन्होंने कहा कि कोरोना-काल में अगर सबसे कारोबार पनपा है, तो नक़ली बीज और नक़ली कीटनाशक दवा कम्पनियों वालों का। क्योंकि किसानों से जुड़े कारोबार पर बहुत ही कम लोगों की नज़र पड़ती है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय और राज्यों के कृषि मंत्रालय में आपसी ताममेल न होने की वजह तो राजनीति हो सकती है; लेकिन किसानों के हित में जो योजनाएँ सरकारी बनती हैं, उन पर अमल क्यों नहीं होता? नक़ली बीजों और नक़ली कीटनाशकों का जो खेल चल रहा है, उसमें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच अधिकारियों का एक तबक़ा किसानों का जमकर दोहनकर रहा है। बतातें चलें नक़ली बीजों और नक़ली कीटनाशकों के कारोबार में किसानों को भ्रमित कर मल्टीनेशनल दवा कम्पनियों वाले अपने-अपने उत्पादों को बेबसाइट के ज़रिये बेच रहे हैं। इस कारोबार को अंजाम देने में देश के बड़े-बड़े सियासतदानों का हाथ होने से कोई कुछ नहीं कर पा रहा है। मध्य प्रदेश के ज़िला टीकमगढ़ के किसान राजेश का कहना है कि देश में अगर सरकारें किसानों के हित सही मायने सरकार सुधार लाना चाहती हैं, तो ज़िला स्तरीय बीज भण्डारण वालों पर कार्रवाई करें। नक़ली बीज, वो भी महँगे दामों पर बेच रहे हैं। ये लोग न सिर्फ़ किसानों की फ़सल से खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। क्योंकि नक़ली बीजों, नक़ली कीटनाशकों से जो फ़सल पैदा होती है। उस फ़सल से चाहे अन्न पैदा हो या फल उनका सेवन करने वालों को हृदय, लिवर, किडनी समेत कैंसर जैसी तमाम बीमारियाँ पनप रही हैं, जो जानलेवा साबित हो रही हैं। इसी वजह से देश दुनिया में भारतीय कृषि उत्पाद की बिक्री ही कम नहीं हो रही है, बल्कि छवि भी ख़राब हो रही है। लोगों में एक शंका पैदा होती है कि नक़ली खाद और नक़ली बीज से उपजी पैदावार का सेवन लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर सकता है। ज़हरीले खाद्य पदार्थों की पैदावार बढऩे के चलते भारतीय खाद्य पदार्थों का विदेशों में निर्यात भी कम हुआ है। कृषि विशेषज्ञ विमल कुमार ने बताया कि किसानों के साथ खिलवाड़ का खेल पुराना है, जो कोरोना-काल में और वर्तमान सरकार की अनदेखी के कारण एक भयंकर रूप ले चुका है। अगर सरकार इस नैक्सिस को तोडऩे लगे भी तो सालोंसाल लगेंगे और वे चेहरे सियासी सामने आएँगे, जो मौज़ूदा समय में किसानों के सबसे हिमायती बने हुए हैं। क्योंकि बीज और कीटनाशक अधिनियम जो बने हैं, वे सब देखने और दिखावे के लिए बने हुए हैं। अगर इन अधिनियमों में व्यापक सुधार व संशोधन न किया गया, तो किसानों को ठगने का सिलसिला जारी रहेगा। क्योंकि अधिनियमों में नक़ली बीज और कीटनाशक के कारोबार के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज होने का प्रावधान होना चाहिए, वो भी क़ानून के तहत। अन्यथा कुछ हासिल नहीं होगा। क्योंकि नक़ली कीटनाशकों के कारोबार में जो लोग संलिप्त हैं, उनकी कम्पनी कहीं है और दवा में पता कहीं का है। इस सारे खेल में दवा का अवैध कारोबार करने वाले सबसेज़्यादा उत्तर प्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ और गुजरात में हैं। चौंकाने वाली बात तो यह है कि जो किसानों को दवा के नाम भ्रमित करने वाले ब्राण्ड बेचे जा रहे हैं। उनमें पता कहीं का है तथा फोन नंबर कहीं और का। खाद्य कंट्रोलर ऑर्डर सबसे दिखावे के साबित हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ के किसानों का कहना है कि सरकार किसी राजनीतिक दल की हो, लेकिन किसानों की समस्या जस-की-तस है। किसानों के जीवन-यापन में रत्ती भर सुधार नहीं हुआ है। सरकारी योजनाएँ और मदद के आँकड़े भले ही सरकार समय-समय पर कुछ ही पेश करें, लेकिन उनसे किसानों का कोई भला नहीं हुआ है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. गजेन्द्र चंद्राकर का कहना है कि देश भर में अपराधियों द्वारा नक़ली कीटनाशकों की बढ़ती मात्रा का उत्पादन, विपणन और बिक्री की जा रही है, जो एक गम्भीर संगठित अपराध है। नक़ली कीटनाशक आपके स्वास्थ्य, आपकी जेब और पर्यावरण के लिए ख़तरा है। इसलिए किसानों को सावधान रहने की ज़रूरत है। जब भी किसान किसानी से सम्बन्धित कोई उत्पाद ख़रीदें, तो पैकेजिंग, लेबल और उत्पाद की जाँच कर लें। अगर कोई नक़ली उत्पाद बेचता दुकानदार पाया जाता है, तो उसकी शिकायत पुलिस व सम्बन्धित विभाग में करें।
चेन्नई को अपने पिछले मुकाबले में किंग्स इलेवन पंजाब के हाथों चार रन से हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि राजस्थान को भी अपने पिछले मैच में कोलकाता नाइट राइडर्स के हाथों सात विकेट से मात खानी पड़ी थी। दोनों टीमें दो-दो साल के प्रतिबंध के बाद लीग के 11वें संस्करण में लौटी हैं और इस सीजन में पहली बार एक-दूसरे के आमने-सामने होंगी। लीग का पहला खिताब जीतने वाली राजस्थान इस संस्करण में चार मैचों में दो जीत और दो हार के साथ चार अंक लेकर पाचवें नंबर पर है। महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व वाली चेन्नई के भी तीन मैचों में दो जीत से इतने ही अंक हैं और वह तालिका में चौथे नंबर पर है। अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में राजस्थान को पहले मैच में सनराइजर्स हैदराबाद ने पहले मैच में नौ विकेट से पीटा था। इसके बाद टीम ने दिल्ली डेयरडेविल्स और रायल चैलेंजर्स बेंगलोर के खिलाफ लगातार दो मैच जीते। दो बार की चैंपियन चेन्नई ने शुरूआती दोनों मैच जीते हैं और तीसरे मैच में उसे पंजाब ने चार से पराजित किया है। चेन्नई चाहेगी कि वह पंजाब को मात देकर जीत से नए घर का स्वागत करे। मोहित शर्मा ने CSK के खिलाफ दिल दहलाने वाले आखिरी ओवर पर किया खुलासाः "मैं सो नहीं पाया"
चेन्नई को अपने पिछले मुकाबले में किंग्स इलेवन पंजाब के हाथों चार रन से हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि राजस्थान को भी अपने पिछले मैच में कोलकाता नाइट राइडर्स के हाथों सात विकेट से मात खानी पड़ी थी। दोनों टीमें दो-दो साल के प्रतिबंध के बाद लीग के ग्यारहवें संस्करण में लौटी हैं और इस सीजन में पहली बार एक-दूसरे के आमने-सामने होंगी। लीग का पहला खिताब जीतने वाली राजस्थान इस संस्करण में चार मैचों में दो जीत और दो हार के साथ चार अंक लेकर पाचवें नंबर पर है। महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व वाली चेन्नई के भी तीन मैचों में दो जीत से इतने ही अंक हैं और वह तालिका में चौथे नंबर पर है। अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में राजस्थान को पहले मैच में सनराइजर्स हैदराबाद ने पहले मैच में नौ विकेट से पीटा था। इसके बाद टीम ने दिल्ली डेयरडेविल्स और रायल चैलेंजर्स बेंगलोर के खिलाफ लगातार दो मैच जीते। दो बार की चैंपियन चेन्नई ने शुरूआती दोनों मैच जीते हैं और तीसरे मैच में उसे पंजाब ने चार से पराजित किया है। चेन्नई चाहेगी कि वह पंजाब को मात देकर जीत से नए घर का स्वागत करे। मोहित शर्मा ने CSK के खिलाफ दिल दहलाने वाले आखिरी ओवर पर किया खुलासाः "मैं सो नहीं पाया"
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में चार लुटेरी दुल्हनों ने दलालों के साथ मिलकर युवकों और उनके परिवार को निशाना बना है। चारों ने शादी के लिए पहले तो डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लिये। शादी के बाद बारात निकाली जा रही थी, जिसमें दूल्हे आगे थे और दुल्हनें पीछे। मुकाम तक पहुंचने से पहले तीन दुल्हनें रास्ते में ही गायब हो गईं। चौथी पेट दर्द का बहाना कर अस्पताल पहुंची और वहां से फरार हो गई। फरियादी ने पुलिस को कहा कि उसके दो बेटे है, जिनकी शादी नहीं हुई है। वे दिव्यांग हैं। उन्होंने दिन-रात मेहनत करके करीब सात लाख रुपये जमा किए थे। जब इसकी जानकारी गणेश और सुन्दरबाई को लगी तो दोनों ने इसकी जानकारी अपने रिश्तेदार महेश को दी। इसके बाद गणेश अपनी मां सुन्दरबाई को लेकर जगदीश के पास पहुंचा और कहा, 'दोनों बेटों की शादी नहीं हो रही है, उम्र हो गई है, जल्द शादी करो। यदि लड़कियां नहीं मिल रही तो हमें बताओ, हम दुल्हनें ढूंढ़ देंगे. ' दोनों की बातों में आकर जगदीश ने भी उन्हें लड़कियां ढूंढने के लिए कह दिया। दोनों ने डेढ़ लाख रुपये माँगा। करीब आठ दिन तक रोज फरियादी से बात कर उन्हें झांसे में ले लिया और सिर्फ दोनों बेटों ही नहीं, उनके साले के बेटे सहित गांव के अन्य युवक को भी शादी करने के नाम पर फंसाया। इन सभी से आरोपियों ने आठ लाख रुपये ले लिये, इसके बाद मंदिर में फरियादी के बेटे लखन, प्रहलाद, साले के बेटे जितेंद्र के साथ एक अन्य युवक की शादी भी कराई।
स्टाफ रिपोर्टर, एएनएम न्यूज़ः मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में चार लुटेरी दुल्हनों ने दलालों के साथ मिलकर युवकों और उनके परिवार को निशाना बना है। चारों ने शादी के लिए पहले तो डेढ़-डेढ़ लाख रुपये लिये। शादी के बाद बारात निकाली जा रही थी, जिसमें दूल्हे आगे थे और दुल्हनें पीछे। मुकाम तक पहुंचने से पहले तीन दुल्हनें रास्ते में ही गायब हो गईं। चौथी पेट दर्द का बहाना कर अस्पताल पहुंची और वहां से फरार हो गई। फरियादी ने पुलिस को कहा कि उसके दो बेटे है, जिनकी शादी नहीं हुई है। वे दिव्यांग हैं। उन्होंने दिन-रात मेहनत करके करीब सात लाख रुपये जमा किए थे। जब इसकी जानकारी गणेश और सुन्दरबाई को लगी तो दोनों ने इसकी जानकारी अपने रिश्तेदार महेश को दी। इसके बाद गणेश अपनी मां सुन्दरबाई को लेकर जगदीश के पास पहुंचा और कहा, 'दोनों बेटों की शादी नहीं हो रही है, उम्र हो गई है, जल्द शादी करो। यदि लड़कियां नहीं मिल रही तो हमें बताओ, हम दुल्हनें ढूंढ़ देंगे. ' दोनों की बातों में आकर जगदीश ने भी उन्हें लड़कियां ढूंढने के लिए कह दिया। दोनों ने डेढ़ लाख रुपये माँगा। करीब आठ दिन तक रोज फरियादी से बात कर उन्हें झांसे में ले लिया और सिर्फ दोनों बेटों ही नहीं, उनके साले के बेटे सहित गांव के अन्य युवक को भी शादी करने के नाम पर फंसाया। इन सभी से आरोपियों ने आठ लाख रुपये ले लिये, इसके बाद मंदिर में फरियादी के बेटे लखन, प्रहलाद, साले के बेटे जितेंद्र के साथ एक अन्य युवक की शादी भी कराई।
Is EVM Hacking Possible: चुनाव के नतीजों से पहले एक बार फिर से EVM का मामला गर्मा गया है और मतगणना में गड़बड़ी के आरोप लगने लगे हैं. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने चुनावों में धांधली का आरोप लगाया है. अखिलेश ने आरोप लगाया कि वाराणसी में EVM से लदी तीन गाड़ियां पकड़ी गई हैं, दो गाड़ियां निकल गईं, लेकिन तीसरी को सपा के कार्यकर्ताओं ने रोक लिया. इसके बाद सपा ने काउंटिंग सेंटर में जैमर लगाने की मांग भी की है. वहीं, चुनाव आयोग ने जवाब देते हुए कहा कि गाड़ियों से जो EVM मिली हैं, वो ट्रेनिंग के मकसद से ले जाई जा रही थीं और उनका चुनाव में इस्तेमाल नहीं हुआ है. पिछले कुछ सालों से चुनावों से पहले और नतीजों के बाद EVM पर सवाल उठाए जाते रहे हैं. हारने वाली पार्टी EVM हैकिंग का दावा करती है. हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि EVM पूरी तरह सुरक्षित है और इसे हैक नहीं किया जा सकता. ये भी पढ़ें-- UP Exit Poll: मोदी या योगी? यूपी में बीजेपी की ऐतिहासिक वापसी का सबसे बड़ा किरदार कौन? क्यों हैक नहीं की जा सकती EVM? पहला तर्क : चुनाव आयोग जिस EVM का इस्तेमाल करता है, वो स्टैंड अलोन मशीनें होती हैं. उसे न तो किसी कम्प्यूटर से कंट्रोल किया जाता है और न ही इंटरनेट या किसी नेटवर्क से कनेक्ट किया जाता है, ऐसे में उसे हैक करना नामुमकिन है. इसके अलावा EVM में जो सॉफ्टवेयर इस्तेमाल होता है, उसे रक्षा मंत्रालय और परमाणु ऊर्जा मंत्रालय से जुड़ी सरकारी कंपनियों के इंजीनियर बनाते हैं. इस सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड को किसी से भी साझा नहीं किया जाता है. दूसरा तर्क : भारत में इस्तेमाल होने EVM मशीन में दो यूनिट होती है. एक कंट्रोलिंग यूनिट (CU) और दूसरी बैलेटिंग यूनिट (BU). ये दोनों अलग-अलग यूनिट होती हैं और इन्हें चुनावों के दौरान अलग-अलग ही बांटा जाता है. अगर किसी भी एक यूनिट के साथ कोई छेड़छाड़ होती है तो मशीन काम नहीं करेगी. इसलिए कमेटी का कहना था कि EVM से छेड़छाड़ करना या हैक करने की गुंजाइश न के बराबर है. जिसने मशीन बनाई, क्या वो नहीं कर सकता छेड़छाड़? - भारत में इस्तेमाल होने वाली EVM को दो सरकारी कंपनियां बनाती हैं. पहली कंपनी है बेंगलुरु स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और दूसरी है हैदराबाद स्थित इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड. - चुनाव आयोग ने 2017 में एक FAQ जारी किया था. इसमें बताया था कि EVM पहले राज्य और फिर वहां से जिलों में जाती है. मैनुफैक्चरर्स को नहीं पता होता कि कौन सी मशीन कहां जाएगी, इसलिए नहीं पता होता कि उम्मीदवार कौन होगा. इसलिए छेड़छाड़ नहीं हो सकती. - इसके अलावा हर EVM का एक अलग सीरियल नंबर होता है. चुनाव आयोग एक ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता है, जिससे पता चलता है कि कौन सी मशीन कहां है, तो उससे छेड़छाड़ करना संभव नहीं है. ये भी पढ़ें-- UP Election Counting: क्या होता है पोस्टल बैलेट और सर्विस वोट, यूपी चुनाव में तय करेंगे हार-जीत? क्या चिप के जरिए हो सकती है छेड़छाड़? - EVM की CU में एक माइक्रो चिप लगी होती है. इसी चिप में उम्मीदवार का डेटा रहता है. कई बार ऐसे सवाल उठाए जाते हैं कि इस माइक्रो चिप में मालवेयर के जरिए छेड़छाड़ की जा सकती है. हालांकि, चुनाव आयोग इस बात को खारिज करता है. - चुनाव आयोग के मुताबिक, एक वोटर एक बार में एक ही बटन दबा सकता है. एक बार बटन दबाने के बाद मशीन बंद हो जाती है और फिर वोटर चाहकर भी दूसरा बटन नहीं दबा सकता. इसलिए चिप के जरिए कोई छेड़छाड़ करना संभव नहीं है. जब EVM हैकिंग का किया गया दावा? - मई 2010 में अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक डिवाइस को मशीन से जोड़कर दिखाया था और दावा किया था कि मोबाइल से मैसेज भेजकर नतीजों को बदला जा सकता है. - मई 2017 में आम आदमी पार्टी के विधायक ने दिल्ली विधानसभा में EVM को से छेड़छाड़ किए जाने का डेमो दिया था. हालांकि, चुनाव आयोग ने इसे खारिज कर दिया था और कहा था कि ये वो EVM नहीं है, जिसका इस्तेमाल होता है.
Is EVM Hacking Possible: चुनाव के नतीजों से पहले एक बार फिर से EVM का मामला गर्मा गया है और मतगणना में गड़बड़ी के आरोप लगने लगे हैं. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनावों में धांधली का आरोप लगाया है. अखिलेश ने आरोप लगाया कि वाराणसी में EVM से लदी तीन गाड़ियां पकड़ी गई हैं, दो गाड़ियां निकल गईं, लेकिन तीसरी को सपा के कार्यकर्ताओं ने रोक लिया. इसके बाद सपा ने काउंटिंग सेंटर में जैमर लगाने की मांग भी की है. वहीं, चुनाव आयोग ने जवाब देते हुए कहा कि गाड़ियों से जो EVM मिली हैं, वो ट्रेनिंग के मकसद से ले जाई जा रही थीं और उनका चुनाव में इस्तेमाल नहीं हुआ है. पिछले कुछ सालों से चुनावों से पहले और नतीजों के बाद EVM पर सवाल उठाए जाते रहे हैं. हारने वाली पार्टी EVM हैकिंग का दावा करती है. हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि EVM पूरी तरह सुरक्षित है और इसे हैक नहीं किया जा सकता. ये भी पढ़ें-- UP Exit Poll: मोदी या योगी? यूपी में बीजेपी की ऐतिहासिक वापसी का सबसे बड़ा किरदार कौन? क्यों हैक नहीं की जा सकती EVM? पहला तर्क : चुनाव आयोग जिस EVM का इस्तेमाल करता है, वो स्टैंड अलोन मशीनें होती हैं. उसे न तो किसी कम्प्यूटर से कंट्रोल किया जाता है और न ही इंटरनेट या किसी नेटवर्क से कनेक्ट किया जाता है, ऐसे में उसे हैक करना नामुमकिन है. इसके अलावा EVM में जो सॉफ्टवेयर इस्तेमाल होता है, उसे रक्षा मंत्रालय और परमाणु ऊर्जा मंत्रालय से जुड़ी सरकारी कंपनियों के इंजीनियर बनाते हैं. इस सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड को किसी से भी साझा नहीं किया जाता है. दूसरा तर्क : भारत में इस्तेमाल होने EVM मशीन में दो यूनिट होती है. एक कंट्रोलिंग यूनिट और दूसरी बैलेटिंग यूनिट . ये दोनों अलग-अलग यूनिट होती हैं और इन्हें चुनावों के दौरान अलग-अलग ही बांटा जाता है. अगर किसी भी एक यूनिट के साथ कोई छेड़छाड़ होती है तो मशीन काम नहीं करेगी. इसलिए कमेटी का कहना था कि EVM से छेड़छाड़ करना या हैक करने की गुंजाइश न के बराबर है. जिसने मशीन बनाई, क्या वो नहीं कर सकता छेड़छाड़? - भारत में इस्तेमाल होने वाली EVM को दो सरकारी कंपनियां बनाती हैं. पहली कंपनी है बेंगलुरु स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और दूसरी है हैदराबाद स्थित इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड. - चुनाव आयोग ने दो हज़ार सत्रह में एक FAQ जारी किया था. इसमें बताया था कि EVM पहले राज्य और फिर वहां से जिलों में जाती है. मैनुफैक्चरर्स को नहीं पता होता कि कौन सी मशीन कहां जाएगी, इसलिए नहीं पता होता कि उम्मीदवार कौन होगा. इसलिए छेड़छाड़ नहीं हो सकती. - इसके अलावा हर EVM का एक अलग सीरियल नंबर होता है. चुनाव आयोग एक ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता है, जिससे पता चलता है कि कौन सी मशीन कहां है, तो उससे छेड़छाड़ करना संभव नहीं है. ये भी पढ़ें-- UP Election Counting: क्या होता है पोस्टल बैलेट और सर्विस वोट, यूपी चुनाव में तय करेंगे हार-जीत? क्या चिप के जरिए हो सकती है छेड़छाड़? - EVM की CU में एक माइक्रो चिप लगी होती है. इसी चिप में उम्मीदवार का डेटा रहता है. कई बार ऐसे सवाल उठाए जाते हैं कि इस माइक्रो चिप में मालवेयर के जरिए छेड़छाड़ की जा सकती है. हालांकि, चुनाव आयोग इस बात को खारिज करता है. - चुनाव आयोग के मुताबिक, एक वोटर एक बार में एक ही बटन दबा सकता है. एक बार बटन दबाने के बाद मशीन बंद हो जाती है और फिर वोटर चाहकर भी दूसरा बटन नहीं दबा सकता. इसलिए चिप के जरिए कोई छेड़छाड़ करना संभव नहीं है. जब EVM हैकिंग का किया गया दावा? - मई दो हज़ार दस में अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक डिवाइस को मशीन से जोड़कर दिखाया था और दावा किया था कि मोबाइल से मैसेज भेजकर नतीजों को बदला जा सकता है. - मई दो हज़ार सत्रह में आम आदमी पार्टी के विधायक ने दिल्ली विधानसभा में EVM को से छेड़छाड़ किए जाने का डेमो दिया था. हालांकि, चुनाव आयोग ने इसे खारिज कर दिया था और कहा था कि ये वो EVM नहीं है, जिसका इस्तेमाल होता है.
पहेली है जिसे शायद मैं कभी भी न सुलझा सकूँगा, और फिर कभी भी क्या हम तुम मिलेंगे, इसको भी मैं नहीं जानता। इतना सब होते हुए भी एक प्रार्थना है और इसे तुम अस्वीकृत न करोगी ! तुम कहती हो कि तुम महीने में सत्तर- अस्सी रुपया पैदा कर लेती हो, यह सौ रुपए का नोट लो और एक महीने के लिए तुम अपने इस काम को छोड़ दो । एक महीने के बाद जो तुम्हारा जी चाहे करना । इस बार उसकी मुसकराहट लोप हो गई। वह मुख जिस पर कामुकता हँस रही थी एकाएक पीला पड़ गया । मेरे सामने करुणा की एक प्रतिमूर्ति खड़ी थी । उसने धीरे से कहा, बाबू जी, मैं यह रुपया न लूँगी । " " क्यों ? क्या तुम अपने काम को इतना पसन्द करती हो कि एक महीने के लिए भी नहीं छोड़ सकतीं ? " उसका गला भर आया - " हाथ जोड़ती हूँ, बाबू जी ! हाथ जोड़ती हूँ आप यह न कहिए । मैं करूँगी, आप जो कुछ कहते हैं वह करूँगी ।" यह कह कर उसने नोट मेरे हाथ से ले लिया । उस समय उसके हाथ काँप रहे थे । अच्छा, अब तुम जा सकती हो ! उसने कहा, "बाबूजी, यह नहीं सोचा था कि दुनिया में दया, हमदर्दी और इंसानियत बाक़ी है। भगवान आप का भला करें । इतना कह कर उसने अपना मुख फेर लिया । लाख कोशिश करने पर भी वह अपनी आँखों से गिरते हुए को मुझसे न छिपा सकी, और वह कमरे के बाहर चली गई वह चली गई और मैं सोचता ही रह गया - अरे ! किस भगवान से यह मेरा भला करने को कह गई है ? उसी भगवान से जो इसे यह घृणित जीवन व्यतीत करने को वाध्य कर रहा है ? उसी भगवान से जो उसे गिराता ही जा रहा है ? उसी भगवान से जिसने इसको उठाना तो दूर रहा है, इसे पशु बना दिया है ? क्या वह भगवान उसके कहने से मेरा भला कर सकता है
पहेली है जिसे शायद मैं कभी भी न सुलझा सकूँगा, और फिर कभी भी क्या हम तुम मिलेंगे, इसको भी मैं नहीं जानता। इतना सब होते हुए भी एक प्रार्थना है और इसे तुम अस्वीकृत न करोगी ! तुम कहती हो कि तुम महीने में सत्तर- अस्सी रुपया पैदा कर लेती हो, यह सौ रुपए का नोट लो और एक महीने के लिए तुम अपने इस काम को छोड़ दो । एक महीने के बाद जो तुम्हारा जी चाहे करना । इस बार उसकी मुसकराहट लोप हो गई। वह मुख जिस पर कामुकता हँस रही थी एकाएक पीला पड़ गया । मेरे सामने करुणा की एक प्रतिमूर्ति खड़ी थी । उसने धीरे से कहा, बाबू जी, मैं यह रुपया न लूँगी । " " क्यों ? क्या तुम अपने काम को इतना पसन्द करती हो कि एक महीने के लिए भी नहीं छोड़ सकतीं ? " उसका गला भर आया - " हाथ जोड़ती हूँ, बाबू जी ! हाथ जोड़ती हूँ आप यह न कहिए । मैं करूँगी, आप जो कुछ कहते हैं वह करूँगी ।" यह कह कर उसने नोट मेरे हाथ से ले लिया । उस समय उसके हाथ काँप रहे थे । अच्छा, अब तुम जा सकती हो ! उसने कहा, "बाबूजी, यह नहीं सोचा था कि दुनिया में दया, हमदर्दी और इंसानियत बाक़ी है। भगवान आप का भला करें । इतना कह कर उसने अपना मुख फेर लिया । लाख कोशिश करने पर भी वह अपनी आँखों से गिरते हुए को मुझसे न छिपा सकी, और वह कमरे के बाहर चली गई वह चली गई और मैं सोचता ही रह गया - अरे ! किस भगवान से यह मेरा भला करने को कह गई है ? उसी भगवान से जो इसे यह घृणित जीवन व्यतीत करने को वाध्य कर रहा है ? उसी भगवान से जो उसे गिराता ही जा रहा है ? उसी भगवान से जिसने इसको उठाना तो दूर रहा है, इसे पशु बना दिया है ? क्या वह भगवान उसके कहने से मेरा भला कर सकता है
माणस्स वत्तव्वो, तेसिमुदयाभावलक्खणोबसमे संते पयदलद्धीए ससुष्पत्तिदसणादो। पञ्चक्खाण-चदुसंजलण-णवणोकसायाणमुदए दिज्जमाणे संते कधब्रुवसमो वोतुं सकिजइ ति णासंकणिजं, तेसिमुदयस्स सव्वघादित्ताभावेण देसोबसमस्स तत्थ वि संभवे विरोहाभावादो। पञ्चक्खाणावरणोयोदयो सव्वषादी चेवे त्ति चे १ ण, देससंजमविसये तस्स बावाराभावादी । संजमलद्वी पुण बारसकसायाणमणुदयोवसमेण चदुसंजलण-णवणोकसायाणं देसोवसमेण च समुप्पज्जदि सि वत्तव्वं । ९६ तेसिं चेव पुब्वृत्ताणं पयडीणमणुदयिन्लाणं डिदिउदयाभावो डिदिउवसामणा णाम । अधवा सव्वासि कम्माणमंतोकोडाकोडीदो उवरिमट्टिदीणमुदयाभावो डिदिउवसामणा त्ति घेत्तन्वा । अणुभागुवसामणा णाम पुव्युत्ताणं कसायपयडीणं विट्ठाण-तिट्ठाण-चउडाणाणुभागस्स उदयाभावो, उदयिल्लाणं पि कसायाणं सब्वधादिफहयाण मुदयाभावो अणुभागोवसामणा त्ति घेत्तव्वं, तेसि देसघादिविडाणाणु - भागोदयणियमदंसणादो । णाणावरणादिकम्माणं पि तिट्ठाण-चउट्ठाण परिचागेण विठ्ठाणियाणुभागपडिलंभो अणुभागोवसामणा ति एत्थ वत्तव्वं विरोहाभाबादो । उपशामना कहनी चाहिए, क्योंकि उनके उदयाभावलक्षण उपशमके होने पर प्रकृत लब्धिकी उत्पत्ति देखी जाती है । शंका - वहाँ प्रत्याख्यानावरणचतुष्क, चार संग्वलन और नौ नोकषायोंको उदयमें देनेपर उपशम कहना कैसे शक्य है ? समाधान ~ ऐसी आशका नहीं करनी चाहिए, क्योंकि उनके उदय में सर्वघातिपनेका अभाव होनेसे देशोपशमके वहाँ भी सम्भव होनेमें विरोधका अभाव है। शंका-प्रत्याख्यानावरणीयका उदय सर्वघाति ही है ? समाधान नहीं, क्योंकि देशसंयमके विषय में उसका व्यापार नहीं होता। परन्तु संयमलब्धि बारह कषायोंके अनुरूप उपशमसे तथा चार सज्वलन और नौ नोकषायोंके देशोपशमसे उत्पन्न होती है ऐसा कहना चाहिए । ६. अनुदयवाली उन्हीं पूर्वोक्त प्रकृतियोंके स्थिति उदयका अभाव स्थिति-उपशामना है। अथवा सभी कर्मोंकी अन्तःकोडाकोड़ीसे उपरिम स्थितियोंके उदयका अभाव स्थितिउपशामना है ऐसा यहाँ ग्रहण करना चाहिए। पूर्वोक्त कषायप्रकृतियोंके द्विस्थान, त्रिस्थान और चतुःस्थान अनुभागका उदयाभाव अनुभाग-उपशामना है तथा उदयवाले कषायोंके भी सर्वघाति स्पर्घकोंका उदयाभाव अनुभाग उपशामना है ऐसा यहाँ ग्रहण करना चाहिए, क्योंकि उनके देशवाति द्विस्थानीय अनुभागके उदयका नियम देखा जाता है। ज्ञानावरणादि कर्मोके भी त्रिस्थान और चतुःस्थान अनुभागके परित्यागसे द्विस्थानीय अनुभागको प्राप्ति अनुभाग-उपशामना है ऐसा यहाँ कहना चाहिए, क्योंकि इसमें बिरोधका अभाव है। अनुदय
माणस्स वत्तव्वो, तेसिमुदयाभावलक्खणोबसमे संते पयदलद्धीए ससुष्पत्तिदसणादो। पञ्चक्खाण-चदुसंजलण-णवणोकसायाणमुदए दिज्जमाणे संते कधब्रुवसमो वोतुं सकिजइ ति णासंकणिजं, तेसिमुदयस्स सव्वघादित्ताभावेण देसोबसमस्स तत्थ वि संभवे विरोहाभावादो। पञ्चक्खाणावरणोयोदयो सव्वषादी चेवे त्ति चे एक ण, देससंजमविसये तस्स बावाराभावादी । संजमलद्वी पुण बारसकसायाणमणुदयोवसमेण चदुसंजलण-णवणोकसायाणं देसोवसमेण च समुप्पज्जदि सि वत्तव्वं । छियानवे तेसिं चेव पुब्वृत्ताणं पयडीणमणुदयिन्लाणं डिदिउदयाभावो डिदिउवसामणा णाम । अधवा सव्वासि कम्माणमंतोकोडाकोडीदो उवरिमट्टिदीणमुदयाभावो डिदिउवसामणा त्ति घेत्तन्वा । अणुभागुवसामणा णाम पुव्युत्ताणं कसायपयडीणं विट्ठाण-तिट्ठाण-चउडाणाणुभागस्स उदयाभावो, उदयिल्लाणं पि कसायाणं सब्वधादिफहयाण मुदयाभावो अणुभागोवसामणा त्ति घेत्तव्वं, तेसि देसघादिविडाणाणु - भागोदयणियमदंसणादो । णाणावरणादिकम्माणं पि तिट्ठाण-चउट्ठाण परिचागेण विठ्ठाणियाणुभागपडिलंभो अणुभागोवसामणा ति एत्थ वत्तव्वं विरोहाभाबादो । उपशामना कहनी चाहिए, क्योंकि उनके उदयाभावलक्षण उपशमके होने पर प्रकृत लब्धिकी उत्पत्ति देखी जाती है । शंका - वहाँ प्रत्याख्यानावरणचतुष्क, चार संग्वलन और नौ नोकषायोंको उदयमें देनेपर उपशम कहना कैसे शक्य है ? समाधान ~ ऐसी आशका नहीं करनी चाहिए, क्योंकि उनके उदय में सर्वघातिपनेका अभाव होनेसे देशोपशमके वहाँ भी सम्भव होनेमें विरोधका अभाव है। शंका-प्रत्याख्यानावरणीयका उदय सर्वघाति ही है ? समाधान नहीं, क्योंकि देशसंयमके विषय में उसका व्यापार नहीं होता। परन्तु संयमलब्धि बारह कषायोंके अनुरूप उपशमसे तथा चार सज्वलन और नौ नोकषायोंके देशोपशमसे उत्पन्न होती है ऐसा कहना चाहिए । छः. अनुदयवाली उन्हीं पूर्वोक्त प्रकृतियोंके स्थिति उदयका अभाव स्थिति-उपशामना है। अथवा सभी कर्मोंकी अन्तःकोडाकोड़ीसे उपरिम स्थितियोंके उदयका अभाव स्थितिउपशामना है ऐसा यहाँ ग्रहण करना चाहिए। पूर्वोक्त कषायप्रकृतियोंके द्विस्थान, त्रिस्थान और चतुःस्थान अनुभागका उदयाभाव अनुभाग-उपशामना है तथा उदयवाले कषायोंके भी सर्वघाति स्पर्घकोंका उदयाभाव अनुभाग उपशामना है ऐसा यहाँ ग्रहण करना चाहिए, क्योंकि उनके देशवाति द्विस्थानीय अनुभागके उदयका नियम देखा जाता है। ज्ञानावरणादि कर्मोके भी त्रिस्थान और चतुःस्थान अनुभागके परित्यागसे द्विस्थानीय अनुभागको प्राप्ति अनुभाग-उपशामना है ऐसा यहाँ कहना चाहिए, क्योंकि इसमें बिरोधका अभाव है। अनुदय
माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद सर्विलांस में लगे लगभग तीन हजार मोबाइल फोन में से 800 बंद हो गए हैं। इनका डेटा खंगाला जा रहा है। इसके साथ ही अतीक की बीवी शाइस्ता परवीन की तलाश में पुलिस ने प्रयागराज में छापामारी तेज कर दी है। पुलिस ने अतीक अहमद और अशरफ के करीबियों की जानकारी जुटाने के लिए लगभग 3000 मोबाइल फोन सर्विलांस में लगाए थे। पुलिस का कहना है कि अतीक व अशरफ की हत्या के बाद लगभग 800 मोबाइल फोन अचानक बंद कर दिए गए। इस बीच 50 हजार की इनामी शाइस्ता परवीन की तलाश में पुलिस ने प्रयागराज में छापामारी तेज कर दी है। दो दिन उसकी कौशाम्बी जनपद में तलाश की गई। ड्रोन की भी मदद ली गई, लेकिन वह नहीं मिली। इधर आज शाइस्ता परवीन का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वे बिना बुर्के में नजर आ रही हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो उमेश पाल मर्डर केस से पहले एक शादी समारोह का है। जिसमें शाइस्ता बिना बुर्के के हैं। शाइस्ता परवीन के इससे पहले जो भी वीडियो सामने आए हैं उन सभी में वह बुर्का पहने हुए नजर आती थीं। किसी में भी उनका चेहरा नजर नहीं आता था, लेकिन यह पहला वीडियो है, जिसमें शाइस्ता का चेहरा साफ नजर आ रहा है।
माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद सर्विलांस में लगे लगभग तीन हजार मोबाइल फोन में से आठ सौ बंद हो गए हैं। इनका डेटा खंगाला जा रहा है। इसके साथ ही अतीक की बीवी शाइस्ता परवीन की तलाश में पुलिस ने प्रयागराज में छापामारी तेज कर दी है। पुलिस ने अतीक अहमद और अशरफ के करीबियों की जानकारी जुटाने के लिए लगभग तीन हज़ार मोबाइल फोन सर्विलांस में लगाए थे। पुलिस का कहना है कि अतीक व अशरफ की हत्या के बाद लगभग आठ सौ मोबाइल फोन अचानक बंद कर दिए गए। इस बीच पचास हजार की इनामी शाइस्ता परवीन की तलाश में पुलिस ने प्रयागराज में छापामारी तेज कर दी है। दो दिन उसकी कौशाम्बी जनपद में तलाश की गई। ड्रोन की भी मदद ली गई, लेकिन वह नहीं मिली। इधर आज शाइस्ता परवीन का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वे बिना बुर्के में नजर आ रही हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो उमेश पाल मर्डर केस से पहले एक शादी समारोह का है। जिसमें शाइस्ता बिना बुर्के के हैं। शाइस्ता परवीन के इससे पहले जो भी वीडियो सामने आए हैं उन सभी में वह बुर्का पहने हुए नजर आती थीं। किसी में भी उनका चेहरा नजर नहीं आता था, लेकिन यह पहला वीडियो है, जिसमें शाइस्ता का चेहरा साफ नजर आ रहा है।
राठ, यूपी खबर,संविधान , वर-वधू , दहेज की शादी,Rath, UP news, Constitution, bride and groom, dowry marriage, गुरूवार को स्वामी ब्रह्मानंद की समाधि के समक्ष वर जयहिंद और वधू भानवती ने समाधि व संविधान को साक्षी मानकर एक दूजे को वरमाला पहना जीवन भर का साथ निभाने का वादा किया। अधिवक्ता मकरध्वज सिंह ने वर वधू को भारत का संविधान उपहार के रूप में भेंट किया। सपा लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष व वधू के भाई कामता राजपूत ने बताया कि संविधान निर्माता बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उन्होंने अपनी बहन भानवती पुत्री जयपथ निवासी इमिलिया की शादी फिजूल खर्च को खत्म करते हुए सादगी के साथ संविधान और स्वामी ब्रह्मानंद को साक्षी मानकर जयहिंद पुत्र बालादीन निवासी पवई के साथ संपन्न कराई है। कहा कि उनका मकसद है कि समाज रूढ़िवादी परंपराओं को आर्थिक स्थिति के अनुसार नकार सादगी के साथ शादियां करना शुरू करे। उनके द्वारा की गई इस पहल का उन्हें सर्वसमाज का भारी समर्थन मिला है। युवजन सभा के राष्ट्रीय सचिव सत्यपाल यादव ने भी वर वधू को संविधान सौंपकर शुभकामनाएं दी। मृत्युंजय प्रताप शनि, दुष्यंत राजपूत, हरिचरन फौजी, गोविंद अहिरवार, श्याम सुंदर सहित वर वधू के स्वजन मौजूद रहे।
राठ, यूपी खबर,संविधान , वर-वधू , दहेज की शादी,Rath, UP news, Constitution, bride and groom, dowry marriage, गुरूवार को स्वामी ब्रह्मानंद की समाधि के समक्ष वर जयहिंद और वधू भानवती ने समाधि व संविधान को साक्षी मानकर एक दूजे को वरमाला पहना जीवन भर का साथ निभाने का वादा किया। अधिवक्ता मकरध्वज सिंह ने वर वधू को भारत का संविधान उपहार के रूप में भेंट किया। सपा लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष व वधू के भाई कामता राजपूत ने बताया कि संविधान निर्माता बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उन्होंने अपनी बहन भानवती पुत्री जयपथ निवासी इमिलिया की शादी फिजूल खर्च को खत्म करते हुए सादगी के साथ संविधान और स्वामी ब्रह्मानंद को साक्षी मानकर जयहिंद पुत्र बालादीन निवासी पवई के साथ संपन्न कराई है। कहा कि उनका मकसद है कि समाज रूढ़िवादी परंपराओं को आर्थिक स्थिति के अनुसार नकार सादगी के साथ शादियां करना शुरू करे। उनके द्वारा की गई इस पहल का उन्हें सर्वसमाज का भारी समर्थन मिला है। युवजन सभा के राष्ट्रीय सचिव सत्यपाल यादव ने भी वर वधू को संविधान सौंपकर शुभकामनाएं दी। मृत्युंजय प्रताप शनि, दुष्यंत राजपूत, हरिचरन फौजी, गोविंद अहिरवार, श्याम सुंदर सहित वर वधू के स्वजन मौजूद रहे।
सौमनाथ वरने सखी साँ वतरानी इमि घर ते विचारियो इतै को डग करी में । कहा करौं मन की रही री मन ही में न तो पियनहि, कित रह्यौ, सोच करै यों बाल । ताको उत्का नायका, वरनत बुद्धि विसाल ।।३२।। अथ मुग्धा उत्का यथा सवैया लेती प्राजु गहने जवाहर के घरी में ॥३१॥ अथ उत्का लच्छनं राजति केलि के मंदिर में सव साज सखीनि रच्यो छविवारो । फैलि रौ सु प्रमंद तहाँ मुखचंद को चंद हू तें उजियारो । लाज तें वृझि सकै न कछू तिय सोचु करै मन ही मन भारो । नाथ कहाँ रोयो नही प्रवलौं नित सग बिहारनहारी ।।३३।। अथ मध्या उत्का पैससी चुपचाप चहूँ दिसि माँझ भई अति । नीद सौ नहीं झुके ग्रॅखियाँ ससिनाथ सनेह विहाल करी मति । भूलि गए घर की सुधि कौं कि कहूँ रस' बातनि में विरमें पति । क्यौं नहीं ग्राए कहा करियै तिय नारि नवाय सखोनि सों वझति ॥ ३४ ॥ अथ प्रोढ़ा उत्का फूलिवै के भए अभिलाष अरविंदनि के वंदन वरन प्राची रूप दरसत है । हेरि हेरि हारे नैन पंथ चित चाइनि सो पाइनि परस विना प्रान तरसत है।
सौमनाथ वरने सखी साँ वतरानी इमि घर ते विचारियो इतै को डग करी में । कहा करौं मन की रही री मन ही में न तो पियनहि, कित रह्यौ, सोच करै यों बाल । ताको उत्का नायका, वरनत बुद्धि विसाल ।।बत्तीस।। अथ मुग्धा उत्का यथा सवैया लेती प्राजु गहने जवाहर के घरी में ॥इकतीस॥ अथ उत्का लच्छनं राजति केलि के मंदिर में सव साज सखीनि रच्यो छविवारो । फैलि रौ सु प्रमंद तहाँ मुखचंद को चंद हू तें उजियारो । लाज तें वृझि सकै न कछू तिय सोचु करै मन ही मन भारो । नाथ कहाँ रोयो नही प्रवलौं नित सग बिहारनहारी ।।तैंतीस।। अथ मध्या उत्का पैससी चुपचाप चहूँ दिसि माँझ भई अति । नीद सौ नहीं झुके ग्रॅखियाँ ससिनाथ सनेह विहाल करी मति । भूलि गए घर की सुधि कौं कि कहूँ रस' बातनि में विरमें पति । क्यौं नहीं ग्राए कहा करियै तिय नारि नवाय सखोनि सों वझति ॥ चौंतीस ॥ अथ प्रोढ़ा उत्का फूलिवै के भए अभिलाष अरविंदनि के वंदन वरन प्राची रूप दरसत है । हेरि हेरि हारे नैन पंथ चित चाइनि सो पाइनि परस विना प्रान तरसत है।
दैनिक जागरण, अलीगढ़ से खबर है कि आशीष गुप्ता ने इस्तीफा दे दिया है. वे वहां पर सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे. आशीष ने अपनी नई पारी अलीगढ़ में ही दैनिक हिंदुस्तान के साथ शुरू की है. इन्हें यहां भी सब एडिटर बनाया गया है. बताया जा रहा है कि उन्होंने जागरण के चीफ रिपोर्टर के तंग आकर संस्थान बदलने का निर्णय किया है. अलीगढ़ से दूसरी खबर है कि पिछले दिनों हिंदुस्तान से बाहर होने वाली प्रियंका ने अपनी नई पारी बुंलदशहर में दैनिक जागरण के साथ शुरू की है. प्रियंका हिंदुस्तान, अलीगढ़ में रिपोर्टर के पद पर कार्यरत थीं, लेकिन परिस्थितिवश संस्थान ने उनसे इस्तीफा मांग लिया था. प्रियंका को दैनिक जागरण में भी रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी दी गई है.
दैनिक जागरण, अलीगढ़ से खबर है कि आशीष गुप्ता ने इस्तीफा दे दिया है. वे वहां पर सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे. आशीष ने अपनी नई पारी अलीगढ़ में ही दैनिक हिंदुस्तान के साथ शुरू की है. इन्हें यहां भी सब एडिटर बनाया गया है. बताया जा रहा है कि उन्होंने जागरण के चीफ रिपोर्टर के तंग आकर संस्थान बदलने का निर्णय किया है. अलीगढ़ से दूसरी खबर है कि पिछले दिनों हिंदुस्तान से बाहर होने वाली प्रियंका ने अपनी नई पारी बुंलदशहर में दैनिक जागरण के साथ शुरू की है. प्रियंका हिंदुस्तान, अलीगढ़ में रिपोर्टर के पद पर कार्यरत थीं, लेकिन परिस्थितिवश संस्थान ने उनसे इस्तीफा मांग लिया था. प्रियंका को दैनिक जागरण में भी रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी दी गई है.
Amazon Fab Phones Fest 25 से 28 मार्च तक चलेगा। अगर आप एक नया स्मार्टफोन खरीदना चाह रहे हैं तो इन डील्स पर नज़र डाल सकते हैं। Amazon इंडिया ने 25 से 28 मार्च के बीच Fab Phones Fest सेल का आयोजन किया है जिस दौरान कई स्मार्टफोंस और इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स पर भारी डील्स मिल रही हैं। अगर आप एक नया स्मार्टफोन खरीदना चाह रहे हैं तो इन डील्स पर एक नज़र डाल सकते हैं और कम दाम में ये प्रोडक्ट्स खरीद सकते हैं। डिस्काउंट के अलावा, एक्सचेंज बोनस और SBI कार्ड की EMI ट्रांजेक्शन पर 5 प्रतिशत कैशबैक मिल रहा है। कैशबैक की बात करें तो मिनिमम ट्रांजेक्शन Rs 12,500 का होना चाहिए और यूज़र्स Rs 1,500 तक का कैशबैक पा सकते हैं। Honor Play में 6.3 इंच की फुल HD+ IPS LCD डिस्प्ले दी गई है जिसका रेज़ोल्यूशन 1080×2340 पिक्सल है और इसका एस्पेक्ट रेश्यो 19.5:9 है। डिवाइस की डिस्प्ले में नोट मौजूद हैं जहाँ, फ्रंट कैमरा, इयरपीस और सेंसर्स को जगह दी गई है। नोटः डिजिट हिंदी अब टेलीग्राम पर भी उपलब्ध है, दिन भर की टेक से जुड़ी ताज़ातरीन खबरों के लिए हमें Telegram पर भी सब्सक्राइब करें!
Amazon Fab Phones Fest पच्चीस से अट्ठाईस मार्च तक चलेगा। अगर आप एक नया स्मार्टफोन खरीदना चाह रहे हैं तो इन डील्स पर नज़र डाल सकते हैं। Amazon इंडिया ने पच्चीस से अट्ठाईस मार्च के बीच Fab Phones Fest सेल का आयोजन किया है जिस दौरान कई स्मार्टफोंस और इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स पर भारी डील्स मिल रही हैं। अगर आप एक नया स्मार्टफोन खरीदना चाह रहे हैं तो इन डील्स पर एक नज़र डाल सकते हैं और कम दाम में ये प्रोडक्ट्स खरीद सकते हैं। डिस्काउंट के अलावा, एक्सचेंज बोनस और SBI कार्ड की EMI ट्रांजेक्शन पर पाँच प्रतिशत कैशबैक मिल रहा है। कैशबैक की बात करें तो मिनिमम ट्रांजेक्शन बारह रुपया,पाँच सौ का होना चाहिए और यूज़र्स एक रुपया,पाँच सौ तक का कैशबैक पा सकते हैं। Honor Play में छः.तीन इंच की फुल HD+ IPS LCD डिस्प्ले दी गई है जिसका रेज़ोल्यूशन एक हज़ार अस्सी×दो हज़ार तीन सौ चालीस पिक्सल है और इसका एस्पेक्ट रेश्यो उन्नीस.पाँच:नौ है। डिवाइस की डिस्प्ले में नोट मौजूद हैं जहाँ, फ्रंट कैमरा, इयरपीस और सेंसर्स को जगह दी गई है। नोटः डिजिट हिंदी अब टेलीग्राम पर भी उपलब्ध है, दिन भर की टेक से जुड़ी ताज़ातरीन खबरों के लिए हमें Telegram पर भी सब्सक्राइब करें!
कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए धरने पर बैठे प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह। इनके साथ ही भाजपाई अपने- अपने घरों पर जता रहे विरोध। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में भाजपाइयों के घरों व प्रतिष्ठानों तथा पार्टी कार्यालयों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हिंसा के विरोध में भारतीय जनता पार्टी बुधवार को पूरे प्रदेश में धरना दें रहे हैं। मंडल व बूथ स्तर पर कोविड प्रोटोकाल व लाकडाउन का ध्यान रखते हुए भाजपाई अपने- अपने घरों पर विरोध जता रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह भी अपने आवास पर धरने पर बैठे हैं। सभी पार्टी पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से धरना देने को कहा गया है। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी में जहां मानव एक दूसरे की जान बचाने के लिए प्रयासरत है, वहीं पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के संरक्षण में लगातार हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी और बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही हैं। भाजपाइयों के घरों व प्रतिष्ठानों तथा पार्टी कार्यालयों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। टीएमसी कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी लोकतंत्र के नाम पर कलंक है। जिसके विरोध में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के निर्देशानुसार करीब एक घंटे के धरने के दौरान कार्यकर्ताओं की संख्या एक बार में 20 से अधिक नहीं होगी। सेवा कार्य प्रभावित न हों : प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश, क्षेत्र, जिला व मंडल पदाधिकारियों सहित जनप्रतिनिधि अपने-अपने घरों पर ममता सरकार के संरक्षण में हो रही हिंसा के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करेंगे। उन्होंने आगाह किया कि सेवा ही संगठन अभियान-2 के तहत भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा कोविड पीड़ितों के लिए किए जा रहे सेवा कार्य इस धरने से प्रभावित न हों, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।
कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए धरने पर बैठे प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह। इनके साथ ही भाजपाई अपने- अपने घरों पर जता रहे विरोध। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में भाजपाइयों के घरों व प्रतिष्ठानों तथा पार्टी कार्यालयों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हिंसा के विरोध में भारतीय जनता पार्टी बुधवार को पूरे प्रदेश में धरना दें रहे हैं। मंडल व बूथ स्तर पर कोविड प्रोटोकाल व लाकडाउन का ध्यान रखते हुए भाजपाई अपने- अपने घरों पर विरोध जता रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह भी अपने आवास पर धरने पर बैठे हैं। सभी पार्टी पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से धरना देने को कहा गया है। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी में जहां मानव एक दूसरे की जान बचाने के लिए प्रयासरत है, वहीं पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के संरक्षण में लगातार हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी और बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही हैं। भाजपाइयों के घरों व प्रतिष्ठानों तथा पार्टी कार्यालयों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। टीएमसी कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी लोकतंत्र के नाम पर कलंक है। जिसके विरोध में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के निर्देशानुसार करीब एक घंटे के धरने के दौरान कार्यकर्ताओं की संख्या एक बार में बीस से अधिक नहीं होगी। सेवा कार्य प्रभावित न हों : प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश, क्षेत्र, जिला व मंडल पदाधिकारियों सहित जनप्रतिनिधि अपने-अपने घरों पर ममता सरकार के संरक्षण में हो रही हिंसा के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करेंगे। उन्होंने आगाह किया कि सेवा ही संगठन अभियान-दो के तहत भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा कोविड पीड़ितों के लिए किए जा रहे सेवा कार्य इस धरने से प्रभावित न हों, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।
हाल ही में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने मत्स्य पालन से संबंधित किसानों के लिये एक ऑनलाइन कोर्स मोबाइल एप "मत्स्य सेतु" लॉन्च किया है। - इस एप को 'इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर' (ICAR-CIFA) और 'नेशनल फिशरीज़ डेवलपमेंट बोर्ड' (NFDB) द्वारा विकसित किया गया है। प्रमुख बिंदुः - इसका उद्देश्य देश में जलीय कृषि करने वाले किसानों तक ताज़े पानी से संबंधित नवीनतम जलीय कृषि प्रौद्योगिकियों का प्रसार करना और उनकी उत्पादकता एवं आय में वृद्धि करना है। - एक्वाकल्चर मछली, शंख और जलीय पौधों के प्रजनन, उत्पादन और हार्वेस्टिंग को कहते हैं। - भारत दुनिया में जलीय कृषि के माध्यम से मछली उत्पादन करने वाला दूसरा प्रमुख उत्पादक है। - इसमें व्यावसायिक रूप से महत्त्वपूर्ण मछलियों जैसे- कार्प, कैटफ़िश, स्कैम्पी, म्यूरल, सजावटी मछली, मोती की खेती आदि की ग्रो-आउट गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। - इसका उपयोग देश भर के हितधारकों, विशेष रूप से मछुआरों, मछली किसानों, युवाओं और उद्यमियों के बीच विभिन्न योजनाओं पर नवीनतम जानकारी का प्रसार करने तथा व्यापार में आसानी प्रदान करने की सुविधा के लिये किया जा सकता है। अन्य संबंधित पहलेंः - शफरी (जलीय कृषि उत्पादों के लिये प्रमाणन योजना): यह अच्छी जलीय कृषि प्रथाओं को अपनाने और वैश्विक उपभोक्ताओं को आश्वस्त करने के लिये गुणवत्तापूर्ण एंटीबायोटिक मुक्त झींगा उत्पादों का उत्पादन में मदद करने हेतु हैचरी के लिये एक बाज़ार आधारित उपकरण है। - वर्ष 2018-19 के दौरान मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) की स्थापना। - प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजनाः इस कार्यक्रम का उद्देश्य वर्ष 2024-25 तक 22 मिलियन टन मछली उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना है। साथ ही इससे 55 लाख लोगों के लिये रोज़गार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। - नीली क्रांति पर ध्यान केंद्रित करनाः मछुआरों और मछली किसानों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिये एवं मत्स्य पालन के एकीकृत और समग्र प्रबंधन हेतु एक सक्षम वातावरण बनाना। - मछुआरों और मछली किसानों को उनकी कार्यशील पूंजी की ज़रूरतों को पूरा करने में मदद के लिये किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) सुविधाओं का विस्तार करना। हाल ही में सिंगापुर में प्रवासी श्रमिकों हेतु सरकार द्वारा शुरू की गई प्रतियोगिता में गणेशन संधिराकासन (Ganesan Sandhirakasan) नाम के एक भारतीय ने सिलंबम (Silambam) के प्रदर्शन में शीर्ष पुरस्कार प्राप्त किया है। प्रमुख बिंदुः सिलंबम के बारे मेंः - सिलंबम एक प्राचीन हथियार आधारित मार्शल आर्ट (Weapon-Based Martial Art) है जिसकी उत्पत्ति तमिलकम में हुई जो वर्तमान में भारत का तमिलनाडु क्षेत्र है। यह विश्व के सबसे पुराने मार्शल आर्ट में से एक है। - सिलंबम शब्द स्वयं एक खेल के बारे में बताता है, सिलम का अर्थ है 'पहाड़' (Mountain) और बम का अर्थ बाँस (Bamboo) है जिसका उपयोग मार्शल आर्ट के इस रूप में मुख्य हथियार के रूप में किया जाता है। - यह केरल के मार्शल आर्ट कलारीपयट्टू (kalaripayattu) से निकटता रखता है। - पैरों की गति, सिलंबम (Silambam) और कुट्टा वारिसाई (Kutta Varisai के प्रमुख तत्व हैं । छड़ी की गति के साथ तालमेल बनाने के लिये पैर की गति में महारत हासिल करने हेतु सोलह प्रकार के संचालनों (Movement) की आवश्यकता होती है। - इसके प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कई सशस्त्र विरोधों के खिलाफ रक्षा प्रदान करना है। इस्तेमाल किये जाने वाले हथियारः - बाँस की छड़ी (Bamboo staff)- यह मुख्य हथियार है तथा इसकी लंबाई प्रयोग करने वाले की ऊंँचाई पर निर्भर करती है। - मारू (Maru)- यह एक धमाकेदार हथियार है जिसे हिरण के सींगों से बनाया जाता है। - अरुवा (दरांती), सवुकु ( कोड़ा), वाल (घुमावदार तलवार), कुट्टू कटाई (नुकीली अँगुली डस्टर), कट्टी (चाकू), सेडिकुची (लाठी या छोटी छड़ी)। - ऐसा माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति ऋषि अगस्त्य मुनिवर (Agastya Munivar) द्वारा लगभग 1000 ईसा पूर्व हुई थी। - सिलप्पादिक्करम और संगम साहित्य (Sangam literature) में इस प्रथा के बारे में उल्लेख किया गया है तथा यह दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की है, जबकि मौखिक लोक कथाओं में इसे और अधिक लगभग 7000 वर्ष प्राचीन माना जाता है। - लेकिन हाल के सर्वेक्षणों और पुरातात्त्विक उत्खनन से इस बात की पुष्टि की गई है कि सिलंबम का अभ्यास कम-से-कम 10,000 ईसा पूर्व किया जाता था। प्रतिबंध और विकासः - दक्षिण भारत के अधिकांश शासकों द्वारा इसका उपयोग युद्ध में किया जाता था। तमिल शासक वीरापांड्या कट्टाबोम्मन (Veerapandiya Kattabomman) के सैनिकों ने ब्रिटिश उपनिवेशवादियों के खिलाफ युद्ध छेड़ने हेतु सिलंबम का प्रयोग किया था 18वीं शताब्दी के अंत तक इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। - आग्नेयास्त्रों की शुरूआत के साथ प्रतिबंध ने सिलंबम की लड़ाकू प्रकृति को काफी प्रभावित किया जिसके कारण यह एक प्रदर्शन कला में तब्दील हो गयी है। हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने संविधान के अनुच्छेद-169 के तहत राज्य में विधान परिषद के गठन हेतु राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया है। कानून के मुताबिक, यदि पश्चिम बंगाल के इस प्रस्ताव को राज्यसभा और लोकसभा का समर्थन मिलता है तो राज्य में अधिकतम 94 सदस्यों (कुल विधानसभा सीटों का एक-तिहाई) वाली विधान परिषद का गठन किया जाएगा। वर्तमान में केवल छह राज्यों- बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में विधान परिषद मौजूद है। ज्ञात हो कि पूर्व में पश्चिम बंगाल में भी विधान परिषद थी, हालाँकि वर्ष 1969 में वाम दलों की तत्कालीन गठबंधन सरकार ने विधान परिषद को समाप्त कर दिया था। वास्तव में यह उच्च सदन प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य था। गौरतलब है कि भारत में विधायिका की द्विसदनीय प्रणाली है। जिस प्रकार संसद के दो सदन होते हैं, उसी प्रकार संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार राज्यों में विधानसभा के अतिरिक्त एक विधान परिषद भी हो सकती है। अनुच्छेद 169 के तहत भारतीय संसद को विधान परिषद का गठन करने और विघटन करने का अधिकार प्राप्त है। इस संबंध में सर्वप्रथम संबंधित राज्य की विधानसभा द्वारा एक संकल्प पारित किया जाता है, जिसका पूर्ण बहुमत से पारित किया जाना अनिवार्य है। दिल्ली सरकार ने महामारी की स्थिति के मद्देनज़र सड़कों पर रहने वाले बच्चों के कल्याण के लिये एक नीति तैयार की है। दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) द्वारा तैयार की गई यह नीति हॉटस्पॉट क्षेत्रों में निवास करने वाले ऐसे बच्चों की पहचान करने और उन तक मास्क तथा अन्य उपकरण पहुँचाने में नागरिक समाज संगठनों की प्रत्यक्ष भागीदारी को प्रोत्साहित करती है। यह नीति इस बात का भी सुझाव देती है कि ज़िला प्रशासन सड़कों पर निवास करने वाले बच्चों (18 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर) को नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवी के रूप में प्रशिक्षण देने पर विचार कर सकता है, जिससे उन्हें सम्मानजनक रोज़गार प्राप्त करने में मदद मिलेगी और साथ ही वे समान पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों की भी सहायता कर सकेंगे। इस नीति में बच्चों को बचाने और उनके संरक्षण के लिये 'ज़िला कार्य बल' (DTF) के साथ एक 'ज़िला बाल संरक्षण अभिसरण समिति' (DCPCC) के गठन का भी प्रस्ताव किया गया है। इस समिति की अध्यक्षता ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी और साथ ही इसमें प्रदेश के गैर-सरकारी संगठनों व 'दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग' के प्रतिनिधि शामिल होंगे। हाल ही में हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य के वरिष्ठ नेता वीरभद्र सिंह का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। 23 जून, 1934 को हिमाचल प्रदेश के 'शिमला' में जन्मे वीरभद्र सिंह कुल छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चुने गए। वीरभद्र सिंह ने मार्च 1998 से मार्च 2003 तक हिमाचल प्रदेश विधानसभा में में विपक्ष के नेता के तौर पर भी कार्य किया। इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार में केंद्रीय पर्यटन और नागरिक उड्डयन उप मंत्री, उद्योग राज्य मंत्री, केंद्रीय इस्पात मंत्री तथा केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री के रूप में भी काम किया था। वह दिसंबर 2017 में हिमाचल प्रदेश के सोलन ज़िले की अर्की विधानसभा से 13वीं विधानसभा के लिये भी चुने गए थे।
हाल ही में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने मत्स्य पालन से संबंधित किसानों के लिये एक ऑनलाइन कोर्स मोबाइल एप "मत्स्य सेतु" लॉन्च किया है। - इस एप को 'इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर एक्वाकल्चर' और 'नेशनल फिशरीज़ डेवलपमेंट बोर्ड' द्वारा विकसित किया गया है। प्रमुख बिंदुः - इसका उद्देश्य देश में जलीय कृषि करने वाले किसानों तक ताज़े पानी से संबंधित नवीनतम जलीय कृषि प्रौद्योगिकियों का प्रसार करना और उनकी उत्पादकता एवं आय में वृद्धि करना है। - एक्वाकल्चर मछली, शंख और जलीय पौधों के प्रजनन, उत्पादन और हार्वेस्टिंग को कहते हैं। - भारत दुनिया में जलीय कृषि के माध्यम से मछली उत्पादन करने वाला दूसरा प्रमुख उत्पादक है। - इसमें व्यावसायिक रूप से महत्त्वपूर्ण मछलियों जैसे- कार्प, कैटफ़िश, स्कैम्पी, म्यूरल, सजावटी मछली, मोती की खेती आदि की ग्रो-आउट गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। - इसका उपयोग देश भर के हितधारकों, विशेष रूप से मछुआरों, मछली किसानों, युवाओं और उद्यमियों के बीच विभिन्न योजनाओं पर नवीनतम जानकारी का प्रसार करने तथा व्यापार में आसानी प्रदान करने की सुविधा के लिये किया जा सकता है। अन्य संबंधित पहलेंः - शफरी : यह अच्छी जलीय कृषि प्रथाओं को अपनाने और वैश्विक उपभोक्ताओं को आश्वस्त करने के लिये गुणवत्तापूर्ण एंटीबायोटिक मुक्त झींगा उत्पादों का उत्पादन में मदद करने हेतु हैचरी के लिये एक बाज़ार आधारित उपकरण है। - वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस के दौरान मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष की स्थापना। - प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजनाः इस कार्यक्रम का उद्देश्य वर्ष दो हज़ार चौबीस-पच्चीस तक बाईस मिलियन टन मछली उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना है। साथ ही इससे पचपन लाख लोगों के लिये रोज़गार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। - नीली क्रांति पर ध्यान केंद्रित करनाः मछुआरों और मछली किसानों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिये एवं मत्स्य पालन के एकीकृत और समग्र प्रबंधन हेतु एक सक्षम वातावरण बनाना। - मछुआरों और मछली किसानों को उनकी कार्यशील पूंजी की ज़रूरतों को पूरा करने में मदद के लिये किसान क्रेडिट कार्ड सुविधाओं का विस्तार करना। हाल ही में सिंगापुर में प्रवासी श्रमिकों हेतु सरकार द्वारा शुरू की गई प्रतियोगिता में गणेशन संधिराकासन नाम के एक भारतीय ने सिलंबम के प्रदर्शन में शीर्ष पुरस्कार प्राप्त किया है। प्रमुख बिंदुः सिलंबम के बारे मेंः - सिलंबम एक प्राचीन हथियार आधारित मार्शल आर्ट है जिसकी उत्पत्ति तमिलकम में हुई जो वर्तमान में भारत का तमिलनाडु क्षेत्र है। यह विश्व के सबसे पुराने मार्शल आर्ट में से एक है। - सिलंबम शब्द स्वयं एक खेल के बारे में बताता है, सिलम का अर्थ है 'पहाड़' और बम का अर्थ बाँस है जिसका उपयोग मार्शल आर्ट के इस रूप में मुख्य हथियार के रूप में किया जाता है। - यह केरल के मार्शल आर्ट कलारीपयट्टू से निकटता रखता है। - पैरों की गति, सिलंबम और कुट्टा वारिसाई की आवश्यकता होती है। - इसके प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कई सशस्त्र विरोधों के खिलाफ रक्षा प्रदान करना है। इस्तेमाल किये जाने वाले हथियारः - बाँस की छड़ी - यह मुख्य हथियार है तथा इसकी लंबाई प्रयोग करने वाले की ऊंँचाई पर निर्भर करती है। - मारू - यह एक धमाकेदार हथियार है जिसे हिरण के सींगों से बनाया जाता है। - अरुवा , सवुकु , वाल , कुट्टू कटाई , कट्टी , सेडिकुची । - ऐसा माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति ऋषि अगस्त्य मुनिवर द्वारा लगभग एक हज़ार ईसा पूर्व हुई थी। - सिलप्पादिक्करम और संगम साहित्य में इस प्रथा के बारे में उल्लेख किया गया है तथा यह दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की है, जबकि मौखिक लोक कथाओं में इसे और अधिक लगभग सात हज़ार वर्ष प्राचीन माना जाता है। - लेकिन हाल के सर्वेक्षणों और पुरातात्त्विक उत्खनन से इस बात की पुष्टि की गई है कि सिलंबम का अभ्यास कम-से-कम दस,शून्य ईसा पूर्व किया जाता था। प्रतिबंध और विकासः - दक्षिण भारत के अधिकांश शासकों द्वारा इसका उपयोग युद्ध में किया जाता था। तमिल शासक वीरापांड्या कट्टाबोम्मन के सैनिकों ने ब्रिटिश उपनिवेशवादियों के खिलाफ युद्ध छेड़ने हेतु सिलंबम का प्रयोग किया था अट्ठारहवीं शताब्दी के अंत तक इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। - आग्नेयास्त्रों की शुरूआत के साथ प्रतिबंध ने सिलंबम की लड़ाकू प्रकृति को काफी प्रभावित किया जिसके कारण यह एक प्रदर्शन कला में तब्दील हो गयी है। हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने संविधान के अनुच्छेद-एक सौ उनहत्तर के तहत राज्य में विधान परिषद के गठन हेतु राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया है। कानून के मुताबिक, यदि पश्चिम बंगाल के इस प्रस्ताव को राज्यसभा और लोकसभा का समर्थन मिलता है तो राज्य में अधिकतम चौरानवे सदस्यों वाली विधान परिषद का गठन किया जाएगा। वर्तमान में केवल छह राज्यों- बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में विधान परिषद मौजूद है। ज्ञात हो कि पूर्व में पश्चिम बंगाल में भी विधान परिषद थी, हालाँकि वर्ष एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में वाम दलों की तत्कालीन गठबंधन सरकार ने विधान परिषद को समाप्त कर दिया था। वास्तव में यह उच्च सदन प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य था। गौरतलब है कि भारत में विधायिका की द्विसदनीय प्रणाली है। जिस प्रकार संसद के दो सदन होते हैं, उसी प्रकार संविधान के अनुच्छेद एक सौ उनहत्तर के अनुसार राज्यों में विधानसभा के अतिरिक्त एक विधान परिषद भी हो सकती है। अनुच्छेद एक सौ उनहत्तर के तहत भारतीय संसद को विधान परिषद का गठन करने और विघटन करने का अधिकार प्राप्त है। इस संबंध में सर्वप्रथम संबंधित राज्य की विधानसभा द्वारा एक संकल्प पारित किया जाता है, जिसका पूर्ण बहुमत से पारित किया जाना अनिवार्य है। दिल्ली सरकार ने महामारी की स्थिति के मद्देनज़र सड़कों पर रहने वाले बच्चों के कल्याण के लिये एक नीति तैयार की है। दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा तैयार की गई यह नीति हॉटस्पॉट क्षेत्रों में निवास करने वाले ऐसे बच्चों की पहचान करने और उन तक मास्क तथा अन्य उपकरण पहुँचाने में नागरिक समाज संगठनों की प्रत्यक्ष भागीदारी को प्रोत्साहित करती है। यह नीति इस बात का भी सुझाव देती है कि ज़िला प्रशासन सड़कों पर निवास करने वाले बच्चों को नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवी के रूप में प्रशिक्षण देने पर विचार कर सकता है, जिससे उन्हें सम्मानजनक रोज़गार प्राप्त करने में मदद मिलेगी और साथ ही वे समान पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों की भी सहायता कर सकेंगे। इस नीति में बच्चों को बचाने और उनके संरक्षण के लिये 'ज़िला कार्य बल' के साथ एक 'ज़िला बाल संरक्षण अभिसरण समिति' के गठन का भी प्रस्ताव किया गया है। इस समिति की अध्यक्षता ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी और साथ ही इसमें प्रदेश के गैर-सरकारी संगठनों व 'दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग' के प्रतिनिधि शामिल होंगे। हाल ही में हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य के वरिष्ठ नेता वीरभद्र सिंह का सत्तासी वर्ष की आयु में निधन हो गया है। तेईस जून, एक हज़ार नौ सौ चौंतीस को हिमाचल प्रदेश के 'शिमला' में जन्मे वीरभद्र सिंह कुल छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चुने गए। वीरभद्र सिंह ने मार्च एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे से मार्च दो हज़ार तीन तक हिमाचल प्रदेश विधानसभा में में विपक्ष के नेता के तौर पर भी कार्य किया। इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार में केंद्रीय पर्यटन और नागरिक उड्डयन उप मंत्री, उद्योग राज्य मंत्री, केंद्रीय इस्पात मंत्री तथा केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री के रूप में भी काम किया था। वह दिसंबर दो हज़ार सत्रह में हिमाचल प्रदेश के सोलन ज़िले की अर्की विधानसभा से तेरहवीं विधानसभा के लिये भी चुने गए थे।
पूल के लिए टाइल इसके डिजाइन का एक अनिवार्य तत्व है। यह पराबैंगनी, यांत्रिक झटके, पानी के दबाव और रसायनों के लिए प्रतिरोधी है। विभिन्न प्रकार के खत्म करने के लिए धन्यवाद, आप गहने और पैटर्न से सजाए गए अद्वितीय सतह बना सकते हैं। टाइल्स के विभिन्न रूपों में तालाब को वास्तविक कला वस्तु में बदलना संभव हो जाता है जो ध्यान आकर्षित करेगा और संचालन में सौंदर्य आनंद देगा। पूल के आस-पास के क्षेत्रों को कवर करने के लिए, पानी में नीचे और वंश, गैर-पर्ची टाइल का उपयोग किया जाता है। कोटिंग में तीन डिग्री अंकन होते हैं, जिन क्षेत्रों में इसका उपयोग किया जाता है, उनके आधार पर - बदलते केबिन से, जहां पानी के प्रवेश के लिए पानी के प्रवेश में महत्व नहीं होता है, जिसे सबसे ज्यादा जगह माना जाता है। पूल के लिए एंटी-पर्ची टाइलों को एक अच्छी तरह से बनावट बनावट की विशेषता है ताकि गीले नंगे पैर वाले व्यक्ति को संतुलन न खोएं और घायल न हो। इस तरह की अस्तर जलाशय के परिधि के साथ, सभी इच्छुक वर्गों, सीढ़ियों पर प्रयोग किया जाता है। स्विमिंग पूल के लिए सभी प्रकार की मिट्टी के बर्तनों में, क्लिंकर टाइल्स सबसे उपयुक्त हैं। यह व्यावहारिक रूप से पानी को अवशोषित नहीं करता है और सभी स्वच्छता और सुरक्षा मानकों को पूरा करता है। इसकी विशेष विनिर्माण प्रक्रिया के कारण इस तरह की सामग्री में सकारात्मक विशेषताएं हैं। मिट्टी के उत्पादन में दबाए गए, फिर अति उच्च तापमान पर जला दिया। नतीजतन, यह बहु-टन भार का सामना कर सकता है, इसमें एक गैर-पर्ची सतह है और आर्द्रता से संरक्षित है। क्लिंकर सामग्री ग्लेज़ेड या अनगिनत हो सकती है। पूल सतहों के डिजाइन के लिए, टाइल-मोज़ेक टाइल्स इष्टतम हैं। ये विभिन्न रंगों और रंगों के छोटे वर्ग हैं। चित्र बनाने के लिए, अंधेरे और हल्के स्वरों की विविधताएं उपयोग की जाती हैं। चमकदार प्रकाश के प्रभाव को पारदर्शी विकल्पों का उपयोग करने के लिए। मोज़ेक कोटिंग जाल के आधार पर बनाई जाती है, इसके कारण एक बार पूरे सतह क्षेत्र को रखना संभव है। अलग-अलग तत्वों के रूप में उपयोग किए जाने पर टाइल्स को आसानी से रखा और काटा जा सकता है। किसी घुमावदार आकार की सतह को सजाने के दौरान मोज़ेक शीट्स का उपयोग सुविधाजनक होता है। पूल बेसिन को सजाने के लिए आप एक मोनोफोनिक मोज़ेक का उपयोग कर सकते हैं या विभिन्न रंगों का मिश्रण खरीद सकते हैं। मोज़ेक में चमकदार सतह या चित्रों के साथ - तलाक, छेड़छाड़, दरारें और अन्य प्रभाव हो सकते हैं। पूल के लिए टाइल मोज़ेक सिरेमिक या ग्लास है। ग्लास इसकी पारदर्शिता के साथ कप को गहराई और मात्रा देता है। यह एक शॉकप्रूफ और निविड़ अंधकार सामग्री है। कांच मोज़ेक की मदद से आप ज्यामितीय पैटर्न डाल सकते हैं या जटिल कलात्मक रचनाएं बना सकते हैं। पूल बेसिन का रंग पानी की छाया निर्धारित करता है। इसलिए, इसके डिजाइन के लिए टाइल अक्सर नीले, नीले रंग में चुना जाता है। टाइल्स के संग्रह में अक्सर ट्रिफ़ेस और समुद्री भोजन के पैनल, डॉल्फ़िन, जेलीफ़िश, कछुए के रूप में पानी के विषयों का उपयोग किया जाता है। कंपोजिटिंग तत्वों के आकार जितना छोटा होगा, ड्राइंग की अधिक सटीकता हासिल की जा सकती है। मोज़ेक तत्व या तो वर्ग या गोल हो सकते हैं, अनियमित। टाइल्स के बीच सीमों पर मोल्ड की उपस्थिति को रोकने के लिए एंटीबैक्टीरियल ग्रौट का इस्तेमाल किया जाता है। पूल के लिए आधुनिक टाइल आपको सही शैली में किसी भी आकार और शैली के कटोरे को ट्रिम करने की अनुमति देता है। एक विश्वसनीय कवर आपको लंबे समय तक परिसर का आराम से उपयोग करने की अनुमति देगा, और एक सुंदर डिजाइन स्नान के दौरान बहुत सुखद संवेदना पैदा करेगा।
पूल के लिए टाइल इसके डिजाइन का एक अनिवार्य तत्व है। यह पराबैंगनी, यांत्रिक झटके, पानी के दबाव और रसायनों के लिए प्रतिरोधी है। विभिन्न प्रकार के खत्म करने के लिए धन्यवाद, आप गहने और पैटर्न से सजाए गए अद्वितीय सतह बना सकते हैं। टाइल्स के विभिन्न रूपों में तालाब को वास्तविक कला वस्तु में बदलना संभव हो जाता है जो ध्यान आकर्षित करेगा और संचालन में सौंदर्य आनंद देगा। पूल के आस-पास के क्षेत्रों को कवर करने के लिए, पानी में नीचे और वंश, गैर-पर्ची टाइल का उपयोग किया जाता है। कोटिंग में तीन डिग्री अंकन होते हैं, जिन क्षेत्रों में इसका उपयोग किया जाता है, उनके आधार पर - बदलते केबिन से, जहां पानी के प्रवेश के लिए पानी के प्रवेश में महत्व नहीं होता है, जिसे सबसे ज्यादा जगह माना जाता है। पूल के लिए एंटी-पर्ची टाइलों को एक अच्छी तरह से बनावट बनावट की विशेषता है ताकि गीले नंगे पैर वाले व्यक्ति को संतुलन न खोएं और घायल न हो। इस तरह की अस्तर जलाशय के परिधि के साथ, सभी इच्छुक वर्गों, सीढ़ियों पर प्रयोग किया जाता है। स्विमिंग पूल के लिए सभी प्रकार की मिट्टी के बर्तनों में, क्लिंकर टाइल्स सबसे उपयुक्त हैं। यह व्यावहारिक रूप से पानी को अवशोषित नहीं करता है और सभी स्वच्छता और सुरक्षा मानकों को पूरा करता है। इसकी विशेष विनिर्माण प्रक्रिया के कारण इस तरह की सामग्री में सकारात्मक विशेषताएं हैं। मिट्टी के उत्पादन में दबाए गए, फिर अति उच्च तापमान पर जला दिया। नतीजतन, यह बहु-टन भार का सामना कर सकता है, इसमें एक गैर-पर्ची सतह है और आर्द्रता से संरक्षित है। क्लिंकर सामग्री ग्लेज़ेड या अनगिनत हो सकती है। पूल सतहों के डिजाइन के लिए, टाइल-मोज़ेक टाइल्स इष्टतम हैं। ये विभिन्न रंगों और रंगों के छोटे वर्ग हैं। चित्र बनाने के लिए, अंधेरे और हल्के स्वरों की विविधताएं उपयोग की जाती हैं। चमकदार प्रकाश के प्रभाव को पारदर्शी विकल्पों का उपयोग करने के लिए। मोज़ेक कोटिंग जाल के आधार पर बनाई जाती है, इसके कारण एक बार पूरे सतह क्षेत्र को रखना संभव है। अलग-अलग तत्वों के रूप में उपयोग किए जाने पर टाइल्स को आसानी से रखा और काटा जा सकता है। किसी घुमावदार आकार की सतह को सजाने के दौरान मोज़ेक शीट्स का उपयोग सुविधाजनक होता है। पूल बेसिन को सजाने के लिए आप एक मोनोफोनिक मोज़ेक का उपयोग कर सकते हैं या विभिन्न रंगों का मिश्रण खरीद सकते हैं। मोज़ेक में चमकदार सतह या चित्रों के साथ - तलाक, छेड़छाड़, दरारें और अन्य प्रभाव हो सकते हैं। पूल के लिए टाइल मोज़ेक सिरेमिक या ग्लास है। ग्लास इसकी पारदर्शिता के साथ कप को गहराई और मात्रा देता है। यह एक शॉकप्रूफ और निविड़ अंधकार सामग्री है। कांच मोज़ेक की मदद से आप ज्यामितीय पैटर्न डाल सकते हैं या जटिल कलात्मक रचनाएं बना सकते हैं। पूल बेसिन का रंग पानी की छाया निर्धारित करता है। इसलिए, इसके डिजाइन के लिए टाइल अक्सर नीले, नीले रंग में चुना जाता है। टाइल्स के संग्रह में अक्सर ट्रिफ़ेस और समुद्री भोजन के पैनल, डॉल्फ़िन, जेलीफ़िश, कछुए के रूप में पानी के विषयों का उपयोग किया जाता है। कंपोजिटिंग तत्वों के आकार जितना छोटा होगा, ड्राइंग की अधिक सटीकता हासिल की जा सकती है। मोज़ेक तत्व या तो वर्ग या गोल हो सकते हैं, अनियमित। टाइल्स के बीच सीमों पर मोल्ड की उपस्थिति को रोकने के लिए एंटीबैक्टीरियल ग्रौट का इस्तेमाल किया जाता है। पूल के लिए आधुनिक टाइल आपको सही शैली में किसी भी आकार और शैली के कटोरे को ट्रिम करने की अनुमति देता है। एक विश्वसनीय कवर आपको लंबे समय तक परिसर का आराम से उपयोग करने की अनुमति देगा, और एक सुंदर डिजाइन स्नान के दौरान बहुत सुखद संवेदना पैदा करेगा।
नई दिल्लीःगणतंत्र दिवस समारोह के दौरान चप्पे-चप्पे पर कड़ी निगाह रखने के लिए राजधानी दिल्ली में हजारों की संख्या में दिल्ली पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया जा रहा है। खुफिया सूचनाओं को ध्यान में रखते हुए किसी भी हवाई हमले की आशंका को नाकाम बनाने के लिए खास तैयारी की गई है। खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट किया है कि आतंकी 9/11 की तर्ज पर हवाई जहाज के जरिए दिल्ली में हमला कर सकते हैं। इसे देखते हुए ऐतिहासिक राजपथ पर सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं, जहां सशस्त्र सेना के सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी देश की सैन्य ताकत के प्रदर्शन को देखेंगे। पूरे मध्य और नई दिल्ली क्षेत्र में दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के करीब 50 हजार जवानों को तैनात किया गया है जो चप्पे-चप्पे पर नजर रखेंगे। हाल की खुफिया सूचना में लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी समूहों की ओर से हेलिकॉप्टर चार्टर सेवाओं और चार्टर उडानों का इस्तेमाल करके हवाई हमला करने की योजना की आशंका व्यक्त की गई है। इसके मद्देनजर दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि ऐसे किसी भी हमले को नाकाम करने या उड़ती संदिग्ध वस्तु का पता लगाने के लिए पुलिस ऐंटी-ड्रोन तकनीक इस्तेमाल कर रही है। अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा सभी ऊंची इमारतों पर सुरक्षा बलों को विमानरोधी तोपों के साथ तैनात किया गया है। सीसीटीवी कैमरा लगाने के साथ प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। सुरक्षा एजेंसियों को जारी अडवाइजरी में कहा गया है कि सुरक्षा बलों के लिए यह जरूरी है कि वे खतरों के दायरे को समझें और उससे निपटने के लिए उपयुक्त रास्ते अपनाएं। सुरक्षा बलों से कहा गया है कि पुलिस और अन्य सुरक्षा कर्मियों की भी ठीक से जांच की जाए क्योंकि ऐसी आशंका है कि आतंकवादी सुरक्षा बलों की वर्दी का इस्तेमाल कर सकते हैं। अडवाइजरी के मुताबिक आतंकवादी फिदायीन हमला करने के लिए सुरक्षा बलों की वर्दी का इस्तेमाल कर सकते हैं और इसलिए सुरक्षाकर्मियों की पहचान और जांच की पर्याप्त व्यवस्था की जाए जो गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान तैनात होंगे। सुरक्षा बलों को चेताया गया है कि कुछ इस्लामी चरमपंथी संगठन 9/11 हमले की तर्ज पर हवाईजहाजों का इस्तेमाल करके हमला करने की योजना बना रहे हैं। 26 जनवरी को सुबह 10 बजकर 35 मिनट से सवा बारह बजे के बीच इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से न किसी कमर्शल फ्लाइट की इजाजत दी जाएगी और न ही कोई प्लेन इस दौरान उतर सकेगा।
नई दिल्लीःगणतंत्र दिवस समारोह के दौरान चप्पे-चप्पे पर कड़ी निगाह रखने के लिए राजधानी दिल्ली में हजारों की संख्या में दिल्ली पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया जा रहा है। खुफिया सूचनाओं को ध्यान में रखते हुए किसी भी हवाई हमले की आशंका को नाकाम बनाने के लिए खास तैयारी की गई है। खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट किया है कि आतंकी नौ/ग्यारह की तर्ज पर हवाई जहाज के जरिए दिल्ली में हमला कर सकते हैं। इसे देखते हुए ऐतिहासिक राजपथ पर सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं, जहां सशस्त्र सेना के सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी देश की सैन्य ताकत के प्रदर्शन को देखेंगे। पूरे मध्य और नई दिल्ली क्षेत्र में दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के करीब पचास हजार जवानों को तैनात किया गया है जो चप्पे-चप्पे पर नजर रखेंगे। हाल की खुफिया सूचना में लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी समूहों की ओर से हेलिकॉप्टर चार्टर सेवाओं और चार्टर उडानों का इस्तेमाल करके हवाई हमला करने की योजना की आशंका व्यक्त की गई है। इसके मद्देनजर दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि ऐसे किसी भी हमले को नाकाम करने या उड़ती संदिग्ध वस्तु का पता लगाने के लिए पुलिस ऐंटी-ड्रोन तकनीक इस्तेमाल कर रही है। अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा सभी ऊंची इमारतों पर सुरक्षा बलों को विमानरोधी तोपों के साथ तैनात किया गया है। सीसीटीवी कैमरा लगाने के साथ प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। सुरक्षा एजेंसियों को जारी अडवाइजरी में कहा गया है कि सुरक्षा बलों के लिए यह जरूरी है कि वे खतरों के दायरे को समझें और उससे निपटने के लिए उपयुक्त रास्ते अपनाएं। सुरक्षा बलों से कहा गया है कि पुलिस और अन्य सुरक्षा कर्मियों की भी ठीक से जांच की जाए क्योंकि ऐसी आशंका है कि आतंकवादी सुरक्षा बलों की वर्दी का इस्तेमाल कर सकते हैं। अडवाइजरी के मुताबिक आतंकवादी फिदायीन हमला करने के लिए सुरक्षा बलों की वर्दी का इस्तेमाल कर सकते हैं और इसलिए सुरक्षाकर्मियों की पहचान और जांच की पर्याप्त व्यवस्था की जाए जो गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान तैनात होंगे। सुरक्षा बलों को चेताया गया है कि कुछ इस्लामी चरमपंथी संगठन नौ/ग्यारह हमले की तर्ज पर हवाईजहाजों का इस्तेमाल करके हमला करने की योजना बना रहे हैं। छब्बीस जनवरी को सुबह दस बजकर पैंतीस मिनट से सवा बारह बजे के बीच इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से न किसी कमर्शल फ्लाइट की इजाजत दी जाएगी और न ही कोई प्लेन इस दौरान उतर सकेगा।
इस शुभ दिन पर हम अपने आप को राष्ट्र की सेवा में समर्पित करें। हम फल की चिंता ना करते हुए अपना कार्य करते रहने पर बल दें। सही कार्य करने पर निश्चय ही अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। हम भगवान श्री कृष्ण के संदेश प्रेम एवं अनुकंपा, एकता एवं बहुल वाद को धारण करें और मिल-जुल कर कार्य करते हुए अपने महान देश को आगे बढा़यें।"
इस शुभ दिन पर हम अपने आप को राष्ट्र की सेवा में समर्पित करें। हम फल की चिंता ना करते हुए अपना कार्य करते रहने पर बल दें। सही कार्य करने पर निश्चय ही अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। हम भगवान श्री कृष्ण के संदेश प्रेम एवं अनुकंपा, एकता एवं बहुल वाद को धारण करें और मिल-जुल कर कार्य करते हुए अपने महान देश को आगे बढा़यें।"
नामांकन पत्र दाखिल करने के पहले दौर की समाप्ति और दूसरे दौर की शुरूआत के साथ-साथ गुजरात में चुनाव प्रचार लगातार तेज हो रहा है जिसकी कुछ दिलचस्प बातें हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं। नामांकन पत्र दाखिल करने के पहले दौर की समाप्ति और दूसरे दौर की शुरूआत के साथ-साथ गुजरात में चुनाव प्रचार लगातार तेज हो रहा है जिसकी कुछ दिलचस्प बातें हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं : - राज्य में गांधी नगर (नार्थ) से निर्दलीय उम्मीदवार महेंद्र भाई पटनी 2 बोरियों में भर कर 10,000 रुपए के एक-एक रुपए वाले सिक्के लेकर नामांकन करने पहुंचा। उसने यह रकम चंदा मांग कर इकट्ठा की है। - राज्य में अफ्रीकी मूल के अनेक भारतीय रहते हैं। सोमनाथ जिले में 'गिर' के प्रसिद्ध जंगल के बीच 'जंबुर' नामक एक छोटा-सा अफ्रीकी गांव बसा हुआ है जहां रहने वाले 'सिद्दी' आदिवासी मूल रूप से अफ्रीका के 'बनतू' समुदाय से जुड़े हैं। - इनकी सभ्यता और संस्कृति पर आज भी अफ्रीका के रीति-रिवाजों का प्रभाव है। चुनाव आयोग यहां रहने वाले सिद्दी समुदाय के 3481 लोगों के लिए विशेष रूप से 3 मतदान केंद्र बना रहा है। - नादियाड में भाजपा के पंकज देसाई ने एक महिला रोबोट को काला चश्मा व भगवा टोपी पहना कर अपने प्रचार में उतारा है। वह उनके लिए घर-घर जाकर प्रचार करने के अलावा सड़कों पर घूम कर पर्चे बांट रही है। - फिल्म अभिनेता रवि किशन ने भाजपा के प्रचार के लिए पहली बार गुजराती-भोजपुरी मिश्रित गीत (रैप) गाया है जो गुजरात में खूब बज रहा है। इसके बोल हैं 'भैया हो, गुजरात मा मोदी छे। ' रविकिशन इससे पहले कई बार उत्तर प्रदेश के चुनावों के लिए भी गीत लिख चुके हैं। - चुनावों में भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही विद्रोही उम्मीदवारों का सामना करना पड़ रहा है और दोनों ही दलों को प्रथम चरण के लिए नामांकन तिथि समाप्त होने तक लगभग एक दर्जन उम्मीदवार बदलने पड़े हैं। दोनों ही पाॢटयों के कार्यकर्ताओं ने पसंदीदा उम्मीदवारों के नाम कटने पर अपने-अपने पार्टी मुख्यालयों पर भारी हंगामा किया और हाय-तौबा मचाई। - तापी जिले की 'व्यारा' सीट से भाजपा ने 20 वर्षों में पहली बार एक ईसाई उम्मीदवार मोहन कोंकणी को मैदान में उतारा है जो 4 बार के विधायक कांग्रेस के पुणाजी गामित का मुकाबला करेंगे। भाजपा के पहले चरण के उम्मीदवारों में वही मात्र एक ईसाई उम्मीदवार हैं। - गुजरात में मुस्लिम मतदाता कांग्रेस का वोट बैंक माने जाते हैं पर कुछ समय से वे कांग्रेस से छिटक कर दूसरी पाॢटयों के प्रत्याशियों को वोट दे रहे हैं। इस बार 'आप' तथा 'ए. आई. एम. आई. एम. ' भी मैदान में हैं। - एक ताजा सर्वे में बताया गया है कि राज्य के मुस्लिम मतदाताओं में से 34 प्रतिशत सीधे 'आप' को वोट देने की बात कह रहे हैं जबकि 24 प्रतिशत का कहना है कि वे भाजपा को हराने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवार को वोट देंगे। सर्वे के अनुसार यदि ये 58 प्रतिशत वोट 'आप' को चले गए तो भाजपा और कांग्रेस को झटका लग सकता है। - चुनावों में विभिन्न गैर-मान्यता प्राप्त राज्य स्तरीय पाॢटयों को कुछ दिलचस्प चुनाव चिन्ह अलाट किए गए हैं। 'इंडियन नैशनल जनता दल' को बल्लेबाज, 'अखिल भारत हिन्दू महासभा' को नारियल, 'राष्ट्रीय जनक्रांति पार्टी' को बांसुरी आदि चुनाव चिन्ह अलाट किए गए हैं। - निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए कुल 168 नए चुनाव चिन्ह तय किए गए हैं। इनमें सी. सी. टी. वी. कैमरा, कम्प्यूटर का माऊस, हैडफोन, लैपटाप, मोबाइल फोन चार्जर, वैक्यूम क्लीनर आदि शामिल हैं। - मोरबी में भाजपा ने पांच बार के विधायक कांति भाई अमृतिया को खड़ा किया है जबकि उनके विरुद्ध उनका भतीजा पंकज रणसरिया 'आप' के टिकट पर खड़ा हो गया है।
नामांकन पत्र दाखिल करने के पहले दौर की समाप्ति और दूसरे दौर की शुरूआत के साथ-साथ गुजरात में चुनाव प्रचार लगातार तेज हो रहा है जिसकी कुछ दिलचस्प बातें हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं। नामांकन पत्र दाखिल करने के पहले दौर की समाप्ति और दूसरे दौर की शुरूआत के साथ-साथ गुजरात में चुनाव प्रचार लगातार तेज हो रहा है जिसकी कुछ दिलचस्प बातें हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं : - राज्य में गांधी नगर से निर्दलीय उम्मीदवार महेंद्र भाई पटनी दो बोरियों में भर कर दस,शून्य रुपयापए के एक-एक रुपए वाले सिक्के लेकर नामांकन करने पहुंचा। उसने यह रकम चंदा मांग कर इकट्ठा की है। - राज्य में अफ्रीकी मूल के अनेक भारतीय रहते हैं। सोमनाथ जिले में 'गिर' के प्रसिद्ध जंगल के बीच 'जंबुर' नामक एक छोटा-सा अफ्रीकी गांव बसा हुआ है जहां रहने वाले 'सिद्दी' आदिवासी मूल रूप से अफ्रीका के 'बनतू' समुदाय से जुड़े हैं। - इनकी सभ्यता और संस्कृति पर आज भी अफ्रीका के रीति-रिवाजों का प्रभाव है। चुनाव आयोग यहां रहने वाले सिद्दी समुदाय के तीन हज़ार चार सौ इक्यासी लोगों के लिए विशेष रूप से तीन मतदान केंद्र बना रहा है। - नादियाड में भाजपा के पंकज देसाई ने एक महिला रोबोट को काला चश्मा व भगवा टोपी पहना कर अपने प्रचार में उतारा है। वह उनके लिए घर-घर जाकर प्रचार करने के अलावा सड़कों पर घूम कर पर्चे बांट रही है। - फिल्म अभिनेता रवि किशन ने भाजपा के प्रचार के लिए पहली बार गुजराती-भोजपुरी मिश्रित गीत गाया है जो गुजरात में खूब बज रहा है। इसके बोल हैं 'भैया हो, गुजरात मा मोदी छे। ' रविकिशन इससे पहले कई बार उत्तर प्रदेश के चुनावों के लिए भी गीत लिख चुके हैं। - चुनावों में भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही विद्रोही उम्मीदवारों का सामना करना पड़ रहा है और दोनों ही दलों को प्रथम चरण के लिए नामांकन तिथि समाप्त होने तक लगभग एक दर्जन उम्मीदवार बदलने पड़े हैं। दोनों ही पाॢटयों के कार्यकर्ताओं ने पसंदीदा उम्मीदवारों के नाम कटने पर अपने-अपने पार्टी मुख्यालयों पर भारी हंगामा किया और हाय-तौबा मचाई। - तापी जिले की 'व्यारा' सीट से भाजपा ने बीस वर्षों में पहली बार एक ईसाई उम्मीदवार मोहन कोंकणी को मैदान में उतारा है जो चार बार के विधायक कांग्रेस के पुणाजी गामित का मुकाबला करेंगे। भाजपा के पहले चरण के उम्मीदवारों में वही मात्र एक ईसाई उम्मीदवार हैं। - गुजरात में मुस्लिम मतदाता कांग्रेस का वोट बैंक माने जाते हैं पर कुछ समय से वे कांग्रेस से छिटक कर दूसरी पाॢटयों के प्रत्याशियों को वोट दे रहे हैं। इस बार 'आप' तथा 'ए. आई. एम. आई. एम. ' भी मैदान में हैं। - एक ताजा सर्वे में बताया गया है कि राज्य के मुस्लिम मतदाताओं में से चौंतीस प्रतिशत सीधे 'आप' को वोट देने की बात कह रहे हैं जबकि चौबीस प्रतिशत का कहना है कि वे भाजपा को हराने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवार को वोट देंगे। सर्वे के अनुसार यदि ये अट्ठावन प्रतिशत वोट 'आप' को चले गए तो भाजपा और कांग्रेस को झटका लग सकता है। - चुनावों में विभिन्न गैर-मान्यता प्राप्त राज्य स्तरीय पाॢटयों को कुछ दिलचस्प चुनाव चिन्ह अलाट किए गए हैं। 'इंडियन नैशनल जनता दल' को बल्लेबाज, 'अखिल भारत हिन्दू महासभा' को नारियल, 'राष्ट्रीय जनक्रांति पार्टी' को बांसुरी आदि चुनाव चिन्ह अलाट किए गए हैं। - निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए कुल एक सौ अड़सठ नए चुनाव चिन्ह तय किए गए हैं। इनमें सी. सी. टी. वी. कैमरा, कम्प्यूटर का माऊस, हैडफोन, लैपटाप, मोबाइल फोन चार्जर, वैक्यूम क्लीनर आदि शामिल हैं। - मोरबी में भाजपा ने पांच बार के विधायक कांति भाई अमृतिया को खड़ा किया है जबकि उनके विरुद्ध उनका भतीजा पंकज रणसरिया 'आप' के टिकट पर खड़ा हो गया है।
संदीप भम्मरकर, भोपाल। मरीजों को मेडिकल ऑक्सीजन उपलब्ध कराने राजधानी के एक बीजेपी नेता ने बड़ा कदम उठाया है। मरीजों को समय पर ऑक्सीजन मिल सके इसके लिए भाजपा नेता ने 100 मशीने उपलब्ध कराई है। मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए भाजपा ने राहुल कोठारी ने सरोकार संस्था के जरिये ऑक्सीजन बैंक तैयार किया है। यह मशीनें भोपाल में होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों को उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने इसके लिए फोन नंबर भी जारी किया है। अगर किसी मरीज को ऑक्सीजन की जरुरत है तो वह 9522122133 नंबर पर फोन कर घर पर ही मशीन प्राप्त कर सकता है। आपको बता दें प्रदेश के साथ ही राजधानी में भी ऑक्सीजन युक्त बेडों की संख्या कम है। अस्पताल में ऑक्सीजन बैड नहीं मिलने से कई मरीज़ और उनक परिजन परेशान हो रहे हैं। अब भाजपा नेता की यह पहल ऐसे जरुरतमंदों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है।
संदीप भम्मरकर, भोपाल। मरीजों को मेडिकल ऑक्सीजन उपलब्ध कराने राजधानी के एक बीजेपी नेता ने बड़ा कदम उठाया है। मरीजों को समय पर ऑक्सीजन मिल सके इसके लिए भाजपा नेता ने एक सौ मशीने उपलब्ध कराई है। मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए भाजपा ने राहुल कोठारी ने सरोकार संस्था के जरिये ऑक्सीजन बैंक तैयार किया है। यह मशीनें भोपाल में होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों को उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने इसके लिए फोन नंबर भी जारी किया है। अगर किसी मरीज को ऑक्सीजन की जरुरत है तो वह नौ पाँच दो दो एक दो दो एक तीन तीन नंबर पर फोन कर घर पर ही मशीन प्राप्त कर सकता है। आपको बता दें प्रदेश के साथ ही राजधानी में भी ऑक्सीजन युक्त बेडों की संख्या कम है। अस्पताल में ऑक्सीजन बैड नहीं मिलने से कई मरीज़ और उनक परिजन परेशान हो रहे हैं। अब भाजपा नेता की यह पहल ऐसे जरुरतमंदों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है।
सियोल : सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन और मंगोलिया दौरे के बाद दक्षिण कोरिया के दो दिवसीय दौरे पर पहुंच गए. सुबह सियोल पहुंचने के बाद मोदी सीधे वॉर मेमोरियल गए जहां उन्होंने सैनिकों को श्रद्धांजलि दी. दो दिवसीय दौरे के दौरान मोदी द. कोरिया के राष्ट्रपति से मुलाकात के अलावा संयुक्त राष्ट्र के महासचिव से भी मिलेंगे. सियोल पहुंचने पर वहां खड़े भारतीय समुदाय के लोगों ने मोदी का दिल खोल कर स्वागत किया. इस दौरान पीएम ने वहां कई भारतीयों से हाथ मिलाया और स्वागत के लिए उनका शुक्रिया भी अदा किया. सियोल नेशनल सिमेट्री में पीएम ने संदेश लिखा. उन्होंने अपने संदेश में लिखा, मैं कोरिया के उन वीर शहीदों को नमन करता हूं जिनके बलिदान ने इस महान देश को 'हान नदी का करिश्मा' बनाया और पूर्व के उजाला के रूप में पुनः स्थापित किया. साथ ही भारत के 60 वीं पैराशूट फील्ड हॉस्पिटल रक्षक दल के वीर जवानों के बलिदान को भी मेरा शत शत नमन जो कोरिया युद्ध के दौरान और उसके पश्चात युद्ध विराम, में तैनात किए गए थे. उनका बलिदान हमारे दो देशों के बीच स्थायी भ्रातृत्व का एक अप्रतिम निसानी है. दक्षिण कोरिया का भारत के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंध काफी पहले से है. दक्षिण कोरिया की कई कंपनियां सालों से भारत में कारोबार कर रही हैं. ऐसे में मोदी की यात्रा के दौरान कई समझौते होने की उम्मीद है. पीएम मोदी के दौरे में दक्षिण कोरिया के साथ डबल टैक्सेशन रोकने पर समझौता हो सकता है. इसके अलावा शिपिंग, ट्रांसपोर्ट, हाईवे के क्षेत्र में भी समझौता होने की उम्मीद है. दोनों देशों के बिजनेस लीडर्स की मीटिंग में ऊर्जा के क्षेत्र में अहम समझौता हो सकता है. इस दौरे में 'मेक इन इंडिया' पर भी सहमति बन सकती है. NTIPL reserves the right to delete, edit, or alter in any manner it sees fit comments that it, in its sole discretion, deems to be obscene, offensive, defamatory, threatening, in violation of trademark, copyright or other laws, or is otherwise unacceptable.
सियोल : सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन और मंगोलिया दौरे के बाद दक्षिण कोरिया के दो दिवसीय दौरे पर पहुंच गए. सुबह सियोल पहुंचने के बाद मोदी सीधे वॉर मेमोरियल गए जहां उन्होंने सैनिकों को श्रद्धांजलि दी. दो दिवसीय दौरे के दौरान मोदी द. कोरिया के राष्ट्रपति से मुलाकात के अलावा संयुक्त राष्ट्र के महासचिव से भी मिलेंगे. सियोल पहुंचने पर वहां खड़े भारतीय समुदाय के लोगों ने मोदी का दिल खोल कर स्वागत किया. इस दौरान पीएम ने वहां कई भारतीयों से हाथ मिलाया और स्वागत के लिए उनका शुक्रिया भी अदा किया. सियोल नेशनल सिमेट्री में पीएम ने संदेश लिखा. उन्होंने अपने संदेश में लिखा, मैं कोरिया के उन वीर शहीदों को नमन करता हूं जिनके बलिदान ने इस महान देश को 'हान नदी का करिश्मा' बनाया और पूर्व के उजाला के रूप में पुनः स्थापित किया. साथ ही भारत के साठ वीं पैराशूट फील्ड हॉस्पिटल रक्षक दल के वीर जवानों के बलिदान को भी मेरा शत शत नमन जो कोरिया युद्ध के दौरान और उसके पश्चात युद्ध विराम, में तैनात किए गए थे. उनका बलिदान हमारे दो देशों के बीच स्थायी भ्रातृत्व का एक अप्रतिम निसानी है. दक्षिण कोरिया का भारत के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंध काफी पहले से है. दक्षिण कोरिया की कई कंपनियां सालों से भारत में कारोबार कर रही हैं. ऐसे में मोदी की यात्रा के दौरान कई समझौते होने की उम्मीद है. पीएम मोदी के दौरे में दक्षिण कोरिया के साथ डबल टैक्सेशन रोकने पर समझौता हो सकता है. इसके अलावा शिपिंग, ट्रांसपोर्ट, हाईवे के क्षेत्र में भी समझौता होने की उम्मीद है. दोनों देशों के बिजनेस लीडर्स की मीटिंग में ऊर्जा के क्षेत्र में अहम समझौता हो सकता है. इस दौरे में 'मेक इन इंडिया' पर भी सहमति बन सकती है. NTIPL reserves the right to delete, edit, or alter in any manner it sees fit comments that it, in its sole discretion, deems to be obscene, offensive, defamatory, threatening, in violation of trademark, copyright or other laws, or is otherwise unacceptable.
देश के रक्षा मंत्री ने टूरिज्म को ध्यान में रखते हुए एक अहम फैसला लिया है। राजनाथ ने सियाचिन सहित दूसरे हाई ऑल्टिट्यूड एरिया में, जहां अब तक आम लोगों का जाना मना था अब टूरिस्टों के लिए खोलने का फैसला किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बात की जानकारी ट्वीट कर दी है। उन्होंने बताया है कि सियाचिन अब टूरिस्टों के लिए खोल दिया गया है। सूत्रों के मुताबकि रक्षा मंत्री का पद संभालने के बाद जब राजनाथ सिंह कुमार पोस्ट गए थे उसी वक्त उन्होंने आर्मी के सीनियर अधिकारियों से कहा था कि यहां हमारी फौज कितनी कठिन परिस्थितियों में रह रही है ये आम लोगों को पता होना चाहिए। उन्हें पता होना चाहिए कि हमारे फौजी किस परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए तैनात हैं। यही नहीं, आर्मी ने दूसरे हाई ऑल्टिट्यूट एरिया को भी आम लोगों के लिए खोलना शुरू कर दिया है। आर्मी के एक अधिकारी ने बताया कि अब अरुणाचल प्रदेश में किबितू और टूटिंग एरिया में भी आम लोग जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस संबंध में आर्मी को भी लिखा था कि वह आम लोगों को इन जगहों पर जाने की इजाजत दें। जिस पर आर्मी ने मना नहीं किया। हालांकि उन्होंने संवेदनशीलता को देखते हुए कुछ नियम व शर्ते रखी हैं। आर्मी के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि जो एरिया हमारा हैं और जहां तक हम आम लोगों को जाने दे सकते हैं उन फॉरवर्ड एरिया में हम उन्हें जाने की इजाजत देंगे। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर सिक्किम के भी कई इलाकों को आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। The Siachen area is now open for tourists and Tourism. From Siachen Base Camp to Kumar Post, the entire area has been opened for Tourism purposes.
देश के रक्षा मंत्री ने टूरिज्म को ध्यान में रखते हुए एक अहम फैसला लिया है। राजनाथ ने सियाचिन सहित दूसरे हाई ऑल्टिट्यूड एरिया में, जहां अब तक आम लोगों का जाना मना था अब टूरिस्टों के लिए खोलने का फैसला किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बात की जानकारी ट्वीट कर दी है। उन्होंने बताया है कि सियाचिन अब टूरिस्टों के लिए खोल दिया गया है। सूत्रों के मुताबकि रक्षा मंत्री का पद संभालने के बाद जब राजनाथ सिंह कुमार पोस्ट गए थे उसी वक्त उन्होंने आर्मी के सीनियर अधिकारियों से कहा था कि यहां हमारी फौज कितनी कठिन परिस्थितियों में रह रही है ये आम लोगों को पता होना चाहिए। उन्हें पता होना चाहिए कि हमारे फौजी किस परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए तैनात हैं। यही नहीं, आर्मी ने दूसरे हाई ऑल्टिट्यूट एरिया को भी आम लोगों के लिए खोलना शुरू कर दिया है। आर्मी के एक अधिकारी ने बताया कि अब अरुणाचल प्रदेश में किबितू और टूटिंग एरिया में भी आम लोग जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस संबंध में आर्मी को भी लिखा था कि वह आम लोगों को इन जगहों पर जाने की इजाजत दें। जिस पर आर्मी ने मना नहीं किया। हालांकि उन्होंने संवेदनशीलता को देखते हुए कुछ नियम व शर्ते रखी हैं। आर्मी के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि जो एरिया हमारा हैं और जहां तक हम आम लोगों को जाने दे सकते हैं उन फॉरवर्ड एरिया में हम उन्हें जाने की इजाजत देंगे। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर सिक्किम के भी कई इलाकों को आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। The Siachen area is now open for tourists and Tourism. From Siachen Base Camp to Kumar Post, the entire area has been opened for Tourism purposes.
निजी संवाददाता-नारकंडा-जिला शिमला के ऊपरी क्षेत्रों में सोमवार को सीजन का पहला हिमपात होने से समूचा क्षेत्र शीतलहर की चपेट में आ गया है। कई दशकों बाद नवंबर माह में दीपावली पर्व के दौरान बर्फबारी होने से जहां किसान बागबान खुश हंै। वहीं पर इतनी जल्द बर्फ गिरने से हैरान भी है। सोमवार सुबह स्नो सिटी नारकंडा बर्फ की सफेद चादर में लिपटी नजर आई। नारकंडा की हाटु पीक और मतियाना की कमलोड़ी पीक पर लगभग आधा फुट बर्फ और नारकंडा मतियाना में एनएच पांच पर दो ईंच बर्फ दर्ज की गई। मौसम के बदले मिजाज से समूचा क्षेत्र शीतलहर की चपेट में आ गया है। निचले इलाकों में जहां बारिश हुई, वहीं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीजन का पहला हिमपात हुआ है। मौसम के बदले मिजाज ने लोगो को गर्म कपडे़ पहनने पर मजबूर कर लिया है। नारकंडा में समय रहते हिमपात होने से स्की स्लोप धोमड़ी में भी इस बार जल्द ही स्कींग शुरू होने की आस है। पर्यटक नगरी नारकंडा में पर्यटकों की आवाजाही भी बढ़ने वाली है। नारकंडा में इस सर्दी का यह पहला हिमपात है। हालांकि इस हिमपात से यातायात पर कोई असर नही पड़ा है। वहीं नंवबर माह में हुइ बारिश और बर्फबारी से क्षेत्र के बागबान और किसान गदगद हुए हैं। कई माह से बारिश न होने से बागबान निराश थे। मौसम न बरसने से सेब के पौधों में कैकर रोग का भी खतरा पैदा हो रहा था। वहीं बगीचों में भी सूखे के कारण कोई कार्य नहीं हो पा रहा था, ऐसे में यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं है। कृषि विशेषज्ञों की माने तो लंबे समय से खुश्क पड़ी धरा पर हुइ बारिश और बर्फबारी संजीवनी का काम करेगी और आने वाली सर्दियों के लिए भी अच्छे संकेत दिखाई दे रहे है।
निजी संवाददाता-नारकंडा-जिला शिमला के ऊपरी क्षेत्रों में सोमवार को सीजन का पहला हिमपात होने से समूचा क्षेत्र शीतलहर की चपेट में आ गया है। कई दशकों बाद नवंबर माह में दीपावली पर्व के दौरान बर्फबारी होने से जहां किसान बागबान खुश हंै। वहीं पर इतनी जल्द बर्फ गिरने से हैरान भी है। सोमवार सुबह स्नो सिटी नारकंडा बर्फ की सफेद चादर में लिपटी नजर आई। नारकंडा की हाटु पीक और मतियाना की कमलोड़ी पीक पर लगभग आधा फुट बर्फ और नारकंडा मतियाना में एनएच पांच पर दो ईंच बर्फ दर्ज की गई। मौसम के बदले मिजाज से समूचा क्षेत्र शीतलहर की चपेट में आ गया है। निचले इलाकों में जहां बारिश हुई, वहीं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीजन का पहला हिमपात हुआ है। मौसम के बदले मिजाज ने लोगो को गर्म कपडे़ पहनने पर मजबूर कर लिया है। नारकंडा में समय रहते हिमपात होने से स्की स्लोप धोमड़ी में भी इस बार जल्द ही स्कींग शुरू होने की आस है। पर्यटक नगरी नारकंडा में पर्यटकों की आवाजाही भी बढ़ने वाली है। नारकंडा में इस सर्दी का यह पहला हिमपात है। हालांकि इस हिमपात से यातायात पर कोई असर नही पड़ा है। वहीं नंवबर माह में हुइ बारिश और बर्फबारी से क्षेत्र के बागबान और किसान गदगद हुए हैं। कई माह से बारिश न होने से बागबान निराश थे। मौसम न बरसने से सेब के पौधों में कैकर रोग का भी खतरा पैदा हो रहा था। वहीं बगीचों में भी सूखे के कारण कोई कार्य नहीं हो पा रहा था, ऐसे में यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं है। कृषि विशेषज्ञों की माने तो लंबे समय से खुश्क पड़ी धरा पर हुइ बारिश और बर्फबारी संजीवनी का काम करेगी और आने वाली सर्दियों के लिए भी अच्छे संकेत दिखाई दे रहे है।
वर्तमान में, पाकिस्तानी प्रांत बलूचिस्तान (देश के दक्षिण-पश्चिम) में सक्रिय कई आतंकवादी समूहों में से किसी ने भी बमबारी की जिम्मेदारी नहीं ली है। अकेले क्वेटा पर हाल ही में स्थानीय तालिबान सेल सहित कम से कम तीन आतंकवादी समूहों ने हमला किया है। वरिष्ठ पुलिस प्रवक्ता अहमद अफरीदी के अनुसार, क्लिनिक में सौ से अधिक पाकिस्तानी वकील और विभिन्न मीडिया आउटलेट्स के कई दर्जन पत्रकार एकत्र हुए हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों में आंतरिक मंत्रालय की प्रेस सेवा के प्रतिनिधि शामिल हैं। संस्करण टाइम्स ऑफ इंडिया के रिपोर्ट है कि एक चिकित्सा सुविधा के द्वार पर एक बम विस्फोट हुआ। स्थानीय टीवी चैनल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के एक बयान का हवाला देते हैं जो क्वेटा में हुआ थाः मैं क्वेटा में आतंकवाद के राक्षसी कृत्य की कड़ी निंदा करता हूं, जिसमें दावा किया गया कि लोगों के पास सबसे महत्वपूर्ण चीज है - जीवन। मैं नागरिकों और सुरक्षा अधिकारियों से शहर में सतर्कता और सुरक्षा उपायों को बढ़ाने का आग्रह करता हूं। हम साथ मिलकर आतंकवाद का सामना करते रहेंगे।
वर्तमान में, पाकिस्तानी प्रांत बलूचिस्तान में सक्रिय कई आतंकवादी समूहों में से किसी ने भी बमबारी की जिम्मेदारी नहीं ली है। अकेले क्वेटा पर हाल ही में स्थानीय तालिबान सेल सहित कम से कम तीन आतंकवादी समूहों ने हमला किया है। वरिष्ठ पुलिस प्रवक्ता अहमद अफरीदी के अनुसार, क्लिनिक में सौ से अधिक पाकिस्तानी वकील और विभिन्न मीडिया आउटलेट्स के कई दर्जन पत्रकार एकत्र हुए हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों में आंतरिक मंत्रालय की प्रेस सेवा के प्रतिनिधि शामिल हैं। संस्करण टाइम्स ऑफ इंडिया के रिपोर्ट है कि एक चिकित्सा सुविधा के द्वार पर एक बम विस्फोट हुआ। स्थानीय टीवी चैनल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के एक बयान का हवाला देते हैं जो क्वेटा में हुआ थाः मैं क्वेटा में आतंकवाद के राक्षसी कृत्य की कड़ी निंदा करता हूं, जिसमें दावा किया गया कि लोगों के पास सबसे महत्वपूर्ण चीज है - जीवन। मैं नागरिकों और सुरक्षा अधिकारियों से शहर में सतर्कता और सुरक्षा उपायों को बढ़ाने का आग्रह करता हूं। हम साथ मिलकर आतंकवाद का सामना करते रहेंगे।