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Seraikela (Bhagya Sagar Singh) : जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत नेगटासाई गांव में बाबा स्पोर्टिंग क्लब द्वारा आयोजित दो दिवसीय फुटबाल प्रतियोगिता के समापन समारोह में रविवार को बतौर मुख्य अतिथि भाजपा नेता गणेश महाली उपस्थित थे, उन्होंने खिलाड़ियों को उत्साहित करते हुए आयोजकों की सराहना की. उन्होंने कहा खेल के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने के उद्देश्य से किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता पड़ती है, तो वे हरसंभव मदद करने को हमेशा तत्पर रहेंगे.
उन्होंने कहा कि खेल को जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिये. खेल स्वास्थ्य के साथ साथ टीम भावना सहित प्रतियोगी क्षमता एवं एकाग्रता का भी विकास करता है. आप खेल के मैदान में जो कुछ भी सीखते हैं वह आपके पूरे जीवन के लिए होता है. इस अवसर पर कार्तिक दास, कार्तिक महतो, कैलाश महतो, रामपद महतो, विमल महतो, प्रभात रंजन, सोनू सरदार, घनश्याम महतो, सतीश महतो, छगनलाल साहू एवं तापस महतो सहित अन्य उपस्थित थे.
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Seraikela : जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत नेगटासाई गांव में बाबा स्पोर्टिंग क्लब द्वारा आयोजित दो दिवसीय फुटबाल प्रतियोगिता के समापन समारोह में रविवार को बतौर मुख्य अतिथि भाजपा नेता गणेश महाली उपस्थित थे, उन्होंने खिलाड़ियों को उत्साहित करते हुए आयोजकों की सराहना की. उन्होंने कहा खेल के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने के उद्देश्य से किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता पड़ती है, तो वे हरसंभव मदद करने को हमेशा तत्पर रहेंगे. उन्होंने कहा कि खेल को जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिये. खेल स्वास्थ्य के साथ साथ टीम भावना सहित प्रतियोगी क्षमता एवं एकाग्रता का भी विकास करता है. आप खेल के मैदान में जो कुछ भी सीखते हैं वह आपके पूरे जीवन के लिए होता है. इस अवसर पर कार्तिक दास, कार्तिक महतो, कैलाश महतो, रामपद महतो, विमल महतो, प्रभात रंजन, सोनू सरदार, घनश्याम महतो, सतीश महतो, छगनलाल साहू एवं तापस महतो सहित अन्य उपस्थित थे.
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लगातार हो रही बारिश के कारण मुंबई के डोंगरी इलाके में एक 4 मंजिला इमारत ढह गई. जानकारी के मुताबिक, टंडेल स्ट्रीट स्थित 'केसरभाई' नाम की इमारत करीब 11:40 बजे ढह गई. हादसे के बाद मलबे में कम से कम 50 से ज्यादा लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है. अब तक इस हादसे में 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. मरने वाले लोगों में 6 पुरुष और 4 महिलाएं हैं. अभी तक एक बच्चे सहित नौ लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला जा सका है. उन्हें इलाज के लिए जेजे अस्पताल पहुंचाया गया है.
हादसे की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और एनडीआरएफ की 3 टीमें घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य कर रही हैं. तंग गली होने की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है. ऐसे में यहां के स्थानीय लोग ही मदद में जुट गए हैं. वहीं लोगों ने ह्यूमन चेन बनाकर मलबा हटाने में मदद करने की भी कोशिश की.
ये इमारत करीब 80-100 साल पुरानी बताई जा रही है. बीएमसी ने इस जर्जर इमारत की चेतावनी भी दी थी. लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.
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लगातार हो रही बारिश के कारण मुंबई के डोंगरी इलाके में एक चार मंजिला इमारत ढह गई. जानकारी के मुताबिक, टंडेल स्ट्रीट स्थित 'केसरभाई' नाम की इमारत करीब ग्यारह:चालीस बजे ढह गई. हादसे के बाद मलबे में कम से कम पचास से ज्यादा लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है. अब तक इस हादसे में दस लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. मरने वाले लोगों में छः पुरुष और चार महिलाएं हैं. अभी तक एक बच्चे सहित नौ लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला जा सका है. उन्हें इलाज के लिए जेजे अस्पताल पहुंचाया गया है. हादसे की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और एनडीआरएफ की तीन टीमें घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य कर रही हैं. तंग गली होने की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है. ऐसे में यहां के स्थानीय लोग ही मदद में जुट गए हैं. वहीं लोगों ने ह्यूमन चेन बनाकर मलबा हटाने में मदद करने की भी कोशिश की. ये इमारत करीब अस्सी-एक सौ साल पुरानी बताई जा रही है. बीएमसी ने इस जर्जर इमारत की चेतावनी भी दी थी. लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. .
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लाभ होता है ऐसी मान्यता छोड़कर अपने स्वभाव में एकाग्रता करना सो उसका लाभ इन्द्रियोंके विषयभूत पदार्थोंको जीतना अथवा सम्यकदर्शन है, और यही भगवानकी सच्ची स्तुति है ।
प्रश्नः- इसमें कहीं भी भगवानका तो नाम ही नहीं आता और मात्र आत्मा ही आत्माकी वात है, तब फिर इसे भगवानको स्तुति कैसे कहते हो ?
उत्तरः - यहाँ भगवानकी निश्चय स्तुतिकी बात है । निश्चयसे तो जैसा भगवानका जात्मा है वैसा ही स्वयं है, इसलिये निश्चय में आत्माकी ही वात आती है। परकी स्तुति ( भगवानका लक्ष ) निश्चय स्तुति नहीं है, किन्तु शुभराग है। पूर्ण स्वभावकी
प्रतीति करना ही भगवानको निश्चय स्तुति है, यही आत्मधर्म है । अपने लिये तो स्वयं ही भगवान है, इसलिये निश्चयसे जो अपनी स्तुति है सो वही भगवानकी स्तुति है। भगवान में और अपने में निश्चयसे कोई भी अन्तर माने तो वह भगवानकी स्तुति नहीं कर सकता । दृष्टि में असंग चैतन्य स्वरूपको स्तुति की सो वह जितेन्द्रिय हो गया । अपने अलग स्वरूपको दृष्टि करने पर सभी पर पदार्थोको और विकारको अपनेने पृथक् जानना ही जितेन्द्रियता है । यहाँ टीकामें द्रव्येन्द्रिय भावेन्द्रिय और इन्द्रियोंके । विषयभूत पर पदार्थोंको जीतने की बात क्रमशः की गई है, परन्तु उसमें कोई क्रम नहीं होता । जहाँ अपने स्वभावकी ओर उन्मुख हुआ कि वहाँ तीनोंका जोतना एक ही साथ होता है । यहाँ जीतनेका अर्थ उन पदार्थोंका दूर ढकेल देना नहीं है, और न उन पर द्रव्योंमें कोई परिवर्तन ही करना है, किन्तु अपना लक्ष अपनी ओर करके उन्हें लक्षनेंसे दूर करना है । उन सबकी ओरके लक्षको छोड़कर स्वभावका लक्ष किया हो यही उनका जीतना है ।
द्रव्येन्द्रियोसे खण्ड-खण्ड रूप ज्ञानसे या ज्ञेय पदार्थों श्रात्माका •सम्यकुदर्शनादि कार्य कर सकता है। ऐसी मान्यता यशावक
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लाभ होता है ऐसी मान्यता छोड़कर अपने स्वभाव में एकाग्रता करना सो उसका लाभ इन्द्रियोंके विषयभूत पदार्थोंको जीतना अथवा सम्यकदर्शन है, और यही भगवानकी सच्ची स्तुति है । प्रश्नः- इसमें कहीं भी भगवानका तो नाम ही नहीं आता और मात्र आत्मा ही आत्माकी वात है, तब फिर इसे भगवानको स्तुति कैसे कहते हो ? उत्तरः - यहाँ भगवानकी निश्चय स्तुतिकी बात है । निश्चयसे तो जैसा भगवानका जात्मा है वैसा ही स्वयं है, इसलिये निश्चय में आत्माकी ही वात आती है। परकी स्तुति निश्चय स्तुति नहीं है, किन्तु शुभराग है। पूर्ण स्वभावकी प्रतीति करना ही भगवानको निश्चय स्तुति है, यही आत्मधर्म है । अपने लिये तो स्वयं ही भगवान है, इसलिये निश्चयसे जो अपनी स्तुति है सो वही भगवानकी स्तुति है। भगवान में और अपने में निश्चयसे कोई भी अन्तर माने तो वह भगवानकी स्तुति नहीं कर सकता । दृष्टि में असंग चैतन्य स्वरूपको स्तुति की सो वह जितेन्द्रिय हो गया । अपने अलग स्वरूपको दृष्टि करने पर सभी पर पदार्थोको और विकारको अपनेने पृथक् जानना ही जितेन्द्रियता है । यहाँ टीकामें द्रव्येन्द्रिय भावेन्द्रिय और इन्द्रियोंके । विषयभूत पर पदार्थोंको जीतने की बात क्रमशः की गई है, परन्तु उसमें कोई क्रम नहीं होता । जहाँ अपने स्वभावकी ओर उन्मुख हुआ कि वहाँ तीनोंका जोतना एक ही साथ होता है । यहाँ जीतनेका अर्थ उन पदार्थोंका दूर ढकेल देना नहीं है, और न उन पर द्रव्योंमें कोई परिवर्तन ही करना है, किन्तु अपना लक्ष अपनी ओर करके उन्हें लक्षनेंसे दूर करना है । उन सबकी ओरके लक्षको छोड़कर स्वभावका लक्ष किया हो यही उनका जीतना है । द्रव्येन्द्रियोसे खण्ड-खण्ड रूप ज्ञानसे या ज्ञेय पदार्थों श्रात्माका •सम्यकुदर्शनादि कार्य कर सकता है। ऐसी मान्यता यशावक
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भोपाल। मप्र की केबीनेट मंत्री एवं शिवपुरी विधायक श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया आज दोपहर अचानक अपनी कुर्सी छोड़कर भाग खड़ी हुईं। यह सबकुछ दोपहर कोई 12:37 बजे हुआ।
भोपाल में आज केबीनेट की मीटिंग थी, सो ज्यादातर मंत्री राजधानी में ही थे। यशोधरा राजे सिंधिया भी मंत्रालय में अपनी कुर्सी पर थीं। इसी बीच भूकंप की खबर आ गई। मुख्यमंत्री का संदेश आया कि मंत्रालय खाली कर दिया जाए। आनन फानन पूरा मंत्रालय भागता नजर आया। यशोधरा राजे सिंधिया भी बाकी मंत्रियों के साथ मंत्रालय के बाहर निकल आईं।
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भोपाल। मप्र की केबीनेट मंत्री एवं शिवपुरी विधायक श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया आज दोपहर अचानक अपनी कुर्सी छोड़कर भाग खड़ी हुईं। यह सबकुछ दोपहर कोई बारह:सैंतीस बजे हुआ। भोपाल में आज केबीनेट की मीटिंग थी, सो ज्यादातर मंत्री राजधानी में ही थे। यशोधरा राजे सिंधिया भी मंत्रालय में अपनी कुर्सी पर थीं। इसी बीच भूकंप की खबर आ गई। मुख्यमंत्री का संदेश आया कि मंत्रालय खाली कर दिया जाए। आनन फानन पूरा मंत्रालय भागता नजर आया। यशोधरा राजे सिंधिया भी बाकी मंत्रियों के साथ मंत्रालय के बाहर निकल आईं।
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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बीमा कंपनियों के प्रमुखों के साथ बैठक कर दावों के निपटारे में तेजी लाने और इस पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने के निर्देश दिए हैं। आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रैल 2020 से अब तक प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना 2,403 करोड़ रुपये के भुगतान के साथ 1. 2 लाख दावों का निपटारा कर दिया गया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई बैठक में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत कोरोना महामारी से लड़ रहे स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारी बीमा योजना के तहत भुगतान में भी तेजी लाने को कहा गया है। वित्तमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया है कि दावों के निपटारे से जुड़ी कागजी प्रक्रिया को आसान और तेज बनाया जाए ताकि लोगों को योजना का पूरा फायदा जल्दी मिल सके।
समीक्षा बैठक के दौरान पता चला कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज योजना के तहत अब तक 209. 5 करोड़ रुपये का भुगतान कर 419 दावों का निपटारा किया गया। राज्यों की तरफ से ऐसे दावों में होने वाली देरी पर वित्तमंत्री ने कहा है कि इसकी नई व्यवस्थाा की गई है। अब ऐसे मामलों में सिर्फ जिलाधिकारी और राज्य के नोडल स्वास्थ्य अथॉरिटी के सर्टिफिकेट से काम हो जाएगा।
सरकार की तरफ से जानकारी दी गई है कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत अब तक कुल 4. 65 लाख दावे निपटाए गए हैं, जिसके तहत 9,307 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। कोरोना महामारी के बाद के 99 फीसददावों का निपटारा किया गया है। इसके अलावा वित्तमंत्री ने कंपनियों के अधिकारियों से कहा कि ये पूरी तरह सुनिश्चित किया जाए कि महामारी के दौरान बीमा की रकम का दावा करने वालों से उचित व्यवहार किया जाए।
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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बीमा कंपनियों के प्रमुखों के साथ बैठक कर दावों के निपटारे में तेजी लाने और इस पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने के निर्देश दिए हैं। आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल दो हज़ार बीस से अब तक प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना दो,चार सौ तीन करोड़ रुपये के भुगतान के साथ एक. दो लाख दावों का निपटारा कर दिया गया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई बैठक में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत कोरोना महामारी से लड़ रहे स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारी बीमा योजना के तहत भुगतान में भी तेजी लाने को कहा गया है। वित्तमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया है कि दावों के निपटारे से जुड़ी कागजी प्रक्रिया को आसान और तेज बनाया जाए ताकि लोगों को योजना का पूरा फायदा जल्दी मिल सके। समीक्षा बैठक के दौरान पता चला कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज योजना के तहत अब तक दो सौ नौ. पाँच करोड़ रुपये का भुगतान कर चार सौ उन्नीस दावों का निपटारा किया गया। राज्यों की तरफ से ऐसे दावों में होने वाली देरी पर वित्तमंत्री ने कहा है कि इसकी नई व्यवस्थाा की गई है। अब ऐसे मामलों में सिर्फ जिलाधिकारी और राज्य के नोडल स्वास्थ्य अथॉरिटी के सर्टिफिकेट से काम हो जाएगा। सरकार की तरफ से जानकारी दी गई है कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत अब तक कुल चार. पैंसठ लाख दावे निपटाए गए हैं, जिसके तहत नौ,तीन सौ सात करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। कोरोना महामारी के बाद के निन्यानवे फीसददावों का निपटारा किया गया है। इसके अलावा वित्तमंत्री ने कंपनियों के अधिकारियों से कहा कि ये पूरी तरह सुनिश्चित किया जाए कि महामारी के दौरान बीमा की रकम का दावा करने वालों से उचित व्यवहार किया जाए।
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कानपुर में काकादेव क्षेत्र में लगातार दूसरी बार भारत गौरव पुरुस्कार प्राप्त देश के नंबर-1 सेक्सोलोजिस्ट होने का दावा करने वाले एक डॉक्टर के क्लीनिक पर 18 जुलाई को कानपुर के आला स्वास्थ्य अधिकारियों का छापा पड़ा. डॉक्टर का क्लीनिक अवैध तरीके से चलाये जाने के कारण से सील कर दिया जाता है. डॉक्टर ने इसके बाद सफाई देते हुए एक प्रेस कांफ्रेंस की.
अपनों के ठुकराए इंद्र भूषण रस्तोगी किसे याद हैं?
: बदहाली में जीवन गुजारने को मजबूर है यह पूर्व संपादक : ये इन्द्र भूषण रस्तोगी, कोई गुमनामी बाबा नहीं हैं जो देश-भर में इनको कोई जानने वाला न हो. राजेश श्रीनेत जी के अमर उजाला, बरेली में सीनियर रह चुके श्री रस्तोगी देश भर में पत्रकारिता जगत खासकर संपादक मंडली में कभी परिचय के मोहताज नहीं रहे. उनका एक भरा-पूरा सम्पादकीय जीवन का इतिहास रहा है, यदि अभी भी उनके शेष जीवन का संरक्षण हो गया तो देश के भविष्य के निर्माण में इनका महत्वपूर्ण योगदान होगा.
देश-भर में चलने वाले भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना हजारे के आन्दोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और यश लूटने के लिए कानपुर के समाजसेवियों में भी होड़ चल रही है. वो चुके नहीं हैं ये बताने और जताने के लिए तरह-तरह के उपक्रम और उपाय किये जाते रहते हैं. कभी फटेहाल और आज मालामाल हो चुके इनके साथ अब जनता नहीं रही है. ये बात उनकी समझ में आ चुकी है. कुछ कालेज के छात्रों को साथ लेकर आन्दोलन चलाकर असफल हो चुके इन समाजसेवियों ने अब नया फंडा निकाला है.
जैसा कि माना जा रहा था "चौथा कोना" का धरना हो तो रहा था अन्ना हजारे के समर्थन में पर उसके परिणाम बहुत ही दूरगामी होने थे. ये आम चर्चा उस धरने में चलती रही थी. कानपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों के द्वारा पर्याप्त दूरी बनाए रखना ये बताने और जताने के लिए पर्याप्त था कि अब वो पत्रकार होने के बावजूद पत्रकारों के सवालों और बहस-मुबाहिसों से अपने मुह चुराने लगे हैं.
आज कानपुर में 2009 में हुए बहुचर्चित और अनसुलझे करन माहेश्वरी ह्त्या-काण्ड के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर ही लिया गया. तीस हज़ार रुपयों के ईनामी अभिषेक अवस्थी को कानपुर के फूलबाग चौराहे के पास से उत्तर प्रदेश की पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स की टीम के द्वारा गिरफ्तार किया गया है.
अब अपने कानपुर शहर में भी देश-दुनिया में व्याप्त मीडिया की अच्छाइयां और बुराइयां आ चुकी हैं. इन्हीं में से एक हैं 'खोजी पत्रकारिता'. इसे काफी हद तक सभी जगहों पर सराहा भी गया है. चाहे वो जूलियन असान्जे के विकीलीक्स के खुलासों का मामला हो या फिर हिन्दू अखबार के द्वारा टू-जी स्पेक्ट्रम का घोटाला देश के सामने लाने का सराहनीय प्रयास ही क्यों न हो. सभी के माध्यम से मानवता और कानून के रसूख को कायम करने का प्रयास किया गया है.
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कानपुर में काकादेव क्षेत्र में लगातार दूसरी बार भारत गौरव पुरुस्कार प्राप्त देश के नंबर-एक सेक्सोलोजिस्ट होने का दावा करने वाले एक डॉक्टर के क्लीनिक पर अट्ठारह जुलाई को कानपुर के आला स्वास्थ्य अधिकारियों का छापा पड़ा. डॉक्टर का क्लीनिक अवैध तरीके से चलाये जाने के कारण से सील कर दिया जाता है. डॉक्टर ने इसके बाद सफाई देते हुए एक प्रेस कांफ्रेंस की. अपनों के ठुकराए इंद्र भूषण रस्तोगी किसे याद हैं? : बदहाली में जीवन गुजारने को मजबूर है यह पूर्व संपादक : ये इन्द्र भूषण रस्तोगी, कोई गुमनामी बाबा नहीं हैं जो देश-भर में इनको कोई जानने वाला न हो. राजेश श्रीनेत जी के अमर उजाला, बरेली में सीनियर रह चुके श्री रस्तोगी देश भर में पत्रकारिता जगत खासकर संपादक मंडली में कभी परिचय के मोहताज नहीं रहे. उनका एक भरा-पूरा सम्पादकीय जीवन का इतिहास रहा है, यदि अभी भी उनके शेष जीवन का संरक्षण हो गया तो देश के भविष्य के निर्माण में इनका महत्वपूर्ण योगदान होगा. देश-भर में चलने वाले भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना हजारे के आन्दोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और यश लूटने के लिए कानपुर के समाजसेवियों में भी होड़ चल रही है. वो चुके नहीं हैं ये बताने और जताने के लिए तरह-तरह के उपक्रम और उपाय किये जाते रहते हैं. कभी फटेहाल और आज मालामाल हो चुके इनके साथ अब जनता नहीं रही है. ये बात उनकी समझ में आ चुकी है. कुछ कालेज के छात्रों को साथ लेकर आन्दोलन चलाकर असफल हो चुके इन समाजसेवियों ने अब नया फंडा निकाला है. जैसा कि माना जा रहा था "चौथा कोना" का धरना हो तो रहा था अन्ना हजारे के समर्थन में पर उसके परिणाम बहुत ही दूरगामी होने थे. ये आम चर्चा उस धरने में चलती रही थी. कानपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों के द्वारा पर्याप्त दूरी बनाए रखना ये बताने और जताने के लिए पर्याप्त था कि अब वो पत्रकार होने के बावजूद पत्रकारों के सवालों और बहस-मुबाहिसों से अपने मुह चुराने लगे हैं. आज कानपुर में दो हज़ार नौ में हुए बहुचर्चित और अनसुलझे करन माहेश्वरी ह्त्या-काण्ड के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर ही लिया गया. तीस हज़ार रुपयों के ईनामी अभिषेक अवस्थी को कानपुर के फूलबाग चौराहे के पास से उत्तर प्रदेश की पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स की टीम के द्वारा गिरफ्तार किया गया है. अब अपने कानपुर शहर में भी देश-दुनिया में व्याप्त मीडिया की अच्छाइयां और बुराइयां आ चुकी हैं. इन्हीं में से एक हैं 'खोजी पत्रकारिता'. इसे काफी हद तक सभी जगहों पर सराहा भी गया है. चाहे वो जूलियन असान्जे के विकीलीक्स के खुलासों का मामला हो या फिर हिन्दू अखबार के द्वारा टू-जी स्पेक्ट्रम का घोटाला देश के सामने लाने का सराहनीय प्रयास ही क्यों न हो. सभी के माध्यम से मानवता और कानून के रसूख को कायम करने का प्रयास किया गया है.
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पटना के जक्कनपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने अपने पति और ससुर पर गंदी हरकत करने का आरोप लगाते हुए मंगलवार की सुबह मामला दर्ज करवाया था। इस मामले में पीड़िता ने अपने पति अभिषेक पर दोस्त के साथ जबरन बेड शेयर करने का आरोप लगाया था।
इस मामले में अभिषेक ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया कि उसकी पत्नी के द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार है । साथ ही कहा कि झूठा आरोप लगाने वाली उसकी पत्नी उसे आत्महत्या के लिए उकसाती है। प्रॉपर्टी बेचकर उसकी जरूरतें पूरी करने का दबाव बनाती है।
अभिषेक ने अपनी पत्नी मारपीट का भी आरोप लगाया है । अभिषेक बताता है कि उसकी पत्नी के द्वारा किए गए मारपीट की कंप्लें उसने कई बार पटना के जक्कनपुर थाने में की है । अभिषेक ने कहा है कि उसके पिता की उम्र 65 से 70 साल की है। इस उम्र में भला कोई बुजुर्ग अपनी बेटी समान बहू को गंदी निगाह से नहीं देख सकता है। आरोप पूरी तरह से गलत है।
वहीं, अभिषेक की पत्नी ने बताया कि अगर उसे संपत्ति का लालच होता तो वह शादी के 2 महीने बाद ही अपने 19 लाख के गहने को पति के द्वारा गिरवी रखने के लिए नहीं दे देती । अभिषेक की पत्नी बताती है कि आज जो बुलेट बाइक और और महंगा मोबाइल अभिषेक चलाता है । वह भी उसने शादी के बाद उसे दिया है । अभिषेक अपने कमरे के बाथरूम घुसकर ड्रग्स का नशा करता है । वह उसे रोकती है तो वह गुस्से से लाल हो जाता है ।
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पटना के जक्कनपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने अपने पति और ससुर पर गंदी हरकत करने का आरोप लगाते हुए मंगलवार की सुबह मामला दर्ज करवाया था। इस मामले में पीड़िता ने अपने पति अभिषेक पर दोस्त के साथ जबरन बेड शेयर करने का आरोप लगाया था। इस मामले में अभिषेक ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया कि उसकी पत्नी के द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार है । साथ ही कहा कि झूठा आरोप लगाने वाली उसकी पत्नी उसे आत्महत्या के लिए उकसाती है। प्रॉपर्टी बेचकर उसकी जरूरतें पूरी करने का दबाव बनाती है। अभिषेक ने अपनी पत्नी मारपीट का भी आरोप लगाया है । अभिषेक बताता है कि उसकी पत्नी के द्वारा किए गए मारपीट की कंप्लें उसने कई बार पटना के जक्कनपुर थाने में की है । अभिषेक ने कहा है कि उसके पिता की उम्र पैंसठ से सत्तर साल की है। इस उम्र में भला कोई बुजुर्ग अपनी बेटी समान बहू को गंदी निगाह से नहीं देख सकता है। आरोप पूरी तरह से गलत है। वहीं, अभिषेक की पत्नी ने बताया कि अगर उसे संपत्ति का लालच होता तो वह शादी के दो महीने बाद ही अपने उन्नीस लाख के गहने को पति के द्वारा गिरवी रखने के लिए नहीं दे देती । अभिषेक की पत्नी बताती है कि आज जो बुलेट बाइक और और महंगा मोबाइल अभिषेक चलाता है । वह भी उसने शादी के बाद उसे दिया है । अभिषेक अपने कमरे के बाथरूम घुसकर ड्रग्स का नशा करता है । वह उसे रोकती है तो वह गुस्से से लाल हो जाता है । This website follows the DNPA Code of Ethics.
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हुए भी भारत को उस घटना का स्मरण दिलाते है जिसम सम्राट अशोक ने युद्ध जनित विश्वस राव विनाश से द्रवित हो महिमा का पाठ गया था। विनोवा की भी यही धारणा है कि विश्व युद्ध से होने वाले सहार को देपर व्यक्ति एवं राष्ट्र युद्ध का अन्त करने वा प्रयत्न करते है और ये महिमा के समीप पहुचने का प्रयास करते हैं। विनोवा विश्व युद्ध से उतने भयभीत नहीं जितने छोटे युद्धी एवं भगढो से विश्व युद्ध व्यक्ति को सीता की परिधि से बाहर कर उसे गमस्त मानवता के लिए चिंतन करने को वाध्य करता है जबि छोटे युद्धो का प्रभाव टौर इसो पिरीत हो होता है। जहाँ विश्व युद्ध घसा भी धार घटता हुआ चरण है वहाँ छोटे युद्ध महिसा वो दूर धनेलने का प्रयास करते हैं। यह विश्व शांति के लिए विश्व युद्ध से भी अधिक भयावह स्थिति है। हिंसर म निष्ठा रखने वाले राष्ट्र जहाँ विश्व युद्ध को समाप्त करने की बात परत हैं वहाँ उमरा सोमित युद्ध को चनाते रने का स्वार्थ यह सिद्ध करता है कि वे निश्स शाति अथवा महिंसा के समर्थव नहीं हैं।
का वातावरण बनाये रखने के लिए इन छोटे छोटे युद्ध को रोकना प्रत्यावश्यव है 138 विनोश के उपर्युक्त विचार प्राधुनिन समयको पोत-युद्ध की राजनीति पर वारा प्रहार है।
आथिर मानता की अवधारणा को विनोबा भावे ते त्या महत्व दिया है। मादिगाना तिच्छे समाज को ना निरर्थन है। विनोवा ने भारत के
जीवन मस्या की भावना को समानता के श्राधुनिर श्रादर्श से सम्बन्धित करने वा प्रयाम दिया है। प्राध्यामि साधना के लिए भौतिक सुविधामा एवं समृद्धि को त्यागना उचित माना गया है। प्रथम श्रम (द लेवर) तथा वेतन की समानता के माध्यम साथ समानता का श्रादर्श स्थापित या प्रयास किया गया है। विनोबा इस दृष्टि से गाधीजी ने पदचिह्नो पर अमर होत दिखाई देते हैं। बाधोजो वे सदृश, विनोजावी भी यही धारणा है कि श्रावश्यकतामा प्रथदा इच्छायो को बहुगुणित करने के स्थान पर उनका वरना चाहिए ताकि सगाज म समन्वय एवं संतोष वा वातावरण बना रहे । प्रकृति ने हमारी श्राश्यता के अनुरूप अनुपात ममत्र वस्तुग्रो वो उत्पन्न दिया है मन प्रत्येक व्यक्ति द्वारा केवल अपनी आवश्यतानुसार वस्तुमा वा उपभोग किया जाय, सहन किया जाय तो विश्व में रोई व्यक्ति क्षुधापीडित प्रथवा अन्य प्रकार से पीड़ित नही रह माता । अनी आवश्यता से अधिक का अधिग्रहण अपराध है, योगी है। परिग्रह एय अस्तेय द्वारा समस्त सामाजिन एवं प्राधिक बुराइयों को दूर किया जा सकता है। विनाबा ने अनुसार किसी भी वस्तु वा उत्पादन स्थय के निमित्त न होकर राष्ट्र एवं समाज ये निमित्त मानना चाहिए। उत्पादन समाज अथवा राष्ट्र को अर्पित कर व्यक्ति स्वार्थ से उपर उठ जाता है। समाज इस उत्पादन वो जब पुन व्यक्ति को प्रत्येव की प्रावस्यक्तामुसार वितरित रता है तब व्यक्ति में नवीन जीवनदायिनी शक्ति का राधार होता है । सहज में व्यक्ति तथा समष्टि की अन्योन्याश्रितता स्पष्ट हो जाती है 38
विजोया के प्राधिक समानता सम्बन्धी विचारों का यह तात्पय नहीं कि वे पूर्ण समानता थवा गणितीय समानता के पक्षपाती हैं। विनोचा गरिणतीय समानता के स्थान पर मौचित्यपूर्ण प्रपवा ऐसी समानता चाहते हैं जैसी को हाथ की पाच अंगुलियों में होती अनेक हैं। पांचा अगुलियाँ बराबर न होते हुए भी पूर्ण सहयोग से एक साथ मिलवर वाप
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हुए भी भारत को उस घटना का स्मरण दिलाते है जिसम सम्राट अशोक ने युद्ध जनित विश्वस राव विनाश से द्रवित हो महिमा का पाठ गया था। विनोवा की भी यही धारणा है कि विश्व युद्ध से होने वाले सहार को देपर व्यक्ति एवं राष्ट्र युद्ध का अन्त करने वा प्रयत्न करते है और ये महिमा के समीप पहुचने का प्रयास करते हैं। विनोवा विश्व युद्ध से उतने भयभीत नहीं जितने छोटे युद्धी एवं भगढो से विश्व युद्ध व्यक्ति को सीता की परिधि से बाहर कर उसे गमस्त मानवता के लिए चिंतन करने को वाध्य करता है जबि छोटे युद्धो का प्रभाव टौर इसो पिरीत हो होता है। जहाँ विश्व युद्ध घसा भी धार घटता हुआ चरण है वहाँ छोटे युद्ध महिसा वो दूर धनेलने का प्रयास करते हैं। यह विश्व शांति के लिए विश्व युद्ध से भी अधिक भयावह स्थिति है। हिंसर म निष्ठा रखने वाले राष्ट्र जहाँ विश्व युद्ध को समाप्त करने की बात परत हैं वहाँ उमरा सोमित युद्ध को चनाते रने का स्वार्थ यह सिद्ध करता है कि वे निश्स शाति अथवा महिंसा के समर्थव नहीं हैं। का वातावरण बनाये रखने के लिए इन छोटे छोटे युद्ध को रोकना प्रत्यावश्यव है एक सौ अड़तीस विनोश के उपर्युक्त विचार प्राधुनिन समयको पोत-युद्ध की राजनीति पर वारा प्रहार है। आथिर मानता की अवधारणा को विनोबा भावे ते त्या महत्व दिया है। मादिगाना तिच्छे समाज को ना निरर्थन है। विनोवा ने भारत के जीवन मस्या की भावना को समानता के श्राधुनिर श्रादर्श से सम्बन्धित करने वा प्रयाम दिया है। प्राध्यामि साधना के लिए भौतिक सुविधामा एवं समृद्धि को त्यागना उचित माना गया है। प्रथम श्रम तथा वेतन की समानता के माध्यम साथ समानता का श्रादर्श स्थापित या प्रयास किया गया है। विनोबा इस दृष्टि से गाधीजी ने पदचिह्नो पर अमर होत दिखाई देते हैं। बाधोजो वे सदृश, विनोजावी भी यही धारणा है कि श्रावश्यकतामा प्रथदा इच्छायो को बहुगुणित करने के स्थान पर उनका वरना चाहिए ताकि सगाज म समन्वय एवं संतोष वा वातावरण बना रहे । प्रकृति ने हमारी श्राश्यता के अनुरूप अनुपात ममत्र वस्तुग्रो वो उत्पन्न दिया है मन प्रत्येक व्यक्ति द्वारा केवल अपनी आवश्यतानुसार वस्तुमा वा उपभोग किया जाय, सहन किया जाय तो विश्व में रोई व्यक्ति क्षुधापीडित प्रथवा अन्य प्रकार से पीड़ित नही रह माता । अनी आवश्यता से अधिक का अधिग्रहण अपराध है, योगी है। परिग्रह एय अस्तेय द्वारा समस्त सामाजिन एवं प्राधिक बुराइयों को दूर किया जा सकता है। विनाबा ने अनुसार किसी भी वस्तु वा उत्पादन स्थय के निमित्त न होकर राष्ट्र एवं समाज ये निमित्त मानना चाहिए। उत्पादन समाज अथवा राष्ट्र को अर्पित कर व्यक्ति स्वार्थ से उपर उठ जाता है। समाज इस उत्पादन वो जब पुन व्यक्ति को प्रत्येव की प्रावस्यक्तामुसार वितरित रता है तब व्यक्ति में नवीन जीवनदायिनी शक्ति का राधार होता है । सहज में व्यक्ति तथा समष्टि की अन्योन्याश्रितता स्पष्ट हो जाती है अड़तीस विजोया के प्राधिक समानता सम्बन्धी विचारों का यह तात्पय नहीं कि वे पूर्ण समानता थवा गणितीय समानता के पक्षपाती हैं। विनोचा गरिणतीय समानता के स्थान पर मौचित्यपूर्ण प्रपवा ऐसी समानता चाहते हैं जैसी को हाथ की पाच अंगुलियों में होती अनेक हैं। पांचा अगुलियाँ बराबर न होते हुए भी पूर्ण सहयोग से एक साथ मिलवर वाप
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सीरियल में कार्तिक और वेदिका की मेंहदी का फंक्शन होने वाला है। जिसमें शो की सारी लेडीज ने फैशन के जलवे दिखाए। सभी का हटके फैशन बहुत शानदार है। सारी लेडीज ने अपने हेयरस्टाइल में अलग-अलग तरह के फूल लगाए हैं।
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सीरियल में कार्तिक और वेदिका की मेंहदी का फंक्शन होने वाला है। जिसमें शो की सारी लेडीज ने फैशन के जलवे दिखाए। सभी का हटके फैशन बहुत शानदार है। सारी लेडीज ने अपने हेयरस्टाइल में अलग-अलग तरह के फूल लगाए हैं।
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Cheapest tourist places: समर वेकेशन को फैमिली टाइम के लिहाज से बेस्ट माना जाता है. इस पीरियड में एक फैमिली चाहे तो घर के आसपास या फिर दूर ट्रिप करके एंजॉय कर सकती है. क्या आप भी बच्चों के साथ घूमने की सोच रहे हैं, लेकिन बजट के चलते जाने को लेकर कंफ्यूजन है. आप इन बेस्ट और सस्ती टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स को एक्सप्लोर कर सकते हैं.
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Cheapest tourist places: समर वेकेशन को फैमिली टाइम के लिहाज से बेस्ट माना जाता है. इस पीरियड में एक फैमिली चाहे तो घर के आसपास या फिर दूर ट्रिप करके एंजॉय कर सकती है. क्या आप भी बच्चों के साथ घूमने की सोच रहे हैं, लेकिन बजट के चलते जाने को लेकर कंफ्यूजन है. आप इन बेस्ट और सस्ती टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स को एक्सप्लोर कर सकते हैं.
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भाजपा के मंत्री विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। आए दिन कोई न कोई भाजपा नेता अपने विवादित बयानों से सुर्खियों में बना रहता है। इस बार इस लिस्ट में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओम प्रकाश राजभर का नाम जुड़ा है।
राजभार ने शुक्रवार को अपनी बिरादरी के लोगों के शराब पीने को लेकर ऐसा बयान दिया है जिस पर विवाद खड़ा हो गया। यूपी के मऊ में अतिपिछड़ा, अतिदलित भागीदारी रैली में राजभर ने कहा किभाजपा एक महीने में जितना खर्च उत्तर प्रदेश में करती है, उतने का तो उनकी बिरादरी वाले एक दिन में शराब पी जाते हैं।
राजभर ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी के झंडे का पीला रंग है और हम भगवान शंकर के पुजारी हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई पीले रंग का विरोध करेगा तो हम शाप दे देंगे, उसे पीलिया हो जाएगा। इससे पहले उन्होंने एक रैली में खुद को गब्बर सिंह बताया था।
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भाजपा के मंत्री विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। आए दिन कोई न कोई भाजपा नेता अपने विवादित बयानों से सुर्खियों में बना रहता है। इस बार इस लिस्ट में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओम प्रकाश राजभर का नाम जुड़ा है। राजभार ने शुक्रवार को अपनी बिरादरी के लोगों के शराब पीने को लेकर ऐसा बयान दिया है जिस पर विवाद खड़ा हो गया। यूपी के मऊ में अतिपिछड़ा, अतिदलित भागीदारी रैली में राजभर ने कहा किभाजपा एक महीने में जितना खर्च उत्तर प्रदेश में करती है, उतने का तो उनकी बिरादरी वाले एक दिन में शराब पी जाते हैं। राजभर ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी के झंडे का पीला रंग है और हम भगवान शंकर के पुजारी हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई पीले रंग का विरोध करेगा तो हम शाप दे देंगे, उसे पीलिया हो जाएगा। इससे पहले उन्होंने एक रैली में खुद को गब्बर सिंह बताया था।
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JAMSHEDPUR : सरायकेला खरसावां जिला के गम्हरिया थाना अंतर्गत छोटा गम्हरिया से होकर गुजरने वाली टाटा- कांड्रा मुख्य मार्ग से सटे सर्विस रोड के गार्डवाल में नक्सलियों ने पोस्टर बाजी की है. जिससे क्षेत्र के लोगों में दहशत व्याप्त है. गौरतलब है कि कल ही सरायकेला पुलिस ने कुचाई के जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाते हुए बड़ी कार्रवाई की थी.
जहां पुलिस ने एक विस्फोटक को डिफ्यूज किया था. साथ ही नक्सली साहित्य और वर्दी भी बरामद किए थे. 24 घंटे भी नहीं बीते कि नक्सलियों ने बीच बाजार में पोस्टर बाजी कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है. वैसे विधानसभा चुनाव से पहले गम्हरिया बाजार में नक्सली पोस्टर बाजी एक बड़े खतरे का संकेत दे रहा है.
लोकसभा चुनाव के वक्त भी गम्हरिया में नक्सली पोस्टरबाजी हुई थी. इससे पूर्व यहां केन बम भी बरामद किया जा चुका है. फिलहाल पुलिस ने पोस्टर जब्त कर लिया है. हालांकि पुलिस इसे शरारती तत्वों द्वारा दहशत फैलाने के उद्देश्य से लगाया गया पोस्टर बता जांच में जुट गई है.
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JAMSHEDPUR : सरायकेला खरसावां जिला के गम्हरिया थाना अंतर्गत छोटा गम्हरिया से होकर गुजरने वाली टाटा- कांड्रा मुख्य मार्ग से सटे सर्विस रोड के गार्डवाल में नक्सलियों ने पोस्टर बाजी की है. जिससे क्षेत्र के लोगों में दहशत व्याप्त है. गौरतलब है कि कल ही सरायकेला पुलिस ने कुचाई के जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाते हुए बड़ी कार्रवाई की थी. जहां पुलिस ने एक विस्फोटक को डिफ्यूज किया था. साथ ही नक्सली साहित्य और वर्दी भी बरामद किए थे. चौबीस घंटाटे भी नहीं बीते कि नक्सलियों ने बीच बाजार में पोस्टर बाजी कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है. वैसे विधानसभा चुनाव से पहले गम्हरिया बाजार में नक्सली पोस्टर बाजी एक बड़े खतरे का संकेत दे रहा है. लोकसभा चुनाव के वक्त भी गम्हरिया में नक्सली पोस्टरबाजी हुई थी. इससे पूर्व यहां केन बम भी बरामद किया जा चुका है. फिलहाल पुलिस ने पोस्टर जब्त कर लिया है. हालांकि पुलिस इसे शरारती तत्वों द्वारा दहशत फैलाने के उद्देश्य से लगाया गया पोस्टर बता जांच में जुट गई है.
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नई दिल्ली/एजेंसी। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने आने वाले दिनों में विपक्षी गठबंधन के आकार लेने का भरोसा जताते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ लड़ाई में क्षेत्रीय पार्टियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हालांकि, इस प्रस्तावित विपक्षी मोर्चे में कांग्रेस की भूमिका पर यादव ने कहा कि यह कांग्रेस को तय करना है। उन्होंने 'पीटीआई-वीडियो' से एक साक्षात्कार में कहा "विपक्षी गठबंधन या मोर्चा बनाने का प्रयास जारी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (अपनी ओर से) प्रयास कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि आने वाले दिनों में, एक विपक्षी गठबंधन आकार लेगा, जो भाजपा के खिलाफ लड़ेगा। "
यह पूछे जाने पर कि क्या वह कांग्रेस और भाजपा को एक ही जैसा मान रहे हैं, सपा प्रमुख ने कहा कि विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय दल हैं जो भगवा खेमा से लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, "कई राज्यों में भाजपा की तुलना में कांग्रेस का अस्तित्व नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय पार्टियां भगवा खेमे के खिलाफ जी जान से लड़ रही हैं और मुझे उम्मीद है कि वे सफल होंगी। " यह बताये जाने पर कि जद (यू), राजद और द्रमुक जैसे क्षेत्रीय दल विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस को शामिल करना चाहते हैं, तो यादव ने कहा कि उनका पहले से ही कांग्रेस से गठबंधन है। उन्होंने कहा, "यह बड़ी लड़ाई का सवाल है और कांग्रेस खुद इस लड़ाई में अपनी भूमिका तय करेगी। " अगले लोकसभा चुनाव में विपक्षी खेमे का चेहरा कौन होगा? इस सवाल पर यादव ने कहा कि चुनाव के बाद इसका फैसला किया जाएगा और अभी यह "उचित सवाल" नहीं है। " उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना कहा, "आप चेहरे की बात कर रहे हैं।
2014 और 2019 में (भाजपा के) चेहरे के बारे में क्या, जिन्होंने चुनाव जीतने के लिए झूठे वादे किए? " सपा प्रमुख ने दावा किया कि 2014 और 2019 में भाजपा द्वारा किया गया कोई भी वादा पूरा नहीं किया गया। यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में रायबरेली और अमेठी लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ेगी, जिसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। इस पर यादव ने आरोप लगाया कि अमेठी में सपा कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही है। उन्होंने कहा, "अमेठी में हमारे कार्यकर्ता मारे जा रहे हैं। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता सवाल कर रहे हैं कि उनके लिए कौन लड़ेगा। वहां समाजवादी कार्यकर्ता हैं जो एक-दूसरे का समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता हमारे समर्थन में नहीं आ रहे हैं। " कांग्रेस नेता सोनिया गांधी रायबरेली से सांसद हैं, जबकि उनके बेटे एवं पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को 2019 के लोकसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अमेठी में हरा दिया था। यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी अगले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा के रथ को रोकने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
उन्होंने कहा, "यदि भाजपा 2024 में सत्ता में आना चाहती है, तो उसे उत्तर प्रदेश में जीतना होगा। हम सुनिश्चित करेंगे कि भाजपा उत्तर प्रदेश के साथ देश में भी हारे। उत्तर प्रदेश में हम अपने मौजूदा सहयोगियों के साथ मिलकर लड़ेंगे। " सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनावों में हाथ मिलाया था, लेकिन भाजपा से हार गई थीं। दो साल बाद हुए लोकसभा चुनाव में, राज्य में सपा-बसपा गठबंधन से कांग्रेस पार्टी को बाहर रखा गया था। अडाणी मुद्दे पर बोलते हुए सपा प्रमुख ने देश की संपत्ति और जनता के पैसों की कथित लूट की मंजूरी देने के लिए केंद्र को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सवाल किया, "तथाकथित नंबर दो (सबसे अमीर व्यक्ति) के बारे में कोई सवाल क्यों नहीं पूछा जा रहा है? भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में जमा लोगों के धन को लेकर कोई जवाबदेही क्यों नहीं है, जिन्हें घाटा हो रहा है? " हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडाणी समूह के खिलाफ फर्जी तरीके से लेन-देन और शेयर की कीमतों में हेर-फेर सहित कई आरोप लगाए थे। अडाणी समूह ने इन आरोपों को झूठा करार देते हुए कहा था कि उसने सभी कानूनों और प्रावधानों का पालन किया है।
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नई दिल्ली/एजेंसी। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आने वाले दिनों में विपक्षी गठबंधन के आकार लेने का भरोसा जताते हुए कहा कि दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ लड़ाई में क्षेत्रीय पार्टियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हालांकि, इस प्रस्तावित विपक्षी मोर्चे में कांग्रेस की भूमिका पर यादव ने कहा कि यह कांग्रेस को तय करना है। उन्होंने 'पीटीआई-वीडियो' से एक साक्षात्कार में कहा "विपक्षी गठबंधन या मोर्चा बनाने का प्रयास जारी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव प्रयास कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि आने वाले दिनों में, एक विपक्षी गठबंधन आकार लेगा, जो भाजपा के खिलाफ लड़ेगा। " यह पूछे जाने पर कि क्या वह कांग्रेस और भाजपा को एक ही जैसा मान रहे हैं, सपा प्रमुख ने कहा कि विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय दल हैं जो भगवा खेमा से लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, "कई राज्यों में भाजपा की तुलना में कांग्रेस का अस्तित्व नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय पार्टियां भगवा खेमे के खिलाफ जी जान से लड़ रही हैं और मुझे उम्मीद है कि वे सफल होंगी। " यह बताये जाने पर कि जद , राजद और द्रमुक जैसे क्षेत्रीय दल विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस को शामिल करना चाहते हैं, तो यादव ने कहा कि उनका पहले से ही कांग्रेस से गठबंधन है। उन्होंने कहा, "यह बड़ी लड़ाई का सवाल है और कांग्रेस खुद इस लड़ाई में अपनी भूमिका तय करेगी। " अगले लोकसभा चुनाव में विपक्षी खेमे का चेहरा कौन होगा? इस सवाल पर यादव ने कहा कि चुनाव के बाद इसका फैसला किया जाएगा और अभी यह "उचित सवाल" नहीं है। " उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना कहा, "आप चेहरे की बात कर रहे हैं। दो हज़ार चौदह और दो हज़ार उन्नीस में चेहरे के बारे में क्या, जिन्होंने चुनाव जीतने के लिए झूठे वादे किए? " सपा प्रमुख ने दावा किया कि दो हज़ार चौदह और दो हज़ार उन्नीस में भाजपा द्वारा किया गया कोई भी वादा पूरा नहीं किया गया। यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में रायबरेली और अमेठी लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ेगी, जिसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। इस पर यादव ने आरोप लगाया कि अमेठी में सपा कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही है। उन्होंने कहा, "अमेठी में हमारे कार्यकर्ता मारे जा रहे हैं। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता सवाल कर रहे हैं कि उनके लिए कौन लड़ेगा। वहां समाजवादी कार्यकर्ता हैं जो एक-दूसरे का समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता हमारे समर्थन में नहीं आ रहे हैं। " कांग्रेस नेता सोनिया गांधी रायबरेली से सांसद हैं, जबकि उनके बेटे एवं पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अमेठी में हरा दिया था। यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी अगले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा के रथ को रोकने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने कहा, "यदि भाजपा दो हज़ार चौबीस में सत्ता में आना चाहती है, तो उसे उत्तर प्रदेश में जीतना होगा। हम सुनिश्चित करेंगे कि भाजपा उत्तर प्रदेश के साथ देश में भी हारे। उत्तर प्रदेश में हम अपने मौजूदा सहयोगियों के साथ मिलकर लड़ेंगे। " सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनावों में हाथ मिलाया था, लेकिन भाजपा से हार गई थीं। दो साल बाद हुए लोकसभा चुनाव में, राज्य में सपा-बसपा गठबंधन से कांग्रेस पार्टी को बाहर रखा गया था। अडाणी मुद्दे पर बोलते हुए सपा प्रमुख ने देश की संपत्ति और जनता के पैसों की कथित लूट की मंजूरी देने के लिए केंद्र को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सवाल किया, "तथाकथित नंबर दो के बारे में कोई सवाल क्यों नहीं पूछा जा रहा है? भारतीय जीवन बीमा निगम और भारतीय स्टेट बैंक में जमा लोगों के धन को लेकर कोई जवाबदेही क्यों नहीं है, जिन्हें घाटा हो रहा है? " हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडाणी समूह के खिलाफ फर्जी तरीके से लेन-देन और शेयर की कीमतों में हेर-फेर सहित कई आरोप लगाए थे। अडाणी समूह ने इन आरोपों को झूठा करार देते हुए कहा था कि उसने सभी कानूनों और प्रावधानों का पालन किया है।
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194: प्रेमचंद रचनावली-5
ओर लगा हुआ था। बेचारा फांसी पा जायगा। जिस वक्त उसने फांसी का हुक्म सुना होगा, उसकी क्या दशा हुई होगी। उसकी बूढ़ी मां और स्त्री यह खबर सुनकर छाती पीटने लगी होंगी। बेचारा स्कूल-मास्टर ही तो था, मुश्किल से रोटियां चलती होंगी। और क्या सहारा होगा? उनकी विपत्ति की कल्पना करके उसे रमा के प्रति उत्तेजनापूर्ण घृणा हुई कि वह उदासीन न रह सकी। उसके मन में ऐसा उद्वेग उठा कि इस वक्त वह आ जायं तो ऐसा धिक्कारूं कि वह भी याद करें। तुम मनुष्य हो। कभी नहीं। तुम मनुष्य के रूप में राक्षस हो, राक्षस । तुम इतने नीच हो कि उसको प्रकट करने के लिए कोई शब्द नहीं है। तुम इतने नीच हो कि आज कमीने से कमीना आदमी भी तुम्हारे ऊपर थूक रहा है। तुम्हें किसी ने पहले ही क्यों न मार डाला। इन आदमियों की जान तो जाती ही; पर तुम्हारे मुंह में तो कालिख न लगती । तुम्हारा इतना पतन हुआ कैसे । जिसका पिता इतना सच्चा, इतना ईमानदार हो; वह इतना लोभी, इतना कायर ।
शाम हो गई, पर देवीदीन न आया। जालपा बार-बार खिड़की पर खड़ी हो होकर इधर-उधर देखती थी; पर देवीदीन का पता न था। धीरे-धीरे आठ बज गए और देवी न लौट।। सहसा एक मोटर द्वार पर आकर रुकी और रमा ने उतरकर जग्गो से पूछा- सब कुशल-मंगल है न दादी । दादा कहां गए हैं ?
जग्गो ने एक बार उसकी ओर देखा और मुंह फेर लिया। केवल इतना बोली- कहीं गए होंगे, मैं नहीं जानती।
रमा ने सोने की चार चूड़ियां जेब से निकालकर जग्गो के पैरों पर रख दीं और बोला- यह तुम्हारे लिए लाया हूं दादी, पहनो, ढीली तो नहीं हैं ?
जग्गो ने चूड़ियां उठाकर जमीन पर पटक दीं और आंखें निकालकर बोली- जहां इतना पाप समा सकता है, वहां चार चूड़ियों की जगह नहीं है। भगवान् की दया से बहुत चूड़ियां पहन चुकी और अब भी सेर- दो सेर सोना पड़ा होगा, लेकिन जो खाया, पहना, अपनी मिहनत की कमाई से, किसी का गला नहीं दबाया, पाप की गठरी सिर पर नहीं लादी, नीयत नहीं बिगाड़ी। उस कोख में आग लगे जिसने तुम-जैसे कपूत को जन्म दिया। यह पाप की कमाई लेकर तुम बहू को देने आए होगे। समझते होगे, तुम्हारे रुपयों की थैली देखकर वह लट्टू हो जाएगी। इतने दिन उसके साथ रहकर भी तुम्हारी लोभी आंखें उसे न पहचान सकीं। तुम जैसे राक्षस उस देवी के जोग न थे। अगर अपनी कुसल चाहते हो, तो इन्हीं पैरों जहां से आए हो वहीं लौट जाओ, उसके सामने जाकर क्यों अपना पानी उतरवाओगे। तुम आज पुलिस के हाथों जख्मी होकर, मार खाकर आए होते, तुम्हें सजा हो गई होती, तुम जेहल में डाल दिए गए होते तो बहू तुम्हारी पूजा करती, तुम्हारे चरन धो-धोकर पीती। वह उन औरतों में है जो चाहे मजूरी करें, उपास करें, फटे- चीथड़े पहनें, पर किसी की बुराई नहीं देख सकतीं। अगर तुम मेरे लड़के होते, तो तुम्हें जहर दे देती। क्यों खड़े मुझे जला रहे रहे हो। चले क्यों नहीं जाते। मैंने तुमसे कुछ ले तो नहीं लिया है?
रमा सिर झुकाए चुपचाप सुनता रहा। तब आहत स्वर में बोला-दादी, मैंने बुराई की है और इसके लिए मरते दम तक लज्जित रहूंगा; लेकिन तुम मुझे जितना नीच समझ रही हो, उतना नीच नहीं हूं। अगर तुम्हें मालूम होता कि पुलिस ने मेरे साथ कैसी-कैसी सख्तियां कीं,
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एक सौ चौरानवे: प्रेमचंद रचनावली-पाँच ओर लगा हुआ था। बेचारा फांसी पा जायगा। जिस वक्त उसने फांसी का हुक्म सुना होगा, उसकी क्या दशा हुई होगी। उसकी बूढ़ी मां और स्त्री यह खबर सुनकर छाती पीटने लगी होंगी। बेचारा स्कूल-मास्टर ही तो था, मुश्किल से रोटियां चलती होंगी। और क्या सहारा होगा? उनकी विपत्ति की कल्पना करके उसे रमा के प्रति उत्तेजनापूर्ण घृणा हुई कि वह उदासीन न रह सकी। उसके मन में ऐसा उद्वेग उठा कि इस वक्त वह आ जायं तो ऐसा धिक्कारूं कि वह भी याद करें। तुम मनुष्य हो। कभी नहीं। तुम मनुष्य के रूप में राक्षस हो, राक्षस । तुम इतने नीच हो कि उसको प्रकट करने के लिए कोई शब्द नहीं है। तुम इतने नीच हो कि आज कमीने से कमीना आदमी भी तुम्हारे ऊपर थूक रहा है। तुम्हें किसी ने पहले ही क्यों न मार डाला। इन आदमियों की जान तो जाती ही; पर तुम्हारे मुंह में तो कालिख न लगती । तुम्हारा इतना पतन हुआ कैसे । जिसका पिता इतना सच्चा, इतना ईमानदार हो; वह इतना लोभी, इतना कायर । शाम हो गई, पर देवीदीन न आया। जालपा बार-बार खिड़की पर खड़ी हो होकर इधर-उधर देखती थी; पर देवीदीन का पता न था। धीरे-धीरे आठ बज गए और देवी न लौट।। सहसा एक मोटर द्वार पर आकर रुकी और रमा ने उतरकर जग्गो से पूछा- सब कुशल-मंगल है न दादी । दादा कहां गए हैं ? जग्गो ने एक बार उसकी ओर देखा और मुंह फेर लिया। केवल इतना बोली- कहीं गए होंगे, मैं नहीं जानती। रमा ने सोने की चार चूड़ियां जेब से निकालकर जग्गो के पैरों पर रख दीं और बोला- यह तुम्हारे लिए लाया हूं दादी, पहनो, ढीली तो नहीं हैं ? जग्गो ने चूड़ियां उठाकर जमीन पर पटक दीं और आंखें निकालकर बोली- जहां इतना पाप समा सकता है, वहां चार चूड़ियों की जगह नहीं है। भगवान् की दया से बहुत चूड़ियां पहन चुकी और अब भी सेर- दो सेर सोना पड़ा होगा, लेकिन जो खाया, पहना, अपनी मिहनत की कमाई से, किसी का गला नहीं दबाया, पाप की गठरी सिर पर नहीं लादी, नीयत नहीं बिगाड़ी। उस कोख में आग लगे जिसने तुम-जैसे कपूत को जन्म दिया। यह पाप की कमाई लेकर तुम बहू को देने आए होगे। समझते होगे, तुम्हारे रुपयों की थैली देखकर वह लट्टू हो जाएगी। इतने दिन उसके साथ रहकर भी तुम्हारी लोभी आंखें उसे न पहचान सकीं। तुम जैसे राक्षस उस देवी के जोग न थे। अगर अपनी कुसल चाहते हो, तो इन्हीं पैरों जहां से आए हो वहीं लौट जाओ, उसके सामने जाकर क्यों अपना पानी उतरवाओगे। तुम आज पुलिस के हाथों जख्मी होकर, मार खाकर आए होते, तुम्हें सजा हो गई होती, तुम जेहल में डाल दिए गए होते तो बहू तुम्हारी पूजा करती, तुम्हारे चरन धो-धोकर पीती। वह उन औरतों में है जो चाहे मजूरी करें, उपास करें, फटे- चीथड़े पहनें, पर किसी की बुराई नहीं देख सकतीं। अगर तुम मेरे लड़के होते, तो तुम्हें जहर दे देती। क्यों खड़े मुझे जला रहे रहे हो। चले क्यों नहीं जाते। मैंने तुमसे कुछ ले तो नहीं लिया है? रमा सिर झुकाए चुपचाप सुनता रहा। तब आहत स्वर में बोला-दादी, मैंने बुराई की है और इसके लिए मरते दम तक लज्जित रहूंगा; लेकिन तुम मुझे जितना नीच समझ रही हो, उतना नीच नहीं हूं। अगर तुम्हें मालूम होता कि पुलिस ने मेरे साथ कैसी-कैसी सख्तियां कीं,
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नयी दिल्ली। भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसद कीथ वाज ने अपनी सरकार से कोहिनूर हीरे को भारत को लौटाने का आग्रह करके ब्रिटेन की महारानी के मुकुट में सुशोभित अनमोल हीरे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है ।
इस हीरे को मध्यकाल में आंध्र प्रदेश के गुंटुर जिले में कोल्लूर खान से निकाला गया था और एक समय इसे दुनिया का सबसे बड़ा हीरा माना जाता था। मूल रूप से इस पर काकतीय राजवंश का मालिकाना हक रहा और उसने इसे एक मंदिर में देवी की आंख के तौर पर स्थापित किया था। इसके बाद यह कई आक्रमणकारियों के हाथों गुजरते हुए आखिरकार ब्रिटेन पहुंचा।
कोहिनूर की वर्तमान कीमत लगभग 15० हजार करोड़ रुपये है। 1०5 कैरेट (लगभग 21. 6०० ग्राम) का यह हीरा महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के ताज का हिस्सा है। कोहिनूर को फ़ारसी में 'कूह-ए-नूर' कहा जाता है, जिसका अर्थ है- कुदरत की विशाल आभा या रोशनी का पर्वत। भारत में अंग्रेज़ी राज के दौरान ब्रितानी प्रधानमंत्री बेंजामिन डिजराएली ने इसे महारानी विक्टोरिया को तब भेंट किया, जब सन 1877 में उन्हें भारत की भी सम्राज्ञी घोषित किया गया था। कोहिनूर का उद्गम और शुरुआती इतिहास स्पष्ट नहीं है। इसकी कहानी भी परी कथाओं से कम रोमांचक नहीं है। इसके खनन से जुड़ी दक्षिण भारत में हीरों की कई कहानियाँ रहीं हैं, परंतु कौन-सी कोहिनूर से सम्बन्धित है, यह कहना कठिन है। चौदहवीं शताब्दी से पूर्व इस हीरे का इतिहास ठीक ज्ञात नहीं है।
दिल्ली सल्तनत में ़खलिजी वंश का अंत 132० में होने के बाद ग़यासुद्दीन तुग़लक़ ने गद्दी संभाली। उसने अपने पुत्र उलूग ़खाँ को 1323 में काकतीय वंश के राजा प्रताप रुद्रदेव के खिलाफ युद्ध के लिए भेजा। वारंगल के युद्ध में राजा प्रताप रुद्रदेव की हार हुई और कोहिनूर उलूग खां की सेना के हाथ लग गया। यहीं से यह हीरा'दिल्ली सल्तनत'के उत्तराधिकारियों के हाथों से गुजरकर 1526 में मुग़ल सम्राट बाबर के पास पहुंचा ।
बाबर ने अपने संस्मरण में आगरा की विजय में एक बृहत् उत्तम हीरा मिलने का उल्लेख किया है। संभवतः वह कोहिनूर ही था, क्योंकि उस हीरे का भार आठ मिस्कल (32० रत्ती) बताया गया है। तराशे जाने के पूर्व कोहिनूर का भार इतना ही था। बाबर ने अपने'बाबरनामा'में लिखा है कि यह हीरा सन 1294 में मालवा के एक राजा का था। बाबर ने इसका मूल्य आंकते हुए कहा कि यह हीरा पूरे संसार का दो दिनों तक पेट भर सकता है।
कोहिनूर मुगलों के पास 1739 तक रहा। उसी साल ईरानी शासक नादिरशाह ने भारत पर आक्रमण कर आगरा और दिल्ली में भीषण लूटपाट की। वह'मयूर्र ंसहासन'सहित कोहिनूर भी लूटकर ले गया। इस हीरे को पाने पर ही नादिरशाह के मुंह से अचानक निकल पड़ा वाह! कोह-ए-नूर।
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नयी दिल्ली। भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसद कीथ वाज ने अपनी सरकार से कोहिनूर हीरे को भारत को लौटाने का आग्रह करके ब्रिटेन की महारानी के मुकुट में सुशोभित अनमोल हीरे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है । इस हीरे को मध्यकाल में आंध्र प्रदेश के गुंटुर जिले में कोल्लूर खान से निकाला गया था और एक समय इसे दुनिया का सबसे बड़ा हीरा माना जाता था। मूल रूप से इस पर काकतीय राजवंश का मालिकाना हक रहा और उसने इसे एक मंदिर में देवी की आंख के तौर पर स्थापित किया था। इसके बाद यह कई आक्रमणकारियों के हाथों गुजरते हुए आखिरकार ब्रिटेन पहुंचा। कोहिनूर की वर्तमान कीमत लगभग एक सौ पचास हजार करोड़ रुपये है। एक सौ पाँच कैरेट का यह हीरा महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के ताज का हिस्सा है। कोहिनूर को फ़ारसी में 'कूह-ए-नूर' कहा जाता है, जिसका अर्थ है- कुदरत की विशाल आभा या रोशनी का पर्वत। भारत में अंग्रेज़ी राज के दौरान ब्रितानी प्रधानमंत्री बेंजामिन डिजराएली ने इसे महारानी विक्टोरिया को तब भेंट किया, जब सन एक हज़ार आठ सौ सतहत्तर में उन्हें भारत की भी सम्राज्ञी घोषित किया गया था। कोहिनूर का उद्गम और शुरुआती इतिहास स्पष्ट नहीं है। इसकी कहानी भी परी कथाओं से कम रोमांचक नहीं है। इसके खनन से जुड़ी दक्षिण भारत में हीरों की कई कहानियाँ रहीं हैं, परंतु कौन-सी कोहिनूर से सम्बन्धित है, यह कहना कठिन है। चौदहवीं शताब्दी से पूर्व इस हीरे का इतिहास ठीक ज्ञात नहीं है। दिल्ली सल्तनत में ़खलिजी वंश का अंत एक हज़ार तीन सौ बीस में होने के बाद ग़यासुद्दीन तुग़लक़ ने गद्दी संभाली। उसने अपने पुत्र उलूग ़खाँ को एक हज़ार तीन सौ तेईस में काकतीय वंश के राजा प्रताप रुद्रदेव के खिलाफ युद्ध के लिए भेजा। वारंगल के युद्ध में राजा प्रताप रुद्रदेव की हार हुई और कोहिनूर उलूग खां की सेना के हाथ लग गया। यहीं से यह हीरा'दिल्ली सल्तनत'के उत्तराधिकारियों के हाथों से गुजरकर एक हज़ार पाँच सौ छब्बीस में मुग़ल सम्राट बाबर के पास पहुंचा । बाबर ने अपने संस्मरण में आगरा की विजय में एक बृहत् उत्तम हीरा मिलने का उल्लेख किया है। संभवतः वह कोहिनूर ही था, क्योंकि उस हीरे का भार आठ मिस्कल बताया गया है। तराशे जाने के पूर्व कोहिनूर का भार इतना ही था। बाबर ने अपने'बाबरनामा'में लिखा है कि यह हीरा सन एक हज़ार दो सौ चौरानवे में मालवा के एक राजा का था। बाबर ने इसका मूल्य आंकते हुए कहा कि यह हीरा पूरे संसार का दो दिनों तक पेट भर सकता है। कोहिनूर मुगलों के पास एक हज़ार सात सौ उनतालीस तक रहा। उसी साल ईरानी शासक नादिरशाह ने भारत पर आक्रमण कर आगरा और दिल्ली में भीषण लूटपाट की। वह'मयूर्र ंसहासन'सहित कोहिनूर भी लूटकर ले गया। इस हीरे को पाने पर ही नादिरशाह के मुंह से अचानक निकल पड़ा वाह! कोह-ए-नूर।
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पिछले अगर दो एपिसोड के मुकाबले देखा जाए तो ये रॉ का एपिसोड थोड़ा बहुत ठीक रहा। ओपनिंग सैगमेंट और मेन इवेंट मैच शानदार था। मेन इवेंट में सैथ रॉलिंस और बैरन कॉर्बिन के बीच जो मैच हुआ, इस मैच ने फैंस का दिल जीत लिया। काफी दिनों बाद ऐसा मैच देखने को मिला। इस बार शो की शुरूआत सैथ रॉलिंस ने की। सैथ ने बैरन कॉर्बिन पर कई आरोप लगाए, जिसके बाद उन्होंने मैच के लिए भी कह दिया। बैरन ने भी इसे स्वीकार कर लिया। सैथ रॉलिंस ने ब्रॉक लैसनर को भी इस बार नहीं छोड़ा और उनकी बेइज्जती कर दी।
इसके अलावा भी कई सैगमेंट और मैच यहां देखने को मिल। चैड गेबल और बॉबी रूड ने रॉ टैग टीम चैंपियनशिप अपने नाम कर ली। ऑथर्स ऑफ पेन को उन्होंने हराया। ये बड़ी जीत इन दोनों के लिए है। मैकइंटायर ने भी अपना खतरनाक रूप यहां पर दिखाया। जिगलर को उन्होंने मात दी। रोंडा राउजी और नाया जैक्स का भी आमना-सामना हुआ। रोंडा काफी गुस्से में आज थी। यहीं वजह थी कि नाया को उन्होंने बैरीकेट से बाहर फैंस के बीच डाल दिया। कई दिनों बाद मेन इवेंट मैच काफी अच्छा रहा। सैथ रॉलिंस और कॉर्बिन के बीच टेबल,लैडर्स, चेयर्स मैच हुआ। इस मैच में रैफरी हीथ स्लेटर थे। उन्होंने अंत में बैरन का साथ देने की कोशिश की लेकिन सैथ ने इसका मौका नहीं दिया। ये मैच इंटरकॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप के लिए था। सैथ रॉलिंस ने ये मैच जीत लिया। फैंस ने भी इस रॉ को देखकर जबरदस्त रिएक्शन ट्विटर पर दिया।
(सैथ रॉलिंस और बैरन कॉर्बिन का मैच शानदार था। )
(पिछले कई महीनों में सैथ और बैरन का ये मुकाबला सबसे बेहतरीन था। )
(पिछले दो हफ्ते के मुकाबले देखा जाए तो ये रॉ काफी अच्छी रहीं। )
(मंडे नाइट रॉ की शानदार वापसी। )
(इस हफ्ते की रॉ काफी अच्छी थी। )
(पिछले हफ्ते के मुकाबले ये रॉ अच्छी थी। सभी सुपरस्टार्स ने अच्छा काम किया। )
(विंस मैकमैहन और रॉ ने इस बात को मान लिया की रॉ में मजा नहीं आ रहा था। सैथ रॉलिंस ने पहले पार्ट में इस बात ही बात की। )
(मेन इवेंट काफी शानदार था। )
(डीन एंब्रोज इंटरकॉन्टिनेंटल चैंपियन बन जाएं तांकि सैथ रॉलिंस इसके बाद यूनिवर्सल चैंपियन बने। और वो रोज रॉ में आएं। )
(आज की रॉ इतनी अच्छी थी कि अब टीएलसी पीपीवी को अच्छे से देखा जा सकता है। )
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पिछले अगर दो एपिसोड के मुकाबले देखा जाए तो ये रॉ का एपिसोड थोड़ा बहुत ठीक रहा। ओपनिंग सैगमेंट और मेन इवेंट मैच शानदार था। मेन इवेंट में सैथ रॉलिंस और बैरन कॉर्बिन के बीच जो मैच हुआ, इस मैच ने फैंस का दिल जीत लिया। काफी दिनों बाद ऐसा मैच देखने को मिला। इस बार शो की शुरूआत सैथ रॉलिंस ने की। सैथ ने बैरन कॉर्बिन पर कई आरोप लगाए, जिसके बाद उन्होंने मैच के लिए भी कह दिया। बैरन ने भी इसे स्वीकार कर लिया। सैथ रॉलिंस ने ब्रॉक लैसनर को भी इस बार नहीं छोड़ा और उनकी बेइज्जती कर दी। इसके अलावा भी कई सैगमेंट और मैच यहां देखने को मिल। चैड गेबल और बॉबी रूड ने रॉ टैग टीम चैंपियनशिप अपने नाम कर ली। ऑथर्स ऑफ पेन को उन्होंने हराया। ये बड़ी जीत इन दोनों के लिए है। मैकइंटायर ने भी अपना खतरनाक रूप यहां पर दिखाया। जिगलर को उन्होंने मात दी। रोंडा राउजी और नाया जैक्स का भी आमना-सामना हुआ। रोंडा काफी गुस्से में आज थी। यहीं वजह थी कि नाया को उन्होंने बैरीकेट से बाहर फैंस के बीच डाल दिया। कई दिनों बाद मेन इवेंट मैच काफी अच्छा रहा। सैथ रॉलिंस और कॉर्बिन के बीच टेबल,लैडर्स, चेयर्स मैच हुआ। इस मैच में रैफरी हीथ स्लेटर थे। उन्होंने अंत में बैरन का साथ देने की कोशिश की लेकिन सैथ ने इसका मौका नहीं दिया। ये मैच इंटरकॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप के लिए था। सैथ रॉलिंस ने ये मैच जीत लिया। फैंस ने भी इस रॉ को देखकर जबरदस्त रिएक्शन ट्विटर पर दिया।
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शिवपुरी। बोर्ड परीक्षा के लिहाज से नकल को लेकर सबसे संवेदनशील माने जा रहे 10वीं का गणित विषय का प्रश्न पत्र शुक्रवार को जिले के 65 परीक्षा केंद्रों पर एक साथ आयोजित किया गया। नकल पर नकेल कसने के लिए कलेक्टर तरुण राठी ने इस बार चिन्हित केंद्रों पर विभिन्न् विभागों के जिला अधिकारियों को पूरे परीक्षा समय के लिए तैनात किया तो वहीं विभागीय और प्रशासनिक उडऩ दस्तों ने भी कई केंद्रों पर आमद दर्ज करवाई।
राहत की बात यह रही कि किसी भी केंद्र पर कोई नकल प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है। शुक्रवार को इस परीक्षा में जिलेभर में कुल 26 हजार 230 परीक्षार्थी नामांकित थे, जिनमें से 24 हजार 522 परीक्षा देने पहुंचे, जबकि 1708 परीक्षार्थी ऐसे थे जो गैर हाजिर रहे।
हांलाकि पूरे जिले भर में पेपर से पहले आउट हो रही ऑटियों के चलते छात्र-छात्राए निश्चत समय के बाद परीक्षा हॉल में अंदर पहुंचे। छात्र-छात्रांए लगभग 20 मिनिट तक सेंटर के बाहर ऑटियों का इंतजार करते दिखे।
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शिवपुरी। बोर्ड परीक्षा के लिहाज से नकल को लेकर सबसे संवेदनशील माने जा रहे दसवीं का गणित विषय का प्रश्न पत्र शुक्रवार को जिले के पैंसठ परीक्षा केंद्रों पर एक साथ आयोजित किया गया। नकल पर नकेल कसने के लिए कलेक्टर तरुण राठी ने इस बार चिन्हित केंद्रों पर विभिन्न् विभागों के जिला अधिकारियों को पूरे परीक्षा समय के लिए तैनात किया तो वहीं विभागीय और प्रशासनिक उडऩ दस्तों ने भी कई केंद्रों पर आमद दर्ज करवाई। राहत की बात यह रही कि किसी भी केंद्र पर कोई नकल प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है। शुक्रवार को इस परीक्षा में जिलेभर में कुल छब्बीस हजार दो सौ तीस परीक्षार्थी नामांकित थे, जिनमें से चौबीस हजार पाँच सौ बाईस परीक्षा देने पहुंचे, जबकि एक हज़ार सात सौ आठ परीक्षार्थी ऐसे थे जो गैर हाजिर रहे। हांलाकि पूरे जिले भर में पेपर से पहले आउट हो रही ऑटियों के चलते छात्र-छात्राए निश्चत समय के बाद परीक्षा हॉल में अंदर पहुंचे। छात्र-छात्रांए लगभग बीस मिनिट तक सेंटर के बाहर ऑटियों का इंतजार करते दिखे।
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अनङ्गत्वेन 'तन्नूनम् एनयोः प्रविशन् वपुः । दुर्गाश्रित इवानङ्गो विव्याधैनं स्वसायकैः ॥९८॥ ताभ्यामिति समं भोगान् भुञ्जनस्य जगद्गुरोः । कालो महानगादेकक्षणवत् सततत्क्षणैः ॥१९॥ अथान्यदा महादेवी सौधे सुप्ता यशस्वति । स्वप्ने पश्यन् महीं ग्रस्तां मेरुं सूर्यञ्च सोडुपम् ।।१०० ॥ सरः सहसमन्धिञ्च चलद्वीचिकमैक्षत । स्वप्नान्ते च व्यबुद्धासौ पठन् मागधनिःस्वनैः ॥१०१॥ त्वं विबुध्यस्व कल्याणि कल्याणशतभागिनि । प्रबोधसमयोऽयं ते सहाब्जिन्या धृतश्रियः । १०२। मुदे तवाम्ब भूयासुः इमे स्वप्नाः शुभावहाः । महीमेरूद्धोन्द्वर्कसरोवरपुरस्सराः ॥ १०३।। नभस्सरोवरे ऽन्विष्य चिरं तिमिरशैवलम् । खेदादिवानाभ्येति शशिहंसोऽस्त पादपम् ॥१०४ ॥ ज्योस्नांभसि चिरं तीव' ताराहंस्यो नभो हृदे । नूनं 'निलेतुमस्ताः शिखराण्याश्रयन्त्यभूः ॥१०५॥ निद्राकषायितैनैः कोकीनां " सेमीक्षितः । तद्दृष्टि पितात्मेव विधुविच्छायतां गतः ।।१०६॥ प्रयाति यामिनो" यामा" निवान्वेतुं पुरोगतान् । ज्योत्स्नांशुक्रेन संवेष्टय तारासर्वस्वमात्मनः ।।१०७ ॥ इतोऽस्तमेति शीतांशुः इतो भास्त्रानुदीयते । संसाररस्येव वैचित्र्यम् उपदेष्टुं समुद्यतौ ॥१०८ ॥
उपाय अवश्य करते हैं ।। ९७ ॥ अथवा कामदेव शरीररहित होनेके कारण इन देवियों के शरीर में प्रविष्ट हो गया था और वहाँ किलेके समान स्थित होकर अपने बाणोंके द्वारा भगवान्को घायल करता था ॥ १८ ॥ इस प्रकार उन देवियों के साथ भोगोंको भोगते हुए जगद्गुरु भगवान् वृषभदेवका बड़ा भारी समय निरन्तर होनेवाले उत्सवोंसे क्षरण भरके समान बीत गया था ॥ १६ ॥ किसी समय यशस्वती महादेवी राजमहलमें सो रही थीं । सोते समय उसने स्वप्न में प्रसी हुई पृथिवी, सुमेरु पर्वत, चन्द्रमा सहित सूर्य, हंस सहित सरोवर तथा चञ्चल लहरोंवाला समुद्र देखा, स्वप्न देखने के बाद मंगल-पाठ पढ़ते हुए बन्दीजनोंके शब्द सुनकर वह जाग पड़ी ।। १००-१०१ ।। उस समय वन्दोजन इस प्रकार मंगल-पाठ पढ़ रहे थे कि हे दूसरोंका कल्याण करनेवाली और स्वयं सैकड़ों कल्याणोंको प्राप्त होनेवाली देवि, अब तू जाग; क्योंकि तू कमलिनीके समान शोभा धारण करनेवाली है - इसलिये यह तेरा जागनेका समय है । भावार्थ - जिस प्रकार यह समय कमलिनीके जागृत - विकसित होनेका है, उसी प्रकार तुम्हारे जागृत होनेका भी है ।। १०२ ॥ हे मातः पृथिवी, मेरु, समुद्र, सूर्य, चन्द्रमा और सरोवर आदि जो अनेक मंगल करनेवाले शुभ स्वप्न देखे है वे तुम्हारे आनन्दके लिये हों ।। १०३ ।। हे दैवि, यह चन्द्रमारूपी हंस चिरकाल तक आकाशरूपी सरोवरमें अन्धकाररूपी शैवालको खोजकर अब खेदखिन्न होने से ही मानो अस्ताचलरूपी वृक्षका आश्रय ले रहा है। अर्थात् अस्त हो रहा है ॥ १०४ ॥ ये तारारूपी हंसियाँ आकाशरूपी सरोवरमें चिरकाल तक तैरकर अब मानो निवास करने के लिये ही अस्ताचलकी शिखरोंका ले रही हैं हो रही हैं ।। १०५ ।। हे देवि, यह चन्द्रमा कान्तिरहित हो गया है, ऐसा मालूम होता है कि रात्रिके समय चकवियोंने निद्राके कारण लाल वर्ण हुए नेत्रोंसे इसे ईर्ष्या के साथ देखा है इसलिये मानो उनकी दृष्टिके दोष से ही दूषित होकर यह कान्तिरहित हो गया है ।। १०६ ॥ हे देवि, अब यह रात्रि भी अपने नक्षत्ररूपी धनको चाँदनीरूपी वस्त्रमें लपेटकर भागी जा रही है, ऐसा मालूम होता है मानो वह आगे गये हुए ( बीते हुए ) प्रहरोंके पीछे ही जाना चाहती हो ।। १०७ ।। इस ओर यह चन्द्रमा अस्त हो रहा है और इस ओर सूर्यका उदय हो रहा है, ऐसा जान पड़ता है मानो
१ वा नून- अ०, प०, स०, द०, म०, ल० । २ नित्योत्सवैः । ३ चलवीचिक- श्र०, प०, द०, म०, स०, ल० । ४ - पुरोगमाः प० । ५ रेऽवीष्य ८० । - अनुप्रय । ६ भिगच्छति । गिरिवृक्षम् । ८ तरणं कृत्वा । ६ वस्तुम् । १० ईर्ष्यया सहितम् । ११ रजनी । १२ प्रहरान् । १३ 'ई गतौ' उदयतीत्यर्थः ।
- पञ्चदशं पर्व
तारका गगनाम्भोधौ मुक्ताफलनिभश्रियः । अरुणौर्वानलेनेमा विलीयन्ते गतत्विष ॥१०९ ॥ सरितां सैकता देव चक्रवाको 'रुवन् रुवन् । अन्विच्छति निजां कान्तां निशाविरहविक्लवः ।।११०।। श्रयं हंसयुवा हंस्या सुषुप्सति समं सति । मृणाल शकलेनाङ्गं कण्डूयँश्चन्बुलम्विना ।।१११ ॥ अब्जिनीयमितो धसे विकसत्पङ्कजाननम् । इतश्च म्लानिमासाद्य नन्नास्येयं कुमुद्वती ।।११२॥ सरसां पुलिनेष्वेताः 'कुरर्यः कुर्वते रुतम् । युष्मन्नूपुरसंवाद' तारं मधुरमेव च ॥११३॥ स्वनीडा दुस्पतन्यद्य कृतकोलाहलस्वनाः । प्रभातमङ्गलानीव पठन्तोऽमी शकुन्तयः ॥११४ ।। प्रसंस्करा "परिक्षीणदशा इमे । काञ्चुकीयैस्सम दीपा यान्ति कालेन मन्दताम् ॥११५॥ इतो निजगृहे देवि त्वन्मङ्गलविधित्सया " । कुब्जवामनिकाप्रायः परिवारः प्रतीच्छति ॥ ॥ ११६ ॥ विमुख शयनं तस्मात् नदीपुलिनसन्निभम् । हंसीव राजहसस्य " वल्लभा मानसाश्रया ॥११७॥ इत्युच्चैर्वन्दिवृन्देषु पठत्सु समयोचितम् । प्राबोधिकानकध्वानैः सा विनिद्राभवच्छनैः ॥११८॥ विमुक्तशयना चैषा कृतमङ्गलमज्जना । प्रष्टुकामा स्वदृष्टानां स्वप्नानां तत्त्वतः फलम् ॥११९॥
ये संसारकी विचित्रताका उपदेश देनेके लिये ही उद्यत हुए हों ॥ १०८ ॥ हे देवि, आकाशरूपी समुद्र में मोतियोंके समान शोभायमान रहनेवाले ये तारे सूर्यरूपी वड़वानलके द्वारा कान्तिरहित होकर विलीन होते जा रहे हैं । १०६ ।। रातभर विरहसे व्याकुल हुआ यह चकवा नदीके बालू के टीले पर स्थित होकर रोता रोता ही अपनी प्यारी स्त्री चकवीको ढूंढ़ रहा है ॥ ११० ।। हे सति, इधर यह जवान हंस चोंच में दबाये हुए मृणाल खण्डसे शरीरको खुजलाता हुआ हंसीके साथ शयन करना चाहता है ॥ ११९ ॥ हे देवि, इधर यह कमलिनी अपने विकसित कमलरूपी मुखको धारण कर रही है और इधर यह कुमुदिनी मुरझाकर नम्रमुख हो रही है, अर्थात् मुरझाये हुए कुमुदको नीचा कर रही है ॥ ११२ । इधर तालाबके किनारों पर ये कुरर पक्षियोंकी स्त्रियां तुम्हारे नूपुरके समान उच्च और मधुर शब्द कर रही हैं ॥ ११३ ।। इस समय ये पक्षी कोलाहल करते हुए अपने अपने घोंसलोंसे उड़ रहे हैं और ऐसे जान पड़ते हैं मानो प्रान कालका मंगल-पाठ ही पढ़ रहे हों ।। ११४ । इधर प्रातःकालका समय पाकर ये दीपक कंचुकियों ( राजाओंकेतःपुर में रहनेवाले वृद्ध या नपुंसक पहरेदारों ) के साथ साथ ही मन्दताको प्राप्त हो रहे हैं क्योंकि जिस प्रकार कंचुकी स्त्रियोके संस्कार से रहित होते है उसी प्रकार दीपक भी प्रातःकाल होने पर स्त्रियोंके द्वाराकी हुई सजावटसे रहित हो रहे हैं और कंचुकी जिस प्रकार परिक्षीण दशा अर्थात् वृद्ध अवस्थाको प्राप्त होते हैं उसी प्रकार दीपक भी परिक्षीण दशा अर्थात् क्षीण बत्तीवाले हो रहे है ॥ ११५ ।। हे देवि, इधर तुम्हारे घर में तुम्हारा मंगल करनेकी इच्छासे यह कुब्जक तथा वामन आदिका परिवार तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है ॥ ११६ ।। इसलिये जिस प्रकार मानसरोवर पर रहनेवाली, राजहंस पक्षीकी प्रिय वल्लभा-हंसी नदीका किनारा छोड़ देती है उसी प्रकार भगवान् वृषभदेवके मनमें रहनेवाली और उनकी प्रिय वल्लभा तू भी शय्या छोड़ ।। ११७ ।। इस प्रकार जब वदीजनोके समूह जोर जोरसे मंगल-पाठ पढ़ रहे थे तब वह यशस्वती महादेवी जगानेवाले दुन्दुभियोंके शब्दोंसे धीरे धीरे निद्रारहित हुई - जाग उठी ।। ११८ ।। और शय्या छोड़कर प्रातःकालका मंगलस्नान कर प्रीतिसे रोमांचितशरीर हो अपने देखे हुए स्वप्नोंका यथार्थ फल पूछनेके लिये संसारके प्राणियों के हृदयवर्ती अंधकारको
१ सूर्यसारथिः । २ कूजन कूजन् । ३ विह्वलः । ४ शयितुमिच्छति । ५ भो पतिव्रते । ६ उत्क्रोशाः । 'उत्क्रोशकुररौ समौ' इत्यभिधानात् । ७ रुतिम् प० । ८ सदृशम् । ६ स्त्रीसम्बन्धि । १० परिक्षीण - वर्तिका । परिनष्टवयस्काः । ११ विधातुमिच्छया । १२ पश्यति । आगच्छति वा तिष्ठति वा । १३ राजश्रे४स्य राजहंसस्य च [राजहंसास्तु ते चञ्चूरः लोहितैः सिताः ।' इत्यमरः]
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अनङ्गत्वेन 'तन्नूनम् एनयोः प्रविशन् वपुः । दुर्गाश्रित इवानङ्गो विव्याधैनं स्वसायकैः ॥अट्ठानवे॥ ताभ्यामिति समं भोगान् भुञ्जनस्य जगद्गुरोः । कालो महानगादेकक्षणवत् सततत्क्षणैः ॥उन्नीस॥ अथान्यदा महादेवी सौधे सुप्ता यशस्वति । स्वप्ने पश्यन् महीं ग्रस्तां मेरुं सूर्यञ्च सोडुपम् ।।एक सौ ॥ सरः सहसमन्धिञ्च चलद्वीचिकमैक्षत । स्वप्नान्ते च व्यबुद्धासौ पठन् मागधनिःस्वनैः ॥एक सौ एक॥ त्वं विबुध्यस्व कल्याणि कल्याणशतभागिनि । प्रबोधसमयोऽयं ते सहाब्जिन्या धृतश्रियः । एक सौ दो। मुदे तवाम्ब भूयासुः इमे स्वप्नाः शुभावहाः । महीमेरूद्धोन्द्वर्कसरोवरपुरस्सराः ॥ एक सौ तीन।। नभस्सरोवरे ऽन्विष्य चिरं तिमिरशैवलम् । खेदादिवानाभ्येति शशिहंसोऽस्त पादपम् ॥एक सौ चार ॥ ज्योस्नांभसि चिरं तीव' ताराहंस्यो नभो हृदे । नूनं 'निलेतुमस्ताः शिखराण्याश्रयन्त्यभूः ॥एक सौ पाँच॥ निद्राकषायितैनैः कोकीनां " सेमीक्षितः । तद्दृष्टि पितात्मेव विधुविच्छायतां गतः ।।एक सौ छः॥ प्रयाति यामिनो" यामा" निवान्वेतुं पुरोगतान् । ज्योत्स्नांशुक्रेन संवेष्टय तारासर्वस्वमात्मनः ।।एक सौ सात ॥ इतोऽस्तमेति शीतांशुः इतो भास्त्रानुदीयते । संसाररस्येव वैचित्र्यम् उपदेष्टुं समुद्यतौ ॥एक सौ आठ ॥ उपाय अवश्य करते हैं ।। सत्तानवे ॥ अथवा कामदेव शरीररहित होनेके कारण इन देवियों के शरीर में प्रविष्ट हो गया था और वहाँ किलेके समान स्थित होकर अपने बाणोंके द्वारा भगवान्को घायल करता था ॥ अट्ठारह ॥ इस प्रकार उन देवियों के साथ भोगोंको भोगते हुए जगद्गुरु भगवान् वृषभदेवका बड़ा भारी समय निरन्तर होनेवाले उत्सवोंसे क्षरण भरके समान बीत गया था ॥ सोलह ॥ किसी समय यशस्वती महादेवी राजमहलमें सो रही थीं । सोते समय उसने स्वप्न में प्रसी हुई पृथिवी, सुमेरु पर्वत, चन्द्रमा सहित सूर्य, हंस सहित सरोवर तथा चञ्चल लहरोंवाला समुद्र देखा, स्वप्न देखने के बाद मंगल-पाठ पढ़ते हुए बन्दीजनोंके शब्द सुनकर वह जाग पड़ी ।। एक सौ-एक सौ एक ।। उस समय वन्दोजन इस प्रकार मंगल-पाठ पढ़ रहे थे कि हे दूसरोंका कल्याण करनेवाली और स्वयं सैकड़ों कल्याणोंको प्राप्त होनेवाली देवि, अब तू जाग; क्योंकि तू कमलिनीके समान शोभा धारण करनेवाली है - इसलिये यह तेरा जागनेका समय है । भावार्थ - जिस प्रकार यह समय कमलिनीके जागृत - विकसित होनेका है, उसी प्रकार तुम्हारे जागृत होनेका भी है ।। एक सौ दो ॥ हे मातः पृथिवी, मेरु, समुद्र, सूर्य, चन्द्रमा और सरोवर आदि जो अनेक मंगल करनेवाले शुभ स्वप्न देखे है वे तुम्हारे आनन्दके लिये हों ।। एक सौ तीन ।। हे दैवि, यह चन्द्रमारूपी हंस चिरकाल तक आकाशरूपी सरोवरमें अन्धकाररूपी शैवालको खोजकर अब खेदखिन्न होने से ही मानो अस्ताचलरूपी वृक्षका आश्रय ले रहा है। अर्थात् अस्त हो रहा है ॥ एक सौ चार ॥ ये तारारूपी हंसियाँ आकाशरूपी सरोवरमें चिरकाल तक तैरकर अब मानो निवास करने के लिये ही अस्ताचलकी शिखरोंका ले रही हैं हो रही हैं ।। एक सौ पाँच ।। हे देवि, यह चन्द्रमा कान्तिरहित हो गया है, ऐसा मालूम होता है कि रात्रिके समय चकवियोंने निद्राके कारण लाल वर्ण हुए नेत्रोंसे इसे ईर्ष्या के साथ देखा है इसलिये मानो उनकी दृष्टिके दोष से ही दूषित होकर यह कान्तिरहित हो गया है ।। एक सौ छः ॥ हे देवि, अब यह रात्रि भी अपने नक्षत्ररूपी धनको चाँदनीरूपी वस्त्रमें लपेटकर भागी जा रही है, ऐसा मालूम होता है मानो वह आगे गये हुए प्रहरोंके पीछे ही जाना चाहती हो ।। एक सौ सात ।। इस ओर यह चन्द्रमा अस्त हो रहा है और इस ओर सूर्यका उदय हो रहा है, ऐसा जान पड़ता है मानो एक वा नून- अशून्य, पशून्य, सशून्य, दशून्य, मशून्य, लशून्य । दो नित्योत्सवैः । तीन चलवीचिक- श्रशून्य, पशून्य, दशून्य, मशून्य, सशून्य, लशून्य । चार - पुरोगमाः पशून्य । पाँच रेऽवीष्य अस्सी । - अनुप्रय । छः भिगच्छति । गिरिवृक्षम् । आठ तरणं कृत्वा । छः वस्तुम् । दस ईर्ष्यया सहितम् । ग्यारह रजनी । बारह प्रहरान् । तेरह 'ई गतौ' उदयतीत्यर्थः । - पञ्चदशं पर्व तारका गगनाम्भोधौ मुक्ताफलनिभश्रियः । अरुणौर्वानलेनेमा विलीयन्ते गतत्विष ॥एक सौ नौ ॥ सरितां सैकता देव चक्रवाको 'रुवन् रुवन् । अन्विच्छति निजां कान्तां निशाविरहविक्लवः ।।एक सौ दस।। श्रयं हंसयुवा हंस्या सुषुप्सति समं सति । मृणाल शकलेनाङ्गं कण्डूयँश्चन्बुलम्विना ।।एक सौ ग्यारह ॥ अब्जिनीयमितो धसे विकसत्पङ्कजाननम् । इतश्च म्लानिमासाद्य नन्नास्येयं कुमुद्वती ।।एक सौ बारह॥ सरसां पुलिनेष्वेताः 'कुरर्यः कुर्वते रुतम् । युष्मन्नूपुरसंवाद' तारं मधुरमेव च ॥एक सौ तेरह॥ स्वनीडा दुस्पतन्यद्य कृतकोलाहलस्वनाः । प्रभातमङ्गलानीव पठन्तोऽमी शकुन्तयः ॥एक सौ चौदह ।। प्रसंस्करा "परिक्षीणदशा इमे । काञ्चुकीयैस्सम दीपा यान्ति कालेन मन्दताम् ॥एक सौ पंद्रह॥ इतो निजगृहे देवि त्वन्मङ्गलविधित्सया " । कुब्जवामनिकाप्रायः परिवारः प्रतीच्छति ॥ ॥ एक सौ सोलह ॥ विमुख शयनं तस्मात् नदीपुलिनसन्निभम् । हंसीव राजहसस्य " वल्लभा मानसाश्रया ॥एक सौ सत्रह॥ इत्युच्चैर्वन्दिवृन्देषु पठत्सु समयोचितम् । प्राबोधिकानकध्वानैः सा विनिद्राभवच्छनैः ॥एक सौ अट्ठारह॥ विमुक्तशयना चैषा कृतमङ्गलमज्जना । प्रष्टुकामा स्वदृष्टानां स्वप्नानां तत्त्वतः फलम् ॥एक सौ उन्नीस॥ ये संसारकी विचित्रताका उपदेश देनेके लिये ही उद्यत हुए हों ॥ एक सौ आठ ॥ हे देवि, आकाशरूपी समुद्र में मोतियोंके समान शोभायमान रहनेवाले ये तारे सूर्यरूपी वड़वानलके द्वारा कान्तिरहित होकर विलीन होते जा रहे हैं । एक सौ छः ।। रातभर विरहसे व्याकुल हुआ यह चकवा नदीके बालू के टीले पर स्थित होकर रोता रोता ही अपनी प्यारी स्त्री चकवीको ढूंढ़ रहा है ॥ एक सौ दस ।। हे सति, इधर यह जवान हंस चोंच में दबाये हुए मृणाल खण्डसे शरीरको खुजलाता हुआ हंसीके साथ शयन करना चाहता है ॥ एक सौ उन्नीस ॥ हे देवि, इधर यह कमलिनी अपने विकसित कमलरूपी मुखको धारण कर रही है और इधर यह कुमुदिनी मुरझाकर नम्रमुख हो रही है, अर्थात् मुरझाये हुए कुमुदको नीचा कर रही है ॥ एक सौ बारह । इधर तालाबके किनारों पर ये कुरर पक्षियोंकी स्त्रियां तुम्हारे नूपुरके समान उच्च और मधुर शब्द कर रही हैं ॥ एक सौ तेरह ।। इस समय ये पक्षी कोलाहल करते हुए अपने अपने घोंसलोंसे उड़ रहे हैं और ऐसे जान पड़ते हैं मानो प्रान कालका मंगल-पाठ ही पढ़ रहे हों ।। एक सौ चौदह । इधर प्रातःकालका समय पाकर ये दीपक कंचुकियों के साथ साथ ही मन्दताको प्राप्त हो रहे हैं क्योंकि जिस प्रकार कंचुकी स्त्रियोके संस्कार से रहित होते है उसी प्रकार दीपक भी प्रातःकाल होने पर स्त्रियोंके द्वाराकी हुई सजावटसे रहित हो रहे हैं और कंचुकी जिस प्रकार परिक्षीण दशा अर्थात् वृद्ध अवस्थाको प्राप्त होते हैं उसी प्रकार दीपक भी परिक्षीण दशा अर्थात् क्षीण बत्तीवाले हो रहे है ॥ एक सौ पंद्रह ।। हे देवि, इधर तुम्हारे घर में तुम्हारा मंगल करनेकी इच्छासे यह कुब्जक तथा वामन आदिका परिवार तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है ॥ एक सौ सोलह ।। इसलिये जिस प्रकार मानसरोवर पर रहनेवाली, राजहंस पक्षीकी प्रिय वल्लभा-हंसी नदीका किनारा छोड़ देती है उसी प्रकार भगवान् वृषभदेवके मनमें रहनेवाली और उनकी प्रिय वल्लभा तू भी शय्या छोड़ ।। एक सौ सत्रह ।। इस प्रकार जब वदीजनोके समूह जोर जोरसे मंगल-पाठ पढ़ रहे थे तब वह यशस्वती महादेवी जगानेवाले दुन्दुभियोंके शब्दोंसे धीरे धीरे निद्रारहित हुई - जाग उठी ।। एक सौ अट्ठारह ।। और शय्या छोड़कर प्रातःकालका मंगलस्नान कर प्रीतिसे रोमांचितशरीर हो अपने देखे हुए स्वप्नोंका यथार्थ फल पूछनेके लिये संसारके प्राणियों के हृदयवर्ती अंधकारको एक सूर्यसारथिः । दो कूजन कूजन् । तीन विह्वलः । चार शयितुमिच्छति । पाँच भो पतिव्रते । छः उत्क्रोशाः । 'उत्क्रोशकुररौ समौ' इत्यभिधानात् । सात रुपयातिम् पशून्य । आठ सदृशम् । छः स्त्रीसम्बन्धि । दस परिक्षीण - वर्तिका । परिनष्टवयस्काः । ग्यारह विधातुमिच्छया । बारह पश्यति । आगच्छति वा तिष्ठति वा । तेरह राजश्रेचारस्य राजहंसस्य च [राजहंसास्तु ते चञ्चूरः लोहितैः सिताः ।' इत्यमरः]
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दिल्ली विश्वविद्यालय के रामानुजन कॉलेज ने 30 घंटे का रिसर्च एवं डाटा एनालॉसिस सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है। यह कोर्स लॉकडाउन और कोविड-19 से उपजी स्थिति को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है। इसकी पढ़ाई ऑनलाइन होगी और उत्तीर्ण होने पर कॉलेज सर्टिफिकेट देगा। यह कॉलेज के कॉमर्स डिपार्टमेंट के एकाउंटिंग एंड फाइनेंस लैब द्वारा संचालित किया जाएगा। कॉलेज ये कोर्स 15 जून से संचालित करेगा।
इसके बारे में कॉलेज ने अपनी और डीयू की वेबसाइट पर विस्तृत विवरण दिया है। दाखिले के लिए पंजीकरण शुल्क 500 रुपये रखा गया है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि इस पाठ्यक्रम को बाजार की जरूरतों को देखते हुए तैयार किया गया है। कोर्स से जुड़े रविंद्र कुमार मीणा ने बताया कि प्रतिदिन चार घंटे कक्षा चलेगी। इस पाठ्यक्रम के लिए कोई भी आवेदन कर सकता है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय के रामानुजन कॉलेज ने तीस घंटाटे का रिसर्च एवं डाटा एनालॉसिस सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है। यह कोर्स लॉकडाउन और कोविड-उन्नीस से उपजी स्थिति को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है। इसकी पढ़ाई ऑनलाइन होगी और उत्तीर्ण होने पर कॉलेज सर्टिफिकेट देगा। यह कॉलेज के कॉमर्स डिपार्टमेंट के एकाउंटिंग एंड फाइनेंस लैब द्वारा संचालित किया जाएगा। कॉलेज ये कोर्स पंद्रह जून से संचालित करेगा। इसके बारे में कॉलेज ने अपनी और डीयू की वेबसाइट पर विस्तृत विवरण दिया है। दाखिले के लिए पंजीकरण शुल्क पाँच सौ रुपयापये रखा गया है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि इस पाठ्यक्रम को बाजार की जरूरतों को देखते हुए तैयार किया गया है। कोर्स से जुड़े रविंद्र कुमार मीणा ने बताया कि प्रतिदिन चार घंटे कक्षा चलेगी। इस पाठ्यक्रम के लिए कोई भी आवेदन कर सकता है।
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नई दिल्लीः भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के सामने इन दिनों जो सबसे बड़ी मुश्किल है, वो है टीम का चयन और संयोजन। तमाम दिग्गज व हुनरमंद खिलाड़ी बाहर अपने मौके का इंतजार कर रहे हैं और तमाम खिलाड़ियों को टीम में होकर भी शीर्ष एकादश में जगह नहीं मिल पाती। ऐसी स्थिति में जब इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज शुरू होने से पहले विराट से प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रविचंद्रन अश्विन को लेकर सवाल किया गया तो वो भड़क गए।
दरअसल, रविचंद्रन अश्विन ने हाल ही में टेस्ट सीरीज में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया और इंग्लैंड को रौंदने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे थे कि आखिर अश्विन को दोबारा सीमित ओवर क्रिकेट के लिए टीम में क्यों मौका नहीं दिया जाता।
'सुंदर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है'
'सवाल पूछना आसान है'
जाहिर तौर पर वॉशिंगटन सुंदर ने टेस्ट सीरीज में ना सिर्फ गेंद से प्रभावित किया बल्कि उससे ज्यादा उनके बल्ले का दम देखने को मिला। आने वाले दिनों में अश्विन की वनडे या टी20 टीम में वापसी हो पाएगी या नहीं, इसका तो पता नहीं लेकिन टीम प्रबंधन और कप्तान का नजरिया साफ है कि जो टीम में है, और वो अच्छा खेल रहा है तो उसको फिलहाल बाहर करने का कोई सवाल नहीं है।
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नई दिल्लीः भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के सामने इन दिनों जो सबसे बड़ी मुश्किल है, वो है टीम का चयन और संयोजन। तमाम दिग्गज व हुनरमंद खिलाड़ी बाहर अपने मौके का इंतजार कर रहे हैं और तमाम खिलाड़ियों को टीम में होकर भी शीर्ष एकादश में जगह नहीं मिल पाती। ऐसी स्थिति में जब इंग्लैंड के खिलाफ टीबीस सीरीज शुरू होने से पहले विराट से प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रविचंद्रन अश्विन को लेकर सवाल किया गया तो वो भड़क गए। दरअसल, रविचंद्रन अश्विन ने हाल ही में टेस्ट सीरीज में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया और इंग्लैंड को रौंदने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे थे कि आखिर अश्विन को दोबारा सीमित ओवर क्रिकेट के लिए टीम में क्यों मौका नहीं दिया जाता। 'सुंदर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है' 'सवाल पूछना आसान है' जाहिर तौर पर वॉशिंगटन सुंदर ने टेस्ट सीरीज में ना सिर्फ गेंद से प्रभावित किया बल्कि उससे ज्यादा उनके बल्ले का दम देखने को मिला। आने वाले दिनों में अश्विन की वनडे या टीबीस टीम में वापसी हो पाएगी या नहीं, इसका तो पता नहीं लेकिन टीम प्रबंधन और कप्तान का नजरिया साफ है कि जो टीम में है, और वो अच्छा खेल रहा है तो उसको फिलहाल बाहर करने का कोई सवाल नहीं है।
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Vasundhara Raje: राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (CM Vasundhara Raje) ने कहा कि राज्य में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच कुर्सी का झगड़ा है और इसका खामियाजा राज्य की जनता को भुगतना पड़ रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके पूर्व डिप्टी सचिन पायलट के बीच खींचतान का जिक्र करते हुए, वसुंधरा राजे ने कहा कि गहलोत बीजेपी पर अन्य सरकारों को हथियाने का आरोप लगाते हैं, लेकिन सच्चाई ये है कि 2008 और 2018 में उन्होंने जो सरकारें बनाईं, वे भी जोड़-तोड़ से बनी थीं। वहीं उन्होंने कहा कि गहलोत सरकार तब अल्पमत में थी और अब अल्पमत में है।
राजे ने कहा, 'उनकी पूववर्ती सरकार ने इस योजना की परिकल्पना की थी लेकिन मुझे अफसोस है कि गहलोत ने इसके लिए पर्याप्त दृढ़ इच्छा शक्ति नहीं दिखाई और इसे आगे बढ़ाने के लिए काम ही नहीं किया। वे केवल बात करते रहें। ' उल्लेखनीय है कि गहलोत लंबे समय से इस परियोजना को 'केंद्रीय परियोजना' का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। बता दें कि राजे ने कटाक्ष करते हुए कहा, 'कांग्रेस की गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार ने महिला अत्याचार, दलित अत्याचार, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सांप्रदायिक उन्माद में बहुत ऊंचाई नापी है।
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Vasundhara Raje: राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि राज्य में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच कुर्सी का झगड़ा है और इसका खामियाजा राज्य की जनता को भुगतना पड़ रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके पूर्व डिप्टी सचिन पायलट के बीच खींचतान का जिक्र करते हुए, वसुंधरा राजे ने कहा कि गहलोत बीजेपी पर अन्य सरकारों को हथियाने का आरोप लगाते हैं, लेकिन सच्चाई ये है कि दो हज़ार आठ और दो हज़ार अट्ठारह में उन्होंने जो सरकारें बनाईं, वे भी जोड़-तोड़ से बनी थीं। वहीं उन्होंने कहा कि गहलोत सरकार तब अल्पमत में थी और अब अल्पमत में है। राजे ने कहा, 'उनकी पूववर्ती सरकार ने इस योजना की परिकल्पना की थी लेकिन मुझे अफसोस है कि गहलोत ने इसके लिए पर्याप्त दृढ़ इच्छा शक्ति नहीं दिखाई और इसे आगे बढ़ाने के लिए काम ही नहीं किया। वे केवल बात करते रहें। ' उल्लेखनीय है कि गहलोत लंबे समय से इस परियोजना को 'केंद्रीय परियोजना' का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। बता दें कि राजे ने कटाक्ष करते हुए कहा, 'कांग्रेस की गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार ने महिला अत्याचार, दलित अत्याचार, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सांप्रदायिक उन्माद में बहुत ऊंचाई नापी है।
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पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार सुबह बटन दबाकर प्लांट का उद्घाटन किया। प्लांट एक मिनट में 1000 लीटर ऑक्सिजन जनरेट करेगा। इस ऑक्सिजन का इस्तेमाल अस्पताल में बनाए एक 102 बेड के अस्थायी कोविड अस्पताल के अलावा बीके सिविल अस्पताल में किया जाएगा।
फरीदाबाद बीके सिविल अस्पताल में 1000 लीटर प्रति मिनट क्षमता वाले ऑक्सिजन प्लांट का उद्घाटन गुरुवार को किया गया। पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वर्चुअल तरीके से देश भर के अलग - अलग राज्यों में स्थापित पीएसए ऑक्सिजन प्लांट का उद्घाटन किया। बीके अस्पताल में यह प्लांट एनएचपीसी ने सीएसआर एक्टिविटी के तहत स्थापित किया है। उद्घाटन अवसर पर बीके सिविल अस्पताल में एक स्कीन भी लगाई गई थी, जिसके माध्यम से उपस्थितजनों ने पीएम नरेंद्र मोदी का संबोधन भी सुना। पीएम नरेंद्र मोदी ने सुबह लगभग 11 बजकर 40 मिनट पर बटन दबाकर प्लांट का उद्घाटन किया। प्लांट एक मिनट में 1000 लीटर ऑक्सिजन जनरेट करेगा। इस ऑक्सिजन का इस्तेमाल अस्पताल में बनाए एक 102 बेड के अस्थायी कोविड अस्पताल के अलावा बीके सिविल अस्पताल में किया जाएगा।
ऑक्सिजन सिलेंडर भी भरे जा सकेंगे प्लांट की खास बात यह है कि इससे ऑक्सिजन सिलेंडर भी भरे जा सकेंगे। अब बीके सिविल अस्पताल में दो ऑक्सिजन प्लांट हो गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 1200 लीटर प्रति मिनट ऑक्सिजन जनरेट करने की है। पीएम द्वारा उद्घाटन करने के बाद अस्पताल में विधायक सीमा त्रिखा ने उद्घाटन पट का लोकापर्ण किया। मौके पर कोरोना वॉरियर्स व कोरोना के दौरान ड्यूटी करते हुए अपनी जना गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया।
'दुनिया को दिखाया कि वैक्सीनेशन कैसे किया जाता है' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान सरकार ने दूर दराज के इलाकों में भी ऑक्सिजन प्लांट लगाने व वेंटिलेटर उपलब्ध कराने का काम किया है। पहले हम मास्क व पीपीई टीक का आयात करते थे, लेकिन अब इसका निर्यात करने लगे हैं। मेक इन इंडिया वैक्सीन का तेजी से व बड़ी मात्रा में निर्माण किया गया है। देश में कोरोना बचाव के टीके की 93 करोड़ डोज लग चुकी हैं और जल्द ही हम 100 करोड़ के आंकड़े को प्राप्त कर लेंगे। कोविन पोर्टल के माध्यम से हमने दुनिया भर को राह दिखाई कि इतने बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन कैसे किया जाता है।
'कोरोना अब बिल्कुल निष्क्रिय हो चुका है' विधायक सीमा त्रिखा ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन के विभिन्न विभाग फ्रंट लाइन वर्कर का काम किया है। इनकी मेहनत से ही दूसरी लहर पर नियंत्रण पाने में कामयाब रहे हैं। वहीं कोरोना काल में पुलिस की सकारात्मक छवि देखने को मिली। अब लोगों का सरकारी व्यवस्थाओं पर विश्वास बढ़ा है। विधायक राजेश नागर ने कहा कि कोरोना की रोकथाम में टीके का भी अहम रोल रहा है। टीके की वजह से कोरोना अब बिल्कुल निष्क्रिय हो चुका है। दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन ने बहुत ही मेहनत की है। मौके पर सिविल सर्जन डॉ विनय गुप्ता व बीके अस्पताल की पीएमओ डॉ सविता यादव ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान एनएचपीसी में सीएसआर के कार्यकारी निदेशक यूएस साही, आरएसएस के प्रांत संपर्क अधिकारी गंगा शंकर मिश्रा, डीसी जितेंद्र यादव के अलावा स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रधान के अधिकारी मौजूद थे।
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पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार सुबह बटन दबाकर प्लांट का उद्घाटन किया। प्लांट एक मिनट में एक हज़ार लीटरटर ऑक्सिजन जनरेट करेगा। इस ऑक्सिजन का इस्तेमाल अस्पताल में बनाए एक एक सौ दो बेड के अस्थायी कोविड अस्पताल के अलावा बीके सिविल अस्पताल में किया जाएगा। फरीदाबाद बीके सिविल अस्पताल में एक हज़ार लीटरटर प्रति मिनट क्षमता वाले ऑक्सिजन प्लांट का उद्घाटन गुरुवार को किया गया। पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वर्चुअल तरीके से देश भर के अलग - अलग राज्यों में स्थापित पीएसए ऑक्सिजन प्लांट का उद्घाटन किया। बीके अस्पताल में यह प्लांट एनएचपीसी ने सीएसआर एक्टिविटी के तहत स्थापित किया है। उद्घाटन अवसर पर बीके सिविल अस्पताल में एक स्कीन भी लगाई गई थी, जिसके माध्यम से उपस्थितजनों ने पीएम नरेंद्र मोदी का संबोधन भी सुना। पीएम नरेंद्र मोदी ने सुबह लगभग ग्यारह बजकर चालीस मिनट पर बटन दबाकर प्लांट का उद्घाटन किया। प्लांट एक मिनट में एक हज़ार लीटरटर ऑक्सिजन जनरेट करेगा। इस ऑक्सिजन का इस्तेमाल अस्पताल में बनाए एक एक सौ दो बेड के अस्थायी कोविड अस्पताल के अलावा बीके सिविल अस्पताल में किया जाएगा। ऑक्सिजन सिलेंडर भी भरे जा सकेंगे प्लांट की खास बात यह है कि इससे ऑक्सिजन सिलेंडर भी भरे जा सकेंगे। अब बीके सिविल अस्पताल में दो ऑक्सिजन प्लांट हो गए हैं, जिनकी कुल क्षमता एक हज़ार दो सौ लीटरटर प्रति मिनट ऑक्सिजन जनरेट करने की है। पीएम द्वारा उद्घाटन करने के बाद अस्पताल में विधायक सीमा त्रिखा ने उद्घाटन पट का लोकापर्ण किया। मौके पर कोरोना वॉरियर्स व कोरोना के दौरान ड्यूटी करते हुए अपनी जना गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया। 'दुनिया को दिखाया कि वैक्सीनेशन कैसे किया जाता है' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान सरकार ने दूर दराज के इलाकों में भी ऑक्सिजन प्लांट लगाने व वेंटिलेटर उपलब्ध कराने का काम किया है। पहले हम मास्क व पीपीई टीक का आयात करते थे, लेकिन अब इसका निर्यात करने लगे हैं। मेक इन इंडिया वैक्सीन का तेजी से व बड़ी मात्रा में निर्माण किया गया है। देश में कोरोना बचाव के टीके की तिरानवे करोड़ डोज लग चुकी हैं और जल्द ही हम एक सौ करोड़ के आंकड़े को प्राप्त कर लेंगे। कोविन पोर्टल के माध्यम से हमने दुनिया भर को राह दिखाई कि इतने बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन कैसे किया जाता है। 'कोरोना अब बिल्कुल निष्क्रिय हो चुका है' विधायक सीमा त्रिखा ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन के विभिन्न विभाग फ्रंट लाइन वर्कर का काम किया है। इनकी मेहनत से ही दूसरी लहर पर नियंत्रण पाने में कामयाब रहे हैं। वहीं कोरोना काल में पुलिस की सकारात्मक छवि देखने को मिली। अब लोगों का सरकारी व्यवस्थाओं पर विश्वास बढ़ा है। विधायक राजेश नागर ने कहा कि कोरोना की रोकथाम में टीके का भी अहम रोल रहा है। टीके की वजह से कोरोना अब बिल्कुल निष्क्रिय हो चुका है। दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन ने बहुत ही मेहनत की है। मौके पर सिविल सर्जन डॉ विनय गुप्ता व बीके अस्पताल की पीएमओ डॉ सविता यादव ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान एनएचपीसी में सीएसआर के कार्यकारी निदेशक यूएस साही, आरएसएस के प्रांत संपर्क अधिकारी गंगा शंकर मिश्रा, डीसी जितेंद्र यादव के अलावा स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रधान के अधिकारी मौजूद थे।
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आज़रबाइजान गणराज्य के शीया मुसलमानों को एक दशक से अधिक समय से हर प्रकार की धार्मिक गतिविधि से वंचित कर दिया गया है।
सीरिया की राजधानी दमिश्क़ में आतंकी हमलों में कई लोग हताहत व घायल हो गये हैं।
जायोनी शासन फिलिस्तीनियों की अधिक हत्या के प्रयास में है।
बगदाद और अरबील के मध्य होने वाली सहमति के अनुसार पीशमर्गा बल मूसिल में प्रवेश नहीं करेगा।
सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद ने कहा है कि पश्चिम ने सीरिया की सत्ता से उन्हें हटाने की अपनी नीति बदली नहीं है।
तुर्की के सैन्य सूत्रों ने इराक़ की संयुक्त सीमाओं पर अतिरिक्त सैन्य बल भेजने की सूचना दी है।
इराक़ के स्वयंसेवी बलों की ओर से घोषणा की गई है कि मूसिल अभियान के कमज़ोर पड़ने पर आधारित समाचार निराधार हैं।
ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने इराक़ के सामर्रा और तिकरीत शहरों में भीषण आतंकी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है।
भारत की राजधानी नई दिल्ली में वायु गुणवत्ता के गिरते स्तर को लेकर सैकड़ों लोगों ने रविवार को जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया।
ईरान ने घोषणा की है कि औषधीय जड़ी बूटियों का निर्यात बढ़कर 30 करोड़ डालर से अधिक हो गया है।
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आज़रबाइजान गणराज्य के शीया मुसलमानों को एक दशक से अधिक समय से हर प्रकार की धार्मिक गतिविधि से वंचित कर दिया गया है। सीरिया की राजधानी दमिश्क़ में आतंकी हमलों में कई लोग हताहत व घायल हो गये हैं। जायोनी शासन फिलिस्तीनियों की अधिक हत्या के प्रयास में है। बगदाद और अरबील के मध्य होने वाली सहमति के अनुसार पीशमर्गा बल मूसिल में प्रवेश नहीं करेगा। सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद ने कहा है कि पश्चिम ने सीरिया की सत्ता से उन्हें हटाने की अपनी नीति बदली नहीं है। तुर्की के सैन्य सूत्रों ने इराक़ की संयुक्त सीमाओं पर अतिरिक्त सैन्य बल भेजने की सूचना दी है। इराक़ के स्वयंसेवी बलों की ओर से घोषणा की गई है कि मूसिल अभियान के कमज़ोर पड़ने पर आधारित समाचार निराधार हैं। ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने इराक़ के सामर्रा और तिकरीत शहरों में भीषण आतंकी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। भारत की राजधानी नई दिल्ली में वायु गुणवत्ता के गिरते स्तर को लेकर सैकड़ों लोगों ने रविवार को जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया। ईरान ने घोषणा की है कि औषधीय जड़ी बूटियों का निर्यात बढ़कर तीस करोड़ डालर से अधिक हो गया है।
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भारतीय फैंस के लिए हेगले ओवल से एक अच्छी खबर सामने आई है। दरअसल श्रीलंका को न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच जीतना था, लेकिन वह ऐसा करने में असफल रही, जिसके कारण टीम इंडिया वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंच गई। ऑस्ट्रेलिया पहले ही वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंच चुकी है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच WTC फाइनलवर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल मुकाबला 7-11 जून के बीच ऐतिहासिक ओवल के मैदान पर खेला जाएगा और इस बार के दो फाइनलिस्ट तय हो गए हैं। ऑस्ट्रेलिया ने इंदौर टेस्ट जीतने के साथ ही WTC के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली थी।
Opinion India Ka: 'तिलकधारी' राहुल का अधूरा ज्ञान. . बड़ा बवाल !
Opinion India Ka : मुस्लिम पक्ष की अर्जी. . . 'फट' गई पर्ची !
2024 Loksabha Election से Pok का क्या है कनेक्शन ?
आखिर क्यों नहीं हो रही है Brij Bhushan Sharan Singh की गिरफ्तारी ?
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भारतीय फैंस के लिए हेगले ओवल से एक अच्छी खबर सामने आई है। दरअसल श्रीलंका को न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच जीतना था, लेकिन वह ऐसा करने में असफल रही, जिसके कारण टीम इंडिया वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंच गई। ऑस्ट्रेलिया पहले ही वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंच चुकी है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच WTC फाइनलवर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल मुकाबला सात-ग्यारह जून के बीच ऐतिहासिक ओवल के मैदान पर खेला जाएगा और इस बार के दो फाइनलिस्ट तय हो गए हैं। ऑस्ट्रेलिया ने इंदौर टेस्ट जीतने के साथ ही WTC के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली थी। Opinion India Ka: 'तिलकधारी' राहुल का अधूरा ज्ञान. . बड़ा बवाल ! Opinion India Ka : मुस्लिम पक्ष की अर्जी. . . 'फट' गई पर्ची ! दो हज़ार चौबीस Loksabha Election से Pok का क्या है कनेक्शन ? आखिर क्यों नहीं हो रही है Brij Bhushan Sharan Singh की गिरफ्तारी ?
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GDP Growth: देश की अर्थव्यवस्था में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 13. 5 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के बुधवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है. इससे पिछले वित्त वर्ष (2021-22) की अप्रैल-जून तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडपी) की वृद्धि दर 20. 1 प्रतिशत रही थी. कई विश्लेषकों ने तुलनात्मक आधार को देखते हुए देश की आर्थिक वृद्धि दर दहाई अंक में रहने का अनुमान जताया था.
13 फीसदी पर जीडीपी वृद्धि दरः रेटिंग एजेंसी इक्रा ने जीडीपी वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 13 प्रतिशत जबकि भारतीय स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट में इसके 15. 7 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी थी. भारतीय रिजर्व बैंक ने इस महीने मौद्रिक नीति समीक्षा में 2022-23 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर करीब 16. 2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था. चीन की वृद्धि दर 2022 की अप्रैल-जून तिमाही में 0. 4 प्रतिशत रही है.
वार्षिक लक्ष्य के 20. 5 फीसदी पर राजकोषीय घाटाः देश की अर्थव्यवस्था में पहली तिमाही को इजाफा दिख रहा है लेकिन वहीं केंद्र का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों के अंत तक वार्षिक लक्ष्य के 20. 5 फीसदी पर पहुंच गया है. एक साल पहले की समान अवधि में यह 21. 3 फीसदी था. बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह आंकड़ा सार्वजनिक वित्त की स्थिति में सुधार को दर्शाता है. व्यय और राजस्व के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है.
लेखा महानियंत्रक (सीजीए) की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, कर समेत सरकार की प्राप्तियां पहले चार माह में 2022-23 के लिए बजट अनुमान के 7. 85 लाख करोड़ रुपये या 34. 4 प्रतिशत पर पहुंच गई हैं. एक साल पहले की समान अवधि के दौरान यह लगभग इतनी ही यानी 34. 6 प्रतिशत पर थीं. वहीं, कर राजस्व 6. 66 लाख करोड़ रुपये या चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान का 34. 4 प्रतिशत रहा. पिछले साल भी सरकार अप्रैल-जुलाई के दौरान अपने वार्षिक अनुमान का 34. 2 प्रतिशत पाने में सफल रही थी.
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GDP Growth: देश की अर्थव्यवस्था में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में तेरह. पाँच प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के बुधवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है. इससे पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर बीस. एक प्रतिशत रही थी. कई विश्लेषकों ने तुलनात्मक आधार को देखते हुए देश की आर्थिक वृद्धि दर दहाई अंक में रहने का अनुमान जताया था. तेरह फीसदी पर जीडीपी वृद्धि दरः रेटिंग एजेंसी इक्रा ने जीडीपी वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में तेरह प्रतिशत जबकि भारतीय स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट में इसके पंद्रह. सात प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी थी. भारतीय रिजर्व बैंक ने इस महीने मौद्रिक नीति समीक्षा में दो हज़ार बाईस-तेईस की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर करीब सोलह. दो प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था. चीन की वृद्धि दर दो हज़ार बाईस की अप्रैल-जून तिमाही में शून्य. चार प्रतिशत रही है. वार्षिक लक्ष्य के बीस. पाँच फीसदी पर राजकोषीय घाटाः देश की अर्थव्यवस्था में पहली तिमाही को इजाफा दिख रहा है लेकिन वहीं केंद्र का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों के अंत तक वार्षिक लक्ष्य के बीस. पाँच फीसदी पर पहुंच गया है. एक साल पहले की समान अवधि में यह इक्कीस. तीन फीसदी था. बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह आंकड़ा सार्वजनिक वित्त की स्थिति में सुधार को दर्शाता है. व्यय और राजस्व के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है. लेखा महानियंत्रक की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, कर समेत सरकार की प्राप्तियां पहले चार माह में दो हज़ार बाईस-तेईस के लिए बजट अनुमान के सात. पचासी लाख करोड़ रुपये या चौंतीस. चार प्रतिशत पर पहुंच गई हैं. एक साल पहले की समान अवधि के दौरान यह लगभग इतनी ही यानी चौंतीस. छः प्रतिशत पर थीं. वहीं, कर राजस्व छः. छयासठ लाख करोड़ रुपये या चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान का चौंतीस. चार प्रतिशत रहा. पिछले साल भी सरकार अप्रैल-जुलाई के दौरान अपने वार्षिक अनुमान का चौंतीस. दो प्रतिशत पाने में सफल रही थी.
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आर्थिक दासता
आर्थिक दासता सभी दासताओं में निकृष्ट है। आर्थिक परतंत्रता अथवा आर्थिक आत्मनिर्भरता का अभाव ही व्यक्तिगत या राष्ट्रीय विपत्तियों का मूल कारण है। वह व्यक्ति, जो दूसरे के ऊपर आर्थिक रूप से निर्भर है, यथार्थ में दास है, भले ही बाहर से कुछ भी दिखाई देता रहे।
आर्यसमाज अनेक अर्थों में हिंदू धर्म का चैंपियन है। इसके सदस्यों को हिंदुत्व पर गर्व है। हिंदू-जाति की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व दाँव पर लगाने में न उन्हें कभी संकोच हुआ है, न कभी होगा। परंतु एक पैरवीकार की शक्ति उसकी स्वाधीनता में निहित है, भले ही वह अपने मुवक्किल के हित से स्वयं को एकाकार कर ले। इसकी स्वाधीनता के लिए यह एक ऐसा खतरा है, जिसके प्रति हम सावधान करना चाहते हैं, और ऐसा हम हिंदू-जाति और हिंदुत्व के हित में कह रहे हैं।
-आर्यसमाज, पृ. 77
आर्यसमाज को यह याद रखना चाहिए कि आज का भारत मात्र हिंदू नहीं है। भारत की समृद्धि और इसका भविष्य हिंदुत्व के और उस बड़े धर्म के, जिसे भारतीय राष्ट्रीयवाद कहते हैं, सामंजस्य पर निर्भर है और केवल इसी सामंजस्य के बल पर भारत विविध राष्ट्रों के बीच अपना सही स्थान बना सकता है।
- आर्यसमाज, पृ. 283
आर्यसमाज जन्म से जाति-निर्धारण का खंडन करता है। यह हिंदू समाज को जातियों और उपजातियों के विविध भेदों में विभाजित करने की निंदा करता है। यह मानता है कि
जाति-प्रथा द्वारा लोगों को एक-दूसरे से अलग करने के लिए जो कृत्रिम दीवारें खड़ी की गई हैं, वे घातक और हानिकारक हैं। परंतु यह जीवन के तथ्यों से आँखें नहीं मूँद सकता और इसे यह मानना पड़ा है कि सब मनुष्य एक समान नहीं होते, वे एक-दूसरे से शारीरिक शक्ति में, बौद्धिक और मानसिक योग्यता में, नैतिक स्वभाव और आध्यात्मिक विकास में परस्पर भिन्न होते हैं। वे भिन्न पर्यावरण में जन्म लेते हैं और जीवन में उनके पद व स्थितियाँ स्वाभाविक रूप से उनके पर्यावरण से प्रभावित होते हैं।
आर्यसमाज जैसी धार्मिक संस्थाओं के लिए यही उचित तथा न्यायसंगत है कि वे राजनीति के क्षेत्र से दूर रहें, नहीं तो उनके आध्यात्मिक सुधार-कार्य को हानि पहुँचेगी।
- लाला लाजपतराय, पृ. 66
आर्यसमाज राष्ट्रीयकरण करनेवाली सर्वाधिक शक्तिशाली शक्तियों में से है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। आर्यसमाज का ध्येय लोगों के जीवन और विचारों में क्रांतिकारी परिवर्तन लाना है। इसका ध्येय वैदिक विचारों और वैदिक जीवन पर आधारित नए राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करना है।
इस बात से न तो इनकार किया जा सकता है और न ही किया जाना चाहिए कि आर्यसमाज राष्ट्रीयकरण की अत्यधिक सक्षम शक्तियों में से एक है। आर्यसमाज का लक्ष्य लोगों की विचारधारा और जीवन में आमूल परिवर्तन करना है। इसका लक्ष्य वैदिक विचारधारा और वैदिक जीवनपद्धति के मूलभूत आधार पर एक नए राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करना है।
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आर्थिक दासता आर्थिक दासता सभी दासताओं में निकृष्ट है। आर्थिक परतंत्रता अथवा आर्थिक आत्मनिर्भरता का अभाव ही व्यक्तिगत या राष्ट्रीय विपत्तियों का मूल कारण है। वह व्यक्ति, जो दूसरे के ऊपर आर्थिक रूप से निर्भर है, यथार्थ में दास है, भले ही बाहर से कुछ भी दिखाई देता रहे। आर्यसमाज अनेक अर्थों में हिंदू धर्म का चैंपियन है। इसके सदस्यों को हिंदुत्व पर गर्व है। हिंदू-जाति की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व दाँव पर लगाने में न उन्हें कभी संकोच हुआ है, न कभी होगा। परंतु एक पैरवीकार की शक्ति उसकी स्वाधीनता में निहित है, भले ही वह अपने मुवक्किल के हित से स्वयं को एकाकार कर ले। इसकी स्वाधीनता के लिए यह एक ऐसा खतरा है, जिसके प्रति हम सावधान करना चाहते हैं, और ऐसा हम हिंदू-जाति और हिंदुत्व के हित में कह रहे हैं। -आर्यसमाज, पृ. सतहत्तर आर्यसमाज को यह याद रखना चाहिए कि आज का भारत मात्र हिंदू नहीं है। भारत की समृद्धि और इसका भविष्य हिंदुत्व के और उस बड़े धर्म के, जिसे भारतीय राष्ट्रीयवाद कहते हैं, सामंजस्य पर निर्भर है और केवल इसी सामंजस्य के बल पर भारत विविध राष्ट्रों के बीच अपना सही स्थान बना सकता है। - आर्यसमाज, पृ. दो सौ तिरासी आर्यसमाज जन्म से जाति-निर्धारण का खंडन करता है। यह हिंदू समाज को जातियों और उपजातियों के विविध भेदों में विभाजित करने की निंदा करता है। यह मानता है कि जाति-प्रथा द्वारा लोगों को एक-दूसरे से अलग करने के लिए जो कृत्रिम दीवारें खड़ी की गई हैं, वे घातक और हानिकारक हैं। परंतु यह जीवन के तथ्यों से आँखें नहीं मूँद सकता और इसे यह मानना पड़ा है कि सब मनुष्य एक समान नहीं होते, वे एक-दूसरे से शारीरिक शक्ति में, बौद्धिक और मानसिक योग्यता में, नैतिक स्वभाव और आध्यात्मिक विकास में परस्पर भिन्न होते हैं। वे भिन्न पर्यावरण में जन्म लेते हैं और जीवन में उनके पद व स्थितियाँ स्वाभाविक रूप से उनके पर्यावरण से प्रभावित होते हैं। आर्यसमाज जैसी धार्मिक संस्थाओं के लिए यही उचित तथा न्यायसंगत है कि वे राजनीति के क्षेत्र से दूर रहें, नहीं तो उनके आध्यात्मिक सुधार-कार्य को हानि पहुँचेगी। - लाला लाजपतराय, पृ. छयासठ आर्यसमाज राष्ट्रीयकरण करनेवाली सर्वाधिक शक्तिशाली शक्तियों में से है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। आर्यसमाज का ध्येय लोगों के जीवन और विचारों में क्रांतिकारी परिवर्तन लाना है। इसका ध्येय वैदिक विचारों और वैदिक जीवन पर आधारित नए राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करना है। इस बात से न तो इनकार किया जा सकता है और न ही किया जाना चाहिए कि आर्यसमाज राष्ट्रीयकरण की अत्यधिक सक्षम शक्तियों में से एक है। आर्यसमाज का लक्ष्य लोगों की विचारधारा और जीवन में आमूल परिवर्तन करना है। इसका लक्ष्य वैदिक विचारधारा और वैदिक जीवनपद्धति के मूलभूत आधार पर एक नए राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करना है।
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मान सम्मान एवं अपणायत के लिए मशहूर राजस्थान विदेशी मेहमानों के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है, पयर्टन की दृष्टि से सबसे अहम राज्य गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडू से भी ज्यादा। कोरोनाकाल में भी विदेश से आने वाले या यहां रह रहे विदेशियों के खिलाफ अपराध के देश भर में 191 घटनाएं सामने आई, लेकिन राजस्थान में महज 4 ही मामले रहे।
देश भर में हर साल 90 लाख से ज्यादा विदेशी भारत भ्रमण पर आते हैं और इनमें से हर छठवां पर्यटक राजस्थान आया है। इस लिहाज से राजस्थान के लिए यह रिपोर्ट और भी दुखद भरी है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की ओर से 15 सितंबर को जारी वर्ष 2020 की समीक्षा रिपोर्ट में सामने आया है कि विदेशियों पर हमले के सबसे अधिक मामले दिल्ली में आए हैं। फिर महाराष्ट्र, यूपी, तमिलनाडु, गोवा और कनार्टक हैं। राजस्थान इन राज्यों में सबसे कम हैं।
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मान सम्मान एवं अपणायत के लिए मशहूर राजस्थान विदेशी मेहमानों के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है, पयर्टन की दृष्टि से सबसे अहम राज्य गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडू से भी ज्यादा। कोरोनाकाल में भी विदेश से आने वाले या यहां रह रहे विदेशियों के खिलाफ अपराध के देश भर में एक सौ इक्यानवे घटनाएं सामने आई, लेकिन राजस्थान में महज चार ही मामले रहे। देश भर में हर साल नब्बे लाख से ज्यादा विदेशी भारत भ्रमण पर आते हैं और इनमें से हर छठवां पर्यटक राजस्थान आया है। इस लिहाज से राजस्थान के लिए यह रिपोर्ट और भी दुखद भरी है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की ओर से पंद्रह सितंबर को जारी वर्ष दो हज़ार बीस की समीक्षा रिपोर्ट में सामने आया है कि विदेशियों पर हमले के सबसे अधिक मामले दिल्ली में आए हैं। फिर महाराष्ट्र, यूपी, तमिलनाडु, गोवा और कनार्टक हैं। राजस्थान इन राज्यों में सबसे कम हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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यमुनानगर (सुमित ओबेरॉय) : मुख्यमंत्री मनोहर लाल कल जिले को करीब 100 करोड़ रुपये की सौगात देगें। डीसी राहुल हुड्डा ने जानकारी देते हुए बताया कि सीएम वर्चुअली प्रदेश के 17 जिलों को करीब 229 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई 46 स्वास्थ्य योजनाओं की सौगात देगें।
राज्य सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री वीरवार को यमुनानगर में करीब 100 करोड़ रूपये की सौगात देंगे। इनमें मुकुंद लाल नागरिक अस्पताल में करीब 95 करोड़ रुपये की राशि का खर्चा व मोहड़ी गांव में पीएचसी पर करीब 5 करोड़ रुपये का खर्चा आया है। जिनका मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटन किया जाएगा। इस कार्यक्रम को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है।
डीसी ने बताया कि ये राज्य स्तरीय कार्यक्रम मुकुंद लाल नागरिक अस्पताल में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान भिवानी जिले के आंची देवी मेघराज जिंदल सिविल अस्पताल, सिवानी और करनाल में 50 बिस्तरों वाले अस्पताल सहित 46 स्वास्थ्य संस्थानों का वर्चुअली उद्घाटन करेंगे।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री उपरोक्त अस्पतालों सहित फतेहाबाद, रोहतक, कैथल, फरीदाबाद, पलवल, सिरसा, पंचकूला, चरखी दादरी, जींद, यमुनानगर, हिसार, गुरुग्राम, नारनौल और कुरुक्षेत्र में 25 उप स्वास्थ्य केंद्र (एसएचसी), 6 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), 4 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), 1 शहरी स्वास्थ्य केंद्र (यूएचसी) और 4 हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर का उद्घाटन करेंगे। ये स्वास्थ्य संस्थान निश्चित रूप से प्रत्येक नागरिक को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बता दें कि राज्य सरकार ने पिछले साढ़े 8 सालों में स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए सराहनीय कार्य किया है। इतना ही नहीं, कई रोगी-हितैषी और लोगों के अनुकूल पहलों के साथ प्रदेश सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि सभी को किफायती दरों पर अत्याधुनिक सुविधाएं मिलें। वर्तमान राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में स्वास्थ्य, चिकित्सा और आयुष के लिए 9647 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
(हरियाणा की खबरें टेलीग्राम पर भी, बस यहां क्लिक करें या फिर टेलीग्राम पर Punjab Kesari Haryana सर्च करें। )
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यमुनानगर : मुख्यमंत्री मनोहर लाल कल जिले को करीब एक सौ करोड़ रुपये की सौगात देगें। डीसी राहुल हुड्डा ने जानकारी देते हुए बताया कि सीएम वर्चुअली प्रदेश के सत्रह जिलों को करीब दो सौ उनतीस करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई छियालीस स्वास्थ्य योजनाओं की सौगात देगें। राज्य सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री वीरवार को यमुनानगर में करीब एक सौ करोड़ रूपये की सौगात देंगे। इनमें मुकुंद लाल नागरिक अस्पताल में करीब पचानवे करोड़ रुपये की राशि का खर्चा व मोहड़ी गांव में पीएचसी पर करीब पाँच करोड़ रुपये का खर्चा आया है। जिनका मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटन किया जाएगा। इस कार्यक्रम को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। डीसी ने बताया कि ये राज्य स्तरीय कार्यक्रम मुकुंद लाल नागरिक अस्पताल में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान भिवानी जिले के आंची देवी मेघराज जिंदल सिविल अस्पताल, सिवानी और करनाल में पचास बिस्तरों वाले अस्पताल सहित छियालीस स्वास्थ्य संस्थानों का वर्चुअली उद्घाटन करेंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री उपरोक्त अस्पतालों सहित फतेहाबाद, रोहतक, कैथल, फरीदाबाद, पलवल, सिरसा, पंचकूला, चरखी दादरी, जींद, यमुनानगर, हिसार, गुरुग्राम, नारनौल और कुरुक्षेत्र में पच्चीस उप स्वास्थ्य केंद्र , छः प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र , चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र , एक शहरी स्वास्थ्य केंद्र और चार हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर का उद्घाटन करेंगे। ये स्वास्थ्य संस्थान निश्चित रूप से प्रत्येक नागरिक को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बता दें कि राज्य सरकार ने पिछले साढ़े आठ सालों में स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए सराहनीय कार्य किया है। इतना ही नहीं, कई रोगी-हितैषी और लोगों के अनुकूल पहलों के साथ प्रदेश सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि सभी को किफायती दरों पर अत्याधुनिक सुविधाएं मिलें। वर्तमान राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए वित्त वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस के बजट में स्वास्थ्य, चिकित्सा और आयुष के लिए नौ हज़ार छः सौ सैंतालीस करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
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मां की असीम ममता को समर्पित मदर्स डे आशमां इंटरनेशनल स्कूल में उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर स्कूल में रंगारंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्रों वे उनकी माताओं ने स्टेज पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रोग्राम का आगाज पवित्र गायत्री मंत्र के पाठ से किया गया। इसके बाद छात्रों द्वारा मां को समर्पित गीत पेश किया गया। छात्रों द्वारा एक के बाद एक पूछो न कैसी है मेरी मां, मां तू कितनी अच्छी है, तिन्न रंग नहीं लभणे, मांवां मांवां यह जन्नत का परछावां आदि गीतों पर स्टेज पर डांस कर माहौल को पूरी तरह मां के प्यार में रंग दिया। इस अवसर पर छात्रों द्वारा मां का दिल गीत पर किए गए प्रदर्शन ने उपस्थित दर्शकों की आंखों को नम कर दिया। इस अवसर पर बच्चों द्वारा मां से संबंधित तैयार किए गए ग्रीटिंग कार्डों की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई। ऐसे खूबसूरत माहौल में माताओं ने भी खुशी में झूमते हुए स्टेज पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। जबकि स्कूल के प्रिंसीपल अमरप्रीत कौर ने उनका साथ दिया।
इस अवसर पर स्कूल के डायरेक्टर जे एस केसर ने उपस्थित अतिथियों का अभिनंदन करते हुए छात्रों को अपने माता पिता का आदर करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने एक माता का अपने बच्चे के प्रति कुर्बानी व उसके समपर्ण को सलाम करते हुए कहा कि एक छोटे बच्चे से उसका एक बच्चे का माता पिता बनने के बाद भी एक मां पूरी जिंदगी उसकी चिंता करती है। इस दुनिया में मां का एक अलग स्थान है। इस अवसर पर बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले छात्रों को मैनेजमेंट द्वारा सम्मानित किया गया।
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मां की असीम ममता को समर्पित मदर्स डे आशमां इंटरनेशनल स्कूल में उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर स्कूल में रंगारंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्रों वे उनकी माताओं ने स्टेज पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रोग्राम का आगाज पवित्र गायत्री मंत्र के पाठ से किया गया। इसके बाद छात्रों द्वारा मां को समर्पित गीत पेश किया गया। छात्रों द्वारा एक के बाद एक पूछो न कैसी है मेरी मां, मां तू कितनी अच्छी है, तिन्न रंग नहीं लभणे, मांवां मांवां यह जन्नत का परछावां आदि गीतों पर स्टेज पर डांस कर माहौल को पूरी तरह मां के प्यार में रंग दिया। इस अवसर पर छात्रों द्वारा मां का दिल गीत पर किए गए प्रदर्शन ने उपस्थित दर्शकों की आंखों को नम कर दिया। इस अवसर पर बच्चों द्वारा मां से संबंधित तैयार किए गए ग्रीटिंग कार्डों की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई। ऐसे खूबसूरत माहौल में माताओं ने भी खुशी में झूमते हुए स्टेज पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। जबकि स्कूल के प्रिंसीपल अमरप्रीत कौर ने उनका साथ दिया। इस अवसर पर स्कूल के डायरेक्टर जे एस केसर ने उपस्थित अतिथियों का अभिनंदन करते हुए छात्रों को अपने माता पिता का आदर करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने एक माता का अपने बच्चे के प्रति कुर्बानी व उसके समपर्ण को सलाम करते हुए कहा कि एक छोटे बच्चे से उसका एक बच्चे का माता पिता बनने के बाद भी एक मां पूरी जिंदगी उसकी चिंता करती है। इस दुनिया में मां का एक अलग स्थान है। इस अवसर पर बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले छात्रों को मैनेजमेंट द्वारा सम्मानित किया गया।
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वाराणसी । सावन के दूसरे सोमवार को वाराणसी के विश्वनाथ मंदिर मार्कण्डेय महादेव प्रयाग के मनकामेश्वर समेत सूबे के सैंकड़ों शिवालयों में जलाभिषेक के लिए तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। काशी में भोले बाबा के दर्शन के लिए रविवार देर रात से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने हाथ में कांवड़ गंगा जल धतूरा भांग और बेलपत्र लेकर हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ भोले के दर्शन किए। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए प्रशासन ने तीन तरफ से श्रद्धालुओं की कतारें लगाई हैं। गिरिजाघर गोदौलिया दशाश्वमेध घाट तथा चौक की तरफ से लंबी कतारें लगी हुई हैं। वाराणसी में शिवभक्तों की सुविधा के लिए दर्जनों स्वयंसेवी संस्थानों की ओर से विशेष व्यवस्था की गई है। वहीं प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त कर रखे हैं। अराजक तत्वों पर नजर रखने के लिए प्रशासन ने कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। शिवालयों के आसपास प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) तथा प्रदेश पुलिस के जवान तैनात हैं। किसी कारणवश परिवार से बिछुड़ गए श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से मिलाने के लिए पुलिस द्वारा विशेष इंतजाम किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि सावन का महीना भगवान शिव का सबसे प्रिय माह माना गया है। भोले बाबा के जलाभिषेक के लिए सावन के सोमवार का विशेष महत्व है।
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वाराणसी । सावन के दूसरे सोमवार को वाराणसी के विश्वनाथ मंदिर मार्कण्डेय महादेव प्रयाग के मनकामेश्वर समेत सूबे के सैंकड़ों शिवालयों में जलाभिषेक के लिए तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। काशी में भोले बाबा के दर्शन के लिए रविवार देर रात से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने हाथ में कांवड़ गंगा जल धतूरा भांग और बेलपत्र लेकर हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ भोले के दर्शन किए। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए प्रशासन ने तीन तरफ से श्रद्धालुओं की कतारें लगाई हैं। गिरिजाघर गोदौलिया दशाश्वमेध घाट तथा चौक की तरफ से लंबी कतारें लगी हुई हैं। वाराणसी में शिवभक्तों की सुविधा के लिए दर्जनों स्वयंसेवी संस्थानों की ओर से विशेष व्यवस्था की गई है। वहीं प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त कर रखे हैं। अराजक तत्वों पर नजर रखने के लिए प्रशासन ने कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। शिवालयों के आसपास प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल तथा प्रदेश पुलिस के जवान तैनात हैं। किसी कारणवश परिवार से बिछुड़ गए श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से मिलाने के लिए पुलिस द्वारा विशेष इंतजाम किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि सावन का महीना भगवान शिव का सबसे प्रिय माह माना गया है। भोले बाबा के जलाभिषेक के लिए सावन के सोमवार का विशेष महत्व है।
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इन दिनों बड़ी तेजी से एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें साफ-साफ देखा जा सकता है कि एक बीमार महिला को ठेले पर लिटा कर अस्पताल ले जाया जा रहा है।
वायरल वीडियो को लेकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि झूठे विज्ञापनों पर फिजूल ख़र्च करने के बजाय चिकित्सा सेवाओं पर खर्च किया जाता तो गरीब बिमार लोगों की जान बचायी जा सकती है।
आपको बता दें कि विधानसभा नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने एक ट्वीट करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में चिकित्सा की झूठी उपलब्धि के झूठे विज्ञापनों में जितना खर्च किया जाता है, उसका थोड़ा-सा हिस्सा भी अगर सपा सरकार के दौरान सुधरी चिकित्सा सेवाओं पर लगातार खर्च किया जाता रहा होता तो आज भाजपा के राज में स्ट्रेचर व एम्बूलेंस के अभाव में लोगों की जो जानें जा रही है वो बचाई जा सकती थी।
बता दें कि अखिलेश यादव ने जिस मामले को लेकर योगी सरकार पर तंज कसते हुए ट्वीट की है, वह ममला बलिया के चिलकरह का है। वायरल वीडियो में एक बुजुर्ग एक बिमार महिला को ठेले पर ले जाता दिखाई दे रहा है, उसका नाम सुकुल प्रजापति है, जो अपनी बिमार पत्नी जोनिया देवी को ठेले पर लिटा कर अस्पताल ले जा रहा था।
उक्त वायरल वीडियो को सूबे उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने संज्ञान में लेते हुए महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को मामले के जांच के लिए निर्देश दिए थे। इसके साथ ही दोषी पाए जाने वालों खिलाफ़ शख्त कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए।
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इन दिनों बड़ी तेजी से एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें साफ-साफ देखा जा सकता है कि एक बीमार महिला को ठेले पर लिटा कर अस्पताल ले जाया जा रहा है। वायरल वीडियो को लेकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि झूठे विज्ञापनों पर फिजूल ख़र्च करने के बजाय चिकित्सा सेवाओं पर खर्च किया जाता तो गरीब बिमार लोगों की जान बचायी जा सकती है। आपको बता दें कि विधानसभा नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने एक ट्वीट करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में चिकित्सा की झूठी उपलब्धि के झूठे विज्ञापनों में जितना खर्च किया जाता है, उसका थोड़ा-सा हिस्सा भी अगर सपा सरकार के दौरान सुधरी चिकित्सा सेवाओं पर लगातार खर्च किया जाता रहा होता तो आज भाजपा के राज में स्ट्रेचर व एम्बूलेंस के अभाव में लोगों की जो जानें जा रही है वो बचाई जा सकती थी। बता दें कि अखिलेश यादव ने जिस मामले को लेकर योगी सरकार पर तंज कसते हुए ट्वीट की है, वह ममला बलिया के चिलकरह का है। वायरल वीडियो में एक बुजुर्ग एक बिमार महिला को ठेले पर ले जाता दिखाई दे रहा है, उसका नाम सुकुल प्रजापति है, जो अपनी बिमार पत्नी जोनिया देवी को ठेले पर लिटा कर अस्पताल ले जा रहा था। उक्त वायरल वीडियो को सूबे उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने संज्ञान में लेते हुए महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को मामले के जांच के लिए निर्देश दिए थे। इसके साथ ही दोषी पाए जाने वालों खिलाफ़ शख्त कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए।
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- 1 hr ago हिंदू देवताओं पर तेल और दूध चढ़ाने को लेकर अक्षय कुमार ने कही थी ऐसी बात? अब हो रहा है बवाल!
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- Lifestyle Sawan Month: सावन में किस वजह से है दाढ़ी-बाल कटवाने की मनाही?
इस बात से तो सभी वाकिफ है कि यश चोपड़ा उन चुनिंदा फिल्मकारों में से हैं जिनकी हर फिल्म मास्टर पीस होती है। उन्हें ना कहने का साहस और दुर्भाग्य बॉलीवुड में शायद ही कोई कर सकता है मगर यह साहस किया है श्रीदेवी ने, जिन्होंने अपनी बेहतरीन फिल्मों में से दो फिल्में 'चांदनी" और 'लम्हें", यश चोपडा के निर्देशन में की।
'वीरज़ारा" के बाद यश चोपडा फिल्म निर्माण में एक बार फिर सक्रिय होने जा रहे हैं। इसके लिए कहानी के साथ साथ उन्होंने कलाकार, जिनमें अमिताभ और श्रीदेवी का नाम ज़ेहन में सोच रखा है। इस फिल्म के लिए अमिताभ काफी उत्साहित हैं मगर अफसोस पति बॉनी कपूर की रज़ामंदी ना होने के कारण श्रीदेवी ने इस फिल्म से इंकार कर दिया है।
यह बात सभी जानते हैं कि अगर यश चोपड़ा की सोची हुई योजना अंजाम तक नहीं पहुंचती है तो वह उसके साथ बिना कोई समझौता किए बगैर उसे यूं ही रहने देते हैं। अगर अमिताभ और श्रीदेवी की यह फिल्म बनती है तो 'खुदा गवाह" के बाद यह उनकी चौथी फिल्म होगी।
बिचारी।
महिलाएं,
हैं।
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यूपी के कानपुर में सड़क हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि घायल दो अन्य का इलाज जारी है। कार सवार सभी लोग वलीमा से वापस आ रहे थे। इसी बीच वह हादसे का शिकार हो गए। मृतक दो युवकों की पहचान संदीप और नितिन के रूप में हुई है।
कानपुरः बिधनू में अफजलपुर गांवके पास कानपुर-सागर हाईवे पर सोमवार रात को दर्दनाक हादसा सामने आया। यहां हुए हादसे में चार लोगों की जान चली गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार ओवरटेक करते समय तेज रफ्तार कार सामने आ रही डीसीएम से टकरा गई, जिसके बाद हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई। वहीं इस हादसे में 2 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद कार बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है और बाडी को काटकर उसमें से लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में घायल लोगों को लाला लाजपत राय अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
हादसे को लेकर बिधनू थाना प्रभारी अतुल सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली के नंबर की आर्टिगा कार घाटमपुर की ओर जा रही थी। इस बीच अफजलपुर गांव के पास कार ने डंपर को ओवरटेक करने का प्रयास किया। इस बीच सामने की ओर से कुम्हड़ा लदी डीसीएम से वह टकरा गई। हादसे में कार सवार 4 लोग घायल हो गए। हादसे की सूचना पुलिस को मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को इलाज के लिए भेजा। पुलिस ने कार की बाडी को काटकर चारों को बाहर निकाला और सीएचसी बिधनू भेजवाया। हालांकि हालत गंभीर देखते हुए उन्हें एलएलआर अस्पताल रेफर कर दिया गया। थाना प्रभारी की ओर से बताया गया कि हादसे के बाद चार लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि दो लोग अभी भी घायल हैं और उनका इलाज चल रहा है। मृतकों की पहचान संदीप, नितिन के रूप में हुई है।
कार पर डीएल-11सीए-8035 नंबर पड़ा हुआ था। जिसके बाद छानबीन में पता चला कि कार दिल्ली के रोहणी निवासी मंजीत कुमार की है। कार में कुछ विजिटिंग कार्ड भी मिले हैं। जिसमें एएमटी मोटर एंड प्रापर्टीज और पता सेक्टर-3 रोहणी दिल्ली लिखा है। कार्ड पर अमित कटारिया और एसडी कटारिया का नाम लिखा है।
कार में आठ लोग सवार होकर रमईपुर निवासी रियाज के वलीमा में शामिल होने के लिए गए हुए थे। वहां से 6 लोग निकले। हादसे के बाद पुलिस इन्हें बिधनू सीएचसी लेकर गई जहां दो लोगों को मृत घोषित किया गया। जबकि चार अन्य को एलएलआर अस्पताल रेफर किया गया। वहीं इस बीच रास्ते में दो अन्य ने भी दम तोड़ दिया।
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यूपी के कानपुर में सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि घायल दो अन्य का इलाज जारी है। कार सवार सभी लोग वलीमा से वापस आ रहे थे। इसी बीच वह हादसे का शिकार हो गए। मृतक दो युवकों की पहचान संदीप और नितिन के रूप में हुई है। कानपुरः बिधनू में अफजलपुर गांवके पास कानपुर-सागर हाईवे पर सोमवार रात को दर्दनाक हादसा सामने आया। यहां हुए हादसे में चार लोगों की जान चली गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार ओवरटेक करते समय तेज रफ्तार कार सामने आ रही डीसीएम से टकरा गई, जिसके बाद हादसे में चार लोगों की मौत हो गई। वहीं इस हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद कार बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है और बाडी को काटकर उसमें से लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में घायल लोगों को लाला लाजपत राय अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। हादसे को लेकर बिधनू थाना प्रभारी अतुल सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली के नंबर की आर्टिगा कार घाटमपुर की ओर जा रही थी। इस बीच अफजलपुर गांव के पास कार ने डंपर को ओवरटेक करने का प्रयास किया। इस बीच सामने की ओर से कुम्हड़ा लदी डीसीएम से वह टकरा गई। हादसे में कार सवार चार लोग घायल हो गए। हादसे की सूचना पुलिस को मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को इलाज के लिए भेजा। पुलिस ने कार की बाडी को काटकर चारों को बाहर निकाला और सीएचसी बिधनू भेजवाया। हालांकि हालत गंभीर देखते हुए उन्हें एलएलआर अस्पताल रेफर कर दिया गया। थाना प्रभारी की ओर से बताया गया कि हादसे के बाद चार लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि दो लोग अभी भी घायल हैं और उनका इलाज चल रहा है। मृतकों की पहचान संदीप, नितिन के रूप में हुई है। कार पर डीएल-ग्यारहसीए-आठ हज़ार पैंतीस नंबर पड़ा हुआ था। जिसके बाद छानबीन में पता चला कि कार दिल्ली के रोहणी निवासी मंजीत कुमार की है। कार में कुछ विजिटिंग कार्ड भी मिले हैं। जिसमें एएमटी मोटर एंड प्रापर्टीज और पता सेक्टर-तीन रोहणी दिल्ली लिखा है। कार्ड पर अमित कटारिया और एसडी कटारिया का नाम लिखा है। कार में आठ लोग सवार होकर रमईपुर निवासी रियाज के वलीमा में शामिल होने के लिए गए हुए थे। वहां से छः लोग निकले। हादसे के बाद पुलिस इन्हें बिधनू सीएचसी लेकर गई जहां दो लोगों को मृत घोषित किया गया। जबकि चार अन्य को एलएलआर अस्पताल रेफर किया गया। वहीं इस बीच रास्ते में दो अन्य ने भी दम तोड़ दिया।
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जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री तथा नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि अगर कांग्रेस उनकी पार्टी के सीट बंटवारे के फार्मूले को स्वीकार कर ले तो वह कांग्रेस के साथ लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन के लिए तैयार हैं। अनंतनाग जिले में पार्टी के एक समारोह से इतर उमर ने मीडिया से यह बात कही। उन्होंने कहा, हमें कांग्रेस से प्रस्ताव मिला है, लेकिन हम बिल्कुल स्पष्ट हैं कि गठबंधन की बात तभी आगे बढ़ेगी जब कश्मीर में लोकसभा की सभी सीटों पर हमारी पार्टी के उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर सहमति बनेगी। जम्मू एवं कश्मीर में लोकसभा की छह सीट हैं। इनमें से तीन कश्मीर घाटी में, दो जम्मू संभाग में और एक लद्दाख संभाग में है। उमर ने राज्य में लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव नहीं कराने के लिए एक बार फिर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह राज्य के लोगों को सरकार चुनने के उनके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित करने के समान है। पूर्व आईएएस अफसर शाह फैसल द्वारा नई पार्टी लॉन्च करने के बारे में उन्होंने कहा कि अभी यह देखा जाना बाकी है कि इस नई पार्टी के पास राज्य के लोगों को कुछ नया देने के लिए है या नहीं। राज्य में जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध और इसके कार्यकर्ताओं की धर-पकड़ पर उमर ने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थे, तब उन्हें जमात पर प्रतिबंध लगाने की कोई जरूरत नहीं महसूस हुई थी।
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जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री तथा नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि अगर कांग्रेस उनकी पार्टी के सीट बंटवारे के फार्मूले को स्वीकार कर ले तो वह कांग्रेस के साथ लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन के लिए तैयार हैं। अनंतनाग जिले में पार्टी के एक समारोह से इतर उमर ने मीडिया से यह बात कही। उन्होंने कहा, हमें कांग्रेस से प्रस्ताव मिला है, लेकिन हम बिल्कुल स्पष्ट हैं कि गठबंधन की बात तभी आगे बढ़ेगी जब कश्मीर में लोकसभा की सभी सीटों पर हमारी पार्टी के उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर सहमति बनेगी। जम्मू एवं कश्मीर में लोकसभा की छह सीट हैं। इनमें से तीन कश्मीर घाटी में, दो जम्मू संभाग में और एक लद्दाख संभाग में है। उमर ने राज्य में लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव नहीं कराने के लिए एक बार फिर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह राज्य के लोगों को सरकार चुनने के उनके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित करने के समान है। पूर्व आईएएस अफसर शाह फैसल द्वारा नई पार्टी लॉन्च करने के बारे में उन्होंने कहा कि अभी यह देखा जाना बाकी है कि इस नई पार्टी के पास राज्य के लोगों को कुछ नया देने के लिए है या नहीं। राज्य में जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध और इसके कार्यकर्ताओं की धर-पकड़ पर उमर ने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थे, तब उन्हें जमात पर प्रतिबंध लगाने की कोई जरूरत नहीं महसूस हुई थी।
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शिमला - सांसद एवं लोक लेखा समिति के सदस्य अनुराग ठाकुर आस्ट्रेलियाई संसद के न्योते पर आस्ट्रेलेशियन लोक लेखा समिति की द्विवार्षिक बैठक में भाग लेने भारत की ओर से आस्ट्रेलिया गए हैं। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने उन्हें इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना है। तीन दिन चलने वाली इन बैठकों में लोकलेखा समिति की जिम्मेदारी, लेखा परीक्षकों पर बाहरी नियंत्रण, आडिट रिपोर्ट्स की जांच, प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिपआदि विषयों पर चर्चा होगी। सांसद अनुराग ठाकुर इस बैठक में भारत के संसद का प्रतिनिधित्व करते हुए भारत का दृष्टिकोण रखेंगे।
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शिमला - सांसद एवं लोक लेखा समिति के सदस्य अनुराग ठाकुर आस्ट्रेलियाई संसद के न्योते पर आस्ट्रेलेशियन लोक लेखा समिति की द्विवार्षिक बैठक में भाग लेने भारत की ओर से आस्ट्रेलिया गए हैं। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने उन्हें इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना है। तीन दिन चलने वाली इन बैठकों में लोकलेखा समिति की जिम्मेदारी, लेखा परीक्षकों पर बाहरी नियंत्रण, आडिट रिपोर्ट्स की जांच, प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिपआदि विषयों पर चर्चा होगी। सांसद अनुराग ठाकुर इस बैठक में भारत के संसद का प्रतिनिधित्व करते हुए भारत का दृष्टिकोण रखेंगे।
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Ravi Shankar Prasad Helicopter Crash: चुनाव प्रचार के लिए बिहार गए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का हेलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में मंत्री बाल बाल बचे हैं। दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election) अभियान के दौरान पटना एयरपोर्ट (Patna Airport) पर उनका हेलिकॉप्टर तार से टकरा गया। जिससे उनके हेलिकॉप्टर के ब्लेड टूट गए। इस दौरान उनके साथ मंगल पांडेय (Mangal Pandey) और संजय झा (Sanjay Jha) भी साथ थे।
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Ravi Shankar Prasad Helicopter Crash: चुनाव प्रचार के लिए बिहार गए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का हेलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में मंत्री बाल बाल बचे हैं। दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान पटना एयरपोर्ट पर उनका हेलिकॉप्टर तार से टकरा गया। जिससे उनके हेलिकॉप्टर के ब्लेड टूट गए। इस दौरान उनके साथ मंगल पांडेय और संजय झा भी साथ थे।
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दिवाली के दूसरे दिन वासा गांव में शुक्रवार को गौवर्धन पूजा, नन्दी पूजा व अन्नकुट पूजन किया गया। गोवर्धन मेले में गायों की दौड़ हुई। अलग-अलग रंग की करीब एक हजार गाय मुकाबले में दौड़ी। श्याम रंग की गाय सबसे आगे रही। आखरीया चौक में दौड़ से पहले शोभायात्रा के साथ ग्रामीण नाचते-गाते हुए पहुंचे। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। बरसों से चली आ रही परंपरा को आज भी मनाया जाता है।
मेले में रेबारी समाज के लोगों ने आखरीया चौक में गायों को कृष्ण उपदेश सुनाए और गुड खिलाया। इसके बाद अलग-अलग रंग की गाय दौड़ी। गाय दौड़ से आने वाले साल का अनुमान लगाया जाता है। दौड़ में श्याम रंग की गाय सबसे आगे रही। बुजूर्गों के अनुसार श्याम रंग की गाय आगे रहती है तो आने वाला साल अच्छा माना जाता है।
सरपंच प्रभुराम हीरागर ने कहा कि रोहिडा के समीप वासा गांव में सर्व-समाज के लोग अपनी गायों को आखरीया चौक में लेकर आते है। विधि-विधान के साथ गौमाता की पूजा की जाती है। जिसके बाद दौड़ शुरू होती है। गाय के रंग के आधार पर नए साल का अनुमान लगाया जाता है। श्याम रंग(लीलकी गाय) आगे रहती है तो आने वाला साल शुभ माना जाता है। सफेद गाय के रहने पर साल मध्यम माना जाता है। काले रंग की गाय के आगे रहने पर साल अशुभ माना जाता है। दौड़ में सहायक विकास अधिकारी केतन ओझा , ग्राम विकास अधिकारी भरत प्रजापत, वासा सरपंच प्रभुराम हीरागर,चन्द्रकान्त दवे, किरीट भाई शुक्ल, सुधीर अग्रवाल, नारायणलाल प्रजापत, छाोगालाल कुम्हार, ग्राम विकास अधिकारी भरत प्रजापत, रजनीकांत दवे सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।
वासा गांव में होने वाला गोवर्धन मेला सालों से मनाया जाता है। मगर पिछले दो साल कोरोना महामारी के कारण मेला स्थगित किया गया था। दो साल बाद गोवर्धन मेला भरा गया।
पिंडवाड़ा के सहायक विकास अधिकारी केतन ओझा ने कहा कि वासा की सभी गोचर भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है। गायों को चारा चरने में समस्या आ रही है। मेले में उमड़े उत्साह को देखकर लगता है वासा में गौ भक्तो की कमी नहीं है। मगर गोचर अतिक्रमण को लेकर सभी चुप है ।
गणपत महाराज के सानिध्य में गोवर्धन पूजा का आयोजन किया गया। इस मौके पर गायों व नन्दी की पूजा की गई । उसके बाद ग्वालो ने गायों को कृष्ण उपदेश सुनाया। इस मौके पर रोहिड़ा सरपंच पवन राठौड़, पंचायत समिति सदस्य रोहिड़ा रणजीत घांची, अशोक माली, भरत माली सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।
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दिवाली के दूसरे दिन वासा गांव में शुक्रवार को गौवर्धन पूजा, नन्दी पूजा व अन्नकुट पूजन किया गया। गोवर्धन मेले में गायों की दौड़ हुई। अलग-अलग रंग की करीब एक हजार गाय मुकाबले में दौड़ी। श्याम रंग की गाय सबसे आगे रही। आखरीया चौक में दौड़ से पहले शोभायात्रा के साथ ग्रामीण नाचते-गाते हुए पहुंचे। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। बरसों से चली आ रही परंपरा को आज भी मनाया जाता है। मेले में रेबारी समाज के लोगों ने आखरीया चौक में गायों को कृष्ण उपदेश सुनाए और गुड खिलाया। इसके बाद अलग-अलग रंग की गाय दौड़ी। गाय दौड़ से आने वाले साल का अनुमान लगाया जाता है। दौड़ में श्याम रंग की गाय सबसे आगे रही। बुजूर्गों के अनुसार श्याम रंग की गाय आगे रहती है तो आने वाला साल अच्छा माना जाता है। सरपंच प्रभुराम हीरागर ने कहा कि रोहिडा के समीप वासा गांव में सर्व-समाज के लोग अपनी गायों को आखरीया चौक में लेकर आते है। विधि-विधान के साथ गौमाता की पूजा की जाती है। जिसके बाद दौड़ शुरू होती है। गाय के रंग के आधार पर नए साल का अनुमान लगाया जाता है। श्याम रंग आगे रहती है तो आने वाला साल शुभ माना जाता है। सफेद गाय के रहने पर साल मध्यम माना जाता है। काले रंग की गाय के आगे रहने पर साल अशुभ माना जाता है। दौड़ में सहायक विकास अधिकारी केतन ओझा , ग्राम विकास अधिकारी भरत प्रजापत, वासा सरपंच प्रभुराम हीरागर,चन्द्रकान्त दवे, किरीट भाई शुक्ल, सुधीर अग्रवाल, नारायणलाल प्रजापत, छाोगालाल कुम्हार, ग्राम विकास अधिकारी भरत प्रजापत, रजनीकांत दवे सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे। वासा गांव में होने वाला गोवर्धन मेला सालों से मनाया जाता है। मगर पिछले दो साल कोरोना महामारी के कारण मेला स्थगित किया गया था। दो साल बाद गोवर्धन मेला भरा गया। पिंडवाड़ा के सहायक विकास अधिकारी केतन ओझा ने कहा कि वासा की सभी गोचर भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है। गायों को चारा चरने में समस्या आ रही है। मेले में उमड़े उत्साह को देखकर लगता है वासा में गौ भक्तो की कमी नहीं है। मगर गोचर अतिक्रमण को लेकर सभी चुप है । गणपत महाराज के सानिध्य में गोवर्धन पूजा का आयोजन किया गया। इस मौके पर गायों व नन्दी की पूजा की गई । उसके बाद ग्वालो ने गायों को कृष्ण उपदेश सुनाया। इस मौके पर रोहिड़ा सरपंच पवन राठौड़, पंचायत समिति सदस्य रोहिड़ा रणजीत घांची, अशोक माली, भरत माली सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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वर्ष की ठंड समय की प्रत्याशा में, कई गर्मी और घर में, लेकिन यह भी विशेष रूप से अपने ही घर में न केवल हीटिंग सिस्टम की विश्वसनीयता के बारे में सोच रहे हैं। हालांकि, बेहतर जितनी जल्दी हो सके, जब वहाँ कुछ समय मरम्मत बाहर ले जाने के लिए है यह करने के लिए। के बाद आप एक विशेष मॉडल की पसंद पर न केवल समय लेने के लिए, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना है कि कारण समय में इसकी स्थापना करने के लिए। चयन करने के लिए रेडिएटर, इन उपकरणों के अन्य मालिकों समीक्षाओं निश्चित रूप से ध्यान में रखा जाना चाहिए।
आज, निर्माताओं डेटा आइटम, जो स्टील या एल्यूमीनियम के बने होते हैं की एक बड़ी संख्या में दे रहे हैं। पहले एक उच्च विश्वसनीयता और इसलिए, सेवा जीवन है, लेकिन गर्मी आप संतुष्ट नहीं कर सकते। दूसरा बेहतर परिवेश को उनके गर्मी से देते हैं, लेकिन एक ही समय में गहन रूप से जंग द्वारा नष्ट कर दिया।
हालांकि, अब आप घर पर द्विधात्वीय रेडिएटर, जो नकारात्मक समीक्षा नहीं कर रहे हैं स्थापित करने के दोनों प्रकार के लाभ जोड़ सकते हैं। अगर वहाँ आपरेशन के दौरान कोई समस्या है, वे केवल प्रौद्योगिकी बढ़ते की पूर्ति में विफल की वजह से हो सकता है। इस तरह के एक उपकरण की कीमत एक छोटे से अधिक हो सकती है, खासकर यदि वे विदेश में किए गए थे। लेकिन द्विधात्वीय रेडिएटर रूस भी कुछ समय पहले का उत्पादन शुरू कर दिया। इन उत्पादों को एक कम लागत है और वे अपवाद आबादी बिना खर्च कर सकते हैं।
क्या है आपरेशन के सिद्धांत है द्विधात्वीय रेडिएटर, जो सकारात्मक समीक्षा कर रहे हैं? के साथ शुरू करने के लिए, कि उनके निर्माण दो अलग अलग सामग्री में इस्तेमाल कियाः इस्पात और एल्यूमीनियम। इस वजह से वे अपने नाम मिला है।
उनके निर्माण स्टील दबाव रखना और जंग का विरोध करने में सक्षम ट्यूबों में प्रयुक्त। इन तत्वों के उत्पादन की विशेष स्थितियों एक पूर्व पर बल दिया राज्य में तैयार उत्पाद में अपने स्थापना अनुमति देते हैं। इस ट्यूब सामग्री के माध्यम से हीटिंग सिस्टम में काफी दबाव का सामना कर सकते। यह भी गर्मी की कार्रवाई के तहत इस्पात और एल्यूमीनियम में होने वाली विकृति में अपरिहार्य अंतर के लिए क्षतिपूर्ति कर सकते हैं, बराबर आसपास के अंतरिक्ष में गर्मी प्रवाह संरक्षण। पानी के साथ संपर्क तत्व एल्यूमीनियम लगभग अनुपस्थित है, इसलिए द्विधात्विक रेडिएटर रेटिंग्स केवल (उनकी विश्वसनीयता और जीवन के संदर्भ में) सबसे अच्छा कर रहे हैं।
इस प्रक्रिया में, इन उपकरणों हस्तांतरण द्रव, जो सबसे अधिक बार गर्म पानी, कभी कभी भाप, एक स्टील ट्यूब के माध्यम से circulates गर्म करें। ट्यूब पंख आंकड़ों के ताप अंतरित, उनके बाहरी सतह है, जो उच्च गुणवत्ता वाले के निर्माण में प्रयोग किया जाता है को कवर एल्यूमीनियम मिश्र धातु। इस कार्य के परिणाम कमरे में जहां काम कर रहे द्विधात्विक रेडिएटर में इष्टतम तापमान है।
यह इन उपकरणों के उत्कृष्ट डिजाइन ध्यान देने योग्य है। वे शैलीगत और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाओं की परवाह किए बिना किसी भी कमरे में पूरी तरह से फिट हो सकता है।
इस प्रकार, यदि आप द्विधात्विक रेडिएटर, समीक्षाएँ जो आप पूरी तरह से मंचन में रुचि रखते हैं, तो यह दोनों के स्वरूप और लागत में एक उपयुक्त मॉडल का चुनाव करने के लिए आगे बढ़ने के लिए समय है। आप VitaTerm, Teploterm, ग्लोबल शैली या Konner के रूप में इस तरह के निर्माताओं के लिए विकल्प चुन सकते हैं।
इन उपकरणों वर्गों से मिलकर बनता है, जिनमें से विधानसभा हीटिंग सिस्टम की स्थापना के स्थल पर सीधे प्रभावित हो सकता है। यह बहुत, अपने चयन की स्थिति की सुविधा है क्योंकि बैटरी अपने स्वाद और प्राथमिकताओं के आधार पर पुनः व्यवस्थित किया जा सकता होगा। हो सकता है कि आप एक ही अद्वितीय डिजाइन बनाने के लिए वर्गों, जो एक अलग डिजाइन है खरीदने के लिए, निर्णय लेते हैं। किसी भी मामले में, अपने घर में द्विधात्विक रेडिएटर की स्थापना एक गर्म, आरामदायक वातावरण जिसमें आप वापस प्राप्त करना चाहते हैं बनाने के लिए मदद मिलेगी।
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वर्ष की ठंड समय की प्रत्याशा में, कई गर्मी और घर में, लेकिन यह भी विशेष रूप से अपने ही घर में न केवल हीटिंग सिस्टम की विश्वसनीयता के बारे में सोच रहे हैं। हालांकि, बेहतर जितनी जल्दी हो सके, जब वहाँ कुछ समय मरम्मत बाहर ले जाने के लिए है यह करने के लिए। के बाद आप एक विशेष मॉडल की पसंद पर न केवल समय लेने के लिए, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना है कि कारण समय में इसकी स्थापना करने के लिए। चयन करने के लिए रेडिएटर, इन उपकरणों के अन्य मालिकों समीक्षाओं निश्चित रूप से ध्यान में रखा जाना चाहिए। आज, निर्माताओं डेटा आइटम, जो स्टील या एल्यूमीनियम के बने होते हैं की एक बड़ी संख्या में दे रहे हैं। पहले एक उच्च विश्वसनीयता और इसलिए, सेवा जीवन है, लेकिन गर्मी आप संतुष्ट नहीं कर सकते। दूसरा बेहतर परिवेश को उनके गर्मी से देते हैं, लेकिन एक ही समय में गहन रूप से जंग द्वारा नष्ट कर दिया। हालांकि, अब आप घर पर द्विधात्वीय रेडिएटर, जो नकारात्मक समीक्षा नहीं कर रहे हैं स्थापित करने के दोनों प्रकार के लाभ जोड़ सकते हैं। अगर वहाँ आपरेशन के दौरान कोई समस्या है, वे केवल प्रौद्योगिकी बढ़ते की पूर्ति में विफल की वजह से हो सकता है। इस तरह के एक उपकरण की कीमत एक छोटे से अधिक हो सकती है, खासकर यदि वे विदेश में किए गए थे। लेकिन द्विधात्वीय रेडिएटर रूस भी कुछ समय पहले का उत्पादन शुरू कर दिया। इन उत्पादों को एक कम लागत है और वे अपवाद आबादी बिना खर्च कर सकते हैं। क्या है आपरेशन के सिद्धांत है द्विधात्वीय रेडिएटर, जो सकारात्मक समीक्षा कर रहे हैं? के साथ शुरू करने के लिए, कि उनके निर्माण दो अलग अलग सामग्री में इस्तेमाल कियाः इस्पात और एल्यूमीनियम। इस वजह से वे अपने नाम मिला है। उनके निर्माण स्टील दबाव रखना और जंग का विरोध करने में सक्षम ट्यूबों में प्रयुक्त। इन तत्वों के उत्पादन की विशेष स्थितियों एक पूर्व पर बल दिया राज्य में तैयार उत्पाद में अपने स्थापना अनुमति देते हैं। इस ट्यूब सामग्री के माध्यम से हीटिंग सिस्टम में काफी दबाव का सामना कर सकते। यह भी गर्मी की कार्रवाई के तहत इस्पात और एल्यूमीनियम में होने वाली विकृति में अपरिहार्य अंतर के लिए क्षतिपूर्ति कर सकते हैं, बराबर आसपास के अंतरिक्ष में गर्मी प्रवाह संरक्षण। पानी के साथ संपर्क तत्व एल्यूमीनियम लगभग अनुपस्थित है, इसलिए द्विधात्विक रेडिएटर रेटिंग्स केवल सबसे अच्छा कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में, इन उपकरणों हस्तांतरण द्रव, जो सबसे अधिक बार गर्म पानी, कभी कभी भाप, एक स्टील ट्यूब के माध्यम से circulates गर्म करें। ट्यूब पंख आंकड़ों के ताप अंतरित, उनके बाहरी सतह है, जो उच्च गुणवत्ता वाले के निर्माण में प्रयोग किया जाता है को कवर एल्यूमीनियम मिश्र धातु। इस कार्य के परिणाम कमरे में जहां काम कर रहे द्विधात्विक रेडिएटर में इष्टतम तापमान है। यह इन उपकरणों के उत्कृष्ट डिजाइन ध्यान देने योग्य है। वे शैलीगत और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाओं की परवाह किए बिना किसी भी कमरे में पूरी तरह से फिट हो सकता है। इस प्रकार, यदि आप द्विधात्विक रेडिएटर, समीक्षाएँ जो आप पूरी तरह से मंचन में रुचि रखते हैं, तो यह दोनों के स्वरूप और लागत में एक उपयुक्त मॉडल का चुनाव करने के लिए आगे बढ़ने के लिए समय है। आप VitaTerm, Teploterm, ग्लोबल शैली या Konner के रूप में इस तरह के निर्माताओं के लिए विकल्प चुन सकते हैं। इन उपकरणों वर्गों से मिलकर बनता है, जिनमें से विधानसभा हीटिंग सिस्टम की स्थापना के स्थल पर सीधे प्रभावित हो सकता है। यह बहुत, अपने चयन की स्थिति की सुविधा है क्योंकि बैटरी अपने स्वाद और प्राथमिकताओं के आधार पर पुनः व्यवस्थित किया जा सकता होगा। हो सकता है कि आप एक ही अद्वितीय डिजाइन बनाने के लिए वर्गों, जो एक अलग डिजाइन है खरीदने के लिए, निर्णय लेते हैं। किसी भी मामले में, अपने घर में द्विधात्विक रेडिएटर की स्थापना एक गर्म, आरामदायक वातावरण जिसमें आप वापस प्राप्त करना चाहते हैं बनाने के लिए मदद मिलेगी।
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मुंबईः आलिया भट्ट और रणबीर कपूर जल्दी ही अयान मुखर्जी की बिग बजट मूवी 'ब्रह्मास्त्र' में नजर आने वाले हैं। ये फिल्म 9 सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है, लेकिन एक बार फिर ये मल्टी स्टारर मूवी विवादों में आ चुकी है। दरअसल, हाल ही में फिल्म की लीड एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने अपने इंटरव्यू में कुछ ऐसा कह दिया जिसके बाद ट्वीटर पर बायकॉट 'ब्रह्मास्त्र' ट्रेंड हो रहा है। अपनी फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' के प्रमोशन के दौरान हाल ही में आलिया भट्ट ने कहा- 'मुझे अगर आप पसंद नहीं करते तो मत देखों मेरी फिल्में। इसमें मैं कुछ नहीं कर सकती। लोगों को तो कुछ न कुछ कहना ही होता है'। वहीं, आलिया का ऐसा कहना था कि सोशल मीडिया पर उनकी फिल्म को लेकर मीम्स की बाढ़ आ गई।
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आपको बता दें कि आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' सितंबर में रिलीज हो रही है। आलिया से पहले करीना कपूर खान ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि- 'हमारी फिल्में क्यों देखते हो? ' वहीं, हाल ही में रिलीज हुई आमिर खान और करीना कपूर की फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' को भी बायकॉट का सामना करना पड़ा था। इसका असर फिल्म की कमाई पर साफ देखने को मिला। अब आलिया की बातों का उनकी फिल्म के कलेक्शन पर कितना कसर पड़ेगा वो अगले महीने की 9 तारीख को पता चल ही जाएगा।
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मुंबईः आलिया भट्ट और रणबीर कपूर जल्दी ही अयान मुखर्जी की बिग बजट मूवी 'ब्रह्मास्त्र' में नजर आने वाले हैं। ये फिल्म नौ सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है, लेकिन एक बार फिर ये मल्टी स्टारर मूवी विवादों में आ चुकी है। दरअसल, हाल ही में फिल्म की लीड एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने अपने इंटरव्यू में कुछ ऐसा कह दिया जिसके बाद ट्वीटर पर बायकॉट 'ब्रह्मास्त्र' ट्रेंड हो रहा है। अपनी फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' के प्रमोशन के दौरान हाल ही में आलिया भट्ट ने कहा- 'मुझे अगर आप पसंद नहीं करते तो मत देखों मेरी फिल्में। इसमें मैं कुछ नहीं कर सकती। लोगों को तो कुछ न कुछ कहना ही होता है'। वहीं, आलिया का ऐसा कहना था कि सोशल मीडिया पर उनकी फिल्म को लेकर मीम्स की बाढ़ आ गई। A post shared by ꧁༒︎🚩Dʜʀᴜᴠ Sʜᴀʀᴍᴀ🚩༒︎꧂ आपको बता दें कि आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' सितंबर में रिलीज हो रही है। आलिया से पहले करीना कपूर खान ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि- 'हमारी फिल्में क्यों देखते हो? ' वहीं, हाल ही में रिलीज हुई आमिर खान और करीना कपूर की फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' को भी बायकॉट का सामना करना पड़ा था। इसका असर फिल्म की कमाई पर साफ देखने को मिला। अब आलिया की बातों का उनकी फिल्म के कलेक्शन पर कितना कसर पड़ेगा वो अगले महीने की नौ तारीख को पता चल ही जाएगा।
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आपको 4G से 5G स्मार्टफोन में अपग्रेड होने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। वरना आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। आइए जानते हैं विस्तार से. .
नई दिल्ली। भारत में 5G को लेकर गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। देश की दिग्गज टेलिकॉम कंपनियों एयरटेल (Airtel) और जियो (Jio) की तरफ से देश के चुनिंदा शहरों में 5G नेटवर्क को रोलआउट कर दिया गया है। ऐसे में देशभर में 5G फोन खरीदने की होड़ मची हुई है। लेकिन क्या आपको मालूम है कि अभी 5G को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं दिखाना चाहिए। वरना आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। साथ ही 5G के नाम पर कहीं आपके पूरे पैसे न डूब जाए।
5G नहीं बन पाया कॉमन नेटवर्क बता दें कि 4G की तरह 5G भारत का कॉमन नेटवर्क नहीं बन पाया है। भारत में चरणबद्ध तरीके से 5G नेटवर्क रोलआउट किया जा रहा है। मौजूदा वक्त में चुनिंदा शहरों में 5G नेटवर्क को रोलआउट कर दिया गया है। हालांकि 5G का कवरेज एरिया बेहद सीमित है। ऐसे में दिसंबर 2023 तक पूरे देश में 5G नेटवर्क उपलब्ध हो पाएगा। जबकि एयरटेल मार्च 2024 तक पूरे देश में 5G नेटवर्क रोलआउट करेगा। वही जिन शहरों में 5G नेटवर्क उपलब्ध है। वहां कुछ साइट्स ही एक्टिव हैं। जबकि एयरटेल और जियो की तरफ से 5G रिचार्ज प्लान का भी ऐलान नहीं किया गया है।
एक साल का लग सकता है वक्त ऐसे में अगर आपके पास 5G फोन मौजूद नहीं है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है, आपको जल्दबाजी में अपने नए 4G को छोड़कर 5G में अपग्रेड नहीं करना चाहिए, क्योंकि 5G को देशभर में रोलआउट होने में करीब एक से दो साल का लंबा वक्त लग सकता है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि अगले एक साल में 5G स्मार्टफन की कीमत कम हो सकती है। साथ ही 5G नेटवर्क पूरी तरह से रोलआउट हो जाएगी। मौजूदा वक्त के 5G नेटवर्क की स्पीड पर भरोसा नहीं किया जा सकता है, क्योंकि ज्यादा ट्रैफिक होने पर रियर 5G स्पीड का टेस्ट होगा।
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आपको चारG से पाँचG स्मार्टफोन में अपग्रेड होने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। वरना आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। आइए जानते हैं विस्तार से. . नई दिल्ली। भारत में पाँचG को लेकर गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। देश की दिग्गज टेलिकॉम कंपनियों एयरटेल और जियो की तरफ से देश के चुनिंदा शहरों में पाँचG नेटवर्क को रोलआउट कर दिया गया है। ऐसे में देशभर में पाँचG फोन खरीदने की होड़ मची हुई है। लेकिन क्या आपको मालूम है कि अभी पाँचG को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं दिखाना चाहिए। वरना आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। साथ ही पाँचG के नाम पर कहीं आपके पूरे पैसे न डूब जाए। पाँचG नहीं बन पाया कॉमन नेटवर्क बता दें कि चारG की तरह पाँचG भारत का कॉमन नेटवर्क नहीं बन पाया है। भारत में चरणबद्ध तरीके से पाँचG नेटवर्क रोलआउट किया जा रहा है। मौजूदा वक्त में चुनिंदा शहरों में पाँचG नेटवर्क को रोलआउट कर दिया गया है। हालांकि पाँचG का कवरेज एरिया बेहद सीमित है। ऐसे में दिसंबर दो हज़ार तेईस तक पूरे देश में पाँचG नेटवर्क उपलब्ध हो पाएगा। जबकि एयरटेल मार्च दो हज़ार चौबीस तक पूरे देश में पाँचG नेटवर्क रोलआउट करेगा। वही जिन शहरों में पाँचG नेटवर्क उपलब्ध है। वहां कुछ साइट्स ही एक्टिव हैं। जबकि एयरटेल और जियो की तरफ से पाँचG रिचार्ज प्लान का भी ऐलान नहीं किया गया है। एक साल का लग सकता है वक्त ऐसे में अगर आपके पास पाँचG फोन मौजूद नहीं है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है, आपको जल्दबाजी में अपने नए चारG को छोड़कर पाँचG में अपग्रेड नहीं करना चाहिए, क्योंकि पाँचG को देशभर में रोलआउट होने में करीब एक से दो साल का लंबा वक्त लग सकता है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि अगले एक साल में पाँचG स्मार्टफन की कीमत कम हो सकती है। साथ ही पाँचG नेटवर्क पूरी तरह से रोलआउट हो जाएगी। मौजूदा वक्त के पाँचG नेटवर्क की स्पीड पर भरोसा नहीं किया जा सकता है, क्योंकि ज्यादा ट्रैफिक होने पर रियर पाँचG स्पीड का टेस्ट होगा।
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वालेंसिया (स्पेन): मौजूदा ओलम्पिक चैम्पियन जर्मनी ने सोमवार को छह देशों के हॉकी टूर्नामेंट में भारत को 4-0 से हरा दिया। हाल ही में लंदन में आयोजित चैम्पियंस ट्राफी में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम जर्मनी के खिलाफ इस मुकाबले में अपनी परछाई तक भी नहीं पहुंच सकी और नतीजतन उसे करारी हार मिली।
जर्मनी के लिए मैच का पहला गोल मैट ग्रामबुश ने पांचवें मिनट में किया और फिर 10वें मिनट में दूसरा गोल करते हुए टीम को 2-0 से आगे कर दिया।
दो गोल से पिछड़ने के बाद भारतीय टीम ने वापसी की जोरदार कोशिश की लेकिन उसकी कोशिश बेकार गई। इसी क्रम में उसने जर्मनी को एक पेनाल्टी कार्नर दिया जिस पर गोल करते हए मोरित्ज फुत्से ने अपनी टीम को 3-0 से आगे कर दिया।
जर्मन टीम के लिए मैच का अंतिम गोल लुकास विंडफेरर ने किया। भारत का अगला मैच मंगलवार को आयरलैंड के साथ है।
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वालेंसिया : मौजूदा ओलम्पिक चैम्पियन जर्मनी ने सोमवार को छह देशों के हॉकी टूर्नामेंट में भारत को चार-शून्य से हरा दिया। हाल ही में लंदन में आयोजित चैम्पियंस ट्राफी में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम जर्मनी के खिलाफ इस मुकाबले में अपनी परछाई तक भी नहीं पहुंच सकी और नतीजतन उसे करारी हार मिली। जर्मनी के लिए मैच का पहला गोल मैट ग्रामबुश ने पांचवें मिनट में किया और फिर दसवें मिनट में दूसरा गोल करते हुए टीम को दो-शून्य से आगे कर दिया। दो गोल से पिछड़ने के बाद भारतीय टीम ने वापसी की जोरदार कोशिश की लेकिन उसकी कोशिश बेकार गई। इसी क्रम में उसने जर्मनी को एक पेनाल्टी कार्नर दिया जिस पर गोल करते हए मोरित्ज फुत्से ने अपनी टीम को तीन-शून्य से आगे कर दिया। जर्मन टीम के लिए मैच का अंतिम गोल लुकास विंडफेरर ने किया। भारत का अगला मैच मंगलवार को आयरलैंड के साथ है।
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उत्तरी 24 परगना जिले के किपालपुर में शनिवार (28 मई) को तृणमूल कांग्रेस की विजय रैली में अज्ञात लोगों द्वारा बम फेंके जाने से छः बच्चों सहित नौ लोग घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शी पुलिस अधिकारी ने कहा कि विजय रैली में बम विस्फोट से तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों सहित छः बच्चे भी घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल एक तृणमूल समर्थक और एक बच्चे को नजदीकी बारासात अस्पताल में भर्ती कराया गया है जबकि बाकी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। उन्होंने बताया कि पुलिस रैली में बम फेंककर भागने वाले संदिग्धों की पहचान और जांच में जुटी हैं।
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उत्तरी चौबीस परगना जिले के किपालपुर में शनिवार को तृणमूल कांग्रेस की विजय रैली में अज्ञात लोगों द्वारा बम फेंके जाने से छः बच्चों सहित नौ लोग घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शी पुलिस अधिकारी ने कहा कि विजय रैली में बम विस्फोट से तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों सहित छः बच्चे भी घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल एक तृणमूल समर्थक और एक बच्चे को नजदीकी बारासात अस्पताल में भर्ती कराया गया है जबकि बाकी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। उन्होंने बताया कि पुलिस रैली में बम फेंककर भागने वाले संदिग्धों की पहचान और जांच में जुटी हैं।
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पूरी दुनिया में कई ऐसी जनजातियां है जिनके बारे में जानना आम लोगों के लिए किसी रहस्य से कम नहीं है। इन जनजातियों का रहन-सहन बाकि दुनिया से न सिर्फ अलग है बल्कि चौंकाने वाला है। जनजाति समुदाय के लोगों के बीच कई ऐसी अजीब प्रथाएं है जिन पर आम लोग यकीन तक नहीं करते हैं। आज हम आप लोगों को एक ऐसी ही जनजाति की प्रथा के बारे में बताने जा रहे हैं। इस जनजाति में घर में किसी सदस्य की मौत के बाद शोक जताने के लिए उंगली का हिस्सा काट दिया जाता है।
हम बात कर रहे हैं इंडोनेशिया के दानी जनजाति के बारे में। यहां यदि किसी भी परिवार में किसी की मौत होती है तो शोक जताने के लिए परिवार का सदस्य अपनी उंगली का एक हिस्सा काट देता है। दानी जनजाति की महिलाओं से उम्मीद की जाती है कि वह मृत रिश्तेदार को श्रद्धांजलि देने और उसका शोक मनाने के लिए अपनी उंगुली का सिरा काटेंगी। यहां कई महिलाओं को परिवार के कई सदस्यों की मौत की वजह से जीवन में कई बार अंगुलियों के हिस्सों को काटना पड़ता है।
उंगली काटने की इस अजीब परंपरा जनजाति के महिला औऱ पुरुष दोनों के लिए ही हैं। हालांकि आमतौर पर इश परंपरा को महिलाएं ही निभाती हैं। पुरुष अपनी उंगली नहीं काटते हैं। इंडोनेशिया में पाई जाने वाली इस जनजाति में मान्यता है कि परिवार के मुखिया के मरने के बाद यदि परिवार की सभी महिला सदस्यों की उंगली काट दी जाए तो इससे जो पीड़ा और दर्द होता है उससे मरे हुए व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है। यही कारण है कि यदि परिवार के मुखिया की मृत्यु होती है तो परिवार की सभी महिलाओं की उंगलियां काट दी जाती हैं। इस प्रक्रिया में महिलाओं की उंगली काटने से पहले उसे 30 मिनट तक धागे से बांधकर रखा जाता है। इसके बाद उसे काटा जाता है। वहीं काटी हुई उंगली को आग में जला दिया जाता है।
हालांकि इंडोनेशिया सरकार ने इस परंपरा पर रोक लगा दी है। जिसके बाद ज्यादातर लोगों को इस परंपरा को छोड़ना पड़ा है। लेकिन कबीले की बुजुर्ग महिलाओं के हाथों में आज भी इस परंपरा के सबूत साफतौर पर देखे जा सकते हैं। अब इंडोनेशिया और दुनिया के बाकी हिस्सों में दानी जानजाति के लोग काफी कम तादाद में बचे हुए हैं।
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पूरी दुनिया में कई ऐसी जनजातियां है जिनके बारे में जानना आम लोगों के लिए किसी रहस्य से कम नहीं है। इन जनजातियों का रहन-सहन बाकि दुनिया से न सिर्फ अलग है बल्कि चौंकाने वाला है। जनजाति समुदाय के लोगों के बीच कई ऐसी अजीब प्रथाएं है जिन पर आम लोग यकीन तक नहीं करते हैं। आज हम आप लोगों को एक ऐसी ही जनजाति की प्रथा के बारे में बताने जा रहे हैं। इस जनजाति में घर में किसी सदस्य की मौत के बाद शोक जताने के लिए उंगली का हिस्सा काट दिया जाता है। हम बात कर रहे हैं इंडोनेशिया के दानी जनजाति के बारे में। यहां यदि किसी भी परिवार में किसी की मौत होती है तो शोक जताने के लिए परिवार का सदस्य अपनी उंगली का एक हिस्सा काट देता है। दानी जनजाति की महिलाओं से उम्मीद की जाती है कि वह मृत रिश्तेदार को श्रद्धांजलि देने और उसका शोक मनाने के लिए अपनी उंगुली का सिरा काटेंगी। यहां कई महिलाओं को परिवार के कई सदस्यों की मौत की वजह से जीवन में कई बार अंगुलियों के हिस्सों को काटना पड़ता है। उंगली काटने की इस अजीब परंपरा जनजाति के महिला औऱ पुरुष दोनों के लिए ही हैं। हालांकि आमतौर पर इश परंपरा को महिलाएं ही निभाती हैं। पुरुष अपनी उंगली नहीं काटते हैं। इंडोनेशिया में पाई जाने वाली इस जनजाति में मान्यता है कि परिवार के मुखिया के मरने के बाद यदि परिवार की सभी महिला सदस्यों की उंगली काट दी जाए तो इससे जो पीड़ा और दर्द होता है उससे मरे हुए व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है। यही कारण है कि यदि परिवार के मुखिया की मृत्यु होती है तो परिवार की सभी महिलाओं की उंगलियां काट दी जाती हैं। इस प्रक्रिया में महिलाओं की उंगली काटने से पहले उसे तीस मिनट तक धागे से बांधकर रखा जाता है। इसके बाद उसे काटा जाता है। वहीं काटी हुई उंगली को आग में जला दिया जाता है। हालांकि इंडोनेशिया सरकार ने इस परंपरा पर रोक लगा दी है। जिसके बाद ज्यादातर लोगों को इस परंपरा को छोड़ना पड़ा है। लेकिन कबीले की बुजुर्ग महिलाओं के हाथों में आज भी इस परंपरा के सबूत साफतौर पर देखे जा सकते हैं। अब इंडोनेशिया और दुनिया के बाकी हिस्सों में दानी जानजाति के लोग काफी कम तादाद में बचे हुए हैं।
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।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ( नदारद )
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद)
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम)
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ ।
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद )
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ( नदारद )
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
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जन्माष्टमी का दिन भगवान श्री कृष्ण के नाम होता है, क्योंकि इस दिन को कान्हा के जन्मदिवस के रूप मे मनाया जाता है। इस दिन लोग उपवास रखते है और रात 12 बजे बांके बिहारी के जन्म के बाद ही अन्न ग्रहण करते हैं। इस साल जन्माष्टमी 30 अगस्त को मनाई जाएगी, जिसके लिए तैयारियां जोरों पर हैं। इस दिन लोग मंदिर जाते है और काफी संख्या में लोग मथुरा-वृंदावन जाकर कान्हा की भक्ति में खो जाते हैं। यही नहीं, लोग अपनी-अपनी सोसाइटी में स्थित मंदिरों में भी कान्हा के इस दिन को सेलिब्रेट करते हैं। लेकिन कोरोना काल होने की वजह से लोग इस बार पहले की तरह मंदिरों का रूख करने से बच रहे हैं, लेकिन वे अपने कान्हा के इस दिन को खास भी बनाना चाहते हैं। ऐसे में अगर आप भी इस कोरोना काल में मंदिरों में नहीं जाना चाहते हैं, तो चलिए हम आपको बताते हैं कि आप कैसे घर पर रहकर ही जन्माष्टमी का पर्व मना सकते है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में।
- आप इस जन्माष्टमी की तैयार घर पर ही कर सकते हैं। आप ठाकुर जी का झूला सजा सकते हैं। इसमें आप फूल, मखमल, रेशमी कपड़ा और लाल छोटा तकिया और झालर लगा सकते हैं। इसके अलावा आप अपने बच्चों को कान्हा बना सकते हैं और घर पर ही दही हांडी फोड़ने की तैयारी भी कर सकते हैं।
- जब आप जन्माष्टमी का पर्व घर पर ही मना रहे हैं, तो आप चाहें तो घर पर ही इस बार भगवान कृष्ण को भोग लगने वाला प्रसाद बना सकते हैं। इसमें माखन मिश्री, मक्खन और खीर जैसी चीजें शामिल हैं।
- आप घर के लोगों के साथ ही भगवान कृष्ण के भजन-कीर्तन कर सकते हैं। कान्हा का झूला और मंदिर को प्यार से सजाएं और इस दिन आप उपवास भी रख सकते हैं। इसके बाद आप परिवार संग भजन-कीर्तन करते हुए कान्हा की भक्ति में खो सकते हैं।
- ध्यान रहे कि आपको कोशिश करनी है कि अपने घर के लोगों के बीच ही बांके बिहारी का स्वागत करें। सोचिए जब आप बाहर कोरोना काल की वजह से घर से बाहर नहीं जा रहे हैं, तो घर में बाहर से पड़ोसियों या अन्य लोगों को क्यों बुलाएंगे। इसलिए आप घर पर ही परिवार के बीच जन्माष्टमी का पर्व मना सकते हैं।
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जन्माष्टमी का दिन भगवान श्री कृष्ण के नाम होता है, क्योंकि इस दिन को कान्हा के जन्मदिवस के रूप मे मनाया जाता है। इस दिन लोग उपवास रखते है और रात बारह बजे बांके बिहारी के जन्म के बाद ही अन्न ग्रहण करते हैं। इस साल जन्माष्टमी तीस अगस्त को मनाई जाएगी, जिसके लिए तैयारियां जोरों पर हैं। इस दिन लोग मंदिर जाते है और काफी संख्या में लोग मथुरा-वृंदावन जाकर कान्हा की भक्ति में खो जाते हैं। यही नहीं, लोग अपनी-अपनी सोसाइटी में स्थित मंदिरों में भी कान्हा के इस दिन को सेलिब्रेट करते हैं। लेकिन कोरोना काल होने की वजह से लोग इस बार पहले की तरह मंदिरों का रूख करने से बच रहे हैं, लेकिन वे अपने कान्हा के इस दिन को खास भी बनाना चाहते हैं। ऐसे में अगर आप भी इस कोरोना काल में मंदिरों में नहीं जाना चाहते हैं, तो चलिए हम आपको बताते हैं कि आप कैसे घर पर रहकर ही जन्माष्टमी का पर्व मना सकते है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में। - आप इस जन्माष्टमी की तैयार घर पर ही कर सकते हैं। आप ठाकुर जी का झूला सजा सकते हैं। इसमें आप फूल, मखमल, रेशमी कपड़ा और लाल छोटा तकिया और झालर लगा सकते हैं। इसके अलावा आप अपने बच्चों को कान्हा बना सकते हैं और घर पर ही दही हांडी फोड़ने की तैयारी भी कर सकते हैं। - जब आप जन्माष्टमी का पर्व घर पर ही मना रहे हैं, तो आप चाहें तो घर पर ही इस बार भगवान कृष्ण को भोग लगने वाला प्रसाद बना सकते हैं। इसमें माखन मिश्री, मक्खन और खीर जैसी चीजें शामिल हैं। - आप घर के लोगों के साथ ही भगवान कृष्ण के भजन-कीर्तन कर सकते हैं। कान्हा का झूला और मंदिर को प्यार से सजाएं और इस दिन आप उपवास भी रख सकते हैं। इसके बाद आप परिवार संग भजन-कीर्तन करते हुए कान्हा की भक्ति में खो सकते हैं। - ध्यान रहे कि आपको कोशिश करनी है कि अपने घर के लोगों के बीच ही बांके बिहारी का स्वागत करें। सोचिए जब आप बाहर कोरोना काल की वजह से घर से बाहर नहीं जा रहे हैं, तो घर में बाहर से पड़ोसियों या अन्य लोगों को क्यों बुलाएंगे। इसलिए आप घर पर ही परिवार के बीच जन्माष्टमी का पर्व मना सकते हैं।
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देश जहां 73वां गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी कर रह है, तो वहीं पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भारत को दहलाने की साजिश रची जा रही है। जी हां, मीडिया में आ रही खबरों की माने तो पाकिस्तान से संचालित इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा जैसे आतंकी संगठन 26 जनवरी पर राजधानी दिल्ली समेत देश के बड़े शहरों में आतंकी हमले की तैयारी में लगे हैं।
दरअसल, गणतंत्र दिवस के मौके पर देश पर मंडरा रहे आतंकी साए के मद्देनजर देश की ख़ुफिया एजेंसियों ने अलर्ट जारी की है। इस ख़ुफिया रिपोर्ट के कुछ अंश जो मीडिया में सामने आए है उसके अनुसार, 26 जनवरी के दिन पाकिस्तान अपने स्लीपर सेल और अवैध रोहिंग्यों के जरिए दिल्ली और पंजाब समेत देश के कई राज्यों में IED ब्लास्ट करवा सकता है। असल में सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से जो जानकारी सामने आई है, उसे माने तो इस्लामिक स्टेट देश में बड़े हमले के लिए रोहिंग्या और दो बांग्लादेशी संगठन अंसार उल बंगला और जमात उल मुजाहिदीन का इस्तेमाल कर रहा है।
इस बाबत सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि PFI के देश में बैन होने के बाद से PFI के लो प्रोफाइल विंग एक्टिव हो चुके हैं। ये लोग भारत के अलग-अलग राज्यों में स्लीपर सेल के तौर पर काम कर रहे हैं, जो आगामी गणतंत्र दिवस पर बड़े शहरों में गोरिल्ला अटैक सकते हैं।
पाकिस्तानी संगठनों के अलावा सुरक्षा एजेंसियों की नजर सिख टेरर ग्रुप पर भी है, बताया जा रहा है कि सिख टेरर ग्रुप दिल्ली और पंजाब में बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी करते हुए दल खालसा और वारिश पंजाब पर कड़ी नजर रखने की बात कही है।
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देश जहां तिहत्तरवां गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी कर रह है, तो वहीं पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भारत को दहलाने की साजिश रची जा रही है। जी हां, मीडिया में आ रही खबरों की माने तो पाकिस्तान से संचालित इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा जैसे आतंकी संगठन छब्बीस जनवरी पर राजधानी दिल्ली समेत देश के बड़े शहरों में आतंकी हमले की तैयारी में लगे हैं। दरअसल, गणतंत्र दिवस के मौके पर देश पर मंडरा रहे आतंकी साए के मद्देनजर देश की ख़ुफिया एजेंसियों ने अलर्ट जारी की है। इस ख़ुफिया रिपोर्ट के कुछ अंश जो मीडिया में सामने आए है उसके अनुसार, छब्बीस जनवरी के दिन पाकिस्तान अपने स्लीपर सेल और अवैध रोहिंग्यों के जरिए दिल्ली और पंजाब समेत देश के कई राज्यों में IED ब्लास्ट करवा सकता है। असल में सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से जो जानकारी सामने आई है, उसे माने तो इस्लामिक स्टेट देश में बड़े हमले के लिए रोहिंग्या और दो बांग्लादेशी संगठन अंसार उल बंगला और जमात उल मुजाहिदीन का इस्तेमाल कर रहा है। इस बाबत सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि PFI के देश में बैन होने के बाद से PFI के लो प्रोफाइल विंग एक्टिव हो चुके हैं। ये लोग भारत के अलग-अलग राज्यों में स्लीपर सेल के तौर पर काम कर रहे हैं, जो आगामी गणतंत्र दिवस पर बड़े शहरों में गोरिल्ला अटैक सकते हैं। पाकिस्तानी संगठनों के अलावा सुरक्षा एजेंसियों की नजर सिख टेरर ग्रुप पर भी है, बताया जा रहा है कि सिख टेरर ग्रुप दिल्ली और पंजाब में बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी करते हुए दल खालसा और वारिश पंजाब पर कड़ी नजर रखने की बात कही है।
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अजय देवगन जल्द ही छत्रपति शिवाजी के सबसे वीर योद्धाओं में शुमार तानाजी मालुसरे की वीरता को सिल्वर स्क्रीन पर पेश करेंगे। फिल्म 'तानाजीः द अनसंग वॉरियर' में अजय देवगन खुद तानाजी मालुसरे का किरदार निभा रहे हैं। बीते दिनों अजय की इस 100वीं फिल्म का पहला ट्रेलर सामने आया जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। अब अजय देवगन इस फिल्म का दूसरा ट्रेलर भी लॉन्च करेंगे। फिल्म का ट्रेलर 15 दिसंबर यानी की आज लॉन्च किया जा रहा है। देखना दिलचस्प होगा कि यह नया ट्रेलर भी पहले ट्रेलर जितनी प्रशंसा पाने में कामयाब हो पाता है या नहीं।
गौरतलब है कि तानाजी मालुसरे, मराठा सेना के वीर सेनापति रहे हैं और अपने बेटे की शादी के ऐन दिन छत्रपति शिवाजी के बुलावे पर युद्ध करने चले गए। तानाजी मालुसरे ने छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ कई युद्ध लड़े थे। मेकर्स का दावा है कि यह पीरियड ड्रामा फिल्म भारतीय फिल्म जगत की सर्वश्रेष्ठ 3डी फिल्म बनेगी। खुद के करियर की 100वीं फिल्म होने की वजह से अजय अपनी पूरी टीम के साथ इस फिल्म को खास बनाने के लिए जी-जान से जुटे हुए हैं।
फिल्म को लेकर अपनी खुशी प्रकट करते हुए अजय देवगन ने कहा, ' तानाजी जैसे अनसुने नायक जिन्होंने भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है उनकी कहानी साझा करने से मुझे खुशी प्राप्त होती है। मैं यह चाहता हूं कि उनकी वीरता से भरी कहानी इस देश के कोने-कोने तक जाए। '
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अजय देवगन जल्द ही छत्रपति शिवाजी के सबसे वीर योद्धाओं में शुमार तानाजी मालुसरे की वीरता को सिल्वर स्क्रीन पर पेश करेंगे। फिल्म 'तानाजीः द अनसंग वॉरियर' में अजय देवगन खुद तानाजी मालुसरे का किरदार निभा रहे हैं। बीते दिनों अजय की इस एक सौवीं फिल्म का पहला ट्रेलर सामने आया जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। अब अजय देवगन इस फिल्म का दूसरा ट्रेलर भी लॉन्च करेंगे। फिल्म का ट्रेलर पंद्रह दिसंबर यानी की आज लॉन्च किया जा रहा है। देखना दिलचस्प होगा कि यह नया ट्रेलर भी पहले ट्रेलर जितनी प्रशंसा पाने में कामयाब हो पाता है या नहीं। गौरतलब है कि तानाजी मालुसरे, मराठा सेना के वीर सेनापति रहे हैं और अपने बेटे की शादी के ऐन दिन छत्रपति शिवाजी के बुलावे पर युद्ध करने चले गए। तानाजी मालुसरे ने छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ कई युद्ध लड़े थे। मेकर्स का दावा है कि यह पीरियड ड्रामा फिल्म भारतीय फिल्म जगत की सर्वश्रेष्ठ तीनडी फिल्म बनेगी। खुद के करियर की एक सौवीं फिल्म होने की वजह से अजय अपनी पूरी टीम के साथ इस फिल्म को खास बनाने के लिए जी-जान से जुटे हुए हैं। फिल्म को लेकर अपनी खुशी प्रकट करते हुए अजय देवगन ने कहा, ' तानाजी जैसे अनसुने नायक जिन्होंने भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है उनकी कहानी साझा करने से मुझे खुशी प्राप्त होती है। मैं यह चाहता हूं कि उनकी वीरता से भरी कहानी इस देश के कोने-कोने तक जाए। '
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मेष राशि (Aries) च, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ :
मेष राशि वाले अपने काम के लिए दूसरों पर दबाव न डालें। दूसरे लोगों की इच्छाओं और दिलचस्पियों पर भी गौर करें, इससे आपको दिली खुशी हासिल होगी। विद्यार्थी अच्छा प्रदर्शन करेंगे। जोड़े अपने गुणवत्ता के क्षणों का आनंद लेंगे। आप बेकार के सामान पर अपने खर्च पर नियंत्रण कर पाएंगे। किसी का अपमान न करें। खुद पर संयम रखें। भागदौड़ ज्यादा रहेंगी। आज यात्रा करें तो सावधानीपूर्वक करें, नहीं तो परिस्थितियां कठिन रहेंगी आपके लिए।
वृषभ राशि (Taurus) ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो ब बो :
आज आप अकेलापन महसूस कर सकते हैं। लंबी यात्राएँ फलदायी साबित होंगी व अच्छे परिणाम देने वाली रहेंगी। किसी भी नकारात्मक भावना को अपने उपर हावी ना होने दें। सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ें। आपको एक नए घर का स्वामित्व मिल सकता है। ससुराल पक्ष से किसी प्रिय मेहमान के आगमन से खुश रहेंगे। चंद्रमा के प्रभाव से साझेदारी के काम समय पर निपट सकते हैं। लव पार्टनर से आपको आर्थिक सहयोग मिल सकता है।
मिथुन राशि (Gemini) का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह :
आज आपका सेहत को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। जीवनसाथी की मासूमियत आपके दिन को खास बना सकती है। कामयाबी की दृष्टि से आज का दिन बेहतरीन, इसलिए रोमांस में समय नष्ट न करें। आपके परिजन स्वयं के साथ आप व्यक्तियों को किसी स्थान ले जाएंगे। किसी भी दस्तावेज पर बिना पढ़े हस्ताक्षर ना करें। वैवाहिक जिंदगी बेहतर होगी। अगर किसी बिजनेस की शुरूआत करने की सोच रहें हैं तो आज से ही शुरू करें, सफलता कदम चूमेगी।
कर्क राशि (Cancer) ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो :
आज आप की यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद व उत्साहवर्धक होगी। जीवनसाथी के खराब स्वास्थ्य के कारण आपका कामकाज प्रभावित हो सकता है। आज आप मित्रों के साथ एक बेहतरीन शाम गुज़ारने वाले हैं। माता-पिता को अनदेखा करना आपके भविष्य की संभावनाओं को खत्म कर सकता है। विवाह के प्रस्ताव रखने का शानदार समय है। जब तक आपकी योजनाएं क्रियान्वित न हों आप उसे गोपनीय रखें। उच्च रक्त चाप से परेशांनी हो सकती है।
सिंह राशि (Leo) मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे :
आज किसी नए काम में हाथ डालेंगे तो जरूर सफल होंगे। नया काम शुरू करने जा रहे हैं उसमें भी लाभ होने का अच्छा संयोग बनने वाला है। आप साहसी और उत्साही होंगे। आप समय के भीतर अपना काम पूरा करेंगे, जिससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। हनुमानजी का ध्यान करें, लाभ होगा। महत्वपूर्ण लोगों के साथ बातचीत करते वक़्त अपने शब्दों को गौर से चुनें। प्रेम के मामलों में गंभीरता के साथ गोपनीयता भी रखें। व्यापार में अच्छा लाभ होने से मन प्रसन्न रहेगा।
कन्या राशि (Virgo) ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो :
आज आपकी किसी से मुलाकात हो सकती है। सैर-सपाटे पर जाने का कार्यक्रम बन सकता है, जो आपकी ऊर्जा और उत्साह को तरोताजा कर देगा। आप जल्दी में होंगे, जो आपके काम करने के तरीके को प्रतिबिंबित करेगा। आपका प्रदर्शन धीमा हो जाएगा। भाईयों के साथ पिकनिक पर जाने का प्लान बन सकता है। बड़ों के प्रति आपका व्यवहार अच्छा बना रहेगा। सामाजिक क्षेत्र में प्रतिष्ठा में इजाफा होगा। विदेश यात्रा के भी योग बन रहे हैं।
तुला राशि (Libra) रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते :
आज आलस्य को त्यागकर कार्यों को समय पर करने से सफलता प्राप्त होगी। रुके हुए और सोचे हुए काम पूर्ण होने लगेंगे। बड़ों से आशीर्वाद लेने के साथ ही आप आत्मविश्वासी बनेंगे। आपकी कार्य क्षमता में वृद्धि होगी। नौकरी पेशा वालों को प्रमोशन मिल सकता है इसके अलावा सैलरी में भी बढ़ोतरी हो सकती है। आपके द्वारा किया कार्य समाज के लिए लाभकारी साबित होगा। कार्यक्षेत्र में तरक्की के योग भी हैं। संतान पक्ष भी मजबूत रहेगा।
वृश्चिक राशि (Scorpio) तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू :
वृश्चिक राशि वाले लक्ष्यों को प्राप्त करने की कोशिश करेंगे। आपका प्रभाव कम होगा। सामाजिक एवं धार्मिक समारोह को बेहतरीन दिन है। घर के सदस्यों के साथ थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। मगर दिन के आख़िर में आपका पार्टनर आपकी परेशानियों को सहलाएगा। नई योजनाएँ आकर्षक होंगी और अच्छी आमदनी का जरिया साबित होंगी। विपरीत स्थितियों से निपटने के लिए आपको अपने सोच में परिवर्तन लाने की जरूरत है।
धनु राशि (Sagittarius) ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे :
धनु राशि वाले आज सोच-समझकर व्यय करें। यात्रा संभव है। ऑफिस के सहकर्मी और बड़े अधिकारी आपके कार्य से संतुष्ट और खुश रहने के योग बन रहे हैं। आपकी रचनात्मकता को सराहा जाएगा। आप दूसरों को मुश्किल समस्याओं से बाहर निकले का रास्ता भी बताएंगे। बच्चों के साथ वक्त बिताकर आप कुछ सुकून भरे पल जी सकते हैं। आज किसी ऐसे व्यक्ति से मुलाकात होगी, जो आपको बिजनेस में काफी फायदा करा सकता है।
मकर राशि (Capricorn) भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी :
आज गृहोपयोगी चीजों में वृद्धि होगी। आप बहुत सक्रिय और ऊर्जावान महसूस करेंगे। आपको अपने बॉस या अपने सहकर्मियों के साथ दौरे पर जाने का अवसर प्राप्त होगा। अगर आज कुछ अधिक करने को नहीं है तो अपने घर के सामानों को दुरुस्त करके आप अपने को व्यस्त रख सकते हैं। मनोबल और कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। आज आप अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभाने की पूरी कोशिश करेंगे तो फायदा होगा।
कुंभ राशि (Aquarius) गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा :
आज स्वजनों और स्नेहीजनों के साथ मतभेद खड़े हों सकते है, परिणामस्वरूप घर में विरोध का वातावरण उपस्थित होगा। यदि कहीं बाहर जाने की प्रोजेक्ट है तो वह आख़िरी वक़्त पर टल सकती है। आप को पेशे या व्यवसाय सम्बन्धी एक रोमांचक अवसर की पेशकश की जा सकती है। आपको फील होगा कि आपका दांपत्य जीवन बहुत खूबसूरत है। रोजगार के अवसर तलाश रहे लोगों की इच्छा पूरी हो सकती है। आज स्वास्थ्य उत्तम रहेगा।
मीन राशि (Pisces) दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची :
आज आप ज्यादा खाने से बचें। स्वयं के प्रिय के साथ पर्याप्त वक्त बिताने की संभावना है। कुछ चिरस्थायी प्यार के क्षणों के कारण आप का वैवाहिक जीवन शानदार रहेगा। नए रिश्ते सुखद होंगें। आप परिवार वालों के साथ बाहर घूमने की योजना बना सकते हैं। अचानक नए स्रोतों से धन मिलेगा। भ्रांति खड़ी न हो इसका ध्यान रखिएगा। दूसरों पर अपने विचार और इच्छाएं थोपने से बचें। गाय को रोटी खिलाएं, आपकी सभी परेशानियां दूर होगी।
आपने Rashifal 18 June 2019 का सभी राशियों का rashifal पढ़ा। आप को Rashifal 18 June 2019 का यह rashifal कैसा लगा? कमेंट करके अपनी राय जरुर दें और हमारे द्वारा बताया गया यह राशिफल अपने मित्रों के साथ भी शेयर करें।
नोटः आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में Rashifal 18 June 2019 से कुछ भिन्नता हो सकती है। पूरी जानकारी के लिए किसी पंडित या ज्योतिषी से मिल सकते हैं।
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मेष राशि च, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ : मेष राशि वाले अपने काम के लिए दूसरों पर दबाव न डालें। दूसरे लोगों की इच्छाओं और दिलचस्पियों पर भी गौर करें, इससे आपको दिली खुशी हासिल होगी। विद्यार्थी अच्छा प्रदर्शन करेंगे। जोड़े अपने गुणवत्ता के क्षणों का आनंद लेंगे। आप बेकार के सामान पर अपने खर्च पर नियंत्रण कर पाएंगे। किसी का अपमान न करें। खुद पर संयम रखें। भागदौड़ ज्यादा रहेंगी। आज यात्रा करें तो सावधानीपूर्वक करें, नहीं तो परिस्थितियां कठिन रहेंगी आपके लिए। वृषभ राशि ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो ब बो : आज आप अकेलापन महसूस कर सकते हैं। लंबी यात्राएँ फलदायी साबित होंगी व अच्छे परिणाम देने वाली रहेंगी। किसी भी नकारात्मक भावना को अपने उपर हावी ना होने दें। सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ें। आपको एक नए घर का स्वामित्व मिल सकता है। ससुराल पक्ष से किसी प्रिय मेहमान के आगमन से खुश रहेंगे। चंद्रमा के प्रभाव से साझेदारी के काम समय पर निपट सकते हैं। लव पार्टनर से आपको आर्थिक सहयोग मिल सकता है। मिथुन राशि का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह : आज आपका सेहत को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। जीवनसाथी की मासूमियत आपके दिन को खास बना सकती है। कामयाबी की दृष्टि से आज का दिन बेहतरीन, इसलिए रोमांस में समय नष्ट न करें। आपके परिजन स्वयं के साथ आप व्यक्तियों को किसी स्थान ले जाएंगे। किसी भी दस्तावेज पर बिना पढ़े हस्ताक्षर ना करें। वैवाहिक जिंदगी बेहतर होगी। अगर किसी बिजनेस की शुरूआत करने की सोच रहें हैं तो आज से ही शुरू करें, सफलता कदम चूमेगी। कर्क राशि ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो : आज आप की यात्रा देशाटन की स्थिति सुखद व उत्साहवर्धक होगी। जीवनसाथी के खराब स्वास्थ्य के कारण आपका कामकाज प्रभावित हो सकता है। आज आप मित्रों के साथ एक बेहतरीन शाम गुज़ारने वाले हैं। माता-पिता को अनदेखा करना आपके भविष्य की संभावनाओं को खत्म कर सकता है। विवाह के प्रस्ताव रखने का शानदार समय है। जब तक आपकी योजनाएं क्रियान्वित न हों आप उसे गोपनीय रखें। उच्च रक्त चाप से परेशांनी हो सकती है। सिंह राशि मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे : आज किसी नए काम में हाथ डालेंगे तो जरूर सफल होंगे। नया काम शुरू करने जा रहे हैं उसमें भी लाभ होने का अच्छा संयोग बनने वाला है। आप साहसी और उत्साही होंगे। आप समय के भीतर अपना काम पूरा करेंगे, जिससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। हनुमानजी का ध्यान करें, लाभ होगा। महत्वपूर्ण लोगों के साथ बातचीत करते वक़्त अपने शब्दों को गौर से चुनें। प्रेम के मामलों में गंभीरता के साथ गोपनीयता भी रखें। व्यापार में अच्छा लाभ होने से मन प्रसन्न रहेगा। कन्या राशि ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो : आज आपकी किसी से मुलाकात हो सकती है। सैर-सपाटे पर जाने का कार्यक्रम बन सकता है, जो आपकी ऊर्जा और उत्साह को तरोताजा कर देगा। आप जल्दी में होंगे, जो आपके काम करने के तरीके को प्रतिबिंबित करेगा। आपका प्रदर्शन धीमा हो जाएगा। भाईयों के साथ पिकनिक पर जाने का प्लान बन सकता है। बड़ों के प्रति आपका व्यवहार अच्छा बना रहेगा। सामाजिक क्षेत्र में प्रतिष्ठा में इजाफा होगा। विदेश यात्रा के भी योग बन रहे हैं। तुला राशि रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते : आज आलस्य को त्यागकर कार्यों को समय पर करने से सफलता प्राप्त होगी। रुके हुए और सोचे हुए काम पूर्ण होने लगेंगे। बड़ों से आशीर्वाद लेने के साथ ही आप आत्मविश्वासी बनेंगे। आपकी कार्य क्षमता में वृद्धि होगी। नौकरी पेशा वालों को प्रमोशन मिल सकता है इसके अलावा सैलरी में भी बढ़ोतरी हो सकती है। आपके द्वारा किया कार्य समाज के लिए लाभकारी साबित होगा। कार्यक्षेत्र में तरक्की के योग भी हैं। संतान पक्ष भी मजबूत रहेगा। वृश्चिक राशि तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू : वृश्चिक राशि वाले लक्ष्यों को प्राप्त करने की कोशिश करेंगे। आपका प्रभाव कम होगा। सामाजिक एवं धार्मिक समारोह को बेहतरीन दिन है। घर के सदस्यों के साथ थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। मगर दिन के आख़िर में आपका पार्टनर आपकी परेशानियों को सहलाएगा। नई योजनाएँ आकर्षक होंगी और अच्छी आमदनी का जरिया साबित होंगी। विपरीत स्थितियों से निपटने के लिए आपको अपने सोच में परिवर्तन लाने की जरूरत है। धनु राशि ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे : धनु राशि वाले आज सोच-समझकर व्यय करें। यात्रा संभव है। ऑफिस के सहकर्मी और बड़े अधिकारी आपके कार्य से संतुष्ट और खुश रहने के योग बन रहे हैं। आपकी रचनात्मकता को सराहा जाएगा। आप दूसरों को मुश्किल समस्याओं से बाहर निकले का रास्ता भी बताएंगे। बच्चों के साथ वक्त बिताकर आप कुछ सुकून भरे पल जी सकते हैं। आज किसी ऐसे व्यक्ति से मुलाकात होगी, जो आपको बिजनेस में काफी फायदा करा सकता है। मकर राशि भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी : आज गृहोपयोगी चीजों में वृद्धि होगी। आप बहुत सक्रिय और ऊर्जावान महसूस करेंगे। आपको अपने बॉस या अपने सहकर्मियों के साथ दौरे पर जाने का अवसर प्राप्त होगा। अगर आज कुछ अधिक करने को नहीं है तो अपने घर के सामानों को दुरुस्त करके आप अपने को व्यस्त रख सकते हैं। मनोबल और कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। आज आप अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभाने की पूरी कोशिश करेंगे तो फायदा होगा। कुंभ राशि गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा : आज स्वजनों और स्नेहीजनों के साथ मतभेद खड़े हों सकते है, परिणामस्वरूप घर में विरोध का वातावरण उपस्थित होगा। यदि कहीं बाहर जाने की प्रोजेक्ट है तो वह आख़िरी वक़्त पर टल सकती है। आप को पेशे या व्यवसाय सम्बन्धी एक रोमांचक अवसर की पेशकश की जा सकती है। आपको फील होगा कि आपका दांपत्य जीवन बहुत खूबसूरत है। रोजगार के अवसर तलाश रहे लोगों की इच्छा पूरी हो सकती है। आज स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। मीन राशि दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची : आज आप ज्यादा खाने से बचें। स्वयं के प्रिय के साथ पर्याप्त वक्त बिताने की संभावना है। कुछ चिरस्थायी प्यार के क्षणों के कारण आप का वैवाहिक जीवन शानदार रहेगा। नए रिश्ते सुखद होंगें। आप परिवार वालों के साथ बाहर घूमने की योजना बना सकते हैं। अचानक नए स्रोतों से धन मिलेगा। भ्रांति खड़ी न हो इसका ध्यान रखिएगा। दूसरों पर अपने विचार और इच्छाएं थोपने से बचें। गाय को रोटी खिलाएं, आपकी सभी परेशानियां दूर होगी। आपने Rashifal अट्ठारह जूनe दो हज़ार उन्नीस का सभी राशियों का rashifal पढ़ा। आप को Rashifal अट्ठारह जूनe दो हज़ार उन्नीस का यह rashifal कैसा लगा? कमेंट करके अपनी राय जरुर दें और हमारे द्वारा बताया गया यह राशिफल अपने मित्रों के साथ भी शेयर करें। नोटः आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में Rashifal अट्ठारह जूनe दो हज़ार उन्नीस से कुछ भिन्नता हो सकती है। पूरी जानकारी के लिए किसी पंडित या ज्योतिषी से मिल सकते हैं।
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चयनित कार्टून पहले अन्य प्रकाशनों में प्रकाशित किए जा चुके हैं जैसे प्रिंट, ऑनलाइन या सोशल मीडिया पर और इन्हें उचित श्रेय भी मिला है।
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.
इंडियन एक्सप्रेस में,मीका अज़ीज़ ने विपक्षी गठबंधन को 'इन्फिनिटी वॉर' से तुलना करके हास्यपूर्ण व्यंग किया है । फिल्म में एक मेगा स्टार-कास्ट का दावा किया, जो एक आसान संतुलन अधिनियम नहीं था।
इंडियन एक्सप्रेस के लिए ही ,
ने सुझाव दिया है कि "ड्राइवर रहित विपक्ष कारपूल "हो सकता है की एक साथ मिलकर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का समाधान दे सके।
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चयनित कार्टून पहले अन्य प्रकाशनों में प्रकाशित किए जा चुके हैं जैसे प्रिंट, ऑनलाइन या सोशल मीडिया पर और इन्हें उचित श्रेय भी मिला है। हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. इंडियन एक्सप्रेस में,मीका अज़ीज़ ने विपक्षी गठबंधन को 'इन्फिनिटी वॉर' से तुलना करके हास्यपूर्ण व्यंग किया है । फिल्म में एक मेगा स्टार-कास्ट का दावा किया, जो एक आसान संतुलन अधिनियम नहीं था। इंडियन एक्सप्रेस के लिए ही , ने सुझाव दिया है कि "ड्राइवर रहित विपक्ष कारपूल "हो सकता है की एक साथ मिलकर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का समाधान दे सके।
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UPTET 2019: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा ( बुधवार, 8 जनवरी ) प्रदेश के 1986 केंद्रों पर कराई जाएगी। सुबह 10 से 12. 30 बजे तक पहली पाली प्राथमिक स्तरकी परीक्षा के लिए 1076336 जबकि 2. 30 से 5 बजे तक उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा के लिए 569174 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं। कुल 1645510 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे। पहली पाली के लिए 1986 व दूसरी के लिए 1063 केंद्र बनाए गए हैं। नकलविहीन एवं शुचितापूर्ण तरीके से परीक्षा कराने के लिए एसटीएफ और विजिलेंस की टीमें लगाई गई हैं। पूर्व में परीक्षा 22 दिसंबर को होनी थी लेकिन नागरिकता संशोधन कानून 2019 को लेकर मचे बवाल और इंटरनेट सेवाएं बाधित होने के कारण परीक्षा टालनी पड़ी थी। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय से सभी केंद्रों को 21 दिसंबर तक प्रश्नपत्र, उत्तर पत्रक (ओएमआर शीट) भेज दिया था।
सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि परीक्षा केंद्र पर केंद्र व्यवस्थापक, नामित पर्यवेक्षक, एवं स्टैटिक मजिस्ट्रेट को भी कैमरा युक्त मोबाइल फोन/स्मार्टफोन ले जाने की अनुमति नहीं है। ये लोग परीक्षा केंद्र पर ऐसे मोबाइल फोन ले जा सकते हैं जो सामान्य कीपैड वाला, कैमरा रहित फोन हो और स्मार्टफोन की श्रेणी में न आता हो।
परीक्षा केंद्र के गेट परीक्षा शुरू होने से 45 मिनट पहले खोले जाएंगे। परीक्षा कक्ष में अभ्यर्थियों को प्रवेश वेबसाइट से डाउनलोड प्रवेश पत्र में अंकित फोटोयुक्त आईडी एवं प्रशिक्षण प्रमाणपत्र के किसी भी सेमेस्टर के अंकपत्र की मूल प्रति या संबंधित प्रशिक्षण संस्था के रजिस्ट्रार या सक्षम अधिकारी द्वारा इंटरनेट से प्राप्त अंकपत्र की प्रमाणित प्रति देखकर ही दिया जाएगा।
अभ्यर्थियों को परीक्षा कक्ष के अंदर प्रवेश पत्र व काले बॉल प्वाइंट पेन के अलावा किसी भी प्रकार की पाठ्यसामग्री, कैलकुलेटर, डॉकुपेन, लिखित सामग्री, कागज के टुकड़े, मोबाइल फोन, पेजर या किसी अन्य प्रकार का इलेक्ट्रानिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं है।
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UPTET दो हज़ार उन्नीस: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा प्रदेश के एक हज़ार नौ सौ छियासी केंद्रों पर कराई जाएगी। सुबह दस से बारह. तीस बजे तक पहली पाली प्राथमिक स्तरकी परीक्षा के लिए दस लाख छिहत्तर हज़ार तीन सौ छत्तीस जबकि दो. तीस से पाँच बजे तक उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा के लिए पाँच लाख उनहत्तर हज़ार एक सौ चौहत्तर अभ्यर्थी पंजीकृत हैं। कुल सोलह लाख पैंतालीस हज़ार पाँच सौ दस अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे। पहली पाली के लिए एक हज़ार नौ सौ छियासी व दूसरी के लिए एक हज़ार तिरेसठ केंद्र बनाए गए हैं। नकलविहीन एवं शुचितापूर्ण तरीके से परीक्षा कराने के लिए एसटीएफ और विजिलेंस की टीमें लगाई गई हैं। पूर्व में परीक्षा बाईस दिसंबर को होनी थी लेकिन नागरिकता संशोधन कानून दो हज़ार उन्नीस को लेकर मचे बवाल और इंटरनेट सेवाएं बाधित होने के कारण परीक्षा टालनी पड़ी थी। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय से सभी केंद्रों को इक्कीस दिसंबर तक प्रश्नपत्र, उत्तर पत्रक भेज दिया था। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि परीक्षा केंद्र पर केंद्र व्यवस्थापक, नामित पर्यवेक्षक, एवं स्टैटिक मजिस्ट्रेट को भी कैमरा युक्त मोबाइल फोन/स्मार्टफोन ले जाने की अनुमति नहीं है। ये लोग परीक्षा केंद्र पर ऐसे मोबाइल फोन ले जा सकते हैं जो सामान्य कीपैड वाला, कैमरा रहित फोन हो और स्मार्टफोन की श्रेणी में न आता हो। परीक्षा केंद्र के गेट परीक्षा शुरू होने से पैंतालीस मिनट पहले खोले जाएंगे। परीक्षा कक्ष में अभ्यर्थियों को प्रवेश वेबसाइट से डाउनलोड प्रवेश पत्र में अंकित फोटोयुक्त आईडी एवं प्रशिक्षण प्रमाणपत्र के किसी भी सेमेस्टर के अंकपत्र की मूल प्रति या संबंधित प्रशिक्षण संस्था के रजिस्ट्रार या सक्षम अधिकारी द्वारा इंटरनेट से प्राप्त अंकपत्र की प्रमाणित प्रति देखकर ही दिया जाएगा। अभ्यर्थियों को परीक्षा कक्ष के अंदर प्रवेश पत्र व काले बॉल प्वाइंट पेन के अलावा किसी भी प्रकार की पाठ्यसामग्री, कैलकुलेटर, डॉकुपेन, लिखित सामग्री, कागज के टुकड़े, मोबाइल फोन, पेजर या किसी अन्य प्रकार का इलेक्ट्रानिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं है।
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'मुझे लगता है महेंद्र सिंह धौनी का समय पूरा हो गया, IPL से बात नहीं बनेगी'
Harsha Bhogle feels is MS Dhoni India ambitions might be over कमेंटेटर हर्षा भोगलो का भी मानना है कि धौनी अब और इंटरनेशनल क्रिकेट नहीं खेलेंगे।
नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय क्रिकेट इतिहास के महानतम कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धौनी का करियर अब आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुका है। इंग्लैंड और वेल्स में खेले गए आईसीसी विश्व कप के बाद से उन्होंने भारत की तरफ से एक भी मैच नहीं खेला है। कयास लगाए जा रहे हैं कि धौनी ने अपना आखिरी मैच खेल लिया है और अब वो भारत की तरह से मैदान पर नहीं उतरेंगे। कमेंटेटर हर्षा भोगलो का भी मानना है कि धौनी अब और इंटरनेशनल क्रिकेट नहीं खेलेंगे।
कोरोना वायरस की वजह से इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 13वें सीजन पर आयोजन पर खतरे के बादल मंडरा रहे है। इस टूर्नामेंट में धौनी के वापसी की उम्मीद की जा रही थी। कहा जा रहा था कि शायद आईपीएल में प्रदर्शन के दम पर धौनी को टीम इंडिया में जगह मिले और वो ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी20 विश्व कप में खेले।
कमेंटेटर हर्षा भोगले ने अपनी राय देते हुए कहा कि अब शायद धौनी का वक्त खत्म हो चुका है। आईपीएल के स्थगित होने के साथ ही महेंद्र सिंह धोनी का दोबारा भारत के लिए खेलने का सपना खत्म हो गया।
29 मार्च से खेला जाने वाला आईपीएल का 13वां सीजन कोरोना वायरस के लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए स्थगित कर दिया गया। इसे 15 अप्रैल तक के लिए टाल दिया गया है। फिलहाल पूरे भारत में सरकार ने 21 दिन का लॉकडाउन घोषित किया है। इसकी वजह से टूर्नामेंट कराया जाना मुश्किल लग रहा है।
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'मुझे लगता है महेंद्र सिंह धौनी का समय पूरा हो गया, IPL से बात नहीं बनेगी' Harsha Bhogle feels is MS Dhoni India ambitions might be over कमेंटेटर हर्षा भोगलो का भी मानना है कि धौनी अब और इंटरनेशनल क्रिकेट नहीं खेलेंगे। नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय क्रिकेट इतिहास के महानतम कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धौनी का करियर अब आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुका है। इंग्लैंड और वेल्स में खेले गए आईसीसी विश्व कप के बाद से उन्होंने भारत की तरफ से एक भी मैच नहीं खेला है। कयास लगाए जा रहे हैं कि धौनी ने अपना आखिरी मैच खेल लिया है और अब वो भारत की तरह से मैदान पर नहीं उतरेंगे। कमेंटेटर हर्षा भोगलो का भी मानना है कि धौनी अब और इंटरनेशनल क्रिकेट नहीं खेलेंगे। कोरोना वायरस की वजह से इंडियन प्रीमियर लीग के तेरहवें सीजन पर आयोजन पर खतरे के बादल मंडरा रहे है। इस टूर्नामेंट में धौनी के वापसी की उम्मीद की जा रही थी। कहा जा रहा था कि शायद आईपीएल में प्रदर्शन के दम पर धौनी को टीम इंडिया में जगह मिले और वो ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टीबीस विश्व कप में खेले। कमेंटेटर हर्षा भोगले ने अपनी राय देते हुए कहा कि अब शायद धौनी का वक्त खत्म हो चुका है। आईपीएल के स्थगित होने के साथ ही महेंद्र सिंह धोनी का दोबारा भारत के लिए खेलने का सपना खत्म हो गया। उनतीस मार्च से खेला जाने वाला आईपीएल का तेरहवां सीजन कोरोना वायरस के लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए स्थगित कर दिया गया। इसे पंद्रह अप्रैल तक के लिए टाल दिया गया है। फिलहाल पूरे भारत में सरकार ने इक्कीस दिन का लॉकडाउन घोषित किया है। इसकी वजह से टूर्नामेंट कराया जाना मुश्किल लग रहा है।
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उन्होंने कहा कि यह फैसला स्थिरता और विकास के लिए जरूरी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कमजोर करता है। मिश्र की एक अदालत ने यह कहा था कि तीनों ने 'झूठी' खबरों का प्रसारण किया और इससे मिस्र को नुकसान पहुंचा। इसके बाद इस मुद्दे पर बढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय आक्रोश पर भी अमेरिका ने बल दिया है। ज्ञात हो कि मिस्त्र की एक अदालत ने शनिवार को समाचार नेटवर्क अल जजीरा के तीन पत्रकारों को तीन साल की सजा सुनाई। इन सभी पर झूठी और भ्रामक खबरें फैलाने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप है। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब दुनिया भर में इन पत्रकारों की रिहाई को लेकर अभियान छिड़ा हुआ है। लंबी सुनवाई के बाद कनाडा के मुहम्मद फाहमी, ऑस्ट्रेलिया के पीटर ग्रेस्टे और मिस्त्र के बाहेर मुहम्मद को सजा सुनाई गई। इनके अतिरिक्त अल जजीरा में काम करने वाले तीन सह अभियुक्तों को भी यही सजा सुनाई गई। तीनों पत्रकारों को पिछले साल मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ मिलकर साजिश रचने, झूठी खबरें फैलाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने समेत कई मामलों में दोषी ठहराया गया था। हालांकि इन तीनों ने यह कहते हुए खुद को निर्दोष बताया कि वे पत्रकार की हैसियत से इन खबरों का प्रसारण कर रहे थे। शुरुआती सुनवाई में इन सभी को 10 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। इस साल जनवरी में इस फैसले को चुनौती दी गई और फरवरी में उन्हें पुनः सुनवाई होने तक मुक्त कर दिया गया था।
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उन्होंने कहा कि यह फैसला स्थिरता और विकास के लिए जरूरी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कमजोर करता है। मिश्र की एक अदालत ने यह कहा था कि तीनों ने 'झूठी' खबरों का प्रसारण किया और इससे मिस्र को नुकसान पहुंचा। इसके बाद इस मुद्दे पर बढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय आक्रोश पर भी अमेरिका ने बल दिया है। ज्ञात हो कि मिस्त्र की एक अदालत ने शनिवार को समाचार नेटवर्क अल जजीरा के तीन पत्रकारों को तीन साल की सजा सुनाई। इन सभी पर झूठी और भ्रामक खबरें फैलाने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप है। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब दुनिया भर में इन पत्रकारों की रिहाई को लेकर अभियान छिड़ा हुआ है। लंबी सुनवाई के बाद कनाडा के मुहम्मद फाहमी, ऑस्ट्रेलिया के पीटर ग्रेस्टे और मिस्त्र के बाहेर मुहम्मद को सजा सुनाई गई। इनके अतिरिक्त अल जजीरा में काम करने वाले तीन सह अभियुक्तों को भी यही सजा सुनाई गई। तीनों पत्रकारों को पिछले साल मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ मिलकर साजिश रचने, झूठी खबरें फैलाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने समेत कई मामलों में दोषी ठहराया गया था। हालांकि इन तीनों ने यह कहते हुए खुद को निर्दोष बताया कि वे पत्रकार की हैसियत से इन खबरों का प्रसारण कर रहे थे। शुरुआती सुनवाई में इन सभी को दस साल जेल की सजा सुनाई गई थी। इस साल जनवरी में इस फैसले को चुनौती दी गई और फरवरी में उन्हें पुनः सुनवाई होने तक मुक्त कर दिया गया था।
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ड्यूज के गोल्याका जिले में आए 5,9 तीव्रता के भूकंप को इस्तांबुल, बोलू, साकार्या, अंकारा, कोकेली, कुताह्या, बिलेसिक, बर्सा और इज़मिर तक एक विस्तृत क्षेत्र में महसूस किया गया था। ड्यूज़ भूकंप के बाद, यह सवाल मन में आया कि क्या भूकंप से इस्तांबुल में बड़ा भूकंप आएगा। ड्यूज में आए भूकंप के बाद विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है।
04.08 बजे, 5,9 तीव्रता का भूकंप, जिसका उपरिकेंद्र ड्यूज के गोल्याका जिले में था, दहशत का कारण बना। भूकंप के बाद भूकंप विशेषज्ञों ने एक के बाद एक बयान दिए।
क्या इससे बड़ा भूकंप आता है?
आईटीयू संकाय सदस्य प्रो. डॉ। ज़ियादीन काकिर ने कहा कि ड्यूज़ में भूकंप एक अपेक्षित बड़े इस्तांबुल भूकंप को ट्रिगर नहीं करेगा और कहा, "अगर इसने इस्तांबुल भूकंप को ट्रिगर किया होता, तो भूकंप के तुरंत बाद इसका प्रभाव पड़ता। भूकंप का स्थान बहुत दूर है," उन्होंने कहा।
Çakır ने भूकंप के बारे में अपनी व्याख्या इस प्रकार जारी रखीः काला सागर से बाहर निकलने पर एक अटूट टुकड़ा था। सबसे अधिक संभावना है कि शेयर का यह टुकड़ा टूट गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि अभी तक किसी के मरने की सूचना नहीं है। भूकंप के लिहाज से यह इलाका बेहद खराब जगह है। यह एक गहरा भरण क्षेत्र, एक प्राकृतिक भराव क्षेत्र, एक समतल क्षेत्र है।
गोल्याका और आसपास के गांवों में विनाश की उच्च संभावना है। आफ्टरशॉक्स होंगे, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इससे बड़ा भूकंप आएगा। मैं अपने नागरिकों को क्षतिग्रस्त इमारतों में नहीं रहने की सलाह देता हूं। आफ्टरशॉक्स इमारतों के गिरने का कारण बन सकते हैं।
मुझे लगता है कि नुकसान होगा क्योंकि ड्यूज और आसपास के गांवों में भूमि वृद्धि हुई है। मुझे उम्मीद है कि कोई हताहत नहीं हुआ है। हम भवन संरचनाओं और क्षेत्र की जमीन दोनों को जानते हैं। पथरीली मंजिलों पर बनी इमारतों को कुछ नहीं होता है। चूंकि प्राकृतिक भराव, अर्थात् बजरी, और नदी के किनारे रेत से ढके हुए हैं, इस तरह से भरे हुए हैं, यहां 6-तीव्रता का भूकंप 7 की तरह महसूस होता है। इसलिए यह अधिक नुकसान करता है।
"कम से कम 1 सप्ताह 10 दिनों तक चल सकता है"
येल्डिज़ टेक्निकल यूनिवर्सिटी के फैकल्टी मेंबर प्रो. ने कहा कि ड्यूज में आए 5,9 तीव्रता के भूकंप के बाद कई आफ्टरशॉक्स आएंगे। डॉ। सुकरू एर्सॉय ने निम्नलिखित कथनों का प्रयोग किया हैः
इसमें कम से कम 1 सप्ताह से 10 दिन का समय लग सकता है। आपको इसके लिए तैयार रहना होगा। भावना और विनाश एक ही चीज नहीं है। अभी तक कोई निगेटिव खबर नहीं है। अगर उसके बाद ऐसा नहीं होता है, तो हो सकता है कि हम इससे ऐसे ही निकल गए हों। इसका मतलब यह नहीं है कि हम भूकंप की वास्तविकता से छुटकारा पा सकते हैं। यह अपेक्षित इस्तांबुल भूकंप अग्रदूत नहीं है। हम मारमारा में 7 तीव्रता के भूकंप की उम्मीद कर रहे हैं। आगे पूर्व।
"पहली बार मैंने देखा है"
भूकंप के संबंध में भूवैज्ञानिक अभियंता सेरिफ बारिस ने निम्नलिखित बयान दियाः यह एक आश्चर्य था क्योंकि यह एक ऐसी जगह थी जिसकी हमने कभी उम्मीद नहीं की थी। 5.9-6 की तीव्रता काफी परेशान करने वाली है। मुझे नहीं लगता कि शहरों और कस्बों में कोई नुकसान होगा, गांवों में नुकसान हो सकता है। वहां भूकंप में फॉल्ट लाइन्स ने टेंशन डिस्चार्ज किया होगा। यह वास्तव में पहली बार है जब मैंने दो बड़े भूकंपों के बाद इतना मध्यम आकार का भूकंप देखा है। तुर्की अल्पाइन-भूकंप बेल्ट में है, इसलिए हमें हमेशा कार्य करना होगा जैसे कि भूकंप आएगा और हमें तैयार रहना होगा। यह शायद उथले भूकंपों से था।
"हमें इस क्षेत्र में बड़े भूकंप की उम्मीद नहीं है"
İTÜ फैकल्टी सदस्य ओकान तुयसुज ने भूकंप के बारे में इस प्रकार बात कीः हमने 17 अगस्त और 12 नवंबर को दो बड़े भूकंपों का अनुभव किया। विशेष रूप से 17 अगस्त को, यह गोल्याका के आसपास के क्षेत्र में आया, जिसे हम कराडेरे फॉल्ट कहते हैं, और वहां से यह मर्मारा तक पहुंच गया। एक उम्मीद थी कि पूर्व और पश्चिम में दो भूकंप होंगे।
5.9 भूकंप आज एक भूकंप है जो 17 अगस्त को टूटने वाली गलती की नोक पर हुआ था। यह काफी उथला भूकंप है। बेशक, उथला होना वह कारक है जो भूकंप को सतह पर तीव्रता से महसूस करता है। 6 विनाशकारी भूकंप है। मैदान ठीक नहीं होने से क्षेत्र में नुकसान की आशंका जताई जा रही है। सौभाग्य से, कोई जीवन या महत्वपूर्ण क्षति का उल्लेख नहीं किया गया है।
एक भूकंप जिसे आश्चर्य माना जा सकता है। यह भविष्यवाणी की गई थी कि इतनी तीव्रता का भूकंप नहीं आएगा। 17 अगस्त को आए भूकंप का सबसे पूर्वी हिस्सा टूट गया था।
इसे एक ट्रिगर भूकंप के रूप में माना जा सकता है। हमें इस क्षेत्र में बड़े भूकंप की उम्मीद नहीं है। 6 बड़े भूकंप। अगर आपको याद हो, जब ड्युज भूकंप आया था, तब इस्तांबुल बहुत हिल गया था। उथलापन, खराब जमीन और भूकंप की तीव्रता को देखते हुए इसके कई प्रांतों में महसूस किए जाने की संभावना है।
"हम इन जमीनों पर भवन बना रहे हैं"
मरमारा विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य प्रो. डॉ। केमलेटिन साहिन ने भूकंप के संबंध में निम्नलिखित कथनों का प्रयोग कियाः 5.9 तीव्रता का भूकंप कोई बड़ा भूकंप नहीं है। यह इमारतों को नष्ट नहीं करता है। यदि हमारी इमारतें 5.9 में ढह रही हैं, तो हमें यही पूछना चाहिए। AFAD ने पिछले कुछ दिनों में एक अभ्यास किया था। ये बहुत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में चोट लगने की घटनाएं आमतौर पर गिरने वाली वस्तुओं, भागने, ऊंचाई से कूदने जैसे मामलों में होती हैं।
जिस क्षेत्र को हम ड्यूज़ मैदान कहते हैं, उसमें जलोढ़ मिट्टी होती है। इन जमीनों पर हम बिल्डिंग भी बनाते हैं। हम नर्म धरती पर बैठे हैं। हमें इस भूगोल में भूकंपों के साथ जीने की आदत डालनी होगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि ठोस भवनों का निर्माण करने के लिए सावधान रहना चाहिए। अन्यथा, इस परिमाण के भूकंपों में कोई भवन विनाश नहीं होगा।
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ड्यूज के गोल्याका जिले में आए पाँच,नौ तीव्रता के भूकंप को इस्तांबुल, बोलू, साकार्या, अंकारा, कोकेली, कुताह्या, बिलेसिक, बर्सा और इज़मिर तक एक विस्तृत क्षेत्र में महसूस किया गया था। ड्यूज़ भूकंप के बाद, यह सवाल मन में आया कि क्या भूकंप से इस्तांबुल में बड़ा भूकंप आएगा। ड्यूज में आए भूकंप के बाद विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है। चार.आठ बजे, पाँच,नौ तीव्रता का भूकंप, जिसका उपरिकेंद्र ड्यूज के गोल्याका जिले में था, दहशत का कारण बना। भूकंप के बाद भूकंप विशेषज्ञों ने एक के बाद एक बयान दिए। क्या इससे बड़ा भूकंप आता है? आईटीयू संकाय सदस्य प्रो. डॉ। ज़ियादीन काकिर ने कहा कि ड्यूज़ में भूकंप एक अपेक्षित बड़े इस्तांबुल भूकंप को ट्रिगर नहीं करेगा और कहा, "अगर इसने इस्तांबुल भूकंप को ट्रिगर किया होता, तो भूकंप के तुरंत बाद इसका प्रभाव पड़ता। भूकंप का स्थान बहुत दूर है," उन्होंने कहा। Çakır ने भूकंप के बारे में अपनी व्याख्या इस प्रकार जारी रखीः काला सागर से बाहर निकलने पर एक अटूट टुकड़ा था। सबसे अधिक संभावना है कि शेयर का यह टुकड़ा टूट गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि अभी तक किसी के मरने की सूचना नहीं है। भूकंप के लिहाज से यह इलाका बेहद खराब जगह है। यह एक गहरा भरण क्षेत्र, एक प्राकृतिक भराव क्षेत्र, एक समतल क्षेत्र है। गोल्याका और आसपास के गांवों में विनाश की उच्च संभावना है। आफ्टरशॉक्स होंगे, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इससे बड़ा भूकंप आएगा। मैं अपने नागरिकों को क्षतिग्रस्त इमारतों में नहीं रहने की सलाह देता हूं। आफ्टरशॉक्स इमारतों के गिरने का कारण बन सकते हैं। मुझे लगता है कि नुकसान होगा क्योंकि ड्यूज और आसपास के गांवों में भूमि वृद्धि हुई है। मुझे उम्मीद है कि कोई हताहत नहीं हुआ है। हम भवन संरचनाओं और क्षेत्र की जमीन दोनों को जानते हैं। पथरीली मंजिलों पर बनी इमारतों को कुछ नहीं होता है। चूंकि प्राकृतिक भराव, अर्थात् बजरी, और नदी के किनारे रेत से ढके हुए हैं, इस तरह से भरे हुए हैं, यहां छः-तीव्रता का भूकंप सात की तरह महसूस होता है। इसलिए यह अधिक नुकसान करता है। "कम से कम एक सप्ताह दस दिनों तक चल सकता है" येल्डिज़ टेक्निकल यूनिवर्सिटी के फैकल्टी मेंबर प्रो. ने कहा कि ड्यूज में आए पाँच,नौ तीव्रता के भूकंप के बाद कई आफ्टरशॉक्स आएंगे। डॉ। सुकरू एर्सॉय ने निम्नलिखित कथनों का प्रयोग किया हैः इसमें कम से कम एक सप्ताह से दस दिन का समय लग सकता है। आपको इसके लिए तैयार रहना होगा। भावना और विनाश एक ही चीज नहीं है। अभी तक कोई निगेटिव खबर नहीं है। अगर उसके बाद ऐसा नहीं होता है, तो हो सकता है कि हम इससे ऐसे ही निकल गए हों। इसका मतलब यह नहीं है कि हम भूकंप की वास्तविकता से छुटकारा पा सकते हैं। यह अपेक्षित इस्तांबुल भूकंप अग्रदूत नहीं है। हम मारमारा में सात तीव्रता के भूकंप की उम्मीद कर रहे हैं। आगे पूर्व। "पहली बार मैंने देखा है" भूकंप के संबंध में भूवैज्ञानिक अभियंता सेरिफ बारिस ने निम्नलिखित बयान दियाः यह एक आश्चर्य था क्योंकि यह एक ऐसी जगह थी जिसकी हमने कभी उम्मीद नहीं की थी। पाँच.नौ-छः की तीव्रता काफी परेशान करने वाली है। मुझे नहीं लगता कि शहरों और कस्बों में कोई नुकसान होगा, गांवों में नुकसान हो सकता है। वहां भूकंप में फॉल्ट लाइन्स ने टेंशन डिस्चार्ज किया होगा। यह वास्तव में पहली बार है जब मैंने दो बड़े भूकंपों के बाद इतना मध्यम आकार का भूकंप देखा है। तुर्की अल्पाइन-भूकंप बेल्ट में है, इसलिए हमें हमेशा कार्य करना होगा जैसे कि भूकंप आएगा और हमें तैयार रहना होगा। यह शायद उथले भूकंपों से था। "हमें इस क्षेत्र में बड़े भूकंप की उम्मीद नहीं है" İTÜ फैकल्टी सदस्य ओकान तुयसुज ने भूकंप के बारे में इस प्रकार बात कीः हमने सत्रह अगस्त और बारह नवंबर को दो बड़े भूकंपों का अनुभव किया। विशेष रूप से सत्रह अगस्त को, यह गोल्याका के आसपास के क्षेत्र में आया, जिसे हम कराडेरे फॉल्ट कहते हैं, और वहां से यह मर्मारा तक पहुंच गया। एक उम्मीद थी कि पूर्व और पश्चिम में दो भूकंप होंगे। पाँच.नौ भूकंप आज एक भूकंप है जो सत्रह अगस्त को टूटने वाली गलती की नोक पर हुआ था। यह काफी उथला भूकंप है। बेशक, उथला होना वह कारक है जो भूकंप को सतह पर तीव्रता से महसूस करता है। छः विनाशकारी भूकंप है। मैदान ठीक नहीं होने से क्षेत्र में नुकसान की आशंका जताई जा रही है। सौभाग्य से, कोई जीवन या महत्वपूर्ण क्षति का उल्लेख नहीं किया गया है। एक भूकंप जिसे आश्चर्य माना जा सकता है। यह भविष्यवाणी की गई थी कि इतनी तीव्रता का भूकंप नहीं आएगा। सत्रह अगस्त को आए भूकंप का सबसे पूर्वी हिस्सा टूट गया था। इसे एक ट्रिगर भूकंप के रूप में माना जा सकता है। हमें इस क्षेत्र में बड़े भूकंप की उम्मीद नहीं है। छः बड़े भूकंप। अगर आपको याद हो, जब ड्युज भूकंप आया था, तब इस्तांबुल बहुत हिल गया था। उथलापन, खराब जमीन और भूकंप की तीव्रता को देखते हुए इसके कई प्रांतों में महसूस किए जाने की संभावना है। "हम इन जमीनों पर भवन बना रहे हैं" मरमारा विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य प्रो. डॉ। केमलेटिन साहिन ने भूकंप के संबंध में निम्नलिखित कथनों का प्रयोग कियाः पाँच.नौ तीव्रता का भूकंप कोई बड़ा भूकंप नहीं है। यह इमारतों को नष्ट नहीं करता है। यदि हमारी इमारतें पाँच.नौ में ढह रही हैं, तो हमें यही पूछना चाहिए। AFAD ने पिछले कुछ दिनों में एक अभ्यास किया था। ये बहुत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में चोट लगने की घटनाएं आमतौर पर गिरने वाली वस्तुओं, भागने, ऊंचाई से कूदने जैसे मामलों में होती हैं। जिस क्षेत्र को हम ड्यूज़ मैदान कहते हैं, उसमें जलोढ़ मिट्टी होती है। इन जमीनों पर हम बिल्डिंग भी बनाते हैं। हम नर्म धरती पर बैठे हैं। हमें इस भूगोल में भूकंपों के साथ जीने की आदत डालनी होगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि ठोस भवनों का निर्माण करने के लिए सावधान रहना चाहिए। अन्यथा, इस परिमाण के भूकंपों में कोई भवन विनाश नहीं होगा।
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मुंबई। पंजाबी सिंगर नेहा कक्कड़ बीते दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। नेहा इन दिनों इंडियन आइडल के सीजन 11 में बतौर जज नजर आ रहीं है। सिंगर अपनी शादी को लेकर भी खूब सुर्खियों में हैं। खबर आई थी की नेहा जल्द आदित्य नारायण संग शादी करने वाली हैं लेकिन ये सब एक मजाक के तौर पर शुरू हुआ था जिसे लोगों ने गंभीरता से ले लिया। नेहा और आदित्य की शादी तो नहीं हुई लेकिन नेहा का नेक काम सबके सामने आ गया है। सोशल मीडिया पर नेहा का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें नेहा अपनी टीम के साथ एक रेस्तरां से बाहर निकलती नजर आ रही है। बाहर आते ही नेहा के पास दो गरीब बच्चें पैसे मांगने आते है। नेहा झट से अपना पर्स खोलकर पहले एक बच्चे को 2 हजार का नोट देती है और कहती हैं ये दोनों के लिए हैं। जिसके बाद दूसरा बच्चा भी मांगता हैं नेहा फिर उसे भी 2 हजार का नोट निकालकर दे देती हैं। नेहा के इस नेक काम की हर कोई तारीफ कर रहा है। सोशल मीडिया पर यूजर्स जमकर नेहा की तारीफ कर रहे हैं। नेहा को कोई दो हजार के नोट बांटता देख हर कोई हैरान हो रहा है, तो कोई कह रहा है कि वो जमीन से जुड़ी हुई है। कोई कह रहा है कि उनका दिल कितना बड़ा है।
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मुंबई। पंजाबी सिंगर नेहा कक्कड़ बीते दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। नेहा इन दिनों इंडियन आइडल के सीजन ग्यारह में बतौर जज नजर आ रहीं है। सिंगर अपनी शादी को लेकर भी खूब सुर्खियों में हैं। खबर आई थी की नेहा जल्द आदित्य नारायण संग शादी करने वाली हैं लेकिन ये सब एक मजाक के तौर पर शुरू हुआ था जिसे लोगों ने गंभीरता से ले लिया। नेहा और आदित्य की शादी तो नहीं हुई लेकिन नेहा का नेक काम सबके सामने आ गया है। सोशल मीडिया पर नेहा का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें नेहा अपनी टीम के साथ एक रेस्तरां से बाहर निकलती नजर आ रही है। बाहर आते ही नेहा के पास दो गरीब बच्चें पैसे मांगने आते है। नेहा झट से अपना पर्स खोलकर पहले एक बच्चे को दो हजार का नोट देती है और कहती हैं ये दोनों के लिए हैं। जिसके बाद दूसरा बच्चा भी मांगता हैं नेहा फिर उसे भी दो हजार का नोट निकालकर दे देती हैं। नेहा के इस नेक काम की हर कोई तारीफ कर रहा है। सोशल मीडिया पर यूजर्स जमकर नेहा की तारीफ कर रहे हैं। नेहा को कोई दो हजार के नोट बांटता देख हर कोई हैरान हो रहा है, तो कोई कह रहा है कि वो जमीन से जुड़ी हुई है। कोई कह रहा है कि उनका दिल कितना बड़ा है।
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अपनी अदाओं से कहर बरपाने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्मवी कपूर एक बार फिर सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। जाह्मवी के लेटेस्ट फोटो शूट ने फैंस के दिलों में आग लगा दी है। ब्लैक ड्रेस में एक साथ कई तस्वीरें शेयर कर जाह्मवी तो जैसे सोशल मीडिया पर सेंसेशन बन गई हैं।
फोटो अपलोड करते ही यह सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। पांच घंटों के अंदर ही जाह्मवी की तस्वीर को छह लाख से भी ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं। एक यूजर ने लिखा कि यू आर जस्ट गॉर्जियस। वहीं कोई उन्हें बोल्ड एंड ब्यूटिफुल कह रहा है, तो कोई खूबसूरती की तारीफ कर रहा है।
इन तस्वीरों में ब्लैक शिमरी ड्रेस में जाह्नवी बेहद हॉट पोज दे रही हैं। उन्होंने बाल भी खोल रखे हैं। ब्लैक ड्रेस के साथ पिंक लिप्स्टिक में जाह्नवी कहर ढा रही हैं।
फैंस के लिए उनकी तस्वीरों से नजरें हटाना मुश्किल हो गया है। बता दें कि सोशल मीडिया पर जाह्नवी की तगड़ी फैन फॉलोइंग है। इंस्टाग्राम पर उनके 14. 3 मिलियन फॉलोवर्स हैं।
धड़क फिल्म से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत करने वाली जाह्नवी आने वाले समय में गुड लक जैरी और मिस्टर एंड मिसेज माही में भी नजर आने वाली हैं। फैंस को उन्हें पर्दे पर देखने का बेसब्री से इंतजार है।
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अपनी अदाओं से कहर बरपाने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्मवी कपूर एक बार फिर सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। जाह्मवी के लेटेस्ट फोटो शूट ने फैंस के दिलों में आग लगा दी है। ब्लैक ड्रेस में एक साथ कई तस्वीरें शेयर कर जाह्मवी तो जैसे सोशल मीडिया पर सेंसेशन बन गई हैं। फोटो अपलोड करते ही यह सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। पांच घंटों के अंदर ही जाह्मवी की तस्वीर को छह लाख से भी ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं। एक यूजर ने लिखा कि यू आर जस्ट गॉर्जियस। वहीं कोई उन्हें बोल्ड एंड ब्यूटिफुल कह रहा है, तो कोई खूबसूरती की तारीफ कर रहा है। इन तस्वीरों में ब्लैक शिमरी ड्रेस में जाह्नवी बेहद हॉट पोज दे रही हैं। उन्होंने बाल भी खोल रखे हैं। ब्लैक ड्रेस के साथ पिंक लिप्स्टिक में जाह्नवी कहर ढा रही हैं। फैंस के लिए उनकी तस्वीरों से नजरें हटाना मुश्किल हो गया है। बता दें कि सोशल मीडिया पर जाह्नवी की तगड़ी फैन फॉलोइंग है। इंस्टाग्राम पर उनके चौदह. तीन मिलियन फॉलोवर्स हैं। धड़क फिल्म से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत करने वाली जाह्नवी आने वाले समय में गुड लक जैरी और मिस्टर एंड मिसेज माही में भी नजर आने वाली हैं। फैंस को उन्हें पर्दे पर देखने का बेसब्री से इंतजार है।
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डंकी फिल्म का नाम है डंकी ।
फिल्म के कलाकार हैं शाहरुख खान, विकी कौशल, तापसी पन्नू, बमन ईरानी,
डंकी फिल्म के निर्देशक हैं राजकुमार हिरानी ।
निर्माता हैं गौरी खान, राजकुमार हिरानी और ज्योति देशपांडे ।
लेखक हैं अभिजात जोशी, कनिका ढिल्लो व राजकुमार हिरानी ।
रिलीज हुई है 21 दिसंबर 2023 को ।
मेरे हिसाब से फिल्म को अंक हैं 3.6 ।
शाहरुख खान और अन्य दमदार स्टार कास्ट की फिल्म डंकी का डंका उतनी जोर से नहीं बज सका जितनी उन्होंने उम्मीद की थी या पठान जवान का बजा था । मुझे लगा कि राजकुमार हिरानी की यह अब तक की सबसे कमजोर फिल्म है । शाहरुख खान की फिल्म डंकी सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है और राजकुमार हिरानी के निर्देशन में उन्होंने पहली बार काम किया है । राजकुमार हिरानी अभी तक खास तरह की पिक्चरें बनाने के लिए जाने जाते रहे हैं जो कि अपनी फिल्मों के माध्यम से भावनाओं के उतार चढ़ाव के साथ साथ सामाजिक संदेश भी देते आये हैं । उनके द्वारा बनायीं गई फिल्मों में मुन्ना भाई एमबीबीएस, पी के और 3 इडियट्स जैसी फ़िल्में है और अब वह डंकी फिल्म लेकर आए हैं ।
डंकी का मतलब आम बोलचाल में जिसे डनकी मारना कहा जाता है, इसका अर्थ है किसी अन्य देश में अवैध तरीके से प्रवेश कर लेना और अवैध तरीके से किसी भी देश में प्रवेश पाने के लिए जिस रास्ते का लोग इस्तेमाल करते हैं उसे डंकी रूट कहा जाता है । दुनिया में ऐसे कई देश हैं, जहां डंकी रूट मशहूर है, डंकी रूट उन लोगों द्वारा बनाया जाता है जिन्हें उस देश का वीजा नहीं मिलता है । भारतीय सिनेमा को मुन्ना भाई एमबीबीएस, लगे रहो मुन्ना भाई, 3 ईडियट्स और पीके जैसी सफल, मनोरंजक और सार्थक संदेश देने वाली फिल्में बनाने वाले राजकुमार हिरानी ने इस बार अधूरी इच्छाओं, संसाधनों और अपने सपनों को एक ऊँची और नई उड़ान देने वाले अलग से विषय पर यह फिल्म डंकी बनाई है । डंकी की कहानी इस तरह से है, फिल्म की शुरुआत में हिरोइन मनु यानि कि तापसी पन्नू के लंदन के एक अस्पताल से भागने से होती है । वह अपने वकील से भारत का वीजा न मिल पाने की स्थिति में शाहरुख खान यानी कि हार्डी का नंबर निकालने को कहती है । वह अपने देश में इसलिए जाना वापस जाना चाहती है क्योंकि उसे ब्रेन ट्यूमर हुआ है और उसके पास जिन्दगी के कुछ ही दिन शेष बचे हैं, जिसे वह अपनों के साथ जीना चाहती है, कहानी पंजाब से है, 25 साल बाद मनु अपने प्रेमी हार्डी को फोन करके दुबई आने को कहती है, मनु अपने दोस्तों बग्गू और बल्ली को लंदन से दुबई साथ चलने को कहती है, जहां से उनके अतीत के पन्ने खुलने आरम्भ होते हैं । फौज में पदस्थ हार्डी पंजाब के लाल्टू में किसी का सामान लौटाने आया होता है, जहाँ पर उसकी मुलाकात मनु से होती है, जो अपने घर की खस्ता हालत सुधारने की वजह से इंग्लैंड जाना चाहती है । बल्ली और बग्गू की भी पारिवारिक दिक्कतें हैं । हार्डी उन्हें एलईडी परीक्षा में शामिल होने को कहता है ताकि छात्र वीजा पर वह इंग्लैंड जा सके पर सबका हाथ अंग्रेजी में तंग होता है । वह अंग्रेजी की क्लास ज्वाइन करते हैं, जहां पर सुखी लंदन जाने के लिए बेचैन है, घटनाक्रम मोड़ लेते हैं और सुखी आत्मदाह कर लेता है, उसकी मौत हार्डी को झकझोर देती है, वह मनु और बाकी दोस्तों को डंकी रूट से लंदन ले जाने की जुगत में लग जाता है हालाँकि हार्डी को मनु से प्रेम हो जाता है लेकिन उनके घर की समस्याओं के कारण किसी भी तरह विदेश भेजने में मदद करने को जी तोड़ कोशिश करता है । अब मनु वापस आ पाती है या अपने प्रेमी से मिल पाती है और वह उसे अपना लेता है या नहीं यह सब जानने के लिए फिल्म को देखना पडेगा ।
फिल्म में यह दिखाया गया है कि हर साल 10 लाख लोग डोंकी मारते हैं हालांकि राजकुमार हिरानी, कणिका ढिल्लों और अभिजीत जोशी द्वारा लिखी गई यह कहानी उस मुद्दे की गहराई में उतर नहीं पाती है, शुरुआत में किरदारों को स्थापित करने में ही काफी समय ले लिया, मध्यांतर के बाद सब डंकी मारते हैं तो फिर उसके बीमारियों का सामना करना पड़ता है । यह कहानी अच्छे से उभर कर नहीं आती है, फिल्म में कुछ भावनात्मक दृश्य भी हैं लेकिन वह भावुक नहीं करते हैं । फिल्म में मनु का किरदार एक जगह पर कहता है, यह जमीन अंग्रेजों ने अपनी फैक्ट्री में नहीं बनाई है, यह रब की जमीन है इसलिए यह हमारी भी उतनी ही जमीन है जितनी कि यह उन लोगों की है । यह बात उसकी अशिक्षा को दिखाता है । अब आप सोचिये कि अगर वीजा प्रणाली ना हो तो दुनिया में किस प्रकार हाहाकार हो सकता है ।
जहाँ तक फिल्म में कलाकारों के अभिनय की बात करें तो मनु और हार्डी की प्रेम कहानी भी उभर कर सामने नहीं आ पाई है, इस प्रेम कहानी को लेकर शाहरुख और तापसी की केमिस्ट्री में कोई रंग नहीं जमा है । मेकअप से झुर्रियां करने के बाद भी तापसी पन्नू कहीं से उम्रदराज नहीं लगती हैं, न उनकी चाल ढाल, न हाव-भाव कोई भी उनको उमरदराज नहीं दर्शाता है। युवा अवस्था में शाहरुख खान काफी जवान लगते हैं, सुखी के रूप में विकी कौशल का अभिनय उम्दा और शानदार है, वह याद रह जाते हैं, सहयोगी भूमिका में नजर आए विक्रम कोचर और अनिल ग्रोवर ने अपनी अदाकारी से किरदार को खास बना दिया है, कुल मिलाकर फिल्म में बीच में कुछ हल्के फुल्के कामेडी के द्रश्य भी हैं जो चेहरे पर कभी-कभी मुस्कान ले आते हैं ।
फिल्म को बनाने के पीछे राजकुमार हिरानी की अच्छी मंशा है, वे एक ऐसे विषय को दिखाना चाहते थे, जिसके बारे में अधिकतर लोगों को पता नहीं था और फिर अपने देश को छोडकर विदेश में किन किन परेशानियाँ का सामना करना पड़ता है । एक द्रश्य में हार्डी (शाहरुख़ खान )कहते भी हैं कि अपना देश अपना ही होता है । फिल्म का संगीत बढ़िया है, इसके कुछ गाने पहले ही लोगों की जुबाँ पर चढ़ गए थे । मुझे लगता है कि क्रिसमस की छुट्टी को इंजॉय करने के लिए यह फिल्म डंकी देखी जा सकती है ।
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डंकी फिल्म का नाम है डंकी । फिल्म के कलाकार हैं शाहरुख खान, विकी कौशल, तापसी पन्नू, बमन ईरानी, डंकी फिल्म के निर्देशक हैं राजकुमार हिरानी । निर्माता हैं गौरी खान, राजकुमार हिरानी और ज्योति देशपांडे । लेखक हैं अभिजात जोशी, कनिका ढिल्लो व राजकुमार हिरानी । रिलीज हुई है इक्कीस दिसंबर दो हज़ार तेईस को । मेरे हिसाब से फिल्म को अंक हैं तीन.छः । शाहरुख खान और अन्य दमदार स्टार कास्ट की फिल्म डंकी का डंका उतनी जोर से नहीं बज सका जितनी उन्होंने उम्मीद की थी या पठान जवान का बजा था । मुझे लगा कि राजकुमार हिरानी की यह अब तक की सबसे कमजोर फिल्म है । शाहरुख खान की फिल्म डंकी सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है और राजकुमार हिरानी के निर्देशन में उन्होंने पहली बार काम किया है । राजकुमार हिरानी अभी तक खास तरह की पिक्चरें बनाने के लिए जाने जाते रहे हैं जो कि अपनी फिल्मों के माध्यम से भावनाओं के उतार चढ़ाव के साथ साथ सामाजिक संदेश भी देते आये हैं । उनके द्वारा बनायीं गई फिल्मों में मुन्ना भाई एमबीबीएस, पी के और तीन इडियट्स जैसी फ़िल्में है और अब वह डंकी फिल्म लेकर आए हैं । डंकी का मतलब आम बोलचाल में जिसे डनकी मारना कहा जाता है, इसका अर्थ है किसी अन्य देश में अवैध तरीके से प्रवेश कर लेना और अवैध तरीके से किसी भी देश में प्रवेश पाने के लिए जिस रास्ते का लोग इस्तेमाल करते हैं उसे डंकी रूट कहा जाता है । दुनिया में ऐसे कई देश हैं, जहां डंकी रूट मशहूर है, डंकी रूट उन लोगों द्वारा बनाया जाता है जिन्हें उस देश का वीजा नहीं मिलता है । भारतीय सिनेमा को मुन्ना भाई एमबीबीएस, लगे रहो मुन्ना भाई, तीन ईडियट्स और पीके जैसी सफल, मनोरंजक और सार्थक संदेश देने वाली फिल्में बनाने वाले राजकुमार हिरानी ने इस बार अधूरी इच्छाओं, संसाधनों और अपने सपनों को एक ऊँची और नई उड़ान देने वाले अलग से विषय पर यह फिल्म डंकी बनाई है । डंकी की कहानी इस तरह से है, फिल्म की शुरुआत में हिरोइन मनु यानि कि तापसी पन्नू के लंदन के एक अस्पताल से भागने से होती है । वह अपने वकील से भारत का वीजा न मिल पाने की स्थिति में शाहरुख खान यानी कि हार्डी का नंबर निकालने को कहती है । वह अपने देश में इसलिए जाना वापस जाना चाहती है क्योंकि उसे ब्रेन ट्यूमर हुआ है और उसके पास जिन्दगी के कुछ ही दिन शेष बचे हैं, जिसे वह अपनों के साथ जीना चाहती है, कहानी पंजाब से है, पच्चीस साल बाद मनु अपने प्रेमी हार्डी को फोन करके दुबई आने को कहती है, मनु अपने दोस्तों बग्गू और बल्ली को लंदन से दुबई साथ चलने को कहती है, जहां से उनके अतीत के पन्ने खुलने आरम्भ होते हैं । फौज में पदस्थ हार्डी पंजाब के लाल्टू में किसी का सामान लौटाने आया होता है, जहाँ पर उसकी मुलाकात मनु से होती है, जो अपने घर की खस्ता हालत सुधारने की वजह से इंग्लैंड जाना चाहती है । बल्ली और बग्गू की भी पारिवारिक दिक्कतें हैं । हार्डी उन्हें एलईडी परीक्षा में शामिल होने को कहता है ताकि छात्र वीजा पर वह इंग्लैंड जा सके पर सबका हाथ अंग्रेजी में तंग होता है । वह अंग्रेजी की क्लास ज्वाइन करते हैं, जहां पर सुखी लंदन जाने के लिए बेचैन है, घटनाक्रम मोड़ लेते हैं और सुखी आत्मदाह कर लेता है, उसकी मौत हार्डी को झकझोर देती है, वह मनु और बाकी दोस्तों को डंकी रूट से लंदन ले जाने की जुगत में लग जाता है हालाँकि हार्डी को मनु से प्रेम हो जाता है लेकिन उनके घर की समस्याओं के कारण किसी भी तरह विदेश भेजने में मदद करने को जी तोड़ कोशिश करता है । अब मनु वापस आ पाती है या अपने प्रेमी से मिल पाती है और वह उसे अपना लेता है या नहीं यह सब जानने के लिए फिल्म को देखना पडेगा । फिल्म में यह दिखाया गया है कि हर साल दस लाख लोग डोंकी मारते हैं हालांकि राजकुमार हिरानी, कणिका ढिल्लों और अभिजीत जोशी द्वारा लिखी गई यह कहानी उस मुद्दे की गहराई में उतर नहीं पाती है, शुरुआत में किरदारों को स्थापित करने में ही काफी समय ले लिया, मध्यांतर के बाद सब डंकी मारते हैं तो फिर उसके बीमारियों का सामना करना पड़ता है । यह कहानी अच्छे से उभर कर नहीं आती है, फिल्म में कुछ भावनात्मक दृश्य भी हैं लेकिन वह भावुक नहीं करते हैं । फिल्म में मनु का किरदार एक जगह पर कहता है, यह जमीन अंग्रेजों ने अपनी फैक्ट्री में नहीं बनाई है, यह रब की जमीन है इसलिए यह हमारी भी उतनी ही जमीन है जितनी कि यह उन लोगों की है । यह बात उसकी अशिक्षा को दिखाता है । अब आप सोचिये कि अगर वीजा प्रणाली ना हो तो दुनिया में किस प्रकार हाहाकार हो सकता है । जहाँ तक फिल्म में कलाकारों के अभिनय की बात करें तो मनु और हार्डी की प्रेम कहानी भी उभर कर सामने नहीं आ पाई है, इस प्रेम कहानी को लेकर शाहरुख और तापसी की केमिस्ट्री में कोई रंग नहीं जमा है । मेकअप से झुर्रियां करने के बाद भी तापसी पन्नू कहीं से उम्रदराज नहीं लगती हैं, न उनकी चाल ढाल, न हाव-भाव कोई भी उनको उमरदराज नहीं दर्शाता है। युवा अवस्था में शाहरुख खान काफी जवान लगते हैं, सुखी के रूप में विकी कौशल का अभिनय उम्दा और शानदार है, वह याद रह जाते हैं, सहयोगी भूमिका में नजर आए विक्रम कोचर और अनिल ग्रोवर ने अपनी अदाकारी से किरदार को खास बना दिया है, कुल मिलाकर फिल्म में बीच में कुछ हल्के फुल्के कामेडी के द्रश्य भी हैं जो चेहरे पर कभी-कभी मुस्कान ले आते हैं । फिल्म को बनाने के पीछे राजकुमार हिरानी की अच्छी मंशा है, वे एक ऐसे विषय को दिखाना चाहते थे, जिसके बारे में अधिकतर लोगों को पता नहीं था और फिर अपने देश को छोडकर विदेश में किन किन परेशानियाँ का सामना करना पड़ता है । एक द्रश्य में हार्डी कहते भी हैं कि अपना देश अपना ही होता है । फिल्म का संगीत बढ़िया है, इसके कुछ गाने पहले ही लोगों की जुबाँ पर चढ़ गए थे । मुझे लगता है कि क्रिसमस की छुट्टी को इंजॉय करने के लिए यह फिल्म डंकी देखी जा सकती है ।
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पेट्रोल, डीजल की कीमतों में बढोत्तरी परेशान क्यों नहीं होती सरकार !
कुछ ही मिनटों में योनि कैसे टाइट करें !
प्रियंका चोपड़ा का ये वीडियो काफी बोल्ड है !
हवाई यात्रा सिर्फ 12 रुपये में.... .
CRPF जवान को डाकू पान सिंह तोमर बनने की धमकी देना पड़ सकता है भारी!
MP : मंत्री ने किया शौचालय साफ, अफसर से कहा - शर्म करो!
जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क का मास्टरमाइंड हैं डीएसपी देवेंद्र सिंह !
लव वॉर ख़त्म, ऋतिक - कंगना में नोटिस वॉर !
मोबाइल तो बन जाएगा वॉलेट लेकिन ये हैं साइड इफेक्ट !
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स्कीम का नाम विनिर्दिष्ट मंच कला अनुदान स्कीम होगा। इस स्कीम के अंतर्गत नाट्य समूहों, रंगमंच समूहों, संगीत मण्डलियों, बाल रंगषाला, एकल कलाकारों और मंच कला कार्यकलापों के सभी प्रकार के स्वरूपों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
इस स्कीम के मुख्य घटक निम्नानुसार हैं :
1. इस स्कीम के अंतर्गत अनुदान या आर्थिक सहायता, परियोजना या कार्यक्रमों के अनुमोदन के आधार पर दी जाएगी तथा यह तदर्थ प्रकार की होगी। स्कीम के अंतर्गत चुनी गई परियोजना के लिए वित्तीय सहायता, सामान्यतः एक वर्ष की अवधि से अधिक नहीं होगी। अनुदान की राशि विषेष वर्ष में सहायता के लिए चुने गए अनुमोदित प्रस्तावों/कार्यक्रमों में सभी मदों में व्यय के लिए पर्याप्त होगी। अनुदान के उद्देष्यों के लिए अनुमोदित मदों के रूप में मानी गई मदों में प्रचलित दरों पर अनियत कलाकारों सहित कलाकारों को वेतन भुगतान, निर्माण / प्रस्तुतिकरण की लागत, रिहर्सल के लिए हॉल का किराया, पोषाकों की लागत, परिवहन के फुटकर खर्च, शोध व्यय आदि षामिल होंगी।
2. निर्माण अनुदान मांगने के लिए आवेदन में सही औचित्य के साथ विस्तृत अनुमानित लागत का उल्लेख का जाना चाहिए जिससे कि विशेषज्ञ समिति वास्तविक आवष्यकताओं के आधार पर अनुदान की सिफारिष पर विचार कर सके।
3. सहायता के लिए व्यक्तिगत प्रस्तावों का चयन करने में यह सुनिष्चित करने का ध्यान रखा जाएगा कि इसमें दुर्लभ और परम्परागत रूपों को वरीयता देते हुए देष के सभी भागों से सभी कला रूपों और शैलियों का प्रतिनिधित्व हो। नए नाटकों / कार्यक्रमों/प्रस्तुतियों को वरीयता प्रदान की जाएगी।
गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले लोगों के प्रषिक्षण से उभरकर आने वाली प्रयोगात्मक और नवाचार पद्धतियों को प्रोत्साहित करने वाली परियोजनाओं को विषेष महत्व दिया जाएगा।
(i) कार्यवृत और आईएफडी के अनुमोदन के पश्चात विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुमोदित मंजूर लागत का 75 प्रतिशत पहली किस्त में दिया जाएगा।
(ii) प्रथम किस्त के अनुमोदन पत्र के माध्यम से यथा उल्लिखित सभी आवश्यक दस्तावेजों समेत दूसरी किस्त जारी करने के आवेदन पत्र के प्राप्त हो जाने के पश्चात शेष राशि का 25 प्रतिशत प्रदान किया जाएगा बशर्ते संगठनों को आवश्यक रूप से अपने आस पास के किसी एक स्कूल में कम से कम 2 सांस्कृतिक गतिविधियां (कार्यक्रम, व्याख्यान, संगोष्ठी, कार्यशाला, प्रदर्शनी आदि) आयोजित करनी होगी। अनुदान के नवीकरण तथा जारी करने के लिए इस संबंध में स्कूल प्रधानाचार्य से एक प्रमाण-पत्र अनिवार्य होगा।
5. जिन अनुदानग्राहियों को निर्माण अनुदान स्वीकृत हुआ है वे अपने कार्यक्रम के विस्तृत विवरण, संस्कृति मंत्रालय को उपलब्ध कराएंगे, जिससे कि इन्हें संस्कृति मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जा सके।
6. निर्माण अनुदान मांगने वाले संगठन/व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में केवल एक ही अनुदान प्राप्त करने के पात्र होंगे।
1. रेपर्टरी अनुदान सहायता के लिए नाटक मंडलियों से यह अपेक्षा की जाती है कि उनके पास पर्याप्त संख्या में और गुणवत्ता परक रंगपटल हो और वे अखिल भारतीय स्तर पर प्रदर्षन कर रही हों।
2. वे अनुदानग्राही जो रेपर्टरी अनुदान प्राप्त कर रहे हैं, उनके वेतन अनुदान के नवीकरण की सिफारिष तभी की जाएगी जब वे वित्त वर्ष के दौरान कम से कम दो निर्माण का मंचन करें। इनमें से एक निर्माण नया अर्थात जो पहले मंचित न किया गया हो, होना चाहिए।
3. इस उद्देष्य के लिए स्थापित विशेषज्ञ समिति द्वारा वेतन अनुदान का वार्षिक पुनरीक्षण किया जाएगा।
4. वेतन अनुदान के मामले में चौथे वर्ष के बाद अनुदान जारी रखने के लिए वास्तविक सत्यापन आवश्यक होगा।
जिन संगठनों को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, वे अपने आसपास के किसी भी स्कूल में कम से कम 02 सांस्कृतिक कार्यकलाप (समारोह, व्याख्यान, सेमिनार, कार्यशाला, प्रदर्शनी आदि) अनिवार्य रूप से आयोजित करेंगे। अनुदान के नवीकरण और जारी करने के लिए स्कूल के प्रधानाचार्य से इस आशय का एक प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से अपेक्षित होगा।
1. यद्यपि, विज्ञापन मंत्रालय की वेबसाइट के माध्यम से वार्षिक आधार पर दिया जाएगा तथापि, वर्ष के दौरान आवेदन कभी भी किया जा सकता है जिनका मूल्यांकन इस उद्देष्य के लिए गठित विशेषज्ञ समिति द्वारा आवधिक आधार पर किया जाएगा। आवेदन-पत्र विधिवत रूप से संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित क्षेत्र प्रषासन या किसी भी राज्य अकादमी या राष्ट्रीय आकादमी सहित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), कलाक्षेत्र फाउंडेषन, सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रषिक्षण केंद्र (सीसीआरटी), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए), क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (जेडसीसी) और इसी प्रकार के निकायों से संस्तुत होना चाहिए।
2. नीचे पैरा च में यथा निर्धारित दस्तावेज, आवेदन पत्र के साथ संलग्न किए जाने चाहिएं। इन दस्तावेजों के बिना प्रस्तुत आवेदनों को अस्वीकृत कर दिया जाएगा। संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय नाटय विद्यालय (एनएसडी) वार्षिक रूप से एनएसडी / मंत्रालय की वेबसाइटों पर स्कीम को अधिसूचित करेगा। स्कीम के पैरा 7 में उल्लिखित आवश्यक दस्तावेजों द्वारा सहायित विहित प्रपत्र में आवेदनों को निदेशक, राष्ट्रीय नाटय विद्यालय, बहावलपुर हाउस, प्लॉट न.1, भगवान दास रोड, नई दिल्ली-110001 को भेजें (आवेदक संगठन द्वारा राष्ट्रीय नाटय विद्यालय को प्रस्तुत आवेदन पत्र में किसी कमी की जानकारी सीधे निदेशक, एनएसडी को प्रस्तुत की जाए)
1. निर्माण अनुदान/रेपर्टरी अनुदान इस उद्देष्य के लिए गठित विशेषज्ञ समिति द्वारा स्वीकृत किए जाएंगे। विशेषज्ञ समिति का गठन दो वर्षों के लिए होगा तथा यह मंत्रालय द्वारा अनुमोदित होगी। विशेषज्ञ समिति अपनी सिफारिशों के लिए मामला-दर-मामला आधार पर औचित्य बताएगी।
2. निधि और अनुदान के लिए आवेदनों की संख्या की उपलब्धता के आधार पर विशेषज्ञ समिति द्वारा आवेदनों की जांच आवधिक रूप से की जाएगी।
3. मंच कला अनुदान स्कीम के अन्तर्गत प्राप्त आवेदनों / प्रस्तावों के संबंध में संस्तुतिकर्ता निकाय इस स्कीम की विशेषज्ञ समिति से भिन्न होगा।
4. निर्माण अनुदान, 75 प्रतिषत और 25 प्रतिषत की दो किस्तों के रूप में वितरित किया जाएगा जबकि संगठनों/संस्थानों को रेपर्टरी अनुदान वार्षिक रूप से जारी किया जाएगा।
2. निर्माण अनुदान : 1/4/2009 से प्रभावी, परियोजना के आधार पर संगठन/व्यक्तियों को अधिकतम 5 लाख रु0 प्रति वर्ष दिए जाएंगे। तथापि, वृहत निर्माणों के मामले में, स्कीम के अनुरूप विषिष्ट आवष्यकताओं को पूरा करने के लिए, माननीय मंत्री के अनुमोदन से अनुदान की ऊपरी सीमा को बढ़ाया जा सकता है।
इस स्कीम के अन्तर्गत व्यय को स्कीम के अधीन आबंटित परिव्यय तक सीमित रखा जाएगा।
नोट : प्रचलन के अनुसार आवेदक संगठनों को भुगतान केवल इलेक्ट्रॉनिक मोड / आरटीजीएस के माध्यम से ही किया जाएगा।
(i) संस्था के संगम ज्ञापन व पंजीकरण प्रमाण-पत्र की प्रतिलिपि।
(ii) आयकर मूल्यांकन आदेश।
(iii) पिछले तीन वर्षों के प्राप्ति और भुगतान लेखे और लेखा परीक्षक के प्रमाण-पत्र सहित तुलन - पत्र। (iv) पिछले वर्ष प्राप्त अनुदान के लिए उपयोग प्रमाण-पत्र की प्रतिलिपि।
(v) कलाकारों के नाम, गुरू/निर्देषकों के नाम, रिहर्सल लागत, पोषाकों की लागत, परिवहन लागत, शोध लागत, लेखन की लागत, मंचन की लागत आदि का सम्पूर्ण ब्यौरा।
(vi) पिछले वर्षों के निर्माण की प्रेस समीक्षा, प्रेस विज्ञापन, टिकट आदि की स्मारिका प्रतिलिपि।
(vii) आवेदन पत्र, सम्बधित राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रषासन या किसी भी राज्य अकादमी या राष्ट्रीय अकादमी जिसमें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), कलाक्षेत्र फाउंडेषन, सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रषिक्षण केंद्र (सीसीआरटी), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए), क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (जेड़सीसी) और सदृष स्तर के निकाय शामिल हैं, से संस्तुत होने चाहिएं।
नोट : पदम पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को संबंधित राज्य सरकारों/ संघ राज्यक्षेत्र प्रषासनों या किसी भी राज्य अकादमियों या राष्ट्रीय अकादमियों जिसमें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, कला क्षेत्र फाउंडेषन, सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रषिक्षण केन्द्र (सीसीआरटी), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, (आईजीएनसीए), क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र और सदृष प्रकृति के निकाय षामिल हैं, से संस्तुति प्राप्त करने की छूट होगी।
संस्कृति मंत्रालय जैसा भी आवष्यक समझे आवधिक आधार पर, विषेषतः रेपर्टरी अनुदानग्राहियों के लिए, आवधिक निरीक्षणों, फील्ड दौरों आदि के माध्यम से अनुदानग्राहियों का मूल्यांकन करेगा।
जहां तक रेपर्टरी अनुदान के नए मामलों का संबंध है, प्रत्येक मामले में अनुमोदित अनुदान मंत्रालय द्वारा यथा निर्धारित संगठनों के वास्तविक सत्यापन के पश्चात ही जारी की जाएगी। इसके अलावा कम से कम 5-10 प्रतिशत नए संस्तुत प्रस्तावों / मामलों का वास्तविक निरीक्षण / सत्यापन संस्कृति मंत्रालय में संबंधित अवर सचिव / अनुभाग अधिकारी द्वारा किया जाएगा।
क. अनुदान प्राप्त करने के लिए पात्रता हेतु आवेदक संगठन का एक समुचित रूप से गठित प्रबंधन निकाय अथवा शासी निकाय अथवा शासी परिषद होनी चाहिए जिसमें लिखित संविधान के रूप में इनकी शक्तियों, दायित्वों और कर्तव्यों को स्पष्ट रूप से उल्लिखित और निर्धारित किया होना चाहिए।
ख. इसके पास जिस परियोजना के लिए अनुदान अपेक्षित है उसको शुरू करने के लिए सुविधाएं, संसाधन, कार्मिक एवं अनुभव होना चाहिए।
ग. आवेदक संगठन को भारत में पंजीकृत होना चाहिए और राष्ट्रीय मौजूदगी समेत इसे अखिल भारतीय स्तर का होना चाहिए तथा इसकी राष्ट्रीय / अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचालनात्मक मौजूदगी होनी चाहिए। घ. इस संगठन के कार्यकलाप मुख्य रूप से अथवा महत्वपूर्ण रूप से सांस्कृतिक होने चाहिए।
ड. इस संगठन की क्षमता वर्ष भर में कम से कम 20 समारोह / कार्यक्रम करने की होनी चाहिए।
च. इस संगठन के पास पर्याप्त कार्यक्षमता, कलाकार / स्टाफ / स्वैच्छिक सदस्य होने चाहिए।
छ. इस संगठन द्वारा सांस्कृतिक कार्यकलापों पर विगत 5 वर्षों के 3 वर्षों में एक करोड़ अथवा अधिक की राशि खर्च की हुई होनी चाहिए।
1. सामान्यतः कुल सरकारी अनुदान के 25 प्रतिशत का उपयोग कला एवं संस्कृति के प्रोन्नयन पर केन्द्रित संस्थान / संगठन/ संस्कृति के भवन के रख-रखाव (स्टाफ वेतन, कार्यालयी खर्च, विविध खर्च) निर्माण / मरम्मत / विस्तार / पुनस्थापन/ नवीकरण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
2. सामान्यतः कुल सरकारी अनुदान के 25 प्रतिशत का उपयोग हर हाल में कला एवं संस्कृति के संवर्धन संबंधी शोध परियोजनाओं समेत सांस्कृतिक विरासत तथा कला के परिरक्षण और संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण समारोह को प्रदर्शित / आयोजित करने पर हुए अन्य विविध खर्चा तथा मानदेय के भुगतान के लिए उपयोग किए जा सकते हैं।
1. विशेषज्ञ सलाहकार समिति द्वारा स्कीम के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों / प्रस्तावों के मूल्यांकन तथा इसके पश्चात् संस्कृति मंत्रालय में प्रशासनिक प्राधिकार के आधार पर अनुदान प्रदान किया जाएगा।
2. यह अनुदान 2 किश्तों में प्रदान किया जाएगा (अर्थात् 75 प्रतिशत और 25 प्रतिशत) इसकी पहली किश्त परियोजना के अनुमोदन के समय जारी की जाएगी। इसकी दूसरी किश्त समुचित प्रारूप (जीएफआर-19 (ई) के अनुसार) में उपयोग प्रमाण-पत्र, अनुदान प्राप्तकर्ता के हिस्से समेत अनुदान की संपूर्ण राशि के उपयोग को दर्शाते हुए लेखाओं का विधिवत लेखा परीक्षा विवरण तथा चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा सत्यापित अन्य दस्तावेजों की प्राप्ति होने पर जारी किया जाएगा। अनुदान की शेष राशि को जारी करने पर निर्णय अनुमोदित अनुदान की अधिकतम सीमा के अध्यधीन रहते हुए वास्तविक व्यय के आधार पर किया जाएगा।
3. वित्तीय सहायता पाने वाला संगठन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार अथवा संबंधित राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत अधिकारी / प्रतिनिधि द्वारा निरीक्षण के लिए खुला रहेगा।
4. परियोजना के लेखाओं को समुचित तथा पृथक रूप से रखा जाएगा और भारत सरकार के द्वारा जब कभी मांगा जाए इन्हें प्रस्तुत किया जाएगा और ये इसके विवेक के आधार पर केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के अधिकारी द्वारा जांच के अध्यधीन होंगे।
5. यह संगठन कला एवं संस्कृति के प्रोन्नयन पर केन्द्रित संस्थान/संगठन/केन्द्र के भवन के रख-रखाव (स्टाफ वेतन, कार्यालय खर्च, विविध खर्च) और निर्माण/मरम्मत/ विस्तार/पुनस्र्थापन/नवीकरण के लिए उपयोग के परिव्यय का विस्तृत मद-वार ब्यौरा प्रदान करेंगे।
6. अनुदान प्राप्तकर्ता निम्नलिखित का रख-रखाव करेगाः
7. संगठन केन्द्र सरकार के अनुदान से पूर्णतः और आंशिक रूप से अर्जित सभी परिसम्पत्तियों का रिकॉर्ड रखेगा और जिस उद्देश्य के लिए अनुदान दिया गया है उसके अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए इन्हें भारत सरकार की पूर्व अनुमति के बिना नहीं बेचेगा अथवा ऋणग्रस्त और उपयोग करेगा।
8. किसी भी समय यदि भारत सरकार के पास ऐसा विश्वास करने के पर्याप्त कारण हैं कि मंजूर की गई धनराशि का उपयोग अनुमोदित उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा रहा है तो अनुदान का भुगतान रोका जा सकता है और पहले के अनुदानों की वसूली की जा सकती है।
9. संगठन को अनुमोदित परियोजना के कार्य के लिए अवश्य ही तर्कसंगत किफायत अपनानी चाहिए। 10. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन वास्तविक उपलब्धियों तथा प्रत्येक अनुमोदित मद पर पृथक रूप से हुए व्यय दोनों के विस्तृत ब्यौरे देते हुए परियोजना की तिमाही प्रगति रिपोर्ट संस्कृति मंत्रालय को प्रस्तुत करेगा।
11. ऐसे आवेदन जिनके पिछले अनुदान/उपयोग प्रमाण-पत्र लंबित हैं उन पर विचार नहीं किया जाएगा। 12. संगठन को अपने आस-पास के किसी भी विद्यालय में कम से कम 2 गतिविधियां (समारोह, व्याख्यान, सेमिनार, कार्यशाला, प्रदर्शनी आदि) अवश्य ही आयोजित करनी चाहिए। दूसरी किस्त जारी करने के लिए इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा जारी एक प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से अपेक्षित होगा।
एक संगठन को सामान्यतः 1.00 करोड़ रू. तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, मंत्रालय द्वारा यह वित्तीय सहायता केवल 2.00 करोड़ रू. तक सीमित होगी। तथापि, संस्कृति मंत्री के अनुमोदन से आपवादिक / सुयोग्य मामलों में इस धनराशि को 5.00 करोड़ रू. तक बढ़ाया जा सकता है। स्कीम के अंतर्गत किसी संगठन के लिए सहायता उपरोक्त सीमा के अध्यधीन अनुमोदित लागत के अधिकतम 67 प्रतिशत तक सीमित रहेगी। अनुमोदित लागत के शेष 33 प्रतिशत को संगठन द्वारा इसके बराबर के हिस्से के रूप में खर्च किया जाएगा (राज्य / संघ राज्यक्षेत्र सरकार/ केन्द्रीय मंत्रालय/ पीएसयू / विश्वविद्यालय आदि द्वारा अंशदान के अलावा)।
केन्द्र सरकार द्वारा जारी किए गए अनुदान के संबंध में पृथक लेखाओं का रख-रखाव किया जाएगा;
क. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन के लेखे भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक अथवा उसके विवेकानुसार उनके नामिती के द्वारा किसी भी समय लेखा परीक्षा के लिए उपलब्ध रहेंगे।
ख. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन अनुमोदित परियोजना पर हुए खर्च को दर्शाते हुए तथा पूर्व वर्षों में सरकारी अनुदान के उपयोग का उल्लेख करते हुए सनदी लेखाकार द्वारा लेखा-परीक्षित लेखाओं का विवरण भारत सरकार को प्रस्तुत करेगा। यदि निर्धारित अवधि के भीतर उपयोग प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो जब तक सरकार द्वारा कोई विशेष छूट न दी गई हो, वह तुरंत प्राप्त अनुदान की राशि को उस पर भारत सरकार की मौजूदा ब्याज दर के साथ वापस लौटाने की व्यवस्था करेगा।
ग. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन, जब कभी भी सरकार द्वारा आवश्यक प्रतीत होने पर भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय द्वारा समिति नियुक्त करके अथवा भारत सरकार द्वारा निर्धारित किसी अन्य तरीके के माध्यम से समीक्षा के लिए खुला रहेगा।
घ. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन विदेश मंत्रालय की पूर्व अनुमति के बिना किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल (जिन्हें संस्कृति मंत्रालय की स्कीम द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त कार्यक्रमों के संबंध में आमंत्रित किया जा रहा है) को आमंत्रित नहीं करेगा। इस प्रकार की अनुमति के आवेदन संस्कृति मंत्रालय के माध्यम से भेजे जाएंगे।
ड. यह संगठन समय-समय पर सरकार द्वारा लगाए गए अन्य शर्तों के अध्यधीन होगा।
ड. आवेदन पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया :
संस्कृति मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर पात्र संगठनों से आवेदनों को आमंत्रित करने के लिए विज्ञापन अपलोड किया जाएगा। विहित प्रपत्र में विधिवत भरे आवेदन पत्रों को केन्द्र सरकार/राज्य सरकार/ संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन के संबंधित सांस्कृतिक विभाग/स्कंध अथवा संस्कृति मंत्रालय के किसी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों/राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), संगीत नाटक अकादमी (एसएनए), ललित कला अकादमी (एलए), सीसीआरटी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए), सहित राष्ट्रीय अकादमियों तथा इसी के समतुल्य निकायों द्वारा संस्तुत किया जाना चाहिए और इन्हें केवल इन्हीं संगठनों के माध्यम से भेजा जाना चाहिए। तथापि, संस्कृति मंत्रालय के पास किसी आवेदन पर सीधे विचार करने का विवेकाधिकार होगा।
घ. निम्नलिखित को शामिल करते हुए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट ;
1. जिस परियोजना के लिए सहायता चाहिए उसकी अवधि समेत उस परियोजना का ब्यौरा।
2. आवर्ती तथा गैर-आवर्ती व्यय का अलग-अलग मदवार ब्यौरा प्रदान करते हुए परियोजना का वित्तीय विवरण।
3. उस स्रोत का उल्लेख जहां से सदृश धनराशि प्राप्त की जाएगी।
ड. आवेदक संगठन का विगत तीन वर्षों का आय और व्यय का विवरण तथा विगत वर्षों के तुलन पत्र की एक प्रति ।
च. समुचित मूल्य के स्टाम्प पेपर पर विहित प्रपत्र में एक क्षतिपूर्ति बंध पत्र ।
छ. अनुमोदित अनुदान के इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण को सुलभ बनाने के लिए विहित प्रपत्र में बैंक खाते के विवरण।
आपवादिक मामलों में संस्कृति मंत्रालय के पास विशेषज्ञ/संचालन/सलाहकार समिति की सिफारिशों पर दिशा-निर्देश के किसी भी मानदंड में कारणों को लेखबद्ध करते हुए छूट प्रदान करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।
इस स्कीम का उद्देष्य स्वैच्छिक सांस्कृतिक संगठनों तथा सरकारी सहायता प्राप्त सांस्कृतिक संगठनों को कलाकारों के लिए समुचित रूप से सुसज्जित प्रषिक्षण, अभ्यास व कला प्रस्तुति स्थलों के सृजन में उनके प्रयासों में सहायता करना है।
1. यह अनुदान सांस्कृतिक स्थल सृजित करने के लिए दिया जाएगा, जिनमें निम्नलिखित शामिल होंगे : 1.1 मंच कलाओं हेतु पारम्परिक सांस्कृतिक स्थल :
क. प्रदर्षन स्थल जैसे ऑडिटोरियम, ओपन-एयर थिएटर, कन्सर्ट हॉल।
ख. रंगमंच/संगीत/नृत्य हेतु रिहर्सल हॉल।
ग. रंगमंच/संगीत/नृत्य हेतु प्रषिक्षण केन्द्र/स्कूल।
1.2 रूपान्तर स्थल अर्थात् स्टूडियो थिएटर आदि :
आन्तरिक अभ्यास-सह-प्रदर्षन स्थल जिन्हें स्टूडियो थिएटर या प्रायोगिक थिएटर कहा गया है, जिनमें निम्नलिखित मुख्य विषेषताएं होती हैंः
क. लघु थिएटर जिसमें संगीत, नृत्य या रंगमंच या इन कलाओं की समग्र प्रस्तुति हेतु सभी अनिवार्य उपस्कर हों,
ख. अनौपचारिक स्थल जिसे पारंपरिक दृष्टि से ऑडिटोरियम नहीं कहा जा सकता, अतः सामान्यतया यह मंच या कला प्रस्तुति क्षेत्र न तो मुख्य रंगपीठ के अन्दर होता है और न ही इसे बहुत ऊंचाई पर बनाया जाता है या यह दर्शकों से दूर किसी भाग का विभाजन करके बनाया जाता है।
ग. दर्शकों के बैठने की व्यवस्था इस प्रकार पूरी तरह से परिवर्तनीय होती है कि इसे कला प्रस्तुति विषेष के कलात्मक उद्देष्य के अनुसार स्थल में एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है, अतः सीटों/कुर्सियों को एक जगह स्थिर नहीं किया जाएगा।
घ. स्थल की सामान्य क्षमता अधिकतम 100 से 200 सीट की होती है, अतः ऐसे स्थल को प्रायः लघु थिएटर या आन्तरिक थिएटर कहा जा सकता है क्योंकि इसमें दर्शक, कला प्रस्तुति का नजदीक से पूरा आनंद उठा सकते हैं।
ङ, कलाकारों के लिए प्रसाधन सुविधा सहित साथ लगे एक या दो नेपथ्यषाला/ ड्रेसिंग रूम, श्रृंगार कक्ष और भण्डार क्षेत्र, अतः समूची यूनिट छोटी होती है परन्तु यह पूरी तरह थिएटर का काम करती है।
क. नया निर्माण या निर्मित स्थल की खरीद।
ख. मौजूदा भवन/स्थल/सुविधा केन्द्र का नवीकरण/उन्नयन/आधुनिकीकरण/विस्तार/फेरबदल।
ग. मौजूदा निर्मित स्थल/सांस्कृतिक केन्द्र के आंतरिक भागों की रिमॉडलिंग।
घ. विद्युत, वातानुकूलन, ध्वनि तंत्र, प्रकाष व ध्वनि प्रणाली तथा उपस्करों की अन्य मदें जैसे वाद्य यंत्र, परिधान, ऑडियो/वीडियो उपस्कर, फर्नीचर तथा स्टूडियो थिएटर के लिए अपेक्षित मंच सामग्री, ऑडिटोरियम, अभ्यास कक्ष, कक्षा कमरे आदि जैसी सुविधाओं की व्यवस्था।
1. इस स्कीम में निम्नलिखित शामिल हैंः
(i) निम्नलिखित मानदण्ड पूरा करने वाले सभी गैर-लाभार्थी संगठनः
क. इस संगठन का स्वरूप मुख्यतः सांस्कृतिक होना चाहिए जो कम से कम तीन वर्ष की अवधि के लिए प्राथमिक रूप से नृत्य, नाटक, रंगमंच, संगीत, ललित कला, भारत विद्या-शास्त्र तथा साहित्य के क्षेत्र में कला व संस्कृति के संवर्धन में कार्यरत होना चाहिए।
ख. संगठन कम से कम तीन वर्ष से सोसायटी पंजीकरण अधिनियम (1860 का XXI) अथवा सदृष अधिनियम के तहत सोसायटी अथवा न्यास अथवा गैर-लाभार्थी कम्पनी के रूप में पंजीकृत हो।
ग. संगठन की अपनी प्रतिष्ठा हो तथा अपने कार्यकलाप के क्षेत्र में सार्थक कार्य करने की उसकी ख्याति हो और उसने स्थानीय, क्षेत्रीय अथवा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई हो।
घ. इसकी घोषणा पत्र संगठन, भारतीय कला व संस्कृति के परिरक्षण, प्रसार व संवर्धन के प्रति समर्पित हो।
(ii) मंच कलाओं के संवर्धन में कार्यरत सरकारी प्रायोजित निकाय ।
(iii) मंच कलाओं के प्रति समर्पित विश्वविद्यालय, विभाग या केन्द्र।
(iv) मंच कलाओं के संवर्धन हेतु स्थापित कॉलेज।
2 मंत्रालय की विनिर्दिष्ट मंच कला परियोजनाओं हेतु कार्यरत व्यावसायिक समूहों और व्यक्तियों को वित्तीय सहायता की स्कीम के तहत कम से कम 3 वर्ष से वेतन अनुदान प्राप्त करते आ रहे संगठन को यह माना जाएगा कि उसने उपर्युक्त सभी शर्ते पूरी कर दी हैं।
3 मंच कलाओं को समर्पित, सरकार द्वारा प्रायोजित निकाय, विश्वविद्यालय विभाग/केन्द्र या कॉलेज भी स्वतः पात्र हो सकता है बशर्ते कि गत तीन वर्षों का उसका रिकार्ड संतोषजनक हो।
4 धार्मिक संस्थाएं, सार्वजनिक पुस्तकालय, संग्रहालय, स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय, विभाग/ केन्द्र जो मंच कलाओं तथा संबद्ध सांस्कृतिक कार्यकलापों के प्रति विषिष्ट रूप से समर्पित नहीं है तथा केन्द्र सरकार/राज्य सरकार/ संघ-राज्यक्षेत्र प्रषासन/ स्थानीय निकाय के विभाग या कार्यालय पात्र नहीं होंगे।
5 वह संगठन जिसने पूर्व की सांस्कृतिक संगठनों को भवन अनुदान स्कीम या इस स्कीम के तहत अपनी भवन परियोजना के लिए अनुदान प्राप्त किया हो, इस स्कीम के तहत पूर्व में मंजूर परियोजना के पूरा होने से पहले दूसरे अनुदान के लिए पात्र नहीं होगा बशर्ते कि उक्त दूसरा अनुदान स्टूडियो थिएटर (प्रायोगिक थिएटर) के लिए न मांगा गया हो और आवेदक संगठन ने चल रही स्वीकृत परियोजना के संबंध में चूक न की हो।
1. इस स्कीम के तहत सभी अनुदान गैर-आवर्ती किस्म के होंगे। आवर्ती व्यय, यदि कोई हो, की जिम्मेदारी अनुदानग्राही संगठन की होगी। इस स्कीम के तहत अधिकतम सहायता इस प्रकार होगी :
25 लाख रु.
25 लाख रु.
2. इस स्कीम के तहत किसी संगठन को उपर्युक्त सीमा के अध्यधीन परियोजना की अनुमोदित प्राक्कलित लागत के अधिकतम 60 प्रतिषत तक सहायता दी जाएगी। परियोजना की अनुमोदित प्राक्कलित लागत की शेष राशि, इसकी बराबर की हिस्सेदारी के रूप में संबंधित संगठन द्वारा वहन की जाएगी।
यदि परियोजना की अनुमोदित लागत 100 लाख रु. है तो संस्वीकृति योग्य अनुदान की अधिकतम राशि 50 लाख रु. होगी और अनुदानग्राही संगठन की बराबर की हिस्सेदारी 50 लाख रु. होगी।
यदि परियोजना की अनुमोदित लागत 70 लाख रु. है तो संस्वीकृति योग्य अनुदान की अधिकतम राशि 42 लाख रु. होगी। और अनुदानग्राही संगठन की बराबर की हिस्सेदारी 28 लाख रु. होगी।
यदि परियोजना की अनुमोदित लागत 60 लाख रु. है तो संस्वीकृति योग्य अनुदान की अधिकतम राशि 25 लाख रु. होगी और अनुदानग्राही संगठन की बराबर की हिस्सेदारी 35 लाख रु. होगी।
यदि परियोजना की अनुमोदित लागत 40 लाख रु. है तो संस्वीकृति योग्य अनुदान की अधिकतम राशि 24 लाख रु. होगी और अनुदानग्राही संगठन की बराबर की हिस्सेदारी 16 लाख रु. होगी।
3. भूमि की लागत (प्राप्तकर्ता संगठन द्वारा अदा की गई वास्तविक धनराशि, न कि बाजार मूल्य) तथा संगठन द्वारा वहन किए गए विकास प्रभार को बराबर हिस्सेदारी के रूप में माना जाएगा।
4. संगठन द्वारा आवेदन की तारीख से एक वर्ष के भीतर निर्माण/भूमि व भवन के विकास तथा फिक्सचर्स व फिटिंग पर पहले से किए गए व्यय को भी बराबर हिस्सेदारी की राशि माना जाएगा। संगठन इस संबंध में किए गए व्यय का सनदी लेखाकार द्वारा विधिवत् रूप से प्रमाणित लेखा-जोखा प्रस्तुत करेगा।
5. यदि बाद में परियोजना की लागत बढ़ जाती है तो भारत सरकार की देयता मूलतः स्वीकृत राशि तक सीमित होगी और अतिरिक्त सम्पूर्ण व्यय, अनुदानग्राही संगठन द्वारा अपने संसाधनों से पूरा किया जाएगा।
6. परियोजना प्रस्ताव पर विचार किए जाने तथा कतिपय राशि के लिए उसे अनुमोदित किए जाने पर सामान्यतया परियोजना की समीक्षा और उसकी लागत बढ़ाने के लिए बाद में किसी भी अनुवर्ती अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
7. वित्तीय सहायता की मंजूरी की वैधता, प्रथम किस्त जारी होने की तारीख से 3 वर्ष की होगी और सभी परियोजनाएं 3 वर्ष की अवधि के भीतर पूरी की जानी अनिवार्य हैं।
1. संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय नाटय विद्यालय (एनएसडी) वार्षिक रूप से एनएसडी/मंत्रालय की वेबसाइटों पर स्कीम को अधिसूचित करेगा। स्कीम के पैरा 7 में उल्लिखित आवश्यक दस्तावेजों सहित विहित प्रपत्र में आवेदनों को निदेशक, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, बहावलपुर हाउस, प्लॉट न.1, भगवान दास रोड, नई दिल्ली-110001 को भेजे (आवेदक संगठन द्वारा राष्ट्रीय नाटय विद्यालय को प्रस्तुत आवेदन पत्र में किसी कमी की जानकारी सीधे निदेशक, एनएसडी को प्रस्तुत की जाए) आवेदन के साथ नीचे खण्ड (पैरा) 7 के तहत उल्लिखित सभी दस्तावेज संलग्न किए जाने अनिवार्य हैं। इन अनिवार्य दस्तावेजों के बिना प्राप्त किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा और उसे प्रेषक को लौटा दिया जाएगा।
आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न किए जाने चाहिएः
1. परियोजना रिपोर्ट/प्रस्ताव जिसमें निम्नलिखित शामिल होंगे :
क. संगठन की रूपरेखा जिसमें संगठन, इसकी क्षमताओं, उपलब्धियों तथा गत तीन वर्षों के इसके कार्यकलापों के वर्ष-वार ब्यौरे का विवरण हो।
ख. परियोजना/प्रस्ताव की तर्कसंगतता/औचित्य सहित इसका विवरण।
ग. लागत प्राक्कलन (भवन/उपस्कर/सुविधाओं) का सार।
घ. वित्त/निधियों के स्रोत।
च. समापन उपरान्त-संगठन किस प्रकार परियोजना के माध्यम से सृजित सुविधा के प्रचालन व अनुरक्षण का संचालन करेगा और आवर्ती अनुरक्षण/प्रचालन लागत को पूरा करेगा।
2. सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 या अन्य संगत अधिनियमों के तहत पंजीकरण प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि।
3. संगठन के नियमों व विनियमों, यदि कोई हों, सहित इसके संगम ज्ञापन (या न्यास विलेख) की प्रतिलिपि।
4. प्रबंधन बोर्ड के वर्तमान सदस्यों/पदाधिकारियों/न्यासियों की सूची जिसमें प्रत्येक सदस्य का नाम व पता हो।
5. गत तीन वित्त वर्षों के वार्षिक लेखाओं (सनदी लेखाकार/सरकारी लेखा परीक्षक द्वारा विधिवत रूप से । प्रमाणित/संपरीक्षित) की प्रतिलिपियां।
6. स्वामित्व विलेख (पंजीकृत हस्तांतरण विलेख, उपहार विलेख, पट्टा विलेख आदि) जिसमें निम्नलिखित का उल्लेख हो :
क. परियोजना की भूमि/भवन पर आवेदक संगठन का स्वामित्व और इस आषय की पुष्टि कि उक्त सम्पत्ति का इस्तेमाल वाणिज्यिक, संस्थागत या शैक्षिक प्रयोजन से किया जा सकता है। निर्मित स्थल की खरीद के प्रस्ताव के मामले में आबंटन पत्र/विक्रय करार की प्रतिलिपि प्रस्तुत की जाए।
ख. भूमि/भवन की लागत यदि स्वामित्व विलेख में भूमि/भवन की लागत का उल्लेख नहीं किया गया है तो लागत के समर्थन में संगत दस्तावेज संलग्न किए जाएं।
7. समुचित नागरिक निकाय/स्थानीय प्राधिकारी (नगर-पालिका, पंचायत, विकास प्राधिकरण, सुधार न्यास आदि) द्वारा विधिवत् रूप से अनुमोदित भवन/विकास योजनाओं की प्रतिलिपि । निर्मित स्थल की खरीद के प्रस्ताव के मामले में सक्षम नागरिक निकाय/स्थानीय प्राधिकारी द्वारा विधिवत् रूप से अनुमोदित/जारी नक्षा योजना तथा निर्माण सम्पूर्ण प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया जाए।
8. पंजीकृत वास्तुविद द्वारा विधिवत् रूप से अनुमोदित लागत प्राक्कलन (भवन/उपस्कर) जो यह प्रमाणित करेगा कि :
क. मात्राएं, परियोजना की ढांचागत अपेक्षाओं के अनुरूप हैं।
ग. लागत प्राक्कलन तर्क संगत हैं।
9. इस आषय के दावे के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य कि संगठन ने अपनी बराबर की हिस्सेदारी प्राप्त कर ली है या इसे प्राप्त करने के प्रबंध कर लिए हैं अर्थात् बैंक विवरण, परियोजना पर किए जा चुके खर्च का प्रमाण पत्र (ब्यौरे के साथ, जो सनदी लेखाकार द्वारा विधिवत् रूप से प्रमाणित हो) ऋण मंजूरी पत्र, परियोजना के लिए निधियों की मंजूरी दर्षाने वाला राज्य सरकार/संघ राज्य प्रषासन/स्थानीय निकाय आदि का पत्र।
10. संगठन के प्रबंधन बोर्ड/कार्यकारी बोर्ड/षासी निकाय का संकल्प (निर्धारित प्रपत्र में) जिसमें संगठन की ओर से अनुदान हेतु आवेदन, बंध-पत्र आदि पर हस्ताक्षर करने के लिए किसी व्यक्ति को प्राधिकृत किए जाने का उल्लेख हो।
11. निर्धारित मूल्य राशि के स्टाम्प पेपर पर मांगी गई सहायता का बंध-पत्र (निर्धारित प्रपत्र में)।
7.12 संगठन के बैंक खाते का ईसीएस ब्यौरा दर्षाने वाला बैंक प्राधिकार पत्र (निर्धारित प्रपत्र में) ।
नोट :
i. आवेदक संगठन, अपने प्रस्ताव के समर्थन में ऐसा कोई भी अन्य दस्तावेज संलग्न कर सकता है जो वह प्रस्तुत करना चाहे (अर्थात् राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय सरकारी निकाय या अकादमी से प्रमाण-पत्र या संस्तुति पत्र, वार्षिक रिपोर्ट, प्रेस क्लिपिंग/समीक्षाएं, कार्य आबंटन पत्र, संबद्धता पत्र आदि)।
ii. जहां कहीं दस्तावेज क्षेत्रीय भाषा में हैं, उनका अंग्रेजी व हिन्दी रूपान्तरण भी उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है।
iii. जहां कहीं कतिपय दस्तावेज की प्रतिलिपियां प्रस्तुत की जा रही हों, उन्हें किसी राजपत्रित अधिकारी या नोटरी पब्लिक द्वारा विधिवत् रूप से सत्यापित कराया जाना चाहिए।
iv. मंच कलाओं को समर्पित सरकार द्वारा प्रायोजित निकायों, विश्वविद्यालय विभागों या केन्द्रों और कॉलेजों के मामले में बिंदु 7.2 से 7.10 पर विनिर्दिष्ट दस्तावेजों में से केवल ऐसे दस्तावेजों को उपलब्ध कराए जाने की आवष्यकता है जो आवेदक संगठन से संबंधित हों।
1. संस्कृति मंत्रालय में प्राप्त सभी आवेदनों की, संस्कृति मंत्रालय के मंचकला प्रभाग द्वारा उपर्युक्त अपेक्षाओं के अनुसार पूर्णता की दृष्टि से जांच की जाएगी। अधूरे आवेदनों (उपरोक्त खंड सं0 7 के अंतर्गत उल्लिखित अपेक्षित दस्तावेजों के बिना) पर विशेषज्ञ समिति द्वारा मूल्यांकन हेतु आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
2. मूल्यांकन समिति द्वारा मूल्यांकन से पहले, जहां कहीं समिति ऐसा चाहे, आवेदनों की, संस्कृति मंत्रालय के अधीन किसी संगठन या इस प्रयोजनार्थ नियुक्त किसी विशेषज्ञ समूह या किसी एजेंसी की सहायता से सत्यापन पूर्व जांच भी की जा सकती है। वैकल्पिक तौर पर इससे पहले प्रस्ताव के मामले विषेष में या स्थायी व्यवस्था के बतौर किसी समतुल्य समूह (पीयर ग्रुप) द्वारा मूल्यांकन कराया जा सकता है। ऐसे पूर्व सत्यापन या पूर्व मूल्यांकन का प्रयोजन आवेदन करने वाले संगठन की प्रतिष्ठा व क्षमताओं तथा परियोजना की सुयोग्यता का आन्तरिक मूल्यांकन करना होगा।
3. सभी तरह से पूर्ण आवेदन पर विशेषज्ञ समिति द्वारा खेपों (बैचों) में विचार किया जाएगा, जिसे संस्कृति मंत्रालय द्वारा । गठित किया जाएगा और समिति, अनुदान हेतु प्राप्त आवेदनों की संख्या के आधार पर वर्ष के दौरान समय-समय पर बैठक करेगी।
4. विशेषज्ञ समिति निम्नलिखित के विषेष सन्दर्भ में प्रत्येक परियोजना प्रस्ताव के गुणावगुण के संबंध में उसका मूल्यांकन करेगी :
क. क्या आवेदक संगठन संबंधित क्षेत्र में सुप्रतिष्ठित है और उसकी एक अपनी पहचान है।
ख. क्या प्रस्ताव की संकल्पना सु-विचारित है;
घ. क्या परियोजना पूरी करने के लिए संगठन की अपनी बराबर की हिस्सेदारी जुटाने की क्षमता है या इसने इसकी व्यवस्था की है (जहां आवेदक संगठन ने बराबर की हिस्सेदारी की सम्पूर्ण राशि पहले ही खर्च कर दी है, उस मामले में इस अपेक्षा को पूरा किया मान लिया जाएगा)।
5. विशेषज्ञ समिति में मंच कलाओं व संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों के कलाकार शामिल होंगे और इसमें वास्तुविद, सिविल इंजीनियर तथा प्रकाष/ध्वनि/मंच षिल्प में तकनीकी विशेषज्ञ तथा साथ ही संस्कृति मंत्रालय के संबंधित अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।
1. परियोजना प्रस्ताव का अनुमोदन होने पर, मंत्रालय इस निर्णय की सूचना, संबंधित संगठन को देगा जिसमें परियोजना की कुल अनुमोदित लागत, मंजूर की गई सहायता की मात्रा, संगठन की बराबर की हिस्सेदारी की मात्रा तथा सहायता की संस्वीकृत राशि जारी करने संबंधी अन्य शर्तों का उल्लेख होगा।
2. संस्वीकृति पत्र में उस भवन/उपस्करों को भी विनिर्दिष्ट किया जाएगा जिनके लिए सहायता मंजूर की गई है।
3. सहायता की संस्वीकृत राशि निम्नलिखित तरीके से किस्तों में जारी की जाएगी।
3.1 प्रथम किस्त : संस्वीकृत सहायता की 40 प्रतिषत राशि की प्रथम किस्त, बिना किसी और पत्राचार के मंत्रालय द्वारा परियोजना प्रस्ताव के अनुमोदन/संस्वीकृति पर जारी की जाएगी।
3.2 दूसरी किस्त : संस्वीकृत अनुदान की 30 प्रतिषत राशि की दूसरी किस्त निम्नलिखित प्रस्तुत किए जाने पर जारी की जाएगी :
क. किसी पंजीकृत वास्तुविद से परियोजना के संबंध में वास्तविक व वित्तीय प्रगति की रिपोर्ट जिसमें स्थल के फोटो सहित पहले से पूरे किए गए कार्य का ब्यौरा हो।
ख. पंजीकृत वास्तुविद से निम्नलिखित आषय का प्रमाण पत्र किः परियोजना कार्य, अनुमोदित योजना के अनुसार पूरा किया गया है/चल रहा है; स्थानीय कानूनों या निर्माण/विकास की अनुमोदित योजना का उल्लंघन नहीं किया गया है; किया गया कार्य संतोषजनक स्तर का है; और यह दर्षाया गया हो कि, किए गए कार्य की लागत का मूल्यांकन और परियोजना कार्य पूरा करने के लिए आगे और राशि अपेक्षित है। ग. सनदी लेखाकार द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित परियोजना के लेखाओं का संपरीक्षित विवरण।
घ. सनदी लेखाकार द्वारा उपयोग प्रमाण-पत्र, जिसमें प्रमाणित किया गया हो कि सहायता राशि की दूसरी किस्त पूरी तरह परियोजना पर खर्च की गई है।
ङ. सनदी लेखाकार का एक प्रमाण-पत्र जिसमें प्रमाणित किया गया है कि संगठन ने अपनी बराबर की हिस्सेदारी का 40 प्रतिषत खर्च कर दिया है।
3.3 अंतिम किस्त : संस्वीकृत अनुदान के 30 प्रतिषत राशि के बराबर अंतिम किस्त निम्नलिखित प्रस्तुत किए जाने के बाद जारी की जाएगी :
3.3.1 अनुदानग्राही संगठन ने निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत किए :
क. किसी पंजीकृत वास्तुविद से परियोजना के संबंध में वास्तविक व वित्तीय प्रगति की रिपोर्ट जिसमें स्थल के फोटो सहित पहले से पूरे किए गए कार्य का ब्यौरा हो।
ख. पंजीकृत वास्तुविद से निम्नलिखित आषय का प्रमाण पत्र : परियोजना कार्य, अनुमोदित योजना के अनुसार पूरा किया गया है/ चल रहा है, स्थानीय कानूनों या निर्माण/विकास की अनुमोदित योजना का उल्लंघन नहीं किया गया है; किया गया कार्य संतोषजनक स्तर का है; और यह दर्षाता है कि, किए गए कार्य की लागत का मूल्यांकन और परियोजना कार्य पूरा करने के लिए आगे और राशि अपेक्षित है।
ग. सनदी लेखाकार द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित परियोजना के लेखाओं का संपरीक्षित विवरण।
घ. सनदी लेखाकार द्वारा उपयोग प्रमाण-पत्र, जिसमें प्रमाणित किया गया हो कि सहायता राशि की दूसरी किस्त पूरी तरह परियोजना पर खर्च की गई है।
ङ. सनदी लेखाकार का प्रमाण-पत्र, जिसमें प्रमाणित किया गया है कि संगठन ने अपनी बराबर की हिस्सेदारी का 70 प्रतिषत खर्च कर दिया है।
3.3.2 संस्कृति मंत्रालय ने अपने प्रतिनिधियों) के माध्यम से परियोजना का वास्तविक रूप से निरीक्षण करा लिया है। परियोजना की प्रकृति और आकार के आधार पर, मंत्रालय ऐसी फील्ड जांच के लिए, मंत्रालय से अथवा इसके संगठनों से और/अथवा विभिन्न कार्यालयों/षाखाओं से लिए गए अधिकारियों और/या विषेषज्ञों के एक दल को प्रतिनियुक्त कर सकता है, अथवा यह निरीक्षण करने के लिए अन्य पक्ष की सेवाएं ले सकता है।
टिप्पणीः यदि आकलित निधियों की अंतिम मांग, अनुमोदित परियोजना लागत से कम है अथवा संगठन द्वारा बराबर की हिस्सेदारी की खर्च की गई राशि अनुमोदित परियोजना लागत के 40 प्रतिषत से कम है, तो अनुदान की अंतिम किस्त की राशि उसी के अनुरूप कम कर दी जाएगी।
4. 25.00 लाख रू. तक को प्रस्तावों का विशेषज्ञ समिति की सिफारिष पर संबंधित संयुक्त सचिव द्वारा अनुमोदित किया जाएगा और 25.00 लाख रू. से अधिक एवं 50.00 लाख रू. तक के प्रस्ताव सचिव (संस्कृति) के स्तर पर अनुमोदित किए जाएंगे।
1. भारत सरकार द्वारा जारी अनुदानों के लिए अलग खाता रखना होगा।
2. परियोजना के खाते और स्थल, संस्कृति मंत्रालय के प्रतिनिधि द्वारा किसी भी समय जांच के लिए तैयार होने चाहिए।
3. यदि परियोजना, पहली किस्त के जारी होने की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर पूरी नहीं की जाती है तो, संगठन को आगे कोई अनुदान जारी नहीं किया जाएगा तथा उक्त दावा काल-बाधित हो जाएगा।
4. संगठन के खाते, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक अथवा अपने विवेक से उनके द्वारा नामिती द्वारा किसी भी समय लेखा-परीक्षा के लिए तैयार होने चाहिए।
5. अनुदान अथवा उसके बाद किसी किस्त के जारी होने के वित्तीय वर्ष की समाप्ति के छः महीने के भीतर अनुदानग्राही, अगले वर्ष में भारत सरकार को अनुमोदित परियोजना पर किए गए व्यय को दर्षाने वाला सनदी लेखाकार द्वारा संपरीक्षित लेखा तथा प्रमाणित विवरण तथा भारत सरकार के अनुदान की उपयोगिता को दर्षाने वाला उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेगा। यदि उक्त अवधि के भीतर उपयोग प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो अनुदानग्राही को भारत सरकार की मौजूदा ब्याज दर पर ब्याज सहित प्राप्त कुल अनुदान राशि को तुरंत वापिस करना होगा, बशर्ते कि भारत सरकार द्वारा विषेष रूप से छूट न दी गई हो।
क. यदि परियोजना में नया निर्माण शामिल है, यथोचित नागरिक प्राधिकारी को भेजी गई भवन निर्माण पूरा होने की सूचना की प्रति अथवा इसके द्वारा जारी सम्पूर्णता प्रमाण पत्र, और पूर्व-निर्मित स्थल की खरीद वाली परियोजनाओं के मामले में, भवन निर्माता/विक्रेता को किए गए सभी भुगतानों की रसीदों, स्वामित्व पत्र और पंजीकरण/मालिकाना शपथ-पत्र की प्रतियां।
ख. वास्तुकार से परियोजना पूरी करने संबंधी रिपोर्ट।
ग. सनदी लेखाकार से प्रमाण पत्र कि संगठन ने अपनी बराबर की हिस्सेदारी की पूर्ण राशि खर्च कर दी है।
7. भारत सरकार के अनुदान पूर्णरूपेण अथवा मुख्य रूप से अधिगृहीत स्थायी और अर्ध-स्थायी परिसंपत्तियों का एक रजिस्टर निर्धारित फार्म (फार्म-जीएफआर-19) में तैयार किया जाना चाहिए। अनुदानग्राही को इस रजिस्टर की एक प्रति प्रतिवर्ष संस्कृति मंत्रालय को प्रस्तुत करनी चाहिए।
8. अनुदानग्राही दो जमानतदारों के साथ निर्धारित प्रपत्र में भारत के राष्ट्रपति के नाम इस आषय का बंध पत्र निष्पादित करेगा कि वह अनुदान की शर्तों का पालन करेगा। उसके द्वारा अनुदान की शर्तों का पालन न किए जाने या बंध-पत्र का उल्लंघन किए जाने की स्थिति में अनुदान प्राप्तकर्ता और जमानती अलग-अलग या मिलकर भारत के राष्ट्रपति को भारत सरकार की वर्तमान उधार दर पर ब्याज सहित अनुदान की समूची राशि लौटाएगा।
9. केन्द्रीय सहायता से अधिगृहीत भवनों व अन्य परिसम्पत्तियों पर प्रथम पुनर्ग्रहणाधिकार भारत के राष्ट्रपति का होगा और भारत सरकार की पूर्व अनुमति के बिना भवन या उपस्कर को किसी अन्य पक्ष को पट्टे पर नहीं दिया जाएगा या उसे गिरवी नहीं रखा जाएगा। तथापि, इस प्रकार अधिगृहीत स्टूडियो थिएटर या अन्य सुविधाओं को अस्थायी इस्तेमाल हेतु किसी अन्य पक्ष को पट्टे पर देने का प्रावधान इस शर्त से मुक्त होगा।
11 अनुदानग्राही संगठन, इस स्कीम के तहत विकसित स्टूडियो/थिएटर/सांस्कृतिक स्थल में समुचित रूप से मंत्रालय । का नाम लिखकर भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय की वित्तीय सहायता का आभार प्रकट करेगा।
12. केवल अनुदानग्राही, भवनों के निर्माण या भूमि और भवनों के उपयोग संबंधी स्थानीय क्षेत्र में यथा लागू कानूनों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार होगा।
13. ऐसी अन्य शर्ते जो भारत सरकार समय-समय पर लागू करे।
14. संगठनों द्वारा उनके इलाके के किसी भी स्कूल में कम से कम 2 कार्यकलाप (कार्यक्रम, व्याख्यान, सेमिनार, कार्यशाला, प्रदर्शनी आदि), अनिवार्य रूप से आयोजित किए जाएं। स्कूल के प्रधानाचार्य से इस आषय का प्रमाण पत्र, दूसरी किस्त जारी करने हेतु अनिवार्य रूप से आयोजित होगी।
सामान्यतया पूर्व की सांस्कृतिक संगठनों को भवन अनुदान स्कीम के तहत स्वीकृत किए गए मामलों को फिर से नहीं खोला जाएगा और न ही सामान्यतया इस स्कीम के प्रावधानों के तहत संस्वीकृत राशि को बढ़ाया जाएगा परन्तु भवन अनुदान के ऐसे मामले में वितरण हेतु लंबित किस्तों को, अनुदानग्राही संगठन के अनुरोध पर, विभिन्न किस्तें जारी करने के लिए पद्धति व इस स्कीम के तहत परिकल्पित दस्तावेजी अपेक्षाओं का पालन करके जारी किया जाएगा। तथापि, ऐसे मामलों में जब कोई किस्त जारी नहीं की गई हो तो अनुदानग्राही संगठन पूर्व स्वीकृति को रद्द करने व इस स्कीम के तहत उसकी परियोजना पर नए सिरे से विचार करने का अनुरोध कर सकता है। विगत के मामलों में जब पूरा संस्वीकृत अनुदान जारी नहीं किया गया हो। और परियोजना अधूरी पड़ी हो तथा अनुदानग्राही संगठन अपने मामलों की समीक्षा तथा इस स्कीम के तहत संस्वीकृत अनुदान को बढ़ाने की मांग करे तो मामला-दर-मामला आधार पर निर्णय किया जाएगा।
1. आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-97) में राज्य सरकारों/ राज्य प्रायोजित निकायों को बहुउद्देशीय सांस्कृतिक परिसरों (एम पी सी सी) की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता अनुदान स्कीम शुरू की गयी थी जिसका उद्देश्य सृजनात्मक कार्यो के सर्वोत्तम स्वरूप को दर्शाने और समाज में कलात्मक और नैतिक रूप से जो अच्छा है, उसके लिए उन्हें संवेनदशील बनाते हुए अपने युवाओं के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। संगीत नृत्य, नाटक, साहित्य, ललित कला आदि जैसे विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्रों में समन्वय और प्रोत्साहन देने के लिए स्कीम के तहत राज्यों में सांस्कृतिक परिसरों की स्थापना की गयी थी। स्कीम में जैसा प्रावधान किया गया था, राज्य अथवा उस स्थान में मौजूद सुविधाओं, सम्बंधित सांस्कृतिक विभागों की वित्तीय स्थिति, अनुदान के समान निधि उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता और बहुउद्देश्यीय सांस्कृतिक परिसरों के आवर्ती व्यय को ध्यान में रखते हुए एक सलाहकार समिति द्वारा राज्य सरकारों के अनुरोध पर विचार किया गया। इस स्कीम के तहत अधिकतम 1.00 करोड़ रूपये का अनुदान उपलब्ध कराया गया बशर्ते राज्य सरकार द्वारा समान अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जाने वाली परियोजना लागत का 50 प्रतिशत हो।
2. विगत निष्पादनों को ध्यान में रखते हुए स्कीम की समीक्षा की गयी थी और स्कीम में रखे गये मानदण्डों को वर्ष 2004 में संशोधित किया गया था। संशोधित स्कीम बहुउद्देशीय सांस्कृतिक परिसरों की दो श्रेणियों (i और ii) के लिए उपलब्धकराई गयी। श्रेणी 1 के लिए परियोजना की लागत 5.00 करोड़ रूपये तथा श्रेणी ii के लिए 2.00 करोड़ रुपए थी।
3. 10वीं योजना के अंत में योजना आयोग द्वारा स्कीम को बंद करने से पूर्व विभिन्न राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों में कुल 49 बहुउद्देशीय सांस्कृतिक परिसरों को सहायता दी गयी थी। परिणाम स्वरूप, 11वीं योजना के मध्य अवधि मूल्यांकन के दौरान योजना आयोग स्कीम को समुचित सुधारों के साथ पुनः संचालित करने पर सहमत हुआ।
4. गुरूदेव रबीन्द्रनाथ टैगेर की 150वीं जयन्ती समारोह मनाने के लिए गठित प्रधानमंत्री के अधीन राष्ट्रीय समिति और वित्त मंत्री के तहत स्थापित राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति ने सम्बंधित विकास के मामले में अनुभव किया है कि 1961 में गुरू रबीन्द्रनाथ टैगोर के शताब्दी समारोह के अवसर पर शुरू किये गये राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के एक भाग के रूप में केन्द्रीय सहायता से पूरे देश में सृजित बड़ी संख्या में रबीन्द्र भवनों, सदनों, रंगशालाओं, मंचों, और अन्य सांस्कृतिक केन्द्रों के नवीकरण, उन्नयन और विस्तार किए जाने की आवश्यकता है। ये केन्द्र 30वर्षों से अधिक समय से संचालन में रहे हैं। और समाज की अच्छी तरह सेवा की है।
5. टैगोर की 150वीं जयंती समारोह के भाग के रूप में यह निर्णय लिया गया कि वर्तमान रबीन्द्र भवनों का पुनर्निर्माण/नवीनीकरण/उन्नयन/आधुनिकीकरण/ विस्तार किया जाय और संषोधित एम पी सी सी स्कीम की रूपरेखा के अनुसार जिन राज्य की राजधानियों और अन्य शहरों में ऐसे परिसर नहीं हैं वहां भी नये सांस्कृतिक परिसरों का निर्माण किया जाय। इसलिए पहले की एम पी सी सी स्कीम को दिनांक 07.05.2011 से टैगोर सांस्कृतिक परिसर (टीसीसी) के नाम से नवीकृत और पुनरांरभ करने का निर्णय लिया गया ताकि अलग-अलग पैमाने पर नये सांस्कृतिक परिसरों की स्थापना करने और सुगम बनाने के अलावा वर्तमान रबीन्द्र सभागारों के उन्नयन, आधुनिकरण और सुधार से इन्हें आधुनिकतम सांस्कृतिक परिसरों के रूप में बदला जा सके।
6. इसकी शुरूआत से, राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति की दो बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं जिनमें कमशः 29 और 38 प्रस्तावों पर विचार किया गया।
7. संस्कृति मंत्रालय यह भी महसूस करता है कि देश में कला संबंधी अवसंरचना में गंभीर अभाव की स्थिति है। इस अभाव को इस स्कीम के माध्यम से निधियां उपलब्ध करवाकर कम किया जाना चाहिए क्योंकि यह स्कीम विशिष्ट रूप से मंच कलाओं और सामान्य रूप से कला एवं संस्कृति के प्रचार और संवर्धन से सीधे जुड़ी हुई है। इस प्रयोजन से, भारत सरकार उक्त टैगोर सांस्कृतिक परिसर (टीसीसी) स्कीम को जारी रखने पर विचार कर रही है जो साधारणतया कला के संवर्धन हेतु लगभग सभी प्रयोजनों के लिए एक बड़े पैमाने पर मंच प्रदान करवाने से संबंधित है। इस स्कीम का उद्देश्य विद्यमान स्थानों के स्तरोन्नयन के साथ-साथ हर प्रकार के नए स्थानों का सृजन करना है। इससे पूरे देश में कलाओं के संवर्धन को प्रोत्साहन मिलेगा। चूंकि इसमें से बहुत सा कार्य लोक क्षेत्र से बाहर किया जा रहा है, अतः गैर-लाभार्थी संगठनों और ऐसे ही निकायों को स्कीम के तहत पात्र आवेदकों में शामिल किया गया है। यह भी महसूस किया गया है कि पूर्व एमपीसीसी स्कीम के अधीन देश में कई परियोजनाओं को भी विद्यमान एमपीसीसी, रबीन्द्र भवनों सदनों रंगशालाओं के स्तरोन्नयन के साथ-साथ विद्यमान भौतिक सुविधाओं के पुनरूद्धार, नवीकरण, विस्तार, परिवर्तन, स्तरोन्नयन, आधुनिकीकरण आदि के लिए अवसंरचना हेतु कुछ निधियों की आवश्यकता है।
8. इन आवश्यकताओं को वृहत, वैविध्यपूर्ण टीसीसी स्कीम में तदनुसार शामिल कर लिया गया था। अनुदान प्राप्तकर्ता राज्य सरकारों / संघ प्रदेश प्रशासनों / गैर लाभार्थी संगठनों के लिए आवश्यक स्टेक (40 प्रतिशत) का भी प्रावधान किया गया है ताकि उनकी संपूर्ण सहभागिता और समर्पण तथा परियोजना का बौद्धिक स्वामित्व सुनिश्चित किया जा सके।
1. इस स्कीम का रीविजिटिड स्वरूप टैगोर सांस्कृतिक परिसर के रूप में जाना जायेगा जो संगीत, नाटक, नृत्य, साहित्य,ललित कला आदि जैसे विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्रों में राज्य में कार्यकलापों को प्रोत्साहन और समन्वय प्रदान करना जारी रखेगा और उनके माध्यम से देश की सांस्कृतिक एकता को संवर्धित करेगा तथा युवा पीढ़ी को सृजनात्मक अभिव्यक्ति और ज्ञान के लिए मार्ग उपलब्ध करायेगा।
2. ये सांस्कृतिक परिसर मंच अभिनय (नृत्य, नाटक और संगीत ), प्रदर्शनियों सेमिनारों, साहित्यिक कार्यकलापों, फिल्म प्रदर्शन आदि के लिए सुविधाओं तथा आधारभूत संरचना के साथ कला और संस्कृति के सभी स्वरूपों के लिए उत्कृष्ट केन्द्रों के रूप में कार्य करेंगे। इसलिए ये मूल टैगोर सभागार स्कीम से परे कार्य करने के लिए अभिप्रेत हैं और सृजनात्मकता तथा सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में बहुआयामी रूचियों को प्रोत्साहन देंगे।
स्कीम के तहत निम्नलिखित को वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी :
1. राज्य सरकार/ संघ राज्य प्रशासन;
2. राज्य सरकार/संघ राज्य प्रशासनों द्वारा स्थापित अथवा प्रायोजित निकाय ;
3. केन्द्र सरकार अथवा इसके अधीन संगठनों द्वारा स्थापित अथवा प्रायोजित निकाय ;
5. परियोजना की स्थापना और संचालन करने में सक्षम ऐसे गैर लाभकारी प्रतिष्ठित संगठन जो उपलब्ध कराई गयी परियोजना की लागत का 40 प्रतिशत अपने समभाग के रूप में जुटा सकें और आवर्ती लागत को पूरा कर सकें। ये संगठन केन्द्र सरकार अथवा सम्बंधित राज्य सरकार/संघ शासित सरकार की उपयुक्त एजेंसी द्वारा निरीक्षित तथा अनुशंसित रहे हों और निम्नलिखित मानदण्डों को पूरा करते हों : क) ऐसा संगठन जो सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम (1860 का xxi) अथवा समान अधिनियमों के तहत या न्यास अथवा गैर-लाभार्थी कम्पनी के रूप में कम से कम तीन वर्षों की अवधि के लिए एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत है।
ख) जिसका घोषणापत्र मूलरूप से भारतीय कला और संस्कृति के परिरक्षण, प्रसार और संवर्धन के लिए समर्पित है।
ग) संगठन की प्रमुख रूप से सांस्कृतिक रूपरेखा हो तथा कम से कम तीन वर्षों से नृत्य, नाटक, रंगमंच, संगीत, ललित कला, भारतविद्या और साहित्य जैसे क्षेत्रों में कला और संस्कृति के सम्वर्धन के लिए मूल रूप से कार्य कर रहा हो।
घ) संगठन पूर्णतया स्थापित हो और अपने कार्यकलापों के क्षेत्र में अर्थपूर्ण कार्य करने के लिए जाना जाता हो तथा स्थानीय, क्षेत्रीय अथवा राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और प्रतिष्ठा/स्थायित्व रखता हो।
निम्नलिखित प्रकृति की परियोजनओं को वित्तीय सहायता दी जायेगी :
1. नये टैगोर सांस्कृतिक परिसर टीसीसी जिला/नगर परिसरों जिनमें लघु प्रेक्षागृह अथवा ओपन एयर एम्फीथियेटर अथवा इंप्रोवाइज्ड मंच के अलावा प्रत्येक परियोजना में सभागार शामिल है। टीसीसी एक बहु उद्देशीय सांस्कृतिक परिसर होगा किंतु किसी विशेष परियोजना में सुविधाएं उपलब्ध कराना स्थानीय आवश्यकताओं तथा सांस्कृतिक लोकाचार पर निर्भर करेगा। आदर्शतः इस स्कीम के उद्देश्यों के लिए टी सी सी का लक्ष्य निम्नलिखित आधुनिक सुविधाएं और आधारभूत संरचना प्राप्त करना है :
के सभागारों का एक समूह) जिसमें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार बैठने की उपयुक्त क्षमता हो, का प्रयोग व्याख्यानों, फिल्म प्रदर्शनों आदि के लिए केन्द्र के रूप में भी किया जा सकता है।
(ख) सेमिनारों, सम्मेलनों कार्यशालाओं आदि के लिए विभिन्न क्षमताओं वाले कक्ष।
(च) आगन्तुक कलाकारों के लिए शयनागार।
(छ) कला और छायाचित्रण के लिए प्रदर्शनी क्षेत्र।
(ज) पुस्तकालय/अध्ययन कक्ष ।
(झ) कार्यालय, कैफेटेरिया/भोजन-प्रबंध, शौचालय, स्वागत कक्ष/प्रतीक्षालय, पार्किंग आदि के लिए सामान्य सुविधाएं ।
(क) रवीन्द्र भवनों सदनों रंगशालाओं,
(ग) अन्य प्रेक्षागृह/ सांस्कृतिक परिसरों के उन्नयन की परियोजना स्कीम में शामिल होगी और निम्नलिखित संघटकों के कोई अन्य अथवा उपयुक्त संयोजन शामिल हो सकते हैंः
(i) मौजूदा वास्तविक सुविधाओं का पुनरूद्धार, नवीकरण, विस्तार, परिवर्तन, उन्नयन और आधुनिकीकरण;
(iii) विद्युतीय, वातानुकूलन, ध्वनिक, प्रकाश एवं ध्वनि प्रणाली और अन्य मदों के उपकरण जैसे दृश्य/श्रव्य उपकरण, फर्नीचर (उपस्कार) तथा मंच सामग्री जैसी सुविधाओं का प्रावधान/उन्नयन।
3. स्वीकृत/जारी एमपीसीसी परियोजनाओं का समापन पहले की एम पी सी सी स्कीम के तहत स्वीकृत परियोजनाएं पुनःनहीं खोली जायेंगी न ही इस स्कीम के प्रावधानों के तहत स्वीकृत राशि को बढ़ाया जायेगा। तथापि, विशेषज्ञ समिति द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं के मामले में, स्कीम स्थगित होने से पूर्व अथवा जारी परियोजनाएं जिनमें भुगतान के लिए कोई किस्तें शेष हैं, उनको उपर्युक्त एमपीसीसी स्कीम के प्रावधानों और सीमा के अनुसार इस स्कीम के तहत केन्द्रीय सहायता का भुगतान जारी रहेगा।
1. भारत सरकार द्वारा वित्तीय सहायता की मात्रा परियोजना लागत के 60 प्रतिशत तक सीमित होगी।
2. प्राप्तकर्ता राज्य सरकार अथवा सम्बंधित संगठन से उसकी हिस्सेदारी के रूप में परियोजना लागत का 40 प्रतिशत योगदान अपेक्षित होगा। ऐसी हिस्सेदारी में जमीन की लागत/ कीमत शामिल नहीं होगी। सम्पर्क मार्ग के साथ विकसित भूमि सम्बंधित राज्य सरकार द्वारा मुफ्त उपलब्ध कराई जायेगी अन्यथा संगठन के पास अपने स्वामित्व की भूमि हो ।
3. किसी भी परियोजना के लिए स्कीम के तहत वित्तीय सहायता सामान्य रूप से अधिकतम 15 करोड़ रूपये तक होगी। विशेष योग्यता और प्रासंगिकता के बहुत दुर्लभ मामले में, वित्तीय सहायता 50 करोड़ रू0 तक बढ़ाई जा सकती है किन्तु तब 15 करोड़ रू0 से अधिक वित्तीय सहायता का ऐसा प्रत्येक व्यक्तिगत मामला नई योजना स्कीमों के लिए निर्धारित सामान्य मूल्यांकन/अनुमोदन तंत्र के अधीन होगा।
4. सभी आवर्ती व्यय राज्य सरकार अथवा संबंधित संगठन द्वारा वहन किये जायेंगे।
5. परियोजना लागत का 0.5 प्रतिशत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की तैयारी के लिए जारी किया जा सकता है।
1. संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) अपनी और मंत्रालय की वेबसाइटों के माध्यम से वार्षिक रूप से स्कीम अभिसूचित करेगा और सभी राज्य सरकारों एवं संघ शासित प्रदेशों को सीधे सूचना प्रेषित करेगा।
2. स्कीम के पैरा 8 में उल्लिखित आवश्यक दस्तावेज सहित निर्धारित प्रपत्र में आवेदन निदेशक, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, बहावलपुर हाउस, प्लॉट नं.1, भगवानदास रोड, नई दिल्ली-110001 को प्रस्तुत करें। (राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा आवेदक संगठन को आवेदन फार्म में कोई कमी पाए जाने पर, तत्संबंधी सूचना सीधे एनएसडी को ही उपलब्ध करवाई जाए)
3. नीचे अनुच्छेद 8 में बताये गये सभी दस्तावेज एवं जैसा लागू हो, आवेदन के साथ लगे हों। इन वांछित दस्तावेजों में से किसी एक के भी न होने पर आवेदन पर विचार नहीं किया जायेगा।
आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज लगे होने चाहिएं :
1. प्रस्तावित परियोजना की व्यवहार्यता रिपोर्ट के साथ परियोजना प्रस्ताव जिसमें निम्नलिखित शामिल हैंः
(क) भवन/विकास योजनाएं (वर्तमान/प्रस्तावित); लागत अनुमानों का सार (भवन, उपकरण, सुविधाएं आदि);
(ख) समभाग हेतु वित्त/ निधि के स्रोत ;
(ग) परियोजना की पूर्णता के लिए समय सीमा ;
(ड) अपने प्रस्ताव के एक समन्वित भाग के रूप में कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और अतिरिक्त पाठ्यक्रम संगठन द्वारा शामिल किया जाना चाहिए।
(ii) समभाग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्धता पत्र।
2.2 प्रतिष्ठित गैर-लाभकारी संगठनों द्वारा आवेदन के लिए :
(i) सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 अथवा अन्य सम्बद्ध अधिनियमों के तहत पंजीकरण के प्रमाण-पत्र की प्रति।
(ii) नियम-विनियम, यदि कोई हो, सहित संगठन के संघ (या न्यास विलेख) के ज्ञापन की प्रति।
(iii) प्रत्येक सदस्य के नाम और पते के साथ प्रबंधन बोर्ड के वर्तमान सदस्यों/ पदधारियों/न्यासियों की सूची।
(iv) पिछले तीन वित्तीय वर्षों के (सनदी लेखाकार/सरकारी लेखा परीक्षक द्वारा प्रमाणित/संपरीक्षित) वार्षिक लेखाओं की प्रति ;
(v) संगठन की रूपरेखा जिसमें कार्यालय का विवरण, इसकी सामर्थ्य, उपलब्धियों और पिछले तीन वर्षों से अधिक का इसके कार्य-कलापों का वर्ष-बार ब्यौरा;
(vi) आयकर अधिनियम की धारा XII ए, 80जी के तहत पैन कार्ड और पंजीकरण, यदि कोई हो;
(vii) आवेदक संगठन के नाम भूमि/भवन का स्वामित्व दर्शाने वाला स्वामित्व विलेख (रजिस्ट्रीकृत अभिहस्तांतरण विलेख, उपहार विलेख, पट्टा विलेख आदि) की प्रति जिसमें यह पुष्टि की गयी हो कि सम्पत्ति का उपयोग वाणिज्यिक/सांस्थानिक उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।
(viii) इस दावे के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य कि संगठन ने अपना समभाग जुटा लिया/प्रबंध कर लिया है अर्थात बैंक । विवरण, परियोजना पर पहले हुए व्यय का प्रमाण पत्र (सनदी लेखाकार द्वारा प्रमाणित वर्ष-वार विवरण सहित),ऋण स्वीकृति पत्र, अथवा परियोजना के लिए स्वीकृत की जाने वाली निधि सम्बंधी राज्य सरकार/संघ शासित सरकार, स्थानीय निकाय आदि का पत्र;
(ix) संगठन की ओर से अनुदान के लिए आवेदन, बंध-पत्र आदि पर हस्ताक्षर करने के लिए किसी व्यक्ति को प्राधिकृत करने वाले संगठन के प्रबंधन बोर्ड/ कार्यकारी बोर्ड/प्रशासकीय निकाय का संकल्प पत्र (निर्धारित प्रारूप में);
(xi) संगठन के बैंक खाते का ईसीएस ब्यौरा दर्शाने वाला बैंक का प्राधिकरण पत्र (निर्धारित प्रारूप में) ।
1. संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्राप्त सभी आवेदनों की दस्तावेजी आवश्यकतानुसार पूर्णता के लिए मंत्रालय द्वारा छानबीन की जायेगी। अपूर्ण आवेदन की जब तक कमियां (जैसे - उपर्युक्त अनुच्छेद 8 के तहत बताये गये अपेक्षित दस्तावेज के बिना) दूर नहीं की जाती, आगे कार्रवाई नहीं की जायेगी।
2. सभी तरह से पूर्ण आवेदनों/परियोजना प्रस्तावों का संस्कृति मंत्रालय (निम्न 9, 4 अनुच्छेद के तहत) द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति द्वारा निम्नलिखित के लिए जॉच की जायेगी :
क) योग्यता निर्धारण;
ग) परियोजना के लिए केन्द्रीय सहायता की राशि की सिफारिश करना।
3. राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति समय-समय पर बैठक करेगी और निम्नलिखित विशिष्ट संदर्भो सहित अपनी कसौटी पर परियोजना प्रस्ताव का मूल्यांकन करेगी :
क) क्या आवेदक संगठन क्षेत्र में पूर्णतया स्थापित है और इसकी अपनी एक निजी पहचान है;
ख) क्या प्रस्ताव पूर्णतया सुविचारित है;
घ) क्या संगठन के पास परियोजना को पूरा करने और पूर्णता के पश्चात, आवर्ती संचालन लागत को वहन करने के लिए अपने सम भाग की क्षमता है या प्रबंध कर चुका है। स्कीम के तहत नई परियोजना की स्वीकृति देते समय राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति भी विद्यमान परिसरों के सदुपयोग और उत्पादन का मूल्यांकन, नये परिसर के लिए वास्तविक जरूरतें तथा राज्य की जनसंख्या और आकार पर विचार करेगी।
4. संस्कृति मंत्रालय संयुक्त सचिव (संस्कृति) की अध्यक्षता में राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति (एन.ए.पी.) गठित करेगा। और इनमें संस्कृति मंत्रालय के अधिकारी, शहरी विकास (के.लो.नि.वि./हडको/रा.भ.नि. नि.स्कूल ऑफ प्लानिंग एण्ड आर्किटेक्चर) के प्रतिनिधि, कला और संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि कलाकार तथा बिजली/ध्वनि/मंच शिल्प के कम से कम एक तकनीकी विशेषज्ञ, जैसा उचित हो, को शामिल किया जायेगा।
5. केन्द्रीय सहायता प्राप्त करने वाले परियोजना प्रस्तावों की जांच एनएसी द्वारा की जाएगी तथा आंतरिक वित्त से परामर्श करके निधियां जारी की जाएंगी। परियोजना प्रस्तावों की जांच में, एनआईसी का सहयोग उसकी उप-समिति द्वारा किया जाएगा।
6. केन्द्रीय सहायता पाने वाले परियोजना प्रस्तावों की जॉच राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति द्वारा प्रथमतया सैद्धांतिक अनुमोदन और डीपीआर जमा करने पर तथा उसके आखिरी अनुमोदन हेतु डीपीआर प्रस्तुत करते समय किया जाएगा। समिति द्वारा अनुशंसित राशि आन्तरिक वित्त के परामर्श से मंत्रालय द्वारा जारी कर दी जायेगी।
7. 15 करोड़ रूपये से अधिक की केन्द्रीय सहायता पाने वाली परियोजना का संस्कृति मंत्रालय की पूर्व अनुमति से, इसके सैद्धांतिक अनुमोदन के लिए राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति द्वारा जॉच की जायेगी। डीपीआर जमा कराने पर इसका मूल्यांकन व्यावहारिक एस एफ सी/ ई एफ सी तंत्र के जरिये किया जायेगा और सक्षम प्राधिकारी अर्थात संस्कृति मंत्री के अनुमोदन पर आंतरिक वित्त के परामर्श से निधि जारी कर दी जायेगी। (ऐसी परियोजना के लिए विशेष अतिरिक्त निधि मंत्रालय को उपलब्ध कराने की आवश्यकता होगी)
8. राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति द्वारा परियोजना प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से अनुमोदन के पश्चात योजना आयोग के प्रारूप/दिशानिर्देशों के अनुसार जहां भी तैयार करना अपेक्षित होगा, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय आवेदक संगठन को निर्णय की सूचना देगा। इस उद्देश्य के लिए अस्थाई तौर से अनुमोदित परियोजना लागत का 0.5 : तक राशि संगठन के अनुरोध पर जारी की जा सकती है। डीपीआर जमा करने के अलावा आवेदक संगठन से प्रस्तुतीकरण भी मांगा जा सकता है।
9. तदनुसार सैद्धांतिक अनुमोदन अथवा अंतिम अनुमोदन से पूर्व राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति संस्कृति मंत्रालय या उसके संगठनों के अधिकारियो सहित विशेषज्ञों की उप-समिति तदर्थ समिति और अधिकारियों द्वारा अथवा इस उद्देश्य के लिए नियुक्त एक बाह्य स्रोत एजेंसी द्वारा मूल्यांकन/कार्यस्थल निरीक्षण/सत्यापन आदि कराने के लिए स्वतंत्र होगी।
डीपीआर के अनुमोदन पर मंत्रालय, परियोजना की अनुमोदित कुल लागत, स्वीकृत सहायता की मात्रा, संगठन के समभाग की मात्रा और सहायता की स्वीकृति राशि को जारी करने के लिए अन्य नियम व शर्ते दर्शाते हुए संगठन को निर्णय की सूचना देगा।
वित्तीय सहायता, सहायता की स्वीकृत राशि के 50 प्रतिशत की दो बराबर किस्तों में जारी की जायेगी।
1. स्वीकृत राशि की पहली किस्त डीपीआर तैयार करने के लिए जारी राशि, यदि कोई हो, को समायोजित करने के पश्चात संस्कृति मंत्रालय द्वारा डीपीआर के अनुमोदन के बाद जारी की जायेगी। किस्त जारी करने से पूर्व यह सुनिशचित किया जायेगा कि भवन योजना संबंधित नागरिक प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित कर दी गयी है।
2. स्वीकृत राशि की दूसरी किस्त निम्नलिखित दस्तावेजों को जमा कराने के पश्चात जारी की जायेगीः (क) स्थान के फोटोग्राफ के साथ पहले किये गये/पूर्ण किये गये कार्य का ब्यौरा देते हुए परियोजना की वास्तविक और वित्तीय प्रगति रिपोर्ट।
(ख) सनदी लेखाकार से जारी उपयोग प्रमाण-पत्र जिसमें यह प्रमाणित किया गया हो कि सहायता की पहली किस्त परियोजना के लिए पूर्णतया इस्तेमाल की गयी है।
(ग) आवेदक संगठन के इस वचनबंध के साथ कि यह परियोजना प्रथम किस्त जारी होने की तारीख से 3 वर्ष की अवधि के भीतर पूरी हो जाएगी।
(घ) सनदी लेखाकार द्वारा हस्ताक्षरित परियोजना के लेखे का संपरीक्षा विवरण जिसमें यह दर्शाया गया हो कि पहली किस्त और आनुपातिक सम भाग भी परियोजना के लिए इस्तेमाल किया गया है।
(ड.) राज्य लो.नि.वि./ के.लो.नि.वि. अथवा पंजीकृत वास्तुकार द्वारा जारी प्रमाण-पत्र जिसमें दर्शाया गया हो कि :
क) राज्य लो.नि.वि./के.लो.नि.वि. अथवा पंजीकृत वास्तुकार द्वारा जारी परियोजना पूर्णता रिपोर्ट।
ख) सनदी लेखाकार/सरकारी लेखापरीक्षक द्वारा प्रमाणित अन्तिम लेखा विवरण।
ग) दूसरी किस्त की राशि का सनदी लेखाकार द्वारा जारी उपयोग प्रमाण-पत्र ।
घ) संगठन ने अपने समभाग की सदृश राशि खर्च कर दी है इस आशय का सनदी लेखाकार द्वारा जारी प्रमाण-पत्र ।
ड.) उपयुक्त नागरिक प्राधिकरण द्वारा जारी पूर्णता प्रमाण-पत्र अथवा संगठन द्वारा जारी परियोजना की पूर्णता की नागरिक प्राधिकरण को सूचना देने वाले पत्र की प्रति (नये निर्माण के मामले में) ।
1. सांस्कृतिक परिसरों का संचालन और रख-रखाव सम्बंधित राज्य सरकार विभाग, निकाय, एजेंसी, स्वायत्तशासी संगठन अथवा गैर-लाभकारी संगठन द्वारा किया जायेगा। परियोजना के लिए उपलब्ध कराई गयी भूमि पंजीकृत सोसाइटी अथवा राज्य सरकार के संबंधित विभाग के नाम हस्तांरित होगी। केन्द्र सरकार सोसाइटी/संगठन के विभिन्न निकायों (सामान्य परिषद, वित्तीय समिति, कार्यकारी बोर्ड आदि) से परिसर संचालन के लिए अपने प्रतिनिधि नामांकित कर सकती है।
2. केन्द्र सरकार द्वारा जारी अनुदान के सम्बंध में सोसाइटी/संगठन द्वारा पृथक खाते रखने होंगे।
3. संस्थान के खातों को भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक अथवा उसके विवेक पर उसके नामित व्यक्ति द्वारा किसी भी समय लेखा परीक्षा हेतु खुला रखना होगा।
4. राज्य सरकार अथवा संगठन को अनुमोदित परियोजना पर आये व्यय का समायोजन करते हुए और केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा जारी अनुदानों के उपयोग दर्शाते हुए सनदी लेखाकार/सरकारी लेखापरीक्षक द्वारा अपने संपरीक्षित लेखा विवरण भारत सरकार को सौंपने होंगे।
5. परियोजना की कार्य पद्धति को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निश्चित किये गये किसी ढंग से जैसे और जब भी आवश्यक समझा जायेगा, समीक्षा हेतु खुला रखना होगा।
6. आवेदक राज्य सरकार संघ राज्य क्षेत्र/संगठन अपने कार्यों में समुचित मितव्ययिता बरतेगी।
7. आवेदक संगठन, इस परियोजना को प्रथम किस्त जारी होने के तीन वर्ष की अवधि के भीतर पूरा करने के लिए बाध्य होगा।
8. केन्द्रीय सहायता से अधिगृहीत भवन और सम्पदा पर पहला ग्रहणाधिकार भारत के राष्ट्रपति का होगा और भारत सरकार की पूर्व अनुमति के बिना न भवन, न ही उपकरण दूसरी पार्टियों को पट्टे अथवा बंधक पर दिया जायेगा। तथापि, अन्य पार्टियों को अस्थायी इस्तेमाल के लिए प्रेक्षागृह के पट्टे और अन्य परियोजना सुविधाओं पर यह नियम लागू नहीं होगा।
9. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि परिसरों का इस्तेमाल पूरे वर्ष इष्टतम रूप से किया जाता रहे।
10. प्राप्तकर्ता संगठन को स्वयं प्रारम्भ में एक वचनबद्धता पत्र देना होगा कि परिसर के दिन-प्रतिदिन के कार्य-कलापों/संचालन के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध करायेगा।
11. केन्द्र सरकार की वित्तीय जिम्मेदारी अनुमोदित परियोजना लागत के भाग की सीमा तक आधारभूत संरचना सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित होगी और परिसर के संचालन या लागत वृद्धि होने के कारण अतिरिक्त व्यय को पूरा करने आदि के लिए नहीं होगी।
12. अनुदान प्राप्तकर्ता को भारत के राष्ट्रपति के पक्ष में अनुदान की शर्तों का पालन करने के लिए एक बंध-पत्र (बॉड) निर्धारित प्रारूप में भरना होगा। अनुदान शर्तों का पालन न करने की स्थिति में बन्ध-पत्र का उल्लंघन करने पर भारत सरकार की प्रचलित उधार दर और इस पर ब्याज सहित अनुदान की वसूली का भारत सरकार निर्णय ले सकती है तथा विलम्ब के मामले में भारत सरकार द्वारा निर्धारित ब्याज की दण्डात्मक दर से वसूली कर सकती है।
13. स्कीम के तहत सभी लाभार्थी संगठनों को अनुदान की स्वीकृति के छः माह के भीतर अपनी प्रगति रिपोर्ट भेजना अपेक्षित है तथा उसके पश्चात योजना के पूरा होने तक हर तीन महीने पर अर्थात त्रैमासिक आधार पर रिपोर्ट भेजनी होगी।
14. अनुदानग्राही संगठन परिसर में महत्वपूर्ण स्थान पर मंत्रालय के नाम को उपयुक्त ढंग से दर्शाते हुए संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की वित्तीय सहायता को ज्ञापित करेगा।
15. जारी अनुदान का प्रयोग प्रशासकीय भवन, आवासीय क्वार्टर, निदेशक के बगले अथवा किसी बाह्य विकास जैसे सम्पर्क मार्ग आदि के लिए नहीं किया जायेगा।
16. भारत सरकार द्वारा समय-समय पर ऐसी अन्य शर्ते लगायी जा सकती हैं।
इस स्कीम को कलाकार पेंशन स्कीम और कल्याण निधि के रूप में जाना जाएगा। इस स्कीम के तहत निम्नलिखित दो प्रकार के अनुरोधों पर विचार किया जाएगाः
(ii) लेखकों, कलाकारों आदि के नये मामले, जो उक्त स्कीम के अधीन अनुदान के लिए पात्र हैं।
(i) उक्त स्कीम के अधीन सहायता हेतु पात्र होने के लिए, किसी व्यक्ति का कला और साहित्य आदि में महत्त्वपूर्ण योगदान होना चाहिए। परंपरागत विद्वान, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान किया है, भी पात्र होंगे, चाहे उनकी कोई कृति प्रकाषित न भी हुई हो।
(ii) आवेदक की निजी आय (पति/पत्नी की आय सहित) 4000/- रुपए प्रतिमाह से अधिक नहीं होनी चाहिए।
(iii) आवेदक की आयु 58 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए (आश्रितों के मामले में यह लागू नहीं है)। आवेदन-पत्र निर्धारित फार्म में भरा जाए तथा इसे संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रषासन के माध्यम से अनुभाग अधिकारी (एस एंड एफ अनुभाग), संस्कृति मंत्रालय, पुरातत्व भवन, आईएनए, नई दिल्ली को भेजा जाए। केन्द्रीय कोटा से सहायता प्रदान करने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा सीधे भी अनुरोध पर विचार किया जा सकता है।
समय-समय पर आवष्यक समझे जाने पर आवेदन-पत्र में संषोधन कर सकता है।
सरकार से सहायता मासिक भत्ते के रूप में हो सकती है। केन्द्र और राज्य कोटे के अधीन अनुषंसित कलाकारों को दिया गया ऐसा भत्ता केन्द्र और संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रषासन द्वारा साझा किया जाएगा, जिसमें से सम्बधित राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रषासन प्रत्येक लाभार्थी को कम से कम 500 रु0 प्रतिमाह भत्ता देगा। ऐसे मामलों में प्रति लाभार्थी को केन्द्र द्वारा दिया जाने वाला मासिक भत्ता 3500/- रुपए प्रतिमाह से अधिक नहीं होगा और केन्द्रीय कोटा के अधीन संस्तुत मामलों में सहायता की राशि प्रति लाभार्थी 4000/- रुपए प्रतिमाह से अधिक नहीं होगी।
(i) राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रषासन की अनुषंसाओं के आलोक में, आवेदक के वित्तीय साधनों और प्रसिद्धि, केन्द्र-राज्य कोटे के तहत दी जाने वाली सहायता की मात्रा और सहायता प्राप्त करने वालों की संख्या, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नामित 'विशेषज्ञ समिति द्वारा, निधियों की उपलब्धता पर, तय की जाएगी।
(ii) केन्द्रीय कोटा से दी जाने वाली सहायता की राशि और सहायता प्राप्तकर्ताओं की संख्या का निर्णय आवेदक की वित्तीय स्थिति का पता लगाने के बाद विशेषज्ञ समिति की अनुशंसाओं पर केन्द्र सरकार द्वारा किया जाएगा। ऐसे मामलों को अनुमोदन के लिए संस्कृति मंत्रालय के प्रभारी मंत्री के समक्ष अवष्य रखा जाएगा।
(i) केन्द्र राज्य/संघ राज्यक्षेत्र कोटा : अंतिम रूप से चयन हो जाने पर, केन्द्र सरकार संस्वीकृतियॉ जारी करती है और सहायता प्राप्तकर्ताओं को सहायता की अपनी शेयर राशि जारी करती है तथा संबंधित राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रषासनों को सहायता का अपना शेयर जारी करने की भी सलाह देती है।
(ii) केन्द्रीय कोटा : केन्द्रीय कोटे के मामलों में, केन्द्र सरकार संस्वीकृति जारी करेगी और सहायता प्राप्तकर्ताओं को सीधे ही भुगतान करेगी।
उपरोक्त उपबंधों के अध्यधीन, स्कीम के अधीन स्वीकृत आवर्ती मासिक भत्ता ऐसी अवधि के लिए होगा जिसे केन्द्र सरकार द्वारा तय किया जाए और/अथवा जो जीवन और आय प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने पर वर्ष-दर-वर्ष आधार पर जारी रखा जाए।
(i) यदि भत्ता प्राप्तकर्ता की वित्तीय क्षमता 4000/- रुपए प्रतिमाह से अधिक हो जाती है तो उक्त स्कीम के अधीन भत्ते को बंद कर दिया जाएगा।
(ii) सरकार, अपने विवेक से, भत्ता प्राप्तकर्ता को तीन महीने का नोटिस देकर, भत्ते को समाप्त भी कर सकती है।
(iii) कोई भत्ता प्राप्तकर्ता, सरकार को लिखित नोटिस देकर भत्ते प्राप्त करने के अपने अधिकार को छोड़ भी सकता है। ऐसे मामलों में अधिकार छोड़ने के पत्र की तिथि से भत्ता बंद कर दिया जाएगा।
भत्ता प्राप्तकर्ता की मृत्यु होने पर, आश्रितों की वित्तीय स्थिति की जांच पड़ताल करने के बाद, केन्द्र सरकार के विवेक से उपरोक्त वित्तीय सहायता जारी रखी जा सकती है।
नोट :
वित्तीय सहायता प्राप्तकर्ता की मृत्यु के मामले में भुगतान का तरीका निम्नानुसार होगा।
2. आश्रितों के लिए - विवाह अथवा रोजगार मिलने अथवा 21 वर्षों की आयु होने तक।
झ. परिचय :
संस्कृति मंत्रालय 1961 से साहित्य, कला और जीवन के ऐसे ही अन्य क्षेत्रों में दीन-हीन परिस्थितियों में रह रहे विशिष्ट व्यक्तियों एवं उनके आश्रितों को वित्तीय सहायता नामक स्कीम चला रहा है। एक राष्ट्रीय कलाकार कल्याण निधि का प्रावधान करने के लिए इस स्कीम के दायरे को बढ़ाया जा रहा है जो अस्पताल में भर्ती होने तथा तत्काल कदम उठाए जाने वाली अन्य आकस्मिकताओं के मामलों में इस स्कीम के अंतर्गत शामिल कलाकारों और कलाकारों के आश्रितों को विशेष वित्तीय सहायता प्रदान करने की अनुमति देगा।
त्र. उद्देश्य :
इस निधि का उद्देश्य इस स्कीम के अतंर्गत वित्तीय सहायता पाने वाले कलाकारों तथा कलाकार की मृत्यु के पश्चात उसके आश्रितों को निम्नानुसार वित्तीय सहायता प्रदान करना होगा :
(क) जब एक कलाकार की मृत्यु हो जाए और उसके आश्रितों की सहायता करना आवश्यक हो।
(ख) जब इस स्कीम के अंतर्गत शामिल कलाकार को चिकित्सा उपचार / बीमारी के लिए एकमुश्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता हो और वह अपनी आजीविका चलाने तथा अपने बच्चों की सहायता करने की स्थिति में न हो और / अथवा अपने इलाज के खर्चे को पूरा करने में असमर्थ हो।
(ग) जब किसी कलाकार को आकस्मिक शारीरिक विकलांगता के समय वित्तीय सहायता की आवश्यकता हो।
ट. निधि से सहायता प्राप्त करने के लिए पात्रता :
1. इस स्कीम के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले कलाकार तथा कलाकार की मृत्यु के पश्चात कलाकार पर आश्रित व्यक्ति।
2. कलाकार की मृत्यु होने पर, परिवार के आश्रित सदस्यों को वित्तीय सहायता का तरीका निम्नानुसार होगाः
2.1 पति अथवा पत्नी-कलाकार की मृत्यु के पश्चात, आवश्यकता की स्थिति में सर्वप्रथम वित्तीय सहायता कलाकार के पति अथवा पत्नी को प्रदान की जाएगी।
2.2 आश्रितों के लिए विवाह होने अथवा रोजगार प्राप्त करने अथवा 21 वर्ष की आयु होने तक, जो भी पहले हो।
ठ. वित्तीय सहायता की सीमा :
प्रदान की गई वित्तीय सहायता गैर-आवर्ती प्रवृति की होगी तथा किसी भी अवसर पर वित्तीय सहायता की राशि निम्नलिखित सीमा तक प्रतिबंधित होगी :
ड. निधि का प्रशासन :
ढ़. अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएं :
जिस बैंक में लाभार्थी का बैंक खाता हो, उस बैंक के प्रबंधक द्वारा विहित पत्र में विधिवत सत्यापित बैंक प्राधिकार, पत्र, 'स्कीम' के अंतर्गत शामिल लाभार्थियों द्वारा उपरोक्त पते पर भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को प्रस्तुत करना होगा, यदि इसे एलआईसी को प्रस्तुत नहीं किया गया हो।
संक्षिप्त नाम : सांस्कृतिक कार्य अनुदान स्कीम (सीएफजीएस)
इस स्कीम को गैर - लाभार्थी संगठनों द्वारा सांस्कृतिक विषयों पर सेमिनारों, उत्सवों तथा प्रदर्शनियों के लिए वित्तीय सहायता की स्कीम कहा जाएगा।
इस स्कीम में सोसाइटियों, न्यासों तथा विश्वविद्यालयों सहित, जो भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर सेमिनार, अनुसंधान, कार्यशालाएं, उत्सव तथा प्रदर्शनियां आयोजित करते हैं, सभी गैर लाभार्थी संगठनों को सहायता देना शामिल है। ये संगठन सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम (1860 का xxi), न्यास अधिनियम, कंपनी अधिनियम या केन्द्र या राज्य सरकार के अन्य किसी अधिनियम के तहत पंजीकृत होने चाहिए और कम से कम तीन वर्ष से कार्यरत होने चाहिए।
तथापि, यह स्कीम ऐसे संगठनों या संस्थाओं के लिए नहीं होगी जो धार्मिक संस्थाओं या स्कूलों/कॉलेजों के रूप में कार्य कर रहे हों।
अनुदान, सांस्कृतिक विरासत, कलाओं, साहित्य और अन्य सृजनात्मक कार्यों के परिरक्षण या संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण विषयों पर सम्मेलनों, सेमिनारों, संगोष्ठियों, उत्सवों तथा प्रदर्शनियों जैसे सभी प्रकार के परस्पर मेलजोल के मंचों के लिए दिया जाएगा।
1) अनुदान का पात्र होने के लिए आवेदक संगठन का समुचित रूप से गठित ऐसा प्रंबधन निकाय या शासी परिषद होनी चाहिए जिसकी शक्तियां, कार्य व जिम्मेदारियां लिखित संविधान में स्पष्ट रूप से परिभाषित व निर्धारित हों।
2) संगठन द्वारा परियोजना लागत के कम से कम 25 प्रतिशत तक मैचिंग संसाधनों का करार किया होना चाहिए या इसकी योजना बनाई जानी चाहिए।
3) संगठन के पास उस समारोह/परियोजना को शुरू करने के लिए सुविधाएं, संसाधन, कार्मिक तथा अनुभव होना चाहिए जिसके लिए अनुदान की मांग की गई हो।
4) यथा आवेदित ऐसे समारोह के आयोजनों के विगत अनुभव को वरीयता दी जाएगी।
वित्तीय सहायता निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए दी जा सकती है :
1) किसी भी कला रूप/महत्वपूर्ण सांस्कृतिक मामलों पर सम्मेलन, सेमिनार, कार्यशालाएं, संगोष्ठियां, उत्सव, प्रदर्शनियां आयोजित करना और लघु अनुसंधान परियोजनाएं आदि शुरू करना।
2) सांस्कृतिक विषयों व उनके प्रकाशनों सहित उनके संबंध में सर्वेक्षण, प्रायोगिक परियोजनाएं आदि संचालित करने जैसे विकास किस्म के कार्यकलापों पर व्यय की पूर्ति करना।
ड. सहायता की मात्रा :
उक्त पैरा 4 के तहत विशिष्ट परियोजनाओं के लिए अनुदान, विशेषज्ञ समिति द्वारा यथा संस्तुत व्यय का 75 प्रतिशत तक परन्तु प्रति परियोजना अधिकतम 5.00 लाख रू. तक दिया जाएगा। अपवाद स्वरूप परिस्थितियों में (सक्षम प्राधिकारी अर्थात् संस्कृति मंत्रालय के अनुमोदन से) 20.00 लाख रूपए की राशि प्रदान की जा सकती है।
केन्द्र सरकार द्वारा जारी अनुदानों के संबंध में अलग लेखे रखे जाएंगे।
1) अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन के लेखाओं की समीक्षा, भारत के नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक या उसके विवेक पर उसके नामिती द्वारा की जा सकेगी।
2) अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन, भारत सरकार को अनुमोदित परियोजना पर किए गए व्यय का उल्लेख करते हुए और पूर्व वर्षों में सरकारी अनुदान के उपयोग का ब्यौरा देते हुए किसी सनदी लेखाकार से संपरीक्षित लेखाओं का विवरण प्रस्तुत करेगा। यदि उपयोग प्रमाण-पत्र निर्धारित अवधि के भीतर प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो अनुदान प्राप्तकर्ता को प्राप्त अनुदान की समग्र राशि और उस पर भारत सरकार की वर्तमान दर पर ब्याज तत्काल वापिस करना होगा बशर्ते कि सरकार द्वारा विशेष रूप से ब्याज माफ न किया गया हो।
3) अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन की, सरकार द्वारा कभी भी आवश्यक समझे जाने पर कोई समिति नियुक्त करके या सरकार द्वारा निर्धारित किसी अन्य तरीके से भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय द्वारा समीक्षा की जा सकेगी।
4) अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन, विदेश मंत्रालय से अनुमति लिए बिना विदेशी प्रतिनिधिमण्डल को आमंत्रित नहीं करेगा, जिसके लिए आवेदन अनिवार्यतः संस्कृति मंत्रालय के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा। 5) यह ऐसी अन्य शर्तों के अध्यधीन होगा जो समय-समय पर सरकार द्वारा लागू की जाएं।
आवेदन, किसी भी राष्ट्रीय अकादमी या भारत सरकार के तहत संस्कृति से सम्बद्ध किसी अन्य संगठन या संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्य प्रशासन, राज्य अकादमियों द्वारा संस्तुत होना चाहिए।
(4) निम्नलिखित सहित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट :
(i) परियोजना की अवधि सहित उस परियोजना का विवरण जिसके लिए सहायता का अनुरोध किया गया है तथा परियोजना के लिए सेवा में लगाए जाने वाले स्टाफ की अर्हताओं तथा अनुभव का ब्यौरा;
(ii) आवर्ती व गैर-आवर्ती व्यय का अलग से मदवार ब्यौरा देते हुए परियोजना का वित्तीय विवरण।
(iii) स्रोत जिनसे सहयोगी निधियां प्राप्त की जाएंगी।
अनुदान, 75 प्रतिशत (प्रथम किस्त) और 25 प्रतिशत (दूसरी किस्त) की दो किस्तों में जारी किया जाएगा।
भुगतान केवल सम्बद्ध संगठन के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक अतंरणों से किया जाएगा।
यह स्कीम सम्पूर्ण वर्ष खुली रहेगी। आवेदन पत्र किसी भी समय निर्धारित प्रपत्र में मंत्रालय की सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध विस्तृत विवरण के आधार पर प्रस्तुत किया जाएगा।
सृजनात्मक कलाओं के क्षेत्रों में सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की समीक्षा करने से पता चला है कि शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों के लिए संस्थागत ढांचा तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद द्वारा शुरू की गई शिक्षावृत्तियों (फेलोशिप) के माध्यम से स्वतंत्र रूप से कार्य करने के पर्याप्त अवसर हैं, सृजनात्मक कला के क्षेत्रों में अथवा हमारे कुछ पारम्परिक कलारूपों को पुनर्जीवित करने के लिए इस प्रकार की कोई योजना नहीं है, जिसके माध्यम से इस प्रकार की सुविधाएँ और अवसर प्रदान किए जाते हों। संभवतः वित्तीय सुरक्षा से युक्त स्वतंत्र वातावरण से इन क्षेत्रों में और अधिक कार्य करने के लिए अपेक्षित अनुकूल वातावरण प्रदान किया जा सकता है। यह भी पाया गया है कि 10-14 वर्षों के आयु-वर्ग (सांस्कृतिक प्रतिभा शोध शिक्षावृत्ति योजना) तथा 18-25 वर्षों के आयु वर्ग (विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्रों में युवा कलाकार हेतु शिक्षावृत्ति योजना) के व्यक्तियों के लिए स्कीम हैं, लेकिन हमारे कुछ पारम्परिक कला-रूपों को पुनर्जीवित करने की बाबत अत्यधिक उन्नत प्रषिक्षण अथवा वैयक्तिक सृजनात्मक प्रयास के लिए बुनियादी वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली कोई स्कीम नहीं है। इस कमी को दूर करने के लिए विभिन्न सृजनात्मक क्षेत्रों के उत्कृष्ट व्यक्तियों को अध्येतावृत्ति (फेलोशिप) प्रदान करने की स्कीम चलाने का निर्णय लिया गया है। इस स्कीम में ग्रामीण/जनजातीय क्षेत्रों के कलाकार भी शामिल होंगे।
ये अध्येतावृत्तियॉ अनुसंधान उन्मुख परियोजनाएं शुरू करने के लिए प्रदान की जाती हैं। आवेदक को परियोजना प्रारंभ करने के संबंध में अपनी योग्यताओं का साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहिए।
अध्येतावृत्तियॉ, प्रषिक्षण प्रदान करने, कार्यषालाएं, सेमिनार आयोजित करने, अथवा स्मरणों को लिपिबद्ध करने/अथवा आत्मकथा, कथा साहित्य आदि लिखने के लिए नहीं प्रदान की जाती हैं।
1.1 मंच कलाएँ (संगीत/नृत्य/रंगमंच लोक, कठपुतली सहित परंपरागत एवं स्वदेशी कलाएँ)
1.2 साहित्यिक कलाएँ (यात्रा-विवरण/ साहित्य का इतिहास और सिद्धांत)
शोध कार्य सृजनात्मक फोटोग्राफी)। 2. संस्कृति से संबंधित नए क्षेत्रों में वरिष्ठ/कनिष्ठ अध्येतावृत्तियाँ निम्नलिखित क्षेत्रों में संस्कृति से सम्बद्ध नए क्षेत्रों में परियोजनाएं आमंत्रित हैं :
इनका उद्देष्य कला और संस्कृति से संबंधित क्षेत्रों में समकालीन मुद्दों में नई शोध तकनीकों, प्रौद्योगिकीय और प्रबंधन सिद्धांतों के विष्लेषणात्मक अनुप्रयोग को प्रोत्साहन देना है। सामान्य और सैद्धांतिक वृहत् अध्ययनों पर विचार किया जाएगा। प्रस्ताव, नवीन और अनुप्रयोग उन्मुख और वरीयतः अन्तर-विधा किस्म का होना चाहिए।
इस स्कीम को संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट व्यक्तियों को अध्येतावृत्तियां प्रदान करने की स्कीम के नाम से जाना जायेगा।
अध्येतावृत्तियों की संख्या प्रत्येक वर्ष 400 होगी। ये दो प्रकार की अध्येतावृत्तियां हैंः वरिष्ठ और कनिष्ठ अध्येतावृत्तियां । वरिष्ठ अध्येतावृत्तियों की संख्या 40 वर्ष और इससे अधिक आयु समूह के कलाकारों के लिए प्रतिमाह 20,000/- रू. की दर से 200 होगी जबकि 25-40 वर्ष की आयु समूह के कलाकारों के लिए प्रतिमाह 10,000/- रू. की दर से कनिष्ठ अध्येतावृत्तियों की संख्या 200 होगी। आयु की गणना प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल से की जाएगी।
इसके अलावा, चुनिंदा परियोजना दस्तावेजों के प्रकाशन की लागत के अधिकतम 20,000/- रू. या 50 प्रतिशत तक, जो भी कम हो, की एक बारगी दिया जाने वाला अनुदान हो सकता है। इसे अनुदानप्राप्तकर्ताओं के 20 प्रतिशत तक सीमित किया जाएगा।
वरिष्ठ अध्येतावृत्ति के लिए आवेदक, अभावग्रस्त परिस्थितियों में विद्यमान कलाकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना के अंतर्गत संस्कृति मंत्रालय से पेंशन प्राप्तकर्ता नहीं होना चाहिए।
आवेदक, इससे पहले सदृश अध्येतावृत्ति का लाभ नहीं लिया होना चाहिए। तथापि, जिस आवेदक को कनिष्ठ अध्येतावृति प्रदान की गई हो, वह वरिष्ठ अध्येतावृत्ति के लिए आवेदन कर सकता है बशर्ते कि पहली परियोजना पूरा होने के बाद 5 वर्ष का समय बीत चुका हो।
स्कीम के पैरा (ख) में सूचीबद्ध क्षेत्र/ दायरे में पात्रता के लिए न्यूनतम शैक्षिक अर्हता स्नातक है।
वरिष्ठ और कनिष्ट अध्येतावृतियों के तहत प्राप्तकर्ता को छमाही प्रगति रिपोर्ट जमा करानी होगी। ऐसी रिपोर्ट समय से प्राप्त न होने पर अध्येतावृति राशि मंत्रालय द्वारा रोकी जा सकती है। रोजगार प्राप्त आवेदकों को उचित माध्यम से आवेदन करना होगा।
चुने गए उम्मीदवारों को उन परियोजनाओं के संबंध में शैक्षिक अथवा अनुप्रयोग उन्मुख अनुसंधान कार्य आयोजित करना होगा जिसके लिए उन्हें अध्येतावृत्तियाँ प्रदान की गई हैं। उन्हें अपनी परियोजना दो वर्ष के अंदर पूरी करनी होगी और उसे इस मंत्रालय को प्रस्तुत करना होगा। सरकार की ओर से अतिरिक्त वित्तीय जिम्मेदारी के बिना अधिकतम तीन माह तक समयवृद्धि की अनुमति होगी।
प्रत्येक मामले में एक वर्ष बाद सत्र के बीच में निष्पादन की समीक्षा/मूल्यांकन किया जाएगा और अध्येतावृत्ति का आगे जारी रहना इस समीक्षा/मूल्यांकन पर निर्भर करेगा।
1. आवेदन पत्र, सांस्कृतिक संसाधन तथा प्रषिक्षण केन्द्र (सीसीआरटी), प्लॉट नं. 15, सेक्टर-7, द्वारका, नई दिल्ली - 110075 द्वारा समय - समय पर प्रकाषित विज्ञापन के अनुसार, केवल ऑनलाइन ही प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
2. यदि आवेदक केन्द्रीय/राज्य सरकार के विभागों/संस्थाओं/उपक्रमों/ विश्वविद्यालयों इत्यादि में कार्यरत हैं, तो अध्येतावृत्ति के लिए चयन होने पर उन्हें दो वर्ष की अवधि का अवकाष लेना होगा। उन्हें अध्येतावृत्ति के अपने आवेदन को विभाग/संस्था/उपक्रम/ विश्वविद्यालय इत्यादि के प्रमुख के माध्यम से इस लिखित आष्वासन के साथ प्रेषित करना चाहिए कि अध्येतावृत्ति के मंजूर होने पर उम्मीदवारों को अध्येतावृत्ति की अवधि के लिए अवकाष प्रदान किया जाएगा। लागू अन्य शर्तों के अतिरिक्त अवकाष मंजूर होने का प्रमाण प्रस्तुत करने पर अध्येतावृत्ति की प्रथम किस्त जारी की जाएगी।
3. संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी जो प्रथम चरण में सभी आवेदनों की जांच करेगी और उनमें से विभिन्न क्षेत्रों में उम्मीदवारों के अपेक्षाकृत संख्या में संभावित चयन के लिए सर्वाधिक उत्कृष्ठ उम्मीदवारों की लघु सूची बनाएगी।
4. विशेषज्ञ समिति द्वारा लघु सूची में रखे गए कनिष्ट अध्येतावृत्ति उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा, जो फिर उनमें से विभिन्न क्षेत्रों में अपेक्षाकृत संख्या में कनिष्ठ अध्येतावृत्ति के लिए सर्वाधिक उत्कृष्ठ उम्मीदवारों को चुनेगी। वरिष्ठ अध्येतावृत्तियों के मामले में ऐसा साक्षात्कार आवश्यक नहीं होगा।
प्रदान की गई राशि का अंतरण केवल अध्येतावृत्ति प्राप्तकर्ताओं के बैंक खाते में इलैक्ट्रॉनिक रूप से किया जाएगा।
संपर्क विवरणः
1. अनुभाग अधिकारी, एस एंड एफ अनुभाग, संस्कृति मंत्रालय, द्वितीय तल, पुरातत्व भवन, डी विंग, जीपीओ कॉम्पलेक्स, आईएनए, नई दिल्ली।
स्कीम का उद्देष्य असाधारण प्रतिभा वाले युवा कलाकारों को भारतीय शास्त्रीय संगीत, भारतीय शास्त्रीय नृत्य, रंगमंच, स्वांग दृष्य कला, लोक, पारम्परिक और स्वदेषी कलाओं तथा सुगम शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में भारत में उच्च प्रषिक्षण के वास्ते वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
घ. विषय/क्षेत्र जिनमें शिक्षावृत्तियां दी जा सकती हैं।
शास्त्रीय हिन्दुस्तानी संगीत (गायन और वाद्य)
(2) शास्त्रीय कर्नाटक संगीत (गायन और वाद्य इत्यादि) भारतीय शास्त्रीय नृत्य/संगीत भरतनाट्यम, कथक, कुचिपुड़ी, कथकली, मोहिनीअट्टम, ओडिसी नृत्य/संगीत, मणिपुरी नृत्य/संगीत, थांगटा,
गौडिया नृत्य, छऊ नृत्य/संगीत, सतरिया नृत्य।
रंगमंच कला का कोई विषिष्ट पहलू, जिसमें अभिनय, निर्देषन आदि शामिल हैं किन्तु नाट्यलेखन और अनुसंधान शामिल नहीं है।
रेखांकन, मूर्तिकला, चित्रकारी, सृजनात्मक फोटोग्राफी, मृत्तिका और सिरेमिक्स आदि।
कठपुतली, स्वांग, लोक रंगमंच, लोक नृत्य, लोक गीत, लोक संगीत, आदि (एक सोदाहरण सूची पैरा 8 टिप्पणी में देखी जा सकती है)।
ड. शिक्षावृति की अवधि एवं कार्यकाल सामान्यतः शिक्षावृत्ति की अवधि दो वर्ष होगी।
प्रत्येक मामले में प्रषिक्षण का स्वरूप अध्येता के पिछले प्रषिक्षण तथा पृष्ठभूमि पर विचार करने के बाद निर्धारित किया जाएगा। सामान्यतः, यह किसी गुरू/प्रषिक्षक अथवा मान्यता प्राप्त संस्था की उच्च प्रषिक्षुता के स्वरूप की होगी।
अध्येता को कठोर प्रषिक्षण लेना होगा। इस प्रकार के प्रषिक्षण में संबंधित विषय/क्षेत्र में सैद्धान्तिक ज्ञान प्राप्त करने में। लगे समय के अतिरिक्त अभ्यास के लिए प्रतिदिन कम से कम तीन घंटे का समय और संबंधित विषयों को समझना भी शामिल है।
प्रत्येक अध्येता को यात्रा, पुस्तकों, कला सामग्री या अन्य उपस्कर और ट्यूशन या प्रशिक्षण प्रभार, यदि कोई हो, पर अपने रहन-सहन के व्यय को पूरा करने के लिए दो वर्ष की अवधि के लिए प्रतिमाह 5000/- रू. का भुगतान किया जाएगा।
(1) अभ्यर्थियों को भारतीय नागरिक होना चाहिए।
(2) अभ्यर्थियों में उनके प्रषिक्षण को प्रभावी ढंग से आगे चलाने के लिए पर्याप्त सामान्य ज्ञान होना चाहिए।
(3) अभ्यर्थियों को उनके प्रशिक्षण को प्रभावी ढंग से आगे चलाने के लिए अपनी इच्छा का प्रमाण देना होगा।
(4) चूंकि, ये शिक्षावृत्तियाँ उच्च प्रषिक्षण के लिए दी जाती हैं, न कि नए सीखने वालों के लिए, अतः अभ्यर्थियों के पास चुने हुए कार्यकलाप के क्षेत्र में प्रवीणता डिग्री होनी चाहिए।
(5) अभ्यर्थी को अपने गरू/संस्थानों से न्यूनतम 5 वर्ष का प्रशिक्षण लिया होना चाहिए। आवेदन के साथ वर्तमान गुरू/संस्थान और पूर्व गुरू/संस्थान (यदि कोई हो) द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित प्रपत्र के भाग-II में इस आशय का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
(6) अभ्यर्थी को सम्बद्ध कलाओं/ विद्याओं में पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए।
(7) अभ्यर्थी की आयु उस वर्ष में 1 अप्रैल को 18 वर्ष से कम और 25 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए जिस वर्ष में आवेदन किया जा रहा है। आयु सीमा में छूट नहीं है।
प्रत्येक वर्ष सीसीआरटी द्वारा आवेदन आमंत्रित करने संबंधी विज्ञापन समय-समय जारी किया जाएगा।
साक्षात्कार के समय आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज (फोटो सहित) जमा कराने होंगे।
1. शैक्षिक योग्यताओं, अनुभवों इत्यादि की एक-एक स्व सत्यापित प्रति। किसी भी हालत में मूल दस्तावेज नहीं भेजने चाहिए।
2. मैट्रिक या समकक्ष प्रमाण-पत्र, यदि कोई हो, अथवा आयु को कोई अन्य संतोषजनक प्रमाण (जन्म पत्रियों के अलावा) की एक सत्यापित प्रति।
3. नवीनतम पासपोर्ट आकार का एक फोटो।
4. जो उम्मीदवार चित्रकला, मूर्तिकला और प्रयुक्त कला के क्षेत्र में शिक्षावृत्ति के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें अपने आवेदन पत्रों के साथ उत्कृष्ट मूल कृतियों की, स्व सत्यापित फोटो भी भेजनी होगी। दृष्यकला के लिए ललित कलाओं में स्नातक अथवा समकक्ष न्यूनतम अर्हता है।
5. यदि आवेदक एक से अधिक क्षेत्र के लिए आवेदन करना चाहता है तो उसे प्रत्येक क्षेत्र के लिए अलग-अलग ऑनलाइन आवेदन-पत्र भेजना चाहिए।
6. चूंकि ये शिक्षावृत्तियां उच्च स्तरीय प्रशिक्षण के लिए दी जाती हैं, अतः अभ्यर्थी को अपने गुरू/संस्थानों से न्यूनतम 5 वर्ष का प्रशिक्षण लिया होना चाहिए। आवेदन के साथ वर्तमान गुरू/संस्थान और पूर्व गुरू/संस्थान (यदि कोई हो) द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित इस आशय का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
1. अभ्यर्थियों को विशेषज्ञ समिति के समक्ष साक्षात्कार/प्रदर्शन के लिए उपस्थित होना होगा। अभ्यर्थियों को साक्षात्कार / प्रदर्शन की तारीख, समय और स्थान की सूचना अभ्यर्थियों के ऑनलाइन आवेदन में दिये गये ई-मेल के माध्यम से दी जायेगी। चयन पूर्णतः योग्यता आधार पर किया जाएगा।
2. परिणाम मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा। निर्णय पत्र उम्मीदवारों को स्पीड पोस्ट द्वारा भेज दिया जाएगा।
3. पते में किसी प्रकार का परिवर्तन हो तो उसे इस मंत्रालय को लिखित में सूचित किया जाना चाहिए। सूचित करते समय प्रशिक्षण के विषय/ क्षेत्र फाईल संख्या (यदि कोई हो) का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाना चाहिए।
4. आगे के किसी भी पत्र व्यवहार के लिए उम्मीदवार निम्नलिखित ब्यौरे अवश्य दें :
(क) स्कीम का नाम (ख) सुस्पष्ट अक्षरों में उम्मीदवार का नाम (ग) प्रशिक्षण का विषय/क्षेत्र (घ) पंजीकरण संख्या।
(1) अनुभाग अधिकारी, एस एंड एफ अनुभाग, संस्कृति मंत्रालय द्वितीय तल, पुरातत्व भवन, डी-विंग, जीपीओ काम्पलैक्स, आईएनए, नई दिल्ली।
10. गौरव गीत (कलगी तुरा)
12. बिंगी पद (अंटिके पंटिके)
13. तत्त्व गीत (एकतारी मेला)
19. दोम्बी दास के गीत (गाथा)
24. समष्टि वादन (पंचमुख-वाद्य, करडी, मजलू, वेलगा, सिट्टी, मेला, छकड़ी, अंजुमन आदि)
2. लोक संगीत (जाति संगीत)
9. तिब्बती कलावस्तु तथा अभिलेखागार के पुस्तकालय, धर्मषाला में तिब्बती चित्रकला और काष्ठ शिल्प का अध्ययन।
यह सूची उदाहरणस्वरूप है, न कि सम्पूर्ण ।
( यदि आपके पास उपरोक्त सामग्री पर कोई टिप्पणी / सुझाव हैं, तो कृपया उन्हें यहां पोस्ट करें)
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विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। स्कीम का नाम विनिर्दिष्ट मंच कला अनुदान स्कीम होगा। इस स्कीम के अंतर्गत नाट्य समूहों, रंगमंच समूहों, संगीत मण्डलियों, बाल रंगषाला, एकल कलाकारों और मंच कला कार्यकलापों के सभी प्रकार के स्वरूपों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस स्कीम के मुख्य घटक निम्नानुसार हैं : एक. इस स्कीम के अंतर्गत अनुदान या आर्थिक सहायता, परियोजना या कार्यक्रमों के अनुमोदन के आधार पर दी जाएगी तथा यह तदर्थ प्रकार की होगी। स्कीम के अंतर्गत चुनी गई परियोजना के लिए वित्तीय सहायता, सामान्यतः एक वर्ष की अवधि से अधिक नहीं होगी। अनुदान की राशि विषेष वर्ष में सहायता के लिए चुने गए अनुमोदित प्रस्तावों/कार्यक्रमों में सभी मदों में व्यय के लिए पर्याप्त होगी। अनुदान के उद्देष्यों के लिए अनुमोदित मदों के रूप में मानी गई मदों में प्रचलित दरों पर अनियत कलाकारों सहित कलाकारों को वेतन भुगतान, निर्माण / प्रस्तुतिकरण की लागत, रिहर्सल के लिए हॉल का किराया, पोषाकों की लागत, परिवहन के फुटकर खर्च, शोध व्यय आदि षामिल होंगी। दो. निर्माण अनुदान मांगने के लिए आवेदन में सही औचित्य के साथ विस्तृत अनुमानित लागत का उल्लेख का जाना चाहिए जिससे कि विशेषज्ञ समिति वास्तविक आवष्यकताओं के आधार पर अनुदान की सिफारिष पर विचार कर सके। तीन. सहायता के लिए व्यक्तिगत प्रस्तावों का चयन करने में यह सुनिष्चित करने का ध्यान रखा जाएगा कि इसमें दुर्लभ और परम्परागत रूपों को वरीयता देते हुए देष के सभी भागों से सभी कला रूपों और शैलियों का प्रतिनिधित्व हो। नए नाटकों / कार्यक्रमों/प्रस्तुतियों को वरीयता प्रदान की जाएगी। गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले लोगों के प्रषिक्षण से उभरकर आने वाली प्रयोगात्मक और नवाचार पद्धतियों को प्रोत्साहित करने वाली परियोजनाओं को विषेष महत्व दिया जाएगा। कार्यवृत और आईएफडी के अनुमोदन के पश्चात विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुमोदित मंजूर लागत का पचहत्तर प्रतिशत पहली किस्त में दिया जाएगा। प्रथम किस्त के अनुमोदन पत्र के माध्यम से यथा उल्लिखित सभी आवश्यक दस्तावेजों समेत दूसरी किस्त जारी करने के आवेदन पत्र के प्राप्त हो जाने के पश्चात शेष राशि का पच्चीस प्रतिशत प्रदान किया जाएगा बशर्ते संगठनों को आवश्यक रूप से अपने आस पास के किसी एक स्कूल में कम से कम दो सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित करनी होगी। अनुदान के नवीकरण तथा जारी करने के लिए इस संबंध में स्कूल प्रधानाचार्य से एक प्रमाण-पत्र अनिवार्य होगा। पाँच. जिन अनुदानग्राहियों को निर्माण अनुदान स्वीकृत हुआ है वे अपने कार्यक्रम के विस्तृत विवरण, संस्कृति मंत्रालय को उपलब्ध कराएंगे, जिससे कि इन्हें संस्कृति मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जा सके। छः. निर्माण अनुदान मांगने वाले संगठन/व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में केवल एक ही अनुदान प्राप्त करने के पात्र होंगे। एक. रेपर्टरी अनुदान सहायता के लिए नाटक मंडलियों से यह अपेक्षा की जाती है कि उनके पास पर्याप्त संख्या में और गुणवत्ता परक रंगपटल हो और वे अखिल भारतीय स्तर पर प्रदर्षन कर रही हों। दो. वे अनुदानग्राही जो रेपर्टरी अनुदान प्राप्त कर रहे हैं, उनके वेतन अनुदान के नवीकरण की सिफारिष तभी की जाएगी जब वे वित्त वर्ष के दौरान कम से कम दो निर्माण का मंचन करें। इनमें से एक निर्माण नया अर्थात जो पहले मंचित न किया गया हो, होना चाहिए। तीन. इस उद्देष्य के लिए स्थापित विशेषज्ञ समिति द्वारा वेतन अनुदान का वार्षिक पुनरीक्षण किया जाएगा। चार. वेतन अनुदान के मामले में चौथे वर्ष के बाद अनुदान जारी रखने के लिए वास्तविक सत्यापन आवश्यक होगा। जिन संगठनों को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, वे अपने आसपास के किसी भी स्कूल में कम से कम दो सांस्कृतिक कार्यकलाप अनिवार्य रूप से आयोजित करेंगे। अनुदान के नवीकरण और जारी करने के लिए स्कूल के प्रधानाचार्य से इस आशय का एक प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से अपेक्षित होगा। एक. यद्यपि, विज्ञापन मंत्रालय की वेबसाइट के माध्यम से वार्षिक आधार पर दिया जाएगा तथापि, वर्ष के दौरान आवेदन कभी भी किया जा सकता है जिनका मूल्यांकन इस उद्देष्य के लिए गठित विशेषज्ञ समिति द्वारा आवधिक आधार पर किया जाएगा। आवेदन-पत्र विधिवत रूप से संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित क्षेत्र प्रषासन या किसी भी राज्य अकादमी या राष्ट्रीय आकादमी सहित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय , कलाक्षेत्र फाउंडेषन, सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रषिक्षण केंद्र , इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र , क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र और इसी प्रकार के निकायों से संस्तुत होना चाहिए। दो. नीचे पैरा च में यथा निर्धारित दस्तावेज, आवेदन पत्र के साथ संलग्न किए जाने चाहिएं। इन दस्तावेजों के बिना प्रस्तुत आवेदनों को अस्वीकृत कर दिया जाएगा। संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय नाटय विद्यालय वार्षिक रूप से एनएसडी / मंत्रालय की वेबसाइटों पर स्कीम को अधिसूचित करेगा। स्कीम के पैरा सात में उल्लिखित आवश्यक दस्तावेजों द्वारा सहायित विहित प्रपत्र में आवेदनों को निदेशक, राष्ट्रीय नाटय विद्यालय, बहावलपुर हाउस, प्लॉट न.एक, भगवान दास रोड, नई दिल्ली-एक लाख दस हज़ार एक को भेजें एक. निर्माण अनुदान/रेपर्टरी अनुदान इस उद्देष्य के लिए गठित विशेषज्ञ समिति द्वारा स्वीकृत किए जाएंगे। विशेषज्ञ समिति का गठन दो वर्षों के लिए होगा तथा यह मंत्रालय द्वारा अनुमोदित होगी। विशेषज्ञ समिति अपनी सिफारिशों के लिए मामला-दर-मामला आधार पर औचित्य बताएगी। दो. निधि और अनुदान के लिए आवेदनों की संख्या की उपलब्धता के आधार पर विशेषज्ञ समिति द्वारा आवेदनों की जांच आवधिक रूप से की जाएगी। तीन. मंच कला अनुदान स्कीम के अन्तर्गत प्राप्त आवेदनों / प्रस्तावों के संबंध में संस्तुतिकर्ता निकाय इस स्कीम की विशेषज्ञ समिति से भिन्न होगा। चार. निर्माण अनुदान, पचहत्तर प्रतिषत और पच्चीस प्रतिषत की दो किस्तों के रूप में वितरित किया जाएगा जबकि संगठनों/संस्थानों को रेपर्टरी अनुदान वार्षिक रूप से जारी किया जाएगा। दो. निर्माण अनुदान : एक अप्रैल दो हज़ार नौ से प्रभावी, परियोजना के आधार पर संगठन/व्यक्तियों को अधिकतम पाँच लाख शून्य रुपया प्रति वर्ष दिए जाएंगे। तथापि, वृहत निर्माणों के मामले में, स्कीम के अनुरूप विषिष्ट आवष्यकताओं को पूरा करने के लिए, माननीय मंत्री के अनुमोदन से अनुदान की ऊपरी सीमा को बढ़ाया जा सकता है। इस स्कीम के अन्तर्गत व्यय को स्कीम के अधीन आबंटित परिव्यय तक सीमित रखा जाएगा। नोट : प्रचलन के अनुसार आवेदक संगठनों को भुगतान केवल इलेक्ट्रॉनिक मोड / आरटीजीएस के माध्यम से ही किया जाएगा। संस्था के संगम ज्ञापन व पंजीकरण प्रमाण-पत्र की प्रतिलिपि। आयकर मूल्यांकन आदेश। पिछले तीन वर्षों के प्राप्ति और भुगतान लेखे और लेखा परीक्षक के प्रमाण-पत्र सहित तुलन - पत्र। पिछले वर्ष प्राप्त अनुदान के लिए उपयोग प्रमाण-पत्र की प्रतिलिपि। कलाकारों के नाम, गुरू/निर्देषकों के नाम, रिहर्सल लागत, पोषाकों की लागत, परिवहन लागत, शोध लागत, लेखन की लागत, मंचन की लागत आदि का सम्पूर्ण ब्यौरा। पिछले वर्षों के निर्माण की प्रेस समीक्षा, प्रेस विज्ञापन, टिकट आदि की स्मारिका प्रतिलिपि। आवेदन पत्र, सम्बधित राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रषासन या किसी भी राज्य अकादमी या राष्ट्रीय अकादमी जिसमें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय , कलाक्षेत्र फाउंडेषन, सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रषिक्षण केंद्र , इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र , क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र और सदृष स्तर के निकाय शामिल हैं, से संस्तुत होने चाहिएं। नोट : पदम पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को संबंधित राज्य सरकारों/ संघ राज्यक्षेत्र प्रषासनों या किसी भी राज्य अकादमियों या राष्ट्रीय अकादमियों जिसमें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, कला क्षेत्र फाउंडेषन, सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रषिक्षण केन्द्र , इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, , क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र और सदृष प्रकृति के निकाय षामिल हैं, से संस्तुति प्राप्त करने की छूट होगी। संस्कृति मंत्रालय जैसा भी आवष्यक समझे आवधिक आधार पर, विषेषतः रेपर्टरी अनुदानग्राहियों के लिए, आवधिक निरीक्षणों, फील्ड दौरों आदि के माध्यम से अनुदानग्राहियों का मूल्यांकन करेगा। जहां तक रेपर्टरी अनुदान के नए मामलों का संबंध है, प्रत्येक मामले में अनुमोदित अनुदान मंत्रालय द्वारा यथा निर्धारित संगठनों के वास्तविक सत्यापन के पश्चात ही जारी की जाएगी। इसके अलावा कम से कम पाँच-दस प्रतिशत नए संस्तुत प्रस्तावों / मामलों का वास्तविक निरीक्षण / सत्यापन संस्कृति मंत्रालय में संबंधित अवर सचिव / अनुभाग अधिकारी द्वारा किया जाएगा। क. अनुदान प्राप्त करने के लिए पात्रता हेतु आवेदक संगठन का एक समुचित रूप से गठित प्रबंधन निकाय अथवा शासी निकाय अथवा शासी परिषद होनी चाहिए जिसमें लिखित संविधान के रूप में इनकी शक्तियों, दायित्वों और कर्तव्यों को स्पष्ट रूप से उल्लिखित और निर्धारित किया होना चाहिए। ख. इसके पास जिस परियोजना के लिए अनुदान अपेक्षित है उसको शुरू करने के लिए सुविधाएं, संसाधन, कार्मिक एवं अनुभव होना चाहिए। ग. आवेदक संगठन को भारत में पंजीकृत होना चाहिए और राष्ट्रीय मौजूदगी समेत इसे अखिल भारतीय स्तर का होना चाहिए तथा इसकी राष्ट्रीय / अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचालनात्मक मौजूदगी होनी चाहिए। घ. इस संगठन के कार्यकलाप मुख्य रूप से अथवा महत्वपूर्ण रूप से सांस्कृतिक होने चाहिए। ड. इस संगठन की क्षमता वर्ष भर में कम से कम बीस समारोह / कार्यक्रम करने की होनी चाहिए। च. इस संगठन के पास पर्याप्त कार्यक्षमता, कलाकार / स्टाफ / स्वैच्छिक सदस्य होने चाहिए। छ. इस संगठन द्वारा सांस्कृतिक कार्यकलापों पर विगत पाँच वर्षों के तीन वर्षों में एक करोड़ अथवा अधिक की राशि खर्च की हुई होनी चाहिए। एक. सामान्यतः कुल सरकारी अनुदान के पच्चीस प्रतिशत का उपयोग कला एवं संस्कृति के प्रोन्नयन पर केन्द्रित संस्थान / संगठन/ संस्कृति के भवन के रख-रखाव निर्माण / मरम्मत / विस्तार / पुनस्थापन/ नवीकरण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। दो. सामान्यतः कुल सरकारी अनुदान के पच्चीस प्रतिशत का उपयोग हर हाल में कला एवं संस्कृति के संवर्धन संबंधी शोध परियोजनाओं समेत सांस्कृतिक विरासत तथा कला के परिरक्षण और संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण समारोह को प्रदर्शित / आयोजित करने पर हुए अन्य विविध खर्चा तथा मानदेय के भुगतान के लिए उपयोग किए जा सकते हैं। एक. विशेषज्ञ सलाहकार समिति द्वारा स्कीम के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों / प्रस्तावों के मूल्यांकन तथा इसके पश्चात् संस्कृति मंत्रालय में प्रशासनिक प्राधिकार के आधार पर अनुदान प्रदान किया जाएगा। दो. यह अनुदान दो किश्तों में प्रदान किया जाएगा इसकी पहली किश्त परियोजना के अनुमोदन के समय जारी की जाएगी। इसकी दूसरी किश्त समुचित प्रारूप के अनुसार) में उपयोग प्रमाण-पत्र, अनुदान प्राप्तकर्ता के हिस्से समेत अनुदान की संपूर्ण राशि के उपयोग को दर्शाते हुए लेखाओं का विधिवत लेखा परीक्षा विवरण तथा चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा सत्यापित अन्य दस्तावेजों की प्राप्ति होने पर जारी किया जाएगा। अनुदान की शेष राशि को जारी करने पर निर्णय अनुमोदित अनुदान की अधिकतम सीमा के अध्यधीन रहते हुए वास्तविक व्यय के आधार पर किया जाएगा। तीन. वित्तीय सहायता पाने वाला संगठन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार अथवा संबंधित राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत अधिकारी / प्रतिनिधि द्वारा निरीक्षण के लिए खुला रहेगा। चार. परियोजना के लेखाओं को समुचित तथा पृथक रूप से रखा जाएगा और भारत सरकार के द्वारा जब कभी मांगा जाए इन्हें प्रस्तुत किया जाएगा और ये इसके विवेक के आधार पर केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के अधिकारी द्वारा जांच के अध्यधीन होंगे। पाँच. यह संगठन कला एवं संस्कृति के प्रोन्नयन पर केन्द्रित संस्थान/संगठन/केन्द्र के भवन के रख-रखाव और निर्माण/मरम्मत/ विस्तार/पुनस्र्थापन/नवीकरण के लिए उपयोग के परिव्यय का विस्तृत मद-वार ब्यौरा प्रदान करेंगे। छः. अनुदान प्राप्तकर्ता निम्नलिखित का रख-रखाव करेगाः सात. संगठन केन्द्र सरकार के अनुदान से पूर्णतः और आंशिक रूप से अर्जित सभी परिसम्पत्तियों का रिकॉर्ड रखेगा और जिस उद्देश्य के लिए अनुदान दिया गया है उसके अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए इन्हें भारत सरकार की पूर्व अनुमति के बिना नहीं बेचेगा अथवा ऋणग्रस्त और उपयोग करेगा। आठ. किसी भी समय यदि भारत सरकार के पास ऐसा विश्वास करने के पर्याप्त कारण हैं कि मंजूर की गई धनराशि का उपयोग अनुमोदित उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा रहा है तो अनुदान का भुगतान रोका जा सकता है और पहले के अनुदानों की वसूली की जा सकती है। नौ. संगठन को अनुमोदित परियोजना के कार्य के लिए अवश्य ही तर्कसंगत किफायत अपनानी चाहिए। दस. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन वास्तविक उपलब्धियों तथा प्रत्येक अनुमोदित मद पर पृथक रूप से हुए व्यय दोनों के विस्तृत ब्यौरे देते हुए परियोजना की तिमाही प्रगति रिपोर्ट संस्कृति मंत्रालय को प्रस्तुत करेगा। ग्यारह. ऐसे आवेदन जिनके पिछले अनुदान/उपयोग प्रमाण-पत्र लंबित हैं उन पर विचार नहीं किया जाएगा। बारह. संगठन को अपने आस-पास के किसी भी विद्यालय में कम से कम दो गतिविधियां अवश्य ही आयोजित करनी चाहिए। दूसरी किस्त जारी करने के लिए इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा जारी एक प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से अपेक्षित होगा। एक संगठन को सामान्यतः एक.शून्य करोड़ रू. तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, मंत्रालय द्वारा यह वित्तीय सहायता केवल दो.शून्य करोड़ रू. तक सीमित होगी। तथापि, संस्कृति मंत्री के अनुमोदन से आपवादिक / सुयोग्य मामलों में इस धनराशि को पाँच.शून्य करोड़ रू. तक बढ़ाया जा सकता है। स्कीम के अंतर्गत किसी संगठन के लिए सहायता उपरोक्त सीमा के अध्यधीन अनुमोदित लागत के अधिकतम सरसठ प्रतिशत तक सीमित रहेगी। अनुमोदित लागत के शेष तैंतीस प्रतिशत को संगठन द्वारा इसके बराबर के हिस्से के रूप में खर्च किया जाएगा । केन्द्र सरकार द्वारा जारी किए गए अनुदान के संबंध में पृथक लेखाओं का रख-रखाव किया जाएगा; क. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन के लेखे भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक अथवा उसके विवेकानुसार उनके नामिती के द्वारा किसी भी समय लेखा परीक्षा के लिए उपलब्ध रहेंगे। ख. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन अनुमोदित परियोजना पर हुए खर्च को दर्शाते हुए तथा पूर्व वर्षों में सरकारी अनुदान के उपयोग का उल्लेख करते हुए सनदी लेखाकार द्वारा लेखा-परीक्षित लेखाओं का विवरण भारत सरकार को प्रस्तुत करेगा। यदि निर्धारित अवधि के भीतर उपयोग प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो जब तक सरकार द्वारा कोई विशेष छूट न दी गई हो, वह तुरंत प्राप्त अनुदान की राशि को उस पर भारत सरकार की मौजूदा ब्याज दर के साथ वापस लौटाने की व्यवस्था करेगा। ग. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन, जब कभी भी सरकार द्वारा आवश्यक प्रतीत होने पर भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय द्वारा समिति नियुक्त करके अथवा भारत सरकार द्वारा निर्धारित किसी अन्य तरीके के माध्यम से समीक्षा के लिए खुला रहेगा। घ. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन विदेश मंत्रालय की पूर्व अनुमति के बिना किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित नहीं करेगा। इस प्रकार की अनुमति के आवेदन संस्कृति मंत्रालय के माध्यम से भेजे जाएंगे। ड. यह संगठन समय-समय पर सरकार द्वारा लगाए गए अन्य शर्तों के अध्यधीन होगा। ड. आवेदन पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया : संस्कृति मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर पात्र संगठनों से आवेदनों को आमंत्रित करने के लिए विज्ञापन अपलोड किया जाएगा। विहित प्रपत्र में विधिवत भरे आवेदन पत्रों को केन्द्र सरकार/राज्य सरकार/ संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन के संबंधित सांस्कृतिक विभाग/स्कंध अथवा संस्कृति मंत्रालय के किसी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों/राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय , संगीत नाटक अकादमी , ललित कला अकादमी , सीसीआरटी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र , सहित राष्ट्रीय अकादमियों तथा इसी के समतुल्य निकायों द्वारा संस्तुत किया जाना चाहिए और इन्हें केवल इन्हीं संगठनों के माध्यम से भेजा जाना चाहिए। तथापि, संस्कृति मंत्रालय के पास किसी आवेदन पर सीधे विचार करने का विवेकाधिकार होगा। घ. निम्नलिखित को शामिल करते हुए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट ; एक. जिस परियोजना के लिए सहायता चाहिए उसकी अवधि समेत उस परियोजना का ब्यौरा। दो. आवर्ती तथा गैर-आवर्ती व्यय का अलग-अलग मदवार ब्यौरा प्रदान करते हुए परियोजना का वित्तीय विवरण। तीन. उस स्रोत का उल्लेख जहां से सदृश धनराशि प्राप्त की जाएगी। ड. आवेदक संगठन का विगत तीन वर्षों का आय और व्यय का विवरण तथा विगत वर्षों के तुलन पत्र की एक प्रति । च. समुचित मूल्य के स्टाम्प पेपर पर विहित प्रपत्र में एक क्षतिपूर्ति बंध पत्र । छ. अनुमोदित अनुदान के इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण को सुलभ बनाने के लिए विहित प्रपत्र में बैंक खाते के विवरण। आपवादिक मामलों में संस्कृति मंत्रालय के पास विशेषज्ञ/संचालन/सलाहकार समिति की सिफारिशों पर दिशा-निर्देश के किसी भी मानदंड में कारणों को लेखबद्ध करते हुए छूट प्रदान करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा। इस स्कीम का उद्देष्य स्वैच्छिक सांस्कृतिक संगठनों तथा सरकारी सहायता प्राप्त सांस्कृतिक संगठनों को कलाकारों के लिए समुचित रूप से सुसज्जित प्रषिक्षण, अभ्यास व कला प्रस्तुति स्थलों के सृजन में उनके प्रयासों में सहायता करना है। एक. यह अनुदान सांस्कृतिक स्थल सृजित करने के लिए दिया जाएगा, जिनमें निम्नलिखित शामिल होंगे : एक.एक मंच कलाओं हेतु पारम्परिक सांस्कृतिक स्थल : क. प्रदर्षन स्थल जैसे ऑडिटोरियम, ओपन-एयर थिएटर, कन्सर्ट हॉल। ख. रंगमंच/संगीत/नृत्य हेतु रिहर्सल हॉल। ग. रंगमंच/संगीत/नृत्य हेतु प्रषिक्षण केन्द्र/स्कूल। एक.दो रूपान्तर स्थल अर्थात् स्टूडियो थिएटर आदि : आन्तरिक अभ्यास-सह-प्रदर्षन स्थल जिन्हें स्टूडियो थिएटर या प्रायोगिक थिएटर कहा गया है, जिनमें निम्नलिखित मुख्य विषेषताएं होती हैंः क. लघु थिएटर जिसमें संगीत, नृत्य या रंगमंच या इन कलाओं की समग्र प्रस्तुति हेतु सभी अनिवार्य उपस्कर हों, ख. अनौपचारिक स्थल जिसे पारंपरिक दृष्टि से ऑडिटोरियम नहीं कहा जा सकता, अतः सामान्यतया यह मंच या कला प्रस्तुति क्षेत्र न तो मुख्य रंगपीठ के अन्दर होता है और न ही इसे बहुत ऊंचाई पर बनाया जाता है या यह दर्शकों से दूर किसी भाग का विभाजन करके बनाया जाता है। ग. दर्शकों के बैठने की व्यवस्था इस प्रकार पूरी तरह से परिवर्तनीय होती है कि इसे कला प्रस्तुति विषेष के कलात्मक उद्देष्य के अनुसार स्थल में एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है, अतः सीटों/कुर्सियों को एक जगह स्थिर नहीं किया जाएगा। घ. स्थल की सामान्य क्षमता अधिकतम एक सौ से दो सौ सीट की होती है, अतः ऐसे स्थल को प्रायः लघु थिएटर या आन्तरिक थिएटर कहा जा सकता है क्योंकि इसमें दर्शक, कला प्रस्तुति का नजदीक से पूरा आनंद उठा सकते हैं। ङ, कलाकारों के लिए प्रसाधन सुविधा सहित साथ लगे एक या दो नेपथ्यषाला/ ड्रेसिंग रूम, श्रृंगार कक्ष और भण्डार क्षेत्र, अतः समूची यूनिट छोटी होती है परन्तु यह पूरी तरह थिएटर का काम करती है। क. नया निर्माण या निर्मित स्थल की खरीद। ख. मौजूदा भवन/स्थल/सुविधा केन्द्र का नवीकरण/उन्नयन/आधुनिकीकरण/विस्तार/फेरबदल। ग. मौजूदा निर्मित स्थल/सांस्कृतिक केन्द्र के आंतरिक भागों की रिमॉडलिंग। घ. विद्युत, वातानुकूलन, ध्वनि तंत्र, प्रकाष व ध्वनि प्रणाली तथा उपस्करों की अन्य मदें जैसे वाद्य यंत्र, परिधान, ऑडियो/वीडियो उपस्कर, फर्नीचर तथा स्टूडियो थिएटर के लिए अपेक्षित मंच सामग्री, ऑडिटोरियम, अभ्यास कक्ष, कक्षा कमरे आदि जैसी सुविधाओं की व्यवस्था। एक. इस स्कीम में निम्नलिखित शामिल हैंः निम्नलिखित मानदण्ड पूरा करने वाले सभी गैर-लाभार्थी संगठनः क. इस संगठन का स्वरूप मुख्यतः सांस्कृतिक होना चाहिए जो कम से कम तीन वर्ष की अवधि के लिए प्राथमिक रूप से नृत्य, नाटक, रंगमंच, संगीत, ललित कला, भारत विद्या-शास्त्र तथा साहित्य के क्षेत्र में कला व संस्कृति के संवर्धन में कार्यरत होना चाहिए। ख. संगठन कम से कम तीन वर्ष से सोसायटी पंजीकरण अधिनियम अथवा सदृष अधिनियम के तहत सोसायटी अथवा न्यास अथवा गैर-लाभार्थी कम्पनी के रूप में पंजीकृत हो। ग. संगठन की अपनी प्रतिष्ठा हो तथा अपने कार्यकलाप के क्षेत्र में सार्थक कार्य करने की उसकी ख्याति हो और उसने स्थानीय, क्षेत्रीय अथवा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई हो। घ. इसकी घोषणा पत्र संगठन, भारतीय कला व संस्कृति के परिरक्षण, प्रसार व संवर्धन के प्रति समर्पित हो। मंच कलाओं के संवर्धन में कार्यरत सरकारी प्रायोजित निकाय । मंच कलाओं के प्रति समर्पित विश्वविद्यालय, विभाग या केन्द्र। मंच कलाओं के संवर्धन हेतु स्थापित कॉलेज। दो मंत्रालय की विनिर्दिष्ट मंच कला परियोजनाओं हेतु कार्यरत व्यावसायिक समूहों और व्यक्तियों को वित्तीय सहायता की स्कीम के तहत कम से कम तीन वर्ष से वेतन अनुदान प्राप्त करते आ रहे संगठन को यह माना जाएगा कि उसने उपर्युक्त सभी शर्ते पूरी कर दी हैं। तीन मंच कलाओं को समर्पित, सरकार द्वारा प्रायोजित निकाय, विश्वविद्यालय विभाग/केन्द्र या कॉलेज भी स्वतः पात्र हो सकता है बशर्ते कि गत तीन वर्षों का उसका रिकार्ड संतोषजनक हो। चार धार्मिक संस्थाएं, सार्वजनिक पुस्तकालय, संग्रहालय, स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय, विभाग/ केन्द्र जो मंच कलाओं तथा संबद्ध सांस्कृतिक कार्यकलापों के प्रति विषिष्ट रूप से समर्पित नहीं है तथा केन्द्र सरकार/राज्य सरकार/ संघ-राज्यक्षेत्र प्रषासन/ स्थानीय निकाय के विभाग या कार्यालय पात्र नहीं होंगे। पाँच वह संगठन जिसने पूर्व की सांस्कृतिक संगठनों को भवन अनुदान स्कीम या इस स्कीम के तहत अपनी भवन परियोजना के लिए अनुदान प्राप्त किया हो, इस स्कीम के तहत पूर्व में मंजूर परियोजना के पूरा होने से पहले दूसरे अनुदान के लिए पात्र नहीं होगा बशर्ते कि उक्त दूसरा अनुदान स्टूडियो थिएटर के लिए न मांगा गया हो और आवेदक संगठन ने चल रही स्वीकृत परियोजना के संबंध में चूक न की हो। एक. इस स्कीम के तहत सभी अनुदान गैर-आवर्ती किस्म के होंगे। आवर्ती व्यय, यदि कोई हो, की जिम्मेदारी अनुदानग्राही संगठन की होगी। इस स्कीम के तहत अधिकतम सहायता इस प्रकार होगी : पच्चीस लाख रु. पच्चीस लाख रु. दो. इस स्कीम के तहत किसी संगठन को उपर्युक्त सीमा के अध्यधीन परियोजना की अनुमोदित प्राक्कलित लागत के अधिकतम साठ प्रतिषत तक सहायता दी जाएगी। परियोजना की अनुमोदित प्राक्कलित लागत की शेष राशि, इसकी बराबर की हिस्सेदारी के रूप में संबंधित संगठन द्वारा वहन की जाएगी। यदि परियोजना की अनुमोदित लागत एक सौ लाख रु. है तो संस्वीकृति योग्य अनुदान की अधिकतम राशि पचास लाख रु. होगी और अनुदानग्राही संगठन की बराबर की हिस्सेदारी पचास लाख रु. होगी। यदि परियोजना की अनुमोदित लागत सत्तर लाख रु. है तो संस्वीकृति योग्य अनुदान की अधिकतम राशि बयालीस लाख रु. होगी। और अनुदानग्राही संगठन की बराबर की हिस्सेदारी अट्ठाईस लाख रु. होगी। यदि परियोजना की अनुमोदित लागत साठ लाख रु. है तो संस्वीकृति योग्य अनुदान की अधिकतम राशि पच्चीस लाख रु. होगी और अनुदानग्राही संगठन की बराबर की हिस्सेदारी पैंतीस लाख रु. होगी। यदि परियोजना की अनुमोदित लागत चालीस लाख रु. है तो संस्वीकृति योग्य अनुदान की अधिकतम राशि चौबीस लाख रु. होगी और अनुदानग्राही संगठन की बराबर की हिस्सेदारी सोलह लाख रु. होगी। तीन. भूमि की लागत तथा संगठन द्वारा वहन किए गए विकास प्रभार को बराबर हिस्सेदारी के रूप में माना जाएगा। चार. संगठन द्वारा आवेदन की तारीख से एक वर्ष के भीतर निर्माण/भूमि व भवन के विकास तथा फिक्सचर्स व फिटिंग पर पहले से किए गए व्यय को भी बराबर हिस्सेदारी की राशि माना जाएगा। संगठन इस संबंध में किए गए व्यय का सनदी लेखाकार द्वारा विधिवत् रूप से प्रमाणित लेखा-जोखा प्रस्तुत करेगा। पाँच. यदि बाद में परियोजना की लागत बढ़ जाती है तो भारत सरकार की देयता मूलतः स्वीकृत राशि तक सीमित होगी और अतिरिक्त सम्पूर्ण व्यय, अनुदानग्राही संगठन द्वारा अपने संसाधनों से पूरा किया जाएगा। छः. परियोजना प्रस्ताव पर विचार किए जाने तथा कतिपय राशि के लिए उसे अनुमोदित किए जाने पर सामान्यतया परियोजना की समीक्षा और उसकी लागत बढ़ाने के लिए बाद में किसी भी अनुवर्ती अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जाएगा। सात. वित्तीय सहायता की मंजूरी की वैधता, प्रथम किस्त जारी होने की तारीख से तीन वर्ष की होगी और सभी परियोजनाएं तीन वर्ष की अवधि के भीतर पूरी की जानी अनिवार्य हैं। एक. संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय नाटय विद्यालय वार्षिक रूप से एनएसडी/मंत्रालय की वेबसाइटों पर स्कीम को अधिसूचित करेगा। स्कीम के पैरा सात में उल्लिखित आवश्यक दस्तावेजों सहित विहित प्रपत्र में आवेदनों को निदेशक, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, बहावलपुर हाउस, प्लॉट न.एक, भगवान दास रोड, नई दिल्ली-एक लाख दस हज़ार एक को भेजे आवेदन के साथ नीचे खण्ड सात के तहत उल्लिखित सभी दस्तावेज संलग्न किए जाने अनिवार्य हैं। इन अनिवार्य दस्तावेजों के बिना प्राप्त किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा और उसे प्रेषक को लौटा दिया जाएगा। आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न किए जाने चाहिएः एक. परियोजना रिपोर्ट/प्रस्ताव जिसमें निम्नलिखित शामिल होंगे : क. संगठन की रूपरेखा जिसमें संगठन, इसकी क्षमताओं, उपलब्धियों तथा गत तीन वर्षों के इसके कार्यकलापों के वर्ष-वार ब्यौरे का विवरण हो। ख. परियोजना/प्रस्ताव की तर्कसंगतता/औचित्य सहित इसका विवरण। ग. लागत प्राक्कलन का सार। घ. वित्त/निधियों के स्रोत। च. समापन उपरान्त-संगठन किस प्रकार परियोजना के माध्यम से सृजित सुविधा के प्रचालन व अनुरक्षण का संचालन करेगा और आवर्ती अनुरक्षण/प्रचालन लागत को पूरा करेगा। दो. सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, एक हज़ार आठ सौ साठ या अन्य संगत अधिनियमों के तहत पंजीकरण प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि। तीन. संगठन के नियमों व विनियमों, यदि कोई हों, सहित इसके संगम ज्ञापन की प्रतिलिपि। चार. प्रबंधन बोर्ड के वर्तमान सदस्यों/पदाधिकारियों/न्यासियों की सूची जिसमें प्रत्येक सदस्य का नाम व पता हो। पाँच. गत तीन वित्त वर्षों के वार्षिक लेखाओं की प्रतिलिपियां। छः. स्वामित्व विलेख जिसमें निम्नलिखित का उल्लेख हो : क. परियोजना की भूमि/भवन पर आवेदक संगठन का स्वामित्व और इस आषय की पुष्टि कि उक्त सम्पत्ति का इस्तेमाल वाणिज्यिक, संस्थागत या शैक्षिक प्रयोजन से किया जा सकता है। निर्मित स्थल की खरीद के प्रस्ताव के मामले में आबंटन पत्र/विक्रय करार की प्रतिलिपि प्रस्तुत की जाए। ख. भूमि/भवन की लागत यदि स्वामित्व विलेख में भूमि/भवन की लागत का उल्लेख नहीं किया गया है तो लागत के समर्थन में संगत दस्तावेज संलग्न किए जाएं। सात. समुचित नागरिक निकाय/स्थानीय प्राधिकारी द्वारा विधिवत् रूप से अनुमोदित भवन/विकास योजनाओं की प्रतिलिपि । निर्मित स्थल की खरीद के प्रस्ताव के मामले में सक्षम नागरिक निकाय/स्थानीय प्राधिकारी द्वारा विधिवत् रूप से अनुमोदित/जारी नक्षा योजना तथा निर्माण सम्पूर्ण प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया जाए। आठ. पंजीकृत वास्तुविद द्वारा विधिवत् रूप से अनुमोदित लागत प्राक्कलन जो यह प्रमाणित करेगा कि : क. मात्राएं, परियोजना की ढांचागत अपेक्षाओं के अनुरूप हैं। ग. लागत प्राक्कलन तर्क संगत हैं। नौ. इस आषय के दावे के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य कि संगठन ने अपनी बराबर की हिस्सेदारी प्राप्त कर ली है या इसे प्राप्त करने के प्रबंध कर लिए हैं अर्थात् बैंक विवरण, परियोजना पर किए जा चुके खर्च का प्रमाण पत्र ऋण मंजूरी पत्र, परियोजना के लिए निधियों की मंजूरी दर्षाने वाला राज्य सरकार/संघ राज्य प्रषासन/स्थानीय निकाय आदि का पत्र। दस. संगठन के प्रबंधन बोर्ड/कार्यकारी बोर्ड/षासी निकाय का संकल्प जिसमें संगठन की ओर से अनुदान हेतु आवेदन, बंध-पत्र आदि पर हस्ताक्षर करने के लिए किसी व्यक्ति को प्राधिकृत किए जाने का उल्लेख हो। ग्यारह. निर्धारित मूल्य राशि के स्टाम्प पेपर पर मांगी गई सहायता का बंध-पत्र । सात.बारह संगठन के बैंक खाते का ईसीएस ब्यौरा दर्षाने वाला बैंक प्राधिकार पत्र । नोट : i. आवेदक संगठन, अपने प्रस्ताव के समर्थन में ऐसा कोई भी अन्य दस्तावेज संलग्न कर सकता है जो वह प्रस्तुत करना चाहे । ii. जहां कहीं दस्तावेज क्षेत्रीय भाषा में हैं, उनका अंग्रेजी व हिन्दी रूपान्तरण भी उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है। iii. जहां कहीं कतिपय दस्तावेज की प्रतिलिपियां प्रस्तुत की जा रही हों, उन्हें किसी राजपत्रित अधिकारी या नोटरी पब्लिक द्वारा विधिवत् रूप से सत्यापित कराया जाना चाहिए। iv. मंच कलाओं को समर्पित सरकार द्वारा प्रायोजित निकायों, विश्वविद्यालय विभागों या केन्द्रों और कॉलेजों के मामले में बिंदु सात.दो से सात.दस पर विनिर्दिष्ट दस्तावेजों में से केवल ऐसे दस्तावेजों को उपलब्ध कराए जाने की आवष्यकता है जो आवेदक संगठन से संबंधित हों। एक. संस्कृति मंत्रालय में प्राप्त सभी आवेदनों की, संस्कृति मंत्रालय के मंचकला प्रभाग द्वारा उपर्युक्त अपेक्षाओं के अनुसार पूर्णता की दृष्टि से जांच की जाएगी। अधूरे आवेदनों पर विशेषज्ञ समिति द्वारा मूल्यांकन हेतु आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। दो. मूल्यांकन समिति द्वारा मूल्यांकन से पहले, जहां कहीं समिति ऐसा चाहे, आवेदनों की, संस्कृति मंत्रालय के अधीन किसी संगठन या इस प्रयोजनार्थ नियुक्त किसी विशेषज्ञ समूह या किसी एजेंसी की सहायता से सत्यापन पूर्व जांच भी की जा सकती है। वैकल्पिक तौर पर इससे पहले प्रस्ताव के मामले विषेष में या स्थायी व्यवस्था के बतौर किसी समतुल्य समूह द्वारा मूल्यांकन कराया जा सकता है। ऐसे पूर्व सत्यापन या पूर्व मूल्यांकन का प्रयोजन आवेदन करने वाले संगठन की प्रतिष्ठा व क्षमताओं तथा परियोजना की सुयोग्यता का आन्तरिक मूल्यांकन करना होगा। तीन. सभी तरह से पूर्ण आवेदन पर विशेषज्ञ समिति द्वारा खेपों में विचार किया जाएगा, जिसे संस्कृति मंत्रालय द्वारा । गठित किया जाएगा और समिति, अनुदान हेतु प्राप्त आवेदनों की संख्या के आधार पर वर्ष के दौरान समय-समय पर बैठक करेगी। चार. विशेषज्ञ समिति निम्नलिखित के विषेष सन्दर्भ में प्रत्येक परियोजना प्रस्ताव के गुणावगुण के संबंध में उसका मूल्यांकन करेगी : क. क्या आवेदक संगठन संबंधित क्षेत्र में सुप्रतिष्ठित है और उसकी एक अपनी पहचान है। ख. क्या प्रस्ताव की संकल्पना सु-विचारित है; घ. क्या परियोजना पूरी करने के लिए संगठन की अपनी बराबर की हिस्सेदारी जुटाने की क्षमता है या इसने इसकी व्यवस्था की है । पाँच. विशेषज्ञ समिति में मंच कलाओं व संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों के कलाकार शामिल होंगे और इसमें वास्तुविद, सिविल इंजीनियर तथा प्रकाष/ध्वनि/मंच षिल्प में तकनीकी विशेषज्ञ तथा साथ ही संस्कृति मंत्रालय के संबंधित अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। एक. परियोजना प्रस्ताव का अनुमोदन होने पर, मंत्रालय इस निर्णय की सूचना, संबंधित संगठन को देगा जिसमें परियोजना की कुल अनुमोदित लागत, मंजूर की गई सहायता की मात्रा, संगठन की बराबर की हिस्सेदारी की मात्रा तथा सहायता की संस्वीकृत राशि जारी करने संबंधी अन्य शर्तों का उल्लेख होगा। दो. संस्वीकृति पत्र में उस भवन/उपस्करों को भी विनिर्दिष्ट किया जाएगा जिनके लिए सहायता मंजूर की गई है। तीन. सहायता की संस्वीकृत राशि निम्नलिखित तरीके से किस्तों में जारी की जाएगी। तीन.एक प्रथम किस्त : संस्वीकृत सहायता की चालीस प्रतिषत राशि की प्रथम किस्त, बिना किसी और पत्राचार के मंत्रालय द्वारा परियोजना प्रस्ताव के अनुमोदन/संस्वीकृति पर जारी की जाएगी। तीन.दो दूसरी किस्त : संस्वीकृत अनुदान की तीस प्रतिषत राशि की दूसरी किस्त निम्नलिखित प्रस्तुत किए जाने पर जारी की जाएगी : क. किसी पंजीकृत वास्तुविद से परियोजना के संबंध में वास्तविक व वित्तीय प्रगति की रिपोर्ट जिसमें स्थल के फोटो सहित पहले से पूरे किए गए कार्य का ब्यौरा हो। ख. पंजीकृत वास्तुविद से निम्नलिखित आषय का प्रमाण पत्र किः परियोजना कार्य, अनुमोदित योजना के अनुसार पूरा किया गया है/चल रहा है; स्थानीय कानूनों या निर्माण/विकास की अनुमोदित योजना का उल्लंघन नहीं किया गया है; किया गया कार्य संतोषजनक स्तर का है; और यह दर्षाया गया हो कि, किए गए कार्य की लागत का मूल्यांकन और परियोजना कार्य पूरा करने के लिए आगे और राशि अपेक्षित है। ग. सनदी लेखाकार द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित परियोजना के लेखाओं का संपरीक्षित विवरण। घ. सनदी लेखाकार द्वारा उपयोग प्रमाण-पत्र, जिसमें प्रमाणित किया गया हो कि सहायता राशि की दूसरी किस्त पूरी तरह परियोजना पर खर्च की गई है। ङ. सनदी लेखाकार का एक प्रमाण-पत्र जिसमें प्रमाणित किया गया है कि संगठन ने अपनी बराबर की हिस्सेदारी का चालीस प्रतिषत खर्च कर दिया है। तीन.तीन अंतिम किस्त : संस्वीकृत अनुदान के तीस प्रतिषत राशि के बराबर अंतिम किस्त निम्नलिखित प्रस्तुत किए जाने के बाद जारी की जाएगी : तीन.तीन.एक अनुदानग्राही संगठन ने निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत किए : क. किसी पंजीकृत वास्तुविद से परियोजना के संबंध में वास्तविक व वित्तीय प्रगति की रिपोर्ट जिसमें स्थल के फोटो सहित पहले से पूरे किए गए कार्य का ब्यौरा हो। ख. पंजीकृत वास्तुविद से निम्नलिखित आषय का प्रमाण पत्र : परियोजना कार्य, अनुमोदित योजना के अनुसार पूरा किया गया है/ चल रहा है, स्थानीय कानूनों या निर्माण/विकास की अनुमोदित योजना का उल्लंघन नहीं किया गया है; किया गया कार्य संतोषजनक स्तर का है; और यह दर्षाता है कि, किए गए कार्य की लागत का मूल्यांकन और परियोजना कार्य पूरा करने के लिए आगे और राशि अपेक्षित है। ग. सनदी लेखाकार द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित परियोजना के लेखाओं का संपरीक्षित विवरण। घ. सनदी लेखाकार द्वारा उपयोग प्रमाण-पत्र, जिसमें प्रमाणित किया गया हो कि सहायता राशि की दूसरी किस्त पूरी तरह परियोजना पर खर्च की गई है। ङ. सनदी लेखाकार का प्रमाण-पत्र, जिसमें प्रमाणित किया गया है कि संगठन ने अपनी बराबर की हिस्सेदारी का सत्तर प्रतिषत खर्च कर दिया है। तीन.तीन.दो संस्कृति मंत्रालय ने अपने प्रतिनिधियों) के माध्यम से परियोजना का वास्तविक रूप से निरीक्षण करा लिया है। परियोजना की प्रकृति और आकार के आधार पर, मंत्रालय ऐसी फील्ड जांच के लिए, मंत्रालय से अथवा इसके संगठनों से और/अथवा विभिन्न कार्यालयों/षाखाओं से लिए गए अधिकारियों और/या विषेषज्ञों के एक दल को प्रतिनियुक्त कर सकता है, अथवा यह निरीक्षण करने के लिए अन्य पक्ष की सेवाएं ले सकता है। टिप्पणीः यदि आकलित निधियों की अंतिम मांग, अनुमोदित परियोजना लागत से कम है अथवा संगठन द्वारा बराबर की हिस्सेदारी की खर्च की गई राशि अनुमोदित परियोजना लागत के चालीस प्रतिषत से कम है, तो अनुदान की अंतिम किस्त की राशि उसी के अनुरूप कम कर दी जाएगी। चार. पच्चीस.शून्य लाख रू. तक को प्रस्तावों का विशेषज्ञ समिति की सिफारिष पर संबंधित संयुक्त सचिव द्वारा अनुमोदित किया जाएगा और पच्चीस.शून्य लाख रू. से अधिक एवं पचास.शून्य लाख रू. तक के प्रस्ताव सचिव के स्तर पर अनुमोदित किए जाएंगे। एक. भारत सरकार द्वारा जारी अनुदानों के लिए अलग खाता रखना होगा। दो. परियोजना के खाते और स्थल, संस्कृति मंत्रालय के प्रतिनिधि द्वारा किसी भी समय जांच के लिए तैयार होने चाहिए। तीन. यदि परियोजना, पहली किस्त के जारी होने की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर पूरी नहीं की जाती है तो, संगठन को आगे कोई अनुदान जारी नहीं किया जाएगा तथा उक्त दावा काल-बाधित हो जाएगा। चार. संगठन के खाते, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक अथवा अपने विवेक से उनके द्वारा नामिती द्वारा किसी भी समय लेखा-परीक्षा के लिए तैयार होने चाहिए। पाँच. अनुदान अथवा उसके बाद किसी किस्त के जारी होने के वित्तीय वर्ष की समाप्ति के छः महीने के भीतर अनुदानग्राही, अगले वर्ष में भारत सरकार को अनुमोदित परियोजना पर किए गए व्यय को दर्षाने वाला सनदी लेखाकार द्वारा संपरीक्षित लेखा तथा प्रमाणित विवरण तथा भारत सरकार के अनुदान की उपयोगिता को दर्षाने वाला उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेगा। यदि उक्त अवधि के भीतर उपयोग प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो अनुदानग्राही को भारत सरकार की मौजूदा ब्याज दर पर ब्याज सहित प्राप्त कुल अनुदान राशि को तुरंत वापिस करना होगा, बशर्ते कि भारत सरकार द्वारा विषेष रूप से छूट न दी गई हो। क. यदि परियोजना में नया निर्माण शामिल है, यथोचित नागरिक प्राधिकारी को भेजी गई भवन निर्माण पूरा होने की सूचना की प्रति अथवा इसके द्वारा जारी सम्पूर्णता प्रमाण पत्र, और पूर्व-निर्मित स्थल की खरीद वाली परियोजनाओं के मामले में, भवन निर्माता/विक्रेता को किए गए सभी भुगतानों की रसीदों, स्वामित्व पत्र और पंजीकरण/मालिकाना शपथ-पत्र की प्रतियां। ख. वास्तुकार से परियोजना पूरी करने संबंधी रिपोर्ट। ग. सनदी लेखाकार से प्रमाण पत्र कि संगठन ने अपनी बराबर की हिस्सेदारी की पूर्ण राशि खर्च कर दी है। सात. भारत सरकार के अनुदान पूर्णरूपेण अथवा मुख्य रूप से अधिगृहीत स्थायी और अर्ध-स्थायी परिसंपत्तियों का एक रजिस्टर निर्धारित फार्म में तैयार किया जाना चाहिए। अनुदानग्राही को इस रजिस्टर की एक प्रति प्रतिवर्ष संस्कृति मंत्रालय को प्रस्तुत करनी चाहिए। आठ. अनुदानग्राही दो जमानतदारों के साथ निर्धारित प्रपत्र में भारत के राष्ट्रपति के नाम इस आषय का बंध पत्र निष्पादित करेगा कि वह अनुदान की शर्तों का पालन करेगा। उसके द्वारा अनुदान की शर्तों का पालन न किए जाने या बंध-पत्र का उल्लंघन किए जाने की स्थिति में अनुदान प्राप्तकर्ता और जमानती अलग-अलग या मिलकर भारत के राष्ट्रपति को भारत सरकार की वर्तमान उधार दर पर ब्याज सहित अनुदान की समूची राशि लौटाएगा। नौ. केन्द्रीय सहायता से अधिगृहीत भवनों व अन्य परिसम्पत्तियों पर प्रथम पुनर्ग्रहणाधिकार भारत के राष्ट्रपति का होगा और भारत सरकार की पूर्व अनुमति के बिना भवन या उपस्कर को किसी अन्य पक्ष को पट्टे पर नहीं दिया जाएगा या उसे गिरवी नहीं रखा जाएगा। तथापि, इस प्रकार अधिगृहीत स्टूडियो थिएटर या अन्य सुविधाओं को अस्थायी इस्तेमाल हेतु किसी अन्य पक्ष को पट्टे पर देने का प्रावधान इस शर्त से मुक्त होगा। ग्यारह अनुदानग्राही संगठन, इस स्कीम के तहत विकसित स्टूडियो/थिएटर/सांस्कृतिक स्थल में समुचित रूप से मंत्रालय । का नाम लिखकर भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय की वित्तीय सहायता का आभार प्रकट करेगा। बारह. केवल अनुदानग्राही, भवनों के निर्माण या भूमि और भवनों के उपयोग संबंधी स्थानीय क्षेत्र में यथा लागू कानूनों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार होगा। तेरह. ऐसी अन्य शर्ते जो भारत सरकार समय-समय पर लागू करे। चौदह. संगठनों द्वारा उनके इलाके के किसी भी स्कूल में कम से कम दो कार्यकलाप , अनिवार्य रूप से आयोजित किए जाएं। स्कूल के प्रधानाचार्य से इस आषय का प्रमाण पत्र, दूसरी किस्त जारी करने हेतु अनिवार्य रूप से आयोजित होगी। सामान्यतया पूर्व की सांस्कृतिक संगठनों को भवन अनुदान स्कीम के तहत स्वीकृत किए गए मामलों को फिर से नहीं खोला जाएगा और न ही सामान्यतया इस स्कीम के प्रावधानों के तहत संस्वीकृत राशि को बढ़ाया जाएगा परन्तु भवन अनुदान के ऐसे मामले में वितरण हेतु लंबित किस्तों को, अनुदानग्राही संगठन के अनुरोध पर, विभिन्न किस्तें जारी करने के लिए पद्धति व इस स्कीम के तहत परिकल्पित दस्तावेजी अपेक्षाओं का पालन करके जारी किया जाएगा। तथापि, ऐसे मामलों में जब कोई किस्त जारी नहीं की गई हो तो अनुदानग्राही संगठन पूर्व स्वीकृति को रद्द करने व इस स्कीम के तहत उसकी परियोजना पर नए सिरे से विचार करने का अनुरोध कर सकता है। विगत के मामलों में जब पूरा संस्वीकृत अनुदान जारी नहीं किया गया हो। और परियोजना अधूरी पड़ी हो तथा अनुदानग्राही संगठन अपने मामलों की समीक्षा तथा इस स्कीम के तहत संस्वीकृत अनुदान को बढ़ाने की मांग करे तो मामला-दर-मामला आधार पर निर्णय किया जाएगा। एक. आठवीं पंचवर्षीय योजना में राज्य सरकारों/ राज्य प्रायोजित निकायों को बहुउद्देशीय सांस्कृतिक परिसरों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता अनुदान स्कीम शुरू की गयी थी जिसका उद्देश्य सृजनात्मक कार्यो के सर्वोत्तम स्वरूप को दर्शाने और समाज में कलात्मक और नैतिक रूप से जो अच्छा है, उसके लिए उन्हें संवेनदशील बनाते हुए अपने युवाओं के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। संगीत नृत्य, नाटक, साहित्य, ललित कला आदि जैसे विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्रों में समन्वय और प्रोत्साहन देने के लिए स्कीम के तहत राज्यों में सांस्कृतिक परिसरों की स्थापना की गयी थी। स्कीम में जैसा प्रावधान किया गया था, राज्य अथवा उस स्थान में मौजूद सुविधाओं, सम्बंधित सांस्कृतिक विभागों की वित्तीय स्थिति, अनुदान के समान निधि उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता और बहुउद्देश्यीय सांस्कृतिक परिसरों के आवर्ती व्यय को ध्यान में रखते हुए एक सलाहकार समिति द्वारा राज्य सरकारों के अनुरोध पर विचार किया गया। इस स्कीम के तहत अधिकतम एक.शून्य करोड़ रूपये का अनुदान उपलब्ध कराया गया बशर्ते राज्य सरकार द्वारा समान अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जाने वाली परियोजना लागत का पचास प्रतिशत हो। दो. विगत निष्पादनों को ध्यान में रखते हुए स्कीम की समीक्षा की गयी थी और स्कीम में रखे गये मानदण्डों को वर्ष दो हज़ार चार में संशोधित किया गया था। संशोधित स्कीम बहुउद्देशीय सांस्कृतिक परिसरों की दो श्रेणियों के लिए उपलब्धकराई गयी। श्रेणी एक के लिए परियोजना की लागत पाँच.शून्य करोड़ रूपये तथा श्रेणी ii के लिए दो.शून्य करोड़ रुपए थी। तीन. दसवीं योजना के अंत में योजना आयोग द्वारा स्कीम को बंद करने से पूर्व विभिन्न राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों में कुल उनचास बहुउद्देशीय सांस्कृतिक परिसरों को सहायता दी गयी थी। परिणाम स्वरूप, ग्यारहवीं योजना के मध्य अवधि मूल्यांकन के दौरान योजना आयोग स्कीम को समुचित सुधारों के साथ पुनः संचालित करने पर सहमत हुआ। चार. गुरूदेव रबीन्द्रनाथ टैगेर की एक सौ पचासवीं जयन्ती समारोह मनाने के लिए गठित प्रधानमंत्री के अधीन राष्ट्रीय समिति और वित्त मंत्री के तहत स्थापित राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति ने सम्बंधित विकास के मामले में अनुभव किया है कि एक हज़ार नौ सौ इकसठ में गुरू रबीन्द्रनाथ टैगोर के शताब्दी समारोह के अवसर पर शुरू किये गये राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के एक भाग के रूप में केन्द्रीय सहायता से पूरे देश में सृजित बड़ी संख्या में रबीन्द्र भवनों, सदनों, रंगशालाओं, मंचों, और अन्य सांस्कृतिक केन्द्रों के नवीकरण, उन्नयन और विस्तार किए जाने की आवश्यकता है। ये केन्द्र तीसवर्षों से अधिक समय से संचालन में रहे हैं। और समाज की अच्छी तरह सेवा की है। पाँच. टैगोर की एक सौ पचासवीं जयंती समारोह के भाग के रूप में यह निर्णय लिया गया कि वर्तमान रबीन्द्र भवनों का पुनर्निर्माण/नवीनीकरण/उन्नयन/आधुनिकीकरण/ विस्तार किया जाय और संषोधित एम पी सी सी स्कीम की रूपरेखा के अनुसार जिन राज्य की राजधानियों और अन्य शहरों में ऐसे परिसर नहीं हैं वहां भी नये सांस्कृतिक परिसरों का निर्माण किया जाय। इसलिए पहले की एम पी सी सी स्कीम को दिनांक सात.पाँच.दो हज़ार ग्यारह से टैगोर सांस्कृतिक परिसर के नाम से नवीकृत और पुनरांरभ करने का निर्णय लिया गया ताकि अलग-अलग पैमाने पर नये सांस्कृतिक परिसरों की स्थापना करने और सुगम बनाने के अलावा वर्तमान रबीन्द्र सभागारों के उन्नयन, आधुनिकरण और सुधार से इन्हें आधुनिकतम सांस्कृतिक परिसरों के रूप में बदला जा सके। छः. इसकी शुरूआत से, राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति की दो बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं जिनमें कमशः उनतीस और अड़तीस प्रस्तावों पर विचार किया गया। सात. संस्कृति मंत्रालय यह भी महसूस करता है कि देश में कला संबंधी अवसंरचना में गंभीर अभाव की स्थिति है। इस अभाव को इस स्कीम के माध्यम से निधियां उपलब्ध करवाकर कम किया जाना चाहिए क्योंकि यह स्कीम विशिष्ट रूप से मंच कलाओं और सामान्य रूप से कला एवं संस्कृति के प्रचार और संवर्धन से सीधे जुड़ी हुई है। इस प्रयोजन से, भारत सरकार उक्त टैगोर सांस्कृतिक परिसर स्कीम को जारी रखने पर विचार कर रही है जो साधारणतया कला के संवर्धन हेतु लगभग सभी प्रयोजनों के लिए एक बड़े पैमाने पर मंच प्रदान करवाने से संबंधित है। इस स्कीम का उद्देश्य विद्यमान स्थानों के स्तरोन्नयन के साथ-साथ हर प्रकार के नए स्थानों का सृजन करना है। इससे पूरे देश में कलाओं के संवर्धन को प्रोत्साहन मिलेगा। चूंकि इसमें से बहुत सा कार्य लोक क्षेत्र से बाहर किया जा रहा है, अतः गैर-लाभार्थी संगठनों और ऐसे ही निकायों को स्कीम के तहत पात्र आवेदकों में शामिल किया गया है। यह भी महसूस किया गया है कि पूर्व एमपीसीसी स्कीम के अधीन देश में कई परियोजनाओं को भी विद्यमान एमपीसीसी, रबीन्द्र भवनों सदनों रंगशालाओं के स्तरोन्नयन के साथ-साथ विद्यमान भौतिक सुविधाओं के पुनरूद्धार, नवीकरण, विस्तार, परिवर्तन, स्तरोन्नयन, आधुनिकीकरण आदि के लिए अवसंरचना हेतु कुछ निधियों की आवश्यकता है। आठ. इन आवश्यकताओं को वृहत, वैविध्यपूर्ण टीसीसी स्कीम में तदनुसार शामिल कर लिया गया था। अनुदान प्राप्तकर्ता राज्य सरकारों / संघ प्रदेश प्रशासनों / गैर लाभार्थी संगठनों के लिए आवश्यक स्टेक का भी प्रावधान किया गया है ताकि उनकी संपूर्ण सहभागिता और समर्पण तथा परियोजना का बौद्धिक स्वामित्व सुनिश्चित किया जा सके। एक. इस स्कीम का रीविजिटिड स्वरूप टैगोर सांस्कृतिक परिसर के रूप में जाना जायेगा जो संगीत, नाटक, नृत्य, साहित्य,ललित कला आदि जैसे विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्रों में राज्य में कार्यकलापों को प्रोत्साहन और समन्वय प्रदान करना जारी रखेगा और उनके माध्यम से देश की सांस्कृतिक एकता को संवर्धित करेगा तथा युवा पीढ़ी को सृजनात्मक अभिव्यक्ति और ज्ञान के लिए मार्ग उपलब्ध करायेगा। दो. ये सांस्कृतिक परिसर मंच अभिनय , प्रदर्शनियों सेमिनारों, साहित्यिक कार्यकलापों, फिल्म प्रदर्शन आदि के लिए सुविधाओं तथा आधारभूत संरचना के साथ कला और संस्कृति के सभी स्वरूपों के लिए उत्कृष्ट केन्द्रों के रूप में कार्य करेंगे। इसलिए ये मूल टैगोर सभागार स्कीम से परे कार्य करने के लिए अभिप्रेत हैं और सृजनात्मकता तथा सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में बहुआयामी रूचियों को प्रोत्साहन देंगे। स्कीम के तहत निम्नलिखित को वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी : एक. राज्य सरकार/ संघ राज्य प्रशासन; दो. राज्य सरकार/संघ राज्य प्रशासनों द्वारा स्थापित अथवा प्रायोजित निकाय ; तीन. केन्द्र सरकार अथवा इसके अधीन संगठनों द्वारा स्थापित अथवा प्रायोजित निकाय ; पाँच. परियोजना की स्थापना और संचालन करने में सक्षम ऐसे गैर लाभकारी प्रतिष्ठित संगठन जो उपलब्ध कराई गयी परियोजना की लागत का चालीस प्रतिशत अपने समभाग के रूप में जुटा सकें और आवर्ती लागत को पूरा कर सकें। ये संगठन केन्द्र सरकार अथवा सम्बंधित राज्य सरकार/संघ शासित सरकार की उपयुक्त एजेंसी द्वारा निरीक्षित तथा अनुशंसित रहे हों और निम्नलिखित मानदण्डों को पूरा करते हों : क) ऐसा संगठन जो सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम अथवा समान अधिनियमों के तहत या न्यास अथवा गैर-लाभार्थी कम्पनी के रूप में कम से कम तीन वर्षों की अवधि के लिए एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत है। ख) जिसका घोषणापत्र मूलरूप से भारतीय कला और संस्कृति के परिरक्षण, प्रसार और संवर्धन के लिए समर्पित है। ग) संगठन की प्रमुख रूप से सांस्कृतिक रूपरेखा हो तथा कम से कम तीन वर्षों से नृत्य, नाटक, रंगमंच, संगीत, ललित कला, भारतविद्या और साहित्य जैसे क्षेत्रों में कला और संस्कृति के सम्वर्धन के लिए मूल रूप से कार्य कर रहा हो। घ) संगठन पूर्णतया स्थापित हो और अपने कार्यकलापों के क्षेत्र में अर्थपूर्ण कार्य करने के लिए जाना जाता हो तथा स्थानीय, क्षेत्रीय अथवा राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और प्रतिष्ठा/स्थायित्व रखता हो। निम्नलिखित प्रकृति की परियोजनओं को वित्तीय सहायता दी जायेगी : एक. नये टैगोर सांस्कृतिक परिसर टीसीसी जिला/नगर परिसरों जिनमें लघु प्रेक्षागृह अथवा ओपन एयर एम्फीथियेटर अथवा इंप्रोवाइज्ड मंच के अलावा प्रत्येक परियोजना में सभागार शामिल है। टीसीसी एक बहु उद्देशीय सांस्कृतिक परिसर होगा किंतु किसी विशेष परियोजना में सुविधाएं उपलब्ध कराना स्थानीय आवश्यकताओं तथा सांस्कृतिक लोकाचार पर निर्भर करेगा। आदर्शतः इस स्कीम के उद्देश्यों के लिए टी सी सी का लक्ष्य निम्नलिखित आधुनिक सुविधाएं और आधारभूत संरचना प्राप्त करना है : के सभागारों का एक समूह) जिसमें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार बैठने की उपयुक्त क्षमता हो, का प्रयोग व्याख्यानों, फिल्म प्रदर्शनों आदि के लिए केन्द्र के रूप में भी किया जा सकता है। सेमिनारों, सम्मेलनों कार्यशालाओं आदि के लिए विभिन्न क्षमताओं वाले कक्ष। आगन्तुक कलाकारों के लिए शयनागार। कला और छायाचित्रण के लिए प्रदर्शनी क्षेत्र। पुस्तकालय/अध्ययन कक्ष । कार्यालय, कैफेटेरिया/भोजन-प्रबंध, शौचालय, स्वागत कक्ष/प्रतीक्षालय, पार्किंग आदि के लिए सामान्य सुविधाएं । रवीन्द्र भवनों सदनों रंगशालाओं, अन्य प्रेक्षागृह/ सांस्कृतिक परिसरों के उन्नयन की परियोजना स्कीम में शामिल होगी और निम्नलिखित संघटकों के कोई अन्य अथवा उपयुक्त संयोजन शामिल हो सकते हैंः मौजूदा वास्तविक सुविधाओं का पुनरूद्धार, नवीकरण, विस्तार, परिवर्तन, उन्नयन और आधुनिकीकरण; विद्युतीय, वातानुकूलन, ध्वनिक, प्रकाश एवं ध्वनि प्रणाली और अन्य मदों के उपकरण जैसे दृश्य/श्रव्य उपकरण, फर्नीचर तथा मंच सामग्री जैसी सुविधाओं का प्रावधान/उन्नयन। तीन. स्वीकृत/जारी एमपीसीसी परियोजनाओं का समापन पहले की एम पी सी सी स्कीम के तहत स्वीकृत परियोजनाएं पुनःनहीं खोली जायेंगी न ही इस स्कीम के प्रावधानों के तहत स्वीकृत राशि को बढ़ाया जायेगा। तथापि, विशेषज्ञ समिति द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं के मामले में, स्कीम स्थगित होने से पूर्व अथवा जारी परियोजनाएं जिनमें भुगतान के लिए कोई किस्तें शेष हैं, उनको उपर्युक्त एमपीसीसी स्कीम के प्रावधानों और सीमा के अनुसार इस स्कीम के तहत केन्द्रीय सहायता का भुगतान जारी रहेगा। एक. भारत सरकार द्वारा वित्तीय सहायता की मात्रा परियोजना लागत के साठ प्रतिशत तक सीमित होगी। दो. प्राप्तकर्ता राज्य सरकार अथवा सम्बंधित संगठन से उसकी हिस्सेदारी के रूप में परियोजना लागत का चालीस प्रतिशत योगदान अपेक्षित होगा। ऐसी हिस्सेदारी में जमीन की लागत/ कीमत शामिल नहीं होगी। सम्पर्क मार्ग के साथ विकसित भूमि सम्बंधित राज्य सरकार द्वारा मुफ्त उपलब्ध कराई जायेगी अन्यथा संगठन के पास अपने स्वामित्व की भूमि हो । तीन. किसी भी परियोजना के लिए स्कीम के तहत वित्तीय सहायता सामान्य रूप से अधिकतम पंद्रह करोड़ रूपये तक होगी। विशेष योग्यता और प्रासंगिकता के बहुत दुर्लभ मामले में, वित्तीय सहायता पचास करोड़ रूशून्य तक बढ़ाई जा सकती है किन्तु तब पंद्रह करोड़ रूशून्य से अधिक वित्तीय सहायता का ऐसा प्रत्येक व्यक्तिगत मामला नई योजना स्कीमों के लिए निर्धारित सामान्य मूल्यांकन/अनुमोदन तंत्र के अधीन होगा। चार. सभी आवर्ती व्यय राज्य सरकार अथवा संबंधित संगठन द्वारा वहन किये जायेंगे। पाँच. परियोजना लागत का शून्य.पाँच प्रतिशत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की तैयारी के लिए जारी किया जा सकता है। एक. संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय अपनी और मंत्रालय की वेबसाइटों के माध्यम से वार्षिक रूप से स्कीम अभिसूचित करेगा और सभी राज्य सरकारों एवं संघ शासित प्रदेशों को सीधे सूचना प्रेषित करेगा। दो. स्कीम के पैरा आठ में उल्लिखित आवश्यक दस्तावेज सहित निर्धारित प्रपत्र में आवेदन निदेशक, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, बहावलपुर हाउस, प्लॉट नं.एक, भगवानदास रोड, नई दिल्ली-एक लाख दस हज़ार एक को प्रस्तुत करें। तीन. नीचे अनुच्छेद आठ में बताये गये सभी दस्तावेज एवं जैसा लागू हो, आवेदन के साथ लगे हों। इन वांछित दस्तावेजों में से किसी एक के भी न होने पर आवेदन पर विचार नहीं किया जायेगा। आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज लगे होने चाहिएं : एक. प्रस्तावित परियोजना की व्यवहार्यता रिपोर्ट के साथ परियोजना प्रस्ताव जिसमें निम्नलिखित शामिल हैंः भवन/विकास योजनाएं ; लागत अनुमानों का सार ; समभाग हेतु वित्त/ निधि के स्रोत ; परियोजना की पूर्णता के लिए समय सीमा ; अपने प्रस्ताव के एक समन्वित भाग के रूप में कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और अतिरिक्त पाठ्यक्रम संगठन द्वारा शामिल किया जाना चाहिए। समभाग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्धता पत्र। दो.दो प्रतिष्ठित गैर-लाभकारी संगठनों द्वारा आवेदन के लिए : सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, एक हज़ार आठ सौ साठ अथवा अन्य सम्बद्ध अधिनियमों के तहत पंजीकरण के प्रमाण-पत्र की प्रति। नियम-विनियम, यदि कोई हो, सहित संगठन के संघ के ज्ञापन की प्रति। प्रत्येक सदस्य के नाम और पते के साथ प्रबंधन बोर्ड के वर्तमान सदस्यों/ पदधारियों/न्यासियों की सूची। पिछले तीन वित्तीय वर्षों के वार्षिक लेखाओं की प्रति ; संगठन की रूपरेखा जिसमें कार्यालय का विवरण, इसकी सामर्थ्य, उपलब्धियों और पिछले तीन वर्षों से अधिक का इसके कार्य-कलापों का वर्ष-बार ब्यौरा; आयकर अधिनियम की धारा XII ए, अस्सीजी के तहत पैन कार्ड और पंजीकरण, यदि कोई हो; आवेदक संगठन के नाम भूमि/भवन का स्वामित्व दर्शाने वाला स्वामित्व विलेख की प्रति जिसमें यह पुष्टि की गयी हो कि सम्पत्ति का उपयोग वाणिज्यिक/सांस्थानिक उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। इस दावे के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य कि संगठन ने अपना समभाग जुटा लिया/प्रबंध कर लिया है अर्थात बैंक । विवरण, परियोजना पर पहले हुए व्यय का प्रमाण पत्र ,ऋण स्वीकृति पत्र, अथवा परियोजना के लिए स्वीकृत की जाने वाली निधि सम्बंधी राज्य सरकार/संघ शासित सरकार, स्थानीय निकाय आदि का पत्र; संगठन की ओर से अनुदान के लिए आवेदन, बंध-पत्र आदि पर हस्ताक्षर करने के लिए किसी व्यक्ति को प्राधिकृत करने वाले संगठन के प्रबंधन बोर्ड/ कार्यकारी बोर्ड/प्रशासकीय निकाय का संकल्प पत्र ; संगठन के बैंक खाते का ईसीएस ब्यौरा दर्शाने वाला बैंक का प्राधिकरण पत्र । एक. संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्राप्त सभी आवेदनों की दस्तावेजी आवश्यकतानुसार पूर्णता के लिए मंत्रालय द्वारा छानबीन की जायेगी। अपूर्ण आवेदन की जब तक कमियां दूर नहीं की जाती, आगे कार्रवाई नहीं की जायेगी। दो. सभी तरह से पूर्ण आवेदनों/परियोजना प्रस्तावों का संस्कृति मंत्रालय द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति द्वारा निम्नलिखित के लिए जॉच की जायेगी : क) योग्यता निर्धारण; ग) परियोजना के लिए केन्द्रीय सहायता की राशि की सिफारिश करना। तीन. राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति समय-समय पर बैठक करेगी और निम्नलिखित विशिष्ट संदर्भो सहित अपनी कसौटी पर परियोजना प्रस्ताव का मूल्यांकन करेगी : क) क्या आवेदक संगठन क्षेत्र में पूर्णतया स्थापित है और इसकी अपनी एक निजी पहचान है; ख) क्या प्रस्ताव पूर्णतया सुविचारित है; घ) क्या संगठन के पास परियोजना को पूरा करने और पूर्णता के पश्चात, आवर्ती संचालन लागत को वहन करने के लिए अपने सम भाग की क्षमता है या प्रबंध कर चुका है। स्कीम के तहत नई परियोजना की स्वीकृति देते समय राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति भी विद्यमान परिसरों के सदुपयोग और उत्पादन का मूल्यांकन, नये परिसर के लिए वास्तविक जरूरतें तथा राज्य की जनसंख्या और आकार पर विचार करेगी। चार. संस्कृति मंत्रालय संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति गठित करेगा। और इनमें संस्कृति मंत्रालय के अधिकारी, शहरी विकास के प्रतिनिधि, कला और संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि कलाकार तथा बिजली/ध्वनि/मंच शिल्प के कम से कम एक तकनीकी विशेषज्ञ, जैसा उचित हो, को शामिल किया जायेगा। पाँच. केन्द्रीय सहायता प्राप्त करने वाले परियोजना प्रस्तावों की जांच एनएसी द्वारा की जाएगी तथा आंतरिक वित्त से परामर्श करके निधियां जारी की जाएंगी। परियोजना प्रस्तावों की जांच में, एनआईसी का सहयोग उसकी उप-समिति द्वारा किया जाएगा। छः. केन्द्रीय सहायता पाने वाले परियोजना प्रस्तावों की जॉच राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति द्वारा प्रथमतया सैद्धांतिक अनुमोदन और डीपीआर जमा करने पर तथा उसके आखिरी अनुमोदन हेतु डीपीआर प्रस्तुत करते समय किया जाएगा। समिति द्वारा अनुशंसित राशि आन्तरिक वित्त के परामर्श से मंत्रालय द्वारा जारी कर दी जायेगी। सात. पंद्रह करोड़ रूपये से अधिक की केन्द्रीय सहायता पाने वाली परियोजना का संस्कृति मंत्रालय की पूर्व अनुमति से, इसके सैद्धांतिक अनुमोदन के लिए राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति द्वारा जॉच की जायेगी। डीपीआर जमा कराने पर इसका मूल्यांकन व्यावहारिक एस एफ सी/ ई एफ सी तंत्र के जरिये किया जायेगा और सक्षम प्राधिकारी अर्थात संस्कृति मंत्री के अनुमोदन पर आंतरिक वित्त के परामर्श से निधि जारी कर दी जायेगी। आठ. राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति द्वारा परियोजना प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से अनुमोदन के पश्चात योजना आयोग के प्रारूप/दिशानिर्देशों के अनुसार जहां भी तैयार करना अपेक्षित होगा, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय आवेदक संगठन को निर्णय की सूचना देगा। इस उद्देश्य के लिए अस्थाई तौर से अनुमोदित परियोजना लागत का शून्य.पाँच : तक राशि संगठन के अनुरोध पर जारी की जा सकती है। डीपीआर जमा करने के अलावा आवेदक संगठन से प्रस्तुतीकरण भी मांगा जा सकता है। नौ. तदनुसार सैद्धांतिक अनुमोदन अथवा अंतिम अनुमोदन से पूर्व राष्ट्रीय मूल्यांकन समिति संस्कृति मंत्रालय या उसके संगठनों के अधिकारियो सहित विशेषज्ञों की उप-समिति तदर्थ समिति और अधिकारियों द्वारा अथवा इस उद्देश्य के लिए नियुक्त एक बाह्य स्रोत एजेंसी द्वारा मूल्यांकन/कार्यस्थल निरीक्षण/सत्यापन आदि कराने के लिए स्वतंत्र होगी। डीपीआर के अनुमोदन पर मंत्रालय, परियोजना की अनुमोदित कुल लागत, स्वीकृत सहायता की मात्रा, संगठन के समभाग की मात्रा और सहायता की स्वीकृति राशि को जारी करने के लिए अन्य नियम व शर्ते दर्शाते हुए संगठन को निर्णय की सूचना देगा। वित्तीय सहायता, सहायता की स्वीकृत राशि के पचास प्रतिशत की दो बराबर किस्तों में जारी की जायेगी। एक. स्वीकृत राशि की पहली किस्त डीपीआर तैयार करने के लिए जारी राशि, यदि कोई हो, को समायोजित करने के पश्चात संस्कृति मंत्रालय द्वारा डीपीआर के अनुमोदन के बाद जारी की जायेगी। किस्त जारी करने से पूर्व यह सुनिशचित किया जायेगा कि भवन योजना संबंधित नागरिक प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित कर दी गयी है। दो. स्वीकृत राशि की दूसरी किस्त निम्नलिखित दस्तावेजों को जमा कराने के पश्चात जारी की जायेगीः स्थान के फोटोग्राफ के साथ पहले किये गये/पूर्ण किये गये कार्य का ब्यौरा देते हुए परियोजना की वास्तविक और वित्तीय प्रगति रिपोर्ट। सनदी लेखाकार से जारी उपयोग प्रमाण-पत्र जिसमें यह प्रमाणित किया गया हो कि सहायता की पहली किस्त परियोजना के लिए पूर्णतया इस्तेमाल की गयी है। आवेदक संगठन के इस वचनबंध के साथ कि यह परियोजना प्रथम किस्त जारी होने की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर पूरी हो जाएगी। सनदी लेखाकार द्वारा हस्ताक्षरित परियोजना के लेखे का संपरीक्षा विवरण जिसमें यह दर्शाया गया हो कि पहली किस्त और आनुपातिक सम भाग भी परियोजना के लिए इस्तेमाल किया गया है। राज्य लो.नि.वि./ के.लो.नि.वि. अथवा पंजीकृत वास्तुकार द्वारा जारी प्रमाण-पत्र जिसमें दर्शाया गया हो कि : क) राज्य लो.नि.वि./के.लो.नि.वि. अथवा पंजीकृत वास्तुकार द्वारा जारी परियोजना पूर्णता रिपोर्ट। ख) सनदी लेखाकार/सरकारी लेखापरीक्षक द्वारा प्रमाणित अन्तिम लेखा विवरण। ग) दूसरी किस्त की राशि का सनदी लेखाकार द्वारा जारी उपयोग प्रमाण-पत्र । घ) संगठन ने अपने समभाग की सदृश राशि खर्च कर दी है इस आशय का सनदी लेखाकार द्वारा जारी प्रमाण-पत्र । ड.) उपयुक्त नागरिक प्राधिकरण द्वारा जारी पूर्णता प्रमाण-पत्र अथवा संगठन द्वारा जारी परियोजना की पूर्णता की नागरिक प्राधिकरण को सूचना देने वाले पत्र की प्रति । एक. सांस्कृतिक परिसरों का संचालन और रख-रखाव सम्बंधित राज्य सरकार विभाग, निकाय, एजेंसी, स्वायत्तशासी संगठन अथवा गैर-लाभकारी संगठन द्वारा किया जायेगा। परियोजना के लिए उपलब्ध कराई गयी भूमि पंजीकृत सोसाइटी अथवा राज्य सरकार के संबंधित विभाग के नाम हस्तांरित होगी। केन्द्र सरकार सोसाइटी/संगठन के विभिन्न निकायों से परिसर संचालन के लिए अपने प्रतिनिधि नामांकित कर सकती है। दो. केन्द्र सरकार द्वारा जारी अनुदान के सम्बंध में सोसाइटी/संगठन द्वारा पृथक खाते रखने होंगे। तीन. संस्थान के खातों को भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक अथवा उसके विवेक पर उसके नामित व्यक्ति द्वारा किसी भी समय लेखा परीक्षा हेतु खुला रखना होगा। चार. राज्य सरकार अथवा संगठन को अनुमोदित परियोजना पर आये व्यय का समायोजन करते हुए और केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा जारी अनुदानों के उपयोग दर्शाते हुए सनदी लेखाकार/सरकारी लेखापरीक्षक द्वारा अपने संपरीक्षित लेखा विवरण भारत सरकार को सौंपने होंगे। पाँच. परियोजना की कार्य पद्धति को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निश्चित किये गये किसी ढंग से जैसे और जब भी आवश्यक समझा जायेगा, समीक्षा हेतु खुला रखना होगा। छः. आवेदक राज्य सरकार संघ राज्य क्षेत्र/संगठन अपने कार्यों में समुचित मितव्ययिता बरतेगी। सात. आवेदक संगठन, इस परियोजना को प्रथम किस्त जारी होने के तीन वर्ष की अवधि के भीतर पूरा करने के लिए बाध्य होगा। आठ. केन्द्रीय सहायता से अधिगृहीत भवन और सम्पदा पर पहला ग्रहणाधिकार भारत के राष्ट्रपति का होगा और भारत सरकार की पूर्व अनुमति के बिना न भवन, न ही उपकरण दूसरी पार्टियों को पट्टे अथवा बंधक पर दिया जायेगा। तथापि, अन्य पार्टियों को अस्थायी इस्तेमाल के लिए प्रेक्षागृह के पट्टे और अन्य परियोजना सुविधाओं पर यह नियम लागू नहीं होगा। नौ. अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि परिसरों का इस्तेमाल पूरे वर्ष इष्टतम रूप से किया जाता रहे। दस. प्राप्तकर्ता संगठन को स्वयं प्रारम्भ में एक वचनबद्धता पत्र देना होगा कि परिसर के दिन-प्रतिदिन के कार्य-कलापों/संचालन के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध करायेगा। ग्यारह. केन्द्र सरकार की वित्तीय जिम्मेदारी अनुमोदित परियोजना लागत के भाग की सीमा तक आधारभूत संरचना सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित होगी और परिसर के संचालन या लागत वृद्धि होने के कारण अतिरिक्त व्यय को पूरा करने आदि के लिए नहीं होगी। बारह. अनुदान प्राप्तकर्ता को भारत के राष्ट्रपति के पक्ष में अनुदान की शर्तों का पालन करने के लिए एक बंध-पत्र निर्धारित प्रारूप में भरना होगा। अनुदान शर्तों का पालन न करने की स्थिति में बन्ध-पत्र का उल्लंघन करने पर भारत सरकार की प्रचलित उधार दर और इस पर ब्याज सहित अनुदान की वसूली का भारत सरकार निर्णय ले सकती है तथा विलम्ब के मामले में भारत सरकार द्वारा निर्धारित ब्याज की दण्डात्मक दर से वसूली कर सकती है। तेरह. स्कीम के तहत सभी लाभार्थी संगठनों को अनुदान की स्वीकृति के छः माह के भीतर अपनी प्रगति रिपोर्ट भेजना अपेक्षित है तथा उसके पश्चात योजना के पूरा होने तक हर तीन महीने पर अर्थात त्रैमासिक आधार पर रिपोर्ट भेजनी होगी। चौदह. अनुदानग्राही संगठन परिसर में महत्वपूर्ण स्थान पर मंत्रालय के नाम को उपयुक्त ढंग से दर्शाते हुए संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की वित्तीय सहायता को ज्ञापित करेगा। पंद्रह. जारी अनुदान का प्रयोग प्रशासकीय भवन, आवासीय क्वार्टर, निदेशक के बगले अथवा किसी बाह्य विकास जैसे सम्पर्क मार्ग आदि के लिए नहीं किया जायेगा। सोलह. भारत सरकार द्वारा समय-समय पर ऐसी अन्य शर्ते लगायी जा सकती हैं। इस स्कीम को कलाकार पेंशन स्कीम और कल्याण निधि के रूप में जाना जाएगा। इस स्कीम के तहत निम्नलिखित दो प्रकार के अनुरोधों पर विचार किया जाएगाः लेखकों, कलाकारों आदि के नये मामले, जो उक्त स्कीम के अधीन अनुदान के लिए पात्र हैं। उक्त स्कीम के अधीन सहायता हेतु पात्र होने के लिए, किसी व्यक्ति का कला और साहित्य आदि में महत्त्वपूर्ण योगदान होना चाहिए। परंपरागत विद्वान, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान किया है, भी पात्र होंगे, चाहे उनकी कोई कृति प्रकाषित न भी हुई हो। आवेदक की निजी आय चार हज़ार/- रुपए प्रतिमाह से अधिक नहीं होनी चाहिए। आवेदक की आयु अट्ठावन वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए । आवेदन-पत्र निर्धारित फार्म में भरा जाए तथा इसे संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रषासन के माध्यम से अनुभाग अधिकारी , संस्कृति मंत्रालय, पुरातत्व भवन, आईएनए, नई दिल्ली को भेजा जाए। केन्द्रीय कोटा से सहायता प्रदान करने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा सीधे भी अनुरोध पर विचार किया जा सकता है। समय-समय पर आवष्यक समझे जाने पर आवेदन-पत्र में संषोधन कर सकता है। सरकार से सहायता मासिक भत्ते के रूप में हो सकती है। केन्द्र और राज्य कोटे के अधीन अनुषंसित कलाकारों को दिया गया ऐसा भत्ता केन्द्र और संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रषासन द्वारा साझा किया जाएगा, जिसमें से सम्बधित राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रषासन प्रत्येक लाभार्थी को कम से कम पाँच सौ रुपयाशून्य प्रतिमाह भत्ता देगा। ऐसे मामलों में प्रति लाभार्थी को केन्द्र द्वारा दिया जाने वाला मासिक भत्ता तीन हज़ार पाँच सौ/- रुपए प्रतिमाह से अधिक नहीं होगा और केन्द्रीय कोटा के अधीन संस्तुत मामलों में सहायता की राशि प्रति लाभार्थी चार हज़ार/- रुपए प्रतिमाह से अधिक नहीं होगी। राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रषासन की अनुषंसाओं के आलोक में, आवेदक के वित्तीय साधनों और प्रसिद्धि, केन्द्र-राज्य कोटे के तहत दी जाने वाली सहायता की मात्रा और सहायता प्राप्त करने वालों की संख्या, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नामित 'विशेषज्ञ समिति द्वारा, निधियों की उपलब्धता पर, तय की जाएगी। केन्द्रीय कोटा से दी जाने वाली सहायता की राशि और सहायता प्राप्तकर्ताओं की संख्या का निर्णय आवेदक की वित्तीय स्थिति का पता लगाने के बाद विशेषज्ञ समिति की अनुशंसाओं पर केन्द्र सरकार द्वारा किया जाएगा। ऐसे मामलों को अनुमोदन के लिए संस्कृति मंत्रालय के प्रभारी मंत्री के समक्ष अवष्य रखा जाएगा। केन्द्र राज्य/संघ राज्यक्षेत्र कोटा : अंतिम रूप से चयन हो जाने पर, केन्द्र सरकार संस्वीकृतियॉ जारी करती है और सहायता प्राप्तकर्ताओं को सहायता की अपनी शेयर राशि जारी करती है तथा संबंधित राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रषासनों को सहायता का अपना शेयर जारी करने की भी सलाह देती है। केन्द्रीय कोटा : केन्द्रीय कोटे के मामलों में, केन्द्र सरकार संस्वीकृति जारी करेगी और सहायता प्राप्तकर्ताओं को सीधे ही भुगतान करेगी। उपरोक्त उपबंधों के अध्यधीन, स्कीम के अधीन स्वीकृत आवर्ती मासिक भत्ता ऐसी अवधि के लिए होगा जिसे केन्द्र सरकार द्वारा तय किया जाए और/अथवा जो जीवन और आय प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने पर वर्ष-दर-वर्ष आधार पर जारी रखा जाए। यदि भत्ता प्राप्तकर्ता की वित्तीय क्षमता चार हज़ार/- रुपए प्रतिमाह से अधिक हो जाती है तो उक्त स्कीम के अधीन भत्ते को बंद कर दिया जाएगा। सरकार, अपने विवेक से, भत्ता प्राप्तकर्ता को तीन महीने का नोटिस देकर, भत्ते को समाप्त भी कर सकती है। कोई भत्ता प्राप्तकर्ता, सरकार को लिखित नोटिस देकर भत्ते प्राप्त करने के अपने अधिकार को छोड़ भी सकता है। ऐसे मामलों में अधिकार छोड़ने के पत्र की तिथि से भत्ता बंद कर दिया जाएगा। भत्ता प्राप्तकर्ता की मृत्यु होने पर, आश्रितों की वित्तीय स्थिति की जांच पड़ताल करने के बाद, केन्द्र सरकार के विवेक से उपरोक्त वित्तीय सहायता जारी रखी जा सकती है। नोट : वित्तीय सहायता प्राप्तकर्ता की मृत्यु के मामले में भुगतान का तरीका निम्नानुसार होगा। दो. आश्रितों के लिए - विवाह अथवा रोजगार मिलने अथवा इक्कीस वर्षों की आयु होने तक। झ. परिचय : संस्कृति मंत्रालय एक हज़ार नौ सौ इकसठ से साहित्य, कला और जीवन के ऐसे ही अन्य क्षेत्रों में दीन-हीन परिस्थितियों में रह रहे विशिष्ट व्यक्तियों एवं उनके आश्रितों को वित्तीय सहायता नामक स्कीम चला रहा है। एक राष्ट्रीय कलाकार कल्याण निधि का प्रावधान करने के लिए इस स्कीम के दायरे को बढ़ाया जा रहा है जो अस्पताल में भर्ती होने तथा तत्काल कदम उठाए जाने वाली अन्य आकस्मिकताओं के मामलों में इस स्कीम के अंतर्गत शामिल कलाकारों और कलाकारों के आश्रितों को विशेष वित्तीय सहायता प्रदान करने की अनुमति देगा। त्र. उद्देश्य : इस निधि का उद्देश्य इस स्कीम के अतंर्गत वित्तीय सहायता पाने वाले कलाकारों तथा कलाकार की मृत्यु के पश्चात उसके आश्रितों को निम्नानुसार वित्तीय सहायता प्रदान करना होगा : जब एक कलाकार की मृत्यु हो जाए और उसके आश्रितों की सहायता करना आवश्यक हो। जब इस स्कीम के अंतर्गत शामिल कलाकार को चिकित्सा उपचार / बीमारी के लिए एकमुश्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता हो और वह अपनी आजीविका चलाने तथा अपने बच्चों की सहायता करने की स्थिति में न हो और / अथवा अपने इलाज के खर्चे को पूरा करने में असमर्थ हो। जब किसी कलाकार को आकस्मिक शारीरिक विकलांगता के समय वित्तीय सहायता की आवश्यकता हो। ट. निधि से सहायता प्राप्त करने के लिए पात्रता : एक. इस स्कीम के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले कलाकार तथा कलाकार की मृत्यु के पश्चात कलाकार पर आश्रित व्यक्ति। दो. कलाकार की मृत्यु होने पर, परिवार के आश्रित सदस्यों को वित्तीय सहायता का तरीका निम्नानुसार होगाः दो.एक पति अथवा पत्नी-कलाकार की मृत्यु के पश्चात, आवश्यकता की स्थिति में सर्वप्रथम वित्तीय सहायता कलाकार के पति अथवा पत्नी को प्रदान की जाएगी। दो.दो आश्रितों के लिए विवाह होने अथवा रोजगार प्राप्त करने अथवा इक्कीस वर्ष की आयु होने तक, जो भी पहले हो। ठ. वित्तीय सहायता की सीमा : प्रदान की गई वित्तीय सहायता गैर-आवर्ती प्रवृति की होगी तथा किसी भी अवसर पर वित्तीय सहायता की राशि निम्नलिखित सीमा तक प्रतिबंधित होगी : ड. निधि का प्रशासन : ढ़. अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएं : जिस बैंक में लाभार्थी का बैंक खाता हो, उस बैंक के प्रबंधक द्वारा विहित पत्र में विधिवत सत्यापित बैंक प्राधिकार, पत्र, 'स्कीम' के अंतर्गत शामिल लाभार्थियों द्वारा उपरोक्त पते पर भारतीय जीवन बीमा निगम को प्रस्तुत करना होगा, यदि इसे एलआईसी को प्रस्तुत नहीं किया गया हो। संक्षिप्त नाम : सांस्कृतिक कार्य अनुदान स्कीम इस स्कीम को गैर - लाभार्थी संगठनों द्वारा सांस्कृतिक विषयों पर सेमिनारों, उत्सवों तथा प्रदर्शनियों के लिए वित्तीय सहायता की स्कीम कहा जाएगा। इस स्कीम में सोसाइटियों, न्यासों तथा विश्वविद्यालयों सहित, जो भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर सेमिनार, अनुसंधान, कार्यशालाएं, उत्सव तथा प्रदर्शनियां आयोजित करते हैं, सभी गैर लाभार्थी संगठनों को सहायता देना शामिल है। ये संगठन सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम , न्यास अधिनियम, कंपनी अधिनियम या केन्द्र या राज्य सरकार के अन्य किसी अधिनियम के तहत पंजीकृत होने चाहिए और कम से कम तीन वर्ष से कार्यरत होने चाहिए। तथापि, यह स्कीम ऐसे संगठनों या संस्थाओं के लिए नहीं होगी जो धार्मिक संस्थाओं या स्कूलों/कॉलेजों के रूप में कार्य कर रहे हों। अनुदान, सांस्कृतिक विरासत, कलाओं, साहित्य और अन्य सृजनात्मक कार्यों के परिरक्षण या संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण विषयों पर सम्मेलनों, सेमिनारों, संगोष्ठियों, उत्सवों तथा प्रदर्शनियों जैसे सभी प्रकार के परस्पर मेलजोल के मंचों के लिए दिया जाएगा। एक) अनुदान का पात्र होने के लिए आवेदक संगठन का समुचित रूप से गठित ऐसा प्रंबधन निकाय या शासी परिषद होनी चाहिए जिसकी शक्तियां, कार्य व जिम्मेदारियां लिखित संविधान में स्पष्ट रूप से परिभाषित व निर्धारित हों। दो) संगठन द्वारा परियोजना लागत के कम से कम पच्चीस प्रतिशत तक मैचिंग संसाधनों का करार किया होना चाहिए या इसकी योजना बनाई जानी चाहिए। तीन) संगठन के पास उस समारोह/परियोजना को शुरू करने के लिए सुविधाएं, संसाधन, कार्मिक तथा अनुभव होना चाहिए जिसके लिए अनुदान की मांग की गई हो। चार) यथा आवेदित ऐसे समारोह के आयोजनों के विगत अनुभव को वरीयता दी जाएगी। वित्तीय सहायता निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए दी जा सकती है : एक) किसी भी कला रूप/महत्वपूर्ण सांस्कृतिक मामलों पर सम्मेलन, सेमिनार, कार्यशालाएं, संगोष्ठियां, उत्सव, प्रदर्शनियां आयोजित करना और लघु अनुसंधान परियोजनाएं आदि शुरू करना। दो) सांस्कृतिक विषयों व उनके प्रकाशनों सहित उनके संबंध में सर्वेक्षण, प्रायोगिक परियोजनाएं आदि संचालित करने जैसे विकास किस्म के कार्यकलापों पर व्यय की पूर्ति करना। ड. सहायता की मात्रा : उक्त पैरा चार के तहत विशिष्ट परियोजनाओं के लिए अनुदान, विशेषज्ञ समिति द्वारा यथा संस्तुत व्यय का पचहत्तर प्रतिशत तक परन्तु प्रति परियोजना अधिकतम पाँच.शून्य लाख रू. तक दिया जाएगा। अपवाद स्वरूप परिस्थितियों में बीस.शून्य लाख रूपए की राशि प्रदान की जा सकती है। केन्द्र सरकार द्वारा जारी अनुदानों के संबंध में अलग लेखे रखे जाएंगे। एक) अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन के लेखाओं की समीक्षा, भारत के नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक या उसके विवेक पर उसके नामिती द्वारा की जा सकेगी। दो) अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन, भारत सरकार को अनुमोदित परियोजना पर किए गए व्यय का उल्लेख करते हुए और पूर्व वर्षों में सरकारी अनुदान के उपयोग का ब्यौरा देते हुए किसी सनदी लेखाकार से संपरीक्षित लेखाओं का विवरण प्रस्तुत करेगा। यदि उपयोग प्रमाण-पत्र निर्धारित अवधि के भीतर प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो अनुदान प्राप्तकर्ता को प्राप्त अनुदान की समग्र राशि और उस पर भारत सरकार की वर्तमान दर पर ब्याज तत्काल वापिस करना होगा बशर्ते कि सरकार द्वारा विशेष रूप से ब्याज माफ न किया गया हो। तीन) अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन की, सरकार द्वारा कभी भी आवश्यक समझे जाने पर कोई समिति नियुक्त करके या सरकार द्वारा निर्धारित किसी अन्य तरीके से भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय द्वारा समीक्षा की जा सकेगी। चार) अनुदान प्राप्तकर्ता संगठन, विदेश मंत्रालय से अनुमति लिए बिना विदेशी प्रतिनिधिमण्डल को आमंत्रित नहीं करेगा, जिसके लिए आवेदन अनिवार्यतः संस्कृति मंत्रालय के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा। पाँच) यह ऐसी अन्य शर्तों के अध्यधीन होगा जो समय-समय पर सरकार द्वारा लागू की जाएं। आवेदन, किसी भी राष्ट्रीय अकादमी या भारत सरकार के तहत संस्कृति से सम्बद्ध किसी अन्य संगठन या संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्य प्रशासन, राज्य अकादमियों द्वारा संस्तुत होना चाहिए। निम्नलिखित सहित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट : परियोजना की अवधि सहित उस परियोजना का विवरण जिसके लिए सहायता का अनुरोध किया गया है तथा परियोजना के लिए सेवा में लगाए जाने वाले स्टाफ की अर्हताओं तथा अनुभव का ब्यौरा; आवर्ती व गैर-आवर्ती व्यय का अलग से मदवार ब्यौरा देते हुए परियोजना का वित्तीय विवरण। स्रोत जिनसे सहयोगी निधियां प्राप्त की जाएंगी। अनुदान, पचहत्तर प्रतिशत और पच्चीस प्रतिशत की दो किस्तों में जारी किया जाएगा। भुगतान केवल सम्बद्ध संगठन के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक अतंरणों से किया जाएगा। यह स्कीम सम्पूर्ण वर्ष खुली रहेगी। आवेदन पत्र किसी भी समय निर्धारित प्रपत्र में मंत्रालय की सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध विस्तृत विवरण के आधार पर प्रस्तुत किया जाएगा। सृजनात्मक कलाओं के क्षेत्रों में सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की समीक्षा करने से पता चला है कि शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों के लिए संस्थागत ढांचा तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद द्वारा शुरू की गई शिक्षावृत्तियों के माध्यम से स्वतंत्र रूप से कार्य करने के पर्याप्त अवसर हैं, सृजनात्मक कला के क्षेत्रों में अथवा हमारे कुछ पारम्परिक कलारूपों को पुनर्जीवित करने के लिए इस प्रकार की कोई योजना नहीं है, जिसके माध्यम से इस प्रकार की सुविधाएँ और अवसर प्रदान किए जाते हों। संभवतः वित्तीय सुरक्षा से युक्त स्वतंत्र वातावरण से इन क्षेत्रों में और अधिक कार्य करने के लिए अपेक्षित अनुकूल वातावरण प्रदान किया जा सकता है। यह भी पाया गया है कि दस-चौदह वर्षों के आयु-वर्ग तथा अट्ठारह-पच्चीस वर्षों के आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए स्कीम हैं, लेकिन हमारे कुछ पारम्परिक कला-रूपों को पुनर्जीवित करने की बाबत अत्यधिक उन्नत प्रषिक्षण अथवा वैयक्तिक सृजनात्मक प्रयास के लिए बुनियादी वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली कोई स्कीम नहीं है। इस कमी को दूर करने के लिए विभिन्न सृजनात्मक क्षेत्रों के उत्कृष्ट व्यक्तियों को अध्येतावृत्ति प्रदान करने की स्कीम चलाने का निर्णय लिया गया है। इस स्कीम में ग्रामीण/जनजातीय क्षेत्रों के कलाकार भी शामिल होंगे। ये अध्येतावृत्तियॉ अनुसंधान उन्मुख परियोजनाएं शुरू करने के लिए प्रदान की जाती हैं। आवेदक को परियोजना प्रारंभ करने के संबंध में अपनी योग्यताओं का साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहिए। अध्येतावृत्तियॉ, प्रषिक्षण प्रदान करने, कार्यषालाएं, सेमिनार आयोजित करने, अथवा स्मरणों को लिपिबद्ध करने/अथवा आत्मकथा, कथा साहित्य आदि लिखने के लिए नहीं प्रदान की जाती हैं। एक.एक मंच कलाएँ एक.दो साहित्यिक कलाएँ शोध कार्य सृजनात्मक फोटोग्राफी)। दो. संस्कृति से संबंधित नए क्षेत्रों में वरिष्ठ/कनिष्ठ अध्येतावृत्तियाँ निम्नलिखित क्षेत्रों में संस्कृति से सम्बद्ध नए क्षेत्रों में परियोजनाएं आमंत्रित हैं : इनका उद्देष्य कला और संस्कृति से संबंधित क्षेत्रों में समकालीन मुद्दों में नई शोध तकनीकों, प्रौद्योगिकीय और प्रबंधन सिद्धांतों के विष्लेषणात्मक अनुप्रयोग को प्रोत्साहन देना है। सामान्य और सैद्धांतिक वृहत् अध्ययनों पर विचार किया जाएगा। प्रस्ताव, नवीन और अनुप्रयोग उन्मुख और वरीयतः अन्तर-विधा किस्म का होना चाहिए। इस स्कीम को संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट व्यक्तियों को अध्येतावृत्तियां प्रदान करने की स्कीम के नाम से जाना जायेगा। अध्येतावृत्तियों की संख्या प्रत्येक वर्ष चार सौ होगी। ये दो प्रकार की अध्येतावृत्तियां हैंः वरिष्ठ और कनिष्ठ अध्येतावृत्तियां । वरिष्ठ अध्येतावृत्तियों की संख्या चालीस वर्ष और इससे अधिक आयु समूह के कलाकारों के लिए प्रतिमाह बीस,शून्य/- रू. की दर से दो सौ होगी जबकि पच्चीस-चालीस वर्ष की आयु समूह के कलाकारों के लिए प्रतिमाह दस,शून्य/- रू. की दर से कनिष्ठ अध्येतावृत्तियों की संख्या दो सौ होगी। आयु की गणना प्रत्येक वर्ष एक अप्रैल से की जाएगी। इसके अलावा, चुनिंदा परियोजना दस्तावेजों के प्रकाशन की लागत के अधिकतम बीस,शून्य/- रू. या पचास प्रतिशत तक, जो भी कम हो, की एक बारगी दिया जाने वाला अनुदान हो सकता है। इसे अनुदानप्राप्तकर्ताओं के बीस प्रतिशत तक सीमित किया जाएगा। वरिष्ठ अध्येतावृत्ति के लिए आवेदक, अभावग्रस्त परिस्थितियों में विद्यमान कलाकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना के अंतर्गत संस्कृति मंत्रालय से पेंशन प्राप्तकर्ता नहीं होना चाहिए। आवेदक, इससे पहले सदृश अध्येतावृत्ति का लाभ नहीं लिया होना चाहिए। तथापि, जिस आवेदक को कनिष्ठ अध्येतावृति प्रदान की गई हो, वह वरिष्ठ अध्येतावृत्ति के लिए आवेदन कर सकता है बशर्ते कि पहली परियोजना पूरा होने के बाद पाँच वर्ष का समय बीत चुका हो। स्कीम के पैरा में सूचीबद्ध क्षेत्र/ दायरे में पात्रता के लिए न्यूनतम शैक्षिक अर्हता स्नातक है। वरिष्ठ और कनिष्ट अध्येतावृतियों के तहत प्राप्तकर्ता को छमाही प्रगति रिपोर्ट जमा करानी होगी। ऐसी रिपोर्ट समय से प्राप्त न होने पर अध्येतावृति राशि मंत्रालय द्वारा रोकी जा सकती है। रोजगार प्राप्त आवेदकों को उचित माध्यम से आवेदन करना होगा। चुने गए उम्मीदवारों को उन परियोजनाओं के संबंध में शैक्षिक अथवा अनुप्रयोग उन्मुख अनुसंधान कार्य आयोजित करना होगा जिसके लिए उन्हें अध्येतावृत्तियाँ प्रदान की गई हैं। उन्हें अपनी परियोजना दो वर्ष के अंदर पूरी करनी होगी और उसे इस मंत्रालय को प्रस्तुत करना होगा। सरकार की ओर से अतिरिक्त वित्तीय जिम्मेदारी के बिना अधिकतम तीन माह तक समयवृद्धि की अनुमति होगी। प्रत्येक मामले में एक वर्ष बाद सत्र के बीच में निष्पादन की समीक्षा/मूल्यांकन किया जाएगा और अध्येतावृत्ति का आगे जारी रहना इस समीक्षा/मूल्यांकन पर निर्भर करेगा। एक. आवेदन पत्र, सांस्कृतिक संसाधन तथा प्रषिक्षण केन्द्र , प्लॉट नं. पंद्रह, सेक्टर-सात, द्वारका, नई दिल्ली - एक लाख दस हज़ार पचहत्तर द्वारा समय - समय पर प्रकाषित विज्ञापन के अनुसार, केवल ऑनलाइन ही प्रस्तुत किए जा सकते हैं। दो. यदि आवेदक केन्द्रीय/राज्य सरकार के विभागों/संस्थाओं/उपक्रमों/ विश्वविद्यालयों इत्यादि में कार्यरत हैं, तो अध्येतावृत्ति के लिए चयन होने पर उन्हें दो वर्ष की अवधि का अवकाष लेना होगा। उन्हें अध्येतावृत्ति के अपने आवेदन को विभाग/संस्था/उपक्रम/ विश्वविद्यालय इत्यादि के प्रमुख के माध्यम से इस लिखित आष्वासन के साथ प्रेषित करना चाहिए कि अध्येतावृत्ति के मंजूर होने पर उम्मीदवारों को अध्येतावृत्ति की अवधि के लिए अवकाष प्रदान किया जाएगा। लागू अन्य शर्तों के अतिरिक्त अवकाष मंजूर होने का प्रमाण प्रस्तुत करने पर अध्येतावृत्ति की प्रथम किस्त जारी की जाएगी। तीन. संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी जो प्रथम चरण में सभी आवेदनों की जांच करेगी और उनमें से विभिन्न क्षेत्रों में उम्मीदवारों के अपेक्षाकृत संख्या में संभावित चयन के लिए सर्वाधिक उत्कृष्ठ उम्मीदवारों की लघु सूची बनाएगी। चार. विशेषज्ञ समिति द्वारा लघु सूची में रखे गए कनिष्ट अध्येतावृत्ति उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा, जो फिर उनमें से विभिन्न क्षेत्रों में अपेक्षाकृत संख्या में कनिष्ठ अध्येतावृत्ति के लिए सर्वाधिक उत्कृष्ठ उम्मीदवारों को चुनेगी। वरिष्ठ अध्येतावृत्तियों के मामले में ऐसा साक्षात्कार आवश्यक नहीं होगा। प्रदान की गई राशि का अंतरण केवल अध्येतावृत्ति प्राप्तकर्ताओं के बैंक खाते में इलैक्ट्रॉनिक रूप से किया जाएगा। संपर्क विवरणः एक. अनुभाग अधिकारी, एस एंड एफ अनुभाग, संस्कृति मंत्रालय, द्वितीय तल, पुरातत्व भवन, डी विंग, जीपीओ कॉम्पलेक्स, आईएनए, नई दिल्ली। स्कीम का उद्देष्य असाधारण प्रतिभा वाले युवा कलाकारों को भारतीय शास्त्रीय संगीत, भारतीय शास्त्रीय नृत्य, रंगमंच, स्वांग दृष्य कला, लोक, पारम्परिक और स्वदेषी कलाओं तथा सुगम शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में भारत में उच्च प्रषिक्षण के वास्ते वित्तीय सहायता प्रदान करना है। घ. विषय/क्षेत्र जिनमें शिक्षावृत्तियां दी जा सकती हैं। शास्त्रीय हिन्दुस्तानी संगीत शास्त्रीय कर्नाटक संगीत भारतीय शास्त्रीय नृत्य/संगीत भरतनाट्यम, कथक, कुचिपुड़ी, कथकली, मोहिनीअट्टम, ओडिसी नृत्य/संगीत, मणिपुरी नृत्य/संगीत, थांगटा, गौडिया नृत्य, छऊ नृत्य/संगीत, सतरिया नृत्य। रंगमंच कला का कोई विषिष्ट पहलू, जिसमें अभिनय, निर्देषन आदि शामिल हैं किन्तु नाट्यलेखन और अनुसंधान शामिल नहीं है। रेखांकन, मूर्तिकला, चित्रकारी, सृजनात्मक फोटोग्राफी, मृत्तिका और सिरेमिक्स आदि। कठपुतली, स्वांग, लोक रंगमंच, लोक नृत्य, लोक गीत, लोक संगीत, आदि । ड. शिक्षावृति की अवधि एवं कार्यकाल सामान्यतः शिक्षावृत्ति की अवधि दो वर्ष होगी। प्रत्येक मामले में प्रषिक्षण का स्वरूप अध्येता के पिछले प्रषिक्षण तथा पृष्ठभूमि पर विचार करने के बाद निर्धारित किया जाएगा। सामान्यतः, यह किसी गुरू/प्रषिक्षक अथवा मान्यता प्राप्त संस्था की उच्च प्रषिक्षुता के स्वरूप की होगी। अध्येता को कठोर प्रषिक्षण लेना होगा। इस प्रकार के प्रषिक्षण में संबंधित विषय/क्षेत्र में सैद्धान्तिक ज्ञान प्राप्त करने में। लगे समय के अतिरिक्त अभ्यास के लिए प्रतिदिन कम से कम तीन घंटे का समय और संबंधित विषयों को समझना भी शामिल है। प्रत्येक अध्येता को यात्रा, पुस्तकों, कला सामग्री या अन्य उपस्कर और ट्यूशन या प्रशिक्षण प्रभार, यदि कोई हो, पर अपने रहन-सहन के व्यय को पूरा करने के लिए दो वर्ष की अवधि के लिए प्रतिमाह पाँच हज़ार/- रू. का भुगतान किया जाएगा। अभ्यर्थियों को भारतीय नागरिक होना चाहिए। अभ्यर्थियों में उनके प्रषिक्षण को प्रभावी ढंग से आगे चलाने के लिए पर्याप्त सामान्य ज्ञान होना चाहिए। अभ्यर्थियों को उनके प्रशिक्षण को प्रभावी ढंग से आगे चलाने के लिए अपनी इच्छा का प्रमाण देना होगा। चूंकि, ये शिक्षावृत्तियाँ उच्च प्रषिक्षण के लिए दी जाती हैं, न कि नए सीखने वालों के लिए, अतः अभ्यर्थियों के पास चुने हुए कार्यकलाप के क्षेत्र में प्रवीणता डिग्री होनी चाहिए। अभ्यर्थी को अपने गरू/संस्थानों से न्यूनतम पाँच वर्ष का प्रशिक्षण लिया होना चाहिए। आवेदन के साथ वर्तमान गुरू/संस्थान और पूर्व गुरू/संस्थान द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित प्रपत्र के भाग-II में इस आशय का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया जाना चाहिए। अभ्यर्थी को सम्बद्ध कलाओं/ विद्याओं में पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए। अभ्यर्थी की आयु उस वर्ष में एक अप्रैल को अट्ठारह वर्ष से कम और पच्चीस वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए जिस वर्ष में आवेदन किया जा रहा है। आयु सीमा में छूट नहीं है। प्रत्येक वर्ष सीसीआरटी द्वारा आवेदन आमंत्रित करने संबंधी विज्ञापन समय-समय जारी किया जाएगा। साक्षात्कार के समय आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज जमा कराने होंगे। एक. शैक्षिक योग्यताओं, अनुभवों इत्यादि की एक-एक स्व सत्यापित प्रति। किसी भी हालत में मूल दस्तावेज नहीं भेजने चाहिए। दो. मैट्रिक या समकक्ष प्रमाण-पत्र, यदि कोई हो, अथवा आयु को कोई अन्य संतोषजनक प्रमाण की एक सत्यापित प्रति। तीन. नवीनतम पासपोर्ट आकार का एक फोटो। चार. जो उम्मीदवार चित्रकला, मूर्तिकला और प्रयुक्त कला के क्षेत्र में शिक्षावृत्ति के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें अपने आवेदन पत्रों के साथ उत्कृष्ट मूल कृतियों की, स्व सत्यापित फोटो भी भेजनी होगी। दृष्यकला के लिए ललित कलाओं में स्नातक अथवा समकक्ष न्यूनतम अर्हता है। पाँच. यदि आवेदक एक से अधिक क्षेत्र के लिए आवेदन करना चाहता है तो उसे प्रत्येक क्षेत्र के लिए अलग-अलग ऑनलाइन आवेदन-पत्र भेजना चाहिए। छः. चूंकि ये शिक्षावृत्तियां उच्च स्तरीय प्रशिक्षण के लिए दी जाती हैं, अतः अभ्यर्थी को अपने गुरू/संस्थानों से न्यूनतम पाँच वर्ष का प्रशिक्षण लिया होना चाहिए। आवेदन के साथ वर्तमान गुरू/संस्थान और पूर्व गुरू/संस्थान द्वारा विधिवत रूप से हस्ताक्षरित इस आशय का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया जाना चाहिए। एक. अभ्यर्थियों को विशेषज्ञ समिति के समक्ष साक्षात्कार/प्रदर्शन के लिए उपस्थित होना होगा। अभ्यर्थियों को साक्षात्कार / प्रदर्शन की तारीख, समय और स्थान की सूचना अभ्यर्थियों के ऑनलाइन आवेदन में दिये गये ई-मेल के माध्यम से दी जायेगी। चयन पूर्णतः योग्यता आधार पर किया जाएगा। दो. परिणाम मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा। निर्णय पत्र उम्मीदवारों को स्पीड पोस्ट द्वारा भेज दिया जाएगा। तीन. पते में किसी प्रकार का परिवर्तन हो तो उसे इस मंत्रालय को लिखित में सूचित किया जाना चाहिए। सूचित करते समय प्रशिक्षण के विषय/ क्षेत्र फाईल संख्या का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाना चाहिए। चार. आगे के किसी भी पत्र व्यवहार के लिए उम्मीदवार निम्नलिखित ब्यौरे अवश्य दें : स्कीम का नाम सुस्पष्ट अक्षरों में उम्मीदवार का नाम प्रशिक्षण का विषय/क्षेत्र पंजीकरण संख्या। अनुभाग अधिकारी, एस एंड एफ अनुभाग, संस्कृति मंत्रालय द्वितीय तल, पुरातत्व भवन, डी-विंग, जीपीओ काम्पलैक्स, आईएनए, नई दिल्ली। दस. गौरव गीत बारह. बिंगी पद तेरह. तत्त्व गीत उन्नीस. दोम्बी दास के गीत चौबीस. समष्टि वादन दो. लोक संगीत नौ. तिब्बती कलावस्तु तथा अभिलेखागार के पुस्तकालय, धर्मषाला में तिब्बती चित्रकला और काष्ठ शिल्प का अध्ययन। यह सूची उदाहरणस्वरूप है, न कि सम्पूर्ण ।
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आज विश्व मृदा दिवस मनाया जा रहा है। इसकी जरूरत इसलिए पड़ी कि अधिक पैदावार के लिए मिट्टी में अंधाधुंध रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है। जिससे मिट्टी की क्वालिटी और उसमें मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो रहे हैं। इससे मिट्टी की क्वालिटी कमजोर होने के साथ खाने-पीने की चीजें भी जहरीली होती जा रही हैं। पानीपत की बात करें तो कई जगहों पर मिट्टी में मौजूद जैविक कॉर्बन 0. 2. 5% रह गया है। जबकि मिट्टी में जैविक कॉर्बन की मात्रा कम से कम 0. 4% होनी चाहिए।
विश्व मृदा दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, उझा की ओर से नवादा पार गांव में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें आसपास के 80 से अधिक किसान शामिल हुए। केंद्र प्रभारी डॉ. राजवीर गर्ग ने बताया कि जैविक कॉर्बन मिट्टी की रीढ़ होती है। मिट्टी में जैविक कॉर्बन की मात्रा कम होने पर मिट्टी बंजर हो जाएगी। इससे बचने के लिए फसलों में जैविक और कॉर्बनिक खादों का प्रयोग करना जरूरी है। मिट्टी की भौतिक स्थिति और जैविक कॉर्बन बढ़ाने से पैदावार भी बढ़ाई जा सकती है।
वैज्ञानिक डॉ. सतपाल सिंह ने बताया कि मनुष्य और प्राणियों के भोजन का 95% मिट्टी से ही प्राप्त होता है। मिट्टी में खाद और पोषक तत्वों का प्रयोग उसकी जांच के बाद भी करना चाहिए। पौधों को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए 17 प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। जांच के बाद आवश्यक पोषक तत्वों का प्रयोग करें।
केंद्र प्रभारी डॉ. राजवीर गर्ग ने बताया कि जिले में 60 हजार से अधिक किसान हैं। सरकार की योजना के तहत करीब-करीब सभी किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड बनाए जा चुके हैं। सॉयल की जांच दो साल में एक बार करानी होती है।
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आज विश्व मृदा दिवस मनाया जा रहा है। इसकी जरूरत इसलिए पड़ी कि अधिक पैदावार के लिए मिट्टी में अंधाधुंध रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है। जिससे मिट्टी की क्वालिटी और उसमें मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो रहे हैं। इससे मिट्टी की क्वालिटी कमजोर होने के साथ खाने-पीने की चीजें भी जहरीली होती जा रही हैं। पानीपत की बात करें तो कई जगहों पर मिट्टी में मौजूद जैविक कॉर्बन शून्य. दो. पाँच% रह गया है। जबकि मिट्टी में जैविक कॉर्बन की मात्रा कम से कम शून्य. चार% होनी चाहिए। विश्व मृदा दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, उझा की ओर से नवादा पार गांव में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें आसपास के अस्सी से अधिक किसान शामिल हुए। केंद्र प्रभारी डॉ. राजवीर गर्ग ने बताया कि जैविक कॉर्बन मिट्टी की रीढ़ होती है। मिट्टी में जैविक कॉर्बन की मात्रा कम होने पर मिट्टी बंजर हो जाएगी। इससे बचने के लिए फसलों में जैविक और कॉर्बनिक खादों का प्रयोग करना जरूरी है। मिट्टी की भौतिक स्थिति और जैविक कॉर्बन बढ़ाने से पैदावार भी बढ़ाई जा सकती है। वैज्ञानिक डॉ. सतपाल सिंह ने बताया कि मनुष्य और प्राणियों के भोजन का पचानवे% मिट्टी से ही प्राप्त होता है। मिट्टी में खाद और पोषक तत्वों का प्रयोग उसकी जांच के बाद भी करना चाहिए। पौधों को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए सत्रह प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। जांच के बाद आवश्यक पोषक तत्वों का प्रयोग करें। केंद्र प्रभारी डॉ. राजवीर गर्ग ने बताया कि जिले में साठ हजार से अधिक किसान हैं। सरकार की योजना के तहत करीब-करीब सभी किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड बनाए जा चुके हैं। सॉयल की जांच दो साल में एक बार करानी होती है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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।श्यामलिमा (Shyamalima)
भगवान शनि देव और हनुमान जी को कुंभ राशि का आराध्य देव माना जाता है। कुम्भ राशि के श्यामलिमा नाम की लड़कियों की उत्तेजना और परिसंचरण को यूरेनस ग्रह द्वारा नियंत्रित किया जाता है। जिस समय वृक्ष फलों और फूलों से भर जाते हैं उस मौसम में श्यामलिमा नाम की लड़कियाँ जन्म लेते हैं। श्यामलिमा नाम की लड़कियाँ गुस्सैल प्रवृत्ति के होते हैं। इन श्यामलिमा नाम की लड़कियों को अस्थमा, एलर्जी, सूजन और हृदय रोगों का खतरा रहता है। इस श्यामलिमा नाम की लड़कियों में बुद्धि, ऊर्जा और प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती और ये डोरसों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। इन्हें दोस्ती करना पसंद होता है।
श्यामलिमा नाम बहुत सुंदर और आकर्षक माना जाता है। इतना ही नहीं इसका मतलब भी बहुत अच्छा होता है। आपको बता दें कि श्यामलिमा नाम का अर्थ काला होता है। काला मतलब होने के कारण श्यामलिमा नाम बहुत सुंदर बन जाता है। अगर आप अपने बच्चे को श्यामलिमा नाम देते हैं तो जीवनभर के लिए उसका संबंध इस नाम के मतलब यानी काला से हो जाएगा। वेदों में भी ये बात कही गई कि शिशु को श्यामलिमा देने से पहले माता-पिता को इसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए। माना जाता है कि श्यामलिमा नाम वाले व्यक्ति के स्वभाव में काला होने की झलक देख सकते हैं। नीचे श्यामलिमा नाम की राशि, लकी नंबर और स्वभाव एवं काला के बारे में विस्तार से बताया गया है।
श्यामलिमा नाम की महिलाएं शनि ग्रह के अधीन आती हैं। इनका शुभ अंक 8 होता है। धन के मामले में 8 अंक वाली श्यामलिमा नाम की लड़कियों को किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं आती है। इनमें धन को संचय कर के रखने का गुण होता है। 8 अंक वाली श्यामलिमा नाम की युवतियां जीवन में अपने नियम खुद बनाती हैं। श्यामलिमा नाम की लड़कियों की संगीत में काफी रुचि होती है। श्यामलिमा नाम की लड़कियां मेहनत और लगन से सफल होती हैं। ये किस्मत पर निर्भर नहीं रहती। इस अंक वाली श्यामलिमा नाम की लड़कियों का स्वभाव काफी दयालु होता है लेकिन इन्हें सफलता देरी से प्राप्त होती है।
कुंभ, श्यामलिमा नाम की लड़कियों की राशि है। खुद पर कंट्रोल रखने वाली और बहुत नरम दिल की होती हैं श्यामलिमा नाम की लड़कियां। इनमें गुणों की कोई कमी नहीं होती है। श्यामलिमा नाम वाली लड़कियां बहुत बुद्धिमान होती हैं और ये अपनी बुद्धिमत्ता पर गर्व महसूस करती हैं। कुम्भ राशि की महिलाएं जिनका नाम श्यामलिमा होता है, वे आसानी से किसी के समझ नहीं आती हैं। वैसे तो श्यामलिमा नाम की लड़कियां सबके साथ अच्छी तरह बात करती हैं, लेकिन दोस्त बहुत ही ध्यान से बनाती हैं। श्यामलिमा नाम की लड़कियां दूसरों के प्रति काफी सहानुभूति रखती हैं और लोगों की मदद करना इन्हें अच्छा लगता है।
।सौंदर्य और बुद्धिमान (Vrsaparvan की बेटी)
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।श्यामलिमा भगवान शनि देव और हनुमान जी को कुंभ राशि का आराध्य देव माना जाता है। कुम्भ राशि के श्यामलिमा नाम की लड़कियों की उत्तेजना और परिसंचरण को यूरेनस ग्रह द्वारा नियंत्रित किया जाता है। जिस समय वृक्ष फलों और फूलों से भर जाते हैं उस मौसम में श्यामलिमा नाम की लड़कियाँ जन्म लेते हैं। श्यामलिमा नाम की लड़कियाँ गुस्सैल प्रवृत्ति के होते हैं। इन श्यामलिमा नाम की लड़कियों को अस्थमा, एलर्जी, सूजन और हृदय रोगों का खतरा रहता है। इस श्यामलिमा नाम की लड़कियों में बुद्धि, ऊर्जा और प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती और ये डोरसों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। इन्हें दोस्ती करना पसंद होता है। श्यामलिमा नाम बहुत सुंदर और आकर्षक माना जाता है। इतना ही नहीं इसका मतलब भी बहुत अच्छा होता है। आपको बता दें कि श्यामलिमा नाम का अर्थ काला होता है। काला मतलब होने के कारण श्यामलिमा नाम बहुत सुंदर बन जाता है। अगर आप अपने बच्चे को श्यामलिमा नाम देते हैं तो जीवनभर के लिए उसका संबंध इस नाम के मतलब यानी काला से हो जाएगा। वेदों में भी ये बात कही गई कि शिशु को श्यामलिमा देने से पहले माता-पिता को इसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए। माना जाता है कि श्यामलिमा नाम वाले व्यक्ति के स्वभाव में काला होने की झलक देख सकते हैं। नीचे श्यामलिमा नाम की राशि, लकी नंबर और स्वभाव एवं काला के बारे में विस्तार से बताया गया है। श्यामलिमा नाम की महिलाएं शनि ग्रह के अधीन आती हैं। इनका शुभ अंक आठ होता है। धन के मामले में आठ अंक वाली श्यामलिमा नाम की लड़कियों को किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं आती है। इनमें धन को संचय कर के रखने का गुण होता है। आठ अंक वाली श्यामलिमा नाम की युवतियां जीवन में अपने नियम खुद बनाती हैं। श्यामलिमा नाम की लड़कियों की संगीत में काफी रुचि होती है। श्यामलिमा नाम की लड़कियां मेहनत और लगन से सफल होती हैं। ये किस्मत पर निर्भर नहीं रहती। इस अंक वाली श्यामलिमा नाम की लड़कियों का स्वभाव काफी दयालु होता है लेकिन इन्हें सफलता देरी से प्राप्त होती है। कुंभ, श्यामलिमा नाम की लड़कियों की राशि है। खुद पर कंट्रोल रखने वाली और बहुत नरम दिल की होती हैं श्यामलिमा नाम की लड़कियां। इनमें गुणों की कोई कमी नहीं होती है। श्यामलिमा नाम वाली लड़कियां बहुत बुद्धिमान होती हैं और ये अपनी बुद्धिमत्ता पर गर्व महसूस करती हैं। कुम्भ राशि की महिलाएं जिनका नाम श्यामलिमा होता है, वे आसानी से किसी के समझ नहीं आती हैं। वैसे तो श्यामलिमा नाम की लड़कियां सबके साथ अच्छी तरह बात करती हैं, लेकिन दोस्त बहुत ही ध्यान से बनाती हैं। श्यामलिमा नाम की लड़कियां दूसरों के प्रति काफी सहानुभूति रखती हैं और लोगों की मदद करना इन्हें अच्छा लगता है। ।सौंदर्य और बुद्धिमान
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उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पांच दिन पहले देवगांव कोतवाल गजानंद चौबे को फोनकर धमकी देने और 50 हजार रुपए रंगदारी मांगने के मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
आजमगढ़ में पांच दिन पहले देवगांव कोतवाल गजानंद चौबे को फोनकर धमकी देने और 50 हजार रुपए रंगदारी मांगने के मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने कोतवाल को रुपये न देने पर हत्या करने की धमकी दी थी। उनके पास से घटना में प्रयुक्त मोबइल, नकदी, एटीएम और पैनकार्ड बरामद हुए हैं।
देवगांव कोतवाल गजानंद चौबे के मोबाइल पर 27 जून को अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने कहा वह लोकभवन लखनऊ से बोल रहा है। 50 हजार रुपये दो, नहीं तो तुम्हे अपदस्थ करा दूंगा। रुपये न मिलने पर हत्या करवा दूंगा। इसके साथ ही मारपीट के एक मुकदमे से भुड़की निवासी अजय यादव, विजय यादव, संजय यादव, दीपू यादव, नीरज यादव व लालू यादव का नाम बाहर निकालने के लिए कहा। मुकदमे की वादी गीता यादव के मुंबई से लौटने पर उसकी हत्या की धमकी दी। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की।
अपराध निरीक्षक रुद्रभान पांडेय ने बताया कि अभियुक्त राजू यादव उर्फ लालू यादव, नीरज यादव निवासी भुड़की व कृष्णमूरत तिवारी निवासी मल्लुपुर मझगवां थाना राजेसुल्तानपुर अंबेडकर नगर को बरडीहां मोड़ पर हाईवे के पास से गिरफ्तार किया गया। उनके पास से सात हजार 570 रुपये नकद, घटना में प्रयुक्त मोबाइल, पैनकार्ड सहित अन्य सामान बरामद हुए। कृष्णमूरत तिवारी पर पांच और नीरज यादव पर दो मुकदमे दर्ज हैं।
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उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पांच दिन पहले देवगांव कोतवाल गजानंद चौबे को फोनकर धमकी देने और पचास हजार रुपए रंगदारी मांगने के मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आजमगढ़ में पांच दिन पहले देवगांव कोतवाल गजानंद चौबे को फोनकर धमकी देने और पचास हजार रुपए रंगदारी मांगने के मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने कोतवाल को रुपये न देने पर हत्या करने की धमकी दी थी। उनके पास से घटना में प्रयुक्त मोबइल, नकदी, एटीएम और पैनकार्ड बरामद हुए हैं। देवगांव कोतवाल गजानंद चौबे के मोबाइल पर सत्ताईस जून को अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने कहा वह लोकभवन लखनऊ से बोल रहा है। पचास हजार रुपये दो, नहीं तो तुम्हे अपदस्थ करा दूंगा। रुपये न मिलने पर हत्या करवा दूंगा। इसके साथ ही मारपीट के एक मुकदमे से भुड़की निवासी अजय यादव, विजय यादव, संजय यादव, दीपू यादव, नीरज यादव व लालू यादव का नाम बाहर निकालने के लिए कहा। मुकदमे की वादी गीता यादव के मुंबई से लौटने पर उसकी हत्या की धमकी दी। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। अपराध निरीक्षक रुद्रभान पांडेय ने बताया कि अभियुक्त राजू यादव उर्फ लालू यादव, नीरज यादव निवासी भुड़की व कृष्णमूरत तिवारी निवासी मल्लुपुर मझगवां थाना राजेसुल्तानपुर अंबेडकर नगर को बरडीहां मोड़ पर हाईवे के पास से गिरफ्तार किया गया। उनके पास से सात हजार पाँच सौ सत्तर रुपयापये नकद, घटना में प्रयुक्त मोबाइल, पैनकार्ड सहित अन्य सामान बरामद हुए। कृष्णमूरत तिवारी पर पांच और नीरज यादव पर दो मुकदमे दर्ज हैं।
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नहीं मिल रहा था। टेलीविजन, वाशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर ने लोगों के जीवन को बदल डाला और सफलता के ये प्रतीक तेजी से पूरे जापान में फैल गये।
सन् 1953 में मिनामाता रोग पहली बार प्रकाश में आया । इस रोग का प्रभाव यह होता था कि इसके रोगी अपनी शारीरिक क्रियाओं पर नियंत्रण खो बैठते थे। इस रोग का कारण औद्योगिक प्रदूषण था, जिसका पता 1959 में चला। लेकिन, 1973 में जाकर इसके रोगियों को अदालती हर्जांना मिल पाया। दूसरे रोगों में निर्बाध औद्योगिक विकास के खतरों को समझ पाने की कमी दिखायी दी। 1967 में प्रदूषण पर रोक लगाने के लिये एक कानून पारित किया गया, और 1970 के दशक में सरकार ने प्रदूषण रोकने के लिये गंभीर उपाय किये।
26.5 तेल आघात और उसके पश्चात् की स्थिति
सन् 1973 में ओपेक (तेल उत्पादक) देशों ने यह धमकी दी कि जो देश उनके प्रति मैत्री भाव नहीं रखते, वे उन्हें तेल देना बंद दर देंगे। यह "तेल आघात" की स्थिति थी। इस धमकी से जापान भयभीत हो गया। जापान तेल के आयात पर आश्रित था, और उसमें कटौती होने से उसकी अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो जाती । लेकिन जो उपाय किए गए, उनसे अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और उसकी मजबूती का पता चलता है। जापान में ऊर्जा की मांग का सत्तर प्रतिशत तेल पर आधारित था, और उसके नीति-निर्माताओं ने ऊर्जा के उपभोग में कटौती का लक्ष्य सामने रखा। उन्हें इसमें इतनी सफलता मिली कि जहां अन्य उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में 1973 से 1980 तक 2 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई, वहीं जापान की अर्थव्यवस्था में 1975 में 3.2 प्रतिशत की, 1976 में 5.3 प्रतिशत की और फिर 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई । अर्थव्यवस्था, प्रधान मंत्री फुकुदा ताकेओ के शब्दों में, "इतनी ऊंचाइयां" छूने लगी जितनी कि "फ्यूजी पर्वत"।
सन् 1972 में सातो इसाकू के बाद प्रधानमंत्री बनने वाले तनाका काकुए ने जापान की राजनीतिक रीतियों को बदलने का राजनीतिक काम शुरू किया। उससे पहले भ्रष्टाचार रहा था और ऐसे बदनामी वाले प्रकरण उभर आए थे जिनके कारण राजनीतिक नेताओं को लज्जित होना पड़ा और कई राजनीतिक जीवन चौपट हो गए। अधिकांश जापानी प्रधान मंत्रियों और राजनीतिकों की तरह तनाका कभी टोक्यो विश्वविद्यालय में नहीं पढ़े थे, न ही. शक्तिशाली लोक सेवक रहे थे, वह तो अपने बूते पर इस स्थिति पर तक पहुंचे थे। तनाका ने किनकेन सेजी अथवा धन की राजनीति की स्थापना की। तनाका ने मित्र और चुनाव क्षेत्र बनाए और व्यापक संरक्षण के माध्यम से एक शक्तिशाली राजनीतिक तंत्र खड़ा कर लिया।
सत्तारूढ़ उदारवादी जनतांत्रिक पार्टी कुछ गुटों का मिश्रण था । ये गुट चंदा इकट्ठा करने और चुनाव लड़ने में स्वाधीन होकर काम करते थे। इसलिए उनमें निरंतर प्रतिस्पर्धा बनी रहती थी लेकिन उनके व्यवहार रीतिं और सहयोग से भी प्रभावित थे। वे एक स्वीकृत ढांचे के अंदर काम करते थे। तनाका के समर्थन और विवादास्पद सौदे प्राप्त करने की आदत का भंडाफोड़ एक पत्रिका में छपे लेख में हुआ। इससे जो विवाद खड़ा हुआ उसके कारण तनाका की सरकार गिर गई। तनाका ने भ्रष्ट आदतों के अतिरिक्त पार्टी के अधिकार को भी नौकरशाही पर हावी रखा ।
नौकरशाही ने राजनीतिक दलों से उन्नित स्वाधीनता बनाए रखकर काम किया था और प्रायः ही राजनीतिकों को विशिष्ट राय उपलब्ध कराई थी। लेकिन, तनाका ने अपने विशेषज्ञ तैयार किए और अपनी विशेष समितियां गठित कीं। तनाका के बाद मिकी ताकेओ आया जिसकी ईमानदार प्रशासक के रूप में प्रतिष्ठा थी। लेकिन, मिकी ताकेओ राजनीति में धन की भूमिका को कम करने और गुटबंदी को समाप्त करने के अपने घोषित लक्ष्यों को प्राप्त
नहीं कर पाया।
सन् 1976 में, जापान लॉकहीड कांड (Lockheed Scandal) में डूब गया। लॉकहीड कंपनी ने अपने विमान बेचने के लिए कुछ जापानियों को धन दिया था। इनमें तत्कालीन प्रधान मंत्री तनामा काकुए भी शामिल था। 1976 में तनाका को गिरफ्तार कर लिया गया । बाद में उस पर लंबा मुकदमा चला। लेकिन, इन अभियोगों के बावजूद तनाका पर्दे के पीछे से अपनी शक्ति का इस्तेमाल करता रहा, और अपनी गुट शक्ति के कारण वह जापानी राजनीति में राजा बनाने वाला. असली कर्णधार रहा । तनाका का डायट के दोनों सदनों के 400 सदस्यों में से 120 पर नियंत्रण था और मंत्रिमंडल का गठन उसकी इस "सेना" के हाथ में होता था । नीतियों के निर्माण पर भी उसकी "सेना" का नियंत्रण था और वह महत्वपूर्ण मंत्री पदों पर हावी रहती थी। 1983 में तनाका को दोषी पाया गया। उसने अपील की। लेकिन अभी तक यह मामला सुलझा नहीं है ।
सन् 1971 में MITI ने नव अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं औद्योगिक नीति की आधारभूत दिशा नाम की एक योजना का प्रकाशन किया। यह योजना 1970 के दशक के लिए एक दृष्टि के रूप में रख गई थी जिसका यह तर्क था कि जापान को औद्योगिक वस्तुओं के उत्पादन से हटकर ज्ञान आधारित उद्योगों की ओर आ जाना चाहिए। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सरकार ने अनेक उपाय किए। जापान ने टी वी ट्यूबों और वी सी आर के अपने उत्पादन को आधुनिक बनाया। और 1978 में उसने अपने कंप्यूटर उद्योग को अमेरिका की बराबरी पर लाने का प्रयास किया। ज्ञान आधारित उद्योग पर जोर के संदर्भ में पहले उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स पर जोर दिया गया और रोबोट तक उसका विस्तार किया गया। वाहन उद्योग के क्षेत्र में, जहां 1950 में जापान ने कुल 1,600 कारें बनाई थीं, वहीं 1980 तक वह अमेरिका से एक करोड़ 10 लाख अधिक कारों का निर्माण कर रहा था ।
जापान ने चुनिंदा सुरक्षा और आर्थिक सहायता की मदद से इस वृद्धि को प्राप्त किया।
प्रारंभ में विदेशी कारों के लिए शुल्क दरें हुआ करती थीं। जब इस पर आपत्ति की गई तो, उसने उन बड़ी कारों और तिपहिया वाहनों की अनुमति दे दी जिनकी मांग नहीं थी। साथ ही साथ, उसने "छोटी कार" की परिभाषा को विस्तृत कर 2,000 सी. सी. तक की कारों को उसमें शामिल कर लिया। शुल्क दरों को 1970 के दशक में ही हटाया गया, और 1980 बाजार में विदेशी कारों का अंश केवल । प्रतिशत था ।
सन् 1982 में नाकासोने यासुहिरो प्रधान मंत्री बना, और आने वाले वर्षों में उसने एक नयी कार्य शैली बनाई। नाकासोने की राजनीति का मूलभूत आधार युद्ध पश्चात् के हिसाबों को चुकता करना था जापान ने प्रधान मंत्री सातो के नेतृत्व में ओकीनावा पर फिर से नियंत्रण कर लिया था, और तनाका के शासन काल में चीन के साथ संबंध शुरू कर दिए थे। नाकासोने जापान को पश्चिमी गठबंधन का एक मजबूत और सक्रिय सदस्य बनाना चाहता था। उसकी सक्रिय कूटनीति इसी आकांक्षा का एक अंग थी उसने दक्षिण कोरिया को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराके और उसके साथ व्यापारिक अनुबंध करके उसके साथ और भी मजबूत संबंध बना लिये। उसने अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रेगन के साथ व्यक्तिगत मित्रता भी कर ली ।
जापान के अंदर नाकासोने ने प्रशासनिक सुधार लागू करने का काम किया। नीति निर्माण के लिए उसने कुछ विशेषज्ञ समितियां गठित कीं, जिनके विषय में आलोचकों ने यह कहा कि इन समितियों ने डायट की अवहेलना करके जनतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट किया । नाकासोने ने जो कदम उठाए; उनमें से 1985 में उसकी यासकुनी स्थल की सरकारी यात्रा ने जापान के अंदर भी और चीन जैसे बाहरी देशों में भी विवाद खड़ा कर दिया। यासुकुनी स्थल वह स्थल था जहां 1894-95 के चीन-जापान युद्ध से युद्ध में मृत लोगों को समाधिस्थ किया जाता था । नाकासोने की इस यात्रा को सैन्यवाद की वापसी के रूप में देखा गया क्योंकि इससे राज्य और धर्म की पृथकता का उल्लंघन होता था। लेकिन अनेक गुटों ने इसे एक अत्यधिक स्वाभाविक राष्ट्रभक्ति की अभिव्यक्ति भी माना ।
शिक्षा के क्षेत्र में भी नाकासोने का जोर केवल रचनात्मकता बनाने पर नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति की भावना का निर्माण करने पर भी रहा। राष्ट्रभक्ति पर इस जोर का उदारवादियों ने विरोध किया, क्योंकि वे उसे युद्ध-पूर्व के उन राष्ट्रीय उद्देश्यों की वापसी मानते थे, जिसने जापान को यद्ध और विस्तारवाद में झोका था ।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में, जापान के उसके व्यापारी सहभागियों के साथ बढ़ते असंतुलनों ने जापान को कड़ी आलोचना का केंद्र बना दिया। 1986 में माएकावा प्रतिवेदन में अर्थव्यवस्था को उदार बनाने के उपाय निश्चित किए गए। इस समिति का अध्यक्ष जापानी बैंक का एक भूतपूर्व गवर्नर था। इस प्रतिवेदन में यह भी सुझाव दिया गया कि अधिक जोर लोगों के रहन-सहन के स्तर को सुधारने के लिए सामाजिक पूंजी बनाने पर दिया जाए । जापान का व्यापार अधिशेष एक समस्या बनता जा रहा था। 1987 में येन के बढ़े मूल्य के कारण व्यापार अधिशेष 96 अरब डालर तक पहुंच गया, जिस पर अमेरिका की प्रतिक्रिया हुई।
अमेरिकी प्रतिक्रिया इस तर्क पर आधारित थी कि जापान ने "उन्मुक्त व्यापार" अपना लिया था। दूसरे शब्दों में, जापान ने अपनी सुरक्षा के लिए कोई धन खर्च नहीं किया था, और इस बचत को आर्थिक वृद्धि और व्यापार की दिशा में लगा दिया था। अमेरिकी आलोचकों का तर्क था कि जापान को अपने बाजारों को मुक्त कर देना चाहिए और रूढ़ वितरण व्यवस्था जैसे गैर शुल्क दर बंधनों को हटा देना चाहिए जिनके चलते विदेशी कंपनियों के लिए जापान में बिक्री करना कठिन हो रहा था। इन आलोचकों के अनुसार जापान को अपने प्रतिरक्षा व्यय का एक बड़ा अंश स्वयं वहन करना चाहिए था।
नाकासोने ने दूर संचार और जापान राष्ट्रीय रेल मार्ग जैसी सरकारी एकाधिकार संस्थाओं का राष्ट्रीयकरण समाप्त करने के लिए भी कदम उठाए । रेल मार्ग को छह क्षेत्रीय समूहों में बांट दिया गया, और स्वदेशी टेलीफोन कंपनी, एन टी टी का निजीकरण कर दिया गया । नाकासोने का प्रभाव जबरदस्त था। उसी के बूते पर उसने 1986 में अपने एल डी पी की अध्यक्षता की दो अवधियां समाप्त होने के बाद एक अतिरिक्त वर्ष ले लिया। लेकिन उसके अंतिम वर्ष में पार्टी की लोकप्रियता में गिरावट आई जिसका कारण अलोकप्रिय कर संबंधी कदम थे। लेकिन, नाकासोने के अपने उत्तराधिकारी ताकोशिता गोबोरू के चयन में भी प्रमुख भूमिका निभाई।
नाकासोने मंत्रिमंडल का दौर, वह दौर था जब जापान में अंतर्राष्ट्रीय मामलों में कहीं अधिक स्पष्ट भूमिका निभानी शुरू की। जापान के अंदर नाकासोने ने जो मुद्दे खोले और कार्यक्रम रखे वे आज भी राजनीतिक कार्यक्रमों का अंग हैं। लेकिन, चुनाव प्रक्रिया में सुधार और राजनीतिक कोषों को विनियमन के मामले में बहुत सफलता नहीं मिली, और ये समस्याएं जापानी राजनीति के लिए आज भी बनी हुई हैं।
जापान के विदेशी संबंधों का संचालन उसकी सुरक्षा की सुनिश्चितता देने वाले अमेरिका के साथ गठबंधन के ढांचे के अंदर हुआ है। इसका अर्थ यह हुआ कि 1970 के दशक तक जापान ने अपने पड़ोसी देशों के साथ फिर से संबंध बनाने की दिशा में लगभग कोई भी कदम नहीं उठाए। युद्ध की समाप्ति पर जापान के हाथों नुकसान उठाने वाले देशों को क्षतिपूर्ति का मामला सुलझा लिया गया था, लेकिन सोवियत संघ के साथ कोई शांति समझौता नहीं किया गया। चीन के साथ भी जापान ने अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की चीन यात्रा के बाद ही संबंध सामान्य किए।
. जापान ने अपनी युद्ध काल की विरासत से मुक्ति पा ली और 1965 में दक्षिणी कोरिया के साथ अपने संबंध सामान्य कर लिए, लेकिन जो कोरियाई जबरन जापान से आए थे उनकी समस्या जैसी की तैसी बनी रही। अमेरिका के साथ गठबंधन के कारण होकैडो के उत्तर में स्थित द्वीपों के आधिपत्य को लेकर जापान के सोवियत संघ के साथ संबंध गड़बड़ रहे ।
जापान की विदेश नीति अब और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का प्रयास कर रही है, क्योंकि जापान ने आर्थिक शक्ति अर्जित कर ली है, इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए वह विकासशील देशों को अपनी आर्थिक सहायता में वृद्धि कर रहा है। जापान और अमेरिका तथा यूरोपीय समुदाय के बीच व्यापारिक और आर्थिक तनाव भी बढ़ रहे हैं, और इसकी सीमित बाजार और अनुचित ढंग से विदेशी प्रतिद्वंद्वियों को बाहर रखने की नीति की जो आलोचना हुई है, उसके कारण जापान ने इस डर से विकासशील देशों में पूंजी निवेश शुरू कर दिया है कि कहीं उनके बाजारों से उसे बाहर न रखा जाए।
बोध प्रश्न 2
1 ) जापान ने तेज आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए ? 15 पंक्तियों में उत्तर दीजिए।
.2 ) जापान की "तेल आघात" पर क्या प्रतिक्रिया रही? 5 पंक्तियों में उत्तर दीजिए ।
3) आज की दुनिया में आप जापान की भूमिका को किस रूप में लेते हैं? 10 पंक्तियों में उत्तर दीजिए।
26.6 सारांश
द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार हुई और मित्र शक्तियों ने उस पर आधिपत्य कर लिया, लेकिन वास्तव में आधिपत्य करने वाली प्रमुख शक्ति अमेरिका थी । अमेरिका ने स्कैंप के माध्यम से जापान को सुधारने और उसे एक विस्तारवादी ताकत न बनने देने के लिए उपाय किए। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने जापान की राजनीति और समाज को जनतांत्रिक बनाने के लिए कदम उठाए और संविधान को फिर से लिखा ।
लेकिन, कोरियाई युद्ध छिड़ने और अमेरिका के नीतिगत उद्देश्यों के कारण अमेरिका ने जापान को एशिया में अपना एक मजबूत मित्र बनाने की दिशा में काम किया। इसलिए, उसने सुधार कार्यों को वापस लेना शुरू कर दिया और रूढ़िवादियों के साथ काम करके एक मजबूत और स्थिर समाज और एक प्रबल मित्र बनाना सुनिश्चित किया ।
सान फ्रांसिस्को की शांति संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद जापान ने अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से बनाने का काम शुरू किया और विश्व के मामलों में कोई भूमिका नहीं निभाई। आर्थिक वृद्धि पर पूरा ध्यान देना इसलिए संभव हुआ क्योंकि अमेरिका ने जापान की की व्यवस्था की । प्रतिरक्षा और सेना पर तो कोई धन व्यय होना नहीं था, सुरक्षा इसलिए स्वाभाविक था कि प्रतिरक्षा पर भारी व्यय करने वाले अन्य राष्ट्रों के मुकाबले जापान में आर्थिक विकास कहीं तेजी से होता, जिन नीतियों को अपनाया गया उनके अनुसार, एक सुरक्षित किंतु प्रतिस्पर्धा पूर्ण बाजार का निर्माण हुआ, और सरकार ने उद्योग के साथ मिलकर उन उद्योगों का पता लगाया जो जापान को एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में उभारने के लिए आवश्यक थे, उन्होंने इन उद्योगों को पनपाया भी। कुछ जगह विफलता भी मिली। लेकिन, व्यवस्था लचीली और समायोजक थी जिसके चलते प्रौद्योगिकी का शुद्ध आयातक जापान 1980 के दशक तक उन्नत प्रौद्योगिकी का निर्यात कर रहा था।
जापानी राजनीति की विशेषता एक ही पार्टी एल डी पी का वर्चस्व रहा, जिसकी शक्ति और लंबा काल ठोस ग्रामीण समर्थन और व्यापारियों और नौकरशाही के साथ घनिष्ठ संबंधों की देन रहा। इन गुटों के साथ मिलकर उसने जापान को उच्च वृद्धि की ओर पहुंचाया और कोई भी इस व्यवस्था के लिए खतरा खड़ा नहीं करना चाहता था । समाजवादी और क्रांतिकारी गुट सक्रिय रहते हुए भी राजनीतिक दृष्टि से हाशिये पर ही
जापान में इस समय बहस चल रही है और वह अपनी भावी प्राथमिकताएं तय करने का प्रयास कर रहा है। वह दुनिया के मामलों में कोई भूमिका निभाने के लिए विकसित कर रहा है। इसका प्रभाव इस पर भी पड़ेगा कि वह किस प्रकार के समाज का निर्माण करता है। क्या जापानी समाज और भी मुक्त होगा और एक बेहतर सामाजिक वातावरण बनाने पर जोर देगा या अधिक आरामदेह जीवन शैली उच्च उत्पादकता और आर्थिक मजबूती को खतरे में डाल देग़ी? ये वे सवाल हैं जिन पर बहस चल रही है। जापान की अंतर्राष्ट्रीय भूमिका के संबंध में भी यही स्थित है। क्या जापान अमेरिकी गठबंधन को अपनी विदेश नीति का आधार बनाकर काम करता रह सकता है या उसके लिए दुनिया के मामलों में कहीं अधिक स्वाधीन भूमिका अपनाने की आवश्यकता है? यह भूमिका क्या होगी? क्या अपने विशाल आर्थिक संसाधनों के साथ जापान तीसरी दुनिया के देशों के विकास कार्यक्रम में कोई भूमिका निभा सकता है या उसकी रुचि केवल एकीकृत बाजार बनाकर अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच पर अपनी शक्ति सुनिश्चित करने में है? शेष विश्व के साथ जापान का भविष्य घनिष्ठता से जुड़ा है और जापान ने तोकुगावा काल के उन वर्षों से एक लंबी यात्रा तय की है, जब वह दुनिया से बिल्कुल कटा हुआ था।
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नहीं मिल रहा था। टेलीविजन, वाशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर ने लोगों के जीवन को बदल डाला और सफलता के ये प्रतीक तेजी से पूरे जापान में फैल गये। सन् एक हज़ार नौ सौ तिरेपन में मिनामाता रोग पहली बार प्रकाश में आया । इस रोग का प्रभाव यह होता था कि इसके रोगी अपनी शारीरिक क्रियाओं पर नियंत्रण खो बैठते थे। इस रोग का कारण औद्योगिक प्रदूषण था, जिसका पता एक हज़ार नौ सौ उनसठ में चला। लेकिन, एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में जाकर इसके रोगियों को अदालती हर्जांना मिल पाया। दूसरे रोगों में निर्बाध औद्योगिक विकास के खतरों को समझ पाने की कमी दिखायी दी। एक हज़ार नौ सौ सरसठ में प्रदूषण पर रोक लगाने के लिये एक कानून पारित किया गया, और एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक में सरकार ने प्रदूषण रोकने के लिये गंभीर उपाय किये। छब्बीस.पाँच तेल आघात और उसके पश्चात् की स्थिति सन् एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में ओपेक देशों ने यह धमकी दी कि जो देश उनके प्रति मैत्री भाव नहीं रखते, वे उन्हें तेल देना बंद दर देंगे। यह "तेल आघात" की स्थिति थी। इस धमकी से जापान भयभीत हो गया। जापान तेल के आयात पर आश्रित था, और उसमें कटौती होने से उसकी अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो जाती । लेकिन जो उपाय किए गए, उनसे अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और उसकी मजबूती का पता चलता है। जापान में ऊर्जा की मांग का सत्तर प्रतिशत तेल पर आधारित था, और उसके नीति-निर्माताओं ने ऊर्जा के उपभोग में कटौती का लक्ष्य सामने रखा। उन्हें इसमें इतनी सफलता मिली कि जहां अन्य उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर से एक हज़ार नौ सौ अस्सी तक दो प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई, वहीं जापान की अर्थव्यवस्था में एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में तीन.दो प्रतिशत की, एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में पाँच.तीन प्रतिशत की और फिर छः प्रतिशत की वृद्धि हुई । अर्थव्यवस्था, प्रधान मंत्री फुकुदा ताकेओ के शब्दों में, "इतनी ऊंचाइयां" छूने लगी जितनी कि "फ्यूजी पर्वत"। सन् एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में सातो इसाकू के बाद प्रधानमंत्री बनने वाले तनाका काकुए ने जापान की राजनीतिक रीतियों को बदलने का राजनीतिक काम शुरू किया। उससे पहले भ्रष्टाचार रहा था और ऐसे बदनामी वाले प्रकरण उभर आए थे जिनके कारण राजनीतिक नेताओं को लज्जित होना पड़ा और कई राजनीतिक जीवन चौपट हो गए। अधिकांश जापानी प्रधान मंत्रियों और राजनीतिकों की तरह तनाका कभी टोक्यो विश्वविद्यालय में नहीं पढ़े थे, न ही. शक्तिशाली लोक सेवक रहे थे, वह तो अपने बूते पर इस स्थिति पर तक पहुंचे थे। तनाका ने किनकेन सेजी अथवा धन की राजनीति की स्थापना की। तनाका ने मित्र और चुनाव क्षेत्र बनाए और व्यापक संरक्षण के माध्यम से एक शक्तिशाली राजनीतिक तंत्र खड़ा कर लिया। सत्तारूढ़ उदारवादी जनतांत्रिक पार्टी कुछ गुटों का मिश्रण था । ये गुट चंदा इकट्ठा करने और चुनाव लड़ने में स्वाधीन होकर काम करते थे। इसलिए उनमें निरंतर प्रतिस्पर्धा बनी रहती थी लेकिन उनके व्यवहार रीतिं और सहयोग से भी प्रभावित थे। वे एक स्वीकृत ढांचे के अंदर काम करते थे। तनाका के समर्थन और विवादास्पद सौदे प्राप्त करने की आदत का भंडाफोड़ एक पत्रिका में छपे लेख में हुआ। इससे जो विवाद खड़ा हुआ उसके कारण तनाका की सरकार गिर गई। तनाका ने भ्रष्ट आदतों के अतिरिक्त पार्टी के अधिकार को भी नौकरशाही पर हावी रखा । नौकरशाही ने राजनीतिक दलों से उन्नित स्वाधीनता बनाए रखकर काम किया था और प्रायः ही राजनीतिकों को विशिष्ट राय उपलब्ध कराई थी। लेकिन, तनाका ने अपने विशेषज्ञ तैयार किए और अपनी विशेष समितियां गठित कीं। तनाका के बाद मिकी ताकेओ आया जिसकी ईमानदार प्रशासक के रूप में प्रतिष्ठा थी। लेकिन, मिकी ताकेओ राजनीति में धन की भूमिका को कम करने और गुटबंदी को समाप्त करने के अपने घोषित लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पाया। सन् एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में, जापान लॉकहीड कांड में डूब गया। लॉकहीड कंपनी ने अपने विमान बेचने के लिए कुछ जापानियों को धन दिया था। इनमें तत्कालीन प्रधान मंत्री तनामा काकुए भी शामिल था। एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में तनाका को गिरफ्तार कर लिया गया । बाद में उस पर लंबा मुकदमा चला। लेकिन, इन अभियोगों के बावजूद तनाका पर्दे के पीछे से अपनी शक्ति का इस्तेमाल करता रहा, और अपनी गुट शक्ति के कारण वह जापानी राजनीति में राजा बनाने वाला. असली कर्णधार रहा । तनाका का डायट के दोनों सदनों के चार सौ सदस्यों में से एक सौ बीस पर नियंत्रण था और मंत्रिमंडल का गठन उसकी इस "सेना" के हाथ में होता था । नीतियों के निर्माण पर भी उसकी "सेना" का नियंत्रण था और वह महत्वपूर्ण मंत्री पदों पर हावी रहती थी। एक हज़ार नौ सौ तिरासी में तनाका को दोषी पाया गया। उसने अपील की। लेकिन अभी तक यह मामला सुलझा नहीं है । सन् एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में MITI ने नव अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं औद्योगिक नीति की आधारभूत दिशा नाम की एक योजना का प्रकाशन किया। यह योजना एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक के लिए एक दृष्टि के रूप में रख गई थी जिसका यह तर्क था कि जापान को औद्योगिक वस्तुओं के उत्पादन से हटकर ज्ञान आधारित उद्योगों की ओर आ जाना चाहिए। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सरकार ने अनेक उपाय किए। जापान ने टी वी ट्यूबों और वी सी आर के अपने उत्पादन को आधुनिक बनाया। और एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में उसने अपने कंप्यूटर उद्योग को अमेरिका की बराबरी पर लाने का प्रयास किया। ज्ञान आधारित उद्योग पर जोर के संदर्भ में पहले उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स पर जोर दिया गया और रोबोट तक उसका विस्तार किया गया। वाहन उद्योग के क्षेत्र में, जहां एक हज़ार नौ सौ पचास में जापान ने कुल एक,छः सौ कारें बनाई थीं, वहीं एक हज़ार नौ सौ अस्सी तक वह अमेरिका से एक करोड़ दस लाख अधिक कारों का निर्माण कर रहा था । जापान ने चुनिंदा सुरक्षा और आर्थिक सहायता की मदद से इस वृद्धि को प्राप्त किया। प्रारंभ में विदेशी कारों के लिए शुल्क दरें हुआ करती थीं। जब इस पर आपत्ति की गई तो, उसने उन बड़ी कारों और तिपहिया वाहनों की अनुमति दे दी जिनकी मांग नहीं थी। साथ ही साथ, उसने "छोटी कार" की परिभाषा को विस्तृत कर दो,शून्य सी. सी. तक की कारों को उसमें शामिल कर लिया। शुल्क दरों को एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक में ही हटाया गया, और एक हज़ार नौ सौ अस्सी बाजार में विदेशी कारों का अंश केवल । प्रतिशत था । सन् एक हज़ार नौ सौ बयासी में नाकासोने यासुहिरो प्रधान मंत्री बना, और आने वाले वर्षों में उसने एक नयी कार्य शैली बनाई। नाकासोने की राजनीति का मूलभूत आधार युद्ध पश्चात् के हिसाबों को चुकता करना था जापान ने प्रधान मंत्री सातो के नेतृत्व में ओकीनावा पर फिर से नियंत्रण कर लिया था, और तनाका के शासन काल में चीन के साथ संबंध शुरू कर दिए थे। नाकासोने जापान को पश्चिमी गठबंधन का एक मजबूत और सक्रिय सदस्य बनाना चाहता था। उसकी सक्रिय कूटनीति इसी आकांक्षा का एक अंग थी उसने दक्षिण कोरिया को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराके और उसके साथ व्यापारिक अनुबंध करके उसके साथ और भी मजबूत संबंध बना लिये। उसने अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रेगन के साथ व्यक्तिगत मित्रता भी कर ली । जापान के अंदर नाकासोने ने प्रशासनिक सुधार लागू करने का काम किया। नीति निर्माण के लिए उसने कुछ विशेषज्ञ समितियां गठित कीं, जिनके विषय में आलोचकों ने यह कहा कि इन समितियों ने डायट की अवहेलना करके जनतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट किया । नाकासोने ने जो कदम उठाए; उनमें से एक हज़ार नौ सौ पचासी में उसकी यासकुनी स्थल की सरकारी यात्रा ने जापान के अंदर भी और चीन जैसे बाहरी देशों में भी विवाद खड़ा कर दिया। यासुकुनी स्थल वह स्थल था जहां एक हज़ार आठ सौ चौरानवे-पचानवे के चीन-जापान युद्ध से युद्ध में मृत लोगों को समाधिस्थ किया जाता था । नाकासोने की इस यात्रा को सैन्यवाद की वापसी के रूप में देखा गया क्योंकि इससे राज्य और धर्म की पृथकता का उल्लंघन होता था। लेकिन अनेक गुटों ने इसे एक अत्यधिक स्वाभाविक राष्ट्रभक्ति की अभिव्यक्ति भी माना । शिक्षा के क्षेत्र में भी नाकासोने का जोर केवल रचनात्मकता बनाने पर नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति की भावना का निर्माण करने पर भी रहा। राष्ट्रभक्ति पर इस जोर का उदारवादियों ने विरोध किया, क्योंकि वे उसे युद्ध-पूर्व के उन राष्ट्रीय उद्देश्यों की वापसी मानते थे, जिसने जापान को यद्ध और विस्तारवाद में झोका था । अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में, जापान के उसके व्यापारी सहभागियों के साथ बढ़ते असंतुलनों ने जापान को कड़ी आलोचना का केंद्र बना दिया। एक हज़ार नौ सौ छियासी में माएकावा प्रतिवेदन में अर्थव्यवस्था को उदार बनाने के उपाय निश्चित किए गए। इस समिति का अध्यक्ष जापानी बैंक का एक भूतपूर्व गवर्नर था। इस प्रतिवेदन में यह भी सुझाव दिया गया कि अधिक जोर लोगों के रहन-सहन के स्तर को सुधारने के लिए सामाजिक पूंजी बनाने पर दिया जाए । जापान का व्यापार अधिशेष एक समस्या बनता जा रहा था। एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में येन के बढ़े मूल्य के कारण व्यापार अधिशेष छियानवे अरब डालर तक पहुंच गया, जिस पर अमेरिका की प्रतिक्रिया हुई। अमेरिकी प्रतिक्रिया इस तर्क पर आधारित थी कि जापान ने "उन्मुक्त व्यापार" अपना लिया था। दूसरे शब्दों में, जापान ने अपनी सुरक्षा के लिए कोई धन खर्च नहीं किया था, और इस बचत को आर्थिक वृद्धि और व्यापार की दिशा में लगा दिया था। अमेरिकी आलोचकों का तर्क था कि जापान को अपने बाजारों को मुक्त कर देना चाहिए और रूढ़ वितरण व्यवस्था जैसे गैर शुल्क दर बंधनों को हटा देना चाहिए जिनके चलते विदेशी कंपनियों के लिए जापान में बिक्री करना कठिन हो रहा था। इन आलोचकों के अनुसार जापान को अपने प्रतिरक्षा व्यय का एक बड़ा अंश स्वयं वहन करना चाहिए था। नाकासोने ने दूर संचार और जापान राष्ट्रीय रेल मार्ग जैसी सरकारी एकाधिकार संस्थाओं का राष्ट्रीयकरण समाप्त करने के लिए भी कदम उठाए । रेल मार्ग को छह क्षेत्रीय समूहों में बांट दिया गया, और स्वदेशी टेलीफोन कंपनी, एन टी टी का निजीकरण कर दिया गया । नाकासोने का प्रभाव जबरदस्त था। उसी के बूते पर उसने एक हज़ार नौ सौ छियासी में अपने एल डी पी की अध्यक्षता की दो अवधियां समाप्त होने के बाद एक अतिरिक्त वर्ष ले लिया। लेकिन उसके अंतिम वर्ष में पार्टी की लोकप्रियता में गिरावट आई जिसका कारण अलोकप्रिय कर संबंधी कदम थे। लेकिन, नाकासोने के अपने उत्तराधिकारी ताकोशिता गोबोरू के चयन में भी प्रमुख भूमिका निभाई। नाकासोने मंत्रिमंडल का दौर, वह दौर था जब जापान में अंतर्राष्ट्रीय मामलों में कहीं अधिक स्पष्ट भूमिका निभानी शुरू की। जापान के अंदर नाकासोने ने जो मुद्दे खोले और कार्यक्रम रखे वे आज भी राजनीतिक कार्यक्रमों का अंग हैं। लेकिन, चुनाव प्रक्रिया में सुधार और राजनीतिक कोषों को विनियमन के मामले में बहुत सफलता नहीं मिली, और ये समस्याएं जापानी राजनीति के लिए आज भी बनी हुई हैं। जापान के विदेशी संबंधों का संचालन उसकी सुरक्षा की सुनिश्चितता देने वाले अमेरिका के साथ गठबंधन के ढांचे के अंदर हुआ है। इसका अर्थ यह हुआ कि एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक तक जापान ने अपने पड़ोसी देशों के साथ फिर से संबंध बनाने की दिशा में लगभग कोई भी कदम नहीं उठाए। युद्ध की समाप्ति पर जापान के हाथों नुकसान उठाने वाले देशों को क्षतिपूर्ति का मामला सुलझा लिया गया था, लेकिन सोवियत संघ के साथ कोई शांति समझौता नहीं किया गया। चीन के साथ भी जापान ने अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की चीन यात्रा के बाद ही संबंध सामान्य किए। . जापान ने अपनी युद्ध काल की विरासत से मुक्ति पा ली और एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में दक्षिणी कोरिया के साथ अपने संबंध सामान्य कर लिए, लेकिन जो कोरियाई जबरन जापान से आए थे उनकी समस्या जैसी की तैसी बनी रही। अमेरिका के साथ गठबंधन के कारण होकैडो के उत्तर में स्थित द्वीपों के आधिपत्य को लेकर जापान के सोवियत संघ के साथ संबंध गड़बड़ रहे । जापान की विदेश नीति अब और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का प्रयास कर रही है, क्योंकि जापान ने आर्थिक शक्ति अर्जित कर ली है, इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए वह विकासशील देशों को अपनी आर्थिक सहायता में वृद्धि कर रहा है। जापान और अमेरिका तथा यूरोपीय समुदाय के बीच व्यापारिक और आर्थिक तनाव भी बढ़ रहे हैं, और इसकी सीमित बाजार और अनुचित ढंग से विदेशी प्रतिद्वंद्वियों को बाहर रखने की नीति की जो आलोचना हुई है, उसके कारण जापान ने इस डर से विकासशील देशों में पूंजी निवेश शुरू कर दिया है कि कहीं उनके बाजारों से उसे बाहर न रखा जाए। बोध प्रश्न दो एक ) जापान ने तेज आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए ? पंद्रह पंक्तियों में उत्तर दीजिए। .दो ) जापान की "तेल आघात" पर क्या प्रतिक्रिया रही? पाँच पंक्तियों में उत्तर दीजिए । तीन) आज की दुनिया में आप जापान की भूमिका को किस रूप में लेते हैं? दस पंक्तियों में उत्तर दीजिए। छब्बीस.छः सारांश द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार हुई और मित्र शक्तियों ने उस पर आधिपत्य कर लिया, लेकिन वास्तव में आधिपत्य करने वाली प्रमुख शक्ति अमेरिका थी । अमेरिका ने स्कैंप के माध्यम से जापान को सुधारने और उसे एक विस्तारवादी ताकत न बनने देने के लिए उपाय किए। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने जापान की राजनीति और समाज को जनतांत्रिक बनाने के लिए कदम उठाए और संविधान को फिर से लिखा । लेकिन, कोरियाई युद्ध छिड़ने और अमेरिका के नीतिगत उद्देश्यों के कारण अमेरिका ने जापान को एशिया में अपना एक मजबूत मित्र बनाने की दिशा में काम किया। इसलिए, उसने सुधार कार्यों को वापस लेना शुरू कर दिया और रूढ़िवादियों के साथ काम करके एक मजबूत और स्थिर समाज और एक प्रबल मित्र बनाना सुनिश्चित किया । सान फ्रांसिस्को की शांति संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद जापान ने अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से बनाने का काम शुरू किया और विश्व के मामलों में कोई भूमिका नहीं निभाई। आर्थिक वृद्धि पर पूरा ध्यान देना इसलिए संभव हुआ क्योंकि अमेरिका ने जापान की की व्यवस्था की । प्रतिरक्षा और सेना पर तो कोई धन व्यय होना नहीं था, सुरक्षा इसलिए स्वाभाविक था कि प्रतिरक्षा पर भारी व्यय करने वाले अन्य राष्ट्रों के मुकाबले जापान में आर्थिक विकास कहीं तेजी से होता, जिन नीतियों को अपनाया गया उनके अनुसार, एक सुरक्षित किंतु प्रतिस्पर्धा पूर्ण बाजार का निर्माण हुआ, और सरकार ने उद्योग के साथ मिलकर उन उद्योगों का पता लगाया जो जापान को एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में उभारने के लिए आवश्यक थे, उन्होंने इन उद्योगों को पनपाया भी। कुछ जगह विफलता भी मिली। लेकिन, व्यवस्था लचीली और समायोजक थी जिसके चलते प्रौद्योगिकी का शुद्ध आयातक जापान एक हज़ार नौ सौ अस्सी के दशक तक उन्नत प्रौद्योगिकी का निर्यात कर रहा था। जापानी राजनीति की विशेषता एक ही पार्टी एल डी पी का वर्चस्व रहा, जिसकी शक्ति और लंबा काल ठोस ग्रामीण समर्थन और व्यापारियों और नौकरशाही के साथ घनिष्ठ संबंधों की देन रहा। इन गुटों के साथ मिलकर उसने जापान को उच्च वृद्धि की ओर पहुंचाया और कोई भी इस व्यवस्था के लिए खतरा खड़ा नहीं करना चाहता था । समाजवादी और क्रांतिकारी गुट सक्रिय रहते हुए भी राजनीतिक दृष्टि से हाशिये पर ही जापान में इस समय बहस चल रही है और वह अपनी भावी प्राथमिकताएं तय करने का प्रयास कर रहा है। वह दुनिया के मामलों में कोई भूमिका निभाने के लिए विकसित कर रहा है। इसका प्रभाव इस पर भी पड़ेगा कि वह किस प्रकार के समाज का निर्माण करता है। क्या जापानी समाज और भी मुक्त होगा और एक बेहतर सामाजिक वातावरण बनाने पर जोर देगा या अधिक आरामदेह जीवन शैली उच्च उत्पादकता और आर्थिक मजबूती को खतरे में डाल देग़ी? ये वे सवाल हैं जिन पर बहस चल रही है। जापान की अंतर्राष्ट्रीय भूमिका के संबंध में भी यही स्थित है। क्या जापान अमेरिकी गठबंधन को अपनी विदेश नीति का आधार बनाकर काम करता रह सकता है या उसके लिए दुनिया के मामलों में कहीं अधिक स्वाधीन भूमिका अपनाने की आवश्यकता है? यह भूमिका क्या होगी? क्या अपने विशाल आर्थिक संसाधनों के साथ जापान तीसरी दुनिया के देशों के विकास कार्यक्रम में कोई भूमिका निभा सकता है या उसकी रुचि केवल एकीकृत बाजार बनाकर अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच पर अपनी शक्ति सुनिश्चित करने में है? शेष विश्व के साथ जापान का भविष्य घनिष्ठता से जुड़ा है और जापान ने तोकुगावा काल के उन वर्षों से एक लंबी यात्रा तय की है, जब वह दुनिया से बिल्कुल कटा हुआ था।
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वित्त वर्ष 22 की पहली तिमाही में 6. 5 अरब डॉलर (जीडीपी का 0. 9 प्रतिशत) चालू खाता अधिशेष दर्ज किया गया है, जबकि वित्त वर्ष 21 की चौथी तिमाही में 8. 1 अरब डॉलर (जीडीपी का 1 प्रतिशत) चालू खाते का घाटा रहा था। भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक भारत के चालू खाते का अधिशेष वित्त वर्ष 21 की पहली तिमाही में 19. 1 अरब डॉलर (सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3. 7 प्रतिशत) था। जून, 2021 में समाप्त तिमाही (वित्त वर्ष 22 की पहली तिमाही) में अधिशेष वस्तुओं का व्यापार घाटा 30. 7 अरब डॉलर रह जाने के कारण हुआ, जो वित्त वर्ष 21 की चौथी तिमाही में 41. 7 अरब डॉलर था। साथ ही इस दौरान शुद्ध सेवा प्राप्तियां भी बढ़ीं।
Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
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वित्त वर्ष बाईस की पहली तिमाही में छः. पाँच अरब डॉलर चालू खाता अधिशेष दर्ज किया गया है, जबकि वित्त वर्ष इक्कीस की चौथी तिमाही में आठ. एक अरब डॉलर चालू खाते का घाटा रहा था। भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक भारत के चालू खाते का अधिशेष वित्त वर्ष इक्कीस की पहली तिमाही में उन्नीस. एक अरब डॉलर का तीन. सात प्रतिशत) था। जून, दो हज़ार इक्कीस में समाप्त तिमाही में अधिशेष वस्तुओं का व्यापार घाटा तीस. सात अरब डॉलर रह जाने के कारण हुआ, जो वित्त वर्ष इक्कीस की चौथी तिमाही में इकतालीस. सात अरब डॉलर था। साथ ही इस दौरान शुद्ध सेवा प्राप्तियां भी बढ़ीं। Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
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शिमला - हिमाचल पथ परिवहन मजदूर संघ के अध्यक्ष गुलाब सिंह धीमान की अध्यक्षता में मुख्य कार्यालय एवं मंडलीय कार्यालय के चुनाव सर्वसम्मति से करवाए गए। इसमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेश शर्मा व राष्ट्रीय मंत्री सुभाष वर्मा ने भाग लिया। नवगठित कार्यकारिणी में रतन लाल को अध्यक्ष, अनिल कुमार को कार्यकारी अध्यक्ष, राजेंद्र सोनी को वरिष्ठ उपाध्यक्ष,
ठियोग - पंजाब के अमृतसर में आयोजित इंटर कार्टिनटल कराटे प्रतियोगिता में छराबड़ा के हिमालयन इंटरनेशल स्कूल के प्रतिभागियों ने शानदार प्रर्दशन करते हुए इस प्रतियोगिता में दो गोल्ड मेडल के अलावा तीन सिल्वर और तीन ही कांस्य पदक जीते हैं। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए स्कूल के कुल आठ प्रतिभागियों ने भाग लिया था।
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शिमला - हिमाचल पथ परिवहन मजदूर संघ के अध्यक्ष गुलाब सिंह धीमान की अध्यक्षता में मुख्य कार्यालय एवं मंडलीय कार्यालय के चुनाव सर्वसम्मति से करवाए गए। इसमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेश शर्मा व राष्ट्रीय मंत्री सुभाष वर्मा ने भाग लिया। नवगठित कार्यकारिणी में रतन लाल को अध्यक्ष, अनिल कुमार को कार्यकारी अध्यक्ष, राजेंद्र सोनी को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, ठियोग - पंजाब के अमृतसर में आयोजित इंटर कार्टिनटल कराटे प्रतियोगिता में छराबड़ा के हिमालयन इंटरनेशल स्कूल के प्रतिभागियों ने शानदार प्रर्दशन करते हुए इस प्रतियोगिता में दो गोल्ड मेडल के अलावा तीन सिल्वर और तीन ही कांस्य पदक जीते हैं। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए स्कूल के कुल आठ प्रतिभागियों ने भाग लिया था।
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निया लगातार अपनी ट्रिप की फोटोज और वीडियो फैंस के साथ शेयर कर रही हैं. उन्होंने बीच पर एंजॉय करने से लेकर क्लब में पार्टी करने तक अपनी ट्रिप की कुछ झलकियां फैंस के साथ शेयर की हैं.
इस दौरान निया क्रीम कलर की शॉर्ट ड्रेस पहने नजर आईं. उन्होंने अपने लुक को स्मोकी आईमेकअप और न्यूड बेस के साथ कंप्लीट किया. निया ने अपनी मां के साथ भी कई पोज दिए.
वहीं निया इससे पहले बीच पर चिल करते हुए भी पिक्स शेयर की थीं. इस दौरान वो बिकिनी में ग्लैमरस दिखीं.
निया ने पिंक हॉल्टर नेक बिकिनी में अपना टोंड फिगर फ्लॉन्ट किया. निया का इंटेंस मेकअप इस लुक को कंप्लीट कर रहा था.
निया ने मियामी के एक क्लब से डांस करते हुए भी एक वीडियो शेयर किया था. इसमें निया कूल वाइब्स दे रही थीं.
निया के वर्क फ्रंट की बात करें तो उन्हें पिछली बार डांस रियलिटी शो झलक दिखलाजा 10 में देखा गया था. इसके अलावा उन्होंने करण कुंद्रा, गशमीर महाजनी और रीम शेख के शो तेरे इश्क में घायल में उन्होंने छोटा कैमियो किया था.
निया टीवी इंडस्ट्री की सक्सेसफुल एक्ट्रेस हैं. वो ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी काम करती नजर आती हैं. निया का काम फैंस को काफी पसंद आता है. निया पहचान शो जमाई राजा से मिली थी.
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निया लगातार अपनी ट्रिप की फोटोज और वीडियो फैंस के साथ शेयर कर रही हैं. उन्होंने बीच पर एंजॉय करने से लेकर क्लब में पार्टी करने तक अपनी ट्रिप की कुछ झलकियां फैंस के साथ शेयर की हैं. इस दौरान निया क्रीम कलर की शॉर्ट ड्रेस पहने नजर आईं. उन्होंने अपने लुक को स्मोकी आईमेकअप और न्यूड बेस के साथ कंप्लीट किया. निया ने अपनी मां के साथ भी कई पोज दिए. वहीं निया इससे पहले बीच पर चिल करते हुए भी पिक्स शेयर की थीं. इस दौरान वो बिकिनी में ग्लैमरस दिखीं. निया ने पिंक हॉल्टर नेक बिकिनी में अपना टोंड फिगर फ्लॉन्ट किया. निया का इंटेंस मेकअप इस लुक को कंप्लीट कर रहा था. निया ने मियामी के एक क्लब से डांस करते हुए भी एक वीडियो शेयर किया था. इसमें निया कूल वाइब्स दे रही थीं. निया के वर्क फ्रंट की बात करें तो उन्हें पिछली बार डांस रियलिटी शो झलक दिखलाजा दस में देखा गया था. इसके अलावा उन्होंने करण कुंद्रा, गशमीर महाजनी और रीम शेख के शो तेरे इश्क में घायल में उन्होंने छोटा कैमियो किया था. निया टीवी इंडस्ट्री की सक्सेसफुल एक्ट्रेस हैं. वो ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी काम करती नजर आती हैं. निया का काम फैंस को काफी पसंद आता है. निया पहचान शो जमाई राजा से मिली थी.
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Dream Girl 2 Box Office Day 1 Early Estimate: आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) और अनन्या पांडे (Ananya Panday) स्टारर मूवी ड्रीम गर्ल 2 ने बॉक्स ऑफिस पर दमदार शुरुआत की है। हालांकि सामने आई रिपोर्ट्स की मानें तो मूवी 10 करोड़ का आंकड़ छूने से पीछे रह जाएगी।
Dream Girl 2 Box Office Day 1 Early Estimate: बॉलीवुड स्टार आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) और अनन्या पांडे (Ananya Panday) स्टारर मूवी ड्रीम गर्ल 2 बीते दिन सिनेमाघर पहुंच गई। इस फिल्म का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था। 'पूजा' के रोल में 'ड्रीम गर्ल' में छाने के बाद एक बार फिर आयुष्मान खुराना ने सिल्वर स्क्रीन पर दोबारा अपना जलवा दिखाया है। 'ड्रीम गर्ल 2' में एक बार फिर 'पूजा' बनकर आए आयुष्मान खुराना दर्शकों का दिल जीतते दिखे। जिसकी वजह से फिल्म ने पहले दिन अच्छी ओपनिंग हासिल की। हालांकि इसके बावजूद फिल्म पहले दिन उम्मीद के मुताबिक 10 करोड़ रुपये की ओपनिंग का आंकड़ा शायद ही पार कर सके।
पहले दिन कुल इतने करोड़ रुपये कमाएगी आयुष्मान-अनन्या की 'ड्रीम गर्ल 2'
सामने आ रही लेटेस्ट रिपोर्ट्स की मानें तो आयुष्मान खुराना और अनन्या पांडे की मूवी 'ड्रीम गर्ल 2' सिनेमाघरों से 10 करोड़ रुपये की कुल कमाई का आंकड़ा छूते-छूते रह जाएगी। खबरों के मुताबिक मूवी पहले दिन कुल 9.50 करोड़ रुपये की रेंज में कमाई करने वाली है। ये कमाई 8.70 से लेकर 9.70 करोड़ रुपये की रेंज में हो सकती है। खबरों की मानें तो मूवी ने देश की 3 बड़ी नेशनल मल्टीप्लेक्स चेन्स पीवीआर, आईनॉक्स और सिनेपोलिस से ही कुल 5 करोड़ रुपये की कमाई पहले दिन हासिल कर ली है। इन तीनों मल्टीप्लेक्सेस का योगदान मूवी को होने वाली कमाई में 60 फीसदी का रहता है। ऐसे में लग रहा है कि मूवी शायद ही 10 करोड़ की कमाई का कुल आंकड़ा पार कर सके।
इस हिसाब से लगता है कि आयुष्मान खुराना की मूवी 'ड्रीम गर्ल 2' उनकी मूवी के पहले पार्ट की ओपनिंग डे का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाएगी। इससे पहले आयुष्मान और नुसरत भरूचा की साल 2019 में आई फिल्म 'ड्रीम गर्ल' ने पहले दिन कुल 10.50 करोड़ रुपये की कमाई की थी। 'ड्रीम गर्ल 2' की अर्ली एस्टिमेट्स की रिपोर्ट इशारा करती है कि ये रिकॉर्ड पार करना थोड़ा मुश्किल होगा।
फिल्म को दर्शकों से मिल रहे रिस्पॉन्स को देखते हुए माना जा रहा है कि ये मूवी वीकेंड पर तेज रफ्तार पकड़ेगी। इस फिल्म को बेहद कम बजट में बनाया गया है। फिल्म की मेकिंग कॉस्ट कुल 35-40 करोड़ के बीच ही है। ऐसे में वीकेंड पर तेज कमाई कर ये मूवी आसानी से हिट का टैग हासिल कर लेगी।
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Dream Girl दो Box Office Day एक Early Estimate: आयुष्मान खुराना और अनन्या पांडे स्टारर मूवी ड्रीम गर्ल दो ने बॉक्स ऑफिस पर दमदार शुरुआत की है। हालांकि सामने आई रिपोर्ट्स की मानें तो मूवी दस करोड़ का आंकड़ छूने से पीछे रह जाएगी। Dream Girl दो Box Office Day एक Early Estimate: बॉलीवुड स्टार आयुष्मान खुराना और अनन्या पांडे स्टारर मूवी ड्रीम गर्ल दो बीते दिन सिनेमाघर पहुंच गई। इस फिल्म का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था। 'पूजा' के रोल में 'ड्रीम गर्ल' में छाने के बाद एक बार फिर आयुष्मान खुराना ने सिल्वर स्क्रीन पर दोबारा अपना जलवा दिखाया है। 'ड्रीम गर्ल दो' में एक बार फिर 'पूजा' बनकर आए आयुष्मान खुराना दर्शकों का दिल जीतते दिखे। जिसकी वजह से फिल्म ने पहले दिन अच्छी ओपनिंग हासिल की। हालांकि इसके बावजूद फिल्म पहले दिन उम्मीद के मुताबिक दस करोड़ रुपये की ओपनिंग का आंकड़ा शायद ही पार कर सके। पहले दिन कुल इतने करोड़ रुपये कमाएगी आयुष्मान-अनन्या की 'ड्रीम गर्ल दो' सामने आ रही लेटेस्ट रिपोर्ट्स की मानें तो आयुष्मान खुराना और अनन्या पांडे की मूवी 'ड्रीम गर्ल दो' सिनेमाघरों से दस करोड़ रुपये की कुल कमाई का आंकड़ा छूते-छूते रह जाएगी। खबरों के मुताबिक मूवी पहले दिन कुल नौ.पचास करोड़ रुपये की रेंज में कमाई करने वाली है। ये कमाई आठ.सत्तर से लेकर नौ.सत्तर करोड़ रुपये की रेंज में हो सकती है। खबरों की मानें तो मूवी ने देश की तीन बड़ी नेशनल मल्टीप्लेक्स चेन्स पीवीआर, आईनॉक्स और सिनेपोलिस से ही कुल पाँच करोड़ रुपये की कमाई पहले दिन हासिल कर ली है। इन तीनों मल्टीप्लेक्सेस का योगदान मूवी को होने वाली कमाई में साठ फीसदी का रहता है। ऐसे में लग रहा है कि मूवी शायद ही दस करोड़ की कमाई का कुल आंकड़ा पार कर सके। इस हिसाब से लगता है कि आयुष्मान खुराना की मूवी 'ड्रीम गर्ल दो' उनकी मूवी के पहले पार्ट की ओपनिंग डे का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाएगी। इससे पहले आयुष्मान और नुसरत भरूचा की साल दो हज़ार उन्नीस में आई फिल्म 'ड्रीम गर्ल' ने पहले दिन कुल दस.पचास करोड़ रुपये की कमाई की थी। 'ड्रीम गर्ल दो' की अर्ली एस्टिमेट्स की रिपोर्ट इशारा करती है कि ये रिकॉर्ड पार करना थोड़ा मुश्किल होगा। फिल्म को दर्शकों से मिल रहे रिस्पॉन्स को देखते हुए माना जा रहा है कि ये मूवी वीकेंड पर तेज रफ्तार पकड़ेगी। इस फिल्म को बेहद कम बजट में बनाया गया है। फिल्म की मेकिंग कॉस्ट कुल पैंतीस-चालीस करोड़ के बीच ही है। ऐसे में वीकेंड पर तेज कमाई कर ये मूवी आसानी से हिट का टैग हासिल कर लेगी। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
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50 ग्राम सूजी सेवई (Semolina Vermicelli).
4 बड़े चम्मच बारीक़ कटी प्याज (Onions).
2 बड़े चम्मच बारीक़ कटे गाजर (Carrots).
2 बड़े चम्मच बारीक़ कटी शिमला मिर्च (Capsicum).
2 बड़े चम्मच बारीक़ कटी पत्ता गोभी (Cabbage).
2 बड़े चम्मच बारीक़ कटे टमाटर (Tomatoes).
1 बड़ा चम्मच अदरक लहसुन हरी मिर्च का पेस्ट (Ginger Garlic Chilli Paste).
½ छोटा चम्मच हल्दी पाउडर (Turmeric Powder).
1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर (Red Chilli Powder).
1 छोटा चम्मच पुलाव मसाला (Pulao Masala).
1 बड़ा चम्मच हरी धनिया (Coriander Leaves).
2 सुखी लाल मिर्च (Dry Red Chillies).
स्वाद अनुसार नमक (Salt).
3 बड़े चम्मच तेल (Oil).
चरण 1.
सबसे पहले एक नॉनस्टिक पैन में 1 बड़ा चम्मच तेल डालकर गर्म होने दे फिर उसमे सेवई डाले और उसे हल्का भून ले, सेवई को 2 मिनट तक मीडियम आंच पे भुने.
चरण 2.
अब उसमे 2-3 कप पानी और नमक डाले, अब उसमे उबाल आने दे और सेवई को 80℅ तक पकाएं फिर उसे छन्नी में छान कर ठंडा होने दे, अब इसे एक तरफ रख के पुलाव बनाने की तैयारी करे.
चरण 3.
अब एक नॉनस्टिक कढ़ाई में 2 बड़े चम्मच जितना तेल डाले फिर तेल में सुखी लाल मिर्च को भून कर निकाल ले, अब उसी तेल में प्याज़ को डाले और प्याज़ को ट्रांसपेरेंट होने तक पकाएं.
चरण 4.
अब उसमे अदरक लहसुन हरी मिर्च का पेस्ट और गाजर डालकर हल्का भून ले फिर उसमे पत्ता ग़ोभी और शिमला मिर्च डालकर दोनों को थोडा भून ले फिर उसमे टमाटर डाले और उसे भी हल्का सोते करे.
चरण 5.
जब सभी सामग्री अच्छे से भून जाए फिर उसमे नमक, हल्दी पावडर, लाल मिर्च पावडर और पुलाव मसाला डाले, अब सभी मसालो को अच्छे से भून लेने के बाद उसमे पकाई हुई सेवई डाले.
चरण 6.
अब सेवई को सभी मसालो के साथ अच्छे से टॉस करे और उसे अच्छे से पका ले, अब सभी मसाले और सेवई अच्छे से मिल जाए और पुलाव बन जाए फिर गैस बंद करे और पुलाव को एक बाउल में निकाल के उनमोल्ड करे फिर उसे सुखी लाल मिर्च, हरी धनिया और टमाटर के फूल से गार्निश करके सर्व करे.
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पचास ग्राम सूजी सेवई . चार बड़े चम्मच बारीक़ कटी प्याज . दो बड़े चम्मच बारीक़ कटे गाजर . दो बड़े चम्मच बारीक़ कटी शिमला मिर्च . दो बड़े चम्मच बारीक़ कटी पत्ता गोभी . दो बड़े चम्मच बारीक़ कटे टमाटर . एक बड़ा चम्मच अदरक लहसुन हरी मिर्च का पेस्ट . ½ छोटा चम्मच हल्दी पाउडर . एक छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर . एक छोटा चम्मच पुलाव मसाला . एक बड़ा चम्मच हरी धनिया . दो सुखी लाल मिर्च . स्वाद अनुसार नमक . तीन बड़े चम्मच तेल . चरण एक. सबसे पहले एक नॉनस्टिक पैन में एक बड़ा चम्मच तेल डालकर गर्म होने दे फिर उसमे सेवई डाले और उसे हल्का भून ले, सेवई को दो मिनट तक मीडियम आंच पे भुने. चरण दो. अब उसमे दो-तीन कप पानी और नमक डाले, अब उसमे उबाल आने दे और सेवई को अस्सी℅ तक पकाएं फिर उसे छन्नी में छान कर ठंडा होने दे, अब इसे एक तरफ रख के पुलाव बनाने की तैयारी करे. चरण तीन. अब एक नॉनस्टिक कढ़ाई में दो बड़े चम्मच जितना तेल डाले फिर तेल में सुखी लाल मिर्च को भून कर निकाल ले, अब उसी तेल में प्याज़ को डाले और प्याज़ को ट्रांसपेरेंट होने तक पकाएं. चरण चार. अब उसमे अदरक लहसुन हरी मिर्च का पेस्ट और गाजर डालकर हल्का भून ले फिर उसमे पत्ता ग़ोभी और शिमला मिर्च डालकर दोनों को थोडा भून ले फिर उसमे टमाटर डाले और उसे भी हल्का सोते करे. चरण पाँच. जब सभी सामग्री अच्छे से भून जाए फिर उसमे नमक, हल्दी पावडर, लाल मिर्च पावडर और पुलाव मसाला डाले, अब सभी मसालो को अच्छे से भून लेने के बाद उसमे पकाई हुई सेवई डाले. चरण छः. अब सेवई को सभी मसालो के साथ अच्छे से टॉस करे और उसे अच्छे से पका ले, अब सभी मसाले और सेवई अच्छे से मिल जाए और पुलाव बन जाए फिर गैस बंद करे और पुलाव को एक बाउल में निकाल के उनमोल्ड करे फिर उसे सुखी लाल मिर्च, हरी धनिया और टमाटर के फूल से गार्निश करके सर्व करे.
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चंडीगढ़, अप्रैल 10:
राज्य भर में गेहूं की आवक कुछ जिलों में तेजी दिखाने लगी है। इसका खुलासा करते हुए खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री लाल चंद कटारुचक ने कहा कि हर मंडी में जहां कोई भी किसान अपनी उपज लेकर आया है, वहां समय से खरीद शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य भर में बरदाना, मंडी श्रम और परिवहन की सभी व्यवस्थाएं पर्याप्त हैं।
खरीद की गति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य भर में 5.5 लाख मीट्रिक टन गेहूं पहले ही आ चुका है और 4.3 लाख मीट्रिक टन खरीदा गया है। आज मंडियों में 2.6 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई और आज दिन समाप्त होने तक राज्य भर में केवल 1.2 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद होनी बाकी रहती है। उन्होंने कहा, यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कई मंडियों में गेहूं के आगमन की तारीख पर ही उसकी सफाई उपरांत खरीदा की जा रही है।
ढुलाई की सुविधाओं के बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार ने खरीद के 72 घंटे के भीतर गेहूं उठाने का मानदंड तय किया है। जबकि राज्य एजेंसियों ने 7 अप्रैल तक यानी 72 घंटे पहले 26,872 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की थी और मंडियों से 67,449 मीट्रिक टन गेहूं उठाया जा चुका है। यह स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि राज्य सरकार द्वारा अनिवार्य किया गए मापदंड से अधिक तेजी से,गेहूं उठाया जा रहा है, उन्होंने कहा।
उन्होंने एमएसपी भुगतान का विवरण देते हुए कहा कि 9 करोड़ रुपये से अधिक राशि पहले ही सीधे किसानों के खातों में जारी की जा चुकी हैं और इस के अतिरिक्त 133 करोड़ रुपए के भुगतान को मंजूरी दी गई है। सोमवार को बैंक खुलने के बाद इसे जारी कर दिया जाएग, उन्होंने कहा।
मंत्री ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से खरीद गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहे हैं और खरीद एजेंसियों के सभी प्रबंध निदेशकों को सोमवार से मंडियों का दौरा शुरू करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने किसान के पसीने और मेहनत से उत्पादित एक-एक अनाज खरीदने के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
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चंडीगढ़, अप्रैल दस: राज्य भर में गेहूं की आवक कुछ जिलों में तेजी दिखाने लगी है। इसका खुलासा करते हुए खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री लाल चंद कटारुचक ने कहा कि हर मंडी में जहां कोई भी किसान अपनी उपज लेकर आया है, वहां समय से खरीद शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य भर में बरदाना, मंडी श्रम और परिवहन की सभी व्यवस्थाएं पर्याप्त हैं। खरीद की गति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य भर में पाँच.पाँच लाख मीट्रिक टन गेहूं पहले ही आ चुका है और चार.तीन लाख मीट्रिक टन खरीदा गया है। आज मंडियों में दो.छः लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई और आज दिन समाप्त होने तक राज्य भर में केवल एक.दो लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद होनी बाकी रहती है। उन्होंने कहा, यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कई मंडियों में गेहूं के आगमन की तारीख पर ही उसकी सफाई उपरांत खरीदा की जा रही है। ढुलाई की सुविधाओं के बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार ने खरीद के बहत्तर घंटाटे के भीतर गेहूं उठाने का मानदंड तय किया है। जबकि राज्य एजेंसियों ने सात अप्रैल तक यानी बहत्तर घंटाटे पहले छब्बीस,आठ सौ बहत्तर मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की थी और मंडियों से सरसठ,चार सौ उनचास मीट्रिक टन गेहूं उठाया जा चुका है। यह स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि राज्य सरकार द्वारा अनिवार्य किया गए मापदंड से अधिक तेजी से,गेहूं उठाया जा रहा है, उन्होंने कहा। उन्होंने एमएसपी भुगतान का विवरण देते हुए कहा कि नौ करोड़ रुपये से अधिक राशि पहले ही सीधे किसानों के खातों में जारी की जा चुकी हैं और इस के अतिरिक्त एक सौ तैंतीस करोड़ रुपए के भुगतान को मंजूरी दी गई है। सोमवार को बैंक खुलने के बाद इसे जारी कर दिया जाएग, उन्होंने कहा। मंत्री ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से खरीद गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहे हैं और खरीद एजेंसियों के सभी प्रबंध निदेशकों को सोमवार से मंडियों का दौरा शुरू करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने किसान के पसीने और मेहनत से उत्पादित एक-एक अनाज खरीदने के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
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2014 में, खलीया शॉ, अब 26, अपने डॉक्टर से मिले क्योंकि वह उदास महसूस कर रही थीं। उसने लैमोट्रिगिन के लिए एक पर्चे के साथ छोड़ा, मिर्गी का इलाज करने के लिए एक एंटीकोनवल्सेंट जो मूड स्टेबलाइज़र के रूप में प्रभावी ढंग से काम कर सकता है।
लेकिन एक लंबित मुकदमे का दावा है कि उसे दवा का गलत खुराक दिया गया था- और उसकी फार्मेसी ने इसे पकड़ नहीं लिया, 11 रिपोर्ट्स।
दवा शुरू करने के दो सप्ताह बाद, उसके शरीर में फफोले टूट गए।
"मैं दर्द में दर्द था। उसने महसूस किया कि मैं आग पर था, "उसने न्यूस्टेशन को बताया।
उसे स्टीवंस-जॉन्सन सिंड्रोम नामक एक दुर्लभ स्थिति का निदान किया गया था, जो आंखों, नाक और मुंह जैसे श्लेष्म झिल्ली पर दांत, छीलने, घावों से चिह्नित एक जीवन-धमकी वाली त्वचा रोग है।
शॉ ने 11 एलीव से कहा, "यह अनिवार्य रूप से आपके शरीर को अंदरूनी से जलाने का कारण बनता है और आप बहुत ज्यादा पिघलाते हैं।"
दवाओं के शुरू होने के बाद आमतौर पर लक्षण 1 से 3 सप्ताह शुरू होते हैं मर्क मैनुअल। एक फ्लैट लाल धमाके से पहले यह आमतौर पर बुखार, खांसी, और सिरदर्द से शुरू होता है। तब दांत केंद्र में फफोले फैलता है, फैलता है, और बनाता है। तब त्वचा और छाले छीलते हैं-आपके बाल और नाखून भी गिर सकते हैं। मुंह पर सूअर दर्दनाक भोजन कर सकते हैं, जिससे आप डोलोल कर सकते हैं, और आपकी आंखें सूख सकती हैं और क्रस्ट हो सकती हैं।
बीमारी के परिणामस्वरूप, शॉ की त्वचा खराब हो गई है, उसके पसीने के ग्रंथियां और नाखून चले गए हैं, और वह धीरे-धीरे अपनी दृष्टि खो रही है। उन्होंने चिकित्सकीय प्रेरित कोमा में पांच सप्ताह बिताए।
स्टीवंस-जॉन्सन सिंड्रोम दुर्लभ है, लेकिन यह घातक हो सकता है - इसकी मृत्यु दर लगभग 5 प्रतिशत है। यूके से 2013 की एक केस रिपोर्ट के मुताबिक यह स्थिति अक्सर कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव के रूप में विकसित होती है- जिसमें पेनिसिलिन जैसे एंटीबायोटिक्स, गठिया के लिए यूरिक एसिड रेड्यूसर और लैमोट्रिगिन जैसे एंटीकोनवल्सेंट शामिल हैं।
वास्तव में, Lamictrigine के लिए ब्रांड नाम Lamamrigal के लिए निर्धारित जानकारी, कर देता है इसके उपयोग के परिणामस्वरूप स्टीवंस-जॉनसन सिंड्रोम सहित गंभीर दांतों की संभावना की चेतावनी दीजिए। द्विध्रुवीय और मनोदशा विकारों के लिए दवा लेने वाले वयस्कों में, नैदानिक परीक्षणों में गंभीर धमाके की घटना दर 0.08 प्रतिशत थी।
लैमोट्रिगिन को अन्य एंटीकोनवल्सेंट के साथ वाल्प्रोएटेट के साथ ले जाया जा सकता है, दवा की सिफारिश की प्रारंभिक खुराक से अधिक, या दवा के लिए सिफारिश की खुराक से अधिक है।
शॉ के मुकदमे का दावा है कि 11 एलीव के मुताबिक लैमोट्रिगिन का गलत खुराक दोष था।
"हम एक ही त्रुटियों को और अधिक बार देखना जारी रखते हैं। [वे] आमतौर पर फार्मासिस्टों का परिणाम बहुत व्यस्त हो जाते हैं, बहुत सारे नुस्खे भरते हैं और [फार्मेसी] तकनीक का उपयोग करते हैं जिनके पास वास्तव में प्रशिक्षण और क्षमता नहीं है जो एक फार्मासिस्ट होगा, "उसके वकील ट्रेंट स्पीखल्स समाचार स्टेशन को बताया।
अब तक, शॉ के बिल पहले ही 3.45 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुके हैं, और उन्हें बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि उन्हें लंबे समय तक चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होगी।
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दो हज़ार चौदह में, खलीया शॉ, अब छब्बीस, अपने डॉक्टर से मिले क्योंकि वह उदास महसूस कर रही थीं। उसने लैमोट्रिगिन के लिए एक पर्चे के साथ छोड़ा, मिर्गी का इलाज करने के लिए एक एंटीकोनवल्सेंट जो मूड स्टेबलाइज़र के रूप में प्रभावी ढंग से काम कर सकता है। लेकिन एक लंबित मुकदमे का दावा है कि उसे दवा का गलत खुराक दिया गया था- और उसकी फार्मेसी ने इसे पकड़ नहीं लिया, ग्यारह रिपोर्ट्स। दवा शुरू करने के दो सप्ताह बाद, उसके शरीर में फफोले टूट गए। "मैं दर्द में दर्द था। उसने महसूस किया कि मैं आग पर था, "उसने न्यूस्टेशन को बताया। उसे स्टीवंस-जॉन्सन सिंड्रोम नामक एक दुर्लभ स्थिति का निदान किया गया था, जो आंखों, नाक और मुंह जैसे श्लेष्म झिल्ली पर दांत, छीलने, घावों से चिह्नित एक जीवन-धमकी वाली त्वचा रोग है। शॉ ने ग्यारह एलीव से कहा, "यह अनिवार्य रूप से आपके शरीर को अंदरूनी से जलाने का कारण बनता है और आप बहुत ज्यादा पिघलाते हैं।" दवाओं के शुरू होने के बाद आमतौर पर लक्षण एक से तीन सप्ताह शुरू होते हैं मर्क मैनुअल। एक फ्लैट लाल धमाके से पहले यह आमतौर पर बुखार, खांसी, और सिरदर्द से शुरू होता है। तब दांत केंद्र में फफोले फैलता है, फैलता है, और बनाता है। तब त्वचा और छाले छीलते हैं-आपके बाल और नाखून भी गिर सकते हैं। मुंह पर सूअर दर्दनाक भोजन कर सकते हैं, जिससे आप डोलोल कर सकते हैं, और आपकी आंखें सूख सकती हैं और क्रस्ट हो सकती हैं। बीमारी के परिणामस्वरूप, शॉ की त्वचा खराब हो गई है, उसके पसीने के ग्रंथियां और नाखून चले गए हैं, और वह धीरे-धीरे अपनी दृष्टि खो रही है। उन्होंने चिकित्सकीय प्रेरित कोमा में पांच सप्ताह बिताए। स्टीवंस-जॉन्सन सिंड्रोम दुर्लभ है, लेकिन यह घातक हो सकता है - इसकी मृत्यु दर लगभग पाँच प्रतिशत है। यूके से दो हज़ार तेरह की एक केस रिपोर्ट के मुताबिक यह स्थिति अक्सर कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव के रूप में विकसित होती है- जिसमें पेनिसिलिन जैसे एंटीबायोटिक्स, गठिया के लिए यूरिक एसिड रेड्यूसर और लैमोट्रिगिन जैसे एंटीकोनवल्सेंट शामिल हैं। वास्तव में, Lamictrigine के लिए ब्रांड नाम Lamamrigal के लिए निर्धारित जानकारी, कर देता है इसके उपयोग के परिणामस्वरूप स्टीवंस-जॉनसन सिंड्रोम सहित गंभीर दांतों की संभावना की चेतावनी दीजिए। द्विध्रुवीय और मनोदशा विकारों के लिए दवा लेने वाले वयस्कों में, नैदानिक परीक्षणों में गंभीर धमाके की घटना दर शून्य.आठ प्रतिशत थी। लैमोट्रिगिन को अन्य एंटीकोनवल्सेंट के साथ वाल्प्रोएटेट के साथ ले जाया जा सकता है, दवा की सिफारिश की प्रारंभिक खुराक से अधिक, या दवा के लिए सिफारिश की खुराक से अधिक है। शॉ के मुकदमे का दावा है कि ग्यारह एलीव के मुताबिक लैमोट्रिगिन का गलत खुराक दोष था। "हम एक ही त्रुटियों को और अधिक बार देखना जारी रखते हैं। [वे] आमतौर पर फार्मासिस्टों का परिणाम बहुत व्यस्त हो जाते हैं, बहुत सारे नुस्खे भरते हैं और [फार्मेसी] तकनीक का उपयोग करते हैं जिनके पास वास्तव में प्रशिक्षण और क्षमता नहीं है जो एक फार्मासिस्ट होगा, "उसके वकील ट्रेंट स्पीखल्स समाचार स्टेशन को बताया। अब तक, शॉ के बिल पहले ही तीन.पैंतालीस मिलियन डॉलर तक पहुंच चुके हैं, और उन्हें बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि उन्हें लंबे समय तक चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होगी।
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GT vs PBKS : आईपीएल 2022 (IPL 2022) का 48 वां मुकाबला गुजरात टाइटन्स और पंजाब किंग्स के बीच खेला जा रहा है। यह मुकाबला नवी मुंबई के डी वाई पाटिल स्टेडियम में खेला जा रहा है। इस मैच में कप्तान हार्दिक पांड्या ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। बतौर कप्तान इस मैच (GT vs PBKS) में मयंक अग्रवाल और हार्दिक पांड्या आमने-सामने हैं।
पहले बल्लेबाजी करते हुए गुजरात की टीम ने साई सुदर्शन की अर्धशतकीय पारी की बदौलत 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान 143 रन बनाए और पंजाब को जीत के लिए 144 रनों का लक्ष्य दिया।
गुजरात के खिलाफ इस मैच (GT vs PBKS) में कागिसो रबाडा ने सबसे ज्यादा विकेट लिए। उन्होंने चार बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया। रबाडा ने राहुल तेवतिया, राशिद खान, रिद्धिमान साहा और लॉकी फग्युर्सन का विकेट लिया। उनके आलावा लिविंगस्टोन, ऋषि धवन और अर्शदीप सिंह ने 1-1 विकेट हासिल किया।
इस मैच में (GT vs PBKS) गुजरात की तरफ से साई सुदर्शन ने दमदार अर्धशतक जड़ा। उनके बल्ले से यह अर्धशतक उस समय निकला जब टीम के 4 बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे। सुदर्शन ने टिक कर बल्लेबाजी की और टीम के स्कोर को 100 के पार पहुँचाया। उन्होंने 42 गेंदों में अपना अर्धशतक छक्का जड़कर पूरा किया। सुदर्शन इस मैच में 50 गेंदों में 5 चौके और 1 छक्के की मदद से 64 रन बनाकर नाबाद रहे। वहीं, अलजारी जोसेफ 4 रन बनाकर नाबाद रहे। उनके आलावा फग्युर्सन 5 जबकि प्रदीप 2 रन बनाकर आउट हुए।
Boom chakka wow wow! !
Six by Sai Sudarshan.
पंजाब के खिलाफ जब तीन बल्लेबाज पवेलियन लौट गए थे तब सबकी उम्मीद डेविड मिलर थे लेकिन इस मैच में (GT vs PBKS) में उनका बल्ला नहीं चला। मिलर इस मैच में 14 गेंदों में मात्र 11 रन बनाकर लिविंगस्टोन का शिकार बने। मिलर को देखकर ऐसा लगा कि उन्होंने खुद अपना विकेट फेंक दिया। मिलर के आउट होने के बाअद तेवतिया का विकेट गिरा जो मात्र 11 रन बनाकर आउट हुए। रबाडा ने उन्हें चलता किया। मिलर को चलता करने के बाद रबाडा ने राशिद खान का विकेट लिया। जो 0 रन पर आउट हुए। इनके आउट होने पर लोगों ने क्या कहा, आइये देखते हैं।
Tewatia thinks any pitched ball can be hit to midwicket slog. Unless that's only where he knows to hit, then it's not a problem. It's a "by default" setting.
आखि़र के २ ओवर वाले प्लेयर हो बस और ऐसे प्लेयर कभी इंडिया के लिए नहीं खेल सकते।
Liam Livingstone has David Miller for just 11. Fantastic bowling by Punjab Kings tonight, they've restricted Gujarat Titans batters.
इस मैच में (GT vs PBKS) गुजरात की तरफ से पहला झटका शुभमन गिल के रूप में लगा जो रन आउट होकर पवेलियन लौटे। गिल इस मैच में 6 गेंदों में 2 चौके की मदद से 9 रन बनाकर पवेलियन लौटे। संदीप शर्मा की गेंद पर शुभमन गिल तेजी से रन चुराना चाहते थे लेकिन ऋषि धवन के डॉयरेक्ट थ्रो से गिल रन आउट हुए। इसके बाद गुजरात को दूसरा झटका दूसरे सलामी बल्लेबाजी रिद्धिमान साहा के रूप में लगा जो 17 गेंदों में 1 छक्के और 3 चौके की मदद से 21 रन बनाकर रबाडा का शिकार बने। इस दोनों के आउट होने के बाद सबकी उम्मीदें कप्तान हार्दिक पांड्या से थीं लेकिन वो मात्र 1 रन बनाकर ऋषि धवन का शिकार बने बैठे। इनके आउट होने पर लोगों ने क्या कहा, आइये देखते हैं।
GT key abhi tak key sucess mein hardik Pandya ka ghanta kuch contribution nahi hai.
Tewatia Rashid Khan Miller ney match jitvaye hai.
Ye crunch moment pey out ho jata hai.
Gary Kristen jaisa coach hai iska contribution hai kya?
Shubman Bhai, Strike Rate Toh Slow Hi Thi Aapki. Atleast Fast Bhaag Toh Lo.
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GT vs PBKS : आईपीएल दो हज़ार बाईस का अड़तालीस वां मुकाबला गुजरात टाइटन्स और पंजाब किंग्स के बीच खेला जा रहा है। यह मुकाबला नवी मुंबई के डी वाई पाटिल स्टेडियम में खेला जा रहा है। इस मैच में कप्तान हार्दिक पांड्या ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। बतौर कप्तान इस मैच में मयंक अग्रवाल और हार्दिक पांड्या आमने-सामने हैं। पहले बल्लेबाजी करते हुए गुजरात की टीम ने साई सुदर्शन की अर्धशतकीय पारी की बदौलत बीस ओवर में आठ विकेट के नुकसान एक सौ तैंतालीस रन बनाए और पंजाब को जीत के लिए एक सौ चौंतालीस रनों का लक्ष्य दिया। गुजरात के खिलाफ इस मैच में कागिसो रबाडा ने सबसे ज्यादा विकेट लिए। उन्होंने चार बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया। रबाडा ने राहुल तेवतिया, राशिद खान, रिद्धिमान साहा और लॉकी फग्युर्सन का विकेट लिया। उनके आलावा लिविंगस्टोन, ऋषि धवन और अर्शदीप सिंह ने एक-एक विकेट हासिल किया। इस मैच में गुजरात की तरफ से साई सुदर्शन ने दमदार अर्धशतक जड़ा। उनके बल्ले से यह अर्धशतक उस समय निकला जब टीम के चार बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे। सुदर्शन ने टिक कर बल्लेबाजी की और टीम के स्कोर को एक सौ के पार पहुँचाया। उन्होंने बयालीस गेंदों में अपना अर्धशतक छक्का जड़कर पूरा किया। सुदर्शन इस मैच में पचास गेंदों में पाँच चौके और एक छक्के की मदद से चौंसठ रन बनाकर नाबाद रहे। वहीं, अलजारी जोसेफ चार रन बनाकर नाबाद रहे। उनके आलावा फग्युर्सन पाँच जबकि प्रदीप दो रन बनाकर आउट हुए। Boom chakka wow wow! ! Six by Sai Sudarshan. पंजाब के खिलाफ जब तीन बल्लेबाज पवेलियन लौट गए थे तब सबकी उम्मीद डेविड मिलर थे लेकिन इस मैच में में उनका बल्ला नहीं चला। मिलर इस मैच में चौदह गेंदों में मात्र ग्यारह रन बनाकर लिविंगस्टोन का शिकार बने। मिलर को देखकर ऐसा लगा कि उन्होंने खुद अपना विकेट फेंक दिया। मिलर के आउट होने के बाअद तेवतिया का विकेट गिरा जो मात्र ग्यारह रन बनाकर आउट हुए। रबाडा ने उन्हें चलता किया। मिलर को चलता करने के बाद रबाडा ने राशिद खान का विकेट लिया। जो शून्य रन पर आउट हुए। इनके आउट होने पर लोगों ने क्या कहा, आइये देखते हैं। Tewatia thinks any pitched ball can be hit to midwicket slog. Unless that's only where he knows to hit, then it's not a problem. It's a "by default" setting. आखि़र के दो ओवर वाले प्लेयर हो बस और ऐसे प्लेयर कभी इंडिया के लिए नहीं खेल सकते। Liam Livingstone has David Miller for just ग्यारह. Fantastic bowling by Punjab Kings tonight, they've restricted Gujarat Titans batters. इस मैच में गुजरात की तरफ से पहला झटका शुभमन गिल के रूप में लगा जो रन आउट होकर पवेलियन लौटे। गिल इस मैच में छः गेंदों में दो चौके की मदद से नौ रन बनाकर पवेलियन लौटे। संदीप शर्मा की गेंद पर शुभमन गिल तेजी से रन चुराना चाहते थे लेकिन ऋषि धवन के डॉयरेक्ट थ्रो से गिल रन आउट हुए। इसके बाद गुजरात को दूसरा झटका दूसरे सलामी बल्लेबाजी रिद्धिमान साहा के रूप में लगा जो सत्रह गेंदों में एक छक्के और तीन चौके की मदद से इक्कीस रन बनाकर रबाडा का शिकार बने। इस दोनों के आउट होने के बाद सबकी उम्मीदें कप्तान हार्दिक पांड्या से थीं लेकिन वो मात्र एक रन बनाकर ऋषि धवन का शिकार बने बैठे। इनके आउट होने पर लोगों ने क्या कहा, आइये देखते हैं। GT key abhi tak key sucess mein hardik Pandya ka ghanta kuch contribution nahi hai. Tewatia Rashid Khan Miller ney match jitvaye hai. Ye crunch moment pey out ho jata hai. Gary Kristen jaisa coach hai iska contribution hai kya? Shubman Bhai, Strike Rate Toh Slow Hi Thi Aapki. Atleast Fast Bhaag Toh Lo.
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नई दिल्ली। टीम डिजिटल। दूसरे लडक़ों में ऐसा क्या जो उनकी गर्लफ्रेंड बन जाती है मेरी नहीं। इसी जैलेसी के कारण आरोपी ने इंस्टाग्राम पर अंजान लडक़ी की फर्जी आईडी बनाई। लडक़ी की तरह लड़कियों से बातचीत करने लगा। जब लडक़ी से वह अश£ील बातें करने की कोशिश करता। लडक़ी उसको ब्लॉक कर दिया करती। लडक़ी से बदला लेने के लिये उसके चेहरे की फोटो को मॉर्फड करके अपनी ही फर्जी आईडी पर लगाकर बदनाम करने की कोशिश करता। ऐसे आरोपी को उत्तर पश्चिम जिला की साइबर थाना पुलिस ने लुधियाना पंजाब से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान कुलदीप के रूप में हुई है। आरोपी के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है। आरोपी इस तरह से कितनी लड़कियों को अपना शिकार व बदनाम कर चुका है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में पीडि़त लड़कियां शिकायत भी दर्ज नहीं करवाती हैं,जिससे ऐसे आरोपी फायदा उठाते रहते हैं।
पुलिस उपायुक्त जितेन्द्र कुमार मीनाा ने बताया कि साइबर थाना पुलिस को एक 24 साल की पीडि़ता ने शिकायत दी थी। पीडि़ता ने बताया कि बीते 15 मार्च को उसे एक अनजान इंस्टाग्राम आईडी से सिमरन के नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली थी। उसने उसे स्वीकार कर लिया। जिसके बाद दोनों की बातचीत होने लगी थी। वह जिस तरह से मैसेज करता और बात करता था। उससे उसको शक हुआ कि वह लडक़ी नहीं लडक़ा है।
उसने उसका इग्रोर करना शुरू कर दिया। लेकिन वो जबर्दस्ती बात करने की कोशिश करता। बाद में पता चला कि उसकी फोटो को मॉर्फड करके अपने फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट के डिस्प्ले पिक्चर के रूप में इस्तेमाल करने लगा। आरोपी ने पीडि़ता की तस्वीर के साथ किसी अन्य अश्लील फोटो के साथ मर्ज किया था। जिसकी वजह से उसका अनजान लोगों ने ऑनलाइन पीछा करना शुरू कर दिया। उसके मोबाइल पर आपत्तिजनक कॉल्स आने लगीं।
पुलिस ने मामला दर्ज किया। एसएचओ विजेन्द्र सिंह की देखरेख में एसआई विनोद, महिला एसआई मोहिनी, एएसआई शाहिर खान, हेड कॉन्स्टेबल जसबीर और सोहन को आरोपी को पकडऩे का जिम्मा सौंपा गया। सोशल मीडिया अकाउंट को खंगाला गया। जिससे पता चला कि वह लुधियाना पंजाब में रह रहा है। पुलिस टीम ने लुधियाना में छापेमारी करके उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पूछताछ करने पर पता चला कि वह फीमेल के नाम से सोशल मीडिया पर प्रोफाइल बनाता था और दूसरों से दोस्ती करने के लिए रिक्वेस्ट भेजता था।
बाद में उन्हें परेशान करने के लिए पीडि़ता की मॉर्फड तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देता था। वह इस तरह से करके गर्लफ्रेंंड बनाना चाहता था। जब लडक़ी उसके प्रस्ताव को खारिज कर देती तो वह बदला लेने के लिए ऐसा करता था।
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नई दिल्ली। टीम डिजिटल। दूसरे लडक़ों में ऐसा क्या जो उनकी गर्लफ्रेंड बन जाती है मेरी नहीं। इसी जैलेसी के कारण आरोपी ने इंस्टाग्राम पर अंजान लडक़ी की फर्जी आईडी बनाई। लडक़ी की तरह लड़कियों से बातचीत करने लगा। जब लडक़ी से वह अश£ील बातें करने की कोशिश करता। लडक़ी उसको ब्लॉक कर दिया करती। लडक़ी से बदला लेने के लिये उसके चेहरे की फोटो को मॉर्फड करके अपनी ही फर्जी आईडी पर लगाकर बदनाम करने की कोशिश करता। ऐसे आरोपी को उत्तर पश्चिम जिला की साइबर थाना पुलिस ने लुधियाना पंजाब से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान कुलदीप के रूप में हुई है। आरोपी के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है। आरोपी इस तरह से कितनी लड़कियों को अपना शिकार व बदनाम कर चुका है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में पीडि़त लड़कियां शिकायत भी दर्ज नहीं करवाती हैं,जिससे ऐसे आरोपी फायदा उठाते रहते हैं। पुलिस उपायुक्त जितेन्द्र कुमार मीनाा ने बताया कि साइबर थाना पुलिस को एक चौबीस साल की पीडि़ता ने शिकायत दी थी। पीडि़ता ने बताया कि बीते पंद्रह मार्च को उसे एक अनजान इंस्टाग्राम आईडी से सिमरन के नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली थी। उसने उसे स्वीकार कर लिया। जिसके बाद दोनों की बातचीत होने लगी थी। वह जिस तरह से मैसेज करता और बात करता था। उससे उसको शक हुआ कि वह लडक़ी नहीं लडक़ा है। उसने उसका इग्रोर करना शुरू कर दिया। लेकिन वो जबर्दस्ती बात करने की कोशिश करता। बाद में पता चला कि उसकी फोटो को मॉर्फड करके अपने फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट के डिस्प्ले पिक्चर के रूप में इस्तेमाल करने लगा। आरोपी ने पीडि़ता की तस्वीर के साथ किसी अन्य अश्लील फोटो के साथ मर्ज किया था। जिसकी वजह से उसका अनजान लोगों ने ऑनलाइन पीछा करना शुरू कर दिया। उसके मोबाइल पर आपत्तिजनक कॉल्स आने लगीं। पुलिस ने मामला दर्ज किया। एसएचओ विजेन्द्र सिंह की देखरेख में एसआई विनोद, महिला एसआई मोहिनी, एएसआई शाहिर खान, हेड कॉन्स्टेबल जसबीर और सोहन को आरोपी को पकडऩे का जिम्मा सौंपा गया। सोशल मीडिया अकाउंट को खंगाला गया। जिससे पता चला कि वह लुधियाना पंजाब में रह रहा है। पुलिस टीम ने लुधियाना में छापेमारी करके उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पूछताछ करने पर पता चला कि वह फीमेल के नाम से सोशल मीडिया पर प्रोफाइल बनाता था और दूसरों से दोस्ती करने के लिए रिक्वेस्ट भेजता था। बाद में उन्हें परेशान करने के लिए पीडि़ता की मॉर्फड तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देता था। वह इस तरह से करके गर्लफ्रेंंड बनाना चाहता था। जब लडक़ी उसके प्रस्ताव को खारिज कर देती तो वह बदला लेने के लिए ऐसा करता था।
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60 के दशक में औद्योगिकीकरण के दौरान मजदूरी करने आए लोगों ने उपक्रमों को नवरत्न बना दिया। पर उनका अपना भविष्य खराब हो गया। अधिकांश लोग यूपी बिहार छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश के हैं।
बोकारो, बीके पाण्डेय। बोकारो में सेल व रेल विभाग की जमीन पर बसी करीब तीन लाख से अधिक ऐसी आबादी है जो जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता सूची में शामिल नहीं है। इस आबादी के दर्द पर किसी ने मरहम नहीं लगाया। चुनाव के वक्त नेता अलग-अलग बस्ती में जाकर वोट ले लेते हैं। फिर उनके दर्शन पांच वर्ष बाद होते हैं। 60 साल का यह दर्द अब नासूर बन गया है। मूलवासी व प्रवासी दोनों ही इससे प्रभावित हैं।
बोकारो का एक बड़ा इलाका आजादनगर ऐसे ही लोगों की बस्ती है। यहां सभी समुदाय और कहें तो कई राज्यों के लोग रह रहे हैं। पर यह बस्ती न तो शहर में है और न पंचायत में। बस्ती के घरों को यहां रह रहे लोगों के नाम से पट्टा देकर स्थायी नहीं किया गया। बस्ती को अवैध कहा जाता है। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार ये स्लम में भी नहीं है। मंगलवार को यहां का मिजाज जानने को हम पहुंचे।
हर शहर में पंचायत और नगर निगम का। इस शहर की आजाद नगर की जनता कहां की है किसी को मालूम नहीं। तब तक संजय फिर बोल पड़े भइया हम झोपड़ी वालों की खोज केवल रैली में शामिल होने व वोट लेने के लिए होती है। देश में शौचालय बना यहां के लोगों को नहीं मिला। यह सुन सुधीर कुमार बोले विधायक क्या करे। जमीन केंद्रीय लोक उपक्रम की है। सांसद ही कुछ कर सकते हैं। हर पार्टी के सांसद को देखा पर सिर्फ आश्वासन मिला। 60 साल से यहां रह रहे हैं फिर भी बाहरी कहा जाता है। एमपी और एमएलए के चुनाव में वोट डालने का मौका मिलता है। नगर निगम और पंचायत में नहीं।
- 19 विस्थापित गांव जो कि पुनर्वासित नहीं हुए। कुल आबादी लगभग 80 हजार से अधिक है।
- 50 अवैध बस्तियां जो बोकारो शहर एवं उसके आसपास बसी हैं।
- पांच अवैध बस्ती जो रेलवे की जमीन पर हैं और यहां की आबादी 55 हजार के करीब है।
- बेरमो, गोमिया, चंद्रपुरा के विभिन्न कोयला खदानों के आसपास बसी पचास बस्तियां जिनकी आबादी लगभग 1 लाख है।
- कहीं-कहीं झारखंड सरकार की बिजली तो कहीं चोरी की बिजली।
- आधा-अधूरा राशन कार्ड।
- अपनी जमीन व पहचान के अभाव में प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना के लाभ से वंचित।
- यहां के बेरोजगारों को आवासीय व जाति प्रमाण पत्र निर्गत नहीं होता है।
- स्वच्छ भारत मिशन का कोई लाभ नहीं मिलता।
- सीएसआर या स्वयं के पैसे से लगाए गए चापाकल से पानी मिलता है।
- कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है।
- क्षेत्र में अभियान विद्यालय, उच्च शिक्षा का कोई इंतजाम नहीं।
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साठ के दशक में औद्योगिकीकरण के दौरान मजदूरी करने आए लोगों ने उपक्रमों को नवरत्न बना दिया। पर उनका अपना भविष्य खराब हो गया। अधिकांश लोग यूपी बिहार छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश के हैं। बोकारो, बीके पाण्डेय। बोकारो में सेल व रेल विभाग की जमीन पर बसी करीब तीन लाख से अधिक ऐसी आबादी है जो जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता सूची में शामिल नहीं है। इस आबादी के दर्द पर किसी ने मरहम नहीं लगाया। चुनाव के वक्त नेता अलग-अलग बस्ती में जाकर वोट ले लेते हैं। फिर उनके दर्शन पांच वर्ष बाद होते हैं। साठ साल का यह दर्द अब नासूर बन गया है। मूलवासी व प्रवासी दोनों ही इससे प्रभावित हैं। बोकारो का एक बड़ा इलाका आजादनगर ऐसे ही लोगों की बस्ती है। यहां सभी समुदाय और कहें तो कई राज्यों के लोग रह रहे हैं। पर यह बस्ती न तो शहर में है और न पंचायत में। बस्ती के घरों को यहां रह रहे लोगों के नाम से पट्टा देकर स्थायी नहीं किया गया। बस्ती को अवैध कहा जाता है। जनगणना के आंकड़ों के अनुसार ये स्लम में भी नहीं है। मंगलवार को यहां का मिजाज जानने को हम पहुंचे। हर शहर में पंचायत और नगर निगम का। इस शहर की आजाद नगर की जनता कहां की है किसी को मालूम नहीं। तब तक संजय फिर बोल पड़े भइया हम झोपड़ी वालों की खोज केवल रैली में शामिल होने व वोट लेने के लिए होती है। देश में शौचालय बना यहां के लोगों को नहीं मिला। यह सुन सुधीर कुमार बोले विधायक क्या करे। जमीन केंद्रीय लोक उपक्रम की है। सांसद ही कुछ कर सकते हैं। हर पार्टी के सांसद को देखा पर सिर्फ आश्वासन मिला। साठ साल से यहां रह रहे हैं फिर भी बाहरी कहा जाता है। एमपी और एमएलए के चुनाव में वोट डालने का मौका मिलता है। नगर निगम और पंचायत में नहीं। - उन्नीस विस्थापित गांव जो कि पुनर्वासित नहीं हुए। कुल आबादी लगभग अस्सी हजार से अधिक है। - पचास अवैध बस्तियां जो बोकारो शहर एवं उसके आसपास बसी हैं। - पांच अवैध बस्ती जो रेलवे की जमीन पर हैं और यहां की आबादी पचपन हजार के करीब है। - बेरमो, गोमिया, चंद्रपुरा के विभिन्न कोयला खदानों के आसपास बसी पचास बस्तियां जिनकी आबादी लगभग एक लाख है। - कहीं-कहीं झारखंड सरकार की बिजली तो कहीं चोरी की बिजली। - आधा-अधूरा राशन कार्ड। - अपनी जमीन व पहचान के अभाव में प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना के लाभ से वंचित। - यहां के बेरोजगारों को आवासीय व जाति प्रमाण पत्र निर्गत नहीं होता है। - स्वच्छ भारत मिशन का कोई लाभ नहीं मिलता। - सीएसआर या स्वयं के पैसे से लगाए गए चापाकल से पानी मिलता है। - कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। - क्षेत्र में अभियान विद्यालय, उच्च शिक्षा का कोई इंतजाम नहीं।
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इंडिया न्यूज, नई दिल्ली :
Acquisition of Rocketbox : ई-कामर्स लाजिस्टिक्स कंपनी शिपराकेट (shiprocket) के अनुसार उसने बी2बी लाजिस्टिक्स मंच राकेटबाक्स का अधिग्रहण कर लिया है। फिलहाल अधिग्रहण राशि का खुलासा नहीं किया गया है।
एक बयान में बताया गया है कि राकेटबाक्स के संस्थापक शिपराकेट के नेतृत्व दल में शामिल होंगे और इस समझौते के तहत कार्गो उत्पाद बनाते रहेंगे।
इसमें कहा गया कि शिपराकेट और राकेटबाक्स मिलकर ग्राहकों को व्यवधान रहित अनुभव देने के लिए प्रौद्योगिकी, प्रभावशीलता, विशेषज्ञ कार्गो सांझेदार के मजबूत मेल के तौर पर काम करते हुए परिवहन में आने वाली लागत को कम करेंगे।
शिपराकेट के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी साहिल गोयल (Sahil Goyal) के अनुसार उपभोक्ताओं की तेजी से बदल रही अपेक्षाओं और त्वरित तथा निर्बाध आपूर्ति की उनकी चाह को देखते हुए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य हो गया है कि आपूर्ति श्रृंखला के सभी चरण उत्कृष्ट हों।
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इंडिया न्यूज, नई दिल्ली : Acquisition of Rocketbox : ई-कामर्स लाजिस्टिक्स कंपनी शिपराकेट के अनुसार उसने बीदोबी लाजिस्टिक्स मंच राकेटबाक्स का अधिग्रहण कर लिया है। फिलहाल अधिग्रहण राशि का खुलासा नहीं किया गया है। एक बयान में बताया गया है कि राकेटबाक्स के संस्थापक शिपराकेट के नेतृत्व दल में शामिल होंगे और इस समझौते के तहत कार्गो उत्पाद बनाते रहेंगे। इसमें कहा गया कि शिपराकेट और राकेटबाक्स मिलकर ग्राहकों को व्यवधान रहित अनुभव देने के लिए प्रौद्योगिकी, प्रभावशीलता, विशेषज्ञ कार्गो सांझेदार के मजबूत मेल के तौर पर काम करते हुए परिवहन में आने वाली लागत को कम करेंगे। शिपराकेट के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी साहिल गोयल के अनुसार उपभोक्ताओं की तेजी से बदल रही अपेक्षाओं और त्वरित तथा निर्बाध आपूर्ति की उनकी चाह को देखते हुए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य हो गया है कि आपूर्ति श्रृंखला के सभी चरण उत्कृष्ट हों।
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यूपीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार ने अपने चुनाव अभियान की विधिवत शुरूआत से ठीक पहले साबरमती आश्रम में चरखा चलाकर महात्मा गांधी को याद किया।
अहमदाबादः राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार ने आज अपने प्रचार-प्रसार का सिलसिला शुरू किया। सांसदों और विधायकों का समर्थन मांगने से पहले मीरा कुमार साबरमती आश्रम पहुंची, यहां उन्होंने चरखा चलाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद किया और उसके बाद अपने प्रचार-प्रसार का सिलसिला शुरू किया। सांसदों और विधायकों से समर्थन मांगने के दौरान मीरा कुमार ने कहा कि देश के सर्वोच्च पद के लिए होने वाले इस चुनाव को जातीय आधार पर न आके। साथ ही उन्होंने कहा कि दलित बनाम दलित के तौर पर प्रस्तुत करने के प्रयासों की निंदा होनी चाहिए।
यह भी पढ़ेः अब तक कौन-कौन रहे हैं भारत के राष्ट्रपति?
बता दें कि राष्ट्रपति के चुनाव में मीरा कुमार की लड़ाई एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के साथ है। दोनों ही उम्मीदवारों ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिए हैं। मीरा कुमार ने आज से अपने प्रचार-प्रसार का सिलसिला शुरू किया है।
एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद ने पहले ही अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। रामनाथ कोविंद ने उत्तरप्रदेश से चुनाव प्रचार शुरू किया था। राष्ट्रपति चुनाव में अब सिर्फ 17 दिन बचे हुए हैं। ऐसे में दोनों उम्मीदवार प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं। बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव 17 जुलाई को होगा और मतगणना 20 जुलाई को होगी।
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यूपीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार ने अपने चुनाव अभियान की विधिवत शुरूआत से ठीक पहले साबरमती आश्रम में चरखा चलाकर महात्मा गांधी को याद किया। अहमदाबादः राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार ने आज अपने प्रचार-प्रसार का सिलसिला शुरू किया। सांसदों और विधायकों का समर्थन मांगने से पहले मीरा कुमार साबरमती आश्रम पहुंची, यहां उन्होंने चरखा चलाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद किया और उसके बाद अपने प्रचार-प्रसार का सिलसिला शुरू किया। सांसदों और विधायकों से समर्थन मांगने के दौरान मीरा कुमार ने कहा कि देश के सर्वोच्च पद के लिए होने वाले इस चुनाव को जातीय आधार पर न आके। साथ ही उन्होंने कहा कि दलित बनाम दलित के तौर पर प्रस्तुत करने के प्रयासों की निंदा होनी चाहिए। यह भी पढ़ेः अब तक कौन-कौन रहे हैं भारत के राष्ट्रपति? बता दें कि राष्ट्रपति के चुनाव में मीरा कुमार की लड़ाई एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के साथ है। दोनों ही उम्मीदवारों ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिए हैं। मीरा कुमार ने आज से अपने प्रचार-प्रसार का सिलसिला शुरू किया है। एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद ने पहले ही अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। रामनाथ कोविंद ने उत्तरप्रदेश से चुनाव प्रचार शुरू किया था। राष्ट्रपति चुनाव में अब सिर्फ सत्रह दिन बचे हुए हैं। ऐसे में दोनों उम्मीदवार प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं। बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव सत्रह जुलाई को होगा और मतगणना बीस जुलाई को होगी।
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चौथ का बरवाड़ा तहसील क्षेत्र के शिवाड़ कस्बे में स्थित घुश्मेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार से पांच दिवसीय महाशिवरात्रि महोत्सव सोमवार से शुरू होगा। इस दौरान 1 मार्च को मुख्य मेला आयोजित होगा जिसमें हजारों की संख्या में भगवान शिव के दर्शन करने के लिए शिवभक्त पहुंचेंगे। महाशिवरात्रि महोत्सव को लेकर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। मंदिर ट्रस्ट व पंचायत द्वारा भी सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।
शिवाड़ में स्थित घुश्मेश्वर महादेव मंदिर में द्वादश ज्योतिर्लिंग स्थापित है। ऐसे में हर साल महाशिवरात्रि के अवसर पर हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़ रहती है। इस बार कोरोना संक्रमण कम होने से धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ मनोरंजन के कार्यक्रम भी होंगे। घुश्मेश्वर मंदिर परिसर में घुश्मेश्वर ट्रस्ट द्वारा आकर्षक सजावट की गई है।
रात के समय मंदिर सोने की तरह चमकता नजर आ रहा है। शिवाड़ का देव गिरी पर्वत सफेद होने के कारण चांदी सा चमक रहा है। भक्तों के आने के लिए जगह जगह सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। सवाई माधोपुर से 200 से अधिक जवानों का जाब्ता शिवाड़ में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भेजा गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भी सभी तैयारियों को पूरा कर लिया गया है। घुश्मेश्वर मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश शर्मा ने बताया कि महाशिवरात्रि मेले की शुरुआत 28 फरवरी को सुबह 11 बजे शोभायात्रा के साथ होगी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मनीष दास महाराज तथा शिव लहरी उपस्थित रहेंगे। दोपहर 1:30 बजे मुख्य शिखर पर ध्वजारोहण होगा। दोपहर 3 बजे सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया मेले का शुभारंभ करेंगे। रात्रि को जागरण होगा। 1 मार्च को महाशिवरात्रि पूजन होगा व रात्रि 9:00 बजे दशहरा मैदान में भजन संध्या का आयोजन होगा। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में पूर्व मंत्री वीरेंद्र मीणा तथा अध्यक्षता पूर्व विधायक अजीत सिंह मेहता करेंगे।
इसी तरह 2 मार्च को दशहरा मैदान में रात्रि 9 बजे कवि सम्मेलन का आयोजन करवाया जाएगा। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में बैंक ऑफ बड़ौदा के पूर्व एजीएम एमके शर्मा उपस्थित रहेंगे। इसके अतिरिक्त कई अन्य कार्यक्रम शिवरात्रि महोत्सव के दौरान किए जाएंगे।
पांच दिवसीय महाशिवरात्रि मेले के दौरान कस्बे में भारी वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा। पंचायत प्रशासन की ओर से इस मामले को लेकर दशहरा मैदान के पास पार्किंग की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही जगह-जगह पानी की प्याऊ लगाई गई है तथा महिला भक्तों के रुकने की व्यवस्था भी की गई है।
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चौथ का बरवाड़ा तहसील क्षेत्र के शिवाड़ कस्बे में स्थित घुश्मेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार से पांच दिवसीय महाशिवरात्रि महोत्सव सोमवार से शुरू होगा। इस दौरान एक मार्च को मुख्य मेला आयोजित होगा जिसमें हजारों की संख्या में भगवान शिव के दर्शन करने के लिए शिवभक्त पहुंचेंगे। महाशिवरात्रि महोत्सव को लेकर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। मंदिर ट्रस्ट व पंचायत द्वारा भी सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। शिवाड़ में स्थित घुश्मेश्वर महादेव मंदिर में द्वादश ज्योतिर्लिंग स्थापित है। ऐसे में हर साल महाशिवरात्रि के अवसर पर हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़ रहती है। इस बार कोरोना संक्रमण कम होने से धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ मनोरंजन के कार्यक्रम भी होंगे। घुश्मेश्वर मंदिर परिसर में घुश्मेश्वर ट्रस्ट द्वारा आकर्षक सजावट की गई है। रात के समय मंदिर सोने की तरह चमकता नजर आ रहा है। शिवाड़ का देव गिरी पर्वत सफेद होने के कारण चांदी सा चमक रहा है। भक्तों के आने के लिए जगह जगह सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। सवाई माधोपुर से दो सौ से अधिक जवानों का जाब्ता शिवाड़ में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भेजा गया है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भी सभी तैयारियों को पूरा कर लिया गया है। घुश्मेश्वर मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश शर्मा ने बताया कि महाशिवरात्रि मेले की शुरुआत अट्ठाईस फरवरी को सुबह ग्यारह बजे शोभायात्रा के साथ होगी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मनीष दास महाराज तथा शिव लहरी उपस्थित रहेंगे। दोपहर एक:तीस बजे मुख्य शिखर पर ध्वजारोहण होगा। दोपहर तीन बजे सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया मेले का शुभारंभ करेंगे। रात्रि को जागरण होगा। एक मार्च को महाशिवरात्रि पूजन होगा व रात्रि नौ:शून्य बजे दशहरा मैदान में भजन संध्या का आयोजन होगा। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में पूर्व मंत्री वीरेंद्र मीणा तथा अध्यक्षता पूर्व विधायक अजीत सिंह मेहता करेंगे। इसी तरह दो मार्च को दशहरा मैदान में रात्रि नौ बजे कवि सम्मेलन का आयोजन करवाया जाएगा। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में बैंक ऑफ बड़ौदा के पूर्व एजीएम एमके शर्मा उपस्थित रहेंगे। इसके अतिरिक्त कई अन्य कार्यक्रम शिवरात्रि महोत्सव के दौरान किए जाएंगे। पांच दिवसीय महाशिवरात्रि मेले के दौरान कस्बे में भारी वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा। पंचायत प्रशासन की ओर से इस मामले को लेकर दशहरा मैदान के पास पार्किंग की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही जगह-जगह पानी की प्याऊ लगाई गई है तथा महिला भक्तों के रुकने की व्यवस्था भी की गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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ग्रेटर फरीदाबादः स्मार्ट सिटी फरीदाबाद में बनने वाली पहली स्मार्ट रोड का नक्शा तैयार हो गया है। इसमें सेक्टर-29 बाइपास सड़क पर एक स्काईवॉक बनाया जाएगा। ताकि भविष्य में ग्रेटर फरीदाबाद, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम को जोडऩे वाली इस व्यस्तम सड़क के व्यस्तम सड़क पर ट्रैफिक जाम न हो। स्कॉइवॉक पैदल पथिकों के लिए बेहद जरूरी होगा। सड़क पांच लेन की होगी। एक ग्रीन बेल्ट और साइकिल ट्रेक भी इसके साथ बनाया जाएगा। फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेट की पीएमसी कंपनी ली एसोसिएट्स साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड जल्द ही इसका टेंडर करके काम अलॉट कर देगी। 1. 67 लंबी होगी स्मार्ट सड़क फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेट की पीएमसी कंपनी ली एसोसिएट्स साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड ने राष्ट्रीय राजमार्ग-दो के बडख़ल चौक से बाइपास सड़क के सेक्टर. 29 चौक तक करीब 1. 67 किलोमीटर बनने स्मार्ट रोड का नक्शा तैयार किया है।
इस परियोजना पर करीब 35 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। स्मार्ट सड़क पांच लेन होगी। तीन लेन दक्षिण दिशा में और दो लेन उत्तरी दिशा में होगी। सड़क सड़क के किनारे हरित पट्टी, साइकिल ट्रैक और वेंडिंग जोन भी होगा। स्मार्ट सड़क पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल होगी। इस सड़क की जल निकासी व्यवस्था और जलसंचयन व्यवस्था आधुनिकतम तकनीक से युक्त होगी। सड़क पर ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण नहीं होगा और वायु प्रदूषण भी नियंत्रण में होगा। सड़क आधुनिकतम तकनीक से युक्त होगी। पूरी सड़क सीसीटीवी कैमरों की जद में रहेगी। सड़क गुजरते समय वाईफाई की सुविधा उपलब्ध होगी। अंगुठीनुमा बनेगा स्काई वॉक बाइपास सड़क पर सेक्टर. 29 चौराहे पर बनने वाले इस अंगुठीनुमा स्काईवॉक चारो सड़कों से जुड़ेगा। ग्रेटर फरीदाबाद, सेक्टर-28-29 और पुराने फरीदाबाद के लोगों को सड़कों के जाल को पार करने में इससे आसानी हो सकेगी। इसके माध्यम से लोग यातायात को बगैर बाधित किए सड़कों को पार कर सकेंगे। यह शहर का पहला किसी चौराहे पर बनने वाला स्काई वॉक होगा।
आने वाले समय में यह सड़क व्यस्त सड़कों में से एक होगी और चौराहा भी व्यस्तम होगा। स्काईवॉक के बीच में होगी कोस मीनार अंगुठी नुमा स्काईवॉक के बीच अंगुलीनुमा कोस मीनार होगी। मुगल शासन काल में शेरशाह सूरी मार्ग पर बनी कोस मीनार से ही यह स्काई वॉक जुड़ेगा। एकल पिलर तकनीक से बनने वाले स्काई वॉक चौराहे के पिलर को कोस मीनार की तरह डिजाइन किया जाएगा। जिससे ऐतिहासिक कोस मीनार के बारे में लोग जान सकेंगे। मुगल शासन काल में कभी इसी मार्ग पर कोस मीनार होती थी। स्काई वॉक के लिए किसी भी दिशा से व्यक्ति ऊपर चढ़ सकेगा। इससे यातायात बिल्कुल भी बाधित नहीं होगा। स्काई वॉक जिन चार रास्तों का जोड़ेगा। वहां चढऩे व उतरने के लिए सामान्य सीढिय़ों के साथ-साथ दिव्यांगों समेत अन्य लोगों के लिए एस्केलेटर भी लगेंगे। जो कवर्ड होगें, ताकि धूप और बारिश से बचा जा सके। स्मार्ट रोड के किनारे साइकिल ट्रैक तैयार होगा स्मार्ट रोड की उत्तरी दिशा में शानदार साइकिल ट्रैक बनेगा। यह शहर का पहला साइकिल ट्रैक होगा। यह करीब तीन मीटर चौड़ा बनेगा।
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ग्रेटर फरीदाबादः स्मार्ट सिटी फरीदाबाद में बनने वाली पहली स्मार्ट रोड का नक्शा तैयार हो गया है। इसमें सेक्टर-उनतीस बाइपास सड़क पर एक स्काईवॉक बनाया जाएगा। ताकि भविष्य में ग्रेटर फरीदाबाद, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम को जोडऩे वाली इस व्यस्तम सड़क के व्यस्तम सड़क पर ट्रैफिक जाम न हो। स्कॉइवॉक पैदल पथिकों के लिए बेहद जरूरी होगा। सड़क पांच लेन की होगी। एक ग्रीन बेल्ट और साइकिल ट्रेक भी इसके साथ बनाया जाएगा। फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेट की पीएमसी कंपनी ली एसोसिएट्स साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड जल्द ही इसका टेंडर करके काम अलॉट कर देगी। एक. सरसठ लंबी होगी स्मार्ट सड़क फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेट की पीएमसी कंपनी ली एसोसिएट्स साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड ने राष्ट्रीय राजमार्ग-दो के बडख़ल चौक से बाइपास सड़क के सेक्टर. उनतीस चौक तक करीब एक. सरसठ किलोग्राममीटर बनने स्मार्ट रोड का नक्शा तैयार किया है। इस परियोजना पर करीब पैंतीस करोड़ रुपये का खर्च आएगा। स्मार्ट सड़क पांच लेन होगी। तीन लेन दक्षिण दिशा में और दो लेन उत्तरी दिशा में होगी। सड़क सड़क के किनारे हरित पट्टी, साइकिल ट्रैक और वेंडिंग जोन भी होगा। स्मार्ट सड़क पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल होगी। इस सड़क की जल निकासी व्यवस्था और जलसंचयन व्यवस्था आधुनिकतम तकनीक से युक्त होगी। सड़क पर ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण नहीं होगा और वायु प्रदूषण भी नियंत्रण में होगा। सड़क आधुनिकतम तकनीक से युक्त होगी। पूरी सड़क सीसीटीवी कैमरों की जद में रहेगी। सड़क गुजरते समय वाईफाई की सुविधा उपलब्ध होगी। अंगुठीनुमा बनेगा स्काई वॉक बाइपास सड़क पर सेक्टर. उनतीस चौराहे पर बनने वाले इस अंगुठीनुमा स्काईवॉक चारो सड़कों से जुड़ेगा। ग्रेटर फरीदाबाद, सेक्टर-अट्ठाईस-उनतीस और पुराने फरीदाबाद के लोगों को सड़कों के जाल को पार करने में इससे आसानी हो सकेगी। इसके माध्यम से लोग यातायात को बगैर बाधित किए सड़कों को पार कर सकेंगे। यह शहर का पहला किसी चौराहे पर बनने वाला स्काई वॉक होगा। आने वाले समय में यह सड़क व्यस्त सड़कों में से एक होगी और चौराहा भी व्यस्तम होगा। स्काईवॉक के बीच में होगी कोस मीनार अंगुठी नुमा स्काईवॉक के बीच अंगुलीनुमा कोस मीनार होगी। मुगल शासन काल में शेरशाह सूरी मार्ग पर बनी कोस मीनार से ही यह स्काई वॉक जुड़ेगा। एकल पिलर तकनीक से बनने वाले स्काई वॉक चौराहे के पिलर को कोस मीनार की तरह डिजाइन किया जाएगा। जिससे ऐतिहासिक कोस मीनार के बारे में लोग जान सकेंगे। मुगल शासन काल में कभी इसी मार्ग पर कोस मीनार होती थी। स्काई वॉक के लिए किसी भी दिशा से व्यक्ति ऊपर चढ़ सकेगा। इससे यातायात बिल्कुल भी बाधित नहीं होगा। स्काई वॉक जिन चार रास्तों का जोड़ेगा। वहां चढऩे व उतरने के लिए सामान्य सीढिय़ों के साथ-साथ दिव्यांगों समेत अन्य लोगों के लिए एस्केलेटर भी लगेंगे। जो कवर्ड होगें, ताकि धूप और बारिश से बचा जा सके। स्मार्ट रोड के किनारे साइकिल ट्रैक तैयार होगा स्मार्ट रोड की उत्तरी दिशा में शानदार साइकिल ट्रैक बनेगा। यह शहर का पहला साइकिल ट्रैक होगा। यह करीब तीन मीटर चौड़ा बनेगा।
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हाल के विधानसभा चुनावों में अपनी शर्मनाक हार के बावजूद, कांग्रेस को 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए बहुत अधिक उम्मीदें हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने एक महत्वाकांक्षी दावा करते हुए कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाली उनकी पार्टी आम चुनाव में भाजपा को हराएगी। इतना ही नहीं, पटोले ने कहा कि गांधी भारत के प्रधान नरेंद्र मोदी को भी हटा देंगे।
उन्होंने बुधवार को ट्वीट किया, "वर्ष 2024 में मोदी सरकार की हार के बाद राहुल गांधी के सक्षम नेतृत्व में देश में कांग्रेस की सरकार आएगी।" पटोले ने एक अन्य ट्वीट में कहा, "राहुल गांधी दूरदर्शी नेता हैं। वह 2024 में प्रधानमंत्री होंगे।"
2014 के आम चुनाव ने कांग्रेस को एक जबरदस्त झटका दिया, और जब से पार्टी लगातार डाउनहिल पर है। भारत के पूरे राजनीतिक परिदृश्य पर शासन करने और पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों में अपने खराब प्रदर्शन की वजह से पार्टी लगातार नीचे की ओर खिसक रही है।
कांग्रेस ने पंजाब में अपनी सबसे बड़ी हार देखी, जहां नई प्रवेश करने वाली आम आदमी पार्टी ने महत्वपूर्ण राज्य में उससे सत्ता छीन ली। पार्टी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भी अपनी छाप छोड़ने में विफल रही।
पांच राज्यों में चुनाव हारने के बावजूद, कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में अपना विश्वास जताया है और उनसे मोर्चे से नेतृत्व करने का आग्रह किया है। जबकि सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी ने अपने इस्तीफे की पेशकश की, जिसे सीडब्ल्यूसी ने ठुकरा दिया।
कार्य समिति जल्द ही 2024 के चुनावों सहित भविष्य के लिए रोडमैप तैयार करने के लिए 'चिंतन शिवर' आयोजित करेगी। इस बीच, कई नेताओं ने राहुल गांधी को फिर से पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की इच्छा व्यक्त की है।
इस महीने की शुरुआत में, नाना पटोले ने कहा था कि गांधी परिवार "कांग्रेस कार्यकर्ताओं का दिल" है, और राहुल गांधी उचित प्रक्रिया का पालन करके कांग्रेस अध्यक्ष बनेंगे। उन्होंने कहा-"देश भर के सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मन में गांधी परिवार के लिए सम्मान है और भविष्य में भी ऐसा ही रहेगा। इसे कोई खत्म नहीं कर सकता। गांधी परिवार कांग्रेस कार्यकर्ताओं का दिल है।"
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हाल के विधानसभा चुनावों में अपनी शर्मनाक हार के बावजूद, कांग्रेस को दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनावों के लिए बहुत अधिक उम्मीदें हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने एक महत्वाकांक्षी दावा करते हुए कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाली उनकी पार्टी आम चुनाव में भाजपा को हराएगी। इतना ही नहीं, पटोले ने कहा कि गांधी भारत के प्रधान नरेंद्र मोदी को भी हटा देंगे। उन्होंने बुधवार को ट्वीट किया, "वर्ष दो हज़ार चौबीस में मोदी सरकार की हार के बाद राहुल गांधी के सक्षम नेतृत्व में देश में कांग्रेस की सरकार आएगी।" पटोले ने एक अन्य ट्वीट में कहा, "राहुल गांधी दूरदर्शी नेता हैं। वह दो हज़ार चौबीस में प्रधानमंत्री होंगे।" दो हज़ार चौदह के आम चुनाव ने कांग्रेस को एक जबरदस्त झटका दिया, और जब से पार्टी लगातार डाउनहिल पर है। भारत के पूरे राजनीतिक परिदृश्य पर शासन करने और पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों में अपने खराब प्रदर्शन की वजह से पार्टी लगातार नीचे की ओर खिसक रही है। कांग्रेस ने पंजाब में अपनी सबसे बड़ी हार देखी, जहां नई प्रवेश करने वाली आम आदमी पार्टी ने महत्वपूर्ण राज्य में उससे सत्ता छीन ली। पार्टी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भी अपनी छाप छोड़ने में विफल रही। पांच राज्यों में चुनाव हारने के बावजूद, कांग्रेस कार्य समिति ने अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में अपना विश्वास जताया है और उनसे मोर्चे से नेतृत्व करने का आग्रह किया है। जबकि सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी ने अपने इस्तीफे की पेशकश की, जिसे सीडब्ल्यूसी ने ठुकरा दिया। कार्य समिति जल्द ही दो हज़ार चौबीस के चुनावों सहित भविष्य के लिए रोडमैप तैयार करने के लिए 'चिंतन शिवर' आयोजित करेगी। इस बीच, कई नेताओं ने राहुल गांधी को फिर से पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की इच्छा व्यक्त की है। इस महीने की शुरुआत में, नाना पटोले ने कहा था कि गांधी परिवार "कांग्रेस कार्यकर्ताओं का दिल" है, और राहुल गांधी उचित प्रक्रिया का पालन करके कांग्रेस अध्यक्ष बनेंगे। उन्होंने कहा-"देश भर के सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मन में गांधी परिवार के लिए सम्मान है और भविष्य में भी ऐसा ही रहेगा। इसे कोई खत्म नहीं कर सकता। गांधी परिवार कांग्रेस कार्यकर्ताओं का दिल है।"
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल स्व० एच० मी० मुखर्जी एवं लोकसभा के अध्यक्ष स्व० अनन्त शायनम आयगर के साथ श्री सीतारामजी
उन्होंने विश्वविद्यालय में शिक्षा नही पाई, फिर भी बगाल की तेजस्विता के बीच अपने को प्रतिष्ठित किया है और मुक्ति आन्दोलन के महान् कर्णधारो का अजस्र स्नेह पाया है। जिस समय राजनीति का अर्थ सेवा था, उस समय वे सब से आगे थे । आज राजनीति भोग-नीति है, इसलिए उनमे न पद के लिए होड है, न सम्मान के प्रति आसक्ति अपनी जीवन सध्या में भी वे जन-कल्याण के लिए, साहित्य और कला के लिए समर्पित है। इस आयु मे भी श्री शिक्षायतन जैसी संस्थाए उनकी क्रियात्मक शक्तियो के केन्द्र
उन्होंने अपनी गलतियो का बोझ कभी नही ढोया है । उनका प्रयोग ऊपर चढने के लिए सीढी के रूप में ही किया है । गाधीवाद मे जो सर्वोत्तम है, उसका वे प्रतीक है । वे 'माँ' का रूप हैं, 'माँ', जो बस प्यार ही कर सकती है -- जिसके लिए सार्थक होने का अर्थ ही समर्पित होना है । समर्पण की इसी चमत्कारी प्राभा से मण्डित हे सौम्य-मूर्ति सेकसरियाजी का सम्पूर्ण जीवन ।
बगला के ख्याति प्राप्त नाट्यकार, कहानीकार और उपन्यास लेखक
श्री तरुण राय
मरूद्यान का यह मानव !
मुझे मरुभूमि का कोई अनुभव नहीं है क्योकि वहाँ जाने का कभी मौका ही नही मिला । हाँ, मरुभूमि की तस्वीर देखी है, वर्णन पढा है । पच्चीस साल पहले जब कालेज से निकला ही था, रोजगार के लिये दलाली का जुआ कधे पर रख डलहौजी स्क्वायर मे जाने लगा था। यह क्षेत्र एक बडा फैला हुआ रेगिस्तान ही है - रस रूप हीन सूखा खखाड । मै साहित्य का विद्यार्थी था, नाटक करना मुझे अच्छा लगता था, लेकिन इन सब की बातें करने के लिये इन आफिसो के वातावरण मे कही कोई नहीं था । वहा तो फाटका बाजार की चिल्लाहट, शेयर के ऊँचेनीचे भाव, पाट के दाम, चट की दरें, जहाज का किराया, -- इन्ही सब की कच कच थी । सुना है कि ऊँट मरुस्थल मे काटेदार वृक्षो की डालियाँ चवाना पसन्द करता है । मुह से खून निकलता है, फिर भी उसी मे उसे । मै भी यदि डलहौजी स्क्वायर की मरुभूमि का ऊँट वन पाता तो, हो सकता है, औरो की तरह रुपये के कँटीले पौधे चबा कर आनन्द पाता किन्तु दुर्भा यवश वैसा मैं नहीं बन पाया । इमलिये इस मरुभूमि में एक स्निग्ध-शीतल मरुद्यान की खोज करता रहता था ।
आखिर मरुद्यान मिल गया । मेरे परम मित्र श्री बी० एम० सिंधी के माध्यम से एक दिन मुझे मनचाहा मरुद्यान मिल गया । वह था 'नया समाज' नामक प्रगतिवादी हिन्दी मासिक पत्रिका का दफ्तर जिस दफ्तर मे सिंघीजी काम करते थे, उसी के एक कोने मे उस पत्रिका का दफ्तर था और उन्ही की देखरेख में उसका सचालन था । सम्पादक थे श्री मोहनसिंह सेंगर, जो दुर्भाग्य से आज जीवित नही है । वे समर्थ लेखक तो थे ही, किन्तु उससे भी बडे वे मानव थे । भारतीय संस्कृति का पूर्ण विकास मैने उनमे पाया था । इसीलिये मरुभूमि की बालू की गर्मी मे तप्त होते ही भाग कर मै प्राश्रय लेता था "नया समाज" के इस मरुद्यान मे । मन खोल कर सेगरजी से बाते करता - साहित्य, कला, नाटक आदि के बारे मे । हमारी इन बैठको मे और एक व्यक्ति प्राय उपस्थित रहता था - सौम्य - कान्ति, लम्बा, गोरा, खादी का सफेद कुर्ता-धोती पहने और माथे पर गांधी टोपी लगाये । मुह पर अशेप हँसी । विनयी, नम्र, धीर, स्थिर । मुस्कराते हुए हमारी बातें सुनता,
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल स्वशून्य एचशून्य मीशून्य मुखर्जी एवं लोकसभा के अध्यक्ष स्वशून्य अनन्त शायनम आयगर के साथ श्री सीतारामजी उन्होंने विश्वविद्यालय में शिक्षा नही पाई, फिर भी बगाल की तेजस्विता के बीच अपने को प्रतिष्ठित किया है और मुक्ति आन्दोलन के महान् कर्णधारो का अजस्र स्नेह पाया है। जिस समय राजनीति का अर्थ सेवा था, उस समय वे सब से आगे थे । आज राजनीति भोग-नीति है, इसलिए उनमे न पद के लिए होड है, न सम्मान के प्रति आसक्ति अपनी जीवन सध्या में भी वे जन-कल्याण के लिए, साहित्य और कला के लिए समर्पित है। इस आयु मे भी श्री शिक्षायतन जैसी संस्थाए उनकी क्रियात्मक शक्तियो के केन्द्र उन्होंने अपनी गलतियो का बोझ कभी नही ढोया है । उनका प्रयोग ऊपर चढने के लिए सीढी के रूप में ही किया है । गाधीवाद मे जो सर्वोत्तम है, उसका वे प्रतीक है । वे 'माँ' का रूप हैं, 'माँ', जो बस प्यार ही कर सकती है -- जिसके लिए सार्थक होने का अर्थ ही समर्पित होना है । समर्पण की इसी चमत्कारी प्राभा से मण्डित हे सौम्य-मूर्ति सेकसरियाजी का सम्पूर्ण जीवन । बगला के ख्याति प्राप्त नाट्यकार, कहानीकार और उपन्यास लेखक श्री तरुण राय मरूद्यान का यह मानव ! मुझे मरुभूमि का कोई अनुभव नहीं है क्योकि वहाँ जाने का कभी मौका ही नही मिला । हाँ, मरुभूमि की तस्वीर देखी है, वर्णन पढा है । पच्चीस साल पहले जब कालेज से निकला ही था, रोजगार के लिये दलाली का जुआ कधे पर रख डलहौजी स्क्वायर मे जाने लगा था। यह क्षेत्र एक बडा फैला हुआ रेगिस्तान ही है - रस रूप हीन सूखा खखाड । मै साहित्य का विद्यार्थी था, नाटक करना मुझे अच्छा लगता था, लेकिन इन सब की बातें करने के लिये इन आफिसो के वातावरण मे कही कोई नहीं था । वहा तो फाटका बाजार की चिल्लाहट, शेयर के ऊँचेनीचे भाव, पाट के दाम, चट की दरें, जहाज का किराया, -- इन्ही सब की कच कच थी । सुना है कि ऊँट मरुस्थल मे काटेदार वृक्षो की डालियाँ चवाना पसन्द करता है । मुह से खून निकलता है, फिर भी उसी मे उसे । मै भी यदि डलहौजी स्क्वायर की मरुभूमि का ऊँट वन पाता तो, हो सकता है, औरो की तरह रुपये के कँटीले पौधे चबा कर आनन्द पाता किन्तु दुर्भा यवश वैसा मैं नहीं बन पाया । इमलिये इस मरुभूमि में एक स्निग्ध-शीतल मरुद्यान की खोज करता रहता था । आखिर मरुद्यान मिल गया । मेरे परम मित्र श्री बीशून्य एमशून्य सिंधी के माध्यम से एक दिन मुझे मनचाहा मरुद्यान मिल गया । वह था 'नया समाज' नामक प्रगतिवादी हिन्दी मासिक पत्रिका का दफ्तर जिस दफ्तर मे सिंघीजी काम करते थे, उसी के एक कोने मे उस पत्रिका का दफ्तर था और उन्ही की देखरेख में उसका सचालन था । सम्पादक थे श्री मोहनसिंह सेंगर, जो दुर्भाग्य से आज जीवित नही है । वे समर्थ लेखक तो थे ही, किन्तु उससे भी बडे वे मानव थे । भारतीय संस्कृति का पूर्ण विकास मैने उनमे पाया था । इसीलिये मरुभूमि की बालू की गर्मी मे तप्त होते ही भाग कर मै प्राश्रय लेता था "नया समाज" के इस मरुद्यान मे । मन खोल कर सेगरजी से बाते करता - साहित्य, कला, नाटक आदि के बारे मे । हमारी इन बैठको मे और एक व्यक्ति प्राय उपस्थित रहता था - सौम्य - कान्ति, लम्बा, गोरा, खादी का सफेद कुर्ता-धोती पहने और माथे पर गांधी टोपी लगाये । मुह पर अशेप हँसी । विनयी, नम्र, धीर, स्थिर । मुस्कराते हुए हमारी बातें सुनता,
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हाल ही के एक चर्चा में बताया गया है कि टॉलीवुड के शक्तिशाली हीरो एनटीआर ने आगामी फिल्म के लिए त्रिविक्रम के साथ काम करने के लिए परियोजना को रद्द कर दिया है। बता दें कि एनटीआर त्रिविक्रम श्रीनिवास के साथ एक फिल्म करने वाले थे। इस परियोजना की घोषणा एक साल पहले की गई थी और इसके अलावा, उन्होंने शीर्षक भी बंद कर दिया है। केवल बात यह है कि निर्माताओं ने आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा नहीं की है।
हाल ही में यह पता चला था कि परियोजना को समाप्त कर दिया गया है और एनटीआर कोराताला शिवा के साथ काम करने जा रहा है। कई लोगों ने सोचा है कि परियोजना को रद्द करने के लिए एनटीआर और त्रिविक्रम के बीच क्या हुआ। यहां यह बताना जरूरी है कि एनटीआर फिल्म आरआरआर में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। वह फिल्म में कोमराम भीम का किरदार निभा रहे हैं।
अंदर के सूत्रों का कहना है कि यह सब स्टार और निर्देशक के बीच कुछ मतभेदों के कारण है। जाहिर है, त्रिविक्रम ने परियोजना को लॉन्च करने के लिए कुछ और समय मांगा क्योंकि वह पवन कल्याण की परियोजनाओं में व्यस्त हैं। लेकिन एनटीआर जून में फिल्म शुरू करना चाहते हैं। इसलिए, परियोजना रद्द कर दी गई है।
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हाल ही के एक चर्चा में बताया गया है कि टॉलीवुड के शक्तिशाली हीरो एनटीआर ने आगामी फिल्म के लिए त्रिविक्रम के साथ काम करने के लिए परियोजना को रद्द कर दिया है। बता दें कि एनटीआर त्रिविक्रम श्रीनिवास के साथ एक फिल्म करने वाले थे। इस परियोजना की घोषणा एक साल पहले की गई थी और इसके अलावा, उन्होंने शीर्षक भी बंद कर दिया है। केवल बात यह है कि निर्माताओं ने आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा नहीं की है। हाल ही में यह पता चला था कि परियोजना को समाप्त कर दिया गया है और एनटीआर कोराताला शिवा के साथ काम करने जा रहा है। कई लोगों ने सोचा है कि परियोजना को रद्द करने के लिए एनटीआर और त्रिविक्रम के बीच क्या हुआ। यहां यह बताना जरूरी है कि एनटीआर फिल्म आरआरआर में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। वह फिल्म में कोमराम भीम का किरदार निभा रहे हैं। अंदर के सूत्रों का कहना है कि यह सब स्टार और निर्देशक के बीच कुछ मतभेदों के कारण है। जाहिर है, त्रिविक्रम ने परियोजना को लॉन्च करने के लिए कुछ और समय मांगा क्योंकि वह पवन कल्याण की परियोजनाओं में व्यस्त हैं। लेकिन एनटीआर जून में फिल्म शुरू करना चाहते हैं। इसलिए, परियोजना रद्द कर दी गई है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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किन्नौर जिला में चीनी सीमा से सटे गांव छितकुल की यात्रा पर गए 11 लोग लापता हो गए हैं। इनमें से कोलकाता के 7 और दिल्ली के 1 ट्रेकर्स समेत तीन रसोईए शामिल हैं। ग्यारह सदस्यों का ये दल 11 अक्टूबर को उत्तरकाशी जिले के हर्सिल होते हुए छितकुल की यात्रा पर निकला था। 19 अक्टूबर को ये दल वहां पहुंचने वाला था। जब यह मंगलवार को ये दल छितकुल नहीं पहुंचा तो ट्रेक आयोजकों ने इस बारे में उत्तरकाशी जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय को सूचित किया। वहीं, लापता लोगों की तलाश के लिए किन्नौर जिला प्रशासन ने ITBP की मदद मांगी है।
टीम के सदस्यों की पहचान दिल्ली की अनीता रावत (38) जबकि मिथुन दारी (31), तन्मय तिवारी (30), विकास मकल (33) सौरव घोष (34) सावियन दास (28), रिचर्ड मंडल (30) सुकेन मांझी (43) के रूप में हुई है। ये सभी कोलकाता के रहने वाले है। खाना पकाने वाले कर्मचारियों की पहचान देवेंद्र (37), ज्ञान चंद्र (33) और उपेंद्र (32) के रूप में हुई है, सभी उत्तरकाशी के पुरोला के रहने वाले हैं।
बताया जा रहा है कि ये लोग कथित तौर पर लखवागा दर्रे के पास फंस गए हैं। उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक ने कहा कि आईटीबीपी की टीम कल सुबह बचाव अभियान शुरू करेगी। पुलिस अधीक्षक किन्नौर अशोक रतन ने बताया कि पुलिस ने को भी रवाना कर दिया है।
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किन्नौर जिला में चीनी सीमा से सटे गांव छितकुल की यात्रा पर गए ग्यारह लोग लापता हो गए हैं। इनमें से कोलकाता के सात और दिल्ली के एक ट्रेकर्स समेत तीन रसोईए शामिल हैं। ग्यारह सदस्यों का ये दल ग्यारह अक्टूबर को उत्तरकाशी जिले के हर्सिल होते हुए छितकुल की यात्रा पर निकला था। उन्नीस अक्टूबर को ये दल वहां पहुंचने वाला था। जब यह मंगलवार को ये दल छितकुल नहीं पहुंचा तो ट्रेक आयोजकों ने इस बारे में उत्तरकाशी जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय को सूचित किया। वहीं, लापता लोगों की तलाश के लिए किन्नौर जिला प्रशासन ने ITBP की मदद मांगी है। टीम के सदस्यों की पहचान दिल्ली की अनीता रावत जबकि मिथुन दारी , तन्मय तिवारी , विकास मकल सौरव घोष सावियन दास , रिचर्ड मंडल सुकेन मांझी के रूप में हुई है। ये सभी कोलकाता के रहने वाले है। खाना पकाने वाले कर्मचारियों की पहचान देवेंद्र , ज्ञान चंद्र और उपेंद्र के रूप में हुई है, सभी उत्तरकाशी के पुरोला के रहने वाले हैं। बताया जा रहा है कि ये लोग कथित तौर पर लखवागा दर्रे के पास फंस गए हैं। उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक ने कहा कि आईटीबीपी की टीम कल सुबह बचाव अभियान शुरू करेगी। पुलिस अधीक्षक किन्नौर अशोक रतन ने बताया कि पुलिस ने को भी रवाना कर दिया है।
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१५८ । दिव्यावदान में संस्कृति का स्वरूप
"मा हैव राशश्चन्द्रप्रमस्य महापृथिवीपालस्य मंत्रात्मकस्य कारुरिणकस्य सस्ववस्वलस्यानित्यताबलमागच्छेत, मा हैब अस्माक बेवेन सार्धं नानामावो भविष्यति विनाभावो विप्रयोगः, मा हैव मात्रागोऽपरित्राणो जम्बुदवीपो भविष्यतीति" ।
महाचन्द्र अग्रामात्य ने तो इस सकट से बचने का उपाय भी ढूंढ निकाला कि यदि कोई राजा का शिरोयाचनक आया तो उसे एक रत्नमय शिर के द्वारा प्रलुब्ध किया जायगा, और तदर्थ एक रत्नमय शिर बनवा कर कोशकोष्ठागार मे रख लिया। इतना ही नही महाचन्द्र और महीषर दोनो अग्रामात्य राजा चन्द्रप्रभ का विनाश देखने में असमर्थ हो पहले ही अपने ऐहिक शरीर का परित्याग कर देते हैं । '
राजा शिखण्डी के धर्मपूर्वक राज्य करने पर हिरु और भिरुक नाम के उस के शुभचिन्तक मन्त्री जनपद की उपमा पुष्प - फल वाले वृक्ष से देते हैं -
"पुष्पफल वृक्षसहशा देव जनपवाः । तद्यथा देव पुष्पवृक्षाः फलवृक्षाश्च कालेन कालं सम्यक् परिपाल्यमाना अनुपरतप्रयोगेण यथाकालं पुष्पाणि फलानि चानुप्रयच्छन्ति, एवमेव जनपदा प्रतिपाल्यमाना अनुपरत प्रयोगेण यथाकालं करप्रत्यायाननुप्रयच्छन्तीति" ।
परन्तु इस के विपरीत दूसरी ओर दो दुष्ट अमास्य उससे कहते हैं"देव नाकन्विता नालुचिता नतता नोत्पीडितास्तिलास्तंलं प्रयच्छन्ति, तन्नरपते जनपदा इति" "
एक ओर भद्र एव सदमात्यो का योग, राजा की श्री वृद्धि तथा पुण्यप्रसव मे एक सुदृढ कारण होता था तो दूसरी ओर इस के विपरीत, दुष्टामात्य राजा के कल्मष गर्त -पतन मे कारण होते थे ।
मन्त्रियों के द्वारा किये गए प्रजा-पीडन के भी उदाहरण प्राप्त होते हैं । अशोक के राज्य काल मे तक्षशिला के नगरवासियों ने विद्रोह प्रारंभ कर
१ चन्द्रप्रमबोधिसत्वचर्यावदान, पृ० २०१ ।
रुद्रायणावदान, पू० ४७७ ।
दिव्यावदान में संस्कृति का स्वरूप । १५६
दिया। अशोक ने तत्प्रशमनार्थ अपने पुत्र कुरणाल को भेजा। कुणाल के पहुँचने पर वहाँ के नागरिको ने उनका उचित सत्कार कर कहा - "न तो हमलोग राजकुमार के विरुद्ध है और न राजा अशोक के ही, अपितु उन दुष्टामात्यो के विरोधी हैं, जो हमारा अपमान करते हैं"
इसी प्रकार एक अन्य स्थल पर बिन्दुसार के समय मे तक्षशिला के लोगो द्वारा मन्त्रियों के प्रजापीडक शासन के विरुद्ध विद्रोह करने का उल्लेख प्राप्त होता है। राजा बिन्दुमार अशोक को चतुरगिणी सेना के साथ तक्षशिला भेजते है। यहाँ भी अशोक को नगरवासियों से वैसा ही उत्तर प्राप्त होता है"न वय कुमारस्य विरुद्धाः, नापि राशो बिन्दुसारस्य, अपितु दुष्टामात्या प्रस्माकं परिभवं कुर्वन्ति"
१ कुरणालावदान, पृ० २६३ । २ पांशुप्रदानाबदान, पृ० २३४ ।
तत्कालीन न्याय-पद्धति, तात्कालिक और निष्पक्ष थी । वादी और प्रतिवादी दोनो राजा के समक्ष पहुंचते थे और राजा उनका न्याय करता था। किसी वकील और अदालती खर्च की आवश्यकता न थी। एक बार वरिणग्-ग्राम अपने बनाये हुए नियम के भग किये जाने के अभियोग मे क्रुद्ध होकर पूर्ण पर ६० कार्षापरणो का जुर्माना (आतप) घोषित करता है । यह बात राजा को ज्ञात होने पर वह पूर्ण और वरण-ग्राम को अपने पास बुलवाते हैं। राजा वरिणग्-ग्राम से, पूर्ण पर किये गये जुर्माने का कारण पूछने हैं । वे कहते हैं - "देव । वरिणग् ग्राम ने यह क्रियाकार ( समझौता, नियम) किया था, कि कोई भी व्यक्ति अकेला पण्य को नहीं खरीदेगा। किन्तु पूर्ण ने अकेले ही खरीद लिया है" । पूर्ण कहता है - "देव । क्या इन लोगो ने क्रियाकार करते समय मुझे या मेरे भाई को बुलाया था ?" इस पर वे कहते है - "देव । नही ।" इस प्रकार दोनो पक्षों की बात सुनकर राजा यह अन्तिम न्याय करते हैं"भवन्तः, शोमनं पूर्ण कथयति" "
कितनी सरल, सुगम एव सुन्दर यह न्याय विधि थी । दोनो पक्षो के यथार्थ बातो की जानकारी और फिर तत्काल निर्णय । न वकीलो की भक-भक, न धन का अपव्यय और न दस-पन्द्रह वर्ष की लम्बी अवधि ।
१. पूरर्णावदान, पृ० २०
अमर्ष के कारण राष्ट्रापमदंन किये जाने का उल्लेख प्राप्त होता है । धनसमत राजा यह सोचता था कि केवल मेरा ही राज्य समृद्ध, स्फीत, क्षेम, सुभिक्ष एव आकीबहुजन- मनुष्य है । किन्तु मध्यदेश से आगत वरिणको के द्वारा यह ज्ञात होने पर कि मध्यदेश के वासव राजा का भी राज्य ऐसा ही है, उसे अमर्ष उत्पन्न होता है और वह चतुरंगिणी सेना का सनाह कर मध्यदेश के राज्य को विनष्ट करने के लिए जाता है ।
[क] सेना
सेना के लिए "बलकाय"" या "बलीघ" शब्द प्रयुक्त हुए हैं । राजा के यहाँ उचित सैन्य शक्ति रहती थी। किसी कावंटिक (गाँव के मुखिया) आदि के विरुद्ध होने पर वह उसके विनाश के लिए सेना भेजता था ।
राजा के यहाँ चतु रगिणी सेना रहती थी। चतुरग बलकाय के चार अंग
( १ ) हस्तिकाय
( २ ) अश्वकाय
(३) रथकाय
(४) पत्तिकाय ( पदाति)
मंत्र यावदान, पृ० ३८ ।
३. सुधनकुमारावदान, पृ० २८६ । ४ वही, पृ० २८६ ।
मैत्रयावदान, पृ० ३८
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एक सौ अट्ठावन । दिव्यावदान में संस्कृति का स्वरूप "मा हैव राशश्चन्द्रप्रमस्य महापृथिवीपालस्य मंत्रात्मकस्य कारुरिणकस्य सस्ववस्वलस्यानित्यताबलमागच्छेत, मा हैब अस्माक बेवेन सार्धं नानामावो भविष्यति विनाभावो विप्रयोगः, मा हैव मात्रागोऽपरित्राणो जम्बुदवीपो भविष्यतीति" । महाचन्द्र अग्रामात्य ने तो इस सकट से बचने का उपाय भी ढूंढ निकाला कि यदि कोई राजा का शिरोयाचनक आया तो उसे एक रत्नमय शिर के द्वारा प्रलुब्ध किया जायगा, और तदर्थ एक रत्नमय शिर बनवा कर कोशकोष्ठागार मे रख लिया। इतना ही नही महाचन्द्र और महीषर दोनो अग्रामात्य राजा चन्द्रप्रभ का विनाश देखने में असमर्थ हो पहले ही अपने ऐहिक शरीर का परित्याग कर देते हैं । ' राजा शिखण्डी के धर्मपूर्वक राज्य करने पर हिरु और भिरुक नाम के उस के शुभचिन्तक मन्त्री जनपद की उपमा पुष्प - फल वाले वृक्ष से देते हैं - "पुष्पफल वृक्षसहशा देव जनपवाः । तद्यथा देव पुष्पवृक्षाः फलवृक्षाश्च कालेन कालं सम्यक् परिपाल्यमाना अनुपरतप्रयोगेण यथाकालं पुष्पाणि फलानि चानुप्रयच्छन्ति, एवमेव जनपदा प्रतिपाल्यमाना अनुपरत प्रयोगेण यथाकालं करप्रत्यायाननुप्रयच्छन्तीति" । परन्तु इस के विपरीत दूसरी ओर दो दुष्ट अमास्य उससे कहते हैं"देव नाकन्विता नालुचिता नतता नोत्पीडितास्तिलास्तंलं प्रयच्छन्ति, तन्नरपते जनपदा इति" " एक ओर भद्र एव सदमात्यो का योग, राजा की श्री वृद्धि तथा पुण्यप्रसव मे एक सुदृढ कारण होता था तो दूसरी ओर इस के विपरीत, दुष्टामात्य राजा के कल्मष गर्त -पतन मे कारण होते थे । मन्त्रियों के द्वारा किये गए प्रजा-पीडन के भी उदाहरण प्राप्त होते हैं । अशोक के राज्य काल मे तक्षशिला के नगरवासियों ने विद्रोह प्रारंभ कर एक चन्द्रप्रमबोधिसत्वचर्यावदान, पृशून्य दो सौ एक । रुद्रायणावदान, पूशून्य चार सौ सतहत्तर । दिव्यावदान में संस्कृति का स्वरूप । एक सौ छप्पन दिया। अशोक ने तत्प्रशमनार्थ अपने पुत्र कुरणाल को भेजा। कुणाल के पहुँचने पर वहाँ के नागरिको ने उनका उचित सत्कार कर कहा - "न तो हमलोग राजकुमार के विरुद्ध है और न राजा अशोक के ही, अपितु उन दुष्टामात्यो के विरोधी हैं, जो हमारा अपमान करते हैं" इसी प्रकार एक अन्य स्थल पर बिन्दुसार के समय मे तक्षशिला के लोगो द्वारा मन्त्रियों के प्रजापीडक शासन के विरुद्ध विद्रोह करने का उल्लेख प्राप्त होता है। राजा बिन्दुमार अशोक को चतुरगिणी सेना के साथ तक्षशिला भेजते है। यहाँ भी अशोक को नगरवासियों से वैसा ही उत्तर प्राप्त होता है"न वय कुमारस्य विरुद्धाः, नापि राशो बिन्दुसारस्य, अपितु दुष्टामात्या प्रस्माकं परिभवं कुर्वन्ति" एक कुरणालावदान, पृशून्य दो सौ तिरेसठ । दो पांशुप्रदानाबदान, पृशून्य दो सौ चौंतीस । तत्कालीन न्याय-पद्धति, तात्कालिक और निष्पक्ष थी । वादी और प्रतिवादी दोनो राजा के समक्ष पहुंचते थे और राजा उनका न्याय करता था। किसी वकील और अदालती खर्च की आवश्यकता न थी। एक बार वरिणग्-ग्राम अपने बनाये हुए नियम के भग किये जाने के अभियोग मे क्रुद्ध होकर पूर्ण पर साठ कार्षापरणो का जुर्माना घोषित करता है । यह बात राजा को ज्ञात होने पर वह पूर्ण और वरण-ग्राम को अपने पास बुलवाते हैं। राजा वरिणग्-ग्राम से, पूर्ण पर किये गये जुर्माने का कारण पूछने हैं । वे कहते हैं - "देव । वरिणग् ग्राम ने यह क्रियाकार किया था, कि कोई भी व्यक्ति अकेला पण्य को नहीं खरीदेगा। किन्तु पूर्ण ने अकेले ही खरीद लिया है" । पूर्ण कहता है - "देव । क्या इन लोगो ने क्रियाकार करते समय मुझे या मेरे भाई को बुलाया था ?" इस पर वे कहते है - "देव । नही ।" इस प्रकार दोनो पक्षों की बात सुनकर राजा यह अन्तिम न्याय करते हैं"भवन्तः, शोमनं पूर्ण कथयति" " कितनी सरल, सुगम एव सुन्दर यह न्याय विधि थी । दोनो पक्षो के यथार्थ बातो की जानकारी और फिर तत्काल निर्णय । न वकीलो की भक-भक, न धन का अपव्यय और न दस-पन्द्रह वर्ष की लम्बी अवधि । एक. पूरर्णावदान, पृशून्य बीस अमर्ष के कारण राष्ट्रापमदंन किये जाने का उल्लेख प्राप्त होता है । धनसमत राजा यह सोचता था कि केवल मेरा ही राज्य समृद्ध, स्फीत, क्षेम, सुभिक्ष एव आकीबहुजन- मनुष्य है । किन्तु मध्यदेश से आगत वरिणको के द्वारा यह ज्ञात होने पर कि मध्यदेश के वासव राजा का भी राज्य ऐसा ही है, उसे अमर्ष उत्पन्न होता है और वह चतुरंगिणी सेना का सनाह कर मध्यदेश के राज्य को विनष्ट करने के लिए जाता है । [क] सेना सेना के लिए "बलकाय"" या "बलीघ" शब्द प्रयुक्त हुए हैं । राजा के यहाँ उचित सैन्य शक्ति रहती थी। किसी कावंटिक आदि के विरुद्ध होने पर वह उसके विनाश के लिए सेना भेजता था । राजा के यहाँ चतु रगिणी सेना रहती थी। चतुरग बलकाय के चार अंग हस्तिकाय अश्वकाय रथकाय पत्तिकाय मंत्र यावदान, पृशून्य अड़तीस । तीन. सुधनकुमारावदान, पृशून्य दो सौ छियासी । चार वही, पृशून्य दो सौ छियासी । मैत्रयावदान, पृशून्य अड़तीस
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कृष्णा ने पिछले महीने ऐसे ही 14 फरवरी डालेंवेलेंटाइन डे पर एक पिक शेयर की थी जिसमे दोनों समुद्र तट के पास खड़े है। उस पिक्चर में लिखा है कि हर दिन आपका साथ हो।
बता दें पिछले साल, एबन ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में कृष्णा को "वाइफ़" का दर्जा दिया था जिसके बाद से दोनों की गुप्त शादी का अफवाह शुरू हो गई थी, हालांकि, कृष्णा ने मुंबई मिरर के साथ एक इंटरव्यू में इन अफवाहों को खारिज कर दिया और कहा, "यह खुश करने वाला बस एक शब्द है, हमारे सेक्रेट शादी पर कितने सारे आर्टिकल, अजीब है, यहां तक की मेरी मॉम ने मुझसे पूछा कि क्या चल रहा है। " कृष्णा श्रॉफ और Eban Hyams. पिछले कुछ समय से डेटिंग कर रहे है, हालांकि, कृष्णा ने कहना है कि टाइगर श्रॉफ और एबन एक-दूसरे को पांच साल से जानते हैं और उन्होंने कई बार बास्केटबॉल भी खेला है।
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कृष्णा ने पिछले महीने ऐसे ही चौदह फरवरी डालेंवेलेंटाइन डे पर एक पिक शेयर की थी जिसमे दोनों समुद्र तट के पास खड़े है। उस पिक्चर में लिखा है कि हर दिन आपका साथ हो। बता दें पिछले साल, एबन ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में कृष्णा को "वाइफ़" का दर्जा दिया था जिसके बाद से दोनों की गुप्त शादी का अफवाह शुरू हो गई थी, हालांकि, कृष्णा ने मुंबई मिरर के साथ एक इंटरव्यू में इन अफवाहों को खारिज कर दिया और कहा, "यह खुश करने वाला बस एक शब्द है, हमारे सेक्रेट शादी पर कितने सारे आर्टिकल, अजीब है, यहां तक की मेरी मॉम ने मुझसे पूछा कि क्या चल रहा है। " कृष्णा श्रॉफ और Eban Hyams. पिछले कुछ समय से डेटिंग कर रहे है, हालांकि, कृष्णा ने कहना है कि टाइगर श्रॉफ और एबन एक-दूसरे को पांच साल से जानते हैं और उन्होंने कई बार बास्केटबॉल भी खेला है।
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अवस्था में मार डालने के लिये कहा था । परन्तु अव उन्हें वही जगह अत्यन्त प्रिय है। वे मरना पसन्द नहिं करते इसलिये जब तुम उनको मारने जाते हो तब वह भी भीतर घुस जाते हैं इसमें आश्चर्य और खेद करनेको कोई बात नहीं है। संसारकी स्थिति ही ऐसी है। मुनिराज द्वारा यह धार्मिक उपदेश सुनकर देवरतिको वडा भारी वैशग्य हो गया और संसार में कुछ भी सुख नहीं है ऐसा समझ कर डीके पास मुनिदीक्षा लेकर आत्मकल्याण करने लगा ।
२२. श्रावकाचार प्रथमभाग ।
मंगलाचरण ।
सकल कर्ममल जिनने धोये, हैं वे वर्द्धमान जिनराय । लोकालोक भासते जिसमें, ऐसा दर्पण जिनका ज्ञान । - वडे चावसे भक्तिभावसे, नमस्कार कर वारंवार ।. उनके श्रीचरणों में प्रणमूं, सुख पाऊं हर विघ्नविकार ॥ १ ॥
जिनके ज्ञानमें दर्पणकी समान, समस्त लोक प्रलोक भासता है और जिन्होंने समस्त कर्मरूपी मल आत्मासे धो दिया है उन श्रीवर्द्धमान ( महावीर ) भगवानको मैं बड़े चाव और भक्तिभावसे बारंबार नमस्कार करता हूं ॥ १ ॥
जैनवालबोधकधर्म कहनेकी प्रतिज्ञा।
जो संसार दुःखसे सारे, जीवोंको सुवचाता है । सर्वोत्तम सुखमें पुनि उनको, भली भांति पहुंचाता है । उसी कर्मके काटनहारे, श्रेष्ठ धर्मको कहता हूं । श्रीसमंतभद्रार्यवर्यका, भाव बताना चहता हूं ॥ २ ॥
जो संसारके दुःखोंसे छुटाकर जीवों को सर्वोत्तम सुख में पहुंचाता है और कर्मोको नष्ट करनेवाला है उसी धर्मको श्रीसमंतभद्राचार्यकृत रत्नकरंडश्रावकाचार के अनुसार वर्णन करता हूं ॥ २ ॥
धर्म अधर्म किसे कहते हैं ?
गणघरादि धर्मेश्वर कहते, सम्यग्दर्शन सम्यग्ज्ञान । सम्यकचारित धर्मरम्य है, सुखदायक सब भांति निदान ।। इनसे उलटे मिथ्या हैं सव, दर्शन ज्ञान और चारित्र । भवकारण हैं, भयकारण हैं, दुखकारण हैं मेरे मित्र ॥ ३ ॥ गणधरादिक धर्माचार्योंने सम्यग्दर्शन सम्यग्ज्ञान और सम्यक चारित्रको सर्वसुखदायक धर्म कहा है और इनसे उल्टे मिथ्यादर्शन मिथ्याज्ञान व मिथ्याचारित्रको संसारकी परिपाटी बढानेवाला अधर्म कहा है ॥ ३ ॥
सम्यग्दर्शनका लक्षण ।
आठ अंगयुत तीन मूढ़ता-रहित श्रमद जो हो श्रद्धान ! सच्चे देवशास्त्र गुरुपर दृढ सम्यग्दर्शन उसको जान ।।
सच्चे देवशास्त्रगुरुका मैं, लक्षण यहां बताता हूं तीनमूढता आठ अंग मद, सबका भेद जताता हूं ॥ ४ ॥ आठ अंगसंहित तीनमूढता और आठपदरहित सत्यार्थ देव शास्त्र गुरुपर दृढ श्रद्धान करना सो सम्यग्दर्शन है ॥ ४ ॥
सत्यार्थ (सच्चे ) देवकी पहिचान ।
जो सर्वज्ञ शास्त्रका स्वामी, जिसमें नहीं दोषका लेश । वही आस है वही प्राप्त है, वहीं आप्त है तीर्थ जिनेश ॥ 'जिसके भीतर इन बातोंका, समावेश नहि हो सकता । नहीं आत वह हो सकता है, सत्य देव नहि हो सकता ॥५॥
जो सर्वज्ञ, हितोपदेशी, (शास्त्र का स्वामी ) अष्टादशदोष रहित और बीतरागी है वही सत्यार्थ ( सच्चा ) आप्त है जिसमें ये तीन गुण नहीं हैं वह सच्चादेव या यात कदापि नहीं है ॥ ६ ॥
वीतरागी किसको कहते हैं ।
भूखण्यास चीमारि बुडापा, जन्म मरण भय राग द्वेष । शोक मोढ चिंता मद अचरज, निद्रारती खेद ओ स्वेद ।। दोष अठारह ये माने हैं, हों ये जिनमें जरा नहीं । आप्त वही है देव वही है, नाथ वही है और नहीं ॥ ६ ॥ जो भूख १ प्यास २ वीमारी ३ बुढापा ४ जन्म. ५ ३ मरण ६ भय ७ राग ८ द्वेष ९ शोक १० मोह ११ चिंता १२. मद १३ आश्चर्य १४ निद्रा १५ रवि १६ खेद १७.
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अवस्था में मार डालने के लिये कहा था । परन्तु अव उन्हें वही जगह अत्यन्त प्रिय है। वे मरना पसन्द नहिं करते इसलिये जब तुम उनको मारने जाते हो तब वह भी भीतर घुस जाते हैं इसमें आश्चर्य और खेद करनेको कोई बात नहीं है। संसारकी स्थिति ही ऐसी है। मुनिराज द्वारा यह धार्मिक उपदेश सुनकर देवरतिको वडा भारी वैशग्य हो गया और संसार में कुछ भी सुख नहीं है ऐसा समझ कर डीके पास मुनिदीक्षा लेकर आत्मकल्याण करने लगा । बाईस. श्रावकाचार प्रथमभाग । मंगलाचरण । सकल कर्ममल जिनने धोये, हैं वे वर्द्धमान जिनराय । लोकालोक भासते जिसमें, ऐसा दर्पण जिनका ज्ञान । - वडे चावसे भक्तिभावसे, नमस्कार कर वारंवार ।. उनके श्रीचरणों में प्रणमूं, सुख पाऊं हर विघ्नविकार ॥ एक ॥ जिनके ज्ञानमें दर्पणकी समान, समस्त लोक प्रलोक भासता है और जिन्होंने समस्त कर्मरूपी मल आत्मासे धो दिया है उन श्रीवर्द्धमान भगवानको मैं बड़े चाव और भक्तिभावसे बारंबार नमस्कार करता हूं ॥ एक ॥ जैनवालबोधकधर्म कहनेकी प्रतिज्ञा। जो संसार दुःखसे सारे, जीवोंको सुवचाता है । सर्वोत्तम सुखमें पुनि उनको, भली भांति पहुंचाता है । उसी कर्मके काटनहारे, श्रेष्ठ धर्मको कहता हूं । श्रीसमंतभद्रार्यवर्यका, भाव बताना चहता हूं ॥ दो ॥ जो संसारके दुःखोंसे छुटाकर जीवों को सर्वोत्तम सुख में पहुंचाता है और कर्मोको नष्ट करनेवाला है उसी धर्मको श्रीसमंतभद्राचार्यकृत रत्नकरंडश्रावकाचार के अनुसार वर्णन करता हूं ॥ दो ॥ धर्म अधर्म किसे कहते हैं ? गणघरादि धर्मेश्वर कहते, सम्यग्दर्शन सम्यग्ज्ञान । सम्यकचारित धर्मरम्य है, सुखदायक सब भांति निदान ।। इनसे उलटे मिथ्या हैं सव, दर्शन ज्ञान और चारित्र । भवकारण हैं, भयकारण हैं, दुखकारण हैं मेरे मित्र ॥ तीन ॥ गणधरादिक धर्माचार्योंने सम्यग्दर्शन सम्यग्ज्ञान और सम्यक चारित्रको सर्वसुखदायक धर्म कहा है और इनसे उल्टे मिथ्यादर्शन मिथ्याज्ञान व मिथ्याचारित्रको संसारकी परिपाटी बढानेवाला अधर्म कहा है ॥ तीन ॥ सम्यग्दर्शनका लक्षण । आठ अंगयुत तीन मूढ़ता-रहित श्रमद जो हो श्रद्धान ! सच्चे देवशास्त्र गुरुपर दृढ सम्यग्दर्शन उसको जान ।। सच्चे देवशास्त्रगुरुका मैं, लक्षण यहां बताता हूं तीनमूढता आठ अंग मद, सबका भेद जताता हूं ॥ चार ॥ आठ अंगसंहित तीनमूढता और आठपदरहित सत्यार्थ देव शास्त्र गुरुपर दृढ श्रद्धान करना सो सम्यग्दर्शन है ॥ चार ॥ सत्यार्थ देवकी पहिचान । जो सर्वज्ञ शास्त्रका स्वामी, जिसमें नहीं दोषका लेश । वही आस है वही प्राप्त है, वहीं आप्त है तीर्थ जिनेश ॥ 'जिसके भीतर इन बातोंका, समावेश नहि हो सकता । नहीं आत वह हो सकता है, सत्य देव नहि हो सकता ॥पाँच॥ जो सर्वज्ञ, हितोपदेशी, अष्टादशदोष रहित और बीतरागी है वही सत्यार्थ आप्त है जिसमें ये तीन गुण नहीं हैं वह सच्चादेव या यात कदापि नहीं है ॥ छः ॥ वीतरागी किसको कहते हैं । भूखण्यास चीमारि बुडापा, जन्म मरण भय राग द्वेष । शोक मोढ चिंता मद अचरज, निद्रारती खेद ओ स्वेद ।। दोष अठारह ये माने हैं, हों ये जिनमें जरा नहीं । आप्त वही है देव वही है, नाथ वही है और नहीं ॥ छः ॥ जो भूख एक प्यास दो वीमारी तीन बुढापा चार जन्म. पाँच तीन मरण छः भय सात राग आठ द्वेष नौ शोक दस मोह ग्यारह चिंता बारह. मद तेरह आश्चर्य चौदह निद्रा पंद्रह रवि सोलह खेद सत्रह.
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पिंक लिपस्टिक कलर - कुछ महिलाओं को पिंक कलर की लिपस्टिक बहुत ही पसंद होती है. इससे पता चलता है कि आप बहुत ही एनर्जेटिक हैं. ये आपका नेचर बच्चों जैसा है. आपको पार्टी करना और सोशल होना बहुत ही पसंद है. आप जहां जाती हैं, दोस्त बहुत ही आसानी से बना लेती हैं. आप रिस्क टेकर और एडवेंचर्स हो सकती हैं. नए लोगों से मिलना, नई जगहों को एक्सप्लोर करना, नई चीजें सीखना और कुछ नया एक्सपीरियंस करना आपको बहुत ही पसंद है.
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पिंक लिपस्टिक कलर - कुछ महिलाओं को पिंक कलर की लिपस्टिक बहुत ही पसंद होती है. इससे पता चलता है कि आप बहुत ही एनर्जेटिक हैं. ये आपका नेचर बच्चों जैसा है. आपको पार्टी करना और सोशल होना बहुत ही पसंद है. आप जहां जाती हैं, दोस्त बहुत ही आसानी से बना लेती हैं. आप रिस्क टेकर और एडवेंचर्स हो सकती हैं. नए लोगों से मिलना, नई जगहों को एक्सप्लोर करना, नई चीजें सीखना और कुछ नया एक्सपीरियंस करना आपको बहुत ही पसंद है.
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6 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन की घोषणा केंद्र सरकार कभी भी कर सकती है। चंडीगढ़ प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को इस उम्र के बच्चों के वैक्सीनेशन प्लान के साथ तैयार रहने को कहा है। प्रशासक के सलाहकार धर्म पाल ने कहा है कि चंडीगढ़ को अपनी तैयारी रखनी होगी, ताकि समय नष्ट किए बिना छोटे बच्चों का वैक्सीनेशन किया जा सके।
वहीं धर्म पाल ने स्कूली टीचर्स को कहा है कि वह बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए जागरूक करें। बच्चों के परिजनों से भी अपील की है कि वह अपने बच्चों को वैक्सीन लगवाएं। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच 12 से 18 वर्ष के बच्चों को वैक्सीन लगवाए बिना 4 मई से स्कूल में एंट्री नहीं मिलेगी। सरकारी स्कूलों में इन बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लास का प्रबंध है।
हालांकि ऐसे बच्चे परीक्षा और प्रैक्टिकल के लिए कोरोना नियमों की पालना करते हुए स्कूल आ सकेंगे। शहर के प्राइवेट स्कूलों की एसोसिएशन भी बिना वैक्सीनेशन वाले बच्चों को 4 मई से स्कूल में एंट्री देने के मूड में नहीं है, लेकिन प्राइवेट स्कूल ऑनलाइन क्लास के लिए भी मना कर चुके हैं। ऐसे में लोगों से अपील है कि वैक्सीनेशन कराकर बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होने से बचाएं।
प्रशासन का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर से पहले कई लोगों के वैक्सीनेटिड होने से अस्पतालों में कम मरीज पहुंचे। ऐसे में कोरोना की संभावित चौथी लहर से पहले सभी बच्चों का वैक्सीनेटिड होना ज़रूरी है। प्रशासन चाहता है कि 15 मई तक सभी योग्य बच्चों को कोरोना वैक्सीन लग जाए। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग शिक्षा विभाग के साथ तालमेल बिठा रहा है।
चंडीगढ़ प्रशासन के मुताबिक, जनवरी 2022 में यह पाया गया था कि शहर के निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स में कोविड वैक्सीन की अतिरिक्त डोज थी। इस कीमती वैक्सीन की बर्बादी रोकने के लिए जो वैक्सीन एक्सपायर होने वाली थी, उसे यूटी प्रशासन के पास उपलब्ध ताजा स्टॉक के साथ रिप्लेस किया गया था।
ऐसी वैक्सीन को प्राथमिकता के आधार पर इस्तेमाल किया गया। प्रशासन ने एक बार फिर सभी निजी अस्पतालों से कहा है कि अपने वैक्सीन स्टॉक का मूल्यांकन करें। जो वैक्सीन 30 जून, 2022 तक एक्सपायर होनी है, उसे अगले सप्ताह तक बदल लें। इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन से संपर्क किया जा सकता है। इससे कोई वित्तीय नुकसान नहीं होगा।
शहर में 15 से 18 वर्ष के 72 हजार बच्चों में से 96 प्रतिशत ने पहली और 57 प्रतिशत ने दूसरी वैक्सीन लगवा ली है। इसी तरह 12 से 14 वर्ष के 45 हजार बच्चों में से 53 प्रतिशत बच्चों को पहली और 7. 50 प्रतिशत बच्चों दूसरी वैक्सीन लगी है।
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छः से बारह वर्ष के बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन की घोषणा केंद्र सरकार कभी भी कर सकती है। चंडीगढ़ प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को इस उम्र के बच्चों के वैक्सीनेशन प्लान के साथ तैयार रहने को कहा है। प्रशासक के सलाहकार धर्म पाल ने कहा है कि चंडीगढ़ को अपनी तैयारी रखनी होगी, ताकि समय नष्ट किए बिना छोटे बच्चों का वैक्सीनेशन किया जा सके। वहीं धर्म पाल ने स्कूली टीचर्स को कहा है कि वह बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए जागरूक करें। बच्चों के परिजनों से भी अपील की है कि वह अपने बच्चों को वैक्सीन लगवाएं। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच बारह से अट्ठारह वर्ष के बच्चों को वैक्सीन लगवाए बिना चार मई से स्कूल में एंट्री नहीं मिलेगी। सरकारी स्कूलों में इन बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लास का प्रबंध है। हालांकि ऐसे बच्चे परीक्षा और प्रैक्टिकल के लिए कोरोना नियमों की पालना करते हुए स्कूल आ सकेंगे। शहर के प्राइवेट स्कूलों की एसोसिएशन भी बिना वैक्सीनेशन वाले बच्चों को चार मई से स्कूल में एंट्री देने के मूड में नहीं है, लेकिन प्राइवेट स्कूल ऑनलाइन क्लास के लिए भी मना कर चुके हैं। ऐसे में लोगों से अपील है कि वैक्सीनेशन कराकर बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होने से बचाएं। प्रशासन का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर से पहले कई लोगों के वैक्सीनेटिड होने से अस्पतालों में कम मरीज पहुंचे। ऐसे में कोरोना की संभावित चौथी लहर से पहले सभी बच्चों का वैक्सीनेटिड होना ज़रूरी है। प्रशासन चाहता है कि पंद्रह मई तक सभी योग्य बच्चों को कोरोना वैक्सीन लग जाए। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग शिक्षा विभाग के साथ तालमेल बिठा रहा है। चंडीगढ़ प्रशासन के मुताबिक, जनवरी दो हज़ार बाईस में यह पाया गया था कि शहर के निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स में कोविड वैक्सीन की अतिरिक्त डोज थी। इस कीमती वैक्सीन की बर्बादी रोकने के लिए जो वैक्सीन एक्सपायर होने वाली थी, उसे यूटी प्रशासन के पास उपलब्ध ताजा स्टॉक के साथ रिप्लेस किया गया था। ऐसी वैक्सीन को प्राथमिकता के आधार पर इस्तेमाल किया गया। प्रशासन ने एक बार फिर सभी निजी अस्पतालों से कहा है कि अपने वैक्सीन स्टॉक का मूल्यांकन करें। जो वैक्सीन तीस जून, दो हज़ार बाईस तक एक्सपायर होनी है, उसे अगले सप्ताह तक बदल लें। इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन से संपर्क किया जा सकता है। इससे कोई वित्तीय नुकसान नहीं होगा। शहर में पंद्रह से अट्ठारह वर्ष के बहत्तर हजार बच्चों में से छियानवे प्रतिशत ने पहली और सत्तावन प्रतिशत ने दूसरी वैक्सीन लगवा ली है। इसी तरह बारह से चौदह वर्ष के पैंतालीस हजार बच्चों में से तिरेपन प्रतिशत बच्चों को पहली और सात. पचास प्रतिशत बच्चों दूसरी वैक्सीन लगी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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इस बार सोमवार, 27 दिसंबर 2021 को रुक्मिणी अष्टमी पर्व है। आप सभी को बता दें कि इस दिन भगवान कृष्ण और रुक्मिणी की पूजा की जाती है। वहीँ मान्यताओं के अनुसार इसी दिन द्वापर युग में देवी रुक्मिणी का जन्म हुआ था, वे विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री थी। आप सभी को बता दें कि उन्हें पौराणिक शास्त्रों में लक्ष्मीदेवी का अवतार कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि रुक्मिणी अष्टमी के दिन विधिपूर्वक देवी रुक्मिणी की पूजा अर्चना करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है और जीवन के समस्त कष्टों का अंत होता है। अब हम आपको बताते हैं रुक्मिणी अष्टमी का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
रुक्मिणी अष्टमी व्रत पूजा विधि- इसके लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर व्रत रखने वाली स्त्रियां स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अब भगवान सत्यनारायण ,पीपल व तुलसी को अर्घ्य दें। मान्यताओं के अनुसार पीपल में भगवान विष्णु और तुलसी में माता लक्ष्मी जी का वास होता है। इसके बाद घर के मंदिर में गंगाजल से छिड़काव कर एक चौकी स्थापित करें और उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चौकी पर सर्वप्रथम भगवान गणेश की स्थापना करें और फिर भगवान कृष्ण और देवी रुक्मिणी की मूर्ति स्थापित करें। अब चौकी के एक ओर शुद्ध जल से भरा हुआ मिट्टी का कलश रखकर ऊपर आम, अशोक के पत्तें रखें और फिर एक नारियाल रखें। इसके बाद पूजा आरंभ करें। ध्यान रहे पूजन करते समय सर्वप्रथम भगवान गणेश जी की पूजा करें, फिर भगवान कृष्ण व देवी रुक्मिणी को जल से स्नान कराएं और फिर उनका अभिषेक करें। अब देवी रुक्मिणी को फल, फूल, रौली-मौली, चावल, सुपारी, लॉग, नैवेद्य, अक्षत, चंदन, धूप, दीप आदि अर्पित करें। इसके बाद भगवान कृष्ण को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें और माता रुक्मिणी को लाल रंग के वस्त्र और शृंगार का सामान अर्पित करें। अब रुक्मिणी अष्टमी व्रत की कथा सुनें और आरती करें। ध्यान रहे इस दौरान भोगस्वरूप माता रुक्मिणी को खीर चढ़ाएं और सभी उपस्थति लोगों में इसी प्रसाद का वितरण करें।
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इस बार सोमवार, सत्ताईस दिसंबर दो हज़ार इक्कीस को रुक्मिणी अष्टमी पर्व है। आप सभी को बता दें कि इस दिन भगवान कृष्ण और रुक्मिणी की पूजा की जाती है। वहीँ मान्यताओं के अनुसार इसी दिन द्वापर युग में देवी रुक्मिणी का जन्म हुआ था, वे विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री थी। आप सभी को बता दें कि उन्हें पौराणिक शास्त्रों में लक्ष्मीदेवी का अवतार कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि रुक्मिणी अष्टमी के दिन विधिपूर्वक देवी रुक्मिणी की पूजा अर्चना करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है और जीवन के समस्त कष्टों का अंत होता है। अब हम आपको बताते हैं रुक्मिणी अष्टमी का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि। रुक्मिणी अष्टमी व्रत पूजा विधि- इसके लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर व्रत रखने वाली स्त्रियां स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अब भगवान सत्यनारायण ,पीपल व तुलसी को अर्घ्य दें। मान्यताओं के अनुसार पीपल में भगवान विष्णु और तुलसी में माता लक्ष्मी जी का वास होता है। इसके बाद घर के मंदिर में गंगाजल से छिड़काव कर एक चौकी स्थापित करें और उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चौकी पर सर्वप्रथम भगवान गणेश की स्थापना करें और फिर भगवान कृष्ण और देवी रुक्मिणी की मूर्ति स्थापित करें। अब चौकी के एक ओर शुद्ध जल से भरा हुआ मिट्टी का कलश रखकर ऊपर आम, अशोक के पत्तें रखें और फिर एक नारियाल रखें। इसके बाद पूजा आरंभ करें। ध्यान रहे पूजन करते समय सर्वप्रथम भगवान गणेश जी की पूजा करें, फिर भगवान कृष्ण व देवी रुक्मिणी को जल से स्नान कराएं और फिर उनका अभिषेक करें। अब देवी रुक्मिणी को फल, फूल, रौली-मौली, चावल, सुपारी, लॉग, नैवेद्य, अक्षत, चंदन, धूप, दीप आदि अर्पित करें। इसके बाद भगवान कृष्ण को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें और माता रुक्मिणी को लाल रंग के वस्त्र और शृंगार का सामान अर्पित करें। अब रुक्मिणी अष्टमी व्रत की कथा सुनें और आरती करें। ध्यान रहे इस दौरान भोगस्वरूप माता रुक्मिणी को खीर चढ़ाएं और सभी उपस्थति लोगों में इसी प्रसाद का वितरण करें।
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कोरोना महासंकट के मद्देनजर भारतीय रिजर्व बैंक ने भी एक महत्त्वपूर्ण पहल की है। कमोबेश बैंकों की व्यवस्था, नकदी की मौजूदगी और आम ग्राहक के वित्तीय हितों को भरोसा देने की कोशिश की गई है। बेशक रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में परिवर्तन करता रहा है, लेकिन अब आम ग्राहक असहाय स्थिति में दिख रहा है। दुकानें, रोजगार, बाजार बंद हैं, लिहाजा पैसे का लेन-देन ठहर गया है, लेकिन आम आदमी पर आर्थिक कर्जों और खर्चों के बोझ यथावत हैं। रिजर्व बैंक ने अपने गवर्नर शक्तिकांत दास के जरिए इस मुद्दे को संबोधित किया है। गवर्नर ने राहतों और रियायतों की घोषणा जरूर की है, लेकिन उनका यह अंदेशा पुख्ता होता जा रहा है कि विश्व आर्थिक मंदी की ओर बढ़ता जा रहा है, जाहिर है कि उसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा और अब 5 फीसदी या उससे अधिक की विकास-दर को छूना मुश्किल होगा। यह आकलन देशवासियों को पीड़ा और चिंता का एहसास करा सकता है, लेकिन कोरोना महामारी के विस्तार का यही यथार्थ है। बेशक ढहती अर्थव्यवस्था भी कोई शाश्वत स्थिति नहीं है। बहरहाल रिजर्व बैंक ने जिन प्रयासों और रियायतों की घोषणा की है, उनसे 3. 74 लाख करोड़ रुपए हमारी व्यवस्था को मिलेंगे। यानी बैंकों और आम ग्राहक के हाथ में अतिरिक्त नकदी होगी। उसके लिए बाजार के विकल्प खुल सकते हैं। सामान्य माहौल होने के बाद बाजार खुलेगा, तो खरीददारी भी संभव होगी और औसत मांग वहीं से बढ़ सकेगी। कोरोना और लॉकडाउन के मौजूदा दौर में यह भी एक बुनियादी चिंता थी कि होम लोन, कार लोन या किसी अन्य कर्ज की ईएमआई का भुगतान कैसे होगा? रिजर्व बैंक ने निर्देशात्मक सलाह दी है कि बैंक सभी तरह की ईएमआई के भुगतान और ब्याज पर फिलहाल तीन माह की रोक लगा दें। बैंकों को अपने सॉफ्टवेयर में परिवर्तन कर नए प्रावधानों को जोड़ना होगा अथवा औसत ग्राहक अपने बैंक को आवेदन कर सकते हैं कि फिलहाल तीन महीनों तक ईएमआई की राशि उनके बैंक खाते से न काटी जाए। गवर्नर के वक्तव्य से यह स्पष्ट नहीं है कि यह तीन माह की रोक कारोबारियों, स्व रोजगार वालों या उद्योगपतियों के संदर्भ में भी लगाई गई है या नहीं! बहरहाल अधिसूचना से सब कुछ स्पष्ट हो सकता है। बेशक रिजर्व बैंक ने आश्वस्त किया है कि सभी बैंकों में नकदी बढ़ेगी और कर्ज भी सस्त होंगे। पहले से ज्यादा तरलता बैंकों के पास होगी, लिहाजा भारत में बैंकिंग सिस्टम भी मजबूत रहेगा और आम ग्राहक का पैसा भी सुरक्षित रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि रिजर्व बैंक की रियायतों से आम मध्यम वर्ग और कारोबारियों को बहुत मदद मिलेगी। आर्थिक पैकेज के बाद यह सरकारी पक्ष की दूसरी महत्त्वपूर्ण आर्थिक पहल है। कई राज्य सरकारें भी ऐसी मदद की घोषणाएं कर चुकी हैं। हकीकत का विरोधाभास भी है। खबरें आ रही हैं कि आम मजदूर, गरीब, दिहाड़ीदार का रोजगार छिन चुका है। उस जमात को तुरंत मदद देकर संकट को कम क्यों नहीं किया जा सकता? क्या उसमें भी सरकारी औपचारिकताएं आड़े आती रहेंगी? भारत में कोरोना महासंकट की अभी तो शुरुआत हुई है। वायरस से संक्रमित होने वालों की संख्या शुक्रवार दोपहर तक 753 तक पहुंच चुकी थी। मौत का आंकड़ा भी 17 हो गया है। लगातार संख्या बढ़ रही है, क्योंकि 26 मार्च को एक ही दिन में 88 मरीज सामने आए थे। बेशक यह आंकड़ा भी डरावना है, क्योंकि हम अमरीका और यूरोप से तुलना नहीं कर सकते। अभी तो यह भी निश्चित नहीं है कि यह दौर कब तक जारी रहेगा? क्या 14 अप्रैल को देशव्यापी लॉकडाउन की अवधि खत्म होने के बाद तथ्य सामने आएगा कि कोरोना वायरस की मार और प्रसार को नियंत्रित कर लिया गया है? सवाल यह भी है कि यदि लॉकडाउन का विस्तार किया जाता है, तो यह कब तक संभावित होगा? इतने कालखंड के लिए आर्थिक संसाधन और भोजन की व्यवस्था कैसे होगी? सरकार तो सिर्फ पंजीकृत और सूचीबद्ध तबके तक सीमित है, लेकिन यह देश तो करीब 138 करोड़ की आबादी का है। अनिश्चितता का यह दौर बरकरार रहने वाला है, हालांकि चिंता और तनाव से भी हासिल क्या होगा?
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कोरोना महासंकट के मद्देनजर भारतीय रिजर्व बैंक ने भी एक महत्त्वपूर्ण पहल की है। कमोबेश बैंकों की व्यवस्था, नकदी की मौजूदगी और आम ग्राहक के वित्तीय हितों को भरोसा देने की कोशिश की गई है। बेशक रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में परिवर्तन करता रहा है, लेकिन अब आम ग्राहक असहाय स्थिति में दिख रहा है। दुकानें, रोजगार, बाजार बंद हैं, लिहाजा पैसे का लेन-देन ठहर गया है, लेकिन आम आदमी पर आर्थिक कर्जों और खर्चों के बोझ यथावत हैं। रिजर्व बैंक ने अपने गवर्नर शक्तिकांत दास के जरिए इस मुद्दे को संबोधित किया है। गवर्नर ने राहतों और रियायतों की घोषणा जरूर की है, लेकिन उनका यह अंदेशा पुख्ता होता जा रहा है कि विश्व आर्थिक मंदी की ओर बढ़ता जा रहा है, जाहिर है कि उसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा और अब पाँच फीसदी या उससे अधिक की विकास-दर को छूना मुश्किल होगा। यह आकलन देशवासियों को पीड़ा और चिंता का एहसास करा सकता है, लेकिन कोरोना महामारी के विस्तार का यही यथार्थ है। बेशक ढहती अर्थव्यवस्था भी कोई शाश्वत स्थिति नहीं है। बहरहाल रिजर्व बैंक ने जिन प्रयासों और रियायतों की घोषणा की है, उनसे तीन. चौहत्तर लाख करोड़ रुपए हमारी व्यवस्था को मिलेंगे। यानी बैंकों और आम ग्राहक के हाथ में अतिरिक्त नकदी होगी। उसके लिए बाजार के विकल्प खुल सकते हैं। सामान्य माहौल होने के बाद बाजार खुलेगा, तो खरीददारी भी संभव होगी और औसत मांग वहीं से बढ़ सकेगी। कोरोना और लॉकडाउन के मौजूदा दौर में यह भी एक बुनियादी चिंता थी कि होम लोन, कार लोन या किसी अन्य कर्ज की ईएमआई का भुगतान कैसे होगा? रिजर्व बैंक ने निर्देशात्मक सलाह दी है कि बैंक सभी तरह की ईएमआई के भुगतान और ब्याज पर फिलहाल तीन माह की रोक लगा दें। बैंकों को अपने सॉफ्टवेयर में परिवर्तन कर नए प्रावधानों को जोड़ना होगा अथवा औसत ग्राहक अपने बैंक को आवेदन कर सकते हैं कि फिलहाल तीन महीनों तक ईएमआई की राशि उनके बैंक खाते से न काटी जाए। गवर्नर के वक्तव्य से यह स्पष्ट नहीं है कि यह तीन माह की रोक कारोबारियों, स्व रोजगार वालों या उद्योगपतियों के संदर्भ में भी लगाई गई है या नहीं! बहरहाल अधिसूचना से सब कुछ स्पष्ट हो सकता है। बेशक रिजर्व बैंक ने आश्वस्त किया है कि सभी बैंकों में नकदी बढ़ेगी और कर्ज भी सस्त होंगे। पहले से ज्यादा तरलता बैंकों के पास होगी, लिहाजा भारत में बैंकिंग सिस्टम भी मजबूत रहेगा और आम ग्राहक का पैसा भी सुरक्षित रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि रिजर्व बैंक की रियायतों से आम मध्यम वर्ग और कारोबारियों को बहुत मदद मिलेगी। आर्थिक पैकेज के बाद यह सरकारी पक्ष की दूसरी महत्त्वपूर्ण आर्थिक पहल है। कई राज्य सरकारें भी ऐसी मदद की घोषणाएं कर चुकी हैं। हकीकत का विरोधाभास भी है। खबरें आ रही हैं कि आम मजदूर, गरीब, दिहाड़ीदार का रोजगार छिन चुका है। उस जमात को तुरंत मदद देकर संकट को कम क्यों नहीं किया जा सकता? क्या उसमें भी सरकारी औपचारिकताएं आड़े आती रहेंगी? भारत में कोरोना महासंकट की अभी तो शुरुआत हुई है। वायरस से संक्रमित होने वालों की संख्या शुक्रवार दोपहर तक सात सौ तिरेपन तक पहुंच चुकी थी। मौत का आंकड़ा भी सत्रह हो गया है। लगातार संख्या बढ़ रही है, क्योंकि छब्बीस मार्च को एक ही दिन में अठासी मरीज सामने आए थे। बेशक यह आंकड़ा भी डरावना है, क्योंकि हम अमरीका और यूरोप से तुलना नहीं कर सकते। अभी तो यह भी निश्चित नहीं है कि यह दौर कब तक जारी रहेगा? क्या चौदह अप्रैल को देशव्यापी लॉकडाउन की अवधि खत्म होने के बाद तथ्य सामने आएगा कि कोरोना वायरस की मार और प्रसार को नियंत्रित कर लिया गया है? सवाल यह भी है कि यदि लॉकडाउन का विस्तार किया जाता है, तो यह कब तक संभावित होगा? इतने कालखंड के लिए आर्थिक संसाधन और भोजन की व्यवस्था कैसे होगी? सरकार तो सिर्फ पंजीकृत और सूचीबद्ध तबके तक सीमित है, लेकिन यह देश तो करीब एक सौ अड़तीस करोड़ की आबादी का है। अनिश्चितता का यह दौर बरकरार रहने वाला है, हालांकि चिंता और तनाव से भी हासिल क्या होगा?
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कन्हैया को झटका, सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिलेगी जमानत,
दस्तक टाइम्स एजेंसी/देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार जेएनयू के छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को सुप्रीम कोर्ट ने झटका देते हुए उनकी जमानत याचिका पर सुनावई से इंकार कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत जमानत याचिका की इस तरह सुनवाई नहीं कर सकती क्योंकि अगर उन्होंने ऐसा किया तो सुरक्षा का हवाला देकर आने वाले ऐसे मामलों की लाइन सुप्रीम कोर्ट में लग जाएगी।
कोर्ट ने कन्हैया से कहा कि वो अपनी जमानत याचिका पटियाला हाउस कोर्ट या दिल्ली हाईकोर्ट में डाले। इसके साथ ही अदालत ने भारत सरकार व पुलिस को यह सुनिश्चित करने को कहा कि निचली अदालत में कन्हैया और उसके वकीलों की सुरक्षा का पूरा इंतजाम किया जाए।
इससे पहले आज सुप्रीम कोर्ट ने केस की सुनवाई शुरू होते ही बेल याचिका के सीधे सुप्रीम कोर्ट में दायर किए जाने का कारण कन्हैया के वकीलों से पूछा।
जिस पर कन्हैया के वकीलों ने पटियाला हाउस कोर्ट की ढीली सुरक्षा व्यवस्था और कन्हैया पर दोनों बार पेशी के दौरान किए गए वकीलों के हमले का हवाला दिया।
बता दें कि कन्हैया ने कल यानी बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी जमानत की याचिका डाली थी क्योंकि उसे पटियाला हाउस कोर्ट में अपनी जान को लेकर खतरा अनुभव हुआ।
वहीं आज सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में पटियाला हाउस में हुई मारपीट को लेकर अपनी रिपोर्ट पेश की। इससे पहले रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने अपने एक बयान में ये कहकर विवाद पैदा कर दिया कि जेएनयू में जो कुछ हुआ वो अच्छा नहीं हुआ और ऐसा संस्कारों के अभाव की वजह से हुआ।
कन्हैया मामले की गंभीरता व असाधारणता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट उसकी जमानत याचिका पर विचार के लिए आज तारीख दी थी लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने नियमों का हवाला देते हुए सुनवाई से इंकार कर दिया। जानकारी के अनुसार कन्हैया की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में राजू रामचंद्र केस लड़ रहे हैं।
पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी के दौरान दोनों बार कन्हैया पर जिस तरह हमला किया गया उसी को आधार बनाकर कन्हैया ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी जमानत याचिका में कहा कि वो बेगुनाह है।
उसका कहना था कि कोर्ट ने उसे दोषी साबित नहीं किया है, फिर भी कोर्ट परिसर में मौजूद भीड़ उसे इस तरह मारने के लिए तैयार थी, जैसे वो दोषी साबित हो चुका हो। ऐसे में उसने संभावना जताई है कि जेल में भी उस पर हमले हो सकते हैं। इसके साथ ही कन्हैया ने अपनी याचिका में ये भी कहा है कि पुलिस को अब उसकी हिरासत की जरूरत नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उसके खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिले हैं, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए।
इससे पहले दिल्ली पुलिस कमिश्नर ये कह चुके हैं कि वो कन्हैया की जमानत का विरोध नहीं करेंगे। हालांकि कल यानी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने कहा कि पुलिस पर जमानत का विरोध न करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में किसी को भी कोई बयान देने में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट आज को पटियाला हाउस कोर्ट में कन्हैया की पेशी के दौरान हुई घटनाओं पर भी सुनवाई करेगा। अदालत ने कन्हैया और जेएनयू से जुड़े लोगों की पिटाई और मीडिया से बदसलूकी को गंभीरता से लेते हुए 6 वरिष्ठ वकीलों की टीम को वहां भेजकर स्थिति के बारे में जानकारी लेने को कहा था।
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कन्हैया को झटका, सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिलेगी जमानत, दस्तक टाइम्स एजेंसी/देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार जेएनयू के छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को सुप्रीम कोर्ट ने झटका देते हुए उनकी जमानत याचिका पर सुनावई से इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत जमानत याचिका की इस तरह सुनवाई नहीं कर सकती क्योंकि अगर उन्होंने ऐसा किया तो सुरक्षा का हवाला देकर आने वाले ऐसे मामलों की लाइन सुप्रीम कोर्ट में लग जाएगी। कोर्ट ने कन्हैया से कहा कि वो अपनी जमानत याचिका पटियाला हाउस कोर्ट या दिल्ली हाईकोर्ट में डाले। इसके साथ ही अदालत ने भारत सरकार व पुलिस को यह सुनिश्चित करने को कहा कि निचली अदालत में कन्हैया और उसके वकीलों की सुरक्षा का पूरा इंतजाम किया जाए। इससे पहले आज सुप्रीम कोर्ट ने केस की सुनवाई शुरू होते ही बेल याचिका के सीधे सुप्रीम कोर्ट में दायर किए जाने का कारण कन्हैया के वकीलों से पूछा। जिस पर कन्हैया के वकीलों ने पटियाला हाउस कोर्ट की ढीली सुरक्षा व्यवस्था और कन्हैया पर दोनों बार पेशी के दौरान किए गए वकीलों के हमले का हवाला दिया। बता दें कि कन्हैया ने कल यानी बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी जमानत की याचिका डाली थी क्योंकि उसे पटियाला हाउस कोर्ट में अपनी जान को लेकर खतरा अनुभव हुआ। वहीं आज सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में पटियाला हाउस में हुई मारपीट को लेकर अपनी रिपोर्ट पेश की। इससे पहले रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने अपने एक बयान में ये कहकर विवाद पैदा कर दिया कि जेएनयू में जो कुछ हुआ वो अच्छा नहीं हुआ और ऐसा संस्कारों के अभाव की वजह से हुआ। कन्हैया मामले की गंभीरता व असाधारणता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट उसकी जमानत याचिका पर विचार के लिए आज तारीख दी थी लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने नियमों का हवाला देते हुए सुनवाई से इंकार कर दिया। जानकारी के अनुसार कन्हैया की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में राजू रामचंद्र केस लड़ रहे हैं। पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी के दौरान दोनों बार कन्हैया पर जिस तरह हमला किया गया उसी को आधार बनाकर कन्हैया ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी जमानत याचिका में कहा कि वो बेगुनाह है। उसका कहना था कि कोर्ट ने उसे दोषी साबित नहीं किया है, फिर भी कोर्ट परिसर में मौजूद भीड़ उसे इस तरह मारने के लिए तैयार थी, जैसे वो दोषी साबित हो चुका हो। ऐसे में उसने संभावना जताई है कि जेल में भी उस पर हमले हो सकते हैं। इसके साथ ही कन्हैया ने अपनी याचिका में ये भी कहा है कि पुलिस को अब उसकी हिरासत की जरूरत नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उसके खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिले हैं, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए। इससे पहले दिल्ली पुलिस कमिश्नर ये कह चुके हैं कि वो कन्हैया की जमानत का विरोध नहीं करेंगे। हालांकि कल यानी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने कहा कि पुलिस पर जमानत का विरोध न करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में किसी को भी कोई बयान देने में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट आज को पटियाला हाउस कोर्ट में कन्हैया की पेशी के दौरान हुई घटनाओं पर भी सुनवाई करेगा। अदालत ने कन्हैया और जेएनयू से जुड़े लोगों की पिटाई और मीडिया से बदसलूकी को गंभीरता से लेते हुए छः वरिष्ठ वकीलों की टीम को वहां भेजकर स्थिति के बारे में जानकारी लेने को कहा था।
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नामजोशी मई 2019 से दैनिक भास्कर ग्रुप की रेडियो डिवीजन में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
इंडिया टुडे ग्रुप में Tak चैनल्स के सीओओ विवेक गौड़ का कहना है कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस न्यूज ऐप के सालाना 44 मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर्स और नौ बिलियन व्यूज हैं।
'मर्जर की प्रक्रिया को पूरा होने में कम से कम 8 से 10 महीने लग जाएंगे। ' यह बात 'जी एंटरटेनेमंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' (ZEEL) एमडी और सीईओ पुनीत गोयनका ने कही।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (SPNI) और जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने SPNI के साथ ZEEL के मर्जर को लेकर एग्रीमेंट पर साइन कर दिए हैं।
'सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' और 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' के बोर्ड की ओर से विलय को मंजूरी मिल गई है। दोनों कंपनियों ने इस डील से जुड़े करार पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
विश्व गौरव 'टाइम्स ग्रुप' के नवभारत टाइम्स (ऑनलाइन) में करीब साढ़े छह साल से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
मीडिया, मार्केटिंग व एडवर्टाइजिंग से जुड़ी खबरों की दुनिया में एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप ने अपने 21 साल पूरे कर लिए है। इस मौके का जश्न मनाते हुए ग्रुप ने अपने ब्रैंड को एक नई पहचान दी है।
इस पदोन्नति से पहले विरल जानी कंपनी में फरवरी 2018 से सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (Investment Operations) के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
'इंपैक्ट पर्सन ऑफ द ईयर 2020' अवॉर्ड समारोह की मुख्य अतिथि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी थीं। इस मौके पर उनका भाषण छोटा मगर काफी सारगर्भित और प्रभावशाली था।
एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप ने गुरुवार को 'आईटीसी लिमिटेड' (ITC Limited) के चेयरमैन और एमडी संजीव पुरी को को 'इंपैक्ट पर्सन ऑफ द ईयर 2020' अवॉर्ड से सम्मानित किया।
एक्संचेंज4मीडिया समूह द्वारा मीडिया, मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान देने और ऊंचाइयों को छूने वालों को हर साल यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड दिया जाता है।
वरिष्ठ पत्रकार कृष्णा प्रसाद ने 'द हिंदू' (THE HINDU) ग्रुप में एडिटोरियल ऑफिसर का पद छोड़ने का फैसला लिया है।
देविका श्रेयम्स कुमार सीधे कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर एम. वी श्रेयम्स कुमार को रिपोर्ट करेंगी।
इस नई पारी को शुरू करने से पहले वह करीब साढ़े चार साल से लखनऊ में 'नवभारत टाइम्स' के डिजिटल वेंचर से जुड़े हुए थे।
'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' और 'सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया' के साथ प्रस्तावित मर्जर में सबकुछ ट्रैक पर है और यह प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
एक्सचेंज4मीडिया समूह द्वारा हाल ही में नई दिल्ली में 'ई4एम डिजिटल 40 अंडर 40 कॉन्फ्रेंस' (e4m Digital 40 under 40 conference) का आयोजन किया गया।
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नामजोशी मई दो हज़ार उन्नीस से दैनिक भास्कर ग्रुप की रेडियो डिवीजन में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इंडिया टुडे ग्रुप में Tak चैनल्स के सीओओ विवेक गौड़ का कहना है कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस न्यूज ऐप के सालाना चौंतालीस मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर्स और नौ बिलियन व्यूज हैं। 'मर्जर की प्रक्रिया को पूरा होने में कम से कम आठ से दस महीने लग जाएंगे। ' यह बात 'जी एंटरटेनेमंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' एमडी और सीईओ पुनीत गोयनका ने कही। सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने SPNI के साथ ZEEL के मर्जर को लेकर एग्रीमेंट पर साइन कर दिए हैं। 'सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' और 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' के बोर्ड की ओर से विलय को मंजूरी मिल गई है। दोनों कंपनियों ने इस डील से जुड़े करार पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। विश्व गौरव 'टाइम्स ग्रुप' के नवभारत टाइम्स में करीब साढ़े छह साल से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। मीडिया, मार्केटिंग व एडवर्टाइजिंग से जुड़ी खबरों की दुनिया में एक्सचेंजचारमीडिया ग्रुप ने अपने इक्कीस साल पूरे कर लिए है। इस मौके का जश्न मनाते हुए ग्रुप ने अपने ब्रैंड को एक नई पहचान दी है। इस पदोन्नति से पहले विरल जानी कंपनी में फरवरी दो हज़ार अट्ठारह से सीनियर वाइस प्रेजिडेंट के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। 'इंपैक्ट पर्सन ऑफ द ईयर दो हज़ार बीस' अवॉर्ड समारोह की मुख्य अतिथि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी थीं। इस मौके पर उनका भाषण छोटा मगर काफी सारगर्भित और प्रभावशाली था। एक्सचेंजचारमीडिया ग्रुप ने गुरुवार को 'आईटीसी लिमिटेड' के चेयरमैन और एमडी संजीव पुरी को को 'इंपैक्ट पर्सन ऑफ द ईयर दो हज़ार बीस' अवॉर्ड से सम्मानित किया। एक्संचेंजचारमीडिया समूह द्वारा मीडिया, मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान देने और ऊंचाइयों को छूने वालों को हर साल यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड दिया जाता है। वरिष्ठ पत्रकार कृष्णा प्रसाद ने 'द हिंदू' ग्रुप में एडिटोरियल ऑफिसर का पद छोड़ने का फैसला लिया है। देविका श्रेयम्स कुमार सीधे कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर एम. वी श्रेयम्स कुमार को रिपोर्ट करेंगी। इस नई पारी को शुरू करने से पहले वह करीब साढ़े चार साल से लखनऊ में 'नवभारत टाइम्स' के डिजिटल वेंचर से जुड़े हुए थे। 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' और 'सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया' के साथ प्रस्तावित मर्जर में सबकुछ ट्रैक पर है और यह प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। एक्सचेंजचारमीडिया समूह द्वारा हाल ही में नई दिल्ली में 'ईचारएम डिजिटल चालीस अंडर चालीस कॉन्फ्रेंस' का आयोजन किया गया।
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भारत सरकार ने देशभर के किसानों के लिए एक बड़ी राहत दी है. दरअसल, खेत में किसानों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल फर्टिलाइजर्स को कम करने के लिए एक नई योजना PM PRANAM (पीएम प्रमोशन ऑफ अल्टरनेटिव न्यूट्रिशियंस फॉर एग्रीकल्चर मैनेजमेंट योजना) को सरकार जल्द ही शुरू करने वाली है.
आपको बता दें कि प्रस्तावित योजना का मुख्य उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर सब्सिडी (Subsidy on chemical fertilizers) के बोझ को कम से कम करने का लक्ष्य है. एक रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में केमिकल फर्टिलाइजर्स पर सब्सिडी का आंकड़ा 2. 25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है.
देखा जाए, तो जो पिछले वित्त वर्ष से भी लगभग 39 प्रतिशत अधिक हो सकता है. बता दें कि सरकार को केमिकल फर्टिलाइजर्स पर सब्सिडी (Subsidy on Chemical Fertilizers) पर करीब 1. 62 लाख करोड़ रुपये तक खर्च करने पड़ते थे. इस बोझ से बचने के लिए ही सरकार यह स्कीम लेकर आ रही है.
'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की इस योजना का कोई भी अलग बजट नहीं तय किया जाएगा. वित्तपोषित के लिए फर्टिलाइजर्स डिपार्टमेंट (Fertilizers Department) के तहत संचालित योजनाओं के मौजूदा फर्टिलाइजर सब्सिडी की बचत की जाएगी. यह भी बताया जा रहा है कि योजना की 50 प्रतिशत बचत सब्सिडी को राज्य को अनुदान के तौर पर दिया जाएगा.
वहीं यह भी कहा जा रहा है कि योजना का 70 प्रतिशत वैकल्पिक उर्वरकों के तकनीकी अपनाने व वैकल्पिक रूप से संपत्ति निर्माण के लिए भी इस्तेमाल में किया जाएगा. बाकी बची राशि को किसानों, पंचायतों, किसान उत्पादक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों की मदद के लिए उपयोग में लाया जाएगा.
मिली जानकारी के अनुसार, पीएम प्रणाम योजना को लेकर केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय के कई बड़े अधिकारियों के द्वारा विचार किया गया है. इस दौरान सरकार के अधिकारियों को रबी अभियान के लिए कृषि पर राष्ट्रीय सम्मेलन के समय प्रस्तावित योजना की जानकारी दी.
बता दें कि यह सम्मेलन 7 सितंबर 2022 को आयोजित किया गया था. कई चर्चाओं व संबंधित विभागों के विचारों के बाद ही इस योजना का मसौदा तैयार किया गया है. जो पूरी तरह से देश के किसानों के लिए लाभदायक है.
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भारत सरकार ने देशभर के किसानों के लिए एक बड़ी राहत दी है. दरअसल, खेत में किसानों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल फर्टिलाइजर्स को कम करने के लिए एक नई योजना PM PRANAM को सरकार जल्द ही शुरू करने वाली है. आपको बता दें कि प्रस्तावित योजना का मुख्य उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर सब्सिडी के बोझ को कम से कम करने का लक्ष्य है. एक रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में केमिकल फर्टिलाइजर्स पर सब्सिडी का आंकड़ा दो. पच्चीस लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है. देखा जाए, तो जो पिछले वित्त वर्ष से भी लगभग उनतालीस प्रतिशत अधिक हो सकता है. बता दें कि सरकार को केमिकल फर्टिलाइजर्स पर सब्सिडी पर करीब एक. बासठ लाख करोड़ रुपये तक खर्च करने पड़ते थे. इस बोझ से बचने के लिए ही सरकार यह स्कीम लेकर आ रही है. 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की इस योजना का कोई भी अलग बजट नहीं तय किया जाएगा. वित्तपोषित के लिए फर्टिलाइजर्स डिपार्टमेंट के तहत संचालित योजनाओं के मौजूदा फर्टिलाइजर सब्सिडी की बचत की जाएगी. यह भी बताया जा रहा है कि योजना की पचास प्रतिशत बचत सब्सिडी को राज्य को अनुदान के तौर पर दिया जाएगा. वहीं यह भी कहा जा रहा है कि योजना का सत्तर प्रतिशत वैकल्पिक उर्वरकों के तकनीकी अपनाने व वैकल्पिक रूप से संपत्ति निर्माण के लिए भी इस्तेमाल में किया जाएगा. बाकी बची राशि को किसानों, पंचायतों, किसान उत्पादक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों की मदद के लिए उपयोग में लाया जाएगा. मिली जानकारी के अनुसार, पीएम प्रणाम योजना को लेकर केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय के कई बड़े अधिकारियों के द्वारा विचार किया गया है. इस दौरान सरकार के अधिकारियों को रबी अभियान के लिए कृषि पर राष्ट्रीय सम्मेलन के समय प्रस्तावित योजना की जानकारी दी. बता दें कि यह सम्मेलन सात सितंबर दो हज़ार बाईस को आयोजित किया गया था. कई चर्चाओं व संबंधित विभागों के विचारों के बाद ही इस योजना का मसौदा तैयार किया गया है. जो पूरी तरह से देश के किसानों के लिए लाभदायक है.
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उपनाम Matvienko, रूसियों के बहुमतउत्तरी राजधानी के पूर्व गवर्नर और फेडरेशन काउंसिल के वर्तमान प्रमुख, वैलेंटाइना इवानोव्ना के साथ सहयोगी। हालांकि, उसका बेटा सर्गेई एक व्यक्ति कम प्रसिद्ध नहीं है। 9 0 के दशक में वह आपराधिक मामले में शामिल था। बाद में, जवान आदमी ने अपना मन उठा लिया और अपना खुद का व्यवसाय प्रचार करना शुरू किया, जिसके लिए वह अरबपति बन गया। वित्तीय सफलता के अलावा, सर्गेई Matvienko सुंदर महिलाओं के साथ अपने उपन्यासों के लिए प्रसिद्ध हो गया। पहले, उनकी पत्नी एक लोकप्रिय गायक ज़रा थीं, और आज उनका विवाह एक पूर्व फैशन मॉडल जूलिया जैतेसेवा से हुआ है।
भविष्य में अरबपति का जन्म 5 मई, 1 9 73 को हुआ था। वैलेंटाइना इवानोव्ना और व्लादिमीर Vasilyevich Matvienko के परिवार में। उनका जन्म लेनिनग्राद (अब सेंट पीटर्सबर्ग) में हुआ था। सेर्गेई के माता-पिता लेनिनग्राद केमिकल और फार्मास्युटिकल इंस्टीट्यूट के स्नातक हैं। उनकी मां पहले से ही एक सक्रिय सार्वजनिक आंकड़ा था। स्नातक स्तर की पढ़ाई के कुछ समय बाद, वह विभाग के प्रमुख बने, और 6 साल बाद, कोम्सोमोल जिला समिति के पहले सचिव। सेर्गेई के पिता लेनिनग्राद मिलिटरी मेडिकल एकेडमी में एक शिक्षक के रूप में काम करते थे। यह स्पष्ट है कि इस तरह के परिवार में एक बच्चा अत्यधिक शिक्षित व्यक्ति में उगाया जाना चाहिए था। तो यह हुआ। दो उच्च शिक्षा सर्गेई Matvienko प्राप्त किया। वैलेंटाइना इवानोव्ना के बेटे में लोकप्रिय विशिष्टताओं में डिप्लोमा हैंः "अंतर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र" और "वित्त और क्रेडिट"।
सर्गेई ने 1 99 2 में अपना कामकाजी करियर शुरू किया। अगस्तिन निवेश चेक फंड में प्रबंधक की स्थिति से। 1 99 5 में वहां 3 साल तक काम करने के बाद, युवा फाइनेंसर ने अपनी कंपनी, उत्तरी फेरी की स्थापना की। इसके बाद सीमित देयता कंपनी जोड्ची की स्थापना हुई। थोड़ी देर के लिए Matvienko सर्गेई Vladimirovich बैंकों "Inkombank" और "Lenvneshtorg" के एक कर्मचारी के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। 2003 में, उन्हें बैंक सेंट पीटर्सबर्ग के उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। यह पोस्ट 2010 तक वैलेंटाइना Matvienko का बेटा था। 2004 के साथ, सर्गेई Vladimirovich एक और बड़े वित्तीय संस्थान, Vneshtorgbank के उपाध्यक्ष के रूप में सेवा करना शुरू किया। 2 वर्षों के बाद, वह बंद संयुक्त स्टॉक कंपनी वीटीबी-कैपिटल के संस्थापक बने। निवेश परियोजनाओं और वेंशतोर्गबैंक की रीयल एस्टेट स्थापित कंपनी के प्रबंधन में आई थी। 2010 में, उन्हें वीटीबी विकास के सामान्य निदेशक पद के लिए नियुक्त किया गया था। अन्य चीजों के अलावा, Matvienko इम्पीरिया का मालिक है, जो 28 सहायक कंपनियों का मालिक है और सफाई, निर्माण, मीडिया बाजार और परिवहन के क्षेत्र में गतिविधियों में लगी हुई है। 2012 के वसंत में, सर्गेई व्लादिमीरविच ने एक आशाजनक घरेलू ईस्पोर्ट्स परियोजना मास्को पांच की देखरेख शुरू कर दी।
2011 में Matvienko रूस में सबसे अमीर लोगों की सूची में प्रवेश किया। घरेलू प्रकाशन वित्त द्वारा संकलित अरबपति रेटिंग के मुताबिक, 500 संभव सूची में उन्हें 486 स्थान पर रखा गया था। विशेषज्ञों ने लगभग 5 बिलियन रूबल पर अपनी संपत्ति का अनुमान लगाया है।
आज सर्गेई Matvienko है, जिसका फोटोइस लेख में प्रस्तुत एक सफल व्यवसायी है। उनके साथ रूस और विदेशों में उच्च रैंकिंग अधिकारी हैं, उनकी राय के लिए दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फाइनेंसरों की बात सुनी। हालांकि, अपने युवाओं में, वैलेंटाइना इवानोव्ना के बेटे को कानून के साथ समस्याएं थीं, जो उनके करियर के विकास को प्रभावित करने के सर्वोत्तम तरीके से नहीं हो सकती थीं। 1 99 4 में, युवा Matvienko को आपराधिक मामले में फटकार और लूटपाट शामिल था। उस समय सेर्गेई ने ऑगस्टिन फाउंडेशन में काम किया, और उनकी प्रसिद्ध मां ने माल्टा में आरएफ राजदूत के पद पर कब्जा कर लिया। कई सालों तक, मामले की सामग्री को प्राइइंग आंखों से छुपाया जा सकता था, लेकिन दो हज़ारवां की शुरुआत में, वे पत्रकारों के हाथों में गिर गए और जनता के लिए सुलभ हो गए। सूचना रिसाव सेंट पीटर्सबर्ग के गवर्नर के रूप में वैलेंटाइना Matvienko की नियुक्ति के दौरान हुआ और राजनेता के रूप में अपने करियर की शुरुआत हो सकती है। तब महिला अपनी उच्च स्थिति को पकड़ने में सक्षम थी, लेकिन उसके बेटे का गैरकानूनी कृत्य कई बातचीत के लिए एक विषय बन गया।
यह कैसे हुआ कि शिक्षितएक सभ्य परिवार से अमीर आदमी अपराध में शामिल था? प्रोटोकॉल के मुताबिक, सेर्गेई मात्विएनको और उनके दोस्त येवगेनी मुरिन (सेंट पीटर्सबर्ग राज्य के प्रसिद्ध विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध प्रोफेसर के बेटे) ने गंभीर रूप से अपने दोस्त ए रोझकोव को हराया, और फिर कर्ज के कारण अपनी बहुमूल्य चीजों को दूर करने की कोशिश की, जिसे वह वापस नहीं आया। अपराध के तथ्य पर एक आपराधिक मामला शुरू किया गया था। उन्हें जेल में 4 से 10 साल की धमकी दी गई थी।
सर्गेई Matvienko करने के दिन गिरफ्तार किया गया थाअपराध, हालांकि तीन दिनों के बाद उन्हें घर छोड़ने की इजाजत दी गई, एक लिखित उपक्रम लेना, जगह छोड़ने के लिए नहीं। लड़के ने आंशिक रूप से अपने अपराध को स्वीकार किया। Matvienko हिरासत केंद्र से रिहा होने के बाद मुरिन को हिरासत में ले लिया गया था। हालांकि, अपराधियों में से कोई भी रोझकोव को पात्र सजा नहीं मिली थी। 1 99 4 में, मामला लड़कों के उच्च रैंकिंग माता-पिता के हस्तक्षेप के बिना जाहिर है, नहीं। इसके तुरंत बाद, मात्विएनको ने अपने स्वयं के व्यवसाय में उतरे, उत्तरी फेयरी कंपनी की स्थापना की, और उनके सहयोगी मुरिन, सुधार के लिए सेना में गए।
2004 में सर्गेई Matvienko धर्मनिरपेक्ष इतिहास के नायक में बदल गया। एक व्यापारी के निजी जीवन पर एक युवा गायक जारिफ मोगॉयन के विवाह के संबंध में मीडिया में चर्चा की गई, जिसे मंच नाम ज़ारा के तहत जाना जाता है। सर्गेई ने एक फैशन शो में एक लड़की को देखा, और उसकी विदेशी सुंदरता ने उसे तुरंत आकर्षित किया। सख्त पूर्वी परंपराओं में उगाया गया, ज़रा लंबे समय से Matvienko का सहारा नहीं था। अपने पक्ष को जीतने के लिए, आदमी ने उसे खूबसूरती से देखभाल करना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने सभी प्रदर्शनों में भाग लिया, फूलों के अपने सुरुचिपूर्ण गुलदस्ते दिए। लेकिन ज़रा को अपने जीवन में जाने के लिए जल्दी नहीं था। फिर व्यापारी ने तोड़ने का फैसला किया और गायक को एक प्रस्ताव दिया। लड़की ने उसे उत्तर दिया। ज़रा के माता-पिता ने अपनी बेटी के मंगेतर को पसंद किया, और उन्होंने युवाओं को आशीर्वाद दिया। वैलेंटाइना Matvienko उसके बेटे की पसंद को मंजूरी मिलने के बाद, शादी के लिए तैयारी शुरू हुई।
शादी का जोड़ा दो महीने बाद हुआ थासगाई के बाद। Matvienko जोर देकर कहा कि वह और ज़रा न केवल चित्रित किया गया था, बल्कि चर्च में शादी भी की थी। इस कारण से, लड़की ने रूढ़िवादी अपनाया। हमने सेंट पीटर्सबर्ग में मैरिजेज नंबर 1 के पैलेस में युवा लोगों से विवाह किया, और कज़ान कैथेड्रल में विवाह किया। दुल्हन और दुल्हन एक गाड़ी में शहर के चारों ओर चले गए। नवविवाहितों के सभी रिश्तेदारों और दोस्तों को शानदार उत्सव में आमंत्रित किया गया था।
गायक और व्यवसायी की शादी असली हो गई हैसामाजिक घटना हालांकि, पति-पत्नी सांस्कृतिक शिक्षा में बहुत अलग हो गए और साथ में साथ नहीं मिल सके। इसके अलावा, बैंकर की युवा पत्नी एक पॉप स्टार के करियर में रुचि रखती थी, न कि वारिस का जन्म। सर्गेई के दोस्तों का मानना था कि, एक प्रभावशाली और अमीर आदमी से शादी करने के बाद, ज़रा अपने वित्तीय समर्थन पर गिन रहा था। हालांकि, Matvienko अपनी पत्नी के पदोन्नति में निवेश करने के लिए जल्दी नहीं था, और शादी के तुरंत बाद, नवविवाहित गंभीर संघर्ष करना शुरू कर दिया। ज़रा और उसकी उच्चस्तरीय सास की महत्वाकांक्षाओं से रोमांचित नहीं था।
विवाह जोड़े के डेढ़ साल बादटूट गया ज़ारा और सर्गेई Matvienko के तलाक पिछले 500 हजार डॉलर खर्च किया। वह युवा गायक द्वारा अपने पति से भुगतान के रूप में आवश्यक राशि है। वह पैसा जो उसने अपने प्रचार में निवेश किया था। तलाक के कुछ ही समय बाद, वैलेंटाइना Matvienko की पूर्व बहू आधिकारिक सर्गेई इवानोव से मुलाकात की और 2008 में उससे शादी की। ज़रा की दूसरी शादी पहले की तुलना में अधिक सफल थी। आज, जोड़े दो बेटों को लाता है और बहुत खुश दिखता है।
मैंने तलाक के बाद और पहले पति के बाद बर्बाद नहीं कियाजेरी सर्गेई Matvienko। अपने नए प्रियजन की तस्वीरें लंबे समय तक गुप्त रखी गईं और शादी से कुछ ही समय पहले मीडिया में दिखाई दीं। बैंकर की दूसरी पत्नी फिलोलॉजी के संकाय और फैशन मॉडल जूलिया जैतेसेवा का छात्र था। वह अपने चुने हुए व्यक्ति से बहुत छोटी हैः अपने भविष्य के पति के साथ अपने परिचित होने के समय, वह 20 साल से अधिक पुरानी थी। शानदार गोरा ने अपनी सुंदरता और दिमाग के साथ सर्गेई पर विजय प्राप्त की। लड़की के साथ प्यार में गिरने के बाद, Matvienko जल्द ही उसे एक प्रस्ताव बना दिया।
सेंट पीटर्सबर्ग में विवाहित युवा लोगनवंबर 2008 का अंतिम दिन। शादी के समय, जूलिया गर्भावस्था के अपने चौथे महीने में पहले ही थी। वह एक भव्य बर्फ-सफेद पोशाक में पहनी थी, जिसने गोलाकार पेट को सफलतापूर्वक छुपाया था। उत्सव में केवल पति / पत्नी के करीबी रिश्तेदारों को आमंत्रित किया गया था, और इसके तुरंत बाद, खुश नवविवाहित इटली के रोमांटिक यात्रा पर 7 दिनों तक चले गए। रूस लौटने के बाद, सर्गेई ने अपना काम शुरू किया, और उनकी पत्नी ने अर्थशास्त्र पर अपनी थीसिस की रक्षा के लिए तैयार होना शुरू कर दिया।
6 अप्रैल, 200 9 की शाम को देर हो गई एक कुलीन स्विस क्लिनिक में, सर्गेई की पत्नी यूलिया मात्विएनको ने उन्हें एक बेटी, एरिना बोर किया। इस दिन बच्चे की उपस्थिति उसकी दादी-राजनेता के लिए एक असली उपहार थी, क्योंकि 7 अप्रैल को वैलेंटाइना इवानोव्ना अपने साठवें जन्मदिन मनाने की तैयारी कर रही थीं। सेंट पीटर्सबर्ग के गवर्नर ने लंबे समय से सपना देखा था कि एकमात्र पुत्र उसे पोते या पोती देगा, और आखिरकार, उसकी इच्छा सच हो जाएगी। वैलेंटाइना Matvienko उत्तराधिकारी के जन्म पर अपने बेटे और बहू बधाई देने वाले पहले व्यक्ति में से एक था। उनके अलावा, कई हस्तियों ने युवा परिवार को अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं। लेकिन उनकी पूर्व पत्नी Matvienko सर्गेई Vladimirovich से बधाई प्राप्त नहीं किया था। ज़रा, जिसने हाल ही में दूसरी बार शादी की थी, ने पहले पति के जीवन में खुशीपूर्ण घटना को नजरअंदाज कर दिया।
सर्गेई और यूलिया के पारिवारिक जीवन का विवरणMatvienko आज विज्ञापन नहीं है। एक व्यापारी की दूसरी पत्नी एक गैर-सार्वजनिक व्यक्ति बन गई, इसलिए फैशन पार्टियों में उसे देखना लगभग अवास्तविक है एक युवा महिला का उच्च जीवन थोड़ा हित है। वह अपनी बेटी और घर को बढ़ाने में व्यस्त है, जो उसके प्रभावशाली पति-बैंकर की तरह है।
सर्गेई Matvienko की जीवनी में बहुत कुछ शामिल हैअपने जीवन से उत्सुक तथ्यों। उदाहरण के लिए, प्रसिद्ध व्यापारी ने उत्तरी राजधानी के मुख्य आकर्षणों में से एक, शानदार यूसुपोव पैलेस में अपना 35 वां जन्मदिन मनाया। बैंकर ने जन्मदिन समारोह के लिए लगभग 60 हजार यूरो खर्च किए।
मां की उच्च स्थिति के बावजूद, सर्गेई Matvienko सेना से दूर शर्मिंदा नहीं था। दो साल तक उन्होंने फिनलैंड के साथ सीमा पर रूसी सीमावर्ती सैनिकों में सेवा की।
सर्गेई Matvienko के बारे में इंटरनेट पर बहुत अफवाहें चला जाता है। ज़रा से तलाक के बाद, एक साइट पर एक झूठी जानकारी दिखाई दी जो कि हेरोइन के अत्यधिक मात्रा से मर गई थी।
वैलेंटाइना Matvienko के बेटे को पढ़ने के लिए प्यार करता है। व्यापार यात्रा में वह हमेशा 5-6 किताबें लेता है। साहित्य के अलावा, सर्गेई Vladimirovich शास्त्रीय संगीत का शौक है। उनके पसंदीदा संगीतकार चोपिन, बीथोवेन और मोजार्ट हैं।
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उपनाम Matvienko, रूसियों के बहुमतउत्तरी राजधानी के पूर्व गवर्नर और फेडरेशन काउंसिल के वर्तमान प्रमुख, वैलेंटाइना इवानोव्ना के साथ सहयोगी। हालांकि, उसका बेटा सर्गेई एक व्यक्ति कम प्रसिद्ध नहीं है। नौ शून्य के दशक में वह आपराधिक मामले में शामिल था। बाद में, जवान आदमी ने अपना मन उठा लिया और अपना खुद का व्यवसाय प्रचार करना शुरू किया, जिसके लिए वह अरबपति बन गया। वित्तीय सफलता के अलावा, सर्गेई Matvienko सुंदर महिलाओं के साथ अपने उपन्यासों के लिए प्रसिद्ध हो गया। पहले, उनकी पत्नी एक लोकप्रिय गायक ज़रा थीं, और आज उनका विवाह एक पूर्व फैशन मॉडल जूलिया जैतेसेवा से हुआ है। भविष्य में अरबपति का जन्म पाँच मई, एक नौ तिहत्तर को हुआ था। वैलेंटाइना इवानोव्ना और व्लादिमीर Vasilyevich Matvienko के परिवार में। उनका जन्म लेनिनग्राद में हुआ था। सेर्गेई के माता-पिता लेनिनग्राद केमिकल और फार्मास्युटिकल इंस्टीट्यूट के स्नातक हैं। उनकी मां पहले से ही एक सक्रिय सार्वजनिक आंकड़ा था। स्नातक स्तर की पढ़ाई के कुछ समय बाद, वह विभाग के प्रमुख बने, और छः साल बाद, कोम्सोमोल जिला समिति के पहले सचिव। सेर्गेई के पिता लेनिनग्राद मिलिटरी मेडिकल एकेडमी में एक शिक्षक के रूप में काम करते थे। यह स्पष्ट है कि इस तरह के परिवार में एक बच्चा अत्यधिक शिक्षित व्यक्ति में उगाया जाना चाहिए था। तो यह हुआ। दो उच्च शिक्षा सर्गेई Matvienko प्राप्त किया। वैलेंटाइना इवानोव्ना के बेटे में लोकप्रिय विशिष्टताओं में डिप्लोमा हैंः "अंतर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र" और "वित्त और क्रेडिट"। सर्गेई ने एक निन्यानवे दो में अपना कामकाजी करियर शुरू किया। अगस्तिन निवेश चेक फंड में प्रबंधक की स्थिति से। एक निन्यानवे पाँच में वहां तीन साल तक काम करने के बाद, युवा फाइनेंसर ने अपनी कंपनी, उत्तरी फेरी की स्थापना की। इसके बाद सीमित देयता कंपनी जोड्ची की स्थापना हुई। थोड़ी देर के लिए Matvienko सर्गेई Vladimirovich बैंकों "Inkombank" और "Lenvneshtorg" के एक कर्मचारी के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। दो हज़ार तीन में, उन्हें बैंक सेंट पीटर्सबर्ग के उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। यह पोस्ट दो हज़ार दस तक वैलेंटाइना Matvienko का बेटा था। दो हज़ार चार के साथ, सर्गेई Vladimirovich एक और बड़े वित्तीय संस्थान, Vneshtorgbank के उपाध्यक्ष के रूप में सेवा करना शुरू किया। दो वर्षों के बाद, वह बंद संयुक्त स्टॉक कंपनी वीटीबी-कैपिटल के संस्थापक बने। निवेश परियोजनाओं और वेंशतोर्गबैंक की रीयल एस्टेट स्थापित कंपनी के प्रबंधन में आई थी। दो हज़ार दस में, उन्हें वीटीबी विकास के सामान्य निदेशक पद के लिए नियुक्त किया गया था। अन्य चीजों के अलावा, Matvienko इम्पीरिया का मालिक है, जो अट्ठाईस सहायक कंपनियों का मालिक है और सफाई, निर्माण, मीडिया बाजार और परिवहन के क्षेत्र में गतिविधियों में लगी हुई है। दो हज़ार बारह के वसंत में, सर्गेई व्लादिमीरविच ने एक आशाजनक घरेलू ईस्पोर्ट्स परियोजना मास्को पांच की देखरेख शुरू कर दी। दो हज़ार ग्यारह में Matvienko रूस में सबसे अमीर लोगों की सूची में प्रवेश किया। घरेलू प्रकाशन वित्त द्वारा संकलित अरबपति रेटिंग के मुताबिक, पाँच सौ संभव सूची में उन्हें चार सौ छियासी स्थान पर रखा गया था। विशेषज्ञों ने लगभग पाँच बिलियन रूबल पर अपनी संपत्ति का अनुमान लगाया है। आज सर्गेई Matvienko है, जिसका फोटोइस लेख में प्रस्तुत एक सफल व्यवसायी है। उनके साथ रूस और विदेशों में उच्च रैंकिंग अधिकारी हैं, उनकी राय के लिए दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फाइनेंसरों की बात सुनी। हालांकि, अपने युवाओं में, वैलेंटाइना इवानोव्ना के बेटे को कानून के साथ समस्याएं थीं, जो उनके करियर के विकास को प्रभावित करने के सर्वोत्तम तरीके से नहीं हो सकती थीं। एक निन्यानवे चार में, युवा Matvienko को आपराधिक मामले में फटकार और लूटपाट शामिल था। उस समय सेर्गेई ने ऑगस्टिन फाउंडेशन में काम किया, और उनकी प्रसिद्ध मां ने माल्टा में आरएफ राजदूत के पद पर कब्जा कर लिया। कई सालों तक, मामले की सामग्री को प्राइइंग आंखों से छुपाया जा सकता था, लेकिन दो हज़ारवां की शुरुआत में, वे पत्रकारों के हाथों में गिर गए और जनता के लिए सुलभ हो गए। सूचना रिसाव सेंट पीटर्सबर्ग के गवर्नर के रूप में वैलेंटाइना Matvienko की नियुक्ति के दौरान हुआ और राजनेता के रूप में अपने करियर की शुरुआत हो सकती है। तब महिला अपनी उच्च स्थिति को पकड़ने में सक्षम थी, लेकिन उसके बेटे का गैरकानूनी कृत्य कई बातचीत के लिए एक विषय बन गया। यह कैसे हुआ कि शिक्षितएक सभ्य परिवार से अमीर आदमी अपराध में शामिल था? प्रोटोकॉल के मुताबिक, सेर्गेई मात्विएनको और उनके दोस्त येवगेनी मुरिन ने गंभीर रूप से अपने दोस्त ए रोझकोव को हराया, और फिर कर्ज के कारण अपनी बहुमूल्य चीजों को दूर करने की कोशिश की, जिसे वह वापस नहीं आया। अपराध के तथ्य पर एक आपराधिक मामला शुरू किया गया था। उन्हें जेल में चार से दस साल की धमकी दी गई थी। सर्गेई Matvienko करने के दिन गिरफ्तार किया गया थाअपराध, हालांकि तीन दिनों के बाद उन्हें घर छोड़ने की इजाजत दी गई, एक लिखित उपक्रम लेना, जगह छोड़ने के लिए नहीं। लड़के ने आंशिक रूप से अपने अपराध को स्वीकार किया। Matvienko हिरासत केंद्र से रिहा होने के बाद मुरिन को हिरासत में ले लिया गया था। हालांकि, अपराधियों में से कोई भी रोझकोव को पात्र सजा नहीं मिली थी। एक निन्यानवे चार में, मामला लड़कों के उच्च रैंकिंग माता-पिता के हस्तक्षेप के बिना जाहिर है, नहीं। इसके तुरंत बाद, मात्विएनको ने अपने स्वयं के व्यवसाय में उतरे, उत्तरी फेयरी कंपनी की स्थापना की, और उनके सहयोगी मुरिन, सुधार के लिए सेना में गए। दो हज़ार चार में सर्गेई Matvienko धर्मनिरपेक्ष इतिहास के नायक में बदल गया। एक व्यापारी के निजी जीवन पर एक युवा गायक जारिफ मोगॉयन के विवाह के संबंध में मीडिया में चर्चा की गई, जिसे मंच नाम ज़ारा के तहत जाना जाता है। सर्गेई ने एक फैशन शो में एक लड़की को देखा, और उसकी विदेशी सुंदरता ने उसे तुरंत आकर्षित किया। सख्त पूर्वी परंपराओं में उगाया गया, ज़रा लंबे समय से Matvienko का सहारा नहीं था। अपने पक्ष को जीतने के लिए, आदमी ने उसे खूबसूरती से देखभाल करना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने सभी प्रदर्शनों में भाग लिया, फूलों के अपने सुरुचिपूर्ण गुलदस्ते दिए। लेकिन ज़रा को अपने जीवन में जाने के लिए जल्दी नहीं था। फिर व्यापारी ने तोड़ने का फैसला किया और गायक को एक प्रस्ताव दिया। लड़की ने उसे उत्तर दिया। ज़रा के माता-पिता ने अपनी बेटी के मंगेतर को पसंद किया, और उन्होंने युवाओं को आशीर्वाद दिया। वैलेंटाइना Matvienko उसके बेटे की पसंद को मंजूरी मिलने के बाद, शादी के लिए तैयारी शुरू हुई। शादी का जोड़ा दो महीने बाद हुआ थासगाई के बाद। Matvienko जोर देकर कहा कि वह और ज़रा न केवल चित्रित किया गया था, बल्कि चर्च में शादी भी की थी। इस कारण से, लड़की ने रूढ़िवादी अपनाया। हमने सेंट पीटर्सबर्ग में मैरिजेज नंबर एक के पैलेस में युवा लोगों से विवाह किया, और कज़ान कैथेड्रल में विवाह किया। दुल्हन और दुल्हन एक गाड़ी में शहर के चारों ओर चले गए। नवविवाहितों के सभी रिश्तेदारों और दोस्तों को शानदार उत्सव में आमंत्रित किया गया था। गायक और व्यवसायी की शादी असली हो गई हैसामाजिक घटना हालांकि, पति-पत्नी सांस्कृतिक शिक्षा में बहुत अलग हो गए और साथ में साथ नहीं मिल सके। इसके अलावा, बैंकर की युवा पत्नी एक पॉप स्टार के करियर में रुचि रखती थी, न कि वारिस का जन्म। सर्गेई के दोस्तों का मानना था कि, एक प्रभावशाली और अमीर आदमी से शादी करने के बाद, ज़रा अपने वित्तीय समर्थन पर गिन रहा था। हालांकि, Matvienko अपनी पत्नी के पदोन्नति में निवेश करने के लिए जल्दी नहीं था, और शादी के तुरंत बाद, नवविवाहित गंभीर संघर्ष करना शुरू कर दिया। ज़रा और उसकी उच्चस्तरीय सास की महत्वाकांक्षाओं से रोमांचित नहीं था। विवाह जोड़े के डेढ़ साल बादटूट गया ज़ारा और सर्गेई Matvienko के तलाक पिछले पाँच सौ हजार डॉलर खर्च किया। वह युवा गायक द्वारा अपने पति से भुगतान के रूप में आवश्यक राशि है। वह पैसा जो उसने अपने प्रचार में निवेश किया था। तलाक के कुछ ही समय बाद, वैलेंटाइना Matvienko की पूर्व बहू आधिकारिक सर्गेई इवानोव से मुलाकात की और दो हज़ार आठ में उससे शादी की। ज़रा की दूसरी शादी पहले की तुलना में अधिक सफल थी। आज, जोड़े दो बेटों को लाता है और बहुत खुश दिखता है। मैंने तलाक के बाद और पहले पति के बाद बर्बाद नहीं कियाजेरी सर्गेई Matvienko। अपने नए प्रियजन की तस्वीरें लंबे समय तक गुप्त रखी गईं और शादी से कुछ ही समय पहले मीडिया में दिखाई दीं। बैंकर की दूसरी पत्नी फिलोलॉजी के संकाय और फैशन मॉडल जूलिया जैतेसेवा का छात्र था। वह अपने चुने हुए व्यक्ति से बहुत छोटी हैः अपने भविष्य के पति के साथ अपने परिचित होने के समय, वह बीस साल से अधिक पुरानी थी। शानदार गोरा ने अपनी सुंदरता और दिमाग के साथ सर्गेई पर विजय प्राप्त की। लड़की के साथ प्यार में गिरने के बाद, Matvienko जल्द ही उसे एक प्रस्ताव बना दिया। सेंट पीटर्सबर्ग में विवाहित युवा लोगनवंबर दो हज़ार आठ का अंतिम दिन। शादी के समय, जूलिया गर्भावस्था के अपने चौथे महीने में पहले ही थी। वह एक भव्य बर्फ-सफेद पोशाक में पहनी थी, जिसने गोलाकार पेट को सफलतापूर्वक छुपाया था। उत्सव में केवल पति / पत्नी के करीबी रिश्तेदारों को आमंत्रित किया गया था, और इसके तुरंत बाद, खुश नवविवाहित इटली के रोमांटिक यात्रा पर सात दिनों तक चले गए। रूस लौटने के बाद, सर्गेई ने अपना काम शुरू किया, और उनकी पत्नी ने अर्थशास्त्र पर अपनी थीसिस की रक्षा के लिए तैयार होना शुरू कर दिया। छः अप्रैल, दो सौ नौ की शाम को देर हो गई एक कुलीन स्विस क्लिनिक में, सर्गेई की पत्नी यूलिया मात्विएनको ने उन्हें एक बेटी, एरिना बोर किया। इस दिन बच्चे की उपस्थिति उसकी दादी-राजनेता के लिए एक असली उपहार थी, क्योंकि सात अप्रैल को वैलेंटाइना इवानोव्ना अपने साठवें जन्मदिन मनाने की तैयारी कर रही थीं। सेंट पीटर्सबर्ग के गवर्नर ने लंबे समय से सपना देखा था कि एकमात्र पुत्र उसे पोते या पोती देगा, और आखिरकार, उसकी इच्छा सच हो जाएगी। वैलेंटाइना Matvienko उत्तराधिकारी के जन्म पर अपने बेटे और बहू बधाई देने वाले पहले व्यक्ति में से एक था। उनके अलावा, कई हस्तियों ने युवा परिवार को अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं। लेकिन उनकी पूर्व पत्नी Matvienko सर्गेई Vladimirovich से बधाई प्राप्त नहीं किया था। ज़रा, जिसने हाल ही में दूसरी बार शादी की थी, ने पहले पति के जीवन में खुशीपूर्ण घटना को नजरअंदाज कर दिया। सर्गेई और यूलिया के पारिवारिक जीवन का विवरणMatvienko आज विज्ञापन नहीं है। एक व्यापारी की दूसरी पत्नी एक गैर-सार्वजनिक व्यक्ति बन गई, इसलिए फैशन पार्टियों में उसे देखना लगभग अवास्तविक है एक युवा महिला का उच्च जीवन थोड़ा हित है। वह अपनी बेटी और घर को बढ़ाने में व्यस्त है, जो उसके प्रभावशाली पति-बैंकर की तरह है। सर्गेई Matvienko की जीवनी में बहुत कुछ शामिल हैअपने जीवन से उत्सुक तथ्यों। उदाहरण के लिए, प्रसिद्ध व्यापारी ने उत्तरी राजधानी के मुख्य आकर्षणों में से एक, शानदार यूसुपोव पैलेस में अपना पैंतीस वां जन्मदिन मनाया। बैंकर ने जन्मदिन समारोह के लिए लगभग साठ हजार यूरो खर्च किए। मां की उच्च स्थिति के बावजूद, सर्गेई Matvienko सेना से दूर शर्मिंदा नहीं था। दो साल तक उन्होंने फिनलैंड के साथ सीमा पर रूसी सीमावर्ती सैनिकों में सेवा की। सर्गेई Matvienko के बारे में इंटरनेट पर बहुत अफवाहें चला जाता है। ज़रा से तलाक के बाद, एक साइट पर एक झूठी जानकारी दिखाई दी जो कि हेरोइन के अत्यधिक मात्रा से मर गई थी। वैलेंटाइना Matvienko के बेटे को पढ़ने के लिए प्यार करता है। व्यापार यात्रा में वह हमेशा पाँच-छः किताबें लेता है। साहित्य के अलावा, सर्गेई Vladimirovich शास्त्रीय संगीत का शौक है। उनके पसंदीदा संगीतकार चोपिन, बीथोवेन और मोजार्ट हैं।
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मैनपुरी। दिवस (Encroachment) के मौके पर तहसील सदर ने जन शिकायते सुनने के दौरान जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह के सम्मुख नगला भत निःसर्वेश कुमार ने गाव के ही विजेन्द्र सिंह, गंगा सिंह, राजीव व अश्वनी द्वारा चकरोड संख्या-407 पर अवैध कब्जे कर आवागमन (Encroachment) अवरुद्ध करने की शिकायत प्रार्थना पत्र देकर की।
डीएम ने कहा कि सार्वजनिक भूमि यथा चकरोड चारागाह तालाब, विद्यालय की भूमि आदि पर कहीं भी अनाधिकृत कब्जा रहे क्षेत्रीय लेखपाल के हलके में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा न स्टे चकरोड़ पर अनाधिकृत कब्जा करने की शिकायतें मिल रही है, वहां राजस्व पुलिस टीम मौके पर जाकर पैमाइश के उपरांत चकरोड को अतिक्रमण मुक्त कराये और चकरोड पर कब्जा करने वालों के विरूद्ध कार्यवाही की जाये।
जन सुनवाई के दौरान ग्राम छतारी निजगतपाल सिंह ने खतौनी में गलत नाम को सही कराने की मांग पर असंतोष व्यक्त करते हुये कहा कि खतौनी में गलत नाम दर्ज करने की शिकायत भी निरंतर मिल रही है। उन्होने निर्देश देते हुए कहा कि नाम की प्रविष्टि करते समय पूरी सतर्कता बरती जाये, कही भी इन्द्राज करते समय गलत नाम फीड न किया जाये, रजस्टार कानूनगो सुनिश्चित करें।
श्री सिंह ने उपस्थित अधिकारियों से कहा कि इस दिवस पर प्राप्त शिकायतों का समय पर निस्तारण करे शिकायती प्रार्थना पत्र किसी भी कार्यालय में अकारण लम्बित न रखे, यदि प्रार्थना पत्र अनिस्तारित पाया गया तो सम्बन्धित अधिकारी पर कार्यवाही होगी। उन्होंने कहा कि इस दिवस पर प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध गुणवत्तापरक निस्तारण शासन की सर्वोच् प्राथमिकताओं में है और इसकी समीक्षा निरंतर शासन स्तर से की जा रही है, इसलिए सभी अधिकारी सवदनशील रहकर संपूर्ण समाधान दिवस पर प्राप्त होने वाली शिकायतों का व्यक्तिगत जिम्मेदारी मान निराकरण करे।
गदंगी से निजात दिलाने, नगला हिम्मत निवासिनी ललिता देवी ने नाली के किनारे गाव के ही सुभाष चन्द्र यादव द्वारा अवैध रूप से किये जा रहे शौचालय का निर्माण कार्य रुकवाने ग्राम खुशालपुर निवासिनी सरनोवा ने पट्टे की भूमि की पैमाइश कराये जाने की माग अपने शिकायती प्रार्थना पत्रों के माध्यम से की, जिसे संबंधित अधिकारियों को पृष्ठांकित कर निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापरक निस्तारण करने हेतु आदेशित किया।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित, एसडीएम सदर नवोदित्ता शर्मा, सीएमओ पी. सी. सिह, वानिकी एस एन मौर्य, परियोजना निदेशक के के सिंह, तहसीलदार सदर राज कुमार, उप कृषि निदेशक डीवी सिंह, डीपीआर ओ अवनीश चन्द आदि उपस्थित रहे।
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मैनपुरी। दिवस के मौके पर तहसील सदर ने जन शिकायते सुनने के दौरान जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह के सम्मुख नगला भत निःसर्वेश कुमार ने गाव के ही विजेन्द्र सिंह, गंगा सिंह, राजीव व अश्वनी द्वारा चकरोड संख्या-चार सौ सात पर अवैध कब्जे कर आवागमन अवरुद्ध करने की शिकायत प्रार्थना पत्र देकर की। डीएम ने कहा कि सार्वजनिक भूमि यथा चकरोड चारागाह तालाब, विद्यालय की भूमि आदि पर कहीं भी अनाधिकृत कब्जा रहे क्षेत्रीय लेखपाल के हलके में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा न स्टे चकरोड़ पर अनाधिकृत कब्जा करने की शिकायतें मिल रही है, वहां राजस्व पुलिस टीम मौके पर जाकर पैमाइश के उपरांत चकरोड को अतिक्रमण मुक्त कराये और चकरोड पर कब्जा करने वालों के विरूद्ध कार्यवाही की जाये। जन सुनवाई के दौरान ग्राम छतारी निजगतपाल सिंह ने खतौनी में गलत नाम को सही कराने की मांग पर असंतोष व्यक्त करते हुये कहा कि खतौनी में गलत नाम दर्ज करने की शिकायत भी निरंतर मिल रही है। उन्होने निर्देश देते हुए कहा कि नाम की प्रविष्टि करते समय पूरी सतर्कता बरती जाये, कही भी इन्द्राज करते समय गलत नाम फीड न किया जाये, रजस्टार कानूनगो सुनिश्चित करें। श्री सिंह ने उपस्थित अधिकारियों से कहा कि इस दिवस पर प्राप्त शिकायतों का समय पर निस्तारण करे शिकायती प्रार्थना पत्र किसी भी कार्यालय में अकारण लम्बित न रखे, यदि प्रार्थना पत्र अनिस्तारित पाया गया तो सम्बन्धित अधिकारी पर कार्यवाही होगी। उन्होंने कहा कि इस दिवस पर प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध गुणवत्तापरक निस्तारण शासन की सर्वोच् प्राथमिकताओं में है और इसकी समीक्षा निरंतर शासन स्तर से की जा रही है, इसलिए सभी अधिकारी सवदनशील रहकर संपूर्ण समाधान दिवस पर प्राप्त होने वाली शिकायतों का व्यक्तिगत जिम्मेदारी मान निराकरण करे। गदंगी से निजात दिलाने, नगला हिम्मत निवासिनी ललिता देवी ने नाली के किनारे गाव के ही सुभाष चन्द्र यादव द्वारा अवैध रूप से किये जा रहे शौचालय का निर्माण कार्य रुकवाने ग्राम खुशालपुर निवासिनी सरनोवा ने पट्टे की भूमि की पैमाइश कराये जाने की माग अपने शिकायती प्रार्थना पत्रों के माध्यम से की, जिसे संबंधित अधिकारियों को पृष्ठांकित कर निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापरक निस्तारण करने हेतु आदेशित किया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित, एसडीएम सदर नवोदित्ता शर्मा, सीएमओ पी. सी. सिह, वानिकी एस एन मौर्य, परियोजना निदेशक के के सिंह, तहसीलदार सदर राज कुमार, उप कृषि निदेशक डीवी सिंह, डीपीआर ओ अवनीश चन्द आदि उपस्थित रहे।
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मंडी -कीरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना के तहत मंडी जिला से जुड़े मामलों के समाधान के लिए गठित जिला स्तरीय शिकायत निवारण समिति द्वारा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने की। उन्होंने फोरलेन प्रभावितों की समस्याओं व शिकायतों की सुनवाई की और संबंधित अधिकारियों को समाधान के लिए जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों की समस्याओं के जल्द व स्थायी समाधान के लिए यह समिति हर महीने बैठक करेगी। बैठक में फोरलेन प्रभावितों की सामूहिक समस्याओं से जुड़े विभिन्न मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई । इस दौरान फोरलेन संघर्ष समिति व संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने लोगों की समस्याएं रखीं। बैठक में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी श्रवण मांटा, कार्यकारी एसडीएम सदर संजय कुमार, एसडीएम बल्ह डॉ. आशीष शर्मा, एसडीएम सुंदरनगर राहुल चौहान, एनएचएआई के अधिकारी, फोरलेन संघर्ष समिति (नागचला से बजौरा) के अध्यक्ष ब्रिजेश महंत, फोरलेन संयुक्त संघर्ष समिति (किरतपुर से नेरचौक) के अध्यक्ष जोगिंदर वालिया, फोरलेन संघर्ष समिति के महासचिव धर्मेंद्र ठाकुर, व्यापार मंडल के सचिव विजय ठाकुर सहित फोरलेन संघर्ष समिति के अन्य पदाधिकारी पंडोह से पवन कुमार, जड़ोल से राजकुमार, महंत चौधरी, निखिल शर्मा सहित अन्य सदस्य व परियोजना में कार्यरत कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने फोरलेन परियोजना के चलते प्रभावित क्षेत्रों में धूल मिट्टी उड़ने से लोगों को हो रही परेशानी का संज्ञान लेते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों को इन क्षेत्रों में नियमित अंतराल पर पर्याप्त मात्रा में पानी का छिड़काव करवाने की उपयुक्त व्यवस्था करने को कहा। निर्देश दिए कि एनएचएआई काम में लगी कंपनियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करंे कि फोरलेन परियोजना के पूरे स्ट्रेच पर आबादी वाले इलाकों में लोगों को धूल मिट्टी उड़ने से होने वाली परेशानी से निजात मिले।
उपायुक्त ने एनएचएआई अधिकारियों को परियोजना के तहत जिला में कहां-कहां ओवर ब्रिज और बस ठहराव बनने हैं, इसे लेकर बनाई विस्तृत कार्ययोजना को जिला प्रशासन से साझा करने को कहा। उन्होंने कहा कि इस कार्ययोजना को संघर्ष समिति से भी साझा किया जाएगा, ताकि इसे लेकर सदस्यों के सुझाव मिल सकें। यदि कार्ययोजना से कहीं लोगों को अधिक परेशानी लगे तो इसमें जनहित के अनुरूप बदलाव के लिए एनएचएआई को कहा जाएगा। उन्होंने फोरलेन संघर्ष समिति के पदाधिकारियों से कहा कि उन सभी मामलों, जिनमें लोगों की जमीन ले ली गई है और उसका मुआवजा भी उन्हें मिल चुका है, लेकिन उस पर खड़े भवन का मूल्यांकन नहीं किया गया, जिस कारण उन्हें उसका मुआवजा नहीं मिला, उनकी सूची प्रशासन को सौंपें।
उपायुक्त ने संबंधित एसडीएम को अधिकारियों सहित अपने क्षेत्र में प्रत्येक फोरलेन परियोजना प्रभावित पंचायत में जाकर स्थानीय प्रधान व अन्य पदाधिकारियों व प्रभावित लोगों से बैठक करने के निर्देश दिए। कहा कि बैठक में परियोजना के तहत वहां पुलिया निर्माण कहां प्रस्तावित है, और लोगों की राय में वे कहां बननी चाहिए, इसे लेकर लोगों के सुझाव लें व रिपोर्ट तैयार कर उन्हें सौंपें । एसडीएम प्रभावित पंचायतों मंें लोगों के घरों के रास्ते, हैंडपंप, नालियां, कुहलें, कुंए बंद होने इत्यादि से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी जमीनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। उन्होंने एनएचएआई अधिकारियों को यह तय बनाने को कहा कि मौजूदा सड़क के रखरखाव के दृष्टिगत जहां फोरलेन के लिए कटिंग की गई है वहां जल निकासी के लिए सड़क किनारे नालियां बनाई जाएं।
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मंडी -कीरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना के तहत मंडी जिला से जुड़े मामलों के समाधान के लिए गठित जिला स्तरीय शिकायत निवारण समिति द्वारा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने की। उन्होंने फोरलेन प्रभावितों की समस्याओं व शिकायतों की सुनवाई की और संबंधित अधिकारियों को समाधान के लिए जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों की समस्याओं के जल्द व स्थायी समाधान के लिए यह समिति हर महीने बैठक करेगी। बैठक में फोरलेन प्रभावितों की सामूहिक समस्याओं से जुड़े विभिन्न मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई । इस दौरान फोरलेन संघर्ष समिति व संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने लोगों की समस्याएं रखीं। बैठक में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी श्रवण मांटा, कार्यकारी एसडीएम सदर संजय कुमार, एसडीएम बल्ह डॉ. आशीष शर्मा, एसडीएम सुंदरनगर राहुल चौहान, एनएचएआई के अधिकारी, फोरलेन संघर्ष समिति के अध्यक्ष ब्रिजेश महंत, फोरलेन संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष जोगिंदर वालिया, फोरलेन संघर्ष समिति के महासचिव धर्मेंद्र ठाकुर, व्यापार मंडल के सचिव विजय ठाकुर सहित फोरलेन संघर्ष समिति के अन्य पदाधिकारी पंडोह से पवन कुमार, जड़ोल से राजकुमार, महंत चौधरी, निखिल शर्मा सहित अन्य सदस्य व परियोजना में कार्यरत कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर ने फोरलेन परियोजना के चलते प्रभावित क्षेत्रों में धूल मिट्टी उड़ने से लोगों को हो रही परेशानी का संज्ञान लेते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को इन क्षेत्रों में नियमित अंतराल पर पर्याप्त मात्रा में पानी का छिड़काव करवाने की उपयुक्त व्यवस्था करने को कहा। निर्देश दिए कि एनएचएआई काम में लगी कंपनियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करंे कि फोरलेन परियोजना के पूरे स्ट्रेच पर आबादी वाले इलाकों में लोगों को धूल मिट्टी उड़ने से होने वाली परेशानी से निजात मिले। उपायुक्त ने एनएचएआई अधिकारियों को परियोजना के तहत जिला में कहां-कहां ओवर ब्रिज और बस ठहराव बनने हैं, इसे लेकर बनाई विस्तृत कार्ययोजना को जिला प्रशासन से साझा करने को कहा। उन्होंने कहा कि इस कार्ययोजना को संघर्ष समिति से भी साझा किया जाएगा, ताकि इसे लेकर सदस्यों के सुझाव मिल सकें। यदि कार्ययोजना से कहीं लोगों को अधिक परेशानी लगे तो इसमें जनहित के अनुरूप बदलाव के लिए एनएचएआई को कहा जाएगा। उन्होंने फोरलेन संघर्ष समिति के पदाधिकारियों से कहा कि उन सभी मामलों, जिनमें लोगों की जमीन ले ली गई है और उसका मुआवजा भी उन्हें मिल चुका है, लेकिन उस पर खड़े भवन का मूल्यांकन नहीं किया गया, जिस कारण उन्हें उसका मुआवजा नहीं मिला, उनकी सूची प्रशासन को सौंपें। उपायुक्त ने संबंधित एसडीएम को अधिकारियों सहित अपने क्षेत्र में प्रत्येक फोरलेन परियोजना प्रभावित पंचायत में जाकर स्थानीय प्रधान व अन्य पदाधिकारियों व प्रभावित लोगों से बैठक करने के निर्देश दिए। कहा कि बैठक में परियोजना के तहत वहां पुलिया निर्माण कहां प्रस्तावित है, और लोगों की राय में वे कहां बननी चाहिए, इसे लेकर लोगों के सुझाव लें व रिपोर्ट तैयार कर उन्हें सौंपें । एसडीएम प्रभावित पंचायतों मंें लोगों के घरों के रास्ते, हैंडपंप, नालियां, कुहलें, कुंए बंद होने इत्यादि से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी जमीनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। उन्होंने एनएचएआई अधिकारियों को यह तय बनाने को कहा कि मौजूदा सड़क के रखरखाव के दृष्टिगत जहां फोरलेन के लिए कटिंग की गई है वहां जल निकासी के लिए सड़क किनारे नालियां बनाई जाएं।
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मैंने यहाँ तक सुना है कि सियासी इन्तख़ाबात में लीडरों ने मेरे नाम पर वोट हासिल किये और यह कैसी बदकिस्मती है कि मैं खुद अपने नाम से कोई फायदा न उठा सका। फिल्मी सनअत ने भी मुझे न बख़्शा और मेरी ज़िन्दगी को कुछ इस तरह फ़िल्माया कि ये फिल्में "बाक्स ऑफिस हिट हो गई। ऐसे घटिया मोकालमे जो मैं ज़िन्दगी भर अपनी ज़बान से अदा न कर सका वह मेरी ज़बान से कहलवाये गये। मेरी बीवी को फ़िल्मों में इस कदर हसीन दिखाया गया है कि अगर वह सचमुच इतनी हसीन होती तो मेरे हालाते-ज़िन्दगी मुख़्तलिफ़ होते। कव्वालों ने मेरी ग़ज़लों का कत्ले आम किया। मुझे गली-गली रुसवा किया गया और मैं ज़ब्त करता रहा। मगर अब पानी सर से ऊँचा हो गया है, अब तक मेरी जो रुसवाई हुई है उसकी तलाफ़ी होनी चाहिये वरना में इज़ालए- हैसियते- उरफी का मुकदमा दायर
मिर्ज़ा ग़ालिब ने अपना सहाफती बयान ख़त्म किया और निढाल होकर कुर्सी पर गिर गये। मियाँ मेहदी मजरुह ने फौरन उन्हें पानी पिलाया और पंखा झलने लगे। जब मिर्जा गालिब को होश आया तो मीर मेहदी ने अख़बारी नुमाइन्दों से कहा कि वह अगर कोई सवाल करना चाहते हों तो कर सकते हैं। अख़बारी नुमाइन्दों ने जो पहले ही से इस मौके की ताक में बैठे हुए थे मिर्ज़ा ग़ालिब पर सवालात की बौछार कर दी।
एक सहाफ़ी ने पूछा "अब्र क्या चीज़ है हवा क्या है?"
दूसरे सहाफ़ी ने पूछा "काबे किस मुँह को जाओगे गालिब?" तीसरे सहाफ़ी ने पूछा "नक़्श फरयादी है किस की शोख़ीये तहरीर
चौथे सहाफ़ी ने पूछा "आह का किसने असर देखा है?"
छठे ने पूछा "मौत से पहले आदमी ग़म से निजात पाये क्यों?" मिर्ज़ा ग़ालिब ने अचानक इतने सारे सवालात को सुनकर कहाः आता है अभी देखिये क्या-क्या मेरे आगे
"दोस्तो! मुझसे आसान सवालात पूछिये, आप मुझसे ऐसे सवालात क्यों पूछते हैं जिनके जवाबात मैं खुद अपनी ज़िन्दगी में दे न सका। मेरे ही सवालों के ज़रिये मुझे लाजवाब करने की साज़िश अच्छी नहीं।" 1. पारम्परिक हैसियत को ख़त्म करना
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मैंने यहाँ तक सुना है कि सियासी इन्तख़ाबात में लीडरों ने मेरे नाम पर वोट हासिल किये और यह कैसी बदकिस्मती है कि मैं खुद अपने नाम से कोई फायदा न उठा सका। फिल्मी सनअत ने भी मुझे न बख़्शा और मेरी ज़िन्दगी को कुछ इस तरह फ़िल्माया कि ये फिल्में "बाक्स ऑफिस हिट हो गई। ऐसे घटिया मोकालमे जो मैं ज़िन्दगी भर अपनी ज़बान से अदा न कर सका वह मेरी ज़बान से कहलवाये गये। मेरी बीवी को फ़िल्मों में इस कदर हसीन दिखाया गया है कि अगर वह सचमुच इतनी हसीन होती तो मेरे हालाते-ज़िन्दगी मुख़्तलिफ़ होते। कव्वालों ने मेरी ग़ज़लों का कत्ले आम किया। मुझे गली-गली रुसवा किया गया और मैं ज़ब्त करता रहा। मगर अब पानी सर से ऊँचा हो गया है, अब तक मेरी जो रुसवाई हुई है उसकी तलाफ़ी होनी चाहिये वरना में इज़ालए- हैसियते- उरफी का मुकदमा दायर मिर्ज़ा ग़ालिब ने अपना सहाफती बयान ख़त्म किया और निढाल होकर कुर्सी पर गिर गये। मियाँ मेहदी मजरुह ने फौरन उन्हें पानी पिलाया और पंखा झलने लगे। जब मिर्जा गालिब को होश आया तो मीर मेहदी ने अख़बारी नुमाइन्दों से कहा कि वह अगर कोई सवाल करना चाहते हों तो कर सकते हैं। अख़बारी नुमाइन्दों ने जो पहले ही से इस मौके की ताक में बैठे हुए थे मिर्ज़ा ग़ालिब पर सवालात की बौछार कर दी। एक सहाफ़ी ने पूछा "अब्र क्या चीज़ है हवा क्या है?" दूसरे सहाफ़ी ने पूछा "काबे किस मुँह को जाओगे गालिब?" तीसरे सहाफ़ी ने पूछा "नक़्श फरयादी है किस की शोख़ीये तहरीर चौथे सहाफ़ी ने पूछा "आह का किसने असर देखा है?" छठे ने पूछा "मौत से पहले आदमी ग़म से निजात पाये क्यों?" मिर्ज़ा ग़ालिब ने अचानक इतने सारे सवालात को सुनकर कहाः आता है अभी देखिये क्या-क्या मेरे आगे "दोस्तो! मुझसे आसान सवालात पूछिये, आप मुझसे ऐसे सवालात क्यों पूछते हैं जिनके जवाबात मैं खुद अपनी ज़िन्दगी में दे न सका। मेरे ही सवालों के ज़रिये मुझे लाजवाब करने की साज़िश अच्छी नहीं।" एक. पारम्परिक हैसियत को ख़त्म करना
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स्वाभिमान इंडिया ने बुजुर्गों के साथ रविवार को वनभोज मनाया। बाबूडीह विवाह भवन प्रांगण में आयोजन हुआ। योग, क्विज प्रतियोगिता व गायन कार्यक्रम हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नेता देवाशीष पाल, दर्पण कुमार, पार्षद अशोक पाल, संजीव श्रीवास्तव, शशांक, धनंजय सिंह मौजूद थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के रोशन रॉय, उपेंद्र पांडे, चंदन सिंह, विनायक मिश्रा, विनीत उपाध्याय, विकास कुमार, संतोष कुमार सिंह, योग शिक्षिका अल्ला कुमारी, अनु राय, मनीषा कुमारी, कृति कुमारी, रक्षा अस्थाना आदि का योगदान रहा।
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स्वाभिमान इंडिया ने बुजुर्गों के साथ रविवार को वनभोज मनाया। बाबूडीह विवाह भवन प्रांगण में आयोजन हुआ। योग, क्विज प्रतियोगिता व गायन कार्यक्रम हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नेता देवाशीष पाल, दर्पण कुमार, पार्षद अशोक पाल, संजीव श्रीवास्तव, शशांक, धनंजय सिंह मौजूद थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के रोशन रॉय, उपेंद्र पांडे, चंदन सिंह, विनायक मिश्रा, विनीत उपाध्याय, विकास कुमार, संतोष कुमार सिंह, योग शिक्षिका अल्ला कुमारी, अनु राय, मनीषा कुमारी, कृति कुमारी, रक्षा अस्थाना आदि का योगदान रहा।
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डिस्कवरी चैनल के मशहूर शो 'MAN VS WILD' के होस्ट बेयर ग्रिल्स एक बार फिर से भारत के जंगलों में ट्रैकिंग करते हुए नजर आने वाले हैं। इस बार उनका ठिकाना एशियाटिक शेरों के लिए पहचाना जाने वाला गुजरात का गिर जंगल हो सकता है। खास बात यह है कि इस एपिसोड में ग्रिल्स के साथ अमिताभ बच्चन नजर आ सकते हैं।
गुजरात सरकार के एक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, गिर में शूटिंग के लिए गुजरात सरकार से परमिशन मांगी गई है। ग्रिल्स इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत और अक्षय कुमार के साथ सफारी करते हुए नजर आ चुके हैं।
पीएम मोदी के साथ जिम कॉर्बेट में ग्रिल्स ने एपिसोड किया था।
ग्रिल्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में शूटिंग की थी। इस एपिसोड का प्रसारण अगस्त 2019 में हुआ था, जिसे रिकॉर्ड TRP मिली थी। इसके बाद 'इन टू द वाइल्ड' सीरीज के अंतर्गत ग्रिल्स ने सुपरस्टार रजनीकांत और अक्षय कुमार के साथ कर्नाटक के बांदीपुर नेशनल पार्क में शूटिंग की थी। रजनीकांत के साथ ग्रिल्स का एपिसोड का 23 मार्च 2020 और अक्षय वाला एपिसोड 11 सितंबर 2020 को ब्रॉडकास्ट हुआ था।
भारत में ग्रिल्स ने अभी तक टाइगर रिजर्व में 3 एपिसोड की शूटिंग की है। अब ग्रिल्स चाहते हैं कि भारत में उनके चौथे एपिसोड की शूटिंग एशियाटिक लॉयन के लिए पहचाने जाने वाले गुजरात के गिर जंगल में हो। ग्रिल्स इस एपिसोड में अमिताभ को अपना मेहमान बनाना चाहते हैं। ग्रिल्स के भारत में शूट हुए तीनों एपिसोडों को देश ही नहीं, विदेशों में भी जबर्दस्त TRP मिली थी।
गुजरात सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भास्कर को जानकारी दी कि तमाम औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। गुजरात वन विभाग की आखिरी अनुमति मिलने के बाद ग्रिल्स मार्च में शूटिंग करने आ सकते हैं। ग्रिल्स की टीम ने शूटिंग के लिए लोकेशन की तलाश भी शुरू कर दी है।
अफसर के मुताबिक, इस एपिसोड में ग्रिल्स अमिताभ को मेहमान बनाना चाहते हैं। अमिताभ को तकलीफ न हो, इसके लिए ग्रिल्स की टीम 45 मिनट की यह शूटिंग डेढ़ दिन में ही खत्म करने पर होमवर्क कर रही है।
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डिस्कवरी चैनल के मशहूर शो 'MAN VS WILD' के होस्ट बेयर ग्रिल्स एक बार फिर से भारत के जंगलों में ट्रैकिंग करते हुए नजर आने वाले हैं। इस बार उनका ठिकाना एशियाटिक शेरों के लिए पहचाना जाने वाला गुजरात का गिर जंगल हो सकता है। खास बात यह है कि इस एपिसोड में ग्रिल्स के साथ अमिताभ बच्चन नजर आ सकते हैं। गुजरात सरकार के एक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, गिर में शूटिंग के लिए गुजरात सरकार से परमिशन मांगी गई है। ग्रिल्स इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत और अक्षय कुमार के साथ सफारी करते हुए नजर आ चुके हैं। पीएम मोदी के साथ जिम कॉर्बेट में ग्रिल्स ने एपिसोड किया था। ग्रिल्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में शूटिंग की थी। इस एपिसोड का प्रसारण अगस्त दो हज़ार उन्नीस में हुआ था, जिसे रिकॉर्ड TRP मिली थी। इसके बाद 'इन टू द वाइल्ड' सीरीज के अंतर्गत ग्रिल्स ने सुपरस्टार रजनीकांत और अक्षय कुमार के साथ कर्नाटक के बांदीपुर नेशनल पार्क में शूटिंग की थी। रजनीकांत के साथ ग्रिल्स का एपिसोड का तेईस मार्च दो हज़ार बीस और अक्षय वाला एपिसोड ग्यारह सितंबर दो हज़ार बीस को ब्रॉडकास्ट हुआ था। भारत में ग्रिल्स ने अभी तक टाइगर रिजर्व में तीन एपिसोड की शूटिंग की है। अब ग्रिल्स चाहते हैं कि भारत में उनके चौथे एपिसोड की शूटिंग एशियाटिक लॉयन के लिए पहचाने जाने वाले गुजरात के गिर जंगल में हो। ग्रिल्स इस एपिसोड में अमिताभ को अपना मेहमान बनाना चाहते हैं। ग्रिल्स के भारत में शूट हुए तीनों एपिसोडों को देश ही नहीं, विदेशों में भी जबर्दस्त TRP मिली थी। गुजरात सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भास्कर को जानकारी दी कि तमाम औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। गुजरात वन विभाग की आखिरी अनुमति मिलने के बाद ग्रिल्स मार्च में शूटिंग करने आ सकते हैं। ग्रिल्स की टीम ने शूटिंग के लिए लोकेशन की तलाश भी शुरू कर दी है। अफसर के मुताबिक, इस एपिसोड में ग्रिल्स अमिताभ को मेहमान बनाना चाहते हैं। अमिताभ को तकलीफ न हो, इसके लिए ग्रिल्स की टीम पैंतालीस मिनट की यह शूटिंग डेढ़ दिन में ही खत्म करने पर होमवर्क कर रही है।
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कांग्रेस महासचिव एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज द्वारा कथित कोयला घोटाले के मामले में उन्हें दी गई खुली बहस की चुनौती को स्वीकार करते हुए उनसे इसके लिए समय और स्थान तय करने का अनुरोध किया है.
सिंह ने एक बयान में कहा कि लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज हैं. उन्हें इस मामले में सदन में बहस करनी चाहिए, लेकिन वह वहां तो बहस नहीं कर रही हैं और उनसे लोकसभा के बाहर बहस करना चाहती हैं. वह इसके लिए उनके आभारी हैं.
उन्होंने कहा कि सुषमा जब और जहां चाहें वह उनसे बहस करने को तैयार हैं. समय और स्थान वह स्वयं तय कर लें.
उन्होंने आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा कि लोकसभा में विपक्ष की नेता तो बहस के लिए तैयार हैं, लेकिन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस मामले में चुप क्यों हैं.
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कांग्रेस महासचिव एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज द्वारा कथित कोयला घोटाले के मामले में उन्हें दी गई खुली बहस की चुनौती को स्वीकार करते हुए उनसे इसके लिए समय और स्थान तय करने का अनुरोध किया है. सिंह ने एक बयान में कहा कि लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज हैं. उन्हें इस मामले में सदन में बहस करनी चाहिए, लेकिन वह वहां तो बहस नहीं कर रही हैं और उनसे लोकसभा के बाहर बहस करना चाहती हैं. वह इसके लिए उनके आभारी हैं. उन्होंने कहा कि सुषमा जब और जहां चाहें वह उनसे बहस करने को तैयार हैं. समय और स्थान वह स्वयं तय कर लें. उन्होंने आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा कि लोकसभा में विपक्ष की नेता तो बहस के लिए तैयार हैं, लेकिन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस मामले में चुप क्यों हैं.
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मिथिला हिन्दी न्यूज :- जनता दल यूनाइटेड नेता और बिहार की नीतीश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने शुक्रवार को बड़ा दावा किया है. खुद को हिन्दू राजपूत बताते हुए उनके पूर्वजों द्वारा धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने की बात कही है। आज भी अपने राजपूत जाति के रिश्तेदारों के यहां आना-जाना है। उनसे नजदीकियों की बात मंत्री ने स्वीकार की है।
मंत्री जमा खान कुछ दिनों से जिला प्रभारी होने के नाते से सीतामढ़ी जिले में थे जब वो सीतामढ़ी से लोट रहे थे तो हाजीपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान विवादास्पद बयान देते हुए कहा मैं राजपूत था, मैं हिन्दू था। उस दौरान हमारे पूर्वज जयराम सिंह और भगवान सिंह थे। भगवान सिंह ने इस्लाम स्वीकार कर लिया और मुसलमान हो गए, यही खानदान हम लोगों का है। हमारे बगल के गांव में जयराम सिंह का खानदान है। हमलोगों के यहां आज भी आना-जाना है।
आपको बता दें कि मंत्री जमा खान बिहार के चैनपुर से विधायक हैं और बहुजन समाज पार्टी से होते हुए जदयू में शामिल हुए और मंत्री बने हैं. नीतीश सरकार के अल्पसंख्यक चेहरे वाले जमा खान को बिहार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय का जिम्मा मिला है.
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मिथिला हिन्दी न्यूज :- जनता दल यूनाइटेड नेता और बिहार की नीतीश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने शुक्रवार को बड़ा दावा किया है. खुद को हिन्दू राजपूत बताते हुए उनके पूर्वजों द्वारा धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने की बात कही है। आज भी अपने राजपूत जाति के रिश्तेदारों के यहां आना-जाना है। उनसे नजदीकियों की बात मंत्री ने स्वीकार की है। मंत्री जमा खान कुछ दिनों से जिला प्रभारी होने के नाते से सीतामढ़ी जिले में थे जब वो सीतामढ़ी से लोट रहे थे तो हाजीपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान विवादास्पद बयान देते हुए कहा मैं राजपूत था, मैं हिन्दू था। उस दौरान हमारे पूर्वज जयराम सिंह और भगवान सिंह थे। भगवान सिंह ने इस्लाम स्वीकार कर लिया और मुसलमान हो गए, यही खानदान हम लोगों का है। हमारे बगल के गांव में जयराम सिंह का खानदान है। हमलोगों के यहां आज भी आना-जाना है। आपको बता दें कि मंत्री जमा खान बिहार के चैनपुर से विधायक हैं और बहुजन समाज पार्टी से होते हुए जदयू में शामिल हुए और मंत्री बने हैं. नीतीश सरकार के अल्पसंख्यक चेहरे वाले जमा खान को बिहार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय का जिम्मा मिला है.
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बगहा में बारिश शुरू होते ही VTR से जानवरों का निकलकर रिहायशी क्षेत्र में पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। जरा सोचिए आप बाइक की सवारी कर रहे हों। उसी बाइक के किसी हिस्से में छुप कर अजगर आराम फरमा रहा हो। इसके बाद आपकी क्या हालत होगी।
कुछ ऐसा ही नजारा वाल्मीकिनगर टंकी बाजार के पास देखने को मिला। जहां स्कूटी में अजगर आराम फरमा रहा था। इसका वीडियो सामने आया है। 4 फीट लंबा अजगर स्कूटी की साइड मिरर में लिपटा था, जैसे ही गाड़ी का मालिक स्टार्ट करने गया, अजगर हेडलाइट में घुस गया। ये सब देखकर ऑनर की चीख निकल पड़ी।
इंडो-नेपाल बॉर्डर के पास वाल्मीकिनगर टंकी बाजार के पास रविवार को करीब 4 फीट का लंबा अजगर एक व्यक्ति के स्कूटी की हेड लाइट के भीतर घुसकर आराम फरमा रहा था। अजगर पर नजर पड़ते ही स्कूटी ऑनर मयंक के होश उड़ गए। वह तत्काल स्कूटी छोड़कर भागा। लोगों को इसकी जानकारी दी। फिर वनकर्मियों को सूचित किया गया।
मयंक ने बताया कि स्कूटी को घर से बाहर निकाला। स्टार्ट करने का सोच ही रहा था कि साइड मिरर के पास अजगर दिख गया। वह डर से चिल्लाने लगा। फिर स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों की सूचना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
अजगर पूरी तरह से स्कूटी की हेडलाइट में घुस गया था। वनकर्मियों ने पहले बाइक मिस्त्री को बुलाकर स्कूटी का हेडलाइट खुलवाई। फिर अजगर को कड़ी मशक्कत के बाद निकाला गया। वनकर्मियों ने उसे सुरक्षित निकाल कर जंगल में छोड़ दिया। काफी देर तक लोगों की भीड़ वहां जमा रही। सभी स्कूटी में अजगर को लेकर चर्चा करते रहे।
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बगहा में बारिश शुरू होते ही VTR से जानवरों का निकलकर रिहायशी क्षेत्र में पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। जरा सोचिए आप बाइक की सवारी कर रहे हों। उसी बाइक के किसी हिस्से में छुप कर अजगर आराम फरमा रहा हो। इसके बाद आपकी क्या हालत होगी। कुछ ऐसा ही नजारा वाल्मीकिनगर टंकी बाजार के पास देखने को मिला। जहां स्कूटी में अजगर आराम फरमा रहा था। इसका वीडियो सामने आया है। चार फीट लंबा अजगर स्कूटी की साइड मिरर में लिपटा था, जैसे ही गाड़ी का मालिक स्टार्ट करने गया, अजगर हेडलाइट में घुस गया। ये सब देखकर ऑनर की चीख निकल पड़ी। इंडो-नेपाल बॉर्डर के पास वाल्मीकिनगर टंकी बाजार के पास रविवार को करीब चार फीट का लंबा अजगर एक व्यक्ति के स्कूटी की हेड लाइट के भीतर घुसकर आराम फरमा रहा था। अजगर पर नजर पड़ते ही स्कूटी ऑनर मयंक के होश उड़ गए। वह तत्काल स्कूटी छोड़कर भागा। लोगों को इसकी जानकारी दी। फिर वनकर्मियों को सूचित किया गया। मयंक ने बताया कि स्कूटी को घर से बाहर निकाला। स्टार्ट करने का सोच ही रहा था कि साइड मिरर के पास अजगर दिख गया। वह डर से चिल्लाने लगा। फिर स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों की सूचना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अजगर पूरी तरह से स्कूटी की हेडलाइट में घुस गया था। वनकर्मियों ने पहले बाइक मिस्त्री को बुलाकर स्कूटी का हेडलाइट खुलवाई। फिर अजगर को कड़ी मशक्कत के बाद निकाला गया। वनकर्मियों ने उसे सुरक्षित निकाल कर जंगल में छोड़ दिया। काफी देर तक लोगों की भीड़ वहां जमा रही। सभी स्कूटी में अजगर को लेकर चर्चा करते रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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