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टेस्ट क्रिकेट करियर की जबरदस्त शुरुआत करने वाले ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर म्वॉयसेस हेनरिक्स के लिए उस वक्त बुरी खबर आ गई, जब आईसीसी ने नियमों की अनदेखी करने पर उनके मैच फीस का 10 फीसदी काट लिया। भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच चेन्नई में खेले गए पहले टेस्ट मुकाबले के चौथे दिन उन्होंने यह भयंकर गलती की। दुबई। टेस्ट क्रिकेट करियर की जबरदस्त शुरुआत करने वाले ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर म्वॉयसेस हेनरिक्स के लिए उस वक्त बुरी खबर आ गई, जब आईसीसी ने नियमों की अनदेखी करने पर उनके मैच फीस का 10 फीसदी काट लिया। भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच चेन्नई में खेले गए पहले टेस्ट मुकाबले के चौथे दिन उन्होंने यह भयंकर गलती की। उनके हेलमेट के निचले हिस्से पर मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी का लोगो लगा हुआ था, जो आईसीसी की धारा 2. 1. 1 के तहत गलत है। हेनरिक्स ने भी अपनी गलती स्वीकार कर ली है। गौरतलब है कि चेन्नई टेस्ट हेनरिक्स का पदार्पण मुकाबला था और उन्होंने दोनों पारियों में अर्धशतक लगाए थे। पहली पारी में उन्होंने 68 रन बनाए, जबकि दूसरी पारी में नाबाद 81 रन बनाए। हेनरिक्स एकमात्र ऐसे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज थे, जिन्होंने दोनों पारियों में भारतीय गेंदबाजों का डटकर सामना किया था। इससे पहले आर. अश्विन भी चेन्नई टेस्ट में ही इसी धारा के अंतर्गत दोषी पाए गए थे। उनपर भी मैच फीस का 10 फीसदी जुर्माना लगाया गया था।
टेस्ट क्रिकेट करियर की जबरदस्त शुरुआत करने वाले ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर म्वॉयसेस हेनरिक्स के लिए उस वक्त बुरी खबर आ गई, जब आईसीसी ने नियमों की अनदेखी करने पर उनके मैच फीस का दस फीसदी काट लिया। भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच चेन्नई में खेले गए पहले टेस्ट मुकाबले के चौथे दिन उन्होंने यह भयंकर गलती की। दुबई। टेस्ट क्रिकेट करियर की जबरदस्त शुरुआत करने वाले ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर म्वॉयसेस हेनरिक्स के लिए उस वक्त बुरी खबर आ गई, जब आईसीसी ने नियमों की अनदेखी करने पर उनके मैच फीस का दस फीसदी काट लिया। भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच चेन्नई में खेले गए पहले टेस्ट मुकाबले के चौथे दिन उन्होंने यह भयंकर गलती की। उनके हेलमेट के निचले हिस्से पर मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी का लोगो लगा हुआ था, जो आईसीसी की धारा दो. एक. एक के तहत गलत है। हेनरिक्स ने भी अपनी गलती स्वीकार कर ली है। गौरतलब है कि चेन्नई टेस्ट हेनरिक्स का पदार्पण मुकाबला था और उन्होंने दोनों पारियों में अर्धशतक लगाए थे। पहली पारी में उन्होंने अड़सठ रन बनाए, जबकि दूसरी पारी में नाबाद इक्यासी रन बनाए। हेनरिक्स एकमात्र ऐसे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज थे, जिन्होंने दोनों पारियों में भारतीय गेंदबाजों का डटकर सामना किया था। इससे पहले आर. अश्विन भी चेन्नई टेस्ट में ही इसी धारा के अंतर्गत दोषी पाए गए थे। उनपर भी मैच फीस का दस फीसदी जुर्माना लगाया गया था।
यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि यह मुद्रा ही का प्रताप है जिसके सहारे हम समाज सुधार, आर्थिक स्वतंत्रता, राज. नैतिक स्वतंत्रता, औद्योगिक विकास तथा व्यापारिक उन्नति प्राप्त करने में सफल हुये हैं अर्थशास्त्र के ही नहीं बल्कि जीवन के अन्य पहलुओं को दृष्टि से भी मुद्रा अत्यन्त महत्त्वपूर्ण सिद्ध होती है। (1 ) Mopéy is the pivot around which economic •scence clisrers ?)Every branch of knowledge has its funda mental discovery. In mechanics it is the wheel, in Science fire, in poitics the vote. similarly, in Eco. omics, in the whole dimmercial side of man's existence, money is the essential invention, on which all the hrest is based. Correther. मुद्रा के लाभ (Advantages of Money ) आज के युग में मुद्रा से हम इतने घुलमिल गये हैं कि उस हम को क्या क्या लाभ हैं, इस का हमें तनिक भी ध्यान नहीं 'जेवन्स' के शब्दों में - 'अति प्राचीन काल से मुद्रा के से आदि हो जाने के कारण मुद्रा से होने वाले अपरिमित का हमें ध्यान भी नहीं रहता। इसकी अनुपस्थिति में होने कठिनाइयों का हम तव अनुभव कर सकते हैं जबकि हम मुद्रा स्थिति तथा बैंकिंग आज से बिलकुल भिन्न सामाजिक दशाओं में चले जायें मुद्रा से हमको अनेक लाभ हैं। उन को व्याख्या इस प्रकार की गई है १) मुद्रा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वह उपभोक्ता को उसकी क्रयशक्ति को सामान्य रूप देने में सहायता करती है तथा समाज पर उस के अधिकारों को ऐसे रूप में रखने देती है जो उसके लिये सबसे सुविधाजनक हो । (२) मुद्रा पद्धति का होना नमाज को यह ज्ञात करने में सहायक होता है कि कौन क्या और कितना चाहता जिसमे उत्पादक को यह मालूम हो सके कि क्या वस्तु कितनी मात्रा में पैदा करती है। इसके द्वारा हम हमारी नीमित उत्पादन शक्ति का भी पूरा पूरा लाभ उठा पाते हैं । (३) यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति को यह विश्वास दिलाने में सहायक होती है कि उसके मनोरंजन के साधन जिन तक उसे की पहुँच है उसकी अधिकतम इच्छा पूर्ति करते हैं (४) विशिष्टी करण तथा श्रम विभाजन जिन पर हमारा आजका ढाँचा टिका हुआ है. मुद्रा के अभाव में सम्भव न थे । (५) मुद्रा केवलऋण देने और ऋण लेने में ही सहायक नहीं होती बल्कि इसके द्वारा हम सब प्रकार के आगामी भुगतानं पहिले से करने में समर्थ होते है । (६) पूंजी मं चलन शक्ति (Mobility) लाती है और इस प्रकार पूँजी के उन व्यक्तियों के हाथ में इकट्ठा होने सहायक होती है जो उस का सर्वोत्तम उपयोग कर सकते हैं । यह पूँजी के उन स्थानों से जहां यह अनुपयुक्त अथवा कम उपयुक्त' है उन स्थानों पर जहाँ यह लाभपूर्ण दशा में लगाई जा सकती है, जाने में सहायक होती है । (७) मढ़ियों - रिवाज के स्थान पर प्रसंविदा की स्वतंत्रता और प्रतिस्पर्धा स्थापित कर मुद्रा ने जनता को सामाजिक तथा राजनैतिक रूप से स्वतंत्र होने में सहायता प्रदान की है। (८) मुद्रा ने गाँवों व शहरों की दूर दूर रहने की तथा अलगाव की भावना को तोड़ कर हमारी राजनैतिक तथा राष्ट्रीय भावना कोढ़ बना दिया है । (६) मुद्रा समाज की सेवा टीक इसी प्रकार करती है जिस प्रकार सड़कें व अन्य आवागमन के साधन प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एडेम स्मिथ ने इस बात को इस प्रकार व्यक्त किया है - 'सोने और चाँदीको मुद्रा की, जो किसी देश में चलन में होती है तुलना ठोक ठीक रूप से एक विशाल सड़क से की जा सकती है जो देश के समरत घास और अनाज को बाजार में ले जाती हैं किंतु स्वयं इनका अंश भी पैदा नहीं कर सकती । मुद्रा से हानियाँ ( Disadvantages of Money ) जिस प्रकार मुद्रा को समाज के लिये एक आवश्यक देन माना गया है उसी प्रकार कभी कभी इसको इसके घातक परिणामों के कारण एक अभिशाप भी माना जाता है। हम देखते हैं कि प्रायः मुद्रा के मूल्य में परिवर्तन होते रहते कभी इसकी क्रय शक्ति अधिक हो जाती है और कभी कम
यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि यह मुद्रा ही का प्रताप है जिसके सहारे हम समाज सुधार, आर्थिक स्वतंत्रता, राज. नैतिक स्वतंत्रता, औद्योगिक विकास तथा व्यापारिक उन्नति प्राप्त करने में सफल हुये हैं अर्थशास्त्र के ही नहीं बल्कि जीवन के अन्य पहलुओं को दृष्टि से भी मुद्रा अत्यन्त महत्त्वपूर्ण सिद्ध होती है। Mopéy is the pivot around which economic •scence clisrers ?)Every branch of knowledge has its funda mental discovery. In mechanics it is the wheel, in Science fire, in poitics the vote. similarly, in Eco. omics, in the whole dimmercial side of man's existence, money is the essential invention, on which all the hrest is based. Correther. मुद्रा के लाभ आज के युग में मुद्रा से हम इतने घुलमिल गये हैं कि उस हम को क्या क्या लाभ हैं, इस का हमें तनिक भी ध्यान नहीं 'जेवन्स' के शब्दों में - 'अति प्राचीन काल से मुद्रा के से आदि हो जाने के कारण मुद्रा से होने वाले अपरिमित का हमें ध्यान भी नहीं रहता। इसकी अनुपस्थिति में होने कठिनाइयों का हम तव अनुभव कर सकते हैं जबकि हम मुद्रा स्थिति तथा बैंकिंग आज से बिलकुल भिन्न सामाजिक दशाओं में चले जायें मुद्रा से हमको अनेक लाभ हैं। उन को व्याख्या इस प्रकार की गई है एक) मुद्रा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वह उपभोक्ता को उसकी क्रयशक्ति को सामान्य रूप देने में सहायता करती है तथा समाज पर उस के अधिकारों को ऐसे रूप में रखने देती है जो उसके लिये सबसे सुविधाजनक हो । मुद्रा पद्धति का होना नमाज को यह ज्ञात करने में सहायक होता है कि कौन क्या और कितना चाहता जिसमे उत्पादक को यह मालूम हो सके कि क्या वस्तु कितनी मात्रा में पैदा करती है। इसके द्वारा हम हमारी नीमित उत्पादन शक्ति का भी पूरा पूरा लाभ उठा पाते हैं । यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति को यह विश्वास दिलाने में सहायक होती है कि उसके मनोरंजन के साधन जिन तक उसे की पहुँच है उसकी अधिकतम इच्छा पूर्ति करते हैं विशिष्टी करण तथा श्रम विभाजन जिन पर हमारा आजका ढाँचा टिका हुआ है. मुद्रा के अभाव में सम्भव न थे । मुद्रा केवलऋण देने और ऋण लेने में ही सहायक नहीं होती बल्कि इसके द्वारा हम सब प्रकार के आगामी भुगतानं पहिले से करने में समर्थ होते है । पूंजी मं चलन शक्ति लाती है और इस प्रकार पूँजी के उन व्यक्तियों के हाथ में इकट्ठा होने सहायक होती है जो उस का सर्वोत्तम उपयोग कर सकते हैं । यह पूँजी के उन स्थानों से जहां यह अनुपयुक्त अथवा कम उपयुक्त' है उन स्थानों पर जहाँ यह लाभपूर्ण दशा में लगाई जा सकती है, जाने में सहायक होती है । मढ़ियों - रिवाज के स्थान पर प्रसंविदा की स्वतंत्रता और प्रतिस्पर्धा स्थापित कर मुद्रा ने जनता को सामाजिक तथा राजनैतिक रूप से स्वतंत्र होने में सहायता प्रदान की है। मुद्रा ने गाँवों व शहरों की दूर दूर रहने की तथा अलगाव की भावना को तोड़ कर हमारी राजनैतिक तथा राष्ट्रीय भावना कोढ़ बना दिया है । मुद्रा समाज की सेवा टीक इसी प्रकार करती है जिस प्रकार सड़कें व अन्य आवागमन के साधन प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एडेम स्मिथ ने इस बात को इस प्रकार व्यक्त किया है - 'सोने और चाँदीको मुद्रा की, जो किसी देश में चलन में होती है तुलना ठोक ठीक रूप से एक विशाल सड़क से की जा सकती है जो देश के समरत घास और अनाज को बाजार में ले जाती हैं किंतु स्वयं इनका अंश भी पैदा नहीं कर सकती । मुद्रा से हानियाँ जिस प्रकार मुद्रा को समाज के लिये एक आवश्यक देन माना गया है उसी प्रकार कभी कभी इसको इसके घातक परिणामों के कारण एक अभिशाप भी माना जाता है। हम देखते हैं कि प्रायः मुद्रा के मूल्य में परिवर्तन होते रहते कभी इसकी क्रय शक्ति अधिक हो जाती है और कभी कम
नई दिल्ली : दिल्ली दंगों पर 'टाइम्स नाउ नवभारत' की खबर का बड़ा असर हुआ है। चैनल ने मंगलवार को अपने स्टिंग ऑपरेशन में दिल्ली दंगों पर एक बहुत बड़ा खुलासा किया। इस स्टिंग ऑपरेशन से पता चला कि धर्मांतरण नेटवर्क के सरगना अबु बकर की भूमिका दिल्ली दंगों में भी है। वीडियो में अबु बकर ने अपनी भूमिका कबूली है। चैनल अबु बकर के धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश पहले ही कर चुका है। 'टाइम्स नाउ नवभारत' के इस खुलासे के बाद दिल्ली पुलिस ने चैनल से स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो मांगा। चैनल ने अपना यह फुटेज दिल्ली दंगों की जांच करने वाले डीसीपी क्राइम चिन्मय बिस्वाल को सौंपा है। हरियाणा पुलिस ने धर्मांतरण नेटवर्क से जुड़े खुलासे का वीडियो मांगा है। दिल्ली और हरियाणा पुलिस के लिए स्टिंग ऑपरेशन के फुटेज एक साक्ष्य के रूप में काम करेंगे। पुलिस कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती के साथ रखेगी। बता दें कि चैनल ने देश में चल रहे धर्मांतरण रैकेट का खुलासा किया है। स्टिंग में अबु बकर ने कबूला है कि वह गरीब लोगों को बरगलाकर इस्लाम धर्म कबूल करवा चुका है। उसका धर्मांतरण रैकेट हरियाणा सहित कई राज्यों में फैला है। अबु फिलहाल पुलिस रिमांड में है। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में उसने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं।
नई दिल्ली : दिल्ली दंगों पर 'टाइम्स नाउ नवभारत' की खबर का बड़ा असर हुआ है। चैनल ने मंगलवार को अपने स्टिंग ऑपरेशन में दिल्ली दंगों पर एक बहुत बड़ा खुलासा किया। इस स्टिंग ऑपरेशन से पता चला कि धर्मांतरण नेटवर्क के सरगना अबु बकर की भूमिका दिल्ली दंगों में भी है। वीडियो में अबु बकर ने अपनी भूमिका कबूली है। चैनल अबु बकर के धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश पहले ही कर चुका है। 'टाइम्स नाउ नवभारत' के इस खुलासे के बाद दिल्ली पुलिस ने चैनल से स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो मांगा। चैनल ने अपना यह फुटेज दिल्ली दंगों की जांच करने वाले डीसीपी क्राइम चिन्मय बिस्वाल को सौंपा है। हरियाणा पुलिस ने धर्मांतरण नेटवर्क से जुड़े खुलासे का वीडियो मांगा है। दिल्ली और हरियाणा पुलिस के लिए स्टिंग ऑपरेशन के फुटेज एक साक्ष्य के रूप में काम करेंगे। पुलिस कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती के साथ रखेगी। बता दें कि चैनल ने देश में चल रहे धर्मांतरण रैकेट का खुलासा किया है। स्टिंग में अबु बकर ने कबूला है कि वह गरीब लोगों को बरगलाकर इस्लाम धर्म कबूल करवा चुका है। उसका धर्मांतरण रैकेट हरियाणा सहित कई राज्यों में फैला है। अबु फिलहाल पुलिस रिमांड में है। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में उसने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं।
देहरादून,आजखबर। भारत के सुपर विशेषता मूत्रविज्ञान अस्पतालों की श्रं=खला, आर जी स्टोन यूरोलॉजी एंव लैप्ा्राsस्कोपी हास्पिटल का निःशुल्क चिकित्सा शिविर आज प्ा्रारम्भ हो गया है। शिविर देहरादून के आर्युमेक्स मल्टी स्पेशियेलिटी आर्युवैदिक होस्पिटल पंचकर्मा में लगाया गया, जिसमे 300 मरीजो को निःशुल्क सलाह दी । चिकित्सा शिविर में अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग, यूरोलोमेट्री, ब्लड यूरिया, आरबीएस, आदि टेष्ट निःशुल्क किये जाऐगे जिनकी कीमत 6000 रू तक है भी किये । इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को कैंसर के कारकों और उसका जल्दी पता लगाने के बारे में शिक्षित करना रहा जिसके लस्वरूप रोग गुणक्तापूर्ण जीवन व्यतीत कर सकें। लैप्ा्राsस्कोपी अस्पताल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने कहा, कैंसर विकसित देशों में मृत्यु का प्रमुख कारण है और विकासशील देशों में दूसरा प्रमुख कारण है। कैंसर का बोझ बढ़ती उम्र और कैंसर से जुड़े जीवन-शैली का परिणाम है। यूसिटी ब्लाडर, किडनी, प्ा्राsस्टेट और अंडकोष के कैंसर यूरोलॉजिकल कैंसर के अंतर्गत आते हैं। किडनी कैंसर में लगातार वृद्धि हो रही है। किडनी कैंसर के दो सबसे आम प्रकार सेल-सेल कार्सिनोमा (आरसीसी) और यूरोथेलियल सेल कार्सिनोमा (यू. सी. सी. ) है। "
देहरादून,आजखबर। भारत के सुपर विशेषता मूत्रविज्ञान अस्पतालों की श्रं=खला, आर जी स्टोन यूरोलॉजी एंव लैप्ा्राsस्कोपी हास्पिटल का निःशुल्क चिकित्सा शिविर आज प्ा्रारम्भ हो गया है। शिविर देहरादून के आर्युमेक्स मल्टी स्पेशियेलिटी आर्युवैदिक होस्पिटल पंचकर्मा में लगाया गया, जिसमे तीन सौ मरीजो को निःशुल्क सलाह दी । चिकित्सा शिविर में अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग, यूरोलोमेट्री, ब्लड यूरिया, आरबीएस, आदि टेष्ट निःशुल्क किये जाऐगे जिनकी कीमत छः हज़ार रू तक है भी किये । इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को कैंसर के कारकों और उसका जल्दी पता लगाने के बारे में शिक्षित करना रहा जिसके लस्वरूप रोग गुणक्तापूर्ण जीवन व्यतीत कर सकें। लैप्ा्राsस्कोपी अस्पताल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने कहा, कैंसर विकसित देशों में मृत्यु का प्रमुख कारण है और विकासशील देशों में दूसरा प्रमुख कारण है। कैंसर का बोझ बढ़ती उम्र और कैंसर से जुड़े जीवन-शैली का परिणाम है। यूसिटी ब्लाडर, किडनी, प्ा्राsस्टेट और अंडकोष के कैंसर यूरोलॉजिकल कैंसर के अंतर्गत आते हैं। किडनी कैंसर में लगातार वृद्धि हो रही है। किडनी कैंसर के दो सबसे आम प्रकार सेल-सेल कार्सिनोमा और यूरोथेलियल सेल कार्सिनोमा है। "
ग्राहक : मैं ऐन. पी. इंडस्ट्रीज़ में असिस्टेंट मैनेजर हूं। प्रॉपर्टी डीलर : आप कैसा फ़्लैट चाहते हैं ? ग्राहक मुझे दो बेडरूम्ज़ का ड्रॉइंग, डाइनिंग और किचन वाला फ़्लैट चाहिए। टॉयलेट्स मुझे दो चाहिए और एक अच्छी बालकनी भी । प्रॉपर्टी डीलर : आपका बजट क्या होगा? ग्राहक : करीब पच्चीस सौ रुपए महीना। प्रापर्टी डीलर : कौन सा फ़्लोर चाहिए? ग्राहक : हो सके तो पहला । मकान हवादार, खुली धूप वाला और अच्छे पड़ोस में होना चाहिए। प्रॉपर्टी डीलर : मकान कब देखना चाहते हैं ? ग्राहक : जितनी जल्दी आप दिखा सकें। देखिए मुझे महीने के अंत तक मकान ज़रूर बदलना है। प्रॉपर्टी डीलर : अच्छा, अच्छा। आप मुझे अपना पता और टेलीफ़ोन नं. नोट करवा दीजिए। ग्राहक : सी-894, आज़ादपुर। और मेरा टेलीफ़ोन नंबर है 75134501 प्रॉपर्टी डीलर : ठीक है श्रीवास्तव साहब। मुझे थोड़ा सा वक्त दीजिए। मैं आपके लिए अच्छा सा फ़्लैट ढूंढ दूंगा। ग्राहक : कितना समय लगेगा? प्रॉपर्टी डीलर : मैं एक दो दिन में ही आपसे संपर्क करूंगा। ग्राहक ठीक है। आपका कमीशन क्या है ? प्रॉपर्टी डीलर : जी दो महीने का किराया। ग्राहक : अच्छा चलता हूं । ज़रा ज़ल्दी कुछ कीजिएगा प्रॉपटी डीलर : जी, आप बिल्कुल फिक्र मत करें। Customer : I am assistant manager in N.P. Industries. आइ ऐम असिस्टेंट मैनेजर इन ऐन. पी. इंडस्ट्रीज़. Property dealer: What type of flat do you want ? वॉट टाइप ऑफ़ फ़्लैट डू यू वॉन्ट? Customer: A two bedroom flat with drawing, dining and kitchen. I want two toilets and also a good balcony अटू बेडरूम फ़्लैट विद ड्रॉइंग, डाइनिंग ऐंड किचन. आइ वॉन्ट टू टॉयलेट्स ऐंड ऑलसो अ गुड बालकनी. Property dealer : What is your budget? वॉट इज योर बजट? Customer : About 2500/- per month. अबाउट टू थाउज़ंड फ़ाइव हंड्रेड पर मंथ. Property dealer: Which floor do you want ? विच फ़्लोर डू यू वॉन्ट? Customer : Preferably, first floor. I want an airy and sun facing house in a good neighbourhood. प्रिफ़रेबली फ़र्स्ट फ़्लोर. आइ वॉन्ट एन ऐअरी ऐंड सन फेसिंग हाउस इन अ गुड नेबरहुड, Property dealer: When do you want to see the flat? वेन डू यू वॉन्ट टु सी द फ़्लैट ? टु Customer : As soon as you can show me. You see, I have to shift positively by the end of this month. एज़ सून एज़ यू कैन शो मी. यू सी, आइ हैव टु शिफ्ट पॉज़िटिवली बाइ द ऐंड ऑफ़ दिस मंथ. Property dealer: Oh, I see. Let me note down your address and telephone number ? ओ, आइ सी । लेट मी नोट डाउन योर एड्रेस ऐंड टेलीफ़ोन नंबर. Customer : C-894, Azadpur. And my telephone number is 7513450. सी- 894, आज़ादपुर. ऐंड माइ टेलीफ़ोन नंबर इज़ Property dealer: O.K. Mr. Srivastav. Give me some time. I will find a nice flat for you. ओ. के. मिस्टर श्रीवास्तव, गिव मी सम टाइम आइ विल फ़ाइंड अ नाइस फ़्लैट फ़ॉर यू. Customer: How much time will you take? हाउ मच टाइम विल यू टेक? Property dealer: I'll get back to you in a day or two. आइ विल गेट बैक टु यू इन अ डे ऑर टू. Customer: O.K. What is your commission? ओ. के. वॉट इज योर कमीशन? Property dealer : Two months rent sir. टू मंथ्स रेंट सर. Customer Alright. Please do something quickly. ऑलराइट. प्लीज़ डू समथिंग क्विक्ली. Property dealer : Yes, Yes. Don't worry at all. Bye sir. येस, येस. डोन्ट वरी ऐट ऑल. बाइ सर.
ग्राहक : मैं ऐन. पी. इंडस्ट्रीज़ में असिस्टेंट मैनेजर हूं। प्रॉपर्टी डीलर : आप कैसा फ़्लैट चाहते हैं ? ग्राहक मुझे दो बेडरूम्ज़ का ड्रॉइंग, डाइनिंग और किचन वाला फ़्लैट चाहिए। टॉयलेट्स मुझे दो चाहिए और एक अच्छी बालकनी भी । प्रॉपर्टी डीलर : आपका बजट क्या होगा? ग्राहक : करीब पच्चीस सौ रुपए महीना। प्रापर्टी डीलर : कौन सा फ़्लोर चाहिए? ग्राहक : हो सके तो पहला । मकान हवादार, खुली धूप वाला और अच्छे पड़ोस में होना चाहिए। प्रॉपर्टी डीलर : मकान कब देखना चाहते हैं ? ग्राहक : जितनी जल्दी आप दिखा सकें। देखिए मुझे महीने के अंत तक मकान ज़रूर बदलना है। प्रॉपर्टी डीलर : अच्छा, अच्छा। आप मुझे अपना पता और टेलीफ़ोन नं. नोट करवा दीजिए। ग्राहक : सी-आठ सौ चौरानवे, आज़ादपुर। और मेरा टेलीफ़ोन नंबर है सात करोड़ इक्यावन लाख चौंतीस हज़ार पाँच सौ एक प्रॉपर्टी डीलर : ठीक है श्रीवास्तव साहब। मुझे थोड़ा सा वक्त दीजिए। मैं आपके लिए अच्छा सा फ़्लैट ढूंढ दूंगा। ग्राहक : कितना समय लगेगा? प्रॉपर्टी डीलर : मैं एक दो दिन में ही आपसे संपर्क करूंगा। ग्राहक ठीक है। आपका कमीशन क्या है ? प्रॉपर्टी डीलर : जी दो महीने का किराया। ग्राहक : अच्छा चलता हूं । ज़रा ज़ल्दी कुछ कीजिएगा प्रॉपटी डीलर : जी, आप बिल्कुल फिक्र मत करें। Customer : I am assistant manager in N.P. Industries. आइ ऐम असिस्टेंट मैनेजर इन ऐन. पी. इंडस्ट्रीज़. Property dealer: What type of flat do you want ? वॉट टाइप ऑफ़ फ़्लैट डू यू वॉन्ट? Customer: A two bedroom flat with drawing, dining and kitchen. I want two toilets and also a good balcony अटू बेडरूम फ़्लैट विद ड्रॉइंग, डाइनिंग ऐंड किचन. आइ वॉन्ट टू टॉयलेट्स ऐंड ऑलसो अ गुड बालकनी. Property dealer : What is your budget? वॉट इज योर बजट? Customer : About दो हज़ार पाँच सौ/- per month. अबाउट टू थाउज़ंड फ़ाइव हंड्रेड पर मंथ. Property dealer: Which floor do you want ? विच फ़्लोर डू यू वॉन्ट? Customer : Preferably, first floor. I want an airy and sun facing house in a good neighbourhood. प्रिफ़रेबली फ़र्स्ट फ़्लोर. आइ वॉन्ट एन ऐअरी ऐंड सन फेसिंग हाउस इन अ गुड नेबरहुड, Property dealer: When do you want to see the flat? वेन डू यू वॉन्ट टु सी द फ़्लैट ? टु Customer : As soon as you can show me. You see, I have to shift positively by the end of this month. एज़ सून एज़ यू कैन शो मी. यू सी, आइ हैव टु शिफ्ट पॉज़िटिवली बाइ द ऐंड ऑफ़ दिस मंथ. Property dealer: Oh, I see. Let me note down your address and telephone number ? ओ, आइ सी । लेट मी नोट डाउन योर एड्रेस ऐंड टेलीफ़ोन नंबर. Customer : C-आठ सौ चौरानवे, Azadpur. And my telephone number is पचहत्तर लाख तेरह हज़ार चार सौ पचास. सी- आठ सौ चौरानवे, आज़ादपुर. ऐंड माइ टेलीफ़ोन नंबर इज़ Property dealer: O.K. Mr. Srivastav. Give me some time. I will find a nice flat for you. ओ. के. मिस्टर श्रीवास्तव, गिव मी सम टाइम आइ विल फ़ाइंड अ नाइस फ़्लैट फ़ॉर यू. Customer: How much time will you take? हाउ मच टाइम विल यू टेक? Property dealer: I'll get back to you in a day or two. आइ विल गेट बैक टु यू इन अ डे ऑर टू. Customer: O.K. What is your commission? ओ. के. वॉट इज योर कमीशन? Property dealer : Two months rent sir. टू मंथ्स रेंट सर. Customer Alright. Please do something quickly. ऑलराइट. प्लीज़ डू समथिंग क्विक्ली. Property dealer : Yes, Yes. Don't worry at all. Bye sir. येस, येस. डोन्ट वरी ऐट ऑल. बाइ सर.
'येव्गेनी ओनेगिन' से बहुत ही प्यार था उसे । यह किताब तो हमेशा उसके पास रहती थी और लगभग पूरी की पूरी उसे जबानी याद थी। उन दिनों ही वह अवार भाषा में उसका अनुवाद करने का सपना देखा करता था। युद्ध के मोर्चे पर भी वह उसे अपने साथ ले गया। युद्ध के अंत में गोलियों और गोलों के टुकड़ों से छलनी होने पर उसे मास्को के एक अस्पताल में भेज दिया गया। वहीं मरीया नाम की एक मास्कोवासिनी युवती से उसकी जान-पहचान हो गई। घाव भर जाने पर उसने मरीया से शादी कर ली और मास्को में ही रह गया। मैं जब पढ़ने के लिए मास्को पहुँचा, तो पूछ-ताछ ब्यूरो से मैंने अपने दोस्त का पता लगा लिया। मैं उससे मिलने को बहुत उत्सुक था और वह मुझसे। मरीया ने हमारी दिली और जोशीली बातचीत में किसी तरह का खलल नहीं डाला । अच्छी-सी शराब पीते हुए हम तीनों देर तक बैठे रहे। मुहम्मद युद्ध की चर्चा करता रहा और मैं दागिस्तान, अपने प्यारे पहाड़ों और अपने जन्म-गाँव की। मैं उन्हें अपनी और अन्य जवान अवार कवियों की कविताएँ सुनाता रहा। बाद में मैंने मुहम्मद से पूछा कि वह किस काम में अपना जीवन लगाना चाहता है। 'मैंने इस सवाल पर बहुत सिर खपाया कि मैं क्या करूँ। मगर मरीया की एक मौसी है और मौसी का ईज्या है, जो मास्को में बहुत ही प्रभावशाली व्यक्ति है। मौसी ने देखा कि मैं किसी सोच में डूबा हुआ घुलता रहता हूँ। वह बोली 'तुम इस तरह परेशान क्यों रहते हो, मुहम्मद । मैं ईज्या से कह दूँगी और वह सब कुछ ठीक-ठाक कर देगा।' और सचमुच ऐसा ही हुआ। ईज्या ने विज्ञान अकादमी में मेरे लिए अच्छी-सी नौकरी ढूँढ़ दी। अब मैं वहीं काम करता हूँ।' 'तुम्हारी चित्रकारी का क्या हुआ?' 'गोलियों ने मेरे बदन पर जो चित्रकारी कर दी है, वही काफी है । ' 'और कविता?' 'वह बचपन था, रसूल। अब मैं खासी उम्र का संजीदा आदमी हूँ और मुझे कोई संजीदा काम ही करना चाहिए।' 'और 'येव्गेनी ओनेगिन'?' मेरा दोस्त सोच में डूब गया। हाँ, मैंने उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया था। 'तुम दागिस्तान क्यों नहीं लौटना चाहते?'
'येव्गेनी ओनेगिन' से बहुत ही प्यार था उसे । यह किताब तो हमेशा उसके पास रहती थी और लगभग पूरी की पूरी उसे जबानी याद थी। उन दिनों ही वह अवार भाषा में उसका अनुवाद करने का सपना देखा करता था। युद्ध के मोर्चे पर भी वह उसे अपने साथ ले गया। युद्ध के अंत में गोलियों और गोलों के टुकड़ों से छलनी होने पर उसे मास्को के एक अस्पताल में भेज दिया गया। वहीं मरीया नाम की एक मास्कोवासिनी युवती से उसकी जान-पहचान हो गई। घाव भर जाने पर उसने मरीया से शादी कर ली और मास्को में ही रह गया। मैं जब पढ़ने के लिए मास्को पहुँचा, तो पूछ-ताछ ब्यूरो से मैंने अपने दोस्त का पता लगा लिया। मैं उससे मिलने को बहुत उत्सुक था और वह मुझसे। मरीया ने हमारी दिली और जोशीली बातचीत में किसी तरह का खलल नहीं डाला । अच्छी-सी शराब पीते हुए हम तीनों देर तक बैठे रहे। मुहम्मद युद्ध की चर्चा करता रहा और मैं दागिस्तान, अपने प्यारे पहाड़ों और अपने जन्म-गाँव की। मैं उन्हें अपनी और अन्य जवान अवार कवियों की कविताएँ सुनाता रहा। बाद में मैंने मुहम्मद से पूछा कि वह किस काम में अपना जीवन लगाना चाहता है। 'मैंने इस सवाल पर बहुत सिर खपाया कि मैं क्या करूँ। मगर मरीया की एक मौसी है और मौसी का ईज्या है, जो मास्को में बहुत ही प्रभावशाली व्यक्ति है। मौसी ने देखा कि मैं किसी सोच में डूबा हुआ घुलता रहता हूँ। वह बोली 'तुम इस तरह परेशान क्यों रहते हो, मुहम्मद । मैं ईज्या से कह दूँगी और वह सब कुछ ठीक-ठाक कर देगा।' और सचमुच ऐसा ही हुआ। ईज्या ने विज्ञान अकादमी में मेरे लिए अच्छी-सी नौकरी ढूँढ़ दी। अब मैं वहीं काम करता हूँ।' 'तुम्हारी चित्रकारी का क्या हुआ?' 'गोलियों ने मेरे बदन पर जो चित्रकारी कर दी है, वही काफी है । ' 'और कविता?' 'वह बचपन था, रसूल। अब मैं खासी उम्र का संजीदा आदमी हूँ और मुझे कोई संजीदा काम ही करना चाहिए।' 'और 'येव्गेनी ओनेगिन'?' मेरा दोस्त सोच में डूब गया। हाँ, मैंने उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया था। 'तुम दागिस्तान क्यों नहीं लौटना चाहते?'
दिगम्वर दीक्षा मज्झं शकेणवि', मेरे सर्व जोवो के प्रति मैथी। भाव / 'मित्तीने सर्वभूदेस' ।" मालूम होता है सर्पराज इसीलिए। इनके पास आया इनके वचन सत्य है या नही देखें ये समता' भाव - रखते है या नही थे, मेरे प्रति मंत्री रखते हैं या नही ? सर्प ने चाणों के अनुरूप इनको प्रवृत्ति पाई तो वह प्रम के साथ शरीर में लिपट गया भानो इनके प्रति वह स्नह ध्यरत कर रहा हो । महाराज 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के सिद्धात को स्वीकार कर चुके थे। इससे ही वह सर्पराज आत्मीय भाव से कमर से चढले में लिपटा हुआ था । इतने में मंदिर म अखड़ प्रकाश हेतु 'नदादीप" अखण्डदीपक सुधारने को विहा का उपाध्याय आया । महाराज के ऊपर सर्प लिपटा देखवर वह जान छोड़ कर भागा । बहुत लोगस्वहा आ गय । किन्तु क्या किया जाय यह समझ में, नहीं आता था। यदि गडबडी को अथवा सर्प को दूर करन में वल प्रयोग किया तो वह काट देगा तब क्या भयकर स्थिति हो जायगी । अत सबके सब लोग धवडा रहे थे। बहुत समय के पश्चात सर्प शरीर से उतरा और धीरे धीरे मानो प्रसन्नता पूर्वक बाहर चला गया कारण उसे सच्चे साधक महात्मा का परीक्षण करने का अवसर मिला था और परीक्षण में वे शुद्ध स्वर्ण निकले । - मुनि तेमिसागर महाराज ने इस वर्ष लोणद चातुर्मास के समय १७ उपवास किए थे। उनके तपोमय जीवन को बड़े बड़े साघम प्रणाम १ लका द्वीप के अनुराधपुर में राष्ट्रपति राजेन्द्र बाबू गए थे । वहाँ अशोक सम्राट के पुत्र महेन्द्र के समय से अब तक लगातार जलने वाहा नदा दोप उन्ने देखा था। उसके बारे में राजेन्द्र चावू ने अपनी आत्मकपा में लिखा हैन 'अधिक चमत्कार और आश्चर्य की त हमको सुनाई गई कि वहा जो द्वीप जल रहा था, वह भी महेन्द्र का जलाया हुआ है। उस समय से आज तक यह दीप कभी बुझा नहीं है। उसे वाइसवेइससौ, बरसो से बराबर जलाये रखा है। यदि यह सच है तो शायद दुनिया में उऐसी कोई दूसरी अग्निशिखा न मिलेगी जो दो हजार वरसा से भी ज्यादा समय से चरावर जलती आ रही हो ।" । अमक्या पू०-२८० करते हैं। मैंने उनसे आचार्य महाराज के विषय में पुनः पूछा तो उनने महा -"महाराज जब क्षुल्लक थे, तब वे द्वारा प्राप्त सामग्री हमारे कुडची ग्राम में पधारे थे। उनका आहार हमारे घर में हुआ था। उस समय से मेरा अन्तःकरण उनकी ओर आकर्पित हुआ।" उनने कहा- "तुम लोग भगवान की पूजा, अर्चा, शास्त्र वाचन, दान आदि करते हो किन्तु यह सब गज के स्नान सदृदा है कारण पदचात ससार के प्रपन में फसकर अपने को पुन मलिन बनाते हो । महाराज का कोन्नूर में चातुर्मास हुआ । वहां लगातार चार माह पर्यन्त में उनकी सेवा में जाता था। वहां में अपने मित्र वडोवा कुडचीकर के साथ महाराज को आहार दिया करता था। मेरी मुनि बनने की मनोकामना पहिले से हो थी । आचार्य महाराज के सत्सग से उस भावना को साकर समता प्राप्त हुई । वहा के चातुमास पूर्ण होने के पूर्व ही कार्तिक सुदी चौदस को मैंने तथा गोकाक के पायसागर जी ने उनसे ऐलक दीक्षा ली थी। इसके दस माह बाद आश्विन सुदी ११ को मेने समजोली में निग्रंथ दीक्षा ली थो । वीरसागर जी भी मुनि बने थे । चद्रसागर जी ने ऐलक दीक्षा ली। आचार्य महाराज सवृश विशुद्ध चरित्र निग्रंथ साधु का दर्शन हमने कही किया। उनके समागम से मेरी वात्मा कृतार्थ हो गई। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे गुरु चरणो के समीप रहने का सुअवसर मिलता रहा है । पायसागर जी के विषय में भी प्रकाश डालना उचित प्रतीत होता है, कारण उनकी चर्चा द्वारा आचार्यश्री की महत्ता सहज ही समझ में भा जाती है । - TH मुनि पायसागर महाराज से स्तर्वानिधि क्षेत्र में आचार्य महाराज के विषय में चर्चा की, तब उनने कहा कि "मेरा जीवन उन सन्तराज के प्रसाद से अत्यन्त प्रभावित है। मेरी कथा इस प्रकार है - मै एक नाटक कंपनी का प्रमुख अभिनेता रहा आया पश्चात् आपसो अनबन होने के कारण मैने कपनी छोड दी और में कुछ दिन तक क्रांतिकारी सरीखा रहा । मैने मिलमालिको के विरोध में मजदूरी के सत्याग्रह की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन दिया। इसके पश्चात् मेरा मन सासारिक विडयना से उपटा । अपने कुलषर्म-जैतष में से मेरा रचमान भी परिचय नही था । में दिगम्बर वीक्षा णमोकर मंत्र को भी नहीं जानता था । इसलिए मैंने जटाविभूतिधारी रुद्राक्षमाला अलकृत चिदम्बर बुवा का रूप धारण किया और इस साधुत्व का अभिनय करता हुआ बबई से काशी पहुचा। गंगाजी में गहरे गोते लगाए । 'काशी विश्वनाथ, गगे' के सानिध्य में समय व्यतीत करता हुआ हर प्रकार के साधुओ के सम्पर्क में आया । मे लौकिक कार्यों में दक्ष था, इसलिए साधु बनने पर भी मेरी विचारशक्ति मृत नही हुई थी । वह मूछित अवश्य थी। जब में जटा विभूतिमडित सन्यासी के रूप में फिरता फिरता शोलापुर के समीप गाया, तब मेरी दृष्टि में यह बात आई, कि पाखडी साधु के रूप में फिरकर आत्मवचना तथा पर प्रतारणा के कार्य में लगे रहना महामूर्खता है। मैने भिन्न रं सम्प्रदाय के शास्त्री का परिशीलन किया था, उस शास्त्र ज्ञान ने मुझे साहस प्रदान किया कि में उस साघुत्व के ढकोसले बो दूर फेवदू । अब मैंने अपने जीवन का नया अभिनय शुरू किया। मैं सुन्दर वस्त्रादि सुसज्जित गुडे के रूप में यत्र सत्र विचरण करने लगा। शायद हो कोई ऐसा दोष हो जो खोजने पर मुझमें न मिले । मं अत्यन्त विष} मान्ध व्यक्ति बन गया । सुयोग की बात है । उग्र तपस्वी दिगम्बर श्रमण राज आचार्य शातिसागर महाराज का कोन्नूर आना हुआ । उस समय में सायक्लि हाथ में लिए बना उना उसके पास से निकला । सेक्डों जैनी उन मुनिराज को प्रणाम करते थे । मैं वहा एक कोने में खड़ा हो गया । मेरी दृष्टि उन पर पड़ी । मैंने उन्हें प्रणाम नहीं किया नाममात्र को दोनो हाथ जोडसे लिए थे। उस समय कुछ बन्धुओं ने महाराज से मेरे विषय में कहा - 'महाराज ये जैन कुलोत्पन है । महान व्यसनी है। इसे धर्मं कर्म कुछ नहीं सुहाता है।' मेरी निन्दा महाराज के कानों में पहुंची, किन्तु उनके मुसमडल पर पूर्ण शौति थी । नेत्रों में मेरे प्रति करुणा थी और बलवान आकर्षण शक्ति थी । महाराज ने लोगों को शांत किया। उनके मुह से ये शब्द निकले 'इसने आज हमारे दर्शन किये है, इसलिये इसे कुछ न कुछ लाभ अवश्य होगा # में उनके मुखमण्डले को ध्यान से टकटकी लगाएर देख रहा था ।
दिगम्वर दीक्षा मज्झं शकेणवि', मेरे सर्व जोवो के प्रति मैथी। भाव / 'मित्तीने सर्वभूदेस' ।" मालूम होता है सर्पराज इसीलिए। इनके पास आया इनके वचन सत्य है या नही देखें ये समता' भाव - रखते है या नही थे, मेरे प्रति मंत्री रखते हैं या नही ? सर्प ने चाणों के अनुरूप इनको प्रवृत्ति पाई तो वह प्रम के साथ शरीर में लिपट गया भानो इनके प्रति वह स्नह ध्यरत कर रहा हो । महाराज 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के सिद्धात को स्वीकार कर चुके थे। इससे ही वह सर्पराज आत्मीय भाव से कमर से चढले में लिपटा हुआ था । इतने में मंदिर म अखड़ प्रकाश हेतु 'नदादीप" अखण्डदीपक सुधारने को विहा का उपाध्याय आया । महाराज के ऊपर सर्प लिपटा देखवर वह जान छोड़ कर भागा । बहुत लोगस्वहा आ गय । किन्तु क्या किया जाय यह समझ में, नहीं आता था। यदि गडबडी को अथवा सर्प को दूर करन में वल प्रयोग किया तो वह काट देगा तब क्या भयकर स्थिति हो जायगी । अत सबके सब लोग धवडा रहे थे। बहुत समय के पश्चात सर्प शरीर से उतरा और धीरे धीरे मानो प्रसन्नता पूर्वक बाहर चला गया कारण उसे सच्चे साधक महात्मा का परीक्षण करने का अवसर मिला था और परीक्षण में वे शुद्ध स्वर्ण निकले । - मुनि तेमिसागर महाराज ने इस वर्ष लोणद चातुर्मास के समय सत्रह उपवास किए थे। उनके तपोमय जीवन को बड़े बड़े साघम प्रणाम एक लका द्वीप के अनुराधपुर में राष्ट्रपति राजेन्द्र बाबू गए थे । वहाँ अशोक सम्राट के पुत्र महेन्द्र के समय से अब तक लगातार जलने वाहा नदा दोप उन्ने देखा था। उसके बारे में राजेन्द्र चावू ने अपनी आत्मकपा में लिखा हैन 'अधिक चमत्कार और आश्चर्य की त हमको सुनाई गई कि वहा जो द्वीप जल रहा था, वह भी महेन्द्र का जलाया हुआ है। उस समय से आज तक यह दीप कभी बुझा नहीं है। उसे वाइसवेइससौ, बरसो से बराबर जलाये रखा है। यदि यह सच है तो शायद दुनिया में उऐसी कोई दूसरी अग्निशिखा न मिलेगी जो दो हजार वरसा से भी ज्यादा समय से चरावर जलती आ रही हो ।" । अमक्या पूशून्य-दो सौ अस्सी करते हैं। मैंने उनसे आचार्य महाराज के विषय में पुनः पूछा तो उनने महा -"महाराज जब क्षुल्लक थे, तब वे द्वारा प्राप्त सामग्री हमारे कुडची ग्राम में पधारे थे। उनका आहार हमारे घर में हुआ था। उस समय से मेरा अन्तःकरण उनकी ओर आकर्पित हुआ।" उनने कहा- "तुम लोग भगवान की पूजा, अर्चा, शास्त्र वाचन, दान आदि करते हो किन्तु यह सब गज के स्नान सदृदा है कारण पदचात ससार के प्रपन में फसकर अपने को पुन मलिन बनाते हो । महाराज का कोन्नूर में चातुर्मास हुआ । वहां लगातार चार माह पर्यन्त में उनकी सेवा में जाता था। वहां में अपने मित्र वडोवा कुडचीकर के साथ महाराज को आहार दिया करता था। मेरी मुनि बनने की मनोकामना पहिले से हो थी । आचार्य महाराज के सत्सग से उस भावना को साकर समता प्राप्त हुई । वहा के चातुमास पूर्ण होने के पूर्व ही कार्तिक सुदी चौदस को मैंने तथा गोकाक के पायसागर जी ने उनसे ऐलक दीक्षा ली थी। इसके दस माह बाद आश्विन सुदी ग्यारह को मेने समजोली में निग्रंथ दीक्षा ली थो । वीरसागर जी भी मुनि बने थे । चद्रसागर जी ने ऐलक दीक्षा ली। आचार्य महाराज सवृश विशुद्ध चरित्र निग्रंथ साधु का दर्शन हमने कही किया। उनके समागम से मेरी वात्मा कृतार्थ हो गई। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे गुरु चरणो के समीप रहने का सुअवसर मिलता रहा है । पायसागर जी के विषय में भी प्रकाश डालना उचित प्रतीत होता है, कारण उनकी चर्चा द्वारा आचार्यश्री की महत्ता सहज ही समझ में भा जाती है । - TH मुनि पायसागर महाराज से स्तर्वानिधि क्षेत्र में आचार्य महाराज के विषय में चर्चा की, तब उनने कहा कि "मेरा जीवन उन सन्तराज के प्रसाद से अत्यन्त प्रभावित है। मेरी कथा इस प्रकार है - मै एक नाटक कंपनी का प्रमुख अभिनेता रहा आया पश्चात् आपसो अनबन होने के कारण मैने कपनी छोड दी और में कुछ दिन तक क्रांतिकारी सरीखा रहा । मैने मिलमालिको के विरोध में मजदूरी के सत्याग्रह की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन दिया। इसके पश्चात् मेरा मन सासारिक विडयना से उपटा । अपने कुलषर्म-जैतष में से मेरा रचमान भी परिचय नही था । में दिगम्बर वीक्षा णमोकर मंत्र को भी नहीं जानता था । इसलिए मैंने जटाविभूतिधारी रुद्राक्षमाला अलकृत चिदम्बर बुवा का रूप धारण किया और इस साधुत्व का अभिनय करता हुआ बबई से काशी पहुचा। गंगाजी में गहरे गोते लगाए । 'काशी विश्वनाथ, गगे' के सानिध्य में समय व्यतीत करता हुआ हर प्रकार के साधुओ के सम्पर्क में आया । मे लौकिक कार्यों में दक्ष था, इसलिए साधु बनने पर भी मेरी विचारशक्ति मृत नही हुई थी । वह मूछित अवश्य थी। जब में जटा विभूतिमडित सन्यासी के रूप में फिरता फिरता शोलापुर के समीप गाया, तब मेरी दृष्टि में यह बात आई, कि पाखडी साधु के रूप में फिरकर आत्मवचना तथा पर प्रतारणा के कार्य में लगे रहना महामूर्खता है। मैने भिन्न रं सम्प्रदाय के शास्त्री का परिशीलन किया था, उस शास्त्र ज्ञान ने मुझे साहस प्रदान किया कि में उस साघुत्व के ढकोसले बो दूर फेवदू । अब मैंने अपने जीवन का नया अभिनय शुरू किया। मैं सुन्दर वस्त्रादि सुसज्जित गुडे के रूप में यत्र सत्र विचरण करने लगा। शायद हो कोई ऐसा दोष हो जो खोजने पर मुझमें न मिले । मं अत्यन्त विष} मान्ध व्यक्ति बन गया । सुयोग की बात है । उग्र तपस्वी दिगम्बर श्रमण राज आचार्य शातिसागर महाराज का कोन्नूर आना हुआ । उस समय में सायक्लि हाथ में लिए बना उना उसके पास से निकला । सेक्डों जैनी उन मुनिराज को प्रणाम करते थे । मैं वहा एक कोने में खड़ा हो गया । मेरी दृष्टि उन पर पड़ी । मैंने उन्हें प्रणाम नहीं किया नाममात्र को दोनो हाथ जोडसे लिए थे। उस समय कुछ बन्धुओं ने महाराज से मेरे विषय में कहा - 'महाराज ये जैन कुलोत्पन है । महान व्यसनी है। इसे धर्मं कर्म कुछ नहीं सुहाता है।' मेरी निन्दा महाराज के कानों में पहुंची, किन्तु उनके मुसमडल पर पूर्ण शौति थी । नेत्रों में मेरे प्रति करुणा थी और बलवान आकर्षण शक्ति थी । महाराज ने लोगों को शांत किया। उनके मुह से ये शब्द निकले 'इसने आज हमारे दर्शन किये है, इसलिये इसे कुछ न कुछ लाभ अवश्य होगा # में उनके मुखमण्डले को ध्यान से टकटकी लगाएर देख रहा था ।
नादौन -नादौन बस स्टैंड पर शनिवार शाम को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब तीन चेन स्नेचर महिलाओं ने एक महिला का मंगलसूत्र छीन लिया। महिला को ज्यूं ही अभास हुआ उसने व उसकी सहयोगी ने शोर मचाया और दो महिलाओं को रंगे-हाथों दबोचकर बस से उतार दिया, जबकि तीसरी आरोपी महिला मौका से फरार हो गई। देखते ही देखते काफी लोग मौका पर एकत्रित हो गए। उमड़ी भीड़ ने इन आरोपी महिलाओं की खूब धुनाई कर डाली। पुलिस ने मौका पर पहंुचकर आरोपी महिलाओं को पुलिस थाना ले जाया गया। पीडि़त महिला मधु बाला निवासी जमूली जो बीडीसी भी है। उन्होंने बताया कि वह गांव की संतोष कुमारी के साथ बाजार आई थीं। शनिवार शाम को जब वह घर जाने के लिए बस में चढ़ी तो तीन महिलाओं ने बस में भीड़ डालते हुए एक महिला ने उनके गले से मंगल सूत्र सोने की चेन को छीन लिया, जिससे मंगलसूत्र टूट कर दुपट्टे व कोटी से फंस गया। इस घटना की क्षेत्र में काफी चर्चा है। इससे पहले भी नादौन बस स्टैंट पर चेन स्नेचर की काफी घटनाएं हो चुकी हैं। लोगों ने पुलिस से सतर्कता बढ़ाए जाने की मांग की है। आरोपी महिलाओं का कहना है कि वह आनंदपुर सहिब की रहने वाली हैं ज्वालामुखी आई थीं और वापस आनंदपुर सहिब जा रही थीं। लोगों का कहना है कि यदि आनंदपुर सहिब जा रही थीं जो विपरीत दिशा में मझीण की ओर जाने वाली निजी बस में क्या कर रही थीं। एसएचओ महेंद्र सिंह परमार ने बताया कि आरोपी महिलाएं मुक्तयारां देव व रशपाल आनंदपुर साहिब की रहने वाली हैं आरोपी से पूछताछ की जा रही है।
नादौन -नादौन बस स्टैंड पर शनिवार शाम को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब तीन चेन स्नेचर महिलाओं ने एक महिला का मंगलसूत्र छीन लिया। महिला को ज्यूं ही अभास हुआ उसने व उसकी सहयोगी ने शोर मचाया और दो महिलाओं को रंगे-हाथों दबोचकर बस से उतार दिया, जबकि तीसरी आरोपी महिला मौका से फरार हो गई। देखते ही देखते काफी लोग मौका पर एकत्रित हो गए। उमड़ी भीड़ ने इन आरोपी महिलाओं की खूब धुनाई कर डाली। पुलिस ने मौका पर पहंुचकर आरोपी महिलाओं को पुलिस थाना ले जाया गया। पीडि़त महिला मधु बाला निवासी जमूली जो बीडीसी भी है। उन्होंने बताया कि वह गांव की संतोष कुमारी के साथ बाजार आई थीं। शनिवार शाम को जब वह घर जाने के लिए बस में चढ़ी तो तीन महिलाओं ने बस में भीड़ डालते हुए एक महिला ने उनके गले से मंगल सूत्र सोने की चेन को छीन लिया, जिससे मंगलसूत्र टूट कर दुपट्टे व कोटी से फंस गया। इस घटना की क्षेत्र में काफी चर्चा है। इससे पहले भी नादौन बस स्टैंट पर चेन स्नेचर की काफी घटनाएं हो चुकी हैं। लोगों ने पुलिस से सतर्कता बढ़ाए जाने की मांग की है। आरोपी महिलाओं का कहना है कि वह आनंदपुर सहिब की रहने वाली हैं ज्वालामुखी आई थीं और वापस आनंदपुर सहिब जा रही थीं। लोगों का कहना है कि यदि आनंदपुर सहिब जा रही थीं जो विपरीत दिशा में मझीण की ओर जाने वाली निजी बस में क्या कर रही थीं। एसएचओ महेंद्र सिंह परमार ने बताया कि आरोपी महिलाएं मुक्तयारां देव व रशपाल आनंदपुर साहिब की रहने वाली हैं आरोपी से पूछताछ की जा रही है।
तलवार एवं अन्धकारको ही चर्म (ढाल) के रूपमें कालको शार्ङ्गधनुषके रूपमें, कर्मोंको ही निषंगके रूपमें भगवान्ने धारण किया है। इन्द्रियाँ ही भगवान्के तूणीरमें रहनेवाले बाण हैं, क्रियाशक्तियुक्त मन ही रथ है, शब्दादि पंचतन्मात्रा इस रथका अभिव्यक्त रूप है । जैसे रथारूढ़ होकर व्यक्ति तूणीरसे बाण निकालकर धनुषपर रखकर सन्धान करता है, वैसे ही क्रियाशक्तियुक्त मनपर आरूढ़ होकर प्रत्यक्चैतन्याभिन्न भगवान् ही कालरूप धनुषपर इन्द्रियोंको प्रतिष्ठित करके उनका सन्धान करते हैं। वर, अभय आदिकी मुद्राओंके रूपमें भगवान् अर्थ-क्रिया (प्रयोजनसम्पत्ति) को धारण करते हैं। देव-पूजा स्थल सूर्यमण्डल है, दीक्षा ही पूजा - योग्यता - सम्पत्ति है, भगवान्की परिचर्या ही अपने सम्पूर्ण दुरितोंके क्षयका कारण है। भग शब्दार्थ - ऐश्वर्य - षाड्गुण्य ही भगवान्के श्रीहस्तमें विराजमान लीलाकमल है। इस दृष्टिसे प्रथम वर्णित कमल आसनभूत कमल है। धर्म और यश ही भगवान्के ऊपर डुलनेवाले चमर और व्यजन हैं, अकुतोभय वैकुण्ठधाम ही छत्र है, वेदत्रयीरूप गरुड़ ही यज्ञस्वरूप भगवान्के वाहन हैं, ऋग्यजुः सामइन्हीं तीनों वेदोंसे ही यज्ञकी सम्पत्ति होती है, अतः वेदात्मा ही गरुड़ हैं, यज्ञस्वरूप विष्णु ही उनपर विराजमान होकर चलते हैं। चिद्रूपा भागवती शक्ति ही भगवत्प्रिया लक्ष्मी हैं, भगवदुपासना- विधायक पंचरात्रादि आगम ही पार्षदाधिप विष्वक्सेन हैं। अणिमा, महिमा आदि अष्ट विभूतियाँ ही भगवान्के नन्द, सुनन्दादि पार्षद हैं। वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न, अनिरुद्धरूपसे विराट्, हिरण्यगर्भ, अव्याकृत, ब्रह्म, विश्व, तैजस, प्राज्ञ, तुरीयादि रूपमें भी उन्हीं चतुर्व्यूह, चिन्मूर्ति भगवान्का स्वरूप वर्णित है। ये भगवान् वेदोंके भी कारण हैं। स्वयंदृक् एवं स्वमहिमपूर्ण हैं । परमार्थतः सर्वविध-भेदविवर्जित होनेपर भी भगवान् अपनी शक्तिभूता मायासे ही विश्वका उत्पादन, पालन एवं संहरण करते हैं, अतएव ब्रह्मरूप विष्णु इन आख्याओंसे, अनाच्छन्नज्ञान होते हुए भी विभिन्न रूपोंमें प्रतीत होते हैं। फिर भी वे वस्तुतः भिन्न नहीं हैं क्योंकि तत्त्वदर्शी विद्वानोंको आत्मरूपसे ही भगवान्का उपलम्भ होता है । श्रीभगवान् तुर्य एवं तुर्यातीतरूपसे निर्गुण, निष्क्रिय, निर्मल, निरवद्य, निरंजन, निराकार, निराश्रय, निरतिशयाद्वैत - परमानन्दस्वरूप हैं । सन्देह हो सकता है कि शुद्धाद्वैत परमानन्दपरब्रह्ममें वैकुण्ठ, प्रासाद, प्राकार, विमानादि अनन्त वस्तुभेद कैसे हुए ? यदि ये सब हैं, तो निर्विशेषाद्वैत कैसे? इसका समाधान यह है कि जैसे शुद्ध सुवर्णमें कटक, मुकुट, अंगदादि अनेक भेद होते हैं, जैसे समुद्र- जलमें स्थूल-सूक्ष्म तरंग हैं, जैसे समुद्र- जलमें सूक्ष्म तरंग, फेन, बुद्बुदादि भेद होते हैं, जैसे भूमिमें पर्वत, वृक्ष, तृण, गुल्म, लतादि अनन्त वस्तु - भेद होते हैं, वैसे ही अद्वैत परमानन्द ब्रह्ममें वैकुण्ठादि भेद उपपन्न हो जाते हैं । सब कुछ भगवान्का स्वरूप ही है, भगवद्व्यतिरिक्त अणुभर भी कुछ नहीं हैमत्स्वरूपमेव सर्वमद्व्यतिरिक्तमणुमात्रं न विद्यते । 'परममोक्ष सर्वत्र एक ही है, फिर अनन्तवैकुण्ठ, अनन्त आनन्द - समुद्रादि कैसे संगत होंगे ?' इस शंकाका समाधान यह है कि अविद्या पादमें ही जब अनन्तकोटि ब्रह्माण्ड हैं, तब एक - एक ब्रह्माण्ड में वैकुण्ठ तथा विविध विभूतियोंमें क्या आपत्ति है? फिर तीनों पादोंके वैकुण्ठोंके सम्बन्धमें तो कहना ही क्या है ? निरतिशयानन्दाविर्भाव मोक्ष है, यह त्रिपाद ब्रह्ममें सर्वदा प्रकट रहता है। वह पादत्रय ही परम वैकुण्ठ एवं परम कैवल्य है, इसलिये अविद्या, विद्या, आनन्द और तुर्य - इन चारों पादोंमें अनन्त वैकुण्ठ, अनन्त आनन्द - समुद्रादि ठीक ही है। इस तरह उपासक परम वैकुण्ठमें पहुँचकर भगवान्का ध्यान करके निरतिशयाद्वैत - परमानन्दस्वरूप होकर, सावधानीसे अद्वैत योगमें स्थित होकर, अद्वैत परमानन्दका अनुसन्धान करके स्वयं शुद्धबोधानन्दस्वरूप होकर महावाक्यका स्मरण करता हुआ
तलवार एवं अन्धकारको ही चर्म के रूपमें कालको शार्ङ्गधनुषके रूपमें, कर्मोंको ही निषंगके रूपमें भगवान्ने धारण किया है। इन्द्रियाँ ही भगवान्के तूणीरमें रहनेवाले बाण हैं, क्रियाशक्तियुक्त मन ही रथ है, शब्दादि पंचतन्मात्रा इस रथका अभिव्यक्त रूप है । जैसे रथारूढ़ होकर व्यक्ति तूणीरसे बाण निकालकर धनुषपर रखकर सन्धान करता है, वैसे ही क्रियाशक्तियुक्त मनपर आरूढ़ होकर प्रत्यक्चैतन्याभिन्न भगवान् ही कालरूप धनुषपर इन्द्रियोंको प्रतिष्ठित करके उनका सन्धान करते हैं। वर, अभय आदिकी मुद्राओंके रूपमें भगवान् अर्थ-क्रिया को धारण करते हैं। देव-पूजा स्थल सूर्यमण्डल है, दीक्षा ही पूजा - योग्यता - सम्पत्ति है, भगवान्की परिचर्या ही अपने सम्पूर्ण दुरितोंके क्षयका कारण है। भग शब्दार्थ - ऐश्वर्य - षाड्गुण्य ही भगवान्के श्रीहस्तमें विराजमान लीलाकमल है। इस दृष्टिसे प्रथम वर्णित कमल आसनभूत कमल है। धर्म और यश ही भगवान्के ऊपर डुलनेवाले चमर और व्यजन हैं, अकुतोभय वैकुण्ठधाम ही छत्र है, वेदत्रयीरूप गरुड़ ही यज्ञस्वरूप भगवान्के वाहन हैं, ऋग्यजुः सामइन्हीं तीनों वेदोंसे ही यज्ञकी सम्पत्ति होती है, अतः वेदात्मा ही गरुड़ हैं, यज्ञस्वरूप विष्णु ही उनपर विराजमान होकर चलते हैं। चिद्रूपा भागवती शक्ति ही भगवत्प्रिया लक्ष्मी हैं, भगवदुपासना- विधायक पंचरात्रादि आगम ही पार्षदाधिप विष्वक्सेन हैं। अणिमा, महिमा आदि अष्ट विभूतियाँ ही भगवान्के नन्द, सुनन्दादि पार्षद हैं। वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न, अनिरुद्धरूपसे विराट्, हिरण्यगर्भ, अव्याकृत, ब्रह्म, विश्व, तैजस, प्राज्ञ, तुरीयादि रूपमें भी उन्हीं चतुर्व्यूह, चिन्मूर्ति भगवान्का स्वरूप वर्णित है। ये भगवान् वेदोंके भी कारण हैं। स्वयंदृक् एवं स्वमहिमपूर्ण हैं । परमार्थतः सर्वविध-भेदविवर्जित होनेपर भी भगवान् अपनी शक्तिभूता मायासे ही विश्वका उत्पादन, पालन एवं संहरण करते हैं, अतएव ब्रह्मरूप विष्णु इन आख्याओंसे, अनाच्छन्नज्ञान होते हुए भी विभिन्न रूपोंमें प्रतीत होते हैं। फिर भी वे वस्तुतः भिन्न नहीं हैं क्योंकि तत्त्वदर्शी विद्वानोंको आत्मरूपसे ही भगवान्का उपलम्भ होता है । श्रीभगवान् तुर्य एवं तुर्यातीतरूपसे निर्गुण, निष्क्रिय, निर्मल, निरवद्य, निरंजन, निराकार, निराश्रय, निरतिशयाद्वैत - परमानन्दस्वरूप हैं । सन्देह हो सकता है कि शुद्धाद्वैत परमानन्दपरब्रह्ममें वैकुण्ठ, प्रासाद, प्राकार, विमानादि अनन्त वस्तुभेद कैसे हुए ? यदि ये सब हैं, तो निर्विशेषाद्वैत कैसे? इसका समाधान यह है कि जैसे शुद्ध सुवर्णमें कटक, मुकुट, अंगदादि अनेक भेद होते हैं, जैसे समुद्र- जलमें स्थूल-सूक्ष्म तरंग हैं, जैसे समुद्र- जलमें सूक्ष्म तरंग, फेन, बुद्बुदादि भेद होते हैं, जैसे भूमिमें पर्वत, वृक्ष, तृण, गुल्म, लतादि अनन्त वस्तु - भेद होते हैं, वैसे ही अद्वैत परमानन्द ब्रह्ममें वैकुण्ठादि भेद उपपन्न हो जाते हैं । सब कुछ भगवान्का स्वरूप ही है, भगवद्व्यतिरिक्त अणुभर भी कुछ नहीं हैमत्स्वरूपमेव सर्वमद्व्यतिरिक्तमणुमात्रं न विद्यते । 'परममोक्ष सर्वत्र एक ही है, फिर अनन्तवैकुण्ठ, अनन्त आनन्द - समुद्रादि कैसे संगत होंगे ?' इस शंकाका समाधान यह है कि अविद्या पादमें ही जब अनन्तकोटि ब्रह्माण्ड हैं, तब एक - एक ब्रह्माण्ड में वैकुण्ठ तथा विविध विभूतियोंमें क्या आपत्ति है? फिर तीनों पादोंके वैकुण्ठोंके सम्बन्धमें तो कहना ही क्या है ? निरतिशयानन्दाविर्भाव मोक्ष है, यह त्रिपाद ब्रह्ममें सर्वदा प्रकट रहता है। वह पादत्रय ही परम वैकुण्ठ एवं परम कैवल्य है, इसलिये अविद्या, विद्या, आनन्द और तुर्य - इन चारों पादोंमें अनन्त वैकुण्ठ, अनन्त आनन्द - समुद्रादि ठीक ही है। इस तरह उपासक परम वैकुण्ठमें पहुँचकर भगवान्का ध्यान करके निरतिशयाद्वैत - परमानन्दस्वरूप होकर, सावधानीसे अद्वैत योगमें स्थित होकर, अद्वैत परमानन्दका अनुसन्धान करके स्वयं शुद्धबोधानन्दस्वरूप होकर महावाक्यका स्मरण करता हुआ
(महेश रावलानी) सिवनी (साई)। जून माह का अंतिम सप्ताह आरंभ होने को है और अभी बादलों ने बरसना आंरभ नहीं किया है। शनिवार को दिन भर बादल छाये रहे पर बिना बरसे ही उमस को जमकर बढ़ाते रहे। रविवार को बारिश होने के संकेत मिले हैं। मौसम विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस बार मॉनसून को ऊर्जा न मिलने से वह काफी समय तक ठिठका रहा। इसके बाद हवाओं के कारण इसकी चाल भी कुछ बदली दिख रही थी। अब प्री मॉनसून रेन्स की संभावनाएं रविवार 23 जून से होने की संभावना दिख रही है। सूत्रों ने कहा कि रविवार को 10 मिली मीटर पानी गिरने की उम्मीद है। सूत्रों की मानें तो दोपहर 12 बजे, दोपहर 02 बजे एवं शाम को पाँच बजे के बाद बादलों की गड़गड़ाहट के साथ ही बारिश की उम्मीद की जा रही है। मौसम के पूर्वानुमान के हिसाब से प्री मॉनसून रेन्स का आगाज़ रविवार से हो सकता है। रविवार को दिन में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तो रात में न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।
सिवनी । जून माह का अंतिम सप्ताह आरंभ होने को है और अभी बादलों ने बरसना आंरभ नहीं किया है। शनिवार को दिन भर बादल छाये रहे पर बिना बरसे ही उमस को जमकर बढ़ाते रहे। रविवार को बारिश होने के संकेत मिले हैं। मौसम विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस बार मॉनसून को ऊर्जा न मिलने से वह काफी समय तक ठिठका रहा। इसके बाद हवाओं के कारण इसकी चाल भी कुछ बदली दिख रही थी। अब प्री मॉनसून रेन्स की संभावनाएं रविवार तेईस जून से होने की संभावना दिख रही है। सूत्रों ने कहा कि रविवार को दस मिली मीटर पानी गिरने की उम्मीद है। सूत्रों की मानें तो दोपहर बारह बजे, दोपहर दो बजे एवं शाम को पाँच बजे के बाद बादलों की गड़गड़ाहट के साथ ही बारिश की उम्मीद की जा रही है। मौसम के पूर्वानुमान के हिसाब से प्री मॉनसून रेन्स का आगाज़ रविवार से हो सकता है। रविवार को दिन में अधिकतम तापमान इकतीस डिग्री सेल्सियस तो रात में न्यूनतम तापमान चौबीस डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।
कोरोना वायरस के एस्ट्रोजेनिका के टीके जिसे ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका ने मिलकर विकसित किया है। अब उसके प्रभाव को लेकर एक रिपोर्ट आई है कि इससे वायरस के खिलाफ लड़ने की क्षमता समय के साथ साथ कम होने लगती है। आपको बता दें कि भारत का सिरम इंस्टीट्यूट इसका निर्माण कर रहा है। ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका के कोविड टीके से मिलने वाली सुरक्षा दूसरी डोज लेने के बाद यह सुरक्षा 3 महीने बाद कम होने लगती है। यह दावा प्रतिष्ठित मैगजीन लैसेंट जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में किया गया है। भारत में यह टीका कोविशील्ड के नाम से उपलब्ध है। लैसेंट जर्नल ने यह अध्ययन ब्राजील और स्कॉटलैंड के डाटा से निकाले निष्कर्षों गए के आधार पर किया है। निष्कर्षों में कहा गया है कि जिन लोगों ने यह टीका लगवाया है, उन्हें गंभीर बीमारी से बचने के लिए बूस्टर डोज की जरूरत है। शोधकर्ताओं ने अपने इस अध्ययन में स्कॉटलैंड के 20 लाख और ब्राजील के 4. 2 करोड़ लोग जिन्होंने एस्ट्रोजेनेका का टीका लगवाया है उनके डेटा का विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि टीके के असर में कमी 3 महीने बाद आना शुरू हो जाती है। इसके साथ ही आप इसकी दूसरी डोज लेते हैं तो उसके असर मैं 4 महीने बाद कमी आने शुरू हो जाती है। टिकों के काम होते असर के बारे में ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के प्रोफेसर अजीज शेख ने कहा कि, टीके इस वैश्विक महामारी के खिलाफ हमारा प्रमुख हथियार हैं। लेकिन समय के साथ-साथ उनकी प्रभावशीलता में कमी आना चिंता का सबब है। आपको बता दें कि इस अध्ययन में उन लोगों के परिणामों की तुलना करके 15 दिन के अंतराल पर टीके की प्रभावशीलता का अनुमान लगाया गया है। इस अध्ययन में कोरोना वायरस के ओमिक्रोन वैरिएंट को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। प्रोफेसर अजीज शैक्ख ने आगे कहा, इस बात की पहचान करके की एस्ट्रजेनेका के टीके के असर में कमी आना कब शुरू होती है, सरकारें इस डेटा के जरिये यह तय कर सकती हैं कि लोगों को बूस्टर डोज कब दी जाए। इस अध्ययन में टीके की प्रभावशीलता के असर में कमी स्कॉटलैंड और ब्राजील दोनों ही जगहों का डेटा यह बताता है कि टीके के प्रभाव में कमी 3 महीने बाद आना शुरू हो जाती है।
कोरोना वायरस के एस्ट्रोजेनिका के टीके जिसे ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका ने मिलकर विकसित किया है। अब उसके प्रभाव को लेकर एक रिपोर्ट आई है कि इससे वायरस के खिलाफ लड़ने की क्षमता समय के साथ साथ कम होने लगती है। आपको बता दें कि भारत का सिरम इंस्टीट्यूट इसका निर्माण कर रहा है। ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका के कोविड टीके से मिलने वाली सुरक्षा दूसरी डोज लेने के बाद यह सुरक्षा तीन महीने बाद कम होने लगती है। यह दावा प्रतिष्ठित मैगजीन लैसेंट जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में किया गया है। भारत में यह टीका कोविशील्ड के नाम से उपलब्ध है। लैसेंट जर्नल ने यह अध्ययन ब्राजील और स्कॉटलैंड के डाटा से निकाले निष्कर्षों गए के आधार पर किया है। निष्कर्षों में कहा गया है कि जिन लोगों ने यह टीका लगवाया है, उन्हें गंभीर बीमारी से बचने के लिए बूस्टर डोज की जरूरत है। शोधकर्ताओं ने अपने इस अध्ययन में स्कॉटलैंड के बीस लाख और ब्राजील के चार. दो करोड़ लोग जिन्होंने एस्ट्रोजेनेका का टीका लगवाया है उनके डेटा का विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि टीके के असर में कमी तीन महीने बाद आना शुरू हो जाती है। इसके साथ ही आप इसकी दूसरी डोज लेते हैं तो उसके असर मैं चार महीने बाद कमी आने शुरू हो जाती है। टिकों के काम होते असर के बारे में ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के प्रोफेसर अजीज शेख ने कहा कि, टीके इस वैश्विक महामारी के खिलाफ हमारा प्रमुख हथियार हैं। लेकिन समय के साथ-साथ उनकी प्रभावशीलता में कमी आना चिंता का सबब है। आपको बता दें कि इस अध्ययन में उन लोगों के परिणामों की तुलना करके पंद्रह दिन के अंतराल पर टीके की प्रभावशीलता का अनुमान लगाया गया है। इस अध्ययन में कोरोना वायरस के ओमिक्रोन वैरिएंट को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। प्रोफेसर अजीज शैक्ख ने आगे कहा, इस बात की पहचान करके की एस्ट्रजेनेका के टीके के असर में कमी आना कब शुरू होती है, सरकारें इस डेटा के जरिये यह तय कर सकती हैं कि लोगों को बूस्टर डोज कब दी जाए। इस अध्ययन में टीके की प्रभावशीलता के असर में कमी स्कॉटलैंड और ब्राजील दोनों ही जगहों का डेटा यह बताता है कि टीके के प्रभाव में कमी तीन महीने बाद आना शुरू हो जाती है।
में जाता है तो और भी साफ़ प्रतीत होने लगता है, परन्तु उसकी सरल गणना महीनों से ही होती है। अमुक अमुक महीनों में अमुक ऋतु रहता है, ऐसा कहने की प्रथा आजकल भी हैं और वेदों में भी मिलती अतः मास का सम्बन्ध ऋतु से है । मास के लिये ही तीस उपाओं का जिक्र किया है । उषा शब्द दिन का उपलक्षण है। यदि हमने चैत्र मास की प्रतिपत् से आरम्भ किया था तो सब ऋतुओं में घूमते हुए तीस उपाओं का यह समूह फिर चैन की प्रतिषत् पर पहुँच जायगा । तिलक मे ' परियन्ति 'घूमती हैं--पर बहुत ज़ोर दिया है । उनका कहना है कि यहाँ ध्रुव प्रदेश की क्षितिज पर घूमने वाली उपाओं की और साफ़ इशारा है। अतः यह देखना होगा कि दूसरे स्थलों पर कोई ऐसी बात मिलती है या नहीं जिससे' परियन्ति ' की व्याख्या हो सके और यह निश्चय हो सके कि यह क्षितिज पर का घूमना है या बारह महीनों में आकाश के सत्ताइसों नक्षत्रों में घूमना है या किसी अन्य प्रकार का घूमना है । हम इसके पहिले ऐसे मंत्र उद्धृत कर चुके हैं जिनमें कहा गया है कि उपा का मुंह पश्चिम की ओर है। यह बात ध्रुव प्रदेश की उपा के लिये नहीं कहीं जा सकती। फिर ऋक ३-६१, ३ में उषा को कहा है • ऊर्धा तिष्ठसि 'तुम आकाश में ऊँचे पर रहती हो। यह बात क्षितिजवर्तिनी उषा के लिये नहीं कहीं जा सकती । एक और मंत्र में उधा के पूर्व में उदय होने की बात कही गयी है जब कि शुत्र प्रदेश में उपा दक्षिण में रहती है। फिर चाकू १-१२३, ८ में कहा है 'सशीरय सहशीशिया जैसी आज वैसी ही काल (उपायें होती है ) । यह बात कदापि ध्रुव प्रदेश के किसी भाग की उपा के लिये नहीं कही जा सकती । पहिले दिन उपा धुँधली, दूसरे दिन उससे तेज, तीसरे दिन और तेज, यहाँ तक कि तीसवें दिन तक बहुत तेज़ हो जाती है । उपाकाल समाप्त होने पर सूर्य निकल आता है। अतः वहाँ की उपा एक दूसरे के सहश नहीं कहीं जा सकतीं। हम 'अचेति केतुरूपसः पुरस्ताच्छये दिवो दुहितुर्जायमानः ' ( ऋक् ७-६७, २ ) पहिले उद्धृत कर चुके हैं जिसमें सूर्य के पूर्व दिशा में देख पड़ने की बात है, अतः उषा भी उसी दिशा में होगी। ऋकू ७७६, २ भी उदूत हो चुका है जो उया का पूर्व से उदय होना बतलाता है। अतः यह प्रमाण तो यही संकेत करते हैं कि वेद में हमारे देश के साधारण उपाकाल का
में जाता है तो और भी साफ़ प्रतीत होने लगता है, परन्तु उसकी सरल गणना महीनों से ही होती है। अमुक अमुक महीनों में अमुक ऋतु रहता है, ऐसा कहने की प्रथा आजकल भी हैं और वेदों में भी मिलती अतः मास का सम्बन्ध ऋतु से है । मास के लिये ही तीस उपाओं का जिक्र किया है । उषा शब्द दिन का उपलक्षण है। यदि हमने चैत्र मास की प्रतिपत् से आरम्भ किया था तो सब ऋतुओं में घूमते हुए तीस उपाओं का यह समूह फिर चैन की प्रतिषत् पर पहुँच जायगा । तिलक मे ' परियन्ति 'घूमती हैं--पर बहुत ज़ोर दिया है । उनका कहना है कि यहाँ ध्रुव प्रदेश की क्षितिज पर घूमने वाली उपाओं की और साफ़ इशारा है। अतः यह देखना होगा कि दूसरे स्थलों पर कोई ऐसी बात मिलती है या नहीं जिससे' परियन्ति ' की व्याख्या हो सके और यह निश्चय हो सके कि यह क्षितिज पर का घूमना है या बारह महीनों में आकाश के सत्ताइसों नक्षत्रों में घूमना है या किसी अन्य प्रकार का घूमना है । हम इसके पहिले ऐसे मंत्र उद्धृत कर चुके हैं जिनमें कहा गया है कि उपा का मुंह पश्चिम की ओर है। यह बात ध्रुव प्रदेश की उपा के लिये नहीं कहीं जा सकती। फिर ऋक तीन-इकसठ, तीन में उषा को कहा है • ऊर्धा तिष्ठसि 'तुम आकाश में ऊँचे पर रहती हो। यह बात क्षितिजवर्तिनी उषा के लिये नहीं कहीं जा सकती । एक और मंत्र में उधा के पूर्व में उदय होने की बात कही गयी है जब कि शुत्र प्रदेश में उपा दक्षिण में रहती है। फिर चाकू एक-एक सौ तेईस, आठ में कहा है 'सशीरय सहशीशिया जैसी आज वैसी ही काल । यह बात कदापि ध्रुव प्रदेश के किसी भाग की उपा के लिये नहीं कही जा सकती । पहिले दिन उपा धुँधली, दूसरे दिन उससे तेज, तीसरे दिन और तेज, यहाँ तक कि तीसवें दिन तक बहुत तेज़ हो जाती है । उपाकाल समाप्त होने पर सूर्य निकल आता है। अतः वहाँ की उपा एक दूसरे के सहश नहीं कहीं जा सकतीं। हम 'अचेति केतुरूपसः पुरस्ताच्छये दिवो दुहितुर्जायमानः ' पहिले उद्धृत कर चुके हैं जिसमें सूर्य के पूर्व दिशा में देख पड़ने की बात है, अतः उषा भी उसी दिशा में होगी। ऋकू सात सौ छिहत्तर, दो भी उदूत हो चुका है जो उया का पूर्व से उदय होना बतलाता है। अतः यह प्रमाण तो यही संकेत करते हैं कि वेद में हमारे देश के साधारण उपाकाल का
भारतीय नौसेना ने अपने अपने अधिकारियों और सैनिकों द्वारा फेसबुक इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। इसके अलावा नौसेना ने अपने अड्डों, डॉकयार्ड और जंगी जहाजों पर स्मार्टफोन के प्रयोग पर भी रोक लगाई है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले आंध्र प्रदेश पुलिस ने एक जासूसी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए सात नौसैनिकों को गिरफ्तार किया था। ये एक हवाला व्यापारी के साथ मिलकर खुफिया जानकारियां पाकिस्तान पहुंचा रहे थे। आइये, पूरी खबर जानते हैं। नौसेना के एक अधिकारी ने बताया कि यह कदम सात नौसैनिकों की गिरफ्तारी के बाद उठाया गया है। ये लोग पाकिस्तान को सोशल मीडिया के जरिए खुफिया जानकारी भेज रहे थे। आंध्र प्रदेश पुलिस ने इस रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर 'डॉल्फिन्स नोज' नाम से ऑपरेशन चलाया था। पुलिस ने कहा कि मामले में FIR दर्ज कर ली गई है और देश के विभिन्न हिस्सों से नौसेना के सात कर्मियों और एक हवाला संचालक को गिरफ्तार किया गया है। कुछ अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है। गिरफ्तार किए गए सातों जवान मुंबई, विशाखापट्टनम और करावड़ में तैनात थे। एक अधिकारी ने बताया कि तीन-चार औरतों ने सोशल मीडिया के जरिए इन सैनिकों को हनीट्रैप का शिकार बनाया। उन औरतों ने बाद में इनका परिचय एक पाकिस्तान व्यापारी से करवाया, जो असल में हैंडलर था। उसने इन सैनिकों से संवेदनशील जानकारियां हासिल करना शुरू कर दिया। इन औरतों ने अश्लील बातें लीक करने की धमकी देकर इनसे सबमरीन और जंगी जहाजों की स्थिति पता की। इन्हें हवाला व्यापारी के जरिए हर महीने पैसे मिलते थे। आरोपियों ने क्या-क्या सूचनाएं भेजी? सूत्रों के मुताबिक, ये सातों नौसैनिकों ने जहाजों और सबमरीन से लौटकर पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में किए अपने काम की जानकारी समेत कई खुफिया जानकारियां अपने हैंडलर को दी थी। नौसेना से पहले थलसेना ने भी अपने महत्वपूर्ण पदों पर तैनात अधिकारियों के फेसबुक और व्हाट्सऐप समेत सभी सोशल मीडिया ऐप्स के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। सेना ने यह कदम अधिकारियों के फोन हैक होने और गुप्त सूचनाओं को लीक होने से बचाने के लिए उठाया था। व्हाट्सऐप के जरिए नेताओं, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के फोन हैक होने की घटना सामने आने के बाद थल सेना ने यह एडवायजरी जारी की थी। एडवायजरी में क्या कहा गया था?
भारतीय नौसेना ने अपने अपने अधिकारियों और सैनिकों द्वारा फेसबुक इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। इसके अलावा नौसेना ने अपने अड्डों, डॉकयार्ड और जंगी जहाजों पर स्मार्टफोन के प्रयोग पर भी रोक लगाई है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले आंध्र प्रदेश पुलिस ने एक जासूसी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए सात नौसैनिकों को गिरफ्तार किया था। ये एक हवाला व्यापारी के साथ मिलकर खुफिया जानकारियां पाकिस्तान पहुंचा रहे थे। आइये, पूरी खबर जानते हैं। नौसेना के एक अधिकारी ने बताया कि यह कदम सात नौसैनिकों की गिरफ्तारी के बाद उठाया गया है। ये लोग पाकिस्तान को सोशल मीडिया के जरिए खुफिया जानकारी भेज रहे थे। आंध्र प्रदेश पुलिस ने इस रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर 'डॉल्फिन्स नोज' नाम से ऑपरेशन चलाया था। पुलिस ने कहा कि मामले में FIR दर्ज कर ली गई है और देश के विभिन्न हिस्सों से नौसेना के सात कर्मियों और एक हवाला संचालक को गिरफ्तार किया गया है। कुछ अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है। गिरफ्तार किए गए सातों जवान मुंबई, विशाखापट्टनम और करावड़ में तैनात थे। एक अधिकारी ने बताया कि तीन-चार औरतों ने सोशल मीडिया के जरिए इन सैनिकों को हनीट्रैप का शिकार बनाया। उन औरतों ने बाद में इनका परिचय एक पाकिस्तान व्यापारी से करवाया, जो असल में हैंडलर था। उसने इन सैनिकों से संवेदनशील जानकारियां हासिल करना शुरू कर दिया। इन औरतों ने अश्लील बातें लीक करने की धमकी देकर इनसे सबमरीन और जंगी जहाजों की स्थिति पता की। इन्हें हवाला व्यापारी के जरिए हर महीने पैसे मिलते थे। आरोपियों ने क्या-क्या सूचनाएं भेजी? सूत्रों के मुताबिक, ये सातों नौसैनिकों ने जहाजों और सबमरीन से लौटकर पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में किए अपने काम की जानकारी समेत कई खुफिया जानकारियां अपने हैंडलर को दी थी। नौसेना से पहले थलसेना ने भी अपने महत्वपूर्ण पदों पर तैनात अधिकारियों के फेसबुक और व्हाट्सऐप समेत सभी सोशल मीडिया ऐप्स के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। सेना ने यह कदम अधिकारियों के फोन हैक होने और गुप्त सूचनाओं को लीक होने से बचाने के लिए उठाया था। व्हाट्सऐप के जरिए नेताओं, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के फोन हैक होने की घटना सामने आने के बाद थल सेना ने यह एडवायजरी जारी की थी। एडवायजरी में क्या कहा गया था?
उत्तरकाशीः नवंबर महीने का पहला हफ्ता खत्म होते ही उत्तराखंड में बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है. उत्तराखंड के केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में ताजा बर्फबारी हुई है. रविवार देर शाम से चमोली जिले में रुक-रुक कर बर्फबारी शुरू हो गई है. केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के आसपास रात के वक्त हल्का स्नोफॉल हुआ. बर्फबारी स्नोफॉल के बाद न्यूनतम तापमान भी शून्य के करीब पहुंच गया है. आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट ही आएगी. केदारनाथ-बद्रीनाथ के आसपास की ऊंची पहाड़ियां बर्फबारी से सफेद हो चुकी हैं. कड़ाके की ठंड के बावजूद यहां आने वाले पर्यटकों में भारी उत्साह है. हालांकि बर्फबारी के साथ पर्यटकों और स्थानीय लोगों की मुश्किलें भी शुरू हो गई है. वैसे हर साल नवंबर महीने के आखिरी हफ्ते तक पहली बर्फबारी होती है, लेकिन इस बार बर्फबारी जल्द ही शुरू हो चुकी है. इसी के साथ पहाड़ों पर बर्फ और मैदानी इलाकों में सर्दियों के स्वागत का पूरा प्लॉट तैयार हो गया है. दुनिया भर में गढ़वाल हिमालय के चार धामों के नाम से प्रसिद्ध इन धामों में से तीन के कपाट अब तक शीतकाल के लिए बंद हो चुके हैं, जबकि चौथे धाम बद्रीनाथ के कपाट अभी भी खुले हैं. 29 अक्टूबर को बर्फबारी से पहले उच्च हिमालई क्षेत्र में स्थित विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ और यमुनोत्री धामों के कपाटों को शीतकाल के लिए बंद किया गया. वहीं बद्रीनाथ धाम के कपाट 17 नवंबर को बंद होंगे. ऐसे में यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की कड़कड़ाती ठंड में हालत खराब है. बद्रीनाथ धाम में बारिश और बर्फबारी ने तीर्थ यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. मंदिर परिसर में पारा जमने से फिसलन बढ़ रही है. उधर, उत्तरांखड की ही तरह हिमाचल प्रदेश में भी हालात हैं. हिमाचल के रोहतांग पास में आधा फीट ताजा बर्फबारी रिकॉर्ड की गई. इसके अलावा किन्नौर के पहाड़ों पर बर्फबारी का क्रम शुरू हो गया है. लाहौल-स्पीति, कुल्लू और मनाली की पहाड़ियों में बर्फबारी हो रही है. बारालाचा दर्रे में बर्फबारी के कारण रविवार को मनाली-लेह मार्ग बंद हो गया.
उत्तरकाशीः नवंबर महीने का पहला हफ्ता खत्म होते ही उत्तराखंड में बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है. उत्तराखंड के केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में ताजा बर्फबारी हुई है. रविवार देर शाम से चमोली जिले में रुक-रुक कर बर्फबारी शुरू हो गई है. केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के आसपास रात के वक्त हल्का स्नोफॉल हुआ. बर्फबारी स्नोफॉल के बाद न्यूनतम तापमान भी शून्य के करीब पहुंच गया है. आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट ही आएगी. केदारनाथ-बद्रीनाथ के आसपास की ऊंची पहाड़ियां बर्फबारी से सफेद हो चुकी हैं. कड़ाके की ठंड के बावजूद यहां आने वाले पर्यटकों में भारी उत्साह है. हालांकि बर्फबारी के साथ पर्यटकों और स्थानीय लोगों की मुश्किलें भी शुरू हो गई है. वैसे हर साल नवंबर महीने के आखिरी हफ्ते तक पहली बर्फबारी होती है, लेकिन इस बार बर्फबारी जल्द ही शुरू हो चुकी है. इसी के साथ पहाड़ों पर बर्फ और मैदानी इलाकों में सर्दियों के स्वागत का पूरा प्लॉट तैयार हो गया है. दुनिया भर में गढ़वाल हिमालय के चार धामों के नाम से प्रसिद्ध इन धामों में से तीन के कपाट अब तक शीतकाल के लिए बंद हो चुके हैं, जबकि चौथे धाम बद्रीनाथ के कपाट अभी भी खुले हैं. उनतीस अक्टूबर को बर्फबारी से पहले उच्च हिमालई क्षेत्र में स्थित विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ और यमुनोत्री धामों के कपाटों को शीतकाल के लिए बंद किया गया. वहीं बद्रीनाथ धाम के कपाट सत्रह नवंबर को बंद होंगे. ऐसे में यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की कड़कड़ाती ठंड में हालत खराब है. बद्रीनाथ धाम में बारिश और बर्फबारी ने तीर्थ यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. मंदिर परिसर में पारा जमने से फिसलन बढ़ रही है. उधर, उत्तरांखड की ही तरह हिमाचल प्रदेश में भी हालात हैं. हिमाचल के रोहतांग पास में आधा फीट ताजा बर्फबारी रिकॉर्ड की गई. इसके अलावा किन्नौर के पहाड़ों पर बर्फबारी का क्रम शुरू हो गया है. लाहौल-स्पीति, कुल्लू और मनाली की पहाड़ियों में बर्फबारी हो रही है. बारालाचा दर्रे में बर्फबारी के कारण रविवार को मनाली-लेह मार्ग बंद हो गया.
नई दिल्ली - पेट्रोल पंप पर ग्राहक सोमवार से डेबिट और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट नहीं कर पाएंगे। बैंकों ने अचानक ही प्वाइंट ऑफ सैल (पीओएस) से पेमेंट पर लेवी (सरचार्ज) बढ़ा दी है। यानी अब पेट्रोल या डीजल का भुगतान सिर्फ कैश में करना होगा। कई बैंकों ने शनिवार रात को डीलर्स को नोटिस भेज लेवी बढ़ाने की जानकारी दी। इसके बाद रविवार को पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने बंगलूर में बैठक कर कार्ड पेमेंट से भुगतान न लेने का फैसला किया है। दूसरी ओर बैंकों के अचानक लिए गए इस फैसले से सरकार भी हैरान है। बैंकों के लेवी बढ़ाने के इस फैसले पहले से ही कैश की किल्लत से जूझ रहे उपभोक्ताओं की मुसीबत और बढ़ सकती है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें बैंकों के इस निर्णय की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने बैंकों को कहा है कि लेवी बढ़ाने के इस निर्णय को तुरंत वापस लें। उधर, ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (एआईपीडीए) के अध्यक्ष अजय बंसल ने बताया सोमवार से सभी पेट्रोल पंप स्वाइप मशीनों को हटा लेंगे। पेट्रोल पंप डीलर्स का कहना है, इस एक फीसदी बढ़ाई लेवी का असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा। अगर बैंक प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर एक फीसदी लेवी काटेंगे, तो पेट्रोल पंप डीलर्स कहां जाएंगे। ऐसी स्थिति में बने रहना मुश्किल हो जाएगा।
नई दिल्ली - पेट्रोल पंप पर ग्राहक सोमवार से डेबिट और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट नहीं कर पाएंगे। बैंकों ने अचानक ही प्वाइंट ऑफ सैल से पेमेंट पर लेवी बढ़ा दी है। यानी अब पेट्रोल या डीजल का भुगतान सिर्फ कैश में करना होगा। कई बैंकों ने शनिवार रात को डीलर्स को नोटिस भेज लेवी बढ़ाने की जानकारी दी। इसके बाद रविवार को पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने बंगलूर में बैठक कर कार्ड पेमेंट से भुगतान न लेने का फैसला किया है। दूसरी ओर बैंकों के अचानक लिए गए इस फैसले से सरकार भी हैरान है। बैंकों के लेवी बढ़ाने के इस फैसले पहले से ही कैश की किल्लत से जूझ रहे उपभोक्ताओं की मुसीबत और बढ़ सकती है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें बैंकों के इस निर्णय की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने बैंकों को कहा है कि लेवी बढ़ाने के इस निर्णय को तुरंत वापस लें। उधर, ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बंसल ने बताया सोमवार से सभी पेट्रोल पंप स्वाइप मशीनों को हटा लेंगे। पेट्रोल पंप डीलर्स का कहना है, इस एक फीसदी बढ़ाई लेवी का असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा। अगर बैंक प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर एक फीसदी लेवी काटेंगे, तो पेट्रोल पंप डीलर्स कहां जाएंगे। ऐसी स्थिति में बने रहना मुश्किल हो जाएगा।
कारोबारियों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों के बाजार से पैसा निकालने की वजह से निवेशक सतर्क बने हुए हैं। तीस शेयरों पर आधारित सेंसेक्स एक समय 560 अंक तक उछल गया था। लेकिन अंत में यह केवल 37. 70 अंक यानी 0. 07 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,107. 52 अंक पर बंद हुआ। इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 8. 90 अंक यानी 0. 05 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 17,007. 40 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स के शेयरों में टाटा स्टील सबसे ज्यादा 2. 25 प्रतिशत नुकसान में रहा। इसके अलावा टाइटन, भारतीय स्टेट बैंक, कोटक बैंक, टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक तथा एचडएफसी लि. नुकसान में रहे। दूसरी तरफ, लाभ में रहने वाले शेयरों में पावरग्रिड, इंडसइंड बैंक, डॉ. रेड्डीज, एचसीएल टेक और नेस्ले इंडिया शामिल हैं। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 नुकसान में जबकि 12 लाभ में रहे। एशिया के अन्य बाजारों में हांगकांग का हैंगसेंग, जापान का निक्की और दक्षिण कोरिया का कॉस्पी लाभ में रहे। यूरोप के प्रमुख बाजारों में शुरुआती कारोबार में मिला-जुला रुख रहा। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1. 78 प्रतिशत चढ़कर 85. 56 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया नौ पैसे चढ़कर 81. 58 (अस्थायी) पर बंद हुआ। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक पूंजी बाजार में शुद्ध बिकवाल रहे। उन्होंने सोमवार को 5,101. 30 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे।
कारोबारियों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों के बाजार से पैसा निकालने की वजह से निवेशक सतर्क बने हुए हैं। तीस शेयरों पर आधारित सेंसेक्स एक समय पाँच सौ साठ अंक तक उछल गया था। लेकिन अंत में यह केवल सैंतीस. सत्तर अंक यानी शून्य. सात प्रतिशत की गिरावट के साथ सत्तावन,एक सौ सात. बावन अंक पर बंद हुआ। इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी आठ. नब्बे अंक यानी शून्य. पाँच प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ सत्रह,सात. चालीस अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स के शेयरों में टाटा स्टील सबसे ज्यादा दो. पच्चीस प्रतिशत नुकसान में रहा। इसके अलावा टाइटन, भारतीय स्टेट बैंक, कोटक बैंक, टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक तथा एचडएफसी लि. नुकसान में रहे। दूसरी तरफ, लाभ में रहने वाले शेयरों में पावरग्रिड, इंडसइंड बैंक, डॉ. रेड्डीज, एचसीएल टेक और नेस्ले इंडिया शामिल हैं। सेंसेक्स के तीस शेयरों में से अट्ठारह नुकसान में जबकि बारह लाभ में रहे। एशिया के अन्य बाजारों में हांगकांग का हैंगसेंग, जापान का निक्की और दक्षिण कोरिया का कॉस्पी लाभ में रहे। यूरोप के प्रमुख बाजारों में शुरुआती कारोबार में मिला-जुला रुख रहा। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड एक. अठहत्तर प्रतिशत चढ़कर पचासी. छप्पन डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया नौ पैसे चढ़कर इक्यासी. अट्ठावन पर बंद हुआ। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक पूंजी बाजार में शुद्ध बिकवाल रहे। उन्होंने सोमवार को पाँच,एक सौ एक. तीस करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे।
जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में हो रहे बदलावों के मद्देनजर न सिर्फ जलवायु अनुकूल कृषि बल्कि परंपरागत सिंचाई की पद्धति में पूर्णरूपेण परिवर्तन एवं जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाना आवश्यक है। कृषि कार्य में आवश्यकता से अधिक जल प्रयोग के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों के उपयोग ने कृषि भूमि की उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। इसके कारण फसलों की उत्पादकता एवं पोषक तत्वों में भी कमी आई है। ये बातें डीएम अरविंद वर्मा ने कहीं। कारगिल विजय भवन में जल-जीवन हरियाली दिवस के अवसर पर "वैकल्पिक फसलों, टपकन सिंचाई, जैविक खेती एवं अन्य नई तकनीकों के उपयोग" विषय पर परिचर्चा में वे बोल रहे थे। डीएम ने कहा कि परिचर्चा का मुख्य उद्येश्य किसानों को परंपरागत कृषि पद्धति विशेष तौर पर सिंचाई की पद्धति में व्यापक परिवर्तन के लिए प्रेरित करना है। डीएओ को जल जीवन हरियाली अभियान अंतर्गत कृषि संबद्ध विभिन्न कार्यक्रमों के प्रति लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया। प्रगतिशील किसानों से भी जलवायु अनुकूल कृषि को अपनाने के साथ जैविक खेती एवं सिंचाई की नई पद्धतियों को प्रयोग में लाने का अनुरोध किया। डीएओ ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावाधीन होने वाले मौसमी बदलावों की स्थिति में कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा की। इन प्रभावों को कम करने के उद्येश्य से अपनाए जाने वाले कृषि पद्धतियों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। बताया कि जिले में जैविक खेती अंतर्गत 27 समूहों के माध्यम से 1663 एकड़ में कृषि की जा रही है। इसी प्रकार नमामि गंगे योजना अंतर्गत मटिहानी, साहेबपुरकमाल एवं शाम्हों के एक-एक क्लस्टर में 3750 एकड़ में जैविक खेती के लक्ष्य पर कार्य किए जा रहे हैं। आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत भी जिले में पांच क्लस्टर्स के माध्यम से 100 हेक्टेयर में जैविक खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत ड्रिप एवं स्प्रिंकल सिंचाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस सिंचाई पद्धति में परंपरागत सिंचाई पद्धति के मुकाबले 90 प्रतिशत तक जल का कम उपयोग होता है। इस प्रकार की सिचाई पद्धति के प्रयोग में प्रति एकड़ 60 हजार रुपये तक की लागत आती है तथा इस लागत पर सरकार द्वारा 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। सामुदायिक नलकूप योजना के तहत जिले में लगभग 38 एकड़ आच्छादित किया गया है। कार्यक्रम के दौरान प्रधान वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, खोदावंदपुर, बेगूसराय एवं सहायक निदेशक उद्यान के द्वारा भी कृषि संबंध विभिन्न कार्यक्रमों पर विस्तार से जानकारी दी गई। इससे पूर्व इस मौके सभागार, बामेती, पटना में इस विषय पर आयोजित परिचर्चा कार्यक्रम का लाइव वेबकास्ट भी किया गया। इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष रविंद्र चौधरी, उप विकास आयुक्त सुशांत कुमार, जिला पंचायती राज अधिकारी मंजू प्रसाद, जिला कृषि अधिकारी शैलेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी रजनीकांत प्रवीण, ओएसडी सच्चिदानंद सुमन, जिला जनसंपर्क अधिकारी भुवन कुमार, विधि शाखा के प्रभारी अधिकारी संजीत कुमार सहित कृषि विभाग के अधिकारी एवं प्रगतिशील किसान मौजूद थे।
जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में हो रहे बदलावों के मद्देनजर न सिर्फ जलवायु अनुकूल कृषि बल्कि परंपरागत सिंचाई की पद्धति में पूर्णरूपेण परिवर्तन एवं जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाना आवश्यक है। कृषि कार्य में आवश्यकता से अधिक जल प्रयोग के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों के उपयोग ने कृषि भूमि की उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। इसके कारण फसलों की उत्पादकता एवं पोषक तत्वों में भी कमी आई है। ये बातें डीएम अरविंद वर्मा ने कहीं। कारगिल विजय भवन में जल-जीवन हरियाली दिवस के अवसर पर "वैकल्पिक फसलों, टपकन सिंचाई, जैविक खेती एवं अन्य नई तकनीकों के उपयोग" विषय पर परिचर्चा में वे बोल रहे थे। डीएम ने कहा कि परिचर्चा का मुख्य उद्येश्य किसानों को परंपरागत कृषि पद्धति विशेष तौर पर सिंचाई की पद्धति में व्यापक परिवर्तन के लिए प्रेरित करना है। डीएओ को जल जीवन हरियाली अभियान अंतर्गत कृषि संबद्ध विभिन्न कार्यक्रमों के प्रति लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया। प्रगतिशील किसानों से भी जलवायु अनुकूल कृषि को अपनाने के साथ जैविक खेती एवं सिंचाई की नई पद्धतियों को प्रयोग में लाने का अनुरोध किया। डीएओ ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावाधीन होने वाले मौसमी बदलावों की स्थिति में कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा की। इन प्रभावों को कम करने के उद्येश्य से अपनाए जाने वाले कृषि पद्धतियों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। बताया कि जिले में जैविक खेती अंतर्गत सत्ताईस समूहों के माध्यम से एक हज़ार छः सौ तिरेसठ एकड़ में कृषि की जा रही है। इसी प्रकार नमामि गंगे योजना अंतर्गत मटिहानी, साहेबपुरकमाल एवं शाम्हों के एक-एक क्लस्टर में तीन हज़ार सात सौ पचास एकड़ में जैविक खेती के लक्ष्य पर कार्य किए जा रहे हैं। आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत भी जिले में पांच क्लस्टर्स के माध्यम से एक सौ हेक्टेयर में जैविक खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत ड्रिप एवं स्प्रिंकल सिंचाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस सिंचाई पद्धति में परंपरागत सिंचाई पद्धति के मुकाबले नब्बे प्रतिशत तक जल का कम उपयोग होता है। इस प्रकार की सिचाई पद्धति के प्रयोग में प्रति एकड़ साठ हजार रुपये तक की लागत आती है तथा इस लागत पर सरकार द्वारा नब्बे प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। सामुदायिक नलकूप योजना के तहत जिले में लगभग अड़तीस एकड़ आच्छादित किया गया है। कार्यक्रम के दौरान प्रधान वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, खोदावंदपुर, बेगूसराय एवं सहायक निदेशक उद्यान के द्वारा भी कृषि संबंध विभिन्न कार्यक्रमों पर विस्तार से जानकारी दी गई। इससे पूर्व इस मौके सभागार, बामेती, पटना में इस विषय पर आयोजित परिचर्चा कार्यक्रम का लाइव वेबकास्ट भी किया गया। इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष रविंद्र चौधरी, उप विकास आयुक्त सुशांत कुमार, जिला पंचायती राज अधिकारी मंजू प्रसाद, जिला कृषि अधिकारी शैलेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी रजनीकांत प्रवीण, ओएसडी सच्चिदानंद सुमन, जिला जनसंपर्क अधिकारी भुवन कुमार, विधि शाखा के प्रभारी अधिकारी संजीत कुमार सहित कृषि विभाग के अधिकारी एवं प्रगतिशील किसान मौजूद थे।
फैमिली प्लान करने से पहले महिला को हीमोग्लोबिन की जांच जरूर से करा लेनी चाहिए। गर्भवती होने से पहले ही महिला को विटामिन बी12 और फोलिक एसिड का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए। गर्भवती होने से पहले आपको अपना ब्लड ग्रुप चेक करवा लेना चाहिए। अगर आपको अपना ग्रुप पहले से ही पता है तो अपने पति के ब्लड ग्रुप के साथ उसकी कंपैटिबिलिटी भी चेक कर लेनी चाहिए। अगर आप मां बनने की प्लानिंग कर रही हैं तो आपको उससे पहले किसी डेंटिस्ट के पास जरूर चले जाना चाहिए। दांत से जुड़ी हर तरह की समस्या का निवारण हो जाना बेहतर होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि एक बार गर्भवती हो जाने के बाद आप एंटीबायोटिक्स और पेनकिलर नहीं ले पाएंगी। इससे आपको और आपके बच्चे को परेशानी हो सकती है। अगर महिला किसी प्रकार के तनाव और उदासी से जूझ रही है तो उसे काउंसलर के पास जाना चाहिए। गर्भावस्था में तनाव और घबराहट सही नहीं है। ऐसे में गर्भवती होने से पहले यह समस्या दूर हो जानी चाहिए।
फैमिली प्लान करने से पहले महिला को हीमोग्लोबिन की जांच जरूर से करा लेनी चाहिए। गर्भवती होने से पहले ही महिला को विटामिन बीबारह और फोलिक एसिड का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए। गर्भवती होने से पहले आपको अपना ब्लड ग्रुप चेक करवा लेना चाहिए। अगर आपको अपना ग्रुप पहले से ही पता है तो अपने पति के ब्लड ग्रुप के साथ उसकी कंपैटिबिलिटी भी चेक कर लेनी चाहिए। अगर आप मां बनने की प्लानिंग कर रही हैं तो आपको उससे पहले किसी डेंटिस्ट के पास जरूर चले जाना चाहिए। दांत से जुड़ी हर तरह की समस्या का निवारण हो जाना बेहतर होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि एक बार गर्भवती हो जाने के बाद आप एंटीबायोटिक्स और पेनकिलर नहीं ले पाएंगी। इससे आपको और आपके बच्चे को परेशानी हो सकती है। अगर महिला किसी प्रकार के तनाव और उदासी से जूझ रही है तो उसे काउंसलर के पास जाना चाहिए। गर्भावस्था में तनाव और घबराहट सही नहीं है। ऐसे में गर्भवती होने से पहले यह समस्या दूर हो जानी चाहिए।
नई दिल्लीः भारत में कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलनों में शामिल रहीं प्रमुख महिलाओं को टाइम (TIME) मैगजीन ने अपना कवर पेज डेडिकेट किया है. टाइम मैगजीन ने अपना इंटरनेशल कवर भारत की उन महिलाओं को समर्पित किया है, जो दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं और महीनों से डटकर तीनों कृषि कानूनों की वापसी की मांग कर रही हैं. टाइम मैगजीन के नए इंटरनेशनल कवर पर एक टैगलाइन भी है, जिसमें लिखा है- ' मुझे डराया-धमकाया नहीं जा सकता और मुझे खरीदा नहीं जा सकता. भारत के किसान आंदोलनों का नेतृत्व करने वालीं महिलाएं.' मैगजीन के कवर पेज पर किसान आंदोलन में शामिल कुछ महिला किसानों की तस्वीर है, जिनके साथ कुछ छोटे-छोटे बच्चों को भी दिखाया गया है. कवर पेज पर दिख रहा है कि कुछ महिलाएं सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन कर रही हैं. इस दौरान एक महिला की गोद में बच्चा भी दिख रहा है और एक- दो अन्य बच्चे भी हैं. तस्वीर में बुजुर्ग महिलाएं भी हैं. टाइम मैगजीन ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा है, "टाइम का नया इंटरनेशनल कवर." टाइम मैगजीन ने कवर में जिन महिलाओं को जगह दी है, उसमें 41 वर्षीय अमनदीप कौर, गुरमर कौर, सुरजीत कौर, जसवंत कौर, सरजीत कौर, दिलबीर कौर,बिन्दु अम्मां, उर्मिला देवी, साहुमति पाधा, हीराथ झाड़े, सुदेश गोयत शामिल हैं. इन महिलाओं में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की ज्यादा महिलाएं हैं. टाइम मैगजीन ने अपने आर्टिकल में लिखा है कि कैसे महिला किसानों ने आंदोलन को जारी रखने का संकल्प किया है, जबकि सरकार उन्हें घर जाने के लिए कह चुकी है. इसमें लिखा गया है कि कैसे ये किसान महिलाएं सरकार के कहने के बाद भी पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हजारों किसानों का नेतृत्व करने के लिए मोर्चा संभाले हुए हैं. बता दें कि भारत में चल रहे किसानों के प्रदर्शन को विदेशों में सुर्खियां तब मिलीं, जब पॉप स्टार रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग जैसी अंतरराष्ट्रीय आइकन और मशहूर हस्तियों ट्वीट किया. हालांकि, बाद में यह साफ हो गया कि ग्रेटा थनबर्ग भारत के खिलाफ एक प्रोपेगेंडा की साजिश का हिस्सा थीं, जिसकी जांच अभी चल रही है.
नई दिल्लीः भारत में कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलनों में शामिल रहीं प्रमुख महिलाओं को टाइम मैगजीन ने अपना कवर पेज डेडिकेट किया है. टाइम मैगजीन ने अपना इंटरनेशल कवर भारत की उन महिलाओं को समर्पित किया है, जो दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं और महीनों से डटकर तीनों कृषि कानूनों की वापसी की मांग कर रही हैं. टाइम मैगजीन के नए इंटरनेशनल कवर पर एक टैगलाइन भी है, जिसमें लिखा है- ' मुझे डराया-धमकाया नहीं जा सकता और मुझे खरीदा नहीं जा सकता. भारत के किसान आंदोलनों का नेतृत्व करने वालीं महिलाएं.' मैगजीन के कवर पेज पर किसान आंदोलन में शामिल कुछ महिला किसानों की तस्वीर है, जिनके साथ कुछ छोटे-छोटे बच्चों को भी दिखाया गया है. कवर पेज पर दिख रहा है कि कुछ महिलाएं सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन कर रही हैं. इस दौरान एक महिला की गोद में बच्चा भी दिख रहा है और एक- दो अन्य बच्चे भी हैं. तस्वीर में बुजुर्ग महिलाएं भी हैं. टाइम मैगजीन ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा है, "टाइम का नया इंटरनेशनल कवर." टाइम मैगजीन ने कवर में जिन महिलाओं को जगह दी है, उसमें इकतालीस वर्षीय अमनदीप कौर, गुरमर कौर, सुरजीत कौर, जसवंत कौर, सरजीत कौर, दिलबीर कौर,बिन्दु अम्मां, उर्मिला देवी, साहुमति पाधा, हीराथ झाड़े, सुदेश गोयत शामिल हैं. इन महिलाओं में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की ज्यादा महिलाएं हैं. टाइम मैगजीन ने अपने आर्टिकल में लिखा है कि कैसे महिला किसानों ने आंदोलन को जारी रखने का संकल्प किया है, जबकि सरकार उन्हें घर जाने के लिए कह चुकी है. इसमें लिखा गया है कि कैसे ये किसान महिलाएं सरकार के कहने के बाद भी पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हजारों किसानों का नेतृत्व करने के लिए मोर्चा संभाले हुए हैं. बता दें कि भारत में चल रहे किसानों के प्रदर्शन को विदेशों में सुर्खियां तब मिलीं, जब पॉप स्टार रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग जैसी अंतरराष्ट्रीय आइकन और मशहूर हस्तियों ट्वीट किया. हालांकि, बाद में यह साफ हो गया कि ग्रेटा थनबर्ग भारत के खिलाफ एक प्रोपेगेंडा की साजिश का हिस्सा थीं, जिसकी जांच अभी चल रही है.
भारत सरकार पर्यावरण वन एवं जलवायु मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा 1 जुलाई कल से सिंगल यूज प्लास्टिक परिवहन भंडारण वितरण बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाए जा रहा है। जिसको लेकर आज रायसेन नगर पालिका में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एक बैठक आयोजित की गई। जिसमें शहर के व्यापारी और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सेक्टर न्यू उद्योग क्षेत्र मंडीदीप से आए हुए अधिकारियों द्वारा सिंपल यूस प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के विषय में व्यापारियों और गणमान्य नागरिकों को समझाया वही कल से पूरे मध्यप्रदेश में हो रहे प्रतिबंध के विषय में भी जानकारी दी वही उसके बाद बाजार में जाकर दुकानों पर व्यापारियों को समझाइश दी गई कि कल के बाद से सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग करना बंद कर दें। वही जो ग्राहक आपकी दुकान पर आते हैं उनसे घर से कपड़े का थैला लाने के लिए बोले। वही टीम के सदस्यों द्वारा लोगों से भी सिंगल जूस प्लास्टिक को बंद कर कर बेहतर पर्यावरण के लिए कपड़े या जूट के थैले स्टील के चम्मच या बर्तन के उपयोग करने के लिए आग्रह किया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
भारत सरकार पर्यावरण वन एवं जलवायु मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा एक जुलाई कल से सिंगल यूज प्लास्टिक परिवहन भंडारण वितरण बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाए जा रहा है। जिसको लेकर आज रायसेन नगर पालिका में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एक बैठक आयोजित की गई। जिसमें शहर के व्यापारी और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सेक्टर न्यू उद्योग क्षेत्र मंडीदीप से आए हुए अधिकारियों द्वारा सिंपल यूस प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के विषय में व्यापारियों और गणमान्य नागरिकों को समझाया वही कल से पूरे मध्यप्रदेश में हो रहे प्रतिबंध के विषय में भी जानकारी दी वही उसके बाद बाजार में जाकर दुकानों पर व्यापारियों को समझाइश दी गई कि कल के बाद से सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग करना बंद कर दें। वही जो ग्राहक आपकी दुकान पर आते हैं उनसे घर से कपड़े का थैला लाने के लिए बोले। वही टीम के सदस्यों द्वारा लोगों से भी सिंगल जूस प्लास्टिक को बंद कर कर बेहतर पर्यावरण के लिए कपड़े या जूट के थैले स्टील के चम्मच या बर्तन के उपयोग करने के लिए आग्रह किया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नयी दिल्ली , लोकसभा के बजट सत्र का रविवार को सत्रावसान हो गया। कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई थी। पहले जारी कार्यक्रम के अनुसार सदन की बैठक 03 अप्रैल तक होनी थी। को सत्रावसान कर दिया है। इस सत्र में कुल 23 बैठकें हुईं।
नयी दिल्ली , लोकसभा के बजट सत्र का रविवार को सत्रावसान हो गया। कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई थी। पहले जारी कार्यक्रम के अनुसार सदन की बैठक तीन अप्रैल तक होनी थी। को सत्रावसान कर दिया है। इस सत्र में कुल तेईस बैठकें हुईं।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। जापान, एशिया महाद्वीप में स्थित देश है। जापान चार बड़े और अनेक छोटे द्वीपों का एक समूह है। ये द्वीप एशिया के पूर्व समुद्रतट, यानि प्रशांत महासागर में स्थित हैं। इसके निकटतम पड़ोसी चीन, कोरिया तथा रूस हैं। जापान में वहाँ का मूल निवासियों की जनसंख्या ९८.५% है। बाकी 0.5% कोरियाई, 0.4 % चाइनीज़ तथा 0.6% अन्य लोग है। जापानी अपने देश को निप्पॉन कहते हैं, जिसका मतलब सूर्योदय है। जापान की राजधानी टोक्यो है और उसके अन्य बड़े महानगर योकोहामा, ओसाका और क्योटो हैं। बौद्ध धर्म देश का प्रमुख धर्म है और जापान की जनसंख्या में 96% बौद्ध अनुयायी है। . दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारा (The Delhi-Mumbai Industrial Corridor) भारत सरकार द्वारा प्रायोजित औद्योगिक-विकास की विशाल परियोजना है। एक विशाल औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की यह एक महत्वाकांक्षी योजना है जो छः राज्यों को समेटे हुए हैं। इस परियोजना के पूरा होने पर अधोसंरचना एवं उद्योग का अत्यधिक प्रसार हो जायेगा तथा रेल, सड़क, बंदरगाह एवं हवाई यातायात की व्यापक वृद्धि हो जायेगी। इसके तहत भारत एवं जापान ने परियोजना विकास निधि स्थापित करने का निर्णय लिया है जो आरम्भ में १००० करोड़ रूपये की होगी। दोनो सरकारें समान मात्रा में योगदान करेंगी। . जापान और दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारा परियोजना आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। जापान 53 संबंध है और दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारा परियोजना 21 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (53 + 21)। यह लेख जापान और दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारा परियोजना के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। जापान, एशिया महाद्वीप में स्थित देश है। जापान चार बड़े और अनेक छोटे द्वीपों का एक समूह है। ये द्वीप एशिया के पूर्व समुद्रतट, यानि प्रशांत महासागर में स्थित हैं। इसके निकटतम पड़ोसी चीन, कोरिया तथा रूस हैं। जापान में वहाँ का मूल निवासियों की जनसंख्या अट्ठानवे.पाँच% है। बाकी शून्य.पाँच% कोरियाई, शून्य.चार % चाइनीज़ तथा शून्य.छः% अन्य लोग है। जापानी अपने देश को निप्पॉन कहते हैं, जिसका मतलब सूर्योदय है। जापान की राजधानी टोक्यो है और उसके अन्य बड़े महानगर योकोहामा, ओसाका और क्योटो हैं। बौद्ध धर्म देश का प्रमुख धर्म है और जापान की जनसंख्या में छियानवे% बौद्ध अनुयायी है। . दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारा भारत सरकार द्वारा प्रायोजित औद्योगिक-विकास की विशाल परियोजना है। एक विशाल औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की यह एक महत्वाकांक्षी योजना है जो छः राज्यों को समेटे हुए हैं। इस परियोजना के पूरा होने पर अधोसंरचना एवं उद्योग का अत्यधिक प्रसार हो जायेगा तथा रेल, सड़क, बंदरगाह एवं हवाई यातायात की व्यापक वृद्धि हो जायेगी। इसके तहत भारत एवं जापान ने परियोजना विकास निधि स्थापित करने का निर्णय लिया है जो आरम्भ में एक हज़ार करोड़ रूपये की होगी। दोनो सरकारें समान मात्रा में योगदान करेंगी। . जापान और दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारा परियोजना आम में शून्य बातें हैं । जापान तिरेपन संबंध है और दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारा परियोजना इक्कीस है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख जापान और दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारा परियोजना के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
Maharashtra : महाराष्ट्र के पालघर स्थित केमिकल प्लांट में लगी आग में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। पंलाट में लगी आग को बुझाने का काम जारी है। दमकल विभाग का कहना है कि केमकल फैक्टरी में गुरुवार सुबह आग लगी। दमकल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह आग गुरुवार सुबह करीब साढ़े आठ नौ बजे के बीच तारापुर के महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन क्षेत्र में चेमबांड केमिकल फैक्टरी में लगी। अधिकारियों का कहना है कि इस फैक्सटरी में बहुत ज्यादा केमिकल था। समझा जाता है कि किसी केमिकल में ब्लास्ट हुआ। हालांकि, आग कैसे लगी इसकी असली वजह का अभी पता नहीं चल सका है। लोगों का कहना है कि फैक्टरी से निकलने वाले धुएं को दूर से देखा जा सकता है।
Maharashtra : महाराष्ट्र के पालघर स्थित केमिकल प्लांट में लगी आग में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। पंलाट में लगी आग को बुझाने का काम जारी है। दमकल विभाग का कहना है कि केमकल फैक्टरी में गुरुवार सुबह आग लगी। दमकल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह आग गुरुवार सुबह करीब साढ़े आठ नौ बजे के बीच तारापुर के महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन क्षेत्र में चेमबांड केमिकल फैक्टरी में लगी। अधिकारियों का कहना है कि इस फैक्सटरी में बहुत ज्यादा केमिकल था। समझा जाता है कि किसी केमिकल में ब्लास्ट हुआ। हालांकि, आग कैसे लगी इसकी असली वजह का अभी पता नहीं चल सका है। लोगों का कहना है कि फैक्टरी से निकलने वाले धुएं को दूर से देखा जा सकता है।
फर्रुखाबाद। केंद्रीय परियोजना के लिए फर्रुखाबाद में वस्त्र पार्क बनाने को मंजूरी मिल गई। इस परियोजना का सारा कार्य़ स्पेशल परपज व्हीकल की टीम करेगी। इस परियोजना के काम के लिए केंद्र से 25 करोड़ रुपए की सहायता मिलेगी। फर्रुखाबाद के खिनसेपुर गांव में इस परियोजना की लॉन्चिंग की जाएगी। इसके लिए 188 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। केंद्र से इस परियोजना के लिए हरी झंडी मिलने के बाद से ही उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने अपनी तरफ से तैयारी जोर-शोर से शुरू कर दी है। इसके लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। खिनसेपुर में जो जमीन चिह्नित की गई है उसमें ज्यादातर सरकारी है इसलिए इसकी लॉन्चिंग में कोई दिक्कत नहीं आएगी। अब इसका लेआउट प्लान तैयार किया जाएगा। जिससे यह पता चल सकेगा कि भूखंडों की संख्या कितनी पहुंच सकती है। फिलहाल यह आकलन है कि वस्त्र बनाने के कम से कम 300 कारखाने स्थापित होंगे। इसके लिए उद्यमियों को ऑफर दिए जाएंगे। कानपुर के रूमा औद्योगिक क्षेत्र को वस्त्र सेक्टर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। केंद्र की क्लस्टर डेवलपमेंट स्कीम में उन औद्योगिक क्षेत्रों को रखा गया है जिनमें एक ही प्रकार की कम से कम 30 फैक्ट्रियां हों। रूमा में टेक्सटाइल की इससे अधिक फैक्ट्रियां हैं। यूपीसीडा के सीईओ ने संयुक्त सर्वे करने के लिए टीम गठित कर दी है। टीम यह बताएगी कि इस क्लस्टर में क्या-क्या विकास कार्य किए जा सकते हैं। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करके केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इस पार्क से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। हमने अपनी तैयारी शुरू कर दी है।
फर्रुखाबाद। केंद्रीय परियोजना के लिए फर्रुखाबाद में वस्त्र पार्क बनाने को मंजूरी मिल गई। इस परियोजना का सारा कार्य़ स्पेशल परपज व्हीकल की टीम करेगी। इस परियोजना के काम के लिए केंद्र से पच्चीस करोड़ रुपए की सहायता मिलेगी। फर्रुखाबाद के खिनसेपुर गांव में इस परियोजना की लॉन्चिंग की जाएगी। इसके लिए एक सौ अठासी एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। केंद्र से इस परियोजना के लिए हरी झंडी मिलने के बाद से ही उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने अपनी तरफ से तैयारी जोर-शोर से शुरू कर दी है। इसके लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। खिनसेपुर में जो जमीन चिह्नित की गई है उसमें ज्यादातर सरकारी है इसलिए इसकी लॉन्चिंग में कोई दिक्कत नहीं आएगी। अब इसका लेआउट प्लान तैयार किया जाएगा। जिससे यह पता चल सकेगा कि भूखंडों की संख्या कितनी पहुंच सकती है। फिलहाल यह आकलन है कि वस्त्र बनाने के कम से कम तीन सौ कारखाने स्थापित होंगे। इसके लिए उद्यमियों को ऑफर दिए जाएंगे। कानपुर के रूमा औद्योगिक क्षेत्र को वस्त्र सेक्टर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। केंद्र की क्लस्टर डेवलपमेंट स्कीम में उन औद्योगिक क्षेत्रों को रखा गया है जिनमें एक ही प्रकार की कम से कम तीस फैक्ट्रियां हों। रूमा में टेक्सटाइल की इससे अधिक फैक्ट्रियां हैं। यूपीसीडा के सीईओ ने संयुक्त सर्वे करने के लिए टीम गठित कर दी है। टीम यह बताएगी कि इस क्लस्टर में क्या-क्या विकास कार्य किए जा सकते हैं। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करके केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इस पार्क से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। हमने अपनी तैयारी शुरू कर दी है।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
टिप्पणी २ - यह आनुपूर्वी न तो स्थानीय प्रथा और रूढ़ि के आधार पर भारतीय राज्यों के भीतर शासकों आदि को मिली हुई पूर्वता पर कोई प्रभाव डालेगा और न १५ अगस्त, १९४७, के ठीक पहले लागू शासकों को पारस्परिक स्थानीय पूवता पर प्रभाव डालेगा। टिप्पणी ३-- आनुपूर्वी से उल्लिखित पदाधिकारियों की पंक्ति या कम प्रविष्टियों की संख्या के अनुसार होगा जो एक ही संस्था में सम्मिलित किए गए हैं। उनकी परस्पर पूर्वता उक्त संख्या में प्रविष्टि की तारीख के अनुसार होगी । टिप्पणी ४ - जब संसद के सदस्य प्रमुख राजकीय उत्सवों पर एक साथ आमंत्रित हों तो उनके लिए रक्षित स्थान राजदूत, भारत के मुख्य व्यायाधिपति संसद के अध्यक्ष और राज्यपालों आदि के बाद रक्खा जायगा। टिप्पणी ५- - गुप्त वार्ता विभाग ( इंटेलिजेन्स व्यूरो) का निदेशक पुलिस महानिरीक्षक के पहले रहेगा, चाहे अनुच्छेद ४० में उसकी प्रविष्टि की तारीख कोई भी हो । हिप्पणी ६-- मेजर जनरल, चाहे अनुच्छेद ४० में उनकी प्रविष्टि की तारीख कोई हो, भारतीय नौ सेना के प्रभारी कमोडोरों और भारतीय वायू सेना के कमोडोरों के ऊपर रहेंगे । टिप्पणी ७ -- राज्यों के मुख्य सचिव, राजस्व बोर्ड के सदस्यों से पहले रहेंगे चाहे अनुच्छेद ३९ में प्रविष्टि की तारीख कोई भी हो । टिप्पणी ८ -- आनुपूर्वी के प्रयोजनों के लिए नई दिल्ली, लाल किला (रेड फोर्ट) दिल्ली राज्यों से बाहर समझ जाने चाहिए । टिप्पणी ९ -- राज्य विधान परिषदों के सभापति, विधान सभाओं के अध्यक्षों से ऊपर रहेंगे, यदि वे एक ही तारीख को निर्वाचित हुए हों । टिप्पणी १० -- अधिक बन्दूकों की सलामी वाले शासक, कम बन्दूकों को सलामी वाले शासकों से पहले रहेंगे । एक ही सलामी वाले शासकों की परस्पर पूर्वता उत्तराधिकार की तारीख के अनुसार होगी। टिप्पणी ११ - जब तक कोई खास अनुदेश नहीं निकलता, मंत्रिमंडल सचिव (केबिनेट सेकेट्री) का स्थान भारत सरकार के सचिवों ( सेक्रेट्रीज ) से पहले होगा, चाहे उक्त पद पर उसकी नियुक्ति की तारीख कोई भी हो । टिप्पखी १२ -- राज्य परिषदों के सदस्य, जो देहली में हो, राजकीय उत्सवों में आमंत्रित हों तो उनका स्थान संसद सदस्यों के बाद में होगा ।
टिप्पणी दो - यह आनुपूर्वी न तो स्थानीय प्रथा और रूढ़ि के आधार पर भारतीय राज्यों के भीतर शासकों आदि को मिली हुई पूर्वता पर कोई प्रभाव डालेगा और न पंद्रह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस, के ठीक पहले लागू शासकों को पारस्परिक स्थानीय पूवता पर प्रभाव डालेगा। टिप्पणी तीन-- आनुपूर्वी से उल्लिखित पदाधिकारियों की पंक्ति या कम प्रविष्टियों की संख्या के अनुसार होगा जो एक ही संस्था में सम्मिलित किए गए हैं। उनकी परस्पर पूर्वता उक्त संख्या में प्रविष्टि की तारीख के अनुसार होगी । टिप्पणी चार - जब संसद के सदस्य प्रमुख राजकीय उत्सवों पर एक साथ आमंत्रित हों तो उनके लिए रक्षित स्थान राजदूत, भारत के मुख्य व्यायाधिपति संसद के अध्यक्ष और राज्यपालों आदि के बाद रक्खा जायगा। टिप्पणी पाँच- - गुप्त वार्ता विभाग का निदेशक पुलिस महानिरीक्षक के पहले रहेगा, चाहे अनुच्छेद चालीस में उसकी प्रविष्टि की तारीख कोई भी हो । हिप्पणी छः-- मेजर जनरल, चाहे अनुच्छेद चालीस में उनकी प्रविष्टि की तारीख कोई हो, भारतीय नौ सेना के प्रभारी कमोडोरों और भारतीय वायू सेना के कमोडोरों के ऊपर रहेंगे । टिप्पणी सात -- राज्यों के मुख्य सचिव, राजस्व बोर्ड के सदस्यों से पहले रहेंगे चाहे अनुच्छेद उनतालीस में प्रविष्टि की तारीख कोई भी हो । टिप्पणी आठ -- आनुपूर्वी के प्रयोजनों के लिए नई दिल्ली, लाल किला दिल्ली राज्यों से बाहर समझ जाने चाहिए । टिप्पणी नौ -- राज्य विधान परिषदों के सभापति, विधान सभाओं के अध्यक्षों से ऊपर रहेंगे, यदि वे एक ही तारीख को निर्वाचित हुए हों । टिप्पणी दस -- अधिक बन्दूकों की सलामी वाले शासक, कम बन्दूकों को सलामी वाले शासकों से पहले रहेंगे । एक ही सलामी वाले शासकों की परस्पर पूर्वता उत्तराधिकार की तारीख के अनुसार होगी। टिप्पणी ग्यारह - जब तक कोई खास अनुदेश नहीं निकलता, मंत्रिमंडल सचिव का स्थान भारत सरकार के सचिवों से पहले होगा, चाहे उक्त पद पर उसकी नियुक्ति की तारीख कोई भी हो । टिप्पखी बारह -- राज्य परिषदों के सदस्य, जो देहली में हो, राजकीय उत्सवों में आमंत्रित हों तो उनका स्थान संसद सदस्यों के बाद में होगा ।
चन्द्रपुर (भूतपूर्व चंदा) शहर, पूर्वी महाराष्ट्र राज्य, पश्चिम भारत में वर्धा नदी की एक सहायक नदी के तट पर स्थित है। चंद्रपुर का अर्थ है, 'चंद्रमा का घर'। चंद्रपुर में एक इंजीनियरिंग कॉलेज भी है। 12वीं से 18वीं शताब्दी तक चंद्रपुर गोंड वंश की राजधानी था। बाद में नागपुर के मराठा भोंसले ने इसे जीत लिया। 1854 से 1947 में भारत के स्वतंत्र होने तक यह ब्रिटिश मध्य प्रांत का हिस्सा था। यह ब्रिटिश शासन के दौरान चांद नाम से जाना जाता था। इस स्थान का प्राचीन नाम लोकपुरा भी था, जो आगे चलकर इन्दूर और उसके बाद चन्द्रपुर के नाम से जाना गया। इस ज़िले के प्राचीन स्थल वैरंगढ, कोसल, भद्रावती और मरकड हैं। चन्द्रपुर पर काफ़ी लंबे समय तक हिन्दू और बौद्ध राजाओं का शासन रहा है। बाद में गोंड राजाओं ने इस पर अधिकार कर लियाजिन्होंने 1751 तक यहाँ शासन किया। बाद में इसे ब्रिटिश शासन में मिला लिया गया। चन्द्रपुर का नज़दीकी हवाई अड्डा नागपुर में डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर हवाई अड्डा है जो देश के अनेक शहरों से वायु मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। मुंबई वर्धा चन्द्रपुर रेल लाइन से महाराष्ट्र का यह ज़िला जुड़ा है। महाराष्ट्र और पड़ोसी राज्यों के अनेक शहरों से यहाँ के लिए नियमित रेलगाड़ियाँ हैं। मुंबई नासिक चन्द्रपुर सड़क मार्ग चन्द्रपुर को महाराष्ट्र और देश के अन्य शहरों से जोड़ता है। राज्य परिवहन के अलावा अनेक निजी बसें चन्द्रपुर के लिए चलती हैं। - प्रमुख रेल तथा सड़क मार्ग पर स्थित यह शहर आसपास के क्षेत्रों में उगने वाले कपास, अनाज और अन्य फ़सलों का वाणिज्यिक केंद्र है। - स्थानीय खनिजों पर आधारित उद्योगों में कोयले की कई खानें तथा शीशे का सामान बनाने के उद्योग शामिल हैं। - यह शहर रेशम के कपड़े और अलंकृत चप्पलें जैसे विलास-वस्तुओं के उत्पादन के लिए भी विख्यात है। 2001 की जनगणना के अनुसार चन्द्रपुर नगर पालिका क्षेत्र की जनसंख्या 2,97,612 है। पर्यटकों के देखने लायक़ यहाँ अनेक ऐतिहासिक मन्दिर और स्मारक हैं। साथ ही यहाँ के वन्यजीव अभ्यारण्य भी यहाँ आने वाले सैलानियों के आकर्षण का केंद्र होते हैं। चंद्रपुर के उत्तर में ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान स्थित है। इसके 45 किमी दक्षिण में मानिकगढ़ वन पर्यावरण सैरगाह है। यहाँ कई प्रकार के बांस व दूसरे वृक्ष, बाघ, तेंदुआ, जंगली कुत्ते, भालू गौर, सांबर, मुंतजाक हिरन जैसे जानवर व अनेक प्रजातियों के जंगली पक्षी पाए जाते हैं।
चन्द्रपुर शहर, पूर्वी महाराष्ट्र राज्य, पश्चिम भारत में वर्धा नदी की एक सहायक नदी के तट पर स्थित है। चंद्रपुर का अर्थ है, 'चंद्रमा का घर'। चंद्रपुर में एक इंजीनियरिंग कॉलेज भी है। बारहवीं से अट्ठारहवीं शताब्दी तक चंद्रपुर गोंड वंश की राजधानी था। बाद में नागपुर के मराठा भोंसले ने इसे जीत लिया। एक हज़ार आठ सौ चौवन से एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में भारत के स्वतंत्र होने तक यह ब्रिटिश मध्य प्रांत का हिस्सा था। यह ब्रिटिश शासन के दौरान चांद नाम से जाना जाता था। इस स्थान का प्राचीन नाम लोकपुरा भी था, जो आगे चलकर इन्दूर और उसके बाद चन्द्रपुर के नाम से जाना गया। इस ज़िले के प्राचीन स्थल वैरंगढ, कोसल, भद्रावती और मरकड हैं। चन्द्रपुर पर काफ़ी लंबे समय तक हिन्दू और बौद्ध राजाओं का शासन रहा है। बाद में गोंड राजाओं ने इस पर अधिकार कर लियाजिन्होंने एक हज़ार सात सौ इक्यावन तक यहाँ शासन किया। बाद में इसे ब्रिटिश शासन में मिला लिया गया। चन्द्रपुर का नज़दीकी हवाई अड्डा नागपुर में डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर हवाई अड्डा है जो देश के अनेक शहरों से वायु मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। मुंबई वर्धा चन्द्रपुर रेल लाइन से महाराष्ट्र का यह ज़िला जुड़ा है। महाराष्ट्र और पड़ोसी राज्यों के अनेक शहरों से यहाँ के लिए नियमित रेलगाड़ियाँ हैं। मुंबई नासिक चन्द्रपुर सड़क मार्ग चन्द्रपुर को महाराष्ट्र और देश के अन्य शहरों से जोड़ता है। राज्य परिवहन के अलावा अनेक निजी बसें चन्द्रपुर के लिए चलती हैं। - प्रमुख रेल तथा सड़क मार्ग पर स्थित यह शहर आसपास के क्षेत्रों में उगने वाले कपास, अनाज और अन्य फ़सलों का वाणिज्यिक केंद्र है। - स्थानीय खनिजों पर आधारित उद्योगों में कोयले की कई खानें तथा शीशे का सामान बनाने के उद्योग शामिल हैं। - यह शहर रेशम के कपड़े और अलंकृत चप्पलें जैसे विलास-वस्तुओं के उत्पादन के लिए भी विख्यात है। दो हज़ार एक की जनगणना के अनुसार चन्द्रपुर नगर पालिका क्षेत्र की जनसंख्या दो,सत्तानवे,छः सौ बारह है। पर्यटकों के देखने लायक़ यहाँ अनेक ऐतिहासिक मन्दिर और स्मारक हैं। साथ ही यहाँ के वन्यजीव अभ्यारण्य भी यहाँ आने वाले सैलानियों के आकर्षण का केंद्र होते हैं। चंद्रपुर के उत्तर में ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान स्थित है। इसके पैंतालीस किमी दक्षिण में मानिकगढ़ वन पर्यावरण सैरगाह है। यहाँ कई प्रकार के बांस व दूसरे वृक्ष, बाघ, तेंदुआ, जंगली कुत्ते, भालू गौर, सांबर, मुंतजाक हिरन जैसे जानवर व अनेक प्रजातियों के जंगली पक्षी पाए जाते हैं।
How To Make Amla Candy: आयुर्वेद में एक आंवला को एक औषधीय जड़ी-बूटी के समान माना गया है। इसके सेवन से आपके डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का स्तर कंट्रोल में बना रहता है। साथ ही इसके सेवन से आपकी इम्यूनिटी मजबूत होती है जिससे आप कई मौसमी बीमारियों से बचे रहते हैं। ऐसे में आंवले को लोग अपनी डाइट में आंवला की चटनी, मुरब्बा, जूस या अचार आदि के तौर पर शामिल करते हैं। लेकिन आज हम आपके लिए आंवला कैंडी बनाने की रेसिपी लेकर आए हैं। - जीरा पाउडर 1 चम्मच (भुना हुआ) - इमली का पल्प 1/2 कप (गूदा) आंवला कैंडी कैसे बनाएं? (How To Make Amla Candy) - आंवला कैंडी बनाने के लिए आप सबसे पहले आप आंवला को अच्छी तरह से धो लें। - फिर आप आंवला को धूप में अच्छी तरह से सुखा लें। - इसके बाद आप सूखे आंवले को मिक्सी में पीसकर पाउडर बना लें। - फिर आप एक पैन गैस पर रखकर गर्म कर लें। - इसके बाद आप इसमें अजवाइन, जीरा, हींग और आंवला पाउडर डालकर भून लें। - फिर आप एक दूसरे पैन में 1 कप पानी, इमली का पल्प और गुड़ के टुकड़े डालें। - इसके बाद आप इसको अच्छे से पकाकर एक तार की चाशनी तैयार कर लें। - फिर जब पानी कम रह जाए तो आप इसमें आंवला पाउडर डाल दें। - इसके बाद आप इसको कम से कम 5 मिनट बाद पकाएं और गैस बंद कर दें। - फिर आप इस मिक्चर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। - इसके बाद आप इसकी छोटी-छोटी गोलिया बना लें। - फिर आप इन गोलियों को पिसी चीनी से अच्छी तरह से लपेट लें। - अब आपकी गटागट आंवला कैंडी बनकर तैयार हो चुकी हैं।
How To Make Amla Candy: आयुर्वेद में एक आंवला को एक औषधीय जड़ी-बूटी के समान माना गया है। इसके सेवन से आपके डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का स्तर कंट्रोल में बना रहता है। साथ ही इसके सेवन से आपकी इम्यूनिटी मजबूत होती है जिससे आप कई मौसमी बीमारियों से बचे रहते हैं। ऐसे में आंवले को लोग अपनी डाइट में आंवला की चटनी, मुरब्बा, जूस या अचार आदि के तौर पर शामिल करते हैं। लेकिन आज हम आपके लिए आंवला कैंडी बनाने की रेसिपी लेकर आए हैं। - जीरा पाउडर एक चम्मच - इमली का पल्प एक/दो कप आंवला कैंडी कैसे बनाएं? - आंवला कैंडी बनाने के लिए आप सबसे पहले आप आंवला को अच्छी तरह से धो लें। - फिर आप आंवला को धूप में अच्छी तरह से सुखा लें। - इसके बाद आप सूखे आंवले को मिक्सी में पीसकर पाउडर बना लें। - फिर आप एक पैन गैस पर रखकर गर्म कर लें। - इसके बाद आप इसमें अजवाइन, जीरा, हींग और आंवला पाउडर डालकर भून लें। - फिर आप एक दूसरे पैन में एक कप पानी, इमली का पल्प और गुड़ के टुकड़े डालें। - इसके बाद आप इसको अच्छे से पकाकर एक तार की चाशनी तैयार कर लें। - फिर जब पानी कम रह जाए तो आप इसमें आंवला पाउडर डाल दें। - इसके बाद आप इसको कम से कम पाँच मिनट बाद पकाएं और गैस बंद कर दें। - फिर आप इस मिक्चर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। - इसके बाद आप इसकी छोटी-छोटी गोलिया बना लें। - फिर आप इन गोलियों को पिसी चीनी से अच्छी तरह से लपेट लें। - अब आपकी गटागट आंवला कैंडी बनकर तैयार हो चुकी हैं।
स्त्रीप्रत्ययप्रकरणम् / ३३ जैसे-गनासिकी, तुंगनासिका; कृशोदरी, कृशोदरा; बिम्बोष्ठी, बिम्बोष्ठा; दीर्घजंघी, दीर्घजंघा, समदन्ती, समदन्ता; चारुकर्णी, चारकर्णा; तीक्ष्णशृङ्गी, तीक्ष्णशृङ्गा इत्यादि ।।१३।। वा० - पुच्छाच्च ॥ १०४॥ पुच्छ शब्द भी संयोगोपध स्वांगवाची है, इस कारण निषेध का बाधक यह वात्तिक है । पुच्छान्त स्वांगवाची प्रातिपदिक से विकल्प करके ङीष् प्रत्यय होवे । जैसे - कल्याणपुच्छी, कल्याणपुच्छा ॥१४०।। वा० - कबरमणिविषशरेभ्यो नित्यम् ॥१०५ ।। कबर मणि विष और शर शब्दों से परे जो स्वांगवाची पुच्छ प्रातिपदिक उस से स्त्रीलिङ्ग में नित्य ही ङीष् प्रत्यय हो । जैसे-कबरपुच्छी; मणिपुच्छी; विषपुच्छी; शरपुच्छी इत्यादि ।।१०५।। बा० - उपमानात्पक्षाच्च पुच्छाच्च ।।१०६। उपमानवाची शब्दों से परे जो स्वांगवाची पक्ष और पुच्छ प्रातिपदिक उन से नित्य ही ङीष् प्रत्यय हो । जैसे-उलूकपक्षी सेना; उलूकपुच्छी शाला इत्यादि ।।१०६ ।। न क्रोडादिबह्वचः ।।१०७। -प्र० ४ । १ । ५६ ॥ कोड आदि प्रातिपदिक और बहुत अच् जिस में हों, ऐसे प्रातिपदिक से ङीष् प्रत्यय न होवे । जैसे- कल्याणक्रोडा; कल्याणखुरा; कल्याणबाला; कल्याणशका महाललाटा इत्यादि ।।१०७ ।। ३४ / स्त्रैणताद्धिते सहनञ् विद्यमानपूर्वाच्च ।। १०८।। अ० ४ । १ । ५७ ।। सह नञ विद्यमान ये हों पूर्व जिसके, उस स्वांगवाची स्त्रीलिङ्ग में वर्तमान प्रातिपदिक से ङीष् प्रत्यय न हो । जैसेसकेशा; अकेशा; विद्यमानकेशा; सनासिका; अनासिका; विद्यमाननासिका इत्यादि ।।१०८ ।। नखमुखात्संज्ञायाम् ॥ १०९ ।। ऋ० ४ । १ । ५८ ।। स्त्रीलिङ्ग में वर्त्तमान नखान्त और मुखान्त प्रातिपदिकों से ङीष् प्रत्यय न हो । जैसे- शूर्पणखा; वज्रणखा; गौरमुखा; कालमुखा । 'संज्ञा' ग्रहण इसलिये है कि - ताम्रमुखी कन्या, यहां ङीष् हो ।। १०९ ।। दीर्घजी च छन्दसि ।। ११० ।। अ०४ । १ । ५९ ॥ वेद में 'दीर्घजिह्वी' निपातन किया है। जैसे- दीर्घजिह्वी वै देवानां हृव्यमलेट् । 'दोर्घजिह्वी' शब्द नित्य ङीष् होने के लिये निपातन किया है ।॥ ११० ।। दिक्पूर्वपदान्ङीप् ।। १११! --प्र० ४ । १।६० ॥ दिक् पूर्वपद हो जिस के उस स्वांगवाची स्त्रीलिङ्ग वर्तमान प्रातिपदिक से ङोप् प्रत्यय हो । जैसे--प्राङ्मुखी; प्रत्यङ मुखी ; प्राङनासिकी इत्यादि ।।११।। वाहन्त प्रातिपदिक से ङीष् प्रत्यय होवे। जैसे -दित्यौही; प्रष्ठाही; विश्वौही इत्यादि ।।११२।। स्त्रीप्रत्ययप्रकरणम् / ३५ सख्यशिश्वीति भाषायाम् ॥ ११३ ।। भाषा अर्थात् लौकिक प्रयोग विषय में सखी और अशिश्वी ये दोनों ङीष् प्रत्ययान्त निपातन किये हैं। जैसे - सखीयं मे ब्राह्मणी; नास्याः शिशुरस्तीति अशिश्वी । यहां 'भाषा' ग्रहण इसलिये है कि सखे सप्तपदी भव, यहां न हो ॥ ११३ ।। जाते रस्त्रीविषयादयोपधात् ॥ ११४॥ स्त्रीलिङ्ग में वर्तमान जो यकारोपधवर्जित जातिवाची अकारान्त और नियत स्त्रीलिङ्ग न हो, ऐसे प्रातिपदिक से ङीष् प्रत्यय होवे । जैसे- कुक्कुटी; सूकरी; ब्राह्मणी; वृषली; नाडायनी; चारायणी; बहवृची । यहां 'जाति' ग्रहण इसलिये है कि मुण्डा । 'अस्त्रीविषय' इसलिये है कि-मक्षिका । 'अयोध' इसलिये है कि क्षत्रिया; वैश्या । 'अनुपसर्जन' ग्रहण इसलिये है कि बहुकुक्कुटा; बहुसुकरा, इससे ङीष् न हुआ ॥ ११४ ।। वा० - योपधप्रतिषेधे प्रतिषेधः ॥११५॥ यकारोपध का निषेध जो सूत्र से किया है, वहां हय गवय मुकय मत्स्य और मनुष्य प्रातिपदिकों का निषेध न होवे, अर्थात् इनसे ङीष् प्रत्यय हो । जैसे हयी; गवयी; मुकयी; मत्सी; मनुपो ।।११५।। ३६ / स्त्रैणताद्धिते पाककर्णपर्णपुष्पफलमूलबालोत्तरपदाच्च ॥११६ स्त्रीलिङ्ग में वर्त्तमान जिस प्रातिपदिक के उत्तरपद पाक आदि शब्द हो, उससे ङीष् प्रत्यय हो । जैसे - प्रोदनपाकी; मुद्गपर्णी; पट्पर्णी; शङ्खपुष्पी; बहुफली; दर्भमूली; गोबाली ॥११६।। वा० -- सदच्काण्डप्रान्तशतैकेभ्यः पुष्पात्प्रतिषेधः ॥ ११७ ॥ सत् अंचु काण्ड प्रान्त शत एक इन प्रातिपदिकों से परे जो स्त्रीलिंग में वर्तमान पुष्प प्रातिपदिक उस से ङीष् प्रत्यय न हो । सूत्र ११६ से प्राप्त है, उसका विशेष शब्दों के योग में निषेध किया है। जैसे- सत्पुष्पा; प्राकृपुष्पा; प्रत्यकपुष्पा; काण्डपुष्पा; प्रान्तपुष्पा; शतपुष्पा; एकपुष्पा । ११७।। वा० -- सम्भस्त्राजिनशणपिण्डेभ्यः फलात् ॥ ११८॥ सम् भस्त्र ऋजिन शण और पिण्ड शब्दों से परे जो फल प्रातिपदिक उस से ङीष् प्रत्यय न हो । यहाँ सर्वत्र ङीष् का निषेध होने से टाप् हो जाता है । अजिनफला; गणफला; जैसे सम्फला; भस्त्रफला ; पिण्डफला ।।११८।। वा० -- श्वेताच्च ॥ ११९॥ श्वेत शब्द से परे जो फल उससे भी ङीष् न हो। जैसेश्वेतफला ।।११९॥ त्रि शब्द से परे जो फल उससे भी ङीष् न हो । जैसेत्रिफला ।। १२०।। स्त्रीप्रत्ययप्रकरणम् / ३७ वा० - मूलान्नञः ॥ १२१॥ न से परे जो मूल प्रातिपदिक उससे भी ङीष् प्रत्यय न होवे । जैसे - न मूलमस्याः सा अमूला इत्यादि । १२१ ॥ इतो मनुष्यजातेः ।।१२२॥ - प्र० ४ । १ । ६५ ।। स्त्रीलिङ्ग में वर्त्तमान मनुष्यजातिवाची इकारान्त प्रातिपदिक से ङीष् प्रत्यय हो । जैसे- श्रवन्ती; कुन्ती; दाक्षी; प्लाक्षी इत्यादि । यहाँ 'इकारान्त' ग्रहण इसलिये है कि - विट्; दरत्, यहां ङीष् न होवे । 'मनुष्य ग्रहण इसलिये है कि - तित्तिरिः, यहां न हो । और पूर्वसूत्र से जाति की अनुवृत्ति चली आती, फिर 'जाति' ग्रहण का प्रयोजन यह है कि-यकारोपध से भी ङीष् प्रत्यय हो जावे, जैसे- प्रौदमेयी इत्यादि ।।१२२ ।। वा०-- इन उपसङ ख्यानमजात्यर्थम् ।।१२३।। जाति के न होने से स्त्रीलिंग में वर्त्तमान इञ् प्रत्ययान्त प्रातिपदिक से ङोष् प्रत्यय कहना चाहिये । जैसे- सौतङ्गमी; मौनचित्ती' इत्यादि ।। १२३ ।। स्त्रीलिङ्ग में वर्त्तमान मनुष्यजातिवाची उकारान्त प्रातिपदिक से ऊङ प्रत्यय होवे । जैसे- कुरूः ; ब्रह्मबन्धूः; वीरबन्धूः । यकारोपध के निषेध की अनुवृत्ति यहां प्राती है, इसी कारण अध्वर्यु ब्राह्मणी, इत्यादि में ऊङ प्रत्यय नहीं होता ।। १२४।। १. सुतङ्गम आदि प्रातिपदिकों से चातुरर्थिक प्रकरण का इञ्च प्रत्यय है, इस कारण जाति नहीं ॥
स्त्रीप्रत्ययप्रकरणम् / तैंतीस जैसे-गनासिकी, तुंगनासिका; कृशोदरी, कृशोदरा; बिम्बोष्ठी, बिम्बोष्ठा; दीर्घजंघी, दीर्घजंघा, समदन्ती, समदन्ता; चारुकर्णी, चारकर्णा; तीक्ष्णशृङ्गी, तीक्ष्णशृङ्गा इत्यादि ।।तेरह।। वाशून्य - पुच्छाच्च ॥ एक सौ चार॥ पुच्छ शब्द भी संयोगोपध स्वांगवाची है, इस कारण निषेध का बाधक यह वात्तिक है । पुच्छान्त स्वांगवाची प्रातिपदिक से विकल्प करके ङीष् प्रत्यय होवे । जैसे - कल्याणपुच्छी, कल्याणपुच्छा ॥एक सौ चालीस।। वाशून्य - कबरमणिविषशरेभ्यो नित्यम् ॥एक सौ पाँच ।। कबर मणि विष और शर शब्दों से परे जो स्वांगवाची पुच्छ प्रातिपदिक उस से स्त्रीलिङ्ग में नित्य ही ङीष् प्रत्यय हो । जैसे-कबरपुच्छी; मणिपुच्छी; विषपुच्छी; शरपुच्छी इत्यादि ।।एक सौ पाँच।। बाशून्य - उपमानात्पक्षाच्च पुच्छाच्च ।।एक सौ छः। उपमानवाची शब्दों से परे जो स्वांगवाची पक्ष और पुच्छ प्रातिपदिक उन से नित्य ही ङीष् प्रत्यय हो । जैसे-उलूकपक्षी सेना; उलूकपुच्छी शाला इत्यादि ।।एक सौ छः ।। न क्रोडादिबह्वचः ।।एक सौ सात। -प्रशून्य चार । एक । छप्पन ॥ कोड आदि प्रातिपदिक और बहुत अच् जिस में हों, ऐसे प्रातिपदिक से ङीष् प्रत्यय न होवे । जैसे- कल्याणक्रोडा; कल्याणखुरा; कल्याणबाला; कल्याणशका महाललाटा इत्यादि ।।एक सौ सात ।। चौंतीस / स्त्रैणताद्धिते सहनञ् विद्यमानपूर्वाच्च ।। एक सौ आठ।। अशून्य चार । एक । सत्तावन ।। सह नञ विद्यमान ये हों पूर्व जिसके, उस स्वांगवाची स्त्रीलिङ्ग में वर्तमान प्रातिपदिक से ङीष् प्रत्यय न हो । जैसेसकेशा; अकेशा; विद्यमानकेशा; सनासिका; अनासिका; विद्यमाननासिका इत्यादि ।।एक सौ आठ ।। नखमुखात्संज्ञायाम् ॥ एक सौ नौ ।। ऋशून्य चार । एक । अट्ठावन ।। स्त्रीलिङ्ग में वर्त्तमान नखान्त और मुखान्त प्रातिपदिकों से ङीष् प्रत्यय न हो । जैसे- शूर्पणखा; वज्रणखा; गौरमुखा; कालमुखा । 'संज्ञा' ग्रहण इसलिये है कि - ताम्रमुखी कन्या, यहां ङीष् हो ।। एक सौ नौ ।। दीर्घजी च छन्दसि ।। एक सौ दस ।। अचार । एक । उनसठ ॥ वेद में 'दीर्घजिह्वी' निपातन किया है। जैसे- दीर्घजिह्वी वै देवानां हृव्यमलेट् । 'दोर्घजिह्वी' शब्द नित्य ङीष् होने के लिये निपातन किया है ।॥ एक सौ दस ।। दिक्पूर्वपदान्ङीप् ।। एक सौ ग्यारह! --प्रशून्य चार । एक।साठ ॥ दिक् पूर्वपद हो जिस के उस स्वांगवाची स्त्रीलिङ्ग वर्तमान प्रातिपदिक से ङोप् प्रत्यय हो । जैसे--प्राङ्मुखी; प्रत्यङ मुखी ; प्राङनासिकी इत्यादि ।।ग्यारह।। वाहन्त प्रातिपदिक से ङीष् प्रत्यय होवे। जैसे -दित्यौही; प्रष्ठाही; विश्वौही इत्यादि ।।एक सौ बारह।। स्त्रीप्रत्ययप्रकरणम् / पैंतीस सख्यशिश्वीति भाषायाम् ॥ एक सौ तेरह ।। भाषा अर्थात् लौकिक प्रयोग विषय में सखी और अशिश्वी ये दोनों ङीष् प्रत्ययान्त निपातन किये हैं। जैसे - सखीयं मे ब्राह्मणी; नास्याः शिशुरस्तीति अशिश्वी । यहां 'भाषा' ग्रहण इसलिये है कि सखे सप्तपदी भव, यहां न हो ॥ एक सौ तेरह ।। जाते रस्त्रीविषयादयोपधात् ॥ एक सौ चौदह॥ स्त्रीलिङ्ग में वर्तमान जो यकारोपधवर्जित जातिवाची अकारान्त और नियत स्त्रीलिङ्ग न हो, ऐसे प्रातिपदिक से ङीष् प्रत्यय होवे । जैसे- कुक्कुटी; सूकरी; ब्राह्मणी; वृषली; नाडायनी; चारायणी; बहवृची । यहां 'जाति' ग्रहण इसलिये है कि मुण्डा । 'अस्त्रीविषय' इसलिये है कि-मक्षिका । 'अयोध' इसलिये है कि क्षत्रिया; वैश्या । 'अनुपसर्जन' ग्रहण इसलिये है कि बहुकुक्कुटा; बहुसुकरा, इससे ङीष् न हुआ ॥ एक सौ चौदह ।। वाशून्य - योपधप्रतिषेधे प्रतिषेधः ॥एक सौ पंद्रह॥ यकारोपध का निषेध जो सूत्र से किया है, वहां हय गवय मुकय मत्स्य और मनुष्य प्रातिपदिकों का निषेध न होवे, अर्थात् इनसे ङीष् प्रत्यय हो । जैसे हयी; गवयी; मुकयी; मत्सी; मनुपो ।।एक सौ पंद्रह।। छत्तीस / स्त्रैणताद्धिते पाककर्णपर्णपुष्पफलमूलबालोत्तरपदाच्च ॥एक सौ सोलह स्त्रीलिङ्ग में वर्त्तमान जिस प्रातिपदिक के उत्तरपद पाक आदि शब्द हो, उससे ङीष् प्रत्यय हो । जैसे - प्रोदनपाकी; मुद्गपर्णी; पट्पर्णी; शङ्खपुष्पी; बहुफली; दर्भमूली; गोबाली ॥एक सौ सोलह।। वाशून्य -- सदच्काण्डप्रान्तशतैकेभ्यः पुष्पात्प्रतिषेधः ॥ एक सौ सत्रह ॥ सत् अंचु काण्ड प्रान्त शत एक इन प्रातिपदिकों से परे जो स्त्रीलिंग में वर्तमान पुष्प प्रातिपदिक उस से ङीष् प्रत्यय न हो । सूत्र एक सौ सोलह से प्राप्त है, उसका विशेष शब्दों के योग में निषेध किया है। जैसे- सत्पुष्पा; प्राकृपुष्पा; प्रत्यकपुष्पा; काण्डपुष्पा; प्रान्तपुष्पा; शतपुष्पा; एकपुष्पा । एक सौ सत्रह।। वाशून्य -- सम्भस्त्राजिनशणपिण्डेभ्यः फलात् ॥ एक सौ अट्ठारह॥ सम् भस्त्र ऋजिन शण और पिण्ड शब्दों से परे जो फल प्रातिपदिक उस से ङीष् प्रत्यय न हो । यहाँ सर्वत्र ङीष् का निषेध होने से टाप् हो जाता है । अजिनफला; गणफला; जैसे सम्फला; भस्त्रफला ; पिण्डफला ।।एक सौ अट्ठारह।। वाशून्य -- श्वेताच्च ॥ एक सौ उन्नीस॥ श्वेत शब्द से परे जो फल उससे भी ङीष् न हो। जैसेश्वेतफला ।।एक सौ उन्नीस॥ त्रि शब्द से परे जो फल उससे भी ङीष् न हो । जैसेत्रिफला ।। एक सौ बीस।। स्त्रीप्रत्ययप्रकरणम् / सैंतीस वाशून्य - मूलान्नञः ॥ एक सौ इक्कीस॥ न से परे जो मूल प्रातिपदिक उससे भी ङीष् प्रत्यय न होवे । जैसे - न मूलमस्याः सा अमूला इत्यादि । एक सौ इक्कीस ॥ इतो मनुष्यजातेः ।।एक सौ बाईस॥ - प्रशून्य चार । एक । पैंसठ ।। स्त्रीलिङ्ग में वर्त्तमान मनुष्यजातिवाची इकारान्त प्रातिपदिक से ङीष् प्रत्यय हो । जैसे- श्रवन्ती; कुन्ती; दाक्षी; प्लाक्षी इत्यादि । यहाँ 'इकारान्त' ग्रहण इसलिये है कि - विट्; दरत्, यहां ङीष् न होवे । 'मनुष्य ग्रहण इसलिये है कि - तित्तिरिः, यहां न हो । और पूर्वसूत्र से जाति की अनुवृत्ति चली आती, फिर 'जाति' ग्रहण का प्रयोजन यह है कि-यकारोपध से भी ङीष् प्रत्यय हो जावे, जैसे- प्रौदमेयी इत्यादि ।।एक सौ बाईस ।। वाशून्य-- इन उपसङ ख्यानमजात्यर्थम् ।।एक सौ तेईस।। जाति के न होने से स्त्रीलिंग में वर्त्तमान इञ् प्रत्ययान्त प्रातिपदिक से ङोष् प्रत्यय कहना चाहिये । जैसे- सौतङ्गमी; मौनचित्ती' इत्यादि ।। एक सौ तेईस ।। स्त्रीलिङ्ग में वर्त्तमान मनुष्यजातिवाची उकारान्त प्रातिपदिक से ऊङ प्रत्यय होवे । जैसे- कुरूः ; ब्रह्मबन्धूः; वीरबन्धूः । यकारोपध के निषेध की अनुवृत्ति यहां प्राती है, इसी कारण अध्वर्यु ब्राह्मणी, इत्यादि में ऊङ प्रत्यय नहीं होता ।। एक सौ चौबीस।। एक. सुतङ्गम आदि प्रातिपदिकों से चातुरर्थिक प्रकरण का इञ्च प्रत्यय है, इस कारण जाति नहीं ॥
राजन यादव ने मिट्टी की उपज बढ़ाने और पौधों की पैदावार की तेजी से बढ़ाने हेतु एक फार्मूला बनाया था। जिसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थ का उपयोग नहीं किया गया था। इस फार्मूले से बनाई गई खाद से मिट्टी की पैदावार बिना किसी नुकसान पहुंचाए हो रही थी। पौधे बड़ी तेजी से बढ़ते थे और फल फूल पहले से बड़े होते थे साथ ही उनका वजन भी दुगुना हो रहा था। जबकि रासायनिक खाद से तात्कालिक फसल तो अच्छी होती है मगर बाद में मिट्टी की उर्वरक क्षमता को धीरे -धीरे कम करती जा रही है। इससे उत्पादित फ़सल, फल फूल और सब्जियों से शारीरिक नुकसान और बीमारियाँ भी होती है। जबकि ठीक इसके विपरीत राजन द्वारा बनाए गए फार्मूले से तैयार खाद शरीर को स्वस्थ बनाती थी और कोई बीमारी भी नहीं होती थी। खाने में भी काफी स्वाद आता था। जिससे किसानो की आमदनी बढ़ गई थी। कम लागत में ज्यादा लाभ मिल रहा था। आम लोगों को सस्ते दर पर फल फूल , अनाज और सब्जियाँ मिल रही थी। जमीन की मिट्टी की उर्वरक क्षमता दिन पर दिन बढ़ती जा रही थी। हर तरफ इस खाद हरियाली की काफी चर्चा हो रही थी। हरियाली खाद ने देश में ही नहीं विदेशों में भी तहलका मचा रही थी। भारत इस खाद को विदेशों में भी बेचकर करोड़ों -अरबों रुपए की आय कर रहा था। सैकड़ों देश हरियाली खाद का ऑर्डर लाखों -लाखों क्विंटल में लगातार भारत को भेज रहे थे। मगर भारत की इस उपलब्धि से कुछ दुश्मन देशो को पसंद नहीं आ रही थी। वे अंदर ही अंदर जल भून रहे थे। पाकिस्तान के सेना के एक बड़े ऑफिसर मकसूद कुरेशी ने चीन की खुफिया एजेंसी के निदेशक ली हिंगपिंग से बात कर अपने जासूसों द्वारा भारत से वैज्ञानिक राजन यादव के फार्मूले को चोरी कराने का अनुरोध किया। चीन के के खुफिया एजेंसी के निदेशक ली हिंगपिंग ने कहा -आप अपने दो तेज तर्रार जासूस मेरे पास भेजो और दो मेरे रहेंगे कुल चार जासूस भारत जाएंगे फार्मूले की चोरी करने। मगर इसमें जो भी खर्चा आयेगा तुम्हें पूरा देना पड़ेगा। कुरेशी ने कहा ठीक है। इस फार्मूले से हम दोनों भी खाद बनाकर करोड़ों अरबों काम लेंगे। फिर कोई भी देश भारत से हरियाली खाद को नहीं खरीदेगा। क्योंकि हम दोनों इसे भारत से कम दर पर सबको बेचेंगे। दोनों खूब ठहाका मारकर हंसने लगते है। मगर उनको क्या पता था वे दोनों शेर की मंद में हाथ डालने जा रहे थे। उनकी हंसी आँसुओं में बदलने वाली थी। भारत की सबसे खतरनाक खुफिया संस्था रा को इसकी भनक लग गई। रा के निदेशक हरपाल खन्ना ने तुरंत गृह मंत्रालय को सूचना दिया और आगे की कार्रवाई हेतु आदेश मांगा। मंत्रालय की तरफ से कहा गया -किसी भी कीमत पर फार्मूला चोरी नहीं होना चाहिए इसके लिए जो भी उचित कदम उठाना है उठाए। हरपाल खन्ना ने अपने सबसे खतरनाक और तेज तर्रार तीन जासूसो प्रतिभा सिंह , शिखा शर्मा और दीपांशु वर्मा को बुलाया और उनको फार्मूले को चोरी होने से बचाने हेतु जिम्मेवारी देते हुये कहा तुम तीनों को जो भी सहायता चाहिए मिलेगी मगर किसी कीमत पर राजन यादव का फार्मूला चोरी नहीं होना चाहिए। प्रतिभा जो रा की सबसे सीनियर और खूंखार जासूस थी ने कहा सर आप चिंता न करे हम तीनों के रहते कोई भी हमारे देश की एक सुई भी हाथ नहीं लगा सकता। फिर तीनों ने अपना ओफिसियल ऑर्डर लिया और केंद्रीय कृषि शोध संस्थान की तरफ निकल गए। वहा पहुँचकर तीनों ने वैज्ञानिक राजन और मंजरी से मुलाकात कर उनको सारी स्थिति से अवगत कराया। प्रतिभा ने कहा सबसे पहले मुझे उस जगह को दिखाये जहा फार्मूके को रखा गया है। राजन और मंजरी ने उन तीनों को उस कमरे में ले गए जहां फार्मूले पेन ड्राइव , सीडी और कम्प्युटर में सुरक्षित रखा हुआ था। कमरे के बाहर बड़ा सा ताला लगा हुआ था। शिखा ने कहा यहाँ अभी सुरक्षा गार्ड पहरा में लगा दे। दीपांशु ने कहा यहाँ हर तरफ अंदर और बाहर सीसीटीवी कैमरे लगवा दे। सारी तैयारियां फटाफट कराणे का आदेश दे दिया गया। संस्थान से बाहर निकलकर उसके चारो तरफ की चाहरदीवारी का निरीक्षण करते हुये प्रतिभा ने देखा दीवाल के ऊपर कंटीली तारो से घेराबंदी की गई थी। करीब सौ कदम बाद बाहर घना जंगल था। प्रतिभा ने राजन से कहा सर बाउंड्री वाल के चारों तरफ लाइट कम है। बाउंड्री वाल के चारो कोनो पर इस तरह से लाइट लगवाई जाये जो पास और दूर जंगल तक भी रोशनी दे ताकि किसी भी घुसपैठिए पर नजर रखी जाये। शिखा जो प्रतिभा से जुनियर ओफीसर थी मगर दोनों में काफी दोस्ती थी दोनों एक दूसरे को पार्टनर बोलती थी ने कहा - पार्टनर सीसीटीवी कैमरे बाउंड्री वाल के बाहर भी लगाना होगा। यू आर राइट पार्टनर प्रतिभा ने शिखा के सुझाव का समर्थन करते हुये कहा। सब तरह से संतुष्ट होकर तीनों वहाँ से निकल पड़े। कार दीपांशु ड्राइव कर रहा था। प्रतिभा ने अपने मोबाइल से पाकिस्तान और चीन फोन लगाकर अपने राव के ओफिसरो से कोन्फ्रेंस कर कहा - प्रताप और आकाश आप दोनों ध्यान से मेरी बात सुने - फिर उसने राजन के फार्मूले के चोरी होने की संभावना के बारे में बताते हुये कहा पाकिस्तान और चीन से चार जासूस जो भारत फार्मूले की चोरी करने आ रहे है उनपर निगाह रखना है। जैसे ही वे लोग भारत के लिए निकले तुरंत मुझे उनका फोटो और डीटेल भेज देना है। शिखा ने कहा वाह पार्टनर बहुत अच्छा किया। अगर वे चारों भारत आ गए और मेरे हाथ लग गए तो मैं सबका कचूमर बना दूँगी। दीपांशु ने कहा मैं तो उनको फुटबाल बनाकर खेलूँगा। और मैं क्या करूंगी प्रतिभा ने मुसकुराते हुये पूछा - तुम तो पार्टनर जूडो कराठे और कुंगफू चंपीयन हो उनकी हड्डी पसली एक कर दोगी। और दीपांशु तो एक नम्बर का निसानेबाज़ है। इसका निसाना कभी नहीं चुकता है। चारो अगर इसकी रडार पर आ गए तो फार्मूला चोरी होने से पहले ही चारो की खोपड़ी उड़ा देगा प्रतिभा ने हसते हुये कहा। रास्ते में प्रतिभा ने संस्थान के बारे में डीटेल जानकारी रा निदेशक हरपाल खन्ना को दे दिया और कहा सर मैंने पाकिस्तान और चीन फोन कर अपने ऑफिसर को भी सतर्क रहने बोल दिया है और उनको चारो जासूसो का डीटेल मिलते ही भेजने को कहा है आप भी उनको आदेश दे दे। ठीक है तुम लोग सावधान रहना मैं सबसे बात कर लेता हूँ। खन्ना ने कहा। कुछ ही दिनों में प्रतिभा को पाकिस्तान और चीन के चारों जासूसों का डीटेल मिल गया। उनके भारत आगमन का रूट चार्ट समय और शहर का भी पक्की रिपोर्ट मिल गई। प्रतिभा ने कहा - शिखा और दीपांशु ध्यान से मेरी बात सुनो वे चारों हमारे देश में टुरिस्ट बनकर आ रहे है। चारों दो टीमों में बंट कर आ रहे है। दो लोग मुंबई और दो लोग कोलकाता आएंगे। वहाँ से वे लोग टुरिस्ट की तरह घूमते हुये दिल्ली आएंगे और घटना को अंजाम देंगे। तुम दोनों मुंबई जाओगे और उनके पीछे लगकर उनकी हर हरकत पर निगाह रखना है। मैं कोलकाता जाऊँगी और उन देश के दुश्मनों का क्रियाकर्म कर वही गंगा में बहा दूँगी। ये तो ठीक नहीं कर रही हो पार्टनर मुझे छोड़कर अकेली कोलकता जाओगी मुझे तुम्हारी हमेशा चिंता लगी रहेगी। दीपांशु ने भी शिखा का समर्थन किया। तुम दोनों मेरी चिंता मत करो तुम दोनों तो मेरे बारे में जानते हो जब देश की आन बान और शान की बात आती है मैं दुश्मनों पर अकेली ही काल बनकर टूट पड़ती हूँ। वैसे वहा कोलकाता में मेरी एक सीआईडी की सीनियर ऑफिसर कृति मिश्रा और एक रिस्तेदार सीबीआई ऑफिसर है मिस संतोष अग्रवाल। वे दोनों मुझे बहुत मानते है जब जरूरत पड़ेगी उन दोनों से मदद ले लूँगी। प्रतिभा ने उन दोनों चिंतामुक्त करते हुये कहा। वे दोनों चुप हो गए क्योंकि वे जानते थे देश के लिए इस तरह खतरों से खेलना उनके लिए शान की बात है। हवाई अड्डा पर प्रतिभा ने बाहर निकलते हुये पाकिस्तान के दोनों जासूसों को पहचान लिया। उसने देखा वे दोनों पहले से इंतजार कर रही एक कार में बैठकर निकल गए। प्रतिभा ने एक किराये की टेक्सी को लिया और उनका पीछा करने को कहा। वे दोनों एक फाइब स्टार होटल मून लाइट में पहुँच गए। प्रतिभा ने टेक्सी का भाड़ा चुकाया और रिसेपसन पर पहुँच गई। उसने मैनेजर से उन दोनों के कमरे के बारे में पूछा। उसने बताने में आनाकानी किया। प्रतिभा ने कहा मैं एक पुलिस ऑफिसर हूँ उनकी हरकतें संदेहास्पद है मुझे उनपर निगाह रखनी है। मैनेजर ने तुरंत बताया वे दोनों तीसरी मंजिल के कमरा नंबर तीन सौ तीस में गए है। प्रतिभा ने कहा - मुझे उसी मंजिल पर उनके कमरे के आस पास एक रुम चाहिए। मैनेजर ने उसे तीन सौ पैंतीस नंबर का कमरा बुक कर दिया। प्रतिभा ने उसका एडवांस और अपना पहचान पत्र दिया और एक बैरा लेकर अपने कमरे की तरफ लिफ्ट से चली गई। प्रतिभा अपने कमरे में पहुँचते ही अपना बैग खोला और उसमें से अपना रिवाल्वर , खुफिया कैमरा , माइक्रोफोन और क्लोरोफार्म आदि निकालकर चेक की। उसने फोन कर खन्ना को पाकिस्तान के दोनों जासूसों के बारे में बता दिया और कहा अभी वे दोनों अपने कमरे में गए है वे दोनों मेरी नजर में है सर। ठीक है तुम सावधानी से उनपर निगाह रखो। खन्ना ने कहा। उधर मुंबई में शिखा और दीपांशु ने चीन के दोनों जासूसों का पीछा हवाई अदा से करना शुरू किया। दोनों जासूस एक ट्रेवेलिंग कार से साधारण से होटल में गए। शिखा और दीपांशु भी उनके होटल में जाकर दो कमरा बुक करा लिया। शिखा ने फोन कर प्रतिभा को अपना लोकेसन बताया। प्रतिभा ने उन दोनों की तारीफ करते हुये कहा बहुत खूब पार्टनर लगे रहो उनका पीछा छोड़ना नहीं। प्रतिभा जैसे ही अपने कमरे से बाहर निकली उसने देखा एक सुंदर सी लड़की तीन सौ तैंतीस की तरफ जा रही थी। वो उसे न होटल की कर्मचारी लगी ना बैरा। उसने लपकर उस लड़की के मुंह पर अपना हाथ रख दिया और घसीटते हुये अपने कमरे में खिच लिया। वो लड़की अचानक इस हरकत से घबड़ा गई। प्रतिभा ने उसके मुंह पर हाथ रखे हुये कहा - मैं तुम्हारा मुंह खोल रही हूँ मगर हल्ला मत करना। अगर शोर मचाई तो मैं तुम्हारी खोपड़ी फोड़ दूँगी उसने अपना रिवाल्वर उसकी कनपटी पर सटाते हुए कहा। मुंह खुलते ही वो लड़की लंबी लंबी साँसे लेने लगी काफी घबड़ाई हुई थी। प्रतिभा ने पूछा तुम कौन हो और उस कमरे में क्यों जा रही थी। उस लड़की ने बताया मेरा नाम गुंजन है और मैं एक कॉल गर्ल हूँ मुझे होटल की तरफ से कस्टमर को खुश करने के लिए बुलाया गया था। प्रतिभा ने कहा ठीक है मगर तुम्हें मेरा एक काम करना होगा। मैं एक पुलिस ऑफिसर हूँ मुझे उन दोनों की निगरानी करनी है। तुम इस माइक्रोफोन को उनके कमरे में किसी ऐसे जगह छिपा दो जिसे वे लोग देख नहीं सके और मुझे उनकी बातचीत सुनाई दे सके। एक काम और करना तुम उन दोनों में से किसी एक का मोबाइल नंबर भी लाकर देना मुझे। मगर याद रखना अगर धोखा देने की कोशिश की तो इन दोनों के साथ तुमको भी जेल भेजवा दूँगी। गुंजन ने कहा ठीक है मैडम आप जैसा बोल रही है मैं कर दूँगी। प्रतिभा ने उसे छोड़ दिया। गुंजन जैसे ही उन जासूसों के कमरे में पहुंची वे दोनों अपने मोबाइल पर बीजी थे। उसने मौका देखकर माइक्रोफोन को बेड के पास पड़े एक फूल के गमले में रख दिया। तभी एक जासूस ने उसका स्वागत करते हुये कहा - आ गई तुम क्या पियोगी भिस्की या रम। गुंजन ने कहा - सॉरी सर मैं शराब नहीं पीती। ओके कोई बात नहीं वैसे मासाल्लाह बहुत खूबसूरत हो। गुंजन ने उसका शुक्रिया अदा किया। अगर मैं आप दोनों को इतनी ही पसंद हूँ तो मेरा नंबर ले ले और अपना नंबर दे दे जब भी जरूरत पड़ेगी मुझे फोन कर लेना मैं सेवा में हाजिर हो जाऊँगी। उस जासूस ने अपना मोबाइल नंबर उसे दे दिया। फिर उसने गुंजन से कहा अगर तुम हमारे लिए काम करोगी तो हम तुम्हें मालामाल कर देंगे। तुम्हें भारत के खिलाफ़ काम करना होगा। सॉरी सर मैं अपने धंधे से खुश हूँ मुझे और कोई काम नहीं करना है। तभी उस जासूस जिसका नाम कादिर भुट्टो था उसके मोबाइल पर कुछ आवाज आने लगी। वो चौकना होकर कमरे में चारों तरफ नजर दौड़ाने लगा। उसने अपने साथी सुलेमान खान से कहा इस कमरे में कही माइक्रोफोन रखा हुआ है लग रहा है कोई हमारी बाते सुन रहा है। कादिर ने अपने मोबाइल को लेकर कमरे में चारों तरफ घूमना शुरू किया टेबल पर रखे गमले के पास जाकर रुक गया। उसने उसमें माइक्रोफोन को ढूंढ निकाल और गुस्से से गुंजन की तरफ देखने लगा। तुम भारत की जासूस तो नहीं हो। उसने उसका बाल पकड़ कर डांटते हुए पूछा। मैं कुछ नहीं जानती ये कहा से आया गुंजन ने अपना बाल छुड़ाते हुये कहा। सुलेमान ने अपनी रीवालवर निकाल कर गूंजना पर तान दिया और कहा सच सच बोलो वरना मैं गोली चला दूंगा। तुमको किसने भेजा है। मगर गुंजन ने कहा मेरा विश्वाश करो मैं कुछ नहीं जानती। सुलेमान ने गोली चला दिया गोली गुंजन की छाती में जाकर लगी। धाय की आवाज हुई और गुंजन अपनी छती पकड़कर नीचे कालीन पर गिर पड़ी। उसकी छाती लहूलुहान हो गई। अपने कमरे में प्रतिभा ने माइक्रोफोन से गोली चलने की आवाज सुन ली थी और उनकी बाते भी। उसने फुर्ती से अपना रिवाल्वर निकाला और भागते हुये उस कमरे तक पहचकर दरवाजे के किनारे खड़ी हो गई। थोड़ी ही देर में वे दोनों अपना अपना बेग लिए हुये कमरे से बाहर निकले। प्रतिभा ने दोनों को अपने लात के प्रहार से नीचे गिरा दिया। दोनों फुरती से खड़े हुये और प्रतिभा से भीड़ गए। प्रतिभा ने अपने लातों जुतो से उन दोनों को धुनकर रखा दिया। उन दोनों को लगा इस लड़की से वे पार नहीं पाएंगे वे दोनों लिफ्ट की तरफ भागे। प्रतिभा ने तुरंत नीचे काउंटर पर फोन कर उन दोनों के बारे में बताया और कहा की तुरंत पुलिस को बुलाये वे दोनों किसी कीमत पर भागने न पाये और एक अंबुलेंस भी बुलाने को कहा एक लड़की को इनके कमरे में गोली लगी है। इसके बाद वो भागती हुई कमरे में गई जहां गुंजन अपनी छाती पकड़े दर्द से कराह रही थी। प्रतिभा ने उसका सिर अपनी गोद में रख कर बोली माफ करना तुम्हारी हालत मेरी वजह से हुई है लेकिन चिंता मत करो मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगी। गुंजन ने कराहते हुये कहा मैडम आप अफसोस न करे मैं शरीर जरूर बेचती हूँ मगर देश नहीं बेच सकती इसलिए मैंने उनको कुछ नहीं बताया। वे लोग मुझे भी देश के खिलाफ काम करने के लिए लालच दे रहे थे। प्र्तिभा को उसकी देश भक्ति देखकर बहुत गर्व हुआ उसकी आंखे गीली हो गई। लिफ्ट से निकलते ही दोनों ने अपनी रिवाल्वर लहराते हुये कहा खबरदार अगर किसी ने हमे रोकने की कोशिश किया तो हम उसे गोली मार देंगे। सब लोग डर से इधर उधर हो गए। वे दोनों भागते हुये होटल से बाहर निकल गए और बाहर खड़ी एक गाड़ी के ड्राइवर को धमकाते हुये कहा चलो जल्दी से। वे दोनों उस गाड़ी का दरवाजा खोलकर बैठ गए। ड्राइवर डर से गाड़ी स्टार्ट कर चल पड़ा। उनके जाते ही पुलिस और अंबुलेंस की गाड़ी सायरन बजाती हुई पहुँच गई। प्रतिभा ने पुलिस को अपना परिचय दिया और बताया वे दोनों पाकिस्तानी जासूस है किसी गलत नियत से भारत आए है मैं उनपर नजर रख रही हूँ। आप सब पहले ईस लड़की को अस्पताल भेजवाकर बेहतर इलाज करवाए। और इस शहर के सभी थानों और चेक नाकों पेकटरको सतर्क कर दे वे दोनों बाहर ना जाने पाये। फिर प्रतिभा होटल से भार निकल कर एक भाड़े की कार लेकर हवाई अड्डा की तरफ निकल गई। रास्ते में उसने सीआईडी इंस्पेक्टर कृति मिश्रा को फोन कर उनका हुलिया बताते हुये कहा - दीदी इन दोनो ने अभी अभी होटल में एक लड़की को गोली मारकर है भाग निकले है। इनका पता चलना जरूरी है सभी स्टेशन और हवाई अड्डा पर पता लगवाकर बताए मुझे। कृति ने कहा चिंता मत करो मैं अभी अपने विभाग को सतर्क कर पता लगाती हूँ। प्रतिभा ने सीबीआई ऑफिसर संतोष अगरवाल को फोन कर पूरी घटना बताते हुये कहा आंटी उस लड़की का अपनी देख रेख में इलाज करवाना उसे कुछ होना नहीं चाहिए कॉल गर्ल होते हुये भी वो एक देश भक्त लड़की है। तभी कृति मिश्रा का फोन आया वे दोनों अभी हावड़ा स्टेशन पर देखा गया है पुलिस अभी पहुँचते ही होगी तुम भी जाओ। प्रतिभा ने कार को रेलवे स्टेशन की तरफ मुड़वा दिया। शेष अगले भाग - 2 में। प्रतिभा जैसे ही हावड़ा रेलवे स्टेशन पहुंची वहाँ यात्रियों की काफी भीड़ थी। इतनी भीड़ में उन दोनों जासूसों को खोजना बड़ा मुश्किल था। वे दोनों किसी भी ट्रेन में चढ़कर कही भाग सकते थे। तभी हावड़ा दिल्ली राजधानी एक्स्प्रेस के प्लेटफार्म नुंबर दस से खुलने की घोषणा हुई वो लपक कर उसकी एक बोगी में चढ़ गई। उसने टीटी को अपना पहचान पत्र दिखाया और कहा मुझे कोई सीट जल्दी दे। टीटी ने परिचय देखकर तुरंत एक खाली सीट दे दिया थोड़ी देर में केयर टेकर ने उसे चाय नाश्ता लाकर दिया। चाय पीते हुये उसने सोचना शुरू किया आखिर वे दोनों कहा गए होंगे। अगर मेरे हाथ से नीकल गए तो बहुत गड़बड़ हो जाएगी। ट्रेन खुल चुकी थी। प्रतिभा ने मास्क लगाया और अंदर ही अंदर सारी बोगियां चेक करने लगी। एक बोगी में उसने दो यात्रियों को संदिग्ध अवस्था में देखा। उन दोनों ने भी अपने चेहरे पर मास्क लगा रखा था। मगर उसे संदेह था की वे दोनों वही दोनों जासूस हो सकते है। उसने टीटी से आकर अपना शक जाहिर किया और कहा मुझे अगले स्टेशन पर इन दोनों की तलासी लेनी है और अगर सक सही हुआ तो इनको गिरफ्तार भी करना पड़ेगा। मुझे जि आर पी बल के मदद की जरूरत पड़ेगी। आप अभी जी आर पी को सतर्क करे। तुरंत रेलवे पुलिस बल हरकत में आई और उन दोनों की घेराबंदी शुरू कर दी गई। जैसे ही अगले स्टेशन पर ट्रेन रुकी उन दोनों को आने वाले खतरे का आभास हो गया। वे दोनों ट्रेन से उतरने लगे मगर तभी प्रतिभा ने ट्रेन के अंदर ही उनपर अपने लात जुतो से प्रहार करना शुरू कर दिया। रेलवे पुलिस ने भी अपनी रायफले उनपर तान दिया। इतने में एक जासूस ने अपनी रिवाल्वर निकाल कर प्रतिभा पर फायर कर दिया गोली उसके बालो को छूती हुई निकालकर बोगी की दीवाल में जाकर धंस गई वो बाल बाल बची। मौका देखकर दोनों दर्व्व्जे से कूदकर स्टेशन से बाहर की तरफ भाग निकले। प्रतिभा ने रेलवे पुलिस के सीनियर ऑफिसर से कहा - इन दोनों के बारे में सभी रेलवे स्टेशन को अलर्ट कर दे ये दोनों पाकिस्तान के खूंखार जासूस है बचना नहीं चाहिए इतना कहकर वो भी ट्रेन से बाहर कूद गई और उन दोनों के पीछे भागने लगी। मुंबई में शिखा और दिपांशु ने देखा वे दोनों चीनी जासूस एक किराये की टेक्सी लेकर होटल से बाहर निकले थे। उन दोनों ने भी एक टेक्सी लिया और उनका पीछा करने लगे। मगर वे कही रुक नहीं रहे थे इधर उधर भटक रहे थे। दीपांशु ने कहा - समझ में नहीं आ रहा है ये लोग कर क्या रहे है। शिखा ने ने कहा दो ही बाते हो सकती है या तो वे देखना चाहते है कोई उनका पीछा तो नहीं कर रहा है। या उनको पता चल चुका है हम दोनों उनका पीछा कर रहे है। ओह अच्छा अब समझा। ठीक है भटकने देते है दोनों को देखते है कबतक हम दोनों को बेवकूफ बनाते है ये लोग दीपांशु ने हसते हुये कहा। तभी अचानक आगे वाली टेक्सी रुक गई और दोनों जासूस उतरकर बड़ी तेजी से उनकी टेक्सी को दोनों तरफ से घेर लिया और अपना रिवाल्वर तान दिया। शिखा और दीपांशु इस अचानक घेराबंदी से जरा भी नहीं घबड़ाये मगर आश्चर्य जरूर हुआ। दोनों जल्दी बाहर निकलो वरना गोली चला दूंगा उनमे से एक ने अग्रेजी में कहा। इससे पहले की वे कुछ समझ पाते की दीपांशु ने इतनी तेजी से अपनी टेक्सी का पिछला दरवाजा खोला की उसकी बगल में खड़ा चिनी जासूस जोर से चीख पड़ा और वो जमीन पर गिर पड़ा। मगर तबतक बड़ी फुर्ती से दीपांशु ने टेक्सी से कूद कर उस चीनी जासूस को अपने जूतो की नोक से पिटना शुरू कर दिया। दूसरा जासूस जो शिखा की तरफ खड़ा था भागकर दीपांशु पर मुक्का चला दिया मगर तबतक शिखा अपना गेट खोलकर बाहर निकल चुकी थी उसने एक मुक्का ऐसा उस चीनी की नाक पर मारा की उसके नाक से खून की नदी बहने लगी। उन दोनों को शिखा और दीपांशु की फुर्ती और ताकत का अंदाजा नहीं था। वे बुरी तरह चोट खाकर भागते हुये अपनी टेक्सी में आकर बैठ गए। अभी उनकी टेक्सी स्टार्ट भी नहीं हुई थी की दीपांशु की गोली ने उनकी कार का पिछला दोनों टायर पंचर कर दिया। वे दोनों उतरकर भागने लगे। उनकी इस मार पीट की वजह से वहा काफी भीड़ इकट्ठी हो गई थी। इसी भीड़ का फायदा उठाकर दोनों भाग निकले। शिखा ने कहा भागकर कहा जाएँगे ब्च्चु इनको पाताल से भी ढूंढ निकालूंगी। दीपांशु ने कहा ये लोग जरूर दिल्ली जाने की कोशिश करेंगी। हंम दोनो को तुरंत खन्ना साहब को बोलकर सभी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा पर इनकी सूचना भेजवा देनी चाहिए। ठीक है तुम सर से बात कर लो शिखा ने कहा। वे दोनों वापस अपने होटल लौट आए। प्रतिभा जैसे ही बाहर निकली उसने देखा उन वे दोनों एक ऑटो में बैठ चुके थे। उसने भी एक ऑटो लिया और कहा - उस ऑटो का पीछा करो। कुछ दूर जाकर वे दोनों बस स्टेंड पर उतर गए। प्रतिभा ने भी अपना ऑटो कुछ दूर पर रोकवा दिया और उतर गई। उसने किराया चुकाया और उनका पीछा करने लगी। वे दोनों आगरा जानेवाली बस में बैठ चुके थे। मगर दोनों थोड़ी देर में उससे उतर कर दूसरी बस में बैठ गए वो दिल्ली जा रही थी। प्रतिभा ने एक किराये की कार ली और उसमें बैठ गई। जब दिल्ली जानेवाली बस भिड़ भाड़ और शहर से निकलकर हाईवे पर तेज गति से भागने लगी। प्रतिभा उस बस का कार से पीछा करते हुये भागी जा रही थी। उसने अपना इरादा बदल लिया था। अब वो उनको रंगे हाथो गिरफ्तार नहीं करना चाहती थी। या तो वो उन दोनों को गिरफ्तार कर पुलिस के हवाले करना चाहती थी या उन्हें अपनी गोली का निसाना बनाना चाहती थी। क्योकी इन दोनों ने एक निर्दोष लड़की पर गोली चला दिया था पता नहीं बेचारी किस हाल में होगी। सी आई डी इंस्पेक्टर कृति मिश्रा का फोन आया और उसने प्रतिभा से हाल चाल पूछा। उसने अबतक हुई घटनाओं के बारे में बताया और कहा - दीदी मैं अब भी उनका पीछा कर रही हूँ। आपने उन दोनों के बारे में जो जानकारी दिया उसके लिए आभार आपका। अरे तुम थैंक यू मत बोलो तुम एक बहादुर लड़की हो और देश के लिए काम कर रही हो इसलिए तुम्हारी मदद की। कृति ने कहा। प्रतिभा ने फोन लगाकर सी बी आई ऑफिसर संतोष अग्रवाल से गुंजन का हाल चाल पूछा। संतोष ने बताया बेटी प्रतिभा गुंजन अभी भी बेहोशी की हालत में है। उसका इलाज चल रहा है। मगर तुम चिंता मत करो मैं देख रही हूँ। प्रतिभा ने अचानक अपनी कार को तेज भगाने को कहा और कहा - बस से कुछ आगे जाकर रोकने को कहा। ड्राईवर ने ठीक वैसा ही किया। बस का ड्राईवर अचानक सामने कार आ जाने से चौक गया और वो ब्रेक पर खड़ा हो गया। बस के टायर जोरदार आवाज करते हुये और बस को घसीटते हुये ठीक कार के पीछे रोक दिया। अचानक ब्रेक मारे जाने से सभी यात्री हड़बड़ा गए। उन दोनों जासूसो को भी खतरे का आभास हुआ। तभी दनदनाती हुई प्रतिभा अपने हाथों में रिवाल्वर लिए हुये बस में चढ़ गई और जहा वे दोनों जासूस बैठे हुये थे उनपर अपनी रिवाल्वर तान दिया। बस में सारे यात्री डर से एक खूबसूरत और जवान लड़की के हाथो में रिवाल्वर देख कर हैरत से देख रहे थे। प्रतिभा ने ललकारते हुये कहा खबरदार अगर तुम दोनों ने कोई चालाकी की तो मई यही दोनों कोई ढेर कर दूँगी चुपचाप अभी उतारो बस से। अपने हाथ ऊपर करो और उतरो। वे दोनों अपना हाथ ऊपर किए चुपचाप बस से उतर गए। प्रतिभा ने इशारे से बस को जाने कहा। बस के ड्राइवर ने तुरंत एक्सिलेटर पर अपना पैर रखा और तेजी से आगे भगाता चला गया। प्रतिभा ने उन दोनों जासूसों से कहा तुम दोनों मेरे निसाने पर हो कोई चालाकी मत करना वरना जान से हाथ धो बैठोगे। वे दोनों बड़ी हैरत से मासूम दिखने वाली मगर खतरनाक लड़की को देख रहे थे। एक अकेली लड़की ने उनके नाक में दम कर रखा था। लगातार उनके पीछे पड़ी हुई है। सांस भी नहीं लेने दे रही है। उन दोनों ने आंखों ही आंखों में इशारा किया और सड़क के दाहिने साइड जंगल की तरफ छलांग लगा दिये। प्रतिभा ने दंडन दो फायर किए मगर दोनों तबतक उसकी आंखों से ओझल हो गए। प्रतिभा भी जंगल की तरफ दौड़ लगाने ही वाली थी तभी उसके कार के ड्राइवर ने ज़ोर से आवाज देकर उसे रोकते हुए कहा- आगे मात जाइए मैडम उधर घना जंगल है। इसमें काफी जंगली जानवर रहते है। आपको खतरा हो सकता है रुक जाइए। प्रतिभा के पाँव रुक गए और वापस आकर अपनी कार में बैठ गई। जंगल में कुछ दूर जाकर उन दोनों ने रुक कर सांस लिया। एक ने कहा - ये कैसी लड़की है यार हम दोनों के पीछे हाथ धोकर पड़ गई है। भारतीय लड़की भी इतनी खतरनाक हो सकती है हमें अंदाजा नहीं था। कई बार बाल बाल बचे हम दोनों। दूसरे ने कहा - लगता है ये लड़की हम दोनों के मिशन को पूरा करने नहीं देगी। तभी एक के मोबाइल पर एक चीनी जासूस का फोन आया और उसने आप बीटी सुनाते हुये अंग्रेज़ी में कहा - तुम दोनों कहा और कैसे हो। यहाँ मुंबई में हम दोनों को एक लड़का और एक लड़की ने मार मार्कर बड़ा बुरा हाल कर दिया है बड़ी मुशकील से अपनि जान बचाकर भागे है। लगता है भारतीय खुफिया एजेंसी को हमारे आने की खबर मिल गई है इसलिए अपने खतरनाक एजेंटो को हमारे पीछे लगा दिया है। पाकिस्तानी जासूस ने कहा - तुम दोनों से बुरा हाल महज एक लड़ाकी ने हमारी कर दिया है। बड़ी निडर और खतरनाक लड़की है। ऐसी मार मारती है की जान निकाल देती है। हम दोनों अभी एक जंगल में छिपे हुये है तुम दोनों अब सावधान रहना। दूसरे जासूस ने पाकिस्तान मोबाइल से बात किया और अपना पोजीसन बताया। उधर से कहा गया - तुम दोनों सावधानी से किसी तरह दिल्ली पहुँचो वहा तुम्हें हमारे इंडियन एजेंट सहायता के लिए मिल जाएंगे। याद रहे भारत से खाली हाथ मत लौटना। प्रतिभा ने अपने ड्राइवर से दिल्ली चलने को कहा। आगे जाकर उसने एक होटल में खाना खाया और फिर अपनी कार में आकर बैठ गई। रास्ते में उसने शिखा को फोन लगाकर कहा - तुम दोनों अब दिल्ली के लिए निकलो मई भी वही जा रही हूँ फिर उसने अब तक की घटना के बारे में बता दिया। शिखा ने कहा वाह पार्टनर तुमने तो अकेले ही उन दोनों को छठी का दूध याद दिला दिया। यू आर ग्रेट माइ डीयर। शेष अगले भाग - 3 में। दिल्ली में एक अति आवश्यक गोपनीय बैठक चल रही थी। बैठक में रक्षा मंत्री , गृहमंत्री , रा निदेशक हरपाल खन्ना , पुलिस कमिशनर रजनी शर्मा , पुलिश अधिक्षक प्रियंका गुप्ता , केन्द्रीय कृषि शोध संस्थान के अध्यक्ष डॉक्टर राजन यादव और रक्षा सलाहाकर सभी उपस्थित थे। रक्षा मंत्री ने बैठक की शुरुआत करते हुये कहा -हमारे देश के महान युवा वैज्ञानिक डॉ राजन यादव जो फार्मूला बनाया है उसके बारे में आप सभी जानते ही है। लेकिन इस फार्मूले की चोरी कर भारत के साथ कुछ बिदेशी दुश्मनों ने एक षड़यंत्र के तहत अपने जासूस भारत में भेज दिया है। हमारे देश की सबसे बड़ी और विश्वश्नीय खुफिया एजेंसी जो बिदेश मामलो को देखती है को इस फार्मूले की जिम्मेवारी दी गई है। इनके तीन धुरंधर और जाबांज एजेंट प्रतिभा , शिखा और दीपांशु उन जासूसों पर लागातार नजर रखे हुये है। लेकिन इसमें गृह मंत्रालय के सहयोग की आवश्यकता है। गृह मंत्री ने कहा इसके लिए मैंने अपने सबसे ईमानदार और बहादुर पुलिस कमिश्नर रजनी शर्मा और पुलिस अधीक्षक प्रियंका गुप्ता को जिम्मेवारी दिया है ताकि फार्मूले को चोरी होने से बचाया जा सके। रक्षा सलाहकार ने कहा यह फार्मूले की चोरी का मामला ही नहीं बल्कि हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा का भी मामला है अगर हम सब मिलकर उस फार्मूले को नहीं बचा सके तो पूरे विश्व में हमारे देश के बारे में गलत संदेश जाएगा और कोई भी दुश्मन देश कभी भी मुंह उठाकर भारत में सेंधा लगाने की कोशिश कर सकता है। कोई भी हमसे डरेगा नहीं और हमारी छवि खराब हो जाएगी। निदेशक खन्ना ने कहा मेरी जानकारी में चीन और पाकिस्तान ने अपने जासूसों को मदद करने हेतु हमारे ही देश के कई लोकल एजेंटो को लगा दिया है जिनके पास सभी आधुनिक हथियार है और वे लोग विदेशों में जाकर प्रशिक्षण ले चुके है। वे सभी हमारे द्वारा चिह्नित किए जा रहे है। मगर वे सभी कभी भी घटना को अंजाम दे सकते है। हम सबको अभी से सावधानी रखनी होगी। इसलिए मैं रक्षा मंत्री जी से सेना की मदद देने का भी अनुरोध करूंगा। रक्षा मंत्री ने कहा मेरी तरफ से जब जैसी सहयोग की जरूरत पड़ेगी मैं देने को तैयार हूँ। पुलिस कमिश्नर रजनी शर्मा ने कहा मैं और प्रियंका अपनी टीम के साथ लगातार संस्थान की निगरानी कर रहे है। हमारे रहते हुये वहाँ कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता। रक्षा सलाहकर ने खन्ना साहब आप अपनी टीम और रजनी शर्मा जी की टीम के साथ आज ही बैठक कर एक रणनीति बना ले ताकि कोई चूक न होने पाये। इसके बाद बैठक समाप्त हो गई। रा के कार्यालय में हरपाल खन्ना और प्रतिभा , शिखा और दीपांशु के अलावा करीब दस लोग और बैठक में सामील थे। खन्ना ने प्रतिभा शिखा और दीपांशु की तारीफ करते हुये कहा - तुम तीनों ने बहुत ही बहादुरी का कार्य किया है। उन दुश्मन देश के जासूसो को भी पता चला दिया की भारतिय जासूस भी किसी से कम नहीं है। उनको अफसोस होता होगा की आखिर वे भारत मे क्यों घुस आए। मुझे तुम तीनों पर गर्व है। प्रतिभा ने कहा सर मुझे कलकता की कॉल गर्ल गुंजन की बहुत चिंता हो रही है। हालांकि मेरी आंटी सी बी आई ऑफिसर संतोष अग्रवाल उसके इलाज में मदद कर रही है मगर आखिर उसने मेरे कहने पर ही इतना बड़ा खतरा उठाया था। उसने अपनी राष्ट्र भक्ति की मिसाल दिया और आज वो अपनी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है। आप अपने स्तर से उसके बेहतर इलाज की व्यवस्था करवाए। खन्ना ने कहा तुम उसकी चिंता मत करो मैंने वहाँ के स्वस्थ मंत्री जी से बात कर लिया है वे अपने स्तर से लगे हुये है ताकि उसकी जान बचाई जा सके। प्रतिभा ने कहा पाकीस्तान के जिन दोनों जासूसों के पीछे मैं लगी हुई थी उसमें से एक का गुंजन ने मुझे मोबाइल नंबर दिया था मुझे। उस नंबर को ट्रेक कर मैं लगातार उनके लोकेसन पर नजर रख रही हूँ। अभी वे दोनों दिल्ली में ही है है। अगर आपका आदेश हो तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाये। खन्ना ने कहा - नहीं अभी नहीं अब जबकि वे लोग दिल्ली आ ही गए है तो उन्हें रंगे हाथों पकड़ा जाये। ताकी हमारे दुश्मन देश हम पर अंगुलि नहीं उठा सके। शिखा ने कहा सर उन दोनों चीनी जासूसों से हमारी मुठ भेड़ होने के बाद अजब वे दोनों भागने में सफल रहे हम दोनों ने उसके कमरे की तलासी लिया जिसमे उनके चीनी गुप्तचर एजेंसी का एजंट होने का सबूत मिला है और कई हथियार भी मिले है। शिखा की बात खत्म होते ही दीपांशु ने सभी जब्त समान टेबल पर रख दिया। खन्ना ने कहा बहुत अच्छा किया तुम दोनों ने। यह सब उनके खिलाफ बड़ा सबूत साबित होगा। इसके बाद सबने आगे की रणनीति पर चर्चा किया और बैठक समाप्त हो गई। बैठक की समाप्ति के बाद खन्ना ने उन तीनों से कहा तुम तीनों सावधानी रखना क्योंकि अब तुम तीनों उनकी नजर में आ चुके हो। वे लोग खुद या अपने इंडियन अजेंट से तुम तीनों पर हमला कर सकते है। प्रतिभा ने कहा सर आप हमारी चिंता न करे। उनकी शामत आएगी की वे सब हम तीनों से भिड़े। इस बार अगर हम तीनों एक साथ उनसे भीड़ गए तो उन चारो को मार मार कर उनका भरत्ता बना देंगे। खन्ना ठहाका मारकर हंसने लगे। सच में तुम तीनों दुश्मनों के लिए आफत हो। तुम सबसे भगवान ही उनकी रक्षा कर पाएँगे। प्रतिभा, शिखा और दीपांशु भी हँसते हुये ऑफिस से बाहर निकल गए। एक सप्ताह बाद दिन के बारह बजे केंद्रीय कृषि शोध संस्थान के अंदर बाहर कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था दिख रही थी। संस्थान का काम सामान्य रूप से चल रहा था। गेट पर हर जाने वाले की कड़ी जांच करने के बाद ही उसे जाने दिया जा रहा था। यह नियमित रूटीन वर्क था। अंदर जहां फार्मूला रखा गया था वहाँ भी बाहर कड़ा पहरा था। वहाँ सिर्फ राजन , रजनी और संस्थान के कर्मचारी ही आ जा पा रहे थे। ऐसा नियम बना दिया गया था। बाहरी किसी को वहाँ जाने की अनुमति नहीं थी। पुलिस कमिश्नर रजनी शर्मा और एस पी प्रियंका गुप्ता भी वहाँ मौजूद थी। प्रियंका बाहर की सुरक्षा देख रही थी और रजनी अंदर की सुरक्षा खुद अपनी निगरानी में देख रही थी। कोई भी जरा सी भी भूल चूक नहीं होने देना चाहती थी। संस्थान के भार कुछ दूर पर कुछ ग्रामीण चरवाहे अपनी गाय भैंसो को चरा रहे थे। साथ में कुछ चरवाहे जंगल में अपनी भेड़ बकरियां भी चरा रहे थे। मगर उनको संस्थान के अंदर बाहर चल रही हलचल से बेपरवाह अपनी धुन में लाठियाँ लेकर जानवरों को चराने में मस्त थे। अचानक संस्थान एक गेट पर पांच बोलेरों गाड़ियाँ बड़ी तेजी से आई और आते ही उनमें सवार लोगों ने सुरक्षा में तैनात जवानों पर गोलियाँ बरसाना शुरू कर दिया। अचानक हुई इस फायरिंग से वहाँ भगदड़ मच गई। हर तरफ अफरा तफरी मच गई। बाहर निगरानी कर रही प्रियंका ने अपना रिवाल्वर निकाल कर एक गाड़ी के पीछे छिपकर अपना पोजीसन ले लिया और डॉ हमला वरों को मार गिराया। जवानों ने भी अपनी बंदूकें उन हमलावरों पर दागना शुरू कर दिया। तभी उन लोगों ने लगातार पाँच बम अंदर बाहर फेंके। हर तरफ धुआं धुआं हो गया। अंदर रजनी शर्मा ने भी मोर्चा संभाल लिया था। गोलियों की परवाह किए बिना अपने जवानों और संस्थान की सुरक्षा में अपनी जान जोखिम में डालते हुये ताबड़ तोड़ फायरिंग शूर कर दी। उसने तीन लोगों को मार गिराया। पाँच लोग अंदर घुस आए थे उसमें से तीन रजनी ने मार गिराया था मगर पाँच और लोग गोलियां बरसाते हुये घुस आए। उनका पीछा करती हुई प्रियंका भी पहुँच गई। रजनी ने उसे डांटते हुये कहा रे तुम क्यों अंदर आ गई यहाँ मैं थी न। क्यों न आऊँ दीदी आप माँ बनने वाली है फिर भी आप देश के लिये यहाँ दुश्मनों से लड़ने चली आई है। तभी रजनी के पेट में दर्द उठा। मगर उसने अपने दर्द की परवाह किए बिना उसने सामने से आते हुये एक हमलावर पर अपनी गोली चला दिया वरना वो प्रियंका को निशाना बना देता। प्रियंका रजनी का हाथ पकड़कर उसे एक सुरक्षित जगह पर ले गई और खुद भी मोरचा संभाल लिया। रजानी ने कहा तुझे बड़ा मेरी फिक्र है मगर तेरी भी तो शादी होने वाली है दो दिन बाद तेरी बारात आनेवाली है और तू भी यहाँ अपनी जान खतरे में डाल कर लड़ रही है। प्रियंका ने कहा दीदी आपकी तरह मेरे लिए भी देश से बड़ा कुछ भी नहीं है। जबतक जिंदा रहूँगी एक भी दुश्मन को नहीं छोडूंगी। और फिर दोनों हमलावरों से लोहा लेने लगी। उधर जंगल में चरवाहे इस गोली बारी से डरकर पेड़ो की ओट में छिप गए। तभी उन सबने देखा पाँच अपराधी किस्म के लोग पाने हाथों में रायफले लिए हुई संस्थान की तरफ बढ़ने लगे। एक चरवाहा लाजों देखने में लड़की मालूम पड़ रही अचानक अपनी जेब से रिवाल्वर निकाली और उनपर फायर कर दी। दो लोग चीख मारकर जमीन पर गिर पड़े। बाकी दोनों चरवाहों ने भी अपनी बंदूकें निकाल लिया बाकी बचे तीन लोगों पर निशाना साधा मगर तबतक वे लोग सावधान हो चुके थे। उलट कर उन तीनों ने भी गोलियाँ चलाना शुरू किया मगर तीनों ने पेड़ो की ओट में अपने आपको बचा लिया। एक चरवाहे लड़के ने अपनी गोली से तीनों अपराधियों के हाथ घाल कर दिया। उनके हथियार जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद तीनों चरवाहों ने उन तीनों अपराधियों को आपने लात जूतों से धुन कर रख दिया। गोलियां चलने की आवाज सुनकर दस और गुंडे हथियार लेकर जंगल की तरफ से आते नजर आए। तीनों चरवाहों ने उन तीनों को मार कर अधमरा करने के बाद उन दस गुंडो से लोहा लेना शुरू किया मगर उनको ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। कुछ ही देर में सेना के पाँच जवानों ने उन दस गुंडो को घेर कर ढेर कर दिया। कुछ देर बाद पाँच लोग संस्थान की तरफ से भागते हुये आए। एक चरवाहे लड़की ने निशाना लगाने से मना किया और कहा इनको जंगल में जाने दे और इनको घेर कर रखना है मगर इनको पता नहीं चलना चाहिए। वे पांचों जंगल के अंदर चले गए और एक खाली सुनसान जगह पर बैठ गए। एक ने अपने बैग से एक लेपटोप निकाला और एक पेन ड्राइव उसमें लगाया और मेल करने लगा। मेल के जाते ही वो खुशी से चिल्लाने लगा। तभी उसके मोबाइल पर फोन आया फोन उठाते ही उसका चेहरा बुझ गया। उसकी सिटी वीटी गुम हो गई। उसने अपना माथा पकड़ लिया। तभी तीनों चरवाहों और पंचों सेना के जवानों ने उनको घेर लिया। प्रतिभा , शिखा और दीपांशु जो चरवाहा के भेष में थे अपने रिवाल्वर उन पर तान दिया। प्रतिभा ने कहा क्यों क्या हुआ तुम्हारे पाकिस्तानी आका की डांट पड़ी क्या। तुम लोग क्या सोच कर भारत आए थे की हमारे रहते फार्मूला चुरा लोगे। फार्मूला तो छोड़ो तुमलोग बिना हमारी मर्जी के एक सुई भी चुरा नहीं सकते। उसमें से चार जासूस थे। दो पाकिस्तानी और दो चीनी। चारों ने अचानक तीनों पर छलांग लगा दिया मगर वे लोग उन तीनों को छु पाते इससे पहले ही उन तीनों ने अपने रिवाल्वर से उनके पैर घायल कर दिये। चारो चीख मारते हुये जमीन पर बैठ गए। शिखा ने कहा तुम सबका खेल खत्म हो गया। अब तुम लोग भारत की गिरफ्त में हो। प्रतीभा ने कहा - मैं लगातार तुम्हारे मोबाइल के जरिये तुम्हें ट्रेक कर रही थी। तुम जिससे जब भी जो भी बात करते थे मुझे पता चल जाता था। तुम्हारी सारी योजना मुझे पता चल गई थी। इसलिए तुम सबको रंगे हाथों पकड़ने की योजना बनाई थी और हमने चरवाहा का भेष बनाया था। तुमने जो पेन ड्राइव में फार्मूला चोरी किया था उसमें फार्मूला था ही नहीं। उसमें हिन्दी और भोजपुरी गाना भरा हुआ था। ओरिजिनल फार्मूला मैंने पहले ही वहा से हटा दिया था। केवल तुम सबको रंगे हाथों पकड़ने के लिए यह सब जाल बिछाया गया था। तभी उन पांचों का पीछा करते हुये पुलिस कमिशनर रजनी शर्मा , एसपी प्रियंका गुप्ता और निदेशक हरपाल खन्ना भी अपने दल बल के साथ पहुँच गए। सबने उन तीनों की खूब तारीफ किया। उन पांचों को गिरफ्तार कर लिया गया। पाँचवाँ दिल्ली निवासी ही था जो उनके एजेंट के रूप में काम करता था। सब लोग जैसे ही संस्थान पहुंचे वहाँ सभी मीडिया वाले पहुँच चुके थे। सबने फटाफट उनका फोटो खींचना शुरू किया और हरपाल खन्ना से सारी जानकारी लिया। खन्ना ने प्रतिभा और रजनी से कहा आप दोनों सारी जानकारी प्रेस को दे दो। अगले दिन सभी अखबारों और चैनलों पर रजनी , प्रियंका , प्रतिभा , शिखा और दीपांशु की बहादुरी की खबरे पूरे विस्तार से दी गई थी। भारत सरकार ने पांचों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। गृह मंत्री और रक्षा मंत्री ने भी सबकी काफी प्रशंसा किया।
राजन यादव ने मिट्टी की उपज बढ़ाने और पौधों की पैदावार की तेजी से बढ़ाने हेतु एक फार्मूला बनाया था। जिसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थ का उपयोग नहीं किया गया था। इस फार्मूले से बनाई गई खाद से मिट्टी की पैदावार बिना किसी नुकसान पहुंचाए हो रही थी। पौधे बड़ी तेजी से बढ़ते थे और फल फूल पहले से बड़े होते थे साथ ही उनका वजन भी दुगुना हो रहा था। जबकि रासायनिक खाद से तात्कालिक फसल तो अच्छी होती है मगर बाद में मिट्टी की उर्वरक क्षमता को धीरे -धीरे कम करती जा रही है। इससे उत्पादित फ़सल, फल फूल और सब्जियों से शारीरिक नुकसान और बीमारियाँ भी होती है। जबकि ठीक इसके विपरीत राजन द्वारा बनाए गए फार्मूले से तैयार खाद शरीर को स्वस्थ बनाती थी और कोई बीमारी भी नहीं होती थी। खाने में भी काफी स्वाद आता था। जिससे किसानो की आमदनी बढ़ गई थी। कम लागत में ज्यादा लाभ मिल रहा था। आम लोगों को सस्ते दर पर फल फूल , अनाज और सब्जियाँ मिल रही थी। जमीन की मिट्टी की उर्वरक क्षमता दिन पर दिन बढ़ती जा रही थी। हर तरफ इस खाद हरियाली की काफी चर्चा हो रही थी। हरियाली खाद ने देश में ही नहीं विदेशों में भी तहलका मचा रही थी। भारत इस खाद को विदेशों में भी बेचकर करोड़ों -अरबों रुपए की आय कर रहा था। सैकड़ों देश हरियाली खाद का ऑर्डर लाखों -लाखों क्विंटल में लगातार भारत को भेज रहे थे। मगर भारत की इस उपलब्धि से कुछ दुश्मन देशो को पसंद नहीं आ रही थी। वे अंदर ही अंदर जल भून रहे थे। पाकिस्तान के सेना के एक बड़े ऑफिसर मकसूद कुरेशी ने चीन की खुफिया एजेंसी के निदेशक ली हिंगपिंग से बात कर अपने जासूसों द्वारा भारत से वैज्ञानिक राजन यादव के फार्मूले को चोरी कराने का अनुरोध किया। चीन के के खुफिया एजेंसी के निदेशक ली हिंगपिंग ने कहा -आप अपने दो तेज तर्रार जासूस मेरे पास भेजो और दो मेरे रहेंगे कुल चार जासूस भारत जाएंगे फार्मूले की चोरी करने। मगर इसमें जो भी खर्चा आयेगा तुम्हें पूरा देना पड़ेगा। कुरेशी ने कहा ठीक है। इस फार्मूले से हम दोनों भी खाद बनाकर करोड़ों अरबों काम लेंगे। फिर कोई भी देश भारत से हरियाली खाद को नहीं खरीदेगा। क्योंकि हम दोनों इसे भारत से कम दर पर सबको बेचेंगे। दोनों खूब ठहाका मारकर हंसने लगते है। मगर उनको क्या पता था वे दोनों शेर की मंद में हाथ डालने जा रहे थे। उनकी हंसी आँसुओं में बदलने वाली थी। भारत की सबसे खतरनाक खुफिया संस्था रा को इसकी भनक लग गई। रा के निदेशक हरपाल खन्ना ने तुरंत गृह मंत्रालय को सूचना दिया और आगे की कार्रवाई हेतु आदेश मांगा। मंत्रालय की तरफ से कहा गया -किसी भी कीमत पर फार्मूला चोरी नहीं होना चाहिए इसके लिए जो भी उचित कदम उठाना है उठाए। हरपाल खन्ना ने अपने सबसे खतरनाक और तेज तर्रार तीन जासूसो प्रतिभा सिंह , शिखा शर्मा और दीपांशु वर्मा को बुलाया और उनको फार्मूले को चोरी होने से बचाने हेतु जिम्मेवारी देते हुये कहा तुम तीनों को जो भी सहायता चाहिए मिलेगी मगर किसी कीमत पर राजन यादव का फार्मूला चोरी नहीं होना चाहिए। प्रतिभा जो रा की सबसे सीनियर और खूंखार जासूस थी ने कहा सर आप चिंता न करे हम तीनों के रहते कोई भी हमारे देश की एक सुई भी हाथ नहीं लगा सकता। फिर तीनों ने अपना ओफिसियल ऑर्डर लिया और केंद्रीय कृषि शोध संस्थान की तरफ निकल गए। वहा पहुँचकर तीनों ने वैज्ञानिक राजन और मंजरी से मुलाकात कर उनको सारी स्थिति से अवगत कराया। प्रतिभा ने कहा सबसे पहले मुझे उस जगह को दिखाये जहा फार्मूके को रखा गया है। राजन और मंजरी ने उन तीनों को उस कमरे में ले गए जहां फार्मूले पेन ड्राइव , सीडी और कम्प्युटर में सुरक्षित रखा हुआ था। कमरे के बाहर बड़ा सा ताला लगा हुआ था। शिखा ने कहा यहाँ अभी सुरक्षा गार्ड पहरा में लगा दे। दीपांशु ने कहा यहाँ हर तरफ अंदर और बाहर सीसीटीवी कैमरे लगवा दे। सारी तैयारियां फटाफट कराणे का आदेश दे दिया गया। संस्थान से बाहर निकलकर उसके चारो तरफ की चाहरदीवारी का निरीक्षण करते हुये प्रतिभा ने देखा दीवाल के ऊपर कंटीली तारो से घेराबंदी की गई थी। करीब सौ कदम बाद बाहर घना जंगल था। प्रतिभा ने राजन से कहा सर बाउंड्री वाल के चारों तरफ लाइट कम है। बाउंड्री वाल के चारो कोनो पर इस तरह से लाइट लगवाई जाये जो पास और दूर जंगल तक भी रोशनी दे ताकि किसी भी घुसपैठिए पर नजर रखी जाये। शिखा जो प्रतिभा से जुनियर ओफीसर थी मगर दोनों में काफी दोस्ती थी दोनों एक दूसरे को पार्टनर बोलती थी ने कहा - पार्टनर सीसीटीवी कैमरे बाउंड्री वाल के बाहर भी लगाना होगा। यू आर राइट पार्टनर प्रतिभा ने शिखा के सुझाव का समर्थन करते हुये कहा। सब तरह से संतुष्ट होकर तीनों वहाँ से निकल पड़े। कार दीपांशु ड्राइव कर रहा था। प्रतिभा ने अपने मोबाइल से पाकिस्तान और चीन फोन लगाकर अपने राव के ओफिसरो से कोन्फ्रेंस कर कहा - प्रताप और आकाश आप दोनों ध्यान से मेरी बात सुने - फिर उसने राजन के फार्मूले के चोरी होने की संभावना के बारे में बताते हुये कहा पाकिस्तान और चीन से चार जासूस जो भारत फार्मूले की चोरी करने आ रहे है उनपर निगाह रखना है। जैसे ही वे लोग भारत के लिए निकले तुरंत मुझे उनका फोटो और डीटेल भेज देना है। शिखा ने कहा वाह पार्टनर बहुत अच्छा किया। अगर वे चारों भारत आ गए और मेरे हाथ लग गए तो मैं सबका कचूमर बना दूँगी। दीपांशु ने कहा मैं तो उनको फुटबाल बनाकर खेलूँगा। और मैं क्या करूंगी प्रतिभा ने मुसकुराते हुये पूछा - तुम तो पार्टनर जूडो कराठे और कुंगफू चंपीयन हो उनकी हड्डी पसली एक कर दोगी। और दीपांशु तो एक नम्बर का निसानेबाज़ है। इसका निसाना कभी नहीं चुकता है। चारो अगर इसकी रडार पर आ गए तो फार्मूला चोरी होने से पहले ही चारो की खोपड़ी उड़ा देगा प्रतिभा ने हसते हुये कहा। रास्ते में प्रतिभा ने संस्थान के बारे में डीटेल जानकारी रा निदेशक हरपाल खन्ना को दे दिया और कहा सर मैंने पाकिस्तान और चीन फोन कर अपने ऑफिसर को भी सतर्क रहने बोल दिया है और उनको चारो जासूसो का डीटेल मिलते ही भेजने को कहा है आप भी उनको आदेश दे दे। ठीक है तुम लोग सावधान रहना मैं सबसे बात कर लेता हूँ। खन्ना ने कहा। कुछ ही दिनों में प्रतिभा को पाकिस्तान और चीन के चारों जासूसों का डीटेल मिल गया। उनके भारत आगमन का रूट चार्ट समय और शहर का भी पक्की रिपोर्ट मिल गई। प्रतिभा ने कहा - शिखा और दीपांशु ध्यान से मेरी बात सुनो वे चारों हमारे देश में टुरिस्ट बनकर आ रहे है। चारों दो टीमों में बंट कर आ रहे है। दो लोग मुंबई और दो लोग कोलकाता आएंगे। वहाँ से वे लोग टुरिस्ट की तरह घूमते हुये दिल्ली आएंगे और घटना को अंजाम देंगे। तुम दोनों मुंबई जाओगे और उनके पीछे लगकर उनकी हर हरकत पर निगाह रखना है। मैं कोलकाता जाऊँगी और उन देश के दुश्मनों का क्रियाकर्म कर वही गंगा में बहा दूँगी। ये तो ठीक नहीं कर रही हो पार्टनर मुझे छोड़कर अकेली कोलकता जाओगी मुझे तुम्हारी हमेशा चिंता लगी रहेगी। दीपांशु ने भी शिखा का समर्थन किया। तुम दोनों मेरी चिंता मत करो तुम दोनों तो मेरे बारे में जानते हो जब देश की आन बान और शान की बात आती है मैं दुश्मनों पर अकेली ही काल बनकर टूट पड़ती हूँ। वैसे वहा कोलकाता में मेरी एक सीआईडी की सीनियर ऑफिसर कृति मिश्रा और एक रिस्तेदार सीबीआई ऑफिसर है मिस संतोष अग्रवाल। वे दोनों मुझे बहुत मानते है जब जरूरत पड़ेगी उन दोनों से मदद ले लूँगी। प्रतिभा ने उन दोनों चिंतामुक्त करते हुये कहा। वे दोनों चुप हो गए क्योंकि वे जानते थे देश के लिए इस तरह खतरों से खेलना उनके लिए शान की बात है। हवाई अड्डा पर प्रतिभा ने बाहर निकलते हुये पाकिस्तान के दोनों जासूसों को पहचान लिया। उसने देखा वे दोनों पहले से इंतजार कर रही एक कार में बैठकर निकल गए। प्रतिभा ने एक किराये की टेक्सी को लिया और उनका पीछा करने को कहा। वे दोनों एक फाइब स्टार होटल मून लाइट में पहुँच गए। प्रतिभा ने टेक्सी का भाड़ा चुकाया और रिसेपसन पर पहुँच गई। उसने मैनेजर से उन दोनों के कमरे के बारे में पूछा। उसने बताने में आनाकानी किया। प्रतिभा ने कहा मैं एक पुलिस ऑफिसर हूँ उनकी हरकतें संदेहास्पद है मुझे उनपर निगाह रखनी है। मैनेजर ने तुरंत बताया वे दोनों तीसरी मंजिल के कमरा नंबर तीन सौ तीस में गए है। प्रतिभा ने कहा - मुझे उसी मंजिल पर उनके कमरे के आस पास एक रुम चाहिए। मैनेजर ने उसे तीन सौ पैंतीस नंबर का कमरा बुक कर दिया। प्रतिभा ने उसका एडवांस और अपना पहचान पत्र दिया और एक बैरा लेकर अपने कमरे की तरफ लिफ्ट से चली गई। प्रतिभा अपने कमरे में पहुँचते ही अपना बैग खोला और उसमें से अपना रिवाल्वर , खुफिया कैमरा , माइक्रोफोन और क्लोरोफार्म आदि निकालकर चेक की। उसने फोन कर खन्ना को पाकिस्तान के दोनों जासूसों के बारे में बता दिया और कहा अभी वे दोनों अपने कमरे में गए है वे दोनों मेरी नजर में है सर। ठीक है तुम सावधानी से उनपर निगाह रखो। खन्ना ने कहा। उधर मुंबई में शिखा और दीपांशु ने चीन के दोनों जासूसों का पीछा हवाई अदा से करना शुरू किया। दोनों जासूस एक ट्रेवेलिंग कार से साधारण से होटल में गए। शिखा और दीपांशु भी उनके होटल में जाकर दो कमरा बुक करा लिया। शिखा ने फोन कर प्रतिभा को अपना लोकेसन बताया। प्रतिभा ने उन दोनों की तारीफ करते हुये कहा बहुत खूब पार्टनर लगे रहो उनका पीछा छोड़ना नहीं। प्रतिभा जैसे ही अपने कमरे से बाहर निकली उसने देखा एक सुंदर सी लड़की तीन सौ तैंतीस की तरफ जा रही थी। वो उसे न होटल की कर्मचारी लगी ना बैरा। उसने लपकर उस लड़की के मुंह पर अपना हाथ रख दिया और घसीटते हुये अपने कमरे में खिच लिया। वो लड़की अचानक इस हरकत से घबड़ा गई। प्रतिभा ने उसके मुंह पर हाथ रखे हुये कहा - मैं तुम्हारा मुंह खोल रही हूँ मगर हल्ला मत करना। अगर शोर मचाई तो मैं तुम्हारी खोपड़ी फोड़ दूँगी उसने अपना रिवाल्वर उसकी कनपटी पर सटाते हुए कहा। मुंह खुलते ही वो लड़की लंबी लंबी साँसे लेने लगी काफी घबड़ाई हुई थी। प्रतिभा ने पूछा तुम कौन हो और उस कमरे में क्यों जा रही थी। उस लड़की ने बताया मेरा नाम गुंजन है और मैं एक कॉल गर्ल हूँ मुझे होटल की तरफ से कस्टमर को खुश करने के लिए बुलाया गया था। प्रतिभा ने कहा ठीक है मगर तुम्हें मेरा एक काम करना होगा। मैं एक पुलिस ऑफिसर हूँ मुझे उन दोनों की निगरानी करनी है। तुम इस माइक्रोफोन को उनके कमरे में किसी ऐसे जगह छिपा दो जिसे वे लोग देख नहीं सके और मुझे उनकी बातचीत सुनाई दे सके। एक काम और करना तुम उन दोनों में से किसी एक का मोबाइल नंबर भी लाकर देना मुझे। मगर याद रखना अगर धोखा देने की कोशिश की तो इन दोनों के साथ तुमको भी जेल भेजवा दूँगी। गुंजन ने कहा ठीक है मैडम आप जैसा बोल रही है मैं कर दूँगी। प्रतिभा ने उसे छोड़ दिया। गुंजन जैसे ही उन जासूसों के कमरे में पहुंची वे दोनों अपने मोबाइल पर बीजी थे। उसने मौका देखकर माइक्रोफोन को बेड के पास पड़े एक फूल के गमले में रख दिया। तभी एक जासूस ने उसका स्वागत करते हुये कहा - आ गई तुम क्या पियोगी भिस्की या रम। गुंजन ने कहा - सॉरी सर मैं शराब नहीं पीती। ओके कोई बात नहीं वैसे मासाल्लाह बहुत खूबसूरत हो। गुंजन ने उसका शुक्रिया अदा किया। अगर मैं आप दोनों को इतनी ही पसंद हूँ तो मेरा नंबर ले ले और अपना नंबर दे दे जब भी जरूरत पड़ेगी मुझे फोन कर लेना मैं सेवा में हाजिर हो जाऊँगी। उस जासूस ने अपना मोबाइल नंबर उसे दे दिया। फिर उसने गुंजन से कहा अगर तुम हमारे लिए काम करोगी तो हम तुम्हें मालामाल कर देंगे। तुम्हें भारत के खिलाफ़ काम करना होगा। सॉरी सर मैं अपने धंधे से खुश हूँ मुझे और कोई काम नहीं करना है। तभी उस जासूस जिसका नाम कादिर भुट्टो था उसके मोबाइल पर कुछ आवाज आने लगी। वो चौकना होकर कमरे में चारों तरफ नजर दौड़ाने लगा। उसने अपने साथी सुलेमान खान से कहा इस कमरे में कही माइक्रोफोन रखा हुआ है लग रहा है कोई हमारी बाते सुन रहा है। कादिर ने अपने मोबाइल को लेकर कमरे में चारों तरफ घूमना शुरू किया टेबल पर रखे गमले के पास जाकर रुक गया। उसने उसमें माइक्रोफोन को ढूंढ निकाल और गुस्से से गुंजन की तरफ देखने लगा। तुम भारत की जासूस तो नहीं हो। उसने उसका बाल पकड़ कर डांटते हुए पूछा। मैं कुछ नहीं जानती ये कहा से आया गुंजन ने अपना बाल छुड़ाते हुये कहा। सुलेमान ने अपनी रीवालवर निकाल कर गूंजना पर तान दिया और कहा सच सच बोलो वरना मैं गोली चला दूंगा। तुमको किसने भेजा है। मगर गुंजन ने कहा मेरा विश्वाश करो मैं कुछ नहीं जानती। सुलेमान ने गोली चला दिया गोली गुंजन की छाती में जाकर लगी। धाय की आवाज हुई और गुंजन अपनी छती पकड़कर नीचे कालीन पर गिर पड़ी। उसकी छाती लहूलुहान हो गई। अपने कमरे में प्रतिभा ने माइक्रोफोन से गोली चलने की आवाज सुन ली थी और उनकी बाते भी। उसने फुर्ती से अपना रिवाल्वर निकाला और भागते हुये उस कमरे तक पहचकर दरवाजे के किनारे खड़ी हो गई। थोड़ी ही देर में वे दोनों अपना अपना बेग लिए हुये कमरे से बाहर निकले। प्रतिभा ने दोनों को अपने लात के प्रहार से नीचे गिरा दिया। दोनों फुरती से खड़े हुये और प्रतिभा से भीड़ गए। प्रतिभा ने अपने लातों जुतो से उन दोनों को धुनकर रखा दिया। उन दोनों को लगा इस लड़की से वे पार नहीं पाएंगे वे दोनों लिफ्ट की तरफ भागे। प्रतिभा ने तुरंत नीचे काउंटर पर फोन कर उन दोनों के बारे में बताया और कहा की तुरंत पुलिस को बुलाये वे दोनों किसी कीमत पर भागने न पाये और एक अंबुलेंस भी बुलाने को कहा एक लड़की को इनके कमरे में गोली लगी है। इसके बाद वो भागती हुई कमरे में गई जहां गुंजन अपनी छाती पकड़े दर्द से कराह रही थी। प्रतिभा ने उसका सिर अपनी गोद में रख कर बोली माफ करना तुम्हारी हालत मेरी वजह से हुई है लेकिन चिंता मत करो मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगी। गुंजन ने कराहते हुये कहा मैडम आप अफसोस न करे मैं शरीर जरूर बेचती हूँ मगर देश नहीं बेच सकती इसलिए मैंने उनको कुछ नहीं बताया। वे लोग मुझे भी देश के खिलाफ काम करने के लिए लालच दे रहे थे। प्र्तिभा को उसकी देश भक्ति देखकर बहुत गर्व हुआ उसकी आंखे गीली हो गई। लिफ्ट से निकलते ही दोनों ने अपनी रिवाल्वर लहराते हुये कहा खबरदार अगर किसी ने हमे रोकने की कोशिश किया तो हम उसे गोली मार देंगे। सब लोग डर से इधर उधर हो गए। वे दोनों भागते हुये होटल से बाहर निकल गए और बाहर खड़ी एक गाड़ी के ड्राइवर को धमकाते हुये कहा चलो जल्दी से। वे दोनों उस गाड़ी का दरवाजा खोलकर बैठ गए। ड्राइवर डर से गाड़ी स्टार्ट कर चल पड़ा। उनके जाते ही पुलिस और अंबुलेंस की गाड़ी सायरन बजाती हुई पहुँच गई। प्रतिभा ने पुलिस को अपना परिचय दिया और बताया वे दोनों पाकिस्तानी जासूस है किसी गलत नियत से भारत आए है मैं उनपर नजर रख रही हूँ। आप सब पहले ईस लड़की को अस्पताल भेजवाकर बेहतर इलाज करवाए। और इस शहर के सभी थानों और चेक नाकों पेकटरको सतर्क कर दे वे दोनों बाहर ना जाने पाये। फिर प्रतिभा होटल से भार निकल कर एक भाड़े की कार लेकर हवाई अड्डा की तरफ निकल गई। रास्ते में उसने सीआईडी इंस्पेक्टर कृति मिश्रा को फोन कर उनका हुलिया बताते हुये कहा - दीदी इन दोनो ने अभी अभी होटल में एक लड़की को गोली मारकर है भाग निकले है। इनका पता चलना जरूरी है सभी स्टेशन और हवाई अड्डा पर पता लगवाकर बताए मुझे। कृति ने कहा चिंता मत करो मैं अभी अपने विभाग को सतर्क कर पता लगाती हूँ। प्रतिभा ने सीबीआई ऑफिसर संतोष अगरवाल को फोन कर पूरी घटना बताते हुये कहा आंटी उस लड़की का अपनी देख रेख में इलाज करवाना उसे कुछ होना नहीं चाहिए कॉल गर्ल होते हुये भी वो एक देश भक्त लड़की है। तभी कृति मिश्रा का फोन आया वे दोनों अभी हावड़ा स्टेशन पर देखा गया है पुलिस अभी पहुँचते ही होगी तुम भी जाओ। प्रतिभा ने कार को रेलवे स्टेशन की तरफ मुड़वा दिया। शेष अगले भाग - दो में। प्रतिभा जैसे ही हावड़ा रेलवे स्टेशन पहुंची वहाँ यात्रियों की काफी भीड़ थी। इतनी भीड़ में उन दोनों जासूसों को खोजना बड़ा मुश्किल था। वे दोनों किसी भी ट्रेन में चढ़कर कही भाग सकते थे। तभी हावड़ा दिल्ली राजधानी एक्स्प्रेस के प्लेटफार्म नुंबर दस से खुलने की घोषणा हुई वो लपक कर उसकी एक बोगी में चढ़ गई। उसने टीटी को अपना पहचान पत्र दिखाया और कहा मुझे कोई सीट जल्दी दे। टीटी ने परिचय देखकर तुरंत एक खाली सीट दे दिया थोड़ी देर में केयर टेकर ने उसे चाय नाश्ता लाकर दिया। चाय पीते हुये उसने सोचना शुरू किया आखिर वे दोनों कहा गए होंगे। अगर मेरे हाथ से नीकल गए तो बहुत गड़बड़ हो जाएगी। ट्रेन खुल चुकी थी। प्रतिभा ने मास्क लगाया और अंदर ही अंदर सारी बोगियां चेक करने लगी। एक बोगी में उसने दो यात्रियों को संदिग्ध अवस्था में देखा। उन दोनों ने भी अपने चेहरे पर मास्क लगा रखा था। मगर उसे संदेह था की वे दोनों वही दोनों जासूस हो सकते है। उसने टीटी से आकर अपना शक जाहिर किया और कहा मुझे अगले स्टेशन पर इन दोनों की तलासी लेनी है और अगर सक सही हुआ तो इनको गिरफ्तार भी करना पड़ेगा। मुझे जि आर पी बल के मदद की जरूरत पड़ेगी। आप अभी जी आर पी को सतर्क करे। तुरंत रेलवे पुलिस बल हरकत में आई और उन दोनों की घेराबंदी शुरू कर दी गई। जैसे ही अगले स्टेशन पर ट्रेन रुकी उन दोनों को आने वाले खतरे का आभास हो गया। वे दोनों ट्रेन से उतरने लगे मगर तभी प्रतिभा ने ट्रेन के अंदर ही उनपर अपने लात जुतो से प्रहार करना शुरू कर दिया। रेलवे पुलिस ने भी अपनी रायफले उनपर तान दिया। इतने में एक जासूस ने अपनी रिवाल्वर निकाल कर प्रतिभा पर फायर कर दिया गोली उसके बालो को छूती हुई निकालकर बोगी की दीवाल में जाकर धंस गई वो बाल बाल बची। मौका देखकर दोनों दर्व्व्जे से कूदकर स्टेशन से बाहर की तरफ भाग निकले। प्रतिभा ने रेलवे पुलिस के सीनियर ऑफिसर से कहा - इन दोनों के बारे में सभी रेलवे स्टेशन को अलर्ट कर दे ये दोनों पाकिस्तान के खूंखार जासूस है बचना नहीं चाहिए इतना कहकर वो भी ट्रेन से बाहर कूद गई और उन दोनों के पीछे भागने लगी। मुंबई में शिखा और दिपांशु ने देखा वे दोनों चीनी जासूस एक किराये की टेक्सी लेकर होटल से बाहर निकले थे। उन दोनों ने भी एक टेक्सी लिया और उनका पीछा करने लगे। मगर वे कही रुक नहीं रहे थे इधर उधर भटक रहे थे। दीपांशु ने कहा - समझ में नहीं आ रहा है ये लोग कर क्या रहे है। शिखा ने ने कहा दो ही बाते हो सकती है या तो वे देखना चाहते है कोई उनका पीछा तो नहीं कर रहा है। या उनको पता चल चुका है हम दोनों उनका पीछा कर रहे है। ओह अच्छा अब समझा। ठीक है भटकने देते है दोनों को देखते है कबतक हम दोनों को बेवकूफ बनाते है ये लोग दीपांशु ने हसते हुये कहा। तभी अचानक आगे वाली टेक्सी रुक गई और दोनों जासूस उतरकर बड़ी तेजी से उनकी टेक्सी को दोनों तरफ से घेर लिया और अपना रिवाल्वर तान दिया। शिखा और दीपांशु इस अचानक घेराबंदी से जरा भी नहीं घबड़ाये मगर आश्चर्य जरूर हुआ। दोनों जल्दी बाहर निकलो वरना गोली चला दूंगा उनमे से एक ने अग्रेजी में कहा। इससे पहले की वे कुछ समझ पाते की दीपांशु ने इतनी तेजी से अपनी टेक्सी का पिछला दरवाजा खोला की उसकी बगल में खड़ा चिनी जासूस जोर से चीख पड़ा और वो जमीन पर गिर पड़ा। मगर तबतक बड़ी फुर्ती से दीपांशु ने टेक्सी से कूद कर उस चीनी जासूस को अपने जूतो की नोक से पिटना शुरू कर दिया। दूसरा जासूस जो शिखा की तरफ खड़ा था भागकर दीपांशु पर मुक्का चला दिया मगर तबतक शिखा अपना गेट खोलकर बाहर निकल चुकी थी उसने एक मुक्का ऐसा उस चीनी की नाक पर मारा की उसके नाक से खून की नदी बहने लगी। उन दोनों को शिखा और दीपांशु की फुर्ती और ताकत का अंदाजा नहीं था। वे बुरी तरह चोट खाकर भागते हुये अपनी टेक्सी में आकर बैठ गए। अभी उनकी टेक्सी स्टार्ट भी नहीं हुई थी की दीपांशु की गोली ने उनकी कार का पिछला दोनों टायर पंचर कर दिया। वे दोनों उतरकर भागने लगे। उनकी इस मार पीट की वजह से वहा काफी भीड़ इकट्ठी हो गई थी। इसी भीड़ का फायदा उठाकर दोनों भाग निकले। शिखा ने कहा भागकर कहा जाएँगे ब्च्चु इनको पाताल से भी ढूंढ निकालूंगी। दीपांशु ने कहा ये लोग जरूर दिल्ली जाने की कोशिश करेंगी। हंम दोनो को तुरंत खन्ना साहब को बोलकर सभी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा पर इनकी सूचना भेजवा देनी चाहिए। ठीक है तुम सर से बात कर लो शिखा ने कहा। वे दोनों वापस अपने होटल लौट आए। प्रतिभा जैसे ही बाहर निकली उसने देखा उन वे दोनों एक ऑटो में बैठ चुके थे। उसने भी एक ऑटो लिया और कहा - उस ऑटो का पीछा करो। कुछ दूर जाकर वे दोनों बस स्टेंड पर उतर गए। प्रतिभा ने भी अपना ऑटो कुछ दूर पर रोकवा दिया और उतर गई। उसने किराया चुकाया और उनका पीछा करने लगी। वे दोनों आगरा जानेवाली बस में बैठ चुके थे। मगर दोनों थोड़ी देर में उससे उतर कर दूसरी बस में बैठ गए वो दिल्ली जा रही थी। प्रतिभा ने एक किराये की कार ली और उसमें बैठ गई। जब दिल्ली जानेवाली बस भिड़ भाड़ और शहर से निकलकर हाईवे पर तेज गति से भागने लगी। प्रतिभा उस बस का कार से पीछा करते हुये भागी जा रही थी। उसने अपना इरादा बदल लिया था। अब वो उनको रंगे हाथो गिरफ्तार नहीं करना चाहती थी। या तो वो उन दोनों को गिरफ्तार कर पुलिस के हवाले करना चाहती थी या उन्हें अपनी गोली का निसाना बनाना चाहती थी। क्योकी इन दोनों ने एक निर्दोष लड़की पर गोली चला दिया था पता नहीं बेचारी किस हाल में होगी। सी आई डी इंस्पेक्टर कृति मिश्रा का फोन आया और उसने प्रतिभा से हाल चाल पूछा। उसने अबतक हुई घटनाओं के बारे में बताया और कहा - दीदी मैं अब भी उनका पीछा कर रही हूँ। आपने उन दोनों के बारे में जो जानकारी दिया उसके लिए आभार आपका। अरे तुम थैंक यू मत बोलो तुम एक बहादुर लड़की हो और देश के लिए काम कर रही हो इसलिए तुम्हारी मदद की। कृति ने कहा। प्रतिभा ने फोन लगाकर सी बी आई ऑफिसर संतोष अग्रवाल से गुंजन का हाल चाल पूछा। संतोष ने बताया बेटी प्रतिभा गुंजन अभी भी बेहोशी की हालत में है। उसका इलाज चल रहा है। मगर तुम चिंता मत करो मैं देख रही हूँ। प्रतिभा ने अचानक अपनी कार को तेज भगाने को कहा और कहा - बस से कुछ आगे जाकर रोकने को कहा। ड्राईवर ने ठीक वैसा ही किया। बस का ड्राईवर अचानक सामने कार आ जाने से चौक गया और वो ब्रेक पर खड़ा हो गया। बस के टायर जोरदार आवाज करते हुये और बस को घसीटते हुये ठीक कार के पीछे रोक दिया। अचानक ब्रेक मारे जाने से सभी यात्री हड़बड़ा गए। उन दोनों जासूसो को भी खतरे का आभास हुआ। तभी दनदनाती हुई प्रतिभा अपने हाथों में रिवाल्वर लिए हुये बस में चढ़ गई और जहा वे दोनों जासूस बैठे हुये थे उनपर अपनी रिवाल्वर तान दिया। बस में सारे यात्री डर से एक खूबसूरत और जवान लड़की के हाथो में रिवाल्वर देख कर हैरत से देख रहे थे। प्रतिभा ने ललकारते हुये कहा खबरदार अगर तुम दोनों ने कोई चालाकी की तो मई यही दोनों कोई ढेर कर दूँगी चुपचाप अभी उतारो बस से। अपने हाथ ऊपर करो और उतरो। वे दोनों अपना हाथ ऊपर किए चुपचाप बस से उतर गए। प्रतिभा ने इशारे से बस को जाने कहा। बस के ड्राइवर ने तुरंत एक्सिलेटर पर अपना पैर रखा और तेजी से आगे भगाता चला गया। प्रतिभा ने उन दोनों जासूसों से कहा तुम दोनों मेरे निसाने पर हो कोई चालाकी मत करना वरना जान से हाथ धो बैठोगे। वे दोनों बड़ी हैरत से मासूम दिखने वाली मगर खतरनाक लड़की को देख रहे थे। एक अकेली लड़की ने उनके नाक में दम कर रखा था। लगातार उनके पीछे पड़ी हुई है। सांस भी नहीं लेने दे रही है। उन दोनों ने आंखों ही आंखों में इशारा किया और सड़क के दाहिने साइड जंगल की तरफ छलांग लगा दिये। प्रतिभा ने दंडन दो फायर किए मगर दोनों तबतक उसकी आंखों से ओझल हो गए। प्रतिभा भी जंगल की तरफ दौड़ लगाने ही वाली थी तभी उसके कार के ड्राइवर ने ज़ोर से आवाज देकर उसे रोकते हुए कहा- आगे मात जाइए मैडम उधर घना जंगल है। इसमें काफी जंगली जानवर रहते है। आपको खतरा हो सकता है रुक जाइए। प्रतिभा के पाँव रुक गए और वापस आकर अपनी कार में बैठ गई। जंगल में कुछ दूर जाकर उन दोनों ने रुक कर सांस लिया। एक ने कहा - ये कैसी लड़की है यार हम दोनों के पीछे हाथ धोकर पड़ गई है। भारतीय लड़की भी इतनी खतरनाक हो सकती है हमें अंदाजा नहीं था। कई बार बाल बाल बचे हम दोनों। दूसरे ने कहा - लगता है ये लड़की हम दोनों के मिशन को पूरा करने नहीं देगी। तभी एक के मोबाइल पर एक चीनी जासूस का फोन आया और उसने आप बीटी सुनाते हुये अंग्रेज़ी में कहा - तुम दोनों कहा और कैसे हो। यहाँ मुंबई में हम दोनों को एक लड़का और एक लड़की ने मार मार्कर बड़ा बुरा हाल कर दिया है बड़ी मुशकील से अपनि जान बचाकर भागे है। लगता है भारतीय खुफिया एजेंसी को हमारे आने की खबर मिल गई है इसलिए अपने खतरनाक एजेंटो को हमारे पीछे लगा दिया है। पाकिस्तानी जासूस ने कहा - तुम दोनों से बुरा हाल महज एक लड़ाकी ने हमारी कर दिया है। बड़ी निडर और खतरनाक लड़की है। ऐसी मार मारती है की जान निकाल देती है। हम दोनों अभी एक जंगल में छिपे हुये है तुम दोनों अब सावधान रहना। दूसरे जासूस ने पाकिस्तान मोबाइल से बात किया और अपना पोजीसन बताया। उधर से कहा गया - तुम दोनों सावधानी से किसी तरह दिल्ली पहुँचो वहा तुम्हें हमारे इंडियन एजेंट सहायता के लिए मिल जाएंगे। याद रहे भारत से खाली हाथ मत लौटना। प्रतिभा ने अपने ड्राइवर से दिल्ली चलने को कहा। आगे जाकर उसने एक होटल में खाना खाया और फिर अपनी कार में आकर बैठ गई। रास्ते में उसने शिखा को फोन लगाकर कहा - तुम दोनों अब दिल्ली के लिए निकलो मई भी वही जा रही हूँ फिर उसने अब तक की घटना के बारे में बता दिया। शिखा ने कहा वाह पार्टनर तुमने तो अकेले ही उन दोनों को छठी का दूध याद दिला दिया। यू आर ग्रेट माइ डीयर। शेष अगले भाग - तीन में। दिल्ली में एक अति आवश्यक गोपनीय बैठक चल रही थी। बैठक में रक्षा मंत्री , गृहमंत्री , रा निदेशक हरपाल खन्ना , पुलिस कमिशनर रजनी शर्मा , पुलिश अधिक्षक प्रियंका गुप्ता , केन्द्रीय कृषि शोध संस्थान के अध्यक्ष डॉक्टर राजन यादव और रक्षा सलाहाकर सभी उपस्थित थे। रक्षा मंत्री ने बैठक की शुरुआत करते हुये कहा -हमारे देश के महान युवा वैज्ञानिक डॉ राजन यादव जो फार्मूला बनाया है उसके बारे में आप सभी जानते ही है। लेकिन इस फार्मूले की चोरी कर भारत के साथ कुछ बिदेशी दुश्मनों ने एक षड़यंत्र के तहत अपने जासूस भारत में भेज दिया है। हमारे देश की सबसे बड़ी और विश्वश्नीय खुफिया एजेंसी जो बिदेश मामलो को देखती है को इस फार्मूले की जिम्मेवारी दी गई है। इनके तीन धुरंधर और जाबांज एजेंट प्रतिभा , शिखा और दीपांशु उन जासूसों पर लागातार नजर रखे हुये है। लेकिन इसमें गृह मंत्रालय के सहयोग की आवश्यकता है। गृह मंत्री ने कहा इसके लिए मैंने अपने सबसे ईमानदार और बहादुर पुलिस कमिश्नर रजनी शर्मा और पुलिस अधीक्षक प्रियंका गुप्ता को जिम्मेवारी दिया है ताकि फार्मूले को चोरी होने से बचाया जा सके। रक्षा सलाहकार ने कहा यह फार्मूले की चोरी का मामला ही नहीं बल्कि हमारे देश की आंतरिक सुरक्षा का भी मामला है अगर हम सब मिलकर उस फार्मूले को नहीं बचा सके तो पूरे विश्व में हमारे देश के बारे में गलत संदेश जाएगा और कोई भी दुश्मन देश कभी भी मुंह उठाकर भारत में सेंधा लगाने की कोशिश कर सकता है। कोई भी हमसे डरेगा नहीं और हमारी छवि खराब हो जाएगी। निदेशक खन्ना ने कहा मेरी जानकारी में चीन और पाकिस्तान ने अपने जासूसों को मदद करने हेतु हमारे ही देश के कई लोकल एजेंटो को लगा दिया है जिनके पास सभी आधुनिक हथियार है और वे लोग विदेशों में जाकर प्रशिक्षण ले चुके है। वे सभी हमारे द्वारा चिह्नित किए जा रहे है। मगर वे सभी कभी भी घटना को अंजाम दे सकते है। हम सबको अभी से सावधानी रखनी होगी। इसलिए मैं रक्षा मंत्री जी से सेना की मदद देने का भी अनुरोध करूंगा। रक्षा मंत्री ने कहा मेरी तरफ से जब जैसी सहयोग की जरूरत पड़ेगी मैं देने को तैयार हूँ। पुलिस कमिश्नर रजनी शर्मा ने कहा मैं और प्रियंका अपनी टीम के साथ लगातार संस्थान की निगरानी कर रहे है। हमारे रहते हुये वहाँ कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता। रक्षा सलाहकर ने खन्ना साहब आप अपनी टीम और रजनी शर्मा जी की टीम के साथ आज ही बैठक कर एक रणनीति बना ले ताकि कोई चूक न होने पाये। इसके बाद बैठक समाप्त हो गई। रा के कार्यालय में हरपाल खन्ना और प्रतिभा , शिखा और दीपांशु के अलावा करीब दस लोग और बैठक में सामील थे। खन्ना ने प्रतिभा शिखा और दीपांशु की तारीफ करते हुये कहा - तुम तीनों ने बहुत ही बहादुरी का कार्य किया है। उन दुश्मन देश के जासूसो को भी पता चला दिया की भारतिय जासूस भी किसी से कम नहीं है। उनको अफसोस होता होगा की आखिर वे भारत मे क्यों घुस आए। मुझे तुम तीनों पर गर्व है। प्रतिभा ने कहा सर मुझे कलकता की कॉल गर्ल गुंजन की बहुत चिंता हो रही है। हालांकि मेरी आंटी सी बी आई ऑफिसर संतोष अग्रवाल उसके इलाज में मदद कर रही है मगर आखिर उसने मेरे कहने पर ही इतना बड़ा खतरा उठाया था। उसने अपनी राष्ट्र भक्ति की मिसाल दिया और आज वो अपनी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है। आप अपने स्तर से उसके बेहतर इलाज की व्यवस्था करवाए। खन्ना ने कहा तुम उसकी चिंता मत करो मैंने वहाँ के स्वस्थ मंत्री जी से बात कर लिया है वे अपने स्तर से लगे हुये है ताकि उसकी जान बचाई जा सके। प्रतिभा ने कहा पाकीस्तान के जिन दोनों जासूसों के पीछे मैं लगी हुई थी उसमें से एक का गुंजन ने मुझे मोबाइल नंबर दिया था मुझे। उस नंबर को ट्रेक कर मैं लगातार उनके लोकेसन पर नजर रख रही हूँ। अभी वे दोनों दिल्ली में ही है है। अगर आपका आदेश हो तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाये। खन्ना ने कहा - नहीं अभी नहीं अब जबकि वे लोग दिल्ली आ ही गए है तो उन्हें रंगे हाथों पकड़ा जाये। ताकी हमारे दुश्मन देश हम पर अंगुलि नहीं उठा सके। शिखा ने कहा सर उन दोनों चीनी जासूसों से हमारी मुठ भेड़ होने के बाद अजब वे दोनों भागने में सफल रहे हम दोनों ने उसके कमरे की तलासी लिया जिसमे उनके चीनी गुप्तचर एजेंसी का एजंट होने का सबूत मिला है और कई हथियार भी मिले है। शिखा की बात खत्म होते ही दीपांशु ने सभी जब्त समान टेबल पर रख दिया। खन्ना ने कहा बहुत अच्छा किया तुम दोनों ने। यह सब उनके खिलाफ बड़ा सबूत साबित होगा। इसके बाद सबने आगे की रणनीति पर चर्चा किया और बैठक समाप्त हो गई। बैठक की समाप्ति के बाद खन्ना ने उन तीनों से कहा तुम तीनों सावधानी रखना क्योंकि अब तुम तीनों उनकी नजर में आ चुके हो। वे लोग खुद या अपने इंडियन अजेंट से तुम तीनों पर हमला कर सकते है। प्रतिभा ने कहा सर आप हमारी चिंता न करे। उनकी शामत आएगी की वे सब हम तीनों से भिड़े। इस बार अगर हम तीनों एक साथ उनसे भीड़ गए तो उन चारो को मार मार कर उनका भरत्ता बना देंगे। खन्ना ठहाका मारकर हंसने लगे। सच में तुम तीनों दुश्मनों के लिए आफत हो। तुम सबसे भगवान ही उनकी रक्षा कर पाएँगे। प्रतिभा, शिखा और दीपांशु भी हँसते हुये ऑफिस से बाहर निकल गए। एक सप्ताह बाद दिन के बारह बजे केंद्रीय कृषि शोध संस्थान के अंदर बाहर कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था दिख रही थी। संस्थान का काम सामान्य रूप से चल रहा था। गेट पर हर जाने वाले की कड़ी जांच करने के बाद ही उसे जाने दिया जा रहा था। यह नियमित रूटीन वर्क था। अंदर जहां फार्मूला रखा गया था वहाँ भी बाहर कड़ा पहरा था। वहाँ सिर्फ राजन , रजनी और संस्थान के कर्मचारी ही आ जा पा रहे थे। ऐसा नियम बना दिया गया था। बाहरी किसी को वहाँ जाने की अनुमति नहीं थी। पुलिस कमिश्नर रजनी शर्मा और एस पी प्रियंका गुप्ता भी वहाँ मौजूद थी। प्रियंका बाहर की सुरक्षा देख रही थी और रजनी अंदर की सुरक्षा खुद अपनी निगरानी में देख रही थी। कोई भी जरा सी भी भूल चूक नहीं होने देना चाहती थी। संस्थान के भार कुछ दूर पर कुछ ग्रामीण चरवाहे अपनी गाय भैंसो को चरा रहे थे। साथ में कुछ चरवाहे जंगल में अपनी भेड़ बकरियां भी चरा रहे थे। मगर उनको संस्थान के अंदर बाहर चल रही हलचल से बेपरवाह अपनी धुन में लाठियाँ लेकर जानवरों को चराने में मस्त थे। अचानक संस्थान एक गेट पर पांच बोलेरों गाड़ियाँ बड़ी तेजी से आई और आते ही उनमें सवार लोगों ने सुरक्षा में तैनात जवानों पर गोलियाँ बरसाना शुरू कर दिया। अचानक हुई इस फायरिंग से वहाँ भगदड़ मच गई। हर तरफ अफरा तफरी मच गई। बाहर निगरानी कर रही प्रियंका ने अपना रिवाल्वर निकाल कर एक गाड़ी के पीछे छिपकर अपना पोजीसन ले लिया और डॉ हमला वरों को मार गिराया। जवानों ने भी अपनी बंदूकें उन हमलावरों पर दागना शुरू कर दिया। तभी उन लोगों ने लगातार पाँच बम अंदर बाहर फेंके। हर तरफ धुआं धुआं हो गया। अंदर रजनी शर्मा ने भी मोर्चा संभाल लिया था। गोलियों की परवाह किए बिना अपने जवानों और संस्थान की सुरक्षा में अपनी जान जोखिम में डालते हुये ताबड़ तोड़ फायरिंग शूर कर दी। उसने तीन लोगों को मार गिराया। पाँच लोग अंदर घुस आए थे उसमें से तीन रजनी ने मार गिराया था मगर पाँच और लोग गोलियां बरसाते हुये घुस आए। उनका पीछा करती हुई प्रियंका भी पहुँच गई। रजनी ने उसे डांटते हुये कहा रे तुम क्यों अंदर आ गई यहाँ मैं थी न। क्यों न आऊँ दीदी आप माँ बनने वाली है फिर भी आप देश के लिये यहाँ दुश्मनों से लड़ने चली आई है। तभी रजनी के पेट में दर्द उठा। मगर उसने अपने दर्द की परवाह किए बिना उसने सामने से आते हुये एक हमलावर पर अपनी गोली चला दिया वरना वो प्रियंका को निशाना बना देता। प्रियंका रजनी का हाथ पकड़कर उसे एक सुरक्षित जगह पर ले गई और खुद भी मोरचा संभाल लिया। रजानी ने कहा तुझे बड़ा मेरी फिक्र है मगर तेरी भी तो शादी होने वाली है दो दिन बाद तेरी बारात आनेवाली है और तू भी यहाँ अपनी जान खतरे में डाल कर लड़ रही है। प्रियंका ने कहा दीदी आपकी तरह मेरे लिए भी देश से बड़ा कुछ भी नहीं है। जबतक जिंदा रहूँगी एक भी दुश्मन को नहीं छोडूंगी। और फिर दोनों हमलावरों से लोहा लेने लगी। उधर जंगल में चरवाहे इस गोली बारी से डरकर पेड़ो की ओट में छिप गए। तभी उन सबने देखा पाँच अपराधी किस्म के लोग पाने हाथों में रायफले लिए हुई संस्थान की तरफ बढ़ने लगे। एक चरवाहा लाजों देखने में लड़की मालूम पड़ रही अचानक अपनी जेब से रिवाल्वर निकाली और उनपर फायर कर दी। दो लोग चीख मारकर जमीन पर गिर पड़े। बाकी दोनों चरवाहों ने भी अपनी बंदूकें निकाल लिया बाकी बचे तीन लोगों पर निशाना साधा मगर तबतक वे लोग सावधान हो चुके थे। उलट कर उन तीनों ने भी गोलियाँ चलाना शुरू किया मगर तीनों ने पेड़ो की ओट में अपने आपको बचा लिया। एक चरवाहे लड़के ने अपनी गोली से तीनों अपराधियों के हाथ घाल कर दिया। उनके हथियार जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद तीनों चरवाहों ने उन तीनों अपराधियों को आपने लात जूतों से धुन कर रख दिया। गोलियां चलने की आवाज सुनकर दस और गुंडे हथियार लेकर जंगल की तरफ से आते नजर आए। तीनों चरवाहों ने उन तीनों को मार कर अधमरा करने के बाद उन दस गुंडो से लोहा लेना शुरू किया मगर उनको ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। कुछ ही देर में सेना के पाँच जवानों ने उन दस गुंडो को घेर कर ढेर कर दिया। कुछ देर बाद पाँच लोग संस्थान की तरफ से भागते हुये आए। एक चरवाहे लड़की ने निशाना लगाने से मना किया और कहा इनको जंगल में जाने दे और इनको घेर कर रखना है मगर इनको पता नहीं चलना चाहिए। वे पांचों जंगल के अंदर चले गए और एक खाली सुनसान जगह पर बैठ गए। एक ने अपने बैग से एक लेपटोप निकाला और एक पेन ड्राइव उसमें लगाया और मेल करने लगा। मेल के जाते ही वो खुशी से चिल्लाने लगा। तभी उसके मोबाइल पर फोन आया फोन उठाते ही उसका चेहरा बुझ गया। उसकी सिटी वीटी गुम हो गई। उसने अपना माथा पकड़ लिया। तभी तीनों चरवाहों और पंचों सेना के जवानों ने उनको घेर लिया। प्रतिभा , शिखा और दीपांशु जो चरवाहा के भेष में थे अपने रिवाल्वर उन पर तान दिया। प्रतिभा ने कहा क्यों क्या हुआ तुम्हारे पाकिस्तानी आका की डांट पड़ी क्या। तुम लोग क्या सोच कर भारत आए थे की हमारे रहते फार्मूला चुरा लोगे। फार्मूला तो छोड़ो तुमलोग बिना हमारी मर्जी के एक सुई भी चुरा नहीं सकते। उसमें से चार जासूस थे। दो पाकिस्तानी और दो चीनी। चारों ने अचानक तीनों पर छलांग लगा दिया मगर वे लोग उन तीनों को छु पाते इससे पहले ही उन तीनों ने अपने रिवाल्वर से उनके पैर घायल कर दिये। चारो चीख मारते हुये जमीन पर बैठ गए। शिखा ने कहा तुम सबका खेल खत्म हो गया। अब तुम लोग भारत की गिरफ्त में हो। प्रतीभा ने कहा - मैं लगातार तुम्हारे मोबाइल के जरिये तुम्हें ट्रेक कर रही थी। तुम जिससे जब भी जो भी बात करते थे मुझे पता चल जाता था। तुम्हारी सारी योजना मुझे पता चल गई थी। इसलिए तुम सबको रंगे हाथों पकड़ने की योजना बनाई थी और हमने चरवाहा का भेष बनाया था। तुमने जो पेन ड्राइव में फार्मूला चोरी किया था उसमें फार्मूला था ही नहीं। उसमें हिन्दी और भोजपुरी गाना भरा हुआ था। ओरिजिनल फार्मूला मैंने पहले ही वहा से हटा दिया था। केवल तुम सबको रंगे हाथों पकड़ने के लिए यह सब जाल बिछाया गया था। तभी उन पांचों का पीछा करते हुये पुलिस कमिशनर रजनी शर्मा , एसपी प्रियंका गुप्ता और निदेशक हरपाल खन्ना भी अपने दल बल के साथ पहुँच गए। सबने उन तीनों की खूब तारीफ किया। उन पांचों को गिरफ्तार कर लिया गया। पाँचवाँ दिल्ली निवासी ही था जो उनके एजेंट के रूप में काम करता था। सब लोग जैसे ही संस्थान पहुंचे वहाँ सभी मीडिया वाले पहुँच चुके थे। सबने फटाफट उनका फोटो खींचना शुरू किया और हरपाल खन्ना से सारी जानकारी लिया। खन्ना ने प्रतिभा और रजनी से कहा आप दोनों सारी जानकारी प्रेस को दे दो। अगले दिन सभी अखबारों और चैनलों पर रजनी , प्रियंका , प्रतिभा , शिखा और दीपांशु की बहादुरी की खबरे पूरे विस्तार से दी गई थी। भारत सरकार ने पांचों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। गृह मंत्री और रक्षा मंत्री ने भी सबकी काफी प्रशंसा किया।
उत्तर पूर्वी दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में सोमवार से शुरू हुआ हिंसक प्रदर्शन चौथे दिन प्रवेश कर गया है। आज सुबह कई इलाकों में लोग घरों से निकले और रोजाना की तरह कामकाज के लिए दफ्तर पहुंचे। वहीं, बीती रात को उत्तर पूर्वी दिल्ली के तीन इलाकों में रात को भी आगजनी औऱ तोड़फोड़ की घटना हुई है। इस बीच मृतकों की संख्या 28 पहुंच गई है। 26 लोगों की मौत जीटीबी अस्पताल में हुई और 2 लोगों की जान एलएनजेपी अस्पताल में गई। सुबह छिटपुट घटनाओं के बाद दिनभर शांति रही, लेकिन देर शाम अंधेरा होते-होते कई इलाकों में दंगाइयों का दुस्साहस बढ़ने लगा। देर रात ब्रह्मपुरी, नूर-ए-इलाही और उस्मानपुर के तीसरा पुस्ता इलाके में दंगाइयों ने आगजनी और तोड़फोड़ की है। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के मैदान में उतरने व दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश का असर दिखने लगा है। बुधवार दिनभर कोई बड़ी हिंसा नहीं हुई, हालांकि, अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है।
उत्तर पूर्वी दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में सोमवार से शुरू हुआ हिंसक प्रदर्शन चौथे दिन प्रवेश कर गया है। आज सुबह कई इलाकों में लोग घरों से निकले और रोजाना की तरह कामकाज के लिए दफ्तर पहुंचे। वहीं, बीती रात को उत्तर पूर्वी दिल्ली के तीन इलाकों में रात को भी आगजनी औऱ तोड़फोड़ की घटना हुई है। इस बीच मृतकों की संख्या अट्ठाईस पहुंच गई है। छब्बीस लोगों की मौत जीटीबी अस्पताल में हुई और दो लोगों की जान एलएनजेपी अस्पताल में गई। सुबह छिटपुट घटनाओं के बाद दिनभर शांति रही, लेकिन देर शाम अंधेरा होते-होते कई इलाकों में दंगाइयों का दुस्साहस बढ़ने लगा। देर रात ब्रह्मपुरी, नूर-ए-इलाही और उस्मानपुर के तीसरा पुस्ता इलाके में दंगाइयों ने आगजनी और तोड़फोड़ की है। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के मैदान में उतरने व दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश का असर दिखने लगा है। बुधवार दिनभर कोई बड़ी हिंसा नहीं हुई, हालांकि, अब तक अट्ठाईस लोगों की मौत हो चुकी है।
गिरिश गुप्ता गरियाबंदः- जिला गरियाबन्द क्षेत्रांन्तर्गत् अवैध कारोबारियों (हीरा, गांजा, शराब, जुआ, सट्टा एवं वन्य प्राणी तस्करों पर) शिंकजा कसते हुये गांजा परिवहन करने वालों के ताक में पुलिस द्वारा निरंतर जागरूक होकर अवैध कार्यवाही रोकने हेतु पुलिस कप्तान जे. आर. ठाकुर के दिशा निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री चंद्रेश ठाकुर के मार्गदर्शन, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस गरियाबंद पुष्पेन्द्र नायक के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी सिटी कोतवाली गरियाबंद निरीक्षक सत्येन्द्र सिंह श्याम द्वारा टीम गठित कर एवं स्पेशल टीम गरियाबंद के द्वारा पेट्रोलिंग के दौरान संदिग्ध वाहनो की चेकिंग कार्यवाही की जाती रही है। इसी क्रम में आज दिनांक 24. 01. 2022 को दो युवक एवं दो युवति जो बुलेरा वाहन क्रमांक OR -08- E -2262 में उड़िसा से रायपुर ले जाने के दौरान उक्त जानकारी पर जिला गरियाबंद के स्पेशल टीम एवं थाना गरियाबंद पुलिस द्वारा रोककर पूछताछ करने पर आरोपी 01). सहदेव गिरी पिता प्रकाश गिरी उम्र 23 साल सा. गोलपहाड़ी मेंहदीपाला सैयद पहाड़ीे के निचे थाना घाटीगांव जिला ग्वालियर (म. प्र. ) 02). सुभाष चन्द्र नायक पिता जयानंद नायक उम्र 46 वर्ष हुरियागढ़ थाना जुनागढ़ जिला कालाहाण्डी (उड़िसा) 03). आरबी सोनी पिता दुर्गा सोनी उम्र 26 साल सा. रिसगांव थाना राजाखड़ियार जिला नुवापाड़ा हाल परदेशी पारा बस स्टैण्ड के सामने भवानी पटना जिला कालाहाण्डी(उड़िसा) 04). रूबी सोनी उर्फ मन्नु शर्मा पिता गुलाब सोनी उम्र 22 साल हाल परदेशी पारा बस स्टैण्ड के सामने भवानी पटना जिला कालाहाण्डी(उड़िसा) से कुल 30 किलोग्राम गांजा को उड़िसा से खरीदकर लाना बताये जिसका कीमत 3,00,000/ रूपये एवं बुलेरा वाहन क्रमांक OR. 08. E. 2262 कीमती 10,00,000/रूपये,व चार मोबाईल कुल जुमला 22,000 कुल जुमला कीमती 13,22000/रूपये को पकड़ने में सफलता हासिल हुई। कार्यवाही पश्चात उक्त आरोपियो को रिमाण्ड पर जेल भेजा गया। वरिष्ठ अधिकारियो द्वारां पुलिस को इस प्रकार के अवैध कारोबारियो पर निरंतर कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया। उक्त कार्यवाही में थाना प्रभारी सिटी कोतवाली गरियाबंद निरीक्षक सत्येन्द्र सिंह श्याम, स. उ. नि. टीकाराम ध्रुव, प्रआर कुबेेर बंजारे, आर. मुरारी यादव, स्पेशल टीम, प्रआर. अंगद राव, चुड़ामणी देवता, आर. यादराम, जयप्रकाश, रवि सिन्हा, सुशील पाठक, हरीश साहू, की सराहनीय भूमिका रही।
गिरिश गुप्ता गरियाबंदः- जिला गरियाबन्द क्षेत्रांन्तर्गत् अवैध कारोबारियों शिंकजा कसते हुये गांजा परिवहन करने वालों के ताक में पुलिस द्वारा निरंतर जागरूक होकर अवैध कार्यवाही रोकने हेतु पुलिस कप्तान जे. आर. ठाकुर के दिशा निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री चंद्रेश ठाकुर के मार्गदर्शन, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस गरियाबंद पुष्पेन्द्र नायक के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी सिटी कोतवाली गरियाबंद निरीक्षक सत्येन्द्र सिंह श्याम द्वारा टीम गठित कर एवं स्पेशल टीम गरियाबंद के द्वारा पेट्रोलिंग के दौरान संदिग्ध वाहनो की चेकिंग कार्यवाही की जाती रही है। इसी क्रम में आज दिनांक चौबीस. एक. दो हज़ार बाईस को दो युवक एवं दो युवति जो बुलेरा वाहन क्रमांक OR -आठ- E -दो हज़ार दो सौ बासठ में उड़िसा से रायपुर ले जाने के दौरान उक्त जानकारी पर जिला गरियाबंद के स्पेशल टीम एवं थाना गरियाबंद पुलिस द्वारा रोककर पूछताछ करने पर आरोपी एक). सहदेव गिरी पिता प्रकाश गिरी उम्र तेईस साल सा. गोलपहाड़ी मेंहदीपाला सैयद पहाड़ीे के निचे थाना घाटीगांव जिला ग्वालियर दो). सुभाष चन्द्र नायक पिता जयानंद नायक उम्र छियालीस वर्ष हुरियागढ़ थाना जुनागढ़ जिला कालाहाण्डी तीन). आरबी सोनी पिता दुर्गा सोनी उम्र छब्बीस साल सा. रिसगांव थाना राजाखड़ियार जिला नुवापाड़ा हाल परदेशी पारा बस स्टैण्ड के सामने भवानी पटना जिला कालाहाण्डी चार). रूबी सोनी उर्फ मन्नु शर्मा पिता गुलाब सोनी उम्र बाईस साल हाल परदेशी पारा बस स्टैण्ड के सामने भवानी पटना जिला कालाहाण्डी से कुल तीस किलोग्रामग्राम गांजा को उड़िसा से खरीदकर लाना बताये जिसका कीमत तीन,शून्य,शून्य/ रूपये एवं बुलेरा वाहन क्रमांक OR. आठ. E. दो हज़ार दो सौ बासठ कीमती दस,शून्य,शून्य/रूपये,व चार मोबाईल कुल जुमला बाईस,शून्य कुल जुमला कीमती तेरह,बाईस हज़ार/रूपये को पकड़ने में सफलता हासिल हुई। कार्यवाही पश्चात उक्त आरोपियो को रिमाण्ड पर जेल भेजा गया। वरिष्ठ अधिकारियो द्वारां पुलिस को इस प्रकार के अवैध कारोबारियो पर निरंतर कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया। उक्त कार्यवाही में थाना प्रभारी सिटी कोतवाली गरियाबंद निरीक्षक सत्येन्द्र सिंह श्याम, स. उ. नि. टीकाराम ध्रुव, प्रआर कुबेेर बंजारे, आर. मुरारी यादव, स्पेशल टीम, प्रआर. अंगद राव, चुड़ामणी देवता, आर. यादराम, जयप्रकाश, रवि सिन्हा, सुशील पाठक, हरीश साहू, की सराहनीय भूमिका रही।
ALLAHABAD: हाईकोर्ट के पास गुरुवार दोपहर कुछ लोगों ने अधिवक्ता सुशील पांडेय पर हमला कर दिया। इससे उनका चश्मा टूट गया। घटना से नाराज वकीलों ने हंगामा शुरू कर दिया। मामले की जानकारी होते ही मौके पर पहुंची सिविल लाइंस व कैंट थाने की पुलिस ने तीन लोगों को पकड़ कर मामला दर्ज किया। इसके बाद हंगामा शांत हुआ। पुलिस के अनुसार मुजफ्फरनगर जिले के मंसूरपुर थाना क्षेत्र स्थित हुसैनपुर भोपाड़ा निवासी नेपाल सिंह बेटे सुशील व पोते सचिन के साथ हाईकोर्ट आए थे। हत्या से जुड़े एक मुकदमे में सभी दोपहर को हाईकोर्ट के गेट नंबर एक पर पहुंचे। नेपाल अपना मुकदमा किसी दूसरे अधिवक्ता को देना चाहता था। इसलिए मुकदमे से संबंधित फाइल वकील सुशील पांडेय से वापस लेने गया। वहां दोनों में कहासुनी हुई। अधिवक्ता का आरोप है कि नेपाल ने बेटे व पोते के साथ उन पर हमला किया। इससे उनका चश्मा टूट गया। हमलावरों ने उनके जेब से 15 हजार रुपये भी निकाल लिया और जान से मारने की धमकी दी। हाईकोर्ट के पास अधिवक्ता से मारपीट की जानकारी पर वहां मौजूद अन्य अधिवक्ता मौके पर पहुंच गए। उन्होंने आरोपियों को पकड़ लिया और उनकी पिटाई कर दी। इसी बीच सूचना पर सिविल लाइंस और कैंट पुलिस मौके पर पहुंच गई। आरोपितों को कैंट थाने लाया गया। प्रभारी इंस्पेक्टर कैंट अंबिका कुमारी ने बताया कि अधिवक्ता की तहरीर पर तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में नैनी जेल भेज दिया।
ALLAHABAD: हाईकोर्ट के पास गुरुवार दोपहर कुछ लोगों ने अधिवक्ता सुशील पांडेय पर हमला कर दिया। इससे उनका चश्मा टूट गया। घटना से नाराज वकीलों ने हंगामा शुरू कर दिया। मामले की जानकारी होते ही मौके पर पहुंची सिविल लाइंस व कैंट थाने की पुलिस ने तीन लोगों को पकड़ कर मामला दर्ज किया। इसके बाद हंगामा शांत हुआ। पुलिस के अनुसार मुजफ्फरनगर जिले के मंसूरपुर थाना क्षेत्र स्थित हुसैनपुर भोपाड़ा निवासी नेपाल सिंह बेटे सुशील व पोते सचिन के साथ हाईकोर्ट आए थे। हत्या से जुड़े एक मुकदमे में सभी दोपहर को हाईकोर्ट के गेट नंबर एक पर पहुंचे। नेपाल अपना मुकदमा किसी दूसरे अधिवक्ता को देना चाहता था। इसलिए मुकदमे से संबंधित फाइल वकील सुशील पांडेय से वापस लेने गया। वहां दोनों में कहासुनी हुई। अधिवक्ता का आरोप है कि नेपाल ने बेटे व पोते के साथ उन पर हमला किया। इससे उनका चश्मा टूट गया। हमलावरों ने उनके जेब से पंद्रह हजार रुपये भी निकाल लिया और जान से मारने की धमकी दी। हाईकोर्ट के पास अधिवक्ता से मारपीट की जानकारी पर वहां मौजूद अन्य अधिवक्ता मौके पर पहुंच गए। उन्होंने आरोपियों को पकड़ लिया और उनकी पिटाई कर दी। इसी बीच सूचना पर सिविल लाइंस और कैंट पुलिस मौके पर पहुंच गई। आरोपितों को कैंट थाने लाया गया। प्रभारी इंस्पेक्टर कैंट अंबिका कुमारी ने बताया कि अधिवक्ता की तहरीर पर तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने चौदह दिन की न्यायिक अभिरक्षा में नैनी जेल भेज दिया।
Don't Miss! असिन के बेडरूम मे सलमान! फिल्म लंदन ड्रीम्स में काम करते हुए सलमान खान और असिन के बीच कुछ पकने लगा है। मुम्बई के टैबलाइड के अनुसार सलमान ने असिन को मुम्बई में रहने के लिए एक फ्लैट भी गिफ्ट किया है। अब इन दोनो के बीच क्या खिचड़ी पक रही है यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन इस बात से कैट को परेशानी जरूर हो सकती है।
Don't Miss! असिन के बेडरूम मे सलमान! फिल्म लंदन ड्रीम्स में काम करते हुए सलमान खान और असिन के बीच कुछ पकने लगा है। मुम्बई के टैबलाइड के अनुसार सलमान ने असिन को मुम्बई में रहने के लिए एक फ्लैट भी गिफ्ट किया है। अब इन दोनो के बीच क्या खिचड़ी पक रही है यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन इस बात से कैट को परेशानी जरूर हो सकती है।
पर रहे घूँट जब दो जा लुका कहीं नटखट साकी ।। संगी सब चलनेवाले थे, थे, था बुझने को तैयार दिया; तब 'हाय ! हाय ! क्या किया !!" सोचकर कोप अचानक उठा दिया । वह मस्ती मेरी हुई चूर, वे स्वर्ग जा पड़े कहीं दूर । में छुईमुई-सी लज्जित थी, कहती थी- "प्यारे, प्रारण, पिया !" उस रूप-ज्योति ने श्री चुपके इतने में मुझे उमार लिया। भगिनी-द्वय ( कुसुम-सुधा ) लखनऊ की दो शिक्षित कवयित्रियाँ -अभिन्न हृदय वहनें श्रीमती सावित्री दुलारेलाल 'कुसुम' एम् ए० और श्रीमती सरस्वती रामकृष्ण डालमिया 'सुधा' एम्० ए०, शास्त्री भाव-पूर्ण और नवीन ढंग की रचना लिखने में अपनी सुंदर प्रतिभा का परिचय दे रही हैं। कविताओं में मौलिकता हैं, और हृदयस्पर्शी भावनाओं का मार्मिक चित्रण । अनुभूति की अभिव्यक्ति भी कुछ रचनाओं में सुंदरता में प्रकट हुई है । भाषा स्वच्छ और स्पष्ट है। इन बहनों के माता-पिता ऊँचे दर्जे के, हृदयवान्, उदार विचारों के, सुलके हुए व्यक्ति हैं, पुराण-पथी नहीं। उनका ही प्रभाव दोनो बहनों पर पड़ा है। श्री एम्० ची० सिंह कई भाषाओं के पंडित, काव्य-रसिक और हिंदी-प्रेमी सज्जन हैं, और अपनी इन होनहार प्रिय पुत्रियों को काव्य-कला की ओर रुचि देखकर निरंतर उन्हें उत्साहित करते रहे हैं। दोनो बहनें अनेक पदक पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं। श्रीमती सावित्रीजी 'सुधा' की श्री श्रीमती सरस्वतीजी 'बाल-विनोद' की संपादिका हैं। उनकी एक-एक रचना क्रम से यहाँ दी जाती है
पर रहे घूँट जब दो जा लुका कहीं नटखट साकी ।। संगी सब चलनेवाले थे, थे, था बुझने को तैयार दिया; तब 'हाय ! हाय ! क्या किया !!" सोचकर कोप अचानक उठा दिया । वह मस्ती मेरी हुई चूर, वे स्वर्ग जा पड़े कहीं दूर । में छुईमुई-सी लज्जित थी, कहती थी- "प्यारे, प्रारण, पिया !" उस रूप-ज्योति ने श्री चुपके इतने में मुझे उमार लिया। भगिनी-द्वय लखनऊ की दो शिक्षित कवयित्रियाँ -अभिन्न हृदय वहनें श्रीमती सावित्री दुलारेलाल 'कुसुम' एम् एशून्य और श्रीमती सरस्वती रामकृष्ण डालमिया 'सुधा' एम्शून्य एशून्य, शास्त्री भाव-पूर्ण और नवीन ढंग की रचना लिखने में अपनी सुंदर प्रतिभा का परिचय दे रही हैं। कविताओं में मौलिकता हैं, और हृदयस्पर्शी भावनाओं का मार्मिक चित्रण । अनुभूति की अभिव्यक्ति भी कुछ रचनाओं में सुंदरता में प्रकट हुई है । भाषा स्वच्छ और स्पष्ट है। इन बहनों के माता-पिता ऊँचे दर्जे के, हृदयवान्, उदार विचारों के, सुलके हुए व्यक्ति हैं, पुराण-पथी नहीं। उनका ही प्रभाव दोनो बहनों पर पड़ा है। श्री एम्शून्य चीशून्य सिंह कई भाषाओं के पंडित, काव्य-रसिक और हिंदी-प्रेमी सज्जन हैं, और अपनी इन होनहार प्रिय पुत्रियों को काव्य-कला की ओर रुचि देखकर निरंतर उन्हें उत्साहित करते रहे हैं। दोनो बहनें अनेक पदक पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं। श्रीमती सावित्रीजी 'सुधा' की श्री श्रीमती सरस्वतीजी 'बाल-विनोद' की संपादिका हैं। उनकी एक-एक रचना क्रम से यहाँ दी जाती है
अमरावती/दि. 17- अरविंद सहकारी बैंक मर्या. की स्थानीय राजापेठ शाखा का आठवां वर्धापन दिवस कल बुधवार 16 फरवरी को समारोहपूर्वक मनाया गया. श्री शिवाजी शिक्षा संस्था के कोषाध्यक्ष दिलीपबाबू इंगोले की अध्यक्षता में आयोजीत इस समारोह में बतौर प्रमुख अतिथी दैनिक अमरावती मंडल व दैनिक मातृभुमि के संपादक अनिल अग्रवाल, अमरावती जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष सुरेश साबले, पूर्व राज्यमंत्री डॉ. सुनील देशमुख उपस्थित थे. इस अवसर पर उपस्थित गणमान्यों द्वारा दीप प्रज्वलन करते हुए स्व. अरविंद देशमुख की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया. साथ ही अपने समयोचित विचार व्यक्त करते हुए बैंक को भविष्य हेतु अपनी शुभकामनाएं दी गई. इस अवसर पर सर्वश्री धनंजय बंड, डॉ. विकास वाडेकर, डॉ. नितीन गावंडे, संदीप सोनी, कल्याणी विक्रम वसू, विजय हरवानी, डॉ. शोभा पोटोडे, एड. मिदेश काकड व जवंजाल सहित शहर के अनेकों गणमान्य नागरिक प्रमुख रूप से उपस्थित थे. सभी उपस्थित गणमान्यों का शाखा संचालक प्रकाश मक्रमपुरे सहित शाखा व्यवस्थापक एवं बैंक के सभी कर्मचारियों द्वारा भावपूर्ण स्वागत किया गया.
अमरावती/दि. सत्रह- अरविंद सहकारी बैंक मर्या. की स्थानीय राजापेठ शाखा का आठवां वर्धापन दिवस कल बुधवार सोलह फरवरी को समारोहपूर्वक मनाया गया. श्री शिवाजी शिक्षा संस्था के कोषाध्यक्ष दिलीपबाबू इंगोले की अध्यक्षता में आयोजीत इस समारोह में बतौर प्रमुख अतिथी दैनिक अमरावती मंडल व दैनिक मातृभुमि के संपादक अनिल अग्रवाल, अमरावती जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष सुरेश साबले, पूर्व राज्यमंत्री डॉ. सुनील देशमुख उपस्थित थे. इस अवसर पर उपस्थित गणमान्यों द्वारा दीप प्रज्वलन करते हुए स्व. अरविंद देशमुख की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया. साथ ही अपने समयोचित विचार व्यक्त करते हुए बैंक को भविष्य हेतु अपनी शुभकामनाएं दी गई. इस अवसर पर सर्वश्री धनंजय बंड, डॉ. विकास वाडेकर, डॉ. नितीन गावंडे, संदीप सोनी, कल्याणी विक्रम वसू, विजय हरवानी, डॉ. शोभा पोटोडे, एड. मिदेश काकड व जवंजाल सहित शहर के अनेकों गणमान्य नागरिक प्रमुख रूप से उपस्थित थे. सभी उपस्थित गणमान्यों का शाखा संचालक प्रकाश मक्रमपुरे सहित शाखा व्यवस्थापक एवं बैंक के सभी कर्मचारियों द्वारा भावपूर्ण स्वागत किया गया.
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1992 से लेकर 2000 तक की सभी फिल्मों में जॉनी लीवर काम करते नजर आए। जॉनी लीवर का असली नाम जॉनी प्रकाश है। जॉनी लीवर को फिल्म स्टार की मिमिक्री करने में महारत हासिल है। जॉनी का जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ था। उन्हें हिंदी नहीं आती थी। जॉनी के पिता प्रकाश राव जनमूला हिंदुस्तान लीवर फैक्ट्री में काम करते थे। फिल्म स्टार की मिमिक्री करने की खासियत ने उन्हें स्टेज शो करने का मौका दिया। ऐसे ही एक स्टेज शो में सुनील दत्त की उन पर नजर पड़ी और उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिल गया। करीब 350 फिल्मों में काम कर चुके जॉनी लीवर को 13 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामाकंन मिल चुका है। जॉनी बेहद गरीब परिवार से थे ऐसे में परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए सातवीं क्लास तक पढ़ने के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी। जॉनी पहले गली गली घूमकर पेन बेचा करते थे। इसके बाद वो अपने पिता के साथ हिंदुस्तान लीवर में काम करने लगे। यहां भी वो एक्टिंग और कॉमेडी कर लोगों को हंसाया करते थे। यहीं पर उनको जॉनी लीवर नाम दिया गया। एक इंटरव्यू में जॉनी ने बताया था- "एक स्टेज शो में जब मुझे एकदम से स्टेज पर फेंका गया, तो मेरे सामने अमिताभ बच्चन थे। मेरा वह एक कॉमेडी का पीस इतना बढ़िया हुआ कि पूरे हॉल में जॉनी-जॉनी के नारे लगने लगे। अगले दिन अख़बारों में एक जगह बच्चन की फोटो थी, तो दूसरी जगह मेरी। " अपने जीवन का सबसे खुशनुमा पल जॉनी उसे मानते हैं जब अमरीका में एक शो के बाद लोग उनसे ऑटोग्राफ मांग रहे थे। ऐसे ही एक स्टेज शो में सुनील दत्त की नजर उनपर पड़ी। उन्होंने जॉनी लीवर को फिल्म 'दर्द का रिश्ता' में पहला ब्रेक दिया। एक बार जॉनी का ये सिलसिला शुरू हुआ तो आज तक खत्म नहीं हो पाया है। कई फिल्मों में वो सपोर्टिंग एक्टर के तौर पर नजर आए। दर्शकों ने उनकी कॉमेडी को हीरो से ज्यादा पसंद किया। कई सालों तक तो डायरेक्टर्स फिल्मों में उनसे मिमिक्री ही करवाते रहे। जॉनी की कॉमिक टाइमिंग इतनी कमाल की थी कि लोग सेट पर उनकी एक्टिंग देख हंस-हंस के लोट-पोट हो जाते थे। साल 2000 में जॉनी की 25 फिल्में रिलीज हुई थीं। हिंदी सिनेमा में बेशक अब कॉमेडियन की जगह लगभग गायब हो चुकी है। अब एक ही हीरो रोमांस, एक्शन और कॉमेडी के लिए काफी है लेकिन 90 के दशक के फिल्मों में कॉमेडियन की भूमिका में बेहतरीन कामयाबी अगर किसी ने पाई तो वो थे जॉनी लीवर।
एक हज़ार नौ सौ बानवे से लेकर दो हज़ार तक की सभी फिल्मों में जॉनी लीवर काम करते नजर आए। जॉनी लीवर का असली नाम जॉनी प्रकाश है। जॉनी लीवर को फिल्म स्टार की मिमिक्री करने में महारत हासिल है। जॉनी का जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ था। उन्हें हिंदी नहीं आती थी। जॉनी के पिता प्रकाश राव जनमूला हिंदुस्तान लीवर फैक्ट्री में काम करते थे। फिल्म स्टार की मिमिक्री करने की खासियत ने उन्हें स्टेज शो करने का मौका दिया। ऐसे ही एक स्टेज शो में सुनील दत्त की उन पर नजर पड़ी और उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिल गया। करीब तीन सौ पचास फिल्मों में काम कर चुके जॉनी लीवर को तेरह बार फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामाकंन मिल चुका है। जॉनी बेहद गरीब परिवार से थे ऐसे में परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए सातवीं क्लास तक पढ़ने के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी। जॉनी पहले गली गली घूमकर पेन बेचा करते थे। इसके बाद वो अपने पिता के साथ हिंदुस्तान लीवर में काम करने लगे। यहां भी वो एक्टिंग और कॉमेडी कर लोगों को हंसाया करते थे। यहीं पर उनको जॉनी लीवर नाम दिया गया। एक इंटरव्यू में जॉनी ने बताया था- "एक स्टेज शो में जब मुझे एकदम से स्टेज पर फेंका गया, तो मेरे सामने अमिताभ बच्चन थे। मेरा वह एक कॉमेडी का पीस इतना बढ़िया हुआ कि पूरे हॉल में जॉनी-जॉनी के नारे लगने लगे। अगले दिन अख़बारों में एक जगह बच्चन की फोटो थी, तो दूसरी जगह मेरी। " अपने जीवन का सबसे खुशनुमा पल जॉनी उसे मानते हैं जब अमरीका में एक शो के बाद लोग उनसे ऑटोग्राफ मांग रहे थे। ऐसे ही एक स्टेज शो में सुनील दत्त की नजर उनपर पड़ी। उन्होंने जॉनी लीवर को फिल्म 'दर्द का रिश्ता' में पहला ब्रेक दिया। एक बार जॉनी का ये सिलसिला शुरू हुआ तो आज तक खत्म नहीं हो पाया है। कई फिल्मों में वो सपोर्टिंग एक्टर के तौर पर नजर आए। दर्शकों ने उनकी कॉमेडी को हीरो से ज्यादा पसंद किया। कई सालों तक तो डायरेक्टर्स फिल्मों में उनसे मिमिक्री ही करवाते रहे। जॉनी की कॉमिक टाइमिंग इतनी कमाल की थी कि लोग सेट पर उनकी एक्टिंग देख हंस-हंस के लोट-पोट हो जाते थे। साल दो हज़ार में जॉनी की पच्चीस फिल्में रिलीज हुई थीं। हिंदी सिनेमा में बेशक अब कॉमेडियन की जगह लगभग गायब हो चुकी है। अब एक ही हीरो रोमांस, एक्शन और कॉमेडी के लिए काफी है लेकिन नब्बे के दशक के फिल्मों में कॉमेडियन की भूमिका में बेहतरीन कामयाबी अगर किसी ने पाई तो वो थे जॉनी लीवर।
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेताओं में शामिल अजय देवगन का आज जन्मदिन है. अजय का जन्म 2 अप्रैल 1969 को दिल्ली में हुआ था तथा उन्होंने बॉलीवुड की अनगिनत सफलतम फिल्मों में अपना दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीता है. उनका बॉलीवुड का सफरनामा भी काफी शानदार रहा है तथा वे फिल्मों में अपने एक्शन किरदारों के साथ ही हास्य अभिनेता के रूप में भी दर्शकों के सामने आ चुके है. जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया है. अजय देवगन को उनके सफल फ़िल्मी करियर के चलते उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चूका है. अभिनेता अजय देवगन की फैमिली का भी काफी गहरा बॉलीवुड कनेक्शन रहा है. अजय देवगन के पिता वीरु देवगन एक स्टंट कोरियोग्राफर और एक्शन फिल्म के डायरेक्टर हैं और उनकी मां वीना एक फिल्म प्रोड्यूसर हैं. उनके भाई अनिल देवगन भी एक हिंदी फिल्म डायरेक्टर हैं. सभी जानते हैं कि अजय देवगन ने वर्ष 1991 में फिल्म 'फूल और कांटे' से बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया था. परन्तु अजय ने इससे पहले बॉलीवुड फिल्म 'मेरी प्यारी बहना' में मिथुन चक्रवती के बचपन का किरदार निभाया था. 'फूल और कांटे' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर अवार्ड मिला था. अजय देवगन ने अभिनेत्री काजोल से शादी की है तथा उनके दो बच्चे है. अजय और काजोल की जोड़ी बॉलीवुड की सफल जोडियो में से एक मानी जाती है. दोनों ने हमेशा एकदूसरे का साथ दिया है. हाल ही में कजोल ने फिल्म 'दिलवाले' से बॉलीवुड में वापसी की थी जिसमें कई बार अजय उनका हौसला बढाते नजर आये थे.
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेताओं में शामिल अजय देवगन का आज जन्मदिन है. अजय का जन्म दो अप्रैल एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर को दिल्ली में हुआ था तथा उन्होंने बॉलीवुड की अनगिनत सफलतम फिल्मों में अपना दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीता है. उनका बॉलीवुड का सफरनामा भी काफी शानदार रहा है तथा वे फिल्मों में अपने एक्शन किरदारों के साथ ही हास्य अभिनेता के रूप में भी दर्शकों के सामने आ चुके है. जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया है. अजय देवगन को उनके सफल फ़िल्मी करियर के चलते उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चूका है. अभिनेता अजय देवगन की फैमिली का भी काफी गहरा बॉलीवुड कनेक्शन रहा है. अजय देवगन के पिता वीरु देवगन एक स्टंट कोरियोग्राफर और एक्शन फिल्म के डायरेक्टर हैं और उनकी मां वीना एक फिल्म प्रोड्यूसर हैं. उनके भाई अनिल देवगन भी एक हिंदी फिल्म डायरेक्टर हैं. सभी जानते हैं कि अजय देवगन ने वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में फिल्म 'फूल और कांटे' से बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया था. परन्तु अजय ने इससे पहले बॉलीवुड फिल्म 'मेरी प्यारी बहना' में मिथुन चक्रवती के बचपन का किरदार निभाया था. 'फूल और कांटे' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर अवार्ड मिला था. अजय देवगन ने अभिनेत्री काजोल से शादी की है तथा उनके दो बच्चे है. अजय और काजोल की जोड़ी बॉलीवुड की सफल जोडियो में से एक मानी जाती है. दोनों ने हमेशा एकदूसरे का साथ दिया है. हाल ही में कजोल ने फिल्म 'दिलवाले' से बॉलीवुड में वापसी की थी जिसमें कई बार अजय उनका हौसला बढाते नजर आये थे.
डॉयचे वेले के एक पत्रकार की तलाश में तालिबान घर-घर जाकर तलाशी ले रहे थे। यह पत्रकार अब जर्मनी में काम करते हैं। इस तलाशी के दौरान पत्रकार के दो रिश्तेदारों को गोली मार दी गई जिनमें से एक की मौत हो गई। पीएम मोदी ने कहा कि यह मंदिर आज भी पूरी दुनिया के सामने यह आह्वान कर रहा है कि सत्य को असत्य से हराया नहीं जा सकता। आस्था को आतंक से कुचला नहीं जा सकता। इस मंदिर को सैकड़ों साल के इतिहास में कितनी ही बार तोड़ा गया, मूर्तियों को खंडित किया गया। लेकिन इसे जितनी ही बार गिराया, यह उतनी ही बार खड़ा हो गया। जिला अस्पताल के मानसिक रोग ओपीडी में प्रतिदिन 8-10 मरीज ऐसे पहुंच रहे हैं। जिनको नींद न आना, चिंता, अवसाद,डर और तनाव ने घेरा हुआ है। केंद्र सरकार के इस फैसले को लेकर आने वाले दिनों में दिव्यांग जनों की ओर से विरोध देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि इन सेवाओं में आमतौर पर फील्डवर्क होता है। शायद इसी वजह से केंद्र सरकार ने इनमें दिव्यांग आरक्षण को खत्म करने का फैसला लिया है। तालिबान पर कब्जा जमाने के बाद आतंकी संगठन के लड़ाकों ने अफगानिस्तान में घरों की घर-घर तलाशी ली। रिपोर्ट की मानें तो एनडीएस खुफिया एजेंसी के लिए काम करने वाले अफगानों की पहचान करने के लिए तालिबान यह तलाशी ले रहा है।
डॉयचे वेले के एक पत्रकार की तलाश में तालिबान घर-घर जाकर तलाशी ले रहे थे। यह पत्रकार अब जर्मनी में काम करते हैं। इस तलाशी के दौरान पत्रकार के दो रिश्तेदारों को गोली मार दी गई जिनमें से एक की मौत हो गई। पीएम मोदी ने कहा कि यह मंदिर आज भी पूरी दुनिया के सामने यह आह्वान कर रहा है कि सत्य को असत्य से हराया नहीं जा सकता। आस्था को आतंक से कुचला नहीं जा सकता। इस मंदिर को सैकड़ों साल के इतिहास में कितनी ही बार तोड़ा गया, मूर्तियों को खंडित किया गया। लेकिन इसे जितनी ही बार गिराया, यह उतनी ही बार खड़ा हो गया। जिला अस्पताल के मानसिक रोग ओपीडी में प्रतिदिन आठ-दस मरीज ऐसे पहुंच रहे हैं। जिनको नींद न आना, चिंता, अवसाद,डर और तनाव ने घेरा हुआ है। केंद्र सरकार के इस फैसले को लेकर आने वाले दिनों में दिव्यांग जनों की ओर से विरोध देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि इन सेवाओं में आमतौर पर फील्डवर्क होता है। शायद इसी वजह से केंद्र सरकार ने इनमें दिव्यांग आरक्षण को खत्म करने का फैसला लिया है। तालिबान पर कब्जा जमाने के बाद आतंकी संगठन के लड़ाकों ने अफगानिस्तान में घरों की घर-घर तलाशी ली। रिपोर्ट की मानें तो एनडीएस खुफिया एजेंसी के लिए काम करने वाले अफगानों की पहचान करने के लिए तालिबान यह तलाशी ले रहा है।
कोई दूसरा नहीं है। अक्षुण्ण रखा जाता है, यह कोई कैक्टस से सीखे। ज़मीन बंजर हो या सीलनयुक्त, पहाड़ की तलहटी हो या शिखर, कुछ हवाओं में खुशबू बिखेरते हैं। कुछ कैक्टस सुबह ताज़ा, जाने को बेताब दिखते हैं। कैक्टस बड़े काम की चीज़ है और इसके औषधीय गुण भी हैं। रस के ज़रिए शराब का नशा करने वालों के लिए 'हैंगओवर' मुक्त पाया। से कराया गया था। यह कंपनी 'हैंगओवर प्रिवेंशन फारमूला' मात्रा को नियंत्रित करता है। होने के कगार पर हैं तो कई प्रजातियाँ सहज सुलभ हैं। मामले में सबसे आगे है। मध्यप्रदेश में सैलाना, पश्चिमी बंगाल में कालिंगपांग, फलने-फूलने के लिए जिस तरह की मिट्टी और जलवायु चाहिए, कैक्टसों की बहार आ सकती है।
कोई दूसरा नहीं है। अक्षुण्ण रखा जाता है, यह कोई कैक्टस से सीखे। ज़मीन बंजर हो या सीलनयुक्त, पहाड़ की तलहटी हो या शिखर, कुछ हवाओं में खुशबू बिखेरते हैं। कुछ कैक्टस सुबह ताज़ा, जाने को बेताब दिखते हैं। कैक्टस बड़े काम की चीज़ है और इसके औषधीय गुण भी हैं। रस के ज़रिए शराब का नशा करने वालों के लिए 'हैंगओवर' मुक्त पाया। से कराया गया था। यह कंपनी 'हैंगओवर प्रिवेंशन फारमूला' मात्रा को नियंत्रित करता है। होने के कगार पर हैं तो कई प्रजातियाँ सहज सुलभ हैं। मामले में सबसे आगे है। मध्यप्रदेश में सैलाना, पश्चिमी बंगाल में कालिंगपांग, फलने-फूलने के लिए जिस तरह की मिट्टी और जलवायु चाहिए, कैक्टसों की बहार आ सकती है।
निर्यात की संरचना देश के निर्यात संरचना में एक विशिष्ट परिवर्तन प्रमाणित किया गया है। निर्यात संरचना के उपनिवेशी प्रतिभा के विपरीत निर्यात व्यापार के संरचना में भी विशिष्ट परिवर्तन ज्ञात हुआ है। कई नये वस्तु मुख्यतः अर्धनिर्मित और निर्मित निर्यात सूची में जोडे गये हैं। इसने कुछ परम्परागत वस्तुओं के निर्यात पर भारी मुनाफे को कम कर दिया है जैसे- चाय, रूई, जूट, मसाले, चमड़े इत्यादि जो कुल आय के 50% से भी ज्यादा प्रदान करते हैं। 1965-66 में भी भारत के 810 करोड़ रूपये के कुल निर्यात में जूट, चाय, सूती वस्त्र, अभ्रक और मैंगनीज के निर्यातों का भाग लगभग आधा था। पिछले लगभग दस वर्षों में निर्यात व्यापार की रचना बदली है। आज भी जूट, चाय और सूती वस्त्र भारत के निर्यात व्यापार की मुख्य वस्तुएँ हैं। लेकिन अब भारत चीनी, तंबाकू, काजू, खली, चमडे के तैयार माल, इंजीनियरिंग उपकरणों, रसायनिक वस्तुओं और मछली तथा उससे तैयार की जाने वाली विविध वस्तुओं का निर्यात बडी मात्रा में कर रहा है। भारत अब लगभग 3000 बड़ी छोटी वस्तुओं का निर्यात करता है जबकि आज से पच्चीस वर्ष पहले निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की संख्या 50 के लगभग थी। देश से जल, थल और वायुमार्ग द्वारा जिन प्रमुख वस्तुओं का निर्यात किया जाता है वे निम्न हैं- पटसन की वस्तुएँ (सूत आदि के अतिरिक्त), चाय, सूती वस्त्र (सूत आदि के अतिरिक्त अन्य वस्त्र), सूती वस्त्र (सूती वस्त्र और पटसन को छोड़कर), वस्त्र की बनी चीजें (सूती तथा पटसन के वस्त्र, ऊनी कालीन, चटाई, गलीचे आदि को छोड़कर), सूत और धागा, अलोह धातुओं के अयस्क और साँद्र अयस्क, चमड़ा, कपास ( रद्दी कपास आदि छोड़कर), ताजे फल तथा गिरियाँ (तेल वाली गिरियों को छोड़कर), कच्ची वनस्पति जन्य सामग्री (अखाद्य), चीनी (सीरा सहित ), लौह अयस्क और सॉंन्द्र अयस्क, कच्चा तम्बाकू, वनस्पति तेल (निर्गंधीय), कच्चे खनिज पदार्थ (कोयला, पैट्रोल, उर्वरक तथा रत्नों को छोड़कर), ऊनी कालीन, गलीचे और चटाई आदि, लोहा तथा इस्पात, कहवा, चमड़ा तथा खालें (कच्ची), पैट्रोलियम पदार्थ, कोयला, कोक तथा कोयला चूरे की ईटें आदि भारत के निर्यात में परम्परागत निर्यातों का योगदान कम होता जा रहा है और कुछ गैर-परम्परागत वस्तुओ जैसे इन्जीनियरी का सामान, रसायन, खनिज, ईधन, लोहा एवं इस्पात, हस्तशिल्प के सामान आदि का निर्यात बढ़ता जा रहा है। भारत अपने योजनाबद्ध आर्थिक विकास के फलस्वरूप अनेक महत्वपूर्ण वस्तुओं से निर्यात की स्थिति में आ गया है। कृषि सम्बन्धी मशीनरी और औजार, हाथ-पम्प, स्टील फर्नीचर, बिजली का साज- समान, चमड़े की बढ़िया वस्तुएँ, प्लास्टिक का सामान, साइकिलें, अनेक ऊँची और पेचीदा श्रेणी की वस्तुओं जैसे मशीन टूल्स एवं वस्त्र मशीनरी, सिलाई की मशीनें, रेलवे बैगनों, बिजली की मोटर, डीजल इन्जन आदि का निर्यात बढ़ता जा रहा है। इन वस्तुओं का निर्यात दक्षिण-पूर्वी एशिया और अफ्रीका के विकासशील देशो तथा यूरोप के विकसित देशों- दोनों को किया जा रहा है। भारत आधुनिक टैक्नोंलाजी के क्षेत्र में काफी आगे बढ़ गया है, अतः उसकी प्रतियोगिता शक्ति काफी उन्नत हुई है। देश के निर्यातों का स्वरूप एक औद्योगिक देश के निर्यातों के अनुकूल बनता जा रहा है। भारत न केवल वस्तुओं का बल्कि अपने प्राविधिक ज्ञान और डिजाइन तथा परामर्शदात्री सेवाओं का निर्यात भी करने लगा है। भारतीय उद्यमकर्ताओं ने सऊदी अरब, घाना, ईरान, श्रीलंका, नेपाल, नाइजीरिया, मलेशिया आदि देशों में ही नहीं कनाडा और ब्रिटेन तक में संयुक्त उपक्रम चालू किये हैं। तालिका 4 के अनुसार कृषि उत्पाद एवं अन्य सम्बन्धित उत्पादों के निर्यात का महत्व घटा है तथा निर्मित वस्तुओं के निर्यात का महत्व बढ़ा है। 1991-92 में कृषि उत्पादों का कुल निर्यात में अंश लगभग 17.9 प्रतिशत था जो कि बढ़कर 1995-96 में 19.2 प्रतिशत हो गया, जबकि निर्मित वस्तुओं का निर्यात 1991-92 में 74.6 प्रतिशत से बढ़कर 1995-96 में 75.4 प्रतिशत हो गया। तालिका 4 के आधार पर पता चलता है कि चाय 1991-92 में इसका कुल निर्यात में 28 प्रतिशत अंश था जो कि घटते-घटते वर्ष 1995-96 में 1.1 प्रतिशत रह गया। इसी प्रकार 1991-92 में चमड़ा एवं चमड़े की वस्तुओं का कुल निर्यात में 4.5 प्रतिशत अश था जो कि बढ़कर 1992-93 में 4.7 प्रतिशत हो गया और 1995-96 में घटकर 3.6 प्रतिशत पर आ गया । रत्न एवं आभूषण का 1991-92 में कुल निर्यात में 15.3 प्रतिशत अंश था जो कि बढ़कर 1995-96 में 16.6 प्रतिशत हो गया। आने वाले वर्षों में निर्मित और अर्ध-निर्मित वस्तुओं कच्ची लोह धातु और अन्य खनिज पदार्थों के निर्यात में पर्याप्त वृद्धि होने की संभावना है।
निर्यात की संरचना देश के निर्यात संरचना में एक विशिष्ट परिवर्तन प्रमाणित किया गया है। निर्यात संरचना के उपनिवेशी प्रतिभा के विपरीत निर्यात व्यापार के संरचना में भी विशिष्ट परिवर्तन ज्ञात हुआ है। कई नये वस्तु मुख्यतः अर्धनिर्मित और निर्मित निर्यात सूची में जोडे गये हैं। इसने कुछ परम्परागत वस्तुओं के निर्यात पर भारी मुनाफे को कम कर दिया है जैसे- चाय, रूई, जूट, मसाले, चमड़े इत्यादि जो कुल आय के पचास% से भी ज्यादा प्रदान करते हैं। एक हज़ार नौ सौ पैंसठ-छयासठ में भी भारत के आठ सौ दस करोड़ रूपये के कुल निर्यात में जूट, चाय, सूती वस्त्र, अभ्रक और मैंगनीज के निर्यातों का भाग लगभग आधा था। पिछले लगभग दस वर्षों में निर्यात व्यापार की रचना बदली है। आज भी जूट, चाय और सूती वस्त्र भारत के निर्यात व्यापार की मुख्य वस्तुएँ हैं। लेकिन अब भारत चीनी, तंबाकू, काजू, खली, चमडे के तैयार माल, इंजीनियरिंग उपकरणों, रसायनिक वस्तुओं और मछली तथा उससे तैयार की जाने वाली विविध वस्तुओं का निर्यात बडी मात्रा में कर रहा है। भारत अब लगभग तीन हज़ार बड़ी छोटी वस्तुओं का निर्यात करता है जबकि आज से पच्चीस वर्ष पहले निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की संख्या पचास के लगभग थी। देश से जल, थल और वायुमार्ग द्वारा जिन प्रमुख वस्तुओं का निर्यात किया जाता है वे निम्न हैं- पटसन की वस्तुएँ , चाय, सूती वस्त्र , सूती वस्त्र , वस्त्र की बनी चीजें , सूत और धागा, अलोह धातुओं के अयस्क और साँद्र अयस्क, चमड़ा, कपास , ताजे फल तथा गिरियाँ , कच्ची वनस्पति जन्य सामग्री , चीनी , लौह अयस्क और सॉंन्द्र अयस्क, कच्चा तम्बाकू, वनस्पति तेल , कच्चे खनिज पदार्थ , ऊनी कालीन, गलीचे और चटाई आदि, लोहा तथा इस्पात, कहवा, चमड़ा तथा खालें , पैट्रोलियम पदार्थ, कोयला, कोक तथा कोयला चूरे की ईटें आदि भारत के निर्यात में परम्परागत निर्यातों का योगदान कम होता जा रहा है और कुछ गैर-परम्परागत वस्तुओ जैसे इन्जीनियरी का सामान, रसायन, खनिज, ईधन, लोहा एवं इस्पात, हस्तशिल्प के सामान आदि का निर्यात बढ़ता जा रहा है। भारत अपने योजनाबद्ध आर्थिक विकास के फलस्वरूप अनेक महत्वपूर्ण वस्तुओं से निर्यात की स्थिति में आ गया है। कृषि सम्बन्धी मशीनरी और औजार, हाथ-पम्प, स्टील फर्नीचर, बिजली का साज- समान, चमड़े की बढ़िया वस्तुएँ, प्लास्टिक का सामान, साइकिलें, अनेक ऊँची और पेचीदा श्रेणी की वस्तुओं जैसे मशीन टूल्स एवं वस्त्र मशीनरी, सिलाई की मशीनें, रेलवे बैगनों, बिजली की मोटर, डीजल इन्जन आदि का निर्यात बढ़ता जा रहा है। इन वस्तुओं का निर्यात दक्षिण-पूर्वी एशिया और अफ्रीका के विकासशील देशो तथा यूरोप के विकसित देशों- दोनों को किया जा रहा है। भारत आधुनिक टैक्नोंलाजी के क्षेत्र में काफी आगे बढ़ गया है, अतः उसकी प्रतियोगिता शक्ति काफी उन्नत हुई है। देश के निर्यातों का स्वरूप एक औद्योगिक देश के निर्यातों के अनुकूल बनता जा रहा है। भारत न केवल वस्तुओं का बल्कि अपने प्राविधिक ज्ञान और डिजाइन तथा परामर्शदात्री सेवाओं का निर्यात भी करने लगा है। भारतीय उद्यमकर्ताओं ने सऊदी अरब, घाना, ईरान, श्रीलंका, नेपाल, नाइजीरिया, मलेशिया आदि देशों में ही नहीं कनाडा और ब्रिटेन तक में संयुक्त उपक्रम चालू किये हैं। तालिका चार के अनुसार कृषि उत्पाद एवं अन्य सम्बन्धित उत्पादों के निर्यात का महत्व घटा है तथा निर्मित वस्तुओं के निर्यात का महत्व बढ़ा है। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे-बानवे में कृषि उत्पादों का कुल निर्यात में अंश लगभग सत्रह.नौ प्रतिशत था जो कि बढ़कर एक हज़ार नौ सौ पचानवे-छियानवे में उन्नीस.दो प्रतिशत हो गया, जबकि निर्मित वस्तुओं का निर्यात एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे-बानवे में चौहत्तर.छः प्रतिशत से बढ़कर एक हज़ार नौ सौ पचानवे-छियानवे में पचहत्तर.चार प्रतिशत हो गया। तालिका चार के आधार पर पता चलता है कि चाय एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे-बानवे में इसका कुल निर्यात में अट्ठाईस प्रतिशत अंश था जो कि घटते-घटते वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचानवे-छियानवे में एक.एक प्रतिशत रह गया। इसी प्रकार एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे-बानवे में चमड़ा एवं चमड़े की वस्तुओं का कुल निर्यात में चार.पाँच प्रतिशत अश था जो कि बढ़कर एक हज़ार नौ सौ बानवे-तिरानवे में चार.सात प्रतिशत हो गया और एक हज़ार नौ सौ पचानवे-छियानवे में घटकर तीन.छः प्रतिशत पर आ गया । रत्न एवं आभूषण का एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे-बानवे में कुल निर्यात में पंद्रह.तीन प्रतिशत अंश था जो कि बढ़कर एक हज़ार नौ सौ पचानवे-छियानवे में सोलह.छः प्रतिशत हो गया। आने वाले वर्षों में निर्मित और अर्ध-निर्मित वस्तुओं कच्ची लोह धातु और अन्य खनिज पदार्थों के निर्यात में पर्याप्त वृद्धि होने की संभावना है।
रायपुर। टूलकिट पर कांग्रेसियों ने प्रदेश के अलग-अलग थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई है. इस पर पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट कर कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार (कांग्रेस) और उसके सिस्टम को म्यूकर माइकोसिस (ब्लैक फंगस) हो गया है. लोकतांत्रिक मूल्य उनको ठीक से दिखाई नहीं पड़ रहे हैं. भाजपा नेता और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने ट्वीट में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को टैग करते हुए लिखा है कि विपक्ष पर एफआईआर और सिर्फ एफआईआर... कांग्रेस सरकार ने पुलिस को कितने एफआईआर का लक्ष्य दिया है. दरअसल, टूलकिट मामले में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर प्रदेश के अलग-अलग थानों में स्थानीय कांग्रेस इकाई की ओर से एफआईआर दर्ज कराया गया है. भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ प्रवक्ता संबित पात्रा, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, महासचिव बीएल संतोष के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद पुलिस सक्रिय भी हो गई है, जिसमें बाकायदा नोटिस जारी कर निश्चित समय में पूछताछ के लिए उपलब्ध रहने के लिए ताकीद कर रही है.
रायपुर। टूलकिट पर कांग्रेसियों ने प्रदेश के अलग-अलग थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई है. इस पर पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट कर कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार और उसके सिस्टम को म्यूकर माइकोसिस हो गया है. लोकतांत्रिक मूल्य उनको ठीक से दिखाई नहीं पड़ रहे हैं. भाजपा नेता और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने ट्वीट में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को टैग करते हुए लिखा है कि विपक्ष पर एफआईआर और सिर्फ एफआईआर... कांग्रेस सरकार ने पुलिस को कितने एफआईआर का लक्ष्य दिया है. दरअसल, टूलकिट मामले में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर प्रदेश के अलग-अलग थानों में स्थानीय कांग्रेस इकाई की ओर से एफआईआर दर्ज कराया गया है. भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ प्रवक्ता संबित पात्रा, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, महासचिव बीएल संतोष के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद पुलिस सक्रिय भी हो गई है, जिसमें बाकायदा नोटिस जारी कर निश्चित समय में पूछताछ के लिए उपलब्ध रहने के लिए ताकीद कर रही है.
न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज ट्रेंट बोल्ट की अगुवाई में गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन और कप्तान केन विलियमसन की रणनीतिक बल्लेबाजी से न्यूजीलैंड ने रविवार को अफगानिस्तान को आठ विकेट से हराकर शान से सेमीफाइनल में जगह बनाई। लेकिन भारत की आगे बढ़ने की रही सही उम्मीद खत्म कर दी। अफगानिस्तान की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए आठ विकेट पर 124 रन ही बना पाई। न्यूजीलैंड 18. 1 ओवर में दो विकेट पर 125 रन बनाकर सुपर 12 के ग्रुप दो से सेमीफाइनल में जगह बनाने वाली दूसरी टीम बनी। पाकिस्तान पहले ही अंतिम चार में अपनी जगह सुरक्षित कर चुका था। इससे भारत और नामीबिया के बीच सोमवार को होने वाला मैच औपचारिक रह गया है। ग्रुप एक से इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल में पहुंचे हैं। यह लगातार तीसरा अवसर है जबकि न्यूजीलैंड ने भारत की खिताब जीतने की उम्मीदों पर पानी फेरा। इससे पहले उसने वनडे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भारत को हराया था। अफगानिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए तीन विकेट 19 रन पर गंवा दिये जिसका प्रभाव उसकी पूरी पारी पर दिखा। उसके केवल तीन बल्लेबाज दोहरे अंक में पहुंचे। इनमें नजीबुल्लाह जादरान ने 48 गेंदों पर 73 रन बनाये जिसमें छह चौके और तीन छक्के शामिल हैं। न्यूजीलैंड की तरफ से मैन ऑफ द मैच बोल्ट ने 17 रन देकर तीन विकेट और टिम साउदी ने 24 रन देकर दो विकेट लिए। ईश सोढी, जेम्स नीशाम और एडम मिल्ने को एक एक विकेट मिला। इसके बाद विलियमसन ने अपनी भूमिका निभायी। उन्होंने 42 गेंदों पर तीन चौकों की मदद से नाबाद 40 रन बनाये तथा डेवोन कॉनवे (32 गेंदों पर नाबाद 36, चार चौके) के साथ तीसरे विकेट के लिए 68 रन की अटूट साझेदारी की। मार्टिन गप्टिल ने 23 गेंदों पर चार चौकों की मदद से 28 रन का योगदान दिया। न्यूजीलैंड के सामने लक्ष्य छोटा था, पर गुप्टिल और डेरेल मिचेल (12 गेंद पर 17 रन, तीन चौके) जीत दर्ज करने के लिये उतावले दिखे। ऐसे में मुजीब उर रहमान (31 रन देकर एक) ने मिचेल को विकेट के पीछे कैच कराकर अफगानिस्तान के साथ भारतीय प्रशंसकों के चेहरों की रंगत लौटाई। गप्टिल ने मुजीब पर लगातार दो चौके लगाकर पावरप्ले में स्कोर 45 रन तक पहुंचाया। राशिद खान (27 रन देकर एक) ने इसके बाद गेंद संभाली और आते ही अपना प्रभाव डाला। न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने उन्हें पूरा सम्मान दिया। राशिद ने गुप्टिल को गुगली पर बोल्ड करके टी20 क्रिकेट में अपना 400वां विकेट लिया। अफगानिस्तान ने भारतीय समर्थकों के अपार समर्थन के बीच पावरप्ले के बाद न्यूजीलैंड को अगले पांच ओवर तक गेंद ने सीमा रेखा तक नहीं पहुंचाने दी। विलियमसन ने 12वें ओवर में राशिद की गुगली को अच्छी तरह से पढ़कर उसे मिडविकेट पर चार रन के लिए भेजा। कॉनवे ने पहले स्पिनरों को जांचा परखा और फिर मोहम्मद नबी पर दो चौके लगाकर दबाव को पूरी तरह से खत्म किया। उन्होंने रिवर्स स्वीप से राशिद पर भी चौका लगाया। विलियमसन की पारी की विशेषता यह रही कि उन्होंने किसी भी समय जल्दबाजी नहीं दिखयी और सहजता से टीम को लक्ष्य तक पहुंचाया। इससे पहले अफगानिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया लेकिन वह पावरप्ले में केवल 23 रन बना पाया और इस बीच उसने मोहम्मद शहजाद (चार), हरतुल्लाह जजई (दो) और रहमनुल्लाह गुरबाज (छह) के विकेट गंवाए। नजीबुल्लाह ने नौवें ओवर में नीशाम पर दो चौके जड़कर स्कोर को कुछ गति दी और फिर सोढ़ी की गेंद मिडविकेट पर चार रन के लिये भेजकर टीम का स्कोर 50 रन के पार पहुंचाया। सोढ़ी हालांकि इस ओवर में गुलबदीन नैब (15) को बोल्ड करने में सफल रहे। इसके बाद भी रन बनाने का मुख्य जिम्मा नजीबुल्लाह ने ही उठाए रखा। उन्होंने मिशेल सैंटनर के एक ओवर में दो छक्के लगाए और फिर 33 गेंदों पर अपने करियर का छठा अर्धशतक पूरा किया। दूसरे छोर से कप्तान मोहम्मद नबी (20 गेंदों पर 14) रन बनाने के लिए जूझते रहे। साउदी ने अपनी ही गेंद पर खूबसूरत कैच लेकर नबी की संघर्षपूर्ण पारी का अंत किया। नजीबुल्लाह और नबी ने पांचवें विकेट के लिए 59 रन की साझेदारी की। नजीबुल्लाह 19वें ओवर में पवेलियन लौटे। इसका श्रेय नीशाम को जाता है जिन्होंने बोल्ट की गेंद पर डाइव लगाकर शानदार कैच लिया। बोल्ट ने इसी ओवर में करीम जनत (दो) को भी पवेलियन भेजा।
न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज ट्रेंट बोल्ट की अगुवाई में गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन और कप्तान केन विलियमसन की रणनीतिक बल्लेबाजी से न्यूजीलैंड ने रविवार को अफगानिस्तान को आठ विकेट से हराकर शान से सेमीफाइनल में जगह बनाई। लेकिन भारत की आगे बढ़ने की रही सही उम्मीद खत्म कर दी। अफगानिस्तान की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए आठ विकेट पर एक सौ चौबीस रन ही बना पाई। न्यूजीलैंड अट्ठारह. एक ओवर में दो विकेट पर एक सौ पच्चीस रन बनाकर सुपर बारह के ग्रुप दो से सेमीफाइनल में जगह बनाने वाली दूसरी टीम बनी। पाकिस्तान पहले ही अंतिम चार में अपनी जगह सुरक्षित कर चुका था। इससे भारत और नामीबिया के बीच सोमवार को होने वाला मैच औपचारिक रह गया है। ग्रुप एक से इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल में पहुंचे हैं। यह लगातार तीसरा अवसर है जबकि न्यूजीलैंड ने भारत की खिताब जीतने की उम्मीदों पर पानी फेरा। इससे पहले उसने वनडे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में भारत को हराया था। अफगानिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए तीन विकेट उन्नीस रन पर गंवा दिये जिसका प्रभाव उसकी पूरी पारी पर दिखा। उसके केवल तीन बल्लेबाज दोहरे अंक में पहुंचे। इनमें नजीबुल्लाह जादरान ने अड़तालीस गेंदों पर तिहत्तर रन बनाये जिसमें छह चौके और तीन छक्के शामिल हैं। न्यूजीलैंड की तरफ से मैन ऑफ द मैच बोल्ट ने सत्रह रन देकर तीन विकेट और टिम साउदी ने चौबीस रन देकर दो विकेट लिए। ईश सोढी, जेम्स नीशाम और एडम मिल्ने को एक एक विकेट मिला। इसके बाद विलियमसन ने अपनी भूमिका निभायी। उन्होंने बयालीस गेंदों पर तीन चौकों की मदद से नाबाद चालीस रन बनाये तथा डेवोन कॉनवे के साथ तीसरे विकेट के लिए अड़सठ रन की अटूट साझेदारी की। मार्टिन गप्टिल ने तेईस गेंदों पर चार चौकों की मदद से अट्ठाईस रन का योगदान दिया। न्यूजीलैंड के सामने लक्ष्य छोटा था, पर गुप्टिल और डेरेल मिचेल जीत दर्ज करने के लिये उतावले दिखे। ऐसे में मुजीब उर रहमान ने मिचेल को विकेट के पीछे कैच कराकर अफगानिस्तान के साथ भारतीय प्रशंसकों के चेहरों की रंगत लौटाई। गप्टिल ने मुजीब पर लगातार दो चौके लगाकर पावरप्ले में स्कोर पैंतालीस रन तक पहुंचाया। राशिद खान ने इसके बाद गेंद संभाली और आते ही अपना प्रभाव डाला। न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने उन्हें पूरा सम्मान दिया। राशिद ने गुप्टिल को गुगली पर बोल्ड करके टीबीस क्रिकेट में अपना चार सौवां विकेट लिया। अफगानिस्तान ने भारतीय समर्थकों के अपार समर्थन के बीच पावरप्ले के बाद न्यूजीलैंड को अगले पांच ओवर तक गेंद ने सीमा रेखा तक नहीं पहुंचाने दी। विलियमसन ने बारहवें ओवर में राशिद की गुगली को अच्छी तरह से पढ़कर उसे मिडविकेट पर चार रन के लिए भेजा। कॉनवे ने पहले स्पिनरों को जांचा परखा और फिर मोहम्मद नबी पर दो चौके लगाकर दबाव को पूरी तरह से खत्म किया। उन्होंने रिवर्स स्वीप से राशिद पर भी चौका लगाया। विलियमसन की पारी की विशेषता यह रही कि उन्होंने किसी भी समय जल्दबाजी नहीं दिखयी और सहजता से टीम को लक्ष्य तक पहुंचाया। इससे पहले अफगानिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया लेकिन वह पावरप्ले में केवल तेईस रन बना पाया और इस बीच उसने मोहम्मद शहजाद , हरतुल्लाह जजई और रहमनुल्लाह गुरबाज के विकेट गंवाए। नजीबुल्लाह ने नौवें ओवर में नीशाम पर दो चौके जड़कर स्कोर को कुछ गति दी और फिर सोढ़ी की गेंद मिडविकेट पर चार रन के लिये भेजकर टीम का स्कोर पचास रन के पार पहुंचाया। सोढ़ी हालांकि इस ओवर में गुलबदीन नैब को बोल्ड करने में सफल रहे। इसके बाद भी रन बनाने का मुख्य जिम्मा नजीबुल्लाह ने ही उठाए रखा। उन्होंने मिशेल सैंटनर के एक ओवर में दो छक्के लगाए और फिर तैंतीस गेंदों पर अपने करियर का छठा अर्धशतक पूरा किया। दूसरे छोर से कप्तान मोहम्मद नबी रन बनाने के लिए जूझते रहे। साउदी ने अपनी ही गेंद पर खूबसूरत कैच लेकर नबी की संघर्षपूर्ण पारी का अंत किया। नजीबुल्लाह और नबी ने पांचवें विकेट के लिए उनसठ रन की साझेदारी की। नजीबुल्लाह उन्नीसवें ओवर में पवेलियन लौटे। इसका श्रेय नीशाम को जाता है जिन्होंने बोल्ट की गेंद पर डाइव लगाकर शानदार कैच लिया। बोल्ट ने इसी ओवर में करीम जनत को भी पवेलियन भेजा।
बंगाली एक्ट्रेसेस साड़ी में बला की खूबसूरत लगती हैं। इस तस्वीर में श्रीजिता ने प्लेन साड़ी के साथ प्रिंटेड ब्लाउज लिया है। देवोलिना भट्टाचार्जी का ये साड़ी लुक आसानी से गर्मियों में कैरी किया जा सकता है। इस तस्वीर में सुमोना चक्रवर्ती प्लेन ब्लैक साड़ी पहनी है। इशिता दत्ता ने हल्की साड़ी के साथ रिवीलिंग ब्लाउज पहनकर लुक खास बनाया है। पूजा बनर्जी ने कॉटन की साड़ी पहनी है, जो गर्मियों के लिए बेस्ट होती है। टीना दत्ता इस व्हाइट नेट की साड़ी में ग्लैमरस लग रही हैं। पूजा बनर्जी ने प्रिंटेड साड़ी पहनी है। मौनी रॉय इस ऑफ व्हाइट साड़ी में काफी खूबसूरत लग रही हैं। अगली वेब स्टोरी देखें. Thanks For Reading!
बंगाली एक्ट्रेसेस साड़ी में बला की खूबसूरत लगती हैं। इस तस्वीर में श्रीजिता ने प्लेन साड़ी के साथ प्रिंटेड ब्लाउज लिया है। देवोलिना भट्टाचार्जी का ये साड़ी लुक आसानी से गर्मियों में कैरी किया जा सकता है। इस तस्वीर में सुमोना चक्रवर्ती प्लेन ब्लैक साड़ी पहनी है। इशिता दत्ता ने हल्की साड़ी के साथ रिवीलिंग ब्लाउज पहनकर लुक खास बनाया है। पूजा बनर्जी ने कॉटन की साड़ी पहनी है, जो गर्मियों के लिए बेस्ट होती है। टीना दत्ता इस व्हाइट नेट की साड़ी में ग्लैमरस लग रही हैं। पूजा बनर्जी ने प्रिंटेड साड़ी पहनी है। मौनी रॉय इस ऑफ व्हाइट साड़ी में काफी खूबसूरत लग रही हैं। अगली वेब स्टोरी देखें. Thanks For Reading!
राष्ट्रपति श्री प्रतिभा देवीसिंह पाटील ने पंजाब और राजस्थान के राज्यपाल श्री शिवराज पाटील की अध्यक्षता में देश के कृषि क्षेत्र विशेषकर वर्षा पर आधारित खेती की उत्पादकता, मुनाफा, स्थायित्व और प्रतिस्पर्द्धा बढा़ने के उपायों का अध्ययन करने और सुझाव देने के लिए राज्यपालों की एक समिति गठित की है। यह समिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एकीकृत करने और कृषि एवं इसके सहयोगी क्षेत्रकों में निवेश लाने के लिए स्थानीय स्तर पर अपेक्षित नीतिगत पहलों और विधायी उपायों, योजनाओं के पुनर्गठन और सम्मिलन जैसे संस्थागत सुधार तैयार करने की जरूरत पर चर्चा करेगी। यह समिति कृषि और सहयोगी क्षेत्रकों में नवाचारों और अत्याधुनिक तकनीकों के हस्तांतरण करने, कृषि श्रमिकों और खेती के मशीनीकरण के उभरते माहौल को साधने के लिए जरूरी कदमों पर भी चर्चा करेगी। यह राज्य और केंद्र स्तर पर धारणीय कृषि और ज्ञान प्रबंधन को प्रोत्साहित करने और किसान-उद्योगों के बीच भागीदारी बढ़ाने के लिए कृषि संबंधी सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, कृषि विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों की भूमिका और सहभागिता पर भी चर्चा कर जरूरी सिफारिशें करेगी। पंजाब और राजस्थान के राज्यपाल श्री शिवराज पाटिल के अलावा इस समिति में महाराष्ट्र और गोवा के राज्यपाल श्री के. शंकरनारायणन, जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल एन. एन. वोहरा, मेघालय के राज्यपाल आर. एस. मूसाहारी, कर्नाटक के राज्यपाल श्री एच. आर. भारद्वाज, बिहार के राज्यपाल श्री देवानंद कुंवर, उत्तराखंड के राज्यपाल श्रीमती माग्ररेट अल्वा, नगालैंड के राज्यपाल श्री निखिल कुमार, असम के राज्यपाल श्री जे. बी. पटनायक, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त, तमिलनाडु के राज्यपाल श्री के. रोसैया, मिजोरम के राज्यपाल श्री वी. पुरुषोत्तमन और अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल ले. जनरल (रिटायर्ड) श्री भूपिंदर सिंह शामिल हैं।
राष्ट्रपति श्री प्रतिभा देवीसिंह पाटील ने पंजाब और राजस्थान के राज्यपाल श्री शिवराज पाटील की अध्यक्षता में देश के कृषि क्षेत्र विशेषकर वर्षा पर आधारित खेती की उत्पादकता, मुनाफा, स्थायित्व और प्रतिस्पर्द्धा बढा़ने के उपायों का अध्ययन करने और सुझाव देने के लिए राज्यपालों की एक समिति गठित की है। यह समिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एकीकृत करने और कृषि एवं इसके सहयोगी क्षेत्रकों में निवेश लाने के लिए स्थानीय स्तर पर अपेक्षित नीतिगत पहलों और विधायी उपायों, योजनाओं के पुनर्गठन और सम्मिलन जैसे संस्थागत सुधार तैयार करने की जरूरत पर चर्चा करेगी। यह समिति कृषि और सहयोगी क्षेत्रकों में नवाचारों और अत्याधुनिक तकनीकों के हस्तांतरण करने, कृषि श्रमिकों और खेती के मशीनीकरण के उभरते माहौल को साधने के लिए जरूरी कदमों पर भी चर्चा करेगी। यह राज्य और केंद्र स्तर पर धारणीय कृषि और ज्ञान प्रबंधन को प्रोत्साहित करने और किसान-उद्योगों के बीच भागीदारी बढ़ाने के लिए कृषि संबंधी सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, कृषि विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों की भूमिका और सहभागिता पर भी चर्चा कर जरूरी सिफारिशें करेगी। पंजाब और राजस्थान के राज्यपाल श्री शिवराज पाटिल के अलावा इस समिति में महाराष्ट्र और गोवा के राज्यपाल श्री के. शंकरनारायणन, जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल एन. एन. वोहरा, मेघालय के राज्यपाल आर. एस. मूसाहारी, कर्नाटक के राज्यपाल श्री एच. आर. भारद्वाज, बिहार के राज्यपाल श्री देवानंद कुंवर, उत्तराखंड के राज्यपाल श्रीमती माग्ररेट अल्वा, नगालैंड के राज्यपाल श्री निखिल कुमार, असम के राज्यपाल श्री जे. बी. पटनायक, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त, तमिलनाडु के राज्यपाल श्री के. रोसैया, मिजोरम के राज्यपाल श्री वी. पुरुषोत्तमन और अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल ले. जनरल श्री भूपिंदर सिंह शामिल हैं।
तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने राज भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में तमिलनाडु को तमिझगम कहकर संबोधित किया था. तर्क दिया गया कि तमिलनाडु का मतलब 'देश' होता है और वे उस विचारधारा से आते हैं जहां वन नेशन वन लैंग्वेज को बढ़ावा दिया जाता है. अब राज्यपाल ने तो बयान दे दिया, अपने विचार रख दिए, लेकिन इस एक शब्द ने राज्य की सियासत में ऐसा उबाल लाया कि कई अप्रत्याशित घटनाएं एक साथ होती दिख गईं. 9 जनवरी को सदन के सेशन के दौरान राज्यपाल ने अपने भाषण में द्राविडियन आंदोलन के कई नेताओं के नामों का जिक्र नहीं किया, सरकार ने जो टैक्स्ट पढ़ने को दिया, उसमें बदलाव दिखे. नाराज सीएम स्टालिन ने राज्यपाल के खिलाफ ही एक प्रस्ताव पारित करवा दिया. राज्यपाल बीच कार्यवाही सदन छोड़कर चले गए. अब ये तो सारा ऑफटर इफेक्ट है, यानी कि वो घटनाएं जों तमिझगम शब्द के इस्तेमाल के बाद देखी गईं. लेकिन असल में ये विवाद सैकड़ों साल पुराना है. उतना ही पुराना ये तमिलनाडु नाम भी है. इस एक नाम को लेकर जिस प्रकार का संघर्ष किया गया है, जिन लोगों ने आवाज बुलंद की है, वो सब जानना जरूरी हो जाता है. वो इतिहास ही ये बताने को काफी है कि आज क्यों इस एक मुद्दे पर डीएमके और एडीएमके साथ खड़ी नजर आती है. तमिलनाडु एक ऐसा राज्य है, जो अपनी संस्कृति, अपनी भाषा को लेकर काफी संवेदनशील रहा है. द्राविडियन विचारधारा ने ऐसा जोर पकड़ा है कि यहां के लोगों के लिए उनकी भाषा ही सबकुछ है. अब राज्यपाल आरएन रवि ने उसी विचारधारा को चोट पहुंचा दी है. राज्यपाल को तमिलनाडु से क्या दिक्कत? राज्य की सरकार तो पहले से ही आरएन रवि को बीजेपी सपोर्टर के तौर पर देखती है. कई मौकों पर देखा गया है कि उनकी तरफ से सीएम एमके स्टालिन के द्राविडियन मॉडल की आलोचना की गई है. राज्यपाल मानते हैं कि इसी मॉडल की वजह से तमिलनाडु कई मामलों में पीछे छूट गया है, राष्ट्रवाद की भावना जाग्रत नहीं हो पाई है. लेकिन उनके विरोधी इसका एक दो टूक जवाब भी तैयार रखते हैं. उनका कहना है कि कई ऐसे पहलू हैं जहां पर तमिलनाडु उत्तर भारत के कई दूसरे राज्यों से बेहतर परफॉर्म करता है. असल में तमिलनाडु में 'राइट विंग' वाली राजनीति को कभी वो तवज्जो नहीं दी गई जो स्वीकृति द्राविडियन आंदोलन को मिली. इसी वजह से बीजेपी का कमल कई राज्यों में तो खिल रहा है, लेकिन तमिलनाडु में उसे अभी भी संघर्ष करना पड़ रहा है. तमिलनाडु में क्यों नहीं चलती बीजेपी वाली राजनीति? इसका एक बड़ा कारण ये है कि पार्टी तमिल राष्ट्रवाद को सही तरीके से नहीं समझ पा रही है. यहां ये जानना जरूरी है कि तमिल राष्ट्रवाद वहां की सांस्कृति भाषा, संस्कृति से जुड़ा हुआ है, वहीं द्राविडियन सामाजिक सुधार, आत्मसम्मान, ब्राह्मण विरोधी विचारधारा को बढ़ावा देता है. इन दोनों के मिलान के बाद ही तमिलनाडु की राजनीति को सही तरह से समझा जा सकता है. अब क्योंकि इस विचारधारा को ही आरएन रवि ने गलत बता दिया है, इसलिए ये सियासी लड़ाई राज्यपाल बनाम राज्य से ज्यादा दो अलग-अलग विचारधाराओं की बन गई है. एक वो विचारधारा है जो सालों से तमिलनाडु पर राज कर रही है तो दूसरी वो है जो जमीन पर खुद की उपस्थिति दर्ज करवाने की कवायद में लगी हुई है. अब जिस तमिलनाडु के नाम पर इस समय राज्यपाल आपत्ति जाहिर कर रहे हैं, उस नाम को अर्जित करने में भी कई साल लगे, कई आंदोलन लगे, कई नेताओं की कुर्बानी लगी. 1950 से ही लगातार मांग उठने लगी थी कि मद्रास की जगह राज्य का नाम तमिलनाडु किया जाए. आजाद भारत में मद्रास के अंदर ही आंध्र प्रदेश, केरल भी आते थे. लेकिन जब बाद में केरल, आंध्र प्रदेश अलग राज्य बने, तमिलनाडु वाली मुहिम ने भी तेजी पकड़ी. सामाजिक नेता पेरियार ने तो 1930 में ही अपनी रचनाओं में तमिलनाडु का जिक्र करना शुरू कर दिया था. यानी कि तब भी इस शब्द के अपने मायने थे. लेकिन तमिलनाडु को लेकर आंदोलन 1956 में ज्यादा तेज हुआ जब कांग्रेस नेता K. P. Sankaralinganar अनशन पर चले गए. वे चाहते थे कि मद्रास का नाम बदल तमिलनाडु किया जाए. उनकी मांग तो पूरी नहीं हुई, लेकिन उससे पहले उनका निधन हो गया. इसके बाद कांग्रेस सरकार के सामने इसे लेकर एक प्रस्ताव आया था. लेकिन तब मात्र 42 वोट ही समर्थन में पड़े और तमिलनाडु का सपना पूरा नहीं हो सका. ये साल 1961 था जब तमिलनाडु में कांग्रेस की ही सरकार थी. उस समय डीएमके नेता सीएन अन्नादुरई भी सक्रिय हो चुके थे. दक्षिण भारत के इस राज्य में उनकी सियासी पिच धीरे-धीरे मजबूत हो रही थी. उनके तर्क धारधार होते जा रहे थे. सदन में एक बार कार्यवाही के दौरान उन्होंने तमिलनाडु का महत्व बताते हुए कहा था कि पार्लियामेंट को भी लोकसभा किया गया था. ये समझना जरूरी है कि तमिलनाडु का तमिल लोगों के साथ भावनात्मक रिश्ता है. एक नाम बदल जाने से सदन के सदस्यों को क्या तकलीफ हो सकती है. अब 1961 में जिस नाम बदलने वाले बिल को खारिज कर दिया गया था, इतिहास ने 1967 में फिर खुद को दोहराया. तब राज्य के मुख्यमंत्री अन्नादुरई बन चुके थे. उनकी विचारधारा पहले से स्पष्ट थी, संकल्प था कि राज्य को तोहफे के रूप में तमिलनाडु दिया जाए. उसी उदेश्य के साथ सदन में एक बार फिर नाम बदलने वाला बिल पेश किया गया. इस बार प्रस्ताव प्रचंड बहुमत के साथ पारित हुआ. जो कांग्रेस पहले इसका खुलकर विरोध कर रही थी, उसने भी स्वागत कर दिया. यानी कि मद्रास, अब तमिलनाडु बन चुका था और वहां पर एक नई तरह की राजनीति की शुरुआत हुई थी. उस समय अन्नादुराई ने जोर देकर कहा था कि तमिलनाडु का मतलब अलग देश नहीं है, ये हमेशा ही भारत का अभिन्न अंग रहेगा. अब जो तर्क अन्नादुराई ने इतने सालों पहले दिया था, उसी तर्क को चुनौती आज के राज्यपाल आरएन रवि दे रहे हैं. लेकिन ये कोई पहली बार नहीं है जब तमिलनाडु में राज्य सरकारों की राज्यपालों के साथ तकरार देखने को मिली हो. ये राज्य अपनी इन्हीं तकरारों के लिए जाना जाता है. जब जयललिता मुख्यमंत्री हुआ करती थीं, एक बार उन्होंने एक राज्यपाल पर बदसलूकी करने का आरोप लगा दिया था. इसी तरह एक दूसरे वाक्य में उन्होंने जब नए सदन का उद्घाटन किया, राज्यपाल को न्योता तक नहीं भेजा गया. ऐसे में राजनीति अपनी जगह है, लेकिन इतिहास भी अपनी ही जगह रखता है. तमिलनाडु शब्द से एक वर्ग को दिक्कत हो सकती है, लेकिन इसकी अपनी एक पुरानी कहानी है, एक भावनात्मक रिश्ता है जो शायद अभी खत्म नहीं होने वाला है.
तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने राज भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में तमिलनाडु को तमिझगम कहकर संबोधित किया था. तर्क दिया गया कि तमिलनाडु का मतलब 'देश' होता है और वे उस विचारधारा से आते हैं जहां वन नेशन वन लैंग्वेज को बढ़ावा दिया जाता है. अब राज्यपाल ने तो बयान दे दिया, अपने विचार रख दिए, लेकिन इस एक शब्द ने राज्य की सियासत में ऐसा उबाल लाया कि कई अप्रत्याशित घटनाएं एक साथ होती दिख गईं. नौ जनवरी को सदन के सेशन के दौरान राज्यपाल ने अपने भाषण में द्राविडियन आंदोलन के कई नेताओं के नामों का जिक्र नहीं किया, सरकार ने जो टैक्स्ट पढ़ने को दिया, उसमें बदलाव दिखे. नाराज सीएम स्टालिन ने राज्यपाल के खिलाफ ही एक प्रस्ताव पारित करवा दिया. राज्यपाल बीच कार्यवाही सदन छोड़कर चले गए. अब ये तो सारा ऑफटर इफेक्ट है, यानी कि वो घटनाएं जों तमिझगम शब्द के इस्तेमाल के बाद देखी गईं. लेकिन असल में ये विवाद सैकड़ों साल पुराना है. उतना ही पुराना ये तमिलनाडु नाम भी है. इस एक नाम को लेकर जिस प्रकार का संघर्ष किया गया है, जिन लोगों ने आवाज बुलंद की है, वो सब जानना जरूरी हो जाता है. वो इतिहास ही ये बताने को काफी है कि आज क्यों इस एक मुद्दे पर डीएमके और एडीएमके साथ खड़ी नजर आती है. तमिलनाडु एक ऐसा राज्य है, जो अपनी संस्कृति, अपनी भाषा को लेकर काफी संवेदनशील रहा है. द्राविडियन विचारधारा ने ऐसा जोर पकड़ा है कि यहां के लोगों के लिए उनकी भाषा ही सबकुछ है. अब राज्यपाल आरएन रवि ने उसी विचारधारा को चोट पहुंचा दी है. राज्यपाल को तमिलनाडु से क्या दिक्कत? राज्य की सरकार तो पहले से ही आरएन रवि को बीजेपी सपोर्टर के तौर पर देखती है. कई मौकों पर देखा गया है कि उनकी तरफ से सीएम एमके स्टालिन के द्राविडियन मॉडल की आलोचना की गई है. राज्यपाल मानते हैं कि इसी मॉडल की वजह से तमिलनाडु कई मामलों में पीछे छूट गया है, राष्ट्रवाद की भावना जाग्रत नहीं हो पाई है. लेकिन उनके विरोधी इसका एक दो टूक जवाब भी तैयार रखते हैं. उनका कहना है कि कई ऐसे पहलू हैं जहां पर तमिलनाडु उत्तर भारत के कई दूसरे राज्यों से बेहतर परफॉर्म करता है. असल में तमिलनाडु में 'राइट विंग' वाली राजनीति को कभी वो तवज्जो नहीं दी गई जो स्वीकृति द्राविडियन आंदोलन को मिली. इसी वजह से बीजेपी का कमल कई राज्यों में तो खिल रहा है, लेकिन तमिलनाडु में उसे अभी भी संघर्ष करना पड़ रहा है. तमिलनाडु में क्यों नहीं चलती बीजेपी वाली राजनीति? इसका एक बड़ा कारण ये है कि पार्टी तमिल राष्ट्रवाद को सही तरीके से नहीं समझ पा रही है. यहां ये जानना जरूरी है कि तमिल राष्ट्रवाद वहां की सांस्कृति भाषा, संस्कृति से जुड़ा हुआ है, वहीं द्राविडियन सामाजिक सुधार, आत्मसम्मान, ब्राह्मण विरोधी विचारधारा को बढ़ावा देता है. इन दोनों के मिलान के बाद ही तमिलनाडु की राजनीति को सही तरह से समझा जा सकता है. अब क्योंकि इस विचारधारा को ही आरएन रवि ने गलत बता दिया है, इसलिए ये सियासी लड़ाई राज्यपाल बनाम राज्य से ज्यादा दो अलग-अलग विचारधाराओं की बन गई है. एक वो विचारधारा है जो सालों से तमिलनाडु पर राज कर रही है तो दूसरी वो है जो जमीन पर खुद की उपस्थिति दर्ज करवाने की कवायद में लगी हुई है. अब जिस तमिलनाडु के नाम पर इस समय राज्यपाल आपत्ति जाहिर कर रहे हैं, उस नाम को अर्जित करने में भी कई साल लगे, कई आंदोलन लगे, कई नेताओं की कुर्बानी लगी. एक हज़ार नौ सौ पचास से ही लगातार मांग उठने लगी थी कि मद्रास की जगह राज्य का नाम तमिलनाडु किया जाए. आजाद भारत में मद्रास के अंदर ही आंध्र प्रदेश, केरल भी आते थे. लेकिन जब बाद में केरल, आंध्र प्रदेश अलग राज्य बने, तमिलनाडु वाली मुहिम ने भी तेजी पकड़ी. सामाजिक नेता पेरियार ने तो एक हज़ार नौ सौ तीस में ही अपनी रचनाओं में तमिलनाडु का जिक्र करना शुरू कर दिया था. यानी कि तब भी इस शब्द के अपने मायने थे. लेकिन तमिलनाडु को लेकर आंदोलन एक हज़ार नौ सौ छप्पन में ज्यादा तेज हुआ जब कांग्रेस नेता K. P. Sankaralinganar अनशन पर चले गए. वे चाहते थे कि मद्रास का नाम बदल तमिलनाडु किया जाए. उनकी मांग तो पूरी नहीं हुई, लेकिन उससे पहले उनका निधन हो गया. इसके बाद कांग्रेस सरकार के सामने इसे लेकर एक प्रस्ताव आया था. लेकिन तब मात्र बयालीस वोट ही समर्थन में पड़े और तमिलनाडु का सपना पूरा नहीं हो सका. ये साल एक हज़ार नौ सौ इकसठ था जब तमिलनाडु में कांग्रेस की ही सरकार थी. उस समय डीएमके नेता सीएन अन्नादुरई भी सक्रिय हो चुके थे. दक्षिण भारत के इस राज्य में उनकी सियासी पिच धीरे-धीरे मजबूत हो रही थी. उनके तर्क धारधार होते जा रहे थे. सदन में एक बार कार्यवाही के दौरान उन्होंने तमिलनाडु का महत्व बताते हुए कहा था कि पार्लियामेंट को भी लोकसभा किया गया था. ये समझना जरूरी है कि तमिलनाडु का तमिल लोगों के साथ भावनात्मक रिश्ता है. एक नाम बदल जाने से सदन के सदस्यों को क्या तकलीफ हो सकती है. अब एक हज़ार नौ सौ इकसठ में जिस नाम बदलने वाले बिल को खारिज कर दिया गया था, इतिहास ने एक हज़ार नौ सौ सरसठ में फिर खुद को दोहराया. तब राज्य के मुख्यमंत्री अन्नादुरई बन चुके थे. उनकी विचारधारा पहले से स्पष्ट थी, संकल्प था कि राज्य को तोहफे के रूप में तमिलनाडु दिया जाए. उसी उदेश्य के साथ सदन में एक बार फिर नाम बदलने वाला बिल पेश किया गया. इस बार प्रस्ताव प्रचंड बहुमत के साथ पारित हुआ. जो कांग्रेस पहले इसका खुलकर विरोध कर रही थी, उसने भी स्वागत कर दिया. यानी कि मद्रास, अब तमिलनाडु बन चुका था और वहां पर एक नई तरह की राजनीति की शुरुआत हुई थी. उस समय अन्नादुराई ने जोर देकर कहा था कि तमिलनाडु का मतलब अलग देश नहीं है, ये हमेशा ही भारत का अभिन्न अंग रहेगा. अब जो तर्क अन्नादुराई ने इतने सालों पहले दिया था, उसी तर्क को चुनौती आज के राज्यपाल आरएन रवि दे रहे हैं. लेकिन ये कोई पहली बार नहीं है जब तमिलनाडु में राज्य सरकारों की राज्यपालों के साथ तकरार देखने को मिली हो. ये राज्य अपनी इन्हीं तकरारों के लिए जाना जाता है. जब जयललिता मुख्यमंत्री हुआ करती थीं, एक बार उन्होंने एक राज्यपाल पर बदसलूकी करने का आरोप लगा दिया था. इसी तरह एक दूसरे वाक्य में उन्होंने जब नए सदन का उद्घाटन किया, राज्यपाल को न्योता तक नहीं भेजा गया. ऐसे में राजनीति अपनी जगह है, लेकिन इतिहास भी अपनी ही जगह रखता है. तमिलनाडु शब्द से एक वर्ग को दिक्कत हो सकती है, लेकिन इसकी अपनी एक पुरानी कहानी है, एक भावनात्मक रिश्ता है जो शायद अभी खत्म नहीं होने वाला है.
कप्तान रोहित शर्मा के साथ ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक. (Photo- Twitter) नई दिल्लीः भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टी20 सीरीज का पहला मैच मोहाली में खेला जा रहा है. इसके लिए ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया है. रोहित शर्मा की कप्तानी वाली टीम पहले बैटिंग करने मैदान में उतरी है. भारत की प्लेइंग इलेवन में एक बहुत बड़ा बदलाव देखा गया है. टीम इंडिया ने विकेटकीपर ऋषभ पंत को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा है. उनकी जगह दिनेश कार्तिक टीम में लिया गया हैं. ऋषभ पंत को खेलते देखने की उम्मीद लगाए लोगों को निराशा देखने को मिली है, ऐसे में ऋषभ पंत सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे हैं, लोग उनके प्रति सहानुभूति जताते हुए उन्हें मैच विनर खिलाड़ी बता रहे हैं. हालांकि कुछ लोग ये भी लिख रहे हैं कि कार्तिक और संजू सैमसन जैसे खिलाड़ी पंत से ज्यादा प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, लेकिन बीसीसीआई बार-बार पंत को क्यों मौके दे रही है. लोग पंत को भारत के लिए मैच विनर बता रहे हैं और ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी 20 वर्ल्ड कप के लिए बेहद महत्वपूर्ण बता रहे हैं. .
कप्तान रोहित शर्मा के साथ ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक. नई दिल्लीः भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टीबीस सीरीज का पहला मैच मोहाली में खेला जा रहा है. इसके लिए ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया है. रोहित शर्मा की कप्तानी वाली टीम पहले बैटिंग करने मैदान में उतरी है. भारत की प्लेइंग इलेवन में एक बहुत बड़ा बदलाव देखा गया है. टीम इंडिया ने विकेटकीपर ऋषभ पंत को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा है. उनकी जगह दिनेश कार्तिक टीम में लिया गया हैं. ऋषभ पंत को खेलते देखने की उम्मीद लगाए लोगों को निराशा देखने को मिली है, ऐसे में ऋषभ पंत सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे हैं, लोग उनके प्रति सहानुभूति जताते हुए उन्हें मैच विनर खिलाड़ी बता रहे हैं. हालांकि कुछ लोग ये भी लिख रहे हैं कि कार्तिक और संजू सैमसन जैसे खिलाड़ी पंत से ज्यादा प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, लेकिन बीसीसीआई बार-बार पंत को क्यों मौके दे रही है. लोग पंत को भारत के लिए मैच विनर बता रहे हैं और ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी बीस वर्ल्ड कप के लिए बेहद महत्वपूर्ण बता रहे हैं. .
3. ( क्र. 97 ) श्री अरूण भीमावद : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या यह सही है कि चौधरी वेतन आयोग की अनुशंसा लागू होने के पूर्व सहायक शिक्षकों एवं लिपिक वर्ग-3 के कर्मचारियों का वेतनमान एक समान रुपये 169-300 लागू था ? ( ख ) यदि हाँ, तो फिर चौधरी वेतन आयोग में शिक्षकों का वेतनमान रुपये 545-975 तथा लिपिकों का वेतनमान रुपये 515-800 अलग-अलग क्यों किया गया ? (ग) उक्त वेतन विसंगति के संबंध में क्या माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा कोई निर्णय लिपिकों के पक्ष में पारित किया गया है? क्या उक्त निर्णय के संबंध में शासन द्वारा लिपिकों के आर्थिक हित में कोई आदेश पारित किये गए हैं? यदि नहीं, तो क्यों ? (घ) शासन लिपिकों की उक्त विसंगति को कब तक दूर करेगा? मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ): (क) जी हाँ । (ख) शासकीय अमले में विभिन्न पदों / संवर्गों की कार्य प्रणाली, उनके पदोन्नति के अवसर मिलने वाली सुविधाएं आदि का विश्लेषण कर वेतन पुनरीक्षण की अनुशंसा करने के लिए ही वेतन आयोग का गठन किया जाता है। और इसी उद्देश्य से चौधरी वेतन आयोग का गठन किया गया है। आयोग द्वारा परीक्षणोपरांत दोनों संवगों के लिए अलग-अलग वेतनमान की अनुशंसा की गई थी। (ग) जी हॉ। माननीय उच्च न्यायालय ने दिनांक 13/07/2011 द्वारा निर्णय पारित किया तथा इसी निर्णय के परिप्रेक्ष्य में लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में अवमानना याचिका क्रमांक 1918/2011 दायर की थी, जिसे माननीय उच्च न्यायालय द्वारा परीक्षणोपरांत आदेश दिनांक 08.02.2013 द्वारा समाप्त की गई। लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ द्वारा पुनः रिट पिटीशन क्रमांक 6555/2013 दायर की है, जो माननीय उच्च न्यायालय के विचाराधीन है। (घ) उपरोक्त प्रश्नांश "ग" में उल्लेखानुसार प्रकरण मान. उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती। जिला सिंगरौली में इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना 4. ( क्र. 198 ) श्री राम लल्लू वैश्य : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा सिंगरौली जिले में दिनांक 14 फरवरी 2014 को प्रवास के दौरान सिंगरौली में इंजीनियरिंग कॉलेज खोले जाने की घोषणा की गई थी, यदि हाँ तो इसे कब तक में आरंभ किया जावेगा ? (ख) प्रश्नांश (क) के संबंध में सिंगरौली जिले के किस स्थान पर इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने के लिए भूमि का चयन किया गया है? (ग) प्रश्नांश (क) के संबंध कब तक में किस कॉलेज को प्रारंभ करने की योजना है? तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ): (क) जी नहीं । (ख) एवं (ग) उत्तरांश (क) के परिपेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। खराब ट्रान्सफारमर बदला जाना 5. ( क्र. 208 ) श्री भारत सिंह कुशवाह : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 14 ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में कितने ट्रान्सफारमर कब से खराब है या जले हुये है? उनको बदलने का कार्य क्यो नहीं किया जा रहा? कारण बतायें? (ख) जिस ट्रान्सफारमर पर 10 कृषकों के कनेक्शन है जिसमें से 6 कृषक समय-समय पर बिजली बिल अदा कर रहें एवं शेष 4 कृषक बिल अदा करने की स्थिति में न हो या करना न चाहें तो ऐसी स्थिति में क्या जले हुये ट्रान्सफारमर को बदलने की कार्यवाही की जायेगी ? यदि हां, तो कब तक यदि नहीं, तो क्यो? कारण स्पष्ट करें ? (ग) जो कृषक लगातार नियमानुसार बिजली बिलों का भुगतान कर रहें है इसके बाद भी उन्हें बिजली नहीं मिल पा रही जिससे नुकसान हो रहा क्या ऐसे किसानो के बिजली देने के संबंध में शासन विचार करेगा ? (घ) ऐसी स्थिति में किस प्रकार ऐसे किसानों को शासन बिजली उपलब्ध करायेगा? उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ): (क) प्रश्नाधीन क्षेत्र में 9 जले / खराब वितरण ट्रांसफार्मर संबद्ध उपभोक्ताओं द्वारा नियमानुसार विद्युत बिल की बकाया राशि जमा नहीं करने के कारण बदलने हेतु शेष हैं। उक्त ट्रांसफार्मरों के फेल होने की दिनांक की ट्रांसफार्मरवार जानकारी संलग्न परिशिष्ट के अनुसार है । (ख) वर्तमान में फेल ट्रांसफार्मर से संबंद्ध उपभोक्ताओं द्वारा निम्नानुसार विद्युत बिल की बकाया राशि जमा करने पर ट्रांसफार्मर बदलने का प्रावधान है बकाया राशि (i) रू. 25000/- या उससे कम। (ii) रू. 25000/- से अधिक एवं रू. 1.00 लाख से कम। (iii) रू. 1.00 लाख या उससे अधिक। फेल ट्रांसफार्मर बदलने हेतु आवश्यक राशि संपूर्ण राशि रू. 25000/- अथवा बकाया राशि का कम से कम 50 प्रतिशत, जो भी अधिक है। कम से कम बकाया राशि का 50 प्रतिशत उक्तानुसार विद्युत बिल की बकाया राशि जमा होने पर फेल ट्रांसफार्मर प्राथमिकता के आधार पर बदल दिये जायेंगे। (ग) एवं (घ ) प्रश्नाधीन उल्लेखित बकाया राशि वाले फेल वितरण ट्रांसफार्मरों को छोड़कर, बिजली के बिलों का भुगतान करने वाले कृषि उपभोक्ताओं को नियमानुसार विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। परिशिष्ट "आठ" ग्वालियर स्थित स्वर्ण रेखा नाले का निर्माण 6. ( क्र. 213 ) श्री भारत सिंह कुशवाह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या ग्वालियर में स्वर्ण रेखा नाले का निर्माण पूर्ण हो चुका है? उक्त नाले के निर्माण पर कितनी राशि व्यय की गई? क्या डी. पी. आर. अनुसार कार्य पूर्ण हुआ? (ख) स्वर्ण
तीन. श्री अरूण भीमावद : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सही है कि चौधरी वेतन आयोग की अनुशंसा लागू होने के पूर्व सहायक शिक्षकों एवं लिपिक वर्ग-तीन के कर्मचारियों का वेतनमान एक समान एक सौ उनहत्तर रुपया-तीन सौ लागू था ? यदि हाँ, तो फिर चौधरी वेतन आयोग में शिक्षकों का वेतनमान पाँच सौ पैंतालीस रुपया-नौ सौ पचहत्तर तथा लिपिकों का वेतनमान पाँच सौ पंद्रह रुपया-आठ सौ अलग-अलग क्यों किया गया ? उक्त वेतन विसंगति के संबंध में क्या माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा कोई निर्णय लिपिकों के पक्ष में पारित किया गया है? क्या उक्त निर्णय के संबंध में शासन द्वारा लिपिकों के आर्थिक हित में कोई आदेश पारित किये गए हैं? यदि नहीं, तो क्यों ? शासन लिपिकों की उक्त विसंगति को कब तक दूर करेगा? मुख्यमंत्री : जी हाँ । शासकीय अमले में विभिन्न पदों / संवर्गों की कार्य प्रणाली, उनके पदोन्नति के अवसर मिलने वाली सुविधाएं आदि का विश्लेषण कर वेतन पुनरीक्षण की अनुशंसा करने के लिए ही वेतन आयोग का गठन किया जाता है। और इसी उद्देश्य से चौधरी वेतन आयोग का गठन किया गया है। आयोग द्वारा परीक्षणोपरांत दोनों संवगों के लिए अलग-अलग वेतनमान की अनुशंसा की गई थी। जी हॉ। माननीय उच्च न्यायालय ने दिनांक तेरह जुलाई दो हज़ार ग्यारह द्वारा निर्णय पारित किया तथा इसी निर्णय के परिप्रेक्ष्य में लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में अवमानना याचिका क्रमांक एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह/दो हज़ार ग्यारह दायर की थी, जिसे माननीय उच्च न्यायालय द्वारा परीक्षणोपरांत आदेश दिनांक आठ.दो.दो हज़ार तेरह द्वारा समाप्त की गई। लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ द्वारा पुनः रिट पिटीशन क्रमांक छः हज़ार पाँच सौ पचपन/दो हज़ार तेरह दायर की है, जो माननीय उच्च न्यायालय के विचाराधीन है। उपरोक्त प्रश्नांश "ग" में उल्लेखानुसार प्रकरण मान. उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती। जिला सिंगरौली में इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना चार. श्री राम लल्लू वैश्य : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा सिंगरौली जिले में दिनांक चौदह फरवरी दो हज़ार चौदह को प्रवास के दौरान सिंगरौली में इंजीनियरिंग कॉलेज खोले जाने की घोषणा की गई थी, यदि हाँ तो इसे कब तक में आरंभ किया जावेगा ? प्रश्नांश के संबंध में सिंगरौली जिले के किस स्थान पर इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने के लिए भूमि का चयन किया गया है? प्रश्नांश के संबंध कब तक में किस कॉलेज को प्रारंभ करने की योजना है? तकनीकी शिक्षा मंत्री : जी नहीं । एवं उत्तरांश के परिपेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। खराब ट्रान्सफारमर बदला जाना पाँच. श्री भारत सिंह कुशवाह : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि चौदह ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में कितने ट्रान्सफारमर कब से खराब है या जले हुये है? उनको बदलने का कार्य क्यो नहीं किया जा रहा? कारण बतायें? जिस ट्रान्सफारमर पर दस कृषकों के कनेक्शन है जिसमें से छः कृषक समय-समय पर बिजली बिल अदा कर रहें एवं शेष चार कृषक बिल अदा करने की स्थिति में न हो या करना न चाहें तो ऐसी स्थिति में क्या जले हुये ट्रान्सफारमर को बदलने की कार्यवाही की जायेगी ? यदि हां, तो कब तक यदि नहीं, तो क्यो? कारण स्पष्ट करें ? जो कृषक लगातार नियमानुसार बिजली बिलों का भुगतान कर रहें है इसके बाद भी उन्हें बिजली नहीं मिल पा रही जिससे नुकसान हो रहा क्या ऐसे किसानो के बिजली देने के संबंध में शासन विचार करेगा ? ऐसी स्थिति में किस प्रकार ऐसे किसानों को शासन बिजली उपलब्ध करायेगा? उर्जा मंत्री : प्रश्नाधीन क्षेत्र में नौ जले / खराब वितरण ट्रांसफार्मर संबद्ध उपभोक्ताओं द्वारा नियमानुसार विद्युत बिल की बकाया राशि जमा नहीं करने के कारण बदलने हेतु शेष हैं। उक्त ट्रांसफार्मरों के फेल होने की दिनांक की ट्रांसफार्मरवार जानकारी संलग्न परिशिष्ट के अनुसार है । वर्तमान में फेल ट्रांसफार्मर से संबंद्ध उपभोक्ताओं द्वारा निम्नानुसार विद्युत बिल की बकाया राशि जमा करने पर ट्रांसफार्मर बदलने का प्रावधान है बकाया राशि रू. पच्चीस हज़ार/- या उससे कम। रू. पच्चीस हज़ार/- से अधिक एवं रू. एक.शून्य लाख से कम। रू. एक.शून्य लाख या उससे अधिक। फेल ट्रांसफार्मर बदलने हेतु आवश्यक राशि संपूर्ण राशि रू. पच्चीस हज़ार/- अथवा बकाया राशि का कम से कम पचास प्रतिशत, जो भी अधिक है। कम से कम बकाया राशि का पचास प्रतिशत उक्तानुसार विद्युत बिल की बकाया राशि जमा होने पर फेल ट्रांसफार्मर प्राथमिकता के आधार पर बदल दिये जायेंगे। एवं प्रश्नाधीन उल्लेखित बकाया राशि वाले फेल वितरण ट्रांसफार्मरों को छोड़कर, बिजली के बिलों का भुगतान करने वाले कृषि उपभोक्ताओं को नियमानुसार विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। परिशिष्ट "आठ" ग्वालियर स्थित स्वर्ण रेखा नाले का निर्माण छः. श्री भारत सिंह कुशवाह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या ग्वालियर में स्वर्ण रेखा नाले का निर्माण पूर्ण हो चुका है? उक्त नाले के निर्माण पर कितनी राशि व्यय की गई? क्या डी. पी. आर. अनुसार कार्य पूर्ण हुआ? स्वर्ण
अध्याय ३ सूत्र - २२ • योजनतै कुछ अधिक प्रमाण हिमवान् पर्वततै गोमुख सियाका प्रनालिकातै हिमवान् पर्वततै पचीरा योजन परै दश योजन मोटी काहलाकार धारा भरतक्षेत्रमे पडी सो तहा एकसाठी योजन चौडा लवा गगा नाम कुड है । ताकी दशयोजनप्रमाण ऊडाई है वज्रमय जाका तल है तिस कुडमे साढादश योजन • ऊचा अष्ट योजन चौड़ा लवा एक द्वीप हैं तिस द्वीपऊपरि श्रीदेवीका गृहप्रमाण महलकरि मडित श्री श्रीदेवीका मंदिर है तिम मंदिर ऊपरि कमलासन सिंहासन ऊपरि परमशातस्वरूप जिनेद्रका प्रतिविव विराजे है तिस प्रतिविव ऊपरि हिमवान पर्वतते पडिकरि तिस कुडके दक्षिणतोरणद्वारकरिके निकसि सो सवाछह योजन चौडी अर्ध योजन ऊडी क्रमकरि विस्तारकू प्राप्त होती भुजगवत कुटिलगामिनी खडप्रपातनाम विजयार्द्धकी गुफाकरि विजयार्द्ध के नीचे गमन करि विजयार्द्धक व्यतीतकरि दक्षिणसन्मुख होय दक्षिणभरतका मध्यमे जाय पूर्वसन्मुख मोडा खाय सवा योजन ऊडी साडावासठि योजन चौडा विस्तारकरि मागधद्वारकरि लवणसमुद्रमे प्रवेश करे है । बहुरि तिसही पद्मन्हदके पश्चिम तोरणद्वारकरि निकसि गगाकी ज्यो पाचसे योजन हिमवान् पर्वत ऊपरी सूधी जाय सिधूकूटते दक्षिणसन्मुख मुडी गगाकी ज्यो सिंधूकुडमे पडि तामिस्रागुफाकरि विजयार्द्धकू छाडि पश्चिमसन्मुख होय दक्षिणभरतके अर्द्धत प्रभासतीर्थद्वारकरि लवणसमुद्रमे प्रवेश करै है । याका कुडादिक्की स्वामिनी सिंधूदेवी है । बहुरि तिसही पद्म हृदके उत्तरतोरणद्वारकरि रोहितास्या नाम नदी निकसी सो दोयसे छिहत्तरी योजन अर छह कला ता उत्तरके सन्मुख हिमवान् पर्वतऊपरी गई फेरि साढा द्वादश योजन विस्तार अर एक योजन ऊडी सौ योजन कुछ अधिक लबी हिमवत् क्षेत्रमे एक सौ वीस योजनप्रमाण विस्तीर्ण अर वीस योजन ऊडा वज्रमय तलसहित कुड है, तामे सोलह योजन चौडालवा साढा वारह योजन ऊचा द्वीप है ता ऊपरि श्रीदेवीका ग्रहप्रमाण मंदिर ताविषै जिनप्रतिविव ऊपरि रोहितास्या नामा नदी पडिकरि तिस कुडका उत्तरतोरणद्वारत निकसी उत्तरसन्मुख शब्दवद्वैताढ्यपर्वतकी अर्द्ध प्रदक्षिणा देय अर अर्द्धयोजनपरेसू मूडि पश्चिमसन्मुख जाय पश्चिमलवणसमुद्रमे प्रवेश करे है । सो या नदीनिकसी तहा तो साढा वारा योजन चौडी एक कोश ऊड़ी है। अर समुद्रमे प्रवेश कीया है तहा एकसो पचीस योजन चौडी अर अढाईभोजन ऊडी है । ऐसे ए तीन नदी हिमवान् पर्वततै निकसी है । बहुरि ऐसेही महापद्म हदके दक्षिणतोरणाद्वारत निकसी रोहित नदी सो सुधा दक्षिणसन्मुख होय हैमवत् क्षेत्र मे पडी पूर्वसमुद्रको जाय है । बहुरि महापद्म हृदके उत्तरद्वारत निकसी द्रिकातानदी हरिक्षेत्रमे होय पश्चिमसमुद्रमे प्रवेश करे है । बहुरि तिगछ हदके दक्षिणतोरण द्वारतै निकसी हरित् नदी हरिक्षेत्रमे होय पूर्वसमुद्रको जाय है । वहुरि तिगछ हृदके उत्तर.
अध्याय तीन सूत्र - बाईस • योजनतै कुछ अधिक प्रमाण हिमवान् पर्वततै गोमुख सियाका प्रनालिकातै हिमवान् पर्वततै पचीरा योजन परै दश योजन मोटी काहलाकार धारा भरतक्षेत्रमे पडी सो तहा एकसाठी योजन चौडा लवा गगा नाम कुड है । ताकी दशयोजनप्रमाण ऊडाई है वज्रमय जाका तल है तिस कुडमे साढादश योजन • ऊचा अष्ट योजन चौड़ा लवा एक द्वीप हैं तिस द्वीपऊपरि श्रीदेवीका गृहप्रमाण महलकरि मडित श्री श्रीदेवीका मंदिर है तिम मंदिर ऊपरि कमलासन सिंहासन ऊपरि परमशातस्वरूप जिनेद्रका प्रतिविव विराजे है तिस प्रतिविव ऊपरि हिमवान पर्वतते पडिकरि तिस कुडके दक्षिणतोरणद्वारकरिके निकसि सो सवाछह योजन चौडी अर्ध योजन ऊडी क्रमकरि विस्तारकू प्राप्त होती भुजगवत कुटिलगामिनी खडप्रपातनाम विजयार्द्धकी गुफाकरि विजयार्द्ध के नीचे गमन करि विजयार्द्धक व्यतीतकरि दक्षिणसन्मुख होय दक्षिणभरतका मध्यमे जाय पूर्वसन्मुख मोडा खाय सवा योजन ऊडी साडावासठि योजन चौडा विस्तारकरि मागधद्वारकरि लवणसमुद्रमे प्रवेश करे है । बहुरि तिसही पद्मन्हदके पश्चिम तोरणद्वारकरि निकसि गगाकी ज्यो पाचसे योजन हिमवान् पर्वत ऊपरी सूधी जाय सिधूकूटते दक्षिणसन्मुख मुडी गगाकी ज्यो सिंधूकुडमे पडि तामिस्रागुफाकरि विजयार्द्धकू छाडि पश्चिमसन्मुख होय दक्षिणभरतके अर्द्धत प्रभासतीर्थद्वारकरि लवणसमुद्रमे प्रवेश करै है । याका कुडादिक्की स्वामिनी सिंधूदेवी है । बहुरि तिसही पद्म हृदके उत्तरतोरणद्वारकरि रोहितास्या नाम नदी निकसी सो दोयसे छिहत्तरी योजन अर छह कला ता उत्तरके सन्मुख हिमवान् पर्वतऊपरी गई फेरि साढा द्वादश योजन विस्तार अर एक योजन ऊडी सौ योजन कुछ अधिक लबी हिमवत् क्षेत्रमे एक सौ वीस योजनप्रमाण विस्तीर्ण अर वीस योजन ऊडा वज्रमय तलसहित कुड है, तामे सोलह योजन चौडालवा साढा वारह योजन ऊचा द्वीप है ता ऊपरि श्रीदेवीका ग्रहप्रमाण मंदिर ताविषै जिनप्रतिविव ऊपरि रोहितास्या नामा नदी पडिकरि तिस कुडका उत्तरतोरणद्वारत निकसी उत्तरसन्मुख शब्दवद्वैताढ्यपर्वतकी अर्द्ध प्रदक्षिणा देय अर अर्द्धयोजनपरेसू मूडि पश्चिमसन्मुख जाय पश्चिमलवणसमुद्रमे प्रवेश करे है । सो या नदीनिकसी तहा तो साढा वारा योजन चौडी एक कोश ऊड़ी है। अर समुद्रमे प्रवेश कीया है तहा एकसो पचीस योजन चौडी अर अढाईभोजन ऊडी है । ऐसे ए तीन नदी हिमवान् पर्वततै निकसी है । बहुरि ऐसेही महापद्म हदके दक्षिणतोरणाद्वारत निकसी रोहित नदी सो सुधा दक्षिणसन्मुख होय हैमवत् क्षेत्र मे पडी पूर्वसमुद्रको जाय है । बहुरि महापद्म हृदके उत्तरद्वारत निकसी द्रिकातानदी हरिक्षेत्रमे होय पश्चिमसमुद्रमे प्रवेश करे है । बहुरि तिगछ हदके दक्षिणतोरण द्वारतै निकसी हरित् नदी हरिक्षेत्रमे होय पूर्वसमुद्रको जाय है । वहुरि तिगछ हृदके उत्तर.
बोस इंडस्ट्री की कई जानी-मानी कंपनियों जैसे-' Ogilvy Outreach' और 'RK Swamy/BBDO' से जुड़े हुए थे। 'एक्सचेंज4मीडिया' के साथ एक बातचीत में 'एडिटरजी' के फाउंडर विक्रम चंद्रा ने माना कि महामारी कोविड-19 के कारण डिजिटल कंटेंट को लेकर चीजें काफी बदल रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा को पूछताछ के लिए बुलाया है।
बोस इंडस्ट्री की कई जानी-मानी कंपनियों जैसे-' Ogilvy Outreach' और 'RK Swamy/BBDO' से जुड़े हुए थे। 'एक्सचेंजचारमीडिया' के साथ एक बातचीत में 'एडिटरजी' के फाउंडर विक्रम चंद्रा ने माना कि महामारी कोविड-उन्नीस के कारण डिजिटल कंटेंट को लेकर चीजें काफी बदल रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा को पूछताछ के लिए बुलाया है।
एसआरएन अस्पताल के एक जूनियर डॉक्टर ने रविवार को जमकर हंगामा किया। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर कर्मचारियों व अधिकारियों से गालीगलौज की और दरवाजे पर ताला भी जड़ दिया। इससे पोस्टमार्टम का कार्य बाधित हो गया। हंगामे की सूचना पर पुलिस पहुंची और जूनियर डॉक्टर को कोतवाली ले गई। शाम तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। उधर पुलिस डॉक्टर को हिरासत में लेने की बात से इन्कार करती रही। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
एसआरएन अस्पताल के एक जूनियर डॉक्टर ने रविवार को जमकर हंगामा किया। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर कर्मचारियों व अधिकारियों से गालीगलौज की और दरवाजे पर ताला भी जड़ दिया। इससे पोस्टमार्टम का कार्य बाधित हो गया। हंगामे की सूचना पर पुलिस पहुंची और जूनियर डॉक्टर को कोतवाली ले गई। शाम तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। उधर पुलिस डॉक्टर को हिरासत में लेने की बात से इन्कार करती रही। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
बूंदी। सांसद ओम बिरला ने बुधवार को यहां सर्किट हाउस में आमजन के अभाव अभियोग सुने। इस दौरान उन्होंने समस्याएं लेकर आने वाले परिवादियों के प्रार्थना पत्र लिए और समस्या के संबंध में विस्तार से जानकारी ली तथा संबंधित विभाग के अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि अधिकारी आमजन की समस्याओं का त्वरित निस्तारण कर राहत प्रदान करें। सासंद बिरला के समक्ष लोगों ने बूंदी में नए उद्योग स्थापित कर रोजगार के अवसर बढ़ाने सहित राजस्व संबंधी तथा व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक समस्याएं रखकर उनके समाधान की बात कही। संासद ने भरोसा दिलाया कि तय समय में समस्याओं का समाधान कर राहत दी जाएगी। इस दौरान उन्होंने जिले में संचालित विकास कार्यों की प्रगति जानकारी भी ली। जन सुनवाई के दौरान बूंदी विधायक अशोक डोगरा, नगर परिषद सभापति महावीर मोदी, जिला कलक्टर नरेश कुमार ठकराल, महिपत सिंह हाडा, जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं आमजन उपस्थित रहे।
बूंदी। सांसद ओम बिरला ने बुधवार को यहां सर्किट हाउस में आमजन के अभाव अभियोग सुने। इस दौरान उन्होंने समस्याएं लेकर आने वाले परिवादियों के प्रार्थना पत्र लिए और समस्या के संबंध में विस्तार से जानकारी ली तथा संबंधित विभाग के अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि अधिकारी आमजन की समस्याओं का त्वरित निस्तारण कर राहत प्रदान करें। सासंद बिरला के समक्ष लोगों ने बूंदी में नए उद्योग स्थापित कर रोजगार के अवसर बढ़ाने सहित राजस्व संबंधी तथा व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक समस्याएं रखकर उनके समाधान की बात कही। संासद ने भरोसा दिलाया कि तय समय में समस्याओं का समाधान कर राहत दी जाएगी। इस दौरान उन्होंने जिले में संचालित विकास कार्यों की प्रगति जानकारी भी ली। जन सुनवाई के दौरान बूंदी विधायक अशोक डोगरा, नगर परिषद सभापति महावीर मोदी, जिला कलक्टर नरेश कुमार ठकराल, महिपत सिंह हाडा, जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं आमजन उपस्थित रहे।
रांचीः भाजपा विधायक ढुल्लू महतो ने कतरास स्टेशन पर 26 जोड़ी ट्रेन की ठहराव की मांग को लेकर विधानसभा के मुख्य द्वार पर धरना दिया। विधायक ने कहा कि रेलवे को सबसे ज्यादा राजस्व कतरास स्टेशन से मिलता है। पूर्व में यहां कई ट्रेन का ठहराव होता है। लेकिन अभी ठहराव रोक दिया गया है। उन्होनें कहा कि माल ढुलाई के लिए सिर्फ इस स्टेशन का उपयोग किया जा रहा है। जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में केंद्र सरकार से बात करे और कतरास स्टेशन पर 26 ट्रेन के ठहराव को सुनिश्चित करे। विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष रबिन्द्रनाथ महतो ने धरना पर बैठे भाजपा विधायक ढुल्लू महतो को बाहर से बुलाने के तीन सदस्यों को भेजा। इसके बाद ढुल्लू महतो सदन में आये।
रांचीः भाजपा विधायक ढुल्लू महतो ने कतरास स्टेशन पर छब्बीस जोड़ी ट्रेन की ठहराव की मांग को लेकर विधानसभा के मुख्य द्वार पर धरना दिया। विधायक ने कहा कि रेलवे को सबसे ज्यादा राजस्व कतरास स्टेशन से मिलता है। पूर्व में यहां कई ट्रेन का ठहराव होता है। लेकिन अभी ठहराव रोक दिया गया है। उन्होनें कहा कि माल ढुलाई के लिए सिर्फ इस स्टेशन का उपयोग किया जा रहा है। जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में केंद्र सरकार से बात करे और कतरास स्टेशन पर छब्बीस ट्रेन के ठहराव को सुनिश्चित करे। विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष रबिन्द्रनाथ महतो ने धरना पर बैठे भाजपा विधायक ढुल्लू महतो को बाहर से बुलाने के तीन सदस्यों को भेजा। इसके बाद ढुल्लू महतो सदन में आये।
नई दिल्ली, सितंबर 29। हाल ही में आईआईएफएल वेल्थ हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2022 रिलीज की गयी। इसमें एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस लिस्ट में 40 साल से कम आयु वाले सेल्फ मेड अमीरों की लिस्ट भी सामने आई है। यहां हम आपको 40 साल से कम आयु वाले टॉप 10 अमीर भारतीयों के बारे में बताएंगे। इस लिस्ट में ज़ेरोधा के कोफ़ाउंडर निखिल कामथ पहले नंबर पर हैं। जानते हैं बाकी लिस्ट। आईआईएफएल वेल्थ हुरुन इंडिया 40 एंड अंडर सेल्फ मेड रिच लिस्ट 2022 में टॉप करने वाले रहे निखिल कामथ। उनकी दौलत 17,500 करोड़ रुपये और उनकी आयु 36 साल है। वहीं ओला के संस्थापक भाविश अग्रवाल दूसरे स्थान पर रहे। अग्रवाल की दौलत 11,700 करोड़ रुपये करोड़ रु और आयु 37 साल है। इसी तरह Media. net के दिव्यांक तुरखिया तीसरे स्थान पर रहे। उनकी संपत्ति इस लिस्ट के अनुसार 11,200 करोड़ रुपये और 40 साल है। ब्राउजरस्टैक के 37 वर्षीय नकुल अग्रवाल चौथे नंबर पर हैं। उनकी दौलत 9900 करोड़ रु हैं। इसी कंपनी के इतनी ही दौलत के साथ 38 वर्षीय रितेश अरोड़ा भी लिस्ट के अनुसार चौथे नंबर पर ही हैं। फ्लिपकार्ट के 39 वर्षीय बिन्नी बंसल छठे नंबर पर हैं। उनकी दौलत 8100 करोड़ रु है। बाकी लिस्ट में 7वें नंबर पर रितेश अग्रवाल हैं, जो ओयो के सीईओ हैं। इनकी दौलत 6300 करोड़ रु है। लिस्ट में 8वें नंबर पर हर्शिल माथुर हैं, जो रेजरपे के सीईओ हैं। इनकी दौलत 5500 करोड़ रु है। लिस्ट में 8वें नंबर पर ही संयुक्त रूप से शशांक कुमार हैं, जो रेजरपे के एमडी हैं। इनकी दौलत 5500 करोड़ रु है। 10वें नंबर पर हैं नेहा नारखेडे एंड फैमिली। नेहा नारखेडे की आयु 37 वर्ष हैं। वे कॉन्फ्लुएंट की फाउंडर हैं। उनके पास 4700 करोड़ रु है। 28 सितंबर को जारी की गई लिस्ट में 40 वर्ष से कम आयु के वे सेल्फ-मेड भारतीय उद्यमी शामिल हैं, जिनकी संपत्ति 1,000 करोड़ रुपये है। इस लिस्ट में 15 नए लोग को शामिल हुए हैं, जिनमें से सभी स्टार्टअप के संस्थापक हैं। फिजिक्स वाल्लाह के सह-संस्थापक, अलख पांडे और प्रतीक माहेश्वरी ने भी इस लिस्ट में पहली बार जगह बनाई। पांडे और माहेश्वरी दोनों ही सूची में संयुक्त रूप से 11वें नंबर पर हैं। इनमें से दोनों की दौलत 4,000-4,000 करोड़ रुपये है। लिस्ट के अनुसार 14 लोगों के साथ अपना आधार बनाने के लिए इन युवा अमीरों के लिए बेंगलुरु सबसे लोकप्रिय स्थान रहा। इसके बाद नई दिल्ली और मुंबई का नंबर है। आठ-आठ लोग से इस लिस्ट में शामिल हैं। 40 और इससे कम आयु के अमीरों की कुल दौलत पिछले साल की तुलना में 11% बढ़ी। अब ये वर्तमान में 1,83,700 करोड़ रुपये हो गयी है। हुरुन इंडिया के एमडी और मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद के मुताबिक स्टार्ट-अप और उद्यमिता की वर्तमान लहर ने वैश्विक मानक स्थापित किए हैं और घरेलू उद्यमियों को विदेशी प्रतिस्पर्धियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रेरित किया है।
नई दिल्ली, सितंबर उनतीस। हाल ही में आईआईएफएल वेल्थ हुरुन इंडिया रिच लिस्ट दो हज़ार बाईस रिलीज की गयी। इसमें एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस लिस्ट में चालीस साल से कम आयु वाले सेल्फ मेड अमीरों की लिस्ट भी सामने आई है। यहां हम आपको चालीस साल से कम आयु वाले टॉप दस अमीर भारतीयों के बारे में बताएंगे। इस लिस्ट में ज़ेरोधा के कोफ़ाउंडर निखिल कामथ पहले नंबर पर हैं। जानते हैं बाकी लिस्ट। आईआईएफएल वेल्थ हुरुन इंडिया चालीस एंड अंडर सेल्फ मेड रिच लिस्ट दो हज़ार बाईस में टॉप करने वाले रहे निखिल कामथ। उनकी दौलत सत्रह,पाँच सौ करोड़ रुपये और उनकी आयु छत्तीस साल है। वहीं ओला के संस्थापक भाविश अग्रवाल दूसरे स्थान पर रहे। अग्रवाल की दौलत ग्यारह,सात सौ करोड़ रुपये करोड़ रु और आयु सैंतीस साल है। इसी तरह Media. net के दिव्यांक तुरखिया तीसरे स्थान पर रहे। उनकी संपत्ति इस लिस्ट के अनुसार ग्यारह,दो सौ करोड़ रुपये और चालीस साल है। ब्राउजरस्टैक के सैंतीस वर्षीय नकुल अग्रवाल चौथे नंबर पर हैं। उनकी दौलत नौ हज़ार नौ सौ करोड़ रु हैं। इसी कंपनी के इतनी ही दौलत के साथ अड़तीस वर्षीय रितेश अरोड़ा भी लिस्ट के अनुसार चौथे नंबर पर ही हैं। फ्लिपकार्ट के उनतालीस वर्षीय बिन्नी बंसल छठे नंबर पर हैं। उनकी दौलत आठ हज़ार एक सौ करोड़ रु है। बाकी लिस्ट में सातवें नंबर पर रितेश अग्रवाल हैं, जो ओयो के सीईओ हैं। इनकी दौलत छः हज़ार तीन सौ करोड़ रु है। लिस्ट में आठवें नंबर पर हर्शिल माथुर हैं, जो रेजरपे के सीईओ हैं। इनकी दौलत पाँच हज़ार पाँच सौ करोड़ रु है। लिस्ट में आठवें नंबर पर ही संयुक्त रूप से शशांक कुमार हैं, जो रेजरपे के एमडी हैं। इनकी दौलत पाँच हज़ार पाँच सौ करोड़ रु है। दसवें नंबर पर हैं नेहा नारखेडे एंड फैमिली। नेहा नारखेडे की आयु सैंतीस वर्ष हैं। वे कॉन्फ्लुएंट की फाउंडर हैं। उनके पास चार हज़ार सात सौ करोड़ रु है। अट्ठाईस सितंबर को जारी की गई लिस्ट में चालीस वर्ष से कम आयु के वे सेल्फ-मेड भारतीय उद्यमी शामिल हैं, जिनकी संपत्ति एक,शून्य करोड़ रुपये है। इस लिस्ट में पंद्रह नए लोग को शामिल हुए हैं, जिनमें से सभी स्टार्टअप के संस्थापक हैं। फिजिक्स वाल्लाह के सह-संस्थापक, अलख पांडे और प्रतीक माहेश्वरी ने भी इस लिस्ट में पहली बार जगह बनाई। पांडे और माहेश्वरी दोनों ही सूची में संयुक्त रूप से ग्यारहवें नंबर पर हैं। इनमें से दोनों की दौलत चार,शून्य-चार,शून्य करोड़ रुपये है। लिस्ट के अनुसार चौदह लोगों के साथ अपना आधार बनाने के लिए इन युवा अमीरों के लिए बेंगलुरु सबसे लोकप्रिय स्थान रहा। इसके बाद नई दिल्ली और मुंबई का नंबर है। आठ-आठ लोग से इस लिस्ट में शामिल हैं। चालीस और इससे कम आयु के अमीरों की कुल दौलत पिछले साल की तुलना में ग्यारह% बढ़ी। अब ये वर्तमान में एक,तिरासी,सात सौ करोड़ रुपये हो गयी है। हुरुन इंडिया के एमडी और मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद के मुताबिक स्टार्ट-अप और उद्यमिता की वर्तमान लहर ने वैश्विक मानक स्थापित किए हैं और घरेलू उद्यमियों को विदेशी प्रतिस्पर्धियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रेरित किया है।
CBI Summons Arvind Kejriwal: एक फोन, कई सवाल. . . क्या दिल्ली शराब घोटाले में जेल जाएंगे केजरीवाल ? CBI Summons Arvind Kejriwal: CBI ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को कल पूछताछ के लिए बुलाया है। केजरीवाल से CBI शराब घोटाले को लेकर पूछताछ करेगी। लेकिन सबके मन में यही सवाल है कि आखिर CBI ने केजरीवाल को क्यों बुलाया है।
CBI Summons Arvind Kejriwal: एक फोन, कई सवाल. . . क्या दिल्ली शराब घोटाले में जेल जाएंगे केजरीवाल ? CBI Summons Arvind Kejriwal: CBI ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को कल पूछताछ के लिए बुलाया है। केजरीवाल से CBI शराब घोटाले को लेकर पूछताछ करेगी। लेकिन सबके मन में यही सवाल है कि आखिर CBI ने केजरीवाल को क्यों बुलाया है।
(सुमीर कौल) श्रीनगर/नयी दिल्ली, छह जून जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का करीबी वरिष्ठ पीडीपी नेता वहीद-उर-रहमान पारा पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों का चहेता रहा है तथा 2007 से पत्रकार एवं नेता के रूप में उसका सफर 'छल प्रपंच, धोखाधड़ी एवं पाखंड' की कहानी रही है। उसके विरूद्ध पुलिस द्वारा दाखिल किये गये आरोपपत्र में ऐसा दावा किया गया है। पारा पर आरोप है कि उसने राजनीतिक फायदे के वास्ते आतंकवादियों से सहयोग पाने के लिए उनके साथ साठगांठ कर रखा था और वह बदले में उन्हें कई तरह की मदद पहुंचाता था। फलस्वरूप कई आतंकवादी हमले हुए। पांच सुरक्षाप्राप्त गवाहों एवं तकनीकी खुफिया की मदद से सीआईडी विभाग की शाखा अपराध जांच कश्मीर (सीआईके) ने हाल ही में एनआईए अदालत में आरोपपत्र दायर किया। उसमें आरोप लगाया गया है कि पारा की पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उनसे मिलीभगत थी और साथ ही वह यह भी सुनिश्चित करता था कि उसके राजनीतिक विरोधियों का सफाया हो जाए। यह आरोपपत्र 19 पन्नों का है और उसमें सैंकड़ों पन्नों के अनुलग्नक भी हैं। आरोपपत्र में आतंकवादी संगठनों को भुगतान करके अपनी पार्टी के पक्ष में चुनावी पलड़ा भारी करने के लिए राजनीतिक विरोधियों का सफाया करने तथा अपने पार्टी नेताओं की मदद पहुंचाने के लक्षित प्रयासों की कई घटनाओं का जिक्र है। हालांकि उसके वकील ने उसकी जमानत एवं हिरासती अर्जियों की सुनवाई के दौरान इन आरोपों से इनकार किया है और दावा किया है कि उनके मुवक्किल, जो पिछले साल जिला विकास परिषद का चुनाव जीते, को राजनीतिक बलि का बकरा बनाया जा रहा है। आरोपपत्र में पाकिस्तान में प्रशिक्षण पाए अबू दूजाना और अबू कासिम के साथ उसके संबधों का विस्तार से जिक्र है जो सुरक्षाबलों के साथ अलग- अलग मुठभेड़ों में मारे गये थे। उसमें यह आरोप लगाया गया है कि वह उनसे व्यक्तिगत रूप से या उनके लिए काम करने वालों के माध्यम से मिला करता था। आरोपपत्र में दावा किया गया है कि दुर्दांत पाकिस्तानी आतंकवादी अबू दूजाना की एक लड़की से जबरिया शादी में उसका ही हाथ था। पुलिस ने 2007 से ही उसके जीवन के सफर का पता लगाया है जब वह पाकिस्तान गया था और उसने प्रतिबंधित हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन का साक्षात्कार किया था एवं उसे दक्षिण कश्मीर में अपने गृह जिले पुलवामा से चलाये जा रहे अपने स्थानीय मीडिया चैनल पर प्रसारित किया था। यूएपीए और धनशोधन रोकथाम कानून के तहत मामलों की जांच के लिए अधिकृत सीआईके ने अवैध गतिवधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत पारा पर मुकदमे के लिए जम्मू कश्मीर के गृह विभाग से अनुमति ली। सीआईके ने 'भरोसेमंद एवं गोपनीय सूत्रों' के आधार पर पिछले साल कुछ अज्ञात नेताओं और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इन सूत्रों ने बताया था कि कुछ राजनीतिक नेता अपनी ताकत का दुरूपयोग कर रहे हैं और आतंकवादियों की मदद कर रहे हैं। इस साल मार्च में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पारा के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था जिसमें आरोप लगाया है कि पीडीपी युवा नेता ने 2016 में हिज्बुल मुजाहिदीन के पोस्टर ब्वाय बुरहान वानी की मौत के बीच कश्मीर में अशांति पैदा करने के लिए हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाम को पांच करोड़ रूपये दिये थे। एनआईए के अनुसार पिछले साल नवंबर में गिरफ्तार किया गया पारा हिज्बुल मुजाहिदीन एवं लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतवंकवादी संगठनों के साथ रहा है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
श्रीनगर/नयी दिल्ली, छह जून जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का करीबी वरिष्ठ पीडीपी नेता वहीद-उर-रहमान पारा पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों का चहेता रहा है तथा दो हज़ार सात से पत्रकार एवं नेता के रूप में उसका सफर 'छल प्रपंच, धोखाधड़ी एवं पाखंड' की कहानी रही है। उसके विरूद्ध पुलिस द्वारा दाखिल किये गये आरोपपत्र में ऐसा दावा किया गया है। पारा पर आरोप है कि उसने राजनीतिक फायदे के वास्ते आतंकवादियों से सहयोग पाने के लिए उनके साथ साठगांठ कर रखा था और वह बदले में उन्हें कई तरह की मदद पहुंचाता था। फलस्वरूप कई आतंकवादी हमले हुए। पांच सुरक्षाप्राप्त गवाहों एवं तकनीकी खुफिया की मदद से सीआईडी विभाग की शाखा अपराध जांच कश्मीर ने हाल ही में एनआईए अदालत में आरोपपत्र दायर किया। उसमें आरोप लगाया गया है कि पारा की पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उनसे मिलीभगत थी और साथ ही वह यह भी सुनिश्चित करता था कि उसके राजनीतिक विरोधियों का सफाया हो जाए। यह आरोपपत्र उन्नीस पन्नों का है और उसमें सैंकड़ों पन्नों के अनुलग्नक भी हैं। आरोपपत्र में आतंकवादी संगठनों को भुगतान करके अपनी पार्टी के पक्ष में चुनावी पलड़ा भारी करने के लिए राजनीतिक विरोधियों का सफाया करने तथा अपने पार्टी नेताओं की मदद पहुंचाने के लक्षित प्रयासों की कई घटनाओं का जिक्र है। हालांकि उसके वकील ने उसकी जमानत एवं हिरासती अर्जियों की सुनवाई के दौरान इन आरोपों से इनकार किया है और दावा किया है कि उनके मुवक्किल, जो पिछले साल जिला विकास परिषद का चुनाव जीते, को राजनीतिक बलि का बकरा बनाया जा रहा है। आरोपपत्र में पाकिस्तान में प्रशिक्षण पाए अबू दूजाना और अबू कासिम के साथ उसके संबधों का विस्तार से जिक्र है जो सुरक्षाबलों के साथ अलग- अलग मुठभेड़ों में मारे गये थे। उसमें यह आरोप लगाया गया है कि वह उनसे व्यक्तिगत रूप से या उनके लिए काम करने वालों के माध्यम से मिला करता था। आरोपपत्र में दावा किया गया है कि दुर्दांत पाकिस्तानी आतंकवादी अबू दूजाना की एक लड़की से जबरिया शादी में उसका ही हाथ था। पुलिस ने दो हज़ार सात से ही उसके जीवन के सफर का पता लगाया है जब वह पाकिस्तान गया था और उसने प्रतिबंधित हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन का साक्षात्कार किया था एवं उसे दक्षिण कश्मीर में अपने गृह जिले पुलवामा से चलाये जा रहे अपने स्थानीय मीडिया चैनल पर प्रसारित किया था। यूएपीए और धनशोधन रोकथाम कानून के तहत मामलों की जांच के लिए अधिकृत सीआईके ने अवैध गतिवधि रोकथाम अधिनियम के तहत पारा पर मुकदमे के लिए जम्मू कश्मीर के गृह विभाग से अनुमति ली। सीआईके ने 'भरोसेमंद एवं गोपनीय सूत्रों' के आधार पर पिछले साल कुछ अज्ञात नेताओं और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इन सूत्रों ने बताया था कि कुछ राजनीतिक नेता अपनी ताकत का दुरूपयोग कर रहे हैं और आतंकवादियों की मदद कर रहे हैं। इस साल मार्च में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पारा के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था जिसमें आरोप लगाया है कि पीडीपी युवा नेता ने दो हज़ार सोलह में हिज्बुल मुजाहिदीन के पोस्टर ब्वाय बुरहान वानी की मौत के बीच कश्मीर में अशांति पैदा करने के लिए हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाम को पांच करोड़ रूपये दिये थे। एनआईए के अनुसार पिछले साल नवंबर में गिरफ्तार किया गया पारा हिज्बुल मुजाहिदीन एवं लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतवंकवादी संगठनों के साथ रहा है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
जामताड़ाः झारखंड के जामताड़ा जिले के पांजुनिया गांव के समीप सोमवार सुबह नाला-दुमका मुख्य सड़क पर एक हादसे में दो लोगों की दर्दनाक माैत हो गई. पांजुनिया गांव के मोड़ पर एक ट्रक और बस के बीच आमने-सामने की भिड़ंत हो गई. बस पर सवार दो लोगों की माैके पर ही माैत हो गई. इस हादसे में कई लोग घायल हुए हैं. घायलों को नाला के सीएचसी में भर्ती कराया गया है. मृतकों की पहचान नहीं हो पाई है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. बस पर कंस्ट्रक्शन कंपनी के मजदूर सवार थे. सभी मजदूर कंपनी के कार्यस्थल पर जा रहे थे. दुर्घटना की सूचना पर एसडीपीओ मनोज झा पुलिस जवान के साथ पहुंचे. आक्रोशित ग्रामीणों ने रोड को जाम कर दिया है. तेज रफ्तार की वजह से घटना हुई है.
जामताड़ाः झारखंड के जामताड़ा जिले के पांजुनिया गांव के समीप सोमवार सुबह नाला-दुमका मुख्य सड़क पर एक हादसे में दो लोगों की दर्दनाक माैत हो गई. पांजुनिया गांव के मोड़ पर एक ट्रक और बस के बीच आमने-सामने की भिड़ंत हो गई. बस पर सवार दो लोगों की माैके पर ही माैत हो गई. इस हादसे में कई लोग घायल हुए हैं. घायलों को नाला के सीएचसी में भर्ती कराया गया है. मृतकों की पहचान नहीं हो पाई है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. बस पर कंस्ट्रक्शन कंपनी के मजदूर सवार थे. सभी मजदूर कंपनी के कार्यस्थल पर जा रहे थे. दुर्घटना की सूचना पर एसडीपीओ मनोज झा पुलिस जवान के साथ पहुंचे. आक्रोशित ग्रामीणों ने रोड को जाम कर दिया है. तेज रफ्तार की वजह से घटना हुई है.
एक कहानी जूली की (2016)(U/A) *अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
एक कहानी जूली की *अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
सुमित्रा । वे नगर और ग्राम भी धन्य हैं जहा आपके पेर पडते हैं। आज हमारे भाग्य खुले कि आपके दर्शन हुए। हमारे नेत्र आज सफल हुए। बस यही प्रार्थना है कि जब आप लोटे तो इधर से ही लोटे । हमे दर्शन देते जाए। सीता उनसे कहती - कल का भी क्या ठिकाना है। बहिन । मैं हमेशा । तुम्हारे पास नही रह सकती । हा मेरा धर्म सदैव तुम्हारे पास रह सकता है। अगर तुम मेरे धर्म को अपनालो तो मेरी आवश्यकता ही नही रहेगी। इस प्रकार राम सीता और लक्ष्मण जिधर निकल जाते उधर एक अपूर्व वायुमण्डल तैयार हो जाता था । लोग उनका साथ नही छोड़ना चाहते थे और जब वे लोग इनका साथ छोड़ जाते तो वे ठगे-से रह जाते थे। गावो के जो लोग खेत-खलिहान में होते और राम के आने पर उनके दर्शन से वचित रह जाते थे वे बाद मे आकर घोर पश्चात्ताप करते। उनमे जो सबल होते दौड कर उसी ओर जाते जिस ओर राम गये होते । निर्बल पछताते रह जाते । राम को देखने वाले उससे कहते - तुम्हारा पछताना ठीक ही हे । वास्तव मे तुमने बडा लाभ खो दिया है। मगर अब पछताने से क्या लाभ है ? अधीर अवध अब हमे अवध पर दृष्टि डालनी चाहिए। राम लक्ष्मण और सीता के चले जाने के पश्चात् अवध सूना हो गया। सर्वत्र उदासी ओर विषाद का साम्राज्य छा गया । ऐसा जान पडता, मानो अवध की श्री सीता के रूप मे अवध का सौभाग्य राम के रूप और अवध का सुख लक्ष्मण के रूप मे चला गया। अवध जैसे भयावना लगने लगा। अवध की जनता का चित्त परिताप से पीडित था । राजपरिवार ऐसा मालूम होता मानो किसी ने कभी-अभी उसका सर्वस्व छीन लिया हो । महारानी कोशल्या का क्या पूछना है? उन्हे क्षण भर के लिए भी चेन नही था । खाते-पीते उठते-बैठते सोते-जागते उन्हें अपने दोनो पुत्रो ओर पुत्रवधू की ही चिन्ता रहती। वे सोचती इस समय राम आदि कहा होगे? क्या करते होगे? हाय सुकुमारी सीता केसे पेदल चलती होगी? कहा सोती होगी? कोन जाने किस जन्म का मेरा प्रबल पाप उदय मे आया है। इस प्रकार अवध मे घर-घर दु ख व्याप रहा था। लेकिन भरत को जो कष्ट हुआ उसकी तुलना शायद किसी से नही हो सकती। भरत अन्तर्दाह से भीतर - ही - भीतर दग्ध हो रहे थे। उन्होने अपने-आप को सबसे ज्यादा २४२ श्री जवाहर Ang pag tjera tjev zajetj Domagor ne propuer je propagagaja meng
सुमित्रा । वे नगर और ग्राम भी धन्य हैं जहा आपके पेर पडते हैं। आज हमारे भाग्य खुले कि आपके दर्शन हुए। हमारे नेत्र आज सफल हुए। बस यही प्रार्थना है कि जब आप लोटे तो इधर से ही लोटे । हमे दर्शन देते जाए। सीता उनसे कहती - कल का भी क्या ठिकाना है। बहिन । मैं हमेशा । तुम्हारे पास नही रह सकती । हा मेरा धर्म सदैव तुम्हारे पास रह सकता है। अगर तुम मेरे धर्म को अपनालो तो मेरी आवश्यकता ही नही रहेगी। इस प्रकार राम सीता और लक्ष्मण जिधर निकल जाते उधर एक अपूर्व वायुमण्डल तैयार हो जाता था । लोग उनका साथ नही छोड़ना चाहते थे और जब वे लोग इनका साथ छोड़ जाते तो वे ठगे-से रह जाते थे। गावो के जो लोग खेत-खलिहान में होते और राम के आने पर उनके दर्शन से वचित रह जाते थे वे बाद मे आकर घोर पश्चात्ताप करते। उनमे जो सबल होते दौड कर उसी ओर जाते जिस ओर राम गये होते । निर्बल पछताते रह जाते । राम को देखने वाले उससे कहते - तुम्हारा पछताना ठीक ही हे । वास्तव मे तुमने बडा लाभ खो दिया है। मगर अब पछताने से क्या लाभ है ? अधीर अवध अब हमे अवध पर दृष्टि डालनी चाहिए। राम लक्ष्मण और सीता के चले जाने के पश्चात् अवध सूना हो गया। सर्वत्र उदासी ओर विषाद का साम्राज्य छा गया । ऐसा जान पडता, मानो अवध की श्री सीता के रूप मे अवध का सौभाग्य राम के रूप और अवध का सुख लक्ष्मण के रूप मे चला गया। अवध जैसे भयावना लगने लगा। अवध की जनता का चित्त परिताप से पीडित था । राजपरिवार ऐसा मालूम होता मानो किसी ने कभी-अभी उसका सर्वस्व छीन लिया हो । महारानी कोशल्या का क्या पूछना है? उन्हे क्षण भर के लिए भी चेन नही था । खाते-पीते उठते-बैठते सोते-जागते उन्हें अपने दोनो पुत्रो ओर पुत्रवधू की ही चिन्ता रहती। वे सोचती इस समय राम आदि कहा होगे? क्या करते होगे? हाय सुकुमारी सीता केसे पेदल चलती होगी? कहा सोती होगी? कोन जाने किस जन्म का मेरा प्रबल पाप उदय मे आया है। इस प्रकार अवध मे घर-घर दु ख व्याप रहा था। लेकिन भरत को जो कष्ट हुआ उसकी तुलना शायद किसी से नही हो सकती। भरत अन्तर्दाह से भीतर - ही - भीतर दग्ध हो रहे थे। उन्होने अपने-आप को सबसे ज्यादा दो सौ बयालीस श्री जवाहर Ang pag tjera tjev zajetj Domagor ne propuer je propagagaja meng
जनवरी, १९५७ ] सिद्ध-पट्टण के संबंध में हरिदास और जैन ग्रंथ और शेखावाटी का किसान भी इस दुर्लभ अवसर का आनन्द लूटे बिननहीं रहता। उसकी धरती उसे बुलाती है। रूपक की छटा में श्री हरिदासजी गा उठते हैं - 'संतो खेती की रुति प्राई । प्रौसर बसो बहोड़ि नहि लाभ श्रव जीता ज्यू बाही । धरती सूड़ भाड़ अलसोरह्या, विरह प्रगति जलाई । सुबुधि भोमि राम जल बूढ़ा, यू बाड़ी बनि श्राई ।। हलसौतिये अर्थात् कृषिकर्म के आरंभ में सूड़ ( अर्थात् छोटे पौषों को काटना) करते और उनको इकट्ठा करके जलाते हुए आज भी यहाँ के किसानों को आप देख सकते हैं । देखते-देखते मरुभूमि बाजरा, मोठ और गंवार के पौधों से हरी भरी हो जाती है और किसान 'निनाण' (घास काट कर खेत संवारना ) शुरू कर देते हैं । इसी निंदाण की प्रोर संकेत करते हुए श्री हरिदासजी कहते हैं-- 'खेत निदाण्यो नीपजे, सिरटा मोटा होय ।' ठीक तो है खेत की उपज निनाण से बढ़ती है और बाजरे के मोटे सिट्टो ( भुट्ट) भी तभी आते हैं । जब ये काम के दिन बीत जाते हैं तो शेखावटी के जीवन में एक विचित्र प्रकार की उदासी और आलस्य का वातावरण छा जाता है । पशु पक्षी इस उदासी को और भी विचित्र रंग दे देते हैं । गाँव के बाहर कोई मोटी ताजी भैंस छाया में बैठी जुगाली लेती रहती और गुरसल' तथा कौवे उस पर आकर उठना नहीं चाहती। उधर चोंच से कुरेद कर सींग की फटकार की परवाह न करते हुए काग श्री हरिदासजी के शब्दों में देखिए - माया भैंस विराट् बय, जीव बिलंबे माय । काल काग छोड़े नहीं, वै लागे वो खाय ।। कभी-कभी कीचड़ में लिपटे हुए पशुओं को पहाड़ी कौवा या द्रोणकाक सताता है जिसे शेखावाटी के पुराने लोग 'हिलियोहाडो' कहते हैं और जिसे इस दोहे में याद किया गया है - 'हरि सुख सागर परहर्या, कीच रहा लपटाय । जन हरिदास ता जीवकं हिलीयौहाड़ी खाय ।।' श्री हरिदास जी की प्रतिभा विलक्षण थी । प्रकृति का ऐसा गूगा ज्ञान उनके सिवाय और कौन गा सकता था ? प्रकृति के प्रति ऐसा उपेक्षा भरा प्रेम और वर्णन की ऐसी गत्यात्मक तटस्थता उनके व्यक्तित्व की बड़ी भारी विशेषता है। अपनी सर्वस्पर्शिनी दृष्टि से उन्होंने जड़-जंगम, काल्पनिक और यथार्थ सबको छू लिया है । १. मैना की जाति का एक पक्षी ।
जनवरी, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन ] सिद्ध-पट्टण के संबंध में हरिदास और जैन ग्रंथ और शेखावाटी का किसान भी इस दुर्लभ अवसर का आनन्द लूटे बिननहीं रहता। उसकी धरती उसे बुलाती है। रूपक की छटा में श्री हरिदासजी गा उठते हैं - 'संतो खेती की रुति प्राई । प्रौसर बसो बहोड़ि नहि लाभ श्रव जीता ज्यू बाही । धरती सूड़ भाड़ अलसोरह्या, विरह प्रगति जलाई । सुबुधि भोमि राम जल बूढ़ा, यू बाड़ी बनि श्राई ।। हलसौतिये अर्थात् कृषिकर्म के आरंभ में सूड़ करते और उनको इकट्ठा करके जलाते हुए आज भी यहाँ के किसानों को आप देख सकते हैं । देखते-देखते मरुभूमि बाजरा, मोठ और गंवार के पौधों से हरी भरी हो जाती है और किसान 'निनाण' शुरू कर देते हैं । इसी निंदाण की प्रोर संकेत करते हुए श्री हरिदासजी कहते हैं-- 'खेत निदाण्यो नीपजे, सिरटा मोटा होय ।' ठीक तो है खेत की उपज निनाण से बढ़ती है और बाजरे के मोटे सिट्टो भी तभी आते हैं । जब ये काम के दिन बीत जाते हैं तो शेखावटी के जीवन में एक विचित्र प्रकार की उदासी और आलस्य का वातावरण छा जाता है । पशु पक्षी इस उदासी को और भी विचित्र रंग दे देते हैं । गाँव के बाहर कोई मोटी ताजी भैंस छाया में बैठी जुगाली लेती रहती और गुरसल' तथा कौवे उस पर आकर उठना नहीं चाहती। उधर चोंच से कुरेद कर सींग की फटकार की परवाह न करते हुए काग श्री हरिदासजी के शब्दों में देखिए - माया भैंस विराट् बय, जीव बिलंबे माय । काल काग छोड़े नहीं, वै लागे वो खाय ।। कभी-कभी कीचड़ में लिपटे हुए पशुओं को पहाड़ी कौवा या द्रोणकाक सताता है जिसे शेखावाटी के पुराने लोग 'हिलियोहाडो' कहते हैं और जिसे इस दोहे में याद किया गया है - 'हरि सुख सागर परहर्या, कीच रहा लपटाय । जन हरिदास ता जीवकं हिलीयौहाड़ी खाय ।।' श्री हरिदास जी की प्रतिभा विलक्षण थी । प्रकृति का ऐसा गूगा ज्ञान उनके सिवाय और कौन गा सकता था ? प्रकृति के प्रति ऐसा उपेक्षा भरा प्रेम और वर्णन की ऐसी गत्यात्मक तटस्थता उनके व्यक्तित्व की बड़ी भारी विशेषता है। अपनी सर्वस्पर्शिनी दृष्टि से उन्होंने जड़-जंगम, काल्पनिक और यथार्थ सबको छू लिया है । एक. मैना की जाति का एक पक्षी ।
नई दिल्ली. डेविड वॉर्नर ने जिम में करीब दर्जनभर बदमाशों को उठा-उठाकर पटक दिया. बदमाशों के साथ उनकी लड़ाई का वीडियो काफी वायरल हो रहा है. जिसमें वो अपना दम दिखाते हुए नजर आ रहे हैं. वॉर्नर ने भी इसका वीडियो शेयर किया. जिसके बाद उनकी लड़ाई के वीडियो का सच सामने आया. दरअसल वीडियो साउथ के सुपरस्टार विक्रम की सुपरहिट मूवी I का एक सीन है, जिसमें वॉर्नर ने विक्रम के चेहरे की जगह खुद का चेहरा लगाया. ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने एडिट वीडियो शेयर करते हुए फैंस से पूछा कि मेरी फेवरेट फिल्म में से एक का नाम? वॉर्नर का हिन्दुस्तान से खास लगाव हैं. अक्सर वो भारतीय फिल्मों को लेकर अपने परिवार के साथ रील बनाते रहते हैं. पहले भी वो कई बार शाहरुख खान, अल्लू अर्जुन की फिल्मों के कुछ खास सीन पर अपनी रील बना चुके हैं. बीते दिनों ही डेविड वॉर्नर अपने घर लौट गए थे. वो 4 टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए भारत में ही थे. हालांकि शुरुआती दोनों टेस्ट में वो फ्लॉप रहे. उनका बल्ला शांत रहा. पहले टेस्ट की दोनों पारियों में वॉर्नर ने कुल 11 रन और दूसरे टेस्ट में 15 रन बनाए थे. इस बीच दिल्ली में खेले गए दूसरे टेस्ट के दौरान उनकी कोहनी में चोट लग गई और चोट के चलते उन्हें सीरीज के बीच में ही ऑस्ट्रेलिया लौटना पड़ा. वॉर्नर जल्द से जल्द फिट होने की कोशिश कर रहे हैं. दरअसल अगले महीने आईपीएल 2023 भी खेला जाएगा और ऋषभ पंत की गैर मौजूदगी में वो दिल्ली कैपटिल्स की कप्तानी करते हुए नजर आ सकते हैं. ऋषभ पंत कुछ समय सड़क हादसे का शिकार हो गए थे और वो कुछ दिन पहले ही अस्पताल से घर लौटे हैं. पूरी तरह से फिट होने में उन्हें अभी काफी वक्त लगेगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंत की जगह वॉर्नर दिल्ली की कमान संभाल सकते हैं. ये भी पढ़ें- इंदौर के लिए ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज का मास्टरप्लान,भारत का करेगा काम तमाम!
नई दिल्ली. डेविड वॉर्नर ने जिम में करीब दर्जनभर बदमाशों को उठा-उठाकर पटक दिया. बदमाशों के साथ उनकी लड़ाई का वीडियो काफी वायरल हो रहा है. जिसमें वो अपना दम दिखाते हुए नजर आ रहे हैं. वॉर्नर ने भी इसका वीडियो शेयर किया. जिसके बाद उनकी लड़ाई के वीडियो का सच सामने आया. दरअसल वीडियो साउथ के सुपरस्टार विक्रम की सुपरहिट मूवी I का एक सीन है, जिसमें वॉर्नर ने विक्रम के चेहरे की जगह खुद का चेहरा लगाया. ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने एडिट वीडियो शेयर करते हुए फैंस से पूछा कि मेरी फेवरेट फिल्म में से एक का नाम? वॉर्नर का हिन्दुस्तान से खास लगाव हैं. अक्सर वो भारतीय फिल्मों को लेकर अपने परिवार के साथ रील बनाते रहते हैं. पहले भी वो कई बार शाहरुख खान, अल्लू अर्जुन की फिल्मों के कुछ खास सीन पर अपनी रील बना चुके हैं. बीते दिनों ही डेविड वॉर्नर अपने घर लौट गए थे. वो चार टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए भारत में ही थे. हालांकि शुरुआती दोनों टेस्ट में वो फ्लॉप रहे. उनका बल्ला शांत रहा. पहले टेस्ट की दोनों पारियों में वॉर्नर ने कुल ग्यारह रन और दूसरे टेस्ट में पंद्रह रन बनाए थे. इस बीच दिल्ली में खेले गए दूसरे टेस्ट के दौरान उनकी कोहनी में चोट लग गई और चोट के चलते उन्हें सीरीज के बीच में ही ऑस्ट्रेलिया लौटना पड़ा. वॉर्नर जल्द से जल्द फिट होने की कोशिश कर रहे हैं. दरअसल अगले महीने आईपीएल दो हज़ार तेईस भी खेला जाएगा और ऋषभ पंत की गैर मौजूदगी में वो दिल्ली कैपटिल्स की कप्तानी करते हुए नजर आ सकते हैं. ऋषभ पंत कुछ समय सड़क हादसे का शिकार हो गए थे और वो कुछ दिन पहले ही अस्पताल से घर लौटे हैं. पूरी तरह से फिट होने में उन्हें अभी काफी वक्त लगेगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंत की जगह वॉर्नर दिल्ली की कमान संभाल सकते हैं. ये भी पढ़ें- इंदौर के लिए ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज का मास्टरप्लान,भारत का करेगा काम तमाम!
UP Metro LMRC recruitment 2019 : लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (LMRC) या उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPMRCL) में एग्जीक्यूटिव केटेगरी और नॉन - एग्जीक्यूटिव पदों की भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। बता दें कि यूपी मेट्रो भर्ती 2019 के तहत कुल 186 रिक्ति पदों के लिए अधिसूचित जारी की गई है। महत्वपूर्ण तिथियां : चयन प्रक्रिया : आवेदन कैसे करें : आवेदन कैसे करें : योग्य उम्मीदवार 22 नवंबर से 2 दिसंबर 2019 तक आधिकारिक वेबसाइट www. lmrcl. com के माध्यम से पद पर आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद एक प्रिंटआउट जरूर लें। आपकी उम्र इस नौकरी के लिए मांगी गई तय सीमा में है या नहीं, यह जानने के लिए यहां क्लिक करें। आधिकारिक वेबसाइट के लिए यहां क्लिक करें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आधिकारिक वेबसाइट के लिए यहां क्लिक करें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
UP Metro LMRC recruitment दो हज़ार उन्नीस : लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड या उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड में एग्जीक्यूटिव केटेगरी और नॉन - एग्जीक्यूटिव पदों की भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। बता दें कि यूपी मेट्रो भर्ती दो हज़ार उन्नीस के तहत कुल एक सौ छियासी रिक्ति पदों के लिए अधिसूचित जारी की गई है। महत्वपूर्ण तिथियां : चयन प्रक्रिया : आवेदन कैसे करें : आवेदन कैसे करें : योग्य उम्मीदवार बाईस नवंबर से दो दिसंबर दो हज़ार उन्नीस तक आधिकारिक वेबसाइट www. lmrcl. com के माध्यम से पद पर आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद एक प्रिंटआउट जरूर लें। आपकी उम्र इस नौकरी के लिए मांगी गई तय सीमा में है या नहीं, यह जानने के लिए यहां क्लिक करें। आधिकारिक वेबसाइट के लिए यहां क्लिक करें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आधिकारिक वेबसाइट के लिए यहां क्लिक करें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) रविवार दोपहर हरियाणा (Haryana) के सोनीपत जिले के गोहाना में जन उत्थान रैली (Jan Utthan Rally) करेंगे। रैली के साथ ही गृहमंत्री भाजपा (BJP) के लिए 2024 के चुनाव का शंखनाद भी करेंगे। वहीं अमित शाह रैली के बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक भी करेंगे। भाजपा संगठनात्मक तौर पर पहले से ही चुनावों की तैयारी शुरू कर चुकी है। अब गोहाना रैली के जरिए भाजपा हरियाणा में 2024 के चुनावों का शंखनाद करने जा रही है। अमित शाह दोपहर करीब 1 बजे सीधे गोहाना में रैली स्थल पर पहुंचेंगे और रैली के बाद वहीं पर कार्यकर्ताओं और नेताओं की एक बैठक लेंगे। गौरतलब है कि गृहमंत्री अमित शाह ने देशभर के 170 लोकसभा क्षेत्रों में प्रवास कार्यक्रम शुरू किए हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से वे लोगों के सामने सरकार की उपलब्धियां व विपक्ष की खामियां गिनवाएंगे। यही नहीं 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भी भरेंगे। (आईएएनएस)
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार दोपहर हरियाणा के सोनीपत जिले के गोहाना में जन उत्थान रैली करेंगे। रैली के साथ ही गृहमंत्री भाजपा के लिए दो हज़ार चौबीस के चुनाव का शंखनाद भी करेंगे। वहीं अमित शाह रैली के बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक भी करेंगे। भाजपा संगठनात्मक तौर पर पहले से ही चुनावों की तैयारी शुरू कर चुकी है। अब गोहाना रैली के जरिए भाजपा हरियाणा में दो हज़ार चौबीस के चुनावों का शंखनाद करने जा रही है। अमित शाह दोपहर करीब एक बजे सीधे गोहाना में रैली स्थल पर पहुंचेंगे और रैली के बाद वहीं पर कार्यकर्ताओं और नेताओं की एक बैठक लेंगे। गौरतलब है कि गृहमंत्री अमित शाह ने देशभर के एक सौ सत्तर लोकसभा क्षेत्रों में प्रवास कार्यक्रम शुरू किए हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से वे लोगों के सामने सरकार की उपलब्धियां व विपक्ष की खामियां गिनवाएंगे। यही नहीं दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भी भरेंगे।
विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। लहसुन एक नगदी फसल है। इसकी खेती पूरे भारतवर्ष में की जाती है। लहसुन का उपयोग मसालों के अतिरिक्त औषधि के रूप में जैसे अपच, फफड़ों की बीमारियों, रक्तचाप, दमा आदि में होता है। इसके कन्द में अनेक छोटे-छोटे कन्द होते हैं जो जवा कहलाते हैं और एक सफेद या गुलाबी पतली झीली से आवेष्टित (लैंकी) होती है। लहसुन की खेती मुख्यतः रबी मौसम में होते हैं क्योंकि अत्यन्त गर्म और लम्बे दिन वाला समय इसके कन्दों की बढ़वार के लिए उपयुक्त नहीं होता है। ऐसी जगह जहाँ न तो बहुत गर्मी हो और न बहुत ठण्डा हो, लहसुन की खेती के लिए उपयुक्त है। इसके किस्म को मुख्य रूप से दो भोगों में विभाजित किया गया है। पहले वर्ग के लहसुन में केवल एक गांठ होती है और जवें नहीं होते हैं। इसका प्रयोग केवल आषधि के रूप में होता हैं दूसरे वर्ग के लहसुन में एक से अधिक जवें होते हैं। 1. जामुना सफेद (जी-1) - इस किस्म के जवें गत्रा होता है। गांठ का रंग उजला एवं एक गांठ में 28-30 जवें होते हैं। यह किस्म 155 से 160 दिन में तैयार हो जाती है। इसकी ऊपज क्षमता 150 से 180 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह किस्म परपल ब्लाच रोग से अवरोधी है। 2. एग्रोफाउण्ड सफेद - इस किस्म के रंग उजला होता है तथा प्रति गांठ 20 से 25 जवें होते हैं। इसकी ऊपज क्षमता 130-140 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इस किस्म को तैयार होने में 160 से 165 दिन लगता है। यह किस्म परपल ब्लॉच से अवरोधी है। 3. पंजाब लहसुन - इसके गांठ तथा जवा उजले रंग का होता है। इसकी ऊपज क्षमता 90 से 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। 4. लहसुन 56-4 - इसके गांठ लाल रंग का होता है। इसके प्रत्येक गांठ में 25 से 35 जवें होते हैं। यह 150 से 160 दिन में तैयार हो जाती है जबकि इसकी औसत ऊपज 80 से 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। 5. जमुना सफेद-2 (जी. 50) - इसकी ऊपज क्षमता 130 से 150 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इस किस्म को तैयार होने में 160-170 दिन का समय लगता है। इसके गांठ में 18 से 20 जवा होते हैं तथा गांठ ठोस और उजले रंग का होता है। 6. जमुना सफेद-3 (जी - 282) - इसके बल्व सफेद बड़े आकार एवं ठोस होते हैं। प्रत्येक जवा 1. 04-105 सेमी. मोटाई होता है। एक जवा 25-28 ग्राम वजन का होता है, जवा का रंग सफेद तथा गूदा क्रीम रंग का होता है। 15 से 18 जवा प्रति गांठ (शल्क) पाये जाते हैं। यह प्रजाति 140-150 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी पैदावार 175-200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। 7. एग्रोफाउण्ड पार्ववती - इसके गांठ (बल्व) बड़े आकार तथा क्रिमी उजला रंग का होता है। इसके प्रति गांठ 10 से 16 जवां होता है। इस किस्म को तैयार होने में 160 से 165 दिन का समय लगता है जबकि इसकी ऊपज क्षमता 175 से 225 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है। लहसुन की खेती सभी प्रकार के जीवांशयुक्त भूमि में किया जा सकता है लेकिन अधिक ऊपज के लिये जीवांशयुक्त दोमट भूमि जिसमें जल निकास की व्यवस्था हो सबसे उपयुक्त होता है। भूमि को 4 से 5 बार गहरी जुताई (10-15 सेमी) कर एवं पाटा लगाकर मिट्टी को भूरभूरी बना लेना चाहिए। आखिरी जुताई से तीन सप्ताह पूर्व कम्पोस्ट या सड़ी गोबर की खाद मिला लें। कम्पोस्ट या गोबर खाद का प्रयोग रोपाई/बोआई से 15 से 20 दिन पहले डालकर जुजाई करना चाहिए। नेत्रजन के मात्रा को तीन बराबर भाग में बाँट कर एक भाग नेत्रजन एवं फास्फोरस, पोटाश तथा ज़िक की पूरी मात्रा मिट्टी में अंतिम जुताई या रोपाई/बोआई के दो दिन पहले मिला दें। नेत्रजन की शेष मात्रा उपरिवेशन (टॉपड़ेसिंग) की जाती है। पहला उपरिवेशन 25 से 30 दिन के बाद खेतों से घास निकालकर सिंचाई करने के बाद एवं दूसरा उपरविशन पहले उपरिवेशन से 30 से 50 दिन के बाद करें। फलिओ का बोआई 20 सितम्बर से 20 नवम्बर तक करना चाहिए। लहसुन के कन्दों में कई जवा क्लोब होती है। इन्हीं जवा को गांठों से अलग करके बोआई की जाती है। बोआई के लिए 5 से 7 क्विंटल जवों, पूतियों की आवश्यकता होती है जिनकी मोटाई 8 से 10 मि. मी. हो वैसे जवों या पूतियों को लगाना चाहिए। बोआई के पूर्व खेत को छोटे क्यारियों में बाँट देते हैं। जवों या पूतियों को क्यारियों में हाथ से या डिबलिंग के द्वारा करते हैं। अच्छी ऊपज प्राप्त करने के लिए जवों या पूतियों को 10-15 सेमी. पंक्ति से पंक्ति, 7-8 सेमी. जवा से जवा से की दूरी तथा 2-3 सेमी की गहराई पर बोआई/रोपाई करनी चाहिए। बोआई/रोपाई करते समय यह ध्यान देना आवश्यक है कि कलियों का नुकीला भाग उपर रखी जाये। बोआई के समय खेत में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है। पहली सिंचाई बोआई के 8 से 10 दिन के बाद करें तथा शेष सिंचाई को 10 से 15 दिन के अन्तराल पर आवश्यकतानुसार करें। खरपतवार को खुरपी की सहायता से निकालते रहना चाहिए। लहसुन के फसल (खेत) से हमेशा निकाई-गुड़ाई कर के खरपतवार से मुक्त रखना चाहिए। लहसुन की फसल 130 से 180 दिन में खोदाई के लिये तैयार हो जाती है। जिस समय पौधों की पत्तियाँ पीली पढ़ जाये और सुखने लग जाये सिंचाई बन्द कर देनी चाहिए। इसके कुछ दिनों बाद लहसुन की खुदाई कर लेनी चाहिए। इसके बाद गाँठों को 3-4 दिनों तक छाया में सुखा लेते हैं। फिर 2 से 3 सेमी. छोड़कर पत्तियाँ को केन्द्रों से अलग कर लेते हैं। अच्छी तरह सुख जाने के बाद गांठों को 70 प्रतिशत आद्रता पर 6 से 8 महीनों तक भण्डारित किया जा सकता है। 6 से 8 महीनों के भण्डारण में 15 से 20 प्रतिशत तक नुकसान सुखने से होता है। पत्तियों सहित बण्डल बनाकर रखने से कम हानि होती है। लहसुन की ऊपज किस्मों एवं फसल की देखरेख पर निर्भर करता है। इसकी औसत ऊपज 100 से 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। थिप्स - ये कीट आकार में छोटे तथा पत्तियों एवं तनों से रस चुसते हैं जिससे उन पर उजले धब्बे पड़ जाते हैं। इस कीट से बचाव के लिये मेटासिसटॉक्स 1.5 एम.एल. प्रति लीटर पानी + 0.1 प्रतिशत सेनडोमिट का तीन से चार छिड़काव 15 दिन के अन्तराल पर करें। नील लोहित धब्बे - रोग की प्रारंभिक अवस्था में पत्तियों पर भूरे धब्बे दिखाई देते हैं। इस रोग से बचाव के लिए इन्डोफिल एम-45 का 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से 15 दिन के अन्तर पर दो से तीन छिड़काव करें। मृदु रोमल फफूंदी - इसमें पत्तियों की सतह पर एवं डंठल पर बैगनी रंग के रोयें उभर आते हैं। इसके रोकथाम के लिए 3 ग्राम जिनेव या इन्डोफिल एम-45 का 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 15 दिन के अन्तराल पर दो छिड़काव करें। ( यदि आपके पास उपरोक्त सामग्री पर कोई टिप्पणी / सुझाव हैं, तो कृपया उन्हें यहां पोस्ट करें)
विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। लहसुन एक नगदी फसल है। इसकी खेती पूरे भारतवर्ष में की जाती है। लहसुन का उपयोग मसालों के अतिरिक्त औषधि के रूप में जैसे अपच, फफड़ों की बीमारियों, रक्तचाप, दमा आदि में होता है। इसके कन्द में अनेक छोटे-छोटे कन्द होते हैं जो जवा कहलाते हैं और एक सफेद या गुलाबी पतली झीली से आवेष्टित होती है। लहसुन की खेती मुख्यतः रबी मौसम में होते हैं क्योंकि अत्यन्त गर्म और लम्बे दिन वाला समय इसके कन्दों की बढ़वार के लिए उपयुक्त नहीं होता है। ऐसी जगह जहाँ न तो बहुत गर्मी हो और न बहुत ठण्डा हो, लहसुन की खेती के लिए उपयुक्त है। इसके किस्म को मुख्य रूप से दो भोगों में विभाजित किया गया है। पहले वर्ग के लहसुन में केवल एक गांठ होती है और जवें नहीं होते हैं। इसका प्रयोग केवल आषधि के रूप में होता हैं दूसरे वर्ग के लहसुन में एक से अधिक जवें होते हैं। एक. जामुना सफेद - इस किस्म के जवें गत्रा होता है। गांठ का रंग उजला एवं एक गांठ में अट्ठाईस-तीस जवें होते हैं। यह किस्म एक सौ पचपन से एक सौ साठ दिन में तैयार हो जाती है। इसकी ऊपज क्षमता एक सौ पचास से एक सौ अस्सी क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह किस्म परपल ब्लाच रोग से अवरोधी है। दो. एग्रोफाउण्ड सफेद - इस किस्म के रंग उजला होता है तथा प्रति गांठ बीस से पच्चीस जवें होते हैं। इसकी ऊपज क्षमता एक सौ तीस-एक सौ चालीस क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इस किस्म को तैयार होने में एक सौ साठ से एक सौ पैंसठ दिन लगता है। यह किस्म परपल ब्लॉच से अवरोधी है। तीन. पंजाब लहसुन - इसके गांठ तथा जवा उजले रंग का होता है। इसकी ऊपज क्षमता नब्बे से एक सौ क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। चार. लहसुन छप्पन-चार - इसके गांठ लाल रंग का होता है। इसके प्रत्येक गांठ में पच्चीस से पैंतीस जवें होते हैं। यह एक सौ पचास से एक सौ साठ दिन में तैयार हो जाती है जबकि इसकी औसत ऊपज अस्सी से एक सौ क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। पाँच. जमुना सफेद-दो - इसकी ऊपज क्षमता एक सौ तीस से एक सौ पचास क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इस किस्म को तैयार होने में एक सौ साठ-एक सौ सत्तर दिन का समय लगता है। इसके गांठ में अट्ठारह से बीस जवा होते हैं तथा गांठ ठोस और उजले रंग का होता है। छः. जमुना सफेद-तीन - इसके बल्व सफेद बड़े आकार एवं ठोस होते हैं। प्रत्येक जवा एक. चार-एक सौ पाँच सेमी. मोटाई होता है। एक जवा पच्चीस-अट्ठाईस ग्राम वजन का होता है, जवा का रंग सफेद तथा गूदा क्रीम रंग का होता है। पंद्रह से अट्ठारह जवा प्रति गांठ पाये जाते हैं। यह प्रजाति एक सौ चालीस-एक सौ पचास दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी पैदावार एक सौ पचहत्तर-दो सौ क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। सात. एग्रोफाउण्ड पार्ववती - इसके गांठ बड़े आकार तथा क्रिमी उजला रंग का होता है। इसके प्रति गांठ दस से सोलह जवां होता है। इस किस्म को तैयार होने में एक सौ साठ से एक सौ पैंसठ दिन का समय लगता है जबकि इसकी ऊपज क्षमता एक सौ पचहत्तर से दो सौ पच्चीस क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है। लहसुन की खेती सभी प्रकार के जीवांशयुक्त भूमि में किया जा सकता है लेकिन अधिक ऊपज के लिये जीवांशयुक्त दोमट भूमि जिसमें जल निकास की व्यवस्था हो सबसे उपयुक्त होता है। भूमि को चार से पाँच बार गहरी जुताई कर एवं पाटा लगाकर मिट्टी को भूरभूरी बना लेना चाहिए। आखिरी जुताई से तीन सप्ताह पूर्व कम्पोस्ट या सड़ी गोबर की खाद मिला लें। कम्पोस्ट या गोबर खाद का प्रयोग रोपाई/बोआई से पंद्रह से बीस दिन पहले डालकर जुजाई करना चाहिए। नेत्रजन के मात्रा को तीन बराबर भाग में बाँट कर एक भाग नेत्रजन एवं फास्फोरस, पोटाश तथा ज़िक की पूरी मात्रा मिट्टी में अंतिम जुताई या रोपाई/बोआई के दो दिन पहले मिला दें। नेत्रजन की शेष मात्रा उपरिवेशन की जाती है। पहला उपरिवेशन पच्चीस से तीस दिन के बाद खेतों से घास निकालकर सिंचाई करने के बाद एवं दूसरा उपरविशन पहले उपरिवेशन से तीस से पचास दिन के बाद करें। फलिओ का बोआई बीस सितम्बर से बीस नवम्बर तक करना चाहिए। लहसुन के कन्दों में कई जवा क्लोब होती है। इन्हीं जवा को गांठों से अलग करके बोआई की जाती है। बोआई के लिए पाँच से सात क्विंटल जवों, पूतियों की आवश्यकता होती है जिनकी मोटाई आठ से दस मि. मी. हो वैसे जवों या पूतियों को लगाना चाहिए। बोआई के पूर्व खेत को छोटे क्यारियों में बाँट देते हैं। जवों या पूतियों को क्यारियों में हाथ से या डिबलिंग के द्वारा करते हैं। अच्छी ऊपज प्राप्त करने के लिए जवों या पूतियों को दस-पंद्रह सेमी. पंक्ति से पंक्ति, सात-आठ सेमी. जवा से जवा से की दूरी तथा दो-तीन सेमी की गहराई पर बोआई/रोपाई करनी चाहिए। बोआई/रोपाई करते समय यह ध्यान देना आवश्यक है कि कलियों का नुकीला भाग उपर रखी जाये। बोआई के समय खेत में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है। पहली सिंचाई बोआई के आठ से दस दिन के बाद करें तथा शेष सिंचाई को दस से पंद्रह दिन के अन्तराल पर आवश्यकतानुसार करें। खरपतवार को खुरपी की सहायता से निकालते रहना चाहिए। लहसुन के फसल से हमेशा निकाई-गुड़ाई कर के खरपतवार से मुक्त रखना चाहिए। लहसुन की फसल एक सौ तीस से एक सौ अस्सी दिन में खोदाई के लिये तैयार हो जाती है। जिस समय पौधों की पत्तियाँ पीली पढ़ जाये और सुखने लग जाये सिंचाई बन्द कर देनी चाहिए। इसके कुछ दिनों बाद लहसुन की खुदाई कर लेनी चाहिए। इसके बाद गाँठों को तीन-चार दिनों तक छाया में सुखा लेते हैं। फिर दो से तीन सेमी. छोड़कर पत्तियाँ को केन्द्रों से अलग कर लेते हैं। अच्छी तरह सुख जाने के बाद गांठों को सत्तर प्रतिशत आद्रता पर छः से आठ महीनों तक भण्डारित किया जा सकता है। छः से आठ महीनों के भण्डारण में पंद्रह से बीस प्रतिशत तक नुकसान सुखने से होता है। पत्तियों सहित बण्डल बनाकर रखने से कम हानि होती है। लहसुन की ऊपज किस्मों एवं फसल की देखरेख पर निर्भर करता है। इसकी औसत ऊपज एक सौ से दो सौ क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। थिप्स - ये कीट आकार में छोटे तथा पत्तियों एवं तनों से रस चुसते हैं जिससे उन पर उजले धब्बे पड़ जाते हैं। इस कीट से बचाव के लिये मेटासिसटॉक्स एक.पाँच एम.एल. प्रति लीटर पानी + शून्य.एक प्रतिशत सेनडोमिट का तीन से चार छिड़काव पंद्रह दिन के अन्तराल पर करें। नील लोहित धब्बे - रोग की प्रारंभिक अवस्था में पत्तियों पर भूरे धब्बे दिखाई देते हैं। इस रोग से बचाव के लिए इन्डोफिल एम-पैंतालीस का दो दशमलव पाँच ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से पंद्रह दिन के अन्तर पर दो से तीन छिड़काव करें। मृदु रोमल फफूंदी - इसमें पत्तियों की सतह पर एवं डंठल पर बैगनी रंग के रोयें उभर आते हैं। इसके रोकथाम के लिए तीन ग्राम जिनेव या इन्डोफिल एम-पैंतालीस का दो दशमलव पाँच ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर पंद्रह दिन के अन्तराल पर दो छिड़काव करें।
जंतर-मंतक भड़काऊ नारेबाजी केस में कोर्ट ने अश्विनी उपाध्याय की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया है. कोर्ट 4 बजे अपना फैसला सुनाएगी. कोर्ट में सुनवाई के दौरान अश्वनी उपाध्याय की तरफ से वकील सिद्धार्थ लूथरा और विकास सिंह पेश हुए. कोर्ट ने जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर भड़काऊ नारेबाजी मामले में अश्विनी उपाध्याय की जमानत (Ashwini Upadhyay Bail Plea) मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट शाम 4 बजे मामले में आदेश सुनाएगी. अश्वनी उपाध्याय की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान उनकी तरफ से वकील सिद्धार्थ लूथरा और विकास सिंह पेश हुए. सिद्धार्थ ने कहा कि जब कथित नारेबाजी तो अश्विनी मौके पर नहीं थे. सिद्धार्थ लूथरा ने सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का हवाला देते हुए कहा कि अश्विनी के खिलाफ मामला नहीं बनता. कोर्ट ने अभियोजन पक्ष से पूछा आप जमानत पर क्या कहना चाहते हैं. इस पर वकील ने कहा कि जहां लोग इकट्ठा हुए थे वो जगह संसद के पास है.15 अगस्त के समय इस तरह की भीड़ जानबूझ कर इकट्ठा की गई. कोरोना के समय इतनी बड़ी क्यों भीड़ जुटाई गई. वकील ने आगे दलील दी कि इन लोगों ने आईओ की बात नहीं मानी. उपाध्याय ये कह रहे है कि वो घटना के समय वहां नही थे लेकिन वो थे या नहीं ये जांच का विषय है. जंतर-मंतर पर कथित भड़काऊ नारेबाजी के मामले में गिरफ्तार बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय और पांच अन्य की रिहाई की मांग के लिए कई लोगों ने मंगलवार को कनॉट प्लेस थाने के बाहर प्रदर्शन किया. अश्विनी उपाध्याय की गिरफ्तारी के विरोध में कथित हिंदू नेता रागिनी तिवारी समेत लगभग 40-50 प्रदर्शनकारियों ने कनॉट प्लेस थाने के बाहर सड़क जाम कर दी. इससे इलाके में वाहनों की लंबी कतार लग गई. इसके बाद प्रदर्शनकारियों को यहां से हटाया गया. पुलिस ने बताया की प्रदर्शनकारियों को यहां से हटाकर पर बस के जरिए उनके गंतव्य तक भेज दिया गया है. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने आरोपी अश्विनी उपाध्याय समेत सभी आरोपियों को 2 दिन की न्याययिक हिरासत में भेजा था. कोर्ट ने 12 अगस्त को सभी आरोपियों को पेश करने के लिए कहा है. पटियाला हाउस कोर्ट ने अश्विनी उपाध्यय की जमानत अर्जी पर बुधवार तक दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है. पटियाला हाउस कोर्ट ने मामले में आरोपी दीपक और विनीत को 1 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा है. ये भी पढ़ेंः
जंतर-मंतक भड़काऊ नारेबाजी केस में कोर्ट ने अश्विनी उपाध्याय की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया है. कोर्ट चार बजे अपना फैसला सुनाएगी. कोर्ट में सुनवाई के दौरान अश्वनी उपाध्याय की तरफ से वकील सिद्धार्थ लूथरा और विकास सिंह पेश हुए. कोर्ट ने जंतर-मंतर पर भड़काऊ नारेबाजी मामले में अश्विनी उपाध्याय की जमानत मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट शाम चार बजे मामले में आदेश सुनाएगी. अश्वनी उपाध्याय की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान उनकी तरफ से वकील सिद्धार्थ लूथरा और विकास सिंह पेश हुए. सिद्धार्थ ने कहा कि जब कथित नारेबाजी तो अश्विनी मौके पर नहीं थे. सिद्धार्थ लूथरा ने सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का हवाला देते हुए कहा कि अश्विनी के खिलाफ मामला नहीं बनता. कोर्ट ने अभियोजन पक्ष से पूछा आप जमानत पर क्या कहना चाहते हैं. इस पर वकील ने कहा कि जहां लोग इकट्ठा हुए थे वो जगह संसद के पास है.पंद्रह अगस्त के समय इस तरह की भीड़ जानबूझ कर इकट्ठा की गई. कोरोना के समय इतनी बड़ी क्यों भीड़ जुटाई गई. वकील ने आगे दलील दी कि इन लोगों ने आईओ की बात नहीं मानी. उपाध्याय ये कह रहे है कि वो घटना के समय वहां नही थे लेकिन वो थे या नहीं ये जांच का विषय है. जंतर-मंतर पर कथित भड़काऊ नारेबाजी के मामले में गिरफ्तार बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय और पांच अन्य की रिहाई की मांग के लिए कई लोगों ने मंगलवार को कनॉट प्लेस थाने के बाहर प्रदर्शन किया. अश्विनी उपाध्याय की गिरफ्तारी के विरोध में कथित हिंदू नेता रागिनी तिवारी समेत लगभग चालीस-पचास प्रदर्शनकारियों ने कनॉट प्लेस थाने के बाहर सड़क जाम कर दी. इससे इलाके में वाहनों की लंबी कतार लग गई. इसके बाद प्रदर्शनकारियों को यहां से हटाया गया. पुलिस ने बताया की प्रदर्शनकारियों को यहां से हटाकर पर बस के जरिए उनके गंतव्य तक भेज दिया गया है. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने आरोपी अश्विनी उपाध्याय समेत सभी आरोपियों को दो दिन की न्याययिक हिरासत में भेजा था. कोर्ट ने बारह अगस्त को सभी आरोपियों को पेश करने के लिए कहा है. पटियाला हाउस कोर्ट ने अश्विनी उपाध्यय की जमानत अर्जी पर बुधवार तक दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है. पटियाला हाउस कोर्ट ने मामले में आरोपी दीपक और विनीत को एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा है. ये भी पढ़ेंः
बॉलीवुड की डिंपल गर्ल का ग्रेस अब भी बरकरार है और इसके तीन राज हैं जिसमें 'डाइट, एक्सरसाइज और नींद' शामिल है। इन दिनों वे अपने एक वीडियो को लेकर चर्चा में हैं, जिसमें वे अपने फार्महाउस में दिख रही हैं। क्लिप में 46 साल वर्षीय प्रीति की फिटनेस देख हर कोई हैरान है। इस आर्टिकल में हम प्रीति जिंटा की फिटनेस का राज बताते हैं। आइए, जानते हैं कि बेदाग त्वचा और फिट बॉडी का कैसे ख्याल रखती हैं प्रीति। प्रीति जिंटा क्रैश डाइट को बिल्कुल भी फॉलो नहीं करती हैं, इसकी बजाए वे कड़ी मेहनत करने और अच्छी तरह से खाने में विश्वास करती हैं ताकि उनका शरीर शेप में रहे। प्रीति सुबह योग करना भी पसंद करती हैं क्योंकि वह सोचती हैं कि इससे उन्हें अपने एकाग्रता स्तर (concentration level) में सुधार करने में मदद मिलती है। प्रीति भी करीना, मलाइका, शिल्पा की तरह योग सेशन को बहुत गंभीरता से लेती हैं। प्रीति की फिटनेस का सीक्रेट डांस करना भी है। इसके अलावा हर माह में एक या दो बार एडवेंचर स्पोर्ट्स करना भी पसंद करती हैं। 'कल हो ना हो' की अभिनेत्री एक अच्छे वर्कआउट सेशन के बाद कम दर्द और रीढ़ की अच्छी सेहत के लिए ट्रेनर यास्मीन कराचीवाला के साथ क्रेजी पाइलेट्स भी करती हैं। यास्मीन, जो देश में पाइलेट्स के लिए पहली BASI प्रमाणित ट्रेनर रही हैं और वे प्रीति के अलावा आलिया भट्ट, कैटरीना कैफ और दीपिका पादुकोण जैसी हस्तियों को भी ट्रेनिंग देती हैं। प्रीति का आहार मुख्य रूप से फलों पर आधारित है और यही वजह है कि वे आए दिन ही अपने एप्पल गार्डन की झलक फैंस को दिखाती रहती हैं। बहुत सारे फलों के जूस पीती हैं और उन्हें घर पर बनाना पसंद करती हैं। उनके पसंदीदा फल, एप्पल, पपीता और आम हैं। जब भी एक्ट्रेस को कुछ मीठा खाने की इच्छा होती है, वह अक्सर गाजर का हलवा ले लेती हैं। साथ ही खाने में प्रीति अपने घर पर उगाई गई सब्जियों का ही सेवन करती हैं। अभिनेत्री अपनी मील डाइट में पत्तेदार सब्जियां लेती हैं। उन्होंने भोजन का भी कोई टाइम फिक्स नहीं किया और वे दिन में कम से कम छह से सात बार थोड़ा-थोड़ा भोजन करती हैं। प्रीति आइडल वेट में हैं क्योंकि वे फलों वाली डाइट ज्यादा लेती हैं, इससे उनका उनका वजन नहीं बढ़ता। एक सेलिब्रिटी होने के नाते, प्रीति जिंटा अपने बालों की अच्छी तरह से देखभाल करती हैं। वह उनकी पर्याप्त देखभाल करने के लिए स्वस्थ आहार भी लेती हैं। एक्ट्रेस कहती हैं कि वह सप्ताह में कम से कम 3 बार अपने बालों को शैंपू और कंडीशन करती हैं; वह अक्सर उन्हें काटती हैं ताकि वे जल्दी से बढ़ें। वह हर बार 2-3 महीने में अपनी हेयर स्टाइल भी बदल लेती हैं। यह बात तो हम सभी जानते हैं कि प्रीति 46 साल की उम्र में भी खूबसूरत त्वचा रखती हैं। उनके चेहरे के किसी हिस्से में न कोई दाग और न ही झुर्रियां दिखती हैं। जैसी वे पहले के दौर में पर्दे पर दिखती थीं, वैसे ही अब भी दमकती हैं। अपनी स्वस्थ और चमकती त्वचा को बनाए रखने के लिए प्रीति रोजाना ढेर सारा पानी पीती हैं और खूब सारी गाजर खाती हैं। पानी पीने से शरीर के अंदर मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं जो कि स्किन को इंफेक्टिड कर देते हैं। साथ ही वे हमेशा हाइड्रेटेड रहती हैं। वह टोन को साफ करने और रोजाना खुद को मॉइस्चराइज करने में भी विश्वास करती हैं। उनकी नाइट फेशियल क्रीम भी उनकी बेहतरीन त्वचा के पीछे के रहस्यों में से एक है। इसके अतिरिक्त वे 7-8 घंटे सोती हैं।
बॉलीवुड की डिंपल गर्ल का ग्रेस अब भी बरकरार है और इसके तीन राज हैं जिसमें 'डाइट, एक्सरसाइज और नींद' शामिल है। इन दिनों वे अपने एक वीडियो को लेकर चर्चा में हैं, जिसमें वे अपने फार्महाउस में दिख रही हैं। क्लिप में छियालीस साल वर्षीय प्रीति की फिटनेस देख हर कोई हैरान है। इस आर्टिकल में हम प्रीति जिंटा की फिटनेस का राज बताते हैं। आइए, जानते हैं कि बेदाग त्वचा और फिट बॉडी का कैसे ख्याल रखती हैं प्रीति। प्रीति जिंटा क्रैश डाइट को बिल्कुल भी फॉलो नहीं करती हैं, इसकी बजाए वे कड़ी मेहनत करने और अच्छी तरह से खाने में विश्वास करती हैं ताकि उनका शरीर शेप में रहे। प्रीति सुबह योग करना भी पसंद करती हैं क्योंकि वह सोचती हैं कि इससे उन्हें अपने एकाग्रता स्तर में सुधार करने में मदद मिलती है। प्रीति भी करीना, मलाइका, शिल्पा की तरह योग सेशन को बहुत गंभीरता से लेती हैं। प्रीति की फिटनेस का सीक्रेट डांस करना भी है। इसके अलावा हर माह में एक या दो बार एडवेंचर स्पोर्ट्स करना भी पसंद करती हैं। 'कल हो ना हो' की अभिनेत्री एक अच्छे वर्कआउट सेशन के बाद कम दर्द और रीढ़ की अच्छी सेहत के लिए ट्रेनर यास्मीन कराचीवाला के साथ क्रेजी पाइलेट्स भी करती हैं। यास्मीन, जो देश में पाइलेट्स के लिए पहली BASI प्रमाणित ट्रेनर रही हैं और वे प्रीति के अलावा आलिया भट्ट, कैटरीना कैफ और दीपिका पादुकोण जैसी हस्तियों को भी ट्रेनिंग देती हैं। प्रीति का आहार मुख्य रूप से फलों पर आधारित है और यही वजह है कि वे आए दिन ही अपने एप्पल गार्डन की झलक फैंस को दिखाती रहती हैं। बहुत सारे फलों के जूस पीती हैं और उन्हें घर पर बनाना पसंद करती हैं। उनके पसंदीदा फल, एप्पल, पपीता और आम हैं। जब भी एक्ट्रेस को कुछ मीठा खाने की इच्छा होती है, वह अक्सर गाजर का हलवा ले लेती हैं। साथ ही खाने में प्रीति अपने घर पर उगाई गई सब्जियों का ही सेवन करती हैं। अभिनेत्री अपनी मील डाइट में पत्तेदार सब्जियां लेती हैं। उन्होंने भोजन का भी कोई टाइम फिक्स नहीं किया और वे दिन में कम से कम छह से सात बार थोड़ा-थोड़ा भोजन करती हैं। प्रीति आइडल वेट में हैं क्योंकि वे फलों वाली डाइट ज्यादा लेती हैं, इससे उनका उनका वजन नहीं बढ़ता। एक सेलिब्रिटी होने के नाते, प्रीति जिंटा अपने बालों की अच्छी तरह से देखभाल करती हैं। वह उनकी पर्याप्त देखभाल करने के लिए स्वस्थ आहार भी लेती हैं। एक्ट्रेस कहती हैं कि वह सप्ताह में कम से कम तीन बार अपने बालों को शैंपू और कंडीशन करती हैं; वह अक्सर उन्हें काटती हैं ताकि वे जल्दी से बढ़ें। वह हर बार दो-तीन महीने में अपनी हेयर स्टाइल भी बदल लेती हैं। यह बात तो हम सभी जानते हैं कि प्रीति छियालीस साल की उम्र में भी खूबसूरत त्वचा रखती हैं। उनके चेहरे के किसी हिस्से में न कोई दाग और न ही झुर्रियां दिखती हैं। जैसी वे पहले के दौर में पर्दे पर दिखती थीं, वैसे ही अब भी दमकती हैं। अपनी स्वस्थ और चमकती त्वचा को बनाए रखने के लिए प्रीति रोजाना ढेर सारा पानी पीती हैं और खूब सारी गाजर खाती हैं। पानी पीने से शरीर के अंदर मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं जो कि स्किन को इंफेक्टिड कर देते हैं। साथ ही वे हमेशा हाइड्रेटेड रहती हैं। वह टोन को साफ करने और रोजाना खुद को मॉइस्चराइज करने में भी विश्वास करती हैं। उनकी नाइट फेशियल क्रीम भी उनकी बेहतरीन त्वचा के पीछे के रहस्यों में से एक है। इसके अतिरिक्त वे सात-आठ घंटाटे सोती हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि जो मुद्दे हैं वो इसके अनुबंध की प्रक्रिया से जुड़े हैं। नई दिल्ली कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप आने का वह स्वागत करती है, लेकिन इन विमानों की खरीद के अनुबंध से संबंधी कुछ मुद्दे हैं जिनको उसने पहले उठाया था। पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने यह भी कहा कि राफेल एक अच्छा लड़ाकू विमान है और खरीद के लिए इसका चयन कांग्रेस की अगुआई वाली संप्रग सरकार में हुआ था। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता चिदंबरम ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि विमान में कुछ भी गलत नहीं है। जो मुद्दे हैं वो इसके अनुबंध की प्रक्रिया से जुड़े हुए हैं। राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप के रूप में पांच विमान सोमवार को फ्रांस से भारत के लिए रवाना कर दिए गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इन विमानों के बुधवार को अंबाला वायुसेना स्टेशन पहुंचने की उम्मीद है। भारत ने वायुसेना के लिए 36 राफेल विमान खरीदने के लिए चार साल पहले फ्रांस के साथ 59 हजार करोड़ रुपये का करार किया था।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि जो मुद्दे हैं वो इसके अनुबंध की प्रक्रिया से जुड़े हैं। नई दिल्ली कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप आने का वह स्वागत करती है, लेकिन इन विमानों की खरीद के अनुबंध से संबंधी कुछ मुद्दे हैं जिनको उसने पहले उठाया था। पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने यह भी कहा कि राफेल एक अच्छा लड़ाकू विमान है और खरीद के लिए इसका चयन कांग्रेस की अगुआई वाली संप्रग सरकार में हुआ था। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता चिदंबरम ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि विमान में कुछ भी गलत नहीं है। जो मुद्दे हैं वो इसके अनुबंध की प्रक्रिया से जुड़े हुए हैं। राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप के रूप में पांच विमान सोमवार को फ्रांस से भारत के लिए रवाना कर दिए गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इन विमानों के बुधवार को अंबाला वायुसेना स्टेशन पहुंचने की उम्मीद है। भारत ने वायुसेना के लिए छत्तीस राफेल विमान खरीदने के लिए चार साल पहले फ्रांस के साथ उनसठ हजार करोड़ रुपये का करार किया था।
ओवरथिंकिंग एक सामान्य घटना है जो कई लोगों को प्रभावित करती है। यह हर संभावित परिणाम या परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए एक विस्तारित अवधि के लिए एक विचार पर ध्यान केंद्रित करने की प्रवृत्ति है। जबकि जीवन में कुछ हद तक प्रतिबिंब और योजना आवश्यक है, अधिक सोचना हमारे मानसिक स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक क्षमताओं के लिए हानिकारक हो सकता है। यहां कुछ ऐसे तरीके बताए गए हैं, जिनसे ज्यादा सोचने से हमारी मानसिक क्षमता नष्ट हो सकती हैः यह चिंता और तनाव की ओर ले जाता है। अत्यधिक सोचने से बहुत अधिक चिंता और तनाव हो सकता है। जब हम लगातार किसी विचार पर ध्यान केन्द्रित करते हैं, तो यह जुनूनी हो सकता है, जिससे चिंता और बेचैनी की निरंतर भावना पैदा होती है। ज्यादा सोचने से भी बहुत सारी मानसिक ऊर्जा खर्च होती है, जिससे हम थके हुए हो जाते हैं। इससे चिंता और तनाव का एक दुष्चक्र बन सकता है, जिसे तोड़ना मुश्किल हो सकता है। यह निर्णय लेने की क्षमता को क्षीण करता है। ज्यादा सोचने से निर्णय लेने की हमारी क्षमता क्षीण हो सकती है। जब हम किसी स्थिति या समस्या का विश्लेषण करने में बहुत अधिक समय व्यतीत करते हैं, तो हम गलत चुनाव करने के डर से अनिर्णायक या लकवाग्रस्त हो सकते हैं। इससे कार्रवाई की कमी या शिथिलता हो सकती है, जो समस्या को और बढ़ा सकती है। यह रचनात्मकता को कम करता है। ज्यादा सोचने से रचनात्मकता प्रभावित हो सकती है। जब हम हर विचार का लगातार विश्लेषण और मूल्यांकन कर रहे होते हैं, तो हम अत्यधिक आलोचनात्मक हो सकते हैं और नए विचारों को खारिज कर सकते हैं। इससे रचनात्मकता और नवीनता की कमी हो सकती है, क्योंकि हम सही समाधान या परिणाम खोजने पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। यह आत्म-संदेह की ओर ले जाता है। ज्यादा सोचने से आत्म-संदेह भी हो सकता है। जब हम अपने स्वयं के विचारों और कार्यों का विश्लेषण करने में बहुत अधिक समय व्यतीत करते हैं, तो हम अपनी क्षमताओं पर संदेह करना शुरू कर सकते हैं और अपने निर्णयों पर सवाल उठा सकते हैं। इससे आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान की कमी हो सकती है, जो समस्या को और बढ़ा सकती है। यह अनिद्रा और थकान का कारण बनता है। जरूरत से ज्यादा सोचना हमारे सोने के तरीके को भी बाधित कर सकता है, जिससे अनिद्रा और थकान हो सकती है। जब हम लगातार अपने विचारों और कार्यों का विश्लेषण और मूल्यांकन कर रहे होते हैं, तो हमारा दिमाग अति सक्रिय हो सकता है, जिससे सो जाना या सोते रहना मुश्किल हो जाता है। इससे पुरानी थकान और थकावट हो सकती है, जो हमारी संज्ञानात्मक क्षमताओं को और खराब कर सकती है। इससे डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादा सोचने से डिप्रेशन का खतरा भी बढ़ सकता है। जब हम नकारात्मक विचारों और भावनाओं पर बहुत अधिक समय व्यतीत करते हैं, तो हम अभिभूत और निराश हो सकते हैं। इससे लाचारी और निराशा की भावना पैदा हो सकती है, जो समस्या को और बढ़ा सकती है। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
ओवरथिंकिंग एक सामान्य घटना है जो कई लोगों को प्रभावित करती है। यह हर संभावित परिणाम या परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए एक विस्तारित अवधि के लिए एक विचार पर ध्यान केंद्रित करने की प्रवृत्ति है। जबकि जीवन में कुछ हद तक प्रतिबिंब और योजना आवश्यक है, अधिक सोचना हमारे मानसिक स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक क्षमताओं के लिए हानिकारक हो सकता है। यहां कुछ ऐसे तरीके बताए गए हैं, जिनसे ज्यादा सोचने से हमारी मानसिक क्षमता नष्ट हो सकती हैः यह चिंता और तनाव की ओर ले जाता है। अत्यधिक सोचने से बहुत अधिक चिंता और तनाव हो सकता है। जब हम लगातार किसी विचार पर ध्यान केन्द्रित करते हैं, तो यह जुनूनी हो सकता है, जिससे चिंता और बेचैनी की निरंतर भावना पैदा होती है। ज्यादा सोचने से भी बहुत सारी मानसिक ऊर्जा खर्च होती है, जिससे हम थके हुए हो जाते हैं। इससे चिंता और तनाव का एक दुष्चक्र बन सकता है, जिसे तोड़ना मुश्किल हो सकता है। यह निर्णय लेने की क्षमता को क्षीण करता है। ज्यादा सोचने से निर्णय लेने की हमारी क्षमता क्षीण हो सकती है। जब हम किसी स्थिति या समस्या का विश्लेषण करने में बहुत अधिक समय व्यतीत करते हैं, तो हम गलत चुनाव करने के डर से अनिर्णायक या लकवाग्रस्त हो सकते हैं। इससे कार्रवाई की कमी या शिथिलता हो सकती है, जो समस्या को और बढ़ा सकती है। यह रचनात्मकता को कम करता है। ज्यादा सोचने से रचनात्मकता प्रभावित हो सकती है। जब हम हर विचार का लगातार विश्लेषण और मूल्यांकन कर रहे होते हैं, तो हम अत्यधिक आलोचनात्मक हो सकते हैं और नए विचारों को खारिज कर सकते हैं। इससे रचनात्मकता और नवीनता की कमी हो सकती है, क्योंकि हम सही समाधान या परिणाम खोजने पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। यह आत्म-संदेह की ओर ले जाता है। ज्यादा सोचने से आत्म-संदेह भी हो सकता है। जब हम अपने स्वयं के विचारों और कार्यों का विश्लेषण करने में बहुत अधिक समय व्यतीत करते हैं, तो हम अपनी क्षमताओं पर संदेह करना शुरू कर सकते हैं और अपने निर्णयों पर सवाल उठा सकते हैं। इससे आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान की कमी हो सकती है, जो समस्या को और बढ़ा सकती है। यह अनिद्रा और थकान का कारण बनता है। जरूरत से ज्यादा सोचना हमारे सोने के तरीके को भी बाधित कर सकता है, जिससे अनिद्रा और थकान हो सकती है। जब हम लगातार अपने विचारों और कार्यों का विश्लेषण और मूल्यांकन कर रहे होते हैं, तो हमारा दिमाग अति सक्रिय हो सकता है, जिससे सो जाना या सोते रहना मुश्किल हो जाता है। इससे पुरानी थकान और थकावट हो सकती है, जो हमारी संज्ञानात्मक क्षमताओं को और खराब कर सकती है। इससे डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादा सोचने से डिप्रेशन का खतरा भी बढ़ सकता है। जब हम नकारात्मक विचारों और भावनाओं पर बहुत अधिक समय व्यतीत करते हैं, तो हम अभिभूत और निराश हो सकते हैं। इससे लाचारी और निराशा की भावना पैदा हो सकती है, जो समस्या को और बढ़ा सकती है। अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत 2020 में अगले संयुक्त राष्ट्र वैश्विक वन्यजीव सम्मेलन की मेजबानी करेगा। शनिवार को यह घोषणा की गई है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम संस्था द्वारा ट्वीट कर बताया गया, भारत अगले सीएमएस कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज, सीएमएससीओपी13 की मेजबानी करेगा। मनीला में सीएमएससीओपी12 के समापन पर आधिकारिक रूप से यह घोषणा की गई। इस संबंध में यह घोषणा फिलीपींस की राजधानी में छह दिवसीय ऑफ द पार्टीज टू द कन्वेंशन ऑन माइग्रेटरी स्पीशीज (सीएमएस सीओपी12) के सम्मेलन की 12वीं बैठक के आखिरी दिन हुई। इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए 120 देशों के प्रतिनिधि पहुंचे थे। सीएमएस सीओपी तीन वर्षो में एक बार आयोजित किया जाता है।
नई दिल्ली, अट्ठाईस अक्टूबर । भारत दो हज़ार बीस में अगले संयुक्त राष्ट्र वैश्विक वन्यजीव सम्मेलन की मेजबानी करेगा। शनिवार को यह घोषणा की गई है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम संस्था द्वारा ट्वीट कर बताया गया, भारत अगले सीएमएस कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज, सीएमएससीओपीतेरह की मेजबानी करेगा। मनीला में सीएमएससीओपीबारह के समापन पर आधिकारिक रूप से यह घोषणा की गई। इस संबंध में यह घोषणा फिलीपींस की राजधानी में छह दिवसीय ऑफ द पार्टीज टू द कन्वेंशन ऑन माइग्रेटरी स्पीशीज के सम्मेलन की बारहवीं बैठक के आखिरी दिन हुई। इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए एक सौ बीस देशों के प्रतिनिधि पहुंचे थे। सीएमएस सीओपी तीन वर्षो में एक बार आयोजित किया जाता है।
भेरियोंके बड़ेशब्द १५ और शूरोंके सिंहनादोंसे सेब दिशा पूर्ण हुई और थोड़ेही समयमें वह नरोत्तम कुरुक्षेत्र में पहुंचे १६ वहां जैसे आपके पुत्रने बतलाया उसी प्रकार जाकर वह पश्चिम ओरका देश चारोंओर सब दिशाओं में युक्त होकर परिधिरूपहुआ १७ जोकि सरस्वती के दक्षिण ओरसे दूसरा उत्तमतीर्थ है वहां हरित भूमियुक्त देश में युद्ध करना स्वीकार करके नियत किया १८ इसके पीछे कवचधारी भीमसेन ने वड़ी कोटिवाली गदाको लेकर गरुड़के समान रूपको. धारण किया ९६ युद्ध में शिरस्त्राण और सुवर्णका कवचधारी आपका पुत्र सु. वर्षके गिरिराजके समान शोभायमान हुआ २० वह कवचधारी भीमसेन और दुर्योधन दोनोंबीर युद्ध में कोषयुक्त हाथियों के समान दिखाई पड़े २१ हे महाराज युद्धमण्डल में नियत दोनों नरोत्तम भाई उदयमान सूर्य और चन्द्रमाके समान शोभायमान हुये २२ हे राजा परस्पर मारने के अभिलाषी नेत्रोंसे भस्म करनेवाले बड़े हाथियों के समान क्रोध में पूर्णहोकर दोनों ने परस्पर देखा २३ तव अत्यन्त प्रसन्नचित्त कौरव दुर्योधन गदा को लेकर होठों को चाबता और क्रोधसे रक्तनेत्र श्वासको लेता गदालेकर नियतहुआ २४ तदनन्तर पराक्रमी दुर्योधन ने गदाको लेकर भीमसेनको देखकर बुलाया जैसे हाथीहाथी को २५ बुलाता है उसी प्रकार - पराक्रमी भीमसेनने गदाको लेकर राजा को ऐसे बुलाया जैसे कि बनमें सिंहको सिंहबुलाता है २६ वह हाथ में गदा उठाने वाले दुर्योधन और भीमसेन युद्ध में ऐसे दिखाई पड़े जैसे कि दो शिखरघारी पर्वत होते हैं. २७ वह दोनों अत्यंत क्रोधयुक्त भयानक पराक्रमी गदायुद्ध में वड़े कुशल और.. बलदेवजी के शिष्यथे २८ यमराज और इन्द्रकी समान कम करनेवाले दोनों महावली वरुणके समान कर्मकर्ता थे २६ हे महाराज इसीप्रकार वह दोनों वासुदेवजी परशुरामजी कुवेर देवता और मधुकैटभ दैत्योंके समान होकर ३० दोनों सुंद, उपसुंद, राम, रावण और बालि, सुग्रीव के समान कर्म करनेवालेथे ३१ वैसेही शत्रुओं के तपानेवाले वह दोनों कालमृत्युकी समान मतवाले बड़े हाथियों के समान परस्पर सम्मुख दौड़नेवाले थे ३२ वह भरतवंशियों में श्रेष्ठ शरदऋतुके मध्य में हथिनीके मिलापमें मत्त अहंकारी मतवाले बिजयाभिलाषी हाथियोंके स मान थे ३३ फिर वह दोनों शत्रुसंतापी परस्पर क्रोधयुक्त देखनेवाले और सर्पो के समान क्रोधके प्रकाशित विषों के उगलनेवालेथे ३४ दोनों भरतर्षभ पराक्रमों से भरे सिंहों के समान अजेय और गदायुद्ध में कुशलथे ३५ दोनों नख दंष्ट्रा रूप शस्त्र रखने वाले बीर व्याघ्रों के समान दुःखदायी उत्सववाले सृष्टिके नाशमें क्रोधभरे दो समुद्रों के समतुल्यथे ३६ जैसे पूर्व पश्चिमकी बायुसे उत्पन्न होने वाली वायु से चलायमान दोबादल होते हैं उसीप्रकार वह दोनों महारथी भी क्रोधसंयुक्त होकर दौड़नेवालेथे ३७ वर्षाऋतु में कठिन गर्जना करते किरणों से युक्त दोबादलकेसमान तेजस्वी पराक्रमीहोकर महासाहसी थे ३८ कौरवोंमें श्रेष्ठ वह दोनों उदयहुये दोकालरूपी सूर्यकेसमान अत्यन्त क्रोधी व्याघ्रोंके समान गर्जनेवाले दोबादल के रूप दिखाईपड़े ३६ केसरी सिंहोंकेसमान महाक्रोधी हा.. थियों के समान और ज्वलितअग्नि के समान दोनों महाबाहु ने आनन्द को • पाया ४० क्रोधसे चलायमान दोनोंहोठ परस्पर देखनेवाले दोनों महात्मा शि• खरवारी पतसमान दृष्टिगोचरहुये ४९ वह दोनोंमहात्मा नरोत्तम गदाओं को हाथ में लेकर सम्मुख हुये दोनों अत्यन्त प्रसन्नचित्त होकर परस्पर अङ्गीकृत थे ४२ वह दुर्योधन और भीमसेन हिंसने वाले उत्तमघोड़े चिंग्घाड़नेवालेहाथी और डकारनेवाले बैलोंके समान दिखाई दिये ४३ वह पराक्रमसे मतवाले दोनों नरोत्तम दैत्यों के समान शोभायमान हुये हे राजा इसके पीछे दुर्योधनने 'महात्मा श्रीकृष्ण और बड़े पराक्रमी बलदेवजी और भाइयोसमेत नियत युधि•ष्ठिरसे बड़े अहङ्कारियों के समान यह वचन कहा ४४ । ४५ कि जो बड़ेसाहसी पाञ्चाल सृञ्जी और कैकय देशियों से अपने को बड़ा अहंकारी मानता था उस • भीमसेन से मेरा युद्ध निश्चय हुआ ४६ हे युधिष्ठिर तुम इन उत्तम राजाओं सं मेत इस मेरे और भीमसेन के युद्ध को देखो तब युधिष्ठिर ने दुर्योधन के बचन को सुनकर वैसाहीकिया ४७ इसके अनंन्तर वह सब राजमण्डल वहां बैठ गया और बैठकर ऐसा शोभायमान हुआ जैसे कि आकाश में सूर्य्यमण्डल शोभित होता है ४८ हे महाराज उन सबके बीच में केशवजी के बड़े भाई महाबाहु श्री • मान बलदेवजी भी बैठगये ४६ उज्ज्वल वर्ण नीलाम्बरधारी बलदेवजी उन राजाओं के मध्य में ऐसे शोभायमान हुये जैसे कि रात्रि में नक्षत्रों से संयुक्त पूर्ण 'चन्द्रमा होता है ५० हे महाराज उसीप्रकार वह दोनों गदा हाथमें लिये कठिन - तासे सहने के योग्य परस्पर उग्रवचनों से घायल करते नियंतहुये ५१ अर्थात् वह कौरवों में श्रेष्ठ वहां अयोग्य अप्रिय बचनों को परस्पर कहकर ऊपर को देखते ऐसे नियत हुये जैसे कि युद्ध में इन्द्र और वृत्रासुर नियत हुये थे ५२ ॥ इतिश्रीमहाभारतेगदापर्व्वणिगदायुद्धेषविंशोऽध्यायः २६ ॥ बैशंपायन बोले हे जनमेजय इसके पीछे प्रथम तो वार्त्तालापकाही कठिनयुद्ध हुआ उससमय वहां दुःखित होकर राजाधृतराष्ट्रने यहवचनकहा १ कि निश्चय करके इस मनुष्य शरीरको धिक्कार है जिसकी कि ऐसी दशा है हे निष्पाप जिस स्थानपर ग्यारह अक्षौहिणी का स्वामी मेरापुत्र २ सब राजाओं पर शासन करके इस पृथ्वीको भोगकर गदाको लेकर बड़ी तीव्रतासे युद्ध में पैदलचला जो मेरा पुत्र जगत्का स्वामीहोकर अनाथकेसमान गदाको उठाकर चला इसमें प्रारब्ध से दूसरी बात क्या है ३ । ४ हे सञ्जय मेरे पुत्रने बड़े दुःखकोपाया दुःखित पीड़ित राजा धृतराष्ट्र इसप्रकार कहकर मौन होगया ५ सञ्जय बोले कि तब प्रसन्न चित्त वैलकेसमान गर्जते उस पराक्रमी वादलकेसमान शब्दायमान दुर्योधनने पार्थ भीमसेन को युद्धके निमित्त बुलाया हे महात्मा कौरवराज दुर्योधनकी ओरसे भीमसेन के बुलाने पर नानाप्रकार के घोररूप उत्पात जारीहुये ६ । ७ परस्पर आघातित शब्दों समेत वायुचलीं धूलकी वर्षा हुई सव दिशा अन्धकार से पूर्ण हुई ८ शरीरके रोमांचोंकी खड़ीकरनेवाली बायुओंके कठिन आघात बड़े शब्दों के करनेवाले हुये पृथ्वीपर बड़ी शब्दायमान सैकड़ों उल्का आकाशसे गिरी ह हे राजा पर्व्व के विनाही राहुने सूर्यकोग्रसा अर्थात् विनापर्व के ग्रहण पड़ा और पृथ्वी वनके सब वृक्षोंसमेत कंपायमानहुई १० नीचे से कंकड़ पत्थर खँचनेवाली बड़ी घोर और प्रकाशित बायुचलीं और पर्वतों के शिखर पृथ्वी पर गिरे ११ अनेकरूपवाले मृग दशदिशाओंको दौड़े और घोररूप ज्वलित भयानक शृगालभी शब्द करनेलगे १२ महाघोर निर्घातभी शरीरके रोमांच खड़े करनेवाले हुये हे राजा ज्वलितरूप दिशाओं में अशुभसूचक मृग महाघोर अशुभके प्रकट करनेवाले हुये १३ उस समय कूपों के जलभी चारोंओर को अत्यन्त वृद्धियुक्त हुये आकाशवाणी भी सुनीगई १४ भीमसेनने इसप्रकार के उत्पातों को देखकर अपने बड़े भाई धर्मराज युधिष्ठिर से यह वचनकहा १५ कि यह अभागा दुर्योधन युद्धमें मेरे विजयकरनेको समर्थ नहीं है अब मैं अपने बहुतकालकें संचित क्रोध को ९६ कौरवराज दुर्योधन पर ऐसे छोडूंगा जैसे कि खाण्डव वनमें अग्निको छोड़ाथा हे पाण्डव अब मैं तेरे हृदय के बड़े शूलको उखाडूंगा १७ अर्थात् में गंदासे इसकौरवों के कुलमें महानीच पापीको मारकर कीर्तिरूप मालाको आप के शरीर में धारण करूंगा १८ अब में इस युद्ध में इस पापकर्मीको मारकर इसके शरीरको इसगदासे खंड २ करूंगा १६ यह अब दुबारा हस्तिनापुर नगरमें प्रवेश न करेगा हे भरतर्षभ अब मैं उनसव आगेलिखे दुःखोंके अन्तको प्राप्तहूंगा जैसे कि शयन पर सर्पका छोड़ना, भोजनमें विषदेना, प्रमाण कोटी में गिराना, लाक्षा गृह में जलाना, सभा में हास्यकरना, सर्वस्वहरण २० । २१ एकवर्ष अज्ञात होकर बनमेंबास २२ इन सबदुःखरूपी ऋणोंसे एकहीदिन में इसको मारकर अऋणहूंगा हे भरतर्षभ अब दुर्बुद्धी म्लान अन्तःकरण वाले दुर्योधन की आयु पूर्ण हुई २३ माता पिताका दर्शनभी समाप्त हुआ हे महाराजेन्द्र अब दुर्बुद्धी कौरवराज का सुख २४ और स्त्रियोंका दर्शनभी सम्पूर्ण हुआ अब यह शन्तनु के कुलको कलंक लगानेवाला दुर्योधन २५ लक्ष्मी, राज्य और प्राणों को त्यागकर पृथ्वीपर सोवेगा अब राजा धृतराष्ट्र मरेहुये अपने पुत्रको सुनकर २६ अपने उसदुष्टकर्मको यादकरेगा जो कि शकुनीकी बुद्धि से उत्पन्न हुआ हे राजाओं में श्रेष्ठ प्राक्रमीभीमसेन ऐसीबातें कहकर गदाको हाथ में लेकर २७ युद्ध के निमित्त दुर्योधनको ऐसे बुलाता हुआ सम्मुख नियतहुआ जैसे कि इन्द्र वृत्रासुरको बुलाता हुआ नियत हुआाथा शिखरधारी कैलास के समान उस गदा उठाने वाले दुर्योधन को देखकर ·२८ क्रोषयुक्त भीमसेनने फिर कहा कि हे दुर्योधन राजा धृतराष्ट्र समेत तुम अपने उन पापकर्मों को स्मरणकरो जो कि बारणावंतनगर में हुये और सभामें रजस्वला द्रौपदीको दुःख दिया २६/३० और जो तैंने और शकुनीने राजायुधिष्ठिरको द्यूतमें ठगा और हमसबने महावनों में जिस तेरेकारण से बड़े२ दुःखों को पाया ३१ और योन्यन्तरके समानहोकर हमलोगों ने जिस दुःखको विराटनगरमें पाया अव मैं उन सबदुःखों के कारण रूपको मारताहूं हे दुर्बुद्धी तुझको प्रारब्ध से देखा है और तेरेही कारण से शिखण्डी के हाथसे मारेहुये यह रथियों में श्रेष्ठ श्रीगंगाजी के पुत्र प्रतापवान् कौरवों के पितामह भीष्मजी शरशय्यापर सोते हैं ३२ । ३३ द्रोणाचार्य कर्ण और प्रतापवान् शल्यमारागया और शत्रुता की अग्निका उ त्पन्न करनेवाला सौबलका पुत्र शकुनी मारागया ३४ फिर द्रौपदीका क्लेश उत्पन्न करनेवाला पापी प्रातिकामी मारागया सिंहकेसमान युद्ध करनेवाले शूरवीर तेरे सबभाई मारेगये ३५ तेरेही कारण से यहसव और अन्य बहुतसे राजा मारेगये अब मैं तुझको निस्सन्देह गदासे मारूंगा ३६ हे राजेन्द्र सत्यपराक्रमी और निर्भय आपका पुत्र इस प्रकार बड़े उच्चस्वरसे वार्तालाप करनेवाले भीमसेनसे बोला ३७ कि हे कुलमें महानीच भीमसेन बहुत बातोंसे क्यायोजन है तुम युद्ध करो अब मैं तेरे युद्ध के उत्साहको भंगकरूंगा ३८ हे नीच मैं दुर्योधन तुझ सरीखे किसीमनुष्यके वचनसे डरनेकेयोग्य नहीं हूं बहुतकालसे चाहता हृदय में नियंत तेरे साथ मेरा यह गदायुद्ध प्रारब्धकेही द्वारा देवताओं से प्राप्त हुआ है ३६।४० हे दुर्बुद्धी बहुत बार्तालाप और अपनी प्रशंसाकरने से क्या लाभ है यह वचन कर्मकेही द्वारा प्राप्तकरना योग्य है बिलम्ब मतकरो ४१ उसके उस वचनको सुतः कर उन राजालोगों ने और सोमकों ने जो वहां इकट्ठे थे उसकी प्रशंसाकी ४२ इसकेपीछे वह शरीरके रोम २ से प्रसन्न सबसे स्तूयमान वह कौरवनन्दन दुर्योधन युद्धके लिये बुद्धिकेद्वारा फिर धैर्थ्य में प्रवृत्त हुआ ४३ राजाओंने क्रोधयुक्त उस दुर्योधन को जो कि मतवालेहाथी के समानथा तलकेशब्दों से फिर प्रसन्न किया ४४ महात्मा पांडव भीमसेन अपनी गदाको उस करतीव्रता से उस बड़े साहसी दुर्योधन के सम्मुखगया ४५ उसके जातेही वहां हाथी चिग्घाड़े वारंवार घोड़ेहींसे और विजयाभिलाषी पाण्डवों के शस्त्रभी प्रकाशित हुये ४६ ॥ इतिश्रीमहाभारतेगदापर्व्वणित विशोऽध्यायः २७ ॥ वां अध्याय । संजयवोले कि इसके पीछे बड़ा साहसी दुर्योधन बड़ी तीव्रता से गर्जता उसप्रकारसे आते हुये भीमसेन को देखकर सम्मुखगया १ और शृंगधारी बैलों के समान परस्परमें दोनों दौड़े और गदा के प्रहारों के बड़े शब्द उत्पन्न हुये उन दोनों विजयाभिलाषियों का युद्ध महाकठोर और रोमहर्षण करनेवाला ऐसा हुआ जैसे कि युद्ध से परस्पर विजयाभिलाषी इन्द्र और प्रह्लादका हुआ था ३ रुधिरसे लिप्त सव शरीर गदा हाथों में लिये बड़े साहसी दोनों महात्माः फूले हुये किंशुक वृक्षके समान दिखाई पड़े ४ इसप्रकार उस बड़े भयानक घोर युद्धके वर्त्तमान होनेपर आकाश दर्शनीय होकर ऐसा शोभायमान हुआ जैसे कि पटवीजनों के समूहों से होता है ५ इसप्रकार उस कठिनतर संकुलनाम युद्ध के वर्त्तमान होने पर वह शत्रुओं के बिजय करनेवाले दोनों शूरभी थकगये ६ शत्रु सन्तापी उनदोनोंने एक मुहूर्त्त समाखांसित होकर शुभगदाओंको पकड़ कर परस्पर विश्राम किया ७ फिर उन महापराक्रमी विश्राम किये हुये नरोत्तमोंको हथिनी के लिये मतवाले बलवान हाथियों के समान एक से पराक्रमी गंदा पकड़ने वाले दोनों को अच्छीरीतिसे देखकर देवता मनुष्य और गन्धर्वोने बड़े आश्च को पाया & गंदा पकड़नेवाले उन दुर्योधन और भीमसेन को देखकर विजय होने में सबजीवोंको संदेह प्राप्त हुआ १० इसके पीछे बलवानों में श्रेष्ठ परस्पर अन्तर चाहनेवाले दोनों भाई भिड़ंकर प्रत्यन्तर के समान भ्रमण करने लगे १९ हे राजा अवलोकन करनेवालोंने उसरौद्री मारनेवाली भारी और इन्द्रवज्रकेसमान उठाई हुई यमराज के दण्डकी समान गदाको देखा १२ युद्ध में भीमसेन के हाथसे मारती हुई गदाका एक मुहूर्त्त बड़ा कठिन और घोरशब्द वर्त्तमानहुआ १३ इसके अनन्तर वह दुर्योधन उस कठिन ः तीव्रता रखनेवाली गदा के मारनेवाले अपने शत्रु भीमसेन को देखकर आश्चर्ययुक्तहुआ १४ हे भरतवंशी उससमय भीमसेन नानाप्रकारके मार्ग और मण्डलोंको घूमताहुआ शोभायमान हुआ १५. परस्पर अपनी २ रक्षा में सावधान उन दोनोंने अन्योन्य सम्मुखहोकर बारम्बार ऐसे प्रहार किये जैसे खानेकी वस्तु केलिये दोबिलार परस्पर प्रहार करते हैं १६ भीमसेन इसप्रकार के बहुत से मार्गोंको घूमा फिर सम्मुख तिर्थक् विचित्रमण्डल १७ अपूर्व्व अस्त्रान्तर बहुत प्रकारके दाहिने बायें प्रहारस्थानोंका छोड़ना बचाना दाहिने बायें करना १८ तीव्रता से सम्मुखजाना गिराना और अचल होना शत्रुके उठनेपर फिर युद्धकरना शत्रुके मारनेको चारोंओर जाना शत्रु के हटजानेका स्थानरोकना प्रहार बचानेकेलिये झुककर हटजाना मध्यगति ९६. समीप जाकर शस्त्रका मारना चारों ओरको घूमकर पीछे की ओर बर्त्तमान होके हाथसे शत्रुको घायल करना इन मार्गों में घूमते उन गदायुद्ध में कुशल दोनों ने अनेकप्रकार से परस्पर घायल किया २० फिर धोखा देनेवाले होकर वह कोखोत्तम दोनों भ्रमण करने लगे और क्रीड़ा करनेवाले वह दोनों पराक्रमी म एडलोंको घूमे २९ युद्ध में चारोंओरसे युद्ध की क्रीड़ा को दिखलाते उन दोनों शत्रु. सन्तापियोंने गदाओं से अकस्मात् ऐसे घायल किया २२ जैसे कि दांतोंसे दो
भेरियोंके बड़ेशब्द पंद्रह और शूरोंके सिंहनादोंसे सेब दिशा पूर्ण हुई और थोड़ेही समयमें वह नरोत्तम कुरुक्षेत्र में पहुंचे सोलह वहां जैसे आपके पुत्रने बतलाया उसी प्रकार जाकर वह पश्चिम ओरका देश चारोंओर सब दिशाओं में युक्त होकर परिधिरूपहुआ सत्रह जोकि सरस्वती के दक्षिण ओरसे दूसरा उत्तमतीर्थ है वहां हरित भूमियुक्त देश में युद्ध करना स्वीकार करके नियत किया अट्ठारह इसके पीछे कवचधारी भीमसेन ने वड़ी कोटिवाली गदाको लेकर गरुड़के समान रूपको. धारण किया छियानवे युद्ध में शिरस्त्राण और सुवर्णका कवचधारी आपका पुत्र सु. वर्षके गिरिराजके समान शोभायमान हुआ बीस वह कवचधारी भीमसेन और दुर्योधन दोनोंबीर युद्ध में कोषयुक्त हाथियों के समान दिखाई पड़े इक्कीस हे महाराज युद्धमण्डल में नियत दोनों नरोत्तम भाई उदयमान सूर्य और चन्द्रमाके समान शोभायमान हुये बाईस हे राजा परस्पर मारने के अभिलाषी नेत्रोंसे भस्म करनेवाले बड़े हाथियों के समान क्रोध में पूर्णहोकर दोनों ने परस्पर देखा तेईस तव अत्यन्त प्रसन्नचित्त कौरव दुर्योधन गदा को लेकर होठों को चाबता और क्रोधसे रक्तनेत्र श्वासको लेता गदालेकर नियतहुआ चौबीस तदनन्तर पराक्रमी दुर्योधन ने गदाको लेकर भीमसेनको देखकर बुलाया जैसे हाथीहाथी को पच्चीस बुलाता है उसी प्रकार - पराक्रमी भीमसेनने गदाको लेकर राजा को ऐसे बुलाया जैसे कि बनमें सिंहको सिंहबुलाता है छब्बीस वह हाथ में गदा उठाने वाले दुर्योधन और भीमसेन युद्ध में ऐसे दिखाई पड़े जैसे कि दो शिखरघारी पर्वत होते हैं. सत्ताईस वह दोनों अत्यंत क्रोधयुक्त भयानक पराक्रमी गदायुद्ध में वड़े कुशल और.. बलदेवजी के शिष्यथे अट्ठाईस यमराज और इन्द्रकी समान कम करनेवाले दोनों महावली वरुणके समान कर्मकर्ता थे छब्बीस हे महाराज इसीप्रकार वह दोनों वासुदेवजी परशुरामजी कुवेर देवता और मधुकैटभ दैत्योंके समान होकर तीस दोनों सुंद, उपसुंद, राम, रावण और बालि, सुग्रीव के समान कर्म करनेवालेथे इकतीस वैसेही शत्रुओं के तपानेवाले वह दोनों कालमृत्युकी समान मतवाले बड़े हाथियों के समान परस्पर सम्मुख दौड़नेवाले थे बत्तीस वह भरतवंशियों में श्रेष्ठ शरदऋतुके मध्य में हथिनीके मिलापमें मत्त अहंकारी मतवाले बिजयाभिलाषी हाथियोंके स मान थे तैंतीस फिर वह दोनों शत्रुसंतापी परस्पर क्रोधयुक्त देखनेवाले और सर्पो के समान क्रोधके प्रकाशित विषों के उगलनेवालेथे चौंतीस दोनों भरतर्षभ पराक्रमों से भरे सिंहों के समान अजेय और गदायुद्ध में कुशलथे पैंतीस दोनों नख दंष्ट्रा रूप शस्त्र रखने वाले बीर व्याघ्रों के समान दुःखदायी उत्सववाले सृष्टिके नाशमें क्रोधभरे दो समुद्रों के समतुल्यथे छत्तीस जैसे पूर्व पश्चिमकी बायुसे उत्पन्न होने वाली वायु से चलायमान दोबादल होते हैं उसीप्रकार वह दोनों महारथी भी क्रोधसंयुक्त होकर दौड़नेवालेथे सैंतीस वर्षाऋतु में कठिन गर्जना करते किरणों से युक्त दोबादलकेसमान तेजस्वी पराक्रमीहोकर महासाहसी थे अड़तीस कौरवोंमें श्रेष्ठ वह दोनों उदयहुये दोकालरूपी सूर्यकेसमान अत्यन्त क्रोधी व्याघ्रोंके समान गर्जनेवाले दोबादल के रूप दिखाईपड़े छत्तीस केसरी सिंहोंकेसमान महाक्रोधी हा.. थियों के समान और ज्वलितअग्नि के समान दोनों महाबाहु ने आनन्द को • पाया चालीस क्रोधसे चलायमान दोनोंहोठ परस्पर देखनेवाले दोनों महात्मा शि• खरवारी पतसमान दृष्टिगोचरहुये उनचास वह दोनोंमहात्मा नरोत्तम गदाओं को हाथ में लेकर सम्मुख हुये दोनों अत्यन्त प्रसन्नचित्त होकर परस्पर अङ्गीकृत थे बयालीस वह दुर्योधन और भीमसेन हिंसने वाले उत्तमघोड़े चिंग्घाड़नेवालेहाथी और डकारनेवाले बैलोंके समान दिखाई दिये तैंतालीस वह पराक्रमसे मतवाले दोनों नरोत्तम दैत्यों के समान शोभायमान हुये हे राजा इसके पीछे दुर्योधनने 'महात्मा श्रीकृष्ण और बड़े पराक्रमी बलदेवजी और भाइयोसमेत नियत युधि•ष्ठिरसे बड़े अहङ्कारियों के समान यह वचन कहा चौंतालीस । पैंतालीस कि जो बड़ेसाहसी पाञ्चाल सृञ्जी और कैकय देशियों से अपने को बड़ा अहंकारी मानता था उस • भीमसेन से मेरा युद्ध निश्चय हुआ छियालीस हे युधिष्ठिर तुम इन उत्तम राजाओं सं मेत इस मेरे और भीमसेन के युद्ध को देखो तब युधिष्ठिर ने दुर्योधन के बचन को सुनकर वैसाहीकिया सैंतालीस इसके अनंन्तर वह सब राजमण्डल वहां बैठ गया और बैठकर ऐसा शोभायमान हुआ जैसे कि आकाश में सूर्य्यमण्डल शोभित होता है अड़तालीस हे महाराज उन सबके बीच में केशवजी के बड़े भाई महाबाहु श्री • मान बलदेवजी भी बैठगये छियालीस उज्ज्वल वर्ण नीलाम्बरधारी बलदेवजी उन राजाओं के मध्य में ऐसे शोभायमान हुये जैसे कि रात्रि में नक्षत्रों से संयुक्त पूर्ण 'चन्द्रमा होता है पचास हे महाराज उसीप्रकार वह दोनों गदा हाथमें लिये कठिन - तासे सहने के योग्य परस्पर उग्रवचनों से घायल करते नियंतहुये इक्यावन अर्थात् वह कौरवों में श्रेष्ठ वहां अयोग्य अप्रिय बचनों को परस्पर कहकर ऊपर को देखते ऐसे नियत हुये जैसे कि युद्ध में इन्द्र और वृत्रासुर नियत हुये थे बावन ॥ इतिश्रीमहाभारतेगदापर्व्वणिगदायुद्धेषविंशोऽध्यायः छब्बीस ॥ बैशंपायन बोले हे जनमेजय इसके पीछे प्रथम तो वार्त्तालापकाही कठिनयुद्ध हुआ उससमय वहां दुःखित होकर राजाधृतराष्ट्रने यहवचनकहा एक कि निश्चय करके इस मनुष्य शरीरको धिक्कार है जिसकी कि ऐसी दशा है हे निष्पाप जिस स्थानपर ग्यारह अक्षौहिणी का स्वामी मेरापुत्र दो सब राजाओं पर शासन करके इस पृथ्वीको भोगकर गदाको लेकर बड़ी तीव्रतासे युद्ध में पैदलचला जो मेरा पुत्र जगत्का स्वामीहोकर अनाथकेसमान गदाको उठाकर चला इसमें प्रारब्ध से दूसरी बात क्या है तीन । चार हे सञ्जय मेरे पुत्रने बड़े दुःखकोपाया दुःखित पीड़ित राजा धृतराष्ट्र इसप्रकार कहकर मौन होगया पाँच सञ्जय बोले कि तब प्रसन्न चित्त वैलकेसमान गर्जते उस पराक्रमी वादलकेसमान शब्दायमान दुर्योधनने पार्थ भीमसेन को युद्धके निमित्त बुलाया हे महात्मा कौरवराज दुर्योधनकी ओरसे भीमसेन के बुलाने पर नानाप्रकार के घोररूप उत्पात जारीहुये छः । सात परस्पर आघातित शब्दों समेत वायुचलीं धूलकी वर्षा हुई सव दिशा अन्धकार से पूर्ण हुई आठ शरीरके रोमांचोंकी खड़ीकरनेवाली बायुओंके कठिन आघात बड़े शब्दों के करनेवाले हुये पृथ्वीपर बड़ी शब्दायमान सैकड़ों उल्का आकाशसे गिरी ह हे राजा पर्व्व के विनाही राहुने सूर्यकोग्रसा अर्थात् विनापर्व के ग्रहण पड़ा और पृथ्वी वनके सब वृक्षोंसमेत कंपायमानहुई दस नीचे से कंकड़ पत्थर खँचनेवाली बड़ी घोर और प्रकाशित बायुचलीं और पर्वतों के शिखर पृथ्वी पर गिरे ग्यारह अनेकरूपवाले मृग दशदिशाओंको दौड़े और घोररूप ज्वलित भयानक शृगालभी शब्द करनेलगे बारह महाघोर निर्घातभी शरीरके रोमांच खड़े करनेवाले हुये हे राजा ज्वलितरूप दिशाओं में अशुभसूचक मृग महाघोर अशुभके प्रकट करनेवाले हुये तेरह उस समय कूपों के जलभी चारोंओर को अत्यन्त वृद्धियुक्त हुये आकाशवाणी भी सुनीगई चौदह भीमसेनने इसप्रकार के उत्पातों को देखकर अपने बड़े भाई धर्मराज युधिष्ठिर से यह वचनकहा पंद्रह कि यह अभागा दुर्योधन युद्धमें मेरे विजयकरनेको समर्थ नहीं है अब मैं अपने बहुतकालकें संचित क्रोध को छियानवे कौरवराज दुर्योधन पर ऐसे छोडूंगा जैसे कि खाण्डव वनमें अग्निको छोड़ाथा हे पाण्डव अब मैं तेरे हृदय के बड़े शूलको उखाडूंगा सत्रह अर्थात् में गंदासे इसकौरवों के कुलमें महानीच पापीको मारकर कीर्तिरूप मालाको आप के शरीर में धारण करूंगा अट्ठारह अब में इस युद्ध में इस पापकर्मीको मारकर इसके शरीरको इसगदासे खंड दो करूंगा सोलह यह अब दुबारा हस्तिनापुर नगरमें प्रवेश न करेगा हे भरतर्षभ अब मैं उनसव आगेलिखे दुःखोंके अन्तको प्राप्तहूंगा जैसे कि शयन पर सर्पका छोड़ना, भोजनमें विषदेना, प्रमाण कोटी में गिराना, लाक्षा गृह में जलाना, सभा में हास्यकरना, सर्वस्वहरण बीस । इक्कीस एकवर्ष अज्ञात होकर बनमेंबास बाईस इन सबदुःखरूपी ऋणोंसे एकहीदिन में इसको मारकर अऋणहूंगा हे भरतर्षभ अब दुर्बुद्धी म्लान अन्तःकरण वाले दुर्योधन की आयु पूर्ण हुई तेईस माता पिताका दर्शनभी समाप्त हुआ हे महाराजेन्द्र अब दुर्बुद्धी कौरवराज का सुख चौबीस और स्त्रियोंका दर्शनभी सम्पूर्ण हुआ अब यह शन्तनु के कुलको कलंक लगानेवाला दुर्योधन पच्चीस लक्ष्मी, राज्य और प्राणों को त्यागकर पृथ्वीपर सोवेगा अब राजा धृतराष्ट्र मरेहुये अपने पुत्रको सुनकर छब्बीस अपने उसदुष्टकर्मको यादकरेगा जो कि शकुनीकी बुद्धि से उत्पन्न हुआ हे राजाओं में श्रेष्ठ प्राक्रमीभीमसेन ऐसीबातें कहकर गदाको हाथ में लेकर सत्ताईस युद्ध के निमित्त दुर्योधनको ऐसे बुलाता हुआ सम्मुख नियतहुआ जैसे कि इन्द्र वृत्रासुरको बुलाता हुआ नियत हुआाथा शिखरधारी कैलास के समान उस गदा उठाने वाले दुर्योधन को देखकर ·अट्ठाईस क्रोषयुक्त भीमसेनने फिर कहा कि हे दुर्योधन राजा धृतराष्ट्र समेत तुम अपने उन पापकर्मों को स्मरणकरो जो कि बारणावंतनगर में हुये और सभामें रजस्वला द्रौपदीको दुःख दिया छब्बीस/तीस और जो तैंने और शकुनीने राजायुधिष्ठिरको द्यूतमें ठगा और हमसबने महावनों में जिस तेरेकारण से बड़ेदो दुःखों को पाया इकतीस और योन्यन्तरके समानहोकर हमलोगों ने जिस दुःखको विराटनगरमें पाया अव मैं उन सबदुःखों के कारण रूपको मारताहूं हे दुर्बुद्धी तुझको प्रारब्ध से देखा है और तेरेही कारण से शिखण्डी के हाथसे मारेहुये यह रथियों में श्रेष्ठ श्रीगंगाजी के पुत्र प्रतापवान् कौरवों के पितामह भीष्मजी शरशय्यापर सोते हैं बत्तीस । तैंतीस द्रोणाचार्य कर्ण और प्रतापवान् शल्यमारागया और शत्रुता की अग्निका उ त्पन्न करनेवाला सौबलका पुत्र शकुनी मारागया चौंतीस फिर द्रौपदीका क्लेश उत्पन्न करनेवाला पापी प्रातिकामी मारागया सिंहकेसमान युद्ध करनेवाले शूरवीर तेरे सबभाई मारेगये पैंतीस तेरेही कारण से यहसव और अन्य बहुतसे राजा मारेगये अब मैं तुझको निस्सन्देह गदासे मारूंगा छत्तीस हे राजेन्द्र सत्यपराक्रमी और निर्भय आपका पुत्र इस प्रकार बड़े उच्चस्वरसे वार्तालाप करनेवाले भीमसेनसे बोला सैंतीस कि हे कुलमें महानीच भीमसेन बहुत बातोंसे क्यायोजन है तुम युद्ध करो अब मैं तेरे युद्ध के उत्साहको भंगकरूंगा अड़तीस हे नीच मैं दुर्योधन तुझ सरीखे किसीमनुष्यके वचनसे डरनेकेयोग्य नहीं हूं बहुतकालसे चाहता हृदय में नियंत तेरे साथ मेरा यह गदायुद्ध प्रारब्धकेही द्वारा देवताओं से प्राप्त हुआ है छत्तीस।चालीस हे दुर्बुद्धी बहुत बार्तालाप और अपनी प्रशंसाकरने से क्या लाभ है यह वचन कर्मकेही द्वारा प्राप्तकरना योग्य है बिलम्ब मतकरो इकतालीस उसके उस वचनको सुतः कर उन राजालोगों ने और सोमकों ने जो वहां इकट्ठे थे उसकी प्रशंसाकी बयालीस इसकेपीछे वह शरीरके रोम दो से प्रसन्न सबसे स्तूयमान वह कौरवनन्दन दुर्योधन युद्धके लिये बुद्धिकेद्वारा फिर धैर्थ्य में प्रवृत्त हुआ तैंतालीस राजाओंने क्रोधयुक्त उस दुर्योधन को जो कि मतवालेहाथी के समानथा तलकेशब्दों से फिर प्रसन्न किया चौंतालीस महात्मा पांडव भीमसेन अपनी गदाको उस करतीव्रता से उस बड़े साहसी दुर्योधन के सम्मुखगया पैंतालीस उसके जातेही वहां हाथी चिग्घाड़े वारंवार घोड़ेहींसे और विजयाभिलाषी पाण्डवों के शस्त्रभी प्रकाशित हुये छियालीस ॥ इतिश्रीमहाभारतेगदापर्व्वणित विशोऽध्यायः सत्ताईस ॥ वां अध्याय । संजयवोले कि इसके पीछे बड़ा साहसी दुर्योधन बड़ी तीव्रता से गर्जता उसप्रकारसे आते हुये भीमसेन को देखकर सम्मुखगया एक और शृंगधारी बैलों के समान परस्परमें दोनों दौड़े और गदा के प्रहारों के बड़े शब्द उत्पन्न हुये उन दोनों विजयाभिलाषियों का युद्ध महाकठोर और रोमहर्षण करनेवाला ऐसा हुआ जैसे कि युद्ध से परस्पर विजयाभिलाषी इन्द्र और प्रह्लादका हुआ था तीन रुपयाधिरसे लिप्त सव शरीर गदा हाथों में लिये बड़े साहसी दोनों महात्माः फूले हुये किंशुक वृक्षके समान दिखाई पड़े चार इसप्रकार उस बड़े भयानक घोर युद्धके वर्त्तमान होनेपर आकाश दर्शनीय होकर ऐसा शोभायमान हुआ जैसे कि पटवीजनों के समूहों से होता है पाँच इसप्रकार उस कठिनतर संकुलनाम युद्ध के वर्त्तमान होने पर वह शत्रुओं के बिजय करनेवाले दोनों शूरभी थकगये छः शत्रु सन्तापी उनदोनोंने एक मुहूर्त्त समाखांसित होकर शुभगदाओंको पकड़ कर परस्पर विश्राम किया सात फिर उन महापराक्रमी विश्राम किये हुये नरोत्तमोंको हथिनी के लिये मतवाले बलवान हाथियों के समान एक से पराक्रमी गंदा पकड़ने वाले दोनों को अच्छीरीतिसे देखकर देवता मनुष्य और गन्धर्वोने बड़े आश्च को पाया & गंदा पकड़नेवाले उन दुर्योधन और भीमसेन को देखकर विजय होने में सबजीवोंको संदेह प्राप्त हुआ दस इसके पीछे बलवानों में श्रेष्ठ परस्पर अन्तर चाहनेवाले दोनों भाई भिड़ंकर प्रत्यन्तर के समान भ्रमण करने लगे उन्नीस हे राजा अवलोकन करनेवालोंने उसरौद्री मारनेवाली भारी और इन्द्रवज्रकेसमान उठाई हुई यमराज के दण्डकी समान गदाको देखा बारह युद्ध में भीमसेन के हाथसे मारती हुई गदाका एक मुहूर्त्त बड़ा कठिन और घोरशब्द वर्त्तमानहुआ तेरह इसके अनन्तर वह दुर्योधन उस कठिन ः तीव्रता रखनेवाली गदा के मारनेवाले अपने शत्रु भीमसेन को देखकर आश्चर्ययुक्तहुआ चौदह हे भरतवंशी उससमय भीमसेन नानाप्रकारके मार्ग और मण्डलोंको घूमताहुआ शोभायमान हुआ पंद्रह. परस्पर अपनी दो रक्षा में सावधान उन दोनोंने अन्योन्य सम्मुखहोकर बारम्बार ऐसे प्रहार किये जैसे खानेकी वस्तु केलिये दोबिलार परस्पर प्रहार करते हैं सोलह भीमसेन इसप्रकार के बहुत से मार्गोंको घूमा फिर सम्मुख तिर्थक् विचित्रमण्डल सत्रह अपूर्व्व अस्त्रान्तर बहुत प्रकारके दाहिने बायें प्रहारस्थानोंका छोड़ना बचाना दाहिने बायें करना अट्ठारह तीव्रता से सम्मुखजाना गिराना और अचल होना शत्रुके उठनेपर फिर युद्धकरना शत्रुके मारनेको चारोंओर जाना शत्रु के हटजानेका स्थानरोकना प्रहार बचानेकेलिये झुककर हटजाना मध्यगति छियानवे. समीप जाकर शस्त्रका मारना चारों ओरको घूमकर पीछे की ओर बर्त्तमान होके हाथसे शत्रुको घायल करना इन मार्गों में घूमते उन गदायुद्ध में कुशल दोनों ने अनेकप्रकार से परस्पर घायल किया बीस फिर धोखा देनेवाले होकर वह कोखोत्तम दोनों भ्रमण करने लगे और क्रीड़ा करनेवाले वह दोनों पराक्रमी म एडलोंको घूमे उनतीस युद्ध में चारोंओरसे युद्ध की क्रीड़ा को दिखलाते उन दोनों शत्रु. सन्तापियोंने गदाओं से अकस्मात् ऐसे घायल किया बाईस जैसे कि दांतोंसे दो
(www. arya-tv. com)न्यूजीलैंड की क्रिकेट टीम कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के दौरे पर गई थी। इस दौरे पर 3 वनडे और 5 टी-20 मैच खेले जाने थे। लेकिन न्यूजीलैंड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पाकिस्तान का दौरा रद्द कर दिया। कीवी क्रिकेट बोर्ड ने रावलपिंडी में पहला वनडे शुरू होने से 30 मिनट पहले यह फैसला लिया। न्यूजीलैंड के इस फैसले को लेकर पाकिस्तान में मचा बवाल शांत होने का नाम नहीं ले रहा। पाकिस्तानी क्रिकेट फैंस ने न्यूजीलैंड पर धोखा देने के आरोप लगाए। अब इस दौरे से जुड़ा एक और मामला सामने आया है, जिसकी खूब चर्चा हो रही है। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूजीलैंड के क्रिकेट खिलाड़ियों की सुरक्षा में लगी सिक्योरिटी टीम के खाने-पीने पर 28 लाख रुपए का बिल आया है। इस्लामाबाद के एक होटल में 8 दिन तक कीवी टीम ठहरी रही। इनकी सुरक्षा में करीब 500 पुलिसकर्मी तैनात थे। उनके लिए दिन में दो बार बिरयानी आती थी। 8 दिन का बिल 28 लाख रुपए आया है। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब बिल को पास कराने के लिए फाइनेंस विभाग में भेजा गया। यहां जांच के दौरान इतनी बड़ी रकम सामने आई तो बिल को पास होने से रोक दिया गया। बिल की सच्चाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि अभी तक इस पर आधिकारिक बयान नहीं आया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने न्यूजीलैंड का दौरा रद्द होने को लेकर भारत पर आरोप लगाए। चौधरी ने बुधवार को कहा कि न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम को धमकी भरा ईमेल भारत से भेजा गया था, जिससे दौरा रद्द हुआ। चौधरी ने दावा किया कि उस ईमेल ID को भारत में बनाया गया था और सिंगापुर के IP एड्रेस के जरिए भेजा गया। उन्होंने कहा कि भारत में ईमेल ID को जिस डिवाइस से बनाया गया था, उससे 13 और ईमेल ID बनाए गए। पाकिस्तान ने इस दौरे को बचाने की पूरी कोशिश की थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न को फोन कर सुरक्षा का पूरा आश्वासन देने का वादा भी किया था। इमरान ने कहा था कि पाकिस्तान के पास दुनिया का सबसे अच्छा इंटेलिजेंस सिस्टम है और कीवी टीम के ऊपर किसी भी तरह का खतरा नहीं है। लेकिन, यह काम नहीं आया। पाकिस्तान में क्रिकेट टीमों की सुरक्षा हमेशा चिंता का विषय रही है। 2009 में लाहौर में श्रीलंकाई टीम की बस पर आतंकी हमला हुआ था। इसमें किसी की जान तो नहीं गई थी, लेकिन कुछ खिलाड़ी घायल हुए थे। इसके बाद सभी टीमों ने पाकिस्तान का दौरा करना बंद कर दिया था। पाकिस्तान अपने घरेलू मुकाबले UAE में खेलने पर मजबूर हो गया था। पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान ने दोबारा अपने शहरों में अंतरराष्ट्रीय मैचों का आयोजन करना शुरू किया था, जिसके बाद साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज, जिम्बाब्वे जैसी टीमों ने पाकिस्तान जाकर खेला भी।
न्यूजीलैंड की क्रिकेट टीम कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के दौरे पर गई थी। इस दौरे पर तीन वनडे और पाँच टी-बीस मैच खेले जाने थे। लेकिन न्यूजीलैंड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पाकिस्तान का दौरा रद्द कर दिया। कीवी क्रिकेट बोर्ड ने रावलपिंडी में पहला वनडे शुरू होने से तीस मिनट पहले यह फैसला लिया। न्यूजीलैंड के इस फैसले को लेकर पाकिस्तान में मचा बवाल शांत होने का नाम नहीं ले रहा। पाकिस्तानी क्रिकेट फैंस ने न्यूजीलैंड पर धोखा देने के आरोप लगाए। अब इस दौरे से जुड़ा एक और मामला सामने आया है, जिसकी खूब चर्चा हो रही है। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूजीलैंड के क्रिकेट खिलाड़ियों की सुरक्षा में लगी सिक्योरिटी टीम के खाने-पीने पर अट्ठाईस लाख रुपए का बिल आया है। इस्लामाबाद के एक होटल में आठ दिन तक कीवी टीम ठहरी रही। इनकी सुरक्षा में करीब पाँच सौ पुलिसकर्मी तैनात थे। उनके लिए दिन में दो बार बिरयानी आती थी। आठ दिन का बिल अट्ठाईस लाख रुपए आया है। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब बिल को पास कराने के लिए फाइनेंस विभाग में भेजा गया। यहां जांच के दौरान इतनी बड़ी रकम सामने आई तो बिल को पास होने से रोक दिया गया। बिल की सच्चाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि अभी तक इस पर आधिकारिक बयान नहीं आया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने न्यूजीलैंड का दौरा रद्द होने को लेकर भारत पर आरोप लगाए। चौधरी ने बुधवार को कहा कि न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम को धमकी भरा ईमेल भारत से भेजा गया था, जिससे दौरा रद्द हुआ। चौधरी ने दावा किया कि उस ईमेल ID को भारत में बनाया गया था और सिंगापुर के IP एड्रेस के जरिए भेजा गया। उन्होंने कहा कि भारत में ईमेल ID को जिस डिवाइस से बनाया गया था, उससे तेरह और ईमेल ID बनाए गए। पाकिस्तान ने इस दौरे को बचाने की पूरी कोशिश की थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न को फोन कर सुरक्षा का पूरा आश्वासन देने का वादा भी किया था। इमरान ने कहा था कि पाकिस्तान के पास दुनिया का सबसे अच्छा इंटेलिजेंस सिस्टम है और कीवी टीम के ऊपर किसी भी तरह का खतरा नहीं है। लेकिन, यह काम नहीं आया। पाकिस्तान में क्रिकेट टीमों की सुरक्षा हमेशा चिंता का विषय रही है। दो हज़ार नौ में लाहौर में श्रीलंकाई टीम की बस पर आतंकी हमला हुआ था। इसमें किसी की जान तो नहीं गई थी, लेकिन कुछ खिलाड़ी घायल हुए थे। इसके बाद सभी टीमों ने पाकिस्तान का दौरा करना बंद कर दिया था। पाकिस्तान अपने घरेलू मुकाबले UAE में खेलने पर मजबूर हो गया था। पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान ने दोबारा अपने शहरों में अंतरराष्ट्रीय मैचों का आयोजन करना शुरू किया था, जिसके बाद साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज, जिम्बाब्वे जैसी टीमों ने पाकिस्तान जाकर खेला भी।
रोहित खट्टर और नीतीश चौहान ने ऐसा काम चुना है, जिसमें वे लड़कियों के साथ घूमते भी हैं और इसके लिए पैसे भी लेते हैं. दरअसल रोहित और नितीश 'जुगनी' नाम की एक ट्रैवल एजेंसी चलाते हैं, जिसमें वे हर उम्र की लड़कियों के घूमने का इंतज़ाम करते हैं. वे इन लड़कियों को 'जुगनी' नाम से पुकारते हैं. मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम करते थे. उन्होंने एक दिन यकायक सब छोड़ कर तय किया कि वे सिर्फ लड़कियों के लिए ट्रैवल एजेंसी चलाएंगे. रोहित ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, "मैं ट्रैवल का ही काम करता था और मैंने पाया कि लड़कियों को अकेले घूमने में दिक़्क़त आती है. मैंने सोचा कि ऐसा काम शुरू किया जाए, जिसमें मैं और मेरा दोस्त नीतीश लड़कियों के साथ उनकी छुट्टी पर जाएं ताकि वे अकेले घूमते हुए सुरक्षित महसूस करें. " रोहित और नीतीश एक बार कम से कम छह और ज़्यादा से ज़्यादा 12 लड़कियों को ही ट्रिप लेकर जाते हैं. नीतीश ने कहा, "लड़कियों के साथ यात्रा करना आसान है, जबकि पुरुषों के साथ कई बार मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. " "लड़कियां कभी परेशान नहीं करती हैं. यह और बात है की वे कभी भी किसी चीज की डिमांड कर सकती हैं. " नीतीश के मुताबिक़, "हमें वे सारी चीजें रखनी होती हैं, जो लड़कियां अमूमन अपने पास रखती हैं, मसलन, सैनिट्री पैड, सेफ़्टी पिन, यहां तक कि रबर बैंड भी. " एक साल पहले शुरू की गई अपनी कंपनी के अनुभव बांटते हुए रोहित कहते हैं, "अब समय बदल गया है. किसी भी उम्र की महिला हो, उसे सिर्फ़ घूमना नहीं, एडवेंचर करना अच्छा लगता है. " नीतीश कहते है कि "कई बार जुगनियां शराब पी लेती हैं, उसके बाद हमारा काम उन्हें संभालने का होता है. " रोहित और नीतीश कहते हैं, "सबसे मज़ेदार होता है जब वे हमें फ़ोटो खींचने को कहतीं हैं और ये कभी न ख़त्म होने वाला सिलसिला होता है. कई बार हमें इतनी तस्वीरें खींचनी होती हैं कि उंगुलियों में दर्द होने लगता है. " दिल्ली की रहने वाली जस्सी 'जुगनी' के बारे में कहतीं हैं, "मैं अपने तीसरे ट्रिप में भी जुगनी के साथ ही जा रही हूँ, यह बहुत सुरक्षित है. " 'महिलाओं के लिए, महिलाओं का' भारत में कई ऐसी ट्रैवल एजेंसियां हैं, जो सिर्फ़ महिलाओं को टूर कराती हैं. लेकिन वे महिलाएं ही चलाती हैं. मसलन, 'वूमेन ऑन क्लाउड्स'. इसे शिरीन ने शुरू किया था. सुमित्रा सेनापति ने क़रीब आठ साल पहले ऐसा ही एक ट्रैवल क्लब बनाया था, जिसका नाम है, 'वाउ' यानी 'विमेन ऑन वांडरलस्ट'. ट्रैवल कंपनी केसरी ने घुमक्कड़ महिलाओं के लिए ख़ास 'माई फ़ेयर लेडी' टूर पैकेज पेश किए हैं. इसके तहत महिलाओं को देश-विदेश की कई जानी-अनजानी मंजिलों की सैर कराई जाती है. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
रोहित खट्टर और नीतीश चौहान ने ऐसा काम चुना है, जिसमें वे लड़कियों के साथ घूमते भी हैं और इसके लिए पैसे भी लेते हैं. दरअसल रोहित और नितीश 'जुगनी' नाम की एक ट्रैवल एजेंसी चलाते हैं, जिसमें वे हर उम्र की लड़कियों के घूमने का इंतज़ाम करते हैं. वे इन लड़कियों को 'जुगनी' नाम से पुकारते हैं. मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम करते थे. उन्होंने एक दिन यकायक सब छोड़ कर तय किया कि वे सिर्फ लड़कियों के लिए ट्रैवल एजेंसी चलाएंगे. रोहित ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, "मैं ट्रैवल का ही काम करता था और मैंने पाया कि लड़कियों को अकेले घूमने में दिक़्क़त आती है. मैंने सोचा कि ऐसा काम शुरू किया जाए, जिसमें मैं और मेरा दोस्त नीतीश लड़कियों के साथ उनकी छुट्टी पर जाएं ताकि वे अकेले घूमते हुए सुरक्षित महसूस करें. " रोहित और नीतीश एक बार कम से कम छह और ज़्यादा से ज़्यादा बारह लड़कियों को ही ट्रिप लेकर जाते हैं. नीतीश ने कहा, "लड़कियों के साथ यात्रा करना आसान है, जबकि पुरुषों के साथ कई बार मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. " "लड़कियां कभी परेशान नहीं करती हैं. यह और बात है की वे कभी भी किसी चीज की डिमांड कर सकती हैं. " नीतीश के मुताबिक़, "हमें वे सारी चीजें रखनी होती हैं, जो लड़कियां अमूमन अपने पास रखती हैं, मसलन, सैनिट्री पैड, सेफ़्टी पिन, यहां तक कि रबर बैंड भी. " एक साल पहले शुरू की गई अपनी कंपनी के अनुभव बांटते हुए रोहित कहते हैं, "अब समय बदल गया है. किसी भी उम्र की महिला हो, उसे सिर्फ़ घूमना नहीं, एडवेंचर करना अच्छा लगता है. " नीतीश कहते है कि "कई बार जुगनियां शराब पी लेती हैं, उसके बाद हमारा काम उन्हें संभालने का होता है. " रोहित और नीतीश कहते हैं, "सबसे मज़ेदार होता है जब वे हमें फ़ोटो खींचने को कहतीं हैं और ये कभी न ख़त्म होने वाला सिलसिला होता है. कई बार हमें इतनी तस्वीरें खींचनी होती हैं कि उंगुलियों में दर्द होने लगता है. " दिल्ली की रहने वाली जस्सी 'जुगनी' के बारे में कहतीं हैं, "मैं अपने तीसरे ट्रिप में भी जुगनी के साथ ही जा रही हूँ, यह बहुत सुरक्षित है. " 'महिलाओं के लिए, महिलाओं का' भारत में कई ऐसी ट्रैवल एजेंसियां हैं, जो सिर्फ़ महिलाओं को टूर कराती हैं. लेकिन वे महिलाएं ही चलाती हैं. मसलन, 'वूमेन ऑन क्लाउड्स'. इसे शिरीन ने शुरू किया था. सुमित्रा सेनापति ने क़रीब आठ साल पहले ऐसा ही एक ट्रैवल क्लब बनाया था, जिसका नाम है, 'वाउ' यानी 'विमेन ऑन वांडरलस्ट'. ट्रैवल कंपनी केसरी ने घुमक्कड़ महिलाओं के लिए ख़ास 'माई फ़ेयर लेडी' टूर पैकेज पेश किए हैं. इसके तहत महिलाओं को देश-विदेश की कई जानी-अनजानी मंजिलों की सैर कराई जाती है.
आज धूल, प्रदूषण व तनाव लेने की वजह से लोग जवानी में ही बुड्ढे दिखाई दे रहे है। लोगों के बुड्ढ़ा दिखाई देने के पीछे वजह है उनके बालों का सफेद होना, जोकि समय से पहले ही सफेद हो रहे है। मतलब वे बाल जो 30 वर्ष की आयु के बाद आते हैं वे 30 वर्ष में या उससे पहले ही नज़र आने लगते है । बालों का समय से पहले सफेद होना एक तरह से लोगों के स्वभाव में चिढ़चिढापन व आत्मविश्वास की कमी पैदा करता है। इस वजह से लोग दोस्तों के बीच जाने से डरते हैं क्योंकि वे मानते हैं कि कहीं वे दोस्तों के बीच मजाक का पात्र न बन जाएं, इस डर से लोग सफेद बालों को काटना शुरु कर देते हैं। हालांकि यह उपाय सही नहीं है क्योंकि सफेद बालों को काटने से अधिक संख्या में सफेद बाल आते हैं। लोगों की इस परेशानी को दूर करने व दोस्तों के बीच हंसी का पात्र होने से बचने के लिए, हम आपको बताते हैं सफ़ेद बालों के घरेलु उपचार जिनके इस्तेमाल से आप सफेद बालों की परेशानी से दूर हो जाएंगे और एक तनावमुक्त जीवन पाएंगे.. अगर आपके बालों से प्राकृतिक सुन्दरता यानी काला रंग दूर हो रहा है तो सफ़ेद बालों के घरेलु उपचार कीजिये। आंवला के उपयोग से बालों की प्राकृतिक सुन्दरता बनी रहती है। इसके आपको आंवला उबालना होगा फिर उसे पीसकर पेस्ट बनाना होगा। इसके बाद बालों की जड़ों में लगा दें। यह प्रक्रिया हफ्ते में 2 या तीन बार करने से बालों के काला रंग बना रहेगा। चाहे तो, अदरक को शहद में मिलाकर पेस्ट बना सकते हैं और सफेद हो रहे बालों पर भी लगा सकते हैं। बालों का सफेद होने का कारण बालों में कैमिकल प्रॉड्क्ट का अधिक यूज करना, जिससे हेयर काला रंग जल्दी खो देते हैं। इसके साथ यह भी देखा गया है। जो लोग ज्यादा शैम्पू बदलते हैं उनके बाल समय से पहले सफेद होते हैं। बालों को रोज न धोकर हफ्ते में 2 या 3 बार ही धोएं। इससे बाल रफ्फ नहीं होंगे और बालों की प्राकृतिक सुन्दरता यानी काला रंग बना रहेगा। बालों को धोने से पहले तेल मालिश जरूर करें ऐसा करने से बाल मजबूत होते हैं व चमकदार बनते हैं। समय से पहले बालों का सफेद होने के पीछे वजह है जीवनशैली, भाग दौड़ व स्ट्रेस से भरे दिन में हम आपने खान-पान पर ध्यान नहीं दे पाते। जिसका सीधा असर बॉडी पर होता है और शरीर में समय से बहले बदलाव शुरू हो जाते हैं। तो इसके लिए उपयोगी है प्रोटीन, विटामिन से भरपूर हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना। ये है सफ़ेद बालों के घरेलु उपचार - इन सभी सफ़ेद बालों के घरेलु उपचार को अपनाकर आप बालों को समय से पहले सफेद होने से रोक सकेंगे। 30 की उम्र से पहले सफेद बालों से छुटकारा पाएंगे ।
आज धूल, प्रदूषण व तनाव लेने की वजह से लोग जवानी में ही बुड्ढे दिखाई दे रहे है। लोगों के बुड्ढ़ा दिखाई देने के पीछे वजह है उनके बालों का सफेद होना, जोकि समय से पहले ही सफेद हो रहे है। मतलब वे बाल जो तीस वर्ष की आयु के बाद आते हैं वे तीस वर्ष में या उससे पहले ही नज़र आने लगते है । बालों का समय से पहले सफेद होना एक तरह से लोगों के स्वभाव में चिढ़चिढापन व आत्मविश्वास की कमी पैदा करता है। इस वजह से लोग दोस्तों के बीच जाने से डरते हैं क्योंकि वे मानते हैं कि कहीं वे दोस्तों के बीच मजाक का पात्र न बन जाएं, इस डर से लोग सफेद बालों को काटना शुरु कर देते हैं। हालांकि यह उपाय सही नहीं है क्योंकि सफेद बालों को काटने से अधिक संख्या में सफेद बाल आते हैं। लोगों की इस परेशानी को दूर करने व दोस्तों के बीच हंसी का पात्र होने से बचने के लिए, हम आपको बताते हैं सफ़ेद बालों के घरेलु उपचार जिनके इस्तेमाल से आप सफेद बालों की परेशानी से दूर हो जाएंगे और एक तनावमुक्त जीवन पाएंगे.. अगर आपके बालों से प्राकृतिक सुन्दरता यानी काला रंग दूर हो रहा है तो सफ़ेद बालों के घरेलु उपचार कीजिये। आंवला के उपयोग से बालों की प्राकृतिक सुन्दरता बनी रहती है। इसके आपको आंवला उबालना होगा फिर उसे पीसकर पेस्ट बनाना होगा। इसके बाद बालों की जड़ों में लगा दें। यह प्रक्रिया हफ्ते में दो या तीन बार करने से बालों के काला रंग बना रहेगा। चाहे तो, अदरक को शहद में मिलाकर पेस्ट बना सकते हैं और सफेद हो रहे बालों पर भी लगा सकते हैं। बालों का सफेद होने का कारण बालों में कैमिकल प्रॉड्क्ट का अधिक यूज करना, जिससे हेयर काला रंग जल्दी खो देते हैं। इसके साथ यह भी देखा गया है। जो लोग ज्यादा शैम्पू बदलते हैं उनके बाल समय से पहले सफेद होते हैं। बालों को रोज न धोकर हफ्ते में दो या तीन बार ही धोएं। इससे बाल रफ्फ नहीं होंगे और बालों की प्राकृतिक सुन्दरता यानी काला रंग बना रहेगा। बालों को धोने से पहले तेल मालिश जरूर करें ऐसा करने से बाल मजबूत होते हैं व चमकदार बनते हैं। समय से पहले बालों का सफेद होने के पीछे वजह है जीवनशैली, भाग दौड़ व स्ट्रेस से भरे दिन में हम आपने खान-पान पर ध्यान नहीं दे पाते। जिसका सीधा असर बॉडी पर होता है और शरीर में समय से बहले बदलाव शुरू हो जाते हैं। तो इसके लिए उपयोगी है प्रोटीन, विटामिन से भरपूर हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना। ये है सफ़ेद बालों के घरेलु उपचार - इन सभी सफ़ेद बालों के घरेलु उपचार को अपनाकर आप बालों को समय से पहले सफेद होने से रोक सकेंगे। तीस की उम्र से पहले सफेद बालों से छुटकारा पाएंगे ।
Satyam Weaves Salwar Suit : Brocade Unstitched Salwar Suit : Santoon Semi Stitched Salwar Suit: Woolen salwar suit : B. L. M Salwar Suit Material : नोट : Electronics Store पर विजिट करने के लिए यहां क्लिक करें। Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazonपर उपलब्ध हैं।
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Himachal Pradesh : हिमाचल प्रदेश रोपवे में फंसे सभी पर्यटकों को सुरक्षित बचा लिया गया है. NDRF की टीम ने 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पर्यटकों को सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की. मालूम हो कि हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में रोपवे ट्रॉली में अचानक से तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसकी वजह से 11 पयर्टक रोपवे ट्रॉली में फंस गये थे. इस घटना से हड़कंप मच गया था. आनन-फानन में रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए NDRF की टीम को बुलाया गया. लगभग तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सभी 11 पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लिया गया. हिमाचल प्रदेश आपदा प्रबंधन के प्रमुख सचिव ओंकार चंद शर्मा ने सभी पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लेने की जानकारी दी. परवाणू टिम्बर ट्रेल पर बीच हवा में फंसी केबल कार ट्रॉली में कुल 11 लोग सवार थे, जिसमें चार महिलाएं और दो बुजुर्ग भी शामिल थे. परवाणू के डीएसपी प्रणव चौहान ने केबल कार सिस्टम में तकनीकी खराबी को हादसे का कारण बताया. बता दें कि इससे पहले मई में मध्य प्रदेश के शारदा शक्तिपीठ मैहर देवी में रोपवे की सात ट्रॉलियां में 28 श्रद्धालु फंस गये थे. काफी मशक्कत के बाद रेस्क्यू कर श्रद्धालुओं को बचाया गया था. वहीं अप्रैल में देवघर के त्रिकुट पर्वत पर भी रोपवे हादसा हुआ था. 46 घंटे तक चले बचाव अभियान में 46 लोगों को बचाया जा सका. वहीं इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी.
Himachal Pradesh : हिमाचल प्रदेश रोपवे में फंसे सभी पर्यटकों को सुरक्षित बचा लिया गया है. NDRF की टीम ने तीन घंटाटे की कड़ी मशक्कत के बाद पर्यटकों को सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की. मालूम हो कि हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में रोपवे ट्रॉली में अचानक से तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसकी वजह से ग्यारह पयर्टक रोपवे ट्रॉली में फंस गये थे. इस घटना से हड़कंप मच गया था. आनन-फानन में रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए NDRF की टीम को बुलाया गया. लगभग तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सभी ग्यारह पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लिया गया. हिमाचल प्रदेश आपदा प्रबंधन के प्रमुख सचिव ओंकार चंद शर्मा ने सभी पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लेने की जानकारी दी. परवाणू टिम्बर ट्रेल पर बीच हवा में फंसी केबल कार ट्रॉली में कुल ग्यारह लोग सवार थे, जिसमें चार महिलाएं और दो बुजुर्ग भी शामिल थे. परवाणू के डीएसपी प्रणव चौहान ने केबल कार सिस्टम में तकनीकी खराबी को हादसे का कारण बताया. बता दें कि इससे पहले मई में मध्य प्रदेश के शारदा शक्तिपीठ मैहर देवी में रोपवे की सात ट्रॉलियां में अट्ठाईस श्रद्धालु फंस गये थे. काफी मशक्कत के बाद रेस्क्यू कर श्रद्धालुओं को बचाया गया था. वहीं अप्रैल में देवघर के त्रिकुट पर्वत पर भी रोपवे हादसा हुआ था. छियालीस घंटाटे तक चले बचाव अभियान में छियालीस लोगों को बचाया जा सका. वहीं इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी.
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने बुधवार को अगस्ता वेस्टलैंड मामले में गौतम खेतान के वकील को पूर्व प्रभाव के साथ काला धन कानून की उपयुक्तता को लेकर फटकार लगाई है। आयकर विभाग ने वकील गौतम खेतान के खिलाफ चार नए आरोपपत्र दायर किए हैं। खेतान करोड़ों रुपये के वीवीआईपी चॉपर घोटाले का आरोपी है। खेतान के खिलाफ ये नए आरोपपत्र कर चोरी तथा सिंगापुर के सार्वजनिक नहीं किए गए बैंक खाते रखने के लिए दायर किए गए हैं। दिल्ली की एक अदालत ने अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में आरोपी गौतम खैतान को काले धन एवं धनशोधन से संबंधित एक अन्य मामले में मंगलवार को।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने बुधवार को अगस्ता वेस्टलैंड मामले में गौतम खेतान के वकील को पूर्व प्रभाव के साथ काला धन कानून की उपयुक्तता को लेकर फटकार लगाई है। आयकर विभाग ने वकील गौतम खेतान के खिलाफ चार नए आरोपपत्र दायर किए हैं। खेतान करोड़ों रुपये के वीवीआईपी चॉपर घोटाले का आरोपी है। खेतान के खिलाफ ये नए आरोपपत्र कर चोरी तथा सिंगापुर के सार्वजनिक नहीं किए गए बैंक खाते रखने के लिए दायर किए गए हैं। दिल्ली की एक अदालत ने अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में आरोपी गौतम खैतान को काले धन एवं धनशोधन से संबंधित एक अन्य मामले में मंगलवार को।
गोपालगंज जिले के उचकागांव थाना के चिमनी भठ्ठा पर काम करने वाली एक युवती से दुष्कर्म करने के बाद हत्या कर शव को गंडक नहर में फेंक दिया गया। मंगलवार की दोपहर थाना क्षेत्र के मकसूदपुर गंडक नहर पुल के समीप युवती का शव बरामद किया गया। युवती की शव की पहचान नहीं हो सकी है। वहीं शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना के बाद पुलिस ने नहर से शव को निकाला और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। ऐसी आशंका जतायी जा रही है कि युवती की हत्या के पहले दुष्कर्म किया गया है। उसके गले में दुपट्टा लपेटा गया हुआ है जबकि दोनों हाथ को कपड़ा से बांधा गया है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि महिला का दुपट्टा से गला घोंट कर हत्या करने के बाद उसके शव को ठिकाने लगाने के लिए गंडक नहर में फेंक दिया गया है। जो कहीं से बहते हुए मकसूदपुर पुल के पास आकर फंस गया है। पुल के समीप शव मिलने की सूचना के बाद आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। बरामद शव की शिनाख्त नहीं हो सकी है। लेकिन शव को देखने से प्रतीत हो रहा है कि युवती चिमनी भठ्ठा पर काम करने वाली मजदूर है। वह आदिवासी क्षेत्र की बतायी जा रही है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। थानाध्यक्ष अब्दुल मजीद ने बताया कि शव के पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हत्या या दुष्कर्म की पुष्टि हो सकेगी। पुलिस इसकी गहराई से जांच कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
गोपालगंज जिले के उचकागांव थाना के चिमनी भठ्ठा पर काम करने वाली एक युवती से दुष्कर्म करने के बाद हत्या कर शव को गंडक नहर में फेंक दिया गया। मंगलवार की दोपहर थाना क्षेत्र के मकसूदपुर गंडक नहर पुल के समीप युवती का शव बरामद किया गया। युवती की शव की पहचान नहीं हो सकी है। वहीं शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना के बाद पुलिस ने नहर से शव को निकाला और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। ऐसी आशंका जतायी जा रही है कि युवती की हत्या के पहले दुष्कर्म किया गया है। उसके गले में दुपट्टा लपेटा गया हुआ है जबकि दोनों हाथ को कपड़ा से बांधा गया है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि महिला का दुपट्टा से गला घोंट कर हत्या करने के बाद उसके शव को ठिकाने लगाने के लिए गंडक नहर में फेंक दिया गया है। जो कहीं से बहते हुए मकसूदपुर पुल के पास आकर फंस गया है। पुल के समीप शव मिलने की सूचना के बाद आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। बरामद शव की शिनाख्त नहीं हो सकी है। लेकिन शव को देखने से प्रतीत हो रहा है कि युवती चिमनी भठ्ठा पर काम करने वाली मजदूर है। वह आदिवासी क्षेत्र की बतायी जा रही है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। थानाध्यक्ष अब्दुल मजीद ने बताया कि शव के पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हत्या या दुष्कर्म की पुष्टि हो सकेगी। पुलिस इसकी गहराई से जांच कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मशीनों के आँसू ?" मीना के कण्ठ से स्वर न निकला था, केवल उसके होठों की सूखी पपड़ियों का आकार प्रश्न बन गया था । केवल होठ ही नहीं, उसकी फटी-फटी आँखें, केशों की बिखरी हुई लदें, और मशीन के तार सी पतली-पतली काँपती हुई उँगलियाँ बस तड़प-तड़प कर यही पूछ रही थीं, वह कहाँ है...?" मधु का हृदय काँप उठा। कहे क्या ? बात टालने के लिए, लापरवाही दिखाते हुए बोली, "उँह्, चल उठ, पहले नहा धो, फिर कुछ कहना । चल चलअरी उठ । फूल कहीं भागी जाती है। जी खोल कर मिल लेना । ला, चाभी दे तेरे कपड़े निकाल दूँ सूटकेस से कुछ लाई है लन्दन से मेरे लिए, सेन्टवेन्ट या खाली हाथ चली आई। कहाँ है तेरी इटैची, साबुन, कंधा ? लाई है कि नहीं ?" "हाँ, हाँ, लाई तो हूँ, यहीं कहीं है, बाहर होगा, मेरा बैग भी ले आओ तुम्हीं । " मधु अन्दर बाहर सब देख आई, बैग न मिला । "अरे, वह तो टैक्सी में ही रह गया, मीना बोल उठी, नीचे पायदान पर रखा था, फिर लेना भूल गई हाय, क्या करूँ, मेरा दिमाग़ तो...."
मशीनों के आँसू ?" मीना के कण्ठ से स्वर न निकला था, केवल उसके होठों की सूखी पपड़ियों का आकार प्रश्न बन गया था । केवल होठ ही नहीं, उसकी फटी-फटी आँखें, केशों की बिखरी हुई लदें, और मशीन के तार सी पतली-पतली काँपती हुई उँगलियाँ बस तड़प-तड़प कर यही पूछ रही थीं, वह कहाँ है...?" मधु का हृदय काँप उठा। कहे क्या ? बात टालने के लिए, लापरवाही दिखाते हुए बोली, "उँह्, चल उठ, पहले नहा धो, फिर कुछ कहना । चल चलअरी उठ । फूल कहीं भागी जाती है। जी खोल कर मिल लेना । ला, चाभी दे तेरे कपड़े निकाल दूँ सूटकेस से कुछ लाई है लन्दन से मेरे लिए, सेन्टवेन्ट या खाली हाथ चली आई। कहाँ है तेरी इटैची, साबुन, कंधा ? लाई है कि नहीं ?" "हाँ, हाँ, लाई तो हूँ, यहीं कहीं है, बाहर होगा, मेरा बैग भी ले आओ तुम्हीं । " मधु अन्दर बाहर सब देख आई, बैग न मिला । "अरे, वह तो टैक्सी में ही रह गया, मीना बोल उठी, नीचे पायदान पर रखा था, फिर लेना भूल गई हाय, क्या करूँ, मेरा दिमाग़ तो...."
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को राजधानी रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय सहकारी सम्मेलन एवं राष्ट्रीय पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, आज जरूरत इस बात की है कि सहकारी क्षेत्र को किसानों और ग्रामीणों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सक्षम बनाया जाए। इसके लिए हमें सहकारी बैंकों को राष्ट्रीयकृत बैंकों के समान ही मजबूत बनाने की जरूरत है। साथ ही इन बैंकों से उद्यानिकी और कैश क्रॉप के लिए भी ऋण देने की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, देश के सहकारिता आंदोलन का सबसे बड़ा उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का समर्थन मूल्य दिलाना होना चाहिए। ऐसी कोशिश होनी चाहिए कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके। कहा, अभी सहकारी आंदोलन को और अधिक संगठित कर मजबूत बनाने की आवश्यकता है। देश के विभिन्न राज्यों की सहकारी क्षेत्र की नीतियों की अच्छाइयों को स्वीकार कर और सहकारी क्षेत्र की कमियों को दूर कर आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि ऋण, खाद-बीज की उपलब्धता के साथ सहकारी क्षेत्र से और अधिक सरकारी योजनाओं को जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए अनेक उपाय किए गए हैं। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, लघुवनोंपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी, गौठानों में महिला समूह द्वारा तैयार वर्मी कम्पोस्ट के विक्रय जैसी विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों को सहकारी बैंकों से जोड़ा गया है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (Apex Bank) और नेशनल फेडरेशन ऑफ स्टेट कोआपरेटिव बैंक्स की ओर से रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित इस सम्मेलन में देश भर से प्रतिनिधि आए थे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सम्मेलन में देशभर की सहकारिता समितियों को अलग-अलग श्रेणी में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए पुरस्कृत किया। इस अवसर पर उन्होंने अपेक्स बैंक की स्मारिका और जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक रायपुर की ओर से प्रकाशित किसान किताब का विमोचन भी किया। सम्मेलन की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने की। वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा, संसदीय सचिव विकास उपाध्याय, मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा, पूर्व सांसद एवं कृभको के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव, नेशनल फेडरेशन ऑफ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक्स मुंबई के अध्यक्ष कोंडरू रविंदर राव, अध्यक्ष नाफेड एवं दिल्ली स्टेट को ऑपरेटिव बैंक डॉ विजेंद्र सिंह, बिहार स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग यूनियन के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ अपेक्स बैंक के अध्यक्ष बैजनाथ चंद्राकर आदि आयोजन में प्रमुखता से शामिल थे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने वाले अन्नदाता किसानों को अब ऊर्जा दाता बनाने की जरूरत है। एफसीआई में देश की तीन वर्ष की जरूरत का अनाज जमा है। हमारी आवश्यकता से अधिक अनाज का उत्पादन हो रहा है। केन्द्र को अनाज से भी एथेनॉल उत्पादन की अनुमति देनी चाहिए। इसके लिए यह भी जरूरी है कि राज्य सरकार द्वारा किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी गई उपज का उपयोग एथेनॉल प्लांट में किया जाए। तभी किसानों को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा, एथेनॉल प्लांट लगने से रोजगार के अवसर निर्मित होंगे और पेट्रोलियम पदार्थाें पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की बचत होगी। देश आने वाले समय में पेट्रोलियम के मामले में आत्मनिर्भर बन सकेगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, कृषि के क्षेत्र में मशीनीकरण और मवेशी बाजार बंद होने से किसानों और पशुपालकों के लिए आज पशुपालन अनार्थिक हो गया है। मवेशी इनके लिए बोझ बन गए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने दो रुपए किलो में गोबर खरीदी की गोधन न्याय योजना से इसका समाधान पेश किया। इस गोबर से वर्मी कम्पोस्ट, दीये, गमला जैसे उत्पाद महिलाएं तैयार कर रही है। अब गोबर से प्राकृतिक पेंट और बिजली बनाने का काम भी शुरू किया गया है। गोबर बेचने के साथ-साथ उससे तैयार उत्पादों में लोगों को आय का जरिया मिला है। छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना के अंतर्गत अब तक 68 लाख क्विंटल गोबर खरीदा जा चुका है और गोबर विक्रेताओं को 136 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। इसको देखकर झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी इसकी शुरुआत हो रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को राजधानी रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय सहकारी सम्मेलन एवं राष्ट्रीय पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, आज जरूरत इस बात की है कि सहकारी क्षेत्र को किसानों और ग्रामीणों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सक्षम बनाया जाए। इसके लिए हमें सहकारी बैंकों को राष्ट्रीयकृत बैंकों के समान ही मजबूत बनाने की जरूरत है। साथ ही इन बैंकों से उद्यानिकी और कैश क्रॉप के लिए भी ऋण देने की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, देश के सहकारिता आंदोलन का सबसे बड़ा उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का समर्थन मूल्य दिलाना होना चाहिए। ऐसी कोशिश होनी चाहिए कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके। कहा, अभी सहकारी आंदोलन को और अधिक संगठित कर मजबूत बनाने की आवश्यकता है। देश के विभिन्न राज्यों की सहकारी क्षेत्र की नीतियों की अच्छाइयों को स्वीकार कर और सहकारी क्षेत्र की कमियों को दूर कर आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि ऋण, खाद-बीज की उपलब्धता के साथ सहकारी क्षेत्र से और अधिक सरकारी योजनाओं को जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए अनेक उपाय किए गए हैं। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, लघुवनोंपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी, गौठानों में महिला समूह द्वारा तैयार वर्मी कम्पोस्ट के विक्रय जैसी विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों को सहकारी बैंकों से जोड़ा गया है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक और नेशनल फेडरेशन ऑफ स्टेट कोआपरेटिव बैंक्स की ओर से रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित इस सम्मेलन में देश भर से प्रतिनिधि आए थे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सम्मेलन में देशभर की सहकारिता समितियों को अलग-अलग श्रेणी में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए पुरस्कृत किया। इस अवसर पर उन्होंने अपेक्स बैंक की स्मारिका और जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक रायपुर की ओर से प्रकाशित किसान किताब का विमोचन भी किया। सम्मेलन की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने की। वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा, संसदीय सचिव विकास उपाध्याय, मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा, पूर्व सांसद एवं कृभको के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव, नेशनल फेडरेशन ऑफ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक्स मुंबई के अध्यक्ष कोंडरू रविंदर राव, अध्यक्ष नाफेड एवं दिल्ली स्टेट को ऑपरेटिव बैंक डॉ विजेंद्र सिंह, बिहार स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग यूनियन के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ अपेक्स बैंक के अध्यक्ष बैजनाथ चंद्राकर आदि आयोजन में प्रमुखता से शामिल थे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने वाले अन्नदाता किसानों को अब ऊर्जा दाता बनाने की जरूरत है। एफसीआई में देश की तीन वर्ष की जरूरत का अनाज जमा है। हमारी आवश्यकता से अधिक अनाज का उत्पादन हो रहा है। केन्द्र को अनाज से भी एथेनॉल उत्पादन की अनुमति देनी चाहिए। इसके लिए यह भी जरूरी है कि राज्य सरकार द्वारा किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी गई उपज का उपयोग एथेनॉल प्लांट में किया जाए। तभी किसानों को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा, एथेनॉल प्लांट लगने से रोजगार के अवसर निर्मित होंगे और पेट्रोलियम पदार्थाें पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की बचत होगी। देश आने वाले समय में पेट्रोलियम के मामले में आत्मनिर्भर बन सकेगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, कृषि के क्षेत्र में मशीनीकरण और मवेशी बाजार बंद होने से किसानों और पशुपालकों के लिए आज पशुपालन अनार्थिक हो गया है। मवेशी इनके लिए बोझ बन गए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने दो रुपए किलो में गोबर खरीदी की गोधन न्याय योजना से इसका समाधान पेश किया। इस गोबर से वर्मी कम्पोस्ट, दीये, गमला जैसे उत्पाद महिलाएं तैयार कर रही है। अब गोबर से प्राकृतिक पेंट और बिजली बनाने का काम भी शुरू किया गया है। गोबर बेचने के साथ-साथ उससे तैयार उत्पादों में लोगों को आय का जरिया मिला है। छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना के अंतर्गत अब तक अड़सठ लाख क्विंटल गोबर खरीदा जा चुका है और गोबर विक्रेताओं को एक सौ छत्तीस करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। इसको देखकर झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी इसकी शुरुआत हो रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
इसे भी पढ़ेंः नूपुर शर्मा विवाद पर नीतीश कुमार ने पहली बार तोड़ी चुप्पी, कहा- जब भाजपा ने एक्शन ले लिया तो हंगामा क्यों? केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2019 में अपने एक फैसले में उल्लेख किया था कि एजीएल के ऊपर राहुल और सोनिया गांधी का मालिकाना हक गैरकानूनी तौर पर संपत्ति पर अधिकार जमाने का एक प्रयास है। गांधी परिवार पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा के पति रॉबर्ट वाद्रा ही परिवार के एकमात्र सदस्य नहीं है, जिनकी जमीन संबंधी कारोबार में दिलचसपी है। ईरानी ने कहा कि कांग्रेस के सदस्यों को राहुल गांधी से पूछना चाहिए कि उनके परिवार का डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड के साथ क्या संबंध है, जो हवाला कारोबार करती है और जिसके बारे में वित्तीय खुफिया इकाई ने भी चिंता जताई है। ईडी धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं के तहत राहुल गांधी का बयान दर्ज करेगी। अधिकारियों के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और गांधी परिवार से पूछताछ ईडी की जांच का हिस्सा है ताकि 'यंग इंडियन' और एजेएल के हिस्सेदारी पैटर्न, वित्तीय लेनदेन और प्रवर्तकों की भूमिका को समझा जा सके। 'यंग इंडियन' के प्रवर्तकों और शेयरधारकों में सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी सहित कांग्रेस के कुछ अन्य सदस्य शामिल हैं। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ईडी को भाजपा का 'इलेक्शन मैनेजमेंट डिमार्टमेंट' करार दिया और आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने कांग्रेस के 'सत्याग्रह' को रोकने के लिए नयी दिल्ली के इलाके में अघोषित आपातकाल लगा दिया है।
इसे भी पढ़ेंः नूपुर शर्मा विवाद पर नीतीश कुमार ने पहली बार तोड़ी चुप्पी, कहा- जब भाजपा ने एक्शन ले लिया तो हंगामा क्यों? केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो हज़ार उन्नीस में अपने एक फैसले में उल्लेख किया था कि एजीएल के ऊपर राहुल और सोनिया गांधी का मालिकाना हक गैरकानूनी तौर पर संपत्ति पर अधिकार जमाने का एक प्रयास है। गांधी परिवार पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा के पति रॉबर्ट वाद्रा ही परिवार के एकमात्र सदस्य नहीं है, जिनकी जमीन संबंधी कारोबार में दिलचसपी है। ईरानी ने कहा कि कांग्रेस के सदस्यों को राहुल गांधी से पूछना चाहिए कि उनके परिवार का डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड के साथ क्या संबंध है, जो हवाला कारोबार करती है और जिसके बारे में वित्तीय खुफिया इकाई ने भी चिंता जताई है। ईडी धन शोधन रोकथाम अधिनियम की आपराधिक धाराओं के तहत राहुल गांधी का बयान दर्ज करेगी। अधिकारियों के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और गांधी परिवार से पूछताछ ईडी की जांच का हिस्सा है ताकि 'यंग इंडियन' और एजेएल के हिस्सेदारी पैटर्न, वित्तीय लेनदेन और प्रवर्तकों की भूमिका को समझा जा सके। 'यंग इंडियन' के प्रवर्तकों और शेयरधारकों में सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी सहित कांग्रेस के कुछ अन्य सदस्य शामिल हैं। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ईडी को भाजपा का 'इलेक्शन मैनेजमेंट डिमार्टमेंट' करार दिया और आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने कांग्रेस के 'सत्याग्रह' को रोकने के लिए नयी दिल्ली के इलाके में अघोषित आपातकाल लगा दिया है।
- फ़िल्टर करें : प्रश्न : उत्तर : हल करने का दृष्टिकोणः 'ओपन स्काई संधि' (OST) सदस्य देशों को एक-दूसरे देश की सीमा में सैन्य गतिविधियों संबंधित मतभेद को दूर करने के लिये निगरानी उड़ानों की अनुमति देती है। यह संधि सदस्य देशों को एक-दूसरे की सीमा में गैर-हथियारबंद विमानों के माध्यम सैन्य ठिकानों की निगरानी की सुविधा प्रदान करती है। साथ ही यह संधि सदस्य देशों के बीच पारदर्शिता, परस्पर विश्वास और पूर्वानुमान की स्थिति बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण रही है। अमेरिका द्वारा स्वयं को संधि से अलग करने के कारणः - अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस संधि से अमेरिका को अलग करने की चेतावनी दी थी।उल्लेखनीय है कि इस संधि से अलग होने के लिये संबंधित देश द्वारा संधि में शामिल अन्य सभी देशों को 6 माह पूर्व इसके बारे में सूचित करना अनिवार्य है। - अमेरिका के अनुसार, हाल के वर्षों में रूस द्वारा कई मौकों पर इस संधि का उल्लंघन किया गया है। - पिछले कुछ वर्षों में रूस द्वारा अमेरिका और कुछ अन्य देशों को का कालिलिनग्राद और जॉर्जिया के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे- अब्खाज़िया में निगरानी में विमानों की उड़ानों की अनुमति नही दी गयी। - अमेरिकी के अनुसार, यदि दूसरा पक्ष (अमेरिका के अलावा) संधि में हुए समझौतों को पूरी तरह नहीं लागू करता है, तो यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैश्विक शांति के लिये बनी संपूर्ण बहु-पक्षीय संरचना (संयुक्त राष्ट्र) के अस्तित्त्व को निरर्थक बनाता है। - INF संधि से अलग होने के बाद अमेरिका द्वारा चीन को शामिल करते हुए एक नई संधि स्थापित करने की बात कही गई थी परंतु चीन ने ऐसी किसी संधि में शामिल होने पर असहमति जताई है। - साथ ही चीन ने OST में भी न शामिल होने के संकेत दिए हैं। - अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा इस संधि से अलग होने के निर्णय से अमेरिका की स्थानीय राजनीति में भी ध्रुवीकरण में वृद्धि देखने को मिल सकती है। - बड़े पैमाने पर देखा जाए तो अमेरिका और रूस के अतिरिक्त इस संधि में अन्य सदस्य देशों का प्रभाव बहुत ही सीमित रहा है, ऐसे में दोनों में से एक भी देश के इस संधि के अलग होने से इसका महत्त्व समाप्त हो जाएगा। - अमेरिका के इस संधि से अलग होने के बाद यह संधि भी ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप की तरह ही जारी रह सकती है परंतु उस स्थिति में यूरोपीय देशों लिये अमेरिका के साथ रणनीतिक जानकारी साझा करना उतना आसान नहीं होगा। इस संधि को अधिक कारगर बनाने हेतु अमेरिका और रूस के साथ संधि के अन्य देशों को भी इस संधि में शामिल करने का प्रयास किया जाना चाहिये, जिससे हाल के वर्षों में चीन की बढ़ी सैन्य शक्ति के बाद वैश्विक संतुलन को बनाया रखा जा सके।
- फ़िल्टर करें : प्रश्न : उत्तर : हल करने का दृष्टिकोणः 'ओपन स्काई संधि' सदस्य देशों को एक-दूसरे देश की सीमा में सैन्य गतिविधियों संबंधित मतभेद को दूर करने के लिये निगरानी उड़ानों की अनुमति देती है। यह संधि सदस्य देशों को एक-दूसरे की सीमा में गैर-हथियारबंद विमानों के माध्यम सैन्य ठिकानों की निगरानी की सुविधा प्रदान करती है। साथ ही यह संधि सदस्य देशों के बीच पारदर्शिता, परस्पर विश्वास और पूर्वानुमान की स्थिति बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण रही है। अमेरिका द्वारा स्वयं को संधि से अलग करने के कारणः - अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस संधि से अमेरिका को अलग करने की चेतावनी दी थी।उल्लेखनीय है कि इस संधि से अलग होने के लिये संबंधित देश द्वारा संधि में शामिल अन्य सभी देशों को छः माह पूर्व इसके बारे में सूचित करना अनिवार्य है। - अमेरिका के अनुसार, हाल के वर्षों में रूस द्वारा कई मौकों पर इस संधि का उल्लंघन किया गया है। - पिछले कुछ वर्षों में रूस द्वारा अमेरिका और कुछ अन्य देशों को का कालिलिनग्राद और जॉर्जिया के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे- अब्खाज़िया में निगरानी में विमानों की उड़ानों की अनुमति नही दी गयी। - अमेरिकी के अनुसार, यदि दूसरा पक्ष संधि में हुए समझौतों को पूरी तरह नहीं लागू करता है, तो यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैश्विक शांति के लिये बनी संपूर्ण बहु-पक्षीय संरचना के अस्तित्त्व को निरर्थक बनाता है। - INF संधि से अलग होने के बाद अमेरिका द्वारा चीन को शामिल करते हुए एक नई संधि स्थापित करने की बात कही गई थी परंतु चीन ने ऐसी किसी संधि में शामिल होने पर असहमति जताई है। - साथ ही चीन ने OST में भी न शामिल होने के संकेत दिए हैं। - अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा इस संधि से अलग होने के निर्णय से अमेरिका की स्थानीय राजनीति में भी ध्रुवीकरण में वृद्धि देखने को मिल सकती है। - बड़े पैमाने पर देखा जाए तो अमेरिका और रूस के अतिरिक्त इस संधि में अन्य सदस्य देशों का प्रभाव बहुत ही सीमित रहा है, ऐसे में दोनों में से एक भी देश के इस संधि के अलग होने से इसका महत्त्व समाप्त हो जाएगा। - अमेरिका के इस संधि से अलग होने के बाद यह संधि भी ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप की तरह ही जारी रह सकती है परंतु उस स्थिति में यूरोपीय देशों लिये अमेरिका के साथ रणनीतिक जानकारी साझा करना उतना आसान नहीं होगा। इस संधि को अधिक कारगर बनाने हेतु अमेरिका और रूस के साथ संधि के अन्य देशों को भी इस संधि में शामिल करने का प्रयास किया जाना चाहिये, जिससे हाल के वर्षों में चीन की बढ़ी सैन्य शक्ति के बाद वैश्विक संतुलन को बनाया रखा जा सके।
बरेली : शहर के वार्ड 55 सैदपुर हा¨कस की मेगा ड्रीम होम्स कालोनी के मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण किए जाने की शिकायत पर बुधवार को निगम की टीम वहां पहुंची। अतिक्रमण हटाने पर जमकर हंगामा हो गया। निगम की टीम के साथ खूब नोकझोंक हुई। पुलिस के पहुंचने पर अतिक्रमण हटाया गया। मेगा ड्रीम होम्स के सचिव र¨वद्र कुमार कादियान ने बीते दिनों कालोनी के मेन रोड पर अतिक्रमण किए जाने की शिकायत मेयर डा। उमेश गौतम से की थी। उन्होंने बताया था कि मार्ग के किनारे पर लोगों ने ऊंचे रैंप, चबूतरे बना लिए हैं। कई लोगों ने टीन शेड डाल लिए हैं। इतना ही नहीं कुछ लोगों ने घरों के आगे ठेले वालों को भी खड़ा कर लिया है। मेयर ने नगर आयुक्त को अतिक्रमण हटवाने को पत्र भेजा। नगर आयुक्त अभिषेक आनंद के निर्देश पर वेडनेसडे को नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने वहां चबूतरे, शेड और रैंप तोड़ने शुरू किए तो लोगों ने विरोध कर दिया। जमकर हंगामा होने के साथ ही लोगों ने टीम के साथ काफी नोकझोंक की। इसके बाद टीम ने पुलिस को भी बुला लिया। पुलिस और प्रवर्तन दल ने लोगों को पीछे हटाकर अतिक्रमण पर बुलडोजर चलवाया। कुछ देर में ही अतिक्रमण ध्वस्त कर दिया गया।
बरेली : शहर के वार्ड पचपन सैदपुर हा¨कस की मेगा ड्रीम होम्स कालोनी के मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण किए जाने की शिकायत पर बुधवार को निगम की टीम वहां पहुंची। अतिक्रमण हटाने पर जमकर हंगामा हो गया। निगम की टीम के साथ खूब नोकझोंक हुई। पुलिस के पहुंचने पर अतिक्रमण हटाया गया। मेगा ड्रीम होम्स के सचिव र¨वद्र कुमार कादियान ने बीते दिनों कालोनी के मेन रोड पर अतिक्रमण किए जाने की शिकायत मेयर डा। उमेश गौतम से की थी। उन्होंने बताया था कि मार्ग के किनारे पर लोगों ने ऊंचे रैंप, चबूतरे बना लिए हैं। कई लोगों ने टीन शेड डाल लिए हैं। इतना ही नहीं कुछ लोगों ने घरों के आगे ठेले वालों को भी खड़ा कर लिया है। मेयर ने नगर आयुक्त को अतिक्रमण हटवाने को पत्र भेजा। नगर आयुक्त अभिषेक आनंद के निर्देश पर वेडनेसडे को नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने वहां चबूतरे, शेड और रैंप तोड़ने शुरू किए तो लोगों ने विरोध कर दिया। जमकर हंगामा होने के साथ ही लोगों ने टीम के साथ काफी नोकझोंक की। इसके बाद टीम ने पुलिस को भी बुला लिया। पुलिस और प्रवर्तन दल ने लोगों को पीछे हटाकर अतिक्रमण पर बुलडोजर चलवाया। कुछ देर में ही अतिक्रमण ध्वस्त कर दिया गया।
नई दिल्ली, 17 नवंबर (आईएएनएस)। आधुनिक शौचालय समाधान बनाने वाले प्रमुख कंपनी सैटो ने कहा है कि उसका यह उत्पाद इस महीने के अंत में राजस्थान एवं महाराष्ट्र में उपलब्ध होगा। वर्तमान में सैटो के शौचालय उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में उपलब्ध हैं। विश्व शौचालय दिवस (19 नवंबर) की तैयारियों के सिलसिले में सैटो के ग्लोबल मार्केटिंग प्रमुख विशाल अनेजा ने कहा, 2014 में स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत के साथ ही भारत में एक क्रांतिकारी मिशन शुरू हुआ है। विश्व के किसी भी अन्य देश ने स्वच्छता एवं शौचालयों की इस पैमाने पर जरूरत के लिए ऐसा निर्णायक कदम नहीं उठाया है। हमारा मानना है कि हमारी आधुनिक प्रणाली खुले में शौच की प्रथा से भारत की लड़ाई का एक अहम हिस्सा बनेगी। सैटो ने अपनी तरह के प्रथम आधुनिक शौचालय एवं स्वच्छता समाधान पेश किए हैं। इन्हें खास तौर पर ग्रामीण एवं शहरी सीमा से बाहर के क्षेत्रों के लिए बनाया गया है, जहां सुरक्षित स्वच्छता सुविधाओं की उपलब्धता मुश्किल होती है। अभी उपलब्ध शौचालयों और स्वच्छता समाधान में खुद से बंद होने वाले ट्रैप डोर हैं, जो शौच के बाद खुद-ब-खुद खुले-पिट वाले शौचालयों को पूरी तरह सील कर देते हैं। इस तरह यहां से बदबू कम निकलती है और बिमारियों वाले कीटाणूओं को रोकने में मदद मिलती है, जिससे यह शौचालय सुरक्षित और इस्तेमाल में अधिक सुविधाजनक बनते हैं। सैटो का विश्वास है कि आधुनिक प्रणालियां 2019 तक भारत को खुले में शौच मुक्त बनाने के लक्ष्य में प्रमुख भूमिका निभाएगी। सैटो के आधुनिक शौचालय समाधान कुछ इस तरह तैयार किये गये हैं कि इनसे प्रति फ्लश लगभग 80 फीसदी पानी की बचत होगी। इसी के साथ, सैटो के वी-ट्रैप सिस्टम्स, ट्विन-पिट पोर फ्लस शौचालयों को स्वच्छ भारत मिशन के तहत उपयुक्त शौचालय बनाते हैं। इनकी स्थापना करना आसान है, इनके निर्माण में एक दिन कम समय लगता है और खर्च में भी कमी आती है। यह शौचालय कभी जाम नहीं होते।
नई दिल्ली, सत्रह नवंबर । आधुनिक शौचालय समाधान बनाने वाले प्रमुख कंपनी सैटो ने कहा है कि उसका यह उत्पाद इस महीने के अंत में राजस्थान एवं महाराष्ट्र में उपलब्ध होगा। वर्तमान में सैटो के शौचालय उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में उपलब्ध हैं। विश्व शौचालय दिवस की तैयारियों के सिलसिले में सैटो के ग्लोबल मार्केटिंग प्रमुख विशाल अनेजा ने कहा, दो हज़ार चौदह में स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत के साथ ही भारत में एक क्रांतिकारी मिशन शुरू हुआ है। विश्व के किसी भी अन्य देश ने स्वच्छता एवं शौचालयों की इस पैमाने पर जरूरत के लिए ऐसा निर्णायक कदम नहीं उठाया है। हमारा मानना है कि हमारी आधुनिक प्रणाली खुले में शौच की प्रथा से भारत की लड़ाई का एक अहम हिस्सा बनेगी। सैटो ने अपनी तरह के प्रथम आधुनिक शौचालय एवं स्वच्छता समाधान पेश किए हैं। इन्हें खास तौर पर ग्रामीण एवं शहरी सीमा से बाहर के क्षेत्रों के लिए बनाया गया है, जहां सुरक्षित स्वच्छता सुविधाओं की उपलब्धता मुश्किल होती है। अभी उपलब्ध शौचालयों और स्वच्छता समाधान में खुद से बंद होने वाले ट्रैप डोर हैं, जो शौच के बाद खुद-ब-खुद खुले-पिट वाले शौचालयों को पूरी तरह सील कर देते हैं। इस तरह यहां से बदबू कम निकलती है और बिमारियों वाले कीटाणूओं को रोकने में मदद मिलती है, जिससे यह शौचालय सुरक्षित और इस्तेमाल में अधिक सुविधाजनक बनते हैं। सैटो का विश्वास है कि आधुनिक प्रणालियां दो हज़ार उन्नीस तक भारत को खुले में शौच मुक्त बनाने के लक्ष्य में प्रमुख भूमिका निभाएगी। सैटो के आधुनिक शौचालय समाधान कुछ इस तरह तैयार किये गये हैं कि इनसे प्रति फ्लश लगभग अस्सी फीसदी पानी की बचत होगी। इसी के साथ, सैटो के वी-ट्रैप सिस्टम्स, ट्विन-पिट पोर फ्लस शौचालयों को स्वच्छ भारत मिशन के तहत उपयुक्त शौचालय बनाते हैं। इनकी स्थापना करना आसान है, इनके निर्माण में एक दिन कम समय लगता है और खर्च में भी कमी आती है। यह शौचालय कभी जाम नहीं होते।
Publish Date: Fri, 27 Jan 2017 14:28:05 (IST) दक्षिणी दिल्ली में प्रह्लादपुर इलाके मे एक मां ने अपने तीन साल के बच्चे को पहली मजिल की सीढ़ी से नीचे फेंक दिया। पुलिस के अनुसार, घटना 21 जनवरी की शाम की है। आरोपी महिला की सास के अनुसार बहू सोनू गुप्ता का कुछ समय से पति के साथ मनमुटाव चल रहा है। 21 जनवरी को सोनू की पति से किसी बात पर कहासुनी हुई थी, उस दौरान सोनू ने गुस्से मे आकर तीन साल के पोते अंशुल को पहली मंजिल की सीढ़ी से नीचे फेंक दिया। यह शॉकिंग घटना सीसीटीवी कैमरे मे कैद हो गई है। पुलिस आरोपी महिला के खिलाफ शिकायत दर्ज कर इस फुटेज की जांच कर रही है। .
Publish Date: Fri, सत्ताईस जनवरी दो हज़ार सत्रह चौदह:अट्ठाईस:पाँच दक्षिणी दिल्ली में प्रह्लादपुर इलाके मे एक मां ने अपने तीन साल के बच्चे को पहली मजिल की सीढ़ी से नीचे फेंक दिया। पुलिस के अनुसार, घटना इक्कीस जनवरी की शाम की है। आरोपी महिला की सास के अनुसार बहू सोनू गुप्ता का कुछ समय से पति के साथ मनमुटाव चल रहा है। इक्कीस जनवरी को सोनू की पति से किसी बात पर कहासुनी हुई थी, उस दौरान सोनू ने गुस्से मे आकर तीन साल के पोते अंशुल को पहली मंजिल की सीढ़ी से नीचे फेंक दिया। यह शॉकिंग घटना सीसीटीवी कैमरे मे कैद हो गई है। पुलिस आरोपी महिला के खिलाफ शिकायत दर्ज कर इस फुटेज की जांच कर रही है। .
बैराड़। जिले के पोहरी अनुविभाग की बैराड तहसील में आज शिवपुरी समाचार डॉट कॉम की खबर का बड़ा असर हुआ है। बैराड़ तहसील प्रभारी तहसीलदार के सहारे लगभग 6 माह से चल रही थी। अब बैराड़ तहसील को तहसीलदार मिल गए है। जिससे बैराड़ तहसील में तहसीलदार की अनुपस्थिति से झूझ रही पब्लिक को राहत मिलेगी। जानकारी के अनुसार बीते कुछ दिनों पूर्व शिवपुरी समाचार डॉट कॉम द्वारा उक्त मामले को बैराड़ तहसील प्रभारी अधिकारी के भरोसे,दो माह में सिर्फ 5 दिन ऑफिस आए तहसीलदार नामक शीर्षक से उक्त मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस खबर के प्रकाशन के बाद कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल धीरज परिहार को बैराड़ तहसीलदार के पद पर नियुक्ति कर दिया।
बैराड़। जिले के पोहरी अनुविभाग की बैराड तहसील में आज शिवपुरी समाचार डॉट कॉम की खबर का बड़ा असर हुआ है। बैराड़ तहसील प्रभारी तहसीलदार के सहारे लगभग छः माह से चल रही थी। अब बैराड़ तहसील को तहसीलदार मिल गए है। जिससे बैराड़ तहसील में तहसीलदार की अनुपस्थिति से झूझ रही पब्लिक को राहत मिलेगी। जानकारी के अनुसार बीते कुछ दिनों पूर्व शिवपुरी समाचार डॉट कॉम द्वारा उक्त मामले को बैराड़ तहसील प्रभारी अधिकारी के भरोसे,दो माह में सिर्फ पाँच दिन ऑफिस आए तहसीलदार नामक शीर्षक से उक्त मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस खबर के प्रकाशन के बाद कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल धीरज परिहार को बैराड़ तहसीलदार के पद पर नियुक्ति कर दिया।
एक सुख भरा जीवन जीने का सपना हर कोई देखता है। कुछ ऐसी भी फेमैली होती हैं जो वक्त से पहले अपने बच्चों की शादी कर देते हैं वैसे तो हर लड़की अपनी शादी को लेकर कई सपने देखती हैं लेकिन कुछ सपने पूरे नहीं हो पाते। हाल ही में 28 साल की कुंवारी लड़कियों के लिए एक ऐसी रिसर्ज सामने आई जो उनके लिए काफी खतरनाक साबित हो सकती हैं। 28 साल से ज्यादा उम्र की कुंवारी लड़कियों मे डिमेशिया नाम की एक तेजी से बदल रहीं हैं। न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी और साइकाइट्री जर्नल में उपलब्ध पढ़ाई के मुताबिक कुंवारी लड़कियों में डिमेशिया नाम की बिमारी 42 % तक बढ़ चुकी हैं। इसके साथ ही जिन लड़कियों के पति की मृत्यु जल्दी हो जाती हैं और लम्बें समय तक अकेली रहती हैं उन महिलाओं में भी इस बिमारी को 20% तक अधिक मात्रा में होता हैं। यदि लड़की की लम्बे समय तक शादी न हो तो उन्हें होने लगता है ये सब कुछ Reviewed by News pari on June 21, 2020 Rating:
एक सुख भरा जीवन जीने का सपना हर कोई देखता है। कुछ ऐसी भी फेमैली होती हैं जो वक्त से पहले अपने बच्चों की शादी कर देते हैं वैसे तो हर लड़की अपनी शादी को लेकर कई सपने देखती हैं लेकिन कुछ सपने पूरे नहीं हो पाते। हाल ही में अट्ठाईस साल की कुंवारी लड़कियों के लिए एक ऐसी रिसर्ज सामने आई जो उनके लिए काफी खतरनाक साबित हो सकती हैं। अट्ठाईस साल से ज्यादा उम्र की कुंवारी लड़कियों मे डिमेशिया नाम की एक तेजी से बदल रहीं हैं। न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी और साइकाइट्री जर्नल में उपलब्ध पढ़ाई के मुताबिक कुंवारी लड़कियों में डिमेशिया नाम की बिमारी बयालीस % तक बढ़ चुकी हैं। इसके साथ ही जिन लड़कियों के पति की मृत्यु जल्दी हो जाती हैं और लम्बें समय तक अकेली रहती हैं उन महिलाओं में भी इस बिमारी को बीस% तक अधिक मात्रा में होता हैं। यदि लड़की की लम्बे समय तक शादी न हो तो उन्हें होने लगता है ये सब कुछ Reviewed by News pari on June इक्कीस, दो हज़ार बीस Rating:
रामायण-महाभारत के बाद दूरदर्शन पर एक और सुपरहिट पुराना धारावाहिक दर्शकों के लिए शुरू हो रहा है। दूरदर्शन पर अब 'श्री कृष्णा' सीरियल की वापसी होने जा रही है। 'रामायण' व 'श्री कृष्णा' का निर्देशन भी रामानंद सागर ने ही किया था, प्रसार भारती ने थोड़ी देर पहले इस बारे में जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की है। श्री कृष्णा का प्रसारण डीडी नेशनल पर किया जाएगा, इसकी जानकारी खुद डीडी नेशनल ने ट्विटर अकाउंट पर दी है। दूरदर्शन ने एक ट्वीट कर अपने दर्शकों को जानकारी दी कि खुशखबरी... हमारे दर्शकों के लिए ! ! जल्द आ रहा 'श्री कृष्णा', रामायण और महाभारत के दोबारा प्रसारण के बाद लगातार ये मांग उठ रही थी कि रामानंद सागर द्वारा बनाई गई टीवी सीरियल 'श्री कृष्णा' को दोबारा से शुरू किया जाए। लॉकडाउन के दौरान शुरू हुए दोनों कार्यक्रमों ने दूरदर्शन के टीआरपी रैकिंग में टॉप पर बैठा दिया है। अब लोगों की भारी मांग के बाद अब चैनल जल्द ही 'श्री कृष्णा' शुरू करने वाला है। बता दें कि रामानंद आर्ट्स के प्रोडक्शन में बना ये सीरियल सबसे पहले 1993 में दूरदर्शन के मेट्रो चैनल पर प्रसारित हुआ था और बाद में 1996 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ था।
रामायण-महाभारत के बाद दूरदर्शन पर एक और सुपरहिट पुराना धारावाहिक दर्शकों के लिए शुरू हो रहा है। दूरदर्शन पर अब 'श्री कृष्णा' सीरियल की वापसी होने जा रही है। 'रामायण' व 'श्री कृष्णा' का निर्देशन भी रामानंद सागर ने ही किया था, प्रसार भारती ने थोड़ी देर पहले इस बारे में जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की है। श्री कृष्णा का प्रसारण डीडी नेशनल पर किया जाएगा, इसकी जानकारी खुद डीडी नेशनल ने ट्विटर अकाउंट पर दी है। दूरदर्शन ने एक ट्वीट कर अपने दर्शकों को जानकारी दी कि खुशखबरी... हमारे दर्शकों के लिए ! ! जल्द आ रहा 'श्री कृष्णा', रामायण और महाभारत के दोबारा प्रसारण के बाद लगातार ये मांग उठ रही थी कि रामानंद सागर द्वारा बनाई गई टीवी सीरियल 'श्री कृष्णा' को दोबारा से शुरू किया जाए। लॉकडाउन के दौरान शुरू हुए दोनों कार्यक्रमों ने दूरदर्शन के टीआरपी रैकिंग में टॉप पर बैठा दिया है। अब लोगों की भारी मांग के बाद अब चैनल जल्द ही 'श्री कृष्णा' शुरू करने वाला है। बता दें कि रामानंद आर्ट्स के प्रोडक्शन में बना ये सीरियल सबसे पहले एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में दूरदर्शन के मेट्रो चैनल पर प्रसारित हुआ था और बाद में एक हज़ार नौ सौ छियानवे में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ था।
आज भी केशव निर्मला की सही पहचान नहीं कर सका है। वह बोलती है, हॅसती है और बात बात में मीठी चुटकी ले लेती है। फिर नव निर्मित वातावरण में चुपचाप छुप कर रह जाती है। केशव उस कुहरे को नहीं छेद पाता है । वह तो उसके मनके भीतर पैठ, उसके मन का ताला तोड़ कर पूछ लेना चाहता है - क्यों निमू रानी, आज तुम्हारी वे सब शरारतें कहीं काफूर हो गई हैं। वह खुश मिजाजी और उस मस्ती की दुनिया को छोड़ हो ? आज तो तुम में पिछली सी सजावट नहीं पाता हूँ । न साधारण शोखी ही बची है । न तुम तकरार करती हो । तुम्हारा खिला चेहरा फीकासा दीख रहा है। जब कि गृहस्थी का नाग इसी भाँति लड़कियों को डस लेता है, तब तुम लोग कोई सही उपाय क्यों नहीं कर लेती हो कि अलसा न सको । यदि किसी भावुकता के कारण मन मुरझा जाता है, तो उसका उपचार न करना भूल होगी। यह विज्ञान का युग है, जहाँ कि उस जंक को मिटा डालना ही हितकर होगा । और आज के इनसान की विचारधारा इतिहास की कई पगडंडियाँ लाँघ चुकी है । अब वह आदिम साम्यवाद, दासप्रथा, सामन्तवाद तथा पूँजीवाद की भारी-भारी मंजिलें तय कर चुका है। आज भावुकता की कसौटी पर निर्माण की भावना को परखना अनुचित होगा। तुम को कौन-सी उलक्रन है ? जीवन में कोई अड़चन हो, तो उसका निपटारा हो ही जाना चाहिए । अपने व्यक्तित्व के प्रति सन्देह करके उसे मिटा डालने की चेष्टा करना शुभ नहीं है । न नष्ट हो जाने की भावना जीवन का सही प्रतीक है। मौत भी सबल छुटकारा नहीं है। तभी निर्मला बेची को गोद में लिए आई और कुर्सी पर बैठ कर दूध पिलाने लगी । सरलता से बोली, "ज पाँचवी बोतल टूट गई। बाजार में ठीक से बोतलें नहीं मिल रही हैं और रबर तो बिलकुल सड़े-गले हैं ।" केशव देख रहा था कि माँ में कोई खास उत्साह नहीं हैं। बच्चों को पह
आज भी केशव निर्मला की सही पहचान नहीं कर सका है। वह बोलती है, हॅसती है और बात बात में मीठी चुटकी ले लेती है। फिर नव निर्मित वातावरण में चुपचाप छुप कर रह जाती है। केशव उस कुहरे को नहीं छेद पाता है । वह तो उसके मनके भीतर पैठ, उसके मन का ताला तोड़ कर पूछ लेना चाहता है - क्यों निमू रानी, आज तुम्हारी वे सब शरारतें कहीं काफूर हो गई हैं। वह खुश मिजाजी और उस मस्ती की दुनिया को छोड़ हो ? आज तो तुम में पिछली सी सजावट नहीं पाता हूँ । न साधारण शोखी ही बची है । न तुम तकरार करती हो । तुम्हारा खिला चेहरा फीकासा दीख रहा है। जब कि गृहस्थी का नाग इसी भाँति लड़कियों को डस लेता है, तब तुम लोग कोई सही उपाय क्यों नहीं कर लेती हो कि अलसा न सको । यदि किसी भावुकता के कारण मन मुरझा जाता है, तो उसका उपचार न करना भूल होगी। यह विज्ञान का युग है, जहाँ कि उस जंक को मिटा डालना ही हितकर होगा । और आज के इनसान की विचारधारा इतिहास की कई पगडंडियाँ लाँघ चुकी है । अब वह आदिम साम्यवाद, दासप्रथा, सामन्तवाद तथा पूँजीवाद की भारी-भारी मंजिलें तय कर चुका है। आज भावुकता की कसौटी पर निर्माण की भावना को परखना अनुचित होगा। तुम को कौन-सी उलक्रन है ? जीवन में कोई अड़चन हो, तो उसका निपटारा हो ही जाना चाहिए । अपने व्यक्तित्व के प्रति सन्देह करके उसे मिटा डालने की चेष्टा करना शुभ नहीं है । न नष्ट हो जाने की भावना जीवन का सही प्रतीक है। मौत भी सबल छुटकारा नहीं है। तभी निर्मला बेची को गोद में लिए आई और कुर्सी पर बैठ कर दूध पिलाने लगी । सरलता से बोली, "ज पाँचवी बोतल टूट गई। बाजार में ठीक से बोतलें नहीं मिल रही हैं और रबर तो बिलकुल सड़े-गले हैं ।" केशव देख रहा था कि माँ में कोई खास उत्साह नहीं हैं। बच्चों को पह
अहमदाबादः गुजरात के शीर्ष कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव गांधी ने 7 जून को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। 41 साल की छोटी उम्र में उन्हें दिल का दौरा पड़ा और सोते समय उनका निधन हो गया। प्रसिद्ध गुजराती हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव गांधी जामनगर के रहने वाले हैं। अपने पूरे करियर के दौरान, उन्होंने 16,000 से अधिक दिल के ऑपरेशन किए और वे अपने काम के लिए भी बहुत प्रसिद्ध थे। साथ ही वह दिल की बीमारियों के लिए जागरुकता अभियान भी चलाते थे। इसके अतिरिक्त, वह "हाल्ट हार्ट अटैक" नामक एक फेसबुक अभियान भी चलाते थे। डॉ. गांधी एक स्वस्थ कार्य-जीवन संतुलन बनाए रखने और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए अपने समर्पण के लिए जाने जाते थे। सोचने वाली बात यह है कि जो खुद हार्ट सर्जरी के लिए मशहूर थे, उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। इस बात ने सभी को आश्चर्य में डाल दिया है। यह दुखद घटना इस बात की याद दिलाती है कि शीर्ष हृदय रोग विशेषज्ञ के लिए भी जीवन कितना अप्रत्याशित हो सकता है। शायद आज का खान-पान कुछ ऐसा ही है या बदलता मौसम। या फिर एक व्यक्ति के पास सब कुछ होते हुए भी वह अपने आप तानव मुक्त नहीं रख पाता है। इसके पीछे कई वजह हो सकती है। डॉ गांधी का असामयिक निधन हृदय स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण महत्व पर प्रकाश डालता है। 1. स्वस्थ आहार लेंः अपने आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन और स्वस्थ वसा शामिल करें। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, सोडियम और संतृप्त वसा को सीमित करें। 2. नियमित रूप से व्यायाम करेंः सप्ताह के अधिकांश दिनों में कम से कम 30 मिनट की एरोबिक गतिविधि करने का लक्ष्य रखें। शारीरिक गतिविधि एक स्वस्थ वजन और निम्न रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद कर सकती है। 3. धूम्रपान छोड़ेंः यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो छोड़ दें। यदि आप धूम्रपान नहीं करते हैं, तो शुरू न करें। धूम्रपान से हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। 4. शराब का सेवन ना करेंः बहुत अधिक शराब आपके रक्तचाप को बढ़ा सकती है और अतिरिक्त कैलोरी बढ़ा सकती है, जिससे वजन बढ़ सकता है। इसलिए शराब का सेवन करने से बचें। 5. तनाव मुक्त रहने का प्रयास करेंः उच्च स्तर का तनाव हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है। तनाव से निपटने के स्वस्थ तरीके खोजें, जैसे कि ध्यान, योग या अन्य विश्राम तकनीकों के माध्यम से अपने आप को तनाव मुक्त रखने का प्रायस करें। 6. अपना वजन सामान्य रखें- अपना वजन सामान्य रखें, क्योंकि वजन कम और ज्यादा होने पर भी बीमारियां आपको घेर लेती हैं। याद रखें कि ये जीवन कितना कीमती और अनिश्चित है। आइए अपने स्वास्थ्य के लिए आभार व्यक्त करने के लिए कुछ समय निकालें, अपनी और अपने प्रियजनों की देखभाल के लिए कदम उठाएं, और डॉ. गांधी जैसे स्वास्थ्य नायकों की स्मृति का सम्मान करें, जिन्होंने अपना पूरा जीवन दूसरों को बचाने के लिए समर्पित कर दिया।
अहमदाबादः गुजरात के शीर्ष कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव गांधी ने सात जून को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। इकतालीस साल की छोटी उम्र में उन्हें दिल का दौरा पड़ा और सोते समय उनका निधन हो गया। प्रसिद्ध गुजराती हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव गांधी जामनगर के रहने वाले हैं। अपने पूरे करियर के दौरान, उन्होंने सोलह,शून्य से अधिक दिल के ऑपरेशन किए और वे अपने काम के लिए भी बहुत प्रसिद्ध थे। साथ ही वह दिल की बीमारियों के लिए जागरुकता अभियान भी चलाते थे। इसके अतिरिक्त, वह "हाल्ट हार्ट अटैक" नामक एक फेसबुक अभियान भी चलाते थे। डॉ. गांधी एक स्वस्थ कार्य-जीवन संतुलन बनाए रखने और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए अपने समर्पण के लिए जाने जाते थे। सोचने वाली बात यह है कि जो खुद हार्ट सर्जरी के लिए मशहूर थे, उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। इस बात ने सभी को आश्चर्य में डाल दिया है। यह दुखद घटना इस बात की याद दिलाती है कि शीर्ष हृदय रोग विशेषज्ञ के लिए भी जीवन कितना अप्रत्याशित हो सकता है। शायद आज का खान-पान कुछ ऐसा ही है या बदलता मौसम। या फिर एक व्यक्ति के पास सब कुछ होते हुए भी वह अपने आप तानव मुक्त नहीं रख पाता है। इसके पीछे कई वजह हो सकती है। डॉ गांधी का असामयिक निधन हृदय स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण महत्व पर प्रकाश डालता है। एक. स्वस्थ आहार लेंः अपने आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन और स्वस्थ वसा शामिल करें। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, सोडियम और संतृप्त वसा को सीमित करें। दो. नियमित रूप से व्यायाम करेंः सप्ताह के अधिकांश दिनों में कम से कम तीस मिनट की एरोबिक गतिविधि करने का लक्ष्य रखें। शारीरिक गतिविधि एक स्वस्थ वजन और निम्न रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद कर सकती है। तीन. धूम्रपान छोड़ेंः यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो छोड़ दें। यदि आप धूम्रपान नहीं करते हैं, तो शुरू न करें। धूम्रपान से हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। चार. शराब का सेवन ना करेंः बहुत अधिक शराब आपके रक्तचाप को बढ़ा सकती है और अतिरिक्त कैलोरी बढ़ा सकती है, जिससे वजन बढ़ सकता है। इसलिए शराब का सेवन करने से बचें। पाँच. तनाव मुक्त रहने का प्रयास करेंः उच्च स्तर का तनाव हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकता है। तनाव से निपटने के स्वस्थ तरीके खोजें, जैसे कि ध्यान, योग या अन्य विश्राम तकनीकों के माध्यम से अपने आप को तनाव मुक्त रखने का प्रायस करें। छः. अपना वजन सामान्य रखें- अपना वजन सामान्य रखें, क्योंकि वजन कम और ज्यादा होने पर भी बीमारियां आपको घेर लेती हैं। याद रखें कि ये जीवन कितना कीमती और अनिश्चित है। आइए अपने स्वास्थ्य के लिए आभार व्यक्त करने के लिए कुछ समय निकालें, अपनी और अपने प्रियजनों की देखभाल के लिए कदम उठाएं, और डॉ. गांधी जैसे स्वास्थ्य नायकों की स्मृति का सम्मान करें, जिन्होंने अपना पूरा जीवन दूसरों को बचाने के लिए समर्पित कर दिया।
उड़ता पंजाब (U/A) फिल्म- उड़ता पंजाब 'उड़ता पंजाब' का नाम भले ही आपने एक महीने पहले नहीं सुना हो, लेकिन पिछले दिनों सेंसर बोर्ड के साथ इस फिल्म की इतनी तनातनी मची की. . बच्चे बच्चे के जुबान पर फिल्म का नाम है। खैर, 'उड़ता पंजाब' और सेंसर बोर्ड की कंट्रोवर्सी के बीच सलमान खान ने भी एक सलाह दे डाली है। जी हां, सुपरस्टार के अनुसार फिल्म बैन करने की बजाए. . फिल्म पास करने के लिए बोर्ड कुछ और कैटेगरी भी बना सकती है।
उड़ता पंजाब फिल्म- उड़ता पंजाब 'उड़ता पंजाब' का नाम भले ही आपने एक महीने पहले नहीं सुना हो, लेकिन पिछले दिनों सेंसर बोर्ड के साथ इस फिल्म की इतनी तनातनी मची की. . बच्चे बच्चे के जुबान पर फिल्म का नाम है। खैर, 'उड़ता पंजाब' और सेंसर बोर्ड की कंट्रोवर्सी के बीच सलमान खान ने भी एक सलाह दे डाली है। जी हां, सुपरस्टार के अनुसार फिल्म बैन करने की बजाए. . फिल्म पास करने के लिए बोर्ड कुछ और कैटेगरी भी बना सकती है।
केन्द्र सरकार की तरफ से मान्यता प्राप्त पत्रकारों के संगठन 'प्रेस एसोसिएशन आफ इंडिया' के चुनाव में हिन्दुस्तान टाइम्स से जुड़े रहे राजीव रंजन नाग फिर अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए हैं. महासचिव पद पर देश के चोटी के खेल पत्रकार हरपाल बेदी जीते. बेदी यूएनआई सामाचर एजेंसी से जुड़े रहे हैं. दिल्ली के प्रेस क्लब में राजधानी के वरिष्ठ पत्रकारों ने मतदान में भाग लिया. नाग और बेदी के पैनल के सारे सदस्य प्रबंध समिति के लिए चुने नहीं जा सके. प्रबंध समिति के लिए विनीत वाही और श्रीकांत भाटिया भी निर्वाचित हुए. वाही नेशनल हेरल्ड के चीफ रिपोर्टर रहे हैं. भाटिया सिंधी टाइम्स नाम के अखबार के संपादक हैं. इरा झा को सबसे अधिक 126 वोट पड़े. प्रेस एसोसिएशन आफ इंडिया के पदाधिकारियों के चुनाव हर दो साल में एक बार होते हैं. इसके सदस्य वे हैं, जो संसद से लेकर सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की रिपोर्टिंग करते हैं.
केन्द्र सरकार की तरफ से मान्यता प्राप्त पत्रकारों के संगठन 'प्रेस एसोसिएशन आफ इंडिया' के चुनाव में हिन्दुस्तान टाइम्स से जुड़े रहे राजीव रंजन नाग फिर अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए हैं. महासचिव पद पर देश के चोटी के खेल पत्रकार हरपाल बेदी जीते. बेदी यूएनआई सामाचर एजेंसी से जुड़े रहे हैं. दिल्ली के प्रेस क्लब में राजधानी के वरिष्ठ पत्रकारों ने मतदान में भाग लिया. नाग और बेदी के पैनल के सारे सदस्य प्रबंध समिति के लिए चुने नहीं जा सके. प्रबंध समिति के लिए विनीत वाही और श्रीकांत भाटिया भी निर्वाचित हुए. वाही नेशनल हेरल्ड के चीफ रिपोर्टर रहे हैं. भाटिया सिंधी टाइम्स नाम के अखबार के संपादक हैं. इरा झा को सबसे अधिक एक सौ छब्बीस वोट पड़े. प्रेस एसोसिएशन आफ इंडिया के पदाधिकारियों के चुनाव हर दो साल में एक बार होते हैं. इसके सदस्य वे हैं, जो संसद से लेकर सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की रिपोर्टिंग करते हैं.
चीन कितना भी चाहले लेकिन सच कभी छुपा नहीं सकता। एक न एक दिन उसको सच कबूलना ही पड़ेगा। ...और उसको सच कबूलना ही पड़ा। दरअसल, गलवान की घटना के बाद भारतीय एजेंसियों ने रोते-विलखते चीनी सैनिकों की पिक्चरें हासिल कर लीं जिन्हें न केवल दिखाया गया बल्कि बताया भी गया कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार अपनी फौज और फौजी शहीदों का सम्मान नहीं करती। इस बात का इतना दबाव बना चीन पर कि उसे अपने मुख पृष्ठ के संपादक से कहलवाना पड़ा कि गलवान में भारतीयों के हाथ चीनी सैनिक मारे गये थे। कहते हैं न कि चोर, चोरी से जाए हेरा-फेरी से न जाए। ये ग्लोबल टाइम्स के सम्पादक अपने सैनिकों के मारे जाने की बात कबूलते वक्त भी झूठ बोलना नहीं भूले। हू शी जिन बोले कि हमारे सैनिक मारे तो गये थे लेकिन भारत की तुलना में बहुत कम और हमारा तो कोई सैनिक पकड़ा ही नहीं गया था। हमने भारतीय सैनिक पकड़ रखे। हू शीजिन की याद्दाश्त शायद कमजोर है, वो यह भूल गये कि अपने घायलों और मृत शरीरों के शरीर उठाने और शवों को ढोने के लिए बाकयादा भारत सरकार से अनुमित मांगी थी। चीन के चार हेलीकॉप्टर आये थे उस शाम डेड बॉडी और घायलों को उठाने के लिए। चीनी सैनिकों के शवों की सही संख्या या तो उस सिमेटरी से पता चल सकती है जहां उन्हें दफनाया गया या फिर चीन सरकार की वो सूची जिसमें उन्हें मृत घोषित किया गया। तीसरा एक सोर्स और भी है जो भारत समेत बाकी दुनिया के विश्वसनीय हो सकता है वो है इंडियन आर्मी। क्यों कि इंडियन आर्मी ने चीन के हेलिकॉप्टरों से ढोए जा रहे शवों को अपनी आंखों से देखा है। बहरहाल, जो भी है चीन ने सच्चाई को स्वीकार तो है भले ही आधा ही स्वीकार किया है। चीन की सरकार भले अबतक गलवान में मारे गए अपने सैनिकों के बारे में न बताए लेकिन उसकी मीडिया की तरफ से ही उसकी पोल खुल चुकी है। चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के एडिटर ने खुद माना है कि हां गलवान में चीन को भी नुकसान हुआ था। गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। खबरों में आया था कि चीन के कम से कम 40 से ज्यादा जवान या तो मारे गए हैं या फिर गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। जब राजनाथ सिंह ने संसद में लद्दाख मसले पर बयान दिया तो उन्होंने दोहराया कि चीन को हिंसक झड़प में भारी नुकसान हुआ था। .
चीन कितना भी चाहले लेकिन सच कभी छुपा नहीं सकता। एक न एक दिन उसको सच कबूलना ही पड़ेगा। ...और उसको सच कबूलना ही पड़ा। दरअसल, गलवान की घटना के बाद भारतीय एजेंसियों ने रोते-विलखते चीनी सैनिकों की पिक्चरें हासिल कर लीं जिन्हें न केवल दिखाया गया बल्कि बताया भी गया कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार अपनी फौज और फौजी शहीदों का सम्मान नहीं करती। इस बात का इतना दबाव बना चीन पर कि उसे अपने मुख पृष्ठ के संपादक से कहलवाना पड़ा कि गलवान में भारतीयों के हाथ चीनी सैनिक मारे गये थे। कहते हैं न कि चोर, चोरी से जाए हेरा-फेरी से न जाए। ये ग्लोबल टाइम्स के सम्पादक अपने सैनिकों के मारे जाने की बात कबूलते वक्त भी झूठ बोलना नहीं भूले। हू शी जिन बोले कि हमारे सैनिक मारे तो गये थे लेकिन भारत की तुलना में बहुत कम और हमारा तो कोई सैनिक पकड़ा ही नहीं गया था। हमने भारतीय सैनिक पकड़ रखे। हू शीजिन की याद्दाश्त शायद कमजोर है, वो यह भूल गये कि अपने घायलों और मृत शरीरों के शरीर उठाने और शवों को ढोने के लिए बाकयादा भारत सरकार से अनुमित मांगी थी। चीन के चार हेलीकॉप्टर आये थे उस शाम डेड बॉडी और घायलों को उठाने के लिए। चीनी सैनिकों के शवों की सही संख्या या तो उस सिमेटरी से पता चल सकती है जहां उन्हें दफनाया गया या फिर चीन सरकार की वो सूची जिसमें उन्हें मृत घोषित किया गया। तीसरा एक सोर्स और भी है जो भारत समेत बाकी दुनिया के विश्वसनीय हो सकता है वो है इंडियन आर्मी। क्यों कि इंडियन आर्मी ने चीन के हेलिकॉप्टरों से ढोए जा रहे शवों को अपनी आंखों से देखा है। बहरहाल, जो भी है चीन ने सच्चाई को स्वीकार तो है भले ही आधा ही स्वीकार किया है। चीन की सरकार भले अबतक गलवान में मारे गए अपने सैनिकों के बारे में न बताए लेकिन उसकी मीडिया की तरफ से ही उसकी पोल खुल चुकी है। चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के एडिटर ने खुद माना है कि हां गलवान में चीन को भी नुकसान हुआ था। गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष में भारत के बीस जवान शहीद हो गए थे। खबरों में आया था कि चीन के कम से कम चालीस से ज्यादा जवान या तो मारे गए हैं या फिर गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। जब राजनाथ सिंह ने संसद में लद्दाख मसले पर बयान दिया तो उन्होंने दोहराया कि चीन को हिंसक झड़प में भारी नुकसान हुआ था। .
300 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिक रफ़्तार से दौड़ती गाड़ियां, कहीं है यू टर्न तो कहीं है लंबी सी सड़क. कभी एक आगे निकलता है तो कभी दूसरा. 12 टीमें, 24 ड्राइवर जिनका मकसद है एक दूसरे से आगे निकलना. ऐसा है क्रेज़ फॉर्मूला 1 रेस का. फॉर्मूला 1 या एफ़1 (F1) जिसे एफ़आईए (फेडरेशन इंटरनेशनल डी आई ऑटोमोबाइल) या फार्मूला वन विश्व चैम्पियनशिप के आधिकारिक नाम से भी जाना जाता है, उच्चतम श्रेणी की एकल ऑटो रेसिंग प्रतियोगिता है जो हर वर्ष विभिन्न जगहों पर आयोजित होती है. "फॉर्मूला" जिसे हिंदी में "सूत्र" भी कहा जाता है वह नियम हैं जिसका प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सभी कारें पालन करती हैं. फॉर्मूला 1 ऑटो कारों की वार्षिक प्रतियोगिता है जिसे ग्रांड प्रिक्स यानि "बड़ा पुरस्कार" भी कहा जाता है. फॉर्मूला 1 का आयोजन मार्च से नवंबर माह के बीच, दुनियां भर के विभिन्न देशों में खास रूप से तैयार की गई सड़कें जिन्हें हम सर्किट भी कहते है, में किया जाता है. वर्ष भर हुई इन रेसों के आधार पर दो विश्व चैंपियनशिप दी जाती है. यह चैंपियनशिप विभिन्न रेसों में अर्जित किए गए पॉइंट्स पर आधारित होते हैं. फॉर्मूला 1 का उदय 1920-1930 में यूरोप से हुआ. शुरुआत में इसे यूरोपियन ग्रांड प्रिक्स के नाम से जाना जाता था. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1946 में सभी ने सहमति से एक फॉर्मूला ड्राफ्ट तैयार किया जिसका पालन सभी ऑटो टीमों और ड्राइवरों को करना था. तब से फॉर्मूला 1 की शुरुआत हुई. इसी वर्ष एक अनाधिकारिक रेस का आयोजन भी किया गया. प्रथम विश्व चैम्पियनशिप का आयोजन 1950 में सिल्वरस्टोन, यूनाइटेड किंगडम में हुआ. 1. इस वर्ष की फॉर्मूला 1 का आयोजन मार्च महीने के आखिरी सप्ताह में 25 से 27 तारीख के बीच ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न शहर से शुरू होगा. 2. इस बार कुल मिलाकर 19 रेसें होंगी. 3. 2011 की फॉर्मूला 1 में 12 टीमें और 24 ड्राइवर भाग लेंगे. 4. इस बार 28 से 30 अक्टूबर के बीच ग्रेटर नोएडा (भारत) में पहली बार फॉर्मूला 1 का आयोजन होगा. 5. भारत में होने वाली फॉर्मूला 1 की सर्किट जेपी ग्रुप बना रही है. 6. इस बार की फॉर्मूला 1 में पहली बार दो भारतीय एक साथ भाग लेंगे. करून चंडोक और नारायण कार्तिकेयन. 7. विजय माल्या की टीम फोर्स इंडिया इस बार की फॉर्मूला 1 में मजबूत दावेदार के तौर पर उतरेगी. 8. इस बार पहली बार फॉर्मूला 1 के इतिहास में पांच विश्व चैम्पियन भाग लेंगे.
तीन सौ किलोग्राममीटर प्रति घंटे की अधिक रफ़्तार से दौड़ती गाड़ियां, कहीं है यू टर्न तो कहीं है लंबी सी सड़क. कभी एक आगे निकलता है तो कभी दूसरा. बारह टीमें, चौबीस ड्राइवर जिनका मकसद है एक दूसरे से आगे निकलना. ऐसा है क्रेज़ फॉर्मूला एक रेस का. फॉर्मूला एक या एफ़एक जिसे एफ़आईए या फार्मूला वन विश्व चैम्पियनशिप के आधिकारिक नाम से भी जाना जाता है, उच्चतम श्रेणी की एकल ऑटो रेसिंग प्रतियोगिता है जो हर वर्ष विभिन्न जगहों पर आयोजित होती है. "फॉर्मूला" जिसे हिंदी में "सूत्र" भी कहा जाता है वह नियम हैं जिसका प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सभी कारें पालन करती हैं. फॉर्मूला एक ऑटो कारों की वार्षिक प्रतियोगिता है जिसे ग्रांड प्रिक्स यानि "बड़ा पुरस्कार" भी कहा जाता है. फॉर्मूला एक का आयोजन मार्च से नवंबर माह के बीच, दुनियां भर के विभिन्न देशों में खास रूप से तैयार की गई सड़कें जिन्हें हम सर्किट भी कहते है, में किया जाता है. वर्ष भर हुई इन रेसों के आधार पर दो विश्व चैंपियनशिप दी जाती है. यह चैंपियनशिप विभिन्न रेसों में अर्जित किए गए पॉइंट्स पर आधारित होते हैं. फॉर्मूला एक का उदय एक हज़ार नौ सौ बीस-एक हज़ार नौ सौ तीस में यूरोप से हुआ. शुरुआत में इसे यूरोपियन ग्रांड प्रिक्स के नाम से जाना जाता था. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एक हज़ार नौ सौ छियालीस में सभी ने सहमति से एक फॉर्मूला ड्राफ्ट तैयार किया जिसका पालन सभी ऑटो टीमों और ड्राइवरों को करना था. तब से फॉर्मूला एक की शुरुआत हुई. इसी वर्ष एक अनाधिकारिक रेस का आयोजन भी किया गया. प्रथम विश्व चैम्पियनशिप का आयोजन एक हज़ार नौ सौ पचास में सिल्वरस्टोन, यूनाइटेड किंगडम में हुआ. एक. इस वर्ष की फॉर्मूला एक का आयोजन मार्च महीने के आखिरी सप्ताह में पच्चीस से सत्ताईस तारीख के बीच ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न शहर से शुरू होगा. दो. इस बार कुल मिलाकर उन्नीस रेसें होंगी. तीन. दो हज़ार ग्यारह की फॉर्मूला एक में बारह टीमें और चौबीस ड्राइवर भाग लेंगे. चार. इस बार अट्ठाईस से तीस अक्टूबर के बीच ग्रेटर नोएडा में पहली बार फॉर्मूला एक का आयोजन होगा. पाँच. भारत में होने वाली फॉर्मूला एक की सर्किट जेपी ग्रुप बना रही है. छः. इस बार की फॉर्मूला एक में पहली बार दो भारतीय एक साथ भाग लेंगे. करून चंडोक और नारायण कार्तिकेयन. सात. विजय माल्या की टीम फोर्स इंडिया इस बार की फॉर्मूला एक में मजबूत दावेदार के तौर पर उतरेगी. आठ. इस बार पहली बार फॉर्मूला एक के इतिहास में पांच विश्व चैम्पियन भाग लेंगे.
जालंधर, 26 जून (वार्ता) केन्द्रीय खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक नितिन अग्रवाल की उपस्थिति में सोमवार को यहां बीएसएफ परिसर में नवनिर्मित अत्याधुनिक हॉकी टर्फ का उद्घाटन किया। श्री ठाकुर ने बताया कि नवनिर्मित टर्फ को अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए भारतीय हॉकी महासंघ से सभी आवश्यक मंजूरी मिल गयी है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने हॉकी टर्फ के विकास के लिये आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान की है, जो खेल के बुनियादी ढांचे और विकास को बढ़ावा देने के लिये सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय खेल प्राधिकरण के लिये एक संपत्ति है, जो बीएसएफ और जालंधर क्षेत्र के लिये विश्व स्तरीय हॉकी बुनियादी ढांचे के नये युग की शुरुआत करेगी। श्री ठाकुर ने पंजाब की समृद्ध खेल विरासत का भी उल्लेख किया, जिसने असाधारण एथलीट पैदा किये हैं और भारत की खेल विरासत में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने खेल को बढ़ावा देने और प्रतिभाओं को पोषित करने में संगठन की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए बीएसएफ की खेल विरासत को स्वीकार किया। उन्होंने सरकार के प्रमुख कार्यक्रम खेलो इंडिया और देश भर में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने एवं पोषित करने के निरंतर प्रयासों पर चर्चा की। बीएसएफ के खिलाड़ियों को विभिन्न विषयों में तीन पद्म श्री और 17 अर्जुन पुरस्कार प्राप्त करने का गौरव प्राप्त है और कई बीएसएफ खिलाड़ियों ने विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
जालंधर, छब्बीस जून केन्द्रीय खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक नितिन अग्रवाल की उपस्थिति में सोमवार को यहां बीएसएफ परिसर में नवनिर्मित अत्याधुनिक हॉकी टर्फ का उद्घाटन किया। श्री ठाकुर ने बताया कि नवनिर्मित टर्फ को अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए भारतीय हॉकी महासंघ से सभी आवश्यक मंजूरी मिल गयी है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने हॉकी टर्फ के विकास के लिये आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान की है, जो खेल के बुनियादी ढांचे और विकास को बढ़ावा देने के लिये सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय खेल प्राधिकरण के लिये एक संपत्ति है, जो बीएसएफ और जालंधर क्षेत्र के लिये विश्व स्तरीय हॉकी बुनियादी ढांचे के नये युग की शुरुआत करेगी। श्री ठाकुर ने पंजाब की समृद्ध खेल विरासत का भी उल्लेख किया, जिसने असाधारण एथलीट पैदा किये हैं और भारत की खेल विरासत में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने खेल को बढ़ावा देने और प्रतिभाओं को पोषित करने में संगठन की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए बीएसएफ की खेल विरासत को स्वीकार किया। उन्होंने सरकार के प्रमुख कार्यक्रम खेलो इंडिया और देश भर में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने एवं पोषित करने के निरंतर प्रयासों पर चर्चा की। बीएसएफ के खिलाड़ियों को विभिन्न विषयों में तीन पद्म श्री और सत्रह अर्जुन पुरस्कार प्राप्त करने का गौरव प्राप्त है और कई बीएसएफ खिलाड़ियों ने विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
ई ग्रैंड आई 10 निओस (फोटो सोर्स : सोमनाथ चटर्जी) Hyundai Grand i10 Nios Facelift Review: पिछले कुछ समय से भारत में वाहनों में सेफ्टी फीचर्स एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है. हाल ही सरकार ने सभी कारों के लिए कम से कम 6 एयरबैग का नियम अनिवार्य कर दिया है. इसके कारण कम कीमत वाली छोटी कारें अधिक प्रभावित हुई हैं. नई ग्रैंड आई10 निओस में 6 एयरबैग्स का विकल्प दिया गया है. हालांकि स्टैंडर्ड तौर पर 4 एयरबैग्स दिए गए हैं. यह कार कंपनी के इंट्री लेवल की कार है, और यह सेफ्टी फीचर अपडेट के बाद इसकी बिक्री में और अधिक तेजी आने की उम्मीद है. क्या हुआ है बदलाव? नए अपडेटेड वर्जन में आई 10 Nios के फ्रंट स्टाइल में बदलाव किया गया है जिसमें ग्रिल का निचला हिस्सा बड़ा है, साथ ही किनारों पर DRLs के लिए एक नया डिज़ाइन भी दिया गया है. इसके एलईडी प्रोजेक्टर हेडलैम्प्स को भी नए लुक के साथ पेश किया गया है. साथ ही में इसमें 15 इंच के अलॉय व्हील्स भी दिए गए हैं. पीछे की स्टाइलिंग में नए एलईडी टेल-लैंप के साथ-साथ एक लाइट बार जुड़ा हुआ है. इसमें दो ड्यूल टोन कलर्स के साथ 6 कलर ऑप्शंस भी दिए गए हैं. कैसा है इंटीरियर? इस कार का इंटीरियर पहले जैसा ही है. जिसमें स्मार्टफोन कनेक्टिविटी, वायरलेस चार्जिंग, रियर एसी वेंट और ऑटो क्लाइमेट कंट्रोल के साथ 8 इंच टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम के साथ टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, नई फुटवेल लाइटिंग, नई ग्रे अपहोल्स्ट्री और एक मल्टी इंफॉर्मेशन डिस्प्ले को भी जोड़ा गया है. अच्छे हेडरूम के साथ इसमें काफी अच्छी जगह मिलती है. कैसा है इंजन? नई ग्रैंड आई 10 Nios में अब टर्बो पेट्रोल इंजन को हटा दिया गया है. अब इसमें 1. 2L पेट्रोल इंजन मिलता है, जो कि e20 फ्यूल पर भी काम कर सकता है. इसमें एक सीएनजी वैरिएंट भी मिलता है. Nios में AMT और एक मैनुअल गियरबॉक्स का विकल्प दिया गया है. स्मूथ और सिटी ड्राइविंग के लिए भी इसे पर्याप्त लो-एंड टॉर्क के साथ ट्यून किया गया है. माइलेज के मामले में एएमटी और मैनुअल दोनों के लिए लगभग 20 किमी/लीटर का दावा किया गया है. हमने मैनुअल वैरिएंट चलाया और यह बहुत हल्के क्लच और स्टीयरिंग के साथ ड्राइव करने के लिए काफी आसान है. तेज स्पीड में भी इसकी परफॉर्मेंस काफी अच्छी है. यह कार बहुत साइलेंट है, और इसकी ड्राइविंग बहुत ही स्मूथ है. नई निओस की कीमत 5. 68 लाख रुपये से शुरू होती है जबकि एएमटी वर्जन के लिए टॉप-एंड वैरिएंट की कीमत 8. 4 लाख रुपये है. अपडेटेड फीचर्स की लिस्ट इसकी कीमत को सही ठहराती है. नई स्टाइलिंग, फ्यूचर प्रूफ इंजन और हाई क्वालिटी वाले इंटीरियर इसे शानदार बनाते हैं. नई निओस अपने इस अपडेट के साथ बाजार में अपने प्रतिद्वंदियों को कड़ी टक्कर देगी. हमें नई ग्रैंड आई 10 निओस के लुक्स, फीचर्स, क्वालिटी, स्मूथ पावरट्रेन काफी पसंद आए, लेकिन इसके टॉप-एंड वर्जन की कीमत थोड़ी ज्यादा लगती है. Car loan Information:
ई ग्रैंड आई दस निओस Hyundai Grand iदस Nios Facelift Review: पिछले कुछ समय से भारत में वाहनों में सेफ्टी फीचर्स एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है. हाल ही सरकार ने सभी कारों के लिए कम से कम छः एयरबैग का नियम अनिवार्य कर दिया है. इसके कारण कम कीमत वाली छोटी कारें अधिक प्रभावित हुई हैं. नई ग्रैंड आईदस निओस में छः एयरबैग्स का विकल्प दिया गया है. हालांकि स्टैंडर्ड तौर पर चार एयरबैग्स दिए गए हैं. यह कार कंपनी के इंट्री लेवल की कार है, और यह सेफ्टी फीचर अपडेट के बाद इसकी बिक्री में और अधिक तेजी आने की उम्मीद है. क्या हुआ है बदलाव? नए अपडेटेड वर्जन में आई दस Nios के फ्रंट स्टाइल में बदलाव किया गया है जिसमें ग्रिल का निचला हिस्सा बड़ा है, साथ ही किनारों पर DRLs के लिए एक नया डिज़ाइन भी दिया गया है. इसके एलईडी प्रोजेक्टर हेडलैम्प्स को भी नए लुक के साथ पेश किया गया है. साथ ही में इसमें पंद्रह इंच के अलॉय व्हील्स भी दिए गए हैं. पीछे की स्टाइलिंग में नए एलईडी टेल-लैंप के साथ-साथ एक लाइट बार जुड़ा हुआ है. इसमें दो ड्यूल टोन कलर्स के साथ छः कलर ऑप्शंस भी दिए गए हैं. कैसा है इंटीरियर? इस कार का इंटीरियर पहले जैसा ही है. जिसमें स्मार्टफोन कनेक्टिविटी, वायरलेस चार्जिंग, रियर एसी वेंट और ऑटो क्लाइमेट कंट्रोल के साथ आठ इंच टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम के साथ टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, नई फुटवेल लाइटिंग, नई ग्रे अपहोल्स्ट्री और एक मल्टी इंफॉर्मेशन डिस्प्ले को भी जोड़ा गया है. अच्छे हेडरूम के साथ इसमें काफी अच्छी जगह मिलती है. कैसा है इंजन? नई ग्रैंड आई दस Nios में अब टर्बो पेट्रोल इंजन को हटा दिया गया है. अब इसमें एक. दोL पेट्रोल इंजन मिलता है, जो कि eबीस फ्यूल पर भी काम कर सकता है. इसमें एक सीएनजी वैरिएंट भी मिलता है. Nios में AMT और एक मैनुअल गियरबॉक्स का विकल्प दिया गया है. स्मूथ और सिटी ड्राइविंग के लिए भी इसे पर्याप्त लो-एंड टॉर्क के साथ ट्यून किया गया है. माइलेज के मामले में एएमटी और मैनुअल दोनों के लिए लगभग बीस किमी/लीटर का दावा किया गया है. हमने मैनुअल वैरिएंट चलाया और यह बहुत हल्के क्लच और स्टीयरिंग के साथ ड्राइव करने के लिए काफी आसान है. तेज स्पीड में भी इसकी परफॉर्मेंस काफी अच्छी है. यह कार बहुत साइलेंट है, और इसकी ड्राइविंग बहुत ही स्मूथ है. नई निओस की कीमत पाँच. अड़सठ लाख रुपये से शुरू होती है जबकि एएमटी वर्जन के लिए टॉप-एंड वैरिएंट की कीमत आठ. चार लाख रुपये है. अपडेटेड फीचर्स की लिस्ट इसकी कीमत को सही ठहराती है. नई स्टाइलिंग, फ्यूचर प्रूफ इंजन और हाई क्वालिटी वाले इंटीरियर इसे शानदार बनाते हैं. नई निओस अपने इस अपडेट के साथ बाजार में अपने प्रतिद्वंदियों को कड़ी टक्कर देगी. हमें नई ग्रैंड आई दस निओस के लुक्स, फीचर्स, क्वालिटी, स्मूथ पावरट्रेन काफी पसंद आए, लेकिन इसके टॉप-एंड वर्जन की कीमत थोड़ी ज्यादा लगती है. Car loan Information:
आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की फिल्म ब्रह्मास्त्र इस साल की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक मानी जा रही है. फैंस इस फिल्म का बड़ी बेसब्री के साथ इंतजार कर रहे हैं. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और साउथ के सुपरस्टार अक्किनेनी नागार्जुन भी नजर आने वाले हैं. इतने लंबे समय बाद नागार्जुन को बॉलीवु़ फिल्म में देखने के लिए फैंस काफी उत्सुक है. हाल ही में नागार्जुन को आलिया और रणबीर के साथ फिल्म के सेट पर देखा गया था जिसके बाद उन्हें एक बार फिर स्पॉट किया गा. ई टाइम्स के मुताबिक इस बार उनके कपड़ों पर खून के धब्बे नजर आए जिससे साफ है कि वह सेट एक्शन सीन शूट कर लौट रहे थे. इस दौरान नागार्दुन को अपने क्रू के साथ वैनिटी की ओर जाते हुए देखा गया. इतनी उम्र होने के बाद भी नागार्जुन अपने पुराने अंदाज में नजर आने वाले हैं. ऐसे में इस फिल्म को फैंस काफी उत्सुक हैं. बता दें, फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में रणवीर सिंह अपनी लेडी लव आलिया भट्ट के साथ नजर आएंगे. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, डिंपल कपाड़िया, नागार्जुन अक्किनेनी, मौनी रॉय भी अहम भूमिका में हैं. इस फिल्म को अयान मुखर्जी ने डायरेक्ट किया है और करण जौहर ने प्रोड्यूस किया है. फिल्म 2020 में रिलीज होनी थी लेकिन कोरोना महामारी के चलते डेट को आगे बढ़ाना पड़ा. हालांकि फिल्म की रिलीज की नई डेट का ऐलान अभी नहीं किया गया है. वहीं दूसरी ओर रणवीर और आलिया अपनी बाकी फिल्मों की शूटिंग में भी बिजी हैं. आलिया भट्ट RRR और गंगूबाई काठियावाड़ी जैसी कई फिल्मों में नजर आने वाली हैं तो वहीं रणबीर कपूर भी हाल ही में दिल्ली में अपनी अपकमिंग फिल्म की शूटिंग करते नजर आए थे. इस फिल्म में उनके साथ श्रद्धा कपूर भी नजर आने वाली हैं. बता दें कि कुछ दिनों पहले आलिया से शादी के प्लान के बारे में रणबीर ने बताया था कि अगर हमारी जिंदगियों में यह महामारी नहीं आई होती तो अबतक शादी हो चुकी होती. मैं अपनी जिंदगी में इस लक्ष्य पर जल्द ही टिक मार्क करना चाहता हूं.
आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की फिल्म ब्रह्मास्त्र इस साल की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक मानी जा रही है. फैंस इस फिल्म का बड़ी बेसब्री के साथ इंतजार कर रहे हैं. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और साउथ के सुपरस्टार अक्किनेनी नागार्जुन भी नजर आने वाले हैं. इतने लंबे समय बाद नागार्जुन को बॉलीवु़ फिल्म में देखने के लिए फैंस काफी उत्सुक है. हाल ही में नागार्जुन को आलिया और रणबीर के साथ फिल्म के सेट पर देखा गया था जिसके बाद उन्हें एक बार फिर स्पॉट किया गा. ई टाइम्स के मुताबिक इस बार उनके कपड़ों पर खून के धब्बे नजर आए जिससे साफ है कि वह सेट एक्शन सीन शूट कर लौट रहे थे. इस दौरान नागार्दुन को अपने क्रू के साथ वैनिटी की ओर जाते हुए देखा गया. इतनी उम्र होने के बाद भी नागार्जुन अपने पुराने अंदाज में नजर आने वाले हैं. ऐसे में इस फिल्म को फैंस काफी उत्सुक हैं. बता दें, फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में रणवीर सिंह अपनी लेडी लव आलिया भट्ट के साथ नजर आएंगे. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, डिंपल कपाड़िया, नागार्जुन अक्किनेनी, मौनी रॉय भी अहम भूमिका में हैं. इस फिल्म को अयान मुखर्जी ने डायरेक्ट किया है और करण जौहर ने प्रोड्यूस किया है. फिल्म दो हज़ार बीस में रिलीज होनी थी लेकिन कोरोना महामारी के चलते डेट को आगे बढ़ाना पड़ा. हालांकि फिल्म की रिलीज की नई डेट का ऐलान अभी नहीं किया गया है. वहीं दूसरी ओर रणवीर और आलिया अपनी बाकी फिल्मों की शूटिंग में भी बिजी हैं. आलिया भट्ट RRR और गंगूबाई काठियावाड़ी जैसी कई फिल्मों में नजर आने वाली हैं तो वहीं रणबीर कपूर भी हाल ही में दिल्ली में अपनी अपकमिंग फिल्म की शूटिंग करते नजर आए थे. इस फिल्म में उनके साथ श्रद्धा कपूर भी नजर आने वाली हैं. बता दें कि कुछ दिनों पहले आलिया से शादी के प्लान के बारे में रणबीर ने बताया था कि अगर हमारी जिंदगियों में यह महामारी नहीं आई होती तो अबतक शादी हो चुकी होती. मैं अपनी जिंदगी में इस लक्ष्य पर जल्द ही टिक मार्क करना चाहता हूं.
स्पेन से हिलाकर रख देने वाली खबर सामने आई है. जिसमें कोरोना को लेकर कई खुलासे हुए है. काफी लंबे समय से बताया जा रहा कि कोरोना का जन्म चीन के वुहान शहर से हुई है. लेकिन एक नए अध्ययन ने सारी बाजी को पलटा दिया है. जिसमें कहा जा रहा कि स्पेन के शहर बार्सिलोना में मार्च 2019 से ही दूषित पानी में कोरोना वायरस पाए जाने की बात कही जा रही है. कोरोना को लेकर यह खुलासा बार्सिलोना यूनिवर्सिटी की शोध में किया गया है. गंदे पानी में वायरस की खोज करने के लिए SARS-CoV-2 प्रोजेक्ट का गठन किया गया था. जिसका मकसद समय से पहले वायरस का पता लगाना है, ताकि आने वाले समय में इस प्रकार की स्थिति फैदा न हो सके. बता दे कि शोध टीम का हिस्सा रोजा मारिया पिंटो और अलबर्ट बोश थे. शोधकर्ताओं ने बार्सिलोना में वाटर ट्रीटमेंट के दो बड़े संयत्र में इस्तेमाल किए गए या दूषित पानी का अध्ययन किया. उनका मकसद ये था कि क्या दूषित पानी के अध्ययन से कोरोना वायरस के फैलने का सुराग लगाने में कोई मदद मिल सकती है? अपने बयान में बोश का बताया है कि, "बार्सिलोना में पर्यटक और प्रोफेशनल आते रहते हैं. संभव है कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह का मामला पेश आया हो. चूंकि कोविड-19 के ज्यादातर मामलों में फ्लू (जुकाम) के एक ही जैसे लक्षण जाहिर होते हैं, इसलिए उनकी पहचान फ्लू के तौर पर की गई होगी. " शोधकर्ताओं का कहना है कि बहुत ज्यादा मरीजों में कोरोना वायरस के मामूली लक्षण पाए गए. या उनमें लक्षण जाहिर ही नहीं हुए थे मगर बीमारी का शिकार थे. इसलिए दूषित पानी पर शोध से कोरोना वायरस के मामलों का सुराग लगाने में मदद मिल सकती है. प्रोफेसर बोश का कहना है कि कोविड-19 का शिकार होने वालों को शुरू में गलती से जुकाम के तौर पर पहचान किया गया था. इसलिए स्वास्थ्य मोर्च पर उठाए गए उपाय से पहले ही वायरस आबादी में फैलता चला गया. शोध के बारे में उनका कहना है कि इस सिलसिले में अभी और अध्ययन किए जाने की जरूरत है.
स्पेन से हिलाकर रख देने वाली खबर सामने आई है. जिसमें कोरोना को लेकर कई खुलासे हुए है. काफी लंबे समय से बताया जा रहा कि कोरोना का जन्म चीन के वुहान शहर से हुई है. लेकिन एक नए अध्ययन ने सारी बाजी को पलटा दिया है. जिसमें कहा जा रहा कि स्पेन के शहर बार्सिलोना में मार्च दो हज़ार उन्नीस से ही दूषित पानी में कोरोना वायरस पाए जाने की बात कही जा रही है. कोरोना को लेकर यह खुलासा बार्सिलोना यूनिवर्सिटी की शोध में किया गया है. गंदे पानी में वायरस की खोज करने के लिए SARS-CoV-दो प्रोजेक्ट का गठन किया गया था. जिसका मकसद समय से पहले वायरस का पता लगाना है, ताकि आने वाले समय में इस प्रकार की स्थिति फैदा न हो सके. बता दे कि शोध टीम का हिस्सा रोजा मारिया पिंटो और अलबर्ट बोश थे. शोधकर्ताओं ने बार्सिलोना में वाटर ट्रीटमेंट के दो बड़े संयत्र में इस्तेमाल किए गए या दूषित पानी का अध्ययन किया. उनका मकसद ये था कि क्या दूषित पानी के अध्ययन से कोरोना वायरस के फैलने का सुराग लगाने में कोई मदद मिल सकती है? अपने बयान में बोश का बताया है कि, "बार्सिलोना में पर्यटक और प्रोफेशनल आते रहते हैं. संभव है कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह का मामला पेश आया हो. चूंकि कोविड-उन्नीस के ज्यादातर मामलों में फ्लू के एक ही जैसे लक्षण जाहिर होते हैं, इसलिए उनकी पहचान फ्लू के तौर पर की गई होगी. " शोधकर्ताओं का कहना है कि बहुत ज्यादा मरीजों में कोरोना वायरस के मामूली लक्षण पाए गए. या उनमें लक्षण जाहिर ही नहीं हुए थे मगर बीमारी का शिकार थे. इसलिए दूषित पानी पर शोध से कोरोना वायरस के मामलों का सुराग लगाने में मदद मिल सकती है. प्रोफेसर बोश का कहना है कि कोविड-उन्नीस का शिकार होने वालों को शुरू में गलती से जुकाम के तौर पर पहचान किया गया था. इसलिए स्वास्थ्य मोर्च पर उठाए गए उपाय से पहले ही वायरस आबादी में फैलता चला गया. शोध के बारे में उनका कहना है कि इस सिलसिले में अभी और अध्ययन किए जाने की जरूरत है.
नई दिल्ली। टाटा मोटर्स ने अपने टियागो और टिगोर मॉडल के ऐसे वैरिएंट बाजार में पेश किए हैं जिनसे रेसिंग कार का अनुभव भी लिया जा सकेगा। टिगोर और टियागो के इन वैरिएंट को तमिलनाडु की कंपनी जेयम ऑटोमोटिव्स के सहयोग से विकसित किया गया है। स्पोर्ट्स कार के परफॉर्मेंस वाले ये दोनों मॉडल शुक्रवार से ही बुकिंग के लिए उपलब्ध हो गए हैं। इनकी डिलिवरी अगले महीने से शुरू होगी। इन्हें जेटीपी ब्रांड के तहत पेश किया गया है। हैचबैक टियागो जेटीपी की शुरुआती एक्स शो-रूम कीमत नई दिल्ली में 6. 39 लाख रुपये होगी। वहीं सिडान टिगोर जेटीपी की शुरुआती एक्स शो-रूम कीमत 7. 49 लाख रुपये होगी। टाटा मोटर्स के प्रेसिडेंट (पैसेंजर व्हीकल्स डिविजन) मयंक पारिक ने दैनिक जागरण से फोन से हुई बातचीत में कहा कि नए कस्टमर के लिहाज से नई रणनीति की आवश्यकता थी। टाटा मोटर्स का यह प्रयास इसी रणनीति की पहल है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें इस तरह के बदलाव किए गए हैं जिससे ग्राहक सामान्य कार के साथ-साथ स्पोर्ट्स कार का अनुभव भी ले पाएंगे। इन बदलावों के लिए टियागो की पावर 33 फीसद बढ़ाई गई है। टियागो और टिगोर के नए वैरिएंट का निर्माण टाटा मोटर्स के गुजरात स्थित साणंद प्लांट में किया जा रहा है। मार्च 2017 में टाटा मोटर्स ने कोयंबटूर स्थित जेयम ऑटोमोटिव्स के साथ जेयम टाटा परफॉर्मेंस (जेटीपी) के नाम से एक संयुक्त उद्यम बनाया था। किफायती दामों पर परफॉर्मेंस कार विकसित करने के उद्देश्य से जेटीपी के तहत नए वैरिएंट लांच किए जाने की तैयारी है।
नई दिल्ली। टाटा मोटर्स ने अपने टियागो और टिगोर मॉडल के ऐसे वैरिएंट बाजार में पेश किए हैं जिनसे रेसिंग कार का अनुभव भी लिया जा सकेगा। टिगोर और टियागो के इन वैरिएंट को तमिलनाडु की कंपनी जेयम ऑटोमोटिव्स के सहयोग से विकसित किया गया है। स्पोर्ट्स कार के परफॉर्मेंस वाले ये दोनों मॉडल शुक्रवार से ही बुकिंग के लिए उपलब्ध हो गए हैं। इनकी डिलिवरी अगले महीने से शुरू होगी। इन्हें जेटीपी ब्रांड के तहत पेश किया गया है। हैचबैक टियागो जेटीपी की शुरुआती एक्स शो-रूम कीमत नई दिल्ली में छः. उनतालीस लाख रुपये होगी। वहीं सिडान टिगोर जेटीपी की शुरुआती एक्स शो-रूम कीमत सात. उनचास लाख रुपये होगी। टाटा मोटर्स के प्रेसिडेंट मयंक पारिक ने दैनिक जागरण से फोन से हुई बातचीत में कहा कि नए कस्टमर के लिहाज से नई रणनीति की आवश्यकता थी। टाटा मोटर्स का यह प्रयास इसी रणनीति की पहल है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें इस तरह के बदलाव किए गए हैं जिससे ग्राहक सामान्य कार के साथ-साथ स्पोर्ट्स कार का अनुभव भी ले पाएंगे। इन बदलावों के लिए टियागो की पावर तैंतीस फीसद बढ़ाई गई है। टियागो और टिगोर के नए वैरिएंट का निर्माण टाटा मोटर्स के गुजरात स्थित साणंद प्लांट में किया जा रहा है। मार्च दो हज़ार सत्रह में टाटा मोटर्स ने कोयंबटूर स्थित जेयम ऑटोमोटिव्स के साथ जेयम टाटा परफॉर्मेंस के नाम से एक संयुक्त उद्यम बनाया था। किफायती दामों पर परफॉर्मेंस कार विकसित करने के उद्देश्य से जेटीपी के तहत नए वैरिएंट लांच किए जाने की तैयारी है।
भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ कल होने वाले एक दिवसीय मैच में बल्लेबाज युवराज सिंह के खेलने पर आज कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया, लेकिन संकेत दिया कि युवा सौरभ तिवारी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आगाज कर सकते हैं. जब मुरली विजय के सलामी बल्लेबाज के रूप में मैदान में उतरने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने तुरंत कहा, 'हां, मुरली विजय खेलेगा. ' उन्होंने कहा कि तिवारी छठे या सातवें नंबर पर खेलने के लिये बिलकुल ठीक है क्योंकि वह हमेशा ही बड़े शाट लगाना चाहता है जैसा कि हमने आईपीएल और चैम्पियंस लीग ट्वेंटी-20 में देखा, जिसमें उसे दुनिया के कुछ महान गेंदबाजों का सामना करने का मौका मिला. उन्होंने कहा, 'वह छठे या सातवें स्थान के लिये बिलकुल ठीक है, जहां वह गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा सकता है. ' धोनी ने कहा कि तिवारी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबी पारी खेलने का सकारात्मक रवैया है.
भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ कल होने वाले एक दिवसीय मैच में बल्लेबाज युवराज सिंह के खेलने पर आज कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया, लेकिन संकेत दिया कि युवा सौरभ तिवारी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आगाज कर सकते हैं. जब मुरली विजय के सलामी बल्लेबाज के रूप में मैदान में उतरने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने तुरंत कहा, 'हां, मुरली विजय खेलेगा. ' उन्होंने कहा कि तिवारी छठे या सातवें नंबर पर खेलने के लिये बिलकुल ठीक है क्योंकि वह हमेशा ही बड़े शाट लगाना चाहता है जैसा कि हमने आईपीएल और चैम्पियंस लीग ट्वेंटी-बीस में देखा, जिसमें उसे दुनिया के कुछ महान गेंदबाजों का सामना करने का मौका मिला. उन्होंने कहा, 'वह छठे या सातवें स्थान के लिये बिलकुल ठीक है, जहां वह गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा सकता है. ' धोनी ने कहा कि तिवारी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबी पारी खेलने का सकारात्मक रवैया है.