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तुर्की और सीरिया में 6 फरवरी को आए महाभूकंप (Deadly Earthquake) से अब तक 38 हजार के ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। दोनों देशों में लगातार राहत बचाव कार्य जारी है। भारत ने भी सहयोग के लिए अपनी NDRF टीम भेजी है। इस बीच तीन दिनों तक मलबे में फंसी रही 6 वर्षीय बच्ची को जिंदा मलबे से रेस्क्यू किया गया है। ये चमत्कारी बचाव कार्य भारत के दो खास हीरो की वजह से हो पाया। इनका नाम है 'रोमियो' और 'जूली'। अगर शायद ये दोनों नहीं होते तो बच्ची का पता नहीं लग सकता। रोमियो और जूली वहां हीरो बने जहां मशीनें काम नहीं आईं। टनों मलबे के नीचे छोटी बच्च का पता लगाने में डॉग स्क्वायड ने अहम भूमिका निभाई थी। उनके सहयोग के बिना बच्ची की जान नहीं बच सकती थी। NDRF मौजूदा समय में 6 फरवरी को आए विनाशकारी भूकंप से बुरी तरह प्रभावित नूरदगी और तुर्की के अनेक भागों में डिजास्टर प्लेस पर मलबे जान बचाने और एक जीवित आत्मा को खोजने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।
तुर्की और सीरिया में छः फरवरी को आए महाभूकंप से अब तक अड़तीस हजार के ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। दोनों देशों में लगातार राहत बचाव कार्य जारी है। भारत ने भी सहयोग के लिए अपनी NDRF टीम भेजी है। इस बीच तीन दिनों तक मलबे में फंसी रही छः वर्षीय बच्ची को जिंदा मलबे से रेस्क्यू किया गया है। ये चमत्कारी बचाव कार्य भारत के दो खास हीरो की वजह से हो पाया। इनका नाम है 'रोमियो' और 'जूली'। अगर शायद ये दोनों नहीं होते तो बच्ची का पता नहीं लग सकता। रोमियो और जूली वहां हीरो बने जहां मशीनें काम नहीं आईं। टनों मलबे के नीचे छोटी बच्च का पता लगाने में डॉग स्क्वायड ने अहम भूमिका निभाई थी। उनके सहयोग के बिना बच्ची की जान नहीं बच सकती थी। NDRF मौजूदा समय में छः फरवरी को आए विनाशकारी भूकंप से बुरी तरह प्रभावित नूरदगी और तुर्की के अनेक भागों में डिजास्टर प्लेस पर मलबे जान बचाने और एक जीवित आत्मा को खोजने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।
मेलबर्न, 25 मई (आईएएनएस)। आस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज एलन बॉर्डर मानते हैं कि भारत के विराट कोहली, इंग्लैंड के ईयोन मोर्गन और आस्ट्रेलिया के एरोन फिंच पर 30 मई से इंग्लैंड एंड वेल्स में शुरू हो रहे विश्व कप में नजर बनाए रखनी होगी। आस्ट्रेलिया की 178 वनडे मैचों में कप्तानी करने वाले मोर्गन से भी प्रभावित नजर आएं। बार्डर ने हमवतन कप्तान फिंच की भी बहुत प्रशंसा की।
मेलबर्न, पच्चीस मई । आस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज एलन बॉर्डर मानते हैं कि भारत के विराट कोहली, इंग्लैंड के ईयोन मोर्गन और आस्ट्रेलिया के एरोन फिंच पर तीस मई से इंग्लैंड एंड वेल्स में शुरू हो रहे विश्व कप में नजर बनाए रखनी होगी। आस्ट्रेलिया की एक सौ अठहत्तर वनडे मैचों में कप्तानी करने वाले मोर्गन से भी प्रभावित नजर आएं। बार्डर ने हमवतन कप्तान फिंच की भी बहुत प्रशंसा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि उनकी सरकार ने देश में सालों से हो रही '85 प्रतिशत की लूट को 100 प्रतिशत ख़त्म कर दिया है' प्रधानमंत्री मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में प्रवासी भारतीय दिवस का उद्घाटन करते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर जमकर बरसे. उन्होंने अपनी सरकार के काम भी गिनाए. मोदी ने प्रवासी भारतीयों को भारत का ब्रांड एंबेसडर बताया और कहा कि वो देश की क्षमताओं का प्रतीक हैं. मोदी ने ये भी कहा कि उनकी सरकार चाहती है कि भारतीय 'जहां भी रहें सुरक्षित रहें और बीते साढ़े चार साल में संकट में फंसे दो लाख से ज्यादा भारतीयों को सरकार के प्रयासों से मदद मिली है. ' मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम लिए बिना पूर्व की कांग्रेस सरकारों पर हमला करते हुए कहा, "आप में से अनेक लोगों ने हमारे देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री की भ्रष्टाचार को लेकर कही एक बात जरूर सुनी होगी. उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार दिल्ली से जो पैसा भेजती है, उसका सिर्फ 15 प्रतिशत ही लोगों तक पहुंच पाता है. लेकिन अफसोस ये रहा कि बाद के अपने 10-15 साल के शासन में भी इस लूट को बंद करने का प्रयास नहीं किया गया. देश का मध्यम वर्ग ईमानदारी से टैक्स देता रहा, और जो पार्टी इतने सालों तक सत्ता में रही, वो इस 85 प्रतिशत की लूट को देखकर भी अनदेखा करती रही " लेकिन कांग्रेस ने पहले की सरकारों पर पीएम मोदी के आरोपों की कड़ी निंदा की है. पार्टी प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि पूर्व सरकारों पर आक्षेप लगाना, उनको बदनाम करना उचित नहीं. आनंद शर्मा ने कहा, "हम सोचते थे कि शायद हाल के चुनाव के बाद जो संदेश गए हैं, उससे पीएम की मानसिकता बदलेगी. लेकिन जैसे वे मतदाताओं को अपनी भ्रामक बातों से लुभा लेते हैं. वैसे ही वे प्रवासी भारतीय दिवस पर उन्होंने कहा. " उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. उन्होंने कहा कि किसी भी पीएम के लिए सिर झुकाने वाली बात है. उन्होंने अपने पद की गरिमा कम की है. पीएम की बात पर विश्वास किया जाय, तो भारत में सब कुछ हो चुका है. कुछ करने की ज़रूरत नहीं. दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने इस लीकेज को पूरी तरह बंद कर दिया है. उन्होंने कहा, "हमारी सरकार ने बीते साढ़े चार वर्षों में अलग-अलग योजनाओं के तहत 5 लाख 78 हजार करोड़ रुपए सीधे लोगों के बैंक खाते में ट्रांसफर किए हैं. अब आप अंदाज़ा लगाइए, अगर देश पुराने तौर तरीक़ों से ही चल रहा होता, तो आज भी इस 5 लाख 78 हजार करोड़ रुपए में से 4 लाख 91 हजार करोड़ रुपए लीक हो रहे होते. " प्रधानमंत्री मोदी ने ये दावा भी किया कि उनकी सरकार ने क़रीब सात करोड़ फर्ज़ी लोगों की पहचानकर उन्हें व्यवस्था से हटाया है. मोदी ने कहा कि ये लोग कभी जन्मे ही नहीं थे. उन्होंने कहा, "आप सोचिए, पूरे ब्रिटेन में, फ्रांस में, पूरे इटली में जितने लोग हैं, ऐसे अनेक देशों की जनसंख्या से ज़्यादा तो हमारे यहां वो लोग थे, जो सिर्फ़ कागजों में जी रहे थे और कागजों में ही सरकारी सुविधाओं का लाभ ले रहे थे. " - पूरी दुनिया में भारतीय दूतावासों और कांसुलेट को पासपोर्ट सेवा प्रोजेक्ट से जोड़ा जा रहा है. - पासपोर्ट के साथ वीजा़ नियम सरल किए जा रहे हैं. - ई वीज़ा मिलने से समय की बचत हो रही है. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि उनकी सरकार ने देश में सालों से हो रही 'पचासी प्रतिशत की लूट को एक सौ प्रतिशत ख़त्म कर दिया है' प्रधानमंत्री मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में प्रवासी भारतीय दिवस का उद्घाटन करते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर जमकर बरसे. उन्होंने अपनी सरकार के काम भी गिनाए. मोदी ने प्रवासी भारतीयों को भारत का ब्रांड एंबेसडर बताया और कहा कि वो देश की क्षमताओं का प्रतीक हैं. मोदी ने ये भी कहा कि उनकी सरकार चाहती है कि भारतीय 'जहां भी रहें सुरक्षित रहें और बीते साढ़े चार साल में संकट में फंसे दो लाख से ज्यादा भारतीयों को सरकार के प्रयासों से मदद मिली है. ' मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम लिए बिना पूर्व की कांग्रेस सरकारों पर हमला करते हुए कहा, "आप में से अनेक लोगों ने हमारे देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री की भ्रष्टाचार को लेकर कही एक बात जरूर सुनी होगी. उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार दिल्ली से जो पैसा भेजती है, उसका सिर्फ पंद्रह प्रतिशत ही लोगों तक पहुंच पाता है. लेकिन अफसोस ये रहा कि बाद के अपने दस-पंद्रह साल के शासन में भी इस लूट को बंद करने का प्रयास नहीं किया गया. देश का मध्यम वर्ग ईमानदारी से टैक्स देता रहा, और जो पार्टी इतने सालों तक सत्ता में रही, वो इस पचासी प्रतिशत की लूट को देखकर भी अनदेखा करती रही " लेकिन कांग्रेस ने पहले की सरकारों पर पीएम मोदी के आरोपों की कड़ी निंदा की है. पार्टी प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि पूर्व सरकारों पर आक्षेप लगाना, उनको बदनाम करना उचित नहीं. आनंद शर्मा ने कहा, "हम सोचते थे कि शायद हाल के चुनाव के बाद जो संदेश गए हैं, उससे पीएम की मानसिकता बदलेगी. लेकिन जैसे वे मतदाताओं को अपनी भ्रामक बातों से लुभा लेते हैं. वैसे ही वे प्रवासी भारतीय दिवस पर उन्होंने कहा. " उन चमकते सितारों की कहानी जिन्हें दुनिया अभी और देखना और सुनना चाहती थी. उन्होंने कहा कि किसी भी पीएम के लिए सिर झुकाने वाली बात है. उन्होंने अपने पद की गरिमा कम की है. पीएम की बात पर विश्वास किया जाय, तो भारत में सब कुछ हो चुका है. कुछ करने की ज़रूरत नहीं. दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने इस लीकेज को पूरी तरह बंद कर दिया है. उन्होंने कहा, "हमारी सरकार ने बीते साढ़े चार वर्षों में अलग-अलग योजनाओं के तहत पाँच लाख अठहत्तर हजार करोड़ रुपए सीधे लोगों के बैंक खाते में ट्रांसफर किए हैं. अब आप अंदाज़ा लगाइए, अगर देश पुराने तौर तरीक़ों से ही चल रहा होता, तो आज भी इस पाँच लाख अठहत्तर हजार करोड़ रुपए में से चार लाख इक्यानवे हजार करोड़ रुपए लीक हो रहे होते. " प्रधानमंत्री मोदी ने ये दावा भी किया कि उनकी सरकार ने क़रीब सात करोड़ फर्ज़ी लोगों की पहचानकर उन्हें व्यवस्था से हटाया है. मोदी ने कहा कि ये लोग कभी जन्मे ही नहीं थे. उन्होंने कहा, "आप सोचिए, पूरे ब्रिटेन में, फ्रांस में, पूरे इटली में जितने लोग हैं, ऐसे अनेक देशों की जनसंख्या से ज़्यादा तो हमारे यहां वो लोग थे, जो सिर्फ़ कागजों में जी रहे थे और कागजों में ही सरकारी सुविधाओं का लाभ ले रहे थे. " - पूरी दुनिया में भारतीय दूतावासों और कांसुलेट को पासपोर्ट सेवा प्रोजेक्ट से जोड़ा जा रहा है. - पासपोर्ट के साथ वीजा़ नियम सरल किए जा रहे हैं. - ई वीज़ा मिलने से समय की बचत हो रही है.
नगर के सदर बाजार स्थित गोपाल ज्वेलर्स की दुकान से बाइक सवार बदमाश दो लाख से अधिक के सोने के आभूषणों से भरा डिब्बा छीनकर भाग निकले। भागते समय पुलिस पिकेट ने बदमाशों को पकड़ने की कोशिश की तो बदमाश अपनी बाइक छोड़कर भागने में कामयाब हो गए। खबर मिलते ही सीओ पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। बाइक नंबर के आधार पर बदमाशों की तलाश की जा रही है। दिनदहाड़े हुई घटना से शहर में हड़कंप मच गया है। नगर के पंजाबी कालोनी निवासी संजय पुत्र घनश्याम की सदर बाजार में गोपाल ज्वेलर्स के नाम से दुकान है। रविवार को दोपहर एक बजे के करीब दो बाइक सवार दुकान पर पहुंचे और सोने की चेन खरीदने के लिए दिखाने की बात कही। सराफ संजय ने अलमारी से सोने की चेन का डिब्बा निकाला तभी बाइक सवारों ने झपट्टा मारकर डिब्बा छीन लिया और भाग निकले। दुकानदार ने शोर मचाया तो आगे क्रिश्चियन तिराहे पर लगी पुलिस पिकेट ने उन्हें घेर लिया। पुलिस ने उन्हें घेरा तो बदमाश अपनी बाइक छोड़कर पैदल भागने में कामयाब हो गए। मैनपुरी। दुकानदार संजय ने बताया कि डिब्बे में 45 ग्राम वजन की सोने की महिलाओं की तीन चेनें थीं। जिनकी कीमत लगभग दो लाख 25 हजार रुपये बताई गई है। पुलिस बदमाशों द्वारा छोड़ी गई बाइक संख्या (एमपी 09यूएम 2837) के आधार पर बदमाशों का पता लगा रही है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज भी चेक किए जा रहे हैं। कोतवाली प्रभारी भानुप्रताप सिंह का कहना है कि बदमाशों के सुराग लगे हैं। जल्द उन्हें पकड़ा जाएगा। पीड़ित की ओर से पुलिस को तहरीर भी दे दी गई है।
नगर के सदर बाजार स्थित गोपाल ज्वेलर्स की दुकान से बाइक सवार बदमाश दो लाख से अधिक के सोने के आभूषणों से भरा डिब्बा छीनकर भाग निकले। भागते समय पुलिस पिकेट ने बदमाशों को पकड़ने की कोशिश की तो बदमाश अपनी बाइक छोड़कर भागने में कामयाब हो गए। खबर मिलते ही सीओ पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। बाइक नंबर के आधार पर बदमाशों की तलाश की जा रही है। दिनदहाड़े हुई घटना से शहर में हड़कंप मच गया है। नगर के पंजाबी कालोनी निवासी संजय पुत्र घनश्याम की सदर बाजार में गोपाल ज्वेलर्स के नाम से दुकान है। रविवार को दोपहर एक बजे के करीब दो बाइक सवार दुकान पर पहुंचे और सोने की चेन खरीदने के लिए दिखाने की बात कही। सराफ संजय ने अलमारी से सोने की चेन का डिब्बा निकाला तभी बाइक सवारों ने झपट्टा मारकर डिब्बा छीन लिया और भाग निकले। दुकानदार ने शोर मचाया तो आगे क्रिश्चियन तिराहे पर लगी पुलिस पिकेट ने उन्हें घेर लिया। पुलिस ने उन्हें घेरा तो बदमाश अपनी बाइक छोड़कर पैदल भागने में कामयाब हो गए। मैनपुरी। दुकानदार संजय ने बताया कि डिब्बे में पैंतालीस ग्राम वजन की सोने की महिलाओं की तीन चेनें थीं। जिनकी कीमत लगभग दो लाख पच्चीस हजार रुपये बताई गई है। पुलिस बदमाशों द्वारा छोड़ी गई बाइक संख्या के आधार पर बदमाशों का पता लगा रही है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज भी चेक किए जा रहे हैं। कोतवाली प्रभारी भानुप्रताप सिंह का कहना है कि बदमाशों के सुराग लगे हैं। जल्द उन्हें पकड़ा जाएगा। पीड़ित की ओर से पुलिस को तहरीर भी दे दी गई है।
दिकतिचिच्छाखाभ्योऽतिरिक्ताः सहस्राधिकाः शाखा अपि लुप्ता एवेति तावतापि सूर्यलोके तासा सम्प्रदायाविच्छेदस्य सत्त्वेनापौरुषेयत्वा नपायात् । अन्यथा समाजसम्मता वेदा अपि सहस्राधिकनगर ग्रामादिषु कोटिकोटिमनुष्येषु विच्छिन्जसम्प्रदायत्वेन पौरुषेया एव स्युः । अन्यादृशस्यापौरुषेयत्वस्य समाजिभिरपि वक्तुमशक्यत्वात् । ईश्वरनिमितत्वरूपा पौरुषेयत्वसिद्धिस्तु दुर्लभैव । कस्यचिदृषेर्वंचनेन तथात्वाभ्युपगमे तु बुद्धजिनादिवचनस्य तथैव प्रामाण्यं किन्न स्याद् इत्युक्तौ प्रत्युत्तरासम्भवात् । सूर्यलोके वेदास्तिष्ठन्तीत्यत्र तु वायुपुराणस्य वचनमेव प्रमाणम् । युधिष्ठिरमीमांसको लौकिकवाग्व्याहारेष्वपि सस्वरत्वसाधनाय यतते । परं समाजिनस्तु वेदमन्त्राणामपि सस्वरोच्चारणं कर्तुं न पारयन्ति । यच्च - 'यथा स्वररहित कल्पसूत्राणामाम्नायवत् प्रामाण्य नास्ति, तथैव स्वररहित ब्राह्मणग्रन्थानामप्याम्नायवत् प्रामाण्यं नास्ति' इति, तदपि यत्किञ्चित् तथात्वे समाज्युच्चरितमन्त्राणामपि स्वरहीनत्वेनाप्रामाण्यापत्तेः । वस्तुतस्तु स्वरराहित्यं स्वरसाहित्यं वा न प्रामाण्याप्रामाण्यप्रयोजकं यथा पौरुषेयत्वम् । तदेवं नाम्नायवत्प्रामाण्यप्रयोजकम्, अन्यथा सस्वरस्य कल्पसूत्रस्याम्नायवत्प्रामाण्यापत्तेः । न च तदसम्भव एव, स्वरप्रक्रियया प्रकृष्टपक्षैः साधयितुं शक्यत्वात् । त्वदनभिमतानां काठकादिसंहितानां सस्वरत्वेऽपि त्वया तासामाम्नायवत् प्रामाण्यानभ्युपगमात् । पण्डितरामावतारशमंभिरनेके नवीनाः सस्वरा मन्त्रा निर्मिताः । एका संहिता सस्वरा एवोपलभ्यते । न च प्रसिद्धाम्नायवत्तादृशमन्त्राणां प्रामाण्यं शक्यसमर्थनम्, सम्प्रदायाभावात्, ऐतरेयादिब्राह्मणानां स्वरराहित्येपि पठनपाठनतदर्थानुष्ठान पारम्पर्याविच्छेद दर्शनात्, तत्रैकदेशविकृतमनन्यवदिति रीत्याऽपौरुषेयत्वमेव मन्तव्यम् । सम्प्रदाय में अविच्छिन्नता बनी ही है। जैसे आर्यसमाजी बिना स्वर सम्प्रदाय के हो वेदो का पाठ करते हैं और उनको मन्त्र मानते हैं, उसी तरह से यहाँ भी समझना चाहिये। यह तो आपने कम ही कहा, शाकल प्रभृति कुछ शाखाओ को छोडकर वेद की सहस्राधिक शाखाएँ लुप्त हो गई है, तो भी सूर्यलोक में इनका सम्प्रदाय अविच्छिन्न रूप से विद्यमान है और इस तरह से इनकी अपौरुषेयता में कोई बाधा नही पड़ती । अन्यथा आर्यसमाजियों के द्वारा स्वीकृत वेद भी सहस्त्राधिक नगरो ओर ग्रामो में करोडो-करोड मनुष्यों में बंटे हुए हैं, इस तरह से विच्छिन्न रूप से विद्यमान होने से ये भी पौरुषेय माने जागंगे । हमने अपौरुषेयता का जो लक्षण कर दिया है, उससे भिन्न प्रकार का इसका लक्षण आप बना नही सकते । ईश्वर निर्मित होने से ये अपौरुषेय है, इसको सिद्ध कर पाना असंभव हैं । किसी ऋषि के कथन के आधार पर ऐसा मानने पर तो बुद्ध, जिन प्रभृति के वचनो को भी प्रमाण मानना पडेगा और इसका आपके पास कोई उत्तर नहीं मिलेगा। सूर्यलोक में वेद विद्यमान है, इसमे तो वायु पुराण का वचन प्रमाण है। युधिष्ठिर मीमासक लौकिक बातचीत में भी स्वर की सत्ता सिद्ध करने का प्रयास करते है, परन्तु समाजी बिद्वान् तो मन्त्रों का भी सस्वर उच्चारण नही कर सकते । 'जैसे स्वर रहित कल्प सूत्रो का वेद के समान प्रामाण्य नहीं है, उसी तरह से स्वररहित ब्राह्मणों का भी प्रामाण्य नही मानी जायगा' यह कथन भी निःसार है, क्योकि समाजियों के द्वारा उच्चरित मन्त्र भी स्वरहीन होने से इसी पद्धति के अनुसार अप्रमाण मान लिये जायंगे । वास्तव में स्वरसाहित्य अथवा स्वरराहित्य प्रामाण्य अथवा अप्रामाण्य का प्रयोजक नही है। इसका निश्चायक पौरुषेयत्व और अपौरुषेयत्व धर्म ही है । यदि ऐसा नही माना जायगा तो अस्वर कल्पसूत्र को भी आपको वेद के समान प्रमाण मानन पडेगा। इसमें असंभावना की कोई बात नहीं है, क्योकि स्वर प्रक्रिया के उत्कृष्ट नियमों के आधार पर ऐसा ही किया जा सकता है । फिर आप तो स्वर की विद्यमानता होने पर भी काठक संहिता प्रभृति को वेद के समान प्रमाण नहीं मानते । पण्डित रामावता शर्मा ने अनेक सस्वर मन्त्रों का निर्माण कर दिया था। एक पूरी संहिता ही उन्होने सस्वर बना दी है, किन्तु सम्प्रदाय के अभाव वेद के समान उसका प्रामाण्य कभी भी स्वीकार नही किया जा सकता। इसके विपरीत ऐतरेय प्रभृति ब्राह्मणों में स्वर के अभाव में, पठन-पाठन और उसके अर्थ का अनुष्टान करने की परम्परा के अक्षुण्ण चलते रहने के कारण 'एकदेश विकृत' -- न्याय से अपौरुषेयता लक्षण घटित होने से उनका प्रामाण्य अव्याहत माना जायगा ।
दिकतिचिच्छाखाभ्योऽतिरिक्ताः सहस्राधिकाः शाखा अपि लुप्ता एवेति तावतापि सूर्यलोके तासा सम्प्रदायाविच्छेदस्य सत्त्वेनापौरुषेयत्वा नपायात् । अन्यथा समाजसम्मता वेदा अपि सहस्राधिकनगर ग्रामादिषु कोटिकोटिमनुष्येषु विच्छिन्जसम्प्रदायत्वेन पौरुषेया एव स्युः । अन्यादृशस्यापौरुषेयत्वस्य समाजिभिरपि वक्तुमशक्यत्वात् । ईश्वरनिमितत्वरूपा पौरुषेयत्वसिद्धिस्तु दुर्लभैव । कस्यचिदृषेर्वंचनेन तथात्वाभ्युपगमे तु बुद्धजिनादिवचनस्य तथैव प्रामाण्यं किन्न स्याद् इत्युक्तौ प्रत्युत्तरासम्भवात् । सूर्यलोके वेदास्तिष्ठन्तीत्यत्र तु वायुपुराणस्य वचनमेव प्रमाणम् । युधिष्ठिरमीमांसको लौकिकवाग्व्याहारेष्वपि सस्वरत्वसाधनाय यतते । परं समाजिनस्तु वेदमन्त्राणामपि सस्वरोच्चारणं कर्तुं न पारयन्ति । यच्च - 'यथा स्वररहित कल्पसूत्राणामाम्नायवत् प्रामाण्य नास्ति, तथैव स्वररहित ब्राह्मणग्रन्थानामप्याम्नायवत् प्रामाण्यं नास्ति' इति, तदपि यत्किञ्चित् तथात्वे समाज्युच्चरितमन्त्राणामपि स्वरहीनत्वेनाप्रामाण्यापत्तेः । वस्तुतस्तु स्वरराहित्यं स्वरसाहित्यं वा न प्रामाण्याप्रामाण्यप्रयोजकं यथा पौरुषेयत्वम् । तदेवं नाम्नायवत्प्रामाण्यप्रयोजकम्, अन्यथा सस्वरस्य कल्पसूत्रस्याम्नायवत्प्रामाण्यापत्तेः । न च तदसम्भव एव, स्वरप्रक्रियया प्रकृष्टपक्षैः साधयितुं शक्यत्वात् । त्वदनभिमतानां काठकादिसंहितानां सस्वरत्वेऽपि त्वया तासामाम्नायवत् प्रामाण्यानभ्युपगमात् । पण्डितरामावतारशमंभिरनेके नवीनाः सस्वरा मन्त्रा निर्मिताः । एका संहिता सस्वरा एवोपलभ्यते । न च प्रसिद्धाम्नायवत्तादृशमन्त्राणां प्रामाण्यं शक्यसमर्थनम्, सम्प्रदायाभावात्, ऐतरेयादिब्राह्मणानां स्वरराहित्येपि पठनपाठनतदर्थानुष्ठान पारम्पर्याविच्छेद दर्शनात्, तत्रैकदेशविकृतमनन्यवदिति रीत्याऽपौरुषेयत्वमेव मन्तव्यम् । सम्प्रदाय में अविच्छिन्नता बनी ही है। जैसे आर्यसमाजी बिना स्वर सम्प्रदाय के हो वेदो का पाठ करते हैं और उनको मन्त्र मानते हैं, उसी तरह से यहाँ भी समझना चाहिये। यह तो आपने कम ही कहा, शाकल प्रभृति कुछ शाखाओ को छोडकर वेद की सहस्राधिक शाखाएँ लुप्त हो गई है, तो भी सूर्यलोक में इनका सम्प्रदाय अविच्छिन्न रूप से विद्यमान है और इस तरह से इनकी अपौरुषेयता में कोई बाधा नही पड़ती । अन्यथा आर्यसमाजियों के द्वारा स्वीकृत वेद भी सहस्त्राधिक नगरो ओर ग्रामो में करोडो-करोड मनुष्यों में बंटे हुए हैं, इस तरह से विच्छिन्न रूप से विद्यमान होने से ये भी पौरुषेय माने जागंगे । हमने अपौरुषेयता का जो लक्षण कर दिया है, उससे भिन्न प्रकार का इसका लक्षण आप बना नही सकते । ईश्वर निर्मित होने से ये अपौरुषेय है, इसको सिद्ध कर पाना असंभव हैं । किसी ऋषि के कथन के आधार पर ऐसा मानने पर तो बुद्ध, जिन प्रभृति के वचनो को भी प्रमाण मानना पडेगा और इसका आपके पास कोई उत्तर नहीं मिलेगा। सूर्यलोक में वेद विद्यमान है, इसमे तो वायु पुराण का वचन प्रमाण है। युधिष्ठिर मीमासक लौकिक बातचीत में भी स्वर की सत्ता सिद्ध करने का प्रयास करते है, परन्तु समाजी बिद्वान् तो मन्त्रों का भी सस्वर उच्चारण नही कर सकते । 'जैसे स्वर रहित कल्प सूत्रो का वेद के समान प्रामाण्य नहीं है, उसी तरह से स्वररहित ब्राह्मणों का भी प्रामाण्य नही मानी जायगा' यह कथन भी निःसार है, क्योकि समाजियों के द्वारा उच्चरित मन्त्र भी स्वरहीन होने से इसी पद्धति के अनुसार अप्रमाण मान लिये जायंगे । वास्तव में स्वरसाहित्य अथवा स्वरराहित्य प्रामाण्य अथवा अप्रामाण्य का प्रयोजक नही है। इसका निश्चायक पौरुषेयत्व और अपौरुषेयत्व धर्म ही है । यदि ऐसा नही माना जायगा तो अस्वर कल्पसूत्र को भी आपको वेद के समान प्रमाण मानन पडेगा। इसमें असंभावना की कोई बात नहीं है, क्योकि स्वर प्रक्रिया के उत्कृष्ट नियमों के आधार पर ऐसा ही किया जा सकता है । फिर आप तो स्वर की विद्यमानता होने पर भी काठक संहिता प्रभृति को वेद के समान प्रमाण नहीं मानते । पण्डित रामावता शर्मा ने अनेक सस्वर मन्त्रों का निर्माण कर दिया था। एक पूरी संहिता ही उन्होने सस्वर बना दी है, किन्तु सम्प्रदाय के अभाव वेद के समान उसका प्रामाण्य कभी भी स्वीकार नही किया जा सकता। इसके विपरीत ऐतरेय प्रभृति ब्राह्मणों में स्वर के अभाव में, पठन-पाठन और उसके अर्थ का अनुष्टान करने की परम्परा के अक्षुण्ण चलते रहने के कारण 'एकदेश विकृत' -- न्याय से अपौरुषेयता लक्षण घटित होने से उनका प्रामाण्य अव्याहत माना जायगा ।
प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के बाद देशभर में सफाई को लेकर बने माहौल के बीच जैसलमेर में भारतीय सेना ने इस मिशन में अपनी भागीदारी निभाते हुए आमजन से संवाद को मजबूत करते हुए मिनी मैराथन दौड का आयोजन किया गया। सेना की कोणार्क कोर द्वारा किये गये इस आयोजन में जिला प्रशासन के साथ पुलिस व नगर परिषद के लोगों ने सेना के साथ कदमताल मिलाया। आर्मी केन्ट में हुए इस आयोजन में जवान व अन्य लोगों ने पांच किलोमीटर की इस दौड में हिस्सा लिया। मैराथन दौड पूरी होने के बाद कार्यक्रम की मुख्य अतिथी नगर परिषद सभापति कविता कैलाश खत्री ने दौड में विजेता रहे प्रतिभागियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर सभापति ने कहा कि भारतीय सेना द्वारा किया गया यह आयोजन पर्यटन नगरी की स्वच्छता के साथ साथ सेना के साथ आमजन के संवाद को मजबूत करने वाला साबित होगा।
प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के बाद देशभर में सफाई को लेकर बने माहौल के बीच जैसलमेर में भारतीय सेना ने इस मिशन में अपनी भागीदारी निभाते हुए आमजन से संवाद को मजबूत करते हुए मिनी मैराथन दौड का आयोजन किया गया। सेना की कोणार्क कोर द्वारा किये गये इस आयोजन में जिला प्रशासन के साथ पुलिस व नगर परिषद के लोगों ने सेना के साथ कदमताल मिलाया। आर्मी केन्ट में हुए इस आयोजन में जवान व अन्य लोगों ने पांच किलोमीटर की इस दौड में हिस्सा लिया। मैराथन दौड पूरी होने के बाद कार्यक्रम की मुख्य अतिथी नगर परिषद सभापति कविता कैलाश खत्री ने दौड में विजेता रहे प्रतिभागियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर सभापति ने कहा कि भारतीय सेना द्वारा किया गया यह आयोजन पर्यटन नगरी की स्वच्छता के साथ साथ सेना के साथ आमजन के संवाद को मजबूत करने वाला साबित होगा।
विशेष संवाददाता श्रीनगर। कश्मीर घाटी में पहली बार आयोजित अंतरराष्ट्रीय हाफ मैराथन के आयोजन के मौके पर सुरक्षा बलों और युवकों के बीच आज यहां झड़पें हुईं और महिला धावकों से बदसलूकी और छेड़छाड़ के आरोप में 12 लोगें को गिरफ्तार किया गया। हजरतबल में कश्मीर विश्वविद्यालय में श्रीगनर की ऐतिहासिक डल झील को बचाने के बारे में जागरूकता के लिए आयोजित दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के तुरंत बाद कुछ युवकों ने ``भारत विरोधी" नारेबाजी की, पाकिस्तानी झंडे फहराये और सुरक्षा बलों पर पथराव किया जिसके बाद बलें को ला"ाrचार्ज करना पड़ा और आंसूगैस के गोले छोड़े। पुलिस ने बताया, ``स्थिति अब नियंत्रण में है। "किसी के घायल होने की खबर नहीं है। पीडीपी और नेशनल कांफेंस ने इस घटना की आलोचना की। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के भी इस समारोह में भाग लेने का कार्यक्रम था। परिस्थिति को देखते हुये बाद में उन्होंने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। उमर ने ट्विटर पर कहा, ``पांच किलोमीटर लंबी दौड़ की थीम `सेव द डल' थी। यह दयनीय है कि राजनीति इसके भी आड़े आ गई। "एक पीडीपी नेता ने कहा कि जो लोग नारेबाजी कर रहे थे और पाकिस्तानी झंडा बुलंद कर रहे थे, वही लड़कियों के साथ कथित छेड़छाड़ और बदसलूकी में संलिफ्त थे जिससे विवाद पैदा हुआ। पीडीपी प्रमुख और सांसद महबूबा मुफ्ती ने छेड़छाड़ और बदसलूकी की कथित घटनाओं पर नाखुशी जताई और कहा कि इस तरह का उपदवी व्यवहार सभ्य समाज में अस्वीकार्य है। राज्य की सिविल सोसायटी को इस तरह के अभद व्यवहार के खिलाफ उ"ना चाहिए जहां हमारी बेटियों का गुमराह करने और बाधा पहुंचाने वाले तत्वों द्वारा अपमान किया जा रहा है। उन्हेंने कहा, ``मुझे नहीं पता कि इस मैराथन में क्या गलत हुआ और युवकों ने इसे न केवल बाधित करने का प्रयास किया बल्कि राज्य और बाहर दोनों तरह की महिला प्रतिभागियों का अपमान भी किया गया। " पीडीपी की युवा शाखा के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के राजनीतिक विश्लेषक वहीद पारा ने यहां कहा, ``कुछ लोगों ने महिला प्रतिभागियों से बदसलूकी करने की कोशिश की। छेड़छाड़ और बदसलूकी की ढेर सारी शिकायतें हैं जो निंदनीय है। ' ' एक पुलिस प्रवक्ता ने यहां कहा कि शुरू में कार्यक्रम में सब "ाrक चल रहा था लेकिन बाद में भीड़ में मौजूद कुछ बदमाशों ने महिला धावकें और दर्शकें के बीच मौजूद लड़कियों पर अश्लील और अभद टिफ्पणियां करना शुरू कर दिया। निगीन थाने में छेड़छाड़ और बदसलूकी की घटनाओं के मामलों में प्राथमिकी दर्ज हुई है और इसमें शामिल 12 बदमाशों को अब तक गिरफ्तार किया गया है।
विशेष संवाददाता श्रीनगर। कश्मीर घाटी में पहली बार आयोजित अंतरराष्ट्रीय हाफ मैराथन के आयोजन के मौके पर सुरक्षा बलों और युवकों के बीच आज यहां झड़पें हुईं और महिला धावकों से बदसलूकी और छेड़छाड़ के आरोप में बारह लोगें को गिरफ्तार किया गया। हजरतबल में कश्मीर विश्वविद्यालय में श्रीगनर की ऐतिहासिक डल झील को बचाने के बारे में जागरूकता के लिए आयोजित दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के तुरंत बाद कुछ युवकों ने ``भारत विरोधी" नारेबाजी की, पाकिस्तानी झंडे फहराये और सुरक्षा बलों पर पथराव किया जिसके बाद बलें को ला"ाrचार्ज करना पड़ा और आंसूगैस के गोले छोड़े। पुलिस ने बताया, ``स्थिति अब नियंत्रण में है। "किसी के घायल होने की खबर नहीं है। पीडीपी और नेशनल कांफेंस ने इस घटना की आलोचना की। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के भी इस समारोह में भाग लेने का कार्यक्रम था। परिस्थिति को देखते हुये बाद में उन्होंने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। उमर ने ट्विटर पर कहा, ``पांच किलोमीटर लंबी दौड़ की थीम `सेव द डल' थी। यह दयनीय है कि राजनीति इसके भी आड़े आ गई। "एक पीडीपी नेता ने कहा कि जो लोग नारेबाजी कर रहे थे और पाकिस्तानी झंडा बुलंद कर रहे थे, वही लड़कियों के साथ कथित छेड़छाड़ और बदसलूकी में संलिफ्त थे जिससे विवाद पैदा हुआ। पीडीपी प्रमुख और सांसद महबूबा मुफ्ती ने छेड़छाड़ और बदसलूकी की कथित घटनाओं पर नाखुशी जताई और कहा कि इस तरह का उपदवी व्यवहार सभ्य समाज में अस्वीकार्य है। राज्य की सिविल सोसायटी को इस तरह के अभद व्यवहार के खिलाफ उ"ना चाहिए जहां हमारी बेटियों का गुमराह करने और बाधा पहुंचाने वाले तत्वों द्वारा अपमान किया जा रहा है। उन्हेंने कहा, ``मुझे नहीं पता कि इस मैराथन में क्या गलत हुआ और युवकों ने इसे न केवल बाधित करने का प्रयास किया बल्कि राज्य और बाहर दोनों तरह की महिला प्रतिभागियों का अपमान भी किया गया। " पीडीपी की युवा शाखा के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के राजनीतिक विश्लेषक वहीद पारा ने यहां कहा, ``कुछ लोगों ने महिला प्रतिभागियों से बदसलूकी करने की कोशिश की। छेड़छाड़ और बदसलूकी की ढेर सारी शिकायतें हैं जो निंदनीय है। ' ' एक पुलिस प्रवक्ता ने यहां कहा कि शुरू में कार्यक्रम में सब "ाrक चल रहा था लेकिन बाद में भीड़ में मौजूद कुछ बदमाशों ने महिला धावकें और दर्शकें के बीच मौजूद लड़कियों पर अश्लील और अभद टिफ्पणियां करना शुरू कर दिया। निगीन थाने में छेड़छाड़ और बदसलूकी की घटनाओं के मामलों में प्राथमिकी दर्ज हुई है और इसमें शामिल बारह बदमाशों को अब तक गिरफ्तार किया गया है।
Pratyusha Banerjee: प्रत्युषा 2010 में जमशेदपुर छोड़कर एक्टिंग में अपनी किस्मत आजमाने मायानगरी मुंबई आई थीं और वो सफल भी रहीं। प्रत्युषा ने 'रक्त संबंध' से अपना डेब्यू किया था। इसके बाद वो पॉपुलर टीवी सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में भी नजर आईं। Ashneer Grover: इस वीडियो पर कई इंटरनेट यूजर्स जमकर प्रतिक्रियाएं भी कर रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट किया, 'इनके नए स्टार्टअप का इंतजार है', तो दूसरे ने लिखा, 'अशनीर ग्रोवर 2. 0'। वहीं, कई लोगों ने इस वीडियो में स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा के होने की भी बात कह रहे हैं। Mika Singh: सिंगर मूसेवाला की हत्या के बाद सिंगर को थ्री लेयर सिक्योरिटी दी गई है जिसमें हर आने-जाने चीज की बारीकी से जांच की जा रही है। एंट्री गेट से लेकर सेट पर आने-जाने वाले हर शख्स की कड़ाई से चेकिंग की जा रही है। शूटिंग एरिया की निगरानी ड्रोन से की जा रही है। पर्सनल गार्डों के अलावा और नए गार्डों को तैनात किया गया है। Mika Di Voti: मीका सिंह ने अपने इंस्टाग्राम पर कुछ वीडियोज शेयर की है जिसमें सिंगर के स्वयंवर की तैयारियों को दिखाया जा रहा है। शो की शूटिंग जयपुर में हो रही हैं। वीडियो में कपिल शर्मा, दिलेर मेहंदी और शान को देखा जा रहा है।
Pratyusha Banerjee: प्रत्युषा दो हज़ार दस में जमशेदपुर छोड़कर एक्टिंग में अपनी किस्मत आजमाने मायानगरी मुंबई आई थीं और वो सफल भी रहीं। प्रत्युषा ने 'रक्त संबंध' से अपना डेब्यू किया था। इसके बाद वो पॉपुलर टीवी सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में भी नजर आईं। Ashneer Grover: इस वीडियो पर कई इंटरनेट यूजर्स जमकर प्रतिक्रियाएं भी कर रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट किया, 'इनके नए स्टार्टअप का इंतजार है', तो दूसरे ने लिखा, 'अशनीर ग्रोवर दो. शून्य'। वहीं, कई लोगों ने इस वीडियो में स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा के होने की भी बात कह रहे हैं। Mika Singh: सिंगर मूसेवाला की हत्या के बाद सिंगर को थ्री लेयर सिक्योरिटी दी गई है जिसमें हर आने-जाने चीज की बारीकी से जांच की जा रही है। एंट्री गेट से लेकर सेट पर आने-जाने वाले हर शख्स की कड़ाई से चेकिंग की जा रही है। शूटिंग एरिया की निगरानी ड्रोन से की जा रही है। पर्सनल गार्डों के अलावा और नए गार्डों को तैनात किया गया है। Mika Di Voti: मीका सिंह ने अपने इंस्टाग्राम पर कुछ वीडियोज शेयर की है जिसमें सिंगर के स्वयंवर की तैयारियों को दिखाया जा रहा है। शो की शूटिंग जयपुर में हो रही हैं। वीडियो में कपिल शर्मा, दिलेर मेहंदी और शान को देखा जा रहा है।
नई दिल्ली। बॉलीवुड के मशहूर एक्टर सलमान और हाल ही में नेश्नल अवॉर्ड से सम्मानित किए गए अक्षय कुमार दोनों ही काफी अच्छे दोस्त हैं। इसी वजह से अक्षय ने सलमान को एक सरप्राइज दिया और 16 से शुरु हुए सलमान के दा-बैंग वर्ल्ड टूर में अपनी शिरकत दी। हालांकि इसकी जानकारी पूरे टूर में शामिल होने वाले किसी भी इंसान को नहीं थी। यहां तक की खुद सलमान भी इस बात से अंजान थे। अक्षय ने 16 को हॉन्ग-कॉन्ग से शुरु हुए सलमान के इस टूर के पहले प्रोग्राम में एक थमाकेदा एंट्री की। अक्षय ने बाइक पर एंट्री की और इसके बाद अक्षय बॉलीवुड के कई गानों पर थिरकते हुए भी दिखे। अक्षय ने अपने साथ वहां मौजूद लोगों को भी अपने गानों पर खूब थिरकाया। बता दें की अक्षय इस टूर का हिस्सा नहीं है और वो केवल इसी शो के लिए आए थे। अक्षय बाकी के टूर का हिस्सा नहीं होंगे। अक्षय की डांस का एक वीडियो भी अक्षय के फैन ने शेयर किया है।
नई दिल्ली। बॉलीवुड के मशहूर एक्टर सलमान और हाल ही में नेश्नल अवॉर्ड से सम्मानित किए गए अक्षय कुमार दोनों ही काफी अच्छे दोस्त हैं। इसी वजह से अक्षय ने सलमान को एक सरप्राइज दिया और सोलह से शुरु हुए सलमान के दा-बैंग वर्ल्ड टूर में अपनी शिरकत दी। हालांकि इसकी जानकारी पूरे टूर में शामिल होने वाले किसी भी इंसान को नहीं थी। यहां तक की खुद सलमान भी इस बात से अंजान थे। अक्षय ने सोलह को हॉन्ग-कॉन्ग से शुरु हुए सलमान के इस टूर के पहले प्रोग्राम में एक थमाकेदा एंट्री की। अक्षय ने बाइक पर एंट्री की और इसके बाद अक्षय बॉलीवुड के कई गानों पर थिरकते हुए भी दिखे। अक्षय ने अपने साथ वहां मौजूद लोगों को भी अपने गानों पर खूब थिरकाया। बता दें की अक्षय इस टूर का हिस्सा नहीं है और वो केवल इसी शो के लिए आए थे। अक्षय बाकी के टूर का हिस्सा नहीं होंगे। अक्षय की डांस का एक वीडियो भी अक्षय के फैन ने शेयर किया है।
लिया जा सकता है । इसके दो खण्ड होंगे -- । देख् । + । ता । । यदि इससे आगे खण्ड किया जाय तो उसमें अधिक अभेद का दोप होगा । अधिक भेद -- जहाँ खण्ड करना चाहिए वहाँ खण्ड न करके यदि उसके पहले ही खण्ड कर दिया जाय तो वहाँ अधिक भेद होगा । उदाहरण के लिये हिन्दी का । करम्। शब्दरूप लिया जा सकता है । इसे 1 करम् । के बाद ही खण्डित करना चाहिए ; किन्तु यदि विश्लेषणकर्ता इसे ।कर । + । म् । अथवा कि। + । रम् । रूपों में खण्डित करे तो इसमें अधिक भेद का दोष उपस्थित हो जायेगा । ५.१९ पदग्रामिक विश्लेषण की पद्धतियाँ पदग्रामिक विश्लेषण के लिये भषाशास्त्री कई पद्धतियों का प्रयोग करते हैं जिनमें निम्नलिखित दो पद्धतियाँ मुख्य ( १ ) अर्थपद्धति - डी० सासे, ब्लूमफिल्ड तथा ब्लाक एवं टैगर आदि प्रसिद्ध भाषाशास्त्री पदग्रामिक विश्लेषण का मुख्य आधार अर्थ मानते हैं । इनके अनुसार, ध्वनिग्राम का अल्पतम अर्थवान आवर्त्तन, पद है । जब इन पदों को परिपूरक वितरण एवं अर्थगत समानता के आधार पर गठित किया जाता है तो पदग्राम का निर्माण होता है और पदरूप में इनके प्रत्येक सदस्य को 'सहपद ' की संज्ञा से अभिहित किया जाता है । (२) रूपपद्धति - इसके समर्थक अमेरिका के प्रसिद्ध भाषाशास्त्री प्रो० जैलिग हैरिस, हिल तथा उनके अनुयायी हैं। इनके अनुसार पदग्रामिक विश्लेषण के लिये अर्थ को आधार मानना युक्तियुक्त नहीं है, क्योंकि यदि विचारपूर्वक देखा जाय तो किसी भी शब्द का अर्थ निश्चित एवं सार्वभौम नहीं होता । देशकाल की सीमा के अन्तर्गत एक शब्द का विभिन्न सन्दर्भों में अर्थ भी विभिन्न हो जाता है । इन विद्वानों के अनुसार पदग्रामिक विश्लेषण का आधार वास्तव में रूप होना चाहिए और इसी के आधार पर ये लोग उच्चार का खण्ड भी करते हैं । इसके लिये वे किसी भाषा विशेष के बोलने वालों से यह प्रश्न पूछते हैं कि अमुक उच्चार समान हैं अथवा नहीं । यदि ये उच्चार समान हुए तो वे उन्हें एक कोटि का मानते हैं । रूपपद्धति के अनुगमन से भी बिहारी की 'कनक' वाली समस्या का हल हो जाता है, क्योंकि उस भाषा का बोलनेवाला दोनों उच्चारों में प्रयुक्त । कनक । को भिन्न समझेगा । भाषा के विश्लेषण की यह पद्धति किंचित जटिल एवं दुरूह है । किन्तु
लिया जा सकता है । इसके दो खण्ड होंगे -- । देख् । + । ता । । यदि इससे आगे खण्ड किया जाय तो उसमें अधिक अभेद का दोप होगा । अधिक भेद -- जहाँ खण्ड करना चाहिए वहाँ खण्ड न करके यदि उसके पहले ही खण्ड कर दिया जाय तो वहाँ अधिक भेद होगा । उदाहरण के लिये हिन्दी का । करम्। शब्दरूप लिया जा सकता है । इसे एक करम् । के बाद ही खण्डित करना चाहिए ; किन्तु यदि विश्लेषणकर्ता इसे ।कर । + । म् । अथवा कि। + । रम् । रूपों में खण्डित करे तो इसमें अधिक भेद का दोष उपस्थित हो जायेगा । पाँच.उन्नीस पदग्रामिक विश्लेषण की पद्धतियाँ पदग्रामिक विश्लेषण के लिये भषाशास्त्री कई पद्धतियों का प्रयोग करते हैं जिनमें निम्नलिखित दो पद्धतियाँ मुख्य अर्थपद्धति - डीशून्य सासे, ब्लूमफिल्ड तथा ब्लाक एवं टैगर आदि प्रसिद्ध भाषाशास्त्री पदग्रामिक विश्लेषण का मुख्य आधार अर्थ मानते हैं । इनके अनुसार, ध्वनिग्राम का अल्पतम अर्थवान आवर्त्तन, पद है । जब इन पदों को परिपूरक वितरण एवं अर्थगत समानता के आधार पर गठित किया जाता है तो पदग्राम का निर्माण होता है और पदरूप में इनके प्रत्येक सदस्य को 'सहपद ' की संज्ञा से अभिहित किया जाता है । रूपपद्धति - इसके समर्थक अमेरिका के प्रसिद्ध भाषाशास्त्री प्रोशून्य जैलिग हैरिस, हिल तथा उनके अनुयायी हैं। इनके अनुसार पदग्रामिक विश्लेषण के लिये अर्थ को आधार मानना युक्तियुक्त नहीं है, क्योंकि यदि विचारपूर्वक देखा जाय तो किसी भी शब्द का अर्थ निश्चित एवं सार्वभौम नहीं होता । देशकाल की सीमा के अन्तर्गत एक शब्द का विभिन्न सन्दर्भों में अर्थ भी विभिन्न हो जाता है । इन विद्वानों के अनुसार पदग्रामिक विश्लेषण का आधार वास्तव में रूप होना चाहिए और इसी के आधार पर ये लोग उच्चार का खण्ड भी करते हैं । इसके लिये वे किसी भाषा विशेष के बोलने वालों से यह प्रश्न पूछते हैं कि अमुक उच्चार समान हैं अथवा नहीं । यदि ये उच्चार समान हुए तो वे उन्हें एक कोटि का मानते हैं । रूपपद्धति के अनुगमन से भी बिहारी की 'कनक' वाली समस्या का हल हो जाता है, क्योंकि उस भाषा का बोलनेवाला दोनों उच्चारों में प्रयुक्त । कनक । को भिन्न समझेगा । भाषा के विश्लेषण की यह पद्धति किंचित जटिल एवं दुरूह है । किन्तु
देश की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा 2023 की शुरुआत में भारत में अपनी XUV400 को लॉन्च करने के लिए तैयार है। खबर है कि इस EV को तीन वेरिएंट्स- बेस, EP और EL में पेश किया जाएगा। यह 'बॉर्न इलेक्ट्रिक' लाइन-अप के तहत कंपनी की बिल्कुल नई इलेक्ट्रिक SUV है। यह XUV300 पर आधारित है। कंपनी की मानें तो एक बार चार्ज करने पर यह 456 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम होगी। कैसा है महिंद्रा XUV400 का डिजाइन? डिजाइन की बात करें तो महिंद्रा XUV400 में मस्कुलर बोनट, स्वेप्ट-बैकLED हेडलाइट्स, बूमरैंग-शेप्ड DRLs, वाइड एयर डैम्स, एक रेक्ड विंडस्क्रीन, कॉपर-फिनिश्ड इन्सर्ट्स के साथ एक क्लोज्ड ग्रिल और 'ट्विन पीक्स' लोगो दिया गया है। इस EV के किनारों पर रूफ रेल्स, ORVMs, फ्लेयर्ड व्हील आर्च और 16-इंच ड्यूल-टोन अलॉय व्हील्स दिए गए हैं। साथ ही इस SUV के पिछले हिस्से में रैप-अराउंड LED टेल लाइट्स और रूफ माउंटेड स्पॉइलर भी हैं। XUV400 इलेक्ट्रिक कार को महिंद्रा के इलेक्ट्रिक स्केलेबल और मॉड्यूलर आर्किटेक्चर (MESMA) प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है। कंपनी ने इस को 39. 5kW बैटरी पैक विकल्प के साथ पेश किया है। इस कार की मोटर को 150bhp की पावर बनाने की क्षमता दी गई है। महिंद्रा का दावा है कि यह SUV सिंगल चार्ज में 456 किलोमीटर की रेंज देने की क्षमता रखती है। DC फास्ट चार्जर से यह 50 मिनट में 80 प्रतिशत तक चार्ज हो सकती है। महिंद्रा XUV400 में बड़ा 5-सीटर केबिन दिया गया है। इसमें कॉपर रंग के ट्रिम्स के साथ एक ऑल-ब्लैक डैशबोर्ड, प्रीमियम लेदर अपहोल्स्ट्री, एक सनरूफ, एम्बिएंट लाइटिंग, कनेक्टेड कार तकनीक, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल और लेदर रैप्ड मल्टीफंक्शनल स्टीयरिंग व्हील दिया गया है। इस SUV में सेमी-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और लेटेस्ट कनेक्टिविटी विकल्पों के साथ 7. 0 इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट पैनल है। यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए इसमें छह एयरबैग, ABS और EBD जैसे फीचर्स भी हैं। क्या होगी इस SUV की कीमत? महिंद्रा XUV400 की कीमत और उपलब्धता की जानकारी जनवरी 2023 में इसके लॉन्च इवेंट के दौरान की जाएगी। हालांकि, अनुमान लगाया जा रहा है कि EV की कीमत लगभग 15 लाख (एक्स-शोरूम) रुपये से शुरू होगी।
देश की दिग्गज वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा दो हज़ार तेईस की शुरुआत में भारत में अपनी XUVचार सौ को लॉन्च करने के लिए तैयार है। खबर है कि इस EV को तीन वेरिएंट्स- बेस, EP और EL में पेश किया जाएगा। यह 'बॉर्न इलेक्ट्रिक' लाइन-अप के तहत कंपनी की बिल्कुल नई इलेक्ट्रिक SUV है। यह XUVतीन सौ पर आधारित है। कंपनी की मानें तो एक बार चार्ज करने पर यह चार सौ छप्पन किलोग्राममीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम होगी। कैसा है महिंद्रा XUVचार सौ का डिजाइन? डिजाइन की बात करें तो महिंद्रा XUVचार सौ में मस्कुलर बोनट, स्वेप्ट-बैकLED हेडलाइट्स, बूमरैंग-शेप्ड DRLs, वाइड एयर डैम्स, एक रेक्ड विंडस्क्रीन, कॉपर-फिनिश्ड इन्सर्ट्स के साथ एक क्लोज्ड ग्रिल और 'ट्विन पीक्स' लोगो दिया गया है। इस EV के किनारों पर रूफ रेल्स, ORVMs, फ्लेयर्ड व्हील आर्च और सोलह-इंच ड्यूल-टोन अलॉय व्हील्स दिए गए हैं। साथ ही इस SUV के पिछले हिस्से में रैप-अराउंड LED टेल लाइट्स और रूफ माउंटेड स्पॉइलर भी हैं। XUVचार सौ इलेक्ट्रिक कार को महिंद्रा के इलेक्ट्रिक स्केलेबल और मॉड्यूलर आर्किटेक्चर प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है। कंपनी ने इस को उनतालीस. पाँच किलोवाट बैटरी पैक विकल्प के साथ पेश किया है। इस कार की मोटर को एक सौ पचासbhp की पावर बनाने की क्षमता दी गई है। महिंद्रा का दावा है कि यह SUV सिंगल चार्ज में चार सौ छप्पन किलोग्राममीटर की रेंज देने की क्षमता रखती है। DC फास्ट चार्जर से यह पचास मिनट में अस्सी प्रतिशत तक चार्ज हो सकती है। महिंद्रा XUVचार सौ में बड़ा पाँच-सीटर केबिन दिया गया है। इसमें कॉपर रंग के ट्रिम्स के साथ एक ऑल-ब्लैक डैशबोर्ड, प्रीमियम लेदर अपहोल्स्ट्री, एक सनरूफ, एम्बिएंट लाइटिंग, कनेक्टेड कार तकनीक, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल और लेदर रैप्ड मल्टीफंक्शनल स्टीयरिंग व्हील दिया गया है। इस SUV में सेमी-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और लेटेस्ट कनेक्टिविटी विकल्पों के साथ सात. शून्य इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट पैनल है। यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए इसमें छह एयरबैग, ABS और EBD जैसे फीचर्स भी हैं। क्या होगी इस SUV की कीमत? महिंद्रा XUVचार सौ की कीमत और उपलब्धता की जानकारी जनवरी दो हज़ार तेईस में इसके लॉन्च इवेंट के दौरान की जाएगी। हालांकि, अनुमान लगाया जा रहा है कि EV की कीमत लगभग पंद्रह लाख रुपये से शुरू होगी।
42 / मेहंदी के फूल पत्र आते हैं ?" में जनन से धुआँ धुआँ हो गई। जितनी बार प्रेम पत्र पढ़ा मेरा गुम्सा उतनी बार बढ़ा। मैं जलन की सीमा लाँध गई - चुडैल कही की ! मुझे नैतिकता का पाठ पढ़ाती है और मुद ? छिः..! मैंने निर्णय कर लिया कि मैं दोदों के प्रतिवन्धों के घेरों को तोड़कर उससे अपनी मुक्ति का अधिकार माँगूँगी । सुद इस उम्र मे इश्क फरमाएँगो और मुझे घर मे बन्द करके रखेंगी ! पत्र के अन्त मे कितनो भावुकता से लिखा था, 'मेरी पडकनो में तुम हो तुम हो, और तुम्हारी धड़कनों में बसने वाला घेतन ।' यह मुँह और मसूर की दाल ! दोदी बाई । आते ही उसने हाथ मुंह धोकर साडी बदली और आदेशभरे स्वर मे कहा- 'साना बना लिया ?" 'जी नहीं, मेरे सिर में दर्द है ।' मैंने नाराजगी से कहा । 'लाओ, मैं बना लेती हूं।' कहकर वह रसोईघर में चली गई। बहुत देर तक मैं यह सोचती रही कि खत दूं या नहीं ? कहीं दीदी ने ताव में आकर कुछ अनर्थ कर लिया तो ? शर्म के मारे आत्मघात भी कर सकती है। पर मैं आत्मघात की बात से उदास नही हुई, बल्कि मेरे भीतर एक सुख की लहर दौड़ गई । वडी देर की उधेड़-बुन के पश्चात् मुझमे साहस आया। मैंने वह खत बडो नाटकीयता से आहिस्ता-आहिस्ता डरते-डरते सिर झुकाए हुए दोदो के समक्ष पेश कर दिया, 'यह तुम्हारा खत ।' दीदी की भृकुटियाँ तन गईं। चेहरा तनावों से घिर गया । आँखों के नीचे की भावना सहसा गहरी होने लगी । 'यह क्या है ?' उसने तिक्त स्वर में कहा और उसको आग बरसाती दृष्टि मुझ पर जम गई। 'प्रेमपत्र ।' 'तुम्हें कहाँ से मिला ?' 'यही कागजो के बीच ।' 'तुम मेरे कागज संभालती हो ?" 'नही तो, मैं फाइलें साफ कर रही थी। मैंने सहमते-सहमते झूठ बोला । 'अपने को अधिक चालाक समझती हो ?' दीदी ने निचले होंठ को सतह के नीचे का लावा / 43 अगले दाँत मे दवाकर कहा, 'मैं देख रही हूँ कि इधर तेरी जवानी मौज मार रही है। तू पंख निकाल रही है, पर तुझे तेरी दीदी में अवगुण ढूँढने की असफल चेप्टा नहीं करनी चाहिए। तेरी दीदी नितात सच्चरित्र, सयमी और सादा औरत है। यह प्रेम पत्र मेरा नहीं, मेरे ही नामवाली दसवी कक्षा की छात्रा लक्षणा का है। मेरो ही शिकायत पर उसके माँबाप ने उनका स्कूल छुड़वाया है। जो तड़की किशोरावस्था में ऐसे भयानक प्रेम पत्र लिखती है, वह क्यो नही कुपथ पर डाल दी या चली जाएगी ? मैंने उसके मां-बाप को कह दिया है कि वे जल्द से जल्द इसकी शादी कर दें। स्कूल आना बन्द कर दें ।' एक पश्चात्तापसूचक निःश्वास भरकर दीदी पुनः बोली, 'कैसा जमाना आ गया है ? लडकियां स्कूल मे पढ़ाई कम और प्रेम अधिक करती हैं। पाठ कम और शेर अधिक याद करती हैं। छिः ! यही अनैतिकता और उच्छृंखलता उनके जीवन को बरबाद कर देती है।' दीदी ने अपने स्वर में गर्व भरकर कहा, 'एक तुम हो, जिस पर मुझे ही नहीं, हमारे सारे स्टाफ, मैनेजमेंट और परिचितों को नाज है। तुम्हारी गम्भीरता और शालीनता अनुकरणीय है। तुम्हारा कम बोलना और व्यर्थ का न भटकना एक आदर्श कहलाता है, वर्ना इस उम्र में आज की युवतियाँ बिना लगाम को घोड़ी की तरह हिनहिनाती है और भागती है। जब लोग तुम्हारे स्वभाव, व्यवहार और चरित्र की प्रशंसा करते है तो मेरा मस्तक गौरव से ऊंचा हो जाता है। मुझे गर्व है कि तुमने मेरी शिक्षाओं और आदर्शों का सच्चे दिल से पालन किया है आग लगे आपकी शिक्षाओं को ! -मन-ही-मन में आत सौपि फुत्कार उठी, परन्तु चुपचाप सड़ी रही । 'अब तो कोई अच्छा और योग्य लड़का मिल जाए तो तुम्हारी शादी कर दूं । मुझे हर काम कायदे का पसन्द है ।' मैं तड़प उठी । इतनी सहुई कि मेरी आँखें गजल हो उठी । मेरी आँखों की सजलता मानो कह रही थी, 'तुम मेरी शादी नहीं करोगो । तुम्हें कोई भी लडका पसन्द नहीं आता। तुमने पसन्दगी-नापसन्दगी के चक्कर मे मेरे पच्चीस वर्षों को हत्या कर दो। बाघी उम्र । यौवन से लहकती दहकती आधी उम्र । जरूर में शापिन हूँ । पूर्वजन्म को शापित । 44 / मेहंदी के फूल इसलिए मुझे तुम्हारी गाजियनशिप मिली। एक नीरस औरत । तृष्णाहीन औरत। तुम्हें कोई लडका पसन्द नही आएगा। तुम्हे यह जमाना भी पसन्द नही आएगा। पर मैं अब यह नहीं सह पाऊँगी, पतई नहीं। मैं कल या एक-दो दिनों में अलग हो जाऊँगी। अब में बालिग हूँ, मेरी दीदी, में एकदम बालिग हूँ। बहुत सहा तुम्हारा विचित्र स्वभाव, अन्याय और आतंक । हाय । कभी-कभी मुझे तुझ पर दया भी आती है। इसलिए में करुणाप्लावित हो जाती हूँ कि इस करोडो इन्सानो के मुल्क में में ही तुम्हारी अकेली साथी हूँ । पर क्या करूं, में महसूम करती हूँ कि जो तुम मुझमें देख रही हो, वह झूठ है। मेरा मन इसके विपरीत वातों में भरा है। दीदो, अब में जाऊँगी - क्योकि अब मुझे अच्छी तरह पता लग गया है कि में धीरे-धीरे जरूर दीदी की तरह बन जाऊंगी या बना दी जाऊँगी, पर मे दीदी नहीं बनना चाहती। कदापि नहीं ! बजर धरती की कोई सायंकता नही। मैं ऐमी धरती बनूंगी जो हरीतिमा कहलाती है- कदम उर्वर और चिन्मय ! मैं अपने भीतर अब एक ज्वालामुखी का अनुभव करती
बयालीस / मेहंदी के फूल पत्र आते हैं ?" में जनन से धुआँ धुआँ हो गई। जितनी बार प्रेम पत्र पढ़ा मेरा गुम्सा उतनी बार बढ़ा। मैं जलन की सीमा लाँध गई - चुडैल कही की ! मुझे नैतिकता का पाठ पढ़ाती है और मुद ? छिः..! मैंने निर्णय कर लिया कि मैं दोदों के प्रतिवन्धों के घेरों को तोड़कर उससे अपनी मुक्ति का अधिकार माँगूँगी । सुद इस उम्र मे इश्क फरमाएँगो और मुझे घर मे बन्द करके रखेंगी ! पत्र के अन्त मे कितनो भावुकता से लिखा था, 'मेरी पडकनो में तुम हो तुम हो, और तुम्हारी धड़कनों में बसने वाला घेतन ।' यह मुँह और मसूर की दाल ! दोदी बाई । आते ही उसने हाथ मुंह धोकर साडी बदली और आदेशभरे स्वर मे कहा- 'साना बना लिया ?" 'जी नहीं, मेरे सिर में दर्द है ।' मैंने नाराजगी से कहा । 'लाओ, मैं बना लेती हूं।' कहकर वह रसोईघर में चली गई। बहुत देर तक मैं यह सोचती रही कि खत दूं या नहीं ? कहीं दीदी ने ताव में आकर कुछ अनर्थ कर लिया तो ? शर्म के मारे आत्मघात भी कर सकती है। पर मैं आत्मघात की बात से उदास नही हुई, बल्कि मेरे भीतर एक सुख की लहर दौड़ गई । वडी देर की उधेड़-बुन के पश्चात् मुझमे साहस आया। मैंने वह खत बडो नाटकीयता से आहिस्ता-आहिस्ता डरते-डरते सिर झुकाए हुए दोदो के समक्ष पेश कर दिया, 'यह तुम्हारा खत ।' दीदी की भृकुटियाँ तन गईं। चेहरा तनावों से घिर गया । आँखों के नीचे की भावना सहसा गहरी होने लगी । 'यह क्या है ?' उसने तिक्त स्वर में कहा और उसको आग बरसाती दृष्टि मुझ पर जम गई। 'प्रेमपत्र ।' 'तुम्हें कहाँ से मिला ?' 'यही कागजो के बीच ।' 'तुम मेरे कागज संभालती हो ?" 'नही तो, मैं फाइलें साफ कर रही थी। मैंने सहमते-सहमते झूठ बोला । 'अपने को अधिक चालाक समझती हो ?' दीदी ने निचले होंठ को सतह के नीचे का लावा / तैंतालीस अगले दाँत मे दवाकर कहा, 'मैं देख रही हूँ कि इधर तेरी जवानी मौज मार रही है। तू पंख निकाल रही है, पर तुझे तेरी दीदी में अवगुण ढूँढने की असफल चेप्टा नहीं करनी चाहिए। तेरी दीदी नितात सच्चरित्र, सयमी और सादा औरत है। यह प्रेम पत्र मेरा नहीं, मेरे ही नामवाली दसवी कक्षा की छात्रा लक्षणा का है। मेरो ही शिकायत पर उसके माँबाप ने उनका स्कूल छुड़वाया है। जो तड़की किशोरावस्था में ऐसे भयानक प्रेम पत्र लिखती है, वह क्यो नही कुपथ पर डाल दी या चली जाएगी ? मैंने उसके मां-बाप को कह दिया है कि वे जल्द से जल्द इसकी शादी कर दें। स्कूल आना बन्द कर दें ।' एक पश्चात्तापसूचक निःश्वास भरकर दीदी पुनः बोली, 'कैसा जमाना आ गया है ? लडकियां स्कूल मे पढ़ाई कम और प्रेम अधिक करती हैं। पाठ कम और शेर अधिक याद करती हैं। छिः ! यही अनैतिकता और उच्छृंखलता उनके जीवन को बरबाद कर देती है।' दीदी ने अपने स्वर में गर्व भरकर कहा, 'एक तुम हो, जिस पर मुझे ही नहीं, हमारे सारे स्टाफ, मैनेजमेंट और परिचितों को नाज है। तुम्हारी गम्भीरता और शालीनता अनुकरणीय है। तुम्हारा कम बोलना और व्यर्थ का न भटकना एक आदर्श कहलाता है, वर्ना इस उम्र में आज की युवतियाँ बिना लगाम को घोड़ी की तरह हिनहिनाती है और भागती है। जब लोग तुम्हारे स्वभाव, व्यवहार और चरित्र की प्रशंसा करते है तो मेरा मस्तक गौरव से ऊंचा हो जाता है। मुझे गर्व है कि तुमने मेरी शिक्षाओं और आदर्शों का सच्चे दिल से पालन किया है आग लगे आपकी शिक्षाओं को ! -मन-ही-मन में आत सौपि फुत्कार उठी, परन्तु चुपचाप सड़ी रही । 'अब तो कोई अच्छा और योग्य लड़का मिल जाए तो तुम्हारी शादी कर दूं । मुझे हर काम कायदे का पसन्द है ।' मैं तड़प उठी । इतनी सहुई कि मेरी आँखें गजल हो उठी । मेरी आँखों की सजलता मानो कह रही थी, 'तुम मेरी शादी नहीं करोगो । तुम्हें कोई भी लडका पसन्द नहीं आता। तुमने पसन्दगी-नापसन्दगी के चक्कर मे मेरे पच्चीस वर्षों को हत्या कर दो। बाघी उम्र । यौवन से लहकती दहकती आधी उम्र । जरूर में शापिन हूँ । पूर्वजन्म को शापित । चौंतालीस / मेहंदी के फूल इसलिए मुझे तुम्हारी गाजियनशिप मिली। एक नीरस औरत । तृष्णाहीन औरत। तुम्हें कोई लडका पसन्द नही आएगा। तुम्हे यह जमाना भी पसन्द नही आएगा। पर मैं अब यह नहीं सह पाऊँगी, पतई नहीं। मैं कल या एक-दो दिनों में अलग हो जाऊँगी। अब में बालिग हूँ, मेरी दीदी, में एकदम बालिग हूँ। बहुत सहा तुम्हारा विचित्र स्वभाव, अन्याय और आतंक । हाय । कभी-कभी मुझे तुझ पर दया भी आती है। इसलिए में करुणाप्लावित हो जाती हूँ कि इस करोडो इन्सानो के मुल्क में में ही तुम्हारी अकेली साथी हूँ । पर क्या करूं, में महसूम करती हूँ कि जो तुम मुझमें देख रही हो, वह झूठ है। मेरा मन इसके विपरीत वातों में भरा है। दीदो, अब में जाऊँगी - क्योकि अब मुझे अच्छी तरह पता लग गया है कि में धीरे-धीरे जरूर दीदी की तरह बन जाऊंगी या बना दी जाऊँगी, पर मे दीदी नहीं बनना चाहती। कदापि नहीं ! बजर धरती की कोई सायंकता नही। मैं ऐमी धरती बनूंगी जो हरीतिमा कहलाती है- कदम उर्वर और चिन्मय ! मैं अपने भीतर अब एक ज्वालामुखी का अनुभव करती
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से किसान कर्जमाफी पर उठाए जा रहे सवालों के जवाब में बुधवार को यहां कहा कि कर्ज तो शिवराज के भाई और चाचा के लड़के का भी माफ हुआ है। राहुल गांधी ने बुधवार को भिंड, मुरैना और ग्वालियर में जनसभाओं को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमत्री चौहान को आड़े हाथों लिया और कहा, 'मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बताया है कि राज्य में किसानों का कर्ज माफ हुआ है। उनमें चौहान के भाई रोहित सिंह और चाचा के लड़के भी शामिल हैं।' बता दें कि राज्य में कांग्रेस की सरकार दावा कर रही है कि 21 लाख किसानों का दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ हो चुका है, जबकि बीजेपी राज्य सरकार के दावे को झूठा बता रही है। इसी को लेकर गांधी ने जवाब दिया। गांधी ने कर्जमाफी का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ से कहा, 'वह सूची बताइए जो आप मुझे अपने सेल फोन पर दिखा रहे थे, उसमें किसके नाम हैं।' इस पर कमलनाथ ने कहा कि चौहान के भाई रोहित सिंह चौहान और चाचा के लड़के का भी कर्ज माफ हुआ है। राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी के सत्ता में न लौटने का दावा किया, 'नरेंद्र मोदी लौट कर नहीं आ रहे, फ्लॉप शो खत्म, वह घड़ी गई, उनके चेहरे को देख लो, उनकी ऊर्जा को देख लो। उदास से हैं, वह हार रहे हैं चुनाव। इसलिए कांग्रेस को मध्य प्रदेश में पूरी ताकत लगानी है।' गांधी ने एक बार फिर 'चौकीदार चोर है' का नारा दोहराया। उन्होंने राफेल सौदे का जिक्र किया और कहा, 'मेरे पास सबूत है कि चौकीदार चोर है। जब भी बोलता हूं, सबूत लेकर बोलता हूं। फ्रांस के राष्ट्रपति ने बोला था कि हिंदुस्तान के चौकीदार प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे कहा था कि हवाई जहाज भारत में नहीं फ्रांस में बनेगा और 526 करोड़ रुपये का हवाई जहाज नहीं खरीदा जाएगा, 1600 करोड़ रुपये का हवाई जहाज खरीदा जाएगा।' नोटबंदी और जीएसटी से हुई परेशानियों का जिक्र करते हुए गांधी ने कहा, 'नोटबंदी और गब्बर सिंह टैक्स (जीएसटी) के कारण व्यापार बंद हुए। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने माताओं-बहनों से लेकर हर किसी की जेब से पैसा निकाला। इससे देश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई।' गांधी ने आरोप लगाया, 'मोदी ने पांच साल अन्याय की सरकार चलाई और कांग्रेस न्याय की सरकार चलाना चाहती है। इसीलिए न्याय योजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत हिंदुस्तान के सबसे गरीब लोगों के बैंक खातों में सीधे पैसा डाला जाएगा। 72 हजार रुपये साल के और तीन लाख 60 हजार रुपये पांच सालों में डाले जाएंगे। इस योजना से देश के पांच करोड़ परिवारों के 25 करोड़ लोगों को लाभ होगा।' उन्होंने आगे कहा, '72 हजार रुपये का नंबर उनका नहीं बल्कि देश की जनता के दिल का नंबर है। कांग्रेस मन की बात नहीं करेगी, बल्कि देश की जनता के मन की बात सुनेगी।' उन्होंने आगे कहा, 'न्याय योजना से लाखों करोड़ रुपये जैसे ही सबसे गरीब परिवारों के खातों में जाएंगे, वैसे ही खरीददारी शुरू होगी। यह खरीदी दुकानों से होगी, जैसे ही माल बिकना शुरू होगा, फैक्टरी चालू होगी। उसके बाद युवाओं को रोजगार मिलेगा। इस योजना का मकसद गरीबों की मदद तो है ही, साथ में देश की अर्थव्यवस्था को सुधारना भी है।'
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से किसान कर्जमाफी पर उठाए जा रहे सवालों के जवाब में बुधवार को यहां कहा कि कर्ज तो शिवराज के भाई और चाचा के लड़के का भी माफ हुआ है। राहुल गांधी ने बुधवार को भिंड, मुरैना और ग्वालियर में जनसभाओं को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमत्री चौहान को आड़े हाथों लिया और कहा, 'मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बताया है कि राज्य में किसानों का कर्ज माफ हुआ है। उनमें चौहान के भाई रोहित सिंह और चाचा के लड़के भी शामिल हैं।' बता दें कि राज्य में कांग्रेस की सरकार दावा कर रही है कि इक्कीस लाख किसानों का दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ हो चुका है, जबकि बीजेपी राज्य सरकार के दावे को झूठा बता रही है। इसी को लेकर गांधी ने जवाब दिया। गांधी ने कर्जमाफी का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ से कहा, 'वह सूची बताइए जो आप मुझे अपने सेल फोन पर दिखा रहे थे, उसमें किसके नाम हैं।' इस पर कमलनाथ ने कहा कि चौहान के भाई रोहित सिंह चौहान और चाचा के लड़के का भी कर्ज माफ हुआ है। राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी के सत्ता में न लौटने का दावा किया, 'नरेंद्र मोदी लौट कर नहीं आ रहे, फ्लॉप शो खत्म, वह घड़ी गई, उनके चेहरे को देख लो, उनकी ऊर्जा को देख लो। उदास से हैं, वह हार रहे हैं चुनाव। इसलिए कांग्रेस को मध्य प्रदेश में पूरी ताकत लगानी है।' गांधी ने एक बार फिर 'चौकीदार चोर है' का नारा दोहराया। उन्होंने राफेल सौदे का जिक्र किया और कहा, 'मेरे पास सबूत है कि चौकीदार चोर है। जब भी बोलता हूं, सबूत लेकर बोलता हूं। फ्रांस के राष्ट्रपति ने बोला था कि हिंदुस्तान के चौकीदार प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे कहा था कि हवाई जहाज भारत में नहीं फ्रांस में बनेगा और पाँच सौ छब्बीस करोड़ रुपये का हवाई जहाज नहीं खरीदा जाएगा, एक हज़ार छः सौ करोड़ रुपये का हवाई जहाज खरीदा जाएगा।' नोटबंदी और जीएसटी से हुई परेशानियों का जिक्र करते हुए गांधी ने कहा, 'नोटबंदी और गब्बर सिंह टैक्स के कारण व्यापार बंद हुए। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने माताओं-बहनों से लेकर हर किसी की जेब से पैसा निकाला। इससे देश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई।' गांधी ने आरोप लगाया, 'मोदी ने पांच साल अन्याय की सरकार चलाई और कांग्रेस न्याय की सरकार चलाना चाहती है। इसीलिए न्याय योजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत हिंदुस्तान के सबसे गरीब लोगों के बैंक खातों में सीधे पैसा डाला जाएगा। बहत्तर हजार रुपये साल के और तीन लाख साठ हजार रुपये पांच सालों में डाले जाएंगे। इस योजना से देश के पांच करोड़ परिवारों के पच्चीस करोड़ लोगों को लाभ होगा।' उन्होंने आगे कहा, 'बहत्तर हजार रुपये का नंबर उनका नहीं बल्कि देश की जनता के दिल का नंबर है। कांग्रेस मन की बात नहीं करेगी, बल्कि देश की जनता के मन की बात सुनेगी।' उन्होंने आगे कहा, 'न्याय योजना से लाखों करोड़ रुपये जैसे ही सबसे गरीब परिवारों के खातों में जाएंगे, वैसे ही खरीददारी शुरू होगी। यह खरीदी दुकानों से होगी, जैसे ही माल बिकना शुरू होगा, फैक्टरी चालू होगी। उसके बाद युवाओं को रोजगार मिलेगा। इस योजना का मकसद गरीबों की मदद तो है ही, साथ में देश की अर्थव्यवस्था को सुधारना भी है।'
#AbUttarChahiye: बीजेपी सरकार की वापसी के बाद अब नई भर्ती, अनुदेशक, होमगार्ड का समाधान होगा जल्द! प्रदेश में अनुदेशकों में अपने मानदेय को लेकर असंतोष है. वहीं बेरोजगार युवाओं के लिए प्रदेश में नई भर्ती समेत होमगार्डों जैसे कई मसले हैं, जिनका समाधान होने की उम्मीद प्रदेश में बनने जा रही बीजेपी सरकार से की जा रही है. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) हो चुके हैं, नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बंपर जीत मिली है. अब एक बार फिर सरकार बनाने जा रही है (UP Government). ऐसे में अब प्रदेश में पार्टी द्वारा चुनाव के दौरान किए गए वादे पूरा करने का जिम्मा है. प्रदेश में अनुदेशकों में अपने मानदेय को लेकर असंतोष है. वहीं बेरोजगार युवाओं के लिए प्रदेश में नई भर्ती समेत होमगार्डों जैसे कई मसले हैं, जिनका समाधान होने की उम्मीद एक बार फिर यूपी में बनने जा रही बीजेपी सरकार से की जा रही है.
#AbUttarChahiye: बीजेपी सरकार की वापसी के बाद अब नई भर्ती, अनुदेशक, होमगार्ड का समाधान होगा जल्द! प्रदेश में अनुदेशकों में अपने मानदेय को लेकर असंतोष है. वहीं बेरोजगार युवाओं के लिए प्रदेश में नई भर्ती समेत होमगार्डों जैसे कई मसले हैं, जिनका समाधान होने की उम्मीद प्रदेश में बनने जा रही बीजेपी सरकार से की जा रही है. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, नतीजों में भारतीय जनता पार्टी को बंपर जीत मिली है. अब एक बार फिर सरकार बनाने जा रही है . ऐसे में अब प्रदेश में पार्टी द्वारा चुनाव के दौरान किए गए वादे पूरा करने का जिम्मा है. प्रदेश में अनुदेशकों में अपने मानदेय को लेकर असंतोष है. वहीं बेरोजगार युवाओं के लिए प्रदेश में नई भर्ती समेत होमगार्डों जैसे कई मसले हैं, जिनका समाधान होने की उम्मीद एक बार फिर यूपी में बनने जा रही बीजेपी सरकार से की जा रही है.
भिवानी, 13 मई (हप्र) कोरोना महामारी के चलते किसान, मजदूर, गरीब व आम आदमी आर्थिक व चौतरफा हमलों से घिरा हुआ है। यह बात वक्ताओं ने कितलाना टोल पर चल रहे धरने को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि बीमारी के कारण इलाज के अभाव में सैकड़ों की संख्या में लोग दम तोड़ रहे हैं। वहीं, दवाइयां, आक्सीजन बैड सिफारिशों से भी किसी अस्पताल में मुहैया नहीं हो पा रहे हैं। साथ में लॉकडाउन के चलते तमाम रोजी रोटी के काम-धन्धे चौपट हो गए हैं। उन्होंने कहा कि गरीब आदमी की आंखों के सामने अन्धेरा छा गया है। सरकार नकद में गरीब की मदद करने को हरगिज तैयार नहीं लग रही है। दो महीनों के लिए गरीबों को राशन देने की घोषणा हुई है। मजदूर वर्ग ने आजादी के बाद जो अधिकार हासिल किए थे, मोदी सरकार ने पूंजिपतियों के हक में एक ही झटके में छीन लिए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर कितलाना टोल प्लाजा पर चल रहे धरने के 140वें दिन खाप सांगवान चालीस के सचिव नरसिंह डीपीई, किसान सभा के रणधीर कुंगड़, सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ के नरेश शर्मा, जाटू खाप के राजसिंह जताई, संतोष देशवाल, राजबाला कितलाना, चौगामा खाप के मीरसिंह निमड़ीवाली, युवा कल्याण संगठन के सुभाष यादव ने संयुक्त रूप से अध्यक्षता की। धरने का मंच संचालन कामरेड ओमप्रकाश ने किया। गोहाना (निस) : तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त करवाने के लिए बॉर्डरों पर चल रहे धरनों की वीरानी अब टूटने जा रही है। गेहूं के सीजन से फारिग हो चुके किसान दोबारा से बॉर्डरों पर पहुंचने के लिए कमर कस चुके हैं। इस बार वे खाली हाथ नहीं जाएंगे। उनके साथ गेहूं से भरे ट्रैक्टर-ट्रालियां जाएंगे। बृहस्पतिवार को यह जानकारी भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल ने दी। उन्होंने कहा कि बेशक राज्य सरकार कितने भी केस दर्ज कर ले, किसान घबराएंगे नहीं। वे हर हालत में बॉर्डरों के धरनों पर पहुंचेंगे। भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल ने कहा कि अब किसान धरनों पर खाली नहीं जाएंगे। हर गांव ने अपने स्तर पर सभी जातियों से गेहूं इकट्ठा कर रखा है। किसान अपने-अपने गांव से जमा गेहूं ट्रैक्टर-ट्रालियों में भर कर साथ में ले कर जाएंगे।
भिवानी, तेरह मई कोरोना महामारी के चलते किसान, मजदूर, गरीब व आम आदमी आर्थिक व चौतरफा हमलों से घिरा हुआ है। यह बात वक्ताओं ने कितलाना टोल पर चल रहे धरने को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि बीमारी के कारण इलाज के अभाव में सैकड़ों की संख्या में लोग दम तोड़ रहे हैं। वहीं, दवाइयां, आक्सीजन बैड सिफारिशों से भी किसी अस्पताल में मुहैया नहीं हो पा रहे हैं। साथ में लॉकडाउन के चलते तमाम रोजी रोटी के काम-धन्धे चौपट हो गए हैं। उन्होंने कहा कि गरीब आदमी की आंखों के सामने अन्धेरा छा गया है। सरकार नकद में गरीब की मदद करने को हरगिज तैयार नहीं लग रही है। दो महीनों के लिए गरीबों को राशन देने की घोषणा हुई है। मजदूर वर्ग ने आजादी के बाद जो अधिकार हासिल किए थे, मोदी सरकार ने पूंजिपतियों के हक में एक ही झटके में छीन लिए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर कितलाना टोल प्लाजा पर चल रहे धरने के एक सौ चालीसवें दिन खाप सांगवान चालीस के सचिव नरसिंह डीपीई, किसान सभा के रणधीर कुंगड़, सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ के नरेश शर्मा, जाटू खाप के राजसिंह जताई, संतोष देशवाल, राजबाला कितलाना, चौगामा खाप के मीरसिंह निमड़ीवाली, युवा कल्याण संगठन के सुभाष यादव ने संयुक्त रूप से अध्यक्षता की। धरने का मंच संचालन कामरेड ओमप्रकाश ने किया। गोहाना : तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त करवाने के लिए बॉर्डरों पर चल रहे धरनों की वीरानी अब टूटने जा रही है। गेहूं के सीजन से फारिग हो चुके किसान दोबारा से बॉर्डरों पर पहुंचने के लिए कमर कस चुके हैं। इस बार वे खाली हाथ नहीं जाएंगे। उनके साथ गेहूं से भरे ट्रैक्टर-ट्रालियां जाएंगे। बृहस्पतिवार को यह जानकारी भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल ने दी। उन्होंने कहा कि बेशक राज्य सरकार कितने भी केस दर्ज कर ले, किसान घबराएंगे नहीं। वे हर हालत में बॉर्डरों के धरनों पर पहुंचेंगे। भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल ने कहा कि अब किसान धरनों पर खाली नहीं जाएंगे। हर गांव ने अपने स्तर पर सभी जातियों से गेहूं इकट्ठा कर रखा है। किसान अपने-अपने गांव से जमा गेहूं ट्रैक्टर-ट्रालियों में भर कर साथ में ले कर जाएंगे।
हाल ही में हेमा मालिनी ने एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान बताया है कि कैसे एक बार एक डायरेक्टर ने उन्हें अपनी साड़ी का पिन निकालने के लिए कहा था। फिल्म डबल आईस्मार्ट पैन इंडिया रिलीज होगी। हाल ही में अनुष्का शर्मा ने इंस्टाग्राम पर लंदन का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह विराट और वामिका के साथ जमकर मस्ती करती हुईं नजर आ रही हैं। शाहरुख खान की फिल्म 'जवान' का दमदार टीजर रिलीज हो गया है। बवाल 21 जुलाई को अमेजन प्राइम वीडियो पर 200 देशों के लिए स्ट्रीम की जाएगी। फैन्स और सिने लवर्स के बीच जवान को लेकर जोश और हाई हो गया है। कुछ समय पहले एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम सटोरी के जरिए शेयर किया था कि उन्होने ज़ेहान के जन्म के बाद 10 दिनों में 10 किलो वजन कम किया था। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
हाल ही में हेमा मालिनी ने एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान बताया है कि कैसे एक बार एक डायरेक्टर ने उन्हें अपनी साड़ी का पिन निकालने के लिए कहा था। फिल्म डबल आईस्मार्ट पैन इंडिया रिलीज होगी। हाल ही में अनुष्का शर्मा ने इंस्टाग्राम पर लंदन का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह विराट और वामिका के साथ जमकर मस्ती करती हुईं नजर आ रही हैं। शाहरुख खान की फिल्म 'जवान' का दमदार टीजर रिलीज हो गया है। बवाल इक्कीस जुलाई को अमेजन प्राइम वीडियो पर दो सौ देशों के लिए स्ट्रीम की जाएगी। फैन्स और सिने लवर्स के बीच जवान को लेकर जोश और हाई हो गया है। कुछ समय पहले एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम सटोरी के जरिए शेयर किया था कि उन्होने ज़ेहान के जन्म के बाद दस दिनों में दस किलो वजन कम किया था। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
राजस्थान के जोधपुर जिले में दिनदहाड़े गैंगवार की घटना सामने आई है। यहां पर एक गैंग ने फायरिंग करते हुए दूसरे गैंग के मुखिया को गोली मार दी। इसके बाद खून से सनी हालत में बॉडी को बीच सड़क पर छोड़ कर हो गए फरार। मंदिर के बाहर कुछ देर पहले हुई फायरिंग। जोधपुर (jodhpur). राजस्थान में गैंगवार की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गैंगवार की घटनाओं के चलते पुलिस की साख पर बट्टा लग रहा है। अभी कुछ देर पहले ही जोधपुर में भी गैंगवार हुई है और इस गैंगवार में एक बड़ी गैंग के बदमाशों ने दूसरी गैंग के मुखिया को गोली मार दी है। उसके सिर और शरीर के कई हिस्सों में गोलियां लगी है। उसे गंभीर हालत में मथुरादास माथुर अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में भर्ती कराया गया है। ट्रॉमा वार्ड के बाहर बड़ी संख्या में उसके समर्थक जुट गए हैं। पूरे घटनाक्रम की जांच जोधपुर जिले के शास्त्री नगर थाना पुलिस कर रही है । अब पुलिस कुछ जगहों से सीसीटीवी फुटेज तलाश रही है और उसके बाद आरोपियों की तलाश कर रही है। इस फायरिंग के कुछ देर बाद ही सोशल मीडिया पर फायरिंग करने वाली गैंग के बदमाशों ने इस फायरिंग की जिम्मेदारी ली है और उनका कहना है कि यह पिछले दिनों की गई फायरिंग का बदला है। पुलिस ने बताया कि जोधपुर में राकेश मांजू और विक्रम नादिया नाम के दो बड़े हिस्ट्रीशीटर में काफी समय से दुश्मनी चल रही है। आए दिन दोनों गैंग के बदमाश एक दूसरे पर हमला करते रहते हैं और गंभीर मारपीट को अंजाम देते हैं। करीब 2 साल पहले राकेश मंजू ने अपनी गैंग के बदमाशों के साथ मिलकर विक्रम नादिया पर हमला कर दिया था। जिस समय विक्रम पर हमला किया था उस समय विक्रम अपनी कार में अकेला था। उसे घेर कर गोलियां मार दी गई थी, विक्रम को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसकी जान तो बच गई थी लेकिन वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। बताया जा रहा है कि यह हमला उस हमले का बदला लेने के लिए किया गया है। जिस हिस्ट्रीशीटर को गोली मारी गई है उसका नाम राकेश मांजू है। राकेश मंजू पर जोधपुर में कई मुकदमे चल रहे हैं। आज दोपहर में की गई फायरिंग की जिम्मेदारी विक्रम नादिया के साथी बजरंग ने ली है। उसने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली है और लिखा है कि यह विक्रम नादिया पर गोली मारने का बदला है। इस गैंगवार के बाद अब पुलिस को यह टेंशन हो रही है कि राकेश मांजू गैंग के बदमाश इस वारदात का बदला लेने के लिए कोई कोई बड़ा हमला कर सकते हैं । राकेश मांजू और उसकी गैंग 007 नाम से कुख्यात है।
राजस्थान के जोधपुर जिले में दिनदहाड़े गैंगवार की घटना सामने आई है। यहां पर एक गैंग ने फायरिंग करते हुए दूसरे गैंग के मुखिया को गोली मार दी। इसके बाद खून से सनी हालत में बॉडी को बीच सड़क पर छोड़ कर हो गए फरार। मंदिर के बाहर कुछ देर पहले हुई फायरिंग। जोधपुर . राजस्थान में गैंगवार की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गैंगवार की घटनाओं के चलते पुलिस की साख पर बट्टा लग रहा है। अभी कुछ देर पहले ही जोधपुर में भी गैंगवार हुई है और इस गैंगवार में एक बड़ी गैंग के बदमाशों ने दूसरी गैंग के मुखिया को गोली मार दी है। उसके सिर और शरीर के कई हिस्सों में गोलियां लगी है। उसे गंभीर हालत में मथुरादास माथुर अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में भर्ती कराया गया है। ट्रॉमा वार्ड के बाहर बड़ी संख्या में उसके समर्थक जुट गए हैं। पूरे घटनाक्रम की जांच जोधपुर जिले के शास्त्री नगर थाना पुलिस कर रही है । अब पुलिस कुछ जगहों से सीसीटीवी फुटेज तलाश रही है और उसके बाद आरोपियों की तलाश कर रही है। इस फायरिंग के कुछ देर बाद ही सोशल मीडिया पर फायरिंग करने वाली गैंग के बदमाशों ने इस फायरिंग की जिम्मेदारी ली है और उनका कहना है कि यह पिछले दिनों की गई फायरिंग का बदला है। पुलिस ने बताया कि जोधपुर में राकेश मांजू और विक्रम नादिया नाम के दो बड़े हिस्ट्रीशीटर में काफी समय से दुश्मनी चल रही है। आए दिन दोनों गैंग के बदमाश एक दूसरे पर हमला करते रहते हैं और गंभीर मारपीट को अंजाम देते हैं। करीब दो साल पहले राकेश मंजू ने अपनी गैंग के बदमाशों के साथ मिलकर विक्रम नादिया पर हमला कर दिया था। जिस समय विक्रम पर हमला किया था उस समय विक्रम अपनी कार में अकेला था। उसे घेर कर गोलियां मार दी गई थी, विक्रम को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसकी जान तो बच गई थी लेकिन वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। बताया जा रहा है कि यह हमला उस हमले का बदला लेने के लिए किया गया है। जिस हिस्ट्रीशीटर को गोली मारी गई है उसका नाम राकेश मांजू है। राकेश मंजू पर जोधपुर में कई मुकदमे चल रहे हैं। आज दोपहर में की गई फायरिंग की जिम्मेदारी विक्रम नादिया के साथी बजरंग ने ली है। उसने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली है और लिखा है कि यह विक्रम नादिया पर गोली मारने का बदला है। इस गैंगवार के बाद अब पुलिस को यह टेंशन हो रही है कि राकेश मांजू गैंग के बदमाश इस वारदात का बदला लेने के लिए कोई कोई बड़ा हमला कर सकते हैं । राकेश मांजू और उसकी गैंग सात नाम से कुख्यात है।
महाराष्ट्र की सियासत गांधी जयंती के दिन पूरे दिन गर्म धूप से भी ज्यादा गर्म दिखी. मुंबई से लेकर नागपुर और वर्धा तक सियासी संग्राम मचा रहा है. नागपुर में जहां कांग्रेस काटोल से बीजेपी विधायक आशीष देशमुख को इस्तीफा दिलाकर कांग्रेस में शामिल करने की सफल रही, तो वहीं नागपुर में ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस गांधी जयंती पर शांति मार्च में शामिल हुए. कांग्रेस ने महाराष्ट्र के वर्धा में राहुल गांधी, सोनिया गांधी सहित सभी बड़े नेताओं को लाकर कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सभा की. वहीं वर्धा में ही बीजेपी ने कांग्रेस को टक्कर देने के लिए एक शांति मार्च निकालकर विश्व के सबसे बड़े गांधी चरखे का उद्घाटन किया. मुंबई में बीजेपी ने भी गांधी जी के पुराने आश्रम मणी भवन से मंत्रालय तक करीब चार किलोमीटर का मार्च पास्ट निकाला, जिसमें कई मंत्री भी शामिल हुए. लेकिन इन सबके उलट एनसीपी का पूरे महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार के खिलाफ मुंह पर काली पट्टियां बांध गांधी जी के पुतले के पास प्रदर्शन करना सुर्खियों में बना रहा. पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस शरद पवार के मोदी सरकार के तारीफ भरे बयानों से परेशान है. महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी की कई दौर की बैठक हो चुकी है. जब आने वाले समय में कई मुद्दों पर सहमति बनना लगभग तय माना जा रहा था, तभी शरद पवार ने मोदी सरकार की तारीफ की, जिससे सियासी तूफान खड़ा हो गया. अब जब पवार एक तरफ तारीफ में जुटे हैं तो वहीं एनसीपी के तमाम नेता और कार्यकर्ता उसी मोदी सरकार के खिलाफ मुंह पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन कर रहे हैं. यानी कांग्रेस को भी नाराज न करने का प्लान और बीजेपी को भी खुश करने की प्लानिंग. (ये भी पढ़ें- Video: वर्धा में सोनिया और राहुल ने खाने के बाद खुद धोयी अपनी प्लेट) कांग्रेस सहित दूसरे महागठबंधन की पार्टियां एनसीपी और शरद पवार के इस दांव से परेशान हैं और चित्त हो गई हैं. ऐसा न हो कि एनसीपी नेताओं के मुंह से सरकार के खिलाफ लगी पट्टी हटे और फिर बीजेपी सरकार के लिए अच्छे शब्द निकल पड़ें. .
महाराष्ट्र की सियासत गांधी जयंती के दिन पूरे दिन गर्म धूप से भी ज्यादा गर्म दिखी. मुंबई से लेकर नागपुर और वर्धा तक सियासी संग्राम मचा रहा है. नागपुर में जहां कांग्रेस काटोल से बीजेपी विधायक आशीष देशमुख को इस्तीफा दिलाकर कांग्रेस में शामिल करने की सफल रही, तो वहीं नागपुर में ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस गांधी जयंती पर शांति मार्च में शामिल हुए. कांग्रेस ने महाराष्ट्र के वर्धा में राहुल गांधी, सोनिया गांधी सहित सभी बड़े नेताओं को लाकर कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सभा की. वहीं वर्धा में ही बीजेपी ने कांग्रेस को टक्कर देने के लिए एक शांति मार्च निकालकर विश्व के सबसे बड़े गांधी चरखे का उद्घाटन किया. मुंबई में बीजेपी ने भी गांधी जी के पुराने आश्रम मणी भवन से मंत्रालय तक करीब चार किलोमीटर का मार्च पास्ट निकाला, जिसमें कई मंत्री भी शामिल हुए. लेकिन इन सबके उलट एनसीपी का पूरे महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार के खिलाफ मुंह पर काली पट्टियां बांध गांधी जी के पुतले के पास प्रदर्शन करना सुर्खियों में बना रहा. पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस शरद पवार के मोदी सरकार के तारीफ भरे बयानों से परेशान है. महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी की कई दौर की बैठक हो चुकी है. जब आने वाले समय में कई मुद्दों पर सहमति बनना लगभग तय माना जा रहा था, तभी शरद पवार ने मोदी सरकार की तारीफ की, जिससे सियासी तूफान खड़ा हो गया. अब जब पवार एक तरफ तारीफ में जुटे हैं तो वहीं एनसीपी के तमाम नेता और कार्यकर्ता उसी मोदी सरकार के खिलाफ मुंह पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन कर रहे हैं. यानी कांग्रेस को भी नाराज न करने का प्लान और बीजेपी को भी खुश करने की प्लानिंग. कांग्रेस सहित दूसरे महागठबंधन की पार्टियां एनसीपी और शरद पवार के इस दांव से परेशान हैं और चित्त हो गई हैं. ऐसा न हो कि एनसीपी नेताओं के मुंह से सरकार के खिलाफ लगी पट्टी हटे और फिर बीजेपी सरकार के लिए अच्छे शब्द निकल पड़ें. .
बीजेपी ने पश्चिम बंगाल के किले को ध्वस्त करने की रणनीति बना ली है। पार्टी ने एजेंडा भी तय कर लिया है और इसकी झलक शनिवार को कोलकाता में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के भाषण में दिखाई दी। अमित शाह ने ममता और लेफ्ट को एक साथ शिकस्त देने के लिए NRC के मुद्दे को बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है। साथ ही साथ दुर्गा-पूजा और विसर्जन का मुद्दा छेड़ पार्टी के हिंदुत्ववादी पहचान को भी गहराने का प्रयास किया। कोलकाता से चुनावी हुंकार भरते हुए अमित शाह ने ममता बनर्जी को घुसपैठियों का हिमायती करार दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठिए त्रिणमूल कांग्रेस के वोट बैंक है। उन्होंने कहा कि NRC के मुद्दे पर इसीलिए ममता बनर्जी इसका विरोध कर रही हैं। शाह ने घुसपैठियों को पनाह देने में लेफ्ट को भी बराबर का जिम्मेदार ठहराया। साथ ही साथ मुख्य विपक्षी कांग्रेस को भी इसके कटघरे में खड़ा किया। शाह ने ममता सरकार पर आरोप लगाया कि बीजेपी की आवाज जनता तक नहीं पहुंचे इसलिए बंगाली चैनलों को बंद कर दिया है। NRC के मुद्दे पर हंगामे के बाद यह बीजेपी की राज्य में पहली रैली थी। बीजेपी अध्यक्ष ने टीएमसी को एनआरसी के मुद्दे पर जमकर घेरा। अमित शाह ने कहा, "हम बंगाल विरोधी नहीं ममता विरोधी जरूर हैं। संसद के अंदर नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) पर चर्चा हो रही थी। ममता दीदी ने एनआरसी पर विरोध करने का काम किया। असम के अंदर से विदेशी घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर निकालने की प्रक्रिया एनआरसी है। एनआरसी ममताजी आपके रोकने से नहीं रुकेगी। असम के अंदर एनआरसी की प्रक्रिया को हम न्यायिक तरीके से समाप्त करेंगे। ममताजी आप क्यों घुसपैठियों को रखना चाहते हैं। यह घुसपैठिये टीएमसी का वोटबैंक बने हुए हैं। " शाह ने एनआरसी के मुद्दे पर घेरते हुए कहा कि ममता बनर्जी और कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी यह स्पष्ट करें कि आपके लिए देश पहले है या वोटबैंक। बीजेपी अध्यक्ष ने घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने वाले 'असम एकॉर्ड' का भी हवाला पेश किया। उन्होंने कहा कि असम एकॉर्ड को राजीव गांधी ने बनाया। उस समय कांग्रेस को कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन आज वोटबैंक के चक्कर में राहुल गांधी अपना मत स्पष्ट नहीं करते। उन्होंने जनता से पूछा कि बंगाल के अंदर जो बम धमाके होते हैं वह बांग्लादेशी घुसपैठिये करते हैं या नहीं करते हैं. . । इसके बाद उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी यह भ्रांति फैला रही हैं कि एनआरसी के तहत शरणार्थी भी चले जाएंगे लेकिन मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि शरणार्थियों को वापस भेजने का कोई कार्यक्रम नहीं है। शरणार्थियों को यहां रखना भारत सरकार की जिम्मेदारी है। ' दरअसल, शाह के पूरे भाषण के केंद्र में ममता बनर्जी रहीं। उन्होंने टीएमसी प्रमुख को घरेते हुए पूछा कि जब सिटिजनशिप अमेंडमेंट आएगा तो क्या ममता बनर्जी इसका समर्थन करेगी? क्योंकि, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान से सैंकड़ों हिंदू, सिख और दूसरे संप्रदाय के शरणार्थी देश में हैं। क्या उनकी सिटिजनशिप को पुख्ता करने में सहयोग देंगी. . । अमित शाह ने अपने भाषण में दुर्गापूजा और विसर्जन का जिक्र किया। उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि अगर ममता बनर्जी विसर्जन में बाधा डालेंगी तो बीजेपी कार्यकर्ता उनके सचिवालय की ईंट से ईंट बजा देंगे।
बीजेपी ने पश्चिम बंगाल के किले को ध्वस्त करने की रणनीति बना ली है। पार्टी ने एजेंडा भी तय कर लिया है और इसकी झलक शनिवार को कोलकाता में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के भाषण में दिखाई दी। अमित शाह ने ममता और लेफ्ट को एक साथ शिकस्त देने के लिए NRC के मुद्दे को बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है। साथ ही साथ दुर्गा-पूजा और विसर्जन का मुद्दा छेड़ पार्टी के हिंदुत्ववादी पहचान को भी गहराने का प्रयास किया। कोलकाता से चुनावी हुंकार भरते हुए अमित शाह ने ममता बनर्जी को घुसपैठियों का हिमायती करार दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठिए त्रिणमूल कांग्रेस के वोट बैंक है। उन्होंने कहा कि NRC के मुद्दे पर इसीलिए ममता बनर्जी इसका विरोध कर रही हैं। शाह ने घुसपैठियों को पनाह देने में लेफ्ट को भी बराबर का जिम्मेदार ठहराया। साथ ही साथ मुख्य विपक्षी कांग्रेस को भी इसके कटघरे में खड़ा किया। शाह ने ममता सरकार पर आरोप लगाया कि बीजेपी की आवाज जनता तक नहीं पहुंचे इसलिए बंगाली चैनलों को बंद कर दिया है। NRC के मुद्दे पर हंगामे के बाद यह बीजेपी की राज्य में पहली रैली थी। बीजेपी अध्यक्ष ने टीएमसी को एनआरसी के मुद्दे पर जमकर घेरा। अमित शाह ने कहा, "हम बंगाल विरोधी नहीं ममता विरोधी जरूर हैं। संसद के अंदर नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन पर चर्चा हो रही थी। ममता दीदी ने एनआरसी पर विरोध करने का काम किया। असम के अंदर से विदेशी घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर निकालने की प्रक्रिया एनआरसी है। एनआरसी ममताजी आपके रोकने से नहीं रुकेगी। असम के अंदर एनआरसी की प्रक्रिया को हम न्यायिक तरीके से समाप्त करेंगे। ममताजी आप क्यों घुसपैठियों को रखना चाहते हैं। यह घुसपैठिये टीएमसी का वोटबैंक बने हुए हैं। " शाह ने एनआरसी के मुद्दे पर घेरते हुए कहा कि ममता बनर्जी और कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी यह स्पष्ट करें कि आपके लिए देश पहले है या वोटबैंक। बीजेपी अध्यक्ष ने घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने वाले 'असम एकॉर्ड' का भी हवाला पेश किया। उन्होंने कहा कि असम एकॉर्ड को राजीव गांधी ने बनाया। उस समय कांग्रेस को कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन आज वोटबैंक के चक्कर में राहुल गांधी अपना मत स्पष्ट नहीं करते। उन्होंने जनता से पूछा कि बंगाल के अंदर जो बम धमाके होते हैं वह बांग्लादेशी घुसपैठिये करते हैं या नहीं करते हैं. . । इसके बाद उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी यह भ्रांति फैला रही हैं कि एनआरसी के तहत शरणार्थी भी चले जाएंगे लेकिन मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि शरणार्थियों को वापस भेजने का कोई कार्यक्रम नहीं है। शरणार्थियों को यहां रखना भारत सरकार की जिम्मेदारी है। ' दरअसल, शाह के पूरे भाषण के केंद्र में ममता बनर्जी रहीं। उन्होंने टीएमसी प्रमुख को घरेते हुए पूछा कि जब सिटिजनशिप अमेंडमेंट आएगा तो क्या ममता बनर्जी इसका समर्थन करेगी? क्योंकि, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान से सैंकड़ों हिंदू, सिख और दूसरे संप्रदाय के शरणार्थी देश में हैं। क्या उनकी सिटिजनशिप को पुख्ता करने में सहयोग देंगी. . । अमित शाह ने अपने भाषण में दुर्गापूजा और विसर्जन का जिक्र किया। उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि अगर ममता बनर्जी विसर्जन में बाधा डालेंगी तो बीजेपी कार्यकर्ता उनके सचिवालय की ईंट से ईंट बजा देंगे।
दुमका। 167 वां हूल दिवस के मौके पर राष्ट्रीय जनता दल के जिलाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार यादव के नेतृत्व में बुधवार को राजद कार्यकर्ताओं ने पोखरा चौक स्थित सिदो कान्हू के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके बलिदान को याद किया। राजद जिलाध्यक्ष अमरेंद्र यादव ने कहा कि संथाल हूल ही आजादी की पहली लड़ाई था। आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाले आदिवासियों के संघर्ष गाथा और उनके बलिदान को याद करने का यह खास दिन है। सिद्धो-कान्हू, चाँद भैरव, फूलो झानो आदि शहीदों को याद करते हुए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह के प्रतीक के तौर पर हूल दिवस मनाया जाता है। उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। कार्यक्रम में राजद नेता लक्ष्मण पासवान, युवा नेता प्रमोद पंडित, रामसुंदर पंडित, अफरोज आलम, जुलकर अंसारी,सुशील राय, जयदेव गोराई, कंचन यादव, शेष कुमार,अरुण कुमार, बीरेंद्र यादव सहित दर्जनों लोग शामिल थे।
दुमका। एक सौ सरसठ वां हूल दिवस के मौके पर राष्ट्रीय जनता दल के जिलाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार यादव के नेतृत्व में बुधवार को राजद कार्यकर्ताओं ने पोखरा चौक स्थित सिदो कान्हू के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके बलिदान को याद किया। राजद जिलाध्यक्ष अमरेंद्र यादव ने कहा कि संथाल हूल ही आजादी की पहली लड़ाई था। आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाले आदिवासियों के संघर्ष गाथा और उनके बलिदान को याद करने का यह खास दिन है। सिद्धो-कान्हू, चाँद भैरव, फूलो झानो आदि शहीदों को याद करते हुए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह के प्रतीक के तौर पर हूल दिवस मनाया जाता है। उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। कार्यक्रम में राजद नेता लक्ष्मण पासवान, युवा नेता प्रमोद पंडित, रामसुंदर पंडित, अफरोज आलम, जुलकर अंसारी,सुशील राय, जयदेव गोराई, कंचन यादव, शेष कुमार,अरुण कुमार, बीरेंद्र यादव सहित दर्जनों लोग शामिल थे।
DEHRADUN : गर्मियों का सीजन शुरू होते ही लाइन शिफ्टिंग के नाम पर घंटों बिजली कटौती का सिलसिला भी शुरू हो गया है। रात को अगर घंटों तक बिजली जाएगी, तो आपकी रातों की नींद उड़ना लाजिमी है। संडे लेट नाइट अचानक बिजली घंटों तक गायब रही। मंडे मॉर्निग करीब सुबह 6 बजे के आसपास फिर से बिजली घरों में बहाल हो पाई। इस बीच करीब 6 घंटे तक शहरवासियों को बिजली न होने पर प्रॉब्लम झेलनी पड़ी। रात को करीब 11. 30 बजे के करीब बिजली गायब हो गई थी। गर्मी के दिन शुरू होने के बावजूद प्रभावित लोग बगैर पंखे के रातभर सो नहीं पाए, लेकिन मंगलवार रात यानि कि आज रात भी आपको इसी परेशानी से गुजरना पड़ेगा। क्योंकि संडे नाइट लाइनों को उतारा गया। ट्यूजडे नाइट को इन लाइनों पर टावर्स को अधिक ऊंचाई पर शिफ्ट करने का काम किया जाएगा। ऐसे में एक दिन और आपकी रातों का चैन छिन सकता है। दरअसल, इन दिनों आईएसबीटी पर फ्लाई ओवर बनाने का काम चल रहा है। ऐसे में बिजली की हाईटेंशन लाइन भी बदली जानी हैं। ऐसे में पिटकुल ने देर रात से लाइन शिफ्टिंग का काम शुरू किया, जिसके चलते बिजली का शटडाउन लेना पड़ा। 132 केवी माजरा-ऋषिकेश (लालतप्पड़) लाइन में शिफ्टिंग के साथ ही चार टावर हैं। बिजली कर्मचारियों की मानें तो नॉर्मल टावर की हाइट से क्0 मीटर अधिक ऊंचाई तक टावर लगाए जाने हैं। जबकि फ्लाई ओवर की हाइट 8 मीटर है, इससे अधिक ऊंचाई पर टावर्स लगाए जाने हैं। फ्फ् केवी अजबपुर फीडर से जुड़े एरिया- अजबपुर खुर्द, अजबपुर कला, गणेश विहार, सरस्वती विहार, सकलानी कॉलोनी, अपर राजीवनगर, मोहकमपुर, नत्थनपुर बालावाला, नेहरुग्राम-लोअर-अपर, माजरी माफी, राजेश्वरीपुरम, एमडीडीए, टीएचडीसी कॉलोनी, शास्त्रीनगर, दून यूनिवर्सिटी रोड, केदारपुरम, बंगालीकोठी, बंजारावाला, दूधली, दौड़वाला, कारगी आदि। फ्फ् केवी डोईवाला फीडर से जुड़े क्षेत्र- कुआंवाला, डोईवाला, रानीपोखरी,भानियावाला,जौलीग्रांट, हर्रावाला, लच्छीवाला आदि। क्फ्ख् केवी माजरा-ऋषिकेश लाइन के टावरों की ऊंचाई बढ़ाए जाने का काम पिटकुल द्वारा किया जा रहा है। प्रबंध निदेशक एसएस यादव के निर्देशों के बाद पिटकुल के अधिकारियों के द्वारा यह काम रात में किया जा रहा है। हालांकि इस दौरान सुचारू रूप से विद्युत आपूर्ति के लिए दूसरे स्त्रोतों से विद्युत सप्लाई की गई। मंडे नाइट बिजली कटौती नहीं होगी। टावरों को नॉर्मल हाइट से क्0 मीटर अधिक ऊंचाई पर शिफ्ट किया जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि जहां काम चल रहा है, उन्हीं एरिया में बिजली का शटडाउन लिया जाए। ट्यूजडे रात को लाइन शिफ्टिंग के चलते लाइट गुल रहेगी।
DEHRADUN : गर्मियों का सीजन शुरू होते ही लाइन शिफ्टिंग के नाम पर घंटों बिजली कटौती का सिलसिला भी शुरू हो गया है। रात को अगर घंटों तक बिजली जाएगी, तो आपकी रातों की नींद उड़ना लाजिमी है। संडे लेट नाइट अचानक बिजली घंटों तक गायब रही। मंडे मॉर्निग करीब सुबह छः बजे के आसपास फिर से बिजली घरों में बहाल हो पाई। इस बीच करीब छः घंटाटे तक शहरवासियों को बिजली न होने पर प्रॉब्लम झेलनी पड़ी। रात को करीब ग्यारह. तीस बजे के करीब बिजली गायब हो गई थी। गर्मी के दिन शुरू होने के बावजूद प्रभावित लोग बगैर पंखे के रातभर सो नहीं पाए, लेकिन मंगलवार रात यानि कि आज रात भी आपको इसी परेशानी से गुजरना पड़ेगा। क्योंकि संडे नाइट लाइनों को उतारा गया। ट्यूजडे नाइट को इन लाइनों पर टावर्स को अधिक ऊंचाई पर शिफ्ट करने का काम किया जाएगा। ऐसे में एक दिन और आपकी रातों का चैन छिन सकता है। दरअसल, इन दिनों आईएसबीटी पर फ्लाई ओवर बनाने का काम चल रहा है। ऐसे में बिजली की हाईटेंशन लाइन भी बदली जानी हैं। ऐसे में पिटकुल ने देर रात से लाइन शिफ्टिंग का काम शुरू किया, जिसके चलते बिजली का शटडाउन लेना पड़ा। एक सौ बत्तीस केवी माजरा-ऋषिकेश लाइन में शिफ्टिंग के साथ ही चार टावर हैं। बिजली कर्मचारियों की मानें तो नॉर्मल टावर की हाइट से क्शून्य मीटर अधिक ऊंचाई तक टावर लगाए जाने हैं। जबकि फ्लाई ओवर की हाइट आठ मीटर है, इससे अधिक ऊंचाई पर टावर्स लगाए जाने हैं। फ्फ् केवी अजबपुर फीडर से जुड़े एरिया- अजबपुर खुर्द, अजबपुर कला, गणेश विहार, सरस्वती विहार, सकलानी कॉलोनी, अपर राजीवनगर, मोहकमपुर, नत्थनपुर बालावाला, नेहरुग्राम-लोअर-अपर, माजरी माफी, राजेश्वरीपुरम, एमडीडीए, टीएचडीसी कॉलोनी, शास्त्रीनगर, दून यूनिवर्सिटी रोड, केदारपुरम, बंगालीकोठी, बंजारावाला, दूधली, दौड़वाला, कारगी आदि। फ्फ् केवी डोईवाला फीडर से जुड़े क्षेत्र- कुआंवाला, डोईवाला, रानीपोखरी,भानियावाला,जौलीग्रांट, हर्रावाला, लच्छीवाला आदि। क्फ्ख् केवी माजरा-ऋषिकेश लाइन के टावरों की ऊंचाई बढ़ाए जाने का काम पिटकुल द्वारा किया जा रहा है। प्रबंध निदेशक एसएस यादव के निर्देशों के बाद पिटकुल के अधिकारियों के द्वारा यह काम रात में किया जा रहा है। हालांकि इस दौरान सुचारू रूप से विद्युत आपूर्ति के लिए दूसरे स्त्रोतों से विद्युत सप्लाई की गई। मंडे नाइट बिजली कटौती नहीं होगी। टावरों को नॉर्मल हाइट से क्शून्य मीटर अधिक ऊंचाई पर शिफ्ट किया जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि जहां काम चल रहा है, उन्हीं एरिया में बिजली का शटडाउन लिया जाए। ट्यूजडे रात को लाइन शिफ्टिंग के चलते लाइट गुल रहेगी।
बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस (Jacqueline Fernandez) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। एक्ट्रेस पर ED ने बड़ी कार्रवाई की है। मिली जानकारी के अनुसार ED ने जैकलीन फर्नांडिस की 7. 27 करोड़ की संपत्ति जब्त की है। केवल यही नहीं बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ जबरन वसूली मामले में जैकलीन फर्नांडीज की 7. 27 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। आपको बता दें कि ED ने अनुमान लगाया है कि सुकेश ने जबरन वसूली के पैसे का इस्तेमाल कर जैकलीन (Jacqueline Fernandez) को 5. 71 करोड़ रुपये के गिफ्ट दिए थे। साथ ही उन्होंने जैकलीन के परिवार के सदस्यों को करीब 173,000 अमेरिकी डॉलर और करीब 27,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का फंड भी दिया था। मिली जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा हुआ है। सुकेश चंद्रशेखर पर आरोप है कि उसने लोगों को 200 करोड़ रुपए का चूना लगाया और इसमें से कुछ पैसे उसने जैकलीन फर्नांडिस पर उड़ाए है। वहीं Sukesh Chandrashekhar के बारे में बात करें तो वह अभी तिहाड़ जेल में बंद है और उनके मामले में पूछताछ में एक्ट्रेस जैकलीन समेत और भी कुछ बॉलीवुड हस्तियों के नाम बताए गए हैं। बॉलीवुड की गलियों में तो ये भी चर्चें खूब हुए थे कि जैकलीन ने काफी समय तक सुकेश को डेट किया। इन ख़बरों के बीच ही इन दोनों की कई निजी तस्वीरें भी वायरल हुई थी। अब ईडी ने अनुमान लगाया है कि सुकेश ने जबरन वसूली के पैसे का इस्तेमाल कर जैकलीन को 5. 71 करोड़ रुपये का उपहार दिया था। This website uses cookies.
बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। एक्ट्रेस पर ED ने बड़ी कार्रवाई की है। मिली जानकारी के अनुसार ED ने जैकलीन फर्नांडिस की सात. सत्ताईस करोड़ की संपत्ति जब्त की है। केवल यही नहीं बल्कि प्रवर्तन निदेशालय ने सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ जबरन वसूली मामले में जैकलीन फर्नांडीज की सात. सत्ताईस करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। आपको बता दें कि ED ने अनुमान लगाया है कि सुकेश ने जबरन वसूली के पैसे का इस्तेमाल कर जैकलीन को पाँच. इकहत्तर करोड़ रुपये के गिफ्ट दिए थे। साथ ही उन्होंने जैकलीन के परिवार के सदस्यों को करीब एक सौ तिहत्तर,शून्य अमेरिकी डॉलर और करीब सत्ताईस,शून्य ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का फंड भी दिया था। मिली जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा हुआ है। सुकेश चंद्रशेखर पर आरोप है कि उसने लोगों को दो सौ करोड़ रुपए का चूना लगाया और इसमें से कुछ पैसे उसने जैकलीन फर्नांडिस पर उड़ाए है। वहीं Sukesh Chandrashekhar के बारे में बात करें तो वह अभी तिहाड़ जेल में बंद है और उनके मामले में पूछताछ में एक्ट्रेस जैकलीन समेत और भी कुछ बॉलीवुड हस्तियों के नाम बताए गए हैं। बॉलीवुड की गलियों में तो ये भी चर्चें खूब हुए थे कि जैकलीन ने काफी समय तक सुकेश को डेट किया। इन ख़बरों के बीच ही इन दोनों की कई निजी तस्वीरें भी वायरल हुई थी। अब ईडी ने अनुमान लगाया है कि सुकेश ने जबरन वसूली के पैसे का इस्तेमाल कर जैकलीन को पाँच. इकहत्तर करोड़ रुपये का उपहार दिया था। This website uses cookies.
अलवर न्यूज़ः अलवर शहर के एनईबी थाना क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट नगर निवासी एक सरकारी शिक्षक के घर में चोरी हो गई. चोर 15 हजार रुपये नकद, सोने-चांदी के आभूषण चोरी कर ले गये। शिक्षिका रीना चौधरी ने पुलिस को रिपोर्ट दी है कि चोरी 25 जून की रात को हुई थी. वह भरतपुर गयी हुई थी. पीछे से घर पर कोई नहीं था. रात में चोरों ने सूने मकान से नकदी व आभूषण चोरी कर लिए। अलवर शहर में चोरी की वारदातें होने लगी हैं. 26 जून की रात भी तीन घरों में चोरी हुई है. पुलिस का कहना है कि चारों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। जल्द ही चारों को पकड़कर मामले का खुलासा किया जाएगा।
अलवर न्यूज़ः अलवर शहर के एनईबी थाना क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट नगर निवासी एक सरकारी शिक्षक के घर में चोरी हो गई. चोर पंद्रह हजार रुपये नकद, सोने-चांदी के आभूषण चोरी कर ले गये। शिक्षिका रीना चौधरी ने पुलिस को रिपोर्ट दी है कि चोरी पच्चीस जून की रात को हुई थी. वह भरतपुर गयी हुई थी. पीछे से घर पर कोई नहीं था. रात में चोरों ने सूने मकान से नकदी व आभूषण चोरी कर लिए। अलवर शहर में चोरी की वारदातें होने लगी हैं. छब्बीस जून की रात भी तीन घरों में चोरी हुई है. पुलिस का कहना है कि चारों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। जल्द ही चारों को पकड़कर मामले का खुलासा किया जाएगा।
जब घिसते घिसते मै टूट ही गया तो सभी चाबियाँ अविलम्ब दूसरे नये छल्ने में रग्वैलों की तरह अनुस्यूत हो गयीं । मै खंड-खंड हो धूल में मिलता जाता हूँ और ये चाबियाँ नये छलने के घेरे में झूमती, बलखाती बड़ी उत्सुकता मे मेरी शवयाला देख रही हैं। काश ! शक्ति दान और रसदान से पहले ही मैंने इस वास्तविकता का दर्शन कर लिया होता पर कोरे आदर्श की झोंक मे और भावुकता के गरुड़ वेग से आवृत मानब का मन उम क्षण में - यह शान्त एवं तटस्थ चिन्तन कहाँ कर पाता है ? पर, यह भी एक वास्तविकता है कि छल्ला चाबियों के बिना चाबियां छल्ने के बिना अकेले और अपूर्ण से लगते हैं।
जब घिसते घिसते मै टूट ही गया तो सभी चाबियाँ अविलम्ब दूसरे नये छल्ने में रग्वैलों की तरह अनुस्यूत हो गयीं । मै खंड-खंड हो धूल में मिलता जाता हूँ और ये चाबियाँ नये छलने के घेरे में झूमती, बलखाती बड़ी उत्सुकता मे मेरी शवयाला देख रही हैं। काश ! शक्ति दान और रसदान से पहले ही मैंने इस वास्तविकता का दर्शन कर लिया होता पर कोरे आदर्श की झोंक मे और भावुकता के गरुड़ वेग से आवृत मानब का मन उम क्षण में - यह शान्त एवं तटस्थ चिन्तन कहाँ कर पाता है ? पर, यह भी एक वास्तविकता है कि छल्ला चाबियों के बिना चाबियां छल्ने के बिना अकेले और अपूर्ण से लगते हैं।
हैं। खालीपुर और चन्दैनी बेसिनों की ऊंचाई समुद्र धरातल से ६२५ फुट है। चन्दैनी के भर जाने पर पानी उमड़ कर दक्षिण की ओर चलता है। पहले चन्दैनी अपना पानी कोटला फील में डालती थी जिससे कोटला में अधिक पानी हो जाने से बाढ़ के कारण बड़ी कठिनाई हो जाती थी पर चन्दैनी कटान के बन जाने से अब कठिनाई नहीं रह गई है पर फिर भी यदि कोटना में पानी नहीं समा सकता है और उमड़ आता है तो कटान बना कर पांनी उजीना संगेल के मैदान में फेर दिया जाता है जिसका धारतल चन्दैनी से नीचा है और समुद्र घरातल से केवल ६२० फुट ऊंचा है । कोटला झील में सब से प्रसिद्ध प्रवाह दक्षिण की ओर का है जो फीरोजपुर घाटी होकर आता है । इस बाद प्रदेश की मुख्य नदी लन्दोहा है जिससे अलवर पहाड़ियों का समस्त जल आता है। • लन्दोहा की कुल लम्बाई लगभग २१ मील है । पहाड़ियों के पश्चिम बलोज और पूर्व बांगर नदियों का पानी भी कोटला में ही पहुँचता है । जब कभी वर्षा अधिक हो जाती है तो पानी की अधिकता से भरतपुर की सीमा तक के प्रदेश के सरोवर तथा तालाब और नदी नाले भर जाते हैं । गुरगांव जिला पानी के प्रवाह को रोकने के लिये समय समय पर बांध बनाये गये हैं या निचले प्रदेशों का पानी निकालने के लिये प्रवाह क्षेत्र बनाये गये हैं। उत्तरी गुरगाव प्रवाह नजफगढ़ झील का पानी बहाने में सफल नहीं हुआ है। जब कभी भी भीपण वर्षा हो जाती है तो बहुत सी भूमि समस्त साल जलसग्न पड़ी रहती है । पर पानी भरे रहने से लाभ भी हो जाता है। नीची भूमि में अच्छी मिट्टी पड़ जाती है जिससे खेती अच्छी होने लगती है दक्षिणी गुरगांव बाघों से यह लाभ हुआ है कि खलीलपुर झील कभी भी पानी से नहीं डूबती हैं चन्दैनी, कोटला और संगेल-उजीना झीले, साधारण वर्षो में पतझड़ कालने तक में सूख जाती हैं। यद्यपि ये बांध पूर्ण रूप से घाय श्यकतानुसार नहीं बने हैं तो भी इनसे बहुत लाभ हुआ है। इस जिले की भूरचना सिंध-गंगा के मैदान जैसी कछारी मैदानी है । पर इसमें पहाड़ियां हैं जिनकी बनावट प्रस्तरी भूत तथा पेननसुलर चट्टानों की है। यह परिवर्तन कालीन है और अरावली चट्टानों की भांति ही प्रतीत होती हैं। इनमें मध्यम श्रेणी का स्लेट वाला तथा चूने वाला पत्थर पाया जाता है। मिट्टी में सब कहीं चुना रेह, तथा कंकद है । जिले में आम, सुरेलान, विलायती बकायन, रुहीड़ा, ककेड़ो, लसौदा, गूगल, करील, हिन्स, बखा, धौक, केंदू, ढाक, अमिल्तास, सिरिस, शीसम, इमली, विलायती बबूल, जांट, बबूल, खैर, निम्बार या रौंज, नीम, बकाइन, खजूर, ताड़, वैर, करवेरी, कदम, जाल या डोंगर, हिंगू, झाऊ, फराश, गूलर, पीपल, बार, फाफड़ी आदि के वृक्ष तथा पौधे पाए जाते हैं । जिले में वन अधिक नहीं हैं। नूह जैसे निचले प्रदेश में वृत्त बिलकुल नहीं हैं। रेवाड़ी में फरांश बहुत पाया जाता है। कर का वृक्ष सब कहीं गाँवों में पाया जाता है। गुरगांव के दक्षिण-पश्चिम बहुत से गाँवों में फीकर बहुतायत से उगता है । पालवाल तहसील में कीकर लगाया जाता है, और वहाँ उसके वृक्ष लकड़ी के लिये सुरक्षित रक्खे जाते है काबुली कीकर भी बहुत है। गाँवों के भीतर और पड़ोस में नीम, पीपल और पैर के वृक्ष खूप गां करते हैं. खासकर निचले भागों में जहाँ की मिट्टी बलुही है जैसे सुल्तानपुर, सैलानी आदि में खजूर बहुतायत से उगता है पर इसके फल अच्छे नहीं होते हैं जिले के पूर्वी तथा दक्षिणी भाग मे ताड़ी का वृक्ष होता है। पालवाल तहसील में वन कुछ अधिक है क्योंकि वहां के गाँवों के जाट निवासी कुछ भूमि वृक्षों के लिये अलग छोड़ देते. हैं। ऐसे स्थानों को बनी था रिखियां कहते हैं। इन स्थानों पर करील, हीन या फोखार, जाल या डोंगर, शैंक खैर आदि वृक्षं बहुतायत से उगते है । ढाक, गूलर, फाफड़ी और लसोड़ा आदि के वृक्ष
हैं। खालीपुर और चन्दैनी बेसिनों की ऊंचाई समुद्र धरातल से छः सौ पच्चीस फुट है। चन्दैनी के भर जाने पर पानी उमड़ कर दक्षिण की ओर चलता है। पहले चन्दैनी अपना पानी कोटला फील में डालती थी जिससे कोटला में अधिक पानी हो जाने से बाढ़ के कारण बड़ी कठिनाई हो जाती थी पर चन्दैनी कटान के बन जाने से अब कठिनाई नहीं रह गई है पर फिर भी यदि कोटना में पानी नहीं समा सकता है और उमड़ आता है तो कटान बना कर पांनी उजीना संगेल के मैदान में फेर दिया जाता है जिसका धारतल चन्दैनी से नीचा है और समुद्र घरातल से केवल छः सौ बीस फुट ऊंचा है । कोटला झील में सब से प्रसिद्ध प्रवाह दक्षिण की ओर का है जो फीरोजपुर घाटी होकर आता है । इस बाद प्रदेश की मुख्य नदी लन्दोहा है जिससे अलवर पहाड़ियों का समस्त जल आता है। • लन्दोहा की कुल लम्बाई लगभग इक्कीस मील है । पहाड़ियों के पश्चिम बलोज और पूर्व बांगर नदियों का पानी भी कोटला में ही पहुँचता है । जब कभी वर्षा अधिक हो जाती है तो पानी की अधिकता से भरतपुर की सीमा तक के प्रदेश के सरोवर तथा तालाब और नदी नाले भर जाते हैं । गुरगांव जिला पानी के प्रवाह को रोकने के लिये समय समय पर बांध बनाये गये हैं या निचले प्रदेशों का पानी निकालने के लिये प्रवाह क्षेत्र बनाये गये हैं। उत्तरी गुरगाव प्रवाह नजफगढ़ झील का पानी बहाने में सफल नहीं हुआ है। जब कभी भी भीपण वर्षा हो जाती है तो बहुत सी भूमि समस्त साल जलसग्न पड़ी रहती है । पर पानी भरे रहने से लाभ भी हो जाता है। नीची भूमि में अच्छी मिट्टी पड़ जाती है जिससे खेती अच्छी होने लगती है दक्षिणी गुरगांव बाघों से यह लाभ हुआ है कि खलीलपुर झील कभी भी पानी से नहीं डूबती हैं चन्दैनी, कोटला और संगेल-उजीना झीले, साधारण वर्षो में पतझड़ कालने तक में सूख जाती हैं। यद्यपि ये बांध पूर्ण रूप से घाय श्यकतानुसार नहीं बने हैं तो भी इनसे बहुत लाभ हुआ है। इस जिले की भूरचना सिंध-गंगा के मैदान जैसी कछारी मैदानी है । पर इसमें पहाड़ियां हैं जिनकी बनावट प्रस्तरी भूत तथा पेननसुलर चट्टानों की है। यह परिवर्तन कालीन है और अरावली चट्टानों की भांति ही प्रतीत होती हैं। इनमें मध्यम श्रेणी का स्लेट वाला तथा चूने वाला पत्थर पाया जाता है। मिट्टी में सब कहीं चुना रेह, तथा कंकद है । जिले में आम, सुरेलान, विलायती बकायन, रुहीड़ा, ककेड़ो, लसौदा, गूगल, करील, हिन्स, बखा, धौक, केंदू, ढाक, अमिल्तास, सिरिस, शीसम, इमली, विलायती बबूल, जांट, बबूल, खैर, निम्बार या रौंज, नीम, बकाइन, खजूर, ताड़, वैर, करवेरी, कदम, जाल या डोंगर, हिंगू, झाऊ, फराश, गूलर, पीपल, बार, फाफड़ी आदि के वृक्ष तथा पौधे पाए जाते हैं । जिले में वन अधिक नहीं हैं। नूह जैसे निचले प्रदेश में वृत्त बिलकुल नहीं हैं। रेवाड़ी में फरांश बहुत पाया जाता है। कर का वृक्ष सब कहीं गाँवों में पाया जाता है। गुरगांव के दक्षिण-पश्चिम बहुत से गाँवों में फीकर बहुतायत से उगता है । पालवाल तहसील में कीकर लगाया जाता है, और वहाँ उसके वृक्ष लकड़ी के लिये सुरक्षित रक्खे जाते है काबुली कीकर भी बहुत है। गाँवों के भीतर और पड़ोस में नीम, पीपल और पैर के वृक्ष खूप गां करते हैं. खासकर निचले भागों में जहाँ की मिट्टी बलुही है जैसे सुल्तानपुर, सैलानी आदि में खजूर बहुतायत से उगता है पर इसके फल अच्छे नहीं होते हैं जिले के पूर्वी तथा दक्षिणी भाग मे ताड़ी का वृक्ष होता है। पालवाल तहसील में वन कुछ अधिक है क्योंकि वहां के गाँवों के जाट निवासी कुछ भूमि वृक्षों के लिये अलग छोड़ देते. हैं। ऐसे स्थानों को बनी था रिखियां कहते हैं। इन स्थानों पर करील, हीन या फोखार, जाल या डोंगर, शैंक खैर आदि वृक्षं बहुतायत से उगते है । ढाक, गूलर, फाफड़ी और लसोड़ा आदि के वृक्ष
रायपुर, (ब्यूरो छत्तीसगढ़)। भारत-पाकिस्तान युध्द में भारतीय सेना की ऐतिहासिक जीत की 41वीं वर्षगांठ पर नया रायपुर में छत्तीसगढ़ सरकार के खेल और युवा कल्याण विभाग भारतीय सेना के सहयोग से इस महीने की 16 तारीख को हॉफ मैराथन दौड़ के आयोजन की सभी तैयारियां उत्साह के साथ चल रही हैं। इसमें हजारों की संख्या में आम नागरिक और स्कूल बच्चें शामिल होंगे। उनके अलावा बड़ी संख्या में कॉलजों के विद्यार्थी, एन. सी. सी. और एन. एस. एस. के छात्र, भारतीय सेना के जवान तथा राष्टाrय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी इस दौड़ में हिस्सा लेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह तथा खेल और युवा कल्याण मंत्री सुश्री लता उसेण्डी ने सभी लोगों से इस दौड़ में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि 16 दिसम्बर का दिन भारतीय सेना द्वारा हर साल पूरे देश में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। यही वह ऐतिहासिक दिन है, जब 1971 में भारतीय सेना के सामने पाकिस्तानी सेना का एकतरफा आत्म समर्पण हुआ और पूर्वी पाकिस्तान का रूपांतरण एक स्वतंत्र राष्ट बांग्लादेश के रूप में संभव हो सका। भारतीय सेना के छत्तीसगढ़ और ओड़िशा क्षेत्र के रायपुर स्थित मुख्यालय ने इस वर्ष विजय दिवस पर 16 दिसम्बर को छत्तीसगढ़ सरकार और आम नागरिकों के सहयोग से हॉफ मैराथन दौड़ आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह दौड़ नया रायपुर के ग्राम परसदा स्थित पदेश सरकार के अन्तर्राष्ट्रीय त्रिढकेट स्टेडिम में सवेरे आठ बजे शुरू होगी। दौड़ में पत्येक धावक को अलग-अलग चेस्ट नम्बर तथा आयु समूह के हिसाब से अलग-अलग रंग से चिन्हांकित किया जाएगा। हाफ मैराथन आओ दौड़े विजय दिवस के अवसर पर की थीम के साथ आयोजित की जा रही है। महिला वर्ग में 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए 10 किलोमीटर तथा 12 से 18 वर्ष उम्र की बालिकाओं के लिए पांच किलोमीटर की दौड़ का आयोजन किया जाएगा।
रायपुर, । भारत-पाकिस्तान युध्द में भारतीय सेना की ऐतिहासिक जीत की इकतालीसवीं वर्षगांठ पर नया रायपुर में छत्तीसगढ़ सरकार के खेल और युवा कल्याण विभाग भारतीय सेना के सहयोग से इस महीने की सोलह तारीख को हॉफ मैराथन दौड़ के आयोजन की सभी तैयारियां उत्साह के साथ चल रही हैं। इसमें हजारों की संख्या में आम नागरिक और स्कूल बच्चें शामिल होंगे। उनके अलावा बड़ी संख्या में कॉलजों के विद्यार्थी, एन. सी. सी. और एन. एस. एस. के छात्र, भारतीय सेना के जवान तथा राष्टाrय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी इस दौड़ में हिस्सा लेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह तथा खेल और युवा कल्याण मंत्री सुश्री लता उसेण्डी ने सभी लोगों से इस दौड़ में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि सोलह दिसम्बर का दिन भारतीय सेना द्वारा हर साल पूरे देश में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। यही वह ऐतिहासिक दिन है, जब एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में भारतीय सेना के सामने पाकिस्तानी सेना का एकतरफा आत्म समर्पण हुआ और पूर्वी पाकिस्तान का रूपांतरण एक स्वतंत्र राष्ट बांग्लादेश के रूप में संभव हो सका। भारतीय सेना के छत्तीसगढ़ और ओड़िशा क्षेत्र के रायपुर स्थित मुख्यालय ने इस वर्ष विजय दिवस पर सोलह दिसम्बर को छत्तीसगढ़ सरकार और आम नागरिकों के सहयोग से हॉफ मैराथन दौड़ आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह दौड़ नया रायपुर के ग्राम परसदा स्थित पदेश सरकार के अन्तर्राष्ट्रीय त्रिढकेट स्टेडिम में सवेरे आठ बजे शुरू होगी। दौड़ में पत्येक धावक को अलग-अलग चेस्ट नम्बर तथा आयु समूह के हिसाब से अलग-अलग रंग से चिन्हांकित किया जाएगा। हाफ मैराथन आओ दौड़े विजय दिवस के अवसर पर की थीम के साथ आयोजित की जा रही है। महिला वर्ग में अट्ठारह वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए दस किलोग्राममीटर तथा बारह से अट्ठारह वर्ष उम्र की बालिकाओं के लिए पांच किलोमीटर की दौड़ का आयोजन किया जाएगा।
उत्तर भारत में बारिश ने एक बार फिर से दस्तक दी है। इस कारण से मौसम सुहावना बना हुआ है और पारा छह डिग्री तक लुढ़क गया है। बीते सप्ताह तक दिल्ली-एनसीआर में गर्मी लोगों को परेशान करने लगी थी। लेकिन अब पांच मई तक बारिश व तेज हवा का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं हिमाचल और उत्तराखंड में तो बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। कल देर रात भी दिल्ली-एनसीआर में बारिश हुई, जिससे मौसम में ठंडक बढ़ गई। सुबह से चल रही हवाओं ने भी मौसम को नर्म कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार एक मई से नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इस कारण से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में एक मई से तीन मई तक तेज बारिश व बर्फबारी की संभावना है। जबकि उतर भारत के मैदानी इलाकों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश होने की संभावना है। पश्चिमी यूपी और दिल्ली में भी ओलावृष्टि का अलर्ट है। बीते शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर के कुछ इलाकों में बारिश हुई और मौसम सुहावना बना रहा। इस कारण से शनिवार को अधिकतम तापमान सामान्य से छह डिग्री कम 33. 1 व न्यूनतम तापमान सामान्य से दो डिग्री कम 22. 2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अमूमन इस समयावधि में तापमान 40 डिग्री के पार ही रहता है। मौसम विभाग के उपमहानिदेशक डॉ. कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि अभी पश्चिम विक्षोभ के असर से मौसम सुहावना बना हुआ है। वहीं एक मई को एक नया विक्षोभ दस्तक दे रहा है। इसके कारण चार मई तक उत्तर भारत के कई इलाकों में हल्की से तेज बारिश होगी। इस दौरान तेज हवा भी चलेगी। इस कारण से तापमान में भी काफी कमी होगी और तापमान 30 डिग्री तक पहुंच जाएगा। 30-40 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा भी चलेगी। पांच मई तक लगभग ऐसा ही मौसम बना रहेगा। इस दौरान हिमाचल व उत्तराखंड में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहां ओलावृष्टि की भी संभावना है। यदि फिर कोई नया पश्चिमी विक्षोभ आया और उसका असर रहा तो फिर से गर्मी से राहत रहेगी। लेकिन इसके बारे में अभी कहना काफी मुश्किल है।
उत्तर भारत में बारिश ने एक बार फिर से दस्तक दी है। इस कारण से मौसम सुहावना बना हुआ है और पारा छह डिग्री तक लुढ़क गया है। बीते सप्ताह तक दिल्ली-एनसीआर में गर्मी लोगों को परेशान करने लगी थी। लेकिन अब पांच मई तक बारिश व तेज हवा का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं हिमाचल और उत्तराखंड में तो बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। कल देर रात भी दिल्ली-एनसीआर में बारिश हुई, जिससे मौसम में ठंडक बढ़ गई। सुबह से चल रही हवाओं ने भी मौसम को नर्म कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार एक मई से नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इस कारण से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में एक मई से तीन मई तक तेज बारिश व बर्फबारी की संभावना है। जबकि उतर भारत के मैदानी इलाकों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश होने की संभावना है। पश्चिमी यूपी और दिल्ली में भी ओलावृष्टि का अलर्ट है। बीते शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर के कुछ इलाकों में बारिश हुई और मौसम सुहावना बना रहा। इस कारण से शनिवार को अधिकतम तापमान सामान्य से छह डिग्री कम तैंतीस. एक व न्यूनतम तापमान सामान्य से दो डिग्री कम बाईस. दो डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अमूमन इस समयावधि में तापमान चालीस डिग्री के पार ही रहता है। मौसम विभाग के उपमहानिदेशक डॉ. कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि अभी पश्चिम विक्षोभ के असर से मौसम सुहावना बना हुआ है। वहीं एक मई को एक नया विक्षोभ दस्तक दे रहा है। इसके कारण चार मई तक उत्तर भारत के कई इलाकों में हल्की से तेज बारिश होगी। इस दौरान तेज हवा भी चलेगी। इस कारण से तापमान में भी काफी कमी होगी और तापमान तीस डिग्री तक पहुंच जाएगा। तीस-चालीस किलोग्राममीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा भी चलेगी। पांच मई तक लगभग ऐसा ही मौसम बना रहेगा। इस दौरान हिमाचल व उत्तराखंड में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहां ओलावृष्टि की भी संभावना है। यदि फिर कोई नया पश्चिमी विक्षोभ आया और उसका असर रहा तो फिर से गर्मी से राहत रहेगी। लेकिन इसके बारे में अभी कहना काफी मुश्किल है।
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- अक्षय कुमार की 'सूर्यवंशी' में जबरदस्त एक्शन सीन्स की तैयारी- रोहित शेट्टी का धमाका! - Nach Baliye नौ में होगा बवाल, जब नागिन तीन- कुंडली भाग्य के दो सुपरस्टार की होगी एंट्री! - 'भारत' की करोड़ों की कमाई के बाद सलमान करेंगे इस जोड़ी नंबर एक के साथ धमाका ! - Nach Baliye नौ में हिना खान की एंट्री, हर एपिसोड के लिए मिलेगी इतनी फीस,चौंक जायेंगे ! - Bigg Boss तेरह में एंट्री करने के लिए इस स्टार ने किया 'कसौटी जिंदगी की दो' छोड़ने का फैसला ! - सलमान खान के कारण कपिल शर्मा शो ने तोड़ा टीआरपी रिकॅार्ड, चौंकाने वाली रिपोर्ट !
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
जी हां अपनी फिल्म यमला पगला दीवाना 2 का म्यूजिक लॉच करते हुए धर्मेंद्र ने मीडिया से कहा कि मै आपके साथ एक ऐसी बात शेयर करना चाहता हूं जो मैंने पहले कभी नहीं कही है. और वो बात ये है कि मैं इस इंडस्ट्री का नंबर वन डांसर हूं. इस म्यूजिक लॉच सेलिब्रेशन में शाहरुख खान, रितिक रोशन, आमिर खान, जूही चावला, कुणाल कोहली, जेनिलिया डिसूजा, रमेश सिप्पी और राजकुमार संतोषी जैसे सेलिब्रिटीज मौजूद थे. इन सभी ने धर्मेंद्र के इस डिक्लेरेशन को खूब इंज्वॉय किया. यमला पगला दीवाना 2 के म्यूजिक लॉच में धर्मेंद्र बॉलिवुड के सुपर स्टार्स ऋतिक रोशन, शाहरुख खान और आमिर खान के साथ जम कर थिरके. इस फिल्म को संगीत सीवान ने डायरेक्ट किया है. सात जून को रिलीज होने जा रही यमला पगला दीवाना 2 में धर्मेंद्र, सनी और बॉबी तीनों देओल दिखेंगे.
जी हां अपनी फिल्म यमला पगला दीवाना दो का म्यूजिक लॉच करते हुए धर्मेंद्र ने मीडिया से कहा कि मै आपके साथ एक ऐसी बात शेयर करना चाहता हूं जो मैंने पहले कभी नहीं कही है. और वो बात ये है कि मैं इस इंडस्ट्री का नंबर वन डांसर हूं. इस म्यूजिक लॉच सेलिब्रेशन में शाहरुख खान, रितिक रोशन, आमिर खान, जूही चावला, कुणाल कोहली, जेनिलिया डिसूजा, रमेश सिप्पी और राजकुमार संतोषी जैसे सेलिब्रिटीज मौजूद थे. इन सभी ने धर्मेंद्र के इस डिक्लेरेशन को खूब इंज्वॉय किया. यमला पगला दीवाना दो के म्यूजिक लॉच में धर्मेंद्र बॉलिवुड के सुपर स्टार्स ऋतिक रोशन, शाहरुख खान और आमिर खान के साथ जम कर थिरके. इस फिल्म को संगीत सीवान ने डायरेक्ट किया है. सात जून को रिलीज होने जा रही यमला पगला दीवाना दो में धर्मेंद्र, सनी और बॉबी तीनों देओल दिखेंगे.
इतने लंबे समय पहले सबसे लोकप्रिय माना जाता थाटेफ्लॉन पैन, लेकिन आज उन्हें आत्मविश्वास से सिरेमिक कोटिंग के साथ मॉडल की जगह दी गई है। और यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ऐसी कोटिंग मानव स्वास्थ्य के लिए अधिक व्यावहारिक, टिकाऊ और सुरक्षित है। सामान्य तौर पर, यदि आप चुनते हैं, तो सबसे अच्छा विकल्प सिरेमिक फ्राइंग पैन है। समीक्षा से पता चलता है कि इस पर खाना पकाना एक खुशी है, इसके अलावा यह बहुत उपयोगी है, क्योंकि आप वनस्पति तेल को जोड़ने के बिना भून सकते हैं। यह पहले से ही साबित हो चुका है कि क्षतिग्रस्त टेफ्लॉन250C से अधिक हीटिंग मानव स्वास्थ्य रसायनों के लिए असुरक्षित बड़ी मात्रा में आवंटित करने के लिए शुरू होता है। उनमें से कई ट्यूमर के विकास को बढ़ावा दे सकते हैं, कार्डियोवास्कुलर सिस्टम के काम को बाधित कर सकते हैं, मधुमेह के विकास का कारण बन सकते हैं। तो यह आपकी रसोई में एक छोटी सी ऑडिट करने पर विचार कर रहा है, पुराने पैन बाहर फेंक और नए खरीदते हैं। और सबसे अच्छा, यदि कोई नया अधिग्रहण सिरेमिक फ्राइंग पैन है, तो समीक्षा के बारे में जो उनके बहुमत में केवल सकारात्मक हैं खाना पकाने में ऐसी उपयोगी चीजों के मुख्य लाभों पर गौर करेंः तो, अगर आप जल्दी खाना बनाना चाहते हैं औरस्वास्थ्य के लिए सुरक्षित, आपको निश्चित रूप से एक सिरेमिक फ्राइंग पैन की ज़रूरत है कई होस्टेस द्वारा छोड़ी गई समीक्षाएं उज्ज्वल प्रमाण हैं यह ध्यान दिया जाता है कि इस तरह के व्यंजनों में पकाने के लिए यह वास्तव में सरल और त्वरित है। और फिर भी ऐसे अधिग्रहण आंकड़े देखे जाने वालों के लिए उपयोगी साबित होंगे। सब के बाद, अब आप तेल के बिना भून कर सकते हैं, और इसलिए, और बहुत कम कैलोरी का उपभोग। आधुनिक गृहिणियां वास्तविक आनंद का अनुभव करती हैं और यह भूलने की कोशिश करती हैं कि हाल ही में उन्हें टेफ़लॉन के साथ काम करना पड़ता था, जिसके लिए खुद के प्रति विशेष रूप से सावधान रवैये की आवश्यकता होती है।
इतने लंबे समय पहले सबसे लोकप्रिय माना जाता थाटेफ्लॉन पैन, लेकिन आज उन्हें आत्मविश्वास से सिरेमिक कोटिंग के साथ मॉडल की जगह दी गई है। और यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ऐसी कोटिंग मानव स्वास्थ्य के लिए अधिक व्यावहारिक, टिकाऊ और सुरक्षित है। सामान्य तौर पर, यदि आप चुनते हैं, तो सबसे अच्छा विकल्प सिरेमिक फ्राइंग पैन है। समीक्षा से पता चलता है कि इस पर खाना पकाना एक खुशी है, इसके अलावा यह बहुत उपयोगी है, क्योंकि आप वनस्पति तेल को जोड़ने के बिना भून सकते हैं। यह पहले से ही साबित हो चुका है कि क्षतिग्रस्त टेफ्लॉनदो सौ पचास डिग्री सेल्सियस से अधिक हीटिंग मानव स्वास्थ्य रसायनों के लिए असुरक्षित बड़ी मात्रा में आवंटित करने के लिए शुरू होता है। उनमें से कई ट्यूमर के विकास को बढ़ावा दे सकते हैं, कार्डियोवास्कुलर सिस्टम के काम को बाधित कर सकते हैं, मधुमेह के विकास का कारण बन सकते हैं। तो यह आपकी रसोई में एक छोटी सी ऑडिट करने पर विचार कर रहा है, पुराने पैन बाहर फेंक और नए खरीदते हैं। और सबसे अच्छा, यदि कोई नया अधिग्रहण सिरेमिक फ्राइंग पैन है, तो समीक्षा के बारे में जो उनके बहुमत में केवल सकारात्मक हैं खाना पकाने में ऐसी उपयोगी चीजों के मुख्य लाभों पर गौर करेंः तो, अगर आप जल्दी खाना बनाना चाहते हैं औरस्वास्थ्य के लिए सुरक्षित, आपको निश्चित रूप से एक सिरेमिक फ्राइंग पैन की ज़रूरत है कई होस्टेस द्वारा छोड़ी गई समीक्षाएं उज्ज्वल प्रमाण हैं यह ध्यान दिया जाता है कि इस तरह के व्यंजनों में पकाने के लिए यह वास्तव में सरल और त्वरित है। और फिर भी ऐसे अधिग्रहण आंकड़े देखे जाने वालों के लिए उपयोगी साबित होंगे। सब के बाद, अब आप तेल के बिना भून कर सकते हैं, और इसलिए, और बहुत कम कैलोरी का उपभोग। आधुनिक गृहिणियां वास्तविक आनंद का अनुभव करती हैं और यह भूलने की कोशिश करती हैं कि हाल ही में उन्हें टेफ़लॉन के साथ काम करना पड़ता था, जिसके लिए खुद के प्रति विशेष रूप से सावधान रवैये की आवश्यकता होती है।
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। श्रेणीःदक्षिण अमेरिका के देश. बोगोटा कोलोंबिया देश की राजधानी है। बोगोटा International Center श्रेणीःदक्षिण अमेरिका में राजधानियाँ श्रेणीःराजधानी ज़िले और क्षेत्र. जनसंख्या के अनुसार दक्षिण अमेरिकी देशों की सूची और बोगोटा आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। जनसंख्या के अनुसार दक्षिण अमेरिकी देशों की सूची 19 संबंध है और बोगोटा 1 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (19 + 1)। यह लेख जनसंख्या के अनुसार दक्षिण अमेरिकी देशों की सूची और बोगोटा के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। श्रेणीःदक्षिण अमेरिका के देश. बोगोटा कोलोंबिया देश की राजधानी है। बोगोटा International Center श्रेणीःदक्षिण अमेरिका में राजधानियाँ श्रेणीःराजधानी ज़िले और क्षेत्र. जनसंख्या के अनुसार दक्षिण अमेरिकी देशों की सूची और बोगोटा आम में शून्य बातें हैं । जनसंख्या के अनुसार दक्षिण अमेरिकी देशों की सूची उन्नीस संबंध है और बोगोटा एक है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख जनसंख्या के अनुसार दक्षिण अमेरिकी देशों की सूची और बोगोटा के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
मांजरेकर ने कहा आप तीन साढे तीन घंटे के अंदर 10 ओवर की गेंदबाजी करते हैं जो अपने आप में बहुत बड़ी बात है। वहीं अगर जो आप अंत तक बल्लेबाजी करते हैं और नाबाद लौटे हों टीम की पहले बल्लेबाजी करने के दौरान। नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। भारतीय क्रिकेट टीम के आलराउंडर हार्दिक पांड्या ने टी20 क्रिकेट में शानदार वापसी की। उनको आयरलैंड के दौरे पर टीम का कप्तान भी बनाया गया था। अब इंग्लैंड के खिलाफ भी वह पहले टी20 में अर्धशतक बनाने के साथ चार विकेट हासिल करने में कामयाब रहे। इस प्रदर्शन के बाद भी पूर्व ओपनर संजय मांजरेकर ने उनके वनडे खेलने को लेकर संशय जताया है। मांजरेकर ने कहा, मुझे इस बात की चिंता है। मुझे इस बात को लेकर शंका है कि यह एक अच्छा फैसला है लेकिन मुझे लगता नहीं कि वो वेस्टइंडीज का दौरा कर रहे हैं। वनडे खेलने तो नहीं जा रहे जहां तक मुझे याद आता है। 50 ओवर का मुकाबला एक आलराउंडर के लिए बहुत ही ज्यादा मुश्किल होता है, यह आपके अंदर से काफी कुछ निकाल लेता है। Sports 18 से बात करते हुए उन्होंने आगे कहा, "आप तीन साढे तीन घंटे के अंदर 10 ओवर की गेंदबाजी करते हैं, जो अपने आप में बहुत बड़ी बात है। वहीं अगर जो आप अंत तक बल्लेबाजी करते हैं और नाबाद लौटे हों टीम की पहले बल्लेबाजी करने के दौरान। इसके बाद फिर आपको गेंदबाजी करना हो वो 10 ओवर यह आपको शरीर को पूरी तरह से थका देने वाला होगा। " "मुझे याद है जब मैं कपिल देव के साथ खेला करता था तब उन्होंने इस बात को मुझे खुद स्वीकार किया था। उनका कहना था कि जब पहले बल्लेबाजी करते हैं, एक एक रन के दौड़ लगाते हैं और इसके बाद जाकर 10 ओवर की गेंदबाजी करनी हो तो बहुत ज्यादा मेहनत का काम होता है। " "तो मैं इसी बात को लेकर चिंतित हूं कि क्या हार्दिक पांड्या 50 ओवर के मुकाबले में खेल पाएंगे और क्या उनसे 10 ओवर की गेंदबाजी किए जाने की उम्मीद रहेगी। तो फिर ऐसा हो सकता है कि उनसे ये ओवर कराए जाने की सोच ही नहीं होगी। उनकी बल्लेबाजी बहुत हही ज्यादा अच्छी रही है तो हो सकता है कि वह आपकी टीम में बल्लेबाजी आलराउंडर की हैसियत से खेले जो गेंदबाजी करते हुए 5 ओवर कर दे। "
मांजरेकर ने कहा आप तीन साढे तीन घंटे के अंदर दस ओवर की गेंदबाजी करते हैं जो अपने आप में बहुत बड़ी बात है। वहीं अगर जो आप अंत तक बल्लेबाजी करते हैं और नाबाद लौटे हों टीम की पहले बल्लेबाजी करने के दौरान। नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। भारतीय क्रिकेट टीम के आलराउंडर हार्दिक पांड्या ने टीबीस क्रिकेट में शानदार वापसी की। उनको आयरलैंड के दौरे पर टीम का कप्तान भी बनाया गया था। अब इंग्लैंड के खिलाफ भी वह पहले टीबीस में अर्धशतक बनाने के साथ चार विकेट हासिल करने में कामयाब रहे। इस प्रदर्शन के बाद भी पूर्व ओपनर संजय मांजरेकर ने उनके वनडे खेलने को लेकर संशय जताया है। मांजरेकर ने कहा, मुझे इस बात की चिंता है। मुझे इस बात को लेकर शंका है कि यह एक अच्छा फैसला है लेकिन मुझे लगता नहीं कि वो वेस्टइंडीज का दौरा कर रहे हैं। वनडे खेलने तो नहीं जा रहे जहां तक मुझे याद आता है। पचास ओवर का मुकाबला एक आलराउंडर के लिए बहुत ही ज्यादा मुश्किल होता है, यह आपके अंदर से काफी कुछ निकाल लेता है। Sports अट्ठारह से बात करते हुए उन्होंने आगे कहा, "आप तीन साढे तीन घंटे के अंदर दस ओवर की गेंदबाजी करते हैं, जो अपने आप में बहुत बड़ी बात है। वहीं अगर जो आप अंत तक बल्लेबाजी करते हैं और नाबाद लौटे हों टीम की पहले बल्लेबाजी करने के दौरान। इसके बाद फिर आपको गेंदबाजी करना हो वो दस ओवर यह आपको शरीर को पूरी तरह से थका देने वाला होगा। " "मुझे याद है जब मैं कपिल देव के साथ खेला करता था तब उन्होंने इस बात को मुझे खुद स्वीकार किया था। उनका कहना था कि जब पहले बल्लेबाजी करते हैं, एक एक रन के दौड़ लगाते हैं और इसके बाद जाकर दस ओवर की गेंदबाजी करनी हो तो बहुत ज्यादा मेहनत का काम होता है। " "तो मैं इसी बात को लेकर चिंतित हूं कि क्या हार्दिक पांड्या पचास ओवर के मुकाबले में खेल पाएंगे और क्या उनसे दस ओवर की गेंदबाजी किए जाने की उम्मीद रहेगी। तो फिर ऐसा हो सकता है कि उनसे ये ओवर कराए जाने की सोच ही नहीं होगी। उनकी बल्लेबाजी बहुत हही ज्यादा अच्छी रही है तो हो सकता है कि वह आपकी टीम में बल्लेबाजी आलराउंडर की हैसियत से खेले जो गेंदबाजी करते हुए पाँच ओवर कर दे। "
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा आज 31 साल के हो गए हैं। उनका जन्म 31 अप्रैल 1987 को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था। रोहित शर्मा की बात करे तो वो भारतीय टीम में लिमिटेड ओवर्स के बेहतरीन बल्लेबाज माने जाते हैं इसलिए वनडे इंटरनेशनल में उनके नाम एक या दो नहीं बल्कि तीन दोहरे शतक दर्ज हैं। साथ ही एकदिवसीय मैचों में भी रोहित ने अपना लोहा मनवाया है। उनके नाम एकदिवसीय मैचों में सबसे लंबी पारी खेलने का रिकॉर्ड दर्ज है। अपने अब तक के करियर में रोहित 180 वनडे मैच खेल चुके हैं, जिनमें से तीन में उन्होंने दोहरे शतक,17 में शतक और 34 में अर्धशतक लगाए हैं। इस दौरान रोहित ने 44. 5 की औसत से 6,594 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 86. 96 का रहा है। वहीं टी-20 की बात करे तो इसमें भी रोहित ने अपने बल्ले से कई यादगार पारियां खेली हैं रोहित ने 79 टी-20 मैचों में 1852 रन बनाए, जिसमें उन्होंने दो शतक और 14 अर्धशतक लगाए हैं। इन दिनों देश में क्रिकेट के सबसे बड़े त्योहार आईपीएल की धूम मची हुई है, जिसको देखने के लिए हर कोई बेताब हो रहा है। इसी बीच आईपीएल में रोहित शर्मा की कप्तानी में मुंबई की टीम कुछ खास कमाल नहीं दिखा पा रही है। हालांकि हमें ये नहीं भूलना चाहिए की रोहित ने अपनी टीम को तीन बार आईपीएल का खिताब दिलाया है। मौजदा सत्र में टीम ने सात में से सिर्फ दो मैचों में जीत दर्ज की है। हालांंकि 2015 में भी टीम की यही स्थिति थी लेकिन इसके बावजूद रोहित की टीम ने अपने रंग में वापस आते हुए साल 2015 का खिताब जीता। आइपीएल में हिस्सा ले रहे दुनियाभर के खिलाड़ियों में रोहित शर्मा ही एक ऐसे खिलाड़ी हैं, जो चार बार आइपीएल की खिताब जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं। इनमें से तीन बार तो अपनी ही कप्तानी में उन्होंने मुंबई इंडियंस को चैंपियन बनाया है तो एक बार वो बतौर खिलाड़ी के तौर पर भी डेक्कन चार्जर्स का हिस्सा रहे थे जब साल 2009 में डेक्कन चार्जर्स ने आइपीएल का खिताब जीता था। रोहित ने अपनी कप्तानी में मुंबई इंडियंस को साल 2013, 2015 और 2017 में चैंपियन बना चुके हैं। गौरतलब है कि रोहित का करियर हमेशा उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरता रहा है। जब रोहित की असफलताओं का दौर होता था तो टीवी, अखबार, सोशल मीडिया चारो ओर आलोचनाओं का अंबार लग जाता था। लेकिन जैसे ही 'हिटमैन' का बल्ला चलता है ये आलोचक तारीफों के पुल बांधने में लग जाते हैं। कहा जाता है कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है। यही बात रोहित के ऊपर भी लागू होती है वो क्रिकेट के सबसे ज्यादा अनिश्चित खिलाड़ी हैं। कभी वो बिलकुल फॉर्म में नहीं होते तो कभी वनडे मैच में ही दोहरा शतक ठोंक देते हैं।
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा आज इकतीस साल के हो गए हैं। उनका जन्म इकतीस अप्रैल एक हज़ार नौ सौ सत्तासी को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था। रोहित शर्मा की बात करे तो वो भारतीय टीम में लिमिटेड ओवर्स के बेहतरीन बल्लेबाज माने जाते हैं इसलिए वनडे इंटरनेशनल में उनके नाम एक या दो नहीं बल्कि तीन दोहरे शतक दर्ज हैं। साथ ही एकदिवसीय मैचों में भी रोहित ने अपना लोहा मनवाया है। उनके नाम एकदिवसीय मैचों में सबसे लंबी पारी खेलने का रिकॉर्ड दर्ज है। अपने अब तक के करियर में रोहित एक सौ अस्सी वनडे मैच खेल चुके हैं, जिनमें से तीन में उन्होंने दोहरे शतक,सत्रह में शतक और चौंतीस में अर्धशतक लगाए हैं। इस दौरान रोहित ने चौंतालीस. पाँच की औसत से छः,पाँच सौ चौरानवे रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट छियासी. छियानवे का रहा है। वहीं टी-बीस की बात करे तो इसमें भी रोहित ने अपने बल्ले से कई यादगार पारियां खेली हैं रोहित ने उन्यासी टी-बीस मैचों में एक हज़ार आठ सौ बावन रन बनाए, जिसमें उन्होंने दो शतक और चौदह अर्धशतक लगाए हैं। इन दिनों देश में क्रिकेट के सबसे बड़े त्योहार आईपीएल की धूम मची हुई है, जिसको देखने के लिए हर कोई बेताब हो रहा है। इसी बीच आईपीएल में रोहित शर्मा की कप्तानी में मुंबई की टीम कुछ खास कमाल नहीं दिखा पा रही है। हालांकि हमें ये नहीं भूलना चाहिए की रोहित ने अपनी टीम को तीन बार आईपीएल का खिताब दिलाया है। मौजदा सत्र में टीम ने सात में से सिर्फ दो मैचों में जीत दर्ज की है। हालांंकि दो हज़ार पंद्रह में भी टीम की यही स्थिति थी लेकिन इसके बावजूद रोहित की टीम ने अपने रंग में वापस आते हुए साल दो हज़ार पंद्रह का खिताब जीता। आइपीएल में हिस्सा ले रहे दुनियाभर के खिलाड़ियों में रोहित शर्मा ही एक ऐसे खिलाड़ी हैं, जो चार बार आइपीएल की खिताब जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं। इनमें से तीन बार तो अपनी ही कप्तानी में उन्होंने मुंबई इंडियंस को चैंपियन बनाया है तो एक बार वो बतौर खिलाड़ी के तौर पर भी डेक्कन चार्जर्स का हिस्सा रहे थे जब साल दो हज़ार नौ में डेक्कन चार्जर्स ने आइपीएल का खिताब जीता था। रोहित ने अपनी कप्तानी में मुंबई इंडियंस को साल दो हज़ार तेरह, दो हज़ार पंद्रह और दो हज़ार सत्रह में चैंपियन बना चुके हैं। गौरतलब है कि रोहित का करियर हमेशा उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरता रहा है। जब रोहित की असफलताओं का दौर होता था तो टीवी, अखबार, सोशल मीडिया चारो ओर आलोचनाओं का अंबार लग जाता था। लेकिन जैसे ही 'हिटमैन' का बल्ला चलता है ये आलोचक तारीफों के पुल बांधने में लग जाते हैं। कहा जाता है कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है। यही बात रोहित के ऊपर भी लागू होती है वो क्रिकेट के सबसे ज्यादा अनिश्चित खिलाड़ी हैं। कभी वो बिलकुल फॉर्म में नहीं होते तो कभी वनडे मैच में ही दोहरा शतक ठोंक देते हैं।
बॉलीवुड तड़का टीम. मेगास्टार चिरंजीवी साउथ के सबसे प्रसिद्ध स्टार्स में से एक हैं। टॉलीवुड स्टार को पिछले कई सालों में कई विशेषताओं के लिए सम्मानित किया गया है और अब उनकी पुरस्कारों की लिस्ट में एक और अवॉर्ड शामिल हो गया है। चिरंजीवी को सोमवार को फिल्म महोत्सव के दौरान 2022 के इंडियन फिल्म पर्सनैलिटी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस सम्मान से उत्साहित मेगास्टार ने फिल्म इंडस्ट्री और अपने फैंस के प्रति आभार व्यक्त किया। गौरतलब है कि चार दशकों से ज्यादा के एक शानदार फिल्मी करियर में चिरंजीवी ने तेलुगु में 150 से ज्यादा फीचर फिल्मों के साथ-साथ हिंदी, तमिल और कन्नड़ की कुछ फिल्मों में अभिनय किया है। फिल्म महोत्सव में बीते नौ दिन में 282 फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई। महोत्सव में दुनियाभर के 78 देशों से 65 अंतरराष्ट्रीय और 15 भारतीय भाषाओं में 183 अंतरराष्ट्रीय व 97 भारतीय फिल्मों को प्रदर्शित किया गया। 20 से अधिक मास्टरक्लास, इन-कन्वर्सेशन सेशन और सेलेब्रिटी इवेंट्स आयोजित किए गए।
बॉलीवुड तड़का टीम. मेगास्टार चिरंजीवी साउथ के सबसे प्रसिद्ध स्टार्स में से एक हैं। टॉलीवुड स्टार को पिछले कई सालों में कई विशेषताओं के लिए सम्मानित किया गया है और अब उनकी पुरस्कारों की लिस्ट में एक और अवॉर्ड शामिल हो गया है। चिरंजीवी को सोमवार को फिल्म महोत्सव के दौरान दो हज़ार बाईस के इंडियन फिल्म पर्सनैलिटी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस सम्मान से उत्साहित मेगास्टार ने फिल्म इंडस्ट्री और अपने फैंस के प्रति आभार व्यक्त किया। गौरतलब है कि चार दशकों से ज्यादा के एक शानदार फिल्मी करियर में चिरंजीवी ने तेलुगु में एक सौ पचास से ज्यादा फीचर फिल्मों के साथ-साथ हिंदी, तमिल और कन्नड़ की कुछ फिल्मों में अभिनय किया है। फिल्म महोत्सव में बीते नौ दिन में दो सौ बयासी फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई। महोत्सव में दुनियाभर के अठहत्तर देशों से पैंसठ अंतरराष्ट्रीय और पंद्रह भारतीय भाषाओं में एक सौ तिरासी अंतरराष्ट्रीय व सत्तानवे भारतीय फिल्मों को प्रदर्शित किया गया। बीस से अधिक मास्टरक्लास, इन-कन्वर्सेशन सेशन और सेलेब्रिटी इवेंट्स आयोजित किए गए।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की दिल्ली हाईकोर्ट के द्वारा अंतरिम जमानत रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके अलावा पी. चिदंबरम द्वारा सीबीआई हिरासत के खिलाफ दायर याचिका पर अभी सुनवाई नहीं होगी, क्योंकि ये मामला अभी तक लिस्ट नहीं हो पाया है। हालांकि, अभी ईडी की तरफ से जो हलफनामा दायर किया गया है उसपर भी सुनवाई होनी है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पी. चिदंबरम को अंतरिम जमानत ना देने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल की ओर से कहा गया कि हमने इस मामले को मंगलवार (20 अगस्त) को उठाया था, लेकिन तब नहीं सुना गया और अब ये मामला सुनने में आया है। कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर हमें कोर्ट तब सुन लेती तो हमें जमानत मिल जाती। गौरतलब है कि पी. चिदंबरम की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई की गिरफ्तारी, सीबीआई की हिरासत और ईडी मामले में याचिका दायर की गई हैं।
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की दिल्ली हाईकोर्ट के द्वारा अंतरिम जमानत रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके अलावा पी. चिदंबरम द्वारा सीबीआई हिरासत के खिलाफ दायर याचिका पर अभी सुनवाई नहीं होगी, क्योंकि ये मामला अभी तक लिस्ट नहीं हो पाया है। हालांकि, अभी ईडी की तरफ से जो हलफनामा दायर किया गया है उसपर भी सुनवाई होनी है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पी. चिदंबरम को अंतरिम जमानत ना देने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल की ओर से कहा गया कि हमने इस मामले को मंगलवार को उठाया था, लेकिन तब नहीं सुना गया और अब ये मामला सुनने में आया है। कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर हमें कोर्ट तब सुन लेती तो हमें जमानत मिल जाती। गौरतलब है कि पी. चिदंबरम की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई की गिरफ्तारी, सीबीआई की हिरासत और ईडी मामले में याचिका दायर की गई हैं।
पुष्पेंद्र अपने परिवार के साथ हरिद्वार गए थे, वहीं उन्होंने 15 जून को केदारनाथ जाने का प्लान किया। फिर क्या था, बस निकल गए बाबा केदार के पवित्र दर्शनों के लिए। उनके काफिले में 3 गाडिय़ां शामिल थीं, जिसमें कुल 15 लोग गए थे। पर इस यात्रा के बाद उनके साथ केवल 14 लोग ही वापस आए। उनके एक रिलेटिव जिनकी एज 80 साल थी, वह इस मौत के सैलाब में कहीं बिछड़ गए और काफी ढूंढने के बाद भी नहीं मिल पाए। अंततः उनके मिलने की एक उम्मीद के साथ ही पूरा कारवां वापस आ गया। पुष्पेंद्र ने अपनी फैमिली के साथ 16 जून को बाबा केदार के दर्शन किए और वहीं एक होटल में ठहर गए पर 16 जून की रात जब वह डिनर करने जा रहे थे, तभी उन्हें हैलीपैड और पुल के बहने की सूचना मिली। इससे उनका पूरा परिवार सहम गया। ये हालत हो गई कि उस रात परिवार में किसी ने भी खाना नहीं खाया और पूरी रात जागते हुए गुजार दी। इसके बाद जब वह सुबह 6:36 बजे मंदिर की ओर जा रहे थे, तभी उन्हें भगदड़ होती दिखाई दी और पलक झपकते ही वहां के सभी होटल ताश के पत्तों की तरह गिरने लगे। इसी बीच वह अपनी फैमिली के साथ अपने होटल के टॉप फ्लोर पर पहुंच गए। उनके मुताबिक होटल के दो फ्लोर तक मलबा भर चुका था। वह पूरा दिन उस फ्लोर पर ही भगवान का नाम लेते हुए बैठे रहे। रात होने के बाद मलबा कुछ सख्त हो गया और बारिश भी हल्की पड़ गई तो उन्होंने खिड़की से झांककर देखा तो पानी के साथ कुछ चिप्स के पैकेट, मिल्क पैकेट और फ्रूटी की बॉटल्स बहकर आ रही थीं। वही उठाकर बच्चों को दीं। बच्चों को बहुत भूख लगी थी तो इन्हें खाकर ही सुकून मिला। इसके बाद 18 जून की सुबह मौसम साफ हो गया तो सभी लोग निकलकर मंदिर की ओर गए। मंदिर प्रांगण में तो लाशें ही लाशें बिछी हुई थी। यह देखकर हम सभी और डर गए। दरअसल, सभी श्रद्धालुओं को यह बताया गया था कि मंदिर ही सबसे ऊंचाई पर है, जान बचाने के लिए उन्हें वहीं जाना चाहिए। क्योंकि स्थानीय लोग इस सैलाब की वजह केवल गंगा का कटान मान रहे थे। जबकि, त्रासदी यह थी कि मंदिर के पीछे सरोवर ही उफन रहा था, जिसकी वजह से वहां बादल फट गया और भक्तों को यह त्रासदी झेलनी पड़ी। मौसम साफ होने के बाद ही उन्होंने वहां से निकलने का सोचा तो कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें मंदिर के पीछे की नदी पार करने की सलाह दी। क्योंकि वही एक रास्ता बचा था जिंदा निकलने का। इस बीच उन्होंने जिंदा बचने की उम्मीद ही छोड़ दी। पर उनकी बड़ी बेटी हिमानी ने सभी में हिम्मत भरी और दो स्थानीय लोगों की मदद से उन्होंने नदी के किनारों पर रस्सी बंधवाई, पर इससे भी रास्ता पार करना आसान नहीं था। बहाव इतना तेज था कि जिसका भी हाथ रस्सी से छूट रहा था, वह काल के ग्रास में समा जाता था। पुष्पेंद्र कहते हैं कि जो लोग केदारनाथ में बच भी गए थे, रास्ते में रस्सी छूटने से देखते ही देखते बह गए। एक जगह नदी पार करते वक्त बीच में उनकी हिम्मत टूट गई और रस्सी उनके हाथ से छूटने लगी। उनके कंधे पर ही उनकी बेटी नव्या भी बैठी थी, पर उनके साथी हर्षवर्धन ने उन्हें बचा लिया। इसके बाद उन्होंने इस तरह की तकरीबन 5 नदियां क्रॉस कीं और एक घना जंगल भी पार किया। इसके बाद वह मंदिर के पुल के पार आ पाए। यहां से वह फ ाटा पहुंचे और यहां पहुंचकर उन्होंने तीन दिन तक हैलीकॉप्टर से जाने के लिए अपनी बारी का इंतजार किया। जब वह सोनप्रयाग पहुंचे तो उनकी तीन में से एक गाड़ी भी बह चुकी थी। पुष्पेंद्र 22 जून को देर रात अपने घर वीरसावरकर नगर पहुंचे हैं। इस समय उनकी पीठ और पत्नी के पैर में इंजरी है।
पुष्पेंद्र अपने परिवार के साथ हरिद्वार गए थे, वहीं उन्होंने पंद्रह जून को केदारनाथ जाने का प्लान किया। फिर क्या था, बस निकल गए बाबा केदार के पवित्र दर्शनों के लिए। उनके काफिले में तीन गाडिय़ां शामिल थीं, जिसमें कुल पंद्रह लोग गए थे। पर इस यात्रा के बाद उनके साथ केवल चौदह लोग ही वापस आए। उनके एक रिलेटिव जिनकी एज अस्सी साल थी, वह इस मौत के सैलाब में कहीं बिछड़ गए और काफी ढूंढने के बाद भी नहीं मिल पाए। अंततः उनके मिलने की एक उम्मीद के साथ ही पूरा कारवां वापस आ गया। पुष्पेंद्र ने अपनी फैमिली के साथ सोलह जून को बाबा केदार के दर्शन किए और वहीं एक होटल में ठहर गए पर सोलह जून की रात जब वह डिनर करने जा रहे थे, तभी उन्हें हैलीपैड और पुल के बहने की सूचना मिली। इससे उनका पूरा परिवार सहम गया। ये हालत हो गई कि उस रात परिवार में किसी ने भी खाना नहीं खाया और पूरी रात जागते हुए गुजार दी। इसके बाद जब वह सुबह छः:छत्तीस बजे मंदिर की ओर जा रहे थे, तभी उन्हें भगदड़ होती दिखाई दी और पलक झपकते ही वहां के सभी होटल ताश के पत्तों की तरह गिरने लगे। इसी बीच वह अपनी फैमिली के साथ अपने होटल के टॉप फ्लोर पर पहुंच गए। उनके मुताबिक होटल के दो फ्लोर तक मलबा भर चुका था। वह पूरा दिन उस फ्लोर पर ही भगवान का नाम लेते हुए बैठे रहे। रात होने के बाद मलबा कुछ सख्त हो गया और बारिश भी हल्की पड़ गई तो उन्होंने खिड़की से झांककर देखा तो पानी के साथ कुछ चिप्स के पैकेट, मिल्क पैकेट और फ्रूटी की बॉटल्स बहकर आ रही थीं। वही उठाकर बच्चों को दीं। बच्चों को बहुत भूख लगी थी तो इन्हें खाकर ही सुकून मिला। इसके बाद अट्ठारह जून की सुबह मौसम साफ हो गया तो सभी लोग निकलकर मंदिर की ओर गए। मंदिर प्रांगण में तो लाशें ही लाशें बिछी हुई थी। यह देखकर हम सभी और डर गए। दरअसल, सभी श्रद्धालुओं को यह बताया गया था कि मंदिर ही सबसे ऊंचाई पर है, जान बचाने के लिए उन्हें वहीं जाना चाहिए। क्योंकि स्थानीय लोग इस सैलाब की वजह केवल गंगा का कटान मान रहे थे। जबकि, त्रासदी यह थी कि मंदिर के पीछे सरोवर ही उफन रहा था, जिसकी वजह से वहां बादल फट गया और भक्तों को यह त्रासदी झेलनी पड़ी। मौसम साफ होने के बाद ही उन्होंने वहां से निकलने का सोचा तो कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें मंदिर के पीछे की नदी पार करने की सलाह दी। क्योंकि वही एक रास्ता बचा था जिंदा निकलने का। इस बीच उन्होंने जिंदा बचने की उम्मीद ही छोड़ दी। पर उनकी बड़ी बेटी हिमानी ने सभी में हिम्मत भरी और दो स्थानीय लोगों की मदद से उन्होंने नदी के किनारों पर रस्सी बंधवाई, पर इससे भी रास्ता पार करना आसान नहीं था। बहाव इतना तेज था कि जिसका भी हाथ रस्सी से छूट रहा था, वह काल के ग्रास में समा जाता था। पुष्पेंद्र कहते हैं कि जो लोग केदारनाथ में बच भी गए थे, रास्ते में रस्सी छूटने से देखते ही देखते बह गए। एक जगह नदी पार करते वक्त बीच में उनकी हिम्मत टूट गई और रस्सी उनके हाथ से छूटने लगी। उनके कंधे पर ही उनकी बेटी नव्या भी बैठी थी, पर उनके साथी हर्षवर्धन ने उन्हें बचा लिया। इसके बाद उन्होंने इस तरह की तकरीबन पाँच नदियां क्रॉस कीं और एक घना जंगल भी पार किया। इसके बाद वह मंदिर के पुल के पार आ पाए। यहां से वह फ ाटा पहुंचे और यहां पहुंचकर उन्होंने तीन दिन तक हैलीकॉप्टर से जाने के लिए अपनी बारी का इंतजार किया। जब वह सोनप्रयाग पहुंचे तो उनकी तीन में से एक गाड़ी भी बह चुकी थी। पुष्पेंद्र बाईस जून को देर रात अपने घर वीरसावरकर नगर पहुंचे हैं। इस समय उनकी पीठ और पत्नी के पैर में इंजरी है।
UP Board Result 2020: कुछ ही घंटों में 56 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों का इंतजार खत्म होने वाला है। पहली बार यूपी बोर्ड का रिजल्ट लखनऊ से जारी होगा और वर्षों पुरानी परंपरा टूटेगी। सूबे के उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा दोपहर साढ़े बारह बजे दसवीं और बारहवीं कक्षा के नतीजे घोषित करेंगे। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) के आधिकारिक वेबसाइट पर 10वीं और 12वीं कक्षा के परिणाम जारी होंगे। इस साल दसवीं और बारहवीं कक्षा की परीक्षाएं 18 फरवरी में शुरू हुई थीं और 6 मार्च तक चली थी। बोर्ड की परीक्षाएं कोरोना वायरस की वजह से पहले ही पूरी हो गई थीं। लेकिन कोरोना वायरस से रोकथाम के लिए लगे लॉकडाउन की वजह से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी हुई थी। जिसकी वजह से इस साल रिजल्ट की घोषणा में भी देरी हुई है। इस साल ऐसा पहली बार हो रहा है, जब यूपी बोर्ड के दसवीं और बारहवीं के नतीजे प्रयागराज की बजाय लखनऊ से जारी होंगे। परिणाम की घोषणा भी माध्यमिक शिक्षा निदेशक की जगह माध्यमिक शिक्षा मंत्री जारी करेंगे। परिणामों की घोषणा के साथ ही अभ्यर्थी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना दसवीं और बारहवीं का रिजल्ट चेक कर सकते हैं। गौरतलब है कि पिछले साल यूपी बोर्ड ने अप्रैल आखिर में दसवीं और बारहवीं कक्षा का रिजल्ट जारी किया था। दसवीं की परीक्षा में 80. 07 फीसदी विद्यार्थी पास हुए थे। जबकि बारहवीं कक्षा का रिजल्ट 70. 6 फीसदी रहा था। यूपी बोर्ड के अलावा विद्यार्थी अमर उजाला के results. amarujala. comके जरिए भी अपना दसवीं-बारहवीं का रिजल्ट देख सकते हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
UP Board Result दो हज़ार बीस: कुछ ही घंटों में छप्पन लाख से ज्यादा विद्यार्थियों का इंतजार खत्म होने वाला है। पहली बार यूपी बोर्ड का रिजल्ट लखनऊ से जारी होगा और वर्षों पुरानी परंपरा टूटेगी। सूबे के उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा दोपहर साढ़े बारह बजे दसवीं और बारहवीं कक्षा के नतीजे घोषित करेंगे। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के आधिकारिक वेबसाइट पर दसवीं और बारहवीं कक्षा के परिणाम जारी होंगे। इस साल दसवीं और बारहवीं कक्षा की परीक्षाएं अट्ठारह फरवरी में शुरू हुई थीं और छः मार्च तक चली थी। बोर्ड की परीक्षाएं कोरोना वायरस की वजह से पहले ही पूरी हो गई थीं। लेकिन कोरोना वायरस से रोकथाम के लिए लगे लॉकडाउन की वजह से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी हुई थी। जिसकी वजह से इस साल रिजल्ट की घोषणा में भी देरी हुई है। इस साल ऐसा पहली बार हो रहा है, जब यूपी बोर्ड के दसवीं और बारहवीं के नतीजे प्रयागराज की बजाय लखनऊ से जारी होंगे। परिणाम की घोषणा भी माध्यमिक शिक्षा निदेशक की जगह माध्यमिक शिक्षा मंत्री जारी करेंगे। परिणामों की घोषणा के साथ ही अभ्यर्थी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना दसवीं और बारहवीं का रिजल्ट चेक कर सकते हैं। गौरतलब है कि पिछले साल यूपी बोर्ड ने अप्रैल आखिर में दसवीं और बारहवीं कक्षा का रिजल्ट जारी किया था। दसवीं की परीक्षा में अस्सी. सात फीसदी विद्यार्थी पास हुए थे। जबकि बारहवीं कक्षा का रिजल्ट सत्तर. छः फीसदी रहा था। यूपी बोर्ड के अलावा विद्यार्थी अमर उजाला के results. amarujala. comके जरिए भी अपना दसवीं-बारहवीं का रिजल्ट देख सकते हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
NewDelhi : भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) शंकर रॉयचौधरी ने कहा कि पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ जवानों की मौत की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार पर है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार द्वारा सलाह दी जाती है. द टेलीग्राफ से बात करते हुए 18वें थल सेनाध्यक्ष रॉयचौधरी, द वायर के साथ एक साक्षात्कार में जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के खुलासे पर प्रतिक्रिया दे रहे थे. मलिक ने कहा था कि 2019 का पुलवामा हमला, जिसमें विस्फोटकों से लदी एक कार के सीआरपीएफ के काफिले में घुस जाने के बाद 40 जवान शहीद हो गये थे, सरकार की अक्षमता और लापरवाही का परिणाम था. जनरल रॉयचौधरी ने द टेलीग्राफ से कहा, पुलवामा में जानमाल के नुकसान की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार पर है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) द्वारा सलाह दी जाती है. यह एक धक्का था. उन्होंने कहा कि हमले के पीछे खुफिया विफलता के लिए एनएसए अजीत डोभाल को भी 'उनके हिस्से का दोष मिलना चाहिए. जनरल रॉयचौधरी ने अखबार को बताया कि 2,500 से अधिक कर्मचारियों को ले जा रहे 78 वाहनों के काफिले को ऐसे राजमार्ग से नहीं जाना चाहिए था, जो पाकिस्तान सीमा के इतने करीब हो. मलिक ने द वायर को बताया था कि सीआरपीएफ ने जम्मू से श्रीनगर तक सड़क मार्ग से यात्रा करने के बजाय विमान से यात्रा करने का अनुरोध किया था. लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय (तब राजनाथ सिंह के नेतृत्व में था) ने उन्हें विमान प्रदान नहीं किया. सत्यपाल मलिक ने कहा था कि अगर उनके अनुरोध को मान लिया जाता तो मौतों को रोका जा सकता था. जनरल रॉयचौधरी ने इससे सहमति जताई. टेलीग्राफ के अनुसार उन्होंने कहा, 'जम्मू और श्रीनगर के बीच अंतरराज्यीय राजमार्ग पर चल रहे सीआरपीएफ के काफिले पर पुलवामा में मुजाहिदीन के एक समूह ने घात लगाकर हमला किया था. अगर सैनिकों ने हवाई यात्रा की होती, तो जानमाल के नुकसान को टाला जा सकता था. मलिक ने यह भी दावा किया था कि जब उन्होंने उन विफलताओं के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया, जिनके चलते हमला हुआ था तो मोदी ने उन्हें चुप रहने के लिए कहा. उन्होंने बताया था कि एनएसए डोभाल ने भी उन्हें चुप रहने को कहा था. जनरल शंकर रॉयचौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर चलने वाले सभी बड़े वाहनों और काफिलों पर हमेशा हमले का जोखिम रहता है. उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में पुलवामा आतंकी हमला हुआ था, वह हमेशा एक बहुत ही जोखिम भरा क्षेत्र रहा है. उन्होंने द टेलीग्राफ को बताया, 'जम्मू में सांबा (सतवारी हवाईअड्डे से 31 किमी) के साथ जाने वाली सड़क घुसपैठ के कारण हमेशा असुरक्षित रहती है, जो टनलों के जरिये होती है. 1991 और 1992 के बीच जम्मू कश्मीर में 16 कोर की कमान संभालने वाले जनरल ने कहा, अंतरराज्यीय राजमार्ग पर आप जितना अधिक ट्रैफिक ले जाते हैं, आप उन्हें जोखिम में डालते हैं, क्योंकि सीमा पाकिस्तान से बहुत दूर नहीं है. जनरल रॉयचौधरी भी मलिक के इस बयान से सहमत थे कि आतंकी हमला खुफिया तंत्र की विफलता का परिणाम था. मलिक ने कहा था कि हमले में इस्तेमाल विस्फोटक पदार्थ आरडीएक्स पाकिस्तान से आया था, तथ्य यह है कि एक कार जो हमले से पहले कई दिनों तक कश्मीर में 'घूमती' रही और पता ही नहीं चला, वह एक खुफिया तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था की विफलता थी.
NewDelhi : भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल शंकर रॉयचौधरी ने कहा कि पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ जवानों की मौत की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार पर है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार द्वारा सलाह दी जाती है. द टेलीग्राफ से बात करते हुए अट्ठारहवें थल सेनाध्यक्ष रॉयचौधरी, द वायर के साथ एक साक्षात्कार में जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के खुलासे पर प्रतिक्रिया दे रहे थे. मलिक ने कहा था कि दो हज़ार उन्नीस का पुलवामा हमला, जिसमें विस्फोटकों से लदी एक कार के सीआरपीएफ के काफिले में घुस जाने के बाद चालीस जवान शहीद हो गये थे, सरकार की अक्षमता और लापरवाही का परिणाम था. जनरल रॉयचौधरी ने द टेलीग्राफ से कहा, पुलवामा में जानमाल के नुकसान की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार पर है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार द्वारा सलाह दी जाती है. यह एक धक्का था. उन्होंने कहा कि हमले के पीछे खुफिया विफलता के लिए एनएसए अजीत डोभाल को भी 'उनके हिस्से का दोष मिलना चाहिए. जनरल रॉयचौधरी ने अखबार को बताया कि दो,पाँच सौ से अधिक कर्मचारियों को ले जा रहे अठहत्तर वाहनों के काफिले को ऐसे राजमार्ग से नहीं जाना चाहिए था, जो पाकिस्तान सीमा के इतने करीब हो. मलिक ने द वायर को बताया था कि सीआरपीएफ ने जम्मू से श्रीनगर तक सड़क मार्ग से यात्रा करने के बजाय विमान से यात्रा करने का अनुरोध किया था. लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें विमान प्रदान नहीं किया. सत्यपाल मलिक ने कहा था कि अगर उनके अनुरोध को मान लिया जाता तो मौतों को रोका जा सकता था. जनरल रॉयचौधरी ने इससे सहमति जताई. टेलीग्राफ के अनुसार उन्होंने कहा, 'जम्मू और श्रीनगर के बीच अंतरराज्यीय राजमार्ग पर चल रहे सीआरपीएफ के काफिले पर पुलवामा में मुजाहिदीन के एक समूह ने घात लगाकर हमला किया था. अगर सैनिकों ने हवाई यात्रा की होती, तो जानमाल के नुकसान को टाला जा सकता था. मलिक ने यह भी दावा किया था कि जब उन्होंने उन विफलताओं के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया, जिनके चलते हमला हुआ था तो मोदी ने उन्हें चुप रहने के लिए कहा. उन्होंने बताया था कि एनएसए डोभाल ने भी उन्हें चुप रहने को कहा था. जनरल शंकर रॉयचौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर चलने वाले सभी बड़े वाहनों और काफिलों पर हमेशा हमले का जोखिम रहता है. उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में पुलवामा आतंकी हमला हुआ था, वह हमेशा एक बहुत ही जोखिम भरा क्षेत्र रहा है. उन्होंने द टेलीग्राफ को बताया, 'जम्मू में सांबा के साथ जाने वाली सड़क घुसपैठ के कारण हमेशा असुरक्षित रहती है, जो टनलों के जरिये होती है. एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे और एक हज़ार नौ सौ बानवे के बीच जम्मू कश्मीर में सोलह कोर की कमान संभालने वाले जनरल ने कहा, अंतरराज्यीय राजमार्ग पर आप जितना अधिक ट्रैफिक ले जाते हैं, आप उन्हें जोखिम में डालते हैं, क्योंकि सीमा पाकिस्तान से बहुत दूर नहीं है. जनरल रॉयचौधरी भी मलिक के इस बयान से सहमत थे कि आतंकी हमला खुफिया तंत्र की विफलता का परिणाम था. मलिक ने कहा था कि हमले में इस्तेमाल विस्फोटक पदार्थ आरडीएक्स पाकिस्तान से आया था, तथ्य यह है कि एक कार जो हमले से पहले कई दिनों तक कश्मीर में 'घूमती' रही और पता ही नहीं चला, वह एक खुफिया तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था की विफलता थी.
Hot Air Balloon Catches Fire: अमेरिका (America) से सटे मैक्सिको (Mexico City) से एक दिल दहला देने वाले दर्दनाक हादसे का वीडियो सामने आया है, जिसमें एक हॉट एयर बैलून (Hot Air Balloon) में आग लगते देखा जा रहा है. तेजी से वायरल हो रहे इस हादसे के वीडियो में देखा जा सकता है कि, कैसे धधकती आग से खुद को बचाने के लिए यात्री हवा में लहरा रहे बैलून से कूद गए. इस हादसे का वीडियो इंटरनेट हर किसी की हालत खराब कर रहा है. क्षेत्रीय सरकार (government) ने बताया कि, शनिवार (1 अप्रैल) को मेक्सिको सिटी के पास प्रसिद्ध टियोतिहुआकैन पुरातत्व स्थल के ऊपर उड़ रहे एक हॉट एयर बैलून में आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई. वहीं मेक्सिको की सरकार ने एक बयान (statement) में कहा कि, आग लगने के बाद बैलून में सवार यात्री बैलून से कूद गए. इस हादसे में एक बच्चे के झुलसने (child suffered burns) की भी खबर है. Saturday, April 01, 2023, in the morning hours. a hot air balloon catches fire and collapses in Teotihuacan, 2 people are reportedly dead. वीडियो में देखा जा सकता है कि, कैसे नीले और सफेद रंग का एक गुब्बारा हवा में उड़ रहा होता है. इस बीच एकाएक गुब्बारे के निचले हिस्से में लगे बकेट में अचानक आग लग जाती है. इस दौरान हवा लगते ही तेजी से बढ़ती आग धधकने लगती है. इस दौरान यात्रियों में चीख-पुकार मच जाती है और खुद को बचाने के लिए बकेट में सवार यात्री नीचे कूद जाते हैं. वहीं भड़कती आग के बढ़ने से बलून और ऊपर उठने लगता है. मृतकों की पहचान 39 साल की महिला और 50 साल के पुरुष के रूप में हुई है, जिनके नाम नहीं बताए गए हैं. वहीं इस हादसे में एक बच्चे का चेहरा आग से पूरी तरह से झुलस गया था. बताया जा रहा है कि, उसके चेहरे (face) पर सेकंड डिग्री बर्न (minor had suffered second-degree burns) हुआ है. इसके साथ ही उसके दाहिनी फीमर में फ्रैक्चर (fracture of the right femur) भी हुआ है. वहीं अब तक यह नहीं बताया गया है कि, गुब्बारे पर कोई अन्य यात्री था या नहीं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर इस वीडियो को @Lerpc75 नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है. एक मिनट आठ सेकंड के इस वीडियो को देखकर लोगों की हालत खराब हो रही है. मालूम हो कि कई टूर ऑपरेटर लगभग 150 अमेरिकी डॉलर में मेक्सिको सिटी से 45 मील (70 किलोमीटर) उत्तर-पूर्व में टियोतिहुआकैन के के ऊपर हॉट एयर बैलून की उड़ान सेवा प्रदान करते हैं. सूर्य और चंद्रमा के पिरामिड और इसके एवेन्यू ऑफ द डेड के साथ टियोतिहुआकैन एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जो पूर्व-कोलंबियाई काल का एक जीवित स्मारक है.
Hot Air Balloon Catches Fire: अमेरिका से सटे मैक्सिको से एक दिल दहला देने वाले दर्दनाक हादसे का वीडियो सामने आया है, जिसमें एक हॉट एयर बैलून में आग लगते देखा जा रहा है. तेजी से वायरल हो रहे इस हादसे के वीडियो में देखा जा सकता है कि, कैसे धधकती आग से खुद को बचाने के लिए यात्री हवा में लहरा रहे बैलून से कूद गए. इस हादसे का वीडियो इंटरनेट हर किसी की हालत खराब कर रहा है. क्षेत्रीय सरकार ने बताया कि, शनिवार को मेक्सिको सिटी के पास प्रसिद्ध टियोतिहुआकैन पुरातत्व स्थल के ऊपर उड़ रहे एक हॉट एयर बैलून में आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई. वहीं मेक्सिको की सरकार ने एक बयान में कहा कि, आग लगने के बाद बैलून में सवार यात्री बैलून से कूद गए. इस हादसे में एक बच्चे के झुलसने की भी खबर है. Saturday, April एक, दो हज़ार तेईस, in the morning hours. a hot air balloon catches fire and collapses in Teotihuacan, दो people are reportedly dead. वीडियो में देखा जा सकता है कि, कैसे नीले और सफेद रंग का एक गुब्बारा हवा में उड़ रहा होता है. इस बीच एकाएक गुब्बारे के निचले हिस्से में लगे बकेट में अचानक आग लग जाती है. इस दौरान हवा लगते ही तेजी से बढ़ती आग धधकने लगती है. इस दौरान यात्रियों में चीख-पुकार मच जाती है और खुद को बचाने के लिए बकेट में सवार यात्री नीचे कूद जाते हैं. वहीं भड़कती आग के बढ़ने से बलून और ऊपर उठने लगता है. मृतकों की पहचान उनतालीस साल की महिला और पचास साल के पुरुष के रूप में हुई है, जिनके नाम नहीं बताए गए हैं. वहीं इस हादसे में एक बच्चे का चेहरा आग से पूरी तरह से झुलस गया था. बताया जा रहा है कि, उसके चेहरे पर सेकंड डिग्री बर्न हुआ है. इसके साथ ही उसके दाहिनी फीमर में फ्रैक्चर भी हुआ है. वहीं अब तक यह नहीं बताया गया है कि, गुब्बारे पर कोई अन्य यात्री था या नहीं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर इस वीडियो को @Lerpcपचहत्तर नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है. एक मिनट आठ सेकंड के इस वीडियो को देखकर लोगों की हालत खराब हो रही है. मालूम हो कि कई टूर ऑपरेटर लगभग एक सौ पचास अमेरिकी डॉलर में मेक्सिको सिटी से पैंतालीस मील उत्तर-पूर्व में टियोतिहुआकैन के के ऊपर हॉट एयर बैलून की उड़ान सेवा प्रदान करते हैं. सूर्य और चंद्रमा के पिरामिड और इसके एवेन्यू ऑफ द डेड के साथ टियोतिहुआकैन एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जो पूर्व-कोलंबियाई काल का एक जीवित स्मारक है.
कोरोना वायरस से पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी बुरा हाल है. कोरोना वायरस से पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी बुरा हाल है. पाक में राजनेता के बाद अब क्रिकेट के खिलाडी भी चपेट में आए हैं. पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर खिलाड़ी शाहिद अफरीदी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं. ये बात खुद उन्होंने सोशल मीडिया पर कही है. शाहिद अफरीदी ने ट्वीट करते हुए लिखा है, 'मैं गुरुवार से अस्वस्थ महसूस कर रहा हूं, मेरा शरीर बुरी तरह से दर्द कर रहा था. मेरा कोरोना परीक्षण करवाया और दुर्भाग्य से मैं सकारात्मक हूं। शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना की आवश्यकता है, इंशाअल्लाह'
कोरोना वायरस से पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी बुरा हाल है. कोरोना वायरस से पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी बुरा हाल है. पाक में राजनेता के बाद अब क्रिकेट के खिलाडी भी चपेट में आए हैं. पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर खिलाड़ी शाहिद अफरीदी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं. ये बात खुद उन्होंने सोशल मीडिया पर कही है. शाहिद अफरीदी ने ट्वीट करते हुए लिखा है, 'मैं गुरुवार से अस्वस्थ महसूस कर रहा हूं, मेरा शरीर बुरी तरह से दर्द कर रहा था. मेरा कोरोना परीक्षण करवाया और दुर्भाग्य से मैं सकारात्मक हूं। शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना की आवश्यकता है, इंशाअल्लाह'
शाहजहांपुर जिले में दवा व्यापारी द्वारा परिवार समेत आत्महत्या करने के मामले में मरने से पूर्व मृतक अखिलेश की पत्नी और सूदखोर की बातचीत का कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसमें महिला मकान खाली करने के लिए कुछ घंटो की मोहलत मांगती है पर आरोपी सूदखोर मोहलत देने को तैयार नहीं होता है। पुलिस ने शनिवार को बताया कि वह इस वायरल ऑडियो की जांच कर रही हैं । उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी की वजह से सात जून को परिवार के चार सदस्यों ने कथित तौर पर कच्चे कटरा इलाके स्थित अपने घर में कथित तौर पर फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। इस मामले में आत्महत्या वाले दिन ही दवा व्यवसाई अखिलेश गुप्ता की पत्नी रेशु के पास सूदखोर (ब्याज पर पैसे देने वाला) अविनाश बाजपेई फोन करता है और दोनों के बीच 5 मिनट 10 सेकंड बात होती है। रेशु फोन पर बराबर कुछ घंटों की मोहलत मकान खाली करने के लिए मांगती रही परंतु सूदखोर कथित तौर पर उसे वक्त नहीं देता है । पुलिस अधीक्षक एस आनंद ने शनिवार को 'पीटीआई भाषा' को बताया वायरल ऑडियो कब्जे में ले लिया गया है,और उसे विवेचना में शामिल किया जा रहा है । आरोपी सूदखोर अविनाश बाजपेई को पुलिस ने पहले ही गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया है तथा उसके अन्य साथियों की तलाश की जा रही है। इस मामले में शनिवार को जिले के प्रभारी मंत्री (उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री) कपिल देव ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर कहा कि मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है सभी दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी । वैश्य एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमंत गुप्ता ने पीड़ित परिवार से मिलने के बाद मांग की कि पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए एवं आरोपियों पर रासुका के तहत कार्रवाई की जाए । इससे पूर्व सपा जिला अध्यक्ष तनवीर खा ने भी पीड़ित परिवार के घर पर जाकर उनसे मुलाकात की थी और सीबीआई जांच कराने की मांग की थी। पुलिस अधीक्षक (एसपी) एस. आनंद के अनुसार शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित कच्चे कटरा मोहल्ले में रहने वाले अखिलेश गुप्ता (42), उनकी पत्नी रेशु गुप्ता (39), बेटे शिवांग (12) और बेटी हर्षिता (9) के शव उनके घर में फांसी से लटकते पाए गए थे। एसपी ने कहा यह मामला तब सामने आया जब किसी ने अखिलेश को उनके मोबाइल पर फोन करने की कोशिश की और जब फोन नहीं उठा तो वह उनके घर गया। अखिलेश ने मृत्यु से पूर्व लिखे गए सुसाइड नोट में अपनी आर्थिक तंगी एवं कर्जे से परेशान होने के चलते आत्महत्या जैसा कदम उठाने की बात लिखी थी । पुलिस ने कहा कि ऐसा लगता है कि दंपत्ति ने पहले अपने बच्चों को फंदे से लटकाकर मारा और फिर खुदकुशी कर ली। उन्होंने कहा कि शवों को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।
शाहजहांपुर जिले में दवा व्यापारी द्वारा परिवार समेत आत्महत्या करने के मामले में मरने से पूर्व मृतक अखिलेश की पत्नी और सूदखोर की बातचीत का कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसमें महिला मकान खाली करने के लिए कुछ घंटो की मोहलत मांगती है पर आरोपी सूदखोर मोहलत देने को तैयार नहीं होता है। पुलिस ने शनिवार को बताया कि वह इस वायरल ऑडियो की जांच कर रही हैं । उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी की वजह से सात जून को परिवार के चार सदस्यों ने कथित तौर पर कच्चे कटरा इलाके स्थित अपने घर में कथित तौर पर फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। इस मामले में आत्महत्या वाले दिन ही दवा व्यवसाई अखिलेश गुप्ता की पत्नी रेशु के पास सूदखोर अविनाश बाजपेई फोन करता है और दोनों के बीच पाँच मिनट दस सेकंड बात होती है। रेशु फोन पर बराबर कुछ घंटों की मोहलत मकान खाली करने के लिए मांगती रही परंतु सूदखोर कथित तौर पर उसे वक्त नहीं देता है । पुलिस अधीक्षक एस आनंद ने शनिवार को 'पीटीआई भाषा' को बताया वायरल ऑडियो कब्जे में ले लिया गया है,और उसे विवेचना में शामिल किया जा रहा है । आरोपी सूदखोर अविनाश बाजपेई को पुलिस ने पहले ही गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया है तथा उसके अन्य साथियों की तलाश की जा रही है। इस मामले में शनिवार को जिले के प्रभारी मंत्री कपिल देव ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर कहा कि मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है सभी दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी । वैश्य एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमंत गुप्ता ने पीड़ित परिवार से मिलने के बाद मांग की कि पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए एवं आरोपियों पर रासुका के तहत कार्रवाई की जाए । इससे पूर्व सपा जिला अध्यक्ष तनवीर खा ने भी पीड़ित परिवार के घर पर जाकर उनसे मुलाकात की थी और सीबीआई जांच कराने की मांग की थी। पुलिस अधीक्षक एस. आनंद के अनुसार शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित कच्चे कटरा मोहल्ले में रहने वाले अखिलेश गुप्ता , उनकी पत्नी रेशु गुप्ता , बेटे शिवांग और बेटी हर्षिता के शव उनके घर में फांसी से लटकते पाए गए थे। एसपी ने कहा यह मामला तब सामने आया जब किसी ने अखिलेश को उनके मोबाइल पर फोन करने की कोशिश की और जब फोन नहीं उठा तो वह उनके घर गया। अखिलेश ने मृत्यु से पूर्व लिखे गए सुसाइड नोट में अपनी आर्थिक तंगी एवं कर्जे से परेशान होने के चलते आत्महत्या जैसा कदम उठाने की बात लिखी थी । पुलिस ने कहा कि ऐसा लगता है कि दंपत्ति ने पहले अपने बच्चों को फंदे से लटकाकर मारा और फिर खुदकुशी कर ली। उन्होंने कहा कि शवों को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।
हैदराबादः ऐसा लगता है कि टीएस असेंबली पोल में भाजपा को करारी शिकस्त मिलने के बाद, गोशालामहल के विधायक, राजा सिंह ने गोहत्या के मुद्दे को उजागर करने का फैसला किया है। ऐसे ही एक प्रयास में, सिंह ने गायों को ले जाने वाली एक वैन को रोका है। द हंस इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को उन्होंने एक डीसीएम वैन को रोका, जो गायों को ले जा रही थी। यह घटना उस क्षेत्र में हुई जो शमीरपेट पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है। पुलिस ने वैन के क्लीनर को हिरासत में ले लिया और जांच शुरू कर दी।
हैदराबादः ऐसा लगता है कि टीएस असेंबली पोल में भाजपा को करारी शिकस्त मिलने के बाद, गोशालामहल के विधायक, राजा सिंह ने गोहत्या के मुद्दे को उजागर करने का फैसला किया है। ऐसे ही एक प्रयास में, सिंह ने गायों को ले जाने वाली एक वैन को रोका है। द हंस इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को उन्होंने एक डीसीएम वैन को रोका, जो गायों को ले जा रही थी। यह घटना उस क्षेत्र में हुई जो शमीरपेट पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है। पुलिस ने वैन के क्लीनर को हिरासत में ले लिया और जांच शुरू कर दी।
रायपुर। बस्तर के भीतर सलवा जुडूम आंदोलन के बाद उससे निकले युवाओं ने नक्सलियों के खिलाफ बंदूक थामकर सरकार लिए काम करना शुरू किया था. सरकार ने ऐसे आदिवासी युवाओं को पुलिस विभाग में बतौर विशेष पुलिस अधिकारी एसपीओ पद नियुक्त किया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह नियुक्ति रद्द कर दी गई थी. बाद में फिर कुछ युवाओं को सरकार ने सहायक आरक्षक बनाया. सरकार की ओर आश्वसान दिया गया कि धीरे-धीरे सभी जुडूम आंदोलन से जुड़े रहे युवाओं को नौकरी दी जाएगी. लेकिन 2008 के बाद से ज्यादातर आदिवासी युवा जो एसपीओ थे सब अब बेरोजगार हो गए हैं. आज ऐसे पीड़ित आदिवासी बस्तर बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के साथ रायपुर पहुंचे. रायपुर में पत्रकारों से चर्चा में पीड़ितों ने कहा कि आज उनके सामने बेरोजगारी की संकट के साथ नक्सलियों से जान का खतरा है. क्योंकि वे गांव लौट के जा नहीं सकते क्योंकि गांव लौटने पर नक्सली प्रताड़ित करते हैं, उन्हें मारने की धमकी देते हैं. बीजापुर की रहने वाली दिव्यांग सिरीमनी कहती है कि 2005 वो एसपीओ बनी. सरकार की ओर से बंदूक थामकर नक्सलियों खिलाफ लड़ी. लेकिन काम के दौरान दोनों पैर टूट गए और वे अपाहिज हो गईं. उन्हें दुर्घटना मुआवजा और 2 साल का वेतन अब तक नहीं मिला है. बीजापुर की रहने वाली गीता और जीवन लाल की आप बिती भी कुछ इसी तरह की है. गीता कहती है सरकार ने उन्हें विशेष पुलिस अधिकारी बनाकर नक्सलियों के खिलाफ लड़ने को तैयार किया. कुछ साल नौकरी करती रही. फिर नौकरी चली गई और कोई रोजगार है नहीं. वे अपने गांव अब लौट सकती नहीं, क्योंकि वहां नक्सलियों की प्रताड़ना का शिकार वो जाएंगी. नक्सली जान से मारने की धमकी देत हैं. वहीं जीवन लाल कहता है कि आज बस्तर के भीतर एसपीओ बनकर नौकरी करने वाले उनके जैसे युवाओं की स्थिति बेहद खराब है. वे आज दो पाटों के बीच पीसने को मजबूर है. सरकार की ओर से मदद मिल नहीं रही है. और नक्सली उनके जान के दुश्मन बने हुए हैं. वे बस्तर के प्रशासन के समक्ष गुहार लग चुके हैं, सरकार के प्रतनिधियों से मिलकर मदद मांग चुके हैं, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिल रह. बस्तर बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्य डॉ. संकेत ठाकुर ने सरकार पर आरोप लगाया है कि आज बस्तर के भीतर 10 हजार आदिवासी विशेष पुलिस अधिकारी बनने के बाद बेरोजगार हो गए हैं. इसके साथ ही आदिवासियों पर प्रताड़ना कम नहीं हो रहा है. यौन प्रताड़ना छात्राओं के साथ लगातार हो रही है.
रायपुर। बस्तर के भीतर सलवा जुडूम आंदोलन के बाद उससे निकले युवाओं ने नक्सलियों के खिलाफ बंदूक थामकर सरकार लिए काम करना शुरू किया था. सरकार ने ऐसे आदिवासी युवाओं को पुलिस विभाग में बतौर विशेष पुलिस अधिकारी एसपीओ पद नियुक्त किया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह नियुक्ति रद्द कर दी गई थी. बाद में फिर कुछ युवाओं को सरकार ने सहायक आरक्षक बनाया. सरकार की ओर आश्वसान दिया गया कि धीरे-धीरे सभी जुडूम आंदोलन से जुड़े रहे युवाओं को नौकरी दी जाएगी. लेकिन दो हज़ार आठ के बाद से ज्यादातर आदिवासी युवा जो एसपीओ थे सब अब बेरोजगार हो गए हैं. आज ऐसे पीड़ित आदिवासी बस्तर बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के साथ रायपुर पहुंचे. रायपुर में पत्रकारों से चर्चा में पीड़ितों ने कहा कि आज उनके सामने बेरोजगारी की संकट के साथ नक्सलियों से जान का खतरा है. क्योंकि वे गांव लौट के जा नहीं सकते क्योंकि गांव लौटने पर नक्सली प्रताड़ित करते हैं, उन्हें मारने की धमकी देते हैं. बीजापुर की रहने वाली दिव्यांग सिरीमनी कहती है कि दो हज़ार पाँच वो एसपीओ बनी. सरकार की ओर से बंदूक थामकर नक्सलियों खिलाफ लड़ी. लेकिन काम के दौरान दोनों पैर टूट गए और वे अपाहिज हो गईं. उन्हें दुर्घटना मुआवजा और दो साल का वेतन अब तक नहीं मिला है. बीजापुर की रहने वाली गीता और जीवन लाल की आप बिती भी कुछ इसी तरह की है. गीता कहती है सरकार ने उन्हें विशेष पुलिस अधिकारी बनाकर नक्सलियों के खिलाफ लड़ने को तैयार किया. कुछ साल नौकरी करती रही. फिर नौकरी चली गई और कोई रोजगार है नहीं. वे अपने गांव अब लौट सकती नहीं, क्योंकि वहां नक्सलियों की प्रताड़ना का शिकार वो जाएंगी. नक्सली जान से मारने की धमकी देत हैं. वहीं जीवन लाल कहता है कि आज बस्तर के भीतर एसपीओ बनकर नौकरी करने वाले उनके जैसे युवाओं की स्थिति बेहद खराब है. वे आज दो पाटों के बीच पीसने को मजबूर है. सरकार की ओर से मदद मिल नहीं रही है. और नक्सली उनके जान के दुश्मन बने हुए हैं. वे बस्तर के प्रशासन के समक्ष गुहार लग चुके हैं, सरकार के प्रतनिधियों से मिलकर मदद मांग चुके हैं, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिल रह. बस्तर बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्य डॉ. संकेत ठाकुर ने सरकार पर आरोप लगाया है कि आज बस्तर के भीतर दस हजार आदिवासी विशेष पुलिस अधिकारी बनने के बाद बेरोजगार हो गए हैं. इसके साथ ही आदिवासियों पर प्रताड़ना कम नहीं हो रहा है. यौन प्रताड़ना छात्राओं के साथ लगातार हो रही है.
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बुधवार को हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने वाले वाहन में बैठकर संसद पहुंचे। उनके इस कदम की पूरे देश में चर्चा हो रही है। फिलहाल देशभर में लोग उनकी कार को लेकर पूरी जानकारी हासिल करने में जुटे हैं। हालांकि, गडकरी ने इस कार के इस्तेमाल से सिर्फ ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल का संदेश ही नहीं दिया है, बल्कि अगर वृहद परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो उनका यह कदम भारत सरकार के ग्रीन एनर्जी के विकल्पों पर बदलते रुख को भी दिखाता है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री जापानी कंपनी टोयोटा के मिराई वाहन में बैठकर संसद पहुंचे। इसमें तीन हाइड्रोजन टैंक्स हैं, जो कि किसी आम पेट्रोल वाहन की तरह महज पांच मिनट में ही रिफिल हो जाते हैं। वाहन को संचालित करने के लिए जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-डीजल) से चलने वाली मोटर की जगह 1. 24 kWh लिथियम आयन बैटरी पैक है। कार को ताकतवर बनाने के लिए 182 हॉर्सपावर की इलेक्ट्रिक मोटर है। हाइड्रोजन चालित वाहन में बैठकर संसद पहुंचने के बाद गडकरी के दफ्तर की तरफ से माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट कू पर पोस्ट में कहा गया- "केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी आज हाइड्रोजन आधारित फ्यूल सेल से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन (एफसीईवी) में बैठकर संसद भवन पहुंचे। ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली कार का प्रदर्शन कर गडकरी जी ने हाइड्रोजन और एफसीईवी तकनीक और इसके फायदों को लेकर जागरूकता फैलाने का काम किया, ताकि भारत में भी हाइड्रोजन आधारित समाज को बढ़ावा दिया जा सके। " गौरतलब है कि इससे पहले भी नितिन गडकरी ने गोवा में कहा था कि वे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ऐसे वाहन का इस्तेमाल शुरू करेंगे जो ग्रीन हाइड्रोजन पर चलता होगा। उन्होंने कहा था कि इसके लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ग्रीन हाइड्रोजन की सप्लाई सुनिश्चित करेगा। बाकी इलेक्ट्रिक वाहनों से कैसे अलग है गडकरी की कार, सरकार के रुख में क्या है बदलाव? गौरतलब है कि केंद्र सरकार जीवाश्म ईंधन यानी पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों के प्रयोग को धीरे-धीरे कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा के ज्यादा से ज्यादा प्रयोग पर जोर देती रही है। हालांकि, हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों का जिक्र सरकार की ओर से कम ही किया गया है। यहां तक कि बजट में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से बैटरी स्वैपिंग यानी बैटरी चार्जिंग स्टेशन पर बैटरी चार्ज करने की सुविधा का जिक्र किया था, लेकिन हाइड्रोजन चालित वाहनों की बात नहीं रखी थी। हालांकि, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी कई अलग मौकों पर हाइड्रोजन चालित वाहनों का ही जिक्र करते रहे हैं। अब एक बार फिर हाइड्रोजन चालित कार को संसद ले जाकर उन्होंने सरकार की बदलती नीति पर रुख स्पष्ट किया है। ऐसे में यह जानना अहम है कि केंद्र सरकार अब तक किस तरह के इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग का जिक्र करती रही है और आखिर पारंपरिक ईवी और हाइड्रोजन सेल्स से चलने वाले वाहनों में आधारभूत अंतर क्या है? इलेक्ट्रिक वाहनों की कितनी कैटेगरी? स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन मुख्य तौर पर चार वर्गों में बंटे हैं। 1. पारंपरिक हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (एचईवी) 2. प्लग-इन हाइब्रिड वाहन (पीएचईवी) 3. 4. फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल (एफसीईवी) सरकार का रुख किन वाहनों की तरफ झुका? गौरतलब है कि सरकार की तरफ से अब तक जिन वाहनों का ज्यादातर प्रचार देखने को मिला है, वह बैटरी पावर्ड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (बीईवी) रहे हैं। यानी ऐसे वाहन जो पारंपरिक बैटरी चार्जिंग तकनीक से चलते हैं। हालांकि, गडकरी की ओर से पेश हुआ हाइड्रोजन से चलने वाला वाहन एक फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल (एफसीईवी) है। यानी पारंपरिक स्वच्छ ऊर्जा वाहनों से उलट इसमें चार्जिंग की जरूरत नहीं होती, बल्कि इन्हें जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहनों की तरह ही तुरंत ग्रीन हाइड्रोजन यानी स्वच्छ ईंधन भरकर चलाया जा सकता है। गडकरी की ओर से पेश की गई टोयोटा की मिराई एक एफसीईवी तकनीक पर चलने वाली कार है, जो कि हाइड्रोजन गैस से चलती है। इस ग्रीन फ्यूल को ऊर्जा में कन्वर्ट करने के लिए कार में इलेक्ट्रिक मोटर भी मौजूद रहती है। एफसीईवी में हाइड्रोजन फ्यूल जब वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन के साथ मिलाकर बिजली पैदा करता है तो यही बिजली वाहनों की इलेक्ट्रिक मोटर को ऊर्जा देती है। फिलहाल हॉन्डा की क्लैरिटी और ह्युंडई की नेक्सो भी इसी तकनीक पर काम करने वाली दो और हाइड्रोजन कारें हैं। बैटरी पावर्ड व्हीकल या हाइड्रोजन चालित कारें, जानें कौन बेहतर? सरकार के रुख में बदलाव की एक बड़ी वजह यह है कि जहां हाइड्रोजन से चलने वाली एफसीईवी सीधा ग्रीन फ्यूल से चलती हैं तो वहीं बैटरी से चलने वाली बीईवी चार्जिंग की बदौलत काम करती हैं। अब जहां एक एफसीईवी को ईंधन भरवाने में सिर्फ कुछ मिनटों का ही समय लगता है, तो वहीं बैटरी वाले वाहन को चार्जिंग में ही कम से कम 30 से 45 मिनट तक लग जाते हैं।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बुधवार को हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने वाले वाहन में बैठकर संसद पहुंचे। उनके इस कदम की पूरे देश में चर्चा हो रही है। फिलहाल देशभर में लोग उनकी कार को लेकर पूरी जानकारी हासिल करने में जुटे हैं। हालांकि, गडकरी ने इस कार के इस्तेमाल से सिर्फ ग्रीन एनर्जी के इस्तेमाल का संदेश ही नहीं दिया है, बल्कि अगर वृहद परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो उनका यह कदम भारत सरकार के ग्रीन एनर्जी के विकल्पों पर बदलते रुख को भी दिखाता है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री जापानी कंपनी टोयोटा के मिराई वाहन में बैठकर संसद पहुंचे। इसमें तीन हाइड्रोजन टैंक्स हैं, जो कि किसी आम पेट्रोल वाहन की तरह महज पांच मिनट में ही रिफिल हो जाते हैं। वाहन को संचालित करने के लिए जीवाश्म ईंधन से चलने वाली मोटर की जगह एक. चौबीस किलोवाट-घंटा लिथियम आयन बैटरी पैक है। कार को ताकतवर बनाने के लिए एक सौ बयासी हॉर्सपावर की इलेक्ट्रिक मोटर है। हाइड्रोजन चालित वाहन में बैठकर संसद पहुंचने के बाद गडकरी के दफ्तर की तरफ से माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट कू पर पोस्ट में कहा गया- "केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी आज हाइड्रोजन आधारित फ्यूल सेल से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन में बैठकर संसद भवन पहुंचे। ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली कार का प्रदर्शन कर गडकरी जी ने हाइड्रोजन और एफसीईवी तकनीक और इसके फायदों को लेकर जागरूकता फैलाने का काम किया, ताकि भारत में भी हाइड्रोजन आधारित समाज को बढ़ावा दिया जा सके। " गौरतलब है कि इससे पहले भी नितिन गडकरी ने गोवा में कहा था कि वे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ऐसे वाहन का इस्तेमाल शुरू करेंगे जो ग्रीन हाइड्रोजन पर चलता होगा। उन्होंने कहा था कि इसके लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ग्रीन हाइड्रोजन की सप्लाई सुनिश्चित करेगा। बाकी इलेक्ट्रिक वाहनों से कैसे अलग है गडकरी की कार, सरकार के रुख में क्या है बदलाव? गौरतलब है कि केंद्र सरकार जीवाश्म ईंधन यानी पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों के प्रयोग को धीरे-धीरे कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा के ज्यादा से ज्यादा प्रयोग पर जोर देती रही है। हालांकि, हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों का जिक्र सरकार की ओर से कम ही किया गया है। यहां तक कि बजट में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से बैटरी स्वैपिंग यानी बैटरी चार्जिंग स्टेशन पर बैटरी चार्ज करने की सुविधा का जिक्र किया था, लेकिन हाइड्रोजन चालित वाहनों की बात नहीं रखी थी। हालांकि, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी कई अलग मौकों पर हाइड्रोजन चालित वाहनों का ही जिक्र करते रहे हैं। अब एक बार फिर हाइड्रोजन चालित कार को संसद ले जाकर उन्होंने सरकार की बदलती नीति पर रुख स्पष्ट किया है। ऐसे में यह जानना अहम है कि केंद्र सरकार अब तक किस तरह के इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग का जिक्र करती रही है और आखिर पारंपरिक ईवी और हाइड्रोजन सेल्स से चलने वाले वाहनों में आधारभूत अंतर क्या है? इलेक्ट्रिक वाहनों की कितनी कैटेगरी? स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन मुख्य तौर पर चार वर्गों में बंटे हैं। एक. पारंपरिक हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन दो. प्लग-इन हाइब्रिड वाहन तीन. चार. फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल सरकार का रुख किन वाहनों की तरफ झुका? गौरतलब है कि सरकार की तरफ से अब तक जिन वाहनों का ज्यादातर प्रचार देखने को मिला है, वह बैटरी पावर्ड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स रहे हैं। यानी ऐसे वाहन जो पारंपरिक बैटरी चार्जिंग तकनीक से चलते हैं। हालांकि, गडकरी की ओर से पेश हुआ हाइड्रोजन से चलने वाला वाहन एक फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल है। यानी पारंपरिक स्वच्छ ऊर्जा वाहनों से उलट इसमें चार्जिंग की जरूरत नहीं होती, बल्कि इन्हें जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहनों की तरह ही तुरंत ग्रीन हाइड्रोजन यानी स्वच्छ ईंधन भरकर चलाया जा सकता है। गडकरी की ओर से पेश की गई टोयोटा की मिराई एक एफसीईवी तकनीक पर चलने वाली कार है, जो कि हाइड्रोजन गैस से चलती है। इस ग्रीन फ्यूल को ऊर्जा में कन्वर्ट करने के लिए कार में इलेक्ट्रिक मोटर भी मौजूद रहती है। एफसीईवी में हाइड्रोजन फ्यूल जब वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन के साथ मिलाकर बिजली पैदा करता है तो यही बिजली वाहनों की इलेक्ट्रिक मोटर को ऊर्जा देती है। फिलहाल हॉन्डा की क्लैरिटी और ह्युंडई की नेक्सो भी इसी तकनीक पर काम करने वाली दो और हाइड्रोजन कारें हैं। बैटरी पावर्ड व्हीकल या हाइड्रोजन चालित कारें, जानें कौन बेहतर? सरकार के रुख में बदलाव की एक बड़ी वजह यह है कि जहां हाइड्रोजन से चलने वाली एफसीईवी सीधा ग्रीन फ्यूल से चलती हैं तो वहीं बैटरी से चलने वाली बीईवी चार्जिंग की बदौलत काम करती हैं। अब जहां एक एफसीईवी को ईंधन भरवाने में सिर्फ कुछ मिनटों का ही समय लगता है, तो वहीं बैटरी वाले वाहन को चार्जिंग में ही कम से कम तीस से पैंतालीस मिनट तक लग जाते हैं।
श्रीमान् शासनप्रभारिक गिरिनार आदि तीर्थोद्धारक जगमयुगप्रघान जैनाचार्य श्री विजयनीतिमूरीश्वरजी महाराज, तथा श्रीमान् शान्तमूर्ति विद्वद्वर्य मुनिराज श्री जयतविजयजी महाराज, एवम् सरतरगच्छीय प्रवर्त्तिनी साध्वी श्रीमती पुण्यश्रीजी महाराज की विदुषी शिष्यरना साध्वी श्रीमती विश्रीजी महाराज, उक्त तीनों पूज्यवरों के उपदेश द्वारा अनेसजनों ने प्रथम से माइक होरर मुझे उत्साहित किया है, जिसे यह मय प्रकाशित होने का श्रेय आपसे है । श्रीमान् शासनसम्राट् जगमयुगप्रधान जैनाचार्य श्री निजयनेमिसूरीश्वरजी महाराज के पट्टधर जैनागम-न्याय-दर्शन-ज्योतिष शिल्प-शास्त्रविशारद जैनाचार्य श्री विजयोदयसूरीश्वरजी महाराज ने मय को शुद्ध करने एव वहीं २ कठिन अर्थ को समझाने की पूर्ण मदद की है, इसलिये में उनका बड़ा आभार मानता हूँ । श्रीमान् प्रवर्त्तक श्री कान्तिविजयजी महाराज के विद्वान् प्रशिष्य मुनिराज श्री जसविजय जी महाराज के द्वारा प्राचीन भदारों से अनेक विषय की हस्त लिखित प्राचीन पुस्तकें नकल करने को प्राप्त हुई हैं एतदर्थ आभार मानता हूँ। मिश्री भायशकर गौरीशंकर सोमपुरा पालीताना वाले से मंदिर सम्बधी रकशे एवम् माहिती प्राप्त हुई है, तथा जयपुरवाले ५० जीवराज ओंकारसाल मूर्तिवाले ने कई एक करो एवम् सुप्रसिद्ध मुसब्बर बद्रीनारायण जगन्नाथ चित्रकार ने सम देव देवियों आदि के फोटो बना दिये हैं तथा जिन सजनों ने प्रथम से भाइक बनकर मदद की है, उन सब को धन्यवाद देता हूँ। मवार, मंदिर और मूर्ति आदि ससुदर पूर्ण बनाये जानें कि जिसको देखकर मन प्रपुत्र हो जाय और वर्षा भी कम लगे। उनम रहनेवाला को दया सुख दुख का अनुभव करना पड़ेगा १ एवं किस प्रकार की भूति से कपल का प्रति हो सकती है ? इत्यादि जानन की अभिलप द्वार करके मनुष्यों को हुआ करती है। उन सबको जाउन के लिये माधान मदपियों न आकप्रियों की रचना परके हमारे पर महान् उपकार किया है । उदग्रंथों का सुलभता न होन से आनकल इसका अभ्यास बहुत कम हो गया है। सिम हमारी का हाम हो रहा है। सैकड़ों वर्ष पहले शिल्पशास्त्र की दृष्टि से जो इमारतें बनी हुई दरखने में आती है, वे इतनी मजबूत है कि हजारों वर्ष हो जाने पर भी आज है और इतनी सुन्दर कलापूर्ण है कि उनको देखने के लिये हजारों कोसों से लोग आते हैं और देखकर मुग्ध हो गते हैं। पिल्पकला का हास होने का कारण मालूम होता है किमुसलमानों के राज्य में जबरदस्ती हिन्दू धर्म स भ्रष्ट करके मुसलमान बनाते थे और सुंदर कला पूर्ण मंदिर व इमारतें जो टाय सघ करके बनायी जाती थी उनका विश्वस कर डालते थे और ऐसी सुदर कला यु इमारसे बनान भी न देते थ एव तोद् डालने के भय से बनाना भी कम हो गया। इन अत्याचारों से निपणास्त्र के अभ्यास की अधिक आवश्यकता न रही होगी । जिससे कि मथ दीमक के अन्हार बन गय और जो मुसलमानों के हाथ आये वेदिये गय । जो बुद्ध रूप से रह गय हो उनका जानकार न होने से अभी तक यथार्थ रूप से प्रकट न हो सके तो पाच सात प्रथम है उनमे साधारण जनता को कोई लाभ नहीं पहुँच सकता । क्योंकि वे गुलमात्र होन म जो विद्वान् और गिल्पी होगा वही समय सकता है। तथा हिन्दी भागन्तर पूर्वक जो 'आदि छपे हुए हैं। वे फेवल शब्दार्थ मात्र है, भाषान्तर करनवाल महालय को शाप का अनुभव पूर्वक अभ्यास न होने से उनकी परिभाषा को समझ उहाँ सदा, जिसे दाय पत्र लिखा है एवं नक्शे भी नहीं दिये गये, तो साधारण जनता कैसे समझ सकती है ? मैंने भी तीन वर्ष पहल इस प्रथ का भाषान्तर शब्दार्थ मात्र किया था, उसमें मरे को बुद्ध भी अनुभव न होन से समझता नहीं था। बाद विचार हुआ कि इसको अच्छी तरह समझकर एवं अनुभव करके लिखा जाय तो जनता को लाभ पहुँच सकेगा। ऐसा विचार कर तीन वर्ष तक इस विषय के कितनक प्रयों का अध्ययन करके अनुभव भी किया। बाद इम प्रथ को सविस्तार खुलामावार लिसकर और नक्शे आदि देकर आपके सामने रखने का सदम किया है। हिन्दी भाषा में इस विषय के परिभाषिक शब्दों की सुलभता न होन से मैंने सस्कृत में ही रखे है, जिस एक दशीय भाषा न दाते सार्वत्रिक यही शब्दों का प्रयोग हुआ करे ।
श्रीमान् शासनप्रभारिक गिरिनार आदि तीर्थोद्धारक जगमयुगप्रघान जैनाचार्य श्री विजयनीतिमूरीश्वरजी महाराज, तथा श्रीमान् शान्तमूर्ति विद्वद्वर्य मुनिराज श्री जयतविजयजी महाराज, एवम् सरतरगच्छीय प्रवर्त्तिनी साध्वी श्रीमती पुण्यश्रीजी महाराज की विदुषी शिष्यरना साध्वी श्रीमती विश्रीजी महाराज, उक्त तीनों पूज्यवरों के उपदेश द्वारा अनेसजनों ने प्रथम से माइक होरर मुझे उत्साहित किया है, जिसे यह मय प्रकाशित होने का श्रेय आपसे है । श्रीमान् शासनसम्राट् जगमयुगप्रधान जैनाचार्य श्री निजयनेमिसूरीश्वरजी महाराज के पट्टधर जैनागम-न्याय-दर्शन-ज्योतिष शिल्प-शास्त्रविशारद जैनाचार्य श्री विजयोदयसूरीश्वरजी महाराज ने मय को शुद्ध करने एव वहीं दो कठिन अर्थ को समझाने की पूर्ण मदद की है, इसलिये में उनका बड़ा आभार मानता हूँ । श्रीमान् प्रवर्त्तक श्री कान्तिविजयजी महाराज के विद्वान् प्रशिष्य मुनिराज श्री जसविजय जी महाराज के द्वारा प्राचीन भदारों से अनेक विषय की हस्त लिखित प्राचीन पुस्तकें नकल करने को प्राप्त हुई हैं एतदर्थ आभार मानता हूँ। मिश्री भायशकर गौरीशंकर सोमपुरा पालीताना वाले से मंदिर सम्बधी रकशे एवम् माहिती प्राप्त हुई है, तथा जयपुरवाले पचास जीवराज ओंकारसाल मूर्तिवाले ने कई एक करो एवम् सुप्रसिद्ध मुसब्बर बद्रीनारायण जगन्नाथ चित्रकार ने सम देव देवियों आदि के फोटो बना दिये हैं तथा जिन सजनों ने प्रथम से भाइक बनकर मदद की है, उन सब को धन्यवाद देता हूँ। मवार, मंदिर और मूर्ति आदि ससुदर पूर्ण बनाये जानें कि जिसको देखकर मन प्रपुत्र हो जाय और वर्षा भी कम लगे। उनम रहनेवाला को दया सुख दुख का अनुभव करना पड़ेगा एक एवं किस प्रकार की भूति से कपल का प्रति हो सकती है ? इत्यादि जानन की अभिलप द्वार करके मनुष्यों को हुआ करती है। उन सबको जाउन के लिये माधान मदपियों न आकप्रियों की रचना परके हमारे पर महान् उपकार किया है । उदग्रंथों का सुलभता न होन से आनकल इसका अभ्यास बहुत कम हो गया है। सिम हमारी का हाम हो रहा है। सैकड़ों वर्ष पहले शिल्पशास्त्र की दृष्टि से जो इमारतें बनी हुई दरखने में आती है, वे इतनी मजबूत है कि हजारों वर्ष हो जाने पर भी आज है और इतनी सुन्दर कलापूर्ण है कि उनको देखने के लिये हजारों कोसों से लोग आते हैं और देखकर मुग्ध हो गते हैं। पिल्पकला का हास होने का कारण मालूम होता है किमुसलमानों के राज्य में जबरदस्ती हिन्दू धर्म स भ्रष्ट करके मुसलमान बनाते थे और सुंदर कला पूर्ण मंदिर व इमारतें जो टाय सघ करके बनायी जाती थी उनका विश्वस कर डालते थे और ऐसी सुदर कला यु इमारसे बनान भी न देते थ एव तोद् डालने के भय से बनाना भी कम हो गया। इन अत्याचारों से निपणास्त्र के अभ्यास की अधिक आवश्यकता न रही होगी । जिससे कि मथ दीमक के अन्हार बन गय और जो मुसलमानों के हाथ आये वेदिये गय । जो बुद्ध रूप से रह गय हो उनका जानकार न होने से अभी तक यथार्थ रूप से प्रकट न हो सके तो पाच सात प्रथम है उनमे साधारण जनता को कोई लाभ नहीं पहुँच सकता । क्योंकि वे गुलमात्र होन म जो विद्वान् और गिल्पी होगा वही समय सकता है। तथा हिन्दी भागन्तर पूर्वक जो 'आदि छपे हुए हैं। वे फेवल शब्दार्थ मात्र है, भाषान्तर करनवाल महालय को शाप का अनुभव पूर्वक अभ्यास न होने से उनकी परिभाषा को समझ उहाँ सदा, जिसे दाय पत्र लिखा है एवं नक्शे भी नहीं दिये गये, तो साधारण जनता कैसे समझ सकती है ? मैंने भी तीन वर्ष पहल इस प्रथ का भाषान्तर शब्दार्थ मात्र किया था, उसमें मरे को बुद्ध भी अनुभव न होन से समझता नहीं था। बाद विचार हुआ कि इसको अच्छी तरह समझकर एवं अनुभव करके लिखा जाय तो जनता को लाभ पहुँच सकेगा। ऐसा विचार कर तीन वर्ष तक इस विषय के कितनक प्रयों का अध्ययन करके अनुभव भी किया। बाद इम प्रथ को सविस्तार खुलामावार लिसकर और नक्शे आदि देकर आपके सामने रखने का सदम किया है। हिन्दी भाषा में इस विषय के परिभाषिक शब्दों की सुलभता न होन से मैंने सस्कृत में ही रखे है, जिस एक दशीय भाषा न दाते सार्वत्रिक यही शब्दों का प्रयोग हुआ करे ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लखनऊ के लोकभवन में हुई बैठक में 4210 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट पारित करने व प्रदेश में शिक्षा सेवा चयन आयोग के गठन सहित कई अहम फैसले लिए गए। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। उच्च, माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों का चयन इसी आयोग के माध्यम से किया जाएगा। इसका मुख्यालय प्रयागराज में होगा। आयोग में एक अध्यक्ष व सात सदस्य होंगे। कैबिनेट के अन्य फैसलेः जेम पोर्टल के माध्यम से मैन पावर आउटसोर्स करने पर मंजूरी। रिटायर्ड पीसीएस अधिकारी मोहन सिंह के खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही पर सहमति। लोक निर्माण विभाग द्वारा विकास खंडों को टू लेन मार्ग से जोड़ने की योजना के तहत सड़कों का चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण का प्रस्ताव पास। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रूट पर रेल उपरिगामी पुलों का निर्माण पर मंजूरी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लखनऊ के लोकभवन में हुई बैठक में चार हज़ार दो सौ दस करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट पारित करने व प्रदेश में शिक्षा सेवा चयन आयोग के गठन सहित कई अहम फैसले लिए गए। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। उच्च, माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों का चयन इसी आयोग के माध्यम से किया जाएगा। इसका मुख्यालय प्रयागराज में होगा। आयोग में एक अध्यक्ष व सात सदस्य होंगे। कैबिनेट के अन्य फैसलेः जेम पोर्टल के माध्यम से मैन पावर आउटसोर्स करने पर मंजूरी। रिटायर्ड पीसीएस अधिकारी मोहन सिंह के खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही पर सहमति। लोक निर्माण विभाग द्वारा विकास खंडों को टू लेन मार्ग से जोड़ने की योजना के तहत सड़कों का चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण का प्रस्ताव पास। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रूट पर रेल उपरिगामी पुलों का निर्माण पर मंजूरी।
1. डिप्टी चीफ फ्लाइट ऑपरेशन्स इंस्पेक्टर - एरोप्लेन (Deputy Chief Flight Operations Inspector - Aeroplane) 2. सीनियर फ्लाइट ऑपरेशन्स इंस्पेक्टर - एरोप्लेन (Senior Flight Operations Inspector - Aeroplane) 3. फ्लाइट ऑपरेशन्स इंस्पेक्टर - एरोप्लेन (Flight Operations Inspector - Aeroplane) 4. फ्लाइट ऑपरेशन्स इंस्पेक्टर - हेलिकॉप्टर (Flight Operations Inspector - Helicopter) आयु सीमा क्या है - उम्मीदवार की आयु 55 (पोस्ट - 1) / 50 (पोस्ट - 2) / 40 (पोस्ट - 3,4) वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए. इस जॉब में सिलेक्शन कैसे होगा - इस Govt Job के लिए, मैरिट के आधार पर उम्मीदवार का चयन किया जाएगा. आवेदन कैसे करें - इस जॉब के लिए आपको ऑफलाइन आवेदन करना पड़ेगा.
एक. डिप्टी चीफ फ्लाइट ऑपरेशन्स इंस्पेक्टर - एरोप्लेन दो. सीनियर फ्लाइट ऑपरेशन्स इंस्पेक्टर - एरोप्लेन तीन. फ्लाइट ऑपरेशन्स इंस्पेक्टर - एरोप्लेन चार. फ्लाइट ऑपरेशन्स इंस्पेक्टर - हेलिकॉप्टर आयु सीमा क्या है - उम्मीदवार की आयु पचपन / पचास / चालीस वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए. इस जॉब में सिलेक्शन कैसे होगा - इस Govt Job के लिए, मैरिट के आधार पर उम्मीदवार का चयन किया जाएगा. आवेदन कैसे करें - इस जॉब के लिए आपको ऑफलाइन आवेदन करना पड़ेगा.
रायपुरः 2000 RS note news in hindi भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 2,000 रुपये के नोट को चलन से बाहर करने की शुक्रवार को घोषणा की। हालांकि इस मूल्य के नोट बैंकों में जाकर 30 सितंबर तक जमा या बदले जा सकेंगे। आरबीआई ने शाम को जारी एक बयान में कहा कि अभी चलन में मौजूद 2,000 रुपये के नोट 30 सितंबर तक वैध मुद्रा बने रहेंगे। इसके साथ ही आरबीआई ने बैंकों से 2,000 रुपये का नोट देने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने को कहा है। 2000 RS note news in hindi वहीं, अब इस मामले को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है। विपक्षी दल के नेता इस मुद्दे को लेकर मोदी सरकार की जमकर आलोचना कर रहे हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया ने मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है और लाइन में लगकर नोट बदलने की बात कही है। 2000 रुपए का नोट बंद होने के मुद्दे पर मंत्री शिव डहरिया ने कहा है कि मेरे पास भी 2000 रुपए के 5 नोट काफी समय से रखे हुए हैं। अब सारे काम छोड़ मुझे बैंक की कतार में खड़ा होना पड़ेगा। मोदी सरकार के इस फैसले से आम जनता परेशान होगी। उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने यह निर्णय लिया गया। पीएम मोदी को देश से माफी मांगना चाहिए। भाजपा नेताओं के गौठानों निरीक्षण पर मंत्री शिव डहरिया ने कहा भाजपा के लोग पहले गौसेवा करने की बात करते थे। 15 साल में उन्हें ना भगवान राम याद आए, न गाय गौठान। उन्होंने कहा हमारी सरकार गायों की सेवा कर रही भाजपा को क्यों पीड़ा हो रही। मां कौशल्या की नगरी को चमका रहे BJP को तकलीफ क्यों? भाजपा नेताओं का चाल चरित्र और चेहरा जनता समझ चुकी है।
रायपुरः दो हज़ार RS note news in hindi भारतीय रिजर्व बैंक ने दो,शून्य रुपयापये के नोट को चलन से बाहर करने की शुक्रवार को घोषणा की। हालांकि इस मूल्य के नोट बैंकों में जाकर तीस सितंबर तक जमा या बदले जा सकेंगे। आरबीआई ने शाम को जारी एक बयान में कहा कि अभी चलन में मौजूद दो,शून्य रुपयापये के नोट तीस सितंबर तक वैध मुद्रा बने रहेंगे। इसके साथ ही आरबीआई ने बैंकों से दो,शून्य रुपयापये का नोट देने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने को कहा है। दो हज़ार RS note news in hindi वहीं, अब इस मामले को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है। विपक्षी दल के नेता इस मुद्दे को लेकर मोदी सरकार की जमकर आलोचना कर रहे हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया ने मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है और लाइन में लगकर नोट बदलने की बात कही है। दो हज़ार रुपयापए का नोट बंद होने के मुद्दे पर मंत्री शिव डहरिया ने कहा है कि मेरे पास भी दो हज़ार रुपयापए के पाँच नोट काफी समय से रखे हुए हैं। अब सारे काम छोड़ मुझे बैंक की कतार में खड़ा होना पड़ेगा। मोदी सरकार के इस फैसले से आम जनता परेशान होगी। उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने यह निर्णय लिया गया। पीएम मोदी को देश से माफी मांगना चाहिए। भाजपा नेताओं के गौठानों निरीक्षण पर मंत्री शिव डहरिया ने कहा भाजपा के लोग पहले गौसेवा करने की बात करते थे। पंद्रह साल में उन्हें ना भगवान राम याद आए, न गाय गौठान। उन्होंने कहा हमारी सरकार गायों की सेवा कर रही भाजपा को क्यों पीड़ा हो रही। मां कौशल्या की नगरी को चमका रहे BJP को तकलीफ क्यों? भाजपा नेताओं का चाल चरित्र और चेहरा जनता समझ चुकी है।
ऐसा नहीं है कि परिवार के सदस्यों और सगे संबंधियों ने ही अतीत में राजाओं के साथ दगाबाजी करते हुए तख्तापलट किया, बल्कि संसदीय लोकतंत्र में भी इस तरह की घटनाएं हुई हैं. महाराष्ट्र में रविवार को हुआ सियासी घटनाक्रम इसका ताजा उदाहरण है. मराठा क्षत्रप शरद पवार भी अब उस सूची में शामिल हो गए हैं जिसमें अभी तक ठाकरे, अब्दुल्ला, मुलायम सिंह यादव, बादल और नंदामुरी तारक राम राव उर्फ एनटीआर का नाम शामिल था. इनमें से अधिकांश ने अपनी मेहनत के दम पर वापसी की. अब देखने वाली बात यह है कि पवार अपने करियर की सबसे कठिन और अपमानजनक चुनौती से कैसे निपटेंगे. पवार ने 1999 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया था और अपने दम पर पार्टी को आगे बढ़ाया. अब उनके सामने बगावत से निपटने की चुनौती है. पवार के लिए इससे भी अधिक शर्मनाक बात यह है कि यहां अपने विधायकों ने ही उनका साथ छोड़ दिया है. वहीं दूसरी तरफ कई बयानबाजियों के बावजूद भी कांग्रेस में महाराष्ट्र में एकजुट है. पवार अक्सर अपनी पूर्व पार्टी पर कटाक्ष करते रहे हैं. उन्होंने यहां तक कह दिया था कि कांग्रेस में शामिल लोगों को यह स्वीकार करना चाहिए कि सबसे पुरानी पार्टी का प्रभाव अब 'कश्मीर से कन्याकुमारी' तक वैसा नहीं है जैसा पहले हुआ करता था. पवार को यूपी के उन जमींदारों के बारे में एक किस्सा सुनाना भी पसंद आया था, जिन्होंने अपनी अधिकांश जमीन खो दी है और अपनी 'हवेली' को मेंटेन करने में असमर्थ रहे. यूपी के जमींदारों से कांग्रेस की तुलना करते हुए एक समय उन्होंने कहा था, 'मैंने उत्तर प्रदेश के जमींदारों के बारे में एक कहानी बताई थी जिनके पास बड़ी 'हवेलियाँ' हुआ करती थीं. भूमि हदबंदी कानून के कारण उनकी जमीनें कम हो गईं. हवेलियाँ बची रहीं लेकिन उनकी देखभाल और मरम्मत करने की उनकी कैपिसिटी नहीं रही. जब जमींदार सुबह उठता है, तो वह आसपास हरा-भरा खेत देखता है और कहता है कि यह सारी जमीन उसकी है. यह कभी उनका था, लेकिन अब उनका नहीं है. ' शायद पवार भी यह नहीं जानते होंगे कि वह खुद जल्द ही उसी तरह के जमींदार बन जाएंगे. नाम, निशान और वजूद की लड़ाई. . . NCP से अजित की बगावत के बाद अब सुप्रिया के पास क्या बचा? यह भी कहा जा रहै है कि कम से कम 2024 तक तो पवार दो नावों पर सवार होने का इरादा रखते हैं. वह और उनकी बेटी सुप्रिया महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में रहकर विपक्ष में रहेंगे, जबकि दूसरी तरफ 'अग्रिम पार्टी' होगी जिसमें भतीजे अजीत पवार और भरोसेमंद लेफ्टिनेंट प्रफुल्ल पटेल शामिल हैं जो एनडीए में रहेंगे. हालाँकि, सारा दारोमदार इस बात पर रहेगा कि राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाले प्रभावशाली मराठा मतदाता [30 प्रतिशत से अधिक] कैसे अजित पवार के कदम पर प्रतिक्रिया देते हैं. मराठों का वोटिंग पैटर्न अब तक मिला-जुला रहा है और पश्चिमी महाराष्ट्र में एनसीपी की तुलना में बीजेपी के ख़िलाफ़ ज़्यादा वोटिंग हुई है. भाजपा के प्रति मराठों की नापसंदगी का एकमात्र कारण यह रहा है कि नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव के बावजूद पवार खुद कभी भी भाजपा की तरफ नहीं गए. विश्वासघात का सबसे दुखद हिस्सा यह रहा है कि पवार को धोखा दुश्मनों ने नहीं अपनों ने दिया. पवार कर रहे थे कोशिश? यह एक खुला रहस्य है कि पवार पिछले कुछ हफ्तों से राकांपा नेताओं के बीच एकता की भावना बहाल करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली. राकांपा का एक वर्ग कथित तौर पर भाजपा के साथ बातचीत कर रहा था और कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना [उद्धव] वाले महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन से बाहर निकलने का प्रयास कर रहा था. लगातार इनकार के बावजूद यह बात मीडिया में आई थी कि पवार के भतीजे अजित की अमित शाह और अन्य बीजेपी दिग्गजों से मुलाकात हुई थी. एनसीपी प्रमुख के रूप में पवार का इस्तीफा और उसके बाद सुले को एनसीपी प्रमुख के रूप में पदोन्नत करने का उद्देश्य अजीत पवार को रोकना था, लेकिन इसका उलटा असर हुआ. एनसीपी विभाजन का असर 2024 के लोकसभा चुनावों पर भी पड़ेगा. 2019 के लोकसभा में, भाजपा और तत्कालीन संयुक्त शिवसेना सेना ने 48 लोकसभा सीटों में से 42 सीटें हासिल की थीं. 2024 के लिए अजित पवार की मदद से एनडीए के 2019 के प्रदर्शन को दोहराने की स्क्रिप्ट तैयार करने की कोशिश की जा रही है. राकांपा में विभाजन का न केवल एमवीए पर, बल्कि पश्चिमी महाराष्ट्र में कांग्रेस पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जहां वह राकांपा के साथ गठबंधन में है. अजित पवार का दलबदल काफी हद तक वैसा ही है जैसे चंद्रबाबू नायडू ने अपने ससुर एन टी रामाराव को किनारे कर दिया था या जिस तरह से अखिलेश यादव ने पिता मुलायम सिंह यादव को मात दे दी थी. अजित पवार ने विधायकों के बीच अपना दबदबा दिखाया है. 82 साल के पवार 50 साल से ज्यादा समय से राजनीति में सक्रिय हैं. उन्होंने राजनीति में कई उतार और चढ़ाव देखे हैं. साल 1967 में वे 27 साल की उम्र में पहली बार विधायक बने. 32 साल की उम्र में पहली बार सीएम बन गए. 45 साल पहले शरद ने भी सत्ता के लिए बगावत कर मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली थी. उन्होंने अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत कांग्रेस से की, लेकिन दो बार उसके ही खिलाफ गए और सत्ता में आए. पहली बार 1978 में और दूसरी बार 1999 में. साल 1977 में आम चुनाव के बाद कांग्रेस दो धड़ों में बंट गई थी. नाम रखा गया कांग्रेस (I) और कांग्रेस (U). शरद पवार भी बगावत का हिस्सा बने. वे कांग्रेस (U) में शामिल हुए. साल 1978 में महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव आया और दोनों धड़े एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतरे. इस बीच, जनता पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी और 99 सीटों पर जीत हासिल की. जबकि कांग्रेस (I) ने 62 और कांग्रेस (U) ने 69 सीटें जीतीं. किसी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला. राज्य में जनता पार्टी ने सरकार बनाने के लिए संभावनाएं तलाशीं. लेकिन, जनता पार्टी को रोकने के लिए I और U ने गठबंधन कर लिया और सरकार बना ली. यह सरकार डेढ़ साल से ज्यादा चली. बाद में जनता पार्टी में फूट पड़ गई और महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया. हालांकि, कुछ महीने बाद शरद पवार ने कांग्रेस (यू) से भी बगावत की और जनता पार्टी से हाथ मिला लिया. जनता पार्टी के समर्थन से शरद पवार 38 साल की सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बने. तब देश की राजनीति में इंदिरा गांधी सक्रिय थीं. 1977 की इमरजेंसी के बाद कांग्रेस बुरे दौर से गुजर रही थी. हालांकि, साल 1980 में इंदिरा गांधी सरकार की वापसी हुई तो पवार की सरकार बर्खास्त कर दी गई. बाद में 1986 में पवार कांग्रेस में शामिल हो गए. तब कांग्रेस की कमान राजीव गांधी के हाथों में थी और वो देश के प्रधानमंत्री थे. कुछ ही दिनों में पवार फिर गांधी परिवार के करीब आ गए और 26 जून 1988 में शंकर राव चव्हाण की जगह सीएम की कुर्सी मिल गई. पवार 26 जून 1988 से लेकर 25 जून 1991 के बीच दो बार मुख्यमंत्री बने. NDA में अजित पवार की एंट्री, एकनाथ शिंदे के लिए कैसे साबित हो सकती है बुरी खबर! जुलाई 1978. एक उमस भरी दोपहरी में शरद पवार महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री वसंत दादा पाटील के घर पर खाने पर गए थे. बुलावा खुद पाटील ने ही भेजा था. वे अपने इस युवा उद्योग मंत्री (शरद पवार) से कुछ चर्चा करना चाहते थे. कहते हैं कि शरद पवार गए, खाना खाया, बातचीत की और चलते हुए. उन्होंने दादा पाटील के आगे हाथ जोड़े, कहा- दादा, मैं चलता हूं, भूल-चूक माफ करना. . . सीएम वसंत दादा तब कुछ समझे नहीं, लेकिन शाम को एक खबर ने महाराष्ट्र समेत दिल्ली की राजनीति को भी हिला दिया था. साल था 1999. तारीख 15 मई. कांग्रेस की CWC की बैठक थी. शाम को हुई इस बैठक में अचानक ही शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर की तरफ से विरोध के सुर सुनाई दिए. संगमा ने कहा, सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा बीजेपी लगातार उठा रही है. ये सुनना सोनिया के लिए उतना हैरानी भरा नहीं था, जितना वह अगले व्यक्ति की आवाज सुनकर हुईं. यह कोई और नहीं, शरद पवार थे, जिन्होंने तुरंत ही संगमा की बात का समर्थन किया और अपनी हल्की-मुस्कुराती आवाज में पहले तो संगठन में एकता लाने के लिए सोनिया गांधी की तारीफ की और फिर तुरंत ही अगली लाइन में प्रश्नवाचक चिह्न उछाल दिया. शरद पवार ने कहा, 'कांग्रेस आपके विदेशी मूल के बारे में बीजेपी को जवाब नहीं दे सकी है. इस पर गंभीरता से विचार की जरूरत है. इस तरह, साल 1999 में शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का विरोध किया और उसके बाद तीनों नेताओं को पार्टी से निकाल दिया गया. महज 10 दिन बाद ही तीनों ने मिलकर 25 मई 1999 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का गठन किया.
ऐसा नहीं है कि परिवार के सदस्यों और सगे संबंधियों ने ही अतीत में राजाओं के साथ दगाबाजी करते हुए तख्तापलट किया, बल्कि संसदीय लोकतंत्र में भी इस तरह की घटनाएं हुई हैं. महाराष्ट्र में रविवार को हुआ सियासी घटनाक्रम इसका ताजा उदाहरण है. मराठा क्षत्रप शरद पवार भी अब उस सूची में शामिल हो गए हैं जिसमें अभी तक ठाकरे, अब्दुल्ला, मुलायम सिंह यादव, बादल और नंदामुरी तारक राम राव उर्फ एनटीआर का नाम शामिल था. इनमें से अधिकांश ने अपनी मेहनत के दम पर वापसी की. अब देखने वाली बात यह है कि पवार अपने करियर की सबसे कठिन और अपमानजनक चुनौती से कैसे निपटेंगे. पवार ने एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया था और अपने दम पर पार्टी को आगे बढ़ाया. अब उनके सामने बगावत से निपटने की चुनौती है. पवार के लिए इससे भी अधिक शर्मनाक बात यह है कि यहां अपने विधायकों ने ही उनका साथ छोड़ दिया है. वहीं दूसरी तरफ कई बयानबाजियों के बावजूद भी कांग्रेस में महाराष्ट्र में एकजुट है. पवार अक्सर अपनी पूर्व पार्टी पर कटाक्ष करते रहे हैं. उन्होंने यहां तक कह दिया था कि कांग्रेस में शामिल लोगों को यह स्वीकार करना चाहिए कि सबसे पुरानी पार्टी का प्रभाव अब 'कश्मीर से कन्याकुमारी' तक वैसा नहीं है जैसा पहले हुआ करता था. पवार को यूपी के उन जमींदारों के बारे में एक किस्सा सुनाना भी पसंद आया था, जिन्होंने अपनी अधिकांश जमीन खो दी है और अपनी 'हवेली' को मेंटेन करने में असमर्थ रहे. यूपी के जमींदारों से कांग्रेस की तुलना करते हुए एक समय उन्होंने कहा था, 'मैंने उत्तर प्रदेश के जमींदारों के बारे में एक कहानी बताई थी जिनके पास बड़ी 'हवेलियाँ' हुआ करती थीं. भूमि हदबंदी कानून के कारण उनकी जमीनें कम हो गईं. हवेलियाँ बची रहीं लेकिन उनकी देखभाल और मरम्मत करने की उनकी कैपिसिटी नहीं रही. जब जमींदार सुबह उठता है, तो वह आसपास हरा-भरा खेत देखता है और कहता है कि यह सारी जमीन उसकी है. यह कभी उनका था, लेकिन अब उनका नहीं है. ' शायद पवार भी यह नहीं जानते होंगे कि वह खुद जल्द ही उसी तरह के जमींदार बन जाएंगे. नाम, निशान और वजूद की लड़ाई. . . NCP से अजित की बगावत के बाद अब सुप्रिया के पास क्या बचा? यह भी कहा जा रहै है कि कम से कम दो हज़ार चौबीस तक तो पवार दो नावों पर सवार होने का इरादा रखते हैं. वह और उनकी बेटी सुप्रिया महाविकास अघाड़ी में रहकर विपक्ष में रहेंगे, जबकि दूसरी तरफ 'अग्रिम पार्टी' होगी जिसमें भतीजे अजीत पवार और भरोसेमंद लेफ्टिनेंट प्रफुल्ल पटेल शामिल हैं जो एनडीए में रहेंगे. हालाँकि, सारा दारोमदार इस बात पर रहेगा कि राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने वाले प्रभावशाली मराठा मतदाता [तीस प्रतिशत से अधिक] कैसे अजित पवार के कदम पर प्रतिक्रिया देते हैं. मराठों का वोटिंग पैटर्न अब तक मिला-जुला रहा है और पश्चिमी महाराष्ट्र में एनसीपी की तुलना में बीजेपी के ख़िलाफ़ ज़्यादा वोटिंग हुई है. भाजपा के प्रति मराठों की नापसंदगी का एकमात्र कारण यह रहा है कि नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव के बावजूद पवार खुद कभी भी भाजपा की तरफ नहीं गए. विश्वासघात का सबसे दुखद हिस्सा यह रहा है कि पवार को धोखा दुश्मनों ने नहीं अपनों ने दिया. पवार कर रहे थे कोशिश? यह एक खुला रहस्य है कि पवार पिछले कुछ हफ्तों से राकांपा नेताओं के बीच एकता की भावना बहाल करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली. राकांपा का एक वर्ग कथित तौर पर भाजपा के साथ बातचीत कर रहा था और कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना [उद्धव] वाले महा विकास अघाड़ी गठबंधन से बाहर निकलने का प्रयास कर रहा था. लगातार इनकार के बावजूद यह बात मीडिया में आई थी कि पवार के भतीजे अजित की अमित शाह और अन्य बीजेपी दिग्गजों से मुलाकात हुई थी. एनसीपी प्रमुख के रूप में पवार का इस्तीफा और उसके बाद सुले को एनसीपी प्रमुख के रूप में पदोन्नत करने का उद्देश्य अजीत पवार को रोकना था, लेकिन इसका उलटा असर हुआ. एनसीपी विभाजन का असर दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनावों पर भी पड़ेगा. दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा में, भाजपा और तत्कालीन संयुक्त शिवसेना सेना ने अड़तालीस लोकसभा सीटों में से बयालीस सीटें हासिल की थीं. दो हज़ार चौबीस के लिए अजित पवार की मदद से एनडीए के दो हज़ार उन्नीस के प्रदर्शन को दोहराने की स्क्रिप्ट तैयार करने की कोशिश की जा रही है. राकांपा में विभाजन का न केवल एमवीए पर, बल्कि पश्चिमी महाराष्ट्र में कांग्रेस पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जहां वह राकांपा के साथ गठबंधन में है. अजित पवार का दलबदल काफी हद तक वैसा ही है जैसे चंद्रबाबू नायडू ने अपने ससुर एन टी रामाराव को किनारे कर दिया था या जिस तरह से अखिलेश यादव ने पिता मुलायम सिंह यादव को मात दे दी थी. अजित पवार ने विधायकों के बीच अपना दबदबा दिखाया है. बयासी साल के पवार पचास साल से ज्यादा समय से राजनीति में सक्रिय हैं. उन्होंने राजनीति में कई उतार और चढ़ाव देखे हैं. साल एक हज़ार नौ सौ सरसठ में वे सत्ताईस साल की उम्र में पहली बार विधायक बने. बत्तीस साल की उम्र में पहली बार सीएम बन गए. पैंतालीस साल पहले शरद ने भी सत्ता के लिए बगावत कर मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली थी. उन्होंने अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत कांग्रेस से की, लेकिन दो बार उसके ही खिलाफ गए और सत्ता में आए. पहली बार एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में और दूसरी बार एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में. साल एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में आम चुनाव के बाद कांग्रेस दो धड़ों में बंट गई थी. नाम रखा गया कांग्रेस और कांग्रेस . शरद पवार भी बगावत का हिस्सा बने. वे कांग्रेस में शामिल हुए. साल एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव आया और दोनों धड़े एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतरे. इस बीच, जनता पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी और निन्यानवे सीटों पर जीत हासिल की. जबकि कांग्रेस ने बासठ और कांग्रेस ने उनहत्तर सीटें जीतीं. किसी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला. राज्य में जनता पार्टी ने सरकार बनाने के लिए संभावनाएं तलाशीं. लेकिन, जनता पार्टी को रोकने के लिए I और U ने गठबंधन कर लिया और सरकार बना ली. यह सरकार डेढ़ साल से ज्यादा चली. बाद में जनता पार्टी में फूट पड़ गई और महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया. हालांकि, कुछ महीने बाद शरद पवार ने कांग्रेस से भी बगावत की और जनता पार्टी से हाथ मिला लिया. जनता पार्टी के समर्थन से शरद पवार अड़तीस साल की सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बने. तब देश की राजनीति में इंदिरा गांधी सक्रिय थीं. एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर की इमरजेंसी के बाद कांग्रेस बुरे दौर से गुजर रही थी. हालांकि, साल एक हज़ार नौ सौ अस्सी में इंदिरा गांधी सरकार की वापसी हुई तो पवार की सरकार बर्खास्त कर दी गई. बाद में एक हज़ार नौ सौ छियासी में पवार कांग्रेस में शामिल हो गए. तब कांग्रेस की कमान राजीव गांधी के हाथों में थी और वो देश के प्रधानमंत्री थे. कुछ ही दिनों में पवार फिर गांधी परिवार के करीब आ गए और छब्बीस जून एक हज़ार नौ सौ अठासी में शंकर राव चव्हाण की जगह सीएम की कुर्सी मिल गई. पवार छब्बीस जून एक हज़ार नौ सौ अठासी से लेकर पच्चीस जून एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के बीच दो बार मुख्यमंत्री बने. NDA में अजित पवार की एंट्री, एकनाथ शिंदे के लिए कैसे साबित हो सकती है बुरी खबर! जुलाई एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर. एक उमस भरी दोपहरी में शरद पवार महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री वसंत दादा पाटील के घर पर खाने पर गए थे. बुलावा खुद पाटील ने ही भेजा था. वे अपने इस युवा उद्योग मंत्री से कुछ चर्चा करना चाहते थे. कहते हैं कि शरद पवार गए, खाना खाया, बातचीत की और चलते हुए. उन्होंने दादा पाटील के आगे हाथ जोड़े, कहा- दादा, मैं चलता हूं, भूल-चूक माफ करना. . . सीएम वसंत दादा तब कुछ समझे नहीं, लेकिन शाम को एक खबर ने महाराष्ट्र समेत दिल्ली की राजनीति को भी हिला दिया था. साल था एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे. तारीख पंद्रह मई. कांग्रेस की CWC की बैठक थी. शाम को हुई इस बैठक में अचानक ही शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर की तरफ से विरोध के सुर सुनाई दिए. संगमा ने कहा, सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा बीजेपी लगातार उठा रही है. ये सुनना सोनिया के लिए उतना हैरानी भरा नहीं था, जितना वह अगले व्यक्ति की आवाज सुनकर हुईं. यह कोई और नहीं, शरद पवार थे, जिन्होंने तुरंत ही संगमा की बात का समर्थन किया और अपनी हल्की-मुस्कुराती आवाज में पहले तो संगठन में एकता लाने के लिए सोनिया गांधी की तारीफ की और फिर तुरंत ही अगली लाइन में प्रश्नवाचक चिह्न उछाल दिया. शरद पवार ने कहा, 'कांग्रेस आपके विदेशी मूल के बारे में बीजेपी को जवाब नहीं दे सकी है. इस पर गंभीरता से विचार की जरूरत है. इस तरह, साल एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का विरोध किया और उसके बाद तीनों नेताओं को पार्टी से निकाल दिया गया. महज दस दिन बाद ही तीनों ने मिलकर पच्चीस मई एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया.
नई दिल्ली, (भाषा)। भारत के रविंद्र जडेजा अपने स्पिन जोड़ीदार रविचंद्रन अश्विन को पीछे छोड़कर आईसीसी की टेस्ट गेंदबाजों की ताजा रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर पहुंच गये हैं जबकि चेतेश्वर पुजारा ने बल्लेबाजों की रैंकिंग में दूसरा स्थान हासिल किया है जो उनके करियर की सर्वश्रेष्" रैंकिंग है। बायें हाथ के स्पिनर जडेजा ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ रांची में ड्रा छूटे तीसरे टेस्ट मैच में नौ विकेट लेकर अश्विन को रैकिंग में पीछे छोड़ा। यह मैच ड्रा छूटने से भारत और आस्ट्रेलिया के बीच अभी चार मैचों की श्रृंखला। -। से बराबरी पर है। जडेजा ने पहली पारी में 124 रन देकर पांच और दूसरी पारी में 52 रन देकर चार विकेट लिये। इससे उन्हें सात अंक मिले। इससे पहले वह 892 अंक के साथ अश्विन के साथ संयुक्त शीर्ष पर काबिज थे। बायें हाथ का यह स्पिनर बिशन सिंह बेदी और अश्विन के बाद गेंदबाजी रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचने वाला केवल तीसरा भारतीय गेंदबाज है। पुजारा को उनकी 202 रन की बेजोड़ पारी का इनाम मिला है। इससे वह चार पायदान चढ़कर अपने करियर की सर्वश्रेष्" दूसरी रैकिंग पर पहुंच गये हैं। उनके अब 861 रेटिंग अंक हैं। सौराष्ट्र के बल्लेबाज ने न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन की जगह ली जो अब पांचवें स्थान पर खिसक गये हैं। जो रूट भी पीछे खिसके हैं जबकि भारतीय कप्तान विराट कोहली पहले की तरह चौथे स्थान पर बने हुए है। आस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ शीर्ष पर काबिज हैं। उन्होंने रांची में 178 और 21 रन की पारियां खेलने के बाद अपने करियर की सर्वश्रेष्" रेटिंग 941 अंक हासिल की है। जडेजा अपने शानदार प्रदर्शन से अश्विन के बाद 900 अंक के जादुई आंकड़े को छूने वाले दूसरे भारतीय बनने के करीब पहुंच गये हैं। अश्विन की सर्वश्रेष्" रेटिंग 904 अंक थी लेकिन रांची टेस्ट में केवल दो विकेट हासिल करने के कारण उन्हें 37 अंक का नुकसान हुआ और अब वह जडेजा से 37 अंक पीछे हो गये हैं। अश्विन 862 अंक के साथ दूसरे स्थान पर हैं। बल्लेबाजी रैंकिंग में पुजारा और जडेजा के अलावा अजिंक्य रहाणे शीर्ष 20 में शामिल तीसरे भारतीय बल्लेबाज हैं। उनके 704 अंक हैं और वह 17वें स्थान पर हैं। सलामी बल्लेबाज लोकेश राहुल ने अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखा और वह 23वें स्थान पर पहुंच गये हैं। उनके साथी सलामी बल्लेबाज मुरली विजय 31वें स्थान पर हैं। विकेटकीपर बल्लेबाज रिद्धिमान साहा भी रांची में शतक जड़कर 51वें स्थान पर काबिज हो गये हैं। इस बीच आईसीसी टेस्ट टीम रैंकिंग में दूसरे स्थान के लिये प्रतिस्पर्धा बढ़ गयी है क्योंकि आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका दोनों ही एक अप्रैल तक की समयसीमा तक इस स्थान को हासिल करने की दौड़ में शामिल हैं। भारत का एक अप्रैल तक नंबर एक स्थान पक्का है जिसके लिये उसे आईसीसी से दस लाख डालर की पुरस्कार राशि मिलेगी। आस्ट्रेलिया को दूसरा स्थान हासिल करने और पांच लाख डालर की नकद धनराशि लेने के लिये धर्मशाला में होने वाला चौथा टेस्ट मैच ड्रा कराना होगा। दक्षिण अफ्रीका भी दूसरे स्थान पर पहुंच सकता है लेकिन यह तभी संभव है जबकि आस्ट्रेलिया को हार का सामना करना पड़े और दक्षिण अफ्रीका हैमिल्टन में न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच जीते या ड्रा करवाये। एक अप्रैल को तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को दो लाख डालर और चौथे स्थान की टीम को एक लाख डालर मिलेंगे। इंग्लैंड अभी चौथे स्थान पर है।
नई दिल्ली, । भारत के रविंद्र जडेजा अपने स्पिन जोड़ीदार रविचंद्रन अश्विन को पीछे छोड़कर आईसीसी की टेस्ट गेंदबाजों की ताजा रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर पहुंच गये हैं जबकि चेतेश्वर पुजारा ने बल्लेबाजों की रैंकिंग में दूसरा स्थान हासिल किया है जो उनके करियर की सर्वश्रेष्" रैंकिंग है। बायें हाथ के स्पिनर जडेजा ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ रांची में ड्रा छूटे तीसरे टेस्ट मैच में नौ विकेट लेकर अश्विन को रैकिंग में पीछे छोड़ा। यह मैच ड्रा छूटने से भारत और आस्ट्रेलिया के बीच अभी चार मैचों की श्रृंखला। -। से बराबरी पर है। जडेजा ने पहली पारी में एक सौ चौबीस रन देकर पांच और दूसरी पारी में बावन रन देकर चार विकेट लिये। इससे उन्हें सात अंक मिले। इससे पहले वह आठ सौ बानवे अंक के साथ अश्विन के साथ संयुक्त शीर्ष पर काबिज थे। बायें हाथ का यह स्पिनर बिशन सिंह बेदी और अश्विन के बाद गेंदबाजी रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचने वाला केवल तीसरा भारतीय गेंदबाज है। पुजारा को उनकी दो सौ दो रन की बेजोड़ पारी का इनाम मिला है। इससे वह चार पायदान चढ़कर अपने करियर की सर्वश्रेष्" दूसरी रैकिंग पर पहुंच गये हैं। उनके अब आठ सौ इकसठ रेटिंग अंक हैं। सौराष्ट्र के बल्लेबाज ने न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन की जगह ली जो अब पांचवें स्थान पर खिसक गये हैं। जो रूट भी पीछे खिसके हैं जबकि भारतीय कप्तान विराट कोहली पहले की तरह चौथे स्थान पर बने हुए है। आस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ शीर्ष पर काबिज हैं। उन्होंने रांची में एक सौ अठहत्तर और इक्कीस रन की पारियां खेलने के बाद अपने करियर की सर्वश्रेष्" रेटिंग नौ सौ इकतालीस अंक हासिल की है। जडेजा अपने शानदार प्रदर्शन से अश्विन के बाद नौ सौ अंक के जादुई आंकड़े को छूने वाले दूसरे भारतीय बनने के करीब पहुंच गये हैं। अश्विन की सर्वश्रेष्" रेटिंग नौ सौ चार अंक थी लेकिन रांची टेस्ट में केवल दो विकेट हासिल करने के कारण उन्हें सैंतीस अंक का नुकसान हुआ और अब वह जडेजा से सैंतीस अंक पीछे हो गये हैं। अश्विन आठ सौ बासठ अंक के साथ दूसरे स्थान पर हैं। बल्लेबाजी रैंकिंग में पुजारा और जडेजा के अलावा अजिंक्य रहाणे शीर्ष बीस में शामिल तीसरे भारतीय बल्लेबाज हैं। उनके सात सौ चार अंक हैं और वह सत्रहवें स्थान पर हैं। सलामी बल्लेबाज लोकेश राहुल ने अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखा और वह तेईसवें स्थान पर पहुंच गये हैं। उनके साथी सलामी बल्लेबाज मुरली विजय इकतीसवें स्थान पर हैं। विकेटकीपर बल्लेबाज रिद्धिमान साहा भी रांची में शतक जड़कर इक्यावनवें स्थान पर काबिज हो गये हैं। इस बीच आईसीसी टेस्ट टीम रैंकिंग में दूसरे स्थान के लिये प्रतिस्पर्धा बढ़ गयी है क्योंकि आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका दोनों ही एक अप्रैल तक की समयसीमा तक इस स्थान को हासिल करने की दौड़ में शामिल हैं। भारत का एक अप्रैल तक नंबर एक स्थान पक्का है जिसके लिये उसे आईसीसी से दस लाख डालर की पुरस्कार राशि मिलेगी। आस्ट्रेलिया को दूसरा स्थान हासिल करने और पांच लाख डालर की नकद धनराशि लेने के लिये धर्मशाला में होने वाला चौथा टेस्ट मैच ड्रा कराना होगा। दक्षिण अफ्रीका भी दूसरे स्थान पर पहुंच सकता है लेकिन यह तभी संभव है जबकि आस्ट्रेलिया को हार का सामना करना पड़े और दक्षिण अफ्रीका हैमिल्टन में न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच जीते या ड्रा करवाये। एक अप्रैल को तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को दो लाख डालर और चौथे स्थान की टीम को एक लाख डालर मिलेंगे। इंग्लैंड अभी चौथे स्थान पर है।
वाराणसी में की गयी बारिश के लिए पूजा, साथ ही राग मल्हार बजाया गया ! शादी समारोह में गयी नाबालिग बच्ची के साथ दरिंदे ने किया दुष्कर्म, हुआ गिरफ्तार ! मामला सुलझाने गयी पुलिस बनी महिलाओं का शिकार, महिलाओं ने मारपीट कर पुलिस का वायरलेस छिना ! सरयू नदी में दिखे 12 मगरमच्छ, नदी में नहाने वाले श्रद्धालुओं में मचा हडकंप !
वाराणसी में की गयी बारिश के लिए पूजा, साथ ही राग मल्हार बजाया गया ! शादी समारोह में गयी नाबालिग बच्ची के साथ दरिंदे ने किया दुष्कर्म, हुआ गिरफ्तार ! मामला सुलझाने गयी पुलिस बनी महिलाओं का शिकार, महिलाओं ने मारपीट कर पुलिस का वायरलेस छिना ! सरयू नदी में दिखे बारह मगरमच्छ, नदी में नहाने वाले श्रद्धालुओं में मचा हडकंप !
पटना (ब्यूरो)। स्थानीय मोइनुल हक स्टेडियम में मणिपुर के खिलाफ खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप के फाइनल मुकाबले के चौथे दिन का खेल खत्म होने तक मेजबान बिहार जीत से महज छह विकेट दूर है। इस मैच में बिहार ने अपनी पहली पारी में 546 रन बनाए। वहीं मणिपुर ने अपनी पहली पारी में 337 रन बनाए। बिहार ने अपनी दूसरी पारी में 102 ओवर में 335 रन बनाए। मणिपुर दूसरी पारी में 34 ओवर में 4 विकेट खोकर 107 रन बनाकर खेल रही है। चौथे दिन का खेल समाप्त होने के समय तक मणिपुर के कप्तान लैंग्लोन्याम्बा एम नाबाद 44 रन व विकास सिंह नाबाद 1 रन बना कर क्रीज पर जमे हैं। खेल के चौथे दिन बिहार ने अपनी दूसरी पारी में सचिन कुमार सिंह के नाबाद 82 रन की मदद से बनाए गए छह विकेट पर 156 रन से आगे खेलना शुरू किया। सचिन सिंह के शानदार 132 रन, शिवम सिंह के 45, आशुतोष अमन के 51 व वीर प्रताप सिंह के 35 रन की मदद से 102 ओवर में 335 रन बनाए। मणिपुर के किशन सिंग्हा ने 43 ओवर में 94 रन खर्च कर 7 विकेट, जतिन फैरोजम, रेक्स व प्रीयोजित के ने 1 विकेट लिए। मणिपुर के किशन सिंग्घा ने दोनों पारी में अबतक 11 विकेट अपने नाम किए है। दोपहर टी ब्रेक के बाद दूसरी पारी खेलने उतरी मणिपुर ने कप्तान लैंग्लोन्याम्बा एम के नाबाद 44 रन व प्रीयोजित के के 39 रन की मदद से 34 ओवर में 4 विकेट खोकर 107 रन बनाकर खेल रही है। हालांकि जहां बिहार जीत कर इतिहास रचने से म? हज 6 विकेट दूर है। वहीं मणिपुर के सामने अब भी 438 रन का कठिन लक्ष्य है। बिहार के आशुतोष अमन ने दो, नवाज व सचिन कुमार सिंह ने एक-एक सफलताएं हासिल की।
पटना । स्थानीय मोइनुल हक स्टेडियम में मणिपुर के खिलाफ खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप के फाइनल मुकाबले के चौथे दिन का खेल खत्म होने तक मेजबान बिहार जीत से महज छह विकेट दूर है। इस मैच में बिहार ने अपनी पहली पारी में पाँच सौ छियालीस रन बनाए। वहीं मणिपुर ने अपनी पहली पारी में तीन सौ सैंतीस रन बनाए। बिहार ने अपनी दूसरी पारी में एक सौ दो ओवर में तीन सौ पैंतीस रन बनाए। मणिपुर दूसरी पारी में चौंतीस ओवर में चार विकेट खोकर एक सौ सात रन बनाकर खेल रही है। चौथे दिन का खेल समाप्त होने के समय तक मणिपुर के कप्तान लैंग्लोन्याम्बा एम नाबाद चौंतालीस रन व विकास सिंह नाबाद एक रन बना कर क्रीज पर जमे हैं। खेल के चौथे दिन बिहार ने अपनी दूसरी पारी में सचिन कुमार सिंह के नाबाद बयासी रन की मदद से बनाए गए छह विकेट पर एक सौ छप्पन रन से आगे खेलना शुरू किया। सचिन सिंह के शानदार एक सौ बत्तीस रन, शिवम सिंह के पैंतालीस, आशुतोष अमन के इक्यावन व वीर प्रताप सिंह के पैंतीस रन की मदद से एक सौ दो ओवर में तीन सौ पैंतीस रन बनाए। मणिपुर के किशन सिंग्हा ने तैंतालीस ओवर में चौरानवे रन खर्च कर सात विकेट, जतिन फैरोजम, रेक्स व प्रीयोजित के ने एक विकेट लिए। मणिपुर के किशन सिंग्घा ने दोनों पारी में अबतक ग्यारह विकेट अपने नाम किए है। दोपहर टी ब्रेक के बाद दूसरी पारी खेलने उतरी मणिपुर ने कप्तान लैंग्लोन्याम्बा एम के नाबाद चौंतालीस रन व प्रीयोजित के के उनतालीस रन की मदद से चौंतीस ओवर में चार विकेट खोकर एक सौ सात रन बनाकर खेल रही है। हालांकि जहां बिहार जीत कर इतिहास रचने से म? हज छः विकेट दूर है। वहीं मणिपुर के सामने अब भी चार सौ अड़तीस रन का कठिन लक्ष्य है। बिहार के आशुतोष अमन ने दो, नवाज व सचिन कुमार सिंह ने एक-एक सफलताएं हासिल की।
दसवाँ अध्याय । अर्थात् कारण है वह सब ईश्वर की विभूति है। ऐसी कोई चीज़ संसार में नहीं है जो ईश्वर के बिना हो अर्थात् ईश्वर सव चीजों में मौजूद है । है हे सर्जुन ! ईश्वर की विभूतियों का अन्त नहीं। यह जो मैंने • उनका कुछ वर्णन किया है सो तो सिर्फ दिग्दर्शन के लिए किया है । अर्जुन ! जो-जो चीज़ सुन्दर और अच्छी मालूम होती है और चमत्कारी दिखाई देती है वह सब परमात्मा को विभूति समझनी चाहिए । इसे परमात्मा के तेजोश से पैदा हुई समझनी चाहिए । ६ पर्जुन ! बहुत कहने से क्या, ईश्वर इस सारे जगत् में व्याप्त हो रहा है ।
दसवाँ अध्याय । अर्थात् कारण है वह सब ईश्वर की विभूति है। ऐसी कोई चीज़ संसार में नहीं है जो ईश्वर के बिना हो अर्थात् ईश्वर सव चीजों में मौजूद है । है हे सर्जुन ! ईश्वर की विभूतियों का अन्त नहीं। यह जो मैंने • उनका कुछ वर्णन किया है सो तो सिर्फ दिग्दर्शन के लिए किया है । अर्जुन ! जो-जो चीज़ सुन्दर और अच्छी मालूम होती है और चमत्कारी दिखाई देती है वह सब परमात्मा को विभूति समझनी चाहिए । इसे परमात्मा के तेजोश से पैदा हुई समझनी चाहिए । छः पर्जुन ! बहुत कहने से क्या, ईश्वर इस सारे जगत् में व्याप्त हो रहा है ।
( १५ ) समय, सुद्ध, ( १६ ) समय, सार्थ, सार्थ - ये तीन भाव । ध्रुव - ये तीन भाव । समयं दर्सनं न्यानं, चरनं सुद्ध भावना । सार्थं सुद्ध चिदूपं, तस्य समय सार्थ ध्रुवं ।। ६३ ।। अन्वयार्थ - ( समयं दर्सनं न्यानं । समय जो आत्मा पदार्थ है वह दर्शन ज्ञान स्वरूप है ( चरनं सुद्ध भावना ) उसी दर्शन ज्ञानमई आत्मामें चलना व उसका हो अनुभव करना यह शुद्ध भावना है (सुद्ध चिद्रूप साथ ) शुद्ध चैतन्ध रूप आत्मा ही परम पदार्थ है ( तस्य समय सार्थ ध्रुवं ) उसो आत्माको ही समय कहते हैं, प्रयोजनभूत पदार्थ कहते हैं, उसीको ध्रुव अविनाशी निश्चल पदार्थ कहते हैं। भावार्थ- आत्मा निश्चय समय है, अपने स्वरूपमें एक भावसे परिणमन करनेवाला तथा जाननेवाला है । यह अपने ही स्वभावमें रमणशील होने से यही स्व समय है जब । यह स्वभाव में रमता है तथ इसमें शुद्ध तत्वकी ही भावना होती है। स्वभाव में रमणरूप आत्माका परिणमन होना सो हो सार्थक है क्योंकि उस समय निश्चय रत्नत्रयका लाभ है। आप ही सम्यग्दर्शन ज्ञान चारित्ररूप होरहा है, यही एक स्वानुभवमई मोक्षमार्ग है। यही धर्मध्यान तथा शुक्लध्यान है, यही कर्मोका क्षयकारक भाव है। यह आत्मा निश्चयसे समय है, परम पदार्थ परमात्मा है व यही ध्रुव है, सदा एक रूप है, निश्चल है। शुद्धात्मा मई परिणमन होना परमानन्दको प्रदान करता है। द्वादशांग बाणीका सार एक अपने ही शुद्धात्माका अनुभव है। अनादिकालसे अज्ञानीकी अनुमति रागद्वेषमई मैली होरही है। इसलिये उसको रागद्वेषका ही मलीन स्वाद आता है, वीतराग स्वरूप निज आत्मीक भावका स्वाद नहीं आता है। क्योंकि इसको यह पता नहीं चला कि मैं तो एक आत्मा द्रव्य हूँ-परसे भिन्न हूँ। अपने स्वरूपको शुद्ध सिद्धसम जानकर निश्चय बिना अपने स्वरूपमें रमण होना असंभव है। जैन सिद्धांतका सार यही है जो अपने आत्माका ही स्वाद लें। सर्व परसे उदासीन होजावे । अतीन्द्रिय आनन्दका अद्भुत स्वाद स्वरूप रमणमें आता है। आस्माकी सुन्दरता स्वरूप रहनेमें है, पर समय रूपमें रहना ही अज्ञान है, मोह है, भ्रम है। जिसने अपने घरको पहचान लिया वह अब ॥१२२॥ क्यों दूसरेके घरमें रमण करेगा । धर्म आत्माका स्वभाव है, नित्य स्वभाष में रमण होना ही स्वात्मानुभव है। मुमुक्षुको योग्य है कि शुद्ध निश्चयनयको आश्रय लेकर आत्माको सिद्ध समान अमूर्तीक ज्ञान दर्शन सुख बीर्यमय जाने माने व ऐसा ही निरन्तर मनन करे । भावना करनेसे एकाग्रता प्राप्त होती है। एकाग्रता में ही स्वानुभव है। निजानन्दका भोग है। यही आस्रवको रोकनेके लिये दृढ़ आर्गल है। स्वानुभव दशामें मनके विचार, वचनके आलाप व कायका हलन चलन सर्व बन्द होजाता है। एक ऐसे अनिर्वच नीय भाव में पहुँच जाता है जहां भावना भी बन्द होजाती है। इसीको अद्वैत अनुभव कहते हैं। आपसे ही आपमें आपके लिये आपमें से ही आपको आप ही ध्यावे । इन छः कर्ता कर्म करण सम्प्रदान, अपादान अधिकरण में आप ही रहे। कहने के लिये छः विकल्प हैं। अद्वैत अनुभवमें षट्कारकका भी विकल्प नहीं है। इस स्वानुभव में सर्व चिताएँ डूब जाती हैं। निर्मल शांत रसका ही स्वाद आता है। विना प्रथनके संबर निर्जरा होती हैं। समयसार में कहा है :-- जीवो चरित्तदंसणणाणहिदंत हि ससमयं जगणे । पुग्गक कम्मुवदेस ट्ठिदं च तं प्राण परसमयं ॥ २ ॥ भावार्थ - जय यह जीव आपहीका श्रद्धान, ज्ञान व आचरण करता रहता है तब इसको स्वसमय रूप जानो। जब यह पर पुद्गलके उदयके भीतर ठहरता है तब इसे पर समय जानो। णाणझि भावणा खलु कादव्वा दंणे चरित्ते य । ते पुणु तिणि वि आदा, तम्हा कुण भावणं आदे ॥ ११ ॥ भावार्थ-भेद रूप अपने ज्ञान में, दर्शन में व चारित्र में भावना करनी चाहिये परन्तु निश्चयसे ये तोनों ही आत्मा हैं इसलिये एक आत्माकी ही भावना करनी चाहिये । परमट्टो खलु समओ सुद्धो जो केवली मुणी णाणी 1 तझि ठिश सभावे मुमिणो पावंति णिव्वाणं ॥ १५८ ॥ भावार्थ - परमार्थ या उत्तम पदार्थ एक आत्मा है, वह एक साथ अपने आपमें रमण करनेवाला है इसलिये समय है, सर्व नयोंके विकल्पोंसे अतीत परम शुद्ध है, केवल चैतन्य वस्तु है इससे केवली है, स्वानुभव में स्थित है इससे मुनि है, ज्ञान स्वरूपसे ज्ञानी है, अपने ही स्वभाव में रहता है इससे स्वभाव रूप है । जो कोई मुनिगण ऐसे आत्माके भीतर स्थिर होकर स्वानुभव करते हैं वे ही निर्वाणको पाते हैं । मूलाचार में बहकेरस्वामी प्रत्याख्यान अधिकार में कहते हैंम दूसरा ममन्ति परिवज्जामि णिम्मयत्ति मुवट्ठियो । आलंबणं च मे आदा अवससाई बोसरे ॥ ४५ ॥ भावार्थ --- मैं सबसे ममता त्यागता हूं, निर्ममत्वभावसे स्थिर होता हूं। मैंने अपने ही आत्माका आलम्बन लिया है, और सबका त्याग किया है। (१७) सम्यक्त, वंदना, स्तुति- ये तीन भाव । सम्यक्त सुद्ध दृष्टिं च, वदना नित्य सास्वतं । स्तुतिं सुद्ध द्रव्यस्य, त्रिभङ्गी दल निरोधनं ॥ ६४ ॥ अन्वयार्थ ---( सम्यक्त सुद्ध दृष्टि च ) शुद्ध आत्माका श्रद्धान सम्यग्दर्शन है ( वंदना नित्य सास्वत ) इसी अपने शुद्धात्माको नित्य अविनाशी ध्याना निश्चयसे वन्दना है ( स्तुतिसुद्धद्रव्यस्य) शुद्ध द्रव्यकी हो व्यवहार से स्तुति करते हुए निश्चयसे उसी शुद्ध द्रव्यमें तन्मय होना निश्चय स्तुति है (त्रिभङ्गो दल निरोधन) सम्यग्दर्शन, सम्यग्दर्शन सहित वन्दना, सम्यग्दर्शन सहित स्तुति कर्माश्रवके रोकनेवाले हैं। भावार्थ - सम्यग्दर्शन संसारका नाश करनेवाला गुण है, जिसको यह गुण प्राप्त होजाता है वह मानो मोक्षरूप ही होजाता है, वह सदा अपने शुद्धात्मा को उसी तरह कर्म व शरीग़दिसे भिन्न देखता है जैसे जलके ऊपर पड़ी हुई चिकनई अलग दीखती है। स्वात्मानुभवकी शक्ति सम्यग्दर्शन से पैदा होजाती है। सम्यक्त होनेपर फिर कोई जीव दुर्गतिमें नहीं जाता है। सम्यक्त के साथ में स्वगकी देवायुका या उत्तम मानव आयुका ही बन्ध होता है। जिसने सम्यक्त होने के पहले आयु बन्ध किया हो यह भी पहले नर्कसे और नर्कमें नहीं जाता था भोगभूमिका पशु या मानव पैदा होता है । सम्यग्दर्शन के साथ तीर्थंकरादि व पांच परमेष्ठी आदि महान आत्माओंको जो वन्दना की जाती है वह यद्यपि शुभोपयोग है, परन्तु सम्यग्दर्शन के साथ होनेसे उससे भी पापोंका क्षय होता है। वह वन्दना वीतरागता मिश्रित सराग भाव है। वन्दना व स्तुतिके दो भेद हैं। जहां वचन व कायसे शब्द व विनय हो वह तो द्रव्य वन्दना व द्रव्य स्तुति है। जिसको वन्दना व स्तुति की जाये उसके गुणोंको मनमें विराजमान किया जावे वह भाव वन्दना व स्तुति है। भाव सहित द्रव्य वन्दना व स्तुतिको सफ त्रिभङ्गीसार ॥१२४॥ लता है। सिद्धात्माको अपने भावों में स्थापित करना निश्चय बन्दना है। मस्तक झुकाना, हाथ जोड़ना, द्रव्य वन्दना है । वचनोंसे स्तुति पढ़ना द्रव्य स्तवन है। सिद्धोंका शुद्ध स्वरूप मनमें अंकित करना भाव स्तुति है। सम्यग्दृष्टी ज्ञानी जीव जब अपना उपयोग स्वात्मानुभवमें नहीं जोड़ सकते हैं तब शुद्धात्माओंकी स्तुति व उनको बन्दना करके उपयोगको शुद्ध भाव में लेजानेकी चेष्टा करते हैं। शुद्धात्माकी तरफ परिणमन होनेसे वन्दना व स्तवन करते हुए बहुत पापका क्षय होता है । महान् पुरुषों के शरीराश्रित गुणोंकी महिमा गाना व्यवहार स्तुति है। केवल आत्माको लक्ष्य में लेकर आत्मीक गुणोंका गाना निश्चय स्तुति है । यही स्तुति सच्ची स्तुति है व शुद्धोपयोग में पहुँचानेवाली है। व्यवहार स्तवनका दृष्टान्त यह है समयसार कलश में कहा हैकान्स्यैव स्नपयन्ति ये दशदिशो धाम्ना निरुडन्तिये । घामोद्दाममहस्विनां जनमनो मुष्णांन्त रूपेण ये ।। दिव्येन ध्वनिना सुखं श्रवणयोः साक्षात्क्षरन्तोऽमृतम् । वंद्यास्तेऽष्टसहवलक्षणघर । स्तीथेंश्वराः सूरयः । २४-१ ।। भावार्थ-- वे तीर्थङ्कर महाराज वन्दनीय हैं, जिनकी शरीरकी कांति दशों दिशाओं में फैल रही है, जो अपने तेजसे बड़े २ तेजस्वी व्यक्तियोंके तेजको रोक रहे हैं, जो अपने रूपसे मनुष्योंके मनको हरण कर रहे हैं, जो अपनी दिव्यध्वनिसे कानों में धर्मामृतका सिंचन कर रहे हैं। निश्चय स्तुतिका दृष्टान्त यह है समयसार में कहा हैजो मोहं तु जिणिचा. गाण सहावाधियं मुगदि आद । तं निंद मोह साहुं परमट्टवियाणया वेति ॥ ३७ ।। भावार्थ- जो कोई मोहको जीतकर ज्ञान स्वभाव से पूर्ण अपने आत्माका अनुभव करता है उसे परमार्थके ज्ञाता जित मोह साधु कहते हैं। इस स्तुतिमें लक्ष्य आत्मा ही पर जाता है यह निश्चय स्तुति है। श्री समन्तभद्राचार्य स्वयम्भूस्तोत्र में कहते हैं-यस्य च मूर्तिः कनकमयवि स्वस्फुरदामाकृतपरिवेषा । बागपि उत्त्वं कथयितुकामा स्यात्पदपूर्वा रमयति साधून् ।। १०७ ॥ भावार्थ - व्यवहार स्तवनका दृष्टांत - जिस मल्लिनाथ स्वामीकी कनकमई मूर्ति अपनी शोभासे भामण्डल बना रही है व जिनकी वाणी तत्वको कथन करती हुई स्यात् पदसे विभूषित हो साधुओंके मनको रमा रही है। यस्य व शुक्रं परमतपोऽग्नियनमनन्तं दुस्तिमषाक्षीत् । तं जिनसिंहं कृतकरणीयं मलिमशल्यं शरणमितोऽस्मि ॥ ११० ॥ भावार्थ - यह निश्चय स्तुति है- जिस मल्लिनाथ भगवानने शुक्लध्यानकी बड़ी तेज तपरूपी अग्निको जलाकर अनन्त पाप कर्मोको जला डाला और जिनका आत्मा सिंह समान जिनेन्द्र होंगया, कृतकृत्य होगया, सर्व शल्प रहित होगया, ऐसे परमात्मा श्री मल्लिनाथकी शरणमें मैं प्राप्त होता हूं। ( १८) पदाथ, व्यंजन, स्वरूप - ये तीन भाव । पदार्थं पद विंदन्ते, विजनं न्यान दृष्टि तं । स्वरूपं सर्व चिद्रूपं, विंजनं पद विंदकं ।। ६५ ॥ अन्वयार्थ - पदार्थ पद विंदन्ते ) परमात्मा पदार्थसे परमात्माके पदका अनुभव होता है ( विभनं न्यान दृष्टि तं ) उसका लक्षण या चिह्न शुद्ध ज्ञान व शुद्ध दर्शन है ( स्वरूपं सर्व चिद्रूप) उसका स्वरूप सर्वोग चैतन्यमय है, अमूर्तीक है (विजन पद बिंदक) ज्ञान दर्शन लक्षणके द्वारा परमात्मा पदार्थ का अनुभव होता है। भावार्थ - नौ पदार्थों में जीव नामा पदार्थका अनुभव करना चाहिये । लक्षणसे लक्षणको ग्रहण किया जाता है। जोव पदार्थका लक्षण शुद्ध ज्ञान व शुद्ध दर्शन है। यह लक्षण अव्याप्ति, अतिव्याप्ति व असम्भव दोषोंसे रहता है । सर्व ही जोवोंका निज गुण ज्ञान दर्शन है। जीबके सिवाय किसी भी अजीवमें वे ज्ञान दर्शन नहीं पाए जाते हैं। यह लक्षण असम्भव भी नहीं है स्वयं प्रगट है। हरएक ज्ञानीको अनुभव है कि मैं देखता जानता हूं । जो स्थपरको देखने जाननेवाला है या जो निश्चयसे आपसे आपको देखने जाननेवाला है वही जीव है । उस जीवका सर्वांग स्वरूप चतन्यमय है । पुद्गल मई उसका स्वरूप नहीं है वह अनन्त गुण पर्यायका घारी होकर भी चेतन्यभावसे सर्व प्रदेशोंमें पूर्ण है। इसतरह वह जीव पदार्थ स्वयं परमात्मा, परमेश्वर, जिन, अरहन्त, सिद्ध, निरंजन, निर्विकार, बीतरागी, * कृतकृत्प, परमानन्दी है वही मैं हूं, ऐसा लक्ष्य में लेकर अपने जीव पदार्थका ध्यान व अनुभव करके परमानन्दका लाभ लेना चाहिये। कर्म संयोग जनित सर्व पर्यायोंसे वह भिन्न है। अकेले जीव पदार्थका स्वाद लेना ही हितकर है। तब ही सच्चा स्वाद आएगा। कर्म मिश्रित भाषका स्वाद अशुद्ध स्वाद है । समयसार कलशमें कहा हैम. दूसर
समय, सुद्ध, समय, सार्थ, सार्थ - ये तीन भाव । ध्रुव - ये तीन भाव । समयं दर्सनं न्यानं, चरनं सुद्ध भावना । सार्थं सुद्ध चिदूपं, तस्य समय सार्थ ध्रुवं ।। तिरेसठ ।। अन्वयार्थ - उसी दर्शन ज्ञानमई आत्मामें चलना व उसका हो अनुभव करना यह शुद्ध भावना है शुद्ध चैतन्ध रूप आत्मा ही परम पदार्थ है उसो आत्माको ही समय कहते हैं, प्रयोजनभूत पदार्थ कहते हैं, उसीको ध्रुव अविनाशी निश्चल पदार्थ कहते हैं। भावार्थ- आत्मा निश्चय समय है, अपने स्वरूपमें एक भावसे परिणमन करनेवाला तथा जाननेवाला है । यह अपने ही स्वभावमें रमणशील होने से यही स्व समय है जब । यह स्वभाव में रमता है तथ इसमें शुद्ध तत्वकी ही भावना होती है। स्वभाव में रमणरूप आत्माका परिणमन होना सो हो सार्थक है क्योंकि उस समय निश्चय रत्नत्रयका लाभ है। आप ही सम्यग्दर्शन ज्ञान चारित्ररूप होरहा है, यही एक स्वानुभवमई मोक्षमार्ग है। यही धर्मध्यान तथा शुक्लध्यान है, यही कर्मोका क्षयकारक भाव है। यह आत्मा निश्चयसे समय है, परम पदार्थ परमात्मा है व यही ध्रुव है, सदा एक रूप है, निश्चल है। शुद्धात्मा मई परिणमन होना परमानन्दको प्रदान करता है। द्वादशांग बाणीका सार एक अपने ही शुद्धात्माका अनुभव है। अनादिकालसे अज्ञानीकी अनुमति रागद्वेषमई मैली होरही है। इसलिये उसको रागद्वेषका ही मलीन स्वाद आता है, वीतराग स्वरूप निज आत्मीक भावका स्वाद नहीं आता है। क्योंकि इसको यह पता नहीं चला कि मैं तो एक आत्मा द्रव्य हूँ-परसे भिन्न हूँ। अपने स्वरूपको शुद्ध सिद्धसम जानकर निश्चय बिना अपने स्वरूपमें रमण होना असंभव है। जैन सिद्धांतका सार यही है जो अपने आत्माका ही स्वाद लें। सर्व परसे उदासीन होजावे । अतीन्द्रिय आनन्दका अद्भुत स्वाद स्वरूप रमणमें आता है। आस्माकी सुन्दरता स्वरूप रहनेमें है, पर समय रूपमें रहना ही अज्ञान है, मोह है, भ्रम है। जिसने अपने घरको पहचान लिया वह अब ॥एक सौ बाईस॥ क्यों दूसरेके घरमें रमण करेगा । धर्म आत्माका स्वभाव है, नित्य स्वभाष में रमण होना ही स्वात्मानुभव है। मुमुक्षुको योग्य है कि शुद्ध निश्चयनयको आश्रय लेकर आत्माको सिद्ध समान अमूर्तीक ज्ञान दर्शन सुख बीर्यमय जाने माने व ऐसा ही निरन्तर मनन करे । भावना करनेसे एकाग्रता प्राप्त होती है। एकाग्रता में ही स्वानुभव है। निजानन्दका भोग है। यही आस्रवको रोकनेके लिये दृढ़ आर्गल है। स्वानुभव दशामें मनके विचार, वचनके आलाप व कायका हलन चलन सर्व बन्द होजाता है। एक ऐसे अनिर्वच नीय भाव में पहुँच जाता है जहां भावना भी बन्द होजाती है। इसीको अद्वैत अनुभव कहते हैं। आपसे ही आपमें आपके लिये आपमें से ही आपको आप ही ध्यावे । इन छः कर्ता कर्म करण सम्प्रदान, अपादान अधिकरण में आप ही रहे। कहने के लिये छः विकल्प हैं। अद्वैत अनुभवमें षट्कारकका भी विकल्प नहीं है। इस स्वानुभव में सर्व चिताएँ डूब जाती हैं। निर्मल शांत रसका ही स्वाद आता है। विना प्रथनके संबर निर्जरा होती हैं। समयसार में कहा है :-- जीवो चरित्तदंसणणाणहिदंत हि ससमयं जगणे । पुग्गक कम्मुवदेस ट्ठिदं च तं प्राण परसमयं ॥ दो ॥ भावार्थ - जय यह जीव आपहीका श्रद्धान, ज्ञान व आचरण करता रहता है तब इसको स्वसमय रूप जानो। जब यह पर पुद्गलके उदयके भीतर ठहरता है तब इसे पर समय जानो। णाणझि भावणा खलु कादव्वा दंणे चरित्ते य । ते पुणु तिणि वि आदा, तम्हा कुण भावणं आदे ॥ ग्यारह ॥ भावार्थ-भेद रूप अपने ज्ञान में, दर्शन में व चारित्र में भावना करनी चाहिये परन्तु निश्चयसे ये तोनों ही आत्मा हैं इसलिये एक आत्माकी ही भावना करनी चाहिये । परमट्टो खलु समओ सुद्धो जो केवली मुणी णाणी एक तझि ठिश सभावे मुमिणो पावंति णिव्वाणं ॥ एक सौ अट्ठावन ॥ भावार्थ - परमार्थ या उत्तम पदार्थ एक आत्मा है, वह एक साथ अपने आपमें रमण करनेवाला है इसलिये समय है, सर्व नयोंके विकल्पोंसे अतीत परम शुद्ध है, केवल चैतन्य वस्तु है इससे केवली है, स्वानुभव में स्थित है इससे मुनि है, ज्ञान स्वरूपसे ज्ञानी है, अपने ही स्वभाव में रहता है इससे स्वभाव रूप है । जो कोई मुनिगण ऐसे आत्माके भीतर स्थिर होकर स्वानुभव करते हैं वे ही निर्वाणको पाते हैं । मूलाचार में बहकेरस्वामी प्रत्याख्यान अधिकार में कहते हैंम दूसरा ममन्ति परिवज्जामि णिम्मयत्ति मुवट्ठियो । आलंबणं च मे आदा अवससाई बोसरे ॥ पैंतालीस ॥ भावार्थ --- मैं सबसे ममता त्यागता हूं, निर्ममत्वभावसे स्थिर होता हूं। मैंने अपने ही आत्माका आलम्बन लिया है, और सबका त्याग किया है। सम्यक्त, वंदना, स्तुति- ये तीन भाव । सम्यक्त सुद्ध दृष्टिं च, वदना नित्य सास्वतं । स्तुतिं सुद्ध द्रव्यस्य, त्रिभङ्गी दल निरोधनं ॥ चौंसठ ॥ अन्वयार्थ --- शुद्ध आत्माका श्रद्धान सम्यग्दर्शन है इसी अपने शुद्धात्माको नित्य अविनाशी ध्याना निश्चयसे वन्दना है शुद्ध द्रव्यकी हो व्यवहार से स्तुति करते हुए निश्चयसे उसी शुद्ध द्रव्यमें तन्मय होना निश्चय स्तुति है सम्यग्दर्शन, सम्यग्दर्शन सहित वन्दना, सम्यग्दर्शन सहित स्तुति कर्माश्रवके रोकनेवाले हैं। भावार्थ - सम्यग्दर्शन संसारका नाश करनेवाला गुण है, जिसको यह गुण प्राप्त होजाता है वह मानो मोक्षरूप ही होजाता है, वह सदा अपने शुद्धात्मा को उसी तरह कर्म व शरीग़दिसे भिन्न देखता है जैसे जलके ऊपर पड़ी हुई चिकनई अलग दीखती है। स्वात्मानुभवकी शक्ति सम्यग्दर्शन से पैदा होजाती है। सम्यक्त होनेपर फिर कोई जीव दुर्गतिमें नहीं जाता है। सम्यक्त के साथ में स्वगकी देवायुका या उत्तम मानव आयुका ही बन्ध होता है। जिसने सम्यक्त होने के पहले आयु बन्ध किया हो यह भी पहले नर्कसे और नर्कमें नहीं जाता था भोगभूमिका पशु या मानव पैदा होता है । सम्यग्दर्शन के साथ तीर्थंकरादि व पांच परमेष्ठी आदि महान आत्माओंको जो वन्दना की जाती है वह यद्यपि शुभोपयोग है, परन्तु सम्यग्दर्शन के साथ होनेसे उससे भी पापोंका क्षय होता है। वह वन्दना वीतरागता मिश्रित सराग भाव है। वन्दना व स्तुतिके दो भेद हैं। जहां वचन व कायसे शब्द व विनय हो वह तो द्रव्य वन्दना व द्रव्य स्तुति है। जिसको वन्दना व स्तुति की जाये उसके गुणोंको मनमें विराजमान किया जावे वह भाव वन्दना व स्तुति है। भाव सहित द्रव्य वन्दना व स्तुतिको सफ त्रिभङ्गीसार ॥एक सौ चौबीस॥ लता है। सिद्धात्माको अपने भावों में स्थापित करना निश्चय बन्दना है। मस्तक झुकाना, हाथ जोड़ना, द्रव्य वन्दना है । वचनोंसे स्तुति पढ़ना द्रव्य स्तवन है। सिद्धोंका शुद्ध स्वरूप मनमें अंकित करना भाव स्तुति है। सम्यग्दृष्टी ज्ञानी जीव जब अपना उपयोग स्वात्मानुभवमें नहीं जोड़ सकते हैं तब शुद्धात्माओंकी स्तुति व उनको बन्दना करके उपयोगको शुद्ध भाव में लेजानेकी चेष्टा करते हैं। शुद्धात्माकी तरफ परिणमन होनेसे वन्दना व स्तवन करते हुए बहुत पापका क्षय होता है । महान् पुरुषों के शरीराश्रित गुणोंकी महिमा गाना व्यवहार स्तुति है। केवल आत्माको लक्ष्य में लेकर आत्मीक गुणोंका गाना निश्चय स्तुति है । यही स्तुति सच्ची स्तुति है व शुद्धोपयोग में पहुँचानेवाली है। व्यवहार स्तवनका दृष्टान्त यह है समयसार कलश में कहा हैकान्स्यैव स्नपयन्ति ये दशदिशो धाम्ना निरुडन्तिये । घामोद्दाममहस्विनां जनमनो मुष्णांन्त रूपेण ये ।। दिव्येन ध्वनिना सुखं श्रवणयोः साक्षात्क्षरन्तोऽमृतम् । वंद्यास्तेऽष्टसहवलक्षणघर । स्तीथेंश्वराः सूरयः । चौबीस-एक ।। भावार्थ-- वे तीर्थङ्कर महाराज वन्दनीय हैं, जिनकी शरीरकी कांति दशों दिशाओं में फैल रही है, जो अपने तेजसे बड़े दो तेजस्वी व्यक्तियोंके तेजको रोक रहे हैं, जो अपने रूपसे मनुष्योंके मनको हरण कर रहे हैं, जो अपनी दिव्यध्वनिसे कानों में धर्मामृतका सिंचन कर रहे हैं। निश्चय स्तुतिका दृष्टान्त यह है समयसार में कहा हैजो मोहं तु जिणिचा. गाण सहावाधियं मुगदि आद । तं निंद मोह साहुं परमट्टवियाणया वेति ॥ सैंतीस ।। भावार्थ- जो कोई मोहको जीतकर ज्ञान स्वभाव से पूर्ण अपने आत्माका अनुभव करता है उसे परमार्थके ज्ञाता जित मोह साधु कहते हैं। इस स्तुतिमें लक्ष्य आत्मा ही पर जाता है यह निश्चय स्तुति है। श्री समन्तभद्राचार्य स्वयम्भूस्तोत्र में कहते हैं-यस्य च मूर्तिः कनकमयवि स्वस्फुरदामाकृतपरिवेषा । बागपि उत्त्वं कथयितुकामा स्यात्पदपूर्वा रमयति साधून् ।। एक सौ सात ॥ भावार्थ - व्यवहार स्तवनका दृष्टांत - जिस मल्लिनाथ स्वामीकी कनकमई मूर्ति अपनी शोभासे भामण्डल बना रही है व जिनकी वाणी तत्वको कथन करती हुई स्यात् पदसे विभूषित हो साधुओंके मनको रमा रही है। यस्य व शुक्रं परमतपोऽग्नियनमनन्तं दुस्तिमषाक्षीत् । तं जिनसिंहं कृतकरणीयं मलिमशल्यं शरणमितोऽस्मि ॥ एक सौ दस ॥ भावार्थ - यह निश्चय स्तुति है- जिस मल्लिनाथ भगवानने शुक्लध्यानकी बड़ी तेज तपरूपी अग्निको जलाकर अनन्त पाप कर्मोको जला डाला और जिनका आत्मा सिंह समान जिनेन्द्र होंगया, कृतकृत्य होगया, सर्व शल्प रहित होगया, ऐसे परमात्मा श्री मल्लिनाथकी शरणमें मैं प्राप्त होता हूं। पदाथ, व्यंजन, स्वरूप - ये तीन भाव । पदार्थं पद विंदन्ते, विजनं न्यान दृष्टि तं । स्वरूपं सर्व चिद्रूपं, विंजनं पद विंदकं ।। पैंसठ ॥ अन्वयार्थ - पदार्थ पद विंदन्ते ) परमात्मा पदार्थसे परमात्माके पदका अनुभव होता है उसका लक्षण या चिह्न शुद्ध ज्ञान व शुद्ध दर्शन है उसका स्वरूप सर्वोग चैतन्यमय है, अमूर्तीक है ज्ञान दर्शन लक्षणके द्वारा परमात्मा पदार्थ का अनुभव होता है। भावार्थ - नौ पदार्थों में जीव नामा पदार्थका अनुभव करना चाहिये । लक्षणसे लक्षणको ग्रहण किया जाता है। जोव पदार्थका लक्षण शुद्ध ज्ञान व शुद्ध दर्शन है। यह लक्षण अव्याप्ति, अतिव्याप्ति व असम्भव दोषोंसे रहता है । सर्व ही जोवोंका निज गुण ज्ञान दर्शन है। जीबके सिवाय किसी भी अजीवमें वे ज्ञान दर्शन नहीं पाए जाते हैं। यह लक्षण असम्भव भी नहीं है स्वयं प्रगट है। हरएक ज्ञानीको अनुभव है कि मैं देखता जानता हूं । जो स्थपरको देखने जाननेवाला है या जो निश्चयसे आपसे आपको देखने जाननेवाला है वही जीव है । उस जीवका सर्वांग स्वरूप चतन्यमय है । पुद्गल मई उसका स्वरूप नहीं है वह अनन्त गुण पर्यायका घारी होकर भी चेतन्यभावसे सर्व प्रदेशोंमें पूर्ण है। इसतरह वह जीव पदार्थ स्वयं परमात्मा, परमेश्वर, जिन, अरहन्त, सिद्ध, निरंजन, निर्विकार, बीतरागी, * कृतकृत्प, परमानन्दी है वही मैं हूं, ऐसा लक्ष्य में लेकर अपने जीव पदार्थका ध्यान व अनुभव करके परमानन्दका लाभ लेना चाहिये। कर्म संयोग जनित सर्व पर्यायोंसे वह भिन्न है। अकेले जीव पदार्थका स्वाद लेना ही हितकर है। तब ही सच्चा स्वाद आएगा। कर्म मिश्रित भाषका स्वाद अशुद्ध स्वाद है । समयसार कलशमें कहा हैम. दूसर
पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आ रहा। मंगलवार को सुबह पाकिस्तानी सैनिकों ने सीजफायर का उल्लंघन किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बिना उकसावे के सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों को निशाना बनाकर गोलियां चलाईं। पाकिस्तान की इस हरकत का भारतीय जवानों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया। बीएसएफ जम्मू के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि गोलीबारी में भारत की ओर से कोई हताहत नहीं हुआ है। भारत और पाकिस्तान फरवरी 2020 में जम्मू-कश्मीर में सीमाओं के लिए नए सिरे से एक संघर्ष विराम समझौते पर सहमत हुए थे। समझौते के तहत नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थानीय निवासियों ने खेती फिर से शुरू की थी।
पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आ रहा। मंगलवार को सुबह पाकिस्तानी सैनिकों ने सीजफायर का उल्लंघन किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बिना उकसावे के सीमा सुरक्षा बल के जवानों को निशाना बनाकर गोलियां चलाईं। पाकिस्तान की इस हरकत का भारतीय जवानों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया। बीएसएफ जम्मू के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि गोलीबारी में भारत की ओर से कोई हताहत नहीं हुआ है। भारत और पाकिस्तान फरवरी दो हज़ार बीस में जम्मू-कश्मीर में सीमाओं के लिए नए सिरे से एक संघर्ष विराम समझौते पर सहमत हुए थे। समझौते के तहत नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थानीय निवासियों ने खेती फिर से शुरू की थी।
वीडियो में रैपर मुहम्मद शाह (Rapper Muhammad Shah) से उनका दोस्त कहता है कि वह आलिया पर गाना बनाएं जिसके बाद वह रैप सुनाते हैं। आखिर में रैपर को बताया जाता है कि आलिया का पहले से ही बॉयफ्रेंड है और उन्हें जान्हवी कपूर पर गाना ट्राइ करना चाहिए। ऐसा लग रहा है कि रैपर का एक और गाना जल्द आ सकता है। वीडियो को शेयर करते हुए रैपर ने कैप्शन दिया, 'What if के पहले एपिसोड में. . . #onlylovetoshare' आलिया खुद भी इस पर कॉमेंट करने से खुद को रोक नहीं पाईं। उन्होंने लिखा 'बहुत हार्ड' और इसके साथ फायर वाले इमोजी बनाए। आलिया भट्ट इन दिनों रणबीर कपूर के साथ बीच वकेशन इंजॉय कर रही हैं। हाल ही में कपल कोविड-19 से रिकवर हुआ है जिसके बाद दोनों छुट्टियां मनाने के लिए रवाना हुए। वर्क फ्रंट की बात करें तो आने वाले दिनों में आलिया कई इंट्रेस्टिंग प्रॉजेक्ट्स में नजर आएंगी। वह अयान मुखर्जी की फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में पहली बार रणबीर कपूर के साथ स्क्रीन शेयर करेंगी। इसके अलावा वह 'गंगूबाई काठियावाड़ी' और 'आरआरआर' जैसी फिल्मों में दिखेंगी।
वीडियो में रैपर मुहम्मद शाह से उनका दोस्त कहता है कि वह आलिया पर गाना बनाएं जिसके बाद वह रैप सुनाते हैं। आखिर में रैपर को बताया जाता है कि आलिया का पहले से ही बॉयफ्रेंड है और उन्हें जान्हवी कपूर पर गाना ट्राइ करना चाहिए। ऐसा लग रहा है कि रैपर का एक और गाना जल्द आ सकता है। वीडियो को शेयर करते हुए रैपर ने कैप्शन दिया, 'What if के पहले एपिसोड में. . . #onlylovetoshare' आलिया खुद भी इस पर कॉमेंट करने से खुद को रोक नहीं पाईं। उन्होंने लिखा 'बहुत हार्ड' और इसके साथ फायर वाले इमोजी बनाए। आलिया भट्ट इन दिनों रणबीर कपूर के साथ बीच वकेशन इंजॉय कर रही हैं। हाल ही में कपल कोविड-उन्नीस से रिकवर हुआ है जिसके बाद दोनों छुट्टियां मनाने के लिए रवाना हुए। वर्क फ्रंट की बात करें तो आने वाले दिनों में आलिया कई इंट्रेस्टिंग प्रॉजेक्ट्स में नजर आएंगी। वह अयान मुखर्जी की फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में पहली बार रणबीर कपूर के साथ स्क्रीन शेयर करेंगी। इसके अलावा वह 'गंगूबाई काठियावाड़ी' और 'आरआरआर' जैसी फिल्मों में दिखेंगी।
(current) पीएम मोदी आज जम्मू कश्मीर दौरे पर हैं. दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज पटना में करेंगे जन आकांक्षा रैली. देखें पूरी खबर. . Lie Detector Test : क्या है France के फसादियों पर फंजा कसने का सच? Desh Ki Bahas : हिजाब के हिसाब में और कितना हंगामा? Desh Ki Bahas : हिजाब विवाद या कट्टर जिहाद? Desh Ki Bahas : 'कश्मीर के सच' से सेक्युलर खेमा परेशान?
पीएम मोदी आज जम्मू कश्मीर दौरे पर हैं. दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज पटना में करेंगे जन आकांक्षा रैली. देखें पूरी खबर. . Lie Detector Test : क्या है France के फसादियों पर फंजा कसने का सच? Desh Ki Bahas : हिजाब के हिसाब में और कितना हंगामा? Desh Ki Bahas : हिजाब विवाद या कट्टर जिहाद? Desh Ki Bahas : 'कश्मीर के सच' से सेक्युलर खेमा परेशान?
PM Modi Independence Day Speech: आज पूरा देश आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौवीं बार लाल किले से राष्ट्रीय ध्वज फहराया. इस दौरान 21 तोपों की सलामी भी दी गई. यह 9वां मौका है, जब नरेंद्र मोदी ने पीएम के तौर पर झंडारोहण किया. इससे पहले पीएम मोदी ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं. अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे भारत ने सिद्ध कर दिया कि हमारे पास ये अनमोल सामर्थ्य है. 75 साल की यात्रा में आशाएं, अपेक्षाएं, उतार-चढ़ाव सब के बीच हर एक के प्रयास से हम यहां तक पहुंच पाए. आजादी के बाद जन्मा मैं पहला व्यक्ति था जिसे लाल किले से देशवासियों का गौरव गान करने का अवसर मिला. विश्व भारत की ओर गर्व, अपेक्षा से देख रहा है. दुनिया समस्याओं का समाधान भारत की धरती पर खोजने लगी है. यह हमारे 75 साल की अनुभव यात्रा का परिणाम में है. 'अगले 25 साल भारत के लिए बेहद अहम', देखें क्यों बोले पीएम मोदी. India is celebrating the 75th year of Independence Day with great grandeur. Prime Minister Narendra Modi also unfurled the tricolor from Red Fort. In his address to the nation, Prime Minister Narendra Modi said on Monday that India is honouring the forgotten heros who played role in the country's Independence. PM Modi stated that I urge the youth to dedicate the next 25 years of their lives to the development of the nation. We will work towards even the development of the entire humanity. That is the strength of India. Watch this video.
PM Modi Independence Day Speech: आज पूरा देश आजादी की पचहत्तरवीं वर्षगांठ मना रहा है. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौवीं बार लाल किले से राष्ट्रीय ध्वज फहराया. इस दौरान इक्कीस तोपों की सलामी भी दी गई. यह नौवां मौका है, जब नरेंद्र मोदी ने पीएम के तौर पर झंडारोहण किया. इससे पहले पीएम मोदी ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं. अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे भारत ने सिद्ध कर दिया कि हमारे पास ये अनमोल सामर्थ्य है. पचहत्तर साल की यात्रा में आशाएं, अपेक्षाएं, उतार-चढ़ाव सब के बीच हर एक के प्रयास से हम यहां तक पहुंच पाए. आजादी के बाद जन्मा मैं पहला व्यक्ति था जिसे लाल किले से देशवासियों का गौरव गान करने का अवसर मिला. विश्व भारत की ओर गर्व, अपेक्षा से देख रहा है. दुनिया समस्याओं का समाधान भारत की धरती पर खोजने लगी है. यह हमारे पचहत्तर साल की अनुभव यात्रा का परिणाम में है. 'अगले पच्चीस साल भारत के लिए बेहद अहम', देखें क्यों बोले पीएम मोदी. India is celebrating the पचहत्तरth year of Independence Day with great grandeur. Prime Minister Narendra Modi also unfurled the tricolor from Red Fort. In his address to the nation, Prime Minister Narendra Modi said on Monday that India is honouring the forgotten heros who played role in the country's Independence. PM Modi stated that I urge the youth to dedicate the next पच्चीस years of their lives to the development of the nation. We will work towards even the development of the entire humanity. That is the strength of India. Watch this video.
इसी तरह, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 'माघ मेला' में भाग लेने वाले संतों ने हिंदू देवी-देवताओं की मानहानि को रोकने के लिए 'धर्म सेंसर बोर्ड' की स्थापना की है। धर्म सेंसर बोर्ड इस बात की निगरानी करने जा रहा है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्में, वेब सीरीज हिंदू देवी-देवताओं का अपमान न करें। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 10 सदस्यीय सेंसर बोर्ड के प्रमुख होंगे। नियुक्ति के बाद बोलते हुए, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, "धर्म सेंसर बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि फिल्में और अन्य मनोरंजन सामग्री हिंदू संस्कृति का अपमान न करें और हिंदू देवताओं को बदनाम न करें। Peegate: एयर इंडिया पर 30 लाख का जुर्माना, पायलट का लाइसेंस निलंबित!
इसी तरह, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 'माघ मेला' में भाग लेने वाले संतों ने हिंदू देवी-देवताओं की मानहानि को रोकने के लिए 'धर्म सेंसर बोर्ड' की स्थापना की है। धर्म सेंसर बोर्ड इस बात की निगरानी करने जा रहा है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्में, वेब सीरीज हिंदू देवी-देवताओं का अपमान न करें। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती दस सदस्यीय सेंसर बोर्ड के प्रमुख होंगे। नियुक्ति के बाद बोलते हुए, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, "धर्म सेंसर बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि फिल्में और अन्य मनोरंजन सामग्री हिंदू संस्कृति का अपमान न करें और हिंदू देवताओं को बदनाम न करें। Peegate: एयर इंडिया पर तीस लाख का जुर्माना, पायलट का लाइसेंस निलंबित!
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग, उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा वस्त्र मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में सीआईआई पार्टनरशिप समिट 2023 में कहा कि आज विश्व जिन समस्याओं का सामना कर रहा है, उनके समाधान के लिये यह समय मित्रता और साझेदारी का है। इस विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुये श्री गोयल ने कहा इस मुश्किल भरे समय में, जब दुनिया बड़ी कठिनाई से कोविड से बाहर निकल पाई है, जब हम उन टकरावों का सामना करते हैं जो अर्थव्यवस्थाओं को नीचे ले जाते हैं, जिनसे मंहगाई बढ़ती है तथा परिणामस्वरूप ब्याज दरों में वृद्धि होती है, जिसके कारण दुनिया के अनेक भागों में मंदी चल रही है, तो इस तरह की मुलाकातों से हमें मदद मिलती है कि हम यह देख सकें कि हम वैश्विक चुनौतियों व वैश्विक समस्याओं का सामूहिक समाधान निकालकर एक-दूसरे के लिये कैसे बेहतर काम कर सकते हैं। श्री गोयल ने कहा कि हम आपूर्ति श्रृंखला के हर स्थिति में काम करने लायक, विस्तृत और स्थिर स्रोतों की तलाश में हैं। हम बड़े बाजारों को देख रहे हैं और इस काम में हम जोखिम की संभावना को न्यूनतम करना चाहते हैं। अनेक अर्थव्यवस्थायें इन जोखिमों का सामना कर रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का उद्धरण दिया कि केवल साझेदारी से ही हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। श्री गोयल ने कहा कि भारत ने विश्व के लिए एक उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार वैश्विक नागरिक के रूप में, जब हमने कोविड वैक्सीन विकसित की, तो हमने न केवल अपने नागरिकों के लिए इसे उपलब्ध कराया और उन्हें निशुल्क 2.2 बिलियन टीके लगाए, बल्कि हमने कम विकसित देशों से लेकर प्रशांत द्वीप राष्ट्रों से लेकर कैरिबियन देशों तक, हमारे पड़ोस के छोटे द्वीप राज्यों को भी टीके प्रदान किए। उन्होंने कहा कि 250 करोड़ से अधिक टीके दुनिया के अन्य हिस्सों में निशुल्क मुहैया कराये गये। नवाचार की आवश्यकता पर बोलते हुए, श्री गोयल ने कहा कि हम सभी को अभिनव विचारों, अपने काम को अधिक कुशलता और अधिक प्रभावी ढंग से करने के नये तरीकों को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि भारत में, जहां सात साल पहले मुश्किल से तीन या चार यूनिकॉर्न थे, आज 100 से अधिक यूनिकॉर्न हैं और भारत की स्टार्टअप इको-प्रणाली दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी प्रणाली है। श्री गोयल ने कहा कि भारत में निरंतरता जीवन का एक तरीका है और हमें दुनिया के अन्य हिस्सों को सिखाने या उनसे सीखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे हरित लक्ष्य बहुत महत्त्वाकांक्षी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने निरंतरता भरी जीवनशैली की अवधारणा पेश की है, जो समय की मांग है। इस सिलसिले में याद रहे कि हम सभी दुनिया भर में, विशेष रूप से विकसित दुनिया में जो अपशिष्ट पैदा कर रहे हैं, वह मानवता की जरूरतों की तुलना में जलवायु परिवर्तन की इस बड़ी समस्या का एक बड़ा कारण है। श्री गोयल ने कहा कि जैसा कि महात्मा गांधी ने कहा था, इस पीढ़ी में हम सभी अपने बच्चों के लिये न्यासी और संरक्षक हैं। हम सभी की यह जिम्मेदारी है कि हम विरासत में मिले विश्व की तुलना में एक बेहतर विश्व छोड़कर जायें, ताकि हमारे बच्चों को बेहतर भविष्य मिल सके। श्री गोयल ने कहा कि भारत में हम अपने सतत लक्ष्यों और निरंतरता भरी जीवनशैली के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं। श्री गोयल ने कहा कि हम कचरे को खत्म करने या पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग के लिए प्रतिबद्ध हैं और मैं अपने सभी साझीदार देशों को भारत के साथ काम करने, भारत से सीखने, दुनिया को रहने के लिए एक बेहतर जगह बनाने के इस प्रयास में भारत के साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित करता हूं। श्री गोयल ने विश्व अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत की साझेदारी पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हम अपने कारोबार को सक्षम बनाने के लिए कई देशों के साथ अंतर्राष्ट्रीय समझौते कर रहे हैं, क्योंकि हम दुनिया भर के व्यवसायों को सक्षम बनाना चाहते हैं। हम एक-दूसरे से जुड़ेंगे, ताकि हम अंतरराष्ट्रीय वैश्विक आर्थिक मोर्चे पर दमखम दिखा सकें। उन्होंने कहा कि इस प्रयास का नेतृत्व प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आगे बढ़कर किया है। एक उदाहरण देते हुए श्री गोयल ने कहा कि दो साल पहले, हमारे माल और सेवाओं का निर्यात सामूहिक रूप से 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने फैसला किया कि भारत कोविड के संकट को एक अवसर में बदल देगा, हम इस संकट से विचलित नहीं होंगे। प्रधानमंत्री ने देश की सभी निर्यात संवर्धन परिषदों से बात की और उन्होंने उन चुनौतियों को समझा जो वे सामना कर रहे थे। उन्होंने समाधान खोजा और दुनिया भर में हमारे मिशन प्रमुखों से बात की। और, अब जब हम स्वतंत्र भारत के 75 साल का जश्न मना रहे हैं, तो ऐसे वक्त में हम वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात के 750 बिलियन के लक्ष्य को पार करने के लिए निकल पड़े हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने कहा कि भारत आज अन्य प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अनेक प्रतिस्पर्धात्मक लाभों की पेशकश करता है। उन्होंने कहा कि हम उच्च गुणवत्ता वाले सामान और बड़े पैमाने वाली अर्थव्यवस्थाओं के उपयोग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, खासतौर से विशाल स्वदेशी बाजार के मामले में, जहां यह पेशकश हम उन व्यापारों व निवेशकों को कर रहे हैं, जो भारत आते हैं और यहां काम करते हैं। हम अपने उन मित्र देशों को भी यह पेशकश कर रहे हैं, जिनके भारत के साथ आर्थिक सम्बंध हैं। हमारे एमएसएमई पहले डिजिटलीकरण के साथ जुड़ रहे हैं और जैसा कि पहले उल्लेख किया गया था, भारत बाकी दुनिया के उपयोग के लिए डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं के रूप में अपने डिजिटल संकल्प को पूरा करने में जुटा है। सिंगापुर और भारत ने हाल ही में यूपीआई पर साझेदारी की है और हम निकट भविष्य में यूएई के साथ भी ऐसा करने की उम्मीद करते हैं। हम कई देशों के साथ रुपये के व्यापार का विस्तार कर रहे हैं, जिनमें से कई के साथ बातचीत उन्नत चरण में हैं और जल्द उसे अंतिम रूप दे दिया जायेगा। श्री गोयल ने कहा कि जब हम वैश्विक आर्थिक सुधार के वित्तपोषण के बारे में बात करते हैं, तो एक मजबूत और उत्तरदायी अंतर्राष्ट्रीय संस्थागत ढांचे की आवश्यकता होती है। हमें यह भी देखने की जरूरत है कि कुछ अपारदर्शी अर्थव्यवस्थायें, जिनकी आर्थिक प्रणालियां पूरी तरह से धूमिल हैं, वे बहुपक्षीय भागीदारी के फलों का लाभ उठा रही हैं। मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि दुनिया ऐसे देशों की आलोचना करे और उन्हें जवाबदेह और पारदर्शी बनाये। प्रौद्योगिकी साझेदारी पर बोलते हुए, श्री गोयल ने कहा कि जब हम उदीयमान प्रौद्योगिकियों के बारे में बात करते हैं, तो यह महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि हम कुशलता का हिसाब-किताब लगायें। हमें कुछ ऐसे देश मिलेंगे जिनके पास जबरदस्त कौशल है। इस तरह हम देख सकते हैं कि कहां कौशल है, कहां नही, जिसे मैच-मेकिंग कहा जा सकता है। इसे मद्देनजर रखते हुये हमें यह जानना चाहिये कि अमीर देशों को उन कौशल की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह मैच-मेकिंग ही साझेदारी के बारे में है। उन्होंने कहा कि सिंगापुर और भारत इस मैच-मेकिंग के लिए गंभीर प्रयास कर रहे हैं। इससे पहले, श्री गोयल ने अपने भाषण की शुरूआत भारत के दो ऑस्कर विजेताओं को बधाई देते हुए की। उन्होंने कहा कि दो ऑस्कर जीतने पर आज हमें गर्व है। वृतचित्र 'दी एलीफेंट व्हिस्पर्स' प्रकृति के साथ सतत विकास और समरसता को रेखांकित करता है, लेकिन यह हमें भारत में महिलाओं के विकास की समझ भी देता है, क्योंकि यहां निर्देशक और निर्माता दोनों महिलायें हैं।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग, उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा वस्त्र मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में सीआईआई पार्टनरशिप समिट दो हज़ार तेईस में कहा कि आज विश्व जिन समस्याओं का सामना कर रहा है, उनके समाधान के लिये यह समय मित्रता और साझेदारी का है। इस विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुये श्री गोयल ने कहा इस मुश्किल भरे समय में, जब दुनिया बड़ी कठिनाई से कोविड से बाहर निकल पाई है, जब हम उन टकरावों का सामना करते हैं जो अर्थव्यवस्थाओं को नीचे ले जाते हैं, जिनसे मंहगाई बढ़ती है तथा परिणामस्वरूप ब्याज दरों में वृद्धि होती है, जिसके कारण दुनिया के अनेक भागों में मंदी चल रही है, तो इस तरह की मुलाकातों से हमें मदद मिलती है कि हम यह देख सकें कि हम वैश्विक चुनौतियों व वैश्विक समस्याओं का सामूहिक समाधान निकालकर एक-दूसरे के लिये कैसे बेहतर काम कर सकते हैं। श्री गोयल ने कहा कि हम आपूर्ति श्रृंखला के हर स्थिति में काम करने लायक, विस्तृत और स्थिर स्रोतों की तलाश में हैं। हम बड़े बाजारों को देख रहे हैं और इस काम में हम जोखिम की संभावना को न्यूनतम करना चाहते हैं। अनेक अर्थव्यवस्थायें इन जोखिमों का सामना कर रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का उद्धरण दिया कि केवल साझेदारी से ही हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। श्री गोयल ने कहा कि भारत ने विश्व के लिए एक उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार वैश्विक नागरिक के रूप में, जब हमने कोविड वैक्सीन विकसित की, तो हमने न केवल अपने नागरिकों के लिए इसे उपलब्ध कराया और उन्हें निशुल्क दो.दो बिलियन टीके लगाए, बल्कि हमने कम विकसित देशों से लेकर प्रशांत द्वीप राष्ट्रों से लेकर कैरिबियन देशों तक, हमारे पड़ोस के छोटे द्वीप राज्यों को भी टीके प्रदान किए। उन्होंने कहा कि दो सौ पचास करोड़ से अधिक टीके दुनिया के अन्य हिस्सों में निशुल्क मुहैया कराये गये। नवाचार की आवश्यकता पर बोलते हुए, श्री गोयल ने कहा कि हम सभी को अभिनव विचारों, अपने काम को अधिक कुशलता और अधिक प्रभावी ढंग से करने के नये तरीकों को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि भारत में, जहां सात साल पहले मुश्किल से तीन या चार यूनिकॉर्न थे, आज एक सौ से अधिक यूनिकॉर्न हैं और भारत की स्टार्टअप इको-प्रणाली दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी प्रणाली है। श्री गोयल ने कहा कि भारत में निरंतरता जीवन का एक तरीका है और हमें दुनिया के अन्य हिस्सों को सिखाने या उनसे सीखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे हरित लक्ष्य बहुत महत्त्वाकांक्षी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने निरंतरता भरी जीवनशैली की अवधारणा पेश की है, जो समय की मांग है। इस सिलसिले में याद रहे कि हम सभी दुनिया भर में, विशेष रूप से विकसित दुनिया में जो अपशिष्ट पैदा कर रहे हैं, वह मानवता की जरूरतों की तुलना में जलवायु परिवर्तन की इस बड़ी समस्या का एक बड़ा कारण है। श्री गोयल ने कहा कि जैसा कि महात्मा गांधी ने कहा था, इस पीढ़ी में हम सभी अपने बच्चों के लिये न्यासी और संरक्षक हैं। हम सभी की यह जिम्मेदारी है कि हम विरासत में मिले विश्व की तुलना में एक बेहतर विश्व छोड़कर जायें, ताकि हमारे बच्चों को बेहतर भविष्य मिल सके। श्री गोयल ने कहा कि भारत में हम अपने सतत लक्ष्यों और निरंतरता भरी जीवनशैली के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं। श्री गोयल ने कहा कि हम कचरे को खत्म करने या पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग के लिए प्रतिबद्ध हैं और मैं अपने सभी साझीदार देशों को भारत के साथ काम करने, भारत से सीखने, दुनिया को रहने के लिए एक बेहतर जगह बनाने के इस प्रयास में भारत के साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित करता हूं। श्री गोयल ने विश्व अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत की साझेदारी पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हम अपने कारोबार को सक्षम बनाने के लिए कई देशों के साथ अंतर्राष्ट्रीय समझौते कर रहे हैं, क्योंकि हम दुनिया भर के व्यवसायों को सक्षम बनाना चाहते हैं। हम एक-दूसरे से जुड़ेंगे, ताकि हम अंतरराष्ट्रीय वैश्विक आर्थिक मोर्चे पर दमखम दिखा सकें। उन्होंने कहा कि इस प्रयास का नेतृत्व प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आगे बढ़कर किया है। एक उदाहरण देते हुए श्री गोयल ने कहा कि दो साल पहले, हमारे माल और सेवाओं का निर्यात सामूहिक रूप से पाँच सौ बिलियन अमेरिकी डॉलर का था। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने फैसला किया कि भारत कोविड के संकट को एक अवसर में बदल देगा, हम इस संकट से विचलित नहीं होंगे। प्रधानमंत्री ने देश की सभी निर्यात संवर्धन परिषदों से बात की और उन्होंने उन चुनौतियों को समझा जो वे सामना कर रहे थे। उन्होंने समाधान खोजा और दुनिया भर में हमारे मिशन प्रमुखों से बात की। और, अब जब हम स्वतंत्र भारत के पचहत्तर साल का जश्न मना रहे हैं, तो ऐसे वक्त में हम वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात के सात सौ पचास बिलियन के लक्ष्य को पार करने के लिए निकल पड़े हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने कहा कि भारत आज अन्य प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अनेक प्रतिस्पर्धात्मक लाभों की पेशकश करता है। उन्होंने कहा कि हम उच्च गुणवत्ता वाले सामान और बड़े पैमाने वाली अर्थव्यवस्थाओं के उपयोग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, खासतौर से विशाल स्वदेशी बाजार के मामले में, जहां यह पेशकश हम उन व्यापारों व निवेशकों को कर रहे हैं, जो भारत आते हैं और यहां काम करते हैं। हम अपने उन मित्र देशों को भी यह पेशकश कर रहे हैं, जिनके भारत के साथ आर्थिक सम्बंध हैं। हमारे एमएसएमई पहले डिजिटलीकरण के साथ जुड़ रहे हैं और जैसा कि पहले उल्लेख किया गया था, भारत बाकी दुनिया के उपयोग के लिए डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं के रूप में अपने डिजिटल संकल्प को पूरा करने में जुटा है। सिंगापुर और भारत ने हाल ही में यूपीआई पर साझेदारी की है और हम निकट भविष्य में यूएई के साथ भी ऐसा करने की उम्मीद करते हैं। हम कई देशों के साथ रुपये के व्यापार का विस्तार कर रहे हैं, जिनमें से कई के साथ बातचीत उन्नत चरण में हैं और जल्द उसे अंतिम रूप दे दिया जायेगा। श्री गोयल ने कहा कि जब हम वैश्विक आर्थिक सुधार के वित्तपोषण के बारे में बात करते हैं, तो एक मजबूत और उत्तरदायी अंतर्राष्ट्रीय संस्थागत ढांचे की आवश्यकता होती है। हमें यह भी देखने की जरूरत है कि कुछ अपारदर्शी अर्थव्यवस्थायें, जिनकी आर्थिक प्रणालियां पूरी तरह से धूमिल हैं, वे बहुपक्षीय भागीदारी के फलों का लाभ उठा रही हैं। मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि दुनिया ऐसे देशों की आलोचना करे और उन्हें जवाबदेह और पारदर्शी बनाये। प्रौद्योगिकी साझेदारी पर बोलते हुए, श्री गोयल ने कहा कि जब हम उदीयमान प्रौद्योगिकियों के बारे में बात करते हैं, तो यह महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि हम कुशलता का हिसाब-किताब लगायें। हमें कुछ ऐसे देश मिलेंगे जिनके पास जबरदस्त कौशल है। इस तरह हम देख सकते हैं कि कहां कौशल है, कहां नही, जिसे मैच-मेकिंग कहा जा सकता है। इसे मद्देनजर रखते हुये हमें यह जानना चाहिये कि अमीर देशों को उन कौशल की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह मैच-मेकिंग ही साझेदारी के बारे में है। उन्होंने कहा कि सिंगापुर और भारत इस मैच-मेकिंग के लिए गंभीर प्रयास कर रहे हैं। इससे पहले, श्री गोयल ने अपने भाषण की शुरूआत भारत के दो ऑस्कर विजेताओं को बधाई देते हुए की। उन्होंने कहा कि दो ऑस्कर जीतने पर आज हमें गर्व है। वृतचित्र 'दी एलीफेंट व्हिस्पर्स' प्रकृति के साथ सतत विकास और समरसता को रेखांकित करता है, लेकिन यह हमें भारत में महिलाओं के विकास की समझ भी देता है, क्योंकि यहां निर्देशक और निर्माता दोनों महिलायें हैं।
फतेहपुर. यूपी निकाय चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण के लिए मतदान जारी है। फतेहपुर जिले में शहर की नगर पालिका परिषद क्षेत्र के चित्रांश नगर मोहल्ले के वार्ड नंबर 11 पर एक दुल्हन ने मतदान किया। रागनी की 28 नवंबर को शादी हुई है। आज उसकी विदाई होनी है, लेकिन विदाई से पहले दुल्हन ने मतदान किया। -सहारनपुर, बागपत, बुलंदशहर, मुरादाबाद, संभल, बरेली, एटा, फिरोजाबाद, कन्नौज, औरैया, कानपुर देहात, झांसी, महोबा, फतेहपुर, रायबरेली, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बाराबंकी, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, कुशीनगर, मऊ, चंदौली, जौनपुर और मिर्जापुर। - 5 नगर निगम मुरादाबाद, बरेली, सहारनपुर, फिरोजाबाद और झांसी शामिल हैं। इसमें 76 नगर पालिका परिषद व 152 नगर पंचायतें भी हैं। - निकाय चुनाव में पहली बार सभी बड़ी पार्टियां अपने सिंबल पर चुनाव लड़ रही हैं। आमतौर पर निकाय चुनाव में सीएम कैंपेन नहीं करते, लेकिन योगी आदित्यनाथ पूरी ताकत से इलेक्शन कैंपेन किया है। उन्होंने कई रैलियां की हैं। -सीएम योगी पर यूपी असेंबली इलेक्शन में बीजेपी के शानदार परफॉर्मेंस को दोहराने का दबाव है। इसलिए कैंपेन की कमान उन्होंने खुद संभाली थी।
फतेहपुर. यूपी निकाय चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण के लिए मतदान जारी है। फतेहपुर जिले में शहर की नगर पालिका परिषद क्षेत्र के चित्रांश नगर मोहल्ले के वार्ड नंबर ग्यारह पर एक दुल्हन ने मतदान किया। रागनी की अट्ठाईस नवंबर को शादी हुई है। आज उसकी विदाई होनी है, लेकिन विदाई से पहले दुल्हन ने मतदान किया। -सहारनपुर, बागपत, बुलंदशहर, मुरादाबाद, संभल, बरेली, एटा, फिरोजाबाद, कन्नौज, औरैया, कानपुर देहात, झांसी, महोबा, फतेहपुर, रायबरेली, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बाराबंकी, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, कुशीनगर, मऊ, चंदौली, जौनपुर और मिर्जापुर। - पाँच नगर निगम मुरादाबाद, बरेली, सहारनपुर, फिरोजाबाद और झांसी शामिल हैं। इसमें छिहत्तर नगर पालिका परिषद व एक सौ बावन नगर पंचायतें भी हैं। - निकाय चुनाव में पहली बार सभी बड़ी पार्टियां अपने सिंबल पर चुनाव लड़ रही हैं। आमतौर पर निकाय चुनाव में सीएम कैंपेन नहीं करते, लेकिन योगी आदित्यनाथ पूरी ताकत से इलेक्शन कैंपेन किया है। उन्होंने कई रैलियां की हैं। -सीएम योगी पर यूपी असेंबली इलेक्शन में बीजेपी के शानदार परफॉर्मेंस को दोहराने का दबाव है। इसलिए कैंपेन की कमान उन्होंने खुद संभाली थी।
स्वास्थ्य विभाग में नेत्र परीक्षण अधिकारी के 157 पदों पर भर्ती के लिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग ने इसके लिए विस्तृत विज्ञापन बुधवार को जारी कर दिया। इसके अनुसार ऑनलाइन आवेदन 18 जुलाई से शुरू होंगे। आवेदन सबमिट करने व शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि सात अगस्त है। जबकि शुल्क समायोजन व आवेदन में संशोधन 14 अगस्त तक किया जा सकेगा। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
स्वास्थ्य विभाग में नेत्र परीक्षण अधिकारी के एक सौ सत्तावन पदों पर भर्ती के लिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग ने इसके लिए विस्तृत विज्ञापन बुधवार को जारी कर दिया। इसके अनुसार ऑनलाइन आवेदन अट्ठारह जुलाई से शुरू होंगे। आवेदन सबमिट करने व शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि सात अगस्त है। जबकि शुल्क समायोजन व आवेदन में संशोधन चौदह अगस्त तक किया जा सकेगा। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
बॉलीवुड के सबसे पसंदीदा स्टारकिड्स में सैफ और करीना के लाडले बेटे तैमूर अली खान का नाम भी शुमार रहता है। तैमूर अली खान का आज अपना चौथा जन्मदिन मना रहे हैं। तैमूर का जन्म 20 दिसंबर 2016 को हुआ था। तैमूर के चौथे जन्मदिन पर करीना कपूर खान ने भी अपने बेटे को बधाई दी है। साथ ही एक इमोशनल पोस्ट भी लिखा है। करीना कपूर खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। ऐसे में वो अक्सर कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करती रहती हैं। खासकर करीना ऐसी तस्वीरें शेयर करती हैं जो कहीं देखी ना गई हों। अब हाल ही में तैमूर के जन्मदिन पर भी करीना ने ऐसी ही कुछ तस्वीरों के कलेक्शन का एक वीडियो पोस्ट किया है। करीना ने जो वीडियो शेयर किया है उस वीडियो में तौमूर की ऐसी तस्वीरों का कलेक्शन है जिसे उनके फैंस ने देखा भी नहीं होगा। करीना ने इस वीडियो को पोस्ट करते हुए इमोशनल कैप्शन भी लिखा है। करीना ने लिखा, 'मेरे बच्चे. . . मैं खुश हूं कि सिर्फ चार साल की उम्र में ही तुम्हारे अन्दर इस बात को लेकर दृढ़ निश्चय, समर्पण और फोकस है कि तुम क्या करना चाहते हो। जो कि इन दिनों चारा उठाना और गायों को खाना खिलाना है। ' आगे करीना ने लिखा, 'भगवान तुम्हारा भला करे मेरे मेहनती बच्चे. . . लेकिन जब तुम यह सब कर रहे हो तो कुछ पल रुककर बर्फ को चखना, फूलों को तोड़ना, उछलना-कूदना, पेड़ पर चढ़ना और अपना केक खाना मत भूलना। अपने सपनों का पीछा करो और सिर उठाकर जियो मेरे बच्चे. . . और सबसे बड़ी बात. . . वो करो जो तुम्हें खुश करता है। तुम्हें तुम्हारी अम्मा से ज्यादा प्यार ना कोई कर सकता है और ना ही कर पाएगा। हैप्पी बर्थडे बेटा. . . मेरे टिम। ' गौरतलब है कि करीना कपूर खान जल्दी ही दूसरी बार मां बनने वाली हैं। इस समय करीना अपने प्रेग्नेंसी पीरियड को काफी एन्ज्वॉय कर रही हैं। वहीं तामू के जन्मदिन के मौके पर ही करीना ने अपनी किताब का कवर फोटो भी जारी किया है। इस किताब में करीना ने गर्भधारण के बारे में सब कुछ बताएंगी जो लोग उनसे जानना चाहते थे। करीना की इस किताब का नाम 'करीना कपूर खान्स प्रैगनेंसी बाइबल ' होगा।
बॉलीवुड के सबसे पसंदीदा स्टारकिड्स में सैफ और करीना के लाडले बेटे तैमूर अली खान का नाम भी शुमार रहता है। तैमूर अली खान का आज अपना चौथा जन्मदिन मना रहे हैं। तैमूर का जन्म बीस दिसंबर दो हज़ार सोलह को हुआ था। तैमूर के चौथे जन्मदिन पर करीना कपूर खान ने भी अपने बेटे को बधाई दी है। साथ ही एक इमोशनल पोस्ट भी लिखा है। करीना कपूर खान सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। ऐसे में वो अक्सर कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करती रहती हैं। खासकर करीना ऐसी तस्वीरें शेयर करती हैं जो कहीं देखी ना गई हों। अब हाल ही में तैमूर के जन्मदिन पर भी करीना ने ऐसी ही कुछ तस्वीरों के कलेक्शन का एक वीडियो पोस्ट किया है। करीना ने जो वीडियो शेयर किया है उस वीडियो में तौमूर की ऐसी तस्वीरों का कलेक्शन है जिसे उनके फैंस ने देखा भी नहीं होगा। करीना ने इस वीडियो को पोस्ट करते हुए इमोशनल कैप्शन भी लिखा है। करीना ने लिखा, 'मेरे बच्चे. . . मैं खुश हूं कि सिर्फ चार साल की उम्र में ही तुम्हारे अन्दर इस बात को लेकर दृढ़ निश्चय, समर्पण और फोकस है कि तुम क्या करना चाहते हो। जो कि इन दिनों चारा उठाना और गायों को खाना खिलाना है। ' आगे करीना ने लिखा, 'भगवान तुम्हारा भला करे मेरे मेहनती बच्चे. . . लेकिन जब तुम यह सब कर रहे हो तो कुछ पल रुककर बर्फ को चखना, फूलों को तोड़ना, उछलना-कूदना, पेड़ पर चढ़ना और अपना केक खाना मत भूलना। अपने सपनों का पीछा करो और सिर उठाकर जियो मेरे बच्चे. . . और सबसे बड़ी बात. . . वो करो जो तुम्हें खुश करता है। तुम्हें तुम्हारी अम्मा से ज्यादा प्यार ना कोई कर सकता है और ना ही कर पाएगा। हैप्पी बर्थडे बेटा. . . मेरे टिम। ' गौरतलब है कि करीना कपूर खान जल्दी ही दूसरी बार मां बनने वाली हैं। इस समय करीना अपने प्रेग्नेंसी पीरियड को काफी एन्ज्वॉय कर रही हैं। वहीं तामू के जन्मदिन के मौके पर ही करीना ने अपनी किताब का कवर फोटो भी जारी किया है। इस किताब में करीना ने गर्भधारण के बारे में सब कुछ बताएंगी जो लोग उनसे जानना चाहते थे। करीना की इस किताब का नाम 'करीना कपूर खान्स प्रैगनेंसी बाइबल ' होगा।
Tej Pratap Yadav: घोटालेबाज नीतीश चाचा.. तेजप्रताप के इस वायरल वीडियो की कहानी क्या है? राष्ट्रपति चुनाव में BJP ने नीतीश कुमार ऐसे उलझाया, मुंह बाए रह गए तेजस्वी और तेजप्रताप यादव!
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Thomson के TV को फ्लिपकार्ट से 7499रुपये में खरीद सकते हैं। इस टीवी पर एक्सचेंज ऑफर भी मिल सकता है जिसके तहत आपको 6000रुपये तक का फायदा मिल सकता है। Kodakका ये टीवी भी 7499रुपये में खरीदा जा सकता है साथ ही 6000रुपये तक का एक्सचेंज ऑफर है। अगर आप एक्सचेंज ऑफर का पूरा फायदा ले पाते हैं तो TV को 1499रुपये में खरीदा जा सकता है। साथ ही PNB और Federal बैंक के कार्ड से पेमेंट करने पर 10परसेंट का डिस्काउंट मिलता है। तो है ना ये कमाल का ऑफर। अब अगर आपके घर का हॉल अभी तक बिना टीवी के सूना है तो ये ऑफर कमाल का साबित हो सकता है।
Thomson के TV को फ्लिपकार्ट से सात हज़ार चार सौ निन्यानवे रुपयापये में खरीद सकते हैं। इस टीवी पर एक्सचेंज ऑफर भी मिल सकता है जिसके तहत आपको छः हज़ार रुपयापये तक का फायदा मिल सकता है। Kodakका ये टीवी भी सात हज़ार चार सौ निन्यानवे रुपयापये में खरीदा जा सकता है साथ ही छः हज़ार रुपयापये तक का एक्सचेंज ऑफर है। अगर आप एक्सचेंज ऑफर का पूरा फायदा ले पाते हैं तो TV को एक हज़ार चार सौ निन्यानवे रुपयापये में खरीदा जा सकता है। साथ ही PNB और Federal बैंक के कार्ड से पेमेंट करने पर दसपरसेंट का डिस्काउंट मिलता है। तो है ना ये कमाल का ऑफर। अब अगर आपके घर का हॉल अभी तक बिना टीवी के सूना है तो ये ऑफर कमाल का साबित हो सकता है।
मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी और सैफ अली खान अपनी आने वाली फिल्म 'बंटी और बबली 2' की रिलीज के लिए तैयार हैं। दोनों एक्टर्स ने अबू धाबी में शूट किए गए एक चोरी के दृश्य के बारे में कई बड़े खुलासे किए है। सैफ ने कहा कि युवा कॉन कलाकारों द्वारा सेवानिवृत्त कॉन सितारों को अपने हाइबरनेशन से बाहर आने के लिए मजबूर किया जाता है। पुराने बंटी बबली उन्हें अपस्टार्ट के रूप में मानते हैं और उन्हें अपने ही खेल में हराना चाहते हैं। इसलिए हम नए जोड़े को सबक सिखाने के लिए एक विस्तृत और असाधारण चोर तैयार करते हैं। हमने इसे अबू धाबी और विम्मी में शूट किया है। अभिनेता ने कहा कि उन्होंने अबू धाबी में एक विशाल दल के साथ शूटिंग की है, क्योंकि वे चोर के लिए एक अद्भुत पैमाना चाहते थे। उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास सबसे बड़े आउटडोर क्रू में से एक था। जिसके साथ मैंने काम किया है। वास्तव में 'बंटी बबली' तरीके से बहुत ही मनोरंजक तरीके से शूट किए गए है। मुझे यकीन है कि दर्शकों को हमारा काम पसंद आएगा।
मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी और सैफ अली खान अपनी आने वाली फिल्म 'बंटी और बबली दो' की रिलीज के लिए तैयार हैं। दोनों एक्टर्स ने अबू धाबी में शूट किए गए एक चोरी के दृश्य के बारे में कई बड़े खुलासे किए है। सैफ ने कहा कि युवा कॉन कलाकारों द्वारा सेवानिवृत्त कॉन सितारों को अपने हाइबरनेशन से बाहर आने के लिए मजबूर किया जाता है। पुराने बंटी बबली उन्हें अपस्टार्ट के रूप में मानते हैं और उन्हें अपने ही खेल में हराना चाहते हैं। इसलिए हम नए जोड़े को सबक सिखाने के लिए एक विस्तृत और असाधारण चोर तैयार करते हैं। हमने इसे अबू धाबी और विम्मी में शूट किया है। अभिनेता ने कहा कि उन्होंने अबू धाबी में एक विशाल दल के साथ शूटिंग की है, क्योंकि वे चोर के लिए एक अद्भुत पैमाना चाहते थे। उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास सबसे बड़े आउटडोर क्रू में से एक था। जिसके साथ मैंने काम किया है। वास्तव में 'बंटी बबली' तरीके से बहुत ही मनोरंजक तरीके से शूट किए गए है। मुझे यकीन है कि दर्शकों को हमारा काम पसंद आएगा।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
अलीगढ़ जिले में सोमवार सुबह तेज हवा चलने से मौसम सुहाना हो गया। दोपहर में कुछ घंटे तेज धूप निकली। लेकिन, शाम होते ही मौसम फिर से सुहाना हो गया। जिससे आम लोगों को गर्मी से राहत मिली। वहीं शाम के समय लोगों ने मौसम का मजा लिया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
अलीगढ़ जिले में सोमवार सुबह तेज हवा चलने से मौसम सुहाना हो गया। दोपहर में कुछ घंटे तेज धूप निकली। लेकिन, शाम होते ही मौसम फिर से सुहाना हो गया। जिससे आम लोगों को गर्मी से राहत मिली। वहीं शाम के समय लोगों ने मौसम का मजा लिया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
जनज्वार। कोरोना काल में सरकारी नाकामियों के चलते लाखों लोगों की गई जान के सच को मानते हुए आगे की बेहतर तैयारी पर जोर देने के बजाए हमारी सरकार सच को झुठलाने में ही ज्यादा यकीन कर रही है।लिहाजा अब देश के प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी कानपुर की भी साख का बट्टा लगाने से सरकार पीछे नहीं है। आईआईटी कानपुर द्वारा एक कथित वैज्ञानिक अध्ययन जिसका शीर्षक कोविड संग्राम यूपी मॉडलः नीति, युक्ति, परिणाम है, को पिछले कुछ हफ्तों में मीडिया में व्यापक रूप से प्रसारित व प्रचारित किया गया है। रिपोर्ट के लेखक और मुख्य संपादक प्रोण् मनिंद्र अग्रवाल हैंए जो आईआईटी कानपुर में एक संकाय सदस्य हैं। साथ ही वे तथाकथित सूत्र मॉडल के प्रमुख वास्तुकारों में से एक हैं। सूत्र मॉडल संक्रामक रोगों का एक कंपार्टमेंटल मॉडल है।जिसका प्रचार प्रसार कर सरकार के नुमाइंदे लोगों को गुमराह करने में लगे हैं। ऐसे में लोगों के तरफ से सवाल उठना लाजमी है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसको लेकर आलोचना हो रही है। विश्व के विभिन्न प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के 210 लोगों ने रिपोर्ट के विरोध में हस्ताक्षर अभियान चलाकर अपना एतराज जताया है। कोरोना काल की दूसरी लहर के दौरान गंगा में तैरती लाषें से लेकर आक्सीजन के लिए मची आपाधापी के बीच दम तोड़ते लोग। उस पल को याद कर हर किसी की रूह कांप उठती है।इस दौरान किसी ने अपने मां.बाप को खोया तो कोई भाई.बहन को।हालात ऐसे रहे कि कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं रहा जिसके पारिवारिक सदस्य या रिश्तेदार हों या पड़ोसीए को कोरोना महामारी में न खोया हो। ऐसे लोगों को अगर हमारी सरकारें देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर के एक सरकारी उपलब्धि भरी रिपोर्ट के सहारे गुमराह करने की कोशिश करेगी तो सवाल उठेगा ही। खास बात यह है कि आईआईटी के सिटीजन फोरम व हमारा मंच आईआईटीके नाम की दो संस्थाओं ने रिपोर्ट की आलोचना की है। आलोचना को जायज ठहराते हुए विश्व के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से जुड़े 210 की संख्या में लोगों ने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन जताया है। मुख्य संपादक प्रो. मनिंद्र अग्रवाल की रिपोर्ट के अनुसार 12 अप्रैल को 380 मिट्रिक टन रोजाना ऑक्सीजन की मांग थी। जो कि 25 अप्रैल को ढाई गुना बढकर 840 मिट्रिक टन हो गई। उत्तर प्रदेश ऐसा पहला राज्य था जिसने भारतीय वायुसेना की मदद से खाली टैंकर लिफ्ट कराए। इस दौरान 57 ऑक्सीजन एक्सप्रेस चलाई गई और सख्त ऑडिट की वजह से रोजाना 30 मिट्रिक टन ऑक्सीजन बचाई गई। लगातार टेस्टिंग का नतीजा था कि राज्य में कोरोना की दूसरी लहर आशंकाओं के मुकाबले जैसी गंभीर नहीं हो पाई। राज्य में 11 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन की एक डोज लग चुकी है। इसके अलावा राज्य में कोरोना के मामलों में कमी आने के साथ ही व्यापक टेस्टिंग चल रही है । कोरोना की अन्य लहर की निगरानी के लिए 70,000 निगरानी समितियां सक्रिय की गई हैं। वहीं 238 पीएसए प्लांट के चालू होने के कारण 87,174 ऑक्सीजन बेड हो गए हैं। इसके अलावा सभी 549 पीएसए प्लांट शुरू होने के बाद 1.5 लाख से ज्यादा ऑक्सीजन बेड हो जाएंगे। जो भारत के किसी भी राज्य में सबसे ज्यादा होगा। तीसरी लहर को देखते हुए बच्चों के लिए 6700 आईसीयू बेड तैयार किए जा चुके हैं। इन तमाम दावों के बीच यह भी सच है कि कोरोना की दूसरी लहर की तबाही को हमारी सरकारों को कोई संज्ञान नहीं था। लिहाजा अप्रैल.मई माह में तकरीबन एक पखवारा तक आक्सीजन के अभाव में लोग सर्वाधिक संख्या में दम तोड़ते रहे। ऐसे वक्त में सरकार पूरी तरह लाचार दिखी। ऐसे में यह कहा जा रहा है कि आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट सूत्र मॉडल प्रभावी तौर पर एक कर्व फिटिंग अभ्यास है व जिसकी संक्रामक रोगों के संदर्भ मे भविष्यवाणी करने की शक्ति या वैज्ञानिक योग्यता काफी कम है। इस मॉडल के आधार पर मुख्य संपादक प्रोण् मनिंद्र अग्रवाल व उनके सहयोगियों ने बार.बार ऐसी सार्वजनिक घोषणाएं की हैं जो कि अनुभव के आधार पर गलत साबित हुई हैं। उदाहरण के लिएए 9 मार्च 2021कोए अग्रवाल ने ट्विटर पर घोषणा की कि भारत में कोई श्दूसरी लहरश् नहीं होगी । 30 जनवरी कोए अग्रवाल व उनके सहयोगियों ने एक वैज्ञानिक पत्र में केंद्र सरकार की नीतियों की सराहना की और दावा किया कि यह स्थापित करना आसान है कि लिए गए निर्णयों ने कई लहरों को आने से बचा लिया। जब ये भविष्यवाणियां गलत निकलीं, तब अपनी गलतियों को स्वीकार करने के बजाय अग्रवाल व उनके सहयोगियों ने नए डेटा को फिट करने के लिए बस अपने मॉडल में मापदंडों व राशियों को बाद में संशोधित कर दिया। उदाहरण के लिए, उनके पेपर के बाद के संस्करण में यह स्पष्ट करने के बजाय कि भारत सरकार की आदर्श नीतियों को स्थापित करने वाला उनका आसान विश्लेषण पहले स्थान पर त्रुटिपूर्ण क्यों था,उन्होंने बस चुपचाप उपरोक्त वाक्य को हटा दिया। रिपोर्ट अपने आप में सरकारी डेटा और सरकारी कार्यक्रमों के विवरण का एक गैर.आलोचनात्मक पुनरुत्पादन है। जिसका पारदर्शी उद्देश्य यह दर्शाना है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने महामारी का प्रबंधन किसी अन्य राज्य की तुलना में बेहतर तरीके से किया है। इस रिपोर्ट के कई दावे निराधार हैं। इसके निष्कर्ष अक्सर अतिरंजित हैं और इसके डेटा को अस्पष्ट तरीके से प्रस्तुत किया गया है। अग्रवाल और उनकी टीम नियमित रूप से सरकारी खर्च या प्रयास के दावों को इसके इच्छित प्राप्तकर्ताओं पर सकारात्मक प्रभाव के साथ भ्रमित करती है। इस तरह के दावों को शोध और फील्डवर्क द्वारा समर्थित होना चाहिए और इस रिपोर्ट में इनमें से कोई भी नहीं है। जबकि सच्चाई यह है कि दूसरी लहर के दौरान उत्तर प्रदेश पर आधारित विस्तृत सूचना की समीक्षा करने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि महामारी के प्रति यूपी सरकार की प्रतिक्रिया अपर्याप्त थी। कई लाख मेहनतकशों पर इन विफलताओं का प्रभाव चौका देने वाला रहा हैए और अभी तक जो नुकसान हुआ हैए उसका पूरी तरह से आकलन होना बाकी है। यह रिपोर्ट सरकार की नीति के ईमानदार मूल्यांकन से बहुत दूर हैए और इसके लेखकों का दोषपूर्ण विज्ञान और राज्य सरकार की त्रुटिपूर्ण नीतियों को मजबूत करने के अलावा और कोई उद्देश्य नहीं है। व मूल्यांकन करने की एक गंभीर जिम्मेदारी है ताकि हमने जो भयावहता देखी है,वह खुद को न दोहराए। ऐसे में यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है कि ऐसे अध्ययन खुले और ईमानदार तरीके से किये जायें,न कि इस तरह से कि लोगों के हितों पर एक विशिष्ट सरकार के हितों को तरजीह दी जाए। आईआईटी कानपुर के निदेशक ने इस तरह की रिपोर्ट के निष्कर्षों का समर्थन करते हुए एक प्रस्तावना लिखी है। लोगों का मानना है कि महामारी के यूपी सरकार के घोर कुप्रबंधन पर पर्दा डालने के लिए आईआईटी कानपुर की छाप व साख का उपयोग किया जाना बहुत ही निंदनीय है। हालांकि प्रो. मणीन्द्र का कहना है कि ये किताब यूपी मॉडल के आधार पर हैए इसमें हमने यूपी सरकार से भी डेटा लिया था जिसका पूरा विस्तृत अध्ययन करके हमने छापा है। 120 पेज की यह किताब अब चर्चा का विषय बनी है।जिसे लोग निराधार रिपोर्ट मानते हुए सरकार पर उंगलियां उठा रहे हैं। आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट के खिलाफ दो प्रमुख संगठन "आईआईटी सीटिजन्स फोरम" व "हमारा मंच आईआईटीके" ने मुखर होकर विरोध किया है।साथ ही इसको लेकर सरकार के खिलाफ अभियान चलाया है। जिसके पक्ष में दुनिया के तमाम विश्वविद्यालयों के छात्र व अध्यापक के अलावा प्रमुख बुद्धिजीवियों ने अपना समर्थन जताया है। जिनकी संख्या 210 है। जिसमें कैलिफोर्निया, आईआईटी कानपुर, मुंबई,कैंब्रिज समेत देश विदेश के विभिन्न संस्थानों से जुड़े लोग शामिल हैं। ऐसे में पूरी दुनिया में आईआईटी कानपुर की आलोचना हो रही है।
जनज्वार। कोरोना काल में सरकारी नाकामियों के चलते लाखों लोगों की गई जान के सच को मानते हुए आगे की बेहतर तैयारी पर जोर देने के बजाए हमारी सरकार सच को झुठलाने में ही ज्यादा यकीन कर रही है।लिहाजा अब देश के प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी कानपुर की भी साख का बट्टा लगाने से सरकार पीछे नहीं है। आईआईटी कानपुर द्वारा एक कथित वैज्ञानिक अध्ययन जिसका शीर्षक कोविड संग्राम यूपी मॉडलः नीति, युक्ति, परिणाम है, को पिछले कुछ हफ्तों में मीडिया में व्यापक रूप से प्रसारित व प्रचारित किया गया है। रिपोर्ट के लेखक और मुख्य संपादक प्रोण् मनिंद्र अग्रवाल हैंए जो आईआईटी कानपुर में एक संकाय सदस्य हैं। साथ ही वे तथाकथित सूत्र मॉडल के प्रमुख वास्तुकारों में से एक हैं। सूत्र मॉडल संक्रामक रोगों का एक कंपार्टमेंटल मॉडल है।जिसका प्रचार प्रसार कर सरकार के नुमाइंदे लोगों को गुमराह करने में लगे हैं। ऐसे में लोगों के तरफ से सवाल उठना लाजमी है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसको लेकर आलोचना हो रही है। विश्व के विभिन्न प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के दो सौ दस लोगों ने रिपोर्ट के विरोध में हस्ताक्षर अभियान चलाकर अपना एतराज जताया है। कोरोना काल की दूसरी लहर के दौरान गंगा में तैरती लाषें से लेकर आक्सीजन के लिए मची आपाधापी के बीच दम तोड़ते लोग। उस पल को याद कर हर किसी की रूह कांप उठती है।इस दौरान किसी ने अपने मां.बाप को खोया तो कोई भाई.बहन को।हालात ऐसे रहे कि कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं रहा जिसके पारिवारिक सदस्य या रिश्तेदार हों या पड़ोसीए को कोरोना महामारी में न खोया हो। ऐसे लोगों को अगर हमारी सरकारें देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर के एक सरकारी उपलब्धि भरी रिपोर्ट के सहारे गुमराह करने की कोशिश करेगी तो सवाल उठेगा ही। खास बात यह है कि आईआईटी के सिटीजन फोरम व हमारा मंच आईआईटीके नाम की दो संस्थाओं ने रिपोर्ट की आलोचना की है। आलोचना को जायज ठहराते हुए विश्व के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से जुड़े दो सौ दस की संख्या में लोगों ने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन जताया है। मुख्य संपादक प्रो. मनिंद्र अग्रवाल की रिपोर्ट के अनुसार बारह अप्रैल को तीन सौ अस्सी मिट्रिक टन रोजाना ऑक्सीजन की मांग थी। जो कि पच्चीस अप्रैल को ढाई गुना बढकर आठ सौ चालीस मिट्रिक टन हो गई। उत्तर प्रदेश ऐसा पहला राज्य था जिसने भारतीय वायुसेना की मदद से खाली टैंकर लिफ्ट कराए। इस दौरान सत्तावन ऑक्सीजन एक्सप्रेस चलाई गई और सख्त ऑडिट की वजह से रोजाना तीस मिट्रिक टन ऑक्सीजन बचाई गई। लगातार टेस्टिंग का नतीजा था कि राज्य में कोरोना की दूसरी लहर आशंकाओं के मुकाबले जैसी गंभीर नहीं हो पाई। राज्य में ग्यारह करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन की एक डोज लग चुकी है। इसके अलावा राज्य में कोरोना के मामलों में कमी आने के साथ ही व्यापक टेस्टिंग चल रही है । कोरोना की अन्य लहर की निगरानी के लिए सत्तर,शून्य निगरानी समितियां सक्रिय की गई हैं। वहीं दो सौ अड़तीस पीएसए प्लांट के चालू होने के कारण सत्तासी,एक सौ चौहत्तर ऑक्सीजन बेड हो गए हैं। इसके अलावा सभी पाँच सौ उनचास पीएसए प्लांट शुरू होने के बाद एक.पाँच लाख से ज्यादा ऑक्सीजन बेड हो जाएंगे। जो भारत के किसी भी राज्य में सबसे ज्यादा होगा। तीसरी लहर को देखते हुए बच्चों के लिए छः हज़ार सात सौ आईसीयू बेड तैयार किए जा चुके हैं। इन तमाम दावों के बीच यह भी सच है कि कोरोना की दूसरी लहर की तबाही को हमारी सरकारों को कोई संज्ञान नहीं था। लिहाजा अप्रैल.मई माह में तकरीबन एक पखवारा तक आक्सीजन के अभाव में लोग सर्वाधिक संख्या में दम तोड़ते रहे। ऐसे वक्त में सरकार पूरी तरह लाचार दिखी। ऐसे में यह कहा जा रहा है कि आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट सूत्र मॉडल प्रभावी तौर पर एक कर्व फिटिंग अभ्यास है व जिसकी संक्रामक रोगों के संदर्भ मे भविष्यवाणी करने की शक्ति या वैज्ञानिक योग्यता काफी कम है। इस मॉडल के आधार पर मुख्य संपादक प्रोण् मनिंद्र अग्रवाल व उनके सहयोगियों ने बार.बार ऐसी सार्वजनिक घोषणाएं की हैं जो कि अनुभव के आधार पर गलत साबित हुई हैं। उदाहरण के लिएए नौ मार्च दो हज़ार इक्कीसकोए अग्रवाल ने ट्विटर पर घोषणा की कि भारत में कोई श्दूसरी लहरश् नहीं होगी । तीस जनवरी कोए अग्रवाल व उनके सहयोगियों ने एक वैज्ञानिक पत्र में केंद्र सरकार की नीतियों की सराहना की और दावा किया कि यह स्थापित करना आसान है कि लिए गए निर्णयों ने कई लहरों को आने से बचा लिया। जब ये भविष्यवाणियां गलत निकलीं, तब अपनी गलतियों को स्वीकार करने के बजाय अग्रवाल व उनके सहयोगियों ने नए डेटा को फिट करने के लिए बस अपने मॉडल में मापदंडों व राशियों को बाद में संशोधित कर दिया। उदाहरण के लिए, उनके पेपर के बाद के संस्करण में यह स्पष्ट करने के बजाय कि भारत सरकार की आदर्श नीतियों को स्थापित करने वाला उनका आसान विश्लेषण पहले स्थान पर त्रुटिपूर्ण क्यों था,उन्होंने बस चुपचाप उपरोक्त वाक्य को हटा दिया। रिपोर्ट अपने आप में सरकारी डेटा और सरकारी कार्यक्रमों के विवरण का एक गैर.आलोचनात्मक पुनरुत्पादन है। जिसका पारदर्शी उद्देश्य यह दर्शाना है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने महामारी का प्रबंधन किसी अन्य राज्य की तुलना में बेहतर तरीके से किया है। इस रिपोर्ट के कई दावे निराधार हैं। इसके निष्कर्ष अक्सर अतिरंजित हैं और इसके डेटा को अस्पष्ट तरीके से प्रस्तुत किया गया है। अग्रवाल और उनकी टीम नियमित रूप से सरकारी खर्च या प्रयास के दावों को इसके इच्छित प्राप्तकर्ताओं पर सकारात्मक प्रभाव के साथ भ्रमित करती है। इस तरह के दावों को शोध और फील्डवर्क द्वारा समर्थित होना चाहिए और इस रिपोर्ट में इनमें से कोई भी नहीं है। जबकि सच्चाई यह है कि दूसरी लहर के दौरान उत्तर प्रदेश पर आधारित विस्तृत सूचना की समीक्षा करने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि महामारी के प्रति यूपी सरकार की प्रतिक्रिया अपर्याप्त थी। कई लाख मेहनतकशों पर इन विफलताओं का प्रभाव चौका देने वाला रहा हैए और अभी तक जो नुकसान हुआ हैए उसका पूरी तरह से आकलन होना बाकी है। यह रिपोर्ट सरकार की नीति के ईमानदार मूल्यांकन से बहुत दूर हैए और इसके लेखकों का दोषपूर्ण विज्ञान और राज्य सरकार की त्रुटिपूर्ण नीतियों को मजबूत करने के अलावा और कोई उद्देश्य नहीं है। व मूल्यांकन करने की एक गंभीर जिम्मेदारी है ताकि हमने जो भयावहता देखी है,वह खुद को न दोहराए। ऐसे में यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है कि ऐसे अध्ययन खुले और ईमानदार तरीके से किये जायें,न कि इस तरह से कि लोगों के हितों पर एक विशिष्ट सरकार के हितों को तरजीह दी जाए। आईआईटी कानपुर के निदेशक ने इस तरह की रिपोर्ट के निष्कर्षों का समर्थन करते हुए एक प्रस्तावना लिखी है। लोगों का मानना है कि महामारी के यूपी सरकार के घोर कुप्रबंधन पर पर्दा डालने के लिए आईआईटी कानपुर की छाप व साख का उपयोग किया जाना बहुत ही निंदनीय है। हालांकि प्रो. मणीन्द्र का कहना है कि ये किताब यूपी मॉडल के आधार पर हैए इसमें हमने यूपी सरकार से भी डेटा लिया था जिसका पूरा विस्तृत अध्ययन करके हमने छापा है। एक सौ बीस पेज की यह किताब अब चर्चा का विषय बनी है।जिसे लोग निराधार रिपोर्ट मानते हुए सरकार पर उंगलियां उठा रहे हैं। आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट के खिलाफ दो प्रमुख संगठन "आईआईटी सीटिजन्स फोरम" व "हमारा मंच आईआईटीके" ने मुखर होकर विरोध किया है।साथ ही इसको लेकर सरकार के खिलाफ अभियान चलाया है। जिसके पक्ष में दुनिया के तमाम विश्वविद्यालयों के छात्र व अध्यापक के अलावा प्रमुख बुद्धिजीवियों ने अपना समर्थन जताया है। जिनकी संख्या दो सौ दस है। जिसमें कैलिफोर्निया, आईआईटी कानपुर, मुंबई,कैंब्रिज समेत देश विदेश के विभिन्न संस्थानों से जुड़े लोग शामिल हैं। ऐसे में पूरी दुनिया में आईआईटी कानपुर की आलोचना हो रही है।
की पूर्व घोषित दिसंबर रिलीज की तैयारी के लिए चेन लिंक [LINK] कोड4रेना पर स्टैकिंग v0.1, एक क्राउडसोर्स ऑडिट शुरू किया गया है। चेनलिंक के अनुसार, यह प्रतियोगिता शीर्ष लेखा परीक्षकों द्वारा पूरी की गई कई कोड समीक्षाओं के अलावा, v0.1 कोडबेस की सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने में मदद करेगी। प्रतिस्पर्धी ऑडिट 1 नवंबर से शुरू होगा और 15 नवंबर 2022 तक चलेगा। की दिसंबर रिलीज की तैयारी के लिए #चेन लिंक स्टेकिंग v0.1, एक क्राउडसोर्स ऑडिट आज से शुरू हो रहा है @ कोड4रेना. दिलचस्प बात यह है कि न केवल इस विकास में, बल्कि व्हेल ने भी इसमें रुचि दिखाई संपर्क, क्योंकि यह शीर्ष 2000 ईटीएच व्हेल के पास मौजूद क्रिप्टोकरेंसी की सूची में से एक था। यह अद्यतन काफी आशाजनक लग रहा था क्योंकि इसने LINK में व्हेल की बढ़ती लोकप्रियता और विश्वास का संकेत दिया था। इसके अलावा, लिंक पारिस्थितिकी तंत्र में कई अन्य विकास भी हुए हैं जिन्होंने नेटवर्क के लिए मूल्य जोड़ा, जिसमें एथेरियम, पॉलीगॉन और आर्बिट्रम के हालिया एकीकरण शामिल हैं। ये सभी अपडेट अच्छी तरह से परिलक्षित हुए संपर्कके चार्ट के रूप में इसने लगभग 10% साप्ताहिक लाभ दर्ज किया। हालांकि, क्रिप्टो उद्योग की अस्थिरता और अप्रत्याशित प्रकृति को देखते हुए, आने वाले दिनों में लिंक के इस विकास को बनाए रखने की क्या संभावनाएं हैं? क्रिप्टो क्वांट्स जानकारी सुझाव दिया कि चैनलिंक के मूल्य वृद्धि के अच्छे दिन जल्द ही समाप्त हो सकते हैं क्योंकि कई मेट्रिक्स विपरीत थे संपर्क. एक प्रमुख मंदी का संकेत यह था कि लिंक का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) एक ओवरबॉट स्थिति में था। इस प्रकार, यह दर्शाता है कि जल्द ही कीमतों में कमी की उम्मीद की जा सकती है। इसके अलावा, चेनलिंक के विनिमय भंडार में वृद्धि जारी रही, जो अभी तक एक और मंदी का संकेत था क्योंकि इसने उच्च बिक्री दबाव का संकेत दिया था। वास्तव में, LINK के लेन-देन की कुल संख्या और सक्रिय पतों में भी पिछले 24 घंटों में गिरावट दर्ज की गई है। क्या उम्मीद करें? संयोग से, संपर्कके दैनिक चार्ट रीडिंग अस्पष्ट थे क्योंकि उन्होंने उछाल और गिरावट दोनों की संभावना का सुझाव दिया था। उदाहरण के लिए, मनी फ्लो इंडेक्स (एमएफआई) ने तेजी दर्ज की और ओवरबॉट जोन की ओर बढ़ रहा था। दूसरी ओर, चाइकिन मनी फ्लो (CMF) न्यूट्रल मार्क की ओर नीचे चला गया, जो कि मंदी भी है। हालांकि, एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) रिबन ने एक तेजी से क्रॉसओवर प्रदर्शित किया क्योंकि 20-दिवसीय ईएमए ने 55-दिवसीय फ़्लिप किया, जो बाजार में बैल के लाभ को दर्शाता है। कहा जा रहा है कि, बोलिंगर बैंड ने खुलासा किया कि लिंक की कीमत एक उच्च अस्थिरता क्षेत्र में प्रवेश करने वाली थी। इसलिए, आने वाले दिनों में LINK का मूल्य शीर्ष किस तरह से एक प्रश्न है जिसका उत्तर केवल समय ही दे सकता है।
की पूर्व घोषित दिसंबर रिलीज की तैयारी के लिए चेन लिंक [LINK] कोडचाररेना पर स्टैकिंग vशून्य.एक, एक क्राउडसोर्स ऑडिट शुरू किया गया है। चेनलिंक के अनुसार, यह प्रतियोगिता शीर्ष लेखा परीक्षकों द्वारा पूरी की गई कई कोड समीक्षाओं के अलावा, vशून्य.एक कोडबेस की सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने में मदद करेगी। प्रतिस्पर्धी ऑडिट एक नवंबर से शुरू होगा और पंद्रह नवंबर दो हज़ार बाईस तक चलेगा। की दिसंबर रिलीज की तैयारी के लिए #चेन लिंक स्टेकिंग vशून्य.एक, एक क्राउडसोर्स ऑडिट आज से शुरू हो रहा है @ कोडचाररेना. दिलचस्प बात यह है कि न केवल इस विकास में, बल्कि व्हेल ने भी इसमें रुचि दिखाई संपर्क, क्योंकि यह शीर्ष दो हज़ार ईटीएच व्हेल के पास मौजूद क्रिप्टोकरेंसी की सूची में से एक था। यह अद्यतन काफी आशाजनक लग रहा था क्योंकि इसने LINK में व्हेल की बढ़ती लोकप्रियता और विश्वास का संकेत दिया था। इसके अलावा, लिंक पारिस्थितिकी तंत्र में कई अन्य विकास भी हुए हैं जिन्होंने नेटवर्क के लिए मूल्य जोड़ा, जिसमें एथेरियम, पॉलीगॉन और आर्बिट्रम के हालिया एकीकरण शामिल हैं। ये सभी अपडेट अच्छी तरह से परिलक्षित हुए संपर्कके चार्ट के रूप में इसने लगभग दस% साप्ताहिक लाभ दर्ज किया। हालांकि, क्रिप्टो उद्योग की अस्थिरता और अप्रत्याशित प्रकृति को देखते हुए, आने वाले दिनों में लिंक के इस विकास को बनाए रखने की क्या संभावनाएं हैं? क्रिप्टो क्वांट्स जानकारी सुझाव दिया कि चैनलिंक के मूल्य वृद्धि के अच्छे दिन जल्द ही समाप्त हो सकते हैं क्योंकि कई मेट्रिक्स विपरीत थे संपर्क. एक प्रमुख मंदी का संकेत यह था कि लिंक का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स एक ओवरबॉट स्थिति में था। इस प्रकार, यह दर्शाता है कि जल्द ही कीमतों में कमी की उम्मीद की जा सकती है। इसके अलावा, चेनलिंक के विनिमय भंडार में वृद्धि जारी रही, जो अभी तक एक और मंदी का संकेत था क्योंकि इसने उच्च बिक्री दबाव का संकेत दिया था। वास्तव में, LINK के लेन-देन की कुल संख्या और सक्रिय पतों में भी पिछले चौबीस घंटाटों में गिरावट दर्ज की गई है। क्या उम्मीद करें? संयोग से, संपर्कके दैनिक चार्ट रीडिंग अस्पष्ट थे क्योंकि उन्होंने उछाल और गिरावट दोनों की संभावना का सुझाव दिया था। उदाहरण के लिए, मनी फ्लो इंडेक्स ने तेजी दर्ज की और ओवरबॉट जोन की ओर बढ़ रहा था। दूसरी ओर, चाइकिन मनी फ्लो न्यूट्रल मार्क की ओर नीचे चला गया, जो कि मंदी भी है। हालांकि, एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज रिबन ने एक तेजी से क्रॉसओवर प्रदर्शित किया क्योंकि बीस-दिवसीय ईएमए ने पचपन-दिवसीय फ़्लिप किया, जो बाजार में बैल के लाभ को दर्शाता है। कहा जा रहा है कि, बोलिंगर बैंड ने खुलासा किया कि लिंक की कीमत एक उच्च अस्थिरता क्षेत्र में प्रवेश करने वाली थी। इसलिए, आने वाले दिनों में LINK का मूल्य शीर्ष किस तरह से एक प्रश्न है जिसका उत्तर केवल समय ही दे सकता है।
यूं तो हम अपने चेहरे की खास देखभाल करते हैं। लेकिन सच तो यह है कि हमें फेस को साफ करने का सही तरीका ही नहीं पता होता। फेस धोते वक्त हम अकसर पांच गलतियां करते हैं। क्या हैं वे गलतियां और क्या हैं उनके उपाय, जिन्हें आजामाकर आप अपने फेस को दे सकती हैं एक नई ताजगी। अकसर लोग चेहरे को बार-बार पानी से धोते रहते हैं, लेकिन फिर भी उनकी स्किन पूरी तरह साफ नहीं हो पाती। इस तहर चेहरे पर जमे तैलीय पदाथों के कारण कील-मुंहासे होने लगते हैं। कई बार हम हाथों को गीला कर उस पर साबुन रगड कर सीधे ही चेहरे पर लगाकर धो लेते हैं। इस तरह चेहरा ठीक तरह से साफ नहीं होता। इससे चेहरे पर लगी धूल-मिटी चेहरे पर ही जमी रह जाती है। चेरहे पर जमा तैलीय पदाथों को दूर करने के लिए उसे अच्छा तहर पानी से धोएं। हाथों में पानी लेकर चेहरे को थपकियां देकर धोएं। इससे स्किन के रोम छिद्र खुलते हैं और ताजगी का एहसास होता है। हमेशा अपने चेहरे की सफाइ्र किसी अच्छे फेसवॉश, साबुन या घरेलू उपायों से करें। स्पंज और पफ आदि को चेहरे पर तेजी से रगडने से स्किन की रक्त वाहिकाएं टूट जाती हैं और स्किन की प्राकृतिक चमक कम हो जाती है। फेस की स्किन बॉडी के अन्य भागों से ज्यादा सॉफ्ट और संवेदनशील होती है। इसलिए इसे खास देखभाल की आवश्यकता होती है। जबकि हम चेहरे को बॉडी के अन्य अंगों की तरह ही साफ करते हैं। बॉडी सोप या लिक्विड हैंड सोप से ही फेस धो लेते हैं। इनमें डिटजेंüट और रसायन सहोते हैं। इससे स्किन को नुकसान पहुंचता है।
यूं तो हम अपने चेहरे की खास देखभाल करते हैं। लेकिन सच तो यह है कि हमें फेस को साफ करने का सही तरीका ही नहीं पता होता। फेस धोते वक्त हम अकसर पांच गलतियां करते हैं। क्या हैं वे गलतियां और क्या हैं उनके उपाय, जिन्हें आजामाकर आप अपने फेस को दे सकती हैं एक नई ताजगी। अकसर लोग चेहरे को बार-बार पानी से धोते रहते हैं, लेकिन फिर भी उनकी स्किन पूरी तरह साफ नहीं हो पाती। इस तहर चेहरे पर जमे तैलीय पदाथों के कारण कील-मुंहासे होने लगते हैं। कई बार हम हाथों को गीला कर उस पर साबुन रगड कर सीधे ही चेहरे पर लगाकर धो लेते हैं। इस तरह चेहरा ठीक तरह से साफ नहीं होता। इससे चेहरे पर लगी धूल-मिटी चेहरे पर ही जमी रह जाती है। चेरहे पर जमा तैलीय पदाथों को दूर करने के लिए उसे अच्छा तहर पानी से धोएं। हाथों में पानी लेकर चेहरे को थपकियां देकर धोएं। इससे स्किन के रोम छिद्र खुलते हैं और ताजगी का एहसास होता है। हमेशा अपने चेहरे की सफाइ्र किसी अच्छे फेसवॉश, साबुन या घरेलू उपायों से करें। स्पंज और पफ आदि को चेहरे पर तेजी से रगडने से स्किन की रक्त वाहिकाएं टूट जाती हैं और स्किन की प्राकृतिक चमक कम हो जाती है। फेस की स्किन बॉडी के अन्य भागों से ज्यादा सॉफ्ट और संवेदनशील होती है। इसलिए इसे खास देखभाल की आवश्यकता होती है। जबकि हम चेहरे को बॉडी के अन्य अंगों की तरह ही साफ करते हैं। बॉडी सोप या लिक्विड हैंड सोप से ही फेस धो लेते हैं। इनमें डिटजेंüट और रसायन सहोते हैं। इससे स्किन को नुकसान पहुंचता है।
रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सभी परिवारों को सरकारी खर्च पर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम का अध्ययन करने एक उच्च स्तरीय दल थाईलैण्ड जायेगा। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टी. एस. सिंहदेव ने आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी मंं आयोजित किसान फसल ऋण मुक्ति कार्यक्रम में यह जानकारी दी। उन्होने कहा कि राज्य सरकार ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था लागू करना चाहती है जिसमें आपरेशन से लेकर ओपीडी तक के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाए। उन्होने कहा कि थाईलैण्ड सरकार ने अपने सभी निवासियों के लिए यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम लागू कर रखी है। अध्ययन टीम की रिपोर्ट के बाद इसे राज्य में लागू किया जायेगा। राज्य सरकार पहले ही केन्द्र की आयुष्मान योजना को बेहतर नही मानते हुए इसे राज्य में आने वाले समय में बन्द करने की घोषणा कर चुकी है।
रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सभी परिवारों को सरकारी खर्च पर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम का अध्ययन करने एक उच्च स्तरीय दल थाईलैण्ड जायेगा। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टी. एस. सिंहदेव ने आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी मंं आयोजित किसान फसल ऋण मुक्ति कार्यक्रम में यह जानकारी दी। उन्होने कहा कि राज्य सरकार ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था लागू करना चाहती है जिसमें आपरेशन से लेकर ओपीडी तक के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाए। उन्होने कहा कि थाईलैण्ड सरकार ने अपने सभी निवासियों के लिए यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम लागू कर रखी है। अध्ययन टीम की रिपोर्ट के बाद इसे राज्य में लागू किया जायेगा। राज्य सरकार पहले ही केन्द्र की आयुष्मान योजना को बेहतर नही मानते हुए इसे राज्य में आने वाले समय में बन्द करने की घोषणा कर चुकी है।
Aligarh News : मजबूरी के सामने हारी बिन ब्याही मां की ममता, बेटे को जन्म देने के बाद क्यों किया अपनाने से इनकार? Aligarh News : मानव समाज के इतिहास में मां की ममता ( Maa ki mamta ) से बड़ा उदाहरण कुछ नहीं है लेकिन जिंदगी जब इंसान की परीक्षा लेती है तो वो भी दम तोड़ देती है। निष्ठुरतारूपी नियति के सामने उसकी भी नहीं चलती। जिस जिगर के टुकड़े को जन्म देती है, उसे होश में आते ही छोड़ने को विवश हो जाती है। ममता की मौत का एक ऐसा ही मामला ऐतिहासिक अलीगढ़ ( Aligarh ) से सामने आई है। एक बिन ब्याही मां ( Single mother ) ने बच्चे को जन्म देने के बाद उसे अपनाने इनकार कर दिया। आज की भाषा में अभागी बिन ब्याही मां ( Single mother ) की मजबूरी को आप इसी समझ सकते हैं कि वो प्रसव पीड़ा के दौरान जैसे-तैसे अकेली Delhi से गोरखधाम के लिए रवाना होती है। अलीगढ़ पहुंचते-पहुंचे वो प्रसव पीड़ा तड़त उठती है। विषम परिस्थिति में उसे अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर उतारकर जिला अस्पताल के रवाना हुई। बेसुध अवस्था में सिंगल मां ने बच्चे को जन्म दे दिया। अस्पताल में होश में आने के बाद उनसे बच्चे को अपनाने से इनकार कर दिया। नियति के दुष्चक्र में मैं ऐसी फंसी की अकेली पड़ गई। सबने साथ छोड़ दिया। अंत में मैं जिस गोरखधाम में पैदा हुई वहीं के लिए जैसे-तैसे ट्रेन में चढ़कर रवाना हो गई। ट्रेन में प्रसव का दर्द जारी रहा, उसके बाद किसने मुझे कहां, उतारा, कहा बेटा पैदा हुआ इस सबका पता मुझे अलीगढ़ जिला अस्पताल में होश में आने के बाद हुआ। मेरी जिंदगी की सच्चाई यह है कि मेरे पास जॉब नहीं है, घर नहीं हैं, मैं, कहां रहूंगा, मुझे ये भी पता नहीं है, ऐसे में इसे क्या खिलाउंगी, कैसे पालूंगी, इसलिए मैं इसे दूध भी नहीं पिलाउंगी। न ही अपनाउंगी। सिंगल मदर के पिता का नाम बसंत कुमार है। बच्चे को तकलीफ होगी। वही सीएमएस ने बताया कि लेडी को बेटा हुआ है और अब उसे चाइल्ड लाइन को सौंपा जा रहा है। फिलहाल, बच्चा और मां दोनों स्वस्थ है। युवती का कहना है अभी उसकी शादी नहीं हुई है। वह इस बच्चे की परवरिश नहीं कर सकती। वहीं, अस्पताल की सीएमएस रेनू शर्मा ने बताया कि मां ने बच्चे को पालने से इंकार कर दिया है और बच्चा चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंपा जा रहा है। युवती ने बताया कि उसके पिता को पता था कि वह प्रेग्नेंट है। वह बच्चे के पैदा होने के बारे में घर में किसी को नहीं बताएगी। वह यहां से गोरखधाम जाएगी और वहीं जाकर रहेगी।
Aligarh News : मजबूरी के सामने हारी बिन ब्याही मां की ममता, बेटे को जन्म देने के बाद क्यों किया अपनाने से इनकार? Aligarh News : मानव समाज के इतिहास में मां की ममता से बड़ा उदाहरण कुछ नहीं है लेकिन जिंदगी जब इंसान की परीक्षा लेती है तो वो भी दम तोड़ देती है। निष्ठुरतारूपी नियति के सामने उसकी भी नहीं चलती। जिस जिगर के टुकड़े को जन्म देती है, उसे होश में आते ही छोड़ने को विवश हो जाती है। ममता की मौत का एक ऐसा ही मामला ऐतिहासिक अलीगढ़ से सामने आई है। एक बिन ब्याही मां ने बच्चे को जन्म देने के बाद उसे अपनाने इनकार कर दिया। आज की भाषा में अभागी बिन ब्याही मां की मजबूरी को आप इसी समझ सकते हैं कि वो प्रसव पीड़ा के दौरान जैसे-तैसे अकेली Delhi से गोरखधाम के लिए रवाना होती है। अलीगढ़ पहुंचते-पहुंचे वो प्रसव पीड़ा तड़त उठती है। विषम परिस्थिति में उसे अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर उतारकर जिला अस्पताल के रवाना हुई। बेसुध अवस्था में सिंगल मां ने बच्चे को जन्म दे दिया। अस्पताल में होश में आने के बाद उनसे बच्चे को अपनाने से इनकार कर दिया। नियति के दुष्चक्र में मैं ऐसी फंसी की अकेली पड़ गई। सबने साथ छोड़ दिया। अंत में मैं जिस गोरखधाम में पैदा हुई वहीं के लिए जैसे-तैसे ट्रेन में चढ़कर रवाना हो गई। ट्रेन में प्रसव का दर्द जारी रहा, उसके बाद किसने मुझे कहां, उतारा, कहा बेटा पैदा हुआ इस सबका पता मुझे अलीगढ़ जिला अस्पताल में होश में आने के बाद हुआ। मेरी जिंदगी की सच्चाई यह है कि मेरे पास जॉब नहीं है, घर नहीं हैं, मैं, कहां रहूंगा, मुझे ये भी पता नहीं है, ऐसे में इसे क्या खिलाउंगी, कैसे पालूंगी, इसलिए मैं इसे दूध भी नहीं पिलाउंगी। न ही अपनाउंगी। सिंगल मदर के पिता का नाम बसंत कुमार है। बच्चे को तकलीफ होगी। वही सीएमएस ने बताया कि लेडी को बेटा हुआ है और अब उसे चाइल्ड लाइन को सौंपा जा रहा है। फिलहाल, बच्चा और मां दोनों स्वस्थ है। युवती का कहना है अभी उसकी शादी नहीं हुई है। वह इस बच्चे की परवरिश नहीं कर सकती। वहीं, अस्पताल की सीएमएस रेनू शर्मा ने बताया कि मां ने बच्चे को पालने से इंकार कर दिया है और बच्चा चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंपा जा रहा है। युवती ने बताया कि उसके पिता को पता था कि वह प्रेग्नेंट है। वह बच्चे के पैदा होने के बारे में घर में किसी को नहीं बताएगी। वह यहां से गोरखधाम जाएगी और वहीं जाकर रहेगी।
परिवार को तत्काल सूचित कर दिया गया है। डगलस काउंटी कॉरनर जिल रोमैन ने आधिकारिक तौर पर छात्र की शिनाख्त नहीं की है और बताया कि वह एक 18 साल का छात्र है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, डगलस काउंटी के शेरिफ टोनी स्परलॉक ने बताया कि दोपहर दो बजे (स्थानीय समयानुसार) से ठीक पहले दो संदिग्ध स्कूल में दाखिल हुए और स्कूल के काफी अंदर जाकर दो अलग-अलग जगहों पर छात्रों को निशाना बनाया। टोनी ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि दोनों संदिग्धों को घटनास्थल पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने कहा कि जांचकर्ताओं ने एक हैंडगन बरामद किया, लेकिन उन्हें संदिग्धों के विशेष मकसद के बारे में कोई सुराग नहीं पता चला। (IANS)
परिवार को तत्काल सूचित कर दिया गया है। डगलस काउंटी कॉरनर जिल रोमैन ने आधिकारिक तौर पर छात्र की शिनाख्त नहीं की है और बताया कि वह एक अट्ठारह साल का छात्र है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, डगलस काउंटी के शेरिफ टोनी स्परलॉक ने बताया कि दोपहर दो बजे से ठीक पहले दो संदिग्ध स्कूल में दाखिल हुए और स्कूल के काफी अंदर जाकर दो अलग-अलग जगहों पर छात्रों को निशाना बनाया। टोनी ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि दोनों संदिग्धों को घटनास्थल पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने कहा कि जांचकर्ताओं ने एक हैंडगन बरामद किया, लेकिन उन्हें संदिग्धों के विशेष मकसद के बारे में कोई सुराग नहीं पता चला।
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने राष्ट्रपति पद के चुनाव में ईरानी जनता व इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था को विजेता बताते हुए कहा कि दुश्मन की साज़िश के बावजूद व्यवस्था के प्रति इस महान राष्ट्र का विश्वास बढ़ा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफ़ग़ानिस्तान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह ने अपने अपने बधाई संदेशों में ईरान में 12वें राष्ट्रपति चुनावों में डाक्टर हसन रूहानी को जीत पर बधाई दी है। विश्व के कई देशों के नेताओं ने ईरान में आयोजित हुए राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रपति हसन रूहानी की दोबारा शानदार जीत पर उन्हें बधाई दी है। ईरान में 12वां राष्ट्रपति पद का चुनाव डॉक्टर हसन रूहानी जीत गए हैं। इस प्रकार वह फिर अगले चार साल के लिए देश के राष्ट्रपति होंगे। हालैंड में इस्लामी गणतंत्र ईरान के राजदूत ओपीसीडब्ल्यू के गुप्त आयोग के प्रमुख चुन लिए गये। ईरान में 12वें राष्ट्रपति चुनाव के आरंभिक परिणामों से पता चलता है कि वर्तमान राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी दो करोड़ 27 लाख से अधिक मत प्राप्त करके पहले नंबर पर चल रहे हैं। ईरान में राष्ट्रपति और नगर व ग्राम परिषद के चुनाव के लिए मतदान खत्म होते ही वोटो की गिनती शुरु हो गयी है और किसी भी समय परिणामों की आरंभिक घोषणा का आरंभ हो सकता है। इस्लामी गणतंत्र ईरान में 12वें राष्ट्रपति और पांचवें नगर व ग्राम परिषद के चुनावों के मतदान के बाद बैलेट बाक्स एकत्रित कर लिए गये हैं और मतगणना आरंभ हो गयी है तथा चरण बद्ध ढंग से परिणामों की घोषणा की जाएगी।
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने राष्ट्रपति पद के चुनाव में ईरानी जनता व इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था को विजेता बताते हुए कहा कि दुश्मन की साज़िश के बावजूद व्यवस्था के प्रति इस महान राष्ट्र का विश्वास बढ़ा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफ़ग़ानिस्तान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह ने अपने अपने बधाई संदेशों में ईरान में बारहवें राष्ट्रपति चुनावों में डाक्टर हसन रूहानी को जीत पर बधाई दी है। विश्व के कई देशों के नेताओं ने ईरान में आयोजित हुए राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रपति हसन रूहानी की दोबारा शानदार जीत पर उन्हें बधाई दी है। ईरान में बारहवां राष्ट्रपति पद का चुनाव डॉक्टर हसन रूहानी जीत गए हैं। इस प्रकार वह फिर अगले चार साल के लिए देश के राष्ट्रपति होंगे। हालैंड में इस्लामी गणतंत्र ईरान के राजदूत ओपीसीडब्ल्यू के गुप्त आयोग के प्रमुख चुन लिए गये। ईरान में बारहवें राष्ट्रपति चुनाव के आरंभिक परिणामों से पता चलता है कि वर्तमान राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी दो करोड़ सत्ताईस लाख से अधिक मत प्राप्त करके पहले नंबर पर चल रहे हैं। ईरान में राष्ट्रपति और नगर व ग्राम परिषद के चुनाव के लिए मतदान खत्म होते ही वोटो की गिनती शुरु हो गयी है और किसी भी समय परिणामों की आरंभिक घोषणा का आरंभ हो सकता है। इस्लामी गणतंत्र ईरान में बारहवें राष्ट्रपति और पांचवें नगर व ग्राम परिषद के चुनावों के मतदान के बाद बैलेट बाक्स एकत्रित कर लिए गये हैं और मतगणना आरंभ हो गयी है तथा चरण बद्ध ढंग से परिणामों की घोषणा की जाएगी।
लखनऊ : कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन में सबसे ज्यादा राशन और सब्जी पर कालाबाजारी हो रही है। डीएम द्वारा निर्धारित खाध पदार्थों को मूल्य से अधिक बेचा जा रहा है। तमाम कोशिशों के बाद भी दामों पर नियंत्रण व कालाबाजारी रुकने का नाम नहीं ले रही है। फल व गल्ला मंडी में महंगाई की मार बताकर फुटकर दुकान दार महंगे दामों में फल, सब्जी व प्रोविजन से जुडा सामान बेच रहे हैं। डीएम के यहां 26 मार्च को जो रेट लिस्ट जारी की गई थी, जब इस बाबत दुकानदारों से पूछा गया तो एक जवाब था जब उन्हें सामान महंगा मिलेगा, तो उन्हें भी अपने खर्चे निकालने के लिए दो पैसे कमाने होंगे। अरहर दाल 100 रुपये प्रति किलो बिक रही है, जबकि 20 मार्च तक यही दाल 89 रुपये प्रति किलो थी। चना दाल कई दुकानों में थी, एक दुकानदार ने इसके रेट 75 रुपये प्रति किलो बताए। बताए। मूंग दाल 115 रुपये प्रति किलो वहीं आटा तीस रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है, हालांकि यही आटा चंद दिनो पहले 34 से 40 रुपये प्रति किलो था। चावल मोटा भी 35 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। चीनी निर्धारित मूल्य 38 रुपये से बढाकर 42 से 45 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है। इस संबंध में जब दुकानदार से पूछा गया तो दुकानदार ने तर्क था कि खुली चीनी 42 में है और चीनी मील से पैकेट में आने वाली तीन ब्रांड की चीनी 45 रुपये प्रति किलो तक बेची जा रही है। सरसों तेल जो हर शख्स के यहां इस्तेमाल किया जा रहा है, वहां भी निर्धारित मूल्य 110 से बढाकर 120 से 125 रुपये बेचा जा रहा है। इसी तरह सब्जियों में टमाटर 35 से 40 रुपये प्रति किलो, सेब 100 से 120 रुपये प्रति किलो तक फल मंडी में है जबकि केला पचास से साठ रुपये का एक दर्जन बेचा जा रहा है। उधर प्याज जो सप्ताह भर पहले पचास रुपये प्रति किलो था, वह तीस से 35 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। जबकि लौकी साठ रुपये से घटकर 30 से 35 रुपये प्रति किलो हो गई है। लोबिया 120 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है। लॉकडाउन में लोगों कि खूब जेब कट रही है।
लखनऊ : कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन में सबसे ज्यादा राशन और सब्जी पर कालाबाजारी हो रही है। डीएम द्वारा निर्धारित खाध पदार्थों को मूल्य से अधिक बेचा जा रहा है। तमाम कोशिशों के बाद भी दामों पर नियंत्रण व कालाबाजारी रुकने का नाम नहीं ले रही है। फल व गल्ला मंडी में महंगाई की मार बताकर फुटकर दुकान दार महंगे दामों में फल, सब्जी व प्रोविजन से जुडा सामान बेच रहे हैं। डीएम के यहां छब्बीस मार्च को जो रेट लिस्ट जारी की गई थी, जब इस बाबत दुकानदारों से पूछा गया तो एक जवाब था जब उन्हें सामान महंगा मिलेगा, तो उन्हें भी अपने खर्चे निकालने के लिए दो पैसे कमाने होंगे। अरहर दाल एक सौ रुपयापये प्रति किलो बिक रही है, जबकि बीस मार्च तक यही दाल नवासी रुपयापये प्रति किलो थी। चना दाल कई दुकानों में थी, एक दुकानदार ने इसके रेट पचहत्तर रुपयापये प्रति किलो बताए। बताए। मूंग दाल एक सौ पंद्रह रुपयापये प्रति किलो वहीं आटा तीस रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है, हालांकि यही आटा चंद दिनो पहले चौंतीस से चालीस रुपयापये प्रति किलो था। चावल मोटा भी पैंतीस रुपयापये प्रति किलो बेचा जा रहा है। चीनी निर्धारित मूल्य अड़तीस रुपयापये से बढाकर बयालीस से पैंतालीस रुपयापये प्रति किलो बेची जा रही है। इस संबंध में जब दुकानदार से पूछा गया तो दुकानदार ने तर्क था कि खुली चीनी बयालीस में है और चीनी मील से पैकेट में आने वाली तीन ब्रांड की चीनी पैंतालीस रुपयापये प्रति किलो तक बेची जा रही है। सरसों तेल जो हर शख्स के यहां इस्तेमाल किया जा रहा है, वहां भी निर्धारित मूल्य एक सौ दस से बढाकर एक सौ बीस से एक सौ पच्चीस रुपयापये बेचा जा रहा है। इसी तरह सब्जियों में टमाटर पैंतीस से चालीस रुपयापये प्रति किलो, सेब एक सौ से एक सौ बीस रुपयापये प्रति किलो तक फल मंडी में है जबकि केला पचास से साठ रुपये का एक दर्जन बेचा जा रहा है। उधर प्याज जो सप्ताह भर पहले पचास रुपये प्रति किलो था, वह तीस से पैंतीस रुपयापये प्रति किलो बेचा जा रहा है। जबकि लौकी साठ रुपये से घटकर तीस से पैंतीस रुपयापये प्रति किलो हो गई है। लोबिया एक सौ बीस रुपयापये प्रति किलो बेची जा रही है। लॉकडाउन में लोगों कि खूब जेब कट रही है।
एक अन्य घटना पहले से ही कुख्यात सैन्य इकाई बन गई - 138-th गार्ड्स मोटराइज्ड राइफल ब्रिगेड। इस बार बटालियन कमांडर की वहीं मौत हो गई। अपने अधीनस्थों के साथ कैप्टन गुरोव अपने कार्यकाल की सेवा कर रहे मुनियों के जत्थे को नष्ट करने वाले थे, लेकिन किसी कारणवश पास के जंगल में ऐसा किया। त्रासदी उस समय हुई जब अधिकारी ने एक हथौड़ा के साथ खोल को हटाने की कोशिश की। बटालियन कमांडर को विस्फोट से उसके सिर पर चोट लगी। XenumX गार्ड ब्रिगेड, कामेनका, लेनिनग्राद क्षेत्र के गांव में स्थित है, पहले से ही पिछले वर्ष में "खुद को प्रतिष्ठित" किया है, और एक से अधिक बार। पिछले साल अप्रैल में, एक रात के अभ्यास के दौरान, एक अधिकारी ने गलती से एक टैंक बंदूक से दो सहयोगियों को गोली मार दी थी। पिछले साल जुलाई में एक ढहती दीवार के नीचे एक सिपाही की मौत हो गई थी। 138 के अक्टूबर में, हाइजिंग से संबंधित हाई-प्रोफाइल घोटालों की एक श्रृंखला के बाद, इस सैन्य इकाई की स्थिति को दिमित्री मेदवेदेव के साथ व्यक्तिगत रूप से निपटने के लिए मजबूर किया गया था। तब सुप्रीम कमांडर ने ब्रिगेड कमांडर को बर्खास्त करने का आदेश दिया।
एक अन्य घटना पहले से ही कुख्यात सैन्य इकाई बन गई - एक सौ अड़तीस-th गार्ड्स मोटराइज्ड राइफल ब्रिगेड। इस बार बटालियन कमांडर की वहीं मौत हो गई। अपने अधीनस्थों के साथ कैप्टन गुरोव अपने कार्यकाल की सेवा कर रहे मुनियों के जत्थे को नष्ट करने वाले थे, लेकिन किसी कारणवश पास के जंगल में ऐसा किया। त्रासदी उस समय हुई जब अधिकारी ने एक हथौड़ा के साथ खोल को हटाने की कोशिश की। बटालियन कमांडर को विस्फोट से उसके सिर पर चोट लगी। XenumX गार्ड ब्रिगेड, कामेनका, लेनिनग्राद क्षेत्र के गांव में स्थित है, पहले से ही पिछले वर्ष में "खुद को प्रतिष्ठित" किया है, और एक से अधिक बार। पिछले साल अप्रैल में, एक रात के अभ्यास के दौरान, एक अधिकारी ने गलती से एक टैंक बंदूक से दो सहयोगियों को गोली मार दी थी। पिछले साल जुलाई में एक ढहती दीवार के नीचे एक सिपाही की मौत हो गई थी। एक सौ अड़तीस के अक्टूबर में, हाइजिंग से संबंधित हाई-प्रोफाइल घोटालों की एक श्रृंखला के बाद, इस सैन्य इकाई की स्थिति को दिमित्री मेदवेदेव के साथ व्यक्तिगत रूप से निपटने के लिए मजबूर किया गया था। तब सुप्रीम कमांडर ने ब्रिगेड कमांडर को बर्खास्त करने का आदेश दिया।
लोहरदगाः हत्या के एक मामले में लोहरदगा के दो अभियुक्तों मोफिल खान और मुबारक खान की मौत की सजा को 30 साल के आजीवन कारावास में बदल दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली तीन. न्यायाधीशों की एक पीठ ने दोषियों की अपील पर शुक्रवार को फैसला सुनाया। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के अक्तूबर 2014 के फैसले की समीक्षा का आग्रह किया गया था, जिसमें झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने 2009 में निचली अदालत द्वारा दोनों को सुनाई गई मौत की सजा को कायम रखा था। बता दें कि लोहरदगा के कुड़ू थाने के मकांदु के मोफिल और मुबारक को 2007 में हुई हत्या के एक मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। पीठ ने कहा, यह नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ताओं के सुधार की संभावना नहीं है। हालांकि, संपत्ति विवाद में भाई के पूरे परिवार की सुनियोजित तरीके से हत्या को ध्यान में रख हमारा मानना है कि याचिकाकर्ता 30 साल के लिए सजा के पात्र हैं।
लोहरदगाः हत्या के एक मामले में लोहरदगा के दो अभियुक्तों मोफिल खान और मुबारक खान की मौत की सजा को तीस साल के आजीवन कारावास में बदल दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली तीन. न्यायाधीशों की एक पीठ ने दोषियों की अपील पर शुक्रवार को फैसला सुनाया। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के अक्तूबर दो हज़ार चौदह के फैसले की समीक्षा का आग्रह किया गया था, जिसमें झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने दो हज़ार नौ में निचली अदालत द्वारा दोनों को सुनाई गई मौत की सजा को कायम रखा था। बता दें कि लोहरदगा के कुड़ू थाने के मकांदु के मोफिल और मुबारक को दो हज़ार सात में हुई हत्या के एक मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। पीठ ने कहा, यह नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ताओं के सुधार की संभावना नहीं है। हालांकि, संपत्ति विवाद में भाई के पूरे परिवार की सुनियोजित तरीके से हत्या को ध्यान में रख हमारा मानना है कि याचिकाकर्ता तीस साल के लिए सजा के पात्र हैं।
मीरांपुर। मुजफ्फरनगर। (Muzaffarnagar News) मीरापुर पुलिस द्वारा अवैध रुप से जुआ खेलते ०६ जुआरी अभियुक्तों गिरफ्तार किया। जिनके कब्जे से २१,२४०-रूपये नगद, ५२ ताश के पत्ते, फड़ आदि बरामद किया। जनपद में अवैध रुप से सट्टा/जुआ खेलने वाले अभियुक्तगण की गिरफ्तारी हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन के निर्देशन में चलाये जा रहे अभियान के अन्तर्गत पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के कुशल पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी जानसठ व थाना प्रभारी मीरापुर के कुशल नेतृत्व में थाना मीरापुर पुलिस द्वारा अवैध रुप से जुआ खेल रहे ०६ अभियुक्तगण को ग्राम सिकन्दरपुर से गिरफ्तार किया गया। अभियुक्तगण के कब्जे से २१,२४०- रुपये नगद, ५२ ताश के पत्ते, ०१ फड आदि बरामद किये गये। अभियुक्तगण की गिरफ्तारी व बरामदगी के सम्बन्ध में थाना मीरापुर पुलिस द्वारा अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है। गिरफ्तार अभियुक्तगण सलीम उर्फ कंगारू पुत्र हसन निवासी ग्राम सिकन्दरपुर, आस मौहम्मद उर्फ आशू पुत्र इरशाद निवासी मौ० मुश्तर्क, नाज आलम पुत्र इश्तकार निवासी ग्राम सिकन्दरपुर, आलम पुत्र जरीफ निवासी ग्राम सिकन्दरपुर, इमरान उर्फ सोनू पुत्र सुक्का निवासी मौ० मुश्तर्क, राजा पुत्र छोटा निवासी मौ० मुश्तर्क कस्बा व थाना मीरापुर जिनके कब्जे से ५२ ताश के पत्ते, २१,२४०-रूपये नगद , ०१ फड़ (प्लास्टिक का पल्ल) बरामद की। गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में निरीक्षक अमरपाल शर्मा, उप०नि० संजय कुमार, है०का० कालूराम, सूरज कुमार, अनुज कुमार, मनोज कुमार, टीटू कुमार, नवकमल थाना मीरापुर शामिल रहे।
मीरांपुर। मुजफ्फरनगर। मीरापुर पुलिस द्वारा अवैध रुप से जुआ खेलते छः जुआरी अभियुक्तों गिरफ्तार किया। जिनके कब्जे से इक्कीस,दो सौ चालीस-रूपये नगद, बावन ताश के पत्ते, फड़ आदि बरामद किया। जनपद में अवैध रुप से सट्टा/जुआ खेलने वाले अभियुक्तगण की गिरफ्तारी हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन के निर्देशन में चलाये जा रहे अभियान के अन्तर्गत पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के कुशल पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी जानसठ व थाना प्रभारी मीरापुर के कुशल नेतृत्व में थाना मीरापुर पुलिस द्वारा अवैध रुप से जुआ खेल रहे छः अभियुक्तगण को ग्राम सिकन्दरपुर से गिरफ्तार किया गया। अभियुक्तगण के कब्जे से इक्कीस,दो सौ चालीस- रुपये नगद, बावन ताश के पत्ते, एक फड आदि बरामद किये गये। अभियुक्तगण की गिरफ्तारी व बरामदगी के सम्बन्ध में थाना मीरापुर पुलिस द्वारा अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है। गिरफ्तार अभियुक्तगण सलीम उर्फ कंगारू पुत्र हसन निवासी ग्राम सिकन्दरपुर, आस मौहम्मद उर्फ आशू पुत्र इरशाद निवासी मौशून्य मुश्तर्क, नाज आलम पुत्र इश्तकार निवासी ग्राम सिकन्दरपुर, आलम पुत्र जरीफ निवासी ग्राम सिकन्दरपुर, इमरान उर्फ सोनू पुत्र सुक्का निवासी मौशून्य मुश्तर्क, राजा पुत्र छोटा निवासी मौशून्य मुश्तर्क कस्बा व थाना मीरापुर जिनके कब्जे से बावन ताश के पत्ते, इक्कीस,दो सौ चालीस-रूपये नगद , एक फड़ बरामद की। गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में निरीक्षक अमरपाल शर्मा, उपशून्यनिशून्य संजय कुमार, हैशून्यकाशून्य कालूराम, सूरज कुमार, अनुज कुमार, मनोज कुमार, टीटू कुमार, नवकमल थाना मीरापुर शामिल रहे।
रेवाड़ी, 4 जुलाई (हप्र) इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (आईजीयू) मीरपुर में मंगलवार को प्रवेश परीक्षा के समय हेल्प डेक्स लगाकर विद्यार्थियों की मदद की। इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (इनसो) प्रदेश प्रभारी रवि मसीत ने बताया कि हजारों की संख्या में विद्यार्थी प्रवेश परीक्षा देने के लिए विश्वविद्यालय पहुंचे थे। मंगलवार को एल.एल.बी., एम.बी.ए, एम.सी.ए, एम. ए. हिस्ट्री की परीक्षा थी। सभी विद्यार्थियों की इनसो की टीम ने मदद की। उन्होंने कहा कि हर साल इनसो टीम हेल्प डेस्क लगाती है और विद्यार्थियों की मदद करती है। इनसो हमेशा छात्रों के हित में कार्य करती है। जब तक विश्वविद्यालय में प्रवेश सत्र चलता रहेगा तब तक इनसो की हेल्प डेक्स आगे भी जारी रहेगी। इस मौके पर मनीष चौधरी, चंद्रकांत, रिंकी, मनीष, सुमित, सुनील, जतिन, मोहित, अश्वनी, विकास, निकिता, आयुषी आदि ने सहयोग किया।
रेवाड़ी, चार जुलाई इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर में मंगलवार को प्रवेश परीक्षा के समय हेल्प डेक्स लगाकर विद्यार्थियों की मदद की। इंडियन नेशनल स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन प्रदेश प्रभारी रवि मसीत ने बताया कि हजारों की संख्या में विद्यार्थी प्रवेश परीक्षा देने के लिए विश्वविद्यालय पहुंचे थे। मंगलवार को एल.एल.बी., एम.बी.ए, एम.सी.ए, एम. ए. हिस्ट्री की परीक्षा थी। सभी विद्यार्थियों की इनसो की टीम ने मदद की। उन्होंने कहा कि हर साल इनसो टीम हेल्प डेस्क लगाती है और विद्यार्थियों की मदद करती है। इनसो हमेशा छात्रों के हित में कार्य करती है। जब तक विश्वविद्यालय में प्रवेश सत्र चलता रहेगा तब तक इनसो की हेल्प डेक्स आगे भी जारी रहेगी। इस मौके पर मनीष चौधरी, चंद्रकांत, रिंकी, मनीष, सुमित, सुनील, जतिन, मोहित, अश्वनी, विकास, निकिता, आयुषी आदि ने सहयोग किया।
उधार लिए गया पैसा वापस न करना पड़े, इसके लिए लोग खूब जतन करते हैं। वहीं, एक शख्स ने तो उधारी का पैसा न देना पड़े इसके लिए चौंकाने वाली योजना बना डाली। उधार लिया पैसा न देना पड़े, इसके लिए लोग तरह-तरह के बहाने बनाते हैं। आपने देखा होगा कि ज्यादातर लोग उधार का पैसा देने में टालमटोल करते हैं और बाद में देने की बात करके टालते रहते हैं। वहीं, दूसरी तरफ अमेरिका में एक बुजुर्ग ने उधार लिया पैसा देने से बचने के लिए कुछ अलग ही प्लान बना डाला। जब लोगों के सामने सच्चाई आई तो लोग आश्चर्यचकित रह गए। पुलिस ने बताया कि न्यूयार्क के रहने वाले 60 साल के रॉबर्ट ब्रैंडल एक पिकअप ट्रक में पाए गए। जब उनसे पूछताछ की गई तो पता चला कि उनका दो लोगों ने सुपर बाउल पूल से अपहरण कर लिया और उनके पास से 16000 डॉलर लूट लिए, फिर उन्हें दो दिन तक इधर-उधर घुमाते रहे और बाद में ट्रक में छोड़कर भाग गए। पुलिस जांच में पता चला कि रॉबर्ट ब्रैंडल ने जो जानकारी दी है, वह गलत है। जांच में सामने आया कि ब्रैंडल अधिक पैसा कमाने के उद्देश्य से सुपर बाउल पूल में खेलने गए थे लेकिन उन पर 50000 डॉलर का कर्ज हो गया। इसके बाद पैसा न देने से बचने के लिए ब्रैंडल ने खुद के अपहरण और लूट की योजना बनाई। अब उन पर पुलिस ने झूठ बोलने और गलत तथ्य देने का चार्ज लगाया है।
उधार लिए गया पैसा वापस न करना पड़े, इसके लिए लोग खूब जतन करते हैं। वहीं, एक शख्स ने तो उधारी का पैसा न देना पड़े इसके लिए चौंकाने वाली योजना बना डाली। उधार लिया पैसा न देना पड़े, इसके लिए लोग तरह-तरह के बहाने बनाते हैं। आपने देखा होगा कि ज्यादातर लोग उधार का पैसा देने में टालमटोल करते हैं और बाद में देने की बात करके टालते रहते हैं। वहीं, दूसरी तरफ अमेरिका में एक बुजुर्ग ने उधार लिया पैसा देने से बचने के लिए कुछ अलग ही प्लान बना डाला। जब लोगों के सामने सच्चाई आई तो लोग आश्चर्यचकित रह गए। पुलिस ने बताया कि न्यूयार्क के रहने वाले साठ साल के रॉबर्ट ब्रैंडल एक पिकअप ट्रक में पाए गए। जब उनसे पूछताछ की गई तो पता चला कि उनका दो लोगों ने सुपर बाउल पूल से अपहरण कर लिया और उनके पास से सोलह हज़ार डॉलर लूट लिए, फिर उन्हें दो दिन तक इधर-उधर घुमाते रहे और बाद में ट्रक में छोड़कर भाग गए। पुलिस जांच में पता चला कि रॉबर्ट ब्रैंडल ने जो जानकारी दी है, वह गलत है। जांच में सामने आया कि ब्रैंडल अधिक पैसा कमाने के उद्देश्य से सुपर बाउल पूल में खेलने गए थे लेकिन उन पर पचास हज़ार डॉलर का कर्ज हो गया। इसके बाद पैसा न देने से बचने के लिए ब्रैंडल ने खुद के अपहरण और लूट की योजना बनाई। अब उन पर पुलिस ने झूठ बोलने और गलत तथ्य देने का चार्ज लगाया है।
1- श्राद्ध कर्म के चलते लोहे का बर्तन का उपयोग नहीं करना चाहिए। परम्परा है कि पितृपक्ष में लोहे के बर्तन उपयोग करने से परिवार पर अशुभ असर पड़ता है। इस के चलते पीतल, तांबा या अन्य धातु से बने बर्तनों का उपयोग करना चाहिए। 2- पितृपक्ष में श्राद्ध के चलते तेल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके अतिरिक्त दूसरों के घर का बना खाना तथा पान का सेवन नहीं करना चाहिए। श्राद्ध पक्ष में लहसुन, प्याज से बना खाना नहीं खाना चाहिए। इस दिन ब्राह्माणों को भोजन करवाना शुभ होता है। 3- पितृपक्ष में किसी प्रकार का कोई शुभ कार्य नहीं होता है। किसी प्रकार की नई चीज को नहीं क्रय करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस के चलते अपने पूर्वजों को याद करते हैं तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए पूजा करते हैं। 4- पितृपक्ष में जो भी पुरुष श्राद्ध कर्म करते हैं उन्हें इस के चलते बाल तथा दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए। प्रथा है कि बाल और दाढ़ी कटवाने से धन की हानि होती है क्योंकि यह शोक का वक़्त कहा जाता है। 5- पितृपक्ष में घर पर सात्विक भोजन बनाना सबसे सर्वश्रेष्ट होता है। यदि आपको पितरों की मृत्यु तिथि याद है तो पिंडदान भी करना चाहिए। पितृपक्ष के अंतिम दिन पिंडदान तथा तर्पण करना चाहिए। (इस लेख में बताई गई बातें मान्यताओं पर आधारित है, पाठक अपने विवेक से काम लें, CGTOP36 इसकी पुष्टि नहीं करता है )
एक- श्राद्ध कर्म के चलते लोहे का बर्तन का उपयोग नहीं करना चाहिए। परम्परा है कि पितृपक्ष में लोहे के बर्तन उपयोग करने से परिवार पर अशुभ असर पड़ता है। इस के चलते पीतल, तांबा या अन्य धातु से बने बर्तनों का उपयोग करना चाहिए। दो- पितृपक्ष में श्राद्ध के चलते तेल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके अतिरिक्त दूसरों के घर का बना खाना तथा पान का सेवन नहीं करना चाहिए। श्राद्ध पक्ष में लहसुन, प्याज से बना खाना नहीं खाना चाहिए। इस दिन ब्राह्माणों को भोजन करवाना शुभ होता है। तीन- पितृपक्ष में किसी प्रकार का कोई शुभ कार्य नहीं होता है। किसी प्रकार की नई चीज को नहीं क्रय करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस के चलते अपने पूर्वजों को याद करते हैं तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए पूजा करते हैं। चार- पितृपक्ष में जो भी पुरुष श्राद्ध कर्म करते हैं उन्हें इस के चलते बाल तथा दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए। प्रथा है कि बाल और दाढ़ी कटवाने से धन की हानि होती है क्योंकि यह शोक का वक़्त कहा जाता है। पाँच- पितृपक्ष में घर पर सात्विक भोजन बनाना सबसे सर्वश्रेष्ट होता है। यदि आपको पितरों की मृत्यु तिथि याद है तो पिंडदान भी करना चाहिए। पितृपक्ष के अंतिम दिन पिंडदान तथा तर्पण करना चाहिए।
अलगाववादियों और आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद मुहैया कराने संबंधी मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा गिरफ्तार किए गए मलिक ने 19 अप्रैल को सीने में दर्द की शिकायत की थी। श्रीनगर, 22 अप्रैल (भाषा) जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अलगाववादी नेता यासीन मलिक के गिरते स्वास्थ्य के मद्देनजर एनआईए की हिरासत से उन्हें तत्काल रिहा करने की अपील की। अलगाववादियों और आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद मुहैया कराने संबंधी मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा गिरफ्तार किए गए मलिक ने 19 अप्रैल को सीने में दर्द की शिकायत की थी। उन्हें मेडिकल जांच के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल भेजा गया और नियमित जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें छुट्टी दे दी। उसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में हैं। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में पार्टी के एक कार्यक्रम के इतर मुफ्ती ने संवाददाताओं से कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है। मलिक बहुत बीमार हैं।
अलगाववादियों और आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद मुहैया कराने संबंधी मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किए गए मलिक ने उन्नीस अप्रैल को सीने में दर्द की शिकायत की थी। श्रीनगर, बाईस अप्रैल जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अलगाववादी नेता यासीन मलिक के गिरते स्वास्थ्य के मद्देनजर एनआईए की हिरासत से उन्हें तत्काल रिहा करने की अपील की। अलगाववादियों और आतंकी संगठनों को वित्तीय मदद मुहैया कराने संबंधी मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किए गए मलिक ने उन्नीस अप्रैल को सीने में दर्द की शिकायत की थी। उन्हें मेडिकल जांच के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल भेजा गया और नियमित जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें छुट्टी दे दी। उसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में हैं। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में पार्टी के एक कार्यक्रम के इतर मुफ्ती ने संवाददाताओं से कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है। मलिक बहुत बीमार हैं।
डफरीन की भी स्वास्थ्य सेवा लड़खड़ाई! अमरावती/दि. 9- जिला स्त्री अस्पताल डफरीन की भी स्वास्थ्य सेवा इर्विन अस्पताल की तरह लड़खड़ाई है. इस अस्पताल में बड़े पैमाने पर मनुष्य बल का अभाव है. यहां पर वैद्यकीय अधिकारी पद के कुल पांच पद मंजूर रहने के बावजूद सिर्फ एक ही पद भरा है व चार पद रिक्त है. इनमें वैद्यकीय अधीक्षक,निवासी वैद्यकीय अधिकारी, वैद्यकीय अधिकारी, बालरोग तज्ञ एवं स्त्रीरोग (प्रसूती) तज्ञ के पद रिक्त है. जिसके चलते यहां प्रसूती के लिए आने वाली महिलाओं को उचित उपचार कैसे मिलेगा, यह प्रश्न उपस्थित हो रहा है. डफरीन अस्पताल में हर रोज जिलेभर की गर्भवती महिलाएं प्रसूती के लिए दाखल होती है, लेकिन यहां पर इन महिलाओं को उचित उपचार नहीं मिलने की बात महिलाओं के रिश्तेदारों द्वारा बार-बार कही जा रही है. अस्पताल में मरीजों की तुलना में यहां की सुविधा अधूरी है. अस्पताल की बेड की क्षमता 200 है, लेकिन यहां पर दाखिल होने वाले मरीजों की संख्या कभी 250 तो कभी 300 के करीब रहती है, जिसके चलते अस्पताल में उचित उपचार का अभाव दिखाई दे रहा है. इस अस्पताल में मनुष्य बल कम होने से यहां के डॉक्टर्स व कर्मचारियों पर काम का बोझ ब़ढ़ा है. महीनेभर पहले अस्पताल में सिझेरियन हुई एक महिला के पेट में डॉक्टरों की लापरवाही के कारण कपड़े का नेपकीन रहने का आरोप महिला के रिश्तेदारों ने किया था. इस घटना से अस्पताल का मनमाना कारभार उजागर हुआ था. क्लास 4 का मनुष्यबल कम होने के कारण अस्पताल परिसर में गंदगी का साम्राज्य होने से एक राजनीतिक संगठना द्वारा आंदोलन किया गया था. एक ओर लोकसंख्या की तुलना में सुविधा व अधिकारी- कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है. लेकिन प्रत्यक्ष में मंजूर पद भी पूरी तरह से नहीं भरे जाने की जानकारी डफरीन अस्पताल प्रशासन से प्राप्त हुई है. अस्पताल के उपलब्ध बेड की अपेक्षा दाखिल मरीजों की संख्या अधिक है. अस्पताल में मनुष्य बल का अभाव होकर, वर्गवारीनुसार आवश्यक अधिकारी व कर्मचारी नियुक्ति के संदर्भ में प्रस्ताव वरिष्ठों को भेजा गया है.
डफरीन की भी स्वास्थ्य सेवा लड़खड़ाई! अमरावती/दि. नौ- जिला स्त्री अस्पताल डफरीन की भी स्वास्थ्य सेवा इर्विन अस्पताल की तरह लड़खड़ाई है. इस अस्पताल में बड़े पैमाने पर मनुष्य बल का अभाव है. यहां पर वैद्यकीय अधिकारी पद के कुल पांच पद मंजूर रहने के बावजूद सिर्फ एक ही पद भरा है व चार पद रिक्त है. इनमें वैद्यकीय अधीक्षक,निवासी वैद्यकीय अधिकारी, वैद्यकीय अधिकारी, बालरोग तज्ञ एवं स्त्रीरोग तज्ञ के पद रिक्त है. जिसके चलते यहां प्रसूती के लिए आने वाली महिलाओं को उचित उपचार कैसे मिलेगा, यह प्रश्न उपस्थित हो रहा है. डफरीन अस्पताल में हर रोज जिलेभर की गर्भवती महिलाएं प्रसूती के लिए दाखल होती है, लेकिन यहां पर इन महिलाओं को उचित उपचार नहीं मिलने की बात महिलाओं के रिश्तेदारों द्वारा बार-बार कही जा रही है. अस्पताल में मरीजों की तुलना में यहां की सुविधा अधूरी है. अस्पताल की बेड की क्षमता दो सौ है, लेकिन यहां पर दाखिल होने वाले मरीजों की संख्या कभी दो सौ पचास तो कभी तीन सौ के करीब रहती है, जिसके चलते अस्पताल में उचित उपचार का अभाव दिखाई दे रहा है. इस अस्पताल में मनुष्य बल कम होने से यहां के डॉक्टर्स व कर्मचारियों पर काम का बोझ ब़ढ़ा है. महीनेभर पहले अस्पताल में सिझेरियन हुई एक महिला के पेट में डॉक्टरों की लापरवाही के कारण कपड़े का नेपकीन रहने का आरोप महिला के रिश्तेदारों ने किया था. इस घटना से अस्पताल का मनमाना कारभार उजागर हुआ था. क्लास चार का मनुष्यबल कम होने के कारण अस्पताल परिसर में गंदगी का साम्राज्य होने से एक राजनीतिक संगठना द्वारा आंदोलन किया गया था. एक ओर लोकसंख्या की तुलना में सुविधा व अधिकारी- कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है. लेकिन प्रत्यक्ष में मंजूर पद भी पूरी तरह से नहीं भरे जाने की जानकारी डफरीन अस्पताल प्रशासन से प्राप्त हुई है. अस्पताल के उपलब्ध बेड की अपेक्षा दाखिल मरीजों की संख्या अधिक है. अस्पताल में मनुष्य बल का अभाव होकर, वर्गवारीनुसार आवश्यक अधिकारी व कर्मचारी नियुक्ति के संदर्भ में प्रस्ताव वरिष्ठों को भेजा गया है.
WPL 2023, MI vs GG Highlights: महिला प्रीमियर लीग की शुरुआत मुंबई इंडियंस और गुजरात जायंट्स के बीच मुकाबले के साथ हो गई है। डीवाई पाटिल स्टेडियम पर खेले गए पहले मुकाबले में मुंबई इंडियंस ने गुजरात जायंट्स को 143 रनों के विशाल अंतर से हराया। गुजरात जायंट्स की कप्तान बेथ मूनी ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। मुंबई ने इस फैसले को गलत साबित करते हुए 208 रनों का विशाल लक्ष्य गुजरात के सामने रखा। जवाब में गुजरात जायंट्स की पूरी टीम 64 रनों पर ऑल आउट हो गई। मैच से पहले उद्घाटन समारोह हुआ, जिसकी वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें)। टॉस हारने के बाद बल्लेबाजी करते हुए मुंबई इंडियंस ने 207 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। पहले हेली मैथूस ने 47 रनों की धमाकेदार पारी खेली। उसके बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 30 गेंदों में 65 रन बनाए, ये महिला प्रीमियर लीग का पहला अर्धशतक था। अमेलिया केर ने 45 रनों की शानदार पारी खेली। लक्ष्य का पीछा करते हुए गुजरात जायंट्स का कोई बल्लेबाज क्रीज पर टिक नहीं सका। मुंबई इंडियंस में शामिल स्पिन गेंदबाज साइका इशाक ने 3. 1 ओवरों में 11 रन देकर 4 विकेट चटकाए। अमेलिया केर और नताली सिवर ने 2-2 विकेट चटकाए। गुजरात जायंट्स 64 रनों पर सिमट गई और मुंबई इंडियंस ने 143 रनों की बड़ी जीत दर्ज की। प्लेयर ऑफ़ द मैचः हरमनप्रीत कौर ने 30 गेंदों में 65 रन बनाए, इस पारी में उन्होंने 14 चौके लगाए। गुजरात जायंट्स - 64/9 (15. 1 Over) सबभिनेनी मेघना और कप्तान बेथ मूनी ने गुजरात जायंट्स की पारी की शुरुआत की। पहले ही ओवर में टीम के लिए बुरी खबर आई, बेथ मूनी रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से बाहर लौट गई। इसके बाद एक के बाद एक विकेट गिरते चले गए। पॉवरप्ले में गुजरात जायंट्स ने 17 रन बनाकर 4 विकेट गवाए, और कप्तान बेथ मूनी रिटायर्ड हर्ट होकर बाहर गई। मेघना 2, हरलीन देओल 0, ऐश गार्डनर 0 और एनाबेल सदरलैंड 6 रन बनाकर पॉवरप्ले के अंदर आउट हुई। पॉवरप्ले खत्म हुआ लेकिन गुजरात जायंट्स का बुरा वक्त नहीं, इसके बाद भी टीम के विकेट गिरते रहे। 7वें ओवर की पांचवी गेंद पर जॉर्जिया वेयरहैम 8 रन बनाकर आउट हुई। 8वें ओवर की पहली गेंद पर स्नेह राणा 1 रन बनाकर आउट हुई, ईसी ओवर में अमेलिया केर ने तानना कंवर को शून्य पर पवेलियन लौटाया। गुजरात जायंट्स ने अपना 7वां विकेट 23 के स्कोर पर खोया। 16वें ओवर की पहली गेंद पर साइका इशाक ने मोनिका पटेल का विकेट लिया, ये 9वां विकेट था लेकिन बेथ मूनी बल्लेबाजी के लिए नहीं आ सकती थी इसलिए टीम ऑल आउट हुई। गुजरात जायंट्स की पारी 64 रनों पर सिमट गई, मुंबई इंडियंस ने 143 रनों के अंतर से मैच जीता। 𝗪𝗶𝗰𝗸𝗲𝘁𝘀 𝗶𝗻 𝗽𝗹𝗲𝗻𝘁𝘆! मुंबई इंडियंस - 207/5 (20 Over) हेली मैथूस और यास्तिका भाटिया ने मुंबई इंडियंस की पारी की शुरुआत की। हेली ने आते ही तेज शॉट्स लगाए, उन्होंने मानसी जोशी द्वारा डाले गए दूसरे ओवर में शानदार छक्का भी जड़ा। मुंबई का पहला विकेट यास्तिका भाटिया के रूप में गिरा, वह तनूजा कंवर की गेंद पर कैच आउट हुई। यास्तिका ने 1 रन बनाया। पॉवरप्ले तक मुंबई ने 1 विकेट खोकर 44 रन बनाए। हेली मैथूस ने तेज तर्रार पारी खेलकर मुंबई को धमाकेदार शुरुआत दिलाई। उन्होंने 47 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली, हालाँकि वह अपने अर्धशतक से चूक गई। ऐश गार्डनर द्वारा डाली गई सीधी गेंद पर मैथूस खेल नहीं पाई और बोल्ड हो गई। 31 गेंदों पर खेली इस पारी में मैथूस ने 3 चौके और 4 बड़े छक्के जड़े। उनसे पहले नताली सिवर 23 रन बनाकर आउट हुई। हरमनप्रीत कौर महिला प्रीमियर लीग में अर्धशतक जड़ने वाली पहली प्लेयर बनी। आउट होने से पहले उन्होंने 65 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली। हरमनप्रीत ने 30 गेंदों में 65 रन बनाए, इस पारी में 14 चौके जड़े। हरमनप्रीत कौर के आउट होने के बाद आई पूजा वस्त्राकार ने छोटी लेकिन महत्वपूर्ण पारी खेली। पूजा ने 8 गेंदों में 15 रनों की पारी खेली, जिसमे 3 चौके लगाए। एमेलिया केर ने 45 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली, जिसने मुंबई को 200 पार स्कोर पहुंचाने में मदद की। 24 गेंदों में 45 रनों की पारी पारी में अमेलिया ने 6 चौके और 1 छक्का लगाया। मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 207 रन बनाए। 4th Wicket: हरमनप्रीत कौर- 65: हरमनप्रीत कौर की शानदार पारी का अंत स्नेह राणा ने किया। 17वें ओवर की अंतिम गेंद पर ऑफ़ में डाली गई गेंद को हरमनप्रीत कौर सामने की तरफ खेलना चाहती थी, लेकिन गेंद टर्न होने के साथ बल्ले पर लगकर घूम गई। दयालन हेमलता के हाथों में आसान सा कैच। 3rd Wicket: हेली मैथूस (47): हेली मैथूस ने मुंबई को धमाकेदार शुरुआत दिला दी, हालाँकि वह अपने अर्धशतक से चूक गई। 47 के स्कोर पर ऐश गार्डनर ने उन्हें बोल्ड किया। 2nd Wicket: नताली सिवर (23): जॉर्जिया वेयरहेम ने उन्हें कैच आउट करवाया। ICYMI! यास्तिका भाटिया का विकेटः मुंबई इंडियंस को पहला झटका यास्तिका भाटिया के रूप में लगा। वह तीसरे ओवर की तीसरी गेंद पर कैच आउट हुई, वह कवर में खेलना चाहती थी लेकिन गेंद पॉइंट्स की दिशा में गई। तनूजा कंवर की गेंद पर जॉर्जिया का अच्छा कैच। यास्तिका भाटिया ने 8 गेंदों में सिर्फ 1 रन बनाया। Toss: गुजरात जायंट्स ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। पहले मैच में बतौर कप्तान हरमनप्रीत कौर (मुंबई) और बेथ मूनी (गुजरात) आमने सामने है। ये पहला मैच है इसलिए दोनों टीमों के खिलाड़ियों पर काफी दबाव होगा, जो टीम जीत दर्ज करेगी वो आने वाले मुकाबलों में मानसिक रूप से मजबूत होगी। विमेंस प्रीमियर लीग की तरफ से जानकारी देते हुए बताया गया कि पहले मैच की टाइमिंग में बदलाव हुआ है। पहले ये मैच साढ़े 7 बजे से शुरू होना था, अब 8 बजे से मैच खेला जाएगा। 7:30 बजे टॉस होगा। गुजरात जाइंट्स के खिलाफ शनिवार को होने वाले डब्ल्यूपीएल (महिला प्रीमियर लीग) के पहले मैच की तैयारी में जुटी मुंबई इंडियंस की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कहा कि युवा भारतीय खिलाड़ियों के साथ बातचीत करना और शीर्ष स्तर के क्रिकेट के लिए उनकी समस्याओं से निकलने में उनकी मदद करना उनके एजेंडे में सबसे अहम होगा। क्रिकेट और अन्य खेल से सम्बंधित खबरों (Cricket News, Sports News, Breaking Sports News, Viral Video) को पढ़ने के लिए हमें गूगल न्यूज (Google News) पर फॉलो करें।
WPL दो हज़ार तेईस, MI vs GG Highlights: महिला प्रीमियर लीग की शुरुआत मुंबई इंडियंस और गुजरात जायंट्स के बीच मुकाबले के साथ हो गई है। डीवाई पाटिल स्टेडियम पर खेले गए पहले मुकाबले में मुंबई इंडियंस ने गुजरात जायंट्स को एक सौ तैंतालीस रनों के विशाल अंतर से हराया। गुजरात जायंट्स की कप्तान बेथ मूनी ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। मुंबई ने इस फैसले को गलत साबित करते हुए दो सौ आठ रनों का विशाल लक्ष्य गुजरात के सामने रखा। जवाब में गुजरात जायंट्स की पूरी टीम चौंसठ रनों पर ऑल आउट हो गई। मैच से पहले उद्घाटन समारोह हुआ, जिसकी वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें)। टॉस हारने के बाद बल्लेबाजी करते हुए मुंबई इंडियंस ने दो सौ सात रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। पहले हेली मैथूस ने सैंतालीस रनों की धमाकेदार पारी खेली। उसके बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर ने तीस गेंदों में पैंसठ रन बनाए, ये महिला प्रीमियर लीग का पहला अर्धशतक था। अमेलिया केर ने पैंतालीस रनों की शानदार पारी खेली। लक्ष्य का पीछा करते हुए गुजरात जायंट्स का कोई बल्लेबाज क्रीज पर टिक नहीं सका। मुंबई इंडियंस में शामिल स्पिन गेंदबाज साइका इशाक ने तीन. एक ओवरों में ग्यारह रन देकर चार विकेट चटकाए। अमेलिया केर और नताली सिवर ने दो-दो विकेट चटकाए। गुजरात जायंट्स चौंसठ रनों पर सिमट गई और मुंबई इंडियंस ने एक सौ तैंतालीस रनों की बड़ी जीत दर्ज की। प्लेयर ऑफ़ द मैचः हरमनप्रीत कौर ने तीस गेंदों में पैंसठ रन बनाए, इस पारी में उन्होंने चौदह चौके लगाए। गुजरात जायंट्स - चौंसठ/नौ सबभिनेनी मेघना और कप्तान बेथ मूनी ने गुजरात जायंट्स की पारी की शुरुआत की। पहले ही ओवर में टीम के लिए बुरी खबर आई, बेथ मूनी रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से बाहर लौट गई। इसके बाद एक के बाद एक विकेट गिरते चले गए। पॉवरप्ले में गुजरात जायंट्स ने सत्रह रन बनाकर चार विकेट गवाए, और कप्तान बेथ मूनी रिटायर्ड हर्ट होकर बाहर गई। मेघना दो, हरलीन देओल शून्य, ऐश गार्डनर शून्य और एनाबेल सदरलैंड छः रन बनाकर पॉवरप्ले के अंदर आउट हुई। पॉवरप्ले खत्म हुआ लेकिन गुजरात जायंट्स का बुरा वक्त नहीं, इसके बाद भी टीम के विकेट गिरते रहे। सातवें ओवर की पांचवी गेंद पर जॉर्जिया वेयरहैम आठ रन बनाकर आउट हुई। आठवें ओवर की पहली गेंद पर स्नेह राणा एक रन बनाकर आउट हुई, ईसी ओवर में अमेलिया केर ने तानना कंवर को शून्य पर पवेलियन लौटाया। गुजरात जायंट्स ने अपना सातवां विकेट तेईस के स्कोर पर खोया। सोलहवें ओवर की पहली गेंद पर साइका इशाक ने मोनिका पटेल का विकेट लिया, ये नौवां विकेट था लेकिन बेथ मूनी बल्लेबाजी के लिए नहीं आ सकती थी इसलिए टीम ऑल आउट हुई। गुजरात जायंट्स की पारी चौंसठ रनों पर सिमट गई, मुंबई इंडियंस ने एक सौ तैंतालीस रनों के अंतर से मैच जीता। 𝗪𝗶𝗰𝗸𝗲𝘁𝘀 𝗶𝗻 𝗽𝗹𝗲𝗻𝘁𝘆! मुंबई इंडियंस - दो सौ सात/पाँच हेली मैथूस और यास्तिका भाटिया ने मुंबई इंडियंस की पारी की शुरुआत की। हेली ने आते ही तेज शॉट्स लगाए, उन्होंने मानसी जोशी द्वारा डाले गए दूसरे ओवर में शानदार छक्का भी जड़ा। मुंबई का पहला विकेट यास्तिका भाटिया के रूप में गिरा, वह तनूजा कंवर की गेंद पर कैच आउट हुई। यास्तिका ने एक रन बनाया। पॉवरप्ले तक मुंबई ने एक विकेट खोकर चौंतालीस रन बनाए। हेली मैथूस ने तेज तर्रार पारी खेलकर मुंबई को धमाकेदार शुरुआत दिलाई। उन्होंने सैंतालीस रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली, हालाँकि वह अपने अर्धशतक से चूक गई। ऐश गार्डनर द्वारा डाली गई सीधी गेंद पर मैथूस खेल नहीं पाई और बोल्ड हो गई। इकतीस गेंदों पर खेली इस पारी में मैथूस ने तीन चौके और चार बड़े छक्के जड़े। उनसे पहले नताली सिवर तेईस रन बनाकर आउट हुई। हरमनप्रीत कौर महिला प्रीमियर लीग में अर्धशतक जड़ने वाली पहली प्लेयर बनी। आउट होने से पहले उन्होंने पैंसठ रनों की ऐतिहासिक पारी खेली। हरमनप्रीत ने तीस गेंदों में पैंसठ रन बनाए, इस पारी में चौदह चौके जड़े। हरमनप्रीत कौर के आउट होने के बाद आई पूजा वस्त्राकार ने छोटी लेकिन महत्वपूर्ण पारी खेली। पूजा ने आठ गेंदों में पंद्रह रनों की पारी खेली, जिसमे तीन चौके लगाए। एमेलिया केर ने पैंतालीस रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली, जिसने मुंबई को दो सौ पार स्कोर पहुंचाने में मदद की। चौबीस गेंदों में पैंतालीस रनों की पारी पारी में अमेलिया ने छः चौके और एक छक्का लगाया। मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए दो सौ सात रन बनाए। चारth Wicket: हरमनप्रीत कौर- पैंसठ: हरमनप्रीत कौर की शानदार पारी का अंत स्नेह राणा ने किया। सत्रहवें ओवर की अंतिम गेंद पर ऑफ़ में डाली गई गेंद को हरमनप्रीत कौर सामने की तरफ खेलना चाहती थी, लेकिन गेंद टर्न होने के साथ बल्ले पर लगकर घूम गई। दयालन हेमलता के हाथों में आसान सा कैच। तीनrd Wicket: हेली मैथूस : हेली मैथूस ने मुंबई को धमाकेदार शुरुआत दिला दी, हालाँकि वह अपने अर्धशतक से चूक गई। सैंतालीस के स्कोर पर ऐश गार्डनर ने उन्हें बोल्ड किया। दोnd Wicket: नताली सिवर : जॉर्जिया वेयरहेम ने उन्हें कैच आउट करवाया। ICYMI! यास्तिका भाटिया का विकेटः मुंबई इंडियंस को पहला झटका यास्तिका भाटिया के रूप में लगा। वह तीसरे ओवर की तीसरी गेंद पर कैच आउट हुई, वह कवर में खेलना चाहती थी लेकिन गेंद पॉइंट्स की दिशा में गई। तनूजा कंवर की गेंद पर जॉर्जिया का अच्छा कैच। यास्तिका भाटिया ने आठ गेंदों में सिर्फ एक रन बनाया। Toss: गुजरात जायंट्स ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। पहले मैच में बतौर कप्तान हरमनप्रीत कौर और बेथ मूनी आमने सामने है। ये पहला मैच है इसलिए दोनों टीमों के खिलाड़ियों पर काफी दबाव होगा, जो टीम जीत दर्ज करेगी वो आने वाले मुकाबलों में मानसिक रूप से मजबूत होगी। विमेंस प्रीमियर लीग की तरफ से जानकारी देते हुए बताया गया कि पहले मैच की टाइमिंग में बदलाव हुआ है। पहले ये मैच साढ़े सात बजे से शुरू होना था, अब आठ बजे से मैच खेला जाएगा। सात:तीस बजे टॉस होगा। गुजरात जाइंट्स के खिलाफ शनिवार को होने वाले डब्ल्यूपीएल के पहले मैच की तैयारी में जुटी मुंबई इंडियंस की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कहा कि युवा भारतीय खिलाड़ियों के साथ बातचीत करना और शीर्ष स्तर के क्रिकेट के लिए उनकी समस्याओं से निकलने में उनकी मदद करना उनके एजेंडे में सबसे अहम होगा। क्रिकेट और अन्य खेल से सम्बंधित खबरों को पढ़ने के लिए हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें।
मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश जल निगम ठेकेदार एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं द्वारा जेएमसी एलसीईपीएल कंपनी के विरुद्ध विभिन्न मांगों को लेकर पारस एंक्लेव स्थित ऑफिस पर धरना प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश जल निगम ठेकेदार एसोसिएशन द्वारा मांग की गई है कि जो टेंडर कंपनी द्वारा उनको दिया गया था और जिसके लिए तय की गई दर के हिसाब मे आ रहें पैसे से खर्च भी पूरा नहीं चल पा रहा है एवं ठेकेदारों एवं मजदूरों का गुजारा नहीं हो रहा है। वही ठेकेदारों एवं मजदूरों के द्वारा दरों को बढ़ाने के लिए कई बार अर्जी लगाई जा चुकी है, मगर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है, जिससे क्षुब्ध ठेकेदारों एवं मजदूरों ने उत्तर प्रदेश जल निगम ठेकेदार एसोसिएशन के बैनर तले एकजुट होकर कंपनी के विरुद्ध ऑफिस के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पूरा मामला यह है कि उत्तर प्रदेश जल निगम ठेकेदार एसोसिएशन द्वारा जनपद भर की जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल निगम उत्तर प्रदेश द्वारा एक नई पहल की गई थी, जिसमें जनपद भर के विभिन्न गांवों में जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 221 गांव चिन्हित किए गए थे। इस कार्य को पूरा करने के लिए जेएमसी एलसीईपीएल कंपनी को टेंडर दिया गया था। इस कार्य को प्राथमिकता पूर्वक पूरा करने के लिए कंपनी द्वारा उत्तर प्रदेश जल निगम ठेकेदार एसोसिएशन के ठेकेदारों को बांट दिया गया था। एसोसिएशन के ठेकेदारों को का कार्य का करने के लिए जो दर दी रही है उनमें बचत नहीं हो पा रही है तथा अत्यधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई बार कंपनी के परियोजना प्रबंधक तथा महाप्रबंधक से दरें बढ़ाने की मांग की जा चुकी है, परंतु आश्वासन के बाद भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। उत्तर प्रदेश जल निगम ठेकेदार एसोसिएशन द्वारा 20 जनवरी से जनपद के 90 गांव में पाइप लाइन डालने तथा घरेलू जल कनेक्शनों का कार्य बंद कर दिया गया है। ठेकेदार एवं मजदूर धरना प्रदर्शन पर होने के कारण कार्य पूर्ण रूप से बंद पड़ा हुआ है। बताया गया कि जल निगम विभाग के मंत्री स्वतंत्र देव ने भी विभागीय अधिकारियों तथा कंपनी के उच्च अधिकारियों को उत्तर प्रदेश जल निगम ठेकेदार एसोसिएशन के ठेकेदारों का आर्थिक शोषण एवं उत्पीड़न न करने के निर्देश दिए हुए हैं, बावजूद इसके कंपनी के उच्च अधिकारी अपनी बदी से बाज नहीं आ रहे हैं। प्रदर्शन में संजीव त्यागी प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश ठेकेदार एसोसिएशन, अमृतपाल, प्रदीप कुमार, पिंटू कुमार, अभिषेक राणा, नरेंद्र सिंह, नरेंद्र पवार, राजवीर ठेकेदार, साजिद मलिक, अमीर, आजम, निखिल कुमार, प्रवीण कुमार, इस्लाम, यूनुस एवं आदित्य त्यागी आदि मौजूद रहे।
मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश जल निगम ठेकेदार एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं द्वारा जेएमसी एलसीईपीएल कंपनी के विरुद्ध विभिन्न मांगों को लेकर पारस एंक्लेव स्थित ऑफिस पर धरना प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश जल निगम ठेकेदार एसोसिएशन द्वारा मांग की गई है कि जो टेंडर कंपनी द्वारा उनको दिया गया था और जिसके लिए तय की गई दर के हिसाब मे आ रहें पैसे से खर्च भी पूरा नहीं चल पा रहा है एवं ठेकेदारों एवं मजदूरों का गुजारा नहीं हो रहा है। वही ठेकेदारों एवं मजदूरों के द्वारा दरों को बढ़ाने के लिए कई बार अर्जी लगाई जा चुकी है, मगर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है, जिससे क्षुब्ध ठेकेदारों एवं मजदूरों ने उत्तर प्रदेश जल निगम ठेकेदार एसोसिएशन के बैनर तले एकजुट होकर कंपनी के विरुद्ध ऑफिस के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पूरा मामला यह है कि उत्तर प्रदेश जल निगम ठेकेदार एसोसिएशन द्वारा जनपद भर की जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल निगम उत्तर प्रदेश द्वारा एक नई पहल की गई थी, जिसमें जनपद भर के विभिन्न गांवों में जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए दो सौ इक्कीस गांव चिन्हित किए गए थे। इस कार्य को पूरा करने के लिए जेएमसी एलसीईपीएल कंपनी को टेंडर दिया गया था। इस कार्य को प्राथमिकता पूर्वक पूरा करने के लिए कंपनी द्वारा उत्तर प्रदेश जल निगम ठेकेदार एसोसिएशन के ठेकेदारों को बांट दिया गया था। एसोसिएशन के ठेकेदारों को का कार्य का करने के लिए जो दर दी रही है उनमें बचत नहीं हो पा रही है तथा अत्यधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई बार कंपनी के परियोजना प्रबंधक तथा महाप्रबंधक से दरें बढ़ाने की मांग की जा चुकी है, परंतु आश्वासन के बाद भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। उत्तर प्रदेश जल निगम ठेकेदार एसोसिएशन द्वारा बीस जनवरी से जनपद के नब्बे गांव में पाइप लाइन डालने तथा घरेलू जल कनेक्शनों का कार्य बंद कर दिया गया है। ठेकेदार एवं मजदूर धरना प्रदर्शन पर होने के कारण कार्य पूर्ण रूप से बंद पड़ा हुआ है। बताया गया कि जल निगम विभाग के मंत्री स्वतंत्र देव ने भी विभागीय अधिकारियों तथा कंपनी के उच्च अधिकारियों को उत्तर प्रदेश जल निगम ठेकेदार एसोसिएशन के ठेकेदारों का आर्थिक शोषण एवं उत्पीड़न न करने के निर्देश दिए हुए हैं, बावजूद इसके कंपनी के उच्च अधिकारी अपनी बदी से बाज नहीं आ रहे हैं। प्रदर्शन में संजीव त्यागी प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश ठेकेदार एसोसिएशन, अमृतपाल, प्रदीप कुमार, पिंटू कुमार, अभिषेक राणा, नरेंद्र सिंह, नरेंद्र पवार, राजवीर ठेकेदार, साजिद मलिक, अमीर, आजम, निखिल कुमार, प्रवीण कुमार, इस्लाम, यूनुस एवं आदित्य त्यागी आदि मौजूद रहे।
सेना के लिए लिए जाने वाले फैसले अक्सर कठोर और महत्वपूर्ण होते है. फिर चाहे उनके नियमों की बात हो, ड्रेस की हो या हथियारों की, खैर इस देश की सरकार ने जो फैसला किया है वो वाकई हैरत एंगेज है. हालांकि बात महिलाओं से जुड़ी है । लेकिन मामला ऐसा है कि एक बार आप भी ये कहने पर मजबूर हो जाए की ये क्या बकैती है. सेना के लिए हथियारों की बात तो ठीक है लेकिन कच्छा कौन सा पहना जाए इस पर फैसले दिए जा रहे हैं. मतलब आप सोचिए कि देश के लिए मर मिटने वाले जवानों के लिए हथियारों की बात छोड़कर इस बार पर चर्चा हो रही है कि कच्छा कौन सा पहनना है और कौन सा नहीं. जी हाँ सैन्य बल में महिलाओं को आकर्षित करने के लिए पहली बार स्विस सेना महिला सैनिकों को महिला अंडरवियर देने जारी रही है. ये अंडरवियर पुरुषों के अंडरवियर से अलग महिलाओं के लिए खास होगा. वर्तमान में महिला फौजियों को पुरुषों का 'ढीला' अंडरवियर जारी किया जाता है जो आकार में बड़े होते हैं, मगर अब दो अलग-अलग सेट में महिला अंडरवियर जारी किए जाएंगे. अब तक स्विटजरलैंड की सेना महिला सैनिकों को लूज फिटिंग वाले अंडरवियर देती रही है. यह स्विस महिला सैनिकों के लिए काफी परेशानी भरा हो सकता है. सेना के प्रवक्ता ने बताया कि आने वाले बदलावों में गर्मी के मौसम में 'शॉर्ट अंडरवियर' और सर्दी के मौसम में 'लंबे अंडरवियर' शामिल हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान कपड़े महिला सैनिकों के लिए पुराने हो गए हैं. वर्तमान समय में स्विटजरलैंड की सेना में एक प्रतिशत महिला सैनिक हैं. आने वाले 20 साल तक स्विटजरलैंड महिला सैनिकों की संख्या को 10 फीसदी की दर से बढ़ाना चाहता है. देश की रक्षा मंत्री विओला अमहर्ड ने महिला सैनिकों के लिए अलग अंडरवियर बनाने की योजना स्वागत किया है. मतलब आप सोच सकते है ये सब क्या बकैती हो रही है, सेना के हथियारों तक तो ठीक था लेकिन सेना के कच्छे की बात हो रही है जो बिल्कुल भी सही बात नहीं है. अब आपकी क्या राय है इस पूरे खबर को लेकर.
सेना के लिए लिए जाने वाले फैसले अक्सर कठोर और महत्वपूर्ण होते है. फिर चाहे उनके नियमों की बात हो, ड्रेस की हो या हथियारों की, खैर इस देश की सरकार ने जो फैसला किया है वो वाकई हैरत एंगेज है. हालांकि बात महिलाओं से जुड़ी है । लेकिन मामला ऐसा है कि एक बार आप भी ये कहने पर मजबूर हो जाए की ये क्या बकैती है. सेना के लिए हथियारों की बात तो ठीक है लेकिन कच्छा कौन सा पहना जाए इस पर फैसले दिए जा रहे हैं. मतलब आप सोचिए कि देश के लिए मर मिटने वाले जवानों के लिए हथियारों की बात छोड़कर इस बार पर चर्चा हो रही है कि कच्छा कौन सा पहनना है और कौन सा नहीं. जी हाँ सैन्य बल में महिलाओं को आकर्षित करने के लिए पहली बार स्विस सेना महिला सैनिकों को महिला अंडरवियर देने जारी रही है. ये अंडरवियर पुरुषों के अंडरवियर से अलग महिलाओं के लिए खास होगा. वर्तमान में महिला फौजियों को पुरुषों का 'ढीला' अंडरवियर जारी किया जाता है जो आकार में बड़े होते हैं, मगर अब दो अलग-अलग सेट में महिला अंडरवियर जारी किए जाएंगे. अब तक स्विटजरलैंड की सेना महिला सैनिकों को लूज फिटिंग वाले अंडरवियर देती रही है. यह स्विस महिला सैनिकों के लिए काफी परेशानी भरा हो सकता है. सेना के प्रवक्ता ने बताया कि आने वाले बदलावों में गर्मी के मौसम में 'शॉर्ट अंडरवियर' और सर्दी के मौसम में 'लंबे अंडरवियर' शामिल हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान कपड़े महिला सैनिकों के लिए पुराने हो गए हैं. वर्तमान समय में स्विटजरलैंड की सेना में एक प्रतिशत महिला सैनिक हैं. आने वाले बीस साल तक स्विटजरलैंड महिला सैनिकों की संख्या को दस फीसदी की दर से बढ़ाना चाहता है. देश की रक्षा मंत्री विओला अमहर्ड ने महिला सैनिकों के लिए अलग अंडरवियर बनाने की योजना स्वागत किया है. मतलब आप सोच सकते है ये सब क्या बकैती हो रही है, सेना के हथियारों तक तो ठीक था लेकिन सेना के कच्छे की बात हो रही है जो बिल्कुल भी सही बात नहीं है. अब आपकी क्या राय है इस पूरे खबर को लेकर.
बल्लेबाज सूर्यकुमार को घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए निरंतर बेहतर प्रदर्शन के कारण भारतीय टी20 में पहली बार जगह मिली है। वह इंग्लैंड के खिलाफ 12 मार्च से शुरू हो रही पांच मैचों की टी20 सीरीज में खेलते हुए नजर आ सकते हैं। उन्हें लंबे समय तक जद्दोजहद करने के बाद टीम में चुना गया। टी20 सीरीज से पहले भारत के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने सूर्यकुमार की लगन और मेहनत की जमकर तारीफ की है। उन्होंने सूर्यकुमार को युवा क्रिकेटर्स के लिए एक शानदार रोल मॉडल बताया है। लक्ष्मण का कहना है कि सूर्यकुमार भारतीय टीम में जगह के हकदार हैं। 'जब भी मौका मिला सूर्यकुमार ने रन बनाए' लक्ष्मण ने स्टार स्पोर्ट्स के एक शो में कहा, 'वह इसके हकदार हैं। मुझे लगता है कि वह युवाओं के लिए एक बेहतरीन रोल मॉडल हैं, खासकर भारत में, क्योंकि वे बहुत जल्दी ही धैर्य खो देते हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सभी सकारात्मक रन बनाने वाले भारतीय टीम में आने की उम्मीद करते हैं (लेकिन) यह मुश्किल है। ' उन्होंने कहा, 'इतनी सारी गुणवत्ता, इतनी प्रतिभा और इतनी प्रतियोगिता है, लेकिन सूर्यकुमार ने क्या किया? वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में वापस जाते है, मुंबई के लिए स्कोर करते हैं, जब भी उन्हें मुंबई इंडियंस के लिए खेलने का मौका मिलता है तो वह एक सकारात्मक रन गेनर होता है। वह कठिन परिस्थितियों में खेलते है और मैच जीतते है और आप एक खिलाड़ी से आप यही उम्मीद करते हैं। ' 'भारत टी20 टीम में आने के हकदार हैं' पूर्व बल्लेबाज का कहना है कि सूर्यकुमार को लंबे समय तक भारतीय टीम में नहीं चुना गया, लेकिन उन्होंने खुद पर विश्वास बनाए रखा। उन्होंने अपने प्रदर्शन से सिलेक्टर्स को मजबूर कर दिया कि उन्हें भारतीय टीम में शामिल किए जाए। लक्ष्मण ने कहा, 'मेरे कोच ने मुझे एक बात सीखाई थी कि यदि चयनकर्ता दरवाजा नहीं खोल रहे हैं, तो दरवाजा खोलो! एकमात्र तरीका जो आप कर सकते हैं वह आपका प्रदर्शन। हमें इस चीज को लेकर आश्वस्त नहीं है कि वह अंतिम एकादश में शामिल होंगे। लेकिन वह (सूर्यकुमार) निश्चित रूप से भारत की टी20 टीम में एक स्थान के हकदार हैं। ' सूर्यकुमार यादव के घरेलू क्रिकेट करियर की बात करें तो उन्होंने अब तक 77 फर्स्ट क्लास मैच खेले, जिसमें 14 शतक और 26 अर्धशतक के दम पर 44. 01 की औसत से 5326 रन बनाए हैं। उन्होंने 98 लिस्ट ए मैचों में 3 शतक और 17 अर्धशतकों के जरिए 2779 रन बनाए हैं। उन्होंने 170 टी20 मैच खेले है, जिसमें 19 अर्धशतकों की मदद से 3567 रन बनाए। वहीं, सूर्यकुमार ने आईपीएल में कुल 101 मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने 11 अर्धशतकीय पारियों के दम पर 2024 रन बनाए।
बल्लेबाज सूर्यकुमार को घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए निरंतर बेहतर प्रदर्शन के कारण भारतीय टीबीस में पहली बार जगह मिली है। वह इंग्लैंड के खिलाफ बारह मार्च से शुरू हो रही पांच मैचों की टीबीस सीरीज में खेलते हुए नजर आ सकते हैं। उन्हें लंबे समय तक जद्दोजहद करने के बाद टीम में चुना गया। टीबीस सीरीज से पहले भारत के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने सूर्यकुमार की लगन और मेहनत की जमकर तारीफ की है। उन्होंने सूर्यकुमार को युवा क्रिकेटर्स के लिए एक शानदार रोल मॉडल बताया है। लक्ष्मण का कहना है कि सूर्यकुमार भारतीय टीम में जगह के हकदार हैं। 'जब भी मौका मिला सूर्यकुमार ने रन बनाए' लक्ष्मण ने स्टार स्पोर्ट्स के एक शो में कहा, 'वह इसके हकदार हैं। मुझे लगता है कि वह युवाओं के लिए एक बेहतरीन रोल मॉडल हैं, खासकर भारत में, क्योंकि वे बहुत जल्दी ही धैर्य खो देते हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सभी सकारात्मक रन बनाने वाले भारतीय टीम में आने की उम्मीद करते हैं यह मुश्किल है। ' उन्होंने कहा, 'इतनी सारी गुणवत्ता, इतनी प्रतिभा और इतनी प्रतियोगिता है, लेकिन सूर्यकुमार ने क्या किया? वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में वापस जाते है, मुंबई के लिए स्कोर करते हैं, जब भी उन्हें मुंबई इंडियंस के लिए खेलने का मौका मिलता है तो वह एक सकारात्मक रन गेनर होता है। वह कठिन परिस्थितियों में खेलते है और मैच जीतते है और आप एक खिलाड़ी से आप यही उम्मीद करते हैं। ' 'भारत टीबीस टीम में आने के हकदार हैं' पूर्व बल्लेबाज का कहना है कि सूर्यकुमार को लंबे समय तक भारतीय टीम में नहीं चुना गया, लेकिन उन्होंने खुद पर विश्वास बनाए रखा। उन्होंने अपने प्रदर्शन से सिलेक्टर्स को मजबूर कर दिया कि उन्हें भारतीय टीम में शामिल किए जाए। लक्ष्मण ने कहा, 'मेरे कोच ने मुझे एक बात सीखाई थी कि यदि चयनकर्ता दरवाजा नहीं खोल रहे हैं, तो दरवाजा खोलो! एकमात्र तरीका जो आप कर सकते हैं वह आपका प्रदर्शन। हमें इस चीज को लेकर आश्वस्त नहीं है कि वह अंतिम एकादश में शामिल होंगे। लेकिन वह निश्चित रूप से भारत की टीबीस टीम में एक स्थान के हकदार हैं। ' सूर्यकुमार यादव के घरेलू क्रिकेट करियर की बात करें तो उन्होंने अब तक सतहत्तर फर्स्ट क्लास मैच खेले, जिसमें चौदह शतक और छब्बीस अर्धशतक के दम पर चौंतालीस. एक की औसत से पाँच हज़ार तीन सौ छब्बीस रन बनाए हैं। उन्होंने अट्ठानवे लिस्ट ए मैचों में तीन शतक और सत्रह अर्धशतकों के जरिए दो हज़ार सात सौ उन्यासी रन बनाए हैं। उन्होंने एक सौ सत्तर टीबीस मैच खेले है, जिसमें उन्नीस अर्धशतकों की मदद से तीन हज़ार पाँच सौ सरसठ रन बनाए। वहीं, सूर्यकुमार ने आईपीएल में कुल एक सौ एक मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने ग्यारह अर्धशतकीय पारियों के दम पर दो हज़ार चौबीस रन बनाए।
राजस्थान का राज्य पक्षी कौन-सा है? राजस्थान की सर्वाधिक जनसंख्या किस भाग में निवास करती है? निम्न में से कौन-सी नदी 'कच्छ की खाड़ी' में गिरती है? राजस्थान में सबसे अधिक ऊन देने वाली भेड़ की नस्ल कौन-सी है? राजस्थान में 'पोथीघर अध्ययन केन्द्र' किस देश की सहायता से खोले जायेंगे?
राजस्थान का राज्य पक्षी कौन-सा है? राजस्थान की सर्वाधिक जनसंख्या किस भाग में निवास करती है? निम्न में से कौन-सी नदी 'कच्छ की खाड़ी' में गिरती है? राजस्थान में सबसे अधिक ऊन देने वाली भेड़ की नस्ल कौन-सी है? राजस्थान में 'पोथीघर अध्ययन केन्द्र' किस देश की सहायता से खोले जायेंगे?
Felling Of Forests : सस्ते दाम पर जंगलों को कटवाकर किनका भला कर रही है केंद्र सरकार ? Felling Of Forests : देश में पड़ रही भीषण गर्मी और अभूतपूर्व कोयला संकट (Coal Crisis) के बीच पेड़ यानी पर्यावरण (Environment) की याद फिर आने लगी है लेकिन छत्तीसगढ़ में हसदेव अरण्य (Hasdeo Aranya) से लेकर एमपी के पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) तक में जंगलों की अंधाधुंध कटाई (Indiscriminate Felling Of Forests) जारी है और वह भी बहुत ही सस्ते में। इस साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की एक विशेषज्ञ कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सस्ते दाम पर किए जा रहे जंगलों के सफाए पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए एनपीवी में चार गुना बढ़ोतरी करने की सिफारिश की थी। लेकिन केंद्र सरकार पर्यावरण मंत्रालय (Ministry Of Environment, Forest And Climate Change) की पिछले साल की सिफारिश को भी लागू नहीं कर रही है, जिसमें एनपीवी को महज डेढ़ गुना दाम बढ़ाने का सुझाव दिया गया था। एनपीवी (Net Present Value) वह दर है, जिसके तहत प्रति एकड़ जंगल की कीमत तय की जाती है। जब कोई सरकारी या निजी कंपनी किसी परियोजना के लिए जंगल काटती है तो उसे प्रति एकड़ एनपीवी की दर से ही पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई सरकार को करनी पड़ती है। बीते 13 साल से यानी 2009 से सरकार का एनपीवी नहीं बढ़ा है। यह भी सुप्रीम कोर्ट के 2008 में दिए गए आदेश की अवमानना है, जिसके तहत एनपीवी (NPV) को हर 3 साल में बदलने को कहा गया था। सरकार अभी भी जंगल काटने के लिए प्रति एकड़ 4.38 लाख से 14 लाख रुपए तक वसूल करती है। सस्ते में जंगल क्यों कटवा रही है सरकार ? इसके पीछे का पूरा गणित पर्यावरण संरक्षण और विकास (Environmental Protection And Devlopement) में से किसी एक विकल्प के चुनाव भर का ही नहीं है, बल्कि खनन, सड़क, ऊर्जा आदि ढांचागत परियोजनाओं के लिए जंगल की कटाई के लिए सरकार से अनुमति मागने वाली सार्वजनिक और निजी कंपनियों को भारी मुआवजे से बचाना भी है। पर्यावरण मंत्रालय की ही एक विशेषज्ञ समिति ने 2014 में एनपीवी को चार गुना तक बढ़ाने की सिफारिश की थी, लेकिन बीते साल मंत्रालय ने अपनी सिफारिश में समिति के सुझावों को कूड़े में फेंक दिया। फिर पिछले साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट (Wildlife Trust Of India) के पूर्व अध्यक्ष एमके रंजीत सिंह की अध्यक्षता में एक और विशेषज्ञ कमेटी बनाई और उसने जनवरी में रिपोर्ट पेश करते हुए एनपीवी के आंकलन की सरकार की प्रणाली को पुराना और अवैज्ञानिक ठहराया। हालांकि इससे पहले ही केंद्र सरकार एनपीवी की लागत को 1.53 गुना बढ़ा चुकी थी। यह बढ़ोतरी सभी 6 श्रेणी के वनों और सघन, कम घने और खुले जंगल के लिए अलग-अलग तय की गई थी। जंगल की कीमत क्यों नहीं बढ़ाना चाहती है सरकार ? भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (Indian Institute Of Forest Management) ने 2014 में एक अध्ययन में एनपीवी को चार गुना बढ़ाने का सुझाव दिया था। पहले तो केंद्र की एनडीए सरकार ने कमेटी के सुझावों को सैद्धांतिक रूप से मान लिया, लेकिन फिर बिजली, इस्पात और कोयला मंत्रालयों समेत और भी कुछ सरकारी विभागों और निजी कंपनियों ने सुझावों का यह कहते हुए विरोध किया कि इससे उनकी परियोजनाओं की लागत 437 प्रतिशत बढ़ जाएंगी। भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के अध्ययन में शामिल प्रोफ. मधु वर्मा का कहना है कि फिलहाल जंगल की लागत, यानी एनपीवी का निर्धारण करने के लिए सरकार सिर्फ कार्बन के बाजार मूल्य (कार्बन क्रेडिट) का ही उपयोग कर रही है। लेकिन जंगल की कटाई से पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है, इसलिए उसकी सामाजिक लागत का वैज्ञानिक पद्धति से आंकलन करना जरूरी है। वन प्रबंधन संस्थान के इस तर्क को सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने भी तर्कसंगत पाया था और उसके मुताबिक, एनपीवी को 5 गुना बढ़ाया जाना चाहिए। मधु वर्मा यह भी कहती हैं कि पर्यावरण मंत्रालय ने एनपीवी की गणना के लिए महंगाई दर को ही ध्यान में रखा है, जो कि काफी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने क्षतिपूरक वनीकरण (कैम्पा) फंड कानून 2016 में लागू किया था। मकसद था जंगलों को दूसरे कामों में लगाया जा सके और पर्यावरण को हुए नकसान की भरपाई भी हो। इसके लिए डेवलपर को जंगल के नुकसान की भरपाई के लिए कैम्पा फंड के तहत एनपीवी देने की भी बाध्यता रखी गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की विशेषज्ञ कमेटी ही अब कह रही है कि डेवलपर मामूली मुआवजा देकर वन भूमि पर कब्जा कर लेते हैं। कैम्पा फंड ने अभी तक शायद ही कोई उजड़ा जंगल आबाद हुआ है। यही नहीं, भारत के महालेखाकर नियंत्रक ने भी अपनी रिपोर्ट में कैम्पा फंड की कई विसंगतियों को उजागर किया है। सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण की गैर मौजूदगी और गांवों में पेड़ लगाने के लिा सामुदायिक भूमि पर जबरन अधिग्रहण जैसी विसंगतियां शामिल हैं। साफ है कि निजीकरण के रथ पर सवार केंद्र सरकार विकास के नाम पर निजी कंपनियों को फायदा दिलाने के लिए जंगल को उसकी वास्तविक कीमत नहीं दे रही है। इसका खामियाजा लगभग समूचा भारत भीषण गर्मी, बाढ़ और सूखे के रूप में भुगत रहा है। (जनता की पत्रकारिता करते हुए जनज्वार लगातार निष्पक्ष और निर्भीक रह सका है तो इसका सारा श्रेय जनज्वार के पाठकों और दर्शकों को ही जाता है। हम उन मुद्दों की पड़ताल करते हैं जिनसे मुख्यधारा का मीडिया अक्सर मुंह चुराता दिखाई देता है। हम उन कहानियों को पाठक के सामने ले कर आते हैं जिन्हें खोजने और प्रस्तुत करने में समय लगाना पड़ता है, संसाधन जुटाने पड़ते हैं और साहस दिखाना पड़ता है क्योंकि तथ्यों से अपने पाठकों और व्यापक समाज को रु-ब-रु कराने के लिए हम कटिबद्ध हैं। हमारे द्वारा उद्घाटित रिपोर्ट्स और कहानियाँ अक्सर बदलाव का सबब बनती रही है। साथ ही सरकार और सरकारी अधिकारियों को मजबूर करती रही हैं कि वे नागरिकों को उन सभी चीजों और सेवाओं को मुहैया करवाएं जिनकी उन्हें दरकार है। लाजिमी है कि इस तरह की जन-पत्रकारिता को जारी रखने के लिए हमें लगातार आपके मूल्यवान समर्थन और सहयोग की आवश्यकता है। सहयोग राशि के रूप में आपके द्वारा बढ़ाया गया हर हाथ जनज्वार को अधिक साहस और वित्तीय सामर्थ्य देगा जिसका सीधा परिणाम यह होगा कि आपकी और आपके आस-पास रहने वाले लोगों की ज़िंदगी को प्रभावित करने वाली हर ख़बर और रिपोर्ट को सामने लाने में जनज्वार कभी पीछे नहीं रहेगा, इसलिए आगे आएं और अपना सहयोग दें।)
Felling Of Forests : सस्ते दाम पर जंगलों को कटवाकर किनका भला कर रही है केंद्र सरकार ? Felling Of Forests : देश में पड़ रही भीषण गर्मी और अभूतपूर्व कोयला संकट के बीच पेड़ यानी पर्यावरण की याद फिर आने लगी है लेकिन छत्तीसगढ़ में हसदेव अरण्य से लेकर एमपी के पन्ना टाइगर रिजर्व तक में जंगलों की अंधाधुंध कटाई जारी है और वह भी बहुत ही सस्ते में। इस साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट की एक विशेषज्ञ कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सस्ते दाम पर किए जा रहे जंगलों के सफाए पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए एनपीवी में चार गुना बढ़ोतरी करने की सिफारिश की थी। लेकिन केंद्र सरकार पर्यावरण मंत्रालय की पिछले साल की सिफारिश को भी लागू नहीं कर रही है, जिसमें एनपीवी को महज डेढ़ गुना दाम बढ़ाने का सुझाव दिया गया था। एनपीवी वह दर है, जिसके तहत प्रति एकड़ जंगल की कीमत तय की जाती है। जब कोई सरकारी या निजी कंपनी किसी परियोजना के लिए जंगल काटती है तो उसे प्रति एकड़ एनपीवी की दर से ही पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई सरकार को करनी पड़ती है। बीते तेरह साल से यानी दो हज़ार नौ से सरकार का एनपीवी नहीं बढ़ा है। यह भी सुप्रीम कोर्ट के दो हज़ार आठ में दिए गए आदेश की अवमानना है, जिसके तहत एनपीवी को हर तीन साल में बदलने को कहा गया था। सरकार अभी भी जंगल काटने के लिए प्रति एकड़ चार.अड़तीस लाख से चौदह लाख रुपए तक वसूल करती है। सस्ते में जंगल क्यों कटवा रही है सरकार ? इसके पीछे का पूरा गणित पर्यावरण संरक्षण और विकास में से किसी एक विकल्प के चुनाव भर का ही नहीं है, बल्कि खनन, सड़क, ऊर्जा आदि ढांचागत परियोजनाओं के लिए जंगल की कटाई के लिए सरकार से अनुमति मागने वाली सार्वजनिक और निजी कंपनियों को भारी मुआवजे से बचाना भी है। पर्यावरण मंत्रालय की ही एक विशेषज्ञ समिति ने दो हज़ार चौदह में एनपीवी को चार गुना तक बढ़ाने की सिफारिश की थी, लेकिन बीते साल मंत्रालय ने अपनी सिफारिश में समिति के सुझावों को कूड़े में फेंक दिया। फिर पिछले साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष एमके रंजीत सिंह की अध्यक्षता में एक और विशेषज्ञ कमेटी बनाई और उसने जनवरी में रिपोर्ट पेश करते हुए एनपीवी के आंकलन की सरकार की प्रणाली को पुराना और अवैज्ञानिक ठहराया। हालांकि इससे पहले ही केंद्र सरकार एनपीवी की लागत को एक.तिरेपन गुना बढ़ा चुकी थी। यह बढ़ोतरी सभी छः श्रेणी के वनों और सघन, कम घने और खुले जंगल के लिए अलग-अलग तय की गई थी। जंगल की कीमत क्यों नहीं बढ़ाना चाहती है सरकार ? भारतीय वन प्रबंधन संस्थान ने दो हज़ार चौदह में एक अध्ययन में एनपीवी को चार गुना बढ़ाने का सुझाव दिया था। पहले तो केंद्र की एनडीए सरकार ने कमेटी के सुझावों को सैद्धांतिक रूप से मान लिया, लेकिन फिर बिजली, इस्पात और कोयला मंत्रालयों समेत और भी कुछ सरकारी विभागों और निजी कंपनियों ने सुझावों का यह कहते हुए विरोध किया कि इससे उनकी परियोजनाओं की लागत चार सौ सैंतीस प्रतिशत बढ़ जाएंगी। भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के अध्ययन में शामिल प्रोफ. मधु वर्मा का कहना है कि फिलहाल जंगल की लागत, यानी एनपीवी का निर्धारण करने के लिए सरकार सिर्फ कार्बन के बाजार मूल्य का ही उपयोग कर रही है। लेकिन जंगल की कटाई से पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है, इसलिए उसकी सामाजिक लागत का वैज्ञानिक पद्धति से आंकलन करना जरूरी है। वन प्रबंधन संस्थान के इस तर्क को सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने भी तर्कसंगत पाया था और उसके मुताबिक, एनपीवी को पाँच गुना बढ़ाया जाना चाहिए। मधु वर्मा यह भी कहती हैं कि पर्यावरण मंत्रालय ने एनपीवी की गणना के लिए महंगाई दर को ही ध्यान में रखा है, जो कि काफी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने क्षतिपूरक वनीकरण फंड कानून दो हज़ार सोलह में लागू किया था। मकसद था जंगलों को दूसरे कामों में लगाया जा सके और पर्यावरण को हुए नकसान की भरपाई भी हो। इसके लिए डेवलपर को जंगल के नुकसान की भरपाई के लिए कैम्पा फंड के तहत एनपीवी देने की भी बाध्यता रखी गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की विशेषज्ञ कमेटी ही अब कह रही है कि डेवलपर मामूली मुआवजा देकर वन भूमि पर कब्जा कर लेते हैं। कैम्पा फंड ने अभी तक शायद ही कोई उजड़ा जंगल आबाद हुआ है। यही नहीं, भारत के महालेखाकर नियंत्रक ने भी अपनी रिपोर्ट में कैम्पा फंड की कई विसंगतियों को उजागर किया है। सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण की गैर मौजूदगी और गांवों में पेड़ लगाने के लिा सामुदायिक भूमि पर जबरन अधिग्रहण जैसी विसंगतियां शामिल हैं। साफ है कि निजीकरण के रथ पर सवार केंद्र सरकार विकास के नाम पर निजी कंपनियों को फायदा दिलाने के लिए जंगल को उसकी वास्तविक कीमत नहीं दे रही है। इसका खामियाजा लगभग समूचा भारत भीषण गर्मी, बाढ़ और सूखे के रूप में भुगत रहा है।
पाकिस्तान की सियासत में बीते कुछ दिनों से भूचाल आया हुआ है. अपनी आवाम को 'नए पाकिस्तान' का सपना दिखाकर सत्ता पर काबिज हुए इमरान खान की कुर्सी पर खतरा मंजराने लगा है. जब कि विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाया है, तब से अटकलें लगाई जा रही हैं कि जल्द ही इमरान खान सरकार जल्द ही गिर सकती है. वहीं, अब खबर सामने आ रही है कि, इमरान खान सरकार में दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है. पाकिस्तानी मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के पीएम इमरान खान आज (बुधवार) शाम देश को संबोधित कर सकते हैं. पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री शेख राशिद ने कहा कि, एक आपात इमरजेंसी बैठक बुलाई गई है, जिसके बाद पाक पीएम देश को संबोधित करेंगे. वहीं, पाकिस्तान की इमरान सरकार का साथ छोड़ने जा रही MQM के सदस्य और कानून मंत्री फारुग नसीम और आईटी मंत्री अमीन उल हक ने भी इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है. शाम करीब 5 बजे MQM नेता खालिद मकबूल सिद्दीकी के साथ विपक्ष की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होनी है. बता दें कि, विपक्ष ने उनकी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया है, जिस पर वोटिंग 3 अप्रैल को होगी. पाकिस्तान नेशनल असेंबली में 342 सदस्य हैं. ऐसे में 3 अप्रैल को अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली वोटिंग में इमरान खान को 172 सदस्यों का समर्थन चाहिए. लेकिन, सदन में इमरान खान की पार्टी पीटीआई के सिर्फ 155 सदस्य हैं. ऐसे में सहयोगी दलों का साथ न मिला तो तय है कि. . इमरान खान की सरकार गिर जाएगी.
पाकिस्तान की सियासत में बीते कुछ दिनों से भूचाल आया हुआ है. अपनी आवाम को 'नए पाकिस्तान' का सपना दिखाकर सत्ता पर काबिज हुए इमरान खान की कुर्सी पर खतरा मंजराने लगा है. जब कि विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाया है, तब से अटकलें लगाई जा रही हैं कि जल्द ही इमरान खान सरकार जल्द ही गिर सकती है. वहीं, अब खबर सामने आ रही है कि, इमरान खान सरकार में दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है. पाकिस्तानी मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के पीएम इमरान खान आज शाम देश को संबोधित कर सकते हैं. पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री शेख राशिद ने कहा कि, एक आपात इमरजेंसी बैठक बुलाई गई है, जिसके बाद पाक पीएम देश को संबोधित करेंगे. वहीं, पाकिस्तान की इमरान सरकार का साथ छोड़ने जा रही MQM के सदस्य और कानून मंत्री फारुग नसीम और आईटी मंत्री अमीन उल हक ने भी इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है. शाम करीब पाँच बजे MQM नेता खालिद मकबूल सिद्दीकी के साथ विपक्ष की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होनी है. बता दें कि, विपक्ष ने उनकी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया है, जिस पर वोटिंग तीन अप्रैल को होगी. पाकिस्तान नेशनल असेंबली में तीन सौ बयालीस सदस्य हैं. ऐसे में तीन अप्रैल को अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली वोटिंग में इमरान खान को एक सौ बहत्तर सदस्यों का समर्थन चाहिए. लेकिन, सदन में इमरान खान की पार्टी पीटीआई के सिर्फ एक सौ पचपन सदस्य हैं. ऐसे में सहयोगी दलों का साथ न मिला तो तय है कि. . इमरान खान की सरकार गिर जाएगी.
लखनऊ, (एजेंसी/वार्ता): उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में साेमवार को अयोध्या में आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का 24वां दीक्षान्त समारोह सम्पन्न हुआ और कुल 545 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। जिसमें 293 स्नातक, 180 परास्नातक, तथा 72 पीएचडी की उपाधियाँ प्रदान की गई। श्रीमती पटेल ने इस अवसर पर समारोह को सम्बोधित करते हुए उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों और पदक विजेताओं के साथ-साथ उनके माता-पिता और गुरूजनों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा माता-पिता और गुरुजनों के योगदान से ही विद्यार्थी आज सफलता प्राप्त कर जीवन में आगामी भूमिका की ओर अग्रसर हो रहे हैं। राज्यपाल ने दीक्षान्त समारोह में सभी उपाधि प्राप्त कर्ताओं से अपेक्षा की कि वे अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग प्राकृतिक संसाधनों के संवर्द्धन गुणवत्तापरक उत्पादन, कृषि में रोजगार सृजन करके भारत निर्माण के योगदान में करेंगे। उन्होंने कहा कि आवश्यकताएं एवं परिस्थितियाँ सदैव बदलती रहती हैं और नवीन चुनौतियाँ सामने आती रहती हैं। उन्होंने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को आगामी जीवन में चुनौतियों का सामना करने, क्षेत्र व परिस्थिति के अनुरूप कार्य करने को प्रेरित किया। वर्तमान परिदृश्य में कृषि की बदलती आवश्यकताओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने शिक्षा पद्धति में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसार बदलावों की आवश्यकता पर जोर दिया। भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि और पशुधन क्षेत्र को महत्वपूर्ण बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि युवाओं और पशुपालकों के लिए इस क्षेत्र में आजीविका के बेहतर अवसर हैं और आत्मनिर्भर भारत का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय में पशुनस्ल सुधार की दिशा में हो रहे कार्यों तथा उससे प्रदेश के किसानों को लाभ, पूर्वांचल क्षेत्र में कृषि विकास में योगदान, विभिन्न फसलों की नई प्रजातियों का विकास, अनुपयोगी भूमि को खेती योग्य बनाने में योगदान की सराहना की। उन्होंने खेती को रसायनों का प्रयोग से निकालकर प्राकृतिक खेती को बढ़ाने की चर्चा करते हुए अपेक्षा की कि विश्वविद्यालय अपने परिक्षेत्र में किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने प्राकृतिक खेती को छोटे किसानों के लिए फयदेमंद बताते हुए इसमें पराली का उपयोग किए जाने की चर्चा भी की। श्रीमती पटेल ने विश्वविद्यालय मे हुए शोधों का उपयेाग किसानों तक पहुँचाने, किसानों को कृषि में ड्रोन तकनीक के उपयोग की जानकारी का प्रसार करने, कम पानी में पर्याप्त सिंचाई की जानकारी देने, जल संरक्षण के प्रति जागरूक रहने जैसे विषयों पर विशेष चर्चा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में केन्द्र सरकार द्वारा एक बड़ी पहल करते हुए देश के सिंचित क्षेत्र बढ़ाने के लिए "पर ड्राप मोर क्राप" योजना लागू की गई थी। जल संरक्षण और जल संसाधन प्रबन्धन को बढ़ाने के लिए जलशक्ति अभियान, जल निकायों का नवीनीकरण सहित जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के कार्यों पर ध्यान दिया गया। उन्होंने कहा कि भू-जल का गिरता स्तर भविष्य के जल संकट का संकेत है। इसलिए 'जलभरो' कार्यक्रम का आयोजन कर जागरूकता लाई जा सकती है। राज्यपाल ने देश में मोटे अनाज के घटते उत्पादन और प्रयोग पर भी चिन्ता व्यक्त की। उन्होंने कम पानी में आसानी से हो जाने वाली इनकी विविध फसलों का जिक्र करते हुए इसके व्यंजनों और स्वास्थय के लिए इनके लाभकारी होने के कारण, विश्व में बढ़ रही इनकी मांग की ओर भी ध्यानाकर्षित कराया। उन्होंने कृषि सम्बन्धी रोजगारों में महिलाओं का बड़ा जुड़ाव, ग्रामीण महिला सशक्तिकरण, महिला स्वावलम्बन पर भी विशेष चर्चा की। दीक्षांत समारोह मेें कुल 545 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। जिसमें 293 स्नातक, 180 परास्नातक, तथा 72 पीएचडी की उपाधियाँ प्रदान की गई। मेधावी और अतिरिक्त योग्यता वाले 25 विद्यार्थियों को पदक देकर सम्मानित किया गया, जिसमें छह कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 12 कुलपति स्वर्ण पदक, सात विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इसके अलावा 15 पदक छात्रों ने तथा 10 पदक छात्राओं ने प्राप्त किए। राज्यपाल ने सभी पदक विजेताओं का उत्साहवर्द्धन किया। -(एजेंसी/वार्ता) यह भी पढ़ेंः- मसूर की दाल खाने से स्वास्थ को मिलेंगे कई फायदे, जानिए इसके सेहत राज!
लखनऊ, : उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में साेमवार को अयोध्या में आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का चौबीसवां दीक्षान्त समारोह सम्पन्न हुआ और कुल पाँच सौ पैंतालीस विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। जिसमें दो सौ तिरानवे स्नातक, एक सौ अस्सी परास्नातक, तथा बहत्तर पीएचडी की उपाधियाँ प्रदान की गई। श्रीमती पटेल ने इस अवसर पर समारोह को सम्बोधित करते हुए उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों और पदक विजेताओं के साथ-साथ उनके माता-पिता और गुरूजनों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा माता-पिता और गुरुजनों के योगदान से ही विद्यार्थी आज सफलता प्राप्त कर जीवन में आगामी भूमिका की ओर अग्रसर हो रहे हैं। राज्यपाल ने दीक्षान्त समारोह में सभी उपाधि प्राप्त कर्ताओं से अपेक्षा की कि वे अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग प्राकृतिक संसाधनों के संवर्द्धन गुणवत्तापरक उत्पादन, कृषि में रोजगार सृजन करके भारत निर्माण के योगदान में करेंगे। उन्होंने कहा कि आवश्यकताएं एवं परिस्थितियाँ सदैव बदलती रहती हैं और नवीन चुनौतियाँ सामने आती रहती हैं। उन्होंने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को आगामी जीवन में चुनौतियों का सामना करने, क्षेत्र व परिस्थिति के अनुरूप कार्य करने को प्रेरित किया। वर्तमान परिदृश्य में कृषि की बदलती आवश्यकताओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने शिक्षा पद्धति में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-दो हज़ार बीस के अनुसार बदलावों की आवश्यकता पर जोर दिया। भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि और पशुधन क्षेत्र को महत्वपूर्ण बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि युवाओं और पशुपालकों के लिए इस क्षेत्र में आजीविका के बेहतर अवसर हैं और आत्मनिर्भर भारत का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय में पशुनस्ल सुधार की दिशा में हो रहे कार्यों तथा उससे प्रदेश के किसानों को लाभ, पूर्वांचल क्षेत्र में कृषि विकास में योगदान, विभिन्न फसलों की नई प्रजातियों का विकास, अनुपयोगी भूमि को खेती योग्य बनाने में योगदान की सराहना की। उन्होंने खेती को रसायनों का प्रयोग से निकालकर प्राकृतिक खेती को बढ़ाने की चर्चा करते हुए अपेक्षा की कि विश्वविद्यालय अपने परिक्षेत्र में किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने प्राकृतिक खेती को छोटे किसानों के लिए फयदेमंद बताते हुए इसमें पराली का उपयोग किए जाने की चर्चा भी की। श्रीमती पटेल ने विश्वविद्यालय मे हुए शोधों का उपयेाग किसानों तक पहुँचाने, किसानों को कृषि में ड्रोन तकनीक के उपयोग की जानकारी का प्रसार करने, कम पानी में पर्याप्त सिंचाई की जानकारी देने, जल संरक्षण के प्रति जागरूक रहने जैसे विषयों पर विशेष चर्चा की। उन्होंने बताया कि वर्ष दो हज़ार पंद्रह में केन्द्र सरकार द्वारा एक बड़ी पहल करते हुए देश के सिंचित क्षेत्र बढ़ाने के लिए "पर ड्राप मोर क्राप" योजना लागू की गई थी। जल संरक्षण और जल संसाधन प्रबन्धन को बढ़ाने के लिए जलशक्ति अभियान, जल निकायों का नवीनीकरण सहित जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के कार्यों पर ध्यान दिया गया। उन्होंने कहा कि भू-जल का गिरता स्तर भविष्य के जल संकट का संकेत है। इसलिए 'जलभरो' कार्यक्रम का आयोजन कर जागरूकता लाई जा सकती है। राज्यपाल ने देश में मोटे अनाज के घटते उत्पादन और प्रयोग पर भी चिन्ता व्यक्त की। उन्होंने कम पानी में आसानी से हो जाने वाली इनकी विविध फसलों का जिक्र करते हुए इसके व्यंजनों और स्वास्थय के लिए इनके लाभकारी होने के कारण, विश्व में बढ़ रही इनकी मांग की ओर भी ध्यानाकर्षित कराया। उन्होंने कृषि सम्बन्धी रोजगारों में महिलाओं का बड़ा जुड़ाव, ग्रामीण महिला सशक्तिकरण, महिला स्वावलम्बन पर भी विशेष चर्चा की। दीक्षांत समारोह मेें कुल पाँच सौ पैंतालीस विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। जिसमें दो सौ तिरानवे स्नातक, एक सौ अस्सी परास्नातक, तथा बहत्तर पीएचडी की उपाधियाँ प्रदान की गई। मेधावी और अतिरिक्त योग्यता वाले पच्चीस विद्यार्थियों को पदक देकर सम्मानित किया गया, जिसमें छह कुलाधिपति स्वर्ण पदक, बारह कुलपति स्वर्ण पदक, सात विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इसके अलावा पंद्रह पदक छात्रों ने तथा दस पदक छात्राओं ने प्राप्त किए। राज्यपाल ने सभी पदक विजेताओं का उत्साहवर्द्धन किया। - यह भी पढ़ेंः- मसूर की दाल खाने से स्वास्थ को मिलेंगे कई फायदे, जानिए इसके सेहत राज!
संगठन और कर्मियों के रिकॉर्ड प्रबंधन के रखरखाव- कर्मियों ने सेवा कर्मचारियों की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी। परिस्थितियों में एक नया संगठन बनाने, पुराने, या अन्य पुनर्गठन विकल्पों में से परिवर्तन, और विभाग प्रबंधन कर्मचारियों के काम का मुख्य बिंदु जानने की जरूरतः प्रशिक्षण और कर्मियों खोज, स्वागत, अनुवाद, बर्खास्तगी कर्मियों की है, साथ ही संग्रह और दस्तावेजों के ऑनलाइन भंडारण के लिए नियम। किसी भी संगठन में, फ़ॉर्म की परवाह किए बिनासंपत्ति, वहाँ एक कर्मचारी है कार्य और योग्यता के मामले में यह संख्या और रचना में भिन्न है। मानव संसाधन विभाग का कार्य यह सुनिश्चित करना है कि उद्यम के कर्मचारियों से संबंधित सभी मुद्दों और समस्याओं को जल्दी और सक्षम रूप से संभवतः हल किया जाए। संगठन का स्थिर संचालन इस पर निर्भर करता हैइसके कर्मचारियों कर्मियों की सेवा का पहला कार्य कर्मचारी की सक्षम और समय पर चयन, कानून के अनुसार कर्मियों के रिकॉर्ड का रखरखाव और संग्रह को दस्तावेजों के समय पर वितरण के लिए है। यह किसी भी उद्यम के स्थिर संचालन का आधार है। कर्मचारी प्रबंधन पर निर्देश स्पष्ट रूप सेकर्मियों के विशेषज्ञों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण की आवश्यकता को इंगित करता है हालांकि, व्यवहार में, वांछित प्रोफ़ाइल के कर्मचारियों के प्रशिक्षण में अक्सर एक समस्या होती है। उच्च और माध्यमिक विशेष शैक्षिक संस्थान नहीं हैंवे ऐसे विशेषज्ञों का उत्पादन "कर्मियों के रिकॉर्ड प्रबंधन" जैसी संकीर्ण योग्यता के साथ करते हैं। प्रशिक्षण आमतौर पर जगह पर या प्रोफ़ाइल पाठ्यक्रमों पर होता है। सलाहकार द्वारा किसी कर्मचारी को सीधे कार्यस्थल पर प्रशिक्षित करना संभव है। एचआर प्रबंधन प्रशिक्षण विशेषज्ञ निम्नलिखित तरीकों से सुझाव देते हैंः कार्मिक विभाग और सामान्य संगठन की गतिविधियांकर्मियों के अभिलेख प्रबंधन बहुत ज्यादा वर्तमान कानून और आंतरिक नियामक दस्तावेजों पर निर्भर करता है। यह सुविधा निजी दस्तावेजों की एक बड़ी संख्या के साथ काम करने की बारीकियों से संबंधित है, जो अक्सर गोपनीय होती है। कार्मिक सेवा में कार्यालय का काम निम्न कृत्यों द्वारा नियंत्रित किया जाता हैः कर्मचारी सेवा के कर्मचारी मानक अधिनियमों के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने के लिए बाध्य हैं और सबसे ऊपर, श्रम संहिता। कर्मियों के रिकॉर्ड के रखरखाव कर्मियों के खोज और डिजाइन के साथ शुरू होता है। सबसे पहले, आपको नए कर्मचारियों को खोजने के लिए विकल्पों का निर्धारण करना होगा। उनमें से, निम्नलिखित हैंः कर्मचारी खोजने के लिए सभी विकल्प अपने स्वयं के गुण और दोष हैं, कर्मियों विभाग के कर्मचारी को रिक्ति को बंद करने के लिए सभी अवसरों का अधिक से अधिक होना चाहिए। जब कोई आवेदक मिल जाता है, तो यह आयोजित किया जाता हैसाक्षात्कार। यह वांछनीय है कि उनकी चाल का दस्तावेज हैः इसलिए भर्ती या इनकार करने के लिए एक मापा निर्णय करना आसान है। बाद के मामले में, किसी व्यक्ति को पांच कार्य दिवसों के भीतर कारण के लिखित रूप में सूचित किया जाता है। यदि आवेदक खाली स्थान के लिए उपयुक्त है, तो उसे श्रेय दिया जाना चाहिए। इस से किसी विशेष कर्मचारी के लिए कर्मियों के दस्तावेज का डिजाइन शुरू होता है। रोजगार के पंजीकरण के चरणोंः कार्मिक प्रबंधन के रखरखाव में शामिल हैलेखा रिकॉर्ड के अनिवार्य पंजीकरण, विशेष रूप से, स्टाफिंग और व्यक्तिगत कार्ड ये दस्तावेज़ स्वामित्व के सभी प्रकार के संगठनों के लिए अनिवार्य हैं। स्टाफिंग और संख्या प्रासंगिक होनी चाहिए और संगठन की आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए। इसमें सभी पदों के नाम शामिल हैं, इस अवधि के लिए रिक्तियों का संकेत करने वाले दांव की संख्या। व्यक्तिगत कार्ड एकीकृत दस्तावेज़ हैं,कर्मचारी की कार्यकलाप और व्यक्तिगत जानकारी के बारे में संक्षिप्त जानकारी शामिल है वे कठोर लेखांकन और विशेष भंडारण की स्थिति के अधीन हैं, उन जगहों पर जहां उनके विकृति और चोरी को रोकते हैं। अधिकांश आदेश और आदेशकर्मचारी के साथ विशिष्ट कार्य, एक एकीकृत रूप है वे सभी इच्छुक व्यक्तियों के साथ अनिवार्य समझौते के अधीन हैं और एक रसीद के साथ कर्मचारी के परिचित हैं। कर्मियों के आदेश की प्रतियां व्यक्तिगत फाइल में संग्रहीत की जाती हैं, और अलग फ़ोल्डरों में मूल हैं। दस्तावेजों के आंदोलन को रिकॉर्ड करने के लिए,कर्मियों की सेवा विशेष पत्रिकाओं के रखरखाव को मानती है ये बहु-पृष्ठ प्रारूप के सारणीबद्ध दस्तावेज़ हैं, जो अक्सर एकीकृत होते हैं। आम तौर पर वे बड़ी नोटबुक में या विशेष स्टोर में खरीदे जाते हैं। कर्मियों के पत्रिकाओं के प्रकारः सभी लॉग अनिवार्य रूप से सिले और सील किए जाने चाहिए, और शीट्स गिने। उन्हें सभी दस्तावेजों से अलग से स्टोर करें अधिमानतः एक सुरक्षित या विशेष कैबिनेट में। एक निजी मामला कर्मचारी के बारे में दस्तावेज की व्यक्तिगत जानकारी का संकलन है, जिसे एक निश्चित क्रम में एकत्र और गठित किया गया है। इसमें विभिन्न प्रकार के दस्तावेज़ और प्रतियां शामिल हो सकती हैंः व्यक्तिगत मामलों में निजी शामिल हैंजानकारी, उन्हें अन्य दस्तावेजों से दूर रखा जाना चाहिए। उन तक पहुंच सीमित अधिकारियों की संख्या सीमित है। कर्मचारियों की बर्खास्तगी के साथ, व्यक्तिगत फ़ाइलों को अभिलेखीय भंडारण के लिए सौंप दिया जाता है। सभी संगठनों को कार्य पुस्तकें आयोजित करने के लिए बाध्य हैंइसके कर्मचारियों, अपवाद - कर्मचारियों, अंशकालिक लिया। प्राथमिक रिसेप्शन पर नियोक्ता स्वतंत्र रूप से शुद्ध रूप प्राप्त करता है और उनको पहला रिकॉर्ड बनाता है। शीर्षक पृष्ठ पर कर्मचारी के बारे में प्रासंगिक डेटा बनाते हैं। इसके बाद, उनकी प्रासंगिकता पर नजर रखने और समय पर परिवर्तन करने के लिए आवश्यक है। के बारे में रिकॉर्ड के मुख्य भाग को चालू करने के लिएकर्मचारी के श्रम और सामाजिक गतिविधियों, स्थायी अनुवादों का स्वागत, बर्खास्तगी। सभी प्रविष्टियां सामान्य क्रम में गिने जा चुकी हैं और ऑर्डर के आधार पर दर्ज की जाती हैं। बर्खास्तगी का रिकॉर्ड संगठन के मुहर और सिर के हस्ताक्षर की छाप के साथ है। कार्यपुस्तिका में रिकॉर्ड्स हाथ, नीले द्वारा बनाई गई हैंबॉलपेप पेन, स्पष्ट और समझदार लिखावट दर्ज किए गए डेटा की प्रासंगिकता और विश्वसनीयता की निगरानी करें यदि आपको जानकारी को सही करने की आवश्यकता है, तो उन्हें ध्यान से एक पंक्ति और अपडेट की गई जानकारी के साथ पार कर लिया जाना चाहिए। इस कार्रवाई को सिर के हस्ताक्षर और सील द्वारा जरूरी पुष्टि की गई है। सुरक्षित रूप से अन्य दस्तावेजों से अलग से श्रम की पुस्तकें स्टोर करें जिम्मेदार निकायों के विशेष समाधान के बिना कर्मचारियों या तीसरे पक्ष के हाथों को उन्हें देने के लिए मना किया जाता है। कर्मियों के दस्तावेजों का संग्रहण उनके द्वारा निर्धारित किया जाता हैविशेष महत्व वे व्यक्तिगत जानकारी रखते हैं और गोपनीय हैं। ऐसा डेटा अनधिकृत प्रकटीकरण के अधीन नहीं है अन्यथा, कर्मियों के विभाग के कर्मियों और संगठन के प्रमुख पर जुर्माना लगाया जाता है। कर्मियों के उचित भंडारण को व्यवस्थित करने के लिएकर्मियों की सेवा में दस्तावेज यह एक अलग कमरे के लिए वांछनीय है इसका प्रवेश द्वार एक होना चाहिए और अलार्म के साथ एक धातु के दरवाजे से सुसज्जित होना चाहिए।
संगठन और कर्मियों के रिकॉर्ड प्रबंधन के रखरखाव- कर्मियों ने सेवा कर्मचारियों की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी। परिस्थितियों में एक नया संगठन बनाने, पुराने, या अन्य पुनर्गठन विकल्पों में से परिवर्तन, और विभाग प्रबंधन कर्मचारियों के काम का मुख्य बिंदु जानने की जरूरतः प्रशिक्षण और कर्मियों खोज, स्वागत, अनुवाद, बर्खास्तगी कर्मियों की है, साथ ही संग्रह और दस्तावेजों के ऑनलाइन भंडारण के लिए नियम। किसी भी संगठन में, फ़ॉर्म की परवाह किए बिनासंपत्ति, वहाँ एक कर्मचारी है कार्य और योग्यता के मामले में यह संख्या और रचना में भिन्न है। मानव संसाधन विभाग का कार्य यह सुनिश्चित करना है कि उद्यम के कर्मचारियों से संबंधित सभी मुद्दों और समस्याओं को जल्दी और सक्षम रूप से संभवतः हल किया जाए। संगठन का स्थिर संचालन इस पर निर्भर करता हैइसके कर्मचारियों कर्मियों की सेवा का पहला कार्य कर्मचारी की सक्षम और समय पर चयन, कानून के अनुसार कर्मियों के रिकॉर्ड का रखरखाव और संग्रह को दस्तावेजों के समय पर वितरण के लिए है। यह किसी भी उद्यम के स्थिर संचालन का आधार है। कर्मचारी प्रबंधन पर निर्देश स्पष्ट रूप सेकर्मियों के विशेषज्ञों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण की आवश्यकता को इंगित करता है हालांकि, व्यवहार में, वांछित प्रोफ़ाइल के कर्मचारियों के प्रशिक्षण में अक्सर एक समस्या होती है। उच्च और माध्यमिक विशेष शैक्षिक संस्थान नहीं हैंवे ऐसे विशेषज्ञों का उत्पादन "कर्मियों के रिकॉर्ड प्रबंधन" जैसी संकीर्ण योग्यता के साथ करते हैं। प्रशिक्षण आमतौर पर जगह पर या प्रोफ़ाइल पाठ्यक्रमों पर होता है। सलाहकार द्वारा किसी कर्मचारी को सीधे कार्यस्थल पर प्रशिक्षित करना संभव है। एचआर प्रबंधन प्रशिक्षण विशेषज्ञ निम्नलिखित तरीकों से सुझाव देते हैंः कार्मिक विभाग और सामान्य संगठन की गतिविधियांकर्मियों के अभिलेख प्रबंधन बहुत ज्यादा वर्तमान कानून और आंतरिक नियामक दस्तावेजों पर निर्भर करता है। यह सुविधा निजी दस्तावेजों की एक बड़ी संख्या के साथ काम करने की बारीकियों से संबंधित है, जो अक्सर गोपनीय होती है। कार्मिक सेवा में कार्यालय का काम निम्न कृत्यों द्वारा नियंत्रित किया जाता हैः कर्मचारी सेवा के कर्मचारी मानक अधिनियमों के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने के लिए बाध्य हैं और सबसे ऊपर, श्रम संहिता। कर्मियों के रिकॉर्ड के रखरखाव कर्मियों के खोज और डिजाइन के साथ शुरू होता है। सबसे पहले, आपको नए कर्मचारियों को खोजने के लिए विकल्पों का निर्धारण करना होगा। उनमें से, निम्नलिखित हैंः कर्मचारी खोजने के लिए सभी विकल्प अपने स्वयं के गुण और दोष हैं, कर्मियों विभाग के कर्मचारी को रिक्ति को बंद करने के लिए सभी अवसरों का अधिक से अधिक होना चाहिए। जब कोई आवेदक मिल जाता है, तो यह आयोजित किया जाता हैसाक्षात्कार। यह वांछनीय है कि उनकी चाल का दस्तावेज हैः इसलिए भर्ती या इनकार करने के लिए एक मापा निर्णय करना आसान है। बाद के मामले में, किसी व्यक्ति को पांच कार्य दिवसों के भीतर कारण के लिखित रूप में सूचित किया जाता है। यदि आवेदक खाली स्थान के लिए उपयुक्त है, तो उसे श्रेय दिया जाना चाहिए। इस से किसी विशेष कर्मचारी के लिए कर्मियों के दस्तावेज का डिजाइन शुरू होता है। रोजगार के पंजीकरण के चरणोंः कार्मिक प्रबंधन के रखरखाव में शामिल हैलेखा रिकॉर्ड के अनिवार्य पंजीकरण, विशेष रूप से, स्टाफिंग और व्यक्तिगत कार्ड ये दस्तावेज़ स्वामित्व के सभी प्रकार के संगठनों के लिए अनिवार्य हैं। स्टाफिंग और संख्या प्रासंगिक होनी चाहिए और संगठन की आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए। इसमें सभी पदों के नाम शामिल हैं, इस अवधि के लिए रिक्तियों का संकेत करने वाले दांव की संख्या। व्यक्तिगत कार्ड एकीकृत दस्तावेज़ हैं,कर्मचारी की कार्यकलाप और व्यक्तिगत जानकारी के बारे में संक्षिप्त जानकारी शामिल है वे कठोर लेखांकन और विशेष भंडारण की स्थिति के अधीन हैं, उन जगहों पर जहां उनके विकृति और चोरी को रोकते हैं। अधिकांश आदेश और आदेशकर्मचारी के साथ विशिष्ट कार्य, एक एकीकृत रूप है वे सभी इच्छुक व्यक्तियों के साथ अनिवार्य समझौते के अधीन हैं और एक रसीद के साथ कर्मचारी के परिचित हैं। कर्मियों के आदेश की प्रतियां व्यक्तिगत फाइल में संग्रहीत की जाती हैं, और अलग फ़ोल्डरों में मूल हैं। दस्तावेजों के आंदोलन को रिकॉर्ड करने के लिए,कर्मियों की सेवा विशेष पत्रिकाओं के रखरखाव को मानती है ये बहु-पृष्ठ प्रारूप के सारणीबद्ध दस्तावेज़ हैं, जो अक्सर एकीकृत होते हैं। आम तौर पर वे बड़ी नोटबुक में या विशेष स्टोर में खरीदे जाते हैं। कर्मियों के पत्रिकाओं के प्रकारः सभी लॉग अनिवार्य रूप से सिले और सील किए जाने चाहिए, और शीट्स गिने। उन्हें सभी दस्तावेजों से अलग से स्टोर करें अधिमानतः एक सुरक्षित या विशेष कैबिनेट में। एक निजी मामला कर्मचारी के बारे में दस्तावेज की व्यक्तिगत जानकारी का संकलन है, जिसे एक निश्चित क्रम में एकत्र और गठित किया गया है। इसमें विभिन्न प्रकार के दस्तावेज़ और प्रतियां शामिल हो सकती हैंः व्यक्तिगत मामलों में निजी शामिल हैंजानकारी, उन्हें अन्य दस्तावेजों से दूर रखा जाना चाहिए। उन तक पहुंच सीमित अधिकारियों की संख्या सीमित है। कर्मचारियों की बर्खास्तगी के साथ, व्यक्तिगत फ़ाइलों को अभिलेखीय भंडारण के लिए सौंप दिया जाता है। सभी संगठनों को कार्य पुस्तकें आयोजित करने के लिए बाध्य हैंइसके कर्मचारियों, अपवाद - कर्मचारियों, अंशकालिक लिया। प्राथमिक रिसेप्शन पर नियोक्ता स्वतंत्र रूप से शुद्ध रूप प्राप्त करता है और उनको पहला रिकॉर्ड बनाता है। शीर्षक पृष्ठ पर कर्मचारी के बारे में प्रासंगिक डेटा बनाते हैं। इसके बाद, उनकी प्रासंगिकता पर नजर रखने और समय पर परिवर्तन करने के लिए आवश्यक है। के बारे में रिकॉर्ड के मुख्य भाग को चालू करने के लिएकर्मचारी के श्रम और सामाजिक गतिविधियों, स्थायी अनुवादों का स्वागत, बर्खास्तगी। सभी प्रविष्टियां सामान्य क्रम में गिने जा चुकी हैं और ऑर्डर के आधार पर दर्ज की जाती हैं। बर्खास्तगी का रिकॉर्ड संगठन के मुहर और सिर के हस्ताक्षर की छाप के साथ है। कार्यपुस्तिका में रिकॉर्ड्स हाथ, नीले द्वारा बनाई गई हैंबॉलपेप पेन, स्पष्ट और समझदार लिखावट दर्ज किए गए डेटा की प्रासंगिकता और विश्वसनीयता की निगरानी करें यदि आपको जानकारी को सही करने की आवश्यकता है, तो उन्हें ध्यान से एक पंक्ति और अपडेट की गई जानकारी के साथ पार कर लिया जाना चाहिए। इस कार्रवाई को सिर के हस्ताक्षर और सील द्वारा जरूरी पुष्टि की गई है। सुरक्षित रूप से अन्य दस्तावेजों से अलग से श्रम की पुस्तकें स्टोर करें जिम्मेदार निकायों के विशेष समाधान के बिना कर्मचारियों या तीसरे पक्ष के हाथों को उन्हें देने के लिए मना किया जाता है। कर्मियों के दस्तावेजों का संग्रहण उनके द्वारा निर्धारित किया जाता हैविशेष महत्व वे व्यक्तिगत जानकारी रखते हैं और गोपनीय हैं। ऐसा डेटा अनधिकृत प्रकटीकरण के अधीन नहीं है अन्यथा, कर्मियों के विभाग के कर्मियों और संगठन के प्रमुख पर जुर्माना लगाया जाता है। कर्मियों के उचित भंडारण को व्यवस्थित करने के लिएकर्मियों की सेवा में दस्तावेज यह एक अलग कमरे के लिए वांछनीय है इसका प्रवेश द्वार एक होना चाहिए और अलार्म के साथ एक धातु के दरवाजे से सुसज्जित होना चाहिए।
मुंबई। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने पर्यावरणीय क्षरण के कारण आरे में प्रस्तावित कार शेड (car shed) का काम स्थगित (Adjourned) कर दिया था। हालांकि, इस स्थगन को लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने बड़ा फैसला लिया है और मुंबई के आरे में मेट्रो कारशेड के काम पर लगी रोक हटा ली गई है. ऐसे में अब साफ है कि आरे में गोष्ठी होगी. इसी तरह ढाई साल से ठप पड़े कारशेड का रास्ता साफ हो गया है। एकनाथ शिंदे के इस फैसले से आरे इलाके में कार शेड का काम तेजी से शुरू होने की संभावना है. शिंदे-फडणवीस (Shinde-Fadnavis) सरकार ने एक बार फिर अश्विनी भिड़े को मेट्रो प्रोजेक्ट सौंप दिया है। लगभग 25 प्रतिशत कारशेड का काम पूरा हो चुका है। हालांकि, अब राज्य सरकार नए विवाद पैदा होने से पहले आरे में मेट्रो कारशेड का काम जल्द से जल्द पूरा करने की कोशिश करने जा रही है. राज्य में शिवसेना-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान आरे में मेट्रो-3 का कार शेड बनाने का फैसला लिया गया था. कुछ कारशेड का काम भी पूरा हो चुका है। हालांकि 2019 में महाविकास अघाड़ी सरकार के सत्ता में आने के बाद पहले ही दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आरे कारशेड का काम स्थगित कर दिया था. ठाकरे ने आरे के बजाय कार शेड को कांजुरमार्ग में स्थानांतरित करने का फैसला किया था, यह कहते हुए कि इससे पर्यावरण को नुकसान होगा। हालांकि इस जगह के मालिकाना हक को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच विवाद हाई कोर्ट तक जा चुका है। इस बीच राज्य में सत्ता का हस्तांतरण होते ही शिंदे-फडणवीस सरकार ने कैबिनेट की पहली ही बैठक में मेट्रो-3 का कार शेड आरे में ही बनाने का फैसला किया. इसी के तहत उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाधिवक्ता को अगली सुनवाई में कोर्ट में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है. ऐसे में देखना होगा कि शिवसेना क्या भूमिका निभाती है।
मुंबई। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पर्यावरणीय क्षरण के कारण आरे में प्रस्तावित कार शेड का काम स्थगित कर दिया था। हालांकि, इस स्थगन को लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बड़ा फैसला लिया है और मुंबई के आरे में मेट्रो कारशेड के काम पर लगी रोक हटा ली गई है. ऐसे में अब साफ है कि आरे में गोष्ठी होगी. इसी तरह ढाई साल से ठप पड़े कारशेड का रास्ता साफ हो गया है। एकनाथ शिंदे के इस फैसले से आरे इलाके में कार शेड का काम तेजी से शुरू होने की संभावना है. शिंदे-फडणवीस सरकार ने एक बार फिर अश्विनी भिड़े को मेट्रो प्रोजेक्ट सौंप दिया है। लगभग पच्चीस प्रतिशत कारशेड का काम पूरा हो चुका है। हालांकि, अब राज्य सरकार नए विवाद पैदा होने से पहले आरे में मेट्रो कारशेड का काम जल्द से जल्द पूरा करने की कोशिश करने जा रही है. राज्य में शिवसेना-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान आरे में मेट्रो-तीन का कार शेड बनाने का फैसला लिया गया था. कुछ कारशेड का काम भी पूरा हो चुका है। हालांकि दो हज़ार उन्नीस में महाविकास अघाड़ी सरकार के सत्ता में आने के बाद पहले ही दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आरे कारशेड का काम स्थगित कर दिया था. ठाकरे ने आरे के बजाय कार शेड को कांजुरमार्ग में स्थानांतरित करने का फैसला किया था, यह कहते हुए कि इससे पर्यावरण को नुकसान होगा। हालांकि इस जगह के मालिकाना हक को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच विवाद हाई कोर्ट तक जा चुका है। इस बीच राज्य में सत्ता का हस्तांतरण होते ही शिंदे-फडणवीस सरकार ने कैबिनेट की पहली ही बैठक में मेट्रो-तीन का कार शेड आरे में ही बनाने का फैसला किया. इसी के तहत उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाधिवक्ता को अगली सुनवाई में कोर्ट में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है. ऐसे में देखना होगा कि शिवसेना क्या भूमिका निभाती है।
बातें - ये आगाही हैं और रास नहीं आता मैं झाग हूँ संभलने को तो काफ़ी है मैं हूँ - सिर्फ झाग । किसी उथल-पुथल का पानी की बेचैनी का । रास नही आता पानी को, पंचनामा जो लिखता सूरज किरनीले हाथो मैं हूँ झाग धो दिया जाता एक पल ! हवा के हाथों मिटा देता । जैसे दारा न तो आग ! ओका सूरज, बौका सूरज :: 87
बातें - ये आगाही हैं और रास नहीं आता मैं झाग हूँ संभलने को तो काफ़ी है मैं हूँ - सिर्फ झाग । किसी उथल-पुथल का पानी की बेचैनी का । रास नही आता पानी को, पंचनामा जो लिखता सूरज किरनीले हाथो मैं हूँ झाग धो दिया जाता एक पल ! हवा के हाथों मिटा देता । जैसे दारा न तो आग ! ओका सूरज, बौका सूरज :: सत्तासी
सामाजिक और धार्मिक सुधार जादोलन नही हो रहा था, क्याकि ब्रिटिश सरकार उसे पूरी मदद नही द रही थी । उनका कहना था कि सरकार सामाजिक प्रतिक्रियावाद और अन्याय के गढ को ध्वस्त करने मे उनकी मदद नही कर रही थी। समाज सुधार संबंधी विधेयक पारित होने की गति बडी धीमी थी और सरकार जो थोडे बहुत काम कर रही थी देश के प्रगतिशील विचारो के दवाव में कर रही थी। उन्नीसवी सदी के पूर्वाद्ध में ब्रिटिश शासका ने स्वयं ही दास व्यवस्था सती प्रथा और बाल मृत्यु जसी कुरीतियों के उमूलन के प्रगतिशील काम किए थे। लेकिन बाद में शासक वर्ग के दष्टिकोण म परिवर्तन आए । एज आफ क सेंट ऐक्ट 1891 मे पास हुआ लेकिन कई दशका के बाद यह पहला सरकारी सुधार काय हुआ था। इन सव कारणा से भारतीय राष्ट्रीय आदोलन के नेताओ के इस विचार को वल मिला कि राजनीतिक सत्ता प्राप्त करना आवश्यक है, जिससे लोग सामाजिक और धार्मिक सुधार की गति का तीव्र कर सकें । सुधार आदोलन मे जनतात्रिक भाव गुरू से ही भारतीय राष्ट्रवाद को प्रवत्ति जनतात्रिक थी । समाज और धम सुधार व आदोलनो मे भी यह प्रवृत्ति विद्यमान रही। कमावश मात्रा में इन आदोलना न सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में सामाजिक विशेषाधिकार को समाप्त करने, देश की सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के जनततीकरण और राष्ट्रीय एकता के रास्ते में लाए गए अडगो जसे जाति आदि अनिष्टकर संस्थाजा को सुधारने या खतम करने के प्रयास किए । वे जाति और लिंग के परे सबको समान अधिकार दिलवाना चाहते थे । राष्ट्रीय जनतात्रिक जागरण का राष्ट्रीय जीवन के प्रत्यक क्षेत्र में असर पड़ा । राजनीति उसके चलते प्रशासनिक सुधार स्वायत्त शासन होमरूल, डामिनियन स्टटस और जतत स्वाधीनता के संघप का जन्म हुआ । सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र म भारतीय राष्ट्रवाद न व्यक्ति स्वातत्य, समानता और आत्मनिणय के सिद्धात का प्रतिपादन किया। इसने जन्म और जम पर आधारित विशेषाधिकार पर जिनसे जानि जसी मस्थाजा का सपोपण हुआ था और जो अजनतात्रिक सिद्धात थे, आघात किया । इस तरह भारतीय राष्ट्रवाद सारत जनतानिक था और मध्ययुगीन सिद्धाता और विदेशी शासन व विरुद्ध राघपरत रहा। समाज और धम सुधार के आदोलन भारत के राष्ट्रीय जागरण के सूचक थे और उनका उद्देश्य था मध्ययुगीन सामाजिक सरचना और धार्मिक दष्टिकाण का मान जनतानि अर्थात व्यक्ति स्वातत्य और मानव एकता के मिद्धाता के आधार पर परिशाधन । सुधारका का कहना था कि भारतीय जनता की राजनीतिक स्वतनता और सामाजिक, आर्थिक और सास्कृतिक प्रगति और राष्ट्रीय एकता के लिए यह आवश्यक था कि सामाजिक सबधो और मस्थाओं का जनतवीकरण हो ।
सामाजिक और धार्मिक सुधार जादोलन नही हो रहा था, क्याकि ब्रिटिश सरकार उसे पूरी मदद नही द रही थी । उनका कहना था कि सरकार सामाजिक प्रतिक्रियावाद और अन्याय के गढ को ध्वस्त करने मे उनकी मदद नही कर रही थी। समाज सुधार संबंधी विधेयक पारित होने की गति बडी धीमी थी और सरकार जो थोडे बहुत काम कर रही थी देश के प्रगतिशील विचारो के दवाव में कर रही थी। उन्नीसवी सदी के पूर्वाद्ध में ब्रिटिश शासका ने स्वयं ही दास व्यवस्था सती प्रथा और बाल मृत्यु जसी कुरीतियों के उमूलन के प्रगतिशील काम किए थे। लेकिन बाद में शासक वर्ग के दष्टिकोण म परिवर्तन आए । एज आफ क सेंट ऐक्ट एक हज़ार आठ सौ इक्यानवे मे पास हुआ लेकिन कई दशका के बाद यह पहला सरकारी सुधार काय हुआ था। इन सव कारणा से भारतीय राष्ट्रीय आदोलन के नेताओ के इस विचार को वल मिला कि राजनीतिक सत्ता प्राप्त करना आवश्यक है, जिससे लोग सामाजिक और धार्मिक सुधार की गति का तीव्र कर सकें । सुधार आदोलन मे जनतात्रिक भाव गुरू से ही भारतीय राष्ट्रवाद को प्रवत्ति जनतात्रिक थी । समाज और धम सुधार व आदोलनो मे भी यह प्रवृत्ति विद्यमान रही। कमावश मात्रा में इन आदोलना न सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में सामाजिक विशेषाधिकार को समाप्त करने, देश की सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के जनततीकरण और राष्ट्रीय एकता के रास्ते में लाए गए अडगो जसे जाति आदि अनिष्टकर संस्थाजा को सुधारने या खतम करने के प्रयास किए । वे जाति और लिंग के परे सबको समान अधिकार दिलवाना चाहते थे । राष्ट्रीय जनतात्रिक जागरण का राष्ट्रीय जीवन के प्रत्यक क्षेत्र में असर पड़ा । राजनीति उसके चलते प्रशासनिक सुधार स्वायत्त शासन होमरूल, डामिनियन स्टटस और जतत स्वाधीनता के संघप का जन्म हुआ । सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र म भारतीय राष्ट्रवाद न व्यक्ति स्वातत्य, समानता और आत्मनिणय के सिद्धात का प्रतिपादन किया। इसने जन्म और जम पर आधारित विशेषाधिकार पर जिनसे जानि जसी मस्थाजा का सपोपण हुआ था और जो अजनतात्रिक सिद्धात थे, आघात किया । इस तरह भारतीय राष्ट्रवाद सारत जनतानिक था और मध्ययुगीन सिद्धाता और विदेशी शासन व विरुद्ध राघपरत रहा। समाज और धम सुधार के आदोलन भारत के राष्ट्रीय जागरण के सूचक थे और उनका उद्देश्य था मध्ययुगीन सामाजिक सरचना और धार्मिक दष्टिकाण का मान जनतानि अर्थात व्यक्ति स्वातत्य और मानव एकता के मिद्धाता के आधार पर परिशाधन । सुधारका का कहना था कि भारतीय जनता की राजनीतिक स्वतनता और सामाजिक, आर्थिक और सास्कृतिक प्रगति और राष्ट्रीय एकता के लिए यह आवश्यक था कि सामाजिक सबधो और मस्थाओं का जनतवीकरण हो ।
३७४ अभ्युदय "नहीं, जय !" राम गंभीर स्वर में बोले, "जनस्थान में न्याय का युद्ध वहीं के निवासी लड़ेंगे। तुम चित्रकूट में ही रहोगे ।" "तो यह सारा वार्तालाप "मेरी बात सुनो।" राम बोले, "हमे, अर्थात् मुझे, सीता तथा लक्ष्मण को अंततः दंडक वन मे ही जाना है- ऐसा अयोध्या से चलते समय ही निश्चित था । मुखर का अपना घर दक्षिण की ओर है, अतः वह भी हमारे साथ जाना चाहेगा । हम लोग यहां इसलिए रुके हुए थे, कि हमे अपनी अनुपस्थिति में घटित अयोध्या के समाचार मिल सके । भरत की नीति स्पष्ट हो सके; और हम आगे की योजना तय कर सकें, यह कार्य अब पूर्ण हो चुका है, अतः हमारा चित्रकूट छोड़, दक्षिण की ओर जाना निश्चित है..." "किंतु आर्य !..." कुवलय ने कुछ कहना चाहा। "धैर्य रखो, कुवलय !" राम मुसकराए, "तुम लोगों को मझधार मे छोड़कर नही जाऊंगा। हमारा जाना निश्चित अवश्य है; किंतु जाने से पूर्व हमे कुछ प्रबंध करना है। राक्षसी आतंक इस क्षेत्र मे अभी पर्याप्त मात्रा में है। पर इतना नही कि मैं यहां से हिल न सकू । उद्घोष के रूप में यहां एक ऐसा व्यक्ति है, जो आजन्म अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करेगा। संयोग से, उसके पास अच्छे साथी है । वे लोग जागरूक, संगठित तथा बलिदानी है । अन्य अनेक ग्रामों में भी जन क्रान्ति की प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी है। अनेक आश्रमों में भी यह चिंतन जड़ पकड़ चुका है, कि अत्याचार को समाप्त कर, मानव को सुखी बनाना; ब्रह्म को पाने से अधिक महत्त्वपूर्ण है । अतः जाने से पूर्व, इन सब लोगों में संयोजन का कार्य करने के लिए, मैं अपना आश्रम किसी उपयुक्त उत्तराधिकारी को सौंपना चाहता था । तुम लोगों से उत्तम उत्तराधिकारी और कौन होगा । मेरा विचार है, हम लोग तुम्हारी शस्त्र - परिचालन तथा निर्माण शिक्षा पूरी होने तक यहां रुकें, और फिर - यह आश्रम तुम्हें सौंपकर आगे बढ़ जाएं।" "आर्य ! क्या यह दायित्व हमारे कंधों के लिए भारी नहीं पड़ेगा ?" त्रिलोचन घबराया-सा लग रहा था । "नहीं !" राम ने उसकी आंखों में देखा, "तुमने स्वयं अत्याचार सहा है। फिर तुम्हे तपस्वी जीवन का अभ्यास है, जो उद्घोष और उसके साथियों को नही है । अतः जागरूक श्रमिक तथा बुद्धिजीवी जनता में भाईचारा बनाए रखने के लिए तुम लोग यहां रहोगे और उद्घोष से प्रत्येक क्षेत्र में सहयोग करोगे । किंतु सावधान, मित्रो ! बुद्धिजीवी होने के अहंकार में जन-सामान्य से दूर मत हो जाना, अन्यथा तुम शोषकों के हाथ के खिलौने बन, जन-सामान्य के शत्रु हो, क्रांति की प्रक्रिया की सबसे बड़ी बाधा बन जाओगे।" "बार्थ ! हमें सहयोग दें।" कुबलय ने सिर को तनिक झुकाया, "हम आपकी
तीन सौ चौहत्तर अभ्युदय "नहीं, जय !" राम गंभीर स्वर में बोले, "जनस्थान में न्याय का युद्ध वहीं के निवासी लड़ेंगे। तुम चित्रकूट में ही रहोगे ।" "तो यह सारा वार्तालाप "मेरी बात सुनो।" राम बोले, "हमे, अर्थात् मुझे, सीता तथा लक्ष्मण को अंततः दंडक वन मे ही जाना है- ऐसा अयोध्या से चलते समय ही निश्चित था । मुखर का अपना घर दक्षिण की ओर है, अतः वह भी हमारे साथ जाना चाहेगा । हम लोग यहां इसलिए रुके हुए थे, कि हमे अपनी अनुपस्थिति में घटित अयोध्या के समाचार मिल सके । भरत की नीति स्पष्ट हो सके; और हम आगे की योजना तय कर सकें, यह कार्य अब पूर्ण हो चुका है, अतः हमारा चित्रकूट छोड़, दक्षिण की ओर जाना निश्चित है..." "किंतु आर्य !..." कुवलय ने कुछ कहना चाहा। "धैर्य रखो, कुवलय !" राम मुसकराए, "तुम लोगों को मझधार मे छोड़कर नही जाऊंगा। हमारा जाना निश्चित अवश्य है; किंतु जाने से पूर्व हमे कुछ प्रबंध करना है। राक्षसी आतंक इस क्षेत्र मे अभी पर्याप्त मात्रा में है। पर इतना नही कि मैं यहां से हिल न सकू । उद्घोष के रूप में यहां एक ऐसा व्यक्ति है, जो आजन्म अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करेगा। संयोग से, उसके पास अच्छे साथी है । वे लोग जागरूक, संगठित तथा बलिदानी है । अन्य अनेक ग्रामों में भी जन क्रान्ति की प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी है। अनेक आश्रमों में भी यह चिंतन जड़ पकड़ चुका है, कि अत्याचार को समाप्त कर, मानव को सुखी बनाना; ब्रह्म को पाने से अधिक महत्त्वपूर्ण है । अतः जाने से पूर्व, इन सब लोगों में संयोजन का कार्य करने के लिए, मैं अपना आश्रम किसी उपयुक्त उत्तराधिकारी को सौंपना चाहता था । तुम लोगों से उत्तम उत्तराधिकारी और कौन होगा । मेरा विचार है, हम लोग तुम्हारी शस्त्र - परिचालन तथा निर्माण शिक्षा पूरी होने तक यहां रुकें, और फिर - यह आश्रम तुम्हें सौंपकर आगे बढ़ जाएं।" "आर्य ! क्या यह दायित्व हमारे कंधों के लिए भारी नहीं पड़ेगा ?" त्रिलोचन घबराया-सा लग रहा था । "नहीं !" राम ने उसकी आंखों में देखा, "तुमने स्वयं अत्याचार सहा है। फिर तुम्हे तपस्वी जीवन का अभ्यास है, जो उद्घोष और उसके साथियों को नही है । अतः जागरूक श्रमिक तथा बुद्धिजीवी जनता में भाईचारा बनाए रखने के लिए तुम लोग यहां रहोगे और उद्घोष से प्रत्येक क्षेत्र में सहयोग करोगे । किंतु सावधान, मित्रो ! बुद्धिजीवी होने के अहंकार में जन-सामान्य से दूर मत हो जाना, अन्यथा तुम शोषकों के हाथ के खिलौने बन, जन-सामान्य के शत्रु हो, क्रांति की प्रक्रिया की सबसे बड़ी बाधा बन जाओगे।" "बार्थ ! हमें सहयोग दें।" कुबलय ने सिर को तनिक झुकाया, "हम आपकी
अमरावती- / दि. 25 सावली ग्रामीण व शहरी महिला विकास संस्था, गजानन टाउनशिप, कठोरा रोड, अमरावती की ओर से पुलिस स्टेशन नांदगांव पेठ में रक्षाबंधन निमित्त वहां के अधिकारी कर्मचारियों को राखी बांधने का उपक्रम उत्साह से मनाया गया. अपने व अपने देश की दिन रात सुरक्षा करनेवाले पुलिस विभाग के अधिकारी व कर्मचारी के विषय में अपनेपन की भावना व इस उपक्रम का महत्व संस्था की अध्यक्षा रंजीता तराल ने व्यक्त किया. इस समय नांदगांव पुलिस स्टेशन के थानेदार प्रवीण काले ने इस उपक्रम की प्रशंसा की. इस अवसर पर संस्था की महिला पदाधिकारी वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रवीण काले, दुय्यक पुलिस निरीक्षक हनुमंत डोपेवाड, गणेश राउत, पीएसआय, एएसपी मोहन चोखट, राजुभाई काले, संजय देउलकर, संजय नेवारे, प्रकाश पाल, जय व्होलगरे, धैर्यशील, कुर्हेकर, गजानन तायडे, संजय देशमुख, ललित कुजामभा, स. पो. नि. पाटिल मॅडम, पीएसआय उदय मॅडम प्रमुख रूप से उपस्थित थे. इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संस्था के अध्यक्ष रंजीता तराल, सचिव डॉ. सौ. प्रतिभा राजपुत, कविता गतफने, देवागना उमाले, मेघा ठाकरे, निशा शर्मा ने परिश्रम किया.
अमरावती- / दि. पच्चीस सावली ग्रामीण व शहरी महिला विकास संस्था, गजानन टाउनशिप, कठोरा रोड, अमरावती की ओर से पुलिस स्टेशन नांदगांव पेठ में रक्षाबंधन निमित्त वहां के अधिकारी कर्मचारियों को राखी बांधने का उपक्रम उत्साह से मनाया गया. अपने व अपने देश की दिन रात सुरक्षा करनेवाले पुलिस विभाग के अधिकारी व कर्मचारी के विषय में अपनेपन की भावना व इस उपक्रम का महत्व संस्था की अध्यक्षा रंजीता तराल ने व्यक्त किया. इस समय नांदगांव पुलिस स्टेशन के थानेदार प्रवीण काले ने इस उपक्रम की प्रशंसा की. इस अवसर पर संस्था की महिला पदाधिकारी वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रवीण काले, दुय्यक पुलिस निरीक्षक हनुमंत डोपेवाड, गणेश राउत, पीएसआय, एएसपी मोहन चोखट, राजुभाई काले, संजय देउलकर, संजय नेवारे, प्रकाश पाल, जय व्होलगरे, धैर्यशील, कुर्हेकर, गजानन तायडे, संजय देशमुख, ललित कुजामभा, स. पो. नि. पाटिल मॅडम, पीएसआय उदय मॅडम प्रमुख रूप से उपस्थित थे. इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संस्था के अध्यक्ष रंजीता तराल, सचिव डॉ. सौ. प्रतिभा राजपुत, कविता गतफने, देवागना उमाले, मेघा ठाकरे, निशा शर्मा ने परिश्रम किया.