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अयोध्या. राम जन्मभूमि (Ram Janambhoomi) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला आने के बाद अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार द्वारा गठित होने वाले राम मंदिर ट्रस्ट (Ram Mandir Trust) पर हैं. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार राम मंदिर ट्रस्ट का गठन तीन महीने के भीतर करना है. सूत्रों से मिल रही खबर के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ट्रस्ट की रूपरेखा तैयार कर ली है और 30 जनवरी तक इसकी घोषणा हो सकती है. मिल रही जानकारी के अनुसार इस ट्रस्ट में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े साधु-संत, विश्व हिंदू परिषद (VHP) और आरएसएस से जुड़े लोगों को जगह मिल सकती है. उधर राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष पद के लिए अयोध्या के संतों ने रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के नाम पर सहमति जताई है. वीएचपी भी महंत नृत्य गोपाल दास के नाम पर अपनी सहमति जता चुका है. सूत्रों के मुताबिक इस ट्रस्ट में अयोध्या से करीब 11 सदस्य हो सकते हैं, जिसमें श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, निर्माेही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास और दिगंबर निर्वाणी अखाड़ा के महंत सुरेश दास शामली हो सकते हैं. इसके अलावा ट्रस्ट में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अयोध्या के जिलाधिकारी (डीएम) को भी जगह मिल सकती है. बता दें कि राम मंदिर के पक्ष में नौ नवंबर को आए फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में मंदिर निर्माण के लिए नए ट्रस्ट गठन की जिम्मेदारी केंद्र सरकार को सौंपी थीं. जिसके लिए तीन माह का समय भी दिया था. ट्रस्ट गठन का समय पूरा होने के साथ ही मंदिर निर्माण की कार्रवाई भी पूरी होती नजर आ रही है. राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या के संतों का मत भी एक हो चुका है. सभी संत और धर्माचार्य, विश्व हिंदू परिषद भी महंत नृत्य गोपाल दास के नेतृत्व में मंदिर निर्माण कार्य के लिए आगे आना चाह रहे हैं. यही वजह है कि केंद्र सरकार द्वारा उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. अब महंत नृत्य गोपाल दास को जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गई है. अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास ने बताया कि राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण शीघ्र शुरू होने जा रहा है. केंद्र सरकार मंदिर निर्माण को लेकर जो भी फैसला करेगा हम सभी संत उसके समर्थन में हैं. यदि महंत नृत्य गोपाल दास नए ट्रस्ट के अध्यक्ष बनते हैं तो अयोध्या के संतों में बड़ा उत्साह होगा. अयोध्या के सभी संत चाहते हैं कि महंत नृत्य गोपाल दास के नेतृत्व में मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो. उन्होंने बताया कि इसी माह में ट्रस्ट की घोषणा होने जा रही है और आगामी 25 मार्च के बाद से मंदिर का निर्माण कार्य भी शुरू हो जाएगा. रामजन्मभूमि पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने भी महंत नृत्य गोपाल दास के नाम पर समर्थन दिया है. उन्होंने कहा कि अयोध्या के संतों का एक ही मत है कि अयोध्या में भव्य रामलला का मंदिर बने और जल्द से जल्द तिरपाल से हटकर भव्य दिव्य मंदिर में भगवान राम विराजमान हों. आज देश भर के सभी रामभक्त राम मंदिर निर्माण के इंतजार में हैं. विश्व हिंदू परिषद ने भी महंत नृत्य गोपाल दास को नेतृत्वकर्ता बताते हुए कहा कि जिन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन को दिशा देने का कार्य किया, ऐसे संतों के नेतृत्व में ही हम सभी चलेंगे. वीएचपी के प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि बनने वाले ट्रस्ट में कौन-कौन से लोग शामिल होंगे, इसकी घोषणा गृह मंत्रालय द्वारा ही की जाएगी. महंत नृत्य गोपाल दास जी वैष्णव संप्रदाय के विशिष्ट संत हैं, जिनका आदर पूरा देश करता है. साथ ही वो वर्तमान में रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष भी हैं और हम सभी चाहेंगे कि उनके कद के अनुसार ट्रस्ट में उन्हें जगह मिले. ये भी पढ़ेंः .
अयोध्या. राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार द्वारा गठित होने वाले राम मंदिर ट्रस्ट पर हैं. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार राम मंदिर ट्रस्ट का गठन तीन महीने के भीतर करना है. सूत्रों से मिल रही खबर के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ट्रस्ट की रूपरेखा तैयार कर ली है और तीस जनवरी तक इसकी घोषणा हो सकती है. मिल रही जानकारी के अनुसार इस ट्रस्ट में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े साधु-संत, विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस से जुड़े लोगों को जगह मिल सकती है. उधर राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष पद के लिए अयोध्या के संतों ने रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के नाम पर सहमति जताई है. वीएचपी भी महंत नृत्य गोपाल दास के नाम पर अपनी सहमति जता चुका है. सूत्रों के मुताबिक इस ट्रस्ट में अयोध्या से करीब ग्यारह सदस्य हो सकते हैं, जिसमें श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, निर्माेही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास और दिगंबर निर्वाणी अखाड़ा के महंत सुरेश दास शामली हो सकते हैं. इसके अलावा ट्रस्ट में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अयोध्या के जिलाधिकारी को भी जगह मिल सकती है. बता दें कि राम मंदिर के पक्ष में नौ नवंबर को आए फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में मंदिर निर्माण के लिए नए ट्रस्ट गठन की जिम्मेदारी केंद्र सरकार को सौंपी थीं. जिसके लिए तीन माह का समय भी दिया था. ट्रस्ट गठन का समय पूरा होने के साथ ही मंदिर निर्माण की कार्रवाई भी पूरी होती नजर आ रही है. राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या के संतों का मत भी एक हो चुका है. सभी संत और धर्माचार्य, विश्व हिंदू परिषद भी महंत नृत्य गोपाल दास के नेतृत्व में मंदिर निर्माण कार्य के लिए आगे आना चाह रहे हैं. यही वजह है कि केंद्र सरकार द्वारा उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. अब महंत नृत्य गोपाल दास को जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गई है. अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास ने बताया कि राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण शीघ्र शुरू होने जा रहा है. केंद्र सरकार मंदिर निर्माण को लेकर जो भी फैसला करेगा हम सभी संत उसके समर्थन में हैं. यदि महंत नृत्य गोपाल दास नए ट्रस्ट के अध्यक्ष बनते हैं तो अयोध्या के संतों में बड़ा उत्साह होगा. अयोध्या के सभी संत चाहते हैं कि महंत नृत्य गोपाल दास के नेतृत्व में मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो. उन्होंने बताया कि इसी माह में ट्रस्ट की घोषणा होने जा रही है और आगामी पच्चीस मार्च के बाद से मंदिर का निर्माण कार्य भी शुरू हो जाएगा. रामजन्मभूमि पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने भी महंत नृत्य गोपाल दास के नाम पर समर्थन दिया है. उन्होंने कहा कि अयोध्या के संतों का एक ही मत है कि अयोध्या में भव्य रामलला का मंदिर बने और जल्द से जल्द तिरपाल से हटकर भव्य दिव्य मंदिर में भगवान राम विराजमान हों. आज देश भर के सभी रामभक्त राम मंदिर निर्माण के इंतजार में हैं. विश्व हिंदू परिषद ने भी महंत नृत्य गोपाल दास को नेतृत्वकर्ता बताते हुए कहा कि जिन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन को दिशा देने का कार्य किया, ऐसे संतों के नेतृत्व में ही हम सभी चलेंगे. वीएचपी के प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि बनने वाले ट्रस्ट में कौन-कौन से लोग शामिल होंगे, इसकी घोषणा गृह मंत्रालय द्वारा ही की जाएगी. महंत नृत्य गोपाल दास जी वैष्णव संप्रदाय के विशिष्ट संत हैं, जिनका आदर पूरा देश करता है. साथ ही वो वर्तमान में रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष भी हैं और हम सभी चाहेंगे कि उनके कद के अनुसार ट्रस्ट में उन्हें जगह मिले. ये भी पढ़ेंः .
पुराने दिनों में रूसी शब्द "लाल"एक अन्य अर्थ में थोड़ा सा इस्तेमाल किया - खूबसूरत, सुंदर, प्रीगोजी इसलिए, रूसी भूमि पर कई गांव हैं जिनके नाम "लाल", "लाल" या "लाल" हैं। उनमें से एक क्रॉसो सेलो (लेनिनग्राद क्षेत्र) का शहर है, जो एक ही नाम के सेंट पीटर्सबर्ग जिले का हिस्सा है। इस शहर की स्थापना पीटर द ग्रेट के तहत की गई थी, फिर भी1714 वर्ष तब यह था कि पहले रूसी पेपर मिल का निर्माण इस शहर में शुरू हुआ। मॉस्को के निकट क्रोसोले गांव से निर्माण और उत्पादन की आवश्यकता के लिए, यहां सेरफ़ भेजा गया था। वे भविष्य की जगह के पास बसे थे समय बीत गया, गांव बढ़ गया, और यह सिर्फ श्रमिकों के मूल गांव की तरह कहा जाने लगा। रेड विलेज एक सुरम्य क्षेत्र में था,जंगलों और झीलों के बीच ज़ार पीटर ने अपनी पत्नी, कैथरीन द फर्स्ट के लिए इसे दे दिया, और उसने एक लकड़ी के महल और एक चर्च के पुनर्निर्माण का आदेश दिया (दुर्भाग्य से, वे इस दिन तक नहीं बच गए हैं) 1735 में, अन्ना Ioannovna द्वारा आवंटित धन पर एक नया पत्थर ट्रिनिटी चर्च सेंट कैथरीन महान शहीद बनाया गया था आज यह संपूर्ण लेनिनग्राद क्षेत्र में सबसे पुराना चर्चों में से एक है। कैथरीन द्वितीय के शासनकाल के दौरान, रेड ग्राम को एक अलग दिशा में विकसित करना शुरू हुआ, सेना में। सेंट पीटर्सबर्ग की गार्जियन के गार्डर्स यहां क्वार्टर किए गए थे। 1811 तक इस गांव को आधिकारिक तौर पर "ड्व्वार्टोवोय क्रैस्नोयोए सेलो" कहा जाता था 1 9 14 तक लेनिनग्राद क्षेत्र सेंट पीटर्सबर्ग प्रांत बुलाया गया था इसके बाद, इसे दो बार दो बार नाम दिया गया। लेकिन शहर का नाम वर्तमान में अपरिवर्तित रहा। जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, कैथरीन II के तहत भीइस क्षेत्र में सैन्य युद्धाभ्यास का आयोजन किया गया। सिकंदर प्रथम के शासनकाल के दौरान, रेड ग्राम और उसके आसपास साम्राज्य की गर्मियों की सैन्य राजधानी में पूरी तरह से बदल गया। उनके छोटे भाई, ग्रांड ड्यूक मिखाइल पावलोविच, जिन्होंने सैन्य मामलों की पूजा की, ने खुद के लिए बैरकों के बगल में एक मामूली लकड़ी के महल का निर्माण किया और सैनिकों के साथ अपने सभी समय बिताए। वर्ष के सभी गर्म महीनों में अभ्यास और परेड आयोजित किए गए, जिसमें सम्राट स्वयं भाग लिया गया था। क्रॉसॉय Selo में अक्टूबर क्रांति के बादव्हाइट आर्मी की केंद्रित बलों यहां से वे पेट्रोगैड को उड़ाने की तैयारी कर रहे थे। 1 9 25 में क्रूसोएली सेलो के गांव को एक शहर का दर्जा मिला, और उस क्षण से इसे एक नए मार्ग के साथ विकसित करना शुरू किया। हालांकि, पैट्रियटिक युद्ध के दौरान, फासीवादियों ने सब कुछ दूर किया, क्रॉसो सेलो में तोड़ दिया लेनिनग्राद क्षेत्र पर जर्मन आक्रमणकारियों ने कब्जा कर लिया था, और लेनिनग्राद ही नाकाबंदी में था। युद्ध के अंत के बाद, लाल सेना ने अपने जीर्ण शहर को क्रम में लाना शुरू कर दिया। नई बहु-मंजिला मकान, स्कूल और बालवाड़ी, अस्पतालों और अन्य संस्थानों का निर्माण किया गया। जैसा कि पहले से ही ऊपर बताया गया है, नींव की तारीखKrasnoe Selo (लेनिनग्राद क्षेत्र) शहर 1714 है, इसलिए, इस साल सितंबर के मध्य में (सेंट पीटर्सबर्ग शहर के अधिकारियों के निर्णय के अनुसार), यह गंभीर रूप से अपने tercentenary मनाएगा। इसकी स्थिति के अनुसार, शहर को एक नगरपालिका गठन माना जाता है, जिसमें संलग्नक ख्वाइनोई और मोज़िस्की के गांवों को शामिल करता है। इसमें 2 ऐतिहासिक जिलों - स्काची (गैचिना रेलवे और गोरेलोव्स्की ओवरपास की रेखा के बीच) और मोजाइस्की-डुडर्गोफ (लाल सेलो और डुडरहोफ के झीलों के बीच) भी शामिल हैं। स्थानीय स्थान Krasnoye Selo (लेनिनग्राद क्षेत्र) के केंद्र में स्थित प्रसिद्ध ट्रिनिटी चर्च को छोड़कर, पर्यटकों के लिए विशेष रुचि का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। यहां कैसे पहुंचे, सैद्धांतिक रूप से, हर कोई सेंट पीटर्सबर्ग में जानता है। यह इज़ोरा Upland की पहाड़ियों पर, उत्तरी राजधानी से सिर्फ 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां, पहाड़ी के पैर पर, नामहीन झील है - जो पीटरसन के लिए एक पसंदीदा छुट्टी स्थान है। वैसे, 2011 में यह पारिस्थितिकीविदों द्वारा पूरे क्षेत्र में सबसे स्वच्छ माना गया था। इस जगह के माध्यम से गैचिना-बाल्टीइस्क-सेंट पीटर्सबर्ग रेलवे लाइन है। स्टेशन "Krasnoe Selo" शहर के पूर्वी बाहरी इलाके में स्थित है। आप यहां टैलिन राजमार्ग पर सड़क से भी आ सकते हैं, जिस तरह से केवल 15-20 मिनट खर्च करते हैं। वास्तुकला के मामले में शहर नहीं हैबहुत रुचि है। यहां, उस समय से बहुत कम संरक्षित किया गया है जब इसे साम्राज्य की ग्रीष्मकालीन सैन्य राजधानी माना जाता था। शहर में सबसे खूबसूरत इमारत, निश्चित रूप से, पवित्र ट्रिनिटी का चर्च है, जिसे अन्ना इओनोवना के तहत बनाया गया था और यह बारोक वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण है। हालांकि, इन समय से इसे कई बार बहाल किया जाना था, जिसके परिणामस्वरूप मंदिर की उपस्थिति आंशिक रूप से बदल दी गई थी। शहर में अलेक्जेंडर नेवस्की का चर्च भी है। महल भवनों से आज शाही महलों में से एक की रसोई की केवल दो मंजिला इमारत, साथ ही साथ ग्रैंड ड्यूक माइकल (प्रथम पावेल के सबसे छोटे बेटे) के महल की अपरिवर्तनीय लकड़ी की इमारत को संरक्षित किया गया था। शहर में सोवियत काल में महान देशभक्ति युद्ध के नायकों की स्मृति के लिए एक स्मारक बनाया गया था। शहर के आकर्षण में आप रूस में रेल परिवहन के विकास के इतिहास को समर्पित संग्रहालय "मोस्टी" को भी हाइलाइट कर सकते हैं। सेंट पीटर्सबर्ग रूस में सबसे सुंदर शहर है। हर साल लाखों पर्यटक यहां अपने कई आकर्षण देखने के लिए आते हैं। वे या तो शहर में या इसके उपनगरों में स्थित हैं। Krasnoe Selo में, व्यावहारिक रूप से कोई बड़ा होटल नहीं है, केवल छोटे परिवार के होटल हैं। शायद, इसलिए शहर पर्यटन के दृष्टिकोण से बहुत लोकप्रिय नहीं है। सेंट पीटर्सबर्ग के इस उपनगर के गेस्ट हाउसों में आप मिनी-होटल रेडविल देख सकते हैं। यहां आप काफी सभ्य सेवा और स्वादिष्ट व्यंजन पा सकते हैं।
पुराने दिनों में रूसी शब्द "लाल"एक अन्य अर्थ में थोड़ा सा इस्तेमाल किया - खूबसूरत, सुंदर, प्रीगोजी इसलिए, रूसी भूमि पर कई गांव हैं जिनके नाम "लाल", "लाल" या "लाल" हैं। उनमें से एक क्रॉसो सेलो का शहर है, जो एक ही नाम के सेंट पीटर्सबर्ग जिले का हिस्सा है। इस शहर की स्थापना पीटर द ग्रेट के तहत की गई थी, फिर भीएक हज़ार सात सौ चौदह वर्ष तब यह था कि पहले रूसी पेपर मिल का निर्माण इस शहर में शुरू हुआ। मॉस्को के निकट क्रोसोले गांव से निर्माण और उत्पादन की आवश्यकता के लिए, यहां सेरफ़ भेजा गया था। वे भविष्य की जगह के पास बसे थे समय बीत गया, गांव बढ़ गया, और यह सिर्फ श्रमिकों के मूल गांव की तरह कहा जाने लगा। रेड विलेज एक सुरम्य क्षेत्र में था,जंगलों और झीलों के बीच ज़ार पीटर ने अपनी पत्नी, कैथरीन द फर्स्ट के लिए इसे दे दिया, और उसने एक लकड़ी के महल और एक चर्च के पुनर्निर्माण का आदेश दिया एक हज़ार सात सौ पैंतीस में, अन्ना Ioannovna द्वारा आवंटित धन पर एक नया पत्थर ट्रिनिटी चर्च सेंट कैथरीन महान शहीद बनाया गया था आज यह संपूर्ण लेनिनग्राद क्षेत्र में सबसे पुराना चर्चों में से एक है। कैथरीन द्वितीय के शासनकाल के दौरान, रेड ग्राम को एक अलग दिशा में विकसित करना शुरू हुआ, सेना में। सेंट पीटर्सबर्ग की गार्जियन के गार्डर्स यहां क्वार्टर किए गए थे। एक हज़ार आठ सौ ग्यारह तक इस गांव को आधिकारिक तौर पर "ड्व्वार्टोवोय क्रैस्नोयोए सेलो" कहा जाता था एक नौ चौदह तक लेनिनग्राद क्षेत्र सेंट पीटर्सबर्ग प्रांत बुलाया गया था इसके बाद, इसे दो बार दो बार नाम दिया गया। लेकिन शहर का नाम वर्तमान में अपरिवर्तित रहा। जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, कैथरीन II के तहत भीइस क्षेत्र में सैन्य युद्धाभ्यास का आयोजन किया गया। सिकंदर प्रथम के शासनकाल के दौरान, रेड ग्राम और उसके आसपास साम्राज्य की गर्मियों की सैन्य राजधानी में पूरी तरह से बदल गया। उनके छोटे भाई, ग्रांड ड्यूक मिखाइल पावलोविच, जिन्होंने सैन्य मामलों की पूजा की, ने खुद के लिए बैरकों के बगल में एक मामूली लकड़ी के महल का निर्माण किया और सैनिकों के साथ अपने सभी समय बिताए। वर्ष के सभी गर्म महीनों में अभ्यास और परेड आयोजित किए गए, जिसमें सम्राट स्वयं भाग लिया गया था। क्रॉसॉय Selo में अक्टूबर क्रांति के बादव्हाइट आर्मी की केंद्रित बलों यहां से वे पेट्रोगैड को उड़ाने की तैयारी कर रहे थे। एक नौ पच्चीस में क्रूसोएली सेलो के गांव को एक शहर का दर्जा मिला, और उस क्षण से इसे एक नए मार्ग के साथ विकसित करना शुरू किया। हालांकि, पैट्रियटिक युद्ध के दौरान, फासीवादियों ने सब कुछ दूर किया, क्रॉसो सेलो में तोड़ दिया लेनिनग्राद क्षेत्र पर जर्मन आक्रमणकारियों ने कब्जा कर लिया था, और लेनिनग्राद ही नाकाबंदी में था। युद्ध के अंत के बाद, लाल सेना ने अपने जीर्ण शहर को क्रम में लाना शुरू कर दिया। नई बहु-मंजिला मकान, स्कूल और बालवाड़ी, अस्पतालों और अन्य संस्थानों का निर्माण किया गया। जैसा कि पहले से ही ऊपर बताया गया है, नींव की तारीखKrasnoe Selo शहर एक हज़ार सात सौ चौदह है, इसलिए, इस साल सितंबर के मध्य में , यह गंभीर रूप से अपने tercentenary मनाएगा। इसकी स्थिति के अनुसार, शहर को एक नगरपालिका गठन माना जाता है, जिसमें संलग्नक ख्वाइनोई और मोज़िस्की के गांवों को शामिल करता है। इसमें दो ऐतिहासिक जिलों - स्काची और मोजाइस्की-डुडर्गोफ भी शामिल हैं। स्थानीय स्थान Krasnoye Selo के केंद्र में स्थित प्रसिद्ध ट्रिनिटी चर्च को छोड़कर, पर्यटकों के लिए विशेष रुचि का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। यहां कैसे पहुंचे, सैद्धांतिक रूप से, हर कोई सेंट पीटर्सबर्ग में जानता है। यह इज़ोरा Upland की पहाड़ियों पर, उत्तरी राजधानी से सिर्फ ग्यारह किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थित है। यहां, पहाड़ी के पैर पर, नामहीन झील है - जो पीटरसन के लिए एक पसंदीदा छुट्टी स्थान है। वैसे, दो हज़ार ग्यारह में यह पारिस्थितिकीविदों द्वारा पूरे क्षेत्र में सबसे स्वच्छ माना गया था। इस जगह के माध्यम से गैचिना-बाल्टीइस्क-सेंट पीटर्सबर्ग रेलवे लाइन है। स्टेशन "Krasnoe Selo" शहर के पूर्वी बाहरी इलाके में स्थित है। आप यहां टैलिन राजमार्ग पर सड़क से भी आ सकते हैं, जिस तरह से केवल पंद्रह-बीस मिनट खर्च करते हैं। वास्तुकला के मामले में शहर नहीं हैबहुत रुचि है। यहां, उस समय से बहुत कम संरक्षित किया गया है जब इसे साम्राज्य की ग्रीष्मकालीन सैन्य राजधानी माना जाता था। शहर में सबसे खूबसूरत इमारत, निश्चित रूप से, पवित्र ट्रिनिटी का चर्च है, जिसे अन्ना इओनोवना के तहत बनाया गया था और यह बारोक वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण है। हालांकि, इन समय से इसे कई बार बहाल किया जाना था, जिसके परिणामस्वरूप मंदिर की उपस्थिति आंशिक रूप से बदल दी गई थी। शहर में अलेक्जेंडर नेवस्की का चर्च भी है। महल भवनों से आज शाही महलों में से एक की रसोई की केवल दो मंजिला इमारत, साथ ही साथ ग्रैंड ड्यूक माइकल के महल की अपरिवर्तनीय लकड़ी की इमारत को संरक्षित किया गया था। शहर में सोवियत काल में महान देशभक्ति युद्ध के नायकों की स्मृति के लिए एक स्मारक बनाया गया था। शहर के आकर्षण में आप रूस में रेल परिवहन के विकास के इतिहास को समर्पित संग्रहालय "मोस्टी" को भी हाइलाइट कर सकते हैं। सेंट पीटर्सबर्ग रूस में सबसे सुंदर शहर है। हर साल लाखों पर्यटक यहां अपने कई आकर्षण देखने के लिए आते हैं। वे या तो शहर में या इसके उपनगरों में स्थित हैं। Krasnoe Selo में, व्यावहारिक रूप से कोई बड़ा होटल नहीं है, केवल छोटे परिवार के होटल हैं। शायद, इसलिए शहर पर्यटन के दृष्टिकोण से बहुत लोकप्रिय नहीं है। सेंट पीटर्सबर्ग के इस उपनगर के गेस्ट हाउसों में आप मिनी-होटल रेडविल देख सकते हैं। यहां आप काफी सभ्य सेवा और स्वादिष्ट व्यंजन पा सकते हैं।
हनुमानगढ़। टकराव के माहौल में किसानों की मांग आखिरकार सरकार ने मान ली। जिला कलक्ट्रेट पर दिनभर किसानों के पड़ाव के बाद शाम को हुई वार्ता में अधिकारी 1200 क्यूसेक पानी देने पर सहमत हो गए। इसके बाद किसानों ने पड़ाव समाप्त कर दिया। करीब तीन घंटे तक चली वार्ता में किसान प्रतिनिधि भाखड़ा में मार्च तक 1200 क्यूसेक पानी चलाने की मांग करते रहे जबकि, जल संसाधन विभाग के अधिकारी ना-नुकर करते रहे। आखिरकार किसानों की एकजुटता के आगे सरकार को झुकना पड़ा। नहरों में किसान जिस तरह पानी चाहते थे, अधिकारियों ने उसी के अनुरूप रेग्यूलेशन बनाया। हालांकि किसानों की मांग पर औपचारिक मोहर मंगलवार को लगेगी। इसके लिए मंगलवार को जल वितरण समिति की बैठक बुलाई गई है। इसमें संघर्ष समिति के साथ हुए समझौते की पालना में रेग्यूलेशन बनाकर इसे लागू किया जाएगा। वार्ता में सहमति बनने के बाद पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल ने जब सभा को संबोधित किया तो सभी किसान खुश नजर आए। किसानों का कहना था कि हमारी एकजुटता रंग लाई, जिससे सरकार को झुकना पड़ा। उधर, टकराव की आशंका में पुलिस प्रशासन दिनभर सतर्क रहा। चप्पे-चप्पे पर पुलिस का जाप्ता तैनात था। करीब 1200 से अधिक का जाप्ता पड़ाव स्थल के आसपास लगाया गया था। धरतीपुत्रों के आक्रोश को देखते हुए कलक्ट्रेट परिसर को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया। शाम को आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से निपटने के बाद पुलिस और प्रशासन ने चैन की सांस ली।
हनुमानगढ़। टकराव के माहौल में किसानों की मांग आखिरकार सरकार ने मान ली। जिला कलक्ट्रेट पर दिनभर किसानों के पड़ाव के बाद शाम को हुई वार्ता में अधिकारी एक हज़ार दो सौ क्यूसेक पानी देने पर सहमत हो गए। इसके बाद किसानों ने पड़ाव समाप्त कर दिया। करीब तीन घंटे तक चली वार्ता में किसान प्रतिनिधि भाखड़ा में मार्च तक एक हज़ार दो सौ क्यूसेक पानी चलाने की मांग करते रहे जबकि, जल संसाधन विभाग के अधिकारी ना-नुकर करते रहे। आखिरकार किसानों की एकजुटता के आगे सरकार को झुकना पड़ा। नहरों में किसान जिस तरह पानी चाहते थे, अधिकारियों ने उसी के अनुरूप रेग्यूलेशन बनाया। हालांकि किसानों की मांग पर औपचारिक मोहर मंगलवार को लगेगी। इसके लिए मंगलवार को जल वितरण समिति की बैठक बुलाई गई है। इसमें संघर्ष समिति के साथ हुए समझौते की पालना में रेग्यूलेशन बनाकर इसे लागू किया जाएगा। वार्ता में सहमति बनने के बाद पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल ने जब सभा को संबोधित किया तो सभी किसान खुश नजर आए। किसानों का कहना था कि हमारी एकजुटता रंग लाई, जिससे सरकार को झुकना पड़ा। उधर, टकराव की आशंका में पुलिस प्रशासन दिनभर सतर्क रहा। चप्पे-चप्पे पर पुलिस का जाप्ता तैनात था। करीब एक हज़ार दो सौ से अधिक का जाप्ता पड़ाव स्थल के आसपास लगाया गया था। धरतीपुत्रों के आक्रोश को देखते हुए कलक्ट्रेट परिसर को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया। शाम को आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से निपटने के बाद पुलिस और प्रशासन ने चैन की सांस ली।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कौन बाजी मारेगा, इस सवाल का जवाब तो 15 मई को मिलेगा लेकिन ओपिनियन पोल बता रहा है कि जेडीएस किंगमेकर साबित होगी। सोमवार (23 अप्रैल) को एबीपी न्यूज और लोकनीति सीएसडीएस ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर ओपिनियन पोल जारी किया। सर्वे में भविष्यवाणी की गई कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी और सरकार बनाने की मजबूत स्थिति में होगी। कांग्रेस दूसरे स्थान पर रह सकती है, जबकि जेडीएस किंगमेकर की भूमिका में होगी। पहले एक और एजेंसी के ओपिनियन पोल में राज्य में त्रिशंकु विधानसभा की भविष्यवाणी की गई थी। सर्वे के मुताबिक त्रिशंकु विधानसभा के मामले में बीजेपी का पलड़ा भारी रहने वाला है। सर्वे में कहा गया है कि बीजेपी को सबसे ज्यादा वोट मिल सकते हैं, लेकिन उसके मुकाबले कांग्रेस को 2 फीसदी कम वोट मिलेंगे। सर्वे में कहा गया है कि सिद्धारमैया मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले उम्मीदवार हैं जबकि भाजपा के बीएस येदियुरप्पा का नाम इस मामले में दूसरा है। सर्वे के मुताबिक राज्य की 224 विधानसभा सीटों में से बीजेपी को 89 से 95 सीटें तक मिल सकती हैं, कांग्रेस को 85 से 91 सीटें मिल सकती हैं, जबकि जेडीएस को 32 से 38 सीटें मिलने की बात कही गई है। टाइम्स नाउ और वीएमआर सर्वे के आंकड़ों में भी बहुत अंतर नहीं देखा जा रहा है। लेकिन इस सर्वे में बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस के पक्ष में ज्यादा सीटें जाने की भविष्यवाणी की गई है। इस सर्वे के मुताबिक बीजेपी को 89, कांग्रेस को 91 और जेडीएस को 40 सीटें मिल सकती हैं। सर्वे में कहा गया है कि त्रिशंकु विधासभा की सूरत में बीजेपी और कांग्रेस सरकार बनाने के लिए जेडीएस से गठबंधन की उम्मीद करेंगी। इंडिया टुडे और कारवी ओपिनियन पोल में कांग्रेस को 90-91 सीटें, बीजेपी को 76-86 सीटें और जेडीएस को 34-43 सीटें मिलने की भविष्यवाणी की गई है। इस सर्वे में वोट शेयर के मामले में कांग्रेस को 37 फीसदी, बीजेपी को 35 फीसदी और जेडीएस को 19 फीसदी वोट मिल सकते हैं। सी-फॉर ओपिनियन पोल में 2013 के मुकाबले 2018 के चुनाव में कांग्रेस की भारी जीत की भविष्यवाणी की गई है। सर्वे में कहा गया है कि राज्य में कांग्रेस को 46 फीसदी वोट यानी 126 सीटें मिल सकती हैं। बीजेपी को 31 फीसदी वोट शेयर के साथ 70 सीटें मिल सकती हैं। वहीं 16 फीसदी वोट शेयर के साथ जेडीएस 27 सीटें अपने खाते में डाल सकती है। टीवी 9-सी वोटर सर्वे में कहा गया है कि जेडीएस 25 सीटें जीत सकती है और किंगमेकर की भूमिका निभा सकती है। इस सर्वे में कांग्रेस को सबसे बड़ी पार्टी बताया गया है, जो कि 102 सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है। सर्वे के मुताबिक बीजेपी के खाते में 96 सीटें आ सकती हैं। वर्तमान में कांग्रेस के पास 122 सीटें, बीजेपी के पास 40 सीटें और जेडीएस के पास 40 सीटें हैं।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कौन बाजी मारेगा, इस सवाल का जवाब तो पंद्रह मई को मिलेगा लेकिन ओपिनियन पोल बता रहा है कि जेडीएस किंगमेकर साबित होगी। सोमवार को एबीपी न्यूज और लोकनीति सीएसडीएस ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर ओपिनियन पोल जारी किया। सर्वे में भविष्यवाणी की गई कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी और सरकार बनाने की मजबूत स्थिति में होगी। कांग्रेस दूसरे स्थान पर रह सकती है, जबकि जेडीएस किंगमेकर की भूमिका में होगी। पहले एक और एजेंसी के ओपिनियन पोल में राज्य में त्रिशंकु विधानसभा की भविष्यवाणी की गई थी। सर्वे के मुताबिक त्रिशंकु विधानसभा के मामले में बीजेपी का पलड़ा भारी रहने वाला है। सर्वे में कहा गया है कि बीजेपी को सबसे ज्यादा वोट मिल सकते हैं, लेकिन उसके मुकाबले कांग्रेस को दो फीसदी कम वोट मिलेंगे। सर्वे में कहा गया है कि सिद्धारमैया मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले उम्मीदवार हैं जबकि भाजपा के बीएस येदियुरप्पा का नाम इस मामले में दूसरा है। सर्वे के मुताबिक राज्य की दो सौ चौबीस विधानसभा सीटों में से बीजेपी को नवासी से पचानवे सीटें तक मिल सकती हैं, कांग्रेस को पचासी से इक्यानवे सीटें मिल सकती हैं, जबकि जेडीएस को बत्तीस से अड़तीस सीटें मिलने की बात कही गई है। टाइम्स नाउ और वीएमआर सर्वे के आंकड़ों में भी बहुत अंतर नहीं देखा जा रहा है। लेकिन इस सर्वे में बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस के पक्ष में ज्यादा सीटें जाने की भविष्यवाणी की गई है। इस सर्वे के मुताबिक बीजेपी को नवासी, कांग्रेस को इक्यानवे और जेडीएस को चालीस सीटें मिल सकती हैं। सर्वे में कहा गया है कि त्रिशंकु विधासभा की सूरत में बीजेपी और कांग्रेस सरकार बनाने के लिए जेडीएस से गठबंधन की उम्मीद करेंगी। इंडिया टुडे और कारवी ओपिनियन पोल में कांग्रेस को नब्बे-इक्यानवे सीटें, बीजेपी को छिहत्तर-छियासी सीटें और जेडीएस को चौंतीस-तैंतालीस सीटें मिलने की भविष्यवाणी की गई है। इस सर्वे में वोट शेयर के मामले में कांग्रेस को सैंतीस फीसदी, बीजेपी को पैंतीस फीसदी और जेडीएस को उन्नीस फीसदी वोट मिल सकते हैं। सी-फॉर ओपिनियन पोल में दो हज़ार तेरह के मुकाबले दो हज़ार अट्ठारह के चुनाव में कांग्रेस की भारी जीत की भविष्यवाणी की गई है। सर्वे में कहा गया है कि राज्य में कांग्रेस को छियालीस फीसदी वोट यानी एक सौ छब्बीस सीटें मिल सकती हैं। बीजेपी को इकतीस फीसदी वोट शेयर के साथ सत्तर सीटें मिल सकती हैं। वहीं सोलह फीसदी वोट शेयर के साथ जेडीएस सत्ताईस सीटें अपने खाते में डाल सकती है। टीवी नौ-सी वोटर सर्वे में कहा गया है कि जेडीएस पच्चीस सीटें जीत सकती है और किंगमेकर की भूमिका निभा सकती है। इस सर्वे में कांग्रेस को सबसे बड़ी पार्टी बताया गया है, जो कि एक सौ दो सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है। सर्वे के मुताबिक बीजेपी के खाते में छियानवे सीटें आ सकती हैं। वर्तमान में कांग्रेस के पास एक सौ बाईस सीटें, बीजेपी के पास चालीस सीटें और जेडीएस के पास चालीस सीटें हैं।
BAREILLY: BAREILLY: गत फ् मार्च से सर्वर रूम चेन्नई में खराबी के कारण डाकघरों में कामकाज ठप पड़ गया है। कनेक्टिविटी फेल होने के चलते डाकघर से जुड़े हजारों अकाउंट होल्डर्स को डाकघर का चक्कर लगाकर वापस लौटना पड़ रहा है। चाहे स्पीड पोस्ट हो या रजिस्ट्री या फिर रुपयों के लेन-देने सब तरह के वर्क ठप पड़े हैं। इस नाते कई डाकघरों में कस्टमर्स की नाराजगी कर्मचारियों को सहनी पड़ रही है। पिछले तीन मार्च से डाकघरों में अकाउंट होल्डर्स का यह हाल है कि खाते में पैसा जमा कराने के लिए कतार में लगने के बाद काउंटर पर नंबर आता है, तो पता चलता है कि कनेक्टिविटी फेल हो गई। इसके चलते उन्हें घर लौटना पड़ता है। कभी-कभार कनेक्टिविटी आ जाती है तो वर्क शुरू हो जाता है लेकिन फिर स्थिति खराब हो जाती है। दरअसल, देशभर के डाकघरों के सीपी का नेट कनेक्टिविटी चेन्नई के सर्वर रूम से जुड़ा हुआ है और करीब एक महीना गुजरने को है लेकिन अभी तक प्रॉब्लम का सॉल्यूशन डाक विभाग नहीं ढूंढ पाया है। कुछ रूरल एरिया में डाकघर सीबीएस से नहीं जुड़े होने के कारण वहां मैन्युअल वर्क हो जा रहा है लेकिन ज्यादातर डाकघरों में वर्क सीबीएस से जुड़े होने कारण नहीं हो पा रहा है। दिक्कत यह भी है कि जो डाकघर सीबीएस से जुड़ गए वहां मैन्युअल वर्क भी नहीं हो सकता है। इस नाते कुछ डाकघर निर्धारित समय से ज्यादा वक्त तक खुले रहते हैं लेकिन कनेक्टिविटी फेल रहने के कारण कामकाज नहीं हो पा रहा है। नोट यह आंकड़े बरेली रीजन के हैं। चेन्नई स्थित सर्वर रूम में कुछ तकनीकि दिक्कत है। इसके चलते कनेक्टिविटी फेल है। रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
BAREILLY: BAREILLY: गत फ् मार्च से सर्वर रूम चेन्नई में खराबी के कारण डाकघरों में कामकाज ठप पड़ गया है। कनेक्टिविटी फेल होने के चलते डाकघर से जुड़े हजारों अकाउंट होल्डर्स को डाकघर का चक्कर लगाकर वापस लौटना पड़ रहा है। चाहे स्पीड पोस्ट हो या रजिस्ट्री या फिर रुपयों के लेन-देने सब तरह के वर्क ठप पड़े हैं। इस नाते कई डाकघरों में कस्टमर्स की नाराजगी कर्मचारियों को सहनी पड़ रही है। पिछले तीन मार्च से डाकघरों में अकाउंट होल्डर्स का यह हाल है कि खाते में पैसा जमा कराने के लिए कतार में लगने के बाद काउंटर पर नंबर आता है, तो पता चलता है कि कनेक्टिविटी फेल हो गई। इसके चलते उन्हें घर लौटना पड़ता है। कभी-कभार कनेक्टिविटी आ जाती है तो वर्क शुरू हो जाता है लेकिन फिर स्थिति खराब हो जाती है। दरअसल, देशभर के डाकघरों के सीपी का नेट कनेक्टिविटी चेन्नई के सर्वर रूम से जुड़ा हुआ है और करीब एक महीना गुजरने को है लेकिन अभी तक प्रॉब्लम का सॉल्यूशन डाक विभाग नहीं ढूंढ पाया है। कुछ रूरल एरिया में डाकघर सीबीएस से नहीं जुड़े होने के कारण वहां मैन्युअल वर्क हो जा रहा है लेकिन ज्यादातर डाकघरों में वर्क सीबीएस से जुड़े होने कारण नहीं हो पा रहा है। दिक्कत यह भी है कि जो डाकघर सीबीएस से जुड़ गए वहां मैन्युअल वर्क भी नहीं हो सकता है। इस नाते कुछ डाकघर निर्धारित समय से ज्यादा वक्त तक खुले रहते हैं लेकिन कनेक्टिविटी फेल रहने के कारण कामकाज नहीं हो पा रहा है। नोट यह आंकड़े बरेली रीजन के हैं। चेन्नई स्थित सर्वर रूम में कुछ तकनीकि दिक्कत है। इसके चलते कनेक्टिविटी फेल है। रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
हरियाणा के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO ) द्वारा प्रदेश के सभी 22 जिलों में कुल रजिस्टर्ड मतदाताओं की ताजा संख्या को अपडेट कर दिया गया है। इसमें खुलासा हुआ है कि हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में से 87 पर वोटर बढ़ गए हैं। गुड़गांव का बादशाहपुर सबसे बड़ा हलका बन गया है। राज्य के गृह मंत्री अनिल विज सहित 3 विधानसभाओं में वोटरों की संख्या कम भी हुई है। फाइनल मतदाता सूची के अनुसार हरियाणा में अब कुल 1 करोड़ 96 लाख 58 हजार 234 मतदाता हैं। जनवरी 2022 में यह संख्या 1 करोड़ 93 लाख 31 हजार 458 मतदाता थी। इस प्रकार गत एक वर्ष में 3 लाख 26 हजार 776 मतदाता पूरे प्रदेश में बढ़े हैं। महेंद्रगढ़ जिले का नारनौल विधानसभा हल्का प्रदेश में सबसे छोटा है, जहां बादशाहपुर के आधे से भी कम यानि 1 लाख 55 हजार 359 मतदाता हैं। प्रदेश के तीन विधानसभा क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां पिछले एक वर्ष दौरान मतदाताओं की संख्या में कमी आई है, इसमें सबसे ऊपर अंबाला शहर विधानसभा हलका है, जहां गत एक वर्ष में 3 हजार 797 मतदाता घट गए हैं। जबकि दूसरे स्थान पर सोनीपत जिले का बरोदा हलका है, जहां इस दौरान 1 हजार 791 मतदाता कम हुए हैं। तीसरा हलका पलवल जिले का होडल (आरक्षित ) है, जहां 1 हजार 177 मतदाता कम हुए हैं। वर्तमान 22 जिलों में सबसे अधिक विधानसभा क्षेत्र हिसार जिले में 7 हैं। जबकि फरीदाबाद और सोनीपत में यह 6-6 हैं, करनाल, जींद और सिरसा में पांच-पांच, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, पानीपत, भिवानी, रोहतक, झज्जर, महेंद्रगढ़,गुरुग्राम में चार -चार, फतेहाबाद, मेवात, रेवाड़ी और पलवल में तीन- तीन एवं पंचकूला और चरखी दादरी में दो-दो विधानसभा हलके हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हरियाणा के मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा प्रदेश के सभी बाईस जिलों में कुल रजिस्टर्ड मतदाताओं की ताजा संख्या को अपडेट कर दिया गया है। इसमें खुलासा हुआ है कि हरियाणा की नब्बे विधानसभा सीटों में से सत्तासी पर वोटर बढ़ गए हैं। गुड़गांव का बादशाहपुर सबसे बड़ा हलका बन गया है। राज्य के गृह मंत्री अनिल विज सहित तीन विधानसभाओं में वोटरों की संख्या कम भी हुई है। फाइनल मतदाता सूची के अनुसार हरियाणा में अब कुल एक करोड़ छियानवे लाख अट्ठावन हजार दो सौ चौंतीस मतदाता हैं। जनवरी दो हज़ार बाईस में यह संख्या एक करोड़ तिरानवे लाख इकतीस हजार चार सौ अट्ठावन मतदाता थी। इस प्रकार गत एक वर्ष में तीन लाख छब्बीस हजार सात सौ छिहत्तर मतदाता पूरे प्रदेश में बढ़े हैं। महेंद्रगढ़ जिले का नारनौल विधानसभा हल्का प्रदेश में सबसे छोटा है, जहां बादशाहपुर के आधे से भी कम यानि एक लाख पचपन हजार तीन सौ उनसठ मतदाता हैं। प्रदेश के तीन विधानसभा क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां पिछले एक वर्ष दौरान मतदाताओं की संख्या में कमी आई है, इसमें सबसे ऊपर अंबाला शहर विधानसभा हलका है, जहां गत एक वर्ष में तीन हजार सात सौ सत्तानवे मतदाता घट गए हैं। जबकि दूसरे स्थान पर सोनीपत जिले का बरोदा हलका है, जहां इस दौरान एक हजार सात सौ इक्यानवे मतदाता कम हुए हैं। तीसरा हलका पलवल जिले का होडल है, जहां एक हजार एक सौ सतहत्तर मतदाता कम हुए हैं। वर्तमान बाईस जिलों में सबसे अधिक विधानसभा क्षेत्र हिसार जिले में सात हैं। जबकि फरीदाबाद और सोनीपत में यह छः-छः हैं, करनाल, जींद और सिरसा में पांच-पांच, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, पानीपत, भिवानी, रोहतक, झज्जर, महेंद्रगढ़,गुरुग्राम में चार -चार, फतेहाबाद, मेवात, रेवाड़ी और पलवल में तीन- तीन एवं पंचकूला और चरखी दादरी में दो-दो विधानसभा हलके हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
समारोह में अबीर गुलाल तो जमकर उड़ा हीं अतिथियों के मनोरंजन के लिए बार बाला को बुलाया गया था । इस दौरान होली के गीतों पर बार बाला ठुमके लगाती रही। काम के दिन बिना अनुमति के आयोजन किया गया। होली का रंग छा गया है। होली मिलन समारोहों में रंगों की धमाल के साथ मर्यादाएं भी टूट रही हैं। जहाना बाद के रतनी प्रखंड परिसर में होली के नाम पर जो हुआ वह कानून व्यस्था को शर्मसार कर गया। प्रखंड परिसर में शनिवार को होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। होली मिलन समारोह के लिए बने स्टेज पर सरकारी नियम कानून को ताख पर रख बार बालाओं का अश्लील डांस कराया गया। डांस प्रोग्राम देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी रही। कार्यक्रम का शुभारंभ स्थानीय विधायक कृष्ण मोहन उर्फ सुदय यादव, प्रखंड प्रमुख सोनी कुमारी, राजद के प्रखंड अध्यक्ष मोहम्मद नौशाद आलम ने संयुक्त रूप से किया। समारोह में अबीर गुलाल तो जमकर उड़ा हीं अतिथियों के मनोरंजन के लिए बार बाला को बुलाया गया था । इस दौरान होली के रंग बिरंगे गाने पर बार बाला ठुमके लगाती रही। हद तो तब हो गया जब बगैर अनुमति के प्रखंड प्रांगण में कार्य दिवस के दिन ही बार बाला के डांस के लिए मंच बनाया गया। होली हैः रविशंकर प्रसाद ने थामा मुकेश सहनी का हाथ, वीआईपी ने चखा बीजेपी का मालपुआ; 2025 तक साथ चलेंगे? इस कार्यक्रम में विधायक से लेकर प्रखंड के कई कर्मी और अंचलाधिकारी भी मौजूद रहे। हालांकि विधायक ने कार्यक्रम में आते ही डांस को बंद करने और बार बालाओं को मंच से नीचे उतारने के लिए कहा। इसके बाद विधायक मंच पर गए और कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। लेकिन विधायक के कार्यक्रम से हटते ही फिर से बार बालाओं का डांस शुरू हो गया। विदित हो कि दुर्गापूजा पर भी बार बालाओं का डांस कराया गया था। इसको लेकर एफआईआर भी दर्ज की गयी थी। इसके बावजूद होली के मौके पर डांस प्रोग्राम का आयोजन किया गया। डांस प्रोग्राम का वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है। इस मामले में अंचलाधिकारी कौशल्या कुमारी ने बताया कि होली मिलन समारोह कार्यक्रम की मुझे सूचना थी। उसमें डांस प्रोग्राम का सूचना मुझे नहीं थी। अगर बार बालाओं का डांस हुआ है तो वह गलत है। आरोप साबित हुआ तो कार्रवाई होगी।
समारोह में अबीर गुलाल तो जमकर उड़ा हीं अतिथियों के मनोरंजन के लिए बार बाला को बुलाया गया था । इस दौरान होली के गीतों पर बार बाला ठुमके लगाती रही। काम के दिन बिना अनुमति के आयोजन किया गया। होली का रंग छा गया है। होली मिलन समारोहों में रंगों की धमाल के साथ मर्यादाएं भी टूट रही हैं। जहाना बाद के रतनी प्रखंड परिसर में होली के नाम पर जो हुआ वह कानून व्यस्था को शर्मसार कर गया। प्रखंड परिसर में शनिवार को होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। होली मिलन समारोह के लिए बने स्टेज पर सरकारी नियम कानून को ताख पर रख बार बालाओं का अश्लील डांस कराया गया। डांस प्रोग्राम देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी रही। कार्यक्रम का शुभारंभ स्थानीय विधायक कृष्ण मोहन उर्फ सुदय यादव, प्रखंड प्रमुख सोनी कुमारी, राजद के प्रखंड अध्यक्ष मोहम्मद नौशाद आलम ने संयुक्त रूप से किया। समारोह में अबीर गुलाल तो जमकर उड़ा हीं अतिथियों के मनोरंजन के लिए बार बाला को बुलाया गया था । इस दौरान होली के रंग बिरंगे गाने पर बार बाला ठुमके लगाती रही। हद तो तब हो गया जब बगैर अनुमति के प्रखंड प्रांगण में कार्य दिवस के दिन ही बार बाला के डांस के लिए मंच बनाया गया। होली हैः रविशंकर प्रसाद ने थामा मुकेश सहनी का हाथ, वीआईपी ने चखा बीजेपी का मालपुआ; दो हज़ार पच्चीस तक साथ चलेंगे? इस कार्यक्रम में विधायक से लेकर प्रखंड के कई कर्मी और अंचलाधिकारी भी मौजूद रहे। हालांकि विधायक ने कार्यक्रम में आते ही डांस को बंद करने और बार बालाओं को मंच से नीचे उतारने के लिए कहा। इसके बाद विधायक मंच पर गए और कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। लेकिन विधायक के कार्यक्रम से हटते ही फिर से बार बालाओं का डांस शुरू हो गया। विदित हो कि दुर्गापूजा पर भी बार बालाओं का डांस कराया गया था। इसको लेकर एफआईआर भी दर्ज की गयी थी। इसके बावजूद होली के मौके पर डांस प्रोग्राम का आयोजन किया गया। डांस प्रोग्राम का वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है। इस मामले में अंचलाधिकारी कौशल्या कुमारी ने बताया कि होली मिलन समारोह कार्यक्रम की मुझे सूचना थी। उसमें डांस प्रोग्राम का सूचना मुझे नहीं थी। अगर बार बालाओं का डांस हुआ है तो वह गलत है। आरोप साबित हुआ तो कार्रवाई होगी।
नई दिल्लीः लोगों की मदद के लिए केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से अब कई ऐसी स्कीम चलाई जा रही है, जो वरदान साबित हो रही है। मोदी सरकार अब एक ऐसी स्कीम लेकर आई है, जिसे जानकर आप दो-दो हाथ उछल पड़ेंगे। इस स्कीम का नाम पीएम किसान मानधन योजना है, जिसके तहत हर महीना 3,000 रुपये पेंशन का लाभ दिया जाएगा। इससे जुड़ने के लिए तमाम शर्तें तय की गई हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। इसे जुड़ने के लिए आपको आयु व निवेश का ख्याल रखना होगा। प्रीमियम भरने के बाद आपको फिर पेंशन का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। मोदी सरकार शुरू की गई पीएम किसान मानधन योजना से जुड़ने के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं। इसमें सबसे पहले आपका नाम पीएम किसान सम्मान निधि योजना से जुड़ा होना जरूरी है। अगर आप इस योजना के लाभार्थी हैं तो फिर आराम से पेंशन वाली स्कीम से जुड़ सकते हैं। योजना बुजुर्गों और छोटे/सीमांत किसानों (SMFs) को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए संचालित की गई है। यह एक स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना है। इसके योजना के तहत 60 साल की उम्र तक पहुंचने के बाद प्रत्येक लाभार्थी को 3,000 रुपये पेंशन के रूप में प्रदान किये जाते हैं। देशभर के छोटे और सीमांत किसान, जिनके पास 2 हेक्टेयर तक की खेती योग्य जमीन है, वो इससे जुड़ सकते हैं। किसानों की न्यूनतम आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होना जरूरी है। किसान मानधन वेबसाइट के अनुसार, ऐसे किसानों का नाम उनके राज्य के भूमि रिकॉर्ड में भी होना जरूरी है, जिसके बाद आप जुड़ सकते हैं। इतना ही नहीं मासिक आय 15,000 रुपये या उससे कम है। किसान की उम्र जब 60 वर्ष हो जाएगी तो पेंशन का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। इसमें 55 रुपये से 200 रुपये हर महीने का निवेश करना जरूरी होगा। उम्र के हिसाब से निवेश की सीमा तय की गई है।अघर आप 18 वर्ष की आयु से जुड़ते हैं तो 55 रुपये महीना जमा करना होगा। 30 साल से योजना में रजिस्टर्ड होते हैं तो फिर आपको 110 रुपये का निवेश करना होगा। इतना ही नहीं 40 साल से जुड़ने के बाद आपको फइर 210 रुपये का निवेश करना होगा।
नई दिल्लीः लोगों की मदद के लिए केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से अब कई ऐसी स्कीम चलाई जा रही है, जो वरदान साबित हो रही है। मोदी सरकार अब एक ऐसी स्कीम लेकर आई है, जिसे जानकर आप दो-दो हाथ उछल पड़ेंगे। इस स्कीम का नाम पीएम किसान मानधन योजना है, जिसके तहत हर महीना तीन,शून्य रुपयापये पेंशन का लाभ दिया जाएगा। इससे जुड़ने के लिए तमाम शर्तें तय की गई हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। इसे जुड़ने के लिए आपको आयु व निवेश का ख्याल रखना होगा। प्रीमियम भरने के बाद आपको फिर पेंशन का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। मोदी सरकार शुरू की गई पीएम किसान मानधन योजना से जुड़ने के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं। इसमें सबसे पहले आपका नाम पीएम किसान सम्मान निधि योजना से जुड़ा होना जरूरी है। अगर आप इस योजना के लाभार्थी हैं तो फिर आराम से पेंशन वाली स्कीम से जुड़ सकते हैं। योजना बुजुर्गों और छोटे/सीमांत किसानों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए संचालित की गई है। यह एक स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना है। इसके योजना के तहत साठ साल की उम्र तक पहुंचने के बाद प्रत्येक लाभार्थी को तीन,शून्य रुपयापये पेंशन के रूप में प्रदान किये जाते हैं। देशभर के छोटे और सीमांत किसान, जिनके पास दो हेक्टेयर तक की खेती योग्य जमीन है, वो इससे जुड़ सकते हैं। किसानों की न्यूनतम आयु अट्ठारह से चालीस वर्ष के बीच होना जरूरी है। किसान मानधन वेबसाइट के अनुसार, ऐसे किसानों का नाम उनके राज्य के भूमि रिकॉर्ड में भी होना जरूरी है, जिसके बाद आप जुड़ सकते हैं। इतना ही नहीं मासिक आय पंद्रह,शून्य रुपयापये या उससे कम है। किसान की उम्र जब साठ वर्ष हो जाएगी तो पेंशन का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। इसमें पचपन रुपयापये से दो सौ रुपयापये हर महीने का निवेश करना जरूरी होगा। उम्र के हिसाब से निवेश की सीमा तय की गई है।अघर आप अट्ठारह वर्ष की आयु से जुड़ते हैं तो पचपन रुपयापये महीना जमा करना होगा। तीस साल से योजना में रजिस्टर्ड होते हैं तो फिर आपको एक सौ दस रुपयापये का निवेश करना होगा। इतना ही नहीं चालीस साल से जुड़ने के बाद आपको फइर दो सौ दस रुपयापये का निवेश करना होगा।
अगस्त 1947 में आज़ादी मिलने के कुछ ही समय बाद मशहूर शायर फैज़ अहमद फैज़ ने इस आज़ादी को 'दाग-दाग उज़ाला' कहा। उन्होंने कहाः कहीं तो जा के रुकेगा, सफ़ीन-ए-ग़मे-दिल.......... जब आज़ाद भारत की सरकार ने हकों-अधिकारों की बात करने वालों और जनांदोलनों को कुचलने में अंग्रेजों को भी मात देनी शुरु कर दी, तो शंकर शैलेन्द्र ने लिखा : आजादी को सिरे से नकारते हुए इप्टा ने आम लोगों की आवाज को अल्फाज़ दिए : रघुवीर सहाय ने जन-गण-मन के 'अधिनायक' के बारे में कहा : गुन हरचरना गाता है। जय-जय कौन कराता है। तमगे कौन लगाता है। बाजा रोज बजाता है। चाहे कोई मुझे जंगली कहे। शलभ श्रीराम सिंह ने लिखा : किधर गये वो वायदे? सुखों के ख्वाब क्या हुए? तुझे था जिनका इंतज़ार वो जवाब क्या हुए? घिरे हैं हम सवाल से हमें जवाब चाहिए! नागार्जुन की कविता : किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है? कौन यहां सुखी है, कौन यहां मस्त है? कौन है बुलंद आज, कौन आज मस्त है? मास्टर की छाती में कै ठो हाड़ है! मज़दूर की छाती में कै ठो हाड़ है! घरनी की छाती में कै ठो हाड़ है! बच्चे की छाती में कै ठो हाड़ है! पब्लिक की पीठ पर बजट का पहाड़ है! पब्लिक की पीठ पर बजट का पहाड़ है! किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है! कौन यहां सुखी है, कौन यहां मस्त है!
अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में आज़ादी मिलने के कुछ ही समय बाद मशहूर शायर फैज़ अहमद फैज़ ने इस आज़ादी को 'दाग-दाग उज़ाला' कहा। उन्होंने कहाः कहीं तो जा के रुकेगा, सफ़ीन-ए-ग़मे-दिल.......... जब आज़ाद भारत की सरकार ने हकों-अधिकारों की बात करने वालों और जनांदोलनों को कुचलने में अंग्रेजों को भी मात देनी शुरु कर दी, तो शंकर शैलेन्द्र ने लिखा : आजादी को सिरे से नकारते हुए इप्टा ने आम लोगों की आवाज को अल्फाज़ दिए : रघुवीर सहाय ने जन-गण-मन के 'अधिनायक' के बारे में कहा : गुन हरचरना गाता है। जय-जय कौन कराता है। तमगे कौन लगाता है। बाजा रोज बजाता है। चाहे कोई मुझे जंगली कहे। शलभ श्रीराम सिंह ने लिखा : किधर गये वो वायदे? सुखों के ख्वाब क्या हुए? तुझे था जिनका इंतज़ार वो जवाब क्या हुए? घिरे हैं हम सवाल से हमें जवाब चाहिए! नागार्जुन की कविता : किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है? कौन यहां सुखी है, कौन यहां मस्त है? कौन है बुलंद आज, कौन आज मस्त है? मास्टर की छाती में कै ठो हाड़ है! मज़दूर की छाती में कै ठो हाड़ है! घरनी की छाती में कै ठो हाड़ है! बच्चे की छाती में कै ठो हाड़ है! पब्लिक की पीठ पर बजट का पहाड़ है! पब्लिक की पीठ पर बजट का पहाड़ है! किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है! कौन यहां सुखी है, कौन यहां मस्त है!
सनी लियोनी का कहना है कि अभी फिल्मों में काम करने का मतलब यह नहीं है कि वह हमेशा फिल्मों में काम करती रहेंगी। अडल्ट फिल्मों की अभिनेत्री सनी लियोनी साल 2011 में रियलिटी शो बिग बॉस सीजन पांच के जरिये भारत आईं और साल 2012 में वह अपनी पहली फिल्म 'जिस्म 2' में नजर आईं।सनी को लगता है कि मनोरंजन उद्योग में काम करने वाले प्रत्येक व्यक्त को वहां से निकल कर अन्य क्षेत्रों में भी काम करना चाहिए। उन्होंने प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया को बताया मैं हमेशा फिल्मों में काम नही करूंगी। लियोनी ने कहा कि अगर आप एक कारोबारी व्यक्ति या मनोरंजन से जुड़े व्यक्ति के तौर पर सफल होना चाहते हैं तो आपको हर संभव तरीका खोजना होगा। उन्होंने कहा मेरे लिए फिल्मों का सिलसिला हमेशा जारी नहीं रहेगा। अंत होगा। लेकिन सवाल भी है कि इसके बाद क्या। गौरतलब है कि 'जिस्म 2' के बाद सनी लियोनी ने 'जैकपॉट', 'रागिनी एमएमएस 2' और 'एक पहेली लीला' जैसी कई फिल्मों में काम किया। शाहरुख खान की आने वाली फिल्म 'रईस' के लिए हाल ही में सनी लियोनी ने में एक आइटम सॉन्ग की शूटिंग भी की है। उसके बाद आये फैसले से सभी चौंक गये है।
सनी लियोनी का कहना है कि अभी फिल्मों में काम करने का मतलब यह नहीं है कि वह हमेशा फिल्मों में काम करती रहेंगी। अडल्ट फिल्मों की अभिनेत्री सनी लियोनी साल दो हज़ार ग्यारह में रियलिटी शो बिग बॉस सीजन पांच के जरिये भारत आईं और साल दो हज़ार बारह में वह अपनी पहली फिल्म 'जिस्म दो' में नजर आईं।सनी को लगता है कि मनोरंजन उद्योग में काम करने वाले प्रत्येक व्यक्त को वहां से निकल कर अन्य क्षेत्रों में भी काम करना चाहिए। उन्होंने प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया को बताया मैं हमेशा फिल्मों में काम नही करूंगी। लियोनी ने कहा कि अगर आप एक कारोबारी व्यक्ति या मनोरंजन से जुड़े व्यक्ति के तौर पर सफल होना चाहते हैं तो आपको हर संभव तरीका खोजना होगा। उन्होंने कहा मेरे लिए फिल्मों का सिलसिला हमेशा जारी नहीं रहेगा। अंत होगा। लेकिन सवाल भी है कि इसके बाद क्या। गौरतलब है कि 'जिस्म दो' के बाद सनी लियोनी ने 'जैकपॉट', 'रागिनी एमएमएस दो' और 'एक पहेली लीला' जैसी कई फिल्मों में काम किया। शाहरुख खान की आने वाली फिल्म 'रईस' के लिए हाल ही में सनी लियोनी ने में एक आइटम सॉन्ग की शूटिंग भी की है। उसके बाद आये फैसले से सभी चौंक गये है।
यह आर्टिकल लिखा गया सहयोगी लेखक द्वारा Luigi Oppido1फायरफॉक्स को खोलेंः इसे खोलने के लिए फायरफॉक्स आइकान पर डबल क्लिक करें। - यह टैब फायरफॉक्स विंडो के सबसे ऊपर पेज आइकान और इस पर शीर्षक के साथ स्थित होती है। - होम आइकान अक्सर ही एड्रेस बार के नीचे या फिर दांई तरफ स्थित होता है। यदि यह आप को नहीं दिख रहा है तो किसी भी टैब के पास खाली जगह पर राइट क्लिक (मैक पर कंट्रोल क्लिक) करें। Customize बटन को चुनें, और फिर होम आइकान पर जाएँ और इसे किसी भी टूलबार पर ले कर जाएँ। {"smallUrl":"https:\/\/www1टॉप मेनू बार को प्रदर्शित (display) करेंः विंडोज़ के कुछ संस्करण (version) में टॉप मेनू बार डिफॉल्ट रूप से छिपा हुआ होता है। इनमें से किसी एक विधि (आप को एक से ज़्यादा का प्रयोग करना चाहिए) का प्रयोग कर के इसे प्रदर्शित करेंः - Alt बटन को दबाएँ। - F10 बटन को दबाएँ। - टैब बार पर खाली जगह पर राइट क्लिक करें और Menu Bar बटन को चुनें। {"smallUrl":"https:\/\/www3फायरफॉक्स को इस तरह से सेट करें कि यह जब भी खुले तो इस पर एक मुख पृष्ट दिखेः प्रेफरेन्स टैब पर जाएँ और "When Firefox starts:" शब्दों के बाद ड्रॉप डाउन मेनू पर जाएँ। इस ड्रॉप-डाउन मेनू पर क्लिक करें और Show my home page बटन को क्लिक करें। - यदि आप यह विकल्प नहीं देख पा रहे हैं तो General टैब पर क्लिक करें। {"smallUrl":"https:\/\/www3अपने स्टार्ट पेज पर एक नई साइट जोड़ेंः यदि आप जिस साइट को देखा चाह रहे हैं वह ग्रिड (grid) पर उपस्थित नहीं है, तो उस वर्ग (square), जिसे आप नहीं देखना चाहते हैं, पर जाएँ और उसे पकड़ कर रखें। इस बार पॉप-अप मेनू में से Edit बटन को चुनें। अब आप एक यूआरएल एंटर कर सकते हैं या फिर आप के बुकमार्क्स या आप के द्वारा सबसे ज़्यादा देखी हुई वेबसाइट्स में से किसी एक को चुन सकते हैं। {"smallUrl":"https:\/\/www1फायरफॉक्स को रिसेट करेंःयदि आप का होमपेज एक ऐसे विज्ञापन पर सेट है जिसे आप नहीं चाहते हैं, तो फायरफॉक्स को रिसेट करना एक आसान तरीका होगा। पर ध्यान रहे कि यह आप के सारे एक्सटेंशन और एड-ऑन्स (add-ons) को डिलीट कर देगा। बस आप के बुकमार्क और सहेजे हुए पासवर्ड रहेंगे। - विंडोज़ः कंट्रोल पैनल पर जाएँ और uninstall a program बटन को चुनें। बेबीलॉन ("Babylon") के सामने स्थित बटन Uninstall पर क्लिक करें और स्क्रीन पर दिए गये निर्देशों का पालन करें। यदि बेबीलॉन टूलबार, ब्राउज़र मैनेजर और ब्राउज़र प्रोटेक्शन भी हों तो इन के लिए भी दोहराएँ। अब कोई भी ऊपर दर्शाए गये बेबीलॉन से संबंधित एड-ऑन को फायरफॉक्स से डिलीट कर दें। - मैक (Mac):अपने एप्लीकेशन फोल्डर से बेबीलॉन को पाएँ। फिर इसे ट्रैश (trash) तक खींच कर ले जाएँ, और फिर टॉप मेनू से Finder → Empty Trash बटन चुनें। ऊपर दर्शाए अनुसार फायरफॉक्स से बेबीलॉन को डिलीट करें। {"smallUrl":"https:\/\/www5मैलवेयर (malware) को हटाएँः यदि यह समस्या फिर भी रहती है, तो मैलवेयर जो आप के कंप्यूटर को प्रभावित (infect) किया है, यह आप के फायरफॉक्स को भी प्रभावित कर रहा है। इसे फायरफॉक्स सेट्टिंग्स से भी नहीं हटाया जा सकता, लेकिन इस के लिए आप को हमारी मैलवेयर रिमूवर गाइड का प्रयोग करना होगा जो इस समस्या के समाधान के लिए आप की मदद कर सकती है। - आप उन टैब को जिन्हें अपने होमपेज के लिए रखना चाहते हैं, उन्हें खोलें और होम पेज बॉक्स के नीचे स्थित यूज़ करंट पेज बटन पर क्लिक करें। ध्यान दें कि यह नया होम पेज आप के साथ कंप्यूटर का उपयोग करने वाले अन्य लोगों के लिए भी ठीक हो। - होम पेज का एड्रेस डालते वक़्त http:// or https:// को शामिल करना ना भूलें।
यह आर्टिकल लिखा गया सहयोगी लेखक द्वारा Luigi Oppidoएकफायरफॉक्स को खोलेंः इसे खोलने के लिए फायरफॉक्स आइकान पर डबल क्लिक करें। - यह टैब फायरफॉक्स विंडो के सबसे ऊपर पेज आइकान और इस पर शीर्षक के साथ स्थित होती है। - होम आइकान अक्सर ही एड्रेस बार के नीचे या फिर दांई तरफ स्थित होता है। यदि यह आप को नहीं दिख रहा है तो किसी भी टैब के पास खाली जगह पर राइट क्लिक करें। Customize बटन को चुनें, और फिर होम आइकान पर जाएँ और इसे किसी भी टूलबार पर ले कर जाएँ। {"smallUrl":"https:\/\/wwwएकटॉप मेनू बार को प्रदर्शित करेंः विंडोज़ के कुछ संस्करण में टॉप मेनू बार डिफॉल्ट रूप से छिपा हुआ होता है। इनमें से किसी एक विधि का प्रयोग कर के इसे प्रदर्शित करेंः - Alt बटन को दबाएँ। - Fदस बटन को दबाएँ। - टैब बार पर खाली जगह पर राइट क्लिक करें और Menu Bar बटन को चुनें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwतीनफायरफॉक्स को इस तरह से सेट करें कि यह जब भी खुले तो इस पर एक मुख पृष्ट दिखेः प्रेफरेन्स टैब पर जाएँ और "When Firefox starts:" शब्दों के बाद ड्रॉप डाउन मेनू पर जाएँ। इस ड्रॉप-डाउन मेनू पर क्लिक करें और Show my home page बटन को क्लिक करें। - यदि आप यह विकल्प नहीं देख पा रहे हैं तो General टैब पर क्लिक करें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwतीनअपने स्टार्ट पेज पर एक नई साइट जोड़ेंः यदि आप जिस साइट को देखा चाह रहे हैं वह ग्रिड पर उपस्थित नहीं है, तो उस वर्ग , जिसे आप नहीं देखना चाहते हैं, पर जाएँ और उसे पकड़ कर रखें। इस बार पॉप-अप मेनू में से Edit बटन को चुनें। अब आप एक यूआरएल एंटर कर सकते हैं या फिर आप के बुकमार्क्स या आप के द्वारा सबसे ज़्यादा देखी हुई वेबसाइट्स में से किसी एक को चुन सकते हैं। {"smallUrl":"https:\/\/wwwएकफायरफॉक्स को रिसेट करेंःयदि आप का होमपेज एक ऐसे विज्ञापन पर सेट है जिसे आप नहीं चाहते हैं, तो फायरफॉक्स को रिसेट करना एक आसान तरीका होगा। पर ध्यान रहे कि यह आप के सारे एक्सटेंशन और एड-ऑन्स को डिलीट कर देगा। बस आप के बुकमार्क और सहेजे हुए पासवर्ड रहेंगे। - विंडोज़ः कंट्रोल पैनल पर जाएँ और uninstall a program बटन को चुनें। बेबीलॉन के सामने स्थित बटन Uninstall पर क्लिक करें और स्क्रीन पर दिए गये निर्देशों का पालन करें। यदि बेबीलॉन टूलबार, ब्राउज़र मैनेजर और ब्राउज़र प्रोटेक्शन भी हों तो इन के लिए भी दोहराएँ। अब कोई भी ऊपर दर्शाए गये बेबीलॉन से संबंधित एड-ऑन को फायरफॉक्स से डिलीट कर दें। - मैक :अपने एप्लीकेशन फोल्डर से बेबीलॉन को पाएँ। फिर इसे ट्रैश तक खींच कर ले जाएँ, और फिर टॉप मेनू से Finder → Empty Trash बटन चुनें। ऊपर दर्शाए अनुसार फायरफॉक्स से बेबीलॉन को डिलीट करें। {"smallUrl":"https:\/\/wwwपाँचमैलवेयर को हटाएँः यदि यह समस्या फिर भी रहती है, तो मैलवेयर जो आप के कंप्यूटर को प्रभावित किया है, यह आप के फायरफॉक्स को भी प्रभावित कर रहा है। इसे फायरफॉक्स सेट्टिंग्स से भी नहीं हटाया जा सकता, लेकिन इस के लिए आप को हमारी मैलवेयर रिमूवर गाइड का प्रयोग करना होगा जो इस समस्या के समाधान के लिए आप की मदद कर सकती है। - आप उन टैब को जिन्हें अपने होमपेज के लिए रखना चाहते हैं, उन्हें खोलें और होम पेज बॉक्स के नीचे स्थित यूज़ करंट पेज बटन पर क्लिक करें। ध्यान दें कि यह नया होम पेज आप के साथ कंप्यूटर का उपयोग करने वाले अन्य लोगों के लिए भी ठीक हो। - होम पेज का एड्रेस डालते वक़्त http:// or https:// को शामिल करना ना भूलें।
बचपन का एक जादुई देश ... केवल जब हम इस छोटे राज्य के निवासियों हैं, आकाश सबसे नीला है, रास्पबेरी सबसे प्यारी है, पेंसिल सबसे रंगीन होते हैं, और सर्दियों में बर्फ के तूफान सबसे खराब है। कई मायनों में, हम सभी को बालवाड़ी का श्रेय देना हैः श्रेष्ठ दोस्त, दिलचस्प खिलौने ऊंची छत, चौड़ी खिड़कियाँ और हर जगह से हल्की डाली जाती है और अब यहां रहने की अनूठी इच्छा पैदा हो सकती है। और बच्चों को ज्यादा की ज़रूरत नहीं हैः कुछ नायकों (स्वाभाविक रूप से, सकारात्मक!), पसंदीदा किताबें और कार्टून - और करापज़ की कृपा है और कौन Matroskin या Cheburashka के साथ जागने के लिए, दीवार से मुस्कुरा नहीं करना चाहता था? इस लेख में, शिक्षकों और युवा माता-पिता यह पता कर पाएंगे कि किंडरगार्टन (या बच्चों के कमरे में) की दीवार की सजावट की आवश्यकता क्या है। खाते में लेने की बारीकियों क्या हैं? बालवाड़ी में दीवार का सही डिजाइन - एक रामबाण है? आरंभ करने के लिए, एक महत्वपूर्णविस्तारः आप किस वॉलपेपर से या रंग चुनते हैं, बच्चे पर मनो-भावनात्मक बोझ पर निर्भर करेगा। क्या बच्चों को बचकाना या साहसी हो जाएगा, मुख्य रूप से चरित्र और शिक्षा पर निर्भर करता है लेकिन उन्हें अधिक विनम्र, शांत, दयालु या सक्रिय करने के लिए क्रोमोथेरेपी - रंग उपचार में मदद कर सकता है। बेशक, आपको इस तकनीक को "गोल्डन टैब्लेट" के रूप में नहीं माना जाना चाहिए - एक बालवाड़ी में दीवार की सजावट करना, पेंटिंग का रंग सब कुछ ठीक से नहीं करेगा। यह मुख्य रूप से शिक्षकों का काम है, जिसके मन के चश्मे के माध्यम से बच्चा रंगों की आवेगों को प्राप्त करेगा। तो, आइए पता करें कि किस पर असर पड़ेगाबच्चा उन या अन्य रंग बालवाड़ी की दीवारों की सजावट (नीचे दी गई तस्वीर) बहुत अलग हो सकती है। सभी कमरों में एक आकृति की नकल करने के लिए सभी आवश्यक नहीं हैं। किंडरगार्टन के समूह की दीवारों की सजावट अलग-अलग हो सकती हैः सबसे कम उम्र के छाया और एक पैटर्न के लिए, और बड़े बच्चों के लिए - दूसरा, और वर्ण अलग-अलग हैं हालांकि, बाद में वर्णों पर चर्चा की जाएगी, और अब - क्रोमोथेरेपी। स्पेक्ट्रम का पहला रंग लाल है यह नेता का नेता, नेता, एक बेहद आत्मविश्वासपूर्ण व्यक्तित्व है। एक लाल बच्चा से घिरा हुआ सब कुछ में पहला स्थान लेगा। अक्सर यह ऊर्जा और खुफिया की एक अकुशल आपूर्ति के साथ सफल होगा। हालांकि, सबसे ऊर्जावान रूप से शक्तिशाली रंग के काले पक्ष भी हैं। कंपनी में इतने भारी वातावरण के साथ, बच्चों को आक्रामक और चिड़चिड़ा हो सकता है, जो इस तरह की निविदा उम्र में बेहद अवांछनीय है। अच्छा-कुछ नहीं या खलनायक?
बचपन का एक जादुई देश ... केवल जब हम इस छोटे राज्य के निवासियों हैं, आकाश सबसे नीला है, रास्पबेरी सबसे प्यारी है, पेंसिल सबसे रंगीन होते हैं, और सर्दियों में बर्फ के तूफान सबसे खराब है। कई मायनों में, हम सभी को बालवाड़ी का श्रेय देना हैः श्रेष्ठ दोस्त, दिलचस्प खिलौने ऊंची छत, चौड़ी खिड़कियाँ और हर जगह से हल्की डाली जाती है और अब यहां रहने की अनूठी इच्छा पैदा हो सकती है। और बच्चों को ज्यादा की ज़रूरत नहीं हैः कुछ नायकों , पसंदीदा किताबें और कार्टून - और करापज़ की कृपा है और कौन Matroskin या Cheburashka के साथ जागने के लिए, दीवार से मुस्कुरा नहीं करना चाहता था? इस लेख में, शिक्षकों और युवा माता-पिता यह पता कर पाएंगे कि किंडरगार्टन की दीवार की सजावट की आवश्यकता क्या है। खाते में लेने की बारीकियों क्या हैं? बालवाड़ी में दीवार का सही डिजाइन - एक रामबाण है? आरंभ करने के लिए, एक महत्वपूर्णविस्तारः आप किस वॉलपेपर से या रंग चुनते हैं, बच्चे पर मनो-भावनात्मक बोझ पर निर्भर करेगा। क्या बच्चों को बचकाना या साहसी हो जाएगा, मुख्य रूप से चरित्र और शिक्षा पर निर्भर करता है लेकिन उन्हें अधिक विनम्र, शांत, दयालु या सक्रिय करने के लिए क्रोमोथेरेपी - रंग उपचार में मदद कर सकता है। बेशक, आपको इस तकनीक को "गोल्डन टैब्लेट" के रूप में नहीं माना जाना चाहिए - एक बालवाड़ी में दीवार की सजावट करना, पेंटिंग का रंग सब कुछ ठीक से नहीं करेगा। यह मुख्य रूप से शिक्षकों का काम है, जिसके मन के चश्मे के माध्यम से बच्चा रंगों की आवेगों को प्राप्त करेगा। तो, आइए पता करें कि किस पर असर पड़ेगाबच्चा उन या अन्य रंग बालवाड़ी की दीवारों की सजावट बहुत अलग हो सकती है। सभी कमरों में एक आकृति की नकल करने के लिए सभी आवश्यक नहीं हैं। किंडरगार्टन के समूह की दीवारों की सजावट अलग-अलग हो सकती हैः सबसे कम उम्र के छाया और एक पैटर्न के लिए, और बड़े बच्चों के लिए - दूसरा, और वर्ण अलग-अलग हैं हालांकि, बाद में वर्णों पर चर्चा की जाएगी, और अब - क्रोमोथेरेपी। स्पेक्ट्रम का पहला रंग लाल है यह नेता का नेता, नेता, एक बेहद आत्मविश्वासपूर्ण व्यक्तित्व है। एक लाल बच्चा से घिरा हुआ सब कुछ में पहला स्थान लेगा। अक्सर यह ऊर्जा और खुफिया की एक अकुशल आपूर्ति के साथ सफल होगा। हालांकि, सबसे ऊर्जावान रूप से शक्तिशाली रंग के काले पक्ष भी हैं। कंपनी में इतने भारी वातावरण के साथ, बच्चों को आक्रामक और चिड़चिड़ा हो सकता है, जो इस तरह की निविदा उम्र में बेहद अवांछनीय है। अच्छा-कुछ नहीं या खलनायक?
आपने सुना है कि विषाक्त रसायनों आपके लिए बुरे हैं, लेकिन वास्तव में एक जहरीला रसायन क्या है? यहां "विषाक्त रसायन" शब्द के साथ-साथ आपके घर में होने वाले सामान्य जहरीले रसायनों के उदाहरण या पर्यावरण में मुठभेड़ के बारे में एक स्पष्टीकरण दिया गया है। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी या ईपीए एक जहरीले रसायन को किसी भी पदार्थ के रूप में परिभाषित करता है जो पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकता है या त्वचा के माध्यम से श्वास लेने, निगलना या अवशोषित होने पर आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। कई उपयोगी घरेलू परियोजनाओं में जहरीले रसायनों होते हैं। आम उदाहरणों में शामिल हैंः हालांकि ये रसायनों उपयोगी और यहां तक कि जरूरी हो सकते हैं, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि उन्हें पैकेजिंग के निर्देशों के अनुसार इस्तेमाल और निपटान किया जाना चाहिए। प्रकृति में कई जहरीले रसायन होते हैं। उदाहरण के लिए, पौधे खुद कीटों से बचाने के लिए जहरीले रसायनों का उत्पादन करते हैं। पशु सुरक्षा के लिए विषाक्त पदार्थ पैदा करते हैं और शिकार को पकड़ते हैं। अन्य मामलों में, विषाक्त रसायनों केवल चयापचय के उप-उत्पाद हैं। कुछ प्राकृतिक तत्व और खनिज जहरीले होते हैं। प्राकृतिक जहरीले रसायनों के कुछ उदाहरण यहां दिए गए हैंः अमेरिकी व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रशासन (ओएसएचए) ने कई रसायनों की पहचान की है जो इसे अत्यधिक खतरनाक और जहरीले मानते हैं। इनमें से कुछ प्रयोगशाला अभिकर्मक हैं, जबकि अन्य आमतौर पर कुछ उद्योगों और व्यापारों में उपयोग किया जाता है। कुछ शुद्ध तत्व शामिल हैं। सूची में कुछ पदार्थ यहां दिए गए हैं (जो बहुत लंबा है): क्या सभी रसायन विषाक्त हैं? एक रसायन को "विषाक्त" या "गैर विषैले" के रूप में लेबल करना भ्रामक है क्योंकि एक्सपोजर और खुराक के मार्ग के आधार पर कोई भी यौगिक विषाक्त हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आप पर्याप्त मात्रा में पीते हैं तो पानी भी विषाक्त है। विषाक्तता प्रजातियों, आयु और लिंग सहित खुराक और एक्सपोजर के अलावा अन्य कारकों पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, मनुष्य चॉकलेट खा सकते हैं, फिर भी यह कुत्तों के लिए जहरीला है। एक तरह से, सभी रसायनों विषाक्त हैं। इसी प्रकार, लगभग सभी पदार्थों के लिए न्यूनतम खुराक है जिसके नीचे जहरीले प्रभाव नहीं दिखते हैं, जिन्हें विषाक्तता अंतराल कहा जाता है। एक रसायन जीवन और विषाक्त दोनों के लिए आवश्यक हो सकता है। एक उदाहरण लोहा है। रक्त कोशिकाओं को बनाने और अन्य जैव रासायनिक कार्यों को करने के लिए मनुष्यों को लोहे की कम खुराक की आवश्यकता होती है, फिर भी लोहा का अधिक मात्रा घातक होता है। ऑक्सीजन एक और उदाहरण है। विषाक्त पदार्थों को चार समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है। एक पदार्थ के लिए एक से अधिक समूह के लिए संभव है। - रासायनिक विषाक्त पदार्थ - रासायनिक विषाक्त पदार्थों में दोनों अकार्बनिक पदार्थ , जैसे कि पारा और कार्बन मोनोऑक्साइड, और कार्बनिक यौगिकों जैसे मेथिल अल्कोहल शामिल हैं। - जैविक विषाक्त पदार्थ - कई जीव विषाक्त यौगिकों को सिकुड़ते हैं। कुछ स्रोत रोगजनक जीवों को विषाक्त पदार्थ मानते हैं। जैविक विषाक्त पदार्थ का एक अच्छा उदाहरण टेटनस है। - शारीरिक विषाक्त पदार्थ - ये वे पदार्थ हैं जो जैविक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करते हैं। उदाहरणों में एस्बेस्टोस और सिलिका शामिल हैं। - विकिरण - विकिरण के कई जीवों पर एक जहरीला प्रभाव पड़ता है। उदाहरणों में गामा विकिरण और माइक्रोवेव शामिल हैं।
आपने सुना है कि विषाक्त रसायनों आपके लिए बुरे हैं, लेकिन वास्तव में एक जहरीला रसायन क्या है? यहां "विषाक्त रसायन" शब्द के साथ-साथ आपके घर में होने वाले सामान्य जहरीले रसायनों के उदाहरण या पर्यावरण में मुठभेड़ के बारे में एक स्पष्टीकरण दिया गया है। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी या ईपीए एक जहरीले रसायन को किसी भी पदार्थ के रूप में परिभाषित करता है जो पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकता है या त्वचा के माध्यम से श्वास लेने, निगलना या अवशोषित होने पर आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। कई उपयोगी घरेलू परियोजनाओं में जहरीले रसायनों होते हैं। आम उदाहरणों में शामिल हैंः हालांकि ये रसायनों उपयोगी और यहां तक कि जरूरी हो सकते हैं, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि उन्हें पैकेजिंग के निर्देशों के अनुसार इस्तेमाल और निपटान किया जाना चाहिए। प्रकृति में कई जहरीले रसायन होते हैं। उदाहरण के लिए, पौधे खुद कीटों से बचाने के लिए जहरीले रसायनों का उत्पादन करते हैं। पशु सुरक्षा के लिए विषाक्त पदार्थ पैदा करते हैं और शिकार को पकड़ते हैं। अन्य मामलों में, विषाक्त रसायनों केवल चयापचय के उप-उत्पाद हैं। कुछ प्राकृतिक तत्व और खनिज जहरीले होते हैं। प्राकृतिक जहरीले रसायनों के कुछ उदाहरण यहां दिए गए हैंः अमेरिकी व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रशासन ने कई रसायनों की पहचान की है जो इसे अत्यधिक खतरनाक और जहरीले मानते हैं। इनमें से कुछ प्रयोगशाला अभिकर्मक हैं, जबकि अन्य आमतौर पर कुछ उद्योगों और व्यापारों में उपयोग किया जाता है। कुछ शुद्ध तत्व शामिल हैं। सूची में कुछ पदार्थ यहां दिए गए हैं : क्या सभी रसायन विषाक्त हैं? एक रसायन को "विषाक्त" या "गैर विषैले" के रूप में लेबल करना भ्रामक है क्योंकि एक्सपोजर और खुराक के मार्ग के आधार पर कोई भी यौगिक विषाक्त हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आप पर्याप्त मात्रा में पीते हैं तो पानी भी विषाक्त है। विषाक्तता प्रजातियों, आयु और लिंग सहित खुराक और एक्सपोजर के अलावा अन्य कारकों पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, मनुष्य चॉकलेट खा सकते हैं, फिर भी यह कुत्तों के लिए जहरीला है। एक तरह से, सभी रसायनों विषाक्त हैं। इसी प्रकार, लगभग सभी पदार्थों के लिए न्यूनतम खुराक है जिसके नीचे जहरीले प्रभाव नहीं दिखते हैं, जिन्हें विषाक्तता अंतराल कहा जाता है। एक रसायन जीवन और विषाक्त दोनों के लिए आवश्यक हो सकता है। एक उदाहरण लोहा है। रक्त कोशिकाओं को बनाने और अन्य जैव रासायनिक कार्यों को करने के लिए मनुष्यों को लोहे की कम खुराक की आवश्यकता होती है, फिर भी लोहा का अधिक मात्रा घातक होता है। ऑक्सीजन एक और उदाहरण है। विषाक्त पदार्थों को चार समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है। एक पदार्थ के लिए एक से अधिक समूह के लिए संभव है। - रासायनिक विषाक्त पदार्थ - रासायनिक विषाक्त पदार्थों में दोनों अकार्बनिक पदार्थ , जैसे कि पारा और कार्बन मोनोऑक्साइड, और कार्बनिक यौगिकों जैसे मेथिल अल्कोहल शामिल हैं। - जैविक विषाक्त पदार्थ - कई जीव विषाक्त यौगिकों को सिकुड़ते हैं। कुछ स्रोत रोगजनक जीवों को विषाक्त पदार्थ मानते हैं। जैविक विषाक्त पदार्थ का एक अच्छा उदाहरण टेटनस है। - शारीरिक विषाक्त पदार्थ - ये वे पदार्थ हैं जो जैविक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करते हैं। उदाहरणों में एस्बेस्टोस और सिलिका शामिल हैं। - विकिरण - विकिरण के कई जीवों पर एक जहरीला प्रभाव पड़ता है। उदाहरणों में गामा विकिरण और माइक्रोवेव शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CGBSE) कक्षा 10 और कक्षा 12 और वॉकेशनल स्ट्रीम सप्लीमेंट्री परीक्षा का शेड्यूल अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी कर दिया है। परीक्षा में उपस्थित होने वाले छात्र छत्तीसगढ़ बोर्ड की cgbse. nic. in पर जाकर शेड्यूल डाउनलोड कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CGBSE) कक्षा 10 और कक्षा 12 और वॉकेशनल स्ट्रीम सप्लीमेंट्री परीक्षा का शेड्यूल अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी कर दिया है। परीक्षा में उपस्थित होने वाले छात्र छत्तीसगढ़ बोर्ड की cgbse. nic. in पर जाकर शेड्यूल डाउनलोड कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ बोर्ड 28 नवंबर से 9 दिसंबर तक 10वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा आयोजित करेगा। कक्षा 12 की परीक्षाएं 28 नवंबर से 15 दिसंबर तक आयोजित की जाएंगी। छत्तीसगढ़ बोर्ड कक्षा 12वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षाएँ और कक्षा 12 की वॉकेशनल सप्लीमेंट्री परीक्षाएँ सुबह 8:30 से 11:30 बजे के बीच आयोजित की जाती हैं। परीक्षा कोविड -19 दिशानिर्देशों के अनुसार आयोजित की जाएगी, जैसा कि सरकार द्वारा सभी सामाजिक दूरियों के मानदंडों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार निर्धारित किया गया है। पिछले साल सीजीबीएसई 10वीं के परिणाम और कक्षा 12 के परिणाम 23 जून को आए थे। सीजीबीएसई बोर्ड से संबद्ध स्कूलों से कक्षा 10 की परीक्षा के लिए कुल 3,92,153 छात्र उपस्थित हुए थे, जिनमें से 73. 62 प्रतिशत उत्तीर्ण हुए हैं। सीजीबीएसई के तहत कक्षा 12 वीं की परीक्षा के लिए कुल 2,77,563 उपस्थित हुए थे और 70. 69 प्रतिशत छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण की है। जो उम्मीदवार असंतुष्ट हैं और जो छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा में असफल रहे हैं, वे कक्षा 10 और कक्षा 12 की पूरक परीक्षा दे सकेंगे।
छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन कक्षा दस और कक्षा बारह और वॉकेशनल स्ट्रीम सप्लीमेंट्री परीक्षा का शेड्यूल अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी कर दिया है। परीक्षा में उपस्थित होने वाले छात्र छत्तीसगढ़ बोर्ड की cgbse. nic. in पर जाकर शेड्यूल डाउनलोड कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन कक्षा दस और कक्षा बारह और वॉकेशनल स्ट्रीम सप्लीमेंट्री परीक्षा का शेड्यूल अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी कर दिया है। परीक्षा में उपस्थित होने वाले छात्र छत्तीसगढ़ बोर्ड की cgbse. nic. in पर जाकर शेड्यूल डाउनलोड कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ बोर्ड अट्ठाईस नवंबर से नौ दिसंबर तक दसवीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा आयोजित करेगा। कक्षा बारह की परीक्षाएं अट्ठाईस नवंबर से पंद्रह दिसंबर तक आयोजित की जाएंगी। छत्तीसगढ़ बोर्ड कक्षा बारहवीं की सप्लीमेंट्री परीक्षाएँ और कक्षा बारह की वॉकेशनल सप्लीमेंट्री परीक्षाएँ सुबह आठ:तीस से ग्यारह:तीस बजे के बीच आयोजित की जाती हैं। परीक्षा कोविड -उन्नीस दिशानिर्देशों के अनुसार आयोजित की जाएगी, जैसा कि सरकार द्वारा सभी सामाजिक दूरियों के मानदंडों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार निर्धारित किया गया है। पिछले साल सीजीबीएसई दसवीं के परिणाम और कक्षा बारह के परिणाम तेईस जून को आए थे। सीजीबीएसई बोर्ड से संबद्ध स्कूलों से कक्षा दस की परीक्षा के लिए कुल तीन,बानवे,एक सौ तिरेपन छात्र उपस्थित हुए थे, जिनमें से तिहत्तर. बासठ प्रतिशत उत्तीर्ण हुए हैं। सीजीबीएसई के तहत कक्षा बारह वीं की परीक्षा के लिए कुल दो,सतहत्तर,पाँच सौ तिरेसठ उपस्थित हुए थे और सत्तर. उनहत्तर प्रतिशत छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण की है। जो उम्मीदवार असंतुष्ट हैं और जो छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा में असफल रहे हैं, वे कक्षा दस और कक्षा बारह की पूरक परीक्षा दे सकेंगे।
किसी व्यक्ति की आईटीआर फाइलिंग विभिन्न कारणों से बीच में रह सकती है. मसलन, व्यक्ति अपना रिटर्न फाइल करना भूल सकता है, या पर्याप्त जानकारी के अभाव में फाइलिंग प्रक्रिया को बीच में ही छोड़ सकता है. इसके अलावा ऐसा भी होता है कि एक बार ड्यू डेट समाप्त हो जाने के बाद, लोग अपना आईटीआर दाखिल करने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए लापरवाह हो जाते हैं. 2. 5 लाख रुपये से अधिक की वार्षिक आय वाले व्यक्ति के लिए आईटीआर दाखिल करना आवश्यक है. (वरिष्ठ नागरिकों के लिए छूट की सीमा 3 लाख रुपये और अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए 5 लाख रुपये है) इसके अलावा यदि आपका कहीं टीडीएस कटा है तो भी आपको आयकर भरना होगा. भले ही इस सूरत में आपकी कुल आय निर्धारित छूट सीमा से कम ही क्यों न हो. कुछ छूटों के अलावा, अधिकांश करदाताओं को अपना आईटीआर ऑनलाइन दाखिल करने की आवश्यकता होती है. ऑनलाइन आईटीआर दाखिल करने के लिए भी, करदाताओं को आयकर पोर्टल पर लॉग इन करने के बाद दो विकल्प मिलते हैं - आईटीआर यूटिलिटी फाइल को डाउनलोड करने के बाद भरकर अपलोड करने का विकल्प. दूसरे विकल्प में आप ऑनलाइन फाइलिंग विकल्प को चुनकर सीधे पोर्टल पर जानकारी मुहैया कराते हैं. आईटीआर को वैरिफाई करना भी जरूरी होता है. आप आधार ओटीपी का इस्तेमाल करके या फिर बैंक खाते, नेट बैंकिंग या डीमैट खाते के माध्यम से उत्पन्न ईवीसी का उपयोग करके आईटीआर को वैरिफाई कर सकते हैं. इसके अलावा डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (डीएससी) का उपयोग करके भी इसे वैरिफाई किया जा सकता है. .
किसी व्यक्ति की आईटीआर फाइलिंग विभिन्न कारणों से बीच में रह सकती है. मसलन, व्यक्ति अपना रिटर्न फाइल करना भूल सकता है, या पर्याप्त जानकारी के अभाव में फाइलिंग प्रक्रिया को बीच में ही छोड़ सकता है. इसके अलावा ऐसा भी होता है कि एक बार ड्यू डेट समाप्त हो जाने के बाद, लोग अपना आईटीआर दाखिल करने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए लापरवाह हो जाते हैं. दो. पाँच लाख रुपये से अधिक की वार्षिक आय वाले व्यक्ति के लिए आईटीआर दाखिल करना आवश्यक है. इसके अलावा यदि आपका कहीं टीडीएस कटा है तो भी आपको आयकर भरना होगा. भले ही इस सूरत में आपकी कुल आय निर्धारित छूट सीमा से कम ही क्यों न हो. कुछ छूटों के अलावा, अधिकांश करदाताओं को अपना आईटीआर ऑनलाइन दाखिल करने की आवश्यकता होती है. ऑनलाइन आईटीआर दाखिल करने के लिए भी, करदाताओं को आयकर पोर्टल पर लॉग इन करने के बाद दो विकल्प मिलते हैं - आईटीआर यूटिलिटी फाइल को डाउनलोड करने के बाद भरकर अपलोड करने का विकल्प. दूसरे विकल्प में आप ऑनलाइन फाइलिंग विकल्प को चुनकर सीधे पोर्टल पर जानकारी मुहैया कराते हैं. आईटीआर को वैरिफाई करना भी जरूरी होता है. आप आधार ओटीपी का इस्तेमाल करके या फिर बैंक खाते, नेट बैंकिंग या डीमैट खाते के माध्यम से उत्पन्न ईवीसी का उपयोग करके आईटीआर को वैरिफाई कर सकते हैं. इसके अलावा डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र का उपयोग करके भी इसे वैरिफाई किया जा सकता है. .
देवलापार. मां... बताओ न मेरी क्या गलती है? छोटी हूं तो भी इस दूनिया में आने के लिए मैंने तो कोई जीद तो नहीं की थी. मां तुम्हारी वजह से मैं इस दूनिया में आई और इस दुनिया को देखा, लेकिन तुम्हारा ही चेहरा नहीं देख पाई. मै अनामिका. मेरा नाम, मेरा घर, मेरे माता-पिता कौन है, यह तक मुझे नहीं पता. इस स्वार्थी दुनिया में मां के रूप में तूम मेरी रक्षा करोगी,शायद यह भगवान को पता था. इसलिए उन्होने मुझो इस दूनिया में भेजा होगा. लेकिन मां तुमने तो मुझे कपड़े में लपेटकर सड़क पर ही फेंक दिया, तू इतनी निर्दयी कैसे हो गई? मां. . बताओं मेरी क्या गलती थी? एक नवजात भ्रुण शायद यही सवाल अपनी जन्मदाता मां को पूछ रही है. एक मां ने अपने पेट के गोले को बड़ी ही निर्दयता से जंगली जानवरों के हवाले एक खेत में फेंक दिया. देशाभर में बच्चियों के साथ आए दिन कोई न कोई घटनाएं हो रही है, ऐसे में यह दिल झकझोर देनेवाली घटना रामटेक पुलिस स्टेशन अंतर्गत आनेवाले नीमटोल में प्रकाश में आई है. बुधवार की रात करीब 11 बजे निमटोला की सुनिता हंसराज कुमरे (40) यह अपने खेत में अपने बेटी के साथ खेत की रखवाली करने गई थी. एसे उसके खेत में घास से बने झोपड़े में छोटे बच्चे की रोने की आवाज आई. इतनी रात गये छोटे बच्चे की आवाज उसने झोपड़ी में जाकर देखा तो, वहां के मचान पर एक नवजात बच्ची दिखी. आसपास नवजात की मां या किसी और ढूंढा पर कोई नजर नहीं आया. एसे कुछ अजीब लगा, लेकिन लावारिस नवजात शिशु मिलने से वह घबरा सी गई. उसने ग्रामवासियों के माध्यम से पुलिस को इसकी जानकारी दी. सूचना मिलते ही थानेदार प्रवीण बोरकुटे अपने स्टाफ सहित घटनास्थल पर पहुंचे. महिला पुलिस उप निरीक्षक लक्ष्मी एस. घोडके उस बच्ची को उठाकर उसके माता-पिता की खोजबिन की. परंतु, कुछ पता नहीं चल पाया. इसके बाद बच्ची को महिला पुलिस कर्मचारी स्नेहा डोंगरे के हाथों सहीसलामत बच्ची की देखभाल करने के लिए मेडिकल हॉस्पिटल नागपुर में भर्ती किया गया. इस अज्ञात बच्ची के माता-पिता के खिलाफ सुनिता हंसराज कुमरे की जुबानी शिकायत पर भादवि की धारा 317 के तहत मामला दर्ज किया गया. आगे की जांच पुलिस निरीक्षक राकेश नलगुंडवार द्वारा की जा रही है. अनैतिक संबंधों का परिणाम ? यह बच्चा अनैतिक संबंधों से या फिर लड़की होने उसे इस तरह लावारिस छोड़ दिया होगा, ऐसी चर्चा परिसर में हो रही है. उसी प्रकार इस बच्ची का किसी को कुछ पता नहीं चल सके या फिर जंगली जानवर इसे खा जाए और सारे सुराग नष्ट हो जाए, इस उद्देश्य से, बच्ची को फेंकने की भी चर्चा गांव में हो रही है.
देवलापार. मां... बताओ न मेरी क्या गलती है? छोटी हूं तो भी इस दूनिया में आने के लिए मैंने तो कोई जीद तो नहीं की थी. मां तुम्हारी वजह से मैं इस दूनिया में आई और इस दुनिया को देखा, लेकिन तुम्हारा ही चेहरा नहीं देख पाई. मै अनामिका. मेरा नाम, मेरा घर, मेरे माता-पिता कौन है, यह तक मुझे नहीं पता. इस स्वार्थी दुनिया में मां के रूप में तूम मेरी रक्षा करोगी,शायद यह भगवान को पता था. इसलिए उन्होने मुझो इस दूनिया में भेजा होगा. लेकिन मां तुमने तो मुझे कपड़े में लपेटकर सड़क पर ही फेंक दिया, तू इतनी निर्दयी कैसे हो गई? मां. . बताओं मेरी क्या गलती थी? एक नवजात भ्रुण शायद यही सवाल अपनी जन्मदाता मां को पूछ रही है. एक मां ने अपने पेट के गोले को बड़ी ही निर्दयता से जंगली जानवरों के हवाले एक खेत में फेंक दिया. देशाभर में बच्चियों के साथ आए दिन कोई न कोई घटनाएं हो रही है, ऐसे में यह दिल झकझोर देनेवाली घटना रामटेक पुलिस स्टेशन अंतर्गत आनेवाले नीमटोल में प्रकाश में आई है. बुधवार की रात करीब ग्यारह बजे निमटोला की सुनिता हंसराज कुमरे यह अपने खेत में अपने बेटी के साथ खेत की रखवाली करने गई थी. एसे उसके खेत में घास से बने झोपड़े में छोटे बच्चे की रोने की आवाज आई. इतनी रात गये छोटे बच्चे की आवाज उसने झोपड़ी में जाकर देखा तो, वहां के मचान पर एक नवजात बच्ची दिखी. आसपास नवजात की मां या किसी और ढूंढा पर कोई नजर नहीं आया. एसे कुछ अजीब लगा, लेकिन लावारिस नवजात शिशु मिलने से वह घबरा सी गई. उसने ग्रामवासियों के माध्यम से पुलिस को इसकी जानकारी दी. सूचना मिलते ही थानेदार प्रवीण बोरकुटे अपने स्टाफ सहित घटनास्थल पर पहुंचे. महिला पुलिस उप निरीक्षक लक्ष्मी एस. घोडके उस बच्ची को उठाकर उसके माता-पिता की खोजबिन की. परंतु, कुछ पता नहीं चल पाया. इसके बाद बच्ची को महिला पुलिस कर्मचारी स्नेहा डोंगरे के हाथों सहीसलामत बच्ची की देखभाल करने के लिए मेडिकल हॉस्पिटल नागपुर में भर्ती किया गया. इस अज्ञात बच्ची के माता-पिता के खिलाफ सुनिता हंसराज कुमरे की जुबानी शिकायत पर भादवि की धारा तीन सौ सत्रह के तहत मामला दर्ज किया गया. आगे की जांच पुलिस निरीक्षक राकेश नलगुंडवार द्वारा की जा रही है. अनैतिक संबंधों का परिणाम ? यह बच्चा अनैतिक संबंधों से या फिर लड़की होने उसे इस तरह लावारिस छोड़ दिया होगा, ऐसी चर्चा परिसर में हो रही है. उसी प्रकार इस बच्ची का किसी को कुछ पता नहीं चल सके या फिर जंगली जानवर इसे खा जाए और सारे सुराग नष्ट हो जाए, इस उद्देश्य से, बच्ची को फेंकने की भी चर्चा गांव में हो रही है.
Ranji Trophy 2022 : आईपीएल 2022 खत्म होने के बाद अब भारतीय खिलाड़ी दूसरे टूर्नामेंट खेलने में व्यस्त हो गए हैं। टीम इंडिया नौ जून से दक्षिण अफ्रीका से मुकाबला करेगी, इस सीरीज के लिए जो खिलाड़ी नहीं चुने गए हैं, वो रणजी ट्रॉफी खेलने लगे हैं। सोमवार से ही रणजी ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल के मुकाबले शुरू हुए हैं। इस बीच आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स की ओर से खेलने वाले सरफराज खान ने एक और शतक ठोक दिया है। आईपीएल 2022 में उनका बल्ला ज्यादा कुछ नहीं चला, लेकिन रणजी ट्रॉफी में मुंबई की ओर से खेलते हुए सरफराज खान ने उत्तराखंड के खिलाफ जबरदस्त शतक लगाया। खास बात ये है कि पिछली 13 रणजी ट्रॉफी पारियों में से ऐसा छठी बार हुआ है कि सरफराज खान ने 150 से ज्यादा रन की पारी खेली हो। सरफराज खान ने रणजी ट्रॉफी के इस सीजन में तीसरा शतक लगाया है। वे अब 600 से अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। रणजी ट्रॉफी 2022 में उनके ही नाम सबसे ज्यादा रन हैं, यानी वे नंबर एक पर चल रहे हैं। उनके नाम अब तक 650 से ज्यादा रन हो गए हैं। इस मामले में दूसरे नंबर पर चेतन विष्ट हैं, उन्होंने भी 600 से ज्यादा रन बनाए हैं। वहीं शाकिबुल गानी के नाम पर भी 600 से ज्यादा रन हैं। इन तीन बल्लेबाजों के अलावा कोई और खिलाड़ी अब तक 600 से ज्यादा रन बनाने में कामयाब नहीं हो पाया है। सरफराज खान ने उत्तराखंड के खिलाफ मंगलवार को अपना शतक पूरा किया। उन्होंने 205 गेंदों का सामना किया और 153 रन की विस्फोटक पारी खेली। इस दौरान सरफराज खान ने 14 चौके और चार छक्के लगाए। लगातार सभी गेंदबाजों की पिटाई करने के बाद आखिरकार मयंक मिश्रा उन्हें आउट करने में कामयाब रहे। पृथ्वी शॉ और यशस्वी जायसवाल के जल्दी आउट होने के बाद भी सरफराज की पारी की बदौलत मुंबई ने अच्छा स्कोर कर लिया है। टीम ने पांच विकेट पर 450 से ज्यादा का स्कोर टांग दिया है।
Ranji Trophy दो हज़ार बाईस : आईपीएल दो हज़ार बाईस खत्म होने के बाद अब भारतीय खिलाड़ी दूसरे टूर्नामेंट खेलने में व्यस्त हो गए हैं। टीम इंडिया नौ जून से दक्षिण अफ्रीका से मुकाबला करेगी, इस सीरीज के लिए जो खिलाड़ी नहीं चुने गए हैं, वो रणजी ट्रॉफी खेलने लगे हैं। सोमवार से ही रणजी ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल के मुकाबले शुरू हुए हैं। इस बीच आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स की ओर से खेलने वाले सरफराज खान ने एक और शतक ठोक दिया है। आईपीएल दो हज़ार बाईस में उनका बल्ला ज्यादा कुछ नहीं चला, लेकिन रणजी ट्रॉफी में मुंबई की ओर से खेलते हुए सरफराज खान ने उत्तराखंड के खिलाफ जबरदस्त शतक लगाया। खास बात ये है कि पिछली तेरह रणजी ट्रॉफी पारियों में से ऐसा छठी बार हुआ है कि सरफराज खान ने एक सौ पचास से ज्यादा रन की पारी खेली हो। सरफराज खान ने रणजी ट्रॉफी के इस सीजन में तीसरा शतक लगाया है। वे अब छः सौ से अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। रणजी ट्रॉफी दो हज़ार बाईस में उनके ही नाम सबसे ज्यादा रन हैं, यानी वे नंबर एक पर चल रहे हैं। उनके नाम अब तक छः सौ पचास से ज्यादा रन हो गए हैं। इस मामले में दूसरे नंबर पर चेतन विष्ट हैं, उन्होंने भी छः सौ से ज्यादा रन बनाए हैं। वहीं शाकिबुल गानी के नाम पर भी छः सौ से ज्यादा रन हैं। इन तीन बल्लेबाजों के अलावा कोई और खिलाड़ी अब तक छः सौ से ज्यादा रन बनाने में कामयाब नहीं हो पाया है। सरफराज खान ने उत्तराखंड के खिलाफ मंगलवार को अपना शतक पूरा किया। उन्होंने दो सौ पाँच गेंदों का सामना किया और एक सौ तिरेपन रन की विस्फोटक पारी खेली। इस दौरान सरफराज खान ने चौदह चौके और चार छक्के लगाए। लगातार सभी गेंदबाजों की पिटाई करने के बाद आखिरकार मयंक मिश्रा उन्हें आउट करने में कामयाब रहे। पृथ्वी शॉ और यशस्वी जायसवाल के जल्दी आउट होने के बाद भी सरफराज की पारी की बदौलत मुंबई ने अच्छा स्कोर कर लिया है। टीम ने पांच विकेट पर चार सौ पचास से ज्यादा का स्कोर टांग दिया है।
छ्तरपुर जिले के ब्लाक ईसानगर के गांव इकारा में लोगों का हाल बेहाल। तीन महीने से हैंडपंप खराब हैं और ऊपर से गर्मी का मौसम। साधू विश्वकर्मा का कहना है कि पानी की बड़ी दिक्कत है पीने वाला पानी उसी हैंडपंप से भरते हैं। सूखा वैसे भी पड़ा है और गर्मी भी पड़ रही है। यही वजह है की पूरे गांव को पानी की समस्या सता रही है। दो हैंडपंप हैं जिससे सब लोग पानी लाते हैं और अगर वो भी खराब हो गया तो पानी की बहुत ज्यादा दिक्कते होगी। संध्या विश्वकर्मा ने बताया कि हैंडपंप को ऊपर करते ही छल्ला निकल जाता है। बार-बार गिरने की वजह से हम लोगों को छल्ला सुधरवाने में घंटों लग जाता है। उसके बाद भी वही स्थिति रहती है। गांव में तीन हैंडपंप हैं लेकिन इस हैंडपंप को छोड़कर सब खराब पड़े हैं। पूरा गांव इसी हैंडपंप से पानी भरते हैं।एक आहिरवार बस्ती में है उसमें पानी नहीं निकलता है। मातादीन पाल ने बताया कि चैन खराब है और उसमें चार-पांच पाइप कम है। माया का कहना है कि पानी लेने दूसरे हैंडपंप जाना पड़ता है उसमें भी यही दिक्कतें हैं। दो तीन बार शिकायत भी की है, तीन महिना का बिगड़ा हैंडपंप है। सरपंच कुंवर राजपूत ने बताया कि जब भी फोन करते है तो बस पता पूछकर कह देते है की हो जायेगा आज से पन्द्रह दिन हो गया फोन करते हुए, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अभी परसों ही मैंने फोन करके कहा है कि इन्हीं हैंडपंपों को सुधरवा दिया जाए क्योंकि पानी की बहुत ज्यादा समस्या है। कार्यपालन यंत्री एस.के.जैन का कहना है कि अगर वास्तव में जांच के दौरान कुछ खराब पाया जाता है तो उसको सुधरवाया जायेगा।
छ्तरपुर जिले के ब्लाक ईसानगर के गांव इकारा में लोगों का हाल बेहाल। तीन महीने से हैंडपंप खराब हैं और ऊपर से गर्मी का मौसम। साधू विश्वकर्मा का कहना है कि पानी की बड़ी दिक्कत है पीने वाला पानी उसी हैंडपंप से भरते हैं। सूखा वैसे भी पड़ा है और गर्मी भी पड़ रही है। यही वजह है की पूरे गांव को पानी की समस्या सता रही है। दो हैंडपंप हैं जिससे सब लोग पानी लाते हैं और अगर वो भी खराब हो गया तो पानी की बहुत ज्यादा दिक्कते होगी। संध्या विश्वकर्मा ने बताया कि हैंडपंप को ऊपर करते ही छल्ला निकल जाता है। बार-बार गिरने की वजह से हम लोगों को छल्ला सुधरवाने में घंटों लग जाता है। उसके बाद भी वही स्थिति रहती है। गांव में तीन हैंडपंप हैं लेकिन इस हैंडपंप को छोड़कर सब खराब पड़े हैं। पूरा गांव इसी हैंडपंप से पानी भरते हैं।एक आहिरवार बस्ती में है उसमें पानी नहीं निकलता है। मातादीन पाल ने बताया कि चैन खराब है और उसमें चार-पांच पाइप कम है। माया का कहना है कि पानी लेने दूसरे हैंडपंप जाना पड़ता है उसमें भी यही दिक्कतें हैं। दो तीन बार शिकायत भी की है, तीन महिना का बिगड़ा हैंडपंप है। सरपंच कुंवर राजपूत ने बताया कि जब भी फोन करते है तो बस पता पूछकर कह देते है की हो जायेगा आज से पन्द्रह दिन हो गया फोन करते हुए, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अभी परसों ही मैंने फोन करके कहा है कि इन्हीं हैंडपंपों को सुधरवा दिया जाए क्योंकि पानी की बहुत ज्यादा समस्या है। कार्यपालन यंत्री एस.के.जैन का कहना है कि अगर वास्तव में जांच के दौरान कुछ खराब पाया जाता है तो उसको सुधरवाया जायेगा।
व्याख्या - यहाॅ 'सजस्य' पदके द्वारा सम्यक चारित्रके स्वामी - का निर्देश किया गया है और उसे सम्यग्ज्ञानी वतलाया गया है । इससे स्पष्ट है कि जो सम्यग्ज्ञानी नहीं उसके सम्यक चारित्र - होता ही नहीं - मात्र चारित्र-विषयक कुछ क्रियाकलेसे ही सम्यक्चारित्र नहीं बनता, उसके लिये पहले सम्यग्ज्ञानका होना आवश्यक है । हिंसाके लिये इसी ग्रन्थमं आगे 'प्रारणातिपात' ( प्राणव्यपरोपण, प्राणघात), 'वध' तथा 'हति' का, अनृतके लिये 'वितथ' 'लीक' तथा मृपाका एवं फलितार्थ के रूपमे असत्यका; चौर्यके लिये 'स्तेय' का, मैथुनसेवाके लिये 'काम' तथा 'स्मर' का एव फलितार्थरुपमे 'अब्रह्म' का, और परिग्रहके लिये 'सग', 'सू ( ममत्वपरिणाम ) तथा 'इच्छा' का भी प्रयोग किया गया है । । और इसलिये अपने अपने बर्गके इन शब्दोंको एकार्थक, पर्यायनाम अथवा एक दूसरेका नामान्तर समझना चाहिए । सकलं विकलं चरणं तत्सकलं सर्वसंग - विरतानाम् । अनगाराणां, विकलं सागाराणां ससंगानाम् ॥४॥५०॥ ( पूर्वनिर्दिष्ट हिंसादि-विरति लक्षण) चारित्र 'सकल' (परिपूर्ण ) और 'विकल' (अपूर्ण) रूप होता है - महाव्रत -अणुव्रतके भेदसे उसके दो भेद है । सर्वसंगसे-वाह्य तथा प्राभ्यन्तर दोनो प्रकारके पह से - विरक्त गृहत्यागी मुनियाका जो चारित्र है वह सकलचारित्र ‡ देखो, हिंसावर्गके लिये कारिका ५२, ५३, ५४, ७२, ७५ से ७८, ८४, अनृतवर्गके लिये कारिका ५२, ५५, ५६, चौर्यवर्गके लिये कारिका ५२, ५७, मैथुनसेवावर्गके लिये कारिका ५२, ६०, १४३, और परिग्रहबर्गके लिये कारिका ५०, ६१ । कारिका ५० ] (सर्वसयम) है, और परिग्रहसहित गृहस्थोंका जो चारित्र है वह 'विकलचारित्र' (देशसयम ) है ।' व्याख्या - यहाँ चारित्रके दो भेद करके उनके स्वामियोंका निर्देश किया गया है । महाव्रतरूप सकलचारित्रके स्वामी ( अधिकारी) उन गारों (गृहत्यागियों) को बतलाया है जो सपूर्णपरिग्रहसे विरक्त हैं, और अणुव्रतरूप विकलचारित्रके स्वामी उन सागारों (गृहस्थों) को प्रकट किया है जो परिग्रहसहित हैं और इसलिये दोनोंके 'सर्वसंगविरत' और 'ससग' इन दो अलग-अलग विश्लेषणों से स्पष्ट है कि जो अगर सर्वसंगसे विरक्त नहीं हैं जिनके मिथ्यात्वादिक कोई प्रकारका परिग्रह लगा हुआ है वे गृहत्यागी होनेपर भी सकलचारित्रके पात्र या स्वामी नहीं - - यथार्थ में महाव्रती अथवा सकलसंयमी नहीं कहे जा सकते, जैसे कि द्रव्यलिंगी मुनि, आधुनिक परिग्रहधारी भट्टारक तथा ११ वीं प्रतिमामे स्थित क्षुल्लक-ऐलक । और जो सागार किसी समय सकलसगसे विरक्त है उन्हें उस समय गृहमें स्थित होने मात्रसे सर्वथा विकलचारित्री (अ) नहीं कह सकते - उस असगदशामें महाव्रत की ओर बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि प्रथकारमहादयने सामायिकमे स्थित ऐसे गृहस्थोंको 'यति भावको प्राप्त हुआ मुनि' लिखा है ( कारिका १०२) और मोही मुनिसे निर्मोही गृहस्थको श्रेष्ठ बतलाया है (का. ३३) । और इससे यह नतीजा निकलता है कि चारित्रके 'सकल' या 'विकल' होनेमे प्रधान कारण उभय प्रकारके परिग्रहसे विरक्ति तथा अविरक्ति है - मात्र गृहका त्यागी या अत्यागी होना नहीं है। श्रुत' 'सर्वसगविरत' और 'ससंग' ये दोनों विशेषण अपना खास महत्व रखते है और किसी तरह भी उपेक्षणीय नहीं कहे जा सकते । समीचीन-धर्मशास्त्र व्रतभेदरूप गृहस्थचारित्र गृहिणां त्रेधा तिष्ठत्यणु-गुण-शिक्षा-व्रतात्मकं चरणम् । पंच त्रिचतुर्भेदं त्र्यं यथासंख्यमाख्यातम् ॥५॥५१॥ 'गृहस्थोंका (विकल) चारित्र अणुव्रत गुणव्रत - शिक्षाव्रतरूपसे तीन प्रकारका होता है। और वह व्रतत्रयात्मक चारित्र क्रमशः पांच-तीन-चार भेदोंको लिये हुए कहा गया है -- प्रर्थात् प्रव्रतके पाच, गुरगव्रतके तीन और शिक्षाव्रतके चार भेद होते हैं ।' व्याख्या - यहाँ गृहस्थोंके विकल-चारित्रके अगरूपमें जिन 'पांच अगुव्रतों, तीन गुणव्रतों और चार शिक्षाव्रतोंकी सूचना की गई है उनमें अणुव्रत चारित्रकी उत्पत्तिके अंगरूपमें गुरणव्रत चारित्रकी वृद्धि और शिक्षाव्रत चारित्रकी रक्षाके अंगरूपमें स्थित है। आगे ग्रन्थकारमहोदय विकल चारित्रके इन भेदों तथा उपभेदोंका क्रमशः लक्षण - पुरस्सर वर्णन करते हैं । प्राणातिपात वितथव्याहार-स्तेय काम-मूर्च्छाभ्यः । स्थूलेभ्यः पापेभ्यः व्युपरमणमणुव्रतं भवति ॥६॥५२॥ 'स्थूलप्राणातिपात -मोटे रूपमें प्राणोके घातरूप स्थूल हिंसा, स्थूलवितथव्याहार-मोटे रूपमे अन्यथा कथनरूप' स्थूलसत्य---, स्थूलस्तेय - मोटे रूपमें परघन हरणादिरूप स्थूलचौर्य (चोरी), स्थूलकाम ~~-मोटे रूपमें मैथुन सेवारूप स्थूल प्रब्रह्म-मीर स्थूलमूर्च्छामोटे रूपमें ममत्वपरिणामरूप स्थूल-परिग्रह, इन (पाच) पार्पोसे जो विरक्त होना है उसका नाम 'त' है ।' + 'मूर्च्छपः' इति टनरम् ।
व्याख्या - यहाॅ 'सजस्य' पदके द्वारा सम्यक चारित्रके स्वामी - का निर्देश किया गया है और उसे सम्यग्ज्ञानी वतलाया गया है । इससे स्पष्ट है कि जो सम्यग्ज्ञानी नहीं उसके सम्यक चारित्र - होता ही नहीं - मात्र चारित्र-विषयक कुछ क्रियाकलेसे ही सम्यक्चारित्र नहीं बनता, उसके लिये पहले सम्यग्ज्ञानका होना आवश्यक है । हिंसाके लिये इसी ग्रन्थमं आगे 'प्रारणातिपात' , 'वध' तथा 'हति' का, अनृतके लिये 'वितथ' 'लीक' तथा मृपाका एवं फलितार्थ के रूपमे असत्यका; चौर्यके लिये 'स्तेय' का, मैथुनसेवाके लिये 'काम' तथा 'स्मर' का एव फलितार्थरुपमे 'अब्रह्म' का, और परिग्रहके लिये 'सग', 'सू तथा 'इच्छा' का भी प्रयोग किया गया है । । और इसलिये अपने अपने बर्गके इन शब्दोंको एकार्थक, पर्यायनाम अथवा एक दूसरेका नामान्तर समझना चाहिए । सकलं विकलं चरणं तत्सकलं सर्वसंग - विरतानाम् । अनगाराणां, विकलं सागाराणां ससंगानाम् ॥चार॥पचास॥ चारित्र 'सकल' और 'विकल' रूप होता है - महाव्रत -अणुव्रतके भेदसे उसके दो भेद है । सर्वसंगसे-वाह्य तथा प्राभ्यन्तर दोनो प्रकारके पह से - विरक्त गृहत्यागी मुनियाका जो चारित्र है वह सकलचारित्र ‡ देखो, हिंसावर्गके लिये कारिका बावन, तिरेपन, चौवन, बहत्तर, पचहत्तर से अठहत्तर, चौरासी, अनृतवर्गके लिये कारिका बावन, पचपन, छप्पन, चौर्यवर्गके लिये कारिका बावन, सत्तावन, मैथुनसेवावर्गके लिये कारिका बावन, साठ, एक सौ तैंतालीस, और परिग्रहबर्गके लिये कारिका पचास, इकसठ । कारिका पचास ] है, और परिग्रहसहित गृहस्थोंका जो चारित्र है वह 'विकलचारित्र' है ।' व्याख्या - यहाँ चारित्रके दो भेद करके उनके स्वामियोंका निर्देश किया गया है । महाव्रतरूप सकलचारित्रके स्वामी उन गारों को बतलाया है जो सपूर्णपरिग्रहसे विरक्त हैं, और अणुव्रतरूप विकलचारित्रके स्वामी उन सागारों को प्रकट किया है जो परिग्रहसहित हैं और इसलिये दोनोंके 'सर्वसंगविरत' और 'ससग' इन दो अलग-अलग विश्लेषणों से स्पष्ट है कि जो अगर सर्वसंगसे विरक्त नहीं हैं जिनके मिथ्यात्वादिक कोई प्रकारका परिग्रह लगा हुआ है वे गृहत्यागी होनेपर भी सकलचारित्रके पात्र या स्वामी नहीं - - यथार्थ में महाव्रती अथवा सकलसंयमी नहीं कहे जा सकते, जैसे कि द्रव्यलिंगी मुनि, आधुनिक परिग्रहधारी भट्टारक तथा ग्यारह वीं प्रतिमामे स्थित क्षुल्लक-ऐलक । और जो सागार किसी समय सकलसगसे विरक्त है उन्हें उस समय गृहमें स्थित होने मात्रसे सर्वथा विकलचारित्री नहीं कह सकते - उस असगदशामें महाव्रत की ओर बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि प्रथकारमहादयने सामायिकमे स्थित ऐसे गृहस्थोंको 'यति भावको प्राप्त हुआ मुनि' लिखा है और मोही मुनिसे निर्मोही गृहस्थको श्रेष्ठ बतलाया है । और इससे यह नतीजा निकलता है कि चारित्रके 'सकल' या 'विकल' होनेमे प्रधान कारण उभय प्रकारके परिग्रहसे विरक्ति तथा अविरक्ति है - मात्र गृहका त्यागी या अत्यागी होना नहीं है। श्रुत' 'सर्वसगविरत' और 'ससंग' ये दोनों विशेषण अपना खास महत्व रखते है और किसी तरह भी उपेक्षणीय नहीं कहे जा सकते । समीचीन-धर्मशास्त्र व्रतभेदरूप गृहस्थचारित्र गृहिणां त्रेधा तिष्ठत्यणु-गुण-शिक्षा-व्रतात्मकं चरणम् । पंच त्रिचतुर्भेदं त्र्यं यथासंख्यमाख्यातम् ॥पाँच॥इक्यावन॥ 'गृहस्थोंका चारित्र अणुव्रत गुणव्रत - शिक्षाव्रतरूपसे तीन प्रकारका होता है। और वह व्रतत्रयात्मक चारित्र क्रमशः पांच-तीन-चार भेदोंको लिये हुए कहा गया है -- प्रर्थात् प्रव्रतके पाच, गुरगव्रतके तीन और शिक्षाव्रतके चार भेद होते हैं ।' व्याख्या - यहाँ गृहस्थोंके विकल-चारित्रके अगरूपमें जिन 'पांच अगुव्रतों, तीन गुणव्रतों और चार शिक्षाव्रतोंकी सूचना की गई है उनमें अणुव्रत चारित्रकी उत्पत्तिके अंगरूपमें गुरणव्रत चारित्रकी वृद्धि और शिक्षाव्रत चारित्रकी रक्षाके अंगरूपमें स्थित है। आगे ग्रन्थकारमहोदय विकल चारित्रके इन भेदों तथा उपभेदोंका क्रमशः लक्षण - पुरस्सर वर्णन करते हैं । प्राणातिपात वितथव्याहार-स्तेय काम-मूर्च्छाभ्यः । स्थूलेभ्यः पापेभ्यः व्युपरमणमणुव्रतं भवति ॥छः॥बावन॥ 'स्थूलप्राणातिपात -मोटे रूपमें प्राणोके घातरूप स्थूल हिंसा, स्थूलवितथव्याहार-मोटे रूपमे अन्यथा कथनरूप' स्थूलसत्य---, स्थूलस्तेय - मोटे रूपमें परघन हरणादिरूप स्थूलचौर्य , स्थूलकाम ~~-मोटे रूपमें मैथुन सेवारूप स्थूल प्रब्रह्म-मीर स्थूलमूर्च्छामोटे रूपमें ममत्वपरिणामरूप स्थूल-परिग्रह, इन पार्पोसे जो विरक्त होना है उसका नाम 'त' है ।' + 'मूर्च्छपः' इति टनरम् ।
UP पुलिस को बिहार के एक ऐसे टीचर की तलाश है जो नाबालिग का अपहरण नेपाल पहुंचा दिया है। UP में तलाश के बाद अब पुलिस नेपाल में सुराग लगा रही है। इसके साथ ही बिहार पुलिस की मदद से सीतामढ़ी में छापेमारी की जा रही है। कई दिनों से पुलिस आरोपित की गिरफ्तारी को लेकर प्रयास में जुटी थी, लेकिन वह हाथ नहीं आया। UP पुलिस ने आरोपित टीचर को भगोड़ा घोषित करा दिया है और रविवार को UP पुलिस ने बिहार पुलिस के सहयोग से आरोपित के घर नोटिस चिपका दी है। सीतामढ़ी जिले के परिहार थाना क्षेत्र के बुरहवा गांव का रहने वाला दीपक चौहार उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के छावनी थाना क्षेत्र में रहता था। वह वहां बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का काम कर रहा था। उत्तर प्रदेश की बस्ती जिले की पुलिस का कहना है कि टीचर होने के बाद भी दीपक की गतिविधियां काफी संदिग्ध रही है। नाबालिग बच्चियों के गार्जियंस जब तक कुछ शिकायत कर पाते, वह बड़ी घटना कर दिया। 2020 में फरवरी माह में वह एक नाबालिग का अपहरण कर लिया। इस घटना के बाद हड़कंप मच गया और टीचर की तलाश गार्जियंस के साथ पुलिस भी करने लगी। पुलिस ने इस मामले में बस्ती जिले के छावनी थाना में अपहरण का मुकदमा दर्ज किया। यूपी के बस्ती जिले के SP आशीष श्रीवास्तव ने आरोपित की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम को लगया। इस दौरान बिहार के कई ठिकानों पर पुलिस ने छापेमारी भी की लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस को सुराग लगा है कि आरोपित अपहृत नाबालिग को लेकर बिहार आया फिर नेपाल चला गया। काफी छापेमारी के बाद पुलिस ने आरोपी को भगोड़ा घोषित करा दिया है। सीतामढ़ी जिले में कई छापेमारी के बाद यूपी पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर बिहार पुलिस की मदद से 82 CRPC की कार्रवाई शुरू कर दी है। रविवार को आरोपित के घर नोटिस चस्पा दी गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हुई तो उसके घर की कुर्की जब्ती की जाएगी। 30 जुलाई को यूपी के बस्ती जिला न्यायालय के आदेश पर हुई कार्रवाई में बिहार पुलिस सहयोग में लगी है। यूपी के छावनी के थानाध्यक्ष आलोक श्रीवास्तव ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि कई छापेमारी में बाद भी नाबालिग को अपहृत करने वाला हाथ नहीं आया है। बिहार पुलिस की मदद से कई बार संभावित ठिकानों पर छापेमारी की गई लेकिन सुराग लगा कि टीचर नाबालिग को नेपाल में छिपाकर रखा है। नाबालिग के परिवार वालों को किसी अनहोनी का डर सता रहा है। वह बार बार पुलिस नाबालिग काे सुरक्षित बरामद करने की मांग कर रहे हैं। घर वालों को आशंका है कि कहीं उसकी बेटी को नेपाल में बेच न दिया जाए। इससे पुलिस भी काफी एक्टिव है और यूपी से लेकर बिहार में आरोपित की तलाश की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
UP पुलिस को बिहार के एक ऐसे टीचर की तलाश है जो नाबालिग का अपहरण नेपाल पहुंचा दिया है। UP में तलाश के बाद अब पुलिस नेपाल में सुराग लगा रही है। इसके साथ ही बिहार पुलिस की मदद से सीतामढ़ी में छापेमारी की जा रही है। कई दिनों से पुलिस आरोपित की गिरफ्तारी को लेकर प्रयास में जुटी थी, लेकिन वह हाथ नहीं आया। UP पुलिस ने आरोपित टीचर को भगोड़ा घोषित करा दिया है और रविवार को UP पुलिस ने बिहार पुलिस के सहयोग से आरोपित के घर नोटिस चिपका दी है। सीतामढ़ी जिले के परिहार थाना क्षेत्र के बुरहवा गांव का रहने वाला दीपक चौहार उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के छावनी थाना क्षेत्र में रहता था। वह वहां बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का काम कर रहा था। उत्तर प्रदेश की बस्ती जिले की पुलिस का कहना है कि टीचर होने के बाद भी दीपक की गतिविधियां काफी संदिग्ध रही है। नाबालिग बच्चियों के गार्जियंस जब तक कुछ शिकायत कर पाते, वह बड़ी घटना कर दिया। दो हज़ार बीस में फरवरी माह में वह एक नाबालिग का अपहरण कर लिया। इस घटना के बाद हड़कंप मच गया और टीचर की तलाश गार्जियंस के साथ पुलिस भी करने लगी। पुलिस ने इस मामले में बस्ती जिले के छावनी थाना में अपहरण का मुकदमा दर्ज किया। यूपी के बस्ती जिले के SP आशीष श्रीवास्तव ने आरोपित की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम को लगया। इस दौरान बिहार के कई ठिकानों पर पुलिस ने छापेमारी भी की लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस को सुराग लगा है कि आरोपित अपहृत नाबालिग को लेकर बिहार आया फिर नेपाल चला गया। काफी छापेमारी के बाद पुलिस ने आरोपी को भगोड़ा घोषित करा दिया है। सीतामढ़ी जिले में कई छापेमारी के बाद यूपी पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर बिहार पुलिस की मदद से बयासी CRPC की कार्रवाई शुरू कर दी है। रविवार को आरोपित के घर नोटिस चस्पा दी गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हुई तो उसके घर की कुर्की जब्ती की जाएगी। तीस जुलाई को यूपी के बस्ती जिला न्यायालय के आदेश पर हुई कार्रवाई में बिहार पुलिस सहयोग में लगी है। यूपी के छावनी के थानाध्यक्ष आलोक श्रीवास्तव ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि कई छापेमारी में बाद भी नाबालिग को अपहृत करने वाला हाथ नहीं आया है। बिहार पुलिस की मदद से कई बार संभावित ठिकानों पर छापेमारी की गई लेकिन सुराग लगा कि टीचर नाबालिग को नेपाल में छिपाकर रखा है। नाबालिग के परिवार वालों को किसी अनहोनी का डर सता रहा है। वह बार बार पुलिस नाबालिग काे सुरक्षित बरामद करने की मांग कर रहे हैं। घर वालों को आशंका है कि कहीं उसकी बेटी को नेपाल में बेच न दिया जाए। इससे पुलिस भी काफी एक्टिव है और यूपी से लेकर बिहार में आरोपित की तलाश की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
- 54 min ago ब्लैक फ़िल्म में छोटी रानी मुखर्जी का किरदार निभाने वाली आयशा को रणबीर ने दी थी ट्रेनिंग, अब कहां है ये बच्ची? Don't Miss! 9 नवंबर जहां भारत और बाकी देशों में अक्षय कुमार की फिल्म 'लक्ष्मी' को डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज किया गया था। वहीं, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और फिजी में फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। मार्च 2020 के बाद थियेट्रिकल रिलीज पाने वाली यह पहली बॉलीवुड फिल्म है। राघव लॉरेंस के निर्देशन में बनी यह हॉरर- कॉमेडी फिल्म 9 नवंबर को रिलीज हुई है। भारत में फिल्म को समीक्षकों और आम दर्शकों से निगेटिव प्रतिक्रिया देखने को मिली है। हालांकि हॉटस्टार के अनुसार, इस फिल्म के फर्स्ट डे फर्स्ट शो को देखने के लिए सब्सक्राइबर्स द्वारा लॉग इन किया गया.. और यह बन गई ओपनिंग पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली फिल्म। ओवरसीज बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें तो, ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के रिपोर्ट के अनुसार फिल्म ने ऑस्ट्रेलिया में 41.09 लाख, न्यूजीलैंड में 28.38 लाख और फिजी में 10.34 लाख की कमाई की है। जाहिर है यह कमाई औसत से भी कम है।
- चौवन मिनट ago ब्लैक फ़िल्म में छोटी रानी मुखर्जी का किरदार निभाने वाली आयशा को रणबीर ने दी थी ट्रेनिंग, अब कहां है ये बच्ची? Don't Miss! नौ नवंबर जहां भारत और बाकी देशों में अक्षय कुमार की फिल्म 'लक्ष्मी' को डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज किया गया था। वहीं, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और फिजी में फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। मार्च दो हज़ार बीस के बाद थियेट्रिकल रिलीज पाने वाली यह पहली बॉलीवुड फिल्म है। राघव लॉरेंस के निर्देशन में बनी यह हॉरर- कॉमेडी फिल्म नौ नवंबर को रिलीज हुई है। भारत में फिल्म को समीक्षकों और आम दर्शकों से निगेटिव प्रतिक्रिया देखने को मिली है। हालांकि हॉटस्टार के अनुसार, इस फिल्म के फर्स्ट डे फर्स्ट शो को देखने के लिए सब्सक्राइबर्स द्वारा लॉग इन किया गया.. और यह बन गई ओपनिंग पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली फिल्म। ओवरसीज बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें तो, ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के रिपोर्ट के अनुसार फिल्म ने ऑस्ट्रेलिया में इकतालीस.नौ लाख, न्यूजीलैंड में अट्ठाईस.अड़तीस लाख और फिजी में दस.चौंतीस लाख की कमाई की है। जाहिर है यह कमाई औसत से भी कम है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
नरोदाः नरोदा और नरोदा पटिया में वाहनों के प्रवेश के लिए सभी रास्तों पर शुक्रवार को बैरिकेडिंग कर दी गई थी. 2002 में गुजरात दंगों का सबसे भयवाह दौर झेलने वाले इन इलाकों में पुलिस की मौजूदगी को आमतौर पर कुछ अवांछित घटना से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन शुक्रवार को यह सब किया गया था नरोदा की सड़कों पर लगे आकर्षक मेले के लिए, जहां बच्चे ट्रैम्पोलिन पर कूद रहे थे, एक युवा लड़की रस्सी पर चलकर अपने करतब से दर्शकों को हतप्रभ कर रही थी, जबकि वयस्क लोग फुटपाथों पर लगे विभिन्न स्टाल से सामान खरीद रहे थे. 2002 के बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में 11 दोषियों की रिहाई पर लेकर जारी विवाद के बीच नरोदा और नरोदा पटिया - जहां 2002 के दंगों के दौरान लगभग 5,000 लोगों की सशस्त्र भीड़ ने 97 से अधिक लोगों को मार डाला था - में जीवन सामान्य ढर्रे पर चल रहा है. करीब 174 किलोमीटर दूर रंधिकपुर में सामूहिक दुष्कर्म के दोषी 11 लोगों को रिहाई देने के गुजरात सरकार के फैसले से मोहल्ले के मुस्लिम परिवार नाराज हैं. लेकिन, नरोदा-नरोदा पटिया में दंगों के बाद के दो दशकों में सबसे शांत स्थिति नजर आई है, हालांकि 2002 के घाव पूरी तरह भरे नहीं है लेकिन स्थानीय निवासी अब इस मसले को तूल देने के पक्ष में कतई नहीं हैं. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. गुजरात के रंधिकपुर गांव में भीड़ ने बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया था और अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मार्च 2002 के गोधरा दंगों के दौरान जान बचाकर भाग रहे उसके परिवार के चौदह सदस्यों - जिसमें बिलकिस की तीन साल की बेटी सालेहा भी शामिल है - को दंगाइयों ने मार डाला था. बिलकिन बानो उस समय 19 वर्ष की थी और पांच महीने की गर्भवती थी. उसके 11 गुनाहकारों को छोड़ने का फैसला ऐसे समय पर सामने आया है जब एक साल के अंदर राज्य में एक नई विधानसभा के लिए चुनाव होना है. बानो के मामले के बात करते हुए मंसूरी के अपने जख्म भी ताजा हो गए. गोधरा ट्रेन जलने की घटना के एक दिन बाद 28 फरवरी, 2002 को नरोदा और नरोदा पटिया में एक बड़ी भीड़ जमा हो गई थी और उसने क्षेत्र के मुस्लिम निवासियों पर हमला कर दिया, जिसमें कथित तौर पर 97 लोग मारे गए और 33 अन्य घायल हो गए. घटना के दस साल बाद एक विशेष अदालत ने मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व विधायक माया कोडनानी सहित 32 आरोपियों को दोषी ठहराया. 2018 में गुजरात हाई कोर्ट ने 12 आरोपियों पर दोष बरकरार रखे, लेकिन कोडनानी को बरी कर दिया. नरसंहार के दो दशक हो चुके हैं, लेकिन अब भी, देश में कहीं भी सांप्रदायिक संघर्ष होने पर नरोदा और नरोदा पटिया के तमाम मुसलमान कुछ दिनों के लिए बाहर चले जाना ही बेहतर समझते हैं. पड़ोस में रहने वाले रिक्शा चालक रियाज कुरैशी ने बताया कि कैसे इस साल के शुरू में दिल्ली के जहांगीरपुरी में दंगों के बाद कुछ परिवार यहां से चले गए थे, और यही स्थिति तब रही थी जब अयोध्या राम मंदिर पर फैसला आने वाला था. कुछ लोगों का तर्क है कि कुल मिलाकर 2002 के बाद नरोदा और नरोदा पटिया में मुसलमानों की संख्या में गिरावट आई है. हुसैना के बेटे साहिल मंसूरी ने हालात के लिए राजनेताओं को जिम्मेदार ठहराया. (इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. )
नरोदाः नरोदा और नरोदा पटिया में वाहनों के प्रवेश के लिए सभी रास्तों पर शुक्रवार को बैरिकेडिंग कर दी गई थी. दो हज़ार दो में गुजरात दंगों का सबसे भयवाह दौर झेलने वाले इन इलाकों में पुलिस की मौजूदगी को आमतौर पर कुछ अवांछित घटना से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन शुक्रवार को यह सब किया गया था नरोदा की सड़कों पर लगे आकर्षक मेले के लिए, जहां बच्चे ट्रैम्पोलिन पर कूद रहे थे, एक युवा लड़की रस्सी पर चलकर अपने करतब से दर्शकों को हतप्रभ कर रही थी, जबकि वयस्क लोग फुटपाथों पर लगे विभिन्न स्टाल से सामान खरीद रहे थे. दो हज़ार दो के बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में ग्यारह दोषियों की रिहाई पर लेकर जारी विवाद के बीच नरोदा और नरोदा पटिया - जहां दो हज़ार दो के दंगों के दौरान लगभग पाँच,शून्य लोगों की सशस्त्र भीड़ ने सत्तानवे से अधिक लोगों को मार डाला था - में जीवन सामान्य ढर्रे पर चल रहा है. करीब एक सौ चौहत्तर किलोग्राममीटर दूर रंधिकपुर में सामूहिक दुष्कर्म के दोषी ग्यारह लोगों को रिहाई देने के गुजरात सरकार के फैसले से मोहल्ले के मुस्लिम परिवार नाराज हैं. लेकिन, नरोदा-नरोदा पटिया में दंगों के बाद के दो दशकों में सबसे शांत स्थिति नजर आई है, हालांकि दो हज़ार दो के घाव पूरी तरह भरे नहीं है लेकिन स्थानीय निवासी अब इस मसले को तूल देने के पक्ष में कतई नहीं हैं. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. गुजरात के रंधिकपुर गांव में भीड़ ने बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया था और अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मार्च दो हज़ार दो के गोधरा दंगों के दौरान जान बचाकर भाग रहे उसके परिवार के चौदह सदस्यों - जिसमें बिलकिस की तीन साल की बेटी सालेहा भी शामिल है - को दंगाइयों ने मार डाला था. बिलकिन बानो उस समय उन्नीस वर्ष की थी और पांच महीने की गर्भवती थी. उसके ग्यारह गुनाहकारों को छोड़ने का फैसला ऐसे समय पर सामने आया है जब एक साल के अंदर राज्य में एक नई विधानसभा के लिए चुनाव होना है. बानो के मामले के बात करते हुए मंसूरी के अपने जख्म भी ताजा हो गए. गोधरा ट्रेन जलने की घटना के एक दिन बाद अट्ठाईस फरवरी, दो हज़ार दो को नरोदा और नरोदा पटिया में एक बड़ी भीड़ जमा हो गई थी और उसने क्षेत्र के मुस्लिम निवासियों पर हमला कर दिया, जिसमें कथित तौर पर सत्तानवे लोग मारे गए और तैंतीस अन्य घायल हो गए. घटना के दस साल बाद एक विशेष अदालत ने मामले में भारतीय जनता पार्टी की पूर्व विधायक माया कोडनानी सहित बत्तीस आरोपियों को दोषी ठहराया. दो हज़ार अट्ठारह में गुजरात हाई कोर्ट ने बारह आरोपियों पर दोष बरकरार रखे, लेकिन कोडनानी को बरी कर दिया. नरसंहार के दो दशक हो चुके हैं, लेकिन अब भी, देश में कहीं भी सांप्रदायिक संघर्ष होने पर नरोदा और नरोदा पटिया के तमाम मुसलमान कुछ दिनों के लिए बाहर चले जाना ही बेहतर समझते हैं. पड़ोस में रहने वाले रिक्शा चालक रियाज कुरैशी ने बताया कि कैसे इस साल के शुरू में दिल्ली के जहांगीरपुरी में दंगों के बाद कुछ परिवार यहां से चले गए थे, और यही स्थिति तब रही थी जब अयोध्या राम मंदिर पर फैसला आने वाला था. कुछ लोगों का तर्क है कि कुल मिलाकर दो हज़ार दो के बाद नरोदा और नरोदा पटिया में मुसलमानों की संख्या में गिरावट आई है. हुसैना के बेटे साहिल मंसूरी ने हालात के लिए राजनेताओं को जिम्मेदार ठहराया.
सीबीएसई बोर्ड की 10वीं 12वीं की परीक्षा तारीखों की घोषणा हो गई है। सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं 4 मई से शुरू होंगी जो 10 जून तक चलेंगी परिणामों की घोषणा 15 जुलाई तक हो जाएगी, वहीं प्रैक्टिल की परीक्षाएं मार्च में होंगी। केंद्रीय शिक्षामंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बोर्ड परीक्षा की डेटशीट जारी की। उन्होंने कहा कि परीक्षाएं लिखित ही होंगी। CBSE 10वी और 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं 4 मई 2021से शुरू हो जायेंगी। 10 जून 2021 तक ये परीक्षाएं चलेंगी। 1 मार्च 2021 से प्रैक्टिकल की परीक्षाएं शुरू हो जायेंगी। रिजल्ट 15 जुलाई तक आने की संभावना है। शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने यह जानकारी दी और सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी। शिक्षा मंत्री निशंक ने कुछ दिनों पहले इस बात की जानकारी दी थी कि गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर ही परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी पहली प्राथमिकता है।
सीबीएसई बोर्ड की दसवीं बारहवीं की परीक्षा तारीखों की घोषणा हो गई है। सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं चार मई से शुरू होंगी जो दस जून तक चलेंगी परिणामों की घोषणा पंद्रह जुलाई तक हो जाएगी, वहीं प्रैक्टिल की परीक्षाएं मार्च में होंगी। केंद्रीय शिक्षामंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बोर्ड परीक्षा की डेटशीट जारी की। उन्होंने कहा कि परीक्षाएं लिखित ही होंगी। CBSE दसवी और बारहवीं बोर्ड की परीक्षाएं चार मई दो हज़ार इक्कीससे शुरू हो जायेंगी। दस जून दो हज़ार इक्कीस तक ये परीक्षाएं चलेंगी। एक मार्च दो हज़ार इक्कीस से प्रैक्टिकल की परीक्षाएं शुरू हो जायेंगी। रिजल्ट पंद्रह जुलाई तक आने की संभावना है। शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने यह जानकारी दी और सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी। शिक्षा मंत्री निशंक ने कुछ दिनों पहले इस बात की जानकारी दी थी कि गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर ही परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी पहली प्राथमिकता है।
The Fact India: कंगना रनौत के मचअवेटेड शो लॉकअप का फैंस को बेसब्री से इंतजार है. अब इस शो को कैदी भी मिलने शुरू हो चुके है. फेमस कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी कंट्रोवर्सी के चलते जिनके शोज कैंसिल कर दिए गए थे.... को अब कंगना के लॉकअप में अत्याचारी गेम खेलते हुए देखा जाएगा... कंगना की जेल में रहने के लिए मुनव्वर को अपनी जिंदगी के कई राज से पर्दा उठाना पड़ेगा... कॉमेडी करते समय मुनव्वर ने कुछ ऐसी कंट्रोवर्सिज पैदा कर दी थी. . की उन्हें धमकियां मिलने लगी थी. . और इसलिए उनके 12 शो को महज 2 महीने में कैंसिल कर दिया गया था... अब वे फेमस होने कंगना के शो में आ धमके है... ऑल्ट बालाजी ने टीजर को कैपशन के साथ शेयर करते हुए लिखा... शो हुए है इनके कैंसिल क्या चलेंगे लॉक अप (Lockup) में इनके प्लान्स... वैसे आपको बता दे... मुन्व्वर फारूखी... कंगना को बिल्कुल पसंद नहीं करते... औऱ ये बात हम नहीं उनके ट्वीट्स कह रहे है. दरअसल इन दिनों कॉमेडियन के पुराने ट्वीट वायरल हो रहे है. . एक में लिखा है... कंगना नेपोटिज्म के खिलाफ है. लेकिन खुद की बहन को मैनेजर रखा है. दूसरे में लिखा- कंगना की डायरेक्ट की गई मूवी में लीड में कौन सा न्यूकमर था? oops कंगना ही थी... मुनव्वर फारुखी ने सुशांत सिंह राजपूत मामले को लेकर भी कंगना पर अटैक किया था. मुनव्वर फारुखी ने ट्वीट कर पूछा था- न्याय किसे दिलाना है सुशांत को या कंगना को... जब बीएमसी ने कंगना के मुंबई स्थित ऑफिस को गिराया था तब मुनव्वर ने लिखा था- सीबीआई रिया के लिए. जेसीबी कंगना के लिए. मुनव्वर ने 2020-2021 में कंगना पर निशाना साधते हुए कई सिलसिलेवार ट्वीट्स किए थे. उन्होंने कंगना के बात करने के तरीके का भी मजाक उड़ाया था. अब मुनव्वर फारुखी के ट्वीट पढ़ने के बाद आपको क्या लगता है शो में कॉमेडियन कंगना से पंगा लेंगे या उनकी बात को सिर आंखों पर रखकर मानेंगे. खैर ऐसा लगता तो नहीं. पर जो भी हो, कंगना और मुनव्वर फारुखी को एक ही मंच पर देखना एक्साइटिंग होगा. .
The Fact India: कंगना रनौत के मचअवेटेड शो लॉकअप का फैंस को बेसब्री से इंतजार है. अब इस शो को कैदी भी मिलने शुरू हो चुके है. फेमस कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी कंट्रोवर्सी के चलते जिनके शोज कैंसिल कर दिए गए थे.... को अब कंगना के लॉकअप में अत्याचारी गेम खेलते हुए देखा जाएगा... कंगना की जेल में रहने के लिए मुनव्वर को अपनी जिंदगी के कई राज से पर्दा उठाना पड़ेगा... कॉमेडी करते समय मुनव्वर ने कुछ ऐसी कंट्रोवर्सिज पैदा कर दी थी. . की उन्हें धमकियां मिलने लगी थी. . और इसलिए उनके बारह शो को महज दो महीने में कैंसिल कर दिया गया था... अब वे फेमस होने कंगना के शो में आ धमके है... ऑल्ट बालाजी ने टीजर को कैपशन के साथ शेयर करते हुए लिखा... शो हुए है इनके कैंसिल क्या चलेंगे लॉक अप में इनके प्लान्स... वैसे आपको बता दे... मुन्व्वर फारूखी... कंगना को बिल्कुल पसंद नहीं करते... औऱ ये बात हम नहीं उनके ट्वीट्स कह रहे है. दरअसल इन दिनों कॉमेडियन के पुराने ट्वीट वायरल हो रहे है. . एक में लिखा है... कंगना नेपोटिज्म के खिलाफ है. लेकिन खुद की बहन को मैनेजर रखा है. दूसरे में लिखा- कंगना की डायरेक्ट की गई मूवी में लीड में कौन सा न्यूकमर था? oops कंगना ही थी... मुनव्वर फारुखी ने सुशांत सिंह राजपूत मामले को लेकर भी कंगना पर अटैक किया था. मुनव्वर फारुखी ने ट्वीट कर पूछा था- न्याय किसे दिलाना है सुशांत को या कंगना को... जब बीएमसी ने कंगना के मुंबई स्थित ऑफिस को गिराया था तब मुनव्वर ने लिखा था- सीबीआई रिया के लिए. जेसीबी कंगना के लिए. मुनव्वर ने दो हज़ार बीस-दो हज़ार इक्कीस में कंगना पर निशाना साधते हुए कई सिलसिलेवार ट्वीट्स किए थे. उन्होंने कंगना के बात करने के तरीके का भी मजाक उड़ाया था. अब मुनव्वर फारुखी के ट्वीट पढ़ने के बाद आपको क्या लगता है शो में कॉमेडियन कंगना से पंगा लेंगे या उनकी बात को सिर आंखों पर रखकर मानेंगे. खैर ऐसा लगता तो नहीं. पर जो भी हो, कंगना और मुनव्वर फारुखी को एक ही मंच पर देखना एक्साइटिंग होगा. .
नागराज के पास रहने को एक बड़ा-सा घर है और करने को सिर्फ मनपसन्द काम। पर उनकी शांत जिंदगी में तब उथल-पुथल मच जाती है जब उनका भतीजा टिम वहाँ रहने आ जाता है। उसकी रहस्यमयी हरकतें नागराज और उसकी पत्नी की समझ से परे हैं। इसी कड़ी में एक-एक कर अनेक दिलचस्प घटनाएँ घटती हैं इस उपन्यास में....
नागराज के पास रहने को एक बड़ा-सा घर है और करने को सिर्फ मनपसन्द काम। पर उनकी शांत जिंदगी में तब उथल-पुथल मच जाती है जब उनका भतीजा टिम वहाँ रहने आ जाता है। उसकी रहस्यमयी हरकतें नागराज और उसकी पत्नी की समझ से परे हैं। इसी कड़ी में एक-एक कर अनेक दिलचस्प घटनाएँ घटती हैं इस उपन्यास में....
जवाबी हमले में एक बंदूकधारी भी मारा गया है। ट्यूनिश. ट्यूनिशिया के सूसी शहर के दो टूरिस्ट होटलों में शुक्रवार को हुए आतंकी हमले में कम से कम 27 लोग मारे गये हैं। बताया जा रहा है कि जहां आतंकियों ने हमला किया था यह बीच रिसार्ट है जहां एक बंदूकधारी ने विदेशी सैलानियों पर हमला बोल दिया है। ट्यूनेशियाई गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद अली अरुदी ने राष्ट्रीय टेलीविजन के हवाले से कहा कि हमले में 27 लोगों की मौत हो गई है। जवाबी हमले में एक बंदूकधारी भी मारा गया है। यह हमला टयूनिशिया के साउसी शहर में हुआ है जो एक चर्चित टूरिस्ट स्थल है। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही ट्यूनिशिया की राजधानी ट्यूनिश में आतंकवादियों ने हमला कर 22 विदेशों पर्यटकों की हत्या कर दी थी। इसके बाद से ही ट्यूनिशिया में हाई अलर्ट जारी है। किन्तु इसके बावजूद आज की इस बडी घटना से ट्यूनिशिया दहशत में है। किसी संगठन ने अभी हमले की जिम्मेवारी नहीं ली है। यहां उल्लेखनीय है कि आज ही आज ही फ्रांस और कुवैत में भी आतंकवादियों ने हमला किया है जिसमें से फ्रांस में एक और कुवैत में 13 लोग मारे गये हैं।
जवाबी हमले में एक बंदूकधारी भी मारा गया है। ट्यूनिश. ट्यूनिशिया के सूसी शहर के दो टूरिस्ट होटलों में शुक्रवार को हुए आतंकी हमले में कम से कम सत्ताईस लोग मारे गये हैं। बताया जा रहा है कि जहां आतंकियों ने हमला किया था यह बीच रिसार्ट है जहां एक बंदूकधारी ने विदेशी सैलानियों पर हमला बोल दिया है। ट्यूनेशियाई गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद अली अरुदी ने राष्ट्रीय टेलीविजन के हवाले से कहा कि हमले में सत्ताईस लोगों की मौत हो गई है। जवाबी हमले में एक बंदूकधारी भी मारा गया है। यह हमला टयूनिशिया के साउसी शहर में हुआ है जो एक चर्चित टूरिस्ट स्थल है। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही ट्यूनिशिया की राजधानी ट्यूनिश में आतंकवादियों ने हमला कर बाईस विदेशों पर्यटकों की हत्या कर दी थी। इसके बाद से ही ट्यूनिशिया में हाई अलर्ट जारी है। किन्तु इसके बावजूद आज की इस बडी घटना से ट्यूनिशिया दहशत में है। किसी संगठन ने अभी हमले की जिम्मेवारी नहीं ली है। यहां उल्लेखनीय है कि आज ही आज ही फ्रांस और कुवैत में भी आतंकवादियों ने हमला किया है जिसमें से फ्रांस में एक और कुवैत में तेरह लोग मारे गये हैं।
मैरुन रंग के जरीदार लहंगे में दुल्हन तो दूल्हे का दुशाला भी मैरुन और ज़रीदार। सहरे के रंग से लेकर शेरवानी का रंग भी दुल्हन के लहंगे जैसा। कोरोना काल में शादी समारोह भले सादगी और कम मेहमानों के साथ हों, मगर युवा स्टाइल से समझौता नहीं कर सकते। शादियों में इस बार मैचिंग कपल ड्रेस का जादू चल रहा है। डिजायनर से खास मैचिंग परिधान शादियों के लिए तैयार कराए जा रहे हैं। दीपिका और रणवीर, अनुष्का, विराट हाल में दक्षिण भारतीय अभिनेता काजल अग्रवाल, पार्श्व गायिका नेहा कक्कड़ ने भी विवाह समारोह में मैचिंग परिधान पहने। कुछ दिन पहले अमिताभ बच्चन का पूरा परिवार एक ही रंग के परिधानों में एक तस्वीर में नज़र आया। बॉलीवुड को इस मैचिंग ट्रेंड को युवा भी फॉलो कर रहे हैं। दूल्हा-दुल्हन ही नहीं बल्कि मां, बच्चे, पति-पत्नी, पिता -पुत्र व पूरा परिवार अब एक रंग के मैचिंग कपड़ों को डिजायन करा रहा है। शादी समारोहों के लिए विशेषकर मैचिंग परिधान तैयार कराए जा रहे हैं। शादी के लिए दुल्हन के लहंगे, साड़ी से मेल खाती ही दूल्हे की शेरवानी बन रही है। वेस्टर्न आउटफिट में भी दोनों लोग एक ही डिजायनर से मैचिंग कपड़े डिजायन कराते हैं। दूल्हे का सेहरा, पगड़ी भी उसी से मैच करती हुई बनवाते हैं। यहां तक की दुल्हन अपनी कलीरें और जूतियां, मास्क भी ड्रेस से मैच करते हुए बनवाने लगी हैं। ताकि फोटो में सब सेम-सेम लगे।
मैरुन रंग के जरीदार लहंगे में दुल्हन तो दूल्हे का दुशाला भी मैरुन और ज़रीदार। सहरे के रंग से लेकर शेरवानी का रंग भी दुल्हन के लहंगे जैसा। कोरोना काल में शादी समारोह भले सादगी और कम मेहमानों के साथ हों, मगर युवा स्टाइल से समझौता नहीं कर सकते। शादियों में इस बार मैचिंग कपल ड्रेस का जादू चल रहा है। डिजायनर से खास मैचिंग परिधान शादियों के लिए तैयार कराए जा रहे हैं। दीपिका और रणवीर, अनुष्का, विराट हाल में दक्षिण भारतीय अभिनेता काजल अग्रवाल, पार्श्व गायिका नेहा कक्कड़ ने भी विवाह समारोह में मैचिंग परिधान पहने। कुछ दिन पहले अमिताभ बच्चन का पूरा परिवार एक ही रंग के परिधानों में एक तस्वीर में नज़र आया। बॉलीवुड को इस मैचिंग ट्रेंड को युवा भी फॉलो कर रहे हैं। दूल्हा-दुल्हन ही नहीं बल्कि मां, बच्चे, पति-पत्नी, पिता -पुत्र व पूरा परिवार अब एक रंग के मैचिंग कपड़ों को डिजायन करा रहा है। शादी समारोहों के लिए विशेषकर मैचिंग परिधान तैयार कराए जा रहे हैं। शादी के लिए दुल्हन के लहंगे, साड़ी से मेल खाती ही दूल्हे की शेरवानी बन रही है। वेस्टर्न आउटफिट में भी दोनों लोग एक ही डिजायनर से मैचिंग कपड़े डिजायन कराते हैं। दूल्हे का सेहरा, पगड़ी भी उसी से मैच करती हुई बनवाते हैं। यहां तक की दुल्हन अपनी कलीरें और जूतियां, मास्क भी ड्रेस से मैच करते हुए बनवाने लगी हैं। ताकि फोटो में सब सेम-सेम लगे।
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले इलाके में चलती ट्रेन में दो यात्रियों के बीच हुए विवाद के बाद एक यात्री द्वारा दूसरे यात्री को धक्का देने का मामला सामने आया है. यात्री को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पश्चिम बंगाल में एक दिल दहलाने वाली घटना घटी है. ट्रेन में दो यात्रियों के बीच विवाद ने हिंसक रूप ले लिया. एक ने दूसरे को चलती ट्रेन से धक्का दे दिया. शनिवार की रात हावड़ा-मालदा इंटरसिटी एक्सप्रेस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. हालांकि टीवी 9 हिंदी इस वीडियो की सत्यता की की सत्यता की जांच नहीं की है. इस वीडियो में विवाद के बाद एक यात्री को दूसरे को ट्रेन से धक्का देते हुए देखा जा सकता है. हालांकि ट्रेन से गिरे यात्री को गंभीर हालत में बचा लिया गया. रेलवे सूत्रों से उसकी पहचान हो गई है. पीड़ित नाम सजल शेख है. वह बीरभूम के सुंदीपुर का रहने वाला है. वह अस्पताल में चिकित्साधीन है और उसका इलाज चल रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार सजल ने स्वीकार किया कि वह नशे की हालत में ट्रेन में चढ़ा था. जो गलत था. हालांकि उसने दावा किया कि साथी यात्रियों द्वारा एक 'बुरे काम' में बाधा डालने के कारण उसे ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया था. गौरतलब है कि शनिवार की रात हावड़ा-मालदा इंटरसिटी एक्सप्रेस से सजल को धक्का मारने का एक वीडियो जारी किया गया है. उसी ट्रेन के एक अन्य यात्री द्वारा लिए गए वीडियो को देखने के बाद रेलवे पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है. पुलिस ने यह भी दावा किया कि घटना तारापीठ रोड और रामपुरहाट स्टेशन के बीच की जगह पर हुई. सजल को तारापीठ रोड और रामपुरहाट स्टेशन के बीच रेल लाइन से लहूलुहान पाया गया था. अब उनका रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है.
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले इलाके में चलती ट्रेन में दो यात्रियों के बीच हुए विवाद के बाद एक यात्री द्वारा दूसरे यात्री को धक्का देने का मामला सामने आया है. यात्री को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पश्चिम बंगाल में एक दिल दहलाने वाली घटना घटी है. ट्रेन में दो यात्रियों के बीच विवाद ने हिंसक रूप ले लिया. एक ने दूसरे को चलती ट्रेन से धक्का दे दिया. शनिवार की रात हावड़ा-मालदा इंटरसिटी एक्सप्रेस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. हालांकि टीवी नौ हिंदी इस वीडियो की सत्यता की की सत्यता की जांच नहीं की है. इस वीडियो में विवाद के बाद एक यात्री को दूसरे को ट्रेन से धक्का देते हुए देखा जा सकता है. हालांकि ट्रेन से गिरे यात्री को गंभीर हालत में बचा लिया गया. रेलवे सूत्रों से उसकी पहचान हो गई है. पीड़ित नाम सजल शेख है. वह बीरभूम के सुंदीपुर का रहने वाला है. वह अस्पताल में चिकित्साधीन है और उसका इलाज चल रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार सजल ने स्वीकार किया कि वह नशे की हालत में ट्रेन में चढ़ा था. जो गलत था. हालांकि उसने दावा किया कि साथी यात्रियों द्वारा एक 'बुरे काम' में बाधा डालने के कारण उसे ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया था. गौरतलब है कि शनिवार की रात हावड़ा-मालदा इंटरसिटी एक्सप्रेस से सजल को धक्का मारने का एक वीडियो जारी किया गया है. उसी ट्रेन के एक अन्य यात्री द्वारा लिए गए वीडियो को देखने के बाद रेलवे पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है. पुलिस ने यह भी दावा किया कि घटना तारापीठ रोड और रामपुरहाट स्टेशन के बीच की जगह पर हुई. सजल को तारापीठ रोड और रामपुरहाट स्टेशन के बीच रेल लाइन से लहूलुहान पाया गया था. अब उनका रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है.
बिहार में कोरोना वायरस से बचाव को लेकर बिहार सरकार हर संभव एहतियात बरत रही है. स्वास्थ विभाग ने कड़ा फैसला लेते हुए होटल रेस्टोरेंट को बंद करने का आदेश जारी किया गया है. आपको बता दें कि प्रदेश के सभी होटल रेस्टुरेंट 31 मार्च तक के लिए बंद कर दिया गया है. स्वास्थ विभाग ने इसके साथ ही बैंक्विट हॉल भी 31 मार्च तक के लिए बंद कर दिया गया है. आपको बता दें कि शुक्रवार को पीएम मोदी ने 22 मार्च यानी की रविवार को जनता कर्फ्यू की अपील की है. जिसमें उन्होंने आम लोगों को इस अपील को पालन करने को कहा है. कोरोना वायरस अब देश के 20 राज्यों में फैल चुका है. बिहार में अभी तक कोरोना वायरस के एक भी पोजिटिव मरीज नहीं मिले हैं. इसको लेकर पीएम मोदी ने आज ट्वीट कर बिहार की जनता को इसके लिए नमन किया है. पीॉएम मोदी ने कहा है कि आपने मेरे कहे अनुसार अभी से उन सभी बातों को अमल करना शुरु कर दिआ जो कोरोना वायरस को आगे बढ़ाने में बाधक हो सकते हैं. उन्होंने शुक्रवार की रात को ऐलान किया था कि रविवार को सुबह सात बजे से रात के नौ बजे तक पूरे देश मे कोरोना वायरस को हराने के लिए जनता कर्फ्यू की अपील की गई है. कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर में इसकी शुरुआत हुई थी. अब यह विश्व के ज्यादातर देशो में यह फैल गया है. भारत में इसका प्रकोप देखा जा रहा है. भारत में इस बीमारी से 21 राज्य प्रभावीत हो गए हैं. बिहार में अभी तक कोरोना वायरस के एक भी मामला सामने नहीं आया है. इस बीमारी को लेकर बिहार सरकार पुरी तरह से सर्तक हैं. इसी कड़ी में आज से 31 मार्च तक सभी होटलों को बंद कर दिया गया है.
बिहार में कोरोना वायरस से बचाव को लेकर बिहार सरकार हर संभव एहतियात बरत रही है. स्वास्थ विभाग ने कड़ा फैसला लेते हुए होटल रेस्टोरेंट को बंद करने का आदेश जारी किया गया है. आपको बता दें कि प्रदेश के सभी होटल रेस्टुरेंट इकतीस मार्च तक के लिए बंद कर दिया गया है. स्वास्थ विभाग ने इसके साथ ही बैंक्विट हॉल भी इकतीस मार्च तक के लिए बंद कर दिया गया है. आपको बता दें कि शुक्रवार को पीएम मोदी ने बाईस मार्च यानी की रविवार को जनता कर्फ्यू की अपील की है. जिसमें उन्होंने आम लोगों को इस अपील को पालन करने को कहा है. कोरोना वायरस अब देश के बीस राज्यों में फैल चुका है. बिहार में अभी तक कोरोना वायरस के एक भी पोजिटिव मरीज नहीं मिले हैं. इसको लेकर पीएम मोदी ने आज ट्वीट कर बिहार की जनता को इसके लिए नमन किया है. पीॉएम मोदी ने कहा है कि आपने मेरे कहे अनुसार अभी से उन सभी बातों को अमल करना शुरु कर दिआ जो कोरोना वायरस को आगे बढ़ाने में बाधक हो सकते हैं. उन्होंने शुक्रवार की रात को ऐलान किया था कि रविवार को सुबह सात बजे से रात के नौ बजे तक पूरे देश मे कोरोना वायरस को हराने के लिए जनता कर्फ्यू की अपील की गई है. कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर में इसकी शुरुआत हुई थी. अब यह विश्व के ज्यादातर देशो में यह फैल गया है. भारत में इसका प्रकोप देखा जा रहा है. भारत में इस बीमारी से इक्कीस राज्य प्रभावीत हो गए हैं. बिहार में अभी तक कोरोना वायरस के एक भी मामला सामने नहीं आया है. इस बीमारी को लेकर बिहार सरकार पुरी तरह से सर्तक हैं. इसी कड़ी में आज से इकतीस मार्च तक सभी होटलों को बंद कर दिया गया है.
उत्तर प्रदेश के हरदोई के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक महिला ने अनोखे बच्चे को जन्म दिया है। बच्चे के 60 फीसदी शरीर पर बाल हैं और पीठ की तरफ सिर से लेकर कमर तक बाल उगे हुए हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक, इस स्थिति को जिएंट कंजेनिटल मेलानोसाइटिक नेवस कहते हैं। यह बेहद दुर्लभ है। फिलहाल बच्चे के इलाज के लिए उसे लखनऊ भेजने का फैसला किया गया है। क्या है पूरा मामला? हरदोई के शाहाबाद विकास खंड के नाऊ नंगला गांव की रहने वाली एक महिला को प्रसव के लिए मंगलवार को CHC में भर्ती कराया गया था। महिला के बच्चे की नॉर्मल डिलीवरी हुई, लेकिन उसके सिर से कमर तक बाल उगे हुए थे, जिसे देखकर खुद डॉक्टर भी हैरान रह गए। अस्पताल के अधीक्षक ACMO डॉ पंकज मिश्रा का कहना है कि उन्होंने उनके 22 साल के करियर में ऐसा केस पहली बार देखा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, CHC ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य गारंटी कार्यक्रम (RBSK) की टीम को अनोखे बच्चे के जन्म की सूचना दी। इसके बाद RBSK की एक टीम डॉ इकराम हुसैन के नेतृत्व में अस्पताल पहुंची और बच्चे की हालत को देखकर बताया कि उसे जिएंट कंजेनिटल मेलानोसाइटिक नेवस नामक बीमारी है। डॉक्टर्स का कहना है कि यह बीमारी बहुत ही कम नवजात बच्चों में देखने को मिलती है। डॉ इकराम हुसैन ने कहा, "बच्चे का उपचार करके उसे नॉर्मल किया जा सकता है। इसके लिए बच्चे को लखनऊ भेजा जाएगा, ताकि वहां उसका इलाज अच्छे से हो सके। एक बार इलाज शुरू होने के बाद बच्चा जल्दी ही रिकवर कर जाएगा। फिलहाल बच्चा और मां दोनों स्वस्थ हैं। " बता दें कि अनोखे बच्चे के जन्म की बात इलाके में सबको पता चल गई थी, जिसके बाद उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी।
उत्तर प्रदेश के हरदोई के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक महिला ने अनोखे बच्चे को जन्म दिया है। बच्चे के साठ फीसदी शरीर पर बाल हैं और पीठ की तरफ सिर से लेकर कमर तक बाल उगे हुए हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक, इस स्थिति को जिएंट कंजेनिटल मेलानोसाइटिक नेवस कहते हैं। यह बेहद दुर्लभ है। फिलहाल बच्चे के इलाज के लिए उसे लखनऊ भेजने का फैसला किया गया है। क्या है पूरा मामला? हरदोई के शाहाबाद विकास खंड के नाऊ नंगला गांव की रहने वाली एक महिला को प्रसव के लिए मंगलवार को CHC में भर्ती कराया गया था। महिला के बच्चे की नॉर्मल डिलीवरी हुई, लेकिन उसके सिर से कमर तक बाल उगे हुए थे, जिसे देखकर खुद डॉक्टर भी हैरान रह गए। अस्पताल के अधीक्षक ACMO डॉ पंकज मिश्रा का कहना है कि उन्होंने उनके बाईस साल के करियर में ऐसा केस पहली बार देखा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, CHC ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य गारंटी कार्यक्रम की टीम को अनोखे बच्चे के जन्म की सूचना दी। इसके बाद RBSK की एक टीम डॉ इकराम हुसैन के नेतृत्व में अस्पताल पहुंची और बच्चे की हालत को देखकर बताया कि उसे जिएंट कंजेनिटल मेलानोसाइटिक नेवस नामक बीमारी है। डॉक्टर्स का कहना है कि यह बीमारी बहुत ही कम नवजात बच्चों में देखने को मिलती है। डॉ इकराम हुसैन ने कहा, "बच्चे का उपचार करके उसे नॉर्मल किया जा सकता है। इसके लिए बच्चे को लखनऊ भेजा जाएगा, ताकि वहां उसका इलाज अच्छे से हो सके। एक बार इलाज शुरू होने के बाद बच्चा जल्दी ही रिकवर कर जाएगा। फिलहाल बच्चा और मां दोनों स्वस्थ हैं। " बता दें कि अनोखे बच्चे के जन्म की बात इलाके में सबको पता चल गई थी, जिसके बाद उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी।
दुबई : श्रीलंका के पूर्व कप्तान दिनेश चांदीमल ने सूर्यकुमार यादव को भारतीय एकदिवसीय एकादश में जगह नहीं मिलने पर आश्चर्य जताते हुए शुक्रवार को कहा कि इस तरह का आक्रामक बल्लेबाज 30 से 50 रन की पारी से पूरे मैच का रूख मोड़ सकता है। श्रीलंका के लिए 157 एकदिवसीय में लगभग 5000 (4936) रन बनाने वाले चांदीमल ने कहा, 'यह दिखाता है कि भारतीय क्रिकेट में कितनी प्रतिभा है। मुझे फिर भी लगता है कि सूर्यकुमार यादव एकदिवसीय टीम का हिस्सा हो सकते है। ' श्रीलंका के खिलाफ तीसरे और निर्णायक टी20 अंतरराष्ट्रीय में सूर्यकुमार ने शतकीय पारी खेलकर टीम की जीत सुनिश्चित की। उनकी 51 गेंद में नाबाद 112 रन की पारी से भारत ने निर्णायक मुकाबले में श्रीलंका को 91 रन के बड़े अंतर से हराकर तीन मैचों की श्रृंखला को 2-1 से जीता था। संयुक्त अरब अमीरात में खेले जा रहे इंटरनेशनल लीग टी20 (आईएलटी20) में डेजर्ट्स वाइपर्स टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे चांदीमल ने कहा, 'सूर्यकुमार यादव जैसा खिलाड़ी 30 से 50 रन की पारी से प्रतिद्वंद्वी टीम को परेशानी में डाल सकता है। उनकी रन बनाने की गति से काफी फर्क पड़ता है इससे टीम के दूसरे खिलाड़ियों का काम आसान हो जाता है। ' टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला को गंवाने के बाद श्रीलंका की टीम तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला में 0-2 से पीछे है और इसका आखिरी मुकाबला 15 जनवरी को खेला जायेगा। चांदीमल ने उम्मीद जताई कि टीम सकारात्मक क्रिकेट खेलकर दौरे को अच्छे से खत्म करेगी। उन्होंने कहा, 'भारत के खिलाफ उसकी घरेलू सरजमीं पर खेलना आसान नहीं है। लेकिन मैं चाहूंगा कि हमारे खिलाड़ी सकारात्मक क्रिकेट खेले। सकारात्मक सोच के साथ बल्लेबाजी करें और सकारात्मक सोच के साथ गेंदबाजी करें। ' चांदीमल ने कहा कि आईएलटी20 की तरह के लीग से उन खिलाड़ियों को भी फायदा होगा जो राष्ट्रीय टीम का हिस्सा नहीं। पिछले साल फरवरी में अपना पिछला टी20 अंतरराष्ट्रीय और नवंबर में एकदिवसीय खेलने वाले इस पूर्व कप्तान ने कहा, 'इस लीग में अच्छा प्रदर्शन कर खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में वापसी कर सकते है। अपने कौशल को दुनिया को दिखाने का यह अच्छा मंच है। ' चांदीमल ने इस बात पर हैरानी जताई की उनकी राष्ट्रीय टीम के कप्तान दासुन शनाका के लिए इंडियन प्रीमियर लीग की नीलामी में किसी फ्रेंचाइजी ने बोली नहीं लगायी। उन्होंने कहा, 'इस मुझे हैरानी हुई। वह ऐसा खिलाड़ी है जो छोटे प्रारूप में कभी में मैच के रूख को बदल सकता है। मुझे उम्मीद है कि भविष्य में कोई टीम उसे अपने साथ जोडेगी। ' शनाका ने भारत के खिलाफ मौजूदा श्रृंखला के शुरूआती एकदिवसीय में नाबाद 108 रन की पारी खेली। उन्होंने इससे पहले टी20 श्रृंखला में भी गेंद और बल्ले से अच्छा प्रदर्शन किया था। दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय में उन्होंने नाबाद 56 रन की पारी खेलने के बाद चार रन देकर दो विकेट झटके थे जिससे श्रीलंका ने 16 रन से मैच जीता था।
दुबई : श्रीलंका के पूर्व कप्तान दिनेश चांदीमल ने सूर्यकुमार यादव को भारतीय एकदिवसीय एकादश में जगह नहीं मिलने पर आश्चर्य जताते हुए शुक्रवार को कहा कि इस तरह का आक्रामक बल्लेबाज तीस से पचास रन की पारी से पूरे मैच का रूख मोड़ सकता है। श्रीलंका के लिए एक सौ सत्तावन एकदिवसीय में लगभग पाँच हज़ार रन बनाने वाले चांदीमल ने कहा, 'यह दिखाता है कि भारतीय क्रिकेट में कितनी प्रतिभा है। मुझे फिर भी लगता है कि सूर्यकुमार यादव एकदिवसीय टीम का हिस्सा हो सकते है। ' श्रीलंका के खिलाफ तीसरे और निर्णायक टीबीस अंतरराष्ट्रीय में सूर्यकुमार ने शतकीय पारी खेलकर टीम की जीत सुनिश्चित की। उनकी इक्यावन गेंद में नाबाद एक सौ बारह रन की पारी से भारत ने निर्णायक मुकाबले में श्रीलंका को इक्यानवे रन के बड़े अंतर से हराकर तीन मैचों की श्रृंखला को दो-एक से जीता था। संयुक्त अरब अमीरात में खेले जा रहे इंटरनेशनल लीग टीबीस में डेजर्ट्स वाइपर्स टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे चांदीमल ने कहा, 'सूर्यकुमार यादव जैसा खिलाड़ी तीस से पचास रन की पारी से प्रतिद्वंद्वी टीम को परेशानी में डाल सकता है। उनकी रन बनाने की गति से काफी फर्क पड़ता है इससे टीम के दूसरे खिलाड़ियों का काम आसान हो जाता है। ' टीबीस अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला को गंवाने के बाद श्रीलंका की टीम तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला में शून्य-दो से पीछे है और इसका आखिरी मुकाबला पंद्रह जनवरी को खेला जायेगा। चांदीमल ने उम्मीद जताई कि टीम सकारात्मक क्रिकेट खेलकर दौरे को अच्छे से खत्म करेगी। उन्होंने कहा, 'भारत के खिलाफ उसकी घरेलू सरजमीं पर खेलना आसान नहीं है। लेकिन मैं चाहूंगा कि हमारे खिलाड़ी सकारात्मक क्रिकेट खेले। सकारात्मक सोच के साथ बल्लेबाजी करें और सकारात्मक सोच के साथ गेंदबाजी करें। ' चांदीमल ने कहा कि आईएलटीबीस की तरह के लीग से उन खिलाड़ियों को भी फायदा होगा जो राष्ट्रीय टीम का हिस्सा नहीं। पिछले साल फरवरी में अपना पिछला टीबीस अंतरराष्ट्रीय और नवंबर में एकदिवसीय खेलने वाले इस पूर्व कप्तान ने कहा, 'इस लीग में अच्छा प्रदर्शन कर खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में वापसी कर सकते है। अपने कौशल को दुनिया को दिखाने का यह अच्छा मंच है। ' चांदीमल ने इस बात पर हैरानी जताई की उनकी राष्ट्रीय टीम के कप्तान दासुन शनाका के लिए इंडियन प्रीमियर लीग की नीलामी में किसी फ्रेंचाइजी ने बोली नहीं लगायी। उन्होंने कहा, 'इस मुझे हैरानी हुई। वह ऐसा खिलाड़ी है जो छोटे प्रारूप में कभी में मैच के रूख को बदल सकता है। मुझे उम्मीद है कि भविष्य में कोई टीम उसे अपने साथ जोडेगी। ' शनाका ने भारत के खिलाफ मौजूदा श्रृंखला के शुरूआती एकदिवसीय में नाबाद एक सौ आठ रन की पारी खेली। उन्होंने इससे पहले टीबीस श्रृंखला में भी गेंद और बल्ले से अच्छा प्रदर्शन किया था। दूसरे टीबीस अंतरराष्ट्रीय में उन्होंने नाबाद छप्पन रन की पारी खेलने के बाद चार रन देकर दो विकेट झटके थे जिससे श्रीलंका ने सोलह रन से मैच जीता था।
भगवान कृष्ण कभी भी किसी रिश्ते को निभाने में विफल नहीं रहें। खास कर प्यार का रिश्ता। राधा से मोहब्बत करना हो या फिर रुक्मिणी और सत्यभामा का पति बनकर उनका ख्याल रखना। हर रिश्ते को उन्होंने ईमानदारी से निभाया। रिलेशनशिप डेस्क. प्यार हो या परिवार, दिल से जुड़े जज्बात हों या दोस्ती की बात, इन तमाम पैमानों पर एक नाम की चर्चा सबसे ज्यादा होती है। वह नाम है धरती पर नारायण का अवतार माने जाने वाले भगवान श्रीकृष्ण (lord krishna)का। कहते हैं कि इकलौते कृष्ण ही थे जो इंसानी भावनाओं से जुड़े सभी 16 कलाओं में निपुण थे। धर्म-कर्म और ज्ञान-विज्ञान से लेकर दोस्ती-प्यार और परिवार-समाज तक कृष्ण हर कसौटी पर संपूर्ण साबित हुए। कुरुक्षेत्र के मैदान में हुए महायुद्ध के महानायक स्वयं भगवान कृष्ण थे। लेकिन यह भी जग-जाहिर है कि उन्होंने अंतिम वक्त तक युद्ध को टालने की हरसंभव कोशिश की थी। दरअसल कृष्ण तो प्रेम के मसीहा थे और उनका मानना था कि दुनिया का हर मतभेद आपसी बातचीत और प्रेमपूर्ण बर्ताव से दूर किया जा सकता है। निजी जिंदगी में कृष्ण और राधा की प्रेम कहानी भी यही सीख देती है। आज के दौर में जबकि रिश्तों को संभालने और संवारने की चुनौती बढ़ती जा रही है, ऐसे में हम आपको कृष्ण की कामयाब जिंदगी के वे सात मंत्र बताने जा रहे हैं जिन्हें अपना कर आप अपने प्यार और परिवार को बिखरने से बचा सकते हैं। गोकुल की तमाम गोपियों के दिलों में बसने वाले कान्हा का दिल सिर्फ राधा के लिए ही धड़कता था। राधा के जीवन में भी कृष्ण से अनमोल कोई नहीं था। इस अमर प्रेम कहानी के सूत्रधार स्वयं कृष्ण ही थे जिन्होंने अवतारी पुरुष होने के बावजूद कभी भी राधा का अनादर नहीं किया। गोपियों को छेड़ने से लेकर उनकी गगरी फोड़ने तक कृष्ण की लीलाओं से जब भी राधा खीझती थी तो उन्हें मनाने के लिए कान्हा दिन-रात एक कर देते थे। जब तक राधा रानी मान नहीं जातीं तब तक कृष्ण हार नहीं मानते थे। प्रेमी-प्रेमिकाओं और पति-पत्नी के रिश्ते को कामयाब बनाने की यह सबसे बड़ी सीख है। कान्हा को अपने दोस्तों की टोली बहुत पसंद थी। वे अक्सर गाय चराने और माखन चुराने के लिए अपनी टोली के साथ निकल जाया करते थे। राधा रानी को कृष्ण का यह फक्कड़ अंदाज बिल्कुल पसंद नहीं था। पर कृष्ण को दोस्ती के साथ-साथ प्यार निभाना भी खूब आता था। उन्हें जब भी समय मिलता वे अपनी बांसुरी लेकर यमुना के तट पर पहुंच जाते और फिर ऐसी सुरीली तान छेड़ते कि राधा उनके पास खिंची चली आती थीं। निजी जिंदगी में अपने हमसफर का दिल जीतने के लिए ऐसे जतन बेहद जरूरी हैं। कृष्ण जब बांसुरी बजाते थे तो राधा मदहोश हो जाती थीं। और कृष्ण जब रास रचाते थे तो राधा सुध-बुध खोकर नाच उठती थीं। राधा-कृष्ण का एक दूसरे के प्रति प्रेम और समर्पण का भाव इसलिए इतना गहरा था कि क्योंकि दोनों एक दूसरे की कद्र करते थे। जिस तरह राधा रानी कृष्ण की कला की सराहना करती थीं उसी भाव में कृष्ण भी हमेशा उनका हौसला बढ़ाया करते थे। जब समाज ने दोनों के रिश्ते पर उंगली उठाई तब भी कृष्ण पूरी मजबूती से राथा के साथ खड़े रहे। कृष्ण तमाम गोपियों में राधा को ही सर्वश्रेष्ठ मानते थे और उनका कोई भी उत्सव राधा के बिना पूरा नहीं होता था। सीख यह है कि अगर प्यार के रिश्ते में एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते रहें तो संबंधों की बुनियाद कभी नहीं हिलती। कहते हैं प्यार में तकरार न हो तो वह अधूरा है। कृष्ण और राधा का प्रेम भी इससे अछूता नहीं था। कई बार कृष्ण की बातें या बर्ताव राधा को चुभ जाया करती थीं। बाल लीला खत्म करने के बाद जब कृष्ण अपने माता-पिता को जेल से रिहा करवाने के लिए मथुरा जाने लगे तो राधा बिल्कुल तैयार नहीं थीं। वह जानती थीं कि कृष्ण को मथुरा में कंस से लड़ना है। ऐसे में कृष्ण ने अपना कर्तव्य याद दिलाते हुए राधा की उलझन दूर की और मथुरा के लिए रवाना हुए। यह प्रसंग सिखाता है कि प्यार और प्रोफेशन के बीच कैसे संतुलन बनाया जा सकता है। जिस रिश्ते में भरोसा न हो वहां प्यार नहीं टिकता। कृष्ण का प्रेम संबंध भरोसे की बुनियाद पर ही मजबूती से खड़ा रहा। राधा को पता था कि कृष्ण के जीवन का लक्ष्य कितना बड़ा है। यह भी मालूम था कि एक बार कृष्ण गोकुल से चले गए तो लौट कर नहीं आएंगे। बावजूद इसके दोनों के रिश्ते में कभी खटास नहीं आई। बाद में जब कृष्ण ने रुक्मिणी और सत्यभामा से विवाह कर लिया, तब भी दोनों का प्रेम खत्म नहीं हुआ। अपने वैवाहिक जीवन में कृष्ण ने पति और पिता का धर्म भी बखूबी निभाया। प्रेम संबंध से इतर दांपत्य जीवन में प्रवेश करने वालों के लिए कृष्ण का ये संदेश भी काफी मायने रखता है। प्रेम से भरे जीवन में पास-पास रहने से ज्यादा जरूरी होता है साथ-साथ रहना। कृष्ण का प्रेम दर्शन भी इसी पर आधारित है। मथुरा जाने के बाद कृष्ण भी राधा और अन्य गोपियां की विरह वेदना से अनजान नहीं थे। इसीलिए उन्होंने समझाने-बुझाने के लिए उद्धव को अपना दूत बनाकर गोकुल भेजा। पर राधा और गोपियों ने उद्धव को यह कहकर निरुत्तर कर दिया कि कृष्ण भले उनके साथ नहीं पर उनका प्रेम हमेशा उनके साथ रहेगा। रिश्ता प्यार का हो या दोस्ती का, उसके प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में भी कृष्ण का जीवन मिसाल है। जिस भाव से कृष्म ने राधा से प्रेम का रिश्ता निभाया उसी जिम्मेदारी के साथ सुदामा के साथ दोस्ती के रिश्ते का ख्याल रखा। मैया यशोदा और नंद के वात्सल्य का भी मान रखा। साथ ही माता देवकी और पिता वासुदेव के प्रति भी अपना कर्तव्य निभाया। भाई बलराम और बहन सुभद्रा अगाध स्नेह रहा तो अर्जुन और द्रौपदी के प्रति कृष्ण का सखा भाव का भी कोई सानी नहीं। गुरु सांदीपनी के प्रति कृष्ण का शिष्य भाव और भीष्म पितामह के प्रति श्रद्धा भाव का भी पूरी मर्यादा से पालन किया। मथुरा और द्वारिका के राजा बनकर प्रजा का ख्याल रखा और महाभारत युद्ध में गीता का ज्ञान देकर जगत कल्याण के लिए काम किया। जाहिर है, दुनिया को कर्म का अनमोल सिद्धांत देने वाले कृष्ण पथ पर चलकर ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। और पढ़ेंः ब्लैक डायरीः बचपन में चचेरे भाई ने किया था यौन शोषण,गर्लफ्रेंड के साथ रिश्ता बनाने में लगता है डर!
भगवान कृष्ण कभी भी किसी रिश्ते को निभाने में विफल नहीं रहें। खास कर प्यार का रिश्ता। राधा से मोहब्बत करना हो या फिर रुक्मिणी और सत्यभामा का पति बनकर उनका ख्याल रखना। हर रिश्ते को उन्होंने ईमानदारी से निभाया। रिलेशनशिप डेस्क. प्यार हो या परिवार, दिल से जुड़े जज्बात हों या दोस्ती की बात, इन तमाम पैमानों पर एक नाम की चर्चा सबसे ज्यादा होती है। वह नाम है धरती पर नारायण का अवतार माने जाने वाले भगवान श्रीकृष्ण का। कहते हैं कि इकलौते कृष्ण ही थे जो इंसानी भावनाओं से जुड़े सभी सोलह कलाओं में निपुण थे। धर्म-कर्म और ज्ञान-विज्ञान से लेकर दोस्ती-प्यार और परिवार-समाज तक कृष्ण हर कसौटी पर संपूर्ण साबित हुए। कुरुक्षेत्र के मैदान में हुए महायुद्ध के महानायक स्वयं भगवान कृष्ण थे। लेकिन यह भी जग-जाहिर है कि उन्होंने अंतिम वक्त तक युद्ध को टालने की हरसंभव कोशिश की थी। दरअसल कृष्ण तो प्रेम के मसीहा थे और उनका मानना था कि दुनिया का हर मतभेद आपसी बातचीत और प्रेमपूर्ण बर्ताव से दूर किया जा सकता है। निजी जिंदगी में कृष्ण और राधा की प्रेम कहानी भी यही सीख देती है। आज के दौर में जबकि रिश्तों को संभालने और संवारने की चुनौती बढ़ती जा रही है, ऐसे में हम आपको कृष्ण की कामयाब जिंदगी के वे सात मंत्र बताने जा रहे हैं जिन्हें अपना कर आप अपने प्यार और परिवार को बिखरने से बचा सकते हैं। गोकुल की तमाम गोपियों के दिलों में बसने वाले कान्हा का दिल सिर्फ राधा के लिए ही धड़कता था। राधा के जीवन में भी कृष्ण से अनमोल कोई नहीं था। इस अमर प्रेम कहानी के सूत्रधार स्वयं कृष्ण ही थे जिन्होंने अवतारी पुरुष होने के बावजूद कभी भी राधा का अनादर नहीं किया। गोपियों को छेड़ने से लेकर उनकी गगरी फोड़ने तक कृष्ण की लीलाओं से जब भी राधा खीझती थी तो उन्हें मनाने के लिए कान्हा दिन-रात एक कर देते थे। जब तक राधा रानी मान नहीं जातीं तब तक कृष्ण हार नहीं मानते थे। प्रेमी-प्रेमिकाओं और पति-पत्नी के रिश्ते को कामयाब बनाने की यह सबसे बड़ी सीख है। कान्हा को अपने दोस्तों की टोली बहुत पसंद थी। वे अक्सर गाय चराने और माखन चुराने के लिए अपनी टोली के साथ निकल जाया करते थे। राधा रानी को कृष्ण का यह फक्कड़ अंदाज बिल्कुल पसंद नहीं था। पर कृष्ण को दोस्ती के साथ-साथ प्यार निभाना भी खूब आता था। उन्हें जब भी समय मिलता वे अपनी बांसुरी लेकर यमुना के तट पर पहुंच जाते और फिर ऐसी सुरीली तान छेड़ते कि राधा उनके पास खिंची चली आती थीं। निजी जिंदगी में अपने हमसफर का दिल जीतने के लिए ऐसे जतन बेहद जरूरी हैं। कृष्ण जब बांसुरी बजाते थे तो राधा मदहोश हो जाती थीं। और कृष्ण जब रास रचाते थे तो राधा सुध-बुध खोकर नाच उठती थीं। राधा-कृष्ण का एक दूसरे के प्रति प्रेम और समर्पण का भाव इसलिए इतना गहरा था कि क्योंकि दोनों एक दूसरे की कद्र करते थे। जिस तरह राधा रानी कृष्ण की कला की सराहना करती थीं उसी भाव में कृष्ण भी हमेशा उनका हौसला बढ़ाया करते थे। जब समाज ने दोनों के रिश्ते पर उंगली उठाई तब भी कृष्ण पूरी मजबूती से राथा के साथ खड़े रहे। कृष्ण तमाम गोपियों में राधा को ही सर्वश्रेष्ठ मानते थे और उनका कोई भी उत्सव राधा के बिना पूरा नहीं होता था। सीख यह है कि अगर प्यार के रिश्ते में एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते रहें तो संबंधों की बुनियाद कभी नहीं हिलती। कहते हैं प्यार में तकरार न हो तो वह अधूरा है। कृष्ण और राधा का प्रेम भी इससे अछूता नहीं था। कई बार कृष्ण की बातें या बर्ताव राधा को चुभ जाया करती थीं। बाल लीला खत्म करने के बाद जब कृष्ण अपने माता-पिता को जेल से रिहा करवाने के लिए मथुरा जाने लगे तो राधा बिल्कुल तैयार नहीं थीं। वह जानती थीं कि कृष्ण को मथुरा में कंस से लड़ना है। ऐसे में कृष्ण ने अपना कर्तव्य याद दिलाते हुए राधा की उलझन दूर की और मथुरा के लिए रवाना हुए। यह प्रसंग सिखाता है कि प्यार और प्रोफेशन के बीच कैसे संतुलन बनाया जा सकता है। जिस रिश्ते में भरोसा न हो वहां प्यार नहीं टिकता। कृष्ण का प्रेम संबंध भरोसे की बुनियाद पर ही मजबूती से खड़ा रहा। राधा को पता था कि कृष्ण के जीवन का लक्ष्य कितना बड़ा है। यह भी मालूम था कि एक बार कृष्ण गोकुल से चले गए तो लौट कर नहीं आएंगे। बावजूद इसके दोनों के रिश्ते में कभी खटास नहीं आई। बाद में जब कृष्ण ने रुक्मिणी और सत्यभामा से विवाह कर लिया, तब भी दोनों का प्रेम खत्म नहीं हुआ। अपने वैवाहिक जीवन में कृष्ण ने पति और पिता का धर्म भी बखूबी निभाया। प्रेम संबंध से इतर दांपत्य जीवन में प्रवेश करने वालों के लिए कृष्ण का ये संदेश भी काफी मायने रखता है। प्रेम से भरे जीवन में पास-पास रहने से ज्यादा जरूरी होता है साथ-साथ रहना। कृष्ण का प्रेम दर्शन भी इसी पर आधारित है। मथुरा जाने के बाद कृष्ण भी राधा और अन्य गोपियां की विरह वेदना से अनजान नहीं थे। इसीलिए उन्होंने समझाने-बुझाने के लिए उद्धव को अपना दूत बनाकर गोकुल भेजा। पर राधा और गोपियों ने उद्धव को यह कहकर निरुत्तर कर दिया कि कृष्ण भले उनके साथ नहीं पर उनका प्रेम हमेशा उनके साथ रहेगा। रिश्ता प्यार का हो या दोस्ती का, उसके प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में भी कृष्ण का जीवन मिसाल है। जिस भाव से कृष्म ने राधा से प्रेम का रिश्ता निभाया उसी जिम्मेदारी के साथ सुदामा के साथ दोस्ती के रिश्ते का ख्याल रखा। मैया यशोदा और नंद के वात्सल्य का भी मान रखा। साथ ही माता देवकी और पिता वासुदेव के प्रति भी अपना कर्तव्य निभाया। भाई बलराम और बहन सुभद्रा अगाध स्नेह रहा तो अर्जुन और द्रौपदी के प्रति कृष्ण का सखा भाव का भी कोई सानी नहीं। गुरु सांदीपनी के प्रति कृष्ण का शिष्य भाव और भीष्म पितामह के प्रति श्रद्धा भाव का भी पूरी मर्यादा से पालन किया। मथुरा और द्वारिका के राजा बनकर प्रजा का ख्याल रखा और महाभारत युद्ध में गीता का ज्ञान देकर जगत कल्याण के लिए काम किया। जाहिर है, दुनिया को कर्म का अनमोल सिद्धांत देने वाले कृष्ण पथ पर चलकर ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। और पढ़ेंः ब्लैक डायरीः बचपन में चचेरे भाई ने किया था यौन शोषण,गर्लफ्रेंड के साथ रिश्ता बनाने में लगता है डर!
नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : बिहार की राजधानी पटना में एक बड़ा नाव हादसा हो गया है. गंगा नदी में एक नाव पलट जाने से ये हादसा हुआ है जिसमें 25 लोग की मौत हो गयी है. यह हादसा उस वक्त हुआ जब लोग पतंग उत्सव मना के लौट रहे थे. इस हादसे में अभी एक दर्जन से अधिक लोग लापता हैं. हादसे का कारण नाव में लोगों की अधिक संख्या थी जिसकी वजह से नाव का संतुलन बिगड़ गया और नाव पलट गयी. नाव पर 50 से 60 लोग सवार थे. हादसे को लेकर नितीश कुमार ने दुःख प्रकट किया है. वही मरने वालों के परिजनों को 4 लाख रुपए का मुआवजा देने का ऐलान किया है. लापता लोगों की खोजबीन करने के लिए एसडीआरएफ की टीम को तैनात किया गया है. इस हादसे के बाद नितीश कुमार ने आज होने वाला भोज का कार्यक्रम भी रद्द कर दिया है. यह नाव जिला प्रशासन की तरफ से आयोजित पतंग उत्सव में भाग लेकर लौट रही थी तभी ये हादसा हुआ. विडियो में देखें आखिर कैसे हुआ हादसा :
नई दिल्ली, : बिहार की राजधानी पटना में एक बड़ा नाव हादसा हो गया है. गंगा नदी में एक नाव पलट जाने से ये हादसा हुआ है जिसमें पच्चीस लोग की मौत हो गयी है. यह हादसा उस वक्त हुआ जब लोग पतंग उत्सव मना के लौट रहे थे. इस हादसे में अभी एक दर्जन से अधिक लोग लापता हैं. हादसे का कारण नाव में लोगों की अधिक संख्या थी जिसकी वजह से नाव का संतुलन बिगड़ गया और नाव पलट गयी. नाव पर पचास से साठ लोग सवार थे. हादसे को लेकर नितीश कुमार ने दुःख प्रकट किया है. वही मरने वालों के परिजनों को चार लाख रुपए का मुआवजा देने का ऐलान किया है. लापता लोगों की खोजबीन करने के लिए एसडीआरएफ की टीम को तैनात किया गया है. इस हादसे के बाद नितीश कुमार ने आज होने वाला भोज का कार्यक्रम भी रद्द कर दिया है. यह नाव जिला प्रशासन की तरफ से आयोजित पतंग उत्सव में भाग लेकर लौट रही थी तभी ये हादसा हुआ. विडियो में देखें आखिर कैसे हुआ हादसा :
- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने आज क्लास 12वीं के छात्रों के लिए सफलतापूर्वक मैथ्स पेपर का आयोजन किया। - क्लास 12वीं के छात्रों के लिए Mathematics की आंसर-की जारी हो गई है। - छात्र यहां CBSE maths answer key के साथ एनालिसिस कॉपी का लिंक भी पाएंगे। CBSE Class 12 Maths Term 1 Answer Key 2021-22: The Central Board of Secondary Education (CBSE) ने सोमवार को क्लास 12 के छात्रों के लिए टर्म 1 बोर्ड एग्जाम का गणित पेपर आयोजित किया गया। पेपर दोपहर 1 बजे खत्म हो गया था, जिसकी एनालिसिस कॉपी तुरंत ही जारी कर दी गई थी। यदि आप पहले एनालिसिस कॉपी देखना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें। यदि आप भी Central Board of Secondary Education (CBSE) द्वारा आयोजित क्लास 10 Mathematics Standard or Mathematics Basics की आंसर की देखना व डाउनलोड करना चाहते हैं, तो यहां cbse class 10th Math's paper answer key चेक कर सकते हैं। क्लास 12 टर्म 1 बोर्ड एग्जाम का यह तीसरा पेपर है, इससे पहले cbse sociology और cbse english का आयोजन हो चुका है। यह पहली बार है जब छात्र एमसीक्यू फॉर्मेट में पेपर दे रहे हैं, और यह भी पहली बार है कि मात्र 90 मिनट में छात्रों को सवालों का जवाब देना है। स्पष्टीकरणः उत्तर इस विषय को पढ़ाने में वर्षों का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों द्वारा प्रदान किए गए हैं। टाइम्स नाउ नवभारत इन answer key की सटीकता की कोई जिम्मेदारी नहीं लेता है। ये जवाब केवल संदर्भ के रूप में दिए गए हैं।
- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने आज क्लास बारहवीं के छात्रों के लिए सफलतापूर्वक मैथ्स पेपर का आयोजन किया। - क्लास बारहवीं के छात्रों के लिए Mathematics की आंसर-की जारी हो गई है। - छात्र यहां CBSE maths answer key के साथ एनालिसिस कॉपी का लिंक भी पाएंगे। CBSE Class बारह Maths Term एक Answer Key दो हज़ार इक्कीस-बाईस: The Central Board of Secondary Education ने सोमवार को क्लास बारह के छात्रों के लिए टर्म एक बोर्ड एग्जाम का गणित पेपर आयोजित किया गया। पेपर दोपहर एक बजे खत्म हो गया था, जिसकी एनालिसिस कॉपी तुरंत ही जारी कर दी गई थी। यदि आप पहले एनालिसिस कॉपी देखना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें। यदि आप भी Central Board of Secondary Education द्वारा आयोजित क्लास दस Mathematics Standard or Mathematics Basics की आंसर की देखना व डाउनलोड करना चाहते हैं, तो यहां cbse class दसth Math's paper answer key चेक कर सकते हैं। क्लास बारह टर्म एक बोर्ड एग्जाम का यह तीसरा पेपर है, इससे पहले cbse sociology और cbse english का आयोजन हो चुका है। यह पहली बार है जब छात्र एमसीक्यू फॉर्मेट में पेपर दे रहे हैं, और यह भी पहली बार है कि मात्र नब्बे मिनट में छात्रों को सवालों का जवाब देना है। स्पष्टीकरणः उत्तर इस विषय को पढ़ाने में वर्षों का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों द्वारा प्रदान किए गए हैं। टाइम्स नाउ नवभारत इन answer key की सटीकता की कोई जिम्मेदारी नहीं लेता है। ये जवाब केवल संदर्भ के रूप में दिए गए हैं।
भोपाल । मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस में कुछ नहीं है लेकिन मुख्यमंत्री को हटाने का फ़ैसला लेते हैं। चौहान ने कहा कि दुनिया में ऐसी कोई पार्टी देखी है जिसका अध्यक्ष ही न हो? सोनिया गांधी कार्यकारी अध्यक्ष हैं। पंजाब सरकार सही चल रही थी तो उसे डुबो दिया है।
भोपाल । मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस में कुछ नहीं है लेकिन मुख्यमंत्री को हटाने का फ़ैसला लेते हैं। चौहान ने कहा कि दुनिया में ऐसी कोई पार्टी देखी है जिसका अध्यक्ष ही न हो? सोनिया गांधी कार्यकारी अध्यक्ष हैं। पंजाब सरकार सही चल रही थी तो उसे डुबो दिया है।
Sec. 3(i)] THE Gazette of indIA: SEPTEMBER 18, 1971/BHADRA 27, 1893 3751 (Inspection) in the Ministry of External Affiars. Whether age and educational qualifications Prescribed for direct recruits will apply in the case of Promotees. Period of Method of rectt. probation, whether by direct rectt. or by deputation/transfer & percentage of the vacancies to be filled by various methods Not applicable 2 years By direct recruitment. In case of recruitment If a DPC by Promotion/deputa- exists, tion/transfer, grades what is its from which promotion/ composideputation/transfer to tion be made. Not applicable Circumstances in which U.P.S.C. is to be consulted in making rectt. Not As applicable required under the Service Commission (Exemption from Consultation) Regulations, 1958. [No. F. 41/PA-II/70.] BRIJ KUMAR, Under Secy, 3752 THL GAZETTE OF INDIA: SEPTEMBER 18, 1971 / BHADRA 27, 1893 [PART IIनई दिल्ली, 10 अस्त, 1971 सा० का० मि० 1360.-- संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति इसके द्वारा भारतीय विदेश सेवा के प्रधीन निरीक्षण एकक में सहायक निदेशक (निरीक्षण) के पद के भर्ती के तरीके को नियमित करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाते हैं, यथा :-- 1. संक्षिप्त शीर्षक एवं प्रारम्भ :-- ( 1 ) इन नियमों को विदेश मंत्रालय, सहायक निदेशक ( निरीक्षण ) भर्ती नियम, 1971 कहा जायगा । ( 2 ) ये सरकारी राजपस में प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे । होंगे । 2. विनियंग :- ये नियम सम्बद्ध अनुसूची के कालम -1 में उल्लिखित पद पर लागू 3. संख्या, वर्गीकरण और जेतनमान : न पदों की संख्या उनका वर्गीकरण और वेतनमान यहीं होंगे जो अनुसूची के कालम 2 से 4 में बताए गए हैं । 4. भर्ती की पद्धति, प्रायु सीमा, अर्हताएं प्राविः- पद की भर्ती की पद्धत्ति, आयु सीमा, महंता तथा इनसे सम्बद्ध अन्य बातें षही होंगी जो अनुसूची के कालम 5 से 13 तक बसाई गई हैं । परन्तु उक्त अनुसूची के कालम 6 मे विनिर्दिष्ट अधिकतम आयु सीमा में ढील दी जा सकती है, यदि उम्मीदवार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए आदेशों के अनुसार अन्य किसी विशेष वर्ग का हो । 5. अयोग्यता :- ऐसा कोई व्यक्ति - (क) जिसने किसी ऐसे व्यक्ति से विवाह किया हो या विवाह का विधितः समझौता किया हो, जिसकी पत्नी / पति जीवित हो, अथवा (ख) जिसने पत्नी / पति के जीवित हुए किसी अन्य व्यक्ति से विवाह किया हो या विवाह का विधितः समझौता किया हो, इस पद पर नियुक्त के योग्य नहीं होगा । परन्तु यवि केन्द्र सरकार इस बात से आश्वस्त हो कि इस तरह का विवाह उस व्यक्ति पर तथा इस विवाह के दूसरे पक्ष पर लागू होने वाले व्यक्तिक कानून के अधीन अनुज्ञेय है तथा ऐसा करने के कुछ अन्य कारण भी हैं, तो सरकार इस नियम से किसी भी व्यक्ति को छूट दे सकती है ।
Sec. तीन] THE Gazette of indIA: SEPTEMBER अट्ठारह, एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर/BHADRA सत्ताईस, एक हज़ार आठ सौ तिरानवे तीन हज़ार सात सौ इक्यावन in the Ministry of External Affiars. Whether age and educational qualifications Prescribed for direct recruits will apply in the case of Promotees. Period of Method of rectt. probation, whether by direct rectt. or by deputation/transfer & percentage of the vacancies to be filled by various methods Not applicable दो years By direct recruitment. In case of recruitment If a DPC by Promotion/deputa- exists, tion/transfer, grades what is its from which promotion/ composideputation/transfer to tion be made. Not applicable Circumstances in which U.P.S.C. is to be consulted in making rectt. Not As applicable required under the Service Commission Regulations, एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन. [No. F. इकतालीस/PA-II/सत्तर.] BRIJ KUMAR, Under Secy, तीन हज़ार सात सौ बावन THL GAZETTE OF INDIA: SEPTEMBER अट्ठारह, एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर / BHADRA सत्ताईस, एक हज़ार आठ सौ तिरानवे [PART IIनई दिल्ली, दस अस्त, एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर साशून्य काशून्य मिशून्य एक हज़ार तीन सौ साठ.-- संविधान के अनुच्छेद तीन सौ नौ के परन्तुक द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति इसके द्वारा भारतीय विदेश सेवा के प्रधीन निरीक्षण एकक में सहायक निदेशक के पद के भर्ती के तरीके को नियमित करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाते हैं, यथा :-- एक. संक्षिप्त शीर्षक एवं प्रारम्भ :-- इन नियमों को विदेश मंत्रालय, सहायक निदेशक भर्ती नियम, एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर कहा जायगा । ये सरकारी राजपस में प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे । होंगे । दो. विनियंग :- ये नियम सम्बद्ध अनुसूची के कालम -एक में उल्लिखित पद पर लागू तीन. संख्या, वर्गीकरण और जेतनमान : न पदों की संख्या उनका वर्गीकरण और वेतनमान यहीं होंगे जो अनुसूची के कालम दो से चार में बताए गए हैं । चार. भर्ती की पद्धति, प्रायु सीमा, अर्हताएं प्राविः- पद की भर्ती की पद्धत्ति, आयु सीमा, महंता तथा इनसे सम्बद्ध अन्य बातें षही होंगी जो अनुसूची के कालम पाँच से तेरह तक बसाई गई हैं । परन्तु उक्त अनुसूची के कालम छः मे विनिर्दिष्ट अधिकतम आयु सीमा में ढील दी जा सकती है, यदि उम्मीदवार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या समय-समय पर केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए आदेशों के अनुसार अन्य किसी विशेष वर्ग का हो । पाँच. अयोग्यता :- ऐसा कोई व्यक्ति - जिसने किसी ऐसे व्यक्ति से विवाह किया हो या विवाह का विधितः समझौता किया हो, जिसकी पत्नी / पति जीवित हो, अथवा जिसने पत्नी / पति के जीवित हुए किसी अन्य व्यक्ति से विवाह किया हो या विवाह का विधितः समझौता किया हो, इस पद पर नियुक्त के योग्य नहीं होगा । परन्तु यवि केन्द्र सरकार इस बात से आश्वस्त हो कि इस तरह का विवाह उस व्यक्ति पर तथा इस विवाह के दूसरे पक्ष पर लागू होने वाले व्यक्तिक कानून के अधीन अनुज्ञेय है तथा ऐसा करने के कुछ अन्य कारण भी हैं, तो सरकार इस नियम से किसी भी व्यक्ति को छूट दे सकती है ।
मेवार में वर्षा का भोसत २४ इंच झालावाड़ में ३७ इंच और बाँसवाड़े में ३८ इंच के लगभग है। अधिक ऊँचाई के कारण आबू पर वर्ष में ५७-५८ इंच के लगभग वर्षा होती है। जल की अधिकता से इस तरफ कई घने जंगल हैं जिनमें इमारती काम के लिये उपयोगी लड़की के अतिरिक्त तरहतरह के फल-फूल भी होते हैं। इस भाग में फसलें साधारणतया दो होती हैंउनालू और सियालू । परन्तु जलवायु की आर्द्रता के कारण लोगों को प्रायः मलेरिया और मंदाग्नि की शिकायत रहती है। भौगोलिक स्थिति का प्रभाव - राजस्थान की प्राकृतिक स्थिति और अलवायु का प्रभाव इसके इतिहास, इसकी संस्कृति और इसके निवासियों की रहन-सहन एवं आचार-विचार पर बहुत पड़ा है। यहाँ के लोग बड़े परिश्रमी, बड़े साहसी एवं बड़े कष्ट-सहिष्णु होते हैं । चित्रकला, संगीत और कविता के ये बड़े प्रेमी होते हैं और अपने पूर्वजों की गौरव-गाथाओं के सुनने-सुनाने में बड़ा रस लेते हैं। इनमें धर्म-भीरता, रुढ़िवादिता और यशः प्रियता कुछ विशेष देखने में आती है। यहाँ की राजपूत जाति की वीरता और वैश्य जाति की व्यापारिक बुद्धि एवं दानशीलता विश्व विख्यात है। इसके सिवा यहाँ की भील जाति भी अपने पुरुषार्थ, अपनी स्वामिभक्ति और अपने अतिथिसरकार के लिए बहुत प्रसिद्ध है। बहुत दीर्घ काल तक इस जाति ने गजपूतो को उनके स्वाधीनता संग्राम में सहायता दी है। महाराणा प्रताप के मुख्य साथी भील ही थे। जिस समय औरंगजेब ने उदयपुर पर आक्रमण किया उस समय महाराणा राजसिंह की सेना में ५०००० भील थे। आजकल भील एक जंगली जाति मानी जाती है। परन्तु एकता और स्वावलंबन ये इस जाति के दो ऐसे गुण हैं जो भारत की अन्य किसी जाति में इतनी अधिक मात्रा में नहीं पाये जाते । संगीत- केवल वीरता के क्षेत्र में ही नहीं, संगीतकला, चित्रकला, शिल्पकला और साहित्य के क्षेत्र में भी राजस्थान ने बहुत प्रसिद्धि प्राप्त की है। संगीत का आदर यहाँ के राजदरबारों एवं देव-मंदिरों में निरंतर रहा। यहाँ के रागों में 'मीराबाई का मलार बहुत प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक राग माँद और राग सिंधू ये दो राग राजस्थान के खास अपने है। राग माँ शृंगार रस के लिये बहुत उपयुक्त है। इसका उत्पत्ति स्थान जैसलमेर माना गया है।" राग सिंधू बीर रस का राग है। प्राचीन काल में रण१०. ओझा; उदयपुर राज्य का इतिहास, पृ० ५५८ । १९. ओशा; राजपूताने का इतिहास, पहली जिल्द, १० ३१ । प्रयाण के समय ढोली और ढाड़ी लोग इसे सेना के आगे गाते हुए चलते थे। डिंगल भाषा के कवियों ने इसका वर्णन किया है।" युद्ध का अवसर न होने से यह राग अब शनैः शनैः विस्मृत होता चला जा रहा है। संगीत-शास्त्र संबंधी प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में इस राग का नामोल्लेख नहीं मिलता। परन्तु अठारवीं शताब्दी और उसके बाद के कुछ ग्रंथों में इसका नाम देखने में भाता है। उदयपुर के सरस्वती भंडार में 'रागमाला' की एक चित्रित प्रति सुरक्षित है । यह कदाचित् महाराणा जयसिंह के राजम्ब-काल (सं० १७३७-५५) में तैयार की गई थी। इसमें राग सिंधू को राग दीपक का पुत्र बतलाया गया है। इसमें राग सिंधू का एक भव्य चित्र भी है। संगीतकला के साथ-साथ संगीत- साहित्य को भी राजस्थान से बहुत प्रोत्साहन मिला है। संगीत शास्त्र संबंधी कई उत्कृष्ट ग्रंथ यहाँ लिखे गये हैं जिनमें संगीत कला के विविध अंगो का बड़ा सूक्ष्म और वैज्ञानिक विवेचन मिलता है। इनमें मेवाड के महाराणा कुँभाजी (सं० १४९०-१५२५) के रचे तीन ग्रंथ बहुत प्रसिद्ध हैं-संगीत- मीमांसा, संगीतराज और सूदप्रबंध ११ इनमें संगीतराज सब से बड़ा है। कहा जाता है कि इसमें १६००० श्लोक थे। परंतु आजकल यह ग्रंथ पूरा नहीं मिलता। जयपुर के कछवाहा राजा भगवंतदास (सं० १६३०-४६) के पुत्र माधवसिंह बड़े संगीत प्रेमी थे। उन्होंने खानदेश के पुंडरीक विठ्ठल से 'राग-मंजरी' नाम का एक ग्रंथ लिखवाया था" जो प्रकाशित भी हो चुका है। भगवंतदास से कोई दो सौ वर्ष १२. (क) हुवो अति सींघवौ राग, वागी हको । भाट आया पिसण, घाट लागै थका ।। (ख) सखी अमोणी साहिबो, निरमै काळी नाग । सिर राखे मिण समग्रम, रीमै सिधू राग ।। (ग) आळस जाणे ऐस में, बघु ढीलै विकसत । सींधू सुणियाँ सो गुण, कवच न माबै कत ॥ १३. हरबिलास सारडा; महाराणा कुंभा, पृ० १६६ । १४. एम० कृष्णमाचार्य; हिस्ट्री आव क्लासिकल संस्कृत लिटरेचर, पृ० ८६२ । १५. ओझा; राजपुताने का इतिहास, पहली जिल्द, पृ० ३२ । पश्चात् महाराजा प्रतापसिंह (सं० १८३५ - ६० ) जयपुर के राजसिंहासन पर आसीन हुए। इनके समय मे 'राधा-गोविंद-संगीत-सार', 'राम-रत्नाकर' और 'स्वर-सागर' तीन बहुत उत्तम कोटि के ग्रन्थ इस विषय पर लिखे गये ।" इसी प्रकार बीकानेर के महाराजा अनूपसिंह (सं० १७२६-५५) ने भी अपने राजाश्रित पंडित भाष भट्ट से 'संगीत-अनूपांकुश', 'अनूप-संगीत-विलास' और 'अनूप-संगीत-रत्नाकर' नामक तीन ग्रन्थ बनवाये थे । १७ चित्रकला~-~राजस्थान चित्रकला के लिए संसार भर में प्रसिद्ध है। यहाँ के राजकीय चित्रालयों तथा राजपूत सरदारों के घरों में प्राचीन चित्र बहुसंख्या में पाये जाते हैं, जिनमें कोई-कोई चार सौ वर्ष तक के पुराने हैं। ये चित्र एक विशेष शैली में अंकित किये गये है जिसे कला-विशेषज्ञों ने 'राजस्थानी शैली' नाम दिया है। इन चित्रो में देवी-देवताओं, राग-रागिनियों, पौराणिक कथाओं, सामंतो, युद्ध-घटनाओं आदि के चित्र अधिक देखने में आते हैं। ये चित्र मोटे बॉमी कागज पर मिलते हैं। रंगो की उज्ज्वलता, करना की सुघड़ता और वातावरण की तीव्रता इन चित्रों की मुख्य विशेषताएँ हैं। इनमें आलंकारिकता कुछ अधिक पाई जाती है, पर भाष- कोमलता का भी सर्वथाअभाव नहीं है। इनके द्वारा गुप्तकालीन तथा उससे पूर्व की भारतीय चित्रकला का भी अच्छा आभास मिलता है। इन चित्रों में अनेक ऐसे हैं जिन पर मुगल शैली का यथेष्ट प्रभाव दृष्टिगोचर होता है। ये चित्र अकबर- जहाँगीर के समय या उसके बाद के हैं। इनमे मानव आकृति के यथार्थ चित्रण की ओर विशेष ध्यान दिया गया है। सोन्दर्य और अभिव्यक्ति की दृष्टि से ये चित्र अनुपम हैं । फुटकर चित्रों के अतिरिक्त संस्कृत, राजस्थानी, फारसी आदि भाषाओं के चित्रित ग्रन्थ भी राजस्थान में बहुत मिलते हैं। ये ग्रन्थ खुले पत्रों के रूप में भी मिलते हैं और सजिल्द पुस्तकाकार में भी खुले पत्रोंवाले चित्रित ग्रन्थों को राजस्थान में 'जोतदान' कहते हैं। इन ग्रन्थों के चित्रों के चारों ओर सादी कोर होती है और प्रत्येक चित्र के ऊपर उससे संबंधित पूरा छंद अथवा उस छंद का संक्षित गद्यात्मक विवरण लिखा रहता है। रामायण, महाभारत पृथ्वीराज रासौ आदि बड़े आकार के ग्रन्थों की केवल मुख्य-मुख्य घटनाओं के चित्र बनाये गये हैं, पर 'बिहारी सतसई' जैसे छोटे ग्रन्थों के प्रत्येक पद्य का १६. बजनिधि-मन्थावली ( ना० प्र० सभा द्वारा प्रकाशित); पृ० ४८ (मूमिका) । १७. ओझा; बिकानेर राज्य का इतिहास, १० २८६ । चित्रांकन किया गया है। जयपुर के पोथीखाने में रज्मनामा ( महाभारत का फारसी में सारांश) की एक सचित्र प्रति सुरक्षित है जो मुगल सम्राट् अकबर की आशा तैयार की गई थी। इसमें १६९ चित्र है। इस पर चार लाख कृपया खर्च हुआ था और अकवरी दरबार के चौदह चित्रकारों ने इस पर काम किया था ।" यह ग्रन्थ भारतीय चित्रकला के भंडार का अनमोल रत्न है और मुद्रित भी हो चुका है। इस प्रकार की चिश्रित पोथियों का सबसे बड़ा संग्रह उदयपुर के 'सरस्वती भंडार' में पाया जाता है जहाँ लगभग ५० ग्रंथ विद्यमान हैं। शिल्प-संगीतकला और चित्रकला के समान प्राचीन काल में राजस्थान की शिल्पकला भी बहुत बढ़ चढ़ी थी। आयु चिसीह, नागदा, चंद्रावती, झालरापाटन आदि स्थानों के कुछ प्राचीन देवालयों में खुदाई का काम इतना सुन्दर और बारीकी के साथ किया गया है कि उसे देखकर मनुष्य चकित रह जाता । इसी तरह बहुत से अन्य स्थानों में भी शिल्प चातुर्य के उत्कृष्ट नमूने पाये जाते है । उदयपुर में कोई सवा सौ मील पूरब दिशा में बाढ़ोली नामक एक छोटा-सा प्राचीन गाँव है जो नवी दशवीं शताब्दियों में बहुत समृद्ध था और महाती नाम से विख्यात था । यहाँ शिव, विष्णु, गणेश, त्रिमूर्ति आदि के कई जीर्ण-शीर्ण मन्दिर है जिनकी कारीगरी की भारतीय शिल्प के विशेषज्ञ फर्ग्यूसन ने भूरि-भूरि प्रशंसा की है, और शेषशायी नारायण की मूर्ति के सम्बन्ध में तो यहाँ तक कह दिया है कि मेरी देखी हुई हिंदू मूर्तियों में यह सर्वोत्तम है। प्रसिद्ध इतिहासकार कर्नल टाड ने भी यहाँ की तक्षणकला को अद्भुत और वर्णनानीत बतलाया है ।" भाषा - प्राचीन काल में राजस्थान की राजकीय भाषा संस्कृत थी । विद्वान् लोग अपने ग्रंथोंकी रचना इसी भाषा में करते थे और यहाँ के दानपत्र तथा शिलालेख आदि भी इसी भाषामे लिखे जाते थे। लेकिन जनसाधारण की भाषा प्राकृत थी । अशोक के समय का एक स्तम्भ-लेख जयपुर राज्यान्तर्गत १८. टी० एच० हैडले. कैरियरम अब दि जयपुर ऐग्जिबिशन, भाग चतुर्थ, • भूमिका, पृ० १ । २०. दि हिन्दी आय इंडियन रेड ईस्टर्न आर्किटेक्चर, १० १३४ । २१. दि एनस एंड एटिविवटीज आव राजस्थान (क्रक्स का सम्करण), पृ० १७५२-१७६४ । वैराट गाँव से मिला है जो उस समय को प्राकृत में है। प्राकृत के बाद यहाँ अपभ्रंश का प्रचार हुआ। इसमें भी प्रचुर साहित्य रचा गया जिसका अधिकांश श्रेय जैन विद्वानों को है। डिंगल-लगभग छठी से लेकर तेरहवीं शती तक अपभ्रंश यहाँ की साहि त्यिक भाषा के पद पर आरूद रही। तदनन्तर इसका प्रभाव क्षीण होने लगा और इसी के लोकप्रचलित रूप राजस्थानी ने इसका पद ग्रहण करना प्रारम्भ किया जिसका एक रूप (मारवादी) डिंगल नाम से विख्यात हुआ । डिंगल भाषा में चारण लोगों ने अधिक लिखा है। इसलिए कोई कोई ढिंगल साहित्य को चारण साहित्य भी कहते है। राजस्थान में इस जाति के लोग पहले पहल भारवाद में आकर बसे थे। वहाँ से धीरे-धीरे राजस्थान की दूसरी रियासतों में फैले और अपने साथ अपनी भाषा को भी ले गये । इस प्रकार इसका प्रवेश राजस्थान की अन्य रियासतों में हुआ। राजपूतो और चारणोंका पारस्परिक संबंध बहुत प्राचीन काल से चला आ रहा था। उन्होंने डिंगल भाषा-साहित्य को बहुत प्रोत्साहन दिया। मध्यकालीन हिंदू-मुसलिम संघर्ष के वातावरण और राजनीतिक घटनाचकोसे भी बहुत मदद मिली। राजा-महाराजाओं द्वारा सम्मानित होते देख अन्य जातियों के लोगों ने भी इसे अपनाया और इसमें साहित्य-निर्माण करना प्रारम्भ किया। डिंगल साहित्यके दो सर्वश्रेष्ठ काव्य 'ढोला मारूस दूहा' और 'वेलिकिसन रुकमणी री' चारणेतर कवियों ही के रचे हुए हैं। डिंगल का सर्वोत्तम गद्य-अंथ 'नैणसी री ख्यात' भी एक वैश्य लेखक की रचना है । डिंगल साहित्य प्रधानतया वीर रसात्मक है। इसमे राजपूत जाति के इतिहास, उसकी संस्कृति एवं उसकी भाव-भावनाओं की बड़ी सुन्दर व्यंजना हुई है। स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ ठाकुरने इसकी प्रशंसा मे लिखा है कि "भक्ति रस का काव्य तो भारतवर्ष के प्रत्येक साहित्य में किसी न किसी कोटि का पाया जाता है। राधा-कृष्ण को लेकर हर एक प्रान्त ने मंद या उच्च कोटि का साहित्य पैदा किया है। लेकिन राजस्थान ने अपने रक्त से जो साहित्य निर्माण किया है उसके जोद का साहित्य और कहीं नहीं पाया जाता । और उसका कारण है। राजस्थानी कवियों ने कठिन सत्यके बीच में रहकर युद्ध के नगःरॉके बीच अपनी कविताएँ बनाई थीं। प्रकृति का तांडव रूप उनके सामने था । क्या आज कोई केवल अपनी भावुकता के बल पर फिर वहां कप्य - नेमण कर सकता है ? "इस साहित्यमें जो भाव है, जो उद्वेग है वह राजस्थान का खास अपना । यह केवल राजस्थान के की वस्तु है" " रवि बाबू का यह कथन अक्षरशः सत्य है। वास्तव में यह साहित्य है ही ऐसा । युद्ध का, रणभूमि का, वीरोल्लास का, जैसा सजीव, ओजपूर्ण और ' मार्मिक चित्रण डिंगल साहित्यमें मिलता है वैसा भारत की अन्य किसी प्रांतीय भाषा में नहीं मिलता । विशेषकर बीर महिलाओंके हृदयस्थ भावों का वर्णन तो डिगलके कवियोका ऐसा सुन्दर और स्वाभाविक बन पड़ा है कि देखकर मन मुग्ध हो जाता हैःसहणी सबरी हूं सखी, दो उर उलटी दाह । दूध लजाणे पृत सम, वलय लजाणे नाह ।। १ ।। नायण आज न मॉड पग, काल मुणीजै जंग । धारां लागीजें वर्णा, तो हीजे घण रंग ॥ २ ॥ विण मरियों विण जीतियाँ, जो धव आवै धाम । पग पग चूड़ी पाछ, हूँ रावत री जाम ॥ ३ ॥ मैंगल रहिया घूम । बाजूबॅड़ री लूम ॥ ४ ॥ २२. राजस्थान वर्ष २, अक ४, पृ० ७२ । मादर्न रिव्यु, दिसंबर सन् १९३८, पृ० ७१० । -२३. हे सखी ! और सब बाले मुझे सहन हो सकती हैं किन्तु यदि पति मेरी चूडियों को लजा दे और पुत्र मेरे दूध को, तो ये दो बाते मेरे लिये समान रूप से दाहकारी एवं हृदय को उलट देनेवाली है ।। १ ।। हे नाइन ! आज मेरे पैरमे महावर मत लगा, कल युद्ध सुना जाता है। यदि मेरे पति धारा-तीर्थ में स्नान करे अर्थात् तलवार की धार से कटकर युद्ध में काम आवे तो फिर (मती होने के समय ) खुल रग देना ।। २।। हे सखी ! यदि मेरे पति बिना मृत्यु या बिना जीत के घर आ गये तो मैं पग-पग पर अपनी चूडियो के टुकड़े कर डालेगी ! मै भी राजपूत की बेटी हूँ ।। ३ ।। हे ननद ! हाथी झूम रहे है और में तलवार चलाना चाहती हूँ। मेरे भुजबद की लटकन को ऊपर बाँध दो। यह बहुत उलझती है ॥ ४ ॥
मेवार में वर्षा का भोसत चौबीस इंच झालावाड़ में सैंतीस इंच और बाँसवाड़े में अड़तीस इंच के लगभग है। अधिक ऊँचाई के कारण आबू पर वर्ष में सत्तावन-अट्ठावन इंच के लगभग वर्षा होती है। जल की अधिकता से इस तरफ कई घने जंगल हैं जिनमें इमारती काम के लिये उपयोगी लड़की के अतिरिक्त तरहतरह के फल-फूल भी होते हैं। इस भाग में फसलें साधारणतया दो होती हैंउनालू और सियालू । परन्तु जलवायु की आर्द्रता के कारण लोगों को प्रायः मलेरिया और मंदाग्नि की शिकायत रहती है। भौगोलिक स्थिति का प्रभाव - राजस्थान की प्राकृतिक स्थिति और अलवायु का प्रभाव इसके इतिहास, इसकी संस्कृति और इसके निवासियों की रहन-सहन एवं आचार-विचार पर बहुत पड़ा है। यहाँ के लोग बड़े परिश्रमी, बड़े साहसी एवं बड़े कष्ट-सहिष्णु होते हैं । चित्रकला, संगीत और कविता के ये बड़े प्रेमी होते हैं और अपने पूर्वजों की गौरव-गाथाओं के सुनने-सुनाने में बड़ा रस लेते हैं। इनमें धर्म-भीरता, रुढ़िवादिता और यशः प्रियता कुछ विशेष देखने में आती है। यहाँ की राजपूत जाति की वीरता और वैश्य जाति की व्यापारिक बुद्धि एवं दानशीलता विश्व विख्यात है। इसके सिवा यहाँ की भील जाति भी अपने पुरुषार्थ, अपनी स्वामिभक्ति और अपने अतिथिसरकार के लिए बहुत प्रसिद्ध है। बहुत दीर्घ काल तक इस जाति ने गजपूतो को उनके स्वाधीनता संग्राम में सहायता दी है। महाराणा प्रताप के मुख्य साथी भील ही थे। जिस समय औरंगजेब ने उदयपुर पर आक्रमण किया उस समय महाराणा राजसिंह की सेना में पचास हज़ार भील थे। आजकल भील एक जंगली जाति मानी जाती है। परन्तु एकता और स्वावलंबन ये इस जाति के दो ऐसे गुण हैं जो भारत की अन्य किसी जाति में इतनी अधिक मात्रा में नहीं पाये जाते । संगीत- केवल वीरता के क्षेत्र में ही नहीं, संगीतकला, चित्रकला, शिल्पकला और साहित्य के क्षेत्र में भी राजस्थान ने बहुत प्रसिद्धि प्राप्त की है। संगीत का आदर यहाँ के राजदरबारों एवं देव-मंदिरों में निरंतर रहा। यहाँ के रागों में 'मीराबाई का मलार बहुत प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक राग माँद और राग सिंधू ये दो राग राजस्थान के खास अपने है। राग माँ शृंगार रस के लिये बहुत उपयुक्त है। इसका उत्पत्ति स्थान जैसलमेर माना गया है।" राग सिंधू बीर रस का राग है। प्राचीन काल में रणदस. ओझा; उदयपुर राज्य का इतिहास, पृशून्य पाँच सौ अट्ठावन । उन्नीस. ओशा; राजपूताने का इतिहास, पहली जिल्द, दस इकतीस । प्रयाण के समय ढोली और ढाड़ी लोग इसे सेना के आगे गाते हुए चलते थे। डिंगल भाषा के कवियों ने इसका वर्णन किया है।" युद्ध का अवसर न होने से यह राग अब शनैः शनैः विस्मृत होता चला जा रहा है। संगीत-शास्त्र संबंधी प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में इस राग का नामोल्लेख नहीं मिलता। परन्तु अठारवीं शताब्दी और उसके बाद के कुछ ग्रंथों में इसका नाम देखने में भाता है। उदयपुर के सरस्वती भंडार में 'रागमाला' की एक चित्रित प्रति सुरक्षित है । यह कदाचित् महाराणा जयसिंह के राजम्ब-काल में तैयार की गई थी। इसमें राग सिंधू को राग दीपक का पुत्र बतलाया गया है। इसमें राग सिंधू का एक भव्य चित्र भी है। संगीतकला के साथ-साथ संगीत- साहित्य को भी राजस्थान से बहुत प्रोत्साहन मिला है। संगीत शास्त्र संबंधी कई उत्कृष्ट ग्रंथ यहाँ लिखे गये हैं जिनमें संगीत कला के विविध अंगो का बड़ा सूक्ष्म और वैज्ञानिक विवेचन मिलता है। इनमें मेवाड के महाराणा कुँभाजी के रचे तीन ग्रंथ बहुत प्रसिद्ध हैं-संगीत- मीमांसा, संगीतराज और सूदप्रबंध ग्यारह इनमें संगीतराज सब से बड़ा है। कहा जाता है कि इसमें सोलह हज़ार श्लोक थे। परंतु आजकल यह ग्रंथ पूरा नहीं मिलता। जयपुर के कछवाहा राजा भगवंतदास के पुत्र माधवसिंह बड़े संगीत प्रेमी थे। उन्होंने खानदेश के पुंडरीक विठ्ठल से 'राग-मंजरी' नाम का एक ग्रंथ लिखवाया था" जो प्रकाशित भी हो चुका है। भगवंतदास से कोई दो सौ वर्ष बारह. हुवो अति सींघवौ राग, वागी हको । भाट आया पिसण, घाट लागै थका ।। सखी अमोणी साहिबो, निरमै काळी नाग । सिर राखे मिण समग्रम, रीमै सिधू राग ।। आळस जाणे ऐस में, बघु ढीलै विकसत । सींधू सुणियाँ सो गुण, कवच न माबै कत ॥ तेरह. हरबिलास सारडा; महाराणा कुंभा, पृशून्य एक सौ छयासठ । चौदह. एमशून्य कृष्णमाचार्य; हिस्ट्री आव क्लासिकल संस्कृत लिटरेचर, पृशून्य आठ सौ बासठ । पंद्रह. ओझा; राजपुताने का इतिहास, पहली जिल्द, पृशून्य बत्तीस । पश्चात् महाराजा प्रतापसिंह जयपुर के राजसिंहासन पर आसीन हुए। इनके समय मे 'राधा-गोविंद-संगीत-सार', 'राम-रत्नाकर' और 'स्वर-सागर' तीन बहुत उत्तम कोटि के ग्रन्थ इस विषय पर लिखे गये ।" इसी प्रकार बीकानेर के महाराजा अनूपसिंह ने भी अपने राजाश्रित पंडित भाष भट्ट से 'संगीत-अनूपांकुश', 'अनूप-संगीत-विलास' और 'अनूप-संगीत-रत्नाकर' नामक तीन ग्रन्थ बनवाये थे । सत्रह चित्रकला~-~राजस्थान चित्रकला के लिए संसार भर में प्रसिद्ध है। यहाँ के राजकीय चित्रालयों तथा राजपूत सरदारों के घरों में प्राचीन चित्र बहुसंख्या में पाये जाते हैं, जिनमें कोई-कोई चार सौ वर्ष तक के पुराने हैं। ये चित्र एक विशेष शैली में अंकित किये गये है जिसे कला-विशेषज्ञों ने 'राजस्थानी शैली' नाम दिया है। इन चित्रो में देवी-देवताओं, राग-रागिनियों, पौराणिक कथाओं, सामंतो, युद्ध-घटनाओं आदि के चित्र अधिक देखने में आते हैं। ये चित्र मोटे बॉमी कागज पर मिलते हैं। रंगो की उज्ज्वलता, करना की सुघड़ता और वातावरण की तीव्रता इन चित्रों की मुख्य विशेषताएँ हैं। इनमें आलंकारिकता कुछ अधिक पाई जाती है, पर भाष- कोमलता का भी सर्वथाअभाव नहीं है। इनके द्वारा गुप्तकालीन तथा उससे पूर्व की भारतीय चित्रकला का भी अच्छा आभास मिलता है। इन चित्रों में अनेक ऐसे हैं जिन पर मुगल शैली का यथेष्ट प्रभाव दृष्टिगोचर होता है। ये चित्र अकबर- जहाँगीर के समय या उसके बाद के हैं। इनमे मानव आकृति के यथार्थ चित्रण की ओर विशेष ध्यान दिया गया है। सोन्दर्य और अभिव्यक्ति की दृष्टि से ये चित्र अनुपम हैं । फुटकर चित्रों के अतिरिक्त संस्कृत, राजस्थानी, फारसी आदि भाषाओं के चित्रित ग्रन्थ भी राजस्थान में बहुत मिलते हैं। ये ग्रन्थ खुले पत्रों के रूप में भी मिलते हैं और सजिल्द पुस्तकाकार में भी खुले पत्रोंवाले चित्रित ग्रन्थों को राजस्थान में 'जोतदान' कहते हैं। इन ग्रन्थों के चित्रों के चारों ओर सादी कोर होती है और प्रत्येक चित्र के ऊपर उससे संबंधित पूरा छंद अथवा उस छंद का संक्षित गद्यात्मक विवरण लिखा रहता है। रामायण, महाभारत पृथ्वीराज रासौ आदि बड़े आकार के ग्रन्थों की केवल मुख्य-मुख्य घटनाओं के चित्र बनाये गये हैं, पर 'बिहारी सतसई' जैसे छोटे ग्रन्थों के प्रत्येक पद्य का सोलह. बजनिधि-मन्थावली ; पृशून्य अड़तालीस । सत्रह. ओझा; बिकानेर राज्य का इतिहास, दस दो सौ छियासी । चित्रांकन किया गया है। जयपुर के पोथीखाने में रज्मनामा की एक सचित्र प्रति सुरक्षित है जो मुगल सम्राट् अकबर की आशा तैयार की गई थी। इसमें एक सौ उनहत्तर चित्र है। इस पर चार लाख कृपया खर्च हुआ था और अकवरी दरबार के चौदह चित्रकारों ने इस पर काम किया था ।" यह ग्रन्थ भारतीय चित्रकला के भंडार का अनमोल रत्न है और मुद्रित भी हो चुका है। इस प्रकार की चिश्रित पोथियों का सबसे बड़ा संग्रह उदयपुर के 'सरस्वती भंडार' में पाया जाता है जहाँ लगभग पचास ग्रंथ विद्यमान हैं। शिल्प-संगीतकला और चित्रकला के समान प्राचीन काल में राजस्थान की शिल्पकला भी बहुत बढ़ चढ़ी थी। आयु चिसीह, नागदा, चंद्रावती, झालरापाटन आदि स्थानों के कुछ प्राचीन देवालयों में खुदाई का काम इतना सुन्दर और बारीकी के साथ किया गया है कि उसे देखकर मनुष्य चकित रह जाता । इसी तरह बहुत से अन्य स्थानों में भी शिल्प चातुर्य के उत्कृष्ट नमूने पाये जाते है । उदयपुर में कोई सवा सौ मील पूरब दिशा में बाढ़ोली नामक एक छोटा-सा प्राचीन गाँव है जो नवी दशवीं शताब्दियों में बहुत समृद्ध था और महाती नाम से विख्यात था । यहाँ शिव, विष्णु, गणेश, त्रिमूर्ति आदि के कई जीर्ण-शीर्ण मन्दिर है जिनकी कारीगरी की भारतीय शिल्प के विशेषज्ञ फर्ग्यूसन ने भूरि-भूरि प्रशंसा की है, और शेषशायी नारायण की मूर्ति के सम्बन्ध में तो यहाँ तक कह दिया है कि मेरी देखी हुई हिंदू मूर्तियों में यह सर्वोत्तम है। प्रसिद्ध इतिहासकार कर्नल टाड ने भी यहाँ की तक्षणकला को अद्भुत और वर्णनानीत बतलाया है ।" भाषा - प्राचीन काल में राजस्थान की राजकीय भाषा संस्कृत थी । विद्वान् लोग अपने ग्रंथोंकी रचना इसी भाषा में करते थे और यहाँ के दानपत्र तथा शिलालेख आदि भी इसी भाषामे लिखे जाते थे। लेकिन जनसाधारण की भाषा प्राकृत थी । अशोक के समय का एक स्तम्भ-लेख जयपुर राज्यान्तर्गत अट्ठारह. टीशून्य एचशून्य हैडले. कैरियरम अब दि जयपुर ऐग्जिबिशन, भाग चतुर्थ, • भूमिका, पृशून्य एक । बीस. दि हिन्दी आय इंडियन रेड ईस्टर्न आर्किटेक्चर, दस एक सौ चौंतीस । इक्कीस. दि एनस एंड एटिविवटीज आव राजस्थान , पृशून्य एक हज़ार सात सौ बावन-एक हज़ार सात सौ चौंसठ । वैराट गाँव से मिला है जो उस समय को प्राकृत में है। प्राकृत के बाद यहाँ अपभ्रंश का प्रचार हुआ। इसमें भी प्रचुर साहित्य रचा गया जिसका अधिकांश श्रेय जैन विद्वानों को है। डिंगल-लगभग छठी से लेकर तेरहवीं शती तक अपभ्रंश यहाँ की साहि त्यिक भाषा के पद पर आरूद रही। तदनन्तर इसका प्रभाव क्षीण होने लगा और इसी के लोकप्रचलित रूप राजस्थानी ने इसका पद ग्रहण करना प्रारम्भ किया जिसका एक रूप डिंगल नाम से विख्यात हुआ । डिंगल भाषा में चारण लोगों ने अधिक लिखा है। इसलिए कोई कोई ढिंगल साहित्य को चारण साहित्य भी कहते है। राजस्थान में इस जाति के लोग पहले पहल भारवाद में आकर बसे थे। वहाँ से धीरे-धीरे राजस्थान की दूसरी रियासतों में फैले और अपने साथ अपनी भाषा को भी ले गये । इस प्रकार इसका प्रवेश राजस्थान की अन्य रियासतों में हुआ। राजपूतो और चारणोंका पारस्परिक संबंध बहुत प्राचीन काल से चला आ रहा था। उन्होंने डिंगल भाषा-साहित्य को बहुत प्रोत्साहन दिया। मध्यकालीन हिंदू-मुसलिम संघर्ष के वातावरण और राजनीतिक घटनाचकोसे भी बहुत मदद मिली। राजा-महाराजाओं द्वारा सम्मानित होते देख अन्य जातियों के लोगों ने भी इसे अपनाया और इसमें साहित्य-निर्माण करना प्रारम्भ किया। डिंगल साहित्यके दो सर्वश्रेष्ठ काव्य 'ढोला मारूस दूहा' और 'वेलिकिसन रुकमणी री' चारणेतर कवियों ही के रचे हुए हैं। डिंगल का सर्वोत्तम गद्य-अंथ 'नैणसी री ख्यात' भी एक वैश्य लेखक की रचना है । डिंगल साहित्य प्रधानतया वीर रसात्मक है। इसमे राजपूत जाति के इतिहास, उसकी संस्कृति एवं उसकी भाव-भावनाओं की बड़ी सुन्दर व्यंजना हुई है। स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ ठाकुरने इसकी प्रशंसा मे लिखा है कि "भक्ति रस का काव्य तो भारतवर्ष के प्रत्येक साहित्य में किसी न किसी कोटि का पाया जाता है। राधा-कृष्ण को लेकर हर एक प्रान्त ने मंद या उच्च कोटि का साहित्य पैदा किया है। लेकिन राजस्थान ने अपने रक्त से जो साहित्य निर्माण किया है उसके जोद का साहित्य और कहीं नहीं पाया जाता । और उसका कारण है। राजस्थानी कवियों ने कठिन सत्यके बीच में रहकर युद्ध के नगःरॉके बीच अपनी कविताएँ बनाई थीं। प्रकृति का तांडव रूप उनके सामने था । क्या आज कोई केवल अपनी भावुकता के बल पर फिर वहां कप्य - नेमण कर सकता है ? "इस साहित्यमें जो भाव है, जो उद्वेग है वह राजस्थान का खास अपना । यह केवल राजस्थान के की वस्तु है" " रवि बाबू का यह कथन अक्षरशः सत्य है। वास्तव में यह साहित्य है ही ऐसा । युद्ध का, रणभूमि का, वीरोल्लास का, जैसा सजीव, ओजपूर्ण और ' मार्मिक चित्रण डिंगल साहित्यमें मिलता है वैसा भारत की अन्य किसी प्रांतीय भाषा में नहीं मिलता । विशेषकर बीर महिलाओंके हृदयस्थ भावों का वर्णन तो डिगलके कवियोका ऐसा सुन्दर और स्वाभाविक बन पड़ा है कि देखकर मन मुग्ध हो जाता हैःसहणी सबरी हूं सखी, दो उर उलटी दाह । दूध लजाणे पृत सम, वलय लजाणे नाह ।। एक ।। नायण आज न मॉड पग, काल मुणीजै जंग । धारां लागीजें वर्णा, तो हीजे घण रंग ॥ दो ॥ विण मरियों विण जीतियाँ, जो धव आवै धाम । पग पग चूड़ी पाछ, हूँ रावत री जाम ॥ तीन ॥ मैंगल रहिया घूम । बाजूबॅड़ री लूम ॥ चार ॥ बाईस. राजस्थान वर्ष दो, अक चार, पृशून्य बहत्तर । मादर्न रिव्यु, दिसंबर सन् एक हज़ार नौ सौ अड़तीस, पृशून्य सात सौ दस । -तेईस. हे सखी ! और सब बाले मुझे सहन हो सकती हैं किन्तु यदि पति मेरी चूडियों को लजा दे और पुत्र मेरे दूध को, तो ये दो बाते मेरे लिये समान रूप से दाहकारी एवं हृदय को उलट देनेवाली है ।। एक ।। हे नाइन ! आज मेरे पैरमे महावर मत लगा, कल युद्ध सुना जाता है। यदि मेरे पति धारा-तीर्थ में स्नान करे अर्थात् तलवार की धार से कटकर युद्ध में काम आवे तो फिर खुल रग देना ।। दो।। हे सखी ! यदि मेरे पति बिना मृत्यु या बिना जीत के घर आ गये तो मैं पग-पग पर अपनी चूडियो के टुकड़े कर डालेगी ! मै भी राजपूत की बेटी हूँ ।। तीन ।। हे ननद ! हाथी झूम रहे है और में तलवार चलाना चाहती हूँ। मेरे भुजबद की लटकन को ऊपर बाँध दो। यह बहुत उलझती है ॥ चार ॥
रमजान का पाक महीना चल रहा है लेकिन पाकिस्तानी मोहताज है खाने-पीने की चीजों के! पाकिस्तान अपने कर्ज न चुका पाने की स्थिति में पहुँच गया है। वह भुखमरी और सामाजिक उथल-पुथल की कगार पर है। गरीब बेसहारा हो गए हैं और मध्यमवर्गीय भिखारी। खाद्य सामग्री के लिए लगने वाली कतारें हर हफ्ते बड़ी होती जा रही हैं और आटा-दाल के ट्रक लूटे जा रहे हैं। परेशानहाल औरतें, बच्चे और बुजुर्ग थैला भर अनाज के लिए घंटों लंबी-लंबी लाईनों में खड़े रहते हैं और धक्का-मुक्की, हाथापाई और कुचले जाने जैसी तकलीफें भुगतते हैं। ऐसे ही एक अनाज व नगदी वितरण केन्द्र पर मची भगदड़ में 12 लोग मारे गए। अब तक मिली खबरों के मुताबिक इस तरह की घटनाओं में 21 लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। ऐसे भयावह दृश्य इसके पहले हमने केवल श्रीलंका और अफगानिस्तान में देखे थे। पाकिस्तान गंभीर संकट में फंस गया है और आंकड़े से ऐसा नहीं लगता है कि रोशनी की कोई किरण है। तीन करोड़ लोग पिछले साल आई बाढ़ से जुड़ी तकलीफें भुगत रहे हैं। लगभग 4.5 करोड़ निम्न मध्यमवर्ग के लोग किराने के सामान और ईधन के बढ़ते दामों से परेशान हैं। एक किलो आटा, जो सन् 2022 की शुरूआत में 58 रूपये में मिलता था, अब 155 रूपये का है। चावल के दाम दोगुने हो गए हैं और पेट्रोल, जो पिछले साल 145 रू लीटर था, अब 272 रू के भाव से बिक रहा है। मांसाहार केवल अमीरों की पहुंच में है। मुद्रास्फीति तेजी से बढ़ रही है और देश के सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार मार्च में रिकार्ड 35.37 प्रतिशत तक पहुंच गई है जो सन् 1965 के बाद सर्वाधिक है। पाकिस्तानी रूपये का 60 प्रतिशत से अधिक अवमूल्यन हो चुका है। इस सप्ताह ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि देश का वस्त्र उद्योग घटते उत्पादन के चलते 'आसन्न पतन' की स्थिति में पहुंचने वाला है। स्टील मिलें बंद हो रही हैं और बेरोजगारी सर्वकालिक उच्च दर पर है। विश्व खाद्य संगठन ने चेतावनी दी है कि अगले हफ्ते तक 51 लाख पाकिस्तानी गंभीर खाद्य संकट का सामना करने को मजबूर होंगे, जो पिछली तिमाही से 11 लाख ज्यादा होगा। देश फॉसिल फ्यूल और गेहूं के लिए बहुत हद तक आयात पर निर्भर है और इस कारण अर्थव्यवस्था पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ा है। बेहतर आर्थिक अवसरों की तलाश में पिछले साल 8 लाख से ज्यादा पाकिस्तानी विदेश चले गए। लेकिन यह अत्यंत दुःखद है और सचमुच हमारे पड़ोसी का दुर्भाग्य है कि वहां का संकट, वहां के लोगे की दुर्दशा की चर्चा, राजनैतिक कलह के कोलाहल में दब गई है। राजनीति, मनुष्यों से ज्यादा महत्वपूर्ण बन गई है और जनता की समस्याओं पर हावी है। पाकिस्तान की माई-बाप वहां की फौज है जो हमेशा नीति-निर्माण में दखलअंदाजी करती रहती है और निर्वाचित सरकारों को अपना कार्यकाल इसलिए नहीं पूरा करने देती कि कहीं ऐसा न हो कि वे देश को आर्थिक प्रगति के पथ पर आगे ले जाएं और इतने लोकप्रिय हो जाएं कि सेना को चुनौती देने लगें। इमरान खान के कार्यकाल में यह सब काफी हद तक बदल गया था। वे जनता में लोकप्रिय थे, वे लोगों का दिल जीतना जानते थे। परंतु उनके वायदे खोखले निकले। जिस प्रशासनिक व्यवस्था के शीर्ष पर वे थे वह पंगु और अयोग्य होने के साथ-साथ भ्रष्ट भी थी और इमरान खान का ध्यान अर्थव्यवस्था को ठीक करने की बजाए अपने विरोधियों को ठिकाने लगाने पर था। पाकिस्तान की मौजूदासियासी राअस्थिरता को देखते हुए इस बार आईएमएफ भी उसे और कर्ज देने में सकुचा रहा है। गत 24 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में पाकिस्तान का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 4.2 अरब डालर था, जिससे मुश्किल से एक महीने के आयात बिल का भुगतान किया जा सकता है। नतीजे में सरकार को बिजली, ईधन और भोज्य पदार्थों की कीमतें बढ़ानी पड़ीं और चीन से और कर्जा लेना पड़ा। दुनिया में अब केवल चीन ही पाकिस्तान की मदद कर रहा है। दो दिन पहले चीन ने पाकिस्तान को दो अरब डालर का कर्ज दिया ताकि वह आईएमएफ की इस शर्त को पूरा कर सके कि आर्थिक मदद की अगली किस्त तभी जारी की जाएगी जब वह आश्वस्त होगा कि किसी दूसरे स्त्रोत से पाकिस्तान को उसका भुगतान संतुलन ठीक करने के लिए धनराशि मिलेगी। अब पाकिस्तान को उम्मीद है कि आईएमएफ उसे और धन उपलब्ध करवाएगा। पाकिस्तान अब तक 20 से अधिक बार आईएमएफ से मदद ले चुका है और एक बार फिर अपनी अर्थव्यवस्था को डूबने से बचाने के लिए आईएमएफ से सहायता मांग रहा है। इससे और चीन के बढ़ते हुए कर्ज से पाकिस्तान की समस्याएं और बढ़ने वाली हैं। परंतु वहां के राजनेता तनिक भी चिंतित नजर नहीं आते। वे अपने कराहते हुए देश की कीमत पर भी अपनी ताकत बढ़ाना चाहते हैं। यहां तक कि पाकिस्तान के अखबारों की सुर्खियां अर्थव्यवस्था को पूरी तरह ढ़हने से बचाने के तरीकों के बारे में न होकर इमरान खान, जो अब भी लोकप्रिय हैं, को चुनावों में उम्मीदवारी के लिए अयोग्य घोषित करने के बारे में हैं। पाकिस्तान गर्त में जा रहा है और ऐसे में भारत को भी सावधान रहने की जरूरत है। (कॉपीः अमरीश हरदेनिया)
रमजान का पाक महीना चल रहा है लेकिन पाकिस्तानी मोहताज है खाने-पीने की चीजों के! पाकिस्तान अपने कर्ज न चुका पाने की स्थिति में पहुँच गया है। वह भुखमरी और सामाजिक उथल-पुथल की कगार पर है। गरीब बेसहारा हो गए हैं और मध्यमवर्गीय भिखारी। खाद्य सामग्री के लिए लगने वाली कतारें हर हफ्ते बड़ी होती जा रही हैं और आटा-दाल के ट्रक लूटे जा रहे हैं। परेशानहाल औरतें, बच्चे और बुजुर्ग थैला भर अनाज के लिए घंटों लंबी-लंबी लाईनों में खड़े रहते हैं और धक्का-मुक्की, हाथापाई और कुचले जाने जैसी तकलीफें भुगतते हैं। ऐसे ही एक अनाज व नगदी वितरण केन्द्र पर मची भगदड़ में बारह लोग मारे गए। अब तक मिली खबरों के मुताबिक इस तरह की घटनाओं में इक्कीस लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। ऐसे भयावह दृश्य इसके पहले हमने केवल श्रीलंका और अफगानिस्तान में देखे थे। पाकिस्तान गंभीर संकट में फंस गया है और आंकड़े से ऐसा नहीं लगता है कि रोशनी की कोई किरण है। तीन करोड़ लोग पिछले साल आई बाढ़ से जुड़ी तकलीफें भुगत रहे हैं। लगभग चार.पाँच करोड़ निम्न मध्यमवर्ग के लोग किराने के सामान और ईधन के बढ़ते दामों से परेशान हैं। एक किलो आटा, जो सन् दो हज़ार बाईस की शुरूआत में अट्ठावन रूपये में मिलता था, अब एक सौ पचपन रूपये का है। चावल के दाम दोगुने हो गए हैं और पेट्रोल, जो पिछले साल एक सौ पैंतालीस रू लीटर था, अब दो सौ बहत्तर रू के भाव से बिक रहा है। मांसाहार केवल अमीरों की पहुंच में है। मुद्रास्फीति तेजी से बढ़ रही है और देश के सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार मार्च में रिकार्ड पैंतीस.सैंतीस प्रतिशत तक पहुंच गई है जो सन् एक हज़ार नौ सौ पैंसठ के बाद सर्वाधिक है। पाकिस्तानी रूपये का साठ प्रतिशत से अधिक अवमूल्यन हो चुका है। इस सप्ताह ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि देश का वस्त्र उद्योग घटते उत्पादन के चलते 'आसन्न पतन' की स्थिति में पहुंचने वाला है। स्टील मिलें बंद हो रही हैं और बेरोजगारी सर्वकालिक उच्च दर पर है। विश्व खाद्य संगठन ने चेतावनी दी है कि अगले हफ्ते तक इक्यावन लाख पाकिस्तानी गंभीर खाद्य संकट का सामना करने को मजबूर होंगे, जो पिछली तिमाही से ग्यारह लाख ज्यादा होगा। देश फॉसिल फ्यूल और गेहूं के लिए बहुत हद तक आयात पर निर्भर है और इस कारण अर्थव्यवस्था पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ा है। बेहतर आर्थिक अवसरों की तलाश में पिछले साल आठ लाख से ज्यादा पाकिस्तानी विदेश चले गए। लेकिन यह अत्यंत दुःखद है और सचमुच हमारे पड़ोसी का दुर्भाग्य है कि वहां का संकट, वहां के लोगे की दुर्दशा की चर्चा, राजनैतिक कलह के कोलाहल में दब गई है। राजनीति, मनुष्यों से ज्यादा महत्वपूर्ण बन गई है और जनता की समस्याओं पर हावी है। पाकिस्तान की माई-बाप वहां की फौज है जो हमेशा नीति-निर्माण में दखलअंदाजी करती रहती है और निर्वाचित सरकारों को अपना कार्यकाल इसलिए नहीं पूरा करने देती कि कहीं ऐसा न हो कि वे देश को आर्थिक प्रगति के पथ पर आगे ले जाएं और इतने लोकप्रिय हो जाएं कि सेना को चुनौती देने लगें। इमरान खान के कार्यकाल में यह सब काफी हद तक बदल गया था। वे जनता में लोकप्रिय थे, वे लोगों का दिल जीतना जानते थे। परंतु उनके वायदे खोखले निकले। जिस प्रशासनिक व्यवस्था के शीर्ष पर वे थे वह पंगु और अयोग्य होने के साथ-साथ भ्रष्ट भी थी और इमरान खान का ध्यान अर्थव्यवस्था को ठीक करने की बजाए अपने विरोधियों को ठिकाने लगाने पर था। पाकिस्तान की मौजूदासियासी राअस्थिरता को देखते हुए इस बार आईएमएफ भी उसे और कर्ज देने में सकुचा रहा है। गत चौबीस मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में पाकिस्तान का कुल विदेशी मुद्रा भंडार चार.दो अरब डालर था, जिससे मुश्किल से एक महीने के आयात बिल का भुगतान किया जा सकता है। नतीजे में सरकार को बिजली, ईधन और भोज्य पदार्थों की कीमतें बढ़ानी पड़ीं और चीन से और कर्जा लेना पड़ा। दुनिया में अब केवल चीन ही पाकिस्तान की मदद कर रहा है। दो दिन पहले चीन ने पाकिस्तान को दो अरब डालर का कर्ज दिया ताकि वह आईएमएफ की इस शर्त को पूरा कर सके कि आर्थिक मदद की अगली किस्त तभी जारी की जाएगी जब वह आश्वस्त होगा कि किसी दूसरे स्त्रोत से पाकिस्तान को उसका भुगतान संतुलन ठीक करने के लिए धनराशि मिलेगी। अब पाकिस्तान को उम्मीद है कि आईएमएफ उसे और धन उपलब्ध करवाएगा। पाकिस्तान अब तक बीस से अधिक बार आईएमएफ से मदद ले चुका है और एक बार फिर अपनी अर्थव्यवस्था को डूबने से बचाने के लिए आईएमएफ से सहायता मांग रहा है। इससे और चीन के बढ़ते हुए कर्ज से पाकिस्तान की समस्याएं और बढ़ने वाली हैं। परंतु वहां के राजनेता तनिक भी चिंतित नजर नहीं आते। वे अपने कराहते हुए देश की कीमत पर भी अपनी ताकत बढ़ाना चाहते हैं। यहां तक कि पाकिस्तान के अखबारों की सुर्खियां अर्थव्यवस्था को पूरी तरह ढ़हने से बचाने के तरीकों के बारे में न होकर इमरान खान, जो अब भी लोकप्रिय हैं, को चुनावों में उम्मीदवारी के लिए अयोग्य घोषित करने के बारे में हैं। पाकिस्तान गर्त में जा रहा है और ऐसे में भारत को भी सावधान रहने की जरूरत है।
देहरादून, दून में डेंगू का कहर खत्म नहीं हो रहा। फ्राइडे को एलाइजा टेस्ट के बाद 36 और पेशेंट्स में डेंगू की पुष्टि हुई है। जबकि, प्रदेशभर में 95 डेंगू पॉजिटिव सामने आए हैं। डेंगू ने पिछले वर्षो के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। रोज डेंगू के पेशेंट्स सामने आ रहे हैं। फ्राइडे को दून में 36 नए केस के साथ डेंगू पेशेंट्स का आंकड़ा अब 4230 तक पहुंच चुका है, जबकि 6 से ज्यादा लोगों की अब तक जान जा चुकी है। दून के बाद डेंगू के सबसे ज्यादा कहर नैनीताल में बरपा, फ्राइडे को नैनीताल में ही सबसे ज्यादा डेंगू पेशेंट्स सामने आए। नैनीताल में अब तक 2216 लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं, जबकि दो मरीजों की मौत हो चुकी है।
देहरादून, दून में डेंगू का कहर खत्म नहीं हो रहा। फ्राइडे को एलाइजा टेस्ट के बाद छत्तीस और पेशेंट्स में डेंगू की पुष्टि हुई है। जबकि, प्रदेशभर में पचानवे डेंगू पॉजिटिव सामने आए हैं। डेंगू ने पिछले वर्षो के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। रोज डेंगू के पेशेंट्स सामने आ रहे हैं। फ्राइडे को दून में छत्तीस नए केस के साथ डेंगू पेशेंट्स का आंकड़ा अब चार हज़ार दो सौ तीस तक पहुंच चुका है, जबकि छः से ज्यादा लोगों की अब तक जान जा चुकी है। दून के बाद डेंगू के सबसे ज्यादा कहर नैनीताल में बरपा, फ्राइडे को नैनीताल में ही सबसे ज्यादा डेंगू पेशेंट्स सामने आए। नैनीताल में अब तक दो हज़ार दो सौ सोलह लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं, जबकि दो मरीजों की मौत हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस पी. नरसिम्हा की पीठ ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की उस याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया जिसमें उन्होंने मनी लांड्रिंग के मामले में वैधानिक जमानत की मांग की थी। नई दिल्ली, एएनआइ। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की उस याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया जिसमें उन्होंने मनी लांड्रिंग के मामले में वैधानिक जमानत की मांग की थी। जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस पी. नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि इस मामले में उचित राहत इलाहाबाद हाई कोर्ट से मिल सकती है। इससे पहले आय से अधिक संपत्ति मामले से जुड़े मनी लांड्रिंग के आरोपों में लखनऊ की विशेष अदालत ने प्रजापति को वैधानिक जमानत प्रदान करने से इन्कार कर दिया था और उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भी भेज दिया था। हाल ही में लखनऊ की विशेष सांसद-विधायक अदालत ने प्रजापति और दो अन्य को 2017 के चित्रकूट सामूहिक दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही प्रत्येक दोषी पर दो-दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। चित्रकूट की एक महिला ने 2017 में आरोप लगाया था कि प्रजापति जब उत्तर प्रदेश में मंत्री थे तो उन्होंने और उनके छह सहयोगियों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था और उसकी नाबालिग बेटी का शीलभंग करने की कोशिश की थी। मालूम हो कि 18 फरवरी, 2017 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गायत्री प्रसाद प्रजापति एवं अन्य के खिलाफ थाना गौतम पल्ली में सामूहिक दुष्कर्म, जानमाल की धमकी एवं पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। अदालत ने जिन लोगों को सजा सुनाई थी उनमें गायत्री प्रजापति के अलावा आशीष शुक्ला और अशोक तिवारी शामिल हैं। न्यायाधीश ने तीनों को दोषी ठहराते हुए मामले के चार अन्य आरोपियों विकास वर्मा, रूपेश्वर, अमरेंद्र सिंह उर्फ पिंटू और चंद्रपाल को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया था। अभियोजन पक्ष ने दुष्कर्म मामले में 17 गवाह पेश किए थे। मामले में पीड़िता ने दावा किया था कि दुष्कर्म की घटना पहली बार अक्टूबर 2014 में हुई थी। आरोपी की ओर से जुलाई 2016 तक उत्पीड़न जारी रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब आरोपी ने उसकी नाबालिग बेटी से छेड़छाड़ करने की कोशिश की तब उसने शिकायत दर्ज करने का फैसला किया था। प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद प्रजापति को मार्च में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में हैं।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस पी. नरसिम्हा की पीठ ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की उस याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया जिसमें उन्होंने मनी लांड्रिंग के मामले में वैधानिक जमानत की मांग की थी। नई दिल्ली, एएनआइ। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की उस याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया जिसमें उन्होंने मनी लांड्रिंग के मामले में वैधानिक जमानत की मांग की थी। जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस पी. नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि इस मामले में उचित राहत इलाहाबाद हाई कोर्ट से मिल सकती है। इससे पहले आय से अधिक संपत्ति मामले से जुड़े मनी लांड्रिंग के आरोपों में लखनऊ की विशेष अदालत ने प्रजापति को वैधानिक जमानत प्रदान करने से इन्कार कर दिया था और उन्हें प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भी भेज दिया था। हाल ही में लखनऊ की विशेष सांसद-विधायक अदालत ने प्रजापति और दो अन्य को दो हज़ार सत्रह के चित्रकूट सामूहिक दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही प्रत्येक दोषी पर दो-दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। चित्रकूट की एक महिला ने दो हज़ार सत्रह में आरोप लगाया था कि प्रजापति जब उत्तर प्रदेश में मंत्री थे तो उन्होंने और उनके छह सहयोगियों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था और उसकी नाबालिग बेटी का शीलभंग करने की कोशिश की थी। मालूम हो कि अट्ठारह फरवरी, दो हज़ार सत्रह को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गायत्री प्रसाद प्रजापति एवं अन्य के खिलाफ थाना गौतम पल्ली में सामूहिक दुष्कर्म, जानमाल की धमकी एवं पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। अदालत ने जिन लोगों को सजा सुनाई थी उनमें गायत्री प्रजापति के अलावा आशीष शुक्ला और अशोक तिवारी शामिल हैं। न्यायाधीश ने तीनों को दोषी ठहराते हुए मामले के चार अन्य आरोपियों विकास वर्मा, रूपेश्वर, अमरेंद्र सिंह उर्फ पिंटू और चंद्रपाल को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया था। अभियोजन पक्ष ने दुष्कर्म मामले में सत्रह गवाह पेश किए थे। मामले में पीड़िता ने दावा किया था कि दुष्कर्म की घटना पहली बार अक्टूबर दो हज़ार चौदह में हुई थी। आरोपी की ओर से जुलाई दो हज़ार सोलह तक उत्पीड़न जारी रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब आरोपी ने उसकी नाबालिग बेटी से छेड़छाड़ करने की कोशिश की तब उसने शिकायत दर्ज करने का फैसला किया था। प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद प्रजापति को मार्च में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में हैं।
मध्यप्रदेश के धार में आयोजित विजय संकल्प रैली को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी में विपक्ष पर जमके निशान साधा. प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई सबूत मांग रहा है, कोई लाशों की संख्या पूछता है. उन्होंने कहा कि एक हफ्ते से विपक्ष का चेहरा लटका हुआ है. महामिलावट वाले पाकिस्तान में पोस्टर बॉय बन गए हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेसी नेता सेना के शौर्य पर सवाल उठा रहे हैं. गौरतलब है कि कांग्रेस नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करते हुए कहा था कि पुलवामा 'दुर्घटना' के बाद हमारी वायु सेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक के बाद कुछ विदेशी मीडिया में संदेह पैदा किया जा रहा है, जिससे हमारी भारत सरकार की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न चिह्न लग रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश है. मोदी ने कहा कि भारत ने अब आतंकियों और आतंक के समर्थकों को डंके की चोट पर कह दिया है कि अब उनके सामने सुधरने के अलावा कोई चारा नहीं है. अगर वो फिर भी नहीं सुधेरेंगे तो फिर क्या किया जाएगा, ये भी उन्हें बता दिया गया है. मोदी ने कहा कि एक आतंकी की मौत पर जिस पार्टी के नेताओं के आंसू नहीं थमते थे, उस कांग्रेस से आतंकवादियों के खात्मे की उम्मीद नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार हर आतंकी हमले के बाद चुप बैठ जाती थी. भारतीय वायुसेना का एयर स्ट्राइक पाकिस्तान में हुआ, लेकिन सदमा भारत में बैठे लोगों को लगा. कांग्रेस पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों से देश पर राज करने वाली पार्टी अब सेना की योग्यता पर सवाल उठा रही है. उन्होंने बिना नाम लिए दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि खासकर मध्य प्रदेश के नेता हमारी बहादुर सेना की योग्यता पर सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने पुलवामा हमले को घटना बताया ये उनकी मानसिकता है. मोदी ने कहा कि ये वही व्यक्ति है जिसने 26/11 की आतंकी घटना में पाक को क्लिन चीट दे दी थी.
मध्यप्रदेश के धार में आयोजित विजय संकल्प रैली को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी में विपक्ष पर जमके निशान साधा. प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई सबूत मांग रहा है, कोई लाशों की संख्या पूछता है. उन्होंने कहा कि एक हफ्ते से विपक्ष का चेहरा लटका हुआ है. महामिलावट वाले पाकिस्तान में पोस्टर बॉय बन गए हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेसी नेता सेना के शौर्य पर सवाल उठा रहे हैं. गौरतलब है कि कांग्रेस नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करते हुए कहा था कि पुलवामा 'दुर्घटना' के बाद हमारी वायु सेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक के बाद कुछ विदेशी मीडिया में संदेह पैदा किया जा रहा है, जिससे हमारी भारत सरकार की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न चिह्न लग रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश है. मोदी ने कहा कि भारत ने अब आतंकियों और आतंक के समर्थकों को डंके की चोट पर कह दिया है कि अब उनके सामने सुधरने के अलावा कोई चारा नहीं है. अगर वो फिर भी नहीं सुधेरेंगे तो फिर क्या किया जाएगा, ये भी उन्हें बता दिया गया है. मोदी ने कहा कि एक आतंकी की मौत पर जिस पार्टी के नेताओं के आंसू नहीं थमते थे, उस कांग्रेस से आतंकवादियों के खात्मे की उम्मीद नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार हर आतंकी हमले के बाद चुप बैठ जाती थी. भारतीय वायुसेना का एयर स्ट्राइक पाकिस्तान में हुआ, लेकिन सदमा भारत में बैठे लोगों को लगा. कांग्रेस पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों से देश पर राज करने वाली पार्टी अब सेना की योग्यता पर सवाल उठा रही है. उन्होंने बिना नाम लिए दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि खासकर मध्य प्रदेश के नेता हमारी बहादुर सेना की योग्यता पर सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने पुलवामा हमले को घटना बताया ये उनकी मानसिकता है. मोदी ने कहा कि ये वही व्यक्ति है जिसने छब्बीस/ग्यारह की आतंकी घटना में पाक को क्लिन चीट दे दी थी.
GORAKHPUR: शिव पूजा करने जा रही बुजुर्ग महिला को झांसा देकर उचक्कों ने एक लाख का कड़ा गायब कर दिया। घटना संडे मार्निग साढ़े छह बजे सूरजकुंड मोहल्ले में हुई। महिला के बेटे ने तिवारीपुर पुलिस को सूचना देकर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि उचक्कों की तलाश की जा रही है। सूरजकुंड, रुस्तमपुर मोहल्ला निवासी 70 साल की बदामी देवी मलमास में पूजा करती हैं। वह रोजाना सूरजकुंड मंदिर पैदल जाती हैं। संडे मार्निग वह मंदिर की तरफ जा रही थी। थकान लगने पर पुलिया पर बैठ गई। तभी एक अज्ञात बाइक सवार युवक पहुंचा। महिला के करीब जाकर उनसे आशीर्वाद लिया। बातचीत में उनको अपना परिचित बताया। महिला के परिवार के बारे में पूरी जानकारी दी। इस दौरान युवक ने कहा कि वह बड़ी समस्या से घिरा है। एक पंडित ने उसकी प्रॉब्लम सॉल्व करने को कहा है। तभी एक साइकिल सवार युवक दूसरी तरफ से आ गया। पहले युवक ने उसको पंडित कहकर प्रमाण किया। फिर दोनों ने महिला को अपने झांसे में ले लिया। खुद को पंडित बताने वाले युवक ने दूसरे से एक सिक्का मांगा। मंत्र भुनभुनाने के बाद चुपचाप सिक्का रख लेने को कहा। उसने फिर महिला को झांसा देना शुरू कर दिया। बुजुर्ग से एक सिक्का लेकर उनके सोने के कड़े उतारने को कहा। महिला को झांसा देकर उनके दोनों हाथों में मौजूद सोने के चार कड़े उतरवा लिए। फिर उसको कागज में लपेटकर मंत्र पढ़कर दे दिया। महिला से कहा कि घर ले जाकर कागज खोलने पर चमत्कार होगा। मंदिर से लौटने के बाद महिला ने जब कागज खोला तो उसमें रखा सोने का कड़ा गायब था। असली की जगह नकली कड़ा निकला। महिला के बेटे अजय ने तिवारीपुर पुलिस को सूचना देकर कार्रवाई की मांग की। सूचना मिलने पर पुलिस ने मोहल्ले में उचक्कों की तलाश की। लेकिन उनका पता नहीं चला। हुलिया के आधार पर पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
GORAKHPUR: शिव पूजा करने जा रही बुजुर्ग महिला को झांसा देकर उचक्कों ने एक लाख का कड़ा गायब कर दिया। घटना संडे मार्निग साढ़े छह बजे सूरजकुंड मोहल्ले में हुई। महिला के बेटे ने तिवारीपुर पुलिस को सूचना देकर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि उचक्कों की तलाश की जा रही है। सूरजकुंड, रुस्तमपुर मोहल्ला निवासी सत्तर साल की बदामी देवी मलमास में पूजा करती हैं। वह रोजाना सूरजकुंड मंदिर पैदल जाती हैं। संडे मार्निग वह मंदिर की तरफ जा रही थी। थकान लगने पर पुलिया पर बैठ गई। तभी एक अज्ञात बाइक सवार युवक पहुंचा। महिला के करीब जाकर उनसे आशीर्वाद लिया। बातचीत में उनको अपना परिचित बताया। महिला के परिवार के बारे में पूरी जानकारी दी। इस दौरान युवक ने कहा कि वह बड़ी समस्या से घिरा है। एक पंडित ने उसकी प्रॉब्लम सॉल्व करने को कहा है। तभी एक साइकिल सवार युवक दूसरी तरफ से आ गया। पहले युवक ने उसको पंडित कहकर प्रमाण किया। फिर दोनों ने महिला को अपने झांसे में ले लिया। खुद को पंडित बताने वाले युवक ने दूसरे से एक सिक्का मांगा। मंत्र भुनभुनाने के बाद चुपचाप सिक्का रख लेने को कहा। उसने फिर महिला को झांसा देना शुरू कर दिया। बुजुर्ग से एक सिक्का लेकर उनके सोने के कड़े उतारने को कहा। महिला को झांसा देकर उनके दोनों हाथों में मौजूद सोने के चार कड़े उतरवा लिए। फिर उसको कागज में लपेटकर मंत्र पढ़कर दे दिया। महिला से कहा कि घर ले जाकर कागज खोलने पर चमत्कार होगा। मंदिर से लौटने के बाद महिला ने जब कागज खोला तो उसमें रखा सोने का कड़ा गायब था। असली की जगह नकली कड़ा निकला। महिला के बेटे अजय ने तिवारीपुर पुलिस को सूचना देकर कार्रवाई की मांग की। सूचना मिलने पर पुलिस ने मोहल्ले में उचक्कों की तलाश की। लेकिन उनका पता नहीं चला। हुलिया के आधार पर पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
बिग बॉस 13 की सबसे चर्चित कंटेस्टेंट शहनाज गिल के पिता संतोख सिंह गिल के खिलाफ एक महिला ने रेप का केस दर्ज कराया है। संतोख पर पीड़ित महिला ने बंदूक की नोक पर बलात्कार करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब इस मामले को लेकर खुद संतोख सिंह ने सफाई पेश की है। इससे पहले शहनाज के भाई और संतोख सिंह के बेटे शहबाज ने भी इस आरोप को झूठा और बकवास बताया था। बता दें, बिग बॉस के बाद से ही शहनाज गिल अपने भाई शहबाज के साथ मुंबई में रह रही हैं।
बिग बॉस तेरह की सबसे चर्चित कंटेस्टेंट शहनाज गिल के पिता संतोख सिंह गिल के खिलाफ एक महिला ने रेप का केस दर्ज कराया है। संतोख पर पीड़ित महिला ने बंदूक की नोक पर बलात्कार करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब इस मामले को लेकर खुद संतोख सिंह ने सफाई पेश की है। इससे पहले शहनाज के भाई और संतोख सिंह के बेटे शहबाज ने भी इस आरोप को झूठा और बकवास बताया था। बता दें, बिग बॉस के बाद से ही शहनाज गिल अपने भाई शहबाज के साथ मुंबई में रह रही हैं।
रतलाम। रतलाम डीजल शेड में पड़े 7 पुराने इंजन दाहोद वर्कशॉप में नीलाम होने के बाद पहले चरण में 4 इंजन ले जाने के बाद मंगलवार को दूसरे चरण में 3 इंजन कंपनी ने अधिगृहीत किए। कंडम घोषित इंजनों को कंपनी ने प्रति नग 11. 51 लाख रुपए में रेलवे से खरीदा है। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होने की बात भी कही जा रही है। बताया जाता है कि स्क्रैप के रूप में बेचे गए इंजनों के सभी पुर्जे अलग अलग बेचे जाने चाहिए। लेकिन ऑक्शन के बाद पूरा इंजन एक साथ दे दिया गया है। डीजल शेड में रखे डब्ल्यूडीएस 4 बी सीरिज के सात इंजनों की नीलामी प्रक्रिया में हर इंजन की मूल लागत करीब डेढ़ से पौने दो करोड़ रुपए थी। लेकिन करीब 7-8 सालों से शेड में पड़े होने के कारण अनुपयोगी और कंडम हो गए थे। मुख्यालय से अनुमति मिलने के बाद 11 दिसंबर को नीलामी कर निजी कंपनी को कुल 80. 57 लाख रुपए में इंजन बेच दिए गए। कंपनी ने चार इंजनों को दिसंबर में अधिगृहित कर लिया था लेकिन बाकी को पूरी राशि जमा करने के बाद मंगलवार को अधिगृहित किया।
रतलाम। रतलाम डीजल शेड में पड़े सात पुराने इंजन दाहोद वर्कशॉप में नीलाम होने के बाद पहले चरण में चार इंजन ले जाने के बाद मंगलवार को दूसरे चरण में तीन इंजन कंपनी ने अधिगृहीत किए। कंडम घोषित इंजनों को कंपनी ने प्रति नग ग्यारह. इक्यावन लाख रुपए में रेलवे से खरीदा है। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होने की बात भी कही जा रही है। बताया जाता है कि स्क्रैप के रूप में बेचे गए इंजनों के सभी पुर्जे अलग अलग बेचे जाने चाहिए। लेकिन ऑक्शन के बाद पूरा इंजन एक साथ दे दिया गया है। डीजल शेड में रखे डब्ल्यूडीएस चार बी सीरिज के सात इंजनों की नीलामी प्रक्रिया में हर इंजन की मूल लागत करीब डेढ़ से पौने दो करोड़ रुपए थी। लेकिन करीब सात-आठ सालों से शेड में पड़े होने के कारण अनुपयोगी और कंडम हो गए थे। मुख्यालय से अनुमति मिलने के बाद ग्यारह दिसंबर को नीलामी कर निजी कंपनी को कुल अस्सी. सत्तावन लाख रुपए में इंजन बेच दिए गए। कंपनी ने चार इंजनों को दिसंबर में अधिगृहित कर लिया था लेकिन बाकी को पूरी राशि जमा करने के बाद मंगलवार को अधिगृहित किया।
शारदीय नवरात्र जिले में हर्षोउल्लास व विधि विधान से संपन्न हुई। शारदीय नवरात्र के नौवे दिन श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भोजन कराकर आशीर्वाद लिया। मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के बाद पूरे विधि विधान से हवन कराया गया। शारदीय नवरात्र को लेकर प्रत्येक घरों में उल्लास देखा गया। माता के भक्तों ने विश्व शांति के साथ-साथ आरोग्य, सुख शांति की मन्नतें मांगी। पूजा पंडालों से लेकर माता मंदिरों दुर्गाबाग, कालीबाग पटजिरवा माता मंदिर, भंगहा माता मंदिर, सहोदरा आदि में श्रद्धालुओं की भीड़ काफी रही। मेला सा रहा नजारा : शारदीय नवरात्र में माता मंदिरों व पूजा पंडालों के आसपास मेला सा नजारा देखने को मिला। मां की मूर्ति का हुआ विसर्जन, पुलिस चौकस : शारदीय नवरात्र के बाद माता के मूर्ति का विसर्जन बुधवार को गंडक नहर, सागर पोखरा, दुर्गाबाग, उतरवारी पोखरा आदि में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। जहां पुलिस प्रशासन काफी चौकस दिखी। चौराहों पर मजिस्टे्रट के साथ-साथ भारी मात्रा में पुलिस बल को तैनात किया गया था। ताकि असमाजिक तत्वों से आसानी से निपटा जा सके।
शारदीय नवरात्र जिले में हर्षोउल्लास व विधि विधान से संपन्न हुई। शारदीय नवरात्र के नौवे दिन श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भोजन कराकर आशीर्वाद लिया। मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के बाद पूरे विधि विधान से हवन कराया गया। शारदीय नवरात्र को लेकर प्रत्येक घरों में उल्लास देखा गया। माता के भक्तों ने विश्व शांति के साथ-साथ आरोग्य, सुख शांति की मन्नतें मांगी। पूजा पंडालों से लेकर माता मंदिरों दुर्गाबाग, कालीबाग पटजिरवा माता मंदिर, भंगहा माता मंदिर, सहोदरा आदि में श्रद्धालुओं की भीड़ काफी रही। मेला सा रहा नजारा : शारदीय नवरात्र में माता मंदिरों व पूजा पंडालों के आसपास मेला सा नजारा देखने को मिला। मां की मूर्ति का हुआ विसर्जन, पुलिस चौकस : शारदीय नवरात्र के बाद माता के मूर्ति का विसर्जन बुधवार को गंडक नहर, सागर पोखरा, दुर्गाबाग, उतरवारी पोखरा आदि में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। जहां पुलिस प्रशासन काफी चौकस दिखी। चौराहों पर मजिस्टे्रट के साथ-साथ भारी मात्रा में पुलिस बल को तैनात किया गया था। ताकि असमाजिक तत्वों से आसानी से निपटा जा सके।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने देश में अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे पहले कोरोना से बचाव के लिये 3 करोड़ से अधिक लोगों को टीकाकरण खुराक देने में कीर्तिमान स्थापित किया है। तेजी से बीमारी में रोकथाम में सरकार का यह प्रयास 'मील का पत्थर' साबित हुआ है। बीमारियों को रोकने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के यूपी मॉडल ने प्रत्येक दिन नई उपलब्धियां अपने नाम की हैं। टीकाकरण अभियान का भी इसमें विशेष योगदान रहा है। 'जीत का टीका' लगवाने के लिये सरकार के प्रयासों का ही असर है कि लोगों में भी इसके प्रति उत्साह लगातार बढ़ रहा है। शनिवार को दोपहर 1:30 बजे के बाद सरकार ने प्रदेश में 3 करोड़ से अधिक लोगों को टीकाकरण खुराक देने की बड़ी उपलब्धि हासिल की। राज्य सरकार बीमारी की रोकथाम के लिये किसी प्रकार की कमी नहीं छोड़ना चाहती है। जनवरी माह से ही प्रदेश में उसने टीकाकरण कराने का अभियान शुरू किया। टीकाकरण अभियान की समय-समय पर निगरानी और प्रत्येक वर्ग को टीका कवर देने के प्रयास तेजी से शुरू किये गये। बड़ी संख्या में लोगों का टीकाकरण कराना संभव हुआ। टीका कवर देने में सफल साबित हुई राज्य सरकार ने अब अगस्त माह तक 10 करोड़ की जनसंख्या के वैक्सीनेशन का लक्ष्य दिया है। इसके लिये फुलप्रूफ प्लान बनाया गया है। अधिकारी इस लक्ष्य को पाने के लिये पूरी ताकत से जुटे हैं। प्रदेश में शुरू हुए प्रत्येक वर्ग के टीकाकरण अभियान में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक जबदस्त उत्साह दिखाई दे रहा है। प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति के टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करने में जुटी राज्य सरकार बीमारी से बचाव में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती है। इसके लिये 18 से 44 आयु और 45 वर्ष से ऊपर के लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है। 18 से 44 वर्ष के लोगों के लिये 5000 सेंटर बनाए गये हैं। जबकि 45 की आयु के ऊपर के लोगों के लिये 3000 सेंटरों पर टीकाकरण चल रहा है। 12 साल से कम उम्र के अभिभावकों के लिये 200 बूथ बनाए गये हैं। महिलाओं का टीकाकरण करने के लिये प्रत्येक जिले में पिंक बूथ बनाए गये। विदेशों में पढ़ाई, नौकरी और खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने जाने वालों के लिये भी जिला अस्पतालों में टीकाकरण की सुविधा प्रदान की है। लखनऊ। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) के लिए भारतीय सेना की जासूसी करने वाले एक युवक शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान को आतंक निरोधक दस्ता (ATS) ने मंगलवार को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। वह मूल रूप से उप्र के कासगंज जिले के पटियाली थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले जिनौल गांव का रहने वाला है। आरोपी भारतीय सेना की गोपनीय सूचनाएं व्हाट्सएप और फेसबुक के माध्यम से ISI को साझा कर रहा था। खुलासा होने के बाद कासगंज जिले की पुलिस भी सक्रिय हो गई। पुलिस आरोपी शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान के घर पहुंचकर जांच में जुट गई है। एसपी सौरभ दीक्षित ने सीओ पटियाली को इस मामले में जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। ATS ने आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट की धाराओं एवं विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपी शैलेश पूर्व में 8-9 माह तक अरुणांचल प्रदेश में भारतीय सेना में अस्थायी श्रमिक के रूप में कार्य कर चुका है। वहां रहने के दौरान उसके पास सेना की महत्वपूर्ण जानकारियां थीं। वह सेना में किसी पद पर कार्यरत नहीं है, लेकिन वह स्वयं के भारतीय सेना में तैनात होना बताता है। सोशल मीडिया पर भी शैलेश चौहान के नाम से उसकी प्रोफाइल बनी हुई है। उस पर भारतीय सेना की यूनिफॉर्म पहने हुए उसकी फोटो लगी है। शैलेश पहले ISI हैंडलर हरलीन कौर नाम की महिला के संपर्क में आया। उससे मैसेंजर पर बात हुई। उसके बाद वह ISI हैंडलर प्रीती के संपर्क में आया। उसकी ऑडियो कॉल के माध्यम से बात होने लगी। शैलेश ने प्रीती को भी अपना परिचय सेना के जवान के रूप में दिया। निजी बातचीत के दौरान प्रीती ने उसे ISI के लिए काम करने की बात कही। इसके बदले अच्छी रकम देने का लालच दिया। लालच में आकर शैलेश ने प्रीती को सेना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की लोकेशन, सेना की गाड़ियों के मूवमेंट के फोटो भेजे। यही फोटो उसने हरलीन कौर को भी भेजे। शैलेश को फोन पे पर अप्रैल 2023 से रुपये मिलने लगे। एसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि इस मामले की जानकारी कराई जा रही है। पटियाली सीओ को पूरी जांच पड़ताल का जिम्मा सौंपा है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने देश में अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे पहले कोरोना से बचाव के लिये तीन करोड़ से अधिक लोगों को टीकाकरण खुराक देने में कीर्तिमान स्थापित किया है। तेजी से बीमारी में रोकथाम में सरकार का यह प्रयास 'मील का पत्थर' साबित हुआ है। बीमारियों को रोकने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के यूपी मॉडल ने प्रत्येक दिन नई उपलब्धियां अपने नाम की हैं। टीकाकरण अभियान का भी इसमें विशेष योगदान रहा है। 'जीत का टीका' लगवाने के लिये सरकार के प्रयासों का ही असर है कि लोगों में भी इसके प्रति उत्साह लगातार बढ़ रहा है। शनिवार को दोपहर एक:तीस बजे के बाद सरकार ने प्रदेश में तीन करोड़ से अधिक लोगों को टीकाकरण खुराक देने की बड़ी उपलब्धि हासिल की। राज्य सरकार बीमारी की रोकथाम के लिये किसी प्रकार की कमी नहीं छोड़ना चाहती है। जनवरी माह से ही प्रदेश में उसने टीकाकरण कराने का अभियान शुरू किया। टीकाकरण अभियान की समय-समय पर निगरानी और प्रत्येक वर्ग को टीका कवर देने के प्रयास तेजी से शुरू किये गये। बड़ी संख्या में लोगों का टीकाकरण कराना संभव हुआ। टीका कवर देने में सफल साबित हुई राज्य सरकार ने अब अगस्त माह तक दस करोड़ की जनसंख्या के वैक्सीनेशन का लक्ष्य दिया है। इसके लिये फुलप्रूफ प्लान बनाया गया है। अधिकारी इस लक्ष्य को पाने के लिये पूरी ताकत से जुटे हैं। प्रदेश में शुरू हुए प्रत्येक वर्ग के टीकाकरण अभियान में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक जबदस्त उत्साह दिखाई दे रहा है। प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति के टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करने में जुटी राज्य सरकार बीमारी से बचाव में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती है। इसके लिये अट्ठारह से चौंतालीस आयु और पैंतालीस वर्ष से ऊपर के लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है। अट्ठारह से चौंतालीस वर्ष के लोगों के लिये पाँच हज़ार सेंटर बनाए गये हैं। जबकि पैंतालीस की आयु के ऊपर के लोगों के लिये तीन हज़ार सेंटरों पर टीकाकरण चल रहा है। बारह साल से कम उम्र के अभिभावकों के लिये दो सौ बूथ बनाए गये हैं। महिलाओं का टीकाकरण करने के लिये प्रत्येक जिले में पिंक बूथ बनाए गये। विदेशों में पढ़ाई, नौकरी और खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने जाने वालों के लिये भी जिला अस्पतालों में टीकाकरण की सुविधा प्रदान की है। लखनऊ। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए भारतीय सेना की जासूसी करने वाले एक युवक शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान को आतंक निरोधक दस्ता ने मंगलवार को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। वह मूल रूप से उप्र के कासगंज जिले के पटियाली थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले जिनौल गांव का रहने वाला है। आरोपी भारतीय सेना की गोपनीय सूचनाएं व्हाट्सएप और फेसबुक के माध्यम से ISI को साझा कर रहा था। खुलासा होने के बाद कासगंज जिले की पुलिस भी सक्रिय हो गई। पुलिस आरोपी शैलेश कुमार उर्फ शैलेंद्र सिंह चौहान के घर पहुंचकर जांच में जुट गई है। एसपी सौरभ दीक्षित ने सीओ पटियाली को इस मामले में जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। ATS ने आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट की धाराओं एवं विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपी शैलेश पूर्व में आठ-नौ माह तक अरुणांचल प्रदेश में भारतीय सेना में अस्थायी श्रमिक के रूप में कार्य कर चुका है। वहां रहने के दौरान उसके पास सेना की महत्वपूर्ण जानकारियां थीं। वह सेना में किसी पद पर कार्यरत नहीं है, लेकिन वह स्वयं के भारतीय सेना में तैनात होना बताता है। सोशल मीडिया पर भी शैलेश चौहान के नाम से उसकी प्रोफाइल बनी हुई है। उस पर भारतीय सेना की यूनिफॉर्म पहने हुए उसकी फोटो लगी है। शैलेश पहले ISI हैंडलर हरलीन कौर नाम की महिला के संपर्क में आया। उससे मैसेंजर पर बात हुई। उसके बाद वह ISI हैंडलर प्रीती के संपर्क में आया। उसकी ऑडियो कॉल के माध्यम से बात होने लगी। शैलेश ने प्रीती को भी अपना परिचय सेना के जवान के रूप में दिया। निजी बातचीत के दौरान प्रीती ने उसे ISI के लिए काम करने की बात कही। इसके बदले अच्छी रकम देने का लालच दिया। लालच में आकर शैलेश ने प्रीती को सेना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की लोकेशन, सेना की गाड़ियों के मूवमेंट के फोटो भेजे। यही फोटो उसने हरलीन कौर को भी भेजे। शैलेश को फोन पे पर अप्रैल दो हज़ार तेईस से रुपये मिलने लगे। एसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि इस मामले की जानकारी कराई जा रही है। पटियाली सीओ को पूरी जांच पड़ताल का जिम्मा सौंपा है।
दरंग के विधायक ने वन मंत्री से पूछा कि प्रदेश सरकार ने किन-किन जंगलों में वृक्षों को चिह्नित किया है। जो सूखने के कगार पर हैं या गिर गए हैं। सरकार द्वारा इसके लिए क्या किया जा रहा है? जवाब में वन मंत्री गोविन्द ठाकुर ने बताया कि चम्बा वन मंडल के 6 लौट, शिमला वन मंडल का 1 लौट और कोटगढ़ वन मंडल में 1 लौट कुल 8 लौट हैं जिनमें 4773 पेड़ समतुल्य 15350. 993 घनमीटर सम्मलित हैं। घने जंगलों में ये कर पाना सम्भव नहीं लेकिन कुछ जंगलों में सूखे पेड़ों को काटकर उसकी लकड़ी को उपयोग में लाया जाता है।
दरंग के विधायक ने वन मंत्री से पूछा कि प्रदेश सरकार ने किन-किन जंगलों में वृक्षों को चिह्नित किया है। जो सूखने के कगार पर हैं या गिर गए हैं। सरकार द्वारा इसके लिए क्या किया जा रहा है? जवाब में वन मंत्री गोविन्द ठाकुर ने बताया कि चम्बा वन मंडल के छः लौट, शिमला वन मंडल का एक लौट और कोटगढ़ वन मंडल में एक लौट कुल आठ लौट हैं जिनमें चार हज़ार सात सौ तिहत्तर पेड़ समतुल्य पंद्रह हज़ार तीन सौ पचास. नौ सौ तिरानवे घनमीटर सम्मलित हैं। घने जंगलों में ये कर पाना सम्भव नहीं लेकिन कुछ जंगलों में सूखे पेड़ों को काटकर उसकी लकड़ी को उपयोग में लाया जाता है।
इंग्लैंड एंड वेल्स में जारी विश्व कप के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम और इसका सपोर्ट स्टाफ 'सख्त समीक्षा' से गुजरेगा. देश के क्रिकेट बोर्ड ने बुधवार को यह बात कही. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने कहा है कि विश्व कप के बाद टीम और उसके सपोर्ट स्टाफ की समीक्षा की जाएगी और इसकी रिपोर्ट बोर्ड के अध्यक्ष एहसान मनी को सौंपी जाएगी. साथ ही बोर्ड ऑफ गवर्नर (बीओजी) के पास भी यह रिपोर्ट जाएगी. पाकिस्तानी टीम इस समय विश्व कप में नौवें स्थान पर है. उसे हाल ही में भारत के हाथों शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा.
इंग्लैंड एंड वेल्स में जारी विश्व कप के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम और इसका सपोर्ट स्टाफ 'सख्त समीक्षा' से गुजरेगा. देश के क्रिकेट बोर्ड ने बुधवार को यह बात कही. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने कहा है कि विश्व कप के बाद टीम और उसके सपोर्ट स्टाफ की समीक्षा की जाएगी और इसकी रिपोर्ट बोर्ड के अध्यक्ष एहसान मनी को सौंपी जाएगी. साथ ही बोर्ड ऑफ गवर्नर के पास भी यह रिपोर्ट जाएगी. पाकिस्तानी टीम इस समय विश्व कप में नौवें स्थान पर है. उसे हाल ही में भारत के हाथों शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा.
पाकिस्तान ने टॉस जीता और पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया. मिस्बाह उल हक के इस फैसले को पाकिस्तान के गेंदबाजो ने सही साबित किया और पहले ही घंटे के भीतर वेस्टइंडीज के तीन शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों को वापस भेज दिया. वेस्ट इंडीज के ओपनर क्रेग ब्रेथवेट अपना खता भी नहीं खोल सके, उन्हें पाकिस्तान के लिए अपना पहला मैच खेल रहे मोहम्मद अब्बास ने यूनिस खान के हाथो कैच कराया. उसके बाद मोहम्मद आमिर ने वेस्ट इंडीज के लिए अपना पहला मैच खेल रहे 20 साल के सिमरन हट्मेयर(11) व साईं होप(2) को बोल्ड कर दिया. वेस्ट इंडीज एक समय 71 रन पर अपने 5 विकेट गवा चूका था. खराब रोशनी के कारण दिन के खेल को जल्द रोक देना पड़ा, मगर तब तक वेस्ट इंडीज ने अपनी पारी में 81 ओवेर में 244 रन पर अपने 7 विकेट गवा दिए थे. खेल खत्म होने तक क्रिज में वेस्ट इंडीज के कप्तान जेसन होल्डर(30) व देवेन्द्र बिशु(23) मौजुद है. अबतक दोनों के बीच 55 रन की नाबाद साझेदारी हो चुकी है. संक्षिप्त स्कोरः वेस्टइंडीज 244/7 (रोस्टन चेस 63,शेन डोरीच 56; मोहम्मद अमीर 3-28) बनाम पाकिस्तान.
पाकिस्तान ने टॉस जीता और पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया. मिस्बाह उल हक के इस फैसले को पाकिस्तान के गेंदबाजो ने सही साबित किया और पहले ही घंटे के भीतर वेस्टइंडीज के तीन शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों को वापस भेज दिया. वेस्ट इंडीज के ओपनर क्रेग ब्रेथवेट अपना खता भी नहीं खोल सके, उन्हें पाकिस्तान के लिए अपना पहला मैच खेल रहे मोहम्मद अब्बास ने यूनिस खान के हाथो कैच कराया. उसके बाद मोहम्मद आमिर ने वेस्ट इंडीज के लिए अपना पहला मैच खेल रहे बीस साल के सिमरन हट्मेयर व साईं होप को बोल्ड कर दिया. वेस्ट इंडीज एक समय इकहत्तर रन पर अपने पाँच विकेट गवा चूका था. खराब रोशनी के कारण दिन के खेल को जल्द रोक देना पड़ा, मगर तब तक वेस्ट इंडीज ने अपनी पारी में इक्यासी ओवेर में दो सौ चौंतालीस रन पर अपने सात विकेट गवा दिए थे. खेल खत्म होने तक क्रिज में वेस्ट इंडीज के कप्तान जेसन होल्डर व देवेन्द्र बिशु मौजुद है. अबतक दोनों के बीच पचपन रन की नाबाद साझेदारी हो चुकी है. संक्षिप्त स्कोरः वेस्टइंडीज दो सौ चौंतालीस/सात बनाम पाकिस्तान.
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? हाल ही में बॉलीवुड की सुपरस्टार एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा की शादी की खबरों ने फिर से जोर पकड़ लिया है। अनुष्का शर्मा अपनी परिवार समेत आज ही इटली रवाना हुई हैं। जिसके चलते कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों की शादी इटली में होने की पूरी प्लानिंग है। ये सब इस शादी को मीडिया के तामझाम से दूर रखने के लिए किया जा रहा है। जिसके चलते शायद अनुष्का का दुल्हन वाला लुक फैंस न देख पाएं लेकिन उनका ये लुक तो पहले भी आप कई बार देख चुके हैं। यहां तक कि विराट और अनुष्का पहले भी दुल्हा-दुल्हन के कॉस्ट्यूम में नजर आ चुके हैं। दोनों को साथ देखने के लिए तो फैंस हमेशा ही बेताब रहते हैं। वहीं दोनों कई बार एक-दूसरे के साथ कई ईवेंट्स पर साथ नजर भी आ चुके हैं। खास बात ये भी है कि दोनों कई सालों से रिलेशनशिप में हैं और दोनों ने कभी मीडिया के सामने एक-दूसरे से प्यार जताने से पीछे नहीं हटते। अगर आप भी सोच रहे हैं कि अनुष्का दुल्हन के रूप में कैसी दिखाई देगीं तो हम आपको अनुष्का के 10 ऐसी तस्वीरें दिखा रहे हैं जिन्हें देखकर आपको अंदाजा तो लग ही जाएगा।
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? हाल ही में बॉलीवुड की सुपरस्टार एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा की शादी की खबरों ने फिर से जोर पकड़ लिया है। अनुष्का शर्मा अपनी परिवार समेत आज ही इटली रवाना हुई हैं। जिसके चलते कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों की शादी इटली में होने की पूरी प्लानिंग है। ये सब इस शादी को मीडिया के तामझाम से दूर रखने के लिए किया जा रहा है। जिसके चलते शायद अनुष्का का दुल्हन वाला लुक फैंस न देख पाएं लेकिन उनका ये लुक तो पहले भी आप कई बार देख चुके हैं। यहां तक कि विराट और अनुष्का पहले भी दुल्हा-दुल्हन के कॉस्ट्यूम में नजर आ चुके हैं। दोनों को साथ देखने के लिए तो फैंस हमेशा ही बेताब रहते हैं। वहीं दोनों कई बार एक-दूसरे के साथ कई ईवेंट्स पर साथ नजर भी आ चुके हैं। खास बात ये भी है कि दोनों कई सालों से रिलेशनशिप में हैं और दोनों ने कभी मीडिया के सामने एक-दूसरे से प्यार जताने से पीछे नहीं हटते। अगर आप भी सोच रहे हैं कि अनुष्का दुल्हन के रूप में कैसी दिखाई देगीं तो हम आपको अनुष्का के दस ऐसी तस्वीरें दिखा रहे हैं जिन्हें देखकर आपको अंदाजा तो लग ही जाएगा।
Patra Chawl land scam case: ईडी द्वारा संजय राउत पर कार्रवाई करने के बाद महाराष्ट्र के अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने संजय राउत पर निशाना साधते हुए कहा कि, संजय राउत पर ई़डी ने कार्रवाई करने में देरी कर दी। ये कार्रवाई तो उनके खिलाफ पहले ही हो जानी चाहिए थी। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद से लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं। यहां तक कि मशहूर सिंगर सिद्धू मूसेवाला तक की हत्याओं ने जान ले ली थी। लुधियाना में एक कार में युवक गोली लगने से मृत मिला था। एक जगह बदमाशों ने पुलिस के दारोगा की जान ले ली थी। इसी जगह एक प्राचीन शहर का पता भी चला है। उस शहर के चारों कोनों पर मीनारें बनी थीं। पानी के कुंड और सिंचाई के लिए नहरें भी बनाई गई थीं। इससे साबित होता है कि सऊदी अरब अब भले ही रेगिस्तान हो, लेकिन पहले वहां काफी मात्रा में पानी मिलता था। छिपे हुए आतंकियों को तलाशने का जिम्मा एक्सल को सौंपा गया था। उसी दौरान आतंकियों की तरफ से फायरिंग हुई। एक्सल को तीन गोलियां लगीं और वो शहीद हो गया। एक्सल के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर 10 से ज्यादा चोटों के निशान मिले। पात्रा चॉल घोटाले की शुरुआत साल 2007 में हुई थी। तब एचडीआईएल की सहायक कंपनी गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन ने 47 एकड़ में फैले पात्रा चॉल को डेवलप करने का काम हासिल किया था। चॉल में तब काफी लोग रहते थे और इनको 672 फ्लैट बनाकर देने थे। इसके अलावा महाडा MHADA को भी 3000 फ्लैट बनाकर देने थे। आरोप है कि कंपनी ने जमीन पर कोई विकास का काम नहीं किया और जमीन तक दूसरे बिल्डर को बेच दी। मीडिया की खबरें ये भी बताती हैं कि अर्पिता को भले ही पार्थ और अन्य वीआईपी से करीबी का मौका मिला और उन्होंने अकूत संपत्ति हासिल की, लेकिन अपनी मां को एक्टर ने उनके हाल पर छोड़ दिया था। अर्पिता के ड्राइवर रहे पुर्णेंदु भट्टाचार्य ने एबीपी न्यूज को बताया कि अर्पिता कभी-कभी मां से मिलने जाती थी। यूजर्स में से तमाम ने कहा कि जनता को बेवकूफ बनाना बंद कीजिए। आपके विधायकों की गाड़ी से कैश मिला है और आप बीजेपी पर तोहमत मढ़ रहे हैं। डॉ. आईबी लाल नाम के यूजर ने लिखा कि कांग्रेस के विधायकों की गाड़ी से कैश मिला और बीजेपी पर आरोप लगा रहे हैं। रघुराम राजन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने का काम किया है। भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा है। यहां श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे हालात नहीं बनेंगे। राजन ने कहा कि भारत पर विदेशी कर्ज भी है, लेकिन ये अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है। देश में कट्टरता कितनी बढ़ गई है, इसका उदाहरण आए दिन देखने को मिल ही रहा है। अब यूपी के मुजफ्फरनगर में इंडियन आइडल फेम सिंगर फरमानी नाज को भी कट्टरपंथी गालियां दे रहे हैं। वजह ये है कि फरमानी नाज ने बीते दिन भगवान शिव का एक भजन गाकर अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया था। डॉ. राज बहादुर बाकायदा इस घटना के बाद आहत होकर कैमरे पर रोते तक कैद हुए। विपक्ष ने इस मामले में भगवंत मान से मंत्री पर कार्रवाई करने की मांग की है। पता चला है कि मान सरकार अब डॉ. राज बहादुर को इस्तीफा वापस लेने के लिए मना रही है।
Patra Chawl land scam case: ईडी द्वारा संजय राउत पर कार्रवाई करने के बाद महाराष्ट्र के अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने संजय राउत पर निशाना साधते हुए कहा कि, संजय राउत पर ई़डी ने कार्रवाई करने में देरी कर दी। ये कार्रवाई तो उनके खिलाफ पहले ही हो जानी चाहिए थी। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद से लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं। यहां तक कि मशहूर सिंगर सिद्धू मूसेवाला तक की हत्याओं ने जान ले ली थी। लुधियाना में एक कार में युवक गोली लगने से मृत मिला था। एक जगह बदमाशों ने पुलिस के दारोगा की जान ले ली थी। इसी जगह एक प्राचीन शहर का पता भी चला है। उस शहर के चारों कोनों पर मीनारें बनी थीं। पानी के कुंड और सिंचाई के लिए नहरें भी बनाई गई थीं। इससे साबित होता है कि सऊदी अरब अब भले ही रेगिस्तान हो, लेकिन पहले वहां काफी मात्रा में पानी मिलता था। छिपे हुए आतंकियों को तलाशने का जिम्मा एक्सल को सौंपा गया था। उसी दौरान आतंकियों की तरफ से फायरिंग हुई। एक्सल को तीन गोलियां लगीं और वो शहीद हो गया। एक्सल के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर दस से ज्यादा चोटों के निशान मिले। पात्रा चॉल घोटाले की शुरुआत साल दो हज़ार सात में हुई थी। तब एचडीआईएल की सहायक कंपनी गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन ने सैंतालीस एकड़ में फैले पात्रा चॉल को डेवलप करने का काम हासिल किया था। चॉल में तब काफी लोग रहते थे और इनको छः सौ बहत्तर फ्लैट बनाकर देने थे। इसके अलावा महाडा MHADA को भी तीन हज़ार फ्लैट बनाकर देने थे। आरोप है कि कंपनी ने जमीन पर कोई विकास का काम नहीं किया और जमीन तक दूसरे बिल्डर को बेच दी। मीडिया की खबरें ये भी बताती हैं कि अर्पिता को भले ही पार्थ और अन्य वीआईपी से करीबी का मौका मिला और उन्होंने अकूत संपत्ति हासिल की, लेकिन अपनी मां को एक्टर ने उनके हाल पर छोड़ दिया था। अर्पिता के ड्राइवर रहे पुर्णेंदु भट्टाचार्य ने एबीपी न्यूज को बताया कि अर्पिता कभी-कभी मां से मिलने जाती थी। यूजर्स में से तमाम ने कहा कि जनता को बेवकूफ बनाना बंद कीजिए। आपके विधायकों की गाड़ी से कैश मिला है और आप बीजेपी पर तोहमत मढ़ रहे हैं। डॉ. आईबी लाल नाम के यूजर ने लिखा कि कांग्रेस के विधायकों की गाड़ी से कैश मिला और बीजेपी पर आरोप लगा रहे हैं। रघुराम राजन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने का काम किया है। भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा है। यहां श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे हालात नहीं बनेंगे। राजन ने कहा कि भारत पर विदेशी कर्ज भी है, लेकिन ये अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है। देश में कट्टरता कितनी बढ़ गई है, इसका उदाहरण आए दिन देखने को मिल ही रहा है। अब यूपी के मुजफ्फरनगर में इंडियन आइडल फेम सिंगर फरमानी नाज को भी कट्टरपंथी गालियां दे रहे हैं। वजह ये है कि फरमानी नाज ने बीते दिन भगवान शिव का एक भजन गाकर अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया था। डॉ. राज बहादुर बाकायदा इस घटना के बाद आहत होकर कैमरे पर रोते तक कैद हुए। विपक्ष ने इस मामले में भगवंत मान से मंत्री पर कार्रवाई करने की मांग की है। पता चला है कि मान सरकार अब डॉ. राज बहादुर को इस्तीफा वापस लेने के लिए मना रही है।
जब किसी शो की शूटिंग लगातार चलते चलते रोक दिन जाती है तो इसके पीछे कोई बड़ी बजह सामने आती है लेकिन यहाँ तो वजह जानकार आप भी हैरान रहा जाएंगे. हम बात कर रहे भारतीय टेलीविजन के प्रसिद्ध शो चंद्र-नंदिनी की. दरअसल हुआ कुछ यूँ की शूटिंग के समय नंदिनी यानी श्वेता के श्रृंगार में शामिल ज्वेलरी उनके सिर पर लगे विग में उलझ गयी जिसे कड़ी मसक्कत के बाद भी पूरी टीम सुलझा नहीं सकी और आखिर में एक दिन के लिए शूटिंग रोकनी पड़ी. Video :क्या आपने देखा, भाभी जी घर पर है का जबरदस्त रैप सांग?
जब किसी शो की शूटिंग लगातार चलते चलते रोक दिन जाती है तो इसके पीछे कोई बड़ी बजह सामने आती है लेकिन यहाँ तो वजह जानकार आप भी हैरान रहा जाएंगे. हम बात कर रहे भारतीय टेलीविजन के प्रसिद्ध शो चंद्र-नंदिनी की. दरअसल हुआ कुछ यूँ की शूटिंग के समय नंदिनी यानी श्वेता के श्रृंगार में शामिल ज्वेलरी उनके सिर पर लगे विग में उलझ गयी जिसे कड़ी मसक्कत के बाद भी पूरी टीम सुलझा नहीं सकी और आखिर में एक दिन के लिए शूटिंग रोकनी पड़ी. Video :क्या आपने देखा, भाभी जी घर पर है का जबरदस्त रैप सांग?
जस्सी सिंह ने कहा कि 'पीएम मोदी सिखों की समस्याओं को समझते हैं और वह दिल से समुदाय से प्यार करते हैं। जब वह सिख समुदाय के लोगों से मिलते हैं और बात करते हैं, तब भी उनका यह प्यार दिखाई देता है। अमेरिका में सिख समुदाय के नेता ने की पीएम मोदी की तारीफ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे की खूब चर्चा है। इस बीच अमेरिका में रहने वाले एक सिख नेता ने पीएम मोदी के अमेरिका दौरे से पहले बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में रहने वाले सिख समुदाय की मांगों को पीएम मोदी ने पूरा किया है। बता दें कि सिख ऑफ अमेरिका संगठन के चेयरमैन जस्सी सिंह ने यह बात कही है। जस्सी सिंह अमेरिका में सिख समुदाय के एक बड़े नेता हैं। जस्सी सिंह ने पीएम मोदी के आगामी अमेरिका दौरे को ऐतिहासिक पल करार दिया। बता दें कि पीएम मोदी 21 जून से 24 जून तक अमेरिका के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह अमेरिका की संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित करेंगे। जस्सी सिंह ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका आ रहे हैं और यह एक ऐतिहासिक पल है। सिंह ने कहा कि सिख प्रतिनिधिमंडल ने जब भी पीएम मोदी के सामने अपनी मांगें रखी हैं, हर बार पीएम मोदी ने उन मांगों को पूरा करने की कोशिश की है। जस्सी सिंह ने कहा कि इस बार भी सिख प्रतिनिधिमंडल पीएम मोदी से मिलेगा और उन्हें धन्यवाद देगा। 'सिख समुदाय से प्यार करते हैं पीएम मोदी' जस्सी सिंह ने कहा कि 'पीएम मोदी सिखों की समस्याओं को समझते हैं और वह दिल से समुदाय से प्यार करते हैं। जब वह सिख समुदाय के लोगों से मिलते हैं और बात करते हैं, तब भी उनका यह प्यार दिखाई देता है। हाल के सालों में किसी और प्रधानमंत्री ने सिख समुदाय के लिए इतना नहीं किया, जितना पीएम मोदी ने किया है। ' सिख ऑफ अमेरिका संगठन के चेयरमैन ने ये भी बताया कि पीएम मोदी ने उनके समुदाय के लिए क्या क्या किया है। जस्सी सिंह ने बताया कि 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के तौर पर मनाने की मांग हो या फिर गुरुनानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को मनाने की, 1984 दंगे की जांच के लिए एसआईटी के गठन की या फिर विदेश में रहने वाले कई सिखों को ब्लैकलिस्ट से हटाने की, ताकि वह अपनी जन्मभूमि फिर से जा सकें या फिर कृषि कानून वापस लेने की मांग, पीएम मोदी हमेशा सिखों के साथ रहे हैं। सिंह ने कहा कि पीएम मोदी ने काफी कुछ किया है और बहुत कुछ किया जाना बाकी है। अगर हमें मौका मिला तो हम पीएम मोदी से मिलकर हमारी मांगों को पूरा करने के लिए उन्हें धन्यवाद कहेंगे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
जस्सी सिंह ने कहा कि 'पीएम मोदी सिखों की समस्याओं को समझते हैं और वह दिल से समुदाय से प्यार करते हैं। जब वह सिख समुदाय के लोगों से मिलते हैं और बात करते हैं, तब भी उनका यह प्यार दिखाई देता है। अमेरिका में सिख समुदाय के नेता ने की पीएम मोदी की तारीफ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे की खूब चर्चा है। इस बीच अमेरिका में रहने वाले एक सिख नेता ने पीएम मोदी के अमेरिका दौरे से पहले बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में रहने वाले सिख समुदाय की मांगों को पीएम मोदी ने पूरा किया है। बता दें कि सिख ऑफ अमेरिका संगठन के चेयरमैन जस्सी सिंह ने यह बात कही है। जस्सी सिंह अमेरिका में सिख समुदाय के एक बड़े नेता हैं। जस्सी सिंह ने पीएम मोदी के आगामी अमेरिका दौरे को ऐतिहासिक पल करार दिया। बता दें कि पीएम मोदी इक्कीस जून से चौबीस जून तक अमेरिका के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह अमेरिका की संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित करेंगे। जस्सी सिंह ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका आ रहे हैं और यह एक ऐतिहासिक पल है। सिंह ने कहा कि सिख प्रतिनिधिमंडल ने जब भी पीएम मोदी के सामने अपनी मांगें रखी हैं, हर बार पीएम मोदी ने उन मांगों को पूरा करने की कोशिश की है। जस्सी सिंह ने कहा कि इस बार भी सिख प्रतिनिधिमंडल पीएम मोदी से मिलेगा और उन्हें धन्यवाद देगा। 'सिख समुदाय से प्यार करते हैं पीएम मोदी' जस्सी सिंह ने कहा कि 'पीएम मोदी सिखों की समस्याओं को समझते हैं और वह दिल से समुदाय से प्यार करते हैं। जब वह सिख समुदाय के लोगों से मिलते हैं और बात करते हैं, तब भी उनका यह प्यार दिखाई देता है। हाल के सालों में किसी और प्रधानमंत्री ने सिख समुदाय के लिए इतना नहीं किया, जितना पीएम मोदी ने किया है। ' सिख ऑफ अमेरिका संगठन के चेयरमैन ने ये भी बताया कि पीएम मोदी ने उनके समुदाय के लिए क्या क्या किया है। जस्सी सिंह ने बताया कि छब्बीस दिसंबर को वीर बाल दिवस के तौर पर मनाने की मांग हो या फिर गुरुनानक देव जी के पाँच सौ पचासवें प्रकाश पर्व को मनाने की, एक हज़ार नौ सौ चौरासी दंगे की जांच के लिए एसआईटी के गठन की या फिर विदेश में रहने वाले कई सिखों को ब्लैकलिस्ट से हटाने की, ताकि वह अपनी जन्मभूमि फिर से जा सकें या फिर कृषि कानून वापस लेने की मांग, पीएम मोदी हमेशा सिखों के साथ रहे हैं। सिंह ने कहा कि पीएम मोदी ने काफी कुछ किया है और बहुत कुछ किया जाना बाकी है। अगर हमें मौका मिला तो हम पीएम मोदी से मिलकर हमारी मांगों को पूरा करने के लिए उन्हें धन्यवाद कहेंगे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
गदाधरदास सों कही, श्रीवल्लभाचार्यजी पधारे हैं । तिनसों कछू सन्देह पूछनो है, सो मैं जात हों। तब गदाधरदास कहें, जो मैं हूं चलूंगो, सो दोऊ आए । तब गदाधरदास के काका ने श्रीश्राचार्य जो सों पूछयो, जो महाराज ! ठाकुर तो एक है परन्तु वैष्णव सम्प्रदाय में न्यारे न्यारे क्यो मानत हैं ? कोई कृष्ण कों, कोई राम कों, कोई नृसिंघ, कोई नारायण आदि, तामें निश्चय कौन ठाकुर ? तब श्रीश्राचार्यजी कहे जैसे चक्रवर्ती राजा को राज तो सगरी पृथ्वी पर, और राजा देस देस के गाँव गाँव के, सोऊ राजा कहावें, परन्तु चक्रवर्ती के आज्ञाकारी । तैसे ही पूर्णपुरुषोत्तम श्रीकृष्ण सो सर्वोपरि । और अवतार अंस कला करिके दोइ, सब श्रीकृष्ण के आज्ञाकारी । ठाकुर सबकों कहिए । तब गदाधरदास को काका चुप करि रहयो । गदाधरदास दैवी जीव तिनके मन में सिद्धांत बैठि गयो । जो श्रीश्राचार्यजी को सरन जइए तो । श्रीकृष्ण को प्राप्ति होइगी । तेब गदाधरदास में श्रीश्राचार्यजी को दण्डवत प्रणाम करि विनती किये, महाराज ! सरन लीजिए। मैं संसार में बहोत भटक्यो । तब श्रीश्राचार्यजी ने कही, जो तुम अपने काका को तो पूछो । इनको चित्त दुख पावै तो सेवक काहे को होउ ? तब गदाधरदास के काका ने कही, महाराज ! हमारे तो गायत्री मंत्र सों काम है, और तो हम जानत नाहीं, गदाधरदास की ए जाने। ना हम हां कहें, ना हम ना कहें। तब गदाधरदास ने कही, अब में आप को दास भयो । अब संसारी जीव सों व्योहार मेरे नाहीं है। तातें मैं आपु के सरन आयो हों, कृपा करिके सरम लीजिए। और यह बहिर्मुख कब कहेगो जो तू सेवक होउ । या प्रकार गदाधरदास के बचन सुनिके गदाधरदास को काका उहां तें उठि बाहर आई ठाढो भयो ।
गदाधरदास सों कही, श्रीवल्लभाचार्यजी पधारे हैं । तिनसों कछू सन्देह पूछनो है, सो मैं जात हों। तब गदाधरदास कहें, जो मैं हूं चलूंगो, सो दोऊ आए । तब गदाधरदास के काका ने श्रीश्राचार्य जो सों पूछयो, जो महाराज ! ठाकुर तो एक है परन्तु वैष्णव सम्प्रदाय में न्यारे न्यारे क्यो मानत हैं ? कोई कृष्ण कों, कोई राम कों, कोई नृसिंघ, कोई नारायण आदि, तामें निश्चय कौन ठाकुर ? तब श्रीश्राचार्यजी कहे जैसे चक्रवर्ती राजा को राज तो सगरी पृथ्वी पर, और राजा देस देस के गाँव गाँव के, सोऊ राजा कहावें, परन्तु चक्रवर्ती के आज्ञाकारी । तैसे ही पूर्णपुरुषोत्तम श्रीकृष्ण सो सर्वोपरि । और अवतार अंस कला करिके दोइ, सब श्रीकृष्ण के आज्ञाकारी । ठाकुर सबकों कहिए । तब गदाधरदास को काका चुप करि रहयो । गदाधरदास दैवी जीव तिनके मन में सिद्धांत बैठि गयो । जो श्रीश्राचार्यजी को सरन जइए तो । श्रीकृष्ण को प्राप्ति होइगी । तेब गदाधरदास में श्रीश्राचार्यजी को दण्डवत प्रणाम करि विनती किये, महाराज ! सरन लीजिए। मैं संसार में बहोत भटक्यो । तब श्रीश्राचार्यजी ने कही, जो तुम अपने काका को तो पूछो । इनको चित्त दुख पावै तो सेवक काहे को होउ ? तब गदाधरदास के काका ने कही, महाराज ! हमारे तो गायत्री मंत्र सों काम है, और तो हम जानत नाहीं, गदाधरदास की ए जाने। ना हम हां कहें, ना हम ना कहें। तब गदाधरदास ने कही, अब में आप को दास भयो । अब संसारी जीव सों व्योहार मेरे नाहीं है। तातें मैं आपु के सरन आयो हों, कृपा करिके सरम लीजिए। और यह बहिर्मुख कब कहेगो जो तू सेवक होउ । या प्रकार गदाधरदास के बचन सुनिके गदाधरदास को काका उहां तें उठि बाहर आई ठाढो भयो ।
गुजरातः अपराध के मामले में बीते दो साल के सरकारी आंकड़े शांतिप्रिय गुजरात की जनता के लिए भयावह हैं. दो वर्षों में राज्य में 2034 हत्या के मामले दर्ज किए गए. गुजरात में कानून और व्यवस्था की पोल विजय रूपाणी सरकार के आंकड़े ही खोल रहे हैं. राज्य में बेतहाशा अपराध वृद्धि और शराबबंदी की विफलता का आरोप लगाते हुए विपक्ष जहां हमलावर है वहीं यह सवाल भी उठा रहा है कि ऐसे असुरक्षित माहौल में आखिर कैसे कोई कुछ दिन गुजरात में गुजार सकता है. विधानसभा में सरकार की ओर से पेश आंकड़ों के अनुसार राज्य में हर रोज 3 हत्याएं, 4 रेप और 5 रायोटिंग की घटनाएं घट रही हैं. विभिन्न कारणों से रोज 20 से अधिक लोग आत्महत्या कर रहे हैं. यह आंकड़े रूपाणी सरकार के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं. अपराध के मामले में बीते दो साल के सरकारी आंकड़े शांतिप्रिय गुजरात की जनता के लिए भयावह हैं. दो वर्षों में राज्य में 2034 हत्या के मामले दर्ज किए गए. 2720 महिलाओं के साथ रेप. अपहरण के 5897 मामले पंजीबद्ध हुए जबकि 3305 रायोटिंग की घटनाएं घटी. हत्या के प्रयास का मामलों में अहमदाबाद और सूरत आगे रहे हैं. पिछले दो साल में हत्या के प्रयास के अहमदाबाद में 368 और सूरत में 282 मामले दर्ज किए गए. गुजरात में बेकाबू हो रहे आत्महत्या के मामलों ने पुलिस प्रशासन को परेशान करके रख दिया है. दो साल के भीतर 14702 लोगों ने विभिन्न कारणों से मौत को गले लगा लिया है. गुजरात के 33 जिलों में हर रोज 120 से ज्यादा लोगों की आकस्मिक, स्वाभाविक कारणों से मृत्यु होती है.
गुजरातः अपराध के मामले में बीते दो साल के सरकारी आंकड़े शांतिप्रिय गुजरात की जनता के लिए भयावह हैं. दो वर्षों में राज्य में दो हज़ार चौंतीस हत्या के मामले दर्ज किए गए. गुजरात में कानून और व्यवस्था की पोल विजय रूपाणी सरकार के आंकड़े ही खोल रहे हैं. राज्य में बेतहाशा अपराध वृद्धि और शराबबंदी की विफलता का आरोप लगाते हुए विपक्ष जहां हमलावर है वहीं यह सवाल भी उठा रहा है कि ऐसे असुरक्षित माहौल में आखिर कैसे कोई कुछ दिन गुजरात में गुजार सकता है. विधानसभा में सरकार की ओर से पेश आंकड़ों के अनुसार राज्य में हर रोज तीन हत्याएं, चार रेप और पाँच रायोटिंग की घटनाएं घट रही हैं. विभिन्न कारणों से रोज बीस से अधिक लोग आत्महत्या कर रहे हैं. यह आंकड़े रूपाणी सरकार के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं. अपराध के मामले में बीते दो साल के सरकारी आंकड़े शांतिप्रिय गुजरात की जनता के लिए भयावह हैं. दो वर्षों में राज्य में दो हज़ार चौंतीस हत्या के मामले दर्ज किए गए. दो हज़ार सात सौ बीस महिलाओं के साथ रेप. अपहरण के पाँच हज़ार आठ सौ सत्तानवे मामले पंजीबद्ध हुए जबकि तीन हज़ार तीन सौ पाँच रायोटिंग की घटनाएं घटी. हत्या के प्रयास का मामलों में अहमदाबाद और सूरत आगे रहे हैं. पिछले दो साल में हत्या के प्रयास के अहमदाबाद में तीन सौ अड़सठ और सूरत में दो सौ बयासी मामले दर्ज किए गए. गुजरात में बेकाबू हो रहे आत्महत्या के मामलों ने पुलिस प्रशासन को परेशान करके रख दिया है. दो साल के भीतर चौदह हज़ार सात सौ दो लोगों ने विभिन्न कारणों से मौत को गले लगा लिया है. गुजरात के तैंतीस जिलों में हर रोज एक सौ बीस से ज्यादा लोगों की आकस्मिक, स्वाभाविक कारणों से मृत्यु होती है.
की सदस्यता रद्द कर दी, तो सच सामने आ गया है। - कृष्ण वोहरा, सिरसा (हरियाणा) जिन सिद्धातों के आधार पर आम आदमी पार्टी का गठन हुआ था वे कब के रद्दी की टोकरी में फेंके जा चुके हैं। एक के बाद एक उनका झूठ और भ्रष्टाचार पकड़ा जा रहा है, फिर भी उनके नेता जनता को भ्रमित करने से बाज नहीं आ रहे। अपने को ईमानदार कहने वाले अरविंद केजरीवाल राज्यसभा चुनाव के बाद कितने बदनाम हो गए हैं, इसे दिल्ली के लोगों से अच्छा कौन जान सकता है। - विजय कुमार सिंह, विकासपुरी (नई दिल्ली) 'लाल आतंक पर चुप्पी क्यों? ' रपट केरल में हो रहे अत्याचार को सामने रखती है। हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के कार्यकर्ताओं पर होती हिंसा वामपंथ के क्रूर चेहरे को उजागर करती है। एक तरफ दिल्ली में बैठकर मीडया के सामने इनके नेता गरीबों के विकास की बात करते नहीं थकते, जबकि इनकी जहां सरकार होती हैं, वहां भ्रष्टाचार करते हैं, गरीबों को प्रताड़ित करते हैं। आखिर ये कब तक देश की जनता को भ्रमित करेंगे? - महेश चंद्र गंगवाल, अजमेर ( राज. ) रपट 'निशाने पर काशी विश्वनाथ' न केवल खुफिया एजेंसियों पर सवाल उठाती है बल्कि स्थानीय शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। कैसे स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी? जबकि इस जगह से ठीक 100 मीटर की दूरी पर काशी विश्वनाथ का मंदिर है। राज्य सरकार को ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेना होगा और फिर कहीं ऐसी घटना न घटे, उसके लिए सख्त कदम उठाने होंगे। - बी. एल. सचदेवा, 263,आईएनए मार्केट(नई दिल्ली) पाकिस्तान की ओर से आएदिन संघर्षविराम का उल्लंघन किया जाता है। पिछले कुछ अरसे के आंकड़ों को देखें तो उसकी ओर से नियंत्रण रेखा पर किए जा रहे हमलों में बड़ा अंतर आया है। पाकिस्तान भारत की राह में रोड़ा अटकाना चाहता है क्योंकि वह जानता है कि विश्वस्तर पर भारत की छवि एक मजबूत राष्ट्र की बन चुकी है। ऐसे में उसे कैसे नुकसान पहुंचाया जाए, इसके लिए वह बौखलाया हुआ है और सीमा पार कश्मीर में आतंक फैलाए हुए है। सेना को पाकिस्तान की ओर से की जा रही गोलीबारी का मुंहतोड़ जवाब देना होगा और ऐसी सुदृढ़ नीति बनानी होगी जिससे सदैव के लिए ऐसे हमलों पर लगाम लगे। - रामदास गुप्ता, जनता मिल (जम्मू-कश्मीर) नरेंद्र मोदी का 'हिंदुत्व संकीर्ण हो ही नहीं सकता (28 जनवरी, 2018)' साक्षात्कार आज भी प्रासंगिक है। यह हिन्दुत्व की उदारता और सदाश्यता ही है कि वह जहां रहता है, वहां की धरा में माता, पेड़-पौधों में देवी-देवता और पशु तक में भगवान का रूप देखता है। कोई बड़ा-छोटा नहीं, सबमें समान भाव - यही हमारी संस्कृति रही है। समस्त संसार को अपना मानने वाला अगर कोई धर्म है तो वह हिन्दुत्व ही है। लेकिन फिर भी कुछ लोग हिन्दुत्व के खिलाफ पता नहीं क्या-क्या बोलते रहते हैं। दरअसल ऐसे लोग हिन्दुत्व को जानते ही नहीं। - मनोहर मंजुल, प. निमाड़ (म. प्र. ) न्यायालय ने दे दिया, सुने सकल संसार। मगर बहुत है कठिन, वास्तव में यों मरना।
की सदस्यता रद्द कर दी, तो सच सामने आ गया है। - कृष्ण वोहरा, सिरसा जिन सिद्धातों के आधार पर आम आदमी पार्टी का गठन हुआ था वे कब के रद्दी की टोकरी में फेंके जा चुके हैं। एक के बाद एक उनका झूठ और भ्रष्टाचार पकड़ा जा रहा है, फिर भी उनके नेता जनता को भ्रमित करने से बाज नहीं आ रहे। अपने को ईमानदार कहने वाले अरविंद केजरीवाल राज्यसभा चुनाव के बाद कितने बदनाम हो गए हैं, इसे दिल्ली के लोगों से अच्छा कौन जान सकता है। - विजय कुमार सिंह, विकासपुरी 'लाल आतंक पर चुप्पी क्यों? ' रपट केरल में हो रहे अत्याचार को सामने रखती है। हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के कार्यकर्ताओं पर होती हिंसा वामपंथ के क्रूर चेहरे को उजागर करती है। एक तरफ दिल्ली में बैठकर मीडया के सामने इनके नेता गरीबों के विकास की बात करते नहीं थकते, जबकि इनकी जहां सरकार होती हैं, वहां भ्रष्टाचार करते हैं, गरीबों को प्रताड़ित करते हैं। आखिर ये कब तक देश की जनता को भ्रमित करेंगे? - महेश चंद्र गंगवाल, अजमेर रपट 'निशाने पर काशी विश्वनाथ' न केवल खुफिया एजेंसियों पर सवाल उठाती है बल्कि स्थानीय शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। कैसे स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी? जबकि इस जगह से ठीक एक सौ मीटर की दूरी पर काशी विश्वनाथ का मंदिर है। राज्य सरकार को ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेना होगा और फिर कहीं ऐसी घटना न घटे, उसके लिए सख्त कदम उठाने होंगे। - बी. एल. सचदेवा, दो सौ तिरेसठ,आईएनए मार्केट पाकिस्तान की ओर से आएदिन संघर्षविराम का उल्लंघन किया जाता है। पिछले कुछ अरसे के आंकड़ों को देखें तो उसकी ओर से नियंत्रण रेखा पर किए जा रहे हमलों में बड़ा अंतर आया है। पाकिस्तान भारत की राह में रोड़ा अटकाना चाहता है क्योंकि वह जानता है कि विश्वस्तर पर भारत की छवि एक मजबूत राष्ट्र की बन चुकी है। ऐसे में उसे कैसे नुकसान पहुंचाया जाए, इसके लिए वह बौखलाया हुआ है और सीमा पार कश्मीर में आतंक फैलाए हुए है। सेना को पाकिस्तान की ओर से की जा रही गोलीबारी का मुंहतोड़ जवाब देना होगा और ऐसी सुदृढ़ नीति बनानी होगी जिससे सदैव के लिए ऐसे हमलों पर लगाम लगे। - रामदास गुप्ता, जनता मिल नरेंद्र मोदी का 'हिंदुत्व संकीर्ण हो ही नहीं सकता ' साक्षात्कार आज भी प्रासंगिक है। यह हिन्दुत्व की उदारता और सदाश्यता ही है कि वह जहां रहता है, वहां की धरा में माता, पेड़-पौधों में देवी-देवता और पशु तक में भगवान का रूप देखता है। कोई बड़ा-छोटा नहीं, सबमें समान भाव - यही हमारी संस्कृति रही है। समस्त संसार को अपना मानने वाला अगर कोई धर्म है तो वह हिन्दुत्व ही है। लेकिन फिर भी कुछ लोग हिन्दुत्व के खिलाफ पता नहीं क्या-क्या बोलते रहते हैं। दरअसल ऐसे लोग हिन्दुत्व को जानते ही नहीं। - मनोहर मंजुल, प. निमाड़ न्यायालय ने दे दिया, सुने सकल संसार। मगर बहुत है कठिन, वास्तव में यों मरना।
नई दिल्लीः आज कल दिल्ली और उसके आसपास के जगहों में इस बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है। इसके शुरुआती लक्षण तो बहुत मामूली होते हैं लेकिन फिर ये एक भयानक संक्रमण का रूप ले लेती है। यह उग्र संक्रामक रोग है, जो 2 से लेकर 10 वर्ष तक की आयु के बालकों को अधिक होता है। डिप्थीरिया से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़ रही है। इंफैक्शन से फैलने वाली इस बीमारी के बैक्टीरिया हर साल सितंबर महीने में एक्टिव हो जाते हैं। हालांकि यह बीमारी बड़ों को भी हो सकती है लेकिन ज्यादातर बच्चे इसकी चपेट में आते हैं। इसका सबसे पहला लक्षण गले में इंफैक्शन होना है। क्या है डिप्थीरिया? यह गंभीर बैक्टीरियल इंफैक्शन है जो नाक और गले की झिल्ली को प्रभावित करता है। जिससे गला खराब, ग्रंथियों में सूजन,बुखार है। इस बीमारी में गहरे ग्रे रंग के पदार्थ की मोटी परत गले के अंदर जमना शुरू हो जाती है। यह इस बीमारी का मुख्य लक्षण है। यह परत सांस लेने वाली नलिकाओं को प्रभावित करके परेशानी पैदा करती है। बच्चों का टीकाकरण करवाना बहुत जरूरी है। नियमित टीकाकरण में डीपीटी का टीका लगाया जाता है। एक साल के बच्चे को डीपीटी के 3 टीके लगते हैं। इसके बाद डेढ़ साल पर चौथा और चार साल की उम्र में पांचवां टीका लगाया जाता है। इसके बाद डिप्थीरिया की परेशानी काफी हद तक कम हो जाती है।
नई दिल्लीः आज कल दिल्ली और उसके आसपास के जगहों में इस बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई है। इसके शुरुआती लक्षण तो बहुत मामूली होते हैं लेकिन फिर ये एक भयानक संक्रमण का रूप ले लेती है। यह उग्र संक्रामक रोग है, जो दो से लेकर दस वर्ष तक की आयु के बालकों को अधिक होता है। डिप्थीरिया से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़ रही है। इंफैक्शन से फैलने वाली इस बीमारी के बैक्टीरिया हर साल सितंबर महीने में एक्टिव हो जाते हैं। हालांकि यह बीमारी बड़ों को भी हो सकती है लेकिन ज्यादातर बच्चे इसकी चपेट में आते हैं। इसका सबसे पहला लक्षण गले में इंफैक्शन होना है। क्या है डिप्थीरिया? यह गंभीर बैक्टीरियल इंफैक्शन है जो नाक और गले की झिल्ली को प्रभावित करता है। जिससे गला खराब, ग्रंथियों में सूजन,बुखार है। इस बीमारी में गहरे ग्रे रंग के पदार्थ की मोटी परत गले के अंदर जमना शुरू हो जाती है। यह इस बीमारी का मुख्य लक्षण है। यह परत सांस लेने वाली नलिकाओं को प्रभावित करके परेशानी पैदा करती है। बच्चों का टीकाकरण करवाना बहुत जरूरी है। नियमित टीकाकरण में डीपीटी का टीका लगाया जाता है। एक साल के बच्चे को डीपीटी के तीन टीके लगते हैं। इसके बाद डेढ़ साल पर चौथा और चार साल की उम्र में पांचवां टीका लगाया जाता है। इसके बाद डिप्थीरिया की परेशानी काफी हद तक कम हो जाती है।
चीन के हज़ार वरस होगये । जंगल के आश्रम, जहाँ विद्वान् ब्राह्मण अपने शिष्यों के साथ रहा करते थे, बढ़कर बड़े-बड़े विश्व विद्यालय बन गये, और विद्या के इन केन्द्रों में वे सब विषय पढ़ाये जाते थे जिनका उस समय तक मनुष्य को ज्ञान हो सका था। ब्राह्मण युद्धकला भी सिखलाते थे । तुम्हें याद होगा कि महाभारत में पाण्डवों के द्रोणाचार्य थे । वह ब्राह्मण थे और अन्य विषयों के अलावा युद्धकला की भी शिक्षा देते थे। चीन के हज़ार बरस बाहरी दुनिया से एक ऐसी खबर मिली है जिससे तबियत में परेशानी और दुःख होता है। लेकिन साथ ही उसे सुनकर हृदय गर्व और आनन्द से फूल उठता है । हम लोगों ने शोलापुरवालों की किस्मत का फैसला सुन लिया। इस खेदजनक समाचार के फैलने पर देशभर में जो कुछ हुआ उसका भी थोड़ा-बहुत हाल हमें मालूम होगया। जबकि हमारे नौजवान अपनी जान पर खेल रहे हैं और हजारों मर्द और औरतें निर्दय लाठी का मुक़ाबिला कर रहे हैं, मेरे लिए यहाँ चुपचाप मुश्किल होगया। लेकिन इससे भी हमें अच्छी ट्रेनिंग मिल रही है। मेरा खयाल है कि हममें से हरेक स्त्री और पुरुष को अपनी कठिन से कठिन परीक्षा करने के बहुत मौके मिलेंगे। इस समय तो यह जानकर दिल को खुशी होती है कि हमारे लोग तकलीफ़ों और मुसीबतों का सामना करने के लिए कैसी हिम्मत से आगे बढ़ रहे हैं और कैसे दुश्मन का हरेक नया हथियार और प्रहार इन लोगों को ज्यादा-से-ज्यादा ताकतवर और मुक़ाबिला करने के लिए अधिक से अधिक दृढ़ बना रहा है । जबे कमरों की खबरों से भरा हो, तो उसके लिए दूसरी बातों का ख्याल करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन कोरी उपेसे भी कोई खास फ़ायदा नहीं होता, इसलिए, और अगर कोई ठोस काम करना हो तो हमें अपने मन पर काबू करना ही चाहिए । इसलिए आओ, हम पुराने जमाने को लौट चलें और अपनी मौजूदा परेशानियों से दूर हटकर डेरा डालें। चलो, अब प्राचीन इतिहास में हिन्दुस्तान के भाई चीन के पास चलें । चीन में और पूर्वी एशिया के जापान, कोरिया, इण्डोचाइना, स्थाम, बरमा जैसे और मुल्कों में हमारा आर्य जाति से कोई सरोकार नहीं नहीं तो मंगल जातियों से परिचय करना पहुँगा ।
चीन के हज़ार वरस होगये । जंगल के आश्रम, जहाँ विद्वान् ब्राह्मण अपने शिष्यों के साथ रहा करते थे, बढ़कर बड़े-बड़े विश्व विद्यालय बन गये, और विद्या के इन केन्द्रों में वे सब विषय पढ़ाये जाते थे जिनका उस समय तक मनुष्य को ज्ञान हो सका था। ब्राह्मण युद्धकला भी सिखलाते थे । तुम्हें याद होगा कि महाभारत में पाण्डवों के द्रोणाचार्य थे । वह ब्राह्मण थे और अन्य विषयों के अलावा युद्धकला की भी शिक्षा देते थे। चीन के हज़ार बरस बाहरी दुनिया से एक ऐसी खबर मिली है जिससे तबियत में परेशानी और दुःख होता है। लेकिन साथ ही उसे सुनकर हृदय गर्व और आनन्द से फूल उठता है । हम लोगों ने शोलापुरवालों की किस्मत का फैसला सुन लिया। इस खेदजनक समाचार के फैलने पर देशभर में जो कुछ हुआ उसका भी थोड़ा-बहुत हाल हमें मालूम होगया। जबकि हमारे नौजवान अपनी जान पर खेल रहे हैं और हजारों मर्द और औरतें निर्दय लाठी का मुक़ाबिला कर रहे हैं, मेरे लिए यहाँ चुपचाप मुश्किल होगया। लेकिन इससे भी हमें अच्छी ट्रेनिंग मिल रही है। मेरा खयाल है कि हममें से हरेक स्त्री और पुरुष को अपनी कठिन से कठिन परीक्षा करने के बहुत मौके मिलेंगे। इस समय तो यह जानकर दिल को खुशी होती है कि हमारे लोग तकलीफ़ों और मुसीबतों का सामना करने के लिए कैसी हिम्मत से आगे बढ़ रहे हैं और कैसे दुश्मन का हरेक नया हथियार और प्रहार इन लोगों को ज्यादा-से-ज्यादा ताकतवर और मुक़ाबिला करने के लिए अधिक से अधिक दृढ़ बना रहा है । जबे कमरों की खबरों से भरा हो, तो उसके लिए दूसरी बातों का ख्याल करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन कोरी उपेसे भी कोई खास फ़ायदा नहीं होता, इसलिए, और अगर कोई ठोस काम करना हो तो हमें अपने मन पर काबू करना ही चाहिए । इसलिए आओ, हम पुराने जमाने को लौट चलें और अपनी मौजूदा परेशानियों से दूर हटकर डेरा डालें। चलो, अब प्राचीन इतिहास में हिन्दुस्तान के भाई चीन के पास चलें । चीन में और पूर्वी एशिया के जापान, कोरिया, इण्डोचाइना, स्थाम, बरमा जैसे और मुल्कों में हमारा आर्य जाति से कोई सरोकार नहीं नहीं तो मंगल जातियों से परिचय करना पहुँगा ।
Butch & Triple H: WWE सुपरस्टार बुच (Butch) को लेकर हाल ही में बड़ा अपडेट सामने आया है। वो ब्रॉलिंग ब्रूट्स (Brawling Brutes) फैक्शन का हिस्सा हैं। दरअसल, इस ग्रुप में उनके अलावा शेमस (Sheamus) और रिज हॉलैंड (Ridge Holland) मौजूद हैं। ट्रिपल एच (Triple H) ने अब पूर्व NXT UK चैंपियन को लेकर बड़ा प्लान तैयार किया है। Xero News ने हाल ही में ट्वीट करते हुए बताया कि बुच जल्द ही ब्रॉलिंग ब्रूट्स फैक्शन को छोड़ सकते हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि उनका नाम फिर से बदल सकता है और वो अपने पुराने रिंग नेम पीट डन के साथ नज़र आने वाले हैं। बुच इस दौरान हील के तौर पर काम करेंगे और इस चीज़ से संकेत मिलते हैं कि शायद वो शेमस और रिज हॉलैंड को जल्द ही धोखा देते हुए नज़र आ सकते हैं। आप नीचे Xero News का ट्वीट देख सकते हैंः ट्रिपल एच ने क्रिएटिव कंट्रोल हाथ में लेने के बाद फैक्शन्स पर काफी ज्यादा ध्यान दिया है। इसी बीच ब्रॉलिंग ब्रूट्स को काफी ज्यादा फायदा मिला है। बुच को इसी बीच कई बार अहम सिंगल्स मैचों में बुक किया गया है और वो शानदार टैग टीम मैचों का भी हिस्सा बने हैं। बुच को उनके पुराने अवतार में देखना खास रहेगा। वो ट्रिपल एच के फेवरेट स्टार्स में से एक हैं। पीट डन (बुच) को NXT और NXT UK में काफी जबरदस्त पुश मिला था। उन्हें काफी ज्यादा ताकतवर दिखाया जाता था। वो इतिहास के दूसरे NXT UK चैंपियन रहे हैं और उनका टाइटल रन 685 दिन लंबा रहा था। पीट ने मेन रोस्टर पर बुच नाम से डेब्यू किया था और वो शुरुआत से ब्रॉलिंग ब्रूट्स के साथ काम कर रहे हैं। ब्रूट्स पिछले कुछ समय में अच्छी बुकिंग मिलने के बावजूद मिड कार्ड डिवीजन में ही अटके हुए हैं। ऐसे में फैक्शन को अलग करना ही अच्छा निर्णय रहेगा। शेमस और रिज साथ में काम करना जारी रख सकते हैं और दूसरी ओर बुच सिंगल्स स्टार के तौर पर प्रभावित कर सकते हैं। WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं।
Butch & Triple H: WWE सुपरस्टार बुच को लेकर हाल ही में बड़ा अपडेट सामने आया है। वो ब्रॉलिंग ब्रूट्स फैक्शन का हिस्सा हैं। दरअसल, इस ग्रुप में उनके अलावा शेमस और रिज हॉलैंड मौजूद हैं। ट्रिपल एच ने अब पूर्व NXT UK चैंपियन को लेकर बड़ा प्लान तैयार किया है। Xero News ने हाल ही में ट्वीट करते हुए बताया कि बुच जल्द ही ब्रॉलिंग ब्रूट्स फैक्शन को छोड़ सकते हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि उनका नाम फिर से बदल सकता है और वो अपने पुराने रिंग नेम पीट डन के साथ नज़र आने वाले हैं। बुच इस दौरान हील के तौर पर काम करेंगे और इस चीज़ से संकेत मिलते हैं कि शायद वो शेमस और रिज हॉलैंड को जल्द ही धोखा देते हुए नज़र आ सकते हैं। आप नीचे Xero News का ट्वीट देख सकते हैंः ट्रिपल एच ने क्रिएटिव कंट्रोल हाथ में लेने के बाद फैक्शन्स पर काफी ज्यादा ध्यान दिया है। इसी बीच ब्रॉलिंग ब्रूट्स को काफी ज्यादा फायदा मिला है। बुच को इसी बीच कई बार अहम सिंगल्स मैचों में बुक किया गया है और वो शानदार टैग टीम मैचों का भी हिस्सा बने हैं। बुच को उनके पुराने अवतार में देखना खास रहेगा। वो ट्रिपल एच के फेवरेट स्टार्स में से एक हैं। पीट डन को NXT और NXT UK में काफी जबरदस्त पुश मिला था। उन्हें काफी ज्यादा ताकतवर दिखाया जाता था। वो इतिहास के दूसरे NXT UK चैंपियन रहे हैं और उनका टाइटल रन छः सौ पचासी दिन लंबा रहा था। पीट ने मेन रोस्टर पर बुच नाम से डेब्यू किया था और वो शुरुआत से ब्रॉलिंग ब्रूट्स के साथ काम कर रहे हैं। ब्रूट्स पिछले कुछ समय में अच्छी बुकिंग मिलने के बावजूद मिड कार्ड डिवीजन में ही अटके हुए हैं। ऐसे में फैक्शन को अलग करना ही अच्छा निर्णय रहेगा। शेमस और रिज साथ में काम करना जारी रख सकते हैं और दूसरी ओर बुच सिंगल्स स्टार के तौर पर प्रभावित कर सकते हैं। WWE और रेसलिंग से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के साथ-साथ अपडेट्स, लाइव रिजल्ट्स को हमारे Facebook page पर पाएं।
न्यूजीलैंड के विस्फोटक बल्लेबाज कोरी एंडरसन की बैक इंजरी सफल हुई है. वह जल्द ही क्रिकेट के मैदान पर लौट सकते हैं. हाल ही में उन्होंने एक फोटो डाली जिसमे कोरी ने बताया कि वह जल्द ही मैदान पर लौटेंगे. कोरी न्यूजीलैंड के धाकड़ बल्लेबाज हैं. कोरी एंडरसन कमर दर्द की समस्या से पीड़ित थे. इस कारण उनका खेल भी प्रभावित हो रहा था. इस लिए उन्होंने यह सर्जरी कराई. उन्होने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकरी दी. उन्होंने इन्स्टाग्राम पर दो फोटोज डाले, एक सर्जरी से पहले और एक बाद में. जिसमें पहले वाली फोटो में उन्होंने बताया कि वह सर्जरी कराने जा रहे हैं. अपनी पीठ की समस्या को ठीक करने के लिए. उन्होंने एक और फोटो डाली जो सर्जरी के बाद की थी. जिसमे उन्होंने लिखा कि सर्जरी पूरी हो गयी है. अब जल्द ही स्वस्थ होकर मैदान पर लौटने की बारी है. न्यूजीलैंड के खिलाड़ी देश की बजाए इसलिए टी20 लीग की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि वहां उन्हें कम समय में ज्यादा पैसा मिल रहा है. अभी हाल ही में न्यूजीलैंड के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मिचेल मैक्लेनेघन ने टी20 लीग में खेलने के लिए न्यूजीलैंड का सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट छोड़ दिया. अब खबर ये है कि कीवी टीम के तीन और खिलाड़ी मैक्लेनेघन के नक्शे-कदमों पर चलने की तैयारी में हैं. न्यूजीलैंड के बल्लेबाज कॉलिन मुनरो, कोरे एंडरसन और लेग स्पिनर ईश सोढ़ी टीम छोड़कर टी20 लीग का हिस्सा बन सकते हैं. कोरी एंडरसन ने वनडे क्रिकेट में 36 गेंद में शतक ठोंक दुनिया भर में सुर्खियाँ बटोरी थीं. उन्होंने पाकिस्तानी बल्लेबाज शाहिद अफरीदी का रिकॉर्ड तोड़ा था. शहीद ने 37 गेंदों में शतक बनाया था.
न्यूजीलैंड के विस्फोटक बल्लेबाज कोरी एंडरसन की बैक इंजरी सफल हुई है. वह जल्द ही क्रिकेट के मैदान पर लौट सकते हैं. हाल ही में उन्होंने एक फोटो डाली जिसमे कोरी ने बताया कि वह जल्द ही मैदान पर लौटेंगे. कोरी न्यूजीलैंड के धाकड़ बल्लेबाज हैं. कोरी एंडरसन कमर दर्द की समस्या से पीड़ित थे. इस कारण उनका खेल भी प्रभावित हो रहा था. इस लिए उन्होंने यह सर्जरी कराई. उन्होने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकरी दी. उन्होंने इन्स्टाग्राम पर दो फोटोज डाले, एक सर्जरी से पहले और एक बाद में. जिसमें पहले वाली फोटो में उन्होंने बताया कि वह सर्जरी कराने जा रहे हैं. अपनी पीठ की समस्या को ठीक करने के लिए. उन्होंने एक और फोटो डाली जो सर्जरी के बाद की थी. जिसमे उन्होंने लिखा कि सर्जरी पूरी हो गयी है. अब जल्द ही स्वस्थ होकर मैदान पर लौटने की बारी है. न्यूजीलैंड के खिलाड़ी देश की बजाए इसलिए टीबीस लीटरग की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि वहां उन्हें कम समय में ज्यादा पैसा मिल रहा है. अभी हाल ही में न्यूजीलैंड के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मिचेल मैक्लेनेघन ने टीबीस लीटरग में खेलने के लिए न्यूजीलैंड का सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट छोड़ दिया. अब खबर ये है कि कीवी टीम के तीन और खिलाड़ी मैक्लेनेघन के नक्शे-कदमों पर चलने की तैयारी में हैं. न्यूजीलैंड के बल्लेबाज कॉलिन मुनरो, कोरे एंडरसन और लेग स्पिनर ईश सोढ़ी टीम छोड़कर टीबीस लीटरग का हिस्सा बन सकते हैं. कोरी एंडरसन ने वनडे क्रिकेट में छत्तीस गेंद में शतक ठोंक दुनिया भर में सुर्खियाँ बटोरी थीं. उन्होंने पाकिस्तानी बल्लेबाज शाहिद अफरीदी का रिकॉर्ड तोड़ा था. शहीद ने सैंतीस गेंदों में शतक बनाया था.
सुप्रीम कोर्टसे विपक्ष को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने PMLA के तहत गिरफ्तारी को ईडी के अधिकार को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा, ईडी की गिरफ्तारी की प्रक्रिया मनमानी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के कई प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया। हालांकि, कोर्ट ने कानून में फाइनेंस बिल के जरिए किए गए बदलाव के मामले को 7 जजों की बेंच में भेज दिया है। दरअसल, विपक्ष ने याचिका दायर PMLA के कई प्रावधानों को कानून और संविधान के खिलाफ बताया था। वहीं आज सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दायर याचिका को रद्द करते हुए कानून को सही बताया है। कोर्ट ने कहा, मनी लॉन्ड्रिंग एक स्वतंत्र अपराध है। उसे मूल अपराध के साथ जोड़ कर ही देखने की दलील खारिज की जा रही है। कोर्ट ने ये भी कहा कि, सेक्शन 5 में आरोपी के अधिकार भी संतुलित किए गए हैं। ऐसा नहीं कि सिर्फ जांच अधिकारी को ही पूरी शक्ति दे दी गई है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में बीते सोमवार को एक सवाल के जवाब में कहा कि 17 साल पहले कानून के लागू होने के बाद PMLA के तहत दर्ज 5,422 मामलों में केवल 23 लोगों को दोषी ठहराया गया है। 31 मार्च, 2022 तक ईडी ने PMLA के तहत करीब 1,04,702 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की और 992 मामलों में चार्जशीट दायर की, जिसमें 869. 31 करोड़ रुपये जब्त किए गए और 23 आरोपियों को दोषी ठहराया गया।
सुप्रीम कोर्टसे विपक्ष को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने PMLA के तहत गिरफ्तारी को ईडी के अधिकार को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा, ईडी की गिरफ्तारी की प्रक्रिया मनमानी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के कई प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया। हालांकि, कोर्ट ने कानून में फाइनेंस बिल के जरिए किए गए बदलाव के मामले को सात जजों की बेंच में भेज दिया है। दरअसल, विपक्ष ने याचिका दायर PMLA के कई प्रावधानों को कानून और संविधान के खिलाफ बताया था। वहीं आज सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दायर याचिका को रद्द करते हुए कानून को सही बताया है। कोर्ट ने कहा, मनी लॉन्ड्रिंग एक स्वतंत्र अपराध है। उसे मूल अपराध के साथ जोड़ कर ही देखने की दलील खारिज की जा रही है। कोर्ट ने ये भी कहा कि, सेक्शन पाँच में आरोपी के अधिकार भी संतुलित किए गए हैं। ऐसा नहीं कि सिर्फ जांच अधिकारी को ही पूरी शक्ति दे दी गई है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में बीते सोमवार को एक सवाल के जवाब में कहा कि सत्रह साल पहले कानून के लागू होने के बाद PMLA के तहत दर्ज पाँच,चार सौ बाईस मामलों में केवल तेईस लोगों को दोषी ठहराया गया है। इकतीस मार्च, दो हज़ार बाईस तक ईडी ने PMLA के तहत करीब एक,चार,सात सौ दो करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की और नौ सौ बानवे मामलों में चार्जशीट दायर की, जिसमें आठ सौ उनहत्तर. इकतीस करोड़ रुपये जब्त किए गए और तेईस आरोपियों को दोषी ठहराया गया।
लखनऊः उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव अब काफी नज़दीक आ चूका है. ऐसे में नेताओं के बीच में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में एक बार फिर से जिन्ना की एंट्री हो चुकी है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक इंटरव्यू में कहा कि चीन हमारा असली दुश्मन है और पाकिस्तान राजनीतिक दुश्मन है. लेकिन बीजेपी वोट पॉलिटिक्स के लिए सिर्फ पाकिस्तान को निशाना बनाती है. अखिलेश यादव के इस बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा था कि, 'जिन्ना से जो करे प्यार, वो पाकिस्तान से कैसे करे इनकार'. वहीं भाजपा के यूपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने तंज कसते हुए यहां तक कह दिया कि क्या सत्ता में आकर अखिलेश यादव जिन्ना की मूर्तियां लगाएंगे? भाजपा नेताओं द्वारा दिए गए बयान पर अब समाजवादी पार्टी भी हमलावर नज़र आ रही है. समाजवादी पार्टी के नेता इमरान मसूद ने पलटवार करते हुए कहा कि अखिलेश यादव जिन्ना की मूर्ति नहीं लगाएंगे. जिन्ना की मूर्ति वो लगाएंगे जिन्होंने जिन्ना के साथ मिलकर सरकार बनाई. अखिलेश यादव और उनकी विचारधारा के लोगों ने जिन्ना के साथ मिलकर सरकार नहीं बनाई थी. इसके आगे सपा नेता इमरान मसूद ने कहा कि, 12 दिसंबर 1941 को बंगाल प्रोविंस के अंदर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सरकार बनाई और उस सरकार में वित्त मंत्री व उपमुख्यमंत्री बने थे. उन्होंने 'टू नेशन थ्योरी' का समर्थन किया. सरहदी सूबे के अंदर हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग ने मिलकर सरकार बनाई. सिंध में इन लोगों ने मिलकर 1936 में एक प्रस्ताव पेश किया जिसे बाद में लाहौर में पास किया गया. इस प्रस्ताव में कहा गया कि देश का विभाजन होना चाहिए. ये विभाजनकारी नीति का समर्थन करने वाले जिन्ना की मूर्ति लगाएंगे. हम जिन्ना को सबसे बड़ा गुनहगार मानते हैं जिन्होंने देश का विभाजन किया. उत्तर प्रदेश में कब होने है चुनाव? उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा सीटों के लिए सात चरणों में चुनाव होने है. 10 फरवरी को पहले चरण का मतदान होना है. यूपी में सात चरणों में 10, 14, 20, 23, 27, 3 और 7 मार्च को वोट डाले जाएंगे. जबकि वोटों की गिनती 10 मार्च को होगी. उत्तर प्रदेश में इन दिनों राजनीति काफी गरमाई हुई है. नेताओं के बीच में पार्टी बदलने का सिलसिला लगा हुआ है. अब यह देखने वाली बात होगी कि उत्तर प्रदेश की जनता किसके सिर जीत का सेहरा बांधती है. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
लखनऊः उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव अब काफी नज़दीक आ चूका है. ऐसे में नेताओं के बीच में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में एक बार फिर से जिन्ना की एंट्री हो चुकी है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक इंटरव्यू में कहा कि चीन हमारा असली दुश्मन है और पाकिस्तान राजनीतिक दुश्मन है. लेकिन बीजेपी वोट पॉलिटिक्स के लिए सिर्फ पाकिस्तान को निशाना बनाती है. अखिलेश यादव के इस बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा था कि, 'जिन्ना से जो करे प्यार, वो पाकिस्तान से कैसे करे इनकार'. वहीं भाजपा के यूपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने तंज कसते हुए यहां तक कह दिया कि क्या सत्ता में आकर अखिलेश यादव जिन्ना की मूर्तियां लगाएंगे? भाजपा नेताओं द्वारा दिए गए बयान पर अब समाजवादी पार्टी भी हमलावर नज़र आ रही है. समाजवादी पार्टी के नेता इमरान मसूद ने पलटवार करते हुए कहा कि अखिलेश यादव जिन्ना की मूर्ति नहीं लगाएंगे. जिन्ना की मूर्ति वो लगाएंगे जिन्होंने जिन्ना के साथ मिलकर सरकार बनाई. अखिलेश यादव और उनकी विचारधारा के लोगों ने जिन्ना के साथ मिलकर सरकार नहीं बनाई थी. इसके आगे सपा नेता इमरान मसूद ने कहा कि, बारह दिसंबर एक हज़ार नौ सौ इकतालीस को बंगाल प्रोविंस के अंदर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सरकार बनाई और उस सरकार में वित्त मंत्री व उपमुख्यमंत्री बने थे. उन्होंने 'टू नेशन थ्योरी' का समर्थन किया. सरहदी सूबे के अंदर हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग ने मिलकर सरकार बनाई. सिंध में इन लोगों ने मिलकर एक हज़ार नौ सौ छत्तीस में एक प्रस्ताव पेश किया जिसे बाद में लाहौर में पास किया गया. इस प्रस्ताव में कहा गया कि देश का विभाजन होना चाहिए. ये विभाजनकारी नीति का समर्थन करने वाले जिन्ना की मूर्ति लगाएंगे. हम जिन्ना को सबसे बड़ा गुनहगार मानते हैं जिन्होंने देश का विभाजन किया. उत्तर प्रदेश में कब होने है चुनाव? उत्तर प्रदेश के चार सौ तीन विधानसभा सीटों के लिए सात चरणों में चुनाव होने है. दस फरवरी को पहले चरण का मतदान होना है. यूपी में सात चरणों में दस, चौदह, बीस, तेईस, सत्ताईस, तीन और सात मार्च को वोट डाले जाएंगे. जबकि वोटों की गिनती दस मार्च को होगी. उत्तर प्रदेश में इन दिनों राजनीति काफी गरमाई हुई है. नेताओं के बीच में पार्टी बदलने का सिलसिला लगा हुआ है. अब यह देखने वाली बात होगी कि उत्तर प्रदेश की जनता किसके सिर जीत का सेहरा बांधती है. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
अपनी ही कही बात पर फंसना बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह के लिए आम बात हो गई है. गिरिराज सिंह के घर से चोरी के आरोप में गिरफ्तार चोर के पास से डेढ़ करोड़ से ज्यादा का सामान बरामद हुआ है. दिलचस्प बात ये है कि सिंह ने पुलिस में सिर्फ 50 हजार की चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी. पटना पुलिस ने मंगलवार को दिनेश सिंह नाम के चोर के पास से डेढ़ करोड़ के सामान से भरा बैग बरामद किया. इस बैग में एक करोड़ 14 लाख नकद, 600 यूएस डॉलर, सोने के आभूषण और 7 लक्जरी घड़ियां बरामद हुई है. दिनेश का दावा है कि उसने ये सारा सामान गिरिराज सिंह के घर से चुराया है. गिरिराज सिंह ने इस बारे में पुलिस से सिर्फ कुछ ज्वैलरी और नकदी के चोरी हो जाने की शिकायत की थी. गिरिराज सिंह की ओर से इस बरामद नकदी और सामान के लिए कोई दावा नहीं किया गया है. गिरिराज सिंह से इस बारे में जब संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका फोन बंद था. पटना बीजेपी के अध्यक्ष मंगल पांडे ने इस बारे में बताया कि बरामद माल का मालिक कौन है,इस बारे में पुलिस को जांच करनी चाहिए. पुलिस को चोर की कही बातों पर यकीन नहीं करना चाहिए. जब बरामद सामान के बारे में गिरिराज सिंह कोई दावा नहीं कर रहे हैं तो कोई वजह नहीं है कि इस सामान को उनका माना जाए. पटना के एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि दिनेश ने ये चोरी गिरिराज सिंह के घर के दो नौकरों के साथ मिलकर 15 दिन पहले प्लान की थी. पुलिस ने इन तीनों को गिरफ्तार कर लिया है.
अपनी ही कही बात पर फंसना बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह के लिए आम बात हो गई है. गिरिराज सिंह के घर से चोरी के आरोप में गिरफ्तार चोर के पास से डेढ़ करोड़ से ज्यादा का सामान बरामद हुआ है. दिलचस्प बात ये है कि सिंह ने पुलिस में सिर्फ पचास हजार की चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी. पटना पुलिस ने मंगलवार को दिनेश सिंह नाम के चोर के पास से डेढ़ करोड़ के सामान से भरा बैग बरामद किया. इस बैग में एक करोड़ चौदह लाख नकद, छः सौ यूएस डॉलर, सोने के आभूषण और सात लक्जरी घड़ियां बरामद हुई है. दिनेश का दावा है कि उसने ये सारा सामान गिरिराज सिंह के घर से चुराया है. गिरिराज सिंह ने इस बारे में पुलिस से सिर्फ कुछ ज्वैलरी और नकदी के चोरी हो जाने की शिकायत की थी. गिरिराज सिंह की ओर से इस बरामद नकदी और सामान के लिए कोई दावा नहीं किया गया है. गिरिराज सिंह से इस बारे में जब संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका फोन बंद था. पटना बीजेपी के अध्यक्ष मंगल पांडे ने इस बारे में बताया कि बरामद माल का मालिक कौन है,इस बारे में पुलिस को जांच करनी चाहिए. पुलिस को चोर की कही बातों पर यकीन नहीं करना चाहिए. जब बरामद सामान के बारे में गिरिराज सिंह कोई दावा नहीं कर रहे हैं तो कोई वजह नहीं है कि इस सामान को उनका माना जाए. पटना के एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि दिनेश ने ये चोरी गिरिराज सिंह के घर के दो नौकरों के साथ मिलकर पंद्रह दिन पहले प्लान की थी. पुलिस ने इन तीनों को गिरफ्तार कर लिया है.
Dhanbad: कतरास थाना क्षेत्र के तिलाटांड़ लाला टोला में पुलिस ने छापेमारी कर अवैध कोयला डिपो का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने मंगलवार की देर रात छापेमारी कर ट्रक समेत 15 टन पोड़ा कोयला जब्त किया है. पुलिस ने बिट्टू लाला, नागेन्द्र यादव व मनीष केशरी के खिलाफ मामला दर्ज किया है. मालूम हो कि पिछले एक पखवारा से तिलाटांड़ लाला टोला में अवैध कोयला का पोड़ा लगाकर देर रात ट्रकों के माध्यम से बाहर टपाया जाता था. गुप्त सूचना के आधार पर कतरास पुलिस ने छापेमारी की और अवैध कोयला डिपो का भंडाफोड़ किया.
Dhanbad: कतरास थाना क्षेत्र के तिलाटांड़ लाला टोला में पुलिस ने छापेमारी कर अवैध कोयला डिपो का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने मंगलवार की देर रात छापेमारी कर ट्रक समेत पंद्रह टन पोड़ा कोयला जब्त किया है. पुलिस ने बिट्टू लाला, नागेन्द्र यादव व मनीष केशरी के खिलाफ मामला दर्ज किया है. मालूम हो कि पिछले एक पखवारा से तिलाटांड़ लाला टोला में अवैध कोयला का पोड़ा लगाकर देर रात ट्रकों के माध्यम से बाहर टपाया जाता था. गुप्त सूचना के आधार पर कतरास पुलिस ने छापेमारी की और अवैध कोयला डिपो का भंडाफोड़ किया.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर इतिहास रचा है. फिनलैंड के तुर्कू में पावो नूरमी खेलों में 89. 30 मीटर के शानदार थ्रो से उन्होंने अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया। फिनलैंड के तुर्कु में हुए पावो नुरमी गेम्स में नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया, इस दौरान उन्होंने अपना ही बनाया हुआ नेशनल रिकॉर्ड भी तोड़ दिया. नीरज ने यहां पर 89. 30 मीटर दूरी पर भाला फेंका. नीरज चोपड़ा के नाम इससे पहले जो नेशनल रिकॉर्ड था, मार्च 2021 में बना था. जब उन्होंने 88. 07 मीटर दूरी पर भाला फेंका था, उन्होंने 7 अगस्त, 2021 को 87. 58 मीटर के थ्रो के साथ टोक्यो ओलंपिक का स्वर्ण पदक जीता था।
टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर इतिहास रचा है. फिनलैंड के तुर्कू में पावो नूरमी खेलों में नवासी. तीस मीटर के शानदार थ्रो से उन्होंने अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया। फिनलैंड के तुर्कु में हुए पावो नुरमी गेम्स में नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया, इस दौरान उन्होंने अपना ही बनाया हुआ नेशनल रिकॉर्ड भी तोड़ दिया. नीरज ने यहां पर नवासी. तीस मीटर दूरी पर भाला फेंका. नीरज चोपड़ा के नाम इससे पहले जो नेशनल रिकॉर्ड था, मार्च दो हज़ार इक्कीस में बना था. जब उन्होंने अठासी. सात मीटर दूरी पर भाला फेंका था, उन्होंने सात अगस्त, दो हज़ार इक्कीस को सत्तासी. अट्ठावन मीटर के थ्रो के साथ टोक्यो ओलंपिक का स्वर्ण पदक जीता था।
शिमला - प्रदेश अग्निशमन विभाग के बेड़े में दस नए दमकल वाहन शामिल किए गए हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शिमला से सीटीओ से हरी झंडी दिखाकर ये वाहन रवाना किए। ये वाहन राज्य के विभिन्न फायर केंद्रों को भेजे गए हैं। इन वाहनों को चंबा जिला के खड़ामुख व चुराह, कांगड़ा के जयसिंहपुर, नगरोटा बगवां व जवाली जिला, शिमला जिला के चौपाल, कुमारसेन और ऊना के टाहलीवाल, सोलन के अर्की और कुल्लू जिला के आनी केंद्र को रवाना किया गया। नए अग्निशमन वाहनों को मिलाकर अब दमकल विभाग में दमकल वाहनों की संख्या 149 हो गई है। इन वाहनों में से प्रत्येक की क्षमता 4500 लीटर की है। ये वाहन सामान्य आग के साथ-साथ तरल पदार्थों जैसे तेल, पेट्रोल, डीजल आदि की आग बुझाने में भी कारगर है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर मकान लकड़ी के बने होते हैं और जरा सी आग से इनमें आग लग जाती है। उन्होंने कहा कि नए वाहनों के मिलने से आग को बुझाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार अग्निशमन चौकियों के लिए तकनीकी स्टाफ की भी जल्द भर्ती करेगी। वहीं जिला आपदा प्रबंधन की ओर से कुसुम्पटी स्कूल में आग से बचाव के बारे में जानकारी दी गई। अग्निशमन अधिकारी धर्मचंद शर्मा ने स्कूली छात्रों को रसोई गैस से लगने वाली आग के बारे में जानकारी दी।
शिमला - प्रदेश अग्निशमन विभाग के बेड़े में दस नए दमकल वाहन शामिल किए गए हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शिमला से सीटीओ से हरी झंडी दिखाकर ये वाहन रवाना किए। ये वाहन राज्य के विभिन्न फायर केंद्रों को भेजे गए हैं। इन वाहनों को चंबा जिला के खड़ामुख व चुराह, कांगड़ा के जयसिंहपुर, नगरोटा बगवां व जवाली जिला, शिमला जिला के चौपाल, कुमारसेन और ऊना के टाहलीवाल, सोलन के अर्की और कुल्लू जिला के आनी केंद्र को रवाना किया गया। नए अग्निशमन वाहनों को मिलाकर अब दमकल विभाग में दमकल वाहनों की संख्या एक सौ उनचास हो गई है। इन वाहनों में से प्रत्येक की क्षमता चार हज़ार पाँच सौ लीटरटर की है। ये वाहन सामान्य आग के साथ-साथ तरल पदार्थों जैसे तेल, पेट्रोल, डीजल आदि की आग बुझाने में भी कारगर है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर मकान लकड़ी के बने होते हैं और जरा सी आग से इनमें आग लग जाती है। उन्होंने कहा कि नए वाहनों के मिलने से आग को बुझाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार अग्निशमन चौकियों के लिए तकनीकी स्टाफ की भी जल्द भर्ती करेगी। वहीं जिला आपदा प्रबंधन की ओर से कुसुम्पटी स्कूल में आग से बचाव के बारे में जानकारी दी गई। अग्निशमन अधिकारी धर्मचंद शर्मा ने स्कूली छात्रों को रसोई गैस से लगने वाली आग के बारे में जानकारी दी।
मुंबई। बॉलीवुड के कई मशहूर अभिनेताओं का एक्टिंग का गुर सिखाने वाले एक्टिंग गुरु रोशन तनेजा का निधन हो गया है। उनके बेटे रोहितृ तनेजा ने शनिवार सुबह इस बात की जानकारी देते हुए बताया, 'मेरे पिता का शुक्रवार रात 9. 30 बजे नींद में ही निधन हो गया। वह लंबी बीमारी से जूझ रहे थे। उनका अंतिम संस्कार शनिवार शाम 4: 30 बजे मुंबई के सांताक्रुज वेस्ट के विद्युत शमशान गृह में किया जाएगा। रोशन अपने पीछे पत्नी मिथिका और बेटे रोहित, राहुल को छोड़ गए हैं। 87 वर्षीय रोशन ने हिंदी फिल्म जगत के शबाना आजमी, नसीरुद्दीन शाह, जया बच्चन, अभिषेक बच्चन, अनिल कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे दिग्गज कलाकारों को अभिनय का ककहरा सिखाया था। उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पायोनियर ऑफ़ मेथड एक्टिंग कहा जाता है। वह कलाकारों को 1960 के दशक से अभिनय के गुर सिखाते चले आ रहे थे। उनकी शुरुआत एफटीआईआई, पुणे से हुई थी। इसके बाद उन्होंने मुंबई में रोशन तनेजा स्कूल ऑफ एक्टिंग की नींव रखी थी।
मुंबई। बॉलीवुड के कई मशहूर अभिनेताओं का एक्टिंग का गुर सिखाने वाले एक्टिंग गुरु रोशन तनेजा का निधन हो गया है। उनके बेटे रोहितृ तनेजा ने शनिवार सुबह इस बात की जानकारी देते हुए बताया, 'मेरे पिता का शुक्रवार रात नौ. तीस बजे नींद में ही निधन हो गया। वह लंबी बीमारी से जूझ रहे थे। उनका अंतिम संस्कार शनिवार शाम चार: तीस बजे मुंबई के सांताक्रुज वेस्ट के विद्युत शमशान गृह में किया जाएगा। रोशन अपने पीछे पत्नी मिथिका और बेटे रोहित, राहुल को छोड़ गए हैं। सत्तासी वर्षीय रोशन ने हिंदी फिल्म जगत के शबाना आजमी, नसीरुद्दीन शाह, जया बच्चन, अभिषेक बच्चन, अनिल कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे दिग्गज कलाकारों को अभिनय का ककहरा सिखाया था। उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पायोनियर ऑफ़ मेथड एक्टिंग कहा जाता है। वह कलाकारों को एक हज़ार नौ सौ साठ के दशक से अभिनय के गुर सिखाते चले आ रहे थे। उनकी शुरुआत एफटीआईआई, पुणे से हुई थी। इसके बाद उन्होंने मुंबई में रोशन तनेजा स्कूल ऑफ एक्टिंग की नींव रखी थी।
हरारे। आबिद अली (नाबाद 215), अजहर अली (126) और नोउमन अली (97) की शानदार पारियों के दम पर पाकिस्तान ने यहां हरारे स्पोटर्स क्लब में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन अपनी पहली पारी आठ विकेट पर 510 रन पर घोषित की। जिम्बाब्वे ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक चार विकेट पर 52 रन बनाए हैं और वह अभी 458 रन पीछे है। स्टंप्स तक रेगिस चकाब्वा 71 गेंदों पर चार चौकों की मदद से 28 और टेंडाई चिसोरो 19 गेंदों पर एक रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं। पाकिस्तान की तरफ से शाहीन अफरीदी, तबिश खान, हसन अली और साजिद खान ने अबतक एक-एक विकेट लिया है। इससे पहले, पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी और उसने इमरान बट्ट (2) के रूप में 12 रन के कुल योग पर अपना पहला विकेट गंवाया। हालांकि इसके बाद आबिद और अजहर के बीच दूसरे विकेट के लिए हुई 236 रनों की साझेदारी ने पाकिस्तान को मुश्किल हालात से उबारा। अजहर का विकेट 248 रन के कुल योग पर गिरा। उन्होंने 240 गेंदों पर 17 चौकों और एक छक्के की मदद से 126 रन बनाए। अजहर के आउट होने के बाद पाकिस्तान के अन्य बल्लेबाज आबिद का साथ अच्छे से नहीं निभा सके। लेकिन आबिद ने एक छोर से पारी को संभाले रखा। इसके बाद नोउमन ने आबिद के साथ मिलकर आठवें विकेट के लिए 169 रन जोड़े। नोउमन के आउट होने के बाद पाकिस्तान ने पारी घोषित कर दी। नोउमन ने 104 गेंदों पर नौ चौकों और पांच छक्कों के सहारे 97 रन बनाए जबकि आबिद 407 गेंदों पर 29 चौकों की मदद से 215 रन बनाकर नाबाद रहे। पाकिस्तान की पारी में कप्तान बाबर आजम ने दो, फवाद आलम ने पांच, साजिद खान ने 20 और मोहम्मद रिजवान ने 21 रन बनाए। जिम्बाब्वे की ओर से ब्लेसिंग मुजाराबानी ने तीन विकेट, टेंडाई चिसोरो ने दो विकेट लिए जबकि रिचर्ड नगारावा, लुके जोंग्वे और डोनाल्ड त्रिरिपानो को एक-एक विकेट मिला।
हरारे। आबिद अली , अजहर अली और नोउमन अली की शानदार पारियों के दम पर पाकिस्तान ने यहां हरारे स्पोटर्स क्लब में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन अपनी पहली पारी आठ विकेट पर पाँच सौ दस रन पर घोषित की। जिम्बाब्वे ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक चार विकेट पर बावन रन बनाए हैं और वह अभी चार सौ अट्ठावन रन पीछे है। स्टंप्स तक रेगिस चकाब्वा इकहत्तर गेंदों पर चार चौकों की मदद से अट्ठाईस और टेंडाई चिसोरो उन्नीस गेंदों पर एक रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं। पाकिस्तान की तरफ से शाहीन अफरीदी, तबिश खान, हसन अली और साजिद खान ने अबतक एक-एक विकेट लिया है। इससे पहले, पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी और उसने इमरान बट्ट के रूप में बारह रन के कुल योग पर अपना पहला विकेट गंवाया। हालांकि इसके बाद आबिद और अजहर के बीच दूसरे विकेट के लिए हुई दो सौ छत्तीस रनों की साझेदारी ने पाकिस्तान को मुश्किल हालात से उबारा। अजहर का विकेट दो सौ अड़तालीस रन के कुल योग पर गिरा। उन्होंने दो सौ चालीस गेंदों पर सत्रह चौकों और एक छक्के की मदद से एक सौ छब्बीस रन बनाए। अजहर के आउट होने के बाद पाकिस्तान के अन्य बल्लेबाज आबिद का साथ अच्छे से नहीं निभा सके। लेकिन आबिद ने एक छोर से पारी को संभाले रखा। इसके बाद नोउमन ने आबिद के साथ मिलकर आठवें विकेट के लिए एक सौ उनहत्तर रन जोड़े। नोउमन के आउट होने के बाद पाकिस्तान ने पारी घोषित कर दी। नोउमन ने एक सौ चार गेंदों पर नौ चौकों और पांच छक्कों के सहारे सत्तानवे रन बनाए जबकि आबिद चार सौ सात गेंदों पर उनतीस चौकों की मदद से दो सौ पंद्रह रन बनाकर नाबाद रहे। पाकिस्तान की पारी में कप्तान बाबर आजम ने दो, फवाद आलम ने पांच, साजिद खान ने बीस और मोहम्मद रिजवान ने इक्कीस रन बनाए। जिम्बाब्वे की ओर से ब्लेसिंग मुजाराबानी ने तीन विकेट, टेंडाई चिसोरो ने दो विकेट लिए जबकि रिचर्ड नगारावा, लुके जोंग्वे और डोनाल्ड त्रिरिपानो को एक-एक विकेट मिला।
बिलासपुर तहसील में रकबा संशोधन के लिए के लिए रोज किसान आ रहे हैं लेकिन उनका रकबा संशोधन नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह से वे धान भी नहीं बेच पा रहे हैं। सोमवार को भी तहसील के विभिन्न गांवों से आए किसानों की भीड़ लगी रही। किसानों ने बताया कि औपचारिकताओं को हवाला देकर किसानों की समस्या सुलझाए बिना ही उन्हें लौटा दिया गया। रकबा संशोधन के लिए आए किसानों में परसदा लखराम से आए किसान शिवप्रसाद यादव ने बताया कि उसकी आधा एकड़ जमीन गीता बाई के नाम में हैं जिसका सत्यापन कराना है। इसी तरह से ग्राम खैरा ल से आए बहोरिक साहू ने बताया कि उसे भी 58 डिसमिल जमीन का सत्यापन कराना है। किसानों ने बताया कि अबतक उनकी जमीन का सत्यापन नहीं हो पा रहा है जिसकी वजह से वे धान नहीं बेच पा रहे हैं। समय रहते उन्होंने सत्यापन क्यों नहीं कराया पूछने पर उन्होंने कहा कि वे पिछले कई सालों से धान बेचते आ रहे थे और सरकार का आदेश भी था कि पुराने पंजीयनकर्ताओं को सत्यापन की जरूरत नहीं होगी, इसलिए उन्होंने सत्यापन नहीं कराया था। अब कह रहे हैं कि बगैर सत्यापन के धान नहीं लेंगे। सिरगिट्टी से आए किसान शिवशंकर श्रीवास ने बताया कि उनके तीन भाइयों की 5 एकड़ जमीन है। दो अन्य भाई नौकरी में है और उन्होंने भी अलग से पंजीयन कराया है जबकि सभी की खेती मैं ही करता हूं। उनकी भी जमीन जुड़वाने आया था लेकिन मुझे जवाब मिला की जमीन नहीं जुड़ सकती। सोमवार को किसानों की रकबा संशोधन के लिए जोरदार भीड़ रही लेकिन कितने आवेदन रकबा संशोधन के लिए आए, इसका जवाब तहसील में मौजूद आॅपरेटर नहीं दे सका। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बिलासपुर तहसील में रकबा संशोधन के लिए के लिए रोज किसान आ रहे हैं लेकिन उनका रकबा संशोधन नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह से वे धान भी नहीं बेच पा रहे हैं। सोमवार को भी तहसील के विभिन्न गांवों से आए किसानों की भीड़ लगी रही। किसानों ने बताया कि औपचारिकताओं को हवाला देकर किसानों की समस्या सुलझाए बिना ही उन्हें लौटा दिया गया। रकबा संशोधन के लिए आए किसानों में परसदा लखराम से आए किसान शिवप्रसाद यादव ने बताया कि उसकी आधा एकड़ जमीन गीता बाई के नाम में हैं जिसका सत्यापन कराना है। इसी तरह से ग्राम खैरा ल से आए बहोरिक साहू ने बताया कि उसे भी अट्ठावन डिसमिल जमीन का सत्यापन कराना है। किसानों ने बताया कि अबतक उनकी जमीन का सत्यापन नहीं हो पा रहा है जिसकी वजह से वे धान नहीं बेच पा रहे हैं। समय रहते उन्होंने सत्यापन क्यों नहीं कराया पूछने पर उन्होंने कहा कि वे पिछले कई सालों से धान बेचते आ रहे थे और सरकार का आदेश भी था कि पुराने पंजीयनकर्ताओं को सत्यापन की जरूरत नहीं होगी, इसलिए उन्होंने सत्यापन नहीं कराया था। अब कह रहे हैं कि बगैर सत्यापन के धान नहीं लेंगे। सिरगिट्टी से आए किसान शिवशंकर श्रीवास ने बताया कि उनके तीन भाइयों की पाँच एकड़ जमीन है। दो अन्य भाई नौकरी में है और उन्होंने भी अलग से पंजीयन कराया है जबकि सभी की खेती मैं ही करता हूं। उनकी भी जमीन जुड़वाने आया था लेकिन मुझे जवाब मिला की जमीन नहीं जुड़ सकती। सोमवार को किसानों की रकबा संशोधन के लिए जोरदार भीड़ रही लेकिन कितने आवेदन रकबा संशोधन के लिए आए, इसका जवाब तहसील में मौजूद आॅपरेटर नहीं दे सका। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नई दिल्ली/दि. ७ - कोरोना संक्रमण से उबर रहे मरीजों को बीमा कंपनियां स्वास्थ्य बीमा और टर्म इंश्योरेंस जारी करने में इंतजार करा रही हैं. अलग-अलग कंपनियों ने ऐसे लोगों के लिए तीन से छह महीने तक का कूलिंग ऑफ पीरियड तय कर दिया है यानी कोरोना से मुक्त होने के इतने समय बाद ही पॉलिसी जारी की जा रही है. एक बडी जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने अपने एजेंट्स को जारी नोट में कहा है, कोरोना के मामले में कई कारणों से कूलिंग ऑफ पीरिएड लागू किया जा रहा है. इस बारे में हमारी समझ और जानकारी पर्याप्त नहीं है. इसकी जटिलताओं का कोई स्थापित पैटर्न नहीं है. अगर हम कूलिंग ऑफ अवधि नहीं रखते है और व्यक्ति में एक या दो महीने के बाद पल्मोनरी समस्या विकसित हो जाती है, तो हमारे लिए यह तय करना मुश्किल होगा कि क्या कोरोना से संबंधित है या नहीं? नतीजतन, हमने ग्राहकों के लिए तीन महीने की उचित कूलिंग ऑफ अवधि रखने का फैसला लिया है. वहीं, एक जीवन बीमा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने भी दैनिक कंपनी कोरोना से स्वीकार किया कि उनकी कंपनि कोरोना से उबरे मरीजों को टर्म इंश्योरेंस जारी करने में कूलिंग ऑफ पीरियड अपना रही है. इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, कोरोना के बढते क्लेम की वजह से बीमा कंपनियों की वित्तीय स्थिति खराब हो रही है. कंपनियों को अपने अनुमान से कई गुना अधिक क्लेम देना पड गया है. ऐसे में यह कंपनियां और जोखिम नहीं लेना चाह रही हैं. आगे चलकर कंपनियां बीमा का प्रीमियम भी बढा सकती हैं.
नई दिल्ली/दि. सात - कोरोना संक्रमण से उबर रहे मरीजों को बीमा कंपनियां स्वास्थ्य बीमा और टर्म इंश्योरेंस जारी करने में इंतजार करा रही हैं. अलग-अलग कंपनियों ने ऐसे लोगों के लिए तीन से छह महीने तक का कूलिंग ऑफ पीरियड तय कर दिया है यानी कोरोना से मुक्त होने के इतने समय बाद ही पॉलिसी जारी की जा रही है. एक बडी जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने अपने एजेंट्स को जारी नोट में कहा है, कोरोना के मामले में कई कारणों से कूलिंग ऑफ पीरिएड लागू किया जा रहा है. इस बारे में हमारी समझ और जानकारी पर्याप्त नहीं है. इसकी जटिलताओं का कोई स्थापित पैटर्न नहीं है. अगर हम कूलिंग ऑफ अवधि नहीं रखते है और व्यक्ति में एक या दो महीने के बाद पल्मोनरी समस्या विकसित हो जाती है, तो हमारे लिए यह तय करना मुश्किल होगा कि क्या कोरोना से संबंधित है या नहीं? नतीजतन, हमने ग्राहकों के लिए तीन महीने की उचित कूलिंग ऑफ अवधि रखने का फैसला लिया है. वहीं, एक जीवन बीमा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने भी दैनिक कंपनी कोरोना से स्वीकार किया कि उनकी कंपनि कोरोना से उबरे मरीजों को टर्म इंश्योरेंस जारी करने में कूलिंग ऑफ पीरियड अपना रही है. इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, कोरोना के बढते क्लेम की वजह से बीमा कंपनियों की वित्तीय स्थिति खराब हो रही है. कंपनियों को अपने अनुमान से कई गुना अधिक क्लेम देना पड गया है. ऐसे में यह कंपनियां और जोखिम नहीं लेना चाह रही हैं. आगे चलकर कंपनियां बीमा का प्रीमियम भी बढा सकती हैं.
समझी गई कि धनदेवकी सत्यताको राजाने कैसे प्रमाणित किया, और बिना उसको सूचित किये वैसे ही राजासे उसके हक़में फ़ैसला दिला दिया गया ! असत्यभाषणका दोष दिखलाने के लिये जो सत्यघोपकी कथा दी गई है उसमें उसे चोरीका ही अपराधी ठहराया है, जिससे यह दृष्टान्त, असत्यभाषणका न रहकर, दूसरे ग्रन्थोंकी तरह चोरीका ही बन गया है। और इस तरह पर इन सभी कथा इतनी अधिक त्रुटियाँ पाई जाती हैं कि उन पर एक खासा विस्तृत निबन्ध लिखा जा सकता है । परन्तु टीकाकार महाशय यदि इन दृष्टान्तोंको अच्छी तरहसे खिला नहीं सके, उनके मार्मिक का उल्लेख नहीं कर सके और न त्रुटियों को दूर करके उनकी कथाओंको प्रभावशालिनी ही बना सके हैं, तो यह सब उनका अपना दोष है । उसकी वजह से मूल ग्रन्थ पर कोई आपत्ति नहीं की जा सकती। और न मूल आख्यान वैसे कुछ निःसार अथवा महत्त्वशून्य ही हो सकते हैं जैसा कि टीकामें उन्हें बता दिया गया है। इसीसे मेरा यह कहना है कि इस ७वीं आपत्ति में कुछ भी बल नहीं है । छठी आपत्ति के सम्बन्ध में यह कहा जा सकता है कि पट्टामें जिस 'जय' का उल्लेख है वह सुलोचनाके पतिसे भिन्न कोई दूसरा ही व्यक्ति होगा अथवा दूसरे किसी प्राचीन पुराण में जयको, परदारनिवृत्ति व्रतकी जगह अथवा उसके अतिरिक्त, परिग्रहपरिमाणवतका व्रती लिखा होगा । परन्तु पहली अवस्था में इतना ज़रूर मानना होगा कि वह व्यक्ति टीकाकारके समय में भी इतना अप्रसिद्ध था कि टीकाकारको उसका बोध नहीं हो सका और इसलिये उसने मुलोचनाके पति 'जय' को ही जैसेतैसे उदाहृत किया है। दूसरी हालत में, उदाहुत कथा परसे, टीकाकारका उस दूसरे पुराणग्रन्थसे परिचित होना संदिग्ध ज़रूर मालूम होता है। चौथी पत्तिके सम्बन्ध में यह कल्पना की जा सकती है कि 'धनश्री' नामका पद्य कुछ अशुद्ध होगया है । उसका 'यथाक्रमं' पाठ जरा खटकता भी है । यदि ऐसे पद्योंमें इस आशय के किसी पाठके देनेकी ज़रूरत होती तो वह 'मातंगो' तथा 'श्रीपेण' नामके पद्योंमें भी ज़रूर दिया जाता; क्योंकि उनमें भी पूर्वकथित विषयोंके क्रमानुसार दृष्टान्तोंका उल्लेख किया गया है। परन्तु ऐसा नहीं है, इसलिये यह पाठ यहाँ पर अनावश्यक मालूम होता है। इस पाठकी जगह यदि उसीकी जोड़का दूसरा 'ऽन्यथासमं' पाठ बना दिया जाय तो झगड़ा बहुत कुछ मिट जाता है और तब इस पद्यका यह स्पष्ट हो जाता है कि, पहले पद्य में मातंगादिकके जो दृष्टान्त दिये गये हैं उनके साथ ( समं ) ही इन 'धनश्री' आदि दृष्टान्तोंको भी विपरीतरूपसे (अन्यथा ) उदाहृत करना चाहिये - अर्थात्, वे अहिंसादिव्रतोंक दृष्टान्त हैं तो इन्हें हिंसादिक पापोंके दृष्टान्त समझना चाहिये और वहाँ पूजातिशयको दिखाना है तो यहाँ तिरस्कार और दुःखके अतिशयको दिखलाना होगा। इस प्रकारके पाठभेदका हो जाना कोई कठिन बात भी नहीं है । भंडारोंमें ग्रन्थोंकी हालत को देखते हुए, वह बहुत कुछ साधारण जान पड़ती है। परन्तु तब इस पाठभेदके सम्बन्धमें यह मानना होगा कि वह टीकासे पहले हो चुका है और टीकाकारको दूसरे शुद्ध पाठकी उपलब्धि नहीं हुई । यही वजह है कि उसने 'यथाक्रमं' पाठ ही रक्खा है और पद्यके विषयको स्पष्ट करने के लिये उसे टीका 'हिंसादिविरत्यभावे' पदकी वैसे ही ऊपर से कल्पना करनी पड़ी है। शेष पत्तियों के सम्बन्ध में बहुत कुछ विचार करने पर भी, मैं अभी तक ऐसा कोई समाधानकारक उत्तर निश्चित नहीं कर सका हूँ जिससे इन पद्योंको ग्रन्थका एक अंग स्वीकार करने में । दूसरे किसी विद्वानी से भी मुझे तक वैसा कोई उत्तर या तद्विषयक सुझाव प्राप्त नहीं होसका है। इन पत्तियों में बहुत कुछ तथ्य पाया जाता है; और इसलिये इनका पूरी तौरसे समाधान हुए बिना उक्त छहों या पाँच पद्योंको पूर्ण रूपसे ग्रन्थका अंग नहीं कहा जा सकताउन्हें स्वामी समन्तभद्रकी रचना स्वीकार करने में बहुत बड़ा संकोच होता है। आश्चर्य नहीं जो ये पद्य भी टीकासे पहले ही प्रथमें प्रक्षिप्त हो गये हों और साधारण दृष्टि से देखने अथवा परीक्षा दृष्टि से न देखनेके कारण वे टीकाकारको लक्षित न हो सके हों । यह भी संभव है कि इन्हें किसी दूसरे संस्कृत टीकाकार ने रचा हो, कथाओंसे पहले उनकी सूचनाके लिये अपनी टीका दिया हो और बाढ़ को उस टीका परसे मूलग्रन्थकी नकल उतारते समय असावधान लेखकोंकी कृपा से वे मूलका ही अंग बना दिये गये हों। परन्तु कुछ भी हो, इसमें संदेह नहीं कि वे पद्य संदिग्ध ज़रूर हैं और इन्हें सहसा मूलप्रन्थका अंग अथवा स्वामी समन्तभद्रकी रचना मानने में संकोच ज़रूर होता है । यहाँ तककी इस सम्पूर्ण जाँच में जिन पद्योंकी चर्चा की गई है, मैं समझता हूँ, उनसे भिन्न ग्रन्थमं दूसरे ऐसे कोई भी पद्म मालूम नहीं होते जो खास तौरसे संदिग्ध स्थितिमें पाये जाते हों जिन पर किसीने अपना युक्तिपुरम्मर संदेह प्रकट * यद्यपि छठे पद्यका रंगढंग दूसरे पद्योंने कुछ भिन्न है और उसे ग्रन्थका अंग माननेको जी भी कुछ चाहता है परन्तु पहली आपत्ति उसमें खास तौर से बाधा डालती है और यह स्वीकार करने नहीं देती कि वह मी निःसन्देह ग्रन्थका कोई अंग है । हाँ, यदि इसे दृष्टान्तके रूपमें न लेकर फल- प्रतिपादन के रूप में लिया जाय (अर्हपूजाके फलविषयका दूसरा कोई पद्य है भी नहीं ) तो इसे एक प्रकारसे ग्रन्थका अंग कहना ठीक हो सकता है ।
समझी गई कि धनदेवकी सत्यताको राजाने कैसे प्रमाणित किया, और बिना उसको सूचित किये वैसे ही राजासे उसके हक़में फ़ैसला दिला दिया गया ! असत्यभाषणका दोष दिखलाने के लिये जो सत्यघोपकी कथा दी गई है उसमें उसे चोरीका ही अपराधी ठहराया है, जिससे यह दृष्टान्त, असत्यभाषणका न रहकर, दूसरे ग्रन्थोंकी तरह चोरीका ही बन गया है। और इस तरह पर इन सभी कथा इतनी अधिक त्रुटियाँ पाई जाती हैं कि उन पर एक खासा विस्तृत निबन्ध लिखा जा सकता है । परन्तु टीकाकार महाशय यदि इन दृष्टान्तोंको अच्छी तरहसे खिला नहीं सके, उनके मार्मिक का उल्लेख नहीं कर सके और न त्रुटियों को दूर करके उनकी कथाओंको प्रभावशालिनी ही बना सके हैं, तो यह सब उनका अपना दोष है । उसकी वजह से मूल ग्रन्थ पर कोई आपत्ति नहीं की जा सकती। और न मूल आख्यान वैसे कुछ निःसार अथवा महत्त्वशून्य ही हो सकते हैं जैसा कि टीकामें उन्हें बता दिया गया है। इसीसे मेरा यह कहना है कि इस सातवीं आपत्ति में कुछ भी बल नहीं है । छठी आपत्ति के सम्बन्ध में यह कहा जा सकता है कि पट्टामें जिस 'जय' का उल्लेख है वह सुलोचनाके पतिसे भिन्न कोई दूसरा ही व्यक्ति होगा अथवा दूसरे किसी प्राचीन पुराण में जयको, परदारनिवृत्ति व्रतकी जगह अथवा उसके अतिरिक्त, परिग्रहपरिमाणवतका व्रती लिखा होगा । परन्तु पहली अवस्था में इतना ज़रूर मानना होगा कि वह व्यक्ति टीकाकारके समय में भी इतना अप्रसिद्ध था कि टीकाकारको उसका बोध नहीं हो सका और इसलिये उसने मुलोचनाके पति 'जय' को ही जैसेतैसे उदाहृत किया है। दूसरी हालत में, उदाहुत कथा परसे, टीकाकारका उस दूसरे पुराणग्रन्थसे परिचित होना संदिग्ध ज़रूर मालूम होता है। चौथी पत्तिके सम्बन्ध में यह कल्पना की जा सकती है कि 'धनश्री' नामका पद्य कुछ अशुद्ध होगया है । उसका 'यथाक्रमं' पाठ जरा खटकता भी है । यदि ऐसे पद्योंमें इस आशय के किसी पाठके देनेकी ज़रूरत होती तो वह 'मातंगो' तथा 'श्रीपेण' नामके पद्योंमें भी ज़रूर दिया जाता; क्योंकि उनमें भी पूर्वकथित विषयोंके क्रमानुसार दृष्टान्तोंका उल्लेख किया गया है। परन्तु ऐसा नहीं है, इसलिये यह पाठ यहाँ पर अनावश्यक मालूम होता है। इस पाठकी जगह यदि उसीकी जोड़का दूसरा 'ऽन्यथासमं' पाठ बना दिया जाय तो झगड़ा बहुत कुछ मिट जाता है और तब इस पद्यका यह स्पष्ट हो जाता है कि, पहले पद्य में मातंगादिकके जो दृष्टान्त दिये गये हैं उनके साथ ही इन 'धनश्री' आदि दृष्टान्तोंको भी विपरीतरूपसे उदाहृत करना चाहिये - अर्थात्, वे अहिंसादिव्रतोंक दृष्टान्त हैं तो इन्हें हिंसादिक पापोंके दृष्टान्त समझना चाहिये और वहाँ पूजातिशयको दिखाना है तो यहाँ तिरस्कार और दुःखके अतिशयको दिखलाना होगा। इस प्रकारके पाठभेदका हो जाना कोई कठिन बात भी नहीं है । भंडारोंमें ग्रन्थोंकी हालत को देखते हुए, वह बहुत कुछ साधारण जान पड़ती है। परन्तु तब इस पाठभेदके सम्बन्धमें यह मानना होगा कि वह टीकासे पहले हो चुका है और टीकाकारको दूसरे शुद्ध पाठकी उपलब्धि नहीं हुई । यही वजह है कि उसने 'यथाक्रमं' पाठ ही रक्खा है और पद्यके विषयको स्पष्ट करने के लिये उसे टीका 'हिंसादिविरत्यभावे' पदकी वैसे ही ऊपर से कल्पना करनी पड़ी है। शेष पत्तियों के सम्बन्ध में बहुत कुछ विचार करने पर भी, मैं अभी तक ऐसा कोई समाधानकारक उत्तर निश्चित नहीं कर सका हूँ जिससे इन पद्योंको ग्रन्थका एक अंग स्वीकार करने में । दूसरे किसी विद्वानी से भी मुझे तक वैसा कोई उत्तर या तद्विषयक सुझाव प्राप्त नहीं होसका है। इन पत्तियों में बहुत कुछ तथ्य पाया जाता है; और इसलिये इनका पूरी तौरसे समाधान हुए बिना उक्त छहों या पाँच पद्योंको पूर्ण रूपसे ग्रन्थका अंग नहीं कहा जा सकताउन्हें स्वामी समन्तभद्रकी रचना स्वीकार करने में बहुत बड़ा संकोच होता है। आश्चर्य नहीं जो ये पद्य भी टीकासे पहले ही प्रथमें प्रक्षिप्त हो गये हों और साधारण दृष्टि से देखने अथवा परीक्षा दृष्टि से न देखनेके कारण वे टीकाकारको लक्षित न हो सके हों । यह भी संभव है कि इन्हें किसी दूसरे संस्कृत टीकाकार ने रचा हो, कथाओंसे पहले उनकी सूचनाके लिये अपनी टीका दिया हो और बाढ़ को उस टीका परसे मूलग्रन्थकी नकल उतारते समय असावधान लेखकोंकी कृपा से वे मूलका ही अंग बना दिये गये हों। परन्तु कुछ भी हो, इसमें संदेह नहीं कि वे पद्य संदिग्ध ज़रूर हैं और इन्हें सहसा मूलप्रन्थका अंग अथवा स्वामी समन्तभद्रकी रचना मानने में संकोच ज़रूर होता है । यहाँ तककी इस सम्पूर्ण जाँच में जिन पद्योंकी चर्चा की गई है, मैं समझता हूँ, उनसे भिन्न ग्रन्थमं दूसरे ऐसे कोई भी पद्म मालूम नहीं होते जो खास तौरसे संदिग्ध स्थितिमें पाये जाते हों जिन पर किसीने अपना युक्तिपुरम्मर संदेह प्रकट * यद्यपि छठे पद्यका रंगढंग दूसरे पद्योंने कुछ भिन्न है और उसे ग्रन्थका अंग माननेको जी भी कुछ चाहता है परन्तु पहली आपत्ति उसमें खास तौर से बाधा डालती है और यह स्वीकार करने नहीं देती कि वह मी निःसन्देह ग्रन्थका कोई अंग है । हाँ, यदि इसे दृष्टान्तके रूपमें न लेकर फल- प्रतिपादन के रूप में लिया जाय तो इसे एक प्रकारसे ग्रन्थका अंग कहना ठीक हो सकता है ।
वैसा कर तो रही थी, लेकिन वह सब 'मेकैनिकल' था । रियल्ली, आई वाज़ विद यू । तुम जानते हो, डॉक्टर मलिक मे पहले मै एक आई०ए०एस० अफसर की बीवी थी । वहाँ भी मैं अपने को अपने पास रखे रही । मैं हालांकि 'मैकिनल' नही थी, महज़ साथ होने के लिए साथ नहीं थी, फिर भी मैंने अपने को बचा रखा था - अपने निजत्व को । आई मीन अपने 'बीईंग' को । अमलेन्दु अब यह उल्टी-मीधी दार्शनिक बात सुनने को तैयार नही था। वह महसूस कर रहा था, मिसेज शीला मलिक हद से ज्यादा बात को फिलोसीफाइज और अमूर्त कर रही है। उसने पता नही कितनी औरतो से सम्बन्ध जोड़े और तोडे, वह तो इस 'होने वोने' या अपने को बचानेवचाने के चक्कर मे नही पड़ा । नर्स का सवाल उसके और माँ के बीच मे टकराहट बन गया था, उसने उमे कच्चे सूत की तरह तोडकर छिटका दिया । क्या हुआ ? वह अपने रास्ते, नर्स अपने रास्ते लग गई । उसने सम्बन्ध के लिए दूसरा डॉक्टर चुन लिया । वह झुंझलाहट मे वोला - मिसेज मलिक । आप लेक्चरर हैन, आप छोटी-सी बात को भी तूल दे सकती है, लेकिन मैं जानता हूं कि आप समझौते की चाह में भटक रही है। आपकी अस्थिरता कही भी उसे बैठाती नहीं है । शीला मलिक इस चोट से तिलमिला उठी । वह चाहती थी कि सहज ही अपनी उलझन को थोपते-थोपते किसी हल को पा लें, लेकिन इस शर्त पर नही कि जिसे वह अनुभवहीन और भोला समझती हैं, वह अपने को उससे भी ज्यादा अक्लमन्द और सोन में श्रेष्ठ जाहिर करे । डू यू मीन यू नो मी वैटर ऐण्ड कैन थिंक बैटर फॉर मो? मै अपने को जानती हूँ और मुझे क्या करना चाहिये, यह भी चैक आउट कर सकती हूँ । अब तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है । अमलेन्दु के लिये साफ सकेत था, मिसेज शोला मलिक अव उससे कोई ताल्लुक नहीं रखना चाहती । आगे के दिनों ने इसका सबूत दे दिया । मिसेज मलिक डाक्टर मलिक के साथ क्लब आने लगी। ज्यादातर ६२ घड़ी दो घड़ी वह यह दिखाने लगी कि डाक्टर मलिक को वह अज़हद प्यार करती है। डाक्टर अमलेन्दु ने भी उन्हीं का रुख अपना लिया । वह दूसरी मेज़ों पर ताश खेलने लगा । औपचारिकता और दिखावा वैसा का वैसा रहा। सवाल यह जरूर रह गया कि क्या डाक्टर मलिक जवान बीवी की चाहतो और उसके घहरावो को अपने अनुकूल पायेंगे ? मिसेज़ शाला मलिक जैसी औरत क्या अपने इस बदलाव के प्रति भी स्थिर और स्थाई रह पायेंगी ? क्या उन्होंने हलचल को ही तो गति नहीं समझ रखा है ? समझौता, जिसके लिए वह बार-बार उखड़ती हैं, उनकी नजर में स्थिरता और एकरसता के बराबर तो नहीं है । डाक्टर मलिक अपनी इस पलट में क्या वास्तव में सहज है ? उनको तटस्थता मे जो बाधा पैदा हुई है क्या वह उससे उफनेंगे नहीं ? यही सब तो नहीं पता लग पाता आज के पलटा खाने व्यक्तियों के बारे में । नीना और मीना में जो स्वभाव का फर्क था, उसका उल्टा फर्क था डाक्टर अमलेन्दु की और रजनीशकान्त की पत्नियो में। हालांकि दोनो उसी जाति और पेशे को वेटियां थी लेकिन अमलेन्द्र की पत्नी ने परि स्थितियों को बिना विरोध किये, जितना है, उसको स्वीकार कर लिया था; रजनीशकान्त की पत्नी 'जैसा है' को मानने के लिए तैयार नहीं थी । वह रजनोशकान्त पर हावी रहकर उसे पकड़े रहना चाहती थी, जबकि रजनोश हाथ मे आ नहीं रहा था । उसके क्लेशों ने उसके आतक ने रजनीशकान्त को छिटकाया, और इस कदर छिटकाया कि घर उसके लिए हौआ बन गया। न कोई विचाव, न शान्ति । मैं नहीं जानता कि मुझे ऐसी असलियत लिखनी चाहिये या नहीं, जिसने रजनीश के घर को नरक बना दिया था और रजनीश पस्त व्यक्तिसा दर्शन मात्र रह रहा था । ऐगी मी माँ होती है जो बेटे को साथ मिलाकर ऐसे कारनामे
वैसा कर तो रही थी, लेकिन वह सब 'मेकैनिकल' था । रियल्ली, आई वाज़ विद यू । तुम जानते हो, डॉक्टर मलिक मे पहले मै एक आईशून्यएशून्यएसशून्य अफसर की बीवी थी । वहाँ भी मैं अपने को अपने पास रखे रही । मैं हालांकि 'मैकिनल' नही थी, महज़ साथ होने के लिए साथ नहीं थी, फिर भी मैंने अपने को बचा रखा था - अपने निजत्व को । आई मीन अपने 'बीईंग' को । अमलेन्दु अब यह उल्टी-मीधी दार्शनिक बात सुनने को तैयार नही था। वह महसूस कर रहा था, मिसेज शीला मलिक हद से ज्यादा बात को फिलोसीफाइज और अमूर्त कर रही है। उसने पता नही कितनी औरतो से सम्बन्ध जोड़े और तोडे, वह तो इस 'होने वोने' या अपने को बचानेवचाने के चक्कर मे नही पड़ा । नर्स का सवाल उसके और माँ के बीच मे टकराहट बन गया था, उसने उमे कच्चे सूत की तरह तोडकर छिटका दिया । क्या हुआ ? वह अपने रास्ते, नर्स अपने रास्ते लग गई । उसने सम्बन्ध के लिए दूसरा डॉक्टर चुन लिया । वह झुंझलाहट मे वोला - मिसेज मलिक । आप लेक्चरर हैन, आप छोटी-सी बात को भी तूल दे सकती है, लेकिन मैं जानता हूं कि आप समझौते की चाह में भटक रही है। आपकी अस्थिरता कही भी उसे बैठाती नहीं है । शीला मलिक इस चोट से तिलमिला उठी । वह चाहती थी कि सहज ही अपनी उलझन को थोपते-थोपते किसी हल को पा लें, लेकिन इस शर्त पर नही कि जिसे वह अनुभवहीन और भोला समझती हैं, वह अपने को उससे भी ज्यादा अक्लमन्द और सोन में श्रेष्ठ जाहिर करे । डू यू मीन यू नो मी वैटर ऐण्ड कैन थिंक बैटर फॉर मो? मै अपने को जानती हूँ और मुझे क्या करना चाहिये, यह भी चैक आउट कर सकती हूँ । अब तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है । अमलेन्दु के लिये साफ सकेत था, मिसेज शोला मलिक अव उससे कोई ताल्लुक नहीं रखना चाहती । आगे के दिनों ने इसका सबूत दे दिया । मिसेज मलिक डाक्टर मलिक के साथ क्लब आने लगी। ज्यादातर बासठ घड़ी दो घड़ी वह यह दिखाने लगी कि डाक्टर मलिक को वह अज़हद प्यार करती है। डाक्टर अमलेन्दु ने भी उन्हीं का रुख अपना लिया । वह दूसरी मेज़ों पर ताश खेलने लगा । औपचारिकता और दिखावा वैसा का वैसा रहा। सवाल यह जरूर रह गया कि क्या डाक्टर मलिक जवान बीवी की चाहतो और उसके घहरावो को अपने अनुकूल पायेंगे ? मिसेज़ शाला मलिक जैसी औरत क्या अपने इस बदलाव के प्रति भी स्थिर और स्थाई रह पायेंगी ? क्या उन्होंने हलचल को ही तो गति नहीं समझ रखा है ? समझौता, जिसके लिए वह बार-बार उखड़ती हैं, उनकी नजर में स्थिरता और एकरसता के बराबर तो नहीं है । डाक्टर मलिक अपनी इस पलट में क्या वास्तव में सहज है ? उनको तटस्थता मे जो बाधा पैदा हुई है क्या वह उससे उफनेंगे नहीं ? यही सब तो नहीं पता लग पाता आज के पलटा खाने व्यक्तियों के बारे में । नीना और मीना में जो स्वभाव का फर्क था, उसका उल्टा फर्क था डाक्टर अमलेन्दु की और रजनीशकान्त की पत्नियो में। हालांकि दोनो उसी जाति और पेशे को वेटियां थी लेकिन अमलेन्द्र की पत्नी ने परि स्थितियों को बिना विरोध किये, जितना है, उसको स्वीकार कर लिया था; रजनीशकान्त की पत्नी 'जैसा है' को मानने के लिए तैयार नहीं थी । वह रजनोशकान्त पर हावी रहकर उसे पकड़े रहना चाहती थी, जबकि रजनोश हाथ मे आ नहीं रहा था । उसके क्लेशों ने उसके आतक ने रजनीशकान्त को छिटकाया, और इस कदर छिटकाया कि घर उसके लिए हौआ बन गया। न कोई विचाव, न शान्ति । मैं नहीं जानता कि मुझे ऐसी असलियत लिखनी चाहिये या नहीं, जिसने रजनीश के घर को नरक बना दिया था और रजनीश पस्त व्यक्तिसा दर्शन मात्र रह रहा था । ऐगी मी माँ होती है जो बेटे को साथ मिलाकर ऐसे कारनामे
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना में सभी आवासहीनों को रहने के लिए निःशुल्क जमीन दी जाएगी। जनजातीय वर्ग को भी जल, जंगल और जमीन का हक दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री चौहान बैतूल में आयोजित मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शासकीय सेवाओं में पहले बेटे को ही अनुकंपा नियुक्ति दी जाती थी। अब निर्णय लिया गया है कि बेटी को भी अनुकंपा नियुक्ति मिलेगी। भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना में सभी आवासहीनों को रहने के लिए निःशुल्क जमीन दी जाएगी। जनजातीय वर्ग को भी जल, जंगल और जमीन का हक दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री चौहान बैतूल में आयोजित मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शासकीय सेवाओं में पहले बेटे को ही अनुकंपा नियुक्ति दी जाती थी। अब निर्णय लिया गया है कि बेटी को भी अनुकंपा नियुक्ति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने ग्राम जीन निवासी बेटी संगीता गोहे को अनुकंपा नियुक्ति पत्र भी प्रदान किया। प्रदेश में अब अहाते बार नहीं खुलेंगे। सभी अहाते बंद कर दिए गए हैं। इस व्यवस्था से महिलाओं पर होने वाले अत्याचार रूकेंगे और शराब पर नैतिक अंकुश लगेगा। मुख्यंमत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश को बदलने की कोशिश की जा रही है। शिक्षा को और बेहतर बनाने के लिए अब पूरे प्रदेश में सीएम राईज स्कूल की स्थापना हो रही है, जिससे बच्चों को बेहतर शिक्षा प्राप्त हो सके। प्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई भी अब हिन्दी में कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को बदलना है और एक नया मध्यप्रदेश गढ़ना है। इसके लिए सभी को मिल कर कार्य करना होगा। उन्होंने महिलाओं के साथ सभी का आह्वान किया कि मिल कर अन्याय के खिलाफ खड़े हो जाएं।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना में सभी आवासहीनों को रहने के लिए निःशुल्क जमीन दी जाएगी। जनजातीय वर्ग को भी जल, जंगल और जमीन का हक दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री चौहान बैतूल में आयोजित मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शासकीय सेवाओं में पहले बेटे को ही अनुकंपा नियुक्ति दी जाती थी। अब निर्णय लिया गया है कि बेटी को भी अनुकंपा नियुक्ति मिलेगी। भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना में सभी आवासहीनों को रहने के लिए निःशुल्क जमीन दी जाएगी। जनजातीय वर्ग को भी जल, जंगल और जमीन का हक दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री चौहान बैतूल में आयोजित मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शासकीय सेवाओं में पहले बेटे को ही अनुकंपा नियुक्ति दी जाती थी। अब निर्णय लिया गया है कि बेटी को भी अनुकंपा नियुक्ति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने ग्राम जीन निवासी बेटी संगीता गोहे को अनुकंपा नियुक्ति पत्र भी प्रदान किया। प्रदेश में अब अहाते बार नहीं खुलेंगे। सभी अहाते बंद कर दिए गए हैं। इस व्यवस्था से महिलाओं पर होने वाले अत्याचार रूकेंगे और शराब पर नैतिक अंकुश लगेगा। मुख्यंमत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश को बदलने की कोशिश की जा रही है। शिक्षा को और बेहतर बनाने के लिए अब पूरे प्रदेश में सीएम राईज स्कूल की स्थापना हो रही है, जिससे बच्चों को बेहतर शिक्षा प्राप्त हो सके। प्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई भी अब हिन्दी में कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को बदलना है और एक नया मध्यप्रदेश गढ़ना है। इसके लिए सभी को मिल कर कार्य करना होगा। उन्होंने महिलाओं के साथ सभी का आह्वान किया कि मिल कर अन्याय के खिलाफ खड़े हो जाएं।
पीएम मोदी को फिज़ी और पापुआ न्यू गिनी के सर्वोच्च सम्मान से नवाज़ा गया। इसके साथ विदेश में एक बार फिर पीएम मोदी का डंका बज गया। पापुआ न्यू गिनी के एयरपोर्ट पर मेजबान देश के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने पैर छूकर पीएम मोदी का स्वागत किया। 'भारत एक्सप्रेस' न्यूज नेटवर्क ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शनिवार को अपने ब्यूरो ऑफिस का उद्घाटन किया। मिलिंद खांडेकर 'टीवी टुडे नेटवर्क' के 'तक चैनल्स' के मैनेजिंग एडिटर है और हर रविवार सोशल मीडिया पर उनका साप्ताहिक न्यूज़लेटर 'हिसाब किताब' प्रकाशित होता है। दिल्ली हाई कोर्ट सुदर्शन न्यूज सहित कुछ न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एक मुस्लिम व्यक्ति पर जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाने वाली खबरों को हटाने का आदेश दिया है। इस बारे में कंपनी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, 'पांचजन्य' (Panchjanya) की डिजिटल विंग में न्यूज एडिटर, चीफ सब एडिटर और सीनियर सब एडिटर के पद पर वैकेंसी है। नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) ने आपत्ति जताई है और यह कहते हुए इस रिपोर्ट की निंदा की है कि यह रिपोर्ट भारत को नीचा दिखाने का प्रयास है। फिक्की फ्रेम्स 2023 में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक मानचित्र पर ले जाने की प्रतिबद्धता के लिए मीडिया व एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की सराहना की। 2023 के वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत 11 पायदान गिरकर 161वें स्थान पर पहुंच गया है। बिलावल भुट्टो जरदारी गुरुवार को कराची से गोवा पहुंचे और उन्हें ताज एग्जॉटिका फाइव स्टार होटल में ठहराया गया है। यदि आपको किसी न्यूज चैनल में काम करने का अनुभव है और आप नई नौकरी की तलाश में हैं तो यह खबर आपके काफी काम की है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे के मौके पर फ्रांस आधारित संस्था 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' ने बुधवार 3 मई को अपनी वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की। फ्रांस में 50 प्रतिशत मंदी का असर हो सकता है। वहीं कनाडा में 60 फीसदी, इटली में 60 फीसदी और जर्मनी में भी 60 फीसदी मंदी का असर दिख सकता है। अवनीश शर्मा को मीडिया में काम करने का करीब पांच साल का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत 'समाचार प्लस' (Samachar Plus) से की थी। नगर निगम की नाक के नीचे कई स्थानों पर मोटी पार्किंग फीस वसूली जा रही है। 'ऑपरेशन पार्किंग के पॉकेटमार' के जरिए भारत एक्सप्रेस की टीम ने इसका खुलासा किया है। 'एटमॉस्फियर कोर' से पहले भारत रहेजा Minor Hotels, Whitbread और Hilton Worldwide में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। ताजा उदाहरण पिछले दिनों कुख्यात अपराधी अतीक अहमद और उसके भाई की प्रयागराज में तीन अपराधियों द्वारा हत्या की खबरों को पूर्वाग्रह और गलत तथ्य तथा सांप्रदायिक रंग देकर पेश करना है। राजवाड़े वर्तमान में चैनल के कंटेंट और प्रोग्रामिंग की कमान संभाले हुए हैं। डिज्नी स्टार ने अपने पहले चरण के तहत भारत में अपने एम्प्लॉयीज की छंटनी शुरू कर दी है।
पीएम मोदी को फिज़ी और पापुआ न्यू गिनी के सर्वोच्च सम्मान से नवाज़ा गया। इसके साथ विदेश में एक बार फिर पीएम मोदी का डंका बज गया। पापुआ न्यू गिनी के एयरपोर्ट पर मेजबान देश के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने पैर छूकर पीएम मोदी का स्वागत किया। 'भारत एक्सप्रेस' न्यूज नेटवर्क ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शनिवार को अपने ब्यूरो ऑफिस का उद्घाटन किया। मिलिंद खांडेकर 'टीवी टुडे नेटवर्क' के 'तक चैनल्स' के मैनेजिंग एडिटर है और हर रविवार सोशल मीडिया पर उनका साप्ताहिक न्यूज़लेटर 'हिसाब किताब' प्रकाशित होता है। दिल्ली हाई कोर्ट सुदर्शन न्यूज सहित कुछ न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एक मुस्लिम व्यक्ति पर जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाने वाली खबरों को हटाने का आदेश दिया है। इस बारे में कंपनी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, 'पांचजन्य' की डिजिटल विंग में न्यूज एडिटर, चीफ सब एडिटर और सीनियर सब एडिटर के पद पर वैकेंसी है। नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने आपत्ति जताई है और यह कहते हुए इस रिपोर्ट की निंदा की है कि यह रिपोर्ट भारत को नीचा दिखाने का प्रयास है। फिक्की फ्रेम्स दो हज़ार तेईस में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक मानचित्र पर ले जाने की प्रतिबद्धता के लिए मीडिया व एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की सराहना की। दो हज़ार तेईस के वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत ग्यारह पायदान गिरकर एक सौ इकसठवें स्थान पर पहुंच गया है। बिलावल भुट्टो जरदारी गुरुवार को कराची से गोवा पहुंचे और उन्हें ताज एग्जॉटिका फाइव स्टार होटल में ठहराया गया है। यदि आपको किसी न्यूज चैनल में काम करने का अनुभव है और आप नई नौकरी की तलाश में हैं तो यह खबर आपके काफी काम की है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे के मौके पर फ्रांस आधारित संस्था 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' ने बुधवार तीन मई को अपनी वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की। फ्रांस में पचास प्रतिशत मंदी का असर हो सकता है। वहीं कनाडा में साठ फीसदी, इटली में साठ फीसदी और जर्मनी में भी साठ फीसदी मंदी का असर दिख सकता है। अवनीश शर्मा को मीडिया में काम करने का करीब पांच साल का अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत 'समाचार प्लस' से की थी। नगर निगम की नाक के नीचे कई स्थानों पर मोटी पार्किंग फीस वसूली जा रही है। 'ऑपरेशन पार्किंग के पॉकेटमार' के जरिए भारत एक्सप्रेस की टीम ने इसका खुलासा किया है। 'एटमॉस्फियर कोर' से पहले भारत रहेजा Minor Hotels, Whitbread और Hilton Worldwide में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। ताजा उदाहरण पिछले दिनों कुख्यात अपराधी अतीक अहमद और उसके भाई की प्रयागराज में तीन अपराधियों द्वारा हत्या की खबरों को पूर्वाग्रह और गलत तथ्य तथा सांप्रदायिक रंग देकर पेश करना है। राजवाड़े वर्तमान में चैनल के कंटेंट और प्रोग्रामिंग की कमान संभाले हुए हैं। डिज्नी स्टार ने अपने पहले चरण के तहत भारत में अपने एम्प्लॉयीज की छंटनी शुरू कर दी है।
अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर ने अपने फिल्मी करियर के दौरान बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम किया और अपनी मेहनत के बल पर एक मुकाम हासिल किया। हर कलाकार की तरह उर्मिला मातोंडकर ने भी अपने करियर के लिए इंडस्ट्री में बहुत स्ट्रगल किया। उर्मिला मातोंडकर ने फिल्म 'मासूम' में चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम किया था लेकिन बतौर लीड एक्ट्रेस वह फिल्म चमत्कार में नजर आईं थीं। उन्होंने कई फिल्मों में काम किया। हालांकि फिल्म रंगीला से उन्हें जो पहचान मिली वह शायद किसी और फिल्म से नहीं मिली, लेकिन उन्हें इस फिल्म को लेकर आज भी एक बात का अफसोस है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने इस बारे में बात की। एक इंटरव्यू के दौरान बात करते हुए एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर से बात करते हुए जब करियर को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने हर चीज पर खुलकर बात की और अपने स्ट्रगल के दिनों के याद करते हुए कहा, कि 'मैंने बहुत स्ट्रगल किया है। मैं कभी भी अपनी तस्वीरें लेकर किसी प्रोड्यूसर के पास नहीं गई। मेरे परिवार का फिल्म इंडस्ट्री से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हूं लेकिन होता वही है जो होना होता है। ' इस बारे में उन्होंने आगे बात करते हुए कहा कि फिल्म नरसिम्हा में रोल मिला, लेकिन उस फिल्म के लिए मुझे सिर्फ इसलिए साइन किया गया क्योंकि जिस एक्ट्रेस को उस फिल्म में लिया गया था, उसका फ्रैक्चर हो गया था। फिल्म के क्लाइमेक्स का शूट होना था। वहां 500 जूनियर आर्टिस्ट थे और मुझे नाचना गाना था, मैंने डांस की कोई ट्रेनिंग भी नहीं ली थी। मुझे परफॉर्म करने से पहले ही मना कर दिया गया। उर्मिला बताती हैं कि मेरे पास को फेमस सरनेम नहीं था और 90 के दशक में मीडिया निर्दयी थी, मेरे बारे में कुछ भी लिखा जा रहा था। ये सब कुछ करीब चार सालों तक चला और जब फिल्म रंगीला आई तो कहीं जाकर यह सब शांत हुआ। हालांकि इस फिल्म के बारे में भी उन्हें एक बात का मलाल रहा। उर्मिला मातोंडकर ने आगे बात करते हुए कहा, फिल्म रंगीला में उनके अभिनय के लिए उन्हें कोई क्रेडिट नहीं दिया गया। उन्होंने खुलासा किया कि इस फिल्म में उन्होंने जो भी किया, लोगों ने उसे सिर्फ एक सेक्स अपील कहा, उसका एक्टिंग से कुछ लेना देना नहीं था। वह कहती हैं कि अगर ऐसा था तो 'हाय रामा' गाना एक कलाकार के बिना कैसे हो सकता था? क्या सिर्फ इमोशनल कर देने वाले सीन्स देना ही अभिनय है? सेक्सी दिखना भी किरदार की डिमांड होती है। उर्मिला मातोंडकर ने रंगीला के बारे में आगे जिक्र करते हुए कहा कि इतनी बड़ी हिट देने के बावजूद मेरे बारे में एक अच्छा शब्द तक नहीं लिखा गया, अवॉर्ड्स तो भूल ही जाइए। मेरे कपड़ों को, मेरे बालों को, मतलब सारी चीजों को क्रेडिट मिला, लेकिन मुझे नहीं।
अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर ने अपने फिल्मी करियर के दौरान बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम किया और अपनी मेहनत के बल पर एक मुकाम हासिल किया। हर कलाकार की तरह उर्मिला मातोंडकर ने भी अपने करियर के लिए इंडस्ट्री में बहुत स्ट्रगल किया। उर्मिला मातोंडकर ने फिल्म 'मासूम' में चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम किया था लेकिन बतौर लीड एक्ट्रेस वह फिल्म चमत्कार में नजर आईं थीं। उन्होंने कई फिल्मों में काम किया। हालांकि फिल्म रंगीला से उन्हें जो पहचान मिली वह शायद किसी और फिल्म से नहीं मिली, लेकिन उन्हें इस फिल्म को लेकर आज भी एक बात का अफसोस है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने इस बारे में बात की। एक इंटरव्यू के दौरान बात करते हुए एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर से बात करते हुए जब करियर को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने हर चीज पर खुलकर बात की और अपने स्ट्रगल के दिनों के याद करते हुए कहा, कि 'मैंने बहुत स्ट्रगल किया है। मैं कभी भी अपनी तस्वीरें लेकर किसी प्रोड्यूसर के पास नहीं गई। मेरे परिवार का फिल्म इंडस्ट्री से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हूं लेकिन होता वही है जो होना होता है। ' इस बारे में उन्होंने आगे बात करते हुए कहा कि फिल्म नरसिम्हा में रोल मिला, लेकिन उस फिल्म के लिए मुझे सिर्फ इसलिए साइन किया गया क्योंकि जिस एक्ट्रेस को उस फिल्म में लिया गया था, उसका फ्रैक्चर हो गया था। फिल्म के क्लाइमेक्स का शूट होना था। वहां पाँच सौ जूनियर आर्टिस्ट थे और मुझे नाचना गाना था, मैंने डांस की कोई ट्रेनिंग भी नहीं ली थी। मुझे परफॉर्म करने से पहले ही मना कर दिया गया। उर्मिला बताती हैं कि मेरे पास को फेमस सरनेम नहीं था और नब्बे के दशक में मीडिया निर्दयी थी, मेरे बारे में कुछ भी लिखा जा रहा था। ये सब कुछ करीब चार सालों तक चला और जब फिल्म रंगीला आई तो कहीं जाकर यह सब शांत हुआ। हालांकि इस फिल्म के बारे में भी उन्हें एक बात का मलाल रहा। उर्मिला मातोंडकर ने आगे बात करते हुए कहा, फिल्म रंगीला में उनके अभिनय के लिए उन्हें कोई क्रेडिट नहीं दिया गया। उन्होंने खुलासा किया कि इस फिल्म में उन्होंने जो भी किया, लोगों ने उसे सिर्फ एक सेक्स अपील कहा, उसका एक्टिंग से कुछ लेना देना नहीं था। वह कहती हैं कि अगर ऐसा था तो 'हाय रामा' गाना एक कलाकार के बिना कैसे हो सकता था? क्या सिर्फ इमोशनल कर देने वाले सीन्स देना ही अभिनय है? सेक्सी दिखना भी किरदार की डिमांड होती है। उर्मिला मातोंडकर ने रंगीला के बारे में आगे जिक्र करते हुए कहा कि इतनी बड़ी हिट देने के बावजूद मेरे बारे में एक अच्छा शब्द तक नहीं लिखा गया, अवॉर्ड्स तो भूल ही जाइए। मेरे कपड़ों को, मेरे बालों को, मतलब सारी चीजों को क्रेडिट मिला, लेकिन मुझे नहीं।
बिधूना। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बिधूना में भारतीय संविधान के निर्माता, समाज सुधारक डॉ. भीमराव आंबेडकर की 67वीं पुण्यतिथि मनायी गयी। इस अवसर पर सीएचसी अधीक्षक समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर सीएचसी अधीक्षक डॉ. सिद्धार्थ बर्मा ने कहा बाबा साहेब आंबेडकर ने छह दिसंबर 1956 को अंतिम सांस ली थी। जिस कारण आज के दिन को 'परिनिर्वाण दिवस' के रूप में मनाया जाता है। आंबेडकर दलित वर्ग को समानता दिलाने के लिए जीवन भर संघर्ष करते रहे। वे दलित समुदाय के लिए एक अलग राजनैतिक पहचान की वकालत करते रहे। 06 दिसम्बर, पुण्यतिथि विशेषः यदि आज आंबेडकर होते तो उनका नजरिया क्या होता? देश में डॉ. आंबेडकर की याद में कई कार्यक्रम किए जाते हैं। डॉ. आंबेडकर ने सामाजिक छुआ-छूत और जातिवाद के खात्मे के लिए काफी आंदोलन किए। उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, दलितों और समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए न्यौछावर कर दिया। उन्होंने बताया कि डॉ. #आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के छोटे से गांव महू में हुआ था। उनका परिवार मराठी था और मूल रूप से महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के आंबडवे गांव से था। उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमा बाई था। बाबा साहब का जन्म महार जाति में हुआ था। आंबेडकर डायबिटीज के मरीज थे। 6 दिसंबर 1956 को उनका दिल्ली में निधन हो गया था। इस मौके पर डॉ. पूजा वर्मा, डॉ. कृपाराम, डॉ. मनीष त्रिपाठी, डॉ. आर जी मिश्रा, डॉ. संकल्प दुबे, डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह, डॉ. सतेन्द्र यादव, चीफ फार्मासिस्ट अवधेश सिंह सेंगर, नर्स मेंटर पदम सिंह, एलटी अंकिता त्रिपाठी, जितेन्द्र शर्मा, राज कुमार, सचिन कुमार, विवेक कुमार, योगेन्द्र सिंह, अमित कुमार, राम किशोर, शिवम, अटल, अनुपम अवस्थी व सतीश चन्द्र आदि स्वास्थ्य कर्मीयों ने डॉ. आंबेडकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
बिधूना। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बिधूना में भारतीय संविधान के निर्माता, समाज सुधारक डॉ. भीमराव आंबेडकर की सरसठवीं पुण्यतिथि मनायी गयी। इस अवसर पर सीएचसी अधीक्षक समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर सीएचसी अधीक्षक डॉ. सिद्धार्थ बर्मा ने कहा बाबा साहेब आंबेडकर ने छह दिसंबर एक हज़ार नौ सौ छप्पन को अंतिम सांस ली थी। जिस कारण आज के दिन को 'परिनिर्वाण दिवस' के रूप में मनाया जाता है। आंबेडकर दलित वर्ग को समानता दिलाने के लिए जीवन भर संघर्ष करते रहे। वे दलित समुदाय के लिए एक अलग राजनैतिक पहचान की वकालत करते रहे। छः दिसम्बर, पुण्यतिथि विशेषः यदि आज आंबेडकर होते तो उनका नजरिया क्या होता? देश में डॉ. आंबेडकर की याद में कई कार्यक्रम किए जाते हैं। डॉ. आंबेडकर ने सामाजिक छुआ-छूत और जातिवाद के खात्मे के लिए काफी आंदोलन किए। उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, दलितों और समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए न्यौछावर कर दिया। उन्होंने बताया कि डॉ. #आंबेडकर का जन्म चौदह अप्रैल एक हज़ार आठ सौ इक्यानवे को मध्य प्रदेश के छोटे से गांव महू में हुआ था। उनका परिवार मराठी था और मूल रूप से महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के आंबडवे गांव से था। उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमा बाई था। बाबा साहब का जन्म महार जाति में हुआ था। आंबेडकर डायबिटीज के मरीज थे। छः दिसंबर एक हज़ार नौ सौ छप्पन को उनका दिल्ली में निधन हो गया था। इस मौके पर डॉ. पूजा वर्मा, डॉ. कृपाराम, डॉ. मनीष त्रिपाठी, डॉ. आर जी मिश्रा, डॉ. संकल्प दुबे, डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह, डॉ. सतेन्द्र यादव, चीफ फार्मासिस्ट अवधेश सिंह सेंगर, नर्स मेंटर पदम सिंह, एलटी अंकिता त्रिपाठी, जितेन्द्र शर्मा, राज कुमार, सचिन कुमार, विवेक कुमार, योगेन्द्र सिंह, अमित कुमार, राम किशोर, शिवम, अटल, अनुपम अवस्थी व सतीश चन्द्र आदि स्वास्थ्य कर्मीयों ने डॉ. आंबेडकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
सूरजपुर(नईदुनिया न्यूज)। कलेक्टर दीपक सोनी के द्वारा राज्य शासन के निर्देशों के अनुरूप जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने एवं जिला चिकित्सालय में मासिक दौरे के क्रम में आज जिला चिकित्सालय सूरजपुर का औचक निरी. . . chhattisgarhWed, 22 Jan 2020 07:52 PM (IST) सूरजपुर । वार्षिक विकास योजना को लेकर समय सारिणी का निर्धारण कर दिया गया है। कलेक्टर दीपक सोनी द्वारा जिला, विकासखंड में कार्यशाला का आयोजन किए जाने हेतु तिथि एवं समय का निर्धारण किया गया है, जिसके अनुसार 22 जनवरी 2020 क. . . chhattisgarhWed, 22 Jan 2020 07:50 PM (IST) अंबिकापुर/बिश्रामपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। सूरजपुर जिले के हाथी प्रभावित सोनगरा से लगे ग्राम तुलसी के घंटापारा मोहल्ले में मंगलवार-बुधवार की दरम्यानी रात हाथियों के हमले से वृद्घ की मौत हो गई। मृतक मंगलसाय 63 वर्ष शौच के . . . chhattisgarhWed, 22 Jan 2020 07:24 PM (IST) बिहारपुर । ओड़गी विकासखंड के ग्राम पंचायत बिहारपुर की मतदाता सूची में विसंगति को लेकर तहसीलदार की अनुशंसा पर सचिव नर्मदा पाठक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि ग्राम पंचायत बिहारपुर के मतदाता सूची में. . . chhattisgarhWed, 22 Jan 2020 07:19 PM (IST) बिश्रामपुर (नईदुनिया न्यूज)। ग्राम पंचायत रविंद्रनगर में दो पंचवर्षीय से सरपंच निर्वाचित रही सरपंच प्रत्याशी के पुत्र द्वारा विरोधी सरपंच प्रत्याशी एवं उनके समर्थकों पर आपत्तिजनक पोस्ट सोशल मीडिया में वायरल किए जाने से न. . . chhattisgarhWed, 22 Jan 2020 11:01 AM (IST) बिश्रामपुर। ग्राम कोरेया निवासी लवांगो बाई पति बदउ बिंझिया 49 वर्ष ने सोमवार रात हमला नामक कीटनाशक का सेवन कर आत्महत्या कर ली। जयनगर पुलिस मर्ग कायम कर जांच कर रही है। chhattisgarhWed, 22 Jan 2020 11:01 AM (IST) सूरजपुर(नईदुनिया न्यूज)। मतदान कर्मचारियों का प्रशिक्षण जनपद पंचायत प्रेमनगर का शासकीय बालक हॉयर सेकेंडरी स्कूल प्रेमनगर एवं जनपद पंचायत रामानुजनगर का शासकीय बालक हॉयर सेकेंडरी स्कूल रामानुजनगर में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण . . . chhattisgarhWed, 22 Jan 2020 11:01 AM (IST) बिश्रामपुर (नईदुनिया न्यूज)। मंगलवार को बिश्रामपुर-अंबिकापुर हाइवे पर ग्राम अजिरमा में अचानक बाइक चालक के गिरने से अनियंत्रित सफारी वाहन एवं बालू लोड मिनी ट्रक के आपस में टकरा जाने से दोनों वाहन चालकों को गंभीर चोटें आई . . . chhattisgarhWed, 22 Jan 2020 11:00 AM (IST) भटगांव (नईदुनिया न्यूज)। नगर पंचायत जरही व भटगांव के अध्यक्षों का पदभार ग्रहण समारोह मंगलवार को संपन्न हुआ। जरही के नवनिर्वाचित अध्यक्ष बीजू दासन का पदभार ग्रहण समारोह व अध्यक्ष कार्यालय का उद्घाटन समारोह शिक्षा एवं आदिम. . . chhattisgarhWed, 22 Jan 2020 11:00 AM (IST) बिश्रामपुर (नईदुनिया न्यूज)। खनन क्षेत्र में बदलाव पर खान सुरक्षा महानिदेशालय ने ट्रेड यूनियनों को मानसिक रूप से तैयार कर लिया है। कोयला सहित गैस एवं मेटल में सक्रिय यूनियन नेताओं के साथ डीजीएमएस के अधिकारियों ने विस्ता. . . chhattisgarhWed, 22 Jan 2020 11:00 AM (IST)
सूरजपुर। कलेक्टर दीपक सोनी के द्वारा राज्य शासन के निर्देशों के अनुरूप जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने एवं जिला चिकित्सालय में मासिक दौरे के क्रम में आज जिला चिकित्सालय सूरजपुर का औचक निरी. . . chhattisgarhWed, बाईस जनवरी दो हज़ार बीस सात:बावन PM सूरजपुर । वार्षिक विकास योजना को लेकर समय सारिणी का निर्धारण कर दिया गया है। कलेक्टर दीपक सोनी द्वारा जिला, विकासखंड में कार्यशाला का आयोजन किए जाने हेतु तिथि एवं समय का निर्धारण किया गया है, जिसके अनुसार बाईस जनवरी दो हज़ार बीस क. . . chhattisgarhWed, बाईस जनवरी दो हज़ार बीस सात:पचास PM अंबिकापुर/बिश्रामपुर। सूरजपुर जिले के हाथी प्रभावित सोनगरा से लगे ग्राम तुलसी के घंटापारा मोहल्ले में मंगलवार-बुधवार की दरम्यानी रात हाथियों के हमले से वृद्घ की मौत हो गई। मृतक मंगलसाय तिरेसठ वर्ष शौच के . . . chhattisgarhWed, बाईस जनवरी दो हज़ार बीस सात:चौबीस PM बिहारपुर । ओड़गी विकासखंड के ग्राम पंचायत बिहारपुर की मतदाता सूची में विसंगति को लेकर तहसीलदार की अनुशंसा पर सचिव नर्मदा पाठक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि ग्राम पंचायत बिहारपुर के मतदाता सूची में. . . chhattisgarhWed, बाईस जनवरी दो हज़ार बीस सात:उन्नीस PM बिश्रामपुर । ग्राम पंचायत रविंद्रनगर में दो पंचवर्षीय से सरपंच निर्वाचित रही सरपंच प्रत्याशी के पुत्र द्वारा विरोधी सरपंच प्रत्याशी एवं उनके समर्थकों पर आपत्तिजनक पोस्ट सोशल मीडिया में वायरल किए जाने से न. . . chhattisgarhWed, बाईस जनवरी दो हज़ार बीस ग्यारह:एक AM बिश्रामपुर। ग्राम कोरेया निवासी लवांगो बाई पति बदउ बिंझिया उनचास वर्ष ने सोमवार रात हमला नामक कीटनाशक का सेवन कर आत्महत्या कर ली। जयनगर पुलिस मर्ग कायम कर जांच कर रही है। chhattisgarhWed, बाईस जनवरी दो हज़ार बीस ग्यारह:एक AM सूरजपुर। मतदान कर्मचारियों का प्रशिक्षण जनपद पंचायत प्रेमनगर का शासकीय बालक हॉयर सेकेंडरी स्कूल प्रेमनगर एवं जनपद पंचायत रामानुजनगर का शासकीय बालक हॉयर सेकेंडरी स्कूल रामानुजनगर में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण . . . chhattisgarhWed, बाईस जनवरी दो हज़ार बीस ग्यारह:एक AM बिश्रामपुर । मंगलवार को बिश्रामपुर-अंबिकापुर हाइवे पर ग्राम अजिरमा में अचानक बाइक चालक के गिरने से अनियंत्रित सफारी वाहन एवं बालू लोड मिनी ट्रक के आपस में टकरा जाने से दोनों वाहन चालकों को गंभीर चोटें आई . . . chhattisgarhWed, बाईस जनवरी दो हज़ार बीस ग्यारह:शून्य AM भटगांव । नगर पंचायत जरही व भटगांव के अध्यक्षों का पदभार ग्रहण समारोह मंगलवार को संपन्न हुआ। जरही के नवनिर्वाचित अध्यक्ष बीजू दासन का पदभार ग्रहण समारोह व अध्यक्ष कार्यालय का उद्घाटन समारोह शिक्षा एवं आदिम. . . chhattisgarhWed, बाईस जनवरी दो हज़ार बीस ग्यारह:शून्य AM बिश्रामपुर । खनन क्षेत्र में बदलाव पर खान सुरक्षा महानिदेशालय ने ट्रेड यूनियनों को मानसिक रूप से तैयार कर लिया है। कोयला सहित गैस एवं मेटल में सक्रिय यूनियन नेताओं के साथ डीजीएमएस के अधिकारियों ने विस्ता. . . chhattisgarhWed, बाईस जनवरी दो हज़ार बीस ग्यारह:शून्य AM
विराट कोहलीः आईपीएल 2023 (IPL 2023) का 56वां मुकाबला राजस्थान रॉयल्स और कोलकाता नाईट राडर्स (RR vs KKR) के बीच खेला गया. इस मैच में संजू सैमसन ने टॉस जीतकर कोलकाता को पहले बल्लेबाज़ी करने का न्योता दिया। केकेआर ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए राजस्थान के सामने 150 रनों का लक्ष्य रखा था. तो वहीं लक्ष्य का पीछा करने उतरे राजस्थान के सलामी बल्लेबाज़ यशस्वी जायसवाल ने केकेआर के गेंदबाजी क्रम की धज्जियां उड़ा कर रख दी। उन्होंने अपने आग उगलते बल्ले से सिर्फ 13 गेंदों में आईपीएल के इतिहास की सबसे तेज़ फिफ्टी जड़कर सभी को हैरान कर दिया। उनकी इस तूफानी बल्लेबाज़ी को देख हर कोई उनका दीवाना बन चुका है. रन मशीन कहलाए जाने वाले विराट कोहली (Virat Kohli) भी यशस्वी जायसवाल (Yashasvi Jaiswal) की आतिशी पारी के फैन हो गए. विराट ने यशस्वी जायसवाल की तारीफ करते हुए एक खास पोस्ट भी किया है. केकेआर के खिलाफ तूफानी बल्लेबाज़ी करते हुए यशस्वी जायसवाल ने सबसे तेज़ अर्शतक जड़ने का कीर्तिमान अपने नाम कर लिया। इस मामले में यशस्वी ने यह बड़ा कारनामा करते हुए भारतीय बल्लेबाज़ केएल राहुल और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी पैट कमिंस का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। गौरतलब है कि केकेआर के खिलाफ इस मुकाबले में यशस्वी ने 208. 51 स्ट्राइक रेट से बल्लेबज़ी की. उन्होंने 47 गेंदों का सामने करते हुए 98 रन बनाकर राजस्थान को शानदार जीत दिलाई। जायसवाल का साथ देते हुए कप्तान संजू सैमसन ने भी 165. 51 के स्ट्राइक रेट ने 48 रन बनाकर सिर्फ 13. 1 ओवर में ही मैच खत्म किया। हालांकि जहां यशस्वी अपना शतक पूरा करने में 2 रनों से चूक गए तो वहीं सैमसन भी 2 रनों के रहते अपना अर्धशतक बनाने में नाकाम रहे.
विराट कोहलीः आईपीएल दो हज़ार तेईस का छप्पनवां मुकाबला राजस्थान रॉयल्स और कोलकाता नाईट राडर्स के बीच खेला गया. इस मैच में संजू सैमसन ने टॉस जीतकर कोलकाता को पहले बल्लेबाज़ी करने का न्योता दिया। केकेआर ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए राजस्थान के सामने एक सौ पचास रनों का लक्ष्य रखा था. तो वहीं लक्ष्य का पीछा करने उतरे राजस्थान के सलामी बल्लेबाज़ यशस्वी जायसवाल ने केकेआर के गेंदबाजी क्रम की धज्जियां उड़ा कर रख दी। उन्होंने अपने आग उगलते बल्ले से सिर्फ तेरह गेंदों में आईपीएल के इतिहास की सबसे तेज़ फिफ्टी जड़कर सभी को हैरान कर दिया। उनकी इस तूफानी बल्लेबाज़ी को देख हर कोई उनका दीवाना बन चुका है. रन मशीन कहलाए जाने वाले विराट कोहली भी यशस्वी जायसवाल की आतिशी पारी के फैन हो गए. विराट ने यशस्वी जायसवाल की तारीफ करते हुए एक खास पोस्ट भी किया है. केकेआर के खिलाफ तूफानी बल्लेबाज़ी करते हुए यशस्वी जायसवाल ने सबसे तेज़ अर्शतक जड़ने का कीर्तिमान अपने नाम कर लिया। इस मामले में यशस्वी ने यह बड़ा कारनामा करते हुए भारतीय बल्लेबाज़ केएल राहुल और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी पैट कमिंस का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। गौरतलब है कि केकेआर के खिलाफ इस मुकाबले में यशस्वी ने दो सौ आठ. इक्यावन स्ट्राइक रेट से बल्लेबज़ी की. उन्होंने सैंतालीस गेंदों का सामने करते हुए अट्ठानवे रन बनाकर राजस्थान को शानदार जीत दिलाई। जायसवाल का साथ देते हुए कप्तान संजू सैमसन ने भी एक सौ पैंसठ. इक्यावन के स्ट्राइक रेट ने अड़तालीस रन बनाकर सिर्फ तेरह. एक ओवर में ही मैच खत्म किया। हालांकि जहां यशस्वी अपना शतक पूरा करने में दो रनों से चूक गए तो वहीं सैमसन भी दो रनों के रहते अपना अर्धशतक बनाने में नाकाम रहे.
उप-खज़ानों में प्राप्त थीं, का आभारी होना चाहिए । इस सम्बन्ध में डाकखाने की युद्ध सम्बन्धी ऋण शाखा और कैश सर्टिफिकेट की प्ररणाली, जिसे सरकार की ऋण नीति में स्थान मिला था, विशेष उल्लेखनीय है । ट्रेजरी बिल १९१४-१८ की लड़ाई की देन थे, जो सर्वप्रथम १९१७ के ब्रिटिश युद्ध - कार्यालय की तरफ से सरकार द्वारा वितरण के लिए जारी किये गएं । युद्धोत्तरकाल में आय की कमी पूरी करने के लिए ये फिर जारी किये गए थे, जबकि पुराने बिलों की रक़म नये बिल जारी करके अदा की गई थी । अन्त में ट्रेजरी बिल की बहुत बड़ी बकाया रकम लम्बी अवधि के ऋरण से प्राप्त धनों द्वारा दी गई, जोकिं अंच्छे अर्थ - प्रबन्ध की दृष्टि से थी। १९२६-३० से ट्रेजरी बिल का जारी करना केन्द्रीय अर्थ - प्रवन्ध का एक साधारण कार्य हो गया है । १ फरवरी, १९४१ से छः वर्षीय सुरक्षापत्र (डिफ़ेन्स-बॉण्ड) के स्थान पर ३% का दूसरा सुरक्षा ऋरण (डिफेन्स लोन) अधिक के लिए जारी किया गया । १६४२-४३ में सुरक्षा ऋरण में लोगों ने ११५ करोड़ रुपया लगाया । बाद में तीसरा, चौया तथा अनेक ऋरण जारी किये गए, जिनमें १६४३-४४ में कुल २७६ करोड़ रुपया जमा हुआ और यदि युद्ध - प्रारम्भ काल से ही हिसाव लगाया जाए तो कुल ५४७ करोड़ रुपया जमा हुआ। ऊपर वरिंगत ऋणों में अतिरिक्त सरकारी कर्मचारियों के लिए डिफेन्स सर्विस प्राविडेण्ट फण्ड आरम्भ किया गया, जिससे सरकारी कर्मचारियों के लिए नियमित रूप से रुपया जमा करने की सुविधा हो गई । एक सरल ढंग सर्वसाधाररण के लिए रुपया जमा करने का पोस्ट ऑफ़िस डिफ़ेन्स सेविग्ज़ बैंक अकाउण्ट की नई योजना द्वारा प्रचलित किया गया, जिसमें जमा किया हुश्रा रुपया माँगने पर नहीं बल्कि युद्ध- समाप्ति के एक वर्ष बाद मिले सकता था । इसे प्रोत्साहित करने के लिए इसमें व्याज की दर साधारण पोस्ट सेविंग्ज बैंक अकाउण्ट से १% अधिक रखी गई । १९३७-३८ से भारत के लोक ॠरण को निम्न मुख्य विशेषताएँ रही हैं - ( १ ) ब्याज वहन करने वाले भारत सरकार के ऋरण की मात्रा में निरन्तर वृद्धि (जिसमें अनिश्चित काल के ॠरण और निश्चित काल के ऋरण सम्मिलित थे ) ; ( २ ) ११४२-४३ तक सावधि और विना अवधि के ऋरण की मात्रा में, जो किसी सीमा तक स्टलिंग ॠरण की दगी के सम्बन्ध में प्रचलित किये गए थे, निरन्तर वृद्धि; (३) १९४२-४३ तकं अल्पकालीन ऋरण में वृद्धि, जिसका प्रतिनिधित्व ट्रेजरी बिल द्वारा किया जा रहा था, जिसकी मात्रा युद्ध के पहले से ६ गुंनी बढ़ गई थी जो स्टलिंग ॠरण की अदायगी के लिए प्रचलित किये गए थे ; ( ४ ) अगले चार वर्ष में अल्पकालीन ऋरण में कमी होना और अनिश्चित काल के ॠरण की मात्रा में वृद्धि; (५) १९४२-४३ तक छोटी मात्रा में वचत में कमी, पर वाद के वर्षों में फिर से मात्रा बढ़ना (विशेषकर नेशनल सेविंग्ज सर्टीफिकेट के प्रचलन के कारण); और (६) स्टलिंग ऋण का अन्त, जो युद्ध के समय में रुपये के ऋरण से बढ़ गया था, श्रादि ।
उप-खज़ानों में प्राप्त थीं, का आभारी होना चाहिए । इस सम्बन्ध में डाकखाने की युद्ध सम्बन्धी ऋण शाखा और कैश सर्टिफिकेट की प्ररणाली, जिसे सरकार की ऋण नीति में स्थान मिला था, विशेष उल्लेखनीय है । ट्रेजरी बिल एक हज़ार नौ सौ चौदह-अट्ठारह की लड़ाई की देन थे, जो सर्वप्रथम एक हज़ार नौ सौ सत्रह के ब्रिटिश युद्ध - कार्यालय की तरफ से सरकार द्वारा वितरण के लिए जारी किये गएं । युद्धोत्तरकाल में आय की कमी पूरी करने के लिए ये फिर जारी किये गए थे, जबकि पुराने बिलों की रक़म नये बिल जारी करके अदा की गई थी । अन्त में ट्रेजरी बिल की बहुत बड़ी बकाया रकम लम्बी अवधि के ऋरण से प्राप्त धनों द्वारा दी गई, जोकिं अंच्छे अर्थ - प्रबन्ध की दृष्टि से थी। एक हज़ार नौ सौ छब्बीस-तीस से ट्रेजरी बिल का जारी करना केन्द्रीय अर्थ - प्रवन्ध का एक साधारण कार्य हो गया है । एक फरवरी, एक हज़ार नौ सौ इकतालीस से छः वर्षीय सुरक्षापत्र के स्थान पर तीन% का दूसरा सुरक्षा ऋरण अधिक के लिए जारी किया गया । एक हज़ार छः सौ बयालीस-तैंतालीस में सुरक्षा ऋरण में लोगों ने एक सौ पंद्रह करोड़ रुपया लगाया । बाद में तीसरा, चौया तथा अनेक ऋरण जारी किये गए, जिनमें एक हज़ार छः सौ तैंतालीस-चौंतालीस में कुल दो सौ छिहत्तर करोड़ रुपया जमा हुआ और यदि युद्ध - प्रारम्भ काल से ही हिसाव लगाया जाए तो कुल पाँच सौ सैंतालीस करोड़ रुपया जमा हुआ। ऊपर वरिंगत ऋणों में अतिरिक्त सरकारी कर्मचारियों के लिए डिफेन्स सर्विस प्राविडेण्ट फण्ड आरम्भ किया गया, जिससे सरकारी कर्मचारियों के लिए नियमित रूप से रुपया जमा करने की सुविधा हो गई । एक सरल ढंग सर्वसाधाररण के लिए रुपया जमा करने का पोस्ट ऑफ़िस डिफ़ेन्स सेविग्ज़ बैंक अकाउण्ट की नई योजना द्वारा प्रचलित किया गया, जिसमें जमा किया हुश्रा रुपया माँगने पर नहीं बल्कि युद्ध- समाप्ति के एक वर्ष बाद मिले सकता था । इसे प्रोत्साहित करने के लिए इसमें व्याज की दर साधारण पोस्ट सेविंग्ज बैंक अकाउण्ट से एक% अधिक रखी गई । एक हज़ार नौ सौ सैंतीस-अड़तीस से भारत के लोक ॠरण को निम्न मुख्य विशेषताएँ रही हैं - ब्याज वहन करने वाले भारत सरकार के ऋरण की मात्रा में निरन्तर वृद्धि ; एक हज़ार एक सौ बयालीस-तैंतालीस तक सावधि और विना अवधि के ऋरण की मात्रा में, जो किसी सीमा तक स्टलिंग ॠरण की दगी के सम्बन्ध में प्रचलित किये गए थे, निरन्तर वृद्धि; एक हज़ार नौ सौ बयालीस-तैंतालीस तकं अल्पकालीन ऋरण में वृद्धि, जिसका प्रतिनिधित्व ट्रेजरी बिल द्वारा किया जा रहा था, जिसकी मात्रा युद्ध के पहले से छः गुंनी बढ़ गई थी जो स्टलिंग ॠरण की अदायगी के लिए प्रचलित किये गए थे ; अगले चार वर्ष में अल्पकालीन ऋरण में कमी होना और अनिश्चित काल के ॠरण की मात्रा में वृद्धि; एक हज़ार नौ सौ बयालीस-तैंतालीस तक छोटी मात्रा में वचत में कमी, पर वाद के वर्षों में फिर से मात्रा बढ़ना ; और स्टलिंग ऋण का अन्त, जो युद्ध के समय में रुपये के ऋरण से बढ़ गया था, श्रादि ।
दिल्ली के करोल बाग में एक होटल में सुबह आग लग गई। इस घटना में अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं हैं और अभी राहत-बचाव कार्य जारी है। दिल्ली के करोल बाग में एक होटल में सुबह आग लग गई। इस घटना में अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं हैं और अभी राहत-बचाव कार्य जारी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आज तड़के सुबह करोल बाग के अर्पिता पैलेस होटल में आग लग गई। इस दौरान कम से कम मरने वालों की सख्या 9 हो गई है। घटना स्थल पर दमकल की 27 गाड़ियां इसे बुझाने में जुटी हैं। बता दें कि आग लगने के बाद तीन लोग चौथी मंजिल की खिड़की से कूद गए। इनमें से एक की मौत हो गई। दो जख्मी हैं। कुल होटल में 68 लोग हैं। दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग करोलबाग में गुरुद्वारा रोड स्थित होटल अर्पित पैलेस में लगी। दमकल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आग सुबह चार बजकर 35 मिनट पर लगी। उस पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग की 24 गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। उन्होंने बताया कि नौ लोगों की मौत हुई है और दो गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं 35 लोगों को बचा लिया गया है। अधिकारी ने बताया कि आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
दिल्ली के करोल बाग में एक होटल में सुबह आग लग गई। इस घटना में अब तक सत्रह लोगों की मौत हो चुकी है। दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं हैं और अभी राहत-बचाव कार्य जारी है। दिल्ली के करोल बाग में एक होटल में सुबह आग लग गई। इस घटना में अब तक सत्रह लोगों की मौत हो चुकी है। दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं हैं और अभी राहत-बचाव कार्य जारी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आज तड़के सुबह करोल बाग के अर्पिता पैलेस होटल में आग लग गई। इस दौरान कम से कम मरने वालों की सख्या नौ हो गई है। घटना स्थल पर दमकल की सत्ताईस गाड़ियां इसे बुझाने में जुटी हैं। बता दें कि आग लगने के बाद तीन लोग चौथी मंजिल की खिड़की से कूद गए। इनमें से एक की मौत हो गई। दो जख्मी हैं। कुल होटल में अड़सठ लोग हैं। दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग करोलबाग में गुरुद्वारा रोड स्थित होटल अर्पित पैलेस में लगी। दमकल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आग सुबह चार बजकर पैंतीस मिनट पर लगी। उस पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग की चौबीस गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। उन्होंने बताया कि नौ लोगों की मौत हुई है और दो गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं पैंतीस लोगों को बचा लिया गया है। अधिकारी ने बताया कि आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
- दिल्ली विश्वविद्यालय के स्टूडेंट्स ने कैंपस में रचाई शादी! बारात से लेकर विदाई तक हुई सभी रस्में, Video वायरलZara Hatke । Written by: संज्ञा सिंह ।बुधवार अप्रैल 5, 2023 06:12 AM ISTकैंपस में छात्रों ने एक नकली शादी (Fake Wedding) का आयोजन किया, जिसमें दो स्टूडेंट्स ने दूल्हा-दुल्हन और बाकियों ने बारातियों और रिश्तेदारों की भूमिका निभाई. - पाकिस्तानी छात्रों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में धूमधाम से करवाई दो सीनियर्स की 'शादी'! वायरल Video देख भड़के यूजर्स, बोले- मुजरा बाकी है. . . Zara Hatke । Written by: संज्ञा सिंह ।शनिवार मार्च 18, 2023 07:39 AM ISTलॉर्ड आर्यन द्वारा शेयर किए गए एक ट्वीट में बैश के कुछ अंश शेयर किए गए. छात्र लोकप्रिय बॉलीवुड गानों पर नाचते और नकली दूल्हा और दुल्हन के साथ मस्ती करते नजर आते हैं.
- दिल्ली विश्वविद्यालय के स्टूडेंट्स ने कैंपस में रचाई शादी! बारात से लेकर विदाई तक हुई सभी रस्में, Video वायरलZara Hatke । Written by: संज्ञा सिंह ।बुधवार अप्रैल पाँच, दो हज़ार तेईस छः:बारह AM ISTकैंपस में छात्रों ने एक नकली शादी का आयोजन किया, जिसमें दो स्टूडेंट्स ने दूल्हा-दुल्हन और बाकियों ने बारातियों और रिश्तेदारों की भूमिका निभाई. - पाकिस्तानी छात्रों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में धूमधाम से करवाई दो सीनियर्स की 'शादी'! वायरल Video देख भड़के यूजर्स, बोले- मुजरा बाकी है. . . Zara Hatke । Written by: संज्ञा सिंह ।शनिवार मार्च अट्ठारह, दो हज़ार तेईस सात:उनतालीस AM ISTलॉर्ड आर्यन द्वारा शेयर किए गए एक ट्वीट में बैश के कुछ अंश शेयर किए गए. छात्र लोकप्रिय बॉलीवुड गानों पर नाचते और नकली दूल्हा और दुल्हन के साथ मस्ती करते नजर आते हैं.
कई बार डायबिटीज में लोग कई ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिसकी वजह से उनका ब्लड शुगर लेवल बहुत अधिक बढ़ जाता है। यहां पढ़ें कुछ ऐसी ही कॉमन मिस्टेक्स के बारे में। कई बार डायबिटीज में लोग कई ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिसकी वजह से उनका ब्लड शुगर लेवल बहुत अधिक बढ़ जाता है। यहां पढ़ें कुछ ऐसी ही कॉमन मिस्टेक्स के बारे में। Diabetes home remedies: डायबिटीज को दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन ये दवाएं कई बार सेहत को भी कुछ नुकसान पहुंचा देती है। जानें डायबिटीज को कंट्रोल करने के घरेलू नुस्खों के बारे में। एक स्टडी के अनुसार, जो लोग नियमित 20 ग्राम तक चौलाई की सब्जी खाते हैं उन्हें अपना ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करने में सहायता होती है। जानें क्यों डायबिटीज के मरीजों को खजूर का सेवन बहुत ही सावधानी के साथ और सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। ग्लूकोज लेवल को तेजी से बढ़ने से रोकने के लिए किस तरह का नाश्ता खाना चाहिए और किस तरह से आप पूरे दिन भर के लिए अपना शुगर लेवल अंडर कंट्रोल रख सकते हैं। Sign of frequent urination in hindi: बार-बार पेशाब आना कई बार किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है, जिसका जल्द से जल्द इलाज करना बहुत जरूरी होता है। कुछ फलों में नेचुरल शुगर के साथ कई ऐसे तत्व भी पाए जाते हैं जो डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकते हैं। Brown rice tea for diabetes: डायबिटीज के मरीजो के लिए चावल की चाय का सेवन करना काफी फायदेमंद हो सकता है, जो बढ़ते ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती है। Side Effects of Curd: दही पाचन के लिए काफी अच्छा होता है, लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से आपके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। आइए जानते हैं दही का अधिक सेवन करने के नुकसान क्या हैं? Flour for diabetes: बढ़ते शुगर को कंट्रोल करने के लिए कुछ अनाज को मिक्स करके उनके आटे का सेवन किया जा सकता है और डायबिटीज में यह काफी फायदेमंद भी रहता है। जानें किन-किन अनाजों का मिक्स आटा खाना चाहिए। डायबिटीज में नियमित रूप से योग करने से स्वास्थ्य में काफी हद तक सुधार लाया जा सकता है। Dry Fruits benefits: ड्राई फ्रूट्स हमारी हेल्दी डाइट का हिस्सा हैं और अगर इनका सेवन पानी में भिगोकर किया जाए तो ये और भी ज्यादा फायदेमंद रहते हैं। जानें कौन से ड्राई फ्रूट्स को पानी में भिगोकर खाने से फायदा मिलता है। Nuts in Diabetes : कुछ नट्स में विटामिन्स, मिनरल्स, फाइबर, कैल्शियम के साथ मौजूद अनसैच्यूरेटेड फैट आपके ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के साथ-साथ शरीर के दूसरे अंगों के लिए भी फायदेमंद होता है। Diabetes Diet In Winter In Hindi: सर्दियों का मौसम भी डायबिटीज को प्रभावित कर सकता है इसलिए इस मौसम में खुद को हेल्दी रखने के लिए यह टिप्स जरूर फॉलो करें। Black grapes for diabetes: बढ़ते ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए अपनी डाइट में काले अंगूर को शामिल करना काफी फायदेमंद रहता है। इस लेख में जानें डायबिटीज के मरीजों के लिए काले अंगूर खाने के फायदे। डायबिटीज के मरीज अक्सर इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि उन्हें किशमिश खाना चाहिेए या नहीं और कहीं मीठे किशमिश खाने की वजह से उनका ब्लड शुगर लेवल तो नहीं बढ़ जाएगा। Vitamins in diabetes: हाई ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए शरीर में कुछ खास प्रकार के विटामिनों का होना भी बहुत जरूरी है। चलिए जानते हैं, डायबिटीज के मरीजों के लिए कौन से फूड्स जरूरी हैं। Diabetes Drink : ब्लड शुगर के बढ़ने की एक वजह ये भी है कि आपके शरीर में मौजूद कैलोरी की मात्रा को बर्न न कर पाना। इसी वजह से हमारे ब्लड में शुगर की मात्रा दिन ब दिन बढ़ती जाती है। red aloe vera benefits: एलोवेरा के फायदों के बारे में तो आप जानते ही होंगे, लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि रेड एलोवेरा उससे दोगुना ताकतवर होता है। चलिए जानते हैं रेड एलोवेरा से घर पर किन बीमारियों का इलाज किया जा सकता है और इसका इस्तेमाल कैसे करें। BGR-34 tablet uses : एम्स के बड़े डॉक्टरों का दावा डायबिटीज के लिए आयुर्वेदिक दवा 'BGR-34' न सिर्फ ब्लड शुगर कंट्रोल करने में प्रभावी है बल्कि ये मोटापा भी कम कर सकती है। एम्स के डॉक्टरों ने पाया है कि डायबिटीज से निपटने वाली BGR-34 हर्बल दवा अन्य समस्याओं में भी फायदेमंद है। किचन में आसानी से मिलने वाला अदरक ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाला फूड है। जानें डायबिटीज में इसके सेवन के सही तरीके। शोधकर्ताओं के अनुसार, दुनियाभर में जिन 10 देशों में टाइप 1 डायबिटीज के मरीज सबसे अधिक हैं उनमें, अमेरिका, ब्राजील, चीन, जर्मनी और रूस के अलावा भारत भी शमिल हैं। इन 10 देशों में ही टाइप 1 डायबिटीज के लगभग 60 प्रतिशत मरीज (diabetes patients in the world) बसते हैं। High fiber indian snacks: फाइबर से भरपूर स्नैक्स आपके पेट को भरा-भरा रखते हैं। इससे क्रेविंग नहीं होती और आपको ज्यादा खाने का भी मन नहीं करेगा। शोधकर्ताओं ने पाया है कि वे लोग, जो सुबह देर से उठते हैं उनमें फैट को एनर्जी के लिए यूज करने की क्षमता बहुत कम हो जाती है, जिसकी वजह से शरीर में फैट जमा होने लगता है, जिसकी वजह से रोगों का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं और ब्लड शुगर तो नियंत्रित रखना चाहते हैं तो इसके लिए यहां हम आपको एक बेहतरीन लंच आइडिया शेयर कर रहे हैं। Vitamin B1 in Diabetes : शोध के मुताबिक, विटामिन बी1 (थियामिन) सप्लीमेंटशन, विशेषतौर पर रोजाना तीन महीने तक 100 से 900 एमजी की डोज से टाइप-2 डायबिटीज रोगियों में ग्लाइसिमिक परिणामों पर कोई खास असर नहीं पड़ता है। टाइप-2 डायबिटीज कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का एक प्रमुख कारण है, जिसमें ह्रदय रोग, किडनी से जुड़े रोग और स्ट्रोक शामिल है। ये स्थिति कुछ कैंसर के खतरे को बढ़ाने से भी जुड़ी हुई है। कुछ स्टडीज के अनुसार, स्पिरुलिना में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो डायबिटीज और ओबेसिटी जैसी परेशानियों से राहत दिलाता है। डायबिटीज और स्वस्थ जीवन शैली वाले व्यक्तियों में डायबिटीज और अस्वस्थ जीवनशैली वाले लोगों की तुलना में डिमेंशिया विकसित होने की संभावना 45 प्रतिशत कम थी। Herbs For Diabetes In Hindi: डायबिटीज की समस्या से आजकल ज्यादातर लोग परेशान है. डायबिटीज एक कॉमन बीमारियों में से एक हो चुकी है. इस समस्या को कम करने में आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां काफी हद तक मददगार हो सकती हैं. बहेड़ा के सेवन से शरीर की एनर्जी बढ़ती है और ये सूजन को कम करने में भी मददगार है। आइए जानते हैं किन बीमारियों में हम इसका सेवन कर सकते हैं। Benefits of saag: साग स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है, लेकिन आज हम आपको ऐसे खास प्रकार के हरे साग के बारे में बताने वाले हैं, जिसकी मदद से कई बीमारियों को दूर किया जा सकता है। Foods in diabetes: डायबिटीज के मरीजों के लिए अक्सर ये प्रश्न ये होता है कि हम ऐसा क्या खाएं जिससे शुगर कंट्रोल रहे। ऐसे में इन फूड्स का सेवन कर सकते हैं। Plant in diabetes treatment : ये पौधा आपको अपने आस-पास दिखाई नहीं देगा क्योंकि आप इसके बारे में मामूली तौर पर ही जानते होंगे। पंदन, एक ऐसा पौधा है, जो आपको ब्लड शुगर में काफी आराम पहुंचा सकता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए प्रकृति से प्राप्त कुछ पौधों के पत्ते चबाना लाभकारी हो सकता है, इससे उनके ब्लड शुगर लेवल में काफी सुधार देखने को मिल सकता है। डायबिटीज कैंसर के इलाज को लम्बे समय तक के लिए बढ़ा सकता है या इलाज के दौरान संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकता है। आइए जानते हैं कैसे कैंसर रोगी डायबिटीज को बिगाड़ सकती है। कई बॉलीवुड सेलिब्रिटीज डायबिटीज से पीड़ित तो हैं लेकिन, वे इसे कंट्रोल में रखने के लिए विभिन्न उपाय और एहतियात भी बरतते हैं। डायबिटीज है, तो शुगर लेवल को बढ़ने से रोकने के उपाय जरूर अपनाने चाहिए। शुगर लेवल हाई होना डायबिटीज के रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है। आप नीचे बताए गए आसान से टिप्स को नियमित रूप से फॉलो करके अपना शुगर लेवल कंट्रोल में रख सकते हैं। Vegetable Juice For Diabetes: डायबिटीज रोगियों के लिए अपना ब्लड शुगर कंट्रोल करना थोड़ा मुश्किल होता है, यहां हम आपको चार सब्जियों के जूस के बारे में बता रहे हैं, जो आपका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रखेंगे। यहां पढ़ें कुछ ऐसी डाइट टिप्स जो त्योहारों, दावतों और शादियों के समय में मधुमेह रोगियों को अपना ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रखने में मदद कर सकती हैं। (Diet Tips For Diabetes Control during festive season) डायबिटीज के मरीजों को कई बार ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है जहां अचानक से उनका ब्लड शुगर लेवल बहुत अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में काम आ सकतो हैं ये उपाय। ( Best Juices for Diabetics) यहां पढ़े ऐसे हेल्दी ड्रिंक्स के बारे में जो हर मौसम में समान रुप से फायदेमंद हैं और इन्हें बनाना भी आसान है। (Healthy Drinks To Have On Empty Stomach) टाइप टू डायबिटीज में अगर ब्लड शुगर को नियंत्रित ना रखा जाए तो वह आपके लिए जानलेवा भी हो सकता है इसलिए जरूरी है कि आप अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें। अगर आप डायबिटीज पेशेंट हैं और आपको मीठी चीजें खाने का मन करता है तो जरूरी है कि आप इसके कारणों को समझें और उसे ठीक करने का प्रयास करें। अगर आप अपने घटते बढ़ते ब्लड शुगर लेवल से परेशान हैं तो यहां हम आपको चार ऐसी टेस्टी चाय के बारे में बता रहे हैं जिनके सेवन से आप अपने ब्लड शुगर लेवल को आसानी से नियंत्रित रख पाएंगे। यहां पढ़ें ब्रेकफास्ट में खायी जानेवाली ऐसी ही 5 चीज़ों के बारे में जो डायबिटिक्स के लिए हैं बहुत नुकसानदायक और इनसे परहेज करना है उनके लिए महत्वपूर्ण। (Worst Breakfast Foods For Diabetics ) त्योहारों पर डायबिटीज के मरीजों को अपने खानपान पर थोड़ा कंट्रोल करना चाहिए। हालांकि, ऐसा करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। यदि आप जन्माष्टमी (Janmashtami 2021) का आनंद पूरा उठाना चाहते हैं, तो खानपान में इन बातों को फॉलो करके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने से रोक सकते हैं। कुछ योग के बारे में बताते हैं, जिन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करके डायबिटीज को मैनेज कर सकते हैं। जानें, कौन से हैं वे योगासन जो शुगर लेवल के साथ ही डायबिटीज (Yogasan For Diabetes Patients) को भी कंट्रोल में रखते हैं। अगर नैचुरल तरीकों से आप हाई ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करना चाहते हैं तो इन पौधों की पत्तियों का सेवन कर सकते हैं। (Plants that helps to control diabetes ) आज हम आपके सामने एक ऐसी लिस्ट ले कर आए हैं जिसके माध्यम से आप सबसे अधिक शुगर से भरपूर और सबसे कम शुगर युक्त वाले फलों के बारे में जान सकेंगे। जी भर के पानी पीने के बाद भी अगर आपको शरीर में डिहाइड्रेशन (Dehydration in Summer) के लक्षण दिखते हैं तो आप किसी बीमारी के शिकार हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर या एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए।
कई बार डायबिटीज में लोग कई ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिसकी वजह से उनका ब्लड शुगर लेवल बहुत अधिक बढ़ जाता है। यहां पढ़ें कुछ ऐसी ही कॉमन मिस्टेक्स के बारे में। कई बार डायबिटीज में लोग कई ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिसकी वजह से उनका ब्लड शुगर लेवल बहुत अधिक बढ़ जाता है। यहां पढ़ें कुछ ऐसी ही कॉमन मिस्टेक्स के बारे में। Diabetes home remedies: डायबिटीज को दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन ये दवाएं कई बार सेहत को भी कुछ नुकसान पहुंचा देती है। जानें डायबिटीज को कंट्रोल करने के घरेलू नुस्खों के बारे में। एक स्टडी के अनुसार, जो लोग नियमित बीस ग्राम तक चौलाई की सब्जी खाते हैं उन्हें अपना ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करने में सहायता होती है। जानें क्यों डायबिटीज के मरीजों को खजूर का सेवन बहुत ही सावधानी के साथ और सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। ग्लूकोज लेवल को तेजी से बढ़ने से रोकने के लिए किस तरह का नाश्ता खाना चाहिए और किस तरह से आप पूरे दिन भर के लिए अपना शुगर लेवल अंडर कंट्रोल रख सकते हैं। Sign of frequent urination in hindi: बार-बार पेशाब आना कई बार किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है, जिसका जल्द से जल्द इलाज करना बहुत जरूरी होता है। कुछ फलों में नेचुरल शुगर के साथ कई ऐसे तत्व भी पाए जाते हैं जो डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकते हैं। Brown rice tea for diabetes: डायबिटीज के मरीजो के लिए चावल की चाय का सेवन करना काफी फायदेमंद हो सकता है, जो बढ़ते ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती है। Side Effects of Curd: दही पाचन के लिए काफी अच्छा होता है, लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से आपके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। आइए जानते हैं दही का अधिक सेवन करने के नुकसान क्या हैं? Flour for diabetes: बढ़ते शुगर को कंट्रोल करने के लिए कुछ अनाज को मिक्स करके उनके आटे का सेवन किया जा सकता है और डायबिटीज में यह काफी फायदेमंद भी रहता है। जानें किन-किन अनाजों का मिक्स आटा खाना चाहिए। डायबिटीज में नियमित रूप से योग करने से स्वास्थ्य में काफी हद तक सुधार लाया जा सकता है। Dry Fruits benefits: ड्राई फ्रूट्स हमारी हेल्दी डाइट का हिस्सा हैं और अगर इनका सेवन पानी में भिगोकर किया जाए तो ये और भी ज्यादा फायदेमंद रहते हैं। जानें कौन से ड्राई फ्रूट्स को पानी में भिगोकर खाने से फायदा मिलता है। Nuts in Diabetes : कुछ नट्स में विटामिन्स, मिनरल्स, फाइबर, कैल्शियम के साथ मौजूद अनसैच्यूरेटेड फैट आपके ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के साथ-साथ शरीर के दूसरे अंगों के लिए भी फायदेमंद होता है। Diabetes Diet In Winter In Hindi: सर्दियों का मौसम भी डायबिटीज को प्रभावित कर सकता है इसलिए इस मौसम में खुद को हेल्दी रखने के लिए यह टिप्स जरूर फॉलो करें। Black grapes for diabetes: बढ़ते ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए अपनी डाइट में काले अंगूर को शामिल करना काफी फायदेमंद रहता है। इस लेख में जानें डायबिटीज के मरीजों के लिए काले अंगूर खाने के फायदे। डायबिटीज के मरीज अक्सर इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि उन्हें किशमिश खाना चाहिेए या नहीं और कहीं मीठे किशमिश खाने की वजह से उनका ब्लड शुगर लेवल तो नहीं बढ़ जाएगा। Vitamins in diabetes: हाई ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए शरीर में कुछ खास प्रकार के विटामिनों का होना भी बहुत जरूरी है। चलिए जानते हैं, डायबिटीज के मरीजों के लिए कौन से फूड्स जरूरी हैं। Diabetes Drink : ब्लड शुगर के बढ़ने की एक वजह ये भी है कि आपके शरीर में मौजूद कैलोरी की मात्रा को बर्न न कर पाना। इसी वजह से हमारे ब्लड में शुगर की मात्रा दिन ब दिन बढ़ती जाती है। red aloe vera benefits: एलोवेरा के फायदों के बारे में तो आप जानते ही होंगे, लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि रेड एलोवेरा उससे दोगुना ताकतवर होता है। चलिए जानते हैं रेड एलोवेरा से घर पर किन बीमारियों का इलाज किया जा सकता है और इसका इस्तेमाल कैसे करें। BGR-चौंतीस tablet uses : एम्स के बड़े डॉक्टरों का दावा डायबिटीज के लिए आयुर्वेदिक दवा 'BGR-चौंतीस' न सिर्फ ब्लड शुगर कंट्रोल करने में प्रभावी है बल्कि ये मोटापा भी कम कर सकती है। एम्स के डॉक्टरों ने पाया है कि डायबिटीज से निपटने वाली BGR-चौंतीस हर्बल दवा अन्य समस्याओं में भी फायदेमंद है। किचन में आसानी से मिलने वाला अदरक ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाला फूड है। जानें डायबिटीज में इसके सेवन के सही तरीके। शोधकर्ताओं के अनुसार, दुनियाभर में जिन दस देशों में टाइप एक डायबिटीज के मरीज सबसे अधिक हैं उनमें, अमेरिका, ब्राजील, चीन, जर्मनी और रूस के अलावा भारत भी शमिल हैं। इन दस देशों में ही टाइप एक डायबिटीज के लगभग साठ प्रतिशत मरीज बसते हैं। High fiber indian snacks: फाइबर से भरपूर स्नैक्स आपके पेट को भरा-भरा रखते हैं। इससे क्रेविंग नहीं होती और आपको ज्यादा खाने का भी मन नहीं करेगा। शोधकर्ताओं ने पाया है कि वे लोग, जो सुबह देर से उठते हैं उनमें फैट को एनर्जी के लिए यूज करने की क्षमता बहुत कम हो जाती है, जिसकी वजह से शरीर में फैट जमा होने लगता है, जिसकी वजह से रोगों का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं और ब्लड शुगर तो नियंत्रित रखना चाहते हैं तो इसके लिए यहां हम आपको एक बेहतरीन लंच आइडिया शेयर कर रहे हैं। Vitamin Bएक in Diabetes : शोध के मुताबिक, विटामिन बीएक सप्लीमेंटशन, विशेषतौर पर रोजाना तीन महीने तक एक सौ से नौ सौ एमजी की डोज से टाइप-दो डायबिटीज रोगियों में ग्लाइसिमिक परिणामों पर कोई खास असर नहीं पड़ता है। टाइप-दो डायबिटीज कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का एक प्रमुख कारण है, जिसमें ह्रदय रोग, किडनी से जुड़े रोग और स्ट्रोक शामिल है। ये स्थिति कुछ कैंसर के खतरे को बढ़ाने से भी जुड़ी हुई है। कुछ स्टडीज के अनुसार, स्पिरुलिना में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो डायबिटीज और ओबेसिटी जैसी परेशानियों से राहत दिलाता है। डायबिटीज और स्वस्थ जीवन शैली वाले व्यक्तियों में डायबिटीज और अस्वस्थ जीवनशैली वाले लोगों की तुलना में डिमेंशिया विकसित होने की संभावना पैंतालीस प्रतिशत कम थी। Herbs For Diabetes In Hindi: डायबिटीज की समस्या से आजकल ज्यादातर लोग परेशान है. डायबिटीज एक कॉमन बीमारियों में से एक हो चुकी है. इस समस्या को कम करने में आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां काफी हद तक मददगार हो सकती हैं. बहेड़ा के सेवन से शरीर की एनर्जी बढ़ती है और ये सूजन को कम करने में भी मददगार है। आइए जानते हैं किन बीमारियों में हम इसका सेवन कर सकते हैं। Benefits of saag: साग स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है, लेकिन आज हम आपको ऐसे खास प्रकार के हरे साग के बारे में बताने वाले हैं, जिसकी मदद से कई बीमारियों को दूर किया जा सकता है। Foods in diabetes: डायबिटीज के मरीजों के लिए अक्सर ये प्रश्न ये होता है कि हम ऐसा क्या खाएं जिससे शुगर कंट्रोल रहे। ऐसे में इन फूड्स का सेवन कर सकते हैं। Plant in diabetes treatment : ये पौधा आपको अपने आस-पास दिखाई नहीं देगा क्योंकि आप इसके बारे में मामूली तौर पर ही जानते होंगे। पंदन, एक ऐसा पौधा है, जो आपको ब्लड शुगर में काफी आराम पहुंचा सकता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए प्रकृति से प्राप्त कुछ पौधों के पत्ते चबाना लाभकारी हो सकता है, इससे उनके ब्लड शुगर लेवल में काफी सुधार देखने को मिल सकता है। डायबिटीज कैंसर के इलाज को लम्बे समय तक के लिए बढ़ा सकता है या इलाज के दौरान संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकता है। आइए जानते हैं कैसे कैंसर रोगी डायबिटीज को बिगाड़ सकती है। कई बॉलीवुड सेलिब्रिटीज डायबिटीज से पीड़ित तो हैं लेकिन, वे इसे कंट्रोल में रखने के लिए विभिन्न उपाय और एहतियात भी बरतते हैं। डायबिटीज है, तो शुगर लेवल को बढ़ने से रोकने के उपाय जरूर अपनाने चाहिए। शुगर लेवल हाई होना डायबिटीज के रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है। आप नीचे बताए गए आसान से टिप्स को नियमित रूप से फॉलो करके अपना शुगर लेवल कंट्रोल में रख सकते हैं। Vegetable Juice For Diabetes: डायबिटीज रोगियों के लिए अपना ब्लड शुगर कंट्रोल करना थोड़ा मुश्किल होता है, यहां हम आपको चार सब्जियों के जूस के बारे में बता रहे हैं, जो आपका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रखेंगे। यहां पढ़ें कुछ ऐसी डाइट टिप्स जो त्योहारों, दावतों और शादियों के समय में मधुमेह रोगियों को अपना ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रखने में मदद कर सकती हैं। डायबिटीज के मरीजों को कई बार ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है जहां अचानक से उनका ब्लड शुगर लेवल बहुत अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में काम आ सकतो हैं ये उपाय। यहां पढ़े ऐसे हेल्दी ड्रिंक्स के बारे में जो हर मौसम में समान रुप से फायदेमंद हैं और इन्हें बनाना भी आसान है। टाइप टू डायबिटीज में अगर ब्लड शुगर को नियंत्रित ना रखा जाए तो वह आपके लिए जानलेवा भी हो सकता है इसलिए जरूरी है कि आप अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें। अगर आप डायबिटीज पेशेंट हैं और आपको मीठी चीजें खाने का मन करता है तो जरूरी है कि आप इसके कारणों को समझें और उसे ठीक करने का प्रयास करें। अगर आप अपने घटते बढ़ते ब्लड शुगर लेवल से परेशान हैं तो यहां हम आपको चार ऐसी टेस्टी चाय के बारे में बता रहे हैं जिनके सेवन से आप अपने ब्लड शुगर लेवल को आसानी से नियंत्रित रख पाएंगे। यहां पढ़ें ब्रेकफास्ट में खायी जानेवाली ऐसी ही पाँच चीज़ों के बारे में जो डायबिटिक्स के लिए हैं बहुत नुकसानदायक और इनसे परहेज करना है उनके लिए महत्वपूर्ण। त्योहारों पर डायबिटीज के मरीजों को अपने खानपान पर थोड़ा कंट्रोल करना चाहिए। हालांकि, ऐसा करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। यदि आप जन्माष्टमी का आनंद पूरा उठाना चाहते हैं, तो खानपान में इन बातों को फॉलो करके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने से रोक सकते हैं। कुछ योग के बारे में बताते हैं, जिन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करके डायबिटीज को मैनेज कर सकते हैं। जानें, कौन से हैं वे योगासन जो शुगर लेवल के साथ ही डायबिटीज को भी कंट्रोल में रखते हैं। अगर नैचुरल तरीकों से आप हाई ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करना चाहते हैं तो इन पौधों की पत्तियों का सेवन कर सकते हैं। आज हम आपके सामने एक ऐसी लिस्ट ले कर आए हैं जिसके माध्यम से आप सबसे अधिक शुगर से भरपूर और सबसे कम शुगर युक्त वाले फलों के बारे में जान सकेंगे। जी भर के पानी पीने के बाद भी अगर आपको शरीर में डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखते हैं तो आप किसी बीमारी के शिकार हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर या एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए।
एडिटर्स नोट : यह लेख फेमिनिस्ट अप्रोच टू टेक्नॉलजी के प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ी लड़कियों द्वारा लिखे गए लेखों में से एक है। इन लेखों के ज़रिये बिहार और झारखंड के अलग-अलग इलाकों में रहने वाली लड़कियों ने कोविड-19 के दौरान अपने अनुभवों को दर्शाया है। फेमिनिज़म इन इंडिया और फेमिनिस्ट अप्रोच टू टेक्नॉलजी साथ मिलकर इन लेखों को आपसे सामने लेकर आए हैं अपने अभियान #LockdownKeKisse के तहत। इस अभियान के अंतर्गत यह पांचवा लेख झारखंड के गिरीडीह ज़िले की लक्ष्मी ने लिखा है। एक 14 साल की लड़की है। उसका नाम शिवानी कुमारी है। वह झारखंड के एक छोटे से शहर में रहती है। वह अपने घर के पासवाले सरकारी स्कूल में कक्षा आठवीं में पढ़ती है। शिवानी की मां स्कूल में साफ-सफाई का काम करती हैं और उसके पिता कपड़ों की दुकान में काम करते हैं। अभी पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर छाया हुआ है और सबको इससे बचने के लिए कई सावधानियां बरतने की ज़रूरत है। कोरोना वायरस से सुरक्षित रहने के लिए के लिए हमें अपने हाथ साबुन से 20 सेकंड तक अच्छे से धोना है और मास्क लगाना। साथ ही अपने आस-पास साफ-सफाई रखनी ज़रूरी है। पर इस बीमारी की जानकारी शुरुआत में बहुत कम लोगों को थी कि आखिर यह वायरस है क्या और इससे कैसे बचें। जैसे ही इस बीमारी के कारण पूरे देश में लॉकडाउन हो गया और अचानक सब लोग अपने घर में बंद हो गए। लॉकडाउन लागू होते ही सबको मदद की ज़रूरत महसूस हुई। यह वह समय था जब ज़रूरतमंद ज्यादा और मददगार कम थे। तब शिवानी एक मददगार के रूप में उभरी थी। उसे हमेशा से लोगों की मदद करना बहुत अच्छा लगता है। उसे फिर एक मौका मिल गया था लोगों की मदद करने का। सरकार ने जब स्कूल के छात्र-छात्राओं के बीच साबुन और पैड वितरण करने का निर्णय लिया तो शिवानी सबसे पहले मदद करने पहुंच गई। अपने शिक्षकों और शिक्षिकाओं के साथ मिलकर उसने सभी को बच्चों को साबुन दिया। लड़कियों को साबुन और पैड दोनों दिया गया। यह लॉकडाउन के बीच की बात है। जब ज़िला प्रशासन की तरफ से कोई चीज़ वितरण को आती थी तब कुछ शिक्षक और बच्चे भी स्कूल आते थे। लॉकडाउन के कारण सभी छात्राएं स्कूल नहीं आ पाती थी,खासकर दलित छात्राएं। उन छात्राओं तक सैनिटरी नहीं पहुंच पाता था क्योंकि उनका घर दूर था। वे गांव की तरफ से आती थी। उन तक इसकी जानकारी भी नहीं पहुंची थी कि स्कूल में पैड और साबुन बंट रहे हैं पर कोरोना के समय इन चीज़ों की जरूरत तो सबको थी। ऐसे में शिवानी और उसकी कुछ सहेलियों ने फैसला लिया कि जो लड़कियां लॉकडाउन के कारण स्कूल तक नहीं आ पाई हैं उन तक वे जाएंगी और ये सामना पहुंचाएंगी। अपने दोस्तों के साथ और अपने शिक्षक से अनुमति लेकर शिवानी चल पड़ी इन लड़कियों की मदद करने। बारी-बारी से उसने सबको साबुन और पैड दिया। इस काम के दौरान उसने अपनी सुरक्षा का भी बहुत अच्छे से ध्यान रखा। साथ ही अपने दोस्तों से भी इन नियमों का पालन करवाने की ज़िम्मेदारी उसने अच्छे से निभाई। गाँव में सबको साबुन और पैड के साथ कोरोना वायरस के बारे में भी बताना बड़ी बात है। शिवानी इतना बड़ा काम आराम से कर रही थी। न कोई झिझक न शरम। एक अजीब से उत्साह और निष्ठा से वह अपना काम किए जा रही थी। आमतौर पर देखा जाए तो पैड को लेकर बात करने में लडकियाँ शरमाती हैं, पर शिवानी इत्मीनान से अपने शिक्षकों से जानकारी इकट्ठा करती और अपने दोस्तों के साथ साझा करती थी। यही नहीं, अपने परिवार के साथ भी जानकारी को साझा करती थी जो उस समय में बहुत ही महत्त्वपूर्ण था। शिवानी और उसकी कुछ सहेलियों ने फैसला लिया कि जो लड़कियां लॉकडाउन के कारण स्कूल तक नहीं आ पाई हैं उन तक वे जाएंगी और ये सामान पहुंचाएंगी। अपने दोस्तों के साथ और अपने शिक्षक से अनुमति लेकर शिवानी चल पड़ी इन लड़कियों की मदद करने। शिवानी साहसी तो है ही, होनहार भी है। उम्र छोटी है, पर उसका काम उतना ही बड़ा है। शिवानी की जिंदगी में भी कोरोना वायरस का असर हुआ। जिस परेशानी से उसका परिवार दूर हुआ था, वह इस लॉकडाउन के कारण वापस आ गई। कुछ सालों पहले शिवानी के पिता को एक रिश्तेदार के पास दिल्ली भेज दिया गया था। उनकी बुरी आदत थी शराब पीने की और पीकर घर में मार-पीट, गाली-गलौच करने की। वह अब दिल्ली से वापस आ गए थे। शिवानी और उसका परिवार उनसे परेशान रहने लगा था। वह घर पर दिन भर रहते थे। शराब पीकर अपने परिवार वालों से लड़ाई-झगड़ा करते थे। फिर अपनी पत्नी को और बच्चों को गाली देना, मार-पीट करना शुरू कर देते थे। एक दिन शिवानी की मां काम पर से घर आई और उसके पिता गाली देने लगे। बात बढ़ गई। शिवानी के पिता ने उसकी मां को बहुत बुरी तरीके से पीटा। वह काफी घायल हो गई तो घरवाले बगल में ही रहनेवाले डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर बोले कि चोट काफी लगी है। मलहम पट्टी लगानी होगी। उस समय शायद किसी को घरेलू हिंसा कानून का ख्याल नहीं आया। कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई और इलाज होने के बाद शिवानी की मम्मी घर आ गई। घर में इतना लड़ाई-झगड़ा देखकर बच्चे डर गए थे। कोरोना और लॉकडाउन के कारण यह हिंसा सब झेल रहे थे। दादाजी ने सोचा कि कि शिवानी बात तो सही कह रही है। शिवानी के दादा-दादी ने आपस में बात कि वह उनका अपना ही बेटा है, उसे तो सज़ा भी नहीं दिलवा सकते हैं, ना ही और कोई उपाय है। शिवानी ने जो कहा है वह सही ही है। हमलोग उसे गांव भेज देते हैं। वहां खेती का काम करेगा तो कुछ कमाई भी हो जाएगी और यहां शांति से सब रह पाएंगे क्योंकि उसकी शराब पीने की आदत नहीं छूट रही तो क्या कर सकते हैं। दूसरे दिन शिवानी के पिता को गांव जाने के लिए कहा गया पर उन्होंने इनकार कर दिया। वह शाम को फिर शराब पीकर घर आए और फिर से हंगामा करने लगे। उस समय घर पर सिर्फ शिवानी और उसकी मां मौजूद थी। माता-पिता को लड़ते देखकर शिवानी घबरा गई। एक दिन और उसके पिता शिवानी की मां को बुरी तरह पीट रहे थे। शिवानी से यह देखा नहीं जाता है। ऐसी हालत में उसने बहादुरी दिखाई और बाहर निकलकर आस-पास के लोगों को इकट्ठा कर लिया। लोगों ने बीच-बचाव करके उसकी मां को बचाया। बाद में उसके परिवारवाले घर आए और सीधा उसके पिता को गांव भेज दिया। इस तरह शिवानी ने अपनी सूझ-बूझ से मां को बचा लिया। उसके पिता के गांव जाने के बाद फिलहाल सब लोग चैन की सांस ले रहे हैं।
एडिटर्स नोट : यह लेख फेमिनिस्ट अप्रोच टू टेक्नॉलजी के प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ी लड़कियों द्वारा लिखे गए लेखों में से एक है। इन लेखों के ज़रिये बिहार और झारखंड के अलग-अलग इलाकों में रहने वाली लड़कियों ने कोविड-उन्नीस के दौरान अपने अनुभवों को दर्शाया है। फेमिनिज़म इन इंडिया और फेमिनिस्ट अप्रोच टू टेक्नॉलजी साथ मिलकर इन लेखों को आपसे सामने लेकर आए हैं अपने अभियान #LockdownKeKisse के तहत। इस अभियान के अंतर्गत यह पांचवा लेख झारखंड के गिरीडीह ज़िले की लक्ष्मी ने लिखा है। एक चौदह साल की लड़की है। उसका नाम शिवानी कुमारी है। वह झारखंड के एक छोटे से शहर में रहती है। वह अपने घर के पासवाले सरकारी स्कूल में कक्षा आठवीं में पढ़ती है। शिवानी की मां स्कूल में साफ-सफाई का काम करती हैं और उसके पिता कपड़ों की दुकान में काम करते हैं। अभी पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर छाया हुआ है और सबको इससे बचने के लिए कई सावधानियां बरतने की ज़रूरत है। कोरोना वायरस से सुरक्षित रहने के लिए के लिए हमें अपने हाथ साबुन से बीस सेकंड तक अच्छे से धोना है और मास्क लगाना। साथ ही अपने आस-पास साफ-सफाई रखनी ज़रूरी है। पर इस बीमारी की जानकारी शुरुआत में बहुत कम लोगों को थी कि आखिर यह वायरस है क्या और इससे कैसे बचें। जैसे ही इस बीमारी के कारण पूरे देश में लॉकडाउन हो गया और अचानक सब लोग अपने घर में बंद हो गए। लॉकडाउन लागू होते ही सबको मदद की ज़रूरत महसूस हुई। यह वह समय था जब ज़रूरतमंद ज्यादा और मददगार कम थे। तब शिवानी एक मददगार के रूप में उभरी थी। उसे हमेशा से लोगों की मदद करना बहुत अच्छा लगता है। उसे फिर एक मौका मिल गया था लोगों की मदद करने का। सरकार ने जब स्कूल के छात्र-छात्राओं के बीच साबुन और पैड वितरण करने का निर्णय लिया तो शिवानी सबसे पहले मदद करने पहुंच गई। अपने शिक्षकों और शिक्षिकाओं के साथ मिलकर उसने सभी को बच्चों को साबुन दिया। लड़कियों को साबुन और पैड दोनों दिया गया। यह लॉकडाउन के बीच की बात है। जब ज़िला प्रशासन की तरफ से कोई चीज़ वितरण को आती थी तब कुछ शिक्षक और बच्चे भी स्कूल आते थे। लॉकडाउन के कारण सभी छात्राएं स्कूल नहीं आ पाती थी,खासकर दलित छात्राएं। उन छात्राओं तक सैनिटरी नहीं पहुंच पाता था क्योंकि उनका घर दूर था। वे गांव की तरफ से आती थी। उन तक इसकी जानकारी भी नहीं पहुंची थी कि स्कूल में पैड और साबुन बंट रहे हैं पर कोरोना के समय इन चीज़ों की जरूरत तो सबको थी। ऐसे में शिवानी और उसकी कुछ सहेलियों ने फैसला लिया कि जो लड़कियां लॉकडाउन के कारण स्कूल तक नहीं आ पाई हैं उन तक वे जाएंगी और ये सामना पहुंचाएंगी। अपने दोस्तों के साथ और अपने शिक्षक से अनुमति लेकर शिवानी चल पड़ी इन लड़कियों की मदद करने। बारी-बारी से उसने सबको साबुन और पैड दिया। इस काम के दौरान उसने अपनी सुरक्षा का भी बहुत अच्छे से ध्यान रखा। साथ ही अपने दोस्तों से भी इन नियमों का पालन करवाने की ज़िम्मेदारी उसने अच्छे से निभाई। गाँव में सबको साबुन और पैड के साथ कोरोना वायरस के बारे में भी बताना बड़ी बात है। शिवानी इतना बड़ा काम आराम से कर रही थी। न कोई झिझक न शरम। एक अजीब से उत्साह और निष्ठा से वह अपना काम किए जा रही थी। आमतौर पर देखा जाए तो पैड को लेकर बात करने में लडकियाँ शरमाती हैं, पर शिवानी इत्मीनान से अपने शिक्षकों से जानकारी इकट्ठा करती और अपने दोस्तों के साथ साझा करती थी। यही नहीं, अपने परिवार के साथ भी जानकारी को साझा करती थी जो उस समय में बहुत ही महत्त्वपूर्ण था। शिवानी और उसकी कुछ सहेलियों ने फैसला लिया कि जो लड़कियां लॉकडाउन के कारण स्कूल तक नहीं आ पाई हैं उन तक वे जाएंगी और ये सामान पहुंचाएंगी। अपने दोस्तों के साथ और अपने शिक्षक से अनुमति लेकर शिवानी चल पड़ी इन लड़कियों की मदद करने। शिवानी साहसी तो है ही, होनहार भी है। उम्र छोटी है, पर उसका काम उतना ही बड़ा है। शिवानी की जिंदगी में भी कोरोना वायरस का असर हुआ। जिस परेशानी से उसका परिवार दूर हुआ था, वह इस लॉकडाउन के कारण वापस आ गई। कुछ सालों पहले शिवानी के पिता को एक रिश्तेदार के पास दिल्ली भेज दिया गया था। उनकी बुरी आदत थी शराब पीने की और पीकर घर में मार-पीट, गाली-गलौच करने की। वह अब दिल्ली से वापस आ गए थे। शिवानी और उसका परिवार उनसे परेशान रहने लगा था। वह घर पर दिन भर रहते थे। शराब पीकर अपने परिवार वालों से लड़ाई-झगड़ा करते थे। फिर अपनी पत्नी को और बच्चों को गाली देना, मार-पीट करना शुरू कर देते थे। एक दिन शिवानी की मां काम पर से घर आई और उसके पिता गाली देने लगे। बात बढ़ गई। शिवानी के पिता ने उसकी मां को बहुत बुरी तरीके से पीटा। वह काफी घायल हो गई तो घरवाले बगल में ही रहनेवाले डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर बोले कि चोट काफी लगी है। मलहम पट्टी लगानी होगी। उस समय शायद किसी को घरेलू हिंसा कानून का ख्याल नहीं आया। कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई और इलाज होने के बाद शिवानी की मम्मी घर आ गई। घर में इतना लड़ाई-झगड़ा देखकर बच्चे डर गए थे। कोरोना और लॉकडाउन के कारण यह हिंसा सब झेल रहे थे। दादाजी ने सोचा कि कि शिवानी बात तो सही कह रही है। शिवानी के दादा-दादी ने आपस में बात कि वह उनका अपना ही बेटा है, उसे तो सज़ा भी नहीं दिलवा सकते हैं, ना ही और कोई उपाय है। शिवानी ने जो कहा है वह सही ही है। हमलोग उसे गांव भेज देते हैं। वहां खेती का काम करेगा तो कुछ कमाई भी हो जाएगी और यहां शांति से सब रह पाएंगे क्योंकि उसकी शराब पीने की आदत नहीं छूट रही तो क्या कर सकते हैं। दूसरे दिन शिवानी के पिता को गांव जाने के लिए कहा गया पर उन्होंने इनकार कर दिया। वह शाम को फिर शराब पीकर घर आए और फिर से हंगामा करने लगे। उस समय घर पर सिर्फ शिवानी और उसकी मां मौजूद थी। माता-पिता को लड़ते देखकर शिवानी घबरा गई। एक दिन और उसके पिता शिवानी की मां को बुरी तरह पीट रहे थे। शिवानी से यह देखा नहीं जाता है। ऐसी हालत में उसने बहादुरी दिखाई और बाहर निकलकर आस-पास के लोगों को इकट्ठा कर लिया। लोगों ने बीच-बचाव करके उसकी मां को बचाया। बाद में उसके परिवारवाले घर आए और सीधा उसके पिता को गांव भेज दिया। इस तरह शिवानी ने अपनी सूझ-बूझ से मां को बचा लिया। उसके पिता के गांव जाने के बाद फिलहाल सब लोग चैन की सांस ले रहे हैं।
हैं आप; समय है आठ बजेके आसपासका और याद कर रहे हैं बारह बजेकी - तो भी योगयुक्त नहीं हैं। और बैठे हैं यहाँ, और याद कर रहे हैं श्रीमतीजीकी-तो भी योगयुक्त नहीं हैं। योगयुक्तका अर्थ है- कि सावधान होकरके, पूरे मनोयोगके साथ अपने प्राप्त कर्तव्यका अनुष्ठान करते जाना। राम भजे जा काम किये कालू ते तो बोले- भाई ! जा । तस्मात् सर्वेषु कालेषु योगयुक्तो भवार्जुन । सर्वेषु कालेषु - सब समयमें सावधान, सावधान ! सोनेमें भी सावधान, जागनेमें भी सावधान। सवेरे उठनेमें भी सावधान । शास्त्रमें ऐसे लिखा है - कि नींद टूटते ही पहले किसकी याद करना? बोले- भगवान्की याद करना । धरती पर पाँव रखना, तो कहना - तुम हमारी माँ हो । भगवान्का स्मरण करना, गुरुका स्मरण करना । मांगलिक वस्तुका दर्शन करना - माने अपना सारा दिन मंगलमय काममें व्यतीत करना है। अपने आपको कहीं ऐसी जगह बाँधके रख दिया - कि बस, रोवो, रोवो! हर बातमेंसे दुःख निकाल बैठना; यह कोई जिन्दगीका सार नहीं है; यह जिन्दगीका रहस्य नहीं है। हर जगह अनुकूल भाव होना चाहिए ना। भावकी अनुकूलता हृदयमें आनी चाहिए। योगयुक्त - शंकराचार्य भगवान्ने योगयुक्तका अर्थ समाहित' लिखा है। शंकराचार्य भगवान्का जो भाष्य है ना, तत्काल अविद्या - निवर्तक भाष्य है । वह श्रवण - रूप भाष्य है। मधुसूदनीको मनन बोलते हैं; शंकरानन्दीको निदिध्यासन बोलते हैं। श्रीरामानुजाचार्य ने बतायाअर्चिरादिगतिचिन्तनाक्ष्य योगयुक्तो भव । तो फिर सर्वेषु कालेषु नहीं बनेगा । कहते हैं- कि अर्चिमार्ग ऐसा, पितृयान मार्ग ऐसा, देवयान मार्ग ऐसा- इसका निरन्तर चिन्तन करना - ऐसा 'योगयुक्त 'का अर्थ है । और शंकराचार्यने कहा - कि हर समय अपने चित्तको समाहित रखो । आप देखो! दोनोंमें जो फर्क है, वह आपकी बुद्धिमें स्वयं आ जायेगा । देवयान और पितृयान मार्गका निरन्तर चिन्तन कोई मनुष्य काहेको करेगा ? तो जो काम करना हो, वह सावधान होकरके करो। ऐसा करनेसे क्या होगा? बोले- मोह नहीं होगा। योगयुक्तका अर्थ भक्तलोग करते हैं - कि मद्योगयुक्तोभव- ईश्वरका स्मरण रखो। एक बात आपको यह अक्षरब्रह्म योग सुनावें, कि यह जो हमारे शास्त्रों में आता है कि हर समय योगयुक्त रहना, इसका यह मतलब नहीं है कि सामनेसे नजर हटाके सातवें आसमानमें नजर ले जाना। जाके पिया परदेश बसत हैं, लिख लिख भेजत पाती । मोरे पिया मोरे हृदय बसत हैं, रोल करूँ दिन राती ॥ तो देखो, ईश्वर सम्पूर्ण जगत्का अभिन्न निमित्तोपादान कारण है - यदि यह बात पहचान लो, या यह मानो - कि वह विवर्ती अभिन्न निमित्तोपादान कारण है; चाहे वैष्णव मतको स्वीकार करो, चाहे शांकर मतको; एक एक पत्ता, एक-एक तृण, एक-एक कण, एक- एक स्त्री, एक - एक पुरुष उसी ईश्वरसे बने हुए हैं, सबके भीतर चैतन्यके रूपमें ईश्वर है, और सबके शरीरोंका मसाला भी ईश्वर है. यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम् - तो जो चीज हर जगह, हर रूपमें और हर समय मौजूद है, उसका स्मरण करनेके लिए सातवें आसमानकी ओर देखनेकी कोई जरुरत है ? वह तोजँह जँह जो जो चलौं सोइ परिकरमा करौं सो पूजा। हर जगह ईश्वर दिखेगा तो योगयुक्तका अर्थ हुआ - जो भी काम करो, जिससे भी मिलो, जो भी देखो, उसमें ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किं च जगत्यां जगत्सम्पूर्ण जगत्में ईश्वर दिखे। अगर जानते हो, तब तो ईश्वर दिखेगा हर जगह, और नहीं जानते हो, तो ईश्वरसे आवासित कर दो । कम-से-कम यह निश्चय तो दृढ़ हो जाए- कि हमारा सारा व्यवहार ईश्वरमें ही हो रहा है ! तो - वेदेषु यज्ञेषु तपःसु चैव दानेषु यत्पुण्यफलं प्रदिष्टम्बोले, भाई! वेदका स्वाध्याय करो । पुण्य है; क्या पूछना ! क्योंकि वेद अपौरुषेय वाणी है। रघुवंश पढ़ते हैं, तो कालिदास उसके कर्ताके रूपमें हमारी बुद्धिमें आरूढ़ हो जाता है । और जब कर्ता बनके बैठ गया हमारे दिलमें, तो जो परमात्माका अकर्ता शुद्ध स्वरूप है- उसको वह कैसे दिखावेगा? अपौरुषेयका बहुत बड़ा अर्थ है । वह ज्ञान - जो विषयको 'इदं' और जाननेवालेको 'अहं'दो रूपोंमें बाँट देता है - सच्चा ज्ञान नहीं है। ज्ञानमें दो विवर्त होते हैं - यह घड़ी है - यह तो इदं हुआ, और - मैं घड़ीको जानता हूँ - यह अहं - मैं हुआ । ये दोनों ज्ञानके बच्चे हैं। इन दोनोंकी लड़ी जोड़नेवाला, कड़ी जोड़नेवाला ज्ञान । तो ज्ञान तीन टुकड़े- ज्ञाता, ज्ञेय और ज्ञान - बन करके, तिकड़े-तिकड़े बन करके जाना गया । तो ज्ञान कौन है ? किं वदन्ति तत्तत्त्वविदस्तत्त्वं यज्ज्ञानमद्वयम् । वेदको अपौरुषेय क्यों बोलते हैं ? कि यह उस ज्ञानका स्वरूप बताता है, जिसमें ज्ञेय इदं रूपसे उपस्थित नहीं होता, और ज्ञाता अहं रूपसे उपस्थित नहीं होता। ज्ञानके अनन्त अखण्ड समुद्रमें डूब करके ज्ञाता और ज्ञेय - दोनों चकनाचूर हो जाते हैं। ऐसे ज्ञानके स्वरूपका निरूपण करता है वेद; इसलिए उसमें पुरुषकी उपस्थिति नहीं होती । पुरुषकी उपस्थिति नहीं होनेसे ज्ञाता और ज्ञानके भेदसे रहित है यह ज्ञान, इसलिए उसे अपौरुषेय ज्ञान बोलते हैं। नहीं तो क्या होता है? कोई योगी, कोई गुरु, कोई ज्ञानी, कोई सम्प्रदायाचार्य अपनेको बीचमें लाके खड़ा कर देगा; और ज्ञान तो पड़ जायेगा पीछे, और वह आचार्य आगे आ जायेगा । वेदान्तको हम इसलिए स्वीकार नहीं करते - कि उन्होंने वेदान्त कहा है। अद्वैत ब्रह्मका निरूपण करनेके कारण शंकराचार्य प्रामाणिक हैं; शंकराचार्यके द्वारा निरूपित होनेके कारण अद्वैत वेदान्त प्रामाणिक नहीं है । वस्तुकी प्रधानतासे वेदान्त है, व्यक्तिकी प्रधानतासे नहीं। इसीलिए वेद-उपनिषद् ऐसे ज्ञानवादी माने जाते हैं ! उनका नाम ब्रह्मविद्या है। इसलिए उनका नाम ब्रह्मविद्या है, कि वे पुरुषके अन्तःकरणसेजिसमें भ्रम, प्रमाद, विप्रलिप्सा, करणापारव आदि दोष होते हैं - निकले हुए नहीं है। तो वेदसे पवित्र और कोई भी ज्ञान नहीं है, क्योंकि वह व्यक्तिकी स्थापना नहीं करता है। ये पट्टे जितने सम्प्रदाय और सम्प्रदायवाले हैं, वे एक आदमीको सिर पर बैठा देते हैं; और वेद जो हैं, वह आदमीको सिरपर नहीं बैठाता - बल्कि अपने व्यक्तिको भी चूर-चूर कर अद्वैत ब्रह्मकर देता है। इसलिए वेदसे पवित्र दूसरी कोई वस्तु नहीं है । यज्ञेषु - अब वेदने बताया यज्ञ । यज्ञमें भी बड़ी विलक्षणता है। उससे क्या होता है ? बोले- अन्तःकरणकी शुद्धि । सोद्देश्य जब द्रव्यका त्याग होता है - उसको यज्ञ कहते हैं । उद्देश्य है - देवताके लिए हवि-त्याग । अब ये देवता भी वेदके मन्त्रसे बनते हैं, पैदा होते हैं । वेदका सिद्धान्त विचित्र है; देवता विग्रहअधिकरण है पूर्व-मीमांसा - बड़ा भारी विचार है। आजकल तो शाबर भाष्यको भी मीमांसक लोग भी नहीं मानते हैं। ऐसा विचित्र निरूपण है। देवता विग्रहवती होती है कि नहीं; देवताकी मूर्ति होती है कि नहीं - यह इस पर विचार है । तो पूर्व मीमांसाके मूलमें- शाबर भाष्यमें यह विचार किया गया है, कि देवताके विग्रह होता नहीं; मूर्ति होती नहीं । तब क्या होता है ? कि जब हम मन्त्र पढ़ते हैं ना, तो उस मन्त्रकी शक्तिसे देवता उत्पन्न होता है। जैसे एक साथ हजार कुण्डमें यज्ञ किया जाय, हवन किया जाय, और वज्रहस्त पुरंदरः । इन्द्राय स्वाहा करके हवन किया जाय, तो हजार यज्ञमें हजार इन्द्र पैदा होंगे, और युगपत् आहुतिको ग्रहण करेंगे । मन्त्र-शक्तिसे प्रकट होता है इन्द्र; इन्द्र नामका मूर्तिमान कोई पदार्थ नहीं है। इसके बादके जो व्याख्याता लोग हैं ना पूर्वमीमांसाके; खण्डदेवने तो तो लिखा है- कि ऐसी बात करनेमें हमारी जीभ शर्माती है - जिह्रति जिह्वा - जिह्वा हमारी लज्जित होती है। जो बात शाबर भाष्यमें लिखी है, वह हम कैसे बोलें ! तो यज्ञमें कितना आत्म-सामर्थ्य है ! नवीन देवता, नीवन लोक ! यज्ञके द्वारा नवीन स्वर्गका निर्माण कर सकता है मनुष्य ! यज्ञके द्वारा नवीन देवताका निर्माण कर सकता है। अपने सामर्थ्य, अपने ऐश्वर्य, अपने प्रभावका अनुभव करनेके लिए यज्ञ है। तपःसु चैव - और आत्म-संयम ! भोग और भोग-क्रियाको काबू में कर लेना बड़ा पुण्य है । और दानेषु - जो द्रव्य इकट्ठे किये गये हैं ना - दूषित; उनके साथ ममता करनेसे भी मनुष्य दूषित हो जाता है । यह बेईमानीके साथ कमाया हुआ जो धन है, उसको मेरा समझने वाला भी बेईमान हो जाता है। लोग कहते हैं - ईश्वर हमारे अब तक क्यों नहीं आया है ? बाले - कि हमने बेईमानीसे एक करोड़ रुपया कमाया, और उसमेंसे पचास लाख दान कर दिया। अब भी ईश्वर नहीं आया ! बोले- अभी पचास लाख है तुम्हारे पास बेईमानीका । बेईमानीमें आधेमें ईश्वरको खरीद लें, और आधा अपने पास रखें - ऐसा लोग सोचते हैं । अरे भाई, कुछ परिश्रम करो । सचमुच तुम्हारे स्वत्वकी कोई चीज होवे ! वह अगर दान करो - देखो! क्या पुण्य होता है । वैसे तो जो चीज जुड़ गयी है अपने साथ अच्छी-बुरी, सब द्रव्यको छोड़ देना- यह पवित्रताका आपादक है, क्योंकि दुर्भाव जो मनमें है - वह इससे निकलता है। तो दानमें बाहरकी वस्तुएँ छोड़ी जाती हैं, और तपस्यामें भोग और इन्द्रियका संयम करके अन्तःकरणको शुद्ध किया जाता है। यज्ञसे अपने सामर्थ्यका अनुभव किया जाता है, और वेदमें परमात्माको-धर्मको जाना जाता है। अपौरुषेय ज्ञान है । तो ज्ञात दानके लिए वेद, वैभवके अनुभवके लिए यज्ञ, और अपने संयम सामर्थ्यको - कि इन सब चीजोंके बिना भी हम रह सकते हैं - इसका अनुभव करनेके लिए तपस्या और यह जो अंट-शंट अपने पास जुड़ गया है, जिन पर अपना कोई स्वत्व नहीं, जिनपर अपना कोई ममत्व नहीं, ऐसी चीजें अपनी जिन्दगीमें आ गयी हैंइनको छोड़ देना - दान। इनसे पुण्य फलकी प्राप्ति होती है। लेकिन यह प्रवृत्ति मार्ग और निवृत्ति मार्ग यदि जान जाओ ना - तो महापुरुषकी प्राप्ति हो जायेगी । अत्येति तत् - वह महापुरुष, वह ध्यानगम्य परम- पुरुष, वह सत्पुरुषउसकी प्राप्ति हो जाय, तो तत्सर्वं । अत्येति तत्सर्वमिदं विदित्वा - यह जो मार्ग-द्वय - है, ये जो दोनों मार्ग हैं - इनको जान करके, अथवा आठवें अध्यायमें जिस प्रतिपाद्य वस्तुका वर्णन किया गया है - उसको जान करके - किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम। ये जो सात अथवा आठ अथवा दस प्रश्न जो किये गये, उनके उत्तरका जो विवेचन है - उसको ठीक-ठीक जान जाए, तो तत्सर्वं अत्येति - उस सबका अतिक्रमण कर जाता । तमेव विदित्वा - अतिक्रमण कर जाता है, क्योंकि सर्वकर्म-संस्काराणां भगवत्स्मृत्या विफलीकरणात्-भगवान्का जब स्मरण होता है, परमपुरुषका जब स्मरण होता है, तो सब कर्म, और कर्मोंके संस्कार जो हैं - वे सब के सब विफल हो जाते हैं। तो, अत्येति तत्सर्वमिदं विदित्वा - इसको जानो, केवल इसको समझो। इसमें ज्ञानका माहात्म्य बताया । यह एक प्रकारकी विज्ञापनकी पद्धति है। क्या ? कि भाई, वेद पढ़ो, क्योंकि उसमें बड़ा पुण्य है। यज्ञ करो - कि इसमें बड़ा पुण्य है । तपस्या करो; उसमें बड़ा पुण्य है । दान करो - उसमें बड़ा पुण्य है। हाँ, पुण्य तो है ही! इसमें कोई बात नहीं । ये जो दो सृति बताई - देवयान और पितृयान; यह अर्चिरादि मार्ग और धूमादि मार्ग जो बताया- इन दोनोंको जाननेसे क्या लाभ होगा? कि जाननेसे भगवान्का स्मरण होगा, और भगवान्का स्मरण होनेसे कर्मके जो संस्कार बैठे हुए हैं हृदयमें, वे सब के सब धुल जायेंगे । योगी परं स्थानमुपैति चाद्यम् - और फिर इस योगीको परम स्थान परमात्माकी प्राप्ति, परम पुरुषकी प्राप्ति होगी, और आदिस्थानकी प्राप्ति होगी। परमं स्थानं। और वह कैसा? कि आद्यम् - आदौ भवं । आद्य माने - जो शुरू शुरूमें है । सबके प्रारम्भमें जो स्थान है - उस स्थानकी प्राप्ति हो जाती है इस अध्यायके स्वाध्यायसे । अब आपको एक बात सुनाते हैं इस अध्यायके सम्बन्धमें। आठवें अध्यायका श्रवण करनेसे बड़ा भारी आनन्द होता है । बोले- दक्षिणापथमें एक आमर्दक नामका पुर है। वहाँ भवशर्मा नामके एक बड़े दुराचारी ब्राह्मण थे । वेश्या उनके पास, माँस उनके पास, शराब उनके पास ! चोरी वे करें, परस्त्री उनके पास, शिकार वे करें । थे तो ब्राह्मण, पर बड़े पापी थे; बड़ा उग्र जीवन व्यतीत करते थे । एक दिनकी बात है - उन्होंने ताड़ी पीली, और मर गये। मरने पर ताड़के पेड़ हो गये; महात्म्यमें ऐसा वर्णन है । तो एक पति-पत्नी किसी कारणसे ब्रह्म-राक्षस हो गये थे। वे दोनों घूमते फिर उस ताड़ पेड़के नीचे आये । वे दोनों भी ब्रह्मराक्षस इसलिए हुए थे, कि उनकी पत्नी कुमति थी । ब्राह्मणका नाम था कुशीबल, और पत्नीका नाम था कुमति। दान तो वे सबसे लेते थे पहले जन्ममें, लेकिन दानका जो हिस्सा दान करना चाहिए - वह नहीं करते थे । काल पुरुषका दान वे लें, घोड़ेका दान वे लें, तुलादान वे लें, लेकिन दान लेकर उस दानको पचानेके लिए जो दान करना चाहिए, सो वे नहीं करते थे। इसलिए ब्रह्मराक्षस हो गये थे वे दोनों । धनकी शुद्धि बिना दानके होती नहीं है । अब वे दोनों ब्रह्मराक्षस घूमते फिरते उसी ताल वृक्षके नीचे आये, तो पत्नीने पूछा- कि पतिदेव ! हमारा इस योनिसे कभी उद्धार हो सकता है, कि नहीं? उसी ताड़के पेड़के नीचे बैठे थे वे; तो उन्होंने कहा- देखो, उद्धार तो तब - होता है, जब आदमी ब्रह्मविद्याका विचार करे। अपने अध्यात्मका विचार करेकि आँखके भीतर कौन है, कानके भीतर कौन है । अध्यात्म इसको बोलते हैं । ये लोगोंके जेबमें अध्यात्म नामके जो पर्चे होते हैं ना, 'अखिल विश्व अध्यात्म विद्या मण्डल', उसका नाम अध्यात्म नहीं होता है। आजकल अखिल विश्वसे कम तो कोई संस्था होती नहीं है । अनन्तकोटि ब्रह्माण्ड-मण्डलकी जो अध्यात्मविद्या संस्था है, वह जेबमें है। एक सज्जन बताते थे - कि अनन्त कोटि ब्रह्माण्ड मण्डलका जो संत मण्डल है, उसके पार्लियामेंट बोर्डका मैं प्रेसीडेंट हूँ । बोले- कि अध्यात्म माने शरीरके भीतर हमारी क्रियाशक्ति और ज्ञानशक्ति कैसे काम करती है, और उसको पावर कहाँसे मिलती है, प्रकाश कहाँसे मिलता है - उसका जो विचार करता है, उसका नाम अध्यात्म विचार है । सो ब्रह्मविद्या प्राप्त हो, अध्यात्मविचार प्राप्त हो, कर्मविधान प्राप्त हो, तब जाकरके मुक्ति होती है; ऐसा पतिने बताया । तब पत्नीने पूछाकिं तद्द्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म ? ब्रह्म क्या है ? कर्म क्या है ? अध्यात्म क्या है ? सो गीताका आधा श्लोक आ गया। ब्रह्मराक्षसीने अपने पति ब्रह्मराक्षससे प्रश्न किया उसी ताड़वृक्षके नीचे बैठकर । तो सुनते ही वह ताड़का पेड़ चरमराके गिर पड़ा, और उसमेंसे एक मनुष्य निकल आया। अब तो बड़ा आश्चर्य हुआ ब्रह्मराक्षसको! अरे बाबा! तुम कहाँसे निकले? बोला - यह जो गीताका आधा श्लोक बोला ना तुमने आठवें अध्यायका, इसको सुनकर मैं इसमें से निकल पड़ा। अब तो वह वहाँसे निकला, और काशी गया। वहाँ गीताके आठवें अध्यायका रोज पाठ करे । तो एक दिन वैकुण्ठमें विष्णु भगवान् नींद ले रहे थे। अब नींद ही न आवे भगवान्को । लक्ष्मीजीने पूछा- कि देव, आज आपको नींद क्यों नहीं आ रही है ? तो बोले - कि काशीजीमें गंगाके तटपर एक बड़ा मेधावी ब्राह्मण मेरी भक्तिसे भर करके गीताके आठवें अध्यायका पाठकर रहा है। उस पर मैं संतुष्ट हो गया हूँ, और विचार कर रहा हूँ, कि ऐसी क्या चीज है दुनियाँमें, जो दे दें उसको ! यह विचार करनेके कारण आज नींद नहीं आ रही है । लक्ष्मीजीने कहा - कि जिसके ऊपर आप प्रसन्न हैं, और उसे कुछ देनेके लिए चिन्तामें पड़ गये हैं - वह कैसा भक्त होगा! बोले- देवी, यह गीताके आठवें अध्यायका फल है । तो जो आठवें अध्यायका पाठ करता है, उसका मनोरथ पूर्ण करनेके लिए मैं व्याकुल हो जाता है। तो ऐसा समझो - यह गीताका आठवाँ अध्याय तो 'अत्येति तत्सर्वमिदं विदित्वा योगी परं स्थानमुपैति चाद्यम्।' शंकराचार्य भगवान् कहते हैं- कि पहले इसको जानो, उसके बाद इसके अनुसार अनुष्ठान करो । ब्रह्मविद्यामें यह अपरा विद्या है। इस आठवें अध्यायको समझो -माने सात प्रश्नोंके निर्णय द्वारा जो बात कही गयी है, उसको भली भांति समझ करके अवधार्य अनुष्ठाय च - उसका अवधारण करो और उसका अनुष्ठान करो, तब परमेश्वरकी प्राप्ति होगी। श्रीरामानुजाचार्यने भी यही बात कही है-- कि इस अध्यायमें जो भगवन्माहात्म्यका वर्णन है, वह सब वेदेन सुखातिरेकेण तत्सर्वं तृणवत् मन्यते । जानकारीका बड़ा विलक्षण सुख होता है। भोगीको तो मालूम पड़ता है-कि भोगसे सुख होता है। जैसे बच्चा होता है ना; उसको काहेका सुख मालूम है ? कि भाई, जीभ पर पड़ा - तो बोला, बड़ा मजा आया ! तो बच्चेको जीभपर कुछ पड़नेसे ही सुख मिलता है; उसके पास दस हजारका नोट रख दो, तो नन्हें बच्चेको उसका सुख नहीं है । अब वह इससे बड़ा हुआ, भले एक दिन खाना न मिले, लेकिन सुखी हो जायेगा उस रुपयेसे। और उससे भी बड़ा हुआ, बोलेभले दस हजार खर्च करना पड़े, लेकिन ऊँची कुर्सी पर बिठा दो एक दिन । संस्थाका अध्यक्ष बना दो, तो दस हजार दान भी कर देगा। तो देखो, ऐसे मनुष्यके ख्याल बढ़ते हैं । तो संसारके भोगी लोग भोगको सुख मानते हैं । और लोभी लोग? लोभी लोग धनको सुख मानते हैं। और संग्रही लोग ? संग्रही लोग भी धनको सुख मानते हैं और अभिमानी लोग अपने अभिमानको सुख मानते हैं, अभ्यासी लोग अभ्यासको सुख मानते हैं। यह तो अपना-अपना ख्याल है । असली सुख क्या है? अपने व्यक्तित्वको परमात्माके साथ एक कर देनेमें जो सुख है, उसको देखो। यदि सबमें एक ही मनुष्य है- तो उसको परमात्माका सुख मिल रहा है। तुम सबमें एक हो गये, कि नहीं? सब समय सब देशमें एक ! न देशका विरोध रहा, न कालका विरोध रहा, न व्यक्तिका विरोध रहा ! न वस्तुका विरोध रहा। परमात्मासे मिल जानेपर कैसा सुख प्राप्त होता है ! इसको आप ऐसा सोचो - कि जैसे अनन्त कोटि ब्रह्माण्डमें व्यापक, जो हमेशा अजर-अमर सत्स्वरूप, सबका प्रकाशक चित्स्वरूप, और सर्वका आनन्द है, जिसका कोई शत्रु नहीं, कोई विरोधी नहीं - ऐसा, जो अपने स्वभावमें स्थित है - ऐसा जो परमात्माका आनन्द है, वह परमात्मासे एक होने पर मिलता है। ऐसा आनन्द तुम्हें न भोगमें मिलता है, न कर्ममें मिलता है, न अभिमानमें मिलता है, न अभ्यासमें मिलता है। ऐसा आनन्द तो केवल परमात्मासे एक होनेमें मिलता है। और कोई पद्धति नहीं है । • एक अक्षरबाह योग श्रीमद्भगवद्गीताका आठवीं अध्याय श्रीमद्भगवद्गीताके आठवें अध्याय को अक्षरब्रह्म योग, महापुरुष योग, प्रणवब्रह्म योग आदि नामोंसे जाना जाता है। 'ज्ञान' प्रमाणके विभागमें है-वस्तुको दिखानेवाला, और 'ध्यान' निर्माणके विभागमें है-जीवनको बनानेवाला। जीवनको आप जैसा बनाना चाहते हो वैसा ध्यान करो। साधकके जीवनमें जब ध्यानकी विशेषता आती है, तब वह ज्ञानके योग्य हो जाता है। यदि साधक जीवनमें ज्ञानका अभ्यास हो गया तो ज्ञान होने पर भी वह विशेषता बनी रहेगी और साधकके जीवनको चमकाकर निष्ठावान् ज्ञानीके रूपमें लोगोंके सामने रख देगी। ध्यानके प्रसंगका निरूपण करनेके लिए 'अक्षरब्रह्म योग' है। कैसे भगवान्के नामका जप करना, कैसे महापुरुषका ध्यान करना और कैसे अक्षरब्रह्मनिर्गुणब्रह्मका ध्यान करना-विशेष करके इन तीनों बातोंको जानने के लिए आइये! यह आठवाँ अध्याय आरम्भ करें। आनन्दकानन प्रेस टेढ़ीनीम, वाराणसीफोनः 2392337 करते हुए। इसके अन्दर ईश्वर बैठा हुआ है । तो सबसे बढ़िया मनुष्य कौन ? कि जो अपने सामने है। सबसे बढ़िया काम कौन ? कि जो हमको करनेको मिलता है । सबसे बढ़िया समय कौन ? कि भूत नहीं - कि आहा ! कितना बढ़िया समय हमारे सामने आया था - कि यादकरके रोओ; कि नहीं - छह महीनेके बाद एक बहुत बढ़िया योग आनेवाला है। अरे, तबतक जिन्दा रहोगे, तब ना ! मर गये, तो ? वह छह महीना किस काम आवेगा? वर्तमान समयको ठीक-ठीक व्यतीत करना, सामने वाले पुरुषसे ठीक-ठीक व्यवहार करना और जो काम करते हो - उसको अपना पूरा मन लगाके करना ! महाभारतके अनुशासन पर्वमें यह कथा आती है कि महाभारत युद्ध जब समाप्त हो गया, और श्रीकृष्ण विदा होने लगे, तो अर्जुनने श्रीकृष्णसे कहा- कि हे श्रीकृष्ण! जो गीताका उपदेश तुमने हमको किया था, उस समय तो घंटे-घड़ियाल बज रहे थे, और मार-काटकी ध्वनि आ रही थी चारों ओरसे - सो मैंने ध्यानसे नहीं सुना। भूल गया; जरा फिरसे सुना दो। श्रीकृष्णने कहा- अरे राम, बड़ी गलतीकी तुमने, अर्जुन! उस समय मैं योग- युक्त था, जब मैंने तुम्हें गीता सुनाई थी। अब वैसा योग-युक्त मैं कैसे होऊँ - कि फिर सुनाऊँ ? अरे, उस समय जो बात मुँह निकलनी थी, निकल गयी ! तो मनुष्यको सावधान रहना चाहिए । योगयुक्तो भवार्जुन का यह अर्थ नहीं, कि सब जगह प्राणायाम करने बैठ जाना चाहिए। एक आदमीने कल-परसों हमें बताया, कि माँ तो घड़ेमें पानी भरके ले आती है नीचेसे ऊपर; अब वह कहती है - कि उतरवा दो, तो बच्चे कहते हैं कि हम माला फेर रहे हैं, हम कैसे उतरवावें? अब लेके बेचारी खड़ी रहे । तो माला फेरनेमें तो बड़ा भारी पुण्य है, और माँके सिरसे घड़ा उतरवा देनेमें पुण्य नहीं है? यह भ्रान्ति है; भूल है । तो सब समयमें सावधान रहना, चित्तको एकाग्र रखना, और जो काम हो रहा है-उसीमें ईश्वरकी सेवा समझना; उसी कामको पूरे मनोयोगके साथ करना । 'योगयुक्त' का यह अर्थ नहीं है, कि आसन बाँधके, पीठकी रीढ़ सीधी करके, प्राणायाम करके बैठ गये; बोले- अब योगयुक्त हुए। योगयुक्तका अर्थ है - मनका अपने स्थानपर रहना । जैसे आप अभी इस हालमें बैठे हुए हैं - तो आपका मन कहाँ है? हालके भीतर है, कि बाहर है ? यदि आपका मन हालके भीतर है, और प्रवचन सुन रहा है - तो जो काम कर रहे हैं आप, उसमें योगयुक्त हैं। और यदि बैठे हैं प्रवचनमें, और याद कर रहे हैं दुकानकी- तो आप योगयुक्त नहीं हैं। और बैठे
हैं आप; समय है आठ बजेके आसपासका और याद कर रहे हैं बारह बजेकी - तो भी योगयुक्त नहीं हैं। और बैठे हैं यहाँ, और याद कर रहे हैं श्रीमतीजीकी-तो भी योगयुक्त नहीं हैं। योगयुक्तका अर्थ है- कि सावधान होकरके, पूरे मनोयोगके साथ अपने प्राप्त कर्तव्यका अनुष्ठान करते जाना। राम भजे जा काम किये कालू ते तो बोले- भाई ! जा । तस्मात् सर्वेषु कालेषु योगयुक्तो भवार्जुन । सर्वेषु कालेषु - सब समयमें सावधान, सावधान ! सोनेमें भी सावधान, जागनेमें भी सावधान। सवेरे उठनेमें भी सावधान । शास्त्रमें ऐसे लिखा है - कि नींद टूटते ही पहले किसकी याद करना? बोले- भगवान्की याद करना । धरती पर पाँव रखना, तो कहना - तुम हमारी माँ हो । भगवान्का स्मरण करना, गुरुका स्मरण करना । मांगलिक वस्तुका दर्शन करना - माने अपना सारा दिन मंगलमय काममें व्यतीत करना है। अपने आपको कहीं ऐसी जगह बाँधके रख दिया - कि बस, रोवो, रोवो! हर बातमेंसे दुःख निकाल बैठना; यह कोई जिन्दगीका सार नहीं है; यह जिन्दगीका रहस्य नहीं है। हर जगह अनुकूल भाव होना चाहिए ना। भावकी अनुकूलता हृदयमें आनी चाहिए। योगयुक्त - शंकराचार्य भगवान्ने योगयुक्तका अर्थ समाहित' लिखा है। शंकराचार्य भगवान्का जो भाष्य है ना, तत्काल अविद्या - निवर्तक भाष्य है । वह श्रवण - रूप भाष्य है। मधुसूदनीको मनन बोलते हैं; शंकरानन्दीको निदिध्यासन बोलते हैं। श्रीरामानुजाचार्य ने बतायाअर्चिरादिगतिचिन्तनाक्ष्य योगयुक्तो भव । तो फिर सर्वेषु कालेषु नहीं बनेगा । कहते हैं- कि अर्चिमार्ग ऐसा, पितृयान मार्ग ऐसा, देवयान मार्ग ऐसा- इसका निरन्तर चिन्तन करना - ऐसा 'योगयुक्त 'का अर्थ है । और शंकराचार्यने कहा - कि हर समय अपने चित्तको समाहित रखो । आप देखो! दोनोंमें जो फर्क है, वह आपकी बुद्धिमें स्वयं आ जायेगा । देवयान और पितृयान मार्गका निरन्तर चिन्तन कोई मनुष्य काहेको करेगा ? तो जो काम करना हो, वह सावधान होकरके करो। ऐसा करनेसे क्या होगा? बोले- मोह नहीं होगा। योगयुक्तका अर्थ भक्तलोग करते हैं - कि मद्योगयुक्तोभव- ईश्वरका स्मरण रखो। एक बात आपको यह अक्षरब्रह्म योग सुनावें, कि यह जो हमारे शास्त्रों में आता है कि हर समय योगयुक्त रहना, इसका यह मतलब नहीं है कि सामनेसे नजर हटाके सातवें आसमानमें नजर ले जाना। जाके पिया परदेश बसत हैं, लिख लिख भेजत पाती । मोरे पिया मोरे हृदय बसत हैं, रोल करूँ दिन राती ॥ तो देखो, ईश्वर सम्पूर्ण जगत्का अभिन्न निमित्तोपादान कारण है - यदि यह बात पहचान लो, या यह मानो - कि वह विवर्ती अभिन्न निमित्तोपादान कारण है; चाहे वैष्णव मतको स्वीकार करो, चाहे शांकर मतको; एक एक पत्ता, एक-एक तृण, एक-एक कण, एक- एक स्त्री, एक - एक पुरुष उसी ईश्वरसे बने हुए हैं, सबके भीतर चैतन्यके रूपमें ईश्वर है, और सबके शरीरोंका मसाला भी ईश्वर है. यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम् - तो जो चीज हर जगह, हर रूपमें और हर समय मौजूद है, उसका स्मरण करनेके लिए सातवें आसमानकी ओर देखनेकी कोई जरुरत है ? वह तोजँह जँह जो जो चलौं सोइ परिकरमा करौं सो पूजा। हर जगह ईश्वर दिखेगा तो योगयुक्तका अर्थ हुआ - जो भी काम करो, जिससे भी मिलो, जो भी देखो, उसमें ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किं च जगत्यां जगत्सम्पूर्ण जगत्में ईश्वर दिखे। अगर जानते हो, तब तो ईश्वर दिखेगा हर जगह, और नहीं जानते हो, तो ईश्वरसे आवासित कर दो । कम-से-कम यह निश्चय तो दृढ़ हो जाए- कि हमारा सारा व्यवहार ईश्वरमें ही हो रहा है ! तो - वेदेषु यज्ञेषु तपःसु चैव दानेषु यत्पुण्यफलं प्रदिष्टम्बोले, भाई! वेदका स्वाध्याय करो । पुण्य है; क्या पूछना ! क्योंकि वेद अपौरुषेय वाणी है। रघुवंश पढ़ते हैं, तो कालिदास उसके कर्ताके रूपमें हमारी बुद्धिमें आरूढ़ हो जाता है । और जब कर्ता बनके बैठ गया हमारे दिलमें, तो जो परमात्माका अकर्ता शुद्ध स्वरूप है- उसको वह कैसे दिखावेगा? अपौरुषेयका बहुत बड़ा अर्थ है । वह ज्ञान - जो विषयको 'इदं' और जाननेवालेको 'अहं'दो रूपोंमें बाँट देता है - सच्चा ज्ञान नहीं है। ज्ञानमें दो विवर्त होते हैं - यह घड़ी है - यह तो इदं हुआ, और - मैं घड़ीको जानता हूँ - यह अहं - मैं हुआ । ये दोनों ज्ञानके बच्चे हैं। इन दोनोंकी लड़ी जोड़नेवाला, कड़ी जोड़नेवाला ज्ञान । तो ज्ञान तीन टुकड़े- ज्ञाता, ज्ञेय और ज्ञान - बन करके, तिकड़े-तिकड़े बन करके जाना गया । तो ज्ञान कौन है ? किं वदन्ति तत्तत्त्वविदस्तत्त्वं यज्ज्ञानमद्वयम् । वेदको अपौरुषेय क्यों बोलते हैं ? कि यह उस ज्ञानका स्वरूप बताता है, जिसमें ज्ञेय इदं रूपसे उपस्थित नहीं होता, और ज्ञाता अहं रूपसे उपस्थित नहीं होता। ज्ञानके अनन्त अखण्ड समुद्रमें डूब करके ज्ञाता और ज्ञेय - दोनों चकनाचूर हो जाते हैं। ऐसे ज्ञानके स्वरूपका निरूपण करता है वेद; इसलिए उसमें पुरुषकी उपस्थिति नहीं होती । पुरुषकी उपस्थिति नहीं होनेसे ज्ञाता और ज्ञानके भेदसे रहित है यह ज्ञान, इसलिए उसे अपौरुषेय ज्ञान बोलते हैं। नहीं तो क्या होता है? कोई योगी, कोई गुरु, कोई ज्ञानी, कोई सम्प्रदायाचार्य अपनेको बीचमें लाके खड़ा कर देगा; और ज्ञान तो पड़ जायेगा पीछे, और वह आचार्य आगे आ जायेगा । वेदान्तको हम इसलिए स्वीकार नहीं करते - कि उन्होंने वेदान्त कहा है। अद्वैत ब्रह्मका निरूपण करनेके कारण शंकराचार्य प्रामाणिक हैं; शंकराचार्यके द्वारा निरूपित होनेके कारण अद्वैत वेदान्त प्रामाणिक नहीं है । वस्तुकी प्रधानतासे वेदान्त है, व्यक्तिकी प्रधानतासे नहीं। इसीलिए वेद-उपनिषद् ऐसे ज्ञानवादी माने जाते हैं ! उनका नाम ब्रह्मविद्या है। इसलिए उनका नाम ब्रह्मविद्या है, कि वे पुरुषके अन्तःकरणसेजिसमें भ्रम, प्रमाद, विप्रलिप्सा, करणापारव आदि दोष होते हैं - निकले हुए नहीं है। तो वेदसे पवित्र और कोई भी ज्ञान नहीं है, क्योंकि वह व्यक्तिकी स्थापना नहीं करता है। ये पट्टे जितने सम्प्रदाय और सम्प्रदायवाले हैं, वे एक आदमीको सिर पर बैठा देते हैं; और वेद जो हैं, वह आदमीको सिरपर नहीं बैठाता - बल्कि अपने व्यक्तिको भी चूर-चूर कर अद्वैत ब्रह्मकर देता है। इसलिए वेदसे पवित्र दूसरी कोई वस्तु नहीं है । यज्ञेषु - अब वेदने बताया यज्ञ । यज्ञमें भी बड़ी विलक्षणता है। उससे क्या होता है ? बोले- अन्तःकरणकी शुद्धि । सोद्देश्य जब द्रव्यका त्याग होता है - उसको यज्ञ कहते हैं । उद्देश्य है - देवताके लिए हवि-त्याग । अब ये देवता भी वेदके मन्त्रसे बनते हैं, पैदा होते हैं । वेदका सिद्धान्त विचित्र है; देवता विग्रहअधिकरण है पूर्व-मीमांसा - बड़ा भारी विचार है। आजकल तो शाबर भाष्यको भी मीमांसक लोग भी नहीं मानते हैं। ऐसा विचित्र निरूपण है। देवता विग्रहवती होती है कि नहीं; देवताकी मूर्ति होती है कि नहीं - यह इस पर विचार है । तो पूर्व मीमांसाके मूलमें- शाबर भाष्यमें यह विचार किया गया है, कि देवताके विग्रह होता नहीं; मूर्ति होती नहीं । तब क्या होता है ? कि जब हम मन्त्र पढ़ते हैं ना, तो उस मन्त्रकी शक्तिसे देवता उत्पन्न होता है। जैसे एक साथ हजार कुण्डमें यज्ञ किया जाय, हवन किया जाय, और वज्रहस्त पुरंदरः । इन्द्राय स्वाहा करके हवन किया जाय, तो हजार यज्ञमें हजार इन्द्र पैदा होंगे, और युगपत् आहुतिको ग्रहण करेंगे । मन्त्र-शक्तिसे प्रकट होता है इन्द्र; इन्द्र नामका मूर्तिमान कोई पदार्थ नहीं है। इसके बादके जो व्याख्याता लोग हैं ना पूर्वमीमांसाके; खण्डदेवने तो तो लिखा है- कि ऐसी बात करनेमें हमारी जीभ शर्माती है - जिह्रति जिह्वा - जिह्वा हमारी लज्जित होती है। जो बात शाबर भाष्यमें लिखी है, वह हम कैसे बोलें ! तो यज्ञमें कितना आत्म-सामर्थ्य है ! नवीन देवता, नीवन लोक ! यज्ञके द्वारा नवीन स्वर्गका निर्माण कर सकता है मनुष्य ! यज्ञके द्वारा नवीन देवताका निर्माण कर सकता है। अपने सामर्थ्य, अपने ऐश्वर्य, अपने प्रभावका अनुभव करनेके लिए यज्ञ है। तपःसु चैव - और आत्म-संयम ! भोग और भोग-क्रियाको काबू में कर लेना बड़ा पुण्य है । और दानेषु - जो द्रव्य इकट्ठे किये गये हैं ना - दूषित; उनके साथ ममता करनेसे भी मनुष्य दूषित हो जाता है । यह बेईमानीके साथ कमाया हुआ जो धन है, उसको मेरा समझने वाला भी बेईमान हो जाता है। लोग कहते हैं - ईश्वर हमारे अब तक क्यों नहीं आया है ? बाले - कि हमने बेईमानीसे एक करोड़ रुपया कमाया, और उसमेंसे पचास लाख दान कर दिया। अब भी ईश्वर नहीं आया ! बोले- अभी पचास लाख है तुम्हारे पास बेईमानीका । बेईमानीमें आधेमें ईश्वरको खरीद लें, और आधा अपने पास रखें - ऐसा लोग सोचते हैं । अरे भाई, कुछ परिश्रम करो । सचमुच तुम्हारे स्वत्वकी कोई चीज होवे ! वह अगर दान करो - देखो! क्या पुण्य होता है । वैसे तो जो चीज जुड़ गयी है अपने साथ अच्छी-बुरी, सब द्रव्यको छोड़ देना- यह पवित्रताका आपादक है, क्योंकि दुर्भाव जो मनमें है - वह इससे निकलता है। तो दानमें बाहरकी वस्तुएँ छोड़ी जाती हैं, और तपस्यामें भोग और इन्द्रियका संयम करके अन्तःकरणको शुद्ध किया जाता है। यज्ञसे अपने सामर्थ्यका अनुभव किया जाता है, और वेदमें परमात्माको-धर्मको जाना जाता है। अपौरुषेय ज्ञान है । तो ज्ञात दानके लिए वेद, वैभवके अनुभवके लिए यज्ञ, और अपने संयम सामर्थ्यको - कि इन सब चीजोंके बिना भी हम रह सकते हैं - इसका अनुभव करनेके लिए तपस्या और यह जो अंट-शंट अपने पास जुड़ गया है, जिन पर अपना कोई स्वत्व नहीं, जिनपर अपना कोई ममत्व नहीं, ऐसी चीजें अपनी जिन्दगीमें आ गयी हैंइनको छोड़ देना - दान। इनसे पुण्य फलकी प्राप्ति होती है। लेकिन यह प्रवृत्ति मार्ग और निवृत्ति मार्ग यदि जान जाओ ना - तो महापुरुषकी प्राप्ति हो जायेगी । अत्येति तत् - वह महापुरुष, वह ध्यानगम्य परम- पुरुष, वह सत्पुरुषउसकी प्राप्ति हो जाय, तो तत्सर्वं । अत्येति तत्सर्वमिदं विदित्वा - यह जो मार्ग-द्वय - है, ये जो दोनों मार्ग हैं - इनको जान करके, अथवा आठवें अध्यायमें जिस प्रतिपाद्य वस्तुका वर्णन किया गया है - उसको जान करके - किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम। ये जो सात अथवा आठ अथवा दस प्रश्न जो किये गये, उनके उत्तरका जो विवेचन है - उसको ठीक-ठीक जान जाए, तो तत्सर्वं अत्येति - उस सबका अतिक्रमण कर जाता । तमेव विदित्वा - अतिक्रमण कर जाता है, क्योंकि सर्वकर्म-संस्काराणां भगवत्स्मृत्या विफलीकरणात्-भगवान्का जब स्मरण होता है, परमपुरुषका जब स्मरण होता है, तो सब कर्म, और कर्मोंके संस्कार जो हैं - वे सब के सब विफल हो जाते हैं। तो, अत्येति तत्सर्वमिदं विदित्वा - इसको जानो, केवल इसको समझो। इसमें ज्ञानका माहात्म्य बताया । यह एक प्रकारकी विज्ञापनकी पद्धति है। क्या ? कि भाई, वेद पढ़ो, क्योंकि उसमें बड़ा पुण्य है। यज्ञ करो - कि इसमें बड़ा पुण्य है । तपस्या करो; उसमें बड़ा पुण्य है । दान करो - उसमें बड़ा पुण्य है। हाँ, पुण्य तो है ही! इसमें कोई बात नहीं । ये जो दो सृति बताई - देवयान और पितृयान; यह अर्चिरादि मार्ग और धूमादि मार्ग जो बताया- इन दोनोंको जाननेसे क्या लाभ होगा? कि जाननेसे भगवान्का स्मरण होगा, और भगवान्का स्मरण होनेसे कर्मके जो संस्कार बैठे हुए हैं हृदयमें, वे सब के सब धुल जायेंगे । योगी परं स्थानमुपैति चाद्यम् - और फिर इस योगीको परम स्थान परमात्माकी प्राप्ति, परम पुरुषकी प्राप्ति होगी, और आदिस्थानकी प्राप्ति होगी। परमं स्थानं। और वह कैसा? कि आद्यम् - आदौ भवं । आद्य माने - जो शुरू शुरूमें है । सबके प्रारम्भमें जो स्थान है - उस स्थानकी प्राप्ति हो जाती है इस अध्यायके स्वाध्यायसे । अब आपको एक बात सुनाते हैं इस अध्यायके सम्बन्धमें। आठवें अध्यायका श्रवण करनेसे बड़ा भारी आनन्द होता है । बोले- दक्षिणापथमें एक आमर्दक नामका पुर है। वहाँ भवशर्मा नामके एक बड़े दुराचारी ब्राह्मण थे । वेश्या उनके पास, माँस उनके पास, शराब उनके पास ! चोरी वे करें, परस्त्री उनके पास, शिकार वे करें । थे तो ब्राह्मण, पर बड़े पापी थे; बड़ा उग्र जीवन व्यतीत करते थे । एक दिनकी बात है - उन्होंने ताड़ी पीली, और मर गये। मरने पर ताड़के पेड़ हो गये; महात्म्यमें ऐसा वर्णन है । तो एक पति-पत्नी किसी कारणसे ब्रह्म-राक्षस हो गये थे। वे दोनों घूमते फिर उस ताड़ पेड़के नीचे आये । वे दोनों भी ब्रह्मराक्षस इसलिए हुए थे, कि उनकी पत्नी कुमति थी । ब्राह्मणका नाम था कुशीबल, और पत्नीका नाम था कुमति। दान तो वे सबसे लेते थे पहले जन्ममें, लेकिन दानका जो हिस्सा दान करना चाहिए - वह नहीं करते थे । काल पुरुषका दान वे लें, घोड़ेका दान वे लें, तुलादान वे लें, लेकिन दान लेकर उस दानको पचानेके लिए जो दान करना चाहिए, सो वे नहीं करते थे। इसलिए ब्रह्मराक्षस हो गये थे वे दोनों । धनकी शुद्धि बिना दानके होती नहीं है । अब वे दोनों ब्रह्मराक्षस घूमते फिरते उसी ताल वृक्षके नीचे आये, तो पत्नीने पूछा- कि पतिदेव ! हमारा इस योनिसे कभी उद्धार हो सकता है, कि नहीं? उसी ताड़के पेड़के नीचे बैठे थे वे; तो उन्होंने कहा- देखो, उद्धार तो तब - होता है, जब आदमी ब्रह्मविद्याका विचार करे। अपने अध्यात्मका विचार करेकि आँखके भीतर कौन है, कानके भीतर कौन है । अध्यात्म इसको बोलते हैं । ये लोगोंके जेबमें अध्यात्म नामके जो पर्चे होते हैं ना, 'अखिल विश्व अध्यात्म विद्या मण्डल', उसका नाम अध्यात्म नहीं होता है। आजकल अखिल विश्वसे कम तो कोई संस्था होती नहीं है । अनन्तकोटि ब्रह्माण्ड-मण्डलकी जो अध्यात्मविद्या संस्था है, वह जेबमें है। एक सज्जन बताते थे - कि अनन्त कोटि ब्रह्माण्ड मण्डलका जो संत मण्डल है, उसके पार्लियामेंट बोर्डका मैं प्रेसीडेंट हूँ । बोले- कि अध्यात्म माने शरीरके भीतर हमारी क्रियाशक्ति और ज्ञानशक्ति कैसे काम करती है, और उसको पावर कहाँसे मिलती है, प्रकाश कहाँसे मिलता है - उसका जो विचार करता है, उसका नाम अध्यात्म विचार है । सो ब्रह्मविद्या प्राप्त हो, अध्यात्मविचार प्राप्त हो, कर्मविधान प्राप्त हो, तब जाकरके मुक्ति होती है; ऐसा पतिने बताया । तब पत्नीने पूछाकिं तद्द्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म ? ब्रह्म क्या है ? कर्म क्या है ? अध्यात्म क्या है ? सो गीताका आधा श्लोक आ गया। ब्रह्मराक्षसीने अपने पति ब्रह्मराक्षससे प्रश्न किया उसी ताड़वृक्षके नीचे बैठकर । तो सुनते ही वह ताड़का पेड़ चरमराके गिर पड़ा, और उसमेंसे एक मनुष्य निकल आया। अब तो बड़ा आश्चर्य हुआ ब्रह्मराक्षसको! अरे बाबा! तुम कहाँसे निकले? बोला - यह जो गीताका आधा श्लोक बोला ना तुमने आठवें अध्यायका, इसको सुनकर मैं इसमें से निकल पड़ा। अब तो वह वहाँसे निकला, और काशी गया। वहाँ गीताके आठवें अध्यायका रोज पाठ करे । तो एक दिन वैकुण्ठमें विष्णु भगवान् नींद ले रहे थे। अब नींद ही न आवे भगवान्को । लक्ष्मीजीने पूछा- कि देव, आज आपको नींद क्यों नहीं आ रही है ? तो बोले - कि काशीजीमें गंगाके तटपर एक बड़ा मेधावी ब्राह्मण मेरी भक्तिसे भर करके गीताके आठवें अध्यायका पाठकर रहा है। उस पर मैं संतुष्ट हो गया हूँ, और विचार कर रहा हूँ, कि ऐसी क्या चीज है दुनियाँमें, जो दे दें उसको ! यह विचार करनेके कारण आज नींद नहीं आ रही है । लक्ष्मीजीने कहा - कि जिसके ऊपर आप प्रसन्न हैं, और उसे कुछ देनेके लिए चिन्तामें पड़ गये हैं - वह कैसा भक्त होगा! बोले- देवी, यह गीताके आठवें अध्यायका फल है । तो जो आठवें अध्यायका पाठ करता है, उसका मनोरथ पूर्ण करनेके लिए मैं व्याकुल हो जाता है। तो ऐसा समझो - यह गीताका आठवाँ अध्याय तो 'अत्येति तत्सर्वमिदं विदित्वा योगी परं स्थानमुपैति चाद्यम्।' शंकराचार्य भगवान् कहते हैं- कि पहले इसको जानो, उसके बाद इसके अनुसार अनुष्ठान करो । ब्रह्मविद्यामें यह अपरा विद्या है। इस आठवें अध्यायको समझो -माने सात प्रश्नोंके निर्णय द्वारा जो बात कही गयी है, उसको भली भांति समझ करके अवधार्य अनुष्ठाय च - उसका अवधारण करो और उसका अनुष्ठान करो, तब परमेश्वरकी प्राप्ति होगी। श्रीरामानुजाचार्यने भी यही बात कही है-- कि इस अध्यायमें जो भगवन्माहात्म्यका वर्णन है, वह सब वेदेन सुखातिरेकेण तत्सर्वं तृणवत् मन्यते । जानकारीका बड़ा विलक्षण सुख होता है। भोगीको तो मालूम पड़ता है-कि भोगसे सुख होता है। जैसे बच्चा होता है ना; उसको काहेका सुख मालूम है ? कि भाई, जीभ पर पड़ा - तो बोला, बड़ा मजा आया ! तो बच्चेको जीभपर कुछ पड़नेसे ही सुख मिलता है; उसके पास दस हजारका नोट रख दो, तो नन्हें बच्चेको उसका सुख नहीं है । अब वह इससे बड़ा हुआ, भले एक दिन खाना न मिले, लेकिन सुखी हो जायेगा उस रुपयेसे। और उससे भी बड़ा हुआ, बोलेभले दस हजार खर्च करना पड़े, लेकिन ऊँची कुर्सी पर बिठा दो एक दिन । संस्थाका अध्यक्ष बना दो, तो दस हजार दान भी कर देगा। तो देखो, ऐसे मनुष्यके ख्याल बढ़ते हैं । तो संसारके भोगी लोग भोगको सुख मानते हैं । और लोभी लोग? लोभी लोग धनको सुख मानते हैं। और संग्रही लोग ? संग्रही लोग भी धनको सुख मानते हैं और अभिमानी लोग अपने अभिमानको सुख मानते हैं, अभ्यासी लोग अभ्यासको सुख मानते हैं। यह तो अपना-अपना ख्याल है । असली सुख क्या है? अपने व्यक्तित्वको परमात्माके साथ एक कर देनेमें जो सुख है, उसको देखो। यदि सबमें एक ही मनुष्य है- तो उसको परमात्माका सुख मिल रहा है। तुम सबमें एक हो गये, कि नहीं? सब समय सब देशमें एक ! न देशका विरोध रहा, न कालका विरोध रहा, न व्यक्तिका विरोध रहा ! न वस्तुका विरोध रहा। परमात्मासे मिल जानेपर कैसा सुख प्राप्त होता है ! इसको आप ऐसा सोचो - कि जैसे अनन्त कोटि ब्रह्माण्डमें व्यापक, जो हमेशा अजर-अमर सत्स्वरूप, सबका प्रकाशक चित्स्वरूप, और सर्वका आनन्द है, जिसका कोई शत्रु नहीं, कोई विरोधी नहीं - ऐसा, जो अपने स्वभावमें स्थित है - ऐसा जो परमात्माका आनन्द है, वह परमात्मासे एक होने पर मिलता है। ऐसा आनन्द तुम्हें न भोगमें मिलता है, न कर्ममें मिलता है, न अभिमानमें मिलता है, न अभ्यासमें मिलता है। ऐसा आनन्द तो केवल परमात्मासे एक होनेमें मिलता है। और कोई पद्धति नहीं है । • एक अक्षरबाह योग श्रीमद्भगवद्गीताका आठवीं अध्याय श्रीमद्भगवद्गीताके आठवें अध्याय को अक्षरब्रह्म योग, महापुरुष योग, प्रणवब्रह्म योग आदि नामोंसे जाना जाता है। 'ज्ञान' प्रमाणके विभागमें है-वस्तुको दिखानेवाला, और 'ध्यान' निर्माणके विभागमें है-जीवनको बनानेवाला। जीवनको आप जैसा बनाना चाहते हो वैसा ध्यान करो। साधकके जीवनमें जब ध्यानकी विशेषता आती है, तब वह ज्ञानके योग्य हो जाता है। यदि साधक जीवनमें ज्ञानका अभ्यास हो गया तो ज्ञान होने पर भी वह विशेषता बनी रहेगी और साधकके जीवनको चमकाकर निष्ठावान् ज्ञानीके रूपमें लोगोंके सामने रख देगी। ध्यानके प्रसंगका निरूपण करनेके लिए 'अक्षरब्रह्म योग' है। कैसे भगवान्के नामका जप करना, कैसे महापुरुषका ध्यान करना और कैसे अक्षरब्रह्मनिर्गुणब्रह्मका ध्यान करना-विशेष करके इन तीनों बातोंको जानने के लिए आइये! यह आठवाँ अध्याय आरम्भ करें। आनन्दकानन प्रेस टेढ़ीनीम, वाराणसीफोनः तेईस लाख बानवे हज़ार तीन सौ सैंतीस करते हुए। इसके अन्दर ईश्वर बैठा हुआ है । तो सबसे बढ़िया मनुष्य कौन ? कि जो अपने सामने है। सबसे बढ़िया काम कौन ? कि जो हमको करनेको मिलता है । सबसे बढ़िया समय कौन ? कि भूत नहीं - कि आहा ! कितना बढ़िया समय हमारे सामने आया था - कि यादकरके रोओ; कि नहीं - छह महीनेके बाद एक बहुत बढ़िया योग आनेवाला है। अरे, तबतक जिन्दा रहोगे, तब ना ! मर गये, तो ? वह छह महीना किस काम आवेगा? वर्तमान समयको ठीक-ठीक व्यतीत करना, सामने वाले पुरुषसे ठीक-ठीक व्यवहार करना और जो काम करते हो - उसको अपना पूरा मन लगाके करना ! महाभारतके अनुशासन पर्वमें यह कथा आती है कि महाभारत युद्ध जब समाप्त हो गया, और श्रीकृष्ण विदा होने लगे, तो अर्जुनने श्रीकृष्णसे कहा- कि हे श्रीकृष्ण! जो गीताका उपदेश तुमने हमको किया था, उस समय तो घंटे-घड़ियाल बज रहे थे, और मार-काटकी ध्वनि आ रही थी चारों ओरसे - सो मैंने ध्यानसे नहीं सुना। भूल गया; जरा फिरसे सुना दो। श्रीकृष्णने कहा- अरे राम, बड़ी गलतीकी तुमने, अर्जुन! उस समय मैं योग- युक्त था, जब मैंने तुम्हें गीता सुनाई थी। अब वैसा योग-युक्त मैं कैसे होऊँ - कि फिर सुनाऊँ ? अरे, उस समय जो बात मुँह निकलनी थी, निकल गयी ! तो मनुष्यको सावधान रहना चाहिए । योगयुक्तो भवार्जुन का यह अर्थ नहीं, कि सब जगह प्राणायाम करने बैठ जाना चाहिए। एक आदमीने कल-परसों हमें बताया, कि माँ तो घड़ेमें पानी भरके ले आती है नीचेसे ऊपर; अब वह कहती है - कि उतरवा दो, तो बच्चे कहते हैं कि हम माला फेर रहे हैं, हम कैसे उतरवावें? अब लेके बेचारी खड़ी रहे । तो माला फेरनेमें तो बड़ा भारी पुण्य है, और माँके सिरसे घड़ा उतरवा देनेमें पुण्य नहीं है? यह भ्रान्ति है; भूल है । तो सब समयमें सावधान रहना, चित्तको एकाग्र रखना, और जो काम हो रहा है-उसीमें ईश्वरकी सेवा समझना; उसी कामको पूरे मनोयोगके साथ करना । 'योगयुक्त' का यह अर्थ नहीं है, कि आसन बाँधके, पीठकी रीढ़ सीधी करके, प्राणायाम करके बैठ गये; बोले- अब योगयुक्त हुए। योगयुक्तका अर्थ है - मनका अपने स्थानपर रहना । जैसे आप अभी इस हालमें बैठे हुए हैं - तो आपका मन कहाँ है? हालके भीतर है, कि बाहर है ? यदि आपका मन हालके भीतर है, और प्रवचन सुन रहा है - तो जो काम कर रहे हैं आप, उसमें योगयुक्त हैं। और यदि बैठे हैं प्रवचनमें, और याद कर रहे हैं दुकानकी- तो आप योगयुक्त नहीं हैं। और बैठे
अमेरिका में महिला से पुरुष बने एक ट्रांसजेंडर ने एक बेटे को जन्म दिया। डॉक्टर मां बनने की संभावना से इनकार कर चुके थे। अमेरिका के एक ट्रांसजेंडर पुरुष ने बच्चे को जन्म दिया है। लेकिन स्त्री से पुरुष बनने की प्रक्रिया के दौरान गर्भधारण और फिर बच्चे को जन्म देना उनके लिए काफी मुश्किल रहा। हाल ही में अमेरिका के रहने वाले वायली सिम्पसन ने अपने बच्चे के छह महीने का होने पर अपने अनुभव साझा किए। 28 साल के वायली सिम्पसन अमेरिका के टेक्सस प्रांत में अपने पार्टनर स्टीफन गैथ के साथ रहते हैं। 21 बरस की उम्र में उन्होंने लड़की से लड़का बनने की प्रक्रिया की शुरूआत की थी। इस बीच जब उनके पीरियड्स आने बंद हो गए तो डॉक्टरों ने उन्हें आगाह किया कि अब वे कभी मां नहीं बन पाएंगे। लेकिन फरवरी 2018 में जब उन्हें पता चला कि टेस्टोस्टेरॉन थेरपी के बाद भी वह गर्भवती हैं तो वह हैरान रह गए। प्रेग्नेंसी की खबर से हुए हैरान वायली अब तक अपनी ब्रेस्ट भी सर्जरी के जरिए हटवा चुके थे। इस खबर के बाद पहले-पहल तो वे हैरान हुए फिर नर्वस हो गए। इसके बावजूद उन्होंने अपनी इस बिना प्लान की हुई प्रेग्नेंसी को आगे बढ़ाने का फैसला किया। लेकिन इस कपल के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। उन्हें अपने आसपास रहने वाले लोगों के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। सितंबर 2018 को वायली ने सिजेरियन के जरिए एक बेटे को जन्म दिया जिसका नाम रोवन रखा गया। जब वह छह महीने का हुआ तो उन्होंने अपने अनुभव दुनिया के सामने रखे। वायली का कहना है, 'शायद ही किसी ने गर्भवती पुरुष को देखा होगा। जब मैं सड़क से गुजरता था तो लोग मुझसे कहते थे कि मैं कभी पुरुष नहीं बन पाऊंगा क्योंकि पुरुष कभी बच्चों को जन्म नहीं देते। ' लेकिन अपने बेटे को देखने के बाद वायली कहते हैं कि बेटे की खुशी के आगे वे सब तकलीफें और बुरा बर्ताव कुछ मायने नहीं रखते। हालांकि दोनों तय कर चुके हैं कि भविष्य में कोई और बच्चा नहीं करेंगे।
अमेरिका में महिला से पुरुष बने एक ट्रांसजेंडर ने एक बेटे को जन्म दिया। डॉक्टर मां बनने की संभावना से इनकार कर चुके थे। अमेरिका के एक ट्रांसजेंडर पुरुष ने बच्चे को जन्म दिया है। लेकिन स्त्री से पुरुष बनने की प्रक्रिया के दौरान गर्भधारण और फिर बच्चे को जन्म देना उनके लिए काफी मुश्किल रहा। हाल ही में अमेरिका के रहने वाले वायली सिम्पसन ने अपने बच्चे के छह महीने का होने पर अपने अनुभव साझा किए। अट्ठाईस साल के वायली सिम्पसन अमेरिका के टेक्सस प्रांत में अपने पार्टनर स्टीफन गैथ के साथ रहते हैं। इक्कीस बरस की उम्र में उन्होंने लड़की से लड़का बनने की प्रक्रिया की शुरूआत की थी। इस बीच जब उनके पीरियड्स आने बंद हो गए तो डॉक्टरों ने उन्हें आगाह किया कि अब वे कभी मां नहीं बन पाएंगे। लेकिन फरवरी दो हज़ार अट्ठारह में जब उन्हें पता चला कि टेस्टोस्टेरॉन थेरपी के बाद भी वह गर्भवती हैं तो वह हैरान रह गए। प्रेग्नेंसी की खबर से हुए हैरान वायली अब तक अपनी ब्रेस्ट भी सर्जरी के जरिए हटवा चुके थे। इस खबर के बाद पहले-पहल तो वे हैरान हुए फिर नर्वस हो गए। इसके बावजूद उन्होंने अपनी इस बिना प्लान की हुई प्रेग्नेंसी को आगे बढ़ाने का फैसला किया। लेकिन इस कपल के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। उन्हें अपने आसपास रहने वाले लोगों के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। सितंबर दो हज़ार अट्ठारह को वायली ने सिजेरियन के जरिए एक बेटे को जन्म दिया जिसका नाम रोवन रखा गया। जब वह छह महीने का हुआ तो उन्होंने अपने अनुभव दुनिया के सामने रखे। वायली का कहना है, 'शायद ही किसी ने गर्भवती पुरुष को देखा होगा। जब मैं सड़क से गुजरता था तो लोग मुझसे कहते थे कि मैं कभी पुरुष नहीं बन पाऊंगा क्योंकि पुरुष कभी बच्चों को जन्म नहीं देते। ' लेकिन अपने बेटे को देखने के बाद वायली कहते हैं कि बेटे की खुशी के आगे वे सब तकलीफें और बुरा बर्ताव कुछ मायने नहीं रखते। हालांकि दोनों तय कर चुके हैं कि भविष्य में कोई और बच्चा नहीं करेंगे।
सलमान खान और कैटरीना के रिश्ते भले ही पहले जैसे नहीं रहे हों, लेकिन जब जब सलमान पर मुसीबत आई है कैटरीना उनके लिए खड़ी नज़र आई हैं. सूत्र बताते हैं कि कैटरीना एक बार फिर अपना मन्नत उतारने अजमेर शरीफ दरगाह जाने वाली हैं. उनकी टीम ने दरगाह के खादिम से संपर्क भी साधा है और उन्हें ये जानकारी दी है कि कैटरीना चादर चढाने दरगाह शरीफ पहुँचने वाली हैं. कहा जाता है कि कैटरीना ख्वाजा गरीब नवाज़ को बहुत मानती है और जब कभी भी मौका मिलता है वो वहां ज़रूर जाती है. इस बार भी ख्वाजा ने उनकी सुनी है और उनका शुक्रिया अदा करने जाने वाली हैं. आपको बता दें कि कैटरीना इन दिनों शाहरुख़ खान के साथ फिल्म जीरो की शूटिंग में व्यस्त हैं. फिल्म में वह शाहरुख के साथ होंगी मगर फिल्म में वह रोमांस नहीं करेंगे. जी हां, फिल्म में कैटरीना के अपोजिट अभय देओल होंगे. एक इंटरव्यू में कैटरीना ने बताया था कि फिल्म में उनका किरदार एल्कोहलिक का है और जिसकी जिंदगी में बहुत उतार-चढ़ाव आते हैं. फिल्म में कैटरीना का रोल बहुत ही चैलेंजिंग है जिसके लिए उन्होंने बहुत मेहनत भी की है. वहीं, अनुष्का एक स्ट्रगलिंग साइंटिस्ट बनी हैं. आपको बता दें कि इस फिल्म के डायरेक्टर आनंद एल राय हैं. पहले इस फिल्म का नाम कैटरीना मेरी जान रखा गया था लेकिन बाद में कुछ स्क्रिप्ट्स में बदलाव करने के बाद इसके नाम को भी बदलकर जीरो कर दिया गया.
सलमान खान और कैटरीना के रिश्ते भले ही पहले जैसे नहीं रहे हों, लेकिन जब जब सलमान पर मुसीबत आई है कैटरीना उनके लिए खड़ी नज़र आई हैं. सूत्र बताते हैं कि कैटरीना एक बार फिर अपना मन्नत उतारने अजमेर शरीफ दरगाह जाने वाली हैं. उनकी टीम ने दरगाह के खादिम से संपर्क भी साधा है और उन्हें ये जानकारी दी है कि कैटरीना चादर चढाने दरगाह शरीफ पहुँचने वाली हैं. कहा जाता है कि कैटरीना ख्वाजा गरीब नवाज़ को बहुत मानती है और जब कभी भी मौका मिलता है वो वहां ज़रूर जाती है. इस बार भी ख्वाजा ने उनकी सुनी है और उनका शुक्रिया अदा करने जाने वाली हैं. आपको बता दें कि कैटरीना इन दिनों शाहरुख़ खान के साथ फिल्म जीरो की शूटिंग में व्यस्त हैं. फिल्म में वह शाहरुख के साथ होंगी मगर फिल्म में वह रोमांस नहीं करेंगे. जी हां, फिल्म में कैटरीना के अपोजिट अभय देओल होंगे. एक इंटरव्यू में कैटरीना ने बताया था कि फिल्म में उनका किरदार एल्कोहलिक का है और जिसकी जिंदगी में बहुत उतार-चढ़ाव आते हैं. फिल्म में कैटरीना का रोल बहुत ही चैलेंजिंग है जिसके लिए उन्होंने बहुत मेहनत भी की है. वहीं, अनुष्का एक स्ट्रगलिंग साइंटिस्ट बनी हैं. आपको बता दें कि इस फिल्म के डायरेक्टर आनंद एल राय हैं. पहले इस फिल्म का नाम कैटरीना मेरी जान रखा गया था लेकिन बाद में कुछ स्क्रिप्ट्स में बदलाव करने के बाद इसके नाम को भी बदलकर जीरो कर दिया गया.
आदम को लज्जा का अनुभव हुआ क्योंकि वह अपनी पशुओ से तुलना कर सकता था। एक तरह से अब वह उनसे भिन्न था क्योंकि उसे नग्नता का पता था। आदमी अपने को इसलिए ढंकता है ताकि स्वयं को पशुओं से भिन्न कर सकें। और हम उस सभी के प्रति लज्जा का अनुभव करते है जो कि पशुओं जैसा है और जिस क्षण भी कोई पशुओं जैसा कोई कृत्य करता है, हम कहते हैं- क्या कर रहे हो? क्या तुम पशु हो? हम किसी भी चीज की निन्दा कर सकते हैं, यदि हम उसे पशुओं जैसी सिद्ध कर दें। हम यौन को निन्दित करते हैं, क्योंकि वह पाशविक है। हम किसी भी बात को निन्दित कर सकते है यदि पशुओं से उसे जोड़ा जा सके। होश के साथ निन्दा का भाव आया - पशुओं की निन्दा । और निन्दा ने ही हमारे सारे दमन को जन्म दिया, क्योंकि आदमी एक पशु हैं। वह उसके पार जा सकता है, वह दूसरी बात है। परन्तु वह पशुओं से ही आया है तो उनसे ऊपर उठ सकता है, परन्तु वह है तो पशु ही । एक दिन वह पशु नहीं हो सकता है, वह अतिक्रमण कर सकता है, परन्तु वह पशुओं का वंशज है, इसे मना नहीं कर सकता । वह पशुता मौजूद है। और एक बार यह खयाल आ गया कि हम पशुओं से भिन्न हैं, तो आदमी उस सब को दमन करने में लग गया जो कि पशु-वंश परम्परा का हिस्सा था। इस दमन ने विभाजन कर दिया और इसलिए आदमी दो में बंटा हुआ है-दो है। वह जो वास्तविक, बुनियादी है, पशु ही रहता है और उसका बौद्धिक, दिमागी हिस्सा सोचता रहता है झूठी काल्पनिक दिव्यता को-बातें अतः केवल एक हिस्सा ही तुम्हारे मन का तुमसे तादात्स्य जोड़े रखता है और बाकी सारा हिस्सा मना कर दिया जाता है। शरीर में भी हमने विभाजन कर लिए हैं। शरीर के नीचे का हिस्सा निन्दित है। वह शारीरिक तौर से ही नीचे का नहीं है, वह मूल्यों के आधार पर भी नीचा है। ऊपर का हिस्सा खाली ऊपर का ही नहीं है, बल्कि वह ऊँचा है। तुम अपने नीचे के हिस्से के प्रति दोषी अनुभव करते हो। और यदि कोई पूछे कि तुम कहां स्थित हो तो तुम अपने सिर की ओर इशारा करते हो। वह दिमाग का, सिर का, बुद्धि का हिस्सा है। हम अपने को बुद्धि से जोड़ते है, न कि शरीर से। और यदि हमसे कोई बहुत ज्यादा आग्रह करे तो हम अपने को शरीर के ऊपरी हिस्से से जोड़ते है, नीचे के हिस्से से कभी नहीं। नीचे का हिस्सा निन्दित कर दिया गया है। क्यों? शरीर तो एक है। तुम उसे बांट नहीं सकते। कहीं कोई विभाजन नहीं है। सिर और पैर एक है, और तुम्हारा मस्तिष्क और जननेन्द्रियां एक हैं वे एक इकाई की भांति काम करते हैं। परन्तु यौन को मना करने के लिए, सेक्स की निन्दा करने के लिए हम शरीर के सारे निचले हिस्से को मना कर देते हैं। आदम को पाप का अनुभव हुआ, क्योंकि पहली बार उसने अपने को पशुओं से भिन्न महसूस किया। और यौन सर्वाधिक पाशविक वृत्ति है। मैं "पाशविक" शब्द का उपयोग कर रहा हूँ एक तथ्य की तरह, बिना किसी प्रकार के निदा के स्वर के। सबसे अधिक पशुता की बात सेक्स ही होगी। क्योंकि यौन जीवन है और स्रोत है तथा उद्गम है। आदम और ईव सेक्स के प्रति सजग हो गये उन्होंने उसे ढंकने की कोशिश को । केवल बाहरी रूप से नहीं बल्कि उन्होंने उस तथ्य को अपनी भीतरी चेतना में भी छिपाने का प्रयत्न किया। उससे चेतन और अचेतन मन के बीच विभाजन हो गया। मन भी एक है, जैसे कि शरीर एक है। परन्तु यदि तुम किसी बात की निन्दा करते हो तो वह हिस्सा अचेतन में चला जाता है। तुम इतना उसके प्रति निन्दा से भर जाते हो कि तुम भी उसे जानने से डरते हो कि वह तुम्हारे भीतर कहीं भी है। तुम एक रुकावट पैदा करते हो, तुम एक दीवाल खडी कर देते हो। और जो कुछ भी निन्दित है उसे तुम दीवाल के उस पार डाल देते हो और फिर तुम उसे भूल जाते हो। वह वहाँ पड़ा रहता है, वह वहीं से काम करता रहता है, वह तुम्हारा मालिक बना रहता है। और अभी भी तुम अपने को धोखा दे सकते हो कि अब वह कहीं भी नहीं है। वह निन्दित हिस्सा ही हमारा अचेतन बन जाता है। इसीलिए हम कभी ऐसा नहीं सोचते कि हमारा अचेतन मन हमारा ही है। तुम रात सपना देखते हो, तुम एक बहुत कामुकतापूर्ण सपना या बहुत भयानक सपना देखते हो, जिसमें तुमने किसी आदमी को हत्या कर दी हैं। जिसमें कि तुमने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है। सुबह तुम्हें कोई अपराध का भाव नहीं लगता, तुम कहते हो कि वह तो केवल सपना था। वह केवल सपना नहीं था। कुछ भी यूं ही नहीं होता। वह तुम्हारा ही सपना था, किन्तु वह तुम्हारे अचेतन से संबंधित था। सवेरे तुम अपने को चेतन मन से जोड़ लेते हो और इसलिए तुम कहते हो कि यह सिर्फ सपना है। इससे मेरा कुछ लेना-देना नहीं, यह तो बस हो गया। यह असंगत है, आकस्मिक है। तुम उससे कोई संबंध नहीं बना पाते। परन्तु वह तुम्हारा ही सपना था और तुमने ही उसे निर्मित किया था। और वह तुम्हारा ही मन था और तुमने ही कृत्य किया था। सपने में भी तुम्हीं ने हत्या की थी, बलात्कार किया था। चेतन मन के इस निन्दा करने के कारण ही आदम और ईव डर गये, अपनी नग्नता से लज्जित हुए। उन्होंने अपने शरीर को ढंकने की कोशिश को। केवल अपने शरीर को ही नहीं बाद में अपने मन को भी ढंकने लगे। हम भी वहीं कर रहे हैं। क्या है अच्छा? क्या हैं "शुभ"? जो कि समाज के द्वारा अच्छा समझा जाता है, वही तुम अपने चेतन मन में रख लेते ही, और जो कुछ भी बुरा है, समाज द्वारा निन्दित है, उसे तुम अचेतन में फेंक देते हो। वह एक कचरे का थैला हो जाता है। तुम उसमें चीजें फेंकते चले जाते हो और वह वहीं पड़ी रहती है। गहरी जड़ों में, नीचे वे अपना काम करती रहती हैं। वे तुम्हें हर क्षण प्रभावित करती रहती हैं। तुम्हारा चेतन मन तुम्हारे अचेतन मन के समक्ष नपुंसक सिद्ध होता है क्योंकि तुम्हारा चेतन मन केवल समाज को उप-उत्पत्ति है और तुम्हारा अचेतन ही प्राकृतिक है, जैविक है। उसमें शक्ति है, उसमें ऊर्जा है। इसलिए तुम "भली" बातें सोचते रह सकते हो, किंतु तुम "बुरी" बातें करते चले जाओगे। संत अगस्तीन बतलाते हैं- "हे परमात्मा, यही एक मात्र मेरे लिए समस्या है- जो कुछ भी मैं सोचता हूँ कि करने योग्य है मैं कभी नहीं करता, और जो कुछ भी मैं सोचता हूं कि नहीं करना है वही मैं सदैव करता हूं।" यह समस्या संत अगस्तीन के लिए ही नहीं है, यह समस्या प्रत्येक के लिए है, जो भी चेतन और अचेतन में बंटे हैं लज्जित अनुभव करने के कारण ही आदम दो में बंट गया। वह अपने प्रति ही लज्जा से भर गया। और जिस हिस्से के प्रति वह लज्जित अनुभव करने लगा, वह हिस्सा उसके चेतन मन से कट गया। तब से आदमी एक बंटा हुआ, खण्डित जीवन जी रहा है। और उसे लज्जा क्यों अनुभव हुईं? वहां कोई भी तो नहीं था। न कोई उपदेशक था, न ही धार्मिक चर्च था, जिसने उसे शरम करने के लिए कहा हो। जिस क्षण भी तुम सजग होते हो, अहंकार प्रवेश करता है। तुम एक परीक्षक हो जाते हो। बिना होश के तुम मात्र एक हिस्से होते हो- बड़े विराट जीवन के हिस्से । तुम अलग और भिन्न नहीं होते। यदि एक लहर होश में आ जाये तो उसका अहंकार खडा हो जायेगा और उसी क्षण वह सागर से भिन्न हो जायेगी यदि लहर होश में आ सके और सोचे कि मैं हूं तो लहर अपने को सागर से एक नहीं समझ सकती, दूसरी लहरों से एक नहीं मान सकती। वह भिन्न हो जाती है, और अपने को अलग मानने लगती है। अहंकार पैदा हो गया। ज्ञान अहंकार निर्मित करता है। बच्चे बिना अहंकार के होते हैं, क्योंकि उन्हें कोई ज्ञान नहीं होता। वे निर्दोष होते हैं, और निर्दोषिता में अहंकार प्रवेश नहीं कर सकता। जितने तुम विकसित न होते हो, इतने ही अधिक तुम अहंकार में भी वृद्धि करते हो। बूढ़ों के पास बड़ा सघन व गहरा अहंकार होता है। यह स्वाभाविक है। उनका अहंकार सत्तर अस्सी वर्ष तक जिया है। उनके पास लम्बा इतिहास है। तुम्हें आश्चर्य होता है यह जान कर कि तुम याद क्यों नहीं रख पाते-अपने बचपन की। यदि तुम अपनी स्मृति में पीछे लौटकर जाओ, तो तुम तीन या चार वर्ष के अधिक पीछे नहीं जा सकते। ज्यादा-से-ज्यादा तुम पाँचवे या चौथे या तीसरे वर्ष की कोई बात याद कर सकते हो परन्तु पहले तीन वर्ष बिल्कुल खाली हैं। वे वर्ष भी थे तो जरूर और बहुत-सी घटनाएँ हुईं भी थीं किन्तु हम उनको याद क्यों नहीं कर पाते? क्योंकि उस समय कोई अहंकार निर्मित नहीं हुआ था, इसलिए समस्या आना कठिन है। एक प्रकार से तुम नहीं थे, इसलिए तुम याद कैसे कर सकते हो? तुम होते, तो तुम याद भी रख लेते, परन्तु तुम नहीं थे। तुम याद नहीं कर सकते। स्मृति तभी बनती है जबकि अहंकार अस्तित्व में आ गया होता है। यदि तुम नहीं हो, तो स्मृति कहां खडी होगी। तीन साल तो बडी बात है, एक बच्चे के लिए तो प्रत्येक क्या ही एक घटना होती है। वास्तव में उसे अघिक याद होना चाहिए। उसे प्रारंभिक वर्ष अधिक स्मरण होने चाहिए जीवन के शुरू के दिन, क्योंकि तब हर चीज़ रंगीन थी, हर बात अपूर्व थी । जो कुछ होता था, नवीन था। परन्तु उसकी कोई स्मृति नहीं है। क्यों? क्योंकि अहंकार नहीं था। स्मृति को लटकने के लिए अहंकार की खूंटी की आवश्यकता होती हैं। जैसे ही बच्चा अपने को दूसरों से भिन्न समझने लगता है उसे लज्जा अनुभव होती है। उसे वही शर्म मालूम होतीं है जो कि आदम को हुईं थी। आदम ने अपने को नग्न पाया-पशुओं की तरह नग्न, हर चीज की तरह नग्न। तुम्हें भिन्न होना चाहिए, अपूर्व होना चाहिए तुम्हें दूसरों के जैसा नहीं होना चाहिए। तभी केवल तुम्हारा अहंकार बढ़ सकता है। पहला कृत्य तो नग्नता को ढंकने का था अचानक आदम भिन्न हो गया। वह पशु नहीं रहा। आदमी आदम की तरह और उसकी लज्जा के साथ पैदा होता है। आदम की लज्जा की प्रतीति के साथ ही मनुष्य पैदा होता है। एक बच्चा आदमी नहीं होता। वह आदमी तभी होने लगता है जबकि वह अपने को भिन्न, दूसरों से अलग अनुभव करे-जबकि वह एक अहंकार हो जाए। इसलिए ध्यान रहे, धर्म तुमको दोष का भाव नहीं देता। बल्कि वह तुम्हारा ही अहंकार होता है। धर्म इस भाव का शोषण करता है वह दूसरी बात है। हर पिता उसका शोषण करता है, वह भी दूसरी बात है। हर पिता अपने बेटे से कहता है, क्या कर रहे हो, पशुओं की तरह व्यवहार कर रहे हो? हंसो मत, चिल्लाओ मत, यह मत करो, वह मत करो, दूसरों के सामने यह मत करो। क्या कर रहे हो, पशुओं की तरह आचरण कर रहे हो। और यदि बच्चा सोचता है कि वह पशु है तो उसके अहंकार को चोट लगती है। अपने अहंकार को तृप्ति के लिए, वह अनुकरण करता है, वह भी पंक्ति में चलने लगता है। पशु होना बड़ा आनन्दपूर्ण है, क्योंकि तब स्वतंत्रता है - एक गहरी स्वतंत्रता - चलने की, करने की । परन्तु इगो को, अहंकार को यह पीड़ा देता है इसलिए चुनाव करना पड़ता है। यदि तुम स्वतंत्रता को चुनते हो तो तुम पशुओं की भांति हो जाओगे निन्दित । इस संसार में भी और उस संसार में भी तुम निन्दित हो जाओगे। समाज तुम्हें नर्क में फेंक देगा। इसलिए तुम्हें आदमी होना है, पशु की तरह नहीं होना। तभी अहंकार की तृप्ति होती है। तब कोई अहंकार के इर्दगिर्द जीने लगता है। वह वही करता है जो कि इगो-फुलफिलिंग है, अहंकार को मारने वाला है। परन्तु तुम प्रकृति को पूर्णतः झुठला नहीं सकते। वह तुम्हें प्रभावित करती रहेगी। तब कोई दो जीवन जीने लगता है, एक आदम के पूर्व को जिन्दगी, दूसरी आदम के बाद की जिन्दगी तब कोई दो जीवन जीने लगता-है, कोई दो मन के साथ, डबल माइंड के साथ जीने लगता है। तब एक चेहरा निर्मित होता है जो कि समाज को दिखाने के लिए होता है। एक निजी चेहरा होता है और एक सामाजिक चेहरा। परन्तु तुम अपने निजी चेहरे ही हो। और प्रत्येक मनुष्य आदम ही है - नग्न पशु की तरह परन्तु तुम उसे समाज को नहीं दिखा सकते। समाज को तुम आदम के बाद का चेहरा दिखलाते हो-साफ-सुथरा; हर एक बात समाज के अनुसार। जो कुछ भी तुम दूसरों को दिखाते हो वह वास्तविक नहीं होता, बल्कि अपेक्षित होता है जो है वह नहीं, जो होना चाहिए वह इसलिए हर मनुष्य को एक चेहरे से दूसरा चेहरा सतत बदलते रहना पड़ता है। निजी चेहरे से सामाजिक चेहरा बदलते रहना पड़ता हैं। यह एक बड़ा तनाव है। इससे बहुत उर्जा व्यय होती है। परन्तु मैं पशुओं की भांति हो जाने के लिए नहीं कह रहा हूं। वह अब तुम हो भी नहीं सकते। निषेधित फल वापस नहीं लौटाया जा सकता। तुमने उसे खा लिया है, वह तुम्हारी हड्डी और रक्त हो गया है। उसे फेंकने का कोई मार्ग भी नहीं, उसे वापस करने का भी कोई रास्ता नहीं कि हम परमात्मा के पास जाएं और कहें-मैं इसे वापस करता हूं- इस ज्ञान के निषेधित फल को। मुझे क्षमा करें। कोई रास्ता नहीं। वापस लौटने का कोई रास्ता नहीं। अब वह तुम्हारा रक्त बन गया है। हम वापस नहीं लौट झुकते। हम केवल आगे जा सकते हैं। वापस लौटना होता ही नहीं। हम ज्ञान के नीचे नहीं जा सकते। हम केवल ज्ञान के पार जा सकते हैं केवल एक मन की निर्दोषिता संभव है- संपूर्ण जागरूकता की निदोंषिता। दो तरह की निर्दोषितायें है - एक ज्ञान के नीचे की है- बच्चों को, आदम के पूर्व की, पशुओं जैसी। ज्ञान के नीचे तुम, तुम नहीं होते। अहंकार नहीं होता, वह उपद्रवी नहीं होता। तुम इस समग्र ब्रह्म के हिस्से होते हो। तुम नहीं जानते कि तुम उसके एक हिस्से हो, तुम किसी ब्रह्म को नहीं जानते। तुम कुछ भी नहीं जानते। तुम होते हो, बिना कुछ जानते हुए। सचमुच तब कोई दुख नहीं होता क्योंकि बिना ज्ञान के दुख असंभव है। दुख को भोगने के लिए भी किसी को सजग होना पड़ता है। तुम दुख को केसे भोगीगे, यदि तुम्हें उसका पता नहीं है । तुम्हारा ऑपरेशन किया जा रहा है। एक शल्य चिकित्सक तुम्हारा ऑपरेशन कर रहा है। यदि तुम होश में हो तो तुम्हें पीडा होगी। यदि तुम बेहोश हो तो तुम्हें पीड़ा नहीं होगी। पांव पूरा काट दिया गया है और फिर भी कोई पीड़ा नहीं है। पीड़ा का कुछ पता नहीं चलता है। तुम बेहोश हो, तुम बेहोशी में पीड़ा नहीं भोग सकते। तुम्हें पीड़ा होगी यदि तुम होश में हो । जितने अधिक सचेतन, उतनी ही अधिक पीड़ा होगी। इसीलिए जितना अधिक आदमी का ज्ञान बढ़ता है उतना ही वह अधिक पीड़ा को अनुभव करता है। पुराने आदिम लोग इतने दुखी अनुभव नहीं करते थे, जितने कि तुम करते हो। इसका कारण यह नहीं कि वे अच्छे लोग थे बल्कि इसलिए कि उन्हें पता ही नहीं था। आज भी, गांव के रहने वाले लोग आधुनिक जगत के हिस्से नहीं हुए है और वे एक सरल, निर्दोष ढंग से रहते हैं। वे इतने दुखी नहीं है। इसके कारण बहुत-सी भ्रांत धारणाएँ विचारकों के खयाल में आई है। रूसो या टॉल्सटॉय या गाँधीः वे सोचते है कि चूंकि गाँव के लोग ज्यादा आनन्दपूर्ण हैं, अच्छा होगा यदि सारा संसार ही पुनः आदिम युग में पहुँच जाए, वापस जंगल में लौट जाए, प्रकृति में वापस पहुँच जाए। परन्तु वे गलत हैं क्योंकि जो आदमी सभ्यता से भरे शहर में रह चुका उसे गाँवों में कष्ट होगा। उस भाँति कोई भी गाँव का आदमी दुःखी नहीं होगा। रूसो लगातार प्रकृति में वापस लौट जाने की बात करता चला जाता है और पेरिस में रहता जाता है। वह स्वयं गाँव में रहने नहीं जाएगा। वह गाँव के जीवन के संगीत की बात करता है, वहाँ के सौंदर्य की, वहाँ की सरलता की बात करता हैं परन्तु वह स्वयं गाँव नहीं जायेगा। और यदि वह वहाँ चला जाता है तो उसको इतना कष्ट होगा जितना कि किसी गाँव के रहने वाले को कभी नहीं होगा, क्योंकि यदि एक बार चेतना विकसित ही गई तो तुम उसे उतार नहीं सकते। वह "तुम" हो । वह कुछ ऐसी बात नहीं है जिसे कि तुम उतार सको, वह तुम्ही हो । केसे तुम स्वयं को उतार सकते हो? तुम्हारी चेतना ही तुम हो । आदम लज्जा से पीड़ित हुआ, उसे अपनी नग्नता का बोध हुआ; उसका कारण है अहंकार। अहंकार एक केन्द्र है। आदम ने एक केन्द्र को पा लिया। यद्यपि वह मिथ्या ही था, परन्तु फिर भी केन्द्र तो था। अब आदम सारी समष्टि से भिन्न था। वृक्ष थे, तारे ये, सब कुछ था परन्तु आदम अपने में एक द्वीप बना पीड़ित हो रहा था। अब उसका जीवन इसका ही था, न किनारे ब्रह्म का एक हिस्सा और जैसे ही तुम्हारी जिन्दगी तुम्हारी हो जाती है, संघर्ष का प्रवेश होता है। तुम्हें एक-एक इंच संघर्ष करना पड़ता है जीने के लिए, बचने के लिए। पशु संघर्षरत नहीं है। यद्यपि वे हमें अथवा डार्विन को संघर्षरत दिखाई पड़ते हैं, वे संघर्ष में नहीं है। वे डार्विन को लड़ते हुए दिखाई पड़ते हैं क्योंकि हम अपने ही विचार प्रक्षेपित करते रहते है। वे संघर्ष में नहीं हो सकते। वे हमें संघर्षरत दिखाई पड़ सकते हैं क्योंकि हमारे लिए सभी कुछ संघर्ष है। ऐसा दिखलाई पड़ सकता है कि वह संघर्ष में डूबे है, परन्तु वस्तुतः वे संघर्ष में नहीं डूबे हैं। वे तो इस समष्टि की एकता में बह रहे हैं। यहाँ तक कि यदि वे कुछ भी कर रहे हैं तो उसके पीछे भी कोई कर्ता नहीं है। वह एक प्राकृतिक घटना है। यदि एक शेर अपने किसी शिकार को खाने के लिए मार रहा है, तो उसके पीछे थी कोई कर्ता नहीं है, कोई हिंसा नहीं है। वह एक साधारण घटना है केवल भूख के लिए भोजन । वहाँ कोई भूखा नहीं है, पर सिर्फ भूख है। एक भोजन पाने को यांत्रिक व्यवस्था, न कि हिंसा । केवल आदमी हिंसक हो सकता है, क्योंकि केवल आदमी ही कर्ता हो सकता है। तुम बिना भूख के भी मार सकते हो, किन्तु एक शेर बिना भूख के कभी नहीं मार सकता। क्योंकि शेर में उसकी भूख किसी को मारती है, न कि शेर । एक शेर खेल में कभी नहीं मार सकता। शेर के लिए शिकार जैसा कोई खेल नहीं होता। वह सिर्फ मनुष्य के लिए ही होता है। तुम खेल में भी हत्या कर सकते हो- सिर्फ मजे के लिए। यदि शेर तृप्त हो गया है, तो फिर कोई हिंसा नहीं होगी, कोई खेल नहीं होगा। वह तो सिर्फ भूख की घटना है। वहाँ कोई करने वाला नहीं है। प्रकृति एक गहन वैधिक प्रवाह है। इस प्रवाह में आदम अपने प्रति जाग जाता है। और इसलिए सजग हो जाता है कि उसने ज्ञान के वृक्ष का निषेधित फल खा लिया था। ज्ञान निषिद्ध था। "ज्ञान के वृक्ष के फल मत खाता।" ऐसा आदेश था। आदम ने उसकी अवज्ञा की, और तब फिर वह वापस नहीं लौट सकता था। और बाइबिल कहती है कि आदम के विद्रोह के लिए सभी को दुःख उठाना पड़ेगा क्योंकि प्रत्येक आदमी एक तरह से पुनः आदम ही है। परन्तु तुम उसके लिए दुःख नहीं मानोगे। तुम उसके लिए दुख केसे मानोगे जो कि किसी और ने कभी किया हो? परन्तु यह इतिहास प्रति दिन सतत पुनः होता रहता है। हर बच्चे को ईडन के बाग से निष्कासित किया जाता है। प्रत्येक बच्चा आदम की तरह पैदा होता है, और तब उसे निकाल दिया जाता है। इसी कारण कवियों में, कलाकारों में, साहित्यिक लोगों में नोसल्जिया-अतीत के प्रति इतना लगाव होता हैं। इन सभी लोगों में जो कि व्यक्त कर सकने की युक्ति जुटा सकें। अतीत के प्रति भारी लगाव होता है। वे सोचते हैं कि बचपन एक सुनहरा युग था। प्रत्येक यह सोचता है कि बचपन बहुत सुन्दर था, स्वर्ग था, और हर एक बचपन में वापस लौटना चाहता है। यहाँ तक कि एक बूढ़ा भी जो मरण शैय्या पर पड़ा है, अपने बचपन के बारे में उसी तरह से सोचता है कि बचपन बड़ा सौन्दर्य से भरा था, आनन्द था, फूल थे, तितलियाँ थीं, परियों के सपने थे। प्रत्येक अपने बचपन में एक वण्डरलैण्ड में रहता है, खाली अलाइस ही नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चा ! यह छाया हमारे साथ-साथ चलती है। आखिर बचपन इतना सुन्दर, इतना आनन्दपूर्ण क्यों है? क्योंकि तुम तब समष्टि के बहाव के साथ एक होते हो, बिना किसी दायित्व के पूर्ण स्वतन्त्रता में, बिना किसी अन्तःकरण के, बिना किसी बोझ के। तुम इस तरह जिये-जैसे कुछ भी करने के लिए नहीं । तुम्हें कुछ भी तो नहीं करना था, बस जो जैसा था, स्वीकृत था। और तब अहंकार आता है, और तब आते हैं संघर्ष और द्वंद्व । तब हर बात एक दायित्व हो जाती है। और सारी स्वतन्त्रता नष्ट हो जाती है और हर क्षण एक बन्धन बन जाता है। मनौवैज्ञानिक कहते हैं कि धर्म इसी नोसल्जिया को, इसी बचपन को वापस लौट जाने की इच्छा को प्रतिबिम्बित करता है। और वे इससे भी आगे चले जाते हैं-वे कहते हैं कि अन्त में प्रत्येक की मनोकामना फिर से माँ के गर्भ में पहुँच जाने की होती है, क्योंकि जब तुम गर्भ में थे तो तुम इस समिष्ट के हिस्से थे। यह समष्टि ही तुम्हें भोजन दे रही थी। श्वास लेने की भी आवश्यकता न थी माँ ही तुम्हारे लिए श्वास ले रही थी। तुम्हें माँ की कोई खबर नहीं थी। तुम्हें अपना भी कुछ होश नहीं था। तुम बिना किसी होश के थे। गर्भ ही ईडन का बाग है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य आदम की भांति ही जन्म लेता है और प्रत्येक को ज्ञान का निषेधित फल खाना पड़ता है, क्योंकि जैसे-जैसे तुम बड़े होते हो तुम्हारा ज्ञान भी बढ़ता है। वह अनिवार्य है, वह होगा ही; अतः ऐसा नहीं है कि आदम ने विद्रोह किया हो । विद्रोह विकास का हिस्सा है। वह ओर कुछ भी नहीं कर सकता उसे फल खाना ही पडेगा। हर बच्चे को विद्रोह करना ही पड़ता है, फल खाना ही पड़ता है। हर बच्चे को विद्रोही होना ही पड़ता है। जिन्दगी की ज़रूरत है। उसे माँ से दूर जाना ही पडेगा, पिता से अलग होना ही पड़ेगा। वह उसकी कामना करेगा, स्वप्न देखेगा। परन्तु फिर भी दूर जायेगा। यह एक अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसे टाला नहीं जा सकता। पूछा गया है कि इस भाव के पीछे क्या गहरा अर्थ छिपा है? यही अर्थ हैं कि ज्ञान अहंकार प्रदान करता है, अहंकार तुममें तुलना को, निष्कर्ष को, व्यक्तित्व को पैदा करता है। तुम अपने को पशु नहीं मान सकते। मनुष्य ने इस तथ्य को छिपाने के लिए कि वह "पशु है, सभी कुछ किया है। हम पशु हैं, इसे छिपाने के लिए हम हर रोज़ कुछ-न-कुछ कर रहे हैं। परन्तु हम पशु हैं, और इस तथ्य को छिपाने से तथ्य नष्ट नहीं हो जाता। बल्कि यह एक विकृत तथ्य हो जाता है। इसलिए जब यह ढंका हुआ तथ्य प्रकट होता है, तब आदमी और भी अधिक पशु साबित होता है। यदि तुम हिंसक होते हो, तो कोई भी पशु तुमसे प्रतियोगिता नहीं कर सकता। कैसे कर सकता है? किसी पशु ने कभी किसी हिरोशिमा, किसी वियतनाम को नहीं जाना । केवल मनुष्य ही हिरोशिमा को पैदा कर सकता है उसकी कोई तुलना नहीं है सारे इतिहास में पशु सिर्फ कठपुतलियों से खेल रहे हैं- हिरोशिमा की तुलना में उनकी हिंसा ना-कुछ है। यह इकट्ठी कर ली गयी हिंसा है- छिपी हुई, एकत्रित। हम छिपाते चले जाते हैं और वह जितनी इकट्ठी कर लेते है, इतनी ही हमें लज्जा लगती है, क्योंकि हम जानते हैं कि भीतर क्या छिपा है। हम उससे बच नहीं सकते। एक मनोवैज्ञानिक छिपे हुए तथ्यों के बारे में प्रयोग कर रहा था, जिन्हें कि तुम कितना ही चाहो छिपा नहीं सकते। उदाहरण के लिए, यदि कोई कहे कि वह स्त्रियों के प्रति आकर्षित नहीं होता, तो वह उसका अभ्यास कर सकता है और वह स्वयं को व दूसरों को भरोसा भी दिला सकता है कि वह आकर्षित नहीं होता। परन्तु आदम तो ईंव के प्रति आकर्षित होगा ही, ईव आदम की ओर आकर्षित होगी हो । वह मनुष्य की प्रकृति का हिस्सा है, जब तक कि कोई पार नहीं चला जाये, जब तक कि कोई बुद्ध न हो जाए। किन्तु तब बुद्ध नहीं कहते कि मैं स्त्रियों के प्रति आकर्षित नहीं होता, क्योंकि ऐसा कहने के लिए भी तुम्हें आकर्षण और विकर्षण की भाषा में सोचना पड़ता है। वे नहीं कहेंगे कि मैं स्त्रियों से विकर्षित होता हूँ, क्योंकि जब तक कोई आकर्षित नहीं होता, कोई विकर्षित भी नहीं होता। यदि तुम उनसे पूछो, तो वे इतना ही कहेंगे कि स्त्रियाँ व पुरुष दोनों ही मेरे लिए असंगत हैं। मैं दोनों ही नहीं हूँ। यदि मैं पुरुष हूँ तो स्त्री कहीं-न-कहीं छिपी होगी। यदि में स्त्री हूँ तो पुरुष कहीं-न-कहीं छिपा होगा एक मनोवैज्ञानिक ने अभी एक आदमी पर प्रयोग किया जो कि कहता था- मैं स्त्रियों से प्रभावित नहीं होता। और वह नहीं होता था, जहाँ तक ऊपरी बातों का संबंध है। उसे कभी किसी के प्रति आकर्षित होते नहीं देखा गया। तब इस मनोवैज्ञानिक ने उसे तस्वीरें दिखाईं-दस तस्वीरें अलग-अलग चीजों की । केवल एक तस्वीर उसमें एक नग्न स्त्री की थी। मनोवैज्ञानिक यह नहीं देख रहा था कि वह आदमी कौन-सी तस्वीर देख रहा है। वह तो उसकी आँखें देख रहा था। तस्वीर का उलटा हिस्सा मनोवैज्ञानिक की तरफ था। वह उस आदमी को तस्वारें दिखाता था और उसकी आँखों में देखता था। उसने कहा कि यदि तुम आकर्षित नहीं होते, तो मुझे पता चल जाएगा। अन्यथा केवल तुम्हारी आँखें देखकर मैं तुम्हें बता दूंगा कि कब तुम नग्न स्त्री की तस्वीर देख रहे हो। मैं तस्वीर नहीं देख रहा हूँ। तस्वीरें दिखलाई गई और इस बार मनस्विद कहता है कि अब तुम नग्न स्त्री को तस्वीर देख रहे हो, क्योंकि जिस क्षण भी नग्न चित्र सामने होगा, आँखें फैल जायेंगी-और वह अनैच्छिक कृत्य हैं। तुम उस पर काबू नहीं कर सकते तुम कुछ भी नहीं कर सकते। यह एक रिफलेक्स-ऐक्शन है। आँखें जैविक रूप से वैसी बनी हैं। वह आदमी कहता है कि मैं आकर्षित नहीं होता, परन्तु वह केवल चेतन मन है। अचेतन तो हर बार आकर्षित होता है। जब तुम किसी तथ्य को छिपाते हो तो वे तुम्हें प्रेरित करते ही चले जाते हैं और तुम ज्यादा-और ज्यादा लज्जा का अनुभव करते हो। जितनी ऊँची सभ्यता और संस्कृति होगी, उतने ही अधिक लोग ज्यादा लज्जित अनुभव करेंगे। जितने तुम यौन के प्रति लज्जित होते हो उतने ही तुम अधिक सभ्य होते हो। पर तब सभ्य आदमी विक्षिप्त होकर रहेगा ही-खण्डित, विभाजित होगा ही। यह विभाजन शुरू हुआ आदम के साथा और दूसरी बात पूछी गई है कि ज्ञान का निषेधित फल यौन का ही फल है। आपका इस बारे में क्या दृष्टिकोण है? सचमुच, ऐसा ही है। परन्तु इतना ही नहीं है। यौन पहला ज्ञान है, और यौन ही अन्तिम ज्ञान है। जब तुम मनुष्यता में प्रवेश करते हो, तो पहली चीज़ जो कि तुम अनुभव करते हो, और सजग होते हो वह है यौन; और आखिरी चीज़ जबकि तुम मनुष्यता के पार जाते हो, तब भी यौन ही होती है- पहली और अन्तिम। क्योंकि सेक्स बहुत बुनियादी है, वह प्रथम बार होगी ही। वह अल्फा और वही ओमेगा है। एक बच्चा सिर्फ बच्चा ही है, जब तक कि वह काम की दृष्टि से परिपक्व नहीं हो जाता। जैसे ही वह काम की दृष्टि से परिपक्व हो जाता है, वह आदमी हो जाता है। काम परिपक्वता के साथ ही सारा संसार भिन्न हो जाता है। वह संसार फिर वही नहीं रह जाता, क्योंकि तब तुम्हारा दृष्टिकोण, तुम्हारी पकड़, तुम्हारा चीजों को देखने का सारा ढंग ही बदल जाता है। जब तुम स्त्री के प्रति सजग होते हो, तुम आदमी होने लगते हो। वस्तुतः पुरानी बाइबिल की पुस्तक में, "नोलेज" शब्द का हिब्रू भाषा में यौन के अर्थ में ही प्रयोग किया गया है। उदाहारण के लिए ऐसे वचन हैँ कि "वह दो वर्षों तक अपनी पत्नी के पास नहीं जाता"। "ही डू नॉट "नो" हिज वाइफ फॉर टू इयर्स"। इसका अर्थ है कि दो वर्षों तक उनमें कोई यौन सम्बन्ध नहीं थे। उसने अपनी पत्नी को पहली बार उस दिन जाना- हि "न्यू" हिज वाइफ फॉर दि फर्स्ट टाइम ऑन दैट डे। इसका अर्थ होता है कि पहली बार यौन संबंध हुआ। "नोलेज" का हिब्रू भाषा में अर्थ हैं सैक्स। नोलेज यौन का ज्ञान। इसलिए यह सही बात है कि आदम और ईव वह विशेष फल खाने के बाद ही सेक्स से परिचित हुए। यौन-सेक्स सर्वाधिक आधारभूत बात है। बिना यौन के जीवन नहीं हो सकता। जीवन प्रकट होता है-सेक्स के कारण ही और सेक्स के कारण ही खो भी जाता हैं। इसीलिए बुद्ध और महाबीर कहते हैं कि जब तक तुम यौन के पार नहीं चले जाते तुम बार-बार जन्मते रहोगे। तुम जीवन के पार नहीं जा सकते क्योंकि भीतर अगर कामवासना है, तो तुम फिर से जन्म ले लोगे। अतः सेक्स किसी अन्य को पैदा करने के लिए नहीं है, अन्ततः यह तुमको भी जन्म देता है। यह दोहरा काम करता है। तुम काम के द्वारा किसी और को जन्म देते हो, किन्तु वह इतना महत्त्वपूर्ण नहीं है। तुम्हारी काम वासना के कारण ही तुम्हारा फिर जन्म होता है। तुम अपने को ही बारबार जन्म देते रहते ही। आदम अपने काम के प्रति सजग हो गया, वह पहली सजगता थी। परन्तु यह काम सिर्फ प्रारंभ था। उसके बाद शेष सब पीछे-पीछे आयेगा। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि प्रत्येक जिज्ञासा एक तरह से यौन-संबन्धी है इसलिए यदि कोई आदमी नपुंसक पैदा हो, तो उसे कोई जिज्ञासा नहीं होती- सत्य के लिए भी नहीं। क्योंकि जिज्ञासा बुनियादी रूप से सेक्सुअल ही होती है किसी छिपी चीज को खोजना, किसी अनजानी बात को जानना, अज्ञात को जानना-काम-संबंधी बात ही है। बच्चे एक दूसरे के साथ खेल खेलते हैं कि एक दूसरे के विभिन्न अंगों को जानें। यह जिज्ञासा की शुरुआत है, और सारे विज्ञान का प्रारंभ है- जो छिपा है उसे खोजना, जिसका पता नहीं है-उसे जानना। वास्तव में, जितना कोई व्यक्ति कामुक होता है, उतना ही अधिक आविष्कारक हो सकता है। जितना अधिक कोई व्यक्ति कामुक होता है उतना ही बुद्धिमान होता है। कम काम-ऊर्जा के साथ कम बुद्धि होती है; क्योंकि यौन एक गहरा तथ्य है जिसे कि उघाड़ना है - केवल शरीर में ही नहीं, केवल विपरीत लिंगी-शरीर में ही नहीं-बल्कि सभी छिपी हुई वस्तुओं में । अतः यदि समाज बहुत अधिक सेक्स की निन्दा से भरा है तो वह कभी भी वैज्ञानिक नहीं हो सकता, क्योंकि तब वह जिज्ञासा को ही निन्दित कर देता है। पूरब वैज्ञानिक नहीं हो सका क्योंकि वह यौन के प्रति अत्याधिक विरोध से भरा था। और पश्चिम भी वैज्ञानिक नहीं हो पाता यदि ईसाईयत की पकड़ उस पर बनी रहती। यह केवल तभी संभव हो सका जब कि वेटीकन विलीन-सा होने लगा, जबकि रोम अधिक महत्त्वपूर्ण न रहा। केवल इन तीन सौ सालों में ही पश्चिम वैज्ञानिक हो सका, जबकि ईसाईयत का महल धूल-धूसरित हो गया और विलीन हो गया। काम-ऊर्जा के मुवत होने से ही अनुसंधान का द्वार खुल गया। यौन की दृष्टि से मुक्त एक समाज वैज्ञानिक होगा औरयौन को निषेध करने वाला एक समाज गैरवैज्ञानिक होगा। सेक्स के साथ ही हर चीज़ जीवन्त होने लगती है। यदि तुम्हारा बच्चा, जबकि वह परिपक्व होने लगता है, यौन की दृष्टि से परिपक्व, तो वह विद्रोही होने लगता है। तब उसे भूल जाओ। वह बहुत प्राकृतिक बात है। उसको नसों में नई ऊर्जा के आने से, एक नये जीवन के प्रादुर्भाव की वजह से वह विद्रोही होगा ही। वह विद्रोह सिर्फ एक हिस्सा है। वह अवश्यमेव अविष्कारक होगा। वह नई चीजों की खोज करेगा, नये मार्गों की, नये ढंगों की, जीवन के नये तरीकों की, नये समाज की। वह नये सपने देखेगा, वह नये जगत के बारे में सोचेगा। यदि तुम सेक्स को निन्दित कर देते हो, तब फिर युवकों में कोई विद्रोह नहीं होगा। सारे संसार में युवकों का विद्रोह यौन स्वतन्त्रता का ही एक हिस्सा है। पुरानी सभ्यता में कोई विद्रोह नहीं थो । चूंकि काम की इतनी अधिक निदा की गई थी कि ऊर्जा बुरी तरह दब गई। उस ऊर्जा के दमन के साथ ही हर तरह का विद्रोह भी दब गया। यदि तुम काम-ऊर्जा को स्वतन्त्रता देते हो, तो फिर सब प्रकार का विद्रोह होगा, सारा विद्रोह सामने आयेगा। ज्ञान का यौन संबंधी आयाम भी होता है। इसलिए एक तरह से यह बात सही है कि आदम यौन के प्रति सजग हो गया-यौन के आयाम के प्रति । किन्तु उस आयाम के साथ हौ वह दूसरी भी बहुत-सी चीजों के प्रति सजग हो गया यह ज्ञान का सारा फैलाव, यह ज्ञान का विस्फोट, यह अज्ञात की खोज, यह चन्द्रमा तथा दूसरे नक्षत्रों को यात्रा यह सब सेक्स की, काम की प्यास है। और यह ज्ञान की खोज और और दूरी तक होगी, क्योंकि एक नईं ऊर्जा का प्रादुर्भाव हुआ हैं। और अब यह ऊर्जा नये रूप लेगी तो नये साहस के काम करेगी। यौन व यौन की सजगता के साथ, आदम एक लम्बी यात्रा पर निकल गया। हम सभी उस पर हैं, प्रत्येक उस यात्रा पर है। क्योंकि यौन केवल तुम्हारे शरीर का ही हिस्सा नहीं है। वही तुम हो। तुम यौन से ही पैदा होते हो, और यौन के नष्ट हो जाने पर तुम नष्ट हो जाते हो। तुम्हारा जन्म भी यौन का जन्म है और तुम्हारी मृत्यु ही यौन की मृत्यु है। इसलिए जैसे ही तुम्हें लगे कि काम-ऊर्जा समाप्त हो गई, जानें कि मृत्यु निकट है। पैंतीस वर्ष शिखर के वर्ष हैं। काम-ऊर्जा शिखर पर होती है, और उसके बाद हर चीज़ नीचे की और जा रही है और व्यक्ति बूढा होने लगता है-मृत्यु की राह पर सत्तर या उसके करीब मृत्यु की उम्र है। यदि पचास की उम्र पर काम-ऊजां शिखर पर होगी तो व्यक्ति की सामान्य आयु सौ वर्ष हो जायगी। पश्चिम जल्दी ही औसत सौ वर्ष को उम्र प्राप्त कर लेगा, क्योंकि पचास साल का आदमी भी अब लड़कों की तरह व्यवहार करता है। यह अच्छा है। इससे पता चलता है कि समाज जिन्दा है। यह इस बात को बतलाता है कि जिन्दगी लम्बी ही गई है। यदि सौ-साल का आदमी लड़कों की तरह व्यवहार करने लगे तो जिन्दगी दो सौ वर्ष की हो जायेगी, क्योंकि काम-ऊर्जा ही आघारभूत ऊर्जा है। काम-ऊर्जा के कारण ही तुम युवा हो, और काम-ऊर्जा के कारण ही तुम बूढे हो जाओगे। सेक्स के कारण ही तुम पैदा होते हो, और सेक्स के कारण ही तुम मर जाओगे। और इतना ही नहीं, बुद्ध, महावीर और कृष्ण कहते हैं किं कामवासना के कारण ही तुम फिर से पैदा होते हो। यह शरीर तो तुम्हारा काम से चलता ही है, बल्कि तुम्हारे सारे शरीर भी लगतार कामवासना से संचालित हैं। सचमुच जब आदम पहली बार सचेत हुआ तो वह काम के प्रति ही सजग हुआ। यह एक बहुत बुनियादी तथ्य है। परन्तु ईसाईयत ने इसे गलत ही अर्थ दे दिया और तब बहुत नासमझी की बातें उसके पीछे आईं। ऐसा कहा गया कि चूँकि आदम सेक्स के प्रति सजग हो गया और उसे लज्जा अनुभव हुई इसलिए सेक्स बुरा है और पाप है- ओरिजनल सिन - प्रथम बुनियादी पाप- ऐसा नहीं है। यह ओरिजनल लाइट है- प्रथम प्रकाश है। वह इसलिए नहीं लज्जित हुआ कि यौन बुरा है, बल्कि इसलिए कि उसने देखा कि यौन तो पशुता का हिस्सा है और उसने सोचा कि मैं पशु नहीं हूं। इसलिए यौन से लड़ना पड़ेगा। उसे काटकर फेंकना पड़ेगा। किसी भी तरह काम रहित होना पड़ेगा। यह गलत अर्थ है। यह ईसाईयों द्वारा कहानी को गलत अर्थ देना है। अतः काम से लड़ो। धर्म काम के खिलाफ एक युद्ध हो गया। यदि धर्म काम के विरोध में युद्ध है तो फिर धर्म जीवन के खिलाफ भी एक युद्ध हो गया। वस्तुतः धर्म काम के खिलाफ युद्ध नहीं है, वह सिर्फ एक प्रयास है- काम के पार जाने का, खिलाफत में नहीं। यदि तुम विरुद्ध हो गये तो तुम उसी तल पर रहोगे। तब तुम कभी पार नहीं जा सकोगे। इसलिए ईसाई सन्त और रहस्यवादी मृत्यु - शैय्या पर पहुँचने तक सैक्स के खिलाफ ही लड़ते रहते हैं। तब आकर्षण पैदा होता है, और हर क्षण वे आकर्षित होते हैं। वहाँ उन्हें आकर्षित करने के लिए कोई भी नहीं है। उनका अपना दमन ही उनके आकर्षण का निर्माता होता है। वे अपने अन्तर्मन में सतत अपने से ही लड़ते हुए एक बहुत ही कष्टप्रद जीवन बिताते रहे हैं। धर्मं पार जाने के लिए है, न कि लड़ने के लिए। यदि तुम्हें पार जाना है तो तुम्हें सेक्स के पार जाना होगा। अतः काम-ऊर्जा को अतिक्रमण करने के लिए प्रयोग में लाना पड़ेगा। तुम्हें उसके साथ चलना है न कि उससे लड़ना है। तुम्हें उसे अधिकाधिक जानना है। अज्ञान में रहना अब असंभव है। तुम्हें उसे और अधिक समझना है। ज्ञान ही मुक्ति है । यदि तुम उसे जानते ही चले जाओ, जानते ही चले जाओ - अधिकाधिक तो एक घड़ी आती है जब तुम समग्र रूप से सजग ही जाते हो और तब काम विलीन हो जाता है। अब उसी ऊर्जा का तुम्हारे पास एक भिन्न ही आयाम होता है। काम समतल होता है। जब तुम पूर्ण सजग हो जाते हो, तो काम ऊर्ध्व हो जाता है, लम्ब की भांति होता है। और वे सेक्स की ऊपर की ओर गति ही कुण्डलिनी है। यदि सेक्स समतल रेखा में चले तो तुम दूसरों को और अपने को उत्पन्न करते चले जाते हो। यदि ऊर्जा ऊपर की और लम्ब को भाँति गति करती है तो तुम उसके बाहर हो जाते हो-अस्तित्व के चक्र के बाहर जैसा कि बौद्ध कहते है कि जीवन के चक्र के बाहर यह एक नया जन्म होगा-नये शरीर में नहीं, बल्कि अस्तित्त्व के नये ही आयाम में। इसे बौद्धों ने निर्वाण कहा है। तुम उसे मोक्ष भी कह सकते हो अथवा जो भी तुम कहना चाहो कह सकते हो। नाम का कोई अर्थ नहीं है। इसलिए दो मार्ग हैं। आदम अपने काम के प्रति सजग हो गया। अब वह उसे दबा सकता था। वह समतल रेखा में गति कर सकता था उससे सतत लड़ते हुए संताप से भरा और जानता रहता कि पशु भीतर छिपा है। और सदैव यह बहाना करता रहता कि वह वहाँ नहीं है। यही पीड़ा है। और कोई चाहे तो जन्मों समतल रेखा में चलता रह सकता हैं-बिना कहीं भी पहुँचे, क्योंकि वह घूमता हुआ चक्र है। इसीलिए हम उसे चा-चक्र कहते हैएक घुमता हुआ चक्र । तुम चाहो तो इस चक्र से बाहर छलाँग लगा सकते हो। दमन से वह छलांग नहीं लगेगी, वह अधिकाधिक ज्ञान से ही संभव होगी। अतः मैं कहूँगा कि तुमने निषेधित वृक्ष का फल तो खा लिया है, अब पूरा वृक्ष ही खा जाओ। वही केवल एक मात्र मार्ग है। अब वृक्ष ही खा जाओ। एक पत्ता भी पीछे न बचे। पीछे वृक्ष मचे ही नहीं, उसे पूरा ही खा जाओ। तभी केवल तुम ज्ञान से मुक्त हो पाओगे उसके पहले कभी भी नहीं । और जब मैं कहता हूँ कि पूरा वृक्ष ही खा जाओ, तो मेरा मतलब होता हैं कि अब तुम जब जान ही गये हो, तो पूरा ही जान लो । खण्डित, टूटी-फूटी सजगता ही समस्या है। या तो पूर्णतः अनजान रहो अथवा पूरी तरह सजग हो जाओ। समग्रता ही आनन्द है। पूरी तरह अज्ञानी हो जाओ। तब भी तुम आनन्द में होते हो। तुम्हें उसका पता नहीं होता, परन्तु तुम आनन्द में होगे। जैसे कि तुम जब पूरी तरह नींद में डूबे हो, कोई सपना भी नहीं चल रहा है, पर केवल नींद में डूबे हो, मस्तिष्क की कोई गति भी नहीं है, तो तुम आनन्द में हो, परन्तु तुम उसे अनुभव नहीं कर सकते । तुम सवेरे इतना ही कह सकते हो कि रात्रि नींद बडी मधुर थी। परन्तु तब उसका कोई फ्ता नहीं था, जब कि वह थी उसका अनुभव तब हुआ जबकि तुम उसमें से बाहर आ गये। जब ज्ञान प्रवेश करता हैं, सजगता आती है। तब तुम कह सकते हो कि रात्रि बडी आनन्दपूर्ण थी। या तो पूर्णरूप से अज्ञानी हो जायें, जो कि असंभव है, अथवा समग्र रूप से जान लें। समग्रता के साथ ही आनन्द होता है। समग्रता ही आनन्द है। अतः फल को खा लें जड़ के साथ और जाग जाये। एक जागे हुए पुरुष का यही अर्थ होता है, एक बुद्ध का, एक ज्ञान को उपलब्ध व्यक्ति का यही अर्थ होता है कि उसने पूरा वृक्ष को खा लिया। अब कोई सजग होने को भी पीछे नहीं बचा, मात्र एक साधारण जागरूकता ही बची। यह मात्र सजगता-जागरूकता ही ईडन के जाग में पुनः प्रवेश है। तुम दोबारा से वही पुराना रास्ता नहीं खोज सकते, यह तो हमेशा के लिए खो गया । परन्तु तुम एक नया मार्ग खोज सकते हो, तुम फिर से प्रवेश कर सकते हो। और वास्तव मेँ जो कुछ भी शैतान ने आदम को वादा किया था पूरा हो जायेगा, तुम दिव्यस्वरूप हो जाओगे। वह एक तरह से सही है। यदि तुम ज्ञान का फल खा लेते हो तो देवताओं के समान ही जाओगे। हम हमारी वर्तमान मनःस्थिति में इस बात को नहीं समझ सकते, क्योंकि हम नर्क में पड़े हैं। हम बीच में लटके हैं दो चीजों के, सदैव बंटे हुए पीड़ा में, संताप में। ऐसा लगता है कि शैतान ने हमें धोखा दिया आदम को धोखा दिया यह समग्र बात नहीं है, इतिहास अभी अधूरा है। तुम उसे पूरा कर सकते हो, और तभी केवल तुम यह कह सकते हो कि जो कुछ शैतान ने कहा था, यह सही था या गलत । सारे वृक्ष को ही खा जायें और तुम देवताओं के जैसे हो जाओगे एक व्यक्ति जो कि पूर्णतः जागरूक हो गया वही दिव्य हो गया। वह अब मानव नहीं है। मानवता तो एक प्रकार का रोग है मेरा मतलब है, एक डिजीज, एक बेचौनी, एक सतत तनाव। या तो पशु जैसे हो जाओ और तुम स्वस्थ हो जाओगे. अथवा देवतास्वरूप हो जाओ और तब भी तुम स्वस्थ हो जाओगे-स्वस्थ, क्योंकि तुम समग्र हो गये, एक समग्रता ही हो गये। अंग्रेजी का शब्द "होली" बड़ा अच्छा है। इसका मतलब सिर्फ पवित्र ही नहीं होता । वस्तुतः इसका अर्थ होता है-"होल"-समग्र। और जब तक तुम समग्र नहीं हो जाते, तुम "होली" पत्रित्र नहीं हो सकते। और केवल दो ही प्रकार की समग्रताएँ हैं- एक पशुओं जैसी और दूसरी है देवताओं के समान। भगवान, आपने कहा कि जागरूकता, अवेरयनेस व केन्दोकरण से सघनता निर्मित होती हैं, लेकिन मुझे तो लगता हैं कि जागरूकता मेरे भीतर एक गहरी शून्यता का भाव पैदा करती है। कृपया, केन्दीकरण व आंतरिक शून्यता के संबंध को समझायें। जैसा मनुष्य है, वह बिना किसी केन्द्र के है - बिना एक वास्तविक, एक प्रामाणिक केन्द्र के। यूँ कहने के लिए केन्द्र है उसके पास, किन्तु वह एक झूठा केन्द्र है। वह केवल सोचता है कि उसके पास केन्द्र है। अहंकार एक झूठा केन्द्र है। तुम्हें प्रतीत होता है कि वह है, परन्तु वह है नहीं। यदि तुम उसे खोजने जाओ, तो तुम उसे कहीं भी नहीं खोज सकोगे। बुद्ध के ग्यारह सौ वर्षों बाद बोधिधर्म चीन गया। वह स्वयं भी बुद्ध हो गया था। वहाँ का सम्राट बू स्वयं उसके स्वागत के लिए आया । जब वहाँ कोई नहीं था, तो उसने बोधिधर्म से पूछा- "मैं बहुत अधिक परेशान हूँ। मेरा मन कभी शान्त नहीं रहता। मुझे बतायें कि मैं क्या करूँ? मेरा मन शान्त कर दें। उसे बेचौनी से मुक्त कर दें। मैं एक गहरे द्वन्द्ध में पड़ा हूँ। भीतर सदैव संघर्ष चलता रहता है। अतः कुछ करें।" बोधिधर्म ने कहा, "मैं अवश्य कुछ करूँगा। तुम कल सवेरे चार बजे आ जाना, लेकिन अपने स्वयं को साथ लाना-स्मरण रखना।" सम्राट ने सोचा कि या तो यह आदमी पागल है अथवा मैं इसकी बात नहीं समझ पाया। उसने कहा कि हाँ, मैं अवश्य आऊँगा। मैं अपने स्वयं के सहित ही आऊँगा। बोधिधर्म ने फिर से जोर देकर कहा कि देखो, भूलना मत। अपने स्वयं को भी साथ लाना, अन्यथा मैं शान्त किसे करूँगा? सारी रात सम्राट सो भी नहीं सका। वह बात ही कुछ ऐसी अजीब थी बिल्कुल विचित्र बात लगती थी। इस आदमी का मतलब क्या है। और तब सम्राट सोच में पड़ गया कि इस आदमी से मिलने जाये या नहीं, और वह भी सवेरे इतनी जल्दी - चार बजे ही । और बोधिधर्म ने अकेले ही बुलाया था - "तुम्हारे साथ तुम अकेले ही आना, दूसरा कोई और नहीं।" अतः कोई नहीं कह सकता था कि वह क्या करने चाला था। और फिर वह आदमी पागल भी दिखलाईं पड़ता था। मामला खतरनाक लगता था। किन्तु, फिर भी उसको आकर्षण पैदा हुआ। यह अरदमी कुछ भिन्न प्रकार का था। वह खींचता था। वह चुम्बकीय था। इसलिए सम्राट महल में रुक नहीं सका और वह आया। जब वह निकट आया तो बोधिधर्म ने उससे कहा - "आ गये तुम । परन्तु तुम्हारा स्वयं कहाँ है. तुम्हारा मैं कहाँ है? बू ने कहा "तुम तो मुझे पागल किये दे रहे हो। मैं सारी रात नहीं सो सका। तुम्हारा मेरे स्वयं रो मतलब क्या है? मैं यहाँ मौजूद।" अतः बोधिधर्म ने कहा-"तुम्हारा स्वयं बता दो। मैं उसे शान्त कर दूंगा, विश्राम में पहुँचा दूँगा। अपनी आंखें बन्द करो और खोजो कि वह कहाँ है। उसे मुझे बता दो और मैं उसे पूरी तरह गायब कर दूँगा. और फिर दोबारा कोई समस्या नहीं होगी।" अतः सम्राट बू ने बन्द कर लीं और बोधिधर्म के सामने बैठ गया सुबह बिल्कुल शान्ति थी । वहाँ कोई भी नहीं था। उसे अपनी श्वास की आवाज भी सुनाई दे रही धो, उसे अपनी हृदय की धड़कन भी सुनाईं पड़ रही थी। और बोधिधर्म वहाँ सामने ही बैठा उसे बार-बार कह रहा था-"भीतर चले जाओ और खोजों कि वह कहाँ है । और यदि तुम उसे नहीं खोज सकते तो फिर में क्या कर सकता हूँ?" और वह खोजता रहा, ढूंढता रहा भीतरघंटों तक। उसके बाद उसने अपनी आँखें खोली और तब वह दूसरा ही आदमी हो चुका था। उसने कहा-"मुझे वह कहीं भी नहीं मिलता । भीतर सब कुछ शून्य कोई स्वयं कोई "मैं" नहीं हैं।" "बोधिधर्म ने कहा-"यदि भीतर कोई "मैं" नहीं है और केवल शून्य ही तब भी क्या तुम्हें बेचौनी हो रही है? क्या भीतर कोई अशान्ति हैं? अब वह पीड़ा कहाँ है जिसकी कि तुम बात कर रहे थे? तुम उसकी इतनी चर्चा कर रहे थे, अब वह कहाँ है?" बू ने जबाब दिया वह अब कहीं भी नहीं है, क्योंकि वह आदमी ही चला गया, . फिर बिना उसके अशान्ति कैसे हो सकती है? मैंने उसे खोजने की बहुत कोशिश की परन्तु उसका तो पता नहीं चलता। मैं भी धोखे में था। मैं तो सोचता था कि भीतर। मैंने उसे ढूंढा परन्तु वह तो कहीं भी नहीं है। केवल शून्य है - एक रिक्तता, एक खालीपन अतः बोधिधर्म ने कहां अब तुम घर जाओ। और जब कभी तुम्हें ऐसा लगे कि तुम्हें अपने साथ कुछ करने की जरूरत है, तो पहले उसे खोजना कि वह कहाँ है । " यह एक झूठा अस्तित्व है। चूंकि हमने कभी उसे खोजा नहीं इसलिए हमें लगता है कि वह है। हम कभी भीतर नहीं गये है, इसलिए हम केवल "मैं" की बात करते रहते हैं। वह कहीं भी नहीं हैं। इसलिए पहली बात जो कि समझ लेनी है वह यह है कि यदि तुम ध्यान में जाओगे, यदि तुम शान्त होओगे, तो तुम्हें शून्य का अनुभव होगा, क्योंकि तुम अहंकार को नहीं खोज सकते। तब अहंकार के ही साथ कमरे में फर्नीचर भी था, अब फर्नीचर खो गया। तुम केवल एक कमरे हो-बल्कि एक कमरापन। यहाँ तक कि दीवारें भी विलीन हो गई। वे भी तुम्हारे अहंकार का ही हिस्सा थीं। सारा ढाँचा ही गिर गया, इसलिए तुम्हें शून्य का अनुभवं होगा। यह पहला चरण है जब कि अहंकार विलीन हो जाता है। अहंकार एक झूठी बात है, वह है नहीं। सिर्फ लगता है कि वह है, और तुम सोचते चले जाते हो कि वह है। वह सिर्फ तुम्हारे विचार का हिस्सा है न कि तुम्हारे "होने" का वह तुम्हारे मन से संबंधित है, न कि तुम्हारे अस्तित्व से । चूँकि तुम सोचते हो वह वहाँ है, इसलिए वह है। जब तुम उसे खोजने जाते हो तो वह कभी भी नहीं मिलता। तब तुम्हें शून्यता का अनुभव होता है, रिक्तता का। अब इस रिक्तता पर जोर दो, अब इस शून्य में रहो। मन बड़ा चालाक है। वह खेल खेल सकता है। यदि तुम सोचना शुरू कर दो कि वह शून्य है, यदि तुम सोचने लगो कि यह शून्यता है तो तुमने उसे फिर भर दिया। यदि तुम इतना-सा ही कहो कि "यह शून्य है" तो भी तुम उसके बाहर हो गये-उसके बाहर जा चुके। शून्य खो गया। तुम बीच में आ गये। इस शून्यता में ही रहो। शून्य ही हो जाओ। विचार न करो। यह बहुत कठिन है, बड़ा भयानक है। उसमें सिर चकराने लगता है। वह एक बड़ा खड्ड है, एक अनन्त खड्ड तुम नीचे, और नीचे गिरते ही चले जाते हो और नीचे की पेंदी कहीं नहीं आती एैसे में कोई होश खोने लगता है और वह सोचने लगता है। जैसे ही तुम सोचने लगे, तुमने फिर से जमीन पकड़ ली। अब तुम शून्य में नहीं हो । यदि तुम इस शून्य में रह सको बिना भागे, बिना कुछ विचारे, तो अचानक वैसे ही यह शून्य थी विलीन हो जाएगा-जैसे अहंकार खो गया था वैसे, क्योंकि अहंकार के कारण ही शून्य प्रतीत होता है। अहंकार ही उसे भर रहा था। वही फर्नीचर था, और तब कोई शून्य नहीं था। अब अहंकार विलीन हो गया है। इसलिए तुम्हें शून्य की प्रतीति हो रही है। यह शून्य की प्रतीति इसलिए होती है, क्योंकि जो सदैव वहाँ था, अब वह वहाँ नहीं है। अगर इस कुर्सी पर बैठे तुम मुझे देख रहे हो, तब अचानक यदि तुम मुझे इस कुर्सी पर न पाओ तो कुर्सी तुम्हें खाली लगेंगी-इसलिए नहीं कि कुर्सी खाली है, बल्कि इसलिए कि कोई यहाँ बैठा था और अब वह वहाँ नहीं है। इसलिए तुम्हें शून्य दिखाई पढ़ता है, न कि कुर्सी । तुम्हें शून्य मालूम होता है, किसी की अनुपस्थिति तुम्हें एक रिक्तता की तरह महसूस होती है। तुम अभी कुर्सी को नहीं देख रहे हो। तुम वहाँ पर एक व्यक्ति को. देख रहे थे, अब तुम उस व्यक्ति की अनुपस्थिति को देखते हो। परन्तु कुर्सी अभी भी दिखलाई नहीं पड़ रही है। इसलिए जब अहंकार विलीन हो जाता है, तुम्हें शून्य की प्रतीति होती है। यह तो मात्र प्रारंभ है क्योंकि यह शून्यता भी अहंकार का ही नकारात्मक हिस्सा है-दूसरा पहलू। यह शून्य भी विलीन हो जाना चाहिए। र्रिझाई-एक जेन गुरु के लिए ऐसा कहा जाता है कि जब वह अपने गुरु के पास सीख रहा था तो गुरु हमेशा इस बात पर जोर देता था कि उसे शून्य को उपलब्ध करना चाहिए। अतः एक दिन वह आया, उसने शून्य उपलब्ध कर लिया था। वह एक लम्बा श्रम था। अहंकार को गलाने में बहुत मेहनत करनी पढ़ती है। वह एक बडी लम्बी यात्रा थी-बहुत कठिन और कभी-कभी सचमुच सी असंभव - किन्तु फिर भी उसने उसे पा लिया था। इसलिए वह हँसता हुआ, नाचता हुआ आया, आनन्द में डूबा। वह अपने गुरु के चरणों में गिरा और उसने काश, मैंने पा लिया है, अब केवल शून्य ही। गुरु ने उसकी ओर बिना किसी सहानुभृति के देखा और कहा कि अब तुम जाओ ओर इस शून्य को भी फेंक कर आओ। उसे अपने साथ यहाँ मत लाओ। इस शून्य को भी फेंक दो। इस स्थितता को भी गिरा दो, क्योंकि यदि तुम्हारे पास खालीपन भी है, तो भी यह कूछ होने जैसा हो जायेगा। शून्य भी कुछ तो है। यदि तुम उसे भी अनुभव कर सको, तो वह भी कुछ है । यदि तुम उसे भी जान सको. तो वह भी कुछ है। यदि तुम उसे देख सको तो वह भी कुछ है। कुछ नहीं भी कुछ हो जाता है, यदि वह भी तुम्हारे हाथ में है। इसलिए गुरु ने कहा, "इस शून्य को भी फेंक दो। मेरे पास तभी आना जबकि यह "नथिंगनेस" (कुछ नहीं) भी नहीं हो।" रिंझाई तो रोने लगा। उसने ही यह बात क्यों नहीं देख ली? एक शून्य भी उपलब्धि है, वह भी कुछ है। यदि तुमने कुछ नहीं भी पा लिया तो फिर वह कुछ हो जाता। जब तुम इस शून्य में गहरे डूबते हो बिना किसी विचार के. बिना मन में जरा भी कंपन लाये - यदि तुम इसी में ठहर जाते हो, तो अचानक शून्य भी विलीन हो जाता है और तब "स्व" का बोध होता है। तब तुम केन्दित हुए। तब तुम असली केन्द्र पर आये। एक तो झूठा केन्द्र है, और फिर उस झूठे केन्द्र का खो जाना और तब असली केन्द्र का होना है। केन्दित होने से मेरा मतलब एक भृमि तुम्हारे होने की वास्तविक भूमि । यह तुम्हारा केन्द्र नहीं है। क्योंकि तुम तो मिथ्या केन्द्र हो अतः यह तुम्हारा केन्द्र नहीं है। वही असली केन्द्र है- तुम्हारे अस्तित्व का केन्द्र। पूरा अस्तित्व ही इसमें केन्द्रित हो गया। तुम तो झूठे केन्द्र हो, तुम तो खोओगे। परन्तु तुम्हारे खोने में भी यदि तुम इस शून्य से भरने लगो, तो भी अहंकार बड़े ही सूक्ष्म ढंग से लौट आया । बहुत ही सूक्ष्म तरीके से वह वापस आ गया। वह कहेगा कि मैंने इस शुन्य को पा लिया। इसका मतलब वह अभी भी है। उसे वापस मत आने दो। इस शून्य में ही रहो। इस शून्य के साथ कुछ भी न करो, उसके बारे में सोचो भी मत, उसके बारे में कुछ महसूस भी मत करो। शून्य है, उसके साथ रहो, उसे रहने दो। वह चला जाएगा। वह सिर्फ नकारात्मक हिस्सा है। वास्तविक चीज़ तो खो गई, यह मात्र उसकी छाया है। इस छाया को मत पकड़ो, क्योंकि छाया थी तभी हो सकती है जबकि वास्तविकता कहीं-न-कहीं पास ही हो । तभी केवल छाया भी हो सकती है। अन्ततः शून्य भी विलीन हो जाता है, ओर तब केन्द्रीकरण-सेन्टरिंग होता है। तब पहली बार तुम "तुम" नहीं होते और फिर भी तुम होते हो-न कि स्वयं की तरह वरन एक शुद्ध अस्तित्व की भाँतिः बल्कि सर्व को भाँति। और इस बात को ठीक से समझ लें कि यह तुम्हारा केन्द्र नहीं है। यह सर्व का केन्द्र है। अपने झूठे केन्द्र को भूल जाओ। भीतर जाओ और उसे खोजो। और तब वह विलीन हो जाता है। वह कमी भी नहीं मिलता। वह कहीं भी नहीं है इसलिए तुम उसे खोज नहीं सकते। उसके बाद और भी कठिन काम तुम्हें करना होता है-तुम्हें शून्य का सामना करना पड़ता है। यह बिल्कुल मौन होता है। अहंकार के जगत की तुलना में यह बिल्कुल शान्त होता है। तुम एक गहरी शान्ति में होते हो। परन्तु इससे ही सन्तुष्ट मत हो जाना। वह झूठी है। क्योंकि वह "भी अहंकार का ही हिस्सा है। यदि तुम सन्तुष्ट हो गये, तो अहंकार पुनः प्रवेश कर जाएगा। वह वापस लौट जायेगा। उसका एक हिस्सा अमी भी वहाँ मौजूद था। वह हिस्सा फिर से उस सारे को भीतर ले आएगा। बिना किसी विचार के इस शून्य के साथ रहो। वह करीब-करीब मृत्यु जैसा है। जैसै कोई अपनी ही आँखों के सामने मर रहा होता है - एक गहरे खड्ड में विलीन हो रहा होता है। और जल्दी ही तुम खो जाओगे और केवल खड्ड ही रह जाएगा- उस खड्ड का जानने वाला भी, नहीं बचेगा, उस खाई को देखने वाला भी पीछे नहीं छुटेगा, बल्कि मात्र खड्ड ही रह जायेगा। तब तुम केन्दित हुए-केन्द्र में केन्दित । वह तुम्हारा केन्द्र नहीं है। पहली बार, तुम हो । अब भाषा का दूसरा ही अर्थ हो जाता है। तुम नहीं हो और फिर भी तुम हो । यहाँ जाकर "हाँ" और "ना" के परम्परागत अर्थ, उनके रूढिगत भेद खो जाते हैं। तुम तुम्हारी तरह वहाँ नहीं होते। अब तुम वहाँ दिव्य की तरह होते हो-स्वयं ब्रहा की भाँति । यही अस्तित्वगत केन्द्रीकरण है-अस्तित्व में केन्दित होना। तीसरा प्रवचन सजगता के दीप चैतन्य के सूर्य में स्थित होना ही एक मात्र दीपक है एक दिन एक स्त्री मुल्ला नसरुद्दीन की पाठशाला में आई। उसके साथ उसका एक छोटा बच्चा भी था। उस स्त्री ने मुल्ला को उस लड़केको डराने के लिए कहा। वह लड़काबिगड़गया था और किसी की नहीं सुनता था। उसे किसी बड़ेअधिकारी के द्वारा डराने की जरूरत थी । मुल्ला वाकई अपने गाँव में एक बडा अघिकारी था। उसने एक बडी भयावह भाव-भंगिमा बनाई। उसकी आँखें बाहर निकल आईं और उनसे आग निकलने लगी और वह स्वयं भी कूदने लगा, उस स्त्री ने देखा कि अब मुल्ला को रोकना असंभव है। वह तो बच्चे की जान ही लेने लगा वह स्त्री तो बेहोश हो गई, लड़काअपनी जान बचाकर भागा, और मुल्ला खुद इतना डर गया कि वह भी से बाहर भाग गया। वह बाहर ठहरा रहा और वह स्त्री वापस होश में आई । तब मुल्ला धीरे से, चुपचाप गंभीर होकर भीतर दाखिल हुआ। उस स्त्री से कहा, "मुल्ला गजब कर दिया ! मैंने तुम्हें मुझे डराने केलिए तो नहींकहा था। मुल्ला वे जवाब दिया- "तुम्हें असली बात का पता नहीं। केवल तुम्हीं नहींडर गई बल्कि मैं भी अपनेआपसे डर गया। जब भय पकड़लेता है तो वह सब कुछ नष्ट कर देता है। उसे प्रारंभ करना सरल है, किन्तु उसे नियंत्रित करना कठिन है। जब मैंने उसे प्रारंभ किया तो मैं उसका मालिक था, लेकिल शीघ्र ही भय मुझ पर सवार हो गया, और वह मालिक हो गया और मैं उसका गुलाम, तब मैं कुछ नहीं कर सकता था। और, भय के कोई अपने नहीं होते। जब वह पोट पहुँचाता है, तो सबको ही पहुँचाता है।" यह एक बडी सुन्दर कहानी है जो कि मनुष्य के मन के बारे में एक बडी गहरी अंतर्दृष्टि बतलाती है। तुम हर चीज़के बारे में केवल प्रारंभ में सजग होते हो, और फिर बाद में अचेतन कब्जा ले लेता है। अचेतन अधिकार जमा लेता है और अचेतन ही फिर मालिक हो जाता है। तुम क्रोध शुरू कर सकते हो, परन्तु तुम उसे कभी खतम नहीं कर सकते। बल्कि क्रोध ही तुम्हें रामाप्त कर देत्ता है। तुम किसी भी बात को प्रारंभ कर सकते ही, लेकिन जल्दी या बाद में अचेतनअपना अधिकार कर लेता है और तुम्हारी छुटूटी हो जाती है। इसलिए केवल प्रारंभतुम्हारे हाथ में है, अन्त कभी भी तुम्हारे हाथ में नहीं है । और जो भी परिणामउससे होंगे, उसके तुम मालिक नहीं हो। यह स्वाभाविक है, क्योंकि तुम्हारे मन का केवल एक बहुत छोटा-सा हिस्साही जागा हुआ है। वह मोटरकार में सिर्फ एक स्टार्टर की भाँति है। वह केवलस्टार्ट करता है, और उसके बाद वह किसी भी काम का नहीं है। उसके बादमोटर कब्जा । ले लेती हैं। उसकी जरूरत केवल चालू करने के लिए है। उसकेबिना चालू करना कठिन-है। लेकिन यह मत सोचो की चूँकि तुम किसी चीजको चालू करत्ते हो, तो तुम उसके मालिक हो। यही इस कहानी का रहस्य हैचूँकि तुमने चालूकर दिया, तुम सोचने लगते होकि तुम उसे बन्द भी कर सकते हो। ऐसा हो सकता था कि तुम प्रारंभ ही न करते, वह दूसरी बात है। लेकिनएक बार प्रारंभ करने के बाद ऐच्छिक-अनैच्छिक ही जाता है और चेतन अचेतनही जाता है, क्योंकि चेतन केवल ऊपरी पर्त है-मन की ऊपरी सतह और करीब-करीब सारा मन ही अचेतन है। तुम शुरू करो और अचेतन गति करने लगताहै और काम करने लगता है। इसलिए मुल्ला ने कहा, "मैं बिल्कुल जिम्मेवार नहींहूँ । जो कुछ भी हुआ, उसके लिए मैं जिम्मेवार नहीं हूँ। मैं केवल प्रारंभ करने के लिए जिम्मेवार हूँऔर तुमने ही मुझे प्रारंभ करने के लिए कहा था। मैंने बच्चे को डराना प्रारंभकर दिया, और तब बच्चा डर गया और तुम मूच्छित हो गई, और तब मैं भीडर गया, और उसके बाद सब गड़बड हो गयी। हमारे जीवन में भी सभी कुछ गड़बड़ है-इस चेतन मन के, प्रारंभ करनेके कारण और फिर अचेतन मन के उस पर अधिकार करने के कारण। यदि तुमइसे अनुभव नहीं कर सकते और यदि तुम इसे नहीं जान सकते-इस यांत्रिकताको, तो फिर तुम सदा के लिए गुलाम रहोगे। और यह गुलामी आसान हो जातीहै, यदि तुम सोचते रहो कि तुम मालिक हो । जानते हुए गुलाम होना कठिन है। गुलाम होना सरल है, यदि तुम अपने को धोखा देते चले जाओ कि तुम मालिकहो, अपने प्रेम के, अपने क्रोध के, अपने लोभ के, अपनी ईर्ष्या के, अपनी हिंसाके, अपनी निर्दयत्ता के, यहाँ तक कि अपनी सहानुभूति व अपनी करुणा के। मैं कहता हूँ-तुम्हारे, किन्तु यह "तुम्हारे" केवल प्रारंभ में ही है। सिर्फ क्षणभर के लिए, केवल एक चिनगारी ही तुम्हारी है। और तब तुम्हारी यांत्रिकता शुरूहो जाती है और तुम्हारी सारी यांत्रिकता मूच्छित है। ऐसा क्यों? यह चेतनऔर अचेतन में द्वन्द्व क्यों है? और द्वन्द्व है। तुम अपने बारे में पहले से कुछनहीं कह सकते। यहाँ तक कि तुम, तुम्हारे कृत्य भी तुम्हें पहले से पता नहीं है क्योंकि तुम नहीं जानते कि क्या होने वाला है। तुम्हें पता ही नहीं कि तुमक्या करने वाले हो। तुम्हें यह भी मालूम नहीं कि दूसरे क्षण तुम क्या करने वालेहो क्योंकि करने वाला तो भीतर बहुत गहरे अचेतन में छिपा है। तुम कर्ता नहींहो। तुम केवल प्रारंभ करने वाले एक बिन्दु हो। जब तक कि तुम्हारा सारा अचेतनही चेतन न हो जाये तुम स्वयं अपने लिए भी एक समस्या ही रहोगे और एकनर्क बनोगे। सिवाय दुःख के और कुछ भी वहाँ न होगा। जैसा कि मैं हमेशा जोर देता हूँ कि कोई दो ही तरीकों से समग्र हो सकता है। पहला कि तुम अपनी आंशिक चेतना को भी खो दो, इस छोटे से चेतन केटुकडे को भी अचेतन में फेंक दो, उसमें मिला दो, और तब तुम समग्र हो जातेहो। लेकिन तब तुम एक पशु की तरह समग्र हो जाते हो, और वह असंभव हैतुम कुछ भी करो, वह संभव नहीं है। यह सोचा जा सकता है, किन्तु संभवनहीं है तुम बार-बार आगे की ओर फेंक दिये जाओगे। वह छोटा-सा हिस्सा जो कि चेतन हो गया है, पुनः अचेतन नहीं हो सकतायह एक अण्डे को भाँति है जो कि मुर्गी हो गया है। अब मुर्गी वापस लौटकरअण्डा नहीं हो सकती। एक बीज जो कि अंकुरित हो चुका वह वृक्ष होने कीयात्रा में निकल गया। अब वह वापस नहीं लौट सकता। वह फिर लौटकर एकबीज नहीं बन सकता। एक बच्चा जो कि माँ के गर्भ से बाहर आ गया, अबबापस लौट कर नहीं जा सकता, चाहे गर्भ कितना ही आनन्दपूर्ण रहा हो। पीछे लौटना कभी नहीं होता जीवन सदैव भविष्य में गति करता है, अतीतमें कभी भी नहीं। केवल आदमी अतीत की बात सोच सकता है। इसलिए मैंक्या हूँ कि यह सोचा जा सकता है, किन्तु इसे वास्तविक रूप नहीं दिया सकतातुम कल्पना कर सकते हो, तुम सोच सकते होतुम उसमें विश्वास कर सकतेतो, तुम उसमें लौटने का प्रयत्न भी कर सकते हो, किन्तु तुम लौट नहीं सकते वहबिल्कुल असंभव है। व्यक्ति को आगे ही बढ़ना पड़ता है। यह दूसरा मार्गहै समग्र होने का। जाने या अनजाने, हर क्षण कोई आगे ही बढ़ रहा है । यदि तुम जानते हुएआगे बढ़ते हो, तो तुम्हारी गति बंढ़ जाती है। यदि तुम जानते हुए बढ़ रहे हो, तो फिर तुम समय और शक्ति नष्ट नहीं करते। तब वह बात एक जीवन में ही पूरी हो सकती है, जो कि लाखों जीवनों में भी पूरी नहीं होगी, यदि तुम बिना जाने बढ रहे हो। क्योंकि यदि तुम चिना जाने ही बढ रहे हो तो - तुम एक वर्तुल में ही बढ़ोगे। हर दिन तुम वही पुनरुवत करते हो, प्रत्येक जीवन में तुम वही -का-वही दोहराते हो। और जीवन मात्र एक आदत बन जाती है-एक यांत्रिकआदत, एक पुनरुक्ति। यदि तुम जानते हुए, होशपूर्वक आगे बढ़ो तो तुम इस पुनरुक्ति की आदतको तोड़ सकते हो। इसलिए पहली बात तो यह ध्यान में लेने जैसी है कि तुम्हारीसजगता इतनी छोटी-सी है कि वह केवल प्रारंभ करने के लिए है। जब तककि तुम्हारे पास असजगता कम और सजगता ज्यादा न हो, अचेतना कम और चेतना ज्यादा न हो, सन्तुलन नहीं बदलेगा। उसमें क्या-क्या बाधाएँ हैं? ऐसी स्थिति क्यों है? यह तथ्य आखिर क्यों है? यह चेतन और अचेतन में द्वन्द्व क्यों है? इसे जानना पड़ेगा। यह स्वाभाविक है। जो कुछ भी है वह स्वाभाविक है। मनुष्य लाखों वषों में विकसित हुआ है। इस विकास ने ही तुम्हें निर्मित किया है, तुम्हारे शरीर कोतुम्हारी संरचना को। यह विकास एक लम्बा संघर्ष रहा है। हजारों-लाखों सालोंकी विफलताओं, सफलताओं के अनुभव का । तुम्हारे शरीर ने बहुत कुछ सीखाहै। तुम्हारा शरीर लगातार बहुत कुछ सीखता जा रहा है। तुम्हारे शरीर का अथाहज्ञान उसकी कोषिकाओं में स्थित है, तुम्हारे मन में नहीं। वह अपने ही हिसाबसे अपना व्यवहार पुनरुक्त करता चला जाता है। यदि स्थिति भी बदल जाये तोभी शरीर वही रहता है। उदाहरण के लिए, जब तुम क्रोधित होते हो, तो तुमउसी भाँति अनुभव करते हो जैसे कि कोई भी आदम पुरुष । तुम उस वैसे हीमहसूस करते हो, जैसे कि कोई भी पशु। तुम उसे वैसे ही अनुभव करते हो जैसे कि कोई भी बच्चा । और यही यांत्रिकता है। जब तुम क्रोधित होते हो तब तुम्हारेशरीर का एक निश्चित ढंग है एक निश्चित क्रियाकाण्ड है। जिस क्षण भी तुम्हारा मन कहता है "क्रोध"-उसी वक्त तुम्हारे शरीर में जो ग्रंथियां हैं, वे रक्त में रासायनिक द्रव्य छोड़देती हैं। एड्रीनल तुम्हारे रक्तमें छूट जाता है। इसकी जरूरत है क्योंकि क्रोध में तुम्हें या तो चोट करनी पडेगी, या विरोधी द्वारा तुम पर चोट पडेगी। तुम्हें अधिक रक्त-के दौरे की आवश्यकताहै और यह रासायनिक द्रव्य खून के दौरे कोतेज़करने में मदद करेगा। या तोतुम्हें लड़ने की जरूरत पडेगी, या तुम्हें मैदान छोड़कर भाग खड़ा होना पड़ेगादोनों ही स्थितियों में यह रसायन मदद करेगा। इसलिए जब भी कोई पशु क्रोधमें होता है, तो शरीर या तोलड़नेके लिए तैयार हो जाता है या फिर भागनेके लिए। और ये ही दो विकल्प हैं- यदि पशु सोचता है कि वह विरोधी सेज्यादा ताकतवर है, तो वह लडेगा, और यदि वह सोचता है कि वह कमजोरहै, तो वह भाग जायेगा। और यह यांत्रिकता बडी सरलता से चलती है। परन्तु मनुष्य के लिए यह स्थिति बिल्कुलभिन्न हो गई है। जब तुम्हें क्रोधआ रहा है, तुम उसे चाहो तो व्यवत्त नहीं भी करो। पशु के लिए ऐसा करना असंभव है। यह स्थिति पर निर्भर है। यदि वह तुम्हारे नौकरों के प्रति है, तोतुम उसे व्यक्त कर सकते हो लेकिन, यदि वह तुम्हारे मालिक के खिलाफ है, तो तुम उसे व्यक्त भी नहीं कर सकते। इतना ही नहीं बल्कि तुम हँस भी सकतेहो; मुस्करा सकते हो। तुम अपने मालिक कोफुसला सकते हो कि तुम क्रोधिततो हो ही नहीं, बल्कि तुम तो प्रसन्न हो । अब तुम शरीर की सारी यांत्रिकता को गड़बड़ किये दे रहे हो। शरीर तोलड़नेके लिए तैयार है, और तुम मुस्करा रहेहो। तुम सारे शरीर में एक भारी गडबडी उत्पन्न कर रहे हो। शरीर नहीं समझसकत्ता कि तुम क्या कर रहे हो। क्या तुम पागल हो? वह दो में से एकबात करने के लिए तत्पर है जो कि स्वाभाविक है-लड़ना या भागना। यह मुस्कराना एक नई बात है। यह प्रवंचना कुछ नई घटना है, शरीर केपास इसके लिए कोई मैकेनिज्म, कोई संयंत्र नहीं है। शरीर में तो प्रसन्नत्ता केकोई रसायन नहीं छूट रहे हैं, लेकिन फिर भी तुम ऊपर से मुस्कुराते हो। हँसनेके लिए अभी वहां कोई स्सायन नहीं है। तुम्हें जबरदस्ती मुस्कुराहट लानी पड़ती हैं- एक झूठी मुस्कुराहट, और शरीर ने लड़ने के लिए रक्त में स्सायन छोड़ दियाहैं। अब रक्त क्या करेगा? शरीर की अपनी ही भाषा है, जिसे वह भलीभाँतिसमझता है किन्तु तुम बड़े ही पागलपन का, विक्षिप्तता का व्यवहार कर रहे हो। अब तुममें और तुम्हारे शरीर में एक गैप, एक अन्तराल पैदा हो जाता है। शरीरकी यह यांत्रिकता अचेतन है, यह यांत्रिकता अनैच्छिक है। तुम्हारी इच्छा, तुम्हारीमर्जी की कोई भी जरूरत नहीं है, क्योंकि तुम्हारी मर्जी, तुम्हारे संकल्प को समयकी आवश्यकता पड़ेगी और ऐसी स्थितियाँ होती हैं जिनमें कि समय ज़राभीनहीं खोया जा सकता। एक चीते ने तुम पर हमला कर दिया है, अब सोचने के लिए तुम्हारे पाँच समय नहीं है। तुम विचार नहीं कर सकते कि तुम्हें क्या करना है। तुम्हें बिनामन से सलाह किये ही कुछ करना पड़ेगा। यदि बीच में मन आ जाये, तो तुमगये। तुम विचार नहीं कर सकते, तुम चीते से नहीं कह सकते कि "ठहरो, जरा मुझे सोच लेने दो कि मुझे वया करना चाहिए।" तुम्हें तुरन्त कुछ करना पड़ेगाबिना किसी सजगता के। शरीर की अपनी एक यांत्रिकता है। चीता मौजूद है और मन जान रहा हैकि वह वहाँ है। शरीर की यांत्रिकता अपना कार्य करना शुरू कर देती है। वहकार्य करना मन पर निर्भर नहीं है क्योंकि मन बहुत धीरे काम करने वाला है बहुत ही अकुशल है संकटकालीन अवस्था में उस पर भरोसा नहीं किया जा सकत्ता, इसलिए शरीर अपना कार्य करने लगता है। तुम भयभीत होगये हो, तो तुम भाग जाओगे, तुम बच निकलोगे। लेकिन वही बात तब भी होती है जबकि तुम मंच पर एक भारी भीड़को भाषण देने के लिए खड़े होते हो। वहाँ कोई भी चीता नहीं है, परन्तु तुम भारी भीड़ को देखकर डर गये हो। भय रूप लेने लगता है. शरीर को खबर पहुँच गई है। यह खबर कि तुम डर गये हो, यह स्वचालित है। शरीर रसायन छोड़नाशुरू कर देता है-वे ही रसायन जो चीता आप पर हमला करने वाला हो तब छूटते हैं। वहाँ पर कोई शेर- चीत्ता नहींहै। वहाँ सचमुच कोई भी नहीं है जो कि आप पर आक्रमण कर रहा हो। परन्तु ऐसा लगता है जैसे कि श्रोत्ताओं की भीड़-तुम पर हमला कर रही है। वहाँ जो भी मौजूद है वे सब आक्रामक हैं, ऐसा प्रतीत होता है। इसलिए तुम भयभीत ही गये हो। अब शरीर तैयार है, लड़ने के लिए अथवा भाग खड़े होने के लिए, परन्तुदोनों ही रास्ते बन्द हैं। तुम्हें वहाँ खड़ा होना है और बोलना है। अब तुम्हारे शरीर को पसीना छूटने लगता है, सर्द रात में भी। क्यों? तैयार है, लड़ने के लिए अथवाभागने के लिए। रवत तेजी से दौरा कर रहा है, गर्मी उत्पन्न हो गई है, और तुम वहाँखड़े हो। इसलिए तुम पसीने-पसीने होने लगते हो, और तब एक सूक्ष्म कंपकपीदौड़ने लगती है। तुम्हारा सारा शरीर कांपने लगता है। यह ऐसे ही होता है जैसे कि तुम कार को चालू करो और एक्सीलेटर भीदबाओ और साथ ही ब्रेक भी लगाओ। इंजन गर्म हो गया है, गति कर रहा है और तुम ब्रेक भी लगा रहे हो। कार को सारी बॉडी कांपने लगेगी। वही बाततब भी होती है जबकि तुम मंच पर खड़े होते हो। तुम्हें भय लगत्ता है, औरशरीर भागने के लिए तैयार है। एक्सीलेटर दबा दिया गया है, परन्तु तुम भागनहीं सकते। तुम्हें एकत्रित लोगों को भाषण देना ही होगा। तुम नेता हो या कुछहो, तुम भाग नहीं सकते। तुम्हें सामना करना ही पड़ेगा और तुम्हें वहाँ मंच पर खड़ा होना ही पड़ेगा। तुम बच नहीं सकते। अब तुम दोनों बातें एक साथ कर रहे हो जो कि बड़ी विपरीत हैं। तुमएक्सीलेटर पर भी पाँव रखे हो और ब्रेक भी दबा रहे हो। तुम भागते नहीं होऔर तुम्हारा शरीर भगाने के लिए तैयार है। तुम कांपने लगते हो और गर्मी पैदाहो जाती है। अब तुम्हारा शरीर बडी हैरानी में पड़ा है कि तुम यह कैसा व्यवहारकर रहे हो। शरीर को तुम्हारी बात समझ में नहीं आती, एक अन्तराल पैदा होगया। अचेतन एक काम कर रहा है, और चेतन कुछ और करता चला जाता है तुम बंट गये । इस अन्तराल को, इस गैप कोठीक से समझ लेना चाहिए। प्रत्येक कृत्य मेंयह गैप पैदा हो जाता है। तुम एक फिल्म देख रहे हो, एक कामोत्तेजित करनेवाली फिल्म, तुम्हारा काम जाग गया है। तुम्हारा शरीर यौन अनुभव में उतरकर फूटने को तैयार है, परन्तु तुम केवल फिल्म देख रहे हो तुम एक कुर्सी पर बैठे हो, और तुम्हारा शरीर काम-कृत्य में उतरने को तैयार है। फिल्म उसे और अधिक उत्तेजित करने में सहायक होगी, वह तुम्हें और धक्केदेगी। तुम उत्तेजना से भर गये हो, किन्तु तुम कुछ कर नहीं सकते। शरीर कुछकरने के लिए तैयार है, परन्तु स्थिति अनुकूल नहीं है, इसलिए एक गैप निर्मितहो जाता है। तुम अपने को भिन्न ही समझने लगते ही और तुम्हारे और तुम्हारे शरीर के बीच एक बाधा खड़ी हो जाती है। इस बाधा के कारण त्तथा इस बार-बार की उत्तेजना व साथ ही दमन के कारण, इस गति देने व रोकने के कारण, यह सतत विरोध ही तुम्हारा अस्तित्व हो गया है, और तुम रुग्ण होगये हो। यदि तुम पीछे गिर सको और पशु हो सको, जो कि कभी भी नहीं होसकता, जो कि असंभव है, तब तुम समग्र और स्वस्थ हो जाओगे। यह एक बड़ा ही विचित्र तथ्य है कि पशु अपनी स्वाभाविक स्थिति में रुग्ण नहीं परन्तु उन्हेंप्राणी-संग्रहालय में रख दो और वे मनुष्यों की बीमारियाँलेने लगते हैं। कोई भीपशु अपने प्राकृतिक वातावरण में अपनी नैसर्गिक अवस्था में होमो सेवसुअल(समलिंगी) नहीं होता, लेकिन उन्हें अजायब घर में रख दो और वे अजीब-अजीब मूर्खतापूर्ण कृत्य करने लगते हैं। वे समलिंगी संभोग करने लगते हैं। कोईभी पशु स्वाभाविक स्थिति में पागल नहीं होता, परन्तु अजायब घर में वे पागलहो जाते हैं। मनुष्य जाति के सारे इतिहास में ऐसा कभी उल्लेख नहीं किया गयाकि कभी किसी पशु ने आत्महत्या की हो लेकिन अजायब घर में पशु आत्म-हत्या करते हैं। यह बडी विचित्र बात है, परन्तु फिर भी वस्तुत्तः विचित्र नहींहैं, क्योंकि जैसे ही मनुष्य पशुओं को ऐसा जीवन जीने के लिए मजबूर करता है, जो कि उनके लिए स्वाभाविक नहीं है, वे भीतर विभाजित हो जाते हैं। एकविभाजन निर्मित हो जाता है, एक गैप (अन्तराल) पैदा हो जाता है, और अखंडत्ताखो ही जाती है। आदमी विभाजित है। आदमी विभाजित ही पैदा होता है। इसलिए फिर क्याकरें? कैसे इस अन्तराल को नहीं होने दें और कैसे शरीर के प्रत्येक कोष कोसजग करें? केसे शरीर के हर कोने को जगायें? कैसे जागरूकतालाये-यहीसारे धर्मों के लिए सारी समस्या है, सारे योग के लिए और सारी जागरण कीपद्धतियों के लिए कि कैसे इस सजगता-जागरूकता को तुम्हारे समग्र अस्तित्व तक ले जायें कि कुछ भी अचेतन न रह जाये। बहुत-सी विधियों से प्रयत्न किया गया है, बहुत सी विधियाँ संभव है। अतः मैं कुछ विधियों पर बात करूँगा कि कैसे शरीर का प्रत्येक कोष सजग हो जाये । और जब तक कि तुम तुम्हारे समग्र रूप में जागरूक नहीं हो जाते, तुम आनन्दमैं नहीं हो सकते, तुम शान्ति में स्थापित नहीं हो सकते। तब तक तुम पागलखाना बने ही रहोगे। तुम्हारे शरीर का प्रत्येक कोष तुम्हें प्रभावित कटता है। उसका अपना एककार्य है, उसका अपना एक प्रशिक्षण-अपना संस्कार है। जैसे ही तुम प्रारंभ करते हो, कोषअधिकार ले लेता है और अपने ही तरीके से कार्य करने लगता है। तब तुम अशान्त हो जाते हो। तुम सोचते हो कि यह क्या हो रहा है? तुम्हें आश्चर्यहोता हैं कि ऐसा तो मेरा मतलब बिल्कुल नहीं था, ऐसा मैंने कतई नहीं सोचा था। और तुम सही हो तुम्हारी मर्जीबिल्कुल भिन्न रही हो सकती है। परन्तु एक बार तुम अपने शरीर को, उसके कोषों को कुछ करने के लिए दे देते हो तोअपनी ही तरह से उसे करते हैं- जैसी भी उनकी अपनी सिखावन है। इसीकारण से वैज्ञानिक विशेषज्ञः रूसी वैज्ञानिक सोचते हैं कि हम आदमी को नहींबदल सकते जब तक कि हम उसके कोषों को नहीं बदल देते। एक स्कूल है-बिहैवियरिस्टिक स्कूल-मनोवैज्ञानिकों का जो कि सोचताहै कि बुद्ध असफल हो गये, जीसस असफल होगये। वे असफल होंगे ही। उसमें कुछ भी हैरानी की बात नहीं है क्योंकि बिना शरीर की संरचना को बदले, रासायनिकसंरचना को बदले, कुछ भी नहीं बदला जा सकता है कि बुद्ध असफल हो गये, जीसस असफल हो गये। वे असफल होंगे ही। उसमें कुछ भी हैरानी की बात नहीं है क्योंकि बिना शरीर की संरचना को बदले, रासयनिक संरचना को बदले, कुछ भी नहीं बदला जा सकता। ये बिहैबियरिस्टिक-वाट्सन, पावलव, स्कोनर कहते हैं कि यदि बुद्ध शांत हैं तो इसका मतलब यह है कि उनकी रासायनिक संरचना भिन्न है, और तो कोईबात हो नहीं सकती। यदि वे मौन हैं, यदि उनके चारों और शान्ति व्याप्त है, यदि वे कभी भी अशान्त नहीं होते, कभी क्रोधित नहीं होते तो इसका इतना हीमतलब है कि किसी भी तरह उनमें उन रसायनों का अभाव है जिनके कारणकि सारा उत्पात्त होता है, कि जो क्रोध को पैदा करते है। इसलिए स्कोनर कहताहै, आज नहीं कल हम रासायनिक तत्वों से बुद्ध को निर्माण कर लेंगे। किसीध्यान की कोई जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की सजगता बढाने को कोई आवश्यकतानहीं है। केवल रसायनों को परिवर्तित करने की जरूरत है। एक तरह से वह से सही हैं, किन्तु बहुत ही खतरनाक तरह से सहीहैं, क्योंकियदि तुम्हारे शरीर में से किन्हीं रसायनों को निकाल दिया जाये तो तुम्हारा व्यवहारबदल जायेगा। यदि किन्हीं विशेष हारमोन्स कोतुम्हारे शरीर में डाल दिया जाए, तो तुम्हारा व्यवहार बदल जाएगा। तुम पुरुष हो और तुम पुरुष की भाँति व्यवहारकरते हो। परन्तु यह तुम नहीं हो जो कि पुरुष की भाँति व्यवहार कर रहा हैयदि उन हारमोन्स को निकाल दिया जाये और दूसरे हारमोन्स जो कि स्त्री जाति के होते है, उन्हें डाल दिया जाये तो तुमस्त्री की तरह व्यवहार करने लगोगेइसलिए वस्तुतः यह तुम्हारा व्यवहार नहीं है, यह हारमोन्स के कारण है। ये तुमनहीं हो जो कि क्रोध करते हो, बल्कि एक विशेष हारमोन है तुम्हारे शरीर मेंऐसा नहीं है कि तुम शान्त हो और ध्यानी हो, बल्कि ये कुछ तुम्हारे भीतर हारमोन्स हैं। स्कोनर कहता है-इसीलिए बुद्ध असफल हैं, क्योंकि वे उन बातों को कहतेचले जाते है, जो कि असंबद्ध हैं। तुम एक आदमी से कहते हो क्रोध न करो, किन्तु वह ऐसे रासायनिक तत्वों से भरा है, हारमोन्स से, जो कि क्रोध पैदा करतेहैं। इसलिए एक बिहैबियरिस्ट के लिए यह ऐसा ही है - जैसे कि कोई आदमी तेज़बुखार में हो-एक सौ छह डिग्री बुखारर - और आप उससे सुन्दर-सुन्दर बातेंकरते चले जाओ और कहो कि शान्त ही जाओ. ध्यान करो, बुखार को छोडो । यह बहुत अर्थहीन मालूम पड़ता है। वह आदमी क्या कर सकता है। जब तककि तुम उसके शरीर में कुछ परिवर्तन नहीं करते, बुखार रहेगा। ज्वर किसी वायरस के कारण है, किन्हीं रासायनिक तत्वों के कारण है। जब तक वह नहीं बदलजाता, जब तक कि उसको अनुपात में बदलाहट नहीं आती, वह ज्वर से पीडितरहेगा। और बात करने की कोई भी जरूरत नहीं है। यह बिल्कुल ही अर्थहीन है। वही बात क्रोध के साथ है स्कोनर के लिए पावलव के लिए, वही बात सेक्स के साथ है। तुम ब्रह्मचर्य के बारे में बात करते चले जाते हो, और शरीरसेक्स की ऊर्जा से भरा है-सेक्स के कोषों से। वह सेक्स की ऊर्जा तुम परनिर्भर नहीं हैं, बल्कि तुम ही उस पर निर्भर हो । अतः तुम ब्रह्मचर्य की बातें करते जाओ, लेकिन तुम्हारी इन बातों से कुछ भी न होगा। और वे लोग सहीहैं एक तहह से। लेकिन सिर्फ एक तरह से वे सहीं हैं, कि यदि रसायनों को बदल दिया जाये, यदि तुम्हारे शरीर से सारे सेक्स हारमोन्स को बाहर फेंक दिया जाये, तो तुम कामुक नहीं हो सकोगे। परन्तु तुम उससे बुद्ध नहीं हो जाओगेतुम केवल नपुंसक हो जाओगे, अयोग्य। तुममें कुछ कमी हो जायेगी। बुद्ध में कुछ कमी नहीं हो गई है। बल्कि, इसके विपरीत, कुछ क्या और भी नवीन उनके जीवन में आ गया है। ऐसा नहीं है कि उनके सेक्स हारमोन्स नहीं हो गये हैं। वे उन में हैं। फिर क्या हो गया है उन्हें? उनकी चेतना गहरी होगयी है, और उनकी चेतना उनके सेक्स के कोषों में भी प्रवेश कर गई है। अब कामकोष तो हैं, किन्तु वे मनमानी नहीं कर सकते। जब तक केन्द्र उन्हें काम करने के लिए नहीं कहे, वे कुछ नहीं कर सकते, वे निष्क्रिय ही रहेंगे। एक नपुसंक आदमी में काम-कोष नहीं होते। एक बुद्ध में वे मौजूद हैं औरक्या सामान्य आदमी से ज्यादा शक्तिशालीहैं-अधिक बलवान, क्योंकि वे कभी काम में नहीं लाये गये, बिना उपयोग किये पड़े हैं। उनमें ऊर्जा भरी है। उनमें ऊर्जा एकत्रित हो गईं है। परन्तु अब उनमें चेतना प्रवेश कर गई है। अब चेतनाआयल चालू करने वाला बिन्दु ही नहीं है बल्कि अब वह मालिक हो गई है। आनेवाले समय में स्कोनर का प्रभाव हो सकता है। वेह एक बड़ी शक्ति बन सकता है। जैसे कि समाज की बाहरी अर्थ-व्यवस्था के लिए अचानक मार्क्स प्रभावशाली हो गया, उसी तरह किसी दिन भी पावलव-व स्कोनर भी आदमी के मन की भीतरी व्यवस्था के लिए शक्ति के केन्द्र हो सकते हैं। और वे जोभी कहते हैंउसे साबित कर सकते हैं। वे उसे सिद्ध कर सकते हैं। परन्तु इस घटना के दो पहलू हैं। तुम एक बिजली का बल्ब देखते ही । यदि तुम बल्ब को तोड़ दो, तो प्रकाश विलीन हो जाएगा, न कि विद्युत चली जाएगी। वही बात तब भी होती है, जबकिगुण विद्युत के प्रवाह को काट देते हो-बल्ब तो साबुत होता है, किन्तु प्रकाश विलीन हो जाता है। अतः प्रकाश दो प्रकार से विलीन ही सकता है। यदि तुमबल्ब को तोड़ दो, विद्युत होगी. परन्तु तब कोई माध्यम के न होने के कारणजिसके द्वारा कि वह प्रकट होती है, वह प्रकाश नहीं बन पायेगी। यदि तुम्हारेकाम-कोषों को नष्ट कर दिया जाये, तब कामुकत्ता तो होगी, परन्तु कोई माध्यमनहीं होगा उसे प्रकट करने के लिए। यह एक पहलू है। स्कीनर ने बहुत से पशुओं पर प्रयोग किये। किसी विशेष ग्रन्थि का ऑपरेशनकरने से एक बहुत ही खूंखार कुत्ता बुद्ध की तरह शांत हो सकता है। वह चुपचापबैठ सकता है, जैसे कि ध्यानस्थ हो। तुम उसे फिर से खूंखार होने के लिए नहींउकसा सकते। तुम चाहे कुछ भी करो, किन्तु वह तुम्हारी ओर बिना किसी क्रोधके भाव के देखता रहेगा। ऐसा नहीं है कि कुता बुद्ध हो गया है, और न हीऐसी बात है कि उसका अन्तर्मन विलीन हो गया है। वह वैसा ही क्रोधी है, किन्तुअब माध्यम नहीं है जिसके द्वारा कि क्रोध व्यक्त हो सके। यह नपुसंकता है। माध्यम खो गया न कि वासना । यदि माध्यम को नष्ट कर दिया जाये, जैसे किबल्ब को तोड़ दिया जाये तो तुम कह सकते हो कि प्रकाश कहाँ है, और तुम्हारीविद्युत कहाँ है? वह विद्युत मौजूद है, परन्तु वह छिपी हुई है। धर्म दूसरे ही मार्ग से काम करता रहा है। बल्ब को नष्ट करने की कोशिशनहीं करता है। वह मूर्खता की बात है, क्योंकि यदि तुम बल्ब को नष्ट कर दोगेतो तुम्हें उसके पीछे जो बिजली की घारा बह रही है उसका पता नहीं चलेगाधारा को ही बदल दो, उसका रूपान्तरण कर दो, घारा को एक नये ही आयाममें गति करने दो। और तब बल्ब भी वहाँजैसे-का-तैसा मौजूद रहेगा, परन्तु उसमेंकोई प्रकाश नहीं होगा। मैंने कहा कि स्कोनर प्रभावशाली हो सकता है क्योंकि वह एक बहुत सरल मार्ग बतलाता है। तुम क्रोधी हो, तुम्हारा ऑपरेशन किया जा सकता है, तुम कामुकहो, और तुम्हारा आँपरेशन किया जा सकता है। तुम्हारी समस्या का समाधान तुम्हारेद्वारा न होगा बल्कि एक सर्जन के द्वारा किया जाएगा-किसी और के द्वारा। औरजब कभी भी कोई और तुम्हारी समस्या का समाधान करता है तो तुमने एक अवसरखो दिया, क्योंकि जब तुम स्वयं उसका समाघान करते हो, तो तुम विकसित होतेहो। जब कोई और उसका समाधान करता है तो तुम तो वहीके-वही रहते होसमस्या शरीर के द्वारा कर दी जायेगी और फिर कोई समस्या नहीं होगी। परन्तु तब तुम मनुष्य न रह जाओगे। घर्म का सारा जोर चेतना को रूपान्तरित करने पर है। और पहली बात भीतर चेतना को एक बडी शक्ति पैदा कर लेनी है ताकि उससे सजगता और अधिक बढ़सके। यह सूत्र बडा ही अनूठा है। यह कहता है कि... "चैतन्य के सूर्य में स्थित होना ही एक मात्र दीपक है।" सूर्य हमेशा बहुत दूर है। प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में दस मिनट लगते है, और प्रकाश बहुत तेज़गति से चलता है-1, 86, 000 मील प्रति सेकंड की गति से। सूर्य को पृथ्वी तक पहुँचने में दस मिनट लगते है, वह बहुत दूर है। परन्तु सुबह सूर्य उगता है और वह तुम्हारे बाग में खिले फूल तक भी पहुँच जाता है। पहुँचने का यहाँ भिन्न ही अर्थ है। केवल किरणें पहुँचती हैं, न कि सूर्य। इसलिए यदि तुम्हारी ऊर्जा तुम्हारे भीतर गहरे में केन्द्र पर सूर्य ही जाये- यदितुम्हारा केन्द्र सूर्य हो जाये, यदि तुम चैतन्य हो जाओ, केन्द्र पर सजग हो जाओ, यदि तुम्हारी जागरूकता बढ़ जाये, तो तुम्हारी चेतना की किरणें तुम्हारे शरीर के प्रत्येक अंग तक, प्रत्येक कोष तक पहुँच जाती हैं । त्तब तुम्हारी सजगता शरीरके हर एक कोष में प्रवेश कर जाती है। यह ऐसा ही है जैसे कि सुबह सुरज उगता है और पृथ्वी पर सब चीजोंमें जीवन दौड़ पड़ता है। अचानक प्रकाश फैल जाता है, और नींद उड़ जातीहै, रात्रि का भारीपन खो जाता है। अचानक ऐसा लगता है कि जैसै हर चीज़ पुनर्जीवित हो गई। चिडियाँ गीत गाने लगती है और अपने परों को फैला आकाश में उड़ने लगती हैं, फूल खिल उठते हैं, और प्रत्येक चीज़फिर से जिन्दा होजाती है, सूर्य की गर्मी से, उसके स्पर्श मात्र से ही। इसलिए यदि जब तुम्हारेपास केन्दित चेतना होती है, तुम्हारे भीतर सजगता होती है, तो वह हर छिद्र मेंपहुँचने लगती है, शरीर के प्रत्येक रोयें-रोयें में, हर कोष में वह प्रवेश कर जाती है। और तुम्हारे पास बहुत सारे कोष हैं-सात करोड़ कोष है तुम्हारे शरीर मेंतुम एक बहुत बड़ा शहर हो, सात करोड़ कोष और वे सारे मूच्छित हैं। तुम्हारीचेतना उन तक कभी भी नहीं पहुँची। चेतना को बढाओ, और तब उसका हरएक कोष में प्रवेश हो जाता है। और जैसे ही चेतना कोष को स्पर्श करती है, वह भिन्न हो जाता है। उसका गुण ही बदल जाता है। एक आदमी सो रहा है, सुरज उगता है और वह आदमी जागजाता हैं। क्या वह वही आदमी है जो कि सोते समय था? क्या उसका सोना और जागना एक ही है? एक कली बन्द है और मुझाई हुईं है, और फिर सूरजउग जाता है और कली खिल जाती है और फूल बन जाती है। क्या यह फूल वही है? कुछ नया उसमें प्रवेश कर गया है। एक जीवन्तता, एक बढ़ने व खिलनेकी क्षमता प्रकट हुई है। एक चिडियाँ सो रही थी, जैसै कि मृत हो, मृत पदार्थहो । परन्तु सुरज निकल आया है और चिडियों अपने परों पर उड़ निकली हैं। क्या वह वही चिडियाँ हैं? यह अब एक नई ही घटना है। कुछ छू गया है, और चिडिया जीवित हो गई है। हर चीज़चुप थी और अब हर चीज़गीत गारही है। सुबह स्वयं एक गीत है। वही घटना एक बुद्ध के शरीर के कोषों में घटित होती है। उसे हम "बुद्ध-काया" के नाम से जानते हैं-एक जागृत आदमी का शरीर । एक बुद्ध का शरीर । वह वही शरीर नहीं है, जैसा कि तुम्हारा है। न ही वह शरीर है जो कि बुद्धहोने के पहले गौतम काथा। बुद्ध मरने के करीब हैं, तब कोई उनसे पूछता है-"वया आप मर रहे हैं मरने के बाद आप कहाँ होंगे?" बुद्ध ने कहा-जोशरीर पैदा हुआ था वह तो मरेगा। परन्तु एक और भी शरीर है-बुद्ध-कायर, बुद्ध का शरीर जो कि नतो कभी जन्मा था और न कभी मर सकता है। परन्तु मैंने वह शरीर छोड़ दिया है जो कि मुझें मिला था, जो कि मेरे माता-पित्ता ने मुझे दिया था। जैसे कि हरवर्ष सांप अपनी पुरानी केंचुली छोड़ देता है, मैंने भी उसे छोड़ दिया है। अबबुद्ध-कायाहै बुद्ध का शरीर है। इसका वया अर्थ होता है? तुम्हारा शरीर भी बुद्ध का शरीर हो सकता हैजब तुम्हारी चेतना हर कोष तक पहुँचती है, तो तुम्हारे अस्तित्व का गुणधर्म-हीबदल जाता है, रूपान्तरित हो जाता है क्योंकि तब प्रत्येक कोष जीवन्त हो गया, जाग गया, बुद्धत्व को उपलब्ध हो गया, पराधीनता समाप्त हुईं। तुम अपने मालिकहुए। मात्र केन्द्र के चैतन्य होने से तुम अपने मालिक हो जाते हो। यह सूत्र कहता है-चैतन्य के सूर्य में स्थिर होना ही एकमात्र दीपक हैइसलिए तुम मन्दिर में मिट्टी का दीपक लेकर क्यों जा रहे हो? अंतर का दीपकलेकर जाओ। तुम वेदी पर मोमबत्तियाँ क्यों जला रहे हो? उनसे कुछ भी न होगाअन्तर की ज्योति जला लो। बुद्ध-काया को प्राप्त कर लो! अपनेशरीर के हरकोष को जागने दो, अपने शरीर के एक भी कोष को मूच्छित न रहने दो। बौद्धों ने बुद्ध को कुछ अस्थियाँ बचा कर रखी हैं। लोग सोचते हैं कि यह अन्ध-विश्वास है। यह अन्धविश्वास नहीं है, क्योंकि वे अस्थियाँसाधारण हड्डियाँनहीं हैं। ये साघारण नहीं हैं। इन कोषों ने, इन टुकडों ने अस्थियों के इन-इलेक्ट्रॉन्सने कुछ ऐसा जाना है जो कि कभी-कभी ही होता है। कश्मीर में मुहम्मद काएक बाल संभाल कर रखा गया है। वह कोई साधारण बाल नहीं है। वह कोई अन्ध-विश्वास की बात नहीं है। उस बाल ने भी कुछ जाना है। इसे इस भाँति समझने की कोशिश करें, एक फूल जिसने कि कभी सुरजका उगना नहीं जाना, और एक वह फूल जिसने जाना है, सूर्यं कासाक्षात्कारकिया है, वे दोनों एक नहीं हो सकते। दोनों एक नहीं है। एक फूल जिसने किकमी सूर्य का उगना न जाना होउसने अपने भीतर कभी प्रकाश को बढ़ते नहीं जाना, क्योंकि वह तभी बढ़ता है, जबकि सुरज उगता है। वह फूल मरा हुआ है। उसने अपनी आत्मा कभी नहीं जानी। एक फूल जिसने सुरज के उगने केसाथ ही, अपने भीतर भी कुछ बढ़ते हुए अनुभव किया। उसने अपनी आत्मा कोजाना। अब फूल मात्र एक फूल नहीं है। उसने अपने भीतर एक गहरी क्रांतिको जाना है। भीतर कुछ सुगबुगाया है, कुछ उसके भीतर-जीवन्त हुआ है। इसलिए मुहम्मद का बाल एक दूसरी ही बात है, उसका गुण-धर्म ही अलग है। उसने एक आदमी को जाना। वह एक ऐसे आदमी के साथ रहा है जो किआंतरिक सूर्य ही हो गया, एक अंतर्प्रकाश ही बन गया। उस जाल ने एक गहरीडुबकी लगाई है किसी गहरे रहस्य में जो कि बडी मुश्किल से कभी घटता है। इस अन्तर्ज्योति में स्थापित होना ही एकमात्र दीया है जो कि परमात्मा की वेदीपर ले जाने योग्य है। उसके अलावा किसी और चीज़से कुछ भी न होगा। इस चैतन्य के केन्द्र को कैसे निर्मित किया जाये? मैं बहुत-सी विधियों कीबात करूंगा, किन्तु चूंकि मैं बुद्ध कीतथा बुद्ध-काया की बात कर रहा था, अच्छाहोगा कि बुद्ध से ही प्रारंभ करूँ । बुद्ध ने एक विधि खोजी, ने एक बहुत ही आश्चर्यजनकविधि - एक बहुत ही शक्तिशाली पद्धति आंतरिक अग्नि को जलाने के लिए चैतन्यके सूर्य का निर्मित करने के लिए। और न केवल उसे निर्मित करने के लिए बल्कि साथ-ही-साथ वह अन्तर्ज्योति शरीर के प्रत्येक कोष में भी प्रवेश करने लगती है। तुम्हारे सारे अस्तित्व में भी दौड़ने लगती है। बुद्ध ने श्वास का विधि की तरह उपयोग किया-होशपूर्वक श्वास लेना। इस विधि को"अनापान-सतीयोग" के नाम से आता जाता है - भीतर आती वबाहर जाती श्वास के प्रति सजगता । तुम श्वास लेते हो परन्तु यह अचेतन बातहै। और श्वास ही प्राण है, श्वास ही "एलीन-वाइडल" है, मुख्य शक्ति है, प्राणऊर्जा है, आलोक है-और वही अचेतन है। तुम्हें उसका कोई भी होश नहींयदि तुम्हें श्वास लेना पड़े तो तुम किसी भी क्षण मर जाओगे क्योंकि तब बडामुश्किल होगीश्वास लेना। मैंने कुछ मछलियों के बारे में सुना है जो कि छः मिनट से ज्यादा नहींसोती क्योंकि यदि वे इससे ज्यादा सोयें तो मर जायेंगी, क्योंकि वे नींद में श्वासलेना भूल जाती हैं। यदि उनको नींद गहरी हो जाये तो वे "श्वास लेना भूल जातीहैं, इसलिए वे मर जाती हैं। ये विशेष मछलियाँ छः मिनट से ज्यादा नहीं सोसकतीं। उन्हें समूह में रहना पड़ता है-सदैव समूह में कुछ मछलियाँ सो रहीहैं, दूसरी मछलियों को ध्यान रखना पड़ता है कि वे ज्यादा देर तक न सोती रहेंजब उनका समय हो जाता है, वे उनकी नींद को तोड़ देती है, वरना सोती हुईमछलियाँ मर जायेंगी। वे फिर से नहीं जागेंगी। यह वैज्ञानिक निरीक्षण है। यह तुम्हारे लिए भी एक समस्या हो जाये यदितुम्हें याद रखना पड़े कि तुम्हें श्वास लेना है। तुम्हें सतत याद रखना पड़े कितुम्हें सॉस लेना है, और तुम एक क्षण के लिए भी कुछ याद नहीं रख सकतेयदि एक क्षण भी भूल हो जाये तो तुम गये। इसलिए साँस अचैच्छिक क्रियाहै, वह तुम पर निर्भर नहीं है। यहाँ तक कि यदि तुम महीनों तक बेहोशी कीहालत में पड़े रहो, तो भी तुम श्वास लेते रहोगे। मैं कहता हूँ कि सचमुच ये मछलियों बहुत दुर्लभ है। और किसी दिन होसकता है कि आदमी को पता चले कि उनमें एक गहरी सजगता है जो कि आदमीके पास भी नहीं है क्योंकि सतत होशपूर्वक श्वास लेना एक बहुत ही कठिनबात है। हो सकता है उन मछलियों ने कोई विशेष सजगता उपलब्ध कर ली हो, जो कि हमारे पास नहीं है। बुद्ध ने श्वास को दो कार्य एक साथ करने के लिए वाहन की भाँति काममें लिया-एक : चेतना पैंदा करने के लिए, और दूसरा : उस चेतना कोशरीरके हर एक कोष में प्रवेश करा देने के लिए। उन्होंने कहा-होशपूर्वक श्वासलो। यह कोई प्राणायाम नहीं है। यह सिर्फ श्वास को बिना बदले सजगता काविषय बनाने का प्रयास है। तुम्हें अपनी श्वास कीगति में कोई परिवर्तन नहींकरना है। उसे वैसा ही रहने देना- नैसर्गिक जैसी वह है-वैसी ही रहने देनाहैं। उसे परिवर्तित न करें। कुछ और करें। जब तुम श्वासको भीतर ले जाओंतो होशपूर्वक लेजाओ। भीतर जातीश्वास के साथ तुम्हारी चेतना भी भीतर चलीजाए । जब श्वास बाहर आती हो तो तुम भी उसके साथ बाहर चले जाओ। भीतर जाओ, बाहर आओ। श्वास के साथ होशपूर्वक चलो। तुम्हारा ध्यान श्वास पर होउसके साथ वही, एक श्वास भी विस्मृत न हो जाये। बुद्ध ने कहा- बताते हैं कि यदि तुम एक घंटे भी श्वास के प्रति सजगरह सको तो तुम बुद्धत्व को उपलब्ध हो गये समझो। लेकिन एक श्वास भी नहीं चूकनी चाहिए। एक घंटा काफी है। यह बहुत छोटा मालूम पड़ता हैंकेवल समय का एकटुकड़ा, किन्तु वह है नहीं। जब तुम प्रयास करोगे तो सजगता का एक घंटा लाखों साल जैसा प्रतीत होगा क्योंकि साधारणतः तुम पाँच-छः सेकंड से ज्यादा सजग नहीं रह सकते, और वह भी जबकि कोई बहुत अधिक सावधान हो । अन्यथा तुम हर सेकंड पर चूक जाओगे। तुम शुरू करोगे कि श्वास भीतर जा रही हैं। श्वास भीतर चली गई है, और तुम कहीं और चले गये। अचानकतुम्हें याद आयेगा कि श्वास बाहर जा रही है। श्वास बाहर चली गई और तुम कहीं और जा चुके । श्वास के साथ चलने का अर्थ होता है कि एक भी विचार को न चलनेदिया जाये क्योंकि विचार तुम्हारा ध्यान खींच लेगा, विचार तुम्हारे ध्यान को कहीं और ले जाएगा। इसलिए बुद्ध कभी नहीं कहते कि बिचारों को रोको परन्तु वे कहते है - " हौशपूर्वक श्वास लो" विचार स्वतः ही रुक जायेंगे। तुम दोनों कामएक साथ नहीं कर सकते कि विचार भी करो और श्वास पर भी ध्यान रख सको। एक विचार तुम्हारे मस्तिष्क में आता है और तुम्हारा ध्यान कहीं और चलाजाता है। एक अकेला विचार, और तुम अपनी श्वास की प्रक्रिया के प्रति मूच्छित हो जाते हो। इसलिए बुद्ध ने बहुत ही सरल विधि का प्रयोग किया पर एक बहुतही जीवन्त प्रक्रिया का। उन्होंने अपने भिक्षुओ से कहा कि तुम चाहे जो भी करो, किन्तु अपनी भीतर आती और बाहर जाती श्वास के प्रति होश बना रहे। उसकेसाथ ही गति करो, उसके साथ ही बहो । जितना आवक तुम प्रयत्न करोगे, जितनाज्यादा प्रयास करोगे उतना ही तुम उसके प्रति जाग सकोगे। सजगता एक-एकसेकंड करके बढेगी। यह बहुत कठिन है। बहुत मुश्किल बात है। लेकिन एकबार भी तुम उसे अनुभव कर लो तो तुम दूसरे ही आदमी ही जाओगे-एक भिन्नही व्यक्ति, एक भिन्न ही जगत के। यह दो त्तरह से काम करती है : जब तुम होशपूर्वक भीतर श्वास लेते होओरबाहर छोड़ते हो, तो धीरेधीरे तुम अपने केन्द्र पर आ जाते हो, क्योंकि तुम्हारीश्वास तुम्हारे होने के केन्द्र को स्पर्श करती है। हर बार जब श्वास भीतर जातीहै, तो वह तुम्हारे अस्तित्व के, बीइंग के केन्द्र को छूती है । शारीरिक रूप सेतुम सोचते हो कि श्वास का काम तुम्हारे रक्त को साफ करने के लिए है, कि यह हृदय का एक कार्य है कि श्वास ले, कि वह शरीर की बात है। तुम सोचते हो कि श्वास लेना फेफडों का कार्य है, जो कि रक्त की सफाई के लिए एक पम्पिंग स्टेशन है, जो कि रवत को, आँक्सीजन पहुँचाता है और कारबन-डाईं-ऑक्साइडबाहर फेंकता है, जो कि बेकार हो चुकी और उसकी जगह ताजा आक्सीज़न भरता हैं। परन्तु यह केवल शारीरिक बात है। यदि तुम अपनी श्वास के प्रति सजगक्या। शुरू करो, तो धीरे-धीरे तुम गहरे चले जाओगे-तुम्हारे हृदय से भी गहरे, और एक दिन तुम्हें अपने केन्द्र की प्रतीति होगी तुम्हारी नाभि के पास। यह केन्द्रकी प्रतीति तभी होगी जबकि तुम लगातार अपने श्वास के साथ चलते जाओ-क्योंकिफिराने निकट तुम अपने केन्द्र के पहुँचते हो, उतनी ही तुम्हारी चेतना खोने की पाठशाला है। तुम शुरू कर सकते हो भीतर श्वास लेने से, जबकि वह तुम्हारी नाक को स्पर्श करे, वही से तुम सावधान हो जाओ। जितनी अधिक भीतर जाये, उतनी ही चेतना कठिन हो जायेगी और एक विचार भी आ गया, या कोईआवाज़ अथवा कुछ भी हो गया और तुम वापस आ जाओगे। यदि तुम अपने केन्द्र तक जा सको जहाँ कि एक क्षण के लिए श्वास रुक जाती है और एक अन्तराल आ जाता है तो छलांग लग सकती है। श्वास भीतर जाती है, श्वास बाहर आती है, इन दो के बीच में भी एक बहुत सूक्ष्म गैप है वह गैप ही तुम्हारा केन्द्र है। जब तुम श्वास के साथ चलते हो, तब कहीं बहुतश्रम के बाद तुम्हें उस गैप का पता चलता है जबकि श्वास की कोई गति नहीं होती, जबकि श्वास न तो आ रही होती है और न ही जा रही होती है। दो श्वासोंके बीच एक बहुत ही बारीक-सा अन्तराल हैं-एक गैप है। उस अन्तराल मेंतुम अपनेंकेन्द्र पर होते हो। इसलिए बुद्ध वे श्वास का प्रयोग किया केन्द्र के निकट, और अधिक निकटआने के लिए। जब तुम बाहर जाओश्वास के साथ, श्वास के प्रति सजग रहोफिर एक गैप है। सब मिलाकर दो गैप हैं-एक गैप भीतर और एक गैप बाहरश्वास भीतर जाती है, और श्वास बाहर जाती है, दोनों के बीच एक गैप है। श्वासबाहर जाती है, और श्वास भीतर जाती है : फिर एक गैप है। दूसरे गैप के प्रति सजग होना और भी ज्यादा कठिन है। इस प्रक्रिया को देखो। तुम्हाराकेन्द्र भीतर आती श्वास और बाहरजातीश्वास के बीच में है। एक दूसरा भी केन्द्र है-कॉस्मिक सेंटर ब्रह्म केन्द्र । तुमउसे परमात्मा कह सकते हो । जबकि श्वास बाहर जाती है और भीतर आती है, तब भी एक गैप है। उस गैप में ब्रह्म-केन्द्र है। ये दोनों केन्द्र दो भिन्न बातें नहीं हैं। परन्तु पहले तुम अपने आंतरिक केन्द्र के प्रति ही जागोगे और तब तुम अपने बाहर के केन्द्र के प्रति सजग हो जाओगे। और अन्ततः तुम जानोगे कि ये दोनोंकेन्द्र एक ही हैं। तब "भीतर" और "बाहर" का कोई अर्थ नहीं बचता। बुद्ध कहते हैं कि सजगतापूर्वक श्वास लो और तब तुम चैतन्य का एककेन्द्र निर्मित कर सकोगे। और एक बार यह केन्द्र निर्मित हो जाये तो चेतना तुम्हारेश्वास के साथ तुम्हारेरक्त में, कार्यों में प्रवाहित होने लगेगी, क्योंकि प्रत्येक कोष को हवा की, ऑक्सीजन की आवश्यकता है, और प्रत्येक कोष श्वास लेता है-हरकोष। और अब तो वैज्ञानिक कहते हैं कि लगता है कि यह पृथ्वी भी श्वासलेती है। और आइंस्टीन की संसार के फैलने की धारणा के अनुसार सैद्धान्तिकवैज्ञानिक ऐसा कहते है कि सारा जगत ही श्वास ले रहा है। जब तुम श्वास भीतर लेते हो तो तुम्हारी छाती फैल जाती है। जब तुम श्वासबाहर निकालते हो तब तुम्हारी छाती सिकुड़ जाती है अब सैद्धान्तिक वैज्ञानिककहते हैं कि ऐसा प्रतीत होता है कि सारा विश्व ही श्वास ले रहा है। जब जगत भीतर श्वास भीतर लेता है तो वह फैल जाता है। जब वह श्वास बाहर निकालता हैतो सिकुड़ जाता है। पुराने हिन्दू शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि सृष्टि ब्रह्मा की भीतर आतीएक श्वास है ओर प्रलय-बाहर जाती एक श्वास है। बहुत ही सूक्ष्म ढंग से, बहुत ही आणविक तरीके से, वही तुम्हारे भीतरहो रहा है। जब तुम्हारी सजगता तुम्हारे श्वास के साथ बिल्कुल एक हो जाती है, तब तुम्हारी श्वास तुम्हारी चेतना को हर कोष तक ले जाती है। अब किरणें प्रवेश कर जाती है और सारा शरीर बुद्ध-काया हो जाता है। वस्तुतः तब तुम्हारेपास कोई पदार्थगत्त शरीर नहीं होता। तुम्हारे चैतन्य का शरीर होता है। यही इससूत्र का अर्थ है-चैतन्य के सूर्य में स्थापित हो जानायही दीपक है। जिस तरह हमने बुद्ध की विधि समझो, अच्छा होगा कि हम एक दूसरीभी विधि समझ लें- एक और विधि। तन्त्र ने यौन का उपयोग किया। वह भीबडी ही जीवन्त शक्ति है । यदि तुम्हारे भीतर तुम्हें गहरे जाता हो, तो तुम्हें बहुतजीवन्त शक्ति का उपयोग करना पडेगा सर्वाधिक गहरी शक्ति का । तन्त्र यौनका उपयोग करता है। जब तुम यौन-कृत्य में लगे हो तब तुम सृजन के केन्द्र के बहुत ही निकट हो-जीवन के स्रोत के करीब। यदि तुम यौन- कृत्य में होशपूर्वकजा सको तो वह ध्यान हो जाता है। यह बहुत ही कठिन है-श्वास से भी अधिक कठिन । तुम थोडी मात्रा मेंहीशपूर्वक श्वास ले सकते हो। वह तुम कर सकते हो। परन्तु सेक्स की घटनाही ऐसी है कि उसे तुम्हारी मूर्च्छा की आवश्यकता है। यदि तुम होश में हो जाओ तो तुम्हारी काम वासना खो जायेगी। यदि तुम जाग जाओं तो भीतर कोई काम-वासना नहीं बचेगी। इसलिए तन्त्र सर्वाधिक कठिन बात जगत में की। चेतना को जगाने के प्रयोगों के इतिहास में तन्त्र सर्वाधिक गहरा गया। परन्तु सचमुच इसमें कोई अपने को धोखा भी दे सकता है, और तन्त्र केसाथ प्रवंचना बहुत सुगम है क्योंकि तुम्हारे अलावा कोई दूसरा नहीं जान सकताकि वास्तविकता क्या है। कोई भी नहीं जान सकता। किन्तु सौ में से एक व्यक्तितन्त्र को विधि में सफल हो सकता है क्योंकि सेक्स को मूर्च्छा की आवश्यकताहै। अतः एक तान्त्रिकको, तन्त्र के साधक को सेक्स पर काम करना पड़ता है, काम वासना के प्रति होश रखना पड़ता है जैसे कि श्वास पर रखते हैं। उसे उसकेप्रति सजग रहना पड़ता है। जब वस्तुतः ही वह यौन-कृत्य में जाये तो उसे होशको संभाले रखना पड़ता है। तुम्हारा शरीर, तुम्हारी काम-ऊर्जा अपने शिखर पर आ गई है और विस्फोटित होने को है। तन्त्र का साधक होशपूर्वक शिखर पर पहुँचता है, और उसकी एकविधि है जानने की । यदि काम- ऊर्जा का स्खलन अपनेआप हो जाये और तुमउसके मालिक न रह पाओ तो फिर तुम उसके प्रति सजग नहीं थे। तब अचेतनने अधिकार ले लिया। यौन अपने शिखर पर हो, और तुम कुछ भी न कर सकोसिवाय स्खलित होने के, तब वह स्खलन तुम्हारे द्वारा न हुआ। तुम काम कीप्रक्रिया शुरू कर सकते हो, तुम उसे समाप्त नहीं कर सकते। अंत सदैव अचेतनके अधिकार में रहता है। यदि तुम शिखर पर रुके रहो और वह तुम्हारा सचेतन कृत्य हो जाये कितुम चाहो तोस्खलन हो और तुम चाहो तो न हो, यदि तुम शिखर से वापसलौट सको बिना स्खलन के अथवायदि तुम शिखर पर घंटों ही रुक सको, यदिवह तुम्हारा जागृत कृत्य हो, त्तब ही तुम मालिक हो। और यदि कोई काम केशिखर पर पहुँच जायेवीर्य-स्खलन के बिल्कुल किनारे ही-और उसे रोके रहसके और उसके प्रति जागरूक रह सके, तब अचानक वह अपने गहनतम केन्द्र के प्रति जागता हैं-अचानक । और ऐसा नहीं है कि वह अपने ही गहनतम केन्द्रको जान पाता है, बल्कि वह अपने साथी के भी गहरे से गहरे केन्द्र को अनुभवकर पाता है। इसीलिए यदि कोई तन्त्र का साधक है और यदि वह पुरुष है तो वह सदैवअपने साथी की पूजा करेगा। उसका साथी मात्र यौन संबंध का विषय नहीं हैवह दिव्य है । वह एक देवी है। और वह कृत्य शारीरिक कतई नहीं है। यदितुम उसमें होशपूर्वक जा सको, तो वह गहरे से गहरा आध्यात्मिक कृत्य है। परन्तुहर गहनतम बात सदा ही असंभव जैसी होती है। इसलिए या तोश्वास का यासेक्स का उपयोग करो। महावीर ने भूख का उपयोग किया। वह भी एक गहरी बात है। भूख भीतुम्हारे स्वाद की भूख नहीं है अथवा किसी और चीज़के लिए नहीं है। वहतुम्हारे जीवन के लिएज़रूरी है। महावीर ने भूख का उपवास का उपयोग किया जागरण के लिए। यह कोई तप नहीं है। महावीर कोई तपस्वी नहीं हैं। लोगोंने उन्हें बिल्कुल गलत समझा। वे कोई तपस्वी नहीं थे। कोई समझदार आदमीकभी तपस्वी नहीं होता। परन्तु वे भूख को, उपवास को जागरण के लिए एक वाहन की तरह उपयोग कर रहे थे। शायद तुमने इस तथ्य पर कभी ध्यान दिया हो कि जब तुम्हारा पेट पूरा भरा हो तो तुम्हें नींद आने लगती है, तुम बेहोश होने लगते हो। तुम सोना चाहतेहो। परन्तु जब तुम भूखे हो, उपवास कर रहे ही तो तुम सो नहीं सकते। रात्रिमें भी तुम इघर-से-उघर करवटे लेते रहोगे। तुम उपवास में सो नहीं सकते। क्योंनहीं सो सकते। क्योंकि यह सोना तब जीवन के लिए खतरनाक है। अब नींदद्वितीय आवश्यकता है। पहली जरूरत भोजन की हैं-भोजन प्राप्त करने की। वहप्रथम आवश्यकता है। नींद अब कोई समस्या नहीं है। परन्तु महावीर ने उसका बहुत ही वैज्ञानिक ढंग से उपयोग किया। क्योंकिजब तुम उपवास कर रहे हो तो सो नहीं सकते। तुम चीजों को ज्यादा आसानीसे स्मस्या रख सकते ही। सजगता भी सरलता से आती है। और महावीर ने उपवासका उपयोग चेतना के जागरण के विषय की भाँति किया। वे लगातार खड़े रहते। तुमने बुद्ध की मूर्ति बैठी हुईं देखी होगी किन्तु महावीर की ज्यादातर मूर्तियाँखड़ी अवस्था में हैं। वे सदैव खड़े ही रहे थे। तुम्हें अपनी भूख का और भी अघिक अनुभव होगा यदि तुम खड़े हुए हो । यदि तुम बैठे हो तो तुम्हें वह कम मालूमहोगी और यदि तुम लेटे हुए हो तो वह और भी कम महसूस होगी। जब तुम खड़े हो तो सारा शरीर भूख महसूस करने लगता है। तुम्हें सारे शरीर में भूखको प्रतीति होगी। सारा शरीर बहने लगता है, वह भूख की एक सरिता हो जाता है। पैर से सिर तक तुम भूखे हो जाते हो। केवल पेट ही नहीं बल्कि पाँव भी, यहाँ तक सारा शरीर भूख को अनुभव करने लगता है। और महावीर चुपचाप निरीक्षणकरते हुए खड़े रहेंगे, भूख के समय-साथ बहते हुए-जैसे कि कोईश्वास केसाथ करता है। ऐसा कहा जाता है कि उनके मौन के बारह साल के अर्से मेंउन्होंने करीब ग्यारह वर्षों तक उपवास किया। केवल तीन सौ साठ दिन ही उन्होंनेभोजन लिया। उपवास एक विधि था उनके लिए। श्वास की तरह ही भोजन और यौन, ये भी सबसे अधिक गहरी चीजें है। जब तुम अपनी भूख के प्रति सजग होते चले जाते हो, केवल सजग होते जातेहो और कुछ नहीं करते हो, तो अचानक तुम केन्द्र पर फेंक दिये जाते हो, तुम्हारे "होने" तुम्हारे बीइंग पर सबसे पहले भूख ऊपरी परिधि पर होती है, यदि तुमपरिधि घर उसे न भरो, तो उससे गहरी पर्तें भूखी हो जाती हैं। और इस तरहचलता चला जाता है, और अन्ततः तुम्हारा सारा शरीर भूखा हो जाता है। जब सारा शरीर हो भूखा हो जाता है तुम केन्द्र पर फेंक दिये जाते हो। जब तुम्हें भूख की प्रतीति होती है, तो वहं झूठी होती है। वास्तव में, वहमात्र एक आदत होती है, न कि भूख । यदि तुम दिन के एक खास वक्त परभोजन करते हो, मान लो कि एक बजे, तोठीक एक बजे तुम्हें भूख की प्रतीतिहोती है। यह भूख झूठी है जिसका कि शरीर से कोई संबंध नहीं है। यदि तुमएक बजे भोजन न करो, तो दो बजे तुम्हें लगेगा कि भूख चली गई। यदि वहप्राकृतिक थी तो दो बजे उसे बढ़ जाना चाहिए था। वह चली क्यों गई? यदि वहवास्तविक थी तो दो बजे वह और भी अधिक गुनगनी चाहिए और तीन बजे उससेभी ज्यादा, और चार बजे उससे भी ज्यादा। परन्तु वह खो गई। वो एक आदतथी - एक बहुत ही ऊपरी आदत । यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति तीन सप्ताह तक उपवास करे, तभी केवल वहवास्तविक भूख तक आ सकता है। त्तब पहली बार वह जान सकेगा कि वास्तव में भूख वया होती है। अभी तुम यह कदापि नहीं जान सकते कि भूख भी इतनीशक्तिशाली जात है जितना कि यौन-परन्तु मैं वास्तविक भूख के लिए कह रहा हूँ। इसलिए ऐसा होता है कि जब तुम उपवास पर होते हो तो तुम्हारी काम-वासना मर जाती है, क्योंकि अब और भी अधिक आधारभूत। चीज़ दाँव पर है। भोजन तुम्हारे जीवित रहने के लिए है, यौन मनुष्य जाति के जीने के लिए है। यह एक दूर की घटना है जो कि तुम्हारे से संबंधित नहीं है। यौन जातिके लिए भोजन है, न कि तुम्हारे लिए। यौन के द्वारा मनुष्यता जी सकती हैइसलिए वह कोई तुम्हारी समस्या नहीं है। वह मानव जाति की समस्या है। तुमउसे छोड़ भी सकते हो, परन्तु तुम भोजन नहीं छोड़ सकते क्योंकि वह तुम्हारीअपनी समस्या है। वह तुमसे संबंधित है। यदि तुम उपवास करते चले जाओ तोशनैः-शनैः यौन खोजायेगा, और वह अधिकाधिक दूर चला जायेगा इस कारण से बहुत से लोग अपने को ही धोखा दिये चले जाते हैं। वेसोचते हैं कि यदि वे कम भोजन करते हैं तो वे ब्रह्मचारी हो गये हैं। वे ब्रह्मचारीनहीं ही गये हैं। केवल समस्या कोज़रा आगे सरका दिया गया है। उन्हें ठीक-ठाक भोजन दो काम-वासना लौट आएगी-पहले से भी अधिक शक्ति से, ज्यादाताजा व युवा होकर। यदि तुम तीन सप्ताह से भी ज्यादा समय तक उपवास करो, तो तुम्हारा साराशरीर भूखा हो जाता है। शरीर का रोयां-रोयां भूख महसूस करने लगता है। तबपहली बार तुम सही अर्थों में भूखे हुए हो, तुम्हारा पेट भूखा है, तुम्हारा साराशरीर ही भूखा हैं। तुम चारों ओर से एक गहरी भूख की अग्नि से धिरे हो महावीर ने इसका जागरण के लिए उपयोग किया, अतः वे भूखे रहते। उपवासकरते और सजग रहते। एक स्वस्थ आदमी तीन महीनों तक बिना भोजन के रह सकता है। एकसाधारणतः स्वस्थ आदमी तीन माह तक बिना भोजन किये रह सकता है। यदितुम-तीन माह तक उपवास करो तो अचानक एक दिन तुम मृत्यु के किनारे हीखड़े होगे। यह जानते हुए मृत्यु का साक्षात्कार करना हैं, और यह साक्षात्कारतब होता है जबकि तुम अपने शरीर को छोड़ रहे होते हो और अपने केन्द्र परभीतर छलांग लगा रहे होते हो। अब पूरा शरीर कोथक गया है। अब वह नहीं चलसकता। तुम अपने मूल उद्गम पर फेंके जा रहे हो और तुम अब शरीर में नहींरह सकते। धीरे-धीरे तुम शरीर में भीतर, और भीतर और भीतर फेंक दिये जाते हो। भोजन तुम्हें बाहर ले जाता है, उपवास तुम्हें भीतर ले जाता है। एक क्षणऐसा आता है जबकि शरीर तुम्हें और आगे नहीं ले जा सकत्ता । तब तुम अपनेकेन्द्र पर फेंक दिये जाते हो । उस क्षण में, तुम्हारा अंतर सूर्य, युक्त होता है। इसलिए महावीर तीन माह तक उपवास करेंगे-चार माह उपवास पर रहेंगे। वे असाघारणरूप से स्वस्थ थे। और तब अचानक वे गाँव में भोजन मांगने जाते। यह भी एक रहस्य है कि क्यों वे अचानक तीन-चार माह बादगाँव में भोजनमांगने जाते थे। वास्तव में, जब भी वे बिल्कुल किनारे ही होते और ऐसी घडीआ जाती कि एक क्षण भी घातक सिद्ध हो सकता था, तभी वे भोजन मांगने चले जाते। वे पुनः शरीर में प्रवेश कर जाते और फिर उपवास पर चले जाते, और तब फिर केन्द्र पर पहुँच जाते, फिर शरीर में प्रवेश करते और फिर केन्द्रपर चले जाते। तब वे उस मार्ग को महसूस करते : भीतर आती श्वास, बाहर जाती श्वास, - जीवन को शरीर में आते, जीवन कोशरीर से जातें। और तब वे इस प्रक्रिया केप्रति- सजग रहते। वे भोजन करते और वे इस प्रक्रिया के प्रति जागे हुए रहतेवे भोजन करते और वे फिर से शरीर में लौट आते, और फिर से उपवास परउतर जाते। ये वे लगातार करते रहे बारह वर्षों तक। यह एक आंतरिक प्रक्रिया थी। तो मैंने तीन बातों पर चर्चा कोःश्वास, यौन व भूख - बहुत ही बुनियादीव आघाभूत बातें। किसी केप्रति भी सजग हो जाओ। श्वास सबसे अधिक सरलहै। तन्त्र की विधि का उपयोग करना कठिन है। मन इसका उपयोग करना चाहेगापरन्तु वह बहुत कठिन होगा। उपवास की विधि भी कठिन है। मन उसे पसन्दनहींकरेगा। ये दोनों बहुत कठिन है। केवल श्वास की प्रक्रिया सबसे ज्यादा सरलहै। आने वाले युग में मुझें लगता है, कि बुद्ध की विधि बड़ी सहायक होगीयह मध्यम, सरल और बहुत खतरनाक भी नहीं है। इसलिए बुद्ध को मध्य मार्ग का सूत्र खोजने वाला कहते हैं- "मज्झिम-निकाय"-"स्वर्ण मार्ग।" यौन व भोजन, इन दोनों के यह मध्य में है। श्वास स्वर्णमार्ग है बिल्कुल बीच में और दूसरी भी बहुत-सी विधियाँ है। तुम किसी भी विधि से अन्तर्प्रकाशको उपलब्ध हो सकते हो। और एक बार भी तुम उसमें स्थिति हो जाओ तो तुम्हाराअन्तर्प्रकाश तुम्हारे शरीर के कोषों में प्रविष्ट होने लगता है। तब तुम्हारी सारीशारीरिक यांत्रिकता ताजा हो जाती है और तुम बुद्ध-काया को उपलब्ध कर सकतेहो- जागे हुए मनुष्य के शरीर को पा सकते हो।
आदम को लज्जा का अनुभव हुआ क्योंकि वह अपनी पशुओ से तुलना कर सकता था। एक तरह से अब वह उनसे भिन्न था क्योंकि उसे नग्नता का पता था। आदमी अपने को इसलिए ढंकता है ताकि स्वयं को पशुओं से भिन्न कर सकें। और हम उस सभी के प्रति लज्जा का अनुभव करते है जो कि पशुओं जैसा है और जिस क्षण भी कोई पशुओं जैसा कोई कृत्य करता है, हम कहते हैं- क्या कर रहे हो? क्या तुम पशु हो? हम किसी भी चीज की निन्दा कर सकते हैं, यदि हम उसे पशुओं जैसी सिद्ध कर दें। हम यौन को निन्दित करते हैं, क्योंकि वह पाशविक है। हम किसी भी बात को निन्दित कर सकते है यदि पशुओं से उसे जोड़ा जा सके। होश के साथ निन्दा का भाव आया - पशुओं की निन्दा । और निन्दा ने ही हमारे सारे दमन को जन्म दिया, क्योंकि आदमी एक पशु हैं। वह उसके पार जा सकता है, वह दूसरी बात है। परन्तु वह पशुओं से ही आया है तो उनसे ऊपर उठ सकता है, परन्तु वह है तो पशु ही । एक दिन वह पशु नहीं हो सकता है, वह अतिक्रमण कर सकता है, परन्तु वह पशुओं का वंशज है, इसे मना नहीं कर सकता । वह पशुता मौजूद है। और एक बार यह खयाल आ गया कि हम पशुओं से भिन्न हैं, तो आदमी उस सब को दमन करने में लग गया जो कि पशु-वंश परम्परा का हिस्सा था। इस दमन ने विभाजन कर दिया और इसलिए आदमी दो में बंटा हुआ है-दो है। वह जो वास्तविक, बुनियादी है, पशु ही रहता है और उसका बौद्धिक, दिमागी हिस्सा सोचता रहता है झूठी काल्पनिक दिव्यता को-बातें अतः केवल एक हिस्सा ही तुम्हारे मन का तुमसे तादात्स्य जोड़े रखता है और बाकी सारा हिस्सा मना कर दिया जाता है। शरीर में भी हमने विभाजन कर लिए हैं। शरीर के नीचे का हिस्सा निन्दित है। वह शारीरिक तौर से ही नीचे का नहीं है, वह मूल्यों के आधार पर भी नीचा है। ऊपर का हिस्सा खाली ऊपर का ही नहीं है, बल्कि वह ऊँचा है। तुम अपने नीचे के हिस्से के प्रति दोषी अनुभव करते हो। और यदि कोई पूछे कि तुम कहां स्थित हो तो तुम अपने सिर की ओर इशारा करते हो। वह दिमाग का, सिर का, बुद्धि का हिस्सा है। हम अपने को बुद्धि से जोड़ते है, न कि शरीर से। और यदि हमसे कोई बहुत ज्यादा आग्रह करे तो हम अपने को शरीर के ऊपरी हिस्से से जोड़ते है, नीचे के हिस्से से कभी नहीं। नीचे का हिस्सा निन्दित कर दिया गया है। क्यों? शरीर तो एक है। तुम उसे बांट नहीं सकते। कहीं कोई विभाजन नहीं है। सिर और पैर एक है, और तुम्हारा मस्तिष्क और जननेन्द्रियां एक हैं वे एक इकाई की भांति काम करते हैं। परन्तु यौन को मना करने के लिए, सेक्स की निन्दा करने के लिए हम शरीर के सारे निचले हिस्से को मना कर देते हैं। आदम को पाप का अनुभव हुआ, क्योंकि पहली बार उसने अपने को पशुओं से भिन्न महसूस किया। और यौन सर्वाधिक पाशविक वृत्ति है। मैं "पाशविक" शब्द का उपयोग कर रहा हूँ एक तथ्य की तरह, बिना किसी प्रकार के निदा के स्वर के। सबसे अधिक पशुता की बात सेक्स ही होगी। क्योंकि यौन जीवन है और स्रोत है तथा उद्गम है। आदम और ईव सेक्स के प्रति सजग हो गये उन्होंने उसे ढंकने की कोशिश को । केवल बाहरी रूप से नहीं बल्कि उन्होंने उस तथ्य को अपनी भीतरी चेतना में भी छिपाने का प्रयत्न किया। उससे चेतन और अचेतन मन के बीच विभाजन हो गया। मन भी एक है, जैसे कि शरीर एक है। परन्तु यदि तुम किसी बात की निन्दा करते हो तो वह हिस्सा अचेतन में चला जाता है। तुम इतना उसके प्रति निन्दा से भर जाते हो कि तुम भी उसे जानने से डरते हो कि वह तुम्हारे भीतर कहीं भी है। तुम एक रुकावट पैदा करते हो, तुम एक दीवाल खडी कर देते हो। और जो कुछ भी निन्दित है उसे तुम दीवाल के उस पार डाल देते हो और फिर तुम उसे भूल जाते हो। वह वहाँ पड़ा रहता है, वह वहीं से काम करता रहता है, वह तुम्हारा मालिक बना रहता है। और अभी भी तुम अपने को धोखा दे सकते हो कि अब वह कहीं भी नहीं है। वह निन्दित हिस्सा ही हमारा अचेतन बन जाता है। इसीलिए हम कभी ऐसा नहीं सोचते कि हमारा अचेतन मन हमारा ही है। तुम रात सपना देखते हो, तुम एक बहुत कामुकतापूर्ण सपना या बहुत भयानक सपना देखते हो, जिसमें तुमने किसी आदमी को हत्या कर दी हैं। जिसमें कि तुमने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है। सुबह तुम्हें कोई अपराध का भाव नहीं लगता, तुम कहते हो कि वह तो केवल सपना था। वह केवल सपना नहीं था। कुछ भी यूं ही नहीं होता। वह तुम्हारा ही सपना था, किन्तु वह तुम्हारे अचेतन से संबंधित था। सवेरे तुम अपने को चेतन मन से जोड़ लेते हो और इसलिए तुम कहते हो कि यह सिर्फ सपना है। इससे मेरा कुछ लेना-देना नहीं, यह तो बस हो गया। यह असंगत है, आकस्मिक है। तुम उससे कोई संबंध नहीं बना पाते। परन्तु वह तुम्हारा ही सपना था और तुमने ही उसे निर्मित किया था। और वह तुम्हारा ही मन था और तुमने ही कृत्य किया था। सपने में भी तुम्हीं ने हत्या की थी, बलात्कार किया था। चेतन मन के इस निन्दा करने के कारण ही आदम और ईव डर गये, अपनी नग्नता से लज्जित हुए। उन्होंने अपने शरीर को ढंकने की कोशिश को। केवल अपने शरीर को ही नहीं बाद में अपने मन को भी ढंकने लगे। हम भी वहीं कर रहे हैं। क्या है अच्छा? क्या हैं "शुभ"? जो कि समाज के द्वारा अच्छा समझा जाता है, वही तुम अपने चेतन मन में रख लेते ही, और जो कुछ भी बुरा है, समाज द्वारा निन्दित है, उसे तुम अचेतन में फेंक देते हो। वह एक कचरे का थैला हो जाता है। तुम उसमें चीजें फेंकते चले जाते हो और वह वहीं पड़ी रहती है। गहरी जड़ों में, नीचे वे अपना काम करती रहती हैं। वे तुम्हें हर क्षण प्रभावित करती रहती हैं। तुम्हारा चेतन मन तुम्हारे अचेतन मन के समक्ष नपुंसक सिद्ध होता है क्योंकि तुम्हारा चेतन मन केवल समाज को उप-उत्पत्ति है और तुम्हारा अचेतन ही प्राकृतिक है, जैविक है। उसमें शक्ति है, उसमें ऊर्जा है। इसलिए तुम "भली" बातें सोचते रह सकते हो, किंतु तुम "बुरी" बातें करते चले जाओगे। संत अगस्तीन बतलाते हैं- "हे परमात्मा, यही एक मात्र मेरे लिए समस्या है- जो कुछ भी मैं सोचता हूँ कि करने योग्य है मैं कभी नहीं करता, और जो कुछ भी मैं सोचता हूं कि नहीं करना है वही मैं सदैव करता हूं।" यह समस्या संत अगस्तीन के लिए ही नहीं है, यह समस्या प्रत्येक के लिए है, जो भी चेतन और अचेतन में बंटे हैं लज्जित अनुभव करने के कारण ही आदम दो में बंट गया। वह अपने प्रति ही लज्जा से भर गया। और जिस हिस्से के प्रति वह लज्जित अनुभव करने लगा, वह हिस्सा उसके चेतन मन से कट गया। तब से आदमी एक बंटा हुआ, खण्डित जीवन जी रहा है। और उसे लज्जा क्यों अनुभव हुईं? वहां कोई भी तो नहीं था। न कोई उपदेशक था, न ही धार्मिक चर्च था, जिसने उसे शरम करने के लिए कहा हो। जिस क्षण भी तुम सजग होते हो, अहंकार प्रवेश करता है। तुम एक परीक्षक हो जाते हो। बिना होश के तुम मात्र एक हिस्से होते हो- बड़े विराट जीवन के हिस्से । तुम अलग और भिन्न नहीं होते। यदि एक लहर होश में आ जाये तो उसका अहंकार खडा हो जायेगा और उसी क्षण वह सागर से भिन्न हो जायेगी यदि लहर होश में आ सके और सोचे कि मैं हूं तो लहर अपने को सागर से एक नहीं समझ सकती, दूसरी लहरों से एक नहीं मान सकती। वह भिन्न हो जाती है, और अपने को अलग मानने लगती है। अहंकार पैदा हो गया। ज्ञान अहंकार निर्मित करता है। बच्चे बिना अहंकार के होते हैं, क्योंकि उन्हें कोई ज्ञान नहीं होता। वे निर्दोष होते हैं, और निर्दोषिता में अहंकार प्रवेश नहीं कर सकता। जितने तुम विकसित न होते हो, इतने ही अधिक तुम अहंकार में भी वृद्धि करते हो। बूढ़ों के पास बड़ा सघन व गहरा अहंकार होता है। यह स्वाभाविक है। उनका अहंकार सत्तर अस्सी वर्ष तक जिया है। उनके पास लम्बा इतिहास है। तुम्हें आश्चर्य होता है यह जान कर कि तुम याद क्यों नहीं रख पाते-अपने बचपन की। यदि तुम अपनी स्मृति में पीछे लौटकर जाओ, तो तुम तीन या चार वर्ष के अधिक पीछे नहीं जा सकते। ज्यादा-से-ज्यादा तुम पाँचवे या चौथे या तीसरे वर्ष की कोई बात याद कर सकते हो परन्तु पहले तीन वर्ष बिल्कुल खाली हैं। वे वर्ष भी थे तो जरूर और बहुत-सी घटनाएँ हुईं भी थीं किन्तु हम उनको याद क्यों नहीं कर पाते? क्योंकि उस समय कोई अहंकार निर्मित नहीं हुआ था, इसलिए समस्या आना कठिन है। एक प्रकार से तुम नहीं थे, इसलिए तुम याद कैसे कर सकते हो? तुम होते, तो तुम याद भी रख लेते, परन्तु तुम नहीं थे। तुम याद नहीं कर सकते। स्मृति तभी बनती है जबकि अहंकार अस्तित्व में आ गया होता है। यदि तुम नहीं हो, तो स्मृति कहां खडी होगी। तीन साल तो बडी बात है, एक बच्चे के लिए तो प्रत्येक क्या ही एक घटना होती है। वास्तव में उसे अघिक याद होना चाहिए। उसे प्रारंभिक वर्ष अधिक स्मरण होने चाहिए जीवन के शुरू के दिन, क्योंकि तब हर चीज़ रंगीन थी, हर बात अपूर्व थी । जो कुछ होता था, नवीन था। परन्तु उसकी कोई स्मृति नहीं है। क्यों? क्योंकि अहंकार नहीं था। स्मृति को लटकने के लिए अहंकार की खूंटी की आवश्यकता होती हैं। जैसे ही बच्चा अपने को दूसरों से भिन्न समझने लगता है उसे लज्जा अनुभव होती है। उसे वही शर्म मालूम होतीं है जो कि आदम को हुईं थी। आदम ने अपने को नग्न पाया-पशुओं की तरह नग्न, हर चीज की तरह नग्न। तुम्हें भिन्न होना चाहिए, अपूर्व होना चाहिए तुम्हें दूसरों के जैसा नहीं होना चाहिए। तभी केवल तुम्हारा अहंकार बढ़ सकता है। पहला कृत्य तो नग्नता को ढंकने का था अचानक आदम भिन्न हो गया। वह पशु नहीं रहा। आदमी आदम की तरह और उसकी लज्जा के साथ पैदा होता है। आदम की लज्जा की प्रतीति के साथ ही मनुष्य पैदा होता है। एक बच्चा आदमी नहीं होता। वह आदमी तभी होने लगता है जबकि वह अपने को भिन्न, दूसरों से अलग अनुभव करे-जबकि वह एक अहंकार हो जाए। इसलिए ध्यान रहे, धर्म तुमको दोष का भाव नहीं देता। बल्कि वह तुम्हारा ही अहंकार होता है। धर्म इस भाव का शोषण करता है वह दूसरी बात है। हर पिता उसका शोषण करता है, वह भी दूसरी बात है। हर पिता अपने बेटे से कहता है, क्या कर रहे हो, पशुओं की तरह व्यवहार कर रहे हो? हंसो मत, चिल्लाओ मत, यह मत करो, वह मत करो, दूसरों के सामने यह मत करो। क्या कर रहे हो, पशुओं की तरह आचरण कर रहे हो। और यदि बच्चा सोचता है कि वह पशु है तो उसके अहंकार को चोट लगती है। अपने अहंकार को तृप्ति के लिए, वह अनुकरण करता है, वह भी पंक्ति में चलने लगता है। पशु होना बड़ा आनन्दपूर्ण है, क्योंकि तब स्वतंत्रता है - एक गहरी स्वतंत्रता - चलने की, करने की । परन्तु इगो को, अहंकार को यह पीड़ा देता है इसलिए चुनाव करना पड़ता है। यदि तुम स्वतंत्रता को चुनते हो तो तुम पशुओं की भांति हो जाओगे निन्दित । इस संसार में भी और उस संसार में भी तुम निन्दित हो जाओगे। समाज तुम्हें नर्क में फेंक देगा। इसलिए तुम्हें आदमी होना है, पशु की तरह नहीं होना। तभी अहंकार की तृप्ति होती है। तब कोई अहंकार के इर्दगिर्द जीने लगता है। वह वही करता है जो कि इगो-फुलफिलिंग है, अहंकार को मारने वाला है। परन्तु तुम प्रकृति को पूर्णतः झुठला नहीं सकते। वह तुम्हें प्रभावित करती रहेगी। तब कोई दो जीवन जीने लगता है, एक आदम के पूर्व को जिन्दगी, दूसरी आदम के बाद की जिन्दगी तब कोई दो जीवन जीने लगता-है, कोई दो मन के साथ, डबल माइंड के साथ जीने लगता है। तब एक चेहरा निर्मित होता है जो कि समाज को दिखाने के लिए होता है। एक निजी चेहरा होता है और एक सामाजिक चेहरा। परन्तु तुम अपने निजी चेहरे ही हो। और प्रत्येक मनुष्य आदम ही है - नग्न पशु की तरह परन्तु तुम उसे समाज को नहीं दिखा सकते। समाज को तुम आदम के बाद का चेहरा दिखलाते हो-साफ-सुथरा; हर एक बात समाज के अनुसार। जो कुछ भी तुम दूसरों को दिखाते हो वह वास्तविक नहीं होता, बल्कि अपेक्षित होता है जो है वह नहीं, जो होना चाहिए वह इसलिए हर मनुष्य को एक चेहरे से दूसरा चेहरा सतत बदलते रहना पड़ता है। निजी चेहरे से सामाजिक चेहरा बदलते रहना पड़ता हैं। यह एक बड़ा तनाव है। इससे बहुत उर्जा व्यय होती है। परन्तु मैं पशुओं की भांति हो जाने के लिए नहीं कह रहा हूं। वह अब तुम हो भी नहीं सकते। निषेधित फल वापस नहीं लौटाया जा सकता। तुमने उसे खा लिया है, वह तुम्हारी हड्डी और रक्त हो गया है। उसे फेंकने का कोई मार्ग भी नहीं, उसे वापस करने का भी कोई रास्ता नहीं कि हम परमात्मा के पास जाएं और कहें-मैं इसे वापस करता हूं- इस ज्ञान के निषेधित फल को। मुझे क्षमा करें। कोई रास्ता नहीं। वापस लौटने का कोई रास्ता नहीं। अब वह तुम्हारा रक्त बन गया है। हम वापस नहीं लौट झुकते। हम केवल आगे जा सकते हैं। वापस लौटना होता ही नहीं। हम ज्ञान के नीचे नहीं जा सकते। हम केवल ज्ञान के पार जा सकते हैं केवल एक मन की निर्दोषिता संभव है- संपूर्ण जागरूकता की निदोंषिता। दो तरह की निर्दोषितायें है - एक ज्ञान के नीचे की है- बच्चों को, आदम के पूर्व की, पशुओं जैसी। ज्ञान के नीचे तुम, तुम नहीं होते। अहंकार नहीं होता, वह उपद्रवी नहीं होता। तुम इस समग्र ब्रह्म के हिस्से होते हो। तुम नहीं जानते कि तुम उसके एक हिस्से हो, तुम किसी ब्रह्म को नहीं जानते। तुम कुछ भी नहीं जानते। तुम होते हो, बिना कुछ जानते हुए। सचमुच तब कोई दुख नहीं होता क्योंकि बिना ज्ञान के दुख असंभव है। दुख को भोगने के लिए भी किसी को सजग होना पड़ता है। तुम दुख को केसे भोगीगे, यदि तुम्हें उसका पता नहीं है । तुम्हारा ऑपरेशन किया जा रहा है। एक शल्य चिकित्सक तुम्हारा ऑपरेशन कर रहा है। यदि तुम होश में हो तो तुम्हें पीडा होगी। यदि तुम बेहोश हो तो तुम्हें पीड़ा नहीं होगी। पांव पूरा काट दिया गया है और फिर भी कोई पीड़ा नहीं है। पीड़ा का कुछ पता नहीं चलता है। तुम बेहोश हो, तुम बेहोशी में पीड़ा नहीं भोग सकते। तुम्हें पीड़ा होगी यदि तुम होश में हो । जितने अधिक सचेतन, उतनी ही अधिक पीड़ा होगी। इसीलिए जितना अधिक आदमी का ज्ञान बढ़ता है उतना ही वह अधिक पीड़ा को अनुभव करता है। पुराने आदिम लोग इतने दुखी अनुभव नहीं करते थे, जितने कि तुम करते हो। इसका कारण यह नहीं कि वे अच्छे लोग थे बल्कि इसलिए कि उन्हें पता ही नहीं था। आज भी, गांव के रहने वाले लोग आधुनिक जगत के हिस्से नहीं हुए है और वे एक सरल, निर्दोष ढंग से रहते हैं। वे इतने दुखी नहीं है। इसके कारण बहुत-सी भ्रांत धारणाएँ विचारकों के खयाल में आई है। रूसो या टॉल्सटॉय या गाँधीः वे सोचते है कि चूंकि गाँव के लोग ज्यादा आनन्दपूर्ण हैं, अच्छा होगा यदि सारा संसार ही पुनः आदिम युग में पहुँच जाए, वापस जंगल में लौट जाए, प्रकृति में वापस पहुँच जाए। परन्तु वे गलत हैं क्योंकि जो आदमी सभ्यता से भरे शहर में रह चुका उसे गाँवों में कष्ट होगा। उस भाँति कोई भी गाँव का आदमी दुःखी नहीं होगा। रूसो लगातार प्रकृति में वापस लौट जाने की बात करता चला जाता है और पेरिस में रहता जाता है। वह स्वयं गाँव में रहने नहीं जाएगा। वह गाँव के जीवन के संगीत की बात करता है, वहाँ के सौंदर्य की, वहाँ की सरलता की बात करता हैं परन्तु वह स्वयं गाँव नहीं जायेगा। और यदि वह वहाँ चला जाता है तो उसको इतना कष्ट होगा जितना कि किसी गाँव के रहने वाले को कभी नहीं होगा, क्योंकि यदि एक बार चेतना विकसित ही गई तो तुम उसे उतार नहीं सकते। वह "तुम" हो । वह कुछ ऐसी बात नहीं है जिसे कि तुम उतार सको, वह तुम्ही हो । केसे तुम स्वयं को उतार सकते हो? तुम्हारी चेतना ही तुम हो । आदम लज्जा से पीड़ित हुआ, उसे अपनी नग्नता का बोध हुआ; उसका कारण है अहंकार। अहंकार एक केन्द्र है। आदम ने एक केन्द्र को पा लिया। यद्यपि वह मिथ्या ही था, परन्तु फिर भी केन्द्र तो था। अब आदम सारी समष्टि से भिन्न था। वृक्ष थे, तारे ये, सब कुछ था परन्तु आदम अपने में एक द्वीप बना पीड़ित हो रहा था। अब उसका जीवन इसका ही था, न किनारे ब्रह्म का एक हिस्सा और जैसे ही तुम्हारी जिन्दगी तुम्हारी हो जाती है, संघर्ष का प्रवेश होता है। तुम्हें एक-एक इंच संघर्ष करना पड़ता है जीने के लिए, बचने के लिए। पशु संघर्षरत नहीं है। यद्यपि वे हमें अथवा डार्विन को संघर्षरत दिखाई पड़ते हैं, वे संघर्ष में नहीं है। वे डार्विन को लड़ते हुए दिखाई पड़ते हैं क्योंकि हम अपने ही विचार प्रक्षेपित करते रहते है। वे संघर्ष में नहीं हो सकते। वे हमें संघर्षरत दिखाई पड़ सकते हैं क्योंकि हमारे लिए सभी कुछ संघर्ष है। ऐसा दिखलाई पड़ सकता है कि वह संघर्ष में डूबे है, परन्तु वस्तुतः वे संघर्ष में नहीं डूबे हैं। वे तो इस समष्टि की एकता में बह रहे हैं। यहाँ तक कि यदि वे कुछ भी कर रहे हैं तो उसके पीछे भी कोई कर्ता नहीं है। वह एक प्राकृतिक घटना है। यदि एक शेर अपने किसी शिकार को खाने के लिए मार रहा है, तो उसके पीछे थी कोई कर्ता नहीं है, कोई हिंसा नहीं है। वह एक साधारण घटना है केवल भूख के लिए भोजन । वहाँ कोई भूखा नहीं है, पर सिर्फ भूख है। एक भोजन पाने को यांत्रिक व्यवस्था, न कि हिंसा । केवल आदमी हिंसक हो सकता है, क्योंकि केवल आदमी ही कर्ता हो सकता है। तुम बिना भूख के भी मार सकते हो, किन्तु एक शेर बिना भूख के कभी नहीं मार सकता। क्योंकि शेर में उसकी भूख किसी को मारती है, न कि शेर । एक शेर खेल में कभी नहीं मार सकता। शेर के लिए शिकार जैसा कोई खेल नहीं होता। वह सिर्फ मनुष्य के लिए ही होता है। तुम खेल में भी हत्या कर सकते हो- सिर्फ मजे के लिए। यदि शेर तृप्त हो गया है, तो फिर कोई हिंसा नहीं होगी, कोई खेल नहीं होगा। वह तो सिर्फ भूख की घटना है। वहाँ कोई करने वाला नहीं है। प्रकृति एक गहन वैधिक प्रवाह है। इस प्रवाह में आदम अपने प्रति जाग जाता है। और इसलिए सजग हो जाता है कि उसने ज्ञान के वृक्ष का निषेधित फल खा लिया था। ज्ञान निषिद्ध था। "ज्ञान के वृक्ष के फल मत खाता।" ऐसा आदेश था। आदम ने उसकी अवज्ञा की, और तब फिर वह वापस नहीं लौट सकता था। और बाइबिल कहती है कि आदम के विद्रोह के लिए सभी को दुःख उठाना पड़ेगा क्योंकि प्रत्येक आदमी एक तरह से पुनः आदम ही है। परन्तु तुम उसके लिए दुःख नहीं मानोगे। तुम उसके लिए दुख केसे मानोगे जो कि किसी और ने कभी किया हो? परन्तु यह इतिहास प्रति दिन सतत पुनः होता रहता है। हर बच्चे को ईडन के बाग से निष्कासित किया जाता है। प्रत्येक बच्चा आदम की तरह पैदा होता है, और तब उसे निकाल दिया जाता है। इसी कारण कवियों में, कलाकारों में, साहित्यिक लोगों में नोसल्जिया-अतीत के प्रति इतना लगाव होता हैं। इन सभी लोगों में जो कि व्यक्त कर सकने की युक्ति जुटा सकें। अतीत के प्रति भारी लगाव होता है। वे सोचते हैं कि बचपन एक सुनहरा युग था। प्रत्येक यह सोचता है कि बचपन बहुत सुन्दर था, स्वर्ग था, और हर एक बचपन में वापस लौटना चाहता है। यहाँ तक कि एक बूढ़ा भी जो मरण शैय्या पर पड़ा है, अपने बचपन के बारे में उसी तरह से सोचता है कि बचपन बड़ा सौन्दर्य से भरा था, आनन्द था, फूल थे, तितलियाँ थीं, परियों के सपने थे। प्रत्येक अपने बचपन में एक वण्डरलैण्ड में रहता है, खाली अलाइस ही नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चा ! यह छाया हमारे साथ-साथ चलती है। आखिर बचपन इतना सुन्दर, इतना आनन्दपूर्ण क्यों है? क्योंकि तुम तब समष्टि के बहाव के साथ एक होते हो, बिना किसी दायित्व के पूर्ण स्वतन्त्रता में, बिना किसी अन्तःकरण के, बिना किसी बोझ के। तुम इस तरह जिये-जैसे कुछ भी करने के लिए नहीं । तुम्हें कुछ भी तो नहीं करना था, बस जो जैसा था, स्वीकृत था। और तब अहंकार आता है, और तब आते हैं संघर्ष और द्वंद्व । तब हर बात एक दायित्व हो जाती है। और सारी स्वतन्त्रता नष्ट हो जाती है और हर क्षण एक बन्धन बन जाता है। मनौवैज्ञानिक कहते हैं कि धर्म इसी नोसल्जिया को, इसी बचपन को वापस लौट जाने की इच्छा को प्रतिबिम्बित करता है। और वे इससे भी आगे चले जाते हैं-वे कहते हैं कि अन्त में प्रत्येक की मनोकामना फिर से माँ के गर्भ में पहुँच जाने की होती है, क्योंकि जब तुम गर्भ में थे तो तुम इस समिष्ट के हिस्से थे। यह समष्टि ही तुम्हें भोजन दे रही थी। श्वास लेने की भी आवश्यकता न थी माँ ही तुम्हारे लिए श्वास ले रही थी। तुम्हें माँ की कोई खबर नहीं थी। तुम्हें अपना भी कुछ होश नहीं था। तुम बिना किसी होश के थे। गर्भ ही ईडन का बाग है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य आदम की भांति ही जन्म लेता है और प्रत्येक को ज्ञान का निषेधित फल खाना पड़ता है, क्योंकि जैसे-जैसे तुम बड़े होते हो तुम्हारा ज्ञान भी बढ़ता है। वह अनिवार्य है, वह होगा ही; अतः ऐसा नहीं है कि आदम ने विद्रोह किया हो । विद्रोह विकास का हिस्सा है। वह ओर कुछ भी नहीं कर सकता उसे फल खाना ही पडेगा। हर बच्चे को विद्रोह करना ही पड़ता है, फल खाना ही पड़ता है। हर बच्चे को विद्रोही होना ही पड़ता है। जिन्दगी की ज़रूरत है। उसे माँ से दूर जाना ही पडेगा, पिता से अलग होना ही पड़ेगा। वह उसकी कामना करेगा, स्वप्न देखेगा। परन्तु फिर भी दूर जायेगा। यह एक अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसे टाला नहीं जा सकता। पूछा गया है कि इस भाव के पीछे क्या गहरा अर्थ छिपा है? यही अर्थ हैं कि ज्ञान अहंकार प्रदान करता है, अहंकार तुममें तुलना को, निष्कर्ष को, व्यक्तित्व को पैदा करता है। तुम अपने को पशु नहीं मान सकते। मनुष्य ने इस तथ्य को छिपाने के लिए कि वह "पशु है, सभी कुछ किया है। हम पशु हैं, इसे छिपाने के लिए हम हर रोज़ कुछ-न-कुछ कर रहे हैं। परन्तु हम पशु हैं, और इस तथ्य को छिपाने से तथ्य नष्ट नहीं हो जाता। बल्कि यह एक विकृत तथ्य हो जाता है। इसलिए जब यह ढंका हुआ तथ्य प्रकट होता है, तब आदमी और भी अधिक पशु साबित होता है। यदि तुम हिंसक होते हो, तो कोई भी पशु तुमसे प्रतियोगिता नहीं कर सकता। कैसे कर सकता है? किसी पशु ने कभी किसी हिरोशिमा, किसी वियतनाम को नहीं जाना । केवल मनुष्य ही हिरोशिमा को पैदा कर सकता है उसकी कोई तुलना नहीं है सारे इतिहास में पशु सिर्फ कठपुतलियों से खेल रहे हैं- हिरोशिमा की तुलना में उनकी हिंसा ना-कुछ है। यह इकट्ठी कर ली गयी हिंसा है- छिपी हुई, एकत्रित। हम छिपाते चले जाते हैं और वह जितनी इकट्ठी कर लेते है, इतनी ही हमें लज्जा लगती है, क्योंकि हम जानते हैं कि भीतर क्या छिपा है। हम उससे बच नहीं सकते। एक मनोवैज्ञानिक छिपे हुए तथ्यों के बारे में प्रयोग कर रहा था, जिन्हें कि तुम कितना ही चाहो छिपा नहीं सकते। उदाहरण के लिए, यदि कोई कहे कि वह स्त्रियों के प्रति आकर्षित नहीं होता, तो वह उसका अभ्यास कर सकता है और वह स्वयं को व दूसरों को भरोसा भी दिला सकता है कि वह आकर्षित नहीं होता। परन्तु आदम तो ईंव के प्रति आकर्षित होगा ही, ईव आदम की ओर आकर्षित होगी हो । वह मनुष्य की प्रकृति का हिस्सा है, जब तक कि कोई पार नहीं चला जाये, जब तक कि कोई बुद्ध न हो जाए। किन्तु तब बुद्ध नहीं कहते कि मैं स्त्रियों के प्रति आकर्षित नहीं होता, क्योंकि ऐसा कहने के लिए भी तुम्हें आकर्षण और विकर्षण की भाषा में सोचना पड़ता है। वे नहीं कहेंगे कि मैं स्त्रियों से विकर्षित होता हूँ, क्योंकि जब तक कोई आकर्षित नहीं होता, कोई विकर्षित भी नहीं होता। यदि तुम उनसे पूछो, तो वे इतना ही कहेंगे कि स्त्रियाँ व पुरुष दोनों ही मेरे लिए असंगत हैं। मैं दोनों ही नहीं हूँ। यदि मैं पुरुष हूँ तो स्त्री कहीं-न-कहीं छिपी होगी। यदि में स्त्री हूँ तो पुरुष कहीं-न-कहीं छिपा होगा एक मनोवैज्ञानिक ने अभी एक आदमी पर प्रयोग किया जो कि कहता था- मैं स्त्रियों से प्रभावित नहीं होता। और वह नहीं होता था, जहाँ तक ऊपरी बातों का संबंध है। उसे कभी किसी के प्रति आकर्षित होते नहीं देखा गया। तब इस मनोवैज्ञानिक ने उसे तस्वीरें दिखाईं-दस तस्वीरें अलग-अलग चीजों की । केवल एक तस्वीर उसमें एक नग्न स्त्री की थी। मनोवैज्ञानिक यह नहीं देख रहा था कि वह आदमी कौन-सी तस्वीर देख रहा है। वह तो उसकी आँखें देख रहा था। तस्वीर का उलटा हिस्सा मनोवैज्ञानिक की तरफ था। वह उस आदमी को तस्वारें दिखाता था और उसकी आँखों में देखता था। उसने कहा कि यदि तुम आकर्षित नहीं होते, तो मुझे पता चल जाएगा। अन्यथा केवल तुम्हारी आँखें देखकर मैं तुम्हें बता दूंगा कि कब तुम नग्न स्त्री की तस्वीर देख रहे हो। मैं तस्वीर नहीं देख रहा हूँ। तस्वीरें दिखलाई गई और इस बार मनस्विद कहता है कि अब तुम नग्न स्त्री को तस्वीर देख रहे हो, क्योंकि जिस क्षण भी नग्न चित्र सामने होगा, आँखें फैल जायेंगी-और वह अनैच्छिक कृत्य हैं। तुम उस पर काबू नहीं कर सकते तुम कुछ भी नहीं कर सकते। यह एक रिफलेक्स-ऐक्शन है। आँखें जैविक रूप से वैसी बनी हैं। वह आदमी कहता है कि मैं आकर्षित नहीं होता, परन्तु वह केवल चेतन मन है। अचेतन तो हर बार आकर्षित होता है। जब तुम किसी तथ्य को छिपाते हो तो वे तुम्हें प्रेरित करते ही चले जाते हैं और तुम ज्यादा-और ज्यादा लज्जा का अनुभव करते हो। जितनी ऊँची सभ्यता और संस्कृति होगी, उतने ही अधिक लोग ज्यादा लज्जित अनुभव करेंगे। जितने तुम यौन के प्रति लज्जित होते हो उतने ही तुम अधिक सभ्य होते हो। पर तब सभ्य आदमी विक्षिप्त होकर रहेगा ही-खण्डित, विभाजित होगा ही। यह विभाजन शुरू हुआ आदम के साथा और दूसरी बात पूछी गई है कि ज्ञान का निषेधित फल यौन का ही फल है। आपका इस बारे में क्या दृष्टिकोण है? सचमुच, ऐसा ही है। परन्तु इतना ही नहीं है। यौन पहला ज्ञान है, और यौन ही अन्तिम ज्ञान है। जब तुम मनुष्यता में प्रवेश करते हो, तो पहली चीज़ जो कि तुम अनुभव करते हो, और सजग होते हो वह है यौन; और आखिरी चीज़ जबकि तुम मनुष्यता के पार जाते हो, तब भी यौन ही होती है- पहली और अन्तिम। क्योंकि सेक्स बहुत बुनियादी है, वह प्रथम बार होगी ही। वह अल्फा और वही ओमेगा है। एक बच्चा सिर्फ बच्चा ही है, जब तक कि वह काम की दृष्टि से परिपक्व नहीं हो जाता। जैसे ही वह काम की दृष्टि से परिपक्व हो जाता है, वह आदमी हो जाता है। काम परिपक्वता के साथ ही सारा संसार भिन्न हो जाता है। वह संसार फिर वही नहीं रह जाता, क्योंकि तब तुम्हारा दृष्टिकोण, तुम्हारी पकड़, तुम्हारा चीजों को देखने का सारा ढंग ही बदल जाता है। जब तुम स्त्री के प्रति सजग होते हो, तुम आदमी होने लगते हो। वस्तुतः पुरानी बाइबिल की पुस्तक में, "नोलेज" शब्द का हिब्रू भाषा में यौन के अर्थ में ही प्रयोग किया गया है। उदाहारण के लिए ऐसे वचन हैँ कि "वह दो वर्षों तक अपनी पत्नी के पास नहीं जाता"। "ही डू नॉट "नो" हिज वाइफ फॉर टू इयर्स"। इसका अर्थ है कि दो वर्षों तक उनमें कोई यौन सम्बन्ध नहीं थे। उसने अपनी पत्नी को पहली बार उस दिन जाना- हि "न्यू" हिज वाइफ फॉर दि फर्स्ट टाइम ऑन दैट डे। इसका अर्थ होता है कि पहली बार यौन संबंध हुआ। "नोलेज" का हिब्रू भाषा में अर्थ हैं सैक्स। नोलेज यौन का ज्ञान। इसलिए यह सही बात है कि आदम और ईव वह विशेष फल खाने के बाद ही सेक्स से परिचित हुए। यौन-सेक्स सर्वाधिक आधारभूत बात है। बिना यौन के जीवन नहीं हो सकता। जीवन प्रकट होता है-सेक्स के कारण ही और सेक्स के कारण ही खो भी जाता हैं। इसीलिए बुद्ध और महाबीर कहते हैं कि जब तक तुम यौन के पार नहीं चले जाते तुम बार-बार जन्मते रहोगे। तुम जीवन के पार नहीं जा सकते क्योंकि भीतर अगर कामवासना है, तो तुम फिर से जन्म ले लोगे। अतः सेक्स किसी अन्य को पैदा करने के लिए नहीं है, अन्ततः यह तुमको भी जन्म देता है। यह दोहरा काम करता है। तुम काम के द्वारा किसी और को जन्म देते हो, किन्तु वह इतना महत्त्वपूर्ण नहीं है। तुम्हारी काम वासना के कारण ही तुम्हारा फिर जन्म होता है। तुम अपने को ही बारबार जन्म देते रहते ही। आदम अपने काम के प्रति सजग हो गया, वह पहली सजगता थी। परन्तु यह काम सिर्फ प्रारंभ था। उसके बाद शेष सब पीछे-पीछे आयेगा। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि प्रत्येक जिज्ञासा एक तरह से यौन-संबन्धी है इसलिए यदि कोई आदमी नपुंसक पैदा हो, तो उसे कोई जिज्ञासा नहीं होती- सत्य के लिए भी नहीं। क्योंकि जिज्ञासा बुनियादी रूप से सेक्सुअल ही होती है किसी छिपी चीज को खोजना, किसी अनजानी बात को जानना, अज्ञात को जानना-काम-संबंधी बात ही है। बच्चे एक दूसरे के साथ खेल खेलते हैं कि एक दूसरे के विभिन्न अंगों को जानें। यह जिज्ञासा की शुरुआत है, और सारे विज्ञान का प्रारंभ है- जो छिपा है उसे खोजना, जिसका पता नहीं है-उसे जानना। वास्तव में, जितना कोई व्यक्ति कामुक होता है, उतना ही अधिक आविष्कारक हो सकता है। जितना अधिक कोई व्यक्ति कामुक होता है उतना ही बुद्धिमान होता है। कम काम-ऊर्जा के साथ कम बुद्धि होती है; क्योंकि यौन एक गहरा तथ्य है जिसे कि उघाड़ना है - केवल शरीर में ही नहीं, केवल विपरीत लिंगी-शरीर में ही नहीं-बल्कि सभी छिपी हुई वस्तुओं में । अतः यदि समाज बहुत अधिक सेक्स की निन्दा से भरा है तो वह कभी भी वैज्ञानिक नहीं हो सकता, क्योंकि तब वह जिज्ञासा को ही निन्दित कर देता है। पूरब वैज्ञानिक नहीं हो सका क्योंकि वह यौन के प्रति अत्याधिक विरोध से भरा था। और पश्चिम भी वैज्ञानिक नहीं हो पाता यदि ईसाईयत की पकड़ उस पर बनी रहती। यह केवल तभी संभव हो सका जब कि वेटीकन विलीन-सा होने लगा, जबकि रोम अधिक महत्त्वपूर्ण न रहा। केवल इन तीन सौ सालों में ही पश्चिम वैज्ञानिक हो सका, जबकि ईसाईयत का महल धूल-धूसरित हो गया और विलीन हो गया। काम-ऊर्जा के मुवत होने से ही अनुसंधान का द्वार खुल गया। यौन की दृष्टि से मुक्त एक समाज वैज्ञानिक होगा औरयौन को निषेध करने वाला एक समाज गैरवैज्ञानिक होगा। सेक्स के साथ ही हर चीज़ जीवन्त होने लगती है। यदि तुम्हारा बच्चा, जबकि वह परिपक्व होने लगता है, यौन की दृष्टि से परिपक्व, तो वह विद्रोही होने लगता है। तब उसे भूल जाओ। वह बहुत प्राकृतिक बात है। उसको नसों में नई ऊर्जा के आने से, एक नये जीवन के प्रादुर्भाव की वजह से वह विद्रोही होगा ही। वह विद्रोह सिर्फ एक हिस्सा है। वह अवश्यमेव अविष्कारक होगा। वह नई चीजों की खोज करेगा, नये मार्गों की, नये ढंगों की, जीवन के नये तरीकों की, नये समाज की। वह नये सपने देखेगा, वह नये जगत के बारे में सोचेगा। यदि तुम सेक्स को निन्दित कर देते हो, तब फिर युवकों में कोई विद्रोह नहीं होगा। सारे संसार में युवकों का विद्रोह यौन स्वतन्त्रता का ही एक हिस्सा है। पुरानी सभ्यता में कोई विद्रोह नहीं थो । चूंकि काम की इतनी अधिक निदा की गई थी कि ऊर्जा बुरी तरह दब गई। उस ऊर्जा के दमन के साथ ही हर तरह का विद्रोह भी दब गया। यदि तुम काम-ऊर्जा को स्वतन्त्रता देते हो, तो फिर सब प्रकार का विद्रोह होगा, सारा विद्रोह सामने आयेगा। ज्ञान का यौन संबंधी आयाम भी होता है। इसलिए एक तरह से यह बात सही है कि आदम यौन के प्रति सजग हो गया-यौन के आयाम के प्रति । किन्तु उस आयाम के साथ हौ वह दूसरी भी बहुत-सी चीजों के प्रति सजग हो गया यह ज्ञान का सारा फैलाव, यह ज्ञान का विस्फोट, यह अज्ञात की खोज, यह चन्द्रमा तथा दूसरे नक्षत्रों को यात्रा यह सब सेक्स की, काम की प्यास है। और यह ज्ञान की खोज और और दूरी तक होगी, क्योंकि एक नईं ऊर्जा का प्रादुर्भाव हुआ हैं। और अब यह ऊर्जा नये रूप लेगी तो नये साहस के काम करेगी। यौन व यौन की सजगता के साथ, आदम एक लम्बी यात्रा पर निकल गया। हम सभी उस पर हैं, प्रत्येक उस यात्रा पर है। क्योंकि यौन केवल तुम्हारे शरीर का ही हिस्सा नहीं है। वही तुम हो। तुम यौन से ही पैदा होते हो, और यौन के नष्ट हो जाने पर तुम नष्ट हो जाते हो। तुम्हारा जन्म भी यौन का जन्म है और तुम्हारी मृत्यु ही यौन की मृत्यु है। इसलिए जैसे ही तुम्हें लगे कि काम-ऊर्जा समाप्त हो गई, जानें कि मृत्यु निकट है। पैंतीस वर्ष शिखर के वर्ष हैं। काम-ऊर्जा शिखर पर होती है, और उसके बाद हर चीज़ नीचे की और जा रही है और व्यक्ति बूढा होने लगता है-मृत्यु की राह पर सत्तर या उसके करीब मृत्यु की उम्र है। यदि पचास की उम्र पर काम-ऊजां शिखर पर होगी तो व्यक्ति की सामान्य आयु सौ वर्ष हो जायगी। पश्चिम जल्दी ही औसत सौ वर्ष को उम्र प्राप्त कर लेगा, क्योंकि पचास साल का आदमी भी अब लड़कों की तरह व्यवहार करता है। यह अच्छा है। इससे पता चलता है कि समाज जिन्दा है। यह इस बात को बतलाता है कि जिन्दगी लम्बी ही गई है। यदि सौ-साल का आदमी लड़कों की तरह व्यवहार करने लगे तो जिन्दगी दो सौ वर्ष की हो जायेगी, क्योंकि काम-ऊर्जा ही आघारभूत ऊर्जा है। काम-ऊर्जा के कारण ही तुम युवा हो, और काम-ऊर्जा के कारण ही तुम बूढे हो जाओगे। सेक्स के कारण ही तुम पैदा होते हो, और सेक्स के कारण ही तुम मर जाओगे। और इतना ही नहीं, बुद्ध, महावीर और कृष्ण कहते हैं किं कामवासना के कारण ही तुम फिर से पैदा होते हो। यह शरीर तो तुम्हारा काम से चलता ही है, बल्कि तुम्हारे सारे शरीर भी लगतार कामवासना से संचालित हैं। सचमुच जब आदम पहली बार सचेत हुआ तो वह काम के प्रति ही सजग हुआ। यह एक बहुत बुनियादी तथ्य है। परन्तु ईसाईयत ने इसे गलत ही अर्थ दे दिया और तब बहुत नासमझी की बातें उसके पीछे आईं। ऐसा कहा गया कि चूँकि आदम सेक्स के प्रति सजग हो गया और उसे लज्जा अनुभव हुई इसलिए सेक्स बुरा है और पाप है- ओरिजनल सिन - प्रथम बुनियादी पाप- ऐसा नहीं है। यह ओरिजनल लाइट है- प्रथम प्रकाश है। वह इसलिए नहीं लज्जित हुआ कि यौन बुरा है, बल्कि इसलिए कि उसने देखा कि यौन तो पशुता का हिस्सा है और उसने सोचा कि मैं पशु नहीं हूं। इसलिए यौन से लड़ना पड़ेगा। उसे काटकर फेंकना पड़ेगा। किसी भी तरह काम रहित होना पड़ेगा। यह गलत अर्थ है। यह ईसाईयों द्वारा कहानी को गलत अर्थ देना है। अतः काम से लड़ो। धर्म काम के खिलाफ एक युद्ध हो गया। यदि धर्म काम के विरोध में युद्ध है तो फिर धर्म जीवन के खिलाफ भी एक युद्ध हो गया। वस्तुतः धर्म काम के खिलाफ युद्ध नहीं है, वह सिर्फ एक प्रयास है- काम के पार जाने का, खिलाफत में नहीं। यदि तुम विरुद्ध हो गये तो तुम उसी तल पर रहोगे। तब तुम कभी पार नहीं जा सकोगे। इसलिए ईसाई सन्त और रहस्यवादी मृत्यु - शैय्या पर पहुँचने तक सैक्स के खिलाफ ही लड़ते रहते हैं। तब आकर्षण पैदा होता है, और हर क्षण वे आकर्षित होते हैं। वहाँ उन्हें आकर्षित करने के लिए कोई भी नहीं है। उनका अपना दमन ही उनके आकर्षण का निर्माता होता है। वे अपने अन्तर्मन में सतत अपने से ही लड़ते हुए एक बहुत ही कष्टप्रद जीवन बिताते रहे हैं। धर्मं पार जाने के लिए है, न कि लड़ने के लिए। यदि तुम्हें पार जाना है तो तुम्हें सेक्स के पार जाना होगा। अतः काम-ऊर्जा को अतिक्रमण करने के लिए प्रयोग में लाना पड़ेगा। तुम्हें उसके साथ चलना है न कि उससे लड़ना है। तुम्हें उसे अधिकाधिक जानना है। अज्ञान में रहना अब असंभव है। तुम्हें उसे और अधिक समझना है। ज्ञान ही मुक्ति है । यदि तुम उसे जानते ही चले जाओ, जानते ही चले जाओ - अधिकाधिक तो एक घड़ी आती है जब तुम समग्र रूप से सजग ही जाते हो और तब काम विलीन हो जाता है। अब उसी ऊर्जा का तुम्हारे पास एक भिन्न ही आयाम होता है। काम समतल होता है। जब तुम पूर्ण सजग हो जाते हो, तो काम ऊर्ध्व हो जाता है, लम्ब की भांति होता है। और वे सेक्स की ऊपर की ओर गति ही कुण्डलिनी है। यदि सेक्स समतल रेखा में चले तो तुम दूसरों को और अपने को उत्पन्न करते चले जाते हो। यदि ऊर्जा ऊपर की और लम्ब को भाँति गति करती है तो तुम उसके बाहर हो जाते हो-अस्तित्व के चक्र के बाहर जैसा कि बौद्ध कहते है कि जीवन के चक्र के बाहर यह एक नया जन्म होगा-नये शरीर में नहीं, बल्कि अस्तित्त्व के नये ही आयाम में। इसे बौद्धों ने निर्वाण कहा है। तुम उसे मोक्ष भी कह सकते हो अथवा जो भी तुम कहना चाहो कह सकते हो। नाम का कोई अर्थ नहीं है। इसलिए दो मार्ग हैं। आदम अपने काम के प्रति सजग हो गया। अब वह उसे दबा सकता था। वह समतल रेखा में गति कर सकता था उससे सतत लड़ते हुए संताप से भरा और जानता रहता कि पशु भीतर छिपा है। और सदैव यह बहाना करता रहता कि वह वहाँ नहीं है। यही पीड़ा है। और कोई चाहे तो जन्मों समतल रेखा में चलता रह सकता हैं-बिना कहीं भी पहुँचे, क्योंकि वह घूमता हुआ चक्र है। इसीलिए हम उसे चा-चक्र कहते हैएक घुमता हुआ चक्र । तुम चाहो तो इस चक्र से बाहर छलाँग लगा सकते हो। दमन से वह छलांग नहीं लगेगी, वह अधिकाधिक ज्ञान से ही संभव होगी। अतः मैं कहूँगा कि तुमने निषेधित वृक्ष का फल तो खा लिया है, अब पूरा वृक्ष ही खा जाओ। वही केवल एक मात्र मार्ग है। अब वृक्ष ही खा जाओ। एक पत्ता भी पीछे न बचे। पीछे वृक्ष मचे ही नहीं, उसे पूरा ही खा जाओ। तभी केवल तुम ज्ञान से मुक्त हो पाओगे उसके पहले कभी भी नहीं । और जब मैं कहता हूँ कि पूरा वृक्ष ही खा जाओ, तो मेरा मतलब होता हैं कि अब तुम जब जान ही गये हो, तो पूरा ही जान लो । खण्डित, टूटी-फूटी सजगता ही समस्या है। या तो पूर्णतः अनजान रहो अथवा पूरी तरह सजग हो जाओ। समग्रता ही आनन्द है। पूरी तरह अज्ञानी हो जाओ। तब भी तुम आनन्द में होते हो। तुम्हें उसका पता नहीं होता, परन्तु तुम आनन्द में होगे। जैसे कि तुम जब पूरी तरह नींद में डूबे हो, कोई सपना भी नहीं चल रहा है, पर केवल नींद में डूबे हो, मस्तिष्क की कोई गति भी नहीं है, तो तुम आनन्द में हो, परन्तु तुम उसे अनुभव नहीं कर सकते । तुम सवेरे इतना ही कह सकते हो कि रात्रि नींद बडी मधुर थी। परन्तु तब उसका कोई फ्ता नहीं था, जब कि वह थी उसका अनुभव तब हुआ जबकि तुम उसमें से बाहर आ गये। जब ज्ञान प्रवेश करता हैं, सजगता आती है। तब तुम कह सकते हो कि रात्रि बडी आनन्दपूर्ण थी। या तो पूर्णरूप से अज्ञानी हो जायें, जो कि असंभव है, अथवा समग्र रूप से जान लें। समग्रता के साथ ही आनन्द होता है। समग्रता ही आनन्द है। अतः फल को खा लें जड़ के साथ और जाग जाये। एक जागे हुए पुरुष का यही अर्थ होता है, एक बुद्ध का, एक ज्ञान को उपलब्ध व्यक्ति का यही अर्थ होता है कि उसने पूरा वृक्ष को खा लिया। अब कोई सजग होने को भी पीछे नहीं बचा, मात्र एक साधारण जागरूकता ही बची। यह मात्र सजगता-जागरूकता ही ईडन के जाग में पुनः प्रवेश है। तुम दोबारा से वही पुराना रास्ता नहीं खोज सकते, यह तो हमेशा के लिए खो गया । परन्तु तुम एक नया मार्ग खोज सकते हो, तुम फिर से प्रवेश कर सकते हो। और वास्तव मेँ जो कुछ भी शैतान ने आदम को वादा किया था पूरा हो जायेगा, तुम दिव्यस्वरूप हो जाओगे। वह एक तरह से सही है। यदि तुम ज्ञान का फल खा लेते हो तो देवताओं के समान ही जाओगे। हम हमारी वर्तमान मनःस्थिति में इस बात को नहीं समझ सकते, क्योंकि हम नर्क में पड़े हैं। हम बीच में लटके हैं दो चीजों के, सदैव बंटे हुए पीड़ा में, संताप में। ऐसा लगता है कि शैतान ने हमें धोखा दिया आदम को धोखा दिया यह समग्र बात नहीं है, इतिहास अभी अधूरा है। तुम उसे पूरा कर सकते हो, और तभी केवल तुम यह कह सकते हो कि जो कुछ शैतान ने कहा था, यह सही था या गलत । सारे वृक्ष को ही खा जायें और तुम देवताओं के जैसे हो जाओगे एक व्यक्ति जो कि पूर्णतः जागरूक हो गया वही दिव्य हो गया। वह अब मानव नहीं है। मानवता तो एक प्रकार का रोग है मेरा मतलब है, एक डिजीज, एक बेचौनी, एक सतत तनाव। या तो पशु जैसे हो जाओ और तुम स्वस्थ हो जाओगे. अथवा देवतास्वरूप हो जाओ और तब भी तुम स्वस्थ हो जाओगे-स्वस्थ, क्योंकि तुम समग्र हो गये, एक समग्रता ही हो गये। अंग्रेजी का शब्द "होली" बड़ा अच्छा है। इसका मतलब सिर्फ पवित्र ही नहीं होता । वस्तुतः इसका अर्थ होता है-"होल"-समग्र। और जब तक तुम समग्र नहीं हो जाते, तुम "होली" पत्रित्र नहीं हो सकते। और केवल दो ही प्रकार की समग्रताएँ हैं- एक पशुओं जैसी और दूसरी है देवताओं के समान। भगवान, आपने कहा कि जागरूकता, अवेरयनेस व केन्दोकरण से सघनता निर्मित होती हैं, लेकिन मुझे तो लगता हैं कि जागरूकता मेरे भीतर एक गहरी शून्यता का भाव पैदा करती है। कृपया, केन्दीकरण व आंतरिक शून्यता के संबंध को समझायें। जैसा मनुष्य है, वह बिना किसी केन्द्र के है - बिना एक वास्तविक, एक प्रामाणिक केन्द्र के। यूँ कहने के लिए केन्द्र है उसके पास, किन्तु वह एक झूठा केन्द्र है। वह केवल सोचता है कि उसके पास केन्द्र है। अहंकार एक झूठा केन्द्र है। तुम्हें प्रतीत होता है कि वह है, परन्तु वह है नहीं। यदि तुम उसे खोजने जाओ, तो तुम उसे कहीं भी नहीं खोज सकोगे। बुद्ध के ग्यारह सौ वर्षों बाद बोधिधर्म चीन गया। वह स्वयं भी बुद्ध हो गया था। वहाँ का सम्राट बू स्वयं उसके स्वागत के लिए आया । जब वहाँ कोई नहीं था, तो उसने बोधिधर्म से पूछा- "मैं बहुत अधिक परेशान हूँ। मेरा मन कभी शान्त नहीं रहता। मुझे बतायें कि मैं क्या करूँ? मेरा मन शान्त कर दें। उसे बेचौनी से मुक्त कर दें। मैं एक गहरे द्वन्द्ध में पड़ा हूँ। भीतर सदैव संघर्ष चलता रहता है। अतः कुछ करें।" बोधिधर्म ने कहा, "मैं अवश्य कुछ करूँगा। तुम कल सवेरे चार बजे आ जाना, लेकिन अपने स्वयं को साथ लाना-स्मरण रखना।" सम्राट ने सोचा कि या तो यह आदमी पागल है अथवा मैं इसकी बात नहीं समझ पाया। उसने कहा कि हाँ, मैं अवश्य आऊँगा। मैं अपने स्वयं के सहित ही आऊँगा। बोधिधर्म ने फिर से जोर देकर कहा कि देखो, भूलना मत। अपने स्वयं को भी साथ लाना, अन्यथा मैं शान्त किसे करूँगा? सारी रात सम्राट सो भी नहीं सका। वह बात ही कुछ ऐसी अजीब थी बिल्कुल विचित्र बात लगती थी। इस आदमी का मतलब क्या है। और तब सम्राट सोच में पड़ गया कि इस आदमी से मिलने जाये या नहीं, और वह भी सवेरे इतनी जल्दी - चार बजे ही । और बोधिधर्म ने अकेले ही बुलाया था - "तुम्हारे साथ तुम अकेले ही आना, दूसरा कोई और नहीं।" अतः कोई नहीं कह सकता था कि वह क्या करने चाला था। और फिर वह आदमी पागल भी दिखलाईं पड़ता था। मामला खतरनाक लगता था। किन्तु, फिर भी उसको आकर्षण पैदा हुआ। यह अरदमी कुछ भिन्न प्रकार का था। वह खींचता था। वह चुम्बकीय था। इसलिए सम्राट महल में रुक नहीं सका और वह आया। जब वह निकट आया तो बोधिधर्म ने उससे कहा - "आ गये तुम । परन्तु तुम्हारा स्वयं कहाँ है. तुम्हारा मैं कहाँ है? बू ने कहा "तुम तो मुझे पागल किये दे रहे हो। मैं सारी रात नहीं सो सका। तुम्हारा मेरे स्वयं रो मतलब क्या है? मैं यहाँ मौजूद।" अतः बोधिधर्म ने कहा-"तुम्हारा स्वयं बता दो। मैं उसे शान्त कर दूंगा, विश्राम में पहुँचा दूँगा। अपनी आंखें बन्द करो और खोजो कि वह कहाँ है। उसे मुझे बता दो और मैं उसे पूरी तरह गायब कर दूँगा. और फिर दोबारा कोई समस्या नहीं होगी।" अतः सम्राट बू ने बन्द कर लीं और बोधिधर्म के सामने बैठ गया सुबह बिल्कुल शान्ति थी । वहाँ कोई भी नहीं था। उसे अपनी श्वास की आवाज भी सुनाई दे रही धो, उसे अपनी हृदय की धड़कन भी सुनाईं पड़ रही थी। और बोधिधर्म वहाँ सामने ही बैठा उसे बार-बार कह रहा था-"भीतर चले जाओ और खोजों कि वह कहाँ है । और यदि तुम उसे नहीं खोज सकते तो फिर में क्या कर सकता हूँ?" और वह खोजता रहा, ढूंढता रहा भीतरघंटों तक। उसके बाद उसने अपनी आँखें खोली और तब वह दूसरा ही आदमी हो चुका था। उसने कहा-"मुझे वह कहीं भी नहीं मिलता । भीतर सब कुछ शून्य कोई स्वयं कोई "मैं" नहीं हैं।" "बोधिधर्म ने कहा-"यदि भीतर कोई "मैं" नहीं है और केवल शून्य ही तब भी क्या तुम्हें बेचौनी हो रही है? क्या भीतर कोई अशान्ति हैं? अब वह पीड़ा कहाँ है जिसकी कि तुम बात कर रहे थे? तुम उसकी इतनी चर्चा कर रहे थे, अब वह कहाँ है?" बू ने जबाब दिया वह अब कहीं भी नहीं है, क्योंकि वह आदमी ही चला गया, . फिर बिना उसके अशान्ति कैसे हो सकती है? मैंने उसे खोजने की बहुत कोशिश की परन्तु उसका तो पता नहीं चलता। मैं भी धोखे में था। मैं तो सोचता था कि भीतर। मैंने उसे ढूंढा परन्तु वह तो कहीं भी नहीं है। केवल शून्य है - एक रिक्तता, एक खालीपन अतः बोधिधर्म ने कहां अब तुम घर जाओ। और जब कभी तुम्हें ऐसा लगे कि तुम्हें अपने साथ कुछ करने की जरूरत है, तो पहले उसे खोजना कि वह कहाँ है । " यह एक झूठा अस्तित्व है। चूंकि हमने कभी उसे खोजा नहीं इसलिए हमें लगता है कि वह है। हम कभी भीतर नहीं गये है, इसलिए हम केवल "मैं" की बात करते रहते हैं। वह कहीं भी नहीं हैं। इसलिए पहली बात जो कि समझ लेनी है वह यह है कि यदि तुम ध्यान में जाओगे, यदि तुम शान्त होओगे, तो तुम्हें शून्य का अनुभव होगा, क्योंकि तुम अहंकार को नहीं खोज सकते। तब अहंकार के ही साथ कमरे में फर्नीचर भी था, अब फर्नीचर खो गया। तुम केवल एक कमरे हो-बल्कि एक कमरापन। यहाँ तक कि दीवारें भी विलीन हो गई। वे भी तुम्हारे अहंकार का ही हिस्सा थीं। सारा ढाँचा ही गिर गया, इसलिए तुम्हें शून्य का अनुभवं होगा। यह पहला चरण है जब कि अहंकार विलीन हो जाता है। अहंकार एक झूठी बात है, वह है नहीं। सिर्फ लगता है कि वह है, और तुम सोचते चले जाते हो कि वह है। वह सिर्फ तुम्हारे विचार का हिस्सा है न कि तुम्हारे "होने" का वह तुम्हारे मन से संबंधित है, न कि तुम्हारे अस्तित्व से । चूँकि तुम सोचते हो वह वहाँ है, इसलिए वह है। जब तुम उसे खोजने जाते हो तो वह कभी भी नहीं मिलता। तब तुम्हें शून्यता का अनुभव होता है, रिक्तता का। अब इस रिक्तता पर जोर दो, अब इस शून्य में रहो। मन बड़ा चालाक है। वह खेल खेल सकता है। यदि तुम सोचना शुरू कर दो कि वह शून्य है, यदि तुम सोचने लगो कि यह शून्यता है तो तुमने उसे फिर भर दिया। यदि तुम इतना-सा ही कहो कि "यह शून्य है" तो भी तुम उसके बाहर हो गये-उसके बाहर जा चुके। शून्य खो गया। तुम बीच में आ गये। इस शून्यता में ही रहो। शून्य ही हो जाओ। विचार न करो। यह बहुत कठिन है, बड़ा भयानक है। उसमें सिर चकराने लगता है। वह एक बड़ा खड्ड है, एक अनन्त खड्ड तुम नीचे, और नीचे गिरते ही चले जाते हो और नीचे की पेंदी कहीं नहीं आती एैसे में कोई होश खोने लगता है और वह सोचने लगता है। जैसे ही तुम सोचने लगे, तुमने फिर से जमीन पकड़ ली। अब तुम शून्य में नहीं हो । यदि तुम इस शून्य में रह सको बिना भागे, बिना कुछ विचारे, तो अचानक वैसे ही यह शून्य थी विलीन हो जाएगा-जैसे अहंकार खो गया था वैसे, क्योंकि अहंकार के कारण ही शून्य प्रतीत होता है। अहंकार ही उसे भर रहा था। वही फर्नीचर था, और तब कोई शून्य नहीं था। अब अहंकार विलीन हो गया है। इसलिए तुम्हें शून्य की प्रतीति हो रही है। यह शून्य की प्रतीति इसलिए होती है, क्योंकि जो सदैव वहाँ था, अब वह वहाँ नहीं है। अगर इस कुर्सी पर बैठे तुम मुझे देख रहे हो, तब अचानक यदि तुम मुझे इस कुर्सी पर न पाओ तो कुर्सी तुम्हें खाली लगेंगी-इसलिए नहीं कि कुर्सी खाली है, बल्कि इसलिए कि कोई यहाँ बैठा था और अब वह वहाँ नहीं है। इसलिए तुम्हें शून्य दिखाई पढ़ता है, न कि कुर्सी । तुम्हें शून्य मालूम होता है, किसी की अनुपस्थिति तुम्हें एक रिक्तता की तरह महसूस होती है। तुम अभी कुर्सी को नहीं देख रहे हो। तुम वहाँ पर एक व्यक्ति को. देख रहे थे, अब तुम उस व्यक्ति की अनुपस्थिति को देखते हो। परन्तु कुर्सी अभी भी दिखलाई नहीं पड़ रही है। इसलिए जब अहंकार विलीन हो जाता है, तुम्हें शून्य की प्रतीति होती है। यह तो मात्र प्रारंभ है क्योंकि यह शून्यता भी अहंकार का ही नकारात्मक हिस्सा है-दूसरा पहलू। यह शून्य भी विलीन हो जाना चाहिए। र्रिझाई-एक जेन गुरु के लिए ऐसा कहा जाता है कि जब वह अपने गुरु के पास सीख रहा था तो गुरु हमेशा इस बात पर जोर देता था कि उसे शून्य को उपलब्ध करना चाहिए। अतः एक दिन वह आया, उसने शून्य उपलब्ध कर लिया था। वह एक लम्बा श्रम था। अहंकार को गलाने में बहुत मेहनत करनी पढ़ती है। वह एक बडी लम्बी यात्रा थी-बहुत कठिन और कभी-कभी सचमुच सी असंभव - किन्तु फिर भी उसने उसे पा लिया था। इसलिए वह हँसता हुआ, नाचता हुआ आया, आनन्द में डूबा। वह अपने गुरु के चरणों में गिरा और उसने काश, मैंने पा लिया है, अब केवल शून्य ही। गुरु ने उसकी ओर बिना किसी सहानुभृति के देखा और कहा कि अब तुम जाओ ओर इस शून्य को भी फेंक कर आओ। उसे अपने साथ यहाँ मत लाओ। इस शून्य को भी फेंक दो। इस स्थितता को भी गिरा दो, क्योंकि यदि तुम्हारे पास खालीपन भी है, तो भी यह कूछ होने जैसा हो जायेगा। शून्य भी कुछ तो है। यदि तुम उसे भी अनुभव कर सको, तो वह भी कुछ है । यदि तुम उसे भी जान सको. तो वह भी कुछ है। यदि तुम उसे देख सको तो वह भी कुछ है। कुछ नहीं भी कुछ हो जाता है, यदि वह भी तुम्हारे हाथ में है। इसलिए गुरु ने कहा, "इस शून्य को भी फेंक दो। मेरे पास तभी आना जबकि यह "नथिंगनेस" भी नहीं हो।" रिंझाई तो रोने लगा। उसने ही यह बात क्यों नहीं देख ली? एक शून्य भी उपलब्धि है, वह भी कुछ है। यदि तुमने कुछ नहीं भी पा लिया तो फिर वह कुछ हो जाता। जब तुम इस शून्य में गहरे डूबते हो बिना किसी विचार के. बिना मन में जरा भी कंपन लाये - यदि तुम इसी में ठहर जाते हो, तो अचानक शून्य भी विलीन हो जाता है और तब "स्व" का बोध होता है। तब तुम केन्दित हुए। तब तुम असली केन्द्र पर आये। एक तो झूठा केन्द्र है, और फिर उस झूठे केन्द्र का खो जाना और तब असली केन्द्र का होना है। केन्दित होने से मेरा मतलब एक भृमि तुम्हारे होने की वास्तविक भूमि । यह तुम्हारा केन्द्र नहीं है। क्योंकि तुम तो मिथ्या केन्द्र हो अतः यह तुम्हारा केन्द्र नहीं है। वही असली केन्द्र है- तुम्हारे अस्तित्व का केन्द्र। पूरा अस्तित्व ही इसमें केन्द्रित हो गया। तुम तो झूठे केन्द्र हो, तुम तो खोओगे। परन्तु तुम्हारे खोने में भी यदि तुम इस शून्य से भरने लगो, तो भी अहंकार बड़े ही सूक्ष्म ढंग से लौट आया । बहुत ही सूक्ष्म तरीके से वह वापस आ गया। वह कहेगा कि मैंने इस शुन्य को पा लिया। इसका मतलब वह अभी भी है। उसे वापस मत आने दो। इस शून्य में ही रहो। इस शून्य के साथ कुछ भी न करो, उसके बारे में सोचो भी मत, उसके बारे में कुछ महसूस भी मत करो। शून्य है, उसके साथ रहो, उसे रहने दो। वह चला जाएगा। वह सिर्फ नकारात्मक हिस्सा है। वास्तविक चीज़ तो खो गई, यह मात्र उसकी छाया है। इस छाया को मत पकड़ो, क्योंकि छाया थी तभी हो सकती है जबकि वास्तविकता कहीं-न-कहीं पास ही हो । तभी केवल छाया भी हो सकती है। अन्ततः शून्य भी विलीन हो जाता है, ओर तब केन्द्रीकरण-सेन्टरिंग होता है। तब पहली बार तुम "तुम" नहीं होते और फिर भी तुम होते हो-न कि स्वयं की तरह वरन एक शुद्ध अस्तित्व की भाँतिः बल्कि सर्व को भाँति। और इस बात को ठीक से समझ लें कि यह तुम्हारा केन्द्र नहीं है। यह सर्व का केन्द्र है। अपने झूठे केन्द्र को भूल जाओ। भीतर जाओ और उसे खोजो। और तब वह विलीन हो जाता है। वह कमी भी नहीं मिलता। वह कहीं भी नहीं है इसलिए तुम उसे खोज नहीं सकते। उसके बाद और भी कठिन काम तुम्हें करना होता है-तुम्हें शून्य का सामना करना पड़ता है। यह बिल्कुल मौन होता है। अहंकार के जगत की तुलना में यह बिल्कुल शान्त होता है। तुम एक गहरी शान्ति में होते हो। परन्तु इससे ही सन्तुष्ट मत हो जाना। वह झूठी है। क्योंकि वह "भी अहंकार का ही हिस्सा है। यदि तुम सन्तुष्ट हो गये, तो अहंकार पुनः प्रवेश कर जाएगा। वह वापस लौट जायेगा। उसका एक हिस्सा अमी भी वहाँ मौजूद था। वह हिस्सा फिर से उस सारे को भीतर ले आएगा। बिना किसी विचार के इस शून्य के साथ रहो। वह करीब-करीब मृत्यु जैसा है। जैसै कोई अपनी ही आँखों के सामने मर रहा होता है - एक गहरे खड्ड में विलीन हो रहा होता है। और जल्दी ही तुम खो जाओगे और केवल खड्ड ही रह जाएगा- उस खड्ड का जानने वाला भी, नहीं बचेगा, उस खाई को देखने वाला भी पीछे नहीं छुटेगा, बल्कि मात्र खड्ड ही रह जायेगा। तब तुम केन्दित हुए-केन्द्र में केन्दित । वह तुम्हारा केन्द्र नहीं है। पहली बार, तुम हो । अब भाषा का दूसरा ही अर्थ हो जाता है। तुम नहीं हो और फिर भी तुम हो । यहाँ जाकर "हाँ" और "ना" के परम्परागत अर्थ, उनके रूढिगत भेद खो जाते हैं। तुम तुम्हारी तरह वहाँ नहीं होते। अब तुम वहाँ दिव्य की तरह होते हो-स्वयं ब्रहा की भाँति । यही अस्तित्वगत केन्द्रीकरण है-अस्तित्व में केन्दित होना। तीसरा प्रवचन सजगता के दीप चैतन्य के सूर्य में स्थित होना ही एक मात्र दीपक है एक दिन एक स्त्री मुल्ला नसरुद्दीन की पाठशाला में आई। उसके साथ उसका एक छोटा बच्चा भी था। उस स्त्री ने मुल्ला को उस लड़केको डराने के लिए कहा। वह लड़काबिगड़गया था और किसी की नहीं सुनता था। उसे किसी बड़ेअधिकारी के द्वारा डराने की जरूरत थी । मुल्ला वाकई अपने गाँव में एक बडा अघिकारी था। उसने एक बडी भयावह भाव-भंगिमा बनाई। उसकी आँखें बाहर निकल आईं और उनसे आग निकलने लगी और वह स्वयं भी कूदने लगा, उस स्त्री ने देखा कि अब मुल्ला को रोकना असंभव है। वह तो बच्चे की जान ही लेने लगा वह स्त्री तो बेहोश हो गई, लड़काअपनी जान बचाकर भागा, और मुल्ला खुद इतना डर गया कि वह भी से बाहर भाग गया। वह बाहर ठहरा रहा और वह स्त्री वापस होश में आई । तब मुल्ला धीरे से, चुपचाप गंभीर होकर भीतर दाखिल हुआ। उस स्त्री से कहा, "मुल्ला गजब कर दिया ! मैंने तुम्हें मुझे डराने केलिए तो नहींकहा था। मुल्ला वे जवाब दिया- "तुम्हें असली बात का पता नहीं। केवल तुम्हीं नहींडर गई बल्कि मैं भी अपनेआपसे डर गया। जब भय पकड़लेता है तो वह सब कुछ नष्ट कर देता है। उसे प्रारंभ करना सरल है, किन्तु उसे नियंत्रित करना कठिन है। जब मैंने उसे प्रारंभ किया तो मैं उसका मालिक था, लेकिल शीघ्र ही भय मुझ पर सवार हो गया, और वह मालिक हो गया और मैं उसका गुलाम, तब मैं कुछ नहीं कर सकता था। और, भय के कोई अपने नहीं होते। जब वह पोट पहुँचाता है, तो सबको ही पहुँचाता है।" यह एक बडी सुन्दर कहानी है जो कि मनुष्य के मन के बारे में एक बडी गहरी अंतर्दृष्टि बतलाती है। तुम हर चीज़के बारे में केवल प्रारंभ में सजग होते हो, और फिर बाद में अचेतन कब्जा ले लेता है। अचेतन अधिकार जमा लेता है और अचेतन ही फिर मालिक हो जाता है। तुम क्रोध शुरू कर सकते हो, परन्तु तुम उसे कभी खतम नहीं कर सकते। बल्कि क्रोध ही तुम्हें रामाप्त कर देत्ता है। तुम किसी भी बात को प्रारंभ कर सकते ही, लेकिन जल्दी या बाद में अचेतनअपना अधिकार कर लेता है और तुम्हारी छुटूटी हो जाती है। इसलिए केवल प्रारंभतुम्हारे हाथ में है, अन्त कभी भी तुम्हारे हाथ में नहीं है । और जो भी परिणामउससे होंगे, उसके तुम मालिक नहीं हो। यह स्वाभाविक है, क्योंकि तुम्हारे मन का केवल एक बहुत छोटा-सा हिस्साही जागा हुआ है। वह मोटरकार में सिर्फ एक स्टार्टर की भाँति है। वह केवलस्टार्ट करता है, और उसके बाद वह किसी भी काम का नहीं है। उसके बादमोटर कब्जा । ले लेती हैं। उसकी जरूरत केवल चालू करने के लिए है। उसकेबिना चालू करना कठिन-है। लेकिन यह मत सोचो की चूँकि तुम किसी चीजको चालू करत्ते हो, तो तुम उसके मालिक हो। यही इस कहानी का रहस्य हैचूँकि तुमने चालूकर दिया, तुम सोचने लगते होकि तुम उसे बन्द भी कर सकते हो। ऐसा हो सकता था कि तुम प्रारंभ ही न करते, वह दूसरी बात है। लेकिनएक बार प्रारंभ करने के बाद ऐच्छिक-अनैच्छिक ही जाता है और चेतन अचेतनही जाता है, क्योंकि चेतन केवल ऊपरी पर्त है-मन की ऊपरी सतह और करीब-करीब सारा मन ही अचेतन है। तुम शुरू करो और अचेतन गति करने लगताहै और काम करने लगता है। इसलिए मुल्ला ने कहा, "मैं बिल्कुल जिम्मेवार नहींहूँ । जो कुछ भी हुआ, उसके लिए मैं जिम्मेवार नहीं हूँ। मैं केवल प्रारंभ करने के लिए जिम्मेवार हूँऔर तुमने ही मुझे प्रारंभ करने के लिए कहा था। मैंने बच्चे को डराना प्रारंभकर दिया, और तब बच्चा डर गया और तुम मूच्छित हो गई, और तब मैं भीडर गया, और उसके बाद सब गड़बड हो गयी। हमारे जीवन में भी सभी कुछ गड़बड़ है-इस चेतन मन के, प्रारंभ करनेके कारण और फिर अचेतन मन के उस पर अधिकार करने के कारण। यदि तुमइसे अनुभव नहीं कर सकते और यदि तुम इसे नहीं जान सकते-इस यांत्रिकताको, तो फिर तुम सदा के लिए गुलाम रहोगे। और यह गुलामी आसान हो जातीहै, यदि तुम सोचते रहो कि तुम मालिक हो । जानते हुए गुलाम होना कठिन है। गुलाम होना सरल है, यदि तुम अपने को धोखा देते चले जाओ कि तुम मालिकहो, अपने प्रेम के, अपने क्रोध के, अपने लोभ के, अपनी ईर्ष्या के, अपनी हिंसाके, अपनी निर्दयत्ता के, यहाँ तक कि अपनी सहानुभूति व अपनी करुणा के। मैं कहता हूँ-तुम्हारे, किन्तु यह "तुम्हारे" केवल प्रारंभ में ही है। सिर्फ क्षणभर के लिए, केवल एक चिनगारी ही तुम्हारी है। और तब तुम्हारी यांत्रिकता शुरूहो जाती है और तुम्हारी सारी यांत्रिकता मूच्छित है। ऐसा क्यों? यह चेतनऔर अचेतन में द्वन्द्व क्यों है? और द्वन्द्व है। तुम अपने बारे में पहले से कुछनहीं कह सकते। यहाँ तक कि तुम, तुम्हारे कृत्य भी तुम्हें पहले से पता नहीं है क्योंकि तुम नहीं जानते कि क्या होने वाला है। तुम्हें पता ही नहीं कि तुमक्या करने वाले हो। तुम्हें यह भी मालूम नहीं कि दूसरे क्षण तुम क्या करने वालेहो क्योंकि करने वाला तो भीतर बहुत गहरे अचेतन में छिपा है। तुम कर्ता नहींहो। तुम केवल प्रारंभ करने वाले एक बिन्दु हो। जब तक कि तुम्हारा सारा अचेतनही चेतन न हो जाये तुम स्वयं अपने लिए भी एक समस्या ही रहोगे और एकनर्क बनोगे। सिवाय दुःख के और कुछ भी वहाँ न होगा। जैसा कि मैं हमेशा जोर देता हूँ कि कोई दो ही तरीकों से समग्र हो सकता है। पहला कि तुम अपनी आंशिक चेतना को भी खो दो, इस छोटे से चेतन केटुकडे को भी अचेतन में फेंक दो, उसमें मिला दो, और तब तुम समग्र हो जातेहो। लेकिन तब तुम एक पशु की तरह समग्र हो जाते हो, और वह असंभव हैतुम कुछ भी करो, वह संभव नहीं है। यह सोचा जा सकता है, किन्तु संभवनहीं है तुम बार-बार आगे की ओर फेंक दिये जाओगे। वह छोटा-सा हिस्सा जो कि चेतन हो गया है, पुनः अचेतन नहीं हो सकतायह एक अण्डे को भाँति है जो कि मुर्गी हो गया है। अब मुर्गी वापस लौटकरअण्डा नहीं हो सकती। एक बीज जो कि अंकुरित हो चुका वह वृक्ष होने कीयात्रा में निकल गया। अब वह वापस नहीं लौट सकता। वह फिर लौटकर एकबीज नहीं बन सकता। एक बच्चा जो कि माँ के गर्भ से बाहर आ गया, अबबापस लौट कर नहीं जा सकता, चाहे गर्भ कितना ही आनन्दपूर्ण रहा हो। पीछे लौटना कभी नहीं होता जीवन सदैव भविष्य में गति करता है, अतीतमें कभी भी नहीं। केवल आदमी अतीत की बात सोच सकता है। इसलिए मैंक्या हूँ कि यह सोचा जा सकता है, किन्तु इसे वास्तविक रूप नहीं दिया सकतातुम कल्पना कर सकते हो, तुम सोच सकते होतुम उसमें विश्वास कर सकतेतो, तुम उसमें लौटने का प्रयत्न भी कर सकते हो, किन्तु तुम लौट नहीं सकते वहबिल्कुल असंभव है। व्यक्ति को आगे ही बढ़ना पड़ता है। यह दूसरा मार्गहै समग्र होने का। जाने या अनजाने, हर क्षण कोई आगे ही बढ़ रहा है । यदि तुम जानते हुएआगे बढ़ते हो, तो तुम्हारी गति बंढ़ जाती है। यदि तुम जानते हुए बढ़ रहे हो, तो फिर तुम समय और शक्ति नष्ट नहीं करते। तब वह बात एक जीवन में ही पूरी हो सकती है, जो कि लाखों जीवनों में भी पूरी नहीं होगी, यदि तुम बिना जाने बढ रहे हो। क्योंकि यदि तुम चिना जाने ही बढ रहे हो तो - तुम एक वर्तुल में ही बढ़ोगे। हर दिन तुम वही पुनरुवत करते हो, प्रत्येक जीवन में तुम वही -का-वही दोहराते हो। और जीवन मात्र एक आदत बन जाती है-एक यांत्रिकआदत, एक पुनरुक्ति। यदि तुम जानते हुए, होशपूर्वक आगे बढ़ो तो तुम इस पुनरुक्ति की आदतको तोड़ सकते हो। इसलिए पहली बात तो यह ध्यान में लेने जैसी है कि तुम्हारीसजगता इतनी छोटी-सी है कि वह केवल प्रारंभ करने के लिए है। जब तककि तुम्हारे पास असजगता कम और सजगता ज्यादा न हो, अचेतना कम और चेतना ज्यादा न हो, सन्तुलन नहीं बदलेगा। उसमें क्या-क्या बाधाएँ हैं? ऐसी स्थिति क्यों है? यह तथ्य आखिर क्यों है? यह चेतन और अचेतन में द्वन्द्व क्यों है? इसे जानना पड़ेगा। यह स्वाभाविक है। जो कुछ भी है वह स्वाभाविक है। मनुष्य लाखों वषों में विकसित हुआ है। इस विकास ने ही तुम्हें निर्मित किया है, तुम्हारे शरीर कोतुम्हारी संरचना को। यह विकास एक लम्बा संघर्ष रहा है। हजारों-लाखों सालोंकी विफलताओं, सफलताओं के अनुभव का । तुम्हारे शरीर ने बहुत कुछ सीखाहै। तुम्हारा शरीर लगातार बहुत कुछ सीखता जा रहा है। तुम्हारे शरीर का अथाहज्ञान उसकी कोषिकाओं में स्थित है, तुम्हारे मन में नहीं। वह अपने ही हिसाबसे अपना व्यवहार पुनरुक्त करता चला जाता है। यदि स्थिति भी बदल जाये तोभी शरीर वही रहता है। उदाहरण के लिए, जब तुम क्रोधित होते हो, तो तुमउसी भाँति अनुभव करते हो जैसे कि कोई भी आदम पुरुष । तुम उस वैसे हीमहसूस करते हो, जैसे कि कोई भी पशु। तुम उसे वैसे ही अनुभव करते हो जैसे कि कोई भी बच्चा । और यही यांत्रिकता है। जब तुम क्रोधित होते हो तब तुम्हारेशरीर का एक निश्चित ढंग है एक निश्चित क्रियाकाण्ड है। जिस क्षण भी तुम्हारा मन कहता है "क्रोध"-उसी वक्त तुम्हारे शरीर में जो ग्रंथियां हैं, वे रक्त में रासायनिक द्रव्य छोड़देती हैं। एड्रीनल तुम्हारे रक्तमें छूट जाता है। इसकी जरूरत है क्योंकि क्रोध में तुम्हें या तो चोट करनी पडेगी, या विरोधी द्वारा तुम पर चोट पडेगी। तुम्हें अधिक रक्त-के दौरे की आवश्यकताहै और यह रासायनिक द्रव्य खून के दौरे कोतेज़करने में मदद करेगा। या तोतुम्हें लड़ने की जरूरत पडेगी, या तुम्हें मैदान छोड़कर भाग खड़ा होना पड़ेगादोनों ही स्थितियों में यह रसायन मदद करेगा। इसलिए जब भी कोई पशु क्रोधमें होता है, तो शरीर या तोलड़नेके लिए तैयार हो जाता है या फिर भागनेके लिए। और ये ही दो विकल्प हैं- यदि पशु सोचता है कि वह विरोधी सेज्यादा ताकतवर है, तो वह लडेगा, और यदि वह सोचता है कि वह कमजोरहै, तो वह भाग जायेगा। और यह यांत्रिकता बडी सरलता से चलती है। परन्तु मनुष्य के लिए यह स्थिति बिल्कुलभिन्न हो गई है। जब तुम्हें क्रोधआ रहा है, तुम उसे चाहो तो व्यवत्त नहीं भी करो। पशु के लिए ऐसा करना असंभव है। यह स्थिति पर निर्भर है। यदि वह तुम्हारे नौकरों के प्रति है, तोतुम उसे व्यक्त कर सकते हो लेकिन, यदि वह तुम्हारे मालिक के खिलाफ है, तो तुम उसे व्यक्त भी नहीं कर सकते। इतना ही नहीं बल्कि तुम हँस भी सकतेहो; मुस्करा सकते हो। तुम अपने मालिक कोफुसला सकते हो कि तुम क्रोधिततो हो ही नहीं, बल्कि तुम तो प्रसन्न हो । अब तुम शरीर की सारी यांत्रिकता को गड़बड़ किये दे रहे हो। शरीर तोलड़नेके लिए तैयार है, और तुम मुस्करा रहेहो। तुम सारे शरीर में एक भारी गडबडी उत्पन्न कर रहे हो। शरीर नहीं समझसकत्ता कि तुम क्या कर रहे हो। क्या तुम पागल हो? वह दो में से एकबात करने के लिए तत्पर है जो कि स्वाभाविक है-लड़ना या भागना। यह मुस्कराना एक नई बात है। यह प्रवंचना कुछ नई घटना है, शरीर केपास इसके लिए कोई मैकेनिज्म, कोई संयंत्र नहीं है। शरीर में तो प्रसन्नत्ता केकोई रसायन नहीं छूट रहे हैं, लेकिन फिर भी तुम ऊपर से मुस्कुराते हो। हँसनेके लिए अभी वहां कोई स्सायन नहीं है। तुम्हें जबरदस्ती मुस्कुराहट लानी पड़ती हैं- एक झूठी मुस्कुराहट, और शरीर ने लड़ने के लिए रक्त में स्सायन छोड़ दियाहैं। अब रक्त क्या करेगा? शरीर की अपनी ही भाषा है, जिसे वह भलीभाँतिसमझता है किन्तु तुम बड़े ही पागलपन का, विक्षिप्तता का व्यवहार कर रहे हो। अब तुममें और तुम्हारे शरीर में एक गैप, एक अन्तराल पैदा हो जाता है। शरीरकी यह यांत्रिकता अचेतन है, यह यांत्रिकता अनैच्छिक है। तुम्हारी इच्छा, तुम्हारीमर्जी की कोई भी जरूरत नहीं है, क्योंकि तुम्हारी मर्जी, तुम्हारे संकल्प को समयकी आवश्यकता पड़ेगी और ऐसी स्थितियाँ होती हैं जिनमें कि समय ज़राभीनहीं खोया जा सकता। एक चीते ने तुम पर हमला कर दिया है, अब सोचने के लिए तुम्हारे पाँच समय नहीं है। तुम विचार नहीं कर सकते कि तुम्हें क्या करना है। तुम्हें बिनामन से सलाह किये ही कुछ करना पड़ेगा। यदि बीच में मन आ जाये, तो तुमगये। तुम विचार नहीं कर सकते, तुम चीते से नहीं कह सकते कि "ठहरो, जरा मुझे सोच लेने दो कि मुझे वया करना चाहिए।" तुम्हें तुरन्त कुछ करना पड़ेगाबिना किसी सजगता के। शरीर की अपनी एक यांत्रिकता है। चीता मौजूद है और मन जान रहा हैकि वह वहाँ है। शरीर की यांत्रिकता अपना कार्य करना शुरू कर देती है। वहकार्य करना मन पर निर्भर नहीं है क्योंकि मन बहुत धीरे काम करने वाला है बहुत ही अकुशल है संकटकालीन अवस्था में उस पर भरोसा नहीं किया जा सकत्ता, इसलिए शरीर अपना कार्य करने लगता है। तुम भयभीत होगये हो, तो तुम भाग जाओगे, तुम बच निकलोगे। लेकिन वही बात तब भी होती है जबकि तुम मंच पर एक भारी भीड़को भाषण देने के लिए खड़े होते हो। वहाँ कोई भी चीता नहीं है, परन्तु तुम भारी भीड़ को देखकर डर गये हो। भय रूप लेने लगता है. शरीर को खबर पहुँच गई है। यह खबर कि तुम डर गये हो, यह स्वचालित है। शरीर रसायन छोड़नाशुरू कर देता है-वे ही रसायन जो चीता आप पर हमला करने वाला हो तब छूटते हैं। वहाँ पर कोई शेर- चीत्ता नहींहै। वहाँ सचमुच कोई भी नहीं है जो कि आप पर आक्रमण कर रहा हो। परन्तु ऐसा लगता है जैसे कि श्रोत्ताओं की भीड़-तुम पर हमला कर रही है। वहाँ जो भी मौजूद है वे सब आक्रामक हैं, ऐसा प्रतीत होता है। इसलिए तुम भयभीत ही गये हो। अब शरीर तैयार है, लड़ने के लिए अथवा भाग खड़े होने के लिए, परन्तुदोनों ही रास्ते बन्द हैं। तुम्हें वहाँ खड़ा होना है और बोलना है। अब तुम्हारे शरीर को पसीना छूटने लगता है, सर्द रात में भी। क्यों? तैयार है, लड़ने के लिए अथवाभागने के लिए। रवत तेजी से दौरा कर रहा है, गर्मी उत्पन्न हो गई है, और तुम वहाँखड़े हो। इसलिए तुम पसीने-पसीने होने लगते हो, और तब एक सूक्ष्म कंपकपीदौड़ने लगती है। तुम्हारा सारा शरीर कांपने लगता है। यह ऐसे ही होता है जैसे कि तुम कार को चालू करो और एक्सीलेटर भीदबाओ और साथ ही ब्रेक भी लगाओ। इंजन गर्म हो गया है, गति कर रहा है और तुम ब्रेक भी लगा रहे हो। कार को सारी बॉडी कांपने लगेगी। वही बाततब भी होती है जबकि तुम मंच पर खड़े होते हो। तुम्हें भय लगत्ता है, औरशरीर भागने के लिए तैयार है। एक्सीलेटर दबा दिया गया है, परन्तु तुम भागनहीं सकते। तुम्हें एकत्रित लोगों को भाषण देना ही होगा। तुम नेता हो या कुछहो, तुम भाग नहीं सकते। तुम्हें सामना करना ही पड़ेगा और तुम्हें वहाँ मंच पर खड़ा होना ही पड़ेगा। तुम बच नहीं सकते। अब तुम दोनों बातें एक साथ कर रहे हो जो कि बड़ी विपरीत हैं। तुमएक्सीलेटर पर भी पाँव रखे हो और ब्रेक भी दबा रहे हो। तुम भागते नहीं होऔर तुम्हारा शरीर भगाने के लिए तैयार है। तुम कांपने लगते हो और गर्मी पैदाहो जाती है। अब तुम्हारा शरीर बडी हैरानी में पड़ा है कि तुम यह कैसा व्यवहारकर रहे हो। शरीर को तुम्हारी बात समझ में नहीं आती, एक अन्तराल पैदा होगया। अचेतन एक काम कर रहा है, और चेतन कुछ और करता चला जाता है तुम बंट गये । इस अन्तराल को, इस गैप कोठीक से समझ लेना चाहिए। प्रत्येक कृत्य मेंयह गैप पैदा हो जाता है। तुम एक फिल्म देख रहे हो, एक कामोत्तेजित करनेवाली फिल्म, तुम्हारा काम जाग गया है। तुम्हारा शरीर यौन अनुभव में उतरकर फूटने को तैयार है, परन्तु तुम केवल फिल्म देख रहे हो तुम एक कुर्सी पर बैठे हो, और तुम्हारा शरीर काम-कृत्य में उतरने को तैयार है। फिल्म उसे और अधिक उत्तेजित करने में सहायक होगी, वह तुम्हें और धक्केदेगी। तुम उत्तेजना से भर गये हो, किन्तु तुम कुछ कर नहीं सकते। शरीर कुछकरने के लिए तैयार है, परन्तु स्थिति अनुकूल नहीं है, इसलिए एक गैप निर्मितहो जाता है। तुम अपने को भिन्न ही समझने लगते ही और तुम्हारे और तुम्हारे शरीर के बीच एक बाधा खड़ी हो जाती है। इस बाधा के कारण त्तथा इस बार-बार की उत्तेजना व साथ ही दमन के कारण, इस गति देने व रोकने के कारण, यह सतत विरोध ही तुम्हारा अस्तित्व हो गया है, और तुम रुग्ण होगये हो। यदि तुम पीछे गिर सको और पशु हो सको, जो कि कभी भी नहीं होसकता, जो कि असंभव है, तब तुम समग्र और स्वस्थ हो जाओगे। यह एक बड़ा ही विचित्र तथ्य है कि पशु अपनी स्वाभाविक स्थिति में रुग्ण नहीं परन्तु उन्हेंप्राणी-संग्रहालय में रख दो और वे मनुष्यों की बीमारियाँलेने लगते हैं। कोई भीपशु अपने प्राकृतिक वातावरण में अपनी नैसर्गिक अवस्था में होमो सेवसुअल नहीं होता, लेकिन उन्हें अजायब घर में रख दो और वे अजीब-अजीब मूर्खतापूर्ण कृत्य करने लगते हैं। वे समलिंगी संभोग करने लगते हैं। कोईभी पशु स्वाभाविक स्थिति में पागल नहीं होता, परन्तु अजायब घर में वे पागलहो जाते हैं। मनुष्य जाति के सारे इतिहास में ऐसा कभी उल्लेख नहीं किया गयाकि कभी किसी पशु ने आत्महत्या की हो लेकिन अजायब घर में पशु आत्म-हत्या करते हैं। यह बडी विचित्र बात है, परन्तु फिर भी वस्तुत्तः विचित्र नहींहैं, क्योंकि जैसे ही मनुष्य पशुओं को ऐसा जीवन जीने के लिए मजबूर करता है, जो कि उनके लिए स्वाभाविक नहीं है, वे भीतर विभाजित हो जाते हैं। एकविभाजन निर्मित हो जाता है, एक गैप पैदा हो जाता है, और अखंडत्ताखो ही जाती है। आदमी विभाजित है। आदमी विभाजित ही पैदा होता है। इसलिए फिर क्याकरें? कैसे इस अन्तराल को नहीं होने दें और कैसे शरीर के प्रत्येक कोष कोसजग करें? केसे शरीर के हर कोने को जगायें? कैसे जागरूकतालाये-यहीसारे धर्मों के लिए सारी समस्या है, सारे योग के लिए और सारी जागरण कीपद्धतियों के लिए कि कैसे इस सजगता-जागरूकता को तुम्हारे समग्र अस्तित्व तक ले जायें कि कुछ भी अचेतन न रह जाये। बहुत-सी विधियों से प्रयत्न किया गया है, बहुत सी विधियाँ संभव है। अतः मैं कुछ विधियों पर बात करूँगा कि कैसे शरीर का प्रत्येक कोष सजग हो जाये । और जब तक कि तुम तुम्हारे समग्र रूप में जागरूक नहीं हो जाते, तुम आनन्दमैं नहीं हो सकते, तुम शान्ति में स्थापित नहीं हो सकते। तब तक तुम पागलखाना बने ही रहोगे। तुम्हारे शरीर का प्रत्येक कोष तुम्हें प्रभावित कटता है। उसका अपना एककार्य है, उसका अपना एक प्रशिक्षण-अपना संस्कार है। जैसे ही तुम प्रारंभ करते हो, कोषअधिकार ले लेता है और अपने ही तरीके से कार्य करने लगता है। तब तुम अशान्त हो जाते हो। तुम सोचते हो कि यह क्या हो रहा है? तुम्हें आश्चर्यहोता हैं कि ऐसा तो मेरा मतलब बिल्कुल नहीं था, ऐसा मैंने कतई नहीं सोचा था। और तुम सही हो तुम्हारी मर्जीबिल्कुल भिन्न रही हो सकती है। परन्तु एक बार तुम अपने शरीर को, उसके कोषों को कुछ करने के लिए दे देते हो तोअपनी ही तरह से उसे करते हैं- जैसी भी उनकी अपनी सिखावन है। इसीकारण से वैज्ञानिक विशेषज्ञः रूसी वैज्ञानिक सोचते हैं कि हम आदमी को नहींबदल सकते जब तक कि हम उसके कोषों को नहीं बदल देते। एक स्कूल है-बिहैवियरिस्टिक स्कूल-मनोवैज्ञानिकों का जो कि सोचताहै कि बुद्ध असफल हो गये, जीसस असफल होगये। वे असफल होंगे ही। उसमें कुछ भी हैरानी की बात नहीं है क्योंकि बिना शरीर की संरचना को बदले, रासायनिकसंरचना को बदले, कुछ भी नहीं बदला जा सकता है कि बुद्ध असफल हो गये, जीसस असफल हो गये। वे असफल होंगे ही। उसमें कुछ भी हैरानी की बात नहीं है क्योंकि बिना शरीर की संरचना को बदले, रासयनिक संरचना को बदले, कुछ भी नहीं बदला जा सकता। ये बिहैबियरिस्टिक-वाट्सन, पावलव, स्कोनर कहते हैं कि यदि बुद्ध शांत हैं तो इसका मतलब यह है कि उनकी रासायनिक संरचना भिन्न है, और तो कोईबात हो नहीं सकती। यदि वे मौन हैं, यदि उनके चारों और शान्ति व्याप्त है, यदि वे कभी भी अशान्त नहीं होते, कभी क्रोधित नहीं होते तो इसका इतना हीमतलब है कि किसी भी तरह उनमें उन रसायनों का अभाव है जिनके कारणकि सारा उत्पात्त होता है, कि जो क्रोध को पैदा करते है। इसलिए स्कोनर कहताहै, आज नहीं कल हम रासायनिक तत्वों से बुद्ध को निर्माण कर लेंगे। किसीध्यान की कोई जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की सजगता बढाने को कोई आवश्यकतानहीं है। केवल रसायनों को परिवर्तित करने की जरूरत है। एक तरह से वह से सही हैं, किन्तु बहुत ही खतरनाक तरह से सहीहैं, क्योंकियदि तुम्हारे शरीर में से किन्हीं रसायनों को निकाल दिया जाये तो तुम्हारा व्यवहारबदल जायेगा। यदि किन्हीं विशेष हारमोन्स कोतुम्हारे शरीर में डाल दिया जाए, तो तुम्हारा व्यवहार बदल जाएगा। तुम पुरुष हो और तुम पुरुष की भाँति व्यवहारकरते हो। परन्तु यह तुम नहीं हो जो कि पुरुष की भाँति व्यवहार कर रहा हैयदि उन हारमोन्स को निकाल दिया जाये और दूसरे हारमोन्स जो कि स्त्री जाति के होते है, उन्हें डाल दिया जाये तो तुमस्त्री की तरह व्यवहार करने लगोगेइसलिए वस्तुतः यह तुम्हारा व्यवहार नहीं है, यह हारमोन्स के कारण है। ये तुमनहीं हो जो कि क्रोध करते हो, बल्कि एक विशेष हारमोन है तुम्हारे शरीर मेंऐसा नहीं है कि तुम शान्त हो और ध्यानी हो, बल्कि ये कुछ तुम्हारे भीतर हारमोन्स हैं। स्कोनर कहता है-इसीलिए बुद्ध असफल हैं, क्योंकि वे उन बातों को कहतेचले जाते है, जो कि असंबद्ध हैं। तुम एक आदमी से कहते हो क्रोध न करो, किन्तु वह ऐसे रासायनिक तत्वों से भरा है, हारमोन्स से, जो कि क्रोध पैदा करतेहैं। इसलिए एक बिहैबियरिस्ट के लिए यह ऐसा ही है - जैसे कि कोई आदमी तेज़बुखार में हो-एक सौ छह डिग्री बुखारर - और आप उससे सुन्दर-सुन्दर बातेंकरते चले जाओ और कहो कि शान्त ही जाओ. ध्यान करो, बुखार को छोडो । यह बहुत अर्थहीन मालूम पड़ता है। वह आदमी क्या कर सकता है। जब तककि तुम उसके शरीर में कुछ परिवर्तन नहीं करते, बुखार रहेगा। ज्वर किसी वायरस के कारण है, किन्हीं रासायनिक तत्वों के कारण है। जब तक वह नहीं बदलजाता, जब तक कि उसको अनुपात में बदलाहट नहीं आती, वह ज्वर से पीडितरहेगा। और बात करने की कोई भी जरूरत नहीं है। यह बिल्कुल ही अर्थहीन है। वही बात क्रोध के साथ है स्कोनर के लिए पावलव के लिए, वही बात सेक्स के साथ है। तुम ब्रह्मचर्य के बारे में बात करते चले जाते हो, और शरीरसेक्स की ऊर्जा से भरा है-सेक्स के कोषों से। वह सेक्स की ऊर्जा तुम परनिर्भर नहीं हैं, बल्कि तुम ही उस पर निर्भर हो । अतः तुम ब्रह्मचर्य की बातें करते जाओ, लेकिन तुम्हारी इन बातों से कुछ भी न होगा। और वे लोग सहीहैं एक तहह से। लेकिन सिर्फ एक तरह से वे सहीं हैं, कि यदि रसायनों को बदल दिया जाये, यदि तुम्हारे शरीर से सारे सेक्स हारमोन्स को बाहर फेंक दिया जाये, तो तुम कामुक नहीं हो सकोगे। परन्तु तुम उससे बुद्ध नहीं हो जाओगेतुम केवल नपुंसक हो जाओगे, अयोग्य। तुममें कुछ कमी हो जायेगी। बुद्ध में कुछ कमी नहीं हो गई है। बल्कि, इसके विपरीत, कुछ क्या और भी नवीन उनके जीवन में आ गया है। ऐसा नहीं है कि उनके सेक्स हारमोन्स नहीं हो गये हैं। वे उन में हैं। फिर क्या हो गया है उन्हें? उनकी चेतना गहरी होगयी है, और उनकी चेतना उनके सेक्स के कोषों में भी प्रवेश कर गई है। अब कामकोष तो हैं, किन्तु वे मनमानी नहीं कर सकते। जब तक केन्द्र उन्हें काम करने के लिए नहीं कहे, वे कुछ नहीं कर सकते, वे निष्क्रिय ही रहेंगे। एक नपुसंक आदमी में काम-कोष नहीं होते। एक बुद्ध में वे मौजूद हैं औरक्या सामान्य आदमी से ज्यादा शक्तिशालीहैं-अधिक बलवान, क्योंकि वे कभी काम में नहीं लाये गये, बिना उपयोग किये पड़े हैं। उनमें ऊर्जा भरी है। उनमें ऊर्जा एकत्रित हो गईं है। परन्तु अब उनमें चेतना प्रवेश कर गई है। अब चेतनाआयल चालू करने वाला बिन्दु ही नहीं है बल्कि अब वह मालिक हो गई है। आनेवाले समय में स्कोनर का प्रभाव हो सकता है। वेह एक बड़ी शक्ति बन सकता है। जैसे कि समाज की बाहरी अर्थ-व्यवस्था के लिए अचानक मार्क्स प्रभावशाली हो गया, उसी तरह किसी दिन भी पावलव-व स्कोनर भी आदमी के मन की भीतरी व्यवस्था के लिए शक्ति के केन्द्र हो सकते हैं। और वे जोभी कहते हैंउसे साबित कर सकते हैं। वे उसे सिद्ध कर सकते हैं। परन्तु इस घटना के दो पहलू हैं। तुम एक बिजली का बल्ब देखते ही । यदि तुम बल्ब को तोड़ दो, तो प्रकाश विलीन हो जाएगा, न कि विद्युत चली जाएगी। वही बात तब भी होती है, जबकिगुण विद्युत के प्रवाह को काट देते हो-बल्ब तो साबुत होता है, किन्तु प्रकाश विलीन हो जाता है। अतः प्रकाश दो प्रकार से विलीन ही सकता है। यदि तुमबल्ब को तोड़ दो, विद्युत होगी. परन्तु तब कोई माध्यम के न होने के कारणजिसके द्वारा कि वह प्रकट होती है, वह प्रकाश नहीं बन पायेगी। यदि तुम्हारेकाम-कोषों को नष्ट कर दिया जाये, तब कामुकत्ता तो होगी, परन्तु कोई माध्यमनहीं होगा उसे प्रकट करने के लिए। यह एक पहलू है। स्कीनर ने बहुत से पशुओं पर प्रयोग किये। किसी विशेष ग्रन्थि का ऑपरेशनकरने से एक बहुत ही खूंखार कुत्ता बुद्ध की तरह शांत हो सकता है। वह चुपचापबैठ सकता है, जैसे कि ध्यानस्थ हो। तुम उसे फिर से खूंखार होने के लिए नहींउकसा सकते। तुम चाहे कुछ भी करो, किन्तु वह तुम्हारी ओर बिना किसी क्रोधके भाव के देखता रहेगा। ऐसा नहीं है कि कुता बुद्ध हो गया है, और न हीऐसी बात है कि उसका अन्तर्मन विलीन हो गया है। वह वैसा ही क्रोधी है, किन्तुअब माध्यम नहीं है जिसके द्वारा कि क्रोध व्यक्त हो सके। यह नपुसंकता है। माध्यम खो गया न कि वासना । यदि माध्यम को नष्ट कर दिया जाये, जैसे किबल्ब को तोड़ दिया जाये तो तुम कह सकते हो कि प्रकाश कहाँ है, और तुम्हारीविद्युत कहाँ है? वह विद्युत मौजूद है, परन्तु वह छिपी हुई है। धर्म दूसरे ही मार्ग से काम करता रहा है। बल्ब को नष्ट करने की कोशिशनहीं करता है। वह मूर्खता की बात है, क्योंकि यदि तुम बल्ब को नष्ट कर दोगेतो तुम्हें उसके पीछे जो बिजली की घारा बह रही है उसका पता नहीं चलेगाधारा को ही बदल दो, उसका रूपान्तरण कर दो, घारा को एक नये ही आयाममें गति करने दो। और तब बल्ब भी वहाँजैसे-का-तैसा मौजूद रहेगा, परन्तु उसमेंकोई प्रकाश नहीं होगा। मैंने कहा कि स्कोनर प्रभावशाली हो सकता है क्योंकि वह एक बहुत सरल मार्ग बतलाता है। तुम क्रोधी हो, तुम्हारा ऑपरेशन किया जा सकता है, तुम कामुकहो, और तुम्हारा आँपरेशन किया जा सकता है। तुम्हारी समस्या का समाधान तुम्हारेद्वारा न होगा बल्कि एक सर्जन के द्वारा किया जाएगा-किसी और के द्वारा। औरजब कभी भी कोई और तुम्हारी समस्या का समाधान करता है तो तुमने एक अवसरखो दिया, क्योंकि जब तुम स्वयं उसका समाघान करते हो, तो तुम विकसित होतेहो। जब कोई और उसका समाधान करता है तो तुम तो वहीके-वही रहते होसमस्या शरीर के द्वारा कर दी जायेगी और फिर कोई समस्या नहीं होगी। परन्तु तब तुम मनुष्य न रह जाओगे। घर्म का सारा जोर चेतना को रूपान्तरित करने पर है। और पहली बात भीतर चेतना को एक बडी शक्ति पैदा कर लेनी है ताकि उससे सजगता और अधिक बढ़सके। यह सूत्र बडा ही अनूठा है। यह कहता है कि... "चैतन्य के सूर्य में स्थित होना ही एक मात्र दीपक है।" सूर्य हमेशा बहुत दूर है। प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में दस मिनट लगते है, और प्रकाश बहुत तेज़गति से चलता है-एक, छियासी, शून्य मील प्रति सेकंड की गति से। सूर्य को पृथ्वी तक पहुँचने में दस मिनट लगते है, वह बहुत दूर है। परन्तु सुबह सूर्य उगता है और वह तुम्हारे बाग में खिले फूल तक भी पहुँच जाता है। पहुँचने का यहाँ भिन्न ही अर्थ है। केवल किरणें पहुँचती हैं, न कि सूर्य। इसलिए यदि तुम्हारी ऊर्जा तुम्हारे भीतर गहरे में केन्द्र पर सूर्य ही जाये- यदितुम्हारा केन्द्र सूर्य हो जाये, यदि तुम चैतन्य हो जाओ, केन्द्र पर सजग हो जाओ, यदि तुम्हारी जागरूकता बढ़ जाये, तो तुम्हारी चेतना की किरणें तुम्हारे शरीर के प्रत्येक अंग तक, प्रत्येक कोष तक पहुँच जाती हैं । त्तब तुम्हारी सजगता शरीरके हर एक कोष में प्रवेश कर जाती है। यह ऐसा ही है जैसे कि सुबह सुरज उगता है और पृथ्वी पर सब चीजोंमें जीवन दौड़ पड़ता है। अचानक प्रकाश फैल जाता है, और नींद उड़ जातीहै, रात्रि का भारीपन खो जाता है। अचानक ऐसा लगता है कि जैसै हर चीज़ पुनर्जीवित हो गई। चिडियाँ गीत गाने लगती है और अपने परों को फैला आकाश में उड़ने लगती हैं, फूल खिल उठते हैं, और प्रत्येक चीज़फिर से जिन्दा होजाती है, सूर्य की गर्मी से, उसके स्पर्श मात्र से ही। इसलिए यदि जब तुम्हारेपास केन्दित चेतना होती है, तुम्हारे भीतर सजगता होती है, तो वह हर छिद्र मेंपहुँचने लगती है, शरीर के प्रत्येक रोयें-रोयें में, हर कोष में वह प्रवेश कर जाती है। और तुम्हारे पास बहुत सारे कोष हैं-सात करोड़ कोष है तुम्हारे शरीर मेंतुम एक बहुत बड़ा शहर हो, सात करोड़ कोष और वे सारे मूच्छित हैं। तुम्हारीचेतना उन तक कभी भी नहीं पहुँची। चेतना को बढाओ, और तब उसका हरएक कोष में प्रवेश हो जाता है। और जैसे ही चेतना कोष को स्पर्श करती है, वह भिन्न हो जाता है। उसका गुण ही बदल जाता है। एक आदमी सो रहा है, सुरज उगता है और वह आदमी जागजाता हैं। क्या वह वही आदमी है जो कि सोते समय था? क्या उसका सोना और जागना एक ही है? एक कली बन्द है और मुझाई हुईं है, और फिर सूरजउग जाता है और कली खिल जाती है और फूल बन जाती है। क्या यह फूल वही है? कुछ नया उसमें प्रवेश कर गया है। एक जीवन्तता, एक बढ़ने व खिलनेकी क्षमता प्रकट हुई है। एक चिडियाँ सो रही थी, जैसै कि मृत हो, मृत पदार्थहो । परन्तु सुरज निकल आया है और चिडियों अपने परों पर उड़ निकली हैं। क्या वह वही चिडियाँ हैं? यह अब एक नई ही घटना है। कुछ छू गया है, और चिडिया जीवित हो गई है। हर चीज़चुप थी और अब हर चीज़गीत गारही है। सुबह स्वयं एक गीत है। वही घटना एक बुद्ध के शरीर के कोषों में घटित होती है। उसे हम "बुद्ध-काया" के नाम से जानते हैं-एक जागृत आदमी का शरीर । एक बुद्ध का शरीर । वह वही शरीर नहीं है, जैसा कि तुम्हारा है। न ही वह शरीर है जो कि बुद्धहोने के पहले गौतम काथा। बुद्ध मरने के करीब हैं, तब कोई उनसे पूछता है-"वया आप मर रहे हैं मरने के बाद आप कहाँ होंगे?" बुद्ध ने कहा-जोशरीर पैदा हुआ था वह तो मरेगा। परन्तु एक और भी शरीर है-बुद्ध-कायर, बुद्ध का शरीर जो कि नतो कभी जन्मा था और न कभी मर सकता है। परन्तु मैंने वह शरीर छोड़ दिया है जो कि मुझें मिला था, जो कि मेरे माता-पित्ता ने मुझे दिया था। जैसे कि हरवर्ष सांप अपनी पुरानी केंचुली छोड़ देता है, मैंने भी उसे छोड़ दिया है। अबबुद्ध-कायाहै बुद्ध का शरीर है। इसका वया अर्थ होता है? तुम्हारा शरीर भी बुद्ध का शरीर हो सकता हैजब तुम्हारी चेतना हर कोष तक पहुँचती है, तो तुम्हारे अस्तित्व का गुणधर्म-हीबदल जाता है, रूपान्तरित हो जाता है क्योंकि तब प्रत्येक कोष जीवन्त हो गया, जाग गया, बुद्धत्व को उपलब्ध हो गया, पराधीनता समाप्त हुईं। तुम अपने मालिकहुए। मात्र केन्द्र के चैतन्य होने से तुम अपने मालिक हो जाते हो। यह सूत्र कहता है-चैतन्य के सूर्य में स्थिर होना ही एकमात्र दीपक हैइसलिए तुम मन्दिर में मिट्टी का दीपक लेकर क्यों जा रहे हो? अंतर का दीपकलेकर जाओ। तुम वेदी पर मोमबत्तियाँ क्यों जला रहे हो? उनसे कुछ भी न होगाअन्तर की ज्योति जला लो। बुद्ध-काया को प्राप्त कर लो! अपनेशरीर के हरकोष को जागने दो, अपने शरीर के एक भी कोष को मूच्छित न रहने दो। बौद्धों ने बुद्ध को कुछ अस्थियाँ बचा कर रखी हैं। लोग सोचते हैं कि यह अन्ध-विश्वास है। यह अन्धविश्वास नहीं है, क्योंकि वे अस्थियाँसाधारण हड्डियाँनहीं हैं। ये साघारण नहीं हैं। इन कोषों ने, इन टुकडों ने अस्थियों के इन-इलेक्ट्रॉन्सने कुछ ऐसा जाना है जो कि कभी-कभी ही होता है। कश्मीर में मुहम्मद काएक बाल संभाल कर रखा गया है। वह कोई साधारण बाल नहीं है। वह कोई अन्ध-विश्वास की बात नहीं है। उस बाल ने भी कुछ जाना है। इसे इस भाँति समझने की कोशिश करें, एक फूल जिसने कि कभी सुरजका उगना नहीं जाना, और एक वह फूल जिसने जाना है, सूर्यं कासाक्षात्कारकिया है, वे दोनों एक नहीं हो सकते। दोनों एक नहीं है। एक फूल जिसने किकमी सूर्य का उगना न जाना होउसने अपने भीतर कभी प्रकाश को बढ़ते नहीं जाना, क्योंकि वह तभी बढ़ता है, जबकि सुरज उगता है। वह फूल मरा हुआ है। उसने अपनी आत्मा कभी नहीं जानी। एक फूल जिसने सुरज के उगने केसाथ ही, अपने भीतर भी कुछ बढ़ते हुए अनुभव किया। उसने अपनी आत्मा कोजाना। अब फूल मात्र एक फूल नहीं है। उसने अपने भीतर एक गहरी क्रांतिको जाना है। भीतर कुछ सुगबुगाया है, कुछ उसके भीतर-जीवन्त हुआ है। इसलिए मुहम्मद का बाल एक दूसरी ही बात है, उसका गुण-धर्म ही अलग है। उसने एक आदमी को जाना। वह एक ऐसे आदमी के साथ रहा है जो किआंतरिक सूर्य ही हो गया, एक अंतर्प्रकाश ही बन गया। उस जाल ने एक गहरीडुबकी लगाई है किसी गहरे रहस्य में जो कि बडी मुश्किल से कभी घटता है। इस अन्तर्ज्योति में स्थापित होना ही एकमात्र दीया है जो कि परमात्मा की वेदीपर ले जाने योग्य है। उसके अलावा किसी और चीज़से कुछ भी न होगा। इस चैतन्य के केन्द्र को कैसे निर्मित किया जाये? मैं बहुत-सी विधियों कीबात करूंगा, किन्तु चूंकि मैं बुद्ध कीतथा बुद्ध-काया की बात कर रहा था, अच्छाहोगा कि बुद्ध से ही प्रारंभ करूँ । बुद्ध ने एक विधि खोजी, ने एक बहुत ही आश्चर्यजनकविधि - एक बहुत ही शक्तिशाली पद्धति आंतरिक अग्नि को जलाने के लिए चैतन्यके सूर्य का निर्मित करने के लिए। और न केवल उसे निर्मित करने के लिए बल्कि साथ-ही-साथ वह अन्तर्ज्योति शरीर के प्रत्येक कोष में भी प्रवेश करने लगती है। तुम्हारे सारे अस्तित्व में भी दौड़ने लगती है। बुद्ध ने श्वास का विधि की तरह उपयोग किया-होशपूर्वक श्वास लेना। इस विधि को"अनापान-सतीयोग" के नाम से आता जाता है - भीतर आती वबाहर जाती श्वास के प्रति सजगता । तुम श्वास लेते हो परन्तु यह अचेतन बातहै। और श्वास ही प्राण है, श्वास ही "एलीन-वाइडल" है, मुख्य शक्ति है, प्राणऊर्जा है, आलोक है-और वही अचेतन है। तुम्हें उसका कोई भी होश नहींयदि तुम्हें श्वास लेना पड़े तो तुम किसी भी क्षण मर जाओगे क्योंकि तब बडामुश्किल होगीश्वास लेना। मैंने कुछ मछलियों के बारे में सुना है जो कि छः मिनट से ज्यादा नहींसोती क्योंकि यदि वे इससे ज्यादा सोयें तो मर जायेंगी, क्योंकि वे नींद में श्वासलेना भूल जाती हैं। यदि उनको नींद गहरी हो जाये तो वे "श्वास लेना भूल जातीहैं, इसलिए वे मर जाती हैं। ये विशेष मछलियाँ छः मिनट से ज्यादा नहीं सोसकतीं। उन्हें समूह में रहना पड़ता है-सदैव समूह में कुछ मछलियाँ सो रहीहैं, दूसरी मछलियों को ध्यान रखना पड़ता है कि वे ज्यादा देर तक न सोती रहेंजब उनका समय हो जाता है, वे उनकी नींद को तोड़ देती है, वरना सोती हुईमछलियाँ मर जायेंगी। वे फिर से नहीं जागेंगी। यह वैज्ञानिक निरीक्षण है। यह तुम्हारे लिए भी एक समस्या हो जाये यदितुम्हें याद रखना पड़े कि तुम्हें श्वास लेना है। तुम्हें सतत याद रखना पड़े कितुम्हें सॉस लेना है, और तुम एक क्षण के लिए भी कुछ याद नहीं रख सकतेयदि एक क्षण भी भूल हो जाये तो तुम गये। इसलिए साँस अचैच्छिक क्रियाहै, वह तुम पर निर्भर नहीं है। यहाँ तक कि यदि तुम महीनों तक बेहोशी कीहालत में पड़े रहो, तो भी तुम श्वास लेते रहोगे। मैं कहता हूँ कि सचमुच ये मछलियों बहुत दुर्लभ है। और किसी दिन होसकता है कि आदमी को पता चले कि उनमें एक गहरी सजगता है जो कि आदमीके पास भी नहीं है क्योंकि सतत होशपूर्वक श्वास लेना एक बहुत ही कठिनबात है। हो सकता है उन मछलियों ने कोई विशेष सजगता उपलब्ध कर ली हो, जो कि हमारे पास नहीं है। बुद्ध ने श्वास को दो कार्य एक साथ करने के लिए वाहन की भाँति काममें लिया-एक : चेतना पैंदा करने के लिए, और दूसरा : उस चेतना कोशरीरके हर एक कोष में प्रवेश करा देने के लिए। उन्होंने कहा-होशपूर्वक श्वासलो। यह कोई प्राणायाम नहीं है। यह सिर्फ श्वास को बिना बदले सजगता काविषय बनाने का प्रयास है। तुम्हें अपनी श्वास कीगति में कोई परिवर्तन नहींकरना है। उसे वैसा ही रहने देना- नैसर्गिक जैसी वह है-वैसी ही रहने देनाहैं। उसे परिवर्तित न करें। कुछ और करें। जब तुम श्वासको भीतर ले जाओंतो होशपूर्वक लेजाओ। भीतर जातीश्वास के साथ तुम्हारी चेतना भी भीतर चलीजाए । जब श्वास बाहर आती हो तो तुम भी उसके साथ बाहर चले जाओ। भीतर जाओ, बाहर आओ। श्वास के साथ होशपूर्वक चलो। तुम्हारा ध्यान श्वास पर होउसके साथ वही, एक श्वास भी विस्मृत न हो जाये। बुद्ध ने कहा- बताते हैं कि यदि तुम एक घंटे भी श्वास के प्रति सजगरह सको तो तुम बुद्धत्व को उपलब्ध हो गये समझो। लेकिन एक श्वास भी नहीं चूकनी चाहिए। एक घंटा काफी है। यह बहुत छोटा मालूम पड़ता हैंकेवल समय का एकटुकड़ा, किन्तु वह है नहीं। जब तुम प्रयास करोगे तो सजगता का एक घंटा लाखों साल जैसा प्रतीत होगा क्योंकि साधारणतः तुम पाँच-छः सेकंड से ज्यादा सजग नहीं रह सकते, और वह भी जबकि कोई बहुत अधिक सावधान हो । अन्यथा तुम हर सेकंड पर चूक जाओगे। तुम शुरू करोगे कि श्वास भीतर जा रही हैं। श्वास भीतर चली गई है, और तुम कहीं और चले गये। अचानकतुम्हें याद आयेगा कि श्वास बाहर जा रही है। श्वास बाहर चली गई और तुम कहीं और जा चुके । श्वास के साथ चलने का अर्थ होता है कि एक भी विचार को न चलनेदिया जाये क्योंकि विचार तुम्हारा ध्यान खींच लेगा, विचार तुम्हारे ध्यान को कहीं और ले जाएगा। इसलिए बुद्ध कभी नहीं कहते कि बिचारों को रोको परन्तु वे कहते है - " हौशपूर्वक श्वास लो" विचार स्वतः ही रुक जायेंगे। तुम दोनों कामएक साथ नहीं कर सकते कि विचार भी करो और श्वास पर भी ध्यान रख सको। एक विचार तुम्हारे मस्तिष्क में आता है और तुम्हारा ध्यान कहीं और चलाजाता है। एक अकेला विचार, और तुम अपनी श्वास की प्रक्रिया के प्रति मूच्छित हो जाते हो। इसलिए बुद्ध ने बहुत ही सरल विधि का प्रयोग किया पर एक बहुतही जीवन्त प्रक्रिया का। उन्होंने अपने भिक्षुओ से कहा कि तुम चाहे जो भी करो, किन्तु अपनी भीतर आती और बाहर जाती श्वास के प्रति होश बना रहे। उसकेसाथ ही गति करो, उसके साथ ही बहो । जितना आवक तुम प्रयत्न करोगे, जितनाज्यादा प्रयास करोगे उतना ही तुम उसके प्रति जाग सकोगे। सजगता एक-एकसेकंड करके बढेगी। यह बहुत कठिन है। बहुत मुश्किल बात है। लेकिन एकबार भी तुम उसे अनुभव कर लो तो तुम दूसरे ही आदमी ही जाओगे-एक भिन्नही व्यक्ति, एक भिन्न ही जगत के। यह दो त्तरह से काम करती है : जब तुम होशपूर्वक भीतर श्वास लेते होओरबाहर छोड़ते हो, तो धीरेधीरे तुम अपने केन्द्र पर आ जाते हो, क्योंकि तुम्हारीश्वास तुम्हारे होने के केन्द्र को स्पर्श करती है। हर बार जब श्वास भीतर जातीहै, तो वह तुम्हारे अस्तित्व के, बीइंग के केन्द्र को छूती है । शारीरिक रूप सेतुम सोचते हो कि श्वास का काम तुम्हारे रक्त को साफ करने के लिए है, कि यह हृदय का एक कार्य है कि श्वास ले, कि वह शरीर की बात है। तुम सोचते हो कि श्वास लेना फेफडों का कार्य है, जो कि रक्त की सफाई के लिए एक पम्पिंग स्टेशन है, जो कि रवत को, आँक्सीजन पहुँचाता है और कारबन-डाईं-ऑक्साइडबाहर फेंकता है, जो कि बेकार हो चुकी और उसकी जगह ताजा आक्सीज़न भरता हैं। परन्तु यह केवल शारीरिक बात है। यदि तुम अपनी श्वास के प्रति सजगक्या। शुरू करो, तो धीरे-धीरे तुम गहरे चले जाओगे-तुम्हारे हृदय से भी गहरे, और एक दिन तुम्हें अपने केन्द्र की प्रतीति होगी तुम्हारी नाभि के पास। यह केन्द्रकी प्रतीति तभी होगी जबकि तुम लगातार अपने श्वास के साथ चलते जाओ-क्योंकिफिराने निकट तुम अपने केन्द्र के पहुँचते हो, उतनी ही तुम्हारी चेतना खोने की पाठशाला है। तुम शुरू कर सकते हो भीतर श्वास लेने से, जबकि वह तुम्हारी नाक को स्पर्श करे, वही से तुम सावधान हो जाओ। जितनी अधिक भीतर जाये, उतनी ही चेतना कठिन हो जायेगी और एक विचार भी आ गया, या कोईआवाज़ अथवा कुछ भी हो गया और तुम वापस आ जाओगे। यदि तुम अपने केन्द्र तक जा सको जहाँ कि एक क्षण के लिए श्वास रुक जाती है और एक अन्तराल आ जाता है तो छलांग लग सकती है। श्वास भीतर जाती है, श्वास बाहर आती है, इन दो के बीच में भी एक बहुत सूक्ष्म गैप है वह गैप ही तुम्हारा केन्द्र है। जब तुम श्वास के साथ चलते हो, तब कहीं बहुतश्रम के बाद तुम्हें उस गैप का पता चलता है जबकि श्वास की कोई गति नहीं होती, जबकि श्वास न तो आ रही होती है और न ही जा रही होती है। दो श्वासोंके बीच एक बहुत ही बारीक-सा अन्तराल हैं-एक गैप है। उस अन्तराल मेंतुम अपनेंकेन्द्र पर होते हो। इसलिए बुद्ध वे श्वास का प्रयोग किया केन्द्र के निकट, और अधिक निकटआने के लिए। जब तुम बाहर जाओश्वास के साथ, श्वास के प्रति सजग रहोफिर एक गैप है। सब मिलाकर दो गैप हैं-एक गैप भीतर और एक गैप बाहरश्वास भीतर जाती है, और श्वास बाहर जाती है, दोनों के बीच एक गैप है। श्वासबाहर जाती है, और श्वास भीतर जाती है : फिर एक गैप है। दूसरे गैप के प्रति सजग होना और भी ज्यादा कठिन है। इस प्रक्रिया को देखो। तुम्हाराकेन्द्र भीतर आती श्वास और बाहरजातीश्वास के बीच में है। एक दूसरा भी केन्द्र है-कॉस्मिक सेंटर ब्रह्म केन्द्र । तुमउसे परमात्मा कह सकते हो । जबकि श्वास बाहर जाती है और भीतर आती है, तब भी एक गैप है। उस गैप में ब्रह्म-केन्द्र है। ये दोनों केन्द्र दो भिन्न बातें नहीं हैं। परन्तु पहले तुम अपने आंतरिक केन्द्र के प्रति ही जागोगे और तब तुम अपने बाहर के केन्द्र के प्रति सजग हो जाओगे। और अन्ततः तुम जानोगे कि ये दोनोंकेन्द्र एक ही हैं। तब "भीतर" और "बाहर" का कोई अर्थ नहीं बचता। बुद्ध कहते हैं कि सजगतापूर्वक श्वास लो और तब तुम चैतन्य का एककेन्द्र निर्मित कर सकोगे। और एक बार यह केन्द्र निर्मित हो जाये तो चेतना तुम्हारेश्वास के साथ तुम्हारेरक्त में, कार्यों में प्रवाहित होने लगेगी, क्योंकि प्रत्येक कोष को हवा की, ऑक्सीजन की आवश्यकता है, और प्रत्येक कोष श्वास लेता है-हरकोष। और अब तो वैज्ञानिक कहते हैं कि लगता है कि यह पृथ्वी भी श्वासलेती है। और आइंस्टीन की संसार के फैलने की धारणा के अनुसार सैद्धान्तिकवैज्ञानिक ऐसा कहते है कि सारा जगत ही श्वास ले रहा है। जब तुम श्वास भीतर लेते हो तो तुम्हारी छाती फैल जाती है। जब तुम श्वासबाहर निकालते हो तब तुम्हारी छाती सिकुड़ जाती है अब सैद्धान्तिक वैज्ञानिककहते हैं कि ऐसा प्रतीत होता है कि सारा विश्व ही श्वास ले रहा है। जब जगत भीतर श्वास भीतर लेता है तो वह फैल जाता है। जब वह श्वास बाहर निकालता हैतो सिकुड़ जाता है। पुराने हिन्दू शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि सृष्टि ब्रह्मा की भीतर आतीएक श्वास है ओर प्रलय-बाहर जाती एक श्वास है। बहुत ही सूक्ष्म ढंग से, बहुत ही आणविक तरीके से, वही तुम्हारे भीतरहो रहा है। जब तुम्हारी सजगता तुम्हारे श्वास के साथ बिल्कुल एक हो जाती है, तब तुम्हारी श्वास तुम्हारी चेतना को हर कोष तक ले जाती है। अब किरणें प्रवेश कर जाती है और सारा शरीर बुद्ध-काया हो जाता है। वस्तुतः तब तुम्हारेपास कोई पदार्थगत्त शरीर नहीं होता। तुम्हारे चैतन्य का शरीर होता है। यही इससूत्र का अर्थ है-चैतन्य के सूर्य में स्थापित हो जानायही दीपक है। जिस तरह हमने बुद्ध की विधि समझो, अच्छा होगा कि हम एक दूसरीभी विधि समझ लें- एक और विधि। तन्त्र ने यौन का उपयोग किया। वह भीबडी ही जीवन्त शक्ति है । यदि तुम्हारे भीतर तुम्हें गहरे जाता हो, तो तुम्हें बहुतजीवन्त शक्ति का उपयोग करना पडेगा सर्वाधिक गहरी शक्ति का । तन्त्र यौनका उपयोग करता है। जब तुम यौन-कृत्य में लगे हो तब तुम सृजन के केन्द्र के बहुत ही निकट हो-जीवन के स्रोत के करीब। यदि तुम यौन- कृत्य में होशपूर्वकजा सको तो वह ध्यान हो जाता है। यह बहुत ही कठिन है-श्वास से भी अधिक कठिन । तुम थोडी मात्रा मेंहीशपूर्वक श्वास ले सकते हो। वह तुम कर सकते हो। परन्तु सेक्स की घटनाही ऐसी है कि उसे तुम्हारी मूर्च्छा की आवश्यकता है। यदि तुम होश में हो जाओ तो तुम्हारी काम वासना खो जायेगी। यदि तुम जाग जाओं तो भीतर कोई काम-वासना नहीं बचेगी। इसलिए तन्त्र सर्वाधिक कठिन बात जगत में की। चेतना को जगाने के प्रयोगों के इतिहास में तन्त्र सर्वाधिक गहरा गया। परन्तु सचमुच इसमें कोई अपने को धोखा भी दे सकता है, और तन्त्र केसाथ प्रवंचना बहुत सुगम है क्योंकि तुम्हारे अलावा कोई दूसरा नहीं जान सकताकि वास्तविकता क्या है। कोई भी नहीं जान सकता। किन्तु सौ में से एक व्यक्तितन्त्र को विधि में सफल हो सकता है क्योंकि सेक्स को मूर्च्छा की आवश्यकताहै। अतः एक तान्त्रिकको, तन्त्र के साधक को सेक्स पर काम करना पड़ता है, काम वासना के प्रति होश रखना पड़ता है जैसे कि श्वास पर रखते हैं। उसे उसकेप्रति सजग रहना पड़ता है। जब वस्तुतः ही वह यौन-कृत्य में जाये तो उसे होशको संभाले रखना पड़ता है। तुम्हारा शरीर, तुम्हारी काम-ऊर्जा अपने शिखर पर आ गई है और विस्फोटित होने को है। तन्त्र का साधक होशपूर्वक शिखर पर पहुँचता है, और उसकी एकविधि है जानने की । यदि काम- ऊर्जा का स्खलन अपनेआप हो जाये और तुमउसके मालिक न रह पाओ तो फिर तुम उसके प्रति सजग नहीं थे। तब अचेतनने अधिकार ले लिया। यौन अपने शिखर पर हो, और तुम कुछ भी न कर सकोसिवाय स्खलित होने के, तब वह स्खलन तुम्हारे द्वारा न हुआ। तुम काम कीप्रक्रिया शुरू कर सकते हो, तुम उसे समाप्त नहीं कर सकते। अंत सदैव अचेतनके अधिकार में रहता है। यदि तुम शिखर पर रुके रहो और वह तुम्हारा सचेतन कृत्य हो जाये कितुम चाहो तोस्खलन हो और तुम चाहो तो न हो, यदि तुम शिखर से वापसलौट सको बिना स्खलन के अथवायदि तुम शिखर पर घंटों ही रुक सको, यदिवह तुम्हारा जागृत कृत्य हो, त्तब ही तुम मालिक हो। और यदि कोई काम केशिखर पर पहुँच जायेवीर्य-स्खलन के बिल्कुल किनारे ही-और उसे रोके रहसके और उसके प्रति जागरूक रह सके, तब अचानक वह अपने गहनतम केन्द्र के प्रति जागता हैं-अचानक । और ऐसा नहीं है कि वह अपने ही गहनतम केन्द्रको जान पाता है, बल्कि वह अपने साथी के भी गहरे से गहरे केन्द्र को अनुभवकर पाता है। इसीलिए यदि कोई तन्त्र का साधक है और यदि वह पुरुष है तो वह सदैवअपने साथी की पूजा करेगा। उसका साथी मात्र यौन संबंध का विषय नहीं हैवह दिव्य है । वह एक देवी है। और वह कृत्य शारीरिक कतई नहीं है। यदितुम उसमें होशपूर्वक जा सको, तो वह गहरे से गहरा आध्यात्मिक कृत्य है। परन्तुहर गहनतम बात सदा ही असंभव जैसी होती है। इसलिए या तोश्वास का यासेक्स का उपयोग करो। महावीर ने भूख का उपयोग किया। वह भी एक गहरी बात है। भूख भीतुम्हारे स्वाद की भूख नहीं है अथवा किसी और चीज़के लिए नहीं है। वहतुम्हारे जीवन के लिएज़रूरी है। महावीर ने भूख का उपवास का उपयोग किया जागरण के लिए। यह कोई तप नहीं है। महावीर कोई तपस्वी नहीं हैं। लोगोंने उन्हें बिल्कुल गलत समझा। वे कोई तपस्वी नहीं थे। कोई समझदार आदमीकभी तपस्वी नहीं होता। परन्तु वे भूख को, उपवास को जागरण के लिए एक वाहन की तरह उपयोग कर रहे थे। शायद तुमने इस तथ्य पर कभी ध्यान दिया हो कि जब तुम्हारा पेट पूरा भरा हो तो तुम्हें नींद आने लगती है, तुम बेहोश होने लगते हो। तुम सोना चाहतेहो। परन्तु जब तुम भूखे हो, उपवास कर रहे ही तो तुम सो नहीं सकते। रात्रिमें भी तुम इघर-से-उघर करवटे लेते रहोगे। तुम उपवास में सो नहीं सकते। क्योंनहीं सो सकते। क्योंकि यह सोना तब जीवन के लिए खतरनाक है। अब नींदद्वितीय आवश्यकता है। पहली जरूरत भोजन की हैं-भोजन प्राप्त करने की। वहप्रथम आवश्यकता है। नींद अब कोई समस्या नहीं है। परन्तु महावीर ने उसका बहुत ही वैज्ञानिक ढंग से उपयोग किया। क्योंकिजब तुम उपवास कर रहे हो तो सो नहीं सकते। तुम चीजों को ज्यादा आसानीसे स्मस्या रख सकते ही। सजगता भी सरलता से आती है। और महावीर ने उपवासका उपयोग चेतना के जागरण के विषय की भाँति किया। वे लगातार खड़े रहते। तुमने बुद्ध की मूर्ति बैठी हुईं देखी होगी किन्तु महावीर की ज्यादातर मूर्तियाँखड़ी अवस्था में हैं। वे सदैव खड़े ही रहे थे। तुम्हें अपनी भूख का और भी अघिक अनुभव होगा यदि तुम खड़े हुए हो । यदि तुम बैठे हो तो तुम्हें वह कम मालूमहोगी और यदि तुम लेटे हुए हो तो वह और भी कम महसूस होगी। जब तुम खड़े हो तो सारा शरीर भूख महसूस करने लगता है। तुम्हें सारे शरीर में भूखको प्रतीति होगी। सारा शरीर बहने लगता है, वह भूख की एक सरिता हो जाता है। पैर से सिर तक तुम भूखे हो जाते हो। केवल पेट ही नहीं बल्कि पाँव भी, यहाँ तक सारा शरीर भूख को अनुभव करने लगता है। और महावीर चुपचाप निरीक्षणकरते हुए खड़े रहेंगे, भूख के समय-साथ बहते हुए-जैसे कि कोईश्वास केसाथ करता है। ऐसा कहा जाता है कि उनके मौन के बारह साल के अर्से मेंउन्होंने करीब ग्यारह वर्षों तक उपवास किया। केवल तीन सौ साठ दिन ही उन्होंनेभोजन लिया। उपवास एक विधि था उनके लिए। श्वास की तरह ही भोजन और यौन, ये भी सबसे अधिक गहरी चीजें है। जब तुम अपनी भूख के प्रति सजग होते चले जाते हो, केवल सजग होते जातेहो और कुछ नहीं करते हो, तो अचानक तुम केन्द्र पर फेंक दिये जाते हो, तुम्हारे "होने" तुम्हारे बीइंग पर सबसे पहले भूख ऊपरी परिधि पर होती है, यदि तुमपरिधि घर उसे न भरो, तो उससे गहरी पर्तें भूखी हो जाती हैं। और इस तरहचलता चला जाता है, और अन्ततः तुम्हारा सारा शरीर भूखा हो जाता है। जब सारा शरीर हो भूखा हो जाता है तुम केन्द्र पर फेंक दिये जाते हो। जब तुम्हें भूख की प्रतीति होती है, तो वहं झूठी होती है। वास्तव में, वहमात्र एक आदत होती है, न कि भूख । यदि तुम दिन के एक खास वक्त परभोजन करते हो, मान लो कि एक बजे, तोठीक एक बजे तुम्हें भूख की प्रतीतिहोती है। यह भूख झूठी है जिसका कि शरीर से कोई संबंध नहीं है। यदि तुमएक बजे भोजन न करो, तो दो बजे तुम्हें लगेगा कि भूख चली गई। यदि वहप्राकृतिक थी तो दो बजे उसे बढ़ जाना चाहिए था। वह चली क्यों गई? यदि वहवास्तविक थी तो दो बजे वह और भी अधिक गुनगनी चाहिए और तीन बजे उससेभी ज्यादा, और चार बजे उससे भी ज्यादा। परन्तु वह खो गई। वो एक आदतथी - एक बहुत ही ऊपरी आदत । यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति तीन सप्ताह तक उपवास करे, तभी केवल वहवास्तविक भूख तक आ सकता है। त्तब पहली बार वह जान सकेगा कि वास्तव में भूख वया होती है। अभी तुम यह कदापि नहीं जान सकते कि भूख भी इतनीशक्तिशाली जात है जितना कि यौन-परन्तु मैं वास्तविक भूख के लिए कह रहा हूँ। इसलिए ऐसा होता है कि जब तुम उपवास पर होते हो तो तुम्हारी काम-वासना मर जाती है, क्योंकि अब और भी अधिक आधारभूत। चीज़ दाँव पर है। भोजन तुम्हारे जीवित रहने के लिए है, यौन मनुष्य जाति के जीने के लिए है। यह एक दूर की घटना है जो कि तुम्हारे से संबंधित नहीं है। यौन जातिके लिए भोजन है, न कि तुम्हारे लिए। यौन के द्वारा मनुष्यता जी सकती हैइसलिए वह कोई तुम्हारी समस्या नहीं है। वह मानव जाति की समस्या है। तुमउसे छोड़ भी सकते हो, परन्तु तुम भोजन नहीं छोड़ सकते क्योंकि वह तुम्हारीअपनी समस्या है। वह तुमसे संबंधित है। यदि तुम उपवास करते चले जाओ तोशनैः-शनैः यौन खोजायेगा, और वह अधिकाधिक दूर चला जायेगा इस कारण से बहुत से लोग अपने को ही धोखा दिये चले जाते हैं। वेसोचते हैं कि यदि वे कम भोजन करते हैं तो वे ब्रह्मचारी हो गये हैं। वे ब्रह्मचारीनहीं ही गये हैं। केवल समस्या कोज़रा आगे सरका दिया गया है। उन्हें ठीक-ठाक भोजन दो काम-वासना लौट आएगी-पहले से भी अधिक शक्ति से, ज्यादाताजा व युवा होकर। यदि तुम तीन सप्ताह से भी ज्यादा समय तक उपवास करो, तो तुम्हारा साराशरीर भूखा हो जाता है। शरीर का रोयां-रोयां भूख महसूस करने लगता है। तबपहली बार तुम सही अर्थों में भूखे हुए हो, तुम्हारा पेट भूखा है, तुम्हारा साराशरीर ही भूखा हैं। तुम चारों ओर से एक गहरी भूख की अग्नि से धिरे हो महावीर ने इसका जागरण के लिए उपयोग किया, अतः वे भूखे रहते। उपवासकरते और सजग रहते। एक स्वस्थ आदमी तीन महीनों तक बिना भोजन के रह सकता है। एकसाधारणतः स्वस्थ आदमी तीन माह तक बिना भोजन किये रह सकता है। यदितुम-तीन माह तक उपवास करो तो अचानक एक दिन तुम मृत्यु के किनारे हीखड़े होगे। यह जानते हुए मृत्यु का साक्षात्कार करना हैं, और यह साक्षात्कारतब होता है जबकि तुम अपने शरीर को छोड़ रहे होते हो और अपने केन्द्र परभीतर छलांग लगा रहे होते हो। अब पूरा शरीर कोथक गया है। अब वह नहीं चलसकता। तुम अपने मूल उद्गम पर फेंके जा रहे हो और तुम अब शरीर में नहींरह सकते। धीरे-धीरे तुम शरीर में भीतर, और भीतर और भीतर फेंक दिये जाते हो। भोजन तुम्हें बाहर ले जाता है, उपवास तुम्हें भीतर ले जाता है। एक क्षणऐसा आता है जबकि शरीर तुम्हें और आगे नहीं ले जा सकत्ता । तब तुम अपनेकेन्द्र पर फेंक दिये जाते हो । उस क्षण में, तुम्हारा अंतर सूर्य, युक्त होता है। इसलिए महावीर तीन माह तक उपवास करेंगे-चार माह उपवास पर रहेंगे। वे असाघारणरूप से स्वस्थ थे। और तब अचानक वे गाँव में भोजन मांगने जाते। यह भी एक रहस्य है कि क्यों वे अचानक तीन-चार माह बादगाँव में भोजनमांगने जाते थे। वास्तव में, जब भी वे बिल्कुल किनारे ही होते और ऐसी घडीआ जाती कि एक क्षण भी घातक सिद्ध हो सकता था, तभी वे भोजन मांगने चले जाते। वे पुनः शरीर में प्रवेश कर जाते और फिर उपवास पर चले जाते, और तब फिर केन्द्र पर पहुँच जाते, फिर शरीर में प्रवेश करते और फिर केन्द्रपर चले जाते। तब वे उस मार्ग को महसूस करते : भीतर आती श्वास, बाहर जाती श्वास, - जीवन को शरीर में आते, जीवन कोशरीर से जातें। और तब वे इस प्रक्रिया केप्रति- सजग रहते। वे भोजन करते और वे इस प्रक्रिया के प्रति जागे हुए रहतेवे भोजन करते और वे फिर से शरीर में लौट आते, और फिर से उपवास परउतर जाते। ये वे लगातार करते रहे बारह वर्षों तक। यह एक आंतरिक प्रक्रिया थी। तो मैंने तीन बातों पर चर्चा कोःश्वास, यौन व भूख - बहुत ही बुनियादीव आघाभूत बातें। किसी केप्रति भी सजग हो जाओ। श्वास सबसे अधिक सरलहै। तन्त्र की विधि का उपयोग करना कठिन है। मन इसका उपयोग करना चाहेगापरन्तु वह बहुत कठिन होगा। उपवास की विधि भी कठिन है। मन उसे पसन्दनहींकरेगा। ये दोनों बहुत कठिन है। केवल श्वास की प्रक्रिया सबसे ज्यादा सरलहै। आने वाले युग में मुझें लगता है, कि बुद्ध की विधि बड़ी सहायक होगीयह मध्यम, सरल और बहुत खतरनाक भी नहीं है। इसलिए बुद्ध को मध्य मार्ग का सूत्र खोजने वाला कहते हैं- "मज्झिम-निकाय"-"स्वर्ण मार्ग।" यौन व भोजन, इन दोनों के यह मध्य में है। श्वास स्वर्णमार्ग है बिल्कुल बीच में और दूसरी भी बहुत-सी विधियाँ है। तुम किसी भी विधि से अन्तर्प्रकाशको उपलब्ध हो सकते हो। और एक बार भी तुम उसमें स्थिति हो जाओ तो तुम्हाराअन्तर्प्रकाश तुम्हारे शरीर के कोषों में प्रविष्ट होने लगता है। तब तुम्हारी सारीशारीरिक यांत्रिकता ताजा हो जाती है और तुम बुद्ध-काया को उपलब्ध कर सकतेहो- जागे हुए मनुष्य के शरीर को पा सकते हो।
तमाम उम्र जलूँ आफ़ताब हूँ मैं तो, न ढूँढिये मुझे केवल सराब हूँ मैं तो, किसी चमन का फ़सुर्दा गुलाब हूँ मैं तो . आपका तहे दिल से आभार . मिथिलेश भैया ,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ आपकी नवाजिश का दिल से शुक्रिया . बेहतरीन गजल आपको बधाई .
तमाम उम्र जलूँ आफ़ताब हूँ मैं तो, न ढूँढिये मुझे केवल सराब हूँ मैं तो, किसी चमन का फ़सुर्दा गुलाब हूँ मैं तो . आपका तहे दिल से आभार . मिथिलेश भैया ,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ आपकी नवाजिश का दिल से शुक्रिया . बेहतरीन गजल आपको बधाई .
पंजाब के अमृतसर में एक पॉश एरिया में जुआ खेलते लोगों से पुलिस ने 7. 50 लाख रुपए भी जब्त किए हैं। इतना ही नहीं एक जाने-माने बुक्की राजू टाइगर के साथ शहर के 21 लोगों को भी हिरासत में लिया गया है। वहीं, दूसरी तरफ पुलिस ने कोठी के मालिक और बुक्की राजू टाइगर के खिलाफ जुआ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ तंबाकू व सिगरेट एक्ट के अंतर्गत भी मामला दर्ज किया है। अमृतसर के पॉश एरिया बसंत एवेन्यू में कोठी के अंदर चल रहा जुआ पुलिस ने सोमवार को पकड़ लिया। एसीपी वरिंदर सिंह खोसा ने जानकारी दी कि पुलिस ने यह पूरी कार्रवाई सूचना के आधार पर की। जानकारी मिली थी कि बसंत एवेन्यू कोठी नंबर 6D में जुआ का खेल चल रहा है। इसके बाद टीम बनाई गई और बना समय खराब किए वहां रेड की गई। कोठी के अंदर तकरीबन 21 लोग इकट्ठे थे, जो जुआ खेल रहे थे और खिला भी रहे थे। पुलिस ने सभी आरोपियों की तलाशी लेकर सभी से 7. 50 लाख रुपए जब्त कर लिए। सभी बैठकर वहां सरेआम सिगरेट पी रहे थे। पुलिस ने सावधानी के तौर पर पूरी रेड का वीडियो भी बनाया। जिसमें सभी एक साथ बंद कमरे में शांति से जूआ खेलते दिखे। पुलिस ने कोठी के मालिक हरकीरत सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई की है। पुलिस ने हरकिरत और जुआ खिला रहे बुक्की राजू टाइगर के खिलाफ जुआ अधिनियम और सिगरेट एंड तंबाकू एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया है। सभी को गिरफ्तार करे पूछताछ की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पंजाब के अमृतसर में एक पॉश एरिया में जुआ खेलते लोगों से पुलिस ने सात. पचास लाख रुपए भी जब्त किए हैं। इतना ही नहीं एक जाने-माने बुक्की राजू टाइगर के साथ शहर के इक्कीस लोगों को भी हिरासत में लिया गया है। वहीं, दूसरी तरफ पुलिस ने कोठी के मालिक और बुक्की राजू टाइगर के खिलाफ जुआ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ तंबाकू व सिगरेट एक्ट के अंतर्गत भी मामला दर्ज किया है। अमृतसर के पॉश एरिया बसंत एवेन्यू में कोठी के अंदर चल रहा जुआ पुलिस ने सोमवार को पकड़ लिया। एसीपी वरिंदर सिंह खोसा ने जानकारी दी कि पुलिस ने यह पूरी कार्रवाई सूचना के आधार पर की। जानकारी मिली थी कि बसंत एवेन्यू कोठी नंबर छःD में जुआ का खेल चल रहा है। इसके बाद टीम बनाई गई और बना समय खराब किए वहां रेड की गई। कोठी के अंदर तकरीबन इक्कीस लोग इकट्ठे थे, जो जुआ खेल रहे थे और खिला भी रहे थे। पुलिस ने सभी आरोपियों की तलाशी लेकर सभी से सात. पचास लाख रुपए जब्त कर लिए। सभी बैठकर वहां सरेआम सिगरेट पी रहे थे। पुलिस ने सावधानी के तौर पर पूरी रेड का वीडियो भी बनाया। जिसमें सभी एक साथ बंद कमरे में शांति से जूआ खेलते दिखे। पुलिस ने कोठी के मालिक हरकीरत सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई की है। पुलिस ने हरकिरत और जुआ खिला रहे बुक्की राजू टाइगर के खिलाफ जुआ अधिनियम और सिगरेट एंड तंबाकू एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया है। सभी को गिरफ्तार करे पूछताछ की जा रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
रोहतास के सासाराम मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के सीता बीघा गांव के पास मंगलवार को अचानक एक ऑटो असंतुलित होकर पलट गया। जिससे ऑटो में सवार सभी 8 महिलाएं घायल हो गई। जिसमें से तीन को गंभीर चोट लगी है। मौके पर जुटे ग्रामीणों ने आनन-फानन में सभी महिलाओं को इलाज के लिए सदर अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया है। जहां उनका इलाज चल रहा है। सभी महिलाएं सासाराम मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के खंडा गांव की हैं, जो गांव से सासाराम जा रही थीं। ग्रामीणों ने इनके परिजनों को सूचना दी है। परिजन भी आनन-फानन में सदर अस्पताल पहुंच गए हैं। खंडा गांव की उर्मिला देवी, चेमली देवी, मालती देवी, सोनिया कुंअर, सुमित्रा देवी, मिनता देवी, सोनी देवी एवं अनीता देवी अपने गांव से ऑटो में सवार होकर सासाराम जा रही थीं। तभी सीता बीघा गांव के पास अचानक ऑटो असंतुलित होकर पलट गया। घायल की चीख-पुकार सुन जुटे ग्रामीणों ने उन्हें ऑटो से बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
रोहतास के सासाराम मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के सीता बीघा गांव के पास मंगलवार को अचानक एक ऑटो असंतुलित होकर पलट गया। जिससे ऑटो में सवार सभी आठ महिलाएं घायल हो गई। जिसमें से तीन को गंभीर चोट लगी है। मौके पर जुटे ग्रामीणों ने आनन-फानन में सभी महिलाओं को इलाज के लिए सदर अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया है। जहां उनका इलाज चल रहा है। सभी महिलाएं सासाराम मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के खंडा गांव की हैं, जो गांव से सासाराम जा रही थीं। ग्रामीणों ने इनके परिजनों को सूचना दी है। परिजन भी आनन-फानन में सदर अस्पताल पहुंच गए हैं। खंडा गांव की उर्मिला देवी, चेमली देवी, मालती देवी, सोनिया कुंअर, सुमित्रा देवी, मिनता देवी, सोनी देवी एवं अनीता देवी अपने गांव से ऑटो में सवार होकर सासाराम जा रही थीं। तभी सीता बीघा गांव के पास अचानक ऑटो असंतुलित होकर पलट गया। घायल की चीख-पुकार सुन जुटे ग्रामीणों ने उन्हें ऑटो से बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
लोगों की बुरी नजर उतारने वाले नींबू को इन दिनों खुद महंगाई की नजर लग गई है। गर्मियों में अपने रस से लोगों की थकान मिटाने वाले नींबू के दाम सुनकर ही अब तो लोगों को चक्कर आ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि गर्मी बढ़ते ही नींबू के दाम भी बढ़ गए हैं। दिल्ली के कई इलाकों में नींबू 300 से 350 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। ऐसे में लोगों को एक नींबू के 10 से 12 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि गर्मी अधिक बढ़ने से नींबू की डिमांड भी अधिक बढ़ गई है। अप्रैल की शुरूआत में ही नींबू 250 रुपये प्रति किलो मिल रहा था। लेकिन एक सप्ताह के भीतर ही नींबू 120 रुपये प्रती किलो महंगा हो गया है। बात करें हिमाचल कि तो हिमाचल प्रदेश में भी नींबू के दाम 200 रुपये पार कर चुके हैं। बात दें कि आमतौर पर अक्सर गर्मियों में नींबू के दाम बढ़ जाते हैं, लेकिन बेमौसम बारिश से भी ये महंगा हो जाता है। लेकिन इस बार नींबू के भाव बढ़ने के दूसरे कई कारण हैं। इसमें सबसे बड़ा कारण डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को माना जा रहा है। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने के कारण और मंडियों में आवक घटने के कारण नींबू के भावों में बढ़ोतरी हो रही है।
लोगों की बुरी नजर उतारने वाले नींबू को इन दिनों खुद महंगाई की नजर लग गई है। गर्मियों में अपने रस से लोगों की थकान मिटाने वाले नींबू के दाम सुनकर ही अब तो लोगों को चक्कर आ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि गर्मी बढ़ते ही नींबू के दाम भी बढ़ गए हैं। दिल्ली के कई इलाकों में नींबू तीन सौ से तीन सौ पचास रुपयापये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। ऐसे में लोगों को एक नींबू के दस से बारह रुपयापये चुकाने पड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि गर्मी अधिक बढ़ने से नींबू की डिमांड भी अधिक बढ़ गई है। अप्रैल की शुरूआत में ही नींबू दो सौ पचास रुपयापये प्रति किलो मिल रहा था। लेकिन एक सप्ताह के भीतर ही नींबू एक सौ बीस रुपयापये प्रती किलो महंगा हो गया है। बात करें हिमाचल कि तो हिमाचल प्रदेश में भी नींबू के दाम दो सौ रुपयापये पार कर चुके हैं। बात दें कि आमतौर पर अक्सर गर्मियों में नींबू के दाम बढ़ जाते हैं, लेकिन बेमौसम बारिश से भी ये महंगा हो जाता है। लेकिन इस बार नींबू के भाव बढ़ने के दूसरे कई कारण हैं। इसमें सबसे बड़ा कारण डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को माना जा रहा है। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने के कारण और मंडियों में आवक घटने के कारण नींबू के भावों में बढ़ोतरी हो रही है।
मुंगेलीः विकासखण्ड लोरमी के नवागांव जैत में अवैध रेत खनन व परिवहन के मामले में प्रशासन द्वारा बड़ी कार्यवाही की गई है। एसडीएम श्रीमती पार्वती पटेल ने बताया कि लोरमी क्षेत्र में अवैध रेत खनन व परिवहन पर लगातार कार्यवाही की जा रही है। इसी कड़ी में आज राजस्व विभाग की टीम द्वारा नवागांव जैत के नदी में चल रहे अवैध खनन के बाद परिवहन करने वाले दो ट्रैक्टर सहित 142 ट्राली डंप रेत को जब्त किया गया है। जब्त रेत और ट्रेक्टरों को माइनिंग विभाग को सुपुर्द किया जाएगा। जिनके द्वारा नियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि कलेक्टर श्री राहुल देव ने जिले में अवैध रेत खनन व परिवहन के मामले में सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अवैध रेत खनन व परिवहन के मामले में शासन के नियमानुसार संबंधितों पर कार्यवाही की जाएगी। इसी परिप्रेक्ष्य में यह कार्यवाही की गई।
मुंगेलीः विकासखण्ड लोरमी के नवागांव जैत में अवैध रेत खनन व परिवहन के मामले में प्रशासन द्वारा बड़ी कार्यवाही की गई है। एसडीएम श्रीमती पार्वती पटेल ने बताया कि लोरमी क्षेत्र में अवैध रेत खनन व परिवहन पर लगातार कार्यवाही की जा रही है। इसी कड़ी में आज राजस्व विभाग की टीम द्वारा नवागांव जैत के नदी में चल रहे अवैध खनन के बाद परिवहन करने वाले दो ट्रैक्टर सहित एक सौ बयालीस ट्राली डंप रेत को जब्त किया गया है। जब्त रेत और ट्रेक्टरों को माइनिंग विभाग को सुपुर्द किया जाएगा। जिनके द्वारा नियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि कलेक्टर श्री राहुल देव ने जिले में अवैध रेत खनन व परिवहन के मामले में सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अवैध रेत खनन व परिवहन के मामले में शासन के नियमानुसार संबंधितों पर कार्यवाही की जाएगी। इसी परिप्रेक्ष्य में यह कार्यवाही की गई।
पाकिस्तान में ट्रेन और बस कोलाइड 20 मृत, 55 घायल; यह घोषणा की गई है कि पाकिस्तान के सुक्कुर शहर के कंधरा कस्बे में यात्री ट्रेन और बस की टक्कर के कारण हुई दुर्घटना में 20 लोगों की मौत हो गई और 55 लोग घायल हो गए। सुकुर जिले में डिप्टी कमिश्नर राणा अडेल ने कहा कि 20 लोग मारे गए और 55 घायल हुए। एडेल ने बताया कि कई गंभीर रूप से घायल लोग थे और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। पाकिस्तानी रेलवे सेवा के अधिकारी तारिक कोलाची ने कहा कि बस दो हिस्सों में बंट गई। यह बताया गया कि दुर्घटना में मरने वाले सभी लोग जहां ट्रेन के कंडक्टर और उनके सहायक थे, वे मामूली रूप से घायल थे।
पाकिस्तान में ट्रेन और बस कोलाइड बीस मृत, पचपन घायल; यह घोषणा की गई है कि पाकिस्तान के सुक्कुर शहर के कंधरा कस्बे में यात्री ट्रेन और बस की टक्कर के कारण हुई दुर्घटना में बीस लोगों की मौत हो गई और पचपन लोग घायल हो गए। सुकुर जिले में डिप्टी कमिश्नर राणा अडेल ने कहा कि बीस लोग मारे गए और पचपन घायल हुए। एडेल ने बताया कि कई गंभीर रूप से घायल लोग थे और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। पाकिस्तानी रेलवे सेवा के अधिकारी तारिक कोलाची ने कहा कि बस दो हिस्सों में बंट गई। यह बताया गया कि दुर्घटना में मरने वाले सभी लोग जहां ट्रेन के कंडक्टर और उनके सहायक थे, वे मामूली रूप से घायल थे।
ट्राईसिटी की गोल्फ खिलाड़ी नौ साल की ओजस्विनी ने 15 अगस्त से पहले देश का नाम रोशन किया है। गोल्फर ओजस्विनी ने अमेरिका के नोर्थ कैरोलिना के लांगलीफ गोल्फ एंड फैमिली क्लब में आयोजित वर्ल्ड यूएस किड्स चैंपियनशिप में गर्ल्स अंडर -9 एज ग्रुप में दूसरा स्थान हासिल किया। जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। मोहाली गोल्फ रेंज में प्रेक्टिस करने वाली नौ साल की गोल्फर ओजस्विनी सारस्वत ने इतिहास रचते हुए विदेशी सरजमीं पर देश का नाम रोशन किया है। ओजस्विनी ने अमेरिका के नोर्थ कैरोलिना के लांगलीफ गोल्फ एंड फैमिली क्लब में आयोजित वर्ल्ड यूएस किड्स चैंपियनशिप में गर्ल्स अंडर -9 एज ग्रुप में दूसरा स्थान हासिल किया। ओजस्विनी ने तीसरे दौर के आयोजन में 33, 33, 36 स्कोर कर 3 अंडर पार 102 स्कोर किया था। वह आस्ट्रेलिया की विजेता एलिसिया जिक्सी लुडी से केवल 1 स्ट्रोक से पहले स्थान से चूक गई, जबकि अंतिम दिन तक दोनों गोल्फर्स का 36 स्कोर बराबर था। ओजस्विनी जेसी ग्रेवाल और हरमीत काहलों के नेतृत्व में कोचिंग लेती है। इस प्रतिष्ठित एनुअल चैंपियनशिप में यह उपलब्धि हासिल करने वाली ओजस्विनी भारत की पहली गोल्फर बनी हैं। प्रतियोगिता में 35 देशों के 110 से ज्यादा जूनियर्स गोल्फर्स से हिस्सा लिया था। ओजस्विनी ने हाल ही में एडिनबर्ग, स्काटलैंड में यूरोपीय यूएस किड्स चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल किया था। ओजस्विनी मोहाली के मानव रचना स्कूल की छात्रा है। वह पूर्व अंतरराष्ट्रीय गोल्फर और अर्जुन अवार्डी हरमीत सिंह काहलों के पास मोहाली गोल्फ रेंज में प्रेक्टिस करती हैं। हरमीत काहलों ने बताया कि ओजस्विनी बेहद शानदार गोल्फर हैं, उन्होंने बहुत छोटी उम्र में गोल्फ की तमाम बरीकियां सीख ली हैं। यही वजह है कि वह इंटरनेशनल स्तर मेडल जीतने लगी हैं। हरमीत काहलों ने बताया कि मेरी यही कोशिश रहती है कि ओजस्विनी की रूचि इस खेल में और बढ़े। कोई खिलाड़ी जब टूर्नामेंट में मेडल जीतना शुरू कर देता है तो उसकी रूचि बढ़ती जाती है। ओजस्विनी ने महज एक साल की उम्र में गोल्फ का अभ्यास करना शुरू कर दिया था। तीन साल की उम्र तक उसने गोल्फ के लगभग सभी कौशल सीख लिए थे। चार साल की उम्र में ओजस्विनी ने रेंज में पुट और लांग ड्राइव दोनों प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की। वह अच्छा प्रदर्शन कर रही है और उसका भविष्य मुझे उज्जवल दिखाई दे रहा है।
ट्राईसिटी की गोल्फ खिलाड़ी नौ साल की ओजस्विनी ने पंद्रह अगस्त से पहले देश का नाम रोशन किया है। गोल्फर ओजस्विनी ने अमेरिका के नोर्थ कैरोलिना के लांगलीफ गोल्फ एंड फैमिली क्लब में आयोजित वर्ल्ड यूएस किड्स चैंपियनशिप में गर्ल्स अंडर -नौ एज ग्रुप में दूसरा स्थान हासिल किया। जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। मोहाली गोल्फ रेंज में प्रेक्टिस करने वाली नौ साल की गोल्फर ओजस्विनी सारस्वत ने इतिहास रचते हुए विदेशी सरजमीं पर देश का नाम रोशन किया है। ओजस्विनी ने अमेरिका के नोर्थ कैरोलिना के लांगलीफ गोल्फ एंड फैमिली क्लब में आयोजित वर्ल्ड यूएस किड्स चैंपियनशिप में गर्ल्स अंडर -नौ एज ग्रुप में दूसरा स्थान हासिल किया। ओजस्विनी ने तीसरे दौर के आयोजन में तैंतीस, तैंतीस, छत्तीस स्कोर कर तीन अंडर पार एक सौ दो स्कोर किया था। वह आस्ट्रेलिया की विजेता एलिसिया जिक्सी लुडी से केवल एक स्ट्रोक से पहले स्थान से चूक गई, जबकि अंतिम दिन तक दोनों गोल्फर्स का छत्तीस स्कोर बराबर था। ओजस्विनी जेसी ग्रेवाल और हरमीत काहलों के नेतृत्व में कोचिंग लेती है। इस प्रतिष्ठित एनुअल चैंपियनशिप में यह उपलब्धि हासिल करने वाली ओजस्विनी भारत की पहली गोल्फर बनी हैं। प्रतियोगिता में पैंतीस देशों के एक सौ दस से ज्यादा जूनियर्स गोल्फर्स से हिस्सा लिया था। ओजस्विनी ने हाल ही में एडिनबर्ग, स्काटलैंड में यूरोपीय यूएस किड्स चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल किया था। ओजस्विनी मोहाली के मानव रचना स्कूल की छात्रा है। वह पूर्व अंतरराष्ट्रीय गोल्फर और अर्जुन अवार्डी हरमीत सिंह काहलों के पास मोहाली गोल्फ रेंज में प्रेक्टिस करती हैं। हरमीत काहलों ने बताया कि ओजस्विनी बेहद शानदार गोल्फर हैं, उन्होंने बहुत छोटी उम्र में गोल्फ की तमाम बरीकियां सीख ली हैं। यही वजह है कि वह इंटरनेशनल स्तर मेडल जीतने लगी हैं। हरमीत काहलों ने बताया कि मेरी यही कोशिश रहती है कि ओजस्विनी की रूचि इस खेल में और बढ़े। कोई खिलाड़ी जब टूर्नामेंट में मेडल जीतना शुरू कर देता है तो उसकी रूचि बढ़ती जाती है। ओजस्विनी ने महज एक साल की उम्र में गोल्फ का अभ्यास करना शुरू कर दिया था। तीन साल की उम्र तक उसने गोल्फ के लगभग सभी कौशल सीख लिए थे। चार साल की उम्र में ओजस्विनी ने रेंज में पुट और लांग ड्राइव दोनों प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की। वह अच्छा प्रदर्शन कर रही है और उसका भविष्य मुझे उज्जवल दिखाई दे रहा है।
वित्त सचिव सोमनाथन की अगुवाई में समिति का गठन किया गया है। जिनमें कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव के अलावा वित्त विभाग की विशेष सचिव और PFRDA चेयरमैन बतौर सदस्य शामिल है। पिछले महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि वित्त सचिव की अगुवाई में समिति सरकारी कर्मचारी के एनपीएस के पेंशन संबंधित मामलों पर समीक्षा करेगी। 7th pay Commission, NPS Review Committee : कर्मचारियों-पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर है। वित्त मंत्रालय द्वारा NPS की समीक्षा के लिए वित्त सचिव की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है। दरअसल देश में पुरानी पेंशन योजना की मांग तेज हो गई है। पुरानी पेंशन योजना की मांग को लेकर कर्मचारी उग्र हो रहे हैं। इस बीच अब एनपीएस में सुधार और पेंशन सिस्टम की समीक्षा के लिए समिति का गठन किया गया है। इसकी घोषणा निर्मला सीतारमण द्वारा की गई थी। वित्त मंत्रालय द्वारा सरकारी कर्मचारी के पेंशन सिस्टम की समीक्षा के लिए समिति का गठन वित्त सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में किया जाएगा। समिति कई मामलों की समीक्षा करेगी। वही सुझाव देगी कि क्या शासकीय कर्मचारियों पर लागू नेशनल पेंशन सिस्टम के मौजूदा ढांचे में बदलाव की जरूरत है? इसके साथ ही समिति राजकोषीय निहितार्थ और बजट के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए एनपीएस के तहत शामिल शासकीय कर्मचारी के पेंशन लागू में सुधार के लिए इसे संशोधित करने के भी सुझाव दे सकती है। वित्त सचिव सोमनाथन की अगुवाई में समिति का गठन किया गया है। जिनमें कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव के अलावा वित्त विभाग की विशेष सचिव और PFRDA चेयरमैन बतौर सदस्य शामिल है। पिछले महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि वित्त सचिव की अगुवाई में समिति सरकारी कर्मचारी के एनपीएस के पेंशन संबंधित मामलों पर समीक्षा करेगी। वही समिति को कहा गया कि वह नई पेंशन स्कीम के मौजूदा फ्रेमवर्क और दायरे के संदर्भ में बदलाव की सिफारिश करे। साथ ही समिति को नई पेंशन स्कीम के तहत पेंशन लाभ और आकर्षक बनाने पर भी सुझाव दिया जा सकता है। हालांकि यह जो किसी भी मामले में आम जनता के हितों और बजट के अनुशासन के विपरीत ना हो। इसका खास ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि समिति द्वारा रिपोर्ट कब दिया जाएगा इस पर फिलहाल कुछ नहीं कहा गया समिति राज्य से बात करने के बाद अपनी सिफारिश पेश करेगी। कई राज्य में पुरानी पेंशन योजना की मांग तेज हो गई है। वहीं केंद्रीय कर्मचारी द्वारा भी पुरानी पेंशन योजना की मांग की जा रही है कई राज्य में पुरानी पेंशन योजना को लागू कर दिया गया है। कांग्रेस शासित राज्य में पुरानी पेंशन योजना लागू होने के बाद बीजेपी शासित राज्यों में भी इसे लागू करने को लेकर कर्मचारी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वही राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल में पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने के बाद एनपीएस के तहत जमा फंड को वापस दिए जाने का अनुरोध राज्य सरकारों द्वारा किया जा रहा है। हालांकि वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि 1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के संबंध में एपीएस बहाल करने के किसी भी तरह के प्रस्ताव सामने नहीं है और सरकार इस पर कोई विचार नहीं कर रही है। जबकि आगामी चुनाव और कर्मचारियों की मांग को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार द्वारा भी पेंशन व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि पेंशन व्यवस्था को लेकर विचार किया जा रहा है। राजनीतिक दबाव बना है। जिसके बाद पेंशन व्यवस्था में बदलाव की बात कही जा रही है। - एनपीएस के तहत कटने वाली राशि इक्विटी मार्केट और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश की जाती है। ऐसे में इक्विटी मार्केट में तेजी एनपीएस के पक्ष में है। - साथ ही पेंशन कंप्यूटेशन का भी प्रावधान नहीं है। - पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन का लाभ दिया जाता है। - कर्मचारियों को मासिक पेंशन के लिए वेतन की कटौती नहीं की जाती है। - इसके अलावा जनरल प्रोविडेंट फंड की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई है। - कर्मचारी के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने पर भी उसे पेंशन का लाभ दिया जाता है। - सरकार की ओर से महंगाई भत्ता वृद्धि की सुविधा और वेतन आयोग में सुधार को लागू किया गया है। - साथ ही जीपीएफ के ब्याज पर आयकर नहीं लगता है। - 40% पेंशन कंप्यूटेशन के प्रावधान भी रखे गए हैं।
वित्त सचिव सोमनाथन की अगुवाई में समिति का गठन किया गया है। जिनमें कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव के अलावा वित्त विभाग की विशेष सचिव और PFRDA चेयरमैन बतौर सदस्य शामिल है। पिछले महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि वित्त सचिव की अगुवाई में समिति सरकारी कर्मचारी के एनपीएस के पेंशन संबंधित मामलों पर समीक्षा करेगी। सातth pay Commission, NPS Review Committee : कर्मचारियों-पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर है। वित्त मंत्रालय द्वारा NPS की समीक्षा के लिए वित्त सचिव की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है। दरअसल देश में पुरानी पेंशन योजना की मांग तेज हो गई है। पुरानी पेंशन योजना की मांग को लेकर कर्मचारी उग्र हो रहे हैं। इस बीच अब एनपीएस में सुधार और पेंशन सिस्टम की समीक्षा के लिए समिति का गठन किया गया है। इसकी घोषणा निर्मला सीतारमण द्वारा की गई थी। वित्त मंत्रालय द्वारा सरकारी कर्मचारी के पेंशन सिस्टम की समीक्षा के लिए समिति का गठन वित्त सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में किया जाएगा। समिति कई मामलों की समीक्षा करेगी। वही सुझाव देगी कि क्या शासकीय कर्मचारियों पर लागू नेशनल पेंशन सिस्टम के मौजूदा ढांचे में बदलाव की जरूरत है? इसके साथ ही समिति राजकोषीय निहितार्थ और बजट के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए एनपीएस के तहत शामिल शासकीय कर्मचारी के पेंशन लागू में सुधार के लिए इसे संशोधित करने के भी सुझाव दे सकती है। वित्त सचिव सोमनाथन की अगुवाई में समिति का गठन किया गया है। जिनमें कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव के अलावा वित्त विभाग की विशेष सचिव और PFRDA चेयरमैन बतौर सदस्य शामिल है। पिछले महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि वित्त सचिव की अगुवाई में समिति सरकारी कर्मचारी के एनपीएस के पेंशन संबंधित मामलों पर समीक्षा करेगी। वही समिति को कहा गया कि वह नई पेंशन स्कीम के मौजूदा फ्रेमवर्क और दायरे के संदर्भ में बदलाव की सिफारिश करे। साथ ही समिति को नई पेंशन स्कीम के तहत पेंशन लाभ और आकर्षक बनाने पर भी सुझाव दिया जा सकता है। हालांकि यह जो किसी भी मामले में आम जनता के हितों और बजट के अनुशासन के विपरीत ना हो। इसका खास ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि समिति द्वारा रिपोर्ट कब दिया जाएगा इस पर फिलहाल कुछ नहीं कहा गया समिति राज्य से बात करने के बाद अपनी सिफारिश पेश करेगी। कई राज्य में पुरानी पेंशन योजना की मांग तेज हो गई है। वहीं केंद्रीय कर्मचारी द्वारा भी पुरानी पेंशन योजना की मांग की जा रही है कई राज्य में पुरानी पेंशन योजना को लागू कर दिया गया है। कांग्रेस शासित राज्य में पुरानी पेंशन योजना लागू होने के बाद बीजेपी शासित राज्यों में भी इसे लागू करने को लेकर कर्मचारी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वही राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल में पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने के बाद एनपीएस के तहत जमा फंड को वापस दिए जाने का अनुरोध राज्य सरकारों द्वारा किया जा रहा है। हालांकि वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि एक जनवरी दो हज़ार चार के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के संबंध में एपीएस बहाल करने के किसी भी तरह के प्रस्ताव सामने नहीं है और सरकार इस पर कोई विचार नहीं कर रही है। जबकि आगामी चुनाव और कर्मचारियों की मांग को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार द्वारा भी पेंशन व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि पेंशन व्यवस्था को लेकर विचार किया जा रहा है। राजनीतिक दबाव बना है। जिसके बाद पेंशन व्यवस्था में बदलाव की बात कही जा रही है। - एनपीएस के तहत कटने वाली राशि इक्विटी मार्केट और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश की जाती है। ऐसे में इक्विटी मार्केट में तेजी एनपीएस के पक्ष में है। - साथ ही पेंशन कंप्यूटेशन का भी प्रावधान नहीं है। - पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन का लाभ दिया जाता है। - कर्मचारियों को मासिक पेंशन के लिए वेतन की कटौती नहीं की जाती है। - इसके अलावा जनरल प्रोविडेंट फंड की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई है। - कर्मचारी के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने पर भी उसे पेंशन का लाभ दिया जाता है। - सरकार की ओर से महंगाई भत्ता वृद्धि की सुविधा और वेतन आयोग में सुधार को लागू किया गया है। - साथ ही जीपीएफ के ब्याज पर आयकर नहीं लगता है। - चालीस% पेंशन कंप्यूटेशन के प्रावधान भी रखे गए हैं।
Don't Miss! आशा भोंसले आज अपना 86वां जन्मदिन मना रही हैं और इस मौके पर बधाईयों का तांता लग चुका है। लोग उन्हें जन्मदिन की बधाई तो दे ही रहे हैं, साथ ही उनके पुराने, सदाबहार गीतों को भी याद कर रहे हैं। उन्होंने 12 हजार से ज्यादा गाने गाए हैं। उन्होंने कुल 20 भाषाओं में 1000 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। ये हैरानी की बात नहीं है कि संगीत के लिए उनका ये प्रेम इस हद तक था कि उन्होंने 10 साल की छोटी सी उम्र में गाना शुरू कर दिया था। आशा भोसले की चुलबुली और अल्हड़ आवाज़ का बॉलीवुड दीवाना था। पुराने ज़माने में उनकी खनकती हुई सी आवाज़ किसी को भी दीवाना बना देती है। इसलिए उनके गानों में भी वो बेबाकी दिखाई देती थी चाहे वो ओ हसीना ज़ुल्फोंवाली हो या फिर ये लड़का हाय अल्लाह।
Don't Miss! आशा भोंसले आज अपना छियासीवां जन्मदिन मना रही हैं और इस मौके पर बधाईयों का तांता लग चुका है। लोग उन्हें जन्मदिन की बधाई तो दे ही रहे हैं, साथ ही उनके पुराने, सदाबहार गीतों को भी याद कर रहे हैं। उन्होंने बारह हजार से ज्यादा गाने गाए हैं। उन्होंने कुल बीस भाषाओं में एक हज़ार से ज्यादा फिल्मों में काम किया। ये हैरानी की बात नहीं है कि संगीत के लिए उनका ये प्रेम इस हद तक था कि उन्होंने दस साल की छोटी सी उम्र में गाना शुरू कर दिया था। आशा भोसले की चुलबुली और अल्हड़ आवाज़ का बॉलीवुड दीवाना था। पुराने ज़माने में उनकी खनकती हुई सी आवाज़ किसी को भी दीवाना बना देती है। इसलिए उनके गानों में भी वो बेबाकी दिखाई देती थी चाहे वो ओ हसीना ज़ुल्फोंवाली हो या फिर ये लड़का हाय अल्लाह।
पूरा देश इस वक्त कोरोना वायरस की लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे में हर एक शख्स इस बीमारी को हराने में अपना योगदान दे रहा है। ना केवल बड़े बल्कि बच्चे भी कोरोना को हराने के लिए अपनी तरफ से दान करने की कोशिश कर रहे हैं। कानपुरः पूरा देश इस वक्त कोरोना वायरस की लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे में हर एक शख्स इस बीमारी को हराने में अपना योगदान दे रहा है। ना केवल बड़े बल्कि बच्चे भी अपनी तरफ से दान करने की कोशिश कर रहे हैं। एक ऐसा ही किस्सा उत्तर प्रदेश के कानपुर से आया है। जहां पर बच्चों ने पुलिसकर्मियों को अपनी गुल्लक दी और कहा कि इसे मोदी और योगी अंकल के पास पहुंचा दो। यूपी के कानपुर में लॉकडाउन के मद्देनजर गश्त कर रहे सिपाहियों को रोककर कुछ मासूम बच्चों ने अपनी-अपनी गुल्लक भेंट कर दी और मासूमों ने अपील की कि इन गुल्लकों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा दो, जिससे कोरोना से लड़ा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि हम अपना सारा पैसा देने को तैयार हैं और देश व प्रदेशवासियों को पीएम और सीएम बचा लें। मिली जानकारी के अनुसार कानपुर के थाना कल्याणपुर के अंतर्गत रावतपुर गांव में जब पुलिस लॉकडाउन का पालन करवाने के लिए गश्त पर पहुंची, तो लोगों ने फूल माला और नाश्ते का सामान देकर उनका स्वागत किया। लेकिन इसी बीच कुछ मासूम बच्चे वहां पहुंचे और अपनी गुल्लक में इकट्ठा किये हुए पैसे पुलिस कर्मियों को थमा कर उसे मुख्यमंत्री राहतकोष में देने की अपील की,बच्चों के इस समपर्ण को देख वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी तालियां बजाकर उनका हौसला बढ़ाया। इस दौरान नन्हे मुन्हे बच्चों से जब बात की गई तो उन्होंने जो बाते कहीं वो हर किसी के दिल को छू गई। आठ साल की बच्ची गीत ने बताया कि कोरोना से पूरा देश लड़ रहा है,ऐसे में सभी को सावधानी बरतनी चाहिए। गीत ने कहा कि वो अपनी सेविंग के पैसे राहतकोष में इसलिये दे रही है ताकि कोरोना से लड़ा जा सके। तो वहीं मासूम वैभव को लॉकडाउन के चलते गांव में फंसे अपने पापा की चिंता सता रही है, राहत कोष में दान देने के लिए अपनी गुल्लक लेकर पहुंची वैभव ने कहा कि मोदी और योगी अंकल मेरी सेविंग के पैसे ले लीजिए और जल्दी से कोरोना को खत्म कर के सबको ठीक कर दीजिए, मेरे पापा की दवा खत्म हो गई है और वो लॉकडाउन की वजह से दवा लेने नहीं आ पा रहे हैं। पांच वर्षीय मासूम आलोक ने कहा कि वो अपनी सेविंग के पैसे इसलिए दे रहा है क्योंकि बहुत से लोग भूखे सोते हैं, तो उसके पैसों से कुछ लोगों को खाना मिल जाएगा। यह सब देख मौके पर मौजूद इलाकाई लोग भावुक हो गए तो वहीं पुलिस भी अपनी भावनाओं छिपा न पाए। देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
पूरा देश इस वक्त कोरोना वायरस की लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे में हर एक शख्स इस बीमारी को हराने में अपना योगदान दे रहा है। ना केवल बड़े बल्कि बच्चे भी कोरोना को हराने के लिए अपनी तरफ से दान करने की कोशिश कर रहे हैं। कानपुरः पूरा देश इस वक्त कोरोना वायरस की लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे में हर एक शख्स इस बीमारी को हराने में अपना योगदान दे रहा है। ना केवल बड़े बल्कि बच्चे भी अपनी तरफ से दान करने की कोशिश कर रहे हैं। एक ऐसा ही किस्सा उत्तर प्रदेश के कानपुर से आया है। जहां पर बच्चों ने पुलिसकर्मियों को अपनी गुल्लक दी और कहा कि इसे मोदी और योगी अंकल के पास पहुंचा दो। यूपी के कानपुर में लॉकडाउन के मद्देनजर गश्त कर रहे सिपाहियों को रोककर कुछ मासूम बच्चों ने अपनी-अपनी गुल्लक भेंट कर दी और मासूमों ने अपील की कि इन गुल्लकों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा दो, जिससे कोरोना से लड़ा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि हम अपना सारा पैसा देने को तैयार हैं और देश व प्रदेशवासियों को पीएम और सीएम बचा लें। मिली जानकारी के अनुसार कानपुर के थाना कल्याणपुर के अंतर्गत रावतपुर गांव में जब पुलिस लॉकडाउन का पालन करवाने के लिए गश्त पर पहुंची, तो लोगों ने फूल माला और नाश्ते का सामान देकर उनका स्वागत किया। लेकिन इसी बीच कुछ मासूम बच्चे वहां पहुंचे और अपनी गुल्लक में इकट्ठा किये हुए पैसे पुलिस कर्मियों को थमा कर उसे मुख्यमंत्री राहतकोष में देने की अपील की,बच्चों के इस समपर्ण को देख वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी तालियां बजाकर उनका हौसला बढ़ाया। इस दौरान नन्हे मुन्हे बच्चों से जब बात की गई तो उन्होंने जो बाते कहीं वो हर किसी के दिल को छू गई। आठ साल की बच्ची गीत ने बताया कि कोरोना से पूरा देश लड़ रहा है,ऐसे में सभी को सावधानी बरतनी चाहिए। गीत ने कहा कि वो अपनी सेविंग के पैसे राहतकोष में इसलिये दे रही है ताकि कोरोना से लड़ा जा सके। तो वहीं मासूम वैभव को लॉकडाउन के चलते गांव में फंसे अपने पापा की चिंता सता रही है, राहत कोष में दान देने के लिए अपनी गुल्लक लेकर पहुंची वैभव ने कहा कि मोदी और योगी अंकल मेरी सेविंग के पैसे ले लीजिए और जल्दी से कोरोना को खत्म कर के सबको ठीक कर दीजिए, मेरे पापा की दवा खत्म हो गई है और वो लॉकडाउन की वजह से दवा लेने नहीं आ पा रहे हैं। पांच वर्षीय मासूम आलोक ने कहा कि वो अपनी सेविंग के पैसे इसलिए दे रहा है क्योंकि बहुत से लोग भूखे सोते हैं, तो उसके पैसों से कुछ लोगों को खाना मिल जाएगा। यह सब देख मौके पर मौजूद इलाकाई लोग भावुक हो गए तो वहीं पुलिस भी अपनी भावनाओं छिपा न पाए। देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
नयी दिल्ली, छह नवंबर अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी खेल महासंघ (आईएसएसएफ) ने कहा कि सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक के बिना किसी सूचना के वैश्विक संस्था का पेज हटाये जाने से उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण आईएसएसएफ ने '#अनब्लॉक_आईएसएसएफ_फेसबुक' अभियान शुरू किया है। ट्विटर और इंस्टाग्राम के अलावा दुनिया भर के निशानेबाज खेल की संचालन संस्था के अपडेट के लिये आईएसएसएफ फेसबुक पेज पर निर्भर रहते हैं। इस पेज को 14 जनवरी 2010 में बनाया गया था। आईएसएसएफ ने निशानेबाजी जगत से एकजुटता दिखाने का अनुरोध किया ताकि फेसबुक अपने फैसले को पलट दे। आईएसएसएफ का मुख्यालय म्यूनिख में है और पेज को हटाने का कारण भी पता नहीं है लेकिन फेसबुक की हथियारों पर कड़ी नीति है।
नयी दिल्ली, छह नवंबर अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी खेल महासंघ ने कहा कि सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक के बिना किसी सूचना के वैश्विक संस्था का पेज हटाये जाने से उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण आईएसएसएफ ने '#अनब्लॉक_आईएसएसएफ_फेसबुक' अभियान शुरू किया है। ट्विटर और इंस्टाग्राम के अलावा दुनिया भर के निशानेबाज खेल की संचालन संस्था के अपडेट के लिये आईएसएसएफ फेसबुक पेज पर निर्भर रहते हैं। इस पेज को चौदह जनवरी दो हज़ार दस में बनाया गया था। आईएसएसएफ ने निशानेबाजी जगत से एकजुटता दिखाने का अनुरोध किया ताकि फेसबुक अपने फैसले को पलट दे। आईएसएसएफ का मुख्यालय म्यूनिख में है और पेज को हटाने का कारण भी पता नहीं है लेकिन फेसबुक की हथियारों पर कड़ी नीति है।