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म जब घनी विजयमाला से भूषित शबरासुर मारा गया था, उस युद्ध म विजयी चक्रवत्ती ने तुम्हे दो वर दिये थे, उनको तुम उनसे अब मॉग लो ।
उन दो वरो मे से, एक से राज्य को तुम अपना बना लो और दूसरे स चोटह वर्ष के लिए राम को देश छोडकर अरण्य म भेजने का उपाय करो। इससे सारी समृद्ध पृथ्वी तुम्हारे पुत्र के अनुकूल हो जायगी ।
इस प्रकार कहनेवाली मथरा का कैकेयी ने हष स गाढालिगन किया और नवरत्नो का एक हार तथा अपार द्रव्य उसे दिया। फिर कहा - मेरे अनुपम पुत्र को गरजते समुद्र से आवृत पृथ्वी का राज तुमने दिया। पृथ्वी के पति भरत की माता तुम्ही हो ।
तुमने अच्छा उपाय बताया । भरत को गरिमामय मुकुट पहनाना और राम को घने अरण्य म भेजना, ये दोनो कार्य यदि आज पूर्ण नही होगे, तो चक्रवत्त के सामने ही में अपने प्राण त्याग दंगी। अब तुम जाओ। - इस प्रकार कैकेयी ने मथरा से कहा ।
कूबरी के जाने के पश्चात् कैकेयी उत्तम पुष्पो के पर्यंक से उतर गई । अपने वर्षाकालिक मेघ के जैसे केशपाश म गॅथी पुष्पमाला के ( उन पुष्पो के ) मधु पर आसक्त भ्रमर कुल को व्याकुल करते हुए, इस प्रकार निकाल फेंका, मानो आकाश के बादलो म छिपे चन्द्रमा को ही पकडकर फेक रही हो ।
उसने अपनी प्रकाशमय मेखला को दूर फ्क दिया, जैस अपने बढनेवाले यशरूपी लता को ही उखाड रही हो । मजीर, ककण आदि को भी दूर फेक दिया । यो उसन अपने ललाट पर केशपाश के समीप मे स्थित अपूर्व तिलक को पोछ डाला, जैसे चन्द्रमा के कलक को पोछ रही हो ।
फिर, उत्तम रत्न जटित आभरणो को एक एक करके उठाकर फेंक दिया। कस्तूरीगध से मुक्त अपने कशपाश को ऐसे खोल दिया कि व लटककर धरती को छूने लगे अजनयुक्त नीलोत्पल जैसे नयनो के प्रजन को पिघलाते हुए वह अश्रु बहाने लगी एव पुष्पहीन लता के समान वरती पर लोट गई ।
केकय की पुत्री इस प्रकार ( धरती पर ) पडी रही, जैसे पीडा की अधिकता से कोई हरिणी पडी हो। नाचनेवाला कलापी थककर पडा हो, अथवा 'कमलवासिनी ( लक्ष्मी ) सीता, अयाध्या छोड़कर जानेवाली हे', यह विचार करक उस लक्ष्मी की बडी बहन ज्येष्ठा देवी' आकर वहाँ पडी हा । (१-८८)
२ जिस प्रकार लक्ष्मी को मगल देनेवाला देवी मानते है, उसी प्रकार ज्यष्ठा को अमगल का देवी मानते हैं Cयेष्ठा लक्ष्मी की बड़ी बहन माना गई है । - अनु
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म जब घनी विजयमाला से भूषित शबरासुर मारा गया था, उस युद्ध म विजयी चक्रवत्ती ने तुम्हे दो वर दिये थे, उनको तुम उनसे अब मॉग लो । उन दो वरो मे से, एक से राज्य को तुम अपना बना लो और दूसरे स चोटह वर्ष के लिए राम को देश छोडकर अरण्य म भेजने का उपाय करो। इससे सारी समृद्ध पृथ्वी तुम्हारे पुत्र के अनुकूल हो जायगी । इस प्रकार कहनेवाली मथरा का कैकेयी ने हष स गाढालिगन किया और नवरत्नो का एक हार तथा अपार द्रव्य उसे दिया। फिर कहा - मेरे अनुपम पुत्र को गरजते समुद्र से आवृत पृथ्वी का राज तुमने दिया। पृथ्वी के पति भरत की माता तुम्ही हो । तुमने अच्छा उपाय बताया । भरत को गरिमामय मुकुट पहनाना और राम को घने अरण्य म भेजना, ये दोनो कार्य यदि आज पूर्ण नही होगे, तो चक्रवत्त के सामने ही में अपने प्राण त्याग दंगी। अब तुम जाओ। - इस प्रकार कैकेयी ने मथरा से कहा । कूबरी के जाने के पश्चात् कैकेयी उत्तम पुष्पो के पर्यंक से उतर गई । अपने वर्षाकालिक मेघ के जैसे केशपाश म गॅथी पुष्पमाला के मधु पर आसक्त भ्रमर कुल को व्याकुल करते हुए, इस प्रकार निकाल फेंका, मानो आकाश के बादलो म छिपे चन्द्रमा को ही पकडकर फेक रही हो । उसने अपनी प्रकाशमय मेखला को दूर फ्क दिया, जैस अपने बढनेवाले यशरूपी लता को ही उखाड रही हो । मजीर, ककण आदि को भी दूर फेक दिया । यो उसन अपने ललाट पर केशपाश के समीप मे स्थित अपूर्व तिलक को पोछ डाला, जैसे चन्द्रमा के कलक को पोछ रही हो । फिर, उत्तम रत्न जटित आभरणो को एक एक करके उठाकर फेंक दिया। कस्तूरीगध से मुक्त अपने कशपाश को ऐसे खोल दिया कि व लटककर धरती को छूने लगे अजनयुक्त नीलोत्पल जैसे नयनो के प्रजन को पिघलाते हुए वह अश्रु बहाने लगी एव पुष्पहीन लता के समान वरती पर लोट गई । केकय की पुत्री इस प्रकार पडी रही, जैसे पीडा की अधिकता से कोई हरिणी पडी हो। नाचनेवाला कलापी थककर पडा हो, अथवा 'कमलवासिनी सीता, अयाध्या छोड़कर जानेवाली हे', यह विचार करक उस लक्ष्मी की बडी बहन ज्येष्ठा देवी' आकर वहाँ पडी हा । दो जिस प्रकार लक्ष्मी को मगल देनेवाला देवी मानते है, उसी प्रकार ज्यष्ठा को अमगल का देवी मानते हैं Cयेष्ठा लक्ष्मी की बड़ी बहन माना गई है । - अनु
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टीडीपी के राष्ट्रीय महासचिव नारा लोकेश ने अपने 4 हजार किलोमीटर के वॉकथॉन के हिस्से के रूप में शुक्रवार (62वें दिन) को 800 किलोमीटर युग गलाम पदयात्रा पूरी की। इस दौरान नारा लोकेश जगन मोहन सरकार के खिलाफ जमकर हमला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जगन मोहन सरकार का यह अंत है।
एमएलसी स्नातक चुनावों में विजय कार्ड का उपयोग करते हुए नारा लोकेश ने कहा कि राज्य में वाईएसआरसीपी शासन के अंत की शुरुआत हो गई है। लोकेश ने अपनी जनसभा में जगन सरकार को एससी, बीसी और अल्पसंख्यक विरोधी बताया। उन्होंने एससी, एसटी, बीसी और अल्पसंख्यकों को विफल करने के लिए वाईएसआरसीपी के विधायक जोनलगड्डा पद्मावती पर कटाक्ष किया।
युवा गालम पदयात्रा के दौरान टीडीपी महासचिव नारा लोकेश ने कहा कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार उनकी आवाज को जनता तक पहुंचने से नहीं रोक सकती है और वह इसका असली चेहरा उजागर करने के लिए दृढ़ हैं।
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टीडीपी के राष्ट्रीय महासचिव नारा लोकेश ने अपने चार हजार किलोमीटर के वॉकथॉन के हिस्से के रूप में शुक्रवार को आठ सौ किलोग्राममीटर युग गलाम पदयात्रा पूरी की। इस दौरान नारा लोकेश जगन मोहन सरकार के खिलाफ जमकर हमला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जगन मोहन सरकार का यह अंत है। एमएलसी स्नातक चुनावों में विजय कार्ड का उपयोग करते हुए नारा लोकेश ने कहा कि राज्य में वाईएसआरसीपी शासन के अंत की शुरुआत हो गई है। लोकेश ने अपनी जनसभा में जगन सरकार को एससी, बीसी और अल्पसंख्यक विरोधी बताया। उन्होंने एससी, एसटी, बीसी और अल्पसंख्यकों को विफल करने के लिए वाईएसआरसीपी के विधायक जोनलगड्डा पद्मावती पर कटाक्ष किया। युवा गालम पदयात्रा के दौरान टीडीपी महासचिव नारा लोकेश ने कहा कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार उनकी आवाज को जनता तक पहुंचने से नहीं रोक सकती है और वह इसका असली चेहरा उजागर करने के लिए दृढ़ हैं।
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अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प यह बात साफ़ करते जा रहे हैं कि वह सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान या सऊदी अरब की मुहब्बत में उनका बचाव नहीं कर रहे हैं बल्कि इस्राईल की रक्षा के लिए वह एसा कर रहा हैं केवल अमरीका के हितों और सुरक्षा के लिए नहीं।
सऊदी अरब और मुहम्मद बिन सलमान पर कठोर प्रतिबंध लगाने की अमरीकी कांग्रेस के सदस्यों की कोशिशों के जवाब में ट्रम्प ने साफ़ साफ़ कहा कि मध्यपूर्व में हमारे उपस्थित रहने का एक ही कारण है इस्राईल की रक्षा करना। वाशिंग्टन पोस्ट को साक्षात्कार देते हुए ट्रम्प ने कहा कि तेल का अब इतना महत्व नहीं रहा कि हम उसकी वजह से मध्यपूर्व में मौजूद रहें क्योंकि अब हम अतिरिक्त तेल का उत्पादन कर रहे हैं हम इस इलाक़े में इस्राईल की वजह से मौजूद हैं। ट्रम्प ने आगे कहा कि सऊदी अरब हमारा महत्वपूर्ण घटक है, सऊदी अरब की मदद न हो तो इस्राईल को बहुत अधिक कठिनाइयों का सामना हो जाएगा, सऊदी हमारे लिए अरबों डालर की रक़म ख़र्च कर रहे हैं और वह ईरान पर अंकुश लगाते हैं।
ट्रम्प का यह बयान उन सारे रहस्यों से पर्दा उठाता है जो मध्यपूर्व के इलाक़े में घटने वाली घटनाओं के पीछे निहित हैं और यह भी पता चलता है कि इन घटनाओं में किस देश ने किस उद्देश्य से क्या रोल अदा किया। यह साफ़ हो जाता है कि इस्राईल के ख़िलाफ़ अरबों की लड़ाई में अमरीका से सहयोग करने वाले लोग कौन थे।
अब हम यह समझ सकते हैं कि इराक़ के ख़िलाफ़ युद्ध और उस पर क़ब्ज़ा करने में सऊदी अरब तथा फ़ार्स खाड़ी के अन्य देशों ने अमरीका की किस तरह मदद की। अब हम यह भी समझ सकते हैं कि पिछले सात साल से सीरिया पर युद्ध क्यों थोपा गया है, हम यह भी समझ सकते हैं कि लीबिया में कर्नल मुअम्मर क़ज़्ज़ाफ़ी के खिलाफ़ क्यों आंदोलन चलवाया गया और क्यों लेबनान से फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधक संगठनों को बाहर निकाला गया? यमन पर चार साल से युद्ध क्यों थोपा गया है? ईरान पर प्रतिबंध क्यों लगाए गए हैं? अमरीका और इस्राईल के खिलाफ़ प्रतिरोध करने वाले संगठनों विशेष रूप से हिज़्बुल्लाह, हमास और जेहादे इस्लामी को आतंकी संगठनों की सूची में क्यों शामिल किया गया है?
ट्रम्प तथ्यों से बिना किसी हिचकिचाहट के पर्दा हटा रहे हैं और सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी के मामले में कांग्रेस को कोई बड़ा क़दम उठाने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं और इसके लिए वह यहूदी लाबी से पेंग बढ़ा रहे हैं जो कांग्रेस पर वर्चस्व रखती है। क्या ट्रम्प अपनी इस कोशिश में सफल हो पाएंगे यह बात में पता चलेगा।
यह हक़ीक़त से पर्दे हटने बल्कि फटने का समय है, कम से कम इस मामले में ट्रम्प का शुक्रिया अदा करना चाहिए।
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अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प यह बात साफ़ करते जा रहे हैं कि वह सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान या सऊदी अरब की मुहब्बत में उनका बचाव नहीं कर रहे हैं बल्कि इस्राईल की रक्षा के लिए वह एसा कर रहा हैं केवल अमरीका के हितों और सुरक्षा के लिए नहीं। सऊदी अरब और मुहम्मद बिन सलमान पर कठोर प्रतिबंध लगाने की अमरीकी कांग्रेस के सदस्यों की कोशिशों के जवाब में ट्रम्प ने साफ़ साफ़ कहा कि मध्यपूर्व में हमारे उपस्थित रहने का एक ही कारण है इस्राईल की रक्षा करना। वाशिंग्टन पोस्ट को साक्षात्कार देते हुए ट्रम्प ने कहा कि तेल का अब इतना महत्व नहीं रहा कि हम उसकी वजह से मध्यपूर्व में मौजूद रहें क्योंकि अब हम अतिरिक्त तेल का उत्पादन कर रहे हैं हम इस इलाक़े में इस्राईल की वजह से मौजूद हैं। ट्रम्प ने आगे कहा कि सऊदी अरब हमारा महत्वपूर्ण घटक है, सऊदी अरब की मदद न हो तो इस्राईल को बहुत अधिक कठिनाइयों का सामना हो जाएगा, सऊदी हमारे लिए अरबों डालर की रक़म ख़र्च कर रहे हैं और वह ईरान पर अंकुश लगाते हैं। ट्रम्प का यह बयान उन सारे रहस्यों से पर्दा उठाता है जो मध्यपूर्व के इलाक़े में घटने वाली घटनाओं के पीछे निहित हैं और यह भी पता चलता है कि इन घटनाओं में किस देश ने किस उद्देश्य से क्या रोल अदा किया। यह साफ़ हो जाता है कि इस्राईल के ख़िलाफ़ अरबों की लड़ाई में अमरीका से सहयोग करने वाले लोग कौन थे। अब हम यह समझ सकते हैं कि इराक़ के ख़िलाफ़ युद्ध और उस पर क़ब्ज़ा करने में सऊदी अरब तथा फ़ार्स खाड़ी के अन्य देशों ने अमरीका की किस तरह मदद की। अब हम यह भी समझ सकते हैं कि पिछले सात साल से सीरिया पर युद्ध क्यों थोपा गया है, हम यह भी समझ सकते हैं कि लीबिया में कर्नल मुअम्मर क़ज़्ज़ाफ़ी के खिलाफ़ क्यों आंदोलन चलवाया गया और क्यों लेबनान से फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधक संगठनों को बाहर निकाला गया? यमन पर चार साल से युद्ध क्यों थोपा गया है? ईरान पर प्रतिबंध क्यों लगाए गए हैं? अमरीका और इस्राईल के खिलाफ़ प्रतिरोध करने वाले संगठनों विशेष रूप से हिज़्बुल्लाह, हमास और जेहादे इस्लामी को आतंकी संगठनों की सूची में क्यों शामिल किया गया है? ट्रम्प तथ्यों से बिना किसी हिचकिचाहट के पर्दा हटा रहे हैं और सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी के मामले में कांग्रेस को कोई बड़ा क़दम उठाने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं और इसके लिए वह यहूदी लाबी से पेंग बढ़ा रहे हैं जो कांग्रेस पर वर्चस्व रखती है। क्या ट्रम्प अपनी इस कोशिश में सफल हो पाएंगे यह बात में पता चलेगा। यह हक़ीक़त से पर्दे हटने बल्कि फटने का समय है, कम से कम इस मामले में ट्रम्प का शुक्रिया अदा करना चाहिए।
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ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर कंडीसौड़ तहसील क्षेत्र के अंतर्गत डोबन गांव के समीप एक कार दुर्घटनाग्रस्त होने से दो युवकों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को हायर सेंटर दून अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन देर रात उसने भी दम तोड़ दिया।
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ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर कंडीसौड़ तहसील क्षेत्र के अंतर्गत डोबन गांव के समीप एक कार दुर्घटनाग्रस्त होने से दो युवकों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को हायर सेंटर दून अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन देर रात उसने भी दम तोड़ दिया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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Ghatshila : चाकुलिया प्रखंड के श्यामसुंदरपुर पंचायत के आदिवासी बहुल गांव दूधियाशोल के ग्रामीण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं. जल व स्वच्छता विभाग की लापरवाही के कारण ग्रामीणों को पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों को गर्मी के मौसम में कुएं पर आश्रित रहना पड़ता है. मालूम हो कि इस गांव में जल व स्वच्छता विभाग के तहत दो सोलर जलापूर्ति योजनाएं पिछले डेढ़ साल से अधूरी पड़ी हैं. जलापूर्ति योजनाओं को पूरा करने के लिए कई बार ग्रामीणों ने पदाधिकारियों से गुहार लगाई. लेकिन इस मामले में कोई पहल नहीं की गई है. इस कारण ग्रामीणों में आक्रोश भरा है.
ग्रामीणों ने बताया कि दोनों योजनाओं के ठेकेदार ने पिछले एक साल से काम को अधूरा छोड़ दिया है. साथ ही ठेकेदार का कोई अता-पता भी नहीं है. विभागीय पदाधिकारी से पूछने पर भी वे उचित जवाब नहीं दे रहे हैं. पंचायत समिति की सदस्य ज्योति रानी गोस्वामी ने कहा कि जल व स्वच्छता विभाग के पदाधिकारी इन दोनों योजनाओं को जल्द पूर्ण करवाएं ताकि ग्रामीणों को परेशानियां न झेलनी पड़े.
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Ghatshila : चाकुलिया प्रखंड के श्यामसुंदरपुर पंचायत के आदिवासी बहुल गांव दूधियाशोल के ग्रामीण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं. जल व स्वच्छता विभाग की लापरवाही के कारण ग्रामीणों को पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों को गर्मी के मौसम में कुएं पर आश्रित रहना पड़ता है. मालूम हो कि इस गांव में जल व स्वच्छता विभाग के तहत दो सोलर जलापूर्ति योजनाएं पिछले डेढ़ साल से अधूरी पड़ी हैं. जलापूर्ति योजनाओं को पूरा करने के लिए कई बार ग्रामीणों ने पदाधिकारियों से गुहार लगाई. लेकिन इस मामले में कोई पहल नहीं की गई है. इस कारण ग्रामीणों में आक्रोश भरा है. ग्रामीणों ने बताया कि दोनों योजनाओं के ठेकेदार ने पिछले एक साल से काम को अधूरा छोड़ दिया है. साथ ही ठेकेदार का कोई अता-पता भी नहीं है. विभागीय पदाधिकारी से पूछने पर भी वे उचित जवाब नहीं दे रहे हैं. पंचायत समिति की सदस्य ज्योति रानी गोस्वामी ने कहा कि जल व स्वच्छता विभाग के पदाधिकारी इन दोनों योजनाओं को जल्द पूर्ण करवाएं ताकि ग्रामीणों को परेशानियां न झेलनी पड़े.
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T Raja Singh Hate Speech Case: गोशामहल से विधायक टी राजा सिंह ने हाल ही में आरोप लगाए थे कि उन्हें पाकिस्तान से धमकी भरे फोन आ रहे हैं। उनकी शिकायत के आधार पर हैदराबाद में मामला भी दर्ज हुआ था।
तेलंगाना से भारतीय जनता पार्टी के निलंबित विधायक टी राजा सिंह फिर अपने भाषण के चलते मुश्किल में पड़ गए हैं। महाराष्ट्र की दादर पुलिस ने दो महीने पुराने भाषण के चलते धारा 153(A) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच आगे बढ़ा रही है और भाषणों के वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
FIR के अनुसार, सकल हिंदू समाज ने 29 जनवरी 2023 को दादर में रैली का आयोजन किया था। उस दौरान श्रम कल्याण बोर्ड के दफ्तर के बाहर रैली को संबोधित कर रहे राजा सिंह ने लव जिहाद के मुद्दा का जिक्र किया था। खबर है कि उन्होंने भाषण के दौरान बताया था कि कैसे हिंदुओं को अपनी बेटियों को धर्म विशेष के लोगों से बचाना चाहिए।
एक पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी, 'भाषण की जांच के बाद पता चला है कि वह एक नफरती भाषण था, जो दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक सद्भावना खराब कर सकता था. . . । ' उन्होंने बताया कि इसलिए सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा जानकारी दी, 'हमने सोमवार को मामला दर्ज किया है और हमें भाषण की पेन ड्राइव मिली है। उसे फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया है। '
पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी के बाद भाजपा ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। इसके अलावा उन्हें अगस्त में गिरफ्तार भी किया गया था। तेलंगाना के गोशामहल से विधायक सिंह ने हाल ही में आरोप लगाए थे कि उन्हें पाकिस्तान से धमकी भरे फोन आ रहे हैं। उनकी शिकायत के आधार पर हैदराबाद में मामला भी दर्ज हुआ था।
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T Raja Singh Hate Speech Case: गोशामहल से विधायक टी राजा सिंह ने हाल ही में आरोप लगाए थे कि उन्हें पाकिस्तान से धमकी भरे फोन आ रहे हैं। उनकी शिकायत के आधार पर हैदराबाद में मामला भी दर्ज हुआ था। तेलंगाना से भारतीय जनता पार्टी के निलंबित विधायक टी राजा सिंह फिर अपने भाषण के चलते मुश्किल में पड़ गए हैं। महाराष्ट्र की दादर पुलिस ने दो महीने पुराने भाषण के चलते धारा एक सौ तिरेपन के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच आगे बढ़ा रही है और भाषणों के वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। FIR के अनुसार, सकल हिंदू समाज ने उनतीस जनवरी दो हज़ार तेईस को दादर में रैली का आयोजन किया था। उस दौरान श्रम कल्याण बोर्ड के दफ्तर के बाहर रैली को संबोधित कर रहे राजा सिंह ने लव जिहाद के मुद्दा का जिक्र किया था। खबर है कि उन्होंने भाषण के दौरान बताया था कि कैसे हिंदुओं को अपनी बेटियों को धर्म विशेष के लोगों से बचाना चाहिए। एक पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी, 'भाषण की जांच के बाद पता चला है कि वह एक नफरती भाषण था, जो दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक सद्भावना खराब कर सकता था. . . । ' उन्होंने बताया कि इसलिए सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा जानकारी दी, 'हमने सोमवार को मामला दर्ज किया है और हमें भाषण की पेन ड्राइव मिली है। उसे फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया है। ' पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी के बाद भाजपा ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। इसके अलावा उन्हें अगस्त में गिरफ्तार भी किया गया था। तेलंगाना के गोशामहल से विधायक सिंह ने हाल ही में आरोप लगाए थे कि उन्हें पाकिस्तान से धमकी भरे फोन आ रहे हैं। उनकी शिकायत के आधार पर हैदराबाद में मामला भी दर्ज हुआ था।
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घटनाओं का भी योग होता था। किन्तु मानव सभ्यता के विकास के साथ साथ इन लौकिक घटनाओं की योर मनुष्य की रुचि कम होती गई और वह वास्तविक जगत की श्रोर अधिक खिचता गया। इससे कथा-साहित्य में उन्हीं घटनाओं को स्थान मिलने लगा जो मनुष्य के द्वारा घटित हो सके। पहले कहानी के विषय पेड़-पौधे, जानवर, देवी-देवता अथवा राजा-रानी हो होते थे; किन्तु धीरे-धीरे इन सय के स्थान पर साधारण मनुष्य श्राता गया और आज की कहानियां प्राधिभौतिक अथवा श्राधिदैविक न होकर पूर्ण मानवीय होती हैं। वह मानव भी राजावानी सरीखा विशिष्ट वर्ग का मानव नहीं; किन्तु साधारण-वर्ग का मानव, जिसकी अधिकता थाज संसार में है और जिसके साथ हम निस्संकोच हँस-बोल और खेल कूद सकते हैं । यह तो हुआ विषय-गत अन्तर। इसके अतिरिक्त कहानियों में शैलीगत ग्रन्तर भी ग्रामुल चूल हो चुका है। पहले बहुधा कहानियां "एक था राजा" से प्रारम्भ होकर जैसा उनको सुख मिला वैसा भगवान सव
को दे" पर ग्रन्त होती थीं। किन्तु श्रय इस प्रकार का कोई विधान नहीं रहा। इन परिवर्तनों से कथा-सा हत्य में एक स्वाभाविकता श्रा गई जिससे पाठक के हृदय और मस्तिष्क दोनों को पर्याप्त सामग्री मिलने लगी ।
कथा-साहित्य के भी शैलीगत विशेषताओं के कारण महाकाव्य, खण्ड-काव्य, नाटक, कहानी, उपन्यास आदि भेद होते हैं। इनमें से केवल उपन्यास पर ही विचार करना है, यह जानना आवश्यक है कि वे कौन से तत्व हैं जो उपन्यास को कहानी, नाटक, महाकाव्य आदि से पृथक करते हैं ।
जो लोग यह समझते हैं कि कहानी उपन्यास का एक ग्रंश है और उपन्यास कहानी का विस्तृत रूप, वे वे वास्तव में
उपन्यास और कहानी दोनों नितान्त भिन्न वस्तुए हैं, जिनका अपना अपना निजी अस्तित्व है। यदि किसी उपन्यास में से कोई घटना अलग निकाल ली जावे तो न यह कहानी कहला सकती है और न कोई कहानी, यदि उसे विस्तार देकर लिखा जावे तो, उपन्यास । । उपन्यास में व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन की झलक होती है, जब कि कहानी में उसके जोवन की किसी एक घटना पर ही प्रकाश डाला जाता है। दूसरे शब्दों में यदि उपन्यास उद्यान है, तो कहानी एक स्तवक उपन्यास में एक मूल कथा होती है और उसको विस्तार देने के लिये कई अन्य छोटी-छोटी कथाओं का भी उसमें समावेश किया जाता है; किन्तु कहानी में केवल एक ही कथा हो सकती है, अन्य कथाओं के लिये उसमें स्थान नहीं होता। वरन् आजकल तो ऐसी भी कहानियां होने लगी हैं जिनमें कथा होती ही नहीं, या तो लेखक केवल वातावरण मात्र को सृष्टि भरकर देता है या केवल मनोभावों का विश्लेषण मान। वस इन्हीं के द्वारा प्रभावोत्पादन करना इन कहानियों का उद्देश्य होता है। श्रज्ञेयजी की 'रोज' कहानी में केवल वातावरण मात्र है और जैनेन्द्र जी की 'पत्नी' में केवल मनोविश्लेषण मात्र । उनमें कथानक कुछ भी नहीं है, किन्तु उपन्यास के लिये कथानक का होना आवश्यक है। बिना कुछ कथानक के उपन्यासकार का काम चल ही नहीं लकता । उपन्यास में चरित्र चित्रण के लिये पर्याप्त स्थान रहता है; किन्तु कहानीकार को थोड़े में ही सब कुछ कर दिखाना होता है । कहानी में कुछ गिने चुने ही पात्र होते हैं और नपे तुले शब्दों और कार्यों में ही उनके चरित्रों का विकास दिखाया जाता है। उपन्यासकार कई घटनाओं और परिस्थितियों की सृष्टि कर, लम्बे चौड़े कथोपकथनों द्वारा श्रथवा विश्लेषण द्वारा अपने पात्रों का चरित्र निर्माण कर सकता है, किन्तु कहानीकार का क्षेत्र अत्यन्त संकुचित होता है । कहानी में उपन्यास की अपेक्षा गठनशीलता की श्रावश्यकता अधिक है ।
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घटनाओं का भी योग होता था। किन्तु मानव सभ्यता के विकास के साथ साथ इन लौकिक घटनाओं की योर मनुष्य की रुचि कम होती गई और वह वास्तविक जगत की श्रोर अधिक खिचता गया। इससे कथा-साहित्य में उन्हीं घटनाओं को स्थान मिलने लगा जो मनुष्य के द्वारा घटित हो सके। पहले कहानी के विषय पेड़-पौधे, जानवर, देवी-देवता अथवा राजा-रानी हो होते थे; किन्तु धीरे-धीरे इन सय के स्थान पर साधारण मनुष्य श्राता गया और आज की कहानियां प्राधिभौतिक अथवा श्राधिदैविक न होकर पूर्ण मानवीय होती हैं। वह मानव भी राजावानी सरीखा विशिष्ट वर्ग का मानव नहीं; किन्तु साधारण-वर्ग का मानव, जिसकी अधिकता थाज संसार में है और जिसके साथ हम निस्संकोच हँस-बोल और खेल कूद सकते हैं । यह तो हुआ विषय-गत अन्तर। इसके अतिरिक्त कहानियों में शैलीगत ग्रन्तर भी ग्रामुल चूल हो चुका है। पहले बहुधा कहानियां "एक था राजा" से प्रारम्भ होकर जैसा उनको सुख मिला वैसा भगवान सव को दे" पर ग्रन्त होती थीं। किन्तु श्रय इस प्रकार का कोई विधान नहीं रहा। इन परिवर्तनों से कथा-सा हत्य में एक स्वाभाविकता श्रा गई जिससे पाठक के हृदय और मस्तिष्क दोनों को पर्याप्त सामग्री मिलने लगी । कथा-साहित्य के भी शैलीगत विशेषताओं के कारण महाकाव्य, खण्ड-काव्य, नाटक, कहानी, उपन्यास आदि भेद होते हैं। इनमें से केवल उपन्यास पर ही विचार करना है, यह जानना आवश्यक है कि वे कौन से तत्व हैं जो उपन्यास को कहानी, नाटक, महाकाव्य आदि से पृथक करते हैं । जो लोग यह समझते हैं कि कहानी उपन्यास का एक ग्रंश है और उपन्यास कहानी का विस्तृत रूप, वे वे वास्तव में उपन्यास और कहानी दोनों नितान्त भिन्न वस्तुए हैं, जिनका अपना अपना निजी अस्तित्व है। यदि किसी उपन्यास में से कोई घटना अलग निकाल ली जावे तो न यह कहानी कहला सकती है और न कोई कहानी, यदि उसे विस्तार देकर लिखा जावे तो, उपन्यास । । उपन्यास में व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन की झलक होती है, जब कि कहानी में उसके जोवन की किसी एक घटना पर ही प्रकाश डाला जाता है। दूसरे शब्दों में यदि उपन्यास उद्यान है, तो कहानी एक स्तवक उपन्यास में एक मूल कथा होती है और उसको विस्तार देने के लिये कई अन्य छोटी-छोटी कथाओं का भी उसमें समावेश किया जाता है; किन्तु कहानी में केवल एक ही कथा हो सकती है, अन्य कथाओं के लिये उसमें स्थान नहीं होता। वरन् आजकल तो ऐसी भी कहानियां होने लगी हैं जिनमें कथा होती ही नहीं, या तो लेखक केवल वातावरण मात्र को सृष्टि भरकर देता है या केवल मनोभावों का विश्लेषण मान। वस इन्हीं के द्वारा प्रभावोत्पादन करना इन कहानियों का उद्देश्य होता है। श्रज्ञेयजी की 'रोज' कहानी में केवल वातावरण मात्र है और जैनेन्द्र जी की 'पत्नी' में केवल मनोविश्लेषण मात्र । उनमें कथानक कुछ भी नहीं है, किन्तु उपन्यास के लिये कथानक का होना आवश्यक है। बिना कुछ कथानक के उपन्यासकार का काम चल ही नहीं लकता । उपन्यास में चरित्र चित्रण के लिये पर्याप्त स्थान रहता है; किन्तु कहानीकार को थोड़े में ही सब कुछ कर दिखाना होता है । कहानी में कुछ गिने चुने ही पात्र होते हैं और नपे तुले शब्दों और कार्यों में ही उनके चरित्रों का विकास दिखाया जाता है। उपन्यासकार कई घटनाओं और परिस्थितियों की सृष्टि कर, लम्बे चौड़े कथोपकथनों द्वारा श्रथवा विश्लेषण द्वारा अपने पात्रों का चरित्र निर्माण कर सकता है, किन्तु कहानीकार का क्षेत्र अत्यन्त संकुचित होता है । कहानी में उपन्यास की अपेक्षा गठनशीलता की श्रावश्यकता अधिक है ।
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चर्चा में क्यों?
हाल ही में केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation-MoSPI) ने कोलकाता स्थित भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute-ISI) के साथ मिलकर सकल घरेलू ज्ञान उत्पाद (Gross Domestic Knowledge Product-GDKP) के उभरते क्षेत्र पर नई दिल्ली में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।
सकल घरेलू ज्ञान उत्पाद (Domestic Knowledge Product-GDKP)
- दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर उम्बेर्टो सुलपास्सो (Umberto Sulpasso) द्वारा GDKP के विचार को प्रस्तुत किया गया।
- नॉलेज आइटम्स (Knowledge items-Ki) - अलग-अलग श्रेणियों में आधुनिक और स्थानीय दोनों वर्गों की अलग-अलग संस्कृतियों की सूचना सामग्रियों की पहचान करना।
- कंट्री नॉलेज प्रोड्यूसिंग मैट्रिक्स (Country's Knowledge Producing Matrix-CKPM) - सरकार, निजी संस्थानों और परिवारों द्वारा उत्पादित ज्ञान में विभेद करते हुए GDP प्रभाव के लिये इनकी तुलना करना।
- कंट्री नॉलेज यूज़र मैट्रिक्स (Country's Knowledge User Matrix-CKUM) - व्यक्तियों और निजी कंपनियों द्वारा अपने आधुनिकीकरण के प्रयासों को मापने के लिये स्वीकृत ज्ञान का मूल्य।
- कॉस्ट ऑफ लर्निंग (Cost of Learning) - युवा नागरिकों को समर्थन देने के लिये शिक्षा परिवार बॉण्ड, शिक्षा क्रेडिट कार्ड आदि के माध्यम से सरकार के बजटीय निर्णयों (राजनीतिक संदर्भ) में उपयोग की जाने वाली वर्तमान लागत के समान।
- यह राष्ट्रीय संस्कृति से संबंधित विशिष्ट ज्ञान सामग्रियों के मूल्य की गणना करने और इन सामग्रियों में समय के साथ परिवर्तन की अनुमति देगा।
- उदाहरण के तौर पर, भारत में इन विशिष्ट ज्ञान सामग्रियों के अंतर्गत सांस्कृतिक और धार्मिक शिक्षणों (योग, वेद और नृत्य विद्यालय), धार्मिक त्योहारों एवं फसल त्योहारों के प्रसार को शामिल किया गया है।
- सकल घरेलू ज्ञान उत्पाद एक राष्ट्रीय ज्ञान शिक्षा मंच के निर्माण की सुविधा भी प्रदान कर सकता है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाने के साथ-साथ जीडीपी और निजी निवेश की उचित भूमिका को बढ़ावा देगा।
- यह देश में ज्ञान आधारित अर्थव्यस्था को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण योगदान देगा।
हाल ही में वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के केंद्र में बड़े पैमाने पर पर्वतों जैसे ऊँचे-नीचे स्थानों की खोज की है। पृथ्वी की सतह अर्थात भूपर्पटी (Crust) से 660 किमी. नीचे स्थित परत मेंटल (Mantle) पर यह स्थलाकृति पाई गई है जो हमारे ग्रह की उत्पत्ति एवं विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
- वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के मेंटल क्षेत्र (मध्य भाग) में बड़े पैमाने पर पर्वतों की खोज की है जो हमारे ग्रहों के प्रति समझ को बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
- पृथ्वी की संरचना को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा जाता है - क्रस्ट (Crust), मेंटल (Mantle) और कोर (Core)। क्रस्ट पृथ्वी का बाहरी क्षेत्र, मेंटल मध्य क्षेत्र और कोर आतंरिक क्षेत्र है। इन तीनों की संरचना में भिन्नता के आधार पर इनका वर्गीकरण किया गया है।
- वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की आतंरिक संरचना के प्राप्त आँकड़ों के आधार पर ही इन पहाड़ों की जानकारी दी है।
- जर्नल साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों ने बोलीविया में एक बड़े भूकंप के दौरान लिये गए आँकड़े का उपयोग किया, जिससे पृथ्वी की सतह से 660 किमी. नीचे स्थित क्षेत्र में पहाड़ों एवं अन्य स्थलाकृतियों की जानकारी प्राप्त हुई।
- वैज्ञानिकों ने इस सीमा को जहाँ पर उबड़-खाबड़ एवं समतल भाग पाए गए हैं, को '660 किलोमीटर की सीमा' नाम दिया है।
- उन्होने 660 किमी. की सीमा के इस भाग पर पृथ्वी की सतह से भी ज़्यादा ऊँचा-नीचा स्थान प्राप्त होने का अनुमान लगाया। इन ऊँचे-नीचे भागों को उन्होने रॉकी और अप्लेशियन पर्वत से भी मज़बूत एवं कठोर होने का अनुमान लगाया।
- हालाँकि शोधकर्ताओं ने मेंटल के मध्य भाग (410 किमी.) पर भी जानकारी एकत्र की लेकिन उन्हें वहाँ कोई भी उबड़-खाबड़ स्थान नहीं प्राप्त हुआ।
- 660 किलोमीटर की सीमा पर खुरदरेपन की उपस्थिति हमारे ग्रह की उत्पत्ति एवं विकास को समझने में वैज्ञानिकों के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- अमेरिका में प्रिंसटन विश्वविद्यालय (Princeton University) और चीन में इंस्टीट्यूट ऑफ जियोडेसी एंड जियोफिजिक्स (Institute of Geodesy and Geophysics) के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की गहराई की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिये ग्रह पर सबसे शक्तिशाली तरंगों का इस्तेमाल किया, जो बड़े पैमाने पर भूकंप से उत्पन्न होते हैं।
- वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन में आँकड़े प्राप्त करने हेतु 1994 में बोलीविया में आए भूकंप (8.2 तीव्रता) को आधार बनाया जो अब तक का रिकॉर्ड किया गया दूसरा सबसे बड़ा और गहरा भूकंप है।
- इस प्रयोग के अंतर्गत 7.0 या उससे अधिक की तीव्रता वाले भूकंपों के आँकड़े प्राप्त करने के लिये सभी दिशाओं में भेदी तरंगों को प्रेषित किया गया जिनकी क्षमता पृथ्वी के आतंरिक भागों से आगे तक जाने में सक्षम थी।
- वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक कंप्यूटरों के माध्यम से इन जटिल आँकड़ों का अध्ययन किया। इसमें बताया गया कि जैसे प्रकाश तरंगें किसी दर्पण या प्रिज़्म से टकराकर प्रकाश को परावर्तित करती हैं, ठीक उसी प्रकार भूकंपीय तरंगें समरूप चट्टानों में निर्बाध चलती हैं, लेकिन मार्ग में किसी भी उबड़-खाबड़ या खुरदरेपन के कारण ये तरंगे भी परावर्तित हो जाती हैं।
चर्चा में क्यों?
हाल ही में भारत में एक वर्षा आधारित कृषि मानचित्र तैयार किया गया। इसके अंतर्गत वर्षा आधारित क्षेत्रों में व्याप्त कृषि जैव विविधता और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का विवरण देते हुए नीतिगत पूर्वाग्रहों का दस्तावेज़ीकरण करने का प्रयास किया गया है।
- हाल ही में जारी कृषि मानचित्र में वर्षा आधारित क्षेत्रों में व्याप्त कृषि जैव विविधता और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के साथ-साथ उन नीतिगत पूर्वाग्रहों का दस्तावेज़ीकरण किया गया है, जो इन क्षेत्रों में लोगों को खेती करने में असफल बना रहे हैं।
- भारत में पाँच में से तीन किसान सिंचाई के बजाय वर्षा जल का उपयोग कर फसलों का उत्पादन करते हैं। हालाँकि इस तरह से उनका अपनी भूमि में प्रति हेक्टेयर सरकारी निवेश 20 गुना तक कम हो सकता है।
- ऐसे किसानों की फसलों की सरकारी खरीद प्रमुख सिंचित भूमि की फसलों का सिर्फ एक भाग है और सरकार की कई प्रमुख कृषि योजनाएँ उन्हें लाभान्वित करने के अनुरूप नहीं हैं।
- राष्ट्रीय वर्षा क्षेत्र प्राधिकरण के CEO जो वर्तमान में किसानों की आय दोगुनी करने हेतु बनाई गई सरकारी समिति के प्रमुख भी हैं, इन्होने बताया कि वर्षा आधारित क्षेत्रों के किसानों की अधिक उपेक्षा हुई है जो इन क्षेत्रों में किसानों की कम आय का महत्त्वपूर्ण कारण है।
- एक सम्मेलन के दौरान इन्होंने स्पष्ट किया कि वर्षा आधारित क्षेत्रों में किसानों को सिंचित क्षेत्रों वाले किसानों की तुलना में लगभग 40% कम आय प्राप्त होती है।
- रिवाइटलाइजिंग रेनफेड एग्रीकल्चर (Revitalising Rainfed Agriculture-RRA) नेटवर्क के समन्वयक जिन्होंने यह मानचित्र प्रकाशित किया है ने किसानों की आय में असमानता के लिये सरकार की नीति और उसके व्यय में भेदभाव होना बताया है।
- सिंचित भूमि वाले क्षेत्रों में बड़े बांधों और नहर नेटवर्क के माध्यम से प्रति हेक्टेयर 5 लाख का निवेश प्राप्त होता है, जबकि वर्षा आधारित भूमि में वाटरशेड प्रबंधन का खर्च केवल 18,000-25,000 है। जो यह दर्शाता है कि उपज में अंतर निवेश के अंतर के अनुपात में नहीं है।
- इसी प्रकार जब उपज की खरीद देखी गई तो पाया गया कि सरकार ने 2001-02 तथा 2011-12 के दशक में गेहूं और चावल पर 5.4 लाख करोड़ रुपए खर्च किये। जबकि मोटे अनाज जो वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाए जाते हैं की खरीद पर उसी अवधि में 3,200 करोड़ रुपए खर्च किये गए।
- बीज, उर्वरक सब्सिडी और मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी फ्लैगशिप सरकारी योजनाओं को सिंचित क्षेत्रों के लिये ही बनाया गया है जो कि वर्षा आधारित क्षेत्रों में भी बिना किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखे विस्तृत कर दिया गया है।
- उदाहरण के लिये सरकार योजना द्वारा अधिसूचित बहुत से संकर बीजों को उच्च पैदावार प्राप्त करने के लिये समय पर पानी, उर्वरक और कीटनाशक पदार्थों की बहुत आवश्यकता होती है जिसका वर्षा आधारित किसानों के लिये कोई महत्त्व नही हैं। सरकार द्वारा अब तक स्वदेशी बीजों को प्राप्त करने या जैविक खाद को सब्सिडी देने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
- वर्षा आधारित क्षेत्र के किसानों के लिये अनुसंधान और प्रौद्योगिकी पर ध्यान देने तथा उत्पादन हेतु समर्थन प्रदान करने के लिये सिंचित क्षेत्रों वाले किसानों से ज़्यादा संतुलित दृष्टिकोण अपनाए जाने की आवश्यकता है।
- वर्तमान समय में किसानों की मदद करने के लिये आय समर्थन महत्वपूर्ण है, साथ ही भविष्य के लिये बेहतर प्रयास किये जाने की आवश्यकता है।
- वर्तमान में हर कोई खेती करने के बजाय व्यवसाय करने में सहज महसूस करता है। आने वाले समय में यदि वर्षा आधारित क्षेत्रों में बीज, मिट्टी, पानी की समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता है तो किसान कृषि कार्य छोड़ देंगे।
चर्चा में क्यों?
इंटरनेट के सदुपयोग और दुरुपयोग की बहस में डार्क वेब हमेशा से चर्चा का बिंदु रहा है। पिछले दिनों जब हैकरों ने कुछ वेबसाइटों के डेटा हैक कर लिये तब यह पुनः चर्चा में आ गया।
क्या है डार्क नेट?
- इंटरनेट पर ऐसी कई वेबसाइटें हैं जो आमतौर पर प्रयोग किये जाने वाले गूगल, बिंग जैसे सर्च इंजनों और सामान्य ब्राउज़िंग के दायरे से परे होती हैं। इन्हें डार्क नेट या डीप नेट कहा जाता है।
- सामान्य वेबसाइटों के विपरीत यह एक ऐसा नेटवर्क होता है जिस तक लोगों के चुनिंदा समूहों की पहुँच होती है और इस नेटवर्क तक विशिष्ट ऑथराइज़ेशन प्रक्रिया, सॉफ्टवेयर और कन्फिग्यूरेशन के माध्यम से ही पहुँचा जा सकता है।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 देश में सभी प्रकार के प्रचलित साइबर अपराधों को संबोधित करने के लिये वैधानिक रूपरेखा प्रदान करता है। ऐसे अपराधों के नोटिस में आने पर कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ इस कानून के अनुसार ही उचित कार्रवाइयाँ करती हैं।
1. सरफेस वेब (Surface Web)
- यह इंटरनेट का वह भाग है जिसका आमतौर पर हम दिन-प्रतिदिन के कार्यों में प्रयोग करते हैं।
- जैसे गूगल या याहू पर कुछ भी सर्च करते हैं तो हमें सर्च रिज़ल्ट्स प्राप्त होते हैं और इसके लिये किसी विशिष्ट अनुमति की आवश्यकता नहीं होती।
- ऐसी वेबसाइटों की सर्च इंजनों द्वारा इंडेक्सिंग की जाती है। इसलिये इन तक सर्च इंजनों के माध्यम से पहुँचा जा सकता है।
2. डीप वेब (Deep Web)
- इन तक केवल सर्च इंजन के सर्च परिणामों की सहायता से नहीं पहुँचा जा सकता।
- डीप वेब के किसी डॉक्यूमेंट तक पहुँचने के लिये उसके URL एड्रेस पर जाकर लॉग-इन करना होगा, जिसके लिये पासवर्ड और यूज़र नेम का प्रयोग करना होगा।
- जैसे-जीमेल अकाउंट, ब्लॉगिंग वेबसाइट, सरकारी प्रकाशन, अकादमिक डेटाबेस, वैज्ञानिक अनुसंधान आदि ऐसी ही वेबसाइट्स होती हैं जो अपने प्रकृति में वैधानिक हैं किंतु इन तक पहुँच के लिये एडमिन की अनुमति की आवश्यकता होती है।
3. डार्क वेब (Dark Web)
- डार्क वेब अथवा डार्क नेट इंटरनेट का वह भाग है जिसे आमतौर पर प्रयुक्त किये जाने वाले सर्च इंजन से एक्सेस नहीं किया जा सकता।
- इसका इस्तेमाल मानव तस्करी, मादक पदार्थों की खरीद और बिक्री, हथियारों की तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों में किया जाता है।
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के रिकॉर्ड के अनुसार, 2015 से 2017 की अवधि में विभिन्न दवा कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा चार मामले दर्ज किये गए थे जिनमें नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थों की बिक्री तथा खरीद के लिये 'डार्क नेट' का इस्तेमाल किया गया था।
- डार्क वेब की साइट्स को टॉर एन्क्रिप्शन टूल की सहायता से छुपा दिया जाता है जिससे इन तक सामान्य सर्च इंजन से नहीं पहुँचा जा सकता।
- इन तक पहुँच के लिये एक विशेष ब्राउज़र टॉर (TOR) का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके लिये 'द ऑनियन राउटर' (The Onion Router) शब्द का भी प्रयोग किया जाता है क्योंकि इसमें एकल असुरक्षित सर्वर के विपरीत नोड्स के एक नेटवर्क का उपयोग करते हुए परत-दर-परत डेटा का एन्क्रिप्शन होता है। जिससे इसके प्रयोगकर्त्ताओं की गोपनीयता बनी रहती है।
- समग्र इंटरनेट का 96% भाग डार्क वेब से निर्मित है, जबकि सतही वेब केवल 4% है।
- सिल्क रोड मार्केटप्लेस नामक वेबसाइट डार्क नेटवर्क का एक प्रसिद्ध उदाहरण है जिस पर हथियारों सहित विभिन्न प्रकार की अवैध वस्तुओं की खरीद और बिक्री की जाती थी।
Rapid Fire करेंट अफेयर्स (18 February)
- पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से आयात होने वाली वस्तुओं पर बेसिक सीमा शुल्क बढ़ाकर 200 फीसदी कर दिया है। पाकिस्तान से भारत को होने वाला कुल निर्यात 2017-18 में लगभग 3482 करोड़ रुपए था। पाकिस्तान से प्रमुखतः ताज़े फल, सूखे मेवे, सीमेंट, खनिज एवं अयस्क, तैयार चमड़ा, प्रसंस्कृत खाद्य, अकार्बनिक रसायन, कच्चा कपास, मसाले, ऊन, रबर उत्पाद, प्लास्टिक, डाई और खेल का सामान भारत आता है। पाकिस्तान से आने वाले दो सामानों, फल और सीमेंट पर अभी क्रमशः 30-35% और 7.5% ड्यूटी ही लगती थी। आयात शुल्क को 200 फीसदी बढ़ाने की वज़ह से पाकिस्तान से भारत को होने वाला आयात लगभग बंद हो जाएगा। भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2017-18 में 2.41 अरब डॉलर रहा, जो 2016-17 में 2.27 अरब डॉलर था। भारत ने 2017-18 में 48.85 करोड़ डॉलर का सामान पाकिस्तान से आयात किया, जबकि 1.92 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया गया।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार 2018 में दुनियाभर में खसरे के कुल 2,29,068 मामले दर्ज किये गए, जो 2017 की तुलना में लगभग दोगुने हैं। चूँकि खसरे का उन्मूलन नहीं हो पा रहा, ऐसे में यह हर किसी की ज़िम्मेदारी है कि टीकाकरण में हो रही चूक को सुधारने का प्रयास करे। एक व्यक्ति के संक्रमित होने से 9-10 लोगों में इसके विषाणु फैलने का खतरा बढ़ जाता है। हालाँकि 2000 के बाद से खसरे से होने वाली मौतों में 80 फीसदी तक कमी आई है जिससे संभवतः दो करोड़ 10 लाख लोगों की जान बची है। लेकिन खसरा भौगोलिक या राजनीतिक सीमाओं में बंधा हुआ नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने खसरे के प्रकोप को रोकने एवं उसके उन्मूलन के लिये खसरे के टीके की दो डोज़ देकर उच्च टीकाकरण कार्यक्रम चलाते रहने की विभिन्न देशों से अपील की है।
- भारतीय रेलवे देश में पहला रेल परीक्षण ट्रैक बनाने की योजना पर काम कर रहा है। राजस्थान के नावां शहर में सांभर झील के पास देश के पहले रेलवे टेस्ट ट्रैक के लिये काम शुरू किया जा चुका है। इस पर अनुमानित 353.48 करोड़ रुपए की लागत आएगी। यह देश में नई ट्रेनों के प्रयोग और परीक्षण का पहला ट्रैक होगा। इस टेस्ट ट्रैक का उपयोग करके कई नए परीक्षण और रोलिंग स्टॉक तथा इसके घटकों, रेलवे पुलों एवं भू-तकनीकी क्षेत्र से संबंधित नई तकनीकों का भी परीक्षण संभव होगा। इस ट्रैक के निर्माण के बाद भारत उन देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास अपना रेलवे टेस्ट ट्रैक है। अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान आदि देशों में ट्रायल के लिये टेस्ट ट्रैक का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन हमारे देश में अभी तक मौजूदा रेलवे लाइनों पर ही टेस्ट होता है। इस योजना के पहले चरण में 25 किलोमीटर और दूसरे चरण में 20 किलोमीटर लंबी लाइन बिछाई जाएगी। लखनऊ स्थित रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइज़ेशन (RDSO) ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि RDSO भारतीय रेलवे की तकनीकी ज़रूरतों के लिये काम करने वाला अनुसंधान संगठन है।
- देश में किलोग्राम का नया मानक 20 मई से लागू होगा। केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय किलोग्राम की नई परिभाषा के मुताबिक इसका नया प्रोटोटाइप अर्थात् मूल नमूना तैयार करेगा। नए नमूने से ही पूरे देश में किलोग्राम का वज़न तय किया जाएगा। इससे किलोग्राम के वज़न में मामूली बदलाव आ सकता है, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। गौरतलब है कि अभी तक किलोग्राम का मानक इसके द्रव्यमान पर आधारित था। पूरी दुनिया में किलोग्राम का वजन फ्रांस के इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एडं मेजर्स की तिजोरी में रखे सिलेंडरनुमा एक बाट से तय किया जाता है। यह 90 फीसदी प्लेटिनम और 10 प्रतिशत इरिडियम से बना है। यह 1889 से तिजोरी में बंद है। 130 साल बाद किलोग्राम के मानक में बदलाव किया जा रहा है। किलोग्राम की नई परिभाषा भौतिक स्थिरांक पर आधारित है। इसमें वज़न तय करने के लिये धातु के बजाय विद्युत धारा (करंट) को आधार बनाया गया है। नई परिभाषा के ज़रिये किलोग्राम के 10 करोड़वें हिस्से को भी मापा जा सकता है।
- देश में इलेक्ट्रिकल वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिये केंद्र सरकार ने कुछ दिशा-निर्देश जारी किये हैं। इनमें इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों को सड़क या राजमार्ग के दोनों तरफ हर 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थापित करने की सिफारिश की गई है। सरकार ने आदर्श इमारत उपनियम-2016 और शहरी क्षेत्र विकास योजना रूपरेखा और अनुपालन दिशा-निर्देश-2014 में संशोधन कर ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के प्रावधान किये हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों और बुनियादी ढाँचे के लिये उपनियम बनाने में ये दिशा-निर्देश राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिये परामर्श देने का काम करेंगे। इसमें स्पष्ट उल्लेख है कि लंबी दूरी तक जाने में सक्षम या भारी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये राजमार्गों के दोनों तरफ प्रत्येक 100 किलोमीटर पर कम-से-कम एक ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन बनाया जाना चाहिये। आवासीय क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशन बनाने का ज़िक्र भी दिशा-निर्देशों में है। सरकार को उम्मीद है कि 2030 तक सड़क पर चलने वाले कुल वाहनों में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी ई-वाहनों की होगी।
- मौजूदा चैम्पियन साइना नेहवाल ने ओलंपिक रजत पदक विजेता पी.वी. सिंधु को हराकर 83वीं सीनियर राष्ट्रीय बैडमिंटन चैम्पियनशिप का महिला एकल खिताब जीत लिया। फाइनल में सिंधु को पराजित कर साइना ने लगातार दूसरी बार यह खिताब अपने नाम किया। पुरुष एकल में सौरभ वर्मा ने युवा खिलाड़ी लक्ष्य सेन को हराकर खिताब जीता। पुरुष युगल में प्रणव जैरी चोपड़ा और चिराग शेट्टी की जोड़ी ने अर्जुन एम.आर. और श्लोक रामचंद्रन की जोड़ी को हराकर चैम्पियन बनने का गौरव हासिल किया।
- अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल में भारत की ओर से सबसे ज़्यादा गोल करने वाले फुटबॉलर सुनील छेत्री को इस खेल के विकास में सहयोग देने के लिये 'फुटबॉल दिल्ली' ने पहले फुटबॉल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया। 34 वर्षीय सुनील छेत्री को सरकार पद्मश्री से सम्मानित कर चुकी है। आपको बता दें कि 'फुटबॉल दिल्ली' इस खेल का दिल्ली में संचालन करती है। सुनील छेत्री को कैप्टन फैंटास्टिक के नाम से भी जाना जाता है। वह सक्रिय खिलाड़ियों के बीच क्रिस्टियानो रोनाल्डो के बाद अंतर्राष्ट्रीय मैचों में दूसरे सबसे अधिक गोल करने वाले फुटबॉलर हैं।
- राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हरियाणा सरकार द्वारा सोनीपत ज़िले के गन्नौर में आयोजित चौथे कृषि नेतृत्व शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया और हरियाणा किसान रत्न पुरस्कार और हरियाणा कृषि रत्न पुरस्कार प्रदान किये। इस सम्मेलन का उद्देश्य कृषि में आधुनिक, 21वीं शताब्दी की प्रौद्योगिकियों का अनुसरण करने की प्रक्रिया को बढ़ावा देना था। राष्ट्रपति ने कृषि को एक व्यापक उद्यमशील परिप्रेक्ष्य में देखने तथा पारंपरिक कृषि को कृषि मूल्य श्रृंखला के साथ जोड़ने की अपील की।
- 18 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सांस्कृतिक सद्भाव के लिये वर्ष 2014, 2015 और 2016 हेतु टैगोर पुरस्कार क्रमशः राजकुमार सिंहाजीत सिंह (मणिपुरी नृत्य), छायानट (बांग्लादेश का एक सांस्कृतिक संगठन) और राम वनजी सुतार (प्रख्यात मूर्तिकार) को प्रदान किया। उल्लेखनीय है कि सांस्कृतिक सद्भाव के लिये टैगोर पुरस्कार की शुरुआत भारत सरकार ने 2012 में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की 150वीं जयंती के अवसर पर की थी। यह पुरस्कार वर्ष में एक बार दिया जाता है जिसके तहत एक करोड़ रुपए नकद (विदेशी मुद्रा में विनिमय योग्य), एक प्रशस्ति पत्र, धातु की मूर्ति और एक उत्कृष्ट पारंपरिक हस्तशिल्प/हस्तकरघा वस्तु दी जाती है।
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चर्चा में क्यों? हाल ही में केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने कोलकाता स्थित भारतीय सांख्यिकी संस्थान के साथ मिलकर सकल घरेलू ज्ञान उत्पाद के उभरते क्षेत्र पर नई दिल्ली में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। सकल घरेलू ज्ञान उत्पाद - दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर उम्बेर्टो सुलपास्सो द्वारा GDKP के विचार को प्रस्तुत किया गया। - नॉलेज आइटम्स - अलग-अलग श्रेणियों में आधुनिक और स्थानीय दोनों वर्गों की अलग-अलग संस्कृतियों की सूचना सामग्रियों की पहचान करना। - कंट्री नॉलेज प्रोड्यूसिंग मैट्रिक्स - सरकार, निजी संस्थानों और परिवारों द्वारा उत्पादित ज्ञान में विभेद करते हुए GDP प्रभाव के लिये इनकी तुलना करना। - कंट्री नॉलेज यूज़र मैट्रिक्स - व्यक्तियों और निजी कंपनियों द्वारा अपने आधुनिकीकरण के प्रयासों को मापने के लिये स्वीकृत ज्ञान का मूल्य। - कॉस्ट ऑफ लर्निंग - युवा नागरिकों को समर्थन देने के लिये शिक्षा परिवार बॉण्ड, शिक्षा क्रेडिट कार्ड आदि के माध्यम से सरकार के बजटीय निर्णयों में उपयोग की जाने वाली वर्तमान लागत के समान। - यह राष्ट्रीय संस्कृति से संबंधित विशिष्ट ज्ञान सामग्रियों के मूल्य की गणना करने और इन सामग्रियों में समय के साथ परिवर्तन की अनुमति देगा। - उदाहरण के तौर पर, भारत में इन विशिष्ट ज्ञान सामग्रियों के अंतर्गत सांस्कृतिक और धार्मिक शिक्षणों , धार्मिक त्योहारों एवं फसल त्योहारों के प्रसार को शामिल किया गया है। - सकल घरेलू ज्ञान उत्पाद एक राष्ट्रीय ज्ञान शिक्षा मंच के निर्माण की सुविधा भी प्रदान कर सकता है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाने के साथ-साथ जीडीपी और निजी निवेश की उचित भूमिका को बढ़ावा देगा। - यह देश में ज्ञान आधारित अर्थव्यस्था को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण योगदान देगा। हाल ही में वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के केंद्र में बड़े पैमाने पर पर्वतों जैसे ऊँचे-नीचे स्थानों की खोज की है। पृथ्वी की सतह अर्थात भूपर्पटी से छः सौ साठ किमी. नीचे स्थित परत मेंटल पर यह स्थलाकृति पाई गई है जो हमारे ग्रह की उत्पत्ति एवं विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। - वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के मेंटल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पर्वतों की खोज की है जो हमारे ग्रहों के प्रति समझ को बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। - पृथ्वी की संरचना को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा जाता है - क्रस्ट , मेंटल और कोर । क्रस्ट पृथ्वी का बाहरी क्षेत्र, मेंटल मध्य क्षेत्र और कोर आतंरिक क्षेत्र है। इन तीनों की संरचना में भिन्नता के आधार पर इनका वर्गीकरण किया गया है। - वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की आतंरिक संरचना के प्राप्त आँकड़ों के आधार पर ही इन पहाड़ों की जानकारी दी है। - जर्नल साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों ने बोलीविया में एक बड़े भूकंप के दौरान लिये गए आँकड़े का उपयोग किया, जिससे पृथ्वी की सतह से छः सौ साठ किमी. नीचे स्थित क्षेत्र में पहाड़ों एवं अन्य स्थलाकृतियों की जानकारी प्राप्त हुई। - वैज्ञानिकों ने इस सीमा को जहाँ पर उबड़-खाबड़ एवं समतल भाग पाए गए हैं, को 'छः सौ साठ किलोग्राममीटर की सीमा' नाम दिया है। - उन्होने छः सौ साठ किमी. की सीमा के इस भाग पर पृथ्वी की सतह से भी ज़्यादा ऊँचा-नीचा स्थान प्राप्त होने का अनुमान लगाया। इन ऊँचे-नीचे भागों को उन्होने रॉकी और अप्लेशियन पर्वत से भी मज़बूत एवं कठोर होने का अनुमान लगाया। - हालाँकि शोधकर्ताओं ने मेंटल के मध्य भाग पर भी जानकारी एकत्र की लेकिन उन्हें वहाँ कोई भी उबड़-खाबड़ स्थान नहीं प्राप्त हुआ। - छः सौ साठ किलोग्राममीटर की सीमा पर खुरदरेपन की उपस्थिति हमारे ग्रह की उत्पत्ति एवं विकास को समझने में वैज्ञानिकों के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। - अमेरिका में प्रिंसटन विश्वविद्यालय और चीन में इंस्टीट्यूट ऑफ जियोडेसी एंड जियोफिजिक्स के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की गहराई की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिये ग्रह पर सबसे शक्तिशाली तरंगों का इस्तेमाल किया, जो बड़े पैमाने पर भूकंप से उत्पन्न होते हैं। - वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन में आँकड़े प्राप्त करने हेतु एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में बोलीविया में आए भूकंप को आधार बनाया जो अब तक का रिकॉर्ड किया गया दूसरा सबसे बड़ा और गहरा भूकंप है। - इस प्रयोग के अंतर्गत सात.शून्य या उससे अधिक की तीव्रता वाले भूकंपों के आँकड़े प्राप्त करने के लिये सभी दिशाओं में भेदी तरंगों को प्रेषित किया गया जिनकी क्षमता पृथ्वी के आतंरिक भागों से आगे तक जाने में सक्षम थी। - वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक कंप्यूटरों के माध्यम से इन जटिल आँकड़ों का अध्ययन किया। इसमें बताया गया कि जैसे प्रकाश तरंगें किसी दर्पण या प्रिज़्म से टकराकर प्रकाश को परावर्तित करती हैं, ठीक उसी प्रकार भूकंपीय तरंगें समरूप चट्टानों में निर्बाध चलती हैं, लेकिन मार्ग में किसी भी उबड़-खाबड़ या खुरदरेपन के कारण ये तरंगे भी परावर्तित हो जाती हैं। चर्चा में क्यों? हाल ही में भारत में एक वर्षा आधारित कृषि मानचित्र तैयार किया गया। इसके अंतर्गत वर्षा आधारित क्षेत्रों में व्याप्त कृषि जैव विविधता और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का विवरण देते हुए नीतिगत पूर्वाग्रहों का दस्तावेज़ीकरण करने का प्रयास किया गया है। - हाल ही में जारी कृषि मानचित्र में वर्षा आधारित क्षेत्रों में व्याप्त कृषि जैव विविधता और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के साथ-साथ उन नीतिगत पूर्वाग्रहों का दस्तावेज़ीकरण किया गया है, जो इन क्षेत्रों में लोगों को खेती करने में असफल बना रहे हैं। - भारत में पाँच में से तीन किसान सिंचाई के बजाय वर्षा जल का उपयोग कर फसलों का उत्पादन करते हैं। हालाँकि इस तरह से उनका अपनी भूमि में प्रति हेक्टेयर सरकारी निवेश बीस गुना तक कम हो सकता है। - ऐसे किसानों की फसलों की सरकारी खरीद प्रमुख सिंचित भूमि की फसलों का सिर्फ एक भाग है और सरकार की कई प्रमुख कृषि योजनाएँ उन्हें लाभान्वित करने के अनुरूप नहीं हैं। - राष्ट्रीय वर्षा क्षेत्र प्राधिकरण के CEO जो वर्तमान में किसानों की आय दोगुनी करने हेतु बनाई गई सरकारी समिति के प्रमुख भी हैं, इन्होने बताया कि वर्षा आधारित क्षेत्रों के किसानों की अधिक उपेक्षा हुई है जो इन क्षेत्रों में किसानों की कम आय का महत्त्वपूर्ण कारण है। - एक सम्मेलन के दौरान इन्होंने स्पष्ट किया कि वर्षा आधारित क्षेत्रों में किसानों को सिंचित क्षेत्रों वाले किसानों की तुलना में लगभग चालीस% कम आय प्राप्त होती है। - रिवाइटलाइजिंग रेनफेड एग्रीकल्चर नेटवर्क के समन्वयक जिन्होंने यह मानचित्र प्रकाशित किया है ने किसानों की आय में असमानता के लिये सरकार की नीति और उसके व्यय में भेदभाव होना बताया है। - सिंचित भूमि वाले क्षेत्रों में बड़े बांधों और नहर नेटवर्क के माध्यम से प्रति हेक्टेयर पाँच लाख का निवेश प्राप्त होता है, जबकि वर्षा आधारित भूमि में वाटरशेड प्रबंधन का खर्च केवल अट्ठारह,शून्य-पच्चीस,शून्य है। जो यह दर्शाता है कि उपज में अंतर निवेश के अंतर के अनुपात में नहीं है। - इसी प्रकार जब उपज की खरीद देखी गई तो पाया गया कि सरकार ने दो हज़ार एक-दो तथा दो हज़ार ग्यारह-बारह के दशक में गेहूं और चावल पर पाँच.चार लाख करोड़ रुपए खर्च किये। जबकि मोटे अनाज जो वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाए जाते हैं की खरीद पर उसी अवधि में तीन,दो सौ करोड़ रुपए खर्च किये गए। - बीज, उर्वरक सब्सिडी और मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी फ्लैगशिप सरकारी योजनाओं को सिंचित क्षेत्रों के लिये ही बनाया गया है जो कि वर्षा आधारित क्षेत्रों में भी बिना किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखे विस्तृत कर दिया गया है। - उदाहरण के लिये सरकार योजना द्वारा अधिसूचित बहुत से संकर बीजों को उच्च पैदावार प्राप्त करने के लिये समय पर पानी, उर्वरक और कीटनाशक पदार्थों की बहुत आवश्यकता होती है जिसका वर्षा आधारित किसानों के लिये कोई महत्त्व नही हैं। सरकार द्वारा अब तक स्वदेशी बीजों को प्राप्त करने या जैविक खाद को सब्सिडी देने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। - वर्षा आधारित क्षेत्र के किसानों के लिये अनुसंधान और प्रौद्योगिकी पर ध्यान देने तथा उत्पादन हेतु समर्थन प्रदान करने के लिये सिंचित क्षेत्रों वाले किसानों से ज़्यादा संतुलित दृष्टिकोण अपनाए जाने की आवश्यकता है। - वर्तमान समय में किसानों की मदद करने के लिये आय समर्थन महत्वपूर्ण है, साथ ही भविष्य के लिये बेहतर प्रयास किये जाने की आवश्यकता है। - वर्तमान में हर कोई खेती करने के बजाय व्यवसाय करने में सहज महसूस करता है। आने वाले समय में यदि वर्षा आधारित क्षेत्रों में बीज, मिट्टी, पानी की समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता है तो किसान कृषि कार्य छोड़ देंगे। चर्चा में क्यों? इंटरनेट के सदुपयोग और दुरुपयोग की बहस में डार्क वेब हमेशा से चर्चा का बिंदु रहा है। पिछले दिनों जब हैकरों ने कुछ वेबसाइटों के डेटा हैक कर लिये तब यह पुनः चर्चा में आ गया। क्या है डार्क नेट? - इंटरनेट पर ऐसी कई वेबसाइटें हैं जो आमतौर पर प्रयोग किये जाने वाले गूगल, बिंग जैसे सर्च इंजनों और सामान्य ब्राउज़िंग के दायरे से परे होती हैं। इन्हें डार्क नेट या डीप नेट कहा जाता है। - सामान्य वेबसाइटों के विपरीत यह एक ऐसा नेटवर्क होता है जिस तक लोगों के चुनिंदा समूहों की पहुँच होती है और इस नेटवर्क तक विशिष्ट ऑथराइज़ेशन प्रक्रिया, सॉफ्टवेयर और कन्फिग्यूरेशन के माध्यम से ही पहुँचा जा सकता है। - सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, दो हज़ार देश में सभी प्रकार के प्रचलित साइबर अपराधों को संबोधित करने के लिये वैधानिक रूपरेखा प्रदान करता है। ऐसे अपराधों के नोटिस में आने पर कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ इस कानून के अनुसार ही उचित कार्रवाइयाँ करती हैं। एक. सरफेस वेब - यह इंटरनेट का वह भाग है जिसका आमतौर पर हम दिन-प्रतिदिन के कार्यों में प्रयोग करते हैं। - जैसे गूगल या याहू पर कुछ भी सर्च करते हैं तो हमें सर्च रिज़ल्ट्स प्राप्त होते हैं और इसके लिये किसी विशिष्ट अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। - ऐसी वेबसाइटों की सर्च इंजनों द्वारा इंडेक्सिंग की जाती है। इसलिये इन तक सर्च इंजनों के माध्यम से पहुँचा जा सकता है। दो. डीप वेब - इन तक केवल सर्च इंजन के सर्च परिणामों की सहायता से नहीं पहुँचा जा सकता। - डीप वेब के किसी डॉक्यूमेंट तक पहुँचने के लिये उसके URL एड्रेस पर जाकर लॉग-इन करना होगा, जिसके लिये पासवर्ड और यूज़र नेम का प्रयोग करना होगा। - जैसे-जीमेल अकाउंट, ब्लॉगिंग वेबसाइट, सरकारी प्रकाशन, अकादमिक डेटाबेस, वैज्ञानिक अनुसंधान आदि ऐसी ही वेबसाइट्स होती हैं जो अपने प्रकृति में वैधानिक हैं किंतु इन तक पहुँच के लिये एडमिन की अनुमति की आवश्यकता होती है। तीन. डार्क वेब - डार्क वेब अथवा डार्क नेट इंटरनेट का वह भाग है जिसे आमतौर पर प्रयुक्त किये जाने वाले सर्च इंजन से एक्सेस नहीं किया जा सकता। - इसका इस्तेमाल मानव तस्करी, मादक पदार्थों की खरीद और बिक्री, हथियारों की तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों में किया जाता है। - नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के रिकॉर्ड के अनुसार, दो हज़ार पंद्रह से दो हज़ार सत्रह की अवधि में विभिन्न दवा कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा चार मामले दर्ज किये गए थे जिनमें नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थों की बिक्री तथा खरीद के लिये 'डार्क नेट' का इस्तेमाल किया गया था। - डार्क वेब की साइट्स को टॉर एन्क्रिप्शन टूल की सहायता से छुपा दिया जाता है जिससे इन तक सामान्य सर्च इंजन से नहीं पहुँचा जा सकता। - इन तक पहुँच के लिये एक विशेष ब्राउज़र टॉर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके लिये 'द ऑनियन राउटर' शब्द का भी प्रयोग किया जाता है क्योंकि इसमें एकल असुरक्षित सर्वर के विपरीत नोड्स के एक नेटवर्क का उपयोग करते हुए परत-दर-परत डेटा का एन्क्रिप्शन होता है। जिससे इसके प्रयोगकर्त्ताओं की गोपनीयता बनी रहती है। - समग्र इंटरनेट का छियानवे% भाग डार्क वेब से निर्मित है, जबकि सतही वेब केवल चार% है। - सिल्क रोड मार्केटप्लेस नामक वेबसाइट डार्क नेटवर्क का एक प्रसिद्ध उदाहरण है जिस पर हथियारों सहित विभिन्न प्रकार की अवैध वस्तुओं की खरीद और बिक्री की जाती थी। Rapid Fire करेंट अफेयर्स - पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से आयात होने वाली वस्तुओं पर बेसिक सीमा शुल्क बढ़ाकर दो सौ फीसदी कर दिया है। पाकिस्तान से भारत को होने वाला कुल निर्यात दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में लगभग तीन हज़ार चार सौ बयासी करोड़ रुपए था। पाकिस्तान से प्रमुखतः ताज़े फल, सूखे मेवे, सीमेंट, खनिज एवं अयस्क, तैयार चमड़ा, प्रसंस्कृत खाद्य, अकार्बनिक रसायन, कच्चा कपास, मसाले, ऊन, रबर उत्पाद, प्लास्टिक, डाई और खेल का सामान भारत आता है। पाकिस्तान से आने वाले दो सामानों, फल और सीमेंट पर अभी क्रमशः तीस-पैंतीस% और सात.पाँच% ड्यूटी ही लगती थी। आयात शुल्क को दो सौ फीसदी बढ़ाने की वज़ह से पाकिस्तान से भारत को होने वाला आयात लगभग बंद हो जाएगा। भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में दो.इकतालीस अरब डॉलर रहा, जो दो हज़ार सोलह-सत्रह में दो.सत्ताईस अरब डॉलर था। भारत ने दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह में अड़तालीस.पचासी करोड़ डॉलर का सामान पाकिस्तान से आयात किया, जबकि एक.बानवे अरब डॉलर का सामान निर्यात किया गया। - विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार दो हज़ार अट्ठारह में दुनियाभर में खसरे के कुल दो,उनतीस,अड़सठ मामले दर्ज किये गए, जो दो हज़ार सत्रह की तुलना में लगभग दोगुने हैं। चूँकि खसरे का उन्मूलन नहीं हो पा रहा, ऐसे में यह हर किसी की ज़िम्मेदारी है कि टीकाकरण में हो रही चूक को सुधारने का प्रयास करे। एक व्यक्ति के संक्रमित होने से नौ-दस लोगों में इसके विषाणु फैलने का खतरा बढ़ जाता है। हालाँकि दो हज़ार के बाद से खसरे से होने वाली मौतों में अस्सी फीसदी तक कमी आई है जिससे संभवतः दो करोड़ दस लाख लोगों की जान बची है। लेकिन खसरा भौगोलिक या राजनीतिक सीमाओं में बंधा हुआ नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने खसरे के प्रकोप को रोकने एवं उसके उन्मूलन के लिये खसरे के टीके की दो डोज़ देकर उच्च टीकाकरण कार्यक्रम चलाते रहने की विभिन्न देशों से अपील की है। - भारतीय रेलवे देश में पहला रेल परीक्षण ट्रैक बनाने की योजना पर काम कर रहा है। राजस्थान के नावां शहर में सांभर झील के पास देश के पहले रेलवे टेस्ट ट्रैक के लिये काम शुरू किया जा चुका है। इस पर अनुमानित तीन सौ तिरेपन.अड़तालीस करोड़ रुपए की लागत आएगी। यह देश में नई ट्रेनों के प्रयोग और परीक्षण का पहला ट्रैक होगा। इस टेस्ट ट्रैक का उपयोग करके कई नए परीक्षण और रोलिंग स्टॉक तथा इसके घटकों, रेलवे पुलों एवं भू-तकनीकी क्षेत्र से संबंधित नई तकनीकों का भी परीक्षण संभव होगा। इस ट्रैक के निर्माण के बाद भारत उन देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास अपना रेलवे टेस्ट ट्रैक है। अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान आदि देशों में ट्रायल के लिये टेस्ट ट्रैक का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन हमारे देश में अभी तक मौजूदा रेलवे लाइनों पर ही टेस्ट होता है। इस योजना के पहले चरण में पच्चीस किलोग्राममीटर और दूसरे चरण में बीस किलोग्राममीटर लंबी लाइन बिछाई जाएगी। लखनऊ स्थित रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइज़ेशन ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि RDSO भारतीय रेलवे की तकनीकी ज़रूरतों के लिये काम करने वाला अनुसंधान संगठन है। - देश में किलोग्राम का नया मानक बीस मई से लागू होगा। केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय किलोग्राम की नई परिभाषा के मुताबिक इसका नया प्रोटोटाइप अर्थात् मूल नमूना तैयार करेगा। नए नमूने से ही पूरे देश में किलोग्राम का वज़न तय किया जाएगा। इससे किलोग्राम के वज़न में मामूली बदलाव आ सकता है, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। गौरतलब है कि अभी तक किलोग्राम का मानक इसके द्रव्यमान पर आधारित था। पूरी दुनिया में किलोग्राम का वजन फ्रांस के इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एडं मेजर्स की तिजोरी में रखे सिलेंडरनुमा एक बाट से तय किया जाता है। यह नब्बे फीसदी प्लेटिनम और दस प्रतिशत इरिडियम से बना है। यह एक हज़ार आठ सौ नवासी से तिजोरी में बंद है। एक सौ तीस साल बाद किलोग्राम के मानक में बदलाव किया जा रहा है। किलोग्राम की नई परिभाषा भौतिक स्थिरांक पर आधारित है। इसमें वज़न तय करने के लिये धातु के बजाय विद्युत धारा को आधार बनाया गया है। नई परिभाषा के ज़रिये किलोग्राम के दस करोड़वें हिस्से को भी मापा जा सकता है। - देश में इलेक्ट्रिकल वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिये केंद्र सरकार ने कुछ दिशा-निर्देश जारी किये हैं। इनमें इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों को सड़क या राजमार्ग के दोनों तरफ हर पच्चीस किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थापित करने की सिफारिश की गई है। सरकार ने आदर्श इमारत उपनियम-दो हज़ार सोलह और शहरी क्षेत्र विकास योजना रूपरेखा और अनुपालन दिशा-निर्देश-दो हज़ार चौदह में संशोधन कर ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के प्रावधान किये हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों और बुनियादी ढाँचे के लिये उपनियम बनाने में ये दिशा-निर्देश राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिये परामर्श देने का काम करेंगे। इसमें स्पष्ट उल्लेख है कि लंबी दूरी तक जाने में सक्षम या भारी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये राजमार्गों के दोनों तरफ प्रत्येक एक सौ किलोग्राममीटर पर कम-से-कम एक ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन बनाया जाना चाहिये। आवासीय क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशन बनाने का ज़िक्र भी दिशा-निर्देशों में है। सरकार को उम्मीद है कि दो हज़ार तीस तक सड़क पर चलने वाले कुल वाहनों में पच्चीस प्रतिशत हिस्सेदारी ई-वाहनों की होगी। - मौजूदा चैम्पियन साइना नेहवाल ने ओलंपिक रजत पदक विजेता पी.वी. सिंधु को हराकर तिरासीवीं सीनियर राष्ट्रीय बैडमिंटन चैम्पियनशिप का महिला एकल खिताब जीत लिया। फाइनल में सिंधु को पराजित कर साइना ने लगातार दूसरी बार यह खिताब अपने नाम किया। पुरुष एकल में सौरभ वर्मा ने युवा खिलाड़ी लक्ष्य सेन को हराकर खिताब जीता। पुरुष युगल में प्रणव जैरी चोपड़ा और चिराग शेट्टी की जोड़ी ने अर्जुन एम.आर. और श्लोक रामचंद्रन की जोड़ी को हराकर चैम्पियन बनने का गौरव हासिल किया। - अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल में भारत की ओर से सबसे ज़्यादा गोल करने वाले फुटबॉलर सुनील छेत्री को इस खेल के विकास में सहयोग देने के लिये 'फुटबॉल दिल्ली' ने पहले फुटबॉल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया। चौंतीस वर्षीय सुनील छेत्री को सरकार पद्मश्री से सम्मानित कर चुकी है। आपको बता दें कि 'फुटबॉल दिल्ली' इस खेल का दिल्ली में संचालन करती है। सुनील छेत्री को कैप्टन फैंटास्टिक के नाम से भी जाना जाता है। वह सक्रिय खिलाड़ियों के बीच क्रिस्टियानो रोनाल्डो के बाद अंतर्राष्ट्रीय मैचों में दूसरे सबसे अधिक गोल करने वाले फुटबॉलर हैं। - राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हरियाणा सरकार द्वारा सोनीपत ज़िले के गन्नौर में आयोजित चौथे कृषि नेतृत्व शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया और हरियाणा किसान रत्न पुरस्कार और हरियाणा कृषि रत्न पुरस्कार प्रदान किये। इस सम्मेलन का उद्देश्य कृषि में आधुनिक, इक्कीसवीं शताब्दी की प्रौद्योगिकियों का अनुसरण करने की प्रक्रिया को बढ़ावा देना था। राष्ट्रपति ने कृषि को एक व्यापक उद्यमशील परिप्रेक्ष्य में देखने तथा पारंपरिक कृषि को कृषि मूल्य श्रृंखला के साथ जोड़ने की अपील की। - अट्ठारह फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सांस्कृतिक सद्भाव के लिये वर्ष दो हज़ार चौदह, दो हज़ार पंद्रह और दो हज़ार सोलह हेतु टैगोर पुरस्कार क्रमशः राजकुमार सिंहाजीत सिंह , छायानट और राम वनजी सुतार को प्रदान किया। उल्लेखनीय है कि सांस्कृतिक सद्भाव के लिये टैगोर पुरस्कार की शुरुआत भारत सरकार ने दो हज़ार बारह में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की एक सौ पचासवीं जयंती के अवसर पर की थी। यह पुरस्कार वर्ष में एक बार दिया जाता है जिसके तहत एक करोड़ रुपए नकद , एक प्रशस्ति पत्र, धातु की मूर्ति और एक उत्कृष्ट पारंपरिक हस्तशिल्प/हस्तकरघा वस्तु दी जाती है।
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साल 2022 में शुरू होगा पृथ्वी की बर्बादी का दौर, हुयी ये 3 भयानक भविष्यवाणियां!
भारत के टॉप 10 रेड लाइट एरिया. . ! क्या आप जानते हैं वे कहाँ हैं?
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साल दो हज़ार बाईस में शुरू होगा पृथ्वी की बर्बादी का दौर, हुयी ये तीन भयानक भविष्यवाणियां! भारत के टॉप दस रेड लाइट एरिया. . ! क्या आप जानते हैं वे कहाँ हैं?
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रांची : प्रदेश 5ाजपा पार्टी के लिए तीस करोड़ रुपये का फंड जुटाएगी। रविवार को रि6स ऑडिटोरियम में हुई 5ाजपा की प्रांतीय बैठक में आजीवन सहयोग निधि के तहत यह लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके लिए फरवरी तक की मियाद तय करते हुए टॉप से बॉटम तक के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की जवाबदेही तय की गई है। राशि ड्रा3ट या चेक के माध्यम से ही ली जाएगी। पार्टी ने व्य1ितगत स्तर पर मंत्रियों-सांसदों से अधिकतम दो ला2ा और विधायकों से पचास हजार रुपये के सहयोग की उ6मीद र2ाी है।
प्रांतीय बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने की। इस मौके पर मु2यमंत्री रघुवर दास, केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा, सुदर्शन 5ागत, राज्य सरकार के मंत्री, सांसद-विधायक, जिलाध्यक्ष, प्रदेश पदाधिकारी, कार्यसमिति सदस्य, मेयर डिप्टी मेयर, जिला परिषद अध्यक्ष सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। आजीवन सहयोग निधि के तहत तय लक्ष्य के बारे में संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने 5ाजपा पदाधिकारियों को जानकारी दी। बैठक के उपरांत प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश ने बताया कि आजीवन सहयोग निधि के तहत 5ाजपा अपने सदस्यों और समाज से राशि का संग्रह करती है और सार्वजनिक धन के माध्यम से पार्टी को चलाती है। इसी सिलसिले में इस वर्ष फरवरी तक तीस करोड़ रुपये की राशि एकत्र करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
स्पष्ट किया कि पार्टी फंड के तहत एकत्र की जाने वाली राशि ड्रा3ट या चेक के माध्यम से ही ली जाएगी। कहा कि 5ाजपा सांसद, विधायक, पदाधिकारी व्य1ितगत स्तर और समाज से यह राशि एकत्र करेंगे। जो आर्थिक रूप से कमजोर सदस्य हैं उनके लिए सक्षम पदाधिकारी राशि दे सकते हैं। कहा, आजीवन सहयोग निधि के राशि संग्रह के लिए रसीद जिलाध्यक्षों को दे दी गई है। कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों से कम से कम दो हजार रुपये की राशि बतौर सहयोग ली जाएगी। बता दें कि 5ाजपा ने झार2ांड में पहली बार आजीवन सहयोग निधि के तहत 30 करोड़ का 5ारी 5ारकम लक्ष्य तय किया है। झार2ांड गठन से अब तक पार्टी आजीवन सहयोग निधि के तहत तीन करोड़ रुपये का फंड 5ाी नहीं जुटा सकी है। भाजपा आजीवन सहयोग निधि के संयोजक और धनबाद के मेयर चंद्रशे2ार अग्रवाल ने विश्वास जताया कि पार्टी आसानी से सहयोग निधि के लक्ष्य को हासिल कर लेगी।
प्रदेश 5ाजपा ने राज्य के प्रत्येक मंडल से 50 हजार रुपये की राशि जुटाने का लक्ष्य तय किया है। संगठन की दृष्टि से 5ाजपा ने 512 मंडलों में प्रदेश को वि5ा1तकिया है। इस लिहाज से सिर्फ इन मंडलों से ही 2. 56 करोड़ की सहयोग निधि एकत्र हो जाएगी।
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रांची : प्रदेश पाँचाजपा पार्टी के लिए तीस करोड़ रुपये का फंड जुटाएगी। रविवार को रिछःस ऑडिटोरियम में हुई पाँचाजपा की प्रांतीय बैठक में आजीवन सहयोग निधि के तहत यह लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके लिए फरवरी तक की मियाद तय करते हुए टॉप से बॉटम तक के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की जवाबदेही तय की गई है। राशि ड्रातीनट या चेक के माध्यम से ही ली जाएगी। पार्टी ने व्यएकितगत स्तर पर मंत्रियों-सांसदों से अधिकतम दो लादोा और विधायकों से पचास हजार रुपये के सहयोग की उछःमीद रदोाी है। प्रांतीय बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने की। इस मौके पर मुदोयमंत्री रघुवर दास, केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा, सुदर्शन पाँचागत, राज्य सरकार के मंत्री, सांसद-विधायक, जिलाध्यक्ष, प्रदेश पदाधिकारी, कार्यसमिति सदस्य, मेयर डिप्टी मेयर, जिला परिषद अध्यक्ष सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। आजीवन सहयोग निधि के तहत तय लक्ष्य के बारे में संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने पाँचाजपा पदाधिकारियों को जानकारी दी। बैठक के उपरांत प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश ने बताया कि आजीवन सहयोग निधि के तहत पाँचाजपा अपने सदस्यों और समाज से राशि का संग्रह करती है और सार्वजनिक धन के माध्यम से पार्टी को चलाती है। इसी सिलसिले में इस वर्ष फरवरी तक तीस करोड़ रुपये की राशि एकत्र करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। स्पष्ट किया कि पार्टी फंड के तहत एकत्र की जाने वाली राशि ड्रातीनट या चेक के माध्यम से ही ली जाएगी। कहा कि पाँचाजपा सांसद, विधायक, पदाधिकारी व्यएकितगत स्तर और समाज से यह राशि एकत्र करेंगे। जो आर्थिक रूप से कमजोर सदस्य हैं उनके लिए सक्षम पदाधिकारी राशि दे सकते हैं। कहा, आजीवन सहयोग निधि के राशि संग्रह के लिए रसीद जिलाध्यक्षों को दे दी गई है। कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों से कम से कम दो हजार रुपये की राशि बतौर सहयोग ली जाएगी। बता दें कि पाँचाजपा ने झारदोांड में पहली बार आजीवन सहयोग निधि के तहत तीस करोड़ का पाँचारी पाँचारकम लक्ष्य तय किया है। झारदोांड गठन से अब तक पार्टी आजीवन सहयोग निधि के तहत तीन करोड़ रुपये का फंड पाँचाी नहीं जुटा सकी है। भाजपा आजीवन सहयोग निधि के संयोजक और धनबाद के मेयर चंद्रशेदोार अग्रवाल ने विश्वास जताया कि पार्टी आसानी से सहयोग निधि के लक्ष्य को हासिल कर लेगी। प्रदेश पाँचाजपा ने राज्य के प्रत्येक मंडल से पचास हजार रुपये की राशि जुटाने का लक्ष्य तय किया है। संगठन की दृष्टि से पाँचाजपा ने पाँच सौ बारह मंडलों में प्रदेश को विपाँचाएकतकिया है। इस लिहाज से सिर्फ इन मंडलों से ही दो. छप्पन करोड़ की सहयोग निधि एकत्र हो जाएगी।
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इन्द्रजीत ने भी अपना, अस्त्र सुग्रीव पै साध लिया । उस तरफ बंधा भामंडल, यहां सुग्रीव नरेश को बांध लिया ।। यह हाल लखा वज्रङ्गवली ने, क्रोध बढ़न में छाया है । अन्य लक्षों को गौण बना, उस तरफ हो रथ बढ़ाया है।
जा पहुँचें भटपट वहीं, जहाँ थे दोनों वीर । रोक रथ होऊ शूरों के, चोला अमित वली वीर ।" क्यों उछल कूद मचाई है, व परभव को पहुंचाऊंगा । सुग्रीव और भामंडल के, बांधन का स्वाद चखाऊंगा ।। फिर क्या था व वीर परस्पर, वारणों की वर्षा करने लगे । घनघोर युद्ध छिड़ गया वहां, कायर लख के ही गिरने लगे । रक्त नही बहती यहाँ नम में, रक्त कुवारे चलते हैं । जिस पर जा पड़े वीरों के बारण, क्या पता कहां जा मिलते हैं । थे श्रमित वली रावण सुत, पर वज्रांग भी एक ही नाहर थे । थे कांपते जिनके नाम से नृप, ऐसे दुनियां में जाहिर थे । रुप गये पांव श्री राम चमू के, देख के योद्धा चलधारी । भिड़ गई सेना फिर से आपस में, मारा मार मची भारी ॥ भुशुण्डी शतव्नी परिघापटा, भाला खंजर भी खटकते हैं । उन वीरों के रण में आपस में, व्योम में चार सरकते हैं ।
अस्त्र शस्त्र कड़कते, ज्यों हो विद्युत पात । देख तेज वज्रंग का, सोचें दोनों भ्रात ॥ अमित बली हनुमंत है, शक इसमें कुछ नांय । शक्ति ना हर कोई सह सकें, नाम सुनत भग जांय ।
उधर वली श्री हनुमान के, वारणों से अम्बर छाया है। इत मेघवाहन और इन्द्रजीत क्या, रावण दल घवराया है । इतने में मूर्छा त्याग के रण में, भानुकर्ण भी आया है। फिर तो क्या था रणभूमि में, कल्पान्त काल सा छाया है । दोहा
कुम्भकर्ण ने उछल कर, मारी गदा घुमाय । पवन पुत्र उस गढ़ा से, गिरे मूर्छा खाय ।। हो गये वीर तीनों वेवस, फिर राघव सेना घबराई । यह हाल देख वानर दल का, रावण सेना अति गवई ॥ पक्षी जैसे उड़ते नभ में, यों वीरों के सिर उड़ते हैं यह हाल विभीषण देख, राम श्रगे यों गिरा उचरते हैं ।
विभोषण - राम भयभीत
दोहा (विभीषण )
सेना हमारी हो गई,
सभी प्रभु वेकार ।
रावण के सुत भ्रात ने किया बहुत संहार ।।
भामंडल और सुग्रीव बली, दोनों वेवस कर डारे हैं। धोखे में गिरा वत्रांगवली, सब दल के होश विगारे हैं । मानिन्द शेर के गर्ज रहे, निर्भय हो अब दोनों दल में । ऐसे तो खाली कर देंगे, हमको योद्धों से क्षरण पल में ।।
केवल इक श्रंगढ़ वली, निभा रहे हैं काम । जिनके पैरों पर खड़ी, कुछ सेना सुख धाम ।।
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इन्द्रजीत ने भी अपना, अस्त्र सुग्रीव पै साध लिया । उस तरफ बंधा भामंडल, यहां सुग्रीव नरेश को बांध लिया ।। यह हाल लखा वज्रङ्गवली ने, क्रोध बढ़न में छाया है । अन्य लक्षों को गौण बना, उस तरफ हो रथ बढ़ाया है। जा पहुँचें भटपट वहीं, जहाँ थे दोनों वीर । रोक रथ होऊ शूरों के, चोला अमित वली वीर ।" क्यों उछल कूद मचाई है, व परभव को पहुंचाऊंगा । सुग्रीव और भामंडल के, बांधन का स्वाद चखाऊंगा ।। फिर क्या था व वीर परस्पर, वारणों की वर्षा करने लगे । घनघोर युद्ध छिड़ गया वहां, कायर लख के ही गिरने लगे । रक्त नही बहती यहाँ नम में, रक्त कुवारे चलते हैं । जिस पर जा पड़े वीरों के बारण, क्या पता कहां जा मिलते हैं । थे श्रमित वली रावण सुत, पर वज्रांग भी एक ही नाहर थे । थे कांपते जिनके नाम से नृप, ऐसे दुनियां में जाहिर थे । रुप गये पांव श्री राम चमू के, देख के योद्धा चलधारी । भिड़ गई सेना फिर से आपस में, मारा मार मची भारी ॥ भुशुण्डी शतव्नी परिघापटा, भाला खंजर भी खटकते हैं । उन वीरों के रण में आपस में, व्योम में चार सरकते हैं । अस्त्र शस्त्र कड़कते, ज्यों हो विद्युत पात । देख तेज वज्रंग का, सोचें दोनों भ्रात ॥ अमित बली हनुमंत है, शक इसमें कुछ नांय । शक्ति ना हर कोई सह सकें, नाम सुनत भग जांय । उधर वली श्री हनुमान के, वारणों से अम्बर छाया है। इत मेघवाहन और इन्द्रजीत क्या, रावण दल घवराया है । इतने में मूर्छा त्याग के रण में, भानुकर्ण भी आया है। फिर तो क्या था रणभूमि में, कल्पान्त काल सा छाया है । दोहा कुम्भकर्ण ने उछल कर, मारी गदा घुमाय । पवन पुत्र उस गढ़ा से, गिरे मूर्छा खाय ।। हो गये वीर तीनों वेवस, फिर राघव सेना घबराई । यह हाल देख वानर दल का, रावण सेना अति गवई ॥ पक्षी जैसे उड़ते नभ में, यों वीरों के सिर उड़ते हैं यह हाल विभीषण देख, राम श्रगे यों गिरा उचरते हैं । विभोषण - राम भयभीत दोहा सेना हमारी हो गई, सभी प्रभु वेकार । रावण के सुत भ्रात ने किया बहुत संहार ।। भामंडल और सुग्रीव बली, दोनों वेवस कर डारे हैं। धोखे में गिरा वत्रांगवली, सब दल के होश विगारे हैं । मानिन्द शेर के गर्ज रहे, निर्भय हो अब दोनों दल में । ऐसे तो खाली कर देंगे, हमको योद्धों से क्षरण पल में ।। केवल इक श्रंगढ़ वली, निभा रहे हैं काम । जिनके पैरों पर खड़ी, कुछ सेना सुख धाम ।।
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नई दिल्लीः अपने बयान को लेकर चर्चा में रहने वाले बॉलीवुड अभिनेता ऋषि कपूर एक बार फिस से चर्चा में आ गए हैं। इस बार उनका गुस्सा गांधी परिवार पर निकला है। ऋषि कपूर ने जगहों और संपत्तियों के नाम गांधी या नेहरू से रखे जाने को लेकर गांधी परिवार पर निशाना साधा है।
दरअसल देश में कई संपत्तियों पर गांधी का नाम होने से ऋषि कपूर खफा हैं जिसे लेकर उन्होंने अपनी ट्विटर वॉल पर गांधी परिवार के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली है। उन्होंने कहा है कि देश के महत्वपूर्ण जगहों या हिस्सों के नाम उन लोगों के नाम पर होने चाहिएं जिन्होंने हमारे देश के लिए कुछ योगदान किया हो।
उनका कहना है कि ज्यादातर संपत्तियों पर गांधी फैमिली का नाम क्यों है? जैसे की इंदिरा गांधी एयरपोर्ट क्यों है महात्मा गांधी क्यों नहीं या भगत सिंह, अंबेडकर भी हो सकता था या फिर ऋषि कपूर भी।
उन्होंने ट्वीट कर कहा है 'ये कितना छिछला है आप खुद सोचिए। ' ऋषि कपूर ने अपने ट्वीट में कहा कि उन्हें मुंबई फिल्म सिटी का नाम भी काफी खटक रहा है। इसका नाम दिलीप कुमार, देव आनंद, अशोक कुमार या अमिताभ बच्चन के नाम पर भी रखा जा सकता है। हमें देश में महत्वपूर्ण सम्पत्तियों का नाम ऐसे व्यक्तियों के नाम पर रखना चाहिए जिन्होंने देश और समाज में कोई सहयोग दिया हो।
हर चीज गांधी फैमिली के नाम पर नहीं होनी चाहिए। मैं इससे सहमत नहीं। आप लोग भी सोचना! ' बांद्रा वर्ली सी लिंक का नाम लता मंगेशकर या जेआरडी टाटा लिंक रोड रख सकते हैं। बाप का माल समझ रखा था? उन्होंने लिखा है 'जब दिल्ली की सड़कें बदल सकती हैं तो कांग्रेस की संपत्ति या प्रॉपर्टी के नाम क्यों नहीं बदल सकते? राजीव गांधी उद्योग का नाम भी कुछ और हो सकता था। सोचना आप लोग भी। ऋषि कपूर ने ऐसे कई ट्वीट किए जिसमें उन्होंने गांधी परिवार को आड़े हाथों लिया है।
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नई दिल्लीः अपने बयान को लेकर चर्चा में रहने वाले बॉलीवुड अभिनेता ऋषि कपूर एक बार फिस से चर्चा में आ गए हैं। इस बार उनका गुस्सा गांधी परिवार पर निकला है। ऋषि कपूर ने जगहों और संपत्तियों के नाम गांधी या नेहरू से रखे जाने को लेकर गांधी परिवार पर निशाना साधा है। दरअसल देश में कई संपत्तियों पर गांधी का नाम होने से ऋषि कपूर खफा हैं जिसे लेकर उन्होंने अपनी ट्विटर वॉल पर गांधी परिवार के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली है। उन्होंने कहा है कि देश के महत्वपूर्ण जगहों या हिस्सों के नाम उन लोगों के नाम पर होने चाहिएं जिन्होंने हमारे देश के लिए कुछ योगदान किया हो। उनका कहना है कि ज्यादातर संपत्तियों पर गांधी फैमिली का नाम क्यों है? जैसे की इंदिरा गांधी एयरपोर्ट क्यों है महात्मा गांधी क्यों नहीं या भगत सिंह, अंबेडकर भी हो सकता था या फिर ऋषि कपूर भी। उन्होंने ट्वीट कर कहा है 'ये कितना छिछला है आप खुद सोचिए। ' ऋषि कपूर ने अपने ट्वीट में कहा कि उन्हें मुंबई फिल्म सिटी का नाम भी काफी खटक रहा है। इसका नाम दिलीप कुमार, देव आनंद, अशोक कुमार या अमिताभ बच्चन के नाम पर भी रखा जा सकता है। हमें देश में महत्वपूर्ण सम्पत्तियों का नाम ऐसे व्यक्तियों के नाम पर रखना चाहिए जिन्होंने देश और समाज में कोई सहयोग दिया हो। हर चीज गांधी फैमिली के नाम पर नहीं होनी चाहिए। मैं इससे सहमत नहीं। आप लोग भी सोचना! ' बांद्रा वर्ली सी लिंक का नाम लता मंगेशकर या जेआरडी टाटा लिंक रोड रख सकते हैं। बाप का माल समझ रखा था? उन्होंने लिखा है 'जब दिल्ली की सड़कें बदल सकती हैं तो कांग्रेस की संपत्ति या प्रॉपर्टी के नाम क्यों नहीं बदल सकते? राजीव गांधी उद्योग का नाम भी कुछ और हो सकता था। सोचना आप लोग भी। ऋषि कपूर ने ऐसे कई ट्वीट किए जिसमें उन्होंने गांधी परिवार को आड़े हाथों लिया है।
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मुख्यमन्त्री राउत ने कहा है कि जानकी मन्दिर को आधार मान कर धार्मिक सर्किट निर्माण करने की योजना सार्वजनिक हो चुकी है । उनका कहना है कि सभी धार्मिकस्थलों को एक ही सर्किट में जोड़कर विकास किया जाएगा । मुख्यमन्त्री राउत ने कहा कि भारत सरकार द्वारा निर्माणाधिन 'रामायण सर्किट' ने सिर्फ जनकपुर और अयोध्या को जोड़ा है, उसको बिस्तार कर भारत की अन्य शहरों को भी जोड़ने की जरुरत है । मुख्यमन्त्री राउत ने कहा है कि धार्मिक महत्व से भरिपूर्ण जानकी मन्दिर की विकास करने के लिए और इस क्षेत्र को विश्व सम्पदा सूची में सुचिकृत कराने के लिए सरकार की ओर से भरमग्दुर प्रयास की जाएगी ।
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मुख्यमन्त्री राउत ने कहा है कि जानकी मन्दिर को आधार मान कर धार्मिक सर्किट निर्माण करने की योजना सार्वजनिक हो चुकी है । उनका कहना है कि सभी धार्मिकस्थलों को एक ही सर्किट में जोड़कर विकास किया जाएगा । मुख्यमन्त्री राउत ने कहा कि भारत सरकार द्वारा निर्माणाधिन 'रामायण सर्किट' ने सिर्फ जनकपुर और अयोध्या को जोड़ा है, उसको बिस्तार कर भारत की अन्य शहरों को भी जोड़ने की जरुरत है । मुख्यमन्त्री राउत ने कहा है कि धार्मिक महत्व से भरिपूर्ण जानकी मन्दिर की विकास करने के लिए और इस क्षेत्र को विश्व सम्पदा सूची में सुचिकृत कराने के लिए सरकार की ओर से भरमग्दुर प्रयास की जाएगी ।
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बीजिंग (एएनआई): चीनी विदेश मंत्री किन गैंग गोवा में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए भारत की यात्रा करेंगे।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा कि बैठक में किन गैंग एससीओ के अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।
एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक 4 और 5 मई को गोवा में होगी।
"बैठक में, स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री किन गैंग अन्य एससीओ सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्थिति और विभिन्न क्षेत्रों में एससीओ सहयोग सहित अन्य विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे, ताकि इस साल के एससीओ शिखर सम्मेलन की पूरी तैयारी की जा सके। " "प्रवक्ता ने कहा।
प्रवक्ता ने कहा कि किन गैंग अर्थव्यवस्था और आजीविका सहित विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को गहरा करने के लिए म्यांमार का दौरा भी करेगी।
किन गैंग ने नई दिल्ली में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी और बताया था कि द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति चुनौतियों के संदर्भ में "असामान्य" थी, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और शांति के संदर्भ में। .
भारत और चीन ने चीनी सेना की कार्रवाई के बाद पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से पीछे हटने के लिए कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ता की है, जिसके कारण मई 2020 में गतिरोध पैदा हो गया था।
किन गैंग को पिछले साल दिसंबर में चीन का नया विदेश मंत्री नियुक्त किया गया था।
चीन के रक्षा मंत्री जनरल ली शांगफू एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए पिछले महीने दिल्ली में थे। (एएनआई)
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बीजिंग : चीनी विदेश मंत्री किन गैंग गोवा में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए भारत की यात्रा करेंगे। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा कि बैठक में किन गैंग एससीओ के अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक चार और पाँच मई को गोवा में होगी। "बैठक में, स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री किन गैंग अन्य एससीओ सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्थिति और विभिन्न क्षेत्रों में एससीओ सहयोग सहित अन्य विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे, ताकि इस साल के एससीओ शिखर सम्मेलन की पूरी तैयारी की जा सके। " "प्रवक्ता ने कहा। प्रवक्ता ने कहा कि किन गैंग अर्थव्यवस्था और आजीविका सहित विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को गहरा करने के लिए म्यांमार का दौरा भी करेगी। किन गैंग ने नई दिल्ली में जीबीस विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी और बताया था कि द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति चुनौतियों के संदर्भ में "असामान्य" थी, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और शांति के संदर्भ में। . भारत और चीन ने चीनी सेना की कार्रवाई के बाद पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा से पीछे हटने के लिए कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ता की है, जिसके कारण मई दो हज़ार बीस में गतिरोध पैदा हो गया था। किन गैंग को पिछले साल दिसंबर में चीन का नया विदेश मंत्री नियुक्त किया गया था। चीन के रक्षा मंत्री जनरल ली शांगफू एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए पिछले महीने दिल्ली में थे।
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South Korea: जनसंख्या रोककर अमीर बना दक्षिण कोरिया, अब यहां के लोग बच्चे क्यों नहीं पैदा कर पा रहे?
1 GB Data Price: एक जीबी इंटरनेट की कीमत किन देशों में हैं भारत से कम और कहां है ज्यादा?
दक्षिण कोरिया में परमाणु बमों से लैस पनडुब्बियां तैनात करेगा अमेरिका, किम जोंग को जंग का न्योता?
Jung Chae Yulll: दक्षिण कोरिया की प्रसिद्ध अभिनेत्री जंग चा यूल की संदिग्ध मौत, 26 साल थी उम्र, जानें कौन थीं?
उत्तर कोरिया ने किया समुद्र में सुनामी लाने वाली मिसाइल का टेस्ट, जानें दुनिया के लिए कितना है खतरनाक?
'नाटु नाटु' गाने पर नाचे दक्षिण कोरिया के राजदूत, वीडियो वायरल, पीएम मोदी के रिएक्शन पर बोले राजदूत. .
उत्तर कोरिया ने फिर दागी बैलिस्टिक मिसाइलें, अमेरिका के खिलाफ क्यों आगबबूला हुईं किम जोंग की बहन?
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खबर के मुताबिक पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है की बिहार के चार पंचायत पर एक तकनीकी सहायक बहाल करने की योजना है। इसको लेकर तैयारी चल रही हैं। बहुत जल्द बिहार के पंचायतों में तकनीकी सहायक की भर्ती की जाएगी।
किन-किन पदों पर होगी भर्ती।
1 . बता दें की आठ हजार 387 पंचायतों में करीब सात हजार कार्यपालक सहायक बहाल हो चुके हैं। बाकि बचे कार्यपालक सहायक के पदों पर बहुत जल्द भर्ती की जाएगी।
2 . पंचयती राज विभाग में दो हजार 96 आइटी सहायक के पद स्वीकृत किये गए थे। जिसमे एक हजार 625 की बहाली हो चुकी है। शेष की बहाली जल्द होगी।
3 . पंचायती राज विभाग में दो हजार 96 स्वीकृत पदों में एक हजार 418 पदों पर बहाली हो चुकी है। शेष पदों पर जल्द बहाली होगी।
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खबर के मुताबिक पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है की बिहार के चार पंचायत पर एक तकनीकी सहायक बहाल करने की योजना है। इसको लेकर तैयारी चल रही हैं। बहुत जल्द बिहार के पंचायतों में तकनीकी सहायक की भर्ती की जाएगी। किन-किन पदों पर होगी भर्ती। एक . बता दें की आठ हजार तीन सौ सत्तासी पंचायतों में करीब सात हजार कार्यपालक सहायक बहाल हो चुके हैं। बाकि बचे कार्यपालक सहायक के पदों पर बहुत जल्द भर्ती की जाएगी। दो . पंचयती राज विभाग में दो हजार छियानवे आइटी सहायक के पद स्वीकृत किये गए थे। जिसमे एक हजार छः सौ पच्चीस की बहाली हो चुकी है। शेष की बहाली जल्द होगी। तीन . पंचायती राज विभाग में दो हजार छियानवे स्वीकृत पदों में एक हजार चार सौ अट्ठारह पदों पर बहाली हो चुकी है। शेष पदों पर जल्द बहाली होगी।
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शिवस चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसटीएसओ) 'फास्ट जर्नी टू द फ्यूचर- हाई स्पीड ट्रेन' पर एक कार्यशाला आयोजित करेगा।
कार्यशाला में, जो तुर्की में हाई स्पीड ट्रेन द्वारा पहुंचे प्रांतों के बीच पहली बार आयोजित की जाएगी, पर्यटन, उद्योग, सेवा क्षेत्र और शिक्षा के क्षेत्र में इससे होने वाले सकारात्मक लाभ पर चर्चा की जाएगी।
परिवहन और अवसंरचना मंत्री आदिल करिश्माईलू, उप मंत्री, एके पार्टी इज़मिर उप-बिनाली येल्डरिम, गवर्नर सालिह अहान, प्रतिनियुक्ति, मेयर हिलमी बिलगिन, टीसीडीडी महाप्रबंधक İsa Apaydın, T ,RASAŞ महाप्रबंधक मुस्तफा मेटिन यार, प्रांतीय प्रोटोकॉल, राजनीतिक पार्टी के प्रतिनिधि, विश्वविद्यालय के डॉक्टरों और शिक्षाविदों, पड़ोसी प्रांतों और प्रांतों जहां YHT सेवा में है, NGO प्रतिनिधि, जिला गवर्नर, जिला गवर्नर, Sivas के ओपिनियन लीडर्स, संबंधित क्षेत्रों के प्रतिनिधि और पत्रकार। भाग लेने की उम्मीद है।
कार्यशाला में वक्ताओं के रूप में महत्वपूर्ण नाम भी भाग लेंगे, जिसमें Sivas YHT के लिए तैयार है, प्रांत में किन बदलावों का अनुभव किया जाएगा, और विचारों और सुझावों पर चर्चा की जाएगी।
पर्यटन के क्षेत्र में विकसित परियोजनाओं के लिए कई पुरस्कार जीते, डॉ. केम किने, पत्रकार-लेखक और यात्री फातिह तुर्कमेनोग्लू, और एब्रू बेबारा डेमिर, जो दुनिया के शीर्ष 10 शेफ में से हैं, आयोजित होने वाले पैनल में अपने अनुभवों के साथ प्रतिभागियों के लिए योगदान देंगे।
यह कहते हुए कि हाई स्पीड ट्रेन कार्यशाला मंगलवार, 16 मार्च, 2021 को आयोजित की जाएगी, सिवास चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसटीएसओ) बोर्ड के अध्यक्ष मुस्तफा एकेन ने कहा, "यह एक व्यापक कार्यशाला होगी जिसमें सभी हितधारक शामिल होंगे। भाग लेंगे। "
हमारे राष्ट्रपति मुस्तफा एकेन ने 'फ़ास्ट जर्नी टू द फ़्यूचर - हाई स्पीड ट्रेन' वर्कशॉप के महत्व को बताया और कहा, "हाई-स्पीड ट्रेन सिवास के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा, "सिवास, जो विकसित हो रहा है और लगातार बढ़ रहा है, हाई-स्पीड ट्रेन के साथ और भी अधिक गति प्राप्त करेगा।"
हमारे राष्ट्रपति इकेन ने निम्नलिखित नोट किया; "हम जानते हैं कि अंकारा और सिवास के बीच हाई स्पीड ट्रेन लाइन के खुलने से क्षेत्र का तेजी से विकास होगा और क्षेत्र के लोगों का जीवन बदल जाएगा। इस्तांबुल में एक व्यक्ति 4 घंटे में सिवास आ सकेगा। आप 2 घंटे में अंकारा जा सकते हैं। 2 मिलियन विदेशी नागरिक सालाना सिवास आते हैं। करीब 800 हजार पर्यटक आते हैं। हमारा अनुमान है कि हाई-स्पीड ट्रेन के आने से यह संख्या 5 मिलियन हो जाएगी। पर्यटन राजस्व में भारी वृद्धि होगी। बेशक, यहां हमें इस स्थिति के अनुसार अपने शहर और पर्यटन क्षेत्रों को तैयार करना होगा। इन्हें साकार करने के लिए, हमें एकता और एकजुटता से काम करने की आवश्यकता है ताकि YHT अर्थव्यवस्था और संवर्धन के मामले में हमारे प्रांत में योगदान दे। यदि कमियां हैं, तो हमें समाधान सुझावों को पहचानने और बनाने की आवश्यकता है। यात्राएँ शुरू होने से पहले, हमें हर दृष्टि से अपने शहर को तैयार करना चाहिए। हर किसी को, हमारे ट्रेडमैन से लेकर हमारे संस्थानों और गैर-सरकारी संगठनों को अपना हिस्सा बनाना चाहिए। इस कारण से, सिवास चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, हम इस कार्यशाला को आयोजित कर रहे हैं। YHT ने टेस्ट ड्राइव शुरू किया। यह Sivas YHT स्टेशन पर आता है। हमारे लोगों ने YHT के आगमन को देखा और बेसब्री से इसके चालू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। एसटीएसओ के रूप में, हम उन प्रांतों के साथ समन्वय में एक कार्यशाला आयोजित करेंगे, जहां हाई स्पीड ट्रेन के लिए सिवास तैयार करने के लिए हाई स्पीड ट्रेन सेवाएं शुरू होती हैं। इस कार्यशाला में, हम स्वास्थ्य से लेकर उद्योग तक, व्यापार से लेकर शिक्षा तक कई क्षेत्रों में एक रोडमैप को परिभाषित करेंगे। हम शहरी परिवहन, स्वास्थ्य संस्थानों, रेस्तरां, होटल, पर्यटन क्षेत्रों, और जिलों जैसे कई क्षेत्रों में हमारी मौजूदा सेवाओं पर विचार करेंगे, और हम कमियों को खत्म करने के लिए एक काम शुरू करेंगे, यदि कोई हो। हम अपनी कार्यशाला के परिणामों को एक पुस्तिका में एकत्र करेंगे और उन्हें संबंधित स्थानों पर वितरित करेंगे। मुझे उम्मीद है कि 'फास्ट जर्नी टू द फ्यूचर - हाई स्पीड ट्रेन' कार्यशाला हमारे शहर के लिए अच्छे परिणाम लाएगी। "
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शिवस चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री 'फास्ट जर्नी टू द फ्यूचर- हाई स्पीड ट्रेन' पर एक कार्यशाला आयोजित करेगा। कार्यशाला में, जो तुर्की में हाई स्पीड ट्रेन द्वारा पहुंचे प्रांतों के बीच पहली बार आयोजित की जाएगी, पर्यटन, उद्योग, सेवा क्षेत्र और शिक्षा के क्षेत्र में इससे होने वाले सकारात्मक लाभ पर चर्चा की जाएगी। परिवहन और अवसंरचना मंत्री आदिल करिश्माईलू, उप मंत्री, एके पार्टी इज़मिर उप-बिनाली येल्डरिम, गवर्नर सालिह अहान, प्रतिनियुक्ति, मेयर हिलमी बिलगिन, टीसीडीडी महाप्रबंधक İsa Apaydın, T ,RASAŞ महाप्रबंधक मुस्तफा मेटिन यार, प्रांतीय प्रोटोकॉल, राजनीतिक पार्टी के प्रतिनिधि, विश्वविद्यालय के डॉक्टरों और शिक्षाविदों, पड़ोसी प्रांतों और प्रांतों जहां YHT सेवा में है, NGO प्रतिनिधि, जिला गवर्नर, जिला गवर्नर, Sivas के ओपिनियन लीडर्स, संबंधित क्षेत्रों के प्रतिनिधि और पत्रकार। भाग लेने की उम्मीद है। कार्यशाला में वक्ताओं के रूप में महत्वपूर्ण नाम भी भाग लेंगे, जिसमें Sivas YHT के लिए तैयार है, प्रांत में किन बदलावों का अनुभव किया जाएगा, और विचारों और सुझावों पर चर्चा की जाएगी। पर्यटन के क्षेत्र में विकसित परियोजनाओं के लिए कई पुरस्कार जीते, डॉ. केम किने, पत्रकार-लेखक और यात्री फातिह तुर्कमेनोग्लू, और एब्रू बेबारा डेमिर, जो दुनिया के शीर्ष दस शेफ में से हैं, आयोजित होने वाले पैनल में अपने अनुभवों के साथ प्रतिभागियों के लिए योगदान देंगे। यह कहते हुए कि हाई स्पीड ट्रेन कार्यशाला मंगलवार, सोलह मार्च, दो हज़ार इक्कीस को आयोजित की जाएगी, सिवास चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री बोर्ड के अध्यक्ष मुस्तफा एकेन ने कहा, "यह एक व्यापक कार्यशाला होगी जिसमें सभी हितधारक शामिल होंगे। भाग लेंगे। " हमारे राष्ट्रपति मुस्तफा एकेन ने 'फ़ास्ट जर्नी टू द फ़्यूचर - हाई स्पीड ट्रेन' वर्कशॉप के महत्व को बताया और कहा, "हाई-स्पीड ट्रेन सिवास के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा, "सिवास, जो विकसित हो रहा है और लगातार बढ़ रहा है, हाई-स्पीड ट्रेन के साथ और भी अधिक गति प्राप्त करेगा।" हमारे राष्ट्रपति इकेन ने निम्नलिखित नोट किया; "हम जानते हैं कि अंकारा और सिवास के बीच हाई स्पीड ट्रेन लाइन के खुलने से क्षेत्र का तेजी से विकास होगा और क्षेत्र के लोगों का जीवन बदल जाएगा। इस्तांबुल में एक व्यक्ति चार घंटाटे में सिवास आ सकेगा। आप दो घंटाटे में अंकारा जा सकते हैं। दो मिलियन विदेशी नागरिक सालाना सिवास आते हैं। करीब आठ सौ हजार पर्यटक आते हैं। हमारा अनुमान है कि हाई-स्पीड ट्रेन के आने से यह संख्या पाँच मिलियन हो जाएगी। पर्यटन राजस्व में भारी वृद्धि होगी। बेशक, यहां हमें इस स्थिति के अनुसार अपने शहर और पर्यटन क्षेत्रों को तैयार करना होगा। इन्हें साकार करने के लिए, हमें एकता और एकजुटता से काम करने की आवश्यकता है ताकि YHT अर्थव्यवस्था और संवर्धन के मामले में हमारे प्रांत में योगदान दे। यदि कमियां हैं, तो हमें समाधान सुझावों को पहचानने और बनाने की आवश्यकता है। यात्राएँ शुरू होने से पहले, हमें हर दृष्टि से अपने शहर को तैयार करना चाहिए। हर किसी को, हमारे ट्रेडमैन से लेकर हमारे संस्थानों और गैर-सरकारी संगठनों को अपना हिस्सा बनाना चाहिए। इस कारण से, सिवास चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, हम इस कार्यशाला को आयोजित कर रहे हैं। YHT ने टेस्ट ड्राइव शुरू किया। यह Sivas YHT स्टेशन पर आता है। हमारे लोगों ने YHT के आगमन को देखा और बेसब्री से इसके चालू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। एसटीएसओ के रूप में, हम उन प्रांतों के साथ समन्वय में एक कार्यशाला आयोजित करेंगे, जहां हाई स्पीड ट्रेन के लिए सिवास तैयार करने के लिए हाई स्पीड ट्रेन सेवाएं शुरू होती हैं। इस कार्यशाला में, हम स्वास्थ्य से लेकर उद्योग तक, व्यापार से लेकर शिक्षा तक कई क्षेत्रों में एक रोडमैप को परिभाषित करेंगे। हम शहरी परिवहन, स्वास्थ्य संस्थानों, रेस्तरां, होटल, पर्यटन क्षेत्रों, और जिलों जैसे कई क्षेत्रों में हमारी मौजूदा सेवाओं पर विचार करेंगे, और हम कमियों को खत्म करने के लिए एक काम शुरू करेंगे, यदि कोई हो। हम अपनी कार्यशाला के परिणामों को एक पुस्तिका में एकत्र करेंगे और उन्हें संबंधित स्थानों पर वितरित करेंगे। मुझे उम्मीद है कि 'फास्ट जर्नी टू द फ्यूचर - हाई स्पीड ट्रेन' कार्यशाला हमारे शहर के लिए अच्छे परिणाम लाएगी। "
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नगालैंड के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि राज्य को पहली बार महिला विधायक मिली है। 60 साल पहले राज्य का दर्जा प्राप्त करने के बाद से नागालैंड में ऐसा पहली बार हुआ है। राज्य में अब तक 13 बार राज्य के विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, लेकिन आज तक एक भी महिला विधायक के रूप में नहीं चुनी गई हैं। गुरूवार को नगालैंड राज्य में विधानसभा चुनाव में नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी की हेकानी जाखलू नगालैंड की पहली महिला चुनी जा चुकी हैं।
जाखलू ने जाखलू ने दीमापुर-3 विधानसभा सीट से चुनाव जीता है। लोक जनशक्ति पार्टी के अज़ेतो झिमोमी को 40. 34 प्रतिशत मत प्राप्त हुए, वहीं दूसरी तरफ जाखलू को 45. 16 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। हेकानी जाखलू ने अपने विरोधी प्रत्याशी को 1,536 मतों के अंतर से मात दी।
48 वर्षीय जखालू के लिए विधानसभा तक का सफर काफी लंबा रहा है। उन्होंने लेडी श्री राम कॉलेज फॉर वूमेन और दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ लॉ में पढ़ाई की और बाद में सैन फ्रांसिस्को विश्वविद्यालय से एलएलएम किया। इसको पूरा करने के बाद में उन्होंने दिल्ली में एक लॉ फर्म में काम किया। 2005 में वह यूथनेट नामक एक गैर सरकारी संगठन शुरू करने के लिए नागालैंड वापस लौट आई। 2019 में हेकानी जाखलू ने बाल और महिला विकास मंत्रालय से नारी शक्ति पुरस्कार प्राप्त किया।
हेकानी जाखलू ने कहा कि 17 साल से एनजीओ सेक्टर में युवाओं के लिए काम कर रही हूं, लेकिन उस पद से इतना ही किया जा सकता है। यही कारण है कि मैं नीति निर्माण में शामिल होना चाहती थी और राज्य में सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकाय में प्रवेश करना चाहती थी। युवाओं को सशक्त बनाने और महिलाओं के हक के लिए लड़ना है। इसके साथ ही अपने निर्वाचन क्षेत्र को एक आदर्श निर्वाचन क्षेत्र बनाना है और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा करनी है।
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नगालैंड के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि राज्य को पहली बार महिला विधायक मिली है। साठ साल पहले राज्य का दर्जा प्राप्त करने के बाद से नागालैंड में ऐसा पहली बार हुआ है। राज्य में अब तक तेरह बार राज्य के विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, लेकिन आज तक एक भी महिला विधायक के रूप में नहीं चुनी गई हैं। गुरूवार को नगालैंड राज्य में विधानसभा चुनाव में नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी की हेकानी जाखलू नगालैंड की पहली महिला चुनी जा चुकी हैं। जाखलू ने जाखलू ने दीमापुर-तीन विधानसभा सीट से चुनाव जीता है। लोक जनशक्ति पार्टी के अज़ेतो झिमोमी को चालीस. चौंतीस प्रतिशत मत प्राप्त हुए, वहीं दूसरी तरफ जाखलू को पैंतालीस. सोलह प्रतिशत मत प्राप्त हुए। हेकानी जाखलू ने अपने विरोधी प्रत्याशी को एक,पाँच सौ छत्तीस मतों के अंतर से मात दी। अड़तालीस वर्षीय जखालू के लिए विधानसभा तक का सफर काफी लंबा रहा है। उन्होंने लेडी श्री राम कॉलेज फॉर वूमेन और दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ लॉ में पढ़ाई की और बाद में सैन फ्रांसिस्को विश्वविद्यालय से एलएलएम किया। इसको पूरा करने के बाद में उन्होंने दिल्ली में एक लॉ फर्म में काम किया। दो हज़ार पाँच में वह यूथनेट नामक एक गैर सरकारी संगठन शुरू करने के लिए नागालैंड वापस लौट आई। दो हज़ार उन्नीस में हेकानी जाखलू ने बाल और महिला विकास मंत्रालय से नारी शक्ति पुरस्कार प्राप्त किया। हेकानी जाखलू ने कहा कि सत्रह साल से एनजीओ सेक्टर में युवाओं के लिए काम कर रही हूं, लेकिन उस पद से इतना ही किया जा सकता है। यही कारण है कि मैं नीति निर्माण में शामिल होना चाहती थी और राज्य में सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकाय में प्रवेश करना चाहती थी। युवाओं को सशक्त बनाने और महिलाओं के हक के लिए लड़ना है। इसके साथ ही अपने निर्वाचन क्षेत्र को एक आदर्श निर्वाचन क्षेत्र बनाना है और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा करनी है।
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नयी दिल्ली, दिल्ली नगर निगम के पांच वार्ड में हुए उपचुनावों के बुधवार को घोषित परिणामों में चार वार्ड में आम आदमी पार्टी (आप) के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की जबकि एक वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी विजयी रहा। निर्वाचन अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
नयी दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और कृषि जैसे कई क्षेत्रों में प्रतिभाशाली युवाओं के लिये दरवाजे खुल रहे हैं।
नयी दिल्ली, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मीडिया में आई खबर का हवाला देते हुए बुधवार को दावा किया कि लद्दाख के देपसांग में हमारी जमीन चली गई है, दौलत बेग ओल्डी खतरे में है तथा सरकार की "कायरता" के भविष्य में दुखद परिणाम होंगे।
नयी दिल्ली, भाजपा ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को देशभक्ति के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी पाठशाला करार देते हुए इसकी तुलना पाकिस्तान के कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों से करने पर राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया और कहा कि कांग्रेस नेता को आरएसएस को समझने में "बहुत समय" लगेगा।
नयी दिल्ली, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को दिल्ली स्थित आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में कोविड-19 टीके की पहली खुराक ली और उन सभी लोगों से टीका लगवाने की अपील की, जो दूसरे चरण के टीकाकरण अभियान के तहत इसकी पात्रता रखते हैं।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हाथरस के सासनी में बेटी के साथ छेड़छाड़ की शिकायत करने वाले किसान की हत्या करने के आरोप में बुधवार को दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया जबकि मुख्य आरोपी अब भी फरार है और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया है ।
बगदाद, पश्चिमी इराक में अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन बलों की मौजूदगी वाले एक सैन्य हवाईअड्डे को निशाना बनाकर बुधवार को कम से कम 10 रॉकेट दागे गए।
नयी दिल्ली, उत्तर प्रदेश में अपराध की घटनाओं में वृद्धि को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने बुधवार को कहा कि योगी आदित्यनाथ के प्रचार के विपरीत हर रोज कोई न कोई परिवार न्याय के लिए चीख रहा है।
लखनऊ, भाजपा सांसद कौशल किशोर के बेटे आयुष पर मंगलवार देर रात कथित हमले के मामले में बुधवार को नया मोड़ आ गया। पुलिस ने दावा किया कि इस मामले में हिरासत में लिये गये आयुष के साले आदर्श ने पूछताछ में बताया कि इस घटना को कुछ लोगों को फंसाने के लिये जानबूझकर अंजाम दिया गया था। पुलिस के अनुसार आदर्श ने गोली चलाने की बात कबूल की है।
नयी दिल्ली, भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के एक दिन में 14,989 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 1,11,39,516 हो गई। वहीं, देश में एक महीने बाद उपचाराधीन मरीजों की संख्या 1. 7 लाख से अधिक दर्ज की गई।
मुंबई/नयी दिल्ली, आयकर विभाग ने बुधवार को बॉलीवुड अभिनेत्री तापसी पन्नू और फिल्मकार अनुराग कश्यम के साथ ही उनके साझेदारों के परिसरों पर बुधवार को छापेमारी की। यह जानकारी अधिकारियों ने दी।
नयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 370 को निरस्त किये जाने को लेकर दिये गये बयान पर नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ कार्रवाई किये जाने के अनुरोध वाली एक जनहित याचिका बुधवार को खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा लिये गये एक निर्णय को लेकर असहमति वाले विचारों की अभिव्यक्ति को राजद्रोह नहीं कहा जा सकता है।
नयी दिल्ली, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुजफ्फरपुर के आश्रय गृह यौन हिंसा कांड के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर और उसकी पत्नी के विरूद्ध धनशोधन मामले में दिल्ली में स्थित उनकी 1. 45 करोड़ रूपये की संपत्ति एवं एक सावधि जमा जब्त की है।
लंदन, ब्रिटेन के सांसद भारत में प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता के मुद्दे पर अगले सोमवार को बहस करेंगे। यह बहस उस ई-अर्जी की प्रतिक्रिया में होगी जिस पर 100,000 से अधिक हस्ताक्षर मिले है जो ऐसी चर्चा के लिए जरूरी होता है। इसकी पुष्टि हाउस ऑफ कॉमन्स याचिका समिति ने बुधवार को की।
यांगून (म्यांमा), म्यांमा में पिछले महीने सेना द्वारा किए गए तख्तापलट के खिलाफ प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बुधवार को कम से कम आठ लोगों की मौत हो गयी।
नयी दिल्ली, रेल मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तराखंड के कोटद्वार और दिल्ली जंक्शन के बीच चलने वाली सिद्धबली जनशताब्दी विशेष रेलगाड़ी की बुधवार को शुरुआत की।
बेंगलुरु, कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री रमेश जारकिहोली ने अपने खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद बुधवार को मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा को अपना त्यागपत्र भेज दिया।
रोटरडम, शीर्ष वरीयता प्राप्त रूस के दानिल मेदवेदेव को एबीएन एमरो विश्व टेनिस टूर्नामेंट के पहले ही दौर में दुसान लाजोविच ने 7 . 6, 6 . 4 से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया ।
बासेल, शीर्ष भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी किदाम्बी श्रीकांत ने बुधवार को यहां हमवतन समीर वर्मा की चुनौती समाप्त करते हुए स्विस ओपन सुपर 300 टूर्नामेंट में अपना अभियान जीत से शुरू किया।
नयी दिल्ली, छह बार की विश्व चैम्पियन एम सी मैरीकॉम को अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ (एआईबीए) की 'चैम्पियंस एंड वेटरंस' समिति का अध्यक्ष चुना गया। विश्व संस्था ने पिछले साल इस पैनल का गठन किया था।
मुंबई, शेयर बाजारों में तेजी का सिलसिला बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में भी जारी रहा और सेंसेक्स 1,148 अंक की लंबी छलांग के साथ 51,000 अंक के स्तर को पार कर गया। वहीं निफ्टी 15,200 अंक के स्तर को लांघ गया।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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नयी दिल्ली, दिल्ली नगर निगम के पांच वार्ड में हुए उपचुनावों के बुधवार को घोषित परिणामों में चार वार्ड में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की जबकि एक वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी विजयी रहा। निर्वाचन अधिकारियों ने यह जानकारी दी। नयी दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और कृषि जैसे कई क्षेत्रों में प्रतिभाशाली युवाओं के लिये दरवाजे खुल रहे हैं। नयी दिल्ली, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मीडिया में आई खबर का हवाला देते हुए बुधवार को दावा किया कि लद्दाख के देपसांग में हमारी जमीन चली गई है, दौलत बेग ओल्डी खतरे में है तथा सरकार की "कायरता" के भविष्य में दुखद परिणाम होंगे। नयी दिल्ली, भाजपा ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को देशभक्ति के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी पाठशाला करार देते हुए इसकी तुलना पाकिस्तान के कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों से करने पर राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया और कहा कि कांग्रेस नेता को आरएसएस को समझने में "बहुत समय" लगेगा। नयी दिल्ली, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को दिल्ली स्थित आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में कोविड-उन्नीस टीके की पहली खुराक ली और उन सभी लोगों से टीका लगवाने की अपील की, जो दूसरे चरण के टीकाकरण अभियान के तहत इसकी पात्रता रखते हैं। लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हाथरस के सासनी में बेटी के साथ छेड़छाड़ की शिकायत करने वाले किसान की हत्या करने के आरोप में बुधवार को दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया जबकि मुख्य आरोपी अब भी फरार है और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया है । बगदाद, पश्चिमी इराक में अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन बलों की मौजूदगी वाले एक सैन्य हवाईअड्डे को निशाना बनाकर बुधवार को कम से कम दस रॉकेट दागे गए। नयी दिल्ली, उत्तर प्रदेश में अपराध की घटनाओं में वृद्धि को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने बुधवार को कहा कि योगी आदित्यनाथ के प्रचार के विपरीत हर रोज कोई न कोई परिवार न्याय के लिए चीख रहा है। लखनऊ, भाजपा सांसद कौशल किशोर के बेटे आयुष पर मंगलवार देर रात कथित हमले के मामले में बुधवार को नया मोड़ आ गया। पुलिस ने दावा किया कि इस मामले में हिरासत में लिये गये आयुष के साले आदर्श ने पूछताछ में बताया कि इस घटना को कुछ लोगों को फंसाने के लिये जानबूझकर अंजाम दिया गया था। पुलिस के अनुसार आदर्श ने गोली चलाने की बात कबूल की है। नयी दिल्ली, भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के एक दिन में चौदह,नौ सौ नवासी नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर एक,ग्यारह,उनतालीस,पाँच सौ सोलह हो गई। वहीं, देश में एक महीने बाद उपचाराधीन मरीजों की संख्या एक. सात लाख से अधिक दर्ज की गई। मुंबई/नयी दिल्ली, आयकर विभाग ने बुधवार को बॉलीवुड अभिनेत्री तापसी पन्नू और फिल्मकार अनुराग कश्यम के साथ ही उनके साझेदारों के परिसरों पर बुधवार को छापेमारी की। यह जानकारी अधिकारियों ने दी। नयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को निरस्त किये जाने को लेकर दिये गये बयान पर नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ कार्रवाई किये जाने के अनुरोध वाली एक जनहित याचिका बुधवार को खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा लिये गये एक निर्णय को लेकर असहमति वाले विचारों की अभिव्यक्ति को राजद्रोह नहीं कहा जा सकता है। नयी दिल्ली, प्रवर्तन निदेशालय ने मुजफ्फरपुर के आश्रय गृह यौन हिंसा कांड के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर और उसकी पत्नी के विरूद्ध धनशोधन मामले में दिल्ली में स्थित उनकी एक. पैंतालीस करोड़ रूपये की संपत्ति एवं एक सावधि जमा जब्त की है। लंदन, ब्रिटेन के सांसद भारत में प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता के मुद्दे पर अगले सोमवार को बहस करेंगे। यह बहस उस ई-अर्जी की प्रतिक्रिया में होगी जिस पर एक सौ,शून्य से अधिक हस्ताक्षर मिले है जो ऐसी चर्चा के लिए जरूरी होता है। इसकी पुष्टि हाउस ऑफ कॉमन्स याचिका समिति ने बुधवार को की। यांगून , म्यांमा में पिछले महीने सेना द्वारा किए गए तख्तापलट के खिलाफ प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बुधवार को कम से कम आठ लोगों की मौत हो गयी। नयी दिल्ली, रेल मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तराखंड के कोटद्वार और दिल्ली जंक्शन के बीच चलने वाली सिद्धबली जनशताब्दी विशेष रेलगाड़ी की बुधवार को शुरुआत की। बेंगलुरु, कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री रमेश जारकिहोली ने अपने खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद बुधवार को मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा को अपना त्यागपत्र भेज दिया। रोटरडम, शीर्ष वरीयता प्राप्त रूस के दानिल मेदवेदेव को एबीएन एमरो विश्व टेनिस टूर्नामेंट के पहले ही दौर में दुसान लाजोविच ने सात . छः, छः . चार से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया । बासेल, शीर्ष भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी किदाम्बी श्रीकांत ने बुधवार को यहां हमवतन समीर वर्मा की चुनौती समाप्त करते हुए स्विस ओपन सुपर तीन सौ टूर्नामेंट में अपना अभियान जीत से शुरू किया। नयी दिल्ली, छह बार की विश्व चैम्पियन एम सी मैरीकॉम को अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ की 'चैम्पियंस एंड वेटरंस' समिति का अध्यक्ष चुना गया। विश्व संस्था ने पिछले साल इस पैनल का गठन किया था। मुंबई, शेयर बाजारों में तेजी का सिलसिला बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में भी जारी रहा और सेंसेक्स एक,एक सौ अड़तालीस अंक की लंबी छलांग के साथ इक्यावन,शून्य अंक के स्तर को पार कर गया। वहीं निफ्टी पंद्रह,दो सौ अंक के स्तर को लांघ गया। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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पटना। भाकपा-माले के पोलित ब्यूरो के पूर्व सदस्य व पूर्व राज्य सचिव कॉ. रामजतन शर्मा व पार्टी के केंद्रीय कंट्रोल कमीशन के सदस्य कॉ. अरविंद कुमार सिंह की स्मृति में आज माले विधायक दल कार्यालय में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। श्रद्धाजंलि सभा में माले महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य, वरिष्ठ नेता कॉ. स्वदेश भट्टाचार्य, माले राज्य सचिव कुणाल, राजद के महासचिव श्याम रजक, सीपीआई के राज्य सचिव रामनरेश पांडेय, सीपीआई (एम) के राज्य सचिव मंडल सदस्य अरूण कुमार सिंह सहित अन्य वाम दलों के नेता भी शामिल हुए। सभा का संचालन पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य कॉ. धीरेन्द्र झा ने किया। श्रद्धांजलि सभा में यूपी के पार्टी प्रभारी रामजी राय, झारखंड के माले राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद आदि भी शामिल हुए।
माले महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि 1970 के दशक में हमने एक बहुत छोटी ताकत के रूप में शुरूआत की थी। हमारे उस आंदोलन ने गरीबों को सम्मान, जमीन, मजदूरी आदि सवालों पर संगठित किया। गरीब मजदूरों-किसानों के आंदोलन से लेकर विश्वविद्यालयों में छात्रों के बीच बदलाव की महत्वकांक्षा को लेकर कॉ. रामजतन शर्मा लगातार बिना थके काम करते रहे। प्रो. अरविंद कुमार भी उसी जीवंतता के प्रतीक थे। हमें फासीवाद के इस मुश्किल दौर में इन दोनों नेताओं से बदलाव का नजरिया व लड़ने की ताकत मिलती है।
आज पूरे देश में चर्चा है कि इस बार 5 अगस्त को क्या होगा? 5 अगस्त 2019 को कश्मीर में धारा 370 खत्म कर दिया गया, तो 5 अगस्त 2020 को राममंदिर का शगूफा दोड़ दिया गया। पश्चिम बंगाल में करारी हार के बाद बंगाल, यूपी, महाराष्ट्र को टुकड़ों में बांट देने की साजिश रची जा रही है। भाजपा यह जानती है कि यदि इसी प्रकार से चुनाव हुआ, तो यूपी से योगी को जाना पड़ेगा। और इसलिए पूरी कोशिश है कि चुनाव का माहौल बदल दिया जाए। लेकिन दमन-हिंसा-आतंक झेलते हुए भी लोग लगातार लड़ रहे हैं। यही हमारे लिए ऊर्जा का स्रोत है।
श्रद्धांजलि सभा में राजद के श्याम रजक ने कहा कि जनवादी व वामपंथी ताकतें आज मिलकर लड़ रही हैं। इन महापुरूषों से हमें प्रेरणा मिलती है। आज गरीबों की लड़ाई को कुचलने की साजिश रची जा रही है, इसके खिलाफ हम मिलकर लड़ेंगे। रामनरेश पांडेय ने कहा कि रामजतन शर्मा का जीवन एक उदाहरण बनकर हमारे दिलों में गूंज रहा है। अरुण मिश्रा ने कहा कि कम्युनिस्ट आंदोलन से जुड़े तमाम लोगों के लिए वे प्रेरणा स्रोत हैं। नंदकिशोर सिंह व साधना मिश्रा ने भी श्रद्धांजलि सभा में अपने वक्तव्य रखे।
रामजी राय ने रामजतन शर्मा व अरविंद कुमार सिंह के साथ बिताए गए दिनों को याद करते हुए अपने अनुभवों को साझा किया। कहा कि बहसों में बेहद सहजता उनका खास गुण था।
इससे पहले नेताओं व कार्यकर्ताओं ने दिवंगत नेताओं को अपनी श्रद्धांजलि दी। पोलित ब्यूरो व केंद्रीय कमेटी के सभी सदस्यों के साथ-साथ पार्टी के पूर्व राज्य सचिव नंदकिशोर प्रसाद, वरिष्ठ नेता केडी यादव, राजाराम, माले के सभी विधायक गण, एआईएफबी के राज्य सचिव अमरीक महतो, सीपीआई (एमएल) क्लास स्ट्रगल के नंदकिशोर सिंह, एसयूसीआईसी की साधना मिश्रा, पार्टी की राज्य कमेटी की सदस्य व कॉ. अरविंद कुमार सिंह की पत्नी अनीता सिन्हा आदि नेताओं ने दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि दी। इन नेताओं के अलावा एनआईटी के पूर्व प्राध्यापक प्रो. संतोष कुमार, पटना इतिहास विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. भारती एस कुमार, डॉ. अलीम अख्तर, साहित्यकार सुमंत शरण आदि भी उपस्थित थे।
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पटना। भाकपा-माले के पोलित ब्यूरो के पूर्व सदस्य व पूर्व राज्य सचिव कॉ. रामजतन शर्मा व पार्टी के केंद्रीय कंट्रोल कमीशन के सदस्य कॉ. अरविंद कुमार सिंह की स्मृति में आज माले विधायक दल कार्यालय में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। श्रद्धाजंलि सभा में माले महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य, वरिष्ठ नेता कॉ. स्वदेश भट्टाचार्य, माले राज्य सचिव कुणाल, राजद के महासचिव श्याम रजक, सीपीआई के राज्य सचिव रामनरेश पांडेय, सीपीआई के राज्य सचिव मंडल सदस्य अरूण कुमार सिंह सहित अन्य वाम दलों के नेता भी शामिल हुए। सभा का संचालन पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य कॉ. धीरेन्द्र झा ने किया। श्रद्धांजलि सभा में यूपी के पार्टी प्रभारी रामजी राय, झारखंड के माले राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद आदि भी शामिल हुए। माले महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि एक हज़ार नौ सौ सत्तर के दशक में हमने एक बहुत छोटी ताकत के रूप में शुरूआत की थी। हमारे उस आंदोलन ने गरीबों को सम्मान, जमीन, मजदूरी आदि सवालों पर संगठित किया। गरीब मजदूरों-किसानों के आंदोलन से लेकर विश्वविद्यालयों में छात्रों के बीच बदलाव की महत्वकांक्षा को लेकर कॉ. रामजतन शर्मा लगातार बिना थके काम करते रहे। प्रो. अरविंद कुमार भी उसी जीवंतता के प्रतीक थे। हमें फासीवाद के इस मुश्किल दौर में इन दोनों नेताओं से बदलाव का नजरिया व लड़ने की ताकत मिलती है। आज पूरे देश में चर्चा है कि इस बार पाँच अगस्त को क्या होगा? पाँच अगस्त दो हज़ार उन्नीस को कश्मीर में धारा तीन सौ सत्तर खत्म कर दिया गया, तो पाँच अगस्त दो हज़ार बीस को राममंदिर का शगूफा दोड़ दिया गया। पश्चिम बंगाल में करारी हार के बाद बंगाल, यूपी, महाराष्ट्र को टुकड़ों में बांट देने की साजिश रची जा रही है। भाजपा यह जानती है कि यदि इसी प्रकार से चुनाव हुआ, तो यूपी से योगी को जाना पड़ेगा। और इसलिए पूरी कोशिश है कि चुनाव का माहौल बदल दिया जाए। लेकिन दमन-हिंसा-आतंक झेलते हुए भी लोग लगातार लड़ रहे हैं। यही हमारे लिए ऊर्जा का स्रोत है। श्रद्धांजलि सभा में राजद के श्याम रजक ने कहा कि जनवादी व वामपंथी ताकतें आज मिलकर लड़ रही हैं। इन महापुरूषों से हमें प्रेरणा मिलती है। आज गरीबों की लड़ाई को कुचलने की साजिश रची जा रही है, इसके खिलाफ हम मिलकर लड़ेंगे। रामनरेश पांडेय ने कहा कि रामजतन शर्मा का जीवन एक उदाहरण बनकर हमारे दिलों में गूंज रहा है। अरुण मिश्रा ने कहा कि कम्युनिस्ट आंदोलन से जुड़े तमाम लोगों के लिए वे प्रेरणा स्रोत हैं। नंदकिशोर सिंह व साधना मिश्रा ने भी श्रद्धांजलि सभा में अपने वक्तव्य रखे। रामजी राय ने रामजतन शर्मा व अरविंद कुमार सिंह के साथ बिताए गए दिनों को याद करते हुए अपने अनुभवों को साझा किया। कहा कि बहसों में बेहद सहजता उनका खास गुण था। इससे पहले नेताओं व कार्यकर्ताओं ने दिवंगत नेताओं को अपनी श्रद्धांजलि दी। पोलित ब्यूरो व केंद्रीय कमेटी के सभी सदस्यों के साथ-साथ पार्टी के पूर्व राज्य सचिव नंदकिशोर प्रसाद, वरिष्ठ नेता केडी यादव, राजाराम, माले के सभी विधायक गण, एआईएफबी के राज्य सचिव अमरीक महतो, सीपीआई क्लास स्ट्रगल के नंदकिशोर सिंह, एसयूसीआईसी की साधना मिश्रा, पार्टी की राज्य कमेटी की सदस्य व कॉ. अरविंद कुमार सिंह की पत्नी अनीता सिन्हा आदि नेताओं ने दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि दी। इन नेताओं के अलावा एनआईटी के पूर्व प्राध्यापक प्रो. संतोष कुमार, पटना इतिहास विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. भारती एस कुमार, डॉ. अलीम अख्तर, साहित्यकार सुमंत शरण आदि भी उपस्थित थे।
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दिल्ली दंगाः मार्केट जल गया, अब हम अपना क़र्ज़ कैसे उतारें?
वीडियोः पिछले सप्ताह उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में गोकलपुर का टायर मार्केट भी जलकर खाक हो गया था. मार्केट के पास ही पुलिस थाना होने के बावजूद न तो दंगाइयों में डर था न ही पुलिस ने दंगाइयों को रोकने की कोशिश की. अब यहां के दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट है, कर्ज के बोझ से दबे ये लोग सरकार से मार्केट को फिर से खोलने की गुहार लगा रहे हैं. इसी पर रीतू तोमर की रिपोर्ट.
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दिल्ली दंगाः मार्केट जल गया, अब हम अपना क़र्ज़ कैसे उतारें? वीडियोः पिछले सप्ताह उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में गोकलपुर का टायर मार्केट भी जलकर खाक हो गया था. मार्केट के पास ही पुलिस थाना होने के बावजूद न तो दंगाइयों में डर था न ही पुलिस ने दंगाइयों को रोकने की कोशिश की. अब यहां के दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट है, कर्ज के बोझ से दबे ये लोग सरकार से मार्केट को फिर से खोलने की गुहार लगा रहे हैं. इसी पर रीतू तोमर की रिपोर्ट.
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
सार्वजनिक प्रतिष्ठान सरकार के द्वारा चालित कम्पनियों के लिए संयुक्त रूप से प्रयुक्त शब्द है। सार्वजनिक प्रतिष्ठान की परिभाषा और सीमा निर्धारण सम्बंधित देश पर निर्भर करता है, लेकिन अधिकतर देशों में पुलिस, सेना, राजमार्ग, परिवहन, प्राथमिक शिक्षा जैसी सुविधाएं सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में समाहित होती हैं। . हीरो मोटो कॉर्प दुनिया की सबसे बड़ी मोटरसाइकल कंपनी है। इसे भारत की हीरो साइकल और जापान की होंडा मोटर ने मिल कर १९८४ में बनाया था। हीरो समूह के संस्थापक बृजमोहन लाल मुंजाल थे। फिलहाल हीरो मोटो कॉर्प का संचालन बृजमोहन लाल मुंजाल के बेटे और कंपनी के एमडी पवन मुंजाल के हाथों में है। .
सार्वजनिक प्रतिष्ठान और हीरो मोटोकॉर्प आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
सार्वजनिक प्रतिष्ठान 4 संबंध है और हीरो मोटोकॉर्प 10 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (4 + 10)।
यह लेख सार्वजनिक प्रतिष्ठान और हीरो मोटोकॉर्प के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। सार्वजनिक प्रतिष्ठान सरकार के द्वारा चालित कम्पनियों के लिए संयुक्त रूप से प्रयुक्त शब्द है। सार्वजनिक प्रतिष्ठान की परिभाषा और सीमा निर्धारण सम्बंधित देश पर निर्भर करता है, लेकिन अधिकतर देशों में पुलिस, सेना, राजमार्ग, परिवहन, प्राथमिक शिक्षा जैसी सुविधाएं सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में समाहित होती हैं। . हीरो मोटो कॉर्प दुनिया की सबसे बड़ी मोटरसाइकल कंपनी है। इसे भारत की हीरो साइकल और जापान की होंडा मोटर ने मिल कर एक हज़ार नौ सौ चौरासी में बनाया था। हीरो समूह के संस्थापक बृजमोहन लाल मुंजाल थे। फिलहाल हीरो मोटो कॉर्प का संचालन बृजमोहन लाल मुंजाल के बेटे और कंपनी के एमडी पवन मुंजाल के हाथों में है। . सार्वजनिक प्रतिष्ठान और हीरो मोटोकॉर्प आम में शून्य बातें हैं । सार्वजनिक प्रतिष्ठान चार संबंध है और हीरो मोटोकॉर्प दस है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख सार्वजनिक प्रतिष्ठान और हीरो मोटोकॉर्प के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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दिलेर समाचार, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मैं भी चौकीदार' अभियान के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशेवर, कारोबारियों व चौकीदारों से बातचीत की. इस दौरान पीएम मोदी ने अपने चिरपरिचित अंदाज में भाषण की शुरुआत भारत माता की जय के नारे के साथ की. प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि मैं देश की जनता के पैसों पर पंजा नहीं पड़ने दूंगा. उन्होंने कहा कि एक चौकीदार के रूप में मैं अपनी जिम्मेदारी निभाऊंगा.
लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा. पीएम ने कहा कि कुछ लोगों का विकास नहीं हो पाता है. यह विकास बौद्धिक स्तर पर रुक जाता है. उन्होंने कहा कि देश की जनता मुझे चौकीदार के रूप में पसंद करती है. जनता को राजा-महाराजा पसंद नहीं आते हैं. उन्होंने कहा कि चौकीदार न कोई व्यवस्था है, न कोई यूनिफॉर्म की पहचान है. उन्होंने कहा कि चौकीदार एक भावना है. यह भावना देश की जनता में लगातार बढ़ रही है.
उन्होंने कहा कि स्वच्छता का आंदोलन देश की जनता का आंदोलन हो गया है. सवा सौ करोड़ लोगों ने चौकीदारी की जिम्मेदारी निभाई. उन्होंने कहा कि चौकीदारी का सिद्धांत महात्मा गांधी ने देश को दिया था. यह गांधी का सिद्धांत है. 2014 में भाजपा ने मुझे दायित्व दिया उसके बाद मुझे देश के कोने-कोने में जाने की जरूरत पड़ी. तब मैंने देश के लोगों से कहा था कि आप मुझे जो दायित्व दे रहे हैं उसका मतलब है कि आप एक चौकीदार बैठा रहे हैं.
पीएम मोदी ने कहा कि राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर, नफा-नुकसान को किनारे रखकर देश को सबसे ऊपर रखा. पीएम ने बालाकोट हमले के सवाल पर यह उत्तर दिया. उन्होंने कहा कि पूर्ण बहुमत की सरकार देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. दुनिया में भारत की आवाज सुनाई देने का सीधा अर्थ बहुमत की सरकार है. उन्होंने कहा कि बालाकोट पर कार्रवाई मैंने नहीं की, देश के जवानों ने की, हमारे सुरक्षा बलों ने की.
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया का कोई नेता जब मुझसे हाथ मिलाता है या गले मिलता है, तो उसे मोदी नहीं दिखता, पूर्ण बहुमत वाली सरकार के माध्यम से सवा सौ करोड़ देशवासी दिखते हैं. पीएम मोदी ने कहा कि मेरे लिए चुनाव नही देश प्राथमिकता है. उन्होंने आतंकवाद पर निशाना साधते हुए कहा कि हम आतंकियों को उन्हीं की भाषा में उनकी ही जमीन पर जवाब देंगे. उन्होंने कहा कि बहुमत की सरकार ही ऐसे कड़े फैसले ले सकती है.
पीएम मोदी ने भ्रष्टाचार के सवाल पर कहा कि हमारी सरकार ने कई लोगों को जेल के दरवाजे तक पहुंचा दिया है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग जमानत पर चल रहे हैं, कुछ जमानत के लिए कोशिश में लगे हैं. उन्होंने कहा कि लुटेरों को देश की पाई-पाई चुकानी होगी. उन्होंने कहा कि कुछ लोग विदेश की अदालतों में कहते हैं कि भारत की जेलों की स्थिति अच्छी नहीं है. अब इनको कोई महल में थोड़ी रखेगा. अंग्रेजों ने गांधी जी को जिस जेल में रखा था, मैं उनको उससे अच्छी जेल नहीं दे सकता हूं. उन्होंने कहा कि 2019 के बाद कई और भ्रष्टाचारी जेल जाएंगे.
उन्होंने कहा कि अगर मोदी अपने राजनीतिक भविष्य का सोचता, तो वो मोदी नहीं होता. उन्होंने कहा कि अगर इसी राजनीतिक पैंतरेबाजी से देश चलाना होता, तो मोदी की देश को कोई जरूरत नहीं थी. उन्होंने कहा कि हमारा देश 6वीं आर्थिक ताकत बन गया है.
उन्होंने कहा कि मैंने देश में एक माहौल बनाया है और आगे भी बनाना है कि हमे दुनिया की बराबरी करनी है. हमने बहुत सारा समय भारत-पाकिस्तान करने में ही गुजार दिया. पाकिस्तान अपनी मौत मरेगा उसे छोड़ दो, हमे आगे बढ़ना है बस इसी पर हमारा ध्यान रहना चाहिए.
पीएम मोदी ने मिशन शक्ति पर कहा किहमारे एक बुद्धिमान नेता कहते हैं कि इसे सीक्रेट रखना चाहिए था, सबके सामने नहीं लाना चाहिए था. मैं उन बुद्धिमान से कहना चाहता हूं कि कुछ सामान्य बुद्धि का प्रयोग कर लीजिए. जब अमेरिका, चीन और रूस ने इसे डंके की चोट पर किया तो हम गुपचुप क्यों करें.
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दिलेर समाचार, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मैं भी चौकीदार' अभियान के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशेवर, कारोबारियों व चौकीदारों से बातचीत की. इस दौरान पीएम मोदी ने अपने चिरपरिचित अंदाज में भाषण की शुरुआत भारत माता की जय के नारे के साथ की. प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि मैं देश की जनता के पैसों पर पंजा नहीं पड़ने दूंगा. उन्होंने कहा कि एक चौकीदार के रूप में मैं अपनी जिम्मेदारी निभाऊंगा. लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा. पीएम ने कहा कि कुछ लोगों का विकास नहीं हो पाता है. यह विकास बौद्धिक स्तर पर रुक जाता है. उन्होंने कहा कि देश की जनता मुझे चौकीदार के रूप में पसंद करती है. जनता को राजा-महाराजा पसंद नहीं आते हैं. उन्होंने कहा कि चौकीदार न कोई व्यवस्था है, न कोई यूनिफॉर्म की पहचान है. उन्होंने कहा कि चौकीदार एक भावना है. यह भावना देश की जनता में लगातार बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि स्वच्छता का आंदोलन देश की जनता का आंदोलन हो गया है. सवा सौ करोड़ लोगों ने चौकीदारी की जिम्मेदारी निभाई. उन्होंने कहा कि चौकीदारी का सिद्धांत महात्मा गांधी ने देश को दिया था. यह गांधी का सिद्धांत है. दो हज़ार चौदह में भाजपा ने मुझे दायित्व दिया उसके बाद मुझे देश के कोने-कोने में जाने की जरूरत पड़ी. तब मैंने देश के लोगों से कहा था कि आप मुझे जो दायित्व दे रहे हैं उसका मतलब है कि आप एक चौकीदार बैठा रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर, नफा-नुकसान को किनारे रखकर देश को सबसे ऊपर रखा. पीएम ने बालाकोट हमले के सवाल पर यह उत्तर दिया. उन्होंने कहा कि पूर्ण बहुमत की सरकार देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. दुनिया में भारत की आवाज सुनाई देने का सीधा अर्थ बहुमत की सरकार है. उन्होंने कहा कि बालाकोट पर कार्रवाई मैंने नहीं की, देश के जवानों ने की, हमारे सुरक्षा बलों ने की. पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया का कोई नेता जब मुझसे हाथ मिलाता है या गले मिलता है, तो उसे मोदी नहीं दिखता, पूर्ण बहुमत वाली सरकार के माध्यम से सवा सौ करोड़ देशवासी दिखते हैं. पीएम मोदी ने कहा कि मेरे लिए चुनाव नही देश प्राथमिकता है. उन्होंने आतंकवाद पर निशाना साधते हुए कहा कि हम आतंकियों को उन्हीं की भाषा में उनकी ही जमीन पर जवाब देंगे. उन्होंने कहा कि बहुमत की सरकार ही ऐसे कड़े फैसले ले सकती है. पीएम मोदी ने भ्रष्टाचार के सवाल पर कहा कि हमारी सरकार ने कई लोगों को जेल के दरवाजे तक पहुंचा दिया है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग जमानत पर चल रहे हैं, कुछ जमानत के लिए कोशिश में लगे हैं. उन्होंने कहा कि लुटेरों को देश की पाई-पाई चुकानी होगी. उन्होंने कहा कि कुछ लोग विदेश की अदालतों में कहते हैं कि भारत की जेलों की स्थिति अच्छी नहीं है. अब इनको कोई महल में थोड़ी रखेगा. अंग्रेजों ने गांधी जी को जिस जेल में रखा था, मैं उनको उससे अच्छी जेल नहीं दे सकता हूं. उन्होंने कहा कि दो हज़ार उन्नीस के बाद कई और भ्रष्टाचारी जेल जाएंगे. उन्होंने कहा कि अगर मोदी अपने राजनीतिक भविष्य का सोचता, तो वो मोदी नहीं होता. उन्होंने कहा कि अगर इसी राजनीतिक पैंतरेबाजी से देश चलाना होता, तो मोदी की देश को कोई जरूरत नहीं थी. उन्होंने कहा कि हमारा देश छःवीं आर्थिक ताकत बन गया है. उन्होंने कहा कि मैंने देश में एक माहौल बनाया है और आगे भी बनाना है कि हमे दुनिया की बराबरी करनी है. हमने बहुत सारा समय भारत-पाकिस्तान करने में ही गुजार दिया. पाकिस्तान अपनी मौत मरेगा उसे छोड़ दो, हमे आगे बढ़ना है बस इसी पर हमारा ध्यान रहना चाहिए. पीएम मोदी ने मिशन शक्ति पर कहा किहमारे एक बुद्धिमान नेता कहते हैं कि इसे सीक्रेट रखना चाहिए था, सबके सामने नहीं लाना चाहिए था. मैं उन बुद्धिमान से कहना चाहता हूं कि कुछ सामान्य बुद्धि का प्रयोग कर लीजिए. जब अमेरिका, चीन और रूस ने इसे डंके की चोट पर किया तो हम गुपचुप क्यों करें.
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क्यों यार क्या हाल है ?
तू पास हो गया ?
अरे कहाँ यार मैं तो "लटक" गया.
ज़रा देंखू तेरा रिजल्ट,
अरे तू भी तो है पास!
छोर यार देखता नहीं कितने कम हैं "मार्क्स".
अबे नंबर को मार गोली,
रोनी सूरत क्यों बनाये है जैसे उठ रही हो तेरी डोली.
अरे मार्क्स से क्या होता है,
एडमिशन तो डोनेशन पर होता है.
तेरा भी एडमिशन हो जायेगा,
मत घबरा, तू भी कालेज गोइंग स्टुडेंट कहलायेगा.
आ चल देख आते हैं एक पिक्चर,
फिर तो सुनना ही है घर में लेक्चर.
मेरे मार्क्स तो तुझसे भी हैं कम,
लेकिन मैं नहीं करता कोई गम.
बस कालेज में किसी तरह एडमिशन ले लेना है,
फिर तो हर दिन अपना और रोज़ एक "नावेल" पढ़ना है.
यह सुनकर उसे कुछ हिम्मत आई,
ऐश्वर्या की कोई पिक्चर लगी है भाई ?
हाँ चल, वही पिक्चर देखते हैं.
पीठ तो बाद में सिंकेगी,
पहले चलकर आँख सेंकते हैं.
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क्यों यार क्या हाल है ? तू पास हो गया ? अरे कहाँ यार मैं तो "लटक" गया. ज़रा देंखू तेरा रिजल्ट, अरे तू भी तो है पास! छोर यार देखता नहीं कितने कम हैं "मार्क्स". अबे नंबर को मार गोली, रोनी सूरत क्यों बनाये है जैसे उठ रही हो तेरी डोली. अरे मार्क्स से क्या होता है, एडमिशन तो डोनेशन पर होता है. तेरा भी एडमिशन हो जायेगा, मत घबरा, तू भी कालेज गोइंग स्टुडेंट कहलायेगा. आ चल देख आते हैं एक पिक्चर, फिर तो सुनना ही है घर में लेक्चर. मेरे मार्क्स तो तुझसे भी हैं कम, लेकिन मैं नहीं करता कोई गम. बस कालेज में किसी तरह एडमिशन ले लेना है, फिर तो हर दिन अपना और रोज़ एक "नावेल" पढ़ना है. यह सुनकर उसे कुछ हिम्मत आई, ऐश्वर्या की कोई पिक्चर लगी है भाई ? हाँ चल, वही पिक्चर देखते हैं. पीठ तो बाद में सिंकेगी, पहले चलकर आँख सेंकते हैं.
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वीर अर्जुन संवाददाता देहरादून। एक दर्दनाक हादसे में अपना परिवार गंवा चुकी वृद्ध महिला को अब अपना आशियाना बचाना भी मुश्किल हो रहा है। वह पुलिस से भी गुहार लगा चुकी है। किन्तु पुलिस भी इस वृद्ध महिला की सुनवाई करने में आनाकानी कर रही है। जिसके चलते उसे कोर्ट का दरवाजा खट्खटाना पड़ा है। कोर्ट ने महिला की शिकायत का संज्ञान लेते हुए उसकी शिकायत दर्ज करने के निर्देश पुलिस को दिए है। कोर्ट में दिए पार्थना पत्र में वृद्धा कैलाशो देवी ने बताया कि उसके पति ने अपने दामाद मनोज को उनकी जमीन पर मकान बनाने के लिए रूपए दिए थे। तथा सोलह जनवरी 2008 को उसके पति व दामाद के बीच यह समझौता हुआ था कि मकान बनने के बाद वह और उसका पति उसी मकान में जबतक जिंदा होंगे साथ-साथ रहेंगे। 3 अक्टूबर 2011 को उनके दामाद की मौत हो गई। जिसकी शव चाय बागान में मिली थी तभी से वह और उसका पति इस मकान में रह रहे है। किन्तु मनोज की मौत के बाद कुछ लोग उन्हे व उसके पति को निकालने के लिए लगातार परेशान करने लगे। 12 नंवबर 2011 को उसके पति की भी मौत हो गयी और उसके बाद से ही क्षेत्र में कुछ लोग षडयंत्र रचकर उसकी संपत्ती हड़पने की कोशिश कर रहे है। यहां तक की कई बार उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई। तथा यह कहते हुए कि उन्होंने यह संपत्ति खरीद ली है। उनके घर में आ घूसे और घर का सामान एक ट्रक में लादकर ले गए तथा वहां पर अपना एक ताला भी लगा दिया। वृद्धा का आरोप है कि जिस व्यक्ति ने उन्हे घर से बाहर निकाल कर ताला लगाया है। वह भूमाफिया है और गरीबों की जमीनों को इसी तरह खाली कराता है। इस संबध में पूर्व में एसएसपी व पटेलनगर पुलिस से भी शिकायत की गई किन्तु पुलिस ने भी इस मामले में कोई गंभीरता नही दिखाई।
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वीर अर्जुन संवाददाता देहरादून। एक दर्दनाक हादसे में अपना परिवार गंवा चुकी वृद्ध महिला को अब अपना आशियाना बचाना भी मुश्किल हो रहा है। वह पुलिस से भी गुहार लगा चुकी है। किन्तु पुलिस भी इस वृद्ध महिला की सुनवाई करने में आनाकानी कर रही है। जिसके चलते उसे कोर्ट का दरवाजा खट्खटाना पड़ा है। कोर्ट ने महिला की शिकायत का संज्ञान लेते हुए उसकी शिकायत दर्ज करने के निर्देश पुलिस को दिए है। कोर्ट में दिए पार्थना पत्र में वृद्धा कैलाशो देवी ने बताया कि उसके पति ने अपने दामाद मनोज को उनकी जमीन पर मकान बनाने के लिए रूपए दिए थे। तथा सोलह जनवरी दो हज़ार आठ को उसके पति व दामाद के बीच यह समझौता हुआ था कि मकान बनने के बाद वह और उसका पति उसी मकान में जबतक जिंदा होंगे साथ-साथ रहेंगे। तीन अक्टूबर दो हज़ार ग्यारह को उनके दामाद की मौत हो गई। जिसकी शव चाय बागान में मिली थी तभी से वह और उसका पति इस मकान में रह रहे है। किन्तु मनोज की मौत के बाद कुछ लोग उन्हे व उसके पति को निकालने के लिए लगातार परेशान करने लगे। बारह नंवबर दो हज़ार ग्यारह को उसके पति की भी मौत हो गयी और उसके बाद से ही क्षेत्र में कुछ लोग षडयंत्र रचकर उसकी संपत्ती हड़पने की कोशिश कर रहे है। यहां तक की कई बार उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई। तथा यह कहते हुए कि उन्होंने यह संपत्ति खरीद ली है। उनके घर में आ घूसे और घर का सामान एक ट्रक में लादकर ले गए तथा वहां पर अपना एक ताला भी लगा दिया। वृद्धा का आरोप है कि जिस व्यक्ति ने उन्हे घर से बाहर निकाल कर ताला लगाया है। वह भूमाफिया है और गरीबों की जमीनों को इसी तरह खाली कराता है। इस संबध में पूर्व में एसएसपी व पटेलनगर पुलिस से भी शिकायत की गई किन्तु पुलिस ने भी इस मामले में कोई गंभीरता नही दिखाई।
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दिल्ली. भारतीय वायुसेना लड़ाकू विमान राफेल मिलने के बाद से साउथ एशिया में वायुसेना में देश की ताकत में खासा इजाफा हुआ है. अब राफेल के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से पाकिस्तान भी टेंशन में आ गया है.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उनका देश भारत के साथ हथियारों की रेस में शामिल नहीं होगा. हमारा फोकस शिक्षा, विकास और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में है. इसलिए हम इन्ही मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे.
राफेल पर खीज निकालते हुए पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हम अपनी रक्षा कर सकते हैं. चाहे हमारे सामने राफेल हो या कई हो. दरअसल राफेल के मुद्दे पर जैसे ही पत्रकारों ने सवाल पूछा पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अधिकारी अपनी खीझ मिटाते नजर आए.
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दिल्ली. भारतीय वायुसेना लड़ाकू विमान राफेल मिलने के बाद से साउथ एशिया में वायुसेना में देश की ताकत में खासा इजाफा हुआ है. अब राफेल के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से पाकिस्तान भी टेंशन में आ गया है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उनका देश भारत के साथ हथियारों की रेस में शामिल नहीं होगा. हमारा फोकस शिक्षा, विकास और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में है. इसलिए हम इन्ही मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे. राफेल पर खीज निकालते हुए पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हम अपनी रक्षा कर सकते हैं. चाहे हमारे सामने राफेल हो या कई हो. दरअसल राफेल के मुद्दे पर जैसे ही पत्रकारों ने सवाल पूछा पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अधिकारी अपनी खीझ मिटाते नजर आए.
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दिया जाना हो; तथा यदि अनुवादक ऐसे निदेश की अवज्ञा करे, तो यह धारित किया जाएगा कि उसने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 166 के अधीन अपराध किया है ।
163. जब कि कोई पक्षकार किसी दस्तावेज को, जिसे पेश करने की उसने दूसरे पक्षकार को सूचना दी है, मंगाता है और ऐसी दस्तावेज पेश की जाती है और उन पक्षकार द्वारा, जिगने उसके पेश करने की मांग की थी, निरीक्षित हो जाती है, तब यदि उसे पेश करने वाला पक्षकार उससे ऐसा करने की अपेक्षा करता है, तो वह उसे साक्ष्य के रूप में देने के लिए आबद्ध होगा ।
164. जबकि कोई पक्षकार ऐसी किसी दस्तावेज़ को पेश करने से इन्कार कर देता है, जिसे पेश करने को उसे सूचना मिल चुकी है, तब वह तत्पश्चात् उस दस्तावेज़ को दूसरे पक्षकार की सम्मनि के या न्यायालय के आदेश के बिना साक्ष्य के रूप में उपयोग में नहीं ला सकेगा ।
ख पर किसी करार के आधार पर के बाद लाता है और वह ख को उसे पेश करने की सूचना देता है। विचारण में क उस दस्तावेज़ की मांग करता है और ख उसे पेश करने से इन्कार करता है । क उसकी अन्तर्वस्तु का द्वितीयिक साक्ष्य देता है । क द्वारा दिए हुए द्वितीयिक साक्ष्य का खण्डन करने के लिए या यह दर्शित करने के लिए कि वह करार स्टाम्पित नहीं है, ख दस्तावेज ही को पेश करना चाहता है । वह ऐसा नहीं कर सकता ।
165. न्यायाधीश सुसंगत तथ्यों का पता चलाने के लिए या उनका उचित सबूत अभिप्राप्त करने के लिए, किसी भी रूप में किसी भी समय किसी भी साक्षी या पक्षकारों से किसी भी सुसंगत या विसंगत तथ्य के बारे में कोई भी प्रश्न, जो वह चाहे, पूछ सकेगा; तथा किसी भी दस्तावेज़ या चीज को पेश करने का आदेश दे सकेगा; और न तो पक्षकार और न उनके अभिकर्ता हक़दार होंगे कि वे किसी भी ऐसे प्रश्न या आदेश के प्रति कोई भी आक्षेप करें, न ऐसे किसी भी प्रश्न के प्रत्युत्तर में दिए गए किसी भी उत्तर पर किसी भी साक्षी की न्यायालय की इजाजत के बिना प्रतिपरीक्षा करने के हक़दार होंगे,
परन्तु निर्णय को उन तथ्यों पर, जो इस अधिनियम द्वारा सुसंगत घोषित किए गए हैं और जो सम्यक् रूप से साबित किए गए हों, आधारित होना होगा;
परन्तु यह भी कि न तो यह धारा न्यायाधीश को किसी साक्षी को किसी ऐसे प्रश्न का उत्तर देने के लिए या किसी ऐसी दस्तावेज को पेश करने को विवश करने के लिए प्राधिकृत करेगी, जिसका उत्तर देने से या जिसे पेश करने से, यदि प्रतिपक्षी द्वारा वह प्रश्न पूछा गया होता था वह दस्तावेज़ मंगाई गई होती, तो ऐसा साक्षी दोनों धाराओं को सम्मिलित करते हुए धारा 121 से धारा 131 पर्यन्त धाराओं के अधीन इन्कार करने का हक़दार होता; और न न्यायाधीश कोई ऐसा प्रश्न पूछेगा जिसका पूछना किसी अन्य व्यक्ति के लिए धारा 148 या धारा 149 के अधीन अनुचित होता; और न यह एतस्मिन्पूर्व अपवादित दशाओं के सिवाय किसी भी दस्तावेज के प्राथमिक साक्ष्य का दिया जाना अभिमुक्त करेगा ।
मंगाई गई और सूचना पर पेश की गई दस्तावेज़ का साक्ष्य के रूप में दिया
सूचना पाने परे जिस दस्तावेज के पेश करने से इन्कार कर दिया गया है उसको साक्ष्य के रूप में उपयोग में लाना ।
प्रश्न करने या पेशकरण का आदेश
देने की न्यायालय की शक्ति ।
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दिया जाना हो; तथा यदि अनुवादक ऐसे निदेश की अवज्ञा करे, तो यह धारित किया जाएगा कि उसने भारतीय दण्ड संहिता की धारा एक सौ छयासठ के अधीन अपराध किया है । एक सौ तिरेसठ. जब कि कोई पक्षकार किसी दस्तावेज को, जिसे पेश करने की उसने दूसरे पक्षकार को सूचना दी है, मंगाता है और ऐसी दस्तावेज पेश की जाती है और उन पक्षकार द्वारा, जिगने उसके पेश करने की मांग की थी, निरीक्षित हो जाती है, तब यदि उसे पेश करने वाला पक्षकार उससे ऐसा करने की अपेक्षा करता है, तो वह उसे साक्ष्य के रूप में देने के लिए आबद्ध होगा । एक सौ चौंसठ. जबकि कोई पक्षकार ऐसी किसी दस्तावेज़ को पेश करने से इन्कार कर देता है, जिसे पेश करने को उसे सूचना मिल चुकी है, तब वह तत्पश्चात् उस दस्तावेज़ को दूसरे पक्षकार की सम्मनि के या न्यायालय के आदेश के बिना साक्ष्य के रूप में उपयोग में नहीं ला सकेगा । ख पर किसी करार के आधार पर के बाद लाता है और वह ख को उसे पेश करने की सूचना देता है। विचारण में क उस दस्तावेज़ की मांग करता है और ख उसे पेश करने से इन्कार करता है । क उसकी अन्तर्वस्तु का द्वितीयिक साक्ष्य देता है । क द्वारा दिए हुए द्वितीयिक साक्ष्य का खण्डन करने के लिए या यह दर्शित करने के लिए कि वह करार स्टाम्पित नहीं है, ख दस्तावेज ही को पेश करना चाहता है । वह ऐसा नहीं कर सकता । एक सौ पैंसठ. न्यायाधीश सुसंगत तथ्यों का पता चलाने के लिए या उनका उचित सबूत अभिप्राप्त करने के लिए, किसी भी रूप में किसी भी समय किसी भी साक्षी या पक्षकारों से किसी भी सुसंगत या विसंगत तथ्य के बारे में कोई भी प्रश्न, जो वह चाहे, पूछ सकेगा; तथा किसी भी दस्तावेज़ या चीज को पेश करने का आदेश दे सकेगा; और न तो पक्षकार और न उनके अभिकर्ता हक़दार होंगे कि वे किसी भी ऐसे प्रश्न या आदेश के प्रति कोई भी आक्षेप करें, न ऐसे किसी भी प्रश्न के प्रत्युत्तर में दिए गए किसी भी उत्तर पर किसी भी साक्षी की न्यायालय की इजाजत के बिना प्रतिपरीक्षा करने के हक़दार होंगे, परन्तु निर्णय को उन तथ्यों पर, जो इस अधिनियम द्वारा सुसंगत घोषित किए गए हैं और जो सम्यक् रूप से साबित किए गए हों, आधारित होना होगा; परन्तु यह भी कि न तो यह धारा न्यायाधीश को किसी साक्षी को किसी ऐसे प्रश्न का उत्तर देने के लिए या किसी ऐसी दस्तावेज को पेश करने को विवश करने के लिए प्राधिकृत करेगी, जिसका उत्तर देने से या जिसे पेश करने से, यदि प्रतिपक्षी द्वारा वह प्रश्न पूछा गया होता था वह दस्तावेज़ मंगाई गई होती, तो ऐसा साक्षी दोनों धाराओं को सम्मिलित करते हुए धारा एक सौ इक्कीस से धारा एक सौ इकतीस पर्यन्त धाराओं के अधीन इन्कार करने का हक़दार होता; और न न्यायाधीश कोई ऐसा प्रश्न पूछेगा जिसका पूछना किसी अन्य व्यक्ति के लिए धारा एक सौ अड़तालीस या धारा एक सौ उनचास के अधीन अनुचित होता; और न यह एतस्मिन्पूर्व अपवादित दशाओं के सिवाय किसी भी दस्तावेज के प्राथमिक साक्ष्य का दिया जाना अभिमुक्त करेगा । मंगाई गई और सूचना पर पेश की गई दस्तावेज़ का साक्ष्य के रूप में दिया सूचना पाने परे जिस दस्तावेज के पेश करने से इन्कार कर दिया गया है उसको साक्ष्य के रूप में उपयोग में लाना । प्रश्न करने या पेशकरण का आदेश देने की न्यायालय की शक्ति ।
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Bangaluru : कर्नाटक में आगामी 10 मई को विधानसभा चुनाव होने वाला है. इसको लेकर कांग्रेस और बीजेपी ने कई रैलियां और जनसभाएं की. अब कर्नाटक चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एंट्री होने वाली है. पीएम शनिवार और रविवार को दो दिवसीय कर्नाटक दौरे पर रहेंगे. इस दौरान वह छह जनसभाओं को संबोधित करेंगे. साथ ही दो जगहों पर रोड शो करेंगे. शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय दौरे के तहत पीएम मोदी आज तीन जन सभाओं को संबोधित करेंगे और एक रोड शो करेंगे. (पढ़ें, बृजभूषण पर एफआईआर के बाद पहलवानों से मिल भावुक हुईं प्रियंका)
यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, पीएम मोदी शनिवार सुबह दिल्ली से विशेष विमान से बीदर हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरेंगे. वह सुबह 10 बजकर 20 मिनट पर बीदर हवाई अड्डे पहुंचेंगे. जहां से वह हेलीकॉप्टर से बीदर जिले के हुमनाबाद जायेंगे और सुबह 11 बजे एक जनसभा को संबोधित करेंगे. इसके बाद विजयपुरा में दोपहर एक बजे एक और जनसभा को संबोधित करेंगे. फिर बेलगावी जिले के कुड़ाची में दोपहर करीब पौने दो बजे लोगों को संबोधित करेंगे. इसके बाद मोदी शाम को बेंगलुरु उत्तर में रोड शो करने के लिए रवाना होंगे.
यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, बेंगलुरु में रात को विश्राम के बाद वह रविवार सुबह राजभवन से कोलार, रामनगर के चन्नापटना और हासन के बेलूर जायेंगे. कोलार में वह सुबह 11. 30 बजे एक जनसभा को संबोधित करेंगे. इसके बाद चन्नापटना और बेलूर में जनसभा को संबोधित करेंगे. रविवार को मैसूरु में भी प्रधानमंत्री का रोड शो है. रोड शो करने के बाद वह मैसूरु से दिल्ली के लिए रवाना होंगे. बता दें कि फरवरी के बाद से मोदी का इस साल कर्नाटक का यह नौवां दौरा है.
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करने वाले कांग्रेस उम्मीदवार के. एच. मुनियप्पा पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं. इस सीट पर 2018 के विधानसभा चुनाव में मुकाबला मुख्य रूप से नारायणस्वामी (86,966 वोट) और कांग्रेस के वेंकटस्वामी (69,956) के बीच था. भाजपा उम्मीदवार के. नागेश 9,820 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे. कर्नाटक में में 10 मई को 224 सीट पर विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनाव के नतीजे 13 मई का आयेंगे.
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Bangaluru : कर्नाटक में आगामी दस मई को विधानसभा चुनाव होने वाला है. इसको लेकर कांग्रेस और बीजेपी ने कई रैलियां और जनसभाएं की. अब कर्नाटक चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एंट्री होने वाली है. पीएम शनिवार और रविवार को दो दिवसीय कर्नाटक दौरे पर रहेंगे. इस दौरान वह छह जनसभाओं को संबोधित करेंगे. साथ ही दो जगहों पर रोड शो करेंगे. शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय दौरे के तहत पीएम मोदी आज तीन जन सभाओं को संबोधित करेंगे और एक रोड शो करेंगे. यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, पीएम मोदी शनिवार सुबह दिल्ली से विशेष विमान से बीदर हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरेंगे. वह सुबह दस बजकर बीस मिनट पर बीदर हवाई अड्डे पहुंचेंगे. जहां से वह हेलीकॉप्टर से बीदर जिले के हुमनाबाद जायेंगे और सुबह ग्यारह बजे एक जनसभा को संबोधित करेंगे. इसके बाद विजयपुरा में दोपहर एक बजे एक और जनसभा को संबोधित करेंगे. फिर बेलगावी जिले के कुड़ाची में दोपहर करीब पौने दो बजे लोगों को संबोधित करेंगे. इसके बाद मोदी शाम को बेंगलुरु उत्तर में रोड शो करने के लिए रवाना होंगे. यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, बेंगलुरु में रात को विश्राम के बाद वह रविवार सुबह राजभवन से कोलार, रामनगर के चन्नापटना और हासन के बेलूर जायेंगे. कोलार में वह सुबह ग्यारह. तीस बजे एक जनसभा को संबोधित करेंगे. इसके बाद चन्नापटना और बेलूर में जनसभा को संबोधित करेंगे. रविवार को मैसूरु में भी प्रधानमंत्री का रोड शो है. रोड शो करने के बाद वह मैसूरु से दिल्ली के लिए रवाना होंगे. बता दें कि फरवरी के बाद से मोदी का इस साल कर्नाटक का यह नौवां दौरा है. साल दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करने वाले कांग्रेस उम्मीदवार के. एच. मुनियप्पा पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं. इस सीट पर दो हज़ार अट्ठारह के विधानसभा चुनाव में मुकाबला मुख्य रूप से नारायणस्वामी और कांग्रेस के वेंकटस्वामी के बीच था. भाजपा उम्मीदवार के. नागेश नौ,आठ सौ बीस मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे. कर्नाटक में में दस मई को दो सौ चौबीस सीट पर विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनाव के नतीजे तेरह मई का आयेंगे.
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पटनाः पटना जिला बाल संरक्षण इकाई और बाल कल्याण समिति के प्रयास से तीन वर्ष बाद एक लड़के को झारखंड में रह रहे उसके परिवार से मिलवाया गया है। पटना के जिलाधिकारी चन्द्रशेखर सिंह ने इसपर खुशी जताते हुए कहा की यह बाल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले सभी कर्मियों के उत्तरदायित्व, सकारात्मक सोच और अथक प्रयास के फलीभूत होने का उदाहरण है।
पटना जिला प्रशासन द्वारा सोमवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, तीन वर्ष पूर्व रेलवे पुलिस बल के माध्यम से पटना जंक्शन पर आठ वर्षीय (तब पांच वर्षीय) बालक अजय मंडल को मुक्त कर रेलवे चाइल्ड लाइन के सुपर्द किया गया था। उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। बयान के मुताबिक बालक हमेशा अपने घर जाने की बात कहता और वह अपना पता सिर्फ "टाटा" (जमेशदपुर) बताता था। बालक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार तीन से चार बार सामाजिक अन्वेषण रिपोर्ट की मांग की गई पर हर बार निराशा हाथ लगी।
बयान में कहा गया कि काफी विचारोपरांत बालहित में यह निर्णय लिया गया की बालक को बताए गए पते पर ले जाया जाए। विज्ञप्ति के मुताबिक, बालक का घर जो कि जमशेदपुर से 50 किलोमीटर की दूरी पर था, मिलने पर विशेष परिस्थिति में माता-पिता को सुपुर्द करने का आदेश दिया गया जिसके उपरांत पटना जिला बाल संरक्षण इकाई की तीन सदस्यों की टीम बालक को लेकर वहां लेकर पहुंची और स्थानीय पुलिस एवम चाइल्ड लाइन के सहयोग से बच्चे को उसके परिवार के सुपुर्द किया।
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पटनाः पटना जिला बाल संरक्षण इकाई और बाल कल्याण समिति के प्रयास से तीन वर्ष बाद एक लड़के को झारखंड में रह रहे उसके परिवार से मिलवाया गया है। पटना के जिलाधिकारी चन्द्रशेखर सिंह ने इसपर खुशी जताते हुए कहा की यह बाल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले सभी कर्मियों के उत्तरदायित्व, सकारात्मक सोच और अथक प्रयास के फलीभूत होने का उदाहरण है। पटना जिला प्रशासन द्वारा सोमवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, तीन वर्ष पूर्व रेलवे पुलिस बल के माध्यम से पटना जंक्शन पर आठ वर्षीय बालक अजय मंडल को मुक्त कर रेलवे चाइल्ड लाइन के सुपर्द किया गया था। उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। बयान के मुताबिक बालक हमेशा अपने घर जाने की बात कहता और वह अपना पता सिर्फ "टाटा" बताता था। बालक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार तीन से चार बार सामाजिक अन्वेषण रिपोर्ट की मांग की गई पर हर बार निराशा हाथ लगी। बयान में कहा गया कि काफी विचारोपरांत बालहित में यह निर्णय लिया गया की बालक को बताए गए पते पर ले जाया जाए। विज्ञप्ति के मुताबिक, बालक का घर जो कि जमशेदपुर से पचास किलोग्राममीटर की दूरी पर था, मिलने पर विशेष परिस्थिति में माता-पिता को सुपुर्द करने का आदेश दिया गया जिसके उपरांत पटना जिला बाल संरक्षण इकाई की तीन सदस्यों की टीम बालक को लेकर वहां लेकर पहुंची और स्थानीय पुलिस एवम चाइल्ड लाइन के सहयोग से बच्चे को उसके परिवार के सुपुर्द किया।
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जिससे आज संविधान खतरे में है। नेता द्वय ने कहा कि संविधान को बचाने और लोकतंत्र की रक्षा के लिए 15 जून 2023 को बिहार के हर प्रखंड मुख्यालयों पर बिहार के लोकप्रिय नेता नीतीश कुमार और महागठबंधन के सभी दलों के नेताओं के नेतृत्व में धरना का कार्यक्रम तय है। धरना में जनता जदयू के कार्यकर्ता महागठबंधन के सभी दलों के कार्यकर्ताओं के साथ बढ़ चढ़ कर हजारों हजार की संख्या में धरना पर बैठेंगे और भाजपा द्वारा किए जा रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ साजिश का पर्दाफाश करेंगे और भाजपा को जनता के सामने बेनकाब करेंगे।
प्रदेश महासचिव सह विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि भाजपा के खिलाफ प्रखंड मुख्यालय में धरना देकर अपने नेता विकास पुरुष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आवाज को दिल्ली तक पहुंचाना है, और यह सुनिश्चित करना है कि 2024 में देश के प्रधानमंत्री के रूप में बिहार और देश की जनता नीतीश कुमार को ही पसंद कर रही है ।
आज केंद्र में बैठी तानाशाही हिटलर शाही लोकतंत्र को समाप्त करने वाली भाजपा सरकार को भी उखाड़ फेंकने का आंदोलन बिहार से शुरू हो गया है।
जद(यू0) के सभी साथियों का कर्तव्य बनता है कि संगठन को धारदार बनाते हुए वर्ष 2024 लोकसभा और 20 25 विधान सभा का चुनाव को देखते हुए संगठन को और मजबूत बनाएं और बूथ स्तर पर कमेटी का गठन शीघ्र करें।
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जिससे आज संविधान खतरे में है। नेता द्वय ने कहा कि संविधान को बचाने और लोकतंत्र की रक्षा के लिए पंद्रह जून दो हज़ार तेईस को बिहार के हर प्रखंड मुख्यालयों पर बिहार के लोकप्रिय नेता नीतीश कुमार और महागठबंधन के सभी दलों के नेताओं के नेतृत्व में धरना का कार्यक्रम तय है। धरना में जनता जदयू के कार्यकर्ता महागठबंधन के सभी दलों के कार्यकर्ताओं के साथ बढ़ चढ़ कर हजारों हजार की संख्या में धरना पर बैठेंगे और भाजपा द्वारा किए जा रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ साजिश का पर्दाफाश करेंगे और भाजपा को जनता के सामने बेनकाब करेंगे। प्रदेश महासचिव सह विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि भाजपा के खिलाफ प्रखंड मुख्यालय में धरना देकर अपने नेता विकास पुरुष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आवाज को दिल्ली तक पहुंचाना है, और यह सुनिश्चित करना है कि दो हज़ार चौबीस में देश के प्रधानमंत्री के रूप में बिहार और देश की जनता नीतीश कुमार को ही पसंद कर रही है । आज केंद्र में बैठी तानाशाही हिटलर शाही लोकतंत्र को समाप्त करने वाली भाजपा सरकार को भी उखाड़ फेंकने का आंदोलन बिहार से शुरू हो गया है। जद के सभी साथियों का कर्तव्य बनता है कि संगठन को धारदार बनाते हुए वर्ष दो हज़ार चौबीस लोकसभा और बीस पच्चीस विधान सभा का चुनाव को देखते हुए संगठन को और मजबूत बनाएं और बूथ स्तर पर कमेटी का गठन शीघ्र करें।
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सहायक होते है। इस मततिधिनिणयमें आचायने मताँके लिए तिथियाका निय किया है । जैनाचारम व्रत उपवास के लिए तिथियोंका विधान किया गया है। अचायने यहाँ कितने प्रमाण तिथिके होनेपर मत करना चाहिए, इसका विस्तारमे निरूपण किया है। योग्य समय मत करनेसे विशेष फलकी प्राप्ति होती हूँ।
तिथिहासे प्रवर्त्तय किं विधानम् ? सकला तिथि का ? कथ मतनिर्णय इति चेसदाहअर्थ-तिथेक्रे हासमें प्रत करनेश क्या नियम है ? कमतरना चाहिए । सक्ला- मम्पूर्ण तिथि क्या है। उसमें किस प्रकारका भत व्यक्त किया गया है ? इस प्रकार के प्रश्न पूछे जानेपर आचार्य कहते हैतिथिहास मे व्रत करने का विधान यिनार्क उदेश्यस्त समेति च ।
सा तिथि सकला ज्ञेया उपनामादिकर्मणि ॥११॥ संस्कृत व्यवस्था तिथो त्रिमुहत्तप्पमे वर्तमानेषु पट्उदेति सा तिथि देनसिकतेषु ग्रनत्रयाष्टाह्निक दशलाक्षणिकरत्नावलीकनकापली द्विकाबध्येकावलीमुक्तावलीपोडशमा रणादिपु सक्ला झेया । चकारात् या तिथि उदयाले त्रिमुहूर्त्तादिनागत दिन सेऽपि वर्तमाना तिथ्युदयनाले त्रिमुहूर्त्तादिना गतदि यसेऽपिर्तमा तिथि त्रिमुत्तादिनासा अस्तगता तिथिक्षैया । तद्नत गत दिवसेपर स्यात् अस्तमननिमुहूर्त्ताधिकत्वा दिति देतो । चन्दात् द्वितीयोऽयोऽपि ग्राह्य निमुहर्चेषु सत्सु १ नमिनसक्लदेवपापतापापहारम्,
जिनपसमुद्दिष्ट जमपाथोधितारम् । कुम्त सल्लोकाश्रयमानेन सारम्,
व्रतमिद मिति पूज्य देवनाथस्य पूज्यम् ॥- व्रतोयापन सग्रह पृ० २२
यस्याम अस्तमेति सा तिथिर्जिन रात्रिगंगनपञ्चमीचन्दनपष्टया दिपु ने शक्यतेषु सकला माह्या; इति नात्पर्यायें ।
अर्थ-देवसिक मतो भ- रत्नत्रय, अष्टाहिस, दशलक्षण, रत्न* वली, एकावला, द्विसवली, कनकाउली, मुकावली, पोडशशरण अदिमें सूर्योदय के समय तीन मुहूत अथात् छ घटीसे लेकर छ मुहूर्त अर्थात् बारहयगे पर्यन्त उत प्रती प्रतिपादित तिथियोंके होनेपर प्रत किये जाते हैं। रात्रिमतों में जिनरात्रि, आकाशपञ्चमी, चदनष्ठो, नक्षत्रमाला आदिमें अस्तकालीन तिथि ली गयी है भधात् जिस दिन ताममुहूत - घटी तिथे सूर्यकेअन्न समयमें रहे, उस दिन वह तिथि नैशिक प्रतामे ग्रहण की गयी है। अभिप्राय यह है कि दैवसिक पतोंमें उदयकालमै छ घडी तिथिका और नैशिक प्रतामें अम्नकालमेघी तिथिका रहना आवश्यक
विवेचन - श्रावकके व्रत मूल्त दो प्रकारके होते है - नित्य व्रत और नैमित्तिक व्रत । पाँच अणुव्रत, तीन गुणव्रत और चार शिक्षाघ्रत इन यारह प्रतका निश्य पालन किया जाता है, अतः ये नित्य व्रत कहे जाते है। नैमित्तिक घतौका पालन किसी विशेष अवसरपर ही किया जाता है, इनके लिए तिथे और समय निश्चित है तथा नैमित्तिक प्रताके कमें धानक अपने मूड गुण और उत्तरगुणाको विशुद्ध करता है, उत्तरोत्तर अपनी आत्माका विकास करता रहा है। नैमित्तिक व्रतोंकी संख्या १०८ है, इन १०८ प्रतॉम कुछ पुन व्रत होनके कारण व्यवहारमं० मत लिये जाते है । धतमान में प्रमुख दस-पन्द्रह मतका हा प्रचर देखा जाता है । नैमित्तिक व्रतोंके प्रधान हो भेद है-सिक और नैशिक । जिन मताको समस्या निम की जाती है, ये तव निकी क्रियाएँ रातम सम्पन्न की जाता है, ये नैशिक कहलाते हैं। दोनो ही प्रकार के द्वता प्रोषधोपवास, महाचय पत्र धर्मध्यानका करना आवश्यक माना गया है। फिर भी कुछ बातें ऐसी है जिनका व्रतकी उपयोगिता और यावहारिक्ताके अनुसार रात या दिनमें करना आवश्यक है।
रत्नावलीत में एक चम ७२ उपवास किये जाते है। यह यत
श्रावण कृष्ण द्वितीयामे आरम्भ किया जाता है। इसम मध्ये माममें छ उपवास करनेका विधान है। मत करनवाला प्रथम श्रावण कृष्ण प्रतिपदा के दिन करता है और श्रावण कृष्ण द्वितीयाका उपयास करता है। उपवास दिन पूजा, मध्याय और जाप करता हुआ मझयमे रहता है। श्रावण कृष्ण तृतीयाके दिन दोनों समय शुद्ध भोजन करता है, पुन चतुर्थी दिनान करता है तथा पञ्चमीको प्रोषधोपयास करता के है। सप्तमी प्रकाशन करता हुआ अमीको उपवास करता है। इस प्रकार कृष्णम तीन उपवास-द्वतीया, पञ्चमी और अष्टमीको करता है। द्वितीय पक कर तृतीयाको उपवास, चतुर्थीको काशन पश्चमीको उपवास, पष्टीको प्रकाशन, सप्तमीको एकाशन और अष्टमोको उपवास करता है। इस प्रकार शुरूपता पम्मी और अष्टमीको उपवास करता है । श्रावणमाम घर्षका प्रथम मास माना जाता है, अत मतका आरम्भ श्रावण माससे होता है। मत करनेवाला श्रावण में कुछ उपवास करता है। इसी प्रकार प्रत्येक मासमें कृष्णपक्ष में द्वितीया, पञ्चमी और अष्टमी तथा शुरू में तृतीया, पन्चमी और अष्टमीको उपवास करने चाहिए । प्रत्येक महीनेम छ उपवास करते हुए वर्षाम्तनक कुर ७२ उपवास किये जाते है । ग्नावलीत एक तक हो किया
जता है। द्वितीय वर्ष भाद्रपद मासमें उद्यापन करना चाहिए। यदि उद्यापनकी शक्ति न हो तो दो वर्ष प्रत करना चाहिए ।
एकाग्रत भो श्रावण मासमे आरम्भ किया जाता है। श्रावण कृष्ण चतुर्थी, अष्टमी भर चतुर्दशीको उपचास करना तथा श्रावण शुद्ध पक्षम प्रतिपदा, पञ्चमी, अष्टमी और चतुदशीको उपवास करना इस प्रकार श्रावण मासम कुल सात उपवास करना । भाद्रपद आदि मासोंमें भी कृष्णपक्ष की चतुर्थी, अष्टमी और चतुदशी तथा शुरूपक्षकी प्रतिपदा, पन्चमी, अष्टमी और चतुदशी इस प्रकार कुल सात उपवास प्रत्येक मासमें करने चाहिए। घर्ष में कुल ८४ उपवास किये जाते हैं। एक वर्ष व्रत करने के उपरान्त उद्यापन करना चाहिए ।
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सहायक होते है। इस मततिधिनिणयमें आचायने मताँके लिए तिथियाका निय किया है । जैनाचारम व्रत उपवास के लिए तिथियोंका विधान किया गया है। अचायने यहाँ कितने प्रमाण तिथिके होनेपर मत करना चाहिए, इसका विस्तारमे निरूपण किया है। योग्य समय मत करनेसे विशेष फलकी प्राप्ति होती हूँ। तिथिहासे प्रवर्त्तय किं विधानम् ? सकला तिथि का ? कथ मतनिर्णय इति चेसदाहअर्थ-तिथेक्रे हासमें प्रत करनेश क्या नियम है ? कमतरना चाहिए । सक्ला- मम्पूर्ण तिथि क्या है। उसमें किस प्रकारका भत व्यक्त किया गया है ? इस प्रकार के प्रश्न पूछे जानेपर आचार्य कहते हैतिथिहास मे व्रत करने का विधान यिनार्क उदेश्यस्त समेति च । सा तिथि सकला ज्ञेया उपनामादिकर्मणि ॥ग्यारह॥ संस्कृत व्यवस्था तिथो त्रिमुहत्तप्पमे वर्तमानेषु पट्उदेति सा तिथि देनसिकतेषु ग्रनत्रयाष्टाह्निक दशलाक्षणिकरत्नावलीकनकापली द्विकाबध्येकावलीमुक्तावलीपोडशमा रणादिपु सक्ला झेया । चकारात् या तिथि उदयाले त्रिमुहूर्त्तादिनागत दिन सेऽपि वर्तमाना तिथ्युदयनाले त्रिमुहूर्त्तादिना गतदि यसेऽपिर्तमा तिथि त्रिमुत्तादिनासा अस्तगता तिथिक्षैया । तद्नत गत दिवसेपर स्यात् अस्तमननिमुहूर्त्ताधिकत्वा दिति देतो । चन्दात् द्वितीयोऽयोऽपि ग्राह्य निमुहर्चेषु सत्सु एक नमिनसक्लदेवपापतापापहारम्, जिनपसमुद्दिष्ट जमपाथोधितारम् । कुम्त सल्लोकाश्रयमानेन सारम्, व्रतमिद मिति पूज्य देवनाथस्य पूज्यम् ॥- व्रतोयापन सग्रह पृशून्य बाईस यस्याम अस्तमेति सा तिथिर्जिन रात्रिगंगनपञ्चमीचन्दनपष्टया दिपु ने शक्यतेषु सकला माह्या; इति नात्पर्यायें । अर्थ-देवसिक मतो भ- रत्नत्रय, अष्टाहिस, दशलक्षण, रत्न* वली, एकावला, द्विसवली, कनकाउली, मुकावली, पोडशशरण अदिमें सूर्योदय के समय तीन मुहूत अथात् छ घटीसे लेकर छ मुहूर्त अर्थात् बारहयगे पर्यन्त उत प्रती प्रतिपादित तिथियोंके होनेपर प्रत किये जाते हैं। रात्रिमतों में जिनरात्रि, आकाशपञ्चमी, चदनष्ठो, नक्षत्रमाला आदिमें अस्तकालीन तिथि ली गयी है भधात् जिस दिन ताममुहूत - घटी तिथे सूर्यकेअन्न समयमें रहे, उस दिन वह तिथि नैशिक प्रतामे ग्रहण की गयी है। अभिप्राय यह है कि दैवसिक पतोंमें उदयकालमै छ घडी तिथिका और नैशिक प्रतामें अम्नकालमेघी तिथिका रहना आवश्यक विवेचन - श्रावकके व्रत मूल्त दो प्रकारके होते है - नित्य व्रत और नैमित्तिक व्रत । पाँच अणुव्रत, तीन गुणव्रत और चार शिक्षाघ्रत इन यारह प्रतका निश्य पालन किया जाता है, अतः ये नित्य व्रत कहे जाते है। नैमित्तिक घतौका पालन किसी विशेष अवसरपर ही किया जाता है, इनके लिए तिथे और समय निश्चित है तथा नैमित्तिक प्रताके कमें धानक अपने मूड गुण और उत्तरगुणाको विशुद्ध करता है, उत्तरोत्तर अपनी आत्माका विकास करता रहा है। नैमित्तिक व्रतोंकी संख्या एक सौ आठ है, इन एक सौ आठ प्रतॉम कुछ पुन व्रत होनके कारण व्यवहारमंशून्य मत लिये जाते है । धतमान में प्रमुख दस-पन्द्रह मतका हा प्रचर देखा जाता है । नैमित्तिक व्रतोंके प्रधान हो भेद है-सिक और नैशिक । जिन मताको समस्या निम की जाती है, ये तव निकी क्रियाएँ रातम सम्पन्न की जाता है, ये नैशिक कहलाते हैं। दोनो ही प्रकार के द्वता प्रोषधोपवास, महाचय पत्र धर्मध्यानका करना आवश्यक माना गया है। फिर भी कुछ बातें ऐसी है जिनका व्रतकी उपयोगिता और यावहारिक्ताके अनुसार रात या दिनमें करना आवश्यक है। रत्नावलीत में एक चम बहत्तर उपवास किये जाते है। यह यत श्रावण कृष्ण द्वितीयामे आरम्भ किया जाता है। इसम मध्ये माममें छ उपवास करनेका विधान है। मत करनवाला प्रथम श्रावण कृष्ण प्रतिपदा के दिन करता है और श्रावण कृष्ण द्वितीयाका उपयास करता है। उपवास दिन पूजा, मध्याय और जाप करता हुआ मझयमे रहता है। श्रावण कृष्ण तृतीयाके दिन दोनों समय शुद्ध भोजन करता है, पुन चतुर्थी दिनान करता है तथा पञ्चमीको प्रोषधोपयास करता के है। सप्तमी प्रकाशन करता हुआ अमीको उपवास करता है। इस प्रकार कृष्णम तीन उपवास-द्वतीया, पञ्चमी और अष्टमीको करता है। द्वितीय पक कर तृतीयाको उपवास, चतुर्थीको काशन पश्चमीको उपवास, पष्टीको प्रकाशन, सप्तमीको एकाशन और अष्टमोको उपवास करता है। इस प्रकार शुरूपता पम्मी और अष्टमीको उपवास करता है । श्रावणमाम घर्षका प्रथम मास माना जाता है, अत मतका आरम्भ श्रावण माससे होता है। मत करनेवाला श्रावण में कुछ उपवास करता है। इसी प्रकार प्रत्येक मासमें कृष्णपक्ष में द्वितीया, पञ्चमी और अष्टमी तथा शुरू में तृतीया, पन्चमी और अष्टमीको उपवास करने चाहिए । प्रत्येक महीनेम छ उपवास करते हुए वर्षाम्तनक कुर बहत्तर उपवास किये जाते है । ग्नावलीत एक तक हो किया जता है। द्वितीय वर्ष भाद्रपद मासमें उद्यापन करना चाहिए। यदि उद्यापनकी शक्ति न हो तो दो वर्ष प्रत करना चाहिए । एकाग्रत भो श्रावण मासमे आरम्भ किया जाता है। श्रावण कृष्ण चतुर्थी, अष्टमी भर चतुर्दशीको उपचास करना तथा श्रावण शुद्ध पक्षम प्रतिपदा, पञ्चमी, अष्टमी और चतुदशीको उपवास करना इस प्रकार श्रावण मासम कुल सात उपवास करना । भाद्रपद आदि मासोंमें भी कृष्णपक्ष की चतुर्थी, अष्टमी और चतुदशी तथा शुरूपक्षकी प्रतिपदा, पन्चमी, अष्टमी और चतुदशी इस प्रकार कुल सात उपवास प्रत्येक मासमें करने चाहिए। घर्ष में कुल चौरासी उपवास किये जाते हैं। एक वर्ष व्रत करने के उपरान्त उद्यापन करना चाहिए ।
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प्रतापगढ़ में प्रेमिका से मिलने गए युवक को लड़की के घरवालों ने घर में बंधक बना लिया। काफी देर तक उसकी पिटाई की। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह युवक को छुड़ाया। लेकिन किसी पक्ष ने पुलिस को तहरीर नहीं दी। पुलिस ऐसी किसी घटना से इनकार कर रही है।
अंतू थानाक्षेत्र में किशुनगंज बाजार के पास के एक गांव में रहने वाले इंटर के छात्र और पड़ोसी गांव की किशोरी के बीच काफी दिनों से प्रेम संबंध है। बुधवार दोपहर किशोरी को अकेला पाकर छात्र उसके घर में घुस गया। इसी दौरान किशोरी के परिजन आ गए और लड़के को घर में बंधकर बनाकर पीटना शुरू कर दिया। करीब दो घंटे तक उसकी पिटाई की। इसी दौरान किसी ने पुलिस को फोन कर दिया।
अंतू पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को किसी तरह छुड़ाया लेकिन लोकलाज के चलते किसी पक्ष ने पुलिस को तहरीर नहीं दी। फिलहाल अंतू एसओ अर्जुन सिंह ने ऐसी किसी घटना की जानकारी से इनकार किया।
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प्रतापगढ़ में प्रेमिका से मिलने गए युवक को लड़की के घरवालों ने घर में बंधक बना लिया। काफी देर तक उसकी पिटाई की। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह युवक को छुड़ाया। लेकिन किसी पक्ष ने पुलिस को तहरीर नहीं दी। पुलिस ऐसी किसी घटना से इनकार कर रही है। अंतू थानाक्षेत्र में किशुनगंज बाजार के पास के एक गांव में रहने वाले इंटर के छात्र और पड़ोसी गांव की किशोरी के बीच काफी दिनों से प्रेम संबंध है। बुधवार दोपहर किशोरी को अकेला पाकर छात्र उसके घर में घुस गया। इसी दौरान किशोरी के परिजन आ गए और लड़के को घर में बंधकर बनाकर पीटना शुरू कर दिया। करीब दो घंटे तक उसकी पिटाई की। इसी दौरान किसी ने पुलिस को फोन कर दिया। अंतू पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को किसी तरह छुड़ाया लेकिन लोकलाज के चलते किसी पक्ष ने पुलिस को तहरीर नहीं दी। फिलहाल अंतू एसओ अर्जुन सिंह ने ऐसी किसी घटना की जानकारी से इनकार किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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इस महीने 21 मई को Honor 20 Pro को लंदन में आयोजित होने वाले इवेंट में लॉन्च किया जा सकता है. Honor 20 को भी इस स्मार्टफोन के साथ ही लॉन्च किया जा सकता है. इसके अलावा Honor 20i और Honor 20 Lite भी लॉन्च किए जा सकते हैं. Honor 20 सीरीज के चारों स्मार्टफोन्स के बारे में कुछ समय पहले ही कई जानकारियां लीक हो चुकी हैं. अब जो नई जानकारी सामने आई है उसमें Honor 20 Pro का इमेज दिखाया गया है. Digital Trends ने Honor 20 Pro के दो इमेज को पोस्ट किया है. जिसके अनुसार ये फीचर फोन मे हो सकते है.
हाल ही मे सामने आई नई तस्वीरों के मुताबिक, पंचहोल डिस्प्ले फोन के फ्रंट पैनल में दिया गया है. फोन के बांयी तरफ फ्रंट कैमरा को देखा जा सकता है. लीक्ड तस्वीरों में फ्रंट कैमरा को वॉलपेपर के बीच में देखा जा सकता है. इसके अलावा फोन में प्री-इंस्टॉल्ड Fornite गेम को भी देखा जा सकता है. Honor 20 Pro की अब तक जो जानकारी लीक हुई है उसके मुताबिक फोन डार्क ब्लू फिनिश और ग्रेडिएंट डिजाइन के साथ आ सकता है. फोन के डिस्प्ले की बात करें तो Honor 20 में 6. 1 का डिस्प्ले दिया जा सकता है, जबकि Honor 20 Pro में 6. 5 इंच का OLED डिस्प्ले दिया जा सकता है. इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर दोनों ही स्मार्टफोन में दिया जा सकता है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार Honor 20 के रेंडर की बात करें तो यह फोन ब्लू, ब्लैक और पर्ल व्हाइट तीन कलर ऑप्शन्स के साथ लॉन्च किया जा सकता है. इसके अलावा Honor 20 में 6GB रैम और Honor 20 Pro में 8GB रैम दिया जा सकता है. फोन एंड्रॉइड 9 पाई पर आधारित EMUI 9 पर काम कर सकता है. फोन में किरीन 980 एसओसी प्रोसेसर दिया जा सकता है. फास्ट चार्जिंग के साथ फोन में 3,650mAh की बैटरी 22. 5W की दी गई है.
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इस महीने इक्कीस मई को Honor बीस Pro को लंदन में आयोजित होने वाले इवेंट में लॉन्च किया जा सकता है. Honor बीस को भी इस स्मार्टफोन के साथ ही लॉन्च किया जा सकता है. इसके अलावा Honor बीसi और Honor बीस Lite भी लॉन्च किए जा सकते हैं. Honor बीस सीरीज के चारों स्मार्टफोन्स के बारे में कुछ समय पहले ही कई जानकारियां लीक हो चुकी हैं. अब जो नई जानकारी सामने आई है उसमें Honor बीस Pro का इमेज दिखाया गया है. Digital Trends ने Honor बीस Pro के दो इमेज को पोस्ट किया है. जिसके अनुसार ये फीचर फोन मे हो सकते है. हाल ही मे सामने आई नई तस्वीरों के मुताबिक, पंचहोल डिस्प्ले फोन के फ्रंट पैनल में दिया गया है. फोन के बांयी तरफ फ्रंट कैमरा को देखा जा सकता है. लीक्ड तस्वीरों में फ्रंट कैमरा को वॉलपेपर के बीच में देखा जा सकता है. इसके अलावा फोन में प्री-इंस्टॉल्ड Fornite गेम को भी देखा जा सकता है. Honor बीस Pro की अब तक जो जानकारी लीक हुई है उसके मुताबिक फोन डार्क ब्लू फिनिश और ग्रेडिएंट डिजाइन के साथ आ सकता है. फोन के डिस्प्ले की बात करें तो Honor बीस में छः. एक का डिस्प्ले दिया जा सकता है, जबकि Honor बीस Pro में छः. पाँच इंच का OLED डिस्प्ले दिया जा सकता है. इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर दोनों ही स्मार्टफोन में दिया जा सकता है. प्राप्त जानकारी के अनुसार Honor बीस के रेंडर की बात करें तो यह फोन ब्लू, ब्लैक और पर्ल व्हाइट तीन कलर ऑप्शन्स के साथ लॉन्च किया जा सकता है. इसके अलावा Honor बीस में छःGB रैम और Honor बीस Pro में आठGB रैम दिया जा सकता है. फोन एंड्रॉइड नौ पाई पर आधारित EMUI नौ पर काम कर सकता है. फोन में किरीन नौ सौ अस्सी एसओसी प्रोसेसर दिया जा सकता है. फास्ट चार्जिंग के साथ फोन में तीन,छः सौ पचासmAh की बैटरी बाईस. पाँच वाट की दी गई है.
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उत्तरी यमन में हुए एक हवाई हमले में कम से कम बीस लोग मारे गए हैं. ये हमला एक शादी समारोह पर हुआ है.
बचाव दलों के मुताबिक रविवार देर रात हुए इस हमले में तीस से अधिक लोग घायल भी हुए हैं.
हूथी विद्रोहियों ने इस हमले का आरोप सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन पर लगाया है.
सऊदी गठबंधन यमन की निर्वासित सरकार के समर्थन में हूथियों पर हमले कर रहा है.
वहीं गठबंधन के एक प्रवक्ता ने कहा है कि हमले की रिपोर्टों की जांच की जा रही है.
यमन की निजी न्यूज़ वेबसाइट अल मसदर ऑनलाइन के मुताबिक ये हमला बनी क़िस इलाक़े के अल रक़ा गांव में हुआ है.
हमले के बाद हज्जा इलाक़े के रिपब्लिकन अस्पताल में आपातकाल घोषित कर दिया गया है और लोगों से रक्तदान करने की अपील की गई है.
यमन में हूथी विद्रोहियों पर हमले कर रहे सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन पर नागरिकों पर हमले करने के आरोप लगते रहे हैं.
साल 2017 में शादा प्रांत में एक बाज़ार पर हमले के आरोप भी गठबंधन पर लगे थे हालांकि गठबंधन ने कहा था कि हमला हूथी विद्रोहियों को निशाना बनाकर किया गया था.
यमन में तीन साल से चल रहे गृहयुद्ध में अब तक दस हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं.
इस गृह युद्ध की वजह से यमन में भुखमरी के हालात हो गए हैं और दसियों लाख लोग बेहद मुश्किल में जीवन जी रहे हैं.
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उत्तरी यमन में हुए एक हवाई हमले में कम से कम बीस लोग मारे गए हैं. ये हमला एक शादी समारोह पर हुआ है. बचाव दलों के मुताबिक रविवार देर रात हुए इस हमले में तीस से अधिक लोग घायल भी हुए हैं. हूथी विद्रोहियों ने इस हमले का आरोप सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन पर लगाया है. सऊदी गठबंधन यमन की निर्वासित सरकार के समर्थन में हूथियों पर हमले कर रहा है. वहीं गठबंधन के एक प्रवक्ता ने कहा है कि हमले की रिपोर्टों की जांच की जा रही है. यमन की निजी न्यूज़ वेबसाइट अल मसदर ऑनलाइन के मुताबिक ये हमला बनी क़िस इलाक़े के अल रक़ा गांव में हुआ है. हमले के बाद हज्जा इलाक़े के रिपब्लिकन अस्पताल में आपातकाल घोषित कर दिया गया है और लोगों से रक्तदान करने की अपील की गई है. यमन में हूथी विद्रोहियों पर हमले कर रहे सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन पर नागरिकों पर हमले करने के आरोप लगते रहे हैं. साल दो हज़ार सत्रह में शादा प्रांत में एक बाज़ार पर हमले के आरोप भी गठबंधन पर लगे थे हालांकि गठबंधन ने कहा था कि हमला हूथी विद्रोहियों को निशाना बनाकर किया गया था. यमन में तीन साल से चल रहे गृहयुद्ध में अब तक दस हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं. इस गृह युद्ध की वजह से यमन में भुखमरी के हालात हो गए हैं और दसियों लाख लोग बेहद मुश्किल में जीवन जी रहे हैं.
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आज काफी साल बाद में अपने गांव जा रही हूं। अपनी दादी से मिलने शायद 20 साल हो गए मुझे। बहुत छोटी सी थी तब का मुझे अपने गांव याद है वह पीपल के पेड़ पगडंडी झुरमुट ।लेकिन हॉस्टल जाने के बाद तो सब कुछ बदल गया होगा तो शायद पर न कुछ बदला ना होगा तो वह है मेरी दादी और उनका प्यार आज तो मैं आंगन में खटिया बिछा कर बहुत देर तक बातें करूंगी दादी से।
"दादी यह भूत प्रेत क्या होते हैं कभी तुमने इनके बारे में जिक्र नहीं किया मुझे रातों में बहुत डर लगता है पर समझ में नहीं आता कि यह सच में होते भी हैं या नहीं होते हैं? तुम्हें तो पता होगा ना दादी की भूत प्रेत क्या होते हैं? जिन्न छलावे सब के बारे में दादी ने बहुत ही आसान शब्दों में कहा हां बेटा भूत प्रेत "जिन्न छलावे सब होते हैं साधारण सी बात है जिस चीज का कोई नाम होगा लोगों में उसके बारे में कोई संभावना होगी तो वो दुनिया में जरूर होगी।जैसे भगवान है तो शैतान भी होगा।"
" दुनिया में हर चीज हो सकती है जैसे तुम फिल्मों में देखती हो कि एलियंस होते हैं भूत दिखाए जाते हैं। यह सिर्फ एक कोरी कल्पना थोड़ी है और साथ ही साथ यह जो जिन्न परियां तुम्हें दिखाई जाते हैं ना मददगार, नेक ।ये हमेशा यह बिल्कुल ऐसे नहीं होते यह कभी-कभी बहुत खतरनाक होते हैं जिन्न और परियां सबसे ताकतवर योनि मानी जाती है और इन से पीछा छुड़ाना बहुत ही मुश्किल है पर छलावे खुद डरपोक किस्म के होते हैं लेकिन अगर सामने वाला डर जाए तो हावी हो जाते हैं और इन्हीं सब बातों से तो इनका अस्तित्व सामने आता है।"
"तो दादी आपने भी कभी देखा है क्या कहती है अच्छा दादी आप भी कभी अपना अनुभव बताइए आपने कभी देखा है ऐसा भूत प्रेत जिन्न परी कुछ तो जरूर देखा होगा "
तब तक मां ने आवाज दी तुम दादी और पोती रात भर यही बातें करते रहोगी क्या चलो सो जाओ। डर जाओगी तो फिर कल का काम तो हो चुका।
मुझे नींद नहीं आ रही थी मुझे दादी से बहुत कुछ जानना था क्योंकि दादी अब चुप बैठी थी वह कुछ बोल नहीं रही थी मैंने कहा दादी आपको यह बातें बतानी होगी लेकिन फिर कभी और इतना कहकर हम सो गए ।किसी तरह से रात बीती और मेरे दिमाग में उथल-पुथल चलती रही अगले दिन सारा काम करके शाम को मैंने फिर दादी को पकड़ लिया दादी कल की बात अधूरी रह गई थी चलिए हम चलते हैं छत पर।
मैं दादी को लेकर छत पर पहुंच गई मैंने कहा दादी इस गांव में तो कुछ भी नहीं बदला यह देखो पीपल का पेड़ आज भी वैसे क्या वैसा है तो दादी ने कुछ नहीं कहा मैंने कहा आप कुछ बता रही थी आप बताइए तो दादी ने कहा "
मैं यह बात बहुत पुरानी है जो मैं तुम्हें बता रही हूं । यह बात मेरी शादी के समय की है। उस समय गर्मियों में ही शादियां ज्यादा हुआ करती थी और बारात तीन दिन तक रुका करती थी। शादी में बहुत सारे रीति रस्म भी हुआ करते थे जो अब शायद नहीं होते हैं।
गर्मी की वजह से विदाई के समय डोली उठाने वाले कहार थक कर के मेरी डोली एक पेड़ के तने के पास लगा कर सुस्ताने लगे वह लोग पानी पीने के लिए कुछ दूर चले गए मैं डोली में अकेली बैठी थी कि अचानक से मुझे खुशबू सी महसूस हुई मैंने अपनी डोली का पर्दा खोल कर देखा तो मुझे कुछ नहीं दिखा और मैं एकदम नींद में सो गई उस गर्मी में मुझे ठंडक से महसूस हो रही थी।जब मैं ससुराल पहुँची तो शाम हो चुकी थी।अब तो मेरे सिर में बहुत दर्द हो रहा था।पर उस बांसुरी की आवाज मेरे कानों में गूंज रही थी और मैं मन ही मन सोच रही थी कि काश कि यह बांसुरी मुझे मिल जाती और पता नहीं कब मेरी आंख लग गई जब आधी रात को मेरी आंख खुली तो मैंने अपने सिरहाने एक सुंदर सी बांसुरी देखी। पहले तो मैं डर गई कि यह बांसुरी कहां से आई फिर कौतुहल बस उठा लिया इतनी प्यारी बांसुरी अब मेरे हाथ मे थी मैंने बजानी चाही पर सुबह होने को थी। मैंने उसको अपने आंचल में छुपाया और अम्मा जी के कमरे में चली गयी सुबह का सारा काम कर ही रही थी कि नाश्ता बनाने की बात होने लगी तभी मेरे देवर और ननद आ गए और उन्होंने कहा भाभी भाभी आज आप गरम गरम जलेबी बनाओ मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मेरे दिमाग में तो बस में बांसुरी ही घूम रही थी मैंने देखा कि कोई नहीं है चौके में तो मैंने धीरे से वह बाँसुरी उठाई और बजाना शुरू कर दी है बांसुरी बजाने में इतनी खो गयी थी कि जब आंख खुली तो मैंने देखा कि खूब हरे दोनों में जलेबिया रखी हुई है। मैं वह जलेबी लेकर के बाहर जा रही थी कि सभी देवर ननद और बच्चों ने जलेबियां मेरे हाथ से ले ली और खाना शुरु कर दिया और मैंने भी किसी को सच नहीं बताया कि कि मुझे जलेबी बनाना नहीं आती थी पर यह जादुई बांसुरी का ही कमाल था कि मुझे समझ में आ गया था कि इसकी वजह से ही यह सब कुछ हो रहा है। फिर तो मेरा यह सबब बन गया था बच्चे मुझसे कुछ भी खाने की जिद करते और मैं बाँसुरी बजा करके वह सामान वहां पर रख दिया करती कभी पकौड़ी या कभी पुए कभी मठरी जब जिसका जो मन करता वह आकर मुझसे कहता और मैं अपना हाथ बढ़ा देती और मुझे सब सामान हाथ में मिल जाता बहुत दिन तक ऐसा ही चलता रहा और मुझे इसके बारे में किसी से बताने की जरूरत समझ में नहीं आई फिर मेरी नंद का ब्याह तय हुआ और उसके ब्याह की तैयारी में मुझे बहुत सारा काम था विवाह की तैयारी में हमारे घर में सारे जेवर संदूक में रख दिए गए थे तब हमारा घर मिट्टी का होता था तो उस मिट्टी की दीवार में सेंध काटकर चोर चोरी करने के लिए आए ।उन्होंने बहुत बड़े संदूक को खींचने की कोशिश की। एक तरफ से वह चार चोर उस संदूक को खींच रहे थे और दूसरी और मैं अकेली थी मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मेरे अंदर इतनी ताकत कहां से आ गई इस खींचातानी में भोर हो गई और मैं उस संदूक पर बेहोश होकर के गिर गई ।
घर वालों ने देखा कि संदूक आधे दीवार के बीच में है और उधर बाहर से चोर पकड़े गए ।चोरों ने तो सीधे मेरा नाम ले लिया कि "यही औरत थी जो रात भर संदूक को खींचती रही और हम संदूक को खींच नहीं पाए और उसने हमें चोरी नहीं करने दी हमें माफ करिए हमने आपका एक तिनका भी नहीं चुराया हमें जाने दीजिए"
घर मैं शादी का माहौल था तो लोगों ने उन चोरों को जाने दिया अब पूरा घर मेरे सामने इकट्ठा था सब मुझसे पूछ रहे थे कि तुम्हारे अंदर इतनी ताकत कहां से आ गई और मैं कुछ बताने के लिए होश में ही नहीं थी।बस मुसकुरा रही थी। घरवालों को समझते देर न लगी कि मेरे ऊपर किसी चीज का साया है उन्होंने आनन-फानन में तुरंत तांत्रिक को बुलाया और मुझे दिखाने लगे तांत्रिक आते ही दरवाजे के अंदर ही नहीं आ रहा था उसने बाहर से ही बता दिया कि इनके ऊपर जिन्न का कब्जा है और यह बात सुनते ही मेरा चेहरा एकदम तमतमा गया मैं सब सामान उठा उठाकर फेंकने लगी मेरे बगल में जो बच्चे खेल रहे थे मैंने उनको एक को हवा में उठा दिया और मैं उन्हें पटकने वाली थी कि मेरी सासू मां ने मेरे सामने हाथ जोड़े तब तक मेरी आवाज बदल गयी और मैं चिल्लाते हुए बोली कि कोई तांत्रिक घर में नहीं आएगा और मैं रूपा को कभी परेशान नहीं करूंगा लेकिन घर वाले कहां मानने वाले थे।वो लोग मुझे बांध कर के बाहर ले गए। वहां जिन्न ने कबूला की वो मेरे ऊपर अपना प्रभाव जमा चुका था।और मुझे छोड़ेगा नही।जब मेरी डोली पीपल के पेड़ के नीचे रखी गई थी उस समय ही वो मुझ पर हावी हो चुका था।तांत्रिक में पूरी कोशिश की उस तांत्रिक के बस की बात नही थी।
तब तक उस जिन्न ने मुझ पर ही वार शुरू कर दिया मैं अधमरी सी हो गयी थी और बोलती थी कि वो मुझे साथ ले जाएगा।हर समय साये दिखते।डरावने चेहरे डरावनी आवाज हर समय महसूस होती।असमान्य गतिविधिया सबको महसूस होती जैसे बिना आग के चूल्हे का दूध खौलता रहे। सारी पूजा निष्फल हुई जा रही थी।मुझे कमरे में बंद कर के ननद की शादी की गईं। अगले दिन मेरे पति यानी तेरे दादा जी मेरे पास आये मुझे बेहोशी की हालत में देख के रोने लगे तभी जिन्न ने कहा इसे सही सलामत देखना चाहते हो तो इसके पास भी मत आना उन्होंने जिन्न से कहा रूपा को कष्ट मत दो।और तभी उन्होंने मेरी कमरे के एक कोने में बाँसुरी देखी।उस बाँसुरी को देख वो चौके और उसे उठा कर बाहर चले गए तांत्रिक ने फिर पूजा की अबकी पूजा का असर हुआ। तांत्रिक ने मेरे पति से पुछा की कुछ मिला है क्या ।उन्होंने बाँसुरी दिखाई।बाँसुरी को देख तांत्रिक सकते में आ गया।उसने कहा ये प्रेतबधित बाँसुरी है।और इसी बाँसुरी के कारण ये जिन्न असाधारण है।उसने अपने गुरु को बुलाया।उनके गुरु ने मेरे सिर पर पानी डाला फिर मैं बैठ के पानी से ही कुछ लिखने लगी।जिन्न ने अपनी कहानी लिखी वो एक बाँसुरी वादक था उसकी हत्या की गई थी।उसकी जान प्राण सब बाँसुरी ही थी फिर अचानक से गुरु ने बाँसुरी बजा कर उस जिन्न को मेरे शरीर से बाहर निकाला।और उसके बाद बाँसुरी तोड़ दी।उसके निकलने के बाद भी मैं दो दिन तक बेहोश रही।
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आज काफी साल बाद में अपने गांव जा रही हूं। अपनी दादी से मिलने शायद बीस साल हो गए मुझे। बहुत छोटी सी थी तब का मुझे अपने गांव याद है वह पीपल के पेड़ पगडंडी झुरमुट ।लेकिन हॉस्टल जाने के बाद तो सब कुछ बदल गया होगा तो शायद पर न कुछ बदला ना होगा तो वह है मेरी दादी और उनका प्यार आज तो मैं आंगन में खटिया बिछा कर बहुत देर तक बातें करूंगी दादी से। "दादी यह भूत प्रेत क्या होते हैं कभी तुमने इनके बारे में जिक्र नहीं किया मुझे रातों में बहुत डर लगता है पर समझ में नहीं आता कि यह सच में होते भी हैं या नहीं होते हैं? तुम्हें तो पता होगा ना दादी की भूत प्रेत क्या होते हैं? जिन्न छलावे सब के बारे में दादी ने बहुत ही आसान शब्दों में कहा हां बेटा भूत प्रेत "जिन्न छलावे सब होते हैं साधारण सी बात है जिस चीज का कोई नाम होगा लोगों में उसके बारे में कोई संभावना होगी तो वो दुनिया में जरूर होगी।जैसे भगवान है तो शैतान भी होगा।" " दुनिया में हर चीज हो सकती है जैसे तुम फिल्मों में देखती हो कि एलियंस होते हैं भूत दिखाए जाते हैं। यह सिर्फ एक कोरी कल्पना थोड़ी है और साथ ही साथ यह जो जिन्न परियां तुम्हें दिखाई जाते हैं ना मददगार, नेक ।ये हमेशा यह बिल्कुल ऐसे नहीं होते यह कभी-कभी बहुत खतरनाक होते हैं जिन्न और परियां सबसे ताकतवर योनि मानी जाती है और इन से पीछा छुड़ाना बहुत ही मुश्किल है पर छलावे खुद डरपोक किस्म के होते हैं लेकिन अगर सामने वाला डर जाए तो हावी हो जाते हैं और इन्हीं सब बातों से तो इनका अस्तित्व सामने आता है।" "तो दादी आपने भी कभी देखा है क्या कहती है अच्छा दादी आप भी कभी अपना अनुभव बताइए आपने कभी देखा है ऐसा भूत प्रेत जिन्न परी कुछ तो जरूर देखा होगा " तब तक मां ने आवाज दी तुम दादी और पोती रात भर यही बातें करते रहोगी क्या चलो सो जाओ। डर जाओगी तो फिर कल का काम तो हो चुका। मुझे नींद नहीं आ रही थी मुझे दादी से बहुत कुछ जानना था क्योंकि दादी अब चुप बैठी थी वह कुछ बोल नहीं रही थी मैंने कहा दादी आपको यह बातें बतानी होगी लेकिन फिर कभी और इतना कहकर हम सो गए ।किसी तरह से रात बीती और मेरे दिमाग में उथल-पुथल चलती रही अगले दिन सारा काम करके शाम को मैंने फिर दादी को पकड़ लिया दादी कल की बात अधूरी रह गई थी चलिए हम चलते हैं छत पर। मैं दादी को लेकर छत पर पहुंच गई मैंने कहा दादी इस गांव में तो कुछ भी नहीं बदला यह देखो पीपल का पेड़ आज भी वैसे क्या वैसा है तो दादी ने कुछ नहीं कहा मैंने कहा आप कुछ बता रही थी आप बताइए तो दादी ने कहा " मैं यह बात बहुत पुरानी है जो मैं तुम्हें बता रही हूं । यह बात मेरी शादी के समय की है। उस समय गर्मियों में ही शादियां ज्यादा हुआ करती थी और बारात तीन दिन तक रुका करती थी। शादी में बहुत सारे रीति रस्म भी हुआ करते थे जो अब शायद नहीं होते हैं। गर्मी की वजह से विदाई के समय डोली उठाने वाले कहार थक कर के मेरी डोली एक पेड़ के तने के पास लगा कर सुस्ताने लगे वह लोग पानी पीने के लिए कुछ दूर चले गए मैं डोली में अकेली बैठी थी कि अचानक से मुझे खुशबू सी महसूस हुई मैंने अपनी डोली का पर्दा खोल कर देखा तो मुझे कुछ नहीं दिखा और मैं एकदम नींद में सो गई उस गर्मी में मुझे ठंडक से महसूस हो रही थी।जब मैं ससुराल पहुँची तो शाम हो चुकी थी।अब तो मेरे सिर में बहुत दर्द हो रहा था।पर उस बांसुरी की आवाज मेरे कानों में गूंज रही थी और मैं मन ही मन सोच रही थी कि काश कि यह बांसुरी मुझे मिल जाती और पता नहीं कब मेरी आंख लग गई जब आधी रात को मेरी आंख खुली तो मैंने अपने सिरहाने एक सुंदर सी बांसुरी देखी। पहले तो मैं डर गई कि यह बांसुरी कहां से आई फिर कौतुहल बस उठा लिया इतनी प्यारी बांसुरी अब मेरे हाथ मे थी मैंने बजानी चाही पर सुबह होने को थी। मैंने उसको अपने आंचल में छुपाया और अम्मा जी के कमरे में चली गयी सुबह का सारा काम कर ही रही थी कि नाश्ता बनाने की बात होने लगी तभी मेरे देवर और ननद आ गए और उन्होंने कहा भाभी भाभी आज आप गरम गरम जलेबी बनाओ मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मेरे दिमाग में तो बस में बांसुरी ही घूम रही थी मैंने देखा कि कोई नहीं है चौके में तो मैंने धीरे से वह बाँसुरी उठाई और बजाना शुरू कर दी है बांसुरी बजाने में इतनी खो गयी थी कि जब आंख खुली तो मैंने देखा कि खूब हरे दोनों में जलेबिया रखी हुई है। मैं वह जलेबी लेकर के बाहर जा रही थी कि सभी देवर ननद और बच्चों ने जलेबियां मेरे हाथ से ले ली और खाना शुरु कर दिया और मैंने भी किसी को सच नहीं बताया कि कि मुझे जलेबी बनाना नहीं आती थी पर यह जादुई बांसुरी का ही कमाल था कि मुझे समझ में आ गया था कि इसकी वजह से ही यह सब कुछ हो रहा है। फिर तो मेरा यह सबब बन गया था बच्चे मुझसे कुछ भी खाने की जिद करते और मैं बाँसुरी बजा करके वह सामान वहां पर रख दिया करती कभी पकौड़ी या कभी पुए कभी मठरी जब जिसका जो मन करता वह आकर मुझसे कहता और मैं अपना हाथ बढ़ा देती और मुझे सब सामान हाथ में मिल जाता बहुत दिन तक ऐसा ही चलता रहा और मुझे इसके बारे में किसी से बताने की जरूरत समझ में नहीं आई फिर मेरी नंद का ब्याह तय हुआ और उसके ब्याह की तैयारी में मुझे बहुत सारा काम था विवाह की तैयारी में हमारे घर में सारे जेवर संदूक में रख दिए गए थे तब हमारा घर मिट्टी का होता था तो उस मिट्टी की दीवार में सेंध काटकर चोर चोरी करने के लिए आए ।उन्होंने बहुत बड़े संदूक को खींचने की कोशिश की। एक तरफ से वह चार चोर उस संदूक को खींच रहे थे और दूसरी और मैं अकेली थी मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मेरे अंदर इतनी ताकत कहां से आ गई इस खींचातानी में भोर हो गई और मैं उस संदूक पर बेहोश होकर के गिर गई । घर वालों ने देखा कि संदूक आधे दीवार के बीच में है और उधर बाहर से चोर पकड़े गए ।चोरों ने तो सीधे मेरा नाम ले लिया कि "यही औरत थी जो रात भर संदूक को खींचती रही और हम संदूक को खींच नहीं पाए और उसने हमें चोरी नहीं करने दी हमें माफ करिए हमने आपका एक तिनका भी नहीं चुराया हमें जाने दीजिए" घर मैं शादी का माहौल था तो लोगों ने उन चोरों को जाने दिया अब पूरा घर मेरे सामने इकट्ठा था सब मुझसे पूछ रहे थे कि तुम्हारे अंदर इतनी ताकत कहां से आ गई और मैं कुछ बताने के लिए होश में ही नहीं थी।बस मुसकुरा रही थी। घरवालों को समझते देर न लगी कि मेरे ऊपर किसी चीज का साया है उन्होंने आनन-फानन में तुरंत तांत्रिक को बुलाया और मुझे दिखाने लगे तांत्रिक आते ही दरवाजे के अंदर ही नहीं आ रहा था उसने बाहर से ही बता दिया कि इनके ऊपर जिन्न का कब्जा है और यह बात सुनते ही मेरा चेहरा एकदम तमतमा गया मैं सब सामान उठा उठाकर फेंकने लगी मेरे बगल में जो बच्चे खेल रहे थे मैंने उनको एक को हवा में उठा दिया और मैं उन्हें पटकने वाली थी कि मेरी सासू मां ने मेरे सामने हाथ जोड़े तब तक मेरी आवाज बदल गयी और मैं चिल्लाते हुए बोली कि कोई तांत्रिक घर में नहीं आएगा और मैं रूपा को कभी परेशान नहीं करूंगा लेकिन घर वाले कहां मानने वाले थे।वो लोग मुझे बांध कर के बाहर ले गए। वहां जिन्न ने कबूला की वो मेरे ऊपर अपना प्रभाव जमा चुका था।और मुझे छोड़ेगा नही।जब मेरी डोली पीपल के पेड़ के नीचे रखी गई थी उस समय ही वो मुझ पर हावी हो चुका था।तांत्रिक में पूरी कोशिश की उस तांत्रिक के बस की बात नही थी। तब तक उस जिन्न ने मुझ पर ही वार शुरू कर दिया मैं अधमरी सी हो गयी थी और बोलती थी कि वो मुझे साथ ले जाएगा।हर समय साये दिखते।डरावने चेहरे डरावनी आवाज हर समय महसूस होती।असमान्य गतिविधिया सबको महसूस होती जैसे बिना आग के चूल्हे का दूध खौलता रहे। सारी पूजा निष्फल हुई जा रही थी।मुझे कमरे में बंद कर के ननद की शादी की गईं। अगले दिन मेरे पति यानी तेरे दादा जी मेरे पास आये मुझे बेहोशी की हालत में देख के रोने लगे तभी जिन्न ने कहा इसे सही सलामत देखना चाहते हो तो इसके पास भी मत आना उन्होंने जिन्न से कहा रूपा को कष्ट मत दो।और तभी उन्होंने मेरी कमरे के एक कोने में बाँसुरी देखी।उस बाँसुरी को देख वो चौके और उसे उठा कर बाहर चले गए तांत्रिक ने फिर पूजा की अबकी पूजा का असर हुआ। तांत्रिक ने मेरे पति से पुछा की कुछ मिला है क्या ।उन्होंने बाँसुरी दिखाई।बाँसुरी को देख तांत्रिक सकते में आ गया।उसने कहा ये प्रेतबधित बाँसुरी है।और इसी बाँसुरी के कारण ये जिन्न असाधारण है।उसने अपने गुरु को बुलाया।उनके गुरु ने मेरे सिर पर पानी डाला फिर मैं बैठ के पानी से ही कुछ लिखने लगी।जिन्न ने अपनी कहानी लिखी वो एक बाँसुरी वादक था उसकी हत्या की गई थी।उसकी जान प्राण सब बाँसुरी ही थी फिर अचानक से गुरु ने बाँसुरी बजा कर उस जिन्न को मेरे शरीर से बाहर निकाला।और उसके बाद बाँसुरी तोड़ दी।उसके निकलने के बाद भी मैं दो दिन तक बेहोश रही।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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Don't Miss!
मशहूर एक्ट्रेस हाले बेरी की एक फोटो इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रही है, जिसमें वह बालकनी में न्यूड होकर वाइन पीती नजर आ रही हैं। एक्ट्रेस ने फोटो को अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। पोस्ट के कैप्शन में 56 वर्षीय एक्ट्रेस ने लिखाः मैं वही करती हूं जो मैं करना चाहती हूं। हैप्पी सैटरडे।
हाले बेरी की इस पोस्ट पर कमेंट्स की बाढ़ आई हुई है। एसशोबिज डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, लीना वेटे ने कमेंट में ताली बजाने वाले इमोजी का इस्तेमाल किया। वहीं केली रॉलैंड ने कमेंट कियाः यस!!!! जबकि जेना दीवान ने कहा, वाह!
बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब बेरी ने इस तरह की फोटो शेयर की हो। मार्च में, 'कैटवूमन' स्टार ने बाथरूम मिरर सेल्फी ली, जिसमें वह बिना कपड़ों की थी। इस पर उन्होंने कैप्शन दियाः मम्प डे सेल्फ लव।
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Don't Miss! मशहूर एक्ट्रेस हाले बेरी की एक फोटो इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रही है, जिसमें वह बालकनी में न्यूड होकर वाइन पीती नजर आ रही हैं। एक्ट्रेस ने फोटो को अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। पोस्ट के कैप्शन में छप्पन वर्षीय एक्ट्रेस ने लिखाः मैं वही करती हूं जो मैं करना चाहती हूं। हैप्पी सैटरडे। हाले बेरी की इस पोस्ट पर कमेंट्स की बाढ़ आई हुई है। एसशोबिज डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, लीना वेटे ने कमेंट में ताली बजाने वाले इमोजी का इस्तेमाल किया। वहीं केली रॉलैंड ने कमेंट कियाः यस!!!! जबकि जेना दीवान ने कहा, वाह! बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब बेरी ने इस तरह की फोटो शेयर की हो। मार्च में, 'कैटवूमन' स्टार ने बाथरूम मिरर सेल्फी ली, जिसमें वह बिना कपड़ों की थी। इस पर उन्होंने कैप्शन दियाः मम्प डे सेल्फ लव।
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Meteorites Rain : आज आसमास में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिलने जा रहा है। आज रात अंतरिक्ष में टूटते तारों की बारिश होगी। यह एक खगोलिया घटना है जो साल में सात बार होती है। आज 14 दिसंबर को यह घटना घटने जा रही है। खबरों के अनुसार आज आसमान से हर घंटे करीब 100 से अधिक उल्कापिंड धरती पर गिरेंगे। इस घटना को जेमिनिड मेटियोर शॉवर कहा जाता है। बता दें कि भारत में यह नजारा शाम 6 बजकर 30 मिनट पर देखा जा सकता है। इसके बाद रात 2 बजे इस नजारे को देखा जा सकता है।
आज रात होने वाली उल्कापिंडों की बारशि में सबसे खास बात यह है कि आज हो भी उल्कापिंड़ धरती पर गिरेंगे वह सबसे चमकदार होंगे। जेमिनिड उल्कापिंडों की बारिश 4 दिसंबर 2022 से शुरू हुई है। यह 17 दिसंबर को खत्म हो जाएगी। लेकिन 14 दिसंबर की रात यह ज्यादा तीव्र और सबसे अधिक खूबसूरत होगी।
खबरों के अनुसार भारत में अगर मौसम साफ रहेगा तो अधिकांश शहरों में इस नजारे को देखा जा सकता है। क्योंकि उल्कापिंडों की बारिश को तभी देखा जा सकता है जब पृथ्वी सूरज की उस कक्षा में पहुंचती है, ये उल्कापिंड जब पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण शक्ति की वजह से हमारे वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो ये जलते हुए दिखाई देते हैं। ऐसे लगता है कि आसमानी बारिश हो रही है। जिसे आम भाषा में टूटते तारे कहा जाता है।
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Meteorites Rain : आज आसमास में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिलने जा रहा है। आज रात अंतरिक्ष में टूटते तारों की बारिश होगी। यह एक खगोलिया घटना है जो साल में सात बार होती है। आज चौदह दिसंबर को यह घटना घटने जा रही है। खबरों के अनुसार आज आसमान से हर घंटे करीब एक सौ से अधिक उल्कापिंड धरती पर गिरेंगे। इस घटना को जेमिनिड मेटियोर शॉवर कहा जाता है। बता दें कि भारत में यह नजारा शाम छः बजकर तीस मिनट पर देखा जा सकता है। इसके बाद रात दो बजे इस नजारे को देखा जा सकता है। आज रात होने वाली उल्कापिंडों की बारशि में सबसे खास बात यह है कि आज हो भी उल्कापिंड़ धरती पर गिरेंगे वह सबसे चमकदार होंगे। जेमिनिड उल्कापिंडों की बारिश चार दिसंबर दो हज़ार बाईस से शुरू हुई है। यह सत्रह दिसंबर को खत्म हो जाएगी। लेकिन चौदह दिसंबर की रात यह ज्यादा तीव्र और सबसे अधिक खूबसूरत होगी। खबरों के अनुसार भारत में अगर मौसम साफ रहेगा तो अधिकांश शहरों में इस नजारे को देखा जा सकता है। क्योंकि उल्कापिंडों की बारिश को तभी देखा जा सकता है जब पृथ्वी सूरज की उस कक्षा में पहुंचती है, ये उल्कापिंड जब पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण शक्ति की वजह से हमारे वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो ये जलते हुए दिखाई देते हैं। ऐसे लगता है कि आसमानी बारिश हो रही है। जिसे आम भाषा में टूटते तारे कहा जाता है।
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GG vs JS Lanka Premier League, 2021 मैच डिटेल्सः
GG vs JS के बीच टूर्नामेंट का पहला क्वालीफायर मैच 19 दिसंबर को Mahinda Rajapaksa International Cricket Stadium, Hambantota, Sri Lanka में खेला जाएगा। यह मैच 03:00 PM(IST) बजे शुरू होगा इस मैच का सीधा प्रसारण व अपडेट Fancode app और cricketaddictor. com पर उपलब्ध रहेगा।
GG vs JS Lanka Premier League, 2021 मैच प्रीव्यूः
यह इस टूर्नामेंट का पहला क्वालीफायर मैच है। इस टूर्नामेंट में दोनों टीमों के प्रदर्शन की तुलना की जाए तो दोनों टीमों नहीं काफी शानदार प्रदर्शन किया है। JS टीम ने इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 8 में से 6 मैचों में जीत दर्ज की है और वह 12 पॉइंट के साथ अंकतालिका में प्रथम स्थान पर रही है। JS टीम की तरफ से इस टूर्नामेंट में वनिन्दु हसरंगा, टॉम कोहलर-कैडमोर,महेश थीक्षाना ने काफी शानदार प्रदर्शन किया है। इस मैच में भी टीम को उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।
दूसरी ओर GG टीम ने भी पिछले कुछ मुकाबलों में काफी शानदार प्रदर्शन किया GG टीम 8 में से 4 मैच जीतकर 9 पॉइंट के साथ अंक तालिका में दूसरे स्थान पर रही है। GG टीम के तरफ से इस टूर्नामेंट में कुसल मेंडिस, भानुका राजपक्षे, समित पटेल ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। दोनों टीमें इस क्वालीफायर मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए इस मैच को जीतकर फाइनल में अपनी जगह पक्की करने के इरादे से मैदान में उतरेंगी।
GG vs JS Lanka Premier League, 2021 मौसम रिपोर्टः
आसमान हल्के बादल छाए रहेंगे परंतु बारिश होने की संभावना नहीं है। तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है।
GG vs JS Lanka Premier League, 2021 पिच रिपोर्टः
यह पिच गेंदबाजों के अनुकूल है इस पिच पर तेज गेंदबाजों को काफी मदद प्राप्त होती है। टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करना इस पिच पर सही निर्णय रहेगा।
पहली पारी का औसत स्कोरः
पहली पारी में बल्लेबाजी करना थोड़ा मुश्किल नजर आया है यहां पर पहली पारी का औसत स्कोर 144 रन है।
लक्ष्य का पीछा करते हुए रिकार्डः
दूसरी पारी में बल्लेबाजी थोड़ी आसान नज़र आई है। इसीलिए यहां पर लक्ष्य का पीछा करते हुए 60 प्रतिशत मुकाबले जीते गए हैं।
संभावित एकादश GG:
संभावित एकादश JS:
GG vs JS Lanka Premier League, 2021 ड्रीम टीम टॉप पिक्सः
कुसल मेंडिस;यह काफी प्रतिभाशाली बल्लेबाज है काफी अच्छी तकनीक के साथ बल्लेबाजी करते हैं इस टूर्नामेंट में अभी तक 30 की औसत से 203 रन बनाए हैं इस मैच में भी यह बल्लेबाजी से अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
समित पटेल; यह भी काफी अनुभवी खिलाड़ी है। अनेक देशों की T20 प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं। इस टूर्नामेंट में अभी तक उन्होंने 116 रन बनाए हैं और 15 विकेट लिए हैं इस मैच में भी टीम को इनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।
भानुका राजपक्षे; इन्होंने हाल ही में खत्म हुए Abu Dhabi T10 टूर्नामेंट में शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया है। यह बल्लेबाजी से काफी अच्छी लय में नजर आ रहे हैं इन्होंने इस टूर्नामेंट के पिछले संस्करण में 25 के औसत से 180 रन बनाए थे इस टूर्नामेंट में अभी तक उन्होंने 140 रन बनाए हैं जिसमें 56 रन की शानदार पारी भी शामिल है इस मैच में यह ड्रीम टीम में कप्तान और उपकप्तान के तौर पर एक अच्छा विकल्प साबित हो सकते हैं।
नूर अहमद; इन्होंने इस टूर्नामेंट में शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए 8 विकेट लिए हैं यह काफी अच्छी इकोनॉमी के साथ गेंदबाजी कर रहे हैं इस मैच में भी यह विकेट निकाल सकते हैं।
टॉम कोहलर-कैडमोर; इन्होंने इस टूर्नामेंट में अभी तक शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए 220 रन बनाए हैं JS टीम से इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज है इस मैच में भी यह बल्लेबाजी से अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
महेश थीक्षाना; इन्होंने इस टूर्नामेंट में अभी तक शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए 13 विकेट लिए हैं यह इस मैच में ड्रीम टीम में एक ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं।
वानिंदु हसरंगा; इन्होने हाल ही में खत्म हुए Abu Dhabi T10 टूर्नामेंट में शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन किया उन्होंने इस टूर्नामेंट के पिछले संस्करण में शानदार प्रदर्शन करते हुए 127 रन बनाए और 17 विकेट लिए थे। इस टूर्नामेंट में भी इन्होंने शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए 8 विकेट लिए और 60 रन बनाए हैं इस मैच में भी यह बल्ले और गेंद दोनों से अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
GG vs JS Lanka Premier League, 2021 कप्तान/उपकप्तान विकल्पः
ड्रीम 11 टीम 1:
ड्रीम 11 टीम 2:
GG vs JS Lanka Premier League, 2021 विशेषज्ञ सलाहः
इस पिच पर बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों को मदद प्राप्त होती है, दूसरी पारी में स्पिन गेंदबाजों को पिच से मदद प्राप्त होती है। टॉम कोहलर-कैडमोर,वनिन्दु हसरंगा ग्रैंड टीम में कप्तान और उपकप्तान के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकते हैं।
GG vs JS Lanka Premier League, 2021 संभावित विजेताः
JS के मैच जीतने की संभावना ज्यादा है। वह इस मैच में ज्यादा संतुलित और मजबूत टीम नजर आ रही है।
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GG vs JS Lanka Premier League, दो हज़ार इक्कीस मैच डिटेल्सः GG vs JS के बीच टूर्नामेंट का पहला क्वालीफायर मैच उन्नीस दिसंबर को Mahinda Rajapaksa International Cricket Stadium, Hambantota, Sri Lanka में खेला जाएगा। यह मैच तीन:शून्य PM बजे शुरू होगा इस मैच का सीधा प्रसारण व अपडेट Fancode app और cricketaddictor. com पर उपलब्ध रहेगा। GG vs JS Lanka Premier League, दो हज़ार इक्कीस मैच प्रीव्यूः यह इस टूर्नामेंट का पहला क्वालीफायर मैच है। इस टूर्नामेंट में दोनों टीमों के प्रदर्शन की तुलना की जाए तो दोनों टीमों नहीं काफी शानदार प्रदर्शन किया है। JS टीम ने इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए आठ में से छः मैचों में जीत दर्ज की है और वह बारह पॉइंट के साथ अंकतालिका में प्रथम स्थान पर रही है। JS टीम की तरफ से इस टूर्नामेंट में वनिन्दु हसरंगा, टॉम कोहलर-कैडमोर,महेश थीक्षाना ने काफी शानदार प्रदर्शन किया है। इस मैच में भी टीम को उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। दूसरी ओर GG टीम ने भी पिछले कुछ मुकाबलों में काफी शानदार प्रदर्शन किया GG टीम आठ में से चार मैच जीतकर नौ पॉइंट के साथ अंक तालिका में दूसरे स्थान पर रही है। GG टीम के तरफ से इस टूर्नामेंट में कुसल मेंडिस, भानुका राजपक्षे, समित पटेल ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। दोनों टीमें इस क्वालीफायर मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए इस मैच को जीतकर फाइनल में अपनी जगह पक्की करने के इरादे से मैदान में उतरेंगी। GG vs JS Lanka Premier League, दो हज़ार इक्कीस मौसम रिपोर्टः आसमान हल्के बादल छाए रहेंगे परंतु बारिश होने की संभावना नहीं है। तापमान अट्ठाईस डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है। GG vs JS Lanka Premier League, दो हज़ार इक्कीस पिच रिपोर्टः यह पिच गेंदबाजों के अनुकूल है इस पिच पर तेज गेंदबाजों को काफी मदद प्राप्त होती है। टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करना इस पिच पर सही निर्णय रहेगा। पहली पारी का औसत स्कोरः पहली पारी में बल्लेबाजी करना थोड़ा मुश्किल नजर आया है यहां पर पहली पारी का औसत स्कोर एक सौ चौंतालीस रन है। लक्ष्य का पीछा करते हुए रिकार्डः दूसरी पारी में बल्लेबाजी थोड़ी आसान नज़र आई है। इसीलिए यहां पर लक्ष्य का पीछा करते हुए साठ प्रतिशत मुकाबले जीते गए हैं। संभावित एकादश GG: संभावित एकादश JS: GG vs JS Lanka Premier League, दो हज़ार इक्कीस ड्रीम टीम टॉप पिक्सः कुसल मेंडिस;यह काफी प्रतिभाशाली बल्लेबाज है काफी अच्छी तकनीक के साथ बल्लेबाजी करते हैं इस टूर्नामेंट में अभी तक तीस की औसत से दो सौ तीन रन बनाए हैं इस मैच में भी यह बल्लेबाजी से अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। समित पटेल; यह भी काफी अनुभवी खिलाड़ी है। अनेक देशों की Tबीस प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं। इस टूर्नामेंट में अभी तक उन्होंने एक सौ सोलह रन बनाए हैं और पंद्रह विकेट लिए हैं इस मैच में भी टीम को इनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। भानुका राजपक्षे; इन्होंने हाल ही में खत्म हुए Abu Dhabi Tदस टूर्नामेंट में शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया है। यह बल्लेबाजी से काफी अच्छी लय में नजर आ रहे हैं इन्होंने इस टूर्नामेंट के पिछले संस्करण में पच्चीस के औसत से एक सौ अस्सी रन बनाए थे इस टूर्नामेंट में अभी तक उन्होंने एक सौ चालीस रन बनाए हैं जिसमें छप्पन रन की शानदार पारी भी शामिल है इस मैच में यह ड्रीम टीम में कप्तान और उपकप्तान के तौर पर एक अच्छा विकल्प साबित हो सकते हैं। नूर अहमद; इन्होंने इस टूर्नामेंट में शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए आठ विकेट लिए हैं यह काफी अच्छी इकोनॉमी के साथ गेंदबाजी कर रहे हैं इस मैच में भी यह विकेट निकाल सकते हैं। टॉम कोहलर-कैडमोर; इन्होंने इस टूर्नामेंट में अभी तक शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए दो सौ बीस रन बनाए हैं JS टीम से इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज है इस मैच में भी यह बल्लेबाजी से अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। महेश थीक्षाना; इन्होंने इस टूर्नामेंट में अभी तक शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए तेरह विकेट लिए हैं यह इस मैच में ड्रीम टीम में एक ट्रंप कार्ड साबित हो सकते हैं। वानिंदु हसरंगा; इन्होने हाल ही में खत्म हुए Abu Dhabi Tदस टूर्नामेंट में शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन किया उन्होंने इस टूर्नामेंट के पिछले संस्करण में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक सौ सत्ताईस रन बनाए और सत्रह विकेट लिए थे। इस टूर्नामेंट में भी इन्होंने शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए आठ विकेट लिए और साठ रन बनाए हैं इस मैच में भी यह बल्ले और गेंद दोनों से अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। GG vs JS Lanka Premier League, दो हज़ार इक्कीस कप्तान/उपकप्तान विकल्पः ड्रीम ग्यारह टीम एक: ड्रीम ग्यारह टीम दो: GG vs JS Lanka Premier League, दो हज़ार इक्कीस विशेषज्ञ सलाहः इस पिच पर बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों को मदद प्राप्त होती है, दूसरी पारी में स्पिन गेंदबाजों को पिच से मदद प्राप्त होती है। टॉम कोहलर-कैडमोर,वनिन्दु हसरंगा ग्रैंड टीम में कप्तान और उपकप्तान के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकते हैं। GG vs JS Lanka Premier League, दो हज़ार इक्कीस संभावित विजेताः JS के मैच जीतने की संभावना ज्यादा है। वह इस मैच में ज्यादा संतुलित और मजबूत टीम नजर आ रही है।
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अलकायदा के आतंकवादियों ने दक्षिणी यमन के एक कारावास पर शुक्रवार को हमला किया और अपने छह लड़ाकों को रिहा करा लिया। इसके एक दिन पहले ही इस संगठन ने देश के एक सैन्य शिविर को अपने कब्जे में ले लिया था। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि अलकायदा इन द अरबियन पेनिनसुला (एक्यूएपी) ने यमन के शाबवा प्रांत में हमला किया, जो राजधानी साना से करीब 100 मील दूर पूर्व में स्थित है। साना हौती विद्रोदियों द्वारा शहर को कब्जे में लेने के बाद कुछ सप्ताह से राजनीतिक गतिरोध देख रहा है। सऊदी अरब सहित तीनों और देशों ने शुक्रवार को घोषणा की कि वे सुरक्षा के गिरते हालात को देखते हुए साना स्थित अपना दूतावास अस्थायी रूप से बंद कर रहे हैं।
अधिकारी ने बताया कि रिहा कराए गए छह में से तीन आतंकवादियों को मृत्युदंड सुनाया गया था। कारावास पर हुए हमले की घटना में कितने लोग मारे गए हैं, इसकी जानकारी सामने नहीं आ पाई है। एक दिन पहले एक्यूएपी ने शाबवा के बायहान शहर में सैन्य शिविर को कब्जे में ले लिया था। शहर पर कब्जा करने से पहले सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच दो घंटे तक संघर्ष हुआ था।
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अलकायदा के आतंकवादियों ने दक्षिणी यमन के एक कारावास पर शुक्रवार को हमला किया और अपने छह लड़ाकों को रिहा करा लिया। इसके एक दिन पहले ही इस संगठन ने देश के एक सैन्य शिविर को अपने कब्जे में ले लिया था। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि अलकायदा इन द अरबियन पेनिनसुला ने यमन के शाबवा प्रांत में हमला किया, जो राजधानी साना से करीब एक सौ मील दूर पूर्व में स्थित है। साना हौती विद्रोदियों द्वारा शहर को कब्जे में लेने के बाद कुछ सप्ताह से राजनीतिक गतिरोध देख रहा है। सऊदी अरब सहित तीनों और देशों ने शुक्रवार को घोषणा की कि वे सुरक्षा के गिरते हालात को देखते हुए साना स्थित अपना दूतावास अस्थायी रूप से बंद कर रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि रिहा कराए गए छह में से तीन आतंकवादियों को मृत्युदंड सुनाया गया था। कारावास पर हुए हमले की घटना में कितने लोग मारे गए हैं, इसकी जानकारी सामने नहीं आ पाई है। एक दिन पहले एक्यूएपी ने शाबवा के बायहान शहर में सैन्य शिविर को कब्जे में ले लिया था। शहर पर कब्जा करने से पहले सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच दो घंटे तक संघर्ष हुआ था।
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Eternals Movie Review: मार्वल स्टूडियोज के नए सुपरहीरो की फिल्म एटर्नल्स (Eternals) दिवाली के मौके पर 5 नवंबर को रिलीज हो गई है। हमने फिल्म देख ली है और आपको फिल्म का सटीक रिव्यू दे रहे हैं।
फिल्म किस बारे में है?
जब लाखों साल पहले धरती पर इंसानी जीवन की शुरुआत होने वाली थी। उस वक्त धरती पर मौजूद समझदार इंसानों को बुरे लोगों (डेविएंट्स) से बचाने के लिए एटर्नल्स धरती पर आते हैं। एटर्नल्स सोचते थे कि उन्होंने धरती से आखिरी डेविएंट को खत्म कर दिया है और इसलिए वे बीते 500 सालों से चुप थे। हालांकि बाद में उन्हें पता चला कि डेविएंट्स पहले से ज्यादा मजबूत दुश्मन बनकर फिर से सामने आ गए हैं। इसलिए उनसे जंग के लिए और इंसानों को बचाने के लिए एटर्नल्स वापस धरती पर आते हैं।
फिल्म में क्या नया है?
क्या नया नहीं है?
एटर्नल्स के साथ सबसे बड़ा इशू यही लगता है कि ये फिल्म आपको दूसरी फिल्मों से प्रेरित लगती है। आपको लगता है कि जैसे एटर्नल्स को सुपरमैन, द फ्लैश, एक्स मैन, ट्रांसफॉर्मर्स जैसी फिल्में जोड़कर बनाया गया है। ये पहली बार है जब आपको मार्वल फिल्म देखते वक्त डीसी के रिफरेंस नजर आने लगते हैं। वहीं फिल्म की कहानी भी आपको ऐसा महसूस करवाती है जैसे अपने ये सब पहले ही कहीं देखा हुआ है। आखिर में इतना ही कहेंगे कि अगर आप इस फिल्म से एक्शन और कास्ट की परफॉर्मेंस हटा दें तो ये फिल्म आपको बेहद निराश करती है।
मार्वल जैसे स्टूडियो से तो आप ये उम्मीद बिल्कुल भी नहीं रखते हैं। यहां तक कि डार्क सुपरहीरोज फिल्में भी थोड़ी मनोरंजक होती हैं लेकिन ये फिल्म तो इस लिस्ट में भी शामिल नहीं होती है। आखिर ऑस्कर विनिंग डायरेक्टर क्लोई झाओ ऐसी गलती कैसे कर सकती हैं? आप ऐसे ही आर्ट डायरेक्टर नहीं हो सकते जिसे कमर्शियल सिनेमा की कोई पहचान न हो। बना सोचे समझे ही आप एक ग्रैंड बजट सुपरहीरो फिल्म कैसे बना सकती हैं? साथ ही ये कैसे संभव है कि एंजेलिना जोली जैसी एक्ट्रेस को आप सेकेंड लीड रखती हैं।
एटर्नल्स मार्वल की बेस्ट छोड़िए अच्छी फिल्म से भी कोसों दूर खड़ी दिखती है। इसका मतलब ये नहीं है कि ये देखने लायक ही नहीं है। मुझे लगता है कि मेकर्स ने यंगस्टर्स और फैमिली ऑडिएंस के लिए फिल्म बनाई थी लेकिन वे भी इसे पसंद नहीं करेंगे। बॉलीवुड लाइफ की ओर से इस सुपरहीरो फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार्स।
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Eternals Movie Review: मार्वल स्टूडियोज के नए सुपरहीरो की फिल्म एटर्नल्स दिवाली के मौके पर पाँच नवंबर को रिलीज हो गई है। हमने फिल्म देख ली है और आपको फिल्म का सटीक रिव्यू दे रहे हैं। फिल्म किस बारे में है? जब लाखों साल पहले धरती पर इंसानी जीवन की शुरुआत होने वाली थी। उस वक्त धरती पर मौजूद समझदार इंसानों को बुरे लोगों से बचाने के लिए एटर्नल्स धरती पर आते हैं। एटर्नल्स सोचते थे कि उन्होंने धरती से आखिरी डेविएंट को खत्म कर दिया है और इसलिए वे बीते पाँच सौ सालों से चुप थे। हालांकि बाद में उन्हें पता चला कि डेविएंट्स पहले से ज्यादा मजबूत दुश्मन बनकर फिर से सामने आ गए हैं। इसलिए उनसे जंग के लिए और इंसानों को बचाने के लिए एटर्नल्स वापस धरती पर आते हैं। फिल्म में क्या नया है? क्या नया नहीं है? एटर्नल्स के साथ सबसे बड़ा इशू यही लगता है कि ये फिल्म आपको दूसरी फिल्मों से प्रेरित लगती है। आपको लगता है कि जैसे एटर्नल्स को सुपरमैन, द फ्लैश, एक्स मैन, ट्रांसफॉर्मर्स जैसी फिल्में जोड़कर बनाया गया है। ये पहली बार है जब आपको मार्वल फिल्म देखते वक्त डीसी के रिफरेंस नजर आने लगते हैं। वहीं फिल्म की कहानी भी आपको ऐसा महसूस करवाती है जैसे अपने ये सब पहले ही कहीं देखा हुआ है। आखिर में इतना ही कहेंगे कि अगर आप इस फिल्म से एक्शन और कास्ट की परफॉर्मेंस हटा दें तो ये फिल्म आपको बेहद निराश करती है। मार्वल जैसे स्टूडियो से तो आप ये उम्मीद बिल्कुल भी नहीं रखते हैं। यहां तक कि डार्क सुपरहीरोज फिल्में भी थोड़ी मनोरंजक होती हैं लेकिन ये फिल्म तो इस लिस्ट में भी शामिल नहीं होती है। आखिर ऑस्कर विनिंग डायरेक्टर क्लोई झाओ ऐसी गलती कैसे कर सकती हैं? आप ऐसे ही आर्ट डायरेक्टर नहीं हो सकते जिसे कमर्शियल सिनेमा की कोई पहचान न हो। बना सोचे समझे ही आप एक ग्रैंड बजट सुपरहीरो फिल्म कैसे बना सकती हैं? साथ ही ये कैसे संभव है कि एंजेलिना जोली जैसी एक्ट्रेस को आप सेकेंड लीड रखती हैं। एटर्नल्स मार्वल की बेस्ट छोड़िए अच्छी फिल्म से भी कोसों दूर खड़ी दिखती है। इसका मतलब ये नहीं है कि ये देखने लायक ही नहीं है। मुझे लगता है कि मेकर्स ने यंगस्टर्स और फैमिली ऑडिएंस के लिए फिल्म बनाई थी लेकिन वे भी इसे पसंद नहीं करेंगे। बॉलीवुड लाइफ की ओर से इस सुपरहीरो फिल्म को पाँच में से दो.पाँच स्टार्स। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
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Najibullah Zadran in Abu Dhabi Knight Riders vs MI Emirates: अफगानिस्तान के बल्लेबाज नजीबुल्लाह जादरान ने आईएलटी20 में अबू धाबी नाइट राइडर्स के खिलाफ आतिशी पारी खेली। वह एमआई अमीरात को जिताकर लौटे।
अफगानिस्तान के नजीबुल्लाह जादरान ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने एक बार फिर अपना यही तेवर दिखाया है। एमआई अमीरात टीम का हिस्सा जादरान ने इंटरनेशनल लीग टी20 (आईएलटी20) में अबू धाबी नाइट राइडर्स के खिलाफ आतिशी पारी खेली। उन्होंने मुश्किल हालात में 17 गेंदों में नाबाद 35 रन बनाकर अपनी टीम को आखिरी गेंद पर जीत दिलाई। उन्होंने पारी में 1 चौका और 4 छक्के ठोके। टॉस गंवाने के बाद अबू धाबी नाइट राइडर्स ने 170/7 का स्कोर खड़ा किया। जवाब में एमआई अमीरात ने निर्धारित 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 176 रन बनाए।
एमआई अमीरात को आखिरी ओवर में जीत के लिए 20 रन की जरूरत थी और क्रीज पर जादरान के अलावा अनुभवी कैरेबियाई खिलाड़ी ड्वेन ब्रावो थे। ऐसे में अबू धाबी नाइट राइडर्स के कप्तान सुनील नरेन ने 20वें ओवर में गेंद स्टार ऑलराउंडर आंद्रे रसेल को सौंपी। ब्रावो ने रसेल का स्वागत मिडविकेट के ऊपर से सिक्स से किया। उन्होंने दूसरी गेंद पर डबल लिया और तीसरी गेंद पर सामने की दिशा में चौका ठोका।
ब्रावो ने चौथी गेंद पर सिंगल लिया, जिसके बाद स्ट्राइक जादरान के पास आ गई। एमआई अमीरात को अंतिम दो गेंदों में 7 रन की दरकार थी और जादरान ने पांचवीं गेंद शॉर्ट मिलने के बाद छक्का जड़ दिया। यह छक्का लगते ही रसेल ने अपना सिर पकड़ लिया। वहीं, जादरान ने जैसे ही आखिरी गेंद पर थर्ड मैन की दिशा में सिक्स मारा तो अबू धाबी नाइट राइडर्स के खेमे में निराशा की लहर दौड़ गई। एमआई अमीरात ने 5 विकेट से जीता। रसेल ने अंतिम ओवर में कुल 25 रन लुटाए। जादरान ने ब्रावो के साथ छठे विकेट के लिए 34 रन की अटूट साझेदारी की।
गौरतलब है कि एमआई अमीरात ने टूर्नामेंट में लगातार तीसरी जीत दर्ज की है। कीरोन पोलार्ड के नेतृत्व वाली टीम ने पहले मैच में 49 रन जबकि दूसरे मैच में 8 विकेट से विजयी हासिल की थी। एमआई अमीरात को चौथा मैच दुबई कैपिटल्स के खिलाफ खेलना है।
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Najibullah Zadran in Abu Dhabi Knight Riders vs MI Emirates: अफगानिस्तान के बल्लेबाज नजीबुल्लाह जादरान ने आईएलटीबीस में अबू धाबी नाइट राइडर्स के खिलाफ आतिशी पारी खेली। वह एमआई अमीरात को जिताकर लौटे। अफगानिस्तान के नजीबुल्लाह जादरान ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने एक बार फिर अपना यही तेवर दिखाया है। एमआई अमीरात टीम का हिस्सा जादरान ने इंटरनेशनल लीग टीबीस में अबू धाबी नाइट राइडर्स के खिलाफ आतिशी पारी खेली। उन्होंने मुश्किल हालात में सत्रह गेंदों में नाबाद पैंतीस रन बनाकर अपनी टीम को आखिरी गेंद पर जीत दिलाई। उन्होंने पारी में एक चौका और चार छक्के ठोके। टॉस गंवाने के बाद अबू धाबी नाइट राइडर्स ने एक सौ सत्तर/सात का स्कोर खड़ा किया। जवाब में एमआई अमीरात ने निर्धारित बीस ओवर में पाँच विकेट के नुकसान पर एक सौ छिहत्तर रन बनाए। एमआई अमीरात को आखिरी ओवर में जीत के लिए बीस रन की जरूरत थी और क्रीज पर जादरान के अलावा अनुभवी कैरेबियाई खिलाड़ी ड्वेन ब्रावो थे। ऐसे में अबू धाबी नाइट राइडर्स के कप्तान सुनील नरेन ने बीसवें ओवर में गेंद स्टार ऑलराउंडर आंद्रे रसेल को सौंपी। ब्रावो ने रसेल का स्वागत मिडविकेट के ऊपर से सिक्स से किया। उन्होंने दूसरी गेंद पर डबल लिया और तीसरी गेंद पर सामने की दिशा में चौका ठोका। ब्रावो ने चौथी गेंद पर सिंगल लिया, जिसके बाद स्ट्राइक जादरान के पास आ गई। एमआई अमीरात को अंतिम दो गेंदों में सात रन की दरकार थी और जादरान ने पांचवीं गेंद शॉर्ट मिलने के बाद छक्का जड़ दिया। यह छक्का लगते ही रसेल ने अपना सिर पकड़ लिया। वहीं, जादरान ने जैसे ही आखिरी गेंद पर थर्ड मैन की दिशा में सिक्स मारा तो अबू धाबी नाइट राइडर्स के खेमे में निराशा की लहर दौड़ गई। एमआई अमीरात ने पाँच विकेट से जीता। रसेल ने अंतिम ओवर में कुल पच्चीस रन लुटाए। जादरान ने ब्रावो के साथ छठे विकेट के लिए चौंतीस रन की अटूट साझेदारी की। गौरतलब है कि एमआई अमीरात ने टूर्नामेंट में लगातार तीसरी जीत दर्ज की है। कीरोन पोलार्ड के नेतृत्व वाली टीम ने पहले मैच में उनचास रन जबकि दूसरे मैच में आठ विकेट से विजयी हासिल की थी। एमआई अमीरात को चौथा मैच दुबई कैपिटल्स के खिलाफ खेलना है।
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दुबई की फ्लाइट में सवार एक यात्री सोने की पेस्ट बनाकर साथ ले आया मगर अमृतसर एयरपोर्ट पर कस्टम अधिकारियों की जांच में पकड़ा गया। उसे गिरफ्तार कर लिया गया। मैटल डिटेक्टर से बचने के लिए उसने सोने की पेस्ट बनाई थी।
दुबई से स्पाइसजेट की फ्लाइट संख्या-SG711 अमृतसर के गुरु रामदास इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुई। फ्लाइट से उतरने के बाद आरोपी ने एयरपोर्ट पर सभी सिक्योरिटी चेक प्वाइंट पार कर लिए मगर कस्टम स्टाफ को उसकी चाल देखकर शक हो गया। इसके बाद जब आरोपी की तलाशी ली गई तो उसकी पेंट से 174. 40 ग्राम सोने की पेस्ट बरामद हुई। सोने में बदलने पर इसका वजन 140. 72 ग्राम निकला। इसकी कीमत 7. 40 लाख रुपए आंकी गई।
भारत में पेस्ट बनाकर सोने की तस्करी का यह पहला मामला नहीं है। अमृतसर एयरपोर्ट पर भी इससे पहले ऐसा ही एक केस पकड़ा जा चुका है। अमृतसर एयरपोर्ट पर बीते अक्टूबर माह में ही 1. 600 ग्राम सोना बरामद किया गया जिसे एक आदमी पेस्ट बनाकर ले जाने की फिराक में था। नई दिल्ली में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी 11 दिसंबर 2018 को टर्मिनल-1 से गोल्ड पेस्ट के साथ एक व्यक्ति पकड़ा गया था। वह भी दुबई से आया था और मुंबई जाने की फिराक में था। उससे 15 लाख रुपए का सोना बरामद हुआ।
मैटल डिटेक्टर से बचने के लिए सोने को पेस्ट में बदला जाता है। भारत के अधिकतर एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के लिए मैटल डिटेक्टर लगे हैं। जब सोने को पेस्ट में बदल जाता है तो वह मैटल नहीं रह जाता। ऐसे में मैटल डिटेक्टर से उसे पकड़ पाना संभव नहीं रहता।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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दुबई की फ्लाइट में सवार एक यात्री सोने की पेस्ट बनाकर साथ ले आया मगर अमृतसर एयरपोर्ट पर कस्टम अधिकारियों की जांच में पकड़ा गया। उसे गिरफ्तार कर लिया गया। मैटल डिटेक्टर से बचने के लिए उसने सोने की पेस्ट बनाई थी। दुबई से स्पाइसजेट की फ्लाइट संख्या-SGसात सौ ग्यारह अमृतसर के गुरु रामदास इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुई। फ्लाइट से उतरने के बाद आरोपी ने एयरपोर्ट पर सभी सिक्योरिटी चेक प्वाइंट पार कर लिए मगर कस्टम स्टाफ को उसकी चाल देखकर शक हो गया। इसके बाद जब आरोपी की तलाशी ली गई तो उसकी पेंट से एक सौ चौहत्तर. चालीस ग्राम सोने की पेस्ट बरामद हुई। सोने में बदलने पर इसका वजन एक सौ चालीस. बहत्तर ग्राम निकला। इसकी कीमत सात. चालीस लाख रुपए आंकी गई। भारत में पेस्ट बनाकर सोने की तस्करी का यह पहला मामला नहीं है। अमृतसर एयरपोर्ट पर भी इससे पहले ऐसा ही एक केस पकड़ा जा चुका है। अमृतसर एयरपोर्ट पर बीते अक्टूबर माह में ही एक. छः सौ ग्राम सोना बरामद किया गया जिसे एक आदमी पेस्ट बनाकर ले जाने की फिराक में था। नई दिल्ली में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी ग्यारह दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह को टर्मिनल-एक से गोल्ड पेस्ट के साथ एक व्यक्ति पकड़ा गया था। वह भी दुबई से आया था और मुंबई जाने की फिराक में था। उससे पंद्रह लाख रुपए का सोना बरामद हुआ। मैटल डिटेक्टर से बचने के लिए सोने को पेस्ट में बदला जाता है। भारत के अधिकतर एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के लिए मैटल डिटेक्टर लगे हैं। जब सोने को पेस्ट में बदल जाता है तो वह मैटल नहीं रह जाता। ऐसे में मैटल डिटेक्टर से उसे पकड़ पाना संभव नहीं रहता। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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बैंक के छुट्टी पर होने से आपके कई जरूरी काम रुक जाते हैं. इसीलिए आपके लिए ये खबर जानना बहुत जरूरी है. क्योंकि सितंबर के शुरू होते ही बैंक 4 दिन तक बन रहने वाले हैं.
बैंक के छुट्टी पर होने से आपके कई जरूरी काम रुक जाते हैं. इसीलिए आपके लिए ये खबर जानना बहुत जरूरी है. क्योंकि सितंबर के शुरू होते ही बैंक 4 दिन तक बन रहने वाले हैं. इस वजह से बैंकिंग लेन-देन में आपको मुश्किल हो सकती है. ये महीना शुरू होने में अब सिर्फ 8 दिन बाकी हैं. आगे जानें किस दिन किस वजह से बंद रहेगा बैंक. .
दरअसल अगले महीने 1 सितंबर को शनिवार है. इस दिन सभी बैंक चालू रहेंगे, लेकिन उसके बाद आने वाले दो दिन बैंक बंद रहेंगे. 2 तारीख को रविवार और 3 को जन्माष्टमी पर्व की छुट्टी होगी. ऐसे में इन दो दिनों के भीतर बैंक में कोई काम नहीं होगा.
इसके बाद 4 और 5 सितंबर को भारतीय रिजर्व बैंक के कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने की धमकी दी है. पेंशन से जुड़ी अपनी मांगों को मनवाने की खातिर इन्होंने हड़ताल पर जाने की धमकी दी है. इसमें आरबीआई के ऑफिसर और अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं.
एटीएम होंगे खाली? : वहीं, इस दौरान एटीएम में कैश मिलने की बात करें, तो इसमें दिक्कत आने की आशंका काफी कम है. एटीएम इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि जब भी कभी बैंक हॉलिडे आते हैं, तो एटीएम इंडस्ट्री से जुड़े लोग पहले ही एटीएम मशीन में जरूरी कैश डाल देते हैं. ताकि किसी भी तरह की दिक्कत न आए.
क्योंकि आरबीआई एक गवर्निंग बॉडी है, तो ऐसे में रोजमर्रा के लेन-देन में इसकी भागीदारी ना के बराबर होती है. हालांकि अगर यह हड़ताल किसी भी वजह से लंबी खिंचती है, तो इससे बैंक के साथ ही ग्राहकों को भी मुश्किल होने की आशंका है.
ऐसे में इन दोनों चीजों को ध्यान में रख कर ही आपको अपने लेन-देन के काम प्लान कर लेने चाहिए. ताकि किसी भी अनपेक्षित हालात में आपके सामने दिक्कतें पेश न हों.
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बैंक के छुट्टी पर होने से आपके कई जरूरी काम रुक जाते हैं. इसीलिए आपके लिए ये खबर जानना बहुत जरूरी है. क्योंकि सितंबर के शुरू होते ही बैंक चार दिन तक बन रहने वाले हैं. बैंक के छुट्टी पर होने से आपके कई जरूरी काम रुक जाते हैं. इसीलिए आपके लिए ये खबर जानना बहुत जरूरी है. क्योंकि सितंबर के शुरू होते ही बैंक चार दिन तक बन रहने वाले हैं. इस वजह से बैंकिंग लेन-देन में आपको मुश्किल हो सकती है. ये महीना शुरू होने में अब सिर्फ आठ दिन बाकी हैं. आगे जानें किस दिन किस वजह से बंद रहेगा बैंक. . दरअसल अगले महीने एक सितंबर को शनिवार है. इस दिन सभी बैंक चालू रहेंगे, लेकिन उसके बाद आने वाले दो दिन बैंक बंद रहेंगे. दो तारीख को रविवार और तीन को जन्माष्टमी पर्व की छुट्टी होगी. ऐसे में इन दो दिनों के भीतर बैंक में कोई काम नहीं होगा. इसके बाद चार और पाँच सितंबर को भारतीय रिजर्व बैंक के कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने की धमकी दी है. पेंशन से जुड़ी अपनी मांगों को मनवाने की खातिर इन्होंने हड़ताल पर जाने की धमकी दी है. इसमें आरबीआई के ऑफिसर और अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं. एटीएम होंगे खाली? : वहीं, इस दौरान एटीएम में कैश मिलने की बात करें, तो इसमें दिक्कत आने की आशंका काफी कम है. एटीएम इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि जब भी कभी बैंक हॉलिडे आते हैं, तो एटीएम इंडस्ट्री से जुड़े लोग पहले ही एटीएम मशीन में जरूरी कैश डाल देते हैं. ताकि किसी भी तरह की दिक्कत न आए. क्योंकि आरबीआई एक गवर्निंग बॉडी है, तो ऐसे में रोजमर्रा के लेन-देन में इसकी भागीदारी ना के बराबर होती है. हालांकि अगर यह हड़ताल किसी भी वजह से लंबी खिंचती है, तो इससे बैंक के साथ ही ग्राहकों को भी मुश्किल होने की आशंका है. ऐसे में इन दोनों चीजों को ध्यान में रख कर ही आपको अपने लेन-देन के काम प्लान कर लेने चाहिए. ताकि किसी भी अनपेक्षित हालात में आपके सामने दिक्कतें पेश न हों.
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इंदौर (Indore) । मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर में एक 16 साल की लड़की (girl) की स्कूल (school) में मौत हो गई। कड़ाके की ठंड (Cold) में कार्डियक अरेस्ट (cardiac arrest) की वजह से स्कूली छात्रा की मौत हुई। मृतका के चाचा ने बताया कि उनकी भतीजी वृंदा त्रिपाठी 11वीं क्लास में पढ़ती थी। वो बुधवार को उषा नगर इलाके में अपने स्कूल में बेहोश हो गई और उसकी मौत हो गई।
मिली जानकारी के मुताबिक, 25 जनवरी को 11वीं में पढ़ने वाली वृंदा गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के लिए रिहर्सल करने स्कूल गई थी। इस दौरान वो बेहोश हो गई। बेहोश होने के बाद उसे हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने सीपीआर देकर उसकी सांस लौटाने की कोशिश की लेकिन वृंदा की जान नहीं बचाई जा सकी। डॉक्टरों के मुताबिक अस्पताल लाने से पहले ही बच्ची की मौत हो चुकी थी। वृंदा के परिजनों ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट से पहले वो बिलकुल ठीक थी। डॉक्टरों ने कहा है कि उसकी मौत संभवतः ठंड से हुई है।
मृतका का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि मृतका के ठुड्डी पर चोट लगी थी। डॉक्टरों ने बताया कि यह चोट गिरने के कारण लगी है। लड़की की मौत कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुई। एक अधिकारी ने बताया कि लड़की ने मौत के समय एक पतला ट्रैक सूट पहना था। इंदौर सोसाइटी फॉर ऑर्गन डोनेशन से जुड़े मुस्कान ग्रुप के स्वयंसेवक जीतू बागानी ने बताया कि मृतका के परिवार ने उसकी आंखें दान कर दी हैं।
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अनिल भरणी के मुताबिक, ठंड में सुबह 4 बजे से 10 बजे तक मानव शरीर में विभिन्न हार्मोनों का स्तर बढ़ जाता है। इससे रक्त के थक्के बनने से अचानक कार्डियक अरेस्ट की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने ठंडे मौसम से बचने के लिए पौष्टिक आहार लेने और व्यायाम करने की सलाह दी है। Share:
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इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में एक सोलह साल की लड़की की स्कूल में मौत हो गई। कड़ाके की ठंड में कार्डियक अरेस्ट की वजह से स्कूली छात्रा की मौत हुई। मृतका के चाचा ने बताया कि उनकी भतीजी वृंदा त्रिपाठी ग्यारहवीं क्लास में पढ़ती थी। वो बुधवार को उषा नगर इलाके में अपने स्कूल में बेहोश हो गई और उसकी मौत हो गई। मिली जानकारी के मुताबिक, पच्चीस जनवरी को ग्यारहवीं में पढ़ने वाली वृंदा गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के लिए रिहर्सल करने स्कूल गई थी। इस दौरान वो बेहोश हो गई। बेहोश होने के बाद उसे हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने सीपीआर देकर उसकी सांस लौटाने की कोशिश की लेकिन वृंदा की जान नहीं बचाई जा सकी। डॉक्टरों के मुताबिक अस्पताल लाने से पहले ही बच्ची की मौत हो चुकी थी। वृंदा के परिजनों ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट से पहले वो बिलकुल ठीक थी। डॉक्टरों ने कहा है कि उसकी मौत संभवतः ठंड से हुई है। मृतका का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि मृतका के ठुड्डी पर चोट लगी थी। डॉक्टरों ने बताया कि यह चोट गिरने के कारण लगी है। लड़की की मौत कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुई। एक अधिकारी ने बताया कि लड़की ने मौत के समय एक पतला ट्रैक सूट पहना था। इंदौर सोसाइटी फॉर ऑर्गन डोनेशन से जुड़े मुस्कान ग्रुप के स्वयंसेवक जीतू बागानी ने बताया कि मृतका के परिवार ने उसकी आंखें दान कर दी हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अनिल भरणी के मुताबिक, ठंड में सुबह चार बजे से दस बजे तक मानव शरीर में विभिन्न हार्मोनों का स्तर बढ़ जाता है। इससे रक्त के थक्के बनने से अचानक कार्डियक अरेस्ट की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने ठंडे मौसम से बचने के लिए पौष्टिक आहार लेने और व्यायाम करने की सलाह दी है। Share:
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KATIHAR : जिला मुख्यालय से चमचमाती सरकारी गाड़ी से फर्राटा भरते हुए कुर्सेला प्रखंड के गंगा नदी के तट तक पहुंचकर नाव के सहारे दियारा के सुदूर इलाके तक पहुंचना फिर कुछ दूर पैदल और कई किलोमीटर ट्रैक्टर की सवारी करके जिला प्रशासन के तमाम अधिकारी को अगर डीएम के साथ किसी गांव तक पहुंचना पड़े तो इस गांव की भौगोलिक स्थिति और अब तक हुए विकास की तस्वीर को अब खुद समझ सकते हैं।
बात कटिहार कुरसेला प्रखंड के गोबराही दियारा का कर रहे हैं जहां के ग्रामीणों के माने तो पहली बार वे लोग अपने गांव में सरकार की किसी योजना के बारे में लाभ ले रहे हैं अब तक कारण चाहे जो भी हो इस गांव तक पहुंचने के या विकास योजनाओं को पहुंचाने की कोशिश कभी नहीं की गई है। इसलिए न तो बिजली की सुविधा है ना सड़क है और ना ही पेयजल की कोई व्यवस्था लगभग 3000 से अधिक आबादी बहुल यह गांव के लोग मानो अब भी आदिम युग में जी रहे हो, अब से कई साल पहले इस गांव तक सोलर के सहारे जो बिजली व्यवस्था बहाल हुई थी, वह अभी खराब पड़ी हुई है। जिसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है।
लेकिन पहली बार कटिहार जिला प्रशासन जिलाधिकारी के नेतृत्व में इस गांव तक पहुंच कर तमाम विभागों को कैंप लगाकर लोगों तक विकास पहुंचाने की एक अच्छी कोशिश की शुरुआत किया है अपने ग्रामीण इससे बेहद संतुष्ट है और उम्मीद कर रहे हैं कि आगे इस गांव के तस्वीर में बदलाव आएगा स्थानीय विधायक ने अब हालात बदलने की उम्मीद जता रहे हैं।
पहली गांव परिवार इस गांव तक जिला प्रशासन के तमाम आमला विकास के साथ आपके द्वार तक पहुंचने के सवाल पर जिलाधिकारी रवि प्रकाश कहते हैं उनकी जानकारी में यह बात उनके जॉइनिंग करने के बाद ही आया था। इसलिए उन्होंने इसे प्राथमिकता के आधार पर चुनौती के रूप में लेते हुए काम शुरू किया और आप इस इलाके तक पहुंच कर तमाम विभागों के कैंप लगाकर लोगों को सरकारी योजनाओं की लाभ पहुंचाया जा रहा है। जहां तक ग्रामीणों की डिमांड की बात जून के सामने आया है। उसमें स्वास्थ, शिक्षा और बिजली प्रमुख है, ग्रामीणों के इन मांगों पर भी जल्द सुविधा बहाल करने की प्रयास किए जाएंगे।
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KATIHAR : जिला मुख्यालय से चमचमाती सरकारी गाड़ी से फर्राटा भरते हुए कुर्सेला प्रखंड के गंगा नदी के तट तक पहुंचकर नाव के सहारे दियारा के सुदूर इलाके तक पहुंचना फिर कुछ दूर पैदल और कई किलोमीटर ट्रैक्टर की सवारी करके जिला प्रशासन के तमाम अधिकारी को अगर डीएम के साथ किसी गांव तक पहुंचना पड़े तो इस गांव की भौगोलिक स्थिति और अब तक हुए विकास की तस्वीर को अब खुद समझ सकते हैं। बात कटिहार कुरसेला प्रखंड के गोबराही दियारा का कर रहे हैं जहां के ग्रामीणों के माने तो पहली बार वे लोग अपने गांव में सरकार की किसी योजना के बारे में लाभ ले रहे हैं अब तक कारण चाहे जो भी हो इस गांव तक पहुंचने के या विकास योजनाओं को पहुंचाने की कोशिश कभी नहीं की गई है। इसलिए न तो बिजली की सुविधा है ना सड़क है और ना ही पेयजल की कोई व्यवस्था लगभग तीन हज़ार से अधिक आबादी बहुल यह गांव के लोग मानो अब भी आदिम युग में जी रहे हो, अब से कई साल पहले इस गांव तक सोलर के सहारे जो बिजली व्यवस्था बहाल हुई थी, वह अभी खराब पड़ी हुई है। जिसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। लेकिन पहली बार कटिहार जिला प्रशासन जिलाधिकारी के नेतृत्व में इस गांव तक पहुंच कर तमाम विभागों को कैंप लगाकर लोगों तक विकास पहुंचाने की एक अच्छी कोशिश की शुरुआत किया है अपने ग्रामीण इससे बेहद संतुष्ट है और उम्मीद कर रहे हैं कि आगे इस गांव के तस्वीर में बदलाव आएगा स्थानीय विधायक ने अब हालात बदलने की उम्मीद जता रहे हैं। पहली गांव परिवार इस गांव तक जिला प्रशासन के तमाम आमला विकास के साथ आपके द्वार तक पहुंचने के सवाल पर जिलाधिकारी रवि प्रकाश कहते हैं उनकी जानकारी में यह बात उनके जॉइनिंग करने के बाद ही आया था। इसलिए उन्होंने इसे प्राथमिकता के आधार पर चुनौती के रूप में लेते हुए काम शुरू किया और आप इस इलाके तक पहुंच कर तमाम विभागों के कैंप लगाकर लोगों को सरकारी योजनाओं की लाभ पहुंचाया जा रहा है। जहां तक ग्रामीणों की डिमांड की बात जून के सामने आया है। उसमें स्वास्थ, शिक्षा और बिजली प्रमुख है, ग्रामीणों के इन मांगों पर भी जल्द सुविधा बहाल करने की प्रयास किए जाएंगे।
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कोरोना प्रश्नोत्तरी : प्लाज्मा थेरेपी से क्या नुकसान हैं ?
कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। भारत में भी कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं। लोगों के मन में रोज नए-नए सवाल उठ रहे हैं। यहां हम विश्व स्वास्थ्य संगठन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और विशेषज्ञों द्वारा दी जा रही कोरोना से जुड़ी जानकारियों को आप तक पहुंचाएंगे।
किसी वायरस का टीका बनाने और एंटीबॉडी बनाने में क्या अंतर है?
जवाब : डॉ. स्कंद शुक्ला के अनुसार, 'टीका उपचार नहीं है। वह रोग की रोकथाम करता है। वैक्सीन खुद कीटाणु को खत्म नहीं करती। वह मानव शरीर को ट्रेनिंग देती है। फिर हमारा इम्यून सिस्टम कीटाणु को मारता है। टीके का असर रोग से पहले होता है। टीका बन भी गया तो संक्रमित व्यक्ति पर इसका असर नहीं होगा। उनके लिए दूसरा तरीका अपनाते हैं, जिसे एंटीबॉडी कहते हैं। एक, संक्रमण होने के बाद शरीर में एंटीबॉडीज खुद बनने लगती हैं। दूसरा टीका लगाने के बाद ये शरीर में बनती हैं। बाद में प्रयोगशाला में भी इन्हें बना लिया जाता है।
नींद और कोरोना वायरस के बीच भी किसी प्रकार का संबंध देखने को मिला है क्या?
जवाब : कोविड-19 के कारण तनाव बढ़ने से लोगों को नींद की परेशानी हो रही है। रात में अच्छी नींद प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। इसी समय शरीर खुद की मरम्मत करता है। जनवरी में अमेरिका में हुए अध्ययन के अनुसार, एक दिन की नींद की कमी भी संक्रमण से लड़ने की हमारी क्षमता पर असर डालती है। लंबे समय तक नींद न आने से त्वचा की सेहत और फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है। दोनों पर ही संक्रमण का असर पहले होता है। खुद को तनावमुक्त रखते हुए नींद को सामान्य पैटर्न पर लाने की कोशिश करें।
प्लाज्मा थेरेपी से क्या नुकसान हैं ?
जवाब : कोविड-19 संक्रमण से ठीक हो चुके व्यक्ति के शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी को निकालकर दूसरों को देने की बात हो रही है। यही प्लाज्मा थेरेपी है। ठीक हो चुके व्यक्ति के खून से प्लाज्मा अलग करके दूसरे रोगी को दिया जाता है। जब किसी को प्लाज्मा चढ़ाया जाता है तो उसमें केवल एंटीबॉडीज नहीं होतीं, और भी कई रसायन होते हैं। ऐसे में प्रतिकूल असर भी हो सकते हैं। लैब में बनाए गए एंटीबॉडी शुद्ध होते हैं, वे प्लाज्मा की तरह कई रसायनों का मिश्रण नहीं होते। इसी वजह से वे ज्यादा बेहतर होते हैं।
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कोरोना प्रश्नोत्तरी : प्लाज्मा थेरेपी से क्या नुकसान हैं ? कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। भारत में भी कोविड-उन्नीस के मामले बढ़ रहे हैं। लोगों के मन में रोज नए-नए सवाल उठ रहे हैं। यहां हम विश्व स्वास्थ्य संगठन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और विशेषज्ञों द्वारा दी जा रही कोरोना से जुड़ी जानकारियों को आप तक पहुंचाएंगे। किसी वायरस का टीका बनाने और एंटीबॉडी बनाने में क्या अंतर है? जवाब : डॉ. स्कंद शुक्ला के अनुसार, 'टीका उपचार नहीं है। वह रोग की रोकथाम करता है। वैक्सीन खुद कीटाणु को खत्म नहीं करती। वह मानव शरीर को ट्रेनिंग देती है। फिर हमारा इम्यून सिस्टम कीटाणु को मारता है। टीके का असर रोग से पहले होता है। टीका बन भी गया तो संक्रमित व्यक्ति पर इसका असर नहीं होगा। उनके लिए दूसरा तरीका अपनाते हैं, जिसे एंटीबॉडी कहते हैं। एक, संक्रमण होने के बाद शरीर में एंटीबॉडीज खुद बनने लगती हैं। दूसरा टीका लगाने के बाद ये शरीर में बनती हैं। बाद में प्रयोगशाला में भी इन्हें बना लिया जाता है। नींद और कोरोना वायरस के बीच भी किसी प्रकार का संबंध देखने को मिला है क्या? जवाब : कोविड-उन्नीस के कारण तनाव बढ़ने से लोगों को नींद की परेशानी हो रही है। रात में अच्छी नींद प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। इसी समय शरीर खुद की मरम्मत करता है। जनवरी में अमेरिका में हुए अध्ययन के अनुसार, एक दिन की नींद की कमी भी संक्रमण से लड़ने की हमारी क्षमता पर असर डालती है। लंबे समय तक नींद न आने से त्वचा की सेहत और फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है। दोनों पर ही संक्रमण का असर पहले होता है। खुद को तनावमुक्त रखते हुए नींद को सामान्य पैटर्न पर लाने की कोशिश करें। प्लाज्मा थेरेपी से क्या नुकसान हैं ? जवाब : कोविड-उन्नीस संक्रमण से ठीक हो चुके व्यक्ति के शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी को निकालकर दूसरों को देने की बात हो रही है। यही प्लाज्मा थेरेपी है। ठीक हो चुके व्यक्ति के खून से प्लाज्मा अलग करके दूसरे रोगी को दिया जाता है। जब किसी को प्लाज्मा चढ़ाया जाता है तो उसमें केवल एंटीबॉडीज नहीं होतीं, और भी कई रसायन होते हैं। ऐसे में प्रतिकूल असर भी हो सकते हैं। लैब में बनाए गए एंटीबॉडी शुद्ध होते हैं, वे प्लाज्मा की तरह कई रसायनों का मिश्रण नहीं होते। इसी वजह से वे ज्यादा बेहतर होते हैं।
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Sanjay Bandi Arrest: तेलंगाना भाजपा के प्रमुख और सांसद बंदी संजय को आज पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया गया, उन्हें तीन अन्य आरोपियों के साथ 19 अप्रैल तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। बंदी के वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के लिए जांच अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की मांग को हम कल हाईकोर्ट में आदेश को चुनौती देने की योजना बना रहे हैं।
एक इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप के समूहों पर मानक 10 (एसएससी) बोर्ड परीक्षा का प्रश्न पत्र सामने आने के बाद कदाचार के एक मामले में शहर की पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी बनाए जाने के बाद बंदी को बुधवार की सुबह पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
करीमनगर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद संजय कुमार को पुलिस की एक टीम ने करीमनगर शहर में उनके आवास से गिरफ्तार किया और शुरू में उन्हें एहतियातन गिरफ़्तार किया गया, जिसके बाद उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और फिर शाम को वारंगल की एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें तीन अन्य लोगों के साथ 19 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
दर्ज एफआईआर के मुताबिक, संजय कुमार पर आरोप है कि एसएससी (10वीं) पेपर लीक की घटनाएं सामने आने के बाद उन्होंने भोले-भाले छात्रों को राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए उकसाया। इसके साथ ही उनपर ये भी आरोप है कि उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को भी प्रदर्शन करने के लिए भड़काया। इससे सार्वजनिक शांति बिगड़ने की आशंका है, जिससे कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है।
एफआईआर दर्ज कराने वाले का कहना है कि संजय कुमार ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को एग्जाम सेंटर के बाहर धरना देने के लिए भड़काया, ताकि आगे की परीक्षाएं होने में बाधा हो। इससे एसएससी का एग्जाम देने वाले छात्रों का मनोबल गिर सकता है। शिकायत में ये भी कहा गया है कि संजय कुमार के बर्ताव से राज्यभर में होने वाली परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित होगी, जिससे छात्रों के भविष्य पर गंभीर असर पड़ेगा।
क्या है मामला?
राज्य के विकराबाद और कमलापुर में 10वीं कक्षा के पेपर लीक का मामला सामने आया था। एफआईआर के मुताबिक, कमलापुर में कुछ अज्ञात लोगों ने एग्जाम सेंटर के बाहर अज्ञात छात्रों से पेपर लिया, उसकी फोटो ली और उसे वॉट्सऐप ग्रुप पर शेयर कर दिया था।
जबकि, विकराबाद में एक निरीक्षक ने एग्जाम शुरू होने के तुरंत बाद 10वीं क्लास के तेलुगू भाषा के पेपर की फोटो ली और उसे दूसरे निरीक्षक को भेज दिया। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सरकारी स्कूल में स्टैंडबाय निरीक्षक ने तेलुगु का पेपर शुरू होने के तुरंत बाद उसकी फोटो ली और उसे दूसरी सरकारी स्कूल के एक टीचर को भेज दिया। ऐसा इसलिए ताकि वो चीटिंग के लिए इसके जवाब तैयार कर सके।
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Sanjay Bandi Arrest: तेलंगाना भाजपा के प्रमुख और सांसद बंदी संजय को आज पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया गया, उन्हें तीन अन्य आरोपियों के साथ उन्नीस अप्रैल तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। बंदी के वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के लिए जांच अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की मांग को हम कल हाईकोर्ट में आदेश को चुनौती देने की योजना बना रहे हैं। एक इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप के समूहों पर मानक दस बोर्ड परीक्षा का प्रश्न पत्र सामने आने के बाद कदाचार के एक मामले में शहर की पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी बनाए जाने के बाद बंदी को बुधवार की सुबह पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। करीमनगर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद संजय कुमार को पुलिस की एक टीम ने करीमनगर शहर में उनके आवास से गिरफ्तार किया और शुरू में उन्हें एहतियातन गिरफ़्तार किया गया, जिसके बाद उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और फिर शाम को वारंगल की एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें तीन अन्य लोगों के साथ उन्नीस अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दर्ज एफआईआर के मुताबिक, संजय कुमार पर आरोप है कि एसएससी पेपर लीक की घटनाएं सामने आने के बाद उन्होंने भोले-भाले छात्रों को राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए उकसाया। इसके साथ ही उनपर ये भी आरोप है कि उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को भी प्रदर्शन करने के लिए भड़काया। इससे सार्वजनिक शांति बिगड़ने की आशंका है, जिससे कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है। एफआईआर दर्ज कराने वाले का कहना है कि संजय कुमार ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को एग्जाम सेंटर के बाहर धरना देने के लिए भड़काया, ताकि आगे की परीक्षाएं होने में बाधा हो। इससे एसएससी का एग्जाम देने वाले छात्रों का मनोबल गिर सकता है। शिकायत में ये भी कहा गया है कि संजय कुमार के बर्ताव से राज्यभर में होने वाली परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित होगी, जिससे छात्रों के भविष्य पर गंभीर असर पड़ेगा। क्या है मामला? राज्य के विकराबाद और कमलापुर में दसवीं कक्षा के पेपर लीक का मामला सामने आया था। एफआईआर के मुताबिक, कमलापुर में कुछ अज्ञात लोगों ने एग्जाम सेंटर के बाहर अज्ञात छात्रों से पेपर लिया, उसकी फोटो ली और उसे वॉट्सऐप ग्रुप पर शेयर कर दिया था। जबकि, विकराबाद में एक निरीक्षक ने एग्जाम शुरू होने के तुरंत बाद दसवीं क्लास के तेलुगू भाषा के पेपर की फोटो ली और उसे दूसरे निरीक्षक को भेज दिया। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सरकारी स्कूल में स्टैंडबाय निरीक्षक ने तेलुगु का पेपर शुरू होने के तुरंत बाद उसकी फोटो ली और उसे दूसरी सरकारी स्कूल के एक टीचर को भेज दिया। ऐसा इसलिए ताकि वो चीटिंग के लिए इसके जवाब तैयार कर सके।
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India Lockdown कोरोना महामारी के चलते देशभर में लगे देशव्यापी लॉकडाउन पर बनी मधुर भंडारकर की फिल्म इंडिया लॉकडाउन अगले महीने ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज होने वाली है। ये फिल्म लॉकडाउन के दौरान हुईं सच्ची घटना से प्रेरित है।
नई दिल्ली, जेएनएन। India Lockdown: साल 2020 की कई कड़वी यादों के लिए आज भी लोगों के जहन में मौजूद है, जहां एक ओर देश में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे थे तो दूसरी तरफ देशव्यापी लॉकडाउन में लोग अपना जीवन यापन करने वाली चीजों को पाने की कोशिश में संघर्ष कर रहे थे। इसी देशव्यापी लॉकडाउन पर बनी मधुर भंडारकर की अगली फिल्म इंडिया लॉकडाउन की रिलीज डेट का एलान हो चुका है।
मधुर की ये फिल्म अगले महीने 2 दिसंबर, 2022 को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगी। मेकर्स ने लॉकडाउन की रिलीज डेट का एलान करते हुए फिल्म का नया पोस्टर भी रिलीज किया है, जिसमें फिल्म की स्टार कास्ट एक बड़े ताले में खड़े हुए दिख रही हैं और चारों ओर से एक चैन से बंधे हुए भी नजर आ रहे हैं।
सच्ची घटनाओं से प्रेरित होगी फिल्म?
आपको बता दें कि ये फिल्म सच्ची घटना पर आधारित होगी। खबरों की मानें तो फिल्म की ज्यादातर शूटिंग को लॉकडाउन में मुंबई और आसपास इलाकों में शूट किया गया है। जो देश में महामारी के चलते लगे लॉकडाउन अपने जीवन यापन के लिए संघर्ष करने वालों की कहानी बताएगी। मधुर भंडारकर के साथ मिलकर कर इस फिल्म का निर्माण डॉ. जयंतीलाल गड़ा के स्टूडियो पेन स्टूडियो ने साथ मिलकर किया है।
आपको बता दें कि पूरे देश में कोरोना महामारी के चलते भारत सरकार ने 25 मार्च 2020 को पूरे देश में लॉकडाउन लागू कर दिया था। जिसके बाद पूरा देश ठप पड़ गया था, बड़े-बड़े ऑफिसेज से लेकर रेल गाड़ियों तक सब कुछ बंद हो गया था। साल 2020 में देशवासियों ने बंद देश का वो नज़ारा देखा था जिसकी कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। देश में देखे गए इस नज़ारे को निर्देशक मधुर भंडारकर ने अपनी फिल्म में उतारा है।
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India Lockdown कोरोना महामारी के चलते देशभर में लगे देशव्यापी लॉकडाउन पर बनी मधुर भंडारकर की फिल्म इंडिया लॉकडाउन अगले महीने ओटीटी प्लेटफॉर्म जीपाँच पर रिलीज होने वाली है। ये फिल्म लॉकडाउन के दौरान हुईं सच्ची घटना से प्रेरित है। नई दिल्ली, जेएनएन। India Lockdown: साल दो हज़ार बीस की कई कड़वी यादों के लिए आज भी लोगों के जहन में मौजूद है, जहां एक ओर देश में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे थे तो दूसरी तरफ देशव्यापी लॉकडाउन में लोग अपना जीवन यापन करने वाली चीजों को पाने की कोशिश में संघर्ष कर रहे थे। इसी देशव्यापी लॉकडाउन पर बनी मधुर भंडारकर की अगली फिल्म इंडिया लॉकडाउन की रिलीज डेट का एलान हो चुका है। मधुर की ये फिल्म अगले महीने दो दिसंबर, दो हज़ार बाईस को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगी। मेकर्स ने लॉकडाउन की रिलीज डेट का एलान करते हुए फिल्म का नया पोस्टर भी रिलीज किया है, जिसमें फिल्म की स्टार कास्ट एक बड़े ताले में खड़े हुए दिख रही हैं और चारों ओर से एक चैन से बंधे हुए भी नजर आ रहे हैं। सच्ची घटनाओं से प्रेरित होगी फिल्म? आपको बता दें कि ये फिल्म सच्ची घटना पर आधारित होगी। खबरों की मानें तो फिल्म की ज्यादातर शूटिंग को लॉकडाउन में मुंबई और आसपास इलाकों में शूट किया गया है। जो देश में महामारी के चलते लगे लॉकडाउन अपने जीवन यापन के लिए संघर्ष करने वालों की कहानी बताएगी। मधुर भंडारकर के साथ मिलकर कर इस फिल्म का निर्माण डॉ. जयंतीलाल गड़ा के स्टूडियो पेन स्टूडियो ने साथ मिलकर किया है। आपको बता दें कि पूरे देश में कोरोना महामारी के चलते भारत सरकार ने पच्चीस मार्च दो हज़ार बीस को पूरे देश में लॉकडाउन लागू कर दिया था। जिसके बाद पूरा देश ठप पड़ गया था, बड़े-बड़े ऑफिसेज से लेकर रेल गाड़ियों तक सब कुछ बंद हो गया था। साल दो हज़ार बीस में देशवासियों ने बंद देश का वो नज़ारा देखा था जिसकी कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। देश में देखे गए इस नज़ारे को निर्देशक मधुर भंडारकर ने अपनी फिल्म में उतारा है।
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Hindi Short Story: पुराने समय में जब इस पृथ्वी में अग्नि न थी, तब सभी प्राणी मात्र ठण्ड से पीड़ित रहते थे। देवलोक से देवी-देवताओं व उनके बच्चे शीत का आनन्द लेने के लिये भूमण्डल में आया करते थे। एक दिन जब सूर्य की बेटी इस भू-मण्डल में आई थी तो उसने देखा कि सभी लोग एक ही दिशा की ओर भाग रहे थे। उसने लोगों से पूछा, 'आप सब क्यों भागे जा रहे हैं, आपको किसका डर है? ' लोगों ने उसे उत्तर दिया 'हम शीत बाधा से पीड़ित हैं, भागने से या दौड़ने से यह दूर हो जाता है। ' अपनी शीत बाधा को दूर करने के लिये ही हम इस प्रकार दौड़ रहे हैं। इन बातों को सुनकर उसे जोर से हंसी आ गई और कुछ देर तक सोचने-विचारने के बाद उन पर दया भी आ गई।
कुछ दिन बाद पुनः जब वह भू-मण्डल में आई तो उसने देखा कि एक स्त्री अपने अबोध बालक को बुरी तरह से पीट रही थी। सूर्य की पुत्री ने उससे पूछा, 'तुम इसे बुरी तरह क्यों पीट रही हो? ' उस स्त्री ने उत्तर दिया? 'इसे जाड़ा लग रहा है, पीटने से इसका जाड़ा दूर हो जायेगा। ' कुछ दूर और आगे जाने के बाद उसे एक मनुष्य दुबक कर झाड़ी के पीछे बैठा हुआ मिला। सूर्य की पुत्री ने उससे भी पूछा, 'तुम इस तरह क्यों बैठे हो? ' उसने उत्तर दिया कि मुझे भयंकर शीत बाधा सता रही है। जाड़े के भय से यहां बैठा हूं और यहां पर मुझे कुछ कम जाड़ा महसूस हो रहा है।
सबको जाड़े से पीड़ित देखकर सूर्य की बेटी स्वर्ग से आग चुराकर लाई। अब सभी लोग आग सेकने लग गये। जिस समय वह आग चुराकर लाई, उस समय सूर्य गहरी नींद में सो रहा था। नींद खुलने पर उसने देखा कि धरती में आग जल रही है। वह क्रोध के मारे लाल होकर अपनी बेटी की खोज में भू-मण्डल में आया। उसकी लड़की भयभीत होकर तालाब में छिप गई। जब उसे अपनी पुत्री का कोई पता न लगा तो उसने अपनी किरणों से आग उगलना आरम्भ कर दिया। इससे सभी पक्षी एवं प्राणी दुःखी हो गये। नाले व तालाब सब सूख गये। तालाब के सूख जाने पर सूर्य की बेटी ने एक सुन्दर पुष्प का रूप धारण कर लिया। यह फूल सूर्य की भांति गोल होता है तथा सूर्य की ओर ही अपना मुंह किए रहता है इसीलिए लोग इसे सूरज मुखी कहते हैं।
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Hindi Short Story: पुराने समय में जब इस पृथ्वी में अग्नि न थी, तब सभी प्राणी मात्र ठण्ड से पीड़ित रहते थे। देवलोक से देवी-देवताओं व उनके बच्चे शीत का आनन्द लेने के लिये भूमण्डल में आया करते थे। एक दिन जब सूर्य की बेटी इस भू-मण्डल में आई थी तो उसने देखा कि सभी लोग एक ही दिशा की ओर भाग रहे थे। उसने लोगों से पूछा, 'आप सब क्यों भागे जा रहे हैं, आपको किसका डर है? ' लोगों ने उसे उत्तर दिया 'हम शीत बाधा से पीड़ित हैं, भागने से या दौड़ने से यह दूर हो जाता है। ' अपनी शीत बाधा को दूर करने के लिये ही हम इस प्रकार दौड़ रहे हैं। इन बातों को सुनकर उसे जोर से हंसी आ गई और कुछ देर तक सोचने-विचारने के बाद उन पर दया भी आ गई। कुछ दिन बाद पुनः जब वह भू-मण्डल में आई तो उसने देखा कि एक स्त्री अपने अबोध बालक को बुरी तरह से पीट रही थी। सूर्य की पुत्री ने उससे पूछा, 'तुम इसे बुरी तरह क्यों पीट रही हो? ' उस स्त्री ने उत्तर दिया? 'इसे जाड़ा लग रहा है, पीटने से इसका जाड़ा दूर हो जायेगा। ' कुछ दूर और आगे जाने के बाद उसे एक मनुष्य दुबक कर झाड़ी के पीछे बैठा हुआ मिला। सूर्य की पुत्री ने उससे भी पूछा, 'तुम इस तरह क्यों बैठे हो? ' उसने उत्तर दिया कि मुझे भयंकर शीत बाधा सता रही है। जाड़े के भय से यहां बैठा हूं और यहां पर मुझे कुछ कम जाड़ा महसूस हो रहा है। सबको जाड़े से पीड़ित देखकर सूर्य की बेटी स्वर्ग से आग चुराकर लाई। अब सभी लोग आग सेकने लग गये। जिस समय वह आग चुराकर लाई, उस समय सूर्य गहरी नींद में सो रहा था। नींद खुलने पर उसने देखा कि धरती में आग जल रही है। वह क्रोध के मारे लाल होकर अपनी बेटी की खोज में भू-मण्डल में आया। उसकी लड़की भयभीत होकर तालाब में छिप गई। जब उसे अपनी पुत्री का कोई पता न लगा तो उसने अपनी किरणों से आग उगलना आरम्भ कर दिया। इससे सभी पक्षी एवं प्राणी दुःखी हो गये। नाले व तालाब सब सूख गये। तालाब के सूख जाने पर सूर्य की बेटी ने एक सुन्दर पुष्प का रूप धारण कर लिया। यह फूल सूर्य की भांति गोल होता है तथा सूर्य की ओर ही अपना मुंह किए रहता है इसीलिए लोग इसे सूरज मुखी कहते हैं।
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हमीरपुर - क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर में सर्वाइकल पीडि़तों की तादाद अचानक बढ़ गई है। इन दिनों लोग सर्वाइकल की चपेट में आकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसके चलते क्षेत्रीय अस्पताल में हड्डियों व मांसपेशियों में दर्द से पीडि़तों की संख्या में भी अचानक से बढ़ोतरी हुई है। गुरुवार को अस्पताल में सर्वाइकल पीडि़त बीस नए मरीज उजागर हुए हैं। क्षेत्रीय अस्पताल के अस्थि रोग विशेषज्ञ डा. रमेश चौहान ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दौड़भाग भरी जिंदगी के बीच घंटों मोबाइल, लैपटॉप और कम्प्यूटर के इस्तेमाल से लोगों पर सर्वाइकल का दर्द भारी पड़ रहा है। मोबाइल और कम्प्यूटर पर घंटों जूझने के कारण युवा पीढ़ी भी तेजी से सर्वाइकल की गिरफ्त में आ रही हैं। मौजूदा समय की बात करें तों 20 से 30 साल की उम्र में युवक-युवतियों में सर्वाइकल की बीमारी ज्यादा तेजी से फैल रही है। लंबी दूरी पर बाइक अदि पर सफर करने से भी सर्वाइकल लोगों पर हावी हो रही है।
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हमीरपुर - क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर में सर्वाइकल पीडि़तों की तादाद अचानक बढ़ गई है। इन दिनों लोग सर्वाइकल की चपेट में आकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसके चलते क्षेत्रीय अस्पताल में हड्डियों व मांसपेशियों में दर्द से पीडि़तों की संख्या में भी अचानक से बढ़ोतरी हुई है। गुरुवार को अस्पताल में सर्वाइकल पीडि़त बीस नए मरीज उजागर हुए हैं। क्षेत्रीय अस्पताल के अस्थि रोग विशेषज्ञ डा. रमेश चौहान ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दौड़भाग भरी जिंदगी के बीच घंटों मोबाइल, लैपटॉप और कम्प्यूटर के इस्तेमाल से लोगों पर सर्वाइकल का दर्द भारी पड़ रहा है। मोबाइल और कम्प्यूटर पर घंटों जूझने के कारण युवा पीढ़ी भी तेजी से सर्वाइकल की गिरफ्त में आ रही हैं। मौजूदा समय की बात करें तों बीस से तीस साल की उम्र में युवक-युवतियों में सर्वाइकल की बीमारी ज्यादा तेजी से फैल रही है। लंबी दूरी पर बाइक अदि पर सफर करने से भी सर्वाइकल लोगों पर हावी हो रही है।
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Ginger Benefits For Hair: बालों (Hair) को मजबूत बनाने, लम्बा और घना करने, टूटने-झड़ने से रोकने और बालों की चमक बढ़ाने के लिए अब तक आपने अपने बालों में कई अलग-अलग तरीकों को अपनाया होगा. लेकिन इस बार केवल एक चीज का इस्तेमाल करने से आपको अपने बालों में ये सारे फायदे (Benefits) एक साथ होते नज़र आएंगे. अब आप सोच रहे होंगे कि वो कौन सी चीज है. तो बता दें कि बालों में अदरक (Ginger) का इस्तेमाल आपको एक साथ कई फायदे दे सकता है. इसके साथ ही ये बालों और स्कैल्प सम्बधी कई और दिक्कतों को दूर करने में भी आपकी मदद कर सकता है. आइये जानते हैं कि बालों में अदरक का इस्तेमाल किस तरह से किया जाये और इसके इस्तेमाल से आपको क्या फायदे मिल सकते हैं.
बालों में अदरक के इस्तेमाल से आपके बालों में मजबूती आएगी साथ ही इनकी ग्रोथ भी बेहतर तरीके से हो सकेगी. इसके साथ ही इस मिश्रण से की गयी सर की मसाज से ब्लड सर्कुलेशन भी अच्छा होगा. इतना ही नहीं ये बालों को पोषण भी देगा जिससे बालों में चमक और नमी बढ़ेगी साथ ही बालों का रूखापन और टूटना-झड़ना भी कम हो जायेगा. इसके इस्तेमाल से डैंड्रफ और बालों के दोमुंहें होने की दिक्कत भी आसानी से दूर होगी.
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Ginger Benefits For Hair: बालों को मजबूत बनाने, लम्बा और घना करने, टूटने-झड़ने से रोकने और बालों की चमक बढ़ाने के लिए अब तक आपने अपने बालों में कई अलग-अलग तरीकों को अपनाया होगा. लेकिन इस बार केवल एक चीज का इस्तेमाल करने से आपको अपने बालों में ये सारे फायदे एक साथ होते नज़र आएंगे. अब आप सोच रहे होंगे कि वो कौन सी चीज है. तो बता दें कि बालों में अदरक का इस्तेमाल आपको एक साथ कई फायदे दे सकता है. इसके साथ ही ये बालों और स्कैल्प सम्बधी कई और दिक्कतों को दूर करने में भी आपकी मदद कर सकता है. आइये जानते हैं कि बालों में अदरक का इस्तेमाल किस तरह से किया जाये और इसके इस्तेमाल से आपको क्या फायदे मिल सकते हैं. बालों में अदरक के इस्तेमाल से आपके बालों में मजबूती आएगी साथ ही इनकी ग्रोथ भी बेहतर तरीके से हो सकेगी. इसके साथ ही इस मिश्रण से की गयी सर की मसाज से ब्लड सर्कुलेशन भी अच्छा होगा. इतना ही नहीं ये बालों को पोषण भी देगा जिससे बालों में चमक और नमी बढ़ेगी साथ ही बालों का रूखापन और टूटना-झड़ना भी कम हो जायेगा. इसके इस्तेमाल से डैंड्रफ और बालों के दोमुंहें होने की दिक्कत भी आसानी से दूर होगी.
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संवर्त्तक (बहुविकल्पी)
।"यह एक बहुविकल्पी शब्द का पृष्ठ है। अर्थात समान शीर्षक वाले लेखों की सूची। अगर आप यहाँ किसी भारतकोश की कड़ी के द्वारा भेजे गए है, तो कृपया उसे सुधार कर सीधे ही संबंधित लेख से जोड़ें, ताकि पाठक अगली बार सही पन्ने पर जा सकें।"
- संवर्त्तक - सूर्य के अनेक नामों से एक नाम है।
- संवर्त्तक (बलराम) - बलराम का एक अन्य नाम है।
- संवर्त्तक (हल) - बलराम के हल का नाम था।
- संवर्त्तक (नाग) - काद्रवेय नाग का नाम था।
- संवर्त्तक (अग्निदेव) - अग्निदेव का एक नाम था।
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संवर्त्तक ।"यह एक बहुविकल्पी शब्द का पृष्ठ है। अर्थात समान शीर्षक वाले लेखों की सूची। अगर आप यहाँ किसी भारतकोश की कड़ी के द्वारा भेजे गए है, तो कृपया उसे सुधार कर सीधे ही संबंधित लेख से जोड़ें, ताकि पाठक अगली बार सही पन्ने पर जा सकें।" - संवर्त्तक - सूर्य के अनेक नामों से एक नाम है। - संवर्त्तक - बलराम का एक अन्य नाम है। - संवर्त्तक - बलराम के हल का नाम था। - संवर्त्तक - काद्रवेय नाग का नाम था। - संवर्त्तक - अग्निदेव का एक नाम था।
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पहलगाम से 5 किमी. की दूरी पर बाईसरन एक आकर्षक चोटी है जहां से पर्यटक बर्फ ढके पर्वत, घने जंगल और शानदार घास के मैदान को देख सकते है। पहाड़ी की चोटी पर पर्यटकों को जाने की अनुमति है जहां से लिड्डर नदी घाटी और पहलगाम घाटी स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। आप पूरे परिवार के साथ यहां पिकनिक भी मना सकते हैं।
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पहलगाम से पाँच किमी. की दूरी पर बाईसरन एक आकर्षक चोटी है जहां से पर्यटक बर्फ ढके पर्वत, घने जंगल और शानदार घास के मैदान को देख सकते है। पहाड़ी की चोटी पर पर्यटकों को जाने की अनुमति है जहां से लिड्डर नदी घाटी और पहलगाम घाटी स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। आप पूरे परिवार के साथ यहां पिकनिक भी मना सकते हैं।
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भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद का केन्द्र कहने के अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि हमारे साथ जो कुछ हो रहा है उसके आधार पर और भी कठोर शब्द प्रयोग करना चाहिए था।
तीन दिवसीय यूरोप दौरे पर गए भारतीय विदेश मंत्री ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर बात करते हुए एक बार फिर पश्चिमी देशों की नीतियों और नेताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ऑस्ट्रियाई पब्लिक ब्रॉडकास्टर ओआरएफ़ से बात करते हुए एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों से लेकर, भारत-पाकिस्तान के बीच जंग की आशंकाओं और रूस के साथ भारत के गहरे रिश्तों से जुड़े सवालों पर जवाब दिए हैं।
पाकिस्तान को लेकर दिए गए कठोर बयान के बारे में जयशंकर ने कहा कि एक राजनयिक होने का मतलब ये नहीं है कि आप सच नहीं बोल सकते, मैं इपिसेंटर से ज़्यादा सख़्त शब्दों का इस्तेमाल कर सकता था, हमारे साथ जो कुछ हो रहा है, उसके हिसाब से इपिसेंटर एक बेहद कूटनीतिक शब्द है।
उन्होंने कहा कि ये वो देश है जिसने कुछ साल पहले हमारी संसद पर हमला किया था, इस देश ने मुंबई शहर पर हमला किया था, होटलों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों को निशाना बनाया था और ये देश हर रोज़ सीमा पार आतंकी भेजता है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय विदेश मंत्री के इस बयान का पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने न्यूयार्क में बड़े कठोर स्वर में जवाब दिया था जिस पर पूरे भारत में हंगामा खड़ा हो गया था।
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस के साथ भारत के क़रीबी रिश्तों पर किए गए सवाल के जवाब में कहा कि हमारा रूस के साथ एक लंबा रिश्ता है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर जयशंकर ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि 'हमने बार-बार स्पष्ट किया है कि ये संघर्ष किसी के हित में नहीं है, रूस के हित में भी नहीं।
इस इंटरव्यू के दौरान एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की गति धीमी होने को लेकर पश्चिमी देशों को निशाने पर लिया।
जयशंकर ने कहा कि आपके सामने एक ऐसी स्थिति होगी जब दुनिया की सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं होगा, ये संयुक्त राष्ट्र संघ के बारे में क्या बताता है।
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भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद का केन्द्र कहने के अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि हमारे साथ जो कुछ हो रहा है उसके आधार पर और भी कठोर शब्द प्रयोग करना चाहिए था। तीन दिवसीय यूरोप दौरे पर गए भारतीय विदेश मंत्री ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर बात करते हुए एक बार फिर पश्चिमी देशों की नीतियों और नेताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऑस्ट्रियाई पब्लिक ब्रॉडकास्टर ओआरएफ़ से बात करते हुए एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों से लेकर, भारत-पाकिस्तान के बीच जंग की आशंकाओं और रूस के साथ भारत के गहरे रिश्तों से जुड़े सवालों पर जवाब दिए हैं। पाकिस्तान को लेकर दिए गए कठोर बयान के बारे में जयशंकर ने कहा कि एक राजनयिक होने का मतलब ये नहीं है कि आप सच नहीं बोल सकते, मैं इपिसेंटर से ज़्यादा सख़्त शब्दों का इस्तेमाल कर सकता था, हमारे साथ जो कुछ हो रहा है, उसके हिसाब से इपिसेंटर एक बेहद कूटनीतिक शब्द है। उन्होंने कहा कि ये वो देश है जिसने कुछ साल पहले हमारी संसद पर हमला किया था, इस देश ने मुंबई शहर पर हमला किया था, होटलों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों को निशाना बनाया था और ये देश हर रोज़ सीमा पार आतंकी भेजता है। उल्लेखनीय है कि भारतीय विदेश मंत्री के इस बयान का पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने न्यूयार्क में बड़े कठोर स्वर में जवाब दिया था जिस पर पूरे भारत में हंगामा खड़ा हो गया था। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस के साथ भारत के क़रीबी रिश्तों पर किए गए सवाल के जवाब में कहा कि हमारा रूस के साथ एक लंबा रिश्ता है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर जयशंकर ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि 'हमने बार-बार स्पष्ट किया है कि ये संघर्ष किसी के हित में नहीं है, रूस के हित में भी नहीं। इस इंटरव्यू के दौरान एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की गति धीमी होने को लेकर पश्चिमी देशों को निशाने पर लिया। जयशंकर ने कहा कि आपके सामने एक ऐसी स्थिति होगी जब दुनिया की सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं होगा, ये संयुक्त राष्ट्र संघ के बारे में क्या बताता है। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने देश से वादा किया कि रूसी सैनिकों के कब्जे से अपने कस्बों और शहरों को वापस लेने के लिए जवाबी हमलों में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। जेलेंस्की ने एक वीडियो संदेश में कहा, " शायद अब आप में से कुछ को ऐसा लग रहा होगा कि लगातार सफलता के बाद अब सन्नाटा पसर गया है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह अगली कार्रवाई की तैयारी है . . . क्योंकि यूक्रेन को मुक्त कराना ही है। " यूक्रेन के सैन्य कमान ने कहा कि उसके बलों ने शनिवार को ओस्किल नदी के पूर्वी तट को सुरक्षित अपने कब्जे में ले लिया। यह नदी रूस से यूक्रेन में दक्षिण की ओर बहती है। इस बीच, रूस के सप्ताहांत में शहरों और कस्बों में गोले दागने के बाद ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने आगाह किया कि रूस नागरिक ठिकानों पर हमले बढ़ा सकता है क्योंकि युद्ध के मैदान में वह पिछड़ रहा है। मंत्रालय ने कहा, " पिछले सात दिन में रूस ने नागरिक ठिकानों पर हमले तेज किए हैं, यहां तक कि उन क्षेत्रों में भी जहां वह तत्काल कोई सैन्य चुनौती का सामना नहीं कर रहा है। रूस अग्रिम पंक्ति पर पिछड़ने के कारण संभवतः यूक्रेन के लोगों व सरकार के मनोबल को सीधे तौर पर निशाना बनाने के लिए ऐसे स्थानों पर हमलों की तैयारी कर रहा है। " खारकीव के गवर्नर ओलेह सिनीहुबोव ने बताया कि शनिवार को रूसी हमलों के दौरान खारकीव क्षेत्र में एक मनोरोग अस्पताल को खाली कराने का प्रयास कर रहे चार चिकित्सकों की मौत हो गई। हमले में दो मरीज घायल भी हो गए।
Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने देश से वादा किया कि रूसी सैनिकों के कब्जे से अपने कस्बों और शहरों को वापस लेने के लिए जवाबी हमलों में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। जेलेंस्की ने एक वीडियो संदेश में कहा, " शायद अब आप में से कुछ को ऐसा लग रहा होगा कि लगातार सफलता के बाद अब सन्नाटा पसर गया है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह अगली कार्रवाई की तैयारी है . . . क्योंकि यूक्रेन को मुक्त कराना ही है। " यूक्रेन के सैन्य कमान ने कहा कि उसके बलों ने शनिवार को ओस्किल नदी के पूर्वी तट को सुरक्षित अपने कब्जे में ले लिया। यह नदी रूस से यूक्रेन में दक्षिण की ओर बहती है। इस बीच, रूस के सप्ताहांत में शहरों और कस्बों में गोले दागने के बाद ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने आगाह किया कि रूस नागरिक ठिकानों पर हमले बढ़ा सकता है क्योंकि युद्ध के मैदान में वह पिछड़ रहा है। मंत्रालय ने कहा, " पिछले सात दिन में रूस ने नागरिक ठिकानों पर हमले तेज किए हैं, यहां तक कि उन क्षेत्रों में भी जहां वह तत्काल कोई सैन्य चुनौती का सामना नहीं कर रहा है। रूस अग्रिम पंक्ति पर पिछड़ने के कारण संभवतः यूक्रेन के लोगों व सरकार के मनोबल को सीधे तौर पर निशाना बनाने के लिए ऐसे स्थानों पर हमलों की तैयारी कर रहा है। " खारकीव के गवर्नर ओलेह सिनीहुबोव ने बताया कि शनिवार को रूसी हमलों के दौरान खारकीव क्षेत्र में एक मनोरोग अस्पताल को खाली कराने का प्रयास कर रहे चार चिकित्सकों की मौत हो गई। हमले में दो मरीज घायल भी हो गए। Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
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Team India (Photo Credit: Social Media)
नई दिल्लीः
India vs Australia 2nd Test: टीम इंडिया ने नागपुर टेस्ट (Nagpur Test) में ऑस्ट्रेलिया को पारी और 132 रनों से हराकर बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी (Border Gavaskar Trophy) का शानदार आगाज किया. इस टेस्ट मैच में भारतीय गेंदबाजों ने कंगारू टीम को दूसरी पारी में महज 91 रनों पर ही सिमटा दिया. इसके साथ ही टीम इंडिया (Team India) ने चार मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 की बढ़त ले ली है. सीरीज का दूसरा टेस्ट 17 फरवरी से दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जाएगा.
सीरीज से शुरु होने से पहले ही कंगारू टीम भारतीय स्पिनरों से डरी हुई थी. उन्होंने भारतीय स्पिनरों से निपटने के लिए खूब तैयारियां की. इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई टीम मैनेजमेंट ने रविचंद्रन अश्विन की स्पिन का तोड़ निकालने के लिए भारत के फर्स्ट क्लास क्रिकेटर महेश पिथिया को कैम्प में बुलाया था. महेश पिथिया (Mahesh Pithiya) का एक्शन अश्विन से मिलता-जुलता है और उनके गेंद पर कंगारु बल्लेबाजों ने जमकर प्रैक्टिस की. लेकिन, इसका कोई फायदा नहीं हुआ और अश्विन ने दूसरी पारी में 5 खिलाड़ियों को पवेलियन भेज कंगारू टीम को चारों खाने चित कर दिया.
अब टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने इसके लेकर ऑस्ट्रेलियाई टीम पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि मेहमान टीम को अब समझ में आ गया होगा कि असली नकली में फर्क होता है. कैफ ने तंज कसते हुआ कहा कि वह उम्मीद कर रहे हैं कि ऑस्ट्रेलियाई टीम दिल्ली टेस्ट (Delhi Test) की तैयारी के लिए रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) के डुप्लीकेट वर्जन की तलाश नहीं कर रही होगी.
मोहम्मद कैफ ने ट्विटर पर लिखा, 'ऑस्ट्रेलिया अब डुप्लीकेट अश्विन और असली अश्विन का सामना करने के बीच के अंतर को जानता है. आप एक युवा फर्स्ट क्लास का सामना करके मौजूदा दौर के महान खिलाड़ियों में से एक का सामना करने के लिए तैयार नहीं हो सकते. उम्मीद है कि अब वे दिल्ली में जडेजा के डुप्लीकेट की तलाश नहीं करेंगे.
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Team India नई दिल्लीः India vs Australia दोnd Test: टीम इंडिया ने नागपुर टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को पारी और एक सौ बत्तीस रनों से हराकर बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी का शानदार आगाज किया. इस टेस्ट मैच में भारतीय गेंदबाजों ने कंगारू टीम को दूसरी पारी में महज इक्यानवे रनों पर ही सिमटा दिया. इसके साथ ही टीम इंडिया ने चार मैचों की टेस्ट सीरीज में एक-शून्य की बढ़त ले ली है. सीरीज का दूसरा टेस्ट सत्रह फरवरी से दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जाएगा. सीरीज से शुरु होने से पहले ही कंगारू टीम भारतीय स्पिनरों से डरी हुई थी. उन्होंने भारतीय स्पिनरों से निपटने के लिए खूब तैयारियां की. इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई टीम मैनेजमेंट ने रविचंद्रन अश्विन की स्पिन का तोड़ निकालने के लिए भारत के फर्स्ट क्लास क्रिकेटर महेश पिथिया को कैम्प में बुलाया था. महेश पिथिया का एक्शन अश्विन से मिलता-जुलता है और उनके गेंद पर कंगारु बल्लेबाजों ने जमकर प्रैक्टिस की. लेकिन, इसका कोई फायदा नहीं हुआ और अश्विन ने दूसरी पारी में पाँच खिलाड़ियों को पवेलियन भेज कंगारू टीम को चारों खाने चित कर दिया. अब टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने इसके लेकर ऑस्ट्रेलियाई टीम पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि मेहमान टीम को अब समझ में आ गया होगा कि असली नकली में फर्क होता है. कैफ ने तंज कसते हुआ कहा कि वह उम्मीद कर रहे हैं कि ऑस्ट्रेलियाई टीम दिल्ली टेस्ट की तैयारी के लिए रवींद्र जडेजा के डुप्लीकेट वर्जन की तलाश नहीं कर रही होगी. मोहम्मद कैफ ने ट्विटर पर लिखा, 'ऑस्ट्रेलिया अब डुप्लीकेट अश्विन और असली अश्विन का सामना करने के बीच के अंतर को जानता है. आप एक युवा फर्स्ट क्लास का सामना करके मौजूदा दौर के महान खिलाड़ियों में से एक का सामना करने के लिए तैयार नहीं हो सकते. उम्मीद है कि अब वे दिल्ली में जडेजा के डुप्लीकेट की तलाश नहीं करेंगे.
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चौक बाजार स्थित रॉयल बूट हाउस सहित आधा दर्जन से अधिक दुकानों को कोरोना गाइडलाइन के उल्लंघन के मामले में जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने किया सील।
मुंगेर। मुंगेर के जिला पदाधिकारी श्री नवीन कुमार पुलिस अधीक्षक जेजे रेड्डी मास्क जांच अभियान के लिए शहर में सड़क पर उतरे। इसी दौरान उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल चौक एक नंबर ट्राफिक के पास स्थित साड़ी संसार के दुकान के अंदर ग्राहक तथा दुकानदार को मास्क नहीं पहने देख दुकान को सील करने का आदेश दिया। इसके बाद डीएम का काफिला बाटा चौक स्थित रॉयल बूट हाउस पहुंचा वहां भी दुकानदार मास्क नहीं पहने थे तथा ग्राहक भी बिना मास्क के अधिक संख्या में थे। इस कारण वहाँ भी रॉयल बूट हाउस को भी सील करने का आदेश दिया गया ।इसी तरह उन्होंने बेकापुर में सोनी ज्वेलर्स,में भी सिलबन्दी करवाई।।वे दोपहर 1:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक शहर के राजीव गांधी चौक ,बाटा चौक, दीनदयाल चौक ,गांधी चौक, बेकापुर किराना पट्टी ,पंजाब नेशनल बैंक होते हुए बड़ी बाजार कस्तूरबा चौक तक चले सघन मास्क जांच अभियान भागीदार बने। ने वन इंडिया फैमिली मार्ट का भी निरीक्षण किया।
डीएम का मास्क जांच अभियान किला परिसर अंबेडकर चौक से ही शुरू हो गया था । डीएम एसपी के साथ प्रभारी एसडीओ, एसडीपीओ ,सीओ, नगर निगम के सिटी मैनेजर कोतवाली थाना प्रभारी पूरब चौकी प्रभारी ,सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे। इस दौरान उन्होंने बिना मास्क के चल रहे लोगों से मास्क नहीं लगाने के कारण जुर्माना भी वसुलवाया और उन्हें मास्क भी दिया। इस दौरान ई रिक्शा टेंपो आदि पर यात्रियों का भी मास्क जांच किया गया तथा वाहन चालकों को निर्देश दिया गया कि बिना मास्क पहने किसी भी यात्री को नहीं बैठाना है नहीं तो उनसे जुर्माना वसूला जाएगा।
मौके पर डीएम ने बताया कि कोरोना गाइड का उल्लंघन करने के आरोप में आधा दर्जन से अधिक दुकानों को 48 से 72 घंटे के लिए सील किया गया है। उन्होंने कहा कि कोरोना तेजी से फैल रहा है ।सभी को नियम का सख्ती से पालन करना होगा ।नहीं तो प्रशासन कठोर कार्रवाई करेगी।
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चौक बाजार स्थित रॉयल बूट हाउस सहित आधा दर्जन से अधिक दुकानों को कोरोना गाइडलाइन के उल्लंघन के मामले में जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने किया सील। मुंगेर। मुंगेर के जिला पदाधिकारी श्री नवीन कुमार पुलिस अधीक्षक जेजे रेड्डी मास्क जांच अभियान के लिए शहर में सड़क पर उतरे। इसी दौरान उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल चौक एक नंबर ट्राफिक के पास स्थित साड़ी संसार के दुकान के अंदर ग्राहक तथा दुकानदार को मास्क नहीं पहने देख दुकान को सील करने का आदेश दिया। इसके बाद डीएम का काफिला बाटा चौक स्थित रॉयल बूट हाउस पहुंचा वहां भी दुकानदार मास्क नहीं पहने थे तथा ग्राहक भी बिना मास्क के अधिक संख्या में थे। इस कारण वहाँ भी रॉयल बूट हाउस को भी सील करने का आदेश दिया गया ।इसी तरह उन्होंने बेकापुर में सोनी ज्वेलर्स,में भी सिलबन्दी करवाई।।वे दोपहर एक:शून्य बजे से शाम चार:शून्य बजे तक शहर के राजीव गांधी चौक ,बाटा चौक, दीनदयाल चौक ,गांधी चौक, बेकापुर किराना पट्टी ,पंजाब नेशनल बैंक होते हुए बड़ी बाजार कस्तूरबा चौक तक चले सघन मास्क जांच अभियान भागीदार बने। ने वन इंडिया फैमिली मार्ट का भी निरीक्षण किया। डीएम का मास्क जांच अभियान किला परिसर अंबेडकर चौक से ही शुरू हो गया था । डीएम एसपी के साथ प्रभारी एसडीओ, एसडीपीओ ,सीओ, नगर निगम के सिटी मैनेजर कोतवाली थाना प्रभारी पूरब चौकी प्रभारी ,सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे। इस दौरान उन्होंने बिना मास्क के चल रहे लोगों से मास्क नहीं लगाने के कारण जुर्माना भी वसुलवाया और उन्हें मास्क भी दिया। इस दौरान ई रिक्शा टेंपो आदि पर यात्रियों का भी मास्क जांच किया गया तथा वाहन चालकों को निर्देश दिया गया कि बिना मास्क पहने किसी भी यात्री को नहीं बैठाना है नहीं तो उनसे जुर्माना वसूला जाएगा। मौके पर डीएम ने बताया कि कोरोना गाइड का उल्लंघन करने के आरोप में आधा दर्जन से अधिक दुकानों को अड़तालीस से बहत्तर घंटाटे के लिए सील किया गया है। उन्होंने कहा कि कोरोना तेजी से फैल रहा है ।सभी को नियम का सख्ती से पालन करना होगा ।नहीं तो प्रशासन कठोर कार्रवाई करेगी।
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डीजीपी मुख्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि मतदान के लिए जो केंद्रीय अर्धसैनिक बल यूपी को उपलब्ध कराया गया था वह मतगणना तक तैनात रहेगा। सभी मतगणना केंद्रों पर आब्जर्वर की तैनाती भी की गई है। उधर विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी अपने स्तर पर तैयारियां कर रखी है। समझा जा रहा है कि रिजल्ट आने के बाद यूपी की सियासत और गरमाएगी।
इंडिया न्यूज, लखनऊ।
UP MLC Election Result 2022 : आज के बाद यूपी की सियासत में और गर्मी देखने को मिल सकती है। क्योंकि एमएलसी चुनाव का रिजल्ट आज आएगा। स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र की 27 विधान परिषद सीटों पर मंगलवार को मतगणना सुबह आठ बजे से शुरू होगी। इन सीटों पर नौ अप्रैल को चुनाव हुआ था। मतगणना 27 जिलों के मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट में होगी। इसके लिए आयोग और पुलिस ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। डीजीपी मुख्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि मतदान के लिए जो केंद्रीय अर्धसैनिक बल यूपी को उपलब्ध कराया गया था वह मतगणना तक तैनात रहेगा।
सभी मतगणना केंद्रों पर आब्जर्वर की तैनाती भी की गई है। स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र की 35 निकाय सीटों पर 36 सदस्यों का चुनाव की प्रक्रिया चार फरवरी को शुरू हुई थी। लेकिन विधानसभा चुनाव के चलते इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया था। 25 मार्च तक इस चुनाव के लिए नामांकन जमा कराए गए। 36 सीटों में से 9 पर भाजपा के सदस्य निर्विरोध निर्वाचित घोषित हुए हैं।
मुरादाबाद-बिजनौर, रामपुर-बरेली, पीलीभीत-शाहजहांपुर, सीतापुर, लखनऊ-उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, बाराबंकी, बहराइच, आजमगढ़-मऊ, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, झांसी-जालौन-ललितपुर, कानपुर-फतेहपुर, इटावा-फर्रुखाबाद, आगरा-फिरोजाबाद, मेरठ-गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर-सहारनपुर, गोंडा, फैजाबाद, बस्ती-सिद्घार्थनगर, गोरखपुर-महाराजगंज, देवरिया और बलिया सीट के लिए 9 अप्रैल को मतदान हुआ था।
(UP MLC Election Result 2022)
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डीजीपी मुख्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि मतदान के लिए जो केंद्रीय अर्धसैनिक बल यूपी को उपलब्ध कराया गया था वह मतगणना तक तैनात रहेगा। सभी मतगणना केंद्रों पर आब्जर्वर की तैनाती भी की गई है। उधर विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी अपने स्तर पर तैयारियां कर रखी है। समझा जा रहा है कि रिजल्ट आने के बाद यूपी की सियासत और गरमाएगी। इंडिया न्यूज, लखनऊ। UP MLC Election Result दो हज़ार बाईस : आज के बाद यूपी की सियासत में और गर्मी देखने को मिल सकती है। क्योंकि एमएलसी चुनाव का रिजल्ट आज आएगा। स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र की सत्ताईस विधान परिषद सीटों पर मंगलवार को मतगणना सुबह आठ बजे से शुरू होगी। इन सीटों पर नौ अप्रैल को चुनाव हुआ था। मतगणना सत्ताईस जिलों के मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट में होगी। इसके लिए आयोग और पुलिस ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। डीजीपी मुख्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि मतदान के लिए जो केंद्रीय अर्धसैनिक बल यूपी को उपलब्ध कराया गया था वह मतगणना तक तैनात रहेगा। सभी मतगणना केंद्रों पर आब्जर्वर की तैनाती भी की गई है। स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र की पैंतीस निकाय सीटों पर छत्तीस सदस्यों का चुनाव की प्रक्रिया चार फरवरी को शुरू हुई थी। लेकिन विधानसभा चुनाव के चलते इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया था। पच्चीस मार्च तक इस चुनाव के लिए नामांकन जमा कराए गए। छत्तीस सीटों में से नौ पर भाजपा के सदस्य निर्विरोध निर्वाचित घोषित हुए हैं। मुरादाबाद-बिजनौर, रामपुर-बरेली, पीलीभीत-शाहजहांपुर, सीतापुर, लखनऊ-उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, बाराबंकी, बहराइच, आजमगढ़-मऊ, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, झांसी-जालौन-ललितपुर, कानपुर-फतेहपुर, इटावा-फर्रुखाबाद, आगरा-फिरोजाबाद, मेरठ-गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर-सहारनपुर, गोंडा, फैजाबाद, बस्ती-सिद्घार्थनगर, गोरखपुर-महाराजगंज, देवरिया और बलिया सीट के लिए नौ अप्रैल को मतदान हुआ था।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने दिसंबर 'रेपो रेट' में 35 आधार-अंकों की वृद्धि की घोषणा की. इस वर्ष यह पांचवीं वृद्धि थी. इस नयी वृद्धि से रेपो रेट 6. 25 प्रतिशत हो गई है. इस घोषणा की दिशा 'समायोजन की वापसी' के रूप कायम रखी गई.
इस साल के लिए मुद्रास्फीति दर 6. 7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है. आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 7 फीसदी से घटकर 6. 8 प्रतिशत किया गया है. हालांकि मुद्रास्फीति में कमी आई है लेकिन इसके बारे में रिजर्व बैंक के अपने अनुमानों के मद्देनजर ऐसा लगता है कि रिजर्व बैंक की मुद्रा नीति कमिटी (एमपीसी) मुद्रास्फीति पर ध्यान केंद्रित रखेगी. 'कोर' मुद्रास्फीति और 'एंकर' मुद्रास्फीति के बारे में अपेक्षाओं से आगे बढ़ने का स्पष्ट दावा स्वागतयोग्य है.
मुद्रास्फीति को लेकर चिंता, आर्थिक वृद्धि को लेकर उम्मीदों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में वृद्धि की संभावना को देखकर ऐसा लगता है कि रिजर्व बैंक सख्त मुद्रा नीति जारी रखेगा.
उपभोक्ता कीमत सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति सितंबर में 7. 4 फीसदी से थोड़ा घटकर अक्टूबर में 6. 8 फीसदी हुई. 'हेडलाइन' मुद्रास्फीति में गिरावट खाद्य सामग्री और ईंधन तक सीमित थी. 'कोर' मुद्रास्फीति (खाद्य सामग्री और ईंधन को छोड़कर सीपीआई) 6 फीसदी पर बनी रही. खाद्य सामग्री की कीमतों में कमी भी व्यापक आधार वाली नहीं थी. सब्जियों और खाद्य तेलों के दाम नरम पड़े मगर अनाजों के दाम 12 फीसदी बढ़ गए. खासकर चावल और गेहूं की कीमतें सरकारी एजेंसियों के पास इंका भंडार कम होने के कारण ऊंची बनी रह सकती हैं.
'कोर' मुद्रास्फीति एक साल से 6 फीसदी से ऊपर के स्तर पर बनी हुई है. खासकर 'घरेलू सामान और सेवाओं', पर्सनल केयर के सामान, मनोरंजन और खेलकूद के सामान की महंगाई अक्टूबर में 6 फीसदी से ऊपर थी.
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दुनियाभर उत्पादन सामग्री की कीमतें नरम हो रही हैं और कंपनियां लागत में कमी का लाभ उपभोक्ताओं में बांट रही हैं. धातुओं, रसायनों, वनस्पति तेलों की, जो मैनुफैक्चरिंग में प्रमुख सामग्री होती हैं, कीमतें घटने लगी हैं लेकिन उत्पादक और सर्विस प्रोवाइडर उपभोक्ताओं को इसका लाभ बहुत जल्दी नहीं देने वाले हैं. इसलिए 'कोर' मुद्रास्फीति आगामी महीनों में स्थिर रहेगी.
बास्केट खाद्य सामग्री की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में मासिक परिवर्तन का अंदाजा देने वाले 'एफएओ फूड प्राइस' सूचकांक (एफएफपीआई) में मार्च के शिखर बिंदु से निरंतर गिरावट देखी जा रही है. नवंबर का आंकड़ा बताता है कि अनाजों और दुग्ध तथा मांस उत्पादों की कीमतों में कमी आई लेकिन वनस्पति तेल महंगे हुए. आगामी महीनों में इन उत्पादों की कीमतों में उलटफेर से घरेलू खाद्य सामग्री की कीमतें प्रभावित होंगी.
दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में नवंबर माह में नाटकीय कमी देखी गई लेकिन आगे यह कई कारणों पर निर्भर होगा मसलन रूसी कच्चे तेल के समुद्र मार्ग से निर्यात पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंध और भावी उत्पादन में 'ओपेक' द्वारा कटौती करने के फैसले पर. कीमतों में ज्यादा गिरावट रोकने के लिए ओपेक उत्पादन में बड़ी कटौती करने की संकेत दे सकता है.
रिजर्व बैंक यह मान कर चल रहा है कि कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत प्रति बैरल 100 अमेरिकी डॉलर रहेगी और इसी के आधार पर वह मुद्रास्फीति के अपने अनुमान लगाएगा.
रिजर्व बैंक ने पॉलिसी रेट में जो वृद्धि की है वह विकसित देशों के केंद्रीय बैंकों की बड़बोली टिप्पणियों के अनुरूप है. रेट वृद्धि से रुपये को अगले सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से, जिसमें वह रेट में और वृद्धि की घोषणा करेगा, से पहले सहारा देगी.
रुपये ने नवंबर में सुधार दर्ज किया लेकिन डॉलर की मजबूती और चालू खाते के निरंतर घाटे के कारण वह दबाव में आ गया. अमेरिका और भारत में ब्याज दरों में घटता अंतर विदेश पूंजी के पलायन के कारण रुपये को चोट पहुंचा सकता है. फेड रिजर्व के गवर्नर ने ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूट में हाल में दिए भाषण में संकेत दिया कि दरों में वृद्धि की गति कम करने की गुंजाइश तो है लेकिन दरों में वृद्धि का चक्र अनुमान से लंबा हो सकता है.
गवर्नर ने कहा कि माल की महंगाई में तेजी से कमी आई है लेकिन सेवाओं की कीमतों में वृद्धि प्राथमिकता बनी रहेगी. इसलिए, दरों में वृद्धि का परिमाण घट सकता है लेकिन दरों में वृद्धि का चक्र जारी रह सकता है.
चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि के अनुमानों में कमी करने के बावजूद इसकी संभावनाएं अच्छी हैं. इसने रिजर्व बैंक के लिए मुद्रास्फीति पर काबू पाने की ज्यादा गुंजाइश बनाई है. दुनियाभर में रबी की अच्छी फसल की उम्मीद, संपर्कों के जरिए दी जाने वाली सेवाओं में विस्तार आदि आर्थिक वृद्धि के निरंतर विकास के संकेत देते हैं. क्रेडिट के मामले में व्यापक आधार वाली वृद्धि के साथ बड़े उद्योगों द्वारा तेजी से उधार लेने के कारण निवेश को बढ़ावा मिलेगा.
मैनुफैक्चरिंग तथा सर्विसेज सेक्टर के लिए पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) सरीखे सूचकांक नवंबर में तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए जो उत्पादन और घरेलू मांग में मजबूत तेजी दिखते हैं.
वैश्विक झटकों के सामने अर्थव्यवस्था के मजबूती से टिके रहने के कारण विश्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष में जीडीपी में वृद्धि के अपने अनुमान को 6. 5 फीसदी से बढ़ाकर 6. 9 फीसदी कर दिया है.
कुल मिलाकर, मुद्रास्फीति का अपने शिखर पर पहुंचना बीती बात भले हो गई हो, उस पर नजर रखना जरूरी है.
(राधिका पाण्डेय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी में कंसल्टेंट हैं. व्यक्त विचार निजी हैं)
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भारतीय रिजर्व बैंक ने दिसंबर 'रेपो रेट' में पैंतीस आधार-अंकों की वृद्धि की घोषणा की. इस वर्ष यह पांचवीं वृद्धि थी. इस नयी वृद्धि से रेपो रेट छः. पच्चीस प्रतिशत हो गई है. इस घोषणा की दिशा 'समायोजन की वापसी' के रूप कायम रखी गई. इस साल के लिए मुद्रास्फीति दर छः. सात फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है. आर्थिक वृद्धि के अनुमान को सात फीसदी से घटकर छः. आठ प्रतिशत किया गया है. हालांकि मुद्रास्फीति में कमी आई है लेकिन इसके बारे में रिजर्व बैंक के अपने अनुमानों के मद्देनजर ऐसा लगता है कि रिजर्व बैंक की मुद्रा नीति कमिटी मुद्रास्फीति पर ध्यान केंद्रित रखेगी. 'कोर' मुद्रास्फीति और 'एंकर' मुद्रास्फीति के बारे में अपेक्षाओं से आगे बढ़ने का स्पष्ट दावा स्वागतयोग्य है. मुद्रास्फीति को लेकर चिंता, आर्थिक वृद्धि को लेकर उम्मीदों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में वृद्धि की संभावना को देखकर ऐसा लगता है कि रिजर्व बैंक सख्त मुद्रा नीति जारी रखेगा. उपभोक्ता कीमत सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति सितंबर में सात. चार फीसदी से थोड़ा घटकर अक्टूबर में छः. आठ फीसदी हुई. 'हेडलाइन' मुद्रास्फीति में गिरावट खाद्य सामग्री और ईंधन तक सीमित थी. 'कोर' मुद्रास्फीति छः फीसदी पर बनी रही. खाद्य सामग्री की कीमतों में कमी भी व्यापक आधार वाली नहीं थी. सब्जियों और खाद्य तेलों के दाम नरम पड़े मगर अनाजों के दाम बारह फीसदी बढ़ गए. खासकर चावल और गेहूं की कीमतें सरकारी एजेंसियों के पास इंका भंडार कम होने के कारण ऊंची बनी रह सकती हैं. 'कोर' मुद्रास्फीति एक साल से छः फीसदी से ऊपर के स्तर पर बनी हुई है. खासकर 'घरेलू सामान और सेवाओं', पर्सनल केयर के सामान, मनोरंजन और खेलकूद के सामान की महंगाई अक्टूबर में छः फीसदी से ऊपर थी. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. दुनियाभर उत्पादन सामग्री की कीमतें नरम हो रही हैं और कंपनियां लागत में कमी का लाभ उपभोक्ताओं में बांट रही हैं. धातुओं, रसायनों, वनस्पति तेलों की, जो मैनुफैक्चरिंग में प्रमुख सामग्री होती हैं, कीमतें घटने लगी हैं लेकिन उत्पादक और सर्विस प्रोवाइडर उपभोक्ताओं को इसका लाभ बहुत जल्दी नहीं देने वाले हैं. इसलिए 'कोर' मुद्रास्फीति आगामी महीनों में स्थिर रहेगी. बास्केट खाद्य सामग्री की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में मासिक परिवर्तन का अंदाजा देने वाले 'एफएओ फूड प्राइस' सूचकांक में मार्च के शिखर बिंदु से निरंतर गिरावट देखी जा रही है. नवंबर का आंकड़ा बताता है कि अनाजों और दुग्ध तथा मांस उत्पादों की कीमतों में कमी आई लेकिन वनस्पति तेल महंगे हुए. आगामी महीनों में इन उत्पादों की कीमतों में उलटफेर से घरेलू खाद्य सामग्री की कीमतें प्रभावित होंगी. दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में नवंबर माह में नाटकीय कमी देखी गई लेकिन आगे यह कई कारणों पर निर्भर होगा मसलन रूसी कच्चे तेल के समुद्र मार्ग से निर्यात पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंध और भावी उत्पादन में 'ओपेक' द्वारा कटौती करने के फैसले पर. कीमतों में ज्यादा गिरावट रोकने के लिए ओपेक उत्पादन में बड़ी कटौती करने की संकेत दे सकता है. रिजर्व बैंक यह मान कर चल रहा है कि कच्चे तेल की औसत कीमत प्रति बैरल एक सौ अमेरिकी डॉलर रहेगी और इसी के आधार पर वह मुद्रास्फीति के अपने अनुमान लगाएगा. रिजर्व बैंक ने पॉलिसी रेट में जो वृद्धि की है वह विकसित देशों के केंद्रीय बैंकों की बड़बोली टिप्पणियों के अनुरूप है. रेट वृद्धि से रुपये को अगले सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से, जिसमें वह रेट में और वृद्धि की घोषणा करेगा, से पहले सहारा देगी. रुपये ने नवंबर में सुधार दर्ज किया लेकिन डॉलर की मजबूती और चालू खाते के निरंतर घाटे के कारण वह दबाव में आ गया. अमेरिका और भारत में ब्याज दरों में घटता अंतर विदेश पूंजी के पलायन के कारण रुपये को चोट पहुंचा सकता है. फेड रिजर्व के गवर्नर ने ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूट में हाल में दिए भाषण में संकेत दिया कि दरों में वृद्धि की गति कम करने की गुंजाइश तो है लेकिन दरों में वृद्धि का चक्र अनुमान से लंबा हो सकता है. गवर्नर ने कहा कि माल की महंगाई में तेजी से कमी आई है लेकिन सेवाओं की कीमतों में वृद्धि प्राथमिकता बनी रहेगी. इसलिए, दरों में वृद्धि का परिमाण घट सकता है लेकिन दरों में वृद्धि का चक्र जारी रह सकता है. चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि के अनुमानों में कमी करने के बावजूद इसकी संभावनाएं अच्छी हैं. इसने रिजर्व बैंक के लिए मुद्रास्फीति पर काबू पाने की ज्यादा गुंजाइश बनाई है. दुनियाभर में रबी की अच्छी फसल की उम्मीद, संपर्कों के जरिए दी जाने वाली सेवाओं में विस्तार आदि आर्थिक वृद्धि के निरंतर विकास के संकेत देते हैं. क्रेडिट के मामले में व्यापक आधार वाली वृद्धि के साथ बड़े उद्योगों द्वारा तेजी से उधार लेने के कारण निवेश को बढ़ावा मिलेगा. मैनुफैक्चरिंग तथा सर्विसेज सेक्टर के लिए पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स सरीखे सूचकांक नवंबर में तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए जो उत्पादन और घरेलू मांग में मजबूत तेजी दिखते हैं. वैश्विक झटकों के सामने अर्थव्यवस्था के मजबूती से टिके रहने के कारण विश्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष में जीडीपी में वृद्धि के अपने अनुमान को छः. पाँच फीसदी से बढ़ाकर छः. नौ फीसदी कर दिया है. कुल मिलाकर, मुद्रास्फीति का अपने शिखर पर पहुंचना बीती बात भले हो गई हो, उस पर नजर रखना जरूरी है.
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- #West-bengalWest Bengal Elections: पश्चिम बंगाल में चुनावों का अनिवार्य हिस्सा क्यों हो गयी है हिंसा?
पश्चिम बंगाल में उत्तर दिनाजपुर जिले के कलियागंज इलाके से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मजबूर पिता अपने 5 महीने के बेटे के शव को प्लास्टिक के बैग में ठूंसकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट यानी बस से 200 किलोमीटर का सफर तय कर घर पहुंचा।
ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि उसके पास एंबुलेंस को देने के लिए 8000 रुपए नहीं थे। जी, हां अस्पताल की एंबुलेंस ने शव को घर तक पहुंचाने के लिए रुपयों की डिमांड की। पिता देने में असमर्थ रहा तो एंबुलेंस नहीं मिली। मजबूरन उसे बैग में शव को रखकर बस के सहारे घर तक जाना पडा।
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मामला कालियागंज के मुस्तफानगर पंचायत के डांगापाड़ा गांव का है। यहां के निवासी असीम देवशर्मा ने बताया कि उसके 5 महीने के दो जुड़वा बेटों की तबीयत पिछले सप्ताह खराब हो गई थी। दोनों बेटों को रायगंज मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। कोई सुधार न होने पर दोनों बेटों को एनबीएमसीएच (उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल) में भर्ती कराया। यहां इलाज के दौरान एक बेटे की तबीयत में सुधार होते ही पत्नी उसे लेकर कालियागंज लौट गई। वहीं, दूसरे बेटे का इलाज चल रहा था।
पीड़ित देव शर्मा के मुताबिक, बीती शनिवार रात बेटे की इलाज के दौरान ही बेटे ने दम तोड दिया। जिसके बाद डॉक्टरों ने शव को परिवार के हवाले कर दिया। पीड़ित ने यह भी बताया कि एनबीएमसीएच की एंबुलेंस ने बेटे के शव को घर तक पहुंचाने के लिए 8 हजार रुपए मांगे। लेकिन, मेरे पास एंबुलेंस के लिए रुपए नहीं थे। बेटे के इलाज में ही 16 हजार का खर्चा हो गया था।
मजबूर पिता बेटे के शव को प्लास्टिक में लपेटकर बैग में रखकर बस से सिलीगुड़ी से रायगंज का 200 किमी का सफर तय कर अपने घर कालियागंज पहुंचा। मामले का वीडियो सोशल मीडिया में सामने आने के बाद एनबीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. संजय मल्लिक का कहना है कि मुझे घटनाक्रम की जानकारी नहीं है। फिलहाल, एनबीएमसीएच के पास अपनी कोई एंबुलेंस नहीं है। रोगी कल्याण समिति के फंड से ही मजबूर को मदद उपलब्ध करा पाते हैं।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने मामले का वीडियो ट्वीट कर कहा कि ये हैं आशिम देबशर्मा। सिलीगुड़ी के एक मेडिकल कॉलेज में 5 महीने के बच्चे की मौत के पिता। उनसे बच्चे के शव को ले जाने के लिए 8000 रुपए एंबुलेंस द्वारा मांगे जा रहे थे। दुर्भाग्य से बच्चे के इलाज में 16 हजार रुपए खर्च करने के बाद 8000 रुपए देने में असमर्थ रहा। इसलिए उन्होंने बच्चे के शव को एक बैग में रखा और कालियागंज के मुस्तफानगर गांव में अपने घर वापस जाने के लिए एक सार्वजनिक बस में सवार हो गए।
Bipasha Basu ने एयरपोर्ट पर हाथ से छिपाया बेटी देवी का चेहरा, पैप्स को कहा- 'बेटी की फोटो मत क्लिक करो'
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- #West-bengalWest Bengal Elections: पश्चिम बंगाल में चुनावों का अनिवार्य हिस्सा क्यों हो गयी है हिंसा? पश्चिम बंगाल में उत्तर दिनाजपुर जिले के कलियागंज इलाके से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मजबूर पिता अपने पाँच महीने के बेटे के शव को प्लास्टिक के बैग में ठूंसकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट यानी बस से दो सौ किलोग्राममीटर का सफर तय कर घर पहुंचा। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि उसके पास एंबुलेंस को देने के लिए आठ हज़ार रुपयापए नहीं थे। जी, हां अस्पताल की एंबुलेंस ने शव को घर तक पहुंचाने के लिए रुपयों की डिमांड की। पिता देने में असमर्थ रहा तो एंबुलेंस नहीं मिली। मजबूरन उसे बैग में शव को रखकर बस के सहारे घर तक जाना पडा। ? मामला कालियागंज के मुस्तफानगर पंचायत के डांगापाड़ा गांव का है। यहां के निवासी असीम देवशर्मा ने बताया कि उसके पाँच महीने के दो जुड़वा बेटों की तबीयत पिछले सप्ताह खराब हो गई थी। दोनों बेटों को रायगंज मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। कोई सुधार न होने पर दोनों बेटों को एनबीएमसीएच में भर्ती कराया। यहां इलाज के दौरान एक बेटे की तबीयत में सुधार होते ही पत्नी उसे लेकर कालियागंज लौट गई। वहीं, दूसरे बेटे का इलाज चल रहा था। पीड़ित देव शर्मा के मुताबिक, बीती शनिवार रात बेटे की इलाज के दौरान ही बेटे ने दम तोड दिया। जिसके बाद डॉक्टरों ने शव को परिवार के हवाले कर दिया। पीड़ित ने यह भी बताया कि एनबीएमसीएच की एंबुलेंस ने बेटे के शव को घर तक पहुंचाने के लिए आठ हजार रुपए मांगे। लेकिन, मेरे पास एंबुलेंस के लिए रुपए नहीं थे। बेटे के इलाज में ही सोलह हजार का खर्चा हो गया था। मजबूर पिता बेटे के शव को प्लास्टिक में लपेटकर बैग में रखकर बस से सिलीगुड़ी से रायगंज का दो सौ किमी का सफर तय कर अपने घर कालियागंज पहुंचा। मामले का वीडियो सोशल मीडिया में सामने आने के बाद एनबीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. संजय मल्लिक का कहना है कि मुझे घटनाक्रम की जानकारी नहीं है। फिलहाल, एनबीएमसीएच के पास अपनी कोई एंबुलेंस नहीं है। रोगी कल्याण समिति के फंड से ही मजबूर को मदद उपलब्ध करा पाते हैं। वहीं, नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने मामले का वीडियो ट्वीट कर कहा कि ये हैं आशिम देबशर्मा। सिलीगुड़ी के एक मेडिकल कॉलेज में पाँच महीने के बच्चे की मौत के पिता। उनसे बच्चे के शव को ले जाने के लिए आठ हज़ार रुपयापए एंबुलेंस द्वारा मांगे जा रहे थे। दुर्भाग्य से बच्चे के इलाज में सोलह हजार रुपए खर्च करने के बाद आठ हज़ार रुपयापए देने में असमर्थ रहा। इसलिए उन्होंने बच्चे के शव को एक बैग में रखा और कालियागंज के मुस्तफानगर गांव में अपने घर वापस जाने के लिए एक सार्वजनिक बस में सवार हो गए। Bipasha Basu ने एयरपोर्ट पर हाथ से छिपाया बेटी देवी का चेहरा, पैप्स को कहा- 'बेटी की फोटो मत क्लिक करो'
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हांगझोउ। हमेशा भारत को आंख दिखाने वाले चीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यहां के हांगझोउ शहर पहुंचते ही अपने सुर बदल लिए हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई मुलाकात के बाद जिनपिंग ने कहा कि भारत के साथ मुश्किल से रिश्ते बने हैं, इन्हें हम बिल्कुल भी बिगड़ने नहीं देंगे।
पीएम मोदी और शी की मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों में आई कड़वाहट को ध्यान में रखते हुए काफी अहम माना जा रहा है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपेक) सहित कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिनको लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच हाल में थोड़ा तनाव देखने को मिला है। वहीं दूसरी तरफ जी-20 के नेताओं की बैठक से इतर मोदी और शी के बीच की यह बैठक आज सुबह हांगझोउ वेस्ट लेक स्टेट गेस्टहाउस में हुई।
इस मुलाकात में जिनपिंग ने पीएम मोदी से कहा कि दोनों देशों को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए और अपने मतभेदों को सुलझाने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। जिनपिंग ने कहा कि हम एक दूसरे की चिंताओं का सम्मान करते हैं और विवादों वाले मुद्दों को रचनात्मक बातचीत से हल करें। कड़ी मेहनत से बने चीन-भारत के रिश्तों को बरकरार रखने के लिए चीन कड़ी मेहनत की इच्छा रखता है। वहीं मोदी ने कहा कि भारत-चीन साझेदारी इस क्षेत्र और पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण है।
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हांगझोउ। हमेशा भारत को आंख दिखाने वाले चीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यहां के हांगझोउ शहर पहुंचते ही अपने सुर बदल लिए हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई मुलाकात के बाद जिनपिंग ने कहा कि भारत के साथ मुश्किल से रिश्ते बने हैं, इन्हें हम बिल्कुल भी बिगड़ने नहीं देंगे। पीएम मोदी और शी की मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों में आई कड़वाहट को ध्यान में रखते हुए काफी अहम माना जा रहा है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे सहित कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिनको लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच हाल में थोड़ा तनाव देखने को मिला है। वहीं दूसरी तरफ जी-बीस के नेताओं की बैठक से इतर मोदी और शी के बीच की यह बैठक आज सुबह हांगझोउ वेस्ट लेक स्टेट गेस्टहाउस में हुई। इस मुलाकात में जिनपिंग ने पीएम मोदी से कहा कि दोनों देशों को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए और अपने मतभेदों को सुलझाने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। जिनपिंग ने कहा कि हम एक दूसरे की चिंताओं का सम्मान करते हैं और विवादों वाले मुद्दों को रचनात्मक बातचीत से हल करें। कड़ी मेहनत से बने चीन-भारत के रिश्तों को बरकरार रखने के लिए चीन कड़ी मेहनत की इच्छा रखता है। वहीं मोदी ने कहा कि भारत-चीन साझेदारी इस क्षेत्र और पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण है।
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शामली (उत्तर प्रदेश): शामली के कैराना में शुक्रवार को पटाखा फैक्ट्री में भयंकर विस्फोट हुआ, जिसमें चार लोगों की मौके पर मौत हो गई। धमाके में करीब एक दर्जन लोग घायल हुए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जानकारी के अनुसार, विस्फोट शाम करीब पौने पांच बजे हुआ। जिस पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ, वह कैराना में रजवाहे के पास स्थित है।
ब्लास्ट की इंटेंसिटी इतनी ज्यादा थी कि वहां मौजूद बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ गए। हादसे की सूचना पर पुलिस-प्रशासन के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे लोगों को निकालने का काम शुरू किया। मलबे से निकाले गए जिन लोगों को गंभीर चोट आई है, उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे में 4 लोगों को मौत हो चुकी है।
धमाके बहुत तेज हुआ था, जिसकी आवाज काफी दूर तक सुनाई दी थी। कहने के लिए जिस फैक्ट्री में विस्फोट हुआ है, वह अचार की फैक्ट्री थी लेकिन आशंका है कि फैक्ट्री में अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री में कई लोग काम करते थे। हालांकि, शुक्रवार होने की वजह से काफी लोग काम पर नहीं आए थे।
इससे पहले बीते साल शामली के कांधला में भी पटाखा फैक्ट्री में बड़ा हादसा हुआ था। इसके अलावा यहां आसपास कई और धमाके भी पहले हो चुके हैं। हाल ही में करनाल की एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हो गया था। नगला चौक के पास स्थित पटाखा फैक्ट्री में बारूद और कैमिकल मिलाते समय जबरदस्त ब्लास्ट हुआ था।
इस दौरान मिक्सिंग यूनिट में काम कर रहा एक कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गया था। बारूद में हुआ विस्फोट इतना जोरदार था कि पैकिंग यूनिट की छत पूरी तरह से ध्वस्त हो गई।
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शामली : शामली के कैराना में शुक्रवार को पटाखा फैक्ट्री में भयंकर विस्फोट हुआ, जिसमें चार लोगों की मौके पर मौत हो गई। धमाके में करीब एक दर्जन लोग घायल हुए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जानकारी के अनुसार, विस्फोट शाम करीब पौने पांच बजे हुआ। जिस पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ, वह कैराना में रजवाहे के पास स्थित है। ब्लास्ट की इंटेंसिटी इतनी ज्यादा थी कि वहां मौजूद बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ गए। हादसे की सूचना पर पुलिस-प्रशासन के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे लोगों को निकालने का काम शुरू किया। मलबे से निकाले गए जिन लोगों को गंभीर चोट आई है, उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे में चार लोगों को मौत हो चुकी है। धमाके बहुत तेज हुआ था, जिसकी आवाज काफी दूर तक सुनाई दी थी। कहने के लिए जिस फैक्ट्री में विस्फोट हुआ है, वह अचार की फैक्ट्री थी लेकिन आशंका है कि फैक्ट्री में अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री में कई लोग काम करते थे। हालांकि, शुक्रवार होने की वजह से काफी लोग काम पर नहीं आए थे। इससे पहले बीते साल शामली के कांधला में भी पटाखा फैक्ट्री में बड़ा हादसा हुआ था। इसके अलावा यहां आसपास कई और धमाके भी पहले हो चुके हैं। हाल ही में करनाल की एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हो गया था। नगला चौक के पास स्थित पटाखा फैक्ट्री में बारूद और कैमिकल मिलाते समय जबरदस्त ब्लास्ट हुआ था। इस दौरान मिक्सिंग यूनिट में काम कर रहा एक कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गया था। बारूद में हुआ विस्फोट इतना जोरदार था कि पैकिंग यूनिट की छत पूरी तरह से ध्वस्त हो गई।
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कहा जाता है कि सूर्य्य के उपादान तो सूक्ष्म हैं, परन्तु सूर्य बृहदाकार वाला है, और उसके इस वृहदाकार वाले होने ही का यह परिणाम है कि वह स्वयं प्रकाशक है, और उसमें सदैव प्रकाश वना रहता है । किस प्रकार प्रकाश उसमें बना रहता है, इसके सम्बन्ध में बादी कहता है कि उसके आकर्षक आकुञ्चक और भूकंपिक अधिगमन से ताप इतनी मात्रा में उत्पन्न हो जाता और होता रहता है, कि जो चिरकाल तक स्थित रहता है और उसके प्रकाश का हेतु हो जाता है । यह उदा हरण भी विपम है। प्रथम तो सूर्य्य जिन अणुओं से बना है, उनमें हैड्रोजन के अणु बहुतायत से होते हैं । उसके सिवा सूर्य्य में यदि सामूहिक रीति से प्रकाश चिरकाल तक रहता है, तो कौन कह सकता है कि हैड्रोजन के अणु कभी तापशून्य हो जाते हैं । परन्तु यदि यह भी मान लिया जावे कि निर्माण कर्ता अणुओं में जितनी प्रकाश की मात्रा है, सामूहिक रूप से आकर्षणादिक उत्पन्न हो जाने के कारण सूर्य का प्रकाश उस मात्रा से बहुत कुछ बढ़ जाता है, तो इससे भी उस पक्ष का समर्थन नहीं हुआ कि जड़ से चेतना उत्पन्न हो सकती है । ताप निर्माण अणुओं में है, वही ताप सूर्य में बढ़ी हुई मात्रा में हो जाता है । जिस श्रेणी की वस्तु ( ताप ) निर्माण कर्ता अणुओं में रहती है, उसी श्रेणी की वस्तु ( ताप ) सूर्य्य में । उदाहरण तो ऐसा खोजना चाहिये कि तिससे जड़ उपादान द्वारा चेतना की उत्पत्ति प्रमाणित हो सके, परन्तु ऐसा उदाहरण मिल नहीं सकता ।
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कहा जाता है कि सूर्य्य के उपादान तो सूक्ष्म हैं, परन्तु सूर्य बृहदाकार वाला है, और उसके इस वृहदाकार वाले होने ही का यह परिणाम है कि वह स्वयं प्रकाशक है, और उसमें सदैव प्रकाश वना रहता है । किस प्रकार प्रकाश उसमें बना रहता है, इसके सम्बन्ध में बादी कहता है कि उसके आकर्षक आकुञ्चक और भूकंपिक अधिगमन से ताप इतनी मात्रा में उत्पन्न हो जाता और होता रहता है, कि जो चिरकाल तक स्थित रहता है और उसके प्रकाश का हेतु हो जाता है । यह उदा हरण भी विपम है। प्रथम तो सूर्य्य जिन अणुओं से बना है, उनमें हैड्रोजन के अणु बहुतायत से होते हैं । उसके सिवा सूर्य्य में यदि सामूहिक रीति से प्रकाश चिरकाल तक रहता है, तो कौन कह सकता है कि हैड्रोजन के अणु कभी तापशून्य हो जाते हैं । परन्तु यदि यह भी मान लिया जावे कि निर्माण कर्ता अणुओं में जितनी प्रकाश की मात्रा है, सामूहिक रूप से आकर्षणादिक उत्पन्न हो जाने के कारण सूर्य का प्रकाश उस मात्रा से बहुत कुछ बढ़ जाता है, तो इससे भी उस पक्ष का समर्थन नहीं हुआ कि जड़ से चेतना उत्पन्न हो सकती है । ताप निर्माण अणुओं में है, वही ताप सूर्य में बढ़ी हुई मात्रा में हो जाता है । जिस श्रेणी की वस्तु निर्माण कर्ता अणुओं में रहती है, उसी श्रेणी की वस्तु सूर्य्य में । उदाहरण तो ऐसा खोजना चाहिये कि तिससे जड़ उपादान द्वारा चेतना की उत्पत्ति प्रमाणित हो सके, परन्तु ऐसा उदाहरण मिल नहीं सकता ।
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भारत और साउथ अफ्रीका (IND vs SA) के बीच खेले जा रहे पहले वनडे मैच में टीम इंडिया ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। तो वहीं पहले बल्लेबाजी करते हुए साउथ अफ्रीका टीम ने 40 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 249 रन बनाए। वहीं इस लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया को शुभमन गिल के बाद कप्तान शिखर धवन (Shikhar Dhawan) के रूप में दूसरा झटका लगा।
बता दें शिखर धवन (Shikhar Dhawan) कुछ खास प्रदर्शन नहीं दिखा पाए और वेन पार्नेल की गेंद पर क्लीन बोल्ड होकर पवेलियन लौट चुके है। वहीं आउट होने के दौरान गब्बर काफी निराश नजर आए। उनका वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
दरअसल भारत और साउथ अफ्रीका (IND vs SA) के बीच खेले जा रहे पहले वनडे मैच में साउथ अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 249 रन बनाए और भारत को 250 रनों का टारगेट दिया है। वहीं इस लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया की शुरुआत बेहद ही खराब नजर आई। जहां दोनों ही सलामी बल्लेबाजों ने सस्ते में अपना विकेट गंवाया।
बता दें छठे ओवर में आठ के स्कोर पर भारत को दूसरा झटका लगा। वेन पार्नेल ने कप्तान शिखर धवन (Shikhar Dhawan) को क्लीन बोल्ड किया। इस दौरान धवन 16 गेंदों में चार रन बना सके। बता दें वेन ने धवन के शरीर के पास डाली और गेंद को गब्बर ऑफ साइड पर खेलना चाहते थे, लेकिन गेंद अंदर आई और बल्ले का अंदरूनी किनाका लेती हुई स्टम्मस से जा टकराई। ऐसे में कप्तान खुद आउट होने के बाद निराश होते हुए पवेलियन की तरफ लौट गए।
Shikhar Dhawan has already Scored his last ODI Ton 3 years ago in CWC 19. We can't expect him to score even one more 100 from him. He will Retire with 17 ODI Tons. Bookmark this Tweet.
Shikhar dhawan need to perform now ! !
Shikhar Dhawan will play Legends Cricket from next year and will open with Sehwag.
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भारत और साउथ अफ्रीका के बीच खेले जा रहे पहले वनडे मैच में टीम इंडिया ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। तो वहीं पहले बल्लेबाजी करते हुए साउथ अफ्रीका टीम ने चालीस ओवर में चार विकेट के नुकसान पर दो सौ उनचास रन बनाए। वहीं इस लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया को शुभमन गिल के बाद कप्तान शिखर धवन के रूप में दूसरा झटका लगा। बता दें शिखर धवन कुछ खास प्रदर्शन नहीं दिखा पाए और वेन पार्नेल की गेंद पर क्लीन बोल्ड होकर पवेलियन लौट चुके है। वहीं आउट होने के दौरान गब्बर काफी निराश नजर आए। उनका वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दरअसल भारत और साउथ अफ्रीका के बीच खेले जा रहे पहले वनडे मैच में साउथ अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए दो सौ उनचास रन बनाए और भारत को दो सौ पचास रनों का टारगेट दिया है। वहीं इस लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया की शुरुआत बेहद ही खराब नजर आई। जहां दोनों ही सलामी बल्लेबाजों ने सस्ते में अपना विकेट गंवाया। बता दें छठे ओवर में आठ के स्कोर पर भारत को दूसरा झटका लगा। वेन पार्नेल ने कप्तान शिखर धवन को क्लीन बोल्ड किया। इस दौरान धवन सोलह गेंदों में चार रन बना सके। बता दें वेन ने धवन के शरीर के पास डाली और गेंद को गब्बर ऑफ साइड पर खेलना चाहते थे, लेकिन गेंद अंदर आई और बल्ले का अंदरूनी किनाका लेती हुई स्टम्मस से जा टकराई। ऐसे में कप्तान खुद आउट होने के बाद निराश होते हुए पवेलियन की तरफ लौट गए। Shikhar Dhawan has already Scored his last ODI Ton तीन years ago in CWC उन्नीस. We can't expect him to score even one more एक सौ from him. He will Retire with सत्रह ODI Tons. Bookmark this Tweet. Shikhar dhawan need to perform now ! ! Shikhar Dhawan will play Legends Cricket from next year and will open with Sehwag.
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दोपहर का समय था । येलिजावेता वसील्येव्ना ने दरवाजा खटखटाया और बताया कि कोई मिलने आया है । ब्लादीमिर इल्यीच लिखने में व्यस्त थे और काम का अध्रा नहीं छोड़ना चाहत थे। पर अगर कोई गरीव विमान सलाह मागन के लिए आता था, तो वह सब काम छोड़ देते थे । येलिजावेता वसील्यव्ना न विमान को प्रदर थाने के लिए वहा । उसका चेहरा रवाहीन और युरींदार था, हालाकि उम्र अभी कोई ज्यादा नहीं थी । किमान न देवप्रतिमा की खोज में वान में नजर डाली, पर वहा कुछ न पावर खिडकी की ओर मुह करवे ही अपन सीने पर सलीव बनाया ।
वैठिये, " ब्लादीमिर इल्यीच ने कहा ।
किसान लाल रुमाल मे वधी मटकी को पैरा के पास रखर नादीमिर इल्मोच द्वारा दिखायी गई कुर्सी पर बैठ गया।
ब्लादीमिर इल्पीच, मै वडी मुसीवत म ह । युद्ध सनाह दीजिये । वह देर तक बताता रहा कि कौन है, वहा से आया है और क्या मुसीवत उसपर टूट पड़ी है। हुआ यह था कि उसकी एक लड़की थी, जिसे उसन मजबूरी के कारण बीस रूबल पगार पर साल भर के लिए एक ज़मीदार के यहा काम करने भेजा था । लडकी अभी ग्यारह महीने ही वाम कर पायी थी कि घर पर मा बीमार पड गई। इतनी बीमार कि हिलडुल भी नहीं सकती थी । घर म छोटे भाई-बहना की पूरी पलटन थी । लडकी को काम छोडकर उनकी देखभाल के लिए घर लौटना पड़ा। मगर जमीदार न उसकी पगार देने से इकार पर दिया। कहा कि पूरे साल काम नहीं किया है ।
"तो क्या वह बेकार ही इन ग्यारह महीना तक कमर तोडती रही 2" किसान ने निराशा भरे स्वर मे वहा । 'क्या मामले को यो ही रहने दें "
"नही, या ही तो नहीं रहने देना चाहिये, नादीमिर इल्यीच ने ' दृढता वे साथ जवाब दिया और गुस्से मे भरकर तजी से कमरे म चहलकदमी करने लगे।
'सुनिये, हम ऐसा करते हैं हम इलाकाई हाकिमो के नाम एक अर्जी लिखकर याय की भाग करगे और जमीदार का मुकदमे की धमकी दगे, ' ब्लादीमिर इल्यीच ने कहा
फिर डेस्क के पास रुके, क्षण भर सोचते रहे और आधे घंटे बाद
अर्जी तैयार थी । वह काफी जोरदार शब्दो मे लिखी गई थी। व्लादीमिर इत्यीच ने किसान को विस्तार से बताया कि अर्जी किसे देनी है और क्या कहना है ।
याय आपके पक्ष में है, " ब्लादीमिर इल्यीच ने हौसला बधाया। हिम्मत न हारे । अगर पहली अर्जी भजूर नहीं होगी, तो फिर आना। हम और ऊपर के हाकिम को लिखेंगे और न्याय पावर रहगे ।
विमान ने टोपी को हाथा के बीच मसलते हुए व्लादीमिर इल्योन को धन्यवाद दिया और लाल रूमाल म बधी मटकी बढाते हुए नज कोस्तातीनोव्ना से कहा
मालकिन मैं और तो क्या दे सकता हूँ, पर यह थोडा सा मक्खन ही क्बूल कर लीजिये
"अरे रे, आप क्या बात करते है ।" नादेज्दा
नबोली ।
'नहीं, नही, मक्खन हमे नही चाहिये, " व्लादीमिर इत्यीच ने भी
किसान हैरान था कि ये लोग उससे कुछ लेने से इकार क्यों कर रह है। खर्जी तो व्लादीमिर इल्यीच ने ही तो लिखी थी। कितने अजब लाग ह ।
विसान अपने दिल में राजनीतिक निर्वासन की सजा पाये हुए उल्यानोत्र की शुभ स्मृति का सजोये चला गया । शूशेन्स्कोय में निर्वासन के काल में ब्लादीमिर इल्योच न न मालूम कितने किसानो के हृदया में अपनी शुभे स्मृति छोडी होगी ।
पिछले साल पहली मई का दिन व्लादीमिर इत्यीच ने अक्ल ही मनाय था । मगर इस बार नादेय कोन्स्तातीनोव्ना उनके साथ थी और उन्होंने पमला किया कि पहली मई वा त्रातिकारियों के ढंग से मनायेंगे ।
सुबह का नाश्ता किया, त्यौहार के दिन वे कपडे पहनकर तयार हो गय । तभी देखा कि दरवाजे पर उही की तरह के राजनीतिक निवासित पालिश नातिवारी प्रोमीन्स्वी खडे ह । शानदार सूट और टाई पहने हुए। "पहली मई मुबारक हा "
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दोपहर का समय था । येलिजावेता वसील्येव्ना ने दरवाजा खटखटाया और बताया कि कोई मिलने आया है । ब्लादीमिर इल्यीच लिखने में व्यस्त थे और काम का अध्रा नहीं छोड़ना चाहत थे। पर अगर कोई गरीव विमान सलाह मागन के लिए आता था, तो वह सब काम छोड़ देते थे । येलिजावेता वसील्यव्ना न विमान को प्रदर थाने के लिए वहा । उसका चेहरा रवाहीन और युरींदार था, हालाकि उम्र अभी कोई ज्यादा नहीं थी । किमान न देवप्रतिमा की खोज में वान में नजर डाली, पर वहा कुछ न पावर खिडकी की ओर मुह करवे ही अपन सीने पर सलीव बनाया । वैठिये, " ब्लादीमिर इल्यीच ने कहा । किसान लाल रुमाल मे वधी मटकी को पैरा के पास रखर नादीमिर इल्मोच द्वारा दिखायी गई कुर्सी पर बैठ गया। ब्लादीमिर इल्पीच, मै वडी मुसीवत म ह । युद्ध सनाह दीजिये । वह देर तक बताता रहा कि कौन है, वहा से आया है और क्या मुसीवत उसपर टूट पड़ी है। हुआ यह था कि उसकी एक लड़की थी, जिसे उसन मजबूरी के कारण बीस रूबल पगार पर साल भर के लिए एक ज़मीदार के यहा काम करने भेजा था । लडकी अभी ग्यारह महीने ही वाम कर पायी थी कि घर पर मा बीमार पड गई। इतनी बीमार कि हिलडुल भी नहीं सकती थी । घर म छोटे भाई-बहना की पूरी पलटन थी । लडकी को काम छोडकर उनकी देखभाल के लिए घर लौटना पड़ा। मगर जमीदार न उसकी पगार देने से इकार पर दिया। कहा कि पूरे साल काम नहीं किया है । "तो क्या वह बेकार ही इन ग्यारह महीना तक कमर तोडती रही दो" किसान ने निराशा भरे स्वर मे वहा । 'क्या मामले को यो ही रहने दें " "नही, या ही तो नहीं रहने देना चाहिये, नादीमिर इल्यीच ने ' दृढता वे साथ जवाब दिया और गुस्से मे भरकर तजी से कमरे म चहलकदमी करने लगे। 'सुनिये, हम ऐसा करते हैं हम इलाकाई हाकिमो के नाम एक अर्जी लिखकर याय की भाग करगे और जमीदार का मुकदमे की धमकी दगे, ' ब्लादीमिर इल्यीच ने कहा फिर डेस्क के पास रुके, क्षण भर सोचते रहे और आधे घंटे बाद अर्जी तैयार थी । वह काफी जोरदार शब्दो मे लिखी गई थी। व्लादीमिर इत्यीच ने किसान को विस्तार से बताया कि अर्जी किसे देनी है और क्या कहना है । याय आपके पक्ष में है, " ब्लादीमिर इल्यीच ने हौसला बधाया। हिम्मत न हारे । अगर पहली अर्जी भजूर नहीं होगी, तो फिर आना। हम और ऊपर के हाकिम को लिखेंगे और न्याय पावर रहगे । विमान ने टोपी को हाथा के बीच मसलते हुए व्लादीमिर इल्योन को धन्यवाद दिया और लाल रूमाल म बधी मटकी बढाते हुए नज कोस्तातीनोव्ना से कहा मालकिन मैं और तो क्या दे सकता हूँ, पर यह थोडा सा मक्खन ही क्बूल कर लीजिये "अरे रे, आप क्या बात करते है ।" नादेज्दा नबोली । 'नहीं, नही, मक्खन हमे नही चाहिये, " व्लादीमिर इत्यीच ने भी किसान हैरान था कि ये लोग उससे कुछ लेने से इकार क्यों कर रह है। खर्जी तो व्लादीमिर इल्यीच ने ही तो लिखी थी। कितने अजब लाग ह । विसान अपने दिल में राजनीतिक निर्वासन की सजा पाये हुए उल्यानोत्र की शुभ स्मृति का सजोये चला गया । शूशेन्स्कोय में निर्वासन के काल में ब्लादीमिर इल्योच न न मालूम कितने किसानो के हृदया में अपनी शुभे स्मृति छोडी होगी । पिछले साल पहली मई का दिन व्लादीमिर इत्यीच ने अक्ल ही मनाय था । मगर इस बार नादेय कोन्स्तातीनोव्ना उनके साथ थी और उन्होंने पमला किया कि पहली मई वा त्रातिकारियों के ढंग से मनायेंगे । सुबह का नाश्ता किया, त्यौहार के दिन वे कपडे पहनकर तयार हो गय । तभी देखा कि दरवाजे पर उही की तरह के राजनीतिक निवासित पालिश नातिवारी प्रोमीन्स्वी खडे ह । शानदार सूट और टाई पहने हुए। "पहली मई मुबारक हा "
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लिये, की है, उसका पूर्ण उरलेख नहीं किया जा सकता । यह बात जनता तथा सरकार दोनों के सामने है और शिक्षा विभाग के सभी हृदयवान् व्यक्ति इसे अच्छी तरह समझते होगे। गत दो वर्षों के भीतर निरक्षरता निवारण-कार्य में 'भंडार' दिल्कुल ही अप्रसर हो हाथ बँटा रहा है। इसे सेवा नहीं, वरन् त्याग कहना चाहिये । मैं तो ऐसा कहना अपना कर्त्तव्य समझता हूँ कि आधुनिक बिहार को बनाने तथा इसका पूर्व गौरव लौटाने में 'भंडार' तथा इसके अध्यक्ष श्रीराम लोचनशरणजी का बड़ा हाथ है। इन दोनों की उत्तरोत्तर उन्नति हो ।
श्रीगुरुदयालप्रसाद, बी. ए., डिप-एड्, स्कूल सब इंसपेक्टर, महुआ, मुजफ्फरपुर
शिक्षा विभाग से सात वर्षों के निकटतम सम्बन्ध ने यह अनुभव करा दिया है कि 'पुस्तक भंडार' विद्यार्थियों के लिये पारिवारिक शब्द हो गया है। 'भंडार' के अध्यक्ष शरणजी ने जिस द्रुत गति से बाल साहित्य का निर्माण किया है वह सर्वथा स्तुत्य और अभिनन्दनीय है। बिहार की पाठ्य पुस्तकों में जो कायापलट के लक्षण दृष्टिगोचर होते हैं वह केवल शरणजी के ही कारण ।
'बालक' मासिक पत्र तो बालक-बालिकाओं का सच्चा साथी, युवकों का मित्र तथा यूढ़ों की गोद का खिलौना बन रहा है। वह भंडार के प्रतिष्ठाता तथा अध्यक्ष 'मास्टर साहब' जैसे अध्यवसायी, निपुण, सहृदय तथा समय की परख रखनेवाले पिता को पाकर फूला नहीं समाता । शरणजी की ठोस सेवाएँ बिहार के साहित्यिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखी जायेंगी।
श्रीरामगुलाम राय, स्कूल सब इंसपेक्टर, बेगूसराय, मुंगेरपुस्तक-भंडार ने साहित्यिक, ऐतिहासिक तथा अन्य पठनीय पुस्तकों को प्रकाशित कर हिन्दी साहित्य की बड़ी सेवा की है और बालोपयोगी मासिक पत्र 'बालक' द्वारा बालकों में हिन्दी पढ़ने और लिखने की रुचि पैदा कर दी है। निरक्षरता- निवारण कार्य में अनपदों के लिये 'भंडार' ने उपयुक्त शब्द-पट तथा ग्रंथमाला तैयार कर बहुत बड़ा सहयोग प्रदान किया है। ईश्वर इस 'भंडार' को सदा भरपूर रक्खें कि यह सर्वदा हिन्दी का भरण-पोषण करता रहे ।
श्रीसुरेन्द्र लाहिडी, स्कूल सब इंसपेक्टर, पाकुरपुस्तक-भंडार केवल पुस्तकों का ही नहीं, वरन् विद्या और बुद्धि का भी एक बड़ा भंडार है। जिस सच्ची लगन एवं निष्ठा से इसने निरक्षरता-निवारण में अपना हाथ बँटाया, वह यथार्थ में प्रशंसनीय है। पुस्तक भंडार की सहायता के विना निरक्षरतानिवारण आन्दोलन का सफल होना कठिन ही नहीं, असम्भव था। इसका सारा श्रेय इसके यशोधन अध्यक्ष श्रीमान् रामलोचनशरणजी 'बिहारी' को ही है ।
श्रीरघुनन्दन पाण्डेय, सब इंसपेक्टर स्कूल्स, तेघरा -
पुस्तक-भंडार हिन्दी भाषा तथा साहित्य की जो सेवा करता भा रहा है, वह वर्णनानीत तथा अकथनीय है। इस विषय में पुस्तक भंडार ने हिन्दी संसार में बिहार का मुख उज्ज्वल किया है और अब बिहार किसी भी प्रान्त से साहित्य सेवा में पिछड़ा हुआ नहीं है। इस शुभ कार्य का सारा श्रेय श्रीरामलोचनशरणजी को है । 'भडार' से निकला हुआ 'बालक' सर्वप्रिय, मनोमोहक तथा चित्ताकर्षक मासिक पत्र है ।
श्रीरमाकान्त मिश्र, बी. ए., डिपू-इन-इडी., सब इंसपेक्टर, स्कूल्स, मुंगेरपुस्तक-भंडार बिहार का गौरव है । साहित्य-शैली को सरल एवं सरस बनाने में यह सर्वदा तत्पर रहता है। 'बालक' नामक मासिक पत्र निकालकर इसने समस्त हिन्दी भाषा-भाषी बालकों के हृदयों में हिन्दी साहित्य के लिये अभिरुचि उत्पन्न कर दी है। वालोपयोगी पत्र-पत्रिकाओं में 'बालक' का स्थान सर्वोत्कृष्ट है। बिहार में साहित्य की उन्नति तथा यहाँ के साहित्य सेवियों की प्रतिष्ठा वृद्धि की ओर इसका विशेष ध्यान रहा है। सर्वांगसुन्दर पुस्तकें निकालकर इसने हिन्दी साहित्य की बड़ी सेवा की है तथा बिहार का मस्तक ऊँचा किया है। इसके अध्यक्ष श्रीमान् रामलोचनशरणजी 'बिहारी' एक सरल, उदार तथा निःस्वार्थ साहित्य-सेवी हैं। 'भंडार' दिनानुदिन उन्नति की ओर अग्रसर हो ।
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लिये, की है, उसका पूर्ण उरलेख नहीं किया जा सकता । यह बात जनता तथा सरकार दोनों के सामने है और शिक्षा विभाग के सभी हृदयवान् व्यक्ति इसे अच्छी तरह समझते होगे। गत दो वर्षों के भीतर निरक्षरता निवारण-कार्य में 'भंडार' दिल्कुल ही अप्रसर हो हाथ बँटा रहा है। इसे सेवा नहीं, वरन् त्याग कहना चाहिये । मैं तो ऐसा कहना अपना कर्त्तव्य समझता हूँ कि आधुनिक बिहार को बनाने तथा इसका पूर्व गौरव लौटाने में 'भंडार' तथा इसके अध्यक्ष श्रीराम लोचनशरणजी का बड़ा हाथ है। इन दोनों की उत्तरोत्तर उन्नति हो । श्रीगुरुदयालप्रसाद, बी. ए., डिप-एड्, स्कूल सब इंसपेक्टर, महुआ, मुजफ्फरपुर शिक्षा विभाग से सात वर्षों के निकटतम सम्बन्ध ने यह अनुभव करा दिया है कि 'पुस्तक भंडार' विद्यार्थियों के लिये पारिवारिक शब्द हो गया है। 'भंडार' के अध्यक्ष शरणजी ने जिस द्रुत गति से बाल साहित्य का निर्माण किया है वह सर्वथा स्तुत्य और अभिनन्दनीय है। बिहार की पाठ्य पुस्तकों में जो कायापलट के लक्षण दृष्टिगोचर होते हैं वह केवल शरणजी के ही कारण । 'बालक' मासिक पत्र तो बालक-बालिकाओं का सच्चा साथी, युवकों का मित्र तथा यूढ़ों की गोद का खिलौना बन रहा है। वह भंडार के प्रतिष्ठाता तथा अध्यक्ष 'मास्टर साहब' जैसे अध्यवसायी, निपुण, सहृदय तथा समय की परख रखनेवाले पिता को पाकर फूला नहीं समाता । शरणजी की ठोस सेवाएँ बिहार के साहित्यिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखी जायेंगी। श्रीरामगुलाम राय, स्कूल सब इंसपेक्टर, बेगूसराय, मुंगेरपुस्तक-भंडार ने साहित्यिक, ऐतिहासिक तथा अन्य पठनीय पुस्तकों को प्रकाशित कर हिन्दी साहित्य की बड़ी सेवा की है और बालोपयोगी मासिक पत्र 'बालक' द्वारा बालकों में हिन्दी पढ़ने और लिखने की रुचि पैदा कर दी है। निरक्षरता- निवारण कार्य में अनपदों के लिये 'भंडार' ने उपयुक्त शब्द-पट तथा ग्रंथमाला तैयार कर बहुत बड़ा सहयोग प्रदान किया है। ईश्वर इस 'भंडार' को सदा भरपूर रक्खें कि यह सर्वदा हिन्दी का भरण-पोषण करता रहे । श्रीसुरेन्द्र लाहिडी, स्कूल सब इंसपेक्टर, पाकुरपुस्तक-भंडार केवल पुस्तकों का ही नहीं, वरन् विद्या और बुद्धि का भी एक बड़ा भंडार है। जिस सच्ची लगन एवं निष्ठा से इसने निरक्षरता-निवारण में अपना हाथ बँटाया, वह यथार्थ में प्रशंसनीय है। पुस्तक भंडार की सहायता के विना निरक्षरतानिवारण आन्दोलन का सफल होना कठिन ही नहीं, असम्भव था। इसका सारा श्रेय इसके यशोधन अध्यक्ष श्रीमान् रामलोचनशरणजी 'बिहारी' को ही है । श्रीरघुनन्दन पाण्डेय, सब इंसपेक्टर स्कूल्स, तेघरा - पुस्तक-भंडार हिन्दी भाषा तथा साहित्य की जो सेवा करता भा रहा है, वह वर्णनानीत तथा अकथनीय है। इस विषय में पुस्तक भंडार ने हिन्दी संसार में बिहार का मुख उज्ज्वल किया है और अब बिहार किसी भी प्रान्त से साहित्य सेवा में पिछड़ा हुआ नहीं है। इस शुभ कार्य का सारा श्रेय श्रीरामलोचनशरणजी को है । 'भडार' से निकला हुआ 'बालक' सर्वप्रिय, मनोमोहक तथा चित्ताकर्षक मासिक पत्र है । श्रीरमाकान्त मिश्र, बी. ए., डिपू-इन-इडी., सब इंसपेक्टर, स्कूल्स, मुंगेरपुस्तक-भंडार बिहार का गौरव है । साहित्य-शैली को सरल एवं सरस बनाने में यह सर्वदा तत्पर रहता है। 'बालक' नामक मासिक पत्र निकालकर इसने समस्त हिन्दी भाषा-भाषी बालकों के हृदयों में हिन्दी साहित्य के लिये अभिरुचि उत्पन्न कर दी है। वालोपयोगी पत्र-पत्रिकाओं में 'बालक' का स्थान सर्वोत्कृष्ट है। बिहार में साहित्य की उन्नति तथा यहाँ के साहित्य सेवियों की प्रतिष्ठा वृद्धि की ओर इसका विशेष ध्यान रहा है। सर्वांगसुन्दर पुस्तकें निकालकर इसने हिन्दी साहित्य की बड़ी सेवा की है तथा बिहार का मस्तक ऊँचा किया है। इसके अध्यक्ष श्रीमान् रामलोचनशरणजी 'बिहारी' एक सरल, उदार तथा निःस्वार्थ साहित्य-सेवी हैं। 'भंडार' दिनानुदिन उन्नति की ओर अग्रसर हो ।
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गर्मी बढ़ने के साथ देश में बिजली कटौती की समस्या भी विकराल होती जा रही है। बिजली कटौती के पीछे कोयले की कमी वजह बताई जा रही है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि देश में पर्याप्त कोयला भंडार है और बिजली कटौती की पीछे कोयले की कमी वाला तर्क सही नहीं है।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश से लेकर पंजाब जैसे सूबों से बिजली कटौती की खबरें आ रही हैं। उपभोक्ता सोशल मीडिया पर शिकायत कर रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने बिजली कटौती के बहाने पंजाब की AAP सरकार को घेरा है।
कितना गंभीर है बिजली संकट? देश के तमाम राज्य बिजली कटौती का सामना कर रहे हैं। यूपी में 20 हजार मेगावाट की मांग है, जबकि आपूर्ति 18-19 हजार मेगावाट ही हो पा रही है। इसी तरह उत्तराखंड में 2468 मेगावाट की मांग है जबकि आपूर्ति 1320 मेगावाट की है। दूसरे राज्यों में भी करीबन यही स्थिति है।
उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां नोएडा, गाजियाबाद जैसे नो पावर कट जोन में भी बिजली कटौती की जा रही है। राजधानी लखनऊ से भी कटौती की खबरें। ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर कटौती की जा रही है।
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गर्मी बढ़ने के साथ देश में बिजली कटौती की समस्या भी विकराल होती जा रही है। बिजली कटौती के पीछे कोयले की कमी वजह बताई जा रही है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि देश में पर्याप्त कोयला भंडार है और बिजली कटौती की पीछे कोयले की कमी वाला तर्क सही नहीं है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश से लेकर पंजाब जैसे सूबों से बिजली कटौती की खबरें आ रही हैं। उपभोक्ता सोशल मीडिया पर शिकायत कर रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने बिजली कटौती के बहाने पंजाब की AAP सरकार को घेरा है। कितना गंभीर है बिजली संकट? देश के तमाम राज्य बिजली कटौती का सामना कर रहे हैं। यूपी में बीस हजार मेगावाट की मांग है, जबकि आपूर्ति अट्ठारह-उन्नीस हजार मेगावाट ही हो पा रही है। इसी तरह उत्तराखंड में दो हज़ार चार सौ अड़सठ मेगावाट की मांग है जबकि आपूर्ति एक हज़ार तीन सौ बीस मेगावाट की है। दूसरे राज्यों में भी करीबन यही स्थिति है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां नोएडा, गाजियाबाद जैसे नो पावर कट जोन में भी बिजली कटौती की जा रही है। राजधानी लखनऊ से भी कटौती की खबरें। ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर कटौती की जा रही है।
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पीएम मोदी लगातार उत्तर प्रदेश को सौगात दे रहे हैं। आज मंगलवार को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के कानपुर के दौरे पर थे। उन्होंने यहां आईआईटी कानपुर से मोती झील तक कानपुर मेट्रो रेल परियोजना का शुभारंभ किया। इस मेट्रो परियोजना को दो साल के रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया। जिसकी लंबाई नौ किलोमीटर है। इस दौरान पीएम मोदी ने मेट्रो की सवारी भी की।
बता दें कि इससे पहले इसी माह की 23 तारीख को पीएम मोदी वाराणसी में अमूल प्लांट की आधारशिला रखी थी। उन्होंने इस दौरान हिसानों को प्राकृतिक खेती करने का भी आह्वान किया था। पीएम मोदी इस समय प्राकृतिक खेती के फायदे भी बताये थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानपुर में अत्याधुनिक कानपुर मेट्रो ट्रेन में सवारी की उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी भी थे।
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पीएम मोदी लगातार उत्तर प्रदेश को सौगात दे रहे हैं। आज मंगलवार को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के कानपुर के दौरे पर थे। उन्होंने यहां आईआईटी कानपुर से मोती झील तक कानपुर मेट्रो रेल परियोजना का शुभारंभ किया। इस मेट्रो परियोजना को दो साल के रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया। जिसकी लंबाई नौ किलोमीटर है। इस दौरान पीएम मोदी ने मेट्रो की सवारी भी की। बता दें कि इससे पहले इसी माह की तेईस तारीख को पीएम मोदी वाराणसी में अमूल प्लांट की आधारशिला रखी थी। उन्होंने इस दौरान हिसानों को प्राकृतिक खेती करने का भी आह्वान किया था। पीएम मोदी इस समय प्राकृतिक खेती के फायदे भी बताये थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानपुर में अत्याधुनिक कानपुर मेट्रो ट्रेन में सवारी की उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी भी थे।
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शादी यानी ढोल, नगाड़ा, बारातियों का बेसुध नाचना, हंगामा, ठिठोली, रस्मो-रिवाज और बहुत सारी मस्ती। अरे, अरे शादियों में एक जरूरी आइटम तो भूल ही गए- असलहे यानी बंदूक, रिवॉल्वर, राइफल, पिस्तौल से फायरिंग। लाइसेंसी नहीं है तो गैरलाइंसेंसी तमंचा तो है ही। बारात है तो फिर वह भी तो चाहिए न-बोतल-सोतल, दारू-सारू, नशा-वशा। शक्ति प्रदर्शन की न जाने कौन-सी मानसिकता इस तरह की आत्मघाती परंपराओं को कायम रखे हुए है? नकली रोब दिखाने का मंसूबा तब तक पूरा होता नहीं दिखता जब तक खुशी के मौकों पर फायरिंग न हो। भले ही कोई ढेर ही क्यों न हो जाए। कभी-कभी तो 'तमंचे पर डिस्को' ने शादी के सरताज तक को नहीं बख्शा है। इस नुमाइशी शौक ने तो कई बार दूल्हा-दुलहन का ही काम तमाम कर दिया है। शादी- विवाह या दूसरे खुशी के अवसरों पर होने वाली फायरिंग से सैकड़ों घर उजड़े हैं। देश के हर कोने से विवाह के मौके पर शक्ति प्रदर्शन की वजह से कइयों की मौतें हुई हैं और जाने कितने घायल हुए हैं। बारातों की खुशी को पल भर में मातम में बदलते देखा गया है। असलहों का शौक इतना गहरा है कि इससे हमारे साधु संत भी नहीं बचे हैं। घर संसार का मोह छोड़ चुकी साध्वी भी जब वर वधू को आशीर्वाद देने पहुंचीं तो फायरिंग कर दीं, जिससे तीन चार घर उजाड़ गए। बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब जैसे राज्यों में तो शादियों में जो जितने राउंड गोली चलाता है वह उतना ही ताकतवर माना जाता है। इसी ताकत के प्रदर्शन में सैंकड़ो राउंड गोली चलाना फैशन बन गया है।
पिछले पांच दिसंबर को पंजाब के बठिंडा जिले के मोड़ मंडी में शादी के दौरान एक गोली चली और गर्भवती डांसर कुलविंदर कौर की मौत हो गई। कुलविंदर को गोली उस समय लगी जब स्टेज पर चार लड़कियां डांस कर रही थीं। अचानक स्टेज के बिल्कुल सामने एक युवक ने बंदूक से फायरिंग की। गोली स्टेज पर डांस कर रही कुलविंदर को लग गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। गोली चलाने वाला आरोपी युवक तुरंत बंदूक फेंककर घटनास्थल से फरार हो गया। कुलविंदर शादियों में चलाई जा रही गोलियों की न तो पहली शिकार हैं न आखिरी। कुलविंदर से पहले भी तमाम लोग इस तरह की घटना के शिकार हुए हैं और अगर प्रशासन अब भी नहीं चेतता है तो लोग शिकार होते रहेंगे। हरियाणा के करनाल में तो अखिल भारतीय हिंदू महासभा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष साध्वी देवा ठाकुर एक शादी समारोह में गई थीं। वहां साध्वी और उनके सुरक्षा गार्ड ने फायरिंग की। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार घायल हो गए थे। दिल्ली में 17 दिसंबर को सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी के बेटे ने नशे में धुत होकर गोली चलाई, जिससे कैटरिंग के एक कर्मचारी की मौत हो गई। 11 दिसंबर को शादी के मौके पर दुलहन के भाई की हर्ष फायरिंग में मौत हो गई।
अहम सवाल है कि क्यों असलहा आज शादियों में इतना महत्त्वपूर्ण हो गया है? क्यों और कब यह हमारे परिवारों और खुशियों का अहम हिस्सा बन गया? क्या शादियों में असलहे लहराए बिना शादियां नहीं हो सकतीं? इन सवालों को समाजशास्त्री सीधे तौर पर बाजारवाद से जोड़ते हैं। समाजाविज्ञानी बद्रीनारायण बताते हैं कि असलहों का प्रदर्शन सामंतवाद से प्रभावित है। ये देन भी सामंतवाद की ही है। शक्ति प्रदर्शन पुराने जमाने में जरूरी होता था। राजे रजवाड़ों के यहां शादी विवाह के मौकों पर प्रशिक्षित तलवार बाज आदि आते थे। शादी और खुशी के मौकों पर कई तरह के खेल खेले जाते थे। असलहों का प्रदर्शन किया जाता था। बदलते समय के साथ तलवार की जगह दुनाली, तमंचे और बंदूकों ने ली। जब शादी विवाह के मौकों पर वे अपनी सामर्थ्य और शक्ति का प्रदर्शन करते तो हैं गांव वाले, मुहल्ले वाले देखते हैं। सामंतीयुग में दूल्हा-दुलहन के परिवार वाले एक दूसरे से ज्यादा ताकतवर दिखने के लिए हवाई फायरिंग किया करते थे। जैसे ही समय बदला बाजारवाद आया। ऐसा लगा कि इन हथियारों का का चलन कम होगा, लेकिन यह और बढ़ गया। हथियारों को कहीं और कभी भी चलाने के विरुद्ध कठोर कानून है।
लाइसेंसी हथियार भी केवल आत्मरक्षा में ही चलाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के वकील राज के सिंह बताते हैं कि 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने शादी-विवाह आदि खुशी के अवसरों पर फायरिंग को गैरकानूनी घोषित कर दिया था, लेकिन न तो इस पर पुलिस का ध्यान है न ही प्रशासन का। यही वजह है कि कई राज्यों में जहां सामंती मानसिकता और दबंगई सिर चढ कर बोलती है, वहां शादी-विवाह तो छोड़िए, हर बात पर असलहों का प्रदर्शन किया जाता है। और बड़े हादसे के बाद पुलिस हाथ मलती नजर आती है। आजादी के बाद समाज में डकैतों आदि का खतरा होता था, तब सरकारों ने आत्मरक्षा के लिए असलहों के लाइसेंस थोक के भाव जारी किए। लेकिन अब जब पुलिस सक्षम है, ऐसे समय में घर-घर में असलहे रखने का कोई तुक नहीं है। इस पर लगाम लगाए जाने की जरूरत है। शादी की रस्मो में वर पक्ष का दुलहन के परिवार से ज्यादा महत्त्वपूर्ण होने का भ्रम हमारा समाज सदियों से पाले हुए है। वधू पक्ष के द्वारा किए गए इंतजाम का वर पक्ष के सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतिबिंब होने का ढकोसला भी खूब होता है। कुछ शहरी इलाकों को छोड़ दें तो बारात के स्वागत से लेकर विदा होने तक दुलहन के परिवार की तरफ से हो रहे हर प्रकार के इंतजामों को दूल्हे के परिवार वालों की तरफ से न जाने कितने ही मापदंडो पर तौला जाता है। मतलब, इस तरह का माहौल होता हैं जहां अगर आप लड़के वालों की तरफ से हैं तो आपको पूरा अधिकार है, अपनी ताकत की नुमाइश करने का और इसका विरोध होने की संभावना नाम मात्र भी नहीं होती। सदियों से हथियारों को ही ताकत से जोड़कर देखा जाता है। तो इस तरह के माहौल में कुछ हवाई फायर तो बस यों ही हो जाती है।
शादियों में नशा, खासकर शराब पीने का चलन भी तेजी से बढ़ा है। नशा और हथियारों की संगत ही दुर्घटनाओं को जन्म देती है। हथियार थामने वाले हाथ लड़खड़ाते हैं। कुछ लड़खड़ाहटें तो नाच गाने तक सीमित रह जाती है, लेकिन सामाजिक प्रतिष्ठा की गलत परिभाषा पढ़ कर आए लोगों के हाथ अपने आप बंदूक तक पहुंच जाते हैं। और फिर जो कुछ होता है, उसकी सिर्फ कहानी ही रह जाती है। मुहावरा है कि बोली और गोली कभी वापस नहीं आती। अगर बंदूक खुले आसमान की तरफ भी तनी है तो भी गोली चलने तक इसका मुंह किसी और की तरफ मुड़ गया तो तबाही निश्चित है। अमूमन इस तरह के किस्से कानून की गिरफ्त से दूर ही रखे जाते हैं लेकिन कोई तबाह जरूर हुआ होता है। अगर ये खबरों की सुर्खिया बन भी जाएं तो चंद ही दिनों में हमारा सभ्य समाज इसे भुलाने में ही अक्लमंदी समझता है और शायद इसलिए कोई हल नहीं निकल पाता। लेकिन इस बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि अगर कुछ लोगों में शक्ति के प्रदर्शन में गोलीबारी को स्थान दिया है तो कुछ ऐसे लोग इसका सिरे से बहिष्कार भी करते हैं। एक शादी का कार्ड उस समय चर्चा में आ गया जब उसमें लिखा गया कि शराब पीनेवाले और असलहावाले लोग शादी में न आएं। किसी भी किस्म की हर्ष फायरिंग पूरे देश में मना है। फिर भी यह रुक नहीं रही। उत्तर प्रदेश में पिछले महीने भर के भीतर दस लोग हर्ष फायरिंग में मारे गए हैं। उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि हर्ष फायरिंग में धाराएं तो वही लगाई जाती हैं जो किसी जघन्य अपराध में लगाई जानी हैं। चूंकि फायरिंग किसी को मारने के इरादे से नहीं होती, इसलिए अक्सर इसमें गैरइरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाता है। अक्सर मारने वाला और मरने वाला एक ही परिवार या रिश्तेदारी का होता है इसलिए भी न तो लोग पैरवी करते हैं और न ही गवाही-बयान देने सामने आते हैं। इस वजह से मामले तार्किक परिणति तक नहीं पहुंच पाते। हालांकि, ऐसे मामलों में असलहों के लाइसेंस रद्द करने का आदेश है और कई बार लाइसेंस निरस्त भी किए जाते हैं। लेकिन देखा गया है कि अधिकतर फायरिंग गैरलाइसेंसी हथियारों जैसे कट्टों-तमंचों से की जाती है। मेरठ, मुंगेर और अब मध्यप्रदेश के खारगोन में धड़ल्ले से अवैध हथियारों का धंधा चल रहा है। देशी तमंचे दो-चार हजार रुपए में ही आसानी से मिल जाते हैं। अवैध हथियारों के मामले में कई बार पुलिस भी लाचार नजर आती है।
हथियार पास में रखने और शादी-विवाह में फायरिंग को मनोचिकित्सक एक अलग नजर से देखते हैं। उनका मानना है कि बाजारवाद, दबंगई और फिल्मों ने इसे खूब बढ़ावा दिया है। उसे फैशन में शामिल कर दिया है। बात बात पर तंमचा निकालना ताकतवर होने की फैशन की निशानी बना दिया गया है। बिहार, उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में तो स्थानीय भाषाओं में बनाए जाने वाले गानों में तमंचे को लेकर कई गाने बनाए गए हैं। इससे युवा वर्ग भी प्रभावित होता है। यहां तक की बॉलीवुड में भी 'तमंचे पर डिस्को' जैसे गाने लोगों को खूब आकर्षित करते रहे हैं। और जब भी समारोहों में गाने बजाए जाते हैं तो डीजे से पहली फरमाइश तमंचे पर डिस्को जैसे गानों की ही होती है।
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शादी यानी ढोल, नगाड़ा, बारातियों का बेसुध नाचना, हंगामा, ठिठोली, रस्मो-रिवाज और बहुत सारी मस्ती। अरे, अरे शादियों में एक जरूरी आइटम तो भूल ही गए- असलहे यानी बंदूक, रिवॉल्वर, राइफल, पिस्तौल से फायरिंग। लाइसेंसी नहीं है तो गैरलाइंसेंसी तमंचा तो है ही। बारात है तो फिर वह भी तो चाहिए न-बोतल-सोतल, दारू-सारू, नशा-वशा। शक्ति प्रदर्शन की न जाने कौन-सी मानसिकता इस तरह की आत्मघाती परंपराओं को कायम रखे हुए है? नकली रोब दिखाने का मंसूबा तब तक पूरा होता नहीं दिखता जब तक खुशी के मौकों पर फायरिंग न हो। भले ही कोई ढेर ही क्यों न हो जाए। कभी-कभी तो 'तमंचे पर डिस्को' ने शादी के सरताज तक को नहीं बख्शा है। इस नुमाइशी शौक ने तो कई बार दूल्हा-दुलहन का ही काम तमाम कर दिया है। शादी- विवाह या दूसरे खुशी के अवसरों पर होने वाली फायरिंग से सैकड़ों घर उजड़े हैं। देश के हर कोने से विवाह के मौके पर शक्ति प्रदर्शन की वजह से कइयों की मौतें हुई हैं और जाने कितने घायल हुए हैं। बारातों की खुशी को पल भर में मातम में बदलते देखा गया है। असलहों का शौक इतना गहरा है कि इससे हमारे साधु संत भी नहीं बचे हैं। घर संसार का मोह छोड़ चुकी साध्वी भी जब वर वधू को आशीर्वाद देने पहुंचीं तो फायरिंग कर दीं, जिससे तीन चार घर उजाड़ गए। बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब जैसे राज्यों में तो शादियों में जो जितने राउंड गोली चलाता है वह उतना ही ताकतवर माना जाता है। इसी ताकत के प्रदर्शन में सैंकड़ो राउंड गोली चलाना फैशन बन गया है। पिछले पांच दिसंबर को पंजाब के बठिंडा जिले के मोड़ मंडी में शादी के दौरान एक गोली चली और गर्भवती डांसर कुलविंदर कौर की मौत हो गई। कुलविंदर को गोली उस समय लगी जब स्टेज पर चार लड़कियां डांस कर रही थीं। अचानक स्टेज के बिल्कुल सामने एक युवक ने बंदूक से फायरिंग की। गोली स्टेज पर डांस कर रही कुलविंदर को लग गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। गोली चलाने वाला आरोपी युवक तुरंत बंदूक फेंककर घटनास्थल से फरार हो गया। कुलविंदर शादियों में चलाई जा रही गोलियों की न तो पहली शिकार हैं न आखिरी। कुलविंदर से पहले भी तमाम लोग इस तरह की घटना के शिकार हुए हैं और अगर प्रशासन अब भी नहीं चेतता है तो लोग शिकार होते रहेंगे। हरियाणा के करनाल में तो अखिल भारतीय हिंदू महासभा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष साध्वी देवा ठाकुर एक शादी समारोह में गई थीं। वहां साध्वी और उनके सुरक्षा गार्ड ने फायरिंग की। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार घायल हो गए थे। दिल्ली में सत्रह दिसंबर को सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी के बेटे ने नशे में धुत होकर गोली चलाई, जिससे कैटरिंग के एक कर्मचारी की मौत हो गई। ग्यारह दिसंबर को शादी के मौके पर दुलहन के भाई की हर्ष फायरिंग में मौत हो गई। अहम सवाल है कि क्यों असलहा आज शादियों में इतना महत्त्वपूर्ण हो गया है? क्यों और कब यह हमारे परिवारों और खुशियों का अहम हिस्सा बन गया? क्या शादियों में असलहे लहराए बिना शादियां नहीं हो सकतीं? इन सवालों को समाजशास्त्री सीधे तौर पर बाजारवाद से जोड़ते हैं। समाजाविज्ञानी बद्रीनारायण बताते हैं कि असलहों का प्रदर्शन सामंतवाद से प्रभावित है। ये देन भी सामंतवाद की ही है। शक्ति प्रदर्शन पुराने जमाने में जरूरी होता था। राजे रजवाड़ों के यहां शादी विवाह के मौकों पर प्रशिक्षित तलवार बाज आदि आते थे। शादी और खुशी के मौकों पर कई तरह के खेल खेले जाते थे। असलहों का प्रदर्शन किया जाता था। बदलते समय के साथ तलवार की जगह दुनाली, तमंचे और बंदूकों ने ली। जब शादी विवाह के मौकों पर वे अपनी सामर्थ्य और शक्ति का प्रदर्शन करते तो हैं गांव वाले, मुहल्ले वाले देखते हैं। सामंतीयुग में दूल्हा-दुलहन के परिवार वाले एक दूसरे से ज्यादा ताकतवर दिखने के लिए हवाई फायरिंग किया करते थे। जैसे ही समय बदला बाजारवाद आया। ऐसा लगा कि इन हथियारों का का चलन कम होगा, लेकिन यह और बढ़ गया। हथियारों को कहीं और कभी भी चलाने के विरुद्ध कठोर कानून है। लाइसेंसी हथियार भी केवल आत्मरक्षा में ही चलाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के वकील राज के सिंह बताते हैं कि दो हज़ार तेरह में सर्वोच्च न्यायालय ने शादी-विवाह आदि खुशी के अवसरों पर फायरिंग को गैरकानूनी घोषित कर दिया था, लेकिन न तो इस पर पुलिस का ध्यान है न ही प्रशासन का। यही वजह है कि कई राज्यों में जहां सामंती मानसिकता और दबंगई सिर चढ कर बोलती है, वहां शादी-विवाह तो छोड़िए, हर बात पर असलहों का प्रदर्शन किया जाता है। और बड़े हादसे के बाद पुलिस हाथ मलती नजर आती है। आजादी के बाद समाज में डकैतों आदि का खतरा होता था, तब सरकारों ने आत्मरक्षा के लिए असलहों के लाइसेंस थोक के भाव जारी किए। लेकिन अब जब पुलिस सक्षम है, ऐसे समय में घर-घर में असलहे रखने का कोई तुक नहीं है। इस पर लगाम लगाए जाने की जरूरत है। शादी की रस्मो में वर पक्ष का दुलहन के परिवार से ज्यादा महत्त्वपूर्ण होने का भ्रम हमारा समाज सदियों से पाले हुए है। वधू पक्ष के द्वारा किए गए इंतजाम का वर पक्ष के सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतिबिंब होने का ढकोसला भी खूब होता है। कुछ शहरी इलाकों को छोड़ दें तो बारात के स्वागत से लेकर विदा होने तक दुलहन के परिवार की तरफ से हो रहे हर प्रकार के इंतजामों को दूल्हे के परिवार वालों की तरफ से न जाने कितने ही मापदंडो पर तौला जाता है। मतलब, इस तरह का माहौल होता हैं जहां अगर आप लड़के वालों की तरफ से हैं तो आपको पूरा अधिकार है, अपनी ताकत की नुमाइश करने का और इसका विरोध होने की संभावना नाम मात्र भी नहीं होती। सदियों से हथियारों को ही ताकत से जोड़कर देखा जाता है। तो इस तरह के माहौल में कुछ हवाई फायर तो बस यों ही हो जाती है। शादियों में नशा, खासकर शराब पीने का चलन भी तेजी से बढ़ा है। नशा और हथियारों की संगत ही दुर्घटनाओं को जन्म देती है। हथियार थामने वाले हाथ लड़खड़ाते हैं। कुछ लड़खड़ाहटें तो नाच गाने तक सीमित रह जाती है, लेकिन सामाजिक प्रतिष्ठा की गलत परिभाषा पढ़ कर आए लोगों के हाथ अपने आप बंदूक तक पहुंच जाते हैं। और फिर जो कुछ होता है, उसकी सिर्फ कहानी ही रह जाती है। मुहावरा है कि बोली और गोली कभी वापस नहीं आती। अगर बंदूक खुले आसमान की तरफ भी तनी है तो भी गोली चलने तक इसका मुंह किसी और की तरफ मुड़ गया तो तबाही निश्चित है। अमूमन इस तरह के किस्से कानून की गिरफ्त से दूर ही रखे जाते हैं लेकिन कोई तबाह जरूर हुआ होता है। अगर ये खबरों की सुर्खिया बन भी जाएं तो चंद ही दिनों में हमारा सभ्य समाज इसे भुलाने में ही अक्लमंदी समझता है और शायद इसलिए कोई हल नहीं निकल पाता। लेकिन इस बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि अगर कुछ लोगों में शक्ति के प्रदर्शन में गोलीबारी को स्थान दिया है तो कुछ ऐसे लोग इसका सिरे से बहिष्कार भी करते हैं। एक शादी का कार्ड उस समय चर्चा में आ गया जब उसमें लिखा गया कि शराब पीनेवाले और असलहावाले लोग शादी में न आएं। किसी भी किस्म की हर्ष फायरिंग पूरे देश में मना है। फिर भी यह रुक नहीं रही। उत्तर प्रदेश में पिछले महीने भर के भीतर दस लोग हर्ष फायरिंग में मारे गए हैं। उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि हर्ष फायरिंग में धाराएं तो वही लगाई जाती हैं जो किसी जघन्य अपराध में लगाई जानी हैं। चूंकि फायरिंग किसी को मारने के इरादे से नहीं होती, इसलिए अक्सर इसमें गैरइरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाता है। अक्सर मारने वाला और मरने वाला एक ही परिवार या रिश्तेदारी का होता है इसलिए भी न तो लोग पैरवी करते हैं और न ही गवाही-बयान देने सामने आते हैं। इस वजह से मामले तार्किक परिणति तक नहीं पहुंच पाते। हालांकि, ऐसे मामलों में असलहों के लाइसेंस रद्द करने का आदेश है और कई बार लाइसेंस निरस्त भी किए जाते हैं। लेकिन देखा गया है कि अधिकतर फायरिंग गैरलाइसेंसी हथियारों जैसे कट्टों-तमंचों से की जाती है। मेरठ, मुंगेर और अब मध्यप्रदेश के खारगोन में धड़ल्ले से अवैध हथियारों का धंधा चल रहा है। देशी तमंचे दो-चार हजार रुपए में ही आसानी से मिल जाते हैं। अवैध हथियारों के मामले में कई बार पुलिस भी लाचार नजर आती है। हथियार पास में रखने और शादी-विवाह में फायरिंग को मनोचिकित्सक एक अलग नजर से देखते हैं। उनका मानना है कि बाजारवाद, दबंगई और फिल्मों ने इसे खूब बढ़ावा दिया है। उसे फैशन में शामिल कर दिया है। बात बात पर तंमचा निकालना ताकतवर होने की फैशन की निशानी बना दिया गया है। बिहार, उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में तो स्थानीय भाषाओं में बनाए जाने वाले गानों में तमंचे को लेकर कई गाने बनाए गए हैं। इससे युवा वर्ग भी प्रभावित होता है। यहां तक की बॉलीवुड में भी 'तमंचे पर डिस्को' जैसे गाने लोगों को खूब आकर्षित करते रहे हैं। और जब भी समारोहों में गाने बजाए जाते हैं तो डीजे से पहली फरमाइश तमंचे पर डिस्को जैसे गानों की ही होती है।
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एक मास्टर की डिग्री क्रमिक स्तर पर छात्रों के लिए अध्ययन की एक इकाई है। एक कार्यक्रम का पीछा करने वाले छात्रों के पास अपने करियर की प्रगति के लिए या डॉक्टरेट कार्यक्रमों की तैयारी के लिए अपने ज्ञान का विस्तार करने की क्षमता है। एक कार्यक्रम को पूरा करने में आमतौर पर एक से दो साल लगते हैं।
ऐतिहासिक संरक्षण में मास्टर क्या है? इन कार्यक्रमों में इतिहास का गहन अध्ययन, भवनों और कलाकृतियों के संरक्षण और एक बड़े क्षेत्र में संरक्षण का सामाजिक-आर्थिक महत्व है। पाठ्यक्रम विषयों में वास्तुकला निरीक्षण और पुनर्वास, वैचारिक अनुसंधान और संरक्षण, यूरोपीय संस्कृति और विरासत और शहरी पुनर्वास कानूनों के प्रभाव का विश्लेषण शामिल हो सकता है। पुनर्वसन हस्तक्षेप के लिए आवश्यक कौशल हासिल करने के दौरान छात्रों को सामाजिक और ऐतिहासिक ज्ञान की एक मजबूत पृष्ठभूमि को सीमेंट करने का अवसर मिलता है।
एक मास्टर की डिग्री को पूरा करने के लिए कई मूल्यवान और विपणन कौशल के साथ छात्रों को लैस कर सकते हैं। कुशल अनुसंधान विधियों को सीखना, क्षेत्र में किसी विशेषज्ञ के रूप में संवाद करना और परामर्श करना और परियोजनाओं की योजना और व्यवस्थित करने में सक्षम होने से, उच्च भुगतान करने वाले पदों या निरंतर शिक्षा के लिए प्रतिस्पर्धा में छात्रों को लाभ मिल सकता है।
एक कार्यक्रम शुरू करने की लागत प्रत्येक संस्था के स्थान और पाठ्यक्रम की अवधि के आधार पर भिन्न हो सकती है। संभावित छात्रों को लागत और आवश्यकताओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए विशिष्ट स्कूलों से संपर्क करना चाहिए।
ऐतिहासिक संरक्षण में एक मास्टर छात्रों को एक विशेष क्षेत्र में विशेषज्ञ बनने के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। स्नातक सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों, इतिहासकारों, संरक्षण सलाहकार, संरक्षण परियोजना प्रबंधकों, संरक्षण और डिजाइन योजनाकारों, सामुदायिक विकास निदेशकों, पुरालेख, क्यूरेटर, घटना समन्वयकों, पुस्तकालय तकनीशियन, प्राकृतिक संसाधन विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं सहित विभिन्न संभावित कैरियर को खोजने की उम्मीद कर सकते हैं। शिक्षकों की।
ऑनलाइन पाठ्यक्रम, अंशकालिक कार्यक्रम और अंतर्राष्ट्रीय विकल्प सभी छात्रों को तलाशने के लिए उपलब्ध हैं। आरंभ करने के लिए, नीचे अपने कार्यक्रम की तलाश करें और सीसा फार्म भरकर अपनी पसंद के विद्यालय के प्रवेश कार्यालय से सीधे संपर्क करें।
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एक मास्टर की डिग्री क्रमिक स्तर पर छात्रों के लिए अध्ययन की एक इकाई है। एक कार्यक्रम का पीछा करने वाले छात्रों के पास अपने करियर की प्रगति के लिए या डॉक्टरेट कार्यक्रमों की तैयारी के लिए अपने ज्ञान का विस्तार करने की क्षमता है। एक कार्यक्रम को पूरा करने में आमतौर पर एक से दो साल लगते हैं। ऐतिहासिक संरक्षण में मास्टर क्या है? इन कार्यक्रमों में इतिहास का गहन अध्ययन, भवनों और कलाकृतियों के संरक्षण और एक बड़े क्षेत्र में संरक्षण का सामाजिक-आर्थिक महत्व है। पाठ्यक्रम विषयों में वास्तुकला निरीक्षण और पुनर्वास, वैचारिक अनुसंधान और संरक्षण, यूरोपीय संस्कृति और विरासत और शहरी पुनर्वास कानूनों के प्रभाव का विश्लेषण शामिल हो सकता है। पुनर्वसन हस्तक्षेप के लिए आवश्यक कौशल हासिल करने के दौरान छात्रों को सामाजिक और ऐतिहासिक ज्ञान की एक मजबूत पृष्ठभूमि को सीमेंट करने का अवसर मिलता है। एक मास्टर की डिग्री को पूरा करने के लिए कई मूल्यवान और विपणन कौशल के साथ छात्रों को लैस कर सकते हैं। कुशल अनुसंधान विधियों को सीखना, क्षेत्र में किसी विशेषज्ञ के रूप में संवाद करना और परामर्श करना और परियोजनाओं की योजना और व्यवस्थित करने में सक्षम होने से, उच्च भुगतान करने वाले पदों या निरंतर शिक्षा के लिए प्रतिस्पर्धा में छात्रों को लाभ मिल सकता है। एक कार्यक्रम शुरू करने की लागत प्रत्येक संस्था के स्थान और पाठ्यक्रम की अवधि के आधार पर भिन्न हो सकती है। संभावित छात्रों को लागत और आवश्यकताओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए विशिष्ट स्कूलों से संपर्क करना चाहिए। ऐतिहासिक संरक्षण में एक मास्टर छात्रों को एक विशेष क्षेत्र में विशेषज्ञ बनने के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। स्नातक सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों, इतिहासकारों, संरक्षण सलाहकार, संरक्षण परियोजना प्रबंधकों, संरक्षण और डिजाइन योजनाकारों, सामुदायिक विकास निदेशकों, पुरालेख, क्यूरेटर, घटना समन्वयकों, पुस्तकालय तकनीशियन, प्राकृतिक संसाधन विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं सहित विभिन्न संभावित कैरियर को खोजने की उम्मीद कर सकते हैं। शिक्षकों की। ऑनलाइन पाठ्यक्रम, अंशकालिक कार्यक्रम और अंतर्राष्ट्रीय विकल्प सभी छात्रों को तलाशने के लिए उपलब्ध हैं। आरंभ करने के लिए, नीचे अपने कार्यक्रम की तलाश करें और सीसा फार्म भरकर अपनी पसंद के विद्यालय के प्रवेश कार्यालय से सीधे संपर्क करें।
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भडन्डस हुन प्रेस क
२०. ( क ) तदनन्तर किसी दिन राजा कूणिक स्नान करके, सुगन्धित द्रव्य, तिलक आदि लगाकर और राजा के योग्य शुद्ध वस्त्र - आभूषण पहनकर चेलनादेवी के पास चरण-वंदना करने के लिए आया ।
उस समय कूणिक राजा ने माता चेलनादेवी को उदासीन यावत् चिन्ता, शोक मे डूबी हुई देखा। देखते ही चेलनादेवी के पाँव पकड़ लिए और चेलनादेवी से इस प्रकार पूछने लगा- "माता । ऐसी क्या बात है कि आज तुम्हारे चित्त मे सतोष, उत्साह, हर्ष और आनन्द नही है जबकि मै स्वय ( आपका पुत्र ) राज्य - वैभव का उपभोग करते हुए सुखपूर्वक समय बिता रहा हूँ ?" (अर्थात् मेरा राजा बनना क्या आपको अच्छा नहीं लग रहा है ?)
उत्तर मे चेलनादेवी ने कूणिक राजा से इस प्रकार कहा- "हे पुत्र । मेरे मन मे प्रसन्नता, उत्साह, 1 हर्ष अथवा आनन्द कैसे हो सकता है? जबकि तुमने देवतास्वरूप, गुरुजन जैसे अत्यन्त स्नेहानुरागयुक्त अपने पिता श्रेणिक राजा को बेडियो से बाँधकर अपना महान् राज्याभिषेक स्वय कराया है।"
HOMAGE AT THE FEET OF THE MOTHER
20. (a) One day after taking his bath, applying perfumes and auspicious mark (tılak), and wearing clean garb and ornaments suitable for the royalty, King Kunik came to Queen Chelana to touch her feet and pay homage
On this occasion he found mother Chelana sad, worried and melancholic He at once touched Queen Chelana's feet and asked"Mother ! What is the matter ? Today you do not appear contented, zealous, joyous or happy, even when 1, your son, live happily enjoying the glory of the kingdom ?" ( Iri other words, does my becoming king not please you ? )
Queen Chelana replied - "Son! How can I be contented, zealous, Joyous or happy when you have ceremoniously ascended the throne by imprisoning your god-like and guru-like father, King Shrenik, who has only love and affection for you "
चेलना रानी द्वारा भ्रान्तिनिवारण
२०. ( ख ) तए णं से कूणिए राया चेल्लणं देविं एवं वयासी- "घाएउकामे णं, अम्मो ! मम सेणिए राया, एवं मारेउ बंधिउ निच्छुभिउकामे णं अम्मो ! ममं सेणिए राया। तं कहं णं अम्मो ! ममं सेणिए राया अच्चंतनेहाणुरागरत्ते ?"
तए णं सा चेल्लणा देवी कूणियं कुमारं एवं वयासी - "एवं खलु, पुत्ता ! तुमंसि ममं गब्भे आभूए समाणे तिन्हं मासाणं बहुपडिपुण्णाणं ममं अयमेयारूवे दोहले पाउब्भूए 'धन्नाओ णं ताओ अम्मयाओ, (जाव) अंगपडिचारियाओ, निरवसेसं भाणियव्वं (जाव), जाहे वि य णं तुमं वेयणाए अभिभूए महया. (जाव) तुसिणीए संचिट्ठसि । एवं खलु पुत्ता ! सेणिए राया अच्चंतनेहाणुरागरत्ते।"
तए णं कूणिए राया चेल्लणाए देवीए अंतिए एयमट्ठे सोच्चा निसम्म चेल्लणं देविं एवं वयासी"दुटु णं अम्मो ! मए कयं सेणियं रायं पियं देवयं गुरुजणगं अच्चंतनेहाणुरागरत्तं नियलबंधण करतेणं । तं गच्छामि णं सेणियस्स रन्नो सयमेव नियलाणि छिंदामि" त्ति कटु परसुहत्थगए जेणेव चारगसाला तेणेव पहारेत्थ गमणाए।
२०. ( ख ) माता चेलनादेवी की बात सुनकर कूणिक ने इस प्रकार कहा- "माता । श्रेणिक राजा तो मेरा घात करने के इच्छुक थे। हे अम्मा ! श्रेणिक राजा तो मुझे मार डालना चाहते थे, बाँधना चाहते थे और मुझे राज्य से निर्वासित कर देना चाहते थे। तो फिर हे माता । आप यह कैसे कहती है कि श्रेणिक राजा का मेरे प्रति अतीव स्नेहानुराग था ?"
यह सुनकर चेलनादेवी ने कृणिककुमार से इस प्रकार कहा- "हे पुत्र । जब तू मेरे गर्भ मे आया था, तब तीन मास अच्छी तरह पूरे होने पर मुझे इस प्रकार का दोहद उत्पन्न हुआ था कि वे माताएँ धन्य है, यावत् । अगपरिचारिकाओ से मैने तुम्हे उकरडे पर फिकवा दिया, आदि। जब भी तुम वेदना से पीडित होते और जोर-जोर से रोते तब श्रेणिक राजा तुम्हारी व्रणग्रस्त अंगुली मुख मे लेते और मवाद चूसते । तब तुम शान्त हो जाते, इत्यादि पूर्व वर्णित सब वृत्तान्त चेलना ने कूणिक को सुनाया। इसी कारण हे पुत्र । मैने कहा कि श्रेणिक राजा के मन मे तुम्हारे प्रति अत्यन्त स्नेहानुराग था ।"
चेलना रानी के मुख से कूणिक राजा ने इस पूर्व वृत्तान्त को सुना, उस पर विचार किया तो वह चेलनादेवी से इस प्रकार कहने लगा- "माता । निश्चित ही मैने बहुत बुरा किया जो देवतास्वरूप, गुरुजन जैसे अत्यन्त स्नेहानुराग से अनुरक्त अपने पिता श्रेणिक राजा को बेडियो से बाँधा। अब मै जाता हूँ और स्वय अपने हाथो से ही श्रेणिक राजा की बेडियो को काटता हूँ।' ऐसा कहकर वह परशु-कुल्हाडी हाथ मे लेकर जहाँ कारागृह था, उस ओर चल दिया।
QUEEN CHELANA REMOVES MISUNDERSTANDING
20. (b) To these words of mother Chelana Kunik responded - "Mother King Shrenik was desirous of destroying me O mother King Shrenik wanted to kill me or apprehend me and exile me from the state O mother' How then do you say that he dearly loved me
Hearing these words Queen Chelana said to prince Kunik-"Son ' On completion of three months after I conceived you I had this dohad"Blessed, fortunate, and contented are those mothers who and so on up to with the help of my maids I threw you on a heap of trash and so on whenever you wailed, King Shrenik came near you and sucked out the blood and pus from your wounded finger. This gave you relief and you stopped crying" Thus Queen Chelana narrated the aforesaid details to Kunik and added - "That is the reason, why I told you that King Shrenik dearly loved you
King Kunik heard this story about his past from Queen Chelana and thought about it He then said - "Mother । Indeed, I have committed a grave mistake by shackling King Shrenik, my god-like and guru-like father who so profoundly loved me Now I shall go and cut his shackles with my own hands" With these words he picked up an axe and left for the prison.
विवेचन - इस सूत्र पर टिप्पणी लिखते हुए आचार्य श्री आत्माराम जी महाराज सूचित करते है - "इससे पता चलता है कि कूणिक इससे पूर्व अपने जन्म-विषयक, सम्पूर्ण घटनाक्रम से अपरिचित था। राजतिलक नही करने के कारण वह क्षुब्ध भी था। कुछ गलतफहमियों के कारण पिता को अपना शत्रु समझने लगा था। दूसरी बात, राज्य लोभ मे वह फँस चुका था। इस दुष्कर्म मे पूर्वजन्मो के कर्म भी प्रेरक कारण बने है। (पूर्वजन्म का वृत्तान्त परिशिष्ट मे देखे )
Elaboration Commenting on this aphorism Acharya Shri Atmaram ji M informs-This informs that prior to the said moment Kunik was not aware of all these details about the post birth incidents of his life He was also angry because of the delay in his coronation He considered his father to be his enemy because of some misunderstandings Further, he was caught in the trap of greed for the kingdom Besides, karmas accumulated in the past births were also the inspiring factor for this (see appendix for the story of the past births)
श्रेणिक का अन्तर्द्वन्द्व
२१. (क) तए णं सेणिए राया कूणियं कुमारं परसुहत्थगयं एज्जमाणं पासइ, पासित्ता एवं वयासी - "एस णं कूणिए कुमारे अपत्थियपत्थिए (जाव) हिरि - सिरि- परिवज्जिए परसुहत्थगए इह हव्यमागच्छइ । तं न नज्जइ णं ममं केणइ कु-मारेणं मारिस्सइ" त्ति कट्टु भीए (जाव) तत्थे तसिए उब्बिग्गे संजायभये तालपुडगं विस आसगंसि पक्खिवइ ।
तए णं से सेणिए राया तालपुडगविसंसि आसगंसि पक्खित्ते समाणे मुहुत्तंतरेण परिणममाणंसि निप्पाणे निच्चेट्ठे जीवविप्पजढे ओइण्णे ।
तए णं से कूणिए कुमारे जेणेव चारगसाला तेणेव उवागए, उवागच्छित्ता सेणियं रायं निप्पाणं निच्चेदूं जीवविप्पजढं ओइण्णं पासइ, पासित्ता महया पिइसोएणं अप्फुण्णे समाणे परसुनियत्ते विव चम्पगवरपायवे धस त्ति धरणीयलंसि सव्यंगेहिं संनिवडिए ।
२१. ( क ) तब श्रेणिक राजा ने कूणिककुमार को हाथ मे कुल्हाडी लिए अपनी ओर आते हुए देखा। देखते ही उसने मन ही मन विचार किया- 'यह अकर्त्तव्य को कर्त्तव्य मानने वाला मेरा विनाश चाहने वाला, यावत् लोक-लाज से रहित, निर्लज्ज कूणिककुमार हाथ मे कुल्हाडी लेकर इधर आ रहा है। न मालूम मुझे यह किस कुमौत से मारेगा।' इस विचार से भयभीत, त्रस्त, आशकाग्रस्त, उद्विग्न और भयाक्रान्त होकर तालपुट विष को अपने मुख मे डाल लिया।
तालपुट विष को मुख मे डालते ही कुछ क्षणो के बाद उस विष के शरीर मे घुल जाने पर श्रेणिक राजा निष्प्राण, निश्चेष्ट एव जीवनरहित हो गया ।
इसके बाद वह कूणिककुमार जहाँ कारावास था वहाँ पहुँचा। पहुँचकर उसने श्रेणिक राजा को निष्प्राण, निश्चेष्ट, निर्जीव देखा। तब वह असह्य भयकर पितृ-शोक से बिलबिलाता हुआ शोक सतप्त हुआ, कुल्हाडी से कटे चम्पक वृक्ष की तरह धडाम से पछाड खाकर भूमि पर गिर पड़ा।
SHRENIK'S INNER CONFLICT
21. (a) King Shrenik saw prince Kunik approaching with an axe in his hand The moment he saw this he thought-Prince Kunik, who considers misdeeds as his duty wishes to destroy me He is shameless and devoid of any considerations of honour He is coming this way with an axe in his hand I do not know what contemptible death he will inflict on me " Filled with fear, awe, apprehension, nervousness and horror, he put taalput-vish ( a deadly poison ) in his mouth
Within a few moments of swallowing it the poison spread throughout the body of King Shrenik and it was rendered breathless, motionless, and lifeless
Prince Kunik reached the prison after this and found King Shrenik breathless, motionless, and lifeless Whining with bereavement of losing his father and engulfed in grief, he fall on the ground like an axed champak tree कूणिक का पश्चात्ताप
२१. ( ख ) तए णं से कूणिए कुमारे मुहुत्तंतरेण आसत्थे समाणे रोयमाणे कंदमाणे सोयमाणे विलवमाणे एवं वयासी - "अहो णं मए अधन्त्रेणं अपुण्णेणं अकयपुण्णेणं दुटुकयं सेणियं रायं पियं देवयं अच्चतनेहाणुरागरत्तं नियलबंधणं करतेणं मम मूलागं चेव णं सेणिए राया कालगए" त्ति कट्टु । राईसरतलवर जाव माडम्बिय - कोडुम्बिय - इब्भ - सेट्ठि- सेणावइ - सत्यवाह-मंति-गणगदोवारिय- अमच्च-चेड पीढमद्द - नगर निगम - दूय - संधिवालसद्धिं संपरिवुडे रोयमाणे कंदमाणे सोयमाणे विलवमाणे महया इड्ढीसक्कारसमुदएणं सेणियस्स रन्नो नीहरणं करेइ ।
तए णं से कूणिए कुमारे एएणं महया मणोमाणसिएणं दुक्खेणं अभिभूए समाणे अन्नया कयाइ अंतेउरपरियाल - संपरिवुडे सभण्डमत्तोवगरणमायाए रायगिहाओ पडिनिक्खमइ, जेणेव चंपानयरी तेणेव उवागच्छइ तत्थ वि णं विउलभोग-समिइसमन्त्रागए कालेणं अप्पसोए जाए यावि होत्था ।
तए णं से कूणिए राया अन्नया कयाइ कालाईए दस कुमारे सद्दावेइ, सद्दावेत्ता रज्जं च जाव रट्ठे च बलं च वाहणं च कोसं च कोट्ठागारं च अंतेउरं च जणवयं च एक्कारसभाए विरिंचइ, विरिचित्ता सयमेव रज्जसिरि करेमाणे पालेमाणे विहरइ ।
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भडन्डस हुन प्रेस क बीस. तदनन्तर किसी दिन राजा कूणिक स्नान करके, सुगन्धित द्रव्य, तिलक आदि लगाकर और राजा के योग्य शुद्ध वस्त्र - आभूषण पहनकर चेलनादेवी के पास चरण-वंदना करने के लिए आया । उस समय कूणिक राजा ने माता चेलनादेवी को उदासीन यावत् चिन्ता, शोक मे डूबी हुई देखा। देखते ही चेलनादेवी के पाँव पकड़ लिए और चेलनादेवी से इस प्रकार पूछने लगा- "माता । ऐसी क्या बात है कि आज तुम्हारे चित्त मे सतोष, उत्साह, हर्ष और आनन्द नही है जबकि मै स्वय राज्य - वैभव का उपभोग करते हुए सुखपूर्वक समय बिता रहा हूँ ?" उत्तर मे चेलनादेवी ने कूणिक राजा से इस प्रकार कहा- "हे पुत्र । मेरे मन मे प्रसन्नता, उत्साह, एक हर्ष अथवा आनन्द कैसे हो सकता है? जबकि तुमने देवतास्वरूप, गुरुजन जैसे अत्यन्त स्नेहानुरागयुक्त अपने पिता श्रेणिक राजा को बेडियो से बाँधकर अपना महान् राज्याभिषेक स्वय कराया है।" HOMAGE AT THE FEET OF THE MOTHER बीस. One day after taking his bath, applying perfumes and auspicious mark , and wearing clean garb and ornaments suitable for the royalty, King Kunik came to Queen Chelana to touch her feet and pay homage On this occasion he found mother Chelana sad, worried and melancholic He at once touched Queen Chelana's feet and asked"Mother ! What is the matter ? Today you do not appear contented, zealous, joyous or happy, even when एक, your son, live happily enjoying the glory of the kingdom ?" Queen Chelana replied - "Son! How can I be contented, zealous, Joyous or happy when you have ceremoniously ascended the throne by imprisoning your god-like and guru-like father, King Shrenik, who has only love and affection for you " चेलना रानी द्वारा भ्रान्तिनिवारण बीस. तए णं से कूणिए राया चेल्लणं देविं एवं वयासी- "घाएउकामे णं, अम्मो ! मम सेणिए राया, एवं मारेउ बंधिउ निच्छुभिउकामे णं अम्मो ! ममं सेणिए राया। तं कहं णं अम्मो ! ममं सेणिए राया अच्चंतनेहाणुरागरत्ते ?" तए णं सा चेल्लणा देवी कूणियं कुमारं एवं वयासी - "एवं खलु, पुत्ता ! तुमंसि ममं गब्भे आभूए समाणे तिन्हं मासाणं बहुपडिपुण्णाणं ममं अयमेयारूवे दोहले पाउब्भूए 'धन्नाओ णं ताओ अम्मयाओ, अंगपडिचारियाओ, निरवसेसं भाणियव्वं , जाहे वि य णं तुमं वेयणाए अभिभूए महया. तुसिणीए संचिट्ठसि । एवं खलु पुत्ता ! सेणिए राया अच्चंतनेहाणुरागरत्ते।" तए णं कूणिए राया चेल्लणाए देवीए अंतिए एयमट्ठे सोच्चा निसम्म चेल्लणं देविं एवं वयासी"दुटु णं अम्मो ! मए कयं सेणियं रायं पियं देवयं गुरुजणगं अच्चंतनेहाणुरागरत्तं नियलबंधण करतेणं । तं गच्छामि णं सेणियस्स रन्नो सयमेव नियलाणि छिंदामि" त्ति कटु परसुहत्थगए जेणेव चारगसाला तेणेव पहारेत्थ गमणाए। बीस. माता चेलनादेवी की बात सुनकर कूणिक ने इस प्रकार कहा- "माता । श्रेणिक राजा तो मेरा घात करने के इच्छुक थे। हे अम्मा ! श्रेणिक राजा तो मुझे मार डालना चाहते थे, बाँधना चाहते थे और मुझे राज्य से निर्वासित कर देना चाहते थे। तो फिर हे माता । आप यह कैसे कहती है कि श्रेणिक राजा का मेरे प्रति अतीव स्नेहानुराग था ?" यह सुनकर चेलनादेवी ने कृणिककुमार से इस प्रकार कहा- "हे पुत्र । जब तू मेरे गर्भ मे आया था, तब तीन मास अच्छी तरह पूरे होने पर मुझे इस प्रकार का दोहद उत्पन्न हुआ था कि वे माताएँ धन्य है, यावत् । अगपरिचारिकाओ से मैने तुम्हे उकरडे पर फिकवा दिया, आदि। जब भी तुम वेदना से पीडित होते और जोर-जोर से रोते तब श्रेणिक राजा तुम्हारी व्रणग्रस्त अंगुली मुख मे लेते और मवाद चूसते । तब तुम शान्त हो जाते, इत्यादि पूर्व वर्णित सब वृत्तान्त चेलना ने कूणिक को सुनाया। इसी कारण हे पुत्र । मैने कहा कि श्रेणिक राजा के मन मे तुम्हारे प्रति अत्यन्त स्नेहानुराग था ।" चेलना रानी के मुख से कूणिक राजा ने इस पूर्व वृत्तान्त को सुना, उस पर विचार किया तो वह चेलनादेवी से इस प्रकार कहने लगा- "माता । निश्चित ही मैने बहुत बुरा किया जो देवतास्वरूप, गुरुजन जैसे अत्यन्त स्नेहानुराग से अनुरक्त अपने पिता श्रेणिक राजा को बेडियो से बाँधा। अब मै जाता हूँ और स्वय अपने हाथो से ही श्रेणिक राजा की बेडियो को काटता हूँ।' ऐसा कहकर वह परशु-कुल्हाडी हाथ मे लेकर जहाँ कारागृह था, उस ओर चल दिया। QUEEN CHELANA REMOVES MISUNDERSTANDING बीस. To these words of mother Chelana Kunik responded - "Mother King Shrenik was desirous of destroying me O mother King Shrenik wanted to kill me or apprehend me and exile me from the state O mother' How then do you say that he dearly loved me Hearing these words Queen Chelana said to prince Kunik-"Son ' On completion of three months after I conceived you I had this dohad"Blessed, fortunate, and contented are those mothers who and so on up to with the help of my maids I threw you on a heap of trash and so on whenever you wailed, King Shrenik came near you and sucked out the blood and pus from your wounded finger. This gave you relief and you stopped crying" Thus Queen Chelana narrated the aforesaid details to Kunik and added - "That is the reason, why I told you that King Shrenik dearly loved you King Kunik heard this story about his past from Queen Chelana and thought about it He then said - "Mother । Indeed, I have committed a grave mistake by shackling King Shrenik, my god-like and guru-like father who so profoundly loved me Now I shall go and cut his shackles with my own hands" With these words he picked up an axe and left for the prison. विवेचन - इस सूत्र पर टिप्पणी लिखते हुए आचार्य श्री आत्माराम जी महाराज सूचित करते है - "इससे पता चलता है कि कूणिक इससे पूर्व अपने जन्म-विषयक, सम्पूर्ण घटनाक्रम से अपरिचित था। राजतिलक नही करने के कारण वह क्षुब्ध भी था। कुछ गलतफहमियों के कारण पिता को अपना शत्रु समझने लगा था। दूसरी बात, राज्य लोभ मे वह फँस चुका था। इस दुष्कर्म मे पूर्वजन्मो के कर्म भी प्रेरक कारण बने है। Elaboration Commenting on this aphorism Acharya Shri Atmaram ji M informs-This informs that prior to the said moment Kunik was not aware of all these details about the post birth incidents of his life He was also angry because of the delay in his coronation He considered his father to be his enemy because of some misunderstandings Further, he was caught in the trap of greed for the kingdom Besides, karmas accumulated in the past births were also the inspiring factor for this श्रेणिक का अन्तर्द्वन्द्व इक्कीस. तए णं सेणिए राया कूणियं कुमारं परसुहत्थगयं एज्जमाणं पासइ, पासित्ता एवं वयासी - "एस णं कूणिए कुमारे अपत्थियपत्थिए हिरि - सिरि- परिवज्जिए परसुहत्थगए इह हव्यमागच्छइ । तं न नज्जइ णं ममं केणइ कु-मारेणं मारिस्सइ" त्ति कट्टु भीए तत्थे तसिए उब्बिग्गे संजायभये तालपुडगं विस आसगंसि पक्खिवइ । तए णं से सेणिए राया तालपुडगविसंसि आसगंसि पक्खित्ते समाणे मुहुत्तंतरेण परिणममाणंसि निप्पाणे निच्चेट्ठे जीवविप्पजढे ओइण्णे । तए णं से कूणिए कुमारे जेणेव चारगसाला तेणेव उवागए, उवागच्छित्ता सेणियं रायं निप्पाणं निच्चेदूं जीवविप्पजढं ओइण्णं पासइ, पासित्ता महया पिइसोएणं अप्फुण्णे समाणे परसुनियत्ते विव चम्पगवरपायवे धस त्ति धरणीयलंसि सव्यंगेहिं संनिवडिए । इक्कीस. तब श्रेणिक राजा ने कूणिककुमार को हाथ मे कुल्हाडी लिए अपनी ओर आते हुए देखा। देखते ही उसने मन ही मन विचार किया- 'यह अकर्त्तव्य को कर्त्तव्य मानने वाला मेरा विनाश चाहने वाला, यावत् लोक-लाज से रहित, निर्लज्ज कूणिककुमार हाथ मे कुल्हाडी लेकर इधर आ रहा है। न मालूम मुझे यह किस कुमौत से मारेगा।' इस विचार से भयभीत, त्रस्त, आशकाग्रस्त, उद्विग्न और भयाक्रान्त होकर तालपुट विष को अपने मुख मे डाल लिया। तालपुट विष को मुख मे डालते ही कुछ क्षणो के बाद उस विष के शरीर मे घुल जाने पर श्रेणिक राजा निष्प्राण, निश्चेष्ट एव जीवनरहित हो गया । इसके बाद वह कूणिककुमार जहाँ कारावास था वहाँ पहुँचा। पहुँचकर उसने श्रेणिक राजा को निष्प्राण, निश्चेष्ट, निर्जीव देखा। तब वह असह्य भयकर पितृ-शोक से बिलबिलाता हुआ शोक सतप्त हुआ, कुल्हाडी से कटे चम्पक वृक्ष की तरह धडाम से पछाड खाकर भूमि पर गिर पड़ा। SHRENIK'S INNER CONFLICT इक्कीस. King Shrenik saw prince Kunik approaching with an axe in his hand The moment he saw this he thought-Prince Kunik, who considers misdeeds as his duty wishes to destroy me He is shameless and devoid of any considerations of honour He is coming this way with an axe in his hand I do not know what contemptible death he will inflict on me " Filled with fear, awe, apprehension, nervousness and horror, he put taalput-vish in his mouth Within a few moments of swallowing it the poison spread throughout the body of King Shrenik and it was rendered breathless, motionless, and lifeless Prince Kunik reached the prison after this and found King Shrenik breathless, motionless, and lifeless Whining with bereavement of losing his father and engulfed in grief, he fall on the ground like an axed champak tree कूणिक का पश्चात्ताप इक्कीस. तए णं से कूणिए कुमारे मुहुत्तंतरेण आसत्थे समाणे रोयमाणे कंदमाणे सोयमाणे विलवमाणे एवं वयासी - "अहो णं मए अधन्त्रेणं अपुण्णेणं अकयपुण्णेणं दुटुकयं सेणियं रायं पियं देवयं अच्चतनेहाणुरागरत्तं नियलबंधणं करतेणं मम मूलागं चेव णं सेणिए राया कालगए" त्ति कट्टु । राईसरतलवर जाव माडम्बिय - कोडुम्बिय - इब्भ - सेट्ठि- सेणावइ - सत्यवाह-मंति-गणगदोवारिय- अमच्च-चेड पीढमद्द - नगर निगम - दूय - संधिवालसद्धिं संपरिवुडे रोयमाणे कंदमाणे सोयमाणे विलवमाणे महया इड्ढीसक्कारसमुदएणं सेणियस्स रन्नो नीहरणं करेइ । तए णं से कूणिए कुमारे एएणं महया मणोमाणसिएणं दुक्खेणं अभिभूए समाणे अन्नया कयाइ अंतेउरपरियाल - संपरिवुडे सभण्डमत्तोवगरणमायाए रायगिहाओ पडिनिक्खमइ, जेणेव चंपानयरी तेणेव उवागच्छइ तत्थ वि णं विउलभोग-समिइसमन्त्रागए कालेणं अप्पसोए जाए यावि होत्था । तए णं से कूणिए राया अन्नया कयाइ कालाईए दस कुमारे सद्दावेइ, सद्दावेत्ता रज्जं च जाव रट्ठे च बलं च वाहणं च कोसं च कोट्ठागारं च अंतेउरं च जणवयं च एक्कारसभाए विरिंचइ, विरिचित्ता सयमेव रज्जसिरि करेमाणे पालेमाणे विहरइ ।
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भूतफाल प्रफट करना हो तो --
१ - तुम को वेद पढ़ने चाहिए थे
२ -- हम को ब्रह्मविद्या सीखनी चाहिए थी ३- लड़कों को संबेरे उठना चाहिए था ४~~ लड़कियों को पूजा करने जाना चाहिए था।
ऊपर के दोनो उदाहरण फर्मवाच्य और नीचे के दोनो भाववाच्य है । भूतकाल की 'थ' क्रिया के साथ 'चाहिए' का योग प्रकट करता है कि वैसा फरना उचित था; पर किया नहीं गया । साधारण स्थिति में सकर्मक के भी भाववाच्य - प्रयोग होते हैं - 'दोनो के नाम-पते अलग-अलग लिखना चाहिए ।' 'राम को रोटी बनाना चाहिए' । परन्तु भूतकालिक 'थ' के साथ ऐसा नहीं होता। तत्र 'न' - प्रत्ययान्त सफर्मक क्रियाएँ फर्मवाच्य ही रहती है१- राम को रोटी बनानी चाहिए थी
२ - तुम्हें श्राना - फानी न करनी चाहिए थी
इस से स्पष्ट है कि स्वाभाविक प्रयोग 'न' -- प्रत्ययान्त सफर्मक के कर्मवाच्य ही है। 'राम को रोटी बनाना चाहिए था' भी वोल देते हैं, परन्तु ठीक नहीं लगता। हॉ, 'राम को पुस्तक पढ़ना अच्छा लगता है। यह ठीक है । यहाँ 'पढ़ना' भाववाचक संज्ञा है, श्राख्यात नहीं। 'विद्या सीखना अच्छा है' । 'विद्या का सीखना'- विद्या सीखना । विभक्ति का लोप है। समास के विना भी विभक्ति का लोप हिन्दी में होता है ।
'त' सामान्य
'त' प्रत्यय सकर्मक-सभी धातुओं से होता है । 'त' में पुंविभक्ति -'ता' - होता, करता श्रादि । यह प्रत्यय वस्तुतः सभी फालों में चलता है। वर्तमान काल के लिए आगे 'है' का प्रयोग करना पड़ता है -
मैं इस घर में रहता हूँ तू कहाँ रहता है ?
'थ' के साथ प्रयोग करने पर किया की प्रवृत्ति भूतकाल में प्रतीत होती है( ४३६ ) मैं इस घर में रहता था तू कहाँ रहता था. ?.
भूतफाल में क्रिया की वर्तमानता । 'तू काशी में पढ़ता था'- अर्थ यह कि जिस समय की चर्चा है, तेरा पढ़ना काशी में जारी था।
'हो गा' लगा देने से क्रिया में सन्दिग्धतां प्रकट होती हैI
वह इस समय सोता हो गा
सीता पौधे सींचती होगी।
सम्भावना है। निश्चय की ओर झुकाव होने पर भी क्रिया सन्दिग्व ही है। इसे 'सन्दिग्धं वर्तमान' कहना ठीक नहीं । 'काल' सन्दिग्ध नहीं है। किया सन्दिग्ध है।
कभी-कभी 'है' के योग से भी वर्तमान काल में क्रिया की वर्तमानता न प्रकट हो कर सामान्य प्रवृत्ति मात्र प्रकट होती है, जैसे१ - शेर मांस खाता है
२ - हम लोग श्रम खाते हैं
३ - तोते मनुष्य की तरह बोलते है ।
यहाँ क्रिया का वर्तमान फाल में होना 'प्रकट नहीं है । शेर का श्रादार क्या है और मनुष्य का क्या, यह बात ऊपर के दोनो वाक्यों में बताई गई है। 'शेर मांस खाता है' का मतलब यह नहीं कि शेर मांस इस समय खा ही रहा है। इसी लिए किया की वर्तमाता प्रकट करने के लिए 'रहा' सदायक क्रिया के योग से प्रयोग होते है ---
१ - राम रोटी खा रहा है.
२ - सीतां कपड़े धो रही है
३ - तुम सो रहे हो
'रद्दा' में भूतकाल का 'य' प्रत्यय यहाँ नहीं है। उस का क्षेत्र पृथकू बहुत दिन फाशी रहा' । यहाँ 'सा रहा हूँ' यादि में 'रहा' भिन्न
चीज है। यह वर्तमान की चीज है। भूतकाल के लिए 'थ' लगाना हो गा
१ - राम रोटी खा रहा था २ - सीता कपड़े धो रही थी
३ - तुम सो रहे थे
'थ' से भूतकाल प्रकट है। उस भूतकाल में खाना, धोना, तथा सोन क्रियाएँ चल रही थीं।
'हो गा' लगाने से क्रिया में सन्दिग्धता प्रकट होगी -
१- राम रोटी खा रहा होगा
२ - सीता कपड़े धो रही होगी
'तुम सो रहे हो गे' वर्तमान के लिए प्रयोग न हो गा; क्योंकि जिस से बात कर रहे हैं, उस का सोना कैसा ? यहाँ कोई सन्देह है ही नहीं। हाँ, भूतकाल में सन्देह प्रकट किया जा सकता है - 'मैं गया, कोई मिला नहीं । तुम सो रहे होगे ! '
यो, यह 'रह' धातु से " प्रत्यय क्रिया की वर्तमानता या जारी रहना प्रकट करता है । 'काल' के लिए 'है' आदि का प्रयोग होता है ।
यह 'रहा' भी ( > केही परिवार का है। निवासार्थक 'रह' का रूप नहीं । ' में वर्तमान है और इस फा हमें भूतकालिक रूप ( 'पद्मावत' में प्रयुक्त हुआ है । ) दिगम'रहा' । सो, 'ला रहा है' में 'रहा' वर्तमानता प्रकट करने के लिए; क्योंकि 'शेर मांस खाता है' में '३' सामान्य स्थिति प्रकट करने लिए है। 'र' () धातु और फालनिरपेक्ष " प्रत्यय, पुंविभक्ति- 'रहा' । 'खा रहा था' - 'खा रही हो गी' श्रादि । क्रिया की स्थिति प्रफट होती है ।
'त' हेतुमद्भूत
जब कि भूनकाल में किसी एक किया के न होने से दूसरी किया न हुई हो, तो इस 'त' प्रत्यय का प्रयोग होता है। त + श्रा = ता, ते, ती ।
१ - सावधानी से चलते, तो ठोकर न लगती २ - परिश्रम करते, तो अनुतीर्ण क्यों होते ?
पहली क्रिया 'हेतु' है, दूसरी 'हेतुमान्'। इसी को संस्कृत व्याकरण में 'हेतु हेतुमद्भूत' कहते हैं।
'त' भाववाच्य
'त' एक भाववाच्य प्रत्यय भी है। पुंविभक्ति से 'ता' बन जाता है और " को 'ए' हो कर-१ - सीता से चलते नहीं बनता २ ~~ लड़कों से चलते न बना ३ - लड़कियाँ चलते चलते थक गई ४- राम चलते चलते थक गया ५ - वह रोते-रोते बेहोश हो गई ६ - उन से बातें करते-करते वह थक जाती ७ - सीता घर से निकलते ही थक गई
'लड़कियाँ चलती चलती थक गई और लड़फा चलता-चलता थफ गया' ऐसे फर्तृवाच्य 'त' से भी प्रयोग होते हैं । 'चलती चलती श्रादि विशे पण है, फर्ता-कारकों के ।
कालसम्बन्धी कुछ बातें
काल-व्यञ्जना में संस्कृत से हिन्दी कुछ भिन्न पद्धति पर है। संस्कृत में भूतकाल और भविष्यत् काल को जैसे अद्यतन' और 'अनद्यतन' कालों में विभक्त किया गया है, वैसी कोई बात यहाँ नहीं है । 'प्रद्यतन' का मतलब है - 'ग्राज फा' और इस से श्रागे-पीछे का भूत-भविष्यत् 'श्रनद्यतन' । को भोजन किए भी चार घंटे बीते हैं, तो 'श्रयतन भूत' श्रीर कोई फाम किए पूरा दिन या इस से अधिक समय बीत गया है, तो 'धनद्यतन भूत' । इसी तरह भविष्यत् भी। परन्तु संस्कृत में 'य' ('ग्राम' ) का समय कुछ और लिया गया है और हिन्दी के युग में लोग 'या' या 'श्रय' के
घेरे में कुछ हेर-फेर कर बैठे हैं। इस लिए 'श्रद्यतन'-'अनद्यतन' की व्यवस्था हिन्दी ने नहीं रखी । 'य' या 'ग्रीन' शब्द से प्रफट होने वाले समय का निर्देश संस्कृत व्याकरण में यों दिया गया है- 'घीती हुई रात के पिछले भाग को लेकर आने वाली रात के पूर्व भाग के पूर्ण होने के समय तक का फाल 'अद्यतन' कहलाता है। यानी पिली रात के बारह बजे से, थाने
वाली रात के बारह बजे तक का समय " या 'न' है । इस से भिन्न 'अद्यतन। अंग्रेजी पद्धति जो श्रानकल 'श्रान' मानने की है, वही किसी समय हमारे यहाँ प्रचलित थी । अंग्रेजी तारीख श्राधी रात से बदलती है । परन्तु हम लोग कुछ इषर - उधर हो गए । भाषा का विकास साधारण जन में होता है। लोग जब सो कर उठे, तब नया दिन ! सो, सूर्योदय से नया दिन मानने लगे। सूर्योदय से लेकर दूसरे सूर्योदय से पहले-पहले का समय 'श्रा' । यो 'श्रद्य' या 'आज' के अर्थ में अन्तर पड़ गया । इन सब झंझटों से बचने के लिए हिन्दी ने 'अद्यतन - अद्यतन रूप से फाल-भेद नहीं किए । परन्तु भूत और भविष्यत् की प्रसन्नता तथा विप्रकृष्टता ( दूरी ) प्रफट करने के लिए यहाँ स्वतंत्र पद्धति है। 'राम गया' सामान्य भूतकाल; 'राम गया था' विप्रकृष्ट भूतकाल, जिसे श्रानकल 'पूर्णभूतकाल' लोग कहते हैं । 'राम गया है' श्रासन्न भूतकाल । 'थ' के प्रयोग से विप्रकृष्टता और 'है' से वासन्नता प्रफट की जाती है। बहुत अधिक प्रसन्नता प्रकट करनी हो, तो लाक्षणिक प्रयोग किए जाते है । किसी ने पूछा- कब जाम्रो गे ? उत्तर लोग कह देते हैं - 'बस, जा रहा हूँ' । 'ना रहा हूँ' वर्तमान काल की क्रिया है। अर्थ स्पष्टतः वाघित है - जा नहीं रहा है; क्योंकि उत्तर देने वाला जाने की क्रिया नहीं कर रहा है; बैठे-बैठे फह रहा है- 'बस, ना रहा हूँ' । इस तरह अर्थ की वाघा होने पर उस ( भविष्यत् ) से निकटतम संबन्ध रखने वाला वर्तमान काल लक्षित होता है। मतलब या 'प्रयोजन' यह कि 'तुरन्त जाने वाला हूँ - जरा भी देर नहीं ।' यदि यों लाक्षणिक प्रयोग न कर के कह दिया जाता - 'अभी तुरन्त नाऊँ गा' तो उतनी श्रासन्नता न प्रफड होती। इसी लिए वह लाक्षणिक प्रयोग । कभी कभी 'वाला' प्रत्यय से भी अतिशयसन्नता प्रकट करते हैं- 'नल्दी चढ़ो, गाड़ी जाने वाली है'। 'जाने वाली है' का मतलब, वही 'जा रही है' - यानी छूटने में देर नहीं। यह 'श्रासन्न भविष्यत्' प्रकट करने वाला 'वाला' प्रत्यय कृदन्त - प्रकरण का है । तद्धित 'वाला' से इसे भिन्न समझना चाहिए । 'चतुराई' में 'भाई' तद्धित भाववाचक प्रत्यय है और 'लिखाई-पढ़ाई भी चल रही है' में 'ई' कृदन्त भाववाचक प्रत्यय है । संज्ञापद और क्रियापद में मेद है, तो दोनों 'आई'-'श्राई' प्रत्ययों में भी भेद अवश्य है । यही बात 'वाला' प्रत्यय में है। संस्कृत के 'भगवान्' भगवन्तौ, भगवन्तः' में तद्धित-प्रत्ययान्त प्रकृति है और 'गतवान् गतवन्ती, गतवन्तः' कृदन्त है। इसी तरह हिन्दी का 'वाला' है।
भविष्यत् की ही तरह भूतकाल की भी श्रासन्नता लाइयिक प्रयोगों से
प्रकट करते हैं। कोई कहीं से ग्राफर बैठा ही है कि किसी ने चाकर पूछा'कम श्राप ?' उत्तर में कर दिया जाता है -- 'चला ही आ रहा हूँ। यानी
देर नहीं हुई। इसी लाक्षणिक प्रयोग का निर्देश पाणिनि ने 'वर्तमानसामीप्ये वर्तमानवद्वा' सूत्र से किया है। ऊपर हम ने" 'वाला' कृदन्त प्रत्यय का जिक्र किया है। हिन्दी की यह पद्धति है कि मूलं धातु की तरह उसके भाववाचक कृदन्त रूप में भी 'सहायक' क्रियाएँ लगती है-'गिर पड़ा' 'जाग पड़ा' और 'गिरना पड़ा' 'जागना पड़ा' । मूल धातु से 'पड़' लग कर चाकस्मिकता प्रकट करती है और उस के भाववाचक कृदन्त 'गिरना' 'जागना' आदि से लग कर विवशता ध्वनित करती है। यहाँ मतलब केवल इस से कि मूल धातुओं की ही तरह उस के भाववाचक कृदन्त रूप भी काम में लाए जाते हैं। कृदन्त 'वाला' प्रत्यय मूल धातु से नहीं, उस के भाववाचक कृदन्त रूप से होता है-'जानेवाला है' 'जाने ही वाली है' इत्यादि । 'राम श्रव गानेवाला है' में 'वाला' कृदन्त है और 'राम एक गानेवाला श्रादमी है' में 'वाला' तद्धित प्रत्यय है । 'कृदन्त संशात्रों से तद्धित प्रत्यय होते ही है'ज्ञानवान्' 'गतिमान्' श्रादि । परन्तु कृदन्त संज्ञा से फिर कृदन्त प्रत्यय सोचने की चीज है । "गाड़ी जानेवाली है' में 'नाना' कृदन्त संशा है- 'बा' धातु से 'न' भाववाचक प्रत्यय । 'इसं कृदन्त ( 'जाना' आदि) से फिर एक क्रंदन्त 'वाला' हो सकता है क्या ? यह प्रश्न । उत्तर है कि हो सकता है, होता है। भाषा का प्रवाह सामने है। ऐसे प्रयोगों को गति क्या फोई : मन्द कर सकता है ? संस्कृत में कृदन्त से फिर दूसरा कृदन्त प्रत्यय नहीं होता, न हो । हिन्दी में तो होता है। उसी का हम न्याख्यान कर रहे हैं। संस्कृत में तद्धितान्त से तो दूसरा तद्धित प्रत्यय ( भिन्नार्थ) होता है न ? 'समर्थ' मे 'सामर्थ्य' तद्धित और फिर इस से ( मनुप् ) 'वान्' - 'सामर्थ्यवान्' । यहाँ तद्वितान्त से तद्धित, यहाँ कृदन्त से कृदन्त । श्रपना-अपना मार्ग । संस्कृत सद्धित 'धनवान्' हिन्दी में इसी 'वान' को सस्तर फर 'गाड़ीवान और रूपान्तर 'गाड़ीवाला' । 'धनवान्' के ही 'वान्' की तरह संस्कृत में भूफि िदन्त 'गतवान्' 'गतवती' । इस 'वान्' को 'वाला' बना कर ( भूत की पद) भविष्यत् - प्रतिनिकट भविष्यत् - 'जाने वाला है' 'जाने वाली है' इत्यादि । 'द्विकर्मक क्रियाएँ
भाषा में कोई-कोई कियाएँ 'द्विकर्मक' भी कहलाती है। फर्मक और सफर्मक, ये दो मेद धातुओं के और फिर सफर्मकों में कुछ दिकर्मक' भी ।
'राम गोविन्द से कुछ कह रहा है' वाक्य में 'राम' कर्ता है। 'कुछ' कर्म है और 'गोविन्द' भी एक तरह का फर्म ही है - 'गौण फर्म ।' 'राम गोविन्द से रास्ता है। यहाँ 'पूछना' किया भी द्विकर्मक है। 'रास्ता' मुख्य कर्म है, 'गोविन्द' गौण कर्म । फर्मवाच्य किया की स्थिति मुख्य फर्म के अनुसार हो गो१ - राम ने गोविन्द से कोई बात पूछी
२ ~ सुशीला ने गोविन्द से रास्ता पूला
हिन्दी में 'से' विभक्ति फरण, पादान, कर्ता तथा कर्म जैसे कई कारकों में लगती है। संस्कृत में 'रामः गोविन्दम् मार्गम् पृच्छति यो मुख्य फर्म ( मार्गम् ) की तरह 'गोविन्दम्' को देख कर; समानरूपता के कारण, 'गौग फर्म' कह दिया गया । उसी की याद हिन्दी में है। संस्कृत में 'दुह्' धातु भी द्विफर्मक है- 'गां पयः दोग्घि' । 'पयः' मुख्य कर्म है, 'गाम्' गौण फर्म । हिन्दी में 'गौ से दूध दुहता है' ऐसे द्विकर्मक प्रयोग होते ही नहीं हैं और यदि होते, तो 'गो' को अपादान कहा जाता । गौ से दूध का बिलगाव होता है। 'राम गौ दुहता है' या 'राम दूध दुहता है' इस तरह एक ही 'कर्म' का प्रयोग होता है। 'राम गौ दुहता है' कहने पर 'गो' को 'गौण फर्म' ही कहा जाएगा । 'दूघ' कहने की जरूरत नहीं; क्योंकि गौ से दूध ही दुद्दा जाता है, कोई और चीन नहीं । 'गौ से' फी जगह 'गो से' लिखना बोलना गलती है । गोरक्षा-श्रान्दोलन के उठने पर पिछले दिनों जगह-जगइ दीवारों पर लिखा गया था - 'गो हमारी माता है' 'गो ही राष्ट्र की सम्पत्ति है' श्रादि । इस तरह वाक्य में 'गो' शब्द का प्रयोग गलत है, जो 'गोरक्षा' जैसे समस्त पदों को देख कर किया गया जान पड़ता है। हिन्दी ने संस्कृत के प्रथमा- एकवचनान्त ( 'तत्वम' ) शब्द 'प्रातिपदिक' रूप से अपनाए है - विसर्ग श्रादि पृथक कर के । 'गो' शब्द का प्रथमा के एकवचन में 'गौः ' रूप होता है। विसर्ग हटा कर 'गो' हिन्दी ने लिया । इस लिए 'गौ हमारी माता है' चाहिए; 'गो' नहीं । 'राजा की बात है' होता है; 'राजन् की बात है' नहीं। जिस शब्द का एकवचन संस्कृत में नहीं बनता, उसे मूल रूप में ही ले लिया गया है - 'दाराः' का 'दार' । पुष्पवाचक 'सुमनस्' का 'स्' अलग कर के 'तुमन' और 'अप्सर' का 'स्' छाँट कर संस्कृत का ही 'या' स्त्री-प्रत्यय लगा फर.- 'प्सरा' । यह प्रासंगिक चर्चा, 'गो' शब्द सामने श्रा जाने से ।
सभी सफर्मक धातुएँ 'प्रेरणा' में द्विकमक हो जाती है; यह श्रमी श्रागे स्पष्ट होगा।
शब्दों के विविध प्रयोग होते हैं। श्रफर्मक धातुएँ भी कभी-कभी सक फर ली जाती है - 'उस ने एक अच्छी लड़ाई लड़ीं ' 'राम ने यह खेल अच्छा खेला' । 'लड़ाई' तथा 'खेल' यहाँ कर्म ही कहे जाएँ गे; यद्यरि 'लड़ना' और 'खेलना फर्मक क्रियाएँ है । 'लड़ाई लड़ी' और 'खेल खेला'। अपने ही एक रूप को फर्म बना लिया गया है। कोई ब्राह्मण अपने ही घर के चार व्यक्तियों को बैठा कर विधिवत् भोजन करा दे र कहे कि 'श्रान मेरे यहाँ चार ब्राह्मणों को भोजन कराया गया है तो क्या झूठ होगा उस का कहना ? यही बात समझिए ।.
सफर्मक धातुओं के भी कर्मक प्रयोग होते हैं, यदि कर्म की विवक्षा न हो - 'गोविन्द काशी में पढ़ रहा है' । 'क्या' पढ़ रहा है, कहना जरूरी नहीं समझा । इस लिए 'पढ़' का कर्मक प्रयोग । श्रति प्रसिद्ध या श्रव्यमिचरित फर्म का उपादान लोग प्रायः नहीं करते और फर्मका फा फर्मक प्रयोग करते है ।
ये इस तरह की बातें बहुत साधारण हैं। इस लिए श्रधिक विस्तार अनावश्यक है। कोई फर्मक मी कभी सकर्मक हो जाती है। '३' फर्मक है; पर 'राम को ज्वर है' में सफर्मक है।
पूर्वकालिक क्रियाएँ
'राम पहले रोटी खाएगा, तब पढ़ने जाए गा' इस वाक्य का संक्षेत्र है'राम रोटी खा कर पढ़ने जाए गा'। दोनो तरह के प्रयोग होते हैं। यदि इस बात पर अधिक बल देना है कि 'रोटी खाए बिना पढ़ने न जाए गा', तो कहा जाए गा~-'राम रोटी खाए गा, तत्र पढ़ने जाए गा' । यदि ऐसी कोई बात नहीं, कियाओं का पूर्वापर कम मात्र बतलाना है, तो फिर 'राम रोटी खा फर पढ़ने जाए गा' होगा। कभी-कभी अगली किया पर जोर देने के लिए भी ऐसे प्रयोग होते हैं । फमी पूर्वक्रिया पर ही जोर होता है। बोलने के ढंग से यह सम सष्ट होता है। सफर्मक धफर्मक सभी धातुओं ये, सभी फालों में, विधि श्रादि सभी श्रथों में, सभी पुरुषों में और सभी वचनों में 'पर' लगता है, किया की पूर्वफालिफवा प्रफट करने के लिए।'
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भूतफाल प्रफट करना हो तो -- एक - तुम को वेद पढ़ने चाहिए थे दो -- हम को ब्रह्मविद्या सीखनी चाहिए थी तीन- लड़कों को संबेरे उठना चाहिए था चार~~ लड़कियों को पूजा करने जाना चाहिए था। ऊपर के दोनो उदाहरण फर्मवाच्य और नीचे के दोनो भाववाच्य है । भूतकाल की 'थ' क्रिया के साथ 'चाहिए' का योग प्रकट करता है कि वैसा फरना उचित था; पर किया नहीं गया । साधारण स्थिति में सकर्मक के भी भाववाच्य - प्रयोग होते हैं - 'दोनो के नाम-पते अलग-अलग लिखना चाहिए ।' 'राम को रोटी बनाना चाहिए' । परन्तु भूतकालिक 'थ' के साथ ऐसा नहीं होता। तत्र 'न' - प्रत्ययान्त सफर्मक क्रियाएँ फर्मवाच्य ही रहती हैएक- राम को रोटी बनानी चाहिए थी दो - तुम्हें श्राना - फानी न करनी चाहिए थी इस से स्पष्ट है कि स्वाभाविक प्रयोग 'न' -- प्रत्ययान्त सफर्मक के कर्मवाच्य ही है। 'राम को रोटी बनाना चाहिए था' भी वोल देते हैं, परन्तु ठीक नहीं लगता। हॉ, 'राम को पुस्तक पढ़ना अच्छा लगता है। यह ठीक है । यहाँ 'पढ़ना' भाववाचक संज्ञा है, श्राख्यात नहीं। 'विद्या सीखना अच्छा है' । 'विद्या का सीखना'- विद्या सीखना । विभक्ति का लोप है। समास के विना भी विभक्ति का लोप हिन्दी में होता है । 'त' सामान्य 'त' प्रत्यय सकर्मक-सभी धातुओं से होता है । 'त' में पुंविभक्ति -'ता' - होता, करता श्रादि । यह प्रत्यय वस्तुतः सभी फालों में चलता है। वर्तमान काल के लिए आगे 'है' का प्रयोग करना पड़ता है - मैं इस घर में रहता हूँ तू कहाँ रहता है ? 'थ' के साथ प्रयोग करने पर किया की प्रवृत्ति भूतकाल में प्रतीत होती है मैं इस घर में रहता था तू कहाँ रहता था. ?. भूतफाल में क्रिया की वर्तमानता । 'तू काशी में पढ़ता था'- अर्थ यह कि जिस समय की चर्चा है, तेरा पढ़ना काशी में जारी था। 'हो गा' लगा देने से क्रिया में सन्दिग्धतां प्रकट होती हैI वह इस समय सोता हो गा सीता पौधे सींचती होगी। सम्भावना है। निश्चय की ओर झुकाव होने पर भी क्रिया सन्दिग्व ही है। इसे 'सन्दिग्धं वर्तमान' कहना ठीक नहीं । 'काल' सन्दिग्ध नहीं है। किया सन्दिग्ध है। कभी-कभी 'है' के योग से भी वर्तमान काल में क्रिया की वर्तमानता न प्रकट हो कर सामान्य प्रवृत्ति मात्र प्रकट होती है, जैसेएक - शेर मांस खाता है दो - हम लोग श्रम खाते हैं तीन - तोते मनुष्य की तरह बोलते है । यहाँ क्रिया का वर्तमान फाल में होना 'प्रकट नहीं है । शेर का श्रादार क्या है और मनुष्य का क्या, यह बात ऊपर के दोनो वाक्यों में बताई गई है। 'शेर मांस खाता है' का मतलब यह नहीं कि शेर मांस इस समय खा ही रहा है। इसी लिए किया की वर्तमाता प्रकट करने के लिए 'रहा' सदायक क्रिया के योग से प्रयोग होते है --- एक - राम रोटी खा रहा है. दो - सीतां कपड़े धो रही है तीन - तुम सो रहे हो 'रद्दा' में भूतकाल का 'य' प्रत्यय यहाँ नहीं है। उस का क्षेत्र पृथकू बहुत दिन फाशी रहा' । यहाँ 'सा रहा हूँ' यादि में 'रहा' भिन्न चीज है। यह वर्तमान की चीज है। भूतकाल के लिए 'थ' लगाना हो गा एक - राम रोटी खा रहा था दो - सीता कपड़े धो रही थी तीन - तुम सो रहे थे 'थ' से भूतकाल प्रकट है। उस भूतकाल में खाना, धोना, तथा सोन क्रियाएँ चल रही थीं। 'हो गा' लगाने से क्रिया में सन्दिग्धता प्रकट होगी - एक- राम रोटी खा रहा होगा दो - सीता कपड़े धो रही होगी 'तुम सो रहे हो गे' वर्तमान के लिए प्रयोग न हो गा; क्योंकि जिस से बात कर रहे हैं, उस का सोना कैसा ? यहाँ कोई सन्देह है ही नहीं। हाँ, भूतकाल में सन्देह प्रकट किया जा सकता है - 'मैं गया, कोई मिला नहीं । तुम सो रहे होगे ! ' यो, यह 'रह' धातु से " प्रत्यय क्रिया की वर्तमानता या जारी रहना प्रकट करता है । 'काल' के लिए 'है' आदि का प्रयोग होता है । यह 'रहा' भी दिगम'रहा' । सो, 'ला रहा है' में 'रहा' वर्तमानता प्रकट करने के लिए; क्योंकि 'शेर मांस खाता है' में 'तीन' सामान्य स्थिति प्रकट करने लिए है। 'र' धातु और फालनिरपेक्ष " प्रत्यय, पुंविभक्ति- 'रहा' । 'खा रहा था' - 'खा रही हो गी' श्रादि । क्रिया की स्थिति प्रफट होती है । 'त' हेतुमद्भूत जब कि भूनकाल में किसी एक किया के न होने से दूसरी किया न हुई हो, तो इस 'त' प्रत्यय का प्रयोग होता है। त + श्रा = ता, ते, ती । एक - सावधानी से चलते, तो ठोकर न लगती दो - परिश्रम करते, तो अनुतीर्ण क्यों होते ? पहली क्रिया 'हेतु' है, दूसरी 'हेतुमान्'। इसी को संस्कृत व्याकरण में 'हेतु हेतुमद्भूत' कहते हैं। 'त' भाववाच्य 'त' एक भाववाच्य प्रत्यय भी है। पुंविभक्ति से 'ता' बन जाता है और " को 'ए' हो कर-एक - सीता से चलते नहीं बनता दो ~~ लड़कों से चलते न बना तीन - लड़कियाँ चलते चलते थक गई चार- राम चलते चलते थक गया पाँच - वह रोते-रोते बेहोश हो गई छः - उन से बातें करते-करते वह थक जाती सात - सीता घर से निकलते ही थक गई 'लड़कियाँ चलती चलती थक गई और लड़फा चलता-चलता थफ गया' ऐसे फर्तृवाच्य 'त' से भी प्रयोग होते हैं । 'चलती चलती श्रादि विशे पण है, फर्ता-कारकों के । कालसम्बन्धी कुछ बातें काल-व्यञ्जना में संस्कृत से हिन्दी कुछ भिन्न पद्धति पर है। संस्कृत में भूतकाल और भविष्यत् काल को जैसे अद्यतन' और 'अनद्यतन' कालों में विभक्त किया गया है, वैसी कोई बात यहाँ नहीं है । 'प्रद्यतन' का मतलब है - 'ग्राज फा' और इस से श्रागे-पीछे का भूत-भविष्यत् 'श्रनद्यतन' । को भोजन किए भी चार घंटे बीते हैं, तो 'श्रयतन भूत' श्रीर कोई फाम किए पूरा दिन या इस से अधिक समय बीत गया है, तो 'धनद्यतन भूत' । इसी तरह भविष्यत् भी। परन्तु संस्कृत में 'य' का समय कुछ और लिया गया है और हिन्दी के युग में लोग 'या' या 'श्रय' के घेरे में कुछ हेर-फेर कर बैठे हैं। इस लिए 'श्रद्यतन'-'अनद्यतन' की व्यवस्था हिन्दी ने नहीं रखी । 'य' या 'ग्रीन' शब्द से प्रफट होने वाले समय का निर्देश संस्कृत व्याकरण में यों दिया गया है- 'घीती हुई रात के पिछले भाग को लेकर आने वाली रात के पूर्व भाग के पूर्ण होने के समय तक का फाल 'अद्यतन' कहलाता है। यानी पिली रात के बारह बजे से, थाने वाली रात के बारह बजे तक का समय " या 'न' है । इस से भिन्न 'अद्यतन। अंग्रेजी पद्धति जो श्रानकल 'श्रान' मानने की है, वही किसी समय हमारे यहाँ प्रचलित थी । अंग्रेजी तारीख श्राधी रात से बदलती है । परन्तु हम लोग कुछ इषर - उधर हो गए । भाषा का विकास साधारण जन में होता है। लोग जब सो कर उठे, तब नया दिन ! सो, सूर्योदय से नया दिन मानने लगे। सूर्योदय से लेकर दूसरे सूर्योदय से पहले-पहले का समय 'श्रा' । यो 'श्रद्य' या 'आज' के अर्थ में अन्तर पड़ गया । इन सब झंझटों से बचने के लिए हिन्दी ने 'अद्यतन - अद्यतन रूप से फाल-भेद नहीं किए । परन्तु भूत और भविष्यत् की प्रसन्नता तथा विप्रकृष्टता प्रफट करने के लिए यहाँ स्वतंत्र पद्धति है। 'राम गया' सामान्य भूतकाल; 'राम गया था' विप्रकृष्ट भूतकाल, जिसे श्रानकल 'पूर्णभूतकाल' लोग कहते हैं । 'राम गया है' श्रासन्न भूतकाल । 'थ' के प्रयोग से विप्रकृष्टता और 'है' से वासन्नता प्रफट की जाती है। बहुत अधिक प्रसन्नता प्रकट करनी हो, तो लाक्षणिक प्रयोग किए जाते है । किसी ने पूछा- कब जाम्रो गे ? उत्तर लोग कह देते हैं - 'बस, जा रहा हूँ' । 'ना रहा हूँ' वर्तमान काल की क्रिया है। अर्थ स्पष्टतः वाघित है - जा नहीं रहा है; क्योंकि उत्तर देने वाला जाने की क्रिया नहीं कर रहा है; बैठे-बैठे फह रहा है- 'बस, ना रहा हूँ' । इस तरह अर्थ की वाघा होने पर उस से निकटतम संबन्ध रखने वाला वर्तमान काल लक्षित होता है। मतलब या 'प्रयोजन' यह कि 'तुरन्त जाने वाला हूँ - जरा भी देर नहीं ।' यदि यों लाक्षणिक प्रयोग न कर के कह दिया जाता - 'अभी तुरन्त नाऊँ गा' तो उतनी श्रासन्नता न प्रफड होती। इसी लिए वह लाक्षणिक प्रयोग । कभी कभी 'वाला' प्रत्यय से भी अतिशयसन्नता प्रकट करते हैं- 'नल्दी चढ़ो, गाड़ी जाने वाली है'। 'जाने वाली है' का मतलब, वही 'जा रही है' - यानी छूटने में देर नहीं। यह 'श्रासन्न भविष्यत्' प्रकट करने वाला 'वाला' प्रत्यय कृदन्त - प्रकरण का है । तद्धित 'वाला' से इसे भिन्न समझना चाहिए । 'चतुराई' में 'भाई' तद्धित भाववाचक प्रत्यय है और 'लिखाई-पढ़ाई भी चल रही है' में 'ई' कृदन्त भाववाचक प्रत्यय है । संज्ञापद और क्रियापद में मेद है, तो दोनों 'आई'-'श्राई' प्रत्ययों में भी भेद अवश्य है । यही बात 'वाला' प्रत्यय में है। संस्कृत के 'भगवान्' भगवन्तौ, भगवन्तः' में तद्धित-प्रत्ययान्त प्रकृति है और 'गतवान् गतवन्ती, गतवन्तः' कृदन्त है। इसी तरह हिन्दी का 'वाला' है। भविष्यत् की ही तरह भूतकाल की भी श्रासन्नता लाइयिक प्रयोगों से प्रकट करते हैं। कोई कहीं से ग्राफर बैठा ही है कि किसी ने चाकर पूछा'कम श्राप ?' उत्तर में कर दिया जाता है -- 'चला ही आ रहा हूँ। यानी देर नहीं हुई। इसी लाक्षणिक प्रयोग का निर्देश पाणिनि ने 'वर्तमानसामीप्ये वर्तमानवद्वा' सूत्र से किया है। ऊपर हम ने" 'वाला' कृदन्त प्रत्यय का जिक्र किया है। हिन्दी की यह पद्धति है कि मूलं धातु की तरह उसके भाववाचक कृदन्त रूप में भी 'सहायक' क्रियाएँ लगती है-'गिर पड़ा' 'जाग पड़ा' और 'गिरना पड़ा' 'जागना पड़ा' । मूल धातु से 'पड़' लग कर चाकस्मिकता प्रकट करती है और उस के भाववाचक कृदन्त 'गिरना' 'जागना' आदि से लग कर विवशता ध्वनित करती है। यहाँ मतलब केवल इस से कि मूल धातुओं की ही तरह उस के भाववाचक कृदन्त रूप भी काम में लाए जाते हैं। कृदन्त 'वाला' प्रत्यय मूल धातु से नहीं, उस के भाववाचक कृदन्त रूप से होता है-'जानेवाला है' 'जाने ही वाली है' इत्यादि । 'राम श्रव गानेवाला है' में 'वाला' कृदन्त है और 'राम एक गानेवाला श्रादमी है' में 'वाला' तद्धित प्रत्यय है । 'कृदन्त संशात्रों से तद्धित प्रत्यय होते ही है'ज्ञानवान्' 'गतिमान्' श्रादि । परन्तु कृदन्त संज्ञा से फिर कृदन्त प्रत्यय सोचने की चीज है । "गाड़ी जानेवाली है' में 'नाना' कृदन्त संशा है- 'बा' धातु से 'न' भाववाचक प्रत्यय । 'इसं कृदन्त से फिर एक क्रंदन्त 'वाला' हो सकता है क्या ? यह प्रश्न । उत्तर है कि हो सकता है, होता है। भाषा का प्रवाह सामने है। ऐसे प्रयोगों को गति क्या फोई : मन्द कर सकता है ? संस्कृत में कृदन्त से फिर दूसरा कृदन्त प्रत्यय नहीं होता, न हो । हिन्दी में तो होता है। उसी का हम न्याख्यान कर रहे हैं। संस्कृत में तद्धितान्त से तो दूसरा तद्धित प्रत्यय होता है न ? 'समर्थ' मे 'सामर्थ्य' तद्धित और फिर इस से 'वान्' - 'सामर्थ्यवान्' । यहाँ तद्वितान्त से तद्धित, यहाँ कृदन्त से कृदन्त । श्रपना-अपना मार्ग । संस्कृत सद्धित 'धनवान्' हिन्दी में इसी 'वान' को सस्तर फर 'गाड़ीवान और रूपान्तर 'गाड़ीवाला' । 'धनवान्' के ही 'वान्' की तरह संस्कृत में भूफि िदन्त 'गतवान्' 'गतवती' । इस 'वान्' को 'वाला' बना कर भविष्यत् - प्रतिनिकट भविष्यत् - 'जाने वाला है' 'जाने वाली है' इत्यादि । 'द्विकर्मक क्रियाएँ भाषा में कोई-कोई कियाएँ 'द्विकर्मक' भी कहलाती है। फर्मक और सफर्मक, ये दो मेद धातुओं के और फिर सफर्मकों में कुछ दिकर्मक' भी । 'राम गोविन्द से कुछ कह रहा है' वाक्य में 'राम' कर्ता है। 'कुछ' कर्म है और 'गोविन्द' भी एक तरह का फर्म ही है - 'गौण फर्म ।' 'राम गोविन्द से रास्ता है। यहाँ 'पूछना' किया भी द्विकर्मक है। 'रास्ता' मुख्य कर्म है, 'गोविन्द' गौण कर्म । फर्मवाच्य किया की स्थिति मुख्य फर्म के अनुसार हो गोएक - राम ने गोविन्द से कोई बात पूछी दो ~ सुशीला ने गोविन्द से रास्ता पूला हिन्दी में 'से' विभक्ति फरण, पादान, कर्ता तथा कर्म जैसे कई कारकों में लगती है। संस्कृत में 'रामः गोविन्दम् मार्गम् पृच्छति यो मुख्य फर्म की तरह 'गोविन्दम्' को देख कर; समानरूपता के कारण, 'गौग फर्म' कह दिया गया । उसी की याद हिन्दी में है। संस्कृत में 'दुह्' धातु भी द्विफर्मक है- 'गां पयः दोग्घि' । 'पयः' मुख्य कर्म है, 'गाम्' गौण फर्म । हिन्दी में 'गौ से दूध दुहता है' ऐसे द्विकर्मक प्रयोग होते ही नहीं हैं और यदि होते, तो 'गो' को अपादान कहा जाता । गौ से दूध का बिलगाव होता है। 'राम गौ दुहता है' या 'राम दूध दुहता है' इस तरह एक ही 'कर्म' का प्रयोग होता है। 'राम गौ दुहता है' कहने पर 'गो' को 'गौण फर्म' ही कहा जाएगा । 'दूघ' कहने की जरूरत नहीं; क्योंकि गौ से दूध ही दुद्दा जाता है, कोई और चीन नहीं । 'गौ से' फी जगह 'गो से' लिखना बोलना गलती है । गोरक्षा-श्रान्दोलन के उठने पर पिछले दिनों जगह-जगइ दीवारों पर लिखा गया था - 'गो हमारी माता है' 'गो ही राष्ट्र की सम्पत्ति है' श्रादि । इस तरह वाक्य में 'गो' शब्द का प्रयोग गलत है, जो 'गोरक्षा' जैसे समस्त पदों को देख कर किया गया जान पड़ता है। हिन्दी ने संस्कृत के प्रथमा- एकवचनान्त शब्द 'प्रातिपदिक' रूप से अपनाए है - विसर्ग श्रादि पृथक कर के । 'गो' शब्द का प्रथमा के एकवचन में 'गौः ' रूप होता है। विसर्ग हटा कर 'गो' हिन्दी ने लिया । इस लिए 'गौ हमारी माता है' चाहिए; 'गो' नहीं । 'राजा की बात है' होता है; 'राजन् की बात है' नहीं। जिस शब्द का एकवचन संस्कृत में नहीं बनता, उसे मूल रूप में ही ले लिया गया है - 'दाराः' का 'दार' । पुष्पवाचक 'सुमनस्' का 'स्' अलग कर के 'तुमन' और 'अप्सर' का 'स्' छाँट कर संस्कृत का ही 'या' स्त्री-प्रत्यय लगा फर.- 'प्सरा' । यह प्रासंगिक चर्चा, 'गो' शब्द सामने श्रा जाने से । सभी सफर्मक धातुएँ 'प्रेरणा' में द्विकमक हो जाती है; यह श्रमी श्रागे स्पष्ट होगा। शब्दों के विविध प्रयोग होते हैं। श्रफर्मक धातुएँ भी कभी-कभी सक फर ली जाती है - 'उस ने एक अच्छी लड़ाई लड़ीं ' 'राम ने यह खेल अच्छा खेला' । 'लड़ाई' तथा 'खेल' यहाँ कर्म ही कहे जाएँ गे; यद्यरि 'लड़ना' और 'खेलना फर्मक क्रियाएँ है । 'लड़ाई लड़ी' और 'खेल खेला'। अपने ही एक रूप को फर्म बना लिया गया है। कोई ब्राह्मण अपने ही घर के चार व्यक्तियों को बैठा कर विधिवत् भोजन करा दे र कहे कि 'श्रान मेरे यहाँ चार ब्राह्मणों को भोजन कराया गया है तो क्या झूठ होगा उस का कहना ? यही बात समझिए ।. सफर्मक धातुओं के भी कर्मक प्रयोग होते हैं, यदि कर्म की विवक्षा न हो - 'गोविन्द काशी में पढ़ रहा है' । 'क्या' पढ़ रहा है, कहना जरूरी नहीं समझा । इस लिए 'पढ़' का कर्मक प्रयोग । श्रति प्रसिद्ध या श्रव्यमिचरित फर्म का उपादान लोग प्रायः नहीं करते और फर्मका फा फर्मक प्रयोग करते है । ये इस तरह की बातें बहुत साधारण हैं। इस लिए श्रधिक विस्तार अनावश्यक है। कोई फर्मक मी कभी सकर्मक हो जाती है। 'तीन' फर्मक है; पर 'राम को ज्वर है' में सफर्मक है। पूर्वकालिक क्रियाएँ 'राम पहले रोटी खाएगा, तब पढ़ने जाए गा' इस वाक्य का संक्षेत्र है'राम रोटी खा कर पढ़ने जाए गा'। दोनो तरह के प्रयोग होते हैं। यदि इस बात पर अधिक बल देना है कि 'रोटी खाए बिना पढ़ने न जाए गा', तो कहा जाए गा~-'राम रोटी खाए गा, तत्र पढ़ने जाए गा' । यदि ऐसी कोई बात नहीं, कियाओं का पूर्वापर कम मात्र बतलाना है, तो फिर 'राम रोटी खा फर पढ़ने जाए गा' होगा। कभी-कभी अगली किया पर जोर देने के लिए भी ऐसे प्रयोग होते हैं । फमी पूर्वक्रिया पर ही जोर होता है। बोलने के ढंग से यह सम सष्ट होता है। सफर्मक धफर्मक सभी धातुओं ये, सभी फालों में, विधि श्रादि सभी श्रथों में, सभी पुरुषों में और सभी वचनों में 'पर' लगता है, किया की पूर्वफालिफवा प्रफट करने के लिए।'
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हिमाचल दस्तक
विस अध्यक्ष ने श्री नयना देवी जी मंदिर में टेका माथा
श्री नयना देवी। प्रदेश के सिद्ध शक्तिपीठ श्री नयना देवी जी में विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार ने परिवार सहित माता के दर्शन किए। इस दौरान प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य आशुतोष शर्मा, मंदिर न्यास कर्मचारी संघ के प्रधान महेंद्र सिंह ठाकुर, पुजारी सतपाल गौतम, ललित मोहन, मंदिर अधिकारी विजय गौतम, पुजारी अनिरुद्ध शर्मा, अमित गौतम, उमेश शर्मा, दीपक शर्मा मौजूद रहे। -हिमाचल दस्तक
दैनिक भास्कर
विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने मां चिंतपूर्णी के दरबार में हाजिरी लगाई
चिंतपूर्णी । सोमवार को प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष विपन सिंह परमार ने चिंतपूर्णी माता रानी के दरबार में पावन पिंडी के दर्शन किए। चिंतपूर्णी मंदिर के पुजारी संदीप कालिया ने विधिवत रूप से पूजा करवाई। पूजा करने वाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने मां चिंतपूर्णी के दरबार में पावन वट वृक्ष को मोली बांधी और मनोकामना मांगी। मंदिर अधिकारी रोहित जाल्टा ने माता रानी की फोटो देकर विधानसभा अध्यक्ष को सम्मानित किया। वित्त अधिकारी आशीष शर्मा, भाजपा जिला देहरा अध्यक्ष संजीव शर्मा, भाजपा आईटी संयोजक राजेश पराशर, भाजपा नेता निरंजन कालिया आदि उपस्थित रहे।
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हिमाचल दस्तक विस अध्यक्ष ने श्री नयना देवी जी मंदिर में टेका माथा श्री नयना देवी। प्रदेश के सिद्ध शक्तिपीठ श्री नयना देवी जी में विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार ने परिवार सहित माता के दर्शन किए। इस दौरान प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य आशुतोष शर्मा, मंदिर न्यास कर्मचारी संघ के प्रधान महेंद्र सिंह ठाकुर, पुजारी सतपाल गौतम, ललित मोहन, मंदिर अधिकारी विजय गौतम, पुजारी अनिरुद्ध शर्मा, अमित गौतम, उमेश शर्मा, दीपक शर्मा मौजूद रहे। -हिमाचल दस्तक दैनिक भास्कर विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने मां चिंतपूर्णी के दरबार में हाजिरी लगाई चिंतपूर्णी । सोमवार को प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष विपन सिंह परमार ने चिंतपूर्णी माता रानी के दरबार में पावन पिंडी के दर्शन किए। चिंतपूर्णी मंदिर के पुजारी संदीप कालिया ने विधिवत रूप से पूजा करवाई। पूजा करने वाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने मां चिंतपूर्णी के दरबार में पावन वट वृक्ष को मोली बांधी और मनोकामना मांगी। मंदिर अधिकारी रोहित जाल्टा ने माता रानी की फोटो देकर विधानसभा अध्यक्ष को सम्मानित किया। वित्त अधिकारी आशीष शर्मा, भाजपा जिला देहरा अध्यक्ष संजीव शर्मा, भाजपा आईटी संयोजक राजेश पराशर, भाजपा नेता निरंजन कालिया आदि उपस्थित रहे।
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हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को बहुत ही पूजनीय माना जाता है, हर कोई मां लक्ष्मी की कृपा पाना चाहता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर आपमें ये 5 गुण हैं, तो आपको कभी भी पैसों की कमी नहीं होगी।
जो लोग अपना काम ईमानदारी से करते हैं और किसी को धोखा नहीं देते, उन लोगों पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
जो लोग हमेशा अपना ज्ञान बढ़ाते हैं, वे हर क्षेत्र में सफल होते हैं और मां लक्ष्मी भी उन लोगों पर अपनी कृपा बनाए रखती हैं।
मां लक्ष्मी उन लोगों पर हमेशा मेहरबान रहती हैं, जो अपना काम मेहनत से करते हैं।
जो लोग अपनी आय का एक हिस्सा जरूरतमंदों की मदद में लगाते हैं, उन्हें कभी भी धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है।
जो लोग सोच-समझकर पैसा खर्च करते हैं, उन पर मां लक्ष्मी हमेशा मेहरबान रहती हैं।
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हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को बहुत ही पूजनीय माना जाता है, हर कोई मां लक्ष्मी की कृपा पाना चाहता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर आपमें ये पाँच गुण हैं, तो आपको कभी भी पैसों की कमी नहीं होगी। जो लोग अपना काम ईमानदारी से करते हैं और किसी को धोखा नहीं देते, उन लोगों पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। जो लोग हमेशा अपना ज्ञान बढ़ाते हैं, वे हर क्षेत्र में सफल होते हैं और मां लक्ष्मी भी उन लोगों पर अपनी कृपा बनाए रखती हैं। मां लक्ष्मी उन लोगों पर हमेशा मेहरबान रहती हैं, जो अपना काम मेहनत से करते हैं। जो लोग अपनी आय का एक हिस्सा जरूरतमंदों की मदद में लगाते हैं, उन्हें कभी भी धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है। जो लोग सोच-समझकर पैसा खर्च करते हैं, उन पर मां लक्ष्मी हमेशा मेहरबान रहती हैं।
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सूरज - क्या आप मुझे शादी करेंगी?
खूबसूरत लड़की ने जोरदार थप्पड़ संता के मुंह पर दे मारा।
सूरज - कमाल है, मैं शादी के लिए बोल रहा हूं आप थप्पड़ मार रही हैं।
खूबसूरत लड़की- यह देख रही हूं कि शादी के बाद पीटूंगी तो कुछ कहोगे तो नहीं।
मंगल को होटल प्रोग्राम,
बुध को घूमने जाएंगे।
गुरुवार रेस्टोरेंट,
शुक्रवार मूवी देखेंगे,
शनिवार को पिकनिक. .
हसबेंड- जरूर...और रविवार को मंदिर जाएंगे।
वाइफ़-क्यों ?
हसबेंड- कटोरा लेकर भीख मांगने।
एक औरत ने फोन कियाः हैल्लो, मेरे घर में आग लग गयी है।
मुन्ना- आपने पानी डाला?
औरत- हां, पर फिर भी आग बुझी ही नहीं।
मास्टर- 15 फलों के नाम बताओ।
गप्पू- आम, केला, अमरूद।
मास्टर- शाबाश, 12 और फलों के नाम बताओ।
गप्पू- एक दर्जन केले।
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सूरज - क्या आप मुझे शादी करेंगी? खूबसूरत लड़की ने जोरदार थप्पड़ संता के मुंह पर दे मारा। सूरज - कमाल है, मैं शादी के लिए बोल रहा हूं आप थप्पड़ मार रही हैं। खूबसूरत लड़की- यह देख रही हूं कि शादी के बाद पीटूंगी तो कुछ कहोगे तो नहीं। मंगल को होटल प्रोग्राम, बुध को घूमने जाएंगे। गुरुवार रेस्टोरेंट, शुक्रवार मूवी देखेंगे, शनिवार को पिकनिक. . हसबेंड- जरूर...और रविवार को मंदिर जाएंगे। वाइफ़-क्यों ? हसबेंड- कटोरा लेकर भीख मांगने। एक औरत ने फोन कियाः हैल्लो, मेरे घर में आग लग गयी है। मुन्ना- आपने पानी डाला? औरत- हां, पर फिर भी आग बुझी ही नहीं। मास्टर- पंद्रह फलों के नाम बताओ। गप्पू- आम, केला, अमरूद। मास्टर- शाबाश, बारह और फलों के नाम बताओ। गप्पू- एक दर्जन केले।
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The Kapil Sharma Show: अक्षय कुमार आ रहे हैं कपिल शर्मा के शो पर। कपिल शर्मा के सेट पर इस दौरान करीना कपूर खान, कियारा आडवाणी और दिलजीत दोसांझ भी नजर आने वाले हैं। शो में गुड न्यूज के साथ मस्ती करते कपिल शर्मा की अक्षय कुमार खबर भी लेते दिखेंगे। दरअसल, कपिल ने अक्षय को सुबह के 3 बजे एक ट्वीट कर दिया था। जिसको लेकर अक्षय कुमार ने उन्हें शो पर सुना दिया। मजाकिया अंदाज में अक्षय ने कपिल को खूब परेशान किया।
अक्षय ने पूछा तू हैरान हुआ कि नहीं जब मैंने फोन किया? कपिल ने बताया हां मैं हैरान हो गया था। कपिल ने अक्षयको लेकर बताया कि- 'तू क्या कर रहा है 3 बजे उठकर, मैंने कहा माफ करदो हम हार गए। ' जब कपिल ने अक्षयसे पूछा कि आप क्यों उठे थे 3 बजे? तो अक्षय ने भी पलट कर जवाब दिया मैं कुछ भी करूं 3 बजे उठ कर।
बता दें, कपिल के सेट पर Good Newwz की टीम आने वाली है। कपिल शर्मा करीना, कियारा अक्षयऔर दिलजीत के साथ खूब मस्ती करेते दिखेंगे। अक्षय तो भारती और कृष्णा के साथ भी कॉमेडी में वन ऑन वन करते दिखेंगे।
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The Kapil Sharma Show: अक्षय कुमार आ रहे हैं कपिल शर्मा के शो पर। कपिल शर्मा के सेट पर इस दौरान करीना कपूर खान, कियारा आडवाणी और दिलजीत दोसांझ भी नजर आने वाले हैं। शो में गुड न्यूज के साथ मस्ती करते कपिल शर्मा की अक्षय कुमार खबर भी लेते दिखेंगे। दरअसल, कपिल ने अक्षय को सुबह के तीन बजे एक ट्वीट कर दिया था। जिसको लेकर अक्षय कुमार ने उन्हें शो पर सुना दिया। मजाकिया अंदाज में अक्षय ने कपिल को खूब परेशान किया। अक्षय ने पूछा तू हैरान हुआ कि नहीं जब मैंने फोन किया? कपिल ने बताया हां मैं हैरान हो गया था। कपिल ने अक्षयको लेकर बताया कि- 'तू क्या कर रहा है तीन बजे उठकर, मैंने कहा माफ करदो हम हार गए। ' जब कपिल ने अक्षयसे पूछा कि आप क्यों उठे थे तीन बजे? तो अक्षय ने भी पलट कर जवाब दिया मैं कुछ भी करूं तीन बजे उठ कर। बता दें, कपिल के सेट पर Good Newwz की टीम आने वाली है। कपिल शर्मा करीना, कियारा अक्षयऔर दिलजीत के साथ खूब मस्ती करेते दिखेंगे। अक्षय तो भारती और कृष्णा के साथ भी कॉमेडी में वन ऑन वन करते दिखेंगे।
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श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और कद्दावर नेता गुलाम नबी आजाद को अब एक आतंकी संगठन ने धमकी दी है। इस संगठन ने धमकी वाले पोस्टर सोशल मीडिया पर भी शेयर किए हैं। बता दें कि, यह आतंकी धमकियां उन्हें उस समय दी गई हैं, जब कि गुलाम नबी ने अपने मिशन कश्मीर के लिए घाटी में कई जगहों पर रैली आयोजित करने की योजना बनाई है। इन पोस्ट में लिखा हुआ है कि, 'एक गद्दार के दिल में कभी भी वफादारी नहीं होती। सिर्फ भरोसेमंद दिखने का झूठा एक्ट है। ' आतंकियों की इस पोस्ट में आजाद को 'राजनीतिक गिरगिट' भी कहा गया है।
यह धमकी आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से जुड़े संगठन द रेसिसटेंस फ्रंट (TRF) ने दी है। इस पोस्टर में लिखा है कि आजाद का कांग्रेस छोड़ना और कश्मीर की सियासत में ऐसे एंट्री लेना कोई इत्तेफाक नहीं है। इसमें आगे लिखा है कि कांग्रेस छोड़ने से पहले आजाद ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। बता दें कि गुलाम नबी आजाद ने कुछ समय पहले ही कांग्रेस से त्यागपत्र दिया है। वह पार्टी के नेतृत्व से बेहद परेशान थे और उन्होंने इस दौरान राहुल गांधी पर कई इल्जाम लगाए थे। आजाद ने अपने इस्तीफे में राहुल गांधी को बचकाना और अपरिपक्व बताया था। 50 वर्षों तक कांग्रेस के लिए अपना खून पसीना बहाने वाले आज़ाद ने कहा था कि पार्टी में अनुभवी लोगों की कोई पूछ परख नहीं है। यही नहीं उन्होंने यह भी दावा किया था कि जो भी पार्टी का नया अध्यक्ष होगा वह कठपुतली होगा। हालांकि, सियासी गलियारों में अब ये चर्चाएं चल रहीं हैं कि गुलाम नबी के कांग्रेस छोड़ने के बाद पार्टी के नेता तो उनपर हमलावर हुए ही, लेकिन आतंकवादियों को कांग्रेस से क्या हमदर्दी है, जो वे जम्मू कश्मीर के वफादार नेता को धमकियां दे रहे हैं।
बता दें कि, आजाद ने पार्टी से इस्तीफा देने के बाद जम्मू-कश्मीर का रुख किया है। वह राज्य की सियासत में काफी सक्रिय नज़र आ रहे हैं। सूबे के कई दिग्गज नेताओं ने भी इनके समर्थन में कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया था। आजाद ने अपनी पार्टी बनाने की घोषणा भी कर दी है और जल्द ही वह इसके नाम और चुनाव चिन्ह का भी ऐलान करने वाले हैं। पार्टी छोड़ने के बाद आजाद राजनीति में काफी एक्टिव नज़र आ रहे हैं। वह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह अपने समर्थकों के साथ राज्य के चुनाव में शामिल होंगे।
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श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और कद्दावर नेता गुलाम नबी आजाद को अब एक आतंकी संगठन ने धमकी दी है। इस संगठन ने धमकी वाले पोस्टर सोशल मीडिया पर भी शेयर किए हैं। बता दें कि, यह आतंकी धमकियां उन्हें उस समय दी गई हैं, जब कि गुलाम नबी ने अपने मिशन कश्मीर के लिए घाटी में कई जगहों पर रैली आयोजित करने की योजना बनाई है। इन पोस्ट में लिखा हुआ है कि, 'एक गद्दार के दिल में कभी भी वफादारी नहीं होती। सिर्फ भरोसेमंद दिखने का झूठा एक्ट है। ' आतंकियों की इस पोस्ट में आजाद को 'राजनीतिक गिरगिट' भी कहा गया है। यह धमकी आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से जुड़े संगठन द रेसिसटेंस फ्रंट ने दी है। इस पोस्टर में लिखा है कि आजाद का कांग्रेस छोड़ना और कश्मीर की सियासत में ऐसे एंट्री लेना कोई इत्तेफाक नहीं है। इसमें आगे लिखा है कि कांग्रेस छोड़ने से पहले आजाद ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। बता दें कि गुलाम नबी आजाद ने कुछ समय पहले ही कांग्रेस से त्यागपत्र दिया है। वह पार्टी के नेतृत्व से बेहद परेशान थे और उन्होंने इस दौरान राहुल गांधी पर कई इल्जाम लगाए थे। आजाद ने अपने इस्तीफे में राहुल गांधी को बचकाना और अपरिपक्व बताया था। पचास वर्षों तक कांग्रेस के लिए अपना खून पसीना बहाने वाले आज़ाद ने कहा था कि पार्टी में अनुभवी लोगों की कोई पूछ परख नहीं है। यही नहीं उन्होंने यह भी दावा किया था कि जो भी पार्टी का नया अध्यक्ष होगा वह कठपुतली होगा। हालांकि, सियासी गलियारों में अब ये चर्चाएं चल रहीं हैं कि गुलाम नबी के कांग्रेस छोड़ने के बाद पार्टी के नेता तो उनपर हमलावर हुए ही, लेकिन आतंकवादियों को कांग्रेस से क्या हमदर्दी है, जो वे जम्मू कश्मीर के वफादार नेता को धमकियां दे रहे हैं। बता दें कि, आजाद ने पार्टी से इस्तीफा देने के बाद जम्मू-कश्मीर का रुख किया है। वह राज्य की सियासत में काफी सक्रिय नज़र आ रहे हैं। सूबे के कई दिग्गज नेताओं ने भी इनके समर्थन में कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया था। आजाद ने अपनी पार्टी बनाने की घोषणा भी कर दी है और जल्द ही वह इसके नाम और चुनाव चिन्ह का भी ऐलान करने वाले हैं। पार्टी छोड़ने के बाद आजाद राजनीति में काफी एक्टिव नज़र आ रहे हैं। वह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह अपने समर्थकों के साथ राज्य के चुनाव में शामिल होंगे।
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नई दिल्लीः जम्मू-कश्मीर में पुलवामा हमले के बाद, पूरे देश में एक ही समय में नाराजगी का माहौल बन गया है। इस आतंकी हमले में कम से कम 40 सीआरपीएफ जवान मारे गए और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
एकजुटता के प्रतीक के रूप में, ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने हिंदी फिल्मों में काम करने वाले पाकिस्तानी अभिनेताओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।
पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आधिकारिक प्रतिबंध के बावजूद यदि कोई संगठन पाकिस्तानी कलाकारों के साथ काम करने पर जोर देता है, तो एआईसीडब्ल्यूए उन्हें प्रतिबंधित करेगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कई बॉलीवुड हस्तियों ने हमले में प्रभावित लोगों के परिवारों को आर्थिक सहायता के रूप में अपना समर्थन दिया है। अमिताभ बच्चन, दिलजीत दोसांझ के बाद, अब 'टोटल धमाल' की पूरी टीम ने पुलवामा हमले में जान गंवाने वाले सैनिकों के परिवारों को 50 लाख रुपये का दान दिया है।
गुरुवार, 14 फरवरी को जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकी समूह के एक आत्मघाती हमलावर की पहचान पुलवामा जिले में CRPF की बस में विस्फोटकों से भरे वाहन से हुई, जिसमें कम से कम 40 CRPF के सैनिक मारे गए और कई घायल हो गए। दूसरों को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
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नई दिल्लीः जम्मू-कश्मीर में पुलवामा हमले के बाद, पूरे देश में एक ही समय में नाराजगी का माहौल बन गया है। इस आतंकी हमले में कम से कम चालीस सीआरपीएफ जवान मारे गए और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। एकजुटता के प्रतीक के रूप में, ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने हिंदी फिल्मों में काम करने वाले पाकिस्तानी अभिनेताओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आधिकारिक प्रतिबंध के बावजूद यदि कोई संगठन पाकिस्तानी कलाकारों के साथ काम करने पर जोर देता है, तो एआईसीडब्ल्यूए उन्हें प्रतिबंधित करेगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कई बॉलीवुड हस्तियों ने हमले में प्रभावित लोगों के परिवारों को आर्थिक सहायता के रूप में अपना समर्थन दिया है। अमिताभ बच्चन, दिलजीत दोसांझ के बाद, अब 'टोटल धमाल' की पूरी टीम ने पुलवामा हमले में जान गंवाने वाले सैनिकों के परिवारों को पचास लाख रुपये का दान दिया है। गुरुवार, चौदह फरवरी को जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी समूह के एक आत्मघाती हमलावर की पहचान पुलवामा जिले में CRPF की बस में विस्फोटकों से भरे वाहन से हुई, जिसमें कम से कम चालीस CRPF के सैनिक मारे गए और कई घायल हो गए। दूसरों को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
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फिल्म अभिनेता नील नितिन मुकेश का आज 37वां जन्मदिन है। उनका जन्म 15 जनवरी 1982 को मुंबई में हुआ था। वह पार्श्व गायक मुकेश के पोते और नितिन मुकेश के बेटे हैं। नितिन का फिल्मी करियर ज्यादा खास नहीं रहा है। नितिन शादीशुदा हैं और उन्होंने रुकमनी माथुर से साल 2017 में शादी रचाई थी। गौरतलब है कि नितिन का प्रियंका भाटिया के साथ अफेयर रहा था लेकिन उनकी शादी नहीं हो पाई. . . . आइए जानते हैं आखिर क्या रही उनकी रिलेशनशिप टूटने की वजह. .
शुरुआती दौर में नितिन ने प्रियंका को लेकर अफेयर की बातें छिपाकर ही रखी थी। वह मीडिया में अपनी रिलेशनशिप के बारे में खुलकर नहीं बोला करते थे। इसके बाद साल 2009 में फिल्म 'जेल' आई जिसकी प्रमोशन के दौरान ये बात पूरी तरह से सामने आ गई कि नितिन और प्रियंका भाटी रिलेशनशिप में हैं। उस दौरान नील ने कहा था 'प्रियंका मेरे परिवार का अभिन्न हिस्सा है और हम दोनों एक-दूजे को लेकर काफी सहज हैं। '
उन्होंने आगे बताया था कि 'मेरे और प्रियंका के माता-पिता केवल एक-दूसरे को जानते ही नहीं हैं बल्कि घर भी आना-जाना लगा रहता है, लेकिन एक प्रेमी जोड़े से ज्यादा प्रियंका और मुझमें एक दोस्ती का रिश्ता है। ' नील ने आगे बताया था कि 'हम एक दूजे से कुछ भी नहीं छिपाते हैं, हम खुलेतौर पर एक-दूजे से मिलते हैं और हम दोनों को खुद पर गर्व भी है। ' लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि दो साल बाद ही नील और प्रियंका को प्यार इतनी आसानी से मिट गया।
पहले आपको बता दें कि प्रियंका एक फैशन डिजाइनर हैं और नील की फिल्मों के लिए वह उनके कॉस्ट्यूम भी डिजाइन किया करती थीं , लेकिन बताया जाता है कि जब नील बॉलीवुड में फेमस होने लगे तो उन्होंने प्रियंका को धीरे-धीरे नजरअंदाज करना शुरू कर दिया और देखते ही देखते दोनों में कब दरार पड़ गई किसी को पता ही नहीं चला। लेकिन इसकी वजह बॉलीवुड की पद्मावती दीपिका पादुकोण को माना जाता है। बता दें कि साल 2010 में फिल्म परिंदे आई थी जिसके बाद नील और दीपिका को लेकर अफेयर की चर्चा चलने लगी थी।
आखिर में बात करें नील के वर्क फ्रंट की तो बता दें कि वह अपनी अपकमिंग फिल्म साहो में नजर आने वाले हैं। फिल्म में बाहुबली फेम एक्टर प्रभास मुख्य भूमिका हैं। बताया जा रहा है कि फिल्म में मुकेश एक खलनायक के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म का बजट 300 करोड़ है और इस साल 15 अगस्त ( स्वतंत्रता दिवस) के मौके पर रिलीज होनी है।
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फिल्म अभिनेता नील नितिन मुकेश का आज सैंतीसवां जन्मदिन है। उनका जन्म पंद्रह जनवरी एक हज़ार नौ सौ बयासी को मुंबई में हुआ था। वह पार्श्व गायक मुकेश के पोते और नितिन मुकेश के बेटे हैं। नितिन का फिल्मी करियर ज्यादा खास नहीं रहा है। नितिन शादीशुदा हैं और उन्होंने रुकमनी माथुर से साल दो हज़ार सत्रह में शादी रचाई थी। गौरतलब है कि नितिन का प्रियंका भाटिया के साथ अफेयर रहा था लेकिन उनकी शादी नहीं हो पाई. . . . आइए जानते हैं आखिर क्या रही उनकी रिलेशनशिप टूटने की वजह. . शुरुआती दौर में नितिन ने प्रियंका को लेकर अफेयर की बातें छिपाकर ही रखी थी। वह मीडिया में अपनी रिलेशनशिप के बारे में खुलकर नहीं बोला करते थे। इसके बाद साल दो हज़ार नौ में फिल्म 'जेल' आई जिसकी प्रमोशन के दौरान ये बात पूरी तरह से सामने आ गई कि नितिन और प्रियंका भाटी रिलेशनशिप में हैं। उस दौरान नील ने कहा था 'प्रियंका मेरे परिवार का अभिन्न हिस्सा है और हम दोनों एक-दूजे को लेकर काफी सहज हैं। ' उन्होंने आगे बताया था कि 'मेरे और प्रियंका के माता-पिता केवल एक-दूसरे को जानते ही नहीं हैं बल्कि घर भी आना-जाना लगा रहता है, लेकिन एक प्रेमी जोड़े से ज्यादा प्रियंका और मुझमें एक दोस्ती का रिश्ता है। ' नील ने आगे बताया था कि 'हम एक दूजे से कुछ भी नहीं छिपाते हैं, हम खुलेतौर पर एक-दूजे से मिलते हैं और हम दोनों को खुद पर गर्व भी है। ' लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि दो साल बाद ही नील और प्रियंका को प्यार इतनी आसानी से मिट गया। पहले आपको बता दें कि प्रियंका एक फैशन डिजाइनर हैं और नील की फिल्मों के लिए वह उनके कॉस्ट्यूम भी डिजाइन किया करती थीं , लेकिन बताया जाता है कि जब नील बॉलीवुड में फेमस होने लगे तो उन्होंने प्रियंका को धीरे-धीरे नजरअंदाज करना शुरू कर दिया और देखते ही देखते दोनों में कब दरार पड़ गई किसी को पता ही नहीं चला। लेकिन इसकी वजह बॉलीवुड की पद्मावती दीपिका पादुकोण को माना जाता है। बता दें कि साल दो हज़ार दस में फिल्म परिंदे आई थी जिसके बाद नील और दीपिका को लेकर अफेयर की चर्चा चलने लगी थी। आखिर में बात करें नील के वर्क फ्रंट की तो बता दें कि वह अपनी अपकमिंग फिल्म साहो में नजर आने वाले हैं। फिल्म में बाहुबली फेम एक्टर प्रभास मुख्य भूमिका हैं। बताया जा रहा है कि फिल्म में मुकेश एक खलनायक के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म का बजट तीन सौ करोड़ है और इस साल पंद्रह अगस्त के मौके पर रिलीज होनी है।
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झारखंड के गढ़वा में 'मंकीपॉक्स' का एक संदिग्ध मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं सभी उपायुक्तों को अस्पतालों में इस लक्षण के मरीजों के लिए अलग बेड की व्यवस्था करने और स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिये गये हैं।
झारखंड सरकार के विकास आयुक्त सह अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अरुण कुमार सिंह ने बताया कि गढ़वा में 'मंकीपॉक्स' का संदिग्ध मामला सामने आने के बाद पूरे राज्य में इस बीमारी को लेकर एलर्ट जारी कर दिया गया और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं सभी उपायुक्तों को अस्पतालों में इस लक्षण के मरीजों के लिए अलग बेड की व्यवस्था करने और स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिये गये हैं।
उन्होंने बताया कि आज गढ़वा में मंकीपॉक्स का एक संदिग्ध मामले सामने आने के बाद ही पूरे राज्य में एलर्ट जारी किया गया और सभी चिकित्सा संस्थानों तथा जिला अस्पतालों को मंकीपॉक्स के संदिग्ध मरीजों को अलग रखने के लिए पांच-पांच बेड की अलग व्यवस्था करने के निर्देश दिये गये।
गढ़वा में सात वर्षीय बालिका में मंकीपॉक्स जैसे लक्षण दिखने के बाद प्रशासन चौकन्ना हो गया।
इस मामले में गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ कमलेश कुमार ने बताया कि लड़की ने कहीं यात्रा नहीं की है। उन्होंने कहा कि यह किसी दवा की प्रतिक्रिया भी हो सकती है, उसके शरीर में जगह-जगह फोड़े जैसे हो गए हैं।
सावधानी के तौर पर बच्ची को अलग वार्ड में रखकर सदर अस्पताल में उसका इलाज किया जा रहा है ।
गढ़वा के इस मामले की जानकारी होते ही आज पलामू जिले में प्रशासन ने जन स्वास्थ्य के प्रति अतिरिक्त एहतियात बरतने के लिए अभियान शुरू किया।
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झारखंड के गढ़वा में 'मंकीपॉक्स' का एक संदिग्ध मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं सभी उपायुक्तों को अस्पतालों में इस लक्षण के मरीजों के लिए अलग बेड की व्यवस्था करने और स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिये गये हैं। झारखंड सरकार के विकास आयुक्त सह अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने बताया कि गढ़वा में 'मंकीपॉक्स' का संदिग्ध मामला सामने आने के बाद पूरे राज्य में इस बीमारी को लेकर एलर्ट जारी कर दिया गया और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं सभी उपायुक्तों को अस्पतालों में इस लक्षण के मरीजों के लिए अलग बेड की व्यवस्था करने और स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि आज गढ़वा में मंकीपॉक्स का एक संदिग्ध मामले सामने आने के बाद ही पूरे राज्य में एलर्ट जारी किया गया और सभी चिकित्सा संस्थानों तथा जिला अस्पतालों को मंकीपॉक्स के संदिग्ध मरीजों को अलग रखने के लिए पांच-पांच बेड की अलग व्यवस्था करने के निर्देश दिये गये। गढ़वा में सात वर्षीय बालिका में मंकीपॉक्स जैसे लक्षण दिखने के बाद प्रशासन चौकन्ना हो गया। इस मामले में गढ़वा के सिविल सर्जन डॉ कमलेश कुमार ने बताया कि लड़की ने कहीं यात्रा नहीं की है। उन्होंने कहा कि यह किसी दवा की प्रतिक्रिया भी हो सकती है, उसके शरीर में जगह-जगह फोड़े जैसे हो गए हैं। सावधानी के तौर पर बच्ची को अलग वार्ड में रखकर सदर अस्पताल में उसका इलाज किया जा रहा है । गढ़वा के इस मामले की जानकारी होते ही आज पलामू जिले में प्रशासन ने जन स्वास्थ्य के प्रति अतिरिक्त एहतियात बरतने के लिए अभियान शुरू किया।
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Don't Miss!
टेलीविजन कॉमेडी शो के लिए मशहूर अभिनेता कृष्णा अभिषेक अब मर्सिडीज-बेंज जीएलई लग्जरी एसयूवी के मालिक बन गए हैं। कृष्णा की बहन, आरती सिंह, जो खुद एक आर्टिस्ट भी हैं, ने कृष्णा के इस लग्जरी एसयूवी के साथ अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की हैं। बहन आरती ने मर्सिडीज कार को घर लाने के लिए अपने भाई की कड़ी मेहनत की सराहना करते हुए पोस्ट के साथ एक प्यारा सा कैप्शन दिया।
मर्सिडीज-बेंज GLE जर्मन वाहन निर्माता की सबसे अधिक लोकप्रिय एसयूवी कारों में से एक है, खासकर यह मशहूर हस्तियों के बीच भी काफी लोकप्रिय है। यह एसयूवी अपनी लग्जरी सुविधाओं के साथ दमदार परफॉर्मेंस के लिए भी जानी जाती है।
आरती इंस्टाग्राम पर अपनी एक पोस्ट में लिखती हैं, " मुझे आप पर बहुत गर्व है। वैसे, मेरा ध्यान कारों पर कभी भी ज्यादा नहीं रहा लेकिन यह मेरी ड्रीम कार रही है। मैं अभी इसे खरीद नहीं सकती लेकिन आपने इसे खरीदा और मेरे सपने को साकार किया. . और इसका पूरा श्रेय आपको जाता है क्योंकि यह आपकी कड़ी मेहनत का नतीजा है। . . . गर्वित बहन कृष्णा 30। "
भारत में मर्सिडीज-बेंज GLE 84 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये की कीमत के बीच उपलब्ध है। इसे पेट्रोल और डीजल, दोनों इंजन विकल्प में उपलब्ध किया गया है। हालांकि, भारत में इसके डीजल इंजन ऑप्शन की बिक्री ज्यादा होती है। डीजल इंजन ऑप्शन में यह एसयूवी 2. 1-लीटर चार-सिलेंडर इंजन से लैस है। यह इंजन 204 बीएचपी की पॉवर और 500 न्यूटन मीटर का पीक टॉर्क जनरेट करता है।
टॉप वैरिएंट में 3. 0-लीटर V6 डीजल इंजन मिलता है जो 258 बीएचपी की पॉवर के साथ 620 न्यूटन मीटर का पीक टॉर्क प्रदान करता है। वहीं 3. 0-लीटर V6 पेट्रोल इंजन 333 बीएचपी की पॉवर के साथ 480 न्यूटन मीटर का टॉर्क उत्पन्न करने में सक्षम है। सभी इंजन वैरिएंट के साथ 9-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का विकल्प मिलता है।
कृष्णा अभिषेक टेलीविजन कॉमेडी शो के लिए लोकप्रिय कलाकारों में से एक रहे हैं और कॉमेडी नाइट्स विद कपिल शो में अपने अभिनय के लिए जाने जाते हैं। अभिनेता को फिल्मों में हास्य प्रदर्शन के बीच विभिन्न चैनलों पर मेजबानी के लिए भी जाना जाता है। कृष्णा अभिषेक के गैरेज में मर्सिडीज बेंज सीएलए, ऑडी क्यू5 और ऑडी ए3 कैब्रियोलेट सहित कई जर्मन लक्जरी कारें देखी गेन हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कृष्णा की बहन, आरती सिंह ने पिछले साल महिंद्रा थार खरीदी थी और कृष्णा ने उन्हें इसके लिए बधाई देते हुए एक पोस्ट डाली और उनकी कड़ी मेहनत की सराहना की थी।
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Don't Miss! टेलीविजन कॉमेडी शो के लिए मशहूर अभिनेता कृष्णा अभिषेक अब मर्सिडीज-बेंज जीएलई लग्जरी एसयूवी के मालिक बन गए हैं। कृष्णा की बहन, आरती सिंह, जो खुद एक आर्टिस्ट भी हैं, ने कृष्णा के इस लग्जरी एसयूवी के साथ अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की हैं। बहन आरती ने मर्सिडीज कार को घर लाने के लिए अपने भाई की कड़ी मेहनत की सराहना करते हुए पोस्ट के साथ एक प्यारा सा कैप्शन दिया। मर्सिडीज-बेंज GLE जर्मन वाहन निर्माता की सबसे अधिक लोकप्रिय एसयूवी कारों में से एक है, खासकर यह मशहूर हस्तियों के बीच भी काफी लोकप्रिय है। यह एसयूवी अपनी लग्जरी सुविधाओं के साथ दमदार परफॉर्मेंस के लिए भी जानी जाती है। आरती इंस्टाग्राम पर अपनी एक पोस्ट में लिखती हैं, " मुझे आप पर बहुत गर्व है। वैसे, मेरा ध्यान कारों पर कभी भी ज्यादा नहीं रहा लेकिन यह मेरी ड्रीम कार रही है। मैं अभी इसे खरीद नहीं सकती लेकिन आपने इसे खरीदा और मेरे सपने को साकार किया. . और इसका पूरा श्रेय आपको जाता है क्योंकि यह आपकी कड़ी मेहनत का नतीजा है। . . . गर्वित बहन कृष्णा तीस। " भारत में मर्सिडीज-बेंज GLE चौरासी लाख रुपये से एक करोड़ रुपये की कीमत के बीच उपलब्ध है। इसे पेट्रोल और डीजल, दोनों इंजन विकल्प में उपलब्ध किया गया है। हालांकि, भारत में इसके डीजल इंजन ऑप्शन की बिक्री ज्यादा होती है। डीजल इंजन ऑप्शन में यह एसयूवी दो. एक-लीटर चार-सिलेंडर इंजन से लैस है। यह इंजन दो सौ चार बीएचपी की पॉवर और पाँच सौ न्यूटन मीटर का पीक टॉर्क जनरेट करता है। टॉप वैरिएंट में तीन. शून्य-लीटर Vछः डीजल इंजन मिलता है जो दो सौ अट्ठावन बीएचपी की पॉवर के साथ छः सौ बीस न्यूटन मीटर का पीक टॉर्क प्रदान करता है। वहीं तीन. शून्य-लीटर Vछः पेट्रोल इंजन तीन सौ तैंतीस बीएचपी की पॉवर के साथ चार सौ अस्सी न्यूटन मीटर का टॉर्क उत्पन्न करने में सक्षम है। सभी इंजन वैरिएंट के साथ नौ-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का विकल्प मिलता है। कृष्णा अभिषेक टेलीविजन कॉमेडी शो के लिए लोकप्रिय कलाकारों में से एक रहे हैं और कॉमेडी नाइट्स विद कपिल शो में अपने अभिनय के लिए जाने जाते हैं। अभिनेता को फिल्मों में हास्य प्रदर्शन के बीच विभिन्न चैनलों पर मेजबानी के लिए भी जाना जाता है। कृष्णा अभिषेक के गैरेज में मर्सिडीज बेंज सीएलए, ऑडी क्यूपाँच और ऑडी एतीन कैब्रियोलेट सहित कई जर्मन लक्जरी कारें देखी गेन हैं। दिलचस्प बात यह है कि कृष्णा की बहन, आरती सिंह ने पिछले साल महिंद्रा थार खरीदी थी और कृष्णा ने उन्हें इसके लिए बधाई देते हुए एक पोस्ट डाली और उनकी कड़ी मेहनत की सराहना की थी।
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एएनएम न्यूज़, ब्यूरो : साउथ ईस्टर्न कोल्फील्डस लिमिटेड ने माइनिंग सरदार और डिप्टी सर्वेयर पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। साउथ ईस्टर्न कोल्फील्डस लिमिटेड ने 405 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइ आवेदन मांगे हैं। इन पदों के लिए आवेदन 03 फरवरी 2023 से कर सकते हैं। आवेदन करने की आखिरी तारीख 23 फरवरी 2023 है।
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एएनएम न्यूज़, ब्यूरो : साउथ ईस्टर्न कोल्फील्डस लिमिटेड ने माइनिंग सरदार और डिप्टी सर्वेयर पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। साउथ ईस्टर्न कोल्फील्डस लिमिटेड ने चार सौ पाँच पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइ आवेदन मांगे हैं। इन पदों के लिए आवेदन तीन फरवरी दो हज़ार तेईस से कर सकते हैं। आवेदन करने की आखिरी तारीख तेईस फरवरी दो हज़ार तेईस है।
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गुरु पुष्य नक्षत्र के मौके पर गुरुवार को खरीदी का महायोग बन रहा है। ज्योर्तिविद के अनुसार पुष्य नक्षत्र पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जो समृद्घि देंगे। महामुहूर्त के चलते वाहन, इलेक्ट्रानिक्स, सोने-चांदी के जेवर, कपड़ा आदि बा. . . madhya pradeshWed, 15 Oct 2014 10:45 PM (IST)
सीहोर। गजकेशरी योग के साथ 95 साल बाद गुरु पुष्य पर राजयोग बन रहा है। दीपावली से सात दिन पहले लगभग 27 घंटे खरीदी का महामुहूर्त गुरु पुष्य नक्षत्र रहेगा। इसे लेकर बाजार में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। धनतेरस से पहले दो . . . madhya pradeshWed, 15 Oct 2014 08:38 AM (IST)
भारत के मंगलयान की सफलता पर गुरुवार को मंगल ग्रह की जन्मस्थली उज्जयिनी में उत्सव मनाया जाएगा। गुरु पुष्य नक्षत्र के साथ आए सवार्थसिद्घि तथा गजकेसरी योग के महामुहूर्त में भगवान मंगलनाथ का पूजन-अभिषेक किया जाएगा। madhya pradeshWed, 15 Oct 2014 01:25 AM (IST)
सीहोर(ब्यूरो)। इसबार दीपावली से सात दिन पहले 27 घंटे खरीदी का महामुहूर्त गुरु पुष्य नक्षत्र रहेगा। लोग दो दिन तक बाजार से पुष्य नक्षत्र के संयोग में खरीदारी कर सकेंगे। 2011 के बाद इस वर्ष गुरु पुष्य नक्षत्र का संयोग बना . . . madhya pradeshWed, 08 Oct 2014 02:53 AM (IST)
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गुरु पुष्य नक्षत्र के मौके पर गुरुवार को खरीदी का महायोग बन रहा है। ज्योर्तिविद के अनुसार पुष्य नक्षत्र पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जो समृद्घि देंगे। महामुहूर्त के चलते वाहन, इलेक्ट्रानिक्स, सोने-चांदी के जेवर, कपड़ा आदि बा. . . madhya pradeshWed, पंद्रह अक्टूबर दो हज़ार चौदह दस:पैंतालीस PM सीहोर। गजकेशरी योग के साथ पचानवे साल बाद गुरु पुष्य पर राजयोग बन रहा है। दीपावली से सात दिन पहले लगभग सत्ताईस घंटाटे खरीदी का महामुहूर्त गुरु पुष्य नक्षत्र रहेगा। इसे लेकर बाजार में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। धनतेरस से पहले दो . . . madhya pradeshWed, पंद्रह अक्टूबर दो हज़ार चौदह आठ:अड़तीस AM भारत के मंगलयान की सफलता पर गुरुवार को मंगल ग्रह की जन्मस्थली उज्जयिनी में उत्सव मनाया जाएगा। गुरु पुष्य नक्षत्र के साथ आए सवार्थसिद्घि तथा गजकेसरी योग के महामुहूर्त में भगवान मंगलनाथ का पूजन-अभिषेक किया जाएगा। madhya pradeshWed, पंद्रह अक्टूबर दो हज़ार चौदह एक:पच्चीस AM सीहोर। इसबार दीपावली से सात दिन पहले सत्ताईस घंटाटे खरीदी का महामुहूर्त गुरु पुष्य नक्षत्र रहेगा। लोग दो दिन तक बाजार से पुष्य नक्षत्र के संयोग में खरीदारी कर सकेंगे। दो हज़ार ग्यारह के बाद इस वर्ष गुरु पुष्य नक्षत्र का संयोग बना . . . madhya pradeshWed, आठ अक्टूबर दो हज़ार चौदह दो:तिरेपन AM
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धीरेंद्र कृष्ण भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए क्या करने वाले हैं इसका रोडमैप तो उन्होंने सामने नहीं रखा है लेकिन उन्होंने संकेत दिए हैं कि वो अपने सनातन को कैसे मजबूत करेंगे. इसके लिए संत समाज के लोग भी उनके साथ खड़े दिख रहे हैं. लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस विषय पर अलग राय रखते हैं. देखें वीडियो.
Dhirendra Krishna Shastri has pledged to make India a Hindu nation. The many saints from Sant Samaj are also supporting him. But Swami Avimukteshwaranand has a different opinion on this subject. Watch the full report.
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धीरेंद्र कृष्ण भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए क्या करने वाले हैं इसका रोडमैप तो उन्होंने सामने नहीं रखा है लेकिन उन्होंने संकेत दिए हैं कि वो अपने सनातन को कैसे मजबूत करेंगे. इसके लिए संत समाज के लोग भी उनके साथ खड़े दिख रहे हैं. लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस विषय पर अलग राय रखते हैं. देखें वीडियो. Dhirendra Krishna Shastri has pledged to make India a Hindu nation. The many saints from Sant Samaj are also supporting him. But Swami Avimukteshwaranand has a different opinion on this subject. Watch the full report.
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समाधि, आमतौर पर संतों और महात्माओं की स्मृति में चौकोर व आयताकार रूप में बनाई जाती है। उन्हे पत्थर या ईटों से बनाया जाता है और उनमें महान दिवंगत आत्माओं की राख या अवशेष को रख दिया जाता है। वहां उनकी तस्वीर या मूर्ति को लगवाया जाता है ताकि उनके जीवन और कार्यो को याद किया जा सके।
ऐसी ही एक समाधि संत बाबा बिहारी जी की है जो मुख्य शहर के काफी करीब, सिरसा शहर के पश्चिमी भाग में रनिया सड़क पर स्थित है। जहां समाधि बनी हुई है, उस परिसर में एक सुंदर बगीचा, वाटिका और एक मंदिर भी बना हुआ है।
समाधि पर हर साल, पहली जनवरी को एक मुफ्त भंडारे का आयोजन किया जाता है। यहां आयोजित त्यौहार में सांस्कृतिक और मनोरंजक गतिविधियां, संगीत, खेल, नृत्य, नाटकीय प्रदर्शन, कविता पाठ, खरीदारी, और कई किस्मों के भोजन आदि का लुत्फ भी उठाया जा सकता है। इस त्यौहार में हर उम्र व वर्ग के लिए कुछ - न - कुछ है और साल भर में यहां हजारों पर्यटक आते है।
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समाधि, आमतौर पर संतों और महात्माओं की स्मृति में चौकोर व आयताकार रूप में बनाई जाती है। उन्हे पत्थर या ईटों से बनाया जाता है और उनमें महान दिवंगत आत्माओं की राख या अवशेष को रख दिया जाता है। वहां उनकी तस्वीर या मूर्ति को लगवाया जाता है ताकि उनके जीवन और कार्यो को याद किया जा सके। ऐसी ही एक समाधि संत बाबा बिहारी जी की है जो मुख्य शहर के काफी करीब, सिरसा शहर के पश्चिमी भाग में रनिया सड़क पर स्थित है। जहां समाधि बनी हुई है, उस परिसर में एक सुंदर बगीचा, वाटिका और एक मंदिर भी बना हुआ है। समाधि पर हर साल, पहली जनवरी को एक मुफ्त भंडारे का आयोजन किया जाता है। यहां आयोजित त्यौहार में सांस्कृतिक और मनोरंजक गतिविधियां, संगीत, खेल, नृत्य, नाटकीय प्रदर्शन, कविता पाठ, खरीदारी, और कई किस्मों के भोजन आदि का लुत्फ भी उठाया जा सकता है। इस त्यौहार में हर उम्र व वर्ग के लिए कुछ - न - कुछ है और साल भर में यहां हजारों पर्यटक आते है।
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हाथरस कांड की चर्चा पूरे देश में है. कांग्रेस समेत विपक्षी राजनीतिक दल इस मामलों को लेकर अपनी खोई जमीन तलासने में जुटे हैं. वहीं उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मामले में बड़ी कार्रवाई की है. सीएम योगी ने हाथरस के एसपी, डीएसपी और इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया है. सभी का नारको पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया जाएगा. अब इस मामले का ऑडियो सामने आया है.
इस ऑडियो में एक अज्ञात व्यक्ति संदीप से बात कर रहा है, वह उनसे कह रहा है कि वो घर से कहीं न जाएं, क्योंकि कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी उनके घर आने वाली हैं.
इस बातचीत में व्यक्ति यह भी कहते सुना जा सकता हैः
इस मामले में एक अन्य बातचीत की रिकॉर्डिंग भी इस बीच सामने आई है. यह ऑडियो किसी ग्रामीण महिला और संदीप के बीच की है. इसमें मृतका के भाई को समझाया जा रहा है कि वह 25 लाख रुपए के मुआवजे पर किसी कीमत पर फैसला न करे और 50 लाख तक के मुआवजे पर निष्कर्ष तक पहुंचे. ऑडियो में सुना जा सकता है कि महिला कहती है कि कुछ राजनेता इस मामले में फैसला न करने के लिए कह रहे हैं. बातचीत के दौरान किसी 'राहुल', मनीष सिसोदिया और बरखा दत्त का नाम भी सामने आता है.
बता दें कि दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हाथरस पीड़िता के दम तोड़ने के बाद से यह पूरा मामला गरमाया हुआ है. दरअसल, मृतका के साथ कथित तौर पर दो हफ्ते पहले बलात्कार हुआ था. इसके बाद उसके साथ घटना के वक्त हुई मारपीट में कई गंभीर चोटें आई और इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई. फिर उसके अंतिम संस्कार को लेकर यूपी पुलिस पर सवाल उठे. हालांकि बाद में यह साफ किया गया कि दाह संस्कार के समय मृतका के पिता वहां मौजूद थे.
एएनआई से बात करते हुए, एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया था कि जिन फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था, वे भी प्राप्त हो गई हैं. एडीजी ने कहा था कि एफएसएल रिपोर्ट में 'बलात्कार' का कोई सबूत नहीं मिला. उन्होंने निष्कर्ष पर बात करते हुए कहा था मृतका पर कोई यौन हमला नहीं हुआ था, और मौत का कारण गला घोंटने और रीढ़ की चोट थी.
बता दें कि एक ओर जहा. पूरा देश इस मामले पर इंसाफ की गुहार लगा रहा है, वहीं इस केस में अब भी कई पहलुओं से राज उठना बाकी है मगर कुछ राजनेता इस केस के जरिए अपनी राजनीति करने में जुटे हैं. इसी दौरान सोशल मीडिया पर भी मुख्यधारा मीडिया अपना अजेंडा चलाने के लिए कई झूठ फैला रहा है. एसआईटी को पूरे मामले की जांच भी सौंप दी गई है.
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हाथरस कांड की चर्चा पूरे देश में है. कांग्रेस समेत विपक्षी राजनीतिक दल इस मामलों को लेकर अपनी खोई जमीन तलासने में जुटे हैं. वहीं उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मामले में बड़ी कार्रवाई की है. सीएम योगी ने हाथरस के एसपी, डीएसपी और इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया है. सभी का नारको पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया जाएगा. अब इस मामले का ऑडियो सामने आया है. इस ऑडियो में एक अज्ञात व्यक्ति संदीप से बात कर रहा है, वह उनसे कह रहा है कि वो घर से कहीं न जाएं, क्योंकि कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी उनके घर आने वाली हैं. इस बातचीत में व्यक्ति यह भी कहते सुना जा सकता हैः इस मामले में एक अन्य बातचीत की रिकॉर्डिंग भी इस बीच सामने आई है. यह ऑडियो किसी ग्रामीण महिला और संदीप के बीच की है. इसमें मृतका के भाई को समझाया जा रहा है कि वह पच्चीस लाख रुपए के मुआवजे पर किसी कीमत पर फैसला न करे और पचास लाख तक के मुआवजे पर निष्कर्ष तक पहुंचे. ऑडियो में सुना जा सकता है कि महिला कहती है कि कुछ राजनेता इस मामले में फैसला न करने के लिए कह रहे हैं. बातचीत के दौरान किसी 'राहुल', मनीष सिसोदिया और बरखा दत्त का नाम भी सामने आता है. बता दें कि दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हाथरस पीड़िता के दम तोड़ने के बाद से यह पूरा मामला गरमाया हुआ है. दरअसल, मृतका के साथ कथित तौर पर दो हफ्ते पहले बलात्कार हुआ था. इसके बाद उसके साथ घटना के वक्त हुई मारपीट में कई गंभीर चोटें आई और इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई. फिर उसके अंतिम संस्कार को लेकर यूपी पुलिस पर सवाल उठे. हालांकि बाद में यह साफ किया गया कि दाह संस्कार के समय मृतका के पिता वहां मौजूद थे. एएनआई से बात करते हुए, एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया था कि जिन फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था, वे भी प्राप्त हो गई हैं. एडीजी ने कहा था कि एफएसएल रिपोर्ट में 'बलात्कार' का कोई सबूत नहीं मिला. उन्होंने निष्कर्ष पर बात करते हुए कहा था मृतका पर कोई यौन हमला नहीं हुआ था, और मौत का कारण गला घोंटने और रीढ़ की चोट थी. बता दें कि एक ओर जहा. पूरा देश इस मामले पर इंसाफ की गुहार लगा रहा है, वहीं इस केस में अब भी कई पहलुओं से राज उठना बाकी है मगर कुछ राजनेता इस केस के जरिए अपनी राजनीति करने में जुटे हैं. इसी दौरान सोशल मीडिया पर भी मुख्यधारा मीडिया अपना अजेंडा चलाने के लिए कई झूठ फैला रहा है. एसआईटी को पूरे मामले की जांच भी सौंप दी गई है.
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Garena Free Fire Max गूगल प्ले स्टोर पर 28 सितम्बर 2021 को रिलीज किया गया था। इस बैटल रॉयल गेम के अंदर अनोखी और खास चीज़ें मौजूद है। जैसे एलीट पास, इलीट बडंल, पेट, स्किन और कैरेक्टर्स आदि। ये सभी गेम की महंगी और एक्सपेंसिव चीज़ें हैं। इन सभी को खरीदने के लिए खिलाड़ियों को डायमंड्स करेंसी का इस्तेमाल करना पड़ता है।
गरेना फ्री फायर में डायमंड का टॉप-अप करने के लिए खिलाड़ियों को अपने जेब से पैसे खर्च करना पड़ता है। खैर, इस आर्टिकल में हम Free Fire Max में मुफ्त डायमंड्स पाने के लिए बेहतरीन ऐप्स पर नजर डालने वाले हैं।
नोटः नीचे खिलाड़ियों को मुफ्त में डायमंड्स प्राप्त करने के लिए एप्लिकेशन के बारे में जानकारी दी गई है।
गरेना फ्री फायर में मुफ्त डायमंड्स पाना आसान नहीं होता है। हालांकि, यहां पर खिलाड़ियों को एप्लिकेशन के बारे में जानकारी दी गई है। इनका इस्तेमाल करके मुफ्त में हिरे खरीद सकते हैं।
Garena Free Fire Max में मुफ्त डायमंड्स पाने के लिए गूगल ओपिनियन रिवॉर्ड सबसे बेहतरीन एप्लिकेशन है। इस ऐप को काफी समय पहले डेवेलप किया गया था। इस ऐप पर खिलाड़ियों को सर्वे और ऑनलाइन काम करना पड़ता है। उसके बाद खिलाड़ियों को गूगल क्रेडिट्स प्राप्त होते हैं। इन क्रेडिट्स का उपयोग करके मुफ्त में हिरे प्राप्त कर सकते हैं।
गरेना फ्री फायर मैक्स के अंदर मुफ्त में डायमंड्स प्राप्त करने के लिए Booyah एप्लिकेशन सबसे बेहतर है। क्योंकि, इस एप्लिकेशन पर खिलाड़ियों को ऑनलाइन मोड के अनुसार स्ट्रीम और वीडियो देखना पड़ता है। इन वीडियो और स्ट्रीम को देखकर क्रेडिट्स और इनाम को प्राप्त कर सकते हैं।
नोटः इंटरनेट पर प्लेयर्स के लिए अनेक जीपीटी वेबसाइट और एप्लिकेशन के विकल्प है, जिन्हें प्लेयर्स अपनी पसंद से उपयोग कर सकते हैं।
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Garena Free Fire Max गूगल प्ले स्टोर पर अट्ठाईस सितम्बर दो हज़ार इक्कीस को रिलीज किया गया था। इस बैटल रॉयल गेम के अंदर अनोखी और खास चीज़ें मौजूद है। जैसे एलीट पास, इलीट बडंल, पेट, स्किन और कैरेक्टर्स आदि। ये सभी गेम की महंगी और एक्सपेंसिव चीज़ें हैं। इन सभी को खरीदने के लिए खिलाड़ियों को डायमंड्स करेंसी का इस्तेमाल करना पड़ता है। गरेना फ्री फायर में डायमंड का टॉप-अप करने के लिए खिलाड़ियों को अपने जेब से पैसे खर्च करना पड़ता है। खैर, इस आर्टिकल में हम Free Fire Max में मुफ्त डायमंड्स पाने के लिए बेहतरीन ऐप्स पर नजर डालने वाले हैं। नोटः नीचे खिलाड़ियों को मुफ्त में डायमंड्स प्राप्त करने के लिए एप्लिकेशन के बारे में जानकारी दी गई है। गरेना फ्री फायर में मुफ्त डायमंड्स पाना आसान नहीं होता है। हालांकि, यहां पर खिलाड़ियों को एप्लिकेशन के बारे में जानकारी दी गई है। इनका इस्तेमाल करके मुफ्त में हिरे खरीद सकते हैं। Garena Free Fire Max में मुफ्त डायमंड्स पाने के लिए गूगल ओपिनियन रिवॉर्ड सबसे बेहतरीन एप्लिकेशन है। इस ऐप को काफी समय पहले डेवेलप किया गया था। इस ऐप पर खिलाड़ियों को सर्वे और ऑनलाइन काम करना पड़ता है। उसके बाद खिलाड़ियों को गूगल क्रेडिट्स प्राप्त होते हैं। इन क्रेडिट्स का उपयोग करके मुफ्त में हिरे प्राप्त कर सकते हैं। गरेना फ्री फायर मैक्स के अंदर मुफ्त में डायमंड्स प्राप्त करने के लिए Booyah एप्लिकेशन सबसे बेहतर है। क्योंकि, इस एप्लिकेशन पर खिलाड़ियों को ऑनलाइन मोड के अनुसार स्ट्रीम और वीडियो देखना पड़ता है। इन वीडियो और स्ट्रीम को देखकर क्रेडिट्स और इनाम को प्राप्त कर सकते हैं। नोटः इंटरनेट पर प्लेयर्स के लिए अनेक जीपीटी वेबसाइट और एप्लिकेशन के विकल्प है, जिन्हें प्लेयर्स अपनी पसंद से उपयोग कर सकते हैं।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी बहन और पूर्व न्यायाधीश मैरीन ट्रंप बैरी की शनिवार को रिलीज हुई कुछ रिकॉर्डिंग में अपने भाई की तीखी आलोचना करते हुए सुना जा सकता है। एक रिकॉर्डिंग में उन्होंने यहां तक कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का कोई सिद्धांत नहीं हैं।
मैरीन ट्रंप बैरी की बातों को उनकी जानकारी के बिना उनकी भतीजी मैरी ट्रंप ने रिकॉर्ड कर लिया था। मैरी ट्रंप की हाल ही में "टू मच एंड नेवर एनफः हाउ माइ फैमिली क्रिएटिड द वर्ल्ड्स मोस्ट डेंजरस मैन" नाम की पुस्तक आई थी। मैरी ट्रंप ने शनिवार को कहा कि उन्होंने यह रिकॉर्डिंग 2018 और 2019 में की थी।
एक रिकॉर्डिंग में 83 वर्षीय मैरीन ट्रंप बैरी कहती हैं कि उन्होंने 2018 में अपने भाई का 'फॉक्स न्यूज' को दिया एक साक्षात्कार सुना, जिसमें ट्रंप ने सुझाव दिया था कि वह उन्हें (बैरी को) माता-पिता से बिछड़ चुके अप्रवासी बच्चों के मामलों की सुनवाई करने के लिए सीमा के पास तैनाती देंगे।
उन्होंने कहा, "मैं बिना किसी दबाव के बोल रही हूं, लेकिन उसकी बनाई हुई कहानियां, बिना तैयारी के कुछ भी बोलना, झूठ. . . . " बैरी को यह भी कहते हुए सुना जा सकता है कि उन्हें लगता है कि उनके भाई ने अप्रवासी मामलों पर कभी उनके विचार जानने या पढ़ने की जहमत नहीं उठाई।
उन्होंने कहा कि "सभी सहमत नहीं होंगे, लेकिन परिणाम स्पष्ट हैं। हमारा देश जल्द ही पहले से भी मजबूत हो जाएगा। " शनिवार को मैरी ने खुलासा किया था कि उन्होंने चुपके से बैरी के साथ 15 घंटे की आमने-सामने की बातचीत रिकॉर्ड कर ली थी। हालांकि, उनसे इन रिकॉर्डिंग के स्रोतों को लेकर सवाल किए जा रहे हैं क्योंकि उनकी पुस्तक में इन रिकॉर्डिंग का कोई जिक्र नहीं है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी बहन और पूर्व न्यायाधीश मैरीन ट्रंप बैरी की शनिवार को रिलीज हुई कुछ रिकॉर्डिंग में अपने भाई की तीखी आलोचना करते हुए सुना जा सकता है। एक रिकॉर्डिंग में उन्होंने यहां तक कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का कोई सिद्धांत नहीं हैं। मैरीन ट्रंप बैरी की बातों को उनकी जानकारी के बिना उनकी भतीजी मैरी ट्रंप ने रिकॉर्ड कर लिया था। मैरी ट्रंप की हाल ही में "टू मच एंड नेवर एनफः हाउ माइ फैमिली क्रिएटिड द वर्ल्ड्स मोस्ट डेंजरस मैन" नाम की पुस्तक आई थी। मैरी ट्रंप ने शनिवार को कहा कि उन्होंने यह रिकॉर्डिंग दो हज़ार अट्ठारह और दो हज़ार उन्नीस में की थी। एक रिकॉर्डिंग में तिरासी वर्षीय मैरीन ट्रंप बैरी कहती हैं कि उन्होंने दो हज़ार अट्ठारह में अपने भाई का 'फॉक्स न्यूज' को दिया एक साक्षात्कार सुना, जिसमें ट्रंप ने सुझाव दिया था कि वह उन्हें माता-पिता से बिछड़ चुके अप्रवासी बच्चों के मामलों की सुनवाई करने के लिए सीमा के पास तैनाती देंगे। उन्होंने कहा, "मैं बिना किसी दबाव के बोल रही हूं, लेकिन उसकी बनाई हुई कहानियां, बिना तैयारी के कुछ भी बोलना, झूठ. . . . " बैरी को यह भी कहते हुए सुना जा सकता है कि उन्हें लगता है कि उनके भाई ने अप्रवासी मामलों पर कभी उनके विचार जानने या पढ़ने की जहमत नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि "सभी सहमत नहीं होंगे, लेकिन परिणाम स्पष्ट हैं। हमारा देश जल्द ही पहले से भी मजबूत हो जाएगा। " शनिवार को मैरी ने खुलासा किया था कि उन्होंने चुपके से बैरी के साथ पंद्रह घंटाटे की आमने-सामने की बातचीत रिकॉर्ड कर ली थी। हालांकि, उनसे इन रिकॉर्डिंग के स्रोतों को लेकर सवाल किए जा रहे हैं क्योंकि उनकी पुस्तक में इन रिकॉर्डिंग का कोई जिक्र नहीं है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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1 साइना नेहवाल भाजपा में हुई शामिल भारतीय शटलर साइना नेहवाल राजनीति के कोर्ट में कदम रख दिया। दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली। बैंडमिंटन खिलाड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में खेलों को बढ़ावा दिया, मैं उनसे प्रेरित हूं। साइना के साथ उनकी बहन चंद्रांशु ने भी भाजपा की सदस्यता ली। 2 अनुराग ठाकुर और सांसद प्रवेश वर्मा भाजपा की स्टार प्रचारक लिस्ट से बाहर चुनाव आयोग ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और सांसद प्रवेश वर्मा को भाजपा की स्टार प्रचारक लिस्ट से बाहर करने का निर्देश दिया है। दोनों नेताओं पर चुनावी रैली के दौरान भड़काऊ और विवादित बयान देने का आरोप है। आयोग ने दोनों नेताओं को 28 जनवरी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। एक दिन बाद ही उन पर एक्शन ले लिया। 3 केरल विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण से पहले हंगामा केरल विधानसभा में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के अभिभाषण से पहले बुधवार को नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के मुद्दे पर हंगामा हुआ। इस दौरान मार्शल राज्यपाल को एस्कॉर्ट करते हुए चेयर तक लेकर गए। विपक्षी दल यूडीएफ के विधायकों ने राज्यपाल के खिलाफ नारेबाजी की। 4 कोरोनावायरस -चीन में मृतकों की संख्या 132 पहुंची कोरोनावायरस से पिछले 24 घंटे में हुबेई प्रांत में 25 लोगों की मौत हो गई। चीन में मौतों का आंकड़ा अब 132 पहुंच गया है। देश में 6000 लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले 10 दिनों में स्थिति भयावह हो सकती है। 5 कोरोनावायरस- 31जनवरी को एयर इंडिया एयरलिफ्ट कर सकती है भारत सरकार ने कहा कि वुहान में 500 भारतीय हैं, जिन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया वुहान से लोगों को एयरलिफ्ट करने के लिए 31 जनवरी को अपनी फ्लाइट भेज सकती है। 6 भारत बंदरू मुंबई में कई ट्रेनें रोकी गईं संशोधित नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी के खिलाफ कुछ संगठनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद के तहत कांजुरमार्ग स्टेशन पर पटरियों पर विरोध प्रदर्शन के कारण बुधवार सुबह मुंबई में मध्य रेलवे की उपनगरीय रेल सेवाएं कुछ हद तक प्रभावित हुईं. 7 अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार पर राहुल गांधी का वार केंद्रीय बजट से ठीक तीन दिन पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पर जमकर निशाना साधा । राहुल गांधी ने पीएम और वित्त मंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इन दोनों को नहीं पता कि आगे क्या करना है। 8 रोहित के लगातार 2 छक्कों से सुपरओवर में जीता भारत भारत ने हेमिल्टन टी-20 मैच को सुपरओवर में जीत लिया है. इसी के साथ ही भारत ने पांच मैचों की टी-20 सीरीज में 3-0 से अजेय बढ़त बना ली है. भारत ने यह मैच जीतकर न्यूजीलैंड की धरती पर इतिहास रच दिया है. इस मैच में जीत के साथ ही भारत ने पहली बार न्यूजीलैंड की धरती पर टी-20 इंटरनेशनल सीरीज फतह कर ली । 9 कोहली टी-20 में बतौर कप्तान सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय विराट कोहली टी-20 में बतौर कप्तान सबसे ज्यादा 1126 रन बनाने वाले भारतीय बन गए हैं। उन्होंने पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को पीछे छोड़ दिया है। कोहली ने यह उपलब्धि बुधवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ हैमिल्टन मैच में हासिल की। 10 बजट से पहले बाजार में लौटी रौनक 2 दिनों की गिरावट के बाद बाजार में आज पुलबैक देखने को मिला है। निफ्टी 74 अंक चढ़कर 12,130 पर बंद हुआ है। वहीं सेंसेक्स 232 अंक चढ़कर 41,199 पर बंद हुआ है। बैंक निफ्टी 116 अंक चढ़कर 30,877 पर बंद हुआ है।
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एक साइना नेहवाल भाजपा में हुई शामिल भारतीय शटलर साइना नेहवाल राजनीति के कोर्ट में कदम रख दिया। दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली। बैंडमिंटन खिलाड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में खेलों को बढ़ावा दिया, मैं उनसे प्रेरित हूं। साइना के साथ उनकी बहन चंद्रांशु ने भी भाजपा की सदस्यता ली। दो अनुराग ठाकुर और सांसद प्रवेश वर्मा भाजपा की स्टार प्रचारक लिस्ट से बाहर चुनाव आयोग ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और सांसद प्रवेश वर्मा को भाजपा की स्टार प्रचारक लिस्ट से बाहर करने का निर्देश दिया है। दोनों नेताओं पर चुनावी रैली के दौरान भड़काऊ और विवादित बयान देने का आरोप है। आयोग ने दोनों नेताओं को अट्ठाईस जनवरी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। एक दिन बाद ही उन पर एक्शन ले लिया। तीन केरल विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण से पहले हंगामा केरल विधानसभा में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के अभिभाषण से पहले बुधवार को नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के मुद्दे पर हंगामा हुआ। इस दौरान मार्शल राज्यपाल को एस्कॉर्ट करते हुए चेयर तक लेकर गए। विपक्षी दल यूडीएफ के विधायकों ने राज्यपाल के खिलाफ नारेबाजी की। चार कोरोनावायरस -चीन में मृतकों की संख्या एक सौ बत्तीस पहुंची कोरोनावायरस से पिछले चौबीस घंटाटे में हुबेई प्रांत में पच्चीस लोगों की मौत हो गई। चीन में मौतों का आंकड़ा अब एक सौ बत्तीस पहुंच गया है। देश में छः हज़ार लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले दस दिनों में स्थिति भयावह हो सकती है। पाँच कोरोनावायरस- इकतीसजनवरी को एयर इंडिया एयरलिफ्ट कर सकती है भारत सरकार ने कहा कि वुहान में पाँच सौ भारतीय हैं, जिन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया वुहान से लोगों को एयरलिफ्ट करने के लिए इकतीस जनवरी को अपनी फ्लाइट भेज सकती है। छः भारत बंदरू मुंबई में कई ट्रेनें रोकी गईं संशोधित नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी के खिलाफ कुछ संगठनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद के तहत कांजुरमार्ग स्टेशन पर पटरियों पर विरोध प्रदर्शन के कारण बुधवार सुबह मुंबई में मध्य रेलवे की उपनगरीय रेल सेवाएं कुछ हद तक प्रभावित हुईं. सात अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार पर राहुल गांधी का वार केंद्रीय बजट से ठीक तीन दिन पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पर जमकर निशाना साधा । राहुल गांधी ने पीएम और वित्त मंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इन दोनों को नहीं पता कि आगे क्या करना है। आठ रोहित के लगातार दो छक्कों से सुपरओवर में जीता भारत भारत ने हेमिल्टन टी-बीस मैच को सुपरओवर में जीत लिया है. इसी के साथ ही भारत ने पांच मैचों की टी-बीस सीरीज में तीन-शून्य से अजेय बढ़त बना ली है. भारत ने यह मैच जीतकर न्यूजीलैंड की धरती पर इतिहास रच दिया है. इस मैच में जीत के साथ ही भारत ने पहली बार न्यूजीलैंड की धरती पर टी-बीस इंटरनेशनल सीरीज फतह कर ली । नौ कोहली टी-बीस में बतौर कप्तान सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय विराट कोहली टी-बीस में बतौर कप्तान सबसे ज्यादा एक हज़ार एक सौ छब्बीस रन बनाने वाले भारतीय बन गए हैं। उन्होंने पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को पीछे छोड़ दिया है। कोहली ने यह उपलब्धि बुधवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ हैमिल्टन मैच में हासिल की। दस बजट से पहले बाजार में लौटी रौनक दो दिनों की गिरावट के बाद बाजार में आज पुलबैक देखने को मिला है। निफ्टी चौहत्तर अंक चढ़कर बारह,एक सौ तीस पर बंद हुआ है। वहीं सेंसेक्स दो सौ बत्तीस अंक चढ़कर इकतालीस,एक सौ निन्यानवे पर बंद हुआ है। बैंक निफ्टी एक सौ सोलह अंक चढ़कर तीस,आठ सौ सतहत्तर पर बंद हुआ है।
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पहुॅचनी, तब तक लशओके मौजूदा क्रममें कोअी अथल-पुथल करनेकी मेरी अिच्छा नहीं थी । और जिसके कारण स्पष्ट हैं । मेरे मनमें अिस बातके चारेमें शक था ही नहीं कि जिस रायके पीछे कार्यका समर्थन न हो, वह राय कितने ही जोरसे कही गभी हो, फिर भी अगर वह विरुद्ध पक्षकी होगी, तो सिविल लाअिन्समें बसनेवाले गोरे अधिकारी वर्गको छेड़े चिना हरगिज़ नही रहेगी; और जिम्मेदार निरकुण नौकरशाहीकी पीठ मजबूत किये बिना हरगिज़ नहीं रहेगी। आंदोलन परसे धारासभाके घुँअके बादल हटते ही मैंने तुरत अपना १६ तारीखका बयान प्रकाशित कर दिया । असमे शुरूसे नागपुर कमेटीने जिस विचारसे यह लगाओ छेड़ी थी, असे दोहरा कर लड़ाअीके मुद्दोंके संबंध में जो गलतफहमियाँ और झूठी खारें फैली थीं, अन सनका खडन कर दिया और फिर दूसरे दिन १८ तारीखके जुलूसका कार्यक्रम तैयार किया । असमें जुलूसका रास्ता, समय व अस सम्बन्धकी सूचनाओं निश्चित कर दीं। अस समय लोकभावना कितनी क्षुब्ध हो गभी थी, धारासभाके कमरेमें होनेवाले वाग्युद्धका भी असर था । ये तमाम हालात अस कार्यक्रमको तैयार करते समय मेरे ध्यानमे थे । जैसा कि स्पष्ट है, १८ तारीखका कार्यक्रम अिस ढंगसे तैयार किया गया था कि जिससे विरोधी पक्षके दृष्टिकोणका यथाशक्ति खयाल रखा जा सके और साथ ही जिन सिद्धांतों की खातिर लड़ाओी लड़ी गभी है, अन पर ज़रा भी आँच न आये । परिणाम यह हुआ कि जुल्लूसको किसी भी तरहकी रुकावट बिना निकलने देना सरकारने बेहतर समझा ।
गवर्नरसे मुलाक़ात
जब जुलूस मनाही की हुआ भूमिसे निकल चुका और लड़ाओ जीतनेकी घोषणा कर दी गओ, तो फौरन सारा देश और खास तौर पर अग्लो अडियन पत्र हर क़िस्मके झूठे, बुद्धिभेद पैदा करनेवाले और कपट पूर्ण समाचारोंसे भर गये । अिसी प्रकार अखबारोंमे मध्यप्रांतके गर्वनर महोदयके साथकी हमारी मुलाकात संबधी चर्चा भी की गअी । यह मुलाकात किस तरह हो पाओी, अिसमे मुझे खुद तो कम ही महत्व दिखाओ देता है। असहयोगी बाह्याचारसे चिपटे रहनेवाले हैं, जैसा जो आम खयाल है वह बेबुनियाद है । मैं खुद तो शिष्टाचारी आमंत्रणकी भी बाट न देखें, अगर मुझे सरकारमें परस्पर समझौतेकी सच्ची अिच्छा दिखाओ दे । फिर भी रिआयने या कौलकरार होनेके जो समाचार और अफवाहे फैलाओ गअी हैं, अनका मैं आज जिस स्थानसे निश्चित शब्दोंमे सार्वजनिक खंडन करता
हॅू । अिन खरोंमे बिलकुल सचाओ नहीं है । हमने सरकार के साथ रिआयत
नहीं की, कोलकरार नहीं किये और असको किसी प्रकारका वचन भी नहीं
दिया । मुलाक़ात १३ अगस्तको हुआी थी । अितना ही हुआ कि अक दूसरे के मुद्दोंको अंक दूसरेके सामने कहनेका हमे मौका मिला ।
अर्ज़ी देने की अफ़वाह
किसीकी तरफसे ये खबरे फैलाओ गओ हैं कि मैंने जिला सुपरिण्टेण्डेण्ट पुलिसको जुलूस निकालनेकी मंजूरीके लिअ अर्जी दी थी । अगर अिस तरहकी कपटपूर्ण और अलटी खबर अखबारोंमे फैलानेवाला सरकारका अंक ऊँचा अफसर ( वह कौन है यह बादमें बताया जायगा ।) ही न होता, तो भैसी अफवाहोंकी तरफ मै देखता तक नहीं । मुझे मंजूरी ही लेनी होती, तो यह लडाओी कितने ही दिन पहले खतम हो गभी होती । टर्कीकी सुलहके अत्सव दिन मनाही किये हुञे भागमेसे जिला मजिस्ट्रेटकी मजूरी लेकर बड़ा जुलूस निकला था, यह मेरे ध्यानसे बाहर नहीं था। स्थानीय धारासभाके कुछ सदस्योंने मुझे कभी बार सुझाया कि यह मंजूरी वे अपने नामसे मॉग ले । मैं यह समझता था कि जिला मजिस्ट्रेटसे रूबरू प्रार्थना कर लूँ, तो काफी होना चाहिये । मामूली संयोगोंमे जुलूसके लिओ भैसी अिजाज़त मॉगनेमे कोआ आपत्ति भी नहीं हो सकती । जैसा करनेकी कांग्रेसकी तरफसे मनाही नहीं, मगर अिस हद तक लडाओके पहुॅच जानेके बाद अिजाजत माँगने जाना मेरे लिओ नामुमकिन था । जब सरकार तलवारके ज़ोरसे हमसे अर्जी दिलवानेकी कोशिश करती हो, असे समय अगर मैं अर्जी दूँ तो कांग्रेसकी शान चली जाय । सच पूछें तो लड़ाओीका मोर्चा ही अिस मुद्दे पर था । और सत्र मुद्दे, फिर वे कुछ भी हों, तो तफसीलके थे । कोअी भी आसानी से देख सकता था कि लडाओ अस वक्त जम चुकी थी और अंक ही मुद्दे पर आकर केन्द्रित हो गभी थी । वह मुद्दा यह था : अंक तरफ सरकार जिते कानूनी सत्ताका खुला भंग कहती है, असे अपने सारे साधनों द्वारा दवा देनेका सरकारका निश्चय था और दूसरी तरफ चाहे जितना दुःख सहना पडे या बलिदान करना पड़े, तो भी स्त्रेच्छाचारी और अन्यायी सत्ताका सविनय भंग करनेका अपना हक़ सही साबित करनेका जनताका अतना ही दृढ निश्चय था । १८ तारीखको मैंने जिला सुपरिष्टेण्डेण्ट पुलिसको खबर दी कि मैं अनकी आज्ञाके विरुद्ध कैसी योजना तैयार करना चाहता हूँ । असमे असी कोअी बात ही नहीं थी, जिससे अिस सूचनाको अर्जी कहा जा सके । अल्टे अस दिनके कार्यक्रमकी नकलमें साफ बता दिया गया था कि अखका उद्देश्य नये निकले हुने हुक्मकी जाँच करके देख लेना था। कुछ भी हो, कार्यक्रममे वडा और अम्मधारण पर्क किया जाय और वह भी सारी लडाओ शुरू होने के बाद पहली ही वार, और उसकी सूचना अगर मैं न दूँ, तो अिसने मुझे कोभी शक नहीं कि मैं अपने फरने
चूकता हूँ । जिला मजिस्ट्रेटके रणक्षेत्र छोड़कर चले जानेके बाद पुलिस पर अचानक धावा करना अनुचित होता । मेरी बुद्धिके अनुसार जिस प्रकारके युद्धमे अचानक हमलेकी छूट नहीं होती। जुलूसकी सूचना भेजनेके बाद थोडी ही देरमे मनाही हुक्मवाली जगह पर पुलिसका दल खड़ा कर दिया गया था। जिसका कारण देना मेरा काम नहीं, परन्तु पुलिसको सूचना देनेकी जरूरत थी, यह अिस वातसे पूरी तरह साचित होता है । फिर भी अिस सूचनासे या जुलूसके कार्यक्रमकी तफसीलले सरकारको अिस प्रतिकूल लड़ाओमेसे निकल जानेकी अनुकूलता मिल गओ हो, तो मैं खुद तो जिस बातसे खुश ही होएगा कि सिद्धांतको किसी तरह कुरखान किये बिना मैंने सरकार की परेशानी किसी हद तक दूर कर दी और उसके लिये अिज्जतके साथ पीछे हटनेका रास्ता खोल दिया । लेकिन मैं फिर कहता हूँ कि सरकारको अर्जी नहीं दी गओी और न अससे परवानगी या परवाना ही लिया गया ।
धारासभाका असर
धारासभाके प्रस्तावोंके हमारी लडाओ पर हुआ असरके बारेमे मैंने अखबारोंमें कुछ झगड़ा चलता हुआ देखा है । धारासभाके कामसे मुझे मदद मिली या काममे रुकावट हुआ, अिस बारेमें कोअी मत प्रकट करनेकी मेरी अिच्छा नहीं है, क्योंकि अिस बारेमे गलतफहमी होना संभव है । अितना कहना काफी है कि पुलिसका हुक्म धारासभाके प्रस्ताव पास होनेके बाद निकला था । लडाओका अंत आया, तब तक अिन प्रस्तावों पर कोभी भी अमल नहीं हुआ था; मगर लडाओ खतम होते ही तमाम नजरबन्द कैदियोंको छोड दिया गया । जो सरकार अपना काम अच्छी तरह जाननेका दावा करती है और नैतिक या शारीरिक बलके सिवाय और किसी चीज़को माननेसे अिनकार करती है, अस सरकारको मुफ्त में मिली हुआ शिक्षा - अिस शिक्षाको धारासभा के प्रस्तावका बड़ा नाम मिला हो तो भी - कभी गले अतरेगी, असा भ्रम किसीके मनमे न रहे यही मैं चाहता हूँ । जैसे सारे प्रयत्न तो अलटे जो लोग अपनी सफाओ देनेके लिओ मौजूद नहीं हैं, अन पर अनुचित और कभी कभी नीच आक्षेप करनेका मौका देते है । अिन प्रस्तावोंसे कोअ मतलब सिद्ध होता हो, तो जितना ही कि अगर अिन प्रस्तावको अलग रखकर काम किया जाय, तो अचित अवसर पर और अचित अद्देश्यके लिओ शायद अनका अनुकूल अपयोग हो सके ।
जुलूसको निकल जाने देनेके बाद तमाम कैदियोंको छोड़ देना सरकारका धार्मिक फर्ज था और यह फर्ज अदा करनेके लिओ में मध्यप्रांतकी सरकारको धन्यवाद देता हूँ । आज छूटकर आये हुञे लगभग हज़ार जेलवासियों से सातको जेलके नियमोंके विरुद्ध बरताव करनेके कारण अभी तक जेलमे बद कर
रखा है, यह देखकर मुझे दुःख होता है । फिर भी मुझे विश्वास है कि वे भी जल्दी ही छूट जायेंगे । कैदियोंके छोडनेमें जो थोड़ी-सी ढील हो गभी है, वह भी मुझे तो विश्वास है कि मध्यप्रांतकी सरकार के काबूसे बाहरके संयोगोंके कारण ही हुआ है । मुझे यह बताते हुझे बड़ी खुशी हो रही है कि मेरे भाओी, जो मेरे आनेके बाद तुरन्त ही मेरे पीछे आ गये थे और जिन्होंने लगभग ठेठ अन्त तक लड़ाओ जारी रखनेमे मेरे साथ पूरी तरह सहयोग किया, वे + भी अिस बारके धारासभाके प्रस्तावों के निकम्मेपन के बारेमे मुझसे पूरी तरह सहमत हैं । यद्यपि मुझे अितना तो कहना चाहिये कि अिन प्रस्तावको निकम्मा माननेमें हमारी दोनोंकी दृष्टि अलग है । सब लोग अच्छी तरह जानते है कि राजनैतिक मामलोंमें हमारे दोनों के बीच अत्तर और दक्षिण ध्रुवके बराबर अंतर है । मगर हम दोनों नागपुरसे अपने-अपने राजनैतिक मनों को थोड़ा-बहुत दृढ करके वापस जा रहे है । सच्ची विजय
स्वेच्छासे स्वीकार किया हुआ अकान्तवास भोग कर अब हमारे बीचमें वापस आने पर मैं आप सबका स्वागत करता हूँ । आप लड़े अससे भी बड़ा युद्ध और बडी कुरबानियॉ बाहर आपकी बाट देख रही है । अन्तिम प्रसंग पर मैंने कहा था कि झडा सत्याग्रहकी लडाओ खतम हुआ और अससे हमारे राष्ट्रीय झंडेके सम्मानकी रक्षा हुआ है । शान्तिमय और व्यवस्थित जुलूस आम रास्तों से ले जानेका हक हमे वापस मिल गया है और सत्य, अहिंसा व कष्ट-सहनकी सम्पूर्ण विजय हुआ है । आपको वापस हमारे बीचमे आकर बैठे देखकर आज मैं अपने ये शब्द ज्यादा ज़ोर देकर बोलने में समर्थ हुआ हूँ ।
मगर हमने जो कुछ भी प्राप्त किया है, असमे हमारे लिओ घमंड करने जैसी कोअी बात नहीं है । हमें जो मिला या हमने जो कष्ट सहन किया, असमें हमारी जीत नहीं है। परन्तु जब तक हमारा अन्तिम ध्येय प्राप्त न हो जाय, तब तक अत्तरोत्तर अधिक कष्ट सहन करनेकी शक्ति हममे आये, यही सच्ची विजय मैं आपसे सच कहता हूँ कि हमारी जो जीत हुआ है, उसका श्रेय मुझे बिलकुल नहीं है। सारा श्रेय जो कष्ट सहन करके आये हैं और जो अिस लड़ाओके लिओ कष्ट सहन करनेको तैयार थे उन्हें है । और साथ ही सारी लड़ाओके अरसेमे अथक शक्ति और अद्भुत व्यवस्थाका परिचय देनेवाली नागपुर कांग्रेस कमेटीको है ।
कमिश्नर संवाददाता
अक बात यहाँ कहे विना में यह बयान पूरा नहीं कर सकता । १८ तारीख की घटनाओंके जो कपट पूर्ण समाचार फैले हैं, शुन सबकी जड़ हैशनेकी में स्व० माननीन विठ्ठलभाओ पटेल ।
कोशिश कर रहा था । यह खोज करते हुझे मुझे अक विचित्र प्रमाण मिल गया । जूनके आखिरी सप्ताह में सेठ जमनालाल बजाज और उनके साथियोंकी गिरफ़्तारी के बाद 'टाअिंग्स ऑफ अिन्डिया' में प्रकाशित होनेवाले अन चार सुप्रसिद्ध पत्रोंकी, और साथ ही शुरूसे अन्त तक अिस लड़ाओके प्रति 'टाअिम्स ऑफ अिन्डिया ' द्वारा अपनाये हुआ रुखकी कुंजी भी शायद मुझे मिले हुञे अिस प्रमाणमे ही होगी। कलकत्ताके 'स्टेट्समैन' पत्रके २१ अगस्तके अंकमे नागपुरके कमिश्नरका १९ ता० का दिया हुआ अंक तार छपा है । असका शीर्षक हैः सत्याग्रह बन्द होगा । नेता हुकूमतके आगे झुक गये '। 'टाअिम्स ऑफ अिन्डिया' के सवाददाताका असी तारीखका तार अस पत्रके २० अगस्तके अंक में 'सरकारकी टेक मान ली ' शीर्षक से छपा है । यह तार अस 'स्टेट्समैन ' मे छपे हु कमिश्नरके तारकी शब्दशः नकल है। ये दोनों तार किट्ठे करके पढ़ने पर यह जान लेना मुश्किल नहीं कि 'टाअिम्स ऑफ अिन्डिया ' का सवाददाता कमिश्नर है या नागपुरका कमिश्नर 'टाअिम्स ऑफ अिन्डिया' का संवाददाता है । सम्भव है कि ' टाअिम्स ऑफ अिन्डिया' की तरह ' हमारे विशेष सवाददाताकी तरफसे ' छापनेके बदले 'नागपुरके कमिश्नरकी तरफसे मिला हुआ तार' छानने में 'स्टेट्समैन' द्वारा की गभी गफलतके कारण कमिश्नरसाहयका भंडाफोड़ हो गया । यह सबूत मिलने के बाद भी कुछ समय तक तो में मान ही न सका कि भैसी घोषणा अन्होंने प्रकाशित की होगी। जॉच करने पर मुझे मालूम हुआ कि यह बात सच है । फिर भी मुझे विश्वास दिलाया गया है कि नागपुरके कमिश्नरने 'स्टेट्समैन' को जो वक्तव्य भेजा, असे प्रकाशित करनेका उन्हें अधिकार नहीं दिया गया था। जिसके सिवाय मैंने यह भी देखा है कि कमिश्नरके अखबारोंके साथके संबंध और प्रवृत्तियों पर काबू रखनेकी ताकत मध्यप्रान्तकी सरकारमे नहीं है । पहले भी अक अवसर पर यह हुक्म होते हुआ भी कि सरकारके काममे तुम्हें दखल न देना चाहिये, अिसी लड़ाओके संबंधमे अन्होंने अपनी जिस प्रकार की प्रवृत्तिसे सरकारको मुश्किलमे डाल दिया था । अिस तरह ये साहब जो जीमे आता है करते रहते है। मैं पूरी तरह स्वीकार करता हूँ कि लड़ाअीका सम्मानपूर्ण अंत करनेकी सरकारकी आन्तरिक अिच्छा थी, और अिस बारेमें मुझे शका नहीं है कि सरकारको कमिश्नरके कामसे अफसोस हुआ है। फिर भी अितना कहना मुझे अपना फर्ज मालूम होता है कि आखिर सरकार कमिश्नर की करतूतोंकी ज़िम्मेदारीसे बच तो हरगिज़ नहीं सकती । समाप्ति
हमे भगवानका अपकार मानना है कि जिस समय देशमें व्यक्तिगत रागद्वेष, दलबन्दी और साम्प्रदायिक झगड़ोंके भारके नीचे परस्पर सहिष्णुता,
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पहुॅचनी, तब तक लशओके मौजूदा क्रममें कोअी अथल-पुथल करनेकी मेरी अिच्छा नहीं थी । और जिसके कारण स्पष्ट हैं । मेरे मनमें अिस बातके चारेमें शक था ही नहीं कि जिस रायके पीछे कार्यका समर्थन न हो, वह राय कितने ही जोरसे कही गभी हो, फिर भी अगर वह विरुद्ध पक्षकी होगी, तो सिविल लाअिन्समें बसनेवाले गोरे अधिकारी वर्गको छेड़े चिना हरगिज़ नही रहेगी; और जिम्मेदार निरकुण नौकरशाहीकी पीठ मजबूत किये बिना हरगिज़ नहीं रहेगी। आंदोलन परसे धारासभाके घुँअके बादल हटते ही मैंने तुरत अपना सोलह तारीखका बयान प्रकाशित कर दिया । असमे शुरूसे नागपुर कमेटीने जिस विचारसे यह लगाओ छेड़ी थी, असे दोहरा कर लड़ाअीके मुद्दोंके संबंध में जो गलतफहमियाँ और झूठी खारें फैली थीं, अन सनका खडन कर दिया और फिर दूसरे दिन अट्ठारह तारीखके जुलूसका कार्यक्रम तैयार किया । असमें जुलूसका रास्ता, समय व अस सम्बन्धकी सूचनाओं निश्चित कर दीं। अस समय लोकभावना कितनी क्षुब्ध हो गभी थी, धारासभाके कमरेमें होनेवाले वाग्युद्धका भी असर था । ये तमाम हालात अस कार्यक्रमको तैयार करते समय मेरे ध्यानमे थे । जैसा कि स्पष्ट है, अट्ठारह तारीखका कार्यक्रम अिस ढंगसे तैयार किया गया था कि जिससे विरोधी पक्षके दृष्टिकोणका यथाशक्ति खयाल रखा जा सके और साथ ही जिन सिद्धांतों की खातिर लड़ाओी लड़ी गभी है, अन पर ज़रा भी आँच न आये । परिणाम यह हुआ कि जुल्लूसको किसी भी तरहकी रुकावट बिना निकलने देना सरकारने बेहतर समझा । गवर्नरसे मुलाक़ात जब जुलूस मनाही की हुआ भूमिसे निकल चुका और लड़ाओ जीतनेकी घोषणा कर दी गओ, तो फौरन सारा देश और खास तौर पर अग्लो अडियन पत्र हर क़िस्मके झूठे, बुद्धिभेद पैदा करनेवाले और कपट पूर्ण समाचारोंसे भर गये । अिसी प्रकार अखबारोंमे मध्यप्रांतके गर्वनर महोदयके साथकी हमारी मुलाकात संबधी चर्चा भी की गअी । यह मुलाकात किस तरह हो पाओी, अिसमे मुझे खुद तो कम ही महत्व दिखाओ देता है। असहयोगी बाह्याचारसे चिपटे रहनेवाले हैं, जैसा जो आम खयाल है वह बेबुनियाद है । मैं खुद तो शिष्टाचारी आमंत्रणकी भी बाट न देखें, अगर मुझे सरकारमें परस्पर समझौतेकी सच्ची अिच्छा दिखाओ दे । फिर भी रिआयने या कौलकरार होनेके जो समाचार और अफवाहे फैलाओ गअी हैं, अनका मैं आज जिस स्थानसे निश्चित शब्दोंमे सार्वजनिक खंडन करता हॅू । अिन खरोंमे बिलकुल सचाओ नहीं है । हमने सरकार के साथ रिआयत नहीं की, कोलकरार नहीं किये और असको किसी प्रकारका वचन भी नहीं दिया । मुलाक़ात तेरह अगस्तको हुआी थी । अितना ही हुआ कि अक दूसरे के मुद्दोंको अंक दूसरेके सामने कहनेका हमे मौका मिला । अर्ज़ी देने की अफ़वाह किसीकी तरफसे ये खबरे फैलाओ गओ हैं कि मैंने जिला सुपरिण्टेण्डेण्ट पुलिसको जुलूस निकालनेकी मंजूरीके लिअ अर्जी दी थी । अगर अिस तरहकी कपटपूर्ण और अलटी खबर अखबारोंमे फैलानेवाला सरकारका अंक ऊँचा अफसर ही न होता, तो भैसी अफवाहोंकी तरफ मै देखता तक नहीं । मुझे मंजूरी ही लेनी होती, तो यह लडाओी कितने ही दिन पहले खतम हो गभी होती । टर्कीकी सुलहके अत्सव दिन मनाही किये हुञे भागमेसे जिला मजिस्ट्रेटकी मजूरी लेकर बड़ा जुलूस निकला था, यह मेरे ध्यानसे बाहर नहीं था। स्थानीय धारासभाके कुछ सदस्योंने मुझे कभी बार सुझाया कि यह मंजूरी वे अपने नामसे मॉग ले । मैं यह समझता था कि जिला मजिस्ट्रेटसे रूबरू प्रार्थना कर लूँ, तो काफी होना चाहिये । मामूली संयोगोंमे जुलूसके लिओ भैसी अिजाज़त मॉगनेमे कोआ आपत्ति भी नहीं हो सकती । जैसा करनेकी कांग्रेसकी तरफसे मनाही नहीं, मगर अिस हद तक लडाओके पहुॅच जानेके बाद अिजाजत माँगने जाना मेरे लिओ नामुमकिन था । जब सरकार तलवारके ज़ोरसे हमसे अर्जी दिलवानेकी कोशिश करती हो, असे समय अगर मैं अर्जी दूँ तो कांग्रेसकी शान चली जाय । सच पूछें तो लड़ाओीका मोर्चा ही अिस मुद्दे पर था । और सत्र मुद्दे, फिर वे कुछ भी हों, तो तफसीलके थे । कोअी भी आसानी से देख सकता था कि लडाओ अस वक्त जम चुकी थी और अंक ही मुद्दे पर आकर केन्द्रित हो गभी थी । वह मुद्दा यह था : अंक तरफ सरकार जिते कानूनी सत्ताका खुला भंग कहती है, असे अपने सारे साधनों द्वारा दवा देनेका सरकारका निश्चय था और दूसरी तरफ चाहे जितना दुःख सहना पडे या बलिदान करना पड़े, तो भी स्त्रेच्छाचारी और अन्यायी सत्ताका सविनय भंग करनेका अपना हक़ सही साबित करनेका जनताका अतना ही दृढ निश्चय था । अट्ठारह तारीखको मैंने जिला सुपरिष्टेण्डेण्ट पुलिसको खबर दी कि मैं अनकी आज्ञाके विरुद्ध कैसी योजना तैयार करना चाहता हूँ । असमे असी कोअी बात ही नहीं थी, जिससे अिस सूचनाको अर्जी कहा जा सके । अल्टे अस दिनके कार्यक्रमकी नकलमें साफ बता दिया गया था कि अखका उद्देश्य नये निकले हुने हुक्मकी जाँच करके देख लेना था। कुछ भी हो, कार्यक्रममे वडा और अम्मधारण पर्क किया जाय और वह भी सारी लडाओ शुरू होने के बाद पहली ही वार, और उसकी सूचना अगर मैं न दूँ, तो अिसने मुझे कोभी शक नहीं कि मैं अपने फरने चूकता हूँ । जिला मजिस्ट्रेटके रणक्षेत्र छोड़कर चले जानेके बाद पुलिस पर अचानक धावा करना अनुचित होता । मेरी बुद्धिके अनुसार जिस प्रकारके युद्धमे अचानक हमलेकी छूट नहीं होती। जुलूसकी सूचना भेजनेके बाद थोडी ही देरमे मनाही हुक्मवाली जगह पर पुलिसका दल खड़ा कर दिया गया था। जिसका कारण देना मेरा काम नहीं, परन्तु पुलिसको सूचना देनेकी जरूरत थी, यह अिस वातसे पूरी तरह साचित होता है । फिर भी अिस सूचनासे या जुलूसके कार्यक्रमकी तफसीलले सरकारको अिस प्रतिकूल लड़ाओमेसे निकल जानेकी अनुकूलता मिल गओ हो, तो मैं खुद तो जिस बातसे खुश ही होएगा कि सिद्धांतको किसी तरह कुरखान किये बिना मैंने सरकार की परेशानी किसी हद तक दूर कर दी और उसके लिये अिज्जतके साथ पीछे हटनेका रास्ता खोल दिया । लेकिन मैं फिर कहता हूँ कि सरकारको अर्जी नहीं दी गओी और न अससे परवानगी या परवाना ही लिया गया । धारासभाका असर धारासभाके प्रस्तावोंके हमारी लडाओ पर हुआ असरके बारेमे मैंने अखबारोंमें कुछ झगड़ा चलता हुआ देखा है । धारासभाके कामसे मुझे मदद मिली या काममे रुकावट हुआ, अिस बारेमें कोअी मत प्रकट करनेकी मेरी अिच्छा नहीं है, क्योंकि अिस बारेमे गलतफहमी होना संभव है । अितना कहना काफी है कि पुलिसका हुक्म धारासभाके प्रस्ताव पास होनेके बाद निकला था । लडाओका अंत आया, तब तक अिन प्रस्तावों पर कोभी भी अमल नहीं हुआ था; मगर लडाओ खतम होते ही तमाम नजरबन्द कैदियोंको छोड दिया गया । जो सरकार अपना काम अच्छी तरह जाननेका दावा करती है और नैतिक या शारीरिक बलके सिवाय और किसी चीज़को माननेसे अिनकार करती है, अस सरकारको मुफ्त में मिली हुआ शिक्षा - अिस शिक्षाको धारासभा के प्रस्तावका बड़ा नाम मिला हो तो भी - कभी गले अतरेगी, असा भ्रम किसीके मनमे न रहे यही मैं चाहता हूँ । जैसे सारे प्रयत्न तो अलटे जो लोग अपनी सफाओ देनेके लिओ मौजूद नहीं हैं, अन पर अनुचित और कभी कभी नीच आक्षेप करनेका मौका देते है । अिन प्रस्तावोंसे कोअ मतलब सिद्ध होता हो, तो जितना ही कि अगर अिन प्रस्तावको अलग रखकर काम किया जाय, तो अचित अवसर पर और अचित अद्देश्यके लिओ शायद अनका अनुकूल अपयोग हो सके । जुलूसको निकल जाने देनेके बाद तमाम कैदियोंको छोड़ देना सरकारका धार्मिक फर्ज था और यह फर्ज अदा करनेके लिओ में मध्यप्रांतकी सरकारको धन्यवाद देता हूँ । आज छूटकर आये हुञे लगभग हज़ार जेलवासियों से सातको जेलके नियमोंके विरुद्ध बरताव करनेके कारण अभी तक जेलमे बद कर रखा है, यह देखकर मुझे दुःख होता है । फिर भी मुझे विश्वास है कि वे भी जल्दी ही छूट जायेंगे । कैदियोंके छोडनेमें जो थोड़ी-सी ढील हो गभी है, वह भी मुझे तो विश्वास है कि मध्यप्रांतकी सरकार के काबूसे बाहरके संयोगोंके कारण ही हुआ है । मुझे यह बताते हुझे बड़ी खुशी हो रही है कि मेरे भाओी, जो मेरे आनेके बाद तुरन्त ही मेरे पीछे आ गये थे और जिन्होंने लगभग ठेठ अन्त तक लड़ाओ जारी रखनेमे मेरे साथ पूरी तरह सहयोग किया, वे + भी अिस बारके धारासभाके प्रस्तावों के निकम्मेपन के बारेमे मुझसे पूरी तरह सहमत हैं । यद्यपि मुझे अितना तो कहना चाहिये कि अिन प्रस्तावको निकम्मा माननेमें हमारी दोनोंकी दृष्टि अलग है । सब लोग अच्छी तरह जानते है कि राजनैतिक मामलोंमें हमारे दोनों के बीच अत्तर और दक्षिण ध्रुवके बराबर अंतर है । मगर हम दोनों नागपुरसे अपने-अपने राजनैतिक मनों को थोड़ा-बहुत दृढ करके वापस जा रहे है । सच्ची विजय स्वेच्छासे स्वीकार किया हुआ अकान्तवास भोग कर अब हमारे बीचमें वापस आने पर मैं आप सबका स्वागत करता हूँ । आप लड़े अससे भी बड़ा युद्ध और बडी कुरबानियॉ बाहर आपकी बाट देख रही है । अन्तिम प्रसंग पर मैंने कहा था कि झडा सत्याग्रहकी लडाओ खतम हुआ और अससे हमारे राष्ट्रीय झंडेके सम्मानकी रक्षा हुआ है । शान्तिमय और व्यवस्थित जुलूस आम रास्तों से ले जानेका हक हमे वापस मिल गया है और सत्य, अहिंसा व कष्ट-सहनकी सम्पूर्ण विजय हुआ है । आपको वापस हमारे बीचमे आकर बैठे देखकर आज मैं अपने ये शब्द ज्यादा ज़ोर देकर बोलने में समर्थ हुआ हूँ । मगर हमने जो कुछ भी प्राप्त किया है, असमे हमारे लिओ घमंड करने जैसी कोअी बात नहीं है । हमें जो मिला या हमने जो कष्ट सहन किया, असमें हमारी जीत नहीं है। परन्तु जब तक हमारा अन्तिम ध्येय प्राप्त न हो जाय, तब तक अत्तरोत्तर अधिक कष्ट सहन करनेकी शक्ति हममे आये, यही सच्ची विजय मैं आपसे सच कहता हूँ कि हमारी जो जीत हुआ है, उसका श्रेय मुझे बिलकुल नहीं है। सारा श्रेय जो कष्ट सहन करके आये हैं और जो अिस लड़ाओके लिओ कष्ट सहन करनेको तैयार थे उन्हें है । और साथ ही सारी लड़ाओके अरसेमे अथक शक्ति और अद्भुत व्यवस्थाका परिचय देनेवाली नागपुर कांग्रेस कमेटीको है । कमिश्नर संवाददाता अक बात यहाँ कहे विना में यह बयान पूरा नहीं कर सकता । अट्ठारह तारीख की घटनाओंके जो कपट पूर्ण समाचार फैले हैं, शुन सबकी जड़ हैशनेकी में स्वशून्य माननीन विठ्ठलभाओ पटेल । कोशिश कर रहा था । यह खोज करते हुझे मुझे अक विचित्र प्रमाण मिल गया । जूनके आखिरी सप्ताह में सेठ जमनालाल बजाज और उनके साथियोंकी गिरफ़्तारी के बाद 'टाअिंग्स ऑफ अिन्डिया' में प्रकाशित होनेवाले अन चार सुप्रसिद्ध पत्रोंकी, और साथ ही शुरूसे अन्त तक अिस लड़ाओके प्रति 'टाअिम्स ऑफ अिन्डिया ' द्वारा अपनाये हुआ रुखकी कुंजी भी शायद मुझे मिले हुञे अिस प्रमाणमे ही होगी। कलकत्ताके 'स्टेट्समैन' पत्रके इक्कीस अगस्तके अंकमे नागपुरके कमिश्नरका उन्नीस ताशून्य का दिया हुआ अंक तार छपा है । असका शीर्षक हैः सत्याग्रह बन्द होगा । नेता हुकूमतके आगे झुक गये '। 'टाअिम्स ऑफ अिन्डिया' के सवाददाताका असी तारीखका तार अस पत्रके बीस अगस्तके अंक में 'सरकारकी टेक मान ली ' शीर्षक से छपा है । यह तार अस 'स्टेट्समैन ' मे छपे हु कमिश्नरके तारकी शब्दशः नकल है। ये दोनों तार किट्ठे करके पढ़ने पर यह जान लेना मुश्किल नहीं कि 'टाअिम्स ऑफ अिन्डिया ' का सवाददाता कमिश्नर है या नागपुरका कमिश्नर 'टाअिम्स ऑफ अिन्डिया' का संवाददाता है । सम्भव है कि ' टाअिम्स ऑफ अिन्डिया' की तरह ' हमारे विशेष सवाददाताकी तरफसे ' छापनेके बदले 'नागपुरके कमिश्नरकी तरफसे मिला हुआ तार' छानने में 'स्टेट्समैन' द्वारा की गभी गफलतके कारण कमिश्नरसाहयका भंडाफोड़ हो गया । यह सबूत मिलने के बाद भी कुछ समय तक तो में मान ही न सका कि भैसी घोषणा अन्होंने प्रकाशित की होगी। जॉच करने पर मुझे मालूम हुआ कि यह बात सच है । फिर भी मुझे विश्वास दिलाया गया है कि नागपुरके कमिश्नरने 'स्टेट्समैन' को जो वक्तव्य भेजा, असे प्रकाशित करनेका उन्हें अधिकार नहीं दिया गया था। जिसके सिवाय मैंने यह भी देखा है कि कमिश्नरके अखबारोंके साथके संबंध और प्रवृत्तियों पर काबू रखनेकी ताकत मध्यप्रान्तकी सरकारमे नहीं है । पहले भी अक अवसर पर यह हुक्म होते हुआ भी कि सरकारके काममे तुम्हें दखल न देना चाहिये, अिसी लड़ाओके संबंधमे अन्होंने अपनी जिस प्रकार की प्रवृत्तिसे सरकारको मुश्किलमे डाल दिया था । अिस तरह ये साहब जो जीमे आता है करते रहते है। मैं पूरी तरह स्वीकार करता हूँ कि लड़ाअीका सम्मानपूर्ण अंत करनेकी सरकारकी आन्तरिक अिच्छा थी, और अिस बारेमें मुझे शका नहीं है कि सरकारको कमिश्नरके कामसे अफसोस हुआ है। फिर भी अितना कहना मुझे अपना फर्ज मालूम होता है कि आखिर सरकार कमिश्नर की करतूतोंकी ज़िम्मेदारीसे बच तो हरगिज़ नहीं सकती । समाप्ति हमे भगवानका अपकार मानना है कि जिस समय देशमें व्यक्तिगत रागद्वेष, दलबन्दी और साम्प्रदायिक झगड़ोंके भारके नीचे परस्पर सहिष्णुता,
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बॉलीवुड के कॉमेडी किंग और डांसिंग मास्टर गोविंदा का आज जन्मदिन है. जी हाँ. . . उनका जन्म 21 दिसंबर, 1963 में एक पंजाबी परिवार मुंबई में हुआ था. आपको बता दें उनके पिता का नाम अरूण कुमार आहूजा और मां का नाम निर्मला देवी है. शुरुआत से ही गोविंदा को एक्टिंग करने का शौक था. उनकी शिक्षा के बारे में बात करे तो गोविंदा ने पढ़ाई अन्नासाहेब वर्तक कॉलेज, वसई, महाराष्ट्र से की है. इस कॉलेज से उन्होंने कॉमर्स से स्नातक की डिग्री ली थी.
आपको बता दें गोविंदा ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत फिल्म 'इल्जाम' से की. जो बॉक्स आफिस पर सुपरहिट हुई थी. इसके बाद से ही गोविंदा के करियर ने रफ़्तार पकड़ ली थी. बता दे कि, 1990 से 1999 के बीच का समय उनके लिए काफी अच्छा रहा उनकी फिल्मों को और उनके अभिनय को आलोचकों और दर्शकों ने तो सराहा ही, इसके साथ ही साथ उन्हें बॉक्स आफिस पर भी सफलता मिली. गोविंदा को लोग प्यार से चीची बुलाते है.
गोविंदा ने लगभग हर शैली की फिल्मों में काम किया है चाहे वह कॉमेडी हो, रोमांस हो, ड्रामा हो, एक्शन हो, कोई भावनात्मक किरदार हो, सभी में गोविंदा ने अपने अभिनय का लोहा मनवाया है. बता दे कि गोविंदा के नाम 'नं 1' का भी खिताब हासिल है क्योंकि उनकी 6 फिल्मों के नाम के अंत में 'नं 1' लगा हुआ है. गोविंदा ने अपने करियर में लगभग अपने समय के हर अभिनेताओं के साथ काम किया. गोविंदा एक ऐसे अभिनेता हैं जिनकी जगह शायद कोई ले पायेगा. उनकी डांसिंग स्किल्स की दुनिया दीवानी है और फिल्म इंडस्ट्री में वे एक अच्छे डांसर के भी रूप में मशहूर है.
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बॉलीवुड के कॉमेडी किंग और डांसिंग मास्टर गोविंदा का आज जन्मदिन है. जी हाँ. . . उनका जन्म इक्कीस दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ में एक पंजाबी परिवार मुंबई में हुआ था. आपको बता दें उनके पिता का नाम अरूण कुमार आहूजा और मां का नाम निर्मला देवी है. शुरुआत से ही गोविंदा को एक्टिंग करने का शौक था. उनकी शिक्षा के बारे में बात करे तो गोविंदा ने पढ़ाई अन्नासाहेब वर्तक कॉलेज, वसई, महाराष्ट्र से की है. इस कॉलेज से उन्होंने कॉमर्स से स्नातक की डिग्री ली थी. आपको बता दें गोविंदा ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत फिल्म 'इल्जाम' से की. जो बॉक्स आफिस पर सुपरहिट हुई थी. इसके बाद से ही गोविंदा के करियर ने रफ़्तार पकड़ ली थी. बता दे कि, एक हज़ार नौ सौ नब्बे से एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे के बीच का समय उनके लिए काफी अच्छा रहा उनकी फिल्मों को और उनके अभिनय को आलोचकों और दर्शकों ने तो सराहा ही, इसके साथ ही साथ उन्हें बॉक्स आफिस पर भी सफलता मिली. गोविंदा को लोग प्यार से चीची बुलाते है. गोविंदा ने लगभग हर शैली की फिल्मों में काम किया है चाहे वह कॉमेडी हो, रोमांस हो, ड्रामा हो, एक्शन हो, कोई भावनात्मक किरदार हो, सभी में गोविंदा ने अपने अभिनय का लोहा मनवाया है. बता दे कि गोविंदा के नाम 'नं एक' का भी खिताब हासिल है क्योंकि उनकी छः फिल्मों के नाम के अंत में 'नं एक' लगा हुआ है. गोविंदा ने अपने करियर में लगभग अपने समय के हर अभिनेताओं के साथ काम किया. गोविंदा एक ऐसे अभिनेता हैं जिनकी जगह शायद कोई ले पायेगा. उनकी डांसिंग स्किल्स की दुनिया दीवानी है और फिल्म इंडस्ट्री में वे एक अच्छे डांसर के भी रूप में मशहूर है.
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यमुनानगर, 29 जुलाई (हप्र)
इनरव्हील क्लब जगाधरी यमुनानगर की नयी कार्यकारिणी का गठन किया गया। अंकिता गर्ग को प्रधान, सुनीता गुप्ता को उप प्रधान चुना गया है। नयी कार्यकारिणी की सचिव वेला विनायक, आईएसओ विनती गोयल, कोषाध्यक्ष नीलिमा सैनी व एडिटर साक्षी गुप्ता को उनके कार्यभार की जिम्मेदारी दी गई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप जलाकर किया गया।
इनरव्हील की प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन की शुरुआत करते हुए पूर्व प्रधान ईशा गांधी ने नवनिर्मित प्रधान अंकिता गर्ग को बधाई दी। बेला विनायक ने क्लब द्वारा किए गए कार्य बताए। उन्होंने कहा कि इनरव्हील क्लब का समाज को विशेष अहम योगदान रहा है। डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन अपेक्षा गर्ग ने प्रधान को कॉलर पहनाकर सम्मानित किया। जिसके बाद नवनिर्वाचित प्रधान ने आने वाले साल के लिए इनरव्हील के कार्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उपस्थित सदस्यों में पीडीसी सुनीता सलूजा, पीडीसी अनीता सलूजा, पीडीसी समीरा सलूजा व अन्य मौजूद रहे। सभा के अंत में सदस्यों ने तीज का त्यौहार भी मनाया।
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यमुनानगर, उनतीस जुलाई इनरव्हील क्लब जगाधरी यमुनानगर की नयी कार्यकारिणी का गठन किया गया। अंकिता गर्ग को प्रधान, सुनीता गुप्ता को उप प्रधान चुना गया है। नयी कार्यकारिणी की सचिव वेला विनायक, आईएसओ विनती गोयल, कोषाध्यक्ष नीलिमा सैनी व एडिटर साक्षी गुप्ता को उनके कार्यभार की जिम्मेदारी दी गई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप जलाकर किया गया। इनरव्हील की प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन की शुरुआत करते हुए पूर्व प्रधान ईशा गांधी ने नवनिर्मित प्रधान अंकिता गर्ग को बधाई दी। बेला विनायक ने क्लब द्वारा किए गए कार्य बताए। उन्होंने कहा कि इनरव्हील क्लब का समाज को विशेष अहम योगदान रहा है। डिस्ट्रिक्ट चेयरमैन अपेक्षा गर्ग ने प्रधान को कॉलर पहनाकर सम्मानित किया। जिसके बाद नवनिर्वाचित प्रधान ने आने वाले साल के लिए इनरव्हील के कार्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उपस्थित सदस्यों में पीडीसी सुनीता सलूजा, पीडीसी अनीता सलूजा, पीडीसी समीरा सलूजा व अन्य मौजूद रहे। सभा के अंत में सदस्यों ने तीज का त्यौहार भी मनाया।
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दुनिया के सबसे अमीरों की सूची में कोई बिल गेट्स का नाम कैसे नहीं जान सकता है। बिल गेट्स हाल में अपनी भारत की याता पर आए थे। इन दौरान उन्होंने सभी देश के बड़े लोगों से मुलाकत भी की है। हाल ही में उसका एक वीडियो सिकेल मेडिया पर खूब वायरल हो रहा है है जिसमे बिल गेट्स एक ई-रिक्शा चलते हुए नजर आ रहे है। इस विदेई को देखने के बाद सभी काफी हैरान रह गए। पहले भी उनके कुछ वीडियो वायरल हुए थे लेकिन इस वीडियो को देखने के बाद सब सोच में पड़े हुए है।
माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर का सबके सामने ई- रिक्शा चलने की असली वजह जानकार सोशल मीडिया यूजर कागि ही खुश हुए। दरअसल उनके ई-रिक्शा चलने के पीछे ये खानी है। जब बिल गेट्स अपनी भारत की यात्रा पर थे तब उन्होंने महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरपर्सन आंनद महिंद्रा से भी मुलाकात की थी। जिसके बाद उन्होने ये वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया था। इससे पहले बिल गेट्स के साथ आंनद महिंद्रा ने एक फोटो भी शेयर की थी। जिसमे उन्होंने लिखा था कि वो "हार्वर्ड विश्वविद्यालय में एक साथ पढ़ते थे"।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बिल गेट्स ने एक वीडियो शेयर की जिसका उन्होंने कैप्शन "मैंने एक इलेक्ट्रिक रिक्शा चलाया, जो 131 किमी (लगभग 81 मील) तक यात्रा करने और 4 लोगों को ले जाने में सक्षम था। महिंद्रा जैसी कंपनियों को परिवहन उद्योग के डीकार्बोनाइजेशन में योगदान करते देखना प्रेरणादायक है"।
वायरल वीडियो के जवाब में वीडियो के जबाब में आंनद महिंद्रा ने भी अपनी प्रतिक्रया दी उन्होंने बिल गेट्स को थैंक्स भी किया उन्होंने ने लिखा "चलती का नाम बिल गेट्स की गाड़ी" बहुत खुशी हुई कि आपने ट्रेओ को देखने का समय निकाला @बिल गेट्स अब आपकी अगली यात्रा के एजेंडे में आपके बीच एक 3-पहिया ईवी ड्रैग रेस होनी चाहिए।
बिल गेट्स का ई-रिक्शा चलने का ये वीडियो सोसाइल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वीडियो को देखने वालो की संख्या लाखों में है है अभी तक वीडियो को 1,47,000 से ज्यादा लोग देख चुके है। इनकी तादात लगातार बढ़ ही रही है। आपको ध्यान होगा की इससे पहले बिल गेट्स का कुछ वेदो वायरल हुआ था जिसमे वो रोटी बनाते और दूसरी वीडियो में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, स्मृति ईरानी के साथ खिचड़ी का स्वाद लेते नजर आए थे।
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दुनिया के सबसे अमीरों की सूची में कोई बिल गेट्स का नाम कैसे नहीं जान सकता है। बिल गेट्स हाल में अपनी भारत की याता पर आए थे। इन दौरान उन्होंने सभी देश के बड़े लोगों से मुलाकत भी की है। हाल ही में उसका एक वीडियो सिकेल मेडिया पर खूब वायरल हो रहा है है जिसमे बिल गेट्स एक ई-रिक्शा चलते हुए नजर आ रहे है। इस विदेई को देखने के बाद सभी काफी हैरान रह गए। पहले भी उनके कुछ वीडियो वायरल हुए थे लेकिन इस वीडियो को देखने के बाद सब सोच में पड़े हुए है। माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर का सबके सामने ई- रिक्शा चलने की असली वजह जानकार सोशल मीडिया यूजर कागि ही खुश हुए। दरअसल उनके ई-रिक्शा चलने के पीछे ये खानी है। जब बिल गेट्स अपनी भारत की यात्रा पर थे तब उन्होंने महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरपर्सन आंनद महिंद्रा से भी मुलाकात की थी। जिसके बाद उन्होने ये वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया था। इससे पहले बिल गेट्स के साथ आंनद महिंद्रा ने एक फोटो भी शेयर की थी। जिसमे उन्होंने लिखा था कि वो "हार्वर्ड विश्वविद्यालय में एक साथ पढ़ते थे"। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बिल गेट्स ने एक वीडियो शेयर की जिसका उन्होंने कैप्शन "मैंने एक इलेक्ट्रिक रिक्शा चलाया, जो एक सौ इकतीस किमी तक यात्रा करने और चार लोगों को ले जाने में सक्षम था। महिंद्रा जैसी कंपनियों को परिवहन उद्योग के डीकार्बोनाइजेशन में योगदान करते देखना प्रेरणादायक है"। वायरल वीडियो के जवाब में वीडियो के जबाब में आंनद महिंद्रा ने भी अपनी प्रतिक्रया दी उन्होंने बिल गेट्स को थैंक्स भी किया उन्होंने ने लिखा "चलती का नाम बिल गेट्स की गाड़ी" बहुत खुशी हुई कि आपने ट्रेओ को देखने का समय निकाला @बिल गेट्स अब आपकी अगली यात्रा के एजेंडे में आपके बीच एक तीन-पहिया ईवी ड्रैग रेस होनी चाहिए। बिल गेट्स का ई-रिक्शा चलने का ये वीडियो सोसाइल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वीडियो को देखने वालो की संख्या लाखों में है है अभी तक वीडियो को एक,सैंतालीस,शून्य से ज्यादा लोग देख चुके है। इनकी तादात लगातार बढ़ ही रही है। आपको ध्यान होगा की इससे पहले बिल गेट्स का कुछ वेदो वायरल हुआ था जिसमे वो रोटी बनाते और दूसरी वीडियो में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, स्मृति ईरानी के साथ खिचड़ी का स्वाद लेते नजर आए थे।
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प्रधानमंत्री कार्यालय से सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को आए एक फोन से हड़कंप मच गया। ये कॉल उन्हें एक बार नहीं बल्कि कई बार आया।
किसी ने खुद को पीएमओ में तैनात एक अधिकारी बताकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लगातार फोन किए। फोन करने वाले ने कुछ सिफारिशी काम भी बताए। मुख्यमंत्री को शक हुआ तो उन्होंने पीएमओ में पड़ताल करवाई। पता चला कि उस नाम का कोई भी व्यक्ति पीएमओ में है ही नहीं। मुख्यमंत्री ने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
हाल ही में मुख्यमंत्री दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करने गए थे। उसी दौरान उमेश कुमार नाम के एक व्यक्ति ने उनके निजी मोबाइल पर फोन किया। फोन उसने पर खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात अधिकारी बताया। इस पर त्रिवेंद्र रावत ने उनसे फोन करने की वजह पूछी, तो उसने विधानसभा में बनाई जाने वाली समिति में एक परिचित को रखने की सिफारिश की।
इस पर मुख्यमंत्री ने बिना किसी सकारात्मक आश्वासन दिए कहा कि समिति बनाना स्पीकर के कार्य क्षेत्र का मामला है। इसके बाद व्यस्तता का हवाला देते हुए सीएम ने फोन काट दिया। इसके अगले दिन दोबारा इसी व्यक्ति ने मुख्यमंत्री को फोन किया और एक अधिकारी की तैनाती की सिफारिश करने लगा।
अलग-अलग वक्त पर तीन बार फोन आने पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री कार्यालय में संबंधित व्यक्ति के नाम और फोन नंबर से जानकारी करवाई तो मालूम चला कि उमेश कुमार नाम का कोई अफसर वहां तैनात ही नहीं है। मुख्यमंत्री ने तत्काल अपने कार्यालय में तैनात अधिकारियों को संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री को फर्जी फोन की बात से शासन में खलबली मच गई। आनन-फानन में संबंधित व्यक्ति के मोबाइल नंबर की पड़ताल शुरू की गई है।
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प्रधानमंत्री कार्यालय से सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को आए एक फोन से हड़कंप मच गया। ये कॉल उन्हें एक बार नहीं बल्कि कई बार आया। किसी ने खुद को पीएमओ में तैनात एक अधिकारी बताकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लगातार फोन किए। फोन करने वाले ने कुछ सिफारिशी काम भी बताए। मुख्यमंत्री को शक हुआ तो उन्होंने पीएमओ में पड़ताल करवाई। पता चला कि उस नाम का कोई भी व्यक्ति पीएमओ में है ही नहीं। मुख्यमंत्री ने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करने गए थे। उसी दौरान उमेश कुमार नाम के एक व्यक्ति ने उनके निजी मोबाइल पर फोन किया। फोन उसने पर खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात अधिकारी बताया। इस पर त्रिवेंद्र रावत ने उनसे फोन करने की वजह पूछी, तो उसने विधानसभा में बनाई जाने वाली समिति में एक परिचित को रखने की सिफारिश की। इस पर मुख्यमंत्री ने बिना किसी सकारात्मक आश्वासन दिए कहा कि समिति बनाना स्पीकर के कार्य क्षेत्र का मामला है। इसके बाद व्यस्तता का हवाला देते हुए सीएम ने फोन काट दिया। इसके अगले दिन दोबारा इसी व्यक्ति ने मुख्यमंत्री को फोन किया और एक अधिकारी की तैनाती की सिफारिश करने लगा। अलग-अलग वक्त पर तीन बार फोन आने पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री कार्यालय में संबंधित व्यक्ति के नाम और फोन नंबर से जानकारी करवाई तो मालूम चला कि उमेश कुमार नाम का कोई अफसर वहां तैनात ही नहीं है। मुख्यमंत्री ने तत्काल अपने कार्यालय में तैनात अधिकारियों को संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री को फर्जी फोन की बात से शासन में खलबली मच गई। आनन-फानन में संबंधित व्यक्ति के मोबाइल नंबर की पड़ताल शुरू की गई है।
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नई दिल्ली, 15 नवंबर (आईएएनएस)। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग में सचिव शकुंतला गैमलिन ने गुरुवार को कहा कि देश में करीब 2. 67 करोड़ दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास के लिए संस्थागत मदद की दरकार है।
उन्होंने कहा कि इन बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल विकास और उनकी अशक्तता कम करके उनको अधिकतम सक्षम बनाने की जरूरत है। गैमलिन विभाग के सहयोग से सार्थक एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा यहां आयोजित विकलांगता पर 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन-2018 को संबोधित कर रही थीं।
गैर लाभकारी संगठन सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए काम करता है। संगठन ने इस कार्यक्रम का विषय 'एक्ट टू इम्पावर' रखा था।
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नई दिल्ली, पंद्रह नवंबर । सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग में सचिव शकुंतला गैमलिन ने गुरुवार को कहा कि देश में करीब दो. सरसठ करोड़ दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास के लिए संस्थागत मदद की दरकार है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल विकास और उनकी अशक्तता कम करके उनको अधिकतम सक्षम बनाने की जरूरत है। गैमलिन विभाग के सहयोग से सार्थक एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा यहां आयोजित विकलांगता पर पाँचवें राष्ट्रीय सम्मेलन-दो हज़ार अट्ठारह को संबोधित कर रही थीं। गैर लाभकारी संगठन सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए काम करता है। संगठन ने इस कार्यक्रम का विषय 'एक्ट टू इम्पावर' रखा था।
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कनकनी गांव में दो अक्तूबर, 1998 को दो काले हिरन के कथित शिकार मामले में अंतिम जिरह के दौरान अभिनेता सलमान खान आज यहां एक अदालत में पेश हुए। खान के वकील एच. एम सारस्वत के अनुसार अंतिम जिरह के दौरान आरोपी को अदालत में मौजूद रहना था और वह अब तक अभिनेता के लिए पेशी से छूट की मांग करते रहे थे। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष खान के पेश होने के बाद सारस्वत ने कहा, आज, हम अंतिम जिरह के दौरान अदालत में उपस्थित थे। अदालत में मौजूद वकीलों के अनुसार जिरह के दौरान खान कुछ समय असहज और भावुक नजर आये लेकिन वह शांत रहे। कनकनी शिकार मामले में अंतिम जिरह निचली अदालत में 13 सितम्बर को शुरू हुई थी।
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कनकनी गांव में दो अक्तूबर, एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे को दो काले हिरन के कथित शिकार मामले में अंतिम जिरह के दौरान अभिनेता सलमान खान आज यहां एक अदालत में पेश हुए। खान के वकील एच. एम सारस्वत के अनुसार अंतिम जिरह के दौरान आरोपी को अदालत में मौजूद रहना था और वह अब तक अभिनेता के लिए पेशी से छूट की मांग करते रहे थे। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष खान के पेश होने के बाद सारस्वत ने कहा, आज, हम अंतिम जिरह के दौरान अदालत में उपस्थित थे। अदालत में मौजूद वकीलों के अनुसार जिरह के दौरान खान कुछ समय असहज और भावुक नजर आये लेकिन वह शांत रहे। कनकनी शिकार मामले में अंतिम जिरह निचली अदालत में तेरह सितम्बर को शुरू हुई थी।
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Amritpal Singh Dibrugarh Jail: अमृतपाल सिंह डिब्रूगढ़ जेल में बंद है. ये जेल पहले से ही हाई सिक्योर्ड है. लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा और बढ़ाई गई है. सीसीटीवी कैमरे बढ़े हैं. पुलिस की मुस्तैदी भी बढ़ा दी गई है.
पंजाब की शांत आब ओ हवा में जहर घोलने के मकसद से आया अमृतपाल आज सलाखों के पीछे है. 36 दिन तक ये खूब भटका. लोगों के बीछ छिपता रहा. खुद को भिंडरावाले पार्ट 2 बताता था. युवाओं को गुमराह करता था. नशा मुक्ति केंद्र के नाम पर कट्टरपंथ के पाठ पढ़ाता था. रविवार शाम उसको डिब्रूगढ़ जेल शिफ्ट कर दिया गया. उसके पहुंचने से पहले ही जेल में सुरक्षा और भी ज्यादा बढ़ा दी गई. हालांकि ये जेल पहले से ही सुरक्षा के पैमानों पर खरी उतरती है मगर अमृतपाल को जब यहां रखने की बात आई और सुरक्षा और बढ़ा दी गई. रविवार की सुबह अमृतपाल को पंजाब के मोगा से गिरफ्तार किया गया था.
असम की डिब्रूगढ़ जेल में पहले भी कई खालिस्तानियों को भेजा जा चुका है. वो भी अमृतपाल से जुड़े हुए थे. पंजाब में गन और गैंगस्टर कल्चर जमकर है. यहां के कई गैंगस्टर जेल से भी अपना-अपना गैंग चलाते हैं. इसी डर से अमृतपाल को हाई सिक्योर्ड जेल भेजा गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमृतपाल के आने से पहले यहां पर 57 सीसीटीवी कैमरा थे. मगर अब 12 और बढ़ाए गए हैं. इसके अलावा पुलिस वालों की संख्या भी बढ़ाई गई है.
ये भी पढ़ें- डिब्रूगढ़ जेल कितनी हाइटेक जहां अमृतपाल सिंह को रखा जाएगा?
सबसे पहले उसको आइसोलेशल वार्ड में रखा गया. डिब्रूगढ़ जेल में उल्फा उग्रवादियों को बंद किया जाता था. इसलिए यहां के अधिकारियों को इस तरह के अपराधियों के हर दांव पेंच पता हैं. इस जेल का निर्माण 1859 में कराया गया था. ये बेहद सुरक्षित है. चूंकि यह शहर के अंदर बनी है. ज्यादातर जेलें शहर के बाहर होती हैं. इस जेल का कोई ऐसा रिकॉर्ड भी नहीं कि कोई कैदी तोड़कर भागा हो.
अमृतपाल सिंह पर NSA के तहत कार्रवाई की गई है. इसके ऊपर संगीन आरोप लगाए गए हैं. आईएसआई की मदद ले रहा था. इरादे था पंजाब में दहशतगर्दी का. हिंदू और ईसाई देवी देवाताओं के खिलाफ अपमान जनक भाषा का प्रयोग करता था. इसके ऊपर आर्म्स एक्ट के तहत भी मुकदमा है. इसके अलावा जिस तरह से अमृतपाल के समर्थकों ने पुलिस थाने पर हमला कर एक आरोपी को छुड़वा लिया. ये भी गंभीर अपराध है.
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Amritpal Singh Dibrugarh Jail: अमृतपाल सिंह डिब्रूगढ़ जेल में बंद है. ये जेल पहले से ही हाई सिक्योर्ड है. लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा और बढ़ाई गई है. सीसीटीवी कैमरे बढ़े हैं. पुलिस की मुस्तैदी भी बढ़ा दी गई है. पंजाब की शांत आब ओ हवा में जहर घोलने के मकसद से आया अमृतपाल आज सलाखों के पीछे है. छत्तीस दिन तक ये खूब भटका. लोगों के बीछ छिपता रहा. खुद को भिंडरावाले पार्ट दो बताता था. युवाओं को गुमराह करता था. नशा मुक्ति केंद्र के नाम पर कट्टरपंथ के पाठ पढ़ाता था. रविवार शाम उसको डिब्रूगढ़ जेल शिफ्ट कर दिया गया. उसके पहुंचने से पहले ही जेल में सुरक्षा और भी ज्यादा बढ़ा दी गई. हालांकि ये जेल पहले से ही सुरक्षा के पैमानों पर खरी उतरती है मगर अमृतपाल को जब यहां रखने की बात आई और सुरक्षा और बढ़ा दी गई. रविवार की सुबह अमृतपाल को पंजाब के मोगा से गिरफ्तार किया गया था. असम की डिब्रूगढ़ जेल में पहले भी कई खालिस्तानियों को भेजा जा चुका है. वो भी अमृतपाल से जुड़े हुए थे. पंजाब में गन और गैंगस्टर कल्चर जमकर है. यहां के कई गैंगस्टर जेल से भी अपना-अपना गैंग चलाते हैं. इसी डर से अमृतपाल को हाई सिक्योर्ड जेल भेजा गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमृतपाल के आने से पहले यहां पर सत्तावन सीसीटीवी कैमरा थे. मगर अब बारह और बढ़ाए गए हैं. इसके अलावा पुलिस वालों की संख्या भी बढ़ाई गई है. ये भी पढ़ें- डिब्रूगढ़ जेल कितनी हाइटेक जहां अमृतपाल सिंह को रखा जाएगा? सबसे पहले उसको आइसोलेशल वार्ड में रखा गया. डिब्रूगढ़ जेल में उल्फा उग्रवादियों को बंद किया जाता था. इसलिए यहां के अधिकारियों को इस तरह के अपराधियों के हर दांव पेंच पता हैं. इस जेल का निर्माण एक हज़ार आठ सौ उनसठ में कराया गया था. ये बेहद सुरक्षित है. चूंकि यह शहर के अंदर बनी है. ज्यादातर जेलें शहर के बाहर होती हैं. इस जेल का कोई ऐसा रिकॉर्ड भी नहीं कि कोई कैदी तोड़कर भागा हो. अमृतपाल सिंह पर NSA के तहत कार्रवाई की गई है. इसके ऊपर संगीन आरोप लगाए गए हैं. आईएसआई की मदद ले रहा था. इरादे था पंजाब में दहशतगर्दी का. हिंदू और ईसाई देवी देवाताओं के खिलाफ अपमान जनक भाषा का प्रयोग करता था. इसके ऊपर आर्म्स एक्ट के तहत भी मुकदमा है. इसके अलावा जिस तरह से अमृतपाल के समर्थकों ने पुलिस थाने पर हमला कर एक आरोपी को छुड़वा लिया. ये भी गंभीर अपराध है.
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- नीदरलैंड्स के द हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) ने 2 साल 2 महीने तक चली सुनवाई के बाद 17 जुलाई को 15-1 के बहुमत से भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की फाँसी की सज़ा पर रोक को बरकरार रखा और पाकिस्तान से इस पर पुनर्विचार करने को कहा। साथ ही पाकिस्तान से कुलभूषण जाधव को कॉन्सुलर एक्सेस देने के लिये भी कहा। लेकिन उसकी सज़ा रद्द करने, बरी करने, रिहा करने या वापस भारत भेजने को लेकर न्यायालय ने कुछ नहीं कहा। विदित हो कि पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव को जासूसी के मामले में मृत्युदंड की सज़ा सुनाई थी। पाकिस्तानी अदालत के इस फैसले को भारत ने मई 2017 में चुनौती दी थी, जिसके बाद जुलाई 2018 में सज़ा पर रोक लगा दी गई। द हेग के पीस पैलेस में प्रेसीडेंट ऑफ द कोर्ट न्यायाधीश अब्दुलकावी अहमद यूसुफ ने सार्वजनिक सुनवाई के दौरान फैसला सुनाया। इस बहुचर्चित मामले में न्यायाधीश यूसुफ के नेतृत्व में न्यायालय की 15 सदस्यीय पीठ ने भारत और पाकिस्तान की मौखिक दलीलें सुनने के बाद 21 फरवरी को आदेश सुरक्षित रख लिया था। ज्ञातव्य है कि अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है। इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र के चार्टर द्वारा जून 1945 में की गई थी और इसने अप्रैल 1946 में काम करना शुरू किया था। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 94 के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश अदालत के उस फैसले को मानेंगे, जिसमें वह स्वयं पक्षकार हैं। ज्ञातव्य है कि वर्तमान में भारत के दलवीर भंडारी अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में न्यायाधीश हैं। वे न्यायाधीश के तौर पर वे 27 अप्रैल, 2012 को चुने गए थे। इसके बाद नवंबर 2017 में वे दूसरे कार्यकाल के लिए भी चुने गए।
- संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (UNFAO) ने 15 जुलाई को एक रिपोर्ट जारी की। इसके मुताबिक वर्ष 2018 में 82.10 करोड़ लोग हर रात भूखे सोने के लिये मजबूर थे। वर्ष 2017 में यह संख्या 81.10 करोड़ थी। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में दुनिया के 14.9 करोड़ बच्चे भूख की समस्या का सामना कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2030 तक इस समस्या को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है, ताकि लोगों का शारीरिक-मानसिक विकास हो सके। रिपोर्ट में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन और युद्ध जैसे हालात के कारण विश्व में कुपोषण और भुखमरी की समस्या बढ़ी है। वर्तमान में खाद्य सुरक्षा की स्थिति बहुत खराब है और इससे उत्पन्न कुपोषण की समस्या को मज़बूत अर्थव्यवस्था और पुख्ता सामाजिक योजनाओं के बिना खत्म नहीं किया जा सकता। अफ्रीकी देशों में कुल जनसंख्या के लगभग 20% लोग कुपोषण से ग्रस्त हैं, वहीं एशिया में यह 12% है। लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों में कुल जनसंख्या के 7% लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। उत्तर अमेरिका और यूरोप में 8% लोग कुपोषण से ग्रस्त हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रमुख डेविड बैसली के मुताबिक, वर्ष 2030 तक शून्य भुखमरी का लक्ष्य हासिल कर पाना बहुत मुश्किल है।
- फ्राँस के मोंट-डे-मारसन में 1 से 12 जुलाई तक भारत और फ्राँस के बीच द्विपक्षीय युद्धाभ्यास गरुड़-4 आयोजित किया गया। इस युद्धाभ्यास में भारत की ओर से चार SU-30 MKI, फ्यूल रिफिलर IL-78, C-17 ग्लोबमास्टर एयरक्राफ्ट के साथ कुल 120 वायु सैनिकों ने हिस्सा लिया, जिसमें गरुड़ कमांडो का दस्ता भी शामिल था। यह गरु़ड़ युद्धाभ्यास का छठा संस्करण था, पाँचवां संस्करण जून 2014 में जोधपुर वायुसेना स्टेशन में आयोजित किया गया था। फ्राँस की वायुसेना की तरफ से अन्य विमानों के अलावा राफेल विमान ने भी युद्धाभ्यास में हिस्सा लिया। विदित हो कि भारत ने फ्राँस से वर्ष 2016 में 36 राफेल युद्धक विमानों का सौदा किया था, जिसकी पहली खेप इसी वर्ष सितंबर में मिलने की आशा है।
- सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व जस्टिस ए.के. सीकरी सिंगापुर अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक न्यायालय (SICC) में अंतर्राष्ट्रीय जज नियुक्त किये गए हैं। उनका कार्यकाल 4 जनवरी 2021 तक होगा। आपको बता दें कि SICC सिंगापुर हाईकोर्ट की एक डिवीजन और देश के सुप्रीम कोर्ट का हिस्सा है। इसका कार्य अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक विवादों का निपटारा करना है। वर्तमान में 16 अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधीश इसमें शामिल हैं। जस्टिस सीकरी इसी वर्ष 6 मार्च को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए थे और इससे पहले वह पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तथा दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। कुछ समय पूर्व उन्हें न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (NBA) ने न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBSA) का चेयरपर्सन बनाया था।
- संगीत नाटक अकादमी ने वर्ष 2018 के लिये उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। नृत्य, संगीत, पारंपरिक/लोक/जनजातीय संगीत/नृत्य/थियेटर और कठपुतली क्षेत्र में 8-8 कलाकारों को पुरस्कृत किया जाना है, जबकि थियेटर के क्षेत्र में 7 पुरस्कार दिये जाने हैं। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार कला प्रदर्शन के विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट युवा प्रतिभाओं की पहचान करने, उन्हें प्रोत्साहन देने और शीघ्र राष्ट्रीय मान्यता देने के उद्देश्य से 40 वर्ष से कम आयु के कलाकारों को प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार में 25 हज़ार रुपए की नकद राशि दी जाती है। आपको बता दें कि संगीत नाटक अकादमी, संगीत, नृत्य और नाटक की राष्ट्रीय अकादमी है तथा यह देश में कला प्रदर्शन का शीर्ष निकाय भी है। इसके साथ ही संगीत नाटक अकादमी पुरस्कारों की भी घोषणा की गई है। वर्ष 2018 के लिये संगीत नाटक अकादमी की आम परिषद ने कुल 44 कलाकारों का चयन किया है। इनमें संगीत के क्षेत्र में 11, नृत्य के क्षेत्र में 9, रंगमंच के क्षेत्र में 9 तथा पारंपरिक/लोक/ जनजातीय संगीत/नृत्य/रंगमंच और कठपुतली कला के क्षेत्र में 10 कलाकारों को चुना गया है। अकादमी पुरस्कार 1952 से दिया जा रहा है। यह सम्मान न केवल उत्कृष्टता और उपलब्धियों के सर्वोच्च मानक का प्रतीक है, बल्कि निरंतर व्यक्तिगत कार्य और योगदान को मान्यता प्रदान करता है। अकादमी फैलो को 3 लाख रुपए और अकादमी पुरस्कार के रूप में ताम्रपत्र और अंगवस्त्रम के अलावा एक लाख रुपए दिये जाते हैं।
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- नीदरलैंड्स के द हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने दो साल दो महीने तक चली सुनवाई के बाद सत्रह जुलाई को पंद्रह-एक के बहुमत से भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की फाँसी की सज़ा पर रोक को बरकरार रखा और पाकिस्तान से इस पर पुनर्विचार करने को कहा। साथ ही पाकिस्तान से कुलभूषण जाधव को कॉन्सुलर एक्सेस देने के लिये भी कहा। लेकिन उसकी सज़ा रद्द करने, बरी करने, रिहा करने या वापस भारत भेजने को लेकर न्यायालय ने कुछ नहीं कहा। विदित हो कि पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव को जासूसी के मामले में मृत्युदंड की सज़ा सुनाई थी। पाकिस्तानी अदालत के इस फैसले को भारत ने मई दो हज़ार सत्रह में चुनौती दी थी, जिसके बाद जुलाई दो हज़ार अट्ठारह में सज़ा पर रोक लगा दी गई। द हेग के पीस पैलेस में प्रेसीडेंट ऑफ द कोर्ट न्यायाधीश अब्दुलकावी अहमद यूसुफ ने सार्वजनिक सुनवाई के दौरान फैसला सुनाया। इस बहुचर्चित मामले में न्यायाधीश यूसुफ के नेतृत्व में न्यायालय की पंद्रह सदस्यीय पीठ ने भारत और पाकिस्तान की मौखिक दलीलें सुनने के बाद इक्कीस फरवरी को आदेश सुरक्षित रख लिया था। ज्ञातव्य है कि अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है। इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र के चार्टर द्वारा जून एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस में की गई थी और इसने अप्रैल एक हज़ार नौ सौ छियालीस में काम करना शुरू किया था। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद चौरानवे के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश अदालत के उस फैसले को मानेंगे, जिसमें वह स्वयं पक्षकार हैं। ज्ञातव्य है कि वर्तमान में भारत के दलवीर भंडारी अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में न्यायाधीश हैं। वे न्यायाधीश के तौर पर वे सत्ताईस अप्रैल, दो हज़ार बारह को चुने गए थे। इसके बाद नवंबर दो हज़ार सत्रह में वे दूसरे कार्यकाल के लिए भी चुने गए। - संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन ने पंद्रह जुलाई को एक रिपोर्ट जारी की। इसके मुताबिक वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में बयासी.दस करोड़ लोग हर रात भूखे सोने के लिये मजबूर थे। वर्ष दो हज़ार सत्रह में यह संख्या इक्यासी.दस करोड़ थी। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में दुनिया के चौदह.नौ करोड़ बच्चे भूख की समस्या का सामना कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष दो हज़ार तीस तक इस समस्या को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है, ताकि लोगों का शारीरिक-मानसिक विकास हो सके। रिपोर्ट में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन और युद्ध जैसे हालात के कारण विश्व में कुपोषण और भुखमरी की समस्या बढ़ी है। वर्तमान में खाद्य सुरक्षा की स्थिति बहुत खराब है और इससे उत्पन्न कुपोषण की समस्या को मज़बूत अर्थव्यवस्था और पुख्ता सामाजिक योजनाओं के बिना खत्म नहीं किया जा सकता। अफ्रीकी देशों में कुल जनसंख्या के लगभग बीस% लोग कुपोषण से ग्रस्त हैं, वहीं एशिया में यह बारह% है। लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों में कुल जनसंख्या के सात% लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। उत्तर अमेरिका और यूरोप में आठ% लोग कुपोषण से ग्रस्त हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रमुख डेविड बैसली के मुताबिक, वर्ष दो हज़ार तीस तक शून्य भुखमरी का लक्ष्य हासिल कर पाना बहुत मुश्किल है। - फ्राँस के मोंट-डे-मारसन में एक से बारह जुलाई तक भारत और फ्राँस के बीच द्विपक्षीय युद्धाभ्यास गरुड़-चार आयोजित किया गया। इस युद्धाभ्यास में भारत की ओर से चार SU-तीस MKI, फ्यूल रिफिलर IL-अठहत्तर, C-सत्रह ग्लोबमास्टर एयरक्राफ्ट के साथ कुल एक सौ बीस वायु सैनिकों ने हिस्सा लिया, जिसमें गरुड़ कमांडो का दस्ता भी शामिल था। यह गरु़ड़ युद्धाभ्यास का छठा संस्करण था, पाँचवां संस्करण जून दो हज़ार चौदह में जोधपुर वायुसेना स्टेशन में आयोजित किया गया था। फ्राँस की वायुसेना की तरफ से अन्य विमानों के अलावा राफेल विमान ने भी युद्धाभ्यास में हिस्सा लिया। विदित हो कि भारत ने फ्राँस से वर्ष दो हज़ार सोलह में छत्तीस राफेल युद्धक विमानों का सौदा किया था, जिसकी पहली खेप इसी वर्ष सितंबर में मिलने की आशा है। - सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व जस्टिस ए.के. सीकरी सिंगापुर अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक न्यायालय में अंतर्राष्ट्रीय जज नियुक्त किये गए हैं। उनका कार्यकाल चार जनवरी दो हज़ार इक्कीस तक होगा। आपको बता दें कि SICC सिंगापुर हाईकोर्ट की एक डिवीजन और देश के सुप्रीम कोर्ट का हिस्सा है। इसका कार्य अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक विवादों का निपटारा करना है। वर्तमान में सोलह अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधीश इसमें शामिल हैं। जस्टिस सीकरी इसी वर्ष छः मार्च को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए थे और इससे पहले वह पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तथा दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। कुछ समय पूर्व उन्हें न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन ने न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी का चेयरपर्सन बनाया था। - संगीत नाटक अकादमी ने वर्ष दो हज़ार अट्ठारह के लिये उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। नृत्य, संगीत, पारंपरिक/लोक/जनजातीय संगीत/नृत्य/थियेटर और कठपुतली क्षेत्र में आठ-आठ कलाकारों को पुरस्कृत किया जाना है, जबकि थियेटर के क्षेत्र में सात पुरस्कार दिये जाने हैं। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार कला प्रदर्शन के विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट युवा प्रतिभाओं की पहचान करने, उन्हें प्रोत्साहन देने और शीघ्र राष्ट्रीय मान्यता देने के उद्देश्य से चालीस वर्ष से कम आयु के कलाकारों को प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार में पच्चीस हज़ार रुपए की नकद राशि दी जाती है। आपको बता दें कि संगीत नाटक अकादमी, संगीत, नृत्य और नाटक की राष्ट्रीय अकादमी है तथा यह देश में कला प्रदर्शन का शीर्ष निकाय भी है। इसके साथ ही संगीत नाटक अकादमी पुरस्कारों की भी घोषणा की गई है। वर्ष दो हज़ार अट्ठारह के लिये संगीत नाटक अकादमी की आम परिषद ने कुल चौंतालीस कलाकारों का चयन किया है। इनमें संगीत के क्षेत्र में ग्यारह, नृत्य के क्षेत्र में नौ, रंगमंच के क्षेत्र में नौ तथा पारंपरिक/लोक/ जनजातीय संगीत/नृत्य/रंगमंच और कठपुतली कला के क्षेत्र में दस कलाकारों को चुना गया है। अकादमी पुरस्कार एक हज़ार नौ सौ बावन से दिया जा रहा है। यह सम्मान न केवल उत्कृष्टता और उपलब्धियों के सर्वोच्च मानक का प्रतीक है, बल्कि निरंतर व्यक्तिगत कार्य और योगदान को मान्यता प्रदान करता है। अकादमी फैलो को तीन लाख रुपए और अकादमी पुरस्कार के रूप में ताम्रपत्र और अंगवस्त्रम के अलावा एक लाख रुपए दिये जाते हैं।
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