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KANPUR : नवाबगंज में रविवार को संदिग्ध परिस्थिति में किशोरी की मौत हो गई। उसका शव रूम में फंदे पर लटका मिला। परिजन घर पहुंचे तो उसका शव देख घर पर कोहराम मच गया। सूचना पर पुलिस ने मौके पर जाकर शव को पोस्टमॉर्टम भेज दिया। परिजनों के कुछ भी बोलने से मना करने से मामला और संदिग्ध हो गया है।
नवाबगंज के गिल्लीपुरवा में रहने वाले दाताराम निषाद किसान हैं। उनके दो बेटियां रागिनी(17) और रोशनी है। वो रविवार को काम पर गए थे। रोशनी भी मां के साथ रिश्तेदार के घर गई थी। रागिनी घर पर अकेली थी। दोपहर में बहन घर पहुंची तो मेन गेट खुला था। वो घर के अन्दर गई तो रागिनी का शव फांसी पर लटका था। जिसे देख वो चीख पड़ी। पड़ोसी समेत इलाकाई लोग मौके पर पहुंच गए। उन्होंने परिजनों को जानकारी दी तो वे भागकर घर पहुंचे। सूचना पर पुलिस ने मौके पर जाकर शव को पोस्टमार्टम भेजा। एसओ का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मौत का कारण पता चलेगा। फिलहाल पुलिस जांच कर रही है।
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KANPUR : नवाबगंज में रविवार को संदिग्ध परिस्थिति में किशोरी की मौत हो गई। उसका शव रूम में फंदे पर लटका मिला। परिजन घर पहुंचे तो उसका शव देख घर पर कोहराम मच गया। सूचना पर पुलिस ने मौके पर जाकर शव को पोस्टमॉर्टम भेज दिया। परिजनों के कुछ भी बोलने से मना करने से मामला और संदिग्ध हो गया है। नवाबगंज के गिल्लीपुरवा में रहने वाले दाताराम निषाद किसान हैं। उनके दो बेटियां रागिनी और रोशनी है। वो रविवार को काम पर गए थे। रोशनी भी मां के साथ रिश्तेदार के घर गई थी। रागिनी घर पर अकेली थी। दोपहर में बहन घर पहुंची तो मेन गेट खुला था। वो घर के अन्दर गई तो रागिनी का शव फांसी पर लटका था। जिसे देख वो चीख पड़ी। पड़ोसी समेत इलाकाई लोग मौके पर पहुंच गए। उन्होंने परिजनों को जानकारी दी तो वे भागकर घर पहुंचे। सूचना पर पुलिस ने मौके पर जाकर शव को पोस्टमार्टम भेजा। एसओ का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मौत का कारण पता चलेगा। फिलहाल पुलिस जांच कर रही है।
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अनिवार्य साधन आवश्यक या अनिवार्य; विषमता विपरीत लिंग के सदस्यों के बीच यौन गतिविधि को संदर्भित करती है।
वाक्यांश "अनिवार्य विषमता" मूल रूप से नर-वर्चस्व वाले समाज द्वारा धारणा को संदर्भित करता है कि एकमात्र सामान्य यौन संबंध एक आदमी और एक महिला के बीच होता है। समाज विषमता को लागू करता है, ब्रांडिंग को किसी भी विचलन या अनुपालन के रूप में ब्रांडिंग करता है। विषमता की सामान्यता और इसकी अवज्ञा दोनों राजनीतिक कृत्यों हैं।
वाक्यांश में निहितार्थ है कि विषमता न तो जन्मजात है और न ही व्यक्ति द्वारा चुने जाते हैं, बल्कि संस्कृति का एक उत्पाद है और इस प्रकार मजबूर किया जाता है।
अनिवार्य विषमता के सिद्धांत के पीछे यह विचार है कि जैविक यौन संबंध निर्धारित होता है, कि लिंग यह है कि कोई कैसे व्यवहार करता है, और कामुकता एक प्राथमिकता है।
एड्रियान रिच ने 1 9 80 के निबंध "अनिवार्य विषमता और लेस्बियन अस्तित्व" में वाक्यांश "अनिवार्य विषमता" को लोकप्रिय किया। निबंध में, उन्होंने विशेष रूप से समलैंगिक नारीवादी दृष्टिकोण से तर्क दिया कि विषमता मनुष्यों में सहज नहीं है। उसने कहा, न ही यह एकमात्र सामान्य कामुकता है। उन्होंने आगे कहा कि महिलाएं पुरुषों के साथ संबंधों की तुलना में अन्य महिलाओं के साथ संबंधों से अधिक लाभ उठा सकती हैं।
रिच के सिद्धांत के मुताबिक अनिवार्य विषमता, पुरुषों की महिलाओं के अधीनता की सेवा में उभरती है और उभरती है। महिलाओं के लिए पुरुषों की पहुंच अनिवार्य विषमता से संरक्षित है।
संस्था को "उचित" स्त्री व्यवहार के मानदंडों से मजबूत किया जाता है।
संस्कृति द्वारा लागू अनिवार्य विषमता कैसे है? अमीर कला और लोकप्रिय संस्कृति को आज (टेलीविजन, फिल्में, विज्ञापन) शक्तिशाली मीडिया के रूप में देखता है ताकि विषमता को एकमात्र सामान्य व्यवहार के रूप में मजबूत किया जा सके।
वह इसके बजाय प्रस्ताव करती है कि कामुकता "समलैंगिक निरंतरता" पर है। जब तक कि महिलाओं को अन्य महिलाओं के साथ गैर-यौन संबंध नहीं हो सकते हैं, और सांस्कृतिक फैसले को लागू किए बिना यौन संबंध हो सकते हैं , रिच का मानना नहीं था कि महिलाओं में वास्तव में शक्ति हो सकती है, और इस प्रकार नारीवाद अनिवार्य विषमता की प्रणाली के तहत अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सका।
अनिवार्य विषमता, रिच पाया, नारीवादी आंदोलन के भीतर भी व्यापक था, अनिवार्य रूप से नारीवादी छात्रवृत्ति और नारीवादी सक्रियता दोनों पर हावी है। लेस्बियन जीवन इतिहास और अन्य गंभीर अध्ययनों में अदृश्य थे, और समलैंगिकों का स्वागत नहीं किया गया और उन्हें अपमानजनक के रूप में देखा गया और इसलिए नारीवादी आंदोलन की स्वीकृति के लिए एक खतरा था।
एड्रियान रिच एक प्रमुख नारीवादी कवि और लेखक हैं जो 1 9 76 में समलैंगिक के रूप में बाहर आए।
एड्रियान रिच ने तर्क दिया कि पितृसत्तात्मक, पुरुष-वर्चस्व वाला समाज अनिवार्य विषमता पर जोर देता है क्योंकि पुरुष नर-मादा संबंधों से लाभान्वित होते हैं। समाज विषम संबंधों को रोमांटिक बनाता है। इसलिए, वह तर्क देती है कि पुरुष मिथक को कायम रखते हैं कि कोई अन्य रिश्ते किसी भी तरह से भयानक हैं।
एड्रियान रिच ने "अनिवार्य विषमता . . . " में लिखा था कि चूंकि मनुष्यों का पहला बंधन मां के साथ होता है, इसलिए पुरुषों और महिलाओं दोनों के साथ संबंध या संबंध होते हैं। अन्य नारीवादी सिद्धांतवादी एड्रियान रिच के तर्क से असहमत थे कि सभी महिलाओं के पास महिलाओं के लिए प्राकृतिक आकर्षण है।
1 9 70 के दशक के दौरान, महिला स्वतंत्रता आंदोलन के अन्य सदस्यों द्वारा कभी-कभी समलैंगिक नारीवादियों को छोड़ दिया जाता था। एड्रियान रिच ने तर्क दिया कि वर्चस्व को तोड़ने और अनिवार्य विषमता को अस्वीकार करने के लिए समलैंगिकता के बारे में मुखर होना जरूरी था कि समाज ने महिलाओं पर मजबूर किया।
1 9 70 के दशक में नारीवादी आंदोलन, समलैंगिक, और अन्य गैर-विषम संबंधों में असहमति संयुक्त राज्य अमेरिका के समाज में अधिक खुले तौर पर स्वीकार हो गई है। कुछ नारीवादी और जीएलबीटी विद्वानों ने "अनिवार्य विषमता" शब्द की जांच जारी रखी है क्योंकि वे एक ऐसे समाज की पूर्वाग्रहों का पता लगाते हैं जो विषम संबंधों को पसंद करते हैं।
इस और इसी तरह की अवधारणाओं के लिए अन्य नाम हीटरोक्सिज्म और विषमताशीलता हैं।
- > कैथलीन एल बैरी। महिला यौन दासता । 1979।
- > पीएल बर्गर और टी। लकमेन। वास्तविकता का सामाजिक निर्माण । 1976।
- > आरडब्ल्यू कॉनेल। मस्तिष्क 2005।
- > कैथरीन ए मैककिन्नन। कामकाजी महिलाओं के यौन उत्पीड़न । 1979।
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अनिवार्य साधन आवश्यक या अनिवार्य; विषमता विपरीत लिंग के सदस्यों के बीच यौन गतिविधि को संदर्भित करती है। वाक्यांश "अनिवार्य विषमता" मूल रूप से नर-वर्चस्व वाले समाज द्वारा धारणा को संदर्भित करता है कि एकमात्र सामान्य यौन संबंध एक आदमी और एक महिला के बीच होता है। समाज विषमता को लागू करता है, ब्रांडिंग को किसी भी विचलन या अनुपालन के रूप में ब्रांडिंग करता है। विषमता की सामान्यता और इसकी अवज्ञा दोनों राजनीतिक कृत्यों हैं। वाक्यांश में निहितार्थ है कि विषमता न तो जन्मजात है और न ही व्यक्ति द्वारा चुने जाते हैं, बल्कि संस्कृति का एक उत्पाद है और इस प्रकार मजबूर किया जाता है। अनिवार्य विषमता के सिद्धांत के पीछे यह विचार है कि जैविक यौन संबंध निर्धारित होता है, कि लिंग यह है कि कोई कैसे व्यवहार करता है, और कामुकता एक प्राथमिकता है। एड्रियान रिच ने एक नौ अस्सी के निबंध "अनिवार्य विषमता और लेस्बियन अस्तित्व" में वाक्यांश "अनिवार्य विषमता" को लोकप्रिय किया। निबंध में, उन्होंने विशेष रूप से समलैंगिक नारीवादी दृष्टिकोण से तर्क दिया कि विषमता मनुष्यों में सहज नहीं है। उसने कहा, न ही यह एकमात्र सामान्य कामुकता है। उन्होंने आगे कहा कि महिलाएं पुरुषों के साथ संबंधों की तुलना में अन्य महिलाओं के साथ संबंधों से अधिक लाभ उठा सकती हैं। रिच के सिद्धांत के मुताबिक अनिवार्य विषमता, पुरुषों की महिलाओं के अधीनता की सेवा में उभरती है और उभरती है। महिलाओं के लिए पुरुषों की पहुंच अनिवार्य विषमता से संरक्षित है। संस्था को "उचित" स्त्री व्यवहार के मानदंडों से मजबूत किया जाता है। संस्कृति द्वारा लागू अनिवार्य विषमता कैसे है? अमीर कला और लोकप्रिय संस्कृति को आज शक्तिशाली मीडिया के रूप में देखता है ताकि विषमता को एकमात्र सामान्य व्यवहार के रूप में मजबूत किया जा सके। वह इसके बजाय प्रस्ताव करती है कि कामुकता "समलैंगिक निरंतरता" पर है। जब तक कि महिलाओं को अन्य महिलाओं के साथ गैर-यौन संबंध नहीं हो सकते हैं, और सांस्कृतिक फैसले को लागू किए बिना यौन संबंध हो सकते हैं , रिच का मानना नहीं था कि महिलाओं में वास्तव में शक्ति हो सकती है, और इस प्रकार नारीवाद अनिवार्य विषमता की प्रणाली के तहत अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सका। अनिवार्य विषमता, रिच पाया, नारीवादी आंदोलन के भीतर भी व्यापक था, अनिवार्य रूप से नारीवादी छात्रवृत्ति और नारीवादी सक्रियता दोनों पर हावी है। लेस्बियन जीवन इतिहास और अन्य गंभीर अध्ययनों में अदृश्य थे, और समलैंगिकों का स्वागत नहीं किया गया और उन्हें अपमानजनक के रूप में देखा गया और इसलिए नारीवादी आंदोलन की स्वीकृति के लिए एक खतरा था। एड्रियान रिच एक प्रमुख नारीवादी कवि और लेखक हैं जो एक नौ छिहत्तर में समलैंगिक के रूप में बाहर आए। एड्रियान रिच ने तर्क दिया कि पितृसत्तात्मक, पुरुष-वर्चस्व वाला समाज अनिवार्य विषमता पर जोर देता है क्योंकि पुरुष नर-मादा संबंधों से लाभान्वित होते हैं। समाज विषम संबंधों को रोमांटिक बनाता है। इसलिए, वह तर्क देती है कि पुरुष मिथक को कायम रखते हैं कि कोई अन्य रिश्ते किसी भी तरह से भयानक हैं। एड्रियान रिच ने "अनिवार्य विषमता . . . " में लिखा था कि चूंकि मनुष्यों का पहला बंधन मां के साथ होता है, इसलिए पुरुषों और महिलाओं दोनों के साथ संबंध या संबंध होते हैं। अन्य नारीवादी सिद्धांतवादी एड्रियान रिच के तर्क से असहमत थे कि सभी महिलाओं के पास महिलाओं के लिए प्राकृतिक आकर्षण है। एक नौ सत्तर के दशक के दौरान, महिला स्वतंत्रता आंदोलन के अन्य सदस्यों द्वारा कभी-कभी समलैंगिक नारीवादियों को छोड़ दिया जाता था। एड्रियान रिच ने तर्क दिया कि वर्चस्व को तोड़ने और अनिवार्य विषमता को अस्वीकार करने के लिए समलैंगिकता के बारे में मुखर होना जरूरी था कि समाज ने महिलाओं पर मजबूर किया। एक नौ सत्तर के दशक में नारीवादी आंदोलन, समलैंगिक, और अन्य गैर-विषम संबंधों में असहमति संयुक्त राज्य अमेरिका के समाज में अधिक खुले तौर पर स्वीकार हो गई है। कुछ नारीवादी और जीएलबीटी विद्वानों ने "अनिवार्य विषमता" शब्द की जांच जारी रखी है क्योंकि वे एक ऐसे समाज की पूर्वाग्रहों का पता लगाते हैं जो विषम संबंधों को पसंद करते हैं। इस और इसी तरह की अवधारणाओं के लिए अन्य नाम हीटरोक्सिज्म और विषमताशीलता हैं। - > कैथलीन एल बैरी। महिला यौन दासता । एक हज़ार नौ सौ उन्यासी। - > पीएल बर्गर और टी। लकमेन। वास्तविकता का सामाजिक निर्माण । एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर। - > आरडब्ल्यू कॉनेल। मस्तिष्क दो हज़ार पाँच। - > कैथरीन ए मैककिन्नन। कामकाजी महिलाओं के यौन उत्पीड़न । एक हज़ार नौ सौ उन्यासी।
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दिल्ली में मेयर चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी की याचिका पर आज यानी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. MCD में मेयर का चुनाव कराने के लिए AAP की उम्मीदवार डॉ. शैली ओबेरॉय की ओर से याचिका दायर की गई है. डॉ. शैली ओबेराय ने सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी के जरिए याचिका दायर की है. वहीं, MCD ने मेयर चुनाव कराए जाने के लिए एजेंडा जारी कर दिया है.
बता दें कि 6 और 24 जनवरी को सदन में लगातार हंगामा और मारपीट के बाद दिल्ली नगर निगम के मेयर चुनाव अब 6 फरवरी को होगा. दिल्ली नगर निगम की साधारण बैठक हर महीने में एक बार होती है, लेकिन ऐसा पहली बार होगा, जब महज एक बैठक में मेयर को नहीं चुना जा सका और इसके लिए तीसरी बैठक बुलानी पड़ी.
एमसीडी ने एजेंडा भी जारी कर दिया है, जिसमें पहले मेयर, फिर डिप्टी मेयर और आखिर में स्टैंडिंग कमेटी के 6 सदस्य चुने जाएंगे. एमसीडी ने बैलट पेपर का प्रकाशन भी नए सिरे से करवा लिया है. एमसीडी चुनाव के परिणाम 7 दिसंबर को आए थे.
6 फरवरी को मेयर चुनने की तीसरी बैठक के पहले आम आदमी पार्टी और बीजेपी ने एक-दूसरे पर पिछली दो बैठकों के लिए हंगामे का ना सिर्फ जिम्मेदार ठहराया बल्कि मेयर ना चुने जाने के पीछे आरोप प्रत्यारोप लगाए. बीजेपी को डर सता रहा है कि 134 सीटें पाकर बहुमत में रहने वाली आम आदमी पार्टी मेयर और उपमहापौर के चुनाव के बाद स्टैंडिंग कमेटी के चुने जाने वाले 6 सदस्यों के चुनाव में हंगामा कर सकती है.
सूत्रों के मुताबिक आम आदमी पार्टी को लगता है कि 104 सीटें जीतने वाली बीजेपी स्टैंडिंग कमेटी के चुनाव में जोड़-तोड़ कर सकती है. लिहाजा हंगामे के आसार बने रहेंगे. सबसे बड़ा काम 250 निर्वाचित पार्षदों की शपथ था जो कि 24 जनवरी को पूरा हो चुका है. अब मेयर चुनाव की प्रक्रिया ही बाकी रह गई है, जिसमें ज्यादा समय नहीं लगने की संभावना है.
दरअसल, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा उपराज्यपाल से 6 फरवरी की तारीख तय करने की सिफारिश की गई थी. अब अगामी सोमवार को मेयर, डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमेटी के 6 सदस्यों के चुनाव के लिए पार्षद मतदान करेंगे. एमसीडी ने बैठक फिर से बुलाने के लिए 10 फरवरी की तारीख प्रस्तावित की थी, जबकि आप के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने तीन विकल्पों के रूप में 3, 4 और 6 फरवरी का सुझाव दिया था. जिसे मानते हुए उपराज्यपाल ने 6 फरवरी तारीख तय की है.
इससे पहले दो बार 6 जनवरी और 24 जनवरी को आम आदमी पार्टी और भाजपा पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक के बीच सत्र स्थगित हो गया था. जिसके बाद आप की मेयर पद की उम्मीदवार शैली ओबेरॉय ने समयबद्ध तरीके से मेयर का चुनाव कराने की मांग को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
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दिल्ली में मेयर चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी की याचिका पर आज यानी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. MCD में मेयर का चुनाव कराने के लिए AAP की उम्मीदवार डॉ. शैली ओबेरॉय की ओर से याचिका दायर की गई है. डॉ. शैली ओबेराय ने सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी के जरिए याचिका दायर की है. वहीं, MCD ने मेयर चुनाव कराए जाने के लिए एजेंडा जारी कर दिया है. बता दें कि छः और चौबीस जनवरी को सदन में लगातार हंगामा और मारपीट के बाद दिल्ली नगर निगम के मेयर चुनाव अब छः फरवरी को होगा. दिल्ली नगर निगम की साधारण बैठक हर महीने में एक बार होती है, लेकिन ऐसा पहली बार होगा, जब महज एक बैठक में मेयर को नहीं चुना जा सका और इसके लिए तीसरी बैठक बुलानी पड़ी. एमसीडी ने एजेंडा भी जारी कर दिया है, जिसमें पहले मेयर, फिर डिप्टी मेयर और आखिर में स्टैंडिंग कमेटी के छः सदस्य चुने जाएंगे. एमसीडी ने बैलट पेपर का प्रकाशन भी नए सिरे से करवा लिया है. एमसीडी चुनाव के परिणाम सात दिसंबर को आए थे. छः फरवरी को मेयर चुनने की तीसरी बैठक के पहले आम आदमी पार्टी और बीजेपी ने एक-दूसरे पर पिछली दो बैठकों के लिए हंगामे का ना सिर्फ जिम्मेदार ठहराया बल्कि मेयर ना चुने जाने के पीछे आरोप प्रत्यारोप लगाए. बीजेपी को डर सता रहा है कि एक सौ चौंतीस सीटें पाकर बहुमत में रहने वाली आम आदमी पार्टी मेयर और उपमहापौर के चुनाव के बाद स्टैंडिंग कमेटी के चुने जाने वाले छः सदस्यों के चुनाव में हंगामा कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक आम आदमी पार्टी को लगता है कि एक सौ चार सीटें जीतने वाली बीजेपी स्टैंडिंग कमेटी के चुनाव में जोड़-तोड़ कर सकती है. लिहाजा हंगामे के आसार बने रहेंगे. सबसे बड़ा काम दो सौ पचास निर्वाचित पार्षदों की शपथ था जो कि चौबीस जनवरी को पूरा हो चुका है. अब मेयर चुनाव की प्रक्रिया ही बाकी रह गई है, जिसमें ज्यादा समय नहीं लगने की संभावना है. दरअसल, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा उपराज्यपाल से छः फरवरी की तारीख तय करने की सिफारिश की गई थी. अब अगामी सोमवार को मेयर, डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमेटी के छः सदस्यों के चुनाव के लिए पार्षद मतदान करेंगे. एमसीडी ने बैठक फिर से बुलाने के लिए दस फरवरी की तारीख प्रस्तावित की थी, जबकि आप के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने तीन विकल्पों के रूप में तीन, चार और छः फरवरी का सुझाव दिया था. जिसे मानते हुए उपराज्यपाल ने छः फरवरी तारीख तय की है. इससे पहले दो बार छः जनवरी और चौबीस जनवरी को आम आदमी पार्टी और भाजपा पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक के बीच सत्र स्थगित हो गया था. जिसके बाद आप की मेयर पद की उम्मीदवार शैली ओबेरॉय ने समयबद्ध तरीके से मेयर का चुनाव कराने की मांग को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
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उनमें से एक, शायद सबसे अधिक ध्यान देने योग्य, अभी भी रूसी सरकार में है। इसके अलावा, उन्हें सभी माफ कर दिया गया और इस देश के भविष्य के लिए जिम्मेदार बनाया गया। यह OJSC RUSNANO के बोर्ड के अध्यक्ष अनातोली चुबैस हैं। क्या होगा यदि वह अपने साथी आदिवासियों को नष्ट करने के लिए तकनीकी और वैज्ञानिक नवाचार शुरू करता है जो "बाजार में फिट" नहीं होना चाहते हैं?
जिन्होंने "मुक्त लोकतांत्रिक विचार" की इस धारा को उठाया, उन्होंने लिखा कि वे इसे "टिप्पणी के बिना" छोड़ देते हैं। खैर, यह उनका रूसी आंतरिक मामला है। लेकिन यह सीधे चिंता का विषय है, अफसोस, यूक्रेन। कोई आश्चर्य नहीं कि यूक्रेनी राजनीतिक बलों के कुछ प्रतिनिधि मौजूदा रूसी सरकार के खिलाफ रैलियों का विरोध करने के लिए जाते हैं। उदाहरण के लिए, यह ज्ञात है कि स्वतंत्रता के प्रतिनिधियों ने फरवरी 4 पर 2012 रैली का दौरा किया, और लगभग सभी यूक्रेनी तथाकथित विपक्षी ताकतों ने मौखिक रूप से और उनके दिल में उनका समर्थन किया - यूलिया Tymoshenko से बाल्टी से बैठे हुए आर्सेनी यात्स्यानुक के खिलाए गर्त में भागते हुए और सिकंदर की ट्रेन में उसके साथ संलग्न। ट्यूरिनकोव, अनातोली ग्रिट्सेंको, नतालिया कोरोलेव्स्काया, बोरिस टारसियुक और अन्य छोटे और बेकार हारे और आउटकास्ट से अन्य रिफ्रैफ।
और, जैसा कि वे कहते हैं, गरीब यहूदी, रूसी, यूक्रेनी और अन्य राष्ट्रीयताओं और राष्ट्रीयताओं के प्रतिनिधियों को कहां होना चाहिए, जो बहुत दुर्भावनापूर्ण और लगातार डेमोक्रेट हैं "तनावपूर्ण"?
"कल्पना करें कि देश में वास्तव में पूरी तरह से लोकतांत्रिक चुनाव आयोजित किए गए थे, जो कि मीडिया की समान पहुंच वाले श्रमिकों की इच्छा के आधार पर, धन के लिए . . . इस तरह के चुनावों का परिणाम परिमाण का एक क्रम बदतर होगा, और शायद देश के लिए विनाशकारी। "
व्लादिमीर VORFOLOMEYEV (रेडियो एको मोस्किवी के पत्रकार): ". . . इस सत्ता में स्टालिनवादियों और घने राष्ट्रवादियों की तुलना में सत्ता में भ्रष्ट (और यहां तक कि सबसे खूनखराबा नौकरशाहों) को भी बनाए रखना बेहतर है (पोस्टस्क्रिप्ट के माध्यम से) . . . "
वेलेरिया नोवोडॉर्स्की (रूसी राजनेता, असंतुष्ट, मानवाधिकार कार्यकर्ता, स्वतंत्र पत्रकार, लिबरल पार्टी "डेमोक्रेटिक यूनियन" के संस्थापक): "रूसियों को अधिकारों के साथ यूरोपीय सभ्यता में अनुमति नहीं दी जा सकती है, उन्हें बाल्टी में रखा गया था, और उन्होंने इसे सही किया"।
"उदाहरण के लिए, मुझे इस बात का बिल्कुल भी ध्यान नहीं है कि डेमोक्रेटिक अमेरिका गैर-लोकतांत्रिक इराक में कितने मिसाइल लॉन्च करेगा। मेरे लिए, जितना बेहतर होगा। जिस तरह हिरोशिमा और नागासाकी की अप्रियता मुझे बिल्कुल नहीं डराती है . . . "
"ऐसा क्यों है कि अमेरिका में भारतीय अपनी संप्रभुता की घोषणा नहीं करते हैं? यह देखा जा सकता है, एक समय में सफेद वासियों ने उन पर अच्छा काम किया है। और हम, शायद, XVII-XVIII सदियों में। उनके "अब जंगली टंगस" के साथ कुछ पूरा नहीं हुआ है।
"यह चेचन्या की स्वतंत्रता है जो मुझे चिंतित करती है। चेचन्या सुंदर है, यह बहादुर है, यह महान है।
"रंगभेद एक सामान्य बात है। "
"नागरिक अधिकार ऐसे लोगों के लिए मौजूद हैं जो प्रबुद्ध, अच्छी तरह से खिलाए गए, अच्छी तरह से संचालित और संतुलित हैं"
"तो रंगभेद सच है, और कुछ सार्वभौमिक मानवाधिकार झूठ हैं। "
"मैंने व्यक्तिगत रूप से मानवाधिकारों के साथ अपना भरण-पोषण किया है। एक बार हम (! ), और सीआईए (! ), और यूएसए (! ) ने इस विचार का इस्तेमाल कम्युनिस्ट शासन और यूएसएसआर के पतन को नष्ट करने के लिए राम के रूप में किया। इस विचार ने अपने उद्देश्य को पूरा किया है, और मानवाधिकारों और मानवाधिकार रक्षकों के बारे में झूठ बोलना बंद किया है। "
"रूस केवल मूर्खों का देश ही नहीं है, बल्कि घमंडों का भी देश है . . . और सामान्य तौर पर, 1917 के बाद से, हम घोड़ों के जूते में शासित होते हैं"
"मैं कभी भी 9 का जश्न नहीं मना सकता और किसी को भी ऐसा करने की सलाह नहीं देता... सभी प्रगतिशील मानवता, अगर यह चाहते हैं, तो विनम्रता और बिना ज्यादा ठाठ के कुछ मना रहे हैं। और केवल ऐसे पूर्ण हारे हुए लोग जो बाकी सब चीजों से गुज़रे हैं, जिन्हें एक मिथक की ज़रूरत है, खुद को साबित करते हुए कि वे अभी भी कुछ मतलब रखते हैं, हमारी तरह इस तरह की परेडों की व्यवस्था कर सकते हैं . . . "
"रूसी लोगों को जेल में जगह है, और कहीं और नहीं, बल्कि जेल की बाल्टी में . . . "
"रूसी राष्ट्र मानवता का कैंसरग्रस्त ट्यूमर है! "
Альфред КОХ (сейчас никто и зовут его «никак», но был «демократом-реформатором» - председателем Госкомимущества (1996-1997) и в 1997 году зампредседателя правительства России): «Я думаю, для того чтобы отобрать у нас атомное оружие, достаточно парашютно-десантной дивизии. Однажды высадить и забрать все эти ракеты к чертовой матери».
कॉन्स्टेंटिन बॉरोवि (नोवोडवस्काया के सहयोगी, रूसी उद्यमी और राजनेता, रूसी कमोडिटी एक्सचेंज के महाप्रबंधक): "जब बाल्टिक राज्यों में रूस के अधिकारों के उल्लंघन के मुद्दे पर चर्चा हो रही है, तो कॉन्स्टेंटिन नाथनोविच ने नाजियों, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडर्स मैरिज, एंडर्स मैरिज)) के बारे में बात की। चर्चा के दौरान, बोरोवॉय ने देश के शीर्ष नेतृत्व को राज्य-विरोधीवाद पर दोषी ठहराया और लेखक ए। आई। सोलजेनित्सिन "रूसी फासीवादी" के नोबेल पुरस्कार विजेता को बुलाया ( टीवी कार्यक्रम "एक के खिलाफ दो" की रिकॉर्डिंग के दौरान)।
लियोनिद नेवलिन (रूस के फेडरेशन काउंसिल ऑफ मोरडोविया के पूर्व सदस्य, युकेओएस मामले में हत्या और वित्तीय अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था, इजरायल में रूसी न्याय से छिपा हुआ): "मैं यहूदी लोगों को उदार मानवतावादी विचार का स्वाभाविक वाहक मानता हूं, दोनों राष्ट्रव्यापी और व्यक्तिगत स्तर। "
मिखाइल KHODORKOVSKY (व्यवसायी, सार्वजनिक व्यक्ति, प्रचारक। वर्तमान में वह करेलिया में सेगेझा में एक सामान्य शासन कॉलोनी में एक 14-year वाक्य की सेवा कर रहा है): ". . . यह इस तरह के राज्य को चुराने के लिए नहीं है"।
"भ्रष्टाचार हमारे साथ शुरू हुआ, और यह हमारे साथ खत्म होना चाहिए . . . "
व्लादिमीर BUKOVSKY (लेखक, राजनीतिक और सार्वजनिक आंकड़ा, न्यूरोफिज़ियोलॉजिस्ट, यूएसएसआर में असंतुष्ट आंदोलन के संस्थापकों में से एक) और सहः "जेकायेव ने बुकोवस्की के साथ ले फिगारो नाम के एक साक्षात्कार में कहा," जो बेरेज़ोव्स्की का लंदन समूह बनाते हैं। " "अब, साशा (लितविनेंको) की मृत्यु के बाद, हम में से पांच बचे हैं - रूस में स्थिति को अस्थिर करने के लिए बहुत कम," ज़ाकेव ने कहा। "
"यह राजनीतिक शब्दकोश से" रूसी प्रभाव के क्षेत्र "की अवधारणा को बाहर फेंकने का समय है . . . "
"रूसी सैनिकों को उत्तरी काकेशस से हटना (! ) चाहिए। "
"ठीक है, क्यों, उदाहरण के लिए, सुदूर पूर्व, मास्को? "।
लेव पोनमारेव (पूर्व-राज्य ड्यूमा डिप्टी, राजनीतिक और सार्वजनिक आंकड़ा, मानव अधिकारों के लिए अखिल रूसी आंदोलन के कार्यकारी निदेशक, संयुक्त लोकतांत्रिक आंदोलन "एकजुटता" के संघीय राजनीतिक परिषद के सदस्य): "हेम्प मार्च और समलैंगिक परेड की अनुमति दी जानी चाहिए . . . "
"लोकतांत्रिक विचारों और उच्च स्तर की नागरिक सक्रियता वाले लोग हमेशा उन लोगों का समर्थन करने की शक्ति और साहस पाएंगे जो असहमत हैं, जिनमें भांग और समलैंगिक परेड के वैधीकरण के समर्थक भी शामिल हैं . . . "
". . . मुझे लगता है कि नरम दवाओं के वैधीकरण का बहुत विषय रूसी समाज के लिए काफी स्वीकार्य है . . . इसलिए, मेरी राय यह हैः युवा लोगों को इस समस्या पर ध्यान आकर्षित करने के लिए इस तरह के प्रदर्शनों, रैलियों और" गांजा मार्च "का अधिकार है" ।
"रूसी फासीवाद एक दूर की घटना नहीं है, यह आबादी की चेतना में निहित है। "
तात्याना TOLSTAYA (लेखक, प्रचारक, टीवी प्रस्तोता): "देश ऐसा नहीं है कि इसके अनुरूप हो! . . इसे साथ में खींचा जाना चाहिए, एक मोटे आदमी को मूर्ख, स्थिर! अभी, शायद नेतृत्व लोगों की तरह कमबख्त होने की कोशिश कर रहा है, लोगों की तरह बेवकूफ है, लोगों की तरह पिछड़ा हुआ है। "
इगोर युर्गेंस (समकालीन विकास संस्थान, रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के करीबी): "किस तरह के नवाचार हैं, किस तरह के उद्योग हैं! रूस का भाग्य - तेल और अन्य कच्चे माल का निर्यात करने के लिए! बाकी के बारे में भूल जाओ!
व्लादिमीर POZNER (सोवियत और रूसी टीवी पत्रकार, पॉज़नर कार्यक्रम के मेजबान): "मुझे लगता है कि रूस के लिए सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक रूढ़िवादी को अपनाना है . . . मुझे लगता है कि रूढ़िवादी रूस के लिए एक भारी बोझ था . . . "
"मारिजुआना से, जैसा कि कई विशेषज्ञ सही बताते हैं, कोई दुर्भाग्य नहीं है। और निश्चित रूप से, इसे कानूनी रूप देने की आवश्यकता है। लेकिन मैं डच सरकार से आगे जाता हूं, मेरा मानना है कि सभी दवाओं को वैध किया जाना चाहिए। यदि हम इसे ऐसा करते हैं कि किसी भी दवा को "तीन कोपेक के लिए" फार्मेसी में खरीदा जा सकता है, तो हम दवा माफिया के पैरों के नीचे से आर्थिक नींव को बाहर कर देंगे।
"मैं एक रूसी नहीं हूं, यह मेरी मातृभूमि नहीं है, मैं यहां बड़ा नहीं हुआ हूं, मुझे यहां पूरी तरह से घर नहीं लगता है . . . "
लीना हदीज़ (रूसी कलाकार): ". . . मैं रूसियों से बीमार महसूस करता हूँ, रूसी बच्चों से जिनके दिलों के लिए कुछ भी नहीं है, सिवाय बकवास और" महानता "के एक ढोंग के अलावा, आप बेहूदा सस्ते बेवकूफ लकीरें हैं जो अपने हाथों को गंदा करने के लिए शर्मिंदा हैं . . . "
सर्गेई KOVALEV (सोवियत असंतुष्ट, यूएसएसआर और रूसी संघ में मानवाधिकार आंदोलन में भागीदार, रूसी मेमोरियल ऐतिहासिक, शैक्षिक और मानवाधिकार सोसायटी, मानव अधिकार संस्थान के अध्यक्ष के अध्यक्ष): "आतंकवादियों को समझने की आवश्यकता है, उन्हें बेहद क्रूरता से काम करना होगा। "
Gleb PAVLOVSKY (रूसी राजनीतिक रणनीतिकार, हाल ही में क्रेमलिन के बेहद करीबी): ". . . हमने कम संख्या में लोगों की मदद से यूएसएसआर को तरल करने की संभावना और जोखिम पर चर्चा की। मैंने खुद को एक ज़ेन मार्क्सवादी के रूप में माना। "
व्लादिमीर KULISTIKOV (एनटीवी के जनरल डायरेक्टर): "रूस, मुझे लगता है, प्रति वर्ग मीटर" पवित्र स्थानों "की संख्या में दुनिया में पहला स्थान लेता है। जंगल शोर है, पैकेज चारों ओर झूठ बोल रहे हैं, शाखाओं पर इस्तेमाल किए गए कंडोम लटके हुए हैं - एक पसंदीदा आराम स्थान। "श्राइन", समझे? अगला - एक घास का मैदान। एना पेत्रोव्ना केर्न के पीछे से पुश्किन वहां से गुजरे। कुछ निशान बाकी हैं, आप जानते हैं कि इसे छूना भी असंभव है।
मेदवेदेव ने उल्लेख किया कि टेलीविजन प्रमुख व्लादिमीर कुलिस्टिकोव को रूसी जनता पसंद नहीं है। कुलिस्टिकोव ने कहाः "मैं मानता हूँ, तुम क्या हो यह हमारे शो शो के लिए तोप का चारा है, मैं उन्हें कैसे पसंद नहीं कर सकता हूं? "
यूरी PIVOVAROV (इतिहासकार, दार्शनिक, सामाजिक विज्ञान पर वैज्ञानिक सूचना संस्थान के निदेशक (INION RAS), रूसी संघ के राजनीतिक विज्ञान के अध्यक्ष): "मुझे विश्वास है कि रूस अगली छमाही में साइबेरिया छोड़ देगाः डेपोलेशन प्रक्रिया इतनी मजबूत होगी कि रूस भौगोलिक रूप से संकीर्ण हो जाएगा यूराल "।
"गोडमर्स्की स्टालिन ने अलेक्जेंडर नेवस्की के घृणित पंथ का निर्माण किया। "
"क्या यूरोप की तरह यहाँ भी एक सभ्य जीवन हो सकता है? मुझे लगता है कि पुरानी रूसी कहानी समाप्त हो जाएगी जब रूस साइबेरिया और सुदूर पूर्व को खो देता है . . . "
सर्गेई IVANENKO (एक लोकतांत्रिक और उदार राजनेता, याब्लो पार्टी के नेताओं में से एक): ". . . रूस में भूरे खतरे से लड़ना, रूसी फासीवाद से लड़ना वास्तव में प्रमुख कार्यों में से एक है। "
"हमारे देश में, सबसे पहले, फासीवाद की छींटाकशी हमारे स्कूल द्वारा . . . तैयार की गई थी। यह मानवतावाद, सहिष्णुता, और बहुसंस्कृतिवाद के मूल्य को समझना नहीं सिखाता है। साथ ही, हमारी मानसिकता, चाहे कितनी भी कड़वी हो, आतंक और हिंसा के महिमामंडन और रोमांस की विशेषता है। "
रोमन DOBROKHOTOV (रूसी जनता का आंकड़ा, युवा आंदोलन के नेता "WE", एकजुटता आंदोलन के संघीय राजनीतिक परिषद के सदस्य): "रूस की आबादी का दो तिहाई xenophobes और अव्यक्त अपराधी हैं। अगर हम उन्हें आजादी दें, तो बाद में, कुछ वर्षों के बाद, बहुत देर हो जाएगी।
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उनमें से एक, शायद सबसे अधिक ध्यान देने योग्य, अभी भी रूसी सरकार में है। इसके अलावा, उन्हें सभी माफ कर दिया गया और इस देश के भविष्य के लिए जिम्मेदार बनाया गया। यह OJSC RUSNANO के बोर्ड के अध्यक्ष अनातोली चुबैस हैं। क्या होगा यदि वह अपने साथी आदिवासियों को नष्ट करने के लिए तकनीकी और वैज्ञानिक नवाचार शुरू करता है जो "बाजार में फिट" नहीं होना चाहते हैं? जिन्होंने "मुक्त लोकतांत्रिक विचार" की इस धारा को उठाया, उन्होंने लिखा कि वे इसे "टिप्पणी के बिना" छोड़ देते हैं। खैर, यह उनका रूसी आंतरिक मामला है। लेकिन यह सीधे चिंता का विषय है, अफसोस, यूक्रेन। कोई आश्चर्य नहीं कि यूक्रेनी राजनीतिक बलों के कुछ प्रतिनिधि मौजूदा रूसी सरकार के खिलाफ रैलियों का विरोध करने के लिए जाते हैं। उदाहरण के लिए, यह ज्ञात है कि स्वतंत्रता के प्रतिनिधियों ने फरवरी चार पर दो हज़ार बारह रैली का दौरा किया, और लगभग सभी यूक्रेनी तथाकथित विपक्षी ताकतों ने मौखिक रूप से और उनके दिल में उनका समर्थन किया - यूलिया Tymoshenko से बाल्टी से बैठे हुए आर्सेनी यात्स्यानुक के खिलाए गर्त में भागते हुए और सिकंदर की ट्रेन में उसके साथ संलग्न। ट्यूरिनकोव, अनातोली ग्रिट्सेंको, नतालिया कोरोलेव्स्काया, बोरिस टारसियुक और अन्य छोटे और बेकार हारे और आउटकास्ट से अन्य रिफ्रैफ। और, जैसा कि वे कहते हैं, गरीब यहूदी, रूसी, यूक्रेनी और अन्य राष्ट्रीयताओं और राष्ट्रीयताओं के प्रतिनिधियों को कहां होना चाहिए, जो बहुत दुर्भावनापूर्ण और लगातार डेमोक्रेट हैं "तनावपूर्ण"? "कल्पना करें कि देश में वास्तव में पूरी तरह से लोकतांत्रिक चुनाव आयोजित किए गए थे, जो कि मीडिया की समान पहुंच वाले श्रमिकों की इच्छा के आधार पर, धन के लिए . . . इस तरह के चुनावों का परिणाम परिमाण का एक क्रम बदतर होगा, और शायद देश के लिए विनाशकारी। " व्लादिमीर VORFOLOMEYEV : ". . . इस सत्ता में स्टालिनवादियों और घने राष्ट्रवादियों की तुलना में सत्ता में भ्रष्ट को भी बनाए रखना बेहतर है . . . " वेलेरिया नोवोडॉर्स्की : "रूसियों को अधिकारों के साथ यूरोपीय सभ्यता में अनुमति नहीं दी जा सकती है, उन्हें बाल्टी में रखा गया था, और उन्होंने इसे सही किया"। "उदाहरण के लिए, मुझे इस बात का बिल्कुल भी ध्यान नहीं है कि डेमोक्रेटिक अमेरिका गैर-लोकतांत्रिक इराक में कितने मिसाइल लॉन्च करेगा। मेरे लिए, जितना बेहतर होगा। जिस तरह हिरोशिमा और नागासाकी की अप्रियता मुझे बिल्कुल नहीं डराती है . . . " "ऐसा क्यों है कि अमेरिका में भारतीय अपनी संप्रभुता की घोषणा नहीं करते हैं? यह देखा जा सकता है, एक समय में सफेद वासियों ने उन पर अच्छा काम किया है। और हम, शायद, XVII-XVIII सदियों में। उनके "अब जंगली टंगस" के साथ कुछ पूरा नहीं हुआ है। "यह चेचन्या की स्वतंत्रता है जो मुझे चिंतित करती है। चेचन्या सुंदर है, यह बहादुर है, यह महान है। "रंगभेद एक सामान्य बात है। " "नागरिक अधिकार ऐसे लोगों के लिए मौजूद हैं जो प्रबुद्ध, अच्छी तरह से खिलाए गए, अच्छी तरह से संचालित और संतुलित हैं" "तो रंगभेद सच है, और कुछ सार्वभौमिक मानवाधिकार झूठ हैं। " "मैंने व्यक्तिगत रूप से मानवाधिकारों के साथ अपना भरण-पोषण किया है। एक बार हम , और सीआईए , और यूएसए ने इस विचार का इस्तेमाल कम्युनिस्ट शासन और यूएसएसआर के पतन को नष्ट करने के लिए राम के रूप में किया। इस विचार ने अपने उद्देश्य को पूरा किया है, और मानवाधिकारों और मानवाधिकार रक्षकों के बारे में झूठ बोलना बंद किया है। " "रूस केवल मूर्खों का देश ही नहीं है, बल्कि घमंडों का भी देश है . . . और सामान्य तौर पर, एक हज़ार नौ सौ सत्रह के बाद से, हम घोड़ों के जूते में शासित होते हैं" "मैं कभी भी नौ का जश्न नहीं मना सकता और किसी को भी ऐसा करने की सलाह नहीं देता... सभी प्रगतिशील मानवता, अगर यह चाहते हैं, तो विनम्रता और बिना ज्यादा ठाठ के कुछ मना रहे हैं। और केवल ऐसे पूर्ण हारे हुए लोग जो बाकी सब चीजों से गुज़रे हैं, जिन्हें एक मिथक की ज़रूरत है, खुद को साबित करते हुए कि वे अभी भी कुछ मतलब रखते हैं, हमारी तरह इस तरह की परेडों की व्यवस्था कर सकते हैं . . . " "रूसी लोगों को जेल में जगह है, और कहीं और नहीं, बल्कि जेल की बाल्टी में . . . " "रूसी राष्ट्र मानवता का कैंसरग्रस्त ट्यूमर है! " Альфред КОХ и в एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे году зампредседателя правительства России): «Я думаю, для того чтобы отобрать у нас атомное оружие, достаточно парашютно-десантной дивизии. Однажды высадить и забрать все эти ракеты к чертовой матери». कॉन्स्टेंटिन बॉरोवि : "जब बाल्टिक राज्यों में रूस के अधिकारों के उल्लंघन के मुद्दे पर चर्चा हो रही है, तो कॉन्स्टेंटिन नाथनोविच ने नाजियों, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडोर्समेंट मैरिज, एंडर्स मैरिज, एंडर्स मैरिज)) के बारे में बात की। चर्चा के दौरान, बोरोवॉय ने देश के शीर्ष नेतृत्व को राज्य-विरोधीवाद पर दोषी ठहराया और लेखक ए। आई। सोलजेनित्सिन "रूसी फासीवादी" के नोबेल पुरस्कार विजेता को बुलाया । लियोनिद नेवलिन : "मैं यहूदी लोगों को उदार मानवतावादी विचार का स्वाभाविक वाहक मानता हूं, दोनों राष्ट्रव्यापी और व्यक्तिगत स्तर। " मिखाइल KHODORKOVSKY : ". . . यह इस तरह के राज्य को चुराने के लिए नहीं है"। "भ्रष्टाचार हमारे साथ शुरू हुआ, और यह हमारे साथ खत्म होना चाहिए . . . " व्लादिमीर BUKOVSKY और सहः "जेकायेव ने बुकोवस्की के साथ ले फिगारो नाम के एक साक्षात्कार में कहा," जो बेरेज़ोव्स्की का लंदन समूह बनाते हैं। " "अब, साशा की मृत्यु के बाद, हम में से पांच बचे हैं - रूस में स्थिति को अस्थिर करने के लिए बहुत कम," ज़ाकेव ने कहा। " "यह राजनीतिक शब्दकोश से" रूसी प्रभाव के क्षेत्र "की अवधारणा को बाहर फेंकने का समय है . . . " "रूसी सैनिकों को उत्तरी काकेशस से हटना चाहिए। " "ठीक है, क्यों, उदाहरण के लिए, सुदूर पूर्व, मास्को? "। लेव पोनमारेव : "हेम्प मार्च और समलैंगिक परेड की अनुमति दी जानी चाहिए . . . " "लोकतांत्रिक विचारों और उच्च स्तर की नागरिक सक्रियता वाले लोग हमेशा उन लोगों का समर्थन करने की शक्ति और साहस पाएंगे जो असहमत हैं, जिनमें भांग और समलैंगिक परेड के वैधीकरण के समर्थक भी शामिल हैं . . . " ". . . मुझे लगता है कि नरम दवाओं के वैधीकरण का बहुत विषय रूसी समाज के लिए काफी स्वीकार्य है . . . इसलिए, मेरी राय यह हैः युवा लोगों को इस समस्या पर ध्यान आकर्षित करने के लिए इस तरह के प्रदर्शनों, रैलियों और" गांजा मार्च "का अधिकार है" । "रूसी फासीवाद एक दूर की घटना नहीं है, यह आबादी की चेतना में निहित है। " तात्याना TOLSTAYA : "देश ऐसा नहीं है कि इसके अनुरूप हो! . . इसे साथ में खींचा जाना चाहिए, एक मोटे आदमी को मूर्ख, स्थिर! अभी, शायद नेतृत्व लोगों की तरह कमबख्त होने की कोशिश कर रहा है, लोगों की तरह बेवकूफ है, लोगों की तरह पिछड़ा हुआ है। " इगोर युर्गेंस : "किस तरह के नवाचार हैं, किस तरह के उद्योग हैं! रूस का भाग्य - तेल और अन्य कच्चे माल का निर्यात करने के लिए! बाकी के बारे में भूल जाओ! व्लादिमीर POZNER : "मुझे लगता है कि रूस के लिए सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक रूढ़िवादी को अपनाना है . . . मुझे लगता है कि रूढ़िवादी रूस के लिए एक भारी बोझ था . . . " "मारिजुआना से, जैसा कि कई विशेषज्ञ सही बताते हैं, कोई दुर्भाग्य नहीं है। और निश्चित रूप से, इसे कानूनी रूप देने की आवश्यकता है। लेकिन मैं डच सरकार से आगे जाता हूं, मेरा मानना है कि सभी दवाओं को वैध किया जाना चाहिए। यदि हम इसे ऐसा करते हैं कि किसी भी दवा को "तीन कोपेक के लिए" फार्मेसी में खरीदा जा सकता है, तो हम दवा माफिया के पैरों के नीचे से आर्थिक नींव को बाहर कर देंगे। "मैं एक रूसी नहीं हूं, यह मेरी मातृभूमि नहीं है, मैं यहां बड़ा नहीं हुआ हूं, मुझे यहां पूरी तरह से घर नहीं लगता है . . . " लीना हदीज़ : ". . . मैं रूसियों से बीमार महसूस करता हूँ, रूसी बच्चों से जिनके दिलों के लिए कुछ भी नहीं है, सिवाय बकवास और" महानता "के एक ढोंग के अलावा, आप बेहूदा सस्ते बेवकूफ लकीरें हैं जो अपने हाथों को गंदा करने के लिए शर्मिंदा हैं . . . " सर्गेई KOVALEV : "आतंकवादियों को समझने की आवश्यकता है, उन्हें बेहद क्रूरता से काम करना होगा। " Gleb PAVLOVSKY : ". . . हमने कम संख्या में लोगों की मदद से यूएसएसआर को तरल करने की संभावना और जोखिम पर चर्चा की। मैंने खुद को एक ज़ेन मार्क्सवादी के रूप में माना। " व्लादिमीर KULISTIKOV : "रूस, मुझे लगता है, प्रति वर्ग मीटर" पवित्र स्थानों "की संख्या में दुनिया में पहला स्थान लेता है। जंगल शोर है, पैकेज चारों ओर झूठ बोल रहे हैं, शाखाओं पर इस्तेमाल किए गए कंडोम लटके हुए हैं - एक पसंदीदा आराम स्थान। "श्राइन", समझे? अगला - एक घास का मैदान। एना पेत्रोव्ना केर्न के पीछे से पुश्किन वहां से गुजरे। कुछ निशान बाकी हैं, आप जानते हैं कि इसे छूना भी असंभव है। मेदवेदेव ने उल्लेख किया कि टेलीविजन प्रमुख व्लादिमीर कुलिस्टिकोव को रूसी जनता पसंद नहीं है। कुलिस्टिकोव ने कहाः "मैं मानता हूँ, तुम क्या हो यह हमारे शो शो के लिए तोप का चारा है, मैं उन्हें कैसे पसंद नहीं कर सकता हूं? " यूरी PIVOVAROV , रूसी संघ के राजनीतिक विज्ञान के अध्यक्ष): "मुझे विश्वास है कि रूस अगली छमाही में साइबेरिया छोड़ देगाः डेपोलेशन प्रक्रिया इतनी मजबूत होगी कि रूस भौगोलिक रूप से संकीर्ण हो जाएगा यूराल "। "गोडमर्स्की स्टालिन ने अलेक्जेंडर नेवस्की के घृणित पंथ का निर्माण किया। " "क्या यूरोप की तरह यहाँ भी एक सभ्य जीवन हो सकता है? मुझे लगता है कि पुरानी रूसी कहानी समाप्त हो जाएगी जब रूस साइबेरिया और सुदूर पूर्व को खो देता है . . . " सर्गेई IVANENKO : ". . . रूस में भूरे खतरे से लड़ना, रूसी फासीवाद से लड़ना वास्तव में प्रमुख कार्यों में से एक है। " "हमारे देश में, सबसे पहले, फासीवाद की छींटाकशी हमारे स्कूल द्वारा . . . तैयार की गई थी। यह मानवतावाद, सहिष्णुता, और बहुसंस्कृतिवाद के मूल्य को समझना नहीं सिखाता है। साथ ही, हमारी मानसिकता, चाहे कितनी भी कड़वी हो, आतंक और हिंसा के महिमामंडन और रोमांस की विशेषता है। " रोमन DOBROKHOTOV : "रूस की आबादी का दो तिहाई xenophobes और अव्यक्त अपराधी हैं। अगर हम उन्हें आजादी दें, तो बाद में, कुछ वर्षों के बाद, बहुत देर हो जाएगी।
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Jashpur: जशपुर जिले के पोंगरो जंगल में इन दिनों भयंकर आग लगी हुई है, विभागीय लापरवाही के कारण आग लगने के कारण जंगल में लगे हजारों पौधे आग के कारण नष्ट हो रहे है। वही विभागीय अधिकारी सिर्फ आग बुझाने की खाना पूर्ति करने करते नजर आ रहे है। हालांकि वन अमला के लापरवाही के कारण छोटे छोटे पौधे व जीव जंतु नष्ट हो जा रहे है।
दरअसल जिले में महुआ का सीजन आने के साथ ही जंगलों में आग की लपटें भी तेज हो रही है। जंगलों से आच्छादित जशपुर जिला के कांसाबेल क्षेत्र में आग की लपटें देखी जा सकती है। लमडांड पोंगरो के जंगल में महुआ बीनने वाले अज्ञात लोगों के द्वारा आग लगा दी गई। जिसके बाद जंगल मे आग फैल गई।
ग्रामीणो ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। लेकिन वन विभाग मौके पर आना मुनासिब नही समझा, घंटो आग ने पूरे जंगल को जलाकर नष्ट कर दिया। बता दें कि महुआ फूल आने से कवायत शुरु होने के साथ ही जंगलों में आग लगा दी जाती है। ताकि महुआ का फूल को आसनी से चुना जा सके। लेकिन ग्रामीणो के द्वारा जंगल मे आग लगने से छोटे छोटे पौधे व जीव जंतु नष्ट हो जाता है । वही कांसाबेल वन रेंजर पार्वती चौहान ने सूचना देने के बाबजूद किसी प्रकार की पहल न करना वन विभाग की लापरवाही को दर्शाता है।
हालांकि इस सबंध में उप वनमंडलाधिकारी आर पी सिंह कंवर ने बताया कि ग्रामीणो को वन में आग न लगाने की अपील की जा रही है । वही जहां भी आग लगने की सूचना आने पर विभाग के कर्मी को भेजकर उसे बुझाया जा रहा है। वन विभाग जगंल की आग बूझाने के प्रयास कर रही है।
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Jashpur: जशपुर जिले के पोंगरो जंगल में इन दिनों भयंकर आग लगी हुई है, विभागीय लापरवाही के कारण आग लगने के कारण जंगल में लगे हजारों पौधे आग के कारण नष्ट हो रहे है। वही विभागीय अधिकारी सिर्फ आग बुझाने की खाना पूर्ति करने करते नजर आ रहे है। हालांकि वन अमला के लापरवाही के कारण छोटे छोटे पौधे व जीव जंतु नष्ट हो जा रहे है। दरअसल जिले में महुआ का सीजन आने के साथ ही जंगलों में आग की लपटें भी तेज हो रही है। जंगलों से आच्छादित जशपुर जिला के कांसाबेल क्षेत्र में आग की लपटें देखी जा सकती है। लमडांड पोंगरो के जंगल में महुआ बीनने वाले अज्ञात लोगों के द्वारा आग लगा दी गई। जिसके बाद जंगल मे आग फैल गई। ग्रामीणो ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। लेकिन वन विभाग मौके पर आना मुनासिब नही समझा, घंटो आग ने पूरे जंगल को जलाकर नष्ट कर दिया। बता दें कि महुआ फूल आने से कवायत शुरु होने के साथ ही जंगलों में आग लगा दी जाती है। ताकि महुआ का फूल को आसनी से चुना जा सके। लेकिन ग्रामीणो के द्वारा जंगल मे आग लगने से छोटे छोटे पौधे व जीव जंतु नष्ट हो जाता है । वही कांसाबेल वन रेंजर पार्वती चौहान ने सूचना देने के बाबजूद किसी प्रकार की पहल न करना वन विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। हालांकि इस सबंध में उप वनमंडलाधिकारी आर पी सिंह कंवर ने बताया कि ग्रामीणो को वन में आग न लगाने की अपील की जा रही है । वही जहां भी आग लगने की सूचना आने पर विभाग के कर्मी को भेजकर उसे बुझाया जा रहा है। वन विभाग जगंल की आग बूझाने के प्रयास कर रही है। This website uses cookies.
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प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को वाराणसी में हरी झंडी दिखाकर महामना एक्सप्रेस को नई दिल्ली के लिए रवाना किया. इसी के साथ नई डिजाइन, नए अंदाज और नए बदलाव वाले रेल डिब्बों वाली ट्रेन की शुरुआत हो गई. रेल मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, दूरंतो और शताब्दी की तरह महामना एक्सप्रेस की ट्रेनों का अलग क्लास होगा और आने वाले समय में अन्य रेलवे मार्गों पर भी महामना एक्सप्रेस चलाने पर विचार किया जा रहा है.
गौरतलब है कि अभी हफ्ते में तीन दिन वाराणसी और नई दिल्ली से चलाई जाने वाली महामना एक्सप्रेस आधुनिक सुविधाओं वाली अपनी तरह की अकेली गाड़ी है. बताया जाता है कि रेलवे ने फिलहाल नए बदलाव के साथ 24 डिब्बे ही बनाए हैं, जिनमें से 18 डिब्बों को वाराणसी-नई दिल्ली महामना एक्सप्रेस में इस्तेमाल किया गया है. आने वाले दिनों में भोपाल कोच फैक्ट्री में और ज्यादा डिब्बों को न्यू लुक और बदलाव के साथ मॉडिफाई किया जाएगा.
जानकारी के मुताबिक, जैसे-जैसे डिब्बे नई रंगत आते जाएंगे वैसे-वैसे नए मार्गों पर महामना एक्सप्रेस चलाने का सिलसिला शुरू हो जाएगा. रेलवे को महामना एक्सप्रेस चलाने में दोहरा फायदा है. एक तरफ जहां वो इससे बेहतर यात्री सुविधाएं दे पाएगी, वहीं दूसरी तरफ वो AC1, AC2 और स्लीपर के किराए में 15 फीसदी की बढ़ोतरी भी वसूल पाएगी.
बता दें कि महामना एक्सप्रेस की सभी श्रेणियों के कोच में आधुनिक और आरामदायक सुविधा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे ने मॉडल रैक परियोजना बनाई थी. यह नया विकसित रैक भारतीय रेल को पिछले 10-12 वर्ष से अधिक समय से सेवा प्रदान कर रहे सात अलग-अलग प्रकार की श्रेणी के डिब्बों का नवीकृत और पुनः सुसज्जित रूप है. इस मॉडल रैक के डिजाइन और विकास में भारतीय रेलवे ने हर कटैगिरी के रैकों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त सुविधाओं का प्रावधान किया है.
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प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को वाराणसी में हरी झंडी दिखाकर महामना एक्सप्रेस को नई दिल्ली के लिए रवाना किया. इसी के साथ नई डिजाइन, नए अंदाज और नए बदलाव वाले रेल डिब्बों वाली ट्रेन की शुरुआत हो गई. रेल मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, दूरंतो और शताब्दी की तरह महामना एक्सप्रेस की ट्रेनों का अलग क्लास होगा और आने वाले समय में अन्य रेलवे मार्गों पर भी महामना एक्सप्रेस चलाने पर विचार किया जा रहा है. गौरतलब है कि अभी हफ्ते में तीन दिन वाराणसी और नई दिल्ली से चलाई जाने वाली महामना एक्सप्रेस आधुनिक सुविधाओं वाली अपनी तरह की अकेली गाड़ी है. बताया जाता है कि रेलवे ने फिलहाल नए बदलाव के साथ चौबीस डिब्बे ही बनाए हैं, जिनमें से अट्ठारह डिब्बों को वाराणसी-नई दिल्ली महामना एक्सप्रेस में इस्तेमाल किया गया है. आने वाले दिनों में भोपाल कोच फैक्ट्री में और ज्यादा डिब्बों को न्यू लुक और बदलाव के साथ मॉडिफाई किया जाएगा. जानकारी के मुताबिक, जैसे-जैसे डिब्बे नई रंगत आते जाएंगे वैसे-वैसे नए मार्गों पर महामना एक्सप्रेस चलाने का सिलसिला शुरू हो जाएगा. रेलवे को महामना एक्सप्रेस चलाने में दोहरा फायदा है. एक तरफ जहां वो इससे बेहतर यात्री सुविधाएं दे पाएगी, वहीं दूसरी तरफ वो ACएक, ACदो और स्लीपर के किराए में पंद्रह फीसदी की बढ़ोतरी भी वसूल पाएगी. बता दें कि महामना एक्सप्रेस की सभी श्रेणियों के कोच में आधुनिक और आरामदायक सुविधा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे ने मॉडल रैक परियोजना बनाई थी. यह नया विकसित रैक भारतीय रेल को पिछले दस-बारह वर्ष से अधिक समय से सेवा प्रदान कर रहे सात अलग-अलग प्रकार की श्रेणी के डिब्बों का नवीकृत और पुनः सुसज्जित रूप है. इस मॉडल रैक के डिजाइन और विकास में भारतीय रेलवे ने हर कटैगिरी के रैकों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त सुविधाओं का प्रावधान किया है.
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महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के चलते पुलिस और स्थानीय प्रशासन अलर्ट है. कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या की वजह से पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने पूरे महाराष्ट्र और विशेष रूप से मुंबई में कड़े कदम उठाए हैं.
वकोला पुलिस ने शनिवार को निर्धारित सीमा से अधिक लोगों को इकट्ठा करने के आरोप में कलिना स्थित तीन मैरिज हॉल और बैंक्वेट हॉल के खिलाफ शिकायत दर्ज की. कोविड-19 सुरक्षा मापदंडों के उल्लंघन को लेकर बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के अधिकारियों ने इसकी शिकायत दर्ज कराई.
बीएमसी अफसरों ने अपनी शिकायत में कहा है कि शुक्रवार को कलिना में सीएसटी रोड पर स्थित तीन मैरिज हॉल और बैंक्वेट हॉल में तीन शादी समारोह आयोजित किए गए थे. स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के साथ बीएमसी के अधिकारियों ने मौके का औचक मुआयना किया. इस दौरान पाया गया कि शादी समारोह में 300 और 500 से ज्यादा लोग एकत्रित थे. बीएमसी के नियमों के मुताबिक शादी समारोह में सिर्फ 50 मेहमानों को ही आने की अनुमति है.
औचक निरीक्षण के दौरान पाया गया कि शादी समारोह में शिरकत करने पहुंचे बहुत से मेहमान मास्क नहीं पहने हुए थे और वे बिना मास्क ही घुम रहे थे, लोगों से बात बातें कर रहे थे. समारोह का वीडियो रिकॉर्डिंग करने के बाद बीएमसी अफसरों ने पुलिस में मामला दर्ज कराया.
तीन मैरिज और बैंक्वेट हॉल के प्रबंधकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. मुंबई में कोरोना मामलों में वृद्धि के साथ बीएमसी और पुलिस अधिकारियों ने बड़ी सभाओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई शुरू कर दी है. पिछले हफ्ते, तीन स्थानों पर बीएमसी अधिकारियों ने मुंबई में कोरोना के सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए दूल्हे और दुल्हन के माता-पिता के खिलाफ केस दर्ज किया था.
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महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के चलते पुलिस और स्थानीय प्रशासन अलर्ट है. कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या की वजह से पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने पूरे महाराष्ट्र और विशेष रूप से मुंबई में कड़े कदम उठाए हैं. वकोला पुलिस ने शनिवार को निर्धारित सीमा से अधिक लोगों को इकट्ठा करने के आरोप में कलिना स्थित तीन मैरिज हॉल और बैंक्वेट हॉल के खिलाफ शिकायत दर्ज की. कोविड-उन्नीस सुरक्षा मापदंडों के उल्लंघन को लेकर बृहन्मुंबई नगर निगम के अधिकारियों ने इसकी शिकायत दर्ज कराई. बीएमसी अफसरों ने अपनी शिकायत में कहा है कि शुक्रवार को कलिना में सीएसटी रोड पर स्थित तीन मैरिज हॉल और बैंक्वेट हॉल में तीन शादी समारोह आयोजित किए गए थे. स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के साथ बीएमसी के अधिकारियों ने मौके का औचक मुआयना किया. इस दौरान पाया गया कि शादी समारोह में तीन सौ और पाँच सौ से ज्यादा लोग एकत्रित थे. बीएमसी के नियमों के मुताबिक शादी समारोह में सिर्फ पचास मेहमानों को ही आने की अनुमति है. औचक निरीक्षण के दौरान पाया गया कि शादी समारोह में शिरकत करने पहुंचे बहुत से मेहमान मास्क नहीं पहने हुए थे और वे बिना मास्क ही घुम रहे थे, लोगों से बात बातें कर रहे थे. समारोह का वीडियो रिकॉर्डिंग करने के बाद बीएमसी अफसरों ने पुलिस में मामला दर्ज कराया. तीन मैरिज और बैंक्वेट हॉल के प्रबंधकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. मुंबई में कोरोना मामलों में वृद्धि के साथ बीएमसी और पुलिस अधिकारियों ने बड़ी सभाओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई शुरू कर दी है. पिछले हफ्ते, तीन स्थानों पर बीएमसी अधिकारियों ने मुंबई में कोरोना के सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए दूल्हे और दुल्हन के माता-पिता के खिलाफ केस दर्ज किया था.
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क्षेत्र के कुंजपुरा में बजानिया नट समुदाय का पांच दिवसीय प्राचीन मेला रविवार से शुरू हो गया है। होली की छठ से शुरु होने वाले लगभग 200 साल पुराने इस मेले का शुभारम्भ दादा आसाराम के मंदिर में हवन पूजन के माध्यम से किया गया। मेले में देश भर से इस समुदाय के लोग शामिल हो रहे हैं। मेले में खानपान की दुकानें व झूले इत्यादि भी आ गए हैं।
मेला प्रबंधक रामवीर यादव ने बताया कि सोमवार को सुबह 10 बजे से महिलाओं की गुजराती फाग होगी और चार दिन लगातार रात को 8 बजे से कानपुर के कलाकारों द्वारा रामलीला का आयोजन किया जाएगा। मंगलवार को सुबह 11 बजे से नट समुदाय के कलाकार अपनी हैरतअंगेज कलाओं का प्रदर्शन करेंगे। 18 मार्च को सुबह 10 बजे से दादा आसाराम मंदिर से एक शोभायात्रा निकाली जाएगी जो नगला वर्माजीत व कैलोखर होते हुए वापस मंदिर पहुंचेगी। अगले दिन सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक बजानिया नट समुदाय के लोग दिनभर अपने इष्टदेव की पूजा-अर्चना करेंगे। मेले की आखिरी रात 8 बजे से नौटंकी का कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम मे देश भर के 22 प्रदेशों की रहने वाले बजानिया नट पहुंचेंगे।
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क्षेत्र के कुंजपुरा में बजानिया नट समुदाय का पांच दिवसीय प्राचीन मेला रविवार से शुरू हो गया है। होली की छठ से शुरु होने वाले लगभग दो सौ साल पुराने इस मेले का शुभारम्भ दादा आसाराम के मंदिर में हवन पूजन के माध्यम से किया गया। मेले में देश भर से इस समुदाय के लोग शामिल हो रहे हैं। मेले में खानपान की दुकानें व झूले इत्यादि भी आ गए हैं। मेला प्रबंधक रामवीर यादव ने बताया कि सोमवार को सुबह दस बजे से महिलाओं की गुजराती फाग होगी और चार दिन लगातार रात को आठ बजे से कानपुर के कलाकारों द्वारा रामलीला का आयोजन किया जाएगा। मंगलवार को सुबह ग्यारह बजे से नट समुदाय के कलाकार अपनी हैरतअंगेज कलाओं का प्रदर्शन करेंगे। अट्ठारह मार्च को सुबह दस बजे से दादा आसाराम मंदिर से एक शोभायात्रा निकाली जाएगी जो नगला वर्माजीत व कैलोखर होते हुए वापस मंदिर पहुंचेगी। अगले दिन सुबह पाँच बजे से शाम पाँच बजे तक बजानिया नट समुदाय के लोग दिनभर अपने इष्टदेव की पूजा-अर्चना करेंगे। मेले की आखिरी रात आठ बजे से नौटंकी का कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम मे देश भर के बाईस प्रदेशों की रहने वाले बजानिया नट पहुंचेंगे।
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बेरोजगारी कर क्या हैं?
आउट-ऑफ-वर्क कर्मचारियों के लिए बेरोजगारी मुआवजे के लाभों को निधि देने के लिए नियोक्ता द्वारा बेरोजगारी करों को संघीय सरकार और राज्यों को भुगतान किया जाता है। नियोक्ता अपने व्यापार के प्रकार के आधार पर कर लगाए जाते हैं; उस प्रकार के व्यवसाय में बेरोजगारी दर जितनी अधिक होगी, कर उतनी ही अधिक होगी।
उदाहरण के लिए, उच्च कारोबार वाले फास्ट फ़ूड रेस्तरां को कम कारोबार वाले मेडिकल कार्यालय की तुलना में उच्च दर पर कर लगाया जाएगा।
बेरोजगारी करों के लिए मुझे कितना भुगतान करना होगा?
कर्मचारियों के सकल वेतन (मजदूरी या वेतन) के आधार पर नियोक्ता द्वारा संघीय बेरोजगारी कर (जिसे फूट कर कहा जाता है ) का भुगतान किया जाता है। प्रत्येक वर्ष FUTA कर प्रतिशत बदल सकता है। वर्तमान में (2015),
2015 के लिए, FUTA कर दर 6. 0% है। कर प्रत्येक कर्मचारी को वर्ष के दौरान मजदूरी के रूप में भुगतान करने वाले पहले $ 7,000 पर लागू होता है। $ 7,000 संघीय मजदूरी आधार है। आपका राज्य मजदूरी आधार अलग हो सकता है। कैलेंडर वर्ष में $ 7,000 से अधिक मजदूरी पर FUTA कर का भुगतान नहीं किया जाता है।
- 2010 में किसी भी 20 या अधिक अलग-अलग हफ्तों में या वर्ष में 20 या अधिक अलग-अलग सप्ताहों में आपके पास दिन के कम से कम कुछ हिस्से के लिए एक या अधिक कर्मचारी थे।
संघीय और राज्य बेरोजगारी कर प्रणाली एक साथ कैसे काम करते हैं?
आम तौर पर, आप अपने बेटा टैक्स के खिलाफ राज्य बेरोजगारी निधि में भुगतान की गई राशि के लिए क्रेडिट ले सकते हैं। क्रेडिट FUTA कर योग्य मजदूरी का 5. 4% जितना हो सकता है। यदि आप अधिकतम 5. 4% क्रेडिट के हकदार हैं, तो क्रेडिट के बाद FUTA कर दर 0. 6% है (30 जून, 2011 के बाद)।
यदि आप अपने राज्य बेरोजगारी करों को पूरी तरह से, समय पर और FUAA कर के अधीन सभी मजदूरी पर भुगतान करते हैं, तो आप अधिकतम क्रेडिट के हकदार हैं। यदि आपके राज्य ने पूर्ण राशि का भुगतान नहीं किया है तो यह FUTA फंड के लिए है, तो आपका क्रेडिट कम हो सकता है। आईआरएस में सी redit कमी राज्यों और क्रेडिट कमी राशि की एक सूची है।
राज्य बेरोजगारी कर नियोक्ता के रूप में मेरे भुगतान को कैसे प्रभावित करता है?
संघीय और राज्य बेरोजगारी करों को प्रशासित करने की लागत का भुगतान करने के लिए आईआरएस में बेरोजगारी कर ट्रस्ट फंड है। कुछ राज्य इस ट्रस्ट फंड से उधार लेते हैं, और उनमें से कुछ राज्य ऋण चुकाने नहीं करते हैं। यदि कोई राज्य दो साल के भीतर चुकाया नहीं जाता है, तो राज्य में नियोक्ता को अतिरिक्त बेरोजगारी कर का भुगतान करना पड़ सकता है।
राज्य FUTA कर के लिए 5. 4% क्रेडिट प्रत्येक वर्ष 0. 3% कम किया जा सकता है। इसलिए, पहले वर्ष के लिए, आपका क्रेडिट केवल 5. 1% होगा और आपकी कुल FUTA कर दर सामान्य 6% की बजाय 6. 3% होगी।
यह देखने के लिए कि क्या आप कम क्रेडिट वाले राज्य में हैं, अपने राज्य के बेरोजगारी ब्यूरो से जांचें। यह सूची हर साल बदलती है।
मैं फ़ुट करों की गणना कैसे करूं?
- प्रत्येक पेरोल के लिए, आपको कर्मचारियों को भुगतान किए गए कुल सकल मजदूरी के आधार पर प्रति कर्मचारी $ 7000 तक देय FUTA कर निर्धारित करना होगा। फिर इस कुल को FUTA कर दर (वर्तमान में . 06) से गुणा करें।
- प्रत्येक वर्ष के अंत में, आपको फॉर्म 940 पूरा करना होगा। फॉर्म आपको पिछले वर्ष के लिए आपके द्वारा दी गई कुल राशि और आपके द्वारा पहले से भुगतान की गई राशि की गणना करने के लिए कहता है। आपको 31 जनवरी तक फॉर्म 940 के साथ आईआरएस में शेष राशि जमा करनी होगी।
मैं संघीय बेरोजगारी (FUTA) कर कैसे भुगतान करूं?
FUTA करों का त्रैमासिक भुगतान किया जाता है, जो कि पेरोल से अलग की गई राशि के आधार पर आपके पास कर दायित्व में $ 500 या उससे अधिक है।
इसलिए, यदि किसी भी तिमाही के लिए आपके अवैतनिक FUTA कर $ 500 से अधिक है, तो आपको तिमाही के अंत के महीने के आखिरी दिन तक उस अवैतनिक राशि का जमा करना होगा। (यह 30 अप्रैल, 31 जुलाई, 31 अक्टूबर, और 31 जनवरी है। )
यदि आपका अवैतनिक FUTA कर $ 500 या उससे कम है, तो इसे अगली तिमाही में ले जाएं; जमा की आवश्यकता नहीं है।
- सबसे पहले, आपको प्रत्येक पेरोल के लिए FUTA करों की गणना करनी होगी।
- फिर, किसी भी तिमाही में जिसमें आपकी कुल FUTA कर देयता $ 500 से अधिक है, आपको जमा में भेजना होगा। 2011 में, सभी कर जमा ईएफटीपीएस (संघीय कर जमा प्रणाली का उपयोग करके किया जाना चाहिए। ईएफटीपीएस के बारे में और पढ़ें, जिसमें रजिस्टर कैसे करें और भुगतान कैसे करें।
- प्रत्येक वर्ष के अंत में, आपको पिछले वर्ष की वजह से किसी भी FUTA राशि का भुगतान करना होगा, जब आप फॉर्म 940 पर वार्षिक बेरोजगारी कर रिपोर्ट दर्ज करते हैं ।
मैं बेरोजगारी करों का भुगतान और रिपोर्टिंग कैसे शुरू करूं?
जब आप एक नया व्यवसाय शुरू करते हैं, तो आपको अपने नियोक्ता आईडी एप्लिकेशन पर कर्मचारियों की अपेक्षित संख्या निर्दिष्ट करनी होगी। यह आईआरएस और आपके राज्य को जानकारी प्रदान करता है कि आपके पास बेरोजगारी करों का भुगतान और रिपोर्ट करने का दायित्व है, और वे शायद आपसे संपर्क करेंगे।
यदि आपसे संपर्क नहीं किया गया है, या यदि आप अपने पहले कर्मचारी को किराए पर लेने के लिए कुछ समय बाद निर्णय लेते हैं, तो आप प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। आप अपने राज्य के साथ पंजीकरण कर सकते हैं (नीचे देखें) और बेरोजगारी बीमा का भुगतान शुरू करने के लिए आईआरएस से संपर्क करें।
मैं राज्य बेरोजगारी करों के बारे में कैसे पता लगा सकता हूं?
प्रत्येक राज्य के पास श्रमिकों को बेरोजगारी मुआवजा लाभ प्रदान करने और उन लाभों को वित्त पोषित करने के लिए एक अलग कार्यक्रम है। राज्य आमतौर पर धन निर्धारित करते हैं जिसमें करों का भुगतान किया जाता है। राज्य रोजगार एजेंसियों एफ रोम श्रम विभाग की एक सूची यहां दी गई है।
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बेरोजगारी कर क्या हैं? आउट-ऑफ-वर्क कर्मचारियों के लिए बेरोजगारी मुआवजे के लाभों को निधि देने के लिए नियोक्ता द्वारा बेरोजगारी करों को संघीय सरकार और राज्यों को भुगतान किया जाता है। नियोक्ता अपने व्यापार के प्रकार के आधार पर कर लगाए जाते हैं; उस प्रकार के व्यवसाय में बेरोजगारी दर जितनी अधिक होगी, कर उतनी ही अधिक होगी। उदाहरण के लिए, उच्च कारोबार वाले फास्ट फ़ूड रेस्तरां को कम कारोबार वाले मेडिकल कार्यालय की तुलना में उच्च दर पर कर लगाया जाएगा। बेरोजगारी करों के लिए मुझे कितना भुगतान करना होगा? कर्मचारियों के सकल वेतन के आधार पर नियोक्ता द्वारा संघीय बेरोजगारी कर का भुगतान किया जाता है। प्रत्येक वर्ष FUTA कर प्रतिशत बदल सकता है। वर्तमान में , दो हज़ार पंद्रह के लिए, FUTA कर दर छः. शून्य% है। कर प्रत्येक कर्मचारी को वर्ष के दौरान मजदूरी के रूप में भुगतान करने वाले पहले सात डॉलर,शून्य पर लागू होता है। सात डॉलर,शून्य संघीय मजदूरी आधार है। आपका राज्य मजदूरी आधार अलग हो सकता है। कैलेंडर वर्ष में सात डॉलर,शून्य से अधिक मजदूरी पर FUTA कर का भुगतान नहीं किया जाता है। - दो हज़ार दस में किसी भी बीस या अधिक अलग-अलग हफ्तों में या वर्ष में बीस या अधिक अलग-अलग सप्ताहों में आपके पास दिन के कम से कम कुछ हिस्से के लिए एक या अधिक कर्मचारी थे। संघीय और राज्य बेरोजगारी कर प्रणाली एक साथ कैसे काम करते हैं? आम तौर पर, आप अपने बेटा टैक्स के खिलाफ राज्य बेरोजगारी निधि में भुगतान की गई राशि के लिए क्रेडिट ले सकते हैं। क्रेडिट FUTA कर योग्य मजदूरी का पाँच. चार% जितना हो सकता है। यदि आप अधिकतम पाँच. चार% क्रेडिट के हकदार हैं, तो क्रेडिट के बाद FUTA कर दर शून्य. छः% है । यदि आप अपने राज्य बेरोजगारी करों को पूरी तरह से, समय पर और FUAA कर के अधीन सभी मजदूरी पर भुगतान करते हैं, तो आप अधिकतम क्रेडिट के हकदार हैं। यदि आपके राज्य ने पूर्ण राशि का भुगतान नहीं किया है तो यह FUTA फंड के लिए है, तो आपका क्रेडिट कम हो सकता है। आईआरएस में सी redit कमी राज्यों और क्रेडिट कमी राशि की एक सूची है। राज्य बेरोजगारी कर नियोक्ता के रूप में मेरे भुगतान को कैसे प्रभावित करता है? संघीय और राज्य बेरोजगारी करों को प्रशासित करने की लागत का भुगतान करने के लिए आईआरएस में बेरोजगारी कर ट्रस्ट फंड है। कुछ राज्य इस ट्रस्ट फंड से उधार लेते हैं, और उनमें से कुछ राज्य ऋण चुकाने नहीं करते हैं। यदि कोई राज्य दो साल के भीतर चुकाया नहीं जाता है, तो राज्य में नियोक्ता को अतिरिक्त बेरोजगारी कर का भुगतान करना पड़ सकता है। राज्य FUTA कर के लिए पाँच. चार% क्रेडिट प्रत्येक वर्ष शून्य. तीन% कम किया जा सकता है। इसलिए, पहले वर्ष के लिए, आपका क्रेडिट केवल पाँच. एक% होगा और आपकी कुल FUTA कर दर सामान्य छः% की बजाय छः. तीन% होगी। यह देखने के लिए कि क्या आप कम क्रेडिट वाले राज्य में हैं, अपने राज्य के बेरोजगारी ब्यूरो से जांचें। यह सूची हर साल बदलती है। मैं फ़ुट करों की गणना कैसे करूं? - प्रत्येक पेरोल के लिए, आपको कर्मचारियों को भुगतान किए गए कुल सकल मजदूरी के आधार पर प्रति कर्मचारी सात हज़ार डॉलर तक देय FUTA कर निर्धारित करना होगा। फिर इस कुल को FUTA कर दर से गुणा करें। - प्रत्येक वर्ष के अंत में, आपको फॉर्म नौ सौ चालीस पूरा करना होगा। फॉर्म आपको पिछले वर्ष के लिए आपके द्वारा दी गई कुल राशि और आपके द्वारा पहले से भुगतान की गई राशि की गणना करने के लिए कहता है। आपको इकतीस जनवरी तक फॉर्म नौ सौ चालीस के साथ आईआरएस में शेष राशि जमा करनी होगी। मैं संघीय बेरोजगारी कर कैसे भुगतान करूं? FUTA करों का त्रैमासिक भुगतान किया जाता है, जो कि पेरोल से अलग की गई राशि के आधार पर आपके पास कर दायित्व में पाँच सौ डॉलर या उससे अधिक है। इसलिए, यदि किसी भी तिमाही के लिए आपके अवैतनिक FUTA कर पाँच सौ डॉलर से अधिक है, तो आपको तिमाही के अंत के महीने के आखिरी दिन तक उस अवैतनिक राशि का जमा करना होगा। यदि आपका अवैतनिक FUTA कर पाँच सौ डॉलर या उससे कम है, तो इसे अगली तिमाही में ले जाएं; जमा की आवश्यकता नहीं है। - सबसे पहले, आपको प्रत्येक पेरोल के लिए FUTA करों की गणना करनी होगी। - फिर, किसी भी तिमाही में जिसमें आपकी कुल FUTA कर देयता पाँच सौ डॉलर से अधिक है, आपको जमा में भेजना होगा। दो हज़ार ग्यारह में, सभी कर जमा ईएफटीपीएस और बेरोजगारी बीमा का भुगतान शुरू करने के लिए आईआरएस से संपर्क करें। मैं राज्य बेरोजगारी करों के बारे में कैसे पता लगा सकता हूं? प्रत्येक राज्य के पास श्रमिकों को बेरोजगारी मुआवजा लाभ प्रदान करने और उन लाभों को वित्त पोषित करने के लिए एक अलग कार्यक्रम है। राज्य आमतौर पर धन निर्धारित करते हैं जिसमें करों का भुगतान किया जाता है। राज्य रोजगार एजेंसियों एफ रोम श्रम विभाग की एक सूची यहां दी गई है।
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चर्चित मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद ऑपरेशन कांड में फाइनल जांच रिपोर्ट आ गई है। छह दिसंबर को इस मामले की फाइनल जांच रिपोर्ट सामने आई है। जांच में ओटी में दो तरह की बैक्टीरिया मिलने की बात कही गई है। सीएस की रिपोर्ट में 'आई हॉस्पिटल के ऑपरेशन थियेटर में सुडोमोनास और स्टेफायलोकोकस बैक्टीरिया पाया गया है। यह काफी खतरनाक बैक्टीरिया होता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बैक्टीरिया (जीवाणु) एक से दो दिन में ही यह आंखों को खराब कर देता है। एसकेएमसीएच में जिन लोगों की आंख निकाली गयी, उनमें भी यह बैक्टीरिया पाया गया।
बता दें कि पिछले साल 22 नवंबर को मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल की ओर से मोतियाबिंद ऑपरेशन कैंप लगाया गया था। इस शिविर में 65 लोगों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया था। आंखों का ऑपरेशन कराने वाले मरीजों ने बताया था, 'ऑपरेशन को एक सप्ताह भी नहीं बीता था कि उनकी आंखों में जलन, दर्द और नहीं दिखने जैसी समस्याएं होने लगी। इसके बाद इन लोगों ने जब इसकी शिकायत आई हॉस्पिटल पहुंचकर चेकअप कराया तो डॉक्टरों ने इंफेक्शन की बात कही। डॉक्टरों ने आंखें निकलवाने की सलाह दी। डॉक्टरों ने कहा कि अगर आंख नहीं निकाली गई तो दूसरी आंख भी खोना पड़ेगा। 16 लोगों की आंखें निकाल दी गईं।
घटना के दो महीने बीत जाने के बाद भी इन पीड़ितों को ना तो बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई गई और ना ही घोषित मुआवजे की राशि दी गई। नीतीश सरकार की ओर से मुआवजा राशि की घोषणा तो की गई पर राशि का खुलासा नहीं किया गया था। 2 महीने बीत जाने के बाद इन सभी का इंतजार जब खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था तो गुरुवार को सभी पीड़ित मुजफ्फरपुर समाहरणालय जिला अधिकारी का घेराव करने पहुंचे पर कोरोना संक्रमण का हवाला देकर उन्हें धरना प्रदर्शन नहीं करने दिया गया।
आंख निकाल दिए गए पीड़ितों ने बताया कि वह सब बेहद गरीब परिवार से आते हैं और महंगा इलाज कराने में सक्षम नहीं है सरकार अगर मुआवजे की घोषणा करती है तो उसे मुआवजा दिया जाना चाहिए था वहीं कुछ लोगों ने आंख के बदले आंख की मांग की कहा उन्हें मुआवजा नहीं चाहिए।
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चर्चित मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद ऑपरेशन कांड में फाइनल जांच रिपोर्ट आ गई है। छह दिसंबर को इस मामले की फाइनल जांच रिपोर्ट सामने आई है। जांच में ओटी में दो तरह की बैक्टीरिया मिलने की बात कही गई है। सीएस की रिपोर्ट में 'आई हॉस्पिटल के ऑपरेशन थियेटर में सुडोमोनास और स्टेफायलोकोकस बैक्टीरिया पाया गया है। यह काफी खतरनाक बैक्टीरिया होता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बैक्टीरिया एक से दो दिन में ही यह आंखों को खराब कर देता है। एसकेएमसीएच में जिन लोगों की आंख निकाली गयी, उनमें भी यह बैक्टीरिया पाया गया। बता दें कि पिछले साल बाईस नवंबर को मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल की ओर से मोतियाबिंद ऑपरेशन कैंप लगाया गया था। इस शिविर में पैंसठ लोगों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया था। आंखों का ऑपरेशन कराने वाले मरीजों ने बताया था, 'ऑपरेशन को एक सप्ताह भी नहीं बीता था कि उनकी आंखों में जलन, दर्द और नहीं दिखने जैसी समस्याएं होने लगी। इसके बाद इन लोगों ने जब इसकी शिकायत आई हॉस्पिटल पहुंचकर चेकअप कराया तो डॉक्टरों ने इंफेक्शन की बात कही। डॉक्टरों ने आंखें निकलवाने की सलाह दी। डॉक्टरों ने कहा कि अगर आंख नहीं निकाली गई तो दूसरी आंख भी खोना पड़ेगा। सोलह लोगों की आंखें निकाल दी गईं। घटना के दो महीने बीत जाने के बाद भी इन पीड़ितों को ना तो बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई गई और ना ही घोषित मुआवजे की राशि दी गई। नीतीश सरकार की ओर से मुआवजा राशि की घोषणा तो की गई पर राशि का खुलासा नहीं किया गया था। दो महीने बीत जाने के बाद इन सभी का इंतजार जब खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था तो गुरुवार को सभी पीड़ित मुजफ्फरपुर समाहरणालय जिला अधिकारी का घेराव करने पहुंचे पर कोरोना संक्रमण का हवाला देकर उन्हें धरना प्रदर्शन नहीं करने दिया गया। आंख निकाल दिए गए पीड़ितों ने बताया कि वह सब बेहद गरीब परिवार से आते हैं और महंगा इलाज कराने में सक्षम नहीं है सरकार अगर मुआवजे की घोषणा करती है तो उसे मुआवजा दिया जाना चाहिए था वहीं कुछ लोगों ने आंख के बदले आंख की मांग की कहा उन्हें मुआवजा नहीं चाहिए।
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राजिम। शासकीय उच्चतर माध्यमिक देवी संपदा स्कूल में छत्तीसगढ़ सरकार के महती योजना सरस्वती साइकिल वितरण का कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। यह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा एक महत्व कांछी योजना है। जिसके तहत बालिकाओं को साइकिल वितरण किया जाता है। शासकीय देवी संपदा स्कूल के कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री प्रेमसाय टेकाम जी प्रथम पंचायत कैबिनेट मंत्री विधायक भैया अमितेश शुक्ला जी के दिशा निर्देश में साईकिल का वितरण किया गया।
जिसमें बालिकाओं का उत्साह देखते बन रहा था इस महती योजना का उपहार पाकर बालिकाएं बहुत खुश हुई और सरकार की योजना के लिए उनके चेहरे में मुस्कुराहट दिख रहा था। बालिकाओं ने कहा हम लोग अपने घर से गांव दूर से आते हैं आने जाने में हमारा समय बचेगा । इस समय का घर में कार्य कर और पढ़ाई कर सदुपयोग करेंगे।
इस कार्यक्रम में वरिष्ठ कांग्रेस नेता ताराचंद मेघवानी, राम कुमार गोस्वामी, विकास तिवारी, सुनील तिवारी, गिरीश राजानी, रामकुमार साहू, जितेंद्र राजू, सोनकर इसके अलावा देवी संपदा स्कूल के शाला शिक्षा समिति के अध्यक्ष प्रकाश साहू प्रिंसिपल जाट एवं अन्य बच्चे शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित थे। इस कार्यक्रम को बहुत ही सादगी पूर्ण से सोशल डिस्टेंडिंग मास्क सेनेटाइजर किया गया। हर बच्चों को 5 बच्चों के ग्रुप बनाकर 10. . 10 मिनट के समय के अंतराल में वितरण किया गया।
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राजिम। शासकीय उच्चतर माध्यमिक देवी संपदा स्कूल में छत्तीसगढ़ सरकार के महती योजना सरस्वती साइकिल वितरण का कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। यह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा एक महत्व कांछी योजना है। जिसके तहत बालिकाओं को साइकिल वितरण किया जाता है। शासकीय देवी संपदा स्कूल के कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री प्रेमसाय टेकाम जी प्रथम पंचायत कैबिनेट मंत्री विधायक भैया अमितेश शुक्ला जी के दिशा निर्देश में साईकिल का वितरण किया गया। जिसमें बालिकाओं का उत्साह देखते बन रहा था इस महती योजना का उपहार पाकर बालिकाएं बहुत खुश हुई और सरकार की योजना के लिए उनके चेहरे में मुस्कुराहट दिख रहा था। बालिकाओं ने कहा हम लोग अपने घर से गांव दूर से आते हैं आने जाने में हमारा समय बचेगा । इस समय का घर में कार्य कर और पढ़ाई कर सदुपयोग करेंगे। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ कांग्रेस नेता ताराचंद मेघवानी, राम कुमार गोस्वामी, विकास तिवारी, सुनील तिवारी, गिरीश राजानी, रामकुमार साहू, जितेंद्र राजू, सोनकर इसके अलावा देवी संपदा स्कूल के शाला शिक्षा समिति के अध्यक्ष प्रकाश साहू प्रिंसिपल जाट एवं अन्य बच्चे शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित थे। इस कार्यक्रम को बहुत ही सादगी पूर्ण से सोशल डिस्टेंडिंग मास्क सेनेटाइजर किया गया। हर बच्चों को पाँच बच्चों के ग्रुप बनाकर दस. . दस मिनट के समय के अंतराल में वितरण किया गया।
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गर्मियों में लस्सी पीने से ताजगी भरा एहसास होता है. लस्सी बहुत ही स्वादिष्ट होती है. अलग-अलग फ्लेवर की लस्सी रोज मिले तो ताजगी भी रहेगी और साथ ही साथ स्वाद से भरपूर आपको कुछ नया एहसास भी मिलेगा. इस बार घर पर शाही लस्सी की रेसिपी जरूर ट्राई करें. इस स्वादिष्ट और सुपर रिफ्रेशिंग शाही लस्सी को बनाने के लिए आपको ठंडी दही, केसर, पानी, वेनिला आइसक्रीम का एक स्कूप और सूखे मेवे की जरूरत होती है. इसे पीते ही आपका दिल ठंडा और खुश दोनों हो जाएगा. आइए आपको बताते हैं इसकी आसान रेसिपी.
-दही, चीनी, पानी और वनीला आइसक्रीम लें और इस मिश्रण को ब्लेंड करें.
-एक छोटी कटोरी में केसर को एक चम्मच पानी के साथ भिगो दें.
-लस्सी के बेस को गिलास में डालें और ऊपर से केसर डाल दें. इस मिश्रण को धीरे से मिलाएं.
-ड्राई फ्रूट्स से सजाएं और इसका मजा लें.
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गर्मियों में लस्सी पीने से ताजगी भरा एहसास होता है. लस्सी बहुत ही स्वादिष्ट होती है. अलग-अलग फ्लेवर की लस्सी रोज मिले तो ताजगी भी रहेगी और साथ ही साथ स्वाद से भरपूर आपको कुछ नया एहसास भी मिलेगा. इस बार घर पर शाही लस्सी की रेसिपी जरूर ट्राई करें. इस स्वादिष्ट और सुपर रिफ्रेशिंग शाही लस्सी को बनाने के लिए आपको ठंडी दही, केसर, पानी, वेनिला आइसक्रीम का एक स्कूप और सूखे मेवे की जरूरत होती है. इसे पीते ही आपका दिल ठंडा और खुश दोनों हो जाएगा. आइए आपको बताते हैं इसकी आसान रेसिपी. -दही, चीनी, पानी और वनीला आइसक्रीम लें और इस मिश्रण को ब्लेंड करें. -एक छोटी कटोरी में केसर को एक चम्मच पानी के साथ भिगो दें. -लस्सी के बेस को गिलास में डालें और ऊपर से केसर डाल दें. इस मिश्रण को धीरे से मिलाएं. -ड्राई फ्रूट्स से सजाएं और इसका मजा लें.
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नई दिल्लीः हर दिन सामने आ रहे कोरोना के नए संदिग्ध और मौत की ख़बरों से आज पूरी दुनिया हिल चुकी है. वहीं इस वायरस कि चपेट में आने से 5000 से अधिक की मौतें भी हो चुकी है. जहां कोरोना वायरस ने विश्वभर के अनेक देशों को अपने चपेट में ले लिया है. पीएम मोदी ने एक बार फिर शनिवार रात को ट्वीट करते हुए कहा, 'एक स्वस्थ ग्रह के लिए समय पर कार्रवाई करनी चाहिए. रविवार शाम 5 बजे सार्क (SAARC) देशों के नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोरोना वायरस (COVID-19) की चुनौती से लड़ने के लिए एक रोडमैप पर चर्चा करेंगे. मुझे विश्वास है कि हमारे एक साथ आने से प्रभावी परिणाम प्राप्त होंगे और हमारे देश के नागरिकों को उसका लाभ मिलेगा. '
मिली जानकारी के अनुसार जिन मुद्दों पर रविवार को चर्चा हो सकती है उसमें नागरिकों के आवागमन को लेकर ज्यादा सतर्कता बरतने से लेकर एक दूसरे को मेडिकल या दवाईयों की मदद पहुंचाने या अनुभव को साझा करना शामिल रहेगा. जंहा अभी भी यह कहा जा रहा है कि भारत इस क्षेत्र का सबसे बड़ा देश है और उसने सफलतापूर्वक अभी तक कोरोना वायरस के प्रसार को सीमित रखा है, इसलिए पीएम मोदी की तरफ से दूसरे देशों को मदद देने की घोषणा की जा सकती है.
भारत ने कई देशों की मदद कीः यदि हम बात करें सूत्रों कि तो पता चला है कि भारत पहले से ही कुछ देशों को मदद दे रहा है. मसलन, चीन के शहर वुहान को भारत की तरफ से 26 फरवरी, 2020 को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए 15 टन मेडिकल सामग्री की आपूर्ति की गई. इस तरह की मदद ईरान को भी जल्द दी जाएगी. जंहा भारत जब चीन व जापान से अपने नागरिकों की निकासी कर रहा था तो बांग्लादेश, मालदीव समेत दूसरे देशों के भी कुछ नागरिकों को निकाला गया. भारत ने सभी सार्क देशों से आग्रह किया था कि अगर उनके किसी नागरिकों को निकालना हो तो जानकारी दे, भारत उसमें मदद करेगा. कुछ देशों ने आग्रह भी किया.
राम विलास पासवान का बड़ा एलान, कहा- 'चीनी उद्योग को उबारने की कोशिश जारी'
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नई दिल्लीः हर दिन सामने आ रहे कोरोना के नए संदिग्ध और मौत की ख़बरों से आज पूरी दुनिया हिल चुकी है. वहीं इस वायरस कि चपेट में आने से पाँच हज़ार से अधिक की मौतें भी हो चुकी है. जहां कोरोना वायरस ने विश्वभर के अनेक देशों को अपने चपेट में ले लिया है. पीएम मोदी ने एक बार फिर शनिवार रात को ट्वीट करते हुए कहा, 'एक स्वस्थ ग्रह के लिए समय पर कार्रवाई करनी चाहिए. रविवार शाम पाँच बजे सार्क देशों के नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोरोना वायरस की चुनौती से लड़ने के लिए एक रोडमैप पर चर्चा करेंगे. मुझे विश्वास है कि हमारे एक साथ आने से प्रभावी परिणाम प्राप्त होंगे और हमारे देश के नागरिकों को उसका लाभ मिलेगा. ' मिली जानकारी के अनुसार जिन मुद्दों पर रविवार को चर्चा हो सकती है उसमें नागरिकों के आवागमन को लेकर ज्यादा सतर्कता बरतने से लेकर एक दूसरे को मेडिकल या दवाईयों की मदद पहुंचाने या अनुभव को साझा करना शामिल रहेगा. जंहा अभी भी यह कहा जा रहा है कि भारत इस क्षेत्र का सबसे बड़ा देश है और उसने सफलतापूर्वक अभी तक कोरोना वायरस के प्रसार को सीमित रखा है, इसलिए पीएम मोदी की तरफ से दूसरे देशों को मदद देने की घोषणा की जा सकती है. भारत ने कई देशों की मदद कीः यदि हम बात करें सूत्रों कि तो पता चला है कि भारत पहले से ही कुछ देशों को मदद दे रहा है. मसलन, चीन के शहर वुहान को भारत की तरफ से छब्बीस फरवरी, दो हज़ार बीस को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए पंद्रह टन मेडिकल सामग्री की आपूर्ति की गई. इस तरह की मदद ईरान को भी जल्द दी जाएगी. जंहा भारत जब चीन व जापान से अपने नागरिकों की निकासी कर रहा था तो बांग्लादेश, मालदीव समेत दूसरे देशों के भी कुछ नागरिकों को निकाला गया. भारत ने सभी सार्क देशों से आग्रह किया था कि अगर उनके किसी नागरिकों को निकालना हो तो जानकारी दे, भारत उसमें मदद करेगा. कुछ देशों ने आग्रह भी किया. राम विलास पासवान का बड़ा एलान, कहा- 'चीनी उद्योग को उबारने की कोशिश जारी'
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देश की सुरक्षा के लिए हमारे जवान धरती, जल और वायु हर छोर पर तैनात है। जब हमारा देश अंग्रेजी हुकुमत का गुलाम हुआ था। तब अंग्रेज पानी के रास्ते हमारे देश में आए थे। तब हमारे पास नौसेना नहीं थी और ना ही हम खुद तटतीय इलाकों की सुरक्षा करना महसूस करते थे।
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देश की सुरक्षा के लिए हमारे जवान धरती, जल और वायु हर छोर पर तैनात है। जब हमारा देश अंग्रेजी हुकुमत का गुलाम हुआ था। तब अंग्रेज पानी के रास्ते हमारे देश में आए थे। तब हमारे पास नौसेना नहीं थी और ना ही हम खुद तटतीय इलाकों की सुरक्षा करना महसूस करते थे।
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Sofia Ansari New Photos: सोशल मीडिया स्टार सोफिया अंसारी के फैंस को उनके नए पोस्ट की बुरी आदत लग चुकी है। जैसा कि सोफिया अंसारी आए दिल अपने पोस्ट से गर्दा उड़ाए रहती हैं, ऐसे में जिस दिन सोफिया की तस्वीरें सामने नहीं आतीं, फैंस उदास रहते हैं।
Sofia Ansari New Photos: सोशल मीडिया स्टार सोफिया अंसारी के फैंस को उनके नए पोस्ट की बुरी आदत लग चुकी है। जैसा कि सोफिया अंसारी आए दिल अपने पोस्ट से गर्दा उड़ाए रहती हैं, ऐसे में जिस दिन सोफिया की तस्वीरें सामने नहीं आतीं, फैंस उदास रहते हैं। आज का दिन भी कुछ ऐसा ही था, फैंस और फॉलोअर्स सोफिया के पोस्ट का सुबह से इंतजार कर रहे थे और अब जाकर उनका ये इंतजार खत्म हो चुका है।
सोफिया अंसारी अब फिर अपने नए पोस्ट के साथ तहलका मचाने के लिए आ गई हैं। इस बार उन्होंने अपनी ऐसी तस्वीरें साझा की हैं, जो यकीनन होश उड़ाने वाली हैं। हम तो आपसे यही कहेंगे कि सोफिया की इन तस्वीरों को जरा संभल कर दी देखिएगा, क्योंकि ये जानलेवा हैं।
सोफिया अंसारी ने इन तस्वीरों में रिवीलिंग आउटफिट तो पहना ही है, साथ ही उनका पोज, उसके क्या ही कहने! कभी लेटकर तो कभी झुककर, उन्होंने इंटरनेट की दुनिया में तो आग ही लगा दिया है। सोफिया की इन तस्वीरों को देख तो लड़कों का बुरा हाल हो गया है, फैंस बेकाबू हो गए हैं, जो कि कमेंट सेक्शन देख साफ पता चल रहा है।
सोफिया अंसारी बोल्डनेस के दम पर सोशल मीडिया पर अपनी एक अलग पहचान बना ली है, और उनकी फैन फॉलोइंग भी तेजी से बढ़ती ही जा रही है। फिलहाल सोफिया अंसारी के लेटेस्ट पोस्ट की बात करें तो इसमें वह ग्रीन कलर का जालीदार कपड़ा पहने दिख रहीं हैं, वहीं उनके हॉट पोज इन तस्वीरों को और अधिक बोल्ड बना रहा है। सोफिया की हॉट अदाएं देख यूजर्स कमेंट करने से खुद को रोक नहीं पा रहें हैं। अब तो कमेंट बॉक्स में जमकर फायर और दिल वाले इमोजी की बरसात हो रही है।
सोफिया अंसारी वैसे हो हॉट पोस्ट से खलबली मचा देती हैं, लेकिन बीते दिन उन्होंने सोशल मीडिया पर एक क्रिप्टिक पोस्ट शेयर किया था, जिसकी भी खूब चर्चा हुई थी। अपने उस पोस्ट में सोफिया अंसारी ने लिखा था, "साल 2022 मेरे लिए अच्छा साल नहीं था। मैंने बीते साल बहुत पॉलिटिक्स देखा। लोगों के माइंड गेम्स मुझपे, मेरी पॉपुलैरिटी और मेरे फेम को लेकर। मैं अपने सोशल मीडिया पेज पर बहुत से backlashes फेस किए। जलन होना और ये सब करना किसी के साथ, वैसे ये दुनिया है। मैं चाहकर भी उनके नाम नहीं बता सकती, जिन्होंने मेरे साथ ऐसा किया, लेकिन एक दिन जरूर बताऊंगी- बड़े-बड़े लोग हैं। पर कुछ लोग जितना अच्छा खुद को दिखाते हैं यहां सोशल मीडिया पर, अक्सर रियल लाइफ में उतने ही बुरे होते हैं। मैं खुश हूं कि मैं फेक नहीं हूं। उम्मीद करती हूं कि 2023 हमारे लिए और खुशियां और ब्लेसिंग लेकर आए। "
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Sofia Ansari New Photos: सोशल मीडिया स्टार सोफिया अंसारी के फैंस को उनके नए पोस्ट की बुरी आदत लग चुकी है। जैसा कि सोफिया अंसारी आए दिल अपने पोस्ट से गर्दा उड़ाए रहती हैं, ऐसे में जिस दिन सोफिया की तस्वीरें सामने नहीं आतीं, फैंस उदास रहते हैं। Sofia Ansari New Photos: सोशल मीडिया स्टार सोफिया अंसारी के फैंस को उनके नए पोस्ट की बुरी आदत लग चुकी है। जैसा कि सोफिया अंसारी आए दिल अपने पोस्ट से गर्दा उड़ाए रहती हैं, ऐसे में जिस दिन सोफिया की तस्वीरें सामने नहीं आतीं, फैंस उदास रहते हैं। आज का दिन भी कुछ ऐसा ही था, फैंस और फॉलोअर्स सोफिया के पोस्ट का सुबह से इंतजार कर रहे थे और अब जाकर उनका ये इंतजार खत्म हो चुका है। सोफिया अंसारी अब फिर अपने नए पोस्ट के साथ तहलका मचाने के लिए आ गई हैं। इस बार उन्होंने अपनी ऐसी तस्वीरें साझा की हैं, जो यकीनन होश उड़ाने वाली हैं। हम तो आपसे यही कहेंगे कि सोफिया की इन तस्वीरों को जरा संभल कर दी देखिएगा, क्योंकि ये जानलेवा हैं। सोफिया अंसारी ने इन तस्वीरों में रिवीलिंग आउटफिट तो पहना ही है, साथ ही उनका पोज, उसके क्या ही कहने! कभी लेटकर तो कभी झुककर, उन्होंने इंटरनेट की दुनिया में तो आग ही लगा दिया है। सोफिया की इन तस्वीरों को देख तो लड़कों का बुरा हाल हो गया है, फैंस बेकाबू हो गए हैं, जो कि कमेंट सेक्शन देख साफ पता चल रहा है। सोफिया अंसारी बोल्डनेस के दम पर सोशल मीडिया पर अपनी एक अलग पहचान बना ली है, और उनकी फैन फॉलोइंग भी तेजी से बढ़ती ही जा रही है। फिलहाल सोफिया अंसारी के लेटेस्ट पोस्ट की बात करें तो इसमें वह ग्रीन कलर का जालीदार कपड़ा पहने दिख रहीं हैं, वहीं उनके हॉट पोज इन तस्वीरों को और अधिक बोल्ड बना रहा है। सोफिया की हॉट अदाएं देख यूजर्स कमेंट करने से खुद को रोक नहीं पा रहें हैं। अब तो कमेंट बॉक्स में जमकर फायर और दिल वाले इमोजी की बरसात हो रही है। सोफिया अंसारी वैसे हो हॉट पोस्ट से खलबली मचा देती हैं, लेकिन बीते दिन उन्होंने सोशल मीडिया पर एक क्रिप्टिक पोस्ट शेयर किया था, जिसकी भी खूब चर्चा हुई थी। अपने उस पोस्ट में सोफिया अंसारी ने लिखा था, "साल दो हज़ार बाईस मेरे लिए अच्छा साल नहीं था। मैंने बीते साल बहुत पॉलिटिक्स देखा। लोगों के माइंड गेम्स मुझपे, मेरी पॉपुलैरिटी और मेरे फेम को लेकर। मैं अपने सोशल मीडिया पेज पर बहुत से backlashes फेस किए। जलन होना और ये सब करना किसी के साथ, वैसे ये दुनिया है। मैं चाहकर भी उनके नाम नहीं बता सकती, जिन्होंने मेरे साथ ऐसा किया, लेकिन एक दिन जरूर बताऊंगी- बड़े-बड़े लोग हैं। पर कुछ लोग जितना अच्छा खुद को दिखाते हैं यहां सोशल मीडिया पर, अक्सर रियल लाइफ में उतने ही बुरे होते हैं। मैं खुश हूं कि मैं फेक नहीं हूं। उम्मीद करती हूं कि दो हज़ार तेईस हमारे लिए और खुशियां और ब्लेसिंग लेकर आए। "
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क्या आपने होली पर कभी भांग पी है?
हां कई बार। भांग पीने के बाद में बहुत मस्ती में आ जाता हूं। मेरे दोस्तों का मानना है कि मैं भांग पीने के बाद बहुत मजेदार बातें करता हूं। यही वजह है कि मेरे दोस्त मुझे कई बार जानबूझ कर भांग पिला देते हैं, जिससे मेरी नौटंकी शुरू हो सके।
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क्या आपने होली पर कभी भांग पी है? हां कई बार। भांग पीने के बाद में बहुत मस्ती में आ जाता हूं। मेरे दोस्तों का मानना है कि मैं भांग पीने के बाद बहुत मजेदार बातें करता हूं। यही वजह है कि मेरे दोस्त मुझे कई बार जानबूझ कर भांग पिला देते हैं, जिससे मेरी नौटंकी शुरू हो सके।
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मुंबई । भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(बीसीसीआई) ने महेंद्र सिंह धोनी के दस्तानों पर भारतीय सेना के बलिदान बैज को लेकर पैदा हुये अनावश्यक विवाद में हस्तक्षेप करते हुये अपने विकेटकीपर बल्लेबाज़ का समर्थन किया है, वहीं इस बीच खेल मंत्री किरन रिजिजू ने भी बोर्ड से इस मामले में उचित कदम उठाने की अपील की है।
इंग्लैंड एंड वेल्स में चल रहे विश्वकप में हिस्सा ले रही भारतीय टीम के खिलाड़ी धोनी के ग्लव्स पर लगे भारतीय सेना के बैज को लेकर वैश्विक संस्था ने आपत्ति जतायी थी जिसके बाद अनावश्यक विवाद पैदा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने बीसीसीआई से अपील की है कि वह धोनी से उनके दस्तानों पर बने सेना के बैज को हटाने के लिए कहे।
आईसीसी नियम के मुताबिक खिलाड़ियों के कपड़ों या अन्य वस्तुओं पर अंतर्राष्ट्रीय मैच के दौरान राजनीति, धर्म या नस्लभेद आदि का संदेश अंकित नहीं होना चाहिए। हालांकि बीसीसीआई का संचालन कर रही प्रशासकों की समिति(सीओए) के प्रमुख विनोद राय ने शुक्रवार को पुष्टि की कि बीसीसीआई ने आईसीसी को पत्र लिखा है और धोनी को उनके भारतीय सेना के बैज लगे ग्लव्स पहनकर खेलने की अनुमति देने की मांग की है।
आईसीसी के विरोध जताने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर वैश्विक क्रिकेट संस्था की काफी आलोचना हो रही है जिसके बाद सीओए को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा है। इस बीच खेल मंत्री रिजिजू ने भी बीसीसीआई से इस मामले में उचित कदम उठाने की मांग की है।
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के चेयरमैन राजीव शुक्ला ने भी धोनी का यह कहकर समर्थन किया है कि पूर्व कप्तान ने बलिदान देने का जो भारतीय सेना का बैज पहना है वह आईसीसी के नियमों का उल्लंघन नहीं है।
उल्लेखनीय है कि विश्वकप में भारत के पहले मैच में धोनी दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ विकेटकीपिंग दस्तानों पर इंडियन पैरा स्पेशल फोर्स के चिह्न के साथ खेल रहे थे। आईसीसी ने बीसीसीआई से कहा है कि वह धोनी के दस्तानों पर से यह चिह्न हटवाए। धोनी के दस्तानों पर बलिदान ब्रिगेड का चिह्न है। सिर्फ पैरामिलिट्री कमांडो को ही यह चिह्न धारण करने का अधिकार है।
हालांकि आईसीसी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मैचों में वह अपने उपकरणों तथा कपड़ों पर किसी तरह के राजनीतिक,धार्मिक या नस्लभेद का समर्थन करने वाले संदेश धारण करने या ऐसी गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति नहीं देता है।
अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज़ धोनी को वर्ष 2011 में पैराशूट रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था। धोनी ने 2015 में पैरा ब्रिगेड की ट्रेनिंग भी ली थी। हालांकि इस तरह का विवाद कोई नया नहीं है। इससे पहले मार्च में भी रांची में आस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में टीम इंडिया के खिलाड़ियों के भारतीय सेना की टोपी पहनकर खेलने पर विवाद पैदा हो गया था।
भारतीय टीम ने पुलवामा में हुये आतंकवादी हमलों में मारे गये सैनिकों को श्रद्धांजलि स्वरूप सेना की टोपी पहनी थी। धोनी ने ही अपने टीम साथियों को मैच से पूर्व ये टोपियां भेंट की थीं। खिलाड़ियों ने इस मैच से मिली कमाई को शहीदों के परिजनों को दिया था। हालांकि आईसीसी ने समाजिक कार्य के लिये धन इकठ्ठा करने के इरादे से उठाये गये इस कदम के मद्देनज़र भारतीय टीम का विरोध नहीं किया था। पाकिस्तान के खेल मंत्री ने हालांकि इसकी शिकायत वैश्विक संस्था से की थी।
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मुंबई । भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने महेंद्र सिंह धोनी के दस्तानों पर भारतीय सेना के बलिदान बैज को लेकर पैदा हुये अनावश्यक विवाद में हस्तक्षेप करते हुये अपने विकेटकीपर बल्लेबाज़ का समर्थन किया है, वहीं इस बीच खेल मंत्री किरन रिजिजू ने भी बोर्ड से इस मामले में उचित कदम उठाने की अपील की है। इंग्लैंड एंड वेल्स में चल रहे विश्वकप में हिस्सा ले रही भारतीय टीम के खिलाड़ी धोनी के ग्लव्स पर लगे भारतीय सेना के बैज को लेकर वैश्विक संस्था ने आपत्ति जतायी थी जिसके बाद अनावश्यक विवाद पैदा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने बीसीसीआई से अपील की है कि वह धोनी से उनके दस्तानों पर बने सेना के बैज को हटाने के लिए कहे। आईसीसी नियम के मुताबिक खिलाड़ियों के कपड़ों या अन्य वस्तुओं पर अंतर्राष्ट्रीय मैच के दौरान राजनीति, धर्म या नस्लभेद आदि का संदेश अंकित नहीं होना चाहिए। हालांकि बीसीसीआई का संचालन कर रही प्रशासकों की समिति के प्रमुख विनोद राय ने शुक्रवार को पुष्टि की कि बीसीसीआई ने आईसीसी को पत्र लिखा है और धोनी को उनके भारतीय सेना के बैज लगे ग्लव्स पहनकर खेलने की अनुमति देने की मांग की है। आईसीसी के विरोध जताने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर वैश्विक क्रिकेट संस्था की काफी आलोचना हो रही है जिसके बाद सीओए को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा है। इस बीच खेल मंत्री रिजिजू ने भी बीसीसीआई से इस मामले में उचित कदम उठाने की मांग की है। इंडियन प्रीमियर लीग के चेयरमैन राजीव शुक्ला ने भी धोनी का यह कहकर समर्थन किया है कि पूर्व कप्तान ने बलिदान देने का जो भारतीय सेना का बैज पहना है वह आईसीसी के नियमों का उल्लंघन नहीं है। उल्लेखनीय है कि विश्वकप में भारत के पहले मैच में धोनी दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ विकेटकीपिंग दस्तानों पर इंडियन पैरा स्पेशल फोर्स के चिह्न के साथ खेल रहे थे। आईसीसी ने बीसीसीआई से कहा है कि वह धोनी के दस्तानों पर से यह चिह्न हटवाए। धोनी के दस्तानों पर बलिदान ब्रिगेड का चिह्न है। सिर्फ पैरामिलिट्री कमांडो को ही यह चिह्न धारण करने का अधिकार है। हालांकि आईसीसी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मैचों में वह अपने उपकरणों तथा कपड़ों पर किसी तरह के राजनीतिक,धार्मिक या नस्लभेद का समर्थन करने वाले संदेश धारण करने या ऐसी गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति नहीं देता है। अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज़ धोनी को वर्ष दो हज़ार ग्यारह में पैराशूट रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया था। धोनी ने दो हज़ार पंद्रह में पैरा ब्रिगेड की ट्रेनिंग भी ली थी। हालांकि इस तरह का विवाद कोई नया नहीं है। इससे पहले मार्च में भी रांची में आस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में टीम इंडिया के खिलाड़ियों के भारतीय सेना की टोपी पहनकर खेलने पर विवाद पैदा हो गया था। भारतीय टीम ने पुलवामा में हुये आतंकवादी हमलों में मारे गये सैनिकों को श्रद्धांजलि स्वरूप सेना की टोपी पहनी थी। धोनी ने ही अपने टीम साथियों को मैच से पूर्व ये टोपियां भेंट की थीं। खिलाड़ियों ने इस मैच से मिली कमाई को शहीदों के परिजनों को दिया था। हालांकि आईसीसी ने समाजिक कार्य के लिये धन इकठ्ठा करने के इरादे से उठाये गये इस कदम के मद्देनज़र भारतीय टीम का विरोध नहीं किया था। पाकिस्तान के खेल मंत्री ने हालांकि इसकी शिकायत वैश्विक संस्था से की थी।
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अजमेर की सिविल लाइन थाना पुलिस ने जेल में मोबाइल का उपयोग करने के मामले में कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को गिरफ्तार किया। कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस सिविल लाइन थाने में लॉरेंस से पूछताछ की। इस दौरान लॉरेंस से पेट्रोल पम्प फायरिंग मामले में भी पूछताछ की गई। लॉरेंस के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में 50 से ज्यादा हत्या, रंगदारी व हत्या के प्रयास के मामले दर्ज है। वर्तमान में उसे अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में रखा गया है।
जेल प्रशासन की ओर से करीब एक साल पहले मोबाइल मिलने का मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के बाद लॉरेंस को हाई सिक्योरिटी जेल से प्रोडक्शन वारंट के जरिए गिरफ्तार किया। पुलिस ने लॉरेंस से सिविल लाइन थाने में पूछताछ की और बाद में कोर्ट में पेश करने से पहले उसका जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में मेडिकल भी कराया। इस दौरान अस्पताल में भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई।
अजमेर पुलिस अधीक्षक (SP) विकास शर्मा ने बताया कि जेल में मिले मोबाइल के मामले में लॉरेंस को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान उससे पेट्रोल पंप फायरिंग मामले में भी पूछताछ की जा रही है।
पंजाब के फाजिल्का से ताल्लुक रखने वाले लॉरेंस बिश्नोई की शुरुआती पढ़ाई फाजिल्का में ही हुई। इसके बाद उसका एडमिशन चंडीगढ़ के सेक्टर 10 स्थित डीएवी कॉलेज में कराया गया। वहीं छात्र राजनीति में आया और लोकप्रियता भी मिली। पहला गैंग कॉलेज में ही बनाया।
लॉरेंस ने अपना नेटवर्क पहले पंजाब और हरियाणा, फिर कई और राज्यों तक फैला लिया। बिश्नोई के खिलाफ पहली एफआईआर हत्या के प्रयास की दर्ज हुई। कुछ ही दिन बाद, अप्रैल 2010 में एक घर में घुसने को लेकर दूसरी एफआईआर हुई। फरवरी 2011 में मारपीट और फोन की चोरी का केस दर्ज हुआ। ये सारे केस स्टूडेंट पॉलिटिक्स से जुड़े थे।
2016 में लॉरेंस पर एक कांग्रेस नेता की हत्या का आरोप लगा। उसने फेसबुक के जरिए हत्या की जिम्मेदारी ली। लॉरेंस बिश्नोई को पहचान मिली 2018 में। दिल्ली पुलिस ने बिश्नोई के साथ-साथ जिस सम्पत नेहरा के खिलाफ चार्जशीट दायर की है, वह जून 2018 में बेंगलुरु से पकड़ा गया।
सम्पत ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह अभिनेता सलमान खान की हत्या करने वाला था। सम्पत के अनुसार, सलमान को मारने का काम उसे लॉरेंस ने दिया था। लॉरेंस खुद बिश्नोई समाज से है, जिनके लिए काले हिरण पूजनीय हैं। सलमान खान की हत्या कर लॉरेंस बिश्नोई उन काले हिरणों की हत्या का बदला लेना चाहता था।
लॉरेंस बिश्नोई ने राष्ट्रीय स्तर पर क्राइम सिंडिकेट बनाने के लिए हर राज्य के लोकल गैंगस्टर्स के साथ हाथ मिलाने का प्लान बनाया। मकसद था कि उत्तर भारत में अंडरवर्ल्ड पर कंट्रोल। यह सारा खुलासा गैंगस्टर काला जठेड़ी, राजस्थान की लेडी डॉन अनुराधा चौधरी से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की ओर से की गई पूछताछ में हुआ है।
लॉरेंस के ईशारे पर यह इन्टरनेशनल क्राइम सीन्डीकेट मेक्सिको, इटली और थाईलैंड में बैठे अपने साथियों के साथ मिलकर रंगदारी, ड्रग्स तस्करी, जमीन कब्जा और हत्याओं को अंजाम देता है। इनके निशाने पर बॉलिवुड सेलिब्रिटीज, पंजाबी सिंगर्स, प्रोपटी कारोबारी और एक्टर्स होते हैं। लॉरेन्स से इन्टरनेशनल गैंगस्टर गोल्डी बराड और मोन्टी के जरिए इटालियन माफिया तक कांटेक्ट है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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अजमेर की सिविल लाइन थाना पुलिस ने जेल में मोबाइल का उपयोग करने के मामले में कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को गिरफ्तार किया। कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस सिविल लाइन थाने में लॉरेंस से पूछताछ की। इस दौरान लॉरेंस से पेट्रोल पम्प फायरिंग मामले में भी पूछताछ की गई। लॉरेंस के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में पचास से ज्यादा हत्या, रंगदारी व हत्या के प्रयास के मामले दर्ज है। वर्तमान में उसे अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में रखा गया है। जेल प्रशासन की ओर से करीब एक साल पहले मोबाइल मिलने का मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के बाद लॉरेंस को हाई सिक्योरिटी जेल से प्रोडक्शन वारंट के जरिए गिरफ्तार किया। पुलिस ने लॉरेंस से सिविल लाइन थाने में पूछताछ की और बाद में कोर्ट में पेश करने से पहले उसका जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में मेडिकल भी कराया। इस दौरान अस्पताल में भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई। अजमेर पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा ने बताया कि जेल में मिले मोबाइल के मामले में लॉरेंस को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान उससे पेट्रोल पंप फायरिंग मामले में भी पूछताछ की जा रही है। पंजाब के फाजिल्का से ताल्लुक रखने वाले लॉरेंस बिश्नोई की शुरुआती पढ़ाई फाजिल्का में ही हुई। इसके बाद उसका एडमिशन चंडीगढ़ के सेक्टर दस स्थित डीएवी कॉलेज में कराया गया। वहीं छात्र राजनीति में आया और लोकप्रियता भी मिली। पहला गैंग कॉलेज में ही बनाया। लॉरेंस ने अपना नेटवर्क पहले पंजाब और हरियाणा, फिर कई और राज्यों तक फैला लिया। बिश्नोई के खिलाफ पहली एफआईआर हत्या के प्रयास की दर्ज हुई। कुछ ही दिन बाद, अप्रैल दो हज़ार दस में एक घर में घुसने को लेकर दूसरी एफआईआर हुई। फरवरी दो हज़ार ग्यारह में मारपीट और फोन की चोरी का केस दर्ज हुआ। ये सारे केस स्टूडेंट पॉलिटिक्स से जुड़े थे। दो हज़ार सोलह में लॉरेंस पर एक कांग्रेस नेता की हत्या का आरोप लगा। उसने फेसबुक के जरिए हत्या की जिम्मेदारी ली। लॉरेंस बिश्नोई को पहचान मिली दो हज़ार अट्ठारह में। दिल्ली पुलिस ने बिश्नोई के साथ-साथ जिस सम्पत नेहरा के खिलाफ चार्जशीट दायर की है, वह जून दो हज़ार अट्ठारह में बेंगलुरु से पकड़ा गया। सम्पत ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह अभिनेता सलमान खान की हत्या करने वाला था। सम्पत के अनुसार, सलमान को मारने का काम उसे लॉरेंस ने दिया था। लॉरेंस खुद बिश्नोई समाज से है, जिनके लिए काले हिरण पूजनीय हैं। सलमान खान की हत्या कर लॉरेंस बिश्नोई उन काले हिरणों की हत्या का बदला लेना चाहता था। लॉरेंस बिश्नोई ने राष्ट्रीय स्तर पर क्राइम सिंडिकेट बनाने के लिए हर राज्य के लोकल गैंगस्टर्स के साथ हाथ मिलाने का प्लान बनाया। मकसद था कि उत्तर भारत में अंडरवर्ल्ड पर कंट्रोल। यह सारा खुलासा गैंगस्टर काला जठेड़ी, राजस्थान की लेडी डॉन अनुराधा चौधरी से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की ओर से की गई पूछताछ में हुआ है। लॉरेंस के ईशारे पर यह इन्टरनेशनल क्राइम सीन्डीकेट मेक्सिको, इटली और थाईलैंड में बैठे अपने साथियों के साथ मिलकर रंगदारी, ड्रग्स तस्करी, जमीन कब्जा और हत्याओं को अंजाम देता है। इनके निशाने पर बॉलिवुड सेलिब्रिटीज, पंजाबी सिंगर्स, प्रोपटी कारोबारी और एक्टर्स होते हैं। लॉरेन्स से इन्टरनेशनल गैंगस्टर गोल्डी बराड और मोन्टी के जरिए इटालियन माफिया तक कांटेक्ट है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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लखनऊ : केन्द्र सरकार के इंस्पायर अवार्ड मानक योजना 2022-23 का रविवार को परिणाम जारी हुआ जिसमें लखनऊ के 104 बाल वैज्ञानिकों का चयन हुआ है। प्रदेश से 901 बच्चे चयनित हुए।
जेडी कार्यालय के मण्डलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि इस वर्ष इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के तहत जिला स्तरीय प्रदर्शनी में लखनऊ मण्डल से 174 बाल वैज्ञानिकों के मॉडल चुने गए हैं।
लखनऊ में 104, हरदोई में 32, सीतापुर में 18, उन्नाव से 10, लखीमपुरखीरी से सात व रायबरेली से तीन बच्चों के मॉडल चुने गए हैं। केन्द्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग प्रत्येक छात्र को प्रोत्साहन राशि के तौर पर 10 हजार देगी। जेडी सुरेन्द्र तिवारी, डीआईओएस राकेश कुमार पाण्डेय ने बधाई दी।
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लखनऊ : केन्द्र सरकार के इंस्पायर अवार्ड मानक योजना दो हज़ार बाईस-तेईस का रविवार को परिणाम जारी हुआ जिसमें लखनऊ के एक सौ चार बाल वैज्ञानिकों का चयन हुआ है। प्रदेश से नौ सौ एक बच्चे चयनित हुए। जेडी कार्यालय के मण्डलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि इस वर्ष इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के तहत जिला स्तरीय प्रदर्शनी में लखनऊ मण्डल से एक सौ चौहत्तर बाल वैज्ञानिकों के मॉडल चुने गए हैं। लखनऊ में एक सौ चार, हरदोई में बत्तीस, सीतापुर में अट्ठारह, उन्नाव से दस, लखीमपुरखीरी से सात व रायबरेली से तीन बच्चों के मॉडल चुने गए हैं। केन्द्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग प्रत्येक छात्र को प्रोत्साहन राशि के तौर पर दस हजार देगी। जेडी सुरेन्द्र तिवारी, डीआईओएस राकेश कुमार पाण्डेय ने बधाई दी।
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Lalit Kumar (चर्चा । योगदान)
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(कोई अंतर नहीं)
जन्मस्थानः प्रतापगढ़ (उत्तरप्रदेश)
भाषाः हिन्दी, उर्दू, संस्कृत, बांग्ला, अँग्रेजी, फ़ारसी, अरबी और अवधी, भोजपुरी (बोलियाँ)
वर्तमान पदनाम-वरिष्ठ शोध अध्येता (senior research fellow)
वर्तमान में संस्कृत विभाग काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में 'काव्यगुणों' पर शोधकार्य में संलग्न,एवं वहीं अध्यापन के साथ साथ अकादमिक कार्यों में संलग्न।
अकादमिक कार्य- "संस्कृत वाङ्मय को बंगाल का योगदान" एवं ईरानी बच्चो की कहानियां पुस्तके प्रकाशनाधीन।
स्व-शोध विषय एवं ईरान, फ़ारसी साहित्य से संबन्धित शोधलेख विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित।
अनुवाद कार्य के साथ प्राच्य संस्कृत साहित्य,धर्म दर्शन,ईरान एवं इस्लामी अध्ययन में विशेष रुचि।
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Lalit Kumar जन्मस्थानः प्रतापगढ़ भाषाः हिन्दी, उर्दू, संस्कृत, बांग्ला, अँग्रेजी, फ़ारसी, अरबी और अवधी, भोजपुरी वर्तमान पदनाम-वरिष्ठ शोध अध्येता वर्तमान में संस्कृत विभाग काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में 'काव्यगुणों' पर शोधकार्य में संलग्न,एवं वहीं अध्यापन के साथ साथ अकादमिक कार्यों में संलग्न। अकादमिक कार्य- "संस्कृत वाङ्मय को बंगाल का योगदान" एवं ईरानी बच्चो की कहानियां पुस्तके प्रकाशनाधीन। स्व-शोध विषय एवं ईरान, फ़ारसी साहित्य से संबन्धित शोधलेख विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित। अनुवाद कार्य के साथ प्राच्य संस्कृत साहित्य,धर्म दर्शन,ईरान एवं इस्लामी अध्ययन में विशेष रुचि।
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जिले में साम्प्रदायिक सौहार्द और आपसी एकता या धार्मिक समरसता की बात हो तो वजीरगंज का नाम हर जुबां पर पहले आ जाता है। यहां मोहर्रम हो या नवरात्र, होली हो या ईद, दीवाली हो या जलसा। हर मौके पर हिन्दू-मुस्लिम का आपसी सहयोग सर्वविदित है। ऐसे में नगवा के अब्दुल अजीज बाबा जो एक लंबे अरसे से मुस्लिम और हिन्दू दोनों धर्मों के प्रति मोहब्बत रखने के लिए नजीर बने हैं।
जी हां नगवा के हाजी बाबा शमसुद्दीन और सैय्यद मलंगशाह मजार-ए- शरीफ के गद्दीनशीन बाबा अब्दुल अजीज ने अजमेर , देवा , बहराइच ,किछौछा के साथ ही गंगा सागर, जगन्नाथपुरी, मैहर और रामेश्वरम में भी डुबकी लगाई। इमाम - ए - हुसैन के नाम पर रोजा रखा तो बजरंग बली के नाम मंगलवार को प्रसाद भी बंटवाया। मोहर्रम में स्वनिर्मित खूबसूरत ताजिया,तो नवरात्र में मां की पूजा में भी दान। वे क्षेत्र में आपसी सौहार्द की नजीर बनें है।
और 1992 जब बन गया यादगारः 6 दिसम्बर 92 का अयोध्या प्रकरण भले ही कुछ स्वार्थी लोगों में अलग किस्म की याद दिलाता हो, लेकिन बाबा अब्दुल अजीज के लिए सभी धर्म और ईश्वर एक है का यादगार है। इसी दिन उन्होंने धर्मो की खाई को पाटने का संकल्प लिया। तभी से नवरात्र हो या ईद, दशहरा हो या मुहर्रम सभी को आपसी सुर्खियां बांटते हुऐ बाबा अब्दुल अजीज मना रहे हैं। 27 साल का सफर अब उन्हें साम्प्रदायिक सौहार्द और सदभाव के लिए समय पूर्व ही कुरेदने लगता है। उनका कहना है कि उन्हे सुकून मिलता है। उन्होंने अनासागर के साथ नीम सारंग में भी डुबकी लगाई है। ख्वाहिश है कि वे सभी धार्मिक स्थलों पर जायें।
लोग बोले : अध्यापक विनोद सिंह, नुरुद्दीन, अतीकुर्रहमान, अहमद,गफ्फार ने बताया कि अब्दुल अजीज बचपन से ही गांव के गरीबों की इमदाद में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते और दोनों धर्मों के त्योहारों में बराबर शरीक होते रहे। बाबा अजीज के घर के पश्चिम इमाम-ए-हुसैन का चौक तो वहीं गांव के पूर्व कालीथान भी। बाबा बताते हैं कि माह मुहर्रम में मौला से दुआ मांगा करता था कि मौला अपने रौजे का दीदार करा दें। उन पर इमाम-ए-हुसैन का करम हुआ कि 24 सितंबर को कर्बला जाने का मौका मिला है।
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जिले में साम्प्रदायिक सौहार्द और आपसी एकता या धार्मिक समरसता की बात हो तो वजीरगंज का नाम हर जुबां पर पहले आ जाता है। यहां मोहर्रम हो या नवरात्र, होली हो या ईद, दीवाली हो या जलसा। हर मौके पर हिन्दू-मुस्लिम का आपसी सहयोग सर्वविदित है। ऐसे में नगवा के अब्दुल अजीज बाबा जो एक लंबे अरसे से मुस्लिम और हिन्दू दोनों धर्मों के प्रति मोहब्बत रखने के लिए नजीर बने हैं। जी हां नगवा के हाजी बाबा शमसुद्दीन और सैय्यद मलंगशाह मजार-ए- शरीफ के गद्दीनशीन बाबा अब्दुल अजीज ने अजमेर , देवा , बहराइच ,किछौछा के साथ ही गंगा सागर, जगन्नाथपुरी, मैहर और रामेश्वरम में भी डुबकी लगाई। इमाम - ए - हुसैन के नाम पर रोजा रखा तो बजरंग बली के नाम मंगलवार को प्रसाद भी बंटवाया। मोहर्रम में स्वनिर्मित खूबसूरत ताजिया,तो नवरात्र में मां की पूजा में भी दान। वे क्षेत्र में आपसी सौहार्द की नजीर बनें है। और एक हज़ार नौ सौ बानवे जब बन गया यादगारः छः दिसम्बर बानवे का अयोध्या प्रकरण भले ही कुछ स्वार्थी लोगों में अलग किस्म की याद दिलाता हो, लेकिन बाबा अब्दुल अजीज के लिए सभी धर्म और ईश्वर एक है का यादगार है। इसी दिन उन्होंने धर्मो की खाई को पाटने का संकल्प लिया। तभी से नवरात्र हो या ईद, दशहरा हो या मुहर्रम सभी को आपसी सुर्खियां बांटते हुऐ बाबा अब्दुल अजीज मना रहे हैं। सत्ताईस साल का सफर अब उन्हें साम्प्रदायिक सौहार्द और सदभाव के लिए समय पूर्व ही कुरेदने लगता है। उनका कहना है कि उन्हे सुकून मिलता है। उन्होंने अनासागर के साथ नीम सारंग में भी डुबकी लगाई है। ख्वाहिश है कि वे सभी धार्मिक स्थलों पर जायें। लोग बोले : अध्यापक विनोद सिंह, नुरुद्दीन, अतीकुर्रहमान, अहमद,गफ्फार ने बताया कि अब्दुल अजीज बचपन से ही गांव के गरीबों की इमदाद में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते और दोनों धर्मों के त्योहारों में बराबर शरीक होते रहे। बाबा अजीज के घर के पश्चिम इमाम-ए-हुसैन का चौक तो वहीं गांव के पूर्व कालीथान भी। बाबा बताते हैं कि माह मुहर्रम में मौला से दुआ मांगा करता था कि मौला अपने रौजे का दीदार करा दें। उन पर इमाम-ए-हुसैन का करम हुआ कि चौबीस सितंबर को कर्बला जाने का मौका मिला है।
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अमात्य हंस की ज० को सलाह ] भगवान् श्री परिष्टनेमि
सुरेन्द्र जिनके चरणों में भक्तिपूर्वक सिर झुकाते हैं, भला उन अरिष्टनेमि के साथ युद्ध करने का दुस्साहस कौन कर सकता है।" "
"जिस दिन आपका प्रिय पुत्र कालकुमार कुलदेवी द्वारा छलपूर्वक मार दिया गया उसी दिन से आपका भाग्य प्रापसे विपरीत हो गया । नीति का अनुसरण करते हुए यादव शक्तिशाली होते हुए भी मथुरा से भागकर द्वारिका मे जा बसे । अब भी कृष्ण स्वेच्छा से ग्रापके साथ युद्ध करने नहीं आया है अपितु पूछ पर पाणि-प्रहार कर जिस तरह भीषरण काले विषधर को बिल से प्राकृष्ट किया जाता है उसी प्रकार वह आपके द्वारा प्राकृष्ट किया जाकर प्रापके सम्मुख आया है । "
"इतना सब कुछ हो जाने पर भी अभी समय है। आप यदि इसके साथ युद्ध नही करेंगे तो यह अपने आप ही द्वारिका की भोर लौट जायगा ।"
हंस के मुख से इस कटु सत्य को सुनकर जरासन्ध प्राग-बबूला हो गया और उसे तिरस्कृत करते हुए बोला- "दुष्ट ! तेरे मुख से शत्रु की प्रशंसा सुन कर ऐसा आभास होता है कि इन मायावी यादवों ने तुझे भेद-नीति से अपनी श्रोर मिला लिया है । मूर्ख ! तू शत्रु की सराहना करके मुझे डराने का व्यर्थ - प्रयास मत कर । आज तक कभी कही शृगालों की 'हुकी-हुकी' से सिंह डरा है । ये प्रकिचन ग्वाले तेरे देखते ही देखते मेरी क्रोधाग्नि में जल कर भस्म हो जायेंगे।"
दोनों सेनाओं की व्यूह रचना
तदनन्तर दोनो सेनाओं ने व्यूह रचना आरम्भ की। जरासन्ध के सेनानियों ने चक्रव्यूह की रचना की । उस चक्रव्यूह में एक हजार प्रारे रखे गये । प्रत्येक आरे पर एक-एक नृपति, एक सौ हाथी, २ हजार रथी, पांच हजार अश्वारोही सैनिक और सोलह हजार प्रबल पराक्रमी, भीषण-संहारक शास्त्रास्त्रों से सुसज्जित पदाति सैनिक तैनात किये गये । चक्रनाभि के चारों ओर नियत किये गये ११२५० राजाओं के बीच त्रिखण्डाधिपति जरासन्ध ने उस चक्रव्यूह की नाभि में इस भीषरण युद्ध का संचालन करने के लिये मोर्चा सम्हाला ।
मगधेश्वर की पीठ के पीछे की ओर गान्धार और सिन्धु जनपद की सेनाएं, दक्षिण-पार्श्व में दुर्योधन आदि १०० भाइयों की कौरव सेनाएं, आगे की ओर मध्य प्रदेश के सभी राजा और वाम-पार्श्व में अगरिणत भूपतियों की सेनाएं मोर्चा सम्हाले युद्ध के लिये तैयार खड़ी थीं ।
चक्रव्यूह के इन एक हजार आारों की प्रत्येक संधि पर पांच सौ शकट-व्यूहों की रचना की गई। प्रत्येक शकट व्यूह के मध्य में एक-एक नृपति उन शकट-व्यूहों
१ नेमिः कृष्णो बलश्चातिरथाः परबले त्रयः । त्वमेक एव स्वबले बलयोर्महदन्तरम् ।। अच्युतायाः सुरेन्द्रा यं, नमस्कुर्वन्ति भक्तितः । तेन श्री नेमिना साधं, युद्धाय प्रोत्सहेत कः ।। [ त्रिवष्टि शलाका पुरुष चरित्र प. ८ स. ७ श्लो. २२०-२१]
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अमात्य हंस की जशून्य को सलाह ] भगवान् श्री परिष्टनेमि सुरेन्द्र जिनके चरणों में भक्तिपूर्वक सिर झुकाते हैं, भला उन अरिष्टनेमि के साथ युद्ध करने का दुस्साहस कौन कर सकता है।" " "जिस दिन आपका प्रिय पुत्र कालकुमार कुलदेवी द्वारा छलपूर्वक मार दिया गया उसी दिन से आपका भाग्य प्रापसे विपरीत हो गया । नीति का अनुसरण करते हुए यादव शक्तिशाली होते हुए भी मथुरा से भागकर द्वारिका मे जा बसे । अब भी कृष्ण स्वेच्छा से ग्रापके साथ युद्ध करने नहीं आया है अपितु पूछ पर पाणि-प्रहार कर जिस तरह भीषरण काले विषधर को बिल से प्राकृष्ट किया जाता है उसी प्रकार वह आपके द्वारा प्राकृष्ट किया जाकर प्रापके सम्मुख आया है । " "इतना सब कुछ हो जाने पर भी अभी समय है। आप यदि इसके साथ युद्ध नही करेंगे तो यह अपने आप ही द्वारिका की भोर लौट जायगा ।" हंस के मुख से इस कटु सत्य को सुनकर जरासन्ध प्राग-बबूला हो गया और उसे तिरस्कृत करते हुए बोला- "दुष्ट ! तेरे मुख से शत्रु की प्रशंसा सुन कर ऐसा आभास होता है कि इन मायावी यादवों ने तुझे भेद-नीति से अपनी श्रोर मिला लिया है । मूर्ख ! तू शत्रु की सराहना करके मुझे डराने का व्यर्थ - प्रयास मत कर । आज तक कभी कही शृगालों की 'हुकी-हुकी' से सिंह डरा है । ये प्रकिचन ग्वाले तेरे देखते ही देखते मेरी क्रोधाग्नि में जल कर भस्म हो जायेंगे।" दोनों सेनाओं की व्यूह रचना तदनन्तर दोनो सेनाओं ने व्यूह रचना आरम्भ की। जरासन्ध के सेनानियों ने चक्रव्यूह की रचना की । उस चक्रव्यूह में एक हजार प्रारे रखे गये । प्रत्येक आरे पर एक-एक नृपति, एक सौ हाथी, दो हजार रथी, पांच हजार अश्वारोही सैनिक और सोलह हजार प्रबल पराक्रमी, भीषण-संहारक शास्त्रास्त्रों से सुसज्जित पदाति सैनिक तैनात किये गये । चक्रनाभि के चारों ओर नियत किये गये ग्यारह हज़ार दो सौ पचास राजाओं के बीच त्रिखण्डाधिपति जरासन्ध ने उस चक्रव्यूह की नाभि में इस भीषरण युद्ध का संचालन करने के लिये मोर्चा सम्हाला । मगधेश्वर की पीठ के पीछे की ओर गान्धार और सिन्धु जनपद की सेनाएं, दक्षिण-पार्श्व में दुर्योधन आदि एक सौ भाइयों की कौरव सेनाएं, आगे की ओर मध्य प्रदेश के सभी राजा और वाम-पार्श्व में अगरिणत भूपतियों की सेनाएं मोर्चा सम्हाले युद्ध के लिये तैयार खड़ी थीं । चक्रव्यूह के इन एक हजार आारों की प्रत्येक संधि पर पांच सौ शकट-व्यूहों की रचना की गई। प्रत्येक शकट व्यूह के मध्य में एक-एक नृपति उन शकट-व्यूहों एक नेमिः कृष्णो बलश्चातिरथाः परबले त्रयः । त्वमेक एव स्वबले बलयोर्महदन्तरम् ।। अच्युतायाः सुरेन्द्रा यं, नमस्कुर्वन्ति भक्तितः । तेन श्री नेमिना साधं, युद्धाय प्रोत्सहेत कः ।। [ त्रिवष्टि शलाका पुरुष चरित्र प. आठ स. सात श्लो. दो सौ बीस-इक्कीस]
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सिरकोनी जौनपुर। क्षेत्र के बीबीपुर गांव में स्थित शिवजी के मंदिर के पास मंगलवार की रात को दबंगो ने पुरानी रंजिश में दो युवकों को मारपीटकर घायल कर दिया। दोनों युवकों को काफी गम्भीर चोट आयी है। सुंगुलपुर निवासी कार्तिकेय सिंह पुत्र जयहिंद सिंह तथा अनुराग पाठक पुत्र विनोद पाठक बीबीपुर गांव में स्थित एक चक्की पर गेहूं पिसवाने गए थे। वहीं पर दो साल पूर्व हुए विवाद को लेकर बीबीपुर गांव के कुछ दबंग युवको ने दोनों को जमकर पीट दिया। अनुराग पाठक तथा कार्तिकेय को सिर,चेहरे तथा शरीर पर काफी चोट आयीं। लोगों ने किसी तरह से बीचबचाव करके मामले को शांत कराया। घटना की सूचना पर दोनों युवकों के घर से लोग आ गए। घायल युवकों को तत्काल थाने ले आये। पुलिस ने मामले में तहरीर मिलने के बाद विपुल चौहान पुत्र जयप्रकाश चौहान, शिवप्रकाश चौहान पुत्र रतन चौहान, उपेंद्र चौहान पुत्र कैलाश चौहान के विरु द्ध मुकदमा दर्ज कर लिया। घायलो को उपचार के लिए जिला अस्पताल भिजवाया गया।
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सिरकोनी जौनपुर। क्षेत्र के बीबीपुर गांव में स्थित शिवजी के मंदिर के पास मंगलवार की रात को दबंगो ने पुरानी रंजिश में दो युवकों को मारपीटकर घायल कर दिया। दोनों युवकों को काफी गम्भीर चोट आयी है। सुंगुलपुर निवासी कार्तिकेय सिंह पुत्र जयहिंद सिंह तथा अनुराग पाठक पुत्र विनोद पाठक बीबीपुर गांव में स्थित एक चक्की पर गेहूं पिसवाने गए थे। वहीं पर दो साल पूर्व हुए विवाद को लेकर बीबीपुर गांव के कुछ दबंग युवको ने दोनों को जमकर पीट दिया। अनुराग पाठक तथा कार्तिकेय को सिर,चेहरे तथा शरीर पर काफी चोट आयीं। लोगों ने किसी तरह से बीचबचाव करके मामले को शांत कराया। घटना की सूचना पर दोनों युवकों के घर से लोग आ गए। घायल युवकों को तत्काल थाने ले आये। पुलिस ने मामले में तहरीर मिलने के बाद विपुल चौहान पुत्र जयप्रकाश चौहान, शिवप्रकाश चौहान पुत्र रतन चौहान, उपेंद्र चौहान पुत्र कैलाश चौहान के विरु द्ध मुकदमा दर्ज कर लिया। घायलो को उपचार के लिए जिला अस्पताल भिजवाया गया।
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पहले ऐसा नहीं होता था. अब एक बजट फिक्स होता है और सब उसके मुताबिक फिल्म की प्लानिंग करते हैं. माधुरी ने टोटल धमाल के बारे में बात करते हुए कहा कि इसमें वो सारे स्टार्स हैं जिनके साथ मैंने बहुत समय पहले काम किया था और अब लम्बे समय बाद उनके साथ काम करके लगा ही नहीं कि हमारे बीच की बॉन्डिंग में कोई बदलाव आया है. चाहे वो अनिल कपूर हों,अजय देवगन, अरशद वारसी,जावेद जाफरी हों,यह सभी सेट पर खूब धमाल मचाते थे. मुंगड़ा गाने पर उठे विवाद पर माधुरी ने कहा कि सोनाक्षी सिन्हा ने इस पर बहुत अच्छा डांस किया है. वह गानों में बहुत अच्छे एक्सप्रेशन देती हैं.
पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ मैनेज करने की बात पर माधुरी ने कहा कि हमें फैमिली का सपोर्ट मिलता है इसलिए इतने अच्छे से सब मैनेज हो पाता है लेकिन जो आम महिलाएं हैं उन्हें घर और बाहर दोनों संभालना पड़ता है जो कि बेहद मुश्किल टास्क है. ऐसे में परिवार को उन्हें सपोर्ट करना चाहिए.
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पहले ऐसा नहीं होता था. अब एक बजट फिक्स होता है और सब उसके मुताबिक फिल्म की प्लानिंग करते हैं. माधुरी ने टोटल धमाल के बारे में बात करते हुए कहा कि इसमें वो सारे स्टार्स हैं जिनके साथ मैंने बहुत समय पहले काम किया था और अब लम्बे समय बाद उनके साथ काम करके लगा ही नहीं कि हमारे बीच की बॉन्डिंग में कोई बदलाव आया है. चाहे वो अनिल कपूर हों,अजय देवगन, अरशद वारसी,जावेद जाफरी हों,यह सभी सेट पर खूब धमाल मचाते थे. मुंगड़ा गाने पर उठे विवाद पर माधुरी ने कहा कि सोनाक्षी सिन्हा ने इस पर बहुत अच्छा डांस किया है. वह गानों में बहुत अच्छे एक्सप्रेशन देती हैं. पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ मैनेज करने की बात पर माधुरी ने कहा कि हमें फैमिली का सपोर्ट मिलता है इसलिए इतने अच्छे से सब मैनेज हो पाता है लेकिन जो आम महिलाएं हैं उन्हें घर और बाहर दोनों संभालना पड़ता है जो कि बेहद मुश्किल टास्क है. ऐसे में परिवार को उन्हें सपोर्ट करना चाहिए.
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हाथ लै कुश गोत्र उच्चरि स्वर्णयुक्त प्रमाणिये । दान दैब और दीजहि दान सात्विक जानिये ॥ ३ ॥ शब्दार्थ - जानिये = ज्ञानी अर्थात् विद्वान्, साक्षर । देवदेवहि थापि कै= विष्णु स्वरूप मानकर । स्वर्णयुक्त = कुछ सोना सहित । भावार्थ - किसी विद्वान् ब्राह्मण को स्त्री अपने हाथों से पूजकर और उसे साक्षात् विष्णु ही मानकर, वेदमंत्रों सहित ( स्तुति करके ) हाथ कुश लेकर गोत्र का उच्चारण करके, कुछ सुवर्ण सहित जो दान दिया जाय और दान के बाद सांगता भी दिया जाय उसे सात्विक दान जानना चाहिये ।
मूल - दोधक छंद ।
देहि नही अपने कर दानै । और के हाथ जो मंगल जानै । दानह देत जुलावै । सो वह राजस दान कहावै ॥ ४ ॥ भावाथ-वश होकर जो दान अपने हाथ से न करे वरन् दूसरे के हाथों दिलवा दे वह राजसी दान कहलाता है ।
मूल - ( दोधक ) -
विप्रन दजित होन बिधानै । जानहु ताकहँ तामस दानै । विप्र न जानहु ये नर रूपै । जानहु य सब विष्णुस्वरूपै ।।५।। भावार्थ - विधिहीन दान तामस दान कहलाता है। ब्राह्मण को विष्णुरूप ही जानो । इन्हें मनुष्य न समझना चाहिये ।
मूल - ( तोमर छंद )
द्विज घाम देइ जु जाइ । बहु भाँति पूजि सुराइ । कछु नाहिनै परिमान । कहिये सो उत्तम दान ।॥ ६ ॥ भावार्थ- हे सुराइ ( राजा रामचन्द्र ) ब्राह्मण के घर जाकर क प्रकार से उसका पूजन करके जो दान दिया जाता है वह इतना उत्तम दान है कि उसका कुछ परिमाण नहीं कहा जा सकता ।
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हाथ लै कुश गोत्र उच्चरि स्वर्णयुक्त प्रमाणिये । दान दैब और दीजहि दान सात्विक जानिये ॥ तीन ॥ शब्दार्थ - जानिये = ज्ञानी अर्थात् विद्वान्, साक्षर । देवदेवहि थापि कै= विष्णु स्वरूप मानकर । स्वर्णयुक्त = कुछ सोना सहित । भावार्थ - किसी विद्वान् ब्राह्मण को स्त्री अपने हाथों से पूजकर और उसे साक्षात् विष्णु ही मानकर, वेदमंत्रों सहित हाथ कुश लेकर गोत्र का उच्चारण करके, कुछ सुवर्ण सहित जो दान दिया जाय और दान के बाद सांगता भी दिया जाय उसे सात्विक दान जानना चाहिये । मूल - दोधक छंद । देहि नही अपने कर दानै । और के हाथ जो मंगल जानै । दानह देत जुलावै । सो वह राजस दान कहावै ॥ चार ॥ भावाथ-वश होकर जो दान अपने हाथ से न करे वरन् दूसरे के हाथों दिलवा दे वह राजसी दान कहलाता है । मूल - - विप्रन दजित होन बिधानै । जानहु ताकहँ तामस दानै । विप्र न जानहु ये नर रूपै । जानहु य सब विष्णुस्वरूपै ।।पाँच।। भावार्थ - विधिहीन दान तामस दान कहलाता है। ब्राह्मण को विष्णुरूप ही जानो । इन्हें मनुष्य न समझना चाहिये । मूल - द्विज घाम देइ जु जाइ । बहु भाँति पूजि सुराइ । कछु नाहिनै परिमान । कहिये सो उत्तम दान ।॥ छः ॥ भावार्थ- हे सुराइ ब्राह्मण के घर जाकर क प्रकार से उसका पूजन करके जो दान दिया जाता है वह इतना उत्तम दान है कि उसका कुछ परिमाण नहीं कहा जा सकता ।
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Faridabad: फरीदाबाद की अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार के निर्देश पर नगर निगम एक बार फिर से शहर की 306 अवैध कॉलोनियां को नियमित करने के लिए सर्वे शुरू करने जा रही है। इसके लिए कमेटी गठित हो गई है। इस सप्ताह सर्वे के लिए कंपनी नियुक्त हो जाएगी। कंपनी दो माह में सर्वे कार्य पूरा करेगी। जिसके बाद इन कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
लोगों को मिलेंगी सभी मूलभूत सुविधाएंनिगम अधिकारियों के अनुसार इस सर्वे में उन अवैध कॉलोनियों को शामिल किया जा रहा है, जो पचास फीसदी से अधिक आबाद हो चुकी है। अवैध कॉलोनियों के नियमित होने पर इन कॉलोनी में निगम द्वारा पानी, सड़क, सीवर, पार्क व अन्य मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इसके बदले निगम लोगों से विकास शुल्क वसूलेगा। लोगों को कितना विकास शुल्क देना होगा, यह अधिसूचना जारी होने के बाद पता चलेगा। अधिकारियों के अनुसार, विकास शुल्क प्रत्येक कॉलोनी में वहां पर डेवलपमेंट से जुड़े कार्यों के आधार पर लगाया जाएगा। इस सर्वे में उन अवैध कॉलोनियों को नहीं शामिल किया गया है जो सरकारी जमीन कब्जा कर या फिर अरावली क्षेत्र में बसी हैं।
पारखी नजर वाले का ही है खेल, दोनों तस्वीरों में से ढूंढकर दिखाना है तीन अंतर, खोज लिया तो कहलाएंगे 'धुरंधर'
PoK पर CM Yogi Adityanath से बयान से Pakistan में भूचाल!
Prashant Kishor ने PM Modi को चुनौती के सवाल पर Tejashwi Yadav की लगाई क्लास!
दिल्ली हत्याकांड पर Sakshi के पिता का आया बयान- 'Sahil को फांसी होनी चाहिए'
कलावा, रुद्राक्ष. . 'लव जिहाद' के साक्ष्य?
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Faridabad: फरीदाबाद की अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार के निर्देश पर नगर निगम एक बार फिर से शहर की तीन सौ छः अवैध कॉलोनियां को नियमित करने के लिए सर्वे शुरू करने जा रही है। इसके लिए कमेटी गठित हो गई है। इस सप्ताह सर्वे के लिए कंपनी नियुक्त हो जाएगी। कंपनी दो माह में सर्वे कार्य पूरा करेगी। जिसके बाद इन कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू होगी। लोगों को मिलेंगी सभी मूलभूत सुविधाएंनिगम अधिकारियों के अनुसार इस सर्वे में उन अवैध कॉलोनियों को शामिल किया जा रहा है, जो पचास फीसदी से अधिक आबाद हो चुकी है। अवैध कॉलोनियों के नियमित होने पर इन कॉलोनी में निगम द्वारा पानी, सड़क, सीवर, पार्क व अन्य मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इसके बदले निगम लोगों से विकास शुल्क वसूलेगा। लोगों को कितना विकास शुल्क देना होगा, यह अधिसूचना जारी होने के बाद पता चलेगा। अधिकारियों के अनुसार, विकास शुल्क प्रत्येक कॉलोनी में वहां पर डेवलपमेंट से जुड़े कार्यों के आधार पर लगाया जाएगा। इस सर्वे में उन अवैध कॉलोनियों को नहीं शामिल किया गया है जो सरकारी जमीन कब्जा कर या फिर अरावली क्षेत्र में बसी हैं। पारखी नजर वाले का ही है खेल, दोनों तस्वीरों में से ढूंढकर दिखाना है तीन अंतर, खोज लिया तो कहलाएंगे 'धुरंधर' PoK पर CM Yogi Adityanath से बयान से Pakistan में भूचाल! Prashant Kishor ने PM Modi को चुनौती के सवाल पर Tejashwi Yadav की लगाई क्लास! दिल्ली हत्याकांड पर Sakshi के पिता का आया बयान- 'Sahil को फांसी होनी चाहिए' कलावा, रुद्राक्ष. . 'लव जिहाद' के साक्ष्य?
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Aaj Ka Rashifal In Hindi 10 January 2020 : आज पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि और दिन शुक्रवार है। इसके साथ आज मंद्या चंद्र ग्रहण भी है। हम आपको बता रहे हैं आज 10 जनवरी का मेष, वृषभ, सिंह, कर्क, कुंभ और मीन राशि समेत सभी राशियों का राशिफल (Horoscope in Hindi)। जानिए कैसा रहेगा आपका दिन और कैसा रहेगा बिजनेस। जानिये अपना राशिफल (10 January 2020 Ka Rashifal):
मेषः आज आपका दिन काफी अच्छा रहेगा। किसी काम में आपको सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। व्यवसाय ठीक चलेगा। सामाजिक क्षेत्र में आपकी सक्रियता बढ़ सकती है। किसी पुराने दोस्तों से मिलने का योग बन रहा है। परिवार से जुड़ी कोई अच्छी खबर आपको मिल सकती है। आप पार्टनर के साथ यादगार पल बितायेंगे। आपका स्वास्थ्य बेहतर रहेगा।
वृषः आज अपने आत्मविश्वास में आज कमी न होने दें। मन में कुछ दुविधाएं बनी रह सकती हैं। छात्रों के करियर में आज के दिन नया बदलाव आयेगा। किसी निर्णय को लेकर परेशान न हों। अपने गुस्से को शांत रखने का प्रयास करें। संतान पक्ष की चिंता रहेगी। शारीरिक कष्ट से काम में रुकावट हो सकती है।
मिथुनः आज जल्दबाज़ी में निर्णय लेने से बचें। आपको नौकरी या काम-काज से जुड़े कई नए विकल्प मिल सकते हैं। अपनी क्षमताओं को दिखाने का सही समय है। मेहनत और लगन से आने वाले दिनों में आर्थिक लाभ संभव है। आप कार्य विस्तार योजनाओं को अमली जामा पहनाने के लिए कोशिश करेंगे। अपने प्रियजनों के साथ थोड़ा अधिक समय बिताने की कोशिश करें।
कर्कः अपने आप पर भरोसा रखें। धन प्राप्ति सुगम होगी। व्यवसाय में उन्नति के योग हैं। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। परिवार के किसी मांगलिक कार्य में भाग लेने का अवसर मिल सकता है। कोर्ट व कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे। भावनात्मक फैसलों के लिए बहुत अच्छा समय नहीं है।
सिंहः आज आपका दिन शानदार रहेगा। अपना लक्ष्य निर्धारित करने के लिए आप कोई नई योजना बना सकते हैं। संपत्ति के बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। नौकरी-पेशा से जुड़े लोगों को आज कोई अच्छी खबर मिल सकती है। घरेलू समस्याओं को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने में आप सफल होंगे। दाम्पत्य जीवन में थोड़ा तनाव बढ़ सकता है।
कन्याः आज का दिन अच्छा गुजरेगा। कुछ नए अवसर और बड़ी उपलब्धि आपको हासिल हो सकती है। आप अपने निर्धारित लक्ष्य को तय समय में पूरे कर पाएंगे। काम पूरा होने से आप प्रशंसा पाएंगे। किसी मित्र से रिश्ते में खटास आने की आशंका है। मामूली विवाद भी हो सकता है। यात्रा मनोरंजक रहेगी। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।
तुलाः छात्रों के लिए आज का दिन शुभ है। आप प्रतियोगिताओं में अच्छा करेंगे। नौकरीपेशा लोगों को कार्य स्थल पर बहुत अधिक तनाव और दबाव महसूस हो सकता है। कुछ लोगों को वाहनों से संबंधित व्यवसाय और कृषि से अतिरिक्त आय प्राप्त होने के योग हैं। पारिवारिक जीवन ठीक रहेगा। मानसिक तनाव के कारण स्वास्थ्य अस्थिर रह सकता है। आराम करने के लिए पर्याप्त समय लें।
वृश्चिकः आज आपको अपनी अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए। आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए दिन शुभ है। लेन-देन में सावधानी रखें। सुख-सुविधा पर खर्च होगा। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। भाइयों या पार्टनरों से मतभेद हो सकता है। व्यवसाय ठीक चलेगा। पारिवारिक एवं सामाजिक संबंध मजबूत होंगें। आप नए दोस्त भी बनाएंगे।
धनुः आज आपका दिन खुशियों से भरा रहेगा। मेहनत का पूरा फल आपको मिलेगा। ऑफिस में सभी लोगों के साथ बेहतर तालमेल बना रहेगा। अचानक नए स्रोतों से धन लाभ होगा। कोई शुभ समाचार आपको मिलेंगे। आप शाम तक किसी समारोह में शामिल हो सकते हैं। किसी पुराने मित्र से मिलकर आपका मन प्रसन्न होगा। लवमेट के लिए आज का दिन अनुकूल रहेगा।
मकरः आज आपका दिन सामान्य रहेगा। आपकी कार्यप्रणाली सुधरेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में वृद्धि होगी। आर्थिक नीति में परिवर्तन तत्काल लाभ नहीं देगा। सरकार से किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। मित्र व संबंधी सहयोग को आगे आएंगे। किसी बड़ी समस्या से भी सामना हो सकता है। पारिवारिक रिश्ते मजबूत होंगे।
कुंभः आज आपका दिन शानदार रहेगा। आपको किस्मत का पूरा-पूरा साथ मिलेगा। आपको अचानक धन लाभ के अवसर प्राप्त होंगे। घर का माहौल खुशनुमा बना रहेगा। आपकी तरक्की के नये रास्ते खुलेंगे। पूजा-पाठ में मन लगेगा। कोर्ट-कचहरी के काम अनुकूल रहेंगे। पारिवारिक जीवन एवं स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।
मीनः आज आपका दिन ठीक-ठाक रहेगा। ऑफिस के काम में आप बिजी हो सकते हैं। जॉब के लिए दिन सामान्य रह सकता है। बिजनेस में आपको कुछ नए विकल्प सामने आ सकते हैं। आय बढ़ेगी। लेन-देन में सावधानी रखें। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में लापरवाही न करें। घर में मतभेद हो सकता है। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं।
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Aaj Ka Rashifal In Hindi दस जनवरीuary दो हज़ार बीस : आज पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि और दिन शुक्रवार है। इसके साथ आज मंद्या चंद्र ग्रहण भी है। हम आपको बता रहे हैं आज दस जनवरी का मेष, वृषभ, सिंह, कर्क, कुंभ और मीन राशि समेत सभी राशियों का राशिफल । जानिए कैसा रहेगा आपका दिन और कैसा रहेगा बिजनेस। जानिये अपना राशिफल : मेषः आज आपका दिन काफी अच्छा रहेगा। किसी काम में आपको सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। व्यवसाय ठीक चलेगा। सामाजिक क्षेत्र में आपकी सक्रियता बढ़ सकती है। किसी पुराने दोस्तों से मिलने का योग बन रहा है। परिवार से जुड़ी कोई अच्छी खबर आपको मिल सकती है। आप पार्टनर के साथ यादगार पल बितायेंगे। आपका स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। वृषः आज अपने आत्मविश्वास में आज कमी न होने दें। मन में कुछ दुविधाएं बनी रह सकती हैं। छात्रों के करियर में आज के दिन नया बदलाव आयेगा। किसी निर्णय को लेकर परेशान न हों। अपने गुस्से को शांत रखने का प्रयास करें। संतान पक्ष की चिंता रहेगी। शारीरिक कष्ट से काम में रुकावट हो सकती है। मिथुनः आज जल्दबाज़ी में निर्णय लेने से बचें। आपको नौकरी या काम-काज से जुड़े कई नए विकल्प मिल सकते हैं। अपनी क्षमताओं को दिखाने का सही समय है। मेहनत और लगन से आने वाले दिनों में आर्थिक लाभ संभव है। आप कार्य विस्तार योजनाओं को अमली जामा पहनाने के लिए कोशिश करेंगे। अपने प्रियजनों के साथ थोड़ा अधिक समय बिताने की कोशिश करें। कर्कः अपने आप पर भरोसा रखें। धन प्राप्ति सुगम होगी। व्यवसाय में उन्नति के योग हैं। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। परिवार के किसी मांगलिक कार्य में भाग लेने का अवसर मिल सकता है। कोर्ट व कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे। भावनात्मक फैसलों के लिए बहुत अच्छा समय नहीं है। सिंहः आज आपका दिन शानदार रहेगा। अपना लक्ष्य निर्धारित करने के लिए आप कोई नई योजना बना सकते हैं। संपत्ति के बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। नौकरी-पेशा से जुड़े लोगों को आज कोई अच्छी खबर मिल सकती है। घरेलू समस्याओं को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने में आप सफल होंगे। दाम्पत्य जीवन में थोड़ा तनाव बढ़ सकता है। कन्याः आज का दिन अच्छा गुजरेगा। कुछ नए अवसर और बड़ी उपलब्धि आपको हासिल हो सकती है। आप अपने निर्धारित लक्ष्य को तय समय में पूरे कर पाएंगे। काम पूरा होने से आप प्रशंसा पाएंगे। किसी मित्र से रिश्ते में खटास आने की आशंका है। मामूली विवाद भी हो सकता है। यात्रा मनोरंजक रहेगी। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। तुलाः छात्रों के लिए आज का दिन शुभ है। आप प्रतियोगिताओं में अच्छा करेंगे। नौकरीपेशा लोगों को कार्य स्थल पर बहुत अधिक तनाव और दबाव महसूस हो सकता है। कुछ लोगों को वाहनों से संबंधित व्यवसाय और कृषि से अतिरिक्त आय प्राप्त होने के योग हैं। पारिवारिक जीवन ठीक रहेगा। मानसिक तनाव के कारण स्वास्थ्य अस्थिर रह सकता है। आराम करने के लिए पर्याप्त समय लें। वृश्चिकः आज आपको अपनी अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए। आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए दिन शुभ है। लेन-देन में सावधानी रखें। सुख-सुविधा पर खर्च होगा। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। भाइयों या पार्टनरों से मतभेद हो सकता है। व्यवसाय ठीक चलेगा। पारिवारिक एवं सामाजिक संबंध मजबूत होंगें। आप नए दोस्त भी बनाएंगे। धनुः आज आपका दिन खुशियों से भरा रहेगा। मेहनत का पूरा फल आपको मिलेगा। ऑफिस में सभी लोगों के साथ बेहतर तालमेल बना रहेगा। अचानक नए स्रोतों से धन लाभ होगा। कोई शुभ समाचार आपको मिलेंगे। आप शाम तक किसी समारोह में शामिल हो सकते हैं। किसी पुराने मित्र से मिलकर आपका मन प्रसन्न होगा। लवमेट के लिए आज का दिन अनुकूल रहेगा। मकरः आज आपका दिन सामान्य रहेगा। आपकी कार्यप्रणाली सुधरेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में वृद्धि होगी। आर्थिक नीति में परिवर्तन तत्काल लाभ नहीं देगा। सरकार से किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। मित्र व संबंधी सहयोग को आगे आएंगे। किसी बड़ी समस्या से भी सामना हो सकता है। पारिवारिक रिश्ते मजबूत होंगे। कुंभः आज आपका दिन शानदार रहेगा। आपको किस्मत का पूरा-पूरा साथ मिलेगा। आपको अचानक धन लाभ के अवसर प्राप्त होंगे। घर का माहौल खुशनुमा बना रहेगा। आपकी तरक्की के नये रास्ते खुलेंगे। पूजा-पाठ में मन लगेगा। कोर्ट-कचहरी के काम अनुकूल रहेंगे। पारिवारिक जीवन एवं स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। मीनः आज आपका दिन ठीक-ठाक रहेगा। ऑफिस के काम में आप बिजी हो सकते हैं। जॉब के लिए दिन सामान्य रह सकता है। बिजनेस में आपको कुछ नए विकल्प सामने आ सकते हैं। आय बढ़ेगी। लेन-देन में सावधानी रखें। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में लापरवाही न करें। घर में मतभेद हो सकता है। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं।
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उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामलों में बढ़ोतरी जारी है। प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से प्रतिदन साढ़े पांच हजार से अधिक या इसके आसपास मामले दर्ज हो रहे हैं। गुरुवार को भी राज्य में 5776 लोगों में कोविड-19 की पुष्टि हुई है। राज्य के अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने इस बात की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बीते 24 घंटे में संक्रमण के 5776 नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में कुल संक्रमितों की संख्या अब बढ़कर 2 लाख 47 हजार 101 हो गई है। प्रसाद ने बताया कि इसमें से 1 लाख 85 हजार 812 लोग इलाज के बाद पूरी तरह ठीक हो चुके हैं और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि राज्य में फिलहाल कोरोना के 57 हजार 598 सक्रिय मरीज हैं, जिनका इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि इसमें से बड़ी संख्या में लोग होम आइसोलेशन में हैं।
हमने होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों का खास ध्यान रखने की बात कही है। साथ ही उन्हें भी सतर्क रहने को कहा गया है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कोरोना के कारण अभी तक 3691 लोगों की मौत हुई है।
प्रसाद ने बताया कि बुधवार को उत्तर प्रदेश में 1 लाख 36 हजार 803 कोरोना टेस्ट किए गए, जिनमें 90 हजार 262 एंटीजन के माध्यम से और बाकि के टेस्ट आरटी-पीसीआर, ट्रूनैट और सीबीनैट माध्यम से किए गए। कल विभिन्न लैब्स को 42 हजार 892 सैंपल्स आरटी-पीसीआर टेस्ट के लिए दिए गए थे। अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि राज्य में अब तक 60 लाख 50 हजार 450 कोरोना नमूनों की जांच हो चुकी है।
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उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामलों में बढ़ोतरी जारी है। प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से प्रतिदन साढ़े पांच हजार से अधिक या इसके आसपास मामले दर्ज हो रहे हैं। गुरुवार को भी राज्य में पाँच हज़ार सात सौ छिहत्तर लोगों में कोविड-उन्नीस की पुष्टि हुई है। राज्य के अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने इस बात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बीते चौबीस घंटाटे में संक्रमण के पाँच हज़ार सात सौ छिहत्तर नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में कुल संक्रमितों की संख्या अब बढ़कर दो लाख सैंतालीस हजार एक सौ एक हो गई है। प्रसाद ने बताया कि इसमें से एक लाख पचासी हजार आठ सौ बारह लोग इलाज के बाद पूरी तरह ठीक हो चुके हैं और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि राज्य में फिलहाल कोरोना के सत्तावन हजार पाँच सौ अट्ठानवे सक्रिय मरीज हैं, जिनका इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि इसमें से बड़ी संख्या में लोग होम आइसोलेशन में हैं। हमने होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों का खास ध्यान रखने की बात कही है। साथ ही उन्हें भी सतर्क रहने को कहा गया है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कोरोना के कारण अभी तक तीन हज़ार छः सौ इक्यानवे लोगों की मौत हुई है। प्रसाद ने बताया कि बुधवार को उत्तर प्रदेश में एक लाख छत्तीस हजार आठ सौ तीन कोरोना टेस्ट किए गए, जिनमें नब्बे हजार दो सौ बासठ एंटीजन के माध्यम से और बाकि के टेस्ट आरटी-पीसीआर, ट्रूनैट और सीबीनैट माध्यम से किए गए। कल विभिन्न लैब्स को बयालीस हजार आठ सौ बानवे सैंपल्स आरटी-पीसीआर टेस्ट के लिए दिए गए थे। अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि राज्य में अब तक साठ लाख पचास हजार चार सौ पचास कोरोना नमूनों की जांच हो चुकी है।
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जबरन कब्जा कर जेसीबी चलाने की दी जा रही धमकी!
(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। कुरई में एक दबंग किस्म के व्यक्ति कहे जाने वाले के द्वारा एक गरीब महिला और उसके पति की निजि स्वामित्व वाली भूमि पर जबरन कब्जा किया जाकर जेसीबी चलवायी जा रही है।
इस मामले की शिकायत जिला पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर को की जाने के बावजूद अब तक इस दिशा में कोई कार्यवाही न किये जाने के चलते दबंग के हौसले बुलंद होते जा रहे है और गरीब परिवार मुश्किलात के हालात में जी रहा है।
उक्ताशय की जारी विज्ञप्ति में आवेदिका शमीमा बी पति रफीक खान ने बताया है कि उनके स्वयं की पारिवारिक भूमि तहसील ऑफिस के सामने पिण्डकापार कुरई में है। इस पर आवेदिका और उनका परिवार निवास करते हुए कृषि कर आजीविका चलाता है। आवेदिका ने इस संबंध में मध्य प्रदेश शासन का भू अभिलेख का खसरा फॉर्म संलग्न करते हुए बताया है कि उक्त स्थान पर खसरा नंबर 197/1 पर 0. 3700 रकबा है।
उन्होंने बताया कि इस पर वर्षाें से पुश्तैनी आधार पर वे और उनका परिवार काबिज है। अभी पिछले दिनों ग्राम पिण्डकापार कुरई निवासी कृष्ण कुमार उर्फ किस्सू जायसवाल द्वारा जबरन कब्जा करने का प्रयास करते हुए उनकी जमीन पर और मकान पर जेसीबी मशीन चलाने की धमकी दी जा रही है।
विज्ञप्ति में आवेदिका ने बताया कि उनके द्वारा इसकी शिकायत थाना कुरई सहित तहसील न्यायालय और जिला पुलिस अधीक्षक से भी की गयी। बावजूद इसके हल्के के पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक द्वारा भी कोई जाँच नहीं की गयी। उलटे अन्य दस्तावेज को लेकर उनके हस्ताक्षर लेकर आवेदिका को परेशान किया जा रहा है जबकि इस आवेदन के साथ आवेदिका द्वारा दिये गये खसरा नक्शा में भी स्पष्ट इस भूमि पर उसका नाम दर्ज है।
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जबरन कब्जा कर जेसीबी चलाने की दी जा रही धमकी! सिवनी । कुरई में एक दबंग किस्म के व्यक्ति कहे जाने वाले के द्वारा एक गरीब महिला और उसके पति की निजि स्वामित्व वाली भूमि पर जबरन कब्जा किया जाकर जेसीबी चलवायी जा रही है। इस मामले की शिकायत जिला पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर को की जाने के बावजूद अब तक इस दिशा में कोई कार्यवाही न किये जाने के चलते दबंग के हौसले बुलंद होते जा रहे है और गरीब परिवार मुश्किलात के हालात में जी रहा है। उक्ताशय की जारी विज्ञप्ति में आवेदिका शमीमा बी पति रफीक खान ने बताया है कि उनके स्वयं की पारिवारिक भूमि तहसील ऑफिस के सामने पिण्डकापार कुरई में है। इस पर आवेदिका और उनका परिवार निवास करते हुए कृषि कर आजीविका चलाता है। आवेदिका ने इस संबंध में मध्य प्रदेश शासन का भू अभिलेख का खसरा फॉर्म संलग्न करते हुए बताया है कि उक्त स्थान पर खसरा नंबर एक सौ सत्तानवे/एक पर शून्य. तीन हज़ार सात सौ रकबा है। उन्होंने बताया कि इस पर वर्षाें से पुश्तैनी आधार पर वे और उनका परिवार काबिज है। अभी पिछले दिनों ग्राम पिण्डकापार कुरई निवासी कृष्ण कुमार उर्फ किस्सू जायसवाल द्वारा जबरन कब्जा करने का प्रयास करते हुए उनकी जमीन पर और मकान पर जेसीबी मशीन चलाने की धमकी दी जा रही है। विज्ञप्ति में आवेदिका ने बताया कि उनके द्वारा इसकी शिकायत थाना कुरई सहित तहसील न्यायालय और जिला पुलिस अधीक्षक से भी की गयी। बावजूद इसके हल्के के पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक द्वारा भी कोई जाँच नहीं की गयी। उलटे अन्य दस्तावेज को लेकर उनके हस्ताक्षर लेकर आवेदिका को परेशान किया जा रहा है जबकि इस आवेदन के साथ आवेदिका द्वारा दिये गये खसरा नक्शा में भी स्पष्ट इस भूमि पर उसका नाम दर्ज है।
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Daksha Temple and Neelkanth Mahadev Temple में छोटे कपड़े पहन कर आने वाली लड़कियों को छोटे कपड़े में आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी (Panchayati Akhara Mahanirvani) और अखाड़ा परिषद के श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा है कि जिनका शरीर 80 फीसदी तक ढका होगा,उन्हें ही मंदिरों में प्रवेश दिया जाएगा।
दरअसल दक्ष मंदिर और नीलकंठ महादेव मंदिर (Daksha Temple and Neelkanth Mahadev Temple) में छोटे कपड़े पहन कर आने वाली लड़कियों को छोटे कपड़े में आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसको लेकर एक आदेश जारी किया है।
महानिर्वाणी अखाड़े के तीन बड़े मंदिरों में छोटे कपड़े पहनकर जाने वाले लड़के और लड़कियां प्रवेश नहीं कर पाएंगे। हरिद्वार के प्रसिद्ध दक्ष मंदिर, ऋषिकेश के नीलकंठ और देहरादून के टपकेश्वर मंदिर में इसे लागू किया जा रहा है।
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Daksha Temple and Neelkanth Mahadev Temple में छोटे कपड़े पहन कर आने वाली लड़कियों को छोटे कपड़े में आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी और अखाड़ा परिषद के श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा है कि जिनका शरीर अस्सी फीसदी तक ढका होगा,उन्हें ही मंदिरों में प्रवेश दिया जाएगा। दरअसल दक्ष मंदिर और नीलकंठ महादेव मंदिर में छोटे कपड़े पहन कर आने वाली लड़कियों को छोटे कपड़े में आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसको लेकर एक आदेश जारी किया है। महानिर्वाणी अखाड़े के तीन बड़े मंदिरों में छोटे कपड़े पहनकर जाने वाले लड़के और लड़कियां प्रवेश नहीं कर पाएंगे। हरिद्वार के प्रसिद्ध दक्ष मंदिर, ऋषिकेश के नीलकंठ और देहरादून के टपकेश्वर मंदिर में इसे लागू किया जा रहा है।
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इलाहाबाद : महिला सहकर्मियों के शोषण और उत्पीड़न को लेकर हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद शासन ने इलाहाबाद के पूर्व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक राजकुमार यादव को निलंबित करने के बाद जांच टीम में भी बदलाव कर दिया है। अब अपर शिक्षा निदेशक सुक्ता सिंह की अगुवाई में चार सदस्यीय टीम मामले की पड़ताल करेगी। पूर्व डीआइओएस को शासन ने लखनऊ से हटाकर कुशीनगर जिले से संबद्ध किया गया है।
राजकुमार यादव इलाहाबाद के बीएसए थे। अपने रसूख के चलते बाद में उन्होंने इलाहाबाद के जिला विद्यालय निरीक्षक पद पर तैनाती हासिल कर ली। इलाहाबाद में बीएसए रहते यादव पर महिला सहकर्मियों के शोषण व उत्पीड़न के आरोप लगे थे। यह मामला पिछले दिनों हाईकोर्ट पहुंचा था। मामला तूल पकड़ने पर यादव को इलाहाबाद के डीआइओएस पद से हटाकर लखनऊ स्थित माध्यमिक शिक्षा निदेशक शिविर कार्यालय से संबद्ध कर दिया था।
हाईकोर्ट इस कार्यवाही से संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि यादव को लखनऊ में संबद्ध करने से जांच सही नहीं हो सकेगी और महिला सहकर्मियों के शोषण को लेकर बने कानून का उद्देश्य विफल हो जाएगा। कोर्ट ने पूछा कि डीआइओएस को निलंबित क्यों नहीं किया गया और एफआइआर क्यों दर्ज नहीं की गई। कोर्ट ने प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा जितेंद्र कुमार को सात नवंबर को इस मामले में तलब किया है।
शासन ने यादव को इलाहाबाद से हटाए जाने के समय इस मामले की जांच बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा को सौंपी थी। अब प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा ने अपर शिक्षा निदेशक सुक्ता सिंह को जांच अधिकारी बनाया है। वह राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान का कार्य देख रही हैं और लखनऊ शिविर कार्यालय में तैनात हैं। जांच टीम में अपर शिक्षा निदेशक नीना श्रीवास्तव, शिक्षा निदेशालय में उप शिक्षा निदेशक अनिल कुमार चतुर्वेदी एवं उप शिक्षा निदेशक गायत्री को भी शामिल किया है।
अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक रमेश ने बताया कि प्रमुख सचिव ने निष्पक्ष जांच करके जल्द रिपोर्ट सौंपे जाने का आदेश दिया है। साथ ही यादव का लखनऊ शिविर कार्यालय से संबद्धीकरण भी खत्म करके अब उन्हें कुशीनगर जिले में संबद्ध किया गया है।
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इलाहाबाद : महिला सहकर्मियों के शोषण और उत्पीड़न को लेकर हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद शासन ने इलाहाबाद के पूर्व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक राजकुमार यादव को निलंबित करने के बाद जांच टीम में भी बदलाव कर दिया है। अब अपर शिक्षा निदेशक सुक्ता सिंह की अगुवाई में चार सदस्यीय टीम मामले की पड़ताल करेगी। पूर्व डीआइओएस को शासन ने लखनऊ से हटाकर कुशीनगर जिले से संबद्ध किया गया है। राजकुमार यादव इलाहाबाद के बीएसए थे। अपने रसूख के चलते बाद में उन्होंने इलाहाबाद के जिला विद्यालय निरीक्षक पद पर तैनाती हासिल कर ली। इलाहाबाद में बीएसए रहते यादव पर महिला सहकर्मियों के शोषण व उत्पीड़न के आरोप लगे थे। यह मामला पिछले दिनों हाईकोर्ट पहुंचा था। मामला तूल पकड़ने पर यादव को इलाहाबाद के डीआइओएस पद से हटाकर लखनऊ स्थित माध्यमिक शिक्षा निदेशक शिविर कार्यालय से संबद्ध कर दिया था। हाईकोर्ट इस कार्यवाही से संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि यादव को लखनऊ में संबद्ध करने से जांच सही नहीं हो सकेगी और महिला सहकर्मियों के शोषण को लेकर बने कानून का उद्देश्य विफल हो जाएगा। कोर्ट ने पूछा कि डीआइओएस को निलंबित क्यों नहीं किया गया और एफआइआर क्यों दर्ज नहीं की गई। कोर्ट ने प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा जितेंद्र कुमार को सात नवंबर को इस मामले में तलब किया है। शासन ने यादव को इलाहाबाद से हटाए जाने के समय इस मामले की जांच बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा को सौंपी थी। अब प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा ने अपर शिक्षा निदेशक सुक्ता सिंह को जांच अधिकारी बनाया है। वह राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान का कार्य देख रही हैं और लखनऊ शिविर कार्यालय में तैनात हैं। जांच टीम में अपर शिक्षा निदेशक नीना श्रीवास्तव, शिक्षा निदेशालय में उप शिक्षा निदेशक अनिल कुमार चतुर्वेदी एवं उप शिक्षा निदेशक गायत्री को भी शामिल किया है। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक रमेश ने बताया कि प्रमुख सचिव ने निष्पक्ष जांच करके जल्द रिपोर्ट सौंपे जाने का आदेश दिया है। साथ ही यादव का लखनऊ शिविर कार्यालय से संबद्धीकरण भी खत्म करके अब उन्हें कुशीनगर जिले में संबद्ध किया गया है।
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जनवरी में सिर्फ 11 दिन में 6228 मरीज मिल चुके हैं। मार्च 2020 से अब तक 2295745 लोगों की जांच की गई। इनमें से 62142 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई। इलाज के बाद 55556 लोग स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि गंभीर रूप से बीमार 461 संक्रमितों की मौत हो चुकी है।
जम्मू में कोरोना टेस्ट करवाने के लिए सैंपल लेती स्थ्वास्थ्य कर्मी।
गाजियाबाद में कोरोना की तीसरी लहर में मंगलवार को 1679 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई। 24 घंटे में 8729 लोगों की जांच की गई। इनमें एक न्यायाधीश, एक डॉक्टर, सरकारी कर्मचारी और निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं। 10 दिन में 565 बच्चे संक्रमित हो चुके हैं। 16 से 40 साल के 4059 लोग संक्रमित हुए हैं।
दूसरी लहर में चार मई 2021 में 1632 मरीज मिले थे, जबकि 28 अप्रैल को एक दिन में सबसे अधिक 1860 मरीज मिले थे। इलाज के बाद 96 लोगों का होम आइसोलेशन पूरा हो गया। इस समय जिले में 6125 मरीजों का इलाज चल रहा है। जनवरी में सिर्फ 11 दिन में 6228 मरीज मिल चुके हैं। मार्च 2020 से अब तक 2295745 लोगों की जांच की गई। इनमें से 62142 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई। इलाज के बाद 55556 लोग स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि गंभीर रूप से बीमार 461 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। तीसरी लहर में बच्चे भी तेजी से संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। सिर्फ दस दिन में 565 बच्चे संक्रमित हो चुके हैं।
सोमवार को मुरादनगर सीएचसी के एक डॉक्टर, जिला न्यायालय में कार्यरत एक न्यायाधीश, समेत अलग-अलग सरकारी विभागों में कार्यरत कई कर्मचारी भी संक्रमण की चपेट में आए। संक्रमितों में 92 बच्चे शामिल हैं। सबसे अधिक संख्या 25 से 40 आयु वर्ग वालों की है। इनमें से अधिकांश मरीजों का दिल्ली आना जाना है।
कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ ही अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। 24 घंटे में 11 मरीज भर्ती होने के साथ ही अस्पताल में इलाज कराने वालों की संख्या 26 हो गई है। इनमें से नौ बुजुर्ग मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। डीएसओ डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि जिन मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है, सभी का ऑक्सीजन स्तर 90 से 93 के बीच है। इनमें कोई भी मरीज गंभीर नहीं है। मरीजों की आयु भी 60 वर्ष से ज्यादा है। डीएसओ ने बताया कि 17 मरीज कोविड लेवल-3 संतोष अस्पताल में भर्ती हैं। 9 मरीजों का निजी अस्पतालों में उपचार चल रहा है। इन सभी को पहले होम आइसोलेशन में रखा गया था, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
एसीएमओ डॉ. सुनील त्यागी ने बताया कि मरीजों को अस्पतालों में भर्ती करने की जरूरत को देखते हुए एल-1 स्तर के लिए ईएसआई अस्पताल राजेंद्र नगर और एल-2 व एल-3 के लिए संतोष अस्पताल को सक्रिय कर दिया गया है। ईएसआई अस्पताल में 72 बेड हैं, संतोष अस्पताल में 400 बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा 4 निजी अस्पतालों को सक्रिय किया गया है। इसके अलावा 25 निजी अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। एसीएमओ ने बताया कि अगर जरूरत पड़ी तो अस्पतालों की संख्या बढ़ाई जाएगी, लेकिन अभी तक ऐसी जरूरत नहीं है। अभी संतोष अस्पताल में ही काफी बेड खाली हैं।
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जनवरी में सिर्फ ग्यारह दिन में छः हज़ार दो सौ अट्ठाईस मरीज मिल चुके हैं। मार्च दो हज़ार बीस से अब तक बाईस लाख पचानवे हज़ार सात सौ पैंतालीस लोगों की जांच की गई। इनमें से बासठ हज़ार एक सौ बयालीस लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई। इलाज के बाद पचपन हज़ार पाँच सौ छप्पन लोग स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि गंभीर रूप से बीमार चार सौ इकसठ संक्रमितों की मौत हो चुकी है। जम्मू में कोरोना टेस्ट करवाने के लिए सैंपल लेती स्थ्वास्थ्य कर्मी। गाजियाबाद में कोरोना की तीसरी लहर में मंगलवार को एक हज़ार छः सौ उन्यासी लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई। चौबीस घंटाटे में आठ हज़ार सात सौ उनतीस लोगों की जांच की गई। इनमें एक न्यायाधीश, एक डॉक्टर, सरकारी कर्मचारी और निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं। दस दिन में पाँच सौ पैंसठ बच्चे संक्रमित हो चुके हैं। सोलह से चालीस साल के चार हज़ार उनसठ लोग संक्रमित हुए हैं। दूसरी लहर में चार मई दो हज़ार इक्कीस में एक हज़ार छः सौ बत्तीस मरीज मिले थे, जबकि अट्ठाईस अप्रैल को एक दिन में सबसे अधिक एक हज़ार आठ सौ साठ मरीज मिले थे। इलाज के बाद छियानवे लोगों का होम आइसोलेशन पूरा हो गया। इस समय जिले में छः हज़ार एक सौ पच्चीस मरीजों का इलाज चल रहा है। जनवरी में सिर्फ ग्यारह दिन में छः हज़ार दो सौ अट्ठाईस मरीज मिल चुके हैं। मार्च दो हज़ार बीस से अब तक बाईस लाख पचानवे हज़ार सात सौ पैंतालीस लोगों की जांच की गई। इनमें से बासठ हज़ार एक सौ बयालीस लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई। इलाज के बाद पचपन हज़ार पाँच सौ छप्पन लोग स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि गंभीर रूप से बीमार चार सौ इकसठ संक्रमितों की मौत हो चुकी है। तीसरी लहर में बच्चे भी तेजी से संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। सिर्फ दस दिन में पाँच सौ पैंसठ बच्चे संक्रमित हो चुके हैं। सोमवार को मुरादनगर सीएचसी के एक डॉक्टर, जिला न्यायालय में कार्यरत एक न्यायाधीश, समेत अलग-अलग सरकारी विभागों में कार्यरत कई कर्मचारी भी संक्रमण की चपेट में आए। संक्रमितों में बानवे बच्चे शामिल हैं। सबसे अधिक संख्या पच्चीस से चालीस आयु वर्ग वालों की है। इनमें से अधिकांश मरीजों का दिल्ली आना जाना है। कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ ही अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। चौबीस घंटाटे में ग्यारह मरीज भर्ती होने के साथ ही अस्पताल में इलाज कराने वालों की संख्या छब्बीस हो गई है। इनमें से नौ बुजुर्ग मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। डीएसओ डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि जिन मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है, सभी का ऑक्सीजन स्तर नब्बे से तिरानवे के बीच है। इनमें कोई भी मरीज गंभीर नहीं है। मरीजों की आयु भी साठ वर्ष से ज्यादा है। डीएसओ ने बताया कि सत्रह मरीज कोविड लेवल-तीन संतोष अस्पताल में भर्ती हैं। नौ मरीजों का निजी अस्पतालों में उपचार चल रहा है। इन सभी को पहले होम आइसोलेशन में रखा गया था, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। एसीएमओ डॉ. सुनील त्यागी ने बताया कि मरीजों को अस्पतालों में भर्ती करने की जरूरत को देखते हुए एल-एक स्तर के लिए ईएसआई अस्पताल राजेंद्र नगर और एल-दो व एल-तीन के लिए संतोष अस्पताल को सक्रिय कर दिया गया है। ईएसआई अस्पताल में बहत्तर बेड हैं, संतोष अस्पताल में चार सौ बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा चार निजी अस्पतालों को सक्रिय किया गया है। इसके अलावा पच्चीस निजी अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। एसीएमओ ने बताया कि अगर जरूरत पड़ी तो अस्पतालों की संख्या बढ़ाई जाएगी, लेकिन अभी तक ऐसी जरूरत नहीं है। अभी संतोष अस्पताल में ही काफी बेड खाली हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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BBC News,
धर्म संसद के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराने वाले युवक को किस बात का है डर?
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आल्हा गायन प्रस्तुत करती नैना गौतम।
अचलगंज। शहीदे आजम चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ बदरका में उनकी 111वीं जयंती समारोह का रंगारंग शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष संगीत सेंगर ने किया। साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से लगाए गए बाल मेले व विकास प्रदर्शनियों का भी उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि शहीदे आजम चंद्रशेखर आजाद की पावन जन्मभूमि पर हम लोग भी जन्मे हैं यह सोचकर हम सभी को गौरवान्वित महसूस करना चाहिए। अध्यक्षता पूर्व बार अध्यक्ष कमला शंकर अवस्थी व संचालन शारदा प्रसाद शुक्ल ने किया। इसके अलावा शिक्षक संघ के अध्यक्ष बृजेश पांडेय, प्रदीप सिंह, डा. रचना सिंह, धनवंतरि देव गुप्त, सपा के पूर्व जिला सचिव उदयराज यादव, अनुपम मिश्र, अमित शुक्ल, रमाकांत मिश्र, सोनू अवस्थी, शंभू शुक्ल भी मौजूद रहे। अंत में ट्रस्ट के महामंत्री राजेश शुक्ल व ईश्वर चंद्र शुक्ल ने अतिथियों व आए हुए लोगों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से लगाए गए बालमेले का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष संगीता सेंगर ने दीप जला व स्काउट गाइड का झंडा फहराकर किया। इसमें एक दर्जन से अधिक विद्यालयों के बच्चों ने भाग लेते हुए अपनी कला का प्रदर्शन किया। बच्चों ने विभिन्न प्रकार के रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। इस अवसर पर स्वास्थ्य, शिक्षा, जल निगम, कृषि, खादी ग्रामोद्योग विभाग सहित विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं ने प्रदर्शनी लगाकर लोगों को अपने विभाग की योजनाओं की जानकारी लोगों को दी गईं।
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आल्हा गायन प्रस्तुत करती नैना गौतम। अचलगंज। शहीदे आजम चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ बदरका में उनकी एक सौ ग्यारहवीं जयंती समारोह का रंगारंग शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष संगीत सेंगर ने किया। साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से लगाए गए बाल मेले व विकास प्रदर्शनियों का भी उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि शहीदे आजम चंद्रशेखर आजाद की पावन जन्मभूमि पर हम लोग भी जन्मे हैं यह सोचकर हम सभी को गौरवान्वित महसूस करना चाहिए। अध्यक्षता पूर्व बार अध्यक्ष कमला शंकर अवस्थी व संचालन शारदा प्रसाद शुक्ल ने किया। इसके अलावा शिक्षक संघ के अध्यक्ष बृजेश पांडेय, प्रदीप सिंह, डा. रचना सिंह, धनवंतरि देव गुप्त, सपा के पूर्व जिला सचिव उदयराज यादव, अनुपम मिश्र, अमित शुक्ल, रमाकांत मिश्र, सोनू अवस्थी, शंभू शुक्ल भी मौजूद रहे। अंत में ट्रस्ट के महामंत्री राजेश शुक्ल व ईश्वर चंद्र शुक्ल ने अतिथियों व आए हुए लोगों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से लगाए गए बालमेले का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष संगीता सेंगर ने दीप जला व स्काउट गाइड का झंडा फहराकर किया। इसमें एक दर्जन से अधिक विद्यालयों के बच्चों ने भाग लेते हुए अपनी कला का प्रदर्शन किया। बच्चों ने विभिन्न प्रकार के रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। इस अवसर पर स्वास्थ्य, शिक्षा, जल निगम, कृषि, खादी ग्रामोद्योग विभाग सहित विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं ने प्रदर्शनी लगाकर लोगों को अपने विभाग की योजनाओं की जानकारी लोगों को दी गईं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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पटना, बिहार में आज उदयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही सूर्योपासना का महापर्व छठ समाप्त हो गया ।
राजधानी पटना में आज गंगा नदी के अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में लाखों महिला और पुरुष व्रतधारियों ने उगते हुए सूर्य को नदियों और तालाबों में खड़े होकर अर्घ्य अर्पित किया।
औरंगाबाद जिले के ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल देव में आज उदयाचल सूर्य को आठ लाख से अधिक व्रतधारियों- श्रद्धालुओं द्वारा अर्ध्य अर्पित किए जाने के साथ ही चार दिवसीय छठ महापर्व संपन्न हो गया । देव के त्रेतायुगीन सूर्य मंदिर में आज तड़के से ही श्रद्धालु कतारबद्ध होकर भगवान भास्कर की पूजा अर्चना कर रहे हैं। लोक मान्यता है कि देव छठ व्रत करने तथा त्रेतायुगीन सूर्य मंदिर में पूजा अर्चना करने से श्रद्धालुओं की मनोवांछित कामनाएं पूरी होती हैं और इस मौके पर यहां भगवान भास्कर की साक्षात उपस्थिति की रोमांचक अनुभूति होती है ।
गया से प्राप्त समाचार के अनुसार अहले सुबह से ही श्रद्धालु शहर के विभिन्न घाटों और सरोवरों के समीप पहुंचे और पूरे धार्मिक विधि-विधान से पूजा-पाठ करने के बाद उदयीमान सूर्य को अर्घ्य दिया और अपने परिवार की सुख, समृद्धि की कामना की।
दूसरा अर्घ्य अर्पित करने के बाद श्रद्धालुओं का 36 घंटे का निराहार व्रत समाप्त हुआ और उसके बाद हीं व्रतधारियों ने अन्न ग्रहण किया । चार दिवसीय इस महापर्व के तीसरे दिन कल व्रतधारियों ने नदियों और तालाबों में अस्ताचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य अर्पित किया था ।
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पटना, बिहार में आज उदयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही सूर्योपासना का महापर्व छठ समाप्त हो गया । राजधानी पटना में आज गंगा नदी के अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में लाखों महिला और पुरुष व्रतधारियों ने उगते हुए सूर्य को नदियों और तालाबों में खड़े होकर अर्घ्य अर्पित किया। औरंगाबाद जिले के ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल देव में आज उदयाचल सूर्य को आठ लाख से अधिक व्रतधारियों- श्रद्धालुओं द्वारा अर्ध्य अर्पित किए जाने के साथ ही चार दिवसीय छठ महापर्व संपन्न हो गया । देव के त्रेतायुगीन सूर्य मंदिर में आज तड़के से ही श्रद्धालु कतारबद्ध होकर भगवान भास्कर की पूजा अर्चना कर रहे हैं। लोक मान्यता है कि देव छठ व्रत करने तथा त्रेतायुगीन सूर्य मंदिर में पूजा अर्चना करने से श्रद्धालुओं की मनोवांछित कामनाएं पूरी होती हैं और इस मौके पर यहां भगवान भास्कर की साक्षात उपस्थिति की रोमांचक अनुभूति होती है । गया से प्राप्त समाचार के अनुसार अहले सुबह से ही श्रद्धालु शहर के विभिन्न घाटों और सरोवरों के समीप पहुंचे और पूरे धार्मिक विधि-विधान से पूजा-पाठ करने के बाद उदयीमान सूर्य को अर्घ्य दिया और अपने परिवार की सुख, समृद्धि की कामना की। दूसरा अर्घ्य अर्पित करने के बाद श्रद्धालुओं का छत्तीस घंटाटे का निराहार व्रत समाप्त हुआ और उसके बाद हीं व्रतधारियों ने अन्न ग्रहण किया । चार दिवसीय इस महापर्व के तीसरे दिन कल व्रतधारियों ने नदियों और तालाबों में अस्ताचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य अर्पित किया था ।
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भुवनेश्वरः भारत को यहां हॉकी विश्व लीग फाइलन के पूल बी मैच में आज इंग्लैंड के हाथों 2-3 से शिकस्त झेलनी पड़ी जिसके लिये सैम वार्ड ने दो गोल दागे। डेविड गुडफील्ड ने इंग्लैंड को 25वें मिनट में आगे कर दिया जिसके बाद वार्ड ने 43वें और 57वें मिनट में टीम के लिये दो गोल दागे।
भारत के लिये दोनों गोल पेनल्टी कार्नर से आये जिसमें आकाशदीप ने 47वें मिनट और रूपिंदरपाल सिंह ने 50वें मिनट में गोल किया। पहला क्वार्टर दोनों टीमों के लिये नीरस रहा क्योंकि दोनों टीमें तेज और आक्रामक हाकी खेलने के बावजूद गोल करने का अच्छा मौका नहीं बना सकीं।
भारत ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ जिस स्तर का खेल दिखाया था, वह आज उसके आसपास भी नहीं दिखी। वह कल संयोजित और नियंत्रित दिख रही थी लेकिन वह पहले क्वार्टर में बिलकुल इसके विपरीत दिखी।
एसवी सुनील को एक मौके पर गेंद को ज्यादा समय अपने पास रखने का दोषी पाया गया। इंग्लैंड ने मौका मिलते ही भारतीय डिफेंस पर दबाव बना दिया। मैच का पहला मौका 25वें मिनट में तब मिला जब इंग्लैंड ने पहला पेनल्टी कार्नर हासिल किया लेकिन भारतीयों ने इसका अच्छा बचाव किया। हालांकि डेविड गुडफील्ड ने विपक्षी गोलकीपर सूरज करकेरा के पैड से डिफ्लेक्ट हुई गेंद को हासिल कर गोल दाग दिया।
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भुवनेश्वरः भारत को यहां हॉकी विश्व लीग फाइलन के पूल बी मैच में आज इंग्लैंड के हाथों दो-तीन से शिकस्त झेलनी पड़ी जिसके लिये सैम वार्ड ने दो गोल दागे। डेविड गुडफील्ड ने इंग्लैंड को पच्चीसवें मिनट में आगे कर दिया जिसके बाद वार्ड ने तैंतालीसवें और सत्तावनवें मिनट में टीम के लिये दो गोल दागे। भारत के लिये दोनों गोल पेनल्टी कार्नर से आये जिसमें आकाशदीप ने सैंतालीसवें मिनट और रूपिंदरपाल सिंह ने पचासवें मिनट में गोल किया। पहला क्वार्टर दोनों टीमों के लिये नीरस रहा क्योंकि दोनों टीमें तेज और आक्रामक हाकी खेलने के बावजूद गोल करने का अच्छा मौका नहीं बना सकीं। भारत ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ जिस स्तर का खेल दिखाया था, वह आज उसके आसपास भी नहीं दिखी। वह कल संयोजित और नियंत्रित दिख रही थी लेकिन वह पहले क्वार्टर में बिलकुल इसके विपरीत दिखी। एसवी सुनील को एक मौके पर गेंद को ज्यादा समय अपने पास रखने का दोषी पाया गया। इंग्लैंड ने मौका मिलते ही भारतीय डिफेंस पर दबाव बना दिया। मैच का पहला मौका पच्चीसवें मिनट में तब मिला जब इंग्लैंड ने पहला पेनल्टी कार्नर हासिल किया लेकिन भारतीयों ने इसका अच्छा बचाव किया। हालांकि डेविड गुडफील्ड ने विपक्षी गोलकीपर सूरज करकेरा के पैड से डिफ्लेक्ट हुई गेंद को हासिल कर गोल दाग दिया।
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भावावेशसे महामोनसकी गति मन्द या लुप्त होनेका अनुभव भी हममें सबको है। प्राथ सटान सराब होनेसे मलोत्सर्गका नग ही लुप्त हो जाता है। इसीलिए विबन्ध रोगक उपायोक निर्देश सदामकी शुद्धिकी भी गणना की जाती है ।
यह कहनेकी आवश्यकता नहीं कि, भावारश खाये भोजनका स्वाद नहीं लिया जाता में वह ठीक चाया जाता है, जिसमे प्रकारान्तरसे हानि होती है ।
आहार-आदि की रम्यताभाकपचन संस्थानपर इस विपरीत नियाको देखनेसे विशद है, कि अन्नपानका पूर्ण फल प्राप्त करनेके लिए भोजन कितनी शान्तिस करना चाहिए । तत्काल मानसिक क्षोभ न उत्पन्न होने के लिए भोजन, उपकरण, स्थान और समयकी रम्यता आवश्यक है। देखिये -
इब्रुवर्णगन्धरसम्पर्श विविविहितमन्नपान प्राणिना प्राणिसंज्ञकाना प्राणमाचक्षते कुशला । प्रत्यक्षफल दर्शनात ।।
इष्टमिति अभिमत हित च X X X 1 प्राणमिति प्राणंहतृत्वात, यथा भायुतम् ॥
सौमनस्यं बल पुष्टिमुत्साह हर्पण सुखम् ।
स्वादु सजनयत्यन्नमस्त्रादु च विपर्ययम् ।। भुत्क्याऽपि यत्प्रार्थयते मृयस्तत स्वादु भोजनम् ॥ सु० मृ० ८६१४८०
घल सर्वधातुने । सुग्म नीरोगता ।
भोक्तारं बिजने रम्ये निसंपत शुभशुचौ । सुगन्धपुष्परचित समे देंगे च भोजयेन ।।
विजन एकान्ते । विजने हि भुञ्जानस्य दुष्ट दृष्टिनिपाताद्विद्रोपो न भवति । निसपाते उद्घोचन हतं । निसपातं हि भुज्ञानस्य पांगुप्रक्षेपाढिद्रोपो न भवति । शुभं चारतुद्रोपरहित । शुचौ पत्रिं, तत्र न भृतायाग । समे निम्नोन्नतत्वरहितं ॥
इष्टे, देशे इष्टसर्वापकरणे चानीयात् । इष्टुं हि देश भुजानो नानिप्रदेशजर्मनीविधानकरभवनो विधान प्राप्नोति । तथैवेष्टं सर्वपकरण । तस्मादिष्टे देशे तथेटसर्वोपकरणं चाश्रीयात ।।
मनोविघातकर्भावरिति त्रिविधकुक्षीय वक्षमाणे कामादिभिश्चित्तोपतापकरैश्चित्त विकारैरियर्थ । तथेष्टेच सर्वोपकरणैर्भुजानो मनोविघात न प्राप्नोतीति योजना । अनिष्ट भोजनार्मनोविवातो भवति ।।
अन्नमिष्टं ह्युपहितमिर्गन्वादिभि पृथक् ।
च० चि० १५/१२ हे प्रीणाति गन्धादीन् ब्राणादीनीन्द्रियाणि च ॥ कर्मान्तरेणाप्यन्नस्य पाक सपद्यते, तमाह - अन्नमित्यादि । इप्टशनेह प्रिय हित चोच्यते न त्रियमात्रम् । अहितस्य प्रियमात्रस्य न देहव्यवस्थिति गन्धादि नर्पक्त्व च भवति । उपति१ - देखिये ऊपर त च० वि० २६१८-९
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भावावेशसे महामोनसकी गति मन्द या लुप्त होनेका अनुभव भी हममें सबको है। प्राथ सटान सराब होनेसे मलोत्सर्गका नग ही लुप्त हो जाता है। इसीलिए विबन्ध रोगक उपायोक निर्देश सदामकी शुद्धिकी भी गणना की जाती है । यह कहनेकी आवश्यकता नहीं कि, भावारश खाये भोजनका स्वाद नहीं लिया जाता में वह ठीक चाया जाता है, जिसमे प्रकारान्तरसे हानि होती है । आहार-आदि की रम्यताभाकपचन संस्थानपर इस विपरीत नियाको देखनेसे विशद है, कि अन्नपानका पूर्ण फल प्राप्त करनेके लिए भोजन कितनी शान्तिस करना चाहिए । तत्काल मानसिक क्षोभ न उत्पन्न होने के लिए भोजन, उपकरण, स्थान और समयकी रम्यता आवश्यक है। देखिये - इब्रुवर्णगन्धरसम्पर्श विविविहितमन्नपान प्राणिना प्राणिसंज्ञकाना प्राणमाचक्षते कुशला । प्रत्यक्षफल दर्शनात ।। इष्टमिति अभिमत हित च X X X एक प्राणमिति प्राणंहतृत्वात, यथा भायुतम् ॥ सौमनस्यं बल पुष्टिमुत्साह हर्पण सुखम् । स्वादु सजनयत्यन्नमस्त्रादु च विपर्ययम् ।। भुत्क्याऽपि यत्प्रार्थयते मृयस्तत स्वादु भोजनम् ॥ सुशून्य मृशून्य आठ लाख इकसठ हज़ार चार सौ अस्सी घल सर्वधातुने । सुग्म नीरोगता । भोक्तारं बिजने रम्ये निसंपत शुभशुचौ । सुगन्धपुष्परचित समे देंगे च भोजयेन ।। विजन एकान्ते । विजने हि भुञ्जानस्य दुष्ट दृष्टिनिपाताद्विद्रोपो न भवति । निसपाते उद्घोचन हतं । निसपातं हि भुज्ञानस्य पांगुप्रक्षेपाढिद्रोपो न भवति । शुभं चारतुद्रोपरहित । शुचौ पत्रिं, तत्र न भृतायाग । समे निम्नोन्नतत्वरहितं ॥ इष्टे, देशे इष्टसर्वापकरणे चानीयात् । इष्टुं हि देश भुजानो नानिप्रदेशजर्मनीविधानकरभवनो विधान प्राप्नोति । तथैवेष्टं सर्वपकरण । तस्मादिष्टे देशे तथेटसर्वोपकरणं चाश्रीयात ।। मनोविघातकर्भावरिति त्रिविधकुक्षीय वक्षमाणे कामादिभिश्चित्तोपतापकरैश्चित्त विकारैरियर्थ । तथेष्टेच सर्वोपकरणैर्भुजानो मनोविघात न प्राप्नोतीति योजना । अनिष्ट भोजनार्मनोविवातो भवति ।। अन्नमिष्टं ह्युपहितमिर्गन्वादिभि पृथक् । चशून्य चिशून्य पंद्रह/बारह हे प्रीणाति गन्धादीन् ब्राणादीनीन्द्रियाणि च ॥ कर्मान्तरेणाप्यन्नस्य पाक सपद्यते, तमाह - अन्नमित्यादि । इप्टशनेह प्रिय हित चोच्यते न त्रियमात्रम् । अहितस्य प्रियमात्रस्य न देहव्यवस्थिति गन्धादि नर्पक्त्व च भवति । उपतिएक - देखिये ऊपर त चशून्य विशून्य दो हज़ार छः सौ अट्ठारह-नौ
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बांधता था। उसके चेहरे में सब से आकर्षक थीं उसकी मूछे जब देखो वे मुडी रहती थींः वह अपनी मूछों के दोनों ओर के किनारों को कभी सीधा न होने देता था। उसके सिर पर तो इतने बाल नहीं थे कि वह उन पर तेल भी लगाता। हाँ, मूलों को तेल पिलाता था और इसका वह बड़ा शौकीन था । मुडी हुई मूर्खों के ताव को देखने के लिए उसकी जेब में एक छोटा-सा दर्पण था । वह जब-तब इस दर्पण को अपनी जेब से निकालता और देख लेता था कि उसकी मूछें ठीक तरह बल खाए हुए अपनी ताव में हैं या नहीं। कभी-कभी वह अपनी मुडी हुई मूर्खों को देख कर अकेले में जोर-ज़ोर से कहकहे मार कर हंसने लग जाता था। उस समय उसकी यह हँसी देखने ही योग्य होती थी; उसकी आँखों में जो कि बहुत बडी नहीं थीं; ६क तरह की चमक-सी आ जाती थी और वह चमक आँखों से प्रारम्भ हो कर फिर गालों पर झलक उठती थी। अदनी मूर्खों को रेलते हुए कभी-कभी वह 'दर्पण' से बातें करने लग जाता था और कभीकभी जब उसमे रहा न जाता था, तब गाने लग जाता था । कभी वह पुरबिया प्रेम गीत गाता था, कभी आल्हा गाता था । और इसी मस्ती में कभी-कभी ढोल भी बजाने लग जाता था कभी-कभी वह रोने लग जाता था ।
जब अपने काम से उसे ज़रा फुरसत मिलती तब वह अपनी जेब से इसी दर्पण को निकालता और इसमें अपने मुख को देखदेख कर ज़रा सा मुसकुरा उठता था । दीनानाथ सोचते थे कि
यह पागल है या क्या बात है ? किन्तु वह अपना काम बड़ी नत्परता से करता था, इसलिए दीनानाथ को उसे कहने-सुनने का कोई अवसर ही नहीं आया। उनके लिए उसकी ये चेष्टाएँ आकर्षण का विषय बन गई ।
एक दिन दो पहर को वह पुरविया अपनी झोंपड़ी में आराम कर रहा था; दोपहर को दूकान में काम कम रहता था । पुरधिए ले जेब से अपने दर्पण को निकाला । 'दर्पण' आधी हथेली के बराबर थाः इसके पीछे टीन लगा हुआ था। इस दर्पण की आभा क्षीण हो गई थी; कहीं-कहीं उसमें ज़रा ऊपर जंग के धब्चे भी आ गए थे। टीन यहां-वहां से ढीला हो गया था और टूट गया था। इस दर्पण में एक तरे भी पढ़ गई थी । परन्तु वह इस दर्पण को अपनी एक अमूल्य सम्पत्ति सगझता था । इस दर्पण को वर सदा अपने साथ रखता था, वह इसका सदा का साथी थाः उसे जब जब फुरसत मिलती कि वह इस दर्पण को निकाल लेता और फिर उस दर्पण को देखते हुए वह पहले अपनी मूर्खों को ताव देता और फिर उन्हें देखते-देखते धीरेधीरे सब कुछ भूल जाता और कुछ से कुछ हो जाता था । घण्टों बीत जाते थे और वह इसी दर्पण में अपने चेहरे को टकटकी बाँधे देखता रहता था। न जाने कितने भाव इस दर्पण को देख कर उसके हृदय में आते थे। धीरे-धीरे सायङ्काल हो गया । सूर्यास्त होते ही लाली आकाश में फैल गई। पास में बहती हुई
नहर के शान्त, मैले पानी में इस लाली ने झलकने का प्रपत्न किया परन्तु उसके तरंगहीन मैले पानी में वह झलक न सकी । धीरे-धीरे यह शान्ति निस्तब्धता में बदलने लगी। दीनानाथ पुरबिए को न देख कर ज़रा चिन्तित हो गए। उन्होंने उसे कई बार पुकारा परन्तु उन्हें कोई उत्तर न मिला। उन्होंने समझा कि संभवतः वह कहीं बाहर किसी काम पर चला गया है ।
कुछ समय बाद उन्हें कुछ रोने की-सी आवाज़ सुनाई दी। वे अपने हुक्के को छोड़ कर उठे और उस पुरबिए की झोपड़ी के सामने जा कर खड़े हो गए। उन्होंने जो दृश्य देखा उससे वे अवाक् रह गए । देखते क्या हैं कि वह पुरबिया उस टूटे. हुए दर्पण को अपने हाथों में लिए हुए लगातार टकटकी बांधे अपने चेहरे को उसमें देख रहा है। कभी मुसकराता है; कभी रोने लग जाता है। उन्होंने सोचा कि बात क्या है, यह कहीं पागल तो नहीं हो गया है। उन्होंने जब तक उसके कन्धे पर हाथ रख कर उसे झकझोर नहीं दिया तब तक उसे यह भी पता न लगा कि कोई उसकी झोंपडी में आया है। "अरे भाई ! इतना अँधेरा हो गया है; तुम इस अँधेरे में इस टूटे हुए दर्पण में क्या अपने चेहरे को देख रहे हो ? यह बात क्या है, तुम पागल तो नहीं हो ?" दीनानाथ ने पूछा । दीनानाथ अधेड उम्र के आदमी थे; कारवारी मनुष्य थे; वे रसिक पुरुष नहीं थे; कारबारी मनुष्य प्रायः हूँठ होता है परन्तु आज उसे देख कर उनके हृदय में भी रसिकता उत्पन्न हुई और उसके दिल को टटोलने की
इच्छा जागृत हो गई। मनुष्य एक दूसरे को बाह्य रूप और सम्बन्ध में जितना देखता है उतना मनुष्य के रूप में नहीं । जब वह किसी मनुष्य को उसके समस्त बाह्य सम्बन्धों और रूपों को किनारे रख कर उसको मनुष्य के एक मात्र मनुष्य के रूप में देखता है तभी वह उसको यथार्थ में पहचानता है, तभी - जैसे उनकी समस्त अनुभूतियाँ, दुःख-दर्द सब उसके अपने बन जाते हैं ।
"तो बाबू तुम क्या समझते हो कि मैं इसमें अपने चेहरे को देख रहा हूँ। - नहीं, मैं इस दर्पण में किसी और के चेहरे को देख रहा हूँ।" यह कह कर वह फूट-फूट कर रोने लगा । दीनानाथ की उत्सुकता जाग उठी, उन्होंने उसे सान्त्वना देते हुए कहा - "भाई बताओ तो सही कि आखिर बात क्या है ? '
"बाबू, आप इस बात को सुन कर क्या करोगे, रहने दीजिए । चलिए, उठिए । यह किस्सा फिर किसी दिन के लिए रहने दीजिए" पुरबिए ने कहा । अब रात होती जा रही थी । अन्दर और बाहर दोनों जगह अन्धकार फैल रहा था । दूर आकाश में कहीं-कहीं तारे बाहर निकल आए थे । परन्तु उनकी चमक अभी क्षीण-सी ही थी जो रात के साथ-साथ बढ़ती जा रही थी ।
दीनानाथ भी सब कुछ भूल गए। उन्होंने आग्रह किया कि वे तब तक वहां से न उठेंगे जब तक कि उन्हें वह अपना
समस्त वृत्तान्त नहीं सुनाएगा ।
पुरबिर ने उठ कर पहले लेम्प जला दिया और फिर भारी आवाज़ में कहना प्रारम्भ किया - "बाबू, हम छोटे आदमी हैं; हमारा छोटा-ला किस्सा है और यह किस्सा हम अपने जीवन के समान अपने ही पास रखना चाहते हैं। परन्तु अब आपकी बहुत इच्छा है इसलिए सुनाने के लिए मज़बूर हैं । "
"जब पिछली लडाई हुई थी हमारे गांव में भी फ़ौज के लिए भरती हुई थी । भरती करने के भी क्या-क्या नए-नए ढंग थे । तरह-तरह के लालच दिए जाते थे और जब इन सब लालचों का भी गांव वालों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता था तो जोर- - जबर से भरती की जाती थी। बावू साहब बडे आदमी से बढ़ कर खुद गर्ज और कोई नहीं होता। जब इसकी जान पर आ बनती है तब वह सैक्डों और हज़ारों जानों की भी परवाह नहीं करता । वह अपने मरने से पहले हज़ारों को मार और मरवा कर मरता है । पता नहीं मेरा नाम किसने लिखवा दिया था। गांव में मेरी थोडी बहुत जमीन थी; मैं अपनी खेती में खुश था, और हुआ था मेरा अभी-अभी गौना । बताइए, बाबू साहब ऐसी हालत में कौन लडाई पर जाने के लिए तैयार होता । परन्तु मुझे पकड कर ज़बर्दस्ती बुलवाया गया, मुझसे अंगूठा लगवा लिया गया और र तब मुझे धमकी दी गई कि यदि तुम भरती नहीं होगे तो तुम्हारी जमीन खेती सब ज़ब्त कर ली जाएगी। अन्त में विवश हो कर मुझे भरती होना पड़ा ।
जिस दिन मुझे बिदा होना था- हाँ बाबू साहब, जिस दिन मुझे बिदा होना था, मेरी पत्नी ने मुझे अपने हाथ से खाना खिलाया और कहा कि अब तक तुम अपने हाथों से अपनी मूर्खों पर ताव देते रहे हो आज हम तुम्हारी मूछों का शृंगार करेंगी। तुम हमें भूल तो नहीं जाओगे ? मूछें मोड कर उसने यह दर्पण मेरे हाथ पर रख दिया और हँसती हुई बोली- देखो तुम्हारी मूछें आज कैमी बल खा रही है ? यह 'दर्पण' अपने पास रखना और हमें कभी-कभी याद कर लेना । देखो तुम्हारी गह जुदई का समय आसानी से कट जाएगा और जब कभी तुम्हें हमारी याद आए इस दर्पण को देख लेना ।
और सचमुच बाबू साहब यह जुदाई का समय इसी तरह बीत गया । अपनी लडाई का हाल क्या सुना ऊँ ? लडाई समत हो गई थी। मैं वापस आयाः आप समझ सकते हैं उस समय मेरे हृदय में क्या क्या उमंगें होंगी। मैने तभी से इन मूर्छा में विशेष दिलचस्पी लेनी प्रारम्भ कर दी थी। मैंने सोचा था कि मैं जब उसे अपनी बल खाती हुई मूछें दिखलाऊँगा तो वह प्रसन्न हो जाएगी। जब लौट कर अपने गाँव में पहुंचा तब मालूम हुआ कि अभी दो साल हुए यहाँ महामारी फल गई थी और वह विचारी उसी में चल बसी ! यह कहते-कहते वह फिर रोने लग गया। "मेरी सब आशाओं पर पानी फिर गया । मुझे अपने जीवन में कोई दिलचस्पी न रही । वह गाँव जिसका मैं प्रति दिन स्वप्न देखता था और जिसके लिए मैं लडाई से इतने
लम्बे अरसे के बाद तरसता हुआ आया था अब मुझे काटने को 'दौडने लगा । मैं अपने गाँव को छोड कर चला आया और इसी तरह फिरता फिरता आपके पास लायलपुर आ पहुँचा ।"
बाबू, आप समझते होंगे मैं इस दर्पण में अपनी आकृति को देखता हूँ । नहीं- आप विश्वास नहीं करेंगे परन्तु मैं इस दर्पण में अपनी पत्नी को देखता हूँ और मैं दर्पण में उसको देख कर इन मूर्गों को उसी को दिखाया करता हूँ। कभी-कभी मुझे ऐसा अनुभव होता है कि वह मेरी मूछों को देख कर मुस्करा रही है और तब मैं हँसने लग जाता हूँ। आप समझते होंगे मुझे मूछें रखने का शौक़ है। मेरा शौक़-चौक़ तो सब चला गया । अपनी पत्नी की स्मृति मेरे हृदय पर कुछ ऐसी बैठी हुई है कि वह मुझसे एक क्षण के लिए भी अलग नहीं होती । उसने लडाई पर जाते समय मुझे यह 'दर्पण' दिया था । और इन मूछों का अपने हाथों से सिंगार किया था । अब ये दोनों वस्तुएँ ही मेरे जीवन की सम्पत्ति बन गई हैं। कभी-कभी इस दर्पण को देखते देखते मुझे ऐसा अनुभव होता है कि जैसे वह मुझे देख रही है और मैं उसे देख रहा हूँ और तब घण्टों मैं इस दर्पण को अपने हाथों में लिए बैठा रहता हूँ । कितना समय व्यतीत हो जाता है मुझे इसका ज्ञान नहीं रहता। उस समय मुझे कुछ सूझता नहीं । मैं खो-सा जाता हूँ । दीनानाथ की आँखों में आंसू छलछला आए । उन्हें अनुभव हुआ कि सच्चा प्रेम पागलपन का ही दूसरा नाम है । - वंशीधर विद्यालङ्कार
कहानी-लेखक और कहानी
श्री भगवती प्रसाद वाजपेयी
श्री वाजपेयी आजकल कानपुर में रह कर हिन्दी की सेवा कर रहे हैं । हिन्दी के कहानी लेखकों में आपका विशेष स्थान है। सरल भाषा में ऊँचे मे ऊँचा भाव व्यक्त करना शेषता है । गृहस्थ जीवन की अनेक घटनाओं को आपने कहानी का रूप दिया है ।
इस संकलन में आपकी 'प्रायश्चित्त' नामक कहानी प्रकाशित हुई है । कहानी में इस बात को प्रदर्शित किया गया है कि एक व्यक्ति की विपत्ति से दूसरा आदमी किम तरह लाभ उठाता है। बहू के हाथ से बिल्ली मर गई, यह जान कर रामू की माँ बहुत चिन्तित थी । पं० परमसुख इस स्थिति से लाभ उठाना चाहता था । पढ़ते समय हमं परमसुख पर गुस्सा आता है कि वह इतना लालची क्यों है ? किन्तु हमारा यह क्रोध उस समय हँसी में बदल जाता है, जब नौकरानी कर समाचार देती है कि बिल्ली उठ कर भाग गई । बिल्ली मरी नहीं थी, चुपचाप पड़ी हुई थी ।
हिन्दी के प्रगतिशील लेखक इन्दौर में रहते हैं । आप छोटी छोटी कहानियाँ लिखने में बड़े कुशल हैं ।
इस संग्रह की 'किरणें' नामक कहानी आप ही की लिखी हुई है ।
कहानी में एक ग़रीब के घर का वर्णन है। कहानी एक लड़के के मुँह से कहलाई गई है । माँ बीमार है । और पानी बरस रहा है । बड़ी भयानक वर्षा है ।
इस भयानक समय में माँ का देहान्त हो जाता है ।
स्वर्गीय जयशंकर 'प्रसाद'
स्वर्गीय जयशंकर 'प्रसाद' काशी के निवासी थे। पके कारण हिन्दी साहित्य को बहुत गौरव प्राप्त हुआ । जीवन भर हिन्दी की सेवा करते रहे । आप उच्च कोटि के कहानी लेखक' उपन्यासकार, नाटक - लेखक और कवि थे ।
'मधु' कहानी में एक ऐसे शराबी का चित्रण है जो शराब के बिना एक क्षण भी नहीं रह सकता था । शराब के आगे उसे अपने तन, मन की सुध भी नहीं रहती थी । किन्तु उसी शगवी पर एक लड़के के पालन-पोषण का भार पड़ता है तो उसकी वह बुरी लत एकदम-छूट जाती है । वह मेहनत करके उस लड़के का भरण पोषण करने लगता है ।
स्वर्गीय प्रेमचन्द
हिन्दी के श्रेष्ठतम कहानी लेखक और उपन्यासकार । काशी निवासी । आपने भारत के ग्रामीण जीवन का अपनी रचनाओं में सजीव वर्णन किया है। रचनों में जैसे हमारे देश की बोलती है ।
'ईदगाह' कहानी में बालकों के मनोभावों का जिस तरह चित्रण हुआ है वैसा शायद ही किसी दूसरी कहानी में मिले । हामिद एक ग़रीच बुढ़िया का पौत्र है, न माँ, न बाप ! फिर भी वह कितना चतुर और समझदार है । कहानी पढ़ते-पढ़ते कुछ स्थानों पर आ जाते हैं, सब लड़के खिलौने खरीदते हैं, मिठाई खाते हैं, किन्तु वह अपनी दादी के लिए चिमा लाता है, जिससे उसके हाथ न जलें ।
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बांधता था। उसके चेहरे में सब से आकर्षक थीं उसकी मूछे जब देखो वे मुडी रहती थींः वह अपनी मूछों के दोनों ओर के किनारों को कभी सीधा न होने देता था। उसके सिर पर तो इतने बाल नहीं थे कि वह उन पर तेल भी लगाता। हाँ, मूलों को तेल पिलाता था और इसका वह बड़ा शौकीन था । मुडी हुई मूर्खों के ताव को देखने के लिए उसकी जेब में एक छोटा-सा दर्पण था । वह जब-तब इस दर्पण को अपनी जेब से निकालता और देख लेता था कि उसकी मूछें ठीक तरह बल खाए हुए अपनी ताव में हैं या नहीं। कभी-कभी वह अपनी मुडी हुई मूर्खों को देख कर अकेले में जोर-ज़ोर से कहकहे मार कर हंसने लग जाता था। उस समय उसकी यह हँसी देखने ही योग्य होती थी; उसकी आँखों में जो कि बहुत बडी नहीं थीं; छःक तरह की चमक-सी आ जाती थी और वह चमक आँखों से प्रारम्भ हो कर फिर गालों पर झलक उठती थी। अदनी मूर्खों को रेलते हुए कभी-कभी वह 'दर्पण' से बातें करने लग जाता था और कभीकभी जब उसमे रहा न जाता था, तब गाने लग जाता था । कभी वह पुरबिया प्रेम गीत गाता था, कभी आल्हा गाता था । और इसी मस्ती में कभी-कभी ढोल भी बजाने लग जाता था कभी-कभी वह रोने लग जाता था । जब अपने काम से उसे ज़रा फुरसत मिलती तब वह अपनी जेब से इसी दर्पण को निकालता और इसमें अपने मुख को देखदेख कर ज़रा सा मुसकुरा उठता था । दीनानाथ सोचते थे कि यह पागल है या क्या बात है ? किन्तु वह अपना काम बड़ी नत्परता से करता था, इसलिए दीनानाथ को उसे कहने-सुनने का कोई अवसर ही नहीं आया। उनके लिए उसकी ये चेष्टाएँ आकर्षण का विषय बन गई । एक दिन दो पहर को वह पुरविया अपनी झोंपड़ी में आराम कर रहा था; दोपहर को दूकान में काम कम रहता था । पुरधिए ले जेब से अपने दर्पण को निकाला । 'दर्पण' आधी हथेली के बराबर थाः इसके पीछे टीन लगा हुआ था। इस दर्पण की आभा क्षीण हो गई थी; कहीं-कहीं उसमें ज़रा ऊपर जंग के धब्चे भी आ गए थे। टीन यहां-वहां से ढीला हो गया था और टूट गया था। इस दर्पण में एक तरे भी पढ़ गई थी । परन्तु वह इस दर्पण को अपनी एक अमूल्य सम्पत्ति सगझता था । इस दर्पण को वर सदा अपने साथ रखता था, वह इसका सदा का साथी थाः उसे जब जब फुरसत मिलती कि वह इस दर्पण को निकाल लेता और फिर उस दर्पण को देखते हुए वह पहले अपनी मूर्खों को ताव देता और फिर उन्हें देखते-देखते धीरेधीरे सब कुछ भूल जाता और कुछ से कुछ हो जाता था । घण्टों बीत जाते थे और वह इसी दर्पण में अपने चेहरे को टकटकी बाँधे देखता रहता था। न जाने कितने भाव इस दर्पण को देख कर उसके हृदय में आते थे। धीरे-धीरे सायङ्काल हो गया । सूर्यास्त होते ही लाली आकाश में फैल गई। पास में बहती हुई नहर के शान्त, मैले पानी में इस लाली ने झलकने का प्रपत्न किया परन्तु उसके तरंगहीन मैले पानी में वह झलक न सकी । धीरे-धीरे यह शान्ति निस्तब्धता में बदलने लगी। दीनानाथ पुरबिए को न देख कर ज़रा चिन्तित हो गए। उन्होंने उसे कई बार पुकारा परन्तु उन्हें कोई उत्तर न मिला। उन्होंने समझा कि संभवतः वह कहीं बाहर किसी काम पर चला गया है । कुछ समय बाद उन्हें कुछ रोने की-सी आवाज़ सुनाई दी। वे अपने हुक्के को छोड़ कर उठे और उस पुरबिए की झोपड़ी के सामने जा कर खड़े हो गए। उन्होंने जो दृश्य देखा उससे वे अवाक् रह गए । देखते क्या हैं कि वह पुरबिया उस टूटे. हुए दर्पण को अपने हाथों में लिए हुए लगातार टकटकी बांधे अपने चेहरे को उसमें देख रहा है। कभी मुसकराता है; कभी रोने लग जाता है। उन्होंने सोचा कि बात क्या है, यह कहीं पागल तो नहीं हो गया है। उन्होंने जब तक उसके कन्धे पर हाथ रख कर उसे झकझोर नहीं दिया तब तक उसे यह भी पता न लगा कि कोई उसकी झोंपडी में आया है। "अरे भाई ! इतना अँधेरा हो गया है; तुम इस अँधेरे में इस टूटे हुए दर्पण में क्या अपने चेहरे को देख रहे हो ? यह बात क्या है, तुम पागल तो नहीं हो ?" दीनानाथ ने पूछा । दीनानाथ अधेड उम्र के आदमी थे; कारवारी मनुष्य थे; वे रसिक पुरुष नहीं थे; कारबारी मनुष्य प्रायः हूँठ होता है परन्तु आज उसे देख कर उनके हृदय में भी रसिकता उत्पन्न हुई और उसके दिल को टटोलने की इच्छा जागृत हो गई। मनुष्य एक दूसरे को बाह्य रूप और सम्बन्ध में जितना देखता है उतना मनुष्य के रूप में नहीं । जब वह किसी मनुष्य को उसके समस्त बाह्य सम्बन्धों और रूपों को किनारे रख कर उसको मनुष्य के एक मात्र मनुष्य के रूप में देखता है तभी वह उसको यथार्थ में पहचानता है, तभी - जैसे उनकी समस्त अनुभूतियाँ, दुःख-दर्द सब उसके अपने बन जाते हैं । "तो बाबू तुम क्या समझते हो कि मैं इसमें अपने चेहरे को देख रहा हूँ। - नहीं, मैं इस दर्पण में किसी और के चेहरे को देख रहा हूँ।" यह कह कर वह फूट-फूट कर रोने लगा । दीनानाथ की उत्सुकता जाग उठी, उन्होंने उसे सान्त्वना देते हुए कहा - "भाई बताओ तो सही कि आखिर बात क्या है ? ' "बाबू, आप इस बात को सुन कर क्या करोगे, रहने दीजिए । चलिए, उठिए । यह किस्सा फिर किसी दिन के लिए रहने दीजिए" पुरबिए ने कहा । अब रात होती जा रही थी । अन्दर और बाहर दोनों जगह अन्धकार फैल रहा था । दूर आकाश में कहीं-कहीं तारे बाहर निकल आए थे । परन्तु उनकी चमक अभी क्षीण-सी ही थी जो रात के साथ-साथ बढ़ती जा रही थी । दीनानाथ भी सब कुछ भूल गए। उन्होंने आग्रह किया कि वे तब तक वहां से न उठेंगे जब तक कि उन्हें वह अपना समस्त वृत्तान्त नहीं सुनाएगा । पुरबिर ने उठ कर पहले लेम्प जला दिया और फिर भारी आवाज़ में कहना प्रारम्भ किया - "बाबू, हम छोटे आदमी हैं; हमारा छोटा-ला किस्सा है और यह किस्सा हम अपने जीवन के समान अपने ही पास रखना चाहते हैं। परन्तु अब आपकी बहुत इच्छा है इसलिए सुनाने के लिए मज़बूर हैं । " "जब पिछली लडाई हुई थी हमारे गांव में भी फ़ौज के लिए भरती हुई थी । भरती करने के भी क्या-क्या नए-नए ढंग थे । तरह-तरह के लालच दिए जाते थे और जब इन सब लालचों का भी गांव वालों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता था तो जोर- - जबर से भरती की जाती थी। बावू साहब बडे आदमी से बढ़ कर खुद गर्ज और कोई नहीं होता। जब इसकी जान पर आ बनती है तब वह सैक्डों और हज़ारों जानों की भी परवाह नहीं करता । वह अपने मरने से पहले हज़ारों को मार और मरवा कर मरता है । पता नहीं मेरा नाम किसने लिखवा दिया था। गांव में मेरी थोडी बहुत जमीन थी; मैं अपनी खेती में खुश था, और हुआ था मेरा अभी-अभी गौना । बताइए, बाबू साहब ऐसी हालत में कौन लडाई पर जाने के लिए तैयार होता । परन्तु मुझे पकड कर ज़बर्दस्ती बुलवाया गया, मुझसे अंगूठा लगवा लिया गया और र तब मुझे धमकी दी गई कि यदि तुम भरती नहीं होगे तो तुम्हारी जमीन खेती सब ज़ब्त कर ली जाएगी। अन्त में विवश हो कर मुझे भरती होना पड़ा । जिस दिन मुझे बिदा होना था- हाँ बाबू साहब, जिस दिन मुझे बिदा होना था, मेरी पत्नी ने मुझे अपने हाथ से खाना खिलाया और कहा कि अब तक तुम अपने हाथों से अपनी मूर्खों पर ताव देते रहे हो आज हम तुम्हारी मूछों का शृंगार करेंगी। तुम हमें भूल तो नहीं जाओगे ? मूछें मोड कर उसने यह दर्पण मेरे हाथ पर रख दिया और हँसती हुई बोली- देखो तुम्हारी मूछें आज कैमी बल खा रही है ? यह 'दर्पण' अपने पास रखना और हमें कभी-कभी याद कर लेना । देखो तुम्हारी गह जुदई का समय आसानी से कट जाएगा और जब कभी तुम्हें हमारी याद आए इस दर्पण को देख लेना । और सचमुच बाबू साहब यह जुदाई का समय इसी तरह बीत गया । अपनी लडाई का हाल क्या सुना ऊँ ? लडाई समत हो गई थी। मैं वापस आयाः आप समझ सकते हैं उस समय मेरे हृदय में क्या क्या उमंगें होंगी। मैने तभी से इन मूर्छा में विशेष दिलचस्पी लेनी प्रारम्भ कर दी थी। मैंने सोचा था कि मैं जब उसे अपनी बल खाती हुई मूछें दिखलाऊँगा तो वह प्रसन्न हो जाएगी। जब लौट कर अपने गाँव में पहुंचा तब मालूम हुआ कि अभी दो साल हुए यहाँ महामारी फल गई थी और वह विचारी उसी में चल बसी ! यह कहते-कहते वह फिर रोने लग गया। "मेरी सब आशाओं पर पानी फिर गया । मुझे अपने जीवन में कोई दिलचस्पी न रही । वह गाँव जिसका मैं प्रति दिन स्वप्न देखता था और जिसके लिए मैं लडाई से इतने लम्बे अरसे के बाद तरसता हुआ आया था अब मुझे काटने को 'दौडने लगा । मैं अपने गाँव को छोड कर चला आया और इसी तरह फिरता फिरता आपके पास लायलपुर आ पहुँचा ।" बाबू, आप समझते होंगे मैं इस दर्पण में अपनी आकृति को देखता हूँ । नहीं- आप विश्वास नहीं करेंगे परन्तु मैं इस दर्पण में अपनी पत्नी को देखता हूँ और मैं दर्पण में उसको देख कर इन मूर्गों को उसी को दिखाया करता हूँ। कभी-कभी मुझे ऐसा अनुभव होता है कि वह मेरी मूछों को देख कर मुस्करा रही है और तब मैं हँसने लग जाता हूँ। आप समझते होंगे मुझे मूछें रखने का शौक़ है। मेरा शौक़-चौक़ तो सब चला गया । अपनी पत्नी की स्मृति मेरे हृदय पर कुछ ऐसी बैठी हुई है कि वह मुझसे एक क्षण के लिए भी अलग नहीं होती । उसने लडाई पर जाते समय मुझे यह 'दर्पण' दिया था । और इन मूछों का अपने हाथों से सिंगार किया था । अब ये दोनों वस्तुएँ ही मेरे जीवन की सम्पत्ति बन गई हैं। कभी-कभी इस दर्पण को देखते देखते मुझे ऐसा अनुभव होता है कि जैसे वह मुझे देख रही है और मैं उसे देख रहा हूँ और तब घण्टों मैं इस दर्पण को अपने हाथों में लिए बैठा रहता हूँ । कितना समय व्यतीत हो जाता है मुझे इसका ज्ञान नहीं रहता। उस समय मुझे कुछ सूझता नहीं । मैं खो-सा जाता हूँ । दीनानाथ की आँखों में आंसू छलछला आए । उन्हें अनुभव हुआ कि सच्चा प्रेम पागलपन का ही दूसरा नाम है । - वंशीधर विद्यालङ्कार कहानी-लेखक और कहानी श्री भगवती प्रसाद वाजपेयी श्री वाजपेयी आजकल कानपुर में रह कर हिन्दी की सेवा कर रहे हैं । हिन्दी के कहानी लेखकों में आपका विशेष स्थान है। सरल भाषा में ऊँचे मे ऊँचा भाव व्यक्त करना शेषता है । गृहस्थ जीवन की अनेक घटनाओं को आपने कहानी का रूप दिया है । इस संकलन में आपकी 'प्रायश्चित्त' नामक कहानी प्रकाशित हुई है । कहानी में इस बात को प्रदर्शित किया गया है कि एक व्यक्ति की विपत्ति से दूसरा आदमी किम तरह लाभ उठाता है। बहू के हाथ से बिल्ली मर गई, यह जान कर रामू की माँ बहुत चिन्तित थी । पंशून्य परमसुख इस स्थिति से लाभ उठाना चाहता था । पढ़ते समय हमं परमसुख पर गुस्सा आता है कि वह इतना लालची क्यों है ? किन्तु हमारा यह क्रोध उस समय हँसी में बदल जाता है, जब नौकरानी कर समाचार देती है कि बिल्ली उठ कर भाग गई । बिल्ली मरी नहीं थी, चुपचाप पड़ी हुई थी । हिन्दी के प्रगतिशील लेखक इन्दौर में रहते हैं । आप छोटी छोटी कहानियाँ लिखने में बड़े कुशल हैं । इस संग्रह की 'किरणें' नामक कहानी आप ही की लिखी हुई है । कहानी में एक ग़रीब के घर का वर्णन है। कहानी एक लड़के के मुँह से कहलाई गई है । माँ बीमार है । और पानी बरस रहा है । बड़ी भयानक वर्षा है । इस भयानक समय में माँ का देहान्त हो जाता है । स्वर्गीय जयशंकर 'प्रसाद' स्वर्गीय जयशंकर 'प्रसाद' काशी के निवासी थे। पके कारण हिन्दी साहित्य को बहुत गौरव प्राप्त हुआ । जीवन भर हिन्दी की सेवा करते रहे । आप उच्च कोटि के कहानी लेखक' उपन्यासकार, नाटक - लेखक और कवि थे । 'मधु' कहानी में एक ऐसे शराबी का चित्रण है जो शराब के बिना एक क्षण भी नहीं रह सकता था । शराब के आगे उसे अपने तन, मन की सुध भी नहीं रहती थी । किन्तु उसी शगवी पर एक लड़के के पालन-पोषण का भार पड़ता है तो उसकी वह बुरी लत एकदम-छूट जाती है । वह मेहनत करके उस लड़के का भरण पोषण करने लगता है । स्वर्गीय प्रेमचन्द हिन्दी के श्रेष्ठतम कहानी लेखक और उपन्यासकार । काशी निवासी । आपने भारत के ग्रामीण जीवन का अपनी रचनाओं में सजीव वर्णन किया है। रचनों में जैसे हमारे देश की बोलती है । 'ईदगाह' कहानी में बालकों के मनोभावों का जिस तरह चित्रण हुआ है वैसा शायद ही किसी दूसरी कहानी में मिले । हामिद एक ग़रीच बुढ़िया का पौत्र है, न माँ, न बाप ! फिर भी वह कितना चतुर और समझदार है । कहानी पढ़ते-पढ़ते कुछ स्थानों पर आ जाते हैं, सब लड़के खिलौने खरीदते हैं, मिठाई खाते हैं, किन्तु वह अपनी दादी के लिए चिमा लाता है, जिससे उसके हाथ न जलें ।
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अमरनाथ यात्रा में इस भारी चूक के बाद 2007 के बाद ये दूसरा बड़ा हमला है और इस हमले को अंजाम देने का आरोप पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा पर लगा है।
देश के पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक अरमनारथ यात्रा की सुरक्षा में लगे 40 हजार जवानों के बाद भी 10 जून की रात घात लगाए आतंकियों ने अमरनाथ यात्रियों से भरे बस पर हमला कर दिया। इस हमले में 7 लोगों की मौत हो गई जबकि 30 लोग बुरी तरह घायल हो गए। अमरनाथ यात्रा में इस भारी चूक के बाद 2007 के बाद ये दूसरा बड़ा हमला है और इस हमले को अंजाम देने का आरोप पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा पर लगा है।
जम्मू कश्मीर के अनंतनाग के बटेंगू में 10 जून की रात को घात लगाए आतंकियों ने अमरनाथ यात्रियों से भरे बस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई जिसमें 7 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई जबकि 30 से ज्यादा बुरी तरह घायल हो गए। मरने वाले सभी यात्री गुजरात से थे और उनमें पांच महिलाएं भी शामिल हैं।
जिस बस पर आतंकियों ने हमला किया वो भी गुजरात के ही ओम ट्रेवेल्स का था। लेकिन ड्राइवर की सूझबूझ से बाकी लोगों की जान बच गई क्योंकि जब आतंकियों ने गोलीबारी की तो उसने तेजी से बस को भगाना शुरू कर दिया।
26 नवंबर 2008 की रात समुद्र के रास्ते मुंबई में घुसे लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने 72 घंटे तक मुंबई में तांडव मचाया था जिसमें 166 निर्दोष लोग मारे गए थे।
मुंबई हमले के मुख्य आरोपियों में से एक अजमल आमिर कसाब को पूछताछ और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद 21 नवंबर 2012 को फांसी दे दी गई थी। कसाब पाकिस्तान का रहने वाला नागरिक था।
13 दिसंबर 2001 को लश्कर-ए-तैयबा और जैसे मोहम्मद के पाकिस्तान से आए पांच आतंकियों ने संसद भवन पर हमला कर दिया था।
संसद में मौजूद नेताओं को बचाने और आतंकियों को संसद भवन के अंदर घुसने से रोकने में 9 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे।
इस हमले में पाचों आतंकी मार गए थे जबकि हमले का मास्टरमाइंड अफजल गुरु को सुरक्षा एजेंसियों ने हमले के बाद गिरफ्तार किया था। अफजल गुरु को 9 फरवरी 2013 को फांसी की सजा दी गई थी।
साल 2006 में दिल्ली के भीड़ भाड़ वाले बाजार सरोजनी नगर में लश्कर-ऐ-तैयबा के आतंकियों ने दिवाली से ठीक पहले बड़े धमाके को अंजाम दिया था। इस बम ब्लास्ट में 60 लोग मारे गए थे जबकि 500 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
लश्कर-ए-तैयबा आतंकी संगठन ने साल 2006 में वाराणसी में सीरियल बम ब्लास्ट को अंजाम दिया था। इस हमले में 37 लोग मारे गए थे जबकि 90 से ज्यादा लोग बुरी तरह घायल हो गए थे।
लश्कर-ए-तैयबा आतंकी संगठन का सरगना हाजिफ सईद है जिसके इशारे पर आतंकी जम्मू-कश्मीर से लेकर दिल्ली तक आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं।
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अमरनाथ यात्रा में इस भारी चूक के बाद दो हज़ार सात के बाद ये दूसरा बड़ा हमला है और इस हमले को अंजाम देने का आरोप पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा पर लगा है। देश के पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक अरमनारथ यात्रा की सुरक्षा में लगे चालीस हजार जवानों के बाद भी दस जून की रात घात लगाए आतंकियों ने अमरनाथ यात्रियों से भरे बस पर हमला कर दिया। इस हमले में सात लोगों की मौत हो गई जबकि तीस लोग बुरी तरह घायल हो गए। अमरनाथ यात्रा में इस भारी चूक के बाद दो हज़ार सात के बाद ये दूसरा बड़ा हमला है और इस हमले को अंजाम देने का आरोप पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा पर लगा है। जम्मू कश्मीर के अनंतनाग के बटेंगू में दस जून की रात को घात लगाए आतंकियों ने अमरनाथ यात्रियों से भरे बस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई जिसमें सात तीर्थयात्रियों की मौत हो गई जबकि तीस से ज्यादा बुरी तरह घायल हो गए। मरने वाले सभी यात्री गुजरात से थे और उनमें पांच महिलाएं भी शामिल हैं। जिस बस पर आतंकियों ने हमला किया वो भी गुजरात के ही ओम ट्रेवेल्स का था। लेकिन ड्राइवर की सूझबूझ से बाकी लोगों की जान बच गई क्योंकि जब आतंकियों ने गोलीबारी की तो उसने तेजी से बस को भगाना शुरू कर दिया। छब्बीस नवंबर दो हज़ार आठ की रात समुद्र के रास्ते मुंबई में घुसे लश्कर-ए-तैयबा के दस आतंकियों ने बहत्तर घंटाटे तक मुंबई में तांडव मचाया था जिसमें एक सौ छयासठ निर्दोष लोग मारे गए थे। मुंबई हमले के मुख्य आरोपियों में से एक अजमल आमिर कसाब को पूछताछ और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद इक्कीस नवंबर दो हज़ार बारह को फांसी दे दी गई थी। कसाब पाकिस्तान का रहने वाला नागरिक था। तेरह दिसंबर दो हज़ार एक को लश्कर-ए-तैयबा और जैसे मोहम्मद के पाकिस्तान से आए पांच आतंकियों ने संसद भवन पर हमला कर दिया था। संसद में मौजूद नेताओं को बचाने और आतंकियों को संसद भवन के अंदर घुसने से रोकने में नौ सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। इस हमले में पाचों आतंकी मार गए थे जबकि हमले का मास्टरमाइंड अफजल गुरु को सुरक्षा एजेंसियों ने हमले के बाद गिरफ्तार किया था। अफजल गुरु को नौ फरवरी दो हज़ार तेरह को फांसी की सजा दी गई थी। साल दो हज़ार छः में दिल्ली के भीड़ भाड़ वाले बाजार सरोजनी नगर में लश्कर-ऐ-तैयबा के आतंकियों ने दिवाली से ठीक पहले बड़े धमाके को अंजाम दिया था। इस बम ब्लास्ट में साठ लोग मारे गए थे जबकि पाँच सौ से ज्यादा लोग घायल हुए थे। लश्कर-ए-तैयबा आतंकी संगठन ने साल दो हज़ार छः में वाराणसी में सीरियल बम ब्लास्ट को अंजाम दिया था। इस हमले में सैंतीस लोग मारे गए थे जबकि नब्बे से ज्यादा लोग बुरी तरह घायल हो गए थे। लश्कर-ए-तैयबा आतंकी संगठन का सरगना हाजिफ सईद है जिसके इशारे पर आतंकी जम्मू-कश्मीर से लेकर दिल्ली तक आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं।
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चेतना का ये लेटेस्ट लुक उनके फैंस को बेहद पसंद आ रहा हैं। एक्ट्रेस आए दिन अपनी खूबसूरती से लोगों के दिलों को हैकिंग करते नजर आती हैं।
तस्वीर में एक्ट्रेस ने ब्लैक और व्हाइट कलर की फ्लावर प्रिंटेड शिफॉन ड्रेस पहनी हुई हैं।
एक्ट्रेस ऑफ शोल्डर ड्रेस में काफी सुंदर लग रही हैं, कमेंट्स में लोग चेतना को हॉट एज फॉयर बता रहे है।
टीवी स्टार अपनी बोल्डनेस और स्टनिंग अंदाज से सोशल मीडिया पर छाई रहती है।
चेतना के परफेक्ट फिगर पर हर ड्रेस काफी सूट करता हैं, बीच पर बिकिनी में एक्ट्रेस काफी स्लेइंग लुक देती नजर आ रही है।
दिलवाले फिल्म की जेनी की सोशल मीडिया पर भी अच्छी खासी फैन फॉलोइंग हैं, एक्ट्रेस आए दिन अपने बोल्ड लुक्स और शानदार ड्रेसेज के चलते इंस्टाग्राम पर छाई रहती हैं।
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चेतना का ये लेटेस्ट लुक उनके फैंस को बेहद पसंद आ रहा हैं। एक्ट्रेस आए दिन अपनी खूबसूरती से लोगों के दिलों को हैकिंग करते नजर आती हैं। तस्वीर में एक्ट्रेस ने ब्लैक और व्हाइट कलर की फ्लावर प्रिंटेड शिफॉन ड्रेस पहनी हुई हैं। एक्ट्रेस ऑफ शोल्डर ड्रेस में काफी सुंदर लग रही हैं, कमेंट्स में लोग चेतना को हॉट एज फॉयर बता रहे है। टीवी स्टार अपनी बोल्डनेस और स्टनिंग अंदाज से सोशल मीडिया पर छाई रहती है। चेतना के परफेक्ट फिगर पर हर ड्रेस काफी सूट करता हैं, बीच पर बिकिनी में एक्ट्रेस काफी स्लेइंग लुक देती नजर आ रही है। दिलवाले फिल्म की जेनी की सोशल मीडिया पर भी अच्छी खासी फैन फॉलोइंग हैं, एक्ट्रेस आए दिन अपने बोल्ड लुक्स और शानदार ड्रेसेज के चलते इंस्टाग्राम पर छाई रहती हैं।
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गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर हमला करते हुये कहा कि वह पूरी तरह से वोटबैंक की राजनीति के रंग में रंगी है.
मोदी ने अपने ब्लॉग पर लिखा कि दोनों दलों में राजनीति की शैली का अंतर है. भाजपा जहां विकास के लिये राजनीति के प्रति प्रतिबद्ध है वहीं कांग्रेस पूरी तरह से वोटबैंक की राजनीति के रंग में रंगी है.
उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस गुजरात में जीतना चाहती है तो उसे वोटबैंक की राजनीति को छोड़ कर पूरे दिल से विकास की राजनीति को अपनाना चाहिये.
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गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर हमला करते हुये कहा कि वह पूरी तरह से वोटबैंक की राजनीति के रंग में रंगी है. मोदी ने अपने ब्लॉग पर लिखा कि दोनों दलों में राजनीति की शैली का अंतर है. भाजपा जहां विकास के लिये राजनीति के प्रति प्रतिबद्ध है वहीं कांग्रेस पूरी तरह से वोटबैंक की राजनीति के रंग में रंगी है. उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस गुजरात में जीतना चाहती है तो उसे वोटबैंक की राजनीति को छोड़ कर पूरे दिल से विकास की राजनीति को अपनाना चाहिये.
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लखनऊ। लखनऊ की टीम ने बलरामपुर स्पोर्ट स्टेडियम में आयोजित गत 20-21 दिसम्बर को आयोजित 16वीं थाईयोगाआर्ट (स्पोर्ट) यूपी स्टेट चैंपियनशिप में 8 स्वर्ण, 3 रजत और 1 कांस्य पदक जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया। चैंपियनशिप में बेस्ट वारियर ऑफ द ईयर मास्टर अमन कश्यप बने।
इस अवसर पर यूपी थाईयोगाआर्ट (स्पोर्ट) एसोसिएशन के अध्य्क्ष ग्रैंडमास्टर सुधीर श्रीवास्तव खिलाड़ियों की बधाई दी।
स्वर्णः आयुष श्रीवास्तव, अमन कश्यप, आर्यन कश्यप, कुलराज सिंह, कृष्णा मंगलानी, दिव्य पटेल, आयुष्मान कुमार, स्नेहल केसरी।
रजतः मनदीप सिंह, शुभम मौर्य, हर्षित रस्तोगी।
कांस्यः शैलेश आनंद।
टीम कोचः संस्कार श्रीवास्तव व संस्कृति।
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लखनऊ। लखनऊ की टीम ने बलरामपुर स्पोर्ट स्टेडियम में आयोजित गत बीस-इक्कीस दिसम्बर को आयोजित सोलहवीं थाईयोगाआर्ट यूपी स्टेट चैंपियनशिप में आठ स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य पदक जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया। चैंपियनशिप में बेस्ट वारियर ऑफ द ईयर मास्टर अमन कश्यप बने। इस अवसर पर यूपी थाईयोगाआर्ट एसोसिएशन के अध्य्क्ष ग्रैंडमास्टर सुधीर श्रीवास्तव खिलाड़ियों की बधाई दी। स्वर्णः आयुष श्रीवास्तव, अमन कश्यप, आर्यन कश्यप, कुलराज सिंह, कृष्णा मंगलानी, दिव्य पटेल, आयुष्मान कुमार, स्नेहल केसरी। रजतः मनदीप सिंह, शुभम मौर्य, हर्षित रस्तोगी। कांस्यः शैलेश आनंद। टीम कोचः संस्कार श्रीवास्तव व संस्कृति।
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कियारा का ब्राइडल लुक काफी चर्चा का विषय बना हुआ और फैंस को ये जोड़ी काफी पसंद भी आ रही है। वहीं क्या आप जानती हैं कियारा की ब्राइडल ज्वेलरी के की ये खासियत?
कौन है डिजाइनर?
कियारा की पहनी हुई ब्राइडल ज्वेलरी डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ने डिजाइन की है।
बता दें कि असल में ये एक पन्ना है और इसे Zambian Emerald कहा जाता है।
ज्वेलरी में लगे पन्ने का रंग गहरा हरा है। बता दें कि देखने में इस तरह की ज्वेलरी काफी स्टाइलिश दिखने के साथ-साथ क्लासी भी नजर आती है।
कियारा का ब्राइडल ज्वेलरी का पूरा नाम हैण्ड कट डायमंड है। बता दें कि इसे काफी बारीकी के साथ बनाया गया है।
इस तरह के पन्ने को संस्कृत में मरकत मणि, फारसी में जमरन और अंग्रेजी में एमराल्ड कहा जाता है।
क्यों चुना इसे?
बता दें कि जयपुर की एक महारानी का कहना था कि ग्रीन कलर के पन्ने को ग्रीन के साथ नहीं बल्कि इसे पिंक कलर के आउटफिट के साथ कैरी करने से लुक आकर्षक नजर आता है।
इसका इस्तेमाल राशि के अनुसार भी किया जाता है और एस्ट्रोलॉजी के हिसाब से ही इसे अंगूठी के रूप में धारण किया जाता है।
अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें herzindagi. com से।
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कियारा का ब्राइडल लुक काफी चर्चा का विषय बना हुआ और फैंस को ये जोड़ी काफी पसंद भी आ रही है। वहीं क्या आप जानती हैं कियारा की ब्राइडल ज्वेलरी के की ये खासियत? कौन है डिजाइनर? कियारा की पहनी हुई ब्राइडल ज्वेलरी डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ने डिजाइन की है। बता दें कि असल में ये एक पन्ना है और इसे Zambian Emerald कहा जाता है। ज्वेलरी में लगे पन्ने का रंग गहरा हरा है। बता दें कि देखने में इस तरह की ज्वेलरी काफी स्टाइलिश दिखने के साथ-साथ क्लासी भी नजर आती है। कियारा का ब्राइडल ज्वेलरी का पूरा नाम हैण्ड कट डायमंड है। बता दें कि इसे काफी बारीकी के साथ बनाया गया है। इस तरह के पन्ने को संस्कृत में मरकत मणि, फारसी में जमरन और अंग्रेजी में एमराल्ड कहा जाता है। क्यों चुना इसे? बता दें कि जयपुर की एक महारानी का कहना था कि ग्रीन कलर के पन्ने को ग्रीन के साथ नहीं बल्कि इसे पिंक कलर के आउटफिट के साथ कैरी करने से लुक आकर्षक नजर आता है। इसका इस्तेमाल राशि के अनुसार भी किया जाता है और एस्ट्रोलॉजी के हिसाब से ही इसे अंगूठी के रूप में धारण किया जाता है। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें herzindagi. com से।
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आईसीसी क्रिकेट विश्व कप इतिहास के पहले दो विश्व कप की चैंपियन वेस्टइंडीज के लिए इंग्लैंड में हाल ही में खेले गए विश्व कप में बहुत ही निराशाजनक प्रदर्शन रहा। वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम ने इस विश्व कप के पहले मैच को अपने नाम करने के बाद बहुत ही खराब प्रदर्शन किया और टीम को सेमीफाइनल से दूर रहना पड़ा।
वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम को उनके खिलाड़ियों और बोर्ड के बीच चल रहे आंतरिक तनाव को लेकर बहुत ही बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। और टीम में कई अनुभवी खिलाड़ियों को टीम से बाहर रहना पड़ा।
उसी तरह से वेस्टइंडीज के स्टार ऑलराउंडर ड्वेन ब्रावो को भी विश्व कप में नहीं चुना गया। ड्वेन ब्रावो ने वैसे तो इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी थी लेकिन विश्व कप के लिए उन्होंने अपने आपको उपलब्ध कराया था। लेकिन उन्हें विश्व कप की स्क्वॉड में जगह नहीं मिल सकी।
इस नए अध्यक्ष मे जब से पदभार संभाला है उन्होंने सभी के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। मैंने आधिकारिक तौर पर इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी थी, लेकिन खुद को उपलब्ध कराया। लेकिन अन्य खिलाड़ियों के साथ नहीं चुना गया। जिसके बारे में हम सभी को विश्व कप में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलना चाहिए था।
आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया हो तो प्लीज इसे लाइक करें अपने दोस्तों तक इस खबर को सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें। साथ ही कोई सुझाव देना चाहे तो प्लीज कमेंट करें। अगर आपने हमारा पेज अब तक लाइक नहीं किया हो तो कृपया इसे जल्दी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट आप तक पहुंचा सके।
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आईसीसी क्रिकेट विश्व कप इतिहास के पहले दो विश्व कप की चैंपियन वेस्टइंडीज के लिए इंग्लैंड में हाल ही में खेले गए विश्व कप में बहुत ही निराशाजनक प्रदर्शन रहा। वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम ने इस विश्व कप के पहले मैच को अपने नाम करने के बाद बहुत ही खराब प्रदर्शन किया और टीम को सेमीफाइनल से दूर रहना पड़ा। वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम को उनके खिलाड़ियों और बोर्ड के बीच चल रहे आंतरिक तनाव को लेकर बहुत ही बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। और टीम में कई अनुभवी खिलाड़ियों को टीम से बाहर रहना पड़ा। उसी तरह से वेस्टइंडीज के स्टार ऑलराउंडर ड्वेन ब्रावो को भी विश्व कप में नहीं चुना गया। ड्वेन ब्रावो ने वैसे तो इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी थी लेकिन विश्व कप के लिए उन्होंने अपने आपको उपलब्ध कराया था। लेकिन उन्हें विश्व कप की स्क्वॉड में जगह नहीं मिल सकी। इस नए अध्यक्ष मे जब से पदभार संभाला है उन्होंने सभी के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। मैंने आधिकारिक तौर पर इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी थी, लेकिन खुद को उपलब्ध कराया। लेकिन अन्य खिलाड़ियों के साथ नहीं चुना गया। जिसके बारे में हम सभी को विश्व कप में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलना चाहिए था। आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया हो तो प्लीज इसे लाइक करें अपने दोस्तों तक इस खबर को सबसे पहले पहुंचाने के लिए शेयर करें। साथ ही कोई सुझाव देना चाहे तो प्लीज कमेंट करें। अगर आपने हमारा पेज अब तक लाइक नहीं किया हो तो कृपया इसे जल्दी लाइक करें, जिससे लेटेस्ट अपडेट आप तक पहुंचा सके।
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10. बाह्य नेत्रों से देखना सभी जानते हैं, परन्तु ज्ञान नेत्र से देखने वाला कोई विरला ही होता है।
11. मोक्ष-मोक्ष सभी पुकारते हैं, परन्तु मोक्ष जाने वाला कोई विरला ही होता है।
12. कुमित्र बनाना सभी जानते हैं, परन्तु सुमित्र बनाने वाला कोई विरला ही होता है।
दान देने में अंतराय करने वाला।
धर्म- चर्चा के समय व्यर्थ बात करने वाला। भोजन करते समय क्रोध करने वाला। बिना कारण के लड़ाई-झगड़ा करने वाला। सज्जन पुरुषों का अपमान करने वाला। दान देकर अंहकार भाव करने वाला। दान देकर के पश्चात्ताप करने वाला। उपकारी का उपकार नहीं मानने वाला। अपनी खुद की खूब प्रशंसा करने वाला। 10. शान्त हुए क्लेश को वापस कहने वाला। 11. संकरे मार्ग पर दौड़ने वाला ।
12. शक्ति होते हुए भी सेवा नहीं करने वाला। 13. बिना कारण के हँसने वाला।
165. सतरह तरह के मूर्ख
14. मार्ग में चलते हुए खाने वाला।
15. बीती हुई बातों की फिर से सोचने वाला।
16. बिना बतलाए बोलने वाला।
17. दो मनुष्य बात कर रहे हों, तो बीच में बोलने वाला।
166. चिंतन कण
गुणों को नहीं अवगुणों को प्रकट करोजो व्यक्ति समझदार होता है, वह अशुद्ध रक्त, मवाद (पीप) को नहीं छिपाकर उस स्थान पर चीरा आदि लगाकर उसे बहार निकालता है, पर शुद्ध खून को चीरा देकर निकलवाना नहीं चाहता है क्योंकि शुद्ध रक्त-मांस आदि पर ही उसका जीवन टिका हुआ है। अतः उसका प्रदर्शन अच्छा नहीं समझता। यही बात हमारे जीवन के लिए भी है। हम अपने अवगुणों को नहीं छिपाकर उन्हें बाहर निकालने का प्रयत्न करें और गुणों को छिपाकर रखें । उनका प्रदर्शन नहीं करें। जितने हमारे गुण छिपे रहेंगे उतना ही हमारा जीवन ऊँचा बनेगा। पर व्यक्ति अपने अवगुणों को प्रकट नहीं कर, गुणों का प्रदर्शन करता है, जिससे उसके गुणों में वृद्धि नहीं हाकर कमी होती है।
वृक्ष की जड़ें मिट्टी में जितनी गहरी छिपी रहती हैं, उतना ही वृक्ष दृढ़ रहता है, दीर्घकाल तक टिकता है, वृद्धि को प्राप्त होता हैं। वैसे ही गुण भी जितने छिपे रहेंगे, वे वट वृक्ष की भान्ति बढ़ते रहेंगे और जीवन को विकसित एवम् महान बनायेंगे अतः अपने गुणों को प्रकट नहीं करके, अवगुणों को प्रकट करना चाहिए।
( श्रुतधर पंण्डितरत्न पूज्यश्री प्रकाशचन्द्रजी म.सा. के प्रवचन से संकलित)
167. ईमानदार
एक बाग का मालिक नौकर के भरोसे अपना आप का बाग छोड़कर पाँच साल के लिए अपने गाँव चला गया। नौकर ने पाँच वर्ष तक बाग की रखवाली की और आम बेचकर उसकी आमदनी मालिक के पास भेजता रहा । पाँच साल बाद मालिक अपनी पत्नी
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दस. बाह्य नेत्रों से देखना सभी जानते हैं, परन्तु ज्ञान नेत्र से देखने वाला कोई विरला ही होता है। ग्यारह. मोक्ष-मोक्ष सभी पुकारते हैं, परन्तु मोक्ष जाने वाला कोई विरला ही होता है। बारह. कुमित्र बनाना सभी जानते हैं, परन्तु सुमित्र बनाने वाला कोई विरला ही होता है। दान देने में अंतराय करने वाला। धर्म- चर्चा के समय व्यर्थ बात करने वाला। भोजन करते समय क्रोध करने वाला। बिना कारण के लड़ाई-झगड़ा करने वाला। सज्जन पुरुषों का अपमान करने वाला। दान देकर अंहकार भाव करने वाला। दान देकर के पश्चात्ताप करने वाला। उपकारी का उपकार नहीं मानने वाला। अपनी खुद की खूब प्रशंसा करने वाला। दस. शान्त हुए क्लेश को वापस कहने वाला। ग्यारह. संकरे मार्ग पर दौड़ने वाला । बारह. शक्ति होते हुए भी सेवा नहीं करने वाला। तेरह. बिना कारण के हँसने वाला। एक सौ पैंसठ. सतरह तरह के मूर्ख चौदह. मार्ग में चलते हुए खाने वाला। पंद्रह. बीती हुई बातों की फिर से सोचने वाला। सोलह. बिना बतलाए बोलने वाला। सत्रह. दो मनुष्य बात कर रहे हों, तो बीच में बोलने वाला। एक सौ छयासठ. चिंतन कण गुणों को नहीं अवगुणों को प्रकट करोजो व्यक्ति समझदार होता है, वह अशुद्ध रक्त, मवाद को नहीं छिपाकर उस स्थान पर चीरा आदि लगाकर उसे बहार निकालता है, पर शुद्ध खून को चीरा देकर निकलवाना नहीं चाहता है क्योंकि शुद्ध रक्त-मांस आदि पर ही उसका जीवन टिका हुआ है। अतः उसका प्रदर्शन अच्छा नहीं समझता। यही बात हमारे जीवन के लिए भी है। हम अपने अवगुणों को नहीं छिपाकर उन्हें बाहर निकालने का प्रयत्न करें और गुणों को छिपाकर रखें । उनका प्रदर्शन नहीं करें। जितने हमारे गुण छिपे रहेंगे उतना ही हमारा जीवन ऊँचा बनेगा। पर व्यक्ति अपने अवगुणों को प्रकट नहीं कर, गुणों का प्रदर्शन करता है, जिससे उसके गुणों में वृद्धि नहीं हाकर कमी होती है। वृक्ष की जड़ें मिट्टी में जितनी गहरी छिपी रहती हैं, उतना ही वृक्ष दृढ़ रहता है, दीर्घकाल तक टिकता है, वृद्धि को प्राप्त होता हैं। वैसे ही गुण भी जितने छिपे रहेंगे, वे वट वृक्ष की भान्ति बढ़ते रहेंगे और जीवन को विकसित एवम् महान बनायेंगे अतः अपने गुणों को प्रकट नहीं करके, अवगुणों को प्रकट करना चाहिए। एक सौ सरसठ. ईमानदार एक बाग का मालिक नौकर के भरोसे अपना आप का बाग छोड़कर पाँच साल के लिए अपने गाँव चला गया। नौकर ने पाँच वर्ष तक बाग की रखवाली की और आम बेचकर उसकी आमदनी मालिक के पास भेजता रहा । पाँच साल बाद मालिक अपनी पत्नी
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बिजनौर के मण्डावर इलाके में एक युवक ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। युवक की मौत के बाद उसके घर परिवार में कोहराम मचा हुआ है। लोगों की मानें तो युवक ने प्रेम प्रसंग के चलते आत्महत्या की है। ऐसी चर्चा इलाके में जोर शोर से है।
मण्डावर थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर देवमल गांव में तालाब के किनारे एक खेत में इनामपुरा के रहने वाले इकशाद के 24 वर्षीय पुत्र समीर की लाश मिली। शव मिलने की सूचना पूरे इलाके में जंगल में लगी आग की तरह फैल गई। वहीं, मौके पर पहुंची पुलिस को शव के पास से कीटनाशक की शीशी और आधार कार्ड मिला। मौके पर पहुंचे परिजनों ने बताया कि समीर शनिवार देर रात 11 बजे घर से लापता था।
बताया जा रहा है की मृतक युवक का गांव की किसी युवती से एक वर्ष से प्रेम प्रसंग चल रहा था। वहीं अब लड़की के घर वालों ने उसकी कहीं और शादी तय कर दी है। बस इसी बात पर समीर टेंशन में रहता था। युवक के परिजनों ने भी एक बार उसे डांट-फटकार लगाई थी। वहीं अब समीर ने कीटनाशक पी आत्महत्या कर ली। मामले में मण्डावर कोतवाल का कहना है कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, विधिक कार्रवाई की जा रही है।
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बिजनौर के मण्डावर इलाके में एक युवक ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। युवक की मौत के बाद उसके घर परिवार में कोहराम मचा हुआ है। लोगों की मानें तो युवक ने प्रेम प्रसंग के चलते आत्महत्या की है। ऐसी चर्चा इलाके में जोर शोर से है। मण्डावर थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर देवमल गांव में तालाब के किनारे एक खेत में इनामपुरा के रहने वाले इकशाद के चौबीस वर्षीय पुत्र समीर की लाश मिली। शव मिलने की सूचना पूरे इलाके में जंगल में लगी आग की तरह फैल गई। वहीं, मौके पर पहुंची पुलिस को शव के पास से कीटनाशक की शीशी और आधार कार्ड मिला। मौके पर पहुंचे परिजनों ने बताया कि समीर शनिवार देर रात ग्यारह बजे घर से लापता था। बताया जा रहा है की मृतक युवक का गांव की किसी युवती से एक वर्ष से प्रेम प्रसंग चल रहा था। वहीं अब लड़की के घर वालों ने उसकी कहीं और शादी तय कर दी है। बस इसी बात पर समीर टेंशन में रहता था। युवक के परिजनों ने भी एक बार उसे डांट-फटकार लगाई थी। वहीं अब समीर ने कीटनाशक पी आत्महत्या कर ली। मामले में मण्डावर कोतवाल का कहना है कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, विधिक कार्रवाई की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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बॉलीवुड के जाने माने एक्टर विनोद खन्ना का आज ही के दिन यानि 27 अप्रैल को उनका निधन हुआ था। आज विनोद खन्ना की तीसरी पुण्यतिथि है। एक्टर विनोद खन्ना का निधन कैंसर के कारण हुआ। विनोद खन्ना को बीमारी ने इस तरह अंदर ही अंदर खत्म कर दिया कि एक दिन उनकी फोटो वायरल होने के बाद सभी शॉक्ड रह गए थे। विनोद खन्ना का जन्म पेशावर में हुआ था। जब विभाजन हुआ तो उनका परिवार भारत में आकर बस गया।
विनोद खन्ना एक साइंस स्टूडेंट रहे। जब वह कॉलेज में आए तो उनका मन पढ़ाई में नही लग रहा था जिसके बाद उन्होंने थिएटर में काम करना शुरू कर दिया।
विनोद खन्ना ने जब अपने पिता से फिल्म में काम करने के बारे में कहा तो उनके पिता ने बिना कुछ सोचे उनपर बंदूक तान दी और कहा अगर तुम फिल्मों में गये तो तुम्हें गोली मार दूंगा। बहुत समय तक तो उनके पिता माने ही नही बाद में विनोद खन्ना की मां के समझाने पर उनके पिता ने विनोद खन्ना को फिल्मों में दो वर्ष तक काम करने की इजाजत देते हुये कहा अगर फिल्म इंडस्ट्री में सफल नहीं हुए तो घर के काम में हाथ बंटाने के लिए तैयार रहना।
विनोद खन्ना का आखिरी वक्त बहुत दर्द भरा बीता फिल्मों में इतना नाम कमाने वाले एक्टर को कैंसर की बिमारी ने पकड़ लिया और अपने मरने से पहले वह पेशावर में बना अपना पुश्तैनी घर देखना चाहते थे लेकिन दुख की बात ये रही कि उनकी ये इच्छा अधूरी रहा गई। वहीं एक इंटरव्यू में उनकी बेटी ने बताया था कि उन्होंने कैंसर की बीमारी के बारे में किसी को नही बताया था। विनोद खन्ना बेहद बाकमाल एक्टर थे वो आज भी फैंस के दिलों पर राज करते है।
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बॉलीवुड के जाने माने एक्टर विनोद खन्ना का आज ही के दिन यानि सत्ताईस अप्रैल को उनका निधन हुआ था। आज विनोद खन्ना की तीसरी पुण्यतिथि है। एक्टर विनोद खन्ना का निधन कैंसर के कारण हुआ। विनोद खन्ना को बीमारी ने इस तरह अंदर ही अंदर खत्म कर दिया कि एक दिन उनकी फोटो वायरल होने के बाद सभी शॉक्ड रह गए थे। विनोद खन्ना का जन्म पेशावर में हुआ था। जब विभाजन हुआ तो उनका परिवार भारत में आकर बस गया। विनोद खन्ना एक साइंस स्टूडेंट रहे। जब वह कॉलेज में आए तो उनका मन पढ़ाई में नही लग रहा था जिसके बाद उन्होंने थिएटर में काम करना शुरू कर दिया। विनोद खन्ना ने जब अपने पिता से फिल्म में काम करने के बारे में कहा तो उनके पिता ने बिना कुछ सोचे उनपर बंदूक तान दी और कहा अगर तुम फिल्मों में गये तो तुम्हें गोली मार दूंगा। बहुत समय तक तो उनके पिता माने ही नही बाद में विनोद खन्ना की मां के समझाने पर उनके पिता ने विनोद खन्ना को फिल्मों में दो वर्ष तक काम करने की इजाजत देते हुये कहा अगर फिल्म इंडस्ट्री में सफल नहीं हुए तो घर के काम में हाथ बंटाने के लिए तैयार रहना। विनोद खन्ना का आखिरी वक्त बहुत दर्द भरा बीता फिल्मों में इतना नाम कमाने वाले एक्टर को कैंसर की बिमारी ने पकड़ लिया और अपने मरने से पहले वह पेशावर में बना अपना पुश्तैनी घर देखना चाहते थे लेकिन दुख की बात ये रही कि उनकी ये इच्छा अधूरी रहा गई। वहीं एक इंटरव्यू में उनकी बेटी ने बताया था कि उन्होंने कैंसर की बीमारी के बारे में किसी को नही बताया था। विनोद खन्ना बेहद बाकमाल एक्टर थे वो आज भी फैंस के दिलों पर राज करते है।
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अडानी समूह (Adani Group) ने 2021 में बंदरगाह और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में उद्यम करते हुए श्रीलंका (Srilanka) में अपनी व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार किया।
हालांकि, अक्षय ऊर्जा उद्योग में अपनी उपस्थिति स्थापित करने में इसे महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ये बाधाएं मुख्य रूप से सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (सीईबी) के निजी क्षेत्र विरोधी रुख और संगठन के भीतर आंतरिक मुद्दों से उपजी हैं।
सीईबी के व्यापक राजनीतिकरण ने नवीकरणीय ऊर्जा बाजार में निजी संस्थाओं के समावेश को प्रभावी ढंग से समर्थन देने की इसकी क्षमता को बाधित किया है। अडानी समूह और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा निवेशक दोनों ही सीईबी द्वारा बिजली खरीद समझौते (पीपीए) के प्रारूपण का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि यह उनकी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को अंतिम रूप देने में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पीपीए का मसौदा तैयार करने में देरी अडानी के लिए अद्वितीय नहीं है, बल्कि अन्य नवीकरणीय ऊर्जा निवेशकों को भी प्रभावित करती है।
पोर्ट सिटी का दौरा करने वाले अन्य प्रमुख व्यवसायिक आंकड़े बिजनेस ऑफ स्ट्रैटेजिक इंर्पोटेंस (बीएसआई) ढांचे के तहत अच्छी तरह से तैयार कानूनों के अभाव के कारण इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
राज्यमंत्री दिलुम अमुनुगामा ने हाल ही में इस मुद्दे को स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि निगरानी समिति द्वारा नए निवेश कानूनों का मसौदा तैयार करके इन चिंताओं को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।
इन नए विनियमों का उद्देश्य उन पुराने नियमों को सुधारना है जो रियायतें उपलब्ध होने पर भी निवेश के अवसरों में बाधा डालते हैं। निरीक्षण समिति पीपीए और बीएसआई नियमों सहित विभिन्न मुद्दों को हल करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।
नवीकरणीय ऊर्जा के विकास में देरी को कई कारकों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिनमें से एक अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को भुगतान करने में सीईबी की विफलता सबसे अधिक दबाव वाले मुद्दों में से एक है। वित्तीय सहायता की इस कमी ने नए निवेशकों को बाजार में प्रवेश करने से हतोत्साहित किया है। मंत्री के अनुसार, सीलोन बिजली बोर्ड से जुड़ी कई परियोजनाएं पांच से छह वर्षो से स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रही हैं।
श्रीलंका की बढ़ती ऊर्जा मांग को महसूस करने और 70 प्रतिशत स्थापित नवीकरणीय क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बिजली उद्योग को अधिक धन की जरूरत होगी और यह निजी क्षेत्र पर अधिक निर्भर करेगा।
इस समय मौसम की स्थिति के आधार पर, गैर-पारंपरिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र श्रीलंका की दैनिक बिजली आवश्यकता का 15-20 प्रतिशत आपूर्ति करता है। हालांकि, सभी बिजली संयंत्रों को सिस्टम नियंत्रण से जोड़ने में विफलता के कारण, सीईबी की वेबसाइट पर प्रकाशित दैनिक उत्पादन रिपोर्ट में यह बड़ा योगदान पर्याप्त रूप से परिलक्षित नहीं होता है।
निजी संस्थाओं से नवीकरणीय ऊर्जा खरीदने में सीईबी की भागीदारी को श्रीलंका में राजनीतिक उलझनों और निजीकरण विरोधी भावनाओं के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
2022 की पहली तिमाही तक सीईबी ने 65 अरब रुपये का घाटा दर्ज किया था। इसके अतिरिक्त, उएइ संघ ने सरकार की कर नीतियों और हाल ही में बिजली दरों में वृद्धि सहित विभिन्न मुद्दों पर हड़तालें शुरू की हैं। इन हड़तालों और विवादों के कारण अडानी समूह जैसे निवेशकों के लिए और देरी हुई है।
इसके अलावा, सीईबी के कुछ इंजीनियरों ने इसके महत्व के बारे में सूचित किए जाने के बावजूद, अक्षय ऊर्जा के प्रति नकारात्मक रवैया प्रदर्शित किया है। सीईबी अब दावा करता है कि वह वर्तमान ग्रिड में बदलाव किए बिना 2026 तक अतिरिक्त 2,500 मेगावाट ऊर्जा शामिल कर सकता है, जो महत्वपूर्ण है।
हालांकि, बिजली क्षेत्र धीमी गति से काम करता है, और परियोजनाओं को अंतिम रूप देने में काफी समय लगता है।
अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा 442 मिलियन डॉलर के कुल निवेश के साथ श्रीलंका सरकार द्वारा दो पवन ऊर्जा संयंत्रों को चालू करने की मंजूरी दिए हुए पांच महीने पहले ही बीत चुके हैं।
उन्होंने पहली बार 2021 में संपर्क किया था और उन्हें हटाए जाने से पहले पिछले राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। निवेश बोर्ड को उम्मीद थी कि ये पवन ऊर्जा संयंत्र दो साल के भीतर चालू हो जाएंगे और 2025 तक देश के पावर ग्रिड में एकीकृत हो जाएंगे।
अडानी ने पहले ही इस परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण अग्रिम भुगतान कर दिया है, लेकिन बिजली खरीद समझौता (पीपीए) अभी भी लंबित है।
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अडानी समूह ने दो हज़ार इक्कीस में बंदरगाह और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में उद्यम करते हुए श्रीलंका में अपनी व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार किया। हालांकि, अक्षय ऊर्जा उद्योग में अपनी उपस्थिति स्थापित करने में इसे महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ये बाधाएं मुख्य रूप से सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के निजी क्षेत्र विरोधी रुख और संगठन के भीतर आंतरिक मुद्दों से उपजी हैं। सीईबी के व्यापक राजनीतिकरण ने नवीकरणीय ऊर्जा बाजार में निजी संस्थाओं के समावेश को प्रभावी ढंग से समर्थन देने की इसकी क्षमता को बाधित किया है। अडानी समूह और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा निवेशक दोनों ही सीईबी द्वारा बिजली खरीद समझौते के प्रारूपण का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि यह उनकी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को अंतिम रूप देने में एक महत्वपूर्ण कदम है। पीपीए का मसौदा तैयार करने में देरी अडानी के लिए अद्वितीय नहीं है, बल्कि अन्य नवीकरणीय ऊर्जा निवेशकों को भी प्रभावित करती है। पोर्ट सिटी का दौरा करने वाले अन्य प्रमुख व्यवसायिक आंकड़े बिजनेस ऑफ स्ट्रैटेजिक इंर्पोटेंस ढांचे के तहत अच्छी तरह से तैयार कानूनों के अभाव के कारण इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। राज्यमंत्री दिलुम अमुनुगामा ने हाल ही में इस मुद्दे को स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि निगरानी समिति द्वारा नए निवेश कानूनों का मसौदा तैयार करके इन चिंताओं को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। इन नए विनियमों का उद्देश्य उन पुराने नियमों को सुधारना है जो रियायतें उपलब्ध होने पर भी निवेश के अवसरों में बाधा डालते हैं। निरीक्षण समिति पीपीए और बीएसआई नियमों सहित विभिन्न मुद्दों को हल करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। नवीकरणीय ऊर्जा के विकास में देरी को कई कारकों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिनमें से एक अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को भुगतान करने में सीईबी की विफलता सबसे अधिक दबाव वाले मुद्दों में से एक है। वित्तीय सहायता की इस कमी ने नए निवेशकों को बाजार में प्रवेश करने से हतोत्साहित किया है। मंत्री के अनुसार, सीलोन बिजली बोर्ड से जुड़ी कई परियोजनाएं पांच से छह वर्षो से स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रही हैं। श्रीलंका की बढ़ती ऊर्जा मांग को महसूस करने और सत्तर प्रतिशत स्थापित नवीकरणीय क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बिजली उद्योग को अधिक धन की जरूरत होगी और यह निजी क्षेत्र पर अधिक निर्भर करेगा। इस समय मौसम की स्थिति के आधार पर, गैर-पारंपरिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र श्रीलंका की दैनिक बिजली आवश्यकता का पंद्रह-बीस प्रतिशत आपूर्ति करता है। हालांकि, सभी बिजली संयंत्रों को सिस्टम नियंत्रण से जोड़ने में विफलता के कारण, सीईबी की वेबसाइट पर प्रकाशित दैनिक उत्पादन रिपोर्ट में यह बड़ा योगदान पर्याप्त रूप से परिलक्षित नहीं होता है। निजी संस्थाओं से नवीकरणीय ऊर्जा खरीदने में सीईबी की भागीदारी को श्रीलंका में राजनीतिक उलझनों और निजीकरण विरोधी भावनाओं के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। दो हज़ार बाईस की पहली तिमाही तक सीईबी ने पैंसठ अरब रुपये का घाटा दर्ज किया था। इसके अतिरिक्त, उएइ संघ ने सरकार की कर नीतियों और हाल ही में बिजली दरों में वृद्धि सहित विभिन्न मुद्दों पर हड़तालें शुरू की हैं। इन हड़तालों और विवादों के कारण अडानी समूह जैसे निवेशकों के लिए और देरी हुई है। इसके अलावा, सीईबी के कुछ इंजीनियरों ने इसके महत्व के बारे में सूचित किए जाने के बावजूद, अक्षय ऊर्जा के प्रति नकारात्मक रवैया प्रदर्शित किया है। सीईबी अब दावा करता है कि वह वर्तमान ग्रिड में बदलाव किए बिना दो हज़ार छब्बीस तक अतिरिक्त दो,पाँच सौ मेगावाट ऊर्जा शामिल कर सकता है, जो महत्वपूर्ण है। हालांकि, बिजली क्षेत्र धीमी गति से काम करता है, और परियोजनाओं को अंतिम रूप देने में काफी समय लगता है। अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा चार सौ बयालीस मिलियन डॉलर के कुल निवेश के साथ श्रीलंका सरकार द्वारा दो पवन ऊर्जा संयंत्रों को चालू करने की मंजूरी दिए हुए पांच महीने पहले ही बीत चुके हैं। उन्होंने पहली बार दो हज़ार इक्कीस में संपर्क किया था और उन्हें हटाए जाने से पहले पिछले राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। निवेश बोर्ड को उम्मीद थी कि ये पवन ऊर्जा संयंत्र दो साल के भीतर चालू हो जाएंगे और दो हज़ार पच्चीस तक देश के पावर ग्रिड में एकीकृत हो जाएंगे। अडानी ने पहले ही इस परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण अग्रिम भुगतान कर दिया है, लेकिन बिजली खरीद समझौता अभी भी लंबित है।
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*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
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*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
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इस आर्टिकल में हम Garena Free Fire (गरेना फ्री फायर) में Alok कैरेक्टर को किस तरह अनलॉक कर सकते हैं। नीचे दी गई डिटेल्स को ध्यान पूर्वक फॉलो करें।
Free Fire में हर किसी पात्र में यूनिक एबिलिटी है। गेम के भीतर Alok पात्र में 'Drop the Beat' एबिलिटी को जोड़ा गया है। इस पात्र की एबिलिटी से जानकारी मिलती है कि 5 मीटर का शक्तिशाली कवच बनाता है। ये सिर्फ 10 सेकंड्स के लिए होता है। इसकी स्पीड 15% बढ़ती है। लेवल के आधार पर ताकत में वृद्धि होती है। नीचे दी गई डिटेल्स को फॉलो करके पात्र को अनलॉक करेंः
1: अपने गेमिंग डिवाइस में Free Fire गेम को ओपन करें। लॉबी में नीचे की तरफ कैरेक्टर वाले बटन पर टच करना होगा।
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इस आर्टिकल में हम Garena Free Fire में Alok कैरेक्टर को किस तरह अनलॉक कर सकते हैं। नीचे दी गई डिटेल्स को ध्यान पूर्वक फॉलो करें। Free Fire में हर किसी पात्र में यूनिक एबिलिटी है। गेम के भीतर Alok पात्र में 'Drop the Beat' एबिलिटी को जोड़ा गया है। इस पात्र की एबिलिटी से जानकारी मिलती है कि पाँच मीटर का शक्तिशाली कवच बनाता है। ये सिर्फ दस सेकंड्स के लिए होता है। इसकी स्पीड पंद्रह% बढ़ती है। लेवल के आधार पर ताकत में वृद्धि होती है। नीचे दी गई डिटेल्स को फॉलो करके पात्र को अनलॉक करेंः एक: अपने गेमिंग डिवाइस में Free Fire गेम को ओपन करें। लॉबी में नीचे की तरफ कैरेक्टर वाले बटन पर टच करना होगा।
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vii. विभिन्न प्रकार के पट्टो के प्रारूप का सरलीकरण किया गया है तथा इन्हें पृथक-पृथक रंगों में तैयार किया गया है, ताकि पट्टे में प्रदत्त भू-प्रयोजन की पहचान हो सके।
viii. अभियान के दौरान किये जाने वाले कार्यों के संबंध में अधिसूचना, नीति, आदेश व परिपत्र आदि जारी किये गये हैं, जिनको बुकलेट के माध्यम से उपलब्ध कराया जावेगा तथा शहर - 2021' की वैबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जावेगा।
"शहर - 2021" में किये जाने वाले विभिन्न प्रकार के कार्यों की सूची परिशिष्ट-1 पर संलग्न है।
अभियान में सम्पादित किये जाने वाले प्रमुख कार्यों बाबत् दिशा-निर्देशनगरीय क्षेत्रों में स्थित गैर कृषि / आबादी भूमि में स्वामित्व अधिकार अभ्यर्पण कराकर नवीन पट्टे दिया जाना :3.1
नगरीय क्षेत्रों में परम्परागत रूप से बसी पुरानी आबादी क्षेत्र / सघन आबादी क्षेत्र / गैर मुमकिन आबादी क्षेत्र में स्थित भूखण्डों एवं निर्मित भवनों को फ्री होल्ड पट्टे दिये जाएंगे।
राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 69 - ए, जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम की धारा 54 - ई, जोधपुर एवं अजमेर विकास प्राधिकरण अधिनियम की धारा 50-बी व नगर सुधार अधिनियम 1959 की धारा 60 (c) के तहत नगरीय क्षेत्र में स्थित गैर कृषि / आबादी भूमि में पट्टे दिये जाने बाबत विधिक प्रावधान किए गए हैं।
(i) नगरीय क्षेत्रों में नगर पालिका सीमा में स्थित चारदीवारी / पुरानी आबादी क्षेत्र / सघन आबादी क्षेत्रों की बसावट परम्परागत रूप से हुई है, जिनमें सड़को की चौड़ाई, भवन रेखा, आच्छादन, भवनों की उंचाई पूर्व से ही निर्धारित है। ऐसे परम्परागत रूप से विकसित हो चुके आबादी क्षेत्रों में भवनों में आंशिक रूप से नीचे दुकान- ऊपर मकान मिश्रित उपयोग की प्रथा रही है तथा विभिन्न प्रकार के व्यवसाय जैसे किराना, डेयरी, स्टेशनरी, कपड़ा, चाय आदि के साथ-साथ परम्परागत व्यवसाय / कौशल से संबंधित दुकानों यथा मूर्तिकला, हस्तकला, संगीत उत्पाद, खाद्य पदार्थ तथा शैक्षणिक / चिकित्सा / सामुदायिक सुविधाऐं भी स्थित हैं।
भवन विनियमों के प्रावधानों के अनुसार ऐसे परम्परागत रूप से बसे पुराने आबादी क्षेत्र / सघन आबादी क्षेत्रों हेतु सुविधाजनक दुकानों को अनुज्ञेय किये जाने का प्रावधान उपलब्ध है तथा साथ ही इन क्षेत्रों में विद्यमान भवन रेखा को यथावत रखते हुये, भवनों के मानदण्ड निर्धारित किये गये हैं।
(ii) अतः ऐसे पुरानी / सघन आबादी क्षेत्रों में पराम्परागत बसावट को यथावत रखते हुये आवासीय, व्यवसायिक तथा मिश्रित उपयोग हेतु पट्टे दिये जावेगें। इनके ऐतिहासिक महत्व / धरोहर को भी पूर्ण रूप से संरक्षित रखने हेतु तैयार हैरिटेज बायलॉज का भी ध्यान रखा जावेगा। इन आबादी क्षेत्रों में भूमि एवं भवनों का स्वामित्व संयुक्त या आपसी विभाजन / बंटवारे के अनुसार होने पर मौके की स्थिति अनुसार संयुक्त या अलग-अलग पट्टा दिया जावेगा। इस प्रक्रिया में उपविभाजन / पुनर्गठन नियम लागू नही होगें। (आदेश दिनांक 21.10.2020 )
(iii) पुरानी परम्परागत आबादी के अलावा कई पूर्व राजा-महाराजाओं / जागीरदारों द्वारा स्वयं के स्वामित्व की भूमि का उप-विभाजन कर भूखण्डों के रूप में विक्रय किया गया है, उक्त प्रावधानों के अन्तर्गत बसी हुयी कॉलोनियों को यथावत बसावट के अनुरूप पट्टे दिये जायेंगे ।
(iv) गैर - कृषि खातेदारी भूमि, गैर मुमकिन आबादी भूमि, ग्राम पंचायत की आबादी भूमि, ग्रामीण क्षेत्र भूमि रूपान्तरण नियम 1971, 1992 एवं 2007 के तहत जारी संपरिवर्तन आदेशों से संबंधित भूमि जो नगरीय सीमा में सम्मिलित हो चुकी है एवं नगरीय क्षेत्र भूमि रूपान्तरण नियम, 1981 के तहत् जारी गैर-कृषि
3.3 परम्परागत रूप से बसी पुरानी आबादी / सघन आबादी क्षेत्रों में भूमि एवं भवनों का नियोजन अनियमित रूप से होने के कारण उनका सही माप संभव नही हो पाता है। अतः ऐसे क्षेत्रों में भूमि एवं भवनों का माप एवं देय राशि का भवन स्वामी द्वारा स्व-माप / स्व-निर्धारण (Self Measurement / Self Assessment) कर नगरीय निकाय को दिया जावेगा। इस कार्य में 'नगर मित्र की सहायता ली जा सकती है।
प्रयोजनार्थ रूपान्तरण आदेश / पट्टे, स्टेट ग्रान्ट एक्ट के तहत् पूर्व में जारी पट्टे / पूर्व में किसी भी विधि अनुसार निकायों को छोड़कर जारी किये गये पट्टे संबंधित नगरीय निकाय में समर्पित किये जाकर नये पट्टे प्राप्त किये जा सकेगें।
3.4 पुरानी आबादी पर दिये जाने वाले फ्री होल्ड पट्टो पर कोई लीज राशि वसूलनीय नहीं होगी। यदि कोई आवेदक पूर्व में जारी लीज डीड / पट्टा / रूपान्तरण आदेश सरेण्डर कर फ्री होल्ड पट्टा प्राप्त करता है तो भूखण्ड के पेटे बकाया लीज राशि एवं 10 वर्षीय एक मुश्त लीज राशि वसूल की जाकर ही फ्री होल्ड पट्टा जारी किया जायेगा। बकाया ब्याज में शत प्रतिशत व लीज राशि पर 60 प्रतिशत की छूट देय है।
3.5 ऐसी भूमियों की नियमन प्रक्रिया एवं नियमों में जटिलता को दूर करने हेतु विभाग द्वारा समीक्षा की जाकर नगरपालिका अधिनियम, 2009 व 2015 के नियमों में संशोधन किया गया है तथा इस संबंध में विस्तृत परिपत्र, जिसमें प्रक्रिया व दरें दर्शायी गई हैं, जारी किया गया है। (अधिसूचना दिनांक 20.09.2021, परिपत्र दिनांक 27.09.2021)
स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत पट्टे देनाःपूर्व अभियान की भांति ( कट ऑफ डेट सामान्य वर्ग हेतु 01.01.1990 एवं अनुसूचित जाति एवं जनजाति हेतु 01.01.1996) राजस्थान स्टेट गवर्नमेन्ट ग्रान्ट एक्ट 1961 के तहत 300 वर्ग मीटर क्षेत्रफल तक पूर्व में निर्धारित एक रूपये टोकन दर पर आवासीय पट्टा जारी किया जायेगा।
कृषि भूमि पर बसी हुयी कॉलोनियों में मास्टर प्लान / जोनल डवलपमेंट प्लान / स्वीकृत की गयी योजनाओं के अनुरूप पट्टे देना :---
5.1 कृषि भूमि पर विकसित योजनाओं / कॉलोनियों में सेक्टर / ले-आउट प्लान तैयार कर पट्टे दिये जाने के संबंध में
कृषि भूमि पर विकसित गैर अनुमोदित कॉलोनियों के ले-आउट प्लान तैयार कर पट्टे दिये जावेगें ।
माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर खण्ड पीठ के जनहित याचिका संख्या 1554 / 2004 (गुलाब कोठारी बनाम राज्य सरकार एवं अन्य ) में दिये निर्णय दिनांक 15.12.2018 के बिन्दु सं. 54 (e) में निम्नानुसार निर्देश प्रदान किये गये है।
"The Respondents are further directed not to permit conversion of land use/regularisation of unauthorised colony or individual unauthorised constructions until and unless the Zonal Development Plan and Sector Plans for the local area concerned governed by Master Development Plan are prepared, finalised and notified in accordance with law. Further the conversion of the land use or regularisation of unauthorised development shall not be permitted unless the unauthorised development undertaken fulfills the norms laid down for requisite infrastructure facilities and amenities and conforms to the Master Development Plan/Zonal Development Plans / Schemes duly notified."
अतः माननीय उच्च न्यायालय के उक्त निर्देशों की पालना किये जाने हेतु कृषि भूमि पर विकसित योजनाओं के अनुमोदन हेतु निम्नानुसार कार्यवाही की जावेगी :
(i) जिन नगरीय क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा जारी गाईडलाइन्स दिनांक 04.04.2019 के तहत प्रोपर्टी लेवल
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vii. विभिन्न प्रकार के पट्टो के प्रारूप का सरलीकरण किया गया है तथा इन्हें पृथक-पृथक रंगों में तैयार किया गया है, ताकि पट्टे में प्रदत्त भू-प्रयोजन की पहचान हो सके। viii. अभियान के दौरान किये जाने वाले कार्यों के संबंध में अधिसूचना, नीति, आदेश व परिपत्र आदि जारी किये गये हैं, जिनको बुकलेट के माध्यम से उपलब्ध कराया जावेगा तथा शहर - दो हज़ार इक्कीस' की वैबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जावेगा। "शहर - दो हज़ार इक्कीस" में किये जाने वाले विभिन्न प्रकार के कार्यों की सूची परिशिष्ट-एक पर संलग्न है। अभियान में सम्पादित किये जाने वाले प्रमुख कार्यों बाबत् दिशा-निर्देशनगरीय क्षेत्रों में स्थित गैर कृषि / आबादी भूमि में स्वामित्व अधिकार अभ्यर्पण कराकर नवीन पट्टे दिया जाना :तीन.एक नगरीय क्षेत्रों में परम्परागत रूप से बसी पुरानी आबादी क्षेत्र / सघन आबादी क्षेत्र / गैर मुमकिन आबादी क्षेत्र में स्थित भूखण्डों एवं निर्मित भवनों को फ्री होल्ड पट्टे दिये जाएंगे। राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, दो हज़ार नौ की धारा उनहत्तर - ए, जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम की धारा चौवन - ई, जोधपुर एवं अजमेर विकास प्राधिकरण अधिनियम की धारा पचास-बी व नगर सुधार अधिनियम एक हज़ार नौ सौ उनसठ की धारा साठ के तहत नगरीय क्षेत्र में स्थित गैर कृषि / आबादी भूमि में पट्टे दिये जाने बाबत विधिक प्रावधान किए गए हैं। नगरीय क्षेत्रों में नगर पालिका सीमा में स्थित चारदीवारी / पुरानी आबादी क्षेत्र / सघन आबादी क्षेत्रों की बसावट परम्परागत रूप से हुई है, जिनमें सड़को की चौड़ाई, भवन रेखा, आच्छादन, भवनों की उंचाई पूर्व से ही निर्धारित है। ऐसे परम्परागत रूप से विकसित हो चुके आबादी क्षेत्रों में भवनों में आंशिक रूप से नीचे दुकान- ऊपर मकान मिश्रित उपयोग की प्रथा रही है तथा विभिन्न प्रकार के व्यवसाय जैसे किराना, डेयरी, स्टेशनरी, कपड़ा, चाय आदि के साथ-साथ परम्परागत व्यवसाय / कौशल से संबंधित दुकानों यथा मूर्तिकला, हस्तकला, संगीत उत्पाद, खाद्य पदार्थ तथा शैक्षणिक / चिकित्सा / सामुदायिक सुविधाऐं भी स्थित हैं। भवन विनियमों के प्रावधानों के अनुसार ऐसे परम्परागत रूप से बसे पुराने आबादी क्षेत्र / सघन आबादी क्षेत्रों हेतु सुविधाजनक दुकानों को अनुज्ञेय किये जाने का प्रावधान उपलब्ध है तथा साथ ही इन क्षेत्रों में विद्यमान भवन रेखा को यथावत रखते हुये, भवनों के मानदण्ड निर्धारित किये गये हैं। अतः ऐसे पुरानी / सघन आबादी क्षेत्रों में पराम्परागत बसावट को यथावत रखते हुये आवासीय, व्यवसायिक तथा मिश्रित उपयोग हेतु पट्टे दिये जावेगें। इनके ऐतिहासिक महत्व / धरोहर को भी पूर्ण रूप से संरक्षित रखने हेतु तैयार हैरिटेज बायलॉज का भी ध्यान रखा जावेगा। इन आबादी क्षेत्रों में भूमि एवं भवनों का स्वामित्व संयुक्त या आपसी विभाजन / बंटवारे के अनुसार होने पर मौके की स्थिति अनुसार संयुक्त या अलग-अलग पट्टा दिया जावेगा। इस प्रक्रिया में उपविभाजन / पुनर्गठन नियम लागू नही होगें। पुरानी परम्परागत आबादी के अलावा कई पूर्व राजा-महाराजाओं / जागीरदारों द्वारा स्वयं के स्वामित्व की भूमि का उप-विभाजन कर भूखण्डों के रूप में विक्रय किया गया है, उक्त प्रावधानों के अन्तर्गत बसी हुयी कॉलोनियों को यथावत बसावट के अनुरूप पट्टे दिये जायेंगे । गैर - कृषि खातेदारी भूमि, गैर मुमकिन आबादी भूमि, ग्राम पंचायत की आबादी भूमि, ग्रामीण क्षेत्र भूमि रूपान्तरण नियम एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर, एक हज़ार नौ सौ बानवे एवं दो हज़ार सात के तहत जारी संपरिवर्तन आदेशों से संबंधित भूमि जो नगरीय सीमा में सम्मिलित हो चुकी है एवं नगरीय क्षेत्र भूमि रूपान्तरण नियम, एक हज़ार नौ सौ इक्यासी के तहत् जारी गैर-कृषि तीन.तीन परम्परागत रूप से बसी पुरानी आबादी / सघन आबादी क्षेत्रों में भूमि एवं भवनों का नियोजन अनियमित रूप से होने के कारण उनका सही माप संभव नही हो पाता है। अतः ऐसे क्षेत्रों में भूमि एवं भवनों का माप एवं देय राशि का भवन स्वामी द्वारा स्व-माप / स्व-निर्धारण कर नगरीय निकाय को दिया जावेगा। इस कार्य में 'नगर मित्र की सहायता ली जा सकती है। प्रयोजनार्थ रूपान्तरण आदेश / पट्टे, स्टेट ग्रान्ट एक्ट के तहत् पूर्व में जारी पट्टे / पूर्व में किसी भी विधि अनुसार निकायों को छोड़कर जारी किये गये पट्टे संबंधित नगरीय निकाय में समर्पित किये जाकर नये पट्टे प्राप्त किये जा सकेगें। तीन.चार पुरानी आबादी पर दिये जाने वाले फ्री होल्ड पट्टो पर कोई लीज राशि वसूलनीय नहीं होगी। यदि कोई आवेदक पूर्व में जारी लीज डीड / पट्टा / रूपान्तरण आदेश सरेण्डर कर फ्री होल्ड पट्टा प्राप्त करता है तो भूखण्ड के पेटे बकाया लीज राशि एवं दस वर्षीय एक मुश्त लीज राशि वसूल की जाकर ही फ्री होल्ड पट्टा जारी किया जायेगा। बकाया ब्याज में शत प्रतिशत व लीज राशि पर साठ प्रतिशत की छूट देय है। तीन.पाँच ऐसी भूमियों की नियमन प्रक्रिया एवं नियमों में जटिलता को दूर करने हेतु विभाग द्वारा समीक्षा की जाकर नगरपालिका अधिनियम, दो हज़ार नौ व दो हज़ार पंद्रह के नियमों में संशोधन किया गया है तथा इस संबंध में विस्तृत परिपत्र, जिसमें प्रक्रिया व दरें दर्शायी गई हैं, जारी किया गया है। स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत पट्टे देनाःपूर्व अभियान की भांति राजस्थान स्टेट गवर्नमेन्ट ग्रान्ट एक्ट एक हज़ार नौ सौ इकसठ के तहत तीन सौ वर्ग मीटर क्षेत्रफल तक पूर्व में निर्धारित एक रूपये टोकन दर पर आवासीय पट्टा जारी किया जायेगा। कृषि भूमि पर बसी हुयी कॉलोनियों में मास्टर प्लान / जोनल डवलपमेंट प्लान / स्वीकृत की गयी योजनाओं के अनुरूप पट्टे देना :--- पाँच.एक कृषि भूमि पर विकसित योजनाओं / कॉलोनियों में सेक्टर / ले-आउट प्लान तैयार कर पट्टे दिये जाने के संबंध में कृषि भूमि पर विकसित गैर अनुमोदित कॉलोनियों के ले-आउट प्लान तैयार कर पट्टे दिये जावेगें । माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर खण्ड पीठ के जनहित याचिका संख्या एक हज़ार पाँच सौ चौवन / दो हज़ार चार में दिये निर्णय दिनांक पंद्रह.बारह.दो हज़ार अट्ठारह के बिन्दु सं. चौवन में निम्नानुसार निर्देश प्रदान किये गये है। "The Respondents are further directed not to permit conversion of land use/regularisation of unauthorised colony or individual unauthorised constructions until and unless the Zonal Development Plan and Sector Plans for the local area concerned governed by Master Development Plan are prepared, finalised and notified in accordance with law. Further the conversion of the land use or regularisation of unauthorised development shall not be permitted unless the unauthorised development undertaken fulfills the norms laid down for requisite infrastructure facilities and amenities and conforms to the Master Development Plan/Zonal Development Plans / Schemes duly notified." अतः माननीय उच्च न्यायालय के उक्त निर्देशों की पालना किये जाने हेतु कृषि भूमि पर विकसित योजनाओं के अनुमोदन हेतु निम्नानुसार कार्यवाही की जावेगी : जिन नगरीय क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा जारी गाईडलाइन्स दिनांक चार.चार.दो हज़ार उन्नीस के तहत प्रोपर्टी लेवल
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हाल ही में, असम सरकार ने यह घोषणा की कि 1 जनवरी, 2021 से जिस भी व्यक्ति के दो से ज़्यादा बच्चे होंगे वह सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य पाया जायेगा। इसकी चर्चा करते हुए, NDTV की एक एंकर ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के खुद छह बच्चे हैं।
उपरोक्त वीडियो में, एंकर सोनल मेहरोत्रा कपूर को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि, "2017 में असम विधानसभा ने दो-बाल जनसंख्या नीति अपनाई थी। राज्य मंत्रिमंडल ने आखिरकार अब दो से अधिक बच्चों वाले लोगों के लिए सरकारी नौकरियों की सीमा से बाहर करने का फैसला लिया है। इसका मतलब है कि यदि आपके दो से अधिक बच्चे हैं, तो आप असम में किसी भी सरकारी नौकरी के हकदार नहीं होंगे। यह नीति 1 जनवरी, 2021 से लागू होगी ... इसमें दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री के खुद के छह बच्चे हैं, लेकिन उन्होंने आखिरकार इस दो-बाल नीति को लागू करने का फैसला किया है"-अनुवादित। वीडियो में वह हिस्सा जब एंकर मुख्यमंत्री को संदर्भित करती है, वह 00:47 मिनट से शरू होता है।
NDTV की रिपोर्ट, जिसमें बताया गया है कि असम के मुख्यमंत्री के छह बच्चे है, गलत है। 2014 में लोकसभा चुनाव के लिए सर्बानंद सोनोवाल द्वारा दाखिल एक हलफनामे में, जो मुख्य निर्वाचन अधिकारी, असम की वेबसाइट पर उपलब्ध है, यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि उनके कोई बच्चे नहीं हैं।
इसके अलावा, सर्बानंद सोनोवाल की वैवाहिक स्थिति के बारे में जानकारी असम विधानसभा की वेबसाइट पर आसानी से उपलब्ध है। वेबसाइट पर मुख्यमंत्री के परिचय के मुताबिक, उनकी शादी नहीं हुई है।
सोनल मेहरोत्रा कपूर, जिन्होंने कार्यक्रम की एंकरिंग की थी, ने बाद में अपनी गलती को स्वीकार करते हुए एक ट्वीट किया और माफ़ी मांगी।
NDTV ने अपने प्रसारण में झूठा दावा किया था कि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के छह बच्चे है और बाद में अपने प्रसारण को हटा दिया।
26 अक्टूबर को NDTV ने इस गलती पर अपने दर्शकों से माफ़ी मांगते हुए ट्वीट किया।
सत्ता को आईना दिखाने वाली पत्रकारिता का कॉरपोरेट और राजनीति, दोनों के नियंत्रण से मुक्त होना बुनियादी ज़रूरत है. और ये तभी संभव है जब जनता ऐसी पत्रकारिता का हर मोड़ पर साथ दे. फ़ेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियों के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद करें. नीचे दिए गए बटन पर क्लिक कर ऑल्ट न्यूज़ को डोनेट करें.
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हाल ही में, असम सरकार ने यह घोषणा की कि एक जनवरी, दो हज़ार इक्कीस से जिस भी व्यक्ति के दो से ज़्यादा बच्चे होंगे वह सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य पाया जायेगा। इसकी चर्चा करते हुए, NDTV की एक एंकर ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के खुद छह बच्चे हैं। उपरोक्त वीडियो में, एंकर सोनल मेहरोत्रा कपूर को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि, "दो हज़ार सत्रह में असम विधानसभा ने दो-बाल जनसंख्या नीति अपनाई थी। राज्य मंत्रिमंडल ने आखिरकार अब दो से अधिक बच्चों वाले लोगों के लिए सरकारी नौकरियों की सीमा से बाहर करने का फैसला लिया है। इसका मतलब है कि यदि आपके दो से अधिक बच्चे हैं, तो आप असम में किसी भी सरकारी नौकरी के हकदार नहीं होंगे। यह नीति एक जनवरी, दो हज़ार इक्कीस से लागू होगी ... इसमें दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री के खुद के छह बच्चे हैं, लेकिन उन्होंने आखिरकार इस दो-बाल नीति को लागू करने का फैसला किया है"-अनुवादित। वीडियो में वह हिस्सा जब एंकर मुख्यमंत्री को संदर्भित करती है, वह शून्य:सैंतालीस मिनट से शरू होता है। NDTV की रिपोर्ट, जिसमें बताया गया है कि असम के मुख्यमंत्री के छह बच्चे है, गलत है। दो हज़ार चौदह में लोकसभा चुनाव के लिए सर्बानंद सोनोवाल द्वारा दाखिल एक हलफनामे में, जो मुख्य निर्वाचन अधिकारी, असम की वेबसाइट पर उपलब्ध है, यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि उनके कोई बच्चे नहीं हैं। इसके अलावा, सर्बानंद सोनोवाल की वैवाहिक स्थिति के बारे में जानकारी असम विधानसभा की वेबसाइट पर आसानी से उपलब्ध है। वेबसाइट पर मुख्यमंत्री के परिचय के मुताबिक, उनकी शादी नहीं हुई है। सोनल मेहरोत्रा कपूर, जिन्होंने कार्यक्रम की एंकरिंग की थी, ने बाद में अपनी गलती को स्वीकार करते हुए एक ट्वीट किया और माफ़ी मांगी। NDTV ने अपने प्रसारण में झूठा दावा किया था कि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के छह बच्चे है और बाद में अपने प्रसारण को हटा दिया। छब्बीस अक्टूबर को NDTV ने इस गलती पर अपने दर्शकों से माफ़ी मांगते हुए ट्वीट किया। सत्ता को आईना दिखाने वाली पत्रकारिता का कॉरपोरेट और राजनीति, दोनों के नियंत्रण से मुक्त होना बुनियादी ज़रूरत है. और ये तभी संभव है जब जनता ऐसी पत्रकारिता का हर मोड़ पर साथ दे. फ़ेक न्यूज़ और ग़लत जानकारियों के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद करें. नीचे दिए गए बटन पर क्लिक कर ऑल्ट न्यूज़ को डोनेट करें. बैंक ट्रांसफ़र / चेक / DD के माध्यम से डोनेट करने सम्बंधित जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.
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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का फिर नया अंदाज सामने आया है। इस बार उन्होंने बैंड मास्टर तुकाराम गवई के घर रात गुजारी। सीएम शनिवार को बुरहानपुर में खंडवा लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए बहादरपुर गांव में प्रचार के लिए गए थे। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने तुकाराम के घर में उन्होंने भोजन किया। केले के पत्त्ते पर बैंगन का भर्ता, ठेंचा, भिंडी की सब्जी, दाल, चावल और मावे की जलेबी का लुत्फ उठाया। यही नहीं, सुबह 6 बजे जागते ही खुद शेविंग भी की। इसके बाद 8 बजे बहादरपुर स्थित मंदिर में दर्शन के लिए गए।
सीएम ने कहा कि हमारा मकसद सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के घर तक पहुंचना है। देखना चाहते हैं कि जमीनी स्तर पर लोगों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं। मंत्रालय में बैठकर किसी का दर्द नहीं जाना जा सकता। महलों में तो कोई भी सो सकता है। परिस्थितियां, अपेक्षाएं जब पता चलती हैं तो ऐसे में नई योजना का जन्म हो जाता है। मेरे लिए साढ़े आठ करोड़ का परिवार है।
उधर, शिवराज सिंह चौहान जब मंदिर के लिए निकले तो कुछ लोगों ने उनसे मुलाकात की और कहा कि कोरोना काल में हम बेरोजगार हो गए हैं मामाजी। इसके बाद उन्होंने खटिया पर बैठकर गांव वालों से चर्चा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि धीरे-धीरे स्थितियां सामान्य हो रही हैं। उनके साथ पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस भी मौजूद थीं।
सीएम शिवराज सिंह जिस बैंड मास्टर तुकाराम सीताराम गवई के यहां रुके, उसका काम भी दो साल से ठप है। तुकाराम ने सीएम से कहा कि दो साल से बैंड-बाजे वाले परेशान हो रहे हैं। शादी, विवाह में बैंड बजाने की अनुमति नहीं मिल रही। सीएम ने कहा- जल्द चालू करा देंगे।
तुकाराम के घर में दो ही कमरे हैं। एक कमरे में मुख्यमंत्री सोए और दूसरे कमरे में पति-पत्नी, दो बच्चे और बेटा-बहू थे। सुबह सीएम ने कहा कि समझ सकता हूं कि इससे परिवार को कष्ट हुआ होगा, लेकिन योजनाओं की हकीकत जानने के लिए हम कहीं न कहीं जाकर रात में रुकते हैं।
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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का फिर नया अंदाज सामने आया है। इस बार उन्होंने बैंड मास्टर तुकाराम गवई के घर रात गुजारी। सीएम शनिवार को बुरहानपुर में खंडवा लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए बहादरपुर गांव में प्रचार के लिए गए थे। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने तुकाराम के घर में उन्होंने भोजन किया। केले के पत्त्ते पर बैंगन का भर्ता, ठेंचा, भिंडी की सब्जी, दाल, चावल और मावे की जलेबी का लुत्फ उठाया। यही नहीं, सुबह छः बजे जागते ही खुद शेविंग भी की। इसके बाद आठ बजे बहादरपुर स्थित मंदिर में दर्शन के लिए गए। सीएम ने कहा कि हमारा मकसद सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के घर तक पहुंचना है। देखना चाहते हैं कि जमीनी स्तर पर लोगों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं। मंत्रालय में बैठकर किसी का दर्द नहीं जाना जा सकता। महलों में तो कोई भी सो सकता है। परिस्थितियां, अपेक्षाएं जब पता चलती हैं तो ऐसे में नई योजना का जन्म हो जाता है। मेरे लिए साढ़े आठ करोड़ का परिवार है। उधर, शिवराज सिंह चौहान जब मंदिर के लिए निकले तो कुछ लोगों ने उनसे मुलाकात की और कहा कि कोरोना काल में हम बेरोजगार हो गए हैं मामाजी। इसके बाद उन्होंने खटिया पर बैठकर गांव वालों से चर्चा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि धीरे-धीरे स्थितियां सामान्य हो रही हैं। उनके साथ पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस भी मौजूद थीं। सीएम शिवराज सिंह जिस बैंड मास्टर तुकाराम सीताराम गवई के यहां रुके, उसका काम भी दो साल से ठप है। तुकाराम ने सीएम से कहा कि दो साल से बैंड-बाजे वाले परेशान हो रहे हैं। शादी, विवाह में बैंड बजाने की अनुमति नहीं मिल रही। सीएम ने कहा- जल्द चालू करा देंगे। तुकाराम के घर में दो ही कमरे हैं। एक कमरे में मुख्यमंत्री सोए और दूसरे कमरे में पति-पत्नी, दो बच्चे और बेटा-बहू थे। सुबह सीएम ने कहा कि समझ सकता हूं कि इससे परिवार को कष्ट हुआ होगा, लेकिन योजनाओं की हकीकत जानने के लिए हम कहीं न कहीं जाकर रात में रुकते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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हायर एजूकेशन डिपार्टमेंट ने स्टेट यूनिवर्सिटी पीएचडी कोर्स के लिए सहगल समिति की सिफारिशों को लागू करने का डिसीजन लिया था। सही मॉनिटरिंग न होने की वजह से शुरू से ही लेटलतीफी हुई। पहले तो समिति की सिफारिश पर डिसीजन लेने में देर की गई। फिर इसके इम्प्लीमेंटेशन में भी देरी हुई। नतीजा 2010-11 के बाद अभी तक स्टेट यूनिवर्सिटीज के पीएचडी कोर्स में एडमिशन हो ही नहीं पाया।
सहगल समिति ने सभी स्टेट यूनिवर्सिटीज के पीएचडी कोर्स में एडमिशन के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट कराने की सिफारिश की थी। मंशा थी रिसर्च की क्वालिटी मेंटेन करने की। साथ ही एडमिशन प्रॉसेस राइट टाइम करने की। सिफारिशें मंजूर करने के बाद 30 मई 2011 को तत्कालीन हायर एजूकेशन सेक्रेटरी अवनीश कुमार अवस्थी ने एक आदेश जारी किया। 6 जुलाई 2011 को दिए गए इस आदेश के मुताबिक सभी यूनिवर्सिटी के पीएचडी कोर्स में एडमिशन प्रॉसेज पर रोक लगाने को कहा गया था। कहा गया था कि अब एडमिशन नए रूल्स के मुताबिक होगा।
- फॉर्म सबमिट करने की लास्ट डेट 20 मार्च रखी गई। फॉर्म अवेलेबल न हो पाने के कारण इसे 31 मार्च तक एक्सटेंड किया गया।
- नतीजा यूनिवर्सिटी टेस्ट डेट भी टालनी पड़ी। टेस्ट की प्रस्तावित डेट 29 अप्रैल को टालकर एक जून करना पड़ा।
पीएचडी कोर्स में एडमिशन की बाट जोह रहे स्टूडेंट्स की धड़कनें बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि अभी पूरा का पूरा एडमिशन प्रॉसेज बाकी है। बता दें कि एलिजिबिलिटी टेस्ट में पास होने वाले कैंडिडेट्स ही स्टेट यूनिवर्सिटी के पीएचडी कोर्स में एडमिशन लेने के लिए एलिजिबल होंगे। कैंडिडेट्स को एडमिशन के लिए सभी यूनिवर्सिटी के एडमिशन प्रॉसेज को अलग-अलग फॉलो करना होगा। स्टूडेंट्स को अभी सीईटी रिजल्ट का इंतजार है।
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हायर एजूकेशन डिपार्टमेंट ने स्टेट यूनिवर्सिटी पीएचडी कोर्स के लिए सहगल समिति की सिफारिशों को लागू करने का डिसीजन लिया था। सही मॉनिटरिंग न होने की वजह से शुरू से ही लेटलतीफी हुई। पहले तो समिति की सिफारिश पर डिसीजन लेने में देर की गई। फिर इसके इम्प्लीमेंटेशन में भी देरी हुई। नतीजा दो हज़ार दस-ग्यारह के बाद अभी तक स्टेट यूनिवर्सिटीज के पीएचडी कोर्स में एडमिशन हो ही नहीं पाया। सहगल समिति ने सभी स्टेट यूनिवर्सिटीज के पीएचडी कोर्स में एडमिशन के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट कराने की सिफारिश की थी। मंशा थी रिसर्च की क्वालिटी मेंटेन करने की। साथ ही एडमिशन प्रॉसेस राइट टाइम करने की। सिफारिशें मंजूर करने के बाद तीस मई दो हज़ार ग्यारह को तत्कालीन हायर एजूकेशन सेक्रेटरी अवनीश कुमार अवस्थी ने एक आदेश जारी किया। छः जुलाई दो हज़ार ग्यारह को दिए गए इस आदेश के मुताबिक सभी यूनिवर्सिटी के पीएचडी कोर्स में एडमिशन प्रॉसेज पर रोक लगाने को कहा गया था। कहा गया था कि अब एडमिशन नए रूल्स के मुताबिक होगा। - फॉर्म सबमिट करने की लास्ट डेट बीस मार्च रखी गई। फॉर्म अवेलेबल न हो पाने के कारण इसे इकतीस मार्च तक एक्सटेंड किया गया। - नतीजा यूनिवर्सिटी टेस्ट डेट भी टालनी पड़ी। टेस्ट की प्रस्तावित डेट उनतीस अप्रैल को टालकर एक जून करना पड़ा। पीएचडी कोर्स में एडमिशन की बाट जोह रहे स्टूडेंट्स की धड़कनें बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि अभी पूरा का पूरा एडमिशन प्रॉसेज बाकी है। बता दें कि एलिजिबिलिटी टेस्ट में पास होने वाले कैंडिडेट्स ही स्टेट यूनिवर्सिटी के पीएचडी कोर्स में एडमिशन लेने के लिए एलिजिबल होंगे। कैंडिडेट्स को एडमिशन के लिए सभी यूनिवर्सिटी के एडमिशन प्रॉसेज को अलग-अलग फॉलो करना होगा। स्टूडेंट्स को अभी सीईटी रिजल्ट का इंतजार है।
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स्पोर्ट्स डेस्कः टी-20 विश्व कप की शुरूआत 16 अक्तूबर से ऑस्ट्रेलिया में होने जा रही है। भारतीय टीम भी टी-20 विश्व कप के लिए ऑस्ट्रेलिया रवाना हो चुकी है। भारत अपने अभियान की शुरूआत 23 अक्तूबर से करेगा और अपना पहला मैच पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगा। टी-20 विश्व में भारत बनाम पाकिस्तान के महामुकाबले पर पूर्व क्रिकेटर और मौजूदा पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष रमीज राजा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देर से सही मगर भारत ने हमें सम्मान देना शुरू कर दिया है।
रमीज राजा ने कहा,"स्किल और टैलेंट से ज्यादा मेंटल मैच होता है, अगर आप स्वभाव से मजबूत हैं और मानसिक रूप से फोकस्ड हैं और हार मानने को तैयार नहीं हैं तो छोटी टीम भी बड़ी टीम को हरा सकती है। जब भी पाकिस्तान का भारत से मुक़ाबला हुआ है, पाकिस्तान हमेशा से अंडरडॉग रहा है, लेकिन देर से ही सही भारत ने हमें सम्मान देना शुरू कर दिया है। "
रमीज ने आगे कहा,"भारत के ख्याल में ये है कि पाकिस्तान हमें कभी हरा ही नहीं सकता। मैं ये कहता हूं की पाकिस्तान को क्रेडिट दीजिये क्योंकि एक बिलियन डॉलर टीम क्रिकेट इंडस्ट्री को हम हराते हैं। मैं तो खुद विश्व कप खेला हूं, हम लोग तो इंडिया को हरा नहीं पाते थे। इस टीम को क्रेडिट देना चाहिए क्योंकि भारत की तुलना में सीमित संसाधनों के साथ तैयार होकर यह तगड़ा मुकाबला करते हैं। "
रोहित शर्मा (कप्तान), केएल राहुल (उप-कप्तान), विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, दीपक हुड्डा, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), दिनेश कार्तिक (विकेटकीपर), हार्दिक पंड्या, आर. अश्विन, युजवेंद्र चहल, अक्षर पटेल, भुवनेश्वर कुमार, हर्षल पटेल, अर्शदीप सिंह।
स्टैंडबाय खिलाड़ीः मोहम्मद शमी, श्रेयस अय्यर, रवि बिश्नोई, दीपक चाहर।
बाबर आजम (कप्तान), शादाब खान, आसिफ अली, मोहम्मद नवाज, मोहम्मद रिजवान, मोहम्मद वसीम जूनियर, नसीम शाह, शाहीन शाह अफरीदी, शान मसूद, उस्मान कादिर, हैदर अली, हारिस रऊफ, इफ्तिखार अहमद, खुशदिल शाह, मोहम्मद हसनैन।
स्टैंडबाय खिलाड़ीः मोहम्मद हारिस, फखर जमां और शाहनवाज दहानी।
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स्पोर्ट्स डेस्कः टी-बीस विश्व कप की शुरूआत सोलह अक्तूबर से ऑस्ट्रेलिया में होने जा रही है। भारतीय टीम भी टी-बीस विश्व कप के लिए ऑस्ट्रेलिया रवाना हो चुकी है। भारत अपने अभियान की शुरूआत तेईस अक्तूबर से करेगा और अपना पहला मैच पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगा। टी-बीस विश्व में भारत बनाम पाकिस्तान के महामुकाबले पर पूर्व क्रिकेटर और मौजूदा पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष रमीज राजा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देर से सही मगर भारत ने हमें सम्मान देना शुरू कर दिया है। रमीज राजा ने कहा,"स्किल और टैलेंट से ज्यादा मेंटल मैच होता है, अगर आप स्वभाव से मजबूत हैं और मानसिक रूप से फोकस्ड हैं और हार मानने को तैयार नहीं हैं तो छोटी टीम भी बड़ी टीम को हरा सकती है। जब भी पाकिस्तान का भारत से मुक़ाबला हुआ है, पाकिस्तान हमेशा से अंडरडॉग रहा है, लेकिन देर से ही सही भारत ने हमें सम्मान देना शुरू कर दिया है। " रमीज ने आगे कहा,"भारत के ख्याल में ये है कि पाकिस्तान हमें कभी हरा ही नहीं सकता। मैं ये कहता हूं की पाकिस्तान को क्रेडिट दीजिये क्योंकि एक बिलियन डॉलर टीम क्रिकेट इंडस्ट्री को हम हराते हैं। मैं तो खुद विश्व कप खेला हूं, हम लोग तो इंडिया को हरा नहीं पाते थे। इस टीम को क्रेडिट देना चाहिए क्योंकि भारत की तुलना में सीमित संसाधनों के साथ तैयार होकर यह तगड़ा मुकाबला करते हैं। " रोहित शर्मा , केएल राहुल , विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव, दीपक हुड्डा, ऋषभ पंत , दिनेश कार्तिक , हार्दिक पंड्या, आर. अश्विन, युजवेंद्र चहल, अक्षर पटेल, भुवनेश्वर कुमार, हर्षल पटेल, अर्शदीप सिंह। स्टैंडबाय खिलाड़ीः मोहम्मद शमी, श्रेयस अय्यर, रवि बिश्नोई, दीपक चाहर। बाबर आजम , शादाब खान, आसिफ अली, मोहम्मद नवाज, मोहम्मद रिजवान, मोहम्मद वसीम जूनियर, नसीम शाह, शाहीन शाह अफरीदी, शान मसूद, उस्मान कादिर, हैदर अली, हारिस रऊफ, इफ्तिखार अहमद, खुशदिल शाह, मोहम्मद हसनैन। स्टैंडबाय खिलाड़ीः मोहम्मद हारिस, फखर जमां और शाहनवाज दहानी।
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मुंबईः कोरोनोवायरस लॉकडाउन के दौरान घर में कैद बॉलीवुड दीवा मलाइका अरोड़ा ने स्वीट डेजर्ट बनाया, जिसकी तस्वीर उनके कथित बॉयफ्रेंड व अभिनेता अर्जुन कपूर ने सोशल मीडिया पर साझा की है।
अर्जुन ने डेजर्ट की झलकी इंस्टाग्राम पर बूमरैंग के माध्यम से साझा की है, इसे उन्होंने ईस्टर केक बताया। वहीं स्टोरी में उन्होंने मलाइका का नाम न लेते हुए 'उसका' (हर) लिखा और साथ ही दिल वाली इमोजी भी लगाई।
अपने रिश्ते को बहुत लंबे समय तक अंधेरे में रखने के बाद, अर्जुन और मलाइका अब खुलेआम साथ नजर आते हैं। डिनर डेट से लेकर पार्टियों और फिल्म की स्क्रीनिंग तक इस जोड़े की कई बार एक साथ तस्वीरें खिंचवाते देखा गया है।
वहीं काम की बात करें तो अर्जुन की अगली फिल्म 'संदीप और पिंकी फरार' है। फिल्म का निर्देशन दिबाकर बनर्जी ने किया है। फिल्म में परिणीति चोपड़ा भी हैं।
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मुंबईः कोरोनोवायरस लॉकडाउन के दौरान घर में कैद बॉलीवुड दीवा मलाइका अरोड़ा ने स्वीट डेजर्ट बनाया, जिसकी तस्वीर उनके कथित बॉयफ्रेंड व अभिनेता अर्जुन कपूर ने सोशल मीडिया पर साझा की है। अर्जुन ने डेजर्ट की झलकी इंस्टाग्राम पर बूमरैंग के माध्यम से साझा की है, इसे उन्होंने ईस्टर केक बताया। वहीं स्टोरी में उन्होंने मलाइका का नाम न लेते हुए 'उसका' लिखा और साथ ही दिल वाली इमोजी भी लगाई। अपने रिश्ते को बहुत लंबे समय तक अंधेरे में रखने के बाद, अर्जुन और मलाइका अब खुलेआम साथ नजर आते हैं। डिनर डेट से लेकर पार्टियों और फिल्म की स्क्रीनिंग तक इस जोड़े की कई बार एक साथ तस्वीरें खिंचवाते देखा गया है। वहीं काम की बात करें तो अर्जुन की अगली फिल्म 'संदीप और पिंकी फरार' है। फिल्म का निर्देशन दिबाकर बनर्जी ने किया है। फिल्म में परिणीति चोपड़ा भी हैं।
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[ अलङ्कार विवेचन
अग्नि को। अथ च रत्न शब्द से रत्नविद्या का ग्रहण है उस रत्नविद्या का जो श्राधार' है उस अग्नि को ।
( रत्नधातमम् ) रत्न = रमण करने के जो पृथिवी आदि स्थान हैं उन को परमेश्वर धारण करता है । ( आध्यात्मिक अर्थ में )
यहां पर भौतिकाग्नि परक ऋग्वेद के प्रथम मन्त्र की व्याख्या आर्यभाषा में समाप्त दोनों अर्थ करने के कारण अलंकारों पर विचार किया जाता है ।
(विवेचन )
महर्षि ने लिखा है कि इस मन्त्र में श्लेषाकार है अतः आध्यात्मिक और भौतिक दोनों अर्थ इस मन्त्र के हैं ।
( श्लेवालंकार का लक्षण )
जिन शब्दों के अर्थ भिन्न भिन्न हैं पर आकृति एक जैसी है वे शब्द समान उच्चा• अग्+ रण के कारण जहां परस्पर मिले होते हैं उस को श्लेषालङ्कार कहते हैं । जैसे नि - अग्निः = परमेश्वर और अ + ग् + नि - अग्निः = भौतिक अग्नि दोनों अग्नि शब्दों
के अर्थ पृथक पृथक हैं पर आकृति एक जैसी है अतः "अग्निमळे पुरोहि॑ितम्"
मन्त्र में श्लेषालकार है। अग्नि के विशेषण भी सब श्लिष्ट हैं ।
यह श्लेषालंकार ६ प्रकार का है -
१ - वर्णश्लेष । २ - पदश्लेष । ३ - लिङ्गलेष । ४ - भाषाश्लेष । ५ - प्रकृतिश्लेष । ६ - प्रत्ययश्लेष । ७ - विभक्ति श्लेष । - वचनश्लेष । ६ - अभङ्गश्लेष ।
इस मन्त्र में अभङ्गश्लेष अलङ्कार है। पूर्वोक्ताठ भेदों को सभंग श्लेष कहते हैं क्योंकि उन श्लेषों में पदों को भिन्न भिन्न रूप से विश्लेषण करना पड़ता है। जैसे वर्णश्लेष में - विधि सप्तमी एक वचन में विधो और विधु सप्तमी एक वचन में भी विधौ बनता है। इ उ कां श्लेष है। पर अग्निम् = परमात्मानम् । अग्निम् = भौतिकाग्निम् । यहां दोनों अग्निम् का समान रूप से निर्देश है अतः यहां अभङ्गश्लेष नामक नवम् श्लेष है। इन दोनों 'अग्निम्' में स्वरादि का भी कोई भेद नहीं है ।
इस मन्त्र में अग्निम् के भी दो अर्थ हैं और 'अग्निम्' के विशेषणों के भी दो दो अर्थ हैं। जहां विशेषणों के ही दो अर्थ होते हैं पर विशेष्य के दो अर्थ नहीं होते वह
१ - शुक्रनीति मादि में यह बात बताई गई है कि इस अग्नि के प्रभाव से रत्नों का निर्माण होता है।
ऋ० १११ । १ ।। द्वितीयोऽर्थः]
'समासोक्कि' अलंकार होता है। और जहां विशेषण और विशेष्य दोनों श्लिष्ट दीखते द्दों पर प्रकरण आदि के द्वारा एक ही अर्थ हो सकता हो वहां दूसरा अर्थ श्रमिलामूल व्यञ्जना से होता है। इस मन्त्र में दोनों अर्थ प्राकरणिक हैं अतः यहां लब्दश्लेष अलंकार है। इस मन्त्र में आए 'अग्निम्' आदि शब्दों के पर्यायवाचक शब्द वह्नि या परमेश्वर रख देने पर अलङ्कार नहीं बन सकता। इन्हीं शब्दों के रहने पर अलंकार रह सकता है अतः यह श्लेषालङ्कार शब्दश्लेषालङ्कार है अर्थालङ्कार नहीं । संस्कृत प्रमाण पृष्ठ २६०, २६१ पर देखो ।
यह अभङ्गश्लेष अर्थालङ्कार है शब्दालङ्कार नहीं । ऐसा अलङ्कार सर्वस्वकार और पण्डितराज जगन्नाथ मानते हैं । परन्तु मम्मट इस अभङ्गश्लेष को शब्दालङ्कार मानते हैं।
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[ अलङ्कार विवेचन अग्नि को। अथ च रत्न शब्द से रत्नविद्या का ग्रहण है उस रत्नविद्या का जो श्राधार' है उस अग्नि को । रत्न = रमण करने के जो पृथिवी आदि स्थान हैं उन को परमेश्वर धारण करता है । यहां पर भौतिकाग्नि परक ऋग्वेद के प्रथम मन्त्र की व्याख्या आर्यभाषा में समाप्त दोनों अर्थ करने के कारण अलंकारों पर विचार किया जाता है । महर्षि ने लिखा है कि इस मन्त्र में श्लेषाकार है अतः आध्यात्मिक और भौतिक दोनों अर्थ इस मन्त्र के हैं । जिन शब्दों के अर्थ भिन्न भिन्न हैं पर आकृति एक जैसी है वे शब्द समान उच्चा• अग्+ रण के कारण जहां परस्पर मिले होते हैं उस को श्लेषालङ्कार कहते हैं । जैसे नि - अग्निः = परमेश्वर और अ + ग् + नि - अग्निः = भौतिक अग्नि दोनों अग्नि शब्दों के अर्थ पृथक पृथक हैं पर आकृति एक जैसी है अतः "अग्निमळे पुरोहि॑ितम्" मन्त्र में श्लेषालकार है। अग्नि के विशेषण भी सब श्लिष्ट हैं । यह श्लेषालंकार छः प्रकार का है - एक - वर्णश्लेष । दो - पदश्लेष । तीन - लिङ्गलेष । चार - भाषाश्लेष । पाँच - प्रकृतिश्लेष । छः - प्रत्ययश्लेष । सात - विभक्ति श्लेष । - वचनश्लेष । छः - अभङ्गश्लेष । इस मन्त्र में अभङ्गश्लेष अलङ्कार है। पूर्वोक्ताठ भेदों को सभंग श्लेष कहते हैं क्योंकि उन श्लेषों में पदों को भिन्न भिन्न रूप से विश्लेषण करना पड़ता है। जैसे वर्णश्लेष में - विधि सप्तमी एक वचन में विधो और विधु सप्तमी एक वचन में भी विधौ बनता है। इ उ कां श्लेष है। पर अग्निम् = परमात्मानम् । अग्निम् = भौतिकाग्निम् । यहां दोनों अग्निम् का समान रूप से निर्देश है अतः यहां अभङ्गश्लेष नामक नवम् श्लेष है। इन दोनों 'अग्निम्' में स्वरादि का भी कोई भेद नहीं है । इस मन्त्र में अग्निम् के भी दो अर्थ हैं और 'अग्निम्' के विशेषणों के भी दो दो अर्थ हैं। जहां विशेषणों के ही दो अर्थ होते हैं पर विशेष्य के दो अर्थ नहीं होते वह एक - शुक्रनीति मादि में यह बात बताई गई है कि इस अग्नि के प्रभाव से रत्नों का निर्माण होता है। ऋशून्य एक सौ ग्यारह । एक ।। द्वितीयोऽर्थः] 'समासोक्कि' अलंकार होता है। और जहां विशेषण और विशेष्य दोनों श्लिष्ट दीखते द्दों पर प्रकरण आदि के द्वारा एक ही अर्थ हो सकता हो वहां दूसरा अर्थ श्रमिलामूल व्यञ्जना से होता है। इस मन्त्र में दोनों अर्थ प्राकरणिक हैं अतः यहां लब्दश्लेष अलंकार है। इस मन्त्र में आए 'अग्निम्' आदि शब्दों के पर्यायवाचक शब्द वह्नि या परमेश्वर रख देने पर अलङ्कार नहीं बन सकता। इन्हीं शब्दों के रहने पर अलंकार रह सकता है अतः यह श्लेषालङ्कार शब्दश्लेषालङ्कार है अर्थालङ्कार नहीं । संस्कृत प्रमाण पृष्ठ दो सौ साठ, दो सौ इकसठ पर देखो । यह अभङ्गश्लेष अर्थालङ्कार है शब्दालङ्कार नहीं । ऐसा अलङ्कार सर्वस्वकार और पण्डितराज जगन्नाथ मानते हैं । परन्तु मम्मट इस अभङ्गश्लेष को शब्दालङ्कार मानते हैं।
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गुवाहाटी। असम में हाई स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (HSLC) परीक्षा का रिजल्ट आ चुका है। इस एग्जाम में आरएसएस के स्कूल में पढ़ने वाले एक मुस्लिम छात्र सरफराज हुसैन ने टॉप किया है। सरफराज ने 600 में से 590 अंक प्राप्त किये।
गुवाहाटी के दक्षिण में स्थित बेटकुची के शंकरदेव शिशु निकेतन में 16 साल का सरफराज पढ़ता है। यह स्कूल विद्या भारती से सम्बद्ध है। सरफराज ने राज्य में टॉप करने पर कहा, 'मुझे गर्व है कि मैं इस स्कूल का छात्र हूं। ' सरफराज ने कहा, 'इस स्कूल में मिली शिक्षा की बदौलत ही राज्य में टॉप कर पाया।
सरफराज ने बताया, 'मुझे संस्कृत में प्रार्थना बोलने में कोई परेशानी नहीं है। गायत्री मंत्र भी मैं पढ़ता हूं। ' 8वीं कक्षा तक वह संस्कृत में 100/100 नंबर लाते रहे थे।
सरफराज के पिता अजमल हुसैन ने कहा कि आरएसएस के स्कूल में उनके बेटे की पढ़ाई में उन्हें कुछ भी गलत नजर नहीं आता है। वह केवल अपने बच्चे की अच्छी शिक्षा पर ध्यान देना चाहते थे।
हुसैन बताते हैं कि 'जब मैं पहली बार अपने बेटे को यहां लेकर आया था, हेडमास्टर ने मुझसे कहा कि आपके बेटे को श्लोक पढ़ने पड़ेंगे जिसमें गायत्री मंत्र और सरस्वती वंदना भी शामिल है। मैंने इसपर सहमति जता दी। हुसैन कहते हैं कि शिक्षा ऐसी हो जो गुणवत्तापूर्ण हो और व्यक्तित्व निर्माण करे।
इसके अलावा, हुसैन ने कहा कि वह दरांग जिले के पथारूघाट के रहने वाले हैं, ये वो जगह है जहां 1884 में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ हिंदू और मुस्लिमों ने मिलकर विद्रोह किया था। अगर हमारे पूर्वज हिंदुओं के साथ मिलकर अपनी जिंदगी कुर्बान कर सकते हैं तो मुझे कोई वजह नजर नहीं आती कि आखिर क्यों मेरे बच्चे को ऐसे स्कूल में नहीं शिक्षा दिलानी चाहिए।
सरफराज ने संस्कृत में निबंध लेखन प्रतियोगिया और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भी इनाम जीते हैं। दो साल पहले सरफराज ने ऑल-गुवाहाटी गीता रीसाइटेशन कॉन्टेस्ट भी जीता था।
10वीं की परीक्षा के लिए पूरे असम से 3. 8 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। इस परीक्षा में 2. 39 लाख छात्र पास हुए। 54,197 फर्स्ट डिविजन से पास हुए, 96,568 सेकेंड डिविजन और 88,849 थर्ड डिविजन से पास हुए।
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गुवाहाटी। असम में हाई स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट परीक्षा का रिजल्ट आ चुका है। इस एग्जाम में आरएसएस के स्कूल में पढ़ने वाले एक मुस्लिम छात्र सरफराज हुसैन ने टॉप किया है। सरफराज ने छः सौ में से पाँच सौ नब्बे अंक प्राप्त किये। गुवाहाटी के दक्षिण में स्थित बेटकुची के शंकरदेव शिशु निकेतन में सोलह साल का सरफराज पढ़ता है। यह स्कूल विद्या भारती से सम्बद्ध है। सरफराज ने राज्य में टॉप करने पर कहा, 'मुझे गर्व है कि मैं इस स्कूल का छात्र हूं। ' सरफराज ने कहा, 'इस स्कूल में मिली शिक्षा की बदौलत ही राज्य में टॉप कर पाया। सरफराज ने बताया, 'मुझे संस्कृत में प्रार्थना बोलने में कोई परेशानी नहीं है। गायत्री मंत्र भी मैं पढ़ता हूं। ' आठवीं कक्षा तक वह संस्कृत में एक सौ/एक सौ नंबर लाते रहे थे। सरफराज के पिता अजमल हुसैन ने कहा कि आरएसएस के स्कूल में उनके बेटे की पढ़ाई में उन्हें कुछ भी गलत नजर नहीं आता है। वह केवल अपने बच्चे की अच्छी शिक्षा पर ध्यान देना चाहते थे। हुसैन बताते हैं कि 'जब मैं पहली बार अपने बेटे को यहां लेकर आया था, हेडमास्टर ने मुझसे कहा कि आपके बेटे को श्लोक पढ़ने पड़ेंगे जिसमें गायत्री मंत्र और सरस्वती वंदना भी शामिल है। मैंने इसपर सहमति जता दी। हुसैन कहते हैं कि शिक्षा ऐसी हो जो गुणवत्तापूर्ण हो और व्यक्तित्व निर्माण करे। इसके अलावा, हुसैन ने कहा कि वह दरांग जिले के पथारूघाट के रहने वाले हैं, ये वो जगह है जहां एक हज़ार आठ सौ चौरासी में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ हिंदू और मुस्लिमों ने मिलकर विद्रोह किया था। अगर हमारे पूर्वज हिंदुओं के साथ मिलकर अपनी जिंदगी कुर्बान कर सकते हैं तो मुझे कोई वजह नजर नहीं आती कि आखिर क्यों मेरे बच्चे को ऐसे स्कूल में नहीं शिक्षा दिलानी चाहिए। सरफराज ने संस्कृत में निबंध लेखन प्रतियोगिया और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भी इनाम जीते हैं। दो साल पहले सरफराज ने ऑल-गुवाहाटी गीता रीसाइटेशन कॉन्टेस्ट भी जीता था। दसवीं की परीक्षा के लिए पूरे असम से तीन. आठ लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। इस परीक्षा में दो. उनतालीस लाख छात्र पास हुए। चौवन,एक सौ सत्तानवे फर्स्ट डिविजन से पास हुए, छियानवे,पाँच सौ अड़सठ सेकेंड डिविजन और अठासी,आठ सौ उनचास थर्ड डिविजन से पास हुए।
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छत्तीसगढ़ में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर के पूर्व विधायक संतोष बाफना और बैदुराम कश्यप को कोर्ट ने जमानत दे दी है। सभी को पांच-पांच हजार रुपए मुचलके में जमानत दी गई है। दरअसल, इन भाजपा के नेताओं पर कुछ माह पहले रेलवे ने केस दर्ज करवाया था। जिस पर मंगलवार को सभी को जमानत मिल गई है। मामला जगदलपुर सिटी कोतवाली क्षेत्र का है।
जानकारी के मुताबिक, जगदलपुर नगर निगम की कांग्रेसी पार्षद कोमल सेना के ऊपर भाजपाइयों और वार्ड की जनता ने PM आवास दिलाने के नाम पर गरीबों से लाखों रुपए वसूलने का आरोप लगाया था। इसी विरोध में वार्डवासी और भाजपा के कार्यकर्ता आंदोलन में बैठे हुए थे। जब यह मामला तूल पकड़ा तो रेलवे के अधिकारी भी हरकत पर आए और रेलवे की जमीन पर जो लोग कब्जाकर बैठे थे उनको नोटिस थमाया गया था।
इनमें ज्यादातर वे लोग थे जो पार्षद पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाए थे। उनका रेलवे की जमीन पर मकान था। रेलवे ने उनको जमीन खाली करने नोटिस थमा दिया था। इसी के विरोध में भाजपा के कार्यकर्ता भी आंदोलन पर उतर आए थे। रेलवे के खिलाफ भी जमकर हंगामा किया गया था। वहीं रेलवे ने अधिकारियों ने केदार कश्यप संतोष बाफना और बैदुराम कश्यप पर FIR दर्ज करवा दी थी। जिसके बाद आज मंगलवार को कोर्ट से इन सभी भाजपा के नेताओं को जमानत मिल गई है।
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छत्तीसगढ़ में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर के पूर्व विधायक संतोष बाफना और बैदुराम कश्यप को कोर्ट ने जमानत दे दी है। सभी को पांच-पांच हजार रुपए मुचलके में जमानत दी गई है। दरअसल, इन भाजपा के नेताओं पर कुछ माह पहले रेलवे ने केस दर्ज करवाया था। जिस पर मंगलवार को सभी को जमानत मिल गई है। मामला जगदलपुर सिटी कोतवाली क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक, जगदलपुर नगर निगम की कांग्रेसी पार्षद कोमल सेना के ऊपर भाजपाइयों और वार्ड की जनता ने PM आवास दिलाने के नाम पर गरीबों से लाखों रुपए वसूलने का आरोप लगाया था। इसी विरोध में वार्डवासी और भाजपा के कार्यकर्ता आंदोलन में बैठे हुए थे। जब यह मामला तूल पकड़ा तो रेलवे के अधिकारी भी हरकत पर आए और रेलवे की जमीन पर जो लोग कब्जाकर बैठे थे उनको नोटिस थमाया गया था। इनमें ज्यादातर वे लोग थे जो पार्षद पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाए थे। उनका रेलवे की जमीन पर मकान था। रेलवे ने उनको जमीन खाली करने नोटिस थमा दिया था। इसी के विरोध में भाजपा के कार्यकर्ता भी आंदोलन पर उतर आए थे। रेलवे के खिलाफ भी जमकर हंगामा किया गया था। वहीं रेलवे ने अधिकारियों ने केदार कश्यप संतोष बाफना और बैदुराम कश्यप पर FIR दर्ज करवा दी थी। जिसके बाद आज मंगलवार को कोर्ट से इन सभी भाजपा के नेताओं को जमानत मिल गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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बीजू पौधे तैयार करना :
बीज से पौधा तैयार करने की साधारण युक्ति प्रायः सब कृषक जानते हैं। इसमें सिर्फ यही ध्यान रखना है कि अन्नवा तरकारी के बीजों की भांति फलों के बीजों की उत्पन्न शक्ति अधिक दिनों तक नहीं रहती, इसलिए जहाँ तक हो ताज़े बीज लगा देना चाहिए ।
प्रायः सभी पौधे पहले नर्सरी में तैयार किये जा सकते हैं और बाद में समय आने पर निर्धारित स्थान पर लगाये जा सकते हैं। कुछ बीज ऐसे हैं जैसे खरबूजा, तरबूज आदि कि जिनके बीज सीधे खेत में ही लगाये जाते हैं ।
नर्सरी हमेशा बलुआ दुमट मिट्टी की अच्छी होती है। यदि ऐसी न मिले तो मटियार में बालू और बलुआ मे मटियार मिट्टी मिलाकर वैसी बना लेनी चाहिए । गोबर और सड़े हुए पत्तों का खाद बराबर भाग में मिलाकर नर्सरी की मिट्टी में प्रतिवर्ग गजु दो तीन सेर खाद पहुॅचे इतना डालना चाहिए ।
फलों की खेती वालों को खेतों में लगाये जाने वाले बीजू पौधों के सिवाय जिन पौधों पर कलम चढ़ायी जाती है वे भी तैयार करने पड़ते है सो उन्हें भी नर्सरी में तैयार करना चाहिए ताकि उत्तम स्वस्थ पौधे मिल सकें।
कुलमी पौधे तैयार करना : - कलमी पौधे क्यो तैयार किये जाते हैं ? जगत नियन्ता के नियमानुसार उच्चकोटि के प्राणी या पौधों की उत्पत्ति नर नारी के मेल से होती है ।
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बीजू पौधे तैयार करना : बीज से पौधा तैयार करने की साधारण युक्ति प्रायः सब कृषक जानते हैं। इसमें सिर्फ यही ध्यान रखना है कि अन्नवा तरकारी के बीजों की भांति फलों के बीजों की उत्पन्न शक्ति अधिक दिनों तक नहीं रहती, इसलिए जहाँ तक हो ताज़े बीज लगा देना चाहिए । प्रायः सभी पौधे पहले नर्सरी में तैयार किये जा सकते हैं और बाद में समय आने पर निर्धारित स्थान पर लगाये जा सकते हैं। कुछ बीज ऐसे हैं जैसे खरबूजा, तरबूज आदि कि जिनके बीज सीधे खेत में ही लगाये जाते हैं । नर्सरी हमेशा बलुआ दुमट मिट्टी की अच्छी होती है। यदि ऐसी न मिले तो मटियार में बालू और बलुआ मे मटियार मिट्टी मिलाकर वैसी बना लेनी चाहिए । गोबर और सड़े हुए पत्तों का खाद बराबर भाग में मिलाकर नर्सरी की मिट्टी में प्रतिवर्ग गजु दो तीन सेर खाद पहुॅचे इतना डालना चाहिए । फलों की खेती वालों को खेतों में लगाये जाने वाले बीजू पौधों के सिवाय जिन पौधों पर कलम चढ़ायी जाती है वे भी तैयार करने पड़ते है सो उन्हें भी नर्सरी में तैयार करना चाहिए ताकि उत्तम स्वस्थ पौधे मिल सकें। कुलमी पौधे तैयार करना : - कलमी पौधे क्यो तैयार किये जाते हैं ? जगत नियन्ता के नियमानुसार उच्चकोटि के प्राणी या पौधों की उत्पत्ति नर नारी के मेल से होती है ।
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मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की अध्यक्षता वाली केरल कैबिनेट ने बुधवार को सूडान से लाए गए सभी लोगों को राज्य के चार हवाईअड्डों में से किसी एक में मुफ्त हवाई यात्रा करने देने का फैसला किया।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (फाइल फोटो)
कैबिनेट ने नोरका विभाग (केरल प्रवासी के हितों की देखभाल करने वाली एजेंसी) को अधिकृत करने का निर्णय लिया है।
3 अप्रैल को 'ऑपरेशन कावेरी' फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए शुरू किया गया। आईएनएस सुमेधा के अलावा, भारतीय वायु सेना के दो विमानों को सूडान की राजधानी खार्तूम में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए भेजा गया था, जहां 15 अप्रैल के बाद गृहयुद्ध छिड़ गया था। इसकी सेना और अर्धसैनिक बल आपस में भिड़ गए, जिससे बड़े पैमाने पर हिंसा हुई, जिसके कारण 400 से अधिक लोग मारे गए।
भारतीय जहाजों पर वहां पहुंचने के बाद निकासी को सऊदी अरब से भारत लाया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, लगभग 500 केरलवासी सूडान से निकासी की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसमें एक केरलवासी अल्बर्ट ऑगस्टाइन का परिवार भी शामिल है, जो फोन पर बात करते समय क्रॉस फायरिंग में मारे गए थे।
पिछले हफ्ते, विजयन ने फंसे हुए भारतीयों को घर लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।
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मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की अध्यक्षता वाली केरल कैबिनेट ने बुधवार को सूडान से लाए गए सभी लोगों को राज्य के चार हवाईअड्डों में से किसी एक में मुफ्त हवाई यात्रा करने देने का फैसला किया। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन कैबिनेट ने नोरका विभाग को अधिकृत करने का निर्णय लिया है। तीन अप्रैल को 'ऑपरेशन कावेरी' फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए शुरू किया गया। आईएनएस सुमेधा के अलावा, भारतीय वायु सेना के दो विमानों को सूडान की राजधानी खार्तूम में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए भेजा गया था, जहां पंद्रह अप्रैल के बाद गृहयुद्ध छिड़ गया था। इसकी सेना और अर्धसैनिक बल आपस में भिड़ गए, जिससे बड़े पैमाने पर हिंसा हुई, जिसके कारण चार सौ से अधिक लोग मारे गए। भारतीय जहाजों पर वहां पहुंचने के बाद निकासी को सऊदी अरब से भारत लाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, लगभग पाँच सौ केरलवासी सूडान से निकासी की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसमें एक केरलवासी अल्बर्ट ऑगस्टाइन का परिवार भी शामिल है, जो फोन पर बात करते समय क्रॉस फायरिंग में मारे गए थे। पिछले हफ्ते, विजयन ने फंसे हुए भारतीयों को घर लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।
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हेमंत सरकार में शामिल कांग्रेस कोटे के मंत्रियों पर तलवार लटक रही है। आलाकमान ने सभी मंत्रियों के प्रदर्शन का आंकलन किया है। इसमें जिनका प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं होगा वे मंत्रिपरिषद से हटाए जा सकते हैं। उनके स्थान पर नए चेहरे को जगह दी जाएगी।
प्रदीप सिंह, रांचीः हेमंत सरकार में शामिल कांग्रेस कोटे के मंत्रियों पर तलवार लटक रही है। आलाकमान ने सभी मंत्रियों के प्रदर्शन का आंकलन किया है। इसमें जिनका प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं होगा, वे मंत्रिपरिषद से हटाए जा सकते हैं। उनके स्थान पर नए चेहरे को जगह दी जाएगी।
इस संबंध में अंतिम निर्णय तक पहुंचने के लिए दल के विधायकों समेत संगठनात्मक स्तर पर मिली शिकायतों को भी ध्यान रखा जाएगा। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय इसे लेकर सक्रिय हैं। उन्होंने इस संबंध में प्रदेश के कई वरीय नेताओं संग मंत्रणा की है। अलग-अलग स्तर मिले फीडबैक का आंकलन करने के बाद आलाकमान को वे इस संबंध में अंतिम रिपोर्ट सौंपेगे।
हालांकि कांग्रेस कोटे के मंत्रियों में फेरबदल की यह कवायद कुछ समय पूर्व से ही चल रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा समेत कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव के कारण यह टल रहा था। अब इसपर अंतिम फैसला शीघ्र होगा। निर्णय लेने के पहले प्रदेश के वरीय नेताओं के सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी।
कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की यह शिकायत है कि पार्टी कोटे से शामिल मंत्री उनकी सुनते नहीं हैं। वे चुनिंदा लोगों से घिरे रहते हैं। जिलों के दौरे के क्रम में प्रदेश प्रभारी को इससे संबंधित सबसे ज्यादा नाराजगी देखने को मिली है। पार्टी के संवाद कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने खुलकर अपनी भड़ास निकाली है। इसके अलावा विधायकों ने भी शिकायत की है कि उनके क्षेत्र में भ्रमण और कार्यक्रम तय होने के बावजूद उन्हें मंत्री सूचित नहीं करते। हजारीबाग जिले के एक विधायक ने हाल ही में एक मंत्री की शिकायत ऊपर तक पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि मंत्री ने उनके घर के बगल में चाय पी और उन्हें सूचित तक नहीं किया।
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय ने कार्यभार संभालने के बाद निर्देश दिया था कि कांग्रेस कोटे के मंत्री प्रदेश कार्यालय में जनसुनवाई करेंगे। वे इस दौरान आमलोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं की शिकायतें सुनकर समाधान करेंगे। आरंभ में मंत्रियों ने जनसुनवाई की, लेकिन यह जल्द ही बंद हो गया। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के निर्देश पर मंत्रियों को छह-छह जिलों का प्रभार दिया गया था।
मंत्रियों ने शुरू में जिलों के दौरे किए, लेकिन बाद में यह ठप हो गया। मंत्री आलमगीर आलम को साहिबगंज, गोड्डा, बोकारो, पाकुड़, हजारीबाग और गिरिडीह, डा. रामेश्वर उरांव को खूंटी, सिमडेगा, गुमला, रामगढ़, लोहरदगा और पलामू, बन्ना गुप्ता को धनबाद, जमशेदपुर, सरायकेला, रांची, चतरा और कोडरमा एवं बादल को चाईबासा, गढ़वा, देवघर, दुमका, जामताड़ा और लातेहार की जिम्मेदारी दी गई थी।
मंत्रिमंडल में कांग्रेस कोटे के मंत्रियों में फेरबदल पर मुहर लगी तो एक महिला विधायक को मौका मिल सकता है। महिला विधायकों में महगामा की विधायक दीपिका पांडेय सिंह, झरिया की विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह और बड़कागांव की विधायक अंबा प्रसाद शामिल हैं। रामगढ़ की विधायक ममता देवी की विधायकी समाप्त हो चुकी है। अगर मंत्रियों में फेरबदल का निर्णय कांग्रेस आलाकमान ने लिया तो महिला विधायकों को अवश्य मौका मिलेगा।
डा. रामेश्वर उरांव - पार्टी के कार्यक्रमों के प्रति रहते हैं उदासीन। प्रभारी तक के कार्यक्रमों से बनाते हैं दूरी। विभागों में कम सक्रियता, प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद कम हुई सक्रियता।
आलमगीर आलम - विधायकों पर अपेक्षाकृत कमजोर पकड़, विधानसभा के सत्रों में दिखती है परस्पर तालमेल की कमी, विधायकों ने की है शिकायत, इसके बावजूद अल्पसंख्यक होने के कारण हटाए जाने की संभावना कम।
बन्ना गुप्ता - पत्नी को लड़ाना चाहते निकाय चुनाव में, जमशेदपुर में स्थानीय स्तर पर नाराजगी, कुछ बड़े नेता हैं नाराज, हाल के दिनों में तेजी से किया है डैमेज कंट्रोल।
बादल - बतौर मंत्री विभाग पर पकड़ नहीं, कार्यकर्ताओं से ज्यादा संपर्क में नहीं रहते, अधिकारियों पर नहीं बना पाते ज्यादा दबाव, पार्टी स्तर पर शिकायतों का अंबार।
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हेमंत सरकार में शामिल कांग्रेस कोटे के मंत्रियों पर तलवार लटक रही है। आलाकमान ने सभी मंत्रियों के प्रदर्शन का आंकलन किया है। इसमें जिनका प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं होगा वे मंत्रिपरिषद से हटाए जा सकते हैं। उनके स्थान पर नए चेहरे को जगह दी जाएगी। प्रदीप सिंह, रांचीः हेमंत सरकार में शामिल कांग्रेस कोटे के मंत्रियों पर तलवार लटक रही है। आलाकमान ने सभी मंत्रियों के प्रदर्शन का आंकलन किया है। इसमें जिनका प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं होगा, वे मंत्रिपरिषद से हटाए जा सकते हैं। उनके स्थान पर नए चेहरे को जगह दी जाएगी। इस संबंध में अंतिम निर्णय तक पहुंचने के लिए दल के विधायकों समेत संगठनात्मक स्तर पर मिली शिकायतों को भी ध्यान रखा जाएगा। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय इसे लेकर सक्रिय हैं। उन्होंने इस संबंध में प्रदेश के कई वरीय नेताओं संग मंत्रणा की है। अलग-अलग स्तर मिले फीडबैक का आंकलन करने के बाद आलाकमान को वे इस संबंध में अंतिम रिपोर्ट सौंपेगे। हालांकि कांग्रेस कोटे के मंत्रियों में फेरबदल की यह कवायद कुछ समय पूर्व से ही चल रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा समेत कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव के कारण यह टल रहा था। अब इसपर अंतिम फैसला शीघ्र होगा। निर्णय लेने के पहले प्रदेश के वरीय नेताओं के सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी। कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की यह शिकायत है कि पार्टी कोटे से शामिल मंत्री उनकी सुनते नहीं हैं। वे चुनिंदा लोगों से घिरे रहते हैं। जिलों के दौरे के क्रम में प्रदेश प्रभारी को इससे संबंधित सबसे ज्यादा नाराजगी देखने को मिली है। पार्टी के संवाद कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने खुलकर अपनी भड़ास निकाली है। इसके अलावा विधायकों ने भी शिकायत की है कि उनके क्षेत्र में भ्रमण और कार्यक्रम तय होने के बावजूद उन्हें मंत्री सूचित नहीं करते। हजारीबाग जिले के एक विधायक ने हाल ही में एक मंत्री की शिकायत ऊपर तक पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि मंत्री ने उनके घर के बगल में चाय पी और उन्हें सूचित तक नहीं किया। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडेय ने कार्यभार संभालने के बाद निर्देश दिया था कि कांग्रेस कोटे के मंत्री प्रदेश कार्यालय में जनसुनवाई करेंगे। वे इस दौरान आमलोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं की शिकायतें सुनकर समाधान करेंगे। आरंभ में मंत्रियों ने जनसुनवाई की, लेकिन यह जल्द ही बंद हो गया। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के निर्देश पर मंत्रियों को छह-छह जिलों का प्रभार दिया गया था। मंत्रियों ने शुरू में जिलों के दौरे किए, लेकिन बाद में यह ठप हो गया। मंत्री आलमगीर आलम को साहिबगंज, गोड्डा, बोकारो, पाकुड़, हजारीबाग और गिरिडीह, डा. रामेश्वर उरांव को खूंटी, सिमडेगा, गुमला, रामगढ़, लोहरदगा और पलामू, बन्ना गुप्ता को धनबाद, जमशेदपुर, सरायकेला, रांची, चतरा और कोडरमा एवं बादल को चाईबासा, गढ़वा, देवघर, दुमका, जामताड़ा और लातेहार की जिम्मेदारी दी गई थी। मंत्रिमंडल में कांग्रेस कोटे के मंत्रियों में फेरबदल पर मुहर लगी तो एक महिला विधायक को मौका मिल सकता है। महिला विधायकों में महगामा की विधायक दीपिका पांडेय सिंह, झरिया की विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह और बड़कागांव की विधायक अंबा प्रसाद शामिल हैं। रामगढ़ की विधायक ममता देवी की विधायकी समाप्त हो चुकी है। अगर मंत्रियों में फेरबदल का निर्णय कांग्रेस आलाकमान ने लिया तो महिला विधायकों को अवश्य मौका मिलेगा। डा. रामेश्वर उरांव - पार्टी के कार्यक्रमों के प्रति रहते हैं उदासीन। प्रभारी तक के कार्यक्रमों से बनाते हैं दूरी। विभागों में कम सक्रियता, प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद कम हुई सक्रियता। आलमगीर आलम - विधायकों पर अपेक्षाकृत कमजोर पकड़, विधानसभा के सत्रों में दिखती है परस्पर तालमेल की कमी, विधायकों ने की है शिकायत, इसके बावजूद अल्पसंख्यक होने के कारण हटाए जाने की संभावना कम। बन्ना गुप्ता - पत्नी को लड़ाना चाहते निकाय चुनाव में, जमशेदपुर में स्थानीय स्तर पर नाराजगी, कुछ बड़े नेता हैं नाराज, हाल के दिनों में तेजी से किया है डैमेज कंट्रोल। बादल - बतौर मंत्री विभाग पर पकड़ नहीं, कार्यकर्ताओं से ज्यादा संपर्क में नहीं रहते, अधिकारियों पर नहीं बना पाते ज्यादा दबाव, पार्टी स्तर पर शिकायतों का अंबार।
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रोड सेफ्टी टी20 वर्ल्ड सीरीज के पहले मुकाबले में इंडिया लेजेंड्स ने साउथ अफ्रीका लेजेंड्स को 61 रनों से हराते हुए एकतरफा जीत दर्ज की। इंडिया लेजेंड्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवरों में 217-4 का विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में साउथ अफ्रीका लेजेंड्स की टीम 156-9 रन ही बना पाई।
सचिन तेंदुलकर ने टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। नमन ओझा और सचिन तेंदुलकर ने पहले विकेट के लिए 46 रनों की साझेदारी की। सचिन ने 15 गेंदों में दो चौकों की मदद से 16 रन बनाकर आउट हो गए और 52 के स्कोर तक टीम ने नमन ओझा का विकेट भी गंवा दिया था। यहां से सुरेश रैना और स्टुअर्ट बिन्नी ने 64 रनों की साझेदारी करते हुए इंडिया को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। रैना ने 22 गेंदों में 4 चौकों और एक छक्के की मदद से 33 रन बनाए। युवराज सिंह कुछ खास नहीं कर पाए और 8 गेंदों में 6 रन बनाकर आउट हो गए।
हालांकि अंत में स्टुअर्ट बिन्नी ने यूसुफ पठान ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवरों में टीम का स्कोर 217 तक पहुंचाया। बिन्नी ने 42 गेंदों में 5 चौके और 6 छक्कों की मदद से 82* रन बनाए, तो यूसुफ पठान ने 15 गेंदों में एक चौके और 4 छक्कों की मदद से 35* रन बनाए। साउथ अफ्रीका लेजेंड्स के लिए वैन डर वैथ ने सबसे ज्यादा दो, एडी लेई और मखाया एंटिनी ने एक-एक विकेट लिया।
218 रनों का पीछा करने उतरी साउथ अफ्रीका लेजेंड्स ने जरूर पहले विकेट के लिए 43 रन जोड़े, लेकिन इसके बाद टीम ने नियमित अंतराल पर विकेट गंवाए और कोई बड़ी साझेदारी देखने को नहीं मिली। स्पिनर्स के खिलाफ उन्होंने काफी ज्यादा संघर्ष किया। उनके लिए कप्तान जोंटी रोड्स ने 27 गेंदों में 5 चौके और एक छक्के की मदद से 38 रन बनाए। इंडिया लेजेंड्स के लिए राहुल शर्मा ने सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए, मुनाफ पटेल, प्रज्ञान ओझा ने 2-2, इरफान पठान और युवराज सिंह ने एक-एक विकेट लिया।
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रोड सेफ्टी टीबीस वर्ल्ड सीरीज के पहले मुकाबले में इंडिया लेजेंड्स ने साउथ अफ्रीका लेजेंड्स को इकसठ रनों से हराते हुए एकतरफा जीत दर्ज की। इंडिया लेजेंड्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बीस ओवरों में दो सौ सत्रह-चार का विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में साउथ अफ्रीका लेजेंड्स की टीम एक सौ छप्पन-नौ रन ही बना पाई। सचिन तेंदुलकर ने टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। नमन ओझा और सचिन तेंदुलकर ने पहले विकेट के लिए छियालीस रनों की साझेदारी की। सचिन ने पंद्रह गेंदों में दो चौकों की मदद से सोलह रन बनाकर आउट हो गए और बावन के स्कोर तक टीम ने नमन ओझा का विकेट भी गंवा दिया था। यहां से सुरेश रैना और स्टुअर्ट बिन्नी ने चौंसठ रनों की साझेदारी करते हुए इंडिया को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। रैना ने बाईस गेंदों में चार चौकों और एक छक्के की मदद से तैंतीस रन बनाए। युवराज सिंह कुछ खास नहीं कर पाए और आठ गेंदों में छः रन बनाकर आउट हो गए। हालांकि अंत में स्टुअर्ट बिन्नी ने यूसुफ पठान ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित बीस ओवरों में टीम का स्कोर दो सौ सत्रह तक पहुंचाया। बिन्नी ने बयालीस गेंदों में पाँच चौके और छः छक्कों की मदद से बयासी* रन बनाए, तो यूसुफ पठान ने पंद्रह गेंदों में एक चौके और चार छक्कों की मदद से पैंतीस* रन बनाए। साउथ अफ्रीका लेजेंड्स के लिए वैन डर वैथ ने सबसे ज्यादा दो, एडी लेई और मखाया एंटिनी ने एक-एक विकेट लिया। दो सौ अट्ठारह रनों का पीछा करने उतरी साउथ अफ्रीका लेजेंड्स ने जरूर पहले विकेट के लिए तैंतालीस रन जोड़े, लेकिन इसके बाद टीम ने नियमित अंतराल पर विकेट गंवाए और कोई बड़ी साझेदारी देखने को नहीं मिली। स्पिनर्स के खिलाफ उन्होंने काफी ज्यादा संघर्ष किया। उनके लिए कप्तान जोंटी रोड्स ने सत्ताईस गेंदों में पाँच चौके और एक छक्के की मदद से अड़तीस रन बनाए। इंडिया लेजेंड्स के लिए राहुल शर्मा ने सबसे ज्यादा तीन विकेट लिए, मुनाफ पटेल, प्रज्ञान ओझा ने दो-दो, इरफान पठान और युवराज सिंह ने एक-एक विकेट लिया।
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नई दिल्लीः देश की राजधानी दिल्ली जल्द ही बिजली संकट की चपेट में आ सकती है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आने वाले बिजली संकट को लेकर चिंता जाहिर की है।
केजरीवाल ने ट्वीट कर लिखा, दिल्ली को बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है। मैं खुद भी स्थिति पर नज़र बनाए हुए हूं। हम इससे बचाव की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच, मैने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने की अपील की है।
समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबिक कोयले की कमी के कारण कई प्रांतों में बिजली कट रही है। और उत्तर भारत के कई जगहों पर अभूतपूर्व बिजली संकट आ सकता है।
हालांकि सरकार लगातार भरोसा दे रही है कि किसी प्रकार के बिजली संकट से देश को जूझना नहीं पड़ेगा क्योंकि देश के पास पर्याप्त बिजली है।
इससे पहले पड़ोसी देश चीन भी बिजली कटौती का सामना कर रहा है। पिछले कई दिनों से कोयले की कमी के कारण चीन में लगातार बिजली काटी जा रही है। जिसके कारण कई फैक्ट्रियां भी बंद पड़ी हैं। बिजली संकट के कारण स्कूलों को बंद कर दिया गया है। लेकिन अब भारत के सामने भी ये संकट मंडराने लगा है, क्योंकि दुनिया में चीन के बाद भारत में ही सबसे ज्यादा कोयले की खपत होती है।
भारत में 70 फ़ीसदी बिजली की आपूर्ति कोयले से ही होती है और देश के 135 कोयला संचालित पॉवर प्लांट में से अब आधे से अधिक प्लांट में तीन दिन से कम का ही कोयला बचा है।
भारत सरकार के बिजली ग्रिड नियामक पोसोको के डाटा के विश्लेषण से मालूम होता है कि जितनी बिजली भारत में पूरे साल काटी गई थी उसकी 11. 2 प्रतिशत सिर्फ़ अक्तूबर के पहले सप्ताह में ही काटी जा चुकी है।
ये डाटा सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है। इसके विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में बिजली संकट कितना गंभीर हो सकता है।
पिछले साल के मुकाबले अक्तूबर के पहले हफ्ते में भारत में बिजली की कमी 21 गुणा से अधिक है जबकि इसी समय की तुलना में 2019 के मुकाबले ये आंकड़ा चार गुणा ज्यादा है।
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नई दिल्लीः देश की राजधानी दिल्ली जल्द ही बिजली संकट की चपेट में आ सकती है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आने वाले बिजली संकट को लेकर चिंता जाहिर की है। केजरीवाल ने ट्वीट कर लिखा, दिल्ली को बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है। मैं खुद भी स्थिति पर नज़र बनाए हुए हूं। हम इससे बचाव की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच, मैने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने की अपील की है। समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबिक कोयले की कमी के कारण कई प्रांतों में बिजली कट रही है। और उत्तर भारत के कई जगहों पर अभूतपूर्व बिजली संकट आ सकता है। हालांकि सरकार लगातार भरोसा दे रही है कि किसी प्रकार के बिजली संकट से देश को जूझना नहीं पड़ेगा क्योंकि देश के पास पर्याप्त बिजली है। इससे पहले पड़ोसी देश चीन भी बिजली कटौती का सामना कर रहा है। पिछले कई दिनों से कोयले की कमी के कारण चीन में लगातार बिजली काटी जा रही है। जिसके कारण कई फैक्ट्रियां भी बंद पड़ी हैं। बिजली संकट के कारण स्कूलों को बंद कर दिया गया है। लेकिन अब भारत के सामने भी ये संकट मंडराने लगा है, क्योंकि दुनिया में चीन के बाद भारत में ही सबसे ज्यादा कोयले की खपत होती है। भारत में सत्तर फ़ीसदी बिजली की आपूर्ति कोयले से ही होती है और देश के एक सौ पैंतीस कोयला संचालित पॉवर प्लांट में से अब आधे से अधिक प्लांट में तीन दिन से कम का ही कोयला बचा है। भारत सरकार के बिजली ग्रिड नियामक पोसोको के डाटा के विश्लेषण से मालूम होता है कि जितनी बिजली भारत में पूरे साल काटी गई थी उसकी ग्यारह. दो प्रतिशत सिर्फ़ अक्तूबर के पहले सप्ताह में ही काटी जा चुकी है। ये डाटा सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है। इसके विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में बिजली संकट कितना गंभीर हो सकता है। पिछले साल के मुकाबले अक्तूबर के पहले हफ्ते में भारत में बिजली की कमी इक्कीस गुणा से अधिक है जबकि इसी समय की तुलना में दो हज़ार उन्नीस के मुकाबले ये आंकड़ा चार गुणा ज्यादा है। This website uses cookies.
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भाई यशवंत, मैं दैनिक नवज्योति से अपने इस्तीफे की खबर आपकी साइट पर देखकर हैरान हूं। दरअसल, मेरे इस्तीफे की वजह बेहद निजी है और मैंने जयपुर के खास दोस्तों को भी इसके बारे में नहीं बताया था। आपको यह खबर कहां से मिली? ...कभी कहा ना किसी से तेरे फसाने को, ना जाने कैसे खबर हो गई जमाने को.... । चार साल राजस्थान पत्रिका और दस साल नवभारत टाइम्स (जहां मैंने मुख्य उप संपादक से लेकर समाचार संपादक के तौर पर स्थानीय संपादक की जिम्मेदारियां भी निभाईं। दुर्भाग्य से इस अखबार का जयपुर संस्करण बंद हो गया) में काम करने के बाद 1996 में जब मैंने दैनिक नवज्योति में दाखिला लिया था, तब मुझे खुद भी यकीन नहीं था कि इसमें ज्यादा दिन टिक पाऊंगा, लेकिन 13 साल कैसे गुजर गए, पता ही नहीं चला।
इस बीच कुछ बड़े प्रतिष्ठानों से आकर्षक प्रस्ताव भी मिले, मैं तब भी नवज्योति नहीं छोड़ पाया तो इसकी सबसे बड़ी वजह मुझे यहां मिला अपनापन, सम्मान और स्नेह रहा। अचानक 3 अगस्त, 2009 को मैंने इस्तीफा दे दिया। क्यों? इसके बारे में चुप रहना ही बेहतर होगा। आपकी साइट पर खबर आने के बाद यार लोग पूछ रहे हैं. . आखिर क्यों? अब क्या? मेरे पास हाल-फिलहाल कोई जवाब नहीं है, सिवा इसके कि... गो जरा-सी बात पर बरसों के याराने गए, लेकिन इतना तो हुआ कुछ लोग पहचाने गए. . ।
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भाई यशवंत, मैं दैनिक नवज्योति से अपने इस्तीफे की खबर आपकी साइट पर देखकर हैरान हूं। दरअसल, मेरे इस्तीफे की वजह बेहद निजी है और मैंने जयपुर के खास दोस्तों को भी इसके बारे में नहीं बताया था। आपको यह खबर कहां से मिली? ...कभी कहा ना किसी से तेरे फसाने को, ना जाने कैसे खबर हो गई जमाने को.... । चार साल राजस्थान पत्रिका और दस साल नवभारत टाइम्स में काम करने के बाद एक हज़ार नौ सौ छियानवे में जब मैंने दैनिक नवज्योति में दाखिला लिया था, तब मुझे खुद भी यकीन नहीं था कि इसमें ज्यादा दिन टिक पाऊंगा, लेकिन तेरह साल कैसे गुजर गए, पता ही नहीं चला। इस बीच कुछ बड़े प्रतिष्ठानों से आकर्षक प्रस्ताव भी मिले, मैं तब भी नवज्योति नहीं छोड़ पाया तो इसकी सबसे बड़ी वजह मुझे यहां मिला अपनापन, सम्मान और स्नेह रहा। अचानक तीन अगस्त, दो हज़ार नौ को मैंने इस्तीफा दे दिया। क्यों? इसके बारे में चुप रहना ही बेहतर होगा। आपकी साइट पर खबर आने के बाद यार लोग पूछ रहे हैं. . आखिर क्यों? अब क्या? मेरे पास हाल-फिलहाल कोई जवाब नहीं है, सिवा इसके कि... गो जरा-सी बात पर बरसों के याराने गए, लेकिन इतना तो हुआ कुछ लोग पहचाने गए. . ।
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फल या व्यक्ति का अन्त व्यक्तिगत रूप से होता है, परम्परा के विकास या समष्टि रूप से उसकी धारा प्रविच्छिन्न है ।
सिद्धार्थ संसार के क्षरण-भंगुर तथा निस्सार स्वरूप के कारण इसे अन्तिम प्ररणाम - राम राम - करता है, और जन्म के साथ अनिवार्य मररण के दाय को बार बार नहीं चुकाना चाहता (१५) इसलिए वह मुक्ति या निर्वारण को अनिवार्य समझता है
मुक्ति हेतु जाता हूँ यह मैं, मुक्ति, मुक्ति, बस मुक्ति ।
सारतः वह आवागमन के चक्र या संसार के बन्धन से मुक्त होता चाहता है, इसलिए निर्धारण पथ का पथिक बनता है । इसके विपरीत यशोधरा संसार के बन्धन को बन्धन नहीं समझती - क्योंकि 'बन्धन' को सहज 'सम्बन्ध' का रूप देने से वह बन्धन नहीं रह जाता -
निज बन्धन को सम्बन्ध सयत्न बनाऊँ
कह मुक्ति, भला, किस लिए तुझे मैं पाऊँ ? (१०७) यशोधरा को भव भाता है अतएव वह संसार के नाते को क्यों तोड़े ? प्रत्यक्ष जीवन को छोड़ कर अपर मुक्ति से नाता क्यों जोड़े ? वह कहती है -
भव भावे मुझ को और उसे मैं भाऊँ ।
कह मुक्ति, भला, किस लिए तुझे मैं पाऊँ ? (१०७) यशोधरा आवागमन में जीवन का सौन्दर्य, प्रकृति का सहज स्वभाव तथा नूतनता का आनन्द देखती है अतएव वह बौद्धों के निर्वारण-सिद्धांत की समर्थक नहीं । उसका तर्क है --
ये चन्द्र-सूर्य्य निर्वारण नहीं पाते हैं; ओझल हो हो कर हमें दृष्टि आते हैं । झोंके समीर के भूम भूम जाते हैं; जा जा कर नीरद नया नीर लाते हैं ।
तो क्यों जा जा कर लौट न मैं भी आाऊँ ?
कह मुक्ति, भला किस लिए तुझे मैं पाऊँ ? (१०८)
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फल या व्यक्ति का अन्त व्यक्तिगत रूप से होता है, परम्परा के विकास या समष्टि रूप से उसकी धारा प्रविच्छिन्न है । सिद्धार्थ संसार के क्षरण-भंगुर तथा निस्सार स्वरूप के कारण इसे अन्तिम प्ररणाम - राम राम - करता है, और जन्म के साथ अनिवार्य मररण के दाय को बार बार नहीं चुकाना चाहता इसलिए वह मुक्ति या निर्वारण को अनिवार्य समझता है मुक्ति हेतु जाता हूँ यह मैं, मुक्ति, मुक्ति, बस मुक्ति । सारतः वह आवागमन के चक्र या संसार के बन्धन से मुक्त होता चाहता है, इसलिए निर्धारण पथ का पथिक बनता है । इसके विपरीत यशोधरा संसार के बन्धन को बन्धन नहीं समझती - क्योंकि 'बन्धन' को सहज 'सम्बन्ध' का रूप देने से वह बन्धन नहीं रह जाता - निज बन्धन को सम्बन्ध सयत्न बनाऊँ कह मुक्ति, भला, किस लिए तुझे मैं पाऊँ ? यशोधरा को भव भाता है अतएव वह संसार के नाते को क्यों तोड़े ? प्रत्यक्ष जीवन को छोड़ कर अपर मुक्ति से नाता क्यों जोड़े ? वह कहती है - भव भावे मुझ को और उसे मैं भाऊँ । कह मुक्ति, भला, किस लिए तुझे मैं पाऊँ ? यशोधरा आवागमन में जीवन का सौन्दर्य, प्रकृति का सहज स्वभाव तथा नूतनता का आनन्द देखती है अतएव वह बौद्धों के निर्वारण-सिद्धांत की समर्थक नहीं । उसका तर्क है -- ये चन्द्र-सूर्य्य निर्वारण नहीं पाते हैं; ओझल हो हो कर हमें दृष्टि आते हैं । झोंके समीर के भूम भूम जाते हैं; जा जा कर नीरद नया नीर लाते हैं । तो क्यों जा जा कर लौट न मैं भी आाऊँ ? कह मुक्ति, भला किस लिए तुझे मैं पाऊँ ?
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एक अनूठा और अच्छी तरह से पसंद किया जाने वाला रायता,
जनता से रिश्ता वेबडेस्क। एक अनूठा और अच्छी तरह से पसंद किया जाने वाला रायता, आपको यह साइड डिश विभिन्न भारतीय रेस्तरां में थाली या पूर्ण भोजन के हिस्से के रूप में परोसा जाएगा। बूंदी छोटे तले हुए गोले होते हैं जिन्हें चने या बेसन के आटे से बनाया जाता है और गोल छेद वाली एक विशेष करछुल में डाला जाता है।
नटटी बूंदी का क्रंच चाट मसाला और मिर्च पाउडर के साथ मिलकर एक स्वादिष्ट दही मसाला बनाता है।
1 ¼ कप ताजा दही / दही (जरूरत हो तो ज्यादा)
नमक आवश्यकता अनुसार (बूंदी नमकीन है इसलिए बहुत कम प्रयोग करें)
¼ से ½ छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर (गार्निश के लिए और अधिक)
¼ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर (स्वादानुसार समायोजित करें)
½ छोटा चम्मच चाट मसाला (वैकल्पिक, स्वादानुसार समायोजित करें)
बूंदी का रायता कैसे बनाते हैं?
1. दही को नमक और जीरा पाउडर के साथ फेंट लें। हरा धनिया डालकर मिलाएँ। आप चाहें तो दही में थोड़ी सी लाल मिर्च पाउडर भी मिला सकते हैं।
2. आप बाकी बचे मसालों के साथ छोटे तले हुए बॉल्स को सीधे दही के मिश्रण में मिला सकते हैं। लेकिन अगर आप अपने रायते में चिकने स्वाद से बचना चाहते हैं, तो एक वैकल्पिक तरीका है। तली हुई बूंदी को एक कटोरी पानी में एक से दो मिनट के लिए भिगो दें। सभी तरल को निकालने और दही में जोड़ने के लिए अच्छी तरह से निचोड़ें।
3. स्वाद चखें और यदि आवश्यक हो तो और मसाला डालें।
4. गार्निश के लिए कुछ कुरकुरी बूंदी, मिर्च पाउडर, पिसा हुआ जीरा और हरा धनिया छिड़कें।
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एक अनूठा और अच्छी तरह से पसंद किया जाने वाला रायता, जनता से रिश्ता वेबडेस्क। एक अनूठा और अच्छी तरह से पसंद किया जाने वाला रायता, आपको यह साइड डिश विभिन्न भारतीय रेस्तरां में थाली या पूर्ण भोजन के हिस्से के रूप में परोसा जाएगा। बूंदी छोटे तले हुए गोले होते हैं जिन्हें चने या बेसन के आटे से बनाया जाता है और गोल छेद वाली एक विशेष करछुल में डाला जाता है। नटटी बूंदी का क्रंच चाट मसाला और मिर्च पाउडर के साथ मिलकर एक स्वादिष्ट दही मसाला बनाता है। एक ¼ कप ताजा दही / दही नमक आवश्यकता अनुसार ¼ से ½ छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर ¼ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर ½ छोटा चम्मच चाट मसाला बूंदी का रायता कैसे बनाते हैं? एक. दही को नमक और जीरा पाउडर के साथ फेंट लें। हरा धनिया डालकर मिलाएँ। आप चाहें तो दही में थोड़ी सी लाल मिर्च पाउडर भी मिला सकते हैं। दो. आप बाकी बचे मसालों के साथ छोटे तले हुए बॉल्स को सीधे दही के मिश्रण में मिला सकते हैं। लेकिन अगर आप अपने रायते में चिकने स्वाद से बचना चाहते हैं, तो एक वैकल्पिक तरीका है। तली हुई बूंदी को एक कटोरी पानी में एक से दो मिनट के लिए भिगो दें। सभी तरल को निकालने और दही में जोड़ने के लिए अच्छी तरह से निचोड़ें। तीन. स्वाद चखें और यदि आवश्यक हो तो और मसाला डालें। चार. गार्निश के लिए कुछ कुरकुरी बूंदी, मिर्च पाउडर, पिसा हुआ जीरा और हरा धनिया छिड़कें।
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गोरखपुर के गगहा में वाराणसी राजमार्ग पर सोमवार की शाम करीब 5 बजे पिकअप की ठोकर से एक युवक की मौत हो गई। जबकि चचेरा भाई घायल हो गया। हादसे के बाद पिकअप सवार गाड़ी लेकर फरार हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं घायल को इलाज के लिए पुलिस ने अस्प्ताल में भर्ती कराया है। पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक पर केस दर्ज किया है।
हादसे में मृत युवक की पहचान 30 वर्षीय अमरजीत पुत्र शंकर निवासी बलडीहा थाना बड़हलगंज के रूप में हुई। उसकी शादी हो चुकी थी और उसके बच्चे नहीं हैं। वहीं घायल की पहचान प्रीतम भारती पुत्र सुक्खु के रूप में हुई। वह अमरजीत का चचेरा भाई है।
पुलिस के अनुसार अमरजीत बैंड बाजा में काम करता था। अमरजीत व उसका चचेरा भाई गगहा के गजपुर स्थित समय माता मंदिर में आयोजित मुंडन कार्यक्रम में बैंड बाजा बजाने गए थे। वहां से दोनों बाइक से घर जा रहे थे। तभी हादसे के शिकार हो गए और अमरजीत की मौत हो गई और प्रीतम भारती घायल हो गया। लोगों के अनुसार युवक हेलमेट नहीं लगाया था। उसने अगर हेलमेट लगाया होता तो उसकी जान बच सकती थी। एसएसआई अशोक यादव ने बताया कि अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
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गोरखपुर के गगहा में वाराणसी राजमार्ग पर सोमवार की शाम करीब पाँच बजे पिकअप की ठोकर से एक युवक की मौत हो गई। जबकि चचेरा भाई घायल हो गया। हादसे के बाद पिकअप सवार गाड़ी लेकर फरार हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं घायल को इलाज के लिए पुलिस ने अस्प्ताल में भर्ती कराया है। पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक पर केस दर्ज किया है। हादसे में मृत युवक की पहचान तीस वर्षीय अमरजीत पुत्र शंकर निवासी बलडीहा थाना बड़हलगंज के रूप में हुई। उसकी शादी हो चुकी थी और उसके बच्चे नहीं हैं। वहीं घायल की पहचान प्रीतम भारती पुत्र सुक्खु के रूप में हुई। वह अमरजीत का चचेरा भाई है। पुलिस के अनुसार अमरजीत बैंड बाजा में काम करता था। अमरजीत व उसका चचेरा भाई गगहा के गजपुर स्थित समय माता मंदिर में आयोजित मुंडन कार्यक्रम में बैंड बाजा बजाने गए थे। वहां से दोनों बाइक से घर जा रहे थे। तभी हादसे के शिकार हो गए और अमरजीत की मौत हो गई और प्रीतम भारती घायल हो गया। लोगों के अनुसार युवक हेलमेट नहीं लगाया था। उसने अगर हेलमेट लगाया होता तो उसकी जान बच सकती थी। एसएसआई अशोक यादव ने बताया कि अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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शादी का सीजन चल रहा है वहीं कई बार शादियों में कुछ ऐसा हो जाता है जिसे हम भुला नहीं पाते। इन घटनाओं की कभी उम्मीद भी नहीं लगाया होता है। गौरतलब है कि दूल्हा और दुल्हन अपनी शादी में पूरी तैयारी करके आते हैं कि उन्हें क्या पहनना है और कैसे एंट्री लेना है। लेकिन कई बार कुछ गड़बड़ियां हो जाती हैं, जिसके बारे में जब लोगों को पता चलता है तो दंग रह जाते हैं। बता दें कि, सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में घोड़ी चढ़ने से पहले एक दूल्हे की पैंट फट जाती है।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बारात निकलने के कुछ ही सेकंड पहले दूल्हे के साथ एक ऐसा हादसा हो जाता है, जिसके बारे में जब लोगों को पता चलता है तो वह पेट पकड़कर हंसने लगते है। हालांकि, दूल्हे के लिए यह बड़ी समस्या होती है, क्योंकि दूल्हा शादी के लिए सिर्फ एक ही जोड़ा कपड़ा तैयार रखता है, जिसे पूरी शादी में पहनना होता है। बता दें कि, दूल्हा जब घोड़ी पर चढ़ने वाला होता है, तभी दूल्हे की पैंट फट जाती है और फिर वो गुस्सा जाता है। और अपने घरवालों को चिल्लाकर बोलता है कि मेरी पैंट फट गई है दूसरा पैंट लाकर दो।
बता दें कि, इंस्टाग्राम (Instagram Reels) पर घंटा नाम के अकाउंट द्वारा यह वीडियो जैसे ही अपलोड किया गया है। इसे लोगों ने खूब पसंद कर रहे है। इस वीडियो को एक लाख साठ हजार लोगों ने लाइक किया, जबकि लाखों बार इसे देखा जा चुका है।
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शादी का सीजन चल रहा है वहीं कई बार शादियों में कुछ ऐसा हो जाता है जिसे हम भुला नहीं पाते। इन घटनाओं की कभी उम्मीद भी नहीं लगाया होता है। गौरतलब है कि दूल्हा और दुल्हन अपनी शादी में पूरी तैयारी करके आते हैं कि उन्हें क्या पहनना है और कैसे एंट्री लेना है। लेकिन कई बार कुछ गड़बड़ियां हो जाती हैं, जिसके बारे में जब लोगों को पता चलता है तो दंग रह जाते हैं। बता दें कि, सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में घोड़ी चढ़ने से पहले एक दूल्हे की पैंट फट जाती है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बारात निकलने के कुछ ही सेकंड पहले दूल्हे के साथ एक ऐसा हादसा हो जाता है, जिसके बारे में जब लोगों को पता चलता है तो वह पेट पकड़कर हंसने लगते है। हालांकि, दूल्हे के लिए यह बड़ी समस्या होती है, क्योंकि दूल्हा शादी के लिए सिर्फ एक ही जोड़ा कपड़ा तैयार रखता है, जिसे पूरी शादी में पहनना होता है। बता दें कि, दूल्हा जब घोड़ी पर चढ़ने वाला होता है, तभी दूल्हे की पैंट फट जाती है और फिर वो गुस्सा जाता है। और अपने घरवालों को चिल्लाकर बोलता है कि मेरी पैंट फट गई है दूसरा पैंट लाकर दो। बता दें कि, इंस्टाग्राम पर घंटा नाम के अकाउंट द्वारा यह वीडियो जैसे ही अपलोड किया गया है। इसे लोगों ने खूब पसंद कर रहे है। इस वीडियो को एक लाख साठ हजार लोगों ने लाइक किया, जबकि लाखों बार इसे देखा जा चुका है।
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कानपुर STF ने आवास विकास-3 अंबेडकरपुर के अनजिप टेक्नोलॉजी सेंटर से सॉल्वर गैंग के सरगना समेत 6 को अरेस्ट किया है। 19 जनवरी को SSC की एमटीएस परीक्षा में सॉल्वर गिरोह ने सेंधमारी की थी, लेकिन STF ने इन्हें पहले दबोच लिया। सभी के खिलाफ FIR दर्ज करके जेल भेज दिया गया।
जांच में सामने आया है कि एक सॉल्वर सात एग्जाम देने के बाद पकड़ा गया। । गैंग के सदस्यों के पास मिले दस्तावेज से पूरे गिरोह का खुलासा करने के लिए STF काम कर रही है।
STF इंस्पेक्टर लान सिंह ने बताया कि अनजिप टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट में एसएससी के एमटीएस परीक्षा 19 जुलाई को चल रही थी। सेकेंड शिफ्ट में प्रवेश के दौरान चेकिंग में संदिग्ध होने पर स्टाफ ने इंद्रजीत कुमार सिन्हा नाम के कैंडीडेट को रोक लिया। उसका फोटो मिलान नहीं हो रहा था। जांच में पता चला कि यह इंद्रजीत नहीं बिहार नालंदा नूरसराय निवासी अमरेंन्द्र है।
वह अपने बहनोई इंद्रजीत का MTS में सेलेक्शन कराने के लिए उसकी जगह पर परीक्षा देने बैठा था। इसके बाद एसटीएफ ने बिहार नालंदा के नूरसराय निवासी आरपी कुमार, नालंदा मोहनपुर निवासी सुमन कुमार, जलालपुर हरनौथा निवासी सतीश कुमार और बिहार नवादा के रजौली जिला के धम्मौल के अमरजीत को गिरफ्तार कर लिया।
इन सभी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। जांच में सामने आया है कि बिहार का सॉल्वर गैंग यूपी की MTS में हावी है। एक दो नहीं हजारों छात्रों की जगह सॉल्वर बैठाकर परीक्षा में पास कराने का ठेका लिया है।
जांच में सॉल्वरों के पास से एक-दो नहीं दर्जनों एडमिट कार्ड मिला है। पूछताछ में पता चला कि सॉल्वर महज 25 से 50 हजार में परीक्षा देता है। रैकेट चलाने वाले माफिया अभ्यर्थियों से दो से तीन लाख रुपए प्रति परीक्षा लेते हैं।
अनजिप इंस्टीट्यूट में एक दिन पहले 18 जुलाई को भी एक सॉल्वर और अभ्यर्थी पकड़ा गया था। चेकिंग के दौरान अभ्यर्थी कुश कुमार की जगह राजेश कुमार नाम का युवक फर्जी आधार कार्ड और प्रवेश पत्र लेकर परीक्षा देने के लिए घुसा। चेकिंग कर रहे केंद्र व्यवस्थापक राजीव मिश्रा को फर्जी दस्तावेजों को देख शक हुआ।
जिस पर उन्होंने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने परीओना, नूरसराय नालंदा, बिहार के राजेश कुमार को धर दबोचा। इसके बाद अभ्यर्थी कुश को भी सेंटर के बाहर से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मामले की जानकारी मिलने पर एसटीएफ ने अगले दिन अन्य को प्लानिंग के तहत दबोच लिया।
एसटीएफ इंस्पेक्टर लान सिंह ने बताया कि सॉल्वर गैंग के मास्टर माइंड अविनाश और पुरुषोत्म फरार हैं। बिहार के रहने वाले दोनों शातिर ही सॉल्वर गैंग के मास्टर माइंड हैं। इसके साथ ही दोनों ने सैकड़ों छात्रों को एसएससी एमटीएस में पास कराने का ठेका लिया है। दोनों की तलाश में ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है। दोनों की गिरफ्तारी के बाद ही पूरे गिरोह का खुलासा होगा।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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कानपुर STF ने आवास विकास-तीन अंबेडकरपुर के अनजिप टेक्नोलॉजी सेंटर से सॉल्वर गैंग के सरगना समेत छः को अरेस्ट किया है। उन्नीस जनवरी को SSC की एमटीएस परीक्षा में सॉल्वर गिरोह ने सेंधमारी की थी, लेकिन STF ने इन्हें पहले दबोच लिया। सभी के खिलाफ FIR दर्ज करके जेल भेज दिया गया। जांच में सामने आया है कि एक सॉल्वर सात एग्जाम देने के बाद पकड़ा गया। । गैंग के सदस्यों के पास मिले दस्तावेज से पूरे गिरोह का खुलासा करने के लिए STF काम कर रही है। STF इंस्पेक्टर लान सिंह ने बताया कि अनजिप टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट में एसएससी के एमटीएस परीक्षा उन्नीस जुलाई को चल रही थी। सेकेंड शिफ्ट में प्रवेश के दौरान चेकिंग में संदिग्ध होने पर स्टाफ ने इंद्रजीत कुमार सिन्हा नाम के कैंडीडेट को रोक लिया। उसका फोटो मिलान नहीं हो रहा था। जांच में पता चला कि यह इंद्रजीत नहीं बिहार नालंदा नूरसराय निवासी अमरेंन्द्र है। वह अपने बहनोई इंद्रजीत का MTS में सेलेक्शन कराने के लिए उसकी जगह पर परीक्षा देने बैठा था। इसके बाद एसटीएफ ने बिहार नालंदा के नूरसराय निवासी आरपी कुमार, नालंदा मोहनपुर निवासी सुमन कुमार, जलालपुर हरनौथा निवासी सतीश कुमार और बिहार नवादा के रजौली जिला के धम्मौल के अमरजीत को गिरफ्तार कर लिया। इन सभी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। जांच में सामने आया है कि बिहार का सॉल्वर गैंग यूपी की MTS में हावी है। एक दो नहीं हजारों छात्रों की जगह सॉल्वर बैठाकर परीक्षा में पास कराने का ठेका लिया है। जांच में सॉल्वरों के पास से एक-दो नहीं दर्जनों एडमिट कार्ड मिला है। पूछताछ में पता चला कि सॉल्वर महज पच्चीस से पचास हजार में परीक्षा देता है। रैकेट चलाने वाले माफिया अभ्यर्थियों से दो से तीन लाख रुपए प्रति परीक्षा लेते हैं। अनजिप इंस्टीट्यूट में एक दिन पहले अट्ठारह जुलाई को भी एक सॉल्वर और अभ्यर्थी पकड़ा गया था। चेकिंग के दौरान अभ्यर्थी कुश कुमार की जगह राजेश कुमार नाम का युवक फर्जी आधार कार्ड और प्रवेश पत्र लेकर परीक्षा देने के लिए घुसा। चेकिंग कर रहे केंद्र व्यवस्थापक राजीव मिश्रा को फर्जी दस्तावेजों को देख शक हुआ। जिस पर उन्होंने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने परीओना, नूरसराय नालंदा, बिहार के राजेश कुमार को धर दबोचा। इसके बाद अभ्यर्थी कुश को भी सेंटर के बाहर से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मामले की जानकारी मिलने पर एसटीएफ ने अगले दिन अन्य को प्लानिंग के तहत दबोच लिया। एसटीएफ इंस्पेक्टर लान सिंह ने बताया कि सॉल्वर गैंग के मास्टर माइंड अविनाश और पुरुषोत्म फरार हैं। बिहार के रहने वाले दोनों शातिर ही सॉल्वर गैंग के मास्टर माइंड हैं। इसके साथ ही दोनों ने सैकड़ों छात्रों को एसएससी एमटीएस में पास कराने का ठेका लिया है। दोनों की तलाश में ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है। दोनों की गिरफ्तारी के बाद ही पूरे गिरोह का खुलासा होगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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Elon Musk की ओर से ट्विटर के एंड्राइड ऐप की स्पीड धीमी होने का दावा किया गया था जिसके जवाब में ट्विटर कर्मचारी एरिक फ्रौनहोफर ने इसे गलत बताया था। फिर बाद में मस्क ने ट्वीट कर फ्रौनहोफर को नौकरी से निकाल दिया।
नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। एलन मस्क की ओर से किए गए एक दावे को गलत बताने पर ट्विटर के एक कर्मचारी को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ गया। दरअसल, मस्क ने रविवार को एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि कई देशों में ट्विटर काफी धीमा है, जिसके लिए वह माफी मंगाते हैं। होम टाइमलाइन को रेंडर करने के लिए ऐप > 1000 खराब आरसीपी पर काम कर रहा है।
इसके जवाब में निकाले गए ट्विटर कर्मचारी एरिक फ्रौनहोफर (Eric Frohnhoefer) ने कहा कि मैंने ट्विटर में एंड्राइड पर 6 साल से काम कर रहा हूं और कह सकता हूं कि ये गलत है। इसके बाद मस्क ने पूछा कि सही नंबर क्या है? एंड्राइड पर ट्विटर बहुत धीमा है। तुमने इसे ठीक करने के लिए क्या किया है?
एलन और एरिक के बीच चल रहे इस संवाद पर एक अन्य डेवलपर ने सलाह दी कि मैं पिछले 20 सालों से डेवलपर हूं और डोमेन एक्सपर्ट के तौर पर सलाह देना चाहता हूँ कि आपको अपने बास निजी तौर पर ये बता कहनी चाहिए थी। इसके जवाब में फ्रौनहोफर ने कहा कि मुझे लगता है कि उन्हें ये सवाल भी निजी तौर स्लैक या फिर ईमेल के जरिए पर पूछना चाहिए था।
इसके जवाब में एक ट्विटर यूजर (@langdon) ने मस्क से पूछा कि क्या आप इस तरह के एटीट्यूड वाले कर्मचारी को अपनी टीम में रखना चाहते हो। इसके जवाब में मस्क ने लिखा उसे नौकरी से निकाला जाता है।
44 बिलियन डॉलर में ट्विटर का अधिग्रहण करने के बाद मस्क ने कंपनी से करीब 4400 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इसके साथ सीईओ पराग अग्रवाल समेत बड़े अधिकारी भी कंपनी छोड़ चुके हैं।
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Elon Musk की ओर से ट्विटर के एंड्राइड ऐप की स्पीड धीमी होने का दावा किया गया था जिसके जवाब में ट्विटर कर्मचारी एरिक फ्रौनहोफर ने इसे गलत बताया था। फिर बाद में मस्क ने ट्वीट कर फ्रौनहोफर को नौकरी से निकाल दिया। नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। एलन मस्क की ओर से किए गए एक दावे को गलत बताने पर ट्विटर के एक कर्मचारी को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ गया। दरअसल, मस्क ने रविवार को एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि कई देशों में ट्विटर काफी धीमा है, जिसके लिए वह माफी मंगाते हैं। होम टाइमलाइन को रेंडर करने के लिए ऐप > एक हज़ार खराब आरसीपी पर काम कर रहा है। इसके जवाब में निकाले गए ट्विटर कर्मचारी एरिक फ्रौनहोफर ने कहा कि मैंने ट्विटर में एंड्राइड पर छः साल से काम कर रहा हूं और कह सकता हूं कि ये गलत है। इसके बाद मस्क ने पूछा कि सही नंबर क्या है? एंड्राइड पर ट्विटर बहुत धीमा है। तुमने इसे ठीक करने के लिए क्या किया है? एलन और एरिक के बीच चल रहे इस संवाद पर एक अन्य डेवलपर ने सलाह दी कि मैं पिछले बीस सालों से डेवलपर हूं और डोमेन एक्सपर्ट के तौर पर सलाह देना चाहता हूँ कि आपको अपने बास निजी तौर पर ये बता कहनी चाहिए थी। इसके जवाब में फ्रौनहोफर ने कहा कि मुझे लगता है कि उन्हें ये सवाल भी निजी तौर स्लैक या फिर ईमेल के जरिए पर पूछना चाहिए था। इसके जवाब में एक ट्विटर यूजर ने मस्क से पूछा कि क्या आप इस तरह के एटीट्यूड वाले कर्मचारी को अपनी टीम में रखना चाहते हो। इसके जवाब में मस्क ने लिखा उसे नौकरी से निकाला जाता है। चौंतालीस बिलियन डॉलर में ट्विटर का अधिग्रहण करने के बाद मस्क ने कंपनी से करीब चार हज़ार चार सौ कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इसके साथ सीईओ पराग अग्रवाल समेत बड़े अधिकारी भी कंपनी छोड़ चुके हैं।
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भोई क्षत्रिय, भोई राजपूत, भोई आदिवासी भोई भारत की एक प्राचीन जाति है। यह एक आखेटक आदिवासी जाति है जिसका उल्लेख महाभारत और रामायणजैसे भारत के प्राचीनतम महाकाव्यों में मिलता है। भोई समाज शैव धर्म के अंग है। वर्णाश्रम व्यवस्था में वे निषाद अवर्ग रहे हैं। ये मूल रूप से आदिवासी हैं। उड़ीसा में भोई राजवंश के उल्लेख इतिहास में उल्लेखित हैं। से जल जंगल और ज़मीन पर आश्रित होकर अपना जीवन यापन प्राकृतिक संसाधनों की सहायता से करते चले आ रहे हैं। महाभारत के भिष्म पितामह की दुसरी माता सत्यवती एक धीवर(निषाद)पुत्री थी,जरासन्ध भी चंद्रवंशी क्षत्रिय कहार चन्देल राजपूत, व एकलव्य निषाद था...मगर कर्म संबोधन कहार जाति के उपजाति वंश की शाखा के ही भाग है बैसे कर्म संबोधन कहार जाति चंद्रवंशी समाज (रवानी) के लोग स्वयं को कश्यप नाम के एक अति प्राचीन हिन्दू ऋषि के गोत्र से उत्पन्न हुआ बतलाते हैं। इस कारण वे अपने नाम के आगे जातिसूचक शब्द कश्यप लगाने में गर्व अनुभव करते हैं।बैसे महाभारत के भिष्म पितामह की दुसरी माता सत्यवती एक धीवर(निषाद)पुत्री थी,मगध साम्राट बहुबली जरासंध महराज भी चंद्रवंशी क्षत्रिय ही थे!बिहार,झारखंड,पं.बंगाल,आसाम में इस समाज को चंद्रवंशी क्षत्रिय समाज कहते है!रवानी या रमानी चंद्रवंसी समाज या कहार जाति की उपजाति या शाखा है। यह भारत के विभिन्न प्रांतों में विभिन्न नामों से पायी जाती है।और रामायण मे प्रभु श्रीरामचंद्र और केवट के संवाद का वर्णन है इस बात से यह साबित होता हे की भोई एक आदिम जाती है .
4 संबंधोंः चंद्रवंशी समाज, धिवर, निषादराज, कश्यप राजपूत।
चंद्रवंशी समाज भारतवर्ष के प्राचीनतम क्षत्रिय समाजों में से एक है। वर्तमान समय में कर्म संबोधन यह कहार जाति के रूप में जानी जाती है। यह भारत के विभिन्न प्रांतों में विभिन्न नामों से पायी जाती है। .
धिवर, भोई जाति की उपजाति है। यह भोई, कहार, मांझी, धीवर, डोङिया, निषाद, केवट से सम्बंधित है। श्रेणीःजाति.
निषादराज निषादों के राजा का उपनाम है। वे ऋंगवेरपुर के राजा थे, उनका नाम गुह था। वे भोईकहार समाज के थे और उन्होंने ही वनवासकाल में राम, सीता तथा लक्ष्मण को गंगा पार करवाया था। भोई समाज आज भी इनकी पुजा करते है। श्रेणीःरामायण के पात्र.
कश्यप राजपूत महर्षि कश्यप के वंशज होने के कारण ये कश्यप राजपूत उपनाम लगाते हैं। ये मूलरूप से शैव धर्म को मानते हैं। कश्यप शैव समाज का इतिहास काफी प्राचीनतम हैं। क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यताओं के जनक इनके आदिपूर्वज रहें हैं। कश्यप राजपूत सिक्ख, शैव व बौद्ध धर्म में पायें जाते हैं। इतिहास कश्यप समाज का इतिहास हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार प्रथम चक्रवर्ती सम्राट हिरण्याक्ष इसी वंश में हुआ करते थे। कश्यप वंश से ही सूर्यवंश, इक्ष्वाकु वंश, व रघुवंश (जो बाद में अलग हो गए) की उत्पत्ति हुई हैं। उपनाम कश्यप राजपूत, मेहरा राजपूत, कश्यप, कहार, चन्द्रवंशी क्षत्रिय, डोगरा, जामवाल, राजपूत, क्षत्रिय, धीवर, झीवर, बर्मन, वर्मन, वर्धन, डेका, कलिता, कल्यान, भोई राजपूत, भोई, निषाद,गोंड, चोल, चेर, पाण्ड्य, मल्लाह राजपूत, मल्लाह, सूर्यवंशी क्षत्रिय, कीर, गंगापुत्र, अग्निकुल क्षत्रिय, वन्यकुल क्षत्रिय, वन्नियार, Vanniyar, किरात, बेस्ता, बेदार, पाण्ड्य, जाधव, भोयर, राज भोई, कोली, कोल, पल्लव, मुदिराजा, मुथुराजा, आदि 'महापुरुष व देव' महादेव शिव महर्षि कश्यप महर्षि कालू बाबा सम्राट हिरण्यकश्यप सम्राट इक्ष्वाकु सम्राट महाबली राजा वेन सम्राट जरासन्ध सम्राट वाणासुर निषादराज गुह्य एकलव्य श्री राम राजा ध्रुव राजा नल सम्राट स्कंदवर्मन राजा हरिश्चंद्र महारानी दुर्गावती राजेन्द्र चोल महाराज गुलाब सिंह बाबा मोतीराम मेहरा भाई हिम्मत सिंह झिंवर सन्त भीमा भोई.
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भोई क्षत्रिय, भोई राजपूत, भोई आदिवासी भोई भारत की एक प्राचीन जाति है। यह एक आखेटक आदिवासी जाति है जिसका उल्लेख महाभारत और रामायणजैसे भारत के प्राचीनतम महाकाव्यों में मिलता है। भोई समाज शैव धर्म के अंग है। वर्णाश्रम व्यवस्था में वे निषाद अवर्ग रहे हैं। ये मूल रूप से आदिवासी हैं। उड़ीसा में भोई राजवंश के उल्लेख इतिहास में उल्लेखित हैं। से जल जंगल और ज़मीन पर आश्रित होकर अपना जीवन यापन प्राकृतिक संसाधनों की सहायता से करते चले आ रहे हैं। महाभारत के भिष्म पितामह की दुसरी माता सत्यवती एक धीवरपुत्री थी,जरासन्ध भी चंद्रवंशी क्षत्रिय कहार चन्देल राजपूत, व एकलव्य निषाद था...मगर कर्म संबोधन कहार जाति के उपजाति वंश की शाखा के ही भाग है बैसे कर्म संबोधन कहार जाति चंद्रवंशी समाज के लोग स्वयं को कश्यप नाम के एक अति प्राचीन हिन्दू ऋषि के गोत्र से उत्पन्न हुआ बतलाते हैं। इस कारण वे अपने नाम के आगे जातिसूचक शब्द कश्यप लगाने में गर्व अनुभव करते हैं।बैसे महाभारत के भिष्म पितामह की दुसरी माता सत्यवती एक धीवरपुत्री थी,मगध साम्राट बहुबली जरासंध महराज भी चंद्रवंशी क्षत्रिय ही थे!बिहार,झारखंड,पं.बंगाल,आसाम में इस समाज को चंद्रवंशी क्षत्रिय समाज कहते है!रवानी या रमानी चंद्रवंसी समाज या कहार जाति की उपजाति या शाखा है। यह भारत के विभिन्न प्रांतों में विभिन्न नामों से पायी जाती है।और रामायण मे प्रभु श्रीरामचंद्र और केवट के संवाद का वर्णन है इस बात से यह साबित होता हे की भोई एक आदिम जाती है . चार संबंधोंः चंद्रवंशी समाज, धिवर, निषादराज, कश्यप राजपूत। चंद्रवंशी समाज भारतवर्ष के प्राचीनतम क्षत्रिय समाजों में से एक है। वर्तमान समय में कर्म संबोधन यह कहार जाति के रूप में जानी जाती है। यह भारत के विभिन्न प्रांतों में विभिन्न नामों से पायी जाती है। . धिवर, भोई जाति की उपजाति है। यह भोई, कहार, मांझी, धीवर, डोङिया, निषाद, केवट से सम्बंधित है। श्रेणीःजाति. निषादराज निषादों के राजा का उपनाम है। वे ऋंगवेरपुर के राजा थे, उनका नाम गुह था। वे भोईकहार समाज के थे और उन्होंने ही वनवासकाल में राम, सीता तथा लक्ष्मण को गंगा पार करवाया था। भोई समाज आज भी इनकी पुजा करते है। श्रेणीःरामायण के पात्र. कश्यप राजपूत महर्षि कश्यप के वंशज होने के कारण ये कश्यप राजपूत उपनाम लगाते हैं। ये मूलरूप से शैव धर्म को मानते हैं। कश्यप शैव समाज का इतिहास काफी प्राचीनतम हैं। क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यताओं के जनक इनके आदिपूर्वज रहें हैं। कश्यप राजपूत सिक्ख, शैव व बौद्ध धर्म में पायें जाते हैं। इतिहास कश्यप समाज का इतिहास हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार प्रथम चक्रवर्ती सम्राट हिरण्याक्ष इसी वंश में हुआ करते थे। कश्यप वंश से ही सूर्यवंश, इक्ष्वाकु वंश, व रघुवंश की उत्पत्ति हुई हैं। उपनाम कश्यप राजपूत, मेहरा राजपूत, कश्यप, कहार, चन्द्रवंशी क्षत्रिय, डोगरा, जामवाल, राजपूत, क्षत्रिय, धीवर, झीवर, बर्मन, वर्मन, वर्धन, डेका, कलिता, कल्यान, भोई राजपूत, भोई, निषाद,गोंड, चोल, चेर, पाण्ड्य, मल्लाह राजपूत, मल्लाह, सूर्यवंशी क्षत्रिय, कीर, गंगापुत्र, अग्निकुल क्षत्रिय, वन्यकुल क्षत्रिय, वन्नियार, Vanniyar, किरात, बेस्ता, बेदार, पाण्ड्य, जाधव, भोयर, राज भोई, कोली, कोल, पल्लव, मुदिराजा, मुथुराजा, आदि 'महापुरुष व देव' महादेव शिव महर्षि कश्यप महर्षि कालू बाबा सम्राट हिरण्यकश्यप सम्राट इक्ष्वाकु सम्राट महाबली राजा वेन सम्राट जरासन्ध सम्राट वाणासुर निषादराज गुह्य एकलव्य श्री राम राजा ध्रुव राजा नल सम्राट स्कंदवर्मन राजा हरिश्चंद्र महारानी दुर्गावती राजेन्द्र चोल महाराज गुलाब सिंह बाबा मोतीराम मेहरा भाई हिम्मत सिंह झिंवर सन्त भीमा भोई.
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- 41 min ago बॉलीवुड को लेकर एक्ट्रेस ने दिया विवादित बयान, बोलीं- अगर बॉलीवुड में लांच हुई होती तो कपड़े उतरवा देते...'
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साउथ इंडियन फिल्मों की सुपरहिट हिट एक्ट्रेस काजल अग्रवाल ने हिट फिल्मों के बाद अब नई उपलब्धि हासिल की है। दरअसल सिंगापुर मैडम तुसाद म्यूजियम में काजल अग्रवाल का वैक्स स्टैच्यू बनाया गया है। इसकी जानकारी खुद एक्ट्रेस ने दी। साथ ही फोटो भी सोशल मीडिया पर सामने आई। काजल अग्रवाल की ये उपल्बधि कई मायनों में खास है।
इससे पहले किसी साउथ इंडियन एक्ट्रेस का वैक्स स्टैच्यू मैडम तुसाद में नहीं लगा है। ये काजल और साउथ इंडस्ट्री दोनों के लिए ही बेहद खास पल है। सोशल मीडिया पर जो तस्वीरें सामने आई है उसमें काजल सिंगापुर के मैडम तुसाद म्यूजियम में नजर आ रही हैं और उन्होंने वैक्स स्टैच्यू के साथ पोज भी दिए।
सिंगापुर में स्टैच्यू के उद्घाटन के लिए काजल अग्रवाल अपने परिवार संग पहुंची। कुछ तस्वीरों में उनके साथ उनके परिवार के सदस्य भी नजर आ रहे हैं। स्टैच्यू से जुड़ी कई फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रही हैं.
खास बात ये है कि काजल अग्रवाल साउथ की पहली ऐसी एक्ट्रेस बन गई हैं जिनका स्टैच्यू तुसाद म्यूजियम में लगा है। हालांकि इससे पहले बाहुबली फेम प्रभास का स्टैच्यू बनाया गया था।
Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...'
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- इकतालीस मिनट ago बॉलीवुड को लेकर एक्ट्रेस ने दिया विवादित बयान, बोलीं- अगर बॉलीवुड में लांच हुई होती तो कपड़े उतरवा देते...' Don't Miss! साउथ इंडियन फिल्मों की सुपरहिट हिट एक्ट्रेस काजल अग्रवाल ने हिट फिल्मों के बाद अब नई उपलब्धि हासिल की है। दरअसल सिंगापुर मैडम तुसाद म्यूजियम में काजल अग्रवाल का वैक्स स्टैच्यू बनाया गया है। इसकी जानकारी खुद एक्ट्रेस ने दी। साथ ही फोटो भी सोशल मीडिया पर सामने आई। काजल अग्रवाल की ये उपल्बधि कई मायनों में खास है। इससे पहले किसी साउथ इंडियन एक्ट्रेस का वैक्स स्टैच्यू मैडम तुसाद में नहीं लगा है। ये काजल और साउथ इंडस्ट्री दोनों के लिए ही बेहद खास पल है। सोशल मीडिया पर जो तस्वीरें सामने आई है उसमें काजल सिंगापुर के मैडम तुसाद म्यूजियम में नजर आ रही हैं और उन्होंने वैक्स स्टैच्यू के साथ पोज भी दिए। सिंगापुर में स्टैच्यू के उद्घाटन के लिए काजल अग्रवाल अपने परिवार संग पहुंची। कुछ तस्वीरों में उनके साथ उनके परिवार के सदस्य भी नजर आ रहे हैं। स्टैच्यू से जुड़ी कई फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रही हैं. खास बात ये है कि काजल अग्रवाल साउथ की पहली ऐसी एक्ट्रेस बन गई हैं जिनका स्टैच्यू तुसाद म्यूजियम में लगा है। हालांकि इससे पहले बाहुबली फेम प्रभास का स्टैच्यू बनाया गया था। Viral Video: बंद कमरे में लड़कियों ने की ऐसी हरकत, वीडियो देख भड़के यूजर्स, बोले- 'पढ़ने लिखने की उम्र में...'
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Meerut । शहर सर्राफा बाजार बंद होने को लेकर सर्राफा व्यापारियों में आक्त्रोश है। सर्राफा व्यापारियों ने डीएम और सिटी मजिस्ट्रेट के साथ मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने बाजार खोलने की मांग की है। मगर प्रशासन ने बाजार बंद करने के स्पष्ट आदेश दे रखे हैं। ऐसे में आज सर्राफा व्यापारी अपना विरोध जताएंगे। वहीं संयुक्त व्यापार संघ नवीन गुप्ता गुट भी आज इस मामले में कूद सकता है।
दरअसल, शहर सर्राफा बाजार में हाल ही में एक कोरोना का मरीज मिला था। जिसके बाद बुधवार को पूरा बाजार बंद करा दिया गया था। सीओ कोतवाली ने सेनेटाइजेशन कराने के लिए बाजार बंद किया था। जिसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट सत्येंद्र सिंह ने आदेश जारी कर दिया था कि अग्रिम आदेशों तक बाजार बंद रहेगा। ऐसे में गुरुवार को एक बार फिर सर्राफा व्यापारियों ने सीओ से बातचीत की और पत्र भी लिखा लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। जिसको लेकर सर्राफा व्यापारियों में आक्त्रोश है। आज व्यापारी एकत्र होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं। पहले भी व्यापारी बाजार खुलवाने को लेकर पुलिस और प्रशासन का विरोध कर चुके हैं। व्यापारी नेता विजय आनंद अग्रवाल का कहना है कि जहां पर मरीज मिला है उससे कुछ मीटर का एरिया सील किया जा सकता है लेकिन ऐसा नहीं है कि पूरा बाजार बंद कर दिया जाए। व्यापारी अपने हित की लड़ाई लड़ेगा।
अभी बाजार खोलने की अनुमति नहीं है। अग्रिम आदेशों तक बाजार बंद रहेगा। सिटी मजिस्ट्रेट आउट ऑफ स्टेशन हैं। देर रात या शुक्त्रवार को आएंगे, जिसके बाद ही बाजार के बारे में फैसला लिया जाएगा।
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Meerut । शहर सर्राफा बाजार बंद होने को लेकर सर्राफा व्यापारियों में आक्त्रोश है। सर्राफा व्यापारियों ने डीएम और सिटी मजिस्ट्रेट के साथ मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने बाजार खोलने की मांग की है। मगर प्रशासन ने बाजार बंद करने के स्पष्ट आदेश दे रखे हैं। ऐसे में आज सर्राफा व्यापारी अपना विरोध जताएंगे। वहीं संयुक्त व्यापार संघ नवीन गुप्ता गुट भी आज इस मामले में कूद सकता है। दरअसल, शहर सर्राफा बाजार में हाल ही में एक कोरोना का मरीज मिला था। जिसके बाद बुधवार को पूरा बाजार बंद करा दिया गया था। सीओ कोतवाली ने सेनेटाइजेशन कराने के लिए बाजार बंद किया था। जिसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट सत्येंद्र सिंह ने आदेश जारी कर दिया था कि अग्रिम आदेशों तक बाजार बंद रहेगा। ऐसे में गुरुवार को एक बार फिर सर्राफा व्यापारियों ने सीओ से बातचीत की और पत्र भी लिखा लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। जिसको लेकर सर्राफा व्यापारियों में आक्त्रोश है। आज व्यापारी एकत्र होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं। पहले भी व्यापारी बाजार खुलवाने को लेकर पुलिस और प्रशासन का विरोध कर चुके हैं। व्यापारी नेता विजय आनंद अग्रवाल का कहना है कि जहां पर मरीज मिला है उससे कुछ मीटर का एरिया सील किया जा सकता है लेकिन ऐसा नहीं है कि पूरा बाजार बंद कर दिया जाए। व्यापारी अपने हित की लड़ाई लड़ेगा। अभी बाजार खोलने की अनुमति नहीं है। अग्रिम आदेशों तक बाजार बंद रहेगा। सिटी मजिस्ट्रेट आउट ऑफ स्टेशन हैं। देर रात या शुक्त्रवार को आएंगे, जिसके बाद ही बाजार के बारे में फैसला लिया जाएगा।
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ब्रिटेन की सबसे लंबे समय तक राज करने वाली और दुनिया की सबसे बुजुर्ग सम्राट महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का आज निधन हो गया। वह 96 वर्ष की थीं। महारानी पिछले साल के अंत से एक गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं।
एलिजाबेथ द्वितीय ने 70 वर्षों तक शासन किया। ब्रिटेन ने जून में भव्य आयोजनों के साथ राष्ट्र की सेवा के 70 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में महारानी की प्लेटिनम जयंती मनाई थी। 2015 में महारानी एलिजाबेथ अपनी परदादी महारानी विक्टोरिया को पीछे छोड़ते हुए सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाली ब्रिटिश सम्राट बनीं। इस साल, वह दुनिया की दूसरी सबसे लंबे समय तक राज करने वाली सम्राट बनीं।
शाही परिवार में महारानी के बेटे व उत्तराधिकारी प्रिंस चार्ल्स, पोते विलियम व हैरी और उनके परिवार - स्कॉटिश हाइलैंड्स में अपने बाल्मोरल रिट्रीट में जुटे हैं। इसी जगह पर महारानी ने अपने अंतिम दिन बिताए।
वह जिस बीमारी से पीड़ित थीं उसको बकिंघम पैलेस 'एपिसोडिक मोबिलिटी प्रॉब्लम्स' कही जाने वाली बीमारी बताता रहा था। पिछले साल अक्टूबर में एलिजाबेथ ने अस्पताल में एक रात बिताई थी और तब से उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा। एक दिन पहले ही बुधवार को उन्होंने अपने डॉक्टरों द्वारा आराम करने की सलाह के बाद वरिष्ठ मंत्रियों के साथ एक वर्चुअल बैठक रद्द कर दी थी।
महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने कंजरवेटिव पार्टी की नेता लिज ट्रस को मंगलवार को औपचारिक रूप से ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। महारानी ने ब्रिटेन के 15 प्रधानमंत्रियों का शपथ दिलाई थी जिसमें विंस्टन चर्चिल से लेकर लिज ट्रस तक शामिल हैं।
एलिजाबेथ का जन्म 21 अप्रैल, 1926 को हुआ था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जब 11 दिसंबर, 1936 को उनके चाचा एडवर्ड VIII ने त्यागपत्र दिया और उनके पिता किंग जॉर्ज VI बन गए तो वह उत्तराधिकारी बन गईं। तब वह मात्र 10 साल की थीं। उन्होंने 20 नवंबर, 1947 को लंदन के वेस्टमिंस्टर एब्बे में नौसेना के लेफ्टिनेंट फिलिप माउंटबेटन से शादी की। उनके चार बच्चे थे- प्रिंस चार्ल्स, प्रिंसेस ऐनी, प्रिंस एंड्रयू और प्रिंस एडवर्ड। फिलिप का अप्रैल 2021 में 99 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
वह 6 फरवरी, 1952 को अपने पिता की मृत्यु पर सिंहासन पर बैठीं। उन्हें 2 जून, 1953 को वेस्टमिंस्टर एब्बे में ताज पहनाया गया। तब विंस्टन चर्चिल ब्रिटिश पीएम थे। एलिजाबेथ यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित 15 क्षेत्रों की महारानी बनी हुई थीं।
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ब्रिटेन की सबसे लंबे समय तक राज करने वाली और दुनिया की सबसे बुजुर्ग सम्राट महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का आज निधन हो गया। वह छियानवे वर्ष की थीं। महारानी पिछले साल के अंत से एक गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। एलिजाबेथ द्वितीय ने सत्तर वर्षों तक शासन किया। ब्रिटेन ने जून में भव्य आयोजनों के साथ राष्ट्र की सेवा के सत्तर वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में महारानी की प्लेटिनम जयंती मनाई थी। दो हज़ार पंद्रह में महारानी एलिजाबेथ अपनी परदादी महारानी विक्टोरिया को पीछे छोड़ते हुए सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाली ब्रिटिश सम्राट बनीं। इस साल, वह दुनिया की दूसरी सबसे लंबे समय तक राज करने वाली सम्राट बनीं। शाही परिवार में महारानी के बेटे व उत्तराधिकारी प्रिंस चार्ल्स, पोते विलियम व हैरी और उनके परिवार - स्कॉटिश हाइलैंड्स में अपने बाल्मोरल रिट्रीट में जुटे हैं। इसी जगह पर महारानी ने अपने अंतिम दिन बिताए। वह जिस बीमारी से पीड़ित थीं उसको बकिंघम पैलेस 'एपिसोडिक मोबिलिटी प्रॉब्लम्स' कही जाने वाली बीमारी बताता रहा था। पिछले साल अक्टूबर में एलिजाबेथ ने अस्पताल में एक रात बिताई थी और तब से उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा। एक दिन पहले ही बुधवार को उन्होंने अपने डॉक्टरों द्वारा आराम करने की सलाह के बाद वरिष्ठ मंत्रियों के साथ एक वर्चुअल बैठक रद्द कर दी थी। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने कंजरवेटिव पार्टी की नेता लिज ट्रस को मंगलवार को औपचारिक रूप से ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। महारानी ने ब्रिटेन के पंद्रह प्रधानमंत्रियों का शपथ दिलाई थी जिसमें विंस्टन चर्चिल से लेकर लिज ट्रस तक शामिल हैं। एलिजाबेथ का जन्म इक्कीस अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ छब्बीस को हुआ था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जब ग्यारह दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ छत्तीस को उनके चाचा एडवर्ड VIII ने त्यागपत्र दिया और उनके पिता किंग जॉर्ज VI बन गए तो वह उत्तराधिकारी बन गईं। तब वह मात्र दस साल की थीं। उन्होंने बीस नवंबर, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को लंदन के वेस्टमिंस्टर एब्बे में नौसेना के लेफ्टिनेंट फिलिप माउंटबेटन से शादी की। उनके चार बच्चे थे- प्रिंस चार्ल्स, प्रिंसेस ऐनी, प्रिंस एंड्रयू और प्रिंस एडवर्ड। फिलिप का अप्रैल दो हज़ार इक्कीस में निन्यानवे वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह छः फरवरी, एक हज़ार नौ सौ बावन को अपने पिता की मृत्यु पर सिंहासन पर बैठीं। उन्हें दो जून, एक हज़ार नौ सौ तिरेपन को वेस्टमिंस्टर एब्बे में ताज पहनाया गया। तब विंस्टन चर्चिल ब्रिटिश पीएम थे। एलिजाबेथ यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित पंद्रह क्षेत्रों की महारानी बनी हुई थीं।
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How To Clean Shirt Collar: सिरका और बेकिंग सोडा का कुछ खास तरीके से इस्तेमाल करके शर्ट के कॉलर पर मौजूद जिद्दी दाग को आसानी से साफ कर सकते हैं।
Tips To Clean Shirt Collar: शर्ट रंगीन हो या सफेद, दोनों को पहनने का मन तभी करता है जब एकदाम क्लीन और आयरन हो। अगर तोड़ा भी गंदा होता है तो कई बार सामने वाले पर इम्प्रेशन भी खराब पड़ता है।
शर्ट को लेकर यह कई बार देखा जाता है कि शर्ट का बाकी हिस्सा तो चमकता है, लेकिन शर्ट का कॉलर गंदा ही रहता है। कई बार की सफाई के बाद भी कॉलर पर मौजूद तेल, पाउडर या क्रीम का निशान नहीं हटता है।
इस लेख में हम आपको कुछ बेहतरीन टिप्स एंड ट्रिक्स बताने जा रहे हैं जिन्हें फॉलो करके कॉलर के आसपास मौजूद दाग या निशान को 5 मिनट में साफ करके चमका सकते हैं। आइए जानते हैं।
कॉलर के साइड-साइड पर मौजूद गंदगी को साफ करना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन उसे साफ करने से पहले आपको कुछ टिप्स को फॉलो करने की जरूरत है। इसके लिए सबसे पहले 1 कप पानी में 2-3 चम्मच नींबू का रस डालकर अच्छे से मिक्स कर लीजिए। अब इस मिश्रण को कॉलर पर डालकर कुछ समय के लिए छोड़ दीजिए। इससे कॉलर पर मौजूद गंदगी नरम हो जाती है और बाद में सफाई करना आसान होता है।
- सबसे पहले एक बाउल में 3-4 चम्मच सिरका को डालें।
- अब इसमें 1-2 चम्मच बेकिंग सोडाको डालकर गाढ़ा मिश्रण तैयार कर लीजिए।
- इसके बाद मिश्रण को गीले कॉलर पर लगाकर 5 मिनट के लिए छोड़ दें।
- 5 मिनट बाद क्लीनिंग ब्रश से रगड़कर साफ कर लें।
- सबसे पहले एक बाउल में 3-4 चम्मच सिरका निकाल लीजिए।
- इसके बाद सिरके में 2 चम्मच अमोनिया पाउडरऔर पानी की कुछ बूंदों को डालकर अच्छे से मिक्स कर लें।
- अब मिश्रण हल्का गुनगुना कर लें। इसके बाद मिश्रण में ब्रश को डुबोकर कॉलर पर लगाकर 5 मिनट के लिए छोड़ दें।
- 5 मिनट बाद क्लीनिंग ब्रश से रगड़कर साफ कर लें।
- नोटः अगर एक बार में कॉलर साफ नहीं होता है, तो प्रक्रिया को दोबारा कर सकते हैं।
सिरका, बेकिंग सोडा और अमोनिया पाउडर के अलावा अन्य कई चीजों के इस्तेमाल से भी कॉलर पर मौजूद जिद्दी दाग को साफ कर सकते हैं। इसके लिए आप सिरका और ब्लीच पाउडर का मिश्रण भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो, तो इसे फेसबुक पर जरूर शेयर करें और इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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How To Clean Shirt Collar: सिरका और बेकिंग सोडा का कुछ खास तरीके से इस्तेमाल करके शर्ट के कॉलर पर मौजूद जिद्दी दाग को आसानी से साफ कर सकते हैं। Tips To Clean Shirt Collar: शर्ट रंगीन हो या सफेद, दोनों को पहनने का मन तभी करता है जब एकदाम क्लीन और आयरन हो। अगर तोड़ा भी गंदा होता है तो कई बार सामने वाले पर इम्प्रेशन भी खराब पड़ता है। शर्ट को लेकर यह कई बार देखा जाता है कि शर्ट का बाकी हिस्सा तो चमकता है, लेकिन शर्ट का कॉलर गंदा ही रहता है। कई बार की सफाई के बाद भी कॉलर पर मौजूद तेल, पाउडर या क्रीम का निशान नहीं हटता है। इस लेख में हम आपको कुछ बेहतरीन टिप्स एंड ट्रिक्स बताने जा रहे हैं जिन्हें फॉलो करके कॉलर के आसपास मौजूद दाग या निशान को पाँच मिनट में साफ करके चमका सकते हैं। आइए जानते हैं। कॉलर के साइड-साइड पर मौजूद गंदगी को साफ करना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन उसे साफ करने से पहले आपको कुछ टिप्स को फॉलो करने की जरूरत है। इसके लिए सबसे पहले एक कप पानी में दो-तीन चम्मच नींबू का रस डालकर अच्छे से मिक्स कर लीजिए। अब इस मिश्रण को कॉलर पर डालकर कुछ समय के लिए छोड़ दीजिए। इससे कॉलर पर मौजूद गंदगी नरम हो जाती है और बाद में सफाई करना आसान होता है। - सबसे पहले एक बाउल में तीन-चार चम्मच सिरका को डालें। - अब इसमें एक-दो चम्मच बेकिंग सोडाको डालकर गाढ़ा मिश्रण तैयार कर लीजिए। - इसके बाद मिश्रण को गीले कॉलर पर लगाकर पाँच मिनट के लिए छोड़ दें। - पाँच मिनट बाद क्लीनिंग ब्रश से रगड़कर साफ कर लें। - सबसे पहले एक बाउल में तीन-चार चम्मच सिरका निकाल लीजिए। - इसके बाद सिरके में दो चम्मच अमोनिया पाउडरऔर पानी की कुछ बूंदों को डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। - अब मिश्रण हल्का गुनगुना कर लें। इसके बाद मिश्रण में ब्रश को डुबोकर कॉलर पर लगाकर पाँच मिनट के लिए छोड़ दें। - पाँच मिनट बाद क्लीनिंग ब्रश से रगड़कर साफ कर लें। - नोटः अगर एक बार में कॉलर साफ नहीं होता है, तो प्रक्रिया को दोबारा कर सकते हैं। सिरका, बेकिंग सोडा और अमोनिया पाउडर के अलावा अन्य कई चीजों के इस्तेमाल से भी कॉलर पर मौजूद जिद्दी दाग को साफ कर सकते हैं। इसके लिए आप सिरका और ब्लीच पाउडर का मिश्रण भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो, तो इसे फेसबुक पर जरूर शेयर करें और इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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जिले में लगातार फैल रहे वायरल फीवर व डेंगू ने अब मोहल्लों और परिवार को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को जिले में एक और मौत हो गई है। इसी के साथ जिले में मृतकों की संख्या आठ पहुंच गई है। वहीं मंगलवार को 23 नए मरीज मिले। इसी के साथ जिले में डेंगू संक्रमितों की संख्या 560 पहुंची गई है।
नगर के सरस्वती पुरम निवासी योगेंद्र सिंह पुत्र इंद्रदेव सिंह विगत 31 अक्टूबर को डेंगू से संक्रमित हो गए थे। जिन्हें जिला चिकित्सालय अयोध्या में एडमिट होने आये पर बीमारी की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों द्वारा उनको लखनऊ रेफर कर दिया गया था। परिजनों ने योगेंद्र सिंह को लखनऊ के मेदांता में भर्ती कराया कराया था, जहां इलाज चल रहा था। मंगलवार को इलाज के दौरान योगेंद्र की मौत हो गई।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से मंगलवार को जारी हेल्थ बुलेटिन में 23 नए केस डेंगू के पॉजिटिव पाए जाने की रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इसे लेकर अब जनपद में एक अक्टूबर से अब तक कुल 560 डेंगू पॉजिटिव केस पाए गए हैं। मेडिकल कॉलेज में चार, जिला चिकित्सालय में छह ,श्री राम अस्पताल में एक पॉजिटिव केस भर्ती हैं। जिनका इलाज किया जा रहा है।
जिले में लगातार फैल रहे वायरल फीवर व डेंगू ने अब मोहल्लों और परिवार को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। नगर के मेवातीपुरा में एक परिवार में पांच व लालबाग में एक ही परिवार में चार और एक अन्य परिवार में एक मरीज डेंगू पॉजिटिव पाया गया है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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जिले में लगातार फैल रहे वायरल फीवर व डेंगू ने अब मोहल्लों और परिवार को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को जिले में एक और मौत हो गई है। इसी के साथ जिले में मृतकों की संख्या आठ पहुंच गई है। वहीं मंगलवार को तेईस नए मरीज मिले। इसी के साथ जिले में डेंगू संक्रमितों की संख्या पाँच सौ साठ पहुंची गई है। नगर के सरस्वती पुरम निवासी योगेंद्र सिंह पुत्र इंद्रदेव सिंह विगत इकतीस अक्टूबर को डेंगू से संक्रमित हो गए थे। जिन्हें जिला चिकित्सालय अयोध्या में एडमिट होने आये पर बीमारी की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों द्वारा उनको लखनऊ रेफर कर दिया गया था। परिजनों ने योगेंद्र सिंह को लखनऊ के मेदांता में भर्ती कराया कराया था, जहां इलाज चल रहा था। मंगलवार को इलाज के दौरान योगेंद्र की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मंगलवार को जारी हेल्थ बुलेटिन में तेईस नए केस डेंगू के पॉजिटिव पाए जाने की रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इसे लेकर अब जनपद में एक अक्टूबर से अब तक कुल पाँच सौ साठ डेंगू पॉजिटिव केस पाए गए हैं। मेडिकल कॉलेज में चार, जिला चिकित्सालय में छह ,श्री राम अस्पताल में एक पॉजिटिव केस भर्ती हैं। जिनका इलाज किया जा रहा है। जिले में लगातार फैल रहे वायरल फीवर व डेंगू ने अब मोहल्लों और परिवार को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। नगर के मेवातीपुरा में एक परिवार में पांच व लालबाग में एक ही परिवार में चार और एक अन्य परिवार में एक मरीज डेंगू पॉजिटिव पाया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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नई दिल्ली. अयोध्या फैसले (Ayodhya Verdict) के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi adityanath) ने NEWS18 को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर उनके सीएम रहते अयोध्या में मन्दिर बनता है तो ये उनके लिए गौरवशाली मौका होगा. सीएम योगी ने नागरिकता कानून (Citizenship Act) से लेकर अन्य मुद्दों पर पूछे गए सवालों का जवाब दिया. नागरिकता कानून को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ कि इस पर विपक्ष घड़ियाली आंसू बहा रहा है.
'जल्दी ही बनेगा राम राम मंदिर'
राम मंदिर को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए सीएम योगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह हमारे लिए गौरव का विषय है. गोरक्षा पीठ की तीन पीढ़ियां इस आंदोलन से जुड़ी थीं. मेरे दादा गुरु दिग्विजय नाथ जी महाराज, मेरे गुरु अमरनाथ जी महाराज, 1934 से इस आंदोलन से हमारी पीठ जुड़ी रही, सब की भूमिका रही है. ऐसे में अगर मेरे समय में राम मंदिर का निर्माण होगा तो इससे बड़ा गौरव का विषय मेरे लिए कोई नहीं हो सकता. योगी ने कहा कि राम मंदिर के लिए केंद्र सरकार एक ट्रस्ट बनाएगी और जैसा राष्ट्रीय अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह कह रहे हैं, जल्दी ही राम मंदिर का निर्माण होगा.
नागरिकता संशोधन कानून पर सीएम योगी ने कहा कि विपक्ष मुद्दा हीन है, उसके पास कोई मुद्दा नहीं है. इसलिए विपक्ष पाकिस्तान की बोली बोल रहा है, जो देशद्रोह है. योगी ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, ममता और अखिलेश पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षियों के पास मुद्दा हीं नहीं है, वह देशद्रोहियों के साथ खड़ा है. किसी के पास कुछ भी बचा नहीं है.
'हम किसी को कानून तोड़ने नहीं देंगे'
यूपी में हुए बवाल को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अलीगढ़ में जो हुआ, उस पर कार्रवाई हुई. लोगों ने पेट्रोल बम फेंके, पथराव किया. हमारे अधिकारियों ने समाधान किया और कार्रवाई की. लखनऊ में नदवा कॉलेज और मऊ में हुए बवाल पर सीएम योगी ने कहा कि इन दोनों मामलों से सख्ती से कार्रवाई की गई और आगे भी सख्ती से कार्रवाई की जाएगी. हमारे पास सिस्टम है. हम किसी को कानून तोड़ने नहीं देंगे.
'झारखंड विधानसभा चुनाव बीजेपी जीतेगी'
झारखंड दौरे को लेकर पूछे गए सवाल पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि झारखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी जीत दर्ज करेगी. उन्होंने कहा कि हम मुद्दों पर बात करते हैं, विपक्ष आधारहीन और मुद्दाहीन बातें कर रहा है. झारखंड में विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है.
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नई दिल्ली. अयोध्या फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने NEWSअट्ठारह को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर उनके सीएम रहते अयोध्या में मन्दिर बनता है तो ये उनके लिए गौरवशाली मौका होगा. सीएम योगी ने नागरिकता कानून से लेकर अन्य मुद्दों पर पूछे गए सवालों का जवाब दिया. नागरिकता कानून को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ कि इस पर विपक्ष घड़ियाली आंसू बहा रहा है. 'जल्दी ही बनेगा राम राम मंदिर' राम मंदिर को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए सीएम योगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह हमारे लिए गौरव का विषय है. गोरक्षा पीठ की तीन पीढ़ियां इस आंदोलन से जुड़ी थीं. मेरे दादा गुरु दिग्विजय नाथ जी महाराज, मेरे गुरु अमरनाथ जी महाराज, एक हज़ार नौ सौ चौंतीस से इस आंदोलन से हमारी पीठ जुड़ी रही, सब की भूमिका रही है. ऐसे में अगर मेरे समय में राम मंदिर का निर्माण होगा तो इससे बड़ा गौरव का विषय मेरे लिए कोई नहीं हो सकता. योगी ने कहा कि राम मंदिर के लिए केंद्र सरकार एक ट्रस्ट बनाएगी और जैसा राष्ट्रीय अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह कह रहे हैं, जल्दी ही राम मंदिर का निर्माण होगा. नागरिकता संशोधन कानून पर सीएम योगी ने कहा कि विपक्ष मुद्दा हीन है, उसके पास कोई मुद्दा नहीं है. इसलिए विपक्ष पाकिस्तान की बोली बोल रहा है, जो देशद्रोह है. योगी ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, ममता और अखिलेश पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षियों के पास मुद्दा हीं नहीं है, वह देशद्रोहियों के साथ खड़ा है. किसी के पास कुछ भी बचा नहीं है. 'हम किसी को कानून तोड़ने नहीं देंगे' यूपी में हुए बवाल को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अलीगढ़ में जो हुआ, उस पर कार्रवाई हुई. लोगों ने पेट्रोल बम फेंके, पथराव किया. हमारे अधिकारियों ने समाधान किया और कार्रवाई की. लखनऊ में नदवा कॉलेज और मऊ में हुए बवाल पर सीएम योगी ने कहा कि इन दोनों मामलों से सख्ती से कार्रवाई की गई और आगे भी सख्ती से कार्रवाई की जाएगी. हमारे पास सिस्टम है. हम किसी को कानून तोड़ने नहीं देंगे. 'झारखंड विधानसभा चुनाव बीजेपी जीतेगी' झारखंड दौरे को लेकर पूछे गए सवाल पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि झारखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी जीत दर्ज करेगी. उन्होंने कहा कि हम मुद्दों पर बात करते हैं, विपक्ष आधारहीन और मुद्दाहीन बातें कर रहा है. झारखंड में विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है. ये भी पढे़ंः .
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जैसीनगर में सोमवार को हुई महिला किसान शारदा सिंह की हत्या के बाद मंगलवार को उसके मायके वालों ने पीली कोठी दरगाह के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया। शव उसी स्थान पर रखा गया था जहां विधवा किसान ने अपना हक हासिल करने के लिए बच्चों सहित कई बार धरना दिया था। बिलखते बच्चे और उन्हें चुप कराते परिजन. . जिसने भी यह दृश्य देखा, आंखें भर आईं।
वहां से गुजर रहा हर राहगीर एक बार वहां जरूर रुका। शारदा सिंह की सोमवार को कुएं से फसल की सिंचाई को लेकर आरोपी जेठ दरयाब सिंह और जेठानी ने सिर पर लोहे की रॉड से हमला कर हत्या कर दी थी। इस घटना से उसके दो बच्चे प्रियांश और खुशी अनाथ हो गए। मौके पर पहुंचे प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों ने मृतका महिला के परिजनों को आरोपियों को गिरफ्तार करने व बच्चों को प्रतिकर राशि दिए जाने का आश्वासन देकर प्रदर्शन समाप्त करा दिया।
मायके पक्ष के लोग जिला अस्पताल से शव का पोस्टमार्टम कराकर दोपहर 1 बजे गांव ले जाने के बजाए पीली कोठी दरगाह के सामने लेकर आए। वहां वाहन से शव उतारकर उसी स्थान पर रखा जहां चार माह पूर्व शारदा सिंह ने अपने बच्चों का हक पाने के लिए चार माह पहले धरना दिया था। सूचना मिलते ही अपर कलेक्टर दिनेश श्रीवास्तव, सीएसपी गौतम सोलंकी, सिटी मजिस्ट्रेट अविनाश रावत मौके पर पहुंचे। उन्होंने मृतका के पिता राम सिंह, भाई ओम प्रकाश और रामजी से चर्चा की।
मायके पक्ष के लोगों की मांग थी कि हत्या के आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए तथा अनाथ हो चुके दोनों बच्चों को शासन द्वारा प्रतिकर राशि की घोषणा अधिकारी करें। इसके बाद ही शव को गांव ले जाएंगे। परिजन दोनों बच्चों को स्कूल से घटन स्थल पर लेकर आए, मां का शव देखकर दोनों बच्चे लिपटकर विलाप करने लगे। जैसे-तैसे परिजनों ने दोनों बच्चों को शांत कराया।
परिजन शव को मंगलवार को कलेक्ट्रेट में होने वाली जनसुनवाई में ले जाना चाहते थे। इसकी जानकारी मिलते ही गोपालगंज पुलिस ने कलेक्ट्रेट रोड पर स्टॉपर लगाकर रास्ता बंद कर दिया। इससे प्रदर्शन स्थल पर लोगों की भीड़ लग गई। लोगों को हटाने के लिए पुलिस को स्थिति संभालना पड़ी।
मृतका शारदा सिंह के भाई ओम प्रकाश ठाकुर का कहना है मेरी बहन ससुराल वालों से हक मांगने के लिए तीन साल से संघर्ष कर रही थी। प्रशासन की लापरवाही से यह घटना हुई। उन्होंने हल्का नंबर के पटवारी राजकुमार पांडे पर खुलकर राजस्व रिकार्ड में एक पक्षीय कार्रवाई करने का आरोप लगाया। मेरी मांग है बहन की हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। दोनों बच्चों की पढ़ाई और भरण पोषण के लिए प्र्रतिकर राशि दी जाए।
जैसीनगर थाना प्रभारी धनसिंह ने बताया घटना के बाद से आरोपियों की तलाश के लिए उनके घर व रिश्तेदारों के यहां दबिश दी जा रही है। सोमवार की देर रात आरोपी के एक भाई को हिरासत में ले लिया है। आरोपी के ट्रैक्टर को थाने में रखवा लिया। एसपी ने स्पेशल टीम का गठन किया। आरोपियों की तलाश के लिए एसडीओपी बीके आर्य के नेतृत्व में जैसीनगर के साथ-साथ राहतगढ़ और सीहारा पुलिस चौकी के स्टाफ को लगाया गया है।
यह भी संयोग है कि तीन साल पहले खेत में कुएं के पास भगत सिंह की करंट लगने से मौत हुई थी। उसी स्थान पर सोमवार को शारदा सिंह की उसके जेठ व जेठानी ने हत्या कर दी। कुएं के पानी से फसल की सिंचाई को लेकर जेठानी निशा सिंह से शारदा का विवाद हो रहा था। बीच में निशा का पति दरयाब सिंह आया और छोटे भाई की पत्नी शारदा सिंह पर लोहे की रॉड से हमला कर हत्या कर दी।
क्षेत्र की विधायक पारुल साहू ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने संभाग कमिश्नर मनोहर अगनानी को ज्ञापन देकर मृतका शारदा सिंह के राजस्व रिकॉर्ड में हल्का के पटवारी व अन्य कर्मचारियों पर हेराफेरी करने का आरोप लगाया। उन्होंने 6 सितंबर को ज्ञापन दिया था। घटना से दुखी विधायक का कहना है कि इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने संभाग कमिश्नर से ज्ञापन पर कार्रवाई कर ब्यौरा उपलब्ध कराने की मांग की है।
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जैसीनगर में सोमवार को हुई महिला किसान शारदा सिंह की हत्या के बाद मंगलवार को उसके मायके वालों ने पीली कोठी दरगाह के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया। शव उसी स्थान पर रखा गया था जहां विधवा किसान ने अपना हक हासिल करने के लिए बच्चों सहित कई बार धरना दिया था। बिलखते बच्चे और उन्हें चुप कराते परिजन. . जिसने भी यह दृश्य देखा, आंखें भर आईं। वहां से गुजर रहा हर राहगीर एक बार वहां जरूर रुका। शारदा सिंह की सोमवार को कुएं से फसल की सिंचाई को लेकर आरोपी जेठ दरयाब सिंह और जेठानी ने सिर पर लोहे की रॉड से हमला कर हत्या कर दी थी। इस घटना से उसके दो बच्चे प्रियांश और खुशी अनाथ हो गए। मौके पर पहुंचे प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों ने मृतका महिला के परिजनों को आरोपियों को गिरफ्तार करने व बच्चों को प्रतिकर राशि दिए जाने का आश्वासन देकर प्रदर्शन समाप्त करा दिया। मायके पक्ष के लोग जिला अस्पताल से शव का पोस्टमार्टम कराकर दोपहर एक बजे गांव ले जाने के बजाए पीली कोठी दरगाह के सामने लेकर आए। वहां वाहन से शव उतारकर उसी स्थान पर रखा जहां चार माह पूर्व शारदा सिंह ने अपने बच्चों का हक पाने के लिए चार माह पहले धरना दिया था। सूचना मिलते ही अपर कलेक्टर दिनेश श्रीवास्तव, सीएसपी गौतम सोलंकी, सिटी मजिस्ट्रेट अविनाश रावत मौके पर पहुंचे। उन्होंने मृतका के पिता राम सिंह, भाई ओम प्रकाश और रामजी से चर्चा की। मायके पक्ष के लोगों की मांग थी कि हत्या के आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए तथा अनाथ हो चुके दोनों बच्चों को शासन द्वारा प्रतिकर राशि की घोषणा अधिकारी करें। इसके बाद ही शव को गांव ले जाएंगे। परिजन दोनों बच्चों को स्कूल से घटन स्थल पर लेकर आए, मां का शव देखकर दोनों बच्चे लिपटकर विलाप करने लगे। जैसे-तैसे परिजनों ने दोनों बच्चों को शांत कराया। परिजन शव को मंगलवार को कलेक्ट्रेट में होने वाली जनसुनवाई में ले जाना चाहते थे। इसकी जानकारी मिलते ही गोपालगंज पुलिस ने कलेक्ट्रेट रोड पर स्टॉपर लगाकर रास्ता बंद कर दिया। इससे प्रदर्शन स्थल पर लोगों की भीड़ लग गई। लोगों को हटाने के लिए पुलिस को स्थिति संभालना पड़ी। मृतका शारदा सिंह के भाई ओम प्रकाश ठाकुर का कहना है मेरी बहन ससुराल वालों से हक मांगने के लिए तीन साल से संघर्ष कर रही थी। प्रशासन की लापरवाही से यह घटना हुई। उन्होंने हल्का नंबर के पटवारी राजकुमार पांडे पर खुलकर राजस्व रिकार्ड में एक पक्षीय कार्रवाई करने का आरोप लगाया। मेरी मांग है बहन की हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। दोनों बच्चों की पढ़ाई और भरण पोषण के लिए प्र्रतिकर राशि दी जाए। जैसीनगर थाना प्रभारी धनसिंह ने बताया घटना के बाद से आरोपियों की तलाश के लिए उनके घर व रिश्तेदारों के यहां दबिश दी जा रही है। सोमवार की देर रात आरोपी के एक भाई को हिरासत में ले लिया है। आरोपी के ट्रैक्टर को थाने में रखवा लिया। एसपी ने स्पेशल टीम का गठन किया। आरोपियों की तलाश के लिए एसडीओपी बीके आर्य के नेतृत्व में जैसीनगर के साथ-साथ राहतगढ़ और सीहारा पुलिस चौकी के स्टाफ को लगाया गया है। यह भी संयोग है कि तीन साल पहले खेत में कुएं के पास भगत सिंह की करंट लगने से मौत हुई थी। उसी स्थान पर सोमवार को शारदा सिंह की उसके जेठ व जेठानी ने हत्या कर दी। कुएं के पानी से फसल की सिंचाई को लेकर जेठानी निशा सिंह से शारदा का विवाद हो रहा था। बीच में निशा का पति दरयाब सिंह आया और छोटे भाई की पत्नी शारदा सिंह पर लोहे की रॉड से हमला कर हत्या कर दी। क्षेत्र की विधायक पारुल साहू ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने संभाग कमिश्नर मनोहर अगनानी को ज्ञापन देकर मृतका शारदा सिंह के राजस्व रिकॉर्ड में हल्का के पटवारी व अन्य कर्मचारियों पर हेराफेरी करने का आरोप लगाया। उन्होंने छः सितंबर को ज्ञापन दिया था। घटना से दुखी विधायक का कहना है कि इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने संभाग कमिश्नर से ज्ञापन पर कार्रवाई कर ब्यौरा उपलब्ध कराने की मांग की है।
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पीएम नरेंद्र मोदी. (प्रतीकात्मक तस्वीरः Wikimedia Commons)
बात शुरू करते हैं एक रोचक तथ्य के साथ, क्या आपको पता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये अमेरिका की पहली 'राजकीय यात्रा' है। हालांकि 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पिछले 9 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री 7 बार अमेरिका जा चुके हैं लेकिन नियम ये कहता है कि अमेरिका में जब वहां के राष्ट्रपति दुनिया के किसी नेता को खुद आमंत्रित कर, खास तरीके से उसका व्हाइट हाउस में 'औपचारिक स्वागत' करते हैं, तो उसे 'स्टेट विजिट' कहा जाता है और इस तरह की राजकीय यात्राओं को दो देशों के मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों की उच्चतम अभिव्यक्ति माना जाता है।
अमेरिका में प्रधानमंत्री मोदी का दौरा चल रहा है और इस दौरान होने वाली हर मीटिंग के अलग मायने हैं लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की एक मुलाकात जिसे विश्व कौतूहल की दृष्टि से देख रहा था वो ट्विटर, स्पेस एक्स और टेस्ला जैसी कंपनियों के मालिक एलन मस्क के साथ थी। जिस तरह इंटरनेट का विस्तार होते हुए सोशल मीडिया कम्पनियां शक्तिशाली होती गई, AI, Chat GPT ने दुनिया भर के बाजार को प्रभावित कर दिया, लोगों की पसंद-नापसंद बाजार के हवाले हो गयी है उस समय ट्विटर के मालिक का ये कहना कि, 'मैं मोदी का फैन हूँ' के बड़े निहितार्थ हैं।
भारतीय प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा में अमेरिका की टॉप 20 कंपनियों के सीईओ से मिलने का कार्यक्रम है लेकिन एलन मस्क के साथ हुई मुलाकात ने अब तक वैश्विक परिदृश्य पर सबसे अधिक ध्यान आकर्षण किया और ऐसा क्यूँ है इसे, ऐसे समझना होगा कि एलन मस्क का भारत के बारे में सकारात्मक बोलना अमेरिका के बाजार का भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति झुकाव को दिखाता है। मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मस्क जब ये कहते हैं कि 'पूरी दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहाँ सबसे अधिक संभावनाएं हैं'. . तो ये केवल बयानों तक सिमटती बात नहीं होती बल्कि ये दुनिया के सर्वाधिक धनी व्यक्तियों में शामिल एक व्यक्ति का दुनिया को निवेश करने का सन्देश होता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एलन मस्क के साथ ये पहली मुलाकात नहीं है। साल 2015 में जब प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका का दौरा किया था उस दौरान वो कैलिफ़ोर्निया में टेस्ला मोटर्स फैक्ट्री गए थे, जहां पर मस्क ने उन्हें फैक्ट्री का दौरा कराया था। हालांकि पिछली बार और इस बार की मुलाकात के बीच काफी कुछ बदल चुका है। एक तरफ एलन मस्क ने ट्विटर टेकओवर किया और विश्व की महत्त्वाकांक्षी योजनाओं पर पैसा लगाया दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी देश और विदेश में निरंतर लोकप्रिय और शक्तिशाली होते गए।
एलन मस्क इस मुलाकात के बाद जहाँ एक तरफ भारतीय बाजार में अपनी इलेक्ट्रिक कार टेस्ला को ले जाने को लेकर उत्साहित हैं वहीं दूसरी तरफ उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि सस्टेनेबल एनर्जी के भविष्य के लिए भारत में बड़ी संभावनाएं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा को लेकर अमेरिकी उद्योगपतियों ने जो उत्साह दिखाया है, निश्चित तौर पर वो भारत के लिए भविष्य की राहों को सरल और सुगम बनाएगा।
(डिस्क्लेमर- ये लेखक के निजी विचार हैं. )
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पीएम नरेंद्र मोदी. बात शुरू करते हैं एक रोचक तथ्य के साथ, क्या आपको पता है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये अमेरिका की पहली 'राजकीय यात्रा' है। हालांकि दो हज़ार चौदह में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पिछले नौ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री सात बार अमेरिका जा चुके हैं लेकिन नियम ये कहता है कि अमेरिका में जब वहां के राष्ट्रपति दुनिया के किसी नेता को खुद आमंत्रित कर, खास तरीके से उसका व्हाइट हाउस में 'औपचारिक स्वागत' करते हैं, तो उसे 'स्टेट विजिट' कहा जाता है और इस तरह की राजकीय यात्राओं को दो देशों के मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों की उच्चतम अभिव्यक्ति माना जाता है। अमेरिका में प्रधानमंत्री मोदी का दौरा चल रहा है और इस दौरान होने वाली हर मीटिंग के अलग मायने हैं लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की एक मुलाकात जिसे विश्व कौतूहल की दृष्टि से देख रहा था वो ट्विटर, स्पेस एक्स और टेस्ला जैसी कंपनियों के मालिक एलन मस्क के साथ थी। जिस तरह इंटरनेट का विस्तार होते हुए सोशल मीडिया कम्पनियां शक्तिशाली होती गई, AI, Chat GPT ने दुनिया भर के बाजार को प्रभावित कर दिया, लोगों की पसंद-नापसंद बाजार के हवाले हो गयी है उस समय ट्विटर के मालिक का ये कहना कि, 'मैं मोदी का फैन हूँ' के बड़े निहितार्थ हैं। भारतीय प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा में अमेरिका की टॉप बीस कंपनियों के सीईओ से मिलने का कार्यक्रम है लेकिन एलन मस्क के साथ हुई मुलाकात ने अब तक वैश्विक परिदृश्य पर सबसे अधिक ध्यान आकर्षण किया और ऐसा क्यूँ है इसे, ऐसे समझना होगा कि एलन मस्क का भारत के बारे में सकारात्मक बोलना अमेरिका के बाजार का भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति झुकाव को दिखाता है। मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मस्क जब ये कहते हैं कि 'पूरी दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहाँ सबसे अधिक संभावनाएं हैं'. . तो ये केवल बयानों तक सिमटती बात नहीं होती बल्कि ये दुनिया के सर्वाधिक धनी व्यक्तियों में शामिल एक व्यक्ति का दुनिया को निवेश करने का सन्देश होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एलन मस्क के साथ ये पहली मुलाकात नहीं है। साल दो हज़ार पंद्रह में जब प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका का दौरा किया था उस दौरान वो कैलिफ़ोर्निया में टेस्ला मोटर्स फैक्ट्री गए थे, जहां पर मस्क ने उन्हें फैक्ट्री का दौरा कराया था। हालांकि पिछली बार और इस बार की मुलाकात के बीच काफी कुछ बदल चुका है। एक तरफ एलन मस्क ने ट्विटर टेकओवर किया और विश्व की महत्त्वाकांक्षी योजनाओं पर पैसा लगाया दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी देश और विदेश में निरंतर लोकप्रिय और शक्तिशाली होते गए। एलन मस्क इस मुलाकात के बाद जहाँ एक तरफ भारतीय बाजार में अपनी इलेक्ट्रिक कार टेस्ला को ले जाने को लेकर उत्साहित हैं वहीं दूसरी तरफ उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि सस्टेनेबल एनर्जी के भविष्य के लिए भारत में बड़ी संभावनाएं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा को लेकर अमेरिकी उद्योगपतियों ने जो उत्साह दिखाया है, निश्चित तौर पर वो भारत के लिए भविष्य की राहों को सरल और सुगम बनाएगा। .
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सफाई अभियान को लेकर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय की कुर्सी साफ हो सकती है. सूत्रों के हवाले से मिल रही खबर के मुताबिक भाजपा, सतीश उपाध्याय पर कार्रवाई करने का मन बना रही है और इसके चलते उनसे इस्तीफा मांगा जा सकता है. गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्वच्छ भारत अभियान' के लिए शर्मिंदगी का सबब बनते हुए सतीश उपाध्याय को ऐसा कूड़ा-कचरा साफ करते देखा गया था जिसे तस्वीरें खिंचवाने के मकसद से जानबूझकर बिखेरा गया था. इस पूरे वाकये पर विरोधी पार्टियों ने भाजपा पर खूब निशाना साधा. उपाध्याय ने इस बात को माना था कि उन्होंने सांकेतिक रूप से सफाई की थी. साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया था कि वह इस बारे में नहीं जानते थे कि वहां जानबूझकर कूड़ा-कचरा बिखेरा गया है.
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सफाई अभियान को लेकर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय की कुर्सी साफ हो सकती है. सूत्रों के हवाले से मिल रही खबर के मुताबिक भाजपा, सतीश उपाध्याय पर कार्रवाई करने का मन बना रही है और इसके चलते उनसे इस्तीफा मांगा जा सकता है. गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्वच्छ भारत अभियान' के लिए शर्मिंदगी का सबब बनते हुए सतीश उपाध्याय को ऐसा कूड़ा-कचरा साफ करते देखा गया था जिसे तस्वीरें खिंचवाने के मकसद से जानबूझकर बिखेरा गया था. इस पूरे वाकये पर विरोधी पार्टियों ने भाजपा पर खूब निशाना साधा. उपाध्याय ने इस बात को माना था कि उन्होंने सांकेतिक रूप से सफाई की थी. साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया था कि वह इस बारे में नहीं जानते थे कि वहां जानबूझकर कूड़ा-कचरा बिखेरा गया है.
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- 100 ग्राम नारियल (कसा हुआ)
- सूखी मेवा (बारीक)
- सबसे पहले पनीर को कद्दूकस कर लें। - फिर एक कड़ाही में शक्कर, पनीर और नारियल डालकर उसमें दूध डालें ।
- इसके बाद इसे धीमा आंच पर रखें और धीरे-दीरे चम्मच के साथ चलाते रहें।
- जब मिश्रण गाढ़ा होने लगे तो उसमें किशमिश, बादाम, पिस्ता और अखरोट डालकर मिलाएं।
- अब हरी इलाइची को भी मिश्रण में मिलाकर कुछ देर तक चालाते रहें।
- इसके बाद गैस बंद कर दें और मिश्रण को थोड़ा ठंडा करके अपने हाथों से गोल-गोल पनीर के लड्डू तैयार कर लें।
- फिर बारीक कटी सूखी मेवा से सजाएं।
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- एक सौ ग्राम नारियल - सूखी मेवा - सबसे पहले पनीर को कद्दूकस कर लें। - फिर एक कड़ाही में शक्कर, पनीर और नारियल डालकर उसमें दूध डालें । - इसके बाद इसे धीमा आंच पर रखें और धीरे-दीरे चम्मच के साथ चलाते रहें। - जब मिश्रण गाढ़ा होने लगे तो उसमें किशमिश, बादाम, पिस्ता और अखरोट डालकर मिलाएं। - अब हरी इलाइची को भी मिश्रण में मिलाकर कुछ देर तक चालाते रहें। - इसके बाद गैस बंद कर दें और मिश्रण को थोड़ा ठंडा करके अपने हाथों से गोल-गोल पनीर के लड्डू तैयार कर लें। - फिर बारीक कटी सूखी मेवा से सजाएं।
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रांची, 8 जुलाई : आदिवासी छात्र संघ का 19वां स्थापना दिवस सोमवार को रांची में मनाया गया । इस दौरान छात्रों ने एक-दूसरे को केक खिलाकर बधाई दी ।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव ने आदिवासी छात्र संघ के स्थापना दिवस पर सभी छात्र-छात्राओं को शुभकामना देते हुए कहा कि यह संगठन छात्रों के हित के लिए बना है । हम हमेशा छात्र-छात्राओं के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ते रहेंगे। पैसे के बल पर छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को संघ कभी बर्दाश्त नहीं करेगा ।
उन्होंने कहा कि राज्य के सभी महाविद्यालयों में छात्रसंघ सक्रियता के साथ संगठित हो रहा है । फिलहाल राज्य के 14 जिलों में संघ की कमिटी गठित है हालाँकि अब संघ बचे हुए जिलों में कमिटी गठन करने को तैयार है । संघ का उद्देश्य है कि सभी जाति व धर्म के छात्रों को साथ लेकर चला जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भ्रष्टाचार छात्रसंघ कभी बर्दाश्त नहीं करेगा ।
इस दौरान मुख्य रूप से सुशील उरांव , रौशन , सुमित उरांव , मानिता पन्ना , सुप्रिया उरांव , मधु कुमारी , निशा कुमारी, सलिनी उरांव ,कृष्ण तिग्गा ,सुनील एक्का ,मनोज उरांव , संदीप उरांव शामिल थे।
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रांची, आठ जुलाई : आदिवासी छात्र संघ का उन्नीसवां स्थापना दिवस सोमवार को रांची में मनाया गया । इस दौरान छात्रों ने एक-दूसरे को केक खिलाकर बधाई दी । समारोह की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव ने आदिवासी छात्र संघ के स्थापना दिवस पर सभी छात्र-छात्राओं को शुभकामना देते हुए कहा कि यह संगठन छात्रों के हित के लिए बना है । हम हमेशा छात्र-छात्राओं के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ते रहेंगे। पैसे के बल पर छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को संघ कभी बर्दाश्त नहीं करेगा । उन्होंने कहा कि राज्य के सभी महाविद्यालयों में छात्रसंघ सक्रियता के साथ संगठित हो रहा है । फिलहाल राज्य के चौदह जिलों में संघ की कमिटी गठित है हालाँकि अब संघ बचे हुए जिलों में कमिटी गठन करने को तैयार है । संघ का उद्देश्य है कि सभी जाति व धर्म के छात्रों को साथ लेकर चला जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भ्रष्टाचार छात्रसंघ कभी बर्दाश्त नहीं करेगा । इस दौरान मुख्य रूप से सुशील उरांव , रौशन , सुमित उरांव , मानिता पन्ना , सुप्रिया उरांव , मधु कुमारी , निशा कुमारी, सलिनी उरांव ,कृष्ण तिग्गा ,सुनील एक्का ,मनोज उरांव , संदीप उरांव शामिल थे।
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उज्जैन के राजा महाकाल समय-समय पर अपने भक्तों का हाल जानने नगर भ्रमण कर मंदिर लौट आए। सावन भादौ माह, दशहरा पर्व व दीपावली के बाद आज कार्तिक अगहन माह में बाबा महाकाल ठीक शाम 4 बजे मंदिर प्रांगण से शाही ठाठ बाट के साथ भक्तों का हाल जानकर वापस मंदिर लौट आए।
कोविड के नियमों के चलते विगत 2 वर्षों से बनाए गए नए रुट पर बाबा महाकाल मंदिर से बड़ा गणेश, नृसिंहः घाट होते हुए शिप्रा घाट पहुंची, जहां उनका पूजन अभिषेक किया गया।
जिसके बाद बाबा क्षिप्रा के राम घाट से रामानुजकोट आश्रम, हरिसिद्धि माता मंदिर होते हुए बड़ा गणेश व अंत में महाकाल मंदिर लौटी।
सवारी के पहले मंदिर प्रांगण में महाकाल का पूजन व अभिषेक मंदिर प्रशासक गणेश धाकड़ ने किया। आरती के बाद मंदिर प्रांगण से महाकाल की सवारी निकली।
मंदिर के मुख्य गेट पर सबसे पहले बाबा को पुलिस बल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। कार्तिक माह में निकलने वाली सवारी के लिए भक्तों पर प्रतिबंध नहीं होने के चलते इस बार भक्तों को सवारी के दर्शन करने का लाभ मिला। मंदिर के पुजारी दिनेश गुरु ने बताया कि बाबा की पालकी मंदिर से शिप्रा नदी तक पहुंचेगी व वहां बाबा का पूजन अभिषेक कर पालकी में ही मंदिर लाया गया।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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उज्जैन के राजा महाकाल समय-समय पर अपने भक्तों का हाल जानने नगर भ्रमण कर मंदिर लौट आए। सावन भादौ माह, दशहरा पर्व व दीपावली के बाद आज कार्तिक अगहन माह में बाबा महाकाल ठीक शाम चार बजे मंदिर प्रांगण से शाही ठाठ बाट के साथ भक्तों का हाल जानकर वापस मंदिर लौट आए। कोविड के नियमों के चलते विगत दो वर्षों से बनाए गए नए रुट पर बाबा महाकाल मंदिर से बड़ा गणेश, नृसिंहः घाट होते हुए शिप्रा घाट पहुंची, जहां उनका पूजन अभिषेक किया गया। जिसके बाद बाबा क्षिप्रा के राम घाट से रामानुजकोट आश्रम, हरिसिद्धि माता मंदिर होते हुए बड़ा गणेश व अंत में महाकाल मंदिर लौटी। सवारी के पहले मंदिर प्रांगण में महाकाल का पूजन व अभिषेक मंदिर प्रशासक गणेश धाकड़ ने किया। आरती के बाद मंदिर प्रांगण से महाकाल की सवारी निकली। मंदिर के मुख्य गेट पर सबसे पहले बाबा को पुलिस बल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। कार्तिक माह में निकलने वाली सवारी के लिए भक्तों पर प्रतिबंध नहीं होने के चलते इस बार भक्तों को सवारी के दर्शन करने का लाभ मिला। मंदिर के पुजारी दिनेश गुरु ने बताया कि बाबा की पालकी मंदिर से शिप्रा नदी तक पहुंचेगी व वहां बाबा का पूजन अभिषेक कर पालकी में ही मंदिर लाया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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4000 से अधिक गाने लिखे हैं। साजन, धड़कन, तेरे नाम, रेस जैसी फिल्मों के गीत शामिल।
03 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड विजेता। पहली बार आशिकी के गीत नजर के सामने के लिए 1992 में जीता।
2015 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में एंट्री मिली।
सवालः बॉलीवुड में पुराने गानों के नए वर्जन के ट्रेंड को कैसे देखते हैं?
जवाबः यह गलत है। पुराने मशहूर गानों को दोबारा नहीं गाया जाना चाहिए। इस ट्रेंड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। आजकल के गीतकार पुराने गाने में एक लाइन जोड़कर उसे अपना बना लेते हैं। इससे ओरिजिनल कंपोजर को पहचान के साथ आर्थिक नुकसान भी होता है।
सवालः क्या आपको भी ऐसी किसी सिचुएशन से गुजरना पड़ा है?
जवाबः 'दिलबर' मेरा लिखा सांग था। इसे मैंने बेहद खूबसूरती के साथ तैयार किया था। आजकल इसका नया जमकर बज रहा है। लेकिन मुझे इसका कोई बेनिफिट नहीं मिला। मुझसे परमिशन भी नहीं ली गई।
सवालः पुराने सिंगर्स भी इसको लेकर विरोध दर्ज करा चुके हैं। क्या कहेंगे?
जवाबः आप देखिए कि लताजी के गाए गानों को नए सिंगर गुनगुना रहे हैं। उनके एलबम भी रिलीज हो रहे हैं। ऐसे में पुराने सिंगर्स को कौन याद रखेगा?
सवालः 90 के दशक के म्यूजिक और सांग्स में क्या अंतर महसूस करते हैं?
जवाबः पहले लफ्जों में संगीत डाला जाता था, लेकिन अब म्यूजिक क्रिएशन में लफ्जों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाल ही में मेरे पाए एक डायरेक्टर आए और बोले कि ऐसा गाना लिखो कि समझ में नहीं आए। बॉलीवुड म्यूजिक बहुत खराब दौर से गुजर रहा है।
सवालः नए गीतकारों से क्या अपेक्षाएं करते हैं?
जवाबः नए गीतकार संजीदा काम करें। गलत काम से समझौता कतई न करें। कामयाबी तुरंत नहीं मिलती। थोड़ा इंतजार करने के साथ बेहतर काम की तलाश करें।
सवालः गुलजार और जावेद जी के साथ तुलना पर क्या कहेंगे?
जवाबः यह सही नहीं है। गुलजार और जावेदजी मेरे पिताजी के समय के हैं। मैं उनसे जूनियर हूं। इस तुलना को सही नहीं मानता।
सवालः आने वाले प्रोजेक्ट कौन से हैं?
जवाबः रिलीज होने वाली हाउसफुल-4 में मैंने गीत लिखे हैं। हाउसफुल 1 और 2 में भी मैंने गीत तैयार किए थे। धड़कन-2 से भी मैं जुड़ा हूं। अक्षय खन्ना की अपकमिंग मूवी के साथ ही मूवी 'हम होंगे कामयाब' के लिए भी मैंने गीत लिखे हैं।
सवालः संगम नगरी में पहले कितनी बार आना हुआ है यहां?
जवाबः दूसरी बार इलाहाबाद आना होगा। जब 15 साल का था तब आया था। कुछ यादें शेष हैं। देखना चाहूंगा कि कितना बदलाव आया है।
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चार हज़ार से अधिक गाने लिखे हैं। साजन, धड़कन, तेरे नाम, रेस जैसी फिल्मों के गीत शामिल। तीन बार फिल्मफेयर अवॉर्ड विजेता। पहली बार आशिकी के गीत नजर के सामने के लिए एक हज़ार नौ सौ बानवे में जीता। दो हज़ार पंद्रह में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में एंट्री मिली। सवालः बॉलीवुड में पुराने गानों के नए वर्जन के ट्रेंड को कैसे देखते हैं? जवाबः यह गलत है। पुराने मशहूर गानों को दोबारा नहीं गाया जाना चाहिए। इस ट्रेंड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। आजकल के गीतकार पुराने गाने में एक लाइन जोड़कर उसे अपना बना लेते हैं। इससे ओरिजिनल कंपोजर को पहचान के साथ आर्थिक नुकसान भी होता है। सवालः क्या आपको भी ऐसी किसी सिचुएशन से गुजरना पड़ा है? जवाबः 'दिलबर' मेरा लिखा सांग था। इसे मैंने बेहद खूबसूरती के साथ तैयार किया था। आजकल इसका नया जमकर बज रहा है। लेकिन मुझे इसका कोई बेनिफिट नहीं मिला। मुझसे परमिशन भी नहीं ली गई। सवालः पुराने सिंगर्स भी इसको लेकर विरोध दर्ज करा चुके हैं। क्या कहेंगे? जवाबः आप देखिए कि लताजी के गाए गानों को नए सिंगर गुनगुना रहे हैं। उनके एलबम भी रिलीज हो रहे हैं। ऐसे में पुराने सिंगर्स को कौन याद रखेगा? सवालः नब्बे के दशक के म्यूजिक और सांग्स में क्या अंतर महसूस करते हैं? जवाबः पहले लफ्जों में संगीत डाला जाता था, लेकिन अब म्यूजिक क्रिएशन में लफ्जों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाल ही में मेरे पाए एक डायरेक्टर आए और बोले कि ऐसा गाना लिखो कि समझ में नहीं आए। बॉलीवुड म्यूजिक बहुत खराब दौर से गुजर रहा है। सवालः नए गीतकारों से क्या अपेक्षाएं करते हैं? जवाबः नए गीतकार संजीदा काम करें। गलत काम से समझौता कतई न करें। कामयाबी तुरंत नहीं मिलती। थोड़ा इंतजार करने के साथ बेहतर काम की तलाश करें। सवालः गुलजार और जावेद जी के साथ तुलना पर क्या कहेंगे? जवाबः यह सही नहीं है। गुलजार और जावेदजी मेरे पिताजी के समय के हैं। मैं उनसे जूनियर हूं। इस तुलना को सही नहीं मानता। सवालः आने वाले प्रोजेक्ट कौन से हैं? जवाबः रिलीज होने वाली हाउसफुल-चार में मैंने गीत लिखे हैं। हाउसफुल एक और दो में भी मैंने गीत तैयार किए थे। धड़कन-दो से भी मैं जुड़ा हूं। अक्षय खन्ना की अपकमिंग मूवी के साथ ही मूवी 'हम होंगे कामयाब' के लिए भी मैंने गीत लिखे हैं। सवालः संगम नगरी में पहले कितनी बार आना हुआ है यहां? जवाबः दूसरी बार इलाहाबाद आना होगा। जब पंद्रह साल का था तब आया था। कुछ यादें शेष हैं। देखना चाहूंगा कि कितना बदलाव आया है।
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अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पैसे सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं. क्या आप जानते हैं कैसे छपते हैं नोट, और कहा से आता है स्याही-पेपर, रुपये के रूप में जिन नोट का हम इस्तेमाल करते हैं, वह नोट कैसे बनते हैं किस प्रकार की स्याही का इस्तेमाल किया जाता है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
भारतीय करंसी के नोट भारत सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा छापे जाते हैं. यह सिर्फ सरकारी प्रिंटिंग प्रेस में ही छापे जाते हैं. देशभर में चार प्रिंटिंग प्रेस हैं. नासिक, देवास, मैसूर व सालबोनी (प. बंगाल) में नोट छपाई का काम किया जाता है.
नोट छापने की स्याही का आयात मुख्य रूप से स्विटजरलैंड की कंपनी SICPA से किया जाता है. जिसमें इंटैगलियो (Intaglio), फ्लूरोसेंस ( Fluorescent) और ऑप्टिकल वेरिएबल इंक (Optically variable ink (OVI) का इस्तेमाल किया जाता है. बता दें,
आयात होने वाली स्याही के कंपोजिशन में हर बार बदलाव करवाया जाता है, ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कोई भी देश इसकी नकल न कर सके.
इंटैगलियो इंकः इसका इस्तेमाल नोट पर दिखने वाली महात्मा गांधी की तस्वीर छापने में किया जाता है.
फ्लूरोसेंस इंक : नोट के नंबर पैनल की छपाई के लिए इस इंक का उपयोग किया जाता है.
भारत की भी एक पेपर मिल सिक्योरिटी पेपर मिल (होशंगाबाद) है. ये नोट और स्टांप के लिए पेपर बनाती है. हालांकि भारत के नोट में लगने वाला अधिकतर पेपर जर्मनी, जापान और यूके से आयात किया जाता है.
ब्रिटिश सरकार ने साल 1862 में पहला नोट छापा था, जो कि यूके की एक कंपनी द्वारा छापे जाते थे.
युद्ध के चलते सरकार चांदी का सिक्का ढालने में असमर्थ हो गई और इस प्रकार 1917 में पहली बार एक रुपये का नोट लोगों के सामने आया. इसने उस चांदी के सिक्के का स्थान लिया.
30 नवंबर 1917 को एक रुपये का नोट सामने आया जिस पर ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम की तस्वीर छपी थी.
भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट के अनुसार इस नोट की छपाई को पहली बार 1926 में बंद किया गया क्योंकि इसकी लागत अधिक थी. इसके बाद इसे 1940 में फिर से छापना शुरू कर दिया गया जो 1994 तक जारी रहा.
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अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पैसे सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं. क्या आप जानते हैं कैसे छपते हैं नोट, और कहा से आता है स्याही-पेपर, रुपये के रूप में जिन नोट का हम इस्तेमाल करते हैं, वह नोट कैसे बनते हैं किस प्रकार की स्याही का इस्तेमाल किया जाता है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं. भारतीय करंसी के नोट भारत सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा छापे जाते हैं. यह सिर्फ सरकारी प्रिंटिंग प्रेस में ही छापे जाते हैं. देशभर में चार प्रिंटिंग प्रेस हैं. नासिक, देवास, मैसूर व सालबोनी में नोट छपाई का काम किया जाता है. नोट छापने की स्याही का आयात मुख्य रूप से स्विटजरलैंड की कंपनी SICPA से किया जाता है. जिसमें इंटैगलियो , फ्लूरोसेंस और ऑप्टिकल वेरिएबल इंक का इस्तेमाल किया जाता है. बता दें, आयात होने वाली स्याही के कंपोजिशन में हर बार बदलाव करवाया जाता है, ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कोई भी देश इसकी नकल न कर सके. इंटैगलियो इंकः इसका इस्तेमाल नोट पर दिखने वाली महात्मा गांधी की तस्वीर छापने में किया जाता है. फ्लूरोसेंस इंक : नोट के नंबर पैनल की छपाई के लिए इस इंक का उपयोग किया जाता है. भारत की भी एक पेपर मिल सिक्योरिटी पेपर मिल है. ये नोट और स्टांप के लिए पेपर बनाती है. हालांकि भारत के नोट में लगने वाला अधिकतर पेपर जर्मनी, जापान और यूके से आयात किया जाता है. ब्रिटिश सरकार ने साल एक हज़ार आठ सौ बासठ में पहला नोट छापा था, जो कि यूके की एक कंपनी द्वारा छापे जाते थे. युद्ध के चलते सरकार चांदी का सिक्का ढालने में असमर्थ हो गई और इस प्रकार एक हज़ार नौ सौ सत्रह में पहली बार एक रुपये का नोट लोगों के सामने आया. इसने उस चांदी के सिक्के का स्थान लिया. तीस नवंबर एक हज़ार नौ सौ सत्रह को एक रुपये का नोट सामने आया जिस पर ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम की तस्वीर छपी थी. भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट के अनुसार इस नोट की छपाई को पहली बार एक हज़ार नौ सौ छब्बीस में बंद किया गया क्योंकि इसकी लागत अधिक थी. इसके बाद इसे एक हज़ार नौ सौ चालीस में फिर से छापना शुरू कर दिया गया जो एक हज़ार नौ सौ चौरानवे तक जारी रहा. ख़बरों की अपडेट्स पाने के लिए हमसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी जुड़ेंः
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Rahul Gandhi Remarks: कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान प्रेस वार्ता कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और सावरकर पर जमकर निशाना साधा. राहुल गांधी ने सावरकर पर अंग्रेजों की मदद करने का आरोप भी लगाया. जिसपर पलटवार करते हुए आरएसएस नेता ने कहा कि राहुल गांधी की यह टिप्पणी राजनीति में विफलता पर उनकी निराशा है.
सावरकर और संघ के खिलाफ राहुल गांधी की टिप्पणी की निंदा करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार (RSS Leader Indresh Kumar) ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस सांसद सच बोलने के लिए जाने जाते हैं और यह राजनीति में विफलता पर उनकी निराशा का एक रूप है. न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में इंद्रेश कुमार ने कहा कि सावरकर और आरएसएस पर राहुल गांधी का बयान झूठ से भरा है. आरएसएस और सावरकर के खिलाफ झूठे आरोप लगाना कांग्रेस का फैशन बन गया है. आरएसएस नेता ने कहा कि सावरकर एक स्वतंत्रता सेनानी थे और अंग्रेजों ने उन्हें आजीवन कारावास में डाल दिया था. राहुल गांधी को झूठ बोलना बंद कर देना चाहिए.
कांग्रेस की भारत जोड़ी यात्रा (Congress Bharat Jodo Yatra) का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी ने कर्नाटक (Rahul Gandhi in Karnataka) में एक रैली में कहा कि सावरकर स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के लिए काम करते थे और उन्हें इसके लिए पैसे मिलते थे. कांग्रेस सांसद ने आगे आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी ब्रिटिश राज (British Raj) का समर्थन किया. राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस नफरत फैलाने वालों के खिलाफ लड़ने में विश्वास करती है. कांग्रेस नेता ने कहा, मैं हमेशा एक निश्चित विचार के लिए खड़ा रहा हूं, जो भाजपा (BJP) और आरएसएस को परेशान करता है.
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Rahul Gandhi Remarks: कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान प्रेस वार्ता कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और सावरकर पर जमकर निशाना साधा. राहुल गांधी ने सावरकर पर अंग्रेजों की मदद करने का आरोप भी लगाया. जिसपर पलटवार करते हुए आरएसएस नेता ने कहा कि राहुल गांधी की यह टिप्पणी राजनीति में विफलता पर उनकी निराशा है. सावरकर और संघ के खिलाफ राहुल गांधी की टिप्पणी की निंदा करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस सांसद सच बोलने के लिए जाने जाते हैं और यह राजनीति में विफलता पर उनकी निराशा का एक रूप है. न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में इंद्रेश कुमार ने कहा कि सावरकर और आरएसएस पर राहुल गांधी का बयान झूठ से भरा है. आरएसएस और सावरकर के खिलाफ झूठे आरोप लगाना कांग्रेस का फैशन बन गया है. आरएसएस नेता ने कहा कि सावरकर एक स्वतंत्रता सेनानी थे और अंग्रेजों ने उन्हें आजीवन कारावास में डाल दिया था. राहुल गांधी को झूठ बोलना बंद कर देना चाहिए. कांग्रेस की भारत जोड़ी यात्रा का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी ने कर्नाटक में एक रैली में कहा कि सावरकर स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के लिए काम करते थे और उन्हें इसके लिए पैसे मिलते थे. कांग्रेस सांसद ने आगे आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी ब्रिटिश राज का समर्थन किया. राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस नफरत फैलाने वालों के खिलाफ लड़ने में विश्वास करती है. कांग्रेस नेता ने कहा, मैं हमेशा एक निश्चित विचार के लिए खड़ा रहा हूं, जो भाजपा और आरएसएस को परेशान करता है.
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Remtrex 15 Injection डॉक्टर के द्वारा निर्धारित की जाने वाली दवा है, जो मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन दवाओं के रूप में मिलती है। इसे मुख्यतः गैर-हॉजकिन लिंफोमा, लिम्फोमा के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, Remtrex 15 Injection के कुछ अन्य प्रयोग भी हैं, जिनके बारें में आगे बताया गया है।
Remtrex 15 Injection की उचित खुराक मरीज की उम्र, लिंग और उसके स्वास्थ्य संबंधी पिछली समस्याओं पर निर्भर करती है। इसकी खुराक मरीज की समस्या और दवा देने के तरीके पर भी आधारित की जाती है। इस बारे में और अधिक जानने के लिए खुराक वाले खंड में पढ़ें।
Remtrex 15 Injection के कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं, जैसे पेट दर्द आदि। इन दुष्परिणामों के अलावा Remtrex 15 Injection के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। सामान्य तौर पर Remtrex 15 Injection के साइड इफेक्ट लंबे समय तक बने नहीं रहते हैं और एक बार जब इलाज खत्म हो जाता है तो ये भी ठीक हो जाते हैं। अगर ये दुष्प्रभाव और बिगड़ जाते हैं या लंबे समय तक बने रहते हैं तो इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।
इसके अलावा Remtrex 15 Injection का प्रभाव प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए गंभीर है और जो महिलाएं बच्चों को दूध पिलाती हैं, उन पर इसका प्रभाव गंभीर है। Remtrex 15 Injection से जुड़ी चेतावनी कि इसका लिवर, हार्ट और किडनी पर क्या असर होता है, इसके बारे में नीचे बताया गया है।
अगर आपको पहले से ही कुछ समस्याएं हैं तो इस दवा का उपयोग न करें, इससे दुष्परिणाम हो सकते हैं। संक्रमण, लिवर रोग, एनीमिया इन समस्याओं के कुछ उदाहरण हैं। आगे ऐसी अन्य समस्याएं भी बताई गई हैं जिनमें Remtrex 15 Injection लेने से आपको दुष्प्रभाव अनुभव हो सकते हैं।
Remtrex 15 Injection को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। पूरी जानकारी के लिए नीचे दी गई जानकारी देखें।
ऊपर बताई गई सावधानियों के अलावा यह भी ध्यान में रखें कि वाहन चलाते वक्त Remtrex 15 Injection लेना सुरक्षित है, साथ ही इसकी लत पड़ सकती है।
यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Remtrex 15 Injection की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Remtrex 15 Injection की खुराक अलग हो सकती है।
।किशोरावस्था(13 से 18 वर्ष)
।बच्चे(2 से 12 वर्ष)
।शिशु(1 महीने से 2 वर्ष)
क्या Remtrex 15 Injection का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है?
जो महिलाएं गर्भवती हैं, उनको Remtrex लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करती हैं तो आपके शरीर पर इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
क्या Remtrex 15 Injection का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है?
स्तनपान कराने वाली महिलाओं को Remtrex लेने के बाद कई तरह के विपरीत प्रभावों का भी सामना करना पड़ता है। इसीलिए डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद ही आपको इसका सेवन करना चाहिए।
Remtrex 15 Injection का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है?
Remtrex से किडनी प्रभावित हो सकती है। आप भी दवा से साइड इफेक्ट महसूस करें तो दवा लेना तुरंत बंद कर दें। चिकित्सक से सलाह के बाद ही इसे दोबारा लें।
Remtrex 15 Injection का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है?
Remtrex आपके लीवर पर बुरा प्रभाव डाल सकती है, हानिकारक प्रभाव अनुभव करने पर आप दवा को न लें और इसे लेने से पूर्व डॉक्टर से इसकी पूरी जानकारी लें।
क्या ह्रदय पर Remtrex 15 Injection का प्रभाव पड़ता है?
हृदय काफी हद तक Remtrex सुरक्षित है, हालांकि लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेने से बेहतर परिणाम मिल सकता है। इसके खराब परिणाम बेहद कम होते है।
क्या Remtrex 15 Injection आदत या लत बन सकती है?
नहीं, लेकिन फिर भी आप Remtrex 15 Injection को लेने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछें।
क्या Remtrex 15 Injection को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है?
हां, Remtrex 15 Injection के सेवन के बाद आप किसी भारी मशीन या वाहन चलाने का काम कर सकते हैं।
क्या Remtrex 15 Injection को लेना सुरखित है?
हां, डॉक्टर के कहने पर आप Remtrex 15 Injection को खा सकते हैं।
क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Remtrex 15 Injection इस्तेमाल की जा सकती है?
नहीं, Remtrex 15 Injection किसी भी तरह के दिमागी विकार का इलाज नहीं कर पाती है।
क्या Remtrex 15 Injection को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?
खाने व Remtrex 15 Injection को साथ में लेकर आपके शरीर पर क्या प्रभाव होते हैं इस विषय पर कोई जानकारी मौजूद नहीं है।
जब Remtrex 15 Injection ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या?
अगर आप Remtrex 15 Injection और शराब एक समय पर ले रहे हैं तो संभव है कि इसके हल्के दुष्प्रभाव दिखें। कोई बड़ा खतरा नहीं है पर सावधानी जरूर बरतें।
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Remtrex पंद्रह Injection डॉक्टर के द्वारा निर्धारित की जाने वाली दवा है, जो मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन दवाओं के रूप में मिलती है। इसे मुख्यतः गैर-हॉजकिन लिंफोमा, लिम्फोमा के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, Remtrex पंद्रह Injection के कुछ अन्य प्रयोग भी हैं, जिनके बारें में आगे बताया गया है। Remtrex पंद्रह Injection की उचित खुराक मरीज की उम्र, लिंग और उसके स्वास्थ्य संबंधी पिछली समस्याओं पर निर्भर करती है। इसकी खुराक मरीज की समस्या और दवा देने के तरीके पर भी आधारित की जाती है। इस बारे में और अधिक जानने के लिए खुराक वाले खंड में पढ़ें। Remtrex पंद्रह Injection के कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं, जैसे पेट दर्द आदि। इन दुष्परिणामों के अलावा Remtrex पंद्रह Injection के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। सामान्य तौर पर Remtrex पंद्रह Injection के साइड इफेक्ट लंबे समय तक बने नहीं रहते हैं और एक बार जब इलाज खत्म हो जाता है तो ये भी ठीक हो जाते हैं। अगर ये दुष्प्रभाव और बिगड़ जाते हैं या लंबे समय तक बने रहते हैं तो इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। इसके अलावा Remtrex पंद्रह Injection का प्रभाव प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए गंभीर है और जो महिलाएं बच्चों को दूध पिलाती हैं, उन पर इसका प्रभाव गंभीर है। Remtrex पंद्रह Injection से जुड़ी चेतावनी कि इसका लिवर, हार्ट और किडनी पर क्या असर होता है, इसके बारे में नीचे बताया गया है। अगर आपको पहले से ही कुछ समस्याएं हैं तो इस दवा का उपयोग न करें, इससे दुष्परिणाम हो सकते हैं। संक्रमण, लिवर रोग, एनीमिया इन समस्याओं के कुछ उदाहरण हैं। आगे ऐसी अन्य समस्याएं भी बताई गई हैं जिनमें Remtrex पंद्रह Injection लेने से आपको दुष्प्रभाव अनुभव हो सकते हैं। Remtrex पंद्रह Injection को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। पूरी जानकारी के लिए नीचे दी गई जानकारी देखें। ऊपर बताई गई सावधानियों के अलावा यह भी ध्यान में रखें कि वाहन चलाते वक्त Remtrex पंद्रह Injection लेना सुरक्षित है, साथ ही इसकी लत पड़ सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Remtrex पंद्रह Injection की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Remtrex पंद्रह Injection की खुराक अलग हो सकती है। ।किशोरावस्था ।बच्चे ।शिशु क्या Remtrex पंद्रह Injection का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? जो महिलाएं गर्भवती हैं, उनको Remtrex लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करती हैं तो आपके शरीर पर इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं। क्या Remtrex पंद्रह Injection का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? स्तनपान कराने वाली महिलाओं को Remtrex लेने के बाद कई तरह के विपरीत प्रभावों का भी सामना करना पड़ता है। इसीलिए डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद ही आपको इसका सेवन करना चाहिए। Remtrex पंद्रह Injection का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Remtrex से किडनी प्रभावित हो सकती है। आप भी दवा से साइड इफेक्ट महसूस करें तो दवा लेना तुरंत बंद कर दें। चिकित्सक से सलाह के बाद ही इसे दोबारा लें। Remtrex पंद्रह Injection का जिगर पर क्या असर होता है? Remtrex आपके लीवर पर बुरा प्रभाव डाल सकती है, हानिकारक प्रभाव अनुभव करने पर आप दवा को न लें और इसे लेने से पूर्व डॉक्टर से इसकी पूरी जानकारी लें। क्या ह्रदय पर Remtrex पंद्रह Injection का प्रभाव पड़ता है? हृदय काफी हद तक Remtrex सुरक्षित है, हालांकि लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेने से बेहतर परिणाम मिल सकता है। इसके खराब परिणाम बेहद कम होते है। क्या Remtrex पंद्रह Injection आदत या लत बन सकती है? नहीं, लेकिन फिर भी आप Remtrex पंद्रह Injection को लेने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछें। क्या Remtrex पंद्रह Injection को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? हां, Remtrex पंद्रह Injection के सेवन के बाद आप किसी भारी मशीन या वाहन चलाने का काम कर सकते हैं। क्या Remtrex पंद्रह Injection को लेना सुरखित है? हां, डॉक्टर के कहने पर आप Remtrex पंद्रह Injection को खा सकते हैं। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Remtrex पंद्रह Injection इस्तेमाल की जा सकती है? नहीं, Remtrex पंद्रह Injection किसी भी तरह के दिमागी विकार का इलाज नहीं कर पाती है। क्या Remtrex पंद्रह Injection को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? खाने व Remtrex पंद्रह Injection को साथ में लेकर आपके शरीर पर क्या प्रभाव होते हैं इस विषय पर कोई जानकारी मौजूद नहीं है। जब Remtrex पंद्रह Injection ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? अगर आप Remtrex पंद्रह Injection और शराब एक समय पर ले रहे हैं तो संभव है कि इसके हल्के दुष्प्रभाव दिखें। कोई बड़ा खतरा नहीं है पर सावधानी जरूर बरतें।
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कुरुक्षेत्र, 11 फरवरी (हप्र)
सड़कों और गलियों का निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों पर अब प्रशासन की कड़ी नज़र रहेगी। निर्माण सामग्री की गुणवता के साथ समझौता करने वाले ठेकेदारों की खैर नहीं है। वहीं जो ठेकेदार निर्धारित दरों से बहुत कम दरों में टेंडर छुड़वा रहे हैं, और इस कारण निर्माण सामग्री की गुणवता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं उन पर पैनी निगाह रहेगी। विधायक सुभाष सुधा ने शुक्रवार को कहा कि निर्माण सामग्री में काफी गिरावट देखने को मिल रही है, जिसका खमियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
शुक्रवार को नगर परिषद के साथ-साथ अन्य एजेंसियों के अधिकारियों को विधायक ने सख्त आदेश दिए हैं। विधायक ने कहा कि जो भी ठेकेदार 10 फीसदी से कम में टेंडर भरता है और उस एजेंसी को टेंडर दे दिया जाता है, उस एजेंसी से संबंधित विभाग जमानत राशि जमा करवाना सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही निमार्ण सामग्री की गुणवत्ता को चैक करने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में एमिनेंट पर्सन, अधिकारियों को शामिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि गुणवता को लेकर जब ठेकेदार को कमेटी सही प्रमाण पत्र देगी तभी उसकी राशि का भुगतान किया जाएगा।
अधिकारियों को निर्देश देते हुए विधायक ने कहा कि शहर की सड़कों का हाल में ही पैचवर्क किया गया था। कई जगहों पर सही मापदंडों के अनुसार पैचवर्क नहीं किया गया, जिसके कारण सड़कों पर फिर से गड्ढे हो गए हैं। इस विषय को गंभीरता से लेते हुए नगर परिषद के अधिकारियों को पैचवर्क के कार्य को चैक करने के आदेश दिए हैं। जांच रिपोर्ट के बाद ही संबंधित ठेकेदारों का भुगतान नप की तरफ से किया जाएगा। अगर खामियां पाई गई तो ठेकेदार को एक पैसे का भी भुगतान नहीं होगा।
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कुरुक्षेत्र, ग्यारह फरवरी सड़कों और गलियों का निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों पर अब प्रशासन की कड़ी नज़र रहेगी। निर्माण सामग्री की गुणवता के साथ समझौता करने वाले ठेकेदारों की खैर नहीं है। वहीं जो ठेकेदार निर्धारित दरों से बहुत कम दरों में टेंडर छुड़वा रहे हैं, और इस कारण निर्माण सामग्री की गुणवता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं उन पर पैनी निगाह रहेगी। विधायक सुभाष सुधा ने शुक्रवार को कहा कि निर्माण सामग्री में काफी गिरावट देखने को मिल रही है, जिसका खमियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। शुक्रवार को नगर परिषद के साथ-साथ अन्य एजेंसियों के अधिकारियों को विधायक ने सख्त आदेश दिए हैं। विधायक ने कहा कि जो भी ठेकेदार दस फीसदी से कम में टेंडर भरता है और उस एजेंसी को टेंडर दे दिया जाता है, उस एजेंसी से संबंधित विभाग जमानत राशि जमा करवाना सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही निमार्ण सामग्री की गुणवत्ता को चैक करने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में एमिनेंट पर्सन, अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गुणवता को लेकर जब ठेकेदार को कमेटी सही प्रमाण पत्र देगी तभी उसकी राशि का भुगतान किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश देते हुए विधायक ने कहा कि शहर की सड़कों का हाल में ही पैचवर्क किया गया था। कई जगहों पर सही मापदंडों के अनुसार पैचवर्क नहीं किया गया, जिसके कारण सड़कों पर फिर से गड्ढे हो गए हैं। इस विषय को गंभीरता से लेते हुए नगर परिषद के अधिकारियों को पैचवर्क के कार्य को चैक करने के आदेश दिए हैं। जांच रिपोर्ट के बाद ही संबंधित ठेकेदारों का भुगतान नप की तरफ से किया जाएगा। अगर खामियां पाई गई तो ठेकेदार को एक पैसे का भी भुगतान नहीं होगा।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
जनमेजय महाभारत के अनुसार कुरुवंश का राजा था। महाभारत युद्ध में अर्जुनपुत्र अभिमन्यु जिस समय मारा गया, उसकी पत्नी उत्तरा गर्भवती थी। उसके गर्भ से राजा परीक्षित का जन्म हुआ जो महाभारत युद्ध के बाद हस्तिनापुर की गद्दी पर बैठा। जनमेजय इसी परीक्षित तथा मद्रावती का पुत्र था। महाभारत के अनुसार (१.९५.८५) मद्रावती उनकी जननी थीं, किन्तु भगवत् पुराण के अनुसार (१.१६.२), उनकी माता ईरावती थीं, जो कि उत्तर की पुत्री थीं। . पौराणिक कथाओं के अनुसार, जनमेजय ने एक यज्ञ किया था जिसे सर्प सत्र कहते हैं। श्रेणीःहिन्दू मिथक.
जनमेजय और सर्प सत्र आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
जनमेजय 18 संबंध है और सर्प सत्र 2 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (18 + 2)।
यह लेख जनमेजय और सर्प सत्र के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। जनमेजय महाभारत के अनुसार कुरुवंश का राजा था। महाभारत युद्ध में अर्जुनपुत्र अभिमन्यु जिस समय मारा गया, उसकी पत्नी उत्तरा गर्भवती थी। उसके गर्भ से राजा परीक्षित का जन्म हुआ जो महाभारत युद्ध के बाद हस्तिनापुर की गद्दी पर बैठा। जनमेजय इसी परीक्षित तथा मद्रावती का पुत्र था। महाभारत के अनुसार मद्रावती उनकी जननी थीं, किन्तु भगवत् पुराण के अनुसार , उनकी माता ईरावती थीं, जो कि उत्तर की पुत्री थीं। . पौराणिक कथाओं के अनुसार, जनमेजय ने एक यज्ञ किया था जिसे सर्प सत्र कहते हैं। श्रेणीःहिन्दू मिथक. जनमेजय और सर्प सत्र आम में शून्य बातें हैं । जनमेजय अट्ठारह संबंध है और सर्प सत्र दो है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख जनमेजय और सर्प सत्र के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने सोमवार को लोकसभा को सूचित किया कि देश भर के सीबीएसई स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों के लिए एक सामान्य वेतन पैकेज लागू करने के लिए फिलहाल सरकार के पास कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्रालय ने सदस्य अनिल फिरोजिया द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए सदन को सूचित किया कि राज्य सरकारों से भी इस संबंध में सलाह नहीं ली गई है।
5 मई, 2019 तक केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड या CBSE के भारत में 21,271 स्कूल और इससे जुड़े 25 विदेशी देशों के 228 स्कूल हैं। आधिकारिक सीबीएसई के आंकड़ों के अनुसार, 1,138 केंद्रीय विद्यालय, 3,011 सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूल, 16,741 स्वतंत्र स्कूल, 595 जवाहर नवोदय विद्यालय और 14 केंद्रीय तिब्बती स्कूल शामिल हैं। ये स्कूल भारत और विदेशों में करीब 1. 25 करोड़ (या 12. 5 मिलियन) छात्रों की शैक्षिक जरूरतों को पूरा करते हैं।
स्वतंत्र स्कूलों को छोड़कर, अन्य सभी स्कूल संबंधित सरकारी एजेंसियों के वेतन पैकेज को फोलो करते हैं।
नागपुर स्थित सीबीएसई स्कूल स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन (सीएसएसडब्ल्यूए) के एक अधिकारी ने पिछले अक्टूबर में टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि "सीबीएसई स्पष्ट रूप से कहता है कि वेतन उनके राज्य सरकार के समकक्षों के बराबर होना चाहिए। लेकिन कुछ स्कूलों के अलावा वेतन की स्थति काफी खराब है। दो या तीन साल के अनुभव के बाद भी CBSE शिक्षकों को रु 10,000 और रु 15,000 प्रति माह के बीच वेतन दिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सोमवार को लोकसभा को सूचित किया कि देश भर के सीबीएसई स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों के लिए एक सामान्य वेतन पैकेज लागू करने के लिए फिलहाल सरकार के पास कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्रालय ने सदस्य अनिल फिरोजिया द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए सदन को सूचित किया कि राज्य सरकारों से भी इस संबंध में सलाह नहीं ली गई है। पाँच मई, दो हज़ार उन्नीस तक केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड या CBSE के भारत में इक्कीस,दो सौ इकहत्तर स्कूल और इससे जुड़े पच्चीस विदेशी देशों के दो सौ अट्ठाईस स्कूल हैं। आधिकारिक सीबीएसई के आंकड़ों के अनुसार, एक,एक सौ अड़तीस केंद्रीय विद्यालय, तीन,ग्यारह सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूल, सोलह,सात सौ इकतालीस स्वतंत्र स्कूल, पाँच सौ पचानवे जवाहर नवोदय विद्यालय और चौदह केंद्रीय तिब्बती स्कूल शामिल हैं। ये स्कूल भारत और विदेशों में करीब एक. पच्चीस करोड़ छात्रों की शैक्षिक जरूरतों को पूरा करते हैं। स्वतंत्र स्कूलों को छोड़कर, अन्य सभी स्कूल संबंधित सरकारी एजेंसियों के वेतन पैकेज को फोलो करते हैं। नागपुर स्थित सीबीएसई स्कूल स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन के एक अधिकारी ने पिछले अक्टूबर में टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि "सीबीएसई स्पष्ट रूप से कहता है कि वेतन उनके राज्य सरकार के समकक्षों के बराबर होना चाहिए। लेकिन कुछ स्कूलों के अलावा वेतन की स्थति काफी खराब है। दो या तीन साल के अनुभव के बाद भी CBSE शिक्षकों को दस रुपया,शून्य और पंद्रह रुपया,शून्य प्रति माह के बीच वेतन दिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं।
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समानी बिल्ली
अरसेमें मुझे दूध दिया जाता था । और यह कि जहाँ दूध होता है वहाँ बिल्ली अवश्य होती है । सिलिओ हीराने मेरे साथ मित्रता कर ली । वह जहाँ भी होती वहींसे आ जाती और पैरोने नाक घिसती व एची पूँछ करके 'म्यायूँ' का प्रतिष्ठित अव सज्जनोचित शब्द निकालती । वचपनमे हम वैश्वदेव करनेके पश्चात् हो भोजन करने बैठते थे । अिसलिये बिल्लीको दूध पिलाये बिना स्वय दूध पी लेनेकी अिच्छा नहीं होती थी। किन्तु बिल्ली के लिये पात्र कहाँसे लाता ? सद्भाग्यसे हमारे के चबूतरेके किनारे पर अक पोरबन्दरी पत्थरमें छोटीसी तसली जैसा अंक गड्ढा था । असीमें में असे प्रतिदिन दूध पिलाता।
किसी दिन में ' A Tale of Two Cities' के पढनेमे तन्मय रहता और बिल्लोको समय पर दूध नहीं मिलता, तब धीरे-धीरे अंक-अंक पैर बढाती हुआ वह स्लेटसे ढके हुञे मेरे टमलरकी ओर जाती, दूरसे असे सूँघती और तुरन्त हो पीछेकी ओर हट जाती, मानो सहसा असे यह याद आ गया हो कि वह कोअी भारी अपराध करने जा रही हो । यदि बिल्ली संस्कृत जानती होती, तो कह अठती अहो त महत्पाप कर्तुं व्यवसिता वयम् ।' किन्तु वह तो बिल्ली ही ठहरी । असकी सारी संस्कृत अंक अिस 'मायूँ' अद्गारमें हो समाप्त हो जाती । वापस बैठकर स्याम्यायूँ करती हुओ मेरी ओर देखती और गात मुखमुद्रा बनाकर धीरज धारण करती । पर रहा नहीं जाता अिसलिओ फिर आगे जाती, दूधको सूंघती और ठिठक कर वापस पीछेकी ओर हट जाती। अिस प्रकार असने मुझ पर अच्छा प्रभाव डाला। में असे नियमित दूध पिलाता । किसी दिन असे प्रतिदिनकी अपेक्षा दुगुना दूध पिलाता। किन्तु आखिर बिल्ली तो विल्ली ही ठहरी । अंक दिन कहींसे वह अपने अंक दोस्तको ले आओ । होरा तो हमसे डरती ही नहीं थी, अिसलिये वह सीधी आकर मेरे छिनेके पास बैठ गओ और असका दोस्त आँख बचाकर
हीराका पश्चात्ताप
आगे बढा । असने टमलरको अलट दिया। असकी दावत प्रारंभ होनेके पहले ही शामलभाओकी दृष्टि अवर पडी और अन्होने असे बाहर भगा दिया । होराकी मुद्रा भी चोर जैसी हो गयी और वह भी बिना भगाये ही वहाँसे नौ दो ग्यारह हो गओ। लगातार दो-तीन दिन तक नि दोनोने अत्पात मचाया । दीवारके निचले छेदम से पहले हीरा अकेली आती और अनुकूल परिस्थिति देखकर वह अपने साथीको भी बाहर जाकर बुला लाती । अितना सच है कि वह स्वय प्रत्यक्ष चोरीमे भाग नही लेती थी, किन्तु असम्म असकी संपूर्ण सहानुभूति थी । हीराके अपराधका विश्वास हो जाने पर मैंने असे दो दिन तक दूध नही पिलाया। दूध पर कड़ी निगरानी रखी। हीरा समझ गयी । असने अपने दोस्तको मित्रता छोड दो । और आधे-आधे घण्टे तक हमारे पास बैठकर पश्चात्ताप करने लगी। असका दूध फिरसे जारी हुआ सो ठेठ मेरे जेलमुक्त हो जाने तक जारी ही रहा ।
किसी दिन और खास करके जेलमें मटन ( मासाहार ) के दिन अच्छी दाबत सिल जानेने हीरा दूध पीने के लिये आती ही नही, किन्तु में असका भाग दूसरे दिन तक सुरक्षित रखता। अंक दिन शामलभाओ अपने कोदोको रोटीके टुकडे खिला रहे थे कि हीरा कहीसे वहाँ आ गओ। कौवोको अिस अतिथिका आगमन अच्छा नही लगा । वे सब धरती पर पंक्तिबद्ध बैठ गये और सो भी अस स्थान पर, जहाँ कि दीवारकी छाया समाप्त होकर धूप शुरू होती थी । अन्होने विविध स्वरोमें परन्तु अंकमनसे 'का-का-का' का शोर मचाया । बिल्लीने पहले तो अिस कोलाहलकी परवाह नही की, किन्तु कुछ ही देर अकुलाकर अपने दौड लगाओ और दीवारके छेदने निकलकर आँगनके बाहर चली गओ। कौवे ज्ञात हुआ और फिर आग बैठकर धूप से रोटीके टुकडे खाने लगे !
तीसवी अक्तूबरका दिन था । आकाश घने बादलोसे आच्छादित हो रहा था । आकाशमें अंक सुन्दर अिन्द्रधनुष तना । यो तो सभी अिन्द्रधनुष सुन्दर होते हैं, सूर्यके ठीक सामने तननेसे अन्हे दिशाकी अनुकूलता स्वतः मिल जाती है । सूक्ष्म दृष्टिले देखनेवाला मनुष्य देख सकता है कि आकाशम हमेशा दो अिन्द्रधनुष अंक साथ दिखाओ पडते है -- अंक मुख्य तथा दूसरा असका प्रतिधनुष असीके पास, असी मध्यविन्दुको मानते हुये, परन्तु विलकुल धुँधला-सा । अिस धुँधले प्रतिधनुषकी दूसरी विशेषता यह होती है कि मुख्य अिन्द्रधनुषके रग जिस क्रमसे दिखाओ देते है, अससे जिसमें बिलकुल अलटे क्रमसे दिखाओ देते है । नाटकमे जैसे नायिकाके साथ अपनायिका होनेसे ही वह संपूर्ण माना जाता है, असी प्रकार अिस दूसरे प्रतिधनुषके कारण ही पहलेकी शोभा यक्ष-प्रासाद जैसी होती है । किन्तु अिन्द्रधनुपकी प्रमुख शोभा तो असके आसपास छाये हुआ बादलोकी श्यामलतासे ही खिल अठती है। आज बादलोंकी शोभा असाधारण थी । यद्यपि अनका रग अधिक घना नहीं था, फिर भी अस समयके प्रकाशके साथ उनकी विलक्षणताका ठीक मेल बैठ गया था । और जिससे दोनों ही खिल अठे थे । तीसवीं अक्तूबरको तिनसे ही सतोष नही हुआ । पासके अंक मिलसे काला 'सोपिया' रगका धुआँ निकल रहा था । हवाके दबावसे अिस धुओके गुब्बार अधिक फैलनेको अपेक्षा लहरोंको भाँति भीतर ही भीतर घुमड़ते, बल खाते हुञे, अिन्द्रधनुषको चोरकर आगे बढ़ रहे थे ! बड़े प्रतिभाशाली चित्रकारको भी सरलतासे असा सुमेल नहीं सूझ सकता ।
सच ही कबूतर बड़ा मूर्ख प्राणी है । कबूतरके अंक जोडेने हमारे बरामदेके (ओसारीके) छप्परमे मयारी और टेकेकी लकड़ियोके बीचोबीच तथा बीचके कोनेमे अपना घोसला बनानेका विचार किया। वोसला वहाँ ठहर ही नहीं सकता था । और फिर प्रतिदिन सुपरिण्टेडेट आकर छप्परकी तलाशी लेता था कि वह ठीक है या नहीं। कबूतर सुबहसे
पठितमूखका पुरुषार्थ
शाम तक नीमको कुछ सूखी सीके किट्ठी करके जमाते, किन्तु ये जितने तिनके जमाते वे सबके सब नीचे आ गिरते और नीचे कचरा होता । मुझे लगा कि में जिन पतिपत्नीको सि विफल प्रयत्नसे वचा लूँ । मं दो-तीन दिन तक दिनभर अनको अडाता रहा। उन्हें यहां आने ही नहीं देता । किन्तु अिन पठितमूर्ख कबूतरोने अनम-जनोंका
लक्षण रट रखा थाः
'विघ्न पुन पुनरपि प्रतिहन्यमाना.
प्रारब्धम् अत्तमजना न परित्यजन्ति । जिन्होने पुरुषार्थ ( अथवा दाम्पत्यर्थ ) जारी हो रसा। मंने हार खाओ और अनकी दृष्टि में सुनका कार्य निर्विघ्न हुआ। फिर जब-जब भी मैं सुबह सुनके घोसलेके नीचे होकर अिधर-अधर घूमता, तब वे अपनी प्राकृतिक लाल-लाल आँखोसे मेरी ओर टकटकी लगाव देखते और शायद अनेको शाप देते । किन्तु अनको नेत्र लालिमामें कुछ तपस्याका तेज तो था नहीं कि मैं जलफर भस्म हो जाता। अनके भारसे ही कभी वार वह घोसला गिर पड़ता ।
अन्तमें जिस घोसलेके आधा तैयार होनेके पहले हो मादाने अण्डा दिया और वे दोनो बारी-बारीसे असे सेने लगे । अंक दिन ज्यो हो नर अड़ने लगा कि असके भारसे घोसला नीचे गिर पडा और अण्डा फूट गया। अितने पर भी अस दम्पतीको अकल नहीं आओ। फिर असी जगह दूसरा घोसला बनाना शुरू किया। अिस वार घोसला पहलेको अपेक्षा कुछ अच्छा बना, किन्तु पूरा बननेके पहले ही मादाने दूसरा अण्डा दिया। वह भी नीचे लुढ़क पडा । किन्तु अिस वार सोधा जमीन पर न गिरनेसे असके टुकडे नही हु । केवल अस पर दरारें पड़ गओ । मैने अस घोसलेको फिरसे अपर जमा दिया और वह अण्डा अससे रख दिया। अिस अण्डेमे से बच्चेके निकलनेकी तो संभावना थी ही नहीं; किन्तु मैंने सोचा कि अिन पगले दम्पतीको कुछ तो सांत्वना मिलेगी । अन्होने अंक दिन अण्डेको सेया, पर अनके प्रारब्धमे तो
काव्यधारा टूट गओ
दुःख ही लिखा था। वह कैसे टलता ? अंक गिलहरीको अस फूटे अण्डेका पना चल गया । घोंसलेम कबूतर नहीं है, अत्ता अवसर देखकर असने अण्डा फोड़ लाया ! असके दाँतोकी आवाज सुनकर मै असके पास गया । अभी तक मेरो मान्यता थी कि गिलहरी फलाहारी प्राणी है । असे सिस प्रकार अण्डा खाते देखकर मुझे वड़ा आश्चर्य हुआ और बचपनमे ही गिलहरी के प्रति जो काव्यमय प्रेम मेरे हृदयमे अत्पन्न हो गया था, वह भी अकदन कम हो गया । मेरी धारणा थी कि कबूतर और गिलहरी दोनों निरपराध अथवा काव्यकी दृष्टिसे निष्पाप प्राणी है। और जब मैंने अपने बच्चोकी रक्षा करनेके हेतु गिलहरीको काँचे पर हमला करते देखा, तबसे कबूतरकी अपेक्षा भी मंने असे अच्च स्थान दे रखा था । यह सच है कि कबूतर दूसरोको कष्ट नहीं पहुँचाता, किन्तु साथ ही साथ यह भी सच है कि अपना रक्षण करने जितनी भी बुद्धिा साहस में नहीं होता। मेरी मान्यता थी कि हिसा करनेमे असमर्थ होने पर भी गिलहरी स्व-पंरक्षण करने में समर्थ अंक आदर्श प्राणी है; किन्तु जिस कमबख्त गिलहरीने अस अण्डेके साथ ही साथ मेरा यह काव्य भी तोड दिया ।
फिर पतझड़ आया। अड़ानू मनुष्यके वैभवकी भाँति वृक्षोके पत्ते त्वरित गतिसे झड़ने लगे । कैदी आँगनमें झाडू दे देकर थक जाते। प्रातःकाल सुपरिटेंडेंटके आने के समय अंक भी पत्ता जमीन पर नहीं पड़ा रहना चाहिये । सुपरिण्टेडेंटका समय नियत नहीं था । किसी दिन सुबह सात बजे ही आ जाता, किसी दिन नौ बजे तक भी न आता । मेरे बीमार होनेके कारण, किसी दिन मुझे देखने के लिये सर्व कामोंसे निबटकर बारह साढ़े बारह बजे तक आता ! अस समय तक आँगन साफ हो रहना चाहिये, फिर भले चाहे जो हो । वृक्ष जेलके अवश्य थे, किन्तु वे सुपरिटेंडेंटका हुक्म कब मानने लगे ? दिनभर ? पत्ते बरसाते ही रहते और पवन अन्हें बिना किसी पक्षपालके, समान रूपसे आँगनमें फैला देता । बेचारे कंदियोको बारबार आँगन बुहारना पड़ता । जेलमं यदि 'तार' को खानगी व्यवस्था न होतो, तो कँदो बेचारे मर हो जाते । किन्तु वहिलारी है 'तार' की ! प्रातः कालकी 'रोन' में देखभाल करनेके लिये ज्यो हो सुपरिण्टेंडेंट रवाना होता कि आधे मिनटम हो सारे जेलमें 'तार' द्वारा सूचना मिल जाती और फिर तो कैदी जल्दी-जल्दी आँगनको साफ कर डालते ।
अंक दिन हमारे आँगनमें अंक पीला पतिंगा आया । साधारणतया पीले पति मुझे बहुत अच्छे लगते है जैसा नहीं। किन्तु जेलमें असे पतिगोके दर्शन भी दुर्लभ होते है । और पतिंगा भी दिन भर हवानें 'तैरता रहा । हमारे आँगनमें मेरे बोये हुये गलगोटेके पौधेके अतिरिक्त अन्य किसी भी फूलका पौधा न था। और गलगोटेमें पतिगे, तितलियाँ या भ्रमरको आकर्षित करनेवाला कुछ नही होता। फिर भी मेरी समझनें नही
आया कि वह पतिमा अंक दिन तक मेहमान कैसे रहा ? असकी सरकारने १२४ (अ) या १५३ वी धाराके अन्तर्गत तो असे यहाँ नही भेजा होगा । जैसे अपराध तो मनुष्यको ही करने पड़ते है ।
ज्यों-ज्यो पतझडकी ऋतुका प्रभाव पड़ता गया, त्यो त्यो पक्षी भी मौन होते गये । प्रातः और सायकालका कल्लोल बन्द हो जानेसे बहुत ही सूना-सूना लगता । नगरनिवासी प्रकृतिसे अितनी दूर जा पडते है कि अन्हे यह भी ध्यान नहीं रहता कि आजकल कौनसी ऋतु चल रही है । आजके हमारे पढ़ेलिखे बिना मूंछके या मूछ कटाये हुये छोकरोसे पूछिये कि किस महीनेमे कौनसे फूल खिलते है, जामुन किस महीने में लगते है, अिन्द्रधनुष किन किन महीनोमें दिखाओ देता है, आकाशसे ओले किन किन महीनोमें गिरते है ? शहरके छोकरे केवल जितना ही जानते है कि आज क्रीमकी ऋतुके बाद छतरी लगानेकी ऋतु आती है और असके बाद गलेमें मफलर वाँधकर घूमनेकी ऋतु आती है ! ग्रामीणोका जीवन ऋतुओके साथ पूर्णतया सम्बद्ध रहता है । ऋतुके अनुसार हो धार्मिक त्यौहार नियत रहते है। और पक्षियोका तो जीवनमरण ही ऋतुको प्रसन्नता - अप्रसन्नता पर निर्भर रहता है । शरद् ऋतुके आते ही पक्षी अपराधियोकी भाँति मौन हो गये । साहस करके वे अिघरअवर फिरते अवश्य थे, किन्तु अनकी छाती और सिरसे यह स्पष्ट भासित होता था कि अन्हे अपने कठिन दिनोके आगमनका भान हो गया है।
अब हमारा मनोरंजन करनेके लिये दो नये प्राणी आने लगे । वडे-बडे सारसोका अंक जोडा रोज गामको सूर्यास्त होनेके बहुत देर वाद, साबरमतीके पटकी ओरसे राणीय या कालीको दिशामे नियमपूर्वक जाता । लम्बी-लम्बी टाँगोको पेटसे सटाकर थोड़ी-पोडी देरमें 'चकर्र - चकर्र' शब्द करता हुआ यह जोड़ा समुद्र में जाते हु
प्रकृति यान्ति भूतानि
बडे जहाजकी भाँति हमारे सिर परसे होकर निकलता। किसी किसी दिन अन्हें जितना विलम्ब हो जाता कि आकाशम केवल अनका शव हो सुनाओ पडता, किन्तु वे दिखाओ न देते। मुझे लगता है कि 'चकर-चकर ' शव्दध्वनि परसे ही हमारे पूर्वजोने जिनका नाम 'चकर्रवास' रख दिया होगा और वाद संस्कृत मनुष्योने अनका संस्कारी नाम 'चक्रवाक् ' कर दिया होगा । अधिक विलम्ब हो जाता तब अनकी ध्वनिमें आकुलता जान पडती, किन्तु दूसरे दिन जल्दी हो घर पहुंचनेका निश्चय अन्होने किया हो जैसा नहीं दिखता था । बन्दर प्रतिदिन रातको यह निश्चय कर लेते है कि सुवह अठते ही सबसे पहले ससे बचनेके लिओ घर बनायेंगे, असके बाद हो खाने-पीनेको चिन्ता करेंगे । किन्तु न बन्दरोने अभी तक घर बनाये और न तारत हो समय पर घर पहुँचे। जिसका जो स्वभाव पढ़ जाता है, वह कहीं छूट सकता है ? गोतामें यह व्यर्थ हो नहीं लिखा गया है प्रकृति यान्ति भूतानि, निग्रहः कि करिष्यति ?
शामलभाओके पाससे रोटीके टुकडे खा-खाकर कौवे खूब मोटे ताजे हो गये थे । मैने कहा कि चलो, अिन कौनोको थोडी बहुत कसरत करायूँ । मै रोटीके टुकडे लेकर आकाशस खूव भूंचे अछालने लगा। धारणा यह थी कि कौवे अडकर आकाशमें ही अधरसे टुकडे झेल लेंगे। किन्तु ये बुद्ध भूंची गर्दन करके शान्तिपूर्वक यह देख लेते कि रोटोके टुकडे किस ओर अछलते और किधर गिरते हैं, और टुकडोके जमीन पर गिरते ही अनके अपर टूट पडते । मैने शामलभाओ से कहा. 'तुम्हारे गुजरात के कौवे बिलकुल नालायक है। हमारे यहाँ (महाराष्ट्र) वचपनन जव में चिवड़े से काजू वीन-बीन कर अछालता, तो अंक अंक काजूको कौवे अपरके अपर ही झेल लेते थे; किन्तु ये बुद्धू तो आँखें फाड-फाडकर देखते ही रहते है !' नामलभाओका प्रान्तीय अभियान जाग अठा । अन्होने कहा -- 'हमारे यहाँके कौवे भुखमरे थोड़े ही होते हैं । े,
कौचोकी शिक्षा
जो चीज में नहीं सिखा सका, वह चीलने सिखा वीचमे रोटीके टुकडोंके फौवारे अड़ते देकर अंक चीलने अवसर साधा और झपटकर रोटीका अंक वडा ट्वा ● गओ को सावधान होने के पहले ही अंक दूसरी चील आयी और दूसरा दुक ले गयी ! अपने नित्यके वैरीको यह विजय देखकर चौवे सूर चिढ़ गये। अन्हें यह अपगाल असह्य हो जुठा । अन्होने जितनवीन हस्तगत करनेकी बल्कि चचुगत करनेकी प्रतिज्ञा ली; और जैसे जायेंजके लोगोके विरुद्ध रोमन तथा ओरानको फ़ौज विरुद्ध ग्रीक नौका युद्ध सफल हुअ थे, येसे ही कौवे भी अन्तम चीलोंके विरुद्ध अिन कामे सफल हो गये। कौवे रोटीके टुकडोको
सोखे । जितना हो नहीं, वे चोल पर निगरानी रखना भी सीखे । कौनके प्रति मेरी अभिरुचि देखकर शामलभाओके मनमे ओर्ष्या अत्पन्न हुआ, किन्तु कोओ अपाय न सून पन्ने पर वे मुझसे कहने लगे : 'आजसे कोवे आपके हुओ ओर गिलहरियाँ मेरी ।' मैंने कहा ना नहीं है।' किन्तु गिलहरीका अनुनय करनेकी कला जिनमें कहाँ थी ? जिनकी कलाकी पहुँच तो कौवो तक ही थी ।
परन्तु सत्य-मकल्पका फलदाता भगवान है हो । अंक दिन शामउभाओ अंक कैदीको टोपीम अंक गिलहरीका बच्चा मेरे पास ले आये और बोले 'अंक कौवा अिसे लिये जा रहा था । हम दो आदमियो युक्तिपूर्वक जिसको बचाया है। अब जिसका दया करें ? मुझे कॉलेजके दिन याद आये । अंक चिथड़की बत्ती बनाकर असे दूधमे भिगोकर बच्चेको चूसनेके लिये दी, किन्तु वह घबराया हुआ बच्चा किसी भी तरह दूध पीता ही नहीं था । रोटी दी, खिचडी दो, चावल दिये, पर बच्चेने तो निमे से किसीको छुआ तक नही । अन्तमे मेरे नहानेके डिब्वेने अंक कपडा बिछाकर अतमे असको बिठा दिया और हम सो गये। दूसरे दिन तो असने वीखें मार मार कर
अनाथ बच्चा
सारे वातावरणको करुण दना डाला। बेचारे शामलभाओ व्याकुल हो अठे । किसीको भी यह नहीं सून पड़ा कि बच्चेका क्या करना चाहिये । प्रत्येक व्यक्ति आ-आकर बच्चेको हाथमे लेता । बेचारा बच्चा प्राण बचाने के लिये हायसे कूद पडता, थक जाता, पैशाब कर देता और फिर दौड़ता । अंक बार तो ठाकुरसाहक्की कोठरीने पड़े हुये औंधन में जा घुसा । वडी कठिनाओसे हमने असे बाहर निकाला । कौवे और विल्ली दोनोके पंजेसे असे बचाना कुछ सरल काम नहीं था। दूसरा दिन भी समाप्त होने आया। दो दिनसे बेदारा भूखा था। हमें मे भूखसे तथा बिल्ली - कौवोसे बचाने की दुगुनी चिन्ता हो अठी थी । अन्तमं तीसरे पहरके चार बजे मैने देखा कि अंक गिलहरी व्याकुल होकर वृक्ष-वृक्ष पर और कोठरी-कोठरीमें घूम रही है। यही अिस बच्चेको माँ होनी चाहिये । जिस कोठरीमे मैने डिब्बा रख छोड़ा था, अत्तमें असे भेजने के लिये मैन असे दो अंक जगहसे हफाला । पर मै असे कित भाषामे समझाता कि तेरा वच्चा मेरी कोठरीमें है और असकी सुरक्षाके लिओ हो असे भीतर रख छोड़ा है ? बेचारी मांने सोचा होगा कि 'मं दुखिया अपने बच्चेकी खोजमें भटकती फिर रही हूँ और यह यमदूत मेरे पीछे पड़ा है, चैन भी नहीं लेने देता । अन्तमे ठाकुरसाहव, शामलभाओ, दो सिपाही, ठाकुरसाहबका अंक कैदी रसोजिया और भै हम सबने मिलकर अंक कौन्सिल बैठाओ और भारी उत्साहसे अंक योजना बना डाली । जैसे क्रिकेट मैदानमें स्थान-स्थान पर क्षेत्रपाल खडे रहते है, वैसे ही सब लोग दूर दूर खड़े हो गये । मै बच्चेवाला डिव्वा कोठरीसे बाहर निकाल लाया ओर जिस वृक्ष पर गिलहरी माता घूम रही थी, असी वृक्षके नीचे ले जाकर डिब्बेको टेढ़ा रख दिया। दो-तीन कौवोन जिसे देखा, फिर भला वे महाशय वहाँसे टल सकते थे ? ललचाओ हुओ दृष्टिसे वे अकटक अधर ताकने लगे, किन्तु हमारे क्षेत्रपाल पूरे सावधान थे । बच्चा डिब्से बाहर निकला और 'किल्- किल्- किल्- किल्' करके असने भयंकर चीत्कार को
बच्चेको विजय
मेरा ध्यान गिलहरी माताकी ओर था । अस समयकी असकी मुखमुद्रा देखने ही योग्य थी । असके प्राण आँखो और कानोने आ रहे थे। बच्चे के दर्शन होते ही असके लिये आसपासकी दूसरी सारी सृष्टि शून्य हो गयी। गिलहरीकी दौड़से वह अपरसे दौड़ती हुओ नीचे आ गओ । स्टेशनके समीप आते हो जैसे रेलगाडी सीटी देती है, वैसी ही आवाज करती हुआ वह नीचे आओ । बच्चा भी मॉकी ओर दौड़ा। दोनोका मिलन हुआ । तुरन्त हो माता चारो ओर देखने लगी । गिलहरी माता भयभीत न हो जाय जितनी दूर, किन्तु कौवे सफल न हो तिने समीप रहना हमारे लिये आवश्यक था।
अव हमें अंक अद्भुत दृश्य देखने को मिला । साता सोचती थी कि यदि में बच्चेको लेकर अविलम्ब घोसलेमें पहुँच जायूँ तो जग जीती । बच्चेको अिसका विचार कहाँसे आता ? वह तो दो दिनका भूखा था। माँको देखते ही तुरन्त दूध पीने दौड़ा । माँ असे मुँहसे पकड़कर अठाने जाती कि बच्चा तुरन्त छटककर दूध पीने दौडता । अंक डेढ़ मिनट तक यह छूटना-पकड़ना चला । अन्तमे विजय बच्चेको हुआ। माँने देख लिया कि बच्चा माननेवाला नहीं है । अत. प्राणोकी बाजी लगाकर वह वही रुक गयी। बच्चेको दूध पीने दिया । भूखे सिपाही रणांगणमे प्राणोंकी बाजी लगाकर भी भोजन करते है, ठीक वैसा हो यह प्रसंग था । बच्चेकी भूख कुछ शान्त हुआ कि मॉने दृढतापूर्वक असे असके पेटको चमड़ोसे पकड़ा। बच्चेने तुरन्त ही अपने चारो पाॅॉव तथा पूँछ मॉके गलेमें लपेट दिये। माँके गलेके आसपास अलका यह हृदय-धन अनमोल हारकी तरह लिपट गया । असको बचाती हुओ सिर ऊंचा किये आँगन पार करके माँ चबूतरे पर आओ। हमने अपना घेरा संकीर्ण कर लिया। चबूतरेके किनारेके आगे जहाँ दीवारका कोना बाहरकी ओर निकला हुआ था, अतको धार परसे गिलहरी डगमग करती हुओ चढ़ने लगी। कैसी असकी सँभाल ! कैसी असकी अंकाग्रता ! अपर वह लगभग छज्जे तक पहुँच गयी । वहाँसे छलॉग मार कर ही लकड़ेके
जग जीत लिया !
पटिये तक पहुँचा जा सकता था । छलाँग मारेगी कि नहीं ? छलांग मारनेके लिये साहम बटोर कर माँ मारे शरीरको सिकोड़ती, पर कूदने के पहले ही हिम्मत हार जाती। निराश होकर नि ग्वाम डाल फिर अन्य प्रकारसे चल करती। दसेक बार तो असने वायसे वायें और दायेंगे
चकर काटेगे। अपर यदि बच्चा गिर पड़े तो वजा जनभव । जितने-जितने निष्फल प्रयत्न होते, अतनी हो असकी शक्ति क्षोत्र होती और प्रयत्न सफल होनेकी आशा भी कम होती जाती । बेचारीने हताश होकर अंक बार चीत्कार की कौनसा भक्त तिरी अधिक व्याकुल प्रार्थना कर सकता है ? हम जितने लोग आसपास खड़े थे, किन्तु अनको क्या सेवा करते ? मनुष्य-जातिने आज तक गिलहरीका विश्वान सम्पादन कहाँ किया है कि वह असे अपने पास आने देती ? मुजे अंक विचार सूझा । दौड़कर में अपना दुपट्टा ले आया। दो सिरे पैने तथा दो सिरं शामलभाओने पकडे और असे चौडा करके जमीनसे दो-अंक हाथ ऊँचा पकड़ रखा । द्देश्य था कि गिलहो या असका बच्चा गिरी पडे तो चकनाचूर न हो जाय । अन्ततः भगवानने गिलहरीको पुकार सुनी। असके गरीरमे असाधारण बल आया। इवान रोक कर असने विश्वास के साथ अंक छलाँग नारी और क्षणभरने वह अपने स्थान पर पहुँच गयी ! दो छप्परोकी राधिमे, मयारीके खपरैलोके नीचे गिलहरोका निवास था । अस रात्रिमे माँ और बच्चेने कमी मीठी नीद ली होगी । सच ही साँलगा होगा कि मैने जग जीत लिया। उसके बाद कओ दिन तक अस माँ और बच्चेको हम देखते और पहचान लेते थे
कुछ दिनों बाद अिन्स्पेक्टर जनरल आनेवाला था. अतः असके आगमनकी तैयारिया होने लगी। मकान पोते गये, चूने-सोमेटका जो काम करने योग्य था वह किया गया, छप्पर सारे गये और खभे तेलपानीसे नहाये । कैदियोकी कवायद केसे होती थी, वगैरा वाते मनोरंजक
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समानी बिल्ली अरसेमें मुझे दूध दिया जाता था । और यह कि जहाँ दूध होता है वहाँ बिल्ली अवश्य होती है । सिलिओ हीराने मेरे साथ मित्रता कर ली । वह जहाँ भी होती वहींसे आ जाती और पैरोने नाक घिसती व एची पूँछ करके 'म्यायूँ' का प्रतिष्ठित अव सज्जनोचित शब्द निकालती । वचपनमे हम वैश्वदेव करनेके पश्चात् हो भोजन करने बैठते थे । अिसलिये बिल्लीको दूध पिलाये बिना स्वय दूध पी लेनेकी अिच्छा नहीं होती थी। किन्तु बिल्ली के लिये पात्र कहाँसे लाता ? सद्भाग्यसे हमारे के चबूतरेके किनारे पर अक पोरबन्दरी पत्थरमें छोटीसी तसली जैसा अंक गड्ढा था । असीमें में असे प्रतिदिन दूध पिलाता। किसी दिन में ' A Tale of Two Cities' के पढनेमे तन्मय रहता और बिल्लोको समय पर दूध नहीं मिलता, तब धीरे-धीरे अंक-अंक पैर बढाती हुआ वह स्लेटसे ढके हुञे मेरे टमलरकी ओर जाती, दूरसे असे सूँघती और तुरन्त हो पीछेकी ओर हट जाती, मानो सहसा असे यह याद आ गया हो कि वह कोअी भारी अपराध करने जा रही हो । यदि बिल्ली संस्कृत जानती होती, तो कह अठती अहो त महत्पाप कर्तुं व्यवसिता वयम् ।' किन्तु वह तो बिल्ली ही ठहरी । असकी सारी संस्कृत अंक अिस 'मायूँ' अद्गारमें हो समाप्त हो जाती । वापस बैठकर स्याम्यायूँ करती हुओ मेरी ओर देखती और गात मुखमुद्रा बनाकर धीरज धारण करती । पर रहा नहीं जाता अिसलिओ फिर आगे जाती, दूधको सूंघती और ठिठक कर वापस पीछेकी ओर हट जाती। अिस प्रकार असने मुझ पर अच्छा प्रभाव डाला। में असे नियमित दूध पिलाता । किसी दिन असे प्रतिदिनकी अपेक्षा दुगुना दूध पिलाता। किन्तु आखिर बिल्ली तो विल्ली ही ठहरी । अंक दिन कहींसे वह अपने अंक दोस्तको ले आओ । होरा तो हमसे डरती ही नहीं थी, अिसलिये वह सीधी आकर मेरे छिनेके पास बैठ गओ और असका दोस्त आँख बचाकर हीराका पश्चात्ताप आगे बढा । असने टमलरको अलट दिया। असकी दावत प्रारंभ होनेके पहले ही शामलभाओकी दृष्टि अवर पडी और अन्होने असे बाहर भगा दिया । होराकी मुद्रा भी चोर जैसी हो गयी और वह भी बिना भगाये ही वहाँसे नौ दो ग्यारह हो गओ। लगातार दो-तीन दिन तक नि दोनोने अत्पात मचाया । दीवारके निचले छेदम से पहले हीरा अकेली आती और अनुकूल परिस्थिति देखकर वह अपने साथीको भी बाहर जाकर बुला लाती । अितना सच है कि वह स्वय प्रत्यक्ष चोरीमे भाग नही लेती थी, किन्तु असम्म असकी संपूर्ण सहानुभूति थी । हीराके अपराधका विश्वास हो जाने पर मैंने असे दो दिन तक दूध नही पिलाया। दूध पर कड़ी निगरानी रखी। हीरा समझ गयी । असने अपने दोस्तको मित्रता छोड दो । और आधे-आधे घण्टे तक हमारे पास बैठकर पश्चात्ताप करने लगी। असका दूध फिरसे जारी हुआ सो ठेठ मेरे जेलमुक्त हो जाने तक जारी ही रहा । किसी दिन और खास करके जेलमें मटन के दिन अच्छी दाबत सिल जानेने हीरा दूध पीने के लिये आती ही नही, किन्तु में असका भाग दूसरे दिन तक सुरक्षित रखता। अंक दिन शामलभाओ अपने कोदोको रोटीके टुकडे खिला रहे थे कि हीरा कहीसे वहाँ आ गओ। कौवोको अिस अतिथिका आगमन अच्छा नही लगा । वे सब धरती पर पंक्तिबद्ध बैठ गये और सो भी अस स्थान पर, जहाँ कि दीवारकी छाया समाप्त होकर धूप शुरू होती थी । अन्होने विविध स्वरोमें परन्तु अंकमनसे 'का-का-का' का शोर मचाया । बिल्लीने पहले तो अिस कोलाहलकी परवाह नही की, किन्तु कुछ ही देर अकुलाकर अपने दौड लगाओ और दीवारके छेदने निकलकर आँगनके बाहर चली गओ। कौवे ज्ञात हुआ और फिर आग बैठकर धूप से रोटीके टुकडे खाने लगे ! तीसवी अक्तूबरका दिन था । आकाश घने बादलोसे आच्छादित हो रहा था । आकाशमें अंक सुन्दर अिन्द्रधनुष तना । यो तो सभी अिन्द्रधनुष सुन्दर होते हैं, सूर्यके ठीक सामने तननेसे अन्हे दिशाकी अनुकूलता स्वतः मिल जाती है । सूक्ष्म दृष्टिले देखनेवाला मनुष्य देख सकता है कि आकाशम हमेशा दो अिन्द्रधनुष अंक साथ दिखाओ पडते है -- अंक मुख्य तथा दूसरा असका प्रतिधनुष असीके पास, असी मध्यविन्दुको मानते हुये, परन्तु विलकुल धुँधला-सा । अिस धुँधले प्रतिधनुषकी दूसरी विशेषता यह होती है कि मुख्य अिन्द्रधनुषके रग जिस क्रमसे दिखाओ देते है, अससे जिसमें बिलकुल अलटे क्रमसे दिखाओ देते है । नाटकमे जैसे नायिकाके साथ अपनायिका होनेसे ही वह संपूर्ण माना जाता है, असी प्रकार अिस दूसरे प्रतिधनुषके कारण ही पहलेकी शोभा यक्ष-प्रासाद जैसी होती है । किन्तु अिन्द्रधनुपकी प्रमुख शोभा तो असके आसपास छाये हुआ बादलोकी श्यामलतासे ही खिल अठती है। आज बादलोंकी शोभा असाधारण थी । यद्यपि अनका रग अधिक घना नहीं था, फिर भी अस समयके प्रकाशके साथ उनकी विलक्षणताका ठीक मेल बैठ गया था । और जिससे दोनों ही खिल अठे थे । तीसवीं अक्तूबरको तिनसे ही सतोष नही हुआ । पासके अंक मिलसे काला 'सोपिया' रगका धुआँ निकल रहा था । हवाके दबावसे अिस धुओके गुब्बार अधिक फैलनेको अपेक्षा लहरोंको भाँति भीतर ही भीतर घुमड़ते, बल खाते हुञे, अिन्द्रधनुषको चोरकर आगे बढ़ रहे थे ! बड़े प्रतिभाशाली चित्रकारको भी सरलतासे असा सुमेल नहीं सूझ सकता । सच ही कबूतर बड़ा मूर्ख प्राणी है । कबूतरके अंक जोडेने हमारे बरामदेके छप्परमे मयारी और टेकेकी लकड़ियोके बीचोबीच तथा बीचके कोनेमे अपना घोसला बनानेका विचार किया। वोसला वहाँ ठहर ही नहीं सकता था । और फिर प्रतिदिन सुपरिण्टेडेट आकर छप्परकी तलाशी लेता था कि वह ठीक है या नहीं। कबूतर सुबहसे पठितमूखका पुरुषार्थ शाम तक नीमको कुछ सूखी सीके किट्ठी करके जमाते, किन्तु ये जितने तिनके जमाते वे सबके सब नीचे आ गिरते और नीचे कचरा होता । मुझे लगा कि में जिन पतिपत्नीको सि विफल प्रयत्नसे वचा लूँ । मं दो-तीन दिन तक दिनभर अनको अडाता रहा। उन्हें यहां आने ही नहीं देता । किन्तु अिन पठितमूर्ख कबूतरोने अनम-जनोंका लक्षण रट रखा थाः 'विघ्न पुन पुनरपि प्रतिहन्यमाना. प्रारब्धम् अत्तमजना न परित्यजन्ति । जिन्होने पुरुषार्थ जारी हो रसा। मंने हार खाओ और अनकी दृष्टि में सुनका कार्य निर्विघ्न हुआ। फिर जब-जब भी मैं सुबह सुनके घोसलेके नीचे होकर अिधर-अधर घूमता, तब वे अपनी प्राकृतिक लाल-लाल आँखोसे मेरी ओर टकटकी लगाव देखते और शायद अनेको शाप देते । किन्तु अनको नेत्र लालिमामें कुछ तपस्याका तेज तो था नहीं कि मैं जलफर भस्म हो जाता। अनके भारसे ही कभी वार वह घोसला गिर पड़ता । अन्तमें जिस घोसलेके आधा तैयार होनेके पहले हो मादाने अण्डा दिया और वे दोनो बारी-बारीसे असे सेने लगे । अंक दिन ज्यो हो नर अड़ने लगा कि असके भारसे घोसला नीचे गिर पडा और अण्डा फूट गया। अितने पर भी अस दम्पतीको अकल नहीं आओ। फिर असी जगह दूसरा घोसला बनाना शुरू किया। अिस वार घोसला पहलेको अपेक्षा कुछ अच्छा बना, किन्तु पूरा बननेके पहले ही मादाने दूसरा अण्डा दिया। वह भी नीचे लुढ़क पडा । किन्तु अिस वार सोधा जमीन पर न गिरनेसे असके टुकडे नही हु । केवल अस पर दरारें पड़ गओ । मैने अस घोसलेको फिरसे अपर जमा दिया और वह अण्डा अससे रख दिया। अिस अण्डेमे से बच्चेके निकलनेकी तो संभावना थी ही नहीं; किन्तु मैंने सोचा कि अिन पगले दम्पतीको कुछ तो सांत्वना मिलेगी । अन्होने अंक दिन अण्डेको सेया, पर अनके प्रारब्धमे तो काव्यधारा टूट गओ दुःख ही लिखा था। वह कैसे टलता ? अंक गिलहरीको अस फूटे अण्डेका पना चल गया । घोंसलेम कबूतर नहीं है, अत्ता अवसर देखकर असने अण्डा फोड़ लाया ! असके दाँतोकी आवाज सुनकर मै असके पास गया । अभी तक मेरो मान्यता थी कि गिलहरी फलाहारी प्राणी है । असे सिस प्रकार अण्डा खाते देखकर मुझे वड़ा आश्चर्य हुआ और बचपनमे ही गिलहरी के प्रति जो काव्यमय प्रेम मेरे हृदयमे अत्पन्न हो गया था, वह भी अकदन कम हो गया । मेरी धारणा थी कि कबूतर और गिलहरी दोनों निरपराध अथवा काव्यकी दृष्टिसे निष्पाप प्राणी है। और जब मैंने अपने बच्चोकी रक्षा करनेके हेतु गिलहरीको काँचे पर हमला करते देखा, तबसे कबूतरकी अपेक्षा भी मंने असे अच्च स्थान दे रखा था । यह सच है कि कबूतर दूसरोको कष्ट नहीं पहुँचाता, किन्तु साथ ही साथ यह भी सच है कि अपना रक्षण करने जितनी भी बुद्धिा साहस में नहीं होता। मेरी मान्यता थी कि हिसा करनेमे असमर्थ होने पर भी गिलहरी स्व-पंरक्षण करने में समर्थ अंक आदर्श प्राणी है; किन्तु जिस कमबख्त गिलहरीने अस अण्डेके साथ ही साथ मेरा यह काव्य भी तोड दिया । फिर पतझड़ आया। अड़ानू मनुष्यके वैभवकी भाँति वृक्षोके पत्ते त्वरित गतिसे झड़ने लगे । कैदी आँगनमें झाडू दे देकर थक जाते। प्रातःकाल सुपरिटेंडेंटके आने के समय अंक भी पत्ता जमीन पर नहीं पड़ा रहना चाहिये । सुपरिण्टेडेंटका समय नियत नहीं था । किसी दिन सुबह सात बजे ही आ जाता, किसी दिन नौ बजे तक भी न आता । मेरे बीमार होनेके कारण, किसी दिन मुझे देखने के लिये सर्व कामोंसे निबटकर बारह साढ़े बारह बजे तक आता ! अस समय तक आँगन साफ हो रहना चाहिये, फिर भले चाहे जो हो । वृक्ष जेलके अवश्य थे, किन्तु वे सुपरिटेंडेंटका हुक्म कब मानने लगे ? दिनभर ? पत्ते बरसाते ही रहते और पवन अन्हें बिना किसी पक्षपालके, समान रूपसे आँगनमें फैला देता । बेचारे कंदियोको बारबार आँगन बुहारना पड़ता । जेलमं यदि 'तार' को खानगी व्यवस्था न होतो, तो कँदो बेचारे मर हो जाते । किन्तु वहिलारी है 'तार' की ! प्रातः कालकी 'रोन' में देखभाल करनेके लिये ज्यो हो सुपरिण्टेंडेंट रवाना होता कि आधे मिनटम हो सारे जेलमें 'तार' द्वारा सूचना मिल जाती और फिर तो कैदी जल्दी-जल्दी आँगनको साफ कर डालते । अंक दिन हमारे आँगनमें अंक पीला पतिंगा आया । साधारणतया पीले पति मुझे बहुत अच्छे लगते है जैसा नहीं। किन्तु जेलमें असे पतिगोके दर्शन भी दुर्लभ होते है । और पतिंगा भी दिन भर हवानें 'तैरता रहा । हमारे आँगनमें मेरे बोये हुये गलगोटेके पौधेके अतिरिक्त अन्य किसी भी फूलका पौधा न था। और गलगोटेमें पतिगे, तितलियाँ या भ्रमरको आकर्षित करनेवाला कुछ नही होता। फिर भी मेरी समझनें नही आया कि वह पतिमा अंक दिन तक मेहमान कैसे रहा ? असकी सरकारने एक सौ चौबीस या एक सौ तिरेपन वी धाराके अन्तर्गत तो असे यहाँ नही भेजा होगा । जैसे अपराध तो मनुष्यको ही करने पड़ते है । ज्यों-ज्यो पतझडकी ऋतुका प्रभाव पड़ता गया, त्यो त्यो पक्षी भी मौन होते गये । प्रातः और सायकालका कल्लोल बन्द हो जानेसे बहुत ही सूना-सूना लगता । नगरनिवासी प्रकृतिसे अितनी दूर जा पडते है कि अन्हे यह भी ध्यान नहीं रहता कि आजकल कौनसी ऋतु चल रही है । आजके हमारे पढ़ेलिखे बिना मूंछके या मूछ कटाये हुये छोकरोसे पूछिये कि किस महीनेमे कौनसे फूल खिलते है, जामुन किस महीने में लगते है, अिन्द्रधनुष किन किन महीनोमें दिखाओ देता है, आकाशसे ओले किन किन महीनोमें गिरते है ? शहरके छोकरे केवल जितना ही जानते है कि आज क्रीमकी ऋतुके बाद छतरी लगानेकी ऋतु आती है और असके बाद गलेमें मफलर वाँधकर घूमनेकी ऋतु आती है ! ग्रामीणोका जीवन ऋतुओके साथ पूर्णतया सम्बद्ध रहता है । ऋतुके अनुसार हो धार्मिक त्यौहार नियत रहते है। और पक्षियोका तो जीवनमरण ही ऋतुको प्रसन्नता - अप्रसन्नता पर निर्भर रहता है । शरद् ऋतुके आते ही पक्षी अपराधियोकी भाँति मौन हो गये । साहस करके वे अिघरअवर फिरते अवश्य थे, किन्तु अनकी छाती और सिरसे यह स्पष्ट भासित होता था कि अन्हे अपने कठिन दिनोके आगमनका भान हो गया है। अब हमारा मनोरंजन करनेके लिये दो नये प्राणी आने लगे । वडे-बडे सारसोका अंक जोडा रोज गामको सूर्यास्त होनेके बहुत देर वाद, साबरमतीके पटकी ओरसे राणीय या कालीको दिशामे नियमपूर्वक जाता । लम्बी-लम्बी टाँगोको पेटसे सटाकर थोड़ी-पोडी देरमें 'चकर्र - चकर्र' शब्द करता हुआ यह जोड़ा समुद्र में जाते हु प्रकृति यान्ति भूतानि बडे जहाजकी भाँति हमारे सिर परसे होकर निकलता। किसी किसी दिन अन्हें जितना विलम्ब हो जाता कि आकाशम केवल अनका शव हो सुनाओ पडता, किन्तु वे दिखाओ न देते। मुझे लगता है कि 'चकर-चकर ' शव्दध्वनि परसे ही हमारे पूर्वजोने जिनका नाम 'चकर्रवास' रख दिया होगा और वाद संस्कृत मनुष्योने अनका संस्कारी नाम 'चक्रवाक् ' कर दिया होगा । अधिक विलम्ब हो जाता तब अनकी ध्वनिमें आकुलता जान पडती, किन्तु दूसरे दिन जल्दी हो घर पहुंचनेका निश्चय अन्होने किया हो जैसा नहीं दिखता था । बन्दर प्रतिदिन रातको यह निश्चय कर लेते है कि सुवह अठते ही सबसे पहले ससे बचनेके लिओ घर बनायेंगे, असके बाद हो खाने-पीनेको चिन्ता करेंगे । किन्तु न बन्दरोने अभी तक घर बनाये और न तारत हो समय पर घर पहुँचे। जिसका जो स्वभाव पढ़ जाता है, वह कहीं छूट सकता है ? गोतामें यह व्यर्थ हो नहीं लिखा गया है प्रकृति यान्ति भूतानि, निग्रहः कि करिष्यति ? शामलभाओके पाससे रोटीके टुकडे खा-खाकर कौवे खूब मोटे ताजे हो गये थे । मैने कहा कि चलो, अिन कौनोको थोडी बहुत कसरत करायूँ । मै रोटीके टुकडे लेकर आकाशस खूव भूंचे अछालने लगा। धारणा यह थी कि कौवे अडकर आकाशमें ही अधरसे टुकडे झेल लेंगे। किन्तु ये बुद्ध भूंची गर्दन करके शान्तिपूर्वक यह देख लेते कि रोटोके टुकडे किस ओर अछलते और किधर गिरते हैं, और टुकडोके जमीन पर गिरते ही अनके अपर टूट पडते । मैने शामलभाओ से कहा. 'तुम्हारे गुजरात के कौवे बिलकुल नालायक है। हमारे यहाँ वचपनन जव में चिवड़े से काजू वीन-बीन कर अछालता, तो अंक अंक काजूको कौवे अपरके अपर ही झेल लेते थे; किन्तु ये बुद्धू तो आँखें फाड-फाडकर देखते ही रहते है !' नामलभाओका प्रान्तीय अभियान जाग अठा । अन्होने कहा -- 'हमारे यहाँके कौवे भुखमरे थोड़े ही होते हैं । े, कौचोकी शिक्षा जो चीज में नहीं सिखा सका, वह चीलने सिखा वीचमे रोटीके टुकडोंके फौवारे अड़ते देकर अंक चीलने अवसर साधा और झपटकर रोटीका अंक वडा ट्वा ● गओ को सावधान होने के पहले ही अंक दूसरी चील आयी और दूसरा दुक ले गयी ! अपने नित्यके वैरीको यह विजय देखकर चौवे सूर चिढ़ गये। अन्हें यह अपगाल असह्य हो जुठा । अन्होने जितनवीन हस्तगत करनेकी बल्कि चचुगत करनेकी प्रतिज्ञा ली; और जैसे जायेंजके लोगोके विरुद्ध रोमन तथा ओरानको फ़ौज विरुद्ध ग्रीक नौका युद्ध सफल हुअ थे, येसे ही कौवे भी अन्तम चीलोंके विरुद्ध अिन कामे सफल हो गये। कौवे रोटीके टुकडोको सोखे । जितना हो नहीं, वे चोल पर निगरानी रखना भी सीखे । कौनके प्रति मेरी अभिरुचि देखकर शामलभाओके मनमे ओर्ष्या अत्पन्न हुआ, किन्तु कोओ अपाय न सून पन्ने पर वे मुझसे कहने लगे : 'आजसे कोवे आपके हुओ ओर गिलहरियाँ मेरी ।' मैंने कहा ना नहीं है।' किन्तु गिलहरीका अनुनय करनेकी कला जिनमें कहाँ थी ? जिनकी कलाकी पहुँच तो कौवो तक ही थी । परन्तु सत्य-मकल्पका फलदाता भगवान है हो । अंक दिन शामउभाओ अंक कैदीको टोपीम अंक गिलहरीका बच्चा मेरे पास ले आये और बोले 'अंक कौवा अिसे लिये जा रहा था । हम दो आदमियो युक्तिपूर्वक जिसको बचाया है। अब जिसका दया करें ? मुझे कॉलेजके दिन याद आये । अंक चिथड़की बत्ती बनाकर असे दूधमे भिगोकर बच्चेको चूसनेके लिये दी, किन्तु वह घबराया हुआ बच्चा किसी भी तरह दूध पीता ही नहीं था । रोटी दी, खिचडी दो, चावल दिये, पर बच्चेने तो निमे से किसीको छुआ तक नही । अन्तमे मेरे नहानेके डिब्वेने अंक कपडा बिछाकर अतमे असको बिठा दिया और हम सो गये। दूसरे दिन तो असने वीखें मार मार कर अनाथ बच्चा सारे वातावरणको करुण दना डाला। बेचारे शामलभाओ व्याकुल हो अठे । किसीको भी यह नहीं सून पड़ा कि बच्चेका क्या करना चाहिये । प्रत्येक व्यक्ति आ-आकर बच्चेको हाथमे लेता । बेचारा बच्चा प्राण बचाने के लिये हायसे कूद पडता, थक जाता, पैशाब कर देता और फिर दौड़ता । अंक बार तो ठाकुरसाहक्की कोठरीने पड़े हुये औंधन में जा घुसा । वडी कठिनाओसे हमने असे बाहर निकाला । कौवे और विल्ली दोनोके पंजेसे असे बचाना कुछ सरल काम नहीं था। दूसरा दिन भी समाप्त होने आया। दो दिनसे बेदारा भूखा था। हमें मे भूखसे तथा बिल्ली - कौवोसे बचाने की दुगुनी चिन्ता हो अठी थी । अन्तमं तीसरे पहरके चार बजे मैने देखा कि अंक गिलहरी व्याकुल होकर वृक्ष-वृक्ष पर और कोठरी-कोठरीमें घूम रही है। यही अिस बच्चेको माँ होनी चाहिये । जिस कोठरीमे मैने डिब्बा रख छोड़ा था, अत्तमें असे भेजने के लिये मैन असे दो अंक जगहसे हफाला । पर मै असे कित भाषामे समझाता कि तेरा वच्चा मेरी कोठरीमें है और असकी सुरक्षाके लिओ हो असे भीतर रख छोड़ा है ? बेचारी मांने सोचा होगा कि 'मं दुखिया अपने बच्चेकी खोजमें भटकती फिर रही हूँ और यह यमदूत मेरे पीछे पड़ा है, चैन भी नहीं लेने देता । अन्तमे ठाकुरसाहव, शामलभाओ, दो सिपाही, ठाकुरसाहबका अंक कैदी रसोजिया और भै हम सबने मिलकर अंक कौन्सिल बैठाओ और भारी उत्साहसे अंक योजना बना डाली । जैसे क्रिकेट मैदानमें स्थान-स्थान पर क्षेत्रपाल खडे रहते है, वैसे ही सब लोग दूर दूर खड़े हो गये । मै बच्चेवाला डिव्वा कोठरीसे बाहर निकाल लाया ओर जिस वृक्ष पर गिलहरी माता घूम रही थी, असी वृक्षके नीचे ले जाकर डिब्बेको टेढ़ा रख दिया। दो-तीन कौवोन जिसे देखा, फिर भला वे महाशय वहाँसे टल सकते थे ? ललचाओ हुओ दृष्टिसे वे अकटक अधर ताकने लगे, किन्तु हमारे क्षेत्रपाल पूरे सावधान थे । बच्चा डिब्से बाहर निकला और 'किल्- किल्- किल्- किल्' करके असने भयंकर चीत्कार को बच्चेको विजय मेरा ध्यान गिलहरी माताकी ओर था । अस समयकी असकी मुखमुद्रा देखने ही योग्य थी । असके प्राण आँखो और कानोने आ रहे थे। बच्चे के दर्शन होते ही असके लिये आसपासकी दूसरी सारी सृष्टि शून्य हो गयी। गिलहरीकी दौड़से वह अपरसे दौड़ती हुओ नीचे आ गओ । स्टेशनके समीप आते हो जैसे रेलगाडी सीटी देती है, वैसी ही आवाज करती हुआ वह नीचे आओ । बच्चा भी मॉकी ओर दौड़ा। दोनोका मिलन हुआ । तुरन्त हो माता चारो ओर देखने लगी । गिलहरी माता भयभीत न हो जाय जितनी दूर, किन्तु कौवे सफल न हो तिने समीप रहना हमारे लिये आवश्यक था। अव हमें अंक अद्भुत दृश्य देखने को मिला । साता सोचती थी कि यदि में बच्चेको लेकर अविलम्ब घोसलेमें पहुँच जायूँ तो जग जीती । बच्चेको अिसका विचार कहाँसे आता ? वह तो दो दिनका भूखा था। माँको देखते ही तुरन्त दूध पीने दौड़ा । माँ असे मुँहसे पकड़कर अठाने जाती कि बच्चा तुरन्त छटककर दूध पीने दौडता । अंक डेढ़ मिनट तक यह छूटना-पकड़ना चला । अन्तमे विजय बच्चेको हुआ। माँने देख लिया कि बच्चा माननेवाला नहीं है । अत. प्राणोकी बाजी लगाकर वह वही रुक गयी। बच्चेको दूध पीने दिया । भूखे सिपाही रणांगणमे प्राणोंकी बाजी लगाकर भी भोजन करते है, ठीक वैसा हो यह प्रसंग था । बच्चेकी भूख कुछ शान्त हुआ कि मॉने दृढतापूर्वक असे असके पेटको चमड़ोसे पकड़ा। बच्चेने तुरन्त ही अपने चारो पाॅॉव तथा पूँछ मॉके गलेमें लपेट दिये। माँके गलेके आसपास अलका यह हृदय-धन अनमोल हारकी तरह लिपट गया । असको बचाती हुओ सिर ऊंचा किये आँगन पार करके माँ चबूतरे पर आओ। हमने अपना घेरा संकीर्ण कर लिया। चबूतरेके किनारेके आगे जहाँ दीवारका कोना बाहरकी ओर निकला हुआ था, अतको धार परसे गिलहरी डगमग करती हुओ चढ़ने लगी। कैसी असकी सँभाल ! कैसी असकी अंकाग्रता ! अपर वह लगभग छज्जे तक पहुँच गयी । वहाँसे छलॉग मार कर ही लकड़ेके जग जीत लिया ! पटिये तक पहुँचा जा सकता था । छलाँग मारेगी कि नहीं ? छलांग मारनेके लिये साहम बटोर कर माँ मारे शरीरको सिकोड़ती, पर कूदने के पहले ही हिम्मत हार जाती। निराश होकर नि ग्वाम डाल फिर अन्य प्रकारसे चल करती। दसेक बार तो असने वायसे वायें और दायेंगे चकर काटेगे। अपर यदि बच्चा गिर पड़े तो वजा जनभव । जितने-जितने निष्फल प्रयत्न होते, अतनी हो असकी शक्ति क्षोत्र होती और प्रयत्न सफल होनेकी आशा भी कम होती जाती । बेचारीने हताश होकर अंक बार चीत्कार की कौनसा भक्त तिरी अधिक व्याकुल प्रार्थना कर सकता है ? हम जितने लोग आसपास खड़े थे, किन्तु अनको क्या सेवा करते ? मनुष्य-जातिने आज तक गिलहरीका विश्वान सम्पादन कहाँ किया है कि वह असे अपने पास आने देती ? मुजे अंक विचार सूझा । दौड़कर में अपना दुपट्टा ले आया। दो सिरे पैने तथा दो सिरं शामलभाओने पकडे और असे चौडा करके जमीनसे दो-अंक हाथ ऊँचा पकड़ रखा । द्देश्य था कि गिलहो या असका बच्चा गिरी पडे तो चकनाचूर न हो जाय । अन्ततः भगवानने गिलहरीको पुकार सुनी। असके गरीरमे असाधारण बल आया। इवान रोक कर असने विश्वास के साथ अंक छलाँग नारी और क्षणभरने वह अपने स्थान पर पहुँच गयी ! दो छप्परोकी राधिमे, मयारीके खपरैलोके नीचे गिलहरोका निवास था । अस रात्रिमे माँ और बच्चेने कमी मीठी नीद ली होगी । सच ही साँलगा होगा कि मैने जग जीत लिया। उसके बाद कओ दिन तक अस माँ और बच्चेको हम देखते और पहचान लेते थे कुछ दिनों बाद अिन्स्पेक्टर जनरल आनेवाला था. अतः असके आगमनकी तैयारिया होने लगी। मकान पोते गये, चूने-सोमेटका जो काम करने योग्य था वह किया गया, छप्पर सारे गये और खभे तेलपानीसे नहाये । कैदियोकी कवायद केसे होती थी, वगैरा वाते मनोरंजक
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के निजीकरण के एजेंडे का बचाव करते हुए जिस प्रकार निजी क्षेत्र का मजबूती से पक्ष लिया उससे एक बात एकदम साफ हो गई कि आर्थिक सुधारों को चोरी छिपे अंजाम देने का समय अब समाप्त हो चुका है। यह एक सुखद बदलाव है जो 'सूट-बूट की सरकार' जैसा ताना मारे जाने के बाद की हिचक टूटने को दर्शाता है। बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद ज्ञापन का उत्तर देते हुए मोदी ने जोर देकर कहा कि वोट जुटाने के मकसद से संपत्ति तैयार करने वालों को गाली देना अब स्वीकार्य नहीं रहा और कारखानों तथा कारोबार संचालन के मामले में अब अफसरशाही को पीछे हट जाना चाहिए। ये टिप्पणियां अहम हैं और सरकार के व्यापक रुख का निर्देशन इन्हीं के जरिये होना चाहिए। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि देश को संपत्ति तैयार करने वालों की आवश्यकता है। केवल उसी स्थिति में निजी क्षेत्र फल-फूल सकेगा, रोजगार तैयार हो सकेंगे और सरकार के पास अपने दायित्व निभाने के संसाधन रहेंगे। बिना संपत्ति तैयार किए पुनर्वितरण नहीं हो सकता।
आजादी के बाद कई दशकों तक सरकारी क्षेत्र के दबदबे और अत्यधिक सरकारी नियंत्रण वाला मॉडल अपनाया गया लेकिन इससे वांछित परिणाम नहीं हासिल हुए। भारत को उच्च वृद्धि दर तभी हासिल हुई जब सन 1990 के दशक में अर्थव्यवस्था को निजी क्षेत्र के लिए खोला गया और प्रतिस्पर्धा बढ़ी। प्रधानमंत्री के वक्तव्य को सरकारी उपक्रमों से संबंधित नई नीति के परिप्रेक्ष्य में भी देखा जाना चाहिए, जिसकी घोषणा आम बजट में की गई। इसके तहत सरकार केवल सामरिक क्षेत्र के चुनिंदा सरकारी उपक्रमों को अपने पास रखेगी और शेष का या तो निजीकरण किया जाएगा या उन्हें बंद कर दिया जाएगा। सरकार अगले वित्त वर्ष में दो सरकारी बैंकों का भी निजीकरण करेगी। अतीत को देखें तो ये बेहतर कदम हैं और दीर्घावधि में ये देश के हित में साबित होंगे। आंकड़े बताते हैं कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकांश सरकारी उपक्रम उन क्षेत्रों में हैं जहां प्रतिस्पर्धा सीमित है। दूसरी तरह से देखें तो सरकारी उपक्रम प्रतिस्पर्धा के सामने बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते। इससे यह संकेत निकलता है कि संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल नहीं हो रहा। इतना ही नहीं सरकारी क्षेत्र की मौजूदगी से बाजार में विसंगति आने का खतरा रहता है।
बहरहाल, निजी क्षेत्र की भूमिका बढऩे के साथ ही सरकार को ऐसी क्षमता विकसित करनी होगी कि समुचित नियामकीय या प्रवर्तन ढांचे के अभाव में कोई निजी उपक्रम व्यवस्था का दुरुपयोग न कर सके। व्यापक तौर पर देश के नागरिक निजी क्षेत्र पर तभी भरोसा करेंगे जब उन्हें यह यकीन होगा कि व्यवस्था चंद लोगों के पक्ष में झुकी नहीं है और विधिक ढांचा ऐसा नहीं है जो रेंट सीकिंग (नए धन का सृजन किए बिना मौजूदा धन-संपत्ति में वृद्धि) को बढ़ावा देता हो। ऐसी बाजार समर्थक व्यवस्था को बढ़ावा देना ही एकमात्र रास्ता है जहां सर्वाधिक सक्षम उद्यमी सफल हों। संभावित एकाधिकार और सरकारी समर्थन से निजी क्षेत्र में शक्ति का केंद्रीकरण विश्वास और वृद्धि दोनों को प्रभावित करेगा। मजबूत और स्थिर नियामकीय माहौल निवेश जुटाने में मदद करेगा, रोजगार सृजित करेगा, उत्पादन और मांग बढ़ाएगा तथा देश की समग्र संपत्ति में इजाफा करेगा। निजी क्षेत्र के सुचारु कामकाज के लिए आगे चलकर सरकार को न्याय व्यवस्था में भी निवेश करना होगा। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि अनुबंध प्रवर्तन के मामले में भारत का प्रदर्शन बेहतर करने के लिए कदम उठाने होंगे। यह एक ऐसा सूचकांक है जहां देश का प्रदर्शन बीते वर्षों में अत्यधिक खराब रहा है। विश्व बैंक की कारोबारी सुगमता रैकिंग में भी हम इस क्षेत्र में 163वें स्थान पर रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के निजीकरण के एजेंडे का बचाव करते हुए जिस प्रकार निजी क्षेत्र का मजबूती से पक्ष लिया उससे एक बात एकदम साफ हो गई कि आर्थिक सुधारों को चोरी छिपे अंजाम देने का समय अब समाप्त हो चुका है। यह एक सुखद बदलाव है जो 'सूट-बूट की सरकार' जैसा ताना मारे जाने के बाद की हिचक टूटने को दर्शाता है। बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद ज्ञापन का उत्तर देते हुए मोदी ने जोर देकर कहा कि वोट जुटाने के मकसद से संपत्ति तैयार करने वालों को गाली देना अब स्वीकार्य नहीं रहा और कारखानों तथा कारोबार संचालन के मामले में अब अफसरशाही को पीछे हट जाना चाहिए। ये टिप्पणियां अहम हैं और सरकार के व्यापक रुख का निर्देशन इन्हीं के जरिये होना चाहिए। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि देश को संपत्ति तैयार करने वालों की आवश्यकता है। केवल उसी स्थिति में निजी क्षेत्र फल-फूल सकेगा, रोजगार तैयार हो सकेंगे और सरकार के पास अपने दायित्व निभाने के संसाधन रहेंगे। बिना संपत्ति तैयार किए पुनर्वितरण नहीं हो सकता।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के निजीकरण के एजेंडे का बचाव करते हुए जिस प्रकार निजी क्षेत्र का मजबूती से पक्ष लिया उससे एक बात एकदम साफ हो गई कि आर्थिक सुधारों को चोरी छिपे अंजाम देने का समय अब समाप्त हो चुका है। यह एक सुखद बदलाव है जो 'सूट-बूट की सरकार' जैसा ताना मारे जाने के बाद की हिचक टूटने को दर्शाता है। बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद ज्ञापन का उत्तर देते हुए मोदी ने जोर देकर कहा कि वोट जुटाने के मकसद से संपत्ति तैयार करने वालों को गाली देना अब स्वीकार्य नहीं रहा और कारखानों तथा कारोबार संचालन के मामले में अब अफसरशाही को पीछे हट जाना चाहिए। ये टिप्पणियां अहम हैं और सरकार के व्यापक रुख का निर्देशन इन्हीं के जरिये होना चाहिए। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि देश को संपत्ति तैयार करने वालों की आवश्यकता है। केवल उसी स्थिति में निजी क्षेत्र फल-फूल सकेगा, रोजगार तैयार हो सकेंगे और सरकार के पास अपने दायित्व निभाने के संसाधन रहेंगे। बिना संपत्ति तैयार किए पुनर्वितरण नहीं हो सकता। आजादी के बाद कई दशकों तक सरकारी क्षेत्र के दबदबे और अत्यधिक सरकारी नियंत्रण वाला मॉडल अपनाया गया लेकिन इससे वांछित परिणाम नहीं हासिल हुए। भारत को उच्च वृद्धि दर तभी हासिल हुई जब सन एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक में अर्थव्यवस्था को निजी क्षेत्र के लिए खोला गया और प्रतिस्पर्धा बढ़ी। प्रधानमंत्री के वक्तव्य को सरकारी उपक्रमों से संबंधित नई नीति के परिप्रेक्ष्य में भी देखा जाना चाहिए, जिसकी घोषणा आम बजट में की गई। इसके तहत सरकार केवल सामरिक क्षेत्र के चुनिंदा सरकारी उपक्रमों को अपने पास रखेगी और शेष का या तो निजीकरण किया जाएगा या उन्हें बंद कर दिया जाएगा। सरकार अगले वित्त वर्ष में दो सरकारी बैंकों का भी निजीकरण करेगी। अतीत को देखें तो ये बेहतर कदम हैं और दीर्घावधि में ये देश के हित में साबित होंगे। आंकड़े बताते हैं कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकांश सरकारी उपक्रम उन क्षेत्रों में हैं जहां प्रतिस्पर्धा सीमित है। दूसरी तरह से देखें तो सरकारी उपक्रम प्रतिस्पर्धा के सामने बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते। इससे यह संकेत निकलता है कि संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल नहीं हो रहा। इतना ही नहीं सरकारी क्षेत्र की मौजूदगी से बाजार में विसंगति आने का खतरा रहता है। बहरहाल, निजी क्षेत्र की भूमिका बढऩे के साथ ही सरकार को ऐसी क्षमता विकसित करनी होगी कि समुचित नियामकीय या प्रवर्तन ढांचे के अभाव में कोई निजी उपक्रम व्यवस्था का दुरुपयोग न कर सके। व्यापक तौर पर देश के नागरिक निजी क्षेत्र पर तभी भरोसा करेंगे जब उन्हें यह यकीन होगा कि व्यवस्था चंद लोगों के पक्ष में झुकी नहीं है और विधिक ढांचा ऐसा नहीं है जो रेंट सीकिंग को बढ़ावा देता हो। ऐसी बाजार समर्थक व्यवस्था को बढ़ावा देना ही एकमात्र रास्ता है जहां सर्वाधिक सक्षम उद्यमी सफल हों। संभावित एकाधिकार और सरकारी समर्थन से निजी क्षेत्र में शक्ति का केंद्रीकरण विश्वास और वृद्धि दोनों को प्रभावित करेगा। मजबूत और स्थिर नियामकीय माहौल निवेश जुटाने में मदद करेगा, रोजगार सृजित करेगा, उत्पादन और मांग बढ़ाएगा तथा देश की समग्र संपत्ति में इजाफा करेगा। निजी क्षेत्र के सुचारु कामकाज के लिए आगे चलकर सरकार को न्याय व्यवस्था में भी निवेश करना होगा। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि अनुबंध प्रवर्तन के मामले में भारत का प्रदर्शन बेहतर करने के लिए कदम उठाने होंगे। यह एक ऐसा सूचकांक है जहां देश का प्रदर्शन बीते वर्षों में अत्यधिक खराब रहा है। विश्व बैंक की कारोबारी सुगमता रैकिंग में भी हम इस क्षेत्र में एक सौ तिरेसठवें स्थान पर रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के निजीकरण के एजेंडे का बचाव करते हुए जिस प्रकार निजी क्षेत्र का मजबूती से पक्ष लिया उससे एक बात एकदम साफ हो गई कि आर्थिक सुधारों को चोरी छिपे अंजाम देने का समय अब समाप्त हो चुका है। यह एक सुखद बदलाव है जो 'सूट-बूट की सरकार' जैसा ताना मारे जाने के बाद की हिचक टूटने को दर्शाता है। बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद ज्ञापन का उत्तर देते हुए मोदी ने जोर देकर कहा कि वोट जुटाने के मकसद से संपत्ति तैयार करने वालों को गाली देना अब स्वीकार्य नहीं रहा और कारखानों तथा कारोबार संचालन के मामले में अब अफसरशाही को पीछे हट जाना चाहिए। ये टिप्पणियां अहम हैं और सरकार के व्यापक रुख का निर्देशन इन्हीं के जरिये होना चाहिए। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि देश को संपत्ति तैयार करने वालों की आवश्यकता है। केवल उसी स्थिति में निजी क्षेत्र फल-फूल सकेगा, रोजगार तैयार हो सकेंगे और सरकार के पास अपने दायित्व निभाने के संसाधन रहेंगे। बिना संपत्ति तैयार किए पुनर्वितरण नहीं हो सकता।
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जीएसवीएम मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. एसके कटियार ने बताया कि प्रदूषण से दिक्कत बढ़ी है। जो रोगी बॉर्डर लाइन पर रहे हैं, उन्हें आक्सीजन और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है।
वायु मंडल में समाए प्रदूषण के कारण लोगों के फेफड़े काले हो रहे हैं। थूकने पर बलगम काला निकल रहा है। इसके साथ ही सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के रोगियों को सेकेंडरी संक्रमण भी हो रहे हैं। इससे दो और रोगियों की मौत हो गई है।
इसके साथ प्रदूषण के कारण सांस की दिक्कत क्रोनिक रोगियों पर भारी पड़ रही है। हैलट में गुर्दे, लिवर फेल के रोगियों को भर्ती किया गया। सीओपीडी के रोगी वेंटिलेटर पर हैं। हैलट ओपीडी में सांस के रोगियों की भरमार रही। इसके साथ ही सीओपीडी, अस्थमा रोगियों की हालत बिगड़ी।
एक सीओपीडी के रोगी के फेफड़ों में कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा अधिक हो जाने के कारण उसे हैलट इमरजेंसी में वेंटिलेटर पर रखा गया है। रोगी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा के अंडर में हैं। उन्होंने बताया कि कुछ रोगियों के गुर्दे और लिवर फेल हैं।
दो महिलाओं समेत तीन रोगियों को ब्रेन अटैक पड़ा। ओपीडी स्तर पर इलाज करा रहे दो रोगियों की मौत हो गई। इनमें कल्याणपुर के रहने वाले विवेक कनौजिया (58) की सीओपीडी से मौत हुई। उनके बेटे राजेश ने बताया कि उन्हें निमोनिया भी हो गया था।
इसी तरह बाबूपुरवा के चमड़ा कारीगर निजाम (55) की सीओपीडी से मौत हुई। उनके गुर्दे भी खराब हो गए थे। इससे पहले रविवार को भी दो मरीजों की मौत हुई थी। सीओपीडी के अटैक के साथ ही इनके शरीर में भी कार्बन डाई ऑक्साइड बढ़ गई थी। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. एसके कटियार ने बताया कि प्रदूषण से दिक्कत बढ़ी है। जो रोगी बॉर्डर लाइन पर रहे हैं, उन्हें आक्सीजन और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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जीएसवीएम मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. एसके कटियार ने बताया कि प्रदूषण से दिक्कत बढ़ी है। जो रोगी बॉर्डर लाइन पर रहे हैं, उन्हें आक्सीजन और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है। वायु मंडल में समाए प्रदूषण के कारण लोगों के फेफड़े काले हो रहे हैं। थूकने पर बलगम काला निकल रहा है। इसके साथ ही सीओपीडी के रोगियों को सेकेंडरी संक्रमण भी हो रहे हैं। इससे दो और रोगियों की मौत हो गई है। इसके साथ प्रदूषण के कारण सांस की दिक्कत क्रोनिक रोगियों पर भारी पड़ रही है। हैलट में गुर्दे, लिवर फेल के रोगियों को भर्ती किया गया। सीओपीडी के रोगी वेंटिलेटर पर हैं। हैलट ओपीडी में सांस के रोगियों की भरमार रही। इसके साथ ही सीओपीडी, अस्थमा रोगियों की हालत बिगड़ी। एक सीओपीडी के रोगी के फेफड़ों में कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा अधिक हो जाने के कारण उसे हैलट इमरजेंसी में वेंटिलेटर पर रखा गया है। रोगी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा के अंडर में हैं। उन्होंने बताया कि कुछ रोगियों के गुर्दे और लिवर फेल हैं। दो महिलाओं समेत तीन रोगियों को ब्रेन अटैक पड़ा। ओपीडी स्तर पर इलाज करा रहे दो रोगियों की मौत हो गई। इनमें कल्याणपुर के रहने वाले विवेक कनौजिया की सीओपीडी से मौत हुई। उनके बेटे राजेश ने बताया कि उन्हें निमोनिया भी हो गया था। इसी तरह बाबूपुरवा के चमड़ा कारीगर निजाम की सीओपीडी से मौत हुई। उनके गुर्दे भी खराब हो गए थे। इससे पहले रविवार को भी दो मरीजों की मौत हुई थी। सीओपीडी के अटैक के साथ ही इनके शरीर में भी कार्बन डाई ऑक्साइड बढ़ गई थी। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. एसके कटियार ने बताया कि प्रदूषण से दिक्कत बढ़ी है। जो रोगी बॉर्डर लाइन पर रहे हैं, उन्हें आक्सीजन और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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मुंबई की ओर से डोमेस्टिक क्रिकेट खेलने वाले सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ भी शिखर धवन (Shikhar Dhawan) के विकल्प के रूप में देखे जाने वाले खिलाड़ी है। उन्हें खेल के सभी प्रारूपों में भारतीय क्रिकेट टीम के भविष्य के रूप में जाना जाता है। आईपीएल में उनके प्रदर्शन ने उनके अद्भुत प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया है।
जिसके चलते वह ओपनिंग पोजीशन के लिए शिखर धवन (Shikhar Dhawan) की जगह लेने के लिए एक आदर्श उम्मीदवार हैं। रणजी से लेकर विजय हजारे में पृथ्वी शॉ मुंबई के लिए नियमित ओपनर रहे हैं और आईपीएल में अपनी फ्रेंचाइजी दिल्ली कैपिटल्स के लिए भी यही भूमिका निभाते हैं। पावरप्ले का इस्तेमाल करते हुए ताबड़तोड़ अंदाज में रन बटोरने में इस बल्लेबाज को महारथ हासिल है।
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मुंबई की ओर से डोमेस्टिक क्रिकेट खेलने वाले सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ भी शिखर धवन के विकल्प के रूप में देखे जाने वाले खिलाड़ी है। उन्हें खेल के सभी प्रारूपों में भारतीय क्रिकेट टीम के भविष्य के रूप में जाना जाता है। आईपीएल में उनके प्रदर्शन ने उनके अद्भुत प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया है। जिसके चलते वह ओपनिंग पोजीशन के लिए शिखर धवन की जगह लेने के लिए एक आदर्श उम्मीदवार हैं। रणजी से लेकर विजय हजारे में पृथ्वी शॉ मुंबई के लिए नियमित ओपनर रहे हैं और आईपीएल में अपनी फ्रेंचाइजी दिल्ली कैपिटल्स के लिए भी यही भूमिका निभाते हैं। पावरप्ले का इस्तेमाल करते हुए ताबड़तोड़ अंदाज में रन बटोरने में इस बल्लेबाज को महारथ हासिल है।
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Meerut : छात्रों की समस्या को लेकर सीसीएस यूनिवर्सिटी पहुंचे मेरठ कॉलेज के छात्रों ने शुक्रवार को वीसी कार्यालय का गेट तोड़ दिया और जमकर हंगामा काटा जिसके चलते छात्रों की वीसी से भी कहासुनी हो गई। छात्रों ने स्टाफ से अभद्रता की। बाद में छात्र संघ अध्यक्ष के माफी मांगने पर मामला शांत हुआ। सीसीएसयू प्रशासन छात्रों पर कार्यवाही करने की तैयारी में है।
मेरठ कालेज के छात्र संघ अध्यक्ष दुष्यंत तोमर के नेतृत्व में छात्र वीसी से मिलने पहुंचे थे। छात्र पीजी और एलएलबी में एडमिशन बढ़ाने के अलावा यूजी में रिक्त सीटों पर प्रवेश की मांग को लेकर वीसी से मिलना चाहते थे। वहा मौजूद कर्मियों ने प्रशासनिक कार्यालय में ताला मार दिया। इससे छात्र आगबबूला हो गए गेट के बहार ही प्रदर्शन करने लगे। और जमकर नारेबाजी की। बाद में वीसी ने चैनल के बाहर से छात्रों से बातचीत की। छात्रों की मांग को उन्होंने इन्कार कर दिया। छात्रों ने जिद की कि वे कार्यालय में आकर बात करेंगे। वीसी जब अपने कार्यालय में लौटे तो छात्र प्रशासनिक कार्यालय का गेट खुलवाकर अंदर घुस गए। वीसी कार्यालय का गेट बंद होने पर आक्रोशित छात्रों ने गेट तोड़ दिया। कर्मचारियों और सुरक्षा गार्ड के साथ जमकर धक्कामुक्की हुई। छात्रों की कुलपति से जमकर बहस हुई। बाद में छात्र नेता दुष्यंत तोमर ने सार्वजनिक रूप से वीसी से इस मामले को लेकर माफी मांगी। मौके पर छात्रों के हंगामे को देखते हुए यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस भी पहुंच गई।
चीफ प्रॉक्टर जितेंद्र ढाका ने कहना है कि सीसीवी फुटेज देखकर गेट तोड़ने, सुरक्षाकर्मी से धक्कामुक्की और अनुशासन तोड़ने वालों छात्रों की पहचान की जाएगी। इसके बाद इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कर्मियों की ओर से छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर सख्त कार्यवाही होगी।
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Meerut : छात्रों की समस्या को लेकर सीसीएस यूनिवर्सिटी पहुंचे मेरठ कॉलेज के छात्रों ने शुक्रवार को वीसी कार्यालय का गेट तोड़ दिया और जमकर हंगामा काटा जिसके चलते छात्रों की वीसी से भी कहासुनी हो गई। छात्रों ने स्टाफ से अभद्रता की। बाद में छात्र संघ अध्यक्ष के माफी मांगने पर मामला शांत हुआ। सीसीएसयू प्रशासन छात्रों पर कार्यवाही करने की तैयारी में है। मेरठ कालेज के छात्र संघ अध्यक्ष दुष्यंत तोमर के नेतृत्व में छात्र वीसी से मिलने पहुंचे थे। छात्र पीजी और एलएलबी में एडमिशन बढ़ाने के अलावा यूजी में रिक्त सीटों पर प्रवेश की मांग को लेकर वीसी से मिलना चाहते थे। वहा मौजूद कर्मियों ने प्रशासनिक कार्यालय में ताला मार दिया। इससे छात्र आगबबूला हो गए गेट के बहार ही प्रदर्शन करने लगे। और जमकर नारेबाजी की। बाद में वीसी ने चैनल के बाहर से छात्रों से बातचीत की। छात्रों की मांग को उन्होंने इन्कार कर दिया। छात्रों ने जिद की कि वे कार्यालय में आकर बात करेंगे। वीसी जब अपने कार्यालय में लौटे तो छात्र प्रशासनिक कार्यालय का गेट खुलवाकर अंदर घुस गए। वीसी कार्यालय का गेट बंद होने पर आक्रोशित छात्रों ने गेट तोड़ दिया। कर्मचारियों और सुरक्षा गार्ड के साथ जमकर धक्कामुक्की हुई। छात्रों की कुलपति से जमकर बहस हुई। बाद में छात्र नेता दुष्यंत तोमर ने सार्वजनिक रूप से वीसी से इस मामले को लेकर माफी मांगी। मौके पर छात्रों के हंगामे को देखते हुए यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस भी पहुंच गई। चीफ प्रॉक्टर जितेंद्र ढाका ने कहना है कि सीसीवी फुटेज देखकर गेट तोड़ने, सुरक्षाकर्मी से धक्कामुक्की और अनुशासन तोड़ने वालों छात्रों की पहचान की जाएगी। इसके बाद इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कर्मियों की ओर से छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर सख्त कार्यवाही होगी।
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नई दिल्ली। कार्यशैली और खान-पान की वजह से लोगों शारीरिक व मानसिक कमजोरी आजकल ऐसी आम समस्याएं हो चुकी हैं। इन समस्याओं ने हर उम्र के लोगों को अपनी चपेट में लिया हुआ है और इन समस्याओं के चलते न आदमी अपना काम ध्यान कर सकता और न स्वस्थ रह पाता है। ऐसे में यदि शारीरिक और मानसिक कमजोरी की समस्याओं से परेशान हैं तो हम आपको बता रहे हैं कुछ घरेलू आसान नुस्खे। इन नुस्खों अपनाकर किसी भी उम्र का व्यक्ति अपनी कमजोरी दूर कर जवानी जैसा जोश महसूस करने लगेगा। तो जानिए....
- शारीरिक शक्ति बढ़ाने के लिए रोजाना आंवले का मुरब्बा खाएं। रोज केले खाएं और दूध पीएं।
- अश्वगंधा चूर्ण और बिदारीकंद को 100-100 ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बनाएं और आधा चम्मच चूर्ण दूध के साथ सुबह और शाम लें। यह मिश्रण कमजोरी दूर कर शरीर को ताकत देने वाला होता है।
- कमजोरी दूर करने के लिए अनार के छिलकों को सुखाकर पीसकर रोज सुबह और शाम एक चम्मच चूर्ण खाएं।
- 100 ग्राम अजवायन को सफेद प्याज के रस में भिगोकर सुखाएं, ऐसा तीन बार करें तथा इसे कूटकर किसी बोतल में भरकर रख लें। इसके बाद रोज आधा चम्मच चूर्ण एक चम्मच पिसी हुई मिश्री के साथ मिलाकर खाएं। इसके ऊपर से हल्का गर्म दूध पी लें। करीब-करीब एक महीने तक इस मिश्रण का उपयोग करने से कमजोरी दूर होगी।
- रात को सोने से पहले रोज लहसुन की दो कलियां निगल लें। इसके बाद थोड़ा-सा पानी पिएं। आंवले के चूर्ण में मिश्री पीसकर मिला लें तथा रोज रात को सोने से पहले लगभग एक चम्मच चूर्ण लें।
- रोज रात को सोने समय चार-पांच छुहारे, दो-तीन काजू व दो बादाम को 300 ग्राम दूध में खूब अच्छी तरह से उबालकर और पकाकर दो चम्मच मिश्री मिलाकर लें।
- कमजोरी में जल्दी लाभ लेने के लिए धाय के फूल, मुलेठी, नागकेशर, बबूलफली बराबर मात्रा में लेकर इसमें आधी मात्रा में मिश्री मिलाकर पीस लें। इस चूर्ण का 5-5 ग्राम की मात्रा में सेवन लगातार एक माह तक करें।
- 1चम्मच शहद में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट सेवन करें।
- पुनर्नवा की जड़ों का रस (2 चम्मच) दूध के साथ एक माह तक सेवन करने से बूढ व्यक्ति भी युवा की तरह ताकत महसूस करने लगता है।
- 100 ग्राम कौंच के बीज और 100 ग्राम तालमखाना को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें 200 ग्राम मिश्री पीसकर मिला लें। हल्के गर्म दूध में आधा चम्मच चूर्ण मिलाकर पीएं।
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नई दिल्ली। कार्यशैली और खान-पान की वजह से लोगों शारीरिक व मानसिक कमजोरी आजकल ऐसी आम समस्याएं हो चुकी हैं। इन समस्याओं ने हर उम्र के लोगों को अपनी चपेट में लिया हुआ है और इन समस्याओं के चलते न आदमी अपना काम ध्यान कर सकता और न स्वस्थ रह पाता है। ऐसे में यदि शारीरिक और मानसिक कमजोरी की समस्याओं से परेशान हैं तो हम आपको बता रहे हैं कुछ घरेलू आसान नुस्खे। इन नुस्खों अपनाकर किसी भी उम्र का व्यक्ति अपनी कमजोरी दूर कर जवानी जैसा जोश महसूस करने लगेगा। तो जानिए.... - शारीरिक शक्ति बढ़ाने के लिए रोजाना आंवले का मुरब्बा खाएं। रोज केले खाएं और दूध पीएं। - अश्वगंधा चूर्ण और बिदारीकंद को एक सौ-एक सौ ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बनाएं और आधा चम्मच चूर्ण दूध के साथ सुबह और शाम लें। यह मिश्रण कमजोरी दूर कर शरीर को ताकत देने वाला होता है। - कमजोरी दूर करने के लिए अनार के छिलकों को सुखाकर पीसकर रोज सुबह और शाम एक चम्मच चूर्ण खाएं। - एक सौ ग्राम अजवायन को सफेद प्याज के रस में भिगोकर सुखाएं, ऐसा तीन बार करें तथा इसे कूटकर किसी बोतल में भरकर रख लें। इसके बाद रोज आधा चम्मच चूर्ण एक चम्मच पिसी हुई मिश्री के साथ मिलाकर खाएं। इसके ऊपर से हल्का गर्म दूध पी लें। करीब-करीब एक महीने तक इस मिश्रण का उपयोग करने से कमजोरी दूर होगी। - रात को सोने से पहले रोज लहसुन की दो कलियां निगल लें। इसके बाद थोड़ा-सा पानी पिएं। आंवले के चूर्ण में मिश्री पीसकर मिला लें तथा रोज रात को सोने से पहले लगभग एक चम्मच चूर्ण लें। - रोज रात को सोने समय चार-पांच छुहारे, दो-तीन काजू व दो बादाम को तीन सौ ग्राम दूध में खूब अच्छी तरह से उबालकर और पकाकर दो चम्मच मिश्री मिलाकर लें। - कमजोरी में जल्दी लाभ लेने के लिए धाय के फूल, मुलेठी, नागकेशर, बबूलफली बराबर मात्रा में लेकर इसमें आधी मात्रा में मिश्री मिलाकर पीस लें। इस चूर्ण का पाँच-पाँच ग्राम की मात्रा में सेवन लगातार एक माह तक करें। - एकचम्मच शहद में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट सेवन करें। - पुनर्नवा की जड़ों का रस दूध के साथ एक माह तक सेवन करने से बूढ व्यक्ति भी युवा की तरह ताकत महसूस करने लगता है। - एक सौ ग्राम कौंच के बीज और एक सौ ग्राम तालमखाना को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें दो सौ ग्राम मिश्री पीसकर मिला लें। हल्के गर्म दूध में आधा चम्मच चूर्ण मिलाकर पीएं।
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पखांजूर,बिप्लब् कुण्डू। गोण्डाहूर मे कई समस्याएं दिखने को मिल रही है जिसमें एक पशु चिकित्सालय भी है, गोण्डाहूर के कॉलोनी और ग्राम 50 के बीच सालों से बने पशु चिकित्सालय को खोलने के लिए छात्र युवा मंच ने कलेक्टर के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौपा।
परालकोट क्षेत्र प्रमुख प्रसंजीत सरकार का कहना है कि साल मे कई पशु बिना इलाज के ही खत्म होते दिखते है, मनुष्य को आज के इस पिढ़ी मे पशु से बहुत ज्यादा लगाव होता है, इंसानो के बहुत करीब होता है पशु, जिनमे - गाय, कुत्ते, बिल्ली जैसे कई जानवर इंसान पालते है। जब यही जानवरों की मृत्यु हो जाय तब बहुत ठेस पहुंचती है इंसानो को। जानवरों की सही इलाज होना बहुत जरूरी है। गोण्डाहूर क्षेत्र में पशु चिकित्सालय बना तो है किन्तु पशु परिचालक चिकित्सालय मे नजर नहीं आते। पशु चिकित्सालय की हालत खड़े खड़े खराब होती जा रही है और अब तक पाशु चिकित्सालय खुला नहीं है।
पाशु परिचालक से पशु चिकित्सालय मे उपस्थित ना होने की वजह पूछे जाने पर उनके द्वारा बताया गया कि पशु चिकित्सालय मे ना बैठने की जगह है और ना आने जाने के के लिए मार्ग की यहा तक कि वहां पानी की व्यवस्था तक नहीं है। साथ मे बताया कि जब सरकार इन सब की व्यवस्था करेगा पशु चिकित्सालय मे मैं अपनी उपस्थिति दूंगा।
गोण्डाहूर पंचायत मे यहा चिकित्सालय बना हुआ है और पशु परिचालक ने इस समस्या के बारे मे पंचायत से भी बात की थी किन्तु इसका कोई हल नहीं हुआ।
पंखांजूर शहर अध्यक्ष निलकमल बड़ाई का कहना है जहा तक चिकित्सक ने बताया वहाँ सही नहीं है क्युकि बिना मार्ग के बिना पानी की व्यवस्था के चिकित्सालय मे चिकित्सा कैसे हो पाएगा। सरकार को इसकी व्यवस्था जल्द से जल्द करनी चाहिए। और कब तक पशुओं की इस तरह से बिना इलाज मृत्यु होती रहेगी यहा बहुत ही दुःख जनक है।
चिकित्सक की मांग और चिकित्सालय खुलने के लिए छात्र युवा मंच ने यहा प्रस्ताव ज्ञापन मे लिखा और श्रीमान चंदन कुमार के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौपा।
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पखांजूर,बिप्लब् कुण्डू। गोण्डाहूर मे कई समस्याएं दिखने को मिल रही है जिसमें एक पशु चिकित्सालय भी है, गोण्डाहूर के कॉलोनी और ग्राम पचास के बीच सालों से बने पशु चिकित्सालय को खोलने के लिए छात्र युवा मंच ने कलेक्टर के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौपा। परालकोट क्षेत्र प्रमुख प्रसंजीत सरकार का कहना है कि साल मे कई पशु बिना इलाज के ही खत्म होते दिखते है, मनुष्य को आज के इस पिढ़ी मे पशु से बहुत ज्यादा लगाव होता है, इंसानो के बहुत करीब होता है पशु, जिनमे - गाय, कुत्ते, बिल्ली जैसे कई जानवर इंसान पालते है। जब यही जानवरों की मृत्यु हो जाय तब बहुत ठेस पहुंचती है इंसानो को। जानवरों की सही इलाज होना बहुत जरूरी है। गोण्डाहूर क्षेत्र में पशु चिकित्सालय बना तो है किन्तु पशु परिचालक चिकित्सालय मे नजर नहीं आते। पशु चिकित्सालय की हालत खड़े खड़े खराब होती जा रही है और अब तक पाशु चिकित्सालय खुला नहीं है। पाशु परिचालक से पशु चिकित्सालय मे उपस्थित ना होने की वजह पूछे जाने पर उनके द्वारा बताया गया कि पशु चिकित्सालय मे ना बैठने की जगह है और ना आने जाने के के लिए मार्ग की यहा तक कि वहां पानी की व्यवस्था तक नहीं है। साथ मे बताया कि जब सरकार इन सब की व्यवस्था करेगा पशु चिकित्सालय मे मैं अपनी उपस्थिति दूंगा। गोण्डाहूर पंचायत मे यहा चिकित्सालय बना हुआ है और पशु परिचालक ने इस समस्या के बारे मे पंचायत से भी बात की थी किन्तु इसका कोई हल नहीं हुआ। पंखांजूर शहर अध्यक्ष निलकमल बड़ाई का कहना है जहा तक चिकित्सक ने बताया वहाँ सही नहीं है क्युकि बिना मार्ग के बिना पानी की व्यवस्था के चिकित्सालय मे चिकित्सा कैसे हो पाएगा। सरकार को इसकी व्यवस्था जल्द से जल्द करनी चाहिए। और कब तक पशुओं की इस तरह से बिना इलाज मृत्यु होती रहेगी यहा बहुत ही दुःख जनक है। चिकित्सक की मांग और चिकित्सालय खुलने के लिए छात्र युवा मंच ने यहा प्रस्ताव ज्ञापन मे लिखा और श्रीमान चंदन कुमार के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौपा।
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सत्यम मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या सत्यम से धन बाहर ले जाने में इसके प्रवर्तक भी शामिल थे।
सत्यम घोटाले से जुड़े कई पहलुओं की जांच क र रही सीबीआई की टीम ने 7 अप्रैल को फाइल की गई चार्जशीट में जालसाजी, धोखाधड़ी, जाली कागजात और सबूतों को नष्ट करने का आरोप लगाया है। हालांकि फंडों में धोखाधड़ी का कोई आरोप नहीं लगाया गया है।
सीबीआई की जांच में पता चला है कि रामलिंग राजू, उनके भाई बी रामा राजू और सत्यम के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी श्रीनिवास वाडलामणि इन्वेस्टर लिंक पर कर्मचारियों और कंपनी को मिल रहे प्रोजेक्टों की गलत जानकारी दे रहे थे। सीबीआई ने बताया कि कंपनी कम काम मिलने के समय में भी सभी कर्मचारियों को वेतन दे रही थी, इससे कंपनी पर वित्त भार और बढ़ गया है।
सीबीआई ने राजू भाइयों पर एसोसिएट स्टॉक ऑप्शन प्लान के जरिए कंपनी के वित्त विभाग के अधिकारियों को स्टॉकों का आवंटन करने का भी आरोप लगाया है।
वाटरहाउस के ऑडिटर श्रीनिवास तल्लुरी पर आरोप है कि उन्होंने बैंक और सत्यम से मिली सावधि जमा रसीदों (एफडीआर) में अंतर होते हुए भी कंपनी के बहीखातों को सही ठहराया और एफडीआर से जुड़े सही कागजात मिलने के बाद भी तल्लुरी ने राजू द्वारा बैंक की नकली मंजूरी से जुड़े कागजातों का ही इस्तेमाल किया गया।
सीबीआई की जांच में पता चला है कि सत्यम ने ऑडिटरों को 3. 67 करोड़ रुपये की अच्छी खासी रकम चुकाई थी, जबकि विप्रो और इन्फोसिस ने ऑडिटरों को क्रमशः 1. 1 करोड़ और 83 लाख रुपये चुकाए थे।
हैदराबाद के चौदहवें अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने सत्यम संस्थापक बी. रामलिंग राजू, उनके भाई बी. रामा राजू और पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी एस. वाडलामणि की जमानत याचिका पर सुनवाई 20 अप्रैल तक टाल दी है।
अभियोजन पक्ष ने अपना जवाब देने के लिए कुछ समय की मांग की। इस मामले में सीबीआई ने आरोपितों के खिलाफ 7 अप्रैल को आरोपत्र दाखिल किया था।
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सत्यम मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या सत्यम से धन बाहर ले जाने में इसके प्रवर्तक भी शामिल थे। सत्यम घोटाले से जुड़े कई पहलुओं की जांच क र रही सीबीआई की टीम ने सात अप्रैल को फाइल की गई चार्जशीट में जालसाजी, धोखाधड़ी, जाली कागजात और सबूतों को नष्ट करने का आरोप लगाया है। हालांकि फंडों में धोखाधड़ी का कोई आरोप नहीं लगाया गया है। सीबीआई की जांच में पता चला है कि रामलिंग राजू, उनके भाई बी रामा राजू और सत्यम के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी श्रीनिवास वाडलामणि इन्वेस्टर लिंक पर कर्मचारियों और कंपनी को मिल रहे प्रोजेक्टों की गलत जानकारी दे रहे थे। सीबीआई ने बताया कि कंपनी कम काम मिलने के समय में भी सभी कर्मचारियों को वेतन दे रही थी, इससे कंपनी पर वित्त भार और बढ़ गया है। सीबीआई ने राजू भाइयों पर एसोसिएट स्टॉक ऑप्शन प्लान के जरिए कंपनी के वित्त विभाग के अधिकारियों को स्टॉकों का आवंटन करने का भी आरोप लगाया है। वाटरहाउस के ऑडिटर श्रीनिवास तल्लुरी पर आरोप है कि उन्होंने बैंक और सत्यम से मिली सावधि जमा रसीदों में अंतर होते हुए भी कंपनी के बहीखातों को सही ठहराया और एफडीआर से जुड़े सही कागजात मिलने के बाद भी तल्लुरी ने राजू द्वारा बैंक की नकली मंजूरी से जुड़े कागजातों का ही इस्तेमाल किया गया। सीबीआई की जांच में पता चला है कि सत्यम ने ऑडिटरों को तीन. सरसठ करोड़ रुपये की अच्छी खासी रकम चुकाई थी, जबकि विप्रो और इन्फोसिस ने ऑडिटरों को क्रमशः एक. एक करोड़ और तिरासी लाख रुपये चुकाए थे। हैदराबाद के चौदहवें अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने सत्यम संस्थापक बी. रामलिंग राजू, उनके भाई बी. रामा राजू और पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी एस. वाडलामणि की जमानत याचिका पर सुनवाई बीस अप्रैल तक टाल दी है। अभियोजन पक्ष ने अपना जवाब देने के लिए कुछ समय की मांग की। इस मामले में सीबीआई ने आरोपितों के खिलाफ सात अप्रैल को आरोपत्र दाखिल किया था।
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इन दोनों स्मार्टफ़ोन्स के स्क्रीन साइज में अंतर होगा, Nova 2 में 5.2 इंच डिस्प्ले मौजूद होगा और Nova 2 प्लस में 5.5 इंच डिस्प्ले मौजूद होगा.
Huawei Nova 2 और Nova 2 Plus स्मार्टफ़ोन आज लॉन्च होंगे. पहले सामने आये लीक्स के अनुसार, Nova 2 में 5.2 इंच डिस्प्ले मौजूद होगा और Nova 2 प्लस में 5.5 इंच डिस्प्ले मौजूद होगी.
इन दोनों फ़ोन में मौजूद अन्य फीचर्स पर नज़र डालें तो इन डिवाइस में 4GB की रैम होने की संभावना है. इस डिवाइस में स्नैपड्रैगन 660 प्रोसेसर मौजूद है. इस डिवाइस में 3000mAh बैटरी मौजूद होगी. इसके अलावा 20MP सेल्फी कैमरा भी मौजूद हो सकता है.
आपक बता दें कि हाल ही में चाइनीज सर्टिफिकेशन वेबसाइट TENNA पर नजर आया था. इसके मुताबिक इस डिवाइस का डिजाइन पहले के स्मार्टफोन Nova के जैसी ही है. माना जा रहा है कि नोवा 2 में डुअल कैमरा सेटअप मौजूद होगा.
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इन दोनों स्मार्टफ़ोन्स के स्क्रीन साइज में अंतर होगा, Nova दो में पाँच.दो इंच डिस्प्ले मौजूद होगा और Nova दो प्लस में पाँच.पाँच इंच डिस्प्ले मौजूद होगा. Huawei Nova दो और Nova दो Plus स्मार्टफ़ोन आज लॉन्च होंगे. पहले सामने आये लीक्स के अनुसार, Nova दो में पाँच.दो इंच डिस्प्ले मौजूद होगा और Nova दो प्लस में पाँच.पाँच इंच डिस्प्ले मौजूद होगी. इन दोनों फ़ोन में मौजूद अन्य फीचर्स पर नज़र डालें तो इन डिवाइस में चारGB की रैम होने की संभावना है. इस डिवाइस में स्नैपड्रैगन छः सौ साठ प्रोसेसर मौजूद है. इस डिवाइस में तीन हज़ारmAh बैटरी मौजूद होगी. इसके अलावा बीसMP सेल्फी कैमरा भी मौजूद हो सकता है. आपक बता दें कि हाल ही में चाइनीज सर्टिफिकेशन वेबसाइट TENNA पर नजर आया था. इसके मुताबिक इस डिवाइस का डिजाइन पहले के स्मार्टफोन Nova के जैसी ही है. माना जा रहा है कि नोवा दो में डुअल कैमरा सेटअप मौजूद होगा.
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