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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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यहाँ जाएँः
उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन हैं।
में ये वन पश्चिमी घाट पर पाए जाते हैं।
और पालनी पहाड़ी क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
दरार (भूविज्ञान)
इस पृष्ठ का पिछला बदलाव 27 अक्टूबर 2011 को 07:47 बजे हुआ था।
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यहाँ जाएँः उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन हैं। में ये वन पश्चिमी घाट पर पाए जाते हैं। और पालनी पहाड़ी क्षेत्रों में पाए जाते हैं। दरार इस पृष्ठ का पिछला बदलाव सत्ताईस अक्टूबर दो हज़ार ग्यारह को सात:सैंतालीस बजे हुआ था।
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भाषभट्ट के अनूपसगीतरत्नाकर का उल्लेख हम पहले कर चुके है । हम यह भी लिख चुके है कि भावभट्ट बीकानेर के राजा अनूपसिह (सन् १६७४-१७०१) के आश्रित थे तथा संगीतशास्त्र के महान पण्डित थे । इस गीतरत्नाकर मे भावभट्ट ने मानसिह तोमर द्वारा प्रचलित ध्रुपद का लक्षण देकर तोमर कालीन ग्वालियरी भाषा और उसके साहित्य पर पर्याप्त प्रकाश डाला है । भावभट्ट ने लिखा है . श्रथ घोपद लक्षणम् गीरणमध्यदेशीयभाषासाहित्यराजितम् । द्विचतुर्वाक्यसपन्न नरनारीकथाश्रयम् ॥१६५। शृगाररसभावाद्य रागालापपदात्मकम् । पादातानुप्रासयुक्त पादातयमक च वा ॥१६६॥ प्रतिपाद यत्र बद्धमेव पाद-चतुष्टयम् ।
का रूप
उद्ग्राह ध्रुवकाभोगोत्तम ध्रुवपद स्मृतम् ॥ १६७॥
ग्वालियर के ध्रुपद के लक्षण मे भावभट्ट ने तत्कालीन पद-साहित्य के विषय मे अनेक महत्त्वपूर्ण बाते हमे बतला दी है । यह ध्रु पद संस्कृत के अतिरिक्त मध्यदेशीय भाषा एव साहित्य मे राजित था, अर्थात भावभट्ट के समय अठारहवी शताब्दी के प्रारंभ तक मध्यदेशीय भाषा और साहित्य अपना विशिष्ट रूप और अस्तित्व रखते थे । ये पद छोटे-छोटे, दो-चार वाक्यो के, चार चरणों के होते थे। इनमे नरनारी की कथाएँ वर्णित होती थी । इनका मूल रस श्ट गार था । पदो के अन्त मे अनुप्रास था यमक रहता था। उसके गेय होने के लिए जिन गुणो की आवश्यकता थी, वे भी उसमे थे । मानसिंह तोमर कालीन गेय पदसाहित्य का समग्र रूप ही भावभट्ट ने ध्रुपद के लक्षण के व्याज से प्रस्तुत कर दिया है। फकीरुल्ला और भावभट्ट के कथनों को एक साथ देखने से, ग्वालियर के सगीत ने हिन्दी के रूप निर्माण मे जो योग दान किया था, उस पर बहुत कुछ प्रकाश पड़ता है । ग्वालियरी ध्रुपद की
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भाषभट्ट के अनूपसगीतरत्नाकर का उल्लेख हम पहले कर चुके है । हम यह भी लिख चुके है कि भावभट्ट बीकानेर के राजा अनूपसिह के आश्रित थे तथा संगीतशास्त्र के महान पण्डित थे । इस गीतरत्नाकर मे भावभट्ट ने मानसिह तोमर द्वारा प्रचलित ध्रुपद का लक्षण देकर तोमर कालीन ग्वालियरी भाषा और उसके साहित्य पर पर्याप्त प्रकाश डाला है । भावभट्ट ने लिखा है . श्रथ घोपद लक्षणम् गीरणमध्यदेशीयभाषासाहित्यराजितम् । द्विचतुर्वाक्यसपन्न नरनारीकथाश्रयम् ॥एक सौ पैंसठ। शृगाररसभावाद्य रागालापपदात्मकम् । पादातानुप्रासयुक्त पादातयमक च वा ॥एक सौ छयासठ॥ प्रतिपाद यत्र बद्धमेव पाद-चतुष्टयम् । का रूप उद्ग्राह ध्रुवकाभोगोत्तम ध्रुवपद स्मृतम् ॥ एक सौ सरसठ॥ ग्वालियर के ध्रुपद के लक्षण मे भावभट्ट ने तत्कालीन पद-साहित्य के विषय मे अनेक महत्त्वपूर्ण बाते हमे बतला दी है । यह ध्रु पद संस्कृत के अतिरिक्त मध्यदेशीय भाषा एव साहित्य मे राजित था, अर्थात भावभट्ट के समय अठारहवी शताब्दी के प्रारंभ तक मध्यदेशीय भाषा और साहित्य अपना विशिष्ट रूप और अस्तित्व रखते थे । ये पद छोटे-छोटे, दो-चार वाक्यो के, चार चरणों के होते थे। इनमे नरनारी की कथाएँ वर्णित होती थी । इनका मूल रस श्ट गार था । पदो के अन्त मे अनुप्रास था यमक रहता था। उसके गेय होने के लिए जिन गुणो की आवश्यकता थी, वे भी उसमे थे । मानसिंह तोमर कालीन गेय पदसाहित्य का समग्र रूप ही भावभट्ट ने ध्रुपद के लक्षण के व्याज से प्रस्तुत कर दिया है। फकीरुल्ला और भावभट्ट के कथनों को एक साथ देखने से, ग्वालियर के सगीत ने हिन्दी के रूप निर्माण मे जो योग दान किया था, उस पर बहुत कुछ प्रकाश पड़ता है । ग्वालियरी ध्रुपद की
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धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की शान मुगल रोड आजकल सैलानियों का खास आकर्षण बनी हुई है। समुद्र तल से 11,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित मुगल रोड अपने शानदार नजारों और रोमांच से भरे सफर के कारण सैलानियों के लिए बहुत खास जगह बन जाती है। बर्फबारी के मौसम में एक बार फिर मुगल रोड अपनी खूबसूरती से जन्नत बनने को तैयार है। तस्वीरें।
मुगल रोड जम्मू संभाग के पुंछ से कश्मीर के शोपियां जिले के बीच आवागमन के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। पहाड़ी रास्तों के घुमावदार मोड़ों के बीच इसकी कुल लंबाई करीब 84 किमी है।
11,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित मुगल रोड पीर पंजाल श्रेणी की पहाड़ियों के बीच से होकर गुजरती है।
आज मुगल रोड के नाम से प्रसिद्ध इस सड़क का प्रयोग कश्मीर के आवागमन के लिए तत्कालीन मुगल शासकों के द्वारा किया जाता था।
मुगल रोड से शोपियां, श्रीनगर, पुंछ और कई अन्य जिलों के लोग अपनी यात्राओं को करते हैं।
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धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की शान मुगल रोड आजकल सैलानियों का खास आकर्षण बनी हुई है। समुद्र तल से ग्यारह,पाँच सौ फीट की ऊंचाई पर स्थित मुगल रोड अपने शानदार नजारों और रोमांच से भरे सफर के कारण सैलानियों के लिए बहुत खास जगह बन जाती है। बर्फबारी के मौसम में एक बार फिर मुगल रोड अपनी खूबसूरती से जन्नत बनने को तैयार है। तस्वीरें। मुगल रोड जम्मू संभाग के पुंछ से कश्मीर के शोपियां जिले के बीच आवागमन के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। पहाड़ी रास्तों के घुमावदार मोड़ों के बीच इसकी कुल लंबाई करीब चौरासी किमी है। ग्यारह,पाँच सौ फीट की ऊंचाई पर स्थित मुगल रोड पीर पंजाल श्रेणी की पहाड़ियों के बीच से होकर गुजरती है। आज मुगल रोड के नाम से प्रसिद्ध इस सड़क का प्रयोग कश्मीर के आवागमन के लिए तत्कालीन मुगल शासकों के द्वारा किया जाता था। मुगल रोड से शोपियां, श्रीनगर, पुंछ और कई अन्य जिलों के लोग अपनी यात्राओं को करते हैं।
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रूपकाय भगवान् का भौतिक शरीर, धर्मकाय भौतिक के साथ मिश्रित धर्म आध्यात्मिक शरीर है। संभोगकाय तथागत का आनंदमय शरीर है । ' इस प्रकार इस काय के द्वारा बुद्ध को प्रायः देवताओं का सा स्वर्गीय शरीर दे दिया गया है। संभोगकाय संबंधी सिद्धात के निर्माण में योगाचारी महायानी विशेष हाथ था । उन्होंने इसे श्रौतपरंपरा के ईश्वर की समानता पर विकसित किया है । निर्गुण निर्विकार तत्त्व धर्मकाय और नाम रूपमय ईश्वर संभोग काय है, "
भगवान् बुद्ध ने अपने धर्मकाय को स्पष्ट करते हुए वक्कलि से कहा था"बक्कलि ! मेरी इस गंदी काया के देखने से तुझे क्या लाभ ! वक्कलि, जो धर्म को देखता है वह मुझे देखता है ।'
इससे यह प्रमाणित होता है कि कृष्ण के संभोग शरीर की कल्पना महायान संप्रदाय से पूर्व हो चुकी थी जिसके अनुकरण पर महायान संप्रदाय ने बुद्ध के तृतीय शरीर का निर्माण किया । श्रौत धर्म की बौद्ध धर्म पर यह छाप प्रेमाभक्ति के प्रचार में सहायक सिद्ध हुई होगी । बौद्ध धर्म में मारविजय के चित्र एवं साहित्य पर कृष्ण के काम विजय का प्रभाव इस रूप में दिखलाया जा सकता है ।
मध्ययुग में आगम प्रभाव
हमारे देश में बारहवीं तेरहवीं शताब्दी के उपरात एक ऐसी साधना-पद्धति की प्रबल धारा दिखाई पड़ती है जो पूर्ववर्ती सभी धार्मिक आदोलनो की धारा को समेट कर शताब्दियो तक अक्षुण्ण रूप से प्रवाहित होती चली जा रही है। इस नए आंदोलन की गतिविधि से चमत्कृत होकर डा० ग्रियर्सन लिखते हैं - "कोई भी मनुष्य जिसे पंद्रहवीं तथा बाद की शताब्दियो का . साहित्य पढ़ने का मौका मिला है उस भारी व्यवधान को लक्ष्य किए बिना नहीं रह सकता जो पुरानी और नई धार्मिक भावनाओं में विद्यमान है। हम अपने को ऐसे धार्मिक आदोलन के सामने पाते हैं जो उन सब आदोलनो से कहीं अधिक विशाल है जिन्हें भारतवर्ष ने कभी देखा है, यहाँ तक कि वह
१. डा० भरत सिह उपाध्याय, बौद्धदर्शन तथा अन्य भारतीय दर्शन पृष्ठ ५८४ २. अल वकलि किं ते पूतिकायेन दिट्ठेन । यो खो वक्कलि धम्म पस्तति, सो मं पस्सति । यो म पस्सति सो धम्म पस्सति ( सयुक्त निकाय )
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रूपकाय भगवान् का भौतिक शरीर, धर्मकाय भौतिक के साथ मिश्रित धर्म आध्यात्मिक शरीर है। संभोगकाय तथागत का आनंदमय शरीर है । ' इस प्रकार इस काय के द्वारा बुद्ध को प्रायः देवताओं का सा स्वर्गीय शरीर दे दिया गया है। संभोगकाय संबंधी सिद्धात के निर्माण में योगाचारी महायानी विशेष हाथ था । उन्होंने इसे श्रौतपरंपरा के ईश्वर की समानता पर विकसित किया है । निर्गुण निर्विकार तत्त्व धर्मकाय और नाम रूपमय ईश्वर संभोग काय है, " भगवान् बुद्ध ने अपने धर्मकाय को स्पष्ट करते हुए वक्कलि से कहा था"बक्कलि ! मेरी इस गंदी काया के देखने से तुझे क्या लाभ ! वक्कलि, जो धर्म को देखता है वह मुझे देखता है ।' इससे यह प्रमाणित होता है कि कृष्ण के संभोग शरीर की कल्पना महायान संप्रदाय से पूर्व हो चुकी थी जिसके अनुकरण पर महायान संप्रदाय ने बुद्ध के तृतीय शरीर का निर्माण किया । श्रौत धर्म की बौद्ध धर्म पर यह छाप प्रेमाभक्ति के प्रचार में सहायक सिद्ध हुई होगी । बौद्ध धर्म में मारविजय के चित्र एवं साहित्य पर कृष्ण के काम विजय का प्रभाव इस रूप में दिखलाया जा सकता है । मध्ययुग में आगम प्रभाव हमारे देश में बारहवीं तेरहवीं शताब्दी के उपरात एक ऐसी साधना-पद्धति की प्रबल धारा दिखाई पड़ती है जो पूर्ववर्ती सभी धार्मिक आदोलनो की धारा को समेट कर शताब्दियो तक अक्षुण्ण रूप से प्रवाहित होती चली जा रही है। इस नए आंदोलन की गतिविधि से चमत्कृत होकर डाशून्य ग्रियर्सन लिखते हैं - "कोई भी मनुष्य जिसे पंद्रहवीं तथा बाद की शताब्दियो का . साहित्य पढ़ने का मौका मिला है उस भारी व्यवधान को लक्ष्य किए बिना नहीं रह सकता जो पुरानी और नई धार्मिक भावनाओं में विद्यमान है। हम अपने को ऐसे धार्मिक आदोलन के सामने पाते हैं जो उन सब आदोलनो से कहीं अधिक विशाल है जिन्हें भारतवर्ष ने कभी देखा है, यहाँ तक कि वह एक. डाशून्य भरत सिह उपाध्याय, बौद्धदर्शन तथा अन्य भारतीय दर्शन पृष्ठ पाँच सौ चौरासी दो. अल वकलि किं ते पूतिकायेन दिट्ठेन । यो खो वक्कलि धम्म पस्तति, सो मं पस्सति । यो म पस्सति सो धम्म पस्सति
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कार्यक्रम रखा। सम्मान के उपरान्त दुबे जी ने अपने वक्तव्य में कहा"मुझे नहीं लगता है कि मैं सम्मान के लायक हूँ लेकिन जब सम्मान हो ही रहा है तो लगता है कि मेरा भी सम्मान हो सकता है। हाँ इस लायक कवि नहीं हूँ। मगर मुझे पता है कि मैं राष्ट्रीय स्तर का कवि हूँ कोई माने न माने ।"
ये बेबाकी सुनकर उपस्थित जन तालियाँ पीटने
'द्वितीय संस्मरण - श्री विट्ठल भाई ने तीन वर्ष पूर्व अपने निवास पर शहर के किसी एक कवि का एकल काव्य पाठ का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया । प्रथमतः रमेश दुबे जी को रचना पढ़ने हेतु आमन्त्रित किया गया। अतिथि आमन्त्रितों में पुलिस के एक आला अधिकारी को आना था । चूँकि उन्हें आने में देरी थी अतः दुबे जी ने रचनाएँ पढ़ना यह कहते हुए प्रारम्भ कर दिया कि मैं अफसरों और नेताओं को कविता सुनाने नहीं आया हूँ । मेरी दृष्टि में सभी श्रोता समान हैं, विशिष्ट हैं। वास्तव में वह अधिकारियों और नेताओं आदि से अधिक सम्मान सामान्य जन को देते थे । इसी कार्यक्रम में जब उन्होंने अपनी ग़ज़ल पढ़ी तो साथ में यह भी कह दिया -"मैं डॉ. गजाधर सागर को उर्दू का उस्ताद शायर मानता हूँ और वह हैं भी" । कई शायरों को दबी जुबान से एतराज़ भी हुआ । कार्यक्रम के बाद उन्होंने फिर कह दिया "मैं गजाधर सागर को उनकी शायरी और मेहनत को जानता हूँ, कोई माने या न माने वो उस्ताद हैं।" मैं किंकर्तव्यविमूढ़ बैठा था । वैसे ग़ज़ल के मामले में वह मुझसे सलाह लिया करते थे। ये बात उनके पुत्र भी जानते हैं ।
अन्त में मैं एक और मार्मिक और दिल को छू लेने वाली बात कह रहा हूँ जो मैंने उनके निधन के बाद आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भी कही थी । लगभग एक वर्ष पूर्व से उन्होंने मुझसे कहना प्रारम्भ कर दिया था - यार गजाधर तुम मेरी अर्थी में काँधा अवश्य ही लगाओगे, मुझे पूरा विश्वास है, कोई आए चाहे न
मैं कहता अरे भैया मौत की बात कर ही क्यों रहे हो । एक दिन निधन की खबर आ गयी जिसने मुझे झकझोर दिया । भागा भागा गया और नम आँखों से काँधा देता रहा ।
दुबे जी आज नहीं है परन्तु हमारे बीच अपनी रचनाओं, मिलनसारिता और स्पष्टवादिता के साथ हमेशा रहेंगे ।
अपने मित्र के सम्मान में निम्न गजल पेश करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूँग़ज़ल
ग़मों से बस वहीं इन्सान रिश्ता जोड़ जाते हैं अज़ीज़ों से जो आख़िरकार नाता तोड़ जाते हैं
तहेदिल से किया है उन्स जिनने रात दिन सचमुच उन्हें वो एक दिन रोता बिलखता छोड़ जाते हैं
करेगी याद उनको क्यूँ न ये दुनिया हमेशा जब मसाइल' के वो लाखों सख़्त पत्थर तोड़ जाते हैं
बहुत रोकें बहुत टोकें मगर क्या फ़ायदा मुमकिन कि जब वो दौड़ में आगे ही आगे दौड़ जाते हैं
भुलाने की हज़ारों कोशिशें कर लें भले 'सागर' मगर अपनी ही यादों की तरफ़ वो मोड़ जाते हैं।"
1. उन्स प्रेम
2. मसाइल मस्अले,
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कार्यक्रम रखा। सम्मान के उपरान्त दुबे जी ने अपने वक्तव्य में कहा"मुझे नहीं लगता है कि मैं सम्मान के लायक हूँ लेकिन जब सम्मान हो ही रहा है तो लगता है कि मेरा भी सम्मान हो सकता है। हाँ इस लायक कवि नहीं हूँ। मगर मुझे पता है कि मैं राष्ट्रीय स्तर का कवि हूँ कोई माने न माने ।" ये बेबाकी सुनकर उपस्थित जन तालियाँ पीटने 'द्वितीय संस्मरण - श्री विट्ठल भाई ने तीन वर्ष पूर्व अपने निवास पर शहर के किसी एक कवि का एकल काव्य पाठ का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया । प्रथमतः रमेश दुबे जी को रचना पढ़ने हेतु आमन्त्रित किया गया। अतिथि आमन्त्रितों में पुलिस के एक आला अधिकारी को आना था । चूँकि उन्हें आने में देरी थी अतः दुबे जी ने रचनाएँ पढ़ना यह कहते हुए प्रारम्भ कर दिया कि मैं अफसरों और नेताओं को कविता सुनाने नहीं आया हूँ । मेरी दृष्टि में सभी श्रोता समान हैं, विशिष्ट हैं। वास्तव में वह अधिकारियों और नेताओं आदि से अधिक सम्मान सामान्य जन को देते थे । इसी कार्यक्रम में जब उन्होंने अपनी ग़ज़ल पढ़ी तो साथ में यह भी कह दिया -"मैं डॉ. गजाधर सागर को उर्दू का उस्ताद शायर मानता हूँ और वह हैं भी" । कई शायरों को दबी जुबान से एतराज़ भी हुआ । कार्यक्रम के बाद उन्होंने फिर कह दिया "मैं गजाधर सागर को उनकी शायरी और मेहनत को जानता हूँ, कोई माने या न माने वो उस्ताद हैं।" मैं किंकर्तव्यविमूढ़ बैठा था । वैसे ग़ज़ल के मामले में वह मुझसे सलाह लिया करते थे। ये बात उनके पुत्र भी जानते हैं । अन्त में मैं एक और मार्मिक और दिल को छू लेने वाली बात कह रहा हूँ जो मैंने उनके निधन के बाद आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भी कही थी । लगभग एक वर्ष पूर्व से उन्होंने मुझसे कहना प्रारम्भ कर दिया था - यार गजाधर तुम मेरी अर्थी में काँधा अवश्य ही लगाओगे, मुझे पूरा विश्वास है, कोई आए चाहे न मैं कहता अरे भैया मौत की बात कर ही क्यों रहे हो । एक दिन निधन की खबर आ गयी जिसने मुझे झकझोर दिया । भागा भागा गया और नम आँखों से काँधा देता रहा । दुबे जी आज नहीं है परन्तु हमारे बीच अपनी रचनाओं, मिलनसारिता और स्पष्टवादिता के साथ हमेशा रहेंगे । अपने मित्र के सम्मान में निम्न गजल पेश करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूँग़ज़ल ग़मों से बस वहीं इन्सान रिश्ता जोड़ जाते हैं अज़ीज़ों से जो आख़िरकार नाता तोड़ जाते हैं तहेदिल से किया है उन्स जिनने रात दिन सचमुच उन्हें वो एक दिन रोता बिलखता छोड़ जाते हैं करेगी याद उनको क्यूँ न ये दुनिया हमेशा जब मसाइल' के वो लाखों सख़्त पत्थर तोड़ जाते हैं बहुत रोकें बहुत टोकें मगर क्या फ़ायदा मुमकिन कि जब वो दौड़ में आगे ही आगे दौड़ जाते हैं भुलाने की हज़ारों कोशिशें कर लें भले 'सागर' मगर अपनी ही यादों की तरफ़ वो मोड़ जाते हैं।" एक. उन्स प्रेम दो. मसाइल मस्अले,
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Business Idea : अगर आप कोई बिजनेस शुरू करने के बारे में सोच रहे है। मगर आपको समझ नही आ रहा है कि कौन सा बिजनेस शुरू किया जाएं। जिस बिजनेस से आपको एक बढ़िया कमाई हो, तो फिर आपको अधिक परेशान होने की जरूरत नही है। आज हम आपको एक ऐसा ही बिजनेस आइडिया बता रहे हैं। जिस बिजनेस को अगर आप शुरू करते, तो फिर आप उससे जल्द ही अमीर बन सकते है। हम जिस बिजनेस के बारे में बात कर रहे है। उस बिजनेस का नाम फ्लाई ऐश ब्रिक्स यानी राख से बनी ईंट का बिजनेस हैं। आप इस बिजनेस को बेहद कम लागत के साथ शुरू कर सकते है और महीनों के लाखों रूपये की कमाई कर सकते हैं और वार्षिक आपकी करोड़ों रूपये की कमाई हो सकती है। फ्लाई एश ब्रिक को आमतौर पर सीमेंट की जो ईट है उसको कहा जाता है, तो फिर चलिए जानते है इस बिजनेस के बारे में सारी डिटेल।
अगर आप इस बिजनेस को शुरू करते है, तो फिर इस बिजनेस को शुरू करने में आपका अधिकतर जो इन्वेस्टमेंट है वो मशीन में लगेगी। इस मशीन की मदद से अगर आपको ईट बनाना है, तो फिर इसके लिए आपको 5 से 6 लोगों की जरूरत होगी। इससे जो ईट की जो सीमा है उससे दिन के लगभग 3 हजार ईट बनाए जा सकते हैं। इसमें जो निवेश है इसमें कच्चे माल की जो लागत हैं वो शामिल नहीं होती हैं। अगर आप जो ऑटोमैटिक मशीन है उनका इस्तेमाल करना शुरू करते है, तो फिर जो लागत है वो थोड़ा बढ़ जाती हैं। मगर इसकी कमाई के जो मौके हैं वो भी बढ़ जायेंगे। अगर मशीन की जो कीमत है। उसकी जो लागत होती है। वो 10 लाख से लेकर 12 लाख रूपये तक बढ़ जाती है। अगर इस मशीन का उपयोग करते है, तो फिर इसके माध्यम से 1 घंटे में 1000 ईट बनाए जा सकती है। इसका मतलब यही है। इसकी मदद से आप महीने के 3 लाख से 4 लाख ईंटें बना सकते हैं।
राख से बनने वाली जो ईंट होती हैं। उन ईंटों में फ्लाई एश 55 प्रतिशत होती है। 35 प्रतिशत रेत होती है और 10 प्रतिशत सीमेंट की जरूरत होती है। दरअसल, मिट्टी से बनने वाली जो ईंट होती है उसके मुकाबले फ्लाई ऐश से बनी ईंटें बेहद किफायती होती है। अगर व्यक्ति फ्लाई एश की ईंट से मकान बनाता है, तो फिर जो सीमेंट का खर्च होता है। वो खर्चा 20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक कम हो जाता है।
कुछ राज्य है। जैसे उत्तराखंड और हिमांचल प्रदेश जहां पर मिट्टी में नमी की वजह से जो ईंट होती हैं। उसका उत्पादन नहीं होता है। जिस वजह से जो ईंटें होती हैं उसको दूसरे राज्यों से मंगवाया जाता हैं। जिस राज्यों में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब राज्य शामिल हैं। जिस वजह से जो ट्रांसपोटेशन का खर्चा है वो बढ़ जाता है। ऐसे में ये जो जगहें है यह पर सीमेंट और स्टोनडस्ट से बनने वाली जो ईंटें है। वो बिजनेस बेहद ही फायदेमंद हो सकता है। जो पहाड़ी इलाके होते है। उस जगह पर स्टोनडस्ट बेहद ही आसानी से मिल जाता हैं। जिस वजह से कच्चे माल की लागत भी कम होगी। अगर आपके 100 गज की जमीन है, तो फिर आप उसमें कम से कम 2 लाख रूपये का निवेश कर सकते है और महीने के 1 लाख रूपये तक की कमाई बेहद आसानी से कर सकते हैं।
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Business Idea : अगर आप कोई बिजनेस शुरू करने के बारे में सोच रहे है। मगर आपको समझ नही आ रहा है कि कौन सा बिजनेस शुरू किया जाएं। जिस बिजनेस से आपको एक बढ़िया कमाई हो, तो फिर आपको अधिक परेशान होने की जरूरत नही है। आज हम आपको एक ऐसा ही बिजनेस आइडिया बता रहे हैं। जिस बिजनेस को अगर आप शुरू करते, तो फिर आप उससे जल्द ही अमीर बन सकते है। हम जिस बिजनेस के बारे में बात कर रहे है। उस बिजनेस का नाम फ्लाई ऐश ब्रिक्स यानी राख से बनी ईंट का बिजनेस हैं। आप इस बिजनेस को बेहद कम लागत के साथ शुरू कर सकते है और महीनों के लाखों रूपये की कमाई कर सकते हैं और वार्षिक आपकी करोड़ों रूपये की कमाई हो सकती है। फ्लाई एश ब्रिक को आमतौर पर सीमेंट की जो ईट है उसको कहा जाता है, तो फिर चलिए जानते है इस बिजनेस के बारे में सारी डिटेल। अगर आप इस बिजनेस को शुरू करते है, तो फिर इस बिजनेस को शुरू करने में आपका अधिकतर जो इन्वेस्टमेंट है वो मशीन में लगेगी। इस मशीन की मदद से अगर आपको ईट बनाना है, तो फिर इसके लिए आपको पाँच से छः लोगों की जरूरत होगी। इससे जो ईट की जो सीमा है उससे दिन के लगभग तीन हजार ईट बनाए जा सकते हैं। इसमें जो निवेश है इसमें कच्चे माल की जो लागत हैं वो शामिल नहीं होती हैं। अगर आप जो ऑटोमैटिक मशीन है उनका इस्तेमाल करना शुरू करते है, तो फिर जो लागत है वो थोड़ा बढ़ जाती हैं। मगर इसकी कमाई के जो मौके हैं वो भी बढ़ जायेंगे। अगर मशीन की जो कीमत है। उसकी जो लागत होती है। वो दस लाख से लेकर बारह लाख रूपये तक बढ़ जाती है। अगर इस मशीन का उपयोग करते है, तो फिर इसके माध्यम से एक घंटाटे में एक हज़ार ईट बनाए जा सकती है। इसका मतलब यही है। इसकी मदद से आप महीने के तीन लाख से चार लाख ईंटें बना सकते हैं। राख से बनने वाली जो ईंट होती हैं। उन ईंटों में फ्लाई एश पचपन प्रतिशत होती है। पैंतीस प्रतिशत रेत होती है और दस प्रतिशत सीमेंट की जरूरत होती है। दरअसल, मिट्टी से बनने वाली जो ईंट होती है उसके मुकाबले फ्लाई ऐश से बनी ईंटें बेहद किफायती होती है। अगर व्यक्ति फ्लाई एश की ईंट से मकान बनाता है, तो फिर जो सीमेंट का खर्च होता है। वो खर्चा बीस प्रतिशत से तीस प्रतिशत तक कम हो जाता है। कुछ राज्य है। जैसे उत्तराखंड और हिमांचल प्रदेश जहां पर मिट्टी में नमी की वजह से जो ईंट होती हैं। उसका उत्पादन नहीं होता है। जिस वजह से जो ईंटें होती हैं उसको दूसरे राज्यों से मंगवाया जाता हैं। जिस राज्यों में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब राज्य शामिल हैं। जिस वजह से जो ट्रांसपोटेशन का खर्चा है वो बढ़ जाता है। ऐसे में ये जो जगहें है यह पर सीमेंट और स्टोनडस्ट से बनने वाली जो ईंटें है। वो बिजनेस बेहद ही फायदेमंद हो सकता है। जो पहाड़ी इलाके होते है। उस जगह पर स्टोनडस्ट बेहद ही आसानी से मिल जाता हैं। जिस वजह से कच्चे माल की लागत भी कम होगी। अगर आपके एक सौ गज की जमीन है, तो फिर आप उसमें कम से कम दो लाख रूपये का निवेश कर सकते है और महीने के एक लाख रूपये तक की कमाई बेहद आसानी से कर सकते हैं।
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- News Petrol-Diesel Price 11th July: नोएडा में फिर बदले तेल के दाम, जानिए क्या हो गई है कीमत?
कपूर खानदान की फीमेल सुपरस्टार करिश्मा कपूर आज यानी कि 25 जून को अपना जन्मदिन मना रही हैं। आज ही के दिन साल 1974 में रणधीर कपूर और बबीता की बेटी करिश्मा का जन्म सुपरस्टार राज कपूर के घर पर हुआ। पूरा परिवार फिल्मों में स्टार कैटेगरी में गिना जाता। ऐसे में करिश्मा कपूर ने पढ़ाई को छोड़कर फिल्मों की राह पकड़ ली।
90 के दशक के दौरान सिनेमा के पर्दे पर केवल एक ही नाम सबसे ऊपर रहा है वो है करिश्मा कपूर का। करिश्मा कपूर केवल खूबसूरती में ही नहीं बल्कि अभिनय में भी अपना लोहा मनवाने में कामयाब रही हैं। साल 1996 में राजा हिंदुस्तानी फिल्म ने करिश्मा कपूर के करियर के ग्राफ को ऊंचाई पर ला दिया। साल 1991 में प्रेम कैदी फिल्म से करिश्मा कपूर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी।
जुबैदा और फिजा जैसी फिल्मों से करिश्मा कपूर ने फिर से बतौर एक्ट्रेस अपनी काबिलियत का परिचय किया। वहीं आज जब करिश्मा कपूर फिल्मी पर्दे से दूर हैं इसके बाद भी वह करोड़ों की मालकिन हैं। करिश्मा कपूर के पास खुद का आलीशान घर होने के साथ महंगी गाड़ियां भी हैं।
मीडिया रिपोर्ट अनुसार करिश्मा कपूर के पास इतनी प्रॉपर्टी है कि वह इसी के बलबूते अपनी पूरी जिंदगी आराम से बिता सकती हैं। करिश्मा कपूर की नेट वर्थ 12 मिलियन डॉलर यानी कि 87 करोड़ रुपए हैं। टीवी शो, विज्ञापन से करिश्मा कपूर कमाई करती हैं।
रिपोर्ट अनुसार करिश्मा कपूर एक टीवी शो को जज करने के लिए 2 से 4 करोड़ की फीस लेती हैं। वहीं टीवी एड के लिए करिश्मा कपूर की फीस 50 से 80 लाख के बीच होती है। एक से अधिक लाखों की गाड़ियां भी करिश्मा कपूर के पास हैं। कुल मिलाकर देखा जाए को करिश्मा कपूर एक लग्जरी लाइफ जीती आयी हैं।
48 साल की उम्र में करिश्मा कपूर अपनी बिकिनी फोटो से बीते कुछ समय से इंटरनेट पर छाई हुई हैं। करिश्मा कपूर इस तस्वीर में करीना कपूर खान के साथ वेकेशन का मजा उठा रही हैं।
बिन ब्रा बीच रोड में कार खड़ी करके ऐसी हरकत करने लगी भोजपुरी हसीना, लोग मांग रहे हैं लोकेशन!
बॉलीवुड पर राज करती थी ये हसीना, बहन ने भी एक्टिंग में बनाया करियर, इमरान हाशमी से है खास कनेक्शन, पहचाना?
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Don't Miss! - News Petrol-Diesel Price ग्यारह जुलाईy: नोएडा में फिर बदले तेल के दाम, जानिए क्या हो गई है कीमत? कपूर खानदान की फीमेल सुपरस्टार करिश्मा कपूर आज यानी कि पच्चीस जून को अपना जन्मदिन मना रही हैं। आज ही के दिन साल एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर में रणधीर कपूर और बबीता की बेटी करिश्मा का जन्म सुपरस्टार राज कपूर के घर पर हुआ। पूरा परिवार फिल्मों में स्टार कैटेगरी में गिना जाता। ऐसे में करिश्मा कपूर ने पढ़ाई को छोड़कर फिल्मों की राह पकड़ ली। नब्बे के दशक के दौरान सिनेमा के पर्दे पर केवल एक ही नाम सबसे ऊपर रहा है वो है करिश्मा कपूर का। करिश्मा कपूर केवल खूबसूरती में ही नहीं बल्कि अभिनय में भी अपना लोहा मनवाने में कामयाब रही हैं। साल एक हज़ार नौ सौ छियानवे में राजा हिंदुस्तानी फिल्म ने करिश्मा कपूर के करियर के ग्राफ को ऊंचाई पर ला दिया। साल एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में प्रेम कैदी फिल्म से करिश्मा कपूर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। जुबैदा और फिजा जैसी फिल्मों से करिश्मा कपूर ने फिर से बतौर एक्ट्रेस अपनी काबिलियत का परिचय किया। वहीं आज जब करिश्मा कपूर फिल्मी पर्दे से दूर हैं इसके बाद भी वह करोड़ों की मालकिन हैं। करिश्मा कपूर के पास खुद का आलीशान घर होने के साथ महंगी गाड़ियां भी हैं। मीडिया रिपोर्ट अनुसार करिश्मा कपूर के पास इतनी प्रॉपर्टी है कि वह इसी के बलबूते अपनी पूरी जिंदगी आराम से बिता सकती हैं। करिश्मा कपूर की नेट वर्थ बारह मिलियन डॉलर यानी कि सत्तासी करोड़ रुपए हैं। टीवी शो, विज्ञापन से करिश्मा कपूर कमाई करती हैं। रिपोर्ट अनुसार करिश्मा कपूर एक टीवी शो को जज करने के लिए दो से चार करोड़ की फीस लेती हैं। वहीं टीवी एड के लिए करिश्मा कपूर की फीस पचास से अस्सी लाख के बीच होती है। एक से अधिक लाखों की गाड़ियां भी करिश्मा कपूर के पास हैं। कुल मिलाकर देखा जाए को करिश्मा कपूर एक लग्जरी लाइफ जीती आयी हैं। अड़तालीस साल की उम्र में करिश्मा कपूर अपनी बिकिनी फोटो से बीते कुछ समय से इंटरनेट पर छाई हुई हैं। करिश्मा कपूर इस तस्वीर में करीना कपूर खान के साथ वेकेशन का मजा उठा रही हैं। बिन ब्रा बीच रोड में कार खड़ी करके ऐसी हरकत करने लगी भोजपुरी हसीना, लोग मांग रहे हैं लोकेशन! बॉलीवुड पर राज करती थी ये हसीना, बहन ने भी एक्टिंग में बनाया करियर, इमरान हाशमी से है खास कनेक्शन, पहचाना?
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टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार की कार को मंगलवार देर रात एक तेज रफ्तार कैंटर ने टक्कर मार दी. दुर्घटना मेरठ में कमिश्नर के घर के करीब ही हुई. प्रवीण कुमार को कोई चोट नहीं लगी. पुलिस फौरन मौका-ए-वारदात पर पहुंची और आरोपी कैंटर ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया.
प्रवीण कुमार बागपत रोड पर मुलतान नगर में रहते हैं. वह रात करीब 10 बजे पांडव नगर से लौट रहे थे. उनकी लैंड रोवर कार में उनका बेटा भी साथ था.
जैसे ही वह कमिश्वर के घर के करीब पहुंचे एक तेज रफ्तार कैंटर, जो सामने से आ रहा था, ने उनकी कार को टक्कर मार दी. कार को नुकसान पहुंचा लेकिन प्रवीण और उनके बेटे को चोट नहीं लगी. इस दुर्घटना के बाद भीड़ वहां जमा हो गई और उसने ड्राइवर को पकड़ लिया.
घटना की खबर लगने पर सिविल लाइंस थाने की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई. एसपी सिटी पीयूष कुमार ने कहा कि कैंटर के ड्राइवर को पकड़ लिया गया है और उसे पुलिस स्टेशन भेज दिया गया है. सीईओ ने कहा कि प्रवीण और उनका बेटा सुरक्षित है.
प्रवीण कुमार इस दुर्घटना से बच गए हैं. जिस ड्राइवर ने प्रवीण कुमार की कार को टक्कर मारी है उसे नियमों का पालन नहीं करने की सजा मिलना तय है. यह पहली बार नहीं है जब प्रवीण कुमार कार एक्सीडेंट में बचे हैं. साल 2007 की बात है जब पूर्व तेज गेंदबाज एक ओपन जीप से गिर गए थे. तब उनके शहर मेरठ में उनकी घर वापसी पर एक रिसेप्शन का आयोजन किया गया था.
प्रवीण की बात करें तो उन्होंने तीनों फॉर्मेट में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया है. दाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज को उनकी स्विंग के लिए जाना जाता था. 2007 से 2011 तक उन्होंने 68 वनडे इंटरनैशनल में 77 विकेट लिए. यूपी के इस तेज गेंदबाज को सिर्फ छह टेस्ट खेलने का मौका मिला. वहीं इसमें उन्होंने 27 विकेट लिए वहीं 10 टी20 इंटरनैशनल में उन्होंने 8 विकेट अपने नाम किए.
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टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार की कार को मंगलवार देर रात एक तेज रफ्तार कैंटर ने टक्कर मार दी. दुर्घटना मेरठ में कमिश्नर के घर के करीब ही हुई. प्रवीण कुमार को कोई चोट नहीं लगी. पुलिस फौरन मौका-ए-वारदात पर पहुंची और आरोपी कैंटर ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया. प्रवीण कुमार बागपत रोड पर मुलतान नगर में रहते हैं. वह रात करीब दस बजे पांडव नगर से लौट रहे थे. उनकी लैंड रोवर कार में उनका बेटा भी साथ था. जैसे ही वह कमिश्वर के घर के करीब पहुंचे एक तेज रफ्तार कैंटर, जो सामने से आ रहा था, ने उनकी कार को टक्कर मार दी. कार को नुकसान पहुंचा लेकिन प्रवीण और उनके बेटे को चोट नहीं लगी. इस दुर्घटना के बाद भीड़ वहां जमा हो गई और उसने ड्राइवर को पकड़ लिया. घटना की खबर लगने पर सिविल लाइंस थाने की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई. एसपी सिटी पीयूष कुमार ने कहा कि कैंटर के ड्राइवर को पकड़ लिया गया है और उसे पुलिस स्टेशन भेज दिया गया है. सीईओ ने कहा कि प्रवीण और उनका बेटा सुरक्षित है. प्रवीण कुमार इस दुर्घटना से बच गए हैं. जिस ड्राइवर ने प्रवीण कुमार की कार को टक्कर मारी है उसे नियमों का पालन नहीं करने की सजा मिलना तय है. यह पहली बार नहीं है जब प्रवीण कुमार कार एक्सीडेंट में बचे हैं. साल दो हज़ार सात की बात है जब पूर्व तेज गेंदबाज एक ओपन जीप से गिर गए थे. तब उनके शहर मेरठ में उनकी घर वापसी पर एक रिसेप्शन का आयोजन किया गया था. प्रवीण की बात करें तो उन्होंने तीनों फॉर्मेट में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया है. दाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज को उनकी स्विंग के लिए जाना जाता था. दो हज़ार सात से दो हज़ार ग्यारह तक उन्होंने अड़सठ वनडे इंटरनैशनल में सतहत्तर विकेट लिए. यूपी के इस तेज गेंदबाज को सिर्फ छह टेस्ट खेलने का मौका मिला. वहीं इसमें उन्होंने सत्ताईस विकेट लिए वहीं दस टीबीस इंटरनैशनल में उन्होंने आठ विकेट अपने नाम किए.
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पानीपत में गांव दिवाना के पास रेलवे ट्रैक पर एक युवक-युवती ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली है। शवों के रेलवे ट्रैक पर पड़े होने की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची। टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए। दोनों शवों के पास से मिले मोबाइल फोन, कागजात आदि से उनकी पहचान हुई।
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पानीपत में गांव दिवाना के पास रेलवे ट्रैक पर एक युवक-युवती ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली है। शवों के रेलवे ट्रैक पर पड़े होने की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची। टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए। दोनों शवों के पास से मिले मोबाइल फोन, कागजात आदि से उनकी पहचान हुई।
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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को सभी लघु उद्योगों या संस्थाओं/अन्य संस्थाओं (10 करोड़ रूपए से कम पूँजी निवेश वाले) के लिए पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) की मंजूरी लेने के लिए एक स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना (वीडीएस) का ऐलान किया।
मुख्यमंत्री ने लुधियाना के उद्योगपतियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि जल (प्रदूषण की रोकथाम और कंट्रोल) एक्ट, 1974 और हवा (प्रदूषण की रोकथाम और कंट्रोल) एक्ट, 1981 के उपबंधों के अंतर्गत सभी उद्योगों को पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से स्थापना/संचालन के लिए मंजूरी प्राप्त करने की ज़रूरत है।
उन्होंने कहा कि कुछ उद्योगों ने कभी भी बोर्ड से संचालन के लिए सहमति नहीं ली और उनको 1992 के बाद या उद्योग चालू होने की तारीख़ से, जो भी बाद में हो, मंजूरी फीस अदा करने की आवश्यकता है। भगवंत मान ने कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने और उद्योगों को पर्यावरण के नियमों की पालना के दायरे में लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी छोटे उद्योगों या संस्थाओं/अन्य संस्थाओं (10 करोड़ रूपए से कम पूँजी निवेश) के लिए स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना (वी. डी. एस. ) के अधीन लाने का फ़ैसला किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उद्योग निर्धारित क्षेत्रों में चल रहे हों या बोर्ड को चलाने के लिए कभी भी सहमति नहीं ली हो या बोर्ड की पिछली स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजनाओं के अंतर्गत कभी भी सहमति फीस नहीं भरी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत उद्योगों या संस्थाओं/अन्य संस्थाओं को सवा पाँच हज़ार रुपए की थोड़ी सी फीस के अलावा साल 1992 से 31 अक्तूबर, 2018 तक कोई भी फीस नहीं देनी पड़ेगी।
भगवंत मान ने कहा कि ऐसे उद्योगों को पहली नवंबर 2018 के बाद ही सहमति फीस जमा करवानी पड़ेगी। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस योजना के अंतर्गत उद्योगों द्वारा ऑनलाइन आवेदन दाखि़ल करने की आखिरी तारीख़ 31 मार्च, 2023 तक है। उन्होंने कहा कि और अधिक विवरणों के लिए उद्योगपति पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की वैबसाईट www. ppcb. punjab. gov. in देख सकते हैं।
भगवंत मान ने उद्योगपतियों को फोकल प्वाइंट्स, बिजली सप्लाई, सी. एल. यू. , लुधियाना में प्रदर्शनी केंद्र के काम में तेज़ी लाने, ठोस अवशेष प्रबंधन, अनुसंधान और विकास, कौशल विकास और नौजवानों के रोजग़ार और अन्य सम्बन्धित उनके सभी बकाया मुद्दों को हल करने का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राज्य में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उद्योगपतियों को पूर्ण तालमेल और सहयोग का आश्वासन दिया। भगवंत मान ने कहा कि राज्य सरकार के अथक यत्नों के स्वरूप पंजाब जल्द ही देश का अग्रणी औद्योगिक राज्य बनकर उभरेगा।
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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को सभी लघु उद्योगों या संस्थाओं/अन्य संस्थाओं के लिए पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की मंजूरी लेने के लिए एक स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने लुधियाना के उद्योगपतियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि जल एक्ट, एक हज़ार नौ सौ चौहत्तर और हवा एक्ट, एक हज़ार नौ सौ इक्यासी के उपबंधों के अंतर्गत सभी उद्योगों को पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से स्थापना/संचालन के लिए मंजूरी प्राप्त करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ उद्योगों ने कभी भी बोर्ड से संचालन के लिए सहमति नहीं ली और उनको एक हज़ार नौ सौ बानवे के बाद या उद्योग चालू होने की तारीख़ से, जो भी बाद में हो, मंजूरी फीस अदा करने की आवश्यकता है। भगवंत मान ने कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने और उद्योगों को पर्यावरण के नियमों की पालना के दायरे में लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी छोटे उद्योगों या संस्थाओं/अन्य संस्थाओं के लिए स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना के अधीन लाने का फ़ैसला किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उद्योग निर्धारित क्षेत्रों में चल रहे हों या बोर्ड को चलाने के लिए कभी भी सहमति नहीं ली हो या बोर्ड की पिछली स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजनाओं के अंतर्गत कभी भी सहमति फीस नहीं भरी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत उद्योगों या संस्थाओं/अन्य संस्थाओं को सवा पाँच हज़ार रुपए की थोड़ी सी फीस के अलावा साल एक हज़ार नौ सौ बानवे से इकतीस अक्तूबर, दो हज़ार अट्ठारह तक कोई भी फीस नहीं देनी पड़ेगी। भगवंत मान ने कहा कि ऐसे उद्योगों को पहली नवंबर दो हज़ार अट्ठारह के बाद ही सहमति फीस जमा करवानी पड़ेगी। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस योजना के अंतर्गत उद्योगों द्वारा ऑनलाइन आवेदन दाखि़ल करने की आखिरी तारीख़ इकतीस मार्च, दो हज़ार तेईस तक है। उन्होंने कहा कि और अधिक विवरणों के लिए उद्योगपति पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की वैबसाईट www. ppcb. punjab. gov. in देख सकते हैं। भगवंत मान ने उद्योगपतियों को फोकल प्वाइंट्स, बिजली सप्लाई, सी. एल. यू. , लुधियाना में प्रदर्शनी केंद्र के काम में तेज़ी लाने, ठोस अवशेष प्रबंधन, अनुसंधान और विकास, कौशल विकास और नौजवानों के रोजग़ार और अन्य सम्बन्धित उनके सभी बकाया मुद्दों को हल करने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राज्य में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उद्योगपतियों को पूर्ण तालमेल और सहयोग का आश्वासन दिया। भगवंत मान ने कहा कि राज्य सरकार के अथक यत्नों के स्वरूप पंजाब जल्द ही देश का अग्रणी औद्योगिक राज्य बनकर उभरेगा।
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उनके समय के सम्बन्ध मे अवश्य धारणा बना सकते हैं । 1 सतो की जन्म तिथि और निधन तिथि को लेकर ऐतिहासिक विवाद नही होना चाहिए क्योकि उनकी दृष्टि मे जनम और मरण एक काल खण्ड है जिनको दायरे मे आबद्ध नही किया जा सकता । कबीर इन दायरो से मुक्त होते हुए अपने विचारो के रूप मे आज भी हमारे सामने उपस्थित है।
निधन तिथि की भाति कबीर के निधन स्थान के बारे मे भी अभी तक कोई सर्वमान्य मत स्थिर नहीं हो सका है। उनकी मगहर रतनपुर, और पुरी मे समाधियाँ होने के कारण सदेह को बल मिला हैं। रतनपुर और पुरी की समाधियों का उल्लेख 'आइने अकबरी' में हुआ है । 2 समाधि के आधार पर निधन स्थान का निर्धारण नहीं किया जा सकता है। इससे तो उक्त तीनो स्थान सिद्ध हो जायेगे अत वास्तविकता का निर्धारण के लिए अन्य प्रमाणो का भी सहारा लेना जरुरी है। मगहर के सम्बन्ध में अन्य प्रमाण भी सामग्री जुटाते है, जैसेनिर्भय ज्ञान" और धर्मदास की शब्दावली 3 कबीर का निधन स्थान 'मगहर' बताते है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि उनका निधन मगहर मे ही हुआ होगा। 'मगहर' में समाधि तो इसका प्रमाण है ही साथ ही कबीरपथी रचनाओं 'निर्णय ज्ञान' और 'धर्मदास की शब्दावली' भी इसकी पुष्टि करते है।
कबीर की रचनाओं की संख्या के बारे में निश्चित रूप से कुछ कहना संभव नहीं है। रे० वेस्टकाट, डॉ० एफ०ई०की, डॉ० रामकुमार वर्मा और डॉ० पीताम्बर बड़थ्वाल आदि विद्वानों ने इस सम्बन्ध में काफी कार्य किया हैं। कबीर के ग्रंथो की संख्या को वेस्टकाट ने 82, विल्सन ने 90, डॉ० रामकुमार वर्मा ने
डॉ० रामचन्द्र तिवारी, 'कबीर मीमांसा, पृष्ठ 27
2 अबुल फजल, 'आइने अकबरी, (अनुवादित), भाग 2, पृष्ठ 129, 171
'धनी धर्मदास की शब्दावली, पृष्ठ 10 पद 4
57 बताया है परन्तु यह सब संख्याये प्रामाणिक नही मानी जा सकती है क्योंकि विद्वानो ने पुस्तको के अंगो, कबीरपंथी रचनाओ आदि को भी अपनी संख्या मे स्थान दिया है। सच्चाई यह है कि इनकी रचनायें फुटकर पदों, साखियो, रमैनियों या अन्य प्रकार की कविताओं के संग्रह मात्र है। ऐसा प्रसिद्ध है कि कबीर के शिष्य धर्मदास ने सर्वप्रथम सवत 1521 में इनकी रचनाओ का एक सग्रह 'बीजक' के रूप मे तैयार किया था, परन्तु इसके काल की निश्चितता मे सदेह है, दूसरे इसमें संग्रहीत कुछ रचनाओ को कबीर के परवर्ती कवियो द्वारा निर्मित किया जाना भी स्पष्ट है गुरु ग्रन्थ साहिब' मे कबीर की रचनाओ के रुप मे लगभग 225 पद तथा 250 श्लोक और साखियाँ सग्रहीत है। 'कबीर ग्रन्थावली' कबीर की रचनाओं का दूसरा वह सग्रह है जो किसी प्राचीन हस्तलिखित प्रति के आधार पर 'काशी नगरी प्राचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित किया गया है, इसकी लगभग 50 साखियाँ और 5 पद गुरु ग्रन्थ साहिब' के समान है और शेष लगभग 750 साखियाँ तथा चार सौ पद ऐसे है जो उसमें आयी हुई ऐसी रचनाओं से बहुत भिन्न है।
इस प्रकार स्पष्ट है कि कबीर की रचनाओं के बारे मे स्पष्ट जानकारी नही है। बीजक' ही प्रमाणिक ग्रन्थ है, जिसको उनके शिष्यों द्वारा सग्रह करके सुरक्षित रखा गया है। उनकी कृतियों के अश गुरु ग्रन्थ साहब', कबीर ग्रन्थावली आदि रचनाओ में मिलते हैं
कबीर के शिष्य :
कबीर के अनन्त ज्ञान ओर असाधारण व्यक्तित्व से प्रभावित होने कर अनेक व्यक्तियों ने उनको अपना गुरु स्वीकार किया है। दादूपथी राघवदास ने 'भक्तमाल' मे कमाल, कमाली, पद्यनाभ, रामकृपाल, नीर, धीर, ज्ञानी धर्मदास और
डॉ० परशुराम चतुर्वेदी, उत्तरी भारत की संत परम्परा, पृष्ठ 175
हरदास को कबीर का शिष्य स्वीकार किया है। नाभादास ने भक्तमाल मे तत्वा और जीवा को भी कबीर का शिष्य माना है। इसी प्रकार कबीरपंथ की काशी, छत्तीसगढ़ी विदूपुर और धनौती की शाखाओं के प्रवर्तक क्रमशः सुरत गोपाल, धर्मदास, जागूदारा और भगवान गोसाई माने जाते हैं। यह भी कवीर के शिष्यो के रूप में जाने जाते है । कबीर के शिष्य को ग्रहण करने के सम्बन्ध मे प्रामाणिक सामग्री के अभाव के कारण कुछ स्पष्ट रूप से कहना संभव नही है, फिर भी इतना अवश्य कहा जा सकता है कि उक्त कबीरपथी शाखाओ के प्रवर्तक- कबीर के व्यक्तित्व से प्रभावित जरूर थे तभी उन्होंने कबीरपंथ के माध्यम से उनकी शिक्षाओं को प्रचारित-प्रसारित करने का कार्य पूरे मनोयोग रुप से किया। डॉ० परशुराम चतुर्वेदी ने कबीर के शिष्यो में कमाल, कमाली, में पद्यनाभ, तत्वा - जीवा, संत ज्ञानी जी, जागूदास भागोदास, सुरत - गोपाल, धर्मदास का का नाम लिया है। 2
कमाल :
कमाल कबीर के पुत्र तथा दीक्षित शिष्य समझे जाते है । कबीरपथी ग्रन्थ बोध सागर' से पता चलता है कि कबीर का आदेश पाकर यह संत मत का प्रचार करने अहमदाबाद की ओर गये थे। इन्होने दक्षिण में कबीर मत का प्रचार किया था। इनकी कुछ रचनाएँ भी है। कमाल की निश्चित तिथि का पता नही चलता । कमाल की एक समाधि मगहर मे कबीर के रौजे के पास है। 3
कमाली :
यह कबीर की पुत्री के रूप में ज्ञात हैं। कहा जाता है कि कमाली कबीर की औरस पुत्री थी परन्तु कबीरपंथी संत महात्मा इस धारणा को स्वीकार नहीं
। 'नाभादास कृत भक्तमाल, पृष्ठ 533
डॉ० परशुराम चतुर्वेदी, उत्तरी भारत की सत परम्परा', पृष्ठ 219
डॉ० एफ0ई० की, 'कबीर एण्ड हिज फालोवर्स, पृष्ठ 96
करते है। 'की' ने कमाली को पडोसी की पुत्री बताया है । कबीर ने इसको जीवन दान दिया था। वेस्टकाट के अनुसार कबीर ने इसका विवाह सर्वाजीत से
कराया था ।
पद्यनाभ :
पद्यनाभ कबीर के प्रमुख शिष्य माने गये है। नाभादास ने भक्तमाल मे लिखा है कि पद्यनाभ जी ने कबीर की कृपा द्वारा परमतत्व का परिचय प्राप्त दिया था। इनकी जीवन की घटनाओ के बारे मे कुछ भी ज्ञात नहीं है इनके बारे मे कहा गया है कि ये अपने गुरु के साथ काशी में रहते थें इन्होने स्वय नीलकण्ठ को दीक्षित किया था। राम कबीर पथ का इनके शिष्यो प्रशिष्यो द्वारा प्रचार किया जाना उल्लेखनीय है ।
"तत्वा" और "जीवा" :
यह दोनो भाई शूर वीर, उदार और दयालु थे। इनको नर्मदा तट पर कबीर ने दीक्षित किया था । ऐसा कहा जाता है कि इन्होंने वर्तमान फतुहा मठ (जिला पटना, बिहार ) का सर्वप्रथम प्रवर्तन किया था। जिसकी पुष्टि वहाँ के 22 महन्तों की सूची में इनके नाम से की जा सकती हैं
ज्ञानी जी :
भक्तमाल मे कहा गया है कि ये कबीर के प्रमुख शिष्यो मे थे। अपनी सब्दियों में इन्होने कहा है कि मुझ ज्ञानी का गुरु कबीर इस प्रकार कहता है - "ग्यानी का गुरु कहै कबीरा", इनकी समाधि नर्मदा तट पर राजापुर ग्राम में बतायी जाती है। अत इनका कार्य क्षेत्र भी दक्षिण में ही रहा होगा । इनकी रचना 'शब्द पारखी' का भी पता चला है ।
डॉ० एफ०ई० की, 'कबीर एण्ड हिज फालोवर्स, पृष्ठ 16
जागूदास :
इनका जन्म उडीसा मे उत्कल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन मे अधिक रोने के कारण इनके माता-पिता ने कबीर को समर्पित कर दिया था । ' कबीर की उत्कल यात्रा के समय की निश्चित जानकारी न होने के कारण यह नही निश्चित किया जा सका हैं कि इनकी कबीर से मुलाकात कब और कहाँ हुई थी। इनके अतिम विददूपुर में बीते और यही इनका देहान्त हुआ। भागोदास :
यह जागूदास के सहोदर भाई थे। भागोदास भी कबीर के शिष्य थे। भागोदास को अहीर जाति का और पिशौराबाद (बुन्देलखण्ड ) का निवासी बताया गया है। पिशौराबाद से यह बिहार चले गये थे। इन्होने कबीरपथ की भगताही शाखा की स्थापना की थी, जो धनौती मे जाकर प्रचारित हुई । इस शाखा के महन्तो मे इनका उल्लेख 'भक्ति पुष्पाजलि' के अन्तर्गत किया गया है 1 सुरतगोपाल :
इनका पूर्व नाम सर्वाजीत था । कबीर से शास्त्रार्थ में पराजित होने पर इन्होने कबीर की शिष्यता ग्रहण की और सुरत गोपाल नाम ग्रहण किया । कबीरपंथ की कबीर चौरा की काशी की शाखा की स्थापना का श्रेय इनको ही दिया जाता है।
धर्मदास :
धर्मदास की गणना कबीर के प्रमुख शिष्यो में की जाती है। इनको कबीर पथ की छत्तीसगढी शाखा का प्रवर्तक माना गया है। 'अमरसुखनिधान' में कबीर का इनसे 'जिंदरूप' में को मिलना कहा गया है। "जिद रुप जब धरे शरीरा ।
सद्गुरु कबीर चरित्र पृष्ठ 414 - 5
धरमदास मिलि गये कबीरा ।" इससे सिद्ध होता है कि यह कबीर के बाद 17वी शताब्दी के किसी चरण में हुए होगे और कबीर से प्रभावित होकर कबीर दर्शन को प्रचारित- प्रसारित किया होगा ।
निसन्देह कबीर के प्रभाव से प्रभावित होकर असंख्य लोगो ने उनकी शिष्यता ग्रहण की होगी परन्तु उपरोक्त व्यक्ति इसलिये उल्लेखनीय है क्योकि उन्होंने कवीर की शिक्षाओं को विभिन्न क्षेत्रों में प्रचारित-प्रसारित किया जो क्षेत्र कालान्तर में कबीरपंथ की विभिन्न शाखाओ के रुप में उभरे।
परमतत्व :
कबीर ने परमतत्व को अनेक प्रकार से समझाने का प्रयास किया है उनके अनुसार - "परमतत्व का ज्ञान पुस्तकीय ज्ञान नही है बल्कि यह अविगत है, अनुपम है, और इसका वर्णन करना वैसे ही असंभव है जैसे किसी गूगे व्यक्ति के लिये स्वाद की अभिव्यक्ति करना असम्भव है।" 1 परमतत्व या ब्रहम भावना की तीन कोटियाँ है- आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक । परमतत्व निर्गुण और अनिवर्चनीय हैं। वह अनिवर्चनीय है अर्थात उसे निजी अनुभव द्वारा आत्मसात कर लेने पर जो दशा हो पाती है, उसका वर्णन करने में साधक स्वयं को असमर्थ पाते हैं। उसको अलख निरंजन' कहना उसकी निर्गुणता का व्याख्यान करना है। दूसरी ओर कबीर ने उसे द्वैताद्वैत विलक्षण, अलख, अगम्य आदि उसके सगुण रूपो का वर्णन भी विभिन्न रूपों में किया है। इस प्रकार उन्होने परमतत्व सगुण और निर्गुण दोनों रूपो का वर्णन किया है। जैसे2
डॉ० श्यामसुन्दर दास, 'कबीर ग्रन्थावली', पृष्ठ 90, पद 6
डॉ० श्यामसुन्दर दास, कबीर ग्रन्थावली', पृष्ठ 230, रमैणी 3
आत्मतत्व :
"कबीर देख्या एक अग महिमा कही न जाय । तेजपुज पारख घणी नैनूँ रहा समाई ।'
कबीर ने आत्मतत्व पर पर्याप्त चिंतन किया और उसके अनेक रूपो का वर्णन किया है। उनका मानना था कि अहंभाव के परित्याग से ही आत्म ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। आत्मज्ञान की स्थिति में साधक को यह ज्ञान हो पाता है कि आत्मा न मनुष्य है, न देव है, और न गृही या बैरागी बल्कि जाति भेद से परे है, वर्णनातीत है और आत्मप्रकाशमय है कबीर के आत्मतत्व सम्बन्धी विचार परमतत्व पर ही आधारित है। उन्होने आत्मा को बूंद और परमात्मा को समुद्र कहा है। उनका जीवात्मा की एकता का सिद्धान्त विम्ब और प्रतिबिम्ब सिद्धान्त पर आधारित है। वह कही मानव कहीं वस्तु और कहीं अन्य जीवों के रूप में विद्यमान रहती है ।
माया तत्व :
कबीर ने माया तत्व को साधक की साधना में बाधक तत्वमान है। उन्होने शंकराचार्य की भाँति माया को बन्धन रुपा और महाठगिनी कहा है। जिस प्रकार सांख्य दर्शन मे माया को त्रिगुणात्मक और प्रसवधर्मिणी कहा गया है उसी प्रकार कबीर ने भी माया को त्रिगुणात्मक अर्थात, सत्व रज और तामस गुणों से युक्त और प्रसवधर्मिणी माना है, क्योकि सारी सृष्टि की उत्पत्ति का कारण माया ही है। कबीर ने माया के दो भेद किये है - ( 1 ) विद्या माया और (2) अविधा माया । उन्होंने दोनों को स्पष्ट करते हुए कहा है किमाया दुइ भाँति देखी ठोंक बजाय । एक गहावै राम पै एक नरक ले जाय ।
वही, पृष्ठ 16, साखी 38
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उनके समय के सम्बन्ध मे अवश्य धारणा बना सकते हैं । एक सतो की जन्म तिथि और निधन तिथि को लेकर ऐतिहासिक विवाद नही होना चाहिए क्योकि उनकी दृष्टि मे जनम और मरण एक काल खण्ड है जिनको दायरे मे आबद्ध नही किया जा सकता । कबीर इन दायरो से मुक्त होते हुए अपने विचारो के रूप मे आज भी हमारे सामने उपस्थित है। निधन तिथि की भाति कबीर के निधन स्थान के बारे मे भी अभी तक कोई सर्वमान्य मत स्थिर नहीं हो सका है। उनकी मगहर रतनपुर, और पुरी मे समाधियाँ होने के कारण सदेह को बल मिला हैं। रतनपुर और पुरी की समाधियों का उल्लेख 'आइने अकबरी' में हुआ है । दो समाधि के आधार पर निधन स्थान का निर्धारण नहीं किया जा सकता है। इससे तो उक्त तीनो स्थान सिद्ध हो जायेगे अत वास्तविकता का निर्धारण के लिए अन्य प्रमाणो का भी सहारा लेना जरुरी है। मगहर के सम्बन्ध में अन्य प्रमाण भी सामग्री जुटाते है, जैसेनिर्भय ज्ञान" और धर्मदास की शब्दावली तीन कबीर का निधन स्थान 'मगहर' बताते है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि उनका निधन मगहर मे ही हुआ होगा। 'मगहर' में समाधि तो इसका प्रमाण है ही साथ ही कबीरपथी रचनाओं 'निर्णय ज्ञान' और 'धर्मदास की शब्दावली' भी इसकी पुष्टि करते है। कबीर की रचनाओं की संख्या के बारे में निश्चित रूप से कुछ कहना संभव नहीं है। रेशून्य वेस्टकाट, डॉशून्य एफशून्यईशून्यकी, डॉशून्य रामकुमार वर्मा और डॉशून्य पीताम्बर बड़थ्वाल आदि विद्वानों ने इस सम्बन्ध में काफी कार्य किया हैं। कबीर के ग्रंथो की संख्या को वेस्टकाट ने बयासी, विल्सन ने नब्बे, डॉशून्य रामकुमार वर्मा ने डॉशून्य रामचन्द्र तिवारी, 'कबीर मीमांसा, पृष्ठ सत्ताईस दो अबुल फजल, 'आइने अकबरी, , भाग दो, पृष्ठ एक सौ उनतीस, एक सौ इकहत्तर 'धनी धर्मदास की शब्दावली, पृष्ठ दस पद चार सत्तावन बताया है परन्तु यह सब संख्याये प्रामाणिक नही मानी जा सकती है क्योंकि विद्वानो ने पुस्तको के अंगो, कबीरपंथी रचनाओ आदि को भी अपनी संख्या मे स्थान दिया है। सच्चाई यह है कि इनकी रचनायें फुटकर पदों, साखियो, रमैनियों या अन्य प्रकार की कविताओं के संग्रह मात्र है। ऐसा प्रसिद्ध है कि कबीर के शिष्य धर्मदास ने सर्वप्रथम सवत एक हज़ार पाँच सौ इक्कीस में इनकी रचनाओ का एक सग्रह 'बीजक' के रूप मे तैयार किया था, परन्तु इसके काल की निश्चितता मे सदेह है, दूसरे इसमें संग्रहीत कुछ रचनाओ को कबीर के परवर्ती कवियो द्वारा निर्मित किया जाना भी स्पष्ट है गुरु ग्रन्थ साहिब' मे कबीर की रचनाओ के रुप मे लगभग दो सौ पच्चीस पद तथा दो सौ पचास श्लोक और साखियाँ सग्रहीत है। 'कबीर ग्रन्थावली' कबीर की रचनाओं का दूसरा वह सग्रह है जो किसी प्राचीन हस्तलिखित प्रति के आधार पर 'काशी नगरी प्राचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित किया गया है, इसकी लगभग पचास साखियाँ और पाँच पद गुरु ग्रन्थ साहिब' के समान है और शेष लगभग सात सौ पचास साखियाँ तथा चार सौ पद ऐसे है जो उसमें आयी हुई ऐसी रचनाओं से बहुत भिन्न है। इस प्रकार स्पष्ट है कि कबीर की रचनाओं के बारे मे स्पष्ट जानकारी नही है। बीजक' ही प्रमाणिक ग्रन्थ है, जिसको उनके शिष्यों द्वारा सग्रह करके सुरक्षित रखा गया है। उनकी कृतियों के अश गुरु ग्रन्थ साहब', कबीर ग्रन्थावली आदि रचनाओ में मिलते हैं कबीर के शिष्य : कबीर के अनन्त ज्ञान ओर असाधारण व्यक्तित्व से प्रभावित होने कर अनेक व्यक्तियों ने उनको अपना गुरु स्वीकार किया है। दादूपथी राघवदास ने 'भक्तमाल' मे कमाल, कमाली, पद्यनाभ, रामकृपाल, नीर, धीर, ज्ञानी धर्मदास और डॉशून्य परशुराम चतुर्वेदी, उत्तरी भारत की संत परम्परा, पृष्ठ एक सौ पचहत्तर हरदास को कबीर का शिष्य स्वीकार किया है। नाभादास ने भक्तमाल मे तत्वा और जीवा को भी कबीर का शिष्य माना है। इसी प्रकार कबीरपंथ की काशी, छत्तीसगढ़ी विदूपुर और धनौती की शाखाओं के प्रवर्तक क्रमशः सुरत गोपाल, धर्मदास, जागूदारा और भगवान गोसाई माने जाते हैं। यह भी कवीर के शिष्यो के रूप में जाने जाते है । कबीर के शिष्य को ग्रहण करने के सम्बन्ध मे प्रामाणिक सामग्री के अभाव के कारण कुछ स्पष्ट रूप से कहना संभव नही है, फिर भी इतना अवश्य कहा जा सकता है कि उक्त कबीरपथी शाखाओ के प्रवर्तक- कबीर के व्यक्तित्व से प्रभावित जरूर थे तभी उन्होंने कबीरपंथ के माध्यम से उनकी शिक्षाओं को प्रचारित-प्रसारित करने का कार्य पूरे मनोयोग रुप से किया। डॉशून्य परशुराम चतुर्वेदी ने कबीर के शिष्यो में कमाल, कमाली, में पद्यनाभ, तत्वा - जीवा, संत ज्ञानी जी, जागूदास भागोदास, सुरत - गोपाल, धर्मदास का का नाम लिया है। दो कमाल : कमाल कबीर के पुत्र तथा दीक्षित शिष्य समझे जाते है । कबीरपथी ग्रन्थ बोध सागर' से पता चलता है कि कबीर का आदेश पाकर यह संत मत का प्रचार करने अहमदाबाद की ओर गये थे। इन्होने दक्षिण में कबीर मत का प्रचार किया था। इनकी कुछ रचनाएँ भी है। कमाल की निश्चित तिथि का पता नही चलता । कमाल की एक समाधि मगहर मे कबीर के रौजे के पास है। तीन कमाली : यह कबीर की पुत्री के रूप में ज्ञात हैं। कहा जाता है कि कमाली कबीर की औरस पुत्री थी परन्तु कबीरपंथी संत महात्मा इस धारणा को स्वीकार नहीं । 'नाभादास कृत भक्तमाल, पृष्ठ पाँच सौ तैंतीस डॉशून्य परशुराम चतुर्वेदी, उत्तरी भारत की सत परम्परा', पृष्ठ दो सौ उन्नीस डॉशून्य एफशून्यईशून्य की, 'कबीर एण्ड हिज फालोवर्स, पृष्ठ छियानवे करते है। 'की' ने कमाली को पडोसी की पुत्री बताया है । कबीर ने इसको जीवन दान दिया था। वेस्टकाट के अनुसार कबीर ने इसका विवाह सर्वाजीत से कराया था । पद्यनाभ : पद्यनाभ कबीर के प्रमुख शिष्य माने गये है। नाभादास ने भक्तमाल मे लिखा है कि पद्यनाभ जी ने कबीर की कृपा द्वारा परमतत्व का परिचय प्राप्त दिया था। इनकी जीवन की घटनाओ के बारे मे कुछ भी ज्ञात नहीं है इनके बारे मे कहा गया है कि ये अपने गुरु के साथ काशी में रहते थें इन्होने स्वय नीलकण्ठ को दीक्षित किया था। राम कबीर पथ का इनके शिष्यो प्रशिष्यो द्वारा प्रचार किया जाना उल्लेखनीय है । "तत्वा" और "जीवा" : यह दोनो भाई शूर वीर, उदार और दयालु थे। इनको नर्मदा तट पर कबीर ने दीक्षित किया था । ऐसा कहा जाता है कि इन्होंने वर्तमान फतुहा मठ का सर्वप्रथम प्रवर्तन किया था। जिसकी पुष्टि वहाँ के बाईस महन्तों की सूची में इनके नाम से की जा सकती हैं ज्ञानी जी : भक्तमाल मे कहा गया है कि ये कबीर के प्रमुख शिष्यो मे थे। अपनी सब्दियों में इन्होने कहा है कि मुझ ज्ञानी का गुरु कबीर इस प्रकार कहता है - "ग्यानी का गुरु कहै कबीरा", इनकी समाधि नर्मदा तट पर राजापुर ग्राम में बतायी जाती है। अत इनका कार्य क्षेत्र भी दक्षिण में ही रहा होगा । इनकी रचना 'शब्द पारखी' का भी पता चला है । डॉशून्य एफशून्यईशून्य की, 'कबीर एण्ड हिज फालोवर्स, पृष्ठ सोलह जागूदास : इनका जन्म उडीसा मे उत्कल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन मे अधिक रोने के कारण इनके माता-पिता ने कबीर को समर्पित कर दिया था । ' कबीर की उत्कल यात्रा के समय की निश्चित जानकारी न होने के कारण यह नही निश्चित किया जा सका हैं कि इनकी कबीर से मुलाकात कब और कहाँ हुई थी। इनके अतिम विददूपुर में बीते और यही इनका देहान्त हुआ। भागोदास : यह जागूदास के सहोदर भाई थे। भागोदास भी कबीर के शिष्य थे। भागोदास को अहीर जाति का और पिशौराबाद का निवासी बताया गया है। पिशौराबाद से यह बिहार चले गये थे। इन्होने कबीरपथ की भगताही शाखा की स्थापना की थी, जो धनौती मे जाकर प्रचारित हुई । इस शाखा के महन्तो मे इनका उल्लेख 'भक्ति पुष्पाजलि' के अन्तर्गत किया गया है एक सुरतगोपाल : इनका पूर्व नाम सर्वाजीत था । कबीर से शास्त्रार्थ में पराजित होने पर इन्होने कबीर की शिष्यता ग्रहण की और सुरत गोपाल नाम ग्रहण किया । कबीरपंथ की कबीर चौरा की काशी की शाखा की स्थापना का श्रेय इनको ही दिया जाता है। धर्मदास : धर्मदास की गणना कबीर के प्रमुख शिष्यो में की जाती है। इनको कबीर पथ की छत्तीसगढी शाखा का प्रवर्तक माना गया है। 'अमरसुखनिधान' में कबीर का इनसे 'जिंदरूप' में को मिलना कहा गया है। "जिद रुप जब धरे शरीरा । सद्गुरु कबीर चरित्र पृष्ठ चार सौ चौदह - पाँच धरमदास मिलि गये कबीरा ।" इससे सिद्ध होता है कि यह कबीर के बाद सत्रहवी शताब्दी के किसी चरण में हुए होगे और कबीर से प्रभावित होकर कबीर दर्शन को प्रचारित- प्रसारित किया होगा । निसन्देह कबीर के प्रभाव से प्रभावित होकर असंख्य लोगो ने उनकी शिष्यता ग्रहण की होगी परन्तु उपरोक्त व्यक्ति इसलिये उल्लेखनीय है क्योकि उन्होंने कवीर की शिक्षाओं को विभिन्न क्षेत्रों में प्रचारित-प्रसारित किया जो क्षेत्र कालान्तर में कबीरपंथ की विभिन्न शाखाओ के रुप में उभरे। परमतत्व : कबीर ने परमतत्व को अनेक प्रकार से समझाने का प्रयास किया है उनके अनुसार - "परमतत्व का ज्ञान पुस्तकीय ज्ञान नही है बल्कि यह अविगत है, अनुपम है, और इसका वर्णन करना वैसे ही असंभव है जैसे किसी गूगे व्यक्ति के लिये स्वाद की अभिव्यक्ति करना असम्भव है।" एक परमतत्व या ब्रहम भावना की तीन कोटियाँ है- आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक । परमतत्व निर्गुण और अनिवर्चनीय हैं। वह अनिवर्चनीय है अर्थात उसे निजी अनुभव द्वारा आत्मसात कर लेने पर जो दशा हो पाती है, उसका वर्णन करने में साधक स्वयं को असमर्थ पाते हैं। उसको अलख निरंजन' कहना उसकी निर्गुणता का व्याख्यान करना है। दूसरी ओर कबीर ने उसे द्वैताद्वैत विलक्षण, अलख, अगम्य आदि उसके सगुण रूपो का वर्णन भी विभिन्न रूपों में किया है। इस प्रकार उन्होने परमतत्व सगुण और निर्गुण दोनों रूपो का वर्णन किया है। जैसेदो डॉशून्य श्यामसुन्दर दास, 'कबीर ग्रन्थावली', पृष्ठ नब्बे, पद छः डॉशून्य श्यामसुन्दर दास, कबीर ग्रन्थावली', पृष्ठ दो सौ तीस, रमैणी तीन आत्मतत्व : "कबीर देख्या एक अग महिमा कही न जाय । तेजपुज पारख घणी नैनूँ रहा समाई ।' कबीर ने आत्मतत्व पर पर्याप्त चिंतन किया और उसके अनेक रूपो का वर्णन किया है। उनका मानना था कि अहंभाव के परित्याग से ही आत्म ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। आत्मज्ञान की स्थिति में साधक को यह ज्ञान हो पाता है कि आत्मा न मनुष्य है, न देव है, और न गृही या बैरागी बल्कि जाति भेद से परे है, वर्णनातीत है और आत्मप्रकाशमय है कबीर के आत्मतत्व सम्बन्धी विचार परमतत्व पर ही आधारित है। उन्होने आत्मा को बूंद और परमात्मा को समुद्र कहा है। उनका जीवात्मा की एकता का सिद्धान्त विम्ब और प्रतिबिम्ब सिद्धान्त पर आधारित है। वह कही मानव कहीं वस्तु और कहीं अन्य जीवों के रूप में विद्यमान रहती है । माया तत्व : कबीर ने माया तत्व को साधक की साधना में बाधक तत्वमान है। उन्होने शंकराचार्य की भाँति माया को बन्धन रुपा और महाठगिनी कहा है। जिस प्रकार सांख्य दर्शन मे माया को त्रिगुणात्मक और प्रसवधर्मिणी कहा गया है उसी प्रकार कबीर ने भी माया को त्रिगुणात्मक अर्थात, सत्व रज और तामस गुणों से युक्त और प्रसवधर्मिणी माना है, क्योकि सारी सृष्टि की उत्पत्ति का कारण माया ही है। कबीर ने माया के दो भेद किये है - विद्या माया और अविधा माया । उन्होंने दोनों को स्पष्ट करते हुए कहा है किमाया दुइ भाँति देखी ठोंक बजाय । एक गहावै राम पै एक नरक ले जाय । वही, पृष्ठ सोलह, साखी अड़तीस
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इनके इस ट्वीट के जवाब में कांग्रेस महासचिव मुकुल वासनिक ने कहा कि इस पत्र को अपराध के तौर पर देखने वालों को आज नहीं तो कल, इसका अहसास जरूर होगा कि पत्र में उठाए गए मुद्दे विचार योग्य हैं। वासनिक ने भी पत्र पर हस्ताक्षर किये हैं। इन 23 नेताओं में शामिल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली ने सोनिया गांधी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए और उनके अंतरिम अध्यक्ष बने रहने का स्वागत करते हुए यह भी कहा कि पत्र का मकसद पार्टी को अगले लोकसभा चुनाव और अन्य चुनावों के लिए तैयार करना था तथा पार्टी के प्रति उनकी वफादारी जीवन भर रहेगी। साथ ही, मोइली ने कहा कि यह 'स्वीकार्य तथ्य' है कि पार्टी का मौजूदा संगठन कांग्रेस की सोच को आगे ले जाने और लोकतंत्र की रक्षा करने की स्थिति में नहीं है। दूसरी तरफ, इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले एक अन्य नेता ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर 'कहा, "सीडब्ल्यूसी की बैठक में जो नतीजा निकला, उससे हम संतुष्ट हैं। पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले कई नेता सीडब्ल्यूसी की बैठक में मौजूद थे और सबने प्रस्ताव पर सहमति जताई। " उन्होंने कहा, "हमने कभी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व पर कोई अविश्वास नहीं जताया और सोनिया जी जो भी कदम उठाएंगी , वो हमें मंजूर होगा। " पत्र लिखने वालों पर निशाना साधने वाले कांग्रेस नेताओं पर बरसते हुए इस नेता ने कहा, "हम पार्टी को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं, किसी के खिलाफ काम नहीं कर रहे हैं। जो हम पर आरोप लगा रहे हैं वो सिर्फ चापलूसी कर रहे हैं। अगर यह जारी रहा तो पार्टी का नुकसान होगा। " यह पूछे जाने पर कि क्या पत्र को अब सार्वजनिक रूप से जारी कर दिया जाएगा तो उन्होंने कहा, "पत्र को जारी करने का मतलब नहीं है जब इसे बैठक में रख दिया गया और उस पर चर्चा हो गई। " पत्र लिखने वाले कई अन्य नेताओं से भी संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। सीडब्ल्यूसी ने सोमवार को करीब सात घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद सोनिया गांधी से पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बने रहने का आग्रह किया और उन्हें जरूरी संगठनात्मक बदलाव के लिए अधिकृत किया। पार्टी के 23 नेताओं की ओर से नेतृत्व के मुद्दे पर सोनिया को लिखे गए पत्र से खड़े हुए विवाद की पृष्ठभूमि में हुई यह बैठक हंगामेदार रही और इसमें तकरीबन सभी नेताओं ने सोनिया गांधी के नेतृत्व में विश्वास जताया। कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई ने नेताओं को कांग्रेस का अनुशासन एवं गरिमा बनाए रखने के लिए अपनी बातें पार्टी के मंच पर रखने की नसीहत दी और कहा कि किसी को भी पार्टी एवं इसके नेतृत्व को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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इनके इस ट्वीट के जवाब में कांग्रेस महासचिव मुकुल वासनिक ने कहा कि इस पत्र को अपराध के तौर पर देखने वालों को आज नहीं तो कल, इसका अहसास जरूर होगा कि पत्र में उठाए गए मुद्दे विचार योग्य हैं। वासनिक ने भी पत्र पर हस्ताक्षर किये हैं। इन तेईस नेताओं में शामिल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली ने सोनिया गांधी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए और उनके अंतरिम अध्यक्ष बने रहने का स्वागत करते हुए यह भी कहा कि पत्र का मकसद पार्टी को अगले लोकसभा चुनाव और अन्य चुनावों के लिए तैयार करना था तथा पार्टी के प्रति उनकी वफादारी जीवन भर रहेगी। साथ ही, मोइली ने कहा कि यह 'स्वीकार्य तथ्य' है कि पार्टी का मौजूदा संगठन कांग्रेस की सोच को आगे ले जाने और लोकतंत्र की रक्षा करने की स्थिति में नहीं है। दूसरी तरफ, इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले एक अन्य नेता ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर 'कहा, "सीडब्ल्यूसी की बैठक में जो नतीजा निकला, उससे हम संतुष्ट हैं। पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले कई नेता सीडब्ल्यूसी की बैठक में मौजूद थे और सबने प्रस्ताव पर सहमति जताई। " उन्होंने कहा, "हमने कभी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व पर कोई अविश्वास नहीं जताया और सोनिया जी जो भी कदम उठाएंगी , वो हमें मंजूर होगा। " पत्र लिखने वालों पर निशाना साधने वाले कांग्रेस नेताओं पर बरसते हुए इस नेता ने कहा, "हम पार्टी को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं, किसी के खिलाफ काम नहीं कर रहे हैं। जो हम पर आरोप लगा रहे हैं वो सिर्फ चापलूसी कर रहे हैं। अगर यह जारी रहा तो पार्टी का नुकसान होगा। " यह पूछे जाने पर कि क्या पत्र को अब सार्वजनिक रूप से जारी कर दिया जाएगा तो उन्होंने कहा, "पत्र को जारी करने का मतलब नहीं है जब इसे बैठक में रख दिया गया और उस पर चर्चा हो गई। " पत्र लिखने वाले कई अन्य नेताओं से भी संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। सीडब्ल्यूसी ने सोमवार को करीब सात घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद सोनिया गांधी से पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बने रहने का आग्रह किया और उन्हें जरूरी संगठनात्मक बदलाव के लिए अधिकृत किया। पार्टी के तेईस नेताओं की ओर से नेतृत्व के मुद्दे पर सोनिया को लिखे गए पत्र से खड़े हुए विवाद की पृष्ठभूमि में हुई यह बैठक हंगामेदार रही और इसमें तकरीबन सभी नेताओं ने सोनिया गांधी के नेतृत्व में विश्वास जताया। कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई ने नेताओं को कांग्रेस का अनुशासन एवं गरिमा बनाए रखने के लिए अपनी बातें पार्टी के मंच पर रखने की नसीहत दी और कहा कि किसी को भी पार्टी एवं इसके नेतृत्व को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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अध्यायमु - १४ विनि
मैत्रेयुनि गनि विदुरुंडु वल्कु दनुज कुलांतकु
नुत्तममगु ना चरितमु,
विनि तनियदु ना मनंबु विमल चरित्रा ! ॥ 443 ॥ सवन वराहमूर्ति कथ सर्वमु नी दय विटि वेंडियन् विवरमुगा विनं बलुकवे गुणसांद्र ! मुनींद्र चंद्र ! मा- धव गुण कीर्तनामृत वितानमु कर्णपुटांजलिन् वैसन् जविगॉन केल मानु जन संततिफिन् भवताप वेदनल् ॥ 444॥ कावुन ॥ 445॥
श्री हरि यज्ञ वराह रूपमुदाचि मिचि हिरण्याक्षु व्रंचे ननुचु नप्पुडु सुनिनाथ ! चॅप्पिति ना तोड नव्वराहंबु दंष्ट्राग्र मुननु धरणि नैव्भंगिनि धरियिचे हरिकि हिरण्याक्ष तोड वैरमुन केमि कारण मसुर ने गति संहरिचे दा नितयु डिगिपु मिद्ध-चरित ! अनिन मैत्रेय मुनि मुनि दिदुरुनफु हरिकथाकर्णनमुन वेंपार
अध्याय - १४
[कं. ] ऐसा कहने पर सुनकर मैनेय को देखकर विदुर ने कहा कि हे विमल-चरितवाले ! उस दनुज - कुलान्तक (राक्षसान्तक, विष्णु) के चरित को सुनकर मेरा मन अघाता नही । ४४३ [चं.] सवन ( यज्ञ ) वराहमूर्ति की समस्त कथा को तुम्हारी दया से सुन लिया, और विवरण के साथ सुनाओ ( क्योंकि ) हे गुणसान्द्र ! मुनीन्द्रचन्द्र ! माधव के गुण कीर्तन रूपी अमृत-समूह को कर्णपुट रूपी अंजलि से झट पिये विना जन सन्तति के भवताप की वेदनाएँ कैसे मिटेंगी ! ४४४ [व.] इसलिए । ४४५ [सी.] हे मुनिनाथ ! तब मुझसे कहा था कि श्रीहरि के यज्ञ-वराह के रूप के धारण कर अतिशय रूप से हिरण्याक्ष का वध किया । हे इद्ध चरित वाले ! उस वराह ने [ अपने] दंष्ट्राग्र पर धरणी को किस प्रकार धारण किया, हरि को हिरण्याक्ष के साथ शत्रुता रखने का क्या कारण है, [तथा ] असुर का संहार कैसे किया [आदि] समस्त ( कथा ) को विदित करो ! [ते. ] [ऐसा ] कहने पर मैत्रेय मुनि ने विदुर से कहा कि हरि कथा के आकर्णन से विकास को पानेवाले तुम्हें [ अपने] जन्म के फल की सिद्धि ( प्राप्ति ) होने में संदेह नहीं है । हरि की माया जानना कहीं विधि (
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अध्यायमु - चौदह विनि मैत्रेयुनि गनि विदुरुंडु वल्कु दनुज कुलांतकु नुत्तममगु ना चरितमु, विनि तनियदु ना मनंबु विमल चरित्रा ! ॥ चार सौ तैंतालीस ॥ सवन वराहमूर्ति कथ सर्वमु नी दय विटि वेंडियन् विवरमुगा विनं बलुकवे गुणसांद्र ! मुनींद्र चंद्र ! मा- धव गुण कीर्तनामृत वितानमु कर्णपुटांजलिन् वैसन् जविगॉन केल मानु जन संततिफिन् भवताप वेदनल् ॥ चार सौ चौंतालीस॥ कावुन ॥ चार सौ पैंतालीस॥ श्री हरि यज्ञ वराह रूपमुदाचि मिचि हिरण्याक्षु व्रंचे ननुचु नप्पुडु सुनिनाथ ! चॅप्पिति ना तोड नव्वराहंबु दंष्ट्राग्र मुननु धरणि नैव्भंगिनि धरियिचे हरिकि हिरण्याक्ष तोड वैरमुन केमि कारण मसुर ने गति संहरिचे दा नितयु डिगिपु मिद्ध-चरित ! अनिन मैत्रेय मुनि मुनि दिदुरुनफु हरिकथाकर्णनमुन वेंपार अध्याय - चौदह [कं. ] ऐसा कहने पर सुनकर मैनेय को देखकर विदुर ने कहा कि हे विमल-चरितवाले ! उस दनुज - कुलान्तक के चरित को सुनकर मेरा मन अघाता नही । चार सौ तैंतालीस [चं.] सवन वराहमूर्ति की समस्त कथा को तुम्हारी दया से सुन लिया, और विवरण के साथ सुनाओ हे गुणसान्द्र ! मुनीन्द्रचन्द्र ! माधव के गुण कीर्तन रूपी अमृत-समूह को कर्णपुट रूपी अंजलि से झट पिये विना जन सन्तति के भवताप की वेदनाएँ कैसे मिटेंगी ! चार सौ चौंतालीस [व.] इसलिए । चार सौ पैंतालीस [सी.] हे मुनिनाथ ! तब मुझसे कहा था कि श्रीहरि के यज्ञ-वराह के रूप के धारण कर अतिशय रूप से हिरण्याक्ष का वध किया । हे इद्ध चरित वाले ! उस वराह ने [ अपने] दंष्ट्राग्र पर धरणी को किस प्रकार धारण किया, हरि को हिरण्याक्ष के साथ शत्रुता रखने का क्या कारण है, [तथा ] असुर का संहार कैसे किया [आदि] समस्त को विदित करो ! [ते. ] [ऐसा ] कहने पर मैत्रेय मुनि ने विदुर से कहा कि हरि कथा के आकर्णन से विकास को पानेवाले तुम्हें [ अपने] जन्म के फल की सिद्धि होने में संदेह नहीं है । हरि की माया जानना कहीं विधि (
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CISCE Result for Semester 1: काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) सेमेस्टर 1 के आईसीएसई कक्षा 10वीं और आईएससी कक्षा 12वीं परीक्षा के परिणाम जल्द ही cisce. org पर जारी किए जाएंगे। हालांकि समग्र परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा, सीआईएससीई सभी विषयों और उनके द्वारा लिए गए प्रश्नपत्रों में छात्रों द्वारा प्राप्त अंकों को दर्शाने वाली मार्कशीट जारी करेगा।
जहां स्कूल प्रिंसिपल की आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके परिषद के करियर पोर्टल पर अपने छात्रों के परिणाम देख सकते हैं, वहीं छात्र कक्षा 10 के आईसीएसई और कक्षा 12 के आईएससी के परिणाम आधिकारिक वेबसाइटों - cisce. org, results. cisce. org पर देख सकते हैं और डाउनलोड कर सकते हैं। .
पहले ICSE, ISC परीक्षा प्रारूप की घोषणा करते हुए, CISCE ने कहा, 'परीक्षा के लिए उपस्थित होने वाले उम्मीदवारों को एक कंप्यूटर जनित मार्क शीट जारी की जाएगी। यह मार्कशीट केवल सेमेस्टर 1 परीक्षा के लिए उम्मीदवारों की ओर से प्रत्येक विषय या उनके द्वारा लिए गए पेपर में प्राप्त अंकों को इंगित करेगी। '
CISCE जिसने प्रत्येक सेमेस्टर के अंत में 2021-22 शैक्षणिक सत्र के लिए दो पदों में परीक्षा आयोजित की, पहले सेमेस्टर को MCQ- आधारित परीक्षा के रूप में आयोजित किया गया था और ऑनलाइन मोड में आयोजित किया गया था।
सेमेस्टर 1 परीक्षा के प्रश्न पत्र आईसीएसई के लिए 80/100 अंकों और आईएससी के लिए 70/80 अंकों के लिए थे। हालांकि, सीआईएससीई के एक बयान में कहा गया है कि सेमेस्टर 2 की समाप्ति के बाद सीआईएससीई बोर्ड परीक्षा परिणामों की गणना के लिए अंतिम रूप से उपयोग किए जाने वाले अंकों (प्रत्येक सेमेस्टर के लिए) के वेटेज को आधा कर दिया जाएगा।
शैक्षणिक वर्ष 2021-22 के दौरान प्रत्येक दो सेमेस्टर के अंत में आयोजित परीक्षाओं के अलावा, उम्मीदवारों का आईएससी स्तर पर व्यावहारिक और परियोजना कार्य पर भी मूल्यांकन किया जाएगा। CISCE ने पिछले साल 24 जुलाई को ICSE कक्षा 10वीं और ISC कक्षा 12वीं के परिणाम घोषित किए थे।
पिछले वर्ष कुल उत्तीर्ण प्रतिशत आईसीएसई परिणामों के लिए 99. 98 प्रतिशत और आईएससी परिणामों के लिए 99. 76 प्रतिशत रहा। CISCE ने COVID-19 के कारण कक्षा 10वीं और 12वीं दोनों की परीक्षा रद्द कर दी थी और वैकल्पिक मूल्यांकन मानदंडों के आधार पर छात्रों का मूल्यांकन किया गया था।
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CISCE Result for Semester एक: काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन सेमेस्टर एक के आईसीएसई कक्षा दसवीं और आईएससी कक्षा बारहवीं परीक्षा के परिणाम जल्द ही cisce. org पर जारी किए जाएंगे। हालांकि समग्र परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा, सीआईएससीई सभी विषयों और उनके द्वारा लिए गए प्रश्नपत्रों में छात्रों द्वारा प्राप्त अंकों को दर्शाने वाली मार्कशीट जारी करेगा। जहां स्कूल प्रिंसिपल की आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके परिषद के करियर पोर्टल पर अपने छात्रों के परिणाम देख सकते हैं, वहीं छात्र कक्षा दस के आईसीएसई और कक्षा बारह के आईएससी के परिणाम आधिकारिक वेबसाइटों - cisce. org, results. cisce. org पर देख सकते हैं और डाउनलोड कर सकते हैं। . पहले ICSE, ISC परीक्षा प्रारूप की घोषणा करते हुए, CISCE ने कहा, 'परीक्षा के लिए उपस्थित होने वाले उम्मीदवारों को एक कंप्यूटर जनित मार्क शीट जारी की जाएगी। यह मार्कशीट केवल सेमेस्टर एक परीक्षा के लिए उम्मीदवारों की ओर से प्रत्येक विषय या उनके द्वारा लिए गए पेपर में प्राप्त अंकों को इंगित करेगी। ' CISCE जिसने प्रत्येक सेमेस्टर के अंत में दो हज़ार इक्कीस-बाईस शैक्षणिक सत्र के लिए दो पदों में परीक्षा आयोजित की, पहले सेमेस्टर को MCQ- आधारित परीक्षा के रूप में आयोजित किया गया था और ऑनलाइन मोड में आयोजित किया गया था। सेमेस्टर एक परीक्षा के प्रश्न पत्र आईसीएसई के लिए अस्सी/एक सौ अंकों और आईएससी के लिए सत्तर/अस्सी अंकों के लिए थे। हालांकि, सीआईएससीई के एक बयान में कहा गया है कि सेमेस्टर दो की समाप्ति के बाद सीआईएससीई बोर्ड परीक्षा परिणामों की गणना के लिए अंतिम रूप से उपयोग किए जाने वाले अंकों के वेटेज को आधा कर दिया जाएगा। शैक्षणिक वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस के दौरान प्रत्येक दो सेमेस्टर के अंत में आयोजित परीक्षाओं के अलावा, उम्मीदवारों का आईएससी स्तर पर व्यावहारिक और परियोजना कार्य पर भी मूल्यांकन किया जाएगा। CISCE ने पिछले साल चौबीस जुलाई को ICSE कक्षा दसवीं और ISC कक्षा बारहवीं के परिणाम घोषित किए थे। पिछले वर्ष कुल उत्तीर्ण प्रतिशत आईसीएसई परिणामों के लिए निन्यानवे. अट्ठानवे प्रतिशत और आईएससी परिणामों के लिए निन्यानवे. छिहत्तर प्रतिशत रहा। CISCE ने COVID-उन्नीस के कारण कक्षा दसवीं और बारहवीं दोनों की परीक्षा रद्द कर दी थी और वैकल्पिक मूल्यांकन मानदंडों के आधार पर छात्रों का मूल्यांकन किया गया था।
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यूपी में रामपुर और खतौली विधानसभा उपचुनाव और मैनपुरी लोकसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में सभी राजनीति दलों की ओर से जुबानी जंग और तीखी होती जा रही हैं। रामपुर में सपा नेता आजम खान ने जहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए एसपी साहब जिंदाबाद, पुलिस जिंदाबाद के नारे लगाए तो वहीं डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अब उन पर तंज कसा है, ब्रजेश पाठक ने कहा कि वो ये सब फ्रस्ट्रेशन में कर रहे हैं।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक में आजम खान पर तंज कसते हुए कहा कि, "जब सत्ता जाती है तो इस प्रकार के बयान आते हैं. यह प्रदेश की जनता अच्छी तरह से जानती है कि उन लोगों ने कैसे सत्ता का दुरुपयोग किया। सत्ता को अपनी कठपुतली बनाकर रखा. कानून का दुरुपयोग करते थे। अब बीजेपी सरकार में कानून का राज है कि जनता सब देख रही है । आजम खान जो बोल रहे हैं ये सब उनकी फ्रस्ट्रेशन की वजह से हैं।
ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव द्वारा दिए गए मुख्यमंत्री पद के ऑफर पर भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को अच्छी तरह से पता है कि बीजेपी का वोट प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है. हमारी सरकार के पिछले कार्यकाल पर जनता ने दोबारा मुहर लगाई है और यह 37 वर्षों के बाद हुआ है. आने वाले 2024 के लोकसभा चुनाव में हम 80 लोकसभा सीटें जीतेंगे और विपक्षी दल का पूरी तरह से सफाया हो जाएगा.
ब्रजेश पाठक से जब निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि बीजेपी 365 दिन काम करती है. बीजेपी जनता के बीच ही रहती है. चुनाव है तो लड़ना पड़ेगा और चुनाव जीतेंगे सारे नगर निकाय के चुनाव में बीजेपी पहले भी जीतती रही है और इस बार भी जीतेगी. वहीं उन्होंने कांग्रेस की तैयारियां पर कहा कि आप जानते हैं कांग्रेस पार्टी क्या करने वाली है, इस पर हमें कुछ कहना नहीं है.
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यूपी में रामपुर और खतौली विधानसभा उपचुनाव और मैनपुरी लोकसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में सभी राजनीति दलों की ओर से जुबानी जंग और तीखी होती जा रही हैं। रामपुर में सपा नेता आजम खान ने जहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए एसपी साहब जिंदाबाद, पुलिस जिंदाबाद के नारे लगाए तो वहीं डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अब उन पर तंज कसा है, ब्रजेश पाठक ने कहा कि वो ये सब फ्रस्ट्रेशन में कर रहे हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक में आजम खान पर तंज कसते हुए कहा कि, "जब सत्ता जाती है तो इस प्रकार के बयान आते हैं. यह प्रदेश की जनता अच्छी तरह से जानती है कि उन लोगों ने कैसे सत्ता का दुरुपयोग किया। सत्ता को अपनी कठपुतली बनाकर रखा. कानून का दुरुपयोग करते थे। अब बीजेपी सरकार में कानून का राज है कि जनता सब देख रही है । आजम खान जो बोल रहे हैं ये सब उनकी फ्रस्ट्रेशन की वजह से हैं। ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव द्वारा दिए गए मुख्यमंत्री पद के ऑफर पर भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को अच्छी तरह से पता है कि बीजेपी का वोट प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है. हमारी सरकार के पिछले कार्यकाल पर जनता ने दोबारा मुहर लगाई है और यह सैंतीस वर्षों के बाद हुआ है. आने वाले दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव में हम अस्सी लोकसभा सीटें जीतेंगे और विपक्षी दल का पूरी तरह से सफाया हो जाएगा. ब्रजेश पाठक से जब निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि बीजेपी तीन सौ पैंसठ दिन काम करती है. बीजेपी जनता के बीच ही रहती है. चुनाव है तो लड़ना पड़ेगा और चुनाव जीतेंगे सारे नगर निकाय के चुनाव में बीजेपी पहले भी जीतती रही है और इस बार भी जीतेगी. वहीं उन्होंने कांग्रेस की तैयारियां पर कहा कि आप जानते हैं कांग्रेस पार्टी क्या करने वाली है, इस पर हमें कुछ कहना नहीं है.
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने वायुन (पंपोर) में आज एक औद्योगिक एस्टेट की नींव रखी है जिसे सिकॉप द्वारा 29. 31 करोड़रुपए की अनुमानित लागत से विकसित किया जाएगा। इंडस्ट्रियल एस्टेट की स्थापना 272 कानल के क्षेत्र में की जाएगी, जिसमें 149 इकाइयां स्थापित होगी और वहां विकसित एक बड़ा संस्थानिक क्षेत्र का हिस्सा होगा। यह युवा उद्यमियों के यूनिट के रख-रखाव के मुद्दों को संबोधित करने और उनके उत्पादों के लिए सिंगल विंडो मार्केटिंग सुविधा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किया गया है। इस अवसर पर, व्यापार समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की। उन्होंने राज्य में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए एनसीसी देने की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने एसजीएसटी के तहत प्रक्रियाओं की प्रारंभिक सूचना की मांग करते हुए राज्य में भूमि बैंक की स्थापना की दिशा के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। स्थानीय औकॉफ समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी इस अवसर पर मुख्यमंत्री से मुलाकात की और निकटस्थ क्षेत्र में एक प्लेफील्ड का विकास और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र की वृद्धि की मांग की।
महबूबा मुफ्ती ने आधुनिकीकृत पंपोर जॉइनरी मिल्स का भी उद्घाटन किया, जिसें 8. 50 करोड़रुपए की संचयी लागत से पूरा किया गया है। आधुनिकीकरण परियोजना के अंतर्गत नवीनतम मशीनरी स्थापित की गई हैं ताकि उत्पाद की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार किया जा सके और उम्मीद है कि संचालन के दूसरे वर्ष के दौरान जॉइनरी मिल्स सालाना लाभ 5. 33 करोड़ रु का लाभ अर्जित करना शुरू कर देगी। आधुनिकीकरण परियोजना को 18 महीनों के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है। मुख्यमंत्री ने जॉइनरी मिल्स की विभिन्न इकाइयांे और शोरूम का उद्घाटन भी किया। उन्होंने प्रदर्शित लकड़ी के कामों में गहरी दिलचस्पी दिखाई और उत्पादों के समुचित और रचनात्मक डिजाइन को निर्देशित किया। मुख्यमंत्री ने इन निगमों के कई कर्मचारियों कके प्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात की और उनकी राय ली। इन अवसरों पर उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री चंद्र प्रकाश गंगा, उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री सैयद फारूक अंद्राबी, वन राज्य मंत्री मीर जहूर अहमद, उप चेयरमैन जेके मिनरल्स गुलजार अहमद, आयुक्त सचिव उद्योग एवं वाणिज्य शैलेंद्र कुमार, मंडलायुक्त, कश्मीर बसीर खान, कई विभागों और निगमों के प्रमुख व जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे।
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने वायुन में आज एक औद्योगिक एस्टेट की नींव रखी है जिसे सिकॉप द्वारा उनतीस. इकतीस करोड़रुपए की अनुमानित लागत से विकसित किया जाएगा। इंडस्ट्रियल एस्टेट की स्थापना दो सौ बहत्तर कानल के क्षेत्र में की जाएगी, जिसमें एक सौ उनचास इकाइयां स्थापित होगी और वहां विकसित एक बड़ा संस्थानिक क्षेत्र का हिस्सा होगा। यह युवा उद्यमियों के यूनिट के रख-रखाव के मुद्दों को संबोधित करने और उनके उत्पादों के लिए सिंगल विंडो मार्केटिंग सुविधा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किया गया है। इस अवसर पर, व्यापार समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की। उन्होंने राज्य में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए एनसीसी देने की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने एसजीएसटी के तहत प्रक्रियाओं की प्रारंभिक सूचना की मांग करते हुए राज्य में भूमि बैंक की स्थापना की दिशा के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। स्थानीय औकॉफ समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी इस अवसर पर मुख्यमंत्री से मुलाकात की और निकटस्थ क्षेत्र में एक प्लेफील्ड का विकास और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र की वृद्धि की मांग की। महबूबा मुफ्ती ने आधुनिकीकृत पंपोर जॉइनरी मिल्स का भी उद्घाटन किया, जिसें आठ. पचास करोड़रुपए की संचयी लागत से पूरा किया गया है। आधुनिकीकरण परियोजना के अंतर्गत नवीनतम मशीनरी स्थापित की गई हैं ताकि उत्पाद की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार किया जा सके और उम्मीद है कि संचालन के दूसरे वर्ष के दौरान जॉइनरी मिल्स सालाना लाभ पाँच. तैंतीस करोड़ रु का लाभ अर्जित करना शुरू कर देगी। आधुनिकीकरण परियोजना को अट्ठारह महीनों के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है। मुख्यमंत्री ने जॉइनरी मिल्स की विभिन्न इकाइयांे और शोरूम का उद्घाटन भी किया। उन्होंने प्रदर्शित लकड़ी के कामों में गहरी दिलचस्पी दिखाई और उत्पादों के समुचित और रचनात्मक डिजाइन को निर्देशित किया। मुख्यमंत्री ने इन निगमों के कई कर्मचारियों कके प्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात की और उनकी राय ली। इन अवसरों पर उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री चंद्र प्रकाश गंगा, उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री सैयद फारूक अंद्राबी, वन राज्य मंत्री मीर जहूर अहमद, उप चेयरमैन जेके मिनरल्स गुलजार अहमद, आयुक्त सचिव उद्योग एवं वाणिज्य शैलेंद्र कुमार, मंडलायुक्त, कश्मीर बसीर खान, कई विभागों और निगमों के प्रमुख व जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे।
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मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि हमारा देश भारत के संविधान में वर्णित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर काम करता है।
केरल (Kerala) के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (Chief Minister Pinarayi Vijayan) ने गुरुवार को अपनी सरकार की पहली वर्षगांठ समारोह के समापन के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित किया। इस दौरान सीएम पिनाराई विजयन ने कहा, केरल में नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) लागू नहीं होगा। हमारी सरकार विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA- सीएए) को लागू नहीं करेगी। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पर सरकार (Govrnment) की स्पष्ट स्थिति है। यह जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि हमारा देश भारत के संविधान में वर्णित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर काम करता है। आज कल, धर्मनिरपेक्षता को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। इसे लेकर एक खास वर्ग के लोग खासे चिंतित हैं। हाल ही में एक घटना में लोगों का एक समूह धर्म के आधार पर नागरिकता का निर्धारण कर रहा था। केरल सरकार ने इस घटना के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है।
जानकारी के लिए आपको बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पिछले महीने पश्चिम बंगाल के दौरे पर गए थे। इस दौरान शाह ने सिलीगुड़ी में कहा था, कोरोना वायरस महामारी के समाप्त होने के बाद हम नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) को लागू करेंगे।
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मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि हमारा देश भारत के संविधान में वर्णित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर काम करता है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने गुरुवार को अपनी सरकार की पहली वर्षगांठ समारोह के समापन के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित किया। इस दौरान सीएम पिनाराई विजयन ने कहा, केरल में नागरिकता संशोधन कानून लागू नहीं होगा। हमारी सरकार विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम को लागू नहीं करेगी। नागरिकता संशोधन अधिनियम पर सरकार की स्पष्ट स्थिति है। यह जारी रहेगा। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि हमारा देश भारत के संविधान में वर्णित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर काम करता है। आज कल, धर्मनिरपेक्षता को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। इसे लेकर एक खास वर्ग के लोग खासे चिंतित हैं। हाल ही में एक घटना में लोगों का एक समूह धर्म के आधार पर नागरिकता का निर्धारण कर रहा था। केरल सरकार ने इस घटना के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पिछले महीने पश्चिम बंगाल के दौरे पर गए थे। इस दौरान शाह ने सिलीगुड़ी में कहा था, कोरोना वायरस महामारी के समाप्त होने के बाद हम नागरिकता अधिनियम को लागू करेंगे।
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नई दिल्लीः रोहित शर्मा की कप्तानी में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 श्रृंखला के लिए टीम इंडिया का ऐलान हो चुका है. तीन मैचों की श्रृंखला के जरिए रोहित शर्मा फुलटाइम कप्तान के रूप में अपनी पारी का आगाज़ करेंगे. उनके नेतृत्व में 16 सदस्यों वाली टीम इंडिया का ऐलान किया गया है. विराट कोहली को टी20 श्रृंखला के लिए आराम दिया गया है. वे टेस्ट श्रृंखला के लिए टीम में वापस आ सकते हैं. इस बीच खबर सामने आई है कि टी20 के साथ ही ODI में भी रोहित शर्मा को कप्तानी मिल सकती है. इसके लिए न्यूजीलैंड श्रृंखला के बाद दक्षिण अफ्रीका दौरे से पहले BCCI फैसला के सकती है.
बताया जा रहा है कि BCCI सफेद गेंद के क्रिकेट में दो अलग-अलग कप्तान रखने के पक्ष में नहीं है. कोहली ने सिर्फ टी20 फॉर्मेट से कप्तानी छोड़ थी. वे अभी ODI और टेस्ट टीम के कप्तान हैं. मगर BCCI के कोहली को सिर्फ टेस्ट में ही कप्तान बनाए रखने की खबर है. रिपोर्ट के मुताबिक, रोहित शर्मा को ODI टीम का कप्तान बनाए जाने पर बाद में फैसला लिया जाएगा. BCCI का मानना है कि टी20 और ODI के अलग-अलग कप्तान नहीं हो सकते हैं. ऐसे में कोहली से वनडे की कप्तानी छीनी जा सकती है.
बता दें कि कोहली ने अभी सिर्फ टी20 की कप्तानी छोड़ी है. उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप से पहले यह ऐलान कर दिया था. इस फॉर्मेट से कप्तानी छोड़ने का फैसला स्वयं कोहली का ही था. BCCI की इसमें कोई भूमिका नहीं थी. मगर ODI की कप्तानी छोड़ने के लिए BCCI कोहली से कह सकती है. यह भी हो सकता है कि दक्षिण अफ्रीका सीरीज से पहले खुद कोहली ही वनडे कप्तानी से मुक्त होने का ऐलान कर दें.
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नई दिल्लीः रोहित शर्मा की कप्तानी में न्यूजीलैंड के खिलाफ टीबीस श्रृंखला के लिए टीम इंडिया का ऐलान हो चुका है. तीन मैचों की श्रृंखला के जरिए रोहित शर्मा फुलटाइम कप्तान के रूप में अपनी पारी का आगाज़ करेंगे. उनके नेतृत्व में सोलह सदस्यों वाली टीम इंडिया का ऐलान किया गया है. विराट कोहली को टीबीस श्रृंखला के लिए आराम दिया गया है. वे टेस्ट श्रृंखला के लिए टीम में वापस आ सकते हैं. इस बीच खबर सामने आई है कि टीबीस के साथ ही ODI में भी रोहित शर्मा को कप्तानी मिल सकती है. इसके लिए न्यूजीलैंड श्रृंखला के बाद दक्षिण अफ्रीका दौरे से पहले BCCI फैसला के सकती है. बताया जा रहा है कि BCCI सफेद गेंद के क्रिकेट में दो अलग-अलग कप्तान रखने के पक्ष में नहीं है. कोहली ने सिर्फ टीबीस फॉर्मेट से कप्तानी छोड़ थी. वे अभी ODI और टेस्ट टीम के कप्तान हैं. मगर BCCI के कोहली को सिर्फ टेस्ट में ही कप्तान बनाए रखने की खबर है. रिपोर्ट के मुताबिक, रोहित शर्मा को ODI टीम का कप्तान बनाए जाने पर बाद में फैसला लिया जाएगा. BCCI का मानना है कि टीबीस और ODI के अलग-अलग कप्तान नहीं हो सकते हैं. ऐसे में कोहली से वनडे की कप्तानी छीनी जा सकती है. बता दें कि कोहली ने अभी सिर्फ टीबीस की कप्तानी छोड़ी है. उन्होंने टीबीस वर्ल्ड कप से पहले यह ऐलान कर दिया था. इस फॉर्मेट से कप्तानी छोड़ने का फैसला स्वयं कोहली का ही था. BCCI की इसमें कोई भूमिका नहीं थी. मगर ODI की कप्तानी छोड़ने के लिए BCCI कोहली से कह सकती है. यह भी हो सकता है कि दक्षिण अफ्रीका सीरीज से पहले खुद कोहली ही वनडे कप्तानी से मुक्त होने का ऐलान कर दें.
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वीवो ने अपने नए स्मार्टफोन Vivo V23e को वियतनाम में लॉन्तच कर दिया है। नया फोन Vivo V21e का अपग्रेडेड वर्जन है जिसे Vivo V21 5G और Vivo V21 के साथ इसी साल अप्रैल में लॉन्च किया गया था। Vivo V23e में 20:9 आस्पेक्ट रेशियो वाली डिस्प्ले है। इसके अलावा वीवो के इस स्मार्टफोन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप है जिसमें प्राइमरी लेंस 50 मेगापिक्सलस का है। Vivo V23e में एक्सटेंडेड RAM 2. 0 है जिसकी मदद से फोन खुद ही स्टोरेज में से 4 जीबी का इस्तेमाल रैम के लिए जरूरत पड़ने पर कर लेगा।
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वीवो ने अपने नए स्मार्टफोन Vivo Vतेईसe को वियतनाम में लॉन्तच कर दिया है। नया फोन Vivo Vइक्कीसe का अपग्रेडेड वर्जन है जिसे Vivo Vइक्कीस पाँचG और Vivo Vइक्कीस के साथ इसी साल अप्रैल में लॉन्च किया गया था। Vivo Vतेईसe में बीस:नौ आस्पेक्ट रेशियो वाली डिस्प्ले है। इसके अलावा वीवो के इस स्मार्टफोन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप है जिसमें प्राइमरी लेंस पचास मेगापिक्सलस का है। Vivo Vतेईसe में एक्सटेंडेड RAM दो. शून्य है जिसकी मदद से फोन खुद ही स्टोरेज में से चार जीबी का इस्तेमाल रैम के लिए जरूरत पड़ने पर कर लेगा। Get all Tech News in Hindi related to live news update of latest gadgets News apps, tablets etc. Stay updated with us for all breaking news from Tech and more Hindi News.
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भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष व भाजपा सांसद बृजभूषण द्वारा महिला पहलवानों के साथ यौन शोषण मामले में दिल्ली जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे पहलवानों के समर्थन में सीकर में आप युवा मोर्चा के युवाओं ने कैंडल मार्च निकालकर आक्रोश व्यक्त किया और सांसद बृजभूषण को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की। कैंडल मार्च जाट बाजार से लेकर कल्याण सर्किल तक निकाला गया।
जिलाध्यक्ष मुकेश ऑलराउंडर ऑलराउंडर नेकहा कि "बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ" का नारा देनी वाली सरकार के एक बाहुबली सांसद के खिलाफ पहलवान बेटियां धरने पर बैठी है लेकिन केंद्र सरकार मौन है। सरकार देश की बेटियों की कोई सुध नहीं ले रही। देश की महिला पहलवान बेटियों का अपमान हुआ है। उन्होंने कहा कि हम अंतिम समय तक हमारे पहलवानों के साथ है और पुरजोर तरीके से आवाज उठाते रहेंगे।
इस दौरान प्रदेश स्पोर्ट्स विंग उपाध्यक्ष राजवीर मायल, जिलाध्यक्ष झाबर सिंह खीचड़, प्रदेश किसान विंग उपाध्यक्ष चिरंजीलाल महरिया, जिला सचिव रामकुमार वर्मा, कार्यालय प्रभारी शिवनाथ सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष मुकेश कुमार गुर्जर, महेश कुमार फगेडिया, संदीप गढ़वाल, ब्लॉक अध्यक्ष झाबर सिंह ढाका, एससी विंग जिलाध्यक्ष जुगल किशोर, हरीराम सिहाग, रजनीश चौधरी, सुरेन्द्र बाजडोलिया, मनोज गढ़वाल, नरेंद्र बाजिया, सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष व भाजपा सांसद बृजभूषण द्वारा महिला पहलवानों के साथ यौन शोषण मामले में दिल्ली जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे पहलवानों के समर्थन में सीकर में आप युवा मोर्चा के युवाओं ने कैंडल मार्च निकालकर आक्रोश व्यक्त किया और सांसद बृजभूषण को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की। कैंडल मार्च जाट बाजार से लेकर कल्याण सर्किल तक निकाला गया। जिलाध्यक्ष मुकेश ऑलराउंडर ऑलराउंडर नेकहा कि "बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ" का नारा देनी वाली सरकार के एक बाहुबली सांसद के खिलाफ पहलवान बेटियां धरने पर बैठी है लेकिन केंद्र सरकार मौन है। सरकार देश की बेटियों की कोई सुध नहीं ले रही। देश की महिला पहलवान बेटियों का अपमान हुआ है। उन्होंने कहा कि हम अंतिम समय तक हमारे पहलवानों के साथ है और पुरजोर तरीके से आवाज उठाते रहेंगे। इस दौरान प्रदेश स्पोर्ट्स विंग उपाध्यक्ष राजवीर मायल, जिलाध्यक्ष झाबर सिंह खीचड़, प्रदेश किसान विंग उपाध्यक्ष चिरंजीलाल महरिया, जिला सचिव रामकुमार वर्मा, कार्यालय प्रभारी शिवनाथ सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष मुकेश कुमार गुर्जर, महेश कुमार फगेडिया, संदीप गढ़वाल, ब्लॉक अध्यक्ष झाबर सिंह ढाका, एससी विंग जिलाध्यक्ष जुगल किशोर, हरीराम सिहाग, रजनीश चौधरी, सुरेन्द्र बाजडोलिया, मनोज गढ़वाल, नरेंद्र बाजिया, सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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अरुणाचल प्रदेश में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शहा के हाथों से कुछ समय पूर्व ही परशुराम कुंड के स्थान पर भगवान परशुराम की मूर्ति का उद्घाटन किया गया तथा अरुणाचल प्रदेश में पहली बार बननेवाले हवाई अड्डे को अरुणाचल प्रदेश सरकार ने स्थानीय नाम देने का प्रस्ताव केंद्र को दिया । इन घटनाओं की पृष्ठभूमि पर स्थानीय पेपरों में शोर किया गया कि 'अरुणाचल प्रदेश का भगवाकरण हो रहा है । ' अरुणाचल प्रदेश में 'परशुराम कुंड', पुरातन संस्कृति, परंपरा, धार्मिक स्थल आदि क्या भाजपा लेकर आई है ?
अरुणाचल प्रदेश में एक बार ईसाई धर्म न स्वीकारने के कारण महिला को जीवित जलाने की घटना घटी है तथा एक मंत्री ने ईसाइयों के एक बडे उपक्रम का उद्घाटन किया है । उस समय अरुणाचल प्रदेश के समाचार पत्रों में 'विदेशी बस्तियों का अरुणाचल में प्रचार' क्यों नहीं छापा गया ? अरुणाचल प्रदेश के कुछ समाचार पत्र ईसाई मिशनरी और कुछ राजनीतिक दलों के मुखपत्र बन गए हैं । हिन्दू संस्कृति नष्ट करने का उनका षड्यंत्र है । उसी प्रकार ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण के प्रयास भी बडी मात्रा में हो रहे हैं, उन्हें निष्फल करना चाहिए, ऐसा प्रतिपादन अरुणाचल प्रदेश सरकार के बालसंसाधन और विकास संस्था के उपाध्यक्ष श्री. कुरु थाई ने किया ।
हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित 'अरुणाचल प्रदेश' में हिन्दुओं का संघर्ष' इस विषय पर विशेष संवाद में वे बोल रहे थे । इस समय हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. सतिश कोचरेकर ने उनसे संवाद किया ।
श्री. कुरु थाई ने आगे कहा कि, अरुणाचल प्रदेश हिन्दुओं की तपस्या भूमि है और वहां हिन्दू बहुसंख्यक हैं । अरुणाचल में हिन्दू बहुसंख्यक होते हुए भी हिन्दू विरोधी कुप्रचार किया जाता है । अरुणाचल प्रदेश में 40 विविध अनुसूचित जनजाति के लोग रहते हैं । ये लोग सूर्य, चंद्र, नदी, पर्वत, वृक्ष आदि की पूजा करते हैं । ये जनजातियां हिन्दू होते हुए भी उन्हें हिन्दू धर्म से तोडने का प्रयास किया जा रहा है । अरुणाचल प्रदेश सरकार ने संस्कृति संजोने और धर्मांतरण रोकने के लिए 'दि अरुणाचल प्रदेश फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट, 1978' कानून बनाया । यह कानून अभी भी लागू नहीं हुआ है और उसे लागू करने की हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों की मांग है । विदेश से अनगिनत धन आना और सरकार का उस पर नियंत्रण न होना, जातिवाद, अशिक्षा आदि कारणों से हिन्दुओं का धर्मांतरण किया जा रहा है । चर्च मिशनरी आभास करवाते हैं कि वे गरीबों के प्रति सहानुभूति रखते हैं; परंतु गरीबों के घरों की दुर्दशा हो गई है तथा यहां आलीशान चर्च बन रहे हैं । ईसाई मिशनरियां प्रचार करने से पूर्व संबंधित क्षेत्र के प्रमुख, गरीब, संकट से ग्रस्त आदि को खोजकर उन्हें सहायता करती हैं, नौकरी का प्रलोभन देकर, बुद्धिभेद कर उनका धर्मांतरण करती हैं ।
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अरुणाचल प्रदेश में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शहा के हाथों से कुछ समय पूर्व ही परशुराम कुंड के स्थान पर भगवान परशुराम की मूर्ति का उद्घाटन किया गया तथा अरुणाचल प्रदेश में पहली बार बननेवाले हवाई अड्डे को अरुणाचल प्रदेश सरकार ने स्थानीय नाम देने का प्रस्ताव केंद्र को दिया । इन घटनाओं की पृष्ठभूमि पर स्थानीय पेपरों में शोर किया गया कि 'अरुणाचल प्रदेश का भगवाकरण हो रहा है । ' अरुणाचल प्रदेश में 'परशुराम कुंड', पुरातन संस्कृति, परंपरा, धार्मिक स्थल आदि क्या भाजपा लेकर आई है ? अरुणाचल प्रदेश में एक बार ईसाई धर्म न स्वीकारने के कारण महिला को जीवित जलाने की घटना घटी है तथा एक मंत्री ने ईसाइयों के एक बडे उपक्रम का उद्घाटन किया है । उस समय अरुणाचल प्रदेश के समाचार पत्रों में 'विदेशी बस्तियों का अरुणाचल में प्रचार' क्यों नहीं छापा गया ? अरुणाचल प्रदेश के कुछ समाचार पत्र ईसाई मिशनरी और कुछ राजनीतिक दलों के मुखपत्र बन गए हैं । हिन्दू संस्कृति नष्ट करने का उनका षड्यंत्र है । उसी प्रकार ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण के प्रयास भी बडी मात्रा में हो रहे हैं, उन्हें निष्फल करना चाहिए, ऐसा प्रतिपादन अरुणाचल प्रदेश सरकार के बालसंसाधन और विकास संस्था के उपाध्यक्ष श्री. कुरु थाई ने किया । हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित 'अरुणाचल प्रदेश' में हिन्दुओं का संघर्ष' इस विषय पर विशेष संवाद में वे बोल रहे थे । इस समय हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. सतिश कोचरेकर ने उनसे संवाद किया । श्री. कुरु थाई ने आगे कहा कि, अरुणाचल प्रदेश हिन्दुओं की तपस्या भूमि है और वहां हिन्दू बहुसंख्यक हैं । अरुणाचल में हिन्दू बहुसंख्यक होते हुए भी हिन्दू विरोधी कुप्रचार किया जाता है । अरुणाचल प्रदेश में चालीस विविध अनुसूचित जनजाति के लोग रहते हैं । ये लोग सूर्य, चंद्र, नदी, पर्वत, वृक्ष आदि की पूजा करते हैं । ये जनजातियां हिन्दू होते हुए भी उन्हें हिन्दू धर्म से तोडने का प्रयास किया जा रहा है । अरुणाचल प्रदेश सरकार ने संस्कृति संजोने और धर्मांतरण रोकने के लिए 'दि अरुणाचल प्रदेश फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट, एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर' कानून बनाया । यह कानून अभी भी लागू नहीं हुआ है और उसे लागू करने की हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों की मांग है । विदेश से अनगिनत धन आना और सरकार का उस पर नियंत्रण न होना, जातिवाद, अशिक्षा आदि कारणों से हिन्दुओं का धर्मांतरण किया जा रहा है । चर्च मिशनरी आभास करवाते हैं कि वे गरीबों के प्रति सहानुभूति रखते हैं; परंतु गरीबों के घरों की दुर्दशा हो गई है तथा यहां आलीशान चर्च बन रहे हैं । ईसाई मिशनरियां प्रचार करने से पूर्व संबंधित क्षेत्र के प्रमुख, गरीब, संकट से ग्रस्त आदि को खोजकर उन्हें सहायता करती हैं, नौकरी का प्रलोभन देकर, बुद्धिभेद कर उनका धर्मांतरण करती हैं ।
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नई दिल्लीः आज रात 10:30 बजे Apple Wonderlust शुरू होगा। इसी इवेंट कंपनी iPhone 15 सीरीज को लॉन्च करेगी। इस सीरीज में 4 नए मॉडल शामिल होंगे, जैसे- iPhone 15, 15 Plus, 15 Pro और iPhone 15 Pro Max. वहीं गौर करें तो कंपनी जब भी नए मॉडल लॉन्च करती है तब अपने पुराने मॉडल्स की कीमत को कम कर देती है। इसी के साथ कुछ मॉडल्स को डिसकन्टिन्यू कर देती है।
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि iPhone 14 Pro और iPhone 13 Mini को बंद करने की उम्मीद है।
9to5Mac की रिपोर्ट के मुताबिक, iPhone 15 सीरीज के लॉन्च के बाद, Apple ने iPhone 14, iPhone 13 और iPhone 14 Plus मॉडल की कीमत को कम कर दिया जाएगा। अब इन्हें सस्ती कीमत पर बेचा जाएगा।
Macrumors के मुताबिक, रिसर्च फर्म सीआईआरपी के आंकड़ों के अनुसार, iPhone मिनी को बिक्री अन्य आईफोन मॉडलों की तुलना में कम हो रही है, जिसका असर यह हुआ है कि 2022 की पहली तिमाही तक अमेरिका में कुल आईफोन 13 की बिक्री में से सिर्फ 3 फीसदी आईफोन मिनी की बिक्री हुई। इसके आलावा, गुरमन ने यह भी नोट किया है कि तकनीकी दिग्गज 12 सितंबर की शाम को माल रीसेट करने की योजना बना रहे हैं और कार्यक्रम के बाद एक मैनेजर कॉल निर्धारित की गई है।
पहले कई रिपोर्ट्स सामने आई, जिसमें दावा किया गया कि iPhone 15 Pro और iPhone 15 Pro Max की कीमतें iPhone 14 Pro सीरीज की तुलना में काफी ज्यादा होंगी। वहीं इस बार कंपनी प्रीमियम फीचर्स के साथ नए मॉडल्स को लाने वाली है, जैसे- टाइटेनियम फ्रेम, कैमरा अपग्रेड और ज्यादा स्टोरेज। यही वजह है कि iPhone 15 प्रो सीरीज की कीमत iPhone 14 प्रो की तुलना में 100 डॉलर से ज्यादा महंगी हो सकती है।
रिपोर्ट्स की मानें तो ऐप्पल इस साल सभी आईफोन 15 मॉडल्स के साथ डायनेमिक आइलैंड लाएगा। बताया जाता है कि सभी मॉडलों में USB-C चार्ज की सुविधा हो सकती है। एक शक्तिशाली नई A17 बायोनिक चिप प्रो मॉडल और A16 को स्टेंडर्ड मॉडल में चलाएगी।
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नई दिल्लीः आज रात दस:तीस बजे Apple Wonderlust शुरू होगा। इसी इवेंट कंपनी iPhone पंद्रह सीरीज को लॉन्च करेगी। इस सीरीज में चार नए मॉडल शामिल होंगे, जैसे- iPhone पंद्रह, पंद्रह Plus, पंद्रह Pro और iPhone पंद्रह Pro Max. वहीं गौर करें तो कंपनी जब भी नए मॉडल लॉन्च करती है तब अपने पुराने मॉडल्स की कीमत को कम कर देती है। इसी के साथ कुछ मॉडल्स को डिसकन्टिन्यू कर देती है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि iPhone चौदह Pro और iPhone तेरह Mini को बंद करने की उम्मीद है। नौtoपाँचMac की रिपोर्ट के मुताबिक, iPhone पंद्रह सीरीज के लॉन्च के बाद, Apple ने iPhone चौदह, iPhone तेरह और iPhone चौदह Plus मॉडल की कीमत को कम कर दिया जाएगा। अब इन्हें सस्ती कीमत पर बेचा जाएगा। Macrumors के मुताबिक, रिसर्च फर्म सीआईआरपी के आंकड़ों के अनुसार, iPhone मिनी को बिक्री अन्य आईफोन मॉडलों की तुलना में कम हो रही है, जिसका असर यह हुआ है कि दो हज़ार बाईस की पहली तिमाही तक अमेरिका में कुल आईफोन तेरह की बिक्री में से सिर्फ तीन फीसदी आईफोन मिनी की बिक्री हुई। इसके आलावा, गुरमन ने यह भी नोट किया है कि तकनीकी दिग्गज बारह सितंबर की शाम को माल रीसेट करने की योजना बना रहे हैं और कार्यक्रम के बाद एक मैनेजर कॉल निर्धारित की गई है। पहले कई रिपोर्ट्स सामने आई, जिसमें दावा किया गया कि iPhone पंद्रह Pro और iPhone पंद्रह Pro Max की कीमतें iPhone चौदह Pro सीरीज की तुलना में काफी ज्यादा होंगी। वहीं इस बार कंपनी प्रीमियम फीचर्स के साथ नए मॉडल्स को लाने वाली है, जैसे- टाइटेनियम फ्रेम, कैमरा अपग्रेड और ज्यादा स्टोरेज। यही वजह है कि iPhone पंद्रह प्रो सीरीज की कीमत iPhone चौदह प्रो की तुलना में एक सौ डॉलर से ज्यादा महंगी हो सकती है। रिपोर्ट्स की मानें तो ऐप्पल इस साल सभी आईफोन पंद्रह मॉडल्स के साथ डायनेमिक आइलैंड लाएगा। बताया जाता है कि सभी मॉडलों में USB-C चार्ज की सुविधा हो सकती है। एक शक्तिशाली नई Aसत्रह बायोनिक चिप प्रो मॉडल और Aसोलह को स्टेंडर्ड मॉडल में चलाएगी।
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झज्जरः अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक के विरोध में अब अन्य जिलों की तर्ज पर झज्जर में जाट समुदाय के युवा लामबद्ध होने लगे है। इसके लिए प्रदेश स्तर पर एक मंडल बना कर 21 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। जाट आरक्षण की रणनीति तय करने व यशपाल मलिक द्वारा पिछले दिनों जाट समुदाय के लोगों से एकत्रित किए गए चंदे की वापसी को लेकर रविवार को झज्जर शहर के दिल्ली गेट में एक मीटिंग जाट समुदाय के लोगों की हुई। मीटिंग की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष रामफल गुलिया ने की।
मीटिंग में भरत सिंह बैनीवाला कैथल,वीरभान ढुल जींद, महा सिंह देशवाल रोहतक, कृष्ण किरमारा हिसार,मूलचंद दहिया सोनीपत, दिलबाग सिंह दलाल, सुऱेश फौगाट, संदीप धनखड़,राज सिंह,हवा सिंह दलाल के अलावा जाट समुदाय के लोगों ने भाग लिया। मीटिंग में सभी वक्ताओं ने यशपाल मलिक को सत्ताधारी भाजपा का एजेंट बताया और कहा कि सच्चाई तो यह है कि जाट समुदाय की भावनाओं से खिलवाड़ कर यशपाल मलिक ने हरियाणा की 36 बिरादरी के भाईचारे को खराब करने का काम किया है। मीटिंग में तय किया गया कि जाट आरक्षण की आड़ में यशपाल मलिक ने प्रदेश के जाट समुदाय के लोगों से जो करोड़ों रूपए का चंदा एकत्रित किया था उसकी वापसी के लिए उनकी संगठन जाट बाहूल्य जिलों में आगामी 20 नवम्बर से अपने धरने शुरू करेगा।
यह धरने उपायुक्त कार्यालय पर दीए जाएगें। यह भी बताया गया कि 20 नवम्बर को कैथल में,22 नवम्बर को जींद में,24 नवम्बर को हिसार में, 26 नवम्बर को रोहतक मेें, 28 नवम्बर को झज्जर में व 30 नवम्बर को सोनीपत के जिला उपायुक्त पर धरना दिया जाएगा। धरनों के माध्यम से प्रदेश की विभिन्न जेलों में जाट आरक्षण संघर्ष के दौरान बंद हुए युवाओं की रिहाई की भी मांग की जाएगी। (विनीत नरुला)
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झज्जरः अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक के विरोध में अब अन्य जिलों की तर्ज पर झज्जर में जाट समुदाय के युवा लामबद्ध होने लगे है। इसके लिए प्रदेश स्तर पर एक मंडल बना कर इक्कीस सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। जाट आरक्षण की रणनीति तय करने व यशपाल मलिक द्वारा पिछले दिनों जाट समुदाय के लोगों से एकत्रित किए गए चंदे की वापसी को लेकर रविवार को झज्जर शहर के दिल्ली गेट में एक मीटिंग जाट समुदाय के लोगों की हुई। मीटिंग की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष रामफल गुलिया ने की। मीटिंग में भरत सिंह बैनीवाला कैथल,वीरभान ढुल जींद, महा सिंह देशवाल रोहतक, कृष्ण किरमारा हिसार,मूलचंद दहिया सोनीपत, दिलबाग सिंह दलाल, सुऱेश फौगाट, संदीप धनखड़,राज सिंह,हवा सिंह दलाल के अलावा जाट समुदाय के लोगों ने भाग लिया। मीटिंग में सभी वक्ताओं ने यशपाल मलिक को सत्ताधारी भाजपा का एजेंट बताया और कहा कि सच्चाई तो यह है कि जाट समुदाय की भावनाओं से खिलवाड़ कर यशपाल मलिक ने हरियाणा की छत्तीस बिरादरी के भाईचारे को खराब करने का काम किया है। मीटिंग में तय किया गया कि जाट आरक्षण की आड़ में यशपाल मलिक ने प्रदेश के जाट समुदाय के लोगों से जो करोड़ों रूपए का चंदा एकत्रित किया था उसकी वापसी के लिए उनकी संगठन जाट बाहूल्य जिलों में आगामी बीस नवम्बर से अपने धरने शुरू करेगा। यह धरने उपायुक्त कार्यालय पर दीए जाएगें। यह भी बताया गया कि बीस नवम्बर को कैथल में,बाईस नवम्बर को जींद में,चौबीस नवम्बर को हिसार में, छब्बीस नवम्बर को रोहतक मेें, अट्ठाईस नवम्बर को झज्जर में व तीस नवम्बर को सोनीपत के जिला उपायुक्त पर धरना दिया जाएगा। धरनों के माध्यम से प्रदेश की विभिन्न जेलों में जाट आरक्षण संघर्ष के दौरान बंद हुए युवाओं की रिहाई की भी मांग की जाएगी।
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सिरोही के कोतवाली थाने में मुंबई के ठाणे में मेडिकल शॉप बेचने के नाम पर ढाई लाख रुपए की ठगी करने का मामला सामने आया है। पीड़ित ने 2 आरोपियों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज कराया है। आरोपियों ने ठाणे में मेडिकल शॉप 7 लाख रुपए में बेचने के नाम पर पीड़ित से ढाई लाख रुपए एडवांस में मांगे और बाकी कब्जा देने पर देने के लिए कहा। इस पर पीड़ित ने उनके खाते में ढाई लाख रुपए जमा करवा दिए। रुपए जमा करवाने के 7 दिन बाद पीड़ित ने आरोपियों से दुकान की रजिस्ट्री करवाने के लिए कहा तो उन्होंने स्टॉक का मिलना नहीं होने की बात कही और थोड़ा समय देने के लिए कहा। इसके बाद आरोपियों ने कहा कि दुकान के फर्नीचर के लिए 7 लाख रुपए अलग से देने पड़ेंगे। इस पर पीड़ित ने उनको पैसा लौटाने की बात कही तो आरोपियों ने 3 दिन में रुपए लौटाने की बात कही। इसके बाद आरोपी बार-बार बहाने बनाते रहे और एडवांस लिए ढाई लाख रुपए नहीं लौटाए।
सीआई राजेंद्र सिंह राजपुरोहित ने बताया कि तुलसी नगर सिरोही निवासी आकाश विजय सिंह राठौड़ ने पुलिस को रिपोर्ट देकर बताया कि रानी (पाली) निवासी तारा राम पुत्र लालाराम लोहार और जवाली (पाली) निवासी नारायण सिंह पुत्र राम सिंह राजपुरोहित ने उसको मुंबई के ठाणे में अपनी मेडिकल दुकान बेचने की बात कही। उन्होंने कहा कि आप ठाणे जाकर एक बार दुकान को देख लें। जब वह ठाणे गया तो नारायण सिंह से मेडिकल दुकान पर मुलाकात हुई। उन्होंने दुकान का सौदा मेडिकल के सभी सामान और फर्नीचर के साथ 7 लाख रुपए में तय किया और एक-दो सप्ताह में रुपए देने पर दुकान का कब्जा देने का वादा किया।
पीड़ित ने बताया कि कुछ दिनों बाद नारायण सिंह ने कहा कि उन्हें पार्टियों की उधारी चुकानी है, इसलिए ढाई लाख रुपए एडवांस दे दीजिए। बाकी आप कब्जा देने पर दे देना। पीड़ित ने कहा कि आरोपियों की बातों पर विश्वास करते हुए उसने ढाई लाख रुपए नारायण सिंह के खाते में जमा करवा दिए। रुपए देने के 7 दिन बाद मुंबई में मेडिकल दुकान देने की रजिस्ट्री करवाने के लिए कहा तो उन्होंने स्टॉक का मिलाना नहीं होना बताया। थोड़े दिन बाद आरोपियों ने कहा कि हमने दुकान का सौदा 7 लाख में किया था। अगर फर्नीचर चाहिए तो 7 लाख रुपए अलग से देने पड़ेंगे। इस पर उसने सौदा कैंसिल कर ढाई लाख रुपए लौटाने के लिए कहा तो उन्होंने 3 दिन बाद पैसा लौटाने की बात कही। इसके बाद आरोपी बार-बार बहाने करते रहे और ढाई लाख रुपए नहीं लौटाए। सीआई ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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सिरोही के कोतवाली थाने में मुंबई के ठाणे में मेडिकल शॉप बेचने के नाम पर ढाई लाख रुपए की ठगी करने का मामला सामने आया है। पीड़ित ने दो आरोपियों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज कराया है। आरोपियों ने ठाणे में मेडिकल शॉप सात लाख रुपए में बेचने के नाम पर पीड़ित से ढाई लाख रुपए एडवांस में मांगे और बाकी कब्जा देने पर देने के लिए कहा। इस पर पीड़ित ने उनके खाते में ढाई लाख रुपए जमा करवा दिए। रुपए जमा करवाने के सात दिन बाद पीड़ित ने आरोपियों से दुकान की रजिस्ट्री करवाने के लिए कहा तो उन्होंने स्टॉक का मिलना नहीं होने की बात कही और थोड़ा समय देने के लिए कहा। इसके बाद आरोपियों ने कहा कि दुकान के फर्नीचर के लिए सात लाख रुपए अलग से देने पड़ेंगे। इस पर पीड़ित ने उनको पैसा लौटाने की बात कही तो आरोपियों ने तीन दिन में रुपए लौटाने की बात कही। इसके बाद आरोपी बार-बार बहाने बनाते रहे और एडवांस लिए ढाई लाख रुपए नहीं लौटाए। सीआई राजेंद्र सिंह राजपुरोहित ने बताया कि तुलसी नगर सिरोही निवासी आकाश विजय सिंह राठौड़ ने पुलिस को रिपोर्ट देकर बताया कि रानी निवासी तारा राम पुत्र लालाराम लोहार और जवाली निवासी नारायण सिंह पुत्र राम सिंह राजपुरोहित ने उसको मुंबई के ठाणे में अपनी मेडिकल दुकान बेचने की बात कही। उन्होंने कहा कि आप ठाणे जाकर एक बार दुकान को देख लें। जब वह ठाणे गया तो नारायण सिंह से मेडिकल दुकान पर मुलाकात हुई। उन्होंने दुकान का सौदा मेडिकल के सभी सामान और फर्नीचर के साथ सात लाख रुपए में तय किया और एक-दो सप्ताह में रुपए देने पर दुकान का कब्जा देने का वादा किया। पीड़ित ने बताया कि कुछ दिनों बाद नारायण सिंह ने कहा कि उन्हें पार्टियों की उधारी चुकानी है, इसलिए ढाई लाख रुपए एडवांस दे दीजिए। बाकी आप कब्जा देने पर दे देना। पीड़ित ने कहा कि आरोपियों की बातों पर विश्वास करते हुए उसने ढाई लाख रुपए नारायण सिंह के खाते में जमा करवा दिए। रुपए देने के सात दिन बाद मुंबई में मेडिकल दुकान देने की रजिस्ट्री करवाने के लिए कहा तो उन्होंने स्टॉक का मिलाना नहीं होना बताया। थोड़े दिन बाद आरोपियों ने कहा कि हमने दुकान का सौदा सात लाख में किया था। अगर फर्नीचर चाहिए तो सात लाख रुपए अलग से देने पड़ेंगे। इस पर उसने सौदा कैंसिल कर ढाई लाख रुपए लौटाने के लिए कहा तो उन्होंने तीन दिन बाद पैसा लौटाने की बात कही। इसके बाद आरोपी बार-बार बहाने करते रहे और ढाई लाख रुपए नहीं लौटाए। सीआई ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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पिछले आईपीएल की बात है। उस शाम ईडन गार्डन्स में केकेआर बनाम सीएसके का मैच हो रहा था। यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये कोलकाता है। ईडन को देख ऐसा लग रहा था, मानो सरसों का खेत हो। चारों ओर सिर्फ पीला ही पीला दिख रहा था, जो कि चेन्नई सुपरकिंग्स की जर्सी का रंग है। पूरा ईडन 'धोनी-धोनी के नारे से गूंज रहा था। कौन कह सकता था कि यह चेन्नई नहीं, कोलकाता है!
ईडन की गैलरी में एक खास शख्स इस दीवानगी को आसमान पर पहुंचा रहा था। उनका नाम है सरवनन हरि। आईपीएल और धोनी के सुपर फैन, जो धोनी के लिए अपनी जिंदगी तक दांव पर लगा सकते हैं!
धोनी भी अपने इस दीवाने को बहुत चाहते हैं। धोनी कुछ भी करें, मीडिया में चर्चा से बच पाना मुश्किल होता है। लेकिन अपने इस फैन की वह गुपचुप मदद करते हैं। यहां तक कि उनकी बेटी का नाम भी धोनी ने खुद ही रखा।
पिछले साल आईपीएल से कुछ दिन पहले चेन्नई में उनके साथ मारपीट की तस्वीरें वायरल हो गई थीं। कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे पर चेन्नई में आईपीएल नहीं कराने की मांग को लेकर सड़क पर उतरी जनता के हाथों उन्हें बदसलूकी झेलनी पड़ी। उनका विग भी नोंच कर फेंक दिया गया।
जिस दिन स्टेडियम में पहुंचना होता है, दोपहर से ही उनका सजना शुरू हो जाता है। पहले वह पूरे शरीर को पीले रंग में पोतते हैं। सीने पर धोनी का नाम और जर्सी का नंबर 7 लिखते हैं। सिर पर एक बड़ा-सा विग लगाते हैं। उनका यह अजीब स्टाइल ही क्रिकेट की दुनिया में उनकी पहचान है। किसी और वक्त सरवनन को देखने पर कल्पना कर पाना भी मुश्किल है कि यह गैलरी में दिखने वाला वही धोनी फैन है।
मगर इस बार सरवनन का मन खराब है क्योंकि उनके भगवान ने अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है।
खैर, हरि को इन सब की चिंता नहीं है। और जिसके सर पर ऐसे महान क्रिकेटर का हाथ हो, उसे किस बात की फिक्र!
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पिछले आईपीएल की बात है। उस शाम ईडन गार्डन्स में केकेआर बनाम सीएसके का मैच हो रहा था। यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये कोलकाता है। ईडन को देख ऐसा लग रहा था, मानो सरसों का खेत हो। चारों ओर सिर्फ पीला ही पीला दिख रहा था, जो कि चेन्नई सुपरकिंग्स की जर्सी का रंग है। पूरा ईडन 'धोनी-धोनी के नारे से गूंज रहा था। कौन कह सकता था कि यह चेन्नई नहीं, कोलकाता है! ईडन की गैलरी में एक खास शख्स इस दीवानगी को आसमान पर पहुंचा रहा था। उनका नाम है सरवनन हरि। आईपीएल और धोनी के सुपर फैन, जो धोनी के लिए अपनी जिंदगी तक दांव पर लगा सकते हैं! धोनी भी अपने इस दीवाने को बहुत चाहते हैं। धोनी कुछ भी करें, मीडिया में चर्चा से बच पाना मुश्किल होता है। लेकिन अपने इस फैन की वह गुपचुप मदद करते हैं। यहां तक कि उनकी बेटी का नाम भी धोनी ने खुद ही रखा। पिछले साल आईपीएल से कुछ दिन पहले चेन्नई में उनके साथ मारपीट की तस्वीरें वायरल हो गई थीं। कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे पर चेन्नई में आईपीएल नहीं कराने की मांग को लेकर सड़क पर उतरी जनता के हाथों उन्हें बदसलूकी झेलनी पड़ी। उनका विग भी नोंच कर फेंक दिया गया। जिस दिन स्टेडियम में पहुंचना होता है, दोपहर से ही उनका सजना शुरू हो जाता है। पहले वह पूरे शरीर को पीले रंग में पोतते हैं। सीने पर धोनी का नाम और जर्सी का नंबर सात लिखते हैं। सिर पर एक बड़ा-सा विग लगाते हैं। उनका यह अजीब स्टाइल ही क्रिकेट की दुनिया में उनकी पहचान है। किसी और वक्त सरवनन को देखने पर कल्पना कर पाना भी मुश्किल है कि यह गैलरी में दिखने वाला वही धोनी फैन है। मगर इस बार सरवनन का मन खराब है क्योंकि उनके भगवान ने अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। खैर, हरि को इन सब की चिंता नहीं है। और जिसके सर पर ऐसे महान क्रिकेटर का हाथ हो, उसे किस बात की फिक्र!
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Patna: पटना में स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर तैयारी कर ली गई है. इसे लेकर कई मार्गों पर आवागमन बंद रहेंगे. शहर की यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है. 15 अगस्त की सुबह 7 बजे से समारोह की समाप्ति तक शहर के 8 मार्गों पर वाहनों की आवाजाही नहीं होगी.
वाहनों को रोकने के लिए हर जगह पुलिस तैनात रहेंगे. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. गांधी मैदान का पश्चिमी गेट नंबर 1 राज्यपाल, सीएम और उपमुख्यमंत्री के लिए आरक्षित है. देशरत्न मार्ग से डाकबंगला चौराहा, फ्रेजर रोड, डाकबंगला चौराहा, जेपी गोलंबर, चिल्ड्रेन पार्क और करगिल चौक पर सुबह 7 बजे से कार्यक्रम की समाप्ति तक सभी प्रकार के वाहनों की पार्किंग पर रोक है. यातायात प्रतिबंध के बारे में ट्रैफिक एसपी और जिला प्रशासन की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है.
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Patna: पटना में स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर तैयारी कर ली गई है. इसे लेकर कई मार्गों पर आवागमन बंद रहेंगे. शहर की यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है. पंद्रह अगस्त की सुबह सात बजे से समारोह की समाप्ति तक शहर के आठ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही नहीं होगी. वाहनों को रोकने के लिए हर जगह पुलिस तैनात रहेंगे. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. गांधी मैदान का पश्चिमी गेट नंबर एक राज्यपाल, सीएम और उपमुख्यमंत्री के लिए आरक्षित है. देशरत्न मार्ग से डाकबंगला चौराहा, फ्रेजर रोड, डाकबंगला चौराहा, जेपी गोलंबर, चिल्ड्रेन पार्क और करगिल चौक पर सुबह सात बजे से कार्यक्रम की समाप्ति तक सभी प्रकार के वाहनों की पार्किंग पर रोक है. यातायात प्रतिबंध के बारे में ट्रैफिक एसपी और जिला प्रशासन की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है.
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१०।१२०।६।) इत्यादि से भी स्पष्ट है । इसी परम- अक्षर-भाव से थरादेव परमलोकात्मक-अमृतलोक प्रमाणित हो रहे है । ठीक इस के विपरीत इसी अथर्वा के केवल अथवभृगु के प्रवर्ग्यभूत म्वन्द्रमा अपनी क्षरप्रधानता से मृत्युधर्मा प्रमाणित हो रहे हैं । अतएव क्षुरप्रधान चान्द्रसम्वत्सर के अग्निवायु- आदित्य चन्द्रमा नामक चारो ही स्तौम्य-लोकविवत्त' 'मृत्यु' कहलाए है, जैसा कि-'त एव मृत्यवोयद॒ग्निर्वायु-रादित्यश्चन्द्रमाः । ते ह पुरुपं जायमानमेव मृत्युपाशैरभिदधति' ( जै० उप० ४६ । ) - 'एव चै मृत्युर्यत्सम्बत्सरः- चान्द्रः (शत० १० १४ । ३ (१) इत्यादि से स्पष्ट है ।
४७८ - पुनर्म्मार-कामप्र प्रशोकमहिम-नामक लोकों का संस्मरण, एवं अमृत मृत्यु लोकों का स्वरूप-समन्वय -
वस्तुस्थिति ऐसी है कि, पञ्चपर्वा विश्व में 'स्वयम्भू' तथा 'परमेष्ठी', इन दो लोको का एक अमृतलोक विभाग हैं, जो कि वैदिक परिभाषा में पर' लोक कहलाया है, जिस का परमेष्ठी-विवर्त्त' 'कामप्रलोक' कहलाया है, एवं स्वयम्भू विवर्त्त' 'अशोकमहिम' कहलाया है । इस ओर के चन्द्रमा, तथा मूपिण्ड, इन दो लोको का एक मृत्युलोक - विभाग है। द्विपत्मक, किंवा द्विलोकात्मक अमृतलोक विश्वमध्यस्थ सूर्य्य से परस्तात् (ऊपर) है, एवं द्विपर्व-द्विलोकात्मक मृत्युलोक सूर्य सेवा (नीचे) है । स्वयं सूर्य्य अपने अक्षरात्मक अमृतप्राणधर्म से परस्तात् बनता हुआ अमृतलोक है, तो यही अपने क्षरात्मक मर्त्यक्षरधर्मं से वस्तात् बनता हुया मृत्युलोक भी है । उस ओर की अमृतलोकद्वयी का, तथा इस ओर की मृत्युलोकद्वय का अपनी मध्यस्थिति से नियमन रखता हुआ मध्यस्थ सूर्य्य अमृत भी है, मृत्यु भी है, जैसा कि'कृष्णेन रजसा वर्त्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यञ्च इत्यादि यजुर्म्मन्त्र से प्रमाणित है ।
४७६-अमृता लोकत्रयी, और मर्त्या लोकत्रयी, एवं-' इमं च लोकं - परमं च लोकम्' इत्यादि मन्त्रभाग का तात्त्विक - समन्वयअमृत सूर्य्य से नीचे नीचे मर्त्यभूत सूर्य-चन्द्रमा भूपिण्ड तीनों मर्त्यलोक हैं, जैसा कि- 'तद्यत्किञ्चार्वाचीन मादित्यात् ( अमृतसूत्) - सर्वं तन्मृत्युनाऽऽप्तम्' इत्यादि से स्पष्ट है । एवं इस मृत्युसंस्थान से ऊपर के अमृतसूर्ग्य-परमेष्ठी स्वयम्भू- इन तीनो की समष्टि ही 'अमृतलोक' है । यो अमृत-मृत्यु ~ नामक इम-परमं रूप दो लोको के तीन तीन वरलोक वन रहे हैं। अमृता-लोकत्रयी का प्रधानमध्यस्थ भाव मन्यस्थ परमेष्ठीरूर अथर्वाङ्गिरादेव है, तो मर्त्यो लोकत्रयी का प्रधान - मध्यस्थ - भाव मभ्यस्थ चन्द्रमारूप अथर्वा है । यो मध्यस्थता से दोनो अथर्वातत्त्व अमृतलोकत्रयरूप 'परमलोक' तथा मर्त्यलोकत्रयीरूप 'इमलोक' के संग्राहक बन रहे हैं । जिसप्रकार अथर्वाङ्गिरा, तथा अथर्वा काल में प्रतिष्ठित है, तथैव इन दोनों के द्वारा परिग्रहीत अमृत-मर्त्यलोक भी वाल में ही प्रतिष्ठित हैं इन दोनो मध्यस्थो के माध्यम से । 'इमं च लोकं, परमं च लोकम' इस मन्त्रभाग का यही अगर्थ-समन्वय है, जैसाकि
परिलेख से स्पष्ट है ।
* - यन्न दुःखेन सम्भिन्न यच्च ग्रस्तम नन्तरम्
अभिलपोपनीतं च तत्पदं स्त्रः-पदास्पदम् ॥ (स्वयम्भूः) ।
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दस।एक सौ बीस।छः।) इत्यादि से भी स्पष्ट है । इसी परम- अक्षर-भाव से थरादेव परमलोकात्मक-अमृतलोक प्रमाणित हो रहे है । ठीक इस के विपरीत इसी अथर्वा के केवल अथवभृगु के प्रवर्ग्यभूत म्वन्द्रमा अपनी क्षरप्रधानता से मृत्युधर्मा प्रमाणित हो रहे हैं । अतएव क्षुरप्रधान चान्द्रसम्वत्सर के अग्निवायु- आदित्य चन्द्रमा नामक चारो ही स्तौम्य-लोकविवत्त' 'मृत्यु' कहलाए है, जैसा कि-'त एव मृत्यवोयद॒ग्निर्वायु-रादित्यश्चन्द्रमाः । ते ह पुरुपं जायमानमेव मृत्युपाशैरभिदधति' - 'एव चै मृत्युर्यत्सम्बत्सरः- चान्द्रः इत्यादि से स्पष्ट है । चार सौ अठहत्तर - पुनर्म्मार-कामप्र प्रशोकमहिम-नामक लोकों का संस्मरण, एवं अमृत मृत्यु लोकों का स्वरूप-समन्वय - वस्तुस्थिति ऐसी है कि, पञ्चपर्वा विश्व में 'स्वयम्भू' तथा 'परमेष्ठी', इन दो लोको का एक अमृतलोक विभाग हैं, जो कि वैदिक परिभाषा में पर' लोक कहलाया है, जिस का परमेष्ठी-विवर्त्त' 'कामप्रलोक' कहलाया है, एवं स्वयम्भू विवर्त्त' 'अशोकमहिम' कहलाया है । इस ओर के चन्द्रमा, तथा मूपिण्ड, इन दो लोको का एक मृत्युलोक - विभाग है। द्विपत्मक, किंवा द्विलोकात्मक अमृतलोक विश्वमध्यस्थ सूर्य्य से परस्तात् है, एवं द्विपर्व-द्विलोकात्मक मृत्युलोक सूर्य सेवा है । स्वयं सूर्य्य अपने अक्षरात्मक अमृतप्राणधर्म से परस्तात् बनता हुआ अमृतलोक है, तो यही अपने क्षरात्मक मर्त्यक्षरधर्मं से वस्तात् बनता हुया मृत्युलोक भी है । उस ओर की अमृतलोकद्वयी का, तथा इस ओर की मृत्युलोकद्वय का अपनी मध्यस्थिति से नियमन रखता हुआ मध्यस्थ सूर्य्य अमृत भी है, मृत्यु भी है, जैसा कि'कृष्णेन रजसा वर्त्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यञ्च इत्यादि यजुर्म्मन्त्र से प्रमाणित है । चार सौ छिहत्तर-अमृता लोकत्रयी, और मर्त्या लोकत्रयी, एवं-' इमं च लोकं - परमं च लोकम्' इत्यादि मन्त्रभाग का तात्त्विक - समन्वयअमृत सूर्य्य से नीचे नीचे मर्त्यभूत सूर्य-चन्द्रमा भूपिण्ड तीनों मर्त्यलोक हैं, जैसा कि- 'तद्यत्किञ्चार्वाचीन मादित्यात् - सर्वं तन्मृत्युनाऽऽप्तम्' इत्यादि से स्पष्ट है । एवं इस मृत्युसंस्थान से ऊपर के अमृतसूर्ग्य-परमेष्ठी स्वयम्भू- इन तीनो की समष्टि ही 'अमृतलोक' है । यो अमृत-मृत्यु ~ नामक इम-परमं रूप दो लोको के तीन तीन वरलोक वन रहे हैं। अमृता-लोकत्रयी का प्रधानमध्यस्थ भाव मन्यस्थ परमेष्ठीरूर अथर्वाङ्गिरादेव है, तो मर्त्यो लोकत्रयी का प्रधान - मध्यस्थ - भाव मभ्यस्थ चन्द्रमारूप अथर्वा है । यो मध्यस्थता से दोनो अथर्वातत्त्व अमृतलोकत्रयरूप 'परमलोक' तथा मर्त्यलोकत्रयीरूप 'इमलोक' के संग्राहक बन रहे हैं । जिसप्रकार अथर्वाङ्गिरा, तथा अथर्वा काल में प्रतिष्ठित है, तथैव इन दोनों के द्वारा परिग्रहीत अमृत-मर्त्यलोक भी वाल में ही प्रतिष्ठित हैं इन दोनो मध्यस्थो के माध्यम से । 'इमं च लोकं, परमं च लोकम' इस मन्त्रभाग का यही अगर्थ-समन्वय है, जैसाकि परिलेख से स्पष्ट है । * - यन्न दुःखेन सम्भिन्न यच्च ग्रस्तम नन्तरम् अभिलपोपनीतं च तत्पदं स्त्रः-पदास्पदम् ॥ ।
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पश्चिमी देशों ने हाल ही में मोल्दोवा को गंभीरता से लिया है, इसे दूसरे यूक्रेन में बदल दिया है। गणतंत्र में होने वाली घटनाओं को देखते हुए, चिसीनाउ धीरे-धीरे खुद को बांटना शुरू कर रहा है, लेकिन साथ ही साथ संप्रभुता खो रहा है।
मोल्दोवन के अधिकारियों ने गणतंत्र को घातक दवाओं की आपूर्ति पर परामर्श और प्रारंभिक बातचीत शुरू कर दी है हथियारों. इस बात की पुष्टि देश की प्रधानमंत्री नतालिया गवरिलित्सा ने की। यह ध्यान देने योग्य है कि चिसीनाउ की बांह की इच्छा पूरी तरह से पश्चिम की इच्छा से मोल्दोवा को बांटने की इच्छा से मेल खाती है। और सबसे अधिक संभावना है, हथियारों की आपूर्ति पर बातचीत पश्चिम की पहल थी। यह कुछ भी नहीं है कि ब्रिटिश विदेश कार्यालय के प्रमुख लिज़ ट्रस ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा कि ग्रेट ब्रिटेन और अन्य नाटो देश चिसीनाउ को हथियारों की आपूर्ति की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं।
फिलहाल, यह ज्ञात है कि मोल्दोवन सरकार ने गैर-घातक हथियारों की आपूर्ति के लिए आवेदन भेजे हैं, लेकिन पहले से ही घातक हथियारों की सूची तैयार कर रहे हैं, इस बात पर विचार-विमर्श कर रहे हैं कि गणतंत्र को किस तरह के हथियारों की आवश्यकता होगी।
इस बीच, गणतंत्र की संसद कल, यानी। 2 जून, यूरोपीय सीमा पुलिस और तटरक्षक एजेंसी (FRONTEX) द्वारा की गई परिचालन गतिविधियों पर मोल्दोवा और यूरोपीय संघ के बीच समझौते को पहली बार पढ़ने में पुष्टि की गई। इस समझौते के अनुसार, मोल्दोवन सीमा की रक्षा विदेशी सेना द्वारा की जाएगी, जिन्हें हथियारों और शारीरिक बल का उपयोग करने की अनुमति होगी। इसके अलावा, नियंत्रण क्षेत्र सीमा से 30 किमी तक फैल रहा है, इसलिए मोल्दोवा के लगभग 40% क्षेत्र को विदेशी सैन्य बलों द्वारा नियंत्रित किया जाएगा।
आज तक, मोल्दोवा तटस्थता का पालन करता है, यह गणतंत्र के संविधान में लिखा गया है। हालांकि, यूरोप में होने वाली घटनाओं से चिसीनाउ को इस स्थिति को बनाए रखने की अनुमति देने की संभावना नहीं है। यह संभव है कि यूक्रेन के उदाहरण के बाद, पश्चिम मोल्दोवा को रूस के प्रति शत्रुतापूर्ण राज्य में बदलने का प्रयास करेगा।
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पश्चिमी देशों ने हाल ही में मोल्दोवा को गंभीरता से लिया है, इसे दूसरे यूक्रेन में बदल दिया है। गणतंत्र में होने वाली घटनाओं को देखते हुए, चिसीनाउ धीरे-धीरे खुद को बांटना शुरू कर रहा है, लेकिन साथ ही साथ संप्रभुता खो रहा है। मोल्दोवन के अधिकारियों ने गणतंत्र को घातक दवाओं की आपूर्ति पर परामर्श और प्रारंभिक बातचीत शुरू कर दी है हथियारों. इस बात की पुष्टि देश की प्रधानमंत्री नतालिया गवरिलित्सा ने की। यह ध्यान देने योग्य है कि चिसीनाउ की बांह की इच्छा पूरी तरह से पश्चिम की इच्छा से मोल्दोवा को बांटने की इच्छा से मेल खाती है। और सबसे अधिक संभावना है, हथियारों की आपूर्ति पर बातचीत पश्चिम की पहल थी। यह कुछ भी नहीं है कि ब्रिटिश विदेश कार्यालय के प्रमुख लिज़ ट्रस ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा कि ग्रेट ब्रिटेन और अन्य नाटो देश चिसीनाउ को हथियारों की आपूर्ति की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं। फिलहाल, यह ज्ञात है कि मोल्दोवन सरकार ने गैर-घातक हथियारों की आपूर्ति के लिए आवेदन भेजे हैं, लेकिन पहले से ही घातक हथियारों की सूची तैयार कर रहे हैं, इस बात पर विचार-विमर्श कर रहे हैं कि गणतंत्र को किस तरह के हथियारों की आवश्यकता होगी। इस बीच, गणतंत्र की संसद कल, यानी। दो जून, यूरोपीय सीमा पुलिस और तटरक्षक एजेंसी द्वारा की गई परिचालन गतिविधियों पर मोल्दोवा और यूरोपीय संघ के बीच समझौते को पहली बार पढ़ने में पुष्टि की गई। इस समझौते के अनुसार, मोल्दोवन सीमा की रक्षा विदेशी सेना द्वारा की जाएगी, जिन्हें हथियारों और शारीरिक बल का उपयोग करने की अनुमति होगी। इसके अलावा, नियंत्रण क्षेत्र सीमा से तीस किमी तक फैल रहा है, इसलिए मोल्दोवा के लगभग चालीस% क्षेत्र को विदेशी सैन्य बलों द्वारा नियंत्रित किया जाएगा। आज तक, मोल्दोवा तटस्थता का पालन करता है, यह गणतंत्र के संविधान में लिखा गया है। हालांकि, यूरोप में होने वाली घटनाओं से चिसीनाउ को इस स्थिति को बनाए रखने की अनुमति देने की संभावना नहीं है। यह संभव है कि यूक्रेन के उदाहरण के बाद, पश्चिम मोल्दोवा को रूस के प्रति शत्रुतापूर्ण राज्य में बदलने का प्रयास करेगा।
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पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा ने दिग्विजय सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि सतयुग में लक्ष्मण अपने भाई राम के लिए वनवास गए थे, लेकिन मध्यप्रदेश में इस बार लक्ष्मण को भाई के प्रभाव वाली सरकार ने वनवास भेज दिया है.
पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा ने राज्य की कमलनाथ सरकार चाचौड़ा को जिला बनाने की कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह द्वारा उठाई जा रही मांग को लेकर घेरा. उन्होंने दिग्विजय सिंह पर भी तंज कसते हुए कहा कि भाई के प्रभाव वाली सरकार ने भाई को ही वनवास भेज दिया. मिश्रा ने कहा कि जिन्हें संजीवनी बूटी देनी है, वही अपने भाई पर मारक शक्ति चला रहे हैं.
पूर्व मंत्री मिश्रा ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि कांग्रेस विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्णम सिंह द्वारा चाचौड़ा को जिला बनाने की मांग को लेकर निकाली जा रही पदयात्रा को लेकर कहा कि कमलनाथ सरकार अपने ही विधायक की नहीं सुन रही है. उन्होंने कहा कि चाचौड़ा को जल्द जिला बनाया जाना चाहिए.
मिश्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि सतयुग में लक्ष्मण अपने भाई राम के लिए वनवास गए थे, लेकिन मध्यप्रदेश में इस बार लक्ष्मण को भाई के प्रभाव वाली सरकार ने वनवास भेज दिया है. उन्होंने कहा कि जिन्हें संजीवनी बूटी देनी है, वही अपने भाई पर मारक शक्ति चला रहे हैं. मिश्रा ने कहा कि एक तरफ तो प्रदेश सरकार के मंत्री कहते हैं सरकार पर्दे के पीछे से दिग्विजय सिंह ही चला रहे हैं, तो फिर वह कैसी सरकार चला रहे हैं जो अपने भाई की मांग को ही पूरा नहीं कर पा रहे हैं.
गौरतलब है कि कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह चाचौड़ा को जिला बनाए जाने की मांग को लेकर पदयात्रा कर रहे हैं. उनकी यह पदयात्रा 65 किलोमीटर की होगी. इसके पूर्व लक्ष्मण सिंह इसी मांग को लेकर अपने भाई और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भोपाल स्थित शासकीय आवास पर धरने पर भी बैठे थे. इसके अलावा मुख्यमंत्री कमलनाथ से भी वे इस मांग को लेकर चर्चा कर चुके हैं. इसके बाद भी जब मांग पूरी नहीं हुई तो वे फिर से इसी मांग को लेकर पदयात्रा पर निकले हैं.
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पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा ने दिग्विजय सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि सतयुग में लक्ष्मण अपने भाई राम के लिए वनवास गए थे, लेकिन मध्यप्रदेश में इस बार लक्ष्मण को भाई के प्रभाव वाली सरकार ने वनवास भेज दिया है. पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा ने राज्य की कमलनाथ सरकार चाचौड़ा को जिला बनाने की कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह द्वारा उठाई जा रही मांग को लेकर घेरा. उन्होंने दिग्विजय सिंह पर भी तंज कसते हुए कहा कि भाई के प्रभाव वाली सरकार ने भाई को ही वनवास भेज दिया. मिश्रा ने कहा कि जिन्हें संजीवनी बूटी देनी है, वही अपने भाई पर मारक शक्ति चला रहे हैं. पूर्व मंत्री मिश्रा ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि कांग्रेस विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्णम सिंह द्वारा चाचौड़ा को जिला बनाने की मांग को लेकर निकाली जा रही पदयात्रा को लेकर कहा कि कमलनाथ सरकार अपने ही विधायक की नहीं सुन रही है. उन्होंने कहा कि चाचौड़ा को जल्द जिला बनाया जाना चाहिए. मिश्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि सतयुग में लक्ष्मण अपने भाई राम के लिए वनवास गए थे, लेकिन मध्यप्रदेश में इस बार लक्ष्मण को भाई के प्रभाव वाली सरकार ने वनवास भेज दिया है. उन्होंने कहा कि जिन्हें संजीवनी बूटी देनी है, वही अपने भाई पर मारक शक्ति चला रहे हैं. मिश्रा ने कहा कि एक तरफ तो प्रदेश सरकार के मंत्री कहते हैं सरकार पर्दे के पीछे से दिग्विजय सिंह ही चला रहे हैं, तो फिर वह कैसी सरकार चला रहे हैं जो अपने भाई की मांग को ही पूरा नहीं कर पा रहे हैं. गौरतलब है कि कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह चाचौड़ा को जिला बनाए जाने की मांग को लेकर पदयात्रा कर रहे हैं. उनकी यह पदयात्रा पैंसठ किलोग्राममीटर की होगी. इसके पूर्व लक्ष्मण सिंह इसी मांग को लेकर अपने भाई और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भोपाल स्थित शासकीय आवास पर धरने पर भी बैठे थे. इसके अलावा मुख्यमंत्री कमलनाथ से भी वे इस मांग को लेकर चर्चा कर चुके हैं. इसके बाद भी जब मांग पूरी नहीं हुई तो वे फिर से इसी मांग को लेकर पदयात्रा पर निकले हैं.
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BHAGALPUR: बिहार के हेल्थ सिस्टम को सुधारने के लिए स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव लगातार प्रयासरत है। सिस्टम को सुधारने के लिए तेजस्वी यादव आधी रात को अस्पतालों में छापेमारी करते है। हाल ही में उन्होंने एसकेएमसीएच मजुफ्फरपुर में आधी रात को छापेमारी की थी। बावजुद इसके बिहार का स्वास्थ्य विभाग सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला पूर्वी बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज का है। जहां डॉक्टर साहब ने एक बच्ची का घुटना काटने के बजाय पूरा पैर ही काट दिया। इस घटना के बाद परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगा कर अस्पताल में जमकर बवाल काटा।
दरअसल, बांका जिले के धोरैया थाना क्षेत्र के पंजवारा रामकोल के रहने वाले मनोहर कुमार पंडित अपनी 11 साल की बच्ची पूजा कुमारी को 20 अप्रैल को इलाज के लिए जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा अस्पताल में भर्ती कराए थे। बताया जा रहा कि 18 अप्रैल को पूजा को तेज रफ्तार बोलेरो ने धक्का मार दिया था। जिसमें वह घायल हो गई थी और यहां उसे हड्डी विभाग में एडमिट किया गया था।
बता दें कि, आज यानी बुधवार को पूजा का ऑपरेशन डॉक्टरों ने किया। जिसमें बच्ची का एक पैर जांघ के पास से काटकर अलग कर दिया और कटे हुए भाग को अस्पताल के पीछे फेंक दिया गया था। वहीं जब परिजन को यह पता चला तब पिता बच्ची का कटा हुआ पैर अस्पताल के पीछे से खोज कर लाया और अस्पताल अधीक्षक के कार्यालय के सामने जमकर हंगामा किया।
बच्ची के पिता का कहना है कि डॉक्टर के द्वारा कहा गया था कि घुटना के नीचे से पैर काटा जाएगा। लेकिन डॉक्टरों के द्वारा ऑपरेशन में जांघ के पास से पैर काट दिया है। जिसको लेकर पिता डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
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BHAGALPUR: बिहार के हेल्थ सिस्टम को सुधारने के लिए स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव लगातार प्रयासरत है। सिस्टम को सुधारने के लिए तेजस्वी यादव आधी रात को अस्पतालों में छापेमारी करते है। हाल ही में उन्होंने एसकेएमसीएच मजुफ्फरपुर में आधी रात को छापेमारी की थी। बावजुद इसके बिहार का स्वास्थ्य विभाग सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला पूर्वी बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज का है। जहां डॉक्टर साहब ने एक बच्ची का घुटना काटने के बजाय पूरा पैर ही काट दिया। इस घटना के बाद परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगा कर अस्पताल में जमकर बवाल काटा। दरअसल, बांका जिले के धोरैया थाना क्षेत्र के पंजवारा रामकोल के रहने वाले मनोहर कुमार पंडित अपनी ग्यारह साल की बच्ची पूजा कुमारी को बीस अप्रैल को इलाज के लिए जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा अस्पताल में भर्ती कराए थे। बताया जा रहा कि अट्ठारह अप्रैल को पूजा को तेज रफ्तार बोलेरो ने धक्का मार दिया था। जिसमें वह घायल हो गई थी और यहां उसे हड्डी विभाग में एडमिट किया गया था। बता दें कि, आज यानी बुधवार को पूजा का ऑपरेशन डॉक्टरों ने किया। जिसमें बच्ची का एक पैर जांघ के पास से काटकर अलग कर दिया और कटे हुए भाग को अस्पताल के पीछे फेंक दिया गया था। वहीं जब परिजन को यह पता चला तब पिता बच्ची का कटा हुआ पैर अस्पताल के पीछे से खोज कर लाया और अस्पताल अधीक्षक के कार्यालय के सामने जमकर हंगामा किया। बच्ची के पिता का कहना है कि डॉक्टर के द्वारा कहा गया था कि घुटना के नीचे से पैर काटा जाएगा। लेकिन डॉक्टरों के द्वारा ऑपरेशन में जांघ के पास से पैर काट दिया है। जिसको लेकर पिता डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
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Audi A8 L लग्जरी सेडान को भारतीय बाजार में 2020 में 1.56 करोड़ रुपए (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर पेश किया गया था. इस कार को भारत में एक लंबा व्हील-बेस वेरिएंट मिलता है.
बॉलीवुड ऐक्ट्रेस कियारा आडवाणी अपने घर में एक काले रंग की ऑडी ए8 एल (Audi A8 L) लक्जरी सेडान लेकर आई हैं, जो उनके लक्जरी कार कलेक्शन को और ज्यादा बेहतर बना रही है जिसमें बीएमडब्ल्यू एक्स5, मर्सिडीज-बेंज ई-क्लास और बीएमडब्ल्यू 530डी शामिल हैं. ऑडी इंडिया ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर ऐक्ट्रेस की नई कार के साथ पोज देते हुए एक तस्वीर पोस्ट की है.
एक और तस्वीर में ऑडी इंडिया के हेड बलबीर सिंह ढिल्लों को फूलों के गुलदस्ते के साथ ऑडी फैमिली में किआ आडवाणी का स्वागत करते हुए दिखाया गया है. उन्होंने कहा, "प्रोग्रेस और क्रिएटिविटी साथ-साथ चलती है. ऑडी एक्सपीरियंस में @advani_kiara का स्वागत करते हुए हमें खुशी हो रही है." ऑडी A8 L लग्जरी सेडान को भारतीय बाजार में 2020 में 1.56 करोड़ रुपए (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर पेश किया गया था. जर्मन कार मेकर की अल्ट्रा प्रीमियम पेशकश को देश में एक लंबा व्हील-बेस वेरिएंट मिलता है. यह तीन-लीटर वाले V6 पेट्रोल इंजन पर चलता है जो 10Ah लिथियम आयन बैटरी के साथ एक इलेक्ट्रिक मोटर से जुड़ा है.
चौथी जनरेशन के मॉडल में स्लीक एलईडी हेड लाइट के साथ सिंगल-फ्रेम ग्रिल है जो लक्जरी सेडान को एक स्पोर्टी के साथ-साथ एक रिफाइन लुक देता है. यह सेडान 19 इंच के आकर्षक अलॉय पर ड्राइव ऑफर करती है और चारों ओर कैरेक्टर लाइन्स पेश करती है. यह कई प्रीमियम फीचर्स के साथ आता है जैसे पीछे के पैसेंजर्स के लिए एक कस्टमाइज फुट मसाज, हीट फंक्शनैलिटी, सामने की सीट के पीछे दो डिटैचेबल एंड्रॉयड टैबलेट, एम्बिएंट लाइट, लिक्विड चीजें रखने के लिए बॉक्स मिलता है.
A8 L के केबिन में 10.1 इंच का टचस्क्रीन डिस्प्ले, मैट्रिक्स एलईडी रीडिंग लाइट और रियर-सीट रिमोट कंट्रोल सिस्टम भी दिया है. सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो Audi A8 L में दो ऑप्शनल सेंटर एयरबैग, एक्टिव हेड रेस्ट्रेंस, EBD के साथ ABS, लेन असिस्ट वॉर्निंग सिस्टम एक 360 डिग्री कैमरा के साथ आठ एयरबैग मिलते हैं.
इस साल अगस्त में, बॉलीवुड डायरेक्टर करण जौहर ने भी एक सिल्वर Audi A8 L खरीदा था. डायरेक्टर के पास मर्सिडीज मेबैक एस500, Jagaur XJL और बीएमडब्ल्यू 570डी भी हैं.
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Audi Aआठ L लग्जरी सेडान को भारतीय बाजार में दो हज़ार बीस में एक.छप्पन करोड़ रुपए की शुरुआती कीमत पर पेश किया गया था. इस कार को भारत में एक लंबा व्हील-बेस वेरिएंट मिलता है. बॉलीवुड ऐक्ट्रेस कियारा आडवाणी अपने घर में एक काले रंग की ऑडी एआठ एल लक्जरी सेडान लेकर आई हैं, जो उनके लक्जरी कार कलेक्शन को और ज्यादा बेहतर बना रही है जिसमें बीएमडब्ल्यू एक्सपाँच, मर्सिडीज-बेंज ई-क्लास और बीएमडब्ल्यू पाँच सौ तीसडी शामिल हैं. ऑडी इंडिया ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर ऐक्ट्रेस की नई कार के साथ पोज देते हुए एक तस्वीर पोस्ट की है. एक और तस्वीर में ऑडी इंडिया के हेड बलबीर सिंह ढिल्लों को फूलों के गुलदस्ते के साथ ऑडी फैमिली में किआ आडवाणी का स्वागत करते हुए दिखाया गया है. उन्होंने कहा, "प्रोग्रेस और क्रिएटिविटी साथ-साथ चलती है. ऑडी एक्सपीरियंस में @advani_kiara का स्वागत करते हुए हमें खुशी हो रही है." ऑडी Aआठ L लग्जरी सेडान को भारतीय बाजार में दो हज़ार बीस में एक.छप्पन करोड़ रुपए की शुरुआती कीमत पर पेश किया गया था. जर्मन कार मेकर की अल्ट्रा प्रीमियम पेशकश को देश में एक लंबा व्हील-बेस वेरिएंट मिलता है. यह तीन-लीटर वाले Vछः पेट्रोल इंजन पर चलता है जो दसAh लिथियम आयन बैटरी के साथ एक इलेक्ट्रिक मोटर से जुड़ा है. चौथी जनरेशन के मॉडल में स्लीक एलईडी हेड लाइट के साथ सिंगल-फ्रेम ग्रिल है जो लक्जरी सेडान को एक स्पोर्टी के साथ-साथ एक रिफाइन लुक देता है. यह सेडान उन्नीस इंच के आकर्षक अलॉय पर ड्राइव ऑफर करती है और चारों ओर कैरेक्टर लाइन्स पेश करती है. यह कई प्रीमियम फीचर्स के साथ आता है जैसे पीछे के पैसेंजर्स के लिए एक कस्टमाइज फुट मसाज, हीट फंक्शनैलिटी, सामने की सीट के पीछे दो डिटैचेबल एंड्रॉयड टैबलेट, एम्बिएंट लाइट, लिक्विड चीजें रखने के लिए बॉक्स मिलता है. Aआठ L के केबिन में दस.एक इंच का टचस्क्रीन डिस्प्ले, मैट्रिक्स एलईडी रीडिंग लाइट और रियर-सीट रिमोट कंट्रोल सिस्टम भी दिया है. सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो Audi Aआठ L में दो ऑप्शनल सेंटर एयरबैग, एक्टिव हेड रेस्ट्रेंस, EBD के साथ ABS, लेन असिस्ट वॉर्निंग सिस्टम एक तीन सौ साठ डिग्री कैमरा के साथ आठ एयरबैग मिलते हैं. इस साल अगस्त में, बॉलीवुड डायरेक्टर करण जौहर ने भी एक सिल्वर Audi Aआठ L खरीदा था. डायरेक्टर के पास मर्सिडीज मेबैक एसपाँच सौ, Jagaur XJL और बीएमडब्ल्यू पाँच सौ सत्तरडी भी हैं.
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वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में हुए हादसे के बाद यहां अब कॉरिडोर बनने की संभावना प्रबल होती दिखाई दे रही है। हालांकि कॉरिडोर बनने की चर्चा बहुत पहले से चल रही है। कॉरिडोर बनने की चर्चाओं पर मुहर कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण ने लगा दी।
बांके बिहारी मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए शासन की तरफ से अपर मुख्य सचिव धर्मार्थ कार्य अवनीश अवस्थी ने 5 बिन्दुओं पर जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। जिला अधिकारी को पत्र मिलने के बाद डीएम ने अपर नगर आयुक्त नगर निगम, सीओ सदर,तहसीलदार और मंदिर प्रबंधक से जल्द से जल्द बिंदुवार जानकारी मांगी गई। हालांकि इस पत्र को लेकर कोई भी अधिकारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं है।
प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि शासन की तरफ से जिन 5 बिन्दुओं पर रिपोर्ट मांगी है। उनमें राजस्व अभिलेखों में मंदिर की स्थिति, नगर निगम मथुरा वृंदावन के अभिलेखों में मंदिर की स्थिति, बिजली के कनेक्शन का विवरण, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण उनको दर्शनों में होने वाली दिक्कतों के समाधान के लिए टिप्पणी और मंदिर का क्षेत्रफल और सामान्य दिनों में मंदिर के खुलने के समय को लेकर टिप्पणी मांगी गई है।
शासन द्वारा मांगी सूचना के बाद जिला प्रशासन की तरफ से मंदिर प्रबंधक को पत्र भेजकर जानकारी मांगी गई थी। इसके बाद मंदिर प्रबंधक ने सभी गोस्वामियों से शासन द्वारा 5 बिन्दुओं पर मांगी रिपोर्ट पर सूचना पत्र जारी कर जानकारी मांगी गई। जानकारी के अनुसार 4 अगस्त को शासन ने जिला प्रशासन को पत्र लिखा।
6 अगस्त को जिला प्रशासन ने मंदिर प्रबंधन और अन्य अधिकारियों को पत्र लिख कर जानकारी मांगी। मंदिर प्रबंधन ने 7 अगस्त को गोस्वामियों से 2 दिन में रिपोर्ट मांगी। हालांकि इस रिपोर्ट का क्या रहा इस पर कोई बोलने को तैयार नहीं है।
बांके बिहारी मंदिर में हुए हादसे के बाद रविवार की रात को हादसे के कारणों को जानने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार में गन्ना विकास और चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण बांके बिहारी मंदिर पहुंचे। यहां मंत्री ने मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि पिछली बार योगी सरकार में जब उन पर विभाग था उसी समय भूमिका बना दी थी।
इस बार की योगी सरकार में पिछली दो कैबिनेट की हुई मीटिंग में यहां के कॉरिडोर को लेकर डिस्कस भी हुआ। यहां से लेकर यमुना जी तक इतना विशाल कॉरिडोर बनेगा जो काशी विश्वनाथ में है बाबा का उससे भी ज्यादा।
कैबिनेट मंत्री ने बताया की जो कॉरिडोर बनेगा वह इतना विशाल होगा कि उसमें एक बार में 60 से 70 हजार श्रद्धालु आ सकें। अभी बिहारी जी के आंगन की क्षमता लगभग 800 श्रद्धालुओं की है और आते हैं दस गुना से ज्यादा। इस पर भी गोस्वामी समाज से बात करके इस आंगन की क्षमता 5 हजार के करीब हो इस पर मंथन किया जायेगा।
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वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में हुए हादसे के बाद यहां अब कॉरिडोर बनने की संभावना प्रबल होती दिखाई दे रही है। हालांकि कॉरिडोर बनने की चर्चा बहुत पहले से चल रही है। कॉरिडोर बनने की चर्चाओं पर मुहर कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी नारायण ने लगा दी। बांके बिहारी मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए शासन की तरफ से अपर मुख्य सचिव धर्मार्थ कार्य अवनीश अवस्थी ने पाँच बिन्दुओं पर जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। जिला अधिकारी को पत्र मिलने के बाद डीएम ने अपर नगर आयुक्त नगर निगम, सीओ सदर,तहसीलदार और मंदिर प्रबंधक से जल्द से जल्द बिंदुवार जानकारी मांगी गई। हालांकि इस पत्र को लेकर कोई भी अधिकारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि शासन की तरफ से जिन पाँच बिन्दुओं पर रिपोर्ट मांगी है। उनमें राजस्व अभिलेखों में मंदिर की स्थिति, नगर निगम मथुरा वृंदावन के अभिलेखों में मंदिर की स्थिति, बिजली के कनेक्शन का विवरण, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण उनको दर्शनों में होने वाली दिक्कतों के समाधान के लिए टिप्पणी और मंदिर का क्षेत्रफल और सामान्य दिनों में मंदिर के खुलने के समय को लेकर टिप्पणी मांगी गई है। शासन द्वारा मांगी सूचना के बाद जिला प्रशासन की तरफ से मंदिर प्रबंधक को पत्र भेजकर जानकारी मांगी गई थी। इसके बाद मंदिर प्रबंधक ने सभी गोस्वामियों से शासन द्वारा पाँच बिन्दुओं पर मांगी रिपोर्ट पर सूचना पत्र जारी कर जानकारी मांगी गई। जानकारी के अनुसार चार अगस्त को शासन ने जिला प्रशासन को पत्र लिखा। छः अगस्त को जिला प्रशासन ने मंदिर प्रबंधन और अन्य अधिकारियों को पत्र लिख कर जानकारी मांगी। मंदिर प्रबंधन ने सात अगस्त को गोस्वामियों से दो दिन में रिपोर्ट मांगी। हालांकि इस रिपोर्ट का क्या रहा इस पर कोई बोलने को तैयार नहीं है। बांके बिहारी मंदिर में हुए हादसे के बाद रविवार की रात को हादसे के कारणों को जानने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार में गन्ना विकास और चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण बांके बिहारी मंदिर पहुंचे। यहां मंत्री ने मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि पिछली बार योगी सरकार में जब उन पर विभाग था उसी समय भूमिका बना दी थी। इस बार की योगी सरकार में पिछली दो कैबिनेट की हुई मीटिंग में यहां के कॉरिडोर को लेकर डिस्कस भी हुआ। यहां से लेकर यमुना जी तक इतना विशाल कॉरिडोर बनेगा जो काशी विश्वनाथ में है बाबा का उससे भी ज्यादा। कैबिनेट मंत्री ने बताया की जो कॉरिडोर बनेगा वह इतना विशाल होगा कि उसमें एक बार में साठ से सत्तर हजार श्रद्धालु आ सकें। अभी बिहारी जी के आंगन की क्षमता लगभग आठ सौ श्रद्धालुओं की है और आते हैं दस गुना से ज्यादा। इस पर भी गोस्वामी समाज से बात करके इस आंगन की क्षमता पाँच हजार के करीब हो इस पर मंथन किया जायेगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को बेहतर सेहत के लिए रोजाना आहार में पौष्टिक और तमाम पोषक तत्वों से भरपूर आहार को शामिल करने की सलाह देते हैं। आहार में विटामिन्स, प्रोटीन्स और खनिजों के साथ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना भी बहुत आवश्यक माना जाता है। एंटीऑक्सीडेंट शक्तिशाली यौगिक होते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से सुरक्षित रखने और कोशिकाओं की क्षति से बचाते हैं। ऑक्सीकरण की प्रक्रिया के कारण कोशिकाओं को क्षति होने का जोखिम होता है, ऐसे में एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य का सेवन कैंसर, डायबिटीज और गंभीर जानलेवा संक्रमण से सुरक्षित रखने में आपकी मदद कर सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कई प्रकार के फलों और सब्जियों सहित कई अन्य खाद्य पदार्थों में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। कुछ एंटीऑक्सीडेंट्स का सेवन सप्लीमेंट्स के तौर पर भी किया जाता रहा है, हालांकि आहार के माध्यम से इसकी पूर्ति करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। आइए जानते हैं कि एंटीऑक्सीडेंट वाली चीजों का सेवन करना किस प्रकार से लाभदायक हो सकता है?
एंटीऑक्सीडेंट, कैंसर की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। शोध से पता चलता है कि फ्री रेडिकल्स शरीर में क्रोनिक इंफ्लामेशन की समस्या को बढ़ा देते हैं, जिससे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। एंटीऑक्सीडेंट, इन फ्री रेडिकल्स को ट्रैक करके और उनके हानिकारक प्रभावों को बेअसर करने में मदद करते हैं।
शरीर की कोशिकाओं के स्वस्थ रहने से कैंसर के विकास की आशंका कम हो जाती है। हृदय रोग, अल्जाइमर रोग और मैक्युलर डी-जनरेशन जैसी समस्याओं की रोकथाम में भी एंटीऑक्सीडेंट्स को काफी असरदार माना जाता है। आइए जानते हैं कि इसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है?
विशेषज्ञ शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना सेब खाने की सलाह देते हैं, इसका एक कारण इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट भी मानी जाती है। सेब के सेवन से कई प्रकार के विटामिन्स, फाइबर और खनिजों के साथ एंटीऑक्सीडेंट भी पर्याप्त मात्रा में प्राप्त किया जा सकता है। प्रयोगशाला शोध में पाया गया कि सेब में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और क्वेरसेटिन, कैटेचिन, फ्लोरिडज़िन जैसे फाइटोकेमिकल्स होते हैं, जो कई प्रकार के रोगों से सुरक्षा दे सकते हैं।
अध्ययन बताते हैं कि सूखे मेवे का नियमित सेवन शरीर को कई प्रकार के लाभ दे सकते हैं। अखरोट, पेकान और बादाम जैसे सूखे मेवे ओमेगा-3 और कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स से भी भरपूर होते हैं। सूखे मेवे कई प्रकार के रोगों के जोखिम को कम कर सकते हैं। सूखे मेवे में पाए जाने वाले शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स रोगों से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
डार्क चॉकलेट का सेवन शरीर के लिए कई प्रकार से फायदेमंद हो सकता है। अध्ययन से पता चलता है कि डार्क चॉकलेट एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा समृद्ध स्रोत हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि डार्क चॉकलेट हृदय रोग और कई प्रकार के कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। डार्क चॉकलेट का नियमित सेवन करने से कई तरह के रोगों से सुरक्षा मिल सकती है।
नोटः यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है।
अस्वीकरणः अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को बेहतर सेहत के लिए रोजाना आहार में पौष्टिक और तमाम पोषक तत्वों से भरपूर आहार को शामिल करने की सलाह देते हैं। आहार में विटामिन्स, प्रोटीन्स और खनिजों के साथ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना भी बहुत आवश्यक माना जाता है। एंटीऑक्सीडेंट शक्तिशाली यौगिक होते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से सुरक्षित रखने और कोशिकाओं की क्षति से बचाते हैं। ऑक्सीकरण की प्रक्रिया के कारण कोशिकाओं को क्षति होने का जोखिम होता है, ऐसे में एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य का सेवन कैंसर, डायबिटीज और गंभीर जानलेवा संक्रमण से सुरक्षित रखने में आपकी मदद कर सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कई प्रकार के फलों और सब्जियों सहित कई अन्य खाद्य पदार्थों में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। कुछ एंटीऑक्सीडेंट्स का सेवन सप्लीमेंट्स के तौर पर भी किया जाता रहा है, हालांकि आहार के माध्यम से इसकी पूर्ति करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। आइए जानते हैं कि एंटीऑक्सीडेंट वाली चीजों का सेवन करना किस प्रकार से लाभदायक हो सकता है? एंटीऑक्सीडेंट, कैंसर की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। शोध से पता चलता है कि फ्री रेडिकल्स शरीर में क्रोनिक इंफ्लामेशन की समस्या को बढ़ा देते हैं, जिससे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। एंटीऑक्सीडेंट, इन फ्री रेडिकल्स को ट्रैक करके और उनके हानिकारक प्रभावों को बेअसर करने में मदद करते हैं। शरीर की कोशिकाओं के स्वस्थ रहने से कैंसर के विकास की आशंका कम हो जाती है। हृदय रोग, अल्जाइमर रोग और मैक्युलर डी-जनरेशन जैसी समस्याओं की रोकथाम में भी एंटीऑक्सीडेंट्स को काफी असरदार माना जाता है। आइए जानते हैं कि इसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है? विशेषज्ञ शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना सेब खाने की सलाह देते हैं, इसका एक कारण इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट भी मानी जाती है। सेब के सेवन से कई प्रकार के विटामिन्स, फाइबर और खनिजों के साथ एंटीऑक्सीडेंट भी पर्याप्त मात्रा में प्राप्त किया जा सकता है। प्रयोगशाला शोध में पाया गया कि सेब में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और क्वेरसेटिन, कैटेचिन, फ्लोरिडज़िन जैसे फाइटोकेमिकल्स होते हैं, जो कई प्रकार के रोगों से सुरक्षा दे सकते हैं। अध्ययन बताते हैं कि सूखे मेवे का नियमित सेवन शरीर को कई प्रकार के लाभ दे सकते हैं। अखरोट, पेकान और बादाम जैसे सूखे मेवे ओमेगा-तीन और कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स से भी भरपूर होते हैं। सूखे मेवे कई प्रकार के रोगों के जोखिम को कम कर सकते हैं। सूखे मेवे में पाए जाने वाले शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स रोगों से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। डार्क चॉकलेट का सेवन शरीर के लिए कई प्रकार से फायदेमंद हो सकता है। अध्ययन से पता चलता है कि डार्क चॉकलेट एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा समृद्ध स्रोत हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि डार्क चॉकलेट हृदय रोग और कई प्रकार के कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। डार्क चॉकलेट का नियमित सेवन करने से कई तरह के रोगों से सुरक्षा मिल सकती है। नोटः यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है। अस्वीकरणः अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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TAV एयरपोर्ट 4 जून को यात्रियों का स्वागत करने की तैयारी कर रहा है जिसमें तुर्की में पांच ऑपरेटिंग एयरपोर्ट हैं। कोरोनावायरस के खिलाफ उपाय पूरा हो गया है।
टीएवी हवाई अड्डों द्वारा संचालित अंकारा एसेनोबा, इज़मिर अदनान मेंडेस, मिलास बोड्रम, अलान्या गाज़िपासा और एंटाल्या हवाई अड्डों पर कोरोनोवायरस के खिलाफ किए जाने वाले उपायों की तैयारी पूरी कर ली गई है।
"हम वैज्ञानिकों, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों द्वारा कोरोनवायरस महामारी के खिलाफ सुझाई गई सावधानियों को ठीक से लेते हैं, जो दुनिया भर में विमानन उद्योग को गहराई से प्रभावित करता है। इस प्रक्रिया में, हमारी प्राथमिकता हमारे यात्रियों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य की रक्षा करना था। उड़ान प्रतिबंधों के कारण हमारे हवाई अड्डे मार्च से वाणिज्यिक यात्री यातायात के लिए बंद हो गए हैं। हमने आवश्यक सावधानी बरतते हुए देश में कार्गो और नागरिकों को वापस लाने वाली उड़ानों की सेवा जारी रखी। हम उम्मीद करते हैं कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें जून की शुरुआत में धीरे-धीरे शुरू होंगी। हमने अपने टर्मिनलों पर महामारी प्रमाणन के दायरे में परिकल्पित उपाय किए हैं। हम विदेशों में काम कर रहे अपने हवाई अड्डों और जहां उड़ानें खोली जाती हैं, में अनुभव का उपयोग करके अपने यात्रियों को एक सुरक्षित और आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए काम करेंगे। चूंकि हम हवाई अड्डे के मूल्य श्रृंखला के प्रत्येक लिंक में स्थित हैं, सुरक्षा से लेकर खाद्य और पेय क्षेत्रों तक, निजी यात्री लाउंज से लेकर जमीनी सेवाओं और शुल्क-मुक्त तक, हम यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि हमारे यात्रियों को हर स्तर पर उच्चतम स्तर की सेवा मिले। तुर्की, जो इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संस्कृति और पर्यटन, परिवहन और हमारे स्वास्थ्य मंत्रालय, एसएई का प्रबंधन करता है, और हमारे सभी हितधारकों, विशेष रूप से हमारे DGCA और एयरलाइंस को धन्यवाद देता है, "उन्होंने कहा।
हवाईअड्डा महामारी संबंधी सावधानियों और प्रमाणन परिपत्र के अनुसार, यात्रियों और हवाई अड्डे के श्रमिकों को टर्मिनल के पार अपनी शारीरिक दूरी बनाए रखने में मदद करने के लिए दिशा-निर्देश और चिह्न बनाए गए थे।
यह सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की गई है कि यात्री संपर्क के बिना हर उचित स्तर पर सेवा प्राप्त कर सकें। अक्सर उपयोग किए जाने वाले क्षेत्रों, एक्स-रे उपकरणों और सतहों को पूरे टर्मिनल में नियमित रूप से कीटाणुरहित किया जाएगा।
सभी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के अनुसार प्रशिक्षित किया गया था। सभी हवाई अड्डे मुखौटे के साथ काम करेंगे और, जहां आवश्यक हो, दृष्टि, दस्ताने या उपयुक्त कपड़ों के साथ। पहले चरण में, गैर-यात्रियों को हवाई अड्डों में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और सभी यात्रियों को मास्क पहनना आवश्यक होगा।
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TAV एयरपोर्ट चार जून को यात्रियों का स्वागत करने की तैयारी कर रहा है जिसमें तुर्की में पांच ऑपरेटिंग एयरपोर्ट हैं। कोरोनावायरस के खिलाफ उपाय पूरा हो गया है। टीएवी हवाई अड्डों द्वारा संचालित अंकारा एसेनोबा, इज़मिर अदनान मेंडेस, मिलास बोड्रम, अलान्या गाज़िपासा और एंटाल्या हवाई अड्डों पर कोरोनोवायरस के खिलाफ किए जाने वाले उपायों की तैयारी पूरी कर ली गई है। "हम वैज्ञानिकों, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों द्वारा कोरोनवायरस महामारी के खिलाफ सुझाई गई सावधानियों को ठीक से लेते हैं, जो दुनिया भर में विमानन उद्योग को गहराई से प्रभावित करता है। इस प्रक्रिया में, हमारी प्राथमिकता हमारे यात्रियों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य की रक्षा करना था। उड़ान प्रतिबंधों के कारण हमारे हवाई अड्डे मार्च से वाणिज्यिक यात्री यातायात के लिए बंद हो गए हैं। हमने आवश्यक सावधानी बरतते हुए देश में कार्गो और नागरिकों को वापस लाने वाली उड़ानों की सेवा जारी रखी। हम उम्मीद करते हैं कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें जून की शुरुआत में धीरे-धीरे शुरू होंगी। हमने अपने टर्मिनलों पर महामारी प्रमाणन के दायरे में परिकल्पित उपाय किए हैं। हम विदेशों में काम कर रहे अपने हवाई अड्डों और जहां उड़ानें खोली जाती हैं, में अनुभव का उपयोग करके अपने यात्रियों को एक सुरक्षित और आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए काम करेंगे। चूंकि हम हवाई अड्डे के मूल्य श्रृंखला के प्रत्येक लिंक में स्थित हैं, सुरक्षा से लेकर खाद्य और पेय क्षेत्रों तक, निजी यात्री लाउंज से लेकर जमीनी सेवाओं और शुल्क-मुक्त तक, हम यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि हमारे यात्रियों को हर स्तर पर उच्चतम स्तर की सेवा मिले। तुर्की, जो इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संस्कृति और पर्यटन, परिवहन और हमारे स्वास्थ्य मंत्रालय, एसएई का प्रबंधन करता है, और हमारे सभी हितधारकों, विशेष रूप से हमारे DGCA और एयरलाइंस को धन्यवाद देता है, "उन्होंने कहा। हवाईअड्डा महामारी संबंधी सावधानियों और प्रमाणन परिपत्र के अनुसार, यात्रियों और हवाई अड्डे के श्रमिकों को टर्मिनल के पार अपनी शारीरिक दूरी बनाए रखने में मदद करने के लिए दिशा-निर्देश और चिह्न बनाए गए थे। यह सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की गई है कि यात्री संपर्क के बिना हर उचित स्तर पर सेवा प्राप्त कर सकें। अक्सर उपयोग किए जाने वाले क्षेत्रों, एक्स-रे उपकरणों और सतहों को पूरे टर्मिनल में नियमित रूप से कीटाणुरहित किया जाएगा। सभी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के अनुसार प्रशिक्षित किया गया था। सभी हवाई अड्डे मुखौटे के साथ काम करेंगे और, जहां आवश्यक हो, दृष्टि, दस्ताने या उपयुक्त कपड़ों के साथ। पहले चरण में, गैर-यात्रियों को हवाई अड्डों में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और सभी यात्रियों को मास्क पहनना आवश्यक होगा।
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स्वयं को काफी बदला है किन्तु हमारी प्रगति में वह तेजी नहीं आई है जिसकी हमें अपेक्षा थी। आवश्यकता इस रात की है कि हम आज की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने को ढालें और रूढ़ियों और कुरीतियों से यथाशक्ति मुक्ति पायें। सामाजिक उत्थान हमारे सर्वागीण विकास की पहली शर्त है। श्री अगरचन्द नाहटा, दुर्गाप्रसाद लोहिया, हजारीमल याँठिया, बाबू वृन्दावनदास, रामप्रसाद लोहिया के सामयिक भाषण हुए।
उसी दिन, रात्रि को बिजली काटन मिल के विशाल मंच पर ब्रजभाषा कला गण्डल द्वारा अनुपम एवं स्मरणीय सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिसका संचालन किया सुप्रसिद्ध हास्य कवि काका हाथरसी ने।
करने के लिए एडहाक कमेटी की स्थापना और राजस्थान का अकाल, राजस्थानी भाषा का प्रचार आदि। इन प्रस्तावों पर सरे श्री रामगोपाल जी आजाद अलीगढ, क्रान्तिस्वरूप सिंह, कृष्णलाल गर्ग झांसी, मुरलीघर पोद्दार हाथरस, उमरावसिंह गर्ग, केशरीचन्द सिंघी, दीनदयाल ओझा, राजनारायण अग्रवाल, रमांशकर चाण्डक, हरिशंकर पोद्दार, रोशनलाल गाहेश्वरी अलीगढ़, हजारीगल बाँठिया, डा० टी० एन० विमल. अगरचन्द नाहटा, सम्मेलन के प्रधानमंत्री श्री रघुनाथ प्रसाद एवं सम्मेलन के संगठन मंत्री श्री रामकृष्ण सरावगी आदि ने अपने विचारों को व्यक्त किया।
आगामी वर्ष के लिए श्री रामबाबू लाल अग्रवाल एवं श्री रामेश्वर जटिया, युर्जा उपसभापति श्री भवरलाल सेठिया कानपुर, प्रधानमंत्री श्री हजारीमल बाठिया, श्री युगलकिशोर परशुरामपुरिया - सहायक मंत्री एवं श्री गिल्लूगल बजाज कोषाध्यक्ष चुने गये।
इस दिन एक महिला सम्मेलन का भी आयोजन किया गया था जिसकी अध्यक्षा श्रीमती उमालाल एमज ए० थीं. एवं उद्घाटन रानी लक्ष्मी कुमारी चूणावत ने किया। लगभग चार हजार महिलाओं ने इस अधिवेशन में सोत्साह भाग लिया।
सर्वश्री धन्नालाल लोहिया, रामबाबू लाल अग्रवाल, हजारीमल माठिया, गोपाल प्रसाद सेकसरिया उमरावसिंह गर्ग, दुर्गा प्रसाद लोहिया, मुरलीधर पोद्दार, आदि के नेतृत्व में स्वागत समिति द्वारा अधिवेशन की सुन्दर व्यवस्था की गई थी और इस प्रकार उत्तर प्रादेशिक गारवाड़ी सम्मेलन का यह अधिनेशन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
विशिष्ट समारोह 25
धनी हैं। संगीत कार्यालय में लगे सभी तैल चित्र चित्रकार काकाजी की प्रतिभा के परिचायक हैं।
ब्रजकला केन्द्र से काकाजी का अत्यधिक निकट का सम्बन्ध रहा है। हाथरस शाखा के प्रथम अध्यक्ष होने के साथ-साथ केन्द्र की गति विधियों और क्रिया कलापों में काकाजी सदैव ही एक सक्रिय कार्यकर्ता और परामर्शक के रूप में भाग लेते रहे हैं। इन्होने केन्द्र के लिए रास लीलाएँ प्रहसन आदि लिखे और निर्देशित भी किये।
काका बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति हैं, जिनपर लक्ष्मी और सरस्वती दोंनों की ही कृपा है।
जो लोग काकाजी के अद्यतन जीवन से परिचित हैं, वे इस सत्य को स्वीकार करेंगे कि काकाजी का अभिनन्दन एक कर्मठ, परिश्रमी, अध्यवसायी, संघर्षशील और संयमी व्यक्ति का अभिनन्दन है. ब्रज कला केन्द्र के एक निस्पृह कार्यकर्ता का अभिनन्दन है, अभिनन्दन है हिन्दी मे हास्यरस का और समग्र रूप से अभिनन्दन है हाथरस की पावन नगरी का.
ऐसे मंगलमय अवसर पर मेरी काका हाथरसी को तथा उनकी मातृभूमि हाथरस की पुण्य-स्थली को शत-शत बधाइयां ।
स्वागत मंत्री श्री हजारीमल बाँठिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहामाननीय राजवहादुर जी. मान्य अध्यक्ष महोदय, बहिनो एवं भाइयो
काकाजी ब्रजक्षेत्र के एक मात्र ऐसे साहित्यिक है जिन्होंने हिन्दी, खड़ी बोली और ब्रजभाषा में कविता के तथा व्रज के मच के लिए रूपक लिखे हैं और उन्हें सफलता पूर्वक अपने निर्देशन में प्रस्तुत किया है। इस दृष्टि से काका का यह प्रयास अपने आप में अकेला और अनूठा है और इस दृष्टि से वे केवल ब्रजकला के ही नहीं वरन पूरे ब्रजक्षेत्र के लिए अभिनन्दनीय बन गये हैं। मिलनसार व्यवहार और उनके साहित्यकार और कलाकार रूप मे मणि-काचन संयोग जैसा है। इसलिए हाथरस ब्रजकला केन्द्र ने यह निश्चय किया कि आज जब काकाजी अपने जीवन के ६० वर्ष पूरे कर ६१वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, तब इस शुभ अवसर पर उनकी हीरक जयन्ती का आयोजन किया जाय। इस प्रकार आज हाथरस नगर ही नहीं वरन् ब्रजक्षेत्र और हिन्दी क्षेत्र से पधारे मान्य महानुभाव अपने इस साहित्यकार और कलाकार का अभिनंदन करने के लिए यहाँ उपस्थित है ! जहाँ इस उत्सव में ब्रजक्षेत्र के विभिन्न स्थानों के प्रतिनिधि विद्यमान हैं, यहाँ प्रतिष्ठित साहित्यकारों और माननीय श्री राजबहादुरजी जैसे राजनेता के पधारने से हम कृतकृत्य हैं। यह सब क्षेत्रो, सब वर्गों का सहयोग ही काकाजी की लोकप्रियता तथा आज के इस समारोह में इस तथ्य का प्रमाण है कि काकाजी हम सभी के अभिनन्दनीय एवं अभिवंदनीय है। मैं ब्रजकला केन्द्र की ओर से आप सब महानुभावों का हार्दिक स्वागत करता हूँ और आशा करता है, ब्रजकला केन्द्र को आप सबका सहयोग इसी प्रकार मिलता रहेगा।
हजारीमल याँठिया संयोजक
काका हीरक जयन्ती समारोह
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स्वयं को काफी बदला है किन्तु हमारी प्रगति में वह तेजी नहीं आई है जिसकी हमें अपेक्षा थी। आवश्यकता इस रात की है कि हम आज की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने को ढालें और रूढ़ियों और कुरीतियों से यथाशक्ति मुक्ति पायें। सामाजिक उत्थान हमारे सर्वागीण विकास की पहली शर्त है। श्री अगरचन्द नाहटा, दुर्गाप्रसाद लोहिया, हजारीमल याँठिया, बाबू वृन्दावनदास, रामप्रसाद लोहिया के सामयिक भाषण हुए। उसी दिन, रात्रि को बिजली काटन मिल के विशाल मंच पर ब्रजभाषा कला गण्डल द्वारा अनुपम एवं स्मरणीय सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिसका संचालन किया सुप्रसिद्ध हास्य कवि काका हाथरसी ने। करने के लिए एडहाक कमेटी की स्थापना और राजस्थान का अकाल, राजस्थानी भाषा का प्रचार आदि। इन प्रस्तावों पर सरे श्री रामगोपाल जी आजाद अलीगढ, क्रान्तिस्वरूप सिंह, कृष्णलाल गर्ग झांसी, मुरलीघर पोद्दार हाथरस, उमरावसिंह गर्ग, केशरीचन्द सिंघी, दीनदयाल ओझा, राजनारायण अग्रवाल, रमांशकर चाण्डक, हरिशंकर पोद्दार, रोशनलाल गाहेश्वरी अलीगढ़, हजारीगल बाँठिया, डाशून्य टीशून्य एनशून्य विमल. अगरचन्द नाहटा, सम्मेलन के प्रधानमंत्री श्री रघुनाथ प्रसाद एवं सम्मेलन के संगठन मंत्री श्री रामकृष्ण सरावगी आदि ने अपने विचारों को व्यक्त किया। आगामी वर्ष के लिए श्री रामबाबू लाल अग्रवाल एवं श्री रामेश्वर जटिया, युर्जा उपसभापति श्री भवरलाल सेठिया कानपुर, प्रधानमंत्री श्री हजारीमल बाठिया, श्री युगलकिशोर परशुरामपुरिया - सहायक मंत्री एवं श्री गिल्लूगल बजाज कोषाध्यक्ष चुने गये। इस दिन एक महिला सम्मेलन का भी आयोजन किया गया था जिसकी अध्यक्षा श्रीमती उमालाल एमज एशून्य थीं. एवं उद्घाटन रानी लक्ष्मी कुमारी चूणावत ने किया। लगभग चार हजार महिलाओं ने इस अधिवेशन में सोत्साह भाग लिया। सर्वश्री धन्नालाल लोहिया, रामबाबू लाल अग्रवाल, हजारीमल माठिया, गोपाल प्रसाद सेकसरिया उमरावसिंह गर्ग, दुर्गा प्रसाद लोहिया, मुरलीधर पोद्दार, आदि के नेतृत्व में स्वागत समिति द्वारा अधिवेशन की सुन्दर व्यवस्था की गई थी और इस प्रकार उत्तर प्रादेशिक गारवाड़ी सम्मेलन का यह अधिनेशन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। विशिष्ट समारोह पच्चीस धनी हैं। संगीत कार्यालय में लगे सभी तैल चित्र चित्रकार काकाजी की प्रतिभा के परिचायक हैं। ब्रजकला केन्द्र से काकाजी का अत्यधिक निकट का सम्बन्ध रहा है। हाथरस शाखा के प्रथम अध्यक्ष होने के साथ-साथ केन्द्र की गति विधियों और क्रिया कलापों में काकाजी सदैव ही एक सक्रिय कार्यकर्ता और परामर्शक के रूप में भाग लेते रहे हैं। इन्होने केन्द्र के लिए रास लीलाएँ प्रहसन आदि लिखे और निर्देशित भी किये। काका बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति हैं, जिनपर लक्ष्मी और सरस्वती दोंनों की ही कृपा है। जो लोग काकाजी के अद्यतन जीवन से परिचित हैं, वे इस सत्य को स्वीकार करेंगे कि काकाजी का अभिनन्दन एक कर्मठ, परिश्रमी, अध्यवसायी, संघर्षशील और संयमी व्यक्ति का अभिनन्दन है. ब्रज कला केन्द्र के एक निस्पृह कार्यकर्ता का अभिनन्दन है, अभिनन्दन है हिन्दी मे हास्यरस का और समग्र रूप से अभिनन्दन है हाथरस की पावन नगरी का. ऐसे मंगलमय अवसर पर मेरी काका हाथरसी को तथा उनकी मातृभूमि हाथरस की पुण्य-स्थली को शत-शत बधाइयां । स्वागत मंत्री श्री हजारीमल बाँठिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहामाननीय राजवहादुर जी. मान्य अध्यक्ष महोदय, बहिनो एवं भाइयो काकाजी ब्रजक्षेत्र के एक मात्र ऐसे साहित्यिक है जिन्होंने हिन्दी, खड़ी बोली और ब्रजभाषा में कविता के तथा व्रज के मच के लिए रूपक लिखे हैं और उन्हें सफलता पूर्वक अपने निर्देशन में प्रस्तुत किया है। इस दृष्टि से काका का यह प्रयास अपने आप में अकेला और अनूठा है और इस दृष्टि से वे केवल ब्रजकला के ही नहीं वरन पूरे ब्रजक्षेत्र के लिए अभिनन्दनीय बन गये हैं। मिलनसार व्यवहार और उनके साहित्यकार और कलाकार रूप मे मणि-काचन संयोग जैसा है। इसलिए हाथरस ब्रजकला केन्द्र ने यह निश्चय किया कि आज जब काकाजी अपने जीवन के साठ वर्ष पूरे कर इकसठवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, तब इस शुभ अवसर पर उनकी हीरक जयन्ती का आयोजन किया जाय। इस प्रकार आज हाथरस नगर ही नहीं वरन् ब्रजक्षेत्र और हिन्दी क्षेत्र से पधारे मान्य महानुभाव अपने इस साहित्यकार और कलाकार का अभिनंदन करने के लिए यहाँ उपस्थित है ! जहाँ इस उत्सव में ब्रजक्षेत्र के विभिन्न स्थानों के प्रतिनिधि विद्यमान हैं, यहाँ प्रतिष्ठित साहित्यकारों और माननीय श्री राजबहादुरजी जैसे राजनेता के पधारने से हम कृतकृत्य हैं। यह सब क्षेत्रो, सब वर्गों का सहयोग ही काकाजी की लोकप्रियता तथा आज के इस समारोह में इस तथ्य का प्रमाण है कि काकाजी हम सभी के अभिनन्दनीय एवं अभिवंदनीय है। मैं ब्रजकला केन्द्र की ओर से आप सब महानुभावों का हार्दिक स्वागत करता हूँ और आशा करता है, ब्रजकला केन्द्र को आप सबका सहयोग इसी प्रकार मिलता रहेगा। हजारीमल याँठिया संयोजक काका हीरक जयन्ती समारोह
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यूसीएल शोधकर्ताओं के नेतृत्व में एक नए स्वास्थ्य डेटा विश्लेषण के अनुसार, 45 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों में अवसाद के इलाज के लिए टॉकिंग थैरेपी का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकता है. यह उपचार भविष्य में हृदय रोग की कम दरों से जुड़ा हो सकता है.
Alvida Jumma Mubarak 2023 Messages: जुमा-तुल-विदा पर ये हिंदी Quotes, WhatsApp Wishes और HD Wallpapers भेजकर करें अलविदा जुमा मुबारक!
इस वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण 2023 गुरुवार, 20 अप्रैल, 2023 को घटित होगा. यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा जो दक्षिण/पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत, हिंद महासागर और अंटार्कटिका के क्षेत्रों में कम से कम आंशिक रूप से दिखाई देगा. 20 अप्रैल 2023 को सूर्य ग्रहण 07:04:26 पर शुरू होगा. .
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यूसीएल शोधकर्ताओं के नेतृत्व में एक नए स्वास्थ्य डेटा विश्लेषण के अनुसार, पैंतालीस वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों में अवसाद के इलाज के लिए टॉकिंग थैरेपी का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकता है. यह उपचार भविष्य में हृदय रोग की कम दरों से जुड़ा हो सकता है. Alvida Jumma Mubarak दो हज़ार तेईस Messages: जुमा-तुल-विदा पर ये हिंदी Quotes, WhatsApp Wishes और HD Wallpapers भेजकर करें अलविदा जुमा मुबारक! इस वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण दो हज़ार तेईस गुरुवार, बीस अप्रैल, दो हज़ार तेईस को घटित होगा. यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा जो दक्षिण/पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत, हिंद महासागर और अंटार्कटिका के क्षेत्रों में कम से कम आंशिक रूप से दिखाई देगा. बीस अप्रैल दो हज़ार तेईस को सूर्य ग्रहण सात:चार:छब्बीस पर शुरू होगा. .
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उत्तर प्रदेश की रिक्त दो महत्वपूर्ण लोकसभा सीटों के लिए के लिए जुलाई में मतदान होना है. इसमें से एक सीट सपा प्रमुख अखिलेश यादव और दूसरी सीट आजम खान के लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के कारण खाली हुई है. दोनों ने ही विधायकी का चुनाव जीतने के बाद लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. अखिलेश यादव जहां आजमगढ़ से सांसद थे वही आजम खान रामपुर से. आजमगढ़ से डिंपल यादव के चुनाव लड़ाए जाने की चर्चा है, वहीं रामपुर से आजम की जगह कौन चुनाव लड़ेगा? यह तय नहीं हो पा रहा है. वैसे उम्मीद यही थी कि आजम की जगाह उनके किसी पसंद के ही नेता को चुनाव लड़ाया जाएगा, लेकिन आजम ने जिस तरह से अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, उसको देखते हुए कोई भी विश्वास के साथ यह नहीं कह सकता है की रामपुर लोकसभा के उपचुनाव के लिए कौन अखिलेश यादव की पसंद बनेगा. राजनीति के गलियारों में चर्चा यह भी है कि आजम की अखिलेश यादव से नाराजगी की असली वजह रामपुर लोकसभा उप चुनाव ही हैं. आजम खान इस समय दबाव की राजनीति कर रहे हैं, वह जानते हैं कि समाजवादी पार्टी ही नहीं अन्य किसी दल में भी उनके कद का कोई मुस्लिम नेता नहीं है. समाजवादी पार्टी में आजम के बाद मुस्लिम चेहरे के रूप में संभल के सांसद शफीक उर रहमान बर्क और मुरादाबाद के सांसद एसटी हसन ही नजर आते हैं. वह भी आजम खान के साथ नजर आ रहे हैं. संभल के सांसद बर्क भी आजम के सुर में सुर मिलाते हुए अखिलेश को लेकर सख्त बयान दे चुके हैं, जो अखिलेश की परेशानी बढ़ाने के लिए काफी है। वहीं मुरादाबाद से सांसद एस. टी. हसन भी आजम खान प्रकरण से खुश नहीं नजर आ रहे हैं। यह और बात है कि इन दोनों नेताओं का प्रभाव केवल इनके इलाके और जिले तक ही सीमित है। दिग्गज नेता अहमद हसन के निधन और आजम खान की नाराजगी के बाद समाजवादी पार्टी में मुस्लिम लीडरशिप खाली नजर आ रही है।
प्रदेश में अन्य मुस्लिम नेताओं की बात की जाए तो अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे बाहुबली ही नजर आते हैं,पर योगी सरकार का बुलडोजर चलने के बाद इनकी हैसियत ना के बराबर हो गई है,हालांकि अंसारी फैमिली में अफजाल अंसारी सांसद हैं, जबकि मुख्तार के बेटे अब्बास और बड़े भाई सिगबुतल्लाह के बेटे मन्नू अंसारी इस बार विधायक चुने गए हैं। पूर्व विधायक इमरान मसूद और पीस पार्टी बनाकर सियासक कर रहे डॉक्टर अयूब के सितारे भी गर्दिश में ही नजर आ रहे हैं। वहीं कैराना विधायक नाहिद हसन जेल में हैं.
खैर, बात मुस्लिम बहुल सीटों की की जाए तो उत्तर प्रदेश विधान विधानसभा की 403 सीटों में से करीब 150 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम वोटरों का असर है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों के अलावा पश्चिमी यूपी में मुसलमान की बड़ी आबादी है। सिर्फ पश्चिमी यूपी में 26. 21 फीसदी मुसलमान हैं। पश्चिमी यूपी में 26 जिले आते हैं, जहां विधानसभा की 136 सीटें हैं। जयंत भी आजम खान के परिवार से मिलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोटर्स को साधना चाहते हैं। इसीलिए शिवपाल यादव से लेकर कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी भी आजम पर डोरे डालने में लगी है। ओवैसी सपा से नाराज आजम को खुला निमंत्रण दे चुके हैं.
लब्बोलुआब यह है कि उत्तर प्रदेश की सियासत में मुसलमानों की अखिलेश-मुलायम से नाराजगी की वजह से यूपी का सियासी गणित दिलचस्प हो गया है। आजम के मीडिया सलाहकार शानू ने ईद तक आजम के बाहर आने की उम्मीद जाहिर कर दी है। लेकिन ऐसा हो ना सका. इसी के बाद आजम खान के विधायक पुत्र अब्दुल्ला ने एक ट्वीट करके अखिलेश को खूब खरी खरी सुनाई, गौरतलब हो आजम को एक मुकदमे को छोड़कर सभी में जमानत मिल चुकी है. ईद पर आजम के समर्थकों ने अखिलेश को निशाने पर लिया तो वहीं शिवपाल यादव का दर्द भी ईद की मुबारकबाद देते समय सामने आ गया. उन्होंने कहा जिसको हमने सीचा उन्होंने ही हमको रौन्द दिया. उधर,रामपुर के गलियारों में जो चर्चा है उसके अनुसार यदि अखिलेश बगावती तेवर दिखा रहे आजम खान को आश्वासन दे दें कि रामपुर लोकसभा चुनाव के लिए उनकी पसंद का प्रत्याशी मैदान में उतारा जाएगा तो आजम की नाराजगी काफी कम हो सकती है. आजम खां के इस्तीफा देने के कारण रामपुर लोकसभा सीट पर जुलाई तक उपचुनाव होना है। आजम खां इस सीट पर अपने परिवार से ही टिकट चाहते हैं। अभी तक अखिलेश ने कोई वादा नहीं किया है कि उनके परिवार से ही किसी को टिकट देंगे। जाहिर सी बात है कि आजम खां अखिलेश से पक्का वादा चाहते हैं और जब तक यह वादा मिल नहीं जाता, उनकी नाराजगी बनी रहेगी। रामपुर से दस बार के एमएलए आजम खान फिलहाल सीतापुर जेल में हैं। वह 2019 में रामपुर से सांसद चुने गए थे। हाल में हुए विधानसभा चुनाव में विधायक का चुनाव लड़े। उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि सूबे से सत्ता परिवर्तन होगा और सपा सरकार आने पर आजम को रिहाई होगी। सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की आस भी थी, लेकिन आजम तो चुनाव जीते लेकिन सपा सत्ता में आने से वंचित रह गई। तब माना गया कि समाजवादी पार्टी आजम खान को विधानसभा में नेता विपक्ष बनाएगी, उसके बाद आजम के ऊपर कानूनी शिकंजा ढीला पड़ जाएगा। इसलिए उन्होंने सांसद का पद भी छोड़ दिया, लेकिन अखिलेश यादव खुद नेता विपक्ष बन गए। इससे आजम समर्थकों मे नाराजगी सामने आई। उनके मीडिया प्रभारी फसाहत शानू ने बाकायदा मीडिया के सामने सपा और अखिलेश पर आजम का साथ नहीं देने का आरोप लगाया। उसके बाद जगह-जगह से आजम की रिहाई की आवाज उठने लगीं। सूबे के कई सपाइयों ने अपने पद से आजम के पक्ष में इस्तीफा दे दिया।
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उत्तर प्रदेश की रिक्त दो महत्वपूर्ण लोकसभा सीटों के लिए के लिए जुलाई में मतदान होना है. इसमें से एक सीट सपा प्रमुख अखिलेश यादव और दूसरी सीट आजम खान के लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के कारण खाली हुई है. दोनों ने ही विधायकी का चुनाव जीतने के बाद लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. अखिलेश यादव जहां आजमगढ़ से सांसद थे वही आजम खान रामपुर से. आजमगढ़ से डिंपल यादव के चुनाव लड़ाए जाने की चर्चा है, वहीं रामपुर से आजम की जगह कौन चुनाव लड़ेगा? यह तय नहीं हो पा रहा है. वैसे उम्मीद यही थी कि आजम की जगाह उनके किसी पसंद के ही नेता को चुनाव लड़ाया जाएगा, लेकिन आजम ने जिस तरह से अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, उसको देखते हुए कोई भी विश्वास के साथ यह नहीं कह सकता है की रामपुर लोकसभा के उपचुनाव के लिए कौन अखिलेश यादव की पसंद बनेगा. राजनीति के गलियारों में चर्चा यह भी है कि आजम की अखिलेश यादव से नाराजगी की असली वजह रामपुर लोकसभा उप चुनाव ही हैं. आजम खान इस समय दबाव की राजनीति कर रहे हैं, वह जानते हैं कि समाजवादी पार्टी ही नहीं अन्य किसी दल में भी उनके कद का कोई मुस्लिम नेता नहीं है. समाजवादी पार्टी में आजम के बाद मुस्लिम चेहरे के रूप में संभल के सांसद शफीक उर रहमान बर्क और मुरादाबाद के सांसद एसटी हसन ही नजर आते हैं. वह भी आजम खान के साथ नजर आ रहे हैं. संभल के सांसद बर्क भी आजम के सुर में सुर मिलाते हुए अखिलेश को लेकर सख्त बयान दे चुके हैं, जो अखिलेश की परेशानी बढ़ाने के लिए काफी है। वहीं मुरादाबाद से सांसद एस. टी. हसन भी आजम खान प्रकरण से खुश नहीं नजर आ रहे हैं। यह और बात है कि इन दोनों नेताओं का प्रभाव केवल इनके इलाके और जिले तक ही सीमित है। दिग्गज नेता अहमद हसन के निधन और आजम खान की नाराजगी के बाद समाजवादी पार्टी में मुस्लिम लीडरशिप खाली नजर आ रही है। प्रदेश में अन्य मुस्लिम नेताओं की बात की जाए तो अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे बाहुबली ही नजर आते हैं,पर योगी सरकार का बुलडोजर चलने के बाद इनकी हैसियत ना के बराबर हो गई है,हालांकि अंसारी फैमिली में अफजाल अंसारी सांसद हैं, जबकि मुख्तार के बेटे अब्बास और बड़े भाई सिगबुतल्लाह के बेटे मन्नू अंसारी इस बार विधायक चुने गए हैं। पूर्व विधायक इमरान मसूद और पीस पार्टी बनाकर सियासक कर रहे डॉक्टर अयूब के सितारे भी गर्दिश में ही नजर आ रहे हैं। वहीं कैराना विधायक नाहिद हसन जेल में हैं. खैर, बात मुस्लिम बहुल सीटों की की जाए तो उत्तर प्रदेश विधान विधानसभा की चार सौ तीन सीटों में से करीब एक सौ पचास विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम वोटरों का असर है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों के अलावा पश्चिमी यूपी में मुसलमान की बड़ी आबादी है। सिर्फ पश्चिमी यूपी में छब्बीस. इक्कीस फीसदी मुसलमान हैं। पश्चिमी यूपी में छब्बीस जिले आते हैं, जहां विधानसभा की एक सौ छत्तीस सीटें हैं। जयंत भी आजम खान के परिवार से मिलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोटर्स को साधना चाहते हैं। इसीलिए शिवपाल यादव से लेकर कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी भी आजम पर डोरे डालने में लगी है। ओवैसी सपा से नाराज आजम को खुला निमंत्रण दे चुके हैं. लब्बोलुआब यह है कि उत्तर प्रदेश की सियासत में मुसलमानों की अखिलेश-मुलायम से नाराजगी की वजह से यूपी का सियासी गणित दिलचस्प हो गया है। आजम के मीडिया सलाहकार शानू ने ईद तक आजम के बाहर आने की उम्मीद जाहिर कर दी है। लेकिन ऐसा हो ना सका. इसी के बाद आजम खान के विधायक पुत्र अब्दुल्ला ने एक ट्वीट करके अखिलेश को खूब खरी खरी सुनाई, गौरतलब हो आजम को एक मुकदमे को छोड़कर सभी में जमानत मिल चुकी है. ईद पर आजम के समर्थकों ने अखिलेश को निशाने पर लिया तो वहीं शिवपाल यादव का दर्द भी ईद की मुबारकबाद देते समय सामने आ गया. उन्होंने कहा जिसको हमने सीचा उन्होंने ही हमको रौन्द दिया. उधर,रामपुर के गलियारों में जो चर्चा है उसके अनुसार यदि अखिलेश बगावती तेवर दिखा रहे आजम खान को आश्वासन दे दें कि रामपुर लोकसभा चुनाव के लिए उनकी पसंद का प्रत्याशी मैदान में उतारा जाएगा तो आजम की नाराजगी काफी कम हो सकती है. आजम खां के इस्तीफा देने के कारण रामपुर लोकसभा सीट पर जुलाई तक उपचुनाव होना है। आजम खां इस सीट पर अपने परिवार से ही टिकट चाहते हैं। अभी तक अखिलेश ने कोई वादा नहीं किया है कि उनके परिवार से ही किसी को टिकट देंगे। जाहिर सी बात है कि आजम खां अखिलेश से पक्का वादा चाहते हैं और जब तक यह वादा मिल नहीं जाता, उनकी नाराजगी बनी रहेगी। रामपुर से दस बार के एमएलए आजम खान फिलहाल सीतापुर जेल में हैं। वह दो हज़ार उन्नीस में रामपुर से सांसद चुने गए थे। हाल में हुए विधानसभा चुनाव में विधायक का चुनाव लड़े। उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि सूबे से सत्ता परिवर्तन होगा और सपा सरकार आने पर आजम को रिहाई होगी। सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की आस भी थी, लेकिन आजम तो चुनाव जीते लेकिन सपा सत्ता में आने से वंचित रह गई। तब माना गया कि समाजवादी पार्टी आजम खान को विधानसभा में नेता विपक्ष बनाएगी, उसके बाद आजम के ऊपर कानूनी शिकंजा ढीला पड़ जाएगा। इसलिए उन्होंने सांसद का पद भी छोड़ दिया, लेकिन अखिलेश यादव खुद नेता विपक्ष बन गए। इससे आजम समर्थकों मे नाराजगी सामने आई। उनके मीडिया प्रभारी फसाहत शानू ने बाकायदा मीडिया के सामने सपा और अखिलेश पर आजम का साथ नहीं देने का आरोप लगाया। उसके बाद जगह-जगह से आजम की रिहाई की आवाज उठने लगीं। सूबे के कई सपाइयों ने अपने पद से आजम के पक्ष में इस्तीफा दे दिया।
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कोई ओलंपिक प्रतियोगिता स्वागत हैन केवल दर्शकों और प्रशंसकों के लिए एक कार्यक्रम, बल्कि एथलीटों के लिए सबसे पहले। 4 वर्षों तक वे इन प्रतियोगिताओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं, और उनमें से कई के लिए वे सच्चाई का क्षण बन जाते हैं, जब आपको यह पता लगाना आवश्यक होता है कि आपने क्या सीखा है और आप प्रतिद्वंद्वी को पार करते हैं। अपवाद नहीं था और ओलंपिक 2006. यह कहां गया और ओलंपिक के सकारात्मक क्षणों को क्या याद आया?
शीतकालीन ओलंपिक शीतकालीन ओलंपिक को दिया गया थाइतालवी ट्यूरिन में आईओसी सदस्यों के बहुमत से वोट। स्विस शहर स्ion ने शीतकालीन ओलंपिक आयोजित करने का भी दावा किया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अधिकारियों ने टूरिन को यह सम्मानजनक मिशन दिया। बाद में इटली सरकार और ट्यूरिन शहर के सदस्यों को याद किया, इस तथ्य ने शहर के बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था के विकास के लिए एक प्रोत्साहन के रूप में कार्य किया।
आवश्यक इमारतों के निर्माण के लिए $ 1.5 मिलियन से अधिक आवंटित किए गए थे। तथ्य यह है कि ट्यूरिन में मेट्रो का पूरी तरह से पुनर्निर्माण किया गया था, दुनिया में कोई अनुरूप नहीं है।
ओलंपिक 2006 - सर्दी परी कथा, जोगंभीर उद्घाटन के लिए कई लोगों ने इसे याद किया था। इसमें कई प्रसिद्ध इतालवी और यूरोपीय कलाकारों ने भाग लियाः लूसियानो पावरोटी, सोफिया लॉरेन और अन्य। ओलंपिक लौ को जलाने के लिए इतालवी एथलीट स्टीफनी बेलमंडो का सम्मान था, जो 1 99 2 और 2002 के स्की खेल में ओलंपिक चैंपियन थे।
उद्घाटन 10 फरवरी को और परेड से पहले आयोजित किया गया थाओलंपिक प्रतिनिधिमंडल उज्ज्वल शो का आनंद लेने में सक्षम थे, जिसे "पैशन ऑफ स्पायन" कहा जाता था। एक रूसी स्केटर दिमित्री डोरोफिव को रूसी प्रतिनिधिमंडल का झंडा ले जाने के लिए सम्मानित किया गया था। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस तथ्य का दिमित्री के खेल कैरियर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा, और 3 दिनों में उन्होंने 500 मीटर की दूरी पर एक रजत पदक जीता, जो कि पिछले 12 वर्षों में पहली बार रूसी स्केटिंगर्स के साथ हुआ था। इसलिए ध्वज धारक की भूमिका रूसी एथलीटों के लिए खुश माना जा सकता है।
इस शीतकालीन ओलंपिक में पहली बार वहां थेमेडागास्कर और इथियोपिया के रूप में ऐसे विदेशी गर्म देशों के एथलीटों का प्रतिनिधित्व किया जाता है। कुल मिलाकर, 80 देशों के 2663 लोगों ने प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। 2006 ओलंपिक ने नई प्रजातियों को जन्म दिया जो पहले प्रतिस्पर्धा कार्यक्रम में शामिल थे। स्नोबोर्डिंग में, यह अनुशासन बोर्ड पार था; बाईथलॉन में - एक आम शुरुआत के साथ एक दौड़, अच्छी तरह से, स्कीयर टीम स्प्रिंट में अपनी ताकत का परीक्षण करने में सक्षम थे। कार्यक्रम में पहली बार स्केटिंगर्स के साथ एक टीम दौड़ थी। कुल मिलाकर, ओलंपियाड में 15 विषयों की घोषणा की गई, 1026 पदक एथलीटों को दिए गए।
इन प्रतियोगिताओं के तालिबान नेवे और ग्लिट्ज थे,इतालवी कलाकार पेड्रो अल्बुकर्क द्वारा बनाया गया। एथलीटों को दिए गए पदकों के मूल रूप को ध्यान में रखना भी महत्वपूर्ण है। वे एक सर्कल के रूप में बने थे, जिनमें से मध्य में रिबन के लिए एक छेद था। उन्होंने ओलंपिक के छल्ले, साथ ही पियाजा (इतालवी वर्ग) का प्रतीक किया, जो इतालवी शहरों में रहने वाले सभी लोगों के लिए सामाजिक जीवन का केंद्र है। जब एक एथलीट पदक पर डालता है, तो यह छेद केवल दिल के स्तर पर था, जो खेल से संबंधित है और अपने जीवन की आकांक्षाओं का केंद्र है।
2006 ओलंपिक के लिए बहुत सफल थेरूस से एथलीट - कुल पदक स्टैंडिंग में चौथी टीम की जगह। खेल प्रतिनिधिमंडल के प्रत्येक प्रतिभागियों ने आम फंड में इतने लंबे समय से प्रतीक्षित पदक लाने के लिए अपनी सारी ताकत दी।
रूसी स्कीयर Evgeniya Medvedeva, बन गयावह व्यक्ति जिसने राष्ट्रीय टीम के समग्र स्टैंडिंग में पहला पदक लाया। डुथलॉन में कांस्य काफी अनुमान लगाया गया था, लेकिन उसी अनुशासन में इव्गेनी डिमेंटेव का स्वर्ण एक पूर्ण आश्चर्य था। 2006 ओलंपिक ने 50 किमी की स्केटिंग रन के साथ दौड़ में यूजीन और रजत लाया।
सामान्य रूप से, रूसी स्कीयर का प्रदर्शन हो सकता हैसफल कहा जाता हैः महिलाओं की रिले में स्वर्ण, बड़े पैमाने पर शुरू में चांदी जूलिया Chepalova, स्प्रिंट में अलीना Sidko कांस्य। विशेष रूप से आश्चर्य की बात स्की कलाबाजी में कांस्य के रूप में व्लादिमीर लेबेडेव फ्रीस्टाइल के इस प्रकार में भावी विजेताओं के बीच नहीं था।
दृढ़ता से बनाया और रूसी राष्ट्रीय टीमफिगर स्केटिंग - जोड़ी स्केटिंग और बर्फ नृत्य में 2 स्वर्ण, अनुमान लगाया जा सकता है, लेकिन उस से इवेनाई प्लसेंको के इरिना स्लुटस्काया के कांस्य और कमजोर सोने का कोई सुखद सोने नहीं है, हालांकि यहां तर्क देना संभव था। इरीना ने अपने पूरे कार्यक्रम को खूबसूरती से लुढ़काया, लेकिन न्यायाधीशों का निर्णय केवल तीसरा रहा।
लेकिन पुरुषों के स्लीघमैन ने एक असली जीत मनाई। इस अनुशासन में रूसियों की भागीदारी के पूरे समय रूस के लिए अल्बर्ट डेमचेन्को ने पहला पदक जीता।
शायद सबसे बड़ी निराशा औरपरेशानी यह थी कि द्विपक्षीय ओल्गा पाइल्वा डोपिंग के खून में पाया गया था। उनका पुरस्कार रद्द कर दिया गया था, और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के फैसले से खुद को 2 साल तक एथलीट अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
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कोई ओलंपिक प्रतियोगिता स्वागत हैन केवल दर्शकों और प्रशंसकों के लिए एक कार्यक्रम, बल्कि एथलीटों के लिए सबसे पहले। चार वर्षों तक वे इन प्रतियोगिताओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं, और उनमें से कई के लिए वे सच्चाई का क्षण बन जाते हैं, जब आपको यह पता लगाना आवश्यक होता है कि आपने क्या सीखा है और आप प्रतिद्वंद्वी को पार करते हैं। अपवाद नहीं था और ओलंपिक दो हज़ार छः. यह कहां गया और ओलंपिक के सकारात्मक क्षणों को क्या याद आया? शीतकालीन ओलंपिक शीतकालीन ओलंपिक को दिया गया थाइतालवी ट्यूरिन में आईओसी सदस्यों के बहुमत से वोट। स्विस शहर स्ion ने शीतकालीन ओलंपिक आयोजित करने का भी दावा किया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अधिकारियों ने टूरिन को यह सम्मानजनक मिशन दिया। बाद में इटली सरकार और ट्यूरिन शहर के सदस्यों को याद किया, इस तथ्य ने शहर के बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था के विकास के लिए एक प्रोत्साहन के रूप में कार्य किया। आवश्यक इमारतों के निर्माण के लिए एक दशमलव पाँच डॉलर मिलियन से अधिक आवंटित किए गए थे। तथ्य यह है कि ट्यूरिन में मेट्रो का पूरी तरह से पुनर्निर्माण किया गया था, दुनिया में कोई अनुरूप नहीं है। ओलंपिक दो हज़ार छः - सर्दी परी कथा, जोगंभीर उद्घाटन के लिए कई लोगों ने इसे याद किया था। इसमें कई प्रसिद्ध इतालवी और यूरोपीय कलाकारों ने भाग लियाः लूसियानो पावरोटी, सोफिया लॉरेन और अन्य। ओलंपिक लौ को जलाने के लिए इतालवी एथलीट स्टीफनी बेलमंडो का सम्मान था, जो एक निन्यानवे दो और दो हज़ार दो के स्की खेल में ओलंपिक चैंपियन थे। उद्घाटन दस फरवरी को और परेड से पहले आयोजित किया गया थाओलंपिक प्रतिनिधिमंडल उज्ज्वल शो का आनंद लेने में सक्षम थे, जिसे "पैशन ऑफ स्पायन" कहा जाता था। एक रूसी स्केटर दिमित्री डोरोफिव को रूसी प्रतिनिधिमंडल का झंडा ले जाने के लिए सम्मानित किया गया था। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस तथ्य का दिमित्री के खेल कैरियर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा, और तीन दिनों में उन्होंने पाँच सौ मीटर की दूरी पर एक रजत पदक जीता, जो कि पिछले बारह वर्षों में पहली बार रूसी स्केटिंगर्स के साथ हुआ था। इसलिए ध्वज धारक की भूमिका रूसी एथलीटों के लिए खुश माना जा सकता है। इस शीतकालीन ओलंपिक में पहली बार वहां थेमेडागास्कर और इथियोपिया के रूप में ऐसे विदेशी गर्म देशों के एथलीटों का प्रतिनिधित्व किया जाता है। कुल मिलाकर, अस्सी देशों के दो हज़ार छः सौ तिरेसठ लोगों ने प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। दो हज़ार छः ओलंपिक ने नई प्रजातियों को जन्म दिया जो पहले प्रतिस्पर्धा कार्यक्रम में शामिल थे। स्नोबोर्डिंग में, यह अनुशासन बोर्ड पार था; बाईथलॉन में - एक आम शुरुआत के साथ एक दौड़, अच्छी तरह से, स्कीयर टीम स्प्रिंट में अपनी ताकत का परीक्षण करने में सक्षम थे। कार्यक्रम में पहली बार स्केटिंगर्स के साथ एक टीम दौड़ थी। कुल मिलाकर, ओलंपियाड में पंद्रह विषयों की घोषणा की गई, एक हज़ार छब्बीस पदक एथलीटों को दिए गए। इन प्रतियोगिताओं के तालिबान नेवे और ग्लिट्ज थे,इतालवी कलाकार पेड्रो अल्बुकर्क द्वारा बनाया गया। एथलीटों को दिए गए पदकों के मूल रूप को ध्यान में रखना भी महत्वपूर्ण है। वे एक सर्कल के रूप में बने थे, जिनमें से मध्य में रिबन के लिए एक छेद था। उन्होंने ओलंपिक के छल्ले, साथ ही पियाजा का प्रतीक किया, जो इतालवी शहरों में रहने वाले सभी लोगों के लिए सामाजिक जीवन का केंद्र है। जब एक एथलीट पदक पर डालता है, तो यह छेद केवल दिल के स्तर पर था, जो खेल से संबंधित है और अपने जीवन की आकांक्षाओं का केंद्र है। दो हज़ार छः ओलंपिक के लिए बहुत सफल थेरूस से एथलीट - कुल पदक स्टैंडिंग में चौथी टीम की जगह। खेल प्रतिनिधिमंडल के प्रत्येक प्रतिभागियों ने आम फंड में इतने लंबे समय से प्रतीक्षित पदक लाने के लिए अपनी सारी ताकत दी। रूसी स्कीयर Evgeniya Medvedeva, बन गयावह व्यक्ति जिसने राष्ट्रीय टीम के समग्र स्टैंडिंग में पहला पदक लाया। डुथलॉन में कांस्य काफी अनुमान लगाया गया था, लेकिन उसी अनुशासन में इव्गेनी डिमेंटेव का स्वर्ण एक पूर्ण आश्चर्य था। दो हज़ार छः ओलंपिक ने पचास किमी की स्केटिंग रन के साथ दौड़ में यूजीन और रजत लाया। सामान्य रूप से, रूसी स्कीयर का प्रदर्शन हो सकता हैसफल कहा जाता हैः महिलाओं की रिले में स्वर्ण, बड़े पैमाने पर शुरू में चांदी जूलिया Chepalova, स्प्रिंट में अलीना Sidko कांस्य। विशेष रूप से आश्चर्य की बात स्की कलाबाजी में कांस्य के रूप में व्लादिमीर लेबेडेव फ्रीस्टाइल के इस प्रकार में भावी विजेताओं के बीच नहीं था। दृढ़ता से बनाया और रूसी राष्ट्रीय टीमफिगर स्केटिंग - जोड़ी स्केटिंग और बर्फ नृत्य में दो स्वर्ण, अनुमान लगाया जा सकता है, लेकिन उस से इवेनाई प्लसेंको के इरिना स्लुटस्काया के कांस्य और कमजोर सोने का कोई सुखद सोने नहीं है, हालांकि यहां तर्क देना संभव था। इरीना ने अपने पूरे कार्यक्रम को खूबसूरती से लुढ़काया, लेकिन न्यायाधीशों का निर्णय केवल तीसरा रहा। लेकिन पुरुषों के स्लीघमैन ने एक असली जीत मनाई। इस अनुशासन में रूसियों की भागीदारी के पूरे समय रूस के लिए अल्बर्ट डेमचेन्को ने पहला पदक जीता। शायद सबसे बड़ी निराशा औरपरेशानी यह थी कि द्विपक्षीय ओल्गा पाइल्वा डोपिंग के खून में पाया गया था। उनका पुरस्कार रद्द कर दिया गया था, और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के फैसले से खुद को दो साल तक एथलीट अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
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संयुक्त निदेशक आयुर्वेद हि. प्र।
*पांच ग्राम मेथी पाउडर शुगर व जोड़ों के दर्द में उपयोगी है।
*सिर दर्द व भूख खोलने व दस्त रोकने के लिए पांच ग्राम धनियां गुणकारी है।
*काली मिर्च का दो ग्राम पाउडर गले की खराश व दर्द, खांसी, छपाकी में फायदेमंद है।
*पिपली या मघ पीसकर दो ग्राम की मात्रा में पाचन, खांसी, कब्ज जैसे रोगों में शहद के साथ सेवन करने से फायदा होगा।
*सोंठ की तीन ग्राम मात्रा खांसी, श्वास, अपचन पीड़ा आमबात में फायदेमंद है।
*छोटी इलायची माउथ फ्रेशनर है। ये खांसी व वमन रोकती है।
पाठकों से- अगर आपको कोई घरेलू स्वास्थ्य नुस्खा आता है, तो आप भी इस स्तंभ में शामिल हो जाइए। आपके नुस्खे हम नाम सहित प्रकाशित करेंगे।
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संयुक्त निदेशक आयुर्वेद हि. प्र। *पांच ग्राम मेथी पाउडर शुगर व जोड़ों के दर्द में उपयोगी है। *सिर दर्द व भूख खोलने व दस्त रोकने के लिए पांच ग्राम धनियां गुणकारी है। *काली मिर्च का दो ग्राम पाउडर गले की खराश व दर्द, खांसी, छपाकी में फायदेमंद है। *पिपली या मघ पीसकर दो ग्राम की मात्रा में पाचन, खांसी, कब्ज जैसे रोगों में शहद के साथ सेवन करने से फायदा होगा। *सोंठ की तीन ग्राम मात्रा खांसी, श्वास, अपचन पीड़ा आमबात में फायदेमंद है। *छोटी इलायची माउथ फ्रेशनर है। ये खांसी व वमन रोकती है। पाठकों से- अगर आपको कोई घरेलू स्वास्थ्य नुस्खा आता है, तो आप भी इस स्तंभ में शामिल हो जाइए। आपके नुस्खे हम नाम सहित प्रकाशित करेंगे।
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कैटरीना की शादी पर उनके एक्स की याद दिलाने वाले, क्या लड़की सिर्फ चरित्र हरण करने की वस्तु है?
कैटरीना कैफ और विकी कौशल की शादी (Katrina Kaif vicky kaushal wedding) हो रही है. ऐसे समय में शादी से पहले कैटरीना के ब्वॉयफ्रेंड गिनाने जरूरी हैं क्या? कोई कैट की शादी की खबरों पर उन्हें लेकर अपशब्द बोल रहा तो कोई विकी को लेकर ताने कस रहा.
कैटरीना कैफ और विकी कौशल की शादी (Katrina Kaif-Vicky Kaushal wedding) हो रही है. कैट के लिए यह कितनी की खुशी की बात है. इस दिन का सपना तो लगभग हर लड़की देखती है. ऐसे में शादी से पहले कैटरीना के ब्वॉयफ्रेंड गिनाने जरूरी हैं क्या? वैसे एक्टर के पास्ट की लिस्ट पर भले किसी ध्यान ना गया हो, लेकिन एक्ट्रेस की एक-एक बात पर चर्चा की जा रही है. जैसे- कैट की शादी में पहले 5 ब्वॉयफ्रेंड शामिल नहीं होगे. . . किससे रिश्ता जुड़ा किससे टूटा.
समझ नहीं आ रहा कि लोग एक्ट्रेस को शादी की बधाई देने की कोशिश कर रहे हैं या उन्हें नीचा दिखाने की. वैसे यह बात आम लड़की से लेकर हीरोइन तक का पीछा नहीं छोड़तीं. चाहें आम लड़की हो या कैटरीना कैफ, लोगों के लिए वो नुमाइश करने वाली वस्तु ही है.
दरअसल, कुछ लोग कैटरीना कैफ और विकी कौशल की शादी के इस शुभ मौके पर कीचड़ उछालने से बाज नहीं आ रहे हैं. असल में यह उनकी आदतों में शुमार है. उनके लिए एक लड़की इंसान नहीं सिर्फ कोई वस्तु है, जिसे नुमाइश के तौर पर पेश किया जा सके. एक तरफ तो लोग कैटरीना से जुड़ी एक भी खबर मिस नहीं करना चाह रहे तो दूसरी तरफ उनकी जन्मकुंडली खोलकर बैठ गए हैं. कोई कैट की शादी की खबरों पर उन्हें लेकर अपशब्द बोल रहा तो कोई विकी को ताने कस रहा. ये बातें इतनी गिरी हुईं हैं कि हम यहां लिख नहीं सकते.
इतना ही नहीं कुछ लोग तो कैटरीना के एक्स की लिस्ट गिनवा रहे हैं. कई जगह तो ऐसी हेडिंग चलाई जा रही है कि आपका माथा ठनक जाएगा. चलिए आपको उदाहरण के लिए एक लाइन बताते हैं. . . 'कैटरीना की शादी में शामिल नहीं होगे उनके ये एक्स, इतनों के साथ जुड़ा था नाम'. . . 'जब कैटरीना बनी थीं सलमान खान की दुल्हन' आदि.
वैसे पास्ट तो विकी कौशल का भी था लेकिन लोगों को कैटरीना में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी है. तभी तो जब उनकी शादी हो रही है तो सलमान खान से लेकर रणबीर कपूर को याद किया जा रहा है. क्या रिलेशनशिप में सिर्फ अकेले कैटरीना थीं जो रिश्ता टूटने का ठिकरा उनके नाम फोड़ा जाएगा? खैर, हमें उनकी पर्सलन लाइफ बोलने का कोई अधिकार नहीं है. वैसे भी कोई एक्ट्रेस हो या आम लड़की समाज के तराजू पर दोनों को तौला जाता है. कुछ लोगों के लिए लड़कों का पास्ट उनके लिए शान की बात हो जाती है और लड़कियों के लिए शर्मिंदगी की.
खबरों की माने तो कैटरीना कैफ और विकी कौशल की शादी राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के सिक्स सेंस फोर्ट होटल से संपन्न होगी. वहीं शादी का जश्न 7-12 दिसंबर तक चलेगा. देखिए तबतक कैटरीना पर और क्या-क्या कीचड़ उछाले जाएंगे. . . एक बात साफ है कि चाहें आम लड़की हो या हीरोइन, कुछ लोगों की नजरें उसके चरित्र का चीरहरण करने के लिए तैयार रहती हैं.
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कैटरीना की शादी पर उनके एक्स की याद दिलाने वाले, क्या लड़की सिर्फ चरित्र हरण करने की वस्तु है? कैटरीना कैफ और विकी कौशल की शादी हो रही है. ऐसे समय में शादी से पहले कैटरीना के ब्वॉयफ्रेंड गिनाने जरूरी हैं क्या? कोई कैट की शादी की खबरों पर उन्हें लेकर अपशब्द बोल रहा तो कोई विकी को लेकर ताने कस रहा. कैटरीना कैफ और विकी कौशल की शादी हो रही है. कैट के लिए यह कितनी की खुशी की बात है. इस दिन का सपना तो लगभग हर लड़की देखती है. ऐसे में शादी से पहले कैटरीना के ब्वॉयफ्रेंड गिनाने जरूरी हैं क्या? वैसे एक्टर के पास्ट की लिस्ट पर भले किसी ध्यान ना गया हो, लेकिन एक्ट्रेस की एक-एक बात पर चर्चा की जा रही है. जैसे- कैट की शादी में पहले पाँच ब्वॉयफ्रेंड शामिल नहीं होगे. . . किससे रिश्ता जुड़ा किससे टूटा. समझ नहीं आ रहा कि लोग एक्ट्रेस को शादी की बधाई देने की कोशिश कर रहे हैं या उन्हें नीचा दिखाने की. वैसे यह बात आम लड़की से लेकर हीरोइन तक का पीछा नहीं छोड़तीं. चाहें आम लड़की हो या कैटरीना कैफ, लोगों के लिए वो नुमाइश करने वाली वस्तु ही है. दरअसल, कुछ लोग कैटरीना कैफ और विकी कौशल की शादी के इस शुभ मौके पर कीचड़ उछालने से बाज नहीं आ रहे हैं. असल में यह उनकी आदतों में शुमार है. उनके लिए एक लड़की इंसान नहीं सिर्फ कोई वस्तु है, जिसे नुमाइश के तौर पर पेश किया जा सके. एक तरफ तो लोग कैटरीना से जुड़ी एक भी खबर मिस नहीं करना चाह रहे तो दूसरी तरफ उनकी जन्मकुंडली खोलकर बैठ गए हैं. कोई कैट की शादी की खबरों पर उन्हें लेकर अपशब्द बोल रहा तो कोई विकी को ताने कस रहा. ये बातें इतनी गिरी हुईं हैं कि हम यहां लिख नहीं सकते. इतना ही नहीं कुछ लोग तो कैटरीना के एक्स की लिस्ट गिनवा रहे हैं. कई जगह तो ऐसी हेडिंग चलाई जा रही है कि आपका माथा ठनक जाएगा. चलिए आपको उदाहरण के लिए एक लाइन बताते हैं. . . 'कैटरीना की शादी में शामिल नहीं होगे उनके ये एक्स, इतनों के साथ जुड़ा था नाम'. . . 'जब कैटरीना बनी थीं सलमान खान की दुल्हन' आदि. वैसे पास्ट तो विकी कौशल का भी था लेकिन लोगों को कैटरीना में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी है. तभी तो जब उनकी शादी हो रही है तो सलमान खान से लेकर रणबीर कपूर को याद किया जा रहा है. क्या रिलेशनशिप में सिर्फ अकेले कैटरीना थीं जो रिश्ता टूटने का ठिकरा उनके नाम फोड़ा जाएगा? खैर, हमें उनकी पर्सलन लाइफ बोलने का कोई अधिकार नहीं है. वैसे भी कोई एक्ट्रेस हो या आम लड़की समाज के तराजू पर दोनों को तौला जाता है. कुछ लोगों के लिए लड़कों का पास्ट उनके लिए शान की बात हो जाती है और लड़कियों के लिए शर्मिंदगी की. खबरों की माने तो कैटरीना कैफ और विकी कौशल की शादी राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के सिक्स सेंस फोर्ट होटल से संपन्न होगी. वहीं शादी का जश्न सात-बारह दिसंबर तक चलेगा. देखिए तबतक कैटरीना पर और क्या-क्या कीचड़ उछाले जाएंगे. . . एक बात साफ है कि चाहें आम लड़की हो या हीरोइन, कुछ लोगों की नजरें उसके चरित्र का चीरहरण करने के लिए तैयार रहती हैं.
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मनोज सिन्हा के लिए जिसे पहले नुकसान माना जा रहा था उनका भूमिहार जाति से होना, जिसकी पहुंच यूपी में सिमटी हुई है। वही उनके लिए फायदा साबित हुआ।
लखनऊ (जेएनएन)। यूपी में मुख्यमंत्री पद पर अगर मनोज सिन्हा का चयन होता है तो प्रधानमंत्री मोदी उन परंपराओं को तोड़ते दिख सकते हैं कि मुख्यमंत्री जातिगत ताकत का प्रतिनिधि हो। पीएम उन्हें चुनना चाहते हैं है जो बेहतर नतीजे दे सकते हैं। शायद उन्होंने इसके लिए खुद से ही प्रेरणा ली है। मोदी की अपनी जाति का गुजरात में खास प्रतिनिधित्व नहीं है लेकिन फिर भी वह राज्य के और इसके बाद देश के सबसे प्रिय नेता बन गए। उन्होंने फिर दिखाया है कि वह साहसी फैसले लेने से पीछे नहीं हटते अगर उन्हें ये फैसले लोगों के लिए लंबी हित के फायदे में लगते हैं।
आपको बताते चलें कि मनोज सिन्हा के लिए जिसे पहले नुकसान माना जा रहा था उनका भूमिहार जाति से होना, जिसकी पहुंच यूपी में सिमटी हुई है। वही उनके लिए फायदा साबित हुआ। सिन्हा जातिगत समीकरणों के ऊपर के दावेदार के रूप में उभरे जैसे महाराष्ट्र में देवेंद्र फडनवीस, गुजरात में विजय रुपाणी, झारखंड में रघुबर दास, हरियाणा में मनोहरलाल खट्टर उभरे थे। मध्य प्रदेश में भी भले शिवराज सिंह चौहान ओबीसी कैटिगरी से आते हैं, उनकी जाति और जातिगत ताकत का कोई खास प्रचार नहीं होता।
मनोज सिन्हा का हिंदी पट्टी के सबसे अहम और बड़े प्रदेश में सर्वोच्च पद पर पहुंचना फिर से दिखाता है कि मोदी व शाह किसी और मानक के बजाय मेरिट के आधार पर फैसले लेते हैं। आईआईटी बीएचयू से सिविल इंजिनियरिंग कर चुके मनोज सिन्हा तीसरी बार सांसद बने हैं। केंद्रीय संचार मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और रेल राज्य मंत्री के रूप में उनकी छवि जान बूझकर खबरों से दूर व लो-प्राइफल रहने वाले लेकिन अच्छा काम करने शख्स की है, जो बात से ज्यादा काम से बोलता है।
उनकी सबसे बड़ी खासियत संचार मंत्री के रूप में बड़े कॉरपोरेट से लेकर रेलवे में जमीनी कर्मचारी यूनियन के साथ समान सहजता से संवाद साधना है। वह बीएचयू के छात्र संघ अध्यक्ष रहे हैं। मृदुभाषी, शिष्ट और स्पष्ट हैं, धोती और लंबे कुर्ते में उनकी छवि जमीन के जुड़े शख्स की बनती है।
चुनाव से पहले से लेकर नतीजों के आने पर मोदी और शाह की सोशल इंजिनियरिंग के बारे में काफी कुछ कहा गया है। लेकिन सिन्हा को चुनकर उन्होंने सीधा संदेश दिया है कि जाति और समुदाय की चिंताएं गवर्नेंस से जुड़े फैसलों पर असर नहीं करते, कमान किसके हाथ में है यह मायने नहीं रखता। वाराणसी में अपनी आखिरी सभा में पीएम मोदी ने रेल मंत्रालय में सिन्हा के काम की जमकर तारीफ की थी।
सिन्हा को मोदी-शाह का भरोसा हासिल है और उनके गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी अच्छे रिश्ते हैं।
सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में राजनाथ सिंह को सर्वमान्य रूप से सबसे बड़े नेता के रूप में देखा जा रहा था और उनमें 15 साल फिर से सीएम पद संभालने की सभी योग्यताएं भी थीं। लेकिन राजनाथ के कद और राजनीतिक फलक पर उनकी स्वीकार्यता को देखते हुए मोदी और शाह को लगता है कि उनकी दिल्ली में अधिक जरूरत है।
-1 जुलाई 1959 को गाजीपुर के मोहनपुरा में जन्म हुआ। बीएचयू से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक - एमटेक की पढ़ाई की।
-आईआईटी बीएचयू से पढ़े मनोज सिन्हा की छवि काफी साफ सुथरी है।
-मनोज सिन्हा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। पीएम मोदी और मनोज सिन्हा के बीच आरएसएस के दिनों से ही अच्छे संबंध हैं।
-मनोज सिन्हा की 1, मई 1977 को सुलतानगंज, भागलपुर की नीलम सिन्हा से शादी हुई। उनकी एक बेटी है, जिसकी शादी हो चुकी है और एक बेटा है जो एक टेलीकॉम कम्पनी में काम कर रहा है।
-वह पूर्वांचल से आते हैं इसलिए पार्टी को वहां और मजबूत करने का जिम्मा भी वह उठाएंगे।
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मनोज सिन्हा के लिए जिसे पहले नुकसान माना जा रहा था उनका भूमिहार जाति से होना, जिसकी पहुंच यूपी में सिमटी हुई है। वही उनके लिए फायदा साबित हुआ। लखनऊ । यूपी में मुख्यमंत्री पद पर अगर मनोज सिन्हा का चयन होता है तो प्रधानमंत्री मोदी उन परंपराओं को तोड़ते दिख सकते हैं कि मुख्यमंत्री जातिगत ताकत का प्रतिनिधि हो। पीएम उन्हें चुनना चाहते हैं है जो बेहतर नतीजे दे सकते हैं। शायद उन्होंने इसके लिए खुद से ही प्रेरणा ली है। मोदी की अपनी जाति का गुजरात में खास प्रतिनिधित्व नहीं है लेकिन फिर भी वह राज्य के और इसके बाद देश के सबसे प्रिय नेता बन गए। उन्होंने फिर दिखाया है कि वह साहसी फैसले लेने से पीछे नहीं हटते अगर उन्हें ये फैसले लोगों के लिए लंबी हित के फायदे में लगते हैं। आपको बताते चलें कि मनोज सिन्हा के लिए जिसे पहले नुकसान माना जा रहा था उनका भूमिहार जाति से होना, जिसकी पहुंच यूपी में सिमटी हुई है। वही उनके लिए फायदा साबित हुआ। सिन्हा जातिगत समीकरणों के ऊपर के दावेदार के रूप में उभरे जैसे महाराष्ट्र में देवेंद्र फडनवीस, गुजरात में विजय रुपाणी, झारखंड में रघुबर दास, हरियाणा में मनोहरलाल खट्टर उभरे थे। मध्य प्रदेश में भी भले शिवराज सिंह चौहान ओबीसी कैटिगरी से आते हैं, उनकी जाति और जातिगत ताकत का कोई खास प्रचार नहीं होता। मनोज सिन्हा का हिंदी पट्टी के सबसे अहम और बड़े प्रदेश में सर्वोच्च पद पर पहुंचना फिर से दिखाता है कि मोदी व शाह किसी और मानक के बजाय मेरिट के आधार पर फैसले लेते हैं। आईआईटी बीएचयू से सिविल इंजिनियरिंग कर चुके मनोज सिन्हा तीसरी बार सांसद बने हैं। केंद्रीय संचार मंत्री और रेल राज्य मंत्री के रूप में उनकी छवि जान बूझकर खबरों से दूर व लो-प्राइफल रहने वाले लेकिन अच्छा काम करने शख्स की है, जो बात से ज्यादा काम से बोलता है। उनकी सबसे बड़ी खासियत संचार मंत्री के रूप में बड़े कॉरपोरेट से लेकर रेलवे में जमीनी कर्मचारी यूनियन के साथ समान सहजता से संवाद साधना है। वह बीएचयू के छात्र संघ अध्यक्ष रहे हैं। मृदुभाषी, शिष्ट और स्पष्ट हैं, धोती और लंबे कुर्ते में उनकी छवि जमीन के जुड़े शख्स की बनती है। चुनाव से पहले से लेकर नतीजों के आने पर मोदी और शाह की सोशल इंजिनियरिंग के बारे में काफी कुछ कहा गया है। लेकिन सिन्हा को चुनकर उन्होंने सीधा संदेश दिया है कि जाति और समुदाय की चिंताएं गवर्नेंस से जुड़े फैसलों पर असर नहीं करते, कमान किसके हाथ में है यह मायने नहीं रखता। वाराणसी में अपनी आखिरी सभा में पीएम मोदी ने रेल मंत्रालय में सिन्हा के काम की जमकर तारीफ की थी। सिन्हा को मोदी-शाह का भरोसा हासिल है और उनके गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी अच्छे रिश्ते हैं। सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में राजनाथ सिंह को सर्वमान्य रूप से सबसे बड़े नेता के रूप में देखा जा रहा था और उनमें पंद्रह साल फिर से सीएम पद संभालने की सभी योग्यताएं भी थीं। लेकिन राजनाथ के कद और राजनीतिक फलक पर उनकी स्वीकार्यता को देखते हुए मोदी और शाह को लगता है कि उनकी दिल्ली में अधिक जरूरत है। -एक जुलाई एक हज़ार नौ सौ उनसठ को गाजीपुर के मोहनपुरा में जन्म हुआ। बीएचयू से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक - एमटेक की पढ़ाई की। -आईआईटी बीएचयू से पढ़े मनोज सिन्हा की छवि काफी साफ सुथरी है। -मनोज सिन्हा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। पीएम मोदी और मनोज सिन्हा के बीच आरएसएस के दिनों से ही अच्छे संबंध हैं। -मनोज सिन्हा की एक, मई एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर को सुलतानगंज, भागलपुर की नीलम सिन्हा से शादी हुई। उनकी एक बेटी है, जिसकी शादी हो चुकी है और एक बेटा है जो एक टेलीकॉम कम्पनी में काम कर रहा है। -वह पूर्वांचल से आते हैं इसलिए पार्टी को वहां और मजबूत करने का जिम्मा भी वह उठाएंगे।
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ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका ने 23 नवंबर को बयान जारी कर बताया था कि यूके और ब्राजील में किए गए परीक्षणों में वैक्सीन (AZD1222) काफी असरदार पाई गई. आधी डोज दिए जाने पर वैक्सीन 90% तक इफेक्टिव मिली. इसके बाद दूसरे महीने में फुल डोज दिए जाने पर 62% असरदार देखी गई. इसके एक महीने बाद दो फुल डोज देने पर वैक्सीन का असर 70% देखा गया.
कनाडा. पूरी दुनिया में कोरोना का कहर अभी भी बरकरार है. विशेषज्ञों ने कहा है कि जब तक कोरोना की वैक्सीन (Corona Vaccine) नहीं आ जाती है तब तक कोरोना हमारी जिंदगियों से जाने वाला नहीं है. सभी देश कोरोना की वैक्सीन बनाने और जुटाने में लगे हुए हैं और इसी कड़ी में कनाडा भी इस साल के आखिर से पहले मॉडर्ना द्वारा विकसित की जा रही कोरोना वैक्सीन को मंजूरी दे सकता है, फाइजर-बायोएनटेक शॉट्स सोमवार को आने वाले हैं. कनाडा ने अब तक मॉडर्ना वैक्सीन की 40 मिलियन खुराक का ऑर्डर दिया है. सीमित 249,000 खुराक की प्रारंभिक किश्त के साथ फाइजर (Pfizer) वैक्सीन सबसे कमजोर वर्गों के लिए रखी जाएगी. स्वास्थ्य अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आधुनिक वैक्सीन भी जल्द ही उपलब्ध कराई जा सकती है, संभवतः 2020 के अंत से पहले.
देश में कोरोनावायरस संकट की दूसरी लहर के दौरान संक्रमण में नई ऊंचाई दर्ज करने वाले प्रांतों के साथ, कनाडा के लोगों के लिए यह खबर राहत की बात है. यहां मरने वालों की संख्या 13,109 तक पहुंच गई है, सिर्फ 11 दिनों में 1,000 से अधिक मृत्यु देखी गईं. कुल संक्रमण संख्या 441,705 तक पहुंच गई है. आउटलेट ग्लोबल न्यूज़ ने बताया कि मॉडर्ना वैक्सीन का फाइजर संस्करण पर लाभ यह है कि इसे 20 डिग्री सेल्सियस पर स्टोर किया जा सकता है, जहां सामान्य प्रशीतन प्रणाली पर्याप्त हो सकती है, जबकि बाद वाले को अल्ट्राकोल्ड -70 डिग्री सी की स्थिति की आवश्यकता होती है.
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'जवान' से पहले. . . इन 5 फिल्मों में अपनी खलनायकी से डरा चुके हैं शाहरुख खान, विलेनगिरी से फिर मचाएंगे धमाल!
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ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका ने तेईस नवंबर को बयान जारी कर बताया था कि यूके और ब्राजील में किए गए परीक्षणों में वैक्सीन काफी असरदार पाई गई. आधी डोज दिए जाने पर वैक्सीन नब्बे% तक इफेक्टिव मिली. इसके बाद दूसरे महीने में फुल डोज दिए जाने पर बासठ% असरदार देखी गई. इसके एक महीने बाद दो फुल डोज देने पर वैक्सीन का असर सत्तर% देखा गया. कनाडा. पूरी दुनिया में कोरोना का कहर अभी भी बरकरार है. विशेषज्ञों ने कहा है कि जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं आ जाती है तब तक कोरोना हमारी जिंदगियों से जाने वाला नहीं है. सभी देश कोरोना की वैक्सीन बनाने और जुटाने में लगे हुए हैं और इसी कड़ी में कनाडा भी इस साल के आखिर से पहले मॉडर्ना द्वारा विकसित की जा रही कोरोना वैक्सीन को मंजूरी दे सकता है, फाइजर-बायोएनटेक शॉट्स सोमवार को आने वाले हैं. कनाडा ने अब तक मॉडर्ना वैक्सीन की चालीस मिलियन खुराक का ऑर्डर दिया है. सीमित दो सौ उनचास,शून्य खुराक की प्रारंभिक किश्त के साथ फाइजर वैक्सीन सबसे कमजोर वर्गों के लिए रखी जाएगी. स्वास्थ्य अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आधुनिक वैक्सीन भी जल्द ही उपलब्ध कराई जा सकती है, संभवतः दो हज़ार बीस के अंत से पहले. देश में कोरोनावायरस संकट की दूसरी लहर के दौरान संक्रमण में नई ऊंचाई दर्ज करने वाले प्रांतों के साथ, कनाडा के लोगों के लिए यह खबर राहत की बात है. यहां मरने वालों की संख्या तेरह,एक सौ नौ तक पहुंच गई है, सिर्फ ग्यारह दिनों में एक,शून्य से अधिक मृत्यु देखी गईं. कुल संक्रमण संख्या चार सौ इकतालीस,सात सौ पाँच तक पहुंच गई है. आउटलेट ग्लोबल न्यूज़ ने बताया कि मॉडर्ना वैक्सीन का फाइजर संस्करण पर लाभ यह है कि इसे बीस डिग्री सेल्सियस पर स्टोर किया जा सकता है, जहां सामान्य प्रशीतन प्रणाली पर्याप्त हो सकती है, जबकि बाद वाले को अल्ट्राकोल्ड -सत्तर डिग्री सी की स्थिति की आवश्यकता होती है. . 'जवान' से पहले. . . इन पाँच फिल्मों में अपनी खलनायकी से डरा चुके हैं शाहरुख खान, विलेनगिरी से फिर मचाएंगे धमाल!
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इस संसार में यश का कोई मूल्य नहीं है , न धन का न वैभव का. न मान सम्मान से कोई संतुष्टि मिली है न पूंजी से, और मनुष्य इन् सब के पीछे दौड़ता है , भटकता है .
बड़प्पन का अहसास भी एक छल है, भ्रम है.
कभी सोचा है के क्या फायदा है इस अहसास से , जो सिर्फ तात्कालिक ख़ुशी देता है .
हम अपनी इंसानियत भुला कर के पैसो और चीजों के गुलाम होते जा रहे है . दिखावटी लोगो और माहौल में खुश होते है वास्तविकता से परे हम कल्पनाओ और छाया में सुख तलाश करते है .
क्या होता जा रहा है लोगो को क्यों चीजों से प्यार और इंसानों का इ्स्तेमॉल ? ? ?
पैसे और वस्तुए कुछ समय के लिए तो सुख दे सकती है लेकिन हमेशा साथ नहीं निभाती है ... जो हमेशा साथ देते है हर दुःख में हर सुख में वो इंसान होते है और हम इन्ही इंसानों से दूर होते जा रहे है!
लोगो से बात करते है लेकिन सिर्फ अपने मतलब के लिए , कभी उनका हाल लेते है क्या ? ? ?
कभी बिना मतलब उन्हें कॉल करते है क्या? ? ?
कभी बिना बताये उनकी प्रॉब्लम सुनते है क्या ? ? ?
अपनी व्यस्त जीवन से थोडा समय चुरा के सोचिये के आप किस चीज़ के पीछे भाग रहे है ? ? ?
क्या आप लोगो का उपयोग कर रहे है और चीजों से प्यार ? ? ?
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इस संसार में यश का कोई मूल्य नहीं है , न धन का न वैभव का. न मान सम्मान से कोई संतुष्टि मिली है न पूंजी से, और मनुष्य इन् सब के पीछे दौड़ता है , भटकता है . बड़प्पन का अहसास भी एक छल है, भ्रम है. कभी सोचा है के क्या फायदा है इस अहसास से , जो सिर्फ तात्कालिक ख़ुशी देता है . हम अपनी इंसानियत भुला कर के पैसो और चीजों के गुलाम होते जा रहे है . दिखावटी लोगो और माहौल में खुश होते है वास्तविकता से परे हम कल्पनाओ और छाया में सुख तलाश करते है . क्या होता जा रहा है लोगो को क्यों चीजों से प्यार और इंसानों का इ्स्तेमॉल ? ? ? पैसे और वस्तुए कुछ समय के लिए तो सुख दे सकती है लेकिन हमेशा साथ नहीं निभाती है ... जो हमेशा साथ देते है हर दुःख में हर सुख में वो इंसान होते है और हम इन्ही इंसानों से दूर होते जा रहे है! लोगो से बात करते है लेकिन सिर्फ अपने मतलब के लिए , कभी उनका हाल लेते है क्या ? ? ? कभी बिना मतलब उन्हें कॉल करते है क्या? ? ? कभी बिना बताये उनकी प्रॉब्लम सुनते है क्या ? ? ? अपनी व्यस्त जीवन से थोडा समय चुरा के सोचिये के आप किस चीज़ के पीछे भाग रहे है ? ? ? क्या आप लोगो का उपयोग कर रहे है और चीजों से प्यार ? ? ?
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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GORAKHPUR : पूरे परिवार को छोड़कर अचानक गायब हुए पति की तलाश में भटकते-भटकते एक महिला गोरखपुर पहुंच गई। सैटर्डे मॉर्निग रेलवे स्टेशन पहुंची महिला दिन भर तिवारीपुर एरिया में घूम-घूम कर अपने पति को तलाश करती रही। न तो महिला थाने ने उसकी मदद की, न ही पुलिस ने उसकी फरियाद सुनी। एरिया में रहने वाले लोगों ने उसे ढांढस बंधाया। महिला के मुताबिक उसने दिल्ली में पति की गुमशुदगी दर्ज कराई है और उसकी लोकेशन गोरखपुर में मिली है, जिसके बाद वह यहां आई है।
दिल्ली के टैगोर गार्डन एरिया में रहने वाला राजदेव (भ्म्) भ् मई से लापता है। उसकी पत्नी यशोदा ने राजौरी गार्डन थाने में ख् जून को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई है। सैटर्डे मार्निग यशोदा गोरखधाम एक्सप्रेस से सिटी पहुंची। यशोदा के मुताबिक उसके पति के गोरखपुर के तिवारीपुर में मौजूद होने की आशंका पर वो यहां आई है। सैटर्डे को वह तिवारीपुर और सूरजकुंड मोहल्ले में गली-गली पति की फोटो लेकर तलाश करती रही। यशोदा ने बताया कि पति राजदेव दिल्ली में एक बुटीक सेंटर पर काम करता था। भ् मई को वह रहस्यमय हालत में गायब हो गया।
यशोदा ने बताया कि क्99फ् में उसकी शादी राजदेव से हुई थी। तब से वह दिल्ली में परिवार के साथ रह रहा था। उसके दो बेटे और एक बेटी भी है। राजदेव शादी से पहले तिवारीपुर के अंधियारी बाग में रहता था। भ् मई को राजदेव ने उसे बेटे कन्हैया के पास भेजा और खुद मकान का सारा सामान बटोर कर गायब हो गया। उसकी लोकेशन गोरखपुर तब मिली जब राजदेव ने दिल्ली के मकान मालिक को किराए के लिए 9 हजार रुपए बैंक से पेमेंट किया। अंधियारी बाग का पता न होने के चलते वह गली-गली भटकती रही। मदद के लिए महिला थाने पहुंची जहां उसे निराशा हाथ लगी। स्थानीय लोगों ने उसकी मदद का प्रयास किया और उसे तिवारीपुर थाने भेजा, लेकिन दिल्ली में गुमशुदगी दर्ज होने के चलते पुलिस ने भी उसकी मदद नहीं की।
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GORAKHPUR : पूरे परिवार को छोड़कर अचानक गायब हुए पति की तलाश में भटकते-भटकते एक महिला गोरखपुर पहुंच गई। सैटर्डे मॉर्निग रेलवे स्टेशन पहुंची महिला दिन भर तिवारीपुर एरिया में घूम-घूम कर अपने पति को तलाश करती रही। न तो महिला थाने ने उसकी मदद की, न ही पुलिस ने उसकी फरियाद सुनी। एरिया में रहने वाले लोगों ने उसे ढांढस बंधाया। महिला के मुताबिक उसने दिल्ली में पति की गुमशुदगी दर्ज कराई है और उसकी लोकेशन गोरखपुर में मिली है, जिसके बाद वह यहां आई है। दिल्ली के टैगोर गार्डन एरिया में रहने वाला राजदेव भ् मई से लापता है। उसकी पत्नी यशोदा ने राजौरी गार्डन थाने में ख् जून को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई है। सैटर्डे मार्निग यशोदा गोरखधाम एक्सप्रेस से सिटी पहुंची। यशोदा के मुताबिक उसके पति के गोरखपुर के तिवारीपुर में मौजूद होने की आशंका पर वो यहां आई है। सैटर्डे को वह तिवारीपुर और सूरजकुंड मोहल्ले में गली-गली पति की फोटो लेकर तलाश करती रही। यशोदा ने बताया कि पति राजदेव दिल्ली में एक बुटीक सेंटर पर काम करता था। भ् मई को वह रहस्यमय हालत में गायब हो गया। यशोदा ने बताया कि क्निन्यानवेफ् में उसकी शादी राजदेव से हुई थी। तब से वह दिल्ली में परिवार के साथ रह रहा था। उसके दो बेटे और एक बेटी भी है। राजदेव शादी से पहले तिवारीपुर के अंधियारी बाग में रहता था। भ् मई को राजदेव ने उसे बेटे कन्हैया के पास भेजा और खुद मकान का सारा सामान बटोर कर गायब हो गया। उसकी लोकेशन गोरखपुर तब मिली जब राजदेव ने दिल्ली के मकान मालिक को किराए के लिए नौ हजार रुपए बैंक से पेमेंट किया। अंधियारी बाग का पता न होने के चलते वह गली-गली भटकती रही। मदद के लिए महिला थाने पहुंची जहां उसे निराशा हाथ लगी। स्थानीय लोगों ने उसकी मदद का प्रयास किया और उसे तिवारीपुर थाने भेजा, लेकिन दिल्ली में गुमशुदगी दर्ज होने के चलते पुलिस ने भी उसकी मदद नहीं की।
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लोगों के सामने आकर बोलने लगते हैं।
रहती है कि कहीं से उस दिन चण्डे की ध्वनि सुनाई देगी।
प्रदर्शन की पूर्व सूचना, जिसे केड्ली भी कहते हैं।
लोक कला के क्षेत्र में कर्नाटक की श्रीमंत परंपरा है।
चलता है। ययह उनकी थकान दूर करने का एक माध्यम भी है।
लोक गीत के साथ लोक नृत्य भी स्थान पाता है।
कर्नाटक की प्रचलित लोक कलाओं में प्रमुख है यक्षगान।
कर्नाटक में प्रचलित इस यक्षगान के अनेक रूप हैं।
मूडलपाय कहते हैं और पश्चिम के यक्षगान को पडवलपाय।
पश्चिम शैली नामक दो शैलियों में बाँटा गया है।
चित्रकला है।
शास्त्रीय संगीत से भिन्न गीत प्रकार यक्षगान में हैं।
बिलकुल अलग है। देशी ढंग से गीतों को गाया जाता है।
गायन के द्वारा एक लंबी कथा की प्रस्तुति होती है।
नृत्य के पूरक हैं।
की अभिव्यक्ति के लिये अनुकूल नृत्य शैली है।
चक्राकार नाचते हुए वीर रस की अभिव्यक्ति करते हैं।
है फिर नृत्याभिनय होता है।
कल्पना के अनुसार कलाकारों की वेशभूषा होती है। भीम,
आप तैयार करते हैं।
तैयार होने के लिये डेढ़ दो घंटे का समय लग जाता है।
प्राप्त करते हैं।
हारमोनियम में गायक के अनुकूल श्रुति बजाता रहता है।
है, जिसे पीछे से बजाया जाता है।
इसमें प्रवेश किया है, और इसे काफी प्रबुद्ध बनाया है।
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लोगों के सामने आकर बोलने लगते हैं। रहती है कि कहीं से उस दिन चण्डे की ध्वनि सुनाई देगी। प्रदर्शन की पूर्व सूचना, जिसे केड्ली भी कहते हैं। लोक कला के क्षेत्र में कर्नाटक की श्रीमंत परंपरा है। चलता है। ययह उनकी थकान दूर करने का एक माध्यम भी है। लोक गीत के साथ लोक नृत्य भी स्थान पाता है। कर्नाटक की प्रचलित लोक कलाओं में प्रमुख है यक्षगान। कर्नाटक में प्रचलित इस यक्षगान के अनेक रूप हैं। मूडलपाय कहते हैं और पश्चिम के यक्षगान को पडवलपाय। पश्चिम शैली नामक दो शैलियों में बाँटा गया है। चित्रकला है। शास्त्रीय संगीत से भिन्न गीत प्रकार यक्षगान में हैं। बिलकुल अलग है। देशी ढंग से गीतों को गाया जाता है। गायन के द्वारा एक लंबी कथा की प्रस्तुति होती है। नृत्य के पूरक हैं। की अभिव्यक्ति के लिये अनुकूल नृत्य शैली है। चक्राकार नाचते हुए वीर रस की अभिव्यक्ति करते हैं। है फिर नृत्याभिनय होता है। कल्पना के अनुसार कलाकारों की वेशभूषा होती है। भीम, आप तैयार करते हैं। तैयार होने के लिये डेढ़ दो घंटे का समय लग जाता है। प्राप्त करते हैं। हारमोनियम में गायक के अनुकूल श्रुति बजाता रहता है। है, जिसे पीछे से बजाया जाता है। इसमें प्रवेश किया है, और इसे काफी प्रबुद्ध बनाया है।
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आगरा में नगर निकाय चुनाव को लेकर रविवार शाम को भाजपा अनुसूचित मोर्चा के बैनर तले मतदाता सम्मेलन हुआ। महाजन भवन जयपुर हाउस में आयोजित कार्यक्रम में राज्यमंत्री मनोहर लाल कोरी और अनूप प्रधान ने कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार किया।
मतदाता सम्मेलन में अनुसूचित जाति के प्रबुद्धजन और प्रभावी मतदाता सम्मिलित हुए। राज्यमंत्री मनोहर लाल कोरी ने कहा कि योगी सरकार में अनुसूचित समाज को बिना भेदभाव के सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। अनूप प्रधान ने कहा विपक्ष जनता को गुमराह कर रहा है लेकिन लाभन्वित हुए लोग यह चाल समझ रहे हैं।
भाजपा सरकार ने अनुसूचित जाति के सम्मान के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। कार्यक्रम में अनुसूचित जाति मोर्चा के कार्यकर्ताओं को चुनावी रणनीति के बारे में भी बताया गया। कार्यकर्ताओं से कहा गया कि प्रदेश और केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करें।
भाजपा महानगर अध्यक्ष भानु महाजन ने कहा कि निकाय चुनाव में भाजपा एक बार फिर से ऐतिहासिक जीत हासिल करेगी। कार्यकर्ता की मेहनत रंग लाएगी। इस मौके पर विधायक डॉ. जीएस धर्मेश, पूर्व महापौर किशोरीलाल माहौर, रामबाबू हरित, पूर्व महापौर इंद्रजीत आर्य, डॉ. शिवकुमार माहोर, नीरज गुप्ता, डॉ. यादवेंद्र शर्मा, बाबी लाले, महेश शर्मा, सुनील करमचंदानी आदि मौजूद रहे।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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आगरा में नगर निकाय चुनाव को लेकर रविवार शाम को भाजपा अनुसूचित मोर्चा के बैनर तले मतदाता सम्मेलन हुआ। महाजन भवन जयपुर हाउस में आयोजित कार्यक्रम में राज्यमंत्री मनोहर लाल कोरी और अनूप प्रधान ने कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार किया। मतदाता सम्मेलन में अनुसूचित जाति के प्रबुद्धजन और प्रभावी मतदाता सम्मिलित हुए। राज्यमंत्री मनोहर लाल कोरी ने कहा कि योगी सरकार में अनुसूचित समाज को बिना भेदभाव के सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। अनूप प्रधान ने कहा विपक्ष जनता को गुमराह कर रहा है लेकिन लाभन्वित हुए लोग यह चाल समझ रहे हैं। भाजपा सरकार ने अनुसूचित जाति के सम्मान के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। कार्यक्रम में अनुसूचित जाति मोर्चा के कार्यकर्ताओं को चुनावी रणनीति के बारे में भी बताया गया। कार्यकर्ताओं से कहा गया कि प्रदेश और केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करें। भाजपा महानगर अध्यक्ष भानु महाजन ने कहा कि निकाय चुनाव में भाजपा एक बार फिर से ऐतिहासिक जीत हासिल करेगी। कार्यकर्ता की मेहनत रंग लाएगी। इस मौके पर विधायक डॉ. जीएस धर्मेश, पूर्व महापौर किशोरीलाल माहौर, रामबाबू हरित, पूर्व महापौर इंद्रजीत आर्य, डॉ. शिवकुमार माहोर, नीरज गुप्ता, डॉ. यादवेंद्र शर्मा, बाबी लाले, महेश शर्मा, सुनील करमचंदानी आदि मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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सकता । मैने उस वक्त किसी को लिखा भी था कि ऐसे सुन्दर दृश्यों के लिये में शायद अपने आपको राक्षसों को भी बेच देता ।" फिर वे खुद ही कोई बात याद करके बड़े जोर से हँस पड़े - "आपको पता है मैने सुबोरिन को क्या लिखा था ?" वह फिर हॅसे- "मैने लिखा था कि जब मेरे बच्चे हो जायेंगे तो मे गर्व से उनसे कहूँगा- अबे गधो, अपने जमाने में मैंने एक काली आँखोंवाली हिन्दू लड़की से भी प्रेम किया है - कहाँ ? एक चांदनी रात में और उस जगह जहाँ नारियल के पेड़ आपस में गुंथकर कुंज-सा बना लेते हैं । समझे ?... क्या बेबकूफी थी ?"
हमने देखा कि वह बीमार व्यक्ति पुरानी स्मृतियों के बीच में पुनः स्वस्थ हो उठा था । हमलोग इन्टरव्यू लेने आये थे अतः उनकी मानसिकता के इस 'प्रवाह' को रोकना उचित न समझा । निश्चय किया कि इसी में से आवश्यक प्रश्न उठाएंगे। अँधेरा अब इतना बढ़ गया था कि एक दूसरे के चेहरे दिखाई नहीं देते थे ।
"ओल्या, जरा बत्ती जला दो।" चैखुव ने उस महिला को और मुड़कर कहा, - फिर हमारी ओर देखकर बोले -"आप इनसे तो परिचित नहीं होंगे न ! "
हमलोगों ने नकारात्मक सिर हिलाया । उस महिला ने उठकर बत्ती जला दी । वह एक साया पहने थी । उसका सौदर्य दूर से ही आकर्षित करता था। उसने जैसे मख्त अनिच्छा से हमारी ओर हाथ जोड़कर नमस्कार किया। हमें उसका यह व्यवहार बड़ा ही विचित्र लगा ।
"ये है मेरी पत्नी ओल्गानिपर । 'मॉस्को आर्ट थियेटर' की सबसे बड़ी अभिनेत्री ।" फिर पत्नी की ओर देखकर जैसे उसे मनाते हुए हॅरा कर बोले - "आज ओल्या मुझसे बहुत नाराज है ! अभी जरा देर पहले लेखक तेलेशोव आये थे, उनसे मैने कह दिया था बातों-बातों में कि मै कल जा रहा हूं कहीं मरने के लिये । खस, इसी बात पर नाराज है कि मैने ऐसा क्यों कहा...
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सकता । मैने उस वक्त किसी को लिखा भी था कि ऐसे सुन्दर दृश्यों के लिये में शायद अपने आपको राक्षसों को भी बेच देता ।" फिर वे खुद ही कोई बात याद करके बड़े जोर से हँस पड़े - "आपको पता है मैने सुबोरिन को क्या लिखा था ?" वह फिर हॅसे- "मैने लिखा था कि जब मेरे बच्चे हो जायेंगे तो मे गर्व से उनसे कहूँगा- अबे गधो, अपने जमाने में मैंने एक काली आँखोंवाली हिन्दू लड़की से भी प्रेम किया है - कहाँ ? एक चांदनी रात में और उस जगह जहाँ नारियल के पेड़ आपस में गुंथकर कुंज-सा बना लेते हैं । समझे ?... क्या बेबकूफी थी ?" हमने देखा कि वह बीमार व्यक्ति पुरानी स्मृतियों के बीच में पुनः स्वस्थ हो उठा था । हमलोग इन्टरव्यू लेने आये थे अतः उनकी मानसिकता के इस 'प्रवाह' को रोकना उचित न समझा । निश्चय किया कि इसी में से आवश्यक प्रश्न उठाएंगे। अँधेरा अब इतना बढ़ गया था कि एक दूसरे के चेहरे दिखाई नहीं देते थे । "ओल्या, जरा बत्ती जला दो।" चैखुव ने उस महिला को और मुड़कर कहा, - फिर हमारी ओर देखकर बोले -"आप इनसे तो परिचित नहीं होंगे न ! " हमलोगों ने नकारात्मक सिर हिलाया । उस महिला ने उठकर बत्ती जला दी । वह एक साया पहने थी । उसका सौदर्य दूर से ही आकर्षित करता था। उसने जैसे मख्त अनिच्छा से हमारी ओर हाथ जोड़कर नमस्कार किया। हमें उसका यह व्यवहार बड़ा ही विचित्र लगा । "ये है मेरी पत्नी ओल्गानिपर । 'मॉस्को आर्ट थियेटर' की सबसे बड़ी अभिनेत्री ।" फिर पत्नी की ओर देखकर जैसे उसे मनाते हुए हॅरा कर बोले - "आज ओल्या मुझसे बहुत नाराज है ! अभी जरा देर पहले लेखक तेलेशोव आये थे, उनसे मैने कह दिया था बातों-बातों में कि मै कल जा रहा हूं कहीं मरने के लिये । खस, इसी बात पर नाराज है कि मैने ऐसा क्यों कहा...
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हमारी यह परिवार अन्य लोगों के साथ की गई यात्रा, एक यादगार यात्रा थी. इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ, नीचे इस यात्रा से जुड़ी सभी लिंक भी दे रहा हूँ ताकि आपको इसे ढूंढने में परेशानी न हो.
दिन के 3:15 बज रहे थे और हमारी गाड़ी बाबा मन्दिर से वापसी कर रही थी. मौसम के बदलते तेवर और ऊँची-ऊँची पर्वतों और वादियों के नैसर्गिक खूबसूरती ने , कैफेटेरिया में पढ़े-लिखे जाहिल जानवरों की वजह से गरम हुए दिमाग को जाने कब का ठंडा कर दिया. अगर आप असमंजस में हैं कि आखिर मैंने ऐसा क्यों कहा तो इस कड़ी को पढ़ें, ताकी आपको मेरी पूरी बात समझ आ पाए. हमें उसी रास्ते से गंगटोक, माल रोड़ वापस जाना था जिस रास्ते से हम आए थे.
हमारी गाड़ी हंगू झील ( Hangu Lake) से आगे निकली ही थी कि मौसम डरावना होने लगा, बादलों ओर धुंध ने अब रास्तों को भी घेरना शुरू कर दिया. विजिबिलिटी बिल्कुल कम हो गई जिसकी वजह से आठ-दस फीट के आगे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. अन्दर से डर भी लग रहा था, सही बोलूं तो फटी पड़ी थी. एक तो गहरे बादलों और धुंध की अटखेली, ऊँचें पहाड़ों के सर्पीले रास्ते और ऊपर से हमारे ड्राईवर महोदय की स्पीड वैसे ही तेज, जैसे आते वक्त थी. मैंने ड्राईवर महोदय को एक-दो बार विजिबिलिटी बिल्कुल कम होने की वजह से थोड़ा धीरे गाड़ी चलाने को कहा भी पर वो महोदय अपने ही धुन में मस्त बस लापरवाही से इतना कह देते आप चिन्ता मत करिए, ये सब हम रोज देखते हैं आपको बिल्कुल सही-सलामत आपके होटल छोड़ेंगे. जब भी गाड़ी शार्प कट लेती तेज गति से मुडती और आगे कुछ दिखाई नहीं देता तो डर के मारे जान हलक में आ जाती और गाड़ी को जोर से पकड़ लेता.
कभी-कभी तो मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि प्रक्रति के ऐसे रूप को देख एडवेंचर महसूस करूँ या हावी होते डर को सत्य समझूँ या प्रक्रति ने जो हमें अपने आगोस में लेकर अपने अलौकिक रूप के दर्शन कराये उसके लिए धन्यवाद करूँ. हमारे बच्चे हम से कहीं ज्यादा मस्ती में एक-एक पल को जी रहे थी, गाड़ी जब किसी बादलों के बड़े समुन्दर को चीरती हुई आगे बढती तो चारों नटखट मिलकर इतने खुश होकर मस्ती में तालियाँ बजाते, नाचते और चीखते कि हमारा डर भी दूर हो जाता. ये नन्हें नादानों को डर छु भी नहीं पा रहे थे. यही गुण अगर हम इन बच्चों से ग्रहण कर ले तो जिन्दगी को देखने का हमारा नजरिया ही बदल जाए और हम जिन्दगी को सही मायने में जी पाएं. हम डरे-सहमें और प्रकृति के अजीबो-गरीब रूप-रंग देख हतप्रद, कई बार तो ऐसा लगा हमने अपनी प्रक्रति को इसके रूप-रंग को, इसके लावण्यता को पहली ही बार देखा या यूं कहें हमने आज से पहले कुछ देखा-जाना ही नहीं. ऐसे ही आश्चर्यजनक रूप देख अचंभित से हम छंगू झील ( Tsomgo Lake) पहुँचे.
बच्चों ने छंगू झील ( Tsomgo Lake) से गुजरते वक्त याक देखा था, तो सबको याक की सवारी करनी थी. कुछ ही पलों में 4 बजने वाले थे तो हमने " बर्फ के भैंस " की सवारी न कर सिर्फ बच्चों को ही सवारी कराने का तय किया. याक को " बर्फ के भैंस " के नाम से संबोधित करने से श्रीमतिजी की भौहें तन गई, समझ गया श्रीमतिजी को भी " बर्फ के भैंस " पर सवारी करने का मन हो शायद. थोड़ी देर बाद श्रीमतिजी ने कहा ठीक ही कहा आपने - जब यहाँ के लोग हमारे यहाँ घूमने आयें तो उनको भैंस पर बिठाना चाहिए और सबके ठहाके से छंगू झील का शांत वातावरण गुंजायमान हो उठा.
मेरे छोटे राजकुमार की दृष्टी से सबसे सुन्दर लगने वाले " बर्फ के भैंस " यानि याक पर बच्चों की सैर शुरू हुई. बच्चों के चेहरे याक के पास पहुँचते ही आश्चर्यचकित और प्रसन्नता मिश्रित भाव से ओतप्रोत थे. सबसे पहले मेरे दोनों रतनधन दादागिरी कर याक पर सवार हो चुके थे, श्रीमतिजी के बहन के दोनों बच्चे आश्चर्यचकित होकर मुहँ खोले सिर्फ देख रहे थे, आखिर कर भी क्या सकते थे.
वैसे मेरे लिए भी " बर्फ के भैंस " को प्रत्यक्ष देखने का यह पहला ही अवसर था, श्रीमतिजी ने शायद अमरनाथ यात्रा में कहीं इस भैंस को देखा था. सांड जैसा तगड़ा मोटा, लंबे-लंबे काले और सफेद बाल, सींग सुन्दर तरीके से रंगीन सजाई हुई और बैठने के लिए रंगीन जीन ने " बर्फ के भैंस " को खूबसूरत तो बना दिया था पर उससे थोड़ी बदबू सी भी महसूस हो रही थी मुझे. पर दूसरी ओर कुछ लड़कियां और औरतें इस भैंसे से ऐसे चिपक-चिपक कर, किस्सी दे-दे कर फोटोसेशन करवा रहीं थी जैसे बिछड़े प्रियतमा से जन्मों-जन्मों के बाद मिलन हो रहा हो. भैंस वाले भाई ने भी कहा हमें वैसे फोटो निकालने को, पर हम से ये न हो सका. आखिर इतनी बदबूदार जानवर को कोई किस्सी देने वाला न था हमारे साथ, तो फोटसेशन कुछ खास न रहा हमारा. मतलब भैंस भाई से हमारी मुलाकात रोमांटिक न हो सकी. बाकी सबको देखकर तो लग रहा था कि हमारी फिल्म में ये मातम का सीन चल रहा है. आखिर मन-मारकर उस खुशनसीब बर्फ के भैंस और बदनसीब लड़कियों और औरतों से नजर हटाया और अपनी कहानी में वापस आ गया.
तो, दोनों राजकुमारों की शान की सवारी निकली और छंगू झील ( Tsomgo Lake) के नजारों और अलौकिक वातावरण का आनन्द लेते हुए सड़क पर यहाँ से वहाँ. याक वाले भाई ने दोनों बच्चों को " बर्फ के भैंस " का नाम " रेम्बों " बताया और बच्चों को मस्ती से घूमते-घुमाते बार-बार बता रहा था - " ये कोई ऐरा-गैर याक नहीं है, सबसे सुन्दर और सबसे सबसे बढ़िया याक है. जिसका नाम " रेम्बों " है " . बच्चे भी रेम्बों-रेम्बों कर चिल्लाते रहे और " बर्फ के भैंस " ओ... ओ.... मतलब याक के सवारी का आनंद लेते रहे. मेरे दोनों बच्चों के बाद दोनों निरीह से बच्चे भी रेम्बों-रेम्बों की रट लगाते लद लिए और मेरे दोनों शैतान रेम्बों-रेम्बों कर डरते-डरते उसे छूने भी रहे. " ये कोई ऐरा-गैर याक नहीं है, सबसे सुन्दर और सबसे सबसे बढ़िया याक है. जिसका नाम " रेम्बों " है " - ये हमें कई बार सुनने को मिले .
बच्चों की याक की सवारी और मौज-मस्ती के बाद हम वापिस हो रहे थे. लौटने हुए रास्ते में एक पड़ाव हमारा फिर से उस जगह था, जहाँ हमने जैकेट और बूट किराये पर लिए थे. जब तक हमने जैकेट और बूट वापस किए तब-तक ससुरजी के आर्डर किये गए गरमा-गरम मैग्गी भी बड़े से बाउल में हमारे सामने थे. सच पूछो तो पेट में चूहे कूद रहे थे, पर मैं गंगटोक पहुंचकर ही पेट-पूजा की सोच रहा था, दो मिनट में गरमा-गरम मैग्गी बाउल से ऐसे गायब हो गई थी जैसे वहाँ कुछ था ही नहीं. बाकी तो पहले ही बता चुका हूँ कि वहाँ खाने को हमारे लिए कुछ था ही नहीं. सिर्फ मटन और चावल का जुगाड़ था और हम ठहरे 100% शुद्ध शाकाहारी.
यहाँ से निकले तो रास्ते में बैग में पड़े नमकीन और अन्य व्यंजन का लुत्फ़ उठाते हुए पेट की अग्नि को शांत करते हुए, संध्या तक हम गंगटोक अपने होटल पहुँचे. शरीर थककर चूर हो चुका था. श्रीमतिजी ज्यादा परेशान दिख रही थी, क्योंकि मेरे छोटे राजकुमार ने पुरे रास्ते उनकी गोद में ही उधम मचाया कभी गाड़ी की सीट पर बैठे ही नहीं. गाड़ी ने हमें टैक्सी स्टैंड पर छोड़ा था क्योंकि शहर में नो एंट्री के वक्त बाहर जाने वाली गाडियाँ प्रवेश नहीं कर सकती और जैसा आप लोगों को मेरी पोस्ट पढ़कर पता चल ही गया होगा कि सिक्किम में ट्राफिक नियम सिर्फ कड़े नहीं हैं, बल्कि लोग स्वतः ही इन नियमों का पालन भी करते हैं. यहाँ से हमें लोकल टैक्सी लेकर माल रोड़ पर ही स्थित अपने होटल पहुँचाना था. काफी देर की भाग-दौड़ और मसक्कत के बाद सिर्फ एक गाड़ी मिल पाई, जिसमें सिर्फ चार लोग ही जा सकते थे जो कि यहाँ का नियम है. सबको भेज दिया गाड़ी में बिठाकर, मेरे साथ श्रीमतिजी और मेरे बड़े सुपुत्र रह गए. आधे घंटे तक गाड़ी के लिए भागा-भागी करता रहा पर कोई फायदा न हुआ. एक खली गाड़ी आती और लोग उसपर ऐसे टूटते जैसे मधुमक्खी अपने छत्ते में टूट पड़ती है. मुझे यह सब करने में बड़ा ही संकोच होता है, सच कहूँ तो ये मुझसे आज तक न हुआ.
आखिर खीजकर पैदल ही गूगल बाबा (मैप) के सहारे हम चल पड़े. 1 किलोमीटर से ज्यादा पैदल खुद को थके होने के बावजूद भी घसीट चुका था तो हमें एक खाली गाड़ी मिली और हम खुश हो लिए. पर हाय रे किस्मत, थोड़ी दूर जाकर ही जाम ऐसे फंसे कि ड्राईवर ने हाथ जोड़ दिए आगे गया तो बाहर आना मुश्किल है तो आप यहाँ से पैदल ही चले जाइये. ड्राईवर ने पतली सी गली होकर मार्केट तक पहुँचने का शोर्टकट रास्ता बताया, जिसपर पूछते-पाछते हम बेहाल होकर माल रोड़ पर पहुँचे. कई बार तो समझ ही नहीं आ रहा था कि हम रास्ते पर चल रहे हैं या किसी के घर में प्रवेश करने वाले हैं. पहाड़ी रास्ते की तरह ऊपर नीचे जाती सीढियों की वजह से बेटे की हालत क्या हो रही होगी वो हम अपने थकान से अनुभव कर रहे थे. पर थोड़ी न-नुकर के बावजूद भी बेटे ने भी गंगटोक माल तक का लगभग किलोमीटर तक का सफर फ़तेह कर लिया. बाद में पता चला कि जाम कई घंटे तक लगा रहा.
अब पेट में गणपति बाप्पा के मूषकराज उधम मचाये थे, तो सीधा माल रोड़ का रुख किए और माल के मार्केट में ही पतली सी नीचे जाती गली में स्थित मारवारी भोजनालय में छककर भोजन किया. जिसे हमने कल रात चहलकदमी करते वक्त देखा था. बाकी लोग होटल में ही खाना खाने वाले थे. मारवारी भोजनालय के भोजन ने मन तृप्त कर दिया, वरना NJP से लेकर दार्जिलिंग तक तीन दिनों तक जो खाना हमने खाया वो बिल्कुल ही बेस्वाद था और बस जीने के लिए खाने वाली बात हो रही थी. सबसे घटिया खाना हमने दार्जिलिंग के होटल में खाया था. दोनों दिन लेट होने की वजह से और कोई विकल्प नहीं रह रह जाता था.
चहलकदमी करते मैं, श्रीमतिजी और मेरे सुपुत्र होटल की बढ़ रहे थे की बारिश की बड़ी-बड़ी बूंदें टपकने लगी. वहीँ से एक बड़ा सा छाता ख़रीदा ताकि गीले न हो जाएँ और जल्द से होटल की ओर लपके. वैसे एक बात मैं दार्जिलिंग से नोटिस कर रहा था, यहाँ ज्यादातर इस्तेमाल होने वाले छतरी का आकार-प्रकार हमारे छतरी से काफी बड़ा था. तो बड़ा सा छाता इस यात्रा की निशानी के रूप में हम लोगों की एकमात्र शौपिंग थी. होटल के कमरे में बाकी के लोग भी खाना खा चुके थे और अब तो बस निद्रा देवी के आगोस में समाने को एक अदद बिस्तर की जरूरत थी. जिसकी 5000 रुपल्ली के इस सुइट में कोई कमी नहीं थी.
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हमारी यह परिवार अन्य लोगों के साथ की गई यात्रा, एक यादगार यात्रा थी. इस यात्रा वृतांत को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ, नीचे इस यात्रा से जुड़ी सभी लिंक भी दे रहा हूँ ताकि आपको इसे ढूंढने में परेशानी न हो. दिन के तीन:पंद्रह बज रहे थे और हमारी गाड़ी बाबा मन्दिर से वापसी कर रही थी. मौसम के बदलते तेवर और ऊँची-ऊँची पर्वतों और वादियों के नैसर्गिक खूबसूरती ने , कैफेटेरिया में पढ़े-लिखे जाहिल जानवरों की वजह से गरम हुए दिमाग को जाने कब का ठंडा कर दिया. अगर आप असमंजस में हैं कि आखिर मैंने ऐसा क्यों कहा तो इस कड़ी को पढ़ें, ताकी आपको मेरी पूरी बात समझ आ पाए. हमें उसी रास्ते से गंगटोक, माल रोड़ वापस जाना था जिस रास्ते से हम आए थे. हमारी गाड़ी हंगू झील से आगे निकली ही थी कि मौसम डरावना होने लगा, बादलों ओर धुंध ने अब रास्तों को भी घेरना शुरू कर दिया. विजिबिलिटी बिल्कुल कम हो गई जिसकी वजह से आठ-दस फीट के आगे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. अन्दर से डर भी लग रहा था, सही बोलूं तो फटी पड़ी थी. एक तो गहरे बादलों और धुंध की अटखेली, ऊँचें पहाड़ों के सर्पीले रास्ते और ऊपर से हमारे ड्राईवर महोदय की स्पीड वैसे ही तेज, जैसे आते वक्त थी. मैंने ड्राईवर महोदय को एक-दो बार विजिबिलिटी बिल्कुल कम होने की वजह से थोड़ा धीरे गाड़ी चलाने को कहा भी पर वो महोदय अपने ही धुन में मस्त बस लापरवाही से इतना कह देते आप चिन्ता मत करिए, ये सब हम रोज देखते हैं आपको बिल्कुल सही-सलामत आपके होटल छोड़ेंगे. जब भी गाड़ी शार्प कट लेती तेज गति से मुडती और आगे कुछ दिखाई नहीं देता तो डर के मारे जान हलक में आ जाती और गाड़ी को जोर से पकड़ लेता. कभी-कभी तो मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि प्रक्रति के ऐसे रूप को देख एडवेंचर महसूस करूँ या हावी होते डर को सत्य समझूँ या प्रक्रति ने जो हमें अपने आगोस में लेकर अपने अलौकिक रूप के दर्शन कराये उसके लिए धन्यवाद करूँ. हमारे बच्चे हम से कहीं ज्यादा मस्ती में एक-एक पल को जी रहे थी, गाड़ी जब किसी बादलों के बड़े समुन्दर को चीरती हुई आगे बढती तो चारों नटखट मिलकर इतने खुश होकर मस्ती में तालियाँ बजाते, नाचते और चीखते कि हमारा डर भी दूर हो जाता. ये नन्हें नादानों को डर छु भी नहीं पा रहे थे. यही गुण अगर हम इन बच्चों से ग्रहण कर ले तो जिन्दगी को देखने का हमारा नजरिया ही बदल जाए और हम जिन्दगी को सही मायने में जी पाएं. हम डरे-सहमें और प्रकृति के अजीबो-गरीब रूप-रंग देख हतप्रद, कई बार तो ऐसा लगा हमने अपनी प्रक्रति को इसके रूप-रंग को, इसके लावण्यता को पहली ही बार देखा या यूं कहें हमने आज से पहले कुछ देखा-जाना ही नहीं. ऐसे ही आश्चर्यजनक रूप देख अचंभित से हम छंगू झील पहुँचे. बच्चों ने छंगू झील से गुजरते वक्त याक देखा था, तो सबको याक की सवारी करनी थी. कुछ ही पलों में चार बजने वाले थे तो हमने " बर्फ के भैंस " की सवारी न कर सिर्फ बच्चों को ही सवारी कराने का तय किया. याक को " बर्फ के भैंस " के नाम से संबोधित करने से श्रीमतिजी की भौहें तन गई, समझ गया श्रीमतिजी को भी " बर्फ के भैंस " पर सवारी करने का मन हो शायद. थोड़ी देर बाद श्रीमतिजी ने कहा ठीक ही कहा आपने - जब यहाँ के लोग हमारे यहाँ घूमने आयें तो उनको भैंस पर बिठाना चाहिए और सबके ठहाके से छंगू झील का शांत वातावरण गुंजायमान हो उठा. मेरे छोटे राजकुमार की दृष्टी से सबसे सुन्दर लगने वाले " बर्फ के भैंस " यानि याक पर बच्चों की सैर शुरू हुई. बच्चों के चेहरे याक के पास पहुँचते ही आश्चर्यचकित और प्रसन्नता मिश्रित भाव से ओतप्रोत थे. सबसे पहले मेरे दोनों रतनधन दादागिरी कर याक पर सवार हो चुके थे, श्रीमतिजी के बहन के दोनों बच्चे आश्चर्यचकित होकर मुहँ खोले सिर्फ देख रहे थे, आखिर कर भी क्या सकते थे. वैसे मेरे लिए भी " बर्फ के भैंस " को प्रत्यक्ष देखने का यह पहला ही अवसर था, श्रीमतिजी ने शायद अमरनाथ यात्रा में कहीं इस भैंस को देखा था. सांड जैसा तगड़ा मोटा, लंबे-लंबे काले और सफेद बाल, सींग सुन्दर तरीके से रंगीन सजाई हुई और बैठने के लिए रंगीन जीन ने " बर्फ के भैंस " को खूबसूरत तो बना दिया था पर उससे थोड़ी बदबू सी भी महसूस हो रही थी मुझे. पर दूसरी ओर कुछ लड़कियां और औरतें इस भैंसे से ऐसे चिपक-चिपक कर, किस्सी दे-दे कर फोटोसेशन करवा रहीं थी जैसे बिछड़े प्रियतमा से जन्मों-जन्मों के बाद मिलन हो रहा हो. भैंस वाले भाई ने भी कहा हमें वैसे फोटो निकालने को, पर हम से ये न हो सका. आखिर इतनी बदबूदार जानवर को कोई किस्सी देने वाला न था हमारे साथ, तो फोटसेशन कुछ खास न रहा हमारा. मतलब भैंस भाई से हमारी मुलाकात रोमांटिक न हो सकी. बाकी सबको देखकर तो लग रहा था कि हमारी फिल्म में ये मातम का सीन चल रहा है. आखिर मन-मारकर उस खुशनसीब बर्फ के भैंस और बदनसीब लड़कियों और औरतों से नजर हटाया और अपनी कहानी में वापस आ गया. तो, दोनों राजकुमारों की शान की सवारी निकली और छंगू झील के नजारों और अलौकिक वातावरण का आनन्द लेते हुए सड़क पर यहाँ से वहाँ. याक वाले भाई ने दोनों बच्चों को " बर्फ के भैंस " का नाम " रेम्बों " बताया और बच्चों को मस्ती से घूमते-घुमाते बार-बार बता रहा था - " ये कोई ऐरा-गैर याक नहीं है, सबसे सुन्दर और सबसे सबसे बढ़िया याक है. जिसका नाम " रेम्बों " है " . बच्चे भी रेम्बों-रेम्बों कर चिल्लाते रहे और " बर्फ के भैंस " ओ... ओ.... मतलब याक के सवारी का आनंद लेते रहे. मेरे दोनों बच्चों के बाद दोनों निरीह से बच्चे भी रेम्बों-रेम्बों की रट लगाते लद लिए और मेरे दोनों शैतान रेम्बों-रेम्बों कर डरते-डरते उसे छूने भी रहे. " ये कोई ऐरा-गैर याक नहीं है, सबसे सुन्दर और सबसे सबसे बढ़िया याक है. जिसका नाम " रेम्बों " है " - ये हमें कई बार सुनने को मिले . बच्चों की याक की सवारी और मौज-मस्ती के बाद हम वापिस हो रहे थे. लौटने हुए रास्ते में एक पड़ाव हमारा फिर से उस जगह था, जहाँ हमने जैकेट और बूट किराये पर लिए थे. जब तक हमने जैकेट और बूट वापस किए तब-तक ससुरजी के आर्डर किये गए गरमा-गरम मैग्गी भी बड़े से बाउल में हमारे सामने थे. सच पूछो तो पेट में चूहे कूद रहे थे, पर मैं गंगटोक पहुंचकर ही पेट-पूजा की सोच रहा था, दो मिनट में गरमा-गरम मैग्गी बाउल से ऐसे गायब हो गई थी जैसे वहाँ कुछ था ही नहीं. बाकी तो पहले ही बता चुका हूँ कि वहाँ खाने को हमारे लिए कुछ था ही नहीं. सिर्फ मटन और चावल का जुगाड़ था और हम ठहरे एक सौ% शुद्ध शाकाहारी. यहाँ से निकले तो रास्ते में बैग में पड़े नमकीन और अन्य व्यंजन का लुत्फ़ उठाते हुए पेट की अग्नि को शांत करते हुए, संध्या तक हम गंगटोक अपने होटल पहुँचे. शरीर थककर चूर हो चुका था. श्रीमतिजी ज्यादा परेशान दिख रही थी, क्योंकि मेरे छोटे राजकुमार ने पुरे रास्ते उनकी गोद में ही उधम मचाया कभी गाड़ी की सीट पर बैठे ही नहीं. गाड़ी ने हमें टैक्सी स्टैंड पर छोड़ा था क्योंकि शहर में नो एंट्री के वक्त बाहर जाने वाली गाडियाँ प्रवेश नहीं कर सकती और जैसा आप लोगों को मेरी पोस्ट पढ़कर पता चल ही गया होगा कि सिक्किम में ट्राफिक नियम सिर्फ कड़े नहीं हैं, बल्कि लोग स्वतः ही इन नियमों का पालन भी करते हैं. यहाँ से हमें लोकल टैक्सी लेकर माल रोड़ पर ही स्थित अपने होटल पहुँचाना था. काफी देर की भाग-दौड़ और मसक्कत के बाद सिर्फ एक गाड़ी मिल पाई, जिसमें सिर्फ चार लोग ही जा सकते थे जो कि यहाँ का नियम है. सबको भेज दिया गाड़ी में बिठाकर, मेरे साथ श्रीमतिजी और मेरे बड़े सुपुत्र रह गए. आधे घंटे तक गाड़ी के लिए भागा-भागी करता रहा पर कोई फायदा न हुआ. एक खली गाड़ी आती और लोग उसपर ऐसे टूटते जैसे मधुमक्खी अपने छत्ते में टूट पड़ती है. मुझे यह सब करने में बड़ा ही संकोच होता है, सच कहूँ तो ये मुझसे आज तक न हुआ. आखिर खीजकर पैदल ही गूगल बाबा के सहारे हम चल पड़े. एक किलोग्राममीटर से ज्यादा पैदल खुद को थके होने के बावजूद भी घसीट चुका था तो हमें एक खाली गाड़ी मिली और हम खुश हो लिए. पर हाय रे किस्मत, थोड़ी दूर जाकर ही जाम ऐसे फंसे कि ड्राईवर ने हाथ जोड़ दिए आगे गया तो बाहर आना मुश्किल है तो आप यहाँ से पैदल ही चले जाइये. ड्राईवर ने पतली सी गली होकर मार्केट तक पहुँचने का शोर्टकट रास्ता बताया, जिसपर पूछते-पाछते हम बेहाल होकर माल रोड़ पर पहुँचे. कई बार तो समझ ही नहीं आ रहा था कि हम रास्ते पर चल रहे हैं या किसी के घर में प्रवेश करने वाले हैं. पहाड़ी रास्ते की तरह ऊपर नीचे जाती सीढियों की वजह से बेटे की हालत क्या हो रही होगी वो हम अपने थकान से अनुभव कर रहे थे. पर थोड़ी न-नुकर के बावजूद भी बेटे ने भी गंगटोक माल तक का लगभग किलोमीटर तक का सफर फ़तेह कर लिया. बाद में पता चला कि जाम कई घंटे तक लगा रहा. अब पेट में गणपति बाप्पा के मूषकराज उधम मचाये थे, तो सीधा माल रोड़ का रुख किए और माल के मार्केट में ही पतली सी नीचे जाती गली में स्थित मारवारी भोजनालय में छककर भोजन किया. जिसे हमने कल रात चहलकदमी करते वक्त देखा था. बाकी लोग होटल में ही खाना खाने वाले थे. मारवारी भोजनालय के भोजन ने मन तृप्त कर दिया, वरना NJP से लेकर दार्जिलिंग तक तीन दिनों तक जो खाना हमने खाया वो बिल्कुल ही बेस्वाद था और बस जीने के लिए खाने वाली बात हो रही थी. सबसे घटिया खाना हमने दार्जिलिंग के होटल में खाया था. दोनों दिन लेट होने की वजह से और कोई विकल्प नहीं रह रह जाता था. चहलकदमी करते मैं, श्रीमतिजी और मेरे सुपुत्र होटल की बढ़ रहे थे की बारिश की बड़ी-बड़ी बूंदें टपकने लगी. वहीँ से एक बड़ा सा छाता ख़रीदा ताकि गीले न हो जाएँ और जल्द से होटल की ओर लपके. वैसे एक बात मैं दार्जिलिंग से नोटिस कर रहा था, यहाँ ज्यादातर इस्तेमाल होने वाले छतरी का आकार-प्रकार हमारे छतरी से काफी बड़ा था. तो बड़ा सा छाता इस यात्रा की निशानी के रूप में हम लोगों की एकमात्र शौपिंग थी. होटल के कमरे में बाकी के लोग भी खाना खा चुके थे और अब तो बस निद्रा देवी के आगोस में समाने को एक अदद बिस्तर की जरूरत थी. जिसकी पाँच हज़ार रुपयापल्ली के इस सुइट में कोई कमी नहीं थी.
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लखीमपुर खीरी के तिकुनिया क्षेत्र में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शिक्षक अपने स्कूल की छात्रा को लेकर रफूचक्कर हो गया। छात्रा के पिता ढकेरवा नानकार निवासी एक शिक्षक और उसके भाई के खिलाफ बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाने की तहरीर दी है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर शिक्षक और छात्रा की तलाश शुरू कर दी है।
तिकुनिया कोतवाली क्षेत्र के एक प्राइवेट स्कूल में 18 साल की छात्रा पढ़ती है। उसी स्कूल में ढकेरवा नानकार निवासी इदनान खां शिक्षक है। आरोप है कि शिक्षक इदनाम खां ने छात्रा को अपने जाल में फंसा लिया। इसके बाद इदनान खां और उसका भाई मासूम खां छात्रा को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए। छात्रा के पिता ने शिक्षक इदनान और उसके भाई मासूम खान पर कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस के मुताबिक मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। छात्रा की तलाश की जा रही है। पीड़ित पिता के अनुसार आठ फरवरी को शिक्षक अपने भाई के साथ उसकी गैरमौजूदगी में घर आ गया था। यहां से उसकी बेटी को ले गया। जब वह अपने घर पहुंचा, तब बेटी की तलाश की। सुराग न मिलने पर 11 फरवरी को तहरीर देकर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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लखीमपुर खीरी के तिकुनिया क्षेत्र में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शिक्षक अपने स्कूल की छात्रा को लेकर रफूचक्कर हो गया। छात्रा के पिता ढकेरवा नानकार निवासी एक शिक्षक और उसके भाई के खिलाफ बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाने की तहरीर दी है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर शिक्षक और छात्रा की तलाश शुरू कर दी है। तिकुनिया कोतवाली क्षेत्र के एक प्राइवेट स्कूल में अट्ठारह साल की छात्रा पढ़ती है। उसी स्कूल में ढकेरवा नानकार निवासी इदनान खां शिक्षक है। आरोप है कि शिक्षक इदनाम खां ने छात्रा को अपने जाल में फंसा लिया। इसके बाद इदनान खां और उसका भाई मासूम खां छात्रा को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए। छात्रा के पिता ने शिक्षक इदनान और उसके भाई मासूम खान पर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस के मुताबिक मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। छात्रा की तलाश की जा रही है। पीड़ित पिता के अनुसार आठ फरवरी को शिक्षक अपने भाई के साथ उसकी गैरमौजूदगी में घर आ गया था। यहां से उसकी बेटी को ले गया। जब वह अपने घर पहुंचा, तब बेटी की तलाश की। सुराग न मिलने पर ग्यारह फरवरी को तहरीर देकर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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लाइव हिंदी खबर :-Leap year हर चौथे साल आता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार चार सालों में एक बार फरवरी में 29 दिन होते हैं, जिसे हम लीप ईयर कहते हैं। यह तारीख अपने आप में अनोखी मानी जाती है। कहा जाता है की इस दिन जन्में लोग भी अनोखे होते हैं।
जिन लोगों का जन्म 29 फरवरी को आता है, वे अपना वास्तविक जन्मदिन चार साल में ही एक बार मना पाते हैं। जिन बच्चों का जन्म इस साल 29 फरवरी को होगा, उनकी जन्मतिथि का योग 8 बनेगा जो अंकविद्या में शनि ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अलावा 29 तारीख को शनिवार का दिन पड़ रहा है।
शनि अपनी मकर राशि में, गुरु भी स्वराशि धनु में होगा. परंतु इस दिन जन्म लेने वाले बच्चे आंशिक कालसर्प योग से प्रभावित होंगे।
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लाइव हिंदी खबर :-Leap year हर चौथे साल आता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार चार सालों में एक बार फरवरी में उनतीस दिन होते हैं, जिसे हम लीप ईयर कहते हैं। यह तारीख अपने आप में अनोखी मानी जाती है। कहा जाता है की इस दिन जन्में लोग भी अनोखे होते हैं। जिन लोगों का जन्म उनतीस फरवरी को आता है, वे अपना वास्तविक जन्मदिन चार साल में ही एक बार मना पाते हैं। जिन बच्चों का जन्म इस साल उनतीस फरवरी को होगा, उनकी जन्मतिथि का योग आठ बनेगा जो अंकविद्या में शनि ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अलावा उनतीस तारीख को शनिवार का दिन पड़ रहा है। शनि अपनी मकर राशि में, गुरु भी स्वराशि धनु में होगा. परंतु इस दिन जन्म लेने वाले बच्चे आंशिक कालसर्प योग से प्रभावित होंगे।
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Meerut News Today: कानून पर जनता एकमत नजर नहीं आ रही है। शहर काजी बोले कि देश में अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं और देशहित में यूसीसी सही नहीं है। वहीं शहर के तमाम व्यापारियों का कहना है कि सभी देश में एक झंडा एक कानून है। फिर हमारे देश में दो कानून क्यों हैं।
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Meerut News Today: कानून पर जनता एकमत नजर नहीं आ रही है। शहर काजी बोले कि देश में अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं और देशहित में यूसीसी सही नहीं है। वहीं शहर के तमाम व्यापारियों का कहना है कि सभी देश में एक झंडा एक कानून है। फिर हमारे देश में दो कानून क्यों हैं।
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जुलाई आपके लिए कई बदलावों का दौर रहेगा। आप महसूस करेंगे कि ऐसी कोई चीज नहीं है जिसे आप दूर नहीं कर सकते। स्वतंत्रता आपको पंख जोड़ेगी। सामान्य से अधिक स्वेच्छा से, आप लोगों से मिलेंगे, मित्रों से बात करेंगे, और अपने भावनात्मक जीवन के विकास की योजनाएँ बनाएंगे। जब भी आप अपने आप को जरूरत महसूस करते हैं, आपके पड़ोसी और रिश्तेदार तुरंत आपकी मदद के लिए आएंगे।
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जुलाई आपके लिए कई बदलावों का दौर रहेगा। आप महसूस करेंगे कि ऐसी कोई चीज नहीं है जिसे आप दूर नहीं कर सकते। स्वतंत्रता आपको पंख जोड़ेगी। सामान्य से अधिक स्वेच्छा से, आप लोगों से मिलेंगे, मित्रों से बात करेंगे, और अपने भावनात्मक जीवन के विकास की योजनाएँ बनाएंगे। जब भी आप अपने आप को जरूरत महसूस करते हैं, आपके पड़ोसी और रिश्तेदार तुरंत आपकी मदद के लिए आएंगे।
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आईपीएल के इस सीजन में शुक्रवार को विराट कोहली ने अपना पहला शतक लगाते हुए टीम को दूसरी जीत दिला दी। विराट कोहली के शतक के बदौलत बैंगलोर कोलकाता को एक विशाल स्कोर देने में न सिर्फ कामयाब रहा, बल्कि मैच भी अपनी झोली में डाल ली। शुक्रवार को खेले गए मैच में कोहली और मोईन अली की धमाकेदार बल्लेबाजी की वजह से कोलकाता के सामने 213 जैसा विशाल लक्ष्य आ गया। विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी कोलकाता ने खराब शुरुआत की, लेकिन आखिरी में आंद्रे रसेल और नीतीश राणा की बल्लेबाजी से मैच में ट्विस्ट आ गया था। तो चलिए जानते हैं कि हमारे इस लेख में आपके लिए क्या खास है?
शुक्रवार को खेले गए मुकाबले में विराट कोहली ने सिर्फ 58 गेंदों में 100 रन बनाते हुए अपनी टीम को मजबूत किया। विराट के 100 रनों की मदद से बैंगलोर की उम्मीदे एक बार फिर से ज़िंदा हो गई है। विराट ने धमाकेदार बल्लेबाजी करते हुए 58 गेंदों में नौ चौके और 6 छक्कों की मदद से 100 रन बनाए तो वहीं उनका साथ दे रहे मोईन अली ने भी धमाकेदार बल्लेबाजी की। मोईन अली की तूफानी बल्लेबाजी का असर बॉलर कुलदीप पर साफ साफ दिखाई दिया।
मोईन अली की धमाकेदार बल्लेबाजी का फायदा बैंगलोर को ज़रूर मिला हो, लेकिन इससे कोलकाता के गेंदबाजों का मनोबल टूट गया। इसका जीता जागता सबूत कुलदीप यादव के आंसू हैं। दरअसल, 16वें ओवर में मोईन अली ने कुलदीप जमकर खबर ले ली और इस ओवर में इन्होंने (4, 6, 4, 6, 1w, 6) में रनों की बरसात कर दी। इस ओवर की आखिरी गेंद पर कुलदीप यादव ने अपना बदला लेते हुए मोईन अली को कैच आउट कर दिया, लेकिन निराश कुलदीप मैदान में ही रोने लगें।
मोईन अली द्वारा अपनी जमकर धुलाई होने के बाद कुलदीप यादव काफी निराश हुए। इस दौरान उनका आत्मविश्वास भी टूटता हुआ नजर आया। इतना ही नहीं, इस ओवर के बाद टाइम आउट हुआ, जिस दौरान कुलदीप ने अंपायर से अपनी कैप लेकर मैदान पर फेंक किया। हालांकि, बाद में उन्होंने कैप उठा लिया, लेकिन इसी बीच उनकी आंखों से आंसू निकलने लगें, जिसके बाद साथी खिलाड़ियों ने उन्हें सांत्वना दी।
213 रनों का पीछा करने मैदान में उतरी कोलकाता की टीम को इस मुकाबले में 10 रनों से मात खानी पड़ी। शुरुआत में कोलकाता की टीम बिखरती हुई दिखीं, लेकिन नीतीश राणा और आंद्रे रसेल की बल्लेबाजी की वजह से यह मैच आखिरी ओवरो तक चला और मैच में रोमांच बना रहा। आंद्रे रसेल ने तूफानी पारी खेलते हुए 9 छक्के लगाएं, लेकिन उनकी पारी भी कोलकाता को जीत दिलाने में नाकाम रही और वे 19वें ओवर के आखिरी गेंद पर आउट हो गए, जिसके बाद विराट बिग्रेड को इस सीजन में अपनी दूसरी जीत हासिल हुई।
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आईपीएल के इस सीजन में शुक्रवार को विराट कोहली ने अपना पहला शतक लगाते हुए टीम को दूसरी जीत दिला दी। विराट कोहली के शतक के बदौलत बैंगलोर कोलकाता को एक विशाल स्कोर देने में न सिर्फ कामयाब रहा, बल्कि मैच भी अपनी झोली में डाल ली। शुक्रवार को खेले गए मैच में कोहली और मोईन अली की धमाकेदार बल्लेबाजी की वजह से कोलकाता के सामने दो सौ तेरह जैसा विशाल लक्ष्य आ गया। विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी कोलकाता ने खराब शुरुआत की, लेकिन आखिरी में आंद्रे रसेल और नीतीश राणा की बल्लेबाजी से मैच में ट्विस्ट आ गया था। तो चलिए जानते हैं कि हमारे इस लेख में आपके लिए क्या खास है? शुक्रवार को खेले गए मुकाबले में विराट कोहली ने सिर्फ अट्ठावन गेंदों में एक सौ रन बनाते हुए अपनी टीम को मजबूत किया। विराट के एक सौ रनों की मदद से बैंगलोर की उम्मीदे एक बार फिर से ज़िंदा हो गई है। विराट ने धमाकेदार बल्लेबाजी करते हुए अट्ठावन गेंदों में नौ चौके और छः छक्कों की मदद से एक सौ रन बनाए तो वहीं उनका साथ दे रहे मोईन अली ने भी धमाकेदार बल्लेबाजी की। मोईन अली की तूफानी बल्लेबाजी का असर बॉलर कुलदीप पर साफ साफ दिखाई दिया। मोईन अली की धमाकेदार बल्लेबाजी का फायदा बैंगलोर को ज़रूर मिला हो, लेकिन इससे कोलकाता के गेंदबाजों का मनोबल टूट गया। इसका जीता जागता सबूत कुलदीप यादव के आंसू हैं। दरअसल, सोलहवें ओवर में मोईन अली ने कुलदीप जमकर खबर ले ली और इस ओवर में इन्होंने में रनों की बरसात कर दी। इस ओवर की आखिरी गेंद पर कुलदीप यादव ने अपना बदला लेते हुए मोईन अली को कैच आउट कर दिया, लेकिन निराश कुलदीप मैदान में ही रोने लगें। मोईन अली द्वारा अपनी जमकर धुलाई होने के बाद कुलदीप यादव काफी निराश हुए। इस दौरान उनका आत्मविश्वास भी टूटता हुआ नजर आया। इतना ही नहीं, इस ओवर के बाद टाइम आउट हुआ, जिस दौरान कुलदीप ने अंपायर से अपनी कैप लेकर मैदान पर फेंक किया। हालांकि, बाद में उन्होंने कैप उठा लिया, लेकिन इसी बीच उनकी आंखों से आंसू निकलने लगें, जिसके बाद साथी खिलाड़ियों ने उन्हें सांत्वना दी। दो सौ तेरह रनों का पीछा करने मैदान में उतरी कोलकाता की टीम को इस मुकाबले में दस रनों से मात खानी पड़ी। शुरुआत में कोलकाता की टीम बिखरती हुई दिखीं, लेकिन नीतीश राणा और आंद्रे रसेल की बल्लेबाजी की वजह से यह मैच आखिरी ओवरो तक चला और मैच में रोमांच बना रहा। आंद्रे रसेल ने तूफानी पारी खेलते हुए नौ छक्के लगाएं, लेकिन उनकी पारी भी कोलकाता को जीत दिलाने में नाकाम रही और वे उन्नीसवें ओवर के आखिरी गेंद पर आउट हो गए, जिसके बाद विराट बिग्रेड को इस सीजन में अपनी दूसरी जीत हासिल हुई।
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बिलासपुर, (ब्यूरो छत्तीसगढ़)। हाईकोर्ट ने निलंबित आईएएस अधिकारी की रिट अपील पर राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में निलंबत समाप्त करने एवं अंतरिम राहत दिलाने की मांग की गई है। छत्तीसगढ़ शासन के अवर सचिव टी राधाकृष्णनन को गड़बड़ी के आरोप में अक्टूबर में निलंबित किया गया है। उनके ऊपर यह चार्ज लगाया कि राजस्व मंडल में पदस्थ रहते हुए अधिकार क्षेर्त्र से बाहर जा कर कई पकरण में गलत आदेश पारित किया गया है। इसी पकार पाइवेट लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए आदेश दिए जाने की बात कही गई। शासन की कार्रवाई के खिलाप उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इस पर पारंभिक सुनवाई उपरांत कोर्ट ने कहा था कि पकरण में पहले उन्हें केट में वाद पस्तुत करना था। यहां के निर्णय आने के बाद हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। कोर्ट के इस आदेश पर उन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली थी। इसके बाद केट में वाद पस्तुत किया गया। केट कोर्ट ने सुनवाई उपरांत मामले को खारिज कर दिया। केट से निर्णय आने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में रिट अपील की है। इसमें निलंबन की कार्रवाई पर रोक लगाने व अंतरित राहत दिलाने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने अपील पर शासन को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। जिला पंचायत सीईओ कोर्ट में हुए उपस्थित-बायोकेमेस्ट्री को विज्ञान विषय नहीं मानने के खिलाप पेश याचिका पर बिलासपुर जिला पंचायत सीईओ सोमवार को हाईकोर्ट में उपस्थित हुए। इस दौरान उन्होंने जवाब पाइल करने की जानकारी दी। कोर्ट ने सुनवाई को एक सप्ताह आगे बढ़ा दिया है। बिलासपुर निवासी विजय कुमार द्विवेदी ने शिक्षाकर्मी वर्ग 3 के लिए विज्ञान समूह से आवेदन दिया था। आवेदक ने बायोकेमेस्ट्री विषय में डिग्री ली है। जिला पंचायत पशासन ने बायोकेमेस्ट्री को विज्ञान समूह नहीं माना। इस पर आवेदक ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। इसमें जिला पंचायत सीईओ व बिल्हा जनपद पंचायत पशासन को पक्षकार बनाया गया है। मामले में कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। जनपद पंचायत बिल्हा के सीईओ ने जवाब पस्तुत किया, किंतु जिला पंचायत पशासन ने जवाब नहीं दिया था। बार-बार नोटिस के बाद भी जवाब नहीं देने को कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए सीईओ बिलासपुर को व्यक्पिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के बुलावे पर सीईओ ने सोमवार को उपस्थित होकर कोर्ट को बताया कि जवाब पाइल कर दिया गया है। इस पर कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए अगले सप्ताह रखने का आदेश दिया है। निचली अदालत से पारित दुर्घटना अवार्ड निरस्त - हाईकोर्ट की युगलपीठ ने सड़क दुर्घटना के मामले में बलौदा बाजार कोर्ट से पारित अवार्ड को निरस्त करते हुए संबंधित न्यायालय को पिर से सुनवाई करने का आदेश दिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार जनरल एचएस मरकाम बिलासपुर से दुर्ग जा रहे थे। सिमगा के पास उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस पर उनके पुर्त्र अनुराग मरकाम ने दुर्घटना बीमा दावा बलौदा बाजार कोर्ट में पेश किया। सुनवाई उपरांत न्यायालय ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाप 10. 65 लाख रुपए का अवार्ड पारित किया। इसके खिलाप नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने हाईकोर्ट में अपील पस्तुत की। दूसरी ओर अनुराग मरकाम ने हाईकोर्ट में यह कहते हुए आवेदन दिया कि वह बाहर पढ़ाई कर रहा है, इस कारण से कुछ राशि उसे दी जाए। इस पर कोर्ट ने दो लाख रुपए भुगतान करने का आदेश दिया। इस मामले में वाद पस्तुत कर्ता के बजाय श्री मरकाम ने कोर्ट में उपस्थित होकर राशि पाप्त की। इस पर कंपनी ने आपत्ति की। सोमवार को पकरण में जस्टिस आईएम कुद्दुसी व जस्टिस जी मिन्हाजुद्दीन की युगलपीठ में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने बलौदा बाजार कोर्ट से पारित अवार्ड को निरस्त करते हुए मामले में पिर से सुनवाई करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी वेतन भुगतान नहीं करने पर पेश अवमानना नोटिस पर संचालक खेल एवं युवा विभाग ने वेतन भुगतान कर दिया। नोटिस पर पूर्व संचालक व खेल एवं युवा विभाग और वर्तमान में बिलासपुर आईजी ने कोर्ट में उपस्थित होकर पूरा वेतन भुगतान किए जाने की जानकारी दी। हाईकोर्ट ने याचिका को निराकृत कर दिया है।
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बिलासपुर, । हाईकोर्ट ने निलंबित आईएएस अधिकारी की रिट अपील पर राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में निलंबत समाप्त करने एवं अंतरिम राहत दिलाने की मांग की गई है। छत्तीसगढ़ शासन के अवर सचिव टी राधाकृष्णनन को गड़बड़ी के आरोप में अक्टूबर में निलंबित किया गया है। उनके ऊपर यह चार्ज लगाया कि राजस्व मंडल में पदस्थ रहते हुए अधिकार क्षेर्त्र से बाहर जा कर कई पकरण में गलत आदेश पारित किया गया है। इसी पकार पाइवेट लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए आदेश दिए जाने की बात कही गई। शासन की कार्रवाई के खिलाप उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इस पर पारंभिक सुनवाई उपरांत कोर्ट ने कहा था कि पकरण में पहले उन्हें केट में वाद पस्तुत करना था। यहां के निर्णय आने के बाद हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। कोर्ट के इस आदेश पर उन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली थी। इसके बाद केट में वाद पस्तुत किया गया। केट कोर्ट ने सुनवाई उपरांत मामले को खारिज कर दिया। केट से निर्णय आने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में रिट अपील की है। इसमें निलंबन की कार्रवाई पर रोक लगाने व अंतरित राहत दिलाने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने अपील पर शासन को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। जिला पंचायत सीईओ कोर्ट में हुए उपस्थित-बायोकेमेस्ट्री को विज्ञान विषय नहीं मानने के खिलाप पेश याचिका पर बिलासपुर जिला पंचायत सीईओ सोमवार को हाईकोर्ट में उपस्थित हुए। इस दौरान उन्होंने जवाब पाइल करने की जानकारी दी। कोर्ट ने सुनवाई को एक सप्ताह आगे बढ़ा दिया है। बिलासपुर निवासी विजय कुमार द्विवेदी ने शिक्षाकर्मी वर्ग तीन के लिए विज्ञान समूह से आवेदन दिया था। आवेदक ने बायोकेमेस्ट्री विषय में डिग्री ली है। जिला पंचायत पशासन ने बायोकेमेस्ट्री को विज्ञान समूह नहीं माना। इस पर आवेदक ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। इसमें जिला पंचायत सीईओ व बिल्हा जनपद पंचायत पशासन को पक्षकार बनाया गया है। मामले में कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। जनपद पंचायत बिल्हा के सीईओ ने जवाब पस्तुत किया, किंतु जिला पंचायत पशासन ने जवाब नहीं दिया था। बार-बार नोटिस के बाद भी जवाब नहीं देने को कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए सीईओ बिलासपुर को व्यक्पिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के बुलावे पर सीईओ ने सोमवार को उपस्थित होकर कोर्ट को बताया कि जवाब पाइल कर दिया गया है। इस पर कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए अगले सप्ताह रखने का आदेश दिया है। निचली अदालत से पारित दुर्घटना अवार्ड निरस्त - हाईकोर्ट की युगलपीठ ने सड़क दुर्घटना के मामले में बलौदा बाजार कोर्ट से पारित अवार्ड को निरस्त करते हुए संबंधित न्यायालय को पिर से सुनवाई करने का आदेश दिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार जनरल एचएस मरकाम बिलासपुर से दुर्ग जा रहे थे। सिमगा के पास उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस पर उनके पुर्त्र अनुराग मरकाम ने दुर्घटना बीमा दावा बलौदा बाजार कोर्ट में पेश किया। सुनवाई उपरांत न्यायालय ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाप दस. पैंसठ लाख रुपए का अवार्ड पारित किया। इसके खिलाप नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने हाईकोर्ट में अपील पस्तुत की। दूसरी ओर अनुराग मरकाम ने हाईकोर्ट में यह कहते हुए आवेदन दिया कि वह बाहर पढ़ाई कर रहा है, इस कारण से कुछ राशि उसे दी जाए। इस पर कोर्ट ने दो लाख रुपए भुगतान करने का आदेश दिया। इस मामले में वाद पस्तुत कर्ता के बजाय श्री मरकाम ने कोर्ट में उपस्थित होकर राशि पाप्त की। इस पर कंपनी ने आपत्ति की। सोमवार को पकरण में जस्टिस आईएम कुद्दुसी व जस्टिस जी मिन्हाजुद्दीन की युगलपीठ में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने बलौदा बाजार कोर्ट से पारित अवार्ड को निरस्त करते हुए मामले में पिर से सुनवाई करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी वेतन भुगतान नहीं करने पर पेश अवमानना नोटिस पर संचालक खेल एवं युवा विभाग ने वेतन भुगतान कर दिया। नोटिस पर पूर्व संचालक व खेल एवं युवा विभाग और वर्तमान में बिलासपुर आईजी ने कोर्ट में उपस्थित होकर पूरा वेतन भुगतान किए जाने की जानकारी दी। हाईकोर्ट ने याचिका को निराकृत कर दिया है।
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योग दिवस के मौके पर 21 जून को पूरी दुनिया ने भारत संग योग किया लेकिन राजस्थान में 'योग दिवस' राजनीति की भेंट चढ़ गया. यहां योग दिवस बिल्कुल फीका रहा, ना स्कूलों में योग हुआ और ना ही कहीं भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया. और तो और प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी योग करने के लिए नहीं निकले. बता दें कि राजस्थान में इस समय कांग्रेस की सरकार है.
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योग दिवस के मौके पर इक्कीस जून को पूरी दुनिया ने भारत संग योग किया लेकिन राजस्थान में 'योग दिवस' राजनीति की भेंट चढ़ गया. यहां योग दिवस बिल्कुल फीका रहा, ना स्कूलों में योग हुआ और ना ही कहीं भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया. और तो और प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी योग करने के लिए नहीं निकले. बता दें कि राजस्थान में इस समय कांग्रेस की सरकार है.
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नई दिल्ली, मार्च 10। तेजी और ज्यादा से ज्यादा रिटर्न पाने के लिए शेयर बाजार से बढ़िया ऑप्शन कोई दूसरा नहीं। पर यहां जोखिम भी खूब रहता है। बात करें शेयर बाजार में मौजूद कंपनियों को यह आम तौर पर तीन कैटेगरी की होती हैं। लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप। ये वर्गीकरण कंपनियों की मार्केट कैपिटल के आधार पर किया जाता है। मगर कुछ कंपनियां माइक्रो कैप और नैनो कैप में भी आती हैं। ये वे कंपनियां होती हैं, जिनकी मार्केट कैपिटल 40-50 करोड़ रु या इससे भी कम हो। हालांकि ये कंपनियां तगड़ा रिटर्न दे सकती हैं। हम यहां आपको एक ऐसी ही कंपनी की जानकारी देंगे, जो बेहद कम मार्केट कैपिटल वाली है, पर उसने रिटर्न धमाकेदार दिया है।
गुजरात क्रेडिट कॉर्पोरेशन को 1993 में शुरू किया गया था। गुजरात क्रेडिट कॉर्पोरेशन लिमिटेड गुजरात में कमर्शियल और हाउसिंग परियोजनाओं के विस्तृत पोर्टफोलियो के साथ रियल एस्टेट डेवलपमेंट में लगी हुई है। यह एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी है जिसके शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड हैं। इसका कॉर्पोरेट कार्यालय अहमदाबाद, गुजरात राज्य में है। कंपनी का प्रबंधन निदेशक मंडल के मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में किया जाता है जिसमें पेशेवर और अनुभवी व्यक्ति शामिल होते हैं।
कंपनी के अनुसार इसका संगठन अत्यधिक कुशल और प्रोफिशिएंट पेशेवरों का एक संगठन है जिसमें बढ़ती रचनात्मकता और अपने संबंधित कार्य क्षेत्रों में बेहतर करने का उत्साह है। गुजरात क्रेडिट कॉर्पोरेशन के अनुसार इसकी टीम में कंस्ट्रक्शन के कई क्षेत्रों के साथ-साथ स्थिर संरचनाओं के सलाहकार और विशेषज्ञ भी शामिल हैं। कंपनी के पास रियल एस्टेट के क्षेत्र में एक समृद्ध और विशाल अनुभव है।
6 महीनों में यह 8. 78 रु के स्तर से 76. 10 रु तक पहुंच गया। यानी 6 महीनों में गुजरात क्रेडिट कॉर्पोरेशन के शेयर ने 766. 74 फीसदी का रिटर्न दिया है। इतने रिटर्न का मतलब है कि इस शेयर ने निवेशकों के 1 लाख रु को 8. 66 लाख रु से भी अधिक बना दिया है। 76. 10 रु के स्तर पर कंपनी की मार्केट कैपिटल केवल 190. 25 करोड़ रु है। 98. 00 रु का स्तर इसके 52 हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है।
2022 में यह 12. 95 रु के स्तर से 76. 10 रु तक पहुंचा है। यानी इस साल में गुजरात क्रेडिट कॉर्पोरेशन के शेयर ने 487. 64 फीसदी का रिटर्न दिया है। इतने रिटर्न का मतलब है कि इस शेयर ने निवेशकों के 1 लाख रु को 5. 87 लाख रु से भी अधिक बना दिया है। 3. 75 रु का स्तर इसके 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। आज कंपनी का शेयर 5 फीसदी की गिरावट दिखा रहा है।
इस शेयर ने 1 साल में भी खूब मालामाल किया है। 1 साल में पहले यह 3. 90 रु के स्तर पर था, जबकि आज 76. 10 रु पर है। यानी 1 साल में गुजरात क्रेडिट कॉर्पोरेशन के शेयर ने 1851. 28 फीसदी का रिटर्न दिया है। इतने रिटर्न का मतलब है कि इस शेयर ने निवेशकों के 1 लाख रु को 18. 5 लाख रु से भी अधिक बना दिया है।
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नई दिल्ली, मार्च दस। तेजी और ज्यादा से ज्यादा रिटर्न पाने के लिए शेयर बाजार से बढ़िया ऑप्शन कोई दूसरा नहीं। पर यहां जोखिम भी खूब रहता है। बात करें शेयर बाजार में मौजूद कंपनियों को यह आम तौर पर तीन कैटेगरी की होती हैं। लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप। ये वर्गीकरण कंपनियों की मार्केट कैपिटल के आधार पर किया जाता है। मगर कुछ कंपनियां माइक्रो कैप और नैनो कैप में भी आती हैं। ये वे कंपनियां होती हैं, जिनकी मार्केट कैपिटल चालीस-पचास करोड़ रु या इससे भी कम हो। हालांकि ये कंपनियां तगड़ा रिटर्न दे सकती हैं। हम यहां आपको एक ऐसी ही कंपनी की जानकारी देंगे, जो बेहद कम मार्केट कैपिटल वाली है, पर उसने रिटर्न धमाकेदार दिया है। गुजरात क्रेडिट कॉर्पोरेशन को एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में शुरू किया गया था। गुजरात क्रेडिट कॉर्पोरेशन लिमिटेड गुजरात में कमर्शियल और हाउसिंग परियोजनाओं के विस्तृत पोर्टफोलियो के साथ रियल एस्टेट डेवलपमेंट में लगी हुई है। यह एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी है जिसके शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड हैं। इसका कॉर्पोरेट कार्यालय अहमदाबाद, गुजरात राज्य में है। कंपनी का प्रबंधन निदेशक मंडल के मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में किया जाता है जिसमें पेशेवर और अनुभवी व्यक्ति शामिल होते हैं। कंपनी के अनुसार इसका संगठन अत्यधिक कुशल और प्रोफिशिएंट पेशेवरों का एक संगठन है जिसमें बढ़ती रचनात्मकता और अपने संबंधित कार्य क्षेत्रों में बेहतर करने का उत्साह है। गुजरात क्रेडिट कॉर्पोरेशन के अनुसार इसकी टीम में कंस्ट्रक्शन के कई क्षेत्रों के साथ-साथ स्थिर संरचनाओं के सलाहकार और विशेषज्ञ भी शामिल हैं। कंपनी के पास रियल एस्टेट के क्षेत्र में एक समृद्ध और विशाल अनुभव है। छः महीनों में यह आठ. अठहत्तर रुपया के स्तर से छिहत्तर. दस रुपया तक पहुंच गया। यानी छः महीनों में गुजरात क्रेडिट कॉर्पोरेशन के शेयर ने सात सौ छयासठ. चौहत्तर फीसदी का रिटर्न दिया है। इतने रिटर्न का मतलब है कि इस शेयर ने निवेशकों के एक लाख रु को आठ. छयासठ लाख रु से भी अधिक बना दिया है। छिहत्तर. दस रुपया के स्तर पर कंपनी की मार्केट कैपिटल केवल एक सौ नब्बे. पच्चीस करोड़ रु है। अट्ठानवे. शून्य रुपया का स्तर इसके बावन हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है। दो हज़ार बाईस में यह बारह. पचानवे रुपया के स्तर से छिहत्तर. दस रुपया तक पहुंचा है। यानी इस साल में गुजरात क्रेडिट कॉर्पोरेशन के शेयर ने चार सौ सत्तासी. चौंसठ फीसदी का रिटर्न दिया है। इतने रिटर्न का मतलब है कि इस शेयर ने निवेशकों के एक लाख रु को पाँच. सत्तासी लाख रु से भी अधिक बना दिया है। तीन. पचहत्तर रुपया का स्तर इसके बावन हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। आज कंपनी का शेयर पाँच फीसदी की गिरावट दिखा रहा है। इस शेयर ने एक साल में भी खूब मालामाल किया है। एक साल में पहले यह तीन. नब्बे रुपया के स्तर पर था, जबकि आज छिहत्तर. दस रुपया पर है। यानी एक साल में गुजरात क्रेडिट कॉर्पोरेशन के शेयर ने एक हज़ार आठ सौ इक्यावन. अट्ठाईस फीसदी का रिटर्न दिया है। इतने रिटर्न का मतलब है कि इस शेयर ने निवेशकों के एक लाख रु को अट्ठारह. पाँच लाख रु से भी अधिक बना दिया है।
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सोलन - सिल्ब संस्थान सोलन में बुध्वार को जोजो मैथ्यू ने छात्रों को संबोधित किया। जोजो मैथ्यू रूस के मुख्य कार्यकारी निदेशक तथा कंपीटिशन विजार्ड पत्रिका के संपादक हैं। वे सामान्य अध्ययन प्रशिक्षण कार्यक्रम के निदेशक हैं। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा हेतु अनेक पुस्तकों का लेखन किया है। इस अवसर पर शूलिनी विश्वविद्यालय के प्रति उपकुलपति अतुल खोसला ने रूस संस्थान से आए जोजो मैथ्यू, रितेश और प्रियंका का स्वागत किया। जोजो ने बताया कि रूस सिविल सेवा हेतु देश का सबसे प्रामाणिक एवं विश्वसनीय संस्थान है, जो विगत 25 वर्षों से अंग्रेजी माध्यम तथा 17 वर्षांे से हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण देने में संलग्न है। उन्होंने छात्रों को परीक्षा की दृष्टि से एक मजबूत आधार बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इस सत्र में विभिन्न विषयों से जुड़ी आधारभूत संकल्पनाओं तथा सामान्य ज्ञान संबंधी अन्य अवधारणाओं को समझाने पर बल दिया। सत्र के बाद छात्रों में सिविल सेवा हेतु एक अलग नजरिया और जोश देखा गया।
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सोलन - सिल्ब संस्थान सोलन में बुध्वार को जोजो मैथ्यू ने छात्रों को संबोधित किया। जोजो मैथ्यू रूस के मुख्य कार्यकारी निदेशक तथा कंपीटिशन विजार्ड पत्रिका के संपादक हैं। वे सामान्य अध्ययन प्रशिक्षण कार्यक्रम के निदेशक हैं। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा हेतु अनेक पुस्तकों का लेखन किया है। इस अवसर पर शूलिनी विश्वविद्यालय के प्रति उपकुलपति अतुल खोसला ने रूस संस्थान से आए जोजो मैथ्यू, रितेश और प्रियंका का स्वागत किया। जोजो ने बताया कि रूस सिविल सेवा हेतु देश का सबसे प्रामाणिक एवं विश्वसनीय संस्थान है, जो विगत पच्चीस वर्षों से अंग्रेजी माध्यम तथा सत्रह वर्षांे से हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण देने में संलग्न है। उन्होंने छात्रों को परीक्षा की दृष्टि से एक मजबूत आधार बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इस सत्र में विभिन्न विषयों से जुड़ी आधारभूत संकल्पनाओं तथा सामान्य ज्ञान संबंधी अन्य अवधारणाओं को समझाने पर बल दिया। सत्र के बाद छात्रों में सिविल सेवा हेतु एक अलग नजरिया और जोश देखा गया।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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16 दिसम्बर 2022, खंडवाः एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड योजना की समीक्षा बैठक सम्पन्न - आत्मनिर्भर भारत अंतर्गत एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड योजना की समीक्षा एवं हितग्राहियों से चर्चा हेतु कलेक्टर श्री अनूप कुमार सिंह की अध्यक्षता में बैठक गत दिनों आयोजित की गई। कलेक्टर द्वारा बैठक में हितग्राहियों से चर्चा कर जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया जिला खंडवा एवं प्रबंधक नाबार्ड बैंक को बैंक सम्बन्धी समस्यों का निराकरण कर हितग्राहियों को योजना का अधिक से अधिक लाभ दिलाये जाने हेतु निर्देशित किया गया। बैठक में उप संचालक कृषि, के. सी. वास्केल, उपायुक्त सहकारिता, उप संचालक उद्यान, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक खण्डवा, प्रबंधक नाबार्ड बैंक, सचिव मण्डी समिति खण्डवा, जिला विपणन अधिकारी खण्डवा, सहायक कृषि यंत्री, खंडवा, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया जिला खंडवा, सहायक संचालक कृषि एवं हितग्राही उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि कृषि अधोसंरचना कोष योजनान्तर्गत हितग्राहियों को 2 करोड़ तक के ऋण हेतु ब्याज में 3 प्रतिशत प्रतिवर्ष की छूट अधिकतम 7 वर्षाे के लिये उपलब्ध होगी। साथ ही ऋण की ग्यारंटी भारत सरकार के द्वारा दी जा रही है। इस योजना में वह हितग्राही जो अन्य बैंक लिंक योजनाओं का लाभ लेने हेतु पात्र हैं वह भी इस योजना का लाभ भी ले सकते हैं । हितग्राही अपना आवेदन एवं डी. पी. आर. सीए सेतैयार कर आवश्यक दस्तावेज के साथ भारत सरकार के पोर्टल www. agriinfra. dac. gov. in पर अपलोड कर योजना का लाभ लेवें। उप संचालक कृषि द्वारा योजना अंतर्गत जिले में कुल पंजीकृत अधोसंरचना 187 जिसमें ना वेयर हाउस-71, शार्टिंग एण्ड ग्रेडिंग यूनिट-1, कस्टम हायरिंग केंद्र-27, प्राथमिक प्रसंस्करण केन्द्र-4, अन्य अधोसंउप संचालक कृषि द्वारा योजना अंतर्गत जिले में कुल पंजीकृत अधोसंरचना 187 जिसमें स्वीकृत अधोसंरचना वेयर हाउस-71, शार्टिंग एण्ड ग्रेडिंग यूनिट-1, कस्टम हायरिंग केंद्र-27, प्राथमिक प्रसंस्करण केन्द्र-4, अन्य अधोसंरचनाए-5 का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया गया।
आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज - पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ, पहचान पत्र, स्थाई निवासी प्रमाण पत्र, पंजीयन प्रमाण पत्र, बैंक लोन आवेदन, पिछले 3 वर्ष का इन्कमटेक्स रिर्टन, ऑडिट की बेलेंस शीट, केव्हायसी डाक्यूमेंट। इस योजना में लाभार्थी जैसे-किसानों, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों, विपणन सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूह, बहुउद्देशीय सहकारी समितियों, कृषि उद्यमियों, केंद्रीय/राज्य एजेंसियों को शामिल किया गया है।
इन अधोसंरचना का लाभ लें - जैसे- कोल्ड स्टोरेज एवं कोल्ड चेन, वेयरहाउस, सायलोस, पैक हाउस, विश्लेषण/जांच इकाई, ग्रेडिंग एवं पैकेजिंग यूनिट, ई-मार्केटिंग, राईपनिंग चेम्बर, जैव उत्प्रेरक उत्पादन इकाई के निर्माण, प्राथमिक प्रसंस्करण यूनिट एवं बेम्बो सेक्टर प्रोजेक्ट इत्यादि। अनाज (गेंहू, धान) - सफाई, ग्रेडिंग, छनाई, ग्राईडिंग आदि, फल एवं सब्जियां - सफाई, ग्रेडिंग, सुखाई, छंटाई आदि, तिलहनी-सफाई, ग्रेडिंग , सुखाई, दालें बनाना आदि, कपास-सफाई, सुखाना, जिनिंग आदि, गन्ना-सफाई, सुखाई, कैन ब्रेकिंग, एवोपोरेटर आदि, मसाले-सफाई, ग्रेडिंग , सुखाई, उबालना, चमकाना, ग्राईडिंग आदि।
महत्वपूर्ण खबरः कपास मंडी रेट (14 दिसम्बर 2022 के अनुसार)
(नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े - गूगल न्यूज़, टेलीग्राम )
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सोलह दिसम्बर दो हज़ार बाईस, खंडवाः एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड योजना की समीक्षा बैठक सम्पन्न - आत्मनिर्भर भारत अंतर्गत एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड योजना की समीक्षा एवं हितग्राहियों से चर्चा हेतु कलेक्टर श्री अनूप कुमार सिंह की अध्यक्षता में बैठक गत दिनों आयोजित की गई। कलेक्टर द्वारा बैठक में हितग्राहियों से चर्चा कर जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया जिला खंडवा एवं प्रबंधक नाबार्ड बैंक को बैंक सम्बन्धी समस्यों का निराकरण कर हितग्राहियों को योजना का अधिक से अधिक लाभ दिलाये जाने हेतु निर्देशित किया गया। बैठक में उप संचालक कृषि, के. सी. वास्केल, उपायुक्त सहकारिता, उप संचालक उद्यान, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक खण्डवा, प्रबंधक नाबार्ड बैंक, सचिव मण्डी समिति खण्डवा, जिला विपणन अधिकारी खण्डवा, सहायक कृषि यंत्री, खंडवा, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया जिला खंडवा, सहायक संचालक कृषि एवं हितग्राही उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि कृषि अधोसंरचना कोष योजनान्तर्गत हितग्राहियों को दो करोड़ तक के ऋण हेतु ब्याज में तीन प्रतिशत प्रतिवर्ष की छूट अधिकतम सात वर्षाे के लिये उपलब्ध होगी। साथ ही ऋण की ग्यारंटी भारत सरकार के द्वारा दी जा रही है। इस योजना में वह हितग्राही जो अन्य बैंक लिंक योजनाओं का लाभ लेने हेतु पात्र हैं वह भी इस योजना का लाभ भी ले सकते हैं । हितग्राही अपना आवेदन एवं डी. पी. आर. सीए सेतैयार कर आवश्यक दस्तावेज के साथ भारत सरकार के पोर्टल www. agriinfra. dac. gov. in पर अपलोड कर योजना का लाभ लेवें। उप संचालक कृषि द्वारा योजना अंतर्गत जिले में कुल पंजीकृत अधोसंरचना एक सौ सत्तासी जिसमें ना वेयर हाउस-इकहत्तर, शार्टिंग एण्ड ग्रेडिंग यूनिट-एक, कस्टम हायरिंग केंद्र-सत्ताईस, प्राथमिक प्रसंस्करण केन्द्र-चार, अन्य अधोसंउप संचालक कृषि द्वारा योजना अंतर्गत जिले में कुल पंजीकृत अधोसंरचना एक सौ सत्तासी जिसमें स्वीकृत अधोसंरचना वेयर हाउस-इकहत्तर, शार्टिंग एण्ड ग्रेडिंग यूनिट-एक, कस्टम हायरिंग केंद्र-सत्ताईस, प्राथमिक प्रसंस्करण केन्द्र-चार, अन्य अधोसंरचनाए-पाँच का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया गया। आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज - पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ, पहचान पत्र, स्थाई निवासी प्रमाण पत्र, पंजीयन प्रमाण पत्र, बैंक लोन आवेदन, पिछले तीन वर्ष का इन्कमटेक्स रिर्टन, ऑडिट की बेलेंस शीट, केव्हायसी डाक्यूमेंट। इस योजना में लाभार्थी जैसे-किसानों, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों, विपणन सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूह, बहुउद्देशीय सहकारी समितियों, कृषि उद्यमियों, केंद्रीय/राज्य एजेंसियों को शामिल किया गया है। इन अधोसंरचना का लाभ लें - जैसे- कोल्ड स्टोरेज एवं कोल्ड चेन, वेयरहाउस, सायलोस, पैक हाउस, विश्लेषण/जांच इकाई, ग्रेडिंग एवं पैकेजिंग यूनिट, ई-मार्केटिंग, राईपनिंग चेम्बर, जैव उत्प्रेरक उत्पादन इकाई के निर्माण, प्राथमिक प्रसंस्करण यूनिट एवं बेम्बो सेक्टर प्रोजेक्ट इत्यादि। अनाज - सफाई, ग्रेडिंग, छनाई, ग्राईडिंग आदि, फल एवं सब्जियां - सफाई, ग्रेडिंग, सुखाई, छंटाई आदि, तिलहनी-सफाई, ग्रेडिंग , सुखाई, दालें बनाना आदि, कपास-सफाई, सुखाना, जिनिंग आदि, गन्ना-सफाई, सुखाई, कैन ब्रेकिंग, एवोपोरेटर आदि, मसाले-सफाई, ग्रेडिंग , सुखाई, उबालना, चमकाना, ग्राईडिंग आदि। महत्वपूर्ण खबरः कपास मंडी रेट
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हाल ही में आस्ट्रेलिया की वनडे कप्तानी छोड़ने वाले फिंच इंग्लैंड के खिलाफ तीन टी20 मैचों में 25 रन ही बना सके ।
आस्ट्रेलिया का सामना 22 अक्टूबर को सिडनी में न्यूजीलैंड से होगा। फिंच ने कहा कि उनके पास काफी संतुलित टीम है ।
आस्ट्रेलिया ने पिछली तीन में से दो टी20 श्रृंखलायें गंवाई हैं लेकिन फिंच ने कहा कि महत्वपूर्ण बात सही समय पर अच्छा प्रदर्शन करना है ।
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हाल ही में आस्ट्रेलिया की वनडे कप्तानी छोड़ने वाले फिंच इंग्लैंड के खिलाफ तीन टीबीस मैचों में पच्चीस रन ही बना सके । आस्ट्रेलिया का सामना बाईस अक्टूबर को सिडनी में न्यूजीलैंड से होगा। फिंच ने कहा कि उनके पास काफी संतुलित टीम है । आस्ट्रेलिया ने पिछली तीन में से दो टीबीस श्रृंखलायें गंवाई हैं लेकिन फिंच ने कहा कि महत्वपूर्ण बात सही समय पर अच्छा प्रदर्शन करना है ।
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राजधानी दिल्ली में एक मासूम लड़के की ह्त्या हो जाती है, लेकिन कांग्रेस के राजदुलारे चुप हैं. बेटियों के हित की रक्षा का दावा करने वाली कांग्रेस को इस मामले में कोई जातीय समीकरण नहीं मिला कोई धार्मिक एंगल नहीं मिला इसलिए बहुत से नेताओं की जुबां सील गई. धार्मिक मानसिकता किस तरह से अपना रंग दिखाती है, ये इस मामले ने दिखा दिया. इस मामले में दिल्ली पुलिस का जो रोल सामने आया है वो भी वाकई हैरतअंगेज है. ऐसा लग रहा है की विकास राजपूत को इन्साफ दिलाने के रास्ते में दिल्ली पुलिस ही सबसे बड़ी विलेन है.
18 वर्ष के लड़की की गलती बस इतनी थी की उसने दुसरे धर्म की लड़की से मोहब्बत की और यही बात लड़की के घरवालों को नागवारा लगी. और धोखे से लड़के को बाहर बुलाकर उसकी पिट पिट कर ह्त्या कर दी गई. लेकिन इस पुरे मामले में दिल्ली पुलिस का कहना है की इस मामले को साम्प्रदायिक रंग न दिया जाए. ये दो परिवार के बिच विवाद का मामला था. दिल्ली पुलिस के इस रवैये को देखकर हाथरस में यूपी पुलिस की कार्यशैली की याद आ जाती है जहां पुलिस ने खाकी को जोर दिखाया और मनमाने तरीके से बस अपनी चलाई.
राहुल राजपूत के केस में जिस तरह से एक प्रेमिका अपने प्रेमी को इन्साफ दिलाने के लिए जंग में कूद गई है उसे देखकर शायद दिल्ली पुलिस भी डर गई है. यही वजह है की राहुल की मौत के बाद दिल्ली पुलिस अब राहुल के दोस्त को परेशान कर रही है. राहुल के एक दोस्त का कहना है की दिल्ली पुलिस के जवानों ने उसका सिम कार्ड तोड़ दिया और उस पर दवाब बनाया जा रहा है.
शान्ति सेवा न्याय का लबादा ओढ़े दिल्ली पुलिस की ये कार्यवाही वाकई चौंकाने वाली है. बता दें की इस मामले में पांच आरोपियों को पकड़ा गया है. तीन आरोपी दिल्ली पुलिस की चंगुल से बाहर है. सवाल ये है की दिल्ली पुलिस तीन आरोपियों को बचाने की कोशिश क्यों कर रही है.
इस मामले में भी कांग्रेस चुप है, हालांकि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पीड़ित परिवार से मिलने गए उन्हें 10 लाख रूपए मुआवजा देने की घोषणा की और उचित कार्यवाही का भरोसा देकर चले गए पर बीजेपी के कपिल मिश्रा ने इस मामले में केजरीवाल सरकार से पीड़ित परिवार को एक करोड़ रूपए देने कि मांग की.
विपक्ष का आरोप है कि हाथरस के मामले में कांग्रेस कैंडल मार्च करती है कई बड़े नेता पैदल ही कूच कर देते हैं पुरे पुलिस व्यवस्था को ठेंगा दिखा दिया जाता है वहीं कांग्रेस इस मामले में चुप क्यों है. अब इन नेताओं को इन्साफ कि बात याद नहीं आती. अब देखना होगा की इस मामले में दिल्ली पुलिस आगे क्या कार्यवाही करती है, और कब तक राहुल राजपूत को इन्साफ मिलता है.
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राजधानी दिल्ली में एक मासूम लड़के की ह्त्या हो जाती है, लेकिन कांग्रेस के राजदुलारे चुप हैं. बेटियों के हित की रक्षा का दावा करने वाली कांग्रेस को इस मामले में कोई जातीय समीकरण नहीं मिला कोई धार्मिक एंगल नहीं मिला इसलिए बहुत से नेताओं की जुबां सील गई. धार्मिक मानसिकता किस तरह से अपना रंग दिखाती है, ये इस मामले ने दिखा दिया. इस मामले में दिल्ली पुलिस का जो रोल सामने आया है वो भी वाकई हैरतअंगेज है. ऐसा लग रहा है की विकास राजपूत को इन्साफ दिलाने के रास्ते में दिल्ली पुलिस ही सबसे बड़ी विलेन है. अट्ठारह वर्ष के लड़की की गलती बस इतनी थी की उसने दुसरे धर्म की लड़की से मोहब्बत की और यही बात लड़की के घरवालों को नागवारा लगी. और धोखे से लड़के को बाहर बुलाकर उसकी पिट पिट कर ह्त्या कर दी गई. लेकिन इस पुरे मामले में दिल्ली पुलिस का कहना है की इस मामले को साम्प्रदायिक रंग न दिया जाए. ये दो परिवार के बिच विवाद का मामला था. दिल्ली पुलिस के इस रवैये को देखकर हाथरस में यूपी पुलिस की कार्यशैली की याद आ जाती है जहां पुलिस ने खाकी को जोर दिखाया और मनमाने तरीके से बस अपनी चलाई. राहुल राजपूत के केस में जिस तरह से एक प्रेमिका अपने प्रेमी को इन्साफ दिलाने के लिए जंग में कूद गई है उसे देखकर शायद दिल्ली पुलिस भी डर गई है. यही वजह है की राहुल की मौत के बाद दिल्ली पुलिस अब राहुल के दोस्त को परेशान कर रही है. राहुल के एक दोस्त का कहना है की दिल्ली पुलिस के जवानों ने उसका सिम कार्ड तोड़ दिया और उस पर दवाब बनाया जा रहा है. शान्ति सेवा न्याय का लबादा ओढ़े दिल्ली पुलिस की ये कार्यवाही वाकई चौंकाने वाली है. बता दें की इस मामले में पांच आरोपियों को पकड़ा गया है. तीन आरोपी दिल्ली पुलिस की चंगुल से बाहर है. सवाल ये है की दिल्ली पुलिस तीन आरोपियों को बचाने की कोशिश क्यों कर रही है. इस मामले में भी कांग्रेस चुप है, हालांकि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पीड़ित परिवार से मिलने गए उन्हें दस लाख रूपए मुआवजा देने की घोषणा की और उचित कार्यवाही का भरोसा देकर चले गए पर बीजेपी के कपिल मिश्रा ने इस मामले में केजरीवाल सरकार से पीड़ित परिवार को एक करोड़ रूपए देने कि मांग की. विपक्ष का आरोप है कि हाथरस के मामले में कांग्रेस कैंडल मार्च करती है कई बड़े नेता पैदल ही कूच कर देते हैं पुरे पुलिस व्यवस्था को ठेंगा दिखा दिया जाता है वहीं कांग्रेस इस मामले में चुप क्यों है. अब इन नेताओं को इन्साफ कि बात याद नहीं आती. अब देखना होगा की इस मामले में दिल्ली पुलिस आगे क्या कार्यवाही करती है, और कब तक राहुल राजपूत को इन्साफ मिलता है.
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हम अक्सर अपना टीवी रिमोट खो देते हैं। कभी-कभी यह सोफे या बिस्तर के नीचे गिरा होता है, और कभी-कभी छोटे बच्चे इसे इधर उधर छुपा देते हैं। रिमोट खोना परेशान करने वाला हो सकता है क्योंकि यह हमें टीवी का यूज करने से रोकता है। लेकिन क्या होगा अगर हम आपसे कहें कि आप अपने स्मार्टफोन को अपने टीवी रिमोट के रूप में उपयोग कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं इसे कैसे करें।
Google TV ऐप से, आप अपने स्मार्टफोन का यूज करके अपने Android टीवी को कंट्रोल कर सकते हैं। इसका मतलब है कि आप चैनल बदल सकते हैं, वॉल्यूम कम कर सकते हैं और यहां तक कि अपने पसंदीदा ऐप्स भी लॉन्च कर सकते हैं, यह सब बिना उठे और रिमोट ढूंढे किया जा सकता है। यह ऐप एंड्रॉइड और आईफोन दोनों पर काम करता है।
यहां आपके एंड्रॉइड फोन या आईफोन पर Google टीवी ऐप सेट करने और अपने स्मार्टफोन को टीवी रिमोट के रूप में यूज करने के लिए स्टेप-बाई-स्टेप यहां बताया गया है।
1 - सबसे पहले Google Play Store खोलें और Google TV ऐप इंस्टॉल करें।
2 - कफर्म करें कि आपका टीवी और फोन एक ही वाई-फाई नेटवर्क पर हैं। अगर आपके टीवी में वाई-फाई नहीं है, तो आप अपने फोन और टीवी को कनेक्ट करने के लिए ब्लूटूथ का उपयोग भी कर सकते हैं।
3 - Google TV ऐप खोलें। ऐप खुलने के बाद, नीचे राइट कोने में रिमोट बटन पर टैप करें।
ऐप डिवाइसों को स्कैन करना शुरू कर देगा। एक बार जब आपका टीवी मिल जाए, तो उसे लिस्ट से चुनें।
4 - आपकी टीवी स्क्रीन पर एक कोड दिखाई देगा। ऐप में कोड डालें और पेयर पर टैप करें।
5 - एक बार जब आपका फोन आपके टीवी के साथ जुड़ जाता है, तो आप इसका यूज टीवी को कंट्रोल करने के लिए उसी तरह कर सकते हैं जैसे आप रेगुलर रिमोट से करते हैं।
1 - सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपका iPhone और टीवी एक ही वाई-फाई नेटवर्क से जुड़ा है।
2 - अब ऐप स्टोर से Google TV ऐप डाउनलोड और इंस्टॉल करें।
3 - अपने iPhone पर Google TV ऐप खोलें।
4 - स्क्रीन के निचले राइट कोने पर टीवी रिमोट आइकन पर टैप करें।
5 - ऐप ऑटोमैटिक तरिके से आपके टीवी की तलाश शुरू कर देगा। अगर उसे आपका टीवी नहीं मिल रहा है, तो डिवाइसों के लिए स्कैन करें बटन पर टैप करें।
6 - एक बार जब आपका टीवी मिल जाए, तो उसे चुनें और अपनी टीवी स्क्रीन पर दिखाई देने वाला 6 अंकों का कोड दर्ज करें।
7 - अपने iPhone को अपने टीवी से कनेक्ट करने के लिए पेयर पर टैप करें।
एक बार जब आपका iPhone आपके टीवी से कनेक्ट हो जाता है, तो आप इसका यूज अपने टीवी को कंट्रोल करने के लिए उसी तरह कर सकते हैं जैसे आप रेगुलर रिमोट से कंट्रोल करते हैं।
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हम अक्सर अपना टीवी रिमोट खो देते हैं। कभी-कभी यह सोफे या बिस्तर के नीचे गिरा होता है, और कभी-कभी छोटे बच्चे इसे इधर उधर छुपा देते हैं। रिमोट खोना परेशान करने वाला हो सकता है क्योंकि यह हमें टीवी का यूज करने से रोकता है। लेकिन क्या होगा अगर हम आपसे कहें कि आप अपने स्मार्टफोन को अपने टीवी रिमोट के रूप में उपयोग कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं इसे कैसे करें। Google TV ऐप से, आप अपने स्मार्टफोन का यूज करके अपने Android टीवी को कंट्रोल कर सकते हैं। इसका मतलब है कि आप चैनल बदल सकते हैं, वॉल्यूम कम कर सकते हैं और यहां तक कि अपने पसंदीदा ऐप्स भी लॉन्च कर सकते हैं, यह सब बिना उठे और रिमोट ढूंढे किया जा सकता है। यह ऐप एंड्रॉइड और आईफोन दोनों पर काम करता है। यहां आपके एंड्रॉइड फोन या आईफोन पर Google टीवी ऐप सेट करने और अपने स्मार्टफोन को टीवी रिमोट के रूप में यूज करने के लिए स्टेप-बाई-स्टेप यहां बताया गया है। एक - सबसे पहले Google Play Store खोलें और Google TV ऐप इंस्टॉल करें। दो - कफर्म करें कि आपका टीवी और फोन एक ही वाई-फाई नेटवर्क पर हैं। अगर आपके टीवी में वाई-फाई नहीं है, तो आप अपने फोन और टीवी को कनेक्ट करने के लिए ब्लूटूथ का उपयोग भी कर सकते हैं। तीन - Google TV ऐप खोलें। ऐप खुलने के बाद, नीचे राइट कोने में रिमोट बटन पर टैप करें। ऐप डिवाइसों को स्कैन करना शुरू कर देगा। एक बार जब आपका टीवी मिल जाए, तो उसे लिस्ट से चुनें। चार - आपकी टीवी स्क्रीन पर एक कोड दिखाई देगा। ऐप में कोड डालें और पेयर पर टैप करें। पाँच - एक बार जब आपका फोन आपके टीवी के साथ जुड़ जाता है, तो आप इसका यूज टीवी को कंट्रोल करने के लिए उसी तरह कर सकते हैं जैसे आप रेगुलर रिमोट से करते हैं। एक - सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपका iPhone और टीवी एक ही वाई-फाई नेटवर्क से जुड़ा है। दो - अब ऐप स्टोर से Google TV ऐप डाउनलोड और इंस्टॉल करें। तीन - अपने iPhone पर Google TV ऐप खोलें। चार - स्क्रीन के निचले राइट कोने पर टीवी रिमोट आइकन पर टैप करें। पाँच - ऐप ऑटोमैटिक तरिके से आपके टीवी की तलाश शुरू कर देगा। अगर उसे आपका टीवी नहीं मिल रहा है, तो डिवाइसों के लिए स्कैन करें बटन पर टैप करें। छः - एक बार जब आपका टीवी मिल जाए, तो उसे चुनें और अपनी टीवी स्क्रीन पर दिखाई देने वाला छः अंकों का कोड दर्ज करें। सात - अपने iPhone को अपने टीवी से कनेक्ट करने के लिए पेयर पर टैप करें। एक बार जब आपका iPhone आपके टीवी से कनेक्ट हो जाता है, तो आप इसका यूज अपने टीवी को कंट्रोल करने के लिए उसी तरह कर सकते हैं जैसे आप रेगुलर रिमोट से कंट्रोल करते हैं।
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अमर शहीद उमानाथ सिंह जिला पुरुष अस्पताल में संचालित आरटीपीसीआर प्रयोगशाला 30 जून को बंद हो जाएगी। कारण कि लैब में कार्यरत स्टाफ की सेवा 30 जून को समाप्त हो रही है। 10 मई 2021 में संचालित आरटीपीसीआर प्रयोगशाला में अब तक दो लाख 85 हजार कोविड की जांच हुई है। इसके लिए एनएचएम की तरफ से सिलिकान संस्था ने दो माइक्रो बायोलाजिस्ट रखे गए थे। वैसे तो अन्य जनपदों में 10 अगस्त 2020 में आरटीपीसीआर लैब खोला गया था।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक रवींद्र सिंह ने 53 जिले के डीएम व सीएमओ को निर्देश भेजा है, जिसमें जौनपुर भी शामिल है। इसमें कहा गया है कि आरटीपीसीआर प्रयोगशाला में रखे गए माइक्रो बायोलाजिस्ट व आऊट सोर्सिंग पर अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी जाए। जिला अस्पताल में संचालित आरटीपीसीआर प्रयोगशाला के माइक्रो बायोलाजिस्ट राहुल ने बताया कि निर्देश जारी हुआ है। प्रयोगशाला में लैब टेक्नीशियन, ओटी टेक्नीशियन, डाटा आपरेटर, वार्ड आया, वार्ड ब्वाय, नर्स ये लोग आउट सोर्सिंग पर रखे गए थे। दो माइक्रो बायोलाजिस्ट प्रवीण सिंह व राहुल कुमार सिलिकान संस्था की तरफ से थे। जिनकी सेवाएं 30 जून के बाद खत्म हो जाएंगी।
इस संबंध में सीएमएस डा. केके राय ने बताया कि अभी तक ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है। लेकिन सुनने में आया है कि 30 जून के बाद आरटीपीसीआर लैब के सभी जो एजेंसी के माध्यम से रखे गए थे हटा दिया जाएंगे। रही मशीनों की बात तो शासन से जो इंस्ट्रक्शन मिलेगा वैसा किया जाएगा।
'आरटीपीसीआर प्रयोगशाला बंद करने का शासन से निर्देश मिला है। उस प्रयोगशाला में सीबीनाट की जांच होगी। आऊटसोर्सिंग पर रखे गए स्टाफ की सेवा 30 जून को समाप्त हो जाएगी। कोविड की जांच वाराणसी में होगी।
डा. लक्ष्मी सिंहः सीएमओ, जौनपुर।
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अमर शहीद उमानाथ सिंह जिला पुरुष अस्पताल में संचालित आरटीपीसीआर प्रयोगशाला तीस जून को बंद हो जाएगी। कारण कि लैब में कार्यरत स्टाफ की सेवा तीस जून को समाप्त हो रही है। दस मई दो हज़ार इक्कीस में संचालित आरटीपीसीआर प्रयोगशाला में अब तक दो लाख पचासी हजार कोविड की जांच हुई है। इसके लिए एनएचएम की तरफ से सिलिकान संस्था ने दो माइक्रो बायोलाजिस्ट रखे गए थे। वैसे तो अन्य जनपदों में दस अगस्त दो हज़ार बीस में आरटीपीसीआर लैब खोला गया था। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक रवींद्र सिंह ने तिरेपन जिले के डीएम व सीएमओ को निर्देश भेजा है, जिसमें जौनपुर भी शामिल है। इसमें कहा गया है कि आरटीपीसीआर प्रयोगशाला में रखे गए माइक्रो बायोलाजिस्ट व आऊट सोर्सिंग पर अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी जाए। जिला अस्पताल में संचालित आरटीपीसीआर प्रयोगशाला के माइक्रो बायोलाजिस्ट राहुल ने बताया कि निर्देश जारी हुआ है। प्रयोगशाला में लैब टेक्नीशियन, ओटी टेक्नीशियन, डाटा आपरेटर, वार्ड आया, वार्ड ब्वाय, नर्स ये लोग आउट सोर्सिंग पर रखे गए थे। दो माइक्रो बायोलाजिस्ट प्रवीण सिंह व राहुल कुमार सिलिकान संस्था की तरफ से थे। जिनकी सेवाएं तीस जून के बाद खत्म हो जाएंगी। इस संबंध में सीएमएस डा. केके राय ने बताया कि अभी तक ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है। लेकिन सुनने में आया है कि तीस जून के बाद आरटीपीसीआर लैब के सभी जो एजेंसी के माध्यम से रखे गए थे हटा दिया जाएंगे। रही मशीनों की बात तो शासन से जो इंस्ट्रक्शन मिलेगा वैसा किया जाएगा। 'आरटीपीसीआर प्रयोगशाला बंद करने का शासन से निर्देश मिला है। उस प्रयोगशाला में सीबीनाट की जांच होगी। आऊटसोर्सिंग पर रखे गए स्टाफ की सेवा तीस जून को समाप्त हो जाएगी। कोविड की जांच वाराणसी में होगी। डा. लक्ष्मी सिंहः सीएमओ, जौनपुर।
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सर्दियों में बथुए की पूरी, पराठे, रायता समेत कई चीजें बनाई जाती हैं.
आप बथुए की स्वादिष्ट पूरियां भी बना सकते हैं. आइए जानते हैं विधि.
सामग्री- 400 ग्राम आटा, 400 ग्राम बथुआ, एक छोटा चम्मच जीरा, एक छोटा चम्मच नमक, एक छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 3 हरी मिर्च, 4-5 लहसुन की कलियां, एक चुटकी हींग, पानी और तेल जरूरत के अनुसार.
सबसे पहले बथुए को धोकर काट लीजिए फिर कुकर में पानी और बथुआ डालकर 1 सीटी में उबाल लीजिए.
अब उबले हुए बथुए को छानकर ठंडा कर लें. फिर हरी मिर्च, जीरा और लहसुन के साथ मिक्सी में डालकर पीस लें.
अब आटा लीजिए उसमें बथुआ का पेस्ट, हींग, जीरा, लाल मिर्च पाउडर व नमक मिलाकर सॉफ्ट आटा गूंथ कर 10 मिनट सेट होने रख दें.
अब कढ़ाही में तेल डालकर गर्म करें और आटे की लोई को पूरी के साइज में बेल लें.
जब तेल गर्म हो जाए तो पूरियां सेक लें. चमचे की मदद से पूरी के ऊपर भी तेल डालते रहें. ऐसे आपकी पूरी फूली हुई बनेगी.
आपकी पूरी तैयार है, इसे गरम गरम परोसे.
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सर्दियों में बथुए की पूरी, पराठे, रायता समेत कई चीजें बनाई जाती हैं. आप बथुए की स्वादिष्ट पूरियां भी बना सकते हैं. आइए जानते हैं विधि. सामग्री- चार सौ ग्राम आटा, चार सौ ग्राम बथुआ, एक छोटा चम्मच जीरा, एक छोटा चम्मच नमक, एक छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, तीन हरी मिर्च, चार-पाँच लहसुन की कलियां, एक चुटकी हींग, पानी और तेल जरूरत के अनुसार. सबसे पहले बथुए को धोकर काट लीजिए फिर कुकर में पानी और बथुआ डालकर एक सीटी में उबाल लीजिए. अब उबले हुए बथुए को छानकर ठंडा कर लें. फिर हरी मिर्च, जीरा और लहसुन के साथ मिक्सी में डालकर पीस लें. अब आटा लीजिए उसमें बथुआ का पेस्ट, हींग, जीरा, लाल मिर्च पाउडर व नमक मिलाकर सॉफ्ट आटा गूंथ कर दस मिनट सेट होने रख दें. अब कढ़ाही में तेल डालकर गर्म करें और आटे की लोई को पूरी के साइज में बेल लें. जब तेल गर्म हो जाए तो पूरियां सेक लें. चमचे की मदद से पूरी के ऊपर भी तेल डालते रहें. ऐसे आपकी पूरी फूली हुई बनेगी. आपकी पूरी तैयार है, इसे गरम गरम परोसे.
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नई दिल्लीः इंग्लैंड की टीम का आक्रामक अंदाज पाकिस्तान के विरूद्ध टेस्ट (Pakistan vs England) सीरीज के अंतिम मुकाबले के दौरान भी जारी है। बेन स्टोक्स (Ben Stokes) की कप्तानी वाली इंग्लिश टीम ने इस मैच की चौथी पारी में महज 13. 4 ओवरों में ही 100 रन पूरे कर लिए। दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड का स्कोर दो विकेट के हानि पर 112 रन रहा। पाकिस्तान को उन्हीं के घर पर टेस्ट सीरीज में 3-0 से वाइटवॉश करने से इंग्लैंड की टीम अब बस 55 रन दूर है।
इंग्लैंड के दोनों सलामी बैटर ने छोटे लक्ष्य के सामने पहले 10 ओवरों में ही 80 रन ठोक दिए थे। ऐसा लग रहा था कि शायद अगले आधी घंटे में मैच खत्म हो जाएगा लेकिन इसके बाद अबरार अहमद ने जैक क्रॉली को एलबीडब्ल्यू आउट कर पाकिस्तान को कुछ राहत दी। जल्द ही नए बैट्समैन रेहान अहमद भी अबरार की गेंद पर बोल्ड हो गए। इस वक्त बेन डकेट 38 गेंदों का सामना करने के बाद 50 रन बनाकर खेल रहे हैं। दूसरे छोर पर कप्तान बेन स्टोक्स ने भी 15 गेंदों का सामना करने के बाद 10 रन बना लिए हैं।
बाबर आजम की कप्तानी वाली पाकिस्तान की टीम पहली पारी के आधार पर इंग्लैंड से 50 रन पीछे रह गई थी। ऐसे में दूसरी पारी के दौरान उनके सामने चुनौती थी कि बड़ा स्कोर बनाकर इंग्लैंड को कठिनाई में डाला जाए लेकिन डेब्यूटेंट रेहान अहमद और जैक लीच की जोड़ी ने ऐसा नहीं होने दिया।
रेहान ने पांच विकेट हॉल अपने नाम किया। बाबर अहम और मोहम्मद रिजवान जैसे बड़े बैट्समैन रेहान का शिकार बने। इससे पहले लीच ने शुरुआती तीनों बैट्समैन को चलता किया। रिटायरमेंट लेने जा रहे अजहर अली के करियर की यह अंतिम पारी थी। वो इस पारी में खाता तक नहीं खोल पाए। पूरी पाकिस्तान की टीम दूसरी पारी में 216 रन पर ऑलआउट हो गई। बाबर आजम ने सर्वाधिक 54 और सऊद शकील के बल्ले से 53 रन आए।
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नई दिल्लीः इंग्लैंड की टीम का आक्रामक अंदाज पाकिस्तान के विरूद्ध टेस्ट सीरीज के अंतिम मुकाबले के दौरान भी जारी है। बेन स्टोक्स की कप्तानी वाली इंग्लिश टीम ने इस मैच की चौथी पारी में महज तेरह. चार ओवरों में ही एक सौ रन पूरे कर लिए। दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड का स्कोर दो विकेट के हानि पर एक सौ बारह रन रहा। पाकिस्तान को उन्हीं के घर पर टेस्ट सीरीज में तीन-शून्य से वाइटवॉश करने से इंग्लैंड की टीम अब बस पचपन रन दूर है। इंग्लैंड के दोनों सलामी बैटर ने छोटे लक्ष्य के सामने पहले दस ओवरों में ही अस्सी रन ठोक दिए थे। ऐसा लग रहा था कि शायद अगले आधी घंटे में मैच खत्म हो जाएगा लेकिन इसके बाद अबरार अहमद ने जैक क्रॉली को एलबीडब्ल्यू आउट कर पाकिस्तान को कुछ राहत दी। जल्द ही नए बैट्समैन रेहान अहमद भी अबरार की गेंद पर बोल्ड हो गए। इस वक्त बेन डकेट अड़तीस गेंदों का सामना करने के बाद पचास रन बनाकर खेल रहे हैं। दूसरे छोर पर कप्तान बेन स्टोक्स ने भी पंद्रह गेंदों का सामना करने के बाद दस रन बना लिए हैं। बाबर आजम की कप्तानी वाली पाकिस्तान की टीम पहली पारी के आधार पर इंग्लैंड से पचास रन पीछे रह गई थी। ऐसे में दूसरी पारी के दौरान उनके सामने चुनौती थी कि बड़ा स्कोर बनाकर इंग्लैंड को कठिनाई में डाला जाए लेकिन डेब्यूटेंट रेहान अहमद और जैक लीच की जोड़ी ने ऐसा नहीं होने दिया। रेहान ने पांच विकेट हॉल अपने नाम किया। बाबर अहम और मोहम्मद रिजवान जैसे बड़े बैट्समैन रेहान का शिकार बने। इससे पहले लीच ने शुरुआती तीनों बैट्समैन को चलता किया। रिटायरमेंट लेने जा रहे अजहर अली के करियर की यह अंतिम पारी थी। वो इस पारी में खाता तक नहीं खोल पाए। पूरी पाकिस्तान की टीम दूसरी पारी में दो सौ सोलह रन पर ऑलआउट हो गई। बाबर आजम ने सर्वाधिक चौवन और सऊद शकील के बल्ले से तिरेपन रन आए।
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भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मानुएल मैक्रॉन फ्रांस में आयोजित जी-7 के सम्मेलन से पूर्व मुलाकात करेंगे। भारत के विदेश सचिव विजय गोखले ने यह बयान दिया है। फ्रांस राष्ट्रीय दिवस के आयोजन को संबोधित करते हुए विजय गोखले ने कहा कि "हमारे दोनों नेताओं ने निर्णय लिया था कि वह बिअर्रित्ज़ सम्मेलन से पूर्व मुलाकात करेंगे ताकि भारत-फ्रांस संबंधों को अधिक मज़बूत कर सके।
फ्रांस में राष्ट्रीय दिवस का आयोजन शुक्रवार को किया गया था इस समारोह में भारत के लिए फ्रांस के राजदूत अलेक्सेंडर ज़ेग्लेर ने अपने संबोधन के दौरान अपने कार्यकाल के अंत की तरफ इशारा किया था।
इस समरोह में गोखले और ज़ेग्लेर ने भारत और फ्रांस की दोस्ती पर जोर दिया था। इस समारोह में अन्य देशों के राजदूत भी शामिल थे। उन्होंने दोनों देशों के बीच करीबी संबंधों को रेखांकित किया था, विशेषकर आतंकवाद से लड़ने में। भारत और फ्रांस ने हाल ही में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी सूची में शामिल करने के लियए करीबी से कार्य किया था।
फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस का आयोजन 14 जुलाई को किया जाता है और यह फ्रांस में अवकाश का सबसे बड़ा अवसर होता है। इसका आयोजन साल 1789 से आयोजित किया जा रहा है, जिसे पारंपरिक तौर से फ्रांस का प्रतिक माना जाता है।
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भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मानुएल मैक्रॉन फ्रांस में आयोजित जी-सात के सम्मेलन से पूर्व मुलाकात करेंगे। भारत के विदेश सचिव विजय गोखले ने यह बयान दिया है। फ्रांस राष्ट्रीय दिवस के आयोजन को संबोधित करते हुए विजय गोखले ने कहा कि "हमारे दोनों नेताओं ने निर्णय लिया था कि वह बिअर्रित्ज़ सम्मेलन से पूर्व मुलाकात करेंगे ताकि भारत-फ्रांस संबंधों को अधिक मज़बूत कर सके। फ्रांस में राष्ट्रीय दिवस का आयोजन शुक्रवार को किया गया था इस समारोह में भारत के लिए फ्रांस के राजदूत अलेक्सेंडर ज़ेग्लेर ने अपने संबोधन के दौरान अपने कार्यकाल के अंत की तरफ इशारा किया था। इस समरोह में गोखले और ज़ेग्लेर ने भारत और फ्रांस की दोस्ती पर जोर दिया था। इस समारोह में अन्य देशों के राजदूत भी शामिल थे। उन्होंने दोनों देशों के बीच करीबी संबंधों को रेखांकित किया था, विशेषकर आतंकवाद से लड़ने में। भारत और फ्रांस ने हाल ही में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी सूची में शामिल करने के लियए करीबी से कार्य किया था। फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस का आयोजन चौदह जुलाई को किया जाता है और यह फ्रांस में अवकाश का सबसे बड़ा अवसर होता है। इसका आयोजन साल एक हज़ार सात सौ नवासी से आयोजित किया जा रहा है, जिसे पारंपरिक तौर से फ्रांस का प्रतिक माना जाता है।
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पर्यावरण का प्रदूषण सबसे महत्वपूर्ण में से एक हैमानवता की समस्याएं यह प्रकृति, वायु, हमारे ग्रह का भाग्य और मानवता का कितना ध्यान से निपटने पर निर्भर करता है विशेष चिंता का विषय यह क्षेत्र है जहां सबसे बड़े औद्योगिक केंद्र स्थित हैं। हमारे देश में, क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र की पर्यावरण समस्याएं एक प्रमुख स्थान पर हैं। इस क्षेत्र में स्थित उद्यमों के कारण यह क्षेत्र बहुत कमजोर है। हम समझेंगे कि वर्तमान समय में क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र के पर्यावरणीय समस्याएं मौजूद हैं और वे कैसे समाप्त हो जाती हैं।
रूसी संघ के इस विषय में नेता हैंकई संकेतक इसमें सबसे बड़ा क्षेत्र और खनिजों का एकाग्रता है, यह बड़े पैमाने पर उनके उत्पादन के लिए ज़िम्मेदार है। यहां कोयले और निकल, ग्रेफाइट और क्वार्ट्ज रेत के सभी प्रकार के अयस्क, सभी प्रकार के अयस्क हैं। यह क्षेत्र लकड़ी की कटाई में भी व्यस्त है, क्योंकि क्षेत्र के आधे से अधिक क्षेत्र जंगलों के कब्जे में हैं।
अगर हम पर्यावरणीय समस्याओं का वर्णन करते हैंक्रास्नोयार्स्क क्षेत्र, संक्षेप में, हम यह कह सकते हैं कि मुख्य रूप से हानिकारक उद्योगों का काम है जो हवा को प्रदूषित करते हैं और पानी में निर्वहन कचरे को हटा देते हैं। यह तथ्य यह है कि ये संयत (2/3 उनमें से) सम्मिलित हैं, इस क्षेत्र के सबसे घनी आबादी वाले शहरों में स्थित हैंः क्रास्नोयार्स्क और नोरिल्स्क।
एक अन्य समस्या वनों की कटाई है, जो न केवल प्राकृतिक हवाएं हैं, बल्कि जीवों के निवास भी हैं। शहरों में बागानों को ध्यान नहीं दिया जाता है।
इन सभी ने रूस के सबसे बड़े प्रदूषण के साथ इस क्षेत्र को शीर्ष तीन में लाने का मौका दिया। हमें क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र की पर्यावरणीय समस्याओं के बारे में विस्तृत जानकारी दें।
अच्छा साफ हवा हर किसी के लिए महत्वपूर्ण है दुर्भाग्य से, क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र के निवासियों ने इस का सपना देखा है। सब के बाद, बड़े औद्योगिक उद्यमों यह भयावह गति के साथ clogging हैं जो आंकड़ा वायुमंडल में उत्सर्जन का गुणन करता है वह क्रांतिकारी रूप से बढ़ रहा है। 2000 के बाद से, यह लगभग दोगुना हो गया है।
इनमें से अधिकांश को धातुकर्म के लिए दोषी ठहराया जाता हैनोरिल्स्क कम्बाइन जैसे उद्यम, क्रॉसयायरस्क में स्थित पौधे यहां, आवासीय क्षेत्रों के तत्काल क्षेत्र में, एक एल्यूमीनियम प्रसंस्करण संयंत्र है। वैसे, पर्यावरण के उत्सर्जन को कम करने के लिए सबसे बड़े उद्यमों ने अच्छी तरह से स्थापित उपाय किए हैं। सामान्य, छोटे और मध्यम आकार के कारखानों में मानक तोड़कर "पाप" उनके पास पर्यावरणविदों को कर्मचारियों को आकर्षित करने का अवसर नहीं है।
सबसे बुरी बात यह है कि ये सभी उत्सर्जन शहरों के लिए व्यावहारिक रूप से अदृश्य हो रहे हैं, जबकि आधा आवधिक तालिका हवा में है, जिनमें हानिकारक अमोनिया, फार्मलाडिहाइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य शामिल हैं।
इन घटकों का अंतिम उत्पाद है,जो वायु वाहनों को प्रदूषित करता है खासकर इसकी एकाग्रता बड़े शहरों में अधिक है, और यह हर साल बढ़ता है। यह आबादी का कल्याण और बढ़ती माल ढुलाई यातायात में सुधार के कारण है।
जल निकायों की पारिस्थितिक समस्याएंक्रास्नोयार्स्क क्षेत्र भी बहुत बड़ा है। ताजे पानी के साथ कई हजार झीलें हैं, और नदियों का प्रवाह क्षेत्र के माध्यम से होता है, जिसका इस्तेमाल बिजली संयंत्रों के निर्माण के लिए किया जाता है।
दुर्भाग्य से, इस में संचालित उद्यमोंविषय, हवा के अलावा, पानी को भी प्रदूषित करता है यह जीवन-धमकाने वाले तत्वों, जैसे कि सीसा या जस्ता में जारी होने के बारे में है कारखानों और कारखानों से मलजल पर्याप्त रूप से शुद्ध नहीं है, जैसा कि सीवेज अपशिष्टों का खराब इलाज भी किया जाता है। नतीजतन, ताजे पानी की गुणवत्ता खराब होती है, स्वच्छता और निर्बाध आपूर्ति क्षेत्र में जीवन को निर्धारित करती है।
त्याग किए जाने के अलावाअपशिष्ट जल, वे पर्याप्त रूप से ठंडा नहीं होते हैं, जो जल निकायों के पारिस्थितिकी तंत्र की मृत्यु की ओर जाता है। तो, 2011 में, एक मामले दर्ज किए गए थे जब उद्यम ने येनेसी में 40 डिग्री के तापमान के साथ पानी फेंक दिया था। इससे पारिस्थितिक तंत्र को गंभीर नुकसान हुआः प्लंक्टन और, परिणामस्वरूप, मछली की एक बड़ी साइट पर मृत्यु हो गई। क्रस्नोयार्स्क अपराधी था।
भू-संसाधनों के साथ क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र के पर्यावरणीय समस्याएं जंगलों की स्थिति से जुड़ी हैं।
इसके अलावा, क्रास्नोयार्स्क की पर्यावरणीय समस्याएंकिनारों को 105 मिलियन टन अपशिष्ट उद्योग के भंडारण से भी जुड़ा हुआ है। इनमें से, 1 और 2 खतरा वर्गों (सबसे जहरीले लोगों) पर एक निश्चित अनुपात गिरता है। इनमें से 20 मिलियन टन से अधिक आवासीय क्षेत्रों के करीब निकटता में संग्रहीत हैं। एक नियम के रूप में, यह प्रक्रिया मानदंडों के उल्लंघन में आयोजित की जाती है, जो एक पारिस्थितिक विपत्ति को जन्म दे सकती है।
यह सबसे प्रदूषित शहरों के बारे में कहा जाना चाहिएधार। सबसे पहले, यह नोरिल्स्क है यह प्रशासनिक केंद्र हमारे देश का सबसे प्रदूषित शहर है, जो दुनिया के आंकड़ों में भी एक प्रमुख स्थान लेता है।
क्रास्नोयार्स्क नोरिल्स्क के लिए थोड़ा नीच है वायु प्रदूषण (यह गर्म दिन पर विशेष रूप से देखा गया था), मिट्टी (मुख्य रूप से आर्सेनिक) और पानी (इस में शहर के तत्काल आसपास के क्षेत्र में रासायनिक उद्योग उद्यम दोषी हैं)
क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र के पारिस्थितिक समस्याओं का निर्णय मोटे तौर पर इस क्षेत्र के निवासियों, उनकी सतर्कता पर निर्भर करता है।
ऐसी विपत्तिपूर्ण स्थिति से एक और तरीका है पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन सुविधाओं का विकास जो हानिकारक उत्सर्जन के साथ नहीं हैं।
विशेष ध्यान से जंगलों को भुगतान किया जाना चाहिए, तथाकथित "प्रकाश" - वे हानिकारक तत्वों की हवा को शुद्ध करने में सक्षम हैं।
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पर्यावरण का प्रदूषण सबसे महत्वपूर्ण में से एक हैमानवता की समस्याएं यह प्रकृति, वायु, हमारे ग्रह का भाग्य और मानवता का कितना ध्यान से निपटने पर निर्भर करता है विशेष चिंता का विषय यह क्षेत्र है जहां सबसे बड़े औद्योगिक केंद्र स्थित हैं। हमारे देश में, क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र की पर्यावरण समस्याएं एक प्रमुख स्थान पर हैं। इस क्षेत्र में स्थित उद्यमों के कारण यह क्षेत्र बहुत कमजोर है। हम समझेंगे कि वर्तमान समय में क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र के पर्यावरणीय समस्याएं मौजूद हैं और वे कैसे समाप्त हो जाती हैं। रूसी संघ के इस विषय में नेता हैंकई संकेतक इसमें सबसे बड़ा क्षेत्र और खनिजों का एकाग्रता है, यह बड़े पैमाने पर उनके उत्पादन के लिए ज़िम्मेदार है। यहां कोयले और निकल, ग्रेफाइट और क्वार्ट्ज रेत के सभी प्रकार के अयस्क, सभी प्रकार के अयस्क हैं। यह क्षेत्र लकड़ी की कटाई में भी व्यस्त है, क्योंकि क्षेत्र के आधे से अधिक क्षेत्र जंगलों के कब्जे में हैं। अगर हम पर्यावरणीय समस्याओं का वर्णन करते हैंक्रास्नोयार्स्क क्षेत्र, संक्षेप में, हम यह कह सकते हैं कि मुख्य रूप से हानिकारक उद्योगों का काम है जो हवा को प्रदूषित करते हैं और पानी में निर्वहन कचरे को हटा देते हैं। यह तथ्य यह है कि ये संयत सम्मिलित हैं, इस क्षेत्र के सबसे घनी आबादी वाले शहरों में स्थित हैंः क्रास्नोयार्स्क और नोरिल्स्क। एक अन्य समस्या वनों की कटाई है, जो न केवल प्राकृतिक हवाएं हैं, बल्कि जीवों के निवास भी हैं। शहरों में बागानों को ध्यान नहीं दिया जाता है। इन सभी ने रूस के सबसे बड़े प्रदूषण के साथ इस क्षेत्र को शीर्ष तीन में लाने का मौका दिया। हमें क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र की पर्यावरणीय समस्याओं के बारे में विस्तृत जानकारी दें। अच्छा साफ हवा हर किसी के लिए महत्वपूर्ण है दुर्भाग्य से, क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र के निवासियों ने इस का सपना देखा है। सब के बाद, बड़े औद्योगिक उद्यमों यह भयावह गति के साथ clogging हैं जो आंकड़ा वायुमंडल में उत्सर्जन का गुणन करता है वह क्रांतिकारी रूप से बढ़ रहा है। दो हज़ार के बाद से, यह लगभग दोगुना हो गया है। इनमें से अधिकांश को धातुकर्म के लिए दोषी ठहराया जाता हैनोरिल्स्क कम्बाइन जैसे उद्यम, क्रॉसयायरस्क में स्थित पौधे यहां, आवासीय क्षेत्रों के तत्काल क्षेत्र में, एक एल्यूमीनियम प्रसंस्करण संयंत्र है। वैसे, पर्यावरण के उत्सर्जन को कम करने के लिए सबसे बड़े उद्यमों ने अच्छी तरह से स्थापित उपाय किए हैं। सामान्य, छोटे और मध्यम आकार के कारखानों में मानक तोड़कर "पाप" उनके पास पर्यावरणविदों को कर्मचारियों को आकर्षित करने का अवसर नहीं है। सबसे बुरी बात यह है कि ये सभी उत्सर्जन शहरों के लिए व्यावहारिक रूप से अदृश्य हो रहे हैं, जबकि आधा आवधिक तालिका हवा में है, जिनमें हानिकारक अमोनिया, फार्मलाडिहाइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य शामिल हैं। इन घटकों का अंतिम उत्पाद है,जो वायु वाहनों को प्रदूषित करता है खासकर इसकी एकाग्रता बड़े शहरों में अधिक है, और यह हर साल बढ़ता है। यह आबादी का कल्याण और बढ़ती माल ढुलाई यातायात में सुधार के कारण है। जल निकायों की पारिस्थितिक समस्याएंक्रास्नोयार्स्क क्षेत्र भी बहुत बड़ा है। ताजे पानी के साथ कई हजार झीलें हैं, और नदियों का प्रवाह क्षेत्र के माध्यम से होता है, जिसका इस्तेमाल बिजली संयंत्रों के निर्माण के लिए किया जाता है। दुर्भाग्य से, इस में संचालित उद्यमोंविषय, हवा के अलावा, पानी को भी प्रदूषित करता है यह जीवन-धमकाने वाले तत्वों, जैसे कि सीसा या जस्ता में जारी होने के बारे में है कारखानों और कारखानों से मलजल पर्याप्त रूप से शुद्ध नहीं है, जैसा कि सीवेज अपशिष्टों का खराब इलाज भी किया जाता है। नतीजतन, ताजे पानी की गुणवत्ता खराब होती है, स्वच्छता और निर्बाध आपूर्ति क्षेत्र में जीवन को निर्धारित करती है। त्याग किए जाने के अलावाअपशिष्ट जल, वे पर्याप्त रूप से ठंडा नहीं होते हैं, जो जल निकायों के पारिस्थितिकी तंत्र की मृत्यु की ओर जाता है। तो, दो हज़ार ग्यारह में, एक मामले दर्ज किए गए थे जब उद्यम ने येनेसी में चालीस डिग्री के तापमान के साथ पानी फेंक दिया था। इससे पारिस्थितिक तंत्र को गंभीर नुकसान हुआः प्लंक्टन और, परिणामस्वरूप, मछली की एक बड़ी साइट पर मृत्यु हो गई। क्रस्नोयार्स्क अपराधी था। भू-संसाधनों के साथ क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र के पर्यावरणीय समस्याएं जंगलों की स्थिति से जुड़ी हैं। इसके अलावा, क्रास्नोयार्स्क की पर्यावरणीय समस्याएंकिनारों को एक सौ पाँच मिलियन टन अपशिष्ट उद्योग के भंडारण से भी जुड़ा हुआ है। इनमें से, एक और दो खतरा वर्गों पर एक निश्चित अनुपात गिरता है। इनमें से बीस मिलियन टन से अधिक आवासीय क्षेत्रों के करीब निकटता में संग्रहीत हैं। एक नियम के रूप में, यह प्रक्रिया मानदंडों के उल्लंघन में आयोजित की जाती है, जो एक पारिस्थितिक विपत्ति को जन्म दे सकती है। यह सबसे प्रदूषित शहरों के बारे में कहा जाना चाहिएधार। सबसे पहले, यह नोरिल्स्क है यह प्रशासनिक केंद्र हमारे देश का सबसे प्रदूषित शहर है, जो दुनिया के आंकड़ों में भी एक प्रमुख स्थान लेता है। क्रास्नोयार्स्क नोरिल्स्क के लिए थोड़ा नीच है वायु प्रदूषण , मिट्टी और पानी क्रास्नोयार्स्क क्षेत्र के पारिस्थितिक समस्याओं का निर्णय मोटे तौर पर इस क्षेत्र के निवासियों, उनकी सतर्कता पर निर्भर करता है। ऐसी विपत्तिपूर्ण स्थिति से एक और तरीका है पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन सुविधाओं का विकास जो हानिकारक उत्सर्जन के साथ नहीं हैं। विशेष ध्यान से जंगलों को भुगतान किया जाना चाहिए, तथाकथित "प्रकाश" - वे हानिकारक तत्वों की हवा को शुद्ध करने में सक्षम हैं।
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Budh Ast 2023: बुध वृषभ राशि में होने जा रहे अस्त, 19 जून से इन राशि वालों के जीवन में मचेगी खलबली!
Budh Ast 2023 June: ग्रहों के राजकुमार बुध ग्रह सूर्य से दूरी में सबसे पास है। यह छोटा ग्रह ज्योतिष की दुनिया में बहुत महत्व रखता है क्योंकि यह हमारी बुद्धि, संचार, भाषण, तर्कसंगत सोच, तर्क और व्यापार पर शासन करता है। बुध दो राशियों मिथुन और कन्या का स्वामी ग्रह है और शुक्र और शनि ग्रह के साथ मित्रता का भाव रखता है। बुध अक्सर एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करता है और 7 जून 2023 को वृष राशि में गोचर किया था, अब 19 जून 2023 को सुबह 07:16 बजे अस्त हो जाएगा। आइए जानते हैं कि इस गोचर के दौरान 12 में से किन राशियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
17 जून को वक्री शनि बनाएंगे धन और शश राजयोग, इन 3 राशियों पर मेहरबान रहेंगे शनिदेव!
मिथुन राशिः मिथुन राशि वालों के लिए बुध लग्न या प्रथम भाव का स्वामी और चतुर्थ भाव का स्वामी बनता है। करियर के संबंध में, बुध अस्त की यह अवधि उचित प्रयास करने में कुछ मुद्दों या ठहराव या आलस्य की भावना पैदा कर सकती है। वृष राशि में बुध अस्त के दौरान इन जातकों को कुछ बाधाओं के बाद सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।
सिंह राशिः सिंह राशि वालों के लिए बुध दूसरे और 11वें भाव का स्वामी बनता है, ये दोनों ही भाव आर्थिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण भाव हैं। यह करियर के 10वें भाव में अस्त हो जाएगा। सिंह राशि वालों के लिए इस अवधि में भाग्य का साथ नहीं मिल सकता है। सिंह राशि के जातक कार्यस्थल पर बढ़ते दबाव को भी महसूस कर सकते हैं। कई बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है और अधिकारियों के सामने उनकी बदनामी भी हो सकती है।
वृश्चिक राशिः वृश्चिक राशि के जातकों के लिए बुध अष्टम भाव और 11वें भाव का स्वामी है और सातवें भाव में अस्त हो जाता है। बुध असुरक्षा की भावनाओं को जन्म दे सकता है और उनके निर्णय लेने में बाधा भी बन सकता है जो आगे चलकर उनके आत्मसम्मान को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। करियर के मोर्चे पर, इन जातकों पर काम का ज्यादा दबाव हो सकता है। अगर आप व्यवसाय में लगे हैं तो प्रतिस्पर्धी आपसे बेहतर पाने की कोशिश कर सकते हैं। धन के मोर्चे पर, बुध का स्थान भाव जातकों के लिए कठिनाइयों और नुकसान का कारण बन सकता है।
धनु राशिः धनु लग्न वालों के लिए बुध 7वें और 10वें भाव का स्वामी है और छठे भाव में अस्त होगा। अगर इनके करियर की बात करें तो बुध की यह अवधि कार्यकुशलता और प्रोडक्टिविटी के मामले में मध्यम परिणाम देने वाली हो सकती है। इस राशि के जातकों को अपने काम को व्यवस्थित तरीके से करने की आवश्यकता हो सकती है।
मीन राशिः मीन राशि के जातकों के लिए बुध चौथे और सातवें घर का स्वामी है और इस अवधि के दौरान तीसरे भाव में रहता है। करियर के मोर्चे पर, बुध की यह अवधि कम कुशल परिणाम दे सकती है और जातकों को अच्छी वृद्धि नहीं देगी। काम के सिलसिले में पहचान हासिल करना इन जातकों के लिए आसानी से संभव नहीं हो सकता है।
इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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Budh Ast दो हज़ार तेईस: बुध वृषभ राशि में होने जा रहे अस्त, उन्नीस जून से इन राशि वालों के जीवन में मचेगी खलबली! Budh Ast बीसतेईस जूनe: ग्रहों के राजकुमार बुध ग्रह सूर्य से दूरी में सबसे पास है। यह छोटा ग्रह ज्योतिष की दुनिया में बहुत महत्व रखता है क्योंकि यह हमारी बुद्धि, संचार, भाषण, तर्कसंगत सोच, तर्क और व्यापार पर शासन करता है। बुध दो राशियों मिथुन और कन्या का स्वामी ग्रह है और शुक्र और शनि ग्रह के साथ मित्रता का भाव रखता है। बुध अक्सर एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करता है और सात जून दो हज़ार तेईस को वृष राशि में गोचर किया था, अब उन्नीस जून दो हज़ार तेईस को सुबह सात:सोलह बजे अस्त हो जाएगा। आइए जानते हैं कि इस गोचर के दौरान बारह में से किन राशियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सत्रह जून को वक्री शनि बनाएंगे धन और शश राजयोग, इन तीन राशियों पर मेहरबान रहेंगे शनिदेव! मिथुन राशिः मिथुन राशि वालों के लिए बुध लग्न या प्रथम भाव का स्वामी और चतुर्थ भाव का स्वामी बनता है। करियर के संबंध में, बुध अस्त की यह अवधि उचित प्रयास करने में कुछ मुद्दों या ठहराव या आलस्य की भावना पैदा कर सकती है। वृष राशि में बुध अस्त के दौरान इन जातकों को कुछ बाधाओं के बाद सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। सिंह राशिः सिंह राशि वालों के लिए बुध दूसरे और ग्यारहवें भाव का स्वामी बनता है, ये दोनों ही भाव आर्थिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण भाव हैं। यह करियर के दसवें भाव में अस्त हो जाएगा। सिंह राशि वालों के लिए इस अवधि में भाग्य का साथ नहीं मिल सकता है। सिंह राशि के जातक कार्यस्थल पर बढ़ते दबाव को भी महसूस कर सकते हैं। कई बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है और अधिकारियों के सामने उनकी बदनामी भी हो सकती है। वृश्चिक राशिः वृश्चिक राशि के जातकों के लिए बुध अष्टम भाव और ग्यारहवें भाव का स्वामी है और सातवें भाव में अस्त हो जाता है। बुध असुरक्षा की भावनाओं को जन्म दे सकता है और उनके निर्णय लेने में बाधा भी बन सकता है जो आगे चलकर उनके आत्मसम्मान को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। करियर के मोर्चे पर, इन जातकों पर काम का ज्यादा दबाव हो सकता है। अगर आप व्यवसाय में लगे हैं तो प्रतिस्पर्धी आपसे बेहतर पाने की कोशिश कर सकते हैं। धन के मोर्चे पर, बुध का स्थान भाव जातकों के लिए कठिनाइयों और नुकसान का कारण बन सकता है। धनु राशिः धनु लग्न वालों के लिए बुध सातवें और दसवें भाव का स्वामी है और छठे भाव में अस्त होगा। अगर इनके करियर की बात करें तो बुध की यह अवधि कार्यकुशलता और प्रोडक्टिविटी के मामले में मध्यम परिणाम देने वाली हो सकती है। इस राशि के जातकों को अपने काम को व्यवस्थित तरीके से करने की आवश्यकता हो सकती है। मीन राशिः मीन राशि के जातकों के लिए बुध चौथे और सातवें घर का स्वामी है और इस अवधि के दौरान तीसरे भाव में रहता है। करियर के मोर्चे पर, बुध की यह अवधि कम कुशल परिणाम दे सकती है और जातकों को अच्छी वृद्धि नहीं देगी। काम के सिलसिले में पहचान हासिल करना इन जातकों के लिए आसानी से संभव नहीं हो सकता है। इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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दोपहर 2:35 बजे : धनौल्टी सीट पर बीजेपी के प्रीतम सिंह पंवार 7,573 वोटों से आगे चल रहे हैं।
सुबह 8 बजे : पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू की गई है। सभी बैलेट बॉक्स से मतपत्रों को निकाल कर छांटा जा रहा है। इसके बाद सभी वोटों की गिनती होगी। इस बार बुजुर्ग और दिव्यांग वोटरों को भी पोस्टल बैलेट की अनुमति प्रदान की गई है। इसके कारण पोस्टल बैलेट की संख्या पिछली बार से दोगुनी है। इसकी गिनती में समय अधिक लगने की संभावना है।
इस बार यहां बीजेपी के प्रीतम सिंह पंवार और कांग्रेस के जोत सिंह बिष्ट में कांटे की टक्कर है। बात करें 2017 के विधानसभा चुनाव में तो इस सीट (Dhanolti Assembly Seat) पर निर्दलीय उम्मीदवार का वोट शेयर 36। 45 प्रतिशत था। भारतीय जनता पार्टी का वोट शेयर 33। 14 प्रतिशत और कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर 24। 95 प्रतिशत रहा।
2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट (Dhanolti Assembly Seat) पर निर्दलीय उम्मीदवार प्रीतम सिंह पंवार विधायक चुने गए थे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नारायण सिंह राणा को हराया था। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार प्रीतम सिंह पंवार को 17,811 वोट मिला था, जबकि दूसरे नंबर पर भाजपा के नारायण सिंह राणा थे, जिन्हें 16,196 वोट मिला था। तीसरे नंबर पर कांग्रेस पार्टी के मनमोहन सिंह मन्नू भाई थे, जिन्हें 12,193 वोट मिला था।
2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट (Dhanolti Assembly Seat) से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार महावीर सिंह विधायक चुने गए थे। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार मनमोहन सिंह को हराया था। इस चुनाव में भाजपा के महावीर सिंह को 12,081 वोट मिला था, जबकि कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार मनमोहन सिंह को 10,933 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार जोत सिंह बिष्ट थे, जिन्हें 10,261 वोट मिला था।
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दोपहर दो:पैंतीस बजे : धनौल्टी सीट पर बीजेपी के प्रीतम सिंह पंवार सात,पाँच सौ तिहत्तर वोटों से आगे चल रहे हैं। सुबह आठ बजे : पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू की गई है। सभी बैलेट बॉक्स से मतपत्रों को निकाल कर छांटा जा रहा है। इसके बाद सभी वोटों की गिनती होगी। इस बार बुजुर्ग और दिव्यांग वोटरों को भी पोस्टल बैलेट की अनुमति प्रदान की गई है। इसके कारण पोस्टल बैलेट की संख्या पिछली बार से दोगुनी है। इसकी गिनती में समय अधिक लगने की संभावना है। इस बार यहां बीजेपी के प्रीतम सिंह पंवार और कांग्रेस के जोत सिंह बिष्ट में कांटे की टक्कर है। बात करें दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव में तो इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार का वोट शेयर छत्तीस। पैंतालीस प्रतिशत था। भारतीय जनता पार्टी का वोट शेयर तैंतीस। चौदह प्रतिशत और कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर चौबीस। पचानवे प्रतिशत रहा। दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार प्रीतम सिंह पंवार विधायक चुने गए थे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नारायण सिंह राणा को हराया था। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार प्रीतम सिंह पंवार को सत्रह,आठ सौ ग्यारह वोट मिला था, जबकि दूसरे नंबर पर भाजपा के नारायण सिंह राणा थे, जिन्हें सोलह,एक सौ छियानवे वोट मिला था। तीसरे नंबर पर कांग्रेस पार्टी के मनमोहन सिंह मन्नू भाई थे, जिन्हें बारह,एक सौ तिरानवे वोट मिला था। दो हज़ार बारह के विधानसभा चुनाव में इस सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार महावीर सिंह विधायक चुने गए थे। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार मनमोहन सिंह को हराया था। इस चुनाव में भाजपा के महावीर सिंह को बारह,इक्यासी वोट मिला था, जबकि कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार मनमोहन सिंह को दस,नौ सौ तैंतीस वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार जोत सिंह बिष्ट थे, जिन्हें दस,दो सौ इकसठ वोट मिला था।
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चंडीगढ़, 4 अप्रैल (ट्रिन्यू)
पंजाब विधानसभा में चंडीगढ़ को लेकर प्रस्ताव पास होने के बाद पंजाब सरकार व हरियाणा सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है। हरियाणा में सियासत गरमा गई है। स्थिति यह है कि भाजपा के दिग्गज नेता अब खुलकर मैदान में चंडीगढ़ के हक को लेकर बोलने लगे हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री व वरिष्ठ नेता विपुल गोयल ने पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व वाली आप सरकार को घेरते हुए कहा कि मान को मसखरी छोड़कर जनहित के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
गोयल ने कहा कि हरियाणा सरकार, पंजाब को उसी की भाषा में जबाब देना जानती है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हरियाणा चाहे चंडीगढ़ की बात हो या फिर एसवाईएल के पानी का मुद्दा हो हरियाणा के हक की आवाज को हमेशा बुलंद करती रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में सरकार मंगलवार को विस के विशेष सत्र में चंडीगढ़ मामले पर बड़ा फैसला लेगी। पूर्व मंत्री ने कहा, प्रदेश का नेतृत्व कुशल मुख्यमंत्री के हाथों में है। इसलिए जो जैसी भाषा समझेगा, उसे वैसी ही भाषा मे समझाया जाएगा।
गोयल ने कहा कि पंजाब पहले 400 हिंदी भाषी गांव हरियाणा को अधिकार क्षेत्र में दे और एसवाईएल नहर का पानी दे तब कोई बात आगे करे। चंडीगढ़ के मुद्दे पर न तो भाजपा विचलित है और न ही आक्रोश में है। हरियाणा ने पंजाब को हमेशा अपने भाई का दर्जा दिया है। यदि पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार इस भाईचारे को बिगाड़ने का काम करेगी तो हरियाणा भी चुप नहीं बैठेगा।
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चंडीगढ़, चार अप्रैल पंजाब विधानसभा में चंडीगढ़ को लेकर प्रस्ताव पास होने के बाद पंजाब सरकार व हरियाणा सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है। हरियाणा में सियासत गरमा गई है। स्थिति यह है कि भाजपा के दिग्गज नेता अब खुलकर मैदान में चंडीगढ़ के हक को लेकर बोलने लगे हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री व वरिष्ठ नेता विपुल गोयल ने पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व वाली आप सरकार को घेरते हुए कहा कि मान को मसखरी छोड़कर जनहित के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। गोयल ने कहा कि हरियाणा सरकार, पंजाब को उसी की भाषा में जबाब देना जानती है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हरियाणा चाहे चंडीगढ़ की बात हो या फिर एसवाईएल के पानी का मुद्दा हो हरियाणा के हक की आवाज को हमेशा बुलंद करती रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में सरकार मंगलवार को विस के विशेष सत्र में चंडीगढ़ मामले पर बड़ा फैसला लेगी। पूर्व मंत्री ने कहा, प्रदेश का नेतृत्व कुशल मुख्यमंत्री के हाथों में है। इसलिए जो जैसी भाषा समझेगा, उसे वैसी ही भाषा मे समझाया जाएगा। गोयल ने कहा कि पंजाब पहले चार सौ हिंदी भाषी गांव हरियाणा को अधिकार क्षेत्र में दे और एसवाईएल नहर का पानी दे तब कोई बात आगे करे। चंडीगढ़ के मुद्दे पर न तो भाजपा विचलित है और न ही आक्रोश में है। हरियाणा ने पंजाब को हमेशा अपने भाई का दर्जा दिया है। यदि पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार इस भाईचारे को बिगाड़ने का काम करेगी तो हरियाणा भी चुप नहीं बैठेगा।
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दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को चल रहे शराब घोटाले के सिलसिले में आठ घंटे की लगातार पूछताछ के बाद ICBI ने गिरफ्तार कर लिया । पूछताछ पर जाने से पहले सिसोदिया ने रोड शो कर केंद्र सरकार को चुनौती दी.
इस बीच विपक्ष ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार केवल विपक्ष का गला घोंटने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है.
दिल्ली सरकार ने शराब नीति बनाई जिससे व्यापारियों को फायदा होगा और सरकार को नुकसान। आबकारी विभाग के एक आईएएस अधिकारी ने आरोप लगाया था कि इसके लिए दबाव बनाया गया था। उस आरोप के सिलसिले में सिसोदिया से पूछताछ की गई और उन्हें आज गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में जाने से पहले सिसोदिया मां से मिले थे। इसके बाद वे रोड शो कर सीबीआई कार्यालय पहुंचे। इस समय सिसोदिया के साथ उनके हजारों समर्थक भी थे। आप कार्यकर्ताओं के बढ़ते विरोध को देखते हुए पुलिस ने कर्फ्यू लगा दिया। सीबीआई दफ्तर जाने से पहले सिसोदिया ने समर्थकों को संबोधित किया. भगत सिंह देश के लिए शहीद हुए, झूठे आरोप में जेल जाना मेरे लिए छोटी बात है। पुलिस ने दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय और आप सांसद संजय सिंह समेत कई समर्थकों को हिरासत में लिया है.
सीबीआई ने उपमुख्यमंत्री सिसोदिया को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार कर लिया क्योंकि केंद्र सरकार में हिंडनबर्ग मामले में उद्योगपति गौतम अडानी की जांच करने की हिम्मत नहीं है और एक प्रशासनिक अधिकारी का आरोप है। सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने ट्वीट कर कहा है कि सीबीआई बीजेपी की कठपुतली बन गई है और बीजेपी अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल सिर्फ विपक्ष का गला घोंटने में कर रही है.
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दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को चल रहे शराब घोटाले के सिलसिले में आठ घंटे की लगातार पूछताछ के बाद ICBI ने गिरफ्तार कर लिया । पूछताछ पर जाने से पहले सिसोदिया ने रोड शो कर केंद्र सरकार को चुनौती दी. इस बीच विपक्ष ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार केवल विपक्ष का गला घोंटने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है. दिल्ली सरकार ने शराब नीति बनाई जिससे व्यापारियों को फायदा होगा और सरकार को नुकसान। आबकारी विभाग के एक आईएएस अधिकारी ने आरोप लगाया था कि इसके लिए दबाव बनाया गया था। उस आरोप के सिलसिले में सिसोदिया से पूछताछ की गई और उन्हें आज गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में जाने से पहले सिसोदिया मां से मिले थे। इसके बाद वे रोड शो कर सीबीआई कार्यालय पहुंचे। इस समय सिसोदिया के साथ उनके हजारों समर्थक भी थे। आप कार्यकर्ताओं के बढ़ते विरोध को देखते हुए पुलिस ने कर्फ्यू लगा दिया। सीबीआई दफ्तर जाने से पहले सिसोदिया ने समर्थकों को संबोधित किया. भगत सिंह देश के लिए शहीद हुए, झूठे आरोप में जेल जाना मेरे लिए छोटी बात है। पुलिस ने दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय और आप सांसद संजय सिंह समेत कई समर्थकों को हिरासत में लिया है. सीबीआई ने उपमुख्यमंत्री सिसोदिया को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार कर लिया क्योंकि केंद्र सरकार में हिंडनबर्ग मामले में उद्योगपति गौतम अडानी की जांच करने की हिम्मत नहीं है और एक प्रशासनिक अधिकारी का आरोप है। सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने ट्वीट कर कहा है कि सीबीआई बीजेपी की कठपुतली बन गई है और बीजेपी अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल सिर्फ विपक्ष का गला घोंटने में कर रही है.
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डिप्टी कमिश्नर विशेष सारंगल ने बताया कि जालंधर जिले में एबी-एमएम सरबत सेहत बीमा योजना के तहत कुल 2,62,466 पात्र परिवारों को कवर किया गया है।
पंजाब सरकार महिलाओं के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
मुकेरियां के आलो भट्टी गांव के युवक की अमेरिका में गोली मारकर हत्या करने की सूचना प्राप्त हुई है।
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने की आज डेड लाइन है।
पंजाब में बेशक घरेलू खपतकारों को हर महीने 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जा रही हैं पर इसके बावजूद लोग ऐसे काम कर रहे हैं।
वर्ल्ड कप में मोहाली को एक भी मैच न मिलने पर खेल मंत्री ने नाराजगी जताई है।
: दोराहा में भीषण सड़क हादसा होने की घटना सामने आई है।
आम आदमी पार्टी पिछले 9 महीनों से कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने के लिए प्रचार कर रही है।
पंजाब सरकार में तबादलों का दौर लगातार जारी है। सत्ता में आते ही 'आप' सरकार ने पुलिस व अन्य प्रशासनिक हलकों में काफी फेरबदल किया है।
पंजाब के पूर्व डिप्टी स्पीकर बीर दविंदर सिंह के निधन पर पंजाब सी. एम. ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
सुल्तानपुर लोधी के थाने में तैनात रिटायर्ड एस. एच. ओ. पर एफ. आई. आर. दर्ज होने की खबर सामने आई है।
अमृतसर की ब्यूटी एवेन्यू से एक दुखद खबर समाचार मिला है।
पंजाब में राशन कार्ड धारकों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है।
शहर एक प्रॉपर्टी डीलर व उसकी पत्नी पर एक महिला ने मारपीट के आरोप लगाए हैं।
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डिप्टी कमिश्नर विशेष सारंगल ने बताया कि जालंधर जिले में एबी-एमएम सरबत सेहत बीमा योजना के तहत कुल दो,बासठ,चार सौ छयासठ पात्र परिवारों को कवर किया गया है। पंजाब सरकार महिलाओं के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुकेरियां के आलो भट्टी गांव के युवक की अमेरिका में गोली मारकर हत्या करने की सूचना प्राप्त हुई है। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने की आज डेड लाइन है। पंजाब में बेशक घरेलू खपतकारों को हर महीने तीन सौ यूनिट बिजली मुफ्त दी जा रही हैं पर इसके बावजूद लोग ऐसे काम कर रहे हैं। वर्ल्ड कप में मोहाली को एक भी मैच न मिलने पर खेल मंत्री ने नाराजगी जताई है। : दोराहा में भीषण सड़क हादसा होने की घटना सामने आई है। आम आदमी पार्टी पिछले नौ महीनों से कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने के लिए प्रचार कर रही है। पंजाब सरकार में तबादलों का दौर लगातार जारी है। सत्ता में आते ही 'आप' सरकार ने पुलिस व अन्य प्रशासनिक हलकों में काफी फेरबदल किया है। पंजाब के पूर्व डिप्टी स्पीकर बीर दविंदर सिंह के निधन पर पंजाब सी. एम. ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सुल्तानपुर लोधी के थाने में तैनात रिटायर्ड एस. एच. ओ. पर एफ. आई. आर. दर्ज होने की खबर सामने आई है। अमृतसर की ब्यूटी एवेन्यू से एक दुखद खबर समाचार मिला है। पंजाब में राशन कार्ड धारकों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। शहर एक प्रॉपर्टी डीलर व उसकी पत्नी पर एक महिला ने मारपीट के आरोप लगाए हैं। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
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हरियाणा की ओर से यह अवार्ड उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला (Deputy Chief Minister Dushyant Chautala) ने वर्चुअली ग्रहण किया। केंद्रीय मंत्रालय की ओर से यह अवार्ड केंद्रीय पेयजल, स्वच्छता तथा जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने वर्चुअल तौर पर दिया।
चंडीगढ़। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 151वीं जयंती के अवसर पर आयोजित स्वच्छ भारत दिवस (swachh bharat divas) के अवसर पर केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता तथा जल शक्ति मंत्रालय की ओर से 'गन्दगी मुक्त भारत ' अभियान के तहत राज्यों में सर्वाधिक 'ओडीएफ प्लस विलेजिज' होने पर हरियाणा को पूरे देश मे प्रथम पुरस्कार मिला है। इसके अलावा 'स्वच्छ सुंदर सामुदायिक शौचालय' श्रेणी में तीसरा स्थान हासिल किया है।
हरियाणा की ओर से यह अवार्ड उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला (जिनके पास विकास एवं पंचायत विभाग तथा ग्रामीण विकास का विभाग भी है) ने वर्चुअली ग्रहण किया। केंद्रीय मंत्रालय की ओर से यह अवार्ड केंद्रीय पेयजल, स्वच्छता तथा जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने वर्चुअल तौर पर दिया।
हरियाणा के डिप्टी सीएम ने अवार्ड के लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती के अवसर 'गंदगी मुक्त भारत' अभियान के तहत 8 अगस्त से 15 अगस्त 2020 तक प्रदेशभर की पंचायतों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया। हरियाणा इस दिशा में निरंतर कार्यरत रहा है। अब प्रदेश के 131 गांव 'ओडीएफ प्लस ' घोषित किये गए हैं जो अन्य किसी भी राज्य से सर्वाधिक हैं। उन्होंने बताया कि स्वच्छता के लिए ग्रामीण आंचल में सरकार ने स्वच्छता दस्ते भी बनाए हैं जो कि गांवों में सफाई प्रक्रिया में विशेष सहयोग दे रहे हैं।
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हरियाणा की ओर से यह अवार्ड उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने वर्चुअली ग्रहण किया। केंद्रीय मंत्रालय की ओर से यह अवार्ड केंद्रीय पेयजल, स्वच्छता तथा जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने वर्चुअल तौर पर दिया। चंडीगढ़। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की एक सौ इक्यावनवीं जयंती के अवसर पर आयोजित स्वच्छ भारत दिवस के अवसर पर केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता तथा जल शक्ति मंत्रालय की ओर से 'गन्दगी मुक्त भारत ' अभियान के तहत राज्यों में सर्वाधिक 'ओडीएफ प्लस विलेजिज' होने पर हरियाणा को पूरे देश मे प्रथम पुरस्कार मिला है। इसके अलावा 'स्वच्छ सुंदर सामुदायिक शौचालय' श्रेणी में तीसरा स्थान हासिल किया है। हरियाणा की ओर से यह अवार्ड उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने वर्चुअली ग्रहण किया। केंद्रीय मंत्रालय की ओर से यह अवार्ड केंद्रीय पेयजल, स्वच्छता तथा जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने वर्चुअल तौर पर दिया। हरियाणा के डिप्टी सीएम ने अवार्ड के लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती के अवसर 'गंदगी मुक्त भारत' अभियान के तहत आठ अगस्त से पंद्रह अगस्त दो हज़ार बीस तक प्रदेशभर की पंचायतों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया। हरियाणा इस दिशा में निरंतर कार्यरत रहा है। अब प्रदेश के एक सौ इकतीस गांव 'ओडीएफ प्लस ' घोषित किये गए हैं जो अन्य किसी भी राज्य से सर्वाधिक हैं। उन्होंने बताया कि स्वच्छता के लिए ग्रामीण आंचल में सरकार ने स्वच्छता दस्ते भी बनाए हैं जो कि गांवों में सफाई प्रक्रिया में विशेष सहयोग दे रहे हैं।
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वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में गुरुवार को विश्वामित्र भवन में विद्यार्थियों की लंबी कतारें दिखीं। भवन स्थित बैंक के बाहर के अलावा सीढ़ियों पर भी लाइन लगी थी। इस दौरान सोशल डिस्टेंस की धज्जियां भी उड़ीं। मालूम हो कि पीजी विभाग के विद्यार्थी परीक्षा फॉर्म भरने के लिए बैंक में चालान कटाने पहुंचे थे। विवि स्थित बैंक के बाहर सोशल डिस्टेंस का नोटिस लगाये जाने के बावजूद विद्यार्थी इससे बेपरवाह दिखे। दो गज दूरी का पालन नहीं किया गया। बैंक खुलने के बाद बैंक के गलियारे में विद्यार्थियों की भीड़ रही। मालूम हो कि वीर कुंवर सिंह विवि प्रशासन ने पीजी के परीक्षा सत्रों को नियमित करने के लिए पीजी सेमेस्टर थर्ड और टू के परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि घोषित कर दी है। पीजी सेमेस्टर थर्ड सत्र 2018-20 और पीजी सेमेस्टर टू सत्र 2019-20 का परीक्षा भराया जा रहा है। एडमिशन और परीक्षा फॉर्म भरने के लिए विवि पीजी विभाग के विद्यार्थी चलान कटाने के लिए बैंक पहुंच रहे है। हालांकि 18 अप्रैल पहले बिना विलंब शुल्क के तिथि निर्धारित थी। इसे देखते हुए बड़ी संख्या में विद्यार्थी पहुंचे थे। बाद में विवि प्रशासन ने तिथि बढ़ा दी, जिसके बाद विद्यार्थियों ने राहत की सांस ली।
आरा। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोरोना के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए पीजी के परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि बढ़ा दी है, ताकि विद्यार्थी आसानी से फॉर्म भर सकें। पीजी सेमेस्टर थर्ड, सत्र 2018-20 और सेमेस्टर सेकंड, सत्र 2019-21 के परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि 29 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। परीक्षा नियंत्रक प्रो अनवर इमाम ने बताया कि उक्त दोनों सत्रों के परीक्षा फॉर्म उक्त तिथि तक विद्यार्थी बिना विलंब शुल्क के भर सकते हैं। पहले यह तिथि 18 अप्रैल तक सुनिश्चित थी।
आरा। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग ने बीएड प्रथम वर्ष सत्र 2020-22 एवं बीएड द्वितीय वर्ष सत्र 2019-21 के परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि बढ़ा दी है। उक्त दोनों सत्रों के विभिन्न बीएड कॉलेजों के विद्यार्थी 26 अप्रैल तक बिना विलंब शुल्क के परीक्षा फॉर्म भर सकते हैं। यह जानकारी देते हुए परीक्षा नियंत्रक डॉ अनवर इमाम ने दी। बताया कि 27 अप्रैल तक यूनिवर्सिटी में फॉर्म स्वीकार किया जायेगा। बताया कि अंतिम वर्ष और प्रथम वर्ष के परीक्षा फॉर्म को ले कुछ निर्देश भी जारी किये गये है। बताया कि बीएड सत्र 2018-20 अंतिम वर्ष के भोजपुर जिला के परीक्षा केंद्र के अनुत्तीर्ण छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे, वे भी फॉर्म भरेंगे। इधर, प्रथम वर्ष का परीक्षा फॉर्म वैसे ही छात्रों का भरा जायेगा, जिन्होंने संयुक्त प्रवेश परीक्षा पास की है और मेरिट लिस्ट के आधार पर उनका दाखिला लिया गया है। सभी बीएड महाविद्यालय परीक्षा फॉर्म भरवाने से पहले विद्यार्थियों से शपथ पत्र अवश्य लेंगे।
आरा। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के एमबीए सत्र 2021-23 में नामांकन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। एमबीए में एडमिशन की इच्छा रखने वाले विद्यार्थी 17 अप्रैल से आवेदन कर सकते हैं। इसे ले तैयारी शुरू कर दी गई है। निदेशक प्रो संजय कुमार सिंह ने बताया कि विभाग से विद्यार्थी आवेदन फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं। बताया कि स्नातक में 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। साथ ही पार्ट थर्ड के अपियरिंग छात्र छात्राएं भी आवेदन कर सकते हैं। मालूम हो कि एमबीए में कुल 60 सीटें हैं। एडमिशन प्रवेश परीक्षा के आधार पर होगा। मालूम हो कि मैट, सी मैट और कैट में शामिल विद्यार्थियों का दाखिला ग्रुप डिस्कशन के मेरिट लिस्ट के आधार पर होगा, जबकि अन्य के लिए प्रवेश परीक्षा होगी।
आरा। तिलका मांझी यूनिवर्सिटी भागलपुर के पीजी हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ दिव्यानंद पर गत दिनों कुछ अराजक तत्वों की ओर से किये गये हमले की वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी शिक्षक संघ ने निंदा की है। वीर कुंवर सिंह विवि सेवा शिक्षक संघ ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जमकर भर्त्सना की है। कहा कि न्याय की लड़ाई में शिक्षक संघ साथ है।
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वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में गुरुवार को विश्वामित्र भवन में विद्यार्थियों की लंबी कतारें दिखीं। भवन स्थित बैंक के बाहर के अलावा सीढ़ियों पर भी लाइन लगी थी। इस दौरान सोशल डिस्टेंस की धज्जियां भी उड़ीं। मालूम हो कि पीजी विभाग के विद्यार्थी परीक्षा फॉर्म भरने के लिए बैंक में चालान कटाने पहुंचे थे। विवि स्थित बैंक के बाहर सोशल डिस्टेंस का नोटिस लगाये जाने के बावजूद विद्यार्थी इससे बेपरवाह दिखे। दो गज दूरी का पालन नहीं किया गया। बैंक खुलने के बाद बैंक के गलियारे में विद्यार्थियों की भीड़ रही। मालूम हो कि वीर कुंवर सिंह विवि प्रशासन ने पीजी के परीक्षा सत्रों को नियमित करने के लिए पीजी सेमेस्टर थर्ड और टू के परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि घोषित कर दी है। पीजी सेमेस्टर थर्ड सत्र दो हज़ार अट्ठारह-बीस और पीजी सेमेस्टर टू सत्र दो हज़ार उन्नीस-बीस का परीक्षा भराया जा रहा है। एडमिशन और परीक्षा फॉर्म भरने के लिए विवि पीजी विभाग के विद्यार्थी चलान कटाने के लिए बैंक पहुंच रहे है। हालांकि अट्ठारह अप्रैल पहले बिना विलंब शुल्क के तिथि निर्धारित थी। इसे देखते हुए बड़ी संख्या में विद्यार्थी पहुंचे थे। बाद में विवि प्रशासन ने तिथि बढ़ा दी, जिसके बाद विद्यार्थियों ने राहत की सांस ली। आरा। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोरोना के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए पीजी के परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि बढ़ा दी है, ताकि विद्यार्थी आसानी से फॉर्म भर सकें। पीजी सेमेस्टर थर्ड, सत्र दो हज़ार अट्ठारह-बीस और सेमेस्टर सेकंड, सत्र दो हज़ार उन्नीस-इक्कीस के परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि उनतीस अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। परीक्षा नियंत्रक प्रो अनवर इमाम ने बताया कि उक्त दोनों सत्रों के परीक्षा फॉर्म उक्त तिथि तक विद्यार्थी बिना विलंब शुल्क के भर सकते हैं। पहले यह तिथि अट्ठारह अप्रैल तक सुनिश्चित थी। आरा। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग ने बीएड प्रथम वर्ष सत्र दो हज़ार बीस-बाईस एवं बीएड द्वितीय वर्ष सत्र दो हज़ार उन्नीस-इक्कीस के परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि बढ़ा दी है। उक्त दोनों सत्रों के विभिन्न बीएड कॉलेजों के विद्यार्थी छब्बीस अप्रैल तक बिना विलंब शुल्क के परीक्षा फॉर्म भर सकते हैं। यह जानकारी देते हुए परीक्षा नियंत्रक डॉ अनवर इमाम ने दी। बताया कि सत्ताईस अप्रैल तक यूनिवर्सिटी में फॉर्म स्वीकार किया जायेगा। बताया कि अंतिम वर्ष और प्रथम वर्ष के परीक्षा फॉर्म को ले कुछ निर्देश भी जारी किये गये है। बताया कि बीएड सत्र दो हज़ार अट्ठारह-बीस अंतिम वर्ष के भोजपुर जिला के परीक्षा केंद्र के अनुत्तीर्ण छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे, वे भी फॉर्म भरेंगे। इधर, प्रथम वर्ष का परीक्षा फॉर्म वैसे ही छात्रों का भरा जायेगा, जिन्होंने संयुक्त प्रवेश परीक्षा पास की है और मेरिट लिस्ट के आधार पर उनका दाखिला लिया गया है। सभी बीएड महाविद्यालय परीक्षा फॉर्म भरवाने से पहले विद्यार्थियों से शपथ पत्र अवश्य लेंगे। आरा। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के एमबीए सत्र दो हज़ार इक्कीस-तेईस में नामांकन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। एमबीए में एडमिशन की इच्छा रखने वाले विद्यार्थी सत्रह अप्रैल से आवेदन कर सकते हैं। इसे ले तैयारी शुरू कर दी गई है। निदेशक प्रो संजय कुमार सिंह ने बताया कि विभाग से विद्यार्थी आवेदन फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं। बताया कि स्नातक में पचास प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। साथ ही पार्ट थर्ड के अपियरिंग छात्र छात्राएं भी आवेदन कर सकते हैं। मालूम हो कि एमबीए में कुल साठ सीटें हैं। एडमिशन प्रवेश परीक्षा के आधार पर होगा। मालूम हो कि मैट, सी मैट और कैट में शामिल विद्यार्थियों का दाखिला ग्रुप डिस्कशन के मेरिट लिस्ट के आधार पर होगा, जबकि अन्य के लिए प्रवेश परीक्षा होगी। आरा। तिलका मांझी यूनिवर्सिटी भागलपुर के पीजी हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ दिव्यानंद पर गत दिनों कुछ अराजक तत्वों की ओर से किये गये हमले की वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी शिक्षक संघ ने निंदा की है। वीर कुंवर सिंह विवि सेवा शिक्षक संघ ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जमकर भर्त्सना की है। कहा कि न्याय की लड़ाई में शिक्षक संघ साथ है।
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क्षेत्र की पंचायत रायपुर में शुक्रवार को एंबुलेंस रोड मुख्य सडक़ बलोह का मुख्य सचेतक एवं भटियात विधायक बिक्रम सिंह जरियाल ने लोकार्पण किया। समारोह में विधायक का पंचायतवासियों ने जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर जनसभा को संबोधित करते हुए बिक्रम सिंह जरयाल ने कहा कि एंबुलेंस मार्ग मुख्य सडक़ बलोह से हजारों की आबादी को सीधा फायदा पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि उक्त मार्ग को और आगे ले जाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रायपुर से लड़ोई और चलाड़ी से कुठेड़ मार्ग का कार्य भी शीघ्र शुरू करने के निर्देश पीडब्ल्यूडी को जारी किए गए हैं। जरयाल ने रायपुर क्षेत्र में विद्युत समस्या के हल को लेकर 33केवी स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि रायपुर में बारह लाख की लागत से खेल मैदान का कार्य शीघ्र शुरू होने जा रहा है। इस दौरान रायपुर में उन्होंने सीएससी का भी लोकार्पण किया। इस मौके पर खंड विकास अधिकारी सुभाष अत्री, एसडीओ जल शक्ति विभाग पवन कौंडल, जिला भाजपा उपाध्यक्ष नंदकिशोर, रतन चंद, रमेश शर्मा, रायपुर पंचायत प्रधान सुरेश कुमार, सारण पंचायत प्रधान तिलक सिंह नरयाल, भाजपा किसान मोर्चा मीडिया प्रभारी विकास चौहान सहित गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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क्षेत्र की पंचायत रायपुर में शुक्रवार को एंबुलेंस रोड मुख्य सडक़ बलोह का मुख्य सचेतक एवं भटियात विधायक बिक्रम सिंह जरियाल ने लोकार्पण किया। समारोह में विधायक का पंचायतवासियों ने जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर जनसभा को संबोधित करते हुए बिक्रम सिंह जरयाल ने कहा कि एंबुलेंस मार्ग मुख्य सडक़ बलोह से हजारों की आबादी को सीधा फायदा पहुंचा है। उन्होंने कहा कि उक्त मार्ग को और आगे ले जाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रायपुर से लड़ोई और चलाड़ी से कुठेड़ मार्ग का कार्य भी शीघ्र शुरू करने के निर्देश पीडब्ल्यूडी को जारी किए गए हैं। जरयाल ने रायपुर क्षेत्र में विद्युत समस्या के हल को लेकर तैंतीसकेवी स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि रायपुर में बारह लाख की लागत से खेल मैदान का कार्य शीघ्र शुरू होने जा रहा है। इस दौरान रायपुर में उन्होंने सीएससी का भी लोकार्पण किया। इस मौके पर खंड विकास अधिकारी सुभाष अत्री, एसडीओ जल शक्ति विभाग पवन कौंडल, जिला भाजपा उपाध्यक्ष नंदकिशोर, रतन चंद, रमेश शर्मा, रायपुर पंचायत प्रधान सुरेश कुमार, सारण पंचायत प्रधान तिलक सिंह नरयाल, भाजपा किसान मोर्चा मीडिया प्रभारी विकास चौहान सहित गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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जिला कुल्लू में फिर से बदले मौसम के तेवरों को देख जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। मंगलवार को लाहौल घाटी समेत रोहतांग दर्रा, जलोड़ी दर्रा, कुंजुम दर्रा और बारालाचा में सुबह से ही रुक-रूक कर बर्फबारी का दौर जारी रहा। निचले इलाकों में हुई बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन नजर रखे हुए हैं। खतरे वाली संभावित जगहों पर लोगों को ना जाने की हिदायत दी गई है। मंगलवार को एचआरटीसी कुल्लू ने जिला के भल्याणी, डुघीलग, रतोचा, बिजली महादेव, कुठेड़, तेलंग, बस्तोरी, बालू, पाहानाला, कमांद, ग्लवाहधार सहित 20 संवेदनशील रूटों पर बसों को गंतव्य तक नहीं भेजा है।
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जिला कुल्लू में फिर से बदले मौसम के तेवरों को देख जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। मंगलवार को लाहौल घाटी समेत रोहतांग दर्रा, जलोड़ी दर्रा, कुंजुम दर्रा और बारालाचा में सुबह से ही रुक-रूक कर बर्फबारी का दौर जारी रहा। निचले इलाकों में हुई बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन नजर रखे हुए हैं। खतरे वाली संभावित जगहों पर लोगों को ना जाने की हिदायत दी गई है। मंगलवार को एचआरटीसी कुल्लू ने जिला के भल्याणी, डुघीलग, रतोचा, बिजली महादेव, कुठेड़, तेलंग, बस्तोरी, बालू, पाहानाला, कमांद, ग्लवाहधार सहित बीस संवेदनशील रूटों पर बसों को गंतव्य तक नहीं भेजा है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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विदेश में रहने वाले भगोड़े लोगों को वापस लाने के लिए सीबीआई द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन त्रिशूल' के तहत गिल को फिजी से प्रत्यर्पित करके सोमवार देर रात देश लाया गया। सीबीआई का दावा है कि पिछले साल इस ऑपरेशन को शुरू किए जाने के बाद से लगभग 30 भगोड़ों को सफलतापूर्वक भारत लाया गया था।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पर्ल ग्रुप के निदेशक हरचंद सिंह गिल को गिरफ्तार कर लिया है। गिल को पर्ल्स ग्रुप द्वारा कथित रूप से किए गए कई करोड़ रुपए के पोंजी घोटाले की जांच के तहत फिजी से भारत प्रत्यर्पित किया गया है।
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि विदेश में रहने वाले भगोड़े लोगों को वापस लाने के लिए सीबीआई द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन त्रिशूल' के तहत गिल को फिजी से प्रत्यर्पित करके सोमवार देर रात देश लाया गया। सीबीआई का दावा है कि पिछले साल इस ऑपरेशन को शुरू किए जाने के बाद से लगभग 30 भगोड़ों को सफलतापूर्वक भारत लाया गया था।
इस ऑपरेशन का उद्देश्य इंटरपोल की मदद से अपराधियों और भगोड़ों का पता लगाना और उन्हें वापस लाना है। एजेंसी ने 19 फरवरी, 2014 में करोड़ों निवेशकों को निवेश के बदले जमीन देकर ठगने के आरोप में पर्ल्स ग्रुप और उसके संस्थापक निर्मल सिंह भंगू के खिलाफ जांच शुरू की थी। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि देश भर में निवेशकों को धोखा देकर कंपनी ने 60,000 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि की ठगी की।
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विदेश में रहने वाले भगोड़े लोगों को वापस लाने के लिए सीबीआई द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन त्रिशूल' के तहत गिल को फिजी से प्रत्यर्पित करके सोमवार देर रात देश लाया गया। सीबीआई का दावा है कि पिछले साल इस ऑपरेशन को शुरू किए जाने के बाद से लगभग तीस भगोड़ों को सफलतापूर्वक भारत लाया गया था। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने पर्ल ग्रुप के निदेशक हरचंद सिंह गिल को गिरफ्तार कर लिया है। गिल को पर्ल्स ग्रुप द्वारा कथित रूप से किए गए कई करोड़ रुपए के पोंजी घोटाले की जांच के तहत फिजी से भारत प्रत्यर्पित किया गया है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि विदेश में रहने वाले भगोड़े लोगों को वापस लाने के लिए सीबीआई द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन त्रिशूल' के तहत गिल को फिजी से प्रत्यर्पित करके सोमवार देर रात देश लाया गया। सीबीआई का दावा है कि पिछले साल इस ऑपरेशन को शुरू किए जाने के बाद से लगभग तीस भगोड़ों को सफलतापूर्वक भारत लाया गया था। इस ऑपरेशन का उद्देश्य इंटरपोल की मदद से अपराधियों और भगोड़ों का पता लगाना और उन्हें वापस लाना है। एजेंसी ने उन्नीस फरवरी, दो हज़ार चौदह में करोड़ों निवेशकों को निवेश के बदले जमीन देकर ठगने के आरोप में पर्ल्स ग्रुप और उसके संस्थापक निर्मल सिंह भंगू के खिलाफ जांच शुरू की थी। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि देश भर में निवेशकों को धोखा देकर कंपनी ने साठ,शून्य करोड़ रुपये से अधिक धनराशि की ठगी की।
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हत्याकांड के एक आरोपी की बदमाशों ने ईंट से कुचलकर हत्या कर दी। मामला जमीन विवाद का बताया जा रहा है। हत्याकांड का आरोपी कई दिनों फरार चल रहा था। आरोपी का शव अक्सा मस्जिद के निकट बरामद किया गया।
सिवान,जागरण संवाददाताः सराय ओपी के एमएम कालोनी स्थित अक्सा मस्जिद के समीप सोमवार की सुबह पुलिस ने स्थानीय लोगों की सूचना पर एक शव बरामद किया। मृतक रुस्तम अली बताया जा रहा है। रुस्तम की बदमाशों ने ईंट से कुचलचकर निर्मम हत्या की है। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मृत रुस्तम की पत्नी गुड़िया खातून के बयान के आधार पर दस लोगों पर प्राथमिक करते हुए दो को गिरफ्तार कर लिया है।
बता दें कि 30 नवंबर की रात इसी मोहल्ले के शौकत अली की गोली मारकर हत्या की गई थी और रुस्तम इस हत्याकांड में नामजद आराेपित था। लोगों कि मानें तो 30 नवंबर की रात इस्माइल शहीद तकिय में एक शादी समारोह में किसी बात को लेकर कुछ विवाद हुआ था और उसी दौरान शौकत अली की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।
हत्या के मामले में मृतक शौकत अली के बेटे सैफ अली ने चार लोग रुस्तम अली, मो. रईस, मोजाहिद अली और आदिल फहमी को नामजद कर प्राथमिकी कराई थी। पुलिस ने उसी दिन आदिल को गिरफ्तार कर लिया था जबकि तीन आरोपित उस समय से फरार चल रहे थे। प्राथमिकी में नामजद होने के बाद रुस्तम गायब चल रहा था। पुलिस तीनों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही थी, लेकिन कहीं भी आरोपियों का पता नहीं चल रहा था। इसी बीच सोमवार की सुबह एमएम कालोनी स्थित अक्सा मस्जिद के समीप रुस्तम का शव बरामद किया गया।
मृतक रुस्तम अली की पत्नी ने बताया कि शादी समारोह में हुई गोलीबारी में शौकत अली की मौत उसी के पुत्र के द्वारा गोली चलाने से हुई थी। हम लोगों से भूमि विवाद के कारण मेरे पति का नाम दे दिया गया और उस दिन से रुस्तम अली गायब था। थाने को सूचना दी गयी तो थाना द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी बीच रुस्तम अली की हत्या कर उसके शव को अक्सा मस्जिद के पास फेंक दिया गया। कहते हैं ओपी प्रभारी रुस्तम अली की ईंट से कूंचकर हत्या हुई है। रुस्तम की पत्नी ने दस लोगों पर नामजद प्राथमिकी कराई है। नामजद में शौकत अली के दोनों पुत्र का नाम है। दोनों पुत्र सैफ अली एवं साबिद को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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हत्याकांड के एक आरोपी की बदमाशों ने ईंट से कुचलकर हत्या कर दी। मामला जमीन विवाद का बताया जा रहा है। हत्याकांड का आरोपी कई दिनों फरार चल रहा था। आरोपी का शव अक्सा मस्जिद के निकट बरामद किया गया। सिवान,जागरण संवाददाताः सराय ओपी के एमएम कालोनी स्थित अक्सा मस्जिद के समीप सोमवार की सुबह पुलिस ने स्थानीय लोगों की सूचना पर एक शव बरामद किया। मृतक रुस्तम अली बताया जा रहा है। रुस्तम की बदमाशों ने ईंट से कुचलचकर निर्मम हत्या की है। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मृत रुस्तम की पत्नी गुड़िया खातून के बयान के आधार पर दस लोगों पर प्राथमिक करते हुए दो को गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि तीस नवंबर की रात इसी मोहल्ले के शौकत अली की गोली मारकर हत्या की गई थी और रुस्तम इस हत्याकांड में नामजद आराेपित था। लोगों कि मानें तो तीस नवंबर की रात इस्माइल शहीद तकिय में एक शादी समारोह में किसी बात को लेकर कुछ विवाद हुआ था और उसी दौरान शौकत अली की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। हत्या के मामले में मृतक शौकत अली के बेटे सैफ अली ने चार लोग रुस्तम अली, मो. रईस, मोजाहिद अली और आदिल फहमी को नामजद कर प्राथमिकी कराई थी। पुलिस ने उसी दिन आदिल को गिरफ्तार कर लिया था जबकि तीन आरोपित उस समय से फरार चल रहे थे। प्राथमिकी में नामजद होने के बाद रुस्तम गायब चल रहा था। पुलिस तीनों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही थी, लेकिन कहीं भी आरोपियों का पता नहीं चल रहा था। इसी बीच सोमवार की सुबह एमएम कालोनी स्थित अक्सा मस्जिद के समीप रुस्तम का शव बरामद किया गया। मृतक रुस्तम अली की पत्नी ने बताया कि शादी समारोह में हुई गोलीबारी में शौकत अली की मौत उसी के पुत्र के द्वारा गोली चलाने से हुई थी। हम लोगों से भूमि विवाद के कारण मेरे पति का नाम दे दिया गया और उस दिन से रुस्तम अली गायब था। थाने को सूचना दी गयी तो थाना द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी बीच रुस्तम अली की हत्या कर उसके शव को अक्सा मस्जिद के पास फेंक दिया गया। कहते हैं ओपी प्रभारी रुस्तम अली की ईंट से कूंचकर हत्या हुई है। रुस्तम की पत्नी ने दस लोगों पर नामजद प्राथमिकी कराई है। नामजद में शौकत अली के दोनों पुत्र का नाम है। दोनों पुत्र सैफ अली एवं साबिद को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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ई-कॉमर्स कंपनियां आज उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के साथ बैठक के बाद मौखिक रूप से इस बात पर सहमत हो गई हैं कि आगे से वे अपने प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध होने वाले उत्पादों के मूल देश के नाम का उल्लेख करेंगी। इस काम को वे विक्रेताओं के साथ मिलकर सुनिश्चित करेंगी।
कंपनियों से दो हफ्तों में अगली बैठक के लिए आने को कहा गया है जिसमें उन्हें सुझाव देना है और इस फीचर को लागू करने में उन्हें पेश आ रही चुनौतियों के बारे में जानकारी देनी है।
इस मामले के जानकारों के मुताबिक इस वर्चुअल बैठक में एमेजॉन, फ्लिपकार्ट, पेटीएम मॉल, शॉपक्लूज और जियो मार्ट सहित 15 कंपनियां शामिल हुई और दोनों पक्षों के बीच एक मौखिक सहमति बनी।
यह बैठक वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत परिचालित गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) प्लेटफॉर्म की ओर से सूचीबद्ध विक्रेताओं के लिए पोर्टल पर नए उत्पादों को पंजीकृत करने के दौरान उस उत्पाद के मूल देश का नाम उल्लिखित करना अनिवार्य किए जाने के एक दिन बाद बुलाई गई थी।
भारत और चीन के बीच सीमा पर तकरार के कारण देश में चीनी उत्पादों का बहिष्कार का अभियान जोर पकड़ रहा है। जीईएम की ओर से अपने पोर्टल पर विक्रेताओं को उत्पाद के मूल देश के नाम का उल्लेख करने की अनिवार्यता को कुछ लोग इस दिशा में उदाहरण के साथ आगे बढऩे के रूप में देख रहे हैं ताकि बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों को भी ऐसा करने पर मजबूर किया जा सके।
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ई-कॉमर्स कंपनियां आज उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के साथ बैठक के बाद मौखिक रूप से इस बात पर सहमत हो गई हैं कि आगे से वे अपने प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध होने वाले उत्पादों के मूल देश के नाम का उल्लेख करेंगी। इस काम को वे विक्रेताओं के साथ मिलकर सुनिश्चित करेंगी। कंपनियों से दो हफ्तों में अगली बैठक के लिए आने को कहा गया है जिसमें उन्हें सुझाव देना है और इस फीचर को लागू करने में उन्हें पेश आ रही चुनौतियों के बारे में जानकारी देनी है। इस मामले के जानकारों के मुताबिक इस वर्चुअल बैठक में एमेजॉन, फ्लिपकार्ट, पेटीएम मॉल, शॉपक्लूज और जियो मार्ट सहित पंद्रह कंपनियां शामिल हुई और दोनों पक्षों के बीच एक मौखिक सहमति बनी। यह बैठक वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत परिचालित गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म की ओर से सूचीबद्ध विक्रेताओं के लिए पोर्टल पर नए उत्पादों को पंजीकृत करने के दौरान उस उत्पाद के मूल देश का नाम उल्लिखित करना अनिवार्य किए जाने के एक दिन बाद बुलाई गई थी। भारत और चीन के बीच सीमा पर तकरार के कारण देश में चीनी उत्पादों का बहिष्कार का अभियान जोर पकड़ रहा है। जीईएम की ओर से अपने पोर्टल पर विक्रेताओं को उत्पाद के मूल देश के नाम का उल्लेख करने की अनिवार्यता को कुछ लोग इस दिशा में उदाहरण के साथ आगे बढऩे के रूप में देख रहे हैं ताकि बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों को भी ऐसा करने पर मजबूर किया जा सके।
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मुंबई : मशहूर (Famous) सिंगर (Singer) लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की तबियत (Health) में काफी सुधार (Improved) हो गया है। अब वह पहले से काफी ठीक है। उनका इलाज (Treated) आईसीयू (ICU) में चल रहा है। जब तक वह पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाती तब तक उन्हें आईसीयू में रखा जाएगा। उनका इलाज डॉक्टर प्रतीत समदानी (Pratima Samdani) के साथ-साथ अन्य डॉक्टरों की निगरानी में हो रहा है।
92 वर्षीय लता मंगेशकर 8 जनवरी को निमोनिया की शिकार और कोरोना संक्रमित हुई थी। जिसके बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में एडमिट कराया गया था। हालांकि, उनके स्वास्थ्य को लेकर झूठी अफवाहें भी फैलाई जा रही है। जिसपर रोक लगाते हुए प्रवक्ता अनुषा श्रीनिवासन अय्यर ने यह जानकारी दी की लता मंगेशकर की तबियत में काफी सुधार हुआ है और उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा की उनके स्वास्थ्य को लेकर फैलाई जा रही झूठे अफवाहों पर ध्यान न दें और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करें। इसके साथ ही उनके परिवार के सदस्यों ने भी कुछ दिनों पहले लोगों से अपील करते हुए कहा था की लता मंगेशकर के अपडेट दिए जाएंगे आप सभी परिवार के प्राइवेसी का ध्यान रखें।
लता मंगेशकर अब तक कई गानों को अपना सुर दे चुकी है। वह 20 से अधिक भाषाओं में 30 हजार से अधिक गाना गा चुकी है। उनके इस हुनर के लिए अब तक उन्हें कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। जिसमें 'राष्ट्रीय पुरस्कार', 'पद्म भूषण' इसके साथ-साथ गायिका को 'भारत रत्न' से भी सम्मानित किया गया है।
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मुंबई : मशहूर सिंगर लता मंगेशकर की तबियत में काफी सुधार हो गया है। अब वह पहले से काफी ठीक है। उनका इलाज आईसीयू में चल रहा है। जब तक वह पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाती तब तक उन्हें आईसीयू में रखा जाएगा। उनका इलाज डॉक्टर प्रतीत समदानी के साथ-साथ अन्य डॉक्टरों की निगरानी में हो रहा है। बानवे वर्षीय लता मंगेशकर आठ जनवरी को निमोनिया की शिकार और कोरोना संक्रमित हुई थी। जिसके बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में एडमिट कराया गया था। हालांकि, उनके स्वास्थ्य को लेकर झूठी अफवाहें भी फैलाई जा रही है। जिसपर रोक लगाते हुए प्रवक्ता अनुषा श्रीनिवासन अय्यर ने यह जानकारी दी की लता मंगेशकर की तबियत में काफी सुधार हुआ है और उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा की उनके स्वास्थ्य को लेकर फैलाई जा रही झूठे अफवाहों पर ध्यान न दें और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करें। इसके साथ ही उनके परिवार के सदस्यों ने भी कुछ दिनों पहले लोगों से अपील करते हुए कहा था की लता मंगेशकर के अपडेट दिए जाएंगे आप सभी परिवार के प्राइवेसी का ध्यान रखें। लता मंगेशकर अब तक कई गानों को अपना सुर दे चुकी है। वह बीस से अधिक भाषाओं में तीस हजार से अधिक गाना गा चुकी है। उनके इस हुनर के लिए अब तक उन्हें कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। जिसमें 'राष्ट्रीय पुरस्कार', 'पद्म भूषण' इसके साथ-साथ गायिका को 'भारत रत्न' से भी सम्मानित किया गया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट का आज विस्तार किया गया है जिसमें कई नए चेहरे हैं। इन्हीं चेहरों में से एक हैं बंगाल के राजबंशी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले नीतीश प्रमाणिक। पश्चिम बंगाल की कूच बिहार सीट से सांसद नीतीश प्रमाणिक के बारे में आपको बता दें कि उनकी एक पहचान यह भी रही है कि वो कभी शिक्षक रहे हैं। जी हां, नीतीश प्रमाणिक प्राइमरी स्कूल में बतौर असिस्टेंट टीचर छात्रों को ज्ञान भी बांट चुके हैं। 35 साल के नीतीश प्रमाणिक के पास बीसीए की डिग्री है।
नीतीश प्रमाणिक ने अपने सियासी सफर की शुरुआत तृणमलू कांग्रेस से की थी। टीएमसी में उनकी पहचान एक युवा नेता के तौर पर रही। 17, जनवरी 1986 को जन्मे नीतीश प्रमाणिक की छवि एक शिक्षित युवा नेता के तौर पर रही। हालांकि, उनपर कई आपराधिक मुकदमे भी दर्ज हैं। टीएमसी के साथ राजनीतिक सफर पर निकले प्रमाणिक ने साल 2018 में इस पार्टी से अपनी राहें जुदा कर ली।
यहां तक की पंचायत चुनाव में प्रमाणिक ने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ करीब 300 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में उतार दिया था। दिलचस्प बात यह भी है कि इनमें से कई उम्मीदवार चुनाव भी जीते थे। दिनहाता विधानसभा सीट से चुनाव जीत कर नीतीश प्रमाणिक विधायक भी बने। इधर पश्चिम बंगाल में पांव पसारने की कोशिश में जुटी बीजेपी की नजर जब इस तेज-तर्रार युवा चेहरे पर पड़ी तो पार्टी को उनमें काफी संभावनाएं नजर आईं। बिना समय गंवा बीजेपी ने साल 2019 के लोकसभा चुनाव में नीतीश प्रमाणिक को टिकट थमा दिया।
बीजेपी से टिकट हासिल करने के बाद नीतीश प्रमाणिक ने खुद को साबित भी किया। नीतीश प्रमाणिक को कूचबिहार जैसी अहम सीट की जिम्मेदारी दी गई थी। यह सीट किसी समय टीएमसी का गढ़ माना जाता था। लेकिन नीतीश प्रमाणिक ने अपनी काबिलियत के दम पर साल 2019 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के दमदार उम्मीदवार परेश चंद्र अधिकारी को पटखनी दे दी। इसके बाद नीतीश प्रमाणिक का लोहा पार्टी ने भी माना। अब मोदी कैबिनेट में नीतीश प्रमाणिक की एंट्री से पता चलता है कि बंगाल में बीजेपी अब भी सक्रिय रहना चाहती है। खास बात यह भी है कि कूचबिहार से पहली बार किसी सांसद को केंद्र में मंत्री बनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट का आज विस्तार किया गया है जिसमें कई नए चेहरे हैं। इन्हीं चेहरों में से एक हैं बंगाल के राजबंशी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले नीतीश प्रमाणिक। पश्चिम बंगाल की कूच बिहार सीट से सांसद नीतीश प्रमाणिक के बारे में आपको बता दें कि उनकी एक पहचान यह भी रही है कि वो कभी शिक्षक रहे हैं। जी हां, नीतीश प्रमाणिक प्राइमरी स्कूल में बतौर असिस्टेंट टीचर छात्रों को ज्ञान भी बांट चुके हैं। 35 साल के नीतीश प्रमाणिक के पास बीसीए की डिग्री है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट का आज विस्तार किया गया है जिसमें कई नए चेहरे हैं। इन्हीं चेहरों में से एक हैं बंगाल के राजबंशी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले नीतीश प्रमाणिक। पश्चिम बंगाल की कूच बिहार सीट से सांसद नीतीश प्रमाणिक के बारे में आपको बता दें कि उनकी एक पहचान यह भी रही है कि वो कभी शिक्षक रहे हैं। जी हां, नीतीश प्रमाणिक प्राइमरी स्कूल में बतौर असिस्टेंट टीचर छात्रों को ज्ञान भी बांट चुके हैं। पैंतीस साल के नीतीश प्रमाणिक के पास बीसीए की डिग्री है। नीतीश प्रमाणिक ने अपने सियासी सफर की शुरुआत तृणमलू कांग्रेस से की थी। टीएमसी में उनकी पहचान एक युवा नेता के तौर पर रही। सत्रह, जनवरी एक हज़ार नौ सौ छियासी को जन्मे नीतीश प्रमाणिक की छवि एक शिक्षित युवा नेता के तौर पर रही। हालांकि, उनपर कई आपराधिक मुकदमे भी दर्ज हैं। टीएमसी के साथ राजनीतिक सफर पर निकले प्रमाणिक ने साल दो हज़ार अट्ठारह में इस पार्टी से अपनी राहें जुदा कर ली। यहां तक की पंचायत चुनाव में प्रमाणिक ने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ करीब तीन सौ से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में उतार दिया था। दिलचस्प बात यह भी है कि इनमें से कई उम्मीदवार चुनाव भी जीते थे। दिनहाता विधानसभा सीट से चुनाव जीत कर नीतीश प्रमाणिक विधायक भी बने। इधर पश्चिम बंगाल में पांव पसारने की कोशिश में जुटी बीजेपी की नजर जब इस तेज-तर्रार युवा चेहरे पर पड़ी तो पार्टी को उनमें काफी संभावनाएं नजर आईं। बिना समय गंवा बीजेपी ने साल दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में नीतीश प्रमाणिक को टिकट थमा दिया। बीजेपी से टिकट हासिल करने के बाद नीतीश प्रमाणिक ने खुद को साबित भी किया। नीतीश प्रमाणिक को कूचबिहार जैसी अहम सीट की जिम्मेदारी दी गई थी। यह सीट किसी समय टीएमसी का गढ़ माना जाता था। लेकिन नीतीश प्रमाणिक ने अपनी काबिलियत के दम पर साल दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के दमदार उम्मीदवार परेश चंद्र अधिकारी को पटखनी दे दी। इसके बाद नीतीश प्रमाणिक का लोहा पार्टी ने भी माना। अब मोदी कैबिनेट में नीतीश प्रमाणिक की एंट्री से पता चलता है कि बंगाल में बीजेपी अब भी सक्रिय रहना चाहती है। खास बात यह भी है कि कूचबिहार से पहली बार किसी सांसद को केंद्र में मंत्री बनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट का आज विस्तार किया गया है जिसमें कई नए चेहरे हैं। इन्हीं चेहरों में से एक हैं बंगाल के राजबंशी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले नीतीश प्रमाणिक। पश्चिम बंगाल की कूच बिहार सीट से सांसद नीतीश प्रमाणिक के बारे में आपको बता दें कि उनकी एक पहचान यह भी रही है कि वो कभी शिक्षक रहे हैं। जी हां, नीतीश प्रमाणिक प्राइमरी स्कूल में बतौर असिस्टेंट टीचर छात्रों को ज्ञान भी बांट चुके हैं। पैंतीस साल के नीतीश प्रमाणिक के पास बीसीए की डिग्री है।
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शरीरादि में ( तौ ) ब्रह्मज्ञान के अवश्यम्भावी होने से ऐसा नहीं है। सकता, परन्तु अपवर्ग में तौ उस ( शरीर ) का अभाव हो जाता है । इन दोनों सूत्रों का तात्पर्य यह है कि शरीरादि होते हुवे तो कोई अपने को सर्वथा बाह्य ज्ञान की उपलब्धि से नहीं बचा सकता । परन्तु मोक्ष में तो इस स्थूल शरीर का जो चेष्टा और इन्द्रियार्थों का प्राय है, प्रभाव हो जाता है अतएव मोक्ष में इन का प्रसङ्ग नहीं हो सकता क्यों कि जब आधार ही नहीं तो आधेय कहां रह सकता है ? श्रग मोक्ष प्राप्ति के साधन दिखलाते हैंःतद थंयमांनथमाभ्यामात्मसंस्कारोयेगा श्च्चाध्यात्मविध्युपायैः
उ०-उस (मोक्ष) के लिये यम और नियमोसे तथा अध्यात्म विधि के उपायों द्वारा योग से आत्मा संस्कार करना चाहिये ।। योग के आठ अङ्ग हैं, जिन का निरूपण योग शास्त्र के साधन पाद में किया गया है उन में से अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह; ये पांच यम- पहिला हैं और 'शौच' संतोष,
तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्रणिधान; ये पांच नियम दूसरा चङ्ग कहलाते हैं । मुमुक्षु को प्रथम इन के सेवन से आत्मा का संस्कार करना चाहिये थात योगके प्रतिबन्धक मल. विक्षेप और भावरणको दूर करना चाहिये । तत्पश्चात योग अर्थात धारणा, ध्यान और समाधि से अध्यात्मतत्व को प्राप्त होना चाहिये ।
प्र० - मुमुक्षु को फिर क्या करना चाहिये ? ज्ञानग्रहणाभ्यासस्तद्विद्यैश्च सह संवादः ॥ ४७ ॥
९०-ज्ञान के महण का अभ्यास और उसके जानने वालों के सोथ संवाद ।। उक्त साधनों के अतिरिक्त मोक्ष की प्राप्ति के लिये मुमुक्षु को इभ्ययन, श्रषण और मनन के द्वारा तत्वज्ञान का
निरन्तर अभ्यास और बुद्धि के परिपाक के लिये तत्वज्ञानियों के साथ संवाद भी करना चाहिये क्योंकि बिना अभ्यास ज्ञान की वृद्धि और विना सम्वाद के बुद्धि की परिपक्वता और संदेहों को निवृत्ति नहीं हो सकती ॥ आगे सम्वाद का प्रकार दिखलाते हैंःतं शिष्यगुरुसब्रह्मचारिविशिष्ट श्रेयो - डर्थिभिरन सूयिभिरभ्युपेयात् ।। ४८ ।।
उस (आत्म ) को विशिष्ट ज्ञानी, श्रेये।ऽर्थी और निन्दारहित शिष्य, गुरु और सहाध्यायी के द्वारा प्राप्त करे ॥ विना आत्म तत्ववित् आचार्य की दीक्षा के कोई आत्मज्ञान का लाभ नहीं कर सकता व अनिन्दित गुरु. शिष्य और सहाध्यायियों के साथ ऐसे आचार्य की सेवा में विनीतभाव से जाना चाहिये । उपनिषद् भी कहती है -सगुरु मेवाभिगच्छेत श्रोत्रियं ब्रह्मनिष्ठम् । इत्यादि ।।
यदि कहा कि आत्मा को एकरस होने से ध्यान और बिना ध्यान में कोई अन्तर तो है ही नहीं फिर ध्यान का क्या फल है ? तौ उत्तर - #उभयथाऽप्यविशेषश्चेन वपरागनिरोधाद्विशेषः । २६४८३ "दोनों प्रकार ही ( ध्यान और बिना ध्यान में ) विशेष नहीं" यह पक्ष ठीक नहीं, क्यों कि उपराग के रुक जाने से विशेष है । ध्यान समय में उपराग नहीं रहता और बिना ध्यान के आत्मा वा पुरुष पर उपराग (बाह्य पदार्थों की छाया ) रहती है, इसलिये अध्यान से ध्यान में विशेषता है ।। २३ ।
यदि कहो कि निःसङ्गपुरुष में उपराग कहां से आया ! तो
उत्तरनिस्सङ्गोऽप्युपरागोऽविवेकात् ।। २७ ।। (४८३ )
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शरीरादि में ब्रह्मज्ञान के अवश्यम्भावी होने से ऐसा नहीं है। सकता, परन्तु अपवर्ग में तौ उस का अभाव हो जाता है । इन दोनों सूत्रों का तात्पर्य यह है कि शरीरादि होते हुवे तो कोई अपने को सर्वथा बाह्य ज्ञान की उपलब्धि से नहीं बचा सकता । परन्तु मोक्ष में तो इस स्थूल शरीर का जो चेष्टा और इन्द्रियार्थों का प्राय है, प्रभाव हो जाता है अतएव मोक्ष में इन का प्रसङ्ग नहीं हो सकता क्यों कि जब आधार ही नहीं तो आधेय कहां रह सकता है ? श्रग मोक्ष प्राप्ति के साधन दिखलाते हैंःतद थंयमांनथमाभ्यामात्मसंस्कारोयेगा श्च्चाध्यात्मविध्युपायैः उशून्य-उस के लिये यम और नियमोसे तथा अध्यात्म विधि के उपायों द्वारा योग से आत्मा संस्कार करना चाहिये ।। योग के आठ अङ्ग हैं, जिन का निरूपण योग शास्त्र के साधन पाद में किया गया है उन में से अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह; ये पांच यम- पहिला हैं और 'शौच' संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्रणिधान; ये पांच नियम दूसरा चङ्ग कहलाते हैं । मुमुक्षु को प्रथम इन के सेवन से आत्मा का संस्कार करना चाहिये थात योगके प्रतिबन्धक मल. विक्षेप और भावरणको दूर करना चाहिये । तत्पश्चात योग अर्थात धारणा, ध्यान और समाधि से अध्यात्मतत्व को प्राप्त होना चाहिये । प्रशून्य - मुमुक्षु को फिर क्या करना चाहिये ? ज्ञानग्रहणाभ्यासस्तद्विद्यैश्च सह संवादः ॥ सैंतालीस ॥ नब्बे-ज्ञान के महण का अभ्यास और उसके जानने वालों के सोथ संवाद ।। उक्त साधनों के अतिरिक्त मोक्ष की प्राप्ति के लिये मुमुक्षु को इभ्ययन, श्रषण और मनन के द्वारा तत्वज्ञान का निरन्तर अभ्यास और बुद्धि के परिपाक के लिये तत्वज्ञानियों के साथ संवाद भी करना चाहिये क्योंकि बिना अभ्यास ज्ञान की वृद्धि और विना सम्वाद के बुद्धि की परिपक्वता और संदेहों को निवृत्ति नहीं हो सकती ॥ आगे सम्वाद का प्रकार दिखलाते हैंःतं शिष्यगुरुसब्रह्मचारिविशिष्ट श्रेयो - डर्थिभिरन सूयिभिरभ्युपेयात् ।। अड़तालीस ।। उस को विशिष्ट ज्ञानी, श्रेये।ऽर्थी और निन्दारहित शिष्य, गुरु और सहाध्यायी के द्वारा प्राप्त करे ॥ विना आत्म तत्ववित् आचार्य की दीक्षा के कोई आत्मज्ञान का लाभ नहीं कर सकता व अनिन्दित गुरु. शिष्य और सहाध्यायियों के साथ ऐसे आचार्य की सेवा में विनीतभाव से जाना चाहिये । उपनिषद् भी कहती है -सगुरु मेवाभिगच्छेत श्रोत्रियं ब्रह्मनिष्ठम् । इत्यादि ।। यदि कहा कि आत्मा को एकरस होने से ध्यान और बिना ध्यान में कोई अन्तर तो है ही नहीं फिर ध्यान का क्या फल है ? तौ उत्तर - #उभयथाऽप्यविशेषश्चेन वपरागनिरोधाद्विशेषः । छब्बीस हज़ार चार सौ तिरासी "दोनों प्रकार ही विशेष नहीं" यह पक्ष ठीक नहीं, क्यों कि उपराग के रुक जाने से विशेष है । ध्यान समय में उपराग नहीं रहता और बिना ध्यान के आत्मा वा पुरुष पर उपराग रहती है, इसलिये अध्यान से ध्यान में विशेषता है ।। तेईस । यदि कहो कि निःसङ्गपुरुष में उपराग कहां से आया ! तो उत्तरनिस्सङ्गोऽप्युपरागोऽविवेकात् ।। सत्ताईस ।।
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लोकसभा में 12 घटे की लंबी और जोरदार बहस के बाद मोदी सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव असफल हो गया था। इस बहस में सत्तारूढ़ और विपक्ष दोनों ने ही गर्मजोशी से बहस की।
लेकिन उस क्षण सब हैरान रह गए, जब गांधी ने तीखा भाषण देने के बाद प्रधानमंत्री को अचानक गले लगा लिया था।
उन्होंने कहा कि नफरत और लिंचिंग नहीं, बल्कि प्यार व सहिष्णुता भारत के लिए रास्ता तैयार करेगा।
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लोकसभा में बारह घटे की लंबी और जोरदार बहस के बाद मोदी सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव असफल हो गया था। इस बहस में सत्तारूढ़ और विपक्ष दोनों ने ही गर्मजोशी से बहस की। लेकिन उस क्षण सब हैरान रह गए, जब गांधी ने तीखा भाषण देने के बाद प्रधानमंत्री को अचानक गले लगा लिया था। उन्होंने कहा कि नफरत और लिंचिंग नहीं, बल्कि प्यार व सहिष्णुता भारत के लिए रास्ता तैयार करेगा।
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'बॉम्बे वेलवेट' अनुराग कश्यप की सबसे बड़े बजट में बनने वाली फिल्मों में से एक थी. जो 125 करोड़ रुपए के भारी-भरकम बजट में बनी थी. हालांकि इस फिल्म ने बमुश्किल 43 करोड़ की कमाई की थी. तीसरे दिन ही ये इस फिल्म को थिएटर्स से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था.
महामारी के बाद रिलीज हुई इस फिल्म से मेकर्स को बहुत उम्मीदें थीं. हालांकि बुरी तरह फ्लॉप हुए ये फिल्म अपना बजट भी नहीं निकाल पाई. जिसके बाद अर्जुन कपूर, दिशा पाटनी और जॉन अब्राहम के करियर पर भी इसका असर पड़ा.
लाल सिंह चढ्डा आमिर खान के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक थी. इस फिल्म को 180 करोड़ के भारी-भरकम बजट में 4 साल की मेहनत के बाद तैयार किया गया था. फिल्म का प्रमोशन भी काफी अच्छा हुआ. हालांकि जब ये फिल्म रिलीज हुई तो बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई. जिसके बाद फिल्म के मेकर्स को लगभग 100 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा था. खबरों की मानें तो फिल्म के फ्लॉप होने पर आमिर खान ने इसकी एक्टिंग फीस भी छोड़ दी थी.
फिल्म 'रूप की रानी चोरों का राजा' 1993 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म से मेकर्स को खासी उम्मीदें थीं, यहीं वजह थी कि जब फिल्में महज 1-2 करोड़ रुपए के बजट में तैयार की जाती थीं उस समय इस फिल्म को 9 करोड़ के बजट में बनाया गया था. फिल्म में श्रीदेवी और अनिल कपूर जैसे बड़े सितारे थे, लेकिन फिर फिल्म ये फिल्म बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई और अपने बजट का एक तिहाई निकालने में भी कामयाब नहीं हो पाई.
मणिरत्नम के निर्देशन में बनी 'रावण' में ऐश्वर्या और अभिषेक बच्चन जैसी स्टारकास्ट थी. हालांकि फिल्म फिर भी कामयाब नहीं हो पाई और बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई.
सावंरिया 2007 में रिलीज हुई संजय लीला भंसाली की मोस्ट अवेटेड फिल्म में से एक थी. हालांकि बेहतरीन सेट, कास्ट्यूम और स्टारकिड्स की मौजूदगी भी इस फिल्म को हिट नहीं करवा पाई. 45 करोड़ के बजट में बनी ये फिल्म बुरी तरह फ्लॉप तो साबित हुई ही, साथ ही ये अपना बजट भी नहीं निकाल पाई.
रिलीज से पहले 'काइट्स' से ऋतिक रोशन की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जा रही थी, हालांकि जब ये फिल्म रिलीज हुई तो अपने बजट का आधा हिस्सा भी नहीं निकाल पाई. बुरी तरह फ्लॉप हुई इस फिल्म की विफलता का श्रेय इसकी स्क्रिप्ट और भाषा को दिया गया.
इस लिस्ट में हाल ही में रिलीज हुई आदिपुरुष का भी नाम शामिल है. रिलीज से पहले इस फिल्म का अच्छा खासा बज था जो रिलीज के बाद विवादों में बदल गया. 500 करोड़ के बजट में बनी ये फिल्म आधा बजट भी नहीं निकाल पाई है. साथ ही फिल्म के मेकर्स को इतिहास से छेड़छाड़ करने के चलते अब कोर्ट के चक्कर भी काटने पड़ रहे हैं.
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'बॉम्बे वेलवेट' अनुराग कश्यप की सबसे बड़े बजट में बनने वाली फिल्मों में से एक थी. जो एक सौ पच्चीस करोड़ रुपए के भारी-भरकम बजट में बनी थी. हालांकि इस फिल्म ने बमुश्किल तैंतालीस करोड़ की कमाई की थी. तीसरे दिन ही ये इस फिल्म को थिएटर्स से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था. महामारी के बाद रिलीज हुई इस फिल्म से मेकर्स को बहुत उम्मीदें थीं. हालांकि बुरी तरह फ्लॉप हुए ये फिल्म अपना बजट भी नहीं निकाल पाई. जिसके बाद अर्जुन कपूर, दिशा पाटनी और जॉन अब्राहम के करियर पर भी इसका असर पड़ा. लाल सिंह चढ्डा आमिर खान के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक थी. इस फिल्म को एक सौ अस्सी करोड़ के भारी-भरकम बजट में चार साल की मेहनत के बाद तैयार किया गया था. फिल्म का प्रमोशन भी काफी अच्छा हुआ. हालांकि जब ये फिल्म रिलीज हुई तो बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई. जिसके बाद फिल्म के मेकर्स को लगभग एक सौ करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा था. खबरों की मानें तो फिल्म के फ्लॉप होने पर आमिर खान ने इसकी एक्टिंग फीस भी छोड़ दी थी. फिल्म 'रूप की रानी चोरों का राजा' एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में रिलीज हुई थी. इस फिल्म से मेकर्स को खासी उम्मीदें थीं, यहीं वजह थी कि जब फिल्में महज एक-दो करोड़ रुपए के बजट में तैयार की जाती थीं उस समय इस फिल्म को नौ करोड़ के बजट में बनाया गया था. फिल्म में श्रीदेवी और अनिल कपूर जैसे बड़े सितारे थे, लेकिन फिर फिल्म ये फिल्म बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई और अपने बजट का एक तिहाई निकालने में भी कामयाब नहीं हो पाई. मणिरत्नम के निर्देशन में बनी 'रावण' में ऐश्वर्या और अभिषेक बच्चन जैसी स्टारकास्ट थी. हालांकि फिल्म फिर भी कामयाब नहीं हो पाई और बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई. सावंरिया दो हज़ार सात में रिलीज हुई संजय लीला भंसाली की मोस्ट अवेटेड फिल्म में से एक थी. हालांकि बेहतरीन सेट, कास्ट्यूम और स्टारकिड्स की मौजूदगी भी इस फिल्म को हिट नहीं करवा पाई. पैंतालीस करोड़ के बजट में बनी ये फिल्म बुरी तरह फ्लॉप तो साबित हुई ही, साथ ही ये अपना बजट भी नहीं निकाल पाई. रिलीज से पहले 'काइट्स' से ऋतिक रोशन की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जा रही थी, हालांकि जब ये फिल्म रिलीज हुई तो अपने बजट का आधा हिस्सा भी नहीं निकाल पाई. बुरी तरह फ्लॉप हुई इस फिल्म की विफलता का श्रेय इसकी स्क्रिप्ट और भाषा को दिया गया. इस लिस्ट में हाल ही में रिलीज हुई आदिपुरुष का भी नाम शामिल है. रिलीज से पहले इस फिल्म का अच्छा खासा बज था जो रिलीज के बाद विवादों में बदल गया. पाँच सौ करोड़ के बजट में बनी ये फिल्म आधा बजट भी नहीं निकाल पाई है. साथ ही फिल्म के मेकर्स को इतिहास से छेड़छाड़ करने के चलते अब कोर्ट के चक्कर भी काटने पड़ रहे हैं.
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Delhi to Agra Journey: अगर आप दिल्ली से हैं और आगरा घूमने की प्लानिंग कर रहें तो आपके पास आगरा पहुंचने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं।
Delhi to Agra Journey: अगर आप दिल्ली से हैं और आगरा घूमने की प्लानिंग कर रहें तो आपके पास आगरा पहुंचने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। आप फ्लाइट्स, ट्रेन, बस, कार और सड़क के माध्यम से आसानी से आगरा पहुंचकर ताजमहल और आगरा फोर्ट आदि का दीदार कर सकते हैं। दोनों शहर के बीच की दूरी करीब 230 किलोमीटर है। तो आइए जानते हैं दिल्ली से आगरा सड़क, ट्रेन, बस, कार या फ्लाइट के माध्यम से कैसे पहुंच सकते हैंः
फ्लाइट से दिल्ली से आगरा (Delhi to Agra by Flight)
आगरा से नजदीक हवाई अड्डा 7 किमी दूर स्थित है। आप दिल्ली से आगरा के लिए हर दिन कई फ्लाइट लें सकते हैं। दरअसल आगरा में हवाई अड्डा एक सैन्य आधार हवाई पट्टी है, जो पीक सीजन के दौरान कमर्शियल वाहनों की अनुमति देता है। सिर्फ एयर इंडिया की उड़ानें नई दिल्ली और आगरा के बीच चलती हैं। आपको बता दें कि हवाई मार्ग से नई दिल्ली से आगरा पहुंचने में एक घंटे से भी कम समय लगेगा। इसके अलावा वाराणसी के माध्यम से आप आगरा के लिए फ्लाइट लें सकते हैं। नई दिल्ली से आगरा के लिए फ्लाइट का किराया करीब INR 2337 प्रति व्यक्ति है।
ट्रेन से दिल्ली से आगरा (Delhi to Agra by Train)
आगरा में तीन रेलवे स्टेशन हैं, राजा की मंडी, आगरा छावनी और आगरा किला स्टेशन। इन तीनों स्टेशनों में से, आगरा कैंट या आगरा छावनी स्टेशन बहुत प्रसिद्ध है। आप दिल्ली से आगरा के लिए चलने वाली लोकल ट्रेनें, सुपर-फास्ट ट्रेनें, सेमी-लक्जरी ट्रेनें, चेयर कार एक्जीक्यूटिव ट्रेनें और यहां तक कि लग्जरी ट्रेनें से पहुंच सकते हैं। दिल्ली से आगरा के लिए सबसे तेज़ चलने वाली ट्रेन 12050 गतिमान एक्सप्रेस है जो दिल्ली से आगरा एक घंटे 40 मिनट से भी कम समय में पहुँचती है। यह ट्रेन सुबह 8:10 बजे दिल्ली स्टेशन से चलती है और 9:50 बजे आगरा स्टेशन पहुंचती है। इस ट्रेन में मल्टीमीडिया मनोरंजन सुविधाएं, टैरिफ में शामिल ऑन-बोर्ड खानपान सेवाएं आदि शामिल हैं।
बस से दिल्ली से आगरा (Delhi to Agra by Bus)
दरअसल आगरा में मुख्य बस स्टैंड या डिपो ईदगाह में स्थित है। बता दें इस डिपो में दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों से बसें आती हैं। सड़क मार्ग से, आगरा दिल्ली से 233. 1 किमी दूर स्थित है और ताज एक्सप्रेस राजमार्ग के माध्यम से आगरा पहुंचने में करीब 3 घंटे 38 मिनट का समय लगता है। आगरा में एक और बस स्टैंड है, आईएसबीटी। ईदगाह डिपो ताजमहल से सिर्फ 8 किमी दूर स्थित है, लेकिन आईएसबीटी ताजमहल से लगभग 12 किमी दूर स्थित है। इसके अलावा सरकारी बसें और लक्ज़री निजी बसें दोनों उपलब्ध हैं। किराए की बात करें तो 250 रुपए से लेकर 2000 रूपये तक है। बता दें सुबह 6 बजे से 12 बजे के बीच चलने वाली बसों का किराया दोपहर 1 से 12 बजे के बीच चलने वाली बसों की तुलना में काफी कम होता है। दरअसल यह किराया लोगो की संख्या पर निर्भर होता है। हर दिन लगभग 70 बसें नई दिल्ली से आगरा के लिए चलती हैं।
कार से दिल्ली से आगरा (Delhi to Agra by Car)
अगर आप दिल्ली से आगरा कार से आने कि प्लानिंग कर रहें तो आपको बता दें कि NH2 मार्ग दिल्ली को आगरा से जोड़ता है और अब नए ताज एक्सप्रेसवे ने ड्राइविंग समय को काफी कम कर दिया है। कैब की भी सुविधा उपलब्ध है। दिल्ली से आगरा की दूरी इससे 210 किलोमीटर से थोड़ा ज्यादा है। किराए की बात करें तो प्रति व्यक्ति 500 रुपए हो सकता है।
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Delhi to Agra Journey: अगर आप दिल्ली से हैं और आगरा घूमने की प्लानिंग कर रहें तो आपके पास आगरा पहुंचने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। Delhi to Agra Journey: अगर आप दिल्ली से हैं और आगरा घूमने की प्लानिंग कर रहें तो आपके पास आगरा पहुंचने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। आप फ्लाइट्स, ट्रेन, बस, कार और सड़क के माध्यम से आसानी से आगरा पहुंचकर ताजमहल और आगरा फोर्ट आदि का दीदार कर सकते हैं। दोनों शहर के बीच की दूरी करीब दो सौ तीस किलोग्राममीटर है। तो आइए जानते हैं दिल्ली से आगरा सड़क, ट्रेन, बस, कार या फ्लाइट के माध्यम से कैसे पहुंच सकते हैंः फ्लाइट से दिल्ली से आगरा आगरा से नजदीक हवाई अड्डा सात किमी दूर स्थित है। आप दिल्ली से आगरा के लिए हर दिन कई फ्लाइट लें सकते हैं। दरअसल आगरा में हवाई अड्डा एक सैन्य आधार हवाई पट्टी है, जो पीक सीजन के दौरान कमर्शियल वाहनों की अनुमति देता है। सिर्फ एयर इंडिया की उड़ानें नई दिल्ली और आगरा के बीच चलती हैं। आपको बता दें कि हवाई मार्ग से नई दिल्ली से आगरा पहुंचने में एक घंटे से भी कम समय लगेगा। इसके अलावा वाराणसी के माध्यम से आप आगरा के लिए फ्लाइट लें सकते हैं। नई दिल्ली से आगरा के लिए फ्लाइट का किराया करीब INR दो हज़ार तीन सौ सैंतीस प्रति व्यक्ति है। ट्रेन से दिल्ली से आगरा आगरा में तीन रेलवे स्टेशन हैं, राजा की मंडी, आगरा छावनी और आगरा किला स्टेशन। इन तीनों स्टेशनों में से, आगरा कैंट या आगरा छावनी स्टेशन बहुत प्रसिद्ध है। आप दिल्ली से आगरा के लिए चलने वाली लोकल ट्रेनें, सुपर-फास्ट ट्रेनें, सेमी-लक्जरी ट्रेनें, चेयर कार एक्जीक्यूटिव ट्रेनें और यहां तक कि लग्जरी ट्रेनें से पहुंच सकते हैं। दिल्ली से आगरा के लिए सबसे तेज़ चलने वाली ट्रेन बारह हज़ार पचास गतिमान एक्सप्रेस है जो दिल्ली से आगरा एक घंटे चालीस मिनट से भी कम समय में पहुँचती है। यह ट्रेन सुबह आठ:दस बजे दिल्ली स्टेशन से चलती है और नौ:पचास बजे आगरा स्टेशन पहुंचती है। इस ट्रेन में मल्टीमीडिया मनोरंजन सुविधाएं, टैरिफ में शामिल ऑन-बोर्ड खानपान सेवाएं आदि शामिल हैं। बस से दिल्ली से आगरा दरअसल आगरा में मुख्य बस स्टैंड या डिपो ईदगाह में स्थित है। बता दें इस डिपो में दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों से बसें आती हैं। सड़क मार्ग से, आगरा दिल्ली से दो सौ तैंतीस. एक किमी दूर स्थित है और ताज एक्सप्रेस राजमार्ग के माध्यम से आगरा पहुंचने में करीब तीन घंटाटे अड़तीस मिनट का समय लगता है। आगरा में एक और बस स्टैंड है, आईएसबीटी। ईदगाह डिपो ताजमहल से सिर्फ आठ किमी दूर स्थित है, लेकिन आईएसबीटी ताजमहल से लगभग बारह किमी दूर स्थित है। इसके अलावा सरकारी बसें और लक्ज़री निजी बसें दोनों उपलब्ध हैं। किराए की बात करें तो दो सौ पचास रुपयापए से लेकर दो हज़ार रूपये तक है। बता दें सुबह छः बजे से बारह बजे के बीच चलने वाली बसों का किराया दोपहर एक से बारह बजे के बीच चलने वाली बसों की तुलना में काफी कम होता है। दरअसल यह किराया लोगो की संख्या पर निर्भर होता है। हर दिन लगभग सत्तर बसें नई दिल्ली से आगरा के लिए चलती हैं। कार से दिल्ली से आगरा अगर आप दिल्ली से आगरा कार से आने कि प्लानिंग कर रहें तो आपको बता दें कि NHदो मार्ग दिल्ली को आगरा से जोड़ता है और अब नए ताज एक्सप्रेसवे ने ड्राइविंग समय को काफी कम कर दिया है। कैब की भी सुविधा उपलब्ध है। दिल्ली से आगरा की दूरी इससे दो सौ दस किलोग्राममीटर से थोड़ा ज्यादा है। किराए की बात करें तो प्रति व्यक्ति पाँच सौ रुपयापए हो सकता है।
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स्टेफानोस सितसिपास को अपना मैच जीतने में मुश्किल आई. उन्होंने फ्रांस के खिलाड़ी को तकरीबन तीन घंटे तक चले मैच में मात दी.
ग्रीस के युवा खिलाड़ी स्टेफानोस सितसिपास (Stefanos Tsitsipas) और रूस के डेनिल मेदवेदेव (Daniil Medvedev) ने शनिवार को साल के पहले ग्रैंड स्लैम ऑस्ट्रेलियन ओपन (Australian Open) के पुरुष एकल वर्ग के तीसरे दौर में जीत हासिल करते हुए चोथे दौर में जगह बना ली है. वहीं महिला वर्ग में खिताब की प्रबल दावेदारों में शामिल दो बार की ग्रैंडस्लैम चैंपियन रोमानिया की सिमोना हालेप और दूसरी वरीयता प्राप्त आर्यना सबालेंका ने विपरीत अंदाज में जीत दर्ज करके महिला एकल वर्ग के चौथे दौर में प्रवेश किया.
रोजर फेडरर जैसे दिग्गज को मात दे चुके सितसिपास ने फ्रांस के अपने प्रतिद्वंदी बेनुआ पेयर को कड़े मुकाबले में मात दे अगले दोर में जगह बनाई. ग्रीस के खिलाड़ी ने दो घंटे 42 मिनट तक चले मैच में पेयर को चार सेटों के मुकाबले में 6-3, 7-5, 6-7(2-7), 6-4 से मात दी. चौथे दौर में सितसिपास का सामना टेलर फ्रिट्ज से होगा जिन्होंने स्पेन के रोबर्ट बाउतिस्ता अगुट को 6-0, 3-6, 3-6, 6-4, 6-3 से हराया.
नंबर-2 रैंक के खिलाड़ी मेदवेदेव ने नेदरलैंड्स के बोटिक वान डे जांड्सचल्प को सीधे सेटों में 6-4, 6-4, 6-2 से हराया. रूसी खिलाड़ी को ये मैच जीतने में एक घंटे 55 मिनट का समय लगा. यूए ओपन चैंपियन को कोर्ट पर मौजूद दर्शकों से छींटाकशी का सामना करना पड़ा. मैच के बाद उन्होंने कहा, "मैं इसे इस तरह से लेता हूं कि नेदरलैंड्स के खिलाड़ी के खिलाफ खेलना ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी के खिलाफ खेलने से आसान है. हर अच्छे रिश्ते के अपने उतार चढ़ाव होते हैं. मुझे उम्मीद है कि बुरे समय से ज्यादा अच्छा समय होगा. अगले दौर में उनका सामना वाइलडकार्ड एंट्री से आए क्रिस ओ कोनेल से होगा.
पिछले साल विंबलडन और यूएस ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली सबालेंका ने 31वीं वरीय मर्डेका वोंड्रोसोवा से पहला सेट गंवाने के बाद वापसी करके 4-6, 6-3, 6-1 से जीत दर्ज की. हालेप ने डैंका कोविनिच को आसानी से 6-2, 6-1 से पराजित करके लगातार पांचवें साल ऑस्ट्रेलियाई ओपन के चौथे दौर में जगह बनाई. कोविनिच ने पिछले दौर में यूएस ओपन चैंपियन एम्मा रादुकानू को हराया था.
हालेप ने 2018 में फ्रेंच ओपन और 2019 में विंबलडन का खिताब जीता था और 2018 में वह ऑस्ट्रेलियाई ओपन के फाइनल में पहुंची थीं. इस 14वीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी का अगला मुकाबला एलाइज कॉर्नेट से होगा जिन्होंने 29वीं वरीय तमारा जिदानसेक को 4-6, 6-4, 6-2 से हराकर अपना 32वां जन्मदिन मनाया.
पिछले दौर में तीसरी वरीय गरबाइन मुगुरुजा को हराने वाली कॉर्नेट पहली बार ऑस्ट्रेलियाई ओपन के चौथे दौर में पहुंची हैं. अमेरिका की 27वीं वरीयता प्राप्त डेनिली कोलिन्स ने पहला सेट गंवाने के बाद 19 वर्षीय क्लारा टॉसन को 4-6, 6-4, 7-5 से हराया. उनका मुकाबला अब 19वीं वरीयता प्राप्त एलिस मर्टन्स से होगा जिन्होंने झांग शुहाई को 6-2, 6-2 से शिकस्त दी.
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स्टेफानोस सितसिपास को अपना मैच जीतने में मुश्किल आई. उन्होंने फ्रांस के खिलाड़ी को तकरीबन तीन घंटे तक चले मैच में मात दी. ग्रीस के युवा खिलाड़ी स्टेफानोस सितसिपास और रूस के डेनिल मेदवेदेव ने शनिवार को साल के पहले ग्रैंड स्लैम ऑस्ट्रेलियन ओपन के पुरुष एकल वर्ग के तीसरे दौर में जीत हासिल करते हुए चोथे दौर में जगह बना ली है. वहीं महिला वर्ग में खिताब की प्रबल दावेदारों में शामिल दो बार की ग्रैंडस्लैम चैंपियन रोमानिया की सिमोना हालेप और दूसरी वरीयता प्राप्त आर्यना सबालेंका ने विपरीत अंदाज में जीत दर्ज करके महिला एकल वर्ग के चौथे दौर में प्रवेश किया. रोजर फेडरर जैसे दिग्गज को मात दे चुके सितसिपास ने फ्रांस के अपने प्रतिद्वंदी बेनुआ पेयर को कड़े मुकाबले में मात दे अगले दोर में जगह बनाई. ग्रीस के खिलाड़ी ने दो घंटे बयालीस मिनट तक चले मैच में पेयर को चार सेटों के मुकाबले में छः-तीन, सात-पाँच, छः-सात, छः-चार से मात दी. चौथे दौर में सितसिपास का सामना टेलर फ्रिट्ज से होगा जिन्होंने स्पेन के रोबर्ट बाउतिस्ता अगुट को छः-शून्य, तीन-छः, तीन-छः, छः-चार, छः-तीन से हराया. नंबर-दो रैंक के खिलाड़ी मेदवेदेव ने नेदरलैंड्स के बोटिक वान डे जांड्सचल्प को सीधे सेटों में छः-चार, छः-चार, छः-दो से हराया. रूसी खिलाड़ी को ये मैच जीतने में एक घंटे पचपन मिनट का समय लगा. यूए ओपन चैंपियन को कोर्ट पर मौजूद दर्शकों से छींटाकशी का सामना करना पड़ा. मैच के बाद उन्होंने कहा, "मैं इसे इस तरह से लेता हूं कि नेदरलैंड्स के खिलाड़ी के खिलाफ खेलना ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी के खिलाफ खेलने से आसान है. हर अच्छे रिश्ते के अपने उतार चढ़ाव होते हैं. मुझे उम्मीद है कि बुरे समय से ज्यादा अच्छा समय होगा. अगले दौर में उनका सामना वाइलडकार्ड एंट्री से आए क्रिस ओ कोनेल से होगा. पिछले साल विंबलडन और यूएस ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली सबालेंका ने इकतीसवीं वरीय मर्डेका वोंड्रोसोवा से पहला सेट गंवाने के बाद वापसी करके चार-छः, छः-तीन, छः-एक से जीत दर्ज की. हालेप ने डैंका कोविनिच को आसानी से छः-दो, छः-एक से पराजित करके लगातार पांचवें साल ऑस्ट्रेलियाई ओपन के चौथे दौर में जगह बनाई. कोविनिच ने पिछले दौर में यूएस ओपन चैंपियन एम्मा रादुकानू को हराया था. हालेप ने दो हज़ार अट्ठारह में फ्रेंच ओपन और दो हज़ार उन्नीस में विंबलडन का खिताब जीता था और दो हज़ार अट्ठारह में वह ऑस्ट्रेलियाई ओपन के फाइनल में पहुंची थीं. इस चौदहवीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी का अगला मुकाबला एलाइज कॉर्नेट से होगा जिन्होंने उनतीसवीं वरीय तमारा जिदानसेक को चार-छः, छः-चार, छः-दो से हराकर अपना बत्तीसवां जन्मदिन मनाया. पिछले दौर में तीसरी वरीय गरबाइन मुगुरुजा को हराने वाली कॉर्नेट पहली बार ऑस्ट्रेलियाई ओपन के चौथे दौर में पहुंची हैं. अमेरिका की सत्ताईसवीं वरीयता प्राप्त डेनिली कोलिन्स ने पहला सेट गंवाने के बाद उन्नीस वर्षीय क्लारा टॉसन को चार-छः, छः-चार, सात-पाँच से हराया. उनका मुकाबला अब उन्नीसवीं वरीयता प्राप्त एलिस मर्टन्स से होगा जिन्होंने झांग शुहाई को छः-दो, छः-दो से शिकस्त दी.
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- 5 hrs ago ये क्या, 3. 3 लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद!
Don't Miss!
इसी हफ्ते रिलीज होने वाली है शाहरुख खान की कमबैक फिल्म 'पठान'। फिल्म का दो गाना 'बेशरम रंग' और 'झूमे जो पठान' रिलीज हो चुका है। 'बेशरम रंग' गाने को लेकर काफी विवाद हो चुका है। खासतौर पर इस गाने में दीपिका पादुकोण के गेरुआ बिकिनी को लेकर शुरू हुआ विवाद रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। ऐसे में आगे किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए यशराज फिल्म्स ने एक खास तरीका निकाला है। पिछले कुछ दिनों से ही मायानगरी की गलियों में बातें हो रही थी कि इस फिल्म को लेकर शाहरुख खान या फिल्म से जुड़ा कोई भी एक्टर कोई इंटरव्यू अभी नहीं देगा। पहले 'पठान' 25 जनवरी को रिलीज होगी, दर्शकों की प्रतिक्रिया देखने के बाद फिल्म के मेकर्स इसका प्रचार करेंगे।
यशराज फिल्म्स ने पोस्ट किया वीडियो :
यशराज फिल्म्स ने अपने ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें शाहरुख खान इस फिल्म से जुड़े सभी संभावित सवालों का जवाब देते नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि किसी फिल्म से जुड़े प्रेस कांफ्रेंस के दौरान रिपोटर्स एक्टर्स और फिल्म मेकर्स से जिस तरह के सवाल पूछते हैं, जैसे 'फिल्म पठान में अपने किरदार के बारे में बताएं' या 'जीवन के पहले एक्शन फिल्म में काम करने का कैसा अनुभव रहा'। इस वीडियो में शाहरुख खान से कुल 9 सवाल पूछे गये और सारे सवालों का जवाब शाहरुख ने बड़े ही प्यार और मजाकिया लहजे में दिया।
नहीं पूछा गया कोई भी विवादित सवाल :
यशराज फिल्म्स की इस वीडियो में शाहरुख खान से 'पठान' के को-एक्टर्स और फिल्म से जुड़े सवाल तो पूछे गये लेकिन इन सवालों में कोई भी सवाल विवादित नहीं था। जब शाहरुख से पूछा गया कि फिल्म से उन्हें कितनी उम्मीदें हैं? इसके जवाब में शाहरुख खान ने हंसते हुए कहा, "एक अच्छी फिल्म से दर्शकों का मनोरंजन किये हुए एक अर्सा बीत चुका है। उम्मीद करता हूं, दर्शकों को यह फिल्म पसंद आएगी। " वहीं फिल्म में नेगेटिव किरदार निभा रहे जॉन अब्राहम की तारीफ करते हुए शाहरुख खान ने कहा, "वह थे इसलिए मैं एक्शन कर पाया। "
मीडिया से बना रखी है दूरी :
फिल्म 'पठान' को लेकर विवाद होने के बाद से ही फिल्म के मेकर्स से लेकर एक्टर्स तक ने मीडिया से दूरी बना रखी है। शाहरुख खान ने पिछले कई दिनों में ट्विटर पर #AskSRK सेशन के जरिए फैंस के सवालों का जवाब दिया है लेकिन इस दौरान फिल्म से जुड़े किसी भी विवादित सवाल का सीधा जवाब देने से शाहरुख खान बचते नजर आए। वहीं जॉन अब्राहम और दीपिका पादुकोण भी इस फिल्म को लेकर मीडिया के सामने नहीं आ रहे हैं। फिल्म के पहले गाने 'बेशरम रंग' में दीपिका पादुकोण के गेरुआ रंग की बिकिनी के साथ ही विवादों का यह दौर शुरू हुआ था, जिसपर अब राजनीति का रंग चढ़ चुका है।
बिन ब्रा बीच रोड में कार खड़ी करके ऐसी हरकत करने लगी भोजपुरी हसीना, लोग मांग रहे हैं लोकेशन!
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हरिद्वार. उत्तराखंड हरिद्वार कोतवाली पुलिस ने मध्य प्रदेश के एक दंपति को गिरफ्तार किया है, जिसने 2013 की आपदा के दौरान अपनी दो बेटियों को लापता बताकर न केवल उत्तराखंड बल्कि मध्य प्रदेश सरकार से भी मुआवजे की सात लाख की धनराशि वसूल ली.
अब पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद इनका ये राज खुला है. पुलिस ने इस दंपति के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद अब आरोपी रामकृपाल खुद को बेकसूर बता रहा है.
आरोपी रामकृपाल का कहना है कि इसने बच्चे मिलने की सूचना एमपी पुलिस को दी थी, लेकिन एक लाख रुपए लेकर उन्होंने उसे चुप करा दिया. वहीं अब उसके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि अगर ढाई महीने बाद उसकी लापता लड़कियां मिल गई थी तो एमपी सरकार से एक साल बाद मुआवजा क्यों लिया.
वहीं आरोपी की पत्नी विद्या का कहना है कि इसे इस बारे में उसे कुछ नहीं पता है और जो इसने किया है, वो गलत किया है.
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हरिद्वार. उत्तराखंड हरिद्वार कोतवाली पुलिस ने मध्य प्रदेश के एक दंपति को गिरफ्तार किया है, जिसने दो हज़ार तेरह की आपदा के दौरान अपनी दो बेटियों को लापता बताकर न केवल उत्तराखंड बल्कि मध्य प्रदेश सरकार से भी मुआवजे की सात लाख की धनराशि वसूल ली. अब पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद इनका ये राज खुला है. पुलिस ने इस दंपति के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद अब आरोपी रामकृपाल खुद को बेकसूर बता रहा है. आरोपी रामकृपाल का कहना है कि इसने बच्चे मिलने की सूचना एमपी पुलिस को दी थी, लेकिन एक लाख रुपए लेकर उन्होंने उसे चुप करा दिया. वहीं अब उसके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि अगर ढाई महीने बाद उसकी लापता लड़कियां मिल गई थी तो एमपी सरकार से एक साल बाद मुआवजा क्यों लिया. वहीं आरोपी की पत्नी विद्या का कहना है कि इसे इस बारे में उसे कुछ नहीं पता है और जो इसने किया है, वो गलत किया है.
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रेश बाबू आ गये।" यह नौकरानी के मुँहसे सुन स्वामी के सिरहानेसे उठकर नीनी बाहर चली गई। दरवाजे पर वह ठिठकी, देखा कि अपना हैण्डबैग एक ओर मेज़ पर घरे, हाथमें स्टाथस्कोप लिये, आरामकुसौंपर सुरेश बैठा हुआ है। वह जुरा उलझी, अटकी, फिर आगे बढ़कर बोली, "आप आ गये ।" .
सुरेशने सावधानी से 'हाँ' कहा, कुछ देर चुप रह आखिर बोला, "पहले तो विश्वासही न हुआ कि पत्र आपका है। आपकी पाँच साल पुरानी लिखावट याद कर लेने में भी काफ़ी बक्त लगा और पहचान आना पड़ा । "
दस साल पुरानी 'आप' पाकर नीनी स्तब्ध रह गई । पाँच साल पुराने 'तुम' का कहीं भी पता नहीं था। कुछ सोचता सुरेश बोला, "मिस्टर माथुर कहाँ हैं ?"
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रेश बाबू आ गये।" यह नौकरानी के मुँहसे सुन स्वामी के सिरहानेसे उठकर नीनी बाहर चली गई। दरवाजे पर वह ठिठकी, देखा कि अपना हैण्डबैग एक ओर मेज़ पर घरे, हाथमें स्टाथस्कोप लिये, आरामकुसौंपर सुरेश बैठा हुआ है। वह जुरा उलझी, अटकी, फिर आगे बढ़कर बोली, "आप आ गये ।" . सुरेशने सावधानी से 'हाँ' कहा, कुछ देर चुप रह आखिर बोला, "पहले तो विश्वासही न हुआ कि पत्र आपका है। आपकी पाँच साल पुरानी लिखावट याद कर लेने में भी काफ़ी बक्त लगा और पहचान आना पड़ा । " दस साल पुरानी 'आप' पाकर नीनी स्तब्ध रह गई । पाँच साल पुराने 'तुम' का कहीं भी पता नहीं था। कुछ सोचता सुरेश बोला, "मिस्टर माथुर कहाँ हैं ?"
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नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) कोलकाता के औपनिवेशिक युग के घरों की एक झलक देखना चाहते हैं? तो. . . इस दुर्गा पूजा में दिल्ली के चितरंजन पार्क पहुंचें जहां कारीगर झीनी खिड़कियों, प्रांगण और सीढ़ियां युक्त थीम-आधारित पंडाल को अंतिम रूप दे रहे हैं।
शहर में एक अन्य दुर्गा पूजा आयोजन समिति कार्डबोर्ड, लकड़ी से निर्मित डिस्पोजेबल चम्मच और चावल की भूसी से पर्यावरण के अनुकूल पंडाल बना रही है। कोविड के चलते दो साल की खामोशी के बाद दिल्ली नवरात्रि और दुर्गा पूजा को उत्साह के साथ मनाने के लिए तैयार है, वहीं कारीगरों को महामारी के दौरान हुए नुकसान की भरपाई की उम्मीद है।
सहकारिता मैदान में खाने, साड़ियों और खिलौनों के स्टॉल लगाए गए हैं तथा दो साल में पहली बार सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी योजना बनाई गई है।
चितरंजन पार्क के के-ब्लॉक में एक पूजा पंडाल को कागज, कार्डबोर्ड, लकड़ी से निर्मित डिस्पोजेबल चम्मच और चावल की भूसी से डिजाइन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "पिछले दो वर्षों में हममें से अधिकतर के पास काम नहीं था। इस साल, हम नुकसान की भरपाई होने की आशा कर सकते हैं। " उन्होंने कहा कि इस साल समारोह के लिए आयोजकों में उत्साह है।
न्यू अशोक नगर में इस साल के पंडाल की थीम पर्यावरण के अनुकूल रही है। आयोजकों में से एक ने कहा कि पंडाल और दुर्गा की मूर्तियों के निर्माण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री 'पर्यावरण के अनुकूल' है।
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नयी दिल्ली, सत्रह सितंबर कोलकाता के औपनिवेशिक युग के घरों की एक झलक देखना चाहते हैं? तो. . . इस दुर्गा पूजा में दिल्ली के चितरंजन पार्क पहुंचें जहां कारीगर झीनी खिड़कियों, प्रांगण और सीढ़ियां युक्त थीम-आधारित पंडाल को अंतिम रूप दे रहे हैं। शहर में एक अन्य दुर्गा पूजा आयोजन समिति कार्डबोर्ड, लकड़ी से निर्मित डिस्पोजेबल चम्मच और चावल की भूसी से पर्यावरण के अनुकूल पंडाल बना रही है। कोविड के चलते दो साल की खामोशी के बाद दिल्ली नवरात्रि और दुर्गा पूजा को उत्साह के साथ मनाने के लिए तैयार है, वहीं कारीगरों को महामारी के दौरान हुए नुकसान की भरपाई की उम्मीद है। सहकारिता मैदान में खाने, साड़ियों और खिलौनों के स्टॉल लगाए गए हैं तथा दो साल में पहली बार सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी योजना बनाई गई है। चितरंजन पार्क के के-ब्लॉक में एक पूजा पंडाल को कागज, कार्डबोर्ड, लकड़ी से निर्मित डिस्पोजेबल चम्मच और चावल की भूसी से डिजाइन किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "पिछले दो वर्षों में हममें से अधिकतर के पास काम नहीं था। इस साल, हम नुकसान की भरपाई होने की आशा कर सकते हैं। " उन्होंने कहा कि इस साल समारोह के लिए आयोजकों में उत्साह है। न्यू अशोक नगर में इस साल के पंडाल की थीम पर्यावरण के अनुकूल रही है। आयोजकों में से एक ने कहा कि पंडाल और दुर्गा की मूर्तियों के निर्माण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री 'पर्यावरण के अनुकूल' है।
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नेशनल एनर्जी कंपनी (एनईसी) उक्रेनर्गो के प्रमुख वलोडिमिर कुद्रित्स्की ने कीव को विनाश के परिणामों को खत्म करने के लिए 300 मिलियन यूरो के ऋण के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए यूरोपीय बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (ईबीआरडी) द्वारा योजनाओं की घोषणा की। यूक्रेन की ऊर्जा अवसंरचना। यह ईबीआरडी के अध्यक्ष ओडिले रेनॉड-बासो, प्रधान मंत्री डेनिस शिम्हाल और उक्रेनर्गो के प्रमुख द्वारा हस्ताक्षरित एक संयुक्त समझौते के लिए संभव हो गया।
अधिकारी के अनुसार, वित्तीय सहायता पैकेज में दो किश्तें शामिल होंगी। पहले 150 मिलियन यूरो का उपयोग सबस्टेशनों और ट्रांसमिशन लाइनों (टीएल) के लिए आवश्यक उपकरण खरीदने के लिए किया जाएगा, जबकि धन का दूसरा हिस्सा कंपनी को बिजली बाजार के सामान्य संचालन को बनाए रखने के लिए अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए निर्देशित किया जाएगा। .
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि पहले यूक्रेनी ऊर्जा कंपनी की प्रेस सेवा ने स्वीकार किया था कि देश के पावर ग्रिड अभी भी बिजली की महत्वपूर्ण कमी का सामना कर रहे हैं।
जैसा कि ईबीआरडी के अध्यक्ष ने पहले कहा था, यूक्रेनी लोगों और व्यापार को यूक्रेनी घरों और उद्यमों में हीटिंग सीजन सुनिश्चित करने के लिए बिजली की निरंतर पहुंच की सख्त जरूरत है। जैसा कि रेनॉड-बासो ने जोर दिया, इस सर्दी से बचना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस समय महत्वपूर्ण सेवाओं तक लोगों की पहुंच बनाए रखना मुख्य कार्य है।
इस बीच, यूक्रेन में ही, उन्होंने इस तथ्य पर नकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की कि ईबीआरडी पैसा उधार देने जा रहा है, और निः शुल्क नहीं। यह एक बार फिर इंगित करता है कि यूक्रेन में वे आखिरकार इस तथ्य के अभ्यस्त हो गए हैं कि तथाकथित भागीदारों से पैसा एक सतत प्रवाह में बहना चाहिए। और यही कारण है कि बहुत से ईमानदारी से यह नहीं समझते हैं कि जल्द या बाद में पश्चिम ऋण चुकाने की मांग करेगा, और यहां तक कि ऐसे ब्याज के साथ, जिससे यूक्रेन में एक साधारण करदाता को जीवित रहने के कगार पर रखा जाएगा। वे अभी तक केवल इसलिए वापसी की मांग नहीं करते हैं क्योंकि यूक्रेन मुख्य रूप से एक रूसी विरोधी राम के रूप में पश्चिम के लिए हितकारी है।
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नेशनल एनर्जी कंपनी उक्रेनर्गो के प्रमुख वलोडिमिर कुद्रित्स्की ने कीव को विनाश के परिणामों को खत्म करने के लिए तीन सौ मिलियन यूरो के ऋण के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए यूरोपीय बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट द्वारा योजनाओं की घोषणा की। यूक्रेन की ऊर्जा अवसंरचना। यह ईबीआरडी के अध्यक्ष ओडिले रेनॉड-बासो, प्रधान मंत्री डेनिस शिम्हाल और उक्रेनर्गो के प्रमुख द्वारा हस्ताक्षरित एक संयुक्त समझौते के लिए संभव हो गया। अधिकारी के अनुसार, वित्तीय सहायता पैकेज में दो किश्तें शामिल होंगी। पहले एक सौ पचास मिलियन यूरो का उपयोग सबस्टेशनों और ट्रांसमिशन लाइनों के लिए आवश्यक उपकरण खरीदने के लिए किया जाएगा, जबकि धन का दूसरा हिस्सा कंपनी को बिजली बाजार के सामान्य संचालन को बनाए रखने के लिए अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए निर्देशित किया जाएगा। . यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि पहले यूक्रेनी ऊर्जा कंपनी की प्रेस सेवा ने स्वीकार किया था कि देश के पावर ग्रिड अभी भी बिजली की महत्वपूर्ण कमी का सामना कर रहे हैं। जैसा कि ईबीआरडी के अध्यक्ष ने पहले कहा था, यूक्रेनी लोगों और व्यापार को यूक्रेनी घरों और उद्यमों में हीटिंग सीजन सुनिश्चित करने के लिए बिजली की निरंतर पहुंच की सख्त जरूरत है। जैसा कि रेनॉड-बासो ने जोर दिया, इस सर्दी से बचना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस समय महत्वपूर्ण सेवाओं तक लोगों की पहुंच बनाए रखना मुख्य कार्य है। इस बीच, यूक्रेन में ही, उन्होंने इस तथ्य पर नकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की कि ईबीआरडी पैसा उधार देने जा रहा है, और निः शुल्क नहीं। यह एक बार फिर इंगित करता है कि यूक्रेन में वे आखिरकार इस तथ्य के अभ्यस्त हो गए हैं कि तथाकथित भागीदारों से पैसा एक सतत प्रवाह में बहना चाहिए। और यही कारण है कि बहुत से ईमानदारी से यह नहीं समझते हैं कि जल्द या बाद में पश्चिम ऋण चुकाने की मांग करेगा, और यहां तक कि ऐसे ब्याज के साथ, जिससे यूक्रेन में एक साधारण करदाता को जीवित रहने के कगार पर रखा जाएगा। वे अभी तक केवल इसलिए वापसी की मांग नहीं करते हैं क्योंकि यूक्रेन मुख्य रूप से एक रूसी विरोधी राम के रूप में पश्चिम के लिए हितकारी है।
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आज हम आपको जो एलेक्जेंड्रा हेडिसन दिखाएंगे। उसकी फिल्में, साथ ही जीवनी नीचे दी जाएगी। यह एक है अमेरिकी अभिनेत्री, निर्देशक और फोटोग्राफर। वह 1969 में 10 जुलाई को पैदा हुआ था।
अभिनेत्री डेविड हेडिसन (अभिनेता) और ब्रिजेट की बेटी है। यह एक इतालवी अर्मेनियाई मूल है। वह लॉस एंजिल्स, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में अध्ययन किया है, साथ ही Percheyz कॉलेज में के रूप में।
एलेक्जेंड्रा हेडिसन टेलीविजन श्रृंखला की रुचि रचनाकारों, अपनी भूमिकाओं के एक नंबर की पेशकश के द्वारा। उन के बीच में "एल वर्ड" फिल्म। पहले प्रदर्शन करने के लिए चित्र कला का काम सार परिदृश्य बन जाते हैं। 2005 में, शीर्षक से एक श्रृंखला में (फिर से) बिल्डिंग यह संक्रमण और नुकसान की वसूली के विषयों का अनावरण किया, एक स्मृति वास्तुकला के रूप में बेहोश के निर्माण के लिए एक रूपक के रूप का उपयोग कर।
लंदन में "इथाका," जो Konstantinosa Kavafisa के उत्पाद द्वारा नामित किया गया था की एक श्रृंखला प्रदर्शन में एलेक्जेंड्रा हेडिसन, बारिश शीतोष्ण उत्तर अमेरिका में पाए जंगलों तस्वीरें खींची। साप्ताहिक नई यॉर्कर काम 2008 में "कला के लिए पासपोर्ट" में शामिल कहा जाता है।
2001 में - 2004 वर्षों के साथ एक रिश्ते में था एलेन डीजेनेरेस। 2014 में Dzhodi फोस्टर के साथ शादी कर ली।
1994 "मेरे साथ सो जाओ", एलेक्जेंड्रा हेडिसन रुचि फिल्म निर्माताओं में और उसके श्यामला अभिनेत्री है कि वह खेला की भूमिका की पेशकश। वह फिल्म "लोइस और क्लार्क" में रेमी के रूप में अभिनय किया। 1995 में उन्होंने फिल्म पर काम किया "मेल्रोस प्लेस। " अगली फिल्म में रेबेका की भूमिका थी "मैक्स गायब हो गया है। "
1998 में, रोंडा के रूप में अपनी भागीदारी के साथ फिल्म "अब किसी भी दिन" बाहर स्क्रीन। 1999 में, एलेक्जेंड्रा हेडिसन फिल्म में खेला सेली बेनसेन "सात दिन। " सन् 2000 में वह में विक्टोरिया ट्रेकसेल एजेंट की छवि में दिखाई दिया "नैश पुल। " उन्होंने 2005 में पेंटिंग पर काम किया "बूथ में,"। "एल वर्ड" 2006 के बाद से, डायलन मोरलैंड फिल्म में भूमिका निभाई थी। हम एक निर्देशक के रूप में अपने काम के बारे में भूल नहीं कर सकते। इस क्षमता में, वह एनिमेटेड फिल्म बनाने के लिए काम किया है "बूथ में। "
एलेक्जेंड्रा हेडिसन टीवी श्रृंखला में एक भूमिका निभाई "एल वर्ड। " भूखंड आठ महिलाओं की कहानी कहता है। कार्रवाई लॉस एंजिल्स में जगह लेता है।
इसके अलावा, अभिनेत्री टीवी श्रृंखला में अभिनय किया "नैश पुल। " उसकी कहानी विशेष जांच के आरोप में विभाग के प्रमुख के कहता है। उसका नाम नैश पुल है। अपने विभाग औपचारिक रूप से पुलिस के अंतर्गत आता है, लेकिन व्यवहार में यह सबसे जटिल मामलों की जांच कर रही है। नैश में मदद करता है के उनके साथी और दोस्त Dzho Dominges और हार्वे लीक (कंप्यूटर प्रतिभाशाली) और इवान कोरटेज। श्रृंखला में, वहाँ भी गैर-स्थायी माध्यमिक कर्मचारी कर रहे हैं। साजिश में कासिडी (नैश की बेटी) और निक (अपने पिता) है।
एलेक्जेंड्रा हेडिसन Sci-fi टेलीविजन श्रृंखला में एक भूमिका मिली "सात दिन। " उसकी कहानी है जो एक विधि विकसित की है अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के एक गुप्त विभाग, के बारे में बताती समय यात्रा की। यह विशेष विदेशी प्रौद्योगिकियों कि न्यू मैक्सिको, रोसवेल में पाया गया है पर आधारित है।
"कदम वापस" आप निश्चित आपदा को रोकने के लिए प्रति व्यक्ति पिछले 7 दिनों में भेजने के लिए अनुमति देता है। प्रतिबंध ईंधन के रूप में विदेशी रिएक्टर की विशेषताओं के कारण लगाए गए हैं, साथ ही साथ। "क्षेत्र" के उपयोग केवल उन मामलों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हुए हैं में अनुमति दी है। परियोजना एक गुप्त सैन्य अड्डे में नेवादा रेगिस्तान में स्थित है।
अभिनेत्री भी "किसी भी दिन अब। " नाटकीय टीवी श्रृंखला पर काम किया मेरी एलिजाबेथ सिम्स सफेद और अफ्रीकी मूल के अमेरिकी रेने Dzhekson: उसकी कहानी के बारे में दो महिलाओं बताता है। नागरिक अधिकारों के लिए आंदोलन के दौरान वे साठ के दशक में दोस्त थे। हालांकि, एक झगड़ा के बाद, वे बीस साल के लिए बात की थी। यह जब तक गुजर दूर अपने पिता रेने का नहीं था। उन्होंने कहा कि एक प्रमुख वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता था। गर्भावस्था की वजह से मेरी एलिजाबेथ कॉलेज छोड़ दिया, एक गृहिणी बन गया। रेने, बारी में, एक वकील बन गया। प्रेमिका के वर्षों के बाद एक साथ कर रहे हैं और एक जीवित बनाने के लिए मदद करते हैं। प्रत्येक प्रकरण वर्तमान और पिछले दो नायिकाओं से दृश्य भी शामिल है।
इसके अलावा, अभिनेत्री फिल्म में अभिनय "मैक्स गायब हो गया है। " साजिश यह ध्यान का निश्चित रूप से योग्य है। वह लड़का मैक्स के बारे में कहानी कहता है। उनके पिता एक और शादी करके अपनी मां के साथ उसे छोड़ दिया।
तो हम आपको अलेक्जेंडर हेडिसन बारे में बताया। अभिनेत्री की तस्वीरें इस सामग्री से जुड़ी।
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आज हम आपको जो एलेक्जेंड्रा हेडिसन दिखाएंगे। उसकी फिल्में, साथ ही जीवनी नीचे दी जाएगी। यह एक है अमेरिकी अभिनेत्री, निर्देशक और फोटोग्राफर। वह एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में दस जुलाई को पैदा हुआ था। अभिनेत्री डेविड हेडिसन और ब्रिजेट की बेटी है। यह एक इतालवी अर्मेनियाई मूल है। वह लॉस एंजिल्स, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में अध्ययन किया है, साथ ही Percheyz कॉलेज में के रूप में। एलेक्जेंड्रा हेडिसन टेलीविजन श्रृंखला की रुचि रचनाकारों, अपनी भूमिकाओं के एक नंबर की पेशकश के द्वारा। उन के बीच में "एल वर्ड" फिल्म। पहले प्रदर्शन करने के लिए चित्र कला का काम सार परिदृश्य बन जाते हैं। दो हज़ार पाँच में, शीर्षक से एक श्रृंखला में बिल्डिंग यह संक्रमण और नुकसान की वसूली के विषयों का अनावरण किया, एक स्मृति वास्तुकला के रूप में बेहोश के निर्माण के लिए एक रूपक के रूप का उपयोग कर। लंदन में "इथाका," जो Konstantinosa Kavafisa के उत्पाद द्वारा नामित किया गया था की एक श्रृंखला प्रदर्शन में एलेक्जेंड्रा हेडिसन, बारिश शीतोष्ण उत्तर अमेरिका में पाए जंगलों तस्वीरें खींची। साप्ताहिक नई यॉर्कर काम दो हज़ार आठ में "कला के लिए पासपोर्ट" में शामिल कहा जाता है। दो हज़ार एक में - दो हज़ार चार वर्षों के साथ एक रिश्ते में था एलेन डीजेनेरेस। दो हज़ार चौदह में Dzhodi फोस्टर के साथ शादी कर ली। एक हज़ार नौ सौ चौरानवे "मेरे साथ सो जाओ", एलेक्जेंड्रा हेडिसन रुचि फिल्म निर्माताओं में और उसके श्यामला अभिनेत्री है कि वह खेला की भूमिका की पेशकश। वह फिल्म "लोइस और क्लार्क" में रेमी के रूप में अभिनय किया। एक हज़ार नौ सौ पचानवे में उन्होंने फिल्म पर काम किया "मेल्रोस प्लेस। " अगली फिल्म में रेबेका की भूमिका थी "मैक्स गायब हो गया है। " एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में, रोंडा के रूप में अपनी भागीदारी के साथ फिल्म "अब किसी भी दिन" बाहर स्क्रीन। एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में, एलेक्जेंड्रा हेडिसन फिल्म में खेला सेली बेनसेन "सात दिन। " सन् दो हज़ार में वह में विक्टोरिया ट्रेकसेल एजेंट की छवि में दिखाई दिया "नैश पुल। " उन्होंने दो हज़ार पाँच में पेंटिंग पर काम किया "बूथ में,"। "एल वर्ड" दो हज़ार छः के बाद से, डायलन मोरलैंड फिल्म में भूमिका निभाई थी। हम एक निर्देशक के रूप में अपने काम के बारे में भूल नहीं कर सकते। इस क्षमता में, वह एनिमेटेड फिल्म बनाने के लिए काम किया है "बूथ में। " एलेक्जेंड्रा हेडिसन टीवी श्रृंखला में एक भूमिका निभाई "एल वर्ड। " भूखंड आठ महिलाओं की कहानी कहता है। कार्रवाई लॉस एंजिल्स में जगह लेता है। इसके अलावा, अभिनेत्री टीवी श्रृंखला में अभिनय किया "नैश पुल। " उसकी कहानी विशेष जांच के आरोप में विभाग के प्रमुख के कहता है। उसका नाम नैश पुल है। अपने विभाग औपचारिक रूप से पुलिस के अंतर्गत आता है, लेकिन व्यवहार में यह सबसे जटिल मामलों की जांच कर रही है। नैश में मदद करता है के उनके साथी और दोस्त Dzho Dominges और हार्वे लीक और इवान कोरटेज। श्रृंखला में, वहाँ भी गैर-स्थायी माध्यमिक कर्मचारी कर रहे हैं। साजिश में कासिडी और निक है। एलेक्जेंड्रा हेडिसन Sci-fi टेलीविजन श्रृंखला में एक भूमिका मिली "सात दिन। " उसकी कहानी है जो एक विधि विकसित की है अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के एक गुप्त विभाग, के बारे में बताती समय यात्रा की। यह विशेष विदेशी प्रौद्योगिकियों कि न्यू मैक्सिको, रोसवेल में पाया गया है पर आधारित है। "कदम वापस" आप निश्चित आपदा को रोकने के लिए प्रति व्यक्ति पिछले सात दिनों में भेजने के लिए अनुमति देता है। प्रतिबंध ईंधन के रूप में विदेशी रिएक्टर की विशेषताओं के कारण लगाए गए हैं, साथ ही साथ। "क्षेत्र" के उपयोग केवल उन मामलों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हुए हैं में अनुमति दी है। परियोजना एक गुप्त सैन्य अड्डे में नेवादा रेगिस्तान में स्थित है। अभिनेत्री भी "किसी भी दिन अब। " नाटकीय टीवी श्रृंखला पर काम किया मेरी एलिजाबेथ सिम्स सफेद और अफ्रीकी मूल के अमेरिकी रेने Dzhekson: उसकी कहानी के बारे में दो महिलाओं बताता है। नागरिक अधिकारों के लिए आंदोलन के दौरान वे साठ के दशक में दोस्त थे। हालांकि, एक झगड़ा के बाद, वे बीस साल के लिए बात की थी। यह जब तक गुजर दूर अपने पिता रेने का नहीं था। उन्होंने कहा कि एक प्रमुख वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता था। गर्भावस्था की वजह से मेरी एलिजाबेथ कॉलेज छोड़ दिया, एक गृहिणी बन गया। रेने, बारी में, एक वकील बन गया। प्रेमिका के वर्षों के बाद एक साथ कर रहे हैं और एक जीवित बनाने के लिए मदद करते हैं। प्रत्येक प्रकरण वर्तमान और पिछले दो नायिकाओं से दृश्य भी शामिल है। इसके अलावा, अभिनेत्री फिल्म में अभिनय "मैक्स गायब हो गया है। " साजिश यह ध्यान का निश्चित रूप से योग्य है। वह लड़का मैक्स के बारे में कहानी कहता है। उनके पिता एक और शादी करके अपनी मां के साथ उसे छोड़ दिया। तो हम आपको अलेक्जेंडर हेडिसन बारे में बताया। अभिनेत्री की तस्वीरें इस सामग्री से जुड़ी।
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Don't Miss!
शाहरूख खान ने चंकी पांडे को क्यों कहा Thank You!
बॉलीवुड के किंग शाहरूख खान ने अपने शो 'सबसे शाणा कौन' में अपनी जिंदगी से जुड़ी कई बातों को भी दर्शकों से शेयर किया है। यह बात तो कई लोगों को पता है कि शाहरूख किसी फिल्मी परिवार से नहीं हैं। बल्कि वह दिल्ली से आंखों में एक्टर बनने का ख्वाब लिए मुंबई आए थे। उस वक्त शाहरूख यहां किसी को नहीं जानते थे।
लेकिन शाहरूख ने बीती बातों को याद करते हुए चंकी पांडे से अपने जुड़ाव की बातों को बताया। सबसे शाणा कौन है के सेट पर शाहरूख ने बताया कि वे चंकी पांडे के काफी करीब हैं और सालों से इनकी दोस्ती है। उन्होंने कहा, चंकी पांडे एक ऐसे हीरो थे, जिन्होंने शुरूआती दिनों में उन्हें रहने के लिए जगह दी और बॉलीवुड से उनकी परिचय कराया। चंकी पांडे ने शाहरूख को अपने बॉलीवुड दोस्तों से मिलाया था।
शाहरूख ने काफी गंभीरता के साथ इन पलों को बांटा और सबके सामने चंकी पांडे को उनके प्यार और सहारे के लिए धन्यवाद दिया। गौरतलब है कि, शाहरूख के शो सबसे शाणा कौन का पहला एपिसोड सोमवार को दिखाया गया। शो में शाहरूख ने काफी धमाकेदार एंट्री ली थी और एक उनके ओपनिंग डांस को दर्शकों ने काफी पसंद किया। इस डांस सीक्वेंस को श्यामक डावर ने कोरियोग्राफ किया था, जिसमें शाहरूख के सभी गानों को शामिल किया गया था।
बहरहाल, शाहरूख की इन्हीं छोटी छोटी बातों की वजह से उनके फैंस उन्हें अपने दिल में जगह दिए हैं। चंकी पांडे को यूं याद करना और सबके साथ इन पलों को शेयर करना शाहरूख की ओर से काफी प्यारा कदम था।
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Don't Miss! शाहरूख खान ने चंकी पांडे को क्यों कहा Thank You! बॉलीवुड के किंग शाहरूख खान ने अपने शो 'सबसे शाणा कौन' में अपनी जिंदगी से जुड़ी कई बातों को भी दर्शकों से शेयर किया है। यह बात तो कई लोगों को पता है कि शाहरूख किसी फिल्मी परिवार से नहीं हैं। बल्कि वह दिल्ली से आंखों में एक्टर बनने का ख्वाब लिए मुंबई आए थे। उस वक्त शाहरूख यहां किसी को नहीं जानते थे। लेकिन शाहरूख ने बीती बातों को याद करते हुए चंकी पांडे से अपने जुड़ाव की बातों को बताया। सबसे शाणा कौन है के सेट पर शाहरूख ने बताया कि वे चंकी पांडे के काफी करीब हैं और सालों से इनकी दोस्ती है। उन्होंने कहा, चंकी पांडे एक ऐसे हीरो थे, जिन्होंने शुरूआती दिनों में उन्हें रहने के लिए जगह दी और बॉलीवुड से उनकी परिचय कराया। चंकी पांडे ने शाहरूख को अपने बॉलीवुड दोस्तों से मिलाया था। शाहरूख ने काफी गंभीरता के साथ इन पलों को बांटा और सबके सामने चंकी पांडे को उनके प्यार और सहारे के लिए धन्यवाद दिया। गौरतलब है कि, शाहरूख के शो सबसे शाणा कौन का पहला एपिसोड सोमवार को दिखाया गया। शो में शाहरूख ने काफी धमाकेदार एंट्री ली थी और एक उनके ओपनिंग डांस को दर्शकों ने काफी पसंद किया। इस डांस सीक्वेंस को श्यामक डावर ने कोरियोग्राफ किया था, जिसमें शाहरूख के सभी गानों को शामिल किया गया था। बहरहाल, शाहरूख की इन्हीं छोटी छोटी बातों की वजह से उनके फैंस उन्हें अपने दिल में जगह दिए हैं। चंकी पांडे को यूं याद करना और सबके साथ इन पलों को शेयर करना शाहरूख की ओर से काफी प्यारा कदम था।
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१ गांव बलांगोचवांण सगतीदांन रायसिंघोत लाडसिंघोत रौ पटै । गांव इकसाखीयो । कोस ६ ईसांन कूंट में ।
१ गांव वड़ससमेरडीया फतैखां नीहालखां माखुखांजोत नै भेरडीया मीया मीदूखां सवाईखां सिरदारखां मादुखांनोत रं पटे। गांव इकसाखीयो । अगनी कूण सें 1
११. सांसण गांवपरिशिष्ट १ (क
६ चारणां रा सांसरण४०७
१ गांव हाडेचाइकसाखीयो । दिस आथूण में भगवानपुरी सिवपुरी भींवपुरी पटै । माहाराज श्री अजीतसिंघजी चीतलवांणो १७६० रा वरस में पधारीया तरै चढायौ' । कोस ७ गांव ।
१ गांव गोपीकोस & प्राथूण । इकसाखीयो । कोसोटो हुवै । चारण करता जमांवत ने चारण अभा मांनावत रे आदो आद, सो गांव बरजांगजी दीया चारण सोडै मई नै ।
१ गांव अगडावो---
दुसाखीयो । चारण रांगा प्रगता वागावत है। भाखरसिंघ र दीयोड़ो । कोस १६ । सा० पातलोत दीयो धवेचे, पायौ रोहड़ीयै नाथै ।
१. भेंट किया।
१ गाँव घरणावस -
दुसाखीयो । दिस उतराद कोस १३ । चारण भांना रौ । चारण जादे ऊमा रौ दत व्यारी मलकमली सेरखां दीयो, संमत १६६० रा बरस में, चारण भादो वणसूर पायौ ।
१ गांव पादरड़ीइखसाखीयो । दिस ईसांन कूंट । कोस १० । चारण खेता वजा रै दत्त, राव रै वरजांगजी रो । पर्छ राव वरजांगसिंघजी संभत १७६० में दीयो ।
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एक गांव बलांगोचवांण सगतीदांन रायसिंघोत लाडसिंघोत रौ पटै । गांव इकसाखीयो । कोस छः ईसांन कूंट में । एक गांव वड़ससमेरडीया फतैखां नीहालखां माखुखांजोत नै भेरडीया मीया मीदूखां सवाईखां सिरदारखां मादुखांनोत रं पटे। गांव इकसाखीयो । अगनी कूण सें एक ग्यारह. सांसण गांवपरिशिष्ट एक (क छः चारणां रा सांसरणचार सौ सात एक गांव हाडेचाइकसाखीयो । दिस आथूण में भगवानपुरी सिवपुरी भींवपुरी पटै । माहाराज श्री अजीतसिंघजी चीतलवांणो एक हज़ार सात सौ साठ रा वरस में पधारीया तरै चढायौ' । कोस सात गांव । एक गांव गोपीकोस & प्राथूण । इकसाखीयो । कोसोटो हुवै । चारण करता जमांवत ने चारण अभा मांनावत रे आदो आद, सो गांव बरजांगजी दीया चारण सोडै मई नै । एक गांव अगडावो--- दुसाखीयो । चारण रांगा प्रगता वागावत है। भाखरसिंघ र दीयोड़ो । कोस सोलह । साशून्य पातलोत दीयो धवेचे, पायौ रोहड़ीयै नाथै । एक. भेंट किया। एक गाँव घरणावस - दुसाखीयो । दिस उतराद कोस तेरह । चारण भांना रौ । चारण जादे ऊमा रौ दत व्यारी मलकमली सेरखां दीयो, संमत एक हज़ार छः सौ साठ रा बरस में, चारण भादो वणसूर पायौ । एक गांव पादरड़ीइखसाखीयो । दिस ईसांन कूंट । कोस दस । चारण खेता वजा रै दत्त, राव रै वरजांगजी रो । पर्छ राव वरजांगसिंघजी संभत एक हज़ार सात सौ साठ में दीयो ।
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केंद्र ने राज्यों को आगाह किया है कि मौजूदा उपलब्ध तथ्यों के अनुसार कोविड-19 का नया स्वरूप ओमीक्रोन डेल्टा के मुकाबले तीन गुना अधिक तेजी से फैलता है। केंद्र ने राज्यों को नए संक्रमण में तेजी आने की स्थिति में तत्काल त्वरित उपाय करने की सलाह दी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में अब तक ओमीक्रोन के 200 मामले सामने आए हैं। इनमें महाराष्ट्र और दिल्ली में इस नए स्वरूप के 54-54 मामले सामने आए हैं। ओमीक्रोन से संक्रमित कुल लोगों में 77 को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है या वे ठीक हो गए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने राज्य स्वास्थ्य विभागों को लिखे पत्र में उन जिलों में अधिक कारगर उपाय करने के लिए कहा गया है जहां पिछले एक सप्ताह में लोगों के संक्रमित होने की दर 10 प्रतिशत से अधिक रही है या ऑक्सीजन सुविधा वाले या सघन चिकित्सा सुविधा वाले बिस्तरों में 40 प्रतिशत से अधिक भर चुके हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने फिर कहा कि राज्यों को रोजाना होने वाली कुल जांचों में आरटी-पीसीआर जांच का अनुपात बढ़ाना होगा और संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाना होगा। मंत्रालय ने यह भी कहा कि उन जिलों में विशेष सावधानी बरतनी होगी जहां कोविड से बचाव की पहली एवं दूसरी खुराक लगाए जाने की दर राष्ट्रीय औसत से कम रही है।
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केंद्र ने राज्यों को आगाह किया है कि मौजूदा उपलब्ध तथ्यों के अनुसार कोविड-उन्नीस का नया स्वरूप ओमीक्रोन डेल्टा के मुकाबले तीन गुना अधिक तेजी से फैलता है। केंद्र ने राज्यों को नए संक्रमण में तेजी आने की स्थिति में तत्काल त्वरित उपाय करने की सलाह दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में अब तक ओमीक्रोन के दो सौ मामले सामने आए हैं। इनमें महाराष्ट्र और दिल्ली में इस नए स्वरूप के चौवन-चौवन मामले सामने आए हैं। ओमीक्रोन से संक्रमित कुल लोगों में सतहत्तर को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है या वे ठीक हो गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने राज्य स्वास्थ्य विभागों को लिखे पत्र में उन जिलों में अधिक कारगर उपाय करने के लिए कहा गया है जहां पिछले एक सप्ताह में लोगों के संक्रमित होने की दर दस प्रतिशत से अधिक रही है या ऑक्सीजन सुविधा वाले या सघन चिकित्सा सुविधा वाले बिस्तरों में चालीस प्रतिशत से अधिक भर चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने फिर कहा कि राज्यों को रोजाना होने वाली कुल जांचों में आरटी-पीसीआर जांच का अनुपात बढ़ाना होगा और संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाना होगा। मंत्रालय ने यह भी कहा कि उन जिलों में विशेष सावधानी बरतनी होगी जहां कोविड से बचाव की पहली एवं दूसरी खुराक लगाए जाने की दर राष्ट्रीय औसत से कम रही है।
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दिल्ली में आपदा प्रबंधन अथॉरिटी (डीडीएमए) ने कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली में कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जिसके तहत प्राइवेट ऑफिस बंद करने और वर्क फ्रॉम होम का आदेश जारी किया गया है. आदेश में कहा गया है कि केवल आवश्यक सेवाओं वाले कार्यालयों को ही छूट दी जाएगी.
अब तक कार्यालयों को अपने आधे कर्मचारियों के साथ कार्यालय में और बाकी को घर से काम करने के लिए कहा गया था. शहर के सरकारी कार्यालय 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ काम कर रहे हैं.
नए नियम से छूट पाने वालों में निजी बैंक, आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाले कार्यालय, बीमा कंपनियां, फार्मा कंपनियां, माइक्रोफाइनेंस कंपनियां, वकीलों के कार्यालय और कूरियर सेवाएं शामिल हैं.
* प्राइवेट बैंकों को छूट मिलेगी.
* जरूरी सर्विस देने वाली कंपनियों के दफ्तर भी खुले रह सकेंगे.
* इंश्योरेंस और मेडिक्लेम कंपनियों को भी छूट है.
* फार्मा कंपनियों के ऑफिस, जिसमें प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन के मैनेजमेंट की जरूरत हो.
* रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अधीन आने वाली नियमित संस्थाएं या इंटरमीडियरी.
* सभी नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कॉरपोरेशंस को भी छूट होगी.
* सभी माइक्रोफाइनेंस संस्थान भी खुले रह सकते हैं.
* अगर अदालतें/ ट्रिब्यूनल या कमीशन खुले हैं तो वकीलों के दफ्तर भी खुले रह सकते हैं.
* कूरियर सेवाएं भी छूट पाने वाली संस्थाओं के अंतर्गत आती हैं.
दिल्ली में सोमवार को कोरोना वायरस के 19 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आये थे. वहीं, 14,076 मरीज डिस्चार्ज हुए हैं. यहां 17 लोगों की मौत हुई है. दिल्ली में संक्रमण दर 25 प्रतिशत तक पहुंच गई है. पूरे देश में कोरोना वायरस के 1,68,063 नए मामले सामने आए हैं. इस दौरान देश में कोरोना के 69,959 मरीज रिकवर हुए हैं और 277 की मौत हुई है.
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दिल्ली में आपदा प्रबंधन अथॉरिटी ने कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली में कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जिसके तहत प्राइवेट ऑफिस बंद करने और वर्क फ्रॉम होम का आदेश जारी किया गया है. आदेश में कहा गया है कि केवल आवश्यक सेवाओं वाले कार्यालयों को ही छूट दी जाएगी. अब तक कार्यालयों को अपने आधे कर्मचारियों के साथ कार्यालय में और बाकी को घर से काम करने के लिए कहा गया था. शहर के सरकारी कार्यालय पचास प्रतिशत उपस्थिति के साथ काम कर रहे हैं. नए नियम से छूट पाने वालों में निजी बैंक, आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वाले कार्यालय, बीमा कंपनियां, फार्मा कंपनियां, माइक्रोफाइनेंस कंपनियां, वकीलों के कार्यालय और कूरियर सेवाएं शामिल हैं. * प्राइवेट बैंकों को छूट मिलेगी. * जरूरी सर्विस देने वाली कंपनियों के दफ्तर भी खुले रह सकेंगे. * इंश्योरेंस और मेडिक्लेम कंपनियों को भी छूट है. * फार्मा कंपनियों के ऑफिस, जिसमें प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन के मैनेजमेंट की जरूरत हो. * रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अधीन आने वाली नियमित संस्थाएं या इंटरमीडियरी. * सभी नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कॉरपोरेशंस को भी छूट होगी. * सभी माइक्रोफाइनेंस संस्थान भी खुले रह सकते हैं. * अगर अदालतें/ ट्रिब्यूनल या कमीशन खुले हैं तो वकीलों के दफ्तर भी खुले रह सकते हैं. * कूरियर सेवाएं भी छूट पाने वाली संस्थाओं के अंतर्गत आती हैं. दिल्ली में सोमवार को कोरोना वायरस के उन्नीस हजार से ज्यादा नए मामले सामने आये थे. वहीं, चौदह,छिहत्तर मरीज डिस्चार्ज हुए हैं. यहां सत्रह लोगों की मौत हुई है. दिल्ली में संक्रमण दर पच्चीस प्रतिशत तक पहुंच गई है. पूरे देश में कोरोना वायरस के एक,अड़सठ,तिरेसठ नए मामले सामने आए हैं. इस दौरान देश में कोरोना के उनहत्तर,नौ सौ उनसठ मरीज रिकवर हुए हैं और दो सौ सतहत्तर की मौत हुई है.
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सपा प्रमुख ने कहा, मैं अपनी पार्टी के लोगों से कहूंगा कि जहां पर मशीनें रखी गई हैं, वहां पर जब तक काउंटिंग ना हो जाए तब तक वहां किसी का आना जाना ना हो और उसपर नज़र बनाए रखें।
लखनऊः उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 मार्च को आएंगे। लेकिन परिणाम से पहले आए एग्जिट पोल ने विपक्षी पार्टियों की चिंता को बढ़ा दिया है। मंगलवार को समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं से स्ट्रॉन्ग रूम पर नजर बनाए रखने के लिए कहा है।
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, उत्तर प्रदेश का चुनाव लोकतंत्र की आखिरी लड़ाई है। इसके बाद लोगों को क्रांति करनी होगी तभी बदलाव आएगा। सपा प्रमुख ने कहा, मैं अपनी पार्टी के लोगों से कहूंगा कि जहां पर मशीनें रखी गई हैं, वहां पर जब तक काउंटिंग ना हो जाए तब तक वहां किसी का आना जाना ना हो और उसपर नज़र बनाए रखें।
अखिलेश यादव एग्जिट पोल के नतीजों को लेकर कहा, कल जो एग्जिट पोल के नतीजें आए हैं, उससे ये लोग यह सोच बनाना चाहते हैं कि भाजपा जीत रही है, जिससे वे अगर चोरी भी करे तो वह भी पता ना लगे कि चोरी हुई है। यह लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा खतरा है।
ईवीएम की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करते हुए सपा नेता ने कहा, क्या वजह है कि बिना सुरक्षा के EVM मशीनों को ले जाया जा रहा है। बिना प्रत्याशी के जानकारी के आप ईवीएम के एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जा सकते हैं। आखिर सुरक्षाबलों के साथ ईवीएम मीशनों क्यों नहीं जा रही थी।
उन्होंने कहा, ईवीएम मशीनें पकड़ी गई हैं। अब अधिकारी कोई ना कोई बहाना बनाएंगे कि हम ईवीएम को इस वजह से ले जा रहे थे। बरेली में कचड़े की गाड़ी में ईवीएम मशीनें पकड़ी गई हैं।
बता दें कि एग्जिट पोल के नतीजों को लेकर सपा संतुष्ट नहीं है। तमाम एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी की 403 विभानसभा सीटों वाले राज्य में दोबारा सरकार बनती हुई नजर आ रही है।
हालांकि एंटी इनकम्बेंसी की वजह से भारतीय जनता पार्टी को सीटों का नुकसान होते हुए दिखा दे रहा है। लेकिन फिर वह पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाती हुई दिखाई दे रही है।
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सपा प्रमुख ने कहा, मैं अपनी पार्टी के लोगों से कहूंगा कि जहां पर मशीनें रखी गई हैं, वहां पर जब तक काउंटिंग ना हो जाए तब तक वहां किसी का आना जाना ना हो और उसपर नज़र बनाए रखें। लखनऊः उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे दस मार्च को आएंगे। लेकिन परिणाम से पहले आए एग्जिट पोल ने विपक्षी पार्टियों की चिंता को बढ़ा दिया है। मंगलवार को समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं से स्ट्रॉन्ग रूम पर नजर बनाए रखने के लिए कहा है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, उत्तर प्रदेश का चुनाव लोकतंत्र की आखिरी लड़ाई है। इसके बाद लोगों को क्रांति करनी होगी तभी बदलाव आएगा। सपा प्रमुख ने कहा, मैं अपनी पार्टी के लोगों से कहूंगा कि जहां पर मशीनें रखी गई हैं, वहां पर जब तक काउंटिंग ना हो जाए तब तक वहां किसी का आना जाना ना हो और उसपर नज़र बनाए रखें। अखिलेश यादव एग्जिट पोल के नतीजों को लेकर कहा, कल जो एग्जिट पोल के नतीजें आए हैं, उससे ये लोग यह सोच बनाना चाहते हैं कि भाजपा जीत रही है, जिससे वे अगर चोरी भी करे तो वह भी पता ना लगे कि चोरी हुई है। यह लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा खतरा है। ईवीएम की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करते हुए सपा नेता ने कहा, क्या वजह है कि बिना सुरक्षा के EVM मशीनों को ले जाया जा रहा है। बिना प्रत्याशी के जानकारी के आप ईवीएम के एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जा सकते हैं। आखिर सुरक्षाबलों के साथ ईवीएम मीशनों क्यों नहीं जा रही थी। उन्होंने कहा, ईवीएम मशीनें पकड़ी गई हैं। अब अधिकारी कोई ना कोई बहाना बनाएंगे कि हम ईवीएम को इस वजह से ले जा रहे थे। बरेली में कचड़े की गाड़ी में ईवीएम मशीनें पकड़ी गई हैं। बता दें कि एग्जिट पोल के नतीजों को लेकर सपा संतुष्ट नहीं है। तमाम एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी की चार सौ तीन विभानसभा सीटों वाले राज्य में दोबारा सरकार बनती हुई नजर आ रही है। हालांकि एंटी इनकम्बेंसी की वजह से भारतीय जनता पार्टी को सीटों का नुकसान होते हुए दिखा दे रहा है। लेकिन फिर वह पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाती हुई दिखाई दे रही है।
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