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Budget 2023: देश का हर तबका बजट का इंतजार करता है. देश के हर नागरिक को कई उम्मीदें रहती है. 2024 में होने वाले आम चुनावों से पहले यह मौजूदा सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा, लेकिन इससे पहले सरकार आम बजट में गोल्ड (Gold) को लेकर बड़ा ऐलान कर सकती है.
Budget 2023: 1 फरवरी, 2023 को देश का आम बजट पेश होने जा रहा है. केंद्र वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) कल संसद में बजट पेश करेंगी. देश का हर तबका बजट का इंतजार करता है. देश के हर नागरिक को कई उम्मीदें रहती है और हर नागरिक यहीं सोचता है कि सरकार उसके इस बार क्या कुछ नया लेकर आई है. 2024 में होने वाले आम चुनावों से पहले यह मौजूदा सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा, लेकिन इससे पहले सरकार आम बजट में गोल्ड (Gold) को लेकर बड़ा ऐलान कर सकती है.
इस बाद सरकार बजट में सोने पर आयात शुल्क (Import Duty on Gold) कम करने का ऐलान कर सकती है. इससे पहले सरकार ने 2022 में सोने पर आयात शुल्क 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 कर दिया था. इसी के साथ सरकार ने 2.5% एग्रीकल्चर इन्फ्रा सेस जोड़कर कुल शुल्क को 15% कर दिया था, जिसकी वजह से ज्वेलरी बाजार को काभी नुकसान उठाना पड़ा था. आयात शुल्क बढ़ने से भारतीय आभूषण उद्योग के लिए इनपुट लागत बढ़ गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2022 सोने के आभूषणों का कुल सकल निर्यात 4.55% घटकर 4,635.64 करोड़ रुपये रहा था. जबकि पिछले साल इसी अवधि के लिए यह 4,856.47 करोड़ रुपये था. दिसंबर 2022 में सभी प्रकार की स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी का कुल सकल निर्यात 21.95% घटकर 2,265.90 करोड़ रुपये रहा. यह दिसंबर 2021 में 2,903.01 करोड़ रुपये था.
आपको बता दें कि ज्वेलरी के MD ने अपने बयान में कहा कि सरकार को बजट में सोने पर आयात शुल्क को घटाकर 9 फीसदी पर ले आना चाहिए. आभूषण उद्योग को सरकार से विशेष ध्यान की आवश्यकता है. यह एक बहुत बड़ा निर्यातक है, रोजगार के बड़े अवसर पैदा करता है, साथ ही अत्यधिक विनियमित है.
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Budget दो हज़ार तेईस: देश का हर तबका बजट का इंतजार करता है. देश के हर नागरिक को कई उम्मीदें रहती है. दो हज़ार चौबीस में होने वाले आम चुनावों से पहले यह मौजूदा सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा, लेकिन इससे पहले सरकार आम बजट में गोल्ड को लेकर बड़ा ऐलान कर सकती है. Budget दो हज़ार तेईस: एक फरवरी, दो हज़ार तेईस को देश का आम बजट पेश होने जा रहा है. केंद्र वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल संसद में बजट पेश करेंगी. देश का हर तबका बजट का इंतजार करता है. देश के हर नागरिक को कई उम्मीदें रहती है और हर नागरिक यहीं सोचता है कि सरकार उसके इस बार क्या कुछ नया लेकर आई है. दो हज़ार चौबीस में होने वाले आम चुनावों से पहले यह मौजूदा सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा, लेकिन इससे पहले सरकार आम बजट में गोल्ड को लेकर बड़ा ऐलान कर सकती है. इस बाद सरकार बजट में सोने पर आयात शुल्क कम करने का ऐलान कर सकती है. इससे पहले सरकार ने दो हज़ार बाईस में सोने पर आयात शुल्क सात.पाँच फीसदी से बढ़ाकर बारह.पाँच कर दिया था. इसी के साथ सरकार ने दो.पाँच% एग्रीकल्चर इन्फ्रा सेस जोड़कर कुल शुल्क को पंद्रह% कर दिया था, जिसकी वजह से ज्वेलरी बाजार को काभी नुकसान उठाना पड़ा था. आयात शुल्क बढ़ने से भारतीय आभूषण उद्योग के लिए इनपुट लागत बढ़ गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर दो हज़ार बाईस सोने के आभूषणों का कुल सकल निर्यात चार.पचपन% घटकर चार,छः सौ पैंतीस.चौंसठ करोड़ रुपये रहा था. जबकि पिछले साल इसी अवधि के लिए यह चार,आठ सौ छप्पन.सैंतालीस करोड़ रुपये था. दिसंबर दो हज़ार बाईस में सभी प्रकार की स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी का कुल सकल निर्यात इक्कीस.पचानवे% घटकर दो,दो सौ पैंसठ.नब्बे करोड़ रुपये रहा. यह दिसंबर दो हज़ार इक्कीस में दो,नौ सौ तीन.एक करोड़ रुपये था. आपको बता दें कि ज्वेलरी के MD ने अपने बयान में कहा कि सरकार को बजट में सोने पर आयात शुल्क को घटाकर नौ फीसदी पर ले आना चाहिए. आभूषण उद्योग को सरकार से विशेष ध्यान की आवश्यकता है. यह एक बहुत बड़ा निर्यातक है, रोजगार के बड़े अवसर पैदा करता है, साथ ही अत्यधिक विनियमित है.
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पीएम मोदी ने कहा कि लंबे समय बाद स्कूल जाना, दोस्तों से मिलना, क्लॉस में पढ़ाई करना, इसका आनंद ही कुछ और होगा। लेकिन उत्साह के साथ-साथ कोरोना नियमों का पालन सभी को पूरी कड़ाई से करना है। आज शिक्षक पर्व पर अनेक नई परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ है। ये पहल इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि देश अभी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। आज जो योजनाएं शुरु हुई हैं, वो भविष्य के भारत को आकार देने में अहम भूमिका निभाएंगी।
उन्होंने कहा कि आज विद्यांजली 2. 0, निष्ठा 3. 0, टॉकिंग बुक्स और यूएलडी बेस आईएसएल डिक्शनरी जैसे नए कार्यक्रम और व्यवस्थाएं लॉन्च की गई हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि यह हमारे शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी। पीएम मोदी ने कहा कि इस कोरोना काल में आप सभी दिखा चुके है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था का सामर्थ कितना ज्यादा है। चुनौतियां बहुत ज्यादा थीं लेकिन आप लोगों ने इसका तेजी से समाधान किया। ऑनलाइन क्लासेस, ग्रुप वीडियो कॉल, ऑनलाइन प्रोजेक्ट, ऑनलाइन एग्जाम पहले ऐसे शब्द बहुत से लोगों ने सुने भी नहीं थे। लेकिन आज इन्हें सहजता से दैनिक जीवन का हिस्सा बन गए हैं।
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पीएम मोदी ने कहा कि लंबे समय बाद स्कूल जाना, दोस्तों से मिलना, क्लॉस में पढ़ाई करना, इसका आनंद ही कुछ और होगा। लेकिन उत्साह के साथ-साथ कोरोना नियमों का पालन सभी को पूरी कड़ाई से करना है। आज शिक्षक पर्व पर अनेक नई परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ है। ये पहल इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि देश अभी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। आज जो योजनाएं शुरु हुई हैं, वो भविष्य के भारत को आकार देने में अहम भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि आज विद्यांजली दो. शून्य, निष्ठा तीन. शून्य, टॉकिंग बुक्स और यूएलडी बेस आईएसएल डिक्शनरी जैसे नए कार्यक्रम और व्यवस्थाएं लॉन्च की गई हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि यह हमारे शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी। पीएम मोदी ने कहा कि इस कोरोना काल में आप सभी दिखा चुके है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था का सामर्थ कितना ज्यादा है। चुनौतियां बहुत ज्यादा थीं लेकिन आप लोगों ने इसका तेजी से समाधान किया। ऑनलाइन क्लासेस, ग्रुप वीडियो कॉल, ऑनलाइन प्रोजेक्ट, ऑनलाइन एग्जाम पहले ऐसे शब्द बहुत से लोगों ने सुने भी नहीं थे। लेकिन आज इन्हें सहजता से दैनिक जीवन का हिस्सा बन गए हैं।
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बॉलीवुड के बेहतरीन एक्टर्स में से एक नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपने अभी तक के करियर में कई शानदार और यादगार फिल्में की हैं जिसकी छाप आज तक उनके फैंस के मन में है. नवाजुद्दीन सिद्दीकी के स्टारडम की जहां तक बात है तो वो हमेशा ही अपने फैंस के लिए एक खुली किताब रहे हैं. अब चाहे वो उनकी प्रोफेशनल लाइफ हो या उनकी पर्सनल लाइफ हो, उनके फैंस को हमेशा उनकी हर चीज़ के बारे में पता ही होता है.
सिद्दीकी की पत्नी आलिया सिद्दीकी ने उनपर कई गंभीर आरोप भी लगाए और अपने वकील से कहलवाया कि नवाजुद्दीन और उनके परिवार के लोगों ने पिछले हफ्ते उनकी क्लाइंट आलिया सिद्दीकी को फूड, बेड, नहाने के लिए बाथरूम' अवेलेबल नहीं कराया.
आलिया सिद्दीकी के वकील रिजवान सिद्दीकी ने अपने एक बयान में कहा है कि, " नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और उनके परिवार के सदस्यों ने मेरी क्लाइंट आलिया सिद्दीकी को घर से निकालने के लिए हर संभव कोशिश की. उन्होंने आलिया के खिलाफ एक शिकायत भी दर्ज करा दी है जिसमें पुलिस के जरिए उन्होंने गिरफ्तार करने की धमकी दी जा रही है और हर दिन सूरज छिपने के बाद उनकी क्लाइंट को पुलिस स्टेशन बुलाया जा रहा है."
आगे अपने बयान में रिजवान सिद्दीकी ने कहा कि, "हालांकि, मैं डायरेक्टली पुलिस डिपार्टमेंट के एक्शन और फेलियर को उनके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहता, फिर भी फैक्ट ये है कि कोई भी पुलिस अधिकारी कभी भी मेरे क्लाइंट के अधिकारों की रक्षा के लिए नहीं आया, भले ही पुलिस अधिकारियों के सामने उसकी मॉडस्टी का अपमान किया गया हो." वकील ने आगे कहा कि पुलिस अधिकारी के सामने केवल नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के साथ उसके संबंधों पर सवाल उठाया गया था, लेकिन यहां तक कि नाबालिग बेटे की वैधता पर भी सवाल उठाया गया था. फिर भी पुलिस अधिकारी ने आईपीसी की धारा 509 के तहत मेरे मुवक्किल द्वारा दी गई लिखित शिकायत पर कार्रवाई नहीं की."
आपको बता दें, पिछले हफ्ते आलिया की ओर से ये कहा गया था कि नवाजुद्दीन की मां द्वारा पैसों के विवाद को लेकर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी जिसके बाद उनके घर पर उन्हें परेशान किया जा रहा है. आलिया सिद्दीकी फिलहाल नवाजुद्दीन के अंधेरी वाले घर में रहती हैं.
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बॉलीवुड के बेहतरीन एक्टर्स में से एक नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपने अभी तक के करियर में कई शानदार और यादगार फिल्में की हैं जिसकी छाप आज तक उनके फैंस के मन में है. नवाजुद्दीन सिद्दीकी के स्टारडम की जहां तक बात है तो वो हमेशा ही अपने फैंस के लिए एक खुली किताब रहे हैं. अब चाहे वो उनकी प्रोफेशनल लाइफ हो या उनकी पर्सनल लाइफ हो, उनके फैंस को हमेशा उनकी हर चीज़ के बारे में पता ही होता है. सिद्दीकी की पत्नी आलिया सिद्दीकी ने उनपर कई गंभीर आरोप भी लगाए और अपने वकील से कहलवाया कि नवाजुद्दीन और उनके परिवार के लोगों ने पिछले हफ्ते उनकी क्लाइंट आलिया सिद्दीकी को फूड, बेड, नहाने के लिए बाथरूम' अवेलेबल नहीं कराया. आलिया सिद्दीकी के वकील रिजवान सिद्दीकी ने अपने एक बयान में कहा है कि, " नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी और उनके परिवार के सदस्यों ने मेरी क्लाइंट आलिया सिद्दीकी को घर से निकालने के लिए हर संभव कोशिश की. उन्होंने आलिया के खिलाफ एक शिकायत भी दर्ज करा दी है जिसमें पुलिस के जरिए उन्होंने गिरफ्तार करने की धमकी दी जा रही है और हर दिन सूरज छिपने के बाद उनकी क्लाइंट को पुलिस स्टेशन बुलाया जा रहा है." आगे अपने बयान में रिजवान सिद्दीकी ने कहा कि, "हालांकि, मैं डायरेक्टली पुलिस डिपार्टमेंट के एक्शन और फेलियर को उनके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहता, फिर भी फैक्ट ये है कि कोई भी पुलिस अधिकारी कभी भी मेरे क्लाइंट के अधिकारों की रक्षा के लिए नहीं आया, भले ही पुलिस अधिकारियों के सामने उसकी मॉडस्टी का अपमान किया गया हो." वकील ने आगे कहा कि पुलिस अधिकारी के सामने केवल नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के साथ उसके संबंधों पर सवाल उठाया गया था, लेकिन यहां तक कि नाबालिग बेटे की वैधता पर भी सवाल उठाया गया था. फिर भी पुलिस अधिकारी ने आईपीसी की धारा पाँच सौ नौ के तहत मेरे मुवक्किल द्वारा दी गई लिखित शिकायत पर कार्रवाई नहीं की." आपको बता दें, पिछले हफ्ते आलिया की ओर से ये कहा गया था कि नवाजुद्दीन की मां द्वारा पैसों के विवाद को लेकर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी जिसके बाद उनके घर पर उन्हें परेशान किया जा रहा है. आलिया सिद्दीकी फिलहाल नवाजुद्दीन के अंधेरी वाले घर में रहती हैं.
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नई दिल्लीः धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के खिलाफ पटना के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष मामला दर्ज कर लिया गया है। दरअसल, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने प्रयागराज के संगम में कैबिनेट मंत्रियों के साथ सीएम योगी के स्नान करने पर तंज कसा था। शशि थरूर ने तंज कसते हुए ट्वीट किया था कि, 'गंगा भी स्वच्छ रखनी है और पाप भी यहीं धोने हैं। इस संगम में सब नंगे हैं! जय गंगा मैया की! '
कई यूजर्स ने थरूर के इस ट्वीट को लेकर उन्हें जमकर ट्रोल किया था और कांग्रेस नेताओं की पुरानी तस्वीरें साझा की थी। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को प्रयागराज में सीएम योगी ने अपने मंत्रिमंडल के साथ संगम तट पर स्थित किले में अक्षयवट का दर्शन कर पूजा अर्चन की थी। सीएम योगी ने सरस्वती कूप के भी दर्शन किए थे, इसके बाद सीएम योगी ने अपने मंत्रियों के साथ संगम में डुबकी लगाई थी। इस दौरान उनके साथ अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि और अन्य साधु-संतों ने भी संगम में आस्था की डुबकी लगाई थी।
आपको बता दें कि शशि थरूर के इस टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई नेताओं ने तल्ख़ प्रतिक्रिया दी थी। यूपी के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा था कि थरूर को कुंभ का महत्व कैसे पता होगा, जिस परिवेश और संस्कृति में उनका रहना है, वे लोग ये कुम्भ को नहीं समझ सकते हैं। सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा था कि आप लोगों ने बहुत से पाप किए हैं, आप भी कुंभ में एक पवित्र डुबकी लगाइए और हो सकता है कि भागवान आपके गुनाहों को क्षमा कर दें।
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नई दिल्लीः धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के खिलाफ पटना के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष मामला दर्ज कर लिया गया है। दरअसल, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने प्रयागराज के संगम में कैबिनेट मंत्रियों के साथ सीएम योगी के स्नान करने पर तंज कसा था। शशि थरूर ने तंज कसते हुए ट्वीट किया था कि, 'गंगा भी स्वच्छ रखनी है और पाप भी यहीं धोने हैं। इस संगम में सब नंगे हैं! जय गंगा मैया की! ' कई यूजर्स ने थरूर के इस ट्वीट को लेकर उन्हें जमकर ट्रोल किया था और कांग्रेस नेताओं की पुरानी तस्वीरें साझा की थी। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को प्रयागराज में सीएम योगी ने अपने मंत्रिमंडल के साथ संगम तट पर स्थित किले में अक्षयवट का दर्शन कर पूजा अर्चन की थी। सीएम योगी ने सरस्वती कूप के भी दर्शन किए थे, इसके बाद सीएम योगी ने अपने मंत्रियों के साथ संगम में डुबकी लगाई थी। इस दौरान उनके साथ अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि और अन्य साधु-संतों ने भी संगम में आस्था की डुबकी लगाई थी। आपको बता दें कि शशि थरूर के इस टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने तल्ख़ प्रतिक्रिया दी थी। यूपी के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा था कि थरूर को कुंभ का महत्व कैसे पता होगा, जिस परिवेश और संस्कृति में उनका रहना है, वे लोग ये कुम्भ को नहीं समझ सकते हैं। सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा था कि आप लोगों ने बहुत से पाप किए हैं, आप भी कुंभ में एक पवित्र डुबकी लगाइए और हो सकता है कि भागवान आपके गुनाहों को क्षमा कर दें।
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ब्यूटी एक्सपर्ट शहनाज हुसैन से जानें त्वचा को साफ करने का सही तरीका और होममेड क्लीनजर्स बनाने की विधि।
सुंदर दिखने के लिए महिलाएं बहुत सारे कॉस्मैटिक प्रोडक्ट्स और घरेलू नुस्खों को अपनाती हैं, जिससे उनकी त्वचा बेदाग और चमकदार दिखने लगे। मगर त्वचा की सुंदरता के लिए केवल इतना ही काफी नहीं है। त्वचा सुंदर दिखे इसके लिए त्वचा की सफाई बहुत जरूरी है, नहीं तो त्वचा पर मुंहासे और रिंकल्स आने लगते हैं।
जब बात त्वचा को क्लीन करने की होती है तो ज्यादातर महिलाएं साबुन या फेसवॉश से चेहरा वॉश करने को ही त्वचा की सफाई समझती हैं। लेकिन त्वचा को साफ करने का भी एक सही तरीका होता है। अगर आप उसे फॉलो करती हैं तो त्वचा संबंधित हर तरह की पेरशानी से आपको छुटकारा मिल जाएगा। आपको बता दें कि त्वचा को पूरे दिन में पसीने, तेल और धूल-मिट्टी न जाने किन-किन चीजों का सामना करना पड़ता है, जो त्वचा के नेचुरल पीएच बैलेंस को बिगाड़ देती हैं, जिससे तरह-तहर की स्किन प्रॉब्लम्स का सामना करना पड़ता है। ऐसे में त्वचा की ठीक तरह से साफ-सफाई की जाए तो इन सब से बचा जा सकता है।
आमतौर पर महिलाएं साबुन से चेहरे को साफ कर लेती हैं। मगर साबुन त्वचा की डीप क्लीनिंग करने में सक्षम नहीं होता है। बल्कि साबुन का इस्तेमाल करने पर त्वचा में जमा ऑयल और पोर्स में छुपी गंदगी को रिमूव नहीं किया जा सकता है। साथ ही साबुन त्वचा के पीएच बैलेंस को भी बिगाड़ देता है। साबुन में कठोर क्लीनजिंग एजेंट्स होते हैं, जो त्वचा के मॉइश्चर को खत्म कर उन्हें रूखा और बेजान बना देते हैं। इसलिए बहुत जरूरी है कि त्वचा को क्लीन करने की प्रक्रिया में इस बात का ध्यान रखा जाए कि वह अच्छी तरह से साफ हो और उसके पीएच बैलेंस को भी कोई नुकसान न पहुंचे। इतना ही नहीं, इस बात का भी ध्यान रखें कि अगर आप त्वचा पर मेकअप का इस्तेमाल करती हैं तो रात में सोने से पहले उसे साफ जरूर कर लें। यदि आप ऐसा नहीं करती हैं और मेकअप के साथ ही सो जाती हैं तो आपकी त्वचा को ऑक्सीजन नहीं मिलता है और इससे आपको मुंहासे हो सकते हैं।
आपकी त्वचा ड्राई, ऑयली या फिर नार्मल जैसी भी हो आपको साबुन की जगह क्लीनजिंग जैल या फिर क्लीनजिंग क्रीम का यूज करना चाहिए। इससे आपकी त्वचा नरिश रहती है और सॉफ्ट बनी रहती है। अगर आप क्लीनजिंग क्रीम का यूज कर रही हैं तो आपको कॉटन से चेहरे को साफ (चेहरा धोते वक्त भूल से भी न करें ये गलतियां) करना चाहिए। इससे आपकी त्वचा साफ भी हो जाती है और हाइड्रेटेड भी रहती है।
- अगर आपकी त्वचा बहुत अधिक ऑयली है या फिर चेहरे के टी जोन पर ऑयल इकट्ठा हो जाता है तो आपको साबुन की जगह फेस वॉश (नेचुरल चीजों से धोएं अपना चेहरा ) का इस्तेमाल करना चाहिए। आपको अपनी त्वचा के टाइप के अनुसार ही फेस वॉश चुनना चाहिए।
- अगर आपकी त्वचा ऑयली है तो आपको नीम और तुलसी जैसे इंग्रीडियंट्स वाला फेस वॉश यूज करना चाहिए ताकि आपके चेहरे पर मुंहासे न हों।
- अगर त्वचा पर अधिक दाग-धब्बे और मुंहासे हैं तो आपको मेडिकेटेड क्लीनजर का इस्तेमाल करना चाहिए, यह आपके चेहरे पर इकट्ठा हो रहे अतिरिक्त ऑयल को ही रिमूव नहीं करते हैं बल्कि त्वचा को तरोताजा भी बनाते हैं।
इन दोनों ही सामग्रियों को अच्छे से मिला लें और एक बॉटल में भर लें। इसे पूरे चेहरे पर लगाएं और कॉटन से चेहरे को साफ कर लें। अगर यह मिश्रण बच जाए तो आप इसे फ्रिज में भी रख सकती हैं।
इन सभी सामग्रियों को आपस में मिला लें और चेहरे पर कॉटन की मदद से लगाएं। 10 मिनट बाद कॉटन से इसे साफ कर लें और पानी से अच्छी तरह चेहरे को साफ कर लें।
(शहनाज हुसैन भारत की फेमस ब्यूटी और हेयर केयर एक्सपर्ट्स में से एक हैं। इतना ही नहीं, वह 'शहनाज हुसैन ग्रुप' की चेयरपर्सन, फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं। शहनाज हुसैन के कई हर्बल प्रोडक्ट्स आपको बाजार में आसानी से मिल जाएंगे। ब्यूटी के क्षेत्र में आर्यूवेद को बढ़ावा देने के लिए उन्हें कई अवॉर्ड्स से नवाजा भी जा चुका है। )
अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी तो इसे शेयर जरूर करें। इसी तरह और भी शहनाज हुसैन की ब्यूटी टिप्स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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ब्यूटी एक्सपर्ट शहनाज हुसैन से जानें त्वचा को साफ करने का सही तरीका और होममेड क्लीनजर्स बनाने की विधि। सुंदर दिखने के लिए महिलाएं बहुत सारे कॉस्मैटिक प्रोडक्ट्स और घरेलू नुस्खों को अपनाती हैं, जिससे उनकी त्वचा बेदाग और चमकदार दिखने लगे। मगर त्वचा की सुंदरता के लिए केवल इतना ही काफी नहीं है। त्वचा सुंदर दिखे इसके लिए त्वचा की सफाई बहुत जरूरी है, नहीं तो त्वचा पर मुंहासे और रिंकल्स आने लगते हैं। जब बात त्वचा को क्लीन करने की होती है तो ज्यादातर महिलाएं साबुन या फेसवॉश से चेहरा वॉश करने को ही त्वचा की सफाई समझती हैं। लेकिन त्वचा को साफ करने का भी एक सही तरीका होता है। अगर आप उसे फॉलो करती हैं तो त्वचा संबंधित हर तरह की पेरशानी से आपको छुटकारा मिल जाएगा। आपको बता दें कि त्वचा को पूरे दिन में पसीने, तेल और धूल-मिट्टी न जाने किन-किन चीजों का सामना करना पड़ता है, जो त्वचा के नेचुरल पीएच बैलेंस को बिगाड़ देती हैं, जिससे तरह-तहर की स्किन प्रॉब्लम्स का सामना करना पड़ता है। ऐसे में त्वचा की ठीक तरह से साफ-सफाई की जाए तो इन सब से बचा जा सकता है। आमतौर पर महिलाएं साबुन से चेहरे को साफ कर लेती हैं। मगर साबुन त्वचा की डीप क्लीनिंग करने में सक्षम नहीं होता है। बल्कि साबुन का इस्तेमाल करने पर त्वचा में जमा ऑयल और पोर्स में छुपी गंदगी को रिमूव नहीं किया जा सकता है। साथ ही साबुन त्वचा के पीएच बैलेंस को भी बिगाड़ देता है। साबुन में कठोर क्लीनजिंग एजेंट्स होते हैं, जो त्वचा के मॉइश्चर को खत्म कर उन्हें रूखा और बेजान बना देते हैं। इसलिए बहुत जरूरी है कि त्वचा को क्लीन करने की प्रक्रिया में इस बात का ध्यान रखा जाए कि वह अच्छी तरह से साफ हो और उसके पीएच बैलेंस को भी कोई नुकसान न पहुंचे। इतना ही नहीं, इस बात का भी ध्यान रखें कि अगर आप त्वचा पर मेकअप का इस्तेमाल करती हैं तो रात में सोने से पहले उसे साफ जरूर कर लें। यदि आप ऐसा नहीं करती हैं और मेकअप के साथ ही सो जाती हैं तो आपकी त्वचा को ऑक्सीजन नहीं मिलता है और इससे आपको मुंहासे हो सकते हैं। आपकी त्वचा ड्राई, ऑयली या फिर नार्मल जैसी भी हो आपको साबुन की जगह क्लीनजिंग जैल या फिर क्लीनजिंग क्रीम का यूज करना चाहिए। इससे आपकी त्वचा नरिश रहती है और सॉफ्ट बनी रहती है। अगर आप क्लीनजिंग क्रीम का यूज कर रही हैं तो आपको कॉटन से चेहरे को साफ करना चाहिए। इससे आपकी त्वचा साफ भी हो जाती है और हाइड्रेटेड भी रहती है। - अगर आपकी त्वचा बहुत अधिक ऑयली है या फिर चेहरे के टी जोन पर ऑयल इकट्ठा हो जाता है तो आपको साबुन की जगह फेस वॉश का इस्तेमाल करना चाहिए। आपको अपनी त्वचा के टाइप के अनुसार ही फेस वॉश चुनना चाहिए। - अगर आपकी त्वचा ऑयली है तो आपको नीम और तुलसी जैसे इंग्रीडियंट्स वाला फेस वॉश यूज करना चाहिए ताकि आपके चेहरे पर मुंहासे न हों। - अगर त्वचा पर अधिक दाग-धब्बे और मुंहासे हैं तो आपको मेडिकेटेड क्लीनजर का इस्तेमाल करना चाहिए, यह आपके चेहरे पर इकट्ठा हो रहे अतिरिक्त ऑयल को ही रिमूव नहीं करते हैं बल्कि त्वचा को तरोताजा भी बनाते हैं। इन दोनों ही सामग्रियों को अच्छे से मिला लें और एक बॉटल में भर लें। इसे पूरे चेहरे पर लगाएं और कॉटन से चेहरे को साफ कर लें। अगर यह मिश्रण बच जाए तो आप इसे फ्रिज में भी रख सकती हैं। इन सभी सामग्रियों को आपस में मिला लें और चेहरे पर कॉटन की मदद से लगाएं। दस मिनट बाद कॉटन से इसे साफ कर लें और पानी से अच्छी तरह चेहरे को साफ कर लें। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी तो इसे शेयर जरूर करें। इसी तरह और भी शहनाज हुसैन की ब्यूटी टिप्स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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होता है, दूसरे ज्ञाता हो ।
अर्थात् एक जनपदीय शिल्पों में निपुणता प्राप्त करने से पुरुष प्रसंशनीय वह व्यक्ति श्रेष्ठ समझा जाता है जो वेदितृ जनों के मध्य में कई शास्त्रो का
प्राचीन श-" चरणों में विकसित हुआ। अब जनपदों के नये युग में दो प्रकार की नई शिक्षा का विकाश हुआ जिनका उल्लेख यास्क के इस वाक्य में है। एक तो जनपदी वृत्ति या शिल्पों में कुशलता प्रतिष्ठा का कारण था । दूसरे ज्ञान के क्षेत्र में जो किसी भी एक शास्त्र या विज्ञा के जानकार होते थे वे वेदिता कहलाते थे।
जनपदों में अनेक दिग्गज आचार्य हुए जिन्होंने कितने ही नये शास्त्रों की उद्भावना की। सच पूँछा जाय तो भारतीय साहित्य में विविध शास्त्र और दर्शनों की मूल प्रतिष्ठा का आरम्भ इसी युग में हुआ । इस समय राष्ट्र में ज्ञान का चौमुखी विस्फोट हुआ उसका प्रमाण उपनिषदों में, महाभारत में एवं प्राचीन और बौद्ध साहित्य में एवं जैन साहित्य में पाया जाता है । वौद्धिक विकाश के क्षेत्र में यही स्थिति यूनान के पुर राज्यों में हुई थी । वहाँ भी पुर राज्यों का युग ज्ञान के चरमोत्कर्ष का युग था । पुराने ढंग की होमरीय शिक्षा का स्थान नये दार्शनिक चिन्तन और नये शिल्पों ने ले लिया था।
शासन के विविध प्रकारमुख्यत
भारतीय सभा की तुलना यूनानी पुर राज्यों की सभा के साथ करने से उसके संगठन पर मूल्यवान प्रकाश पड़ता है। यूनान में सभा की सदस्यता प्राप्त करने के लिए नागरिक को अट्ठारह वर्ष की आयु प्राप्त करना आवश्यक था । तब उसका नाम जन की सूची मे पंचीबद्ध कर लिया जाता था । किन्तु उसके बाद भी उसके लिए दो वर्ष की सैनिक शिक्षा अनिवार्य थी। अतएव बीस वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने के बाद ही नागरिक को अट्टारह अधिवेशनों में व्यवहारतः सम्मिलित हो पाते थे।
यह योग्यता अट्ठारह वर्ष की आयु में प्राप्त होती थी । कवचहर की ध्वनि यही है कि वह युवा कुमार सैनिक शिक्षा प्राप्त करने लगता था। उसकी समाप्ति के बाद वह सुवा सभेय अर्थात् सभा में भाग लेने योग्य होता था । सभेय वैदिक शब्द जो इस प्रकार है"सभयो युवारस्य यजमानस्य वीरो जायताम् ।"
गण या संघ में प्रतिनिधित्व का आधार कुलों का संगठन था । प्रत्येक कुल एक इकाई माना जाता था। एक कुल का एक प्रतिनिधि शासन में भाग लेने का अधिकारी होता था, जो राजा कहलाता था ।
"गृहे - गृहे हि राजानः । "
{ सभापर्व - 14 / 2}
लिच्छवि गण में 7707 कुल और उनके उतने ही राजा थे। चेत जनपद मे साठ सहस्र क्षत्रियों की गणना की जाती थी, और उन सब की उपाधि राजा थी ।
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होता है, दूसरे ज्ञाता हो । अर्थात् एक जनपदीय शिल्पों में निपुणता प्राप्त करने से पुरुष प्रसंशनीय वह व्यक्ति श्रेष्ठ समझा जाता है जो वेदितृ जनों के मध्य में कई शास्त्रो का प्राचीन श-" चरणों में विकसित हुआ। अब जनपदों के नये युग में दो प्रकार की नई शिक्षा का विकाश हुआ जिनका उल्लेख यास्क के इस वाक्य में है। एक तो जनपदी वृत्ति या शिल्पों में कुशलता प्रतिष्ठा का कारण था । दूसरे ज्ञान के क्षेत्र में जो किसी भी एक शास्त्र या विज्ञा के जानकार होते थे वे वेदिता कहलाते थे। जनपदों में अनेक दिग्गज आचार्य हुए जिन्होंने कितने ही नये शास्त्रों की उद्भावना की। सच पूँछा जाय तो भारतीय साहित्य में विविध शास्त्र और दर्शनों की मूल प्रतिष्ठा का आरम्भ इसी युग में हुआ । इस समय राष्ट्र में ज्ञान का चौमुखी विस्फोट हुआ उसका प्रमाण उपनिषदों में, महाभारत में एवं प्राचीन और बौद्ध साहित्य में एवं जैन साहित्य में पाया जाता है । वौद्धिक विकाश के क्षेत्र में यही स्थिति यूनान के पुर राज्यों में हुई थी । वहाँ भी पुर राज्यों का युग ज्ञान के चरमोत्कर्ष का युग था । पुराने ढंग की होमरीय शिक्षा का स्थान नये दार्शनिक चिन्तन और नये शिल्पों ने ले लिया था। शासन के विविध प्रकारमुख्यत भारतीय सभा की तुलना यूनानी पुर राज्यों की सभा के साथ करने से उसके संगठन पर मूल्यवान प्रकाश पड़ता है। यूनान में सभा की सदस्यता प्राप्त करने के लिए नागरिक को अट्ठारह वर्ष की आयु प्राप्त करना आवश्यक था । तब उसका नाम जन की सूची मे पंचीबद्ध कर लिया जाता था । किन्तु उसके बाद भी उसके लिए दो वर्ष की सैनिक शिक्षा अनिवार्य थी। अतएव बीस वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने के बाद ही नागरिक को अट्टारह अधिवेशनों में व्यवहारतः सम्मिलित हो पाते थे। यह योग्यता अट्ठारह वर्ष की आयु में प्राप्त होती थी । कवचहर की ध्वनि यही है कि वह युवा कुमार सैनिक शिक्षा प्राप्त करने लगता था। उसकी समाप्ति के बाद वह सुवा सभेय अर्थात् सभा में भाग लेने योग्य होता था । सभेय वैदिक शब्द जो इस प्रकार है"सभयो युवारस्य यजमानस्य वीरो जायताम् ।" गण या संघ में प्रतिनिधित्व का आधार कुलों का संगठन था । प्रत्येक कुल एक इकाई माना जाता था। एक कुल का एक प्रतिनिधि शासन में भाग लेने का अधिकारी होता था, जो राजा कहलाता था । "गृहे - गृहे हि राजानः । " { सभापर्व - चौदह / दो} लिच्छवि गण में सात हज़ार सात सौ सात कुल और उनके उतने ही राजा थे। चेत जनपद मे साठ सहस्र क्षत्रियों की गणना की जाती थी, और उन सब की उपाधि राजा थी ।
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गणतंत्र दिवस के मौके पर राजधानी के एसएमएस स्टेडियम में राज्य स्तरीय समारोह में राज्यपाल कलराज मिश्र ने ध्वजारोहण किया। राज्यपाल ने परेड का निरीक्षण किया। राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने से पहले राज्यपाल कलराज मिश्र और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में कोरोना गाइडलाइन के चलते इस बार उत्कृष्ट काम करने वाले अफसर कर्मचारियों और सामाजिक क्षेत्र के लोगों का सम्मान कार्यक्रम नहीं रखा गया।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सुबह 7 बजे सीएम निवास पर ध्वजारोहण किया और सलामी ली। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें गार्ड् आ आॅनर दिया। बड़ी चौपड़ पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ध्वजारोहण किया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश वासियों के गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। गहलोत ने कहा कि यह राष्ट्रीय पर्व संवैधानिक मूल्यों में लोगों की आस्था का प्रतीक है। आज के दिन हम सभी देशवासी भारतीय लोकतंत्र को सशक्त बनाने तथा इस मुल्क को एक एवं अखंड रखने का संकल्प लें।
राजधानी में प्रदेश कांग्रेस कािर्यालय पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने ध्वजारोहण किया। कांग्रेस सेवादल कार्यकर्ताओं ने सलामी दी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता मौजूद रहे। इसके बाद गहलोत ने लोगों को संबोधित किया। बीजेपी मुख्यालय में प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने ध्वजारोहण किया।
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गणतंत्र दिवस के मौके पर राजधानी के एसएमएस स्टेडियम में राज्य स्तरीय समारोह में राज्यपाल कलराज मिश्र ने ध्वजारोहण किया। राज्यपाल ने परेड का निरीक्षण किया। राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने से पहले राज्यपाल कलराज मिश्र और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में कोरोना गाइडलाइन के चलते इस बार उत्कृष्ट काम करने वाले अफसर कर्मचारियों और सामाजिक क्षेत्र के लोगों का सम्मान कार्यक्रम नहीं रखा गया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सुबह सात बजे सीएम निवास पर ध्वजारोहण किया और सलामी ली। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें गार्ड् आ आॅनर दिया। बड़ी चौपड़ पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ध्वजारोहण किया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश वासियों के गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। गहलोत ने कहा कि यह राष्ट्रीय पर्व संवैधानिक मूल्यों में लोगों की आस्था का प्रतीक है। आज के दिन हम सभी देशवासी भारतीय लोकतंत्र को सशक्त बनाने तथा इस मुल्क को एक एवं अखंड रखने का संकल्प लें। राजधानी में प्रदेश कांग्रेस कािर्यालय पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने ध्वजारोहण किया। कांग्रेस सेवादल कार्यकर्ताओं ने सलामी दी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता मौजूद रहे। इसके बाद गहलोत ने लोगों को संबोधित किया। बीजेपी मुख्यालय में प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने ध्वजारोहण किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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महराजगंज जिले के ठूठीबारी थाना क्षेत्र अंतर्गत मैरी गांव किनारे एक अर्धजला शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई । सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक ने घटना की जानकारी लेते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम भेज कार्यवाई में जुट गई है। पुलिस ने बताया कि शव की शिनाख्त भी करवाई जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद यह पता चल पाएगा कि अर्धजलित शव की मौत कैसे हुई थी।
ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र के मैरी से बोदना जाने वाले मार्ग पर सड़क किनारे गड्ढे में बगल के खेत से काटा गया सरसों का डंठल रखा हुआ था। आज जब ग्रामीण उस रास्ते से गुजर रहे थे। इसी दौरान देखा कि डंठल में आग लगी हुई है जिसमें एक शव जल रहा है। इसकी सूचना गांव में दी गई जिसके बाद यह सुनकर लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई।
सूचना के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस ने शव की शिनाख्त में जुट गए हैं लेकिन शव की शिनाख्त नहीं हो पाई जिसके बाद पुलिस ने अर्धजलित शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज विधिक कार्यवाही में जुट गई है । पुलिस अधीक्षक डॉ कौस्तुभ ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद और अर्धजलित व्यक्ति की मौत कैसे हुई थी इसकी जानकारी हो पाएगी साथ ही साथ सोशल मीडिया के माध्यम से शव की शिनाख्त भी करवाई जा रही है ।
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महराजगंज जिले के ठूठीबारी थाना क्षेत्र अंतर्गत मैरी गांव किनारे एक अर्धजला शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई । सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक ने घटना की जानकारी लेते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम भेज कार्यवाई में जुट गई है। पुलिस ने बताया कि शव की शिनाख्त भी करवाई जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद यह पता चल पाएगा कि अर्धजलित शव की मौत कैसे हुई थी। ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र के मैरी से बोदना जाने वाले मार्ग पर सड़क किनारे गड्ढे में बगल के खेत से काटा गया सरसों का डंठल रखा हुआ था। आज जब ग्रामीण उस रास्ते से गुजर रहे थे। इसी दौरान देखा कि डंठल में आग लगी हुई है जिसमें एक शव जल रहा है। इसकी सूचना गांव में दी गई जिसके बाद यह सुनकर लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई। सूचना के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस ने शव की शिनाख्त में जुट गए हैं लेकिन शव की शिनाख्त नहीं हो पाई जिसके बाद पुलिस ने अर्धजलित शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज विधिक कार्यवाही में जुट गई है । पुलिस अधीक्षक डॉ कौस्तुभ ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद और अर्धजलित व्यक्ति की मौत कैसे हुई थी इसकी जानकारी हो पाएगी साथ ही साथ सोशल मीडिया के माध्यम से शव की शिनाख्त भी करवाई जा रही है ।
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नई दिल्ली। नागरिकता संशोधित कानून के उपर पूरे देश में उग्र प्रदर्शन हो रहे हैं। इसका जबरदस्त विरोध हो रहा है। कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को टीवी पर कहा कि कांग्रेस पार्टी सरकार की कार्रवाई की निंदा करती है। सोनिया गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने और अपनी चिंताओं को दर्ज करने का अधिकार है। उन्होंने एक बार फिर कहा कि नागरिकता संशोधन कानून भेदभावपूर्ण है। नोटबंदी की तरह एक बार फिर एक-एक व्यक्ति को अपनी एवं अपने पूर्वजों की नागरिकता साबित करने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ेगा।
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नई दिल्ली। नागरिकता संशोधित कानून के उपर पूरे देश में उग्र प्रदर्शन हो रहे हैं। इसका जबरदस्त विरोध हो रहा है। कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को टीवी पर कहा कि कांग्रेस पार्टी सरकार की कार्रवाई की निंदा करती है। सोनिया गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने और अपनी चिंताओं को दर्ज करने का अधिकार है। उन्होंने एक बार फिर कहा कि नागरिकता संशोधन कानून भेदभावपूर्ण है। नोटबंदी की तरह एक बार फिर एक-एक व्यक्ति को अपनी एवं अपने पूर्वजों की नागरिकता साबित करने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ेगा।
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।सिंसपा (Sinsapa)
भगवान शनि देव और हनुमान जी को कुंभ राशि का आराध्य देव माना जाता है। कुम्भ राशि के सिंसपा नाम की लड़कियों की उत्तेजना और परिसंचरण को यूरेनस ग्रह द्वारा नियंत्रित किया जाता है। जिस समय वृक्ष फलों और फूलों से भर जाते हैं उस मौसम में सिंसपा नाम की लड़कियाँ जन्म लेते हैं। इन्हें गुस्सा जल्दी और अधिक आता है। इन सिंसपा नाम की लड़कियों को अस्थमा, एलर्जी, सूजन और हृदय रोगों का खतरा रहता है। इस सिंसपा नाम की लड़कियों में बुद्धि, ऊर्जा और प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती और ये डोरसों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। इन्हें दोस्ती करना पसंद होता है।
अगर आप अपने बच्चे का नाम सिंसपा रखने की सोच रहें हैं तो पहले उसका मतलब जान लेना जरूरी है। आपको बता दें कि सिंसपा का मतलब अशोक वृक्ष होता है। अशोक वृक्ष होना बहुत अच्छा माना जाता है और इसकी झलक सिंसपा नाम के लोगों में भी दिखती है। सिंसपा नाम रखने से पहले इसका अर्थ जानना जरूरी होता है। जैसे कि सिंसपा नाम का मतलब अशोक वृक्ष होता है और इस अर्थ का प्रभाव सिंसपा नाम के व्यक्ति के स्वभाव में भी दिखने लगता है। सिंसपा नाम का अर्थ जानने के बाद आप भी अपने बच्चे को सिंसपा नाम आराम से दे सकते हैं। यह माना जाता है कि यदि आपका नाम सिंसपा है और इसका अर्थ अशोक वृक्ष है, तो इसका गहरा प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव पर भी पड़ता है। आगे सिंसपा नाम की राशि, सिंसपा का लकी नंबर व इस नाम के अशोक वृक्ष के बारे में संक्षेप में बताया है।
जिन लड़कियों का नाम सिंसपा है, उनका शुभ अंक 8 होता है और वे शनि ग्रह के अधीन आती हैं। सिंसपा नाम वाली लड़कियां धन की बचत करने में निपुण होती हैं, इसलिए इनके पास हमेशा धन रहता है। सिंसपा नाम की लड़कियां अपनी शर्तों पर जीती हैं। ये अपने नियम खुद बनाती हैं। सिंसपा नाम की लड़कियों को संगीत बहुत पसंद होता है। दूसरों की मदद या किस्मत पर सिंसपा नाम की लड़कियां आश्रित नहीं रहती। ये खुद के प्रयासों से सफलता की ऊंचाई तक पहुंचती हैं। सिंसपा नाम की लड़कियां दयालु स्वभाव की होती हैं लेकिन इन्हें अपने जीवन में सफलता थोड़ी देर से मिलती है।
कुंभ, सिंसपा नाम की लड़कियों की राशि है। सिंसपा नाम की महिलाएं आत्मनियंत्रित और प्रतिभावान होती हैं। सिंसपा नाम की महिलाएं बुद्धिमान होने के साथ-साथ अपनी समझदारी पर गर्व भी करती हैं। अक्सर सिंसपा नाम की लड़कियों को समझ पाना मुश्किल होता है। यूं तो सिंसपा नाम की युवतियां बहुत सामाजिक होती हैं, लेकिन अपने दोस्तों को सावधानी से चुनती हैं। सिंसपा नाम वाली लड़कियों का व्यक्तित्व सहानुभूतिपूर्ण होता है और ये हमेशा ज़रूरतमंदों की मदद करती हैं।
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।सिंसपा भगवान शनि देव और हनुमान जी को कुंभ राशि का आराध्य देव माना जाता है। कुम्भ राशि के सिंसपा नाम की लड़कियों की उत्तेजना और परिसंचरण को यूरेनस ग्रह द्वारा नियंत्रित किया जाता है। जिस समय वृक्ष फलों और फूलों से भर जाते हैं उस मौसम में सिंसपा नाम की लड़कियाँ जन्म लेते हैं। इन्हें गुस्सा जल्दी और अधिक आता है। इन सिंसपा नाम की लड़कियों को अस्थमा, एलर्जी, सूजन और हृदय रोगों का खतरा रहता है। इस सिंसपा नाम की लड़कियों में बुद्धि, ऊर्जा और प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती और ये डोरसों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। इन्हें दोस्ती करना पसंद होता है। अगर आप अपने बच्चे का नाम सिंसपा रखने की सोच रहें हैं तो पहले उसका मतलब जान लेना जरूरी है। आपको बता दें कि सिंसपा का मतलब अशोक वृक्ष होता है। अशोक वृक्ष होना बहुत अच्छा माना जाता है और इसकी झलक सिंसपा नाम के लोगों में भी दिखती है। सिंसपा नाम रखने से पहले इसका अर्थ जानना जरूरी होता है। जैसे कि सिंसपा नाम का मतलब अशोक वृक्ष होता है और इस अर्थ का प्रभाव सिंसपा नाम के व्यक्ति के स्वभाव में भी दिखने लगता है। सिंसपा नाम का अर्थ जानने के बाद आप भी अपने बच्चे को सिंसपा नाम आराम से दे सकते हैं। यह माना जाता है कि यदि आपका नाम सिंसपा है और इसका अर्थ अशोक वृक्ष है, तो इसका गहरा प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव पर भी पड़ता है। आगे सिंसपा नाम की राशि, सिंसपा का लकी नंबर व इस नाम के अशोक वृक्ष के बारे में संक्षेप में बताया है। जिन लड़कियों का नाम सिंसपा है, उनका शुभ अंक आठ होता है और वे शनि ग्रह के अधीन आती हैं। सिंसपा नाम वाली लड़कियां धन की बचत करने में निपुण होती हैं, इसलिए इनके पास हमेशा धन रहता है। सिंसपा नाम की लड़कियां अपनी शर्तों पर जीती हैं। ये अपने नियम खुद बनाती हैं। सिंसपा नाम की लड़कियों को संगीत बहुत पसंद होता है। दूसरों की मदद या किस्मत पर सिंसपा नाम की लड़कियां आश्रित नहीं रहती। ये खुद के प्रयासों से सफलता की ऊंचाई तक पहुंचती हैं। सिंसपा नाम की लड़कियां दयालु स्वभाव की होती हैं लेकिन इन्हें अपने जीवन में सफलता थोड़ी देर से मिलती है। कुंभ, सिंसपा नाम की लड़कियों की राशि है। सिंसपा नाम की महिलाएं आत्मनियंत्रित और प्रतिभावान होती हैं। सिंसपा नाम की महिलाएं बुद्धिमान होने के साथ-साथ अपनी समझदारी पर गर्व भी करती हैं। अक्सर सिंसपा नाम की लड़कियों को समझ पाना मुश्किल होता है। यूं तो सिंसपा नाम की युवतियां बहुत सामाजिक होती हैं, लेकिन अपने दोस्तों को सावधानी से चुनती हैं। सिंसपा नाम वाली लड़कियों का व्यक्तित्व सहानुभूतिपूर्ण होता है और ये हमेशा ज़रूरतमंदों की मदद करती हैं।
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Rahul Gandhi: बीते दिनों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी अडानी प्रकरण को लेकर ट्वीट किया था। जिसमें उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार से कुछ नेताओं का हवाला देकर सवाल पूछे थे। सवाल यह था कि आखिर अडानी की कंपनियों में ₹20,000 करोड़ बेनामी पैसे किसके हैं?
Tigers in India: पीएम मोदी ने कहा, हम सभी एक बेहत महत्वपूर्ण पड़ाव के साक्षी बन रहे हैं, प्रोजेक्ट टाइगर को 50 वर्ष हो गए हैं। प्रोजेक्ट टाइगर की सफलता भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए गौरव का विषय है। भारत ने टाइगर को न सिर्फ बचाया है बल्कि उसे फलने फूलने का एक बेहतरीन ईको सिस्टम दिया है। ये हमारे लिए और भी सुखद है कि जिस समय हमने आजादी के 75 साल पूरे किए है।
PM Narendra Modi At bandipur Tiger Reserve: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट कर लिखा, आज PM बांदीपुर में 50 साल पहले लॉन्च हुए प्रोजेक्ट टाइगर का पूरा क्रेडिट लेंगे। वह खूब तमाशा करेंगे। जबकि पर्यावरण, जंगल, वन्य जीव एवं वन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों की रक्षा के लिए बनाए गए सभी कानून ध्वस्त किए जा रहे हैं।
ध्यान रहे कि 2023 में 9 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसमें से चार राज्यों में बीजेपी की सरकार बन चुकी है। इन राज्यों में जहां बीजेपी ने जीत का परचम लहाराया था, तो वहीं कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था। वहीं कर्नाटक में साल के मध्य में तो छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मिजोरम, राजस्थान और तेलंगाना में साल के अंत में चुनाव होने हैं।
Poster War: पोस्टर में भाजपा ने लिखा है, 'डिग्री तो बहाना है केजरीवाल को भ्रष्टाचार से ध्यान हटाना है। ' बता दें कि ये पोस्टर दिल्ली में पार्टी ऑफिस के पास भाजपा नेता आशीष सूद ने लगवाए है। ये पोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
CBI Diamond Jubilee Celebrations: पीएम मोदी ने कहा कि, बरसों तक उन्होंने भी एक इको सिस्टम बनाया है। ये इको सिस्टम अक्सर उनके काले कारनामों को कवर देने के लिए आप जैसी संस्थाओं की छवि बिगाड़ने के लिए एक्टिव हो जाते है। एजेंसी पर भी हमला बोल देते है। ये लोग आपका ध्यान भटकाते रहेंगे। लेकिन आपको अपने काम पर फोकस रखना है कोई भी भ्रष्टाचारी बचना नहीं चाहिए।
Navjot Singh Sidhu: तानाशाही हो गई और जब कभी-भी तानाशाही हुई है, तो क्रांति हुई है और आज की तारीख में क्रांति का नाम राहुल गांधी है। सिद्धू ने कहा कि मैं संविधान को ग्रंथ मानता हूं, लेकिन अफसोस आज की तारीख में संविधान और संवैधानिक संस्थाएं गुलाम हो चुकी हैं।
Kapil Sibal: राज्यसभा सांसद सिब्बल ने जर्मनी को थैक्स कहने पर दिग्विजय सिंह पर भड़के गए है। उन्होंने कांग्रेस नेता को निशाने पर लेते हुए लिखा," हमें आगे चलने के लिए बैसाखियों की जरूरत नहीं है, हमें विदेश से सपोर्ट की जरूरत नहीं है। "
PM Modi: उधर, सर्वे के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गुलजार हो चुका है। सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि इस बार सत्ता में बीजेपी की ही वापसी होगी? फिलहाल इस पर कुछ भी कह पाना मुश्किल है। ध्यान रहे कि उत्तर प्रदेश सर्वाधिक लोकसभा की सीटें हैं, तो ऐसे में सभी सियासी दलों के लिए यह सूबा संदेनशील माना जाता है।
Rahul Gandhi Defamation Case: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राहुल गांधी की सजा पर ट्वीट कर लिखा,कायर, "तानाशाह भाजपा सरकार राहुल गांधी और विपक्ष से तिलमिलाई हुई है क्योंकि हम उनके काले कारनामों को उजागर कर रहे हैं। JPC की माँग कर रहे हैं। राजनैतिक दिवालियेपन की शिकार मोदी सरकार, ED, पुलिस भेजती है, राजनैतिक भाषणों पर केस थोपती है। हम Higher Court में अपील करेंगे। "
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Rahul Gandhi: बीते दिनों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी अडानी प्रकरण को लेकर ट्वीट किया था। जिसमें उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार से कुछ नेताओं का हवाला देकर सवाल पूछे थे। सवाल यह था कि आखिर अडानी की कंपनियों में बीस रुपया,शून्य करोड़ बेनामी पैसे किसके हैं? Tigers in India: पीएम मोदी ने कहा, हम सभी एक बेहत महत्वपूर्ण पड़ाव के साक्षी बन रहे हैं, प्रोजेक्ट टाइगर को पचास वर्ष हो गए हैं। प्रोजेक्ट टाइगर की सफलता भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए गौरव का विषय है। भारत ने टाइगर को न सिर्फ बचाया है बल्कि उसे फलने फूलने का एक बेहतरीन ईको सिस्टम दिया है। ये हमारे लिए और भी सुखद है कि जिस समय हमने आजादी के पचहत्तर साल पूरे किए है। PM Narendra Modi At bandipur Tiger Reserve: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट कर लिखा, आज PM बांदीपुर में पचास साल पहले लॉन्च हुए प्रोजेक्ट टाइगर का पूरा क्रेडिट लेंगे। वह खूब तमाशा करेंगे। जबकि पर्यावरण, जंगल, वन्य जीव एवं वन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों की रक्षा के लिए बनाए गए सभी कानून ध्वस्त किए जा रहे हैं। ध्यान रहे कि दो हज़ार तेईस में नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसमें से चार राज्यों में बीजेपी की सरकार बन चुकी है। इन राज्यों में जहां बीजेपी ने जीत का परचम लहाराया था, तो वहीं कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था। वहीं कर्नाटक में साल के मध्य में तो छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मिजोरम, राजस्थान और तेलंगाना में साल के अंत में चुनाव होने हैं। Poster War: पोस्टर में भाजपा ने लिखा है, 'डिग्री तो बहाना है केजरीवाल को भ्रष्टाचार से ध्यान हटाना है। ' बता दें कि ये पोस्टर दिल्ली में पार्टी ऑफिस के पास भाजपा नेता आशीष सूद ने लगवाए है। ये पोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। CBI Diamond Jubilee Celebrations: पीएम मोदी ने कहा कि, बरसों तक उन्होंने भी एक इको सिस्टम बनाया है। ये इको सिस्टम अक्सर उनके काले कारनामों को कवर देने के लिए आप जैसी संस्थाओं की छवि बिगाड़ने के लिए एक्टिव हो जाते है। एजेंसी पर भी हमला बोल देते है। ये लोग आपका ध्यान भटकाते रहेंगे। लेकिन आपको अपने काम पर फोकस रखना है कोई भी भ्रष्टाचारी बचना नहीं चाहिए। Navjot Singh Sidhu: तानाशाही हो गई और जब कभी-भी तानाशाही हुई है, तो क्रांति हुई है और आज की तारीख में क्रांति का नाम राहुल गांधी है। सिद्धू ने कहा कि मैं संविधान को ग्रंथ मानता हूं, लेकिन अफसोस आज की तारीख में संविधान और संवैधानिक संस्थाएं गुलाम हो चुकी हैं। Kapil Sibal: राज्यसभा सांसद सिब्बल ने जर्मनी को थैक्स कहने पर दिग्विजय सिंह पर भड़के गए है। उन्होंने कांग्रेस नेता को निशाने पर लेते हुए लिखा," हमें आगे चलने के लिए बैसाखियों की जरूरत नहीं है, हमें विदेश से सपोर्ट की जरूरत नहीं है। " PM Modi: उधर, सर्वे के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गुलजार हो चुका है। सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि इस बार सत्ता में बीजेपी की ही वापसी होगी? फिलहाल इस पर कुछ भी कह पाना मुश्किल है। ध्यान रहे कि उत्तर प्रदेश सर्वाधिक लोकसभा की सीटें हैं, तो ऐसे में सभी सियासी दलों के लिए यह सूबा संदेनशील माना जाता है। Rahul Gandhi Defamation Case: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राहुल गांधी की सजा पर ट्वीट कर लिखा,कायर, "तानाशाह भाजपा सरकार राहुल गांधी और विपक्ष से तिलमिलाई हुई है क्योंकि हम उनके काले कारनामों को उजागर कर रहे हैं। JPC की माँग कर रहे हैं। राजनैतिक दिवालियेपन की शिकार मोदी सरकार, ED, पुलिस भेजती है, राजनैतिक भाषणों पर केस थोपती है। हम Higher Court में अपील करेंगे। "
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ऑटोमोटिव वाहनों की एक श्रृंखला "टाइफून" ऑफ-रोड क्षमता वाले बख्तरबंद वाहनों को संदर्भित करती है। इस महीने, सेंट्रल मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट की इकाइयों को इस श्रृंखला से संबंधित नए बख्तरबंद वाहन "टाइफून" और एक बख्तरबंद एम्बुलेंस "लिंजा" प्राप्त हुआ।
एजेंसी कैसे सूचित करती है "Interfax", यह आज सेंट्रल मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट की प्रेस सर्विस में बताया गया।
उन्होंने बताया कि टाइफून बख्तरबंद कारों को समारा क्षेत्र में भेजा गया था, जहां रूसी सशस्त्र बलों की शांति इकाई तैनात है। और चेल्याबिंस्क, नोवोसिबिर्स्क और सेवरडलोव्स्क क्षेत्रों में सैन्य इकाइयों को एक-एक लेंस एम्बुलेंस बख्तरबंद कार मिली। के अतिरिक्त, टैंक चेल्याबिंस्क क्षेत्र में भाग को चार-धुरी कामाज़ के आधार पर बनाए गए ईंधन AC-14-63501 के लिए ऑटोमोबाइल टैंकों से भर दिया गया था।
टाइफून वाहनों ने कवच सुरक्षा बढ़ा दी है और कर्मियों को परिवहन के लिए डिज़ाइन किया गया है। चालक और चालक दल पूरे चौतरफा दृश्य प्रदान करने वाले वीडियो कैमरों की मदद से स्थिति का निरीक्षण कर सकते हैं।
बख्तरबंद कार "टाइफून" के आधार पर बनाई गई बख्तरबंद एम्बुलेंस "लिंजा" की मदद से, युद्ध के मैदान पर सीधे घायलों को खोजना और निकालना संभव है।
पहली बार टाइफून परिवार के बख्तरबंद वाहनों को 2011 में प्रशिक्षण मैदान में प्रदर्शित किया गया था। और 9 मई 2014 को, इन कारों को पहले से ही विजय दिवस के सम्मान में परेड में आम जनता को दिखाया गया था।
- इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
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ऑटोमोटिव वाहनों की एक श्रृंखला "टाइफून" ऑफ-रोड क्षमता वाले बख्तरबंद वाहनों को संदर्भित करती है। इस महीने, सेंट्रल मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट की इकाइयों को इस श्रृंखला से संबंधित नए बख्तरबंद वाहन "टाइफून" और एक बख्तरबंद एम्बुलेंस "लिंजा" प्राप्त हुआ। एजेंसी कैसे सूचित करती है "Interfax", यह आज सेंट्रल मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट की प्रेस सर्विस में बताया गया। उन्होंने बताया कि टाइफून बख्तरबंद कारों को समारा क्षेत्र में भेजा गया था, जहां रूसी सशस्त्र बलों की शांति इकाई तैनात है। और चेल्याबिंस्क, नोवोसिबिर्स्क और सेवरडलोव्स्क क्षेत्रों में सैन्य इकाइयों को एक-एक लेंस एम्बुलेंस बख्तरबंद कार मिली। के अतिरिक्त, टैंक चेल्याबिंस्क क्षेत्र में भाग को चार-धुरी कामाज़ के आधार पर बनाए गए ईंधन AC-चौदह-तिरेसठ हज़ार पाँच सौ एक के लिए ऑटोमोबाइल टैंकों से भर दिया गया था। टाइफून वाहनों ने कवच सुरक्षा बढ़ा दी है और कर्मियों को परिवहन के लिए डिज़ाइन किया गया है। चालक और चालक दल पूरे चौतरफा दृश्य प्रदान करने वाले वीडियो कैमरों की मदद से स्थिति का निरीक्षण कर सकते हैं। बख्तरबंद कार "टाइफून" के आधार पर बनाई गई बख्तरबंद एम्बुलेंस "लिंजा" की मदद से, युद्ध के मैदान पर सीधे घायलों को खोजना और निकालना संभव है। पहली बार टाइफून परिवार के बख्तरबंद वाहनों को दो हज़ार ग्यारह में प्रशिक्षण मैदान में प्रदर्शित किया गया था। और नौ मई दो हज़ार चौदह को, इन कारों को पहले से ही विजय दिवस के सम्मान में परेड में आम जनता को दिखाया गया था। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
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है और न पका सकती है ।" हमे परमार्थ-सत् और कल्पना मे अनिवार्यत विभेद करना ही चाहिये । कल्पना एक मानसिक यथार्थता है जो केवल एक कल्पना के रूप मे ही यथार्थ है ।
यह कि यथार्थता की दो सर्वथा भिन्न धारणायें है, वौद्धमत का सर्वाधिक सामान्य रूप से ज्ञात तथ्य है । प्राचीन परिभाषा यह है कि सत्ता का अर्थ प्रमेयत्व है । मत्ता वारह आयतनो मे विभाजित है जिनमे से अन्तिम आयतन समस्त मानसिक धर्मों को धारण करता है। किन्तु महायान ने इस रूप में परिभाषा को परिवर्तित कर दिया है कि "जो अर्थक्रियाकारी है वही मत् है " . " और ऐसा केवल बाह्य परम मूर्त और विशेष क्षण ही होता है । आन्तक विषय विज्ञान और आकार होते हैं । आकार सदैव सामान्य होते हैं । ये विशुद्ध कल्पना ( अथवा आकाश मे पुष्प ) ६ तथा ऐमी कल्पना में विभक्त है जिनका क्षण के मत् के साथ एक परोक्ष अथवा 'सामान्य' सम्बन्ध होता है । ये अन्तिम अनिवार्यत सामान्य ही होती हैं।
इस विषय पर वौद्ध अनुभववादी सम्प्रदाय के समान हैं । तुकी० डब्लू ० जेम्स एमेज़ इन रैडिकल एम्पिरिभिउम, पृ० ३२-३३, और वी० रसेल एनिलिसिस ऑफ दि माइण्ड, पृ० १३७ ओर बाद - इस अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अन्तर के साथ कि परमार्थ-सत् केवल क्षण ही होता है ।
'यत् प्रमेयम् तत् मत्' । कभी कभी तैयायिको की भी यही परिभाषा है जो 'मत्ता - सामान्यम्' और 'स्वरूप-मत्ता' मे विभेद करते हैं । तुकी० न्याकणि० का प्रामाण्यवाद सम्बन्धी प्रकरण, पृ० १६२ और वाद ।
अ द्वादश - आयतनानि =मर्वम् ज्ञेयम् ।
धर्म आयतन = धर्मा ।
यद् अर्थ-क्रिया-कारि तत् सत् = परमार्थ-सत् ।
अनुपारुय ।
७ वौद्धो के परार्थानुमान के सिद्धान्त द्वारा भी इसकी पुष्टि होती है । क्योकि साध्य आधारवाक्य का वह सवादित्व अर्थ है जो विकल्पो की और उनके नियमो की परोक्ष यथार्थता है, और साध्य आधारवाक्य का अर्थ इन विकल्पो से किसी ऐन्द्रिक धर्म के परमार्थ सत् का सन्दर्भ है; यह अन्तिम ही परमार्थ सत् है ।
बण्ड रसल के अनुसार वाह्य विशेष और मानसिक सामान्य के वीध का सम्बन्ध हेतुक होता है । यह बौद्ध - सिद्धान्त के उस अश के अनुरूप है जो विभिन्न विशेषो द्वारा उत्पन्न विभिन्न उद्दीपको के बीच नमानता के द्वारा सामान्य की यथार्थता को स्थानान्तरित कर देता है । इसके अतिरिक्त हेतुत्व ही पर्याप्त नहीं है । इसके अतिरिक्त भी, विशेष और तदनुम्प मामान्य के बीच एक "सारूप्य" होता है। इस सारूप्य का क्या अर्थ है, इसका अगले अध्याय मे विवेचन किया जायगा ।
१ एनेलिसिस ऑफ माइण्ड, पृ० २२७ बाह्य निरीक्षण के लिये उपलब्ध तथ्य प्रमुखत अभ्यास होते हैं जिनकी यह विचित्रता होती है कि ऐसे उद्दीपको के प्रति भी अत्यन्त समान प्रतिक्रियायें उत्पन्न होती हैं जो अनेक दृष्टियो से परस्पर भिन्न होते हैं । " तुकी० आउट लाइन ऑफ फिलॉसफी, पृ० १७२ और बाद ।
अध्याय ४
६१. दिमाग का नामों का सिद्धान्त
अब हम दिनाग के ज्ञान के नाटक के अन्तिम दृष्य पर पहुँच चुके हैं। कार्यकलाप की अभिजात एकता तथा स्थान की एकता इस नाटक की विशिष्टता है। नाटक मे केवल दो ही पात्र हैं जो ज्ञान के मञ्च पर सदैव प्रगट होते रहते है । ये सत् और विज्ञानत्व हैं । प्रथम प्रवाहमान है और द्वितीय स्थिर । प्रथम को क्षण कहा गया है और द्वितीय को विकल्प, अथवा कभी-कभी केवल न्याय । सत् को हम प्रथम दृष्य मे उसकी वास्तविक शुद्धता मे देख चुके हैं जो अवोधगम्य और अनभिलाष्य किन्तु स्पष्ट और साक्षात् प्रतिभामित होता है । धर्मोत्तर ' इसे एक कौतुक कहते कहते है जो जितना ही स्पष्ट उतना ही कम बुद्धिग्राह्य होता है। दूसरे दृष्य मे हमने विकल्प मे सत के एक परोक्ष अथवा सोवाधिक प्रतिभास को देखा है। निश्चय ने अपना एक ऐसे कार्य के रूप मे उद्घाटन किया है जो असगतिपूर्ण प्रतीत होनेवाले सत् और विज्ञानत्व को एक साथ ला देता है। अनुमान निश्चय के ही एक विस्त र के रूप मे प्रगट हुआ है जिसका कार्य सत् को अनुमित विकल्पो के साथ सम्बद्ध करना है। इस सम्बन्धीकरण का पर्याप्त हेतु दो अत्यन्त महत्त्वपूर्ण यद्यपि अधीनस्थ पात्रो, तादात्म्य और तदुत्पत्ति, द्वारा व्यक्त हुआ है। ये एकात्मक क्षण को, तथा दो भिन्न किन्तु अन्योन्याश्रित क्षणो को व्यक्त करते हैं । नाटक के इस द्वितीय दृष्य को, जो विकल्पो तथा परमार्थ सत् के साथ उनके सम्बन्ध के पदार्थों की स्थापना करता है. बोधालव-समीक्षा कहा जा सकता है जो सवेदनालव- समीक्षा विषयक प्रथम दृष्य का अनुसरण करता है । अन्तिम दृष्य मे सत और वाणी के सम्बन्ध को प्रस्तुत किया गया है । अनभिलाष्य को फिर भी, नामो से, यद्यपि परोक्ष रूप से ही, उपाधित किया जा सकता है, और तब नाटक के प्रणेता के लिये सत् के प्रति नामो के व्यवहार को व्यक्त करना, सत् के उस अश की स्थापना करना भी आवश्यक हो जाता है जिसका ये नाम परोक्ष रूप से स्पर्श कर सकते हैं । जैसा कि देखा जायगा, यत नाम सत् का केवल अपोहात्मक रूप से ही स्पर्श कर अपोह प्रकरण मे ।
सकते है, अत नाटक के अन्तिम दृष्य को वौद्ध - नाममात्रवाद अथवा वस्तुगून्य प्रज्ञप्तिवाद कहा जा सकता है जो बोद्ध अपोहात्मक विधि का भी दृप्य है एक प्रख्यात उदाहरण का अनुसरण करते हुये, इस प्रकार हमे एक सवेदनालम्व समीक्षा, एक बोधालम्व समीक्षा और एक अनुभवातीन अपोहवाद मिलेगा, अनुभवातीत इसलिये क्योकि तर्कशास्त्र यहाँ परमार्थ सत् के साथ सम्बद्ध हो जाता है ।
वास्तव मे हमारे ज्ञान मे भाषा का क्या कार्य है ? क्या यह ज्ञान का वास्तविक स्रोत है ? क्या यह इन्द्रियो और बुद्धि से भिन्न एक पृथक मोत है ? अथवा दो प्रमुख स्रोतो मे से एक मे सम्मिलित गौण स्रोत है ? प्रथम दृष्टि मे यथार्थ ज्ञान के स्रोत के रूप मे शब्द-प्रामाण्य की मर्यादा को अस्वीकृत नही किया जा सकता, क्योकि यहां विश्लेपित प्रणाली के अनुसार यथार्थ ज्ञान का स्रोत या प्रमाण क्या है ? हम देख चुके है कि, यह अदावित अनुभव या अर्थ-सवाद हे । यथार्थ ज्ञान सफल ज्ञान है । यह प्रत्येक सफल अथरिया का पूर्वगामी है । वाह्यार्थ हमारे ज्ञानात्मक सयन्त्र पर एक उद्दीपन उत्पन्न करता है । यथार्थता से उद्दीप्त होकर यह सयन्न उस वस्तु के आकार की कल्पना करता है जिससे उद्दीपन उत्पन्न हुआ रहता है । इस आकार से निर्देशित होकर हम कार्य करते हैं, और यदि आकार ठीक है तो वार्य सफल हो जाता है और 'वस्तु प्राप्त हो जाती है । मान लीजिये हमे यह सूचना मिलती है कि नदी के किनारे एक वृक्ष है और उस वृक्ष मे पाँच सेव फले है । तब हम नदी के किनारे जाकर वृक्ष को ढूंढ लेते है और सेबी तक पहुँच जाते है । कार्य सफल है क्योकि शब्द का प्रामाण्य ठीक था। किन्तु क्या इसका, जैसा कि कुछ दार्शनिको ने माना है, यह अर्थ है कि शब्द बाह्य यथार्थ की पर्याप्त अभिव्यज्ञ्जना है; यह कि विषय और उसके नाम के बीच का सम्बन्ध मौलिक और नित्य है, यह कि सत् नामो के साथ गुंथा हुआ है और नाम के बिना कोई सत् नहीं होता, यह कि फलस्वरूप नाम सत् के पूर्वगामी होते है, यह कि भाषा एक प्रकार की जैवशक्ति है जो हमारे विकल्पो का निर्माण और यहाँ तक कि इन विकल्पो के ही अनुसार स्वय सत् का निर्माण करती है ? आगे हम देखेंगे कि ये सभी विचारधारायें दार्शनिक भारत मे व्यक्त हुई हैं । इन सब का बौद्धो ने जोरदार विरोध किया है । भाषा ज्ञान का एक पृथक् प्रमाण नहीं है और नाम सत का साक्षात् अथवा पर्याप्त अभिव्यञ्जक नही है । नाम आकारो अथवा विकल्पो के अनुरूप होते है और केवल सामान्यो को हो व्यक्त करते हैं। इस प्रकार, ये किसी भी प्रकार सत् के साक्षात् प्रतिभास
नहीं है, क्योकि मत् विशेषो से निर्मित होता है सामान्यो से नहीं । अर्थक्रिया द्वारा सामान्यो तक नहीं पहुंचा जा सकता । विकरपो और नामो की ही भाँति ये भी परोक्ष अथवा सत् के सोपाधिक' प्रतिमान होते हैं । ये नत् की केवल प्रतिव्वनि' और यथार्थ नही बल्कि तार्किक होते हैं । सत् का एक परोक्ष ज्ञान होने के कारण भाषा उस अनुमान से भिन्न नहीं है जिसकी स्वयं भी ज्ञान की एक परोक्ष पद्धति के रूप में परिभाषा की गई है । नाम एक मध्यपद है जिसके द्वारा उसके विषय का ज्ञान होता है । मध्यपद और वृहत् पद यहाँ विषयात्मक सन्दर्भ के तादात्म्य पर आधारित है, निगमन विभागात्मक है, और त्रिरूप हेतु की पूर्ति हो जाती है जैसे १) इस वस्तु को घट कहते हैं, २ ) जहाँ भी ऐसी वस्तुयें मिलती है उन्हें घट कहते है , ३ ) यह नाम किसी अ घट के लिये कभी व्यवहृत नही होता । फिर भी यह सिद्धान्त - यह कि तार्किक हेतु की ही भाँति नाम भी सत् के परोक्ष चिह्न होते है - दिनाग के सिद्धान्त की प्रमुख विशिष्टता नहीं है । वह आगे यह भी कहते है कि सभी नाम प्रतिपेधात्मक अथवा जैसा हम कह मरते हैं, अपोहात्मक होते हैं ।
इस प्रकार मानव बुद्धि के स्वाभाविक अपोह का भारत मे बौद्ध नैयायिको द्वारा नामो के सिद्धान्त के अन्तर्गत विवेचन किया गया है । यह एक प्रकार का वस्तुशून्य-प्रज्ञप्तिवाद ही है । इस बात को भली-भांति समझा गया है कि विकल्प और नाम एक ही भूमि को आवृत्त करते है क्योंकि विकल्पात्मक विचार की एक नामयोग्य विचार के रूप में परिभाषा की गई है - एक ऐसे विचार के रूप मे जो नाम के साथ एकीभूत हो सकता है । दिमाग कहते है कि "नाम विकल्पो मे उत्पन्न होते हैं, और इसके विपरीत विकल्प भी नाम मे उत्पन्न हो सकते हैं।" इसलिये, नाम के अभिप्राय का निर्धारण वैसा ही है जैसा कि विकल्पो की आधारभूत प्रकृति का निर्धारण । विकल्पो के सिद्धान्त को नामो के सिद्धान्त के अन्तर्गत ला दिये जाने की उन विशेष ऐतिहानिक स्थितियो
यह कि भारतीय साक्षाज और परोक्ष प्रतिभास मे स्पष्ट विभेद करते थे, पार्थसारथि ( श्लोकवा० पृ० ५५९ ) के इस स्थल से स्पष्ट है. "ज्ञानावारम् स्वलक्षणम् वा भासमाणाम् अनुभासते, शव्दम् इव प्रति- शब्द " वास्तव मे ज्ञानाकार भासमान स्वलक्षण को अनुभासित करता है । भासमान = प्रतिभाग वैसा ही होता है जैसा दर्पण का प्रतिविम्व ( आदर्शवत्), और अनुभास एक परोक्ष अथवा सोपाविक प्रतिभास है ।
२ तुको० गत टिप्पणी मे उद्धृत स्थल ।
द्वारा सरलता से व्याख्या हो जाती है जिनसे बौद्ध सिद्धान्त उत्पन्न हुआ । कुछ सम्प्रदायों के लिये भाषा हमारे ज्ञान का एक विशेष प्रमाण है जो आधारभूत, परमार्थ तथा इन्द्रियो और बुद्धि के साथ समन्वित है । इन ििसद्धान्तो के उत्तर मे दिनाग यह वक्तव्य देते हैं.
गन्दो से निष्कृष्ट ज्ञान (सिद्धान्तत ) अनुमान से भिन्न नही होता । वास्तव मे कोई नाम केवल विरुद्ध अर्थ के प्रतिषेध द्वारा ही अपने अर्थ को व्यक्त कर सकता है, जैसे उदाहरण के लिये, "उत्पत्तिमान" शब्द ( अपने अर्थ को केवल नित्य अथवा उत्पत्तिरहित वस्तुओं के विभेद द्वारा ही व्यक्त कर सकता है) ।
इस बात का कि शब्दो से निष्कृष्ट ज्ञान ( सिद्धान्तत ) अनुमान से भिन्न नही होता, अर्थ यह है कि यह परोक्ष ज्ञान है । ज्ञान वास्तव मे या तो साक्षात् अथवा परोक्ष, या तो इन्द्रियो से उत्पन्न अथवा बुद्धि से उत्पन्न, या प्रत्यक्ष अथवा अनुमान (विकल्प ) हो सकता है । शब्दों से गृहीत ज्ञान साक्षात् नही होता, सवेदना नही होता । यह तो परोक्ष और अनुमान से गृहीत ज्ञान के ही समान होता है । इस प्रकार साक्षात् और परोक्ष ज्ञान के विभेद के रूप मे इन्द्रियो ओर बुद्धि की एक नवीन विशिष्टता को प्रस्तुत किया गया है । इन्द्रियाँ विधि, विधि-स्वरूप होती हैं । बुद्धि अपोहात्मक होती है, अर्थात् यह सदैव प्रतिषेधास्मक होती है। इसका विधान कभी भी साक्षात्, कभी भी शुद्ध नहीं होता । यह स्वयं अपने अर्थ का अनिवार्यत किसी अन्य अर्थ के प्रतिषेध द्वारा ही विधान करती है । "श्वेत" शब्द सभी श्वेत वस्तुओं के ज्ञान को ससूचित नही करता । ये वस्तुयें अनन्त है और कोई भी ऐसी सभी वस्तुओं को नही जानता । और न यह ( श्वेत शब्द ) इन्द्रियों द्वारा गृहीत बाह्य सत्ता के रूप मे "श्वेतत्व" के सामान्य रूप के ज्ञान को ही ससूचित करता है । किन्तु यह श्वेत और अश्वेत के बीच एक विभाजन रेखा का द्योतक है जिसका श्वेत की प्रत्येक वैयक्तिक स्थिति में ज्ञान होता है । श्वेत का अश्वेत के द्वारा और अश्वेत का श्वेत के द्वारा ज्ञान होता है । गो और गोत्व की दशा में भी ऐसा ही होता है । इसका अ-गो के विभेद के द्वारा ज्ञान होता है । " उत्पत्तिमान" का विकल्प नित्यत्व के साथ विभेद के अतिरिक्त और किसी भी वस्तु से युक्त नही है । प्रतिषेध पारस्परिक है । उत्पत्तिमान होने का अर्थ नित्यत्व का प्रतिषेध और नित्यत्व का अर्थ उत्पत्तिमान होने का प्रतिषेध है । यत प्रत्येक
१ प्रमा० समु० ५१ । तुकी ऊपर पृ० २२७ ।
दशा मे और प्रत्येक नाम की दशा मे यही होता है, अत हम इस आशय मे हीगल के साथ यह कह सकते हैं कि "प्रतिषेधात्मकता ही जगत् की आत्मा है" । किन्तु हीगल ने जगत् मे तर्कशास्त्र के अनिरिक्त और कुछ नही छोडा है, इसलिये उनके जगत् में प्रतिषेध के अतिरिक्त और कुछ नही है । वौद्धो के दृष्टिकोण के अनुसार तर्कशास्त्र के अरिरिक्त एक वास्तविक सत् भी है जो न के तो प्रतिषेधात्मक है और न पोहात्मक । विकल्प तथा तर्क, ये सभी प्रतिपेधात्मक और अपोहात्मक होते हैं । सत् या वस्तू स्वलक्षण विधि, विधि स्वरूप है, यह अ- अपोहात्मक है। प्रतिषेध या अनुपलब्धि ने अन्तत अपने वास्तविक स्वरूप को प्रगट कर दिया । अन्त मे हम इस कठिन प्रश्न का कि "आखिर ससार मे अनुपलब्धि की क्या आवश्यकता है ? अकेले विधि ही पर्याप्त है अब उत्तर दे सकते हैं। ज्ञान सत् का एक विधायक ज्ञान है । यदि अनुपलव्धि भी सत् का ज्ञान है, तो इन दोनो की क्या आवश्यकता है । अब हमारे पास इसका उत्तर है । साक्षात् ज्ञान विधि है, परोक्ष ज्ञान अनुपलब्धि है। किन्तु शुद्ध विधि केवल विज्ञान है, जब कि शुद्ध तर्क सदैव अपोहात्मक, अर्थात प्रतिषेधात्मक होता है । यह सिद्धान्त कि ज्ञान के केवल दो ही प्रमाण हैं, इन्द्रियाँ और बुद्धि, अब एक नवीन और गहन आधार प्राप्त करता है। इन्द्रियाँ और बुद्धि न केवल ज्ञान के साक्षात् और परोक्ष प्रमाण के रूप मे ही वरन् विधि और अनुपलब्धि, अ-अपोहात्मक और अपोहात्मक प्रमाण के रूप मे भी सम्बद्ध हैं ।
अपनी महान कृति मे शब्द द्वारा ससूचित ज्ञान का विवेचन करनेवाले अध्याय को दिङ्नाग इस वक्तव्य से आरम्भ करते हैं कि शाब्दिक ज्ञान साक्षात् नही बल्कि अनुमानात्मक, सापेक्षिक और अपोहात्मक होता है । तदनन्तर ये अन्य सम्प्रदायों के विभिन्न सिद्धान्तो की समीक्षा करते है । ये इस सिद्धान्त को कि नाम सामान्यो को व्यक्त करते हैं, 'अनन्त व्यभिचार" के कारण अस्वीकृत करते हैं । इनकी आलोचना इस मत के विरुद्ध केन्द्रित है कि सामान्य एक विशेष मे स्थित वास्तविक सत्ता है और इसका इन्द्रियों के द्वारा साक्षात् प्रत्यक्ष होता है। सामान्य विशेषो की एक अनन्तता को आवृत्त करता है जिसका साक्षात् प्रत्यक्ष नहीं हो सकता । तदनन्तर आप इस वैशेषिक सिद्धान्त को अस्वीकृत करते हैं जिसके अनुसार नाम "विभेदो" को व्यक्त करते हैं । यह सिद्धन्त स्वय इनके प्रतिषेधात्मक नामो के सिद्धान्त के साथ घनिष्ठ साम्य
'आनन्त्याद् व्यभिचाराच् च,' वही, श्लोक २, तुकी० तसप० पृ० २७७-२७ "न जातिशब्दो भेदानाम् वाचक आनन्त्यात्" ।
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है और न पका सकती है ।" हमे परमार्थ-सत् और कल्पना मे अनिवार्यत विभेद करना ही चाहिये । कल्पना एक मानसिक यथार्थता है जो केवल एक कल्पना के रूप मे ही यथार्थ है । यह कि यथार्थता की दो सर्वथा भिन्न धारणायें है, वौद्धमत का सर्वाधिक सामान्य रूप से ज्ञात तथ्य है । प्राचीन परिभाषा यह है कि सत्ता का अर्थ प्रमेयत्व है । मत्ता वारह आयतनो मे विभाजित है जिनमे से अन्तिम आयतन समस्त मानसिक धर्मों को धारण करता है। किन्तु महायान ने इस रूप में परिभाषा को परिवर्तित कर दिया है कि "जो अर्थक्रियाकारी है वही मत् है " . " और ऐसा केवल बाह्य परम मूर्त और विशेष क्षण ही होता है । आन्तक विषय विज्ञान और आकार होते हैं । आकार सदैव सामान्य होते हैं । ये विशुद्ध कल्पना छः तथा ऐमी कल्पना में विभक्त है जिनका क्षण के मत् के साथ एक परोक्ष अथवा 'सामान्य' सम्बन्ध होता है । ये अन्तिम अनिवार्यत सामान्य ही होती हैं। इस विषय पर वौद्ध अनुभववादी सम्प्रदाय के समान हैं । तुकीशून्य डब्लू शून्य जेम्स एमेज़ इन रैडिकल एम्पिरिभिउम, पृशून्य बत्तीस-तैंतीस, और वीशून्य रसेल एनिलिसिस ऑफ दि माइण्ड, पृशून्य एक सौ सैंतीस ओर बाद - इस अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अन्तर के साथ कि परमार्थ-सत् केवल क्षण ही होता है । 'यत् प्रमेयम् तत् मत्' । कभी कभी तैयायिको की भी यही परिभाषा है जो 'मत्ता - सामान्यम्' और 'स्वरूप-मत्ता' मे विभेद करते हैं । तुकीशून्य न्याकणिशून्य का प्रामाण्यवाद सम्बन्धी प्रकरण, पृशून्य एक सौ बासठ और वाद । अ द्वादश - आयतनानि =मर्वम् ज्ञेयम् । धर्म आयतन = धर्मा । यद् अर्थ-क्रिया-कारि तत् सत् = परमार्थ-सत् । अनुपारुय । सात वौद्धो के परार्थानुमान के सिद्धान्त द्वारा भी इसकी पुष्टि होती है । क्योकि साध्य आधारवाक्य का वह सवादित्व अर्थ है जो विकल्पो की और उनके नियमो की परोक्ष यथार्थता है, और साध्य आधारवाक्य का अर्थ इन विकल्पो से किसी ऐन्द्रिक धर्म के परमार्थ सत् का सन्दर्भ है; यह अन्तिम ही परमार्थ सत् है । बण्ड रसल के अनुसार वाह्य विशेष और मानसिक सामान्य के वीध का सम्बन्ध हेतुक होता है । यह बौद्ध - सिद्धान्त के उस अश के अनुरूप है जो विभिन्न विशेषो द्वारा उत्पन्न विभिन्न उद्दीपको के बीच नमानता के द्वारा सामान्य की यथार्थता को स्थानान्तरित कर देता है । इसके अतिरिक्त हेतुत्व ही पर्याप्त नहीं है । इसके अतिरिक्त भी, विशेष और तदनुम्प मामान्य के बीच एक "सारूप्य" होता है। इस सारूप्य का क्या अर्थ है, इसका अगले अध्याय मे विवेचन किया जायगा । एक एनेलिसिस ऑफ माइण्ड, पृशून्य दो सौ सत्ताईस बाह्य निरीक्षण के लिये उपलब्ध तथ्य प्रमुखत अभ्यास होते हैं जिनकी यह विचित्रता होती है कि ऐसे उद्दीपको के प्रति भी अत्यन्त समान प्रतिक्रियायें उत्पन्न होती हैं जो अनेक दृष्टियो से परस्पर भिन्न होते हैं । " तुकीशून्य आउट लाइन ऑफ फिलॉसफी, पृशून्य एक सौ बहत्तर और बाद । अध्याय चार इकसठ. दिमाग का नामों का सिद्धान्त अब हम दिनाग के ज्ञान के नाटक के अन्तिम दृष्य पर पहुँच चुके हैं। कार्यकलाप की अभिजात एकता तथा स्थान की एकता इस नाटक की विशिष्टता है। नाटक मे केवल दो ही पात्र हैं जो ज्ञान के मञ्च पर सदैव प्रगट होते रहते है । ये सत् और विज्ञानत्व हैं । प्रथम प्रवाहमान है और द्वितीय स्थिर । प्रथम को क्षण कहा गया है और द्वितीय को विकल्प, अथवा कभी-कभी केवल न्याय । सत् को हम प्रथम दृष्य मे उसकी वास्तविक शुद्धता मे देख चुके हैं जो अवोधगम्य और अनभिलाष्य किन्तु स्पष्ट और साक्षात् प्रतिभामित होता है । धर्मोत्तर ' इसे एक कौतुक कहते कहते है जो जितना ही स्पष्ट उतना ही कम बुद्धिग्राह्य होता है। दूसरे दृष्य मे हमने विकल्प मे सत के एक परोक्ष अथवा सोवाधिक प्रतिभास को देखा है। निश्चय ने अपना एक ऐसे कार्य के रूप मे उद्घाटन किया है जो असगतिपूर्ण प्रतीत होनेवाले सत् और विज्ञानत्व को एक साथ ला देता है। अनुमान निश्चय के ही एक विस्त र के रूप मे प्रगट हुआ है जिसका कार्य सत् को अनुमित विकल्पो के साथ सम्बद्ध करना है। इस सम्बन्धीकरण का पर्याप्त हेतु दो अत्यन्त महत्त्वपूर्ण यद्यपि अधीनस्थ पात्रो, तादात्म्य और तदुत्पत्ति, द्वारा व्यक्त हुआ है। ये एकात्मक क्षण को, तथा दो भिन्न किन्तु अन्योन्याश्रित क्षणो को व्यक्त करते हैं । नाटक के इस द्वितीय दृष्य को, जो विकल्पो तथा परमार्थ सत् के साथ उनके सम्बन्ध के पदार्थों की स्थापना करता है. बोधालव-समीक्षा कहा जा सकता है जो सवेदनालव- समीक्षा विषयक प्रथम दृष्य का अनुसरण करता है । अन्तिम दृष्य मे सत और वाणी के सम्बन्ध को प्रस्तुत किया गया है । अनभिलाष्य को फिर भी, नामो से, यद्यपि परोक्ष रूप से ही, उपाधित किया जा सकता है, और तब नाटक के प्रणेता के लिये सत् के प्रति नामो के व्यवहार को व्यक्त करना, सत् के उस अश की स्थापना करना भी आवश्यक हो जाता है जिसका ये नाम परोक्ष रूप से स्पर्श कर सकते हैं । जैसा कि देखा जायगा, यत नाम सत् का केवल अपोहात्मक रूप से ही स्पर्श कर अपोह प्रकरण मे । सकते है, अत नाटक के अन्तिम दृष्य को वौद्ध - नाममात्रवाद अथवा वस्तुगून्य प्रज्ञप्तिवाद कहा जा सकता है जो बोद्ध अपोहात्मक विधि का भी दृप्य है एक प्रख्यात उदाहरण का अनुसरण करते हुये, इस प्रकार हमे एक सवेदनालम्व समीक्षा, एक बोधालम्व समीक्षा और एक अनुभवातीन अपोहवाद मिलेगा, अनुभवातीत इसलिये क्योकि तर्कशास्त्र यहाँ परमार्थ सत् के साथ सम्बद्ध हो जाता है । वास्तव मे हमारे ज्ञान मे भाषा का क्या कार्य है ? क्या यह ज्ञान का वास्तविक स्रोत है ? क्या यह इन्द्रियो और बुद्धि से भिन्न एक पृथक मोत है ? अथवा दो प्रमुख स्रोतो मे से एक मे सम्मिलित गौण स्रोत है ? प्रथम दृष्टि मे यथार्थ ज्ञान के स्रोत के रूप मे शब्द-प्रामाण्य की मर्यादा को अस्वीकृत नही किया जा सकता, क्योकि यहां विश्लेपित प्रणाली के अनुसार यथार्थ ज्ञान का स्रोत या प्रमाण क्या है ? हम देख चुके है कि, यह अदावित अनुभव या अर्थ-सवाद हे । यथार्थ ज्ञान सफल ज्ञान है । यह प्रत्येक सफल अथरिया का पूर्वगामी है । वाह्यार्थ हमारे ज्ञानात्मक सयन्त्र पर एक उद्दीपन उत्पन्न करता है । यथार्थता से उद्दीप्त होकर यह सयन्न उस वस्तु के आकार की कल्पना करता है जिससे उद्दीपन उत्पन्न हुआ रहता है । इस आकार से निर्देशित होकर हम कार्य करते हैं, और यदि आकार ठीक है तो वार्य सफल हो जाता है और 'वस्तु प्राप्त हो जाती है । मान लीजिये हमे यह सूचना मिलती है कि नदी के किनारे एक वृक्ष है और उस वृक्ष मे पाँच सेव फले है । तब हम नदी के किनारे जाकर वृक्ष को ढूंढ लेते है और सेबी तक पहुँच जाते है । कार्य सफल है क्योकि शब्द का प्रामाण्य ठीक था। किन्तु क्या इसका, जैसा कि कुछ दार्शनिको ने माना है, यह अर्थ है कि शब्द बाह्य यथार्थ की पर्याप्त अभिव्यज्ञ्जना है; यह कि विषय और उसके नाम के बीच का सम्बन्ध मौलिक और नित्य है, यह कि सत् नामो के साथ गुंथा हुआ है और नाम के बिना कोई सत् नहीं होता, यह कि फलस्वरूप नाम सत् के पूर्वगामी होते है, यह कि भाषा एक प्रकार की जैवशक्ति है जो हमारे विकल्पो का निर्माण और यहाँ तक कि इन विकल्पो के ही अनुसार स्वय सत् का निर्माण करती है ? आगे हम देखेंगे कि ये सभी विचारधारायें दार्शनिक भारत मे व्यक्त हुई हैं । इन सब का बौद्धो ने जोरदार विरोध किया है । भाषा ज्ञान का एक पृथक् प्रमाण नहीं है और नाम सत का साक्षात् अथवा पर्याप्त अभिव्यञ्जक नही है । नाम आकारो अथवा विकल्पो के अनुरूप होते है और केवल सामान्यो को हो व्यक्त करते हैं। इस प्रकार, ये किसी भी प्रकार सत् के साक्षात् प्रतिभास नहीं है, क्योकि मत् विशेषो से निर्मित होता है सामान्यो से नहीं । अर्थक्रिया द्वारा सामान्यो तक नहीं पहुंचा जा सकता । विकरपो और नामो की ही भाँति ये भी परोक्ष अथवा सत् के सोपाधिक' प्रतिमान होते हैं । ये नत् की केवल प्रतिव्वनि' और यथार्थ नही बल्कि तार्किक होते हैं । सत् का एक परोक्ष ज्ञान होने के कारण भाषा उस अनुमान से भिन्न नहीं है जिसकी स्वयं भी ज्ञान की एक परोक्ष पद्धति के रूप में परिभाषा की गई है । नाम एक मध्यपद है जिसके द्वारा उसके विषय का ज्ञान होता है । मध्यपद और वृहत् पद यहाँ विषयात्मक सन्दर्भ के तादात्म्य पर आधारित है, निगमन विभागात्मक है, और त्रिरूप हेतु की पूर्ति हो जाती है जैसे एक) इस वस्तु को घट कहते हैं, दो ) जहाँ भी ऐसी वस्तुयें मिलती है उन्हें घट कहते है , तीन ) यह नाम किसी अ घट के लिये कभी व्यवहृत नही होता । फिर भी यह सिद्धान्त - यह कि तार्किक हेतु की ही भाँति नाम भी सत् के परोक्ष चिह्न होते है - दिनाग के सिद्धान्त की प्रमुख विशिष्टता नहीं है । वह आगे यह भी कहते है कि सभी नाम प्रतिपेधात्मक अथवा जैसा हम कह मरते हैं, अपोहात्मक होते हैं । इस प्रकार मानव बुद्धि के स्वाभाविक अपोह का भारत मे बौद्ध नैयायिको द्वारा नामो के सिद्धान्त के अन्तर्गत विवेचन किया गया है । यह एक प्रकार का वस्तुशून्य-प्रज्ञप्तिवाद ही है । इस बात को भली-भांति समझा गया है कि विकल्प और नाम एक ही भूमि को आवृत्त करते है क्योंकि विकल्पात्मक विचार की एक नामयोग्य विचार के रूप में परिभाषा की गई है - एक ऐसे विचार के रूप मे जो नाम के साथ एकीभूत हो सकता है । दिमाग कहते है कि "नाम विकल्पो मे उत्पन्न होते हैं, और इसके विपरीत विकल्प भी नाम मे उत्पन्न हो सकते हैं।" इसलिये, नाम के अभिप्राय का निर्धारण वैसा ही है जैसा कि विकल्पो की आधारभूत प्रकृति का निर्धारण । विकल्पो के सिद्धान्त को नामो के सिद्धान्त के अन्तर्गत ला दिये जाने की उन विशेष ऐतिहानिक स्थितियो यह कि भारतीय साक्षाज और परोक्ष प्रतिभास मे स्पष्ट विभेद करते थे, पार्थसारथि के इस स्थल से स्पष्ट है. "ज्ञानावारम् स्वलक्षणम् वा भासमाणाम् अनुभासते, शव्दम् इव प्रति- शब्द " वास्तव मे ज्ञानाकार भासमान स्वलक्षण को अनुभासित करता है । भासमान = प्रतिभाग वैसा ही होता है जैसा दर्पण का प्रतिविम्व , और अनुभास एक परोक्ष अथवा सोपाविक प्रतिभास है । दो तुकोशून्य गत टिप्पणी मे उद्धृत स्थल । द्वारा सरलता से व्याख्या हो जाती है जिनसे बौद्ध सिद्धान्त उत्पन्न हुआ । कुछ सम्प्रदायों के लिये भाषा हमारे ज्ञान का एक विशेष प्रमाण है जो आधारभूत, परमार्थ तथा इन्द्रियो और बुद्धि के साथ समन्वित है । इन ििसद्धान्तो के उत्तर मे दिनाग यह वक्तव्य देते हैं. गन्दो से निष्कृष्ट ज्ञान अनुमान से भिन्न नही होता । वास्तव मे कोई नाम केवल विरुद्ध अर्थ के प्रतिषेध द्वारा ही अपने अर्थ को व्यक्त कर सकता है, जैसे उदाहरण के लिये, "उत्पत्तिमान" शब्द । इस बात का कि शब्दो से निष्कृष्ट ज्ञान अनुमान से भिन्न नही होता, अर्थ यह है कि यह परोक्ष ज्ञान है । ज्ञान वास्तव मे या तो साक्षात् अथवा परोक्ष, या तो इन्द्रियो से उत्पन्न अथवा बुद्धि से उत्पन्न, या प्रत्यक्ष अथवा अनुमान हो सकता है । शब्दों से गृहीत ज्ञान साक्षात् नही होता, सवेदना नही होता । यह तो परोक्ष और अनुमान से गृहीत ज्ञान के ही समान होता है । इस प्रकार साक्षात् और परोक्ष ज्ञान के विभेद के रूप मे इन्द्रियो ओर बुद्धि की एक नवीन विशिष्टता को प्रस्तुत किया गया है । इन्द्रियाँ विधि, विधि-स्वरूप होती हैं । बुद्धि अपोहात्मक होती है, अर्थात् यह सदैव प्रतिषेधास्मक होती है। इसका विधान कभी भी साक्षात्, कभी भी शुद्ध नहीं होता । यह स्वयं अपने अर्थ का अनिवार्यत किसी अन्य अर्थ के प्रतिषेध द्वारा ही विधान करती है । "श्वेत" शब्द सभी श्वेत वस्तुओं के ज्ञान को ससूचित नही करता । ये वस्तुयें अनन्त है और कोई भी ऐसी सभी वस्तुओं को नही जानता । और न यह इन्द्रियों द्वारा गृहीत बाह्य सत्ता के रूप मे "श्वेतत्व" के सामान्य रूप के ज्ञान को ही ससूचित करता है । किन्तु यह श्वेत और अश्वेत के बीच एक विभाजन रेखा का द्योतक है जिसका श्वेत की प्रत्येक वैयक्तिक स्थिति में ज्ञान होता है । श्वेत का अश्वेत के द्वारा और अश्वेत का श्वेत के द्वारा ज्ञान होता है । गो और गोत्व की दशा में भी ऐसा ही होता है । इसका अ-गो के विभेद के द्वारा ज्ञान होता है । " उत्पत्तिमान" का विकल्प नित्यत्व के साथ विभेद के अतिरिक्त और किसी भी वस्तु से युक्त नही है । प्रतिषेध पारस्परिक है । उत्पत्तिमान होने का अर्थ नित्यत्व का प्रतिषेध और नित्यत्व का अर्थ उत्पत्तिमान होने का प्रतिषेध है । यत प्रत्येक एक प्रमाशून्य समुशून्य इक्यावन । तुकी ऊपर पृशून्य दो सौ सत्ताईस । दशा मे और प्रत्येक नाम की दशा मे यही होता है, अत हम इस आशय मे हीगल के साथ यह कह सकते हैं कि "प्रतिषेधात्मकता ही जगत् की आत्मा है" । किन्तु हीगल ने जगत् मे तर्कशास्त्र के अनिरिक्त और कुछ नही छोडा है, इसलिये उनके जगत् में प्रतिषेध के अतिरिक्त और कुछ नही है । वौद्धो के दृष्टिकोण के अनुसार तर्कशास्त्र के अरिरिक्त एक वास्तविक सत् भी है जो न के तो प्रतिषेधात्मक है और न पोहात्मक । विकल्प तथा तर्क, ये सभी प्रतिपेधात्मक और अपोहात्मक होते हैं । सत् या वस्तू स्वलक्षण विधि, विधि स्वरूप है, यह अ- अपोहात्मक है। प्रतिषेध या अनुपलब्धि ने अन्तत अपने वास्तविक स्वरूप को प्रगट कर दिया । अन्त मे हम इस कठिन प्रश्न का कि "आखिर ससार मे अनुपलब्धि की क्या आवश्यकता है ? अकेले विधि ही पर्याप्त है अब उत्तर दे सकते हैं। ज्ञान सत् का एक विधायक ज्ञान है । यदि अनुपलव्धि भी सत् का ज्ञान है, तो इन दोनो की क्या आवश्यकता है । अब हमारे पास इसका उत्तर है । साक्षात् ज्ञान विधि है, परोक्ष ज्ञान अनुपलब्धि है। किन्तु शुद्ध विधि केवल विज्ञान है, जब कि शुद्ध तर्क सदैव अपोहात्मक, अर्थात प्रतिषेधात्मक होता है । यह सिद्धान्त कि ज्ञान के केवल दो ही प्रमाण हैं, इन्द्रियाँ और बुद्धि, अब एक नवीन और गहन आधार प्राप्त करता है। इन्द्रियाँ और बुद्धि न केवल ज्ञान के साक्षात् और परोक्ष प्रमाण के रूप मे ही वरन् विधि और अनुपलब्धि, अ-अपोहात्मक और अपोहात्मक प्रमाण के रूप मे भी सम्बद्ध हैं । अपनी महान कृति मे शब्द द्वारा ससूचित ज्ञान का विवेचन करनेवाले अध्याय को दिङ्नाग इस वक्तव्य से आरम्भ करते हैं कि शाब्दिक ज्ञान साक्षात् नही बल्कि अनुमानात्मक, सापेक्षिक और अपोहात्मक होता है । तदनन्तर ये अन्य सम्प्रदायों के विभिन्न सिद्धान्तो की समीक्षा करते है । ये इस सिद्धान्त को कि नाम सामान्यो को व्यक्त करते हैं, 'अनन्त व्यभिचार" के कारण अस्वीकृत करते हैं । इनकी आलोचना इस मत के विरुद्ध केन्द्रित है कि सामान्य एक विशेष मे स्थित वास्तविक सत्ता है और इसका इन्द्रियों के द्वारा साक्षात् प्रत्यक्ष होता है। सामान्य विशेषो की एक अनन्तता को आवृत्त करता है जिसका साक्षात् प्रत्यक्ष नहीं हो सकता । तदनन्तर आप इस वैशेषिक सिद्धान्त को अस्वीकृत करते हैं जिसके अनुसार नाम "विभेदो" को व्यक्त करते हैं । यह सिद्धन्त स्वय इनके प्रतिषेधात्मक नामो के सिद्धान्त के साथ घनिष्ठ साम्य 'आनन्त्याद् व्यभिचाराच् च,' वही, श्लोक दो, तुकीशून्य तसपशून्य पृशून्य दो सौ सतहत्तर-सत्ताईस "न जातिशब्दो भेदानाम् वाचक आनन्त्यात्" ।
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नकली नोट आपने सुने होंगे। नकली एटीएम कार्ड और चेक बुक्स भी सुनी होंगी। लेकिन, जो लोग 20-22 साल के होंगे, उन्हें ये पता भी नहीं होगा कि इस देश में एक ऐसा घोटाला भी हो चुका है, जिसमें महाराष्ट्र जैसे राज्य का पुलिस कमिश्नर अरेस्ट हुआ, तमाम बड़े बड़े नेताओं की गर्दन नापी गई। लेकिन, जैसा कि इस देश में हर घोटाले के साथ होता है, इस घोटाले में भी हुआ। घोटाले का ये प्यादा यानी अब्दुल करीम तेलगी ऊपर पहुंच गया है, और नीचे छोड़ गया है एक ऐसी कहानी जो इस देश में फर्जी स्टांप पेपर छापकर अरबों रुपये की कहानी है, आइए दिखाते हैं आपको क्या है ये पूरा किस्सा।
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नकली नोट आपने सुने होंगे। नकली एटीएम कार्ड और चेक बुक्स भी सुनी होंगी। लेकिन, जो लोग बीस-बाईस साल के होंगे, उन्हें ये पता भी नहीं होगा कि इस देश में एक ऐसा घोटाला भी हो चुका है, जिसमें महाराष्ट्र जैसे राज्य का पुलिस कमिश्नर अरेस्ट हुआ, तमाम बड़े बड़े नेताओं की गर्दन नापी गई। लेकिन, जैसा कि इस देश में हर घोटाले के साथ होता है, इस घोटाले में भी हुआ। घोटाले का ये प्यादा यानी अब्दुल करीम तेलगी ऊपर पहुंच गया है, और नीचे छोड़ गया है एक ऐसी कहानी जो इस देश में फर्जी स्टांप पेपर छापकर अरबों रुपये की कहानी है, आइए दिखाते हैं आपको क्या है ये पूरा किस्सा।
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ये देखने में शानदार Electric Vegetable Cutter हैं। इनमें आपको इलेक्ट्रिक बैटरी मिल रही है जिसके जरिए इन्हें इस्तेमाल किया जा सकता है। ये काफी सस्ती कीमत में मिल रहे हैं।
यहां पर हम आपके लिए पोर्टेबल इलेक्ट्रिक वेजिटेबल कटर लेकर आए हैं। इन्हें आप हाथ में लेकर आसानी से सब्जियां काट सकते हैं। यह वायरलेस फूड प्रोसेसर देखने में स्टाइलिश है और कम जगह में एडजस्ट हो जाते हैं। इनकी मदद से आप आसानी से प्याज, लहसुन, टमाटर, मिर्ची जैसे आइटम कट कर सकते हैं।
यहां पर आपको 5 स्टार तक की यूजर रेटिंग वाले वेजिटेबल इलेक्ट्रिक कटर मिल रहे हैं। ये सभी वेजिटेबल चॉपर वायरलेस है। इनके इस्तेमाल से आपका काम काफी ज्यादा तेज और आसान बन सकता है। आइए आपको इन Portable Electric Vegetable Cutter के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हैं।
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ये देखने में शानदार Electric Vegetable Cutter हैं। इनमें आपको इलेक्ट्रिक बैटरी मिल रही है जिसके जरिए इन्हें इस्तेमाल किया जा सकता है। ये काफी सस्ती कीमत में मिल रहे हैं। यहां पर हम आपके लिए पोर्टेबल इलेक्ट्रिक वेजिटेबल कटर लेकर आए हैं। इन्हें आप हाथ में लेकर आसानी से सब्जियां काट सकते हैं। यह वायरलेस फूड प्रोसेसर देखने में स्टाइलिश है और कम जगह में एडजस्ट हो जाते हैं। इनकी मदद से आप आसानी से प्याज, लहसुन, टमाटर, मिर्ची जैसे आइटम कट कर सकते हैं। यहां पर आपको पाँच स्टार तक की यूजर रेटिंग वाले वेजिटेबल इलेक्ट्रिक कटर मिल रहे हैं। ये सभी वेजिटेबल चॉपर वायरलेस है। इनके इस्तेमाल से आपका काम काफी ज्यादा तेज और आसान बन सकता है। आइए आपको इन Portable Electric Vegetable Cutter के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हैं।
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राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने फिर से सक्रिय राजनीति में वापसी की है. पिछले महीने संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से लापता हुए तेजस्वी ने लंबे समय के बाद सोमवार को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी.
तेजस्वी ने अपने गायब रहने का कारण बीमारी का इलाज बताया है. उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए लिखा है कि मेरी गैर-मौजूदगी में विरोधियों और मीडिया के एक तबके ने इसे लेकर मसालेदार कहानियां गढ़ने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है.
Friends! For last few weeks I was busy undergoing treatment for my long delayed ligament & ACL injury. However, I'm amused to see political opponents as well as a section of media cooking up spicy stories.
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सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
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राष्ट्रीय जनता दल नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने फिर से सक्रिय राजनीति में वापसी की है. पिछले महीने संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से लापता हुए तेजस्वी ने लंबे समय के बाद सोमवार को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. तेजस्वी ने अपने गायब रहने का कारण बीमारी का इलाज बताया है. उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए लिखा है कि मेरी गैर-मौजूदगी में विरोधियों और मीडिया के एक तबके ने इसे लेकर मसालेदार कहानियां गढ़ने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है. Friends! For last few weeks I was busy undergoing treatment for my long delayed ligament & ACL injury. However, I'm amused to see political opponents as well as a section of media cooking up spicy stories. . सनी देओल की हीरोइन को जब ज्यादा पढ़ी-लिखी होना पड़ा भारी, एक्ट्रेस ने खूब सुने थे ताने, बोलीं- इंडस्ट्री में. .
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DC vs RR: ऋषभ पंत की कप्तानी वाली दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) आईपीएल 2022 में आखिरकार धाकड़ फॉर्म में नजर आ रही है। पिछले मैच में पंजाब किंग्स को चारों खाने चित कर सीजन की सबसे शर्मनाक हार थमाने वाली दिल्ली अब 22 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स से भिड़ने वाली है। पंत की इस टीम का असली इम्तिहान अब संजू सैमसन की अगुवाई वाली टीम से होने वाला है।
ये मौजूदा सीजन की लीग का 34वां मैच होने वाला है, जो कि मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा। दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) इस मुकाबले में एक बड़ी जीत से मिला आत्मविश्वास कायम रखते हुए विजय का सिलसिला जारी रखना चाहेगी। लेकिन ये इतना आसान नहीं होने वाला है, क्योंकि इस बार सामने राजस्थान रॉयल्स है जो इस सीजन में सबसे ज्यादा मजबूत नजर आ रही है। आइए जानते हैं रॉयल्स को मात देने के लिए दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) किस प्लेइंग-XI के साथ उतर सकते हैं।
दाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ को इस बार के सीजन 15 से पहले दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) ने उन्हें रिटेन किया था। इस बल्लेबाज की कला को देखते हुए हर साल दिल्ली इनपर पूरा भरोसा जताती है। वहीं ये मैच में अच्छी पारी के साथ मैच का आगाज करते नजर आते हैं। पंजाब किंग्स के खिलाफ पिछले मैच में शॉ ने सिर्फ 20 गेंदों का सामना करते हुए 41 रन जड़े थे। शानदार फॉर्म में चल रहे इस बल्लेबाज दिल्ली कैपिटल्स किसी भी कीमत पर बेंच पर बिठाना नहीं चाहेगी।
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DC vs RR: ऋषभ पंत की कप्तानी वाली दिल्ली कैपिटल्स आईपीएल दो हज़ार बाईस में आखिरकार धाकड़ फॉर्म में नजर आ रही है। पिछले मैच में पंजाब किंग्स को चारों खाने चित कर सीजन की सबसे शर्मनाक हार थमाने वाली दिल्ली अब बाईस अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स से भिड़ने वाली है। पंत की इस टीम का असली इम्तिहान अब संजू सैमसन की अगुवाई वाली टीम से होने वाला है। ये मौजूदा सीजन की लीग का चौंतीसवां मैच होने वाला है, जो कि मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा। दिल्ली कैपिटल्स इस मुकाबले में एक बड़ी जीत से मिला आत्मविश्वास कायम रखते हुए विजय का सिलसिला जारी रखना चाहेगी। लेकिन ये इतना आसान नहीं होने वाला है, क्योंकि इस बार सामने राजस्थान रॉयल्स है जो इस सीजन में सबसे ज्यादा मजबूत नजर आ रही है। आइए जानते हैं रॉयल्स को मात देने के लिए दिल्ली कैपिटल्स किस प्लेइंग-XI के साथ उतर सकते हैं। दाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ को इस बार के सीजन पंद्रह से पहले दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें रिटेन किया था। इस बल्लेबाज की कला को देखते हुए हर साल दिल्ली इनपर पूरा भरोसा जताती है। वहीं ये मैच में अच्छी पारी के साथ मैच का आगाज करते नजर आते हैं। पंजाब किंग्स के खिलाफ पिछले मैच में शॉ ने सिर्फ बीस गेंदों का सामना करते हुए इकतालीस रन जड़े थे। शानदार फॉर्म में चल रहे इस बल्लेबाज दिल्ली कैपिटल्स किसी भी कीमत पर बेंच पर बिठाना नहीं चाहेगी।
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RANCHI: सोमवार की दोपहर करीब तीन बजे रातू थाना क्षेत्र स्थित सहारा बैंक की शाखा के पास बाइक सवार क्रिमिनल्स ने ख्. म्भ् लाख लूट लिए। जैसे ही बैंक मैनेजर दामोदर गोप व कैशियर विकास कुमार रुपए से भरा बैग लेकर बैंक के नीचे ग्राउंड फ्लोर में पहुंचे, पहले से घात लगाए तीन क्रिमिनल्स ने गन प्वाइंट पर लूटकांड को अंजाम देकर फरार हो गए। एक ने पहले से ही बाइक स्टार्ट कर रखी थी। सूचना पाकर रातू व नगड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बाइक सवार लुटेरे गायब हो गए थे।
पुलिस को मैनेजर दामोदर गोप ने बताया कि सोमवार की दोपहर तीन बजे के करीब अपने कैशियर विकास कुमार के साथ काठीटांड़ चौक स्थित बैंक ऑफ इंडिया में पैसे जमा करने जा रहा था। दो अपराधी कांम्पलेक्स के नीचे खड़े थे और एक बाइक को स्टार्ट करके खड़ा था। जैसे ही हमलोग नीचे आए। क्रिमिनल्स रिवॉल्वर की नोंक पर रुपए से भरा बैग लेकर उड़ गए। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। पुलिस के मुताबिक, जहां लूट की घटना हुई, वहां सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है, जिसका फायदा लुटेरों ने उठाया।
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RANCHI: सोमवार की दोपहर करीब तीन बजे रातू थाना क्षेत्र स्थित सहारा बैंक की शाखा के पास बाइक सवार क्रिमिनल्स ने ख्. म्भ् लाख लूट लिए। जैसे ही बैंक मैनेजर दामोदर गोप व कैशियर विकास कुमार रुपए से भरा बैग लेकर बैंक के नीचे ग्राउंड फ्लोर में पहुंचे, पहले से घात लगाए तीन क्रिमिनल्स ने गन प्वाइंट पर लूटकांड को अंजाम देकर फरार हो गए। एक ने पहले से ही बाइक स्टार्ट कर रखी थी। सूचना पाकर रातू व नगड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बाइक सवार लुटेरे गायब हो गए थे। पुलिस को मैनेजर दामोदर गोप ने बताया कि सोमवार की दोपहर तीन बजे के करीब अपने कैशियर विकास कुमार के साथ काठीटांड़ चौक स्थित बैंक ऑफ इंडिया में पैसे जमा करने जा रहा था। दो अपराधी कांम्पलेक्स के नीचे खड़े थे और एक बाइक को स्टार्ट करके खड़ा था। जैसे ही हमलोग नीचे आए। क्रिमिनल्स रिवॉल्वर की नोंक पर रुपए से भरा बैग लेकर उड़ गए। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। पुलिस के मुताबिक, जहां लूट की घटना हुई, वहां सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है, जिसका फायदा लुटेरों ने उठाया।
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अंक शास्त्र को ही न्यूमरोलॉजी कहते हैं। इस विधा में जन्म तारीख के अंकों को जोड़कर मूलांक निकाला जाता है, जिसे लकी नंबर भी कहते हैं। इसी अंक के आधार पर व्यक्ति के भूत- भविष्य और वर्तमान की गणना की जाती है।
अंक 1 (किसी भी महीने की 1, 10, 19 और 28 तारीख को जन्मे लोग)
गणेशजी कहते हैं कि आज आपको अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सकता है। लाइफ पार्टनर का पूरा-पूरा सहयोग मिलेगा। पहले की गई मेहनत का फल आज मिल सकता है। कोई महत्वपूर्ण जानकारी आपके हाथ लग सकती है। भविष्य की योजनाएं बनाएंगे। मार्केटिंग से जुड़े लोगों को फायदा होगा।
अंक 2 (किसी भी महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख को जन्मे लोग)
गणेशजी कहते हैं कि आज बिजनेस की स्थिति सामान्य रहेगी। वैवाहिक जीवन खुशहाल रहेगा। धार्मिक और आध्यात्मिक कामों में समय व्यतीत होगा। पुराना विवाद अगर किसी का चल रहा है तो वह खत्म हो सकता है। स्टूडेंट्स के लिए दिन ठीक है। करियर से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा।
अंक 3 (किसी भी महीने की 3, 12, 21, 30 तारीख को जन्मे लोग)
गणेशजी कहते हैं कि क्रोध करने से बचें, नहीं तो बात और बिगड़ सकती है। बिजनेस में नई डील हो सकती है। घर में माहौल ठीक रहेगा। पुरानी चिंता और तनाव दूर हो सकता है। सामाजिक कामों की बजाए निजी कामों पर ध्यान दें। आपके लिए गए निर्णय सफल रहेंगे। अपनी सहजता बनाए रखें।
अंक 4 (किसी भी माह की 4, 13, 22 या 31 तारीख को जन्म लेने वाले व्यक्ति)
गणेशजी कहते हैं कि भूमि से संबंधित कामों में आज हाथ न डालें, इसमें फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। किसी वजह से चोट सकती है। बिजनेस को आगे बढ़ाने की योजना बनेगी। जिस काम में हाथ डालेंगे, उसमें सफलता मिलेगी। हर बात की पॉजिटिव-निगेटिव प्रभाव पर विचार करें।
अंक 5 (किसी भी महीने की 5, 14, 23 तारीख को जन्मे लोग)
गणेशजी कहते हैं कि आज पुरानी संपत्ति को लेकर विवाद हो सकता है। आलस्य बिल्कुल न करें, नहीं तो हाथ आया मौका निकल सकता है। बिजनेस में नई योजनाएं बनेंगी और अटके हुए मामले जल्द ही पूरे होंगे। ग्रह गोचर आपके पक्ष में है। अपने संपर्क सूत्र को मजबूत करें।
अंक 6 (किसी भी माह की 6, 15 या 24 तारीख को जन्म लेने वाले व्यक्ति)
गणेशजी कहते हैं कि स्वार्थ की भावना से रिश्ते खराब हो सकते हैं, इसलिए ऐसा करने से बचें। कार्यक्षेत्र में अपनी योजनाओं का खुलासा न करें। परिवार के साथ दिन बीतेगा। आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत होगी। धार्मिक कार्य में रुचि जागेगी। आत्मसम्मान में भी वृद्धि होगी।
अंक 7 (किसी भी माह की 7, 16, 25 तारीख को जन्म लेने वाले व्यक्ति)
गणेशजी कहते हैं कि बड़ा निर्णय लेते समय अनुभवी लोगों की सलाह लें। तनाव का असर आपकी कार्यक्षमता पर भी पड़ेगा। प्रॉपर्टी से जुड़े कामों में फायदा होगा। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। आज का दिन फायदेमंद है। आपके सोचे हुए काम आज पूरे हो सकते हैं।
मूलांक 8 (किसी भी महीने की 8, 17 और 26 तारीख को जन्मे लोग)
गणेशजी कहते हैं कि आज संतान के कारण अपमान हो सकता है। काम की व्यस्तता अधिक रहेगी। पारिवारिक वातावरण अच्छा बना रहेगा। महिलाएं सेहत को लेकर जागरूक रहेंगी। सुख-सुविधाओं पर खर्च होगा। धार्मिक उत्सव में जाने का कार्यक्रम भी बनेगा। अटका हुआ पैसा मिल सकता है।
अंक 9 (किसी भी महीने की 9, 18 और 27 तारीख को जन्म लेने वाले लोग)
गणेशजी कहते हैं कि आज इन्वेस्टमेंट करने से बचें, नहीं तो नुकसान हो सकता है। विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान देंगे। पति-पत्नी में नोंक-झोंक हो सकती है। गैस और पेट दर्द की शिकायत रहेगी। सामाजिक गतिविधियों में आपका योगदान आपको पहचान और सम्मान दिलाएगा।
Bada Mangal 2023 Date: ज्येष्ठ मास में कब-कब रहेगा 'बड़ा मंगल', जानें सही डेट और क्यों खास है ये दिन?
Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें। आर्टिकल पर भरोसा करके अगर आप कुछ उपाय या अन्य कोई कार्य करना चाहते हैं तो इसके लिए आप स्वतः जिम्मेदार होंगे। हम इसके लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।
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अंक शास्त्र को ही न्यूमरोलॉजी कहते हैं। इस विधा में जन्म तारीख के अंकों को जोड़कर मूलांक निकाला जाता है, जिसे लकी नंबर भी कहते हैं। इसी अंक के आधार पर व्यक्ति के भूत- भविष्य और वर्तमान की गणना की जाती है। अंक एक गणेशजी कहते हैं कि आज आपको अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सकता है। लाइफ पार्टनर का पूरा-पूरा सहयोग मिलेगा। पहले की गई मेहनत का फल आज मिल सकता है। कोई महत्वपूर्ण जानकारी आपके हाथ लग सकती है। भविष्य की योजनाएं बनाएंगे। मार्केटिंग से जुड़े लोगों को फायदा होगा। अंक दो गणेशजी कहते हैं कि आज बिजनेस की स्थिति सामान्य रहेगी। वैवाहिक जीवन खुशहाल रहेगा। धार्मिक और आध्यात्मिक कामों में समय व्यतीत होगा। पुराना विवाद अगर किसी का चल रहा है तो वह खत्म हो सकता है। स्टूडेंट्स के लिए दिन ठीक है। करियर से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा। अंक तीन गणेशजी कहते हैं कि क्रोध करने से बचें, नहीं तो बात और बिगड़ सकती है। बिजनेस में नई डील हो सकती है। घर में माहौल ठीक रहेगा। पुरानी चिंता और तनाव दूर हो सकता है। सामाजिक कामों की बजाए निजी कामों पर ध्यान दें। आपके लिए गए निर्णय सफल रहेंगे। अपनी सहजता बनाए रखें। अंक चार गणेशजी कहते हैं कि भूमि से संबंधित कामों में आज हाथ न डालें, इसमें फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। किसी वजह से चोट सकती है। बिजनेस को आगे बढ़ाने की योजना बनेगी। जिस काम में हाथ डालेंगे, उसमें सफलता मिलेगी। हर बात की पॉजिटिव-निगेटिव प्रभाव पर विचार करें। अंक पाँच गणेशजी कहते हैं कि आज पुरानी संपत्ति को लेकर विवाद हो सकता है। आलस्य बिल्कुल न करें, नहीं तो हाथ आया मौका निकल सकता है। बिजनेस में नई योजनाएं बनेंगी और अटके हुए मामले जल्द ही पूरे होंगे। ग्रह गोचर आपके पक्ष में है। अपने संपर्क सूत्र को मजबूत करें। अंक छः गणेशजी कहते हैं कि स्वार्थ की भावना से रिश्ते खराब हो सकते हैं, इसलिए ऐसा करने से बचें। कार्यक्षेत्र में अपनी योजनाओं का खुलासा न करें। परिवार के साथ दिन बीतेगा। आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत होगी। धार्मिक कार्य में रुचि जागेगी। आत्मसम्मान में भी वृद्धि होगी। अंक सात गणेशजी कहते हैं कि बड़ा निर्णय लेते समय अनुभवी लोगों की सलाह लें। तनाव का असर आपकी कार्यक्षमता पर भी पड़ेगा। प्रॉपर्टी से जुड़े कामों में फायदा होगा। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। आज का दिन फायदेमंद है। आपके सोचे हुए काम आज पूरे हो सकते हैं। मूलांक आठ गणेशजी कहते हैं कि आज संतान के कारण अपमान हो सकता है। काम की व्यस्तता अधिक रहेगी। पारिवारिक वातावरण अच्छा बना रहेगा। महिलाएं सेहत को लेकर जागरूक रहेंगी। सुख-सुविधाओं पर खर्च होगा। धार्मिक उत्सव में जाने का कार्यक्रम भी बनेगा। अटका हुआ पैसा मिल सकता है। अंक नौ गणेशजी कहते हैं कि आज इन्वेस्टमेंट करने से बचें, नहीं तो नुकसान हो सकता है। विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान देंगे। पति-पत्नी में नोंक-झोंक हो सकती है। गैस और पेट दर्द की शिकायत रहेगी। सामाजिक गतिविधियों में आपका योगदान आपको पहचान और सम्मान दिलाएगा। Bada Mangal दो हज़ार तेईस Date: ज्येष्ठ मास में कब-कब रहेगा 'बड़ा मंगल', जानें सही डेट और क्यों खास है ये दिन? Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें। आर्टिकल पर भरोसा करके अगर आप कुछ उपाय या अन्य कोई कार्य करना चाहते हैं तो इसके लिए आप स्वतः जिम्मेदार होंगे। हम इसके लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।
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दक्षिण अफ्रीकी टेस्ट कप्तान ग्रीम स्मिथ को अब आइरिश नागरिकता मिल गई। आइरिश गायिका मोर्गान डिएन से अगस्त 2011 में शादी के दो साल बाद उन्हें नागरिकता मिली है।
जोहानिसबर्ग। दक्षिण अफ्रीकी टेस्ट कप्तान ग्रीम स्मिथ को अब आइरिश नागरिकता मिल गई। आइरिश गायिका मोर्गान डिएन से अगस्त 2011 में शादी के दो साल बाद उन्हें नागरिकता मिली है।
काउंटी क्लब सरे से लंबे समय से जुड़े रहने वाले स्मिथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अब विदेश खिलाड़ी के तौर पर नहीं गिने जाएंगे।
गौरतलब है कि ग्रीम स्मिथ ने दक्षिण अफ्रीकी टीम की ओर से 114 टेस्ट मैच में 9220 रन बनाए है जिसमें 27 शतक और 38 अर्धशतक शामिल हैं। 197 वनडे मैचों में 6989 रन बनाए हैं जिसमें 10 शतक और 47 अर्धशतक शामिल हैं।
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दक्षिण अफ्रीकी टेस्ट कप्तान ग्रीम स्मिथ को अब आइरिश नागरिकता मिल गई। आइरिश गायिका मोर्गान डिएन से अगस्त दो हज़ार ग्यारह में शादी के दो साल बाद उन्हें नागरिकता मिली है। जोहानिसबर्ग। दक्षिण अफ्रीकी टेस्ट कप्तान ग्रीम स्मिथ को अब आइरिश नागरिकता मिल गई। आइरिश गायिका मोर्गान डिएन से अगस्त दो हज़ार ग्यारह में शादी के दो साल बाद उन्हें नागरिकता मिली है। काउंटी क्लब सरे से लंबे समय से जुड़े रहने वाले स्मिथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अब विदेश खिलाड़ी के तौर पर नहीं गिने जाएंगे। गौरतलब है कि ग्रीम स्मिथ ने दक्षिण अफ्रीकी टीम की ओर से एक सौ चौदह टेस्ट मैच में नौ हज़ार दो सौ बीस रन बनाए है जिसमें सत्ताईस शतक और अड़तीस अर्धशतक शामिल हैं। एक सौ सत्तानवे वनडे मैचों में छः हज़ार नौ सौ नवासी रन बनाए हैं जिसमें दस शतक और सैंतालीस अर्धशतक शामिल हैं।
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नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी पैसेंजर कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी ने अपनी लोकप्रिय हैचबैक कार सिलेरियो का क्रॉसओवर अवतार सिलेरियो एक्स लॉन्च कर दिया है। इस कार की दिल्ली में एक्सशोरूम कीमत 4. 57 लाख रुपए रखी गई है। वहीं इसके टॉप वेरिएंट की कीमत 5. 42 लाख रुपए है। पुरानी सिलेरियो के मुकाबले यह काफी स्पोर्टी लुक लिए है। कंपनी ने ये कार चार वेरिएंट्स - VXI, VXI (O), ZXI और ZXI (O) में पेश की है। मारुति ने इस कार के हर वेरिएंट को मैन्युअल के साथ ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन में भी उपलब्ध कराया है। रंगों की बात करें तो कंपनी ने सिलेरियो एक्स को एक दम नए पैपरिका ऑरेंज कलर में पेश किया है। इसके अलावा कंपनी ने इसे पहले से उपलब्ध आर्कटिक व्हाइट, ग्लिस्निंग ग्रे, कैफीन ब्राउन और टॉर्क ब्ल्यू के साथ भी उतारा है।
बाहरी लुक की बात करें तो नई मारुति सुज़ुकी सिलेरियो एक्स में कंपनी ने ब्लैक प्लास्टिक क्लैडिंग के साथ नया लुक देने की कोशिश की है। सामने से यह काफी बोल्ड दिखाई देती है। कंपनी ने इस कार में ब्लैक रेडिएटर ग्रिल के साथ एयर डैम दिए गए हैं। बिल्कुल नए फ्रंट बंपर के साथ बड़े फॉगलैंप्स दिए गए हैं। कंपनी ने कार की अंडरबॉडी और साइड में प्लास्टिक क्लैडिंग दी है। नई डिज़ाइन के रियर बंपर के अलावा कार का पिछला हिस्सा लगभग समान है।
इसके केबिन को ऑल-ब्लैक बनाने के साथ व्हाइट फिनिश दिया गया है। सेफ्टी के लिहाज़ से कार के ड्राइवर साइड एयरबैग और सीटबेल्ट सभी वेरिएंट्स में दिया गया है। इसके साथ ही पैसेंजर एयरबैग और एंटीलॉक ब्रेकिंग सिस्टम ऑप्शन के तौर पर मुहैया कराया है। इस कार में भी पिछली सिलेरियो की तरह 998cc का 3-सिलेंडर पेट्रोल कार में दिया गया है।
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नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी पैसेंजर कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी ने अपनी लोकप्रिय हैचबैक कार सिलेरियो का क्रॉसओवर अवतार सिलेरियो एक्स लॉन्च कर दिया है। इस कार की दिल्ली में एक्सशोरूम कीमत चार. सत्तावन लाख रुपए रखी गई है। वहीं इसके टॉप वेरिएंट की कीमत पाँच. बयालीस लाख रुपए है। पुरानी सिलेरियो के मुकाबले यह काफी स्पोर्टी लुक लिए है। कंपनी ने ये कार चार वेरिएंट्स - VXI, VXI , ZXI और ZXI में पेश की है। मारुति ने इस कार के हर वेरिएंट को मैन्युअल के साथ ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन में भी उपलब्ध कराया है। रंगों की बात करें तो कंपनी ने सिलेरियो एक्स को एक दम नए पैपरिका ऑरेंज कलर में पेश किया है। इसके अलावा कंपनी ने इसे पहले से उपलब्ध आर्कटिक व्हाइट, ग्लिस्निंग ग्रे, कैफीन ब्राउन और टॉर्क ब्ल्यू के साथ भी उतारा है। बाहरी लुक की बात करें तो नई मारुति सुज़ुकी सिलेरियो एक्स में कंपनी ने ब्लैक प्लास्टिक क्लैडिंग के साथ नया लुक देने की कोशिश की है। सामने से यह काफी बोल्ड दिखाई देती है। कंपनी ने इस कार में ब्लैक रेडिएटर ग्रिल के साथ एयर डैम दिए गए हैं। बिल्कुल नए फ्रंट बंपर के साथ बड़े फॉगलैंप्स दिए गए हैं। कंपनी ने कार की अंडरबॉडी और साइड में प्लास्टिक क्लैडिंग दी है। नई डिज़ाइन के रियर बंपर के अलावा कार का पिछला हिस्सा लगभग समान है। इसके केबिन को ऑल-ब्लैक बनाने के साथ व्हाइट फिनिश दिया गया है। सेफ्टी के लिहाज़ से कार के ड्राइवर साइड एयरबैग और सीटबेल्ट सभी वेरिएंट्स में दिया गया है। इसके साथ ही पैसेंजर एयरबैग और एंटीलॉक ब्रेकिंग सिस्टम ऑप्शन के तौर पर मुहैया कराया है। इस कार में भी पिछली सिलेरियो की तरह नौ सौ अट्ठानवेcc का तीन-सिलेंडर पेट्रोल कार में दिया गया है।
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सरकार चेक बाउंस को फौजदारी अपराध की श्रेणी से बाहर करने की अपनी पहले की योजना को ठंडे बस्ते में डाल सकती है। सरकार से अनुरोध किया गया है कि चेक बाउंस को अपराध मानने की व्यवस्था जारी रखी जाए ताकि कार्रवाई के डर से लोग अपने वित्तीय वायदे पूरे करते रहें। चेक बाउंस के लंबित मामलों को जल्दी निपटाने के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश पर एक समिति का गठन किया गया है। सरकार अंतिम फैसला करने से पहले उसके सुझावों पर भी विचार कर सकती है।
वित्तीय सेवा विभाग ने कारोबारी धारणा सुधारने तथा अदालती मुकदमों में कमी लाने के लिए छोटे-मोटे अपराधों को फौजदारी अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव रखा था और चेक बाउंस भी इसी में शामिल था। विभाग ने इसे आर्थिक सुधार और न्यायिक व्यवस्था में सुधार लाने के लिए कोविड के बाद की रणनीति बताते हुए विभिन्न हितधारकों से प्रतिक्रिया मांगी थी।
पिछले महीने ही सर्वोच्च न्यायालय ने एक समिति गठित करने का आदेश दिया था, जो देश भर में चेक बाउंस से जुड़े मामलों यानी निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स कानून के तहत मामले जल्दी निपटाने के बारे में सुझाव देगी। उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति में सरकारी अधिकारी और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि बतौर सदस्य शामिल हैं। चेक बाउंस से जुड़े मुकदमे निपटाने में काफी समय लग जाता है। अदालत ने कहा कि देश भर में लंबित कुल मामलों में करीब 30 फीसदी ऐसे ही हैं। उक्त अधिकारी ने कहा कि इस बारे में अंतिम निर्णय समिति के सुझावों को देखने के बाद लिया जाएगा।
निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स कानून की धारा 138 के अनुसार चेक काटने वाले के बैंक खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने के कारण चेक लौट जाना अपराध है। उस सूरत में कानून के तहत उस व्यक्ति को दो साल का कारावास हो सकता है और चेक की राशि का दोगुना तक जुर्माना लग सकता है। चेक बाउंस को अपराध की श्रेणी से हटाए जाने पर कर्ज देने वालों के लिए मुश्किल हो जाएगी क्योंकि उन्हें वसूली में परेशानी होगी। इससे ऋण संबंधी अनुशासन भी कम हो जाएगा और दीवानी अदालतों में ऐसे मुकदमों की भरमार लग जाएगी क्योंकि इन्हें निपटाने में लंबा अरसा लग जाता है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि बेच बाउंस के मामले 10-15 साल तक चलते रहते हैं और इन्हें अपराध की श्रेणी से बाहर करने पर धोखेबाजों को देनदारी नहीं चुकाने का हौसला मिलेगा।
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सरकार चेक बाउंस को फौजदारी अपराध की श्रेणी से बाहर करने की अपनी पहले की योजना को ठंडे बस्ते में डाल सकती है। सरकार से अनुरोध किया गया है कि चेक बाउंस को अपराध मानने की व्यवस्था जारी रखी जाए ताकि कार्रवाई के डर से लोग अपने वित्तीय वायदे पूरे करते रहें। चेक बाउंस के लंबित मामलों को जल्दी निपटाने के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश पर एक समिति का गठन किया गया है। सरकार अंतिम फैसला करने से पहले उसके सुझावों पर भी विचार कर सकती है। वित्तीय सेवा विभाग ने कारोबारी धारणा सुधारने तथा अदालती मुकदमों में कमी लाने के लिए छोटे-मोटे अपराधों को फौजदारी अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव रखा था और चेक बाउंस भी इसी में शामिल था। विभाग ने इसे आर्थिक सुधार और न्यायिक व्यवस्था में सुधार लाने के लिए कोविड के बाद की रणनीति बताते हुए विभिन्न हितधारकों से प्रतिक्रिया मांगी थी। पिछले महीने ही सर्वोच्च न्यायालय ने एक समिति गठित करने का आदेश दिया था, जो देश भर में चेक बाउंस से जुड़े मामलों यानी निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स कानून के तहत मामले जल्दी निपटाने के बारे में सुझाव देगी। उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति में सरकारी अधिकारी और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि बतौर सदस्य शामिल हैं। चेक बाउंस से जुड़े मुकदमे निपटाने में काफी समय लग जाता है। अदालत ने कहा कि देश भर में लंबित कुल मामलों में करीब तीस फीसदी ऐसे ही हैं। उक्त अधिकारी ने कहा कि इस बारे में अंतिम निर्णय समिति के सुझावों को देखने के बाद लिया जाएगा। निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स कानून की धारा एक सौ अड़तीस के अनुसार चेक काटने वाले के बैंक खाते में पर्याप्त रकम नहीं होने के कारण चेक लौट जाना अपराध है। उस सूरत में कानून के तहत उस व्यक्ति को दो साल का कारावास हो सकता है और चेक की राशि का दोगुना तक जुर्माना लग सकता है। चेक बाउंस को अपराध की श्रेणी से हटाए जाने पर कर्ज देने वालों के लिए मुश्किल हो जाएगी क्योंकि उन्हें वसूली में परेशानी होगी। इससे ऋण संबंधी अनुशासन भी कम हो जाएगा और दीवानी अदालतों में ऐसे मुकदमों की भरमार लग जाएगी क्योंकि इन्हें निपटाने में लंबा अरसा लग जाता है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि बेच बाउंस के मामले दस-पंद्रह साल तक चलते रहते हैं और इन्हें अपराध की श्रेणी से बाहर करने पर धोखेबाजों को देनदारी नहीं चुकाने का हौसला मिलेगा।
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Jamshedpur : सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान जोर पकड़ता जा रहा है. इससे जुगसलाई क्षेत्र भी अछूता नहीं है. नगर परिषद की ओर से क्षेत्र के वार्ड नंबर-5 में इस अभियान की शुरुआत की गयी. उसके बाद उसे तेज गति देने का काम किया जा रहा है. इसके तहत सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध सहित प्लास्टिक के वैकल्पिक स्रोतों को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है. उसके साथ ही प्लास्टिक की जगह वैकल्पिक तौर पर इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. इसमें महिलाएं काफी संख्या में भाग ले रही है. उन्हें प्लास्टिक हटाने के लिए क्लोथ बैग बनाना सिखाया जा रहा है. उसके तहत कपड़े एवं जूट से बने झोले का निर्माण करने, रद्दी कागज, न्यूज़ पेपर और ब्राउन पेपर का उपयोग कर पेपर बैग्स एवं ठोंगा बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है. यह अभियान और ट्रेनिंग प्रोग्राम परिषद के ठोस कचरा प्रबंधन की विशेषज्ञ सोनी कुमारी के नेतृत्व में चलाया जा रहा है.
जुगसलाई नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी जेपी यादव का कहना है कि एक जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक की वस्तुओं के निर्माण के अलावा उसके आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग को निषेध किया गया है. इस कारण व्यापारियों के अलावा आम लोगों के समक्ष समस्या उत्पन्न हो गई है. इसी को देखते हुए यह अभियान चलाया जा रहा है. इससे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्लास्टिक के वैकल्पिक स्रोतों से उद्यमिता का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है. साथ ही व्यापारियों को भी समस्या के समाधान के प्रति जागरुक किया जा रहा है.
प्लास्टिक स्टिक युक्त इयर बड्स, गुब्बारों के लिए प्लास्टिक की डंडिया, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइस क्रीम की डांडिया, पॉलीस्टीरिन (थर्मोकोल) की सजावटी सामग्री.
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Jamshedpur : सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान जोर पकड़ता जा रहा है. इससे जुगसलाई क्षेत्र भी अछूता नहीं है. नगर परिषद की ओर से क्षेत्र के वार्ड नंबर-पाँच में इस अभियान की शुरुआत की गयी. उसके बाद उसे तेज गति देने का काम किया जा रहा है. इसके तहत सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध सहित प्लास्टिक के वैकल्पिक स्रोतों को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है. उसके साथ ही प्लास्टिक की जगह वैकल्पिक तौर पर इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. इसमें महिलाएं काफी संख्या में भाग ले रही है. उन्हें प्लास्टिक हटाने के लिए क्लोथ बैग बनाना सिखाया जा रहा है. उसके तहत कपड़े एवं जूट से बने झोले का निर्माण करने, रद्दी कागज, न्यूज़ पेपर और ब्राउन पेपर का उपयोग कर पेपर बैग्स एवं ठोंगा बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है. यह अभियान और ट्रेनिंग प्रोग्राम परिषद के ठोस कचरा प्रबंधन की विशेषज्ञ सोनी कुमारी के नेतृत्व में चलाया जा रहा है. जुगसलाई नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी जेपी यादव का कहना है कि एक जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक की वस्तुओं के निर्माण के अलावा उसके आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग को निषेध किया गया है. इस कारण व्यापारियों के अलावा आम लोगों के समक्ष समस्या उत्पन्न हो गई है. इसी को देखते हुए यह अभियान चलाया जा रहा है. इससे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्लास्टिक के वैकल्पिक स्रोतों से उद्यमिता का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है. साथ ही व्यापारियों को भी समस्या के समाधान के प्रति जागरुक किया जा रहा है. प्लास्टिक स्टिक युक्त इयर बड्स, गुब्बारों के लिए प्लास्टिक की डंडिया, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइस क्रीम की डांडिया, पॉलीस्टीरिन की सजावटी सामग्री.
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आज साल 2021 का आखिरी दिन आ गया है और सभी लोग नए साल के जश्न की तैयारी कर रहे हैं। इसी बीच ई-कॉमर्स कंपनियां और मोबाइल निर्माता स्मार्टफोंस पर बढ़िया डिस्काउंट ऑफर पेश कर रहे हैं। OnePlus की वैबसाइट पर कंपनी 21 से 31 दिसंबर तक कई प्रोडक्टस पर डिस्काउंट ऑफर कर रही है।
इस सेल के दौरान अगर आप OnePlus 9R को खरीदना चाह रहे हैं तो फोन को Rs 39,999 के बजाए केवल Rs 33,999 में खरीद सकते हैं। डिवाइस को ICICI बैंक के कार्ड से खरीदने पर Rs 3000 का इंस्टेंट डिस्काउंट मिल रहा है।
OnePlus 9R मोबाइल फोन में आपको एक 6.55-इंच की FHD+ AMOLED डिस्प्ले मिल रही है, इसमें आपको एक पंच-होल कटआउट भी मिल रहा है, जो फोन में सेल्फी के लिए दिया गया है। इसके अलावा फोन में आपको दो कलर ऑप्शन भी मिल रहे हैं, आपको बता देते है कि आप इस मोबाइल फोन को लेक ब्लू और कार्बन ब्लैक रंगों में ले सकते हैं।
इसके अलावा आपको बता देते है कि आपको यह मोबाइल फोन क्वालकॉम स्नेपड्रैगन 870 के साथ मिल रहा है। इसके अलावा फोन में 8GB तक की रैम और 256GB तक की स्टोरेज मिल रही है। फोन में कैमरा आदि की बात करें तो आपको बता देते है कि OnePlus 9R मोबाइल फोन में एक क्वाड-कैमरा सेटअप मिल रहा है, इसके अलावा इसमें आपको एक 48MP का प्राइमरी सेंसर भी मिल रहा है, फोन में आपको 16MP का अल्ट्रा-वाइड एंगल कैमरा भी मिल रहा है, साथ ही फोन में आपको एक 5MP का मैक्रो लेंस और एक 2MP का मोनोक्रोम लेंस भी मिल रहा है। सेल्फी के लिए फोन में आपको एक 16MP का कैमरा सेटअप मिल रहा है। फोन में एक 4500mAh क्षमता की बैटरी मिल रही है, जो 65T की वार्प चार्ज फ़ास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।
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आज साल दो हज़ार इक्कीस का आखिरी दिन आ गया है और सभी लोग नए साल के जश्न की तैयारी कर रहे हैं। इसी बीच ई-कॉमर्स कंपनियां और मोबाइल निर्माता स्मार्टफोंस पर बढ़िया डिस्काउंट ऑफर पेश कर रहे हैं। OnePlus की वैबसाइट पर कंपनी इक्कीस से इकतीस दिसंबर तक कई प्रोडक्टस पर डिस्काउंट ऑफर कर रही है। इस सेल के दौरान अगर आप OnePlus नौR को खरीदना चाह रहे हैं तो फोन को उनतालीस रुपया,नौ सौ निन्यानवे के बजाए केवल तैंतीस रुपया,नौ सौ निन्यानवे में खरीद सकते हैं। डिवाइस को ICICI बैंक के कार्ड से खरीदने पर तीन हज़ार रुपया का इंस्टेंट डिस्काउंट मिल रहा है। OnePlus नौR मोबाइल फोन में आपको एक छः.पचपन-इंच की FHD+ AMOLED डिस्प्ले मिल रही है, इसमें आपको एक पंच-होल कटआउट भी मिल रहा है, जो फोन में सेल्फी के लिए दिया गया है। इसके अलावा फोन में आपको दो कलर ऑप्शन भी मिल रहे हैं, आपको बता देते है कि आप इस मोबाइल फोन को लेक ब्लू और कार्बन ब्लैक रंगों में ले सकते हैं। इसके अलावा आपको बता देते है कि आपको यह मोबाइल फोन क्वालकॉम स्नेपड्रैगन आठ सौ सत्तर के साथ मिल रहा है। इसके अलावा फोन में आठGB तक की रैम और दो सौ छप्पनGB तक की स्टोरेज मिल रही है। फोन में कैमरा आदि की बात करें तो आपको बता देते है कि OnePlus नौR मोबाइल फोन में एक क्वाड-कैमरा सेटअप मिल रहा है, इसके अलावा इसमें आपको एक अड़तालीसMP का प्राइमरी सेंसर भी मिल रहा है, फोन में आपको सोलहMP का अल्ट्रा-वाइड एंगल कैमरा भी मिल रहा है, साथ ही फोन में आपको एक पाँचMP का मैक्रो लेंस और एक दोMP का मोनोक्रोम लेंस भी मिल रहा है। सेल्फी के लिए फोन में आपको एक सोलहMP का कैमरा सेटअप मिल रहा है। फोन में एक चार हज़ार पाँच सौmAh क्षमता की बैटरी मिल रही है, जो पैंसठT की वार्प चार्ज फ़ास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।
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सुबह उठकर सैर पर जाने के कितने फायदे हैं उसकी शायद कोई सीमा ही नहीं है. सुबह सुबह प्रकृति को निहारना, ठंडी हवा को अपने तन पर महसूस करने के बाद बड़े से बड़ा तनाव भी काफूर हो जाता है. चलिए आज वॉक के कुछ फायदों के बारे में जान लेते हैं.
रोज़ाना वॉक करने या दौड़ने से शरीर की हड्डियां मज़बूत होती हैं इसके साथ ही जोड़ों और मांसपेशियों को नई ऊर्जा मिलती है. वॉक करने से टेंशन और तनाव से मुक्ति मिलती है. आप रोज़ आधा घंटा वॉक करेंगे तो खुद को फ्रेश और टेंशन फ्री महसूस करेंगे. वाक करने से हमारा इम्यून सिस्टम स्ट्रांग होता है और शरीर का मेटाबोलिज्म बढ़ता है. जो लोग रोज वॉक करते हैं उनमें डायबिटीज होने का खतरा कम होता है क्योंकि वाक करने से शरीर में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है और कैलोरी की मात्रा कम होती है.
ये हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने में मदद करता है. आधे घंटे तक वॉक करते हैं तो इससे हार्ट अटैक का खतरा कम होता है इसके अलावा दिल से संबंधित बहुत सारी समस्याएं खत्म होने लगती हैं. रोजाना सुबह वॉक करने से एल्जाइमर होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। रोज़ सुबह वॉक करनेवाले कैंसर के मरीज़ों की सेहत दूसरे मरीज़ों की तुलना में अच्छी रहती है. वाक करने से हमारा शरीर फिट रहता है और दिन भर हम अपने आपको स्ट्रेस से मुक्त रख पाते हैं.
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सुबह उठकर सैर पर जाने के कितने फायदे हैं उसकी शायद कोई सीमा ही नहीं है. सुबह सुबह प्रकृति को निहारना, ठंडी हवा को अपने तन पर महसूस करने के बाद बड़े से बड़ा तनाव भी काफूर हो जाता है. चलिए आज वॉक के कुछ फायदों के बारे में जान लेते हैं. रोज़ाना वॉक करने या दौड़ने से शरीर की हड्डियां मज़बूत होती हैं इसके साथ ही जोड़ों और मांसपेशियों को नई ऊर्जा मिलती है. वॉक करने से टेंशन और तनाव से मुक्ति मिलती है. आप रोज़ आधा घंटा वॉक करेंगे तो खुद को फ्रेश और टेंशन फ्री महसूस करेंगे. वाक करने से हमारा इम्यून सिस्टम स्ट्रांग होता है और शरीर का मेटाबोलिज्म बढ़ता है. जो लोग रोज वॉक करते हैं उनमें डायबिटीज होने का खतरा कम होता है क्योंकि वाक करने से शरीर में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है और कैलोरी की मात्रा कम होती है. ये हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने में मदद करता है. आधे घंटे तक वॉक करते हैं तो इससे हार्ट अटैक का खतरा कम होता है इसके अलावा दिल से संबंधित बहुत सारी समस्याएं खत्म होने लगती हैं. रोजाना सुबह वॉक करने से एल्जाइमर होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। रोज़ सुबह वॉक करनेवाले कैंसर के मरीज़ों की सेहत दूसरे मरीज़ों की तुलना में अच्छी रहती है. वाक करने से हमारा शरीर फिट रहता है और दिन भर हम अपने आपको स्ट्रेस से मुक्त रख पाते हैं.
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Mithai Momo: मोमो रेसिपी का ये वीडियो देख खौल उठेगा आपका भी खून, लोग बोले- उल्टी करवाएगा क्या?
मोमो की इस अजीब सी रेसिपी के वीडियो (Mithai Momo) को देखने के बाद किसी का मन खट्टा हो गया है, तो किसी का उल्टी करने का हो रहा है. कई लोगों ने दुकानदार को सद्बुद्धि देने की बात कही है.
अगर आपको लगता है कि खाने-पीने की चीजों के साथ हर तरह के एक्सपेरिमेंट्स हो चुके हैं, तो शायद आप गलत हैं. इन दिनों मोमो (Momo Recipe) का एक ऐसा वर्जन सामने आया है, जिसे देखने के बाद आप या तो सदमे में चले जाएंगे या फिर आपका खून ही खौल उठेगा. वीडियो में एक स्ट्रीट वेंडर मोमो के साथ अन्याय करते हुए नजर आ रहा है. आप देख सकते हैं कि उसने मोमो में चटपटी फीलिंग की जगह पर अलग-अलग तरह की मिठाइयां ठूंस (Mithai Momo) दी है. ऐसे में अपनी फेवरेट डिश के साथ अत्याचार होता देख सोशल मीडिया की पब्लिक आगबबूला हो गई है. इस वायरल वीडियो को देखने के बाद यूजर्स कह रहे हैं- जालिमों ने मोमो (Momo) को भी नहीं बख्शा. वहीं, कुछ यूजर्स ऐसे भी हैं, जिनका कहना है कि अगर ऐसी चीजें होती रहीं तो प्रलय निश्चित है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में एक शख्स मोमोज के साथ खिलवाड़ करता हुआ नजर आता है. आप देख सकते हैं कि वह कैसे मोमोज की फीलिंग के लिए उसमें मिठाइयां मिला रहा है. फीलिंग के लिए शख्स ने गुलाब जामुन, बूंदी के लड्डू, बर्फी और गाजर के हलवे का इस्तेमाल किया है. अब इस वीडियो को देखने के बाद किसी का मन खट्टा हो गया है, तो किसी का उल्टी करने का हो रहा है. कई लोगों ने दुकानदार को सद्बुद्धि देने की बात कही है. तो आइए देखते हैं इस नए बवाल का वीडियो.
मोमो की इस वीयर्ड कॉम्बिनेशन रेसिपी वाले वीडियो को ट्विटर पर @MukeshVMakhija नाम के हैंडल से शेयर किया गया है. यूजर ने कैप्शन में लिखा है, 'कुछ तो लिहाज करो...मोमो मिठाई.' 29 मार्च को अपलोड हुए इस वीडियो को अब तक 50 हजार बार देखा जा चुका है. हालांकि, इस अजीब सी रेसिपी को देखने के बाद जनता का दिमाग भन्नाया हुआ है. लोग मोमो के साथ हुए खिलवाड़ को देखकर गुस्से से तमतमाए हुए हैं. वीडियो में यूजर्स दुकानदार को जमकर कोसने के साथ ही लगातार अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करा रहे हैं.
एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा है, 'भाई ऐसा करना बंद कर दो वरना प्रलय आ जाएगा.' वहीं, दूसरे यूजर का कहना है, 'मुझे तो देखकर ही उल्टी आ गई भाई!' एक अन्य यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा है, 'पक्का इसे खाकर हार्ट अटैक आ जाएगा.' कुल मिलाकर इस वीडियो को देखने के बाद हर कोई भड़का हुआ है.
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Mithai Momo: मोमो रेसिपी का ये वीडियो देख खौल उठेगा आपका भी खून, लोग बोले- उल्टी करवाएगा क्या? मोमो की इस अजीब सी रेसिपी के वीडियो को देखने के बाद किसी का मन खट्टा हो गया है, तो किसी का उल्टी करने का हो रहा है. कई लोगों ने दुकानदार को सद्बुद्धि देने की बात कही है. अगर आपको लगता है कि खाने-पीने की चीजों के साथ हर तरह के एक्सपेरिमेंट्स हो चुके हैं, तो शायद आप गलत हैं. इन दिनों मोमो का एक ऐसा वर्जन सामने आया है, जिसे देखने के बाद आप या तो सदमे में चले जाएंगे या फिर आपका खून ही खौल उठेगा. वीडियो में एक स्ट्रीट वेंडर मोमो के साथ अन्याय करते हुए नजर आ रहा है. आप देख सकते हैं कि उसने मोमो में चटपटी फीलिंग की जगह पर अलग-अलग तरह की मिठाइयां ठूंस दी है. ऐसे में अपनी फेवरेट डिश के साथ अत्याचार होता देख सोशल मीडिया की पब्लिक आगबबूला हो गई है. इस वायरल वीडियो को देखने के बाद यूजर्स कह रहे हैं- जालिमों ने मोमो को भी नहीं बख्शा. वहीं, कुछ यूजर्स ऐसे भी हैं, जिनका कहना है कि अगर ऐसी चीजें होती रहीं तो प्रलय निश्चित है. सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में एक शख्स मोमोज के साथ खिलवाड़ करता हुआ नजर आता है. आप देख सकते हैं कि वह कैसे मोमोज की फीलिंग के लिए उसमें मिठाइयां मिला रहा है. फीलिंग के लिए शख्स ने गुलाब जामुन, बूंदी के लड्डू, बर्फी और गाजर के हलवे का इस्तेमाल किया है. अब इस वीडियो को देखने के बाद किसी का मन खट्टा हो गया है, तो किसी का उल्टी करने का हो रहा है. कई लोगों ने दुकानदार को सद्बुद्धि देने की बात कही है. तो आइए देखते हैं इस नए बवाल का वीडियो. मोमो की इस वीयर्ड कॉम्बिनेशन रेसिपी वाले वीडियो को ट्विटर पर @MukeshVMakhija नाम के हैंडल से शेयर किया गया है. यूजर ने कैप्शन में लिखा है, 'कुछ तो लिहाज करो...मोमो मिठाई.' उनतीस मार्च को अपलोड हुए इस वीडियो को अब तक पचास हजार बार देखा जा चुका है. हालांकि, इस अजीब सी रेसिपी को देखने के बाद जनता का दिमाग भन्नाया हुआ है. लोग मोमो के साथ हुए खिलवाड़ को देखकर गुस्से से तमतमाए हुए हैं. वीडियो में यूजर्स दुकानदार को जमकर कोसने के साथ ही लगातार अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करा रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा है, 'भाई ऐसा करना बंद कर दो वरना प्रलय आ जाएगा.' वहीं, दूसरे यूजर का कहना है, 'मुझे तो देखकर ही उल्टी आ गई भाई!' एक अन्य यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा है, 'पक्का इसे खाकर हार्ट अटैक आ जाएगा.' कुल मिलाकर इस वीडियो को देखने के बाद हर कोई भड़का हुआ है. यह भी पढ़ेंः
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नई दिल्लीः भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष के लक्ष्मण ने रविवार को दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली सरकार पर ओबीसी समुदाय को धोखा देने और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने का आरोप लगाया।
लक्ष्मण ने कहा कि 1993 के बाद राष्ट्रीय राजधानी में रहने वाले पिछड़े समुदाय को अपना जाति प्रमाण पत्र नहीं मिला है और उन्होंने सरकार पर उनके साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया।
लक्ष्मण ने कहा, "ओबीसी समुदाय के लोग केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के खिलाफ मांग और विरोध कर रहे हैं। वे (आप नेता) समुदाय को दिल्ली में उनके अधिकारों से वंचित कर रहे हैं। "
एएनआई से बात करते हुए, लक्ष्मण ने कहा कि 1993 के बाद राष्ट्रीय राजधानी में प्रवास करने वाले ओबीसी समुदाय के लोगों को प्रमाण पत्र नहीं मिला है।
"दिल्ली देश की राजधानी है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार जैसे विभिन्न राज्यों के 1. 5 करोड़ से अधिक ओबीसी लोग लगभग 25-30 वर्षों से दिल्ली में बसे हुए हैं, लेकिन केवल 1993 से पहले यहां रहने वालों को ही ओबीसी प्रमाणपत्र मिल रहा है। " उसने दावा किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सूची में पिछड़े का दर्जा दिया गया है, लेकिन प्रमाण पत्र नहीं देने से वे अपने अधिकारों और केंद्रीय योजनाओं से वंचित हो जाएंगे.
भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री केजरीवाल पर केंद्र सरकार के आदेश के बावजूद पिछड़े वर्गों के लाभ के लिए राज्य सरकारों को अधिनियमों में संशोधन करने के आदेश के बावजूद 1993 के निवास प्रमाण पत्र अधिनियम को समाप्त करने के अपने चुनावी घोषणा पत्र को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। (एएनआई)
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नई दिल्लीः भारतीय जनता पार्टी के ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष के लक्ष्मण ने रविवार को दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार पर ओबीसी समुदाय को धोखा देने और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने का आरोप लगाया। लक्ष्मण ने कहा कि एक हज़ार नौ सौ तिरानवे के बाद राष्ट्रीय राजधानी में रहने वाले पिछड़े समुदाय को अपना जाति प्रमाण पत्र नहीं मिला है और उन्होंने सरकार पर उनके साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया। लक्ष्मण ने कहा, "ओबीसी समुदाय के लोग केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के खिलाफ मांग और विरोध कर रहे हैं। वे समुदाय को दिल्ली में उनके अधिकारों से वंचित कर रहे हैं। " एएनआई से बात करते हुए, लक्ष्मण ने कहा कि एक हज़ार नौ सौ तिरानवे के बाद राष्ट्रीय राजधानी में प्रवास करने वाले ओबीसी समुदाय के लोगों को प्रमाण पत्र नहीं मिला है। "दिल्ली देश की राजधानी है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार जैसे विभिन्न राज्यों के एक. पाँच करोड़ से अधिक ओबीसी लोग लगभग पच्चीस-तीस वर्षों से दिल्ली में बसे हुए हैं, लेकिन केवल एक हज़ार नौ सौ तिरानवे से पहले यहां रहने वालों को ही ओबीसी प्रमाणपत्र मिल रहा है। " उसने दावा किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सूची में पिछड़े का दर्जा दिया गया है, लेकिन प्रमाण पत्र नहीं देने से वे अपने अधिकारों और केंद्रीय योजनाओं से वंचित हो जाएंगे. भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री केजरीवाल पर केंद्र सरकार के आदेश के बावजूद पिछड़े वर्गों के लाभ के लिए राज्य सरकारों को अधिनियमों में संशोधन करने के आदेश के बावजूद एक हज़ार नौ सौ तिरानवे के निवास प्रमाण पत्र अधिनियम को समाप्त करने के अपने चुनावी घोषणा पत्र को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया।
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अमरीका ने बढ़ाया तालिबान की ओर दोस्ती का हाथ, लेकिन क्यों?
अफ़ग़ानिस्तान के मामलों में अमरीका के विशेष दूत ने तालिबान शासन के साथ पारस्परिक विचार-विमर्श के लिए वाशिंगटन की तैयारी की घोषणा की है।
अफ़ग़ानिस्तान के मामलों में अमरीका के विशेष दूत थोमस वैस्ट ने पत्रकारों से बात करते हुए कहाः हम तालिबान के साथ बातचीत का समर्थन करते हैं और इस देश के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए तालिबान के साथ सहयोग को ज़रूरी समझते हैं।
अमरीकी राजनयिक का कहना था कि तालिबान के साथ बातचीत नहीं करना, उचित क़दम नहीं है, क्योंकि इस तरह से हम अफ़ग़ानिस्तान की जनता के लिए कोई काम नहीं कर सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान अधिकारियों की यात्रा के मामले में छूट देने के बारे में वाशिंगटन का कोई विशेष रुख़ नहीं है, क्योंकि यह एक बड़ा सुरक्षा मुद्दा है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों के बीच 13 तालिबान अधिकारियों की यात्रा को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी और उनकी यात्रा की छूट को आगे नहीं बढ़ाया गया।
अफ़ग़ानिस्तान के मामलों में अमरीका के विशेष दूत वैस्ट की तालिबान के साथ सहयोग की घोषणा का मतलब है कि वाशिंगटन ने तालिबान को लेकर अपनी विदेश नीति में बदलाव किया है। लेकिन इसके लिए अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान की जनता की ज़रूरतों को बहाना बनाया है। क्योंकि वैस्ट ने दावा किया है कि जब तक तालिबान के साथ संबंध नहीं होंगे, इस देश की जनता की समस्याओं का समाधान नहीं निकाला जा सकेगा और लोग वर्तमान संकट में फंसे रहेंगे।
यहां सवाल यह है कि अमरीका अफ़ग़ानिस्तान की पूर्व सरकार के पतन का कारण बना और तालिबान के सत्ता पर क़ब्ज़ा करने के बाद उसी ने अफ़ग़ानिस्तान की संपत्ति को सीज़ करके इस युद्ध ग्रस्त देश में आर्थिक संकट को जन्म दिया। लेकिन अब वही अमरीका यू-टर्न लेते हुए तालिबान के साथ सहयोग को ज़रूरी क़रार दे रहा है।
सच्चाई यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस और चीन अमरीका के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में तालिबान को लेकर नर्म रवैया अपना रहे हैं और तालिबान भी इन देशों को कई बार अफ़ग़ानिस्तान में निवेश की दावत चुके हैं। इससे वाशिंगटन की चिंता बढ़ गई है कि कहीं तालिबान से दूरी बीजिंग और मास्को के लिए अवसर में न बदल जाए।
हालांकि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की वापसी में मदद करके अमरीका ने पड़ोसी देशों के लिए चुनौतियों का एक जाल बिछाया था, लेकिन अब वह इस नतीजे पर पहुंचा है कि कहीं यह चाल उलटी न पड़ जाए और इस स्थिति का फ़ायदा उठाकर ख़ुद उसके प्रतिद्वंद्वी उसके हितों को ख़तरे में डाल दें। यही वजह है कि बाइडन प्रशासन अपनी इस ग़लती को जल्दी से सुधारना चाहता है और तालिबान की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है।
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अमरीका ने बढ़ाया तालिबान की ओर दोस्ती का हाथ, लेकिन क्यों? अफ़ग़ानिस्तान के मामलों में अमरीका के विशेष दूत ने तालिबान शासन के साथ पारस्परिक विचार-विमर्श के लिए वाशिंगटन की तैयारी की घोषणा की है। अफ़ग़ानिस्तान के मामलों में अमरीका के विशेष दूत थोमस वैस्ट ने पत्रकारों से बात करते हुए कहाः हम तालिबान के साथ बातचीत का समर्थन करते हैं और इस देश के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए तालिबान के साथ सहयोग को ज़रूरी समझते हैं। अमरीकी राजनयिक का कहना था कि तालिबान के साथ बातचीत नहीं करना, उचित क़दम नहीं है, क्योंकि इस तरह से हम अफ़ग़ानिस्तान की जनता के लिए कोई काम नहीं कर सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान अधिकारियों की यात्रा के मामले में छूट देने के बारे में वाशिंगटन का कोई विशेष रुख़ नहीं है, क्योंकि यह एक बड़ा सुरक्षा मुद्दा है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों के बीच तेरह तालिबान अधिकारियों की यात्रा को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी और उनकी यात्रा की छूट को आगे नहीं बढ़ाया गया। अफ़ग़ानिस्तान के मामलों में अमरीका के विशेष दूत वैस्ट की तालिबान के साथ सहयोग की घोषणा का मतलब है कि वाशिंगटन ने तालिबान को लेकर अपनी विदेश नीति में बदलाव किया है। लेकिन इसके लिए अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान की जनता की ज़रूरतों को बहाना बनाया है। क्योंकि वैस्ट ने दावा किया है कि जब तक तालिबान के साथ संबंध नहीं होंगे, इस देश की जनता की समस्याओं का समाधान नहीं निकाला जा सकेगा और लोग वर्तमान संकट में फंसे रहेंगे। यहां सवाल यह है कि अमरीका अफ़ग़ानिस्तान की पूर्व सरकार के पतन का कारण बना और तालिबान के सत्ता पर क़ब्ज़ा करने के बाद उसी ने अफ़ग़ानिस्तान की संपत्ति को सीज़ करके इस युद्ध ग्रस्त देश में आर्थिक संकट को जन्म दिया। लेकिन अब वही अमरीका यू-टर्न लेते हुए तालिबान के साथ सहयोग को ज़रूरी क़रार दे रहा है। सच्चाई यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस और चीन अमरीका के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में तालिबान को लेकर नर्म रवैया अपना रहे हैं और तालिबान भी इन देशों को कई बार अफ़ग़ानिस्तान में निवेश की दावत चुके हैं। इससे वाशिंगटन की चिंता बढ़ गई है कि कहीं तालिबान से दूरी बीजिंग और मास्को के लिए अवसर में न बदल जाए। हालांकि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की वापसी में मदद करके अमरीका ने पड़ोसी देशों के लिए चुनौतियों का एक जाल बिछाया था, लेकिन अब वह इस नतीजे पर पहुंचा है कि कहीं यह चाल उलटी न पड़ जाए और इस स्थिति का फ़ायदा उठाकर ख़ुद उसके प्रतिद्वंद्वी उसके हितों को ख़तरे में डाल दें। यही वजह है कि बाइडन प्रशासन अपनी इस ग़लती को जल्दी से सुधारना चाहता है और तालिबान की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है।
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चर्चा में क्यों?
देश भर में कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के आँकड़े तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में लगातार बढ़ती महामारी के बीच बिहार में चुनाव आयोजित करने को लेकर राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ रही है। बिहार में कई राजनीतिक दल COVID-19 महामारी के प्रकोप की समाप्ति तक राज्य चुनाव स्थगित करने की मांग कर रहे हैं।
- निवार्चन आयोग (Election Commission-EC) के लिये कानून के तहत यह अनिवार्य है कि वह लोकसभा या विधानसभा के पाँच वर्ष के कार्यकाल के समाप्त होने से पूर्व छह माह के भीतर किसी भी समय चुनाव आयोजित कराए।
- निर्वाचन आयोग के लिये यह आवश्यक है कि चुनावों की तारीख इस तरह निर्धारित की जाए कि जब निवर्तमान सदन विघटन हो तो नई विधानसभा अथवा लोकसभा मौजूद हो।
- इस प्रकार बिहार के मामले में चुनाव आयोग को 29 नवंबर को निवर्तमान सदन की समाप्ति से पूर्व विधानसभा चुनाव कराना चाहिये।
- वहीं यदि विधानसभा अथवा लोकसभा का विघटन अपने निर्धारित समय से पूर्व हो जाता है तो जहाँ तक संभव हो निर्वाचन आयोग यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि विघटन के छह माह के भीतर एक नई लोकसभा अथवा विधानसभा स्थापित हो जाए।
- नियमों के अनुसार, आमतौर पर एक बार चुनावों की घोषणा के बाद वे तय कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित किये जाते हैं।
- हालाँकि अपवाद स्वरूप कुछ मामलों में असाधारण परिस्थितियों के मद्देनज़र इस प्रक्रिया को स्थगित किया जा सकता है अथवा इसे रोका जा सकता है।
- जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 153 के अनुसार, निवार्चन आयोग आवश्यकता अनुसार निर्धारित तिथि में परिवर्तन करके चुनाव आयोजित कराने की समय सीमा में विस्तार कर सकता है, हालाँकि इस तरह के विस्तार को लोकसभा या विधानसभा के सामान्य विघटन की तारीख से पूर्व होना अनिवार्य है।
- उल्लेखनीय है कि वर्ष 1991 में निर्वाचन आयोग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 153 के इसी प्रावधान को संविधान के अनुच्छेद 324 के साथ प्रयोग करते हुए तमिलनाडु में चुनाव अभियान के दौरान राजीव गांधी की हत्या के बाद तीन सप्ताह के लिये तत्कालीन संसदीय चुनावों को स्थगित कर दिया था।
- विदित हो कि मार्च 2020 में ही COVID-19 महामारी के कारण निर्वाचन आयोग द्वारा 18 राज्यसभा सीटों के चुनाव स्थगित कर दिये गए थे।
- निर्वाचन आयोग, जिसे चुनाव आयोग के नाम से भी जाना जाता है, एक स्वायत्त संवैधानिक निकाय है जो भारत में संघ और राज्य चुनाव प्रक्रियाओं का संचालन करता है।
- यह निकाय भारत में लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं, देश में राष्ट्रपति एवं उप-राष्ट्रपति के पदों के लिये निर्वाचनों का संचालन करता है।
- संविधान के अनुसार निर्वाचन आयोग की स्थापना 25 जनवरी, 1950 को की गई थी। प्रारम्भ में, आयोग में केवल एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे। वर्तमान में इसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो निर्वाचन आयुक्त हैं।
बिहार में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 153 का प्रयोग?
- जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 153 के तहत चुनाव की समय सीमा में विस्तार करने की शक्ति का प्रयोग केवल चुनाव की अधिसूचना जारी करने के बाद ही किया जा सकता है।
- इस प्रकार यदि चुनाव आयोग बिहार विधानसभा चुनाव स्थगित करना चाहता है तो उसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी असाधारण शक्ति का प्रयोग करना होगा।
- निर्वाचन आयोग को चुनाव आयोजित न करा पाने की अपनी असमर्थता के बारे में सरकार को अधिसूचित करना होगा, जिसके पश्चात् भारत सरकार और राष्ट्रपति इस संबंध में आगे की रणनीति निर्धारित करेंगे।
- गौरतलब है कि इस संबंध में मुख्यतः दो निर्णय लिये जा सकते हैं, पहला यह कि राज्य में मौजूदा सदन की समाप्ति पर राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है और दूसरा विकल्प यह है कि राष्ट्रपति राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री को विघटन के बाद भी कुछ समय तक कार्य जारी रखने की अनुमति दे सकते हैं।
- भारतीय संविधान अथवा किसी अन्य कानून में ऐसे कोई भी विशिष्ट प्रावधान नहीं है, जो उन परिस्थितियों को निर्दिष्ट करता हो, जिनके तहत चुनाव स्थगित किये जा सकते हैं।
- हालाँकि कानून विशेषज्ञ मानते हैं कि 'अशांति और अव्यवस्था, भूकंप और बाढ़ जैसे प्राकृतिक आपदाओं अथवा अन्य किसी ऐसे परिस्थिति में, निर्वाचन आयोग चुनाव को स्थगित करने का निर्णय ले सकता है, जो कि आयोग के नियंत्रण में नहीं हैं।
- आमतौर पर निर्वाचन आयोग केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों से सलाह लेने के बाद और तत्कालीन असाधारण परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही चुनाव की समय सीमा में विस्तार संबंधी महत्त्वपूर्ण निर्णय लेता है।
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चर्चा में क्यों? देश भर में कोरोना वायरस महामारी के आँकड़े तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में लगातार बढ़ती महामारी के बीच बिहार में चुनाव आयोजित करने को लेकर राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ रही है। बिहार में कई राजनीतिक दल COVID-उन्नीस महामारी के प्रकोप की समाप्ति तक राज्य चुनाव स्थगित करने की मांग कर रहे हैं। - निवार्चन आयोग के लिये कानून के तहत यह अनिवार्य है कि वह लोकसभा या विधानसभा के पाँच वर्ष के कार्यकाल के समाप्त होने से पूर्व छह माह के भीतर किसी भी समय चुनाव आयोजित कराए। - निर्वाचन आयोग के लिये यह आवश्यक है कि चुनावों की तारीख इस तरह निर्धारित की जाए कि जब निवर्तमान सदन विघटन हो तो नई विधानसभा अथवा लोकसभा मौजूद हो। - इस प्रकार बिहार के मामले में चुनाव आयोग को उनतीस नवंबर को निवर्तमान सदन की समाप्ति से पूर्व विधानसभा चुनाव कराना चाहिये। - वहीं यदि विधानसभा अथवा लोकसभा का विघटन अपने निर्धारित समय से पूर्व हो जाता है तो जहाँ तक संभव हो निर्वाचन आयोग यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि विघटन के छह माह के भीतर एक नई लोकसभा अथवा विधानसभा स्थापित हो जाए। - नियमों के अनुसार, आमतौर पर एक बार चुनावों की घोषणा के बाद वे तय कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित किये जाते हैं। - हालाँकि अपवाद स्वरूप कुछ मामलों में असाधारण परिस्थितियों के मद्देनज़र इस प्रक्रिया को स्थगित किया जा सकता है अथवा इसे रोका जा सकता है। - जनप्रतिनिधित्व अधिनियम एक हज़ार नौ सौ इक्यावन की धारा एक सौ तिरेपन के अनुसार, निवार्चन आयोग आवश्यकता अनुसार निर्धारित तिथि में परिवर्तन करके चुनाव आयोजित कराने की समय सीमा में विस्तार कर सकता है, हालाँकि इस तरह के विस्तार को लोकसभा या विधानसभा के सामान्य विघटन की तारीख से पूर्व होना अनिवार्य है। - उल्लेखनीय है कि वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे में निर्वाचन आयोग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा एक सौ तिरेपन के इसी प्रावधान को संविधान के अनुच्छेद तीन सौ चौबीस के साथ प्रयोग करते हुए तमिलनाडु में चुनाव अभियान के दौरान राजीव गांधी की हत्या के बाद तीन सप्ताह के लिये तत्कालीन संसदीय चुनावों को स्थगित कर दिया था। - विदित हो कि मार्च दो हज़ार बीस में ही COVID-उन्नीस महामारी के कारण निर्वाचन आयोग द्वारा अट्ठारह राज्यसभा सीटों के चुनाव स्थगित कर दिये गए थे। - निर्वाचन आयोग, जिसे चुनाव आयोग के नाम से भी जाना जाता है, एक स्वायत्त संवैधानिक निकाय है जो भारत में संघ और राज्य चुनाव प्रक्रियाओं का संचालन करता है। - यह निकाय भारत में लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं, देश में राष्ट्रपति एवं उप-राष्ट्रपति के पदों के लिये निर्वाचनों का संचालन करता है। - संविधान के अनुसार निर्वाचन आयोग की स्थापना पच्चीस जनवरी, एक हज़ार नौ सौ पचास को की गई थी। प्रारम्भ में, आयोग में केवल एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे। वर्तमान में इसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो निर्वाचन आयुक्त हैं। बिहार में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा एक सौ तिरेपन का प्रयोग? - जनप्रतिनिधित्व अधिनियम एक हज़ार नौ सौ इक्यावन की धारा एक सौ तिरेपन के तहत चुनाव की समय सीमा में विस्तार करने की शक्ति का प्रयोग केवल चुनाव की अधिसूचना जारी करने के बाद ही किया जा सकता है। - इस प्रकार यदि चुनाव आयोग बिहार विधानसभा चुनाव स्थगित करना चाहता है तो उसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद तीन सौ चौबीस के तहत अपनी असाधारण शक्ति का प्रयोग करना होगा। - निर्वाचन आयोग को चुनाव आयोजित न करा पाने की अपनी असमर्थता के बारे में सरकार को अधिसूचित करना होगा, जिसके पश्चात् भारत सरकार और राष्ट्रपति इस संबंध में आगे की रणनीति निर्धारित करेंगे। - गौरतलब है कि इस संबंध में मुख्यतः दो निर्णय लिये जा सकते हैं, पहला यह कि राज्य में मौजूदा सदन की समाप्ति पर राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है और दूसरा विकल्प यह है कि राष्ट्रपति राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री को विघटन के बाद भी कुछ समय तक कार्य जारी रखने की अनुमति दे सकते हैं। - भारतीय संविधान अथवा किसी अन्य कानून में ऐसे कोई भी विशिष्ट प्रावधान नहीं है, जो उन परिस्थितियों को निर्दिष्ट करता हो, जिनके तहत चुनाव स्थगित किये जा सकते हैं। - हालाँकि कानून विशेषज्ञ मानते हैं कि 'अशांति और अव्यवस्था, भूकंप और बाढ़ जैसे प्राकृतिक आपदाओं अथवा अन्य किसी ऐसे परिस्थिति में, निर्वाचन आयोग चुनाव को स्थगित करने का निर्णय ले सकता है, जो कि आयोग के नियंत्रण में नहीं हैं। - आमतौर पर निर्वाचन आयोग केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों से सलाह लेने के बाद और तत्कालीन असाधारण परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही चुनाव की समय सीमा में विस्तार संबंधी महत्त्वपूर्ण निर्णय लेता है।
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यूनिवर्स - कि ब्रह्मांड में मौजूद है सभी का एक संग्रह। यह अंतरिक्ष में अनंत है, क्योंकि एक को उसकी चरम सीमा को नामित नहीं कर सकते। यह समय में अनन्त है, क्योंकि यह एक बड़े धमाके से पहले किया गया था, और बाद ठंडा अभी भी है कुछ वहाँ नहीं होगा। मौलिक विज्ञान ब्रह्मांड के अलग-अलग घटकों का अध्ययनः रसायन विज्ञान आणविक दुनिया, भौतिक विज्ञान की पड़ताल - प्राथमिक कणों और परमाणुओं, जीव विज्ञान के अध्ययन के लिए जिम्मेदार है प्रकृति की घटना। एक पूरे के रूप ब्रह्मांड की संरचना ब्रह्माण्ड विज्ञान का अध्ययन खगोल विज्ञान के सिद्धांत पर आधारित है है।
विभिन्न अनुसंधान के क्षेत्र में साइबरनेटिक्स के तेजी से विकास मॉडलिंग सिद्धांत की बढ़ती लोकप्रियता अपरिहार्य। इस सिद्धांत का सार मॉडल मूल वास्तविक वस्तु के लिए इसी का अध्ययन है। अलग-अलग घटना की बनाना मॉडल आसपास के दुनिया के में गहराई से अध्ययन करने के लिए योगदान करते हैं। एक लंबे समय के लिए सक्रिय रूप से खगोलविदों ब्रह्मांड और एक काल्पनिक सजातीय (समदैशिक) की संरचना का अध्ययन किया है।
आइंस्टीन बेलनाकार मॉडल है जिसमें स्थानीय वक्रता ब्रह्मांड के वैश्विक वक्रता के समय और स्थान की बढ़त परिभाषित का प्रस्ताव रखा। इस मॉडल में, समय समन्वय आमादा नहीं है, यानी समान रूप से समय अतीत से भविष्य के लिए चला जाता है। इसके अलावा, इस मॉडल खगोल Villemom डी सेटर, जो सुझाव दिया है कि लाल पारी की पृष्ठभूमि, समय ब्रह्मांड के विभिन्न भागों में अलग ढंग से बहती है सुधार किया गया है।
आज, के विस्तार ब्रह्मांड के सबसे लोकप्रिय मॉडल, फ्राइडमैन द्वारा प्रस्तावित। इस अवधारणा में, ब्रह्मांड की संरचना लगातार gravitating जनता के एक वैश्विक वक्रता है। वैज्ञानिक दुनिया में मॉडल का विस्तार दो संशोधनों पर बहसः
- बंद मॉडल गुरुत्वाकर्षण मंदी की वजह से धीरे-धीरे मंदी विस्तार हो जाती है;
- खुले मॉडल एक असीम लंबे समय भर में एक धीमा विस्तार पता चलता है।
ब्रह्मांड के किसी भी मॉडल केवल वास्तविक वस्तु की एक प्रति है, और इसलिए अपनी अध्ययन के परिणामों विशुद्ध रूप से सैद्धांतिक, वे व्यावहारिक पुष्टि की आवश्यकता।
आज, पृथ्वी वैज्ञानिकों केवल एक ही ब्रह्मांड का पालन, लेकिन यह दावा है कि यह अद्वितीय है के लिए आधार नहीं है। संरचना और ब्रह्मांड के विकास ब्रह्माण्ड संबंधी अध्ययन के लिए एक वैश्विक चुनौती है। अपने सितारों और सब के सब खगोलीय पिंडों एक विशाल में विलय कर दिया स्टार सिस्टम, आकाशगंगाओं कहा जाता है। प्रत्येक आकाशगंगा एक केंद्रीय कोर, उसके चारों ओर सर्पिल हथियार है, जो सितारों की एक बड़ी संख्या को होस्ट करता है, और में परिधि है बादलों के रूप में, दुर्लभ सितारों से मिलकर। सितारे पैदा होते हैं,, रहते हैं अंतरिक्ष में घूम रहा है, और मर जाते हैं। हमारी आकाशगंगा में, केंद्रीय स्टार रवि, खगोलीय पिंडों है, उसके जैसे, 10 15 अरब साल तक रहते हैं। अब सूरज मध्यम आयु में है।
आकाशगंगा जिसमें हम रहते हैं आकाशगंगा कहा जाता है क्योंकि तारे, गैस और धूल की अधिकतम संख्या के साथ अपने विमान एक धुंधली चमक की तरह रात के आकाश में दिखाई दे रहा है है। इस चमक के बैंड पूरे आकाश की व्यापक अंगूठी चारों ओर से घेरे। आकाशगंगा - आकाशगंगा में केवल, ब्रह्मांड की संरचना के घटक नहीं है। वहाँ असंख्य सितारों के साथ आकाशगंगाओं की एक बड़ी संख्या है। उदाहरण के लिए, एंड्रोमेडा आकाशगंगा और मैगेलैनिक बादल, हम से एक अकल्पनीय दूरी पर स्थित है।
ब्रह्मांड की संरचना फ्लैट शीट गांगेय का संचय, जिस क्षेत्र में काफी हद तक कोई luminescent सामग्री के द्वारा अलग है। इन रिक्तियों के बारे में 100 Mpc के आकार की है। पहली चादर महान दीवार, 200 मिलियन की दूरी पर स्थित मनाया जाता है प्रकाश वर्ष। महान दीवार - आकाशगंगाओं के समूह, 15 लाख प्रकाश की एक मोटाई होने . . उम्र और आकार - 500 मिलियन डीएम . . साल।
- मिल्की वे सौर ग्रह प्रणाली, समूहों की एक स्थानीय समूह और आकाशगंगाओं के superclusters, ओरियन हाथ, आकाशगंगाः पृथ्वी के ब्रह्मांड स्थिति की संरचना में निम्नलिखित विशेषताएं हैं।
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यूनिवर्स - कि ब्रह्मांड में मौजूद है सभी का एक संग्रह। यह अंतरिक्ष में अनंत है, क्योंकि एक को उसकी चरम सीमा को नामित नहीं कर सकते। यह समय में अनन्त है, क्योंकि यह एक बड़े धमाके से पहले किया गया था, और बाद ठंडा अभी भी है कुछ वहाँ नहीं होगा। मौलिक विज्ञान ब्रह्मांड के अलग-अलग घटकों का अध्ययनः रसायन विज्ञान आणविक दुनिया, भौतिक विज्ञान की पड़ताल - प्राथमिक कणों और परमाणुओं, जीव विज्ञान के अध्ययन के लिए जिम्मेदार है प्रकृति की घटना। एक पूरे के रूप ब्रह्मांड की संरचना ब्रह्माण्ड विज्ञान का अध्ययन खगोल विज्ञान के सिद्धांत पर आधारित है है। विभिन्न अनुसंधान के क्षेत्र में साइबरनेटिक्स के तेजी से विकास मॉडलिंग सिद्धांत की बढ़ती लोकप्रियता अपरिहार्य। इस सिद्धांत का सार मॉडल मूल वास्तविक वस्तु के लिए इसी का अध्ययन है। अलग-अलग घटना की बनाना मॉडल आसपास के दुनिया के में गहराई से अध्ययन करने के लिए योगदान करते हैं। एक लंबे समय के लिए सक्रिय रूप से खगोलविदों ब्रह्मांड और एक काल्पनिक सजातीय की संरचना का अध्ययन किया है। आइंस्टीन बेलनाकार मॉडल है जिसमें स्थानीय वक्रता ब्रह्मांड के वैश्विक वक्रता के समय और स्थान की बढ़त परिभाषित का प्रस्ताव रखा। इस मॉडल में, समय समन्वय आमादा नहीं है, यानी समान रूप से समय अतीत से भविष्य के लिए चला जाता है। इसके अलावा, इस मॉडल खगोल Villemom डी सेटर, जो सुझाव दिया है कि लाल पारी की पृष्ठभूमि, समय ब्रह्मांड के विभिन्न भागों में अलग ढंग से बहती है सुधार किया गया है। आज, के विस्तार ब्रह्मांड के सबसे लोकप्रिय मॉडल, फ्राइडमैन द्वारा प्रस्तावित। इस अवधारणा में, ब्रह्मांड की संरचना लगातार gravitating जनता के एक वैश्विक वक्रता है। वैज्ञानिक दुनिया में मॉडल का विस्तार दो संशोधनों पर बहसः - बंद मॉडल गुरुत्वाकर्षण मंदी की वजह से धीरे-धीरे मंदी विस्तार हो जाती है; - खुले मॉडल एक असीम लंबे समय भर में एक धीमा विस्तार पता चलता है। ब्रह्मांड के किसी भी मॉडल केवल वास्तविक वस्तु की एक प्रति है, और इसलिए अपनी अध्ययन के परिणामों विशुद्ध रूप से सैद्धांतिक, वे व्यावहारिक पुष्टि की आवश्यकता। आज, पृथ्वी वैज्ञानिकों केवल एक ही ब्रह्मांड का पालन, लेकिन यह दावा है कि यह अद्वितीय है के लिए आधार नहीं है। संरचना और ब्रह्मांड के विकास ब्रह्माण्ड संबंधी अध्ययन के लिए एक वैश्विक चुनौती है। अपने सितारों और सब के सब खगोलीय पिंडों एक विशाल में विलय कर दिया स्टार सिस्टम, आकाशगंगाओं कहा जाता है। प्रत्येक आकाशगंगा एक केंद्रीय कोर, उसके चारों ओर सर्पिल हथियार है, जो सितारों की एक बड़ी संख्या को होस्ट करता है, और में परिधि है बादलों के रूप में, दुर्लभ सितारों से मिलकर। सितारे पैदा होते हैं,, रहते हैं अंतरिक्ष में घूम रहा है, और मर जाते हैं। हमारी आकाशगंगा में, केंद्रीय स्टार रवि, खगोलीय पिंडों है, उसके जैसे, दस पंद्रह अरब साल तक रहते हैं। अब सूरज मध्यम आयु में है। आकाशगंगा जिसमें हम रहते हैं आकाशगंगा कहा जाता है क्योंकि तारे, गैस और धूल की अधिकतम संख्या के साथ अपने विमान एक धुंधली चमक की तरह रात के आकाश में दिखाई दे रहा है है। इस चमक के बैंड पूरे आकाश की व्यापक अंगूठी चारों ओर से घेरे। आकाशगंगा - आकाशगंगा में केवल, ब्रह्मांड की संरचना के घटक नहीं है। वहाँ असंख्य सितारों के साथ आकाशगंगाओं की एक बड़ी संख्या है। उदाहरण के लिए, एंड्रोमेडा आकाशगंगा और मैगेलैनिक बादल, हम से एक अकल्पनीय दूरी पर स्थित है। ब्रह्मांड की संरचना फ्लैट शीट गांगेय का संचय, जिस क्षेत्र में काफी हद तक कोई luminescent सामग्री के द्वारा अलग है। इन रिक्तियों के बारे में एक सौ Mpc के आकार की है। पहली चादर महान दीवार, दो सौ मिलियन की दूरी पर स्थित मनाया जाता है प्रकाश वर्ष। महान दीवार - आकाशगंगाओं के समूह, पंद्रह लाख प्रकाश की एक मोटाई होने . . उम्र और आकार - पाँच सौ मिलियन डीएम . . साल। - मिल्की वे सौर ग्रह प्रणाली, समूहों की एक स्थानीय समूह और आकाशगंगाओं के superclusters, ओरियन हाथ, आकाशगंगाः पृथ्वी के ब्रह्मांड स्थिति की संरचना में निम्नलिखित विशेषताएं हैं।
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सुंदरनगर - जज के 40 हजार रिश्वत लेने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि फिर से काले कोट को दागदार करने का मामला सामने आया है। सुंदरनगर थाना पुलिस ने मनाली-चंडीगढ़ नेशनल हाई-वे-21 पर नाके के दौरान बोलेरो जीप में सवार दो अधिवक्ताओं से 652 ग्राम चरस बरामद की है। आरोपियों में एक कोलकाता तो दूसरा पंजाब के लुधियाना का रहना वाला है। पुलिस ने वाहन को कब्जे में लेने के साथ दोनों को हिरासत में ले लिया है। मामला सोमवार देर शाम का है जब सुंदरनगर थाना प्रभारी लोकेंद्र नेगी के दिशा-निर्देश पर पुलिस टीम में शामिल हैड कांस्टेबल देविंद्र सचिन सेन, होमगार्ड जवान लेखराज, मेहर चंद, विजय सेन ने पुंघ में नाका लगा रखा था। इसी दौरान कुल्लू की तरफ से आ रही बोलेरो (पीबी-100-ईजी-3035) को रोका गया तो उसमें सवार शख्स घबरा गए। वाहन की तलाशी लेने पर स्वार के पास रखी हुई 652 ग्राम चरस बरामद की गई। पुलिस ने पंजाब निवासी तेजिंद्र पुत्र सतविंद्र (26) निवासी कमालपुर जिला लुधियाना सहित स्वर्ण दित्या (33)पुत्र अभिजीत दि निवासी लेन इन सरायू पांच फ्लोर 31 कोलकाता को हिरासत में लिया है। मामले की पुष्टि करते हुए थाना प्रभारी लोकेंद्र नेगी ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया है कि वे लॉ ग्रेजुएट हैं और कुछ समय प्रैक्टिस करने उपरांत एक ने ट्रांसपोर्ट व दूसरे ने होटल व्यवसाय शुरू किया है।
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सुंदरनगर - जज के चालीस हजार रिश्वत लेने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि फिर से काले कोट को दागदार करने का मामला सामने आया है। सुंदरनगर थाना पुलिस ने मनाली-चंडीगढ़ नेशनल हाई-वे-इक्कीस पर नाके के दौरान बोलेरो जीप में सवार दो अधिवक्ताओं से छः सौ बावन ग्राम चरस बरामद की है। आरोपियों में एक कोलकाता तो दूसरा पंजाब के लुधियाना का रहना वाला है। पुलिस ने वाहन को कब्जे में लेने के साथ दोनों को हिरासत में ले लिया है। मामला सोमवार देर शाम का है जब सुंदरनगर थाना प्रभारी लोकेंद्र नेगी के दिशा-निर्देश पर पुलिस टीम में शामिल हैड कांस्टेबल देविंद्र सचिन सेन, होमगार्ड जवान लेखराज, मेहर चंद, विजय सेन ने पुंघ में नाका लगा रखा था। इसी दौरान कुल्लू की तरफ से आ रही बोलेरो को रोका गया तो उसमें सवार शख्स घबरा गए। वाहन की तलाशी लेने पर स्वार के पास रखी हुई छः सौ बावन ग्राम चरस बरामद की गई। पुलिस ने पंजाब निवासी तेजिंद्र पुत्र सतविंद्र निवासी कमालपुर जिला लुधियाना सहित स्वर्ण दित्या पुत्र अभिजीत दि निवासी लेन इन सरायू पांच फ्लोर इकतीस कोलकाता को हिरासत में लिया है। मामले की पुष्टि करते हुए थाना प्रभारी लोकेंद्र नेगी ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया है कि वे लॉ ग्रेजुएट हैं और कुछ समय प्रैक्टिस करने उपरांत एक ने ट्रांसपोर्ट व दूसरे ने होटल व्यवसाय शुरू किया है।
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Bollywood News Updates: विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' (The Kashmir Files) इन दिनों चर्चा में बनी हुई है। फिल्म रिलीज होते ही खूब कमाई कर रही है।
Abhishek Bachchan birthday special: बॉलीवुड अभिनेता अभिषेक बच्चन (Abhishek Bachchan) आज अपना 46 वां जन्मदिन मना रहे है।
बॅालीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन (Aishwarya Rai Bachchan) को पनामा पेपर्स (Panama Papers Leak) मामले में ईडी के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया है। बता दें कि ऐश्वर्या राय बच्चन को दो बार पहले भी बुलाया गया था,पर उन्होंने पहले दो मौकों पर स्थगन की मांग की थी।
अभिषेक बच्चन (Abhishek Bachchan) अपनी अपकमिंग फिल्म 'बॉब बिस्वास' (Bob Biswas) को लेकर सुर्खियों में बने हुए है। हाल ही में फिल्म का एक गाना रिलीज किया गया था जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है। इसी बीच फिल्म को प्रमोट करने के लिए अब उनके पिता अमिताभ बच्चन आगे आए है। अमिताभ ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर फिल्म का प्रचार करते हुए एक वीडियो शेयर किया हैं।
अभिषेक बच्चन (Abhishek Bachchan) की आने वाली फिल्म बॉब बिस्वास (Bob Biswas) का पहला गाना रिलीज हो गया। शीर्षक तू तो गया रे (Tu Toh Gaya Re) में अभिषेक को दिखाया गया है, जो कुख्यात कॉन्ट्रैक्ट किलर बॉब की भूमिका निभाता है, जो अपने खून से लथपथ अतीत को याद करने की कोशिश कर रहा है। बता दें कि बॉब बिस्वास 3 दिसंबर को Zee5 पर प्रीमियर के लिए बिल्कुल तैयार है।
आदित्य चोपड़ा (Aditya Chopra) की फिल्म धूम 2 (Dhoom 2) की रिलीज को आज 15 साल पूरे हो गए हैं। ये फिल्म आज ही के दिन 24 नवंबर, 2006 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म को 42 करोड़ रुपए के बजट में तैयार किया था बता दें कि फिल्म ने 151 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की थी।
अभिषेक बच्चन (Abhishek Bachchan) की फिल्म बॉब बिस्वास (Bob Biswas) का ट्रेलर आज 19 नवंबर को रिलीज हो गया है। 'बॉब बिस्वास' एक क्राइम-ड्रामा फिल्म है, जो एक प्रेम कहानी पर आधारित है, जिसमें बॉब बिस्वास के दोहरे जीवन को दिखाया गया है। कोलकाता में शूट की गई इस फिल्म में चित्रांगदा सिंह और अभिषेक बच्चन मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म 3 दिसंबर को Zee5 पर प्रीमियर के लिए तैयार है।
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Bollywood News Updates: विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' इन दिनों चर्चा में बनी हुई है। फिल्म रिलीज होते ही खूब कमाई कर रही है। Abhishek Bachchan birthday special: बॉलीवुड अभिनेता अभिषेक बच्चन आज अपना छियालीस वां जन्मदिन मना रहे है। बॅालीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन को पनामा पेपर्स मामले में ईडी के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया है। बता दें कि ऐश्वर्या राय बच्चन को दो बार पहले भी बुलाया गया था,पर उन्होंने पहले दो मौकों पर स्थगन की मांग की थी। अभिषेक बच्चन अपनी अपकमिंग फिल्म 'बॉब बिस्वास' को लेकर सुर्खियों में बने हुए है। हाल ही में फिल्म का एक गाना रिलीज किया गया था जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है। इसी बीच फिल्म को प्रमोट करने के लिए अब उनके पिता अमिताभ बच्चन आगे आए है। अमिताभ ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर फिल्म का प्रचार करते हुए एक वीडियो शेयर किया हैं। अभिषेक बच्चन की आने वाली फिल्म बॉब बिस्वास का पहला गाना रिलीज हो गया। शीर्षक तू तो गया रे में अभिषेक को दिखाया गया है, जो कुख्यात कॉन्ट्रैक्ट किलर बॉब की भूमिका निभाता है, जो अपने खून से लथपथ अतीत को याद करने की कोशिश कर रहा है। बता दें कि बॉब बिस्वास तीन दिसंबर को Zeeपाँच पर प्रीमियर के लिए बिल्कुल तैयार है। आदित्य चोपड़ा की फिल्म धूम दो की रिलीज को आज पंद्रह साल पूरे हो गए हैं। ये फिल्म आज ही के दिन चौबीस नवंबर, दो हज़ार छः में रिलीज हुई थी। इस फिल्म को बयालीस करोड़ रुपए के बजट में तैयार किया था बता दें कि फिल्म ने एक सौ इक्यावन करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की थी। अभिषेक बच्चन की फिल्म बॉब बिस्वास का ट्रेलर आज उन्नीस नवंबर को रिलीज हो गया है। 'बॉब बिस्वास' एक क्राइम-ड्रामा फिल्म है, जो एक प्रेम कहानी पर आधारित है, जिसमें बॉब बिस्वास के दोहरे जीवन को दिखाया गया है। कोलकाता में शूट की गई इस फिल्म में चित्रांगदा सिंह और अभिषेक बच्चन मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म तीन दिसंबर को Zeeपाँच पर प्रीमियर के लिए तैयार है।
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नई दिल्ली। महज इतनी छोटी सी उम्र में अपने कॉमेडी के दम पर घर-घर में अपनी पहुंच बनाने वाले कॉमेडियन सिद्धार्थ सागर बीते दिनों मीडिया से मुखातिब हुए। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़े कई अहम राज खोले। आपको बता दें कि सिद्धार्थ ने साल 2012 में कॉमेडी सर्कस के प्लेटफॉर्म से स्टैंड अप कॉमेडी की शुरुआत की थी। उन्होंने अपनी शानदार डायलॉग डिलिवरी और मजेदार पंचलाइन की वजह से लोगों के दिलों में एक खास जगह बनाई है। 'कॉमेडी क्लासेज' और 'द कपिल शर्मा शो' में सिद्धार्थ द्वारा निभाए किरदार भी लोगों ने खूब पसंद किए। पिछले एक साल से सिद्धार्थ अपनी निजी जिंदगी को लेकर काफी परेशान चल रहे थे।
गौरतलब है कि सिद्धार्थ दो- तीन दिन पहले अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो कर यह जानकारी दी थी कि वह जल्द ही अपने जिंदगी जुड़े अहम राज लोगों के सामने रखूंगा। सिद्धार्थ के प्रेस कॉन्फ्रेंस का पूरा वीडियो बॉलीवुड इनसाइट ने अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया है।
मुंबई। रणबीर कपूर के लिए आज गुरुवार का दिन बेहद खास है। एक्टर आज 28 सितंबर को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। इसके साथ ही उनकी टॉक ऑफ द टाउन फिल्म एनिमल का टीजर भी आज रिलीज होने वाला है। इस बीच उनकी पत्नी आलिया भट्ट ने एक्टर के लिए एक खूबसूरत पोस्ट लिखा।
एक्ट्रेस ने इसके साथ ही रणबीर कपूर के सीक्रेट सोशल मीडिया अकाउंट होने की बात भी कही है। अब उन्होंने ये गलती से बता दिया हो या फिर जानबूझकर, लेकिन एक्टर का राज उनके फैंस को बता दिया है।
आलिया भट्ट ने रणबीर कपूर को विश करने के लिए तस्वीरों की एक सीरीज शेयर की है। इनमें उनके क्वालिटी टाइम बिताने से लेकर उनकी शादी तक, कई अनदेखी फोटो शामिल है। आलिया भट्ट ने सबसे पहली फोटो रणबीर कपूर को किस करते हुए शेयर की है।
इसके बाद की तस्वीर में दोनों स्टेडियम में मैच देखते हुए नजर आ रहे हैं। एक फोटो में आलिया ने रणबीर का दूल्हा लुक शेयर किया है। वहीं, चौथी फोटो में दोनों के मेहंदी सेरेमनी की है, जिसमें रणबीर, आलिया को अपने हाथों में लगी मेहंदी दिखा रहे हैं।
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नई दिल्ली। महज इतनी छोटी सी उम्र में अपने कॉमेडी के दम पर घर-घर में अपनी पहुंच बनाने वाले कॉमेडियन सिद्धार्थ सागर बीते दिनों मीडिया से मुखातिब हुए। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़े कई अहम राज खोले। आपको बता दें कि सिद्धार्थ ने साल दो हज़ार बारह में कॉमेडी सर्कस के प्लेटफॉर्म से स्टैंड अप कॉमेडी की शुरुआत की थी। उन्होंने अपनी शानदार डायलॉग डिलिवरी और मजेदार पंचलाइन की वजह से लोगों के दिलों में एक खास जगह बनाई है। 'कॉमेडी क्लासेज' और 'द कपिल शर्मा शो' में सिद्धार्थ द्वारा निभाए किरदार भी लोगों ने खूब पसंद किए। पिछले एक साल से सिद्धार्थ अपनी निजी जिंदगी को लेकर काफी परेशान चल रहे थे। गौरतलब है कि सिद्धार्थ दो- तीन दिन पहले अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो कर यह जानकारी दी थी कि वह जल्द ही अपने जिंदगी जुड़े अहम राज लोगों के सामने रखूंगा। सिद्धार्थ के प्रेस कॉन्फ्रेंस का पूरा वीडियो बॉलीवुड इनसाइट ने अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया है। मुंबई। रणबीर कपूर के लिए आज गुरुवार का दिन बेहद खास है। एक्टर आज अट्ठाईस सितंबर को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। इसके साथ ही उनकी टॉक ऑफ द टाउन फिल्म एनिमल का टीजर भी आज रिलीज होने वाला है। इस बीच उनकी पत्नी आलिया भट्ट ने एक्टर के लिए एक खूबसूरत पोस्ट लिखा। एक्ट्रेस ने इसके साथ ही रणबीर कपूर के सीक्रेट सोशल मीडिया अकाउंट होने की बात भी कही है। अब उन्होंने ये गलती से बता दिया हो या फिर जानबूझकर, लेकिन एक्टर का राज उनके फैंस को बता दिया है। आलिया भट्ट ने रणबीर कपूर को विश करने के लिए तस्वीरों की एक सीरीज शेयर की है। इनमें उनके क्वालिटी टाइम बिताने से लेकर उनकी शादी तक, कई अनदेखी फोटो शामिल है। आलिया भट्ट ने सबसे पहली फोटो रणबीर कपूर को किस करते हुए शेयर की है। इसके बाद की तस्वीर में दोनों स्टेडियम में मैच देखते हुए नजर आ रहे हैं। एक फोटो में आलिया ने रणबीर का दूल्हा लुक शेयर किया है। वहीं, चौथी फोटो में दोनों के मेहंदी सेरेमनी की है, जिसमें रणबीर, आलिया को अपने हाथों में लगी मेहंदी दिखा रहे हैं।
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Mausam Ki Jankari: मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में 23 अगस्त तक मौसम (Weather) खराब रहने का अनुमान है। वहीं आने वाले दो दिनों में मौसम विभाग ने प्रदेश में तेज बारिश (Heavy Rain) का पूर्वानुमान जताया है।
Mausam Ki Jankari: मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में 23 अगस्त तक मौसम (Weather) खराब रहने का अनुमान है। वहीं आने वाले दो दिनों में मौसम विभाग ने प्रदेश में तेज बारिश (Heavy Rain) का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने दो दिन तक भारी बारिश और तूफान (Storm) चलने का अलर्ट जारी किया है। विभाग ने 19 अगस्त के लिए मैदानी व मध्य पर्वतीय भागों में बारिश-अंधड़ का अलर्ट जारी किया है।
जबकि 20 और 21 अगस्त के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। विभाग ने प्रदेश के 10 जिलों ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। भारी बारिश की वजह से रास्तों पर लैंडस्लाइड का खतरा बन जाता है। इस लिए इन जिलों के लिए प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है।
उधर, मंगलवार दिन में राजधानी शिमला व अन्य भागों में मौसम साफ बना रहा। मैदानी जिलों में मौसम साफ होते ही पारा चढ़ना शुरू हो गया है। ऊना में अधिकतम तापमान 36. 8, बिलासपुर 34. 0, सुंदरनगर 33. 0, भुंतर 33. 1, चंबा 32. 1, कांगड़ा 32. 1, हमीरपुर 32. 8, सोलन 31. 0, धर्मशाला 27. 8, शिमला 25. 4, कल्पा 24. 9, केलांग 24. 3 और डलहौजी में 21. 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
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Mausam Ki Jankari: मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में तेईस अगस्त तक मौसम खराब रहने का अनुमान है। वहीं आने वाले दो दिनों में मौसम विभाग ने प्रदेश में तेज बारिश का पूर्वानुमान जताया है। Mausam Ki Jankari: मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में तेईस अगस्त तक मौसम खराब रहने का अनुमान है। वहीं आने वाले दो दिनों में मौसम विभाग ने प्रदेश में तेज बारिश का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने दो दिन तक भारी बारिश और तूफान चलने का अलर्ट जारी किया है। विभाग ने उन्नीस अगस्त के लिए मैदानी व मध्य पर्वतीय भागों में बारिश-अंधड़ का अलर्ट जारी किया है। जबकि बीस और इक्कीस अगस्त के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। विभाग ने प्रदेश के दस जिलों ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। भारी बारिश की वजह से रास्तों पर लैंडस्लाइड का खतरा बन जाता है। इस लिए इन जिलों के लिए प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। उधर, मंगलवार दिन में राजधानी शिमला व अन्य भागों में मौसम साफ बना रहा। मैदानी जिलों में मौसम साफ होते ही पारा चढ़ना शुरू हो गया है। ऊना में अधिकतम तापमान छत्तीस. आठ, बिलासपुर चौंतीस. शून्य, सुंदरनगर तैंतीस. शून्य, भुंतर तैंतीस. एक, चंबा बत्तीस. एक, कांगड़ा बत्तीस. एक, हमीरपुर बत्तीस. आठ, सोलन इकतीस. शून्य, धर्मशाला सत्ताईस. आठ, शिमला पच्चीस. चार, कल्पा चौबीस. नौ, केलांग चौबीस. तीन और डलहौजी में इक्कीस. छः डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
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कानपुरः कोरोना की जंग में डाक्टर और सफाई कर्मी से लेकर पुलिस कर्मी दिन रात मेहनत कर रहे हैं, हालांकि प्रशासन का भी अहम योगदान है। इसी बीच सोशल मीडिया में कानपुर के जिलाधिकारी की एक शर्मसार कर देने वाली खबर भी चल गयी। जिसमें बताया गया कि जिलाधिकारी एक दारोगा से जूता सेनिटाइज करा रहे हैं। इसकी फोटो भी डाली गयी और यह खबर जिलाधिकारी तक पहुंच गयी। जिसके बाद जिलाधिकारी ने सफाई देते हुए कहा कि ऐसा कुछ नहीं है और मुझे बदनाम करने की साजिश की गयी है।
दरअसल कानपुर के जिलाधिकारी ब्रह्मदेव राम तिवारी काशीराम हॉस्पिटल का जायज़ा लेने पहुंचे थे। हॉस्पिटल के बाहर जिलाधिकारी डाक्टरों के साथ चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान एक दौरान जिलाधिकारी के जूतों के पास कुछ करता हुआ दिखायी दिया। इस सीन को किसी ने कैमरे में कैद कर लिया और सोशल मीडिया में खबर चली कि जिलाधिकारी एक दारोगा से अपना जूता सेनिटाइज करवा रहे हैं। सोशल मीडिया में चली खबर आग की तरह फैली और जिलाधिकारी तक पहुंच गयी। इस पर जिलाधिकारी ने फौरन सफाई देते हुए बताया कि जब हम और पुलिस व डाक्टरों की टीम कांशीराम हॉस्पिटल का मुआयना करके बाहर निकले तो डाक्टरों के बीच कोरोना को लेकर चर्चा होने लगी। इसी बीच मुझे ऐसा लगा कि जूते के नीचे कोई कंकड़ या अन्य कोई वस्तु है। इस पर मैं झुककर जूता देखने लगा तो मौजूद सुरक्षा कर्मी भी बैठकर देखने लगा। इस सीन को किसी ने कैमरे में कैद करके सोशल मीडिया में खबर चलवा दी और यह पूरी मुझे बदनाम करने की साजिश रची गयी है। जिलाधिकारी ने कहा कि मैं अपनी सफाई में इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता जो सच्चाई थी वह बता दिया।
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कानपुरः कोरोना की जंग में डाक्टर और सफाई कर्मी से लेकर पुलिस कर्मी दिन रात मेहनत कर रहे हैं, हालांकि प्रशासन का भी अहम योगदान है। इसी बीच सोशल मीडिया में कानपुर के जिलाधिकारी की एक शर्मसार कर देने वाली खबर भी चल गयी। जिसमें बताया गया कि जिलाधिकारी एक दारोगा से जूता सेनिटाइज करा रहे हैं। इसकी फोटो भी डाली गयी और यह खबर जिलाधिकारी तक पहुंच गयी। जिसके बाद जिलाधिकारी ने सफाई देते हुए कहा कि ऐसा कुछ नहीं है और मुझे बदनाम करने की साजिश की गयी है। दरअसल कानपुर के जिलाधिकारी ब्रह्मदेव राम तिवारी काशीराम हॉस्पिटल का जायज़ा लेने पहुंचे थे। हॉस्पिटल के बाहर जिलाधिकारी डाक्टरों के साथ चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान एक दौरान जिलाधिकारी के जूतों के पास कुछ करता हुआ दिखायी दिया। इस सीन को किसी ने कैमरे में कैद कर लिया और सोशल मीडिया में खबर चली कि जिलाधिकारी एक दारोगा से अपना जूता सेनिटाइज करवा रहे हैं। सोशल मीडिया में चली खबर आग की तरह फैली और जिलाधिकारी तक पहुंच गयी। इस पर जिलाधिकारी ने फौरन सफाई देते हुए बताया कि जब हम और पुलिस व डाक्टरों की टीम कांशीराम हॉस्पिटल का मुआयना करके बाहर निकले तो डाक्टरों के बीच कोरोना को लेकर चर्चा होने लगी। इसी बीच मुझे ऐसा लगा कि जूते के नीचे कोई कंकड़ या अन्य कोई वस्तु है। इस पर मैं झुककर जूता देखने लगा तो मौजूद सुरक्षा कर्मी भी बैठकर देखने लगा। इस सीन को किसी ने कैमरे में कैद करके सोशल मीडिया में खबर चलवा दी और यह पूरी मुझे बदनाम करने की साजिश रची गयी है। जिलाधिकारी ने कहा कि मैं अपनी सफाई में इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता जो सच्चाई थी वह बता दिया।
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जुड़वा 2′, 'मिशन मंगल', 'पिंक' और 'थप्पड़' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकी तापसी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है और हर मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखती है।
दरअसल एक्ट्रेस तापसी पन्नू उस वक्त हैरान रह गयी जब उनके घर की बिजली का बिल 36 हज़ार रूपये आ गया। पिछले 3 महीने से लॉकडाउन के चलते तापसी को इस बिल पर हैरानी हुई और उन्होंने ट्विटर पर सबके साथ इस बिल को शेयर किया।
तापसी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, लॉकडाउन के 3 महीने हो गए है और मुझे आश्चर्य है कि मैंने पिछले महीने अपने अपार्टमेंट में किस नए उपकरण का उपयोग किया है या खरीदा है जो मेरे बिजली बिल में इस तरह की वृद्धि हुई है।
आगे उन्होंने एक और ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने लिखा, यह उस अपार्टमेंट का बिल है, जिसमें कोई नहीं रहता और हफ्त में केवल एक बार साफ-सफाई करने के लिए जाना होता है।
आगे उन्होंने यह भी कहा कि अब तो उन्हें चिंता हो रही है कि कही कोई उन्हें बिना बताये उनके अपार्टमेंट का इस्तेमाल तो नहीं कर रहा है !
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जुड़वा दो′, 'मिशन मंगल', 'पिंक' और 'थप्पड़' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकी तापसी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है और हर मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखती है। दरअसल एक्ट्रेस तापसी पन्नू उस वक्त हैरान रह गयी जब उनके घर की बिजली का बिल छत्तीस हज़ार रूपये आ गया। पिछले तीन महीने से लॉकडाउन के चलते तापसी को इस बिल पर हैरानी हुई और उन्होंने ट्विटर पर सबके साथ इस बिल को शेयर किया। तापसी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, लॉकडाउन के तीन महीने हो गए है और मुझे आश्चर्य है कि मैंने पिछले महीने अपने अपार्टमेंट में किस नए उपकरण का उपयोग किया है या खरीदा है जो मेरे बिजली बिल में इस तरह की वृद्धि हुई है। आगे उन्होंने एक और ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने लिखा, यह उस अपार्टमेंट का बिल है, जिसमें कोई नहीं रहता और हफ्त में केवल एक बार साफ-सफाई करने के लिए जाना होता है। आगे उन्होंने यह भी कहा कि अब तो उन्हें चिंता हो रही है कि कही कोई उन्हें बिना बताये उनके अपार्टमेंट का इस्तेमाल तो नहीं कर रहा है !
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वकील प्रत्यूष जैन द्वारा दायर आरटीआई में प्रतिपूरक वनीकरण भूमि का मालिकाना वन विभाग को दिए जाने के सवाल पर कहा गया कि दिल्ली को एक विशेष मामला मानते हुए, राज्य वन विभाग के पक्ष में भूमि का स्वामित्व सौंपने की शर्त को माफ कर दिया गया है.
नई दिल्लीःदिल्ली में प्रतिपूरक वनरोपण के लिए उपयोग की जाने वाली अधिकांश गैर-वन भूमि का स्वामित्व वन विभाग को नहीं सौंपा गया है, जिससे डीडीए के पास पेड़ों का काटने का अधिकार रहेगा.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वकील प्रत्यूष जैन द्वारा दायर आरटीआई में प्रतिपूरक वनीकरण भूमि का मालिकाना वन विभाग को दिए जाने के सवाल पर कहा गया कि दिल्ली को एक विशेष मामला मानते हुए, राज्य वन विभाग के पक्ष में भूमि का स्वामित्व सौंपने की शर्त को माफ कर दिया गया है.
2019 में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को प्रतिपूरक वनीकरण के लिए उपयोग की जाने वाली भूमि पर डीडीए को स्वामित्व बनाए रखने की अनुमति देने के लिए लिखा था.
बता दें कि, वन संरक्षण अधिनियम, 1980 को लागू करने के लिए जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रतिपूरक वनीकरण के लिए चिन्हित गैर वन भूमि का स्वामित्व राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के वन विभाग को दिया जाएगा. ये दिशानिर्देश मार्च, 2019 से लागू हैं.
पर्यावरण मामलों के वकील ऋत्विक दत्ता का कहना है कि यदि स्वामित्व डीडीए के पास है, लेकिन इसे संरक्षित भूमि के रूप में घोषित किया गया है, तो पेड़ों को काटा जा सकता है, लेकिन वे भूमि पर निर्माण या कोई गैर-वन गतिविधि नहीं कर सकते हैं.
वहीं, वकील आदित्य प्रसाद का कहना है कि अगर भूमि का मालिकाना हक डीडीए के पास रहता है तो वह कभी भी नियमों में बदलाव कर उसका उपयोग कर सकती है.
वहीं, दिल्ली में प्रतिपूरक वनरोपण के लिए उपयोग की जाने वाली अधिकांश गैर-वन भूमि को अभी तक संरक्षित वन भी घोषित नहीं किया गया है, जिससे प्रतिपूरक वनीकरण के लिए उपयोग की जाने वाली भूमि के बड़े हिस्से को असुरक्षित छोड़ दिया गया है.
जैन द्वारा दायर आरटीआई के जवाब से पता चला कि कुल 136. 55 हेक्टेयर भूमि को भारतीय वन अधिनियम के तहत 'संरक्षित' या 'आरक्षित' वन के रूप में अधिसूचित किया जाना है. प्रतिपूरक वनीकरण के लिए लगभग 37. 54 हेक्टेयर गैर-वन भूमि यमुना बाढ़ क्षेत्र में है. मदनपुर खादर क्षेत्र में कुल 35. 16 हेक्टेयर है.
संरक्षित घोषित की गई गैर-वन भूमि के बारे में सवाल पर आरटीआई के जवाब में कहा गया कि गैर वन भूमि में प्रतिपूरक वृक्षारोपण क्षेत्रों को संरक्षित वन घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है.
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वकील प्रत्यूष जैन द्वारा दायर आरटीआई में प्रतिपूरक वनीकरण भूमि का मालिकाना वन विभाग को दिए जाने के सवाल पर कहा गया कि दिल्ली को एक विशेष मामला मानते हुए, राज्य वन विभाग के पक्ष में भूमि का स्वामित्व सौंपने की शर्त को माफ कर दिया गया है. नई दिल्लीःदिल्ली में प्रतिपूरक वनरोपण के लिए उपयोग की जाने वाली अधिकांश गैर-वन भूमि का स्वामित्व वन विभाग को नहीं सौंपा गया है, जिससे डीडीए के पास पेड़ों का काटने का अधिकार रहेगा. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वकील प्रत्यूष जैन द्वारा दायर आरटीआई में प्रतिपूरक वनीकरण भूमि का मालिकाना वन विभाग को दिए जाने के सवाल पर कहा गया कि दिल्ली को एक विशेष मामला मानते हुए, राज्य वन विभाग के पक्ष में भूमि का स्वामित्व सौंपने की शर्त को माफ कर दिया गया है. दो हज़ार उन्नीस में दिल्ली विकास प्राधिकरण ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को प्रतिपूरक वनीकरण के लिए उपयोग की जाने वाली भूमि पर डीडीए को स्वामित्व बनाए रखने की अनुमति देने के लिए लिखा था. बता दें कि, वन संरक्षण अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ अस्सी को लागू करने के लिए जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रतिपूरक वनीकरण के लिए चिन्हित गैर वन भूमि का स्वामित्व राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के वन विभाग को दिया जाएगा. ये दिशानिर्देश मार्च, दो हज़ार उन्नीस से लागू हैं. पर्यावरण मामलों के वकील ऋत्विक दत्ता का कहना है कि यदि स्वामित्व डीडीए के पास है, लेकिन इसे संरक्षित भूमि के रूप में घोषित किया गया है, तो पेड़ों को काटा जा सकता है, लेकिन वे भूमि पर निर्माण या कोई गैर-वन गतिविधि नहीं कर सकते हैं. वहीं, वकील आदित्य प्रसाद का कहना है कि अगर भूमि का मालिकाना हक डीडीए के पास रहता है तो वह कभी भी नियमों में बदलाव कर उसका उपयोग कर सकती है. वहीं, दिल्ली में प्रतिपूरक वनरोपण के लिए उपयोग की जाने वाली अधिकांश गैर-वन भूमि को अभी तक संरक्षित वन भी घोषित नहीं किया गया है, जिससे प्रतिपूरक वनीकरण के लिए उपयोग की जाने वाली भूमि के बड़े हिस्से को असुरक्षित छोड़ दिया गया है. जैन द्वारा दायर आरटीआई के जवाब से पता चला कि कुल एक सौ छत्तीस. पचपन हेक्टेयर भूमि को भारतीय वन अधिनियम के तहत 'संरक्षित' या 'आरक्षित' वन के रूप में अधिसूचित किया जाना है. प्रतिपूरक वनीकरण के लिए लगभग सैंतीस. चौवन हेक्टेयर गैर-वन भूमि यमुना बाढ़ क्षेत्र में है. मदनपुर खादर क्षेत्र में कुल पैंतीस. सोलह हेक्टेयर है. संरक्षित घोषित की गई गैर-वन भूमि के बारे में सवाल पर आरटीआई के जवाब में कहा गया कि गैर वन भूमि में प्रतिपूरक वृक्षारोपण क्षेत्रों को संरक्षित वन घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है.
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उत्तर-पश्चिमी भाग में वोल्खोव नदी स्थित हैरूस। इसका स्रोत झील इल्मेन है मुख्य उपनदियां पचेझा, ओस्कुया हैं 224 किलोमीटर की लंबाई की यात्रा करते हुए, वोल्खोव नदी का जल प्रसिद्ध लाडोगा झील में फैला हुआ है। यह अपेक्षाकृत छोटी नदी को अद्वितीय कहा जा सकता है इसका जल वर्तमान की दिशा बदल सकता है यह कैसे हो सकता है? बात यह है कि नदी के स्रोत और मुंह के बीच की ऊंचाई में अंतर बहुत बड़ा नहीं है, और जब पानी गिर जाता है, तो पानी के चारों ओर मुड़ता है तो वोल्वोव ने अपने वर्तमान की दिशा में परिवर्तन किया। इस नदी के तट पर नोव्गोरोड, नोवा लाडोगा, किरीशि के शहर हैं। नेविगेशन यहां बहुत विकसित किया गया है। नोवगोरोड के क्षेत्र में नदी की चौड़ाई लगभग 220 मीटर है। बेशक, Volkhov पर मछली पकड़ने विशेष ध्यान देने योग्य है। नदी अपने मछली पकड़ने के मार्गों के लिए लंबे समय से प्रसिद्ध है। वैसे, मछली को लगभग हर जगह सफलतापूर्वक पकड़ा जा सकता है। हुक पर पाईक, एएसपी, पाइक पर्च, बरबोट, कैटफ़िश, पेर्च, गले, ब्रीम, व्हाइटफिश, ब्लूफ़िश, चेशन, धूमिल और रफ आते हैं। इसलिए किसी को पकड़ने के बिना छोड़ दिया जाएगा।
Volkhov के पानी में नीचे से निपटने सफलतापूर्वक पकड़ा गया हैब्रीम, शेखोन, यज़्य, गस्टरू और, ज़ाहिर है, कैटफ़िश। मछली पकड़ने के लिए सबसे अच्छी जगह कावा, पचेव और ओस्कुया के मुंह में हैं कीड़े का एक गुच्छा चारा के रूप में उपयोग किया जाता है आकर्षण के बारे में मत भूलो किनारे से मछलियों को पकड़ना सबसे प्रभावी है बहुत से ब्रीम और हिरण हैं लेकिन Volkhov पर मछली पकड़ने इन प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध नहीं है। मछली पकड़ने के प्रशंसक यहाँ के लिए soms पकड़ा मछली का औसत आकार 10-15 किलो है। एक बड़ी कैटफ़िश रात में एक बुलेट और "केवोकॉम" द्वारा पहुंचने और गहरी खाइयों पर पकड़ी जा सकती है। लेकिन यहां सब कुछ अनुभव और भाग्य पर निर्भर करता है।
मछुआरों के बीच सबसे बड़ी दिलचस्पी पर पकड़ रहा हैकताई। वैसे, इन स्थानों में बड़ी संख्या में शिकारियों की उपस्थिति वास्तव में प्रभावशाली है वोल्खोव पर मत्स्य पालन पाइक, झेंडर, एस्प और पर्च के कैच के लिए प्रसिद्ध है। ठीक है, अगर आप स्पिनर के साथ कैटफ़िश को ट्रोल करते हैं, तो आप सोच सकते हैं कि उस समय जानबूझ कर खर्च किया जाता है। आप किनारे और नाव से दोनों चारा पर पकड़ सकते हैं यह ट्रैक के लिए मछली के लिए बहुत प्रभावी है दिन के दौरान, 15 किलो तक की छोटी कैटफ़िश और पाईक को पकड़ा जा सकता है। और अलमारियों पर भी ब्लैकहैड्स हैं कई जगहों पर, नदी की पूरी लंबाई के साथ, पहुंच में, बड़ी संख्या में एक पाईक पर्च है वह स्वेच्छा से दोनों wobblers और सिलिकॉन फँसाना चाहे के लिए चला जाता है यह शिकारी झील इल्मेन से नदी के जल में आता है, जिसमें पाइक और एस्प भी पाए जाते हैं। लेकिन यह स्वयं विक्खोव और उसकी सहायक नदियों में मछली के लिए बेहतर है। ज़शेचा ओस्केय, कावा, कोल्पिंकी, के्रेस्टी और पचेवझा के मच्छरों में पाया जा सकता है। वे उसे कताई के चम्मच-चारा और विनोोटेल पर पकड़ लेते हैं। Asp और औसत wobblers पर प्रतिक्रिया सामान्य तौर पर, यह तर्क दिया जा सकता है कि पूरे नदी में आपको बहुत ही आकर्षक जगह मिल सकती है। तो बिना, बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन अभी भी एक ट्रॉफी है, कोई भी नहीं छोड़ा जाएगा।
शायद मछुआरों के लिए सबसे पसंदीदा जगह परVolkhov नदी Gruzino के गांव है यह Chudovsky जिले में स्थित है। यह समझौता नदी बैंक के पास है तो वह इतने सारे मछुआरों को खुद क्यों आकर्षित करता है? सबसे पहले, इन स्थानों की सुंदरता और जाहिर है, मछली की एक बड़ी संख्या की उपस्थिति। किनारे के लिए बहुत सुविधाजनक सुविधाएं हैं और कताई के लिए सक्रिय रूप से मछली का अवसर है। काटने, एक नियम के रूप में, आप इंतजार नहीं रखता पाईक यहाँ और एक अच्छा पर्च पकड़ा गया है। और इस गांव के लिए सड़कें ही मुश्किलें पैदा नहीं करती हैं। इसे मार्ग के लिए P36 दृष्टिकोण। आप Chudovo शहर के माध्यम से ड्राइव कर सकते हैं, जो जॉर्जिया के 14 किमी पश्चिम में स्थित है।
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उत्तर-पश्चिमी भाग में वोल्खोव नदी स्थित हैरूस। इसका स्रोत झील इल्मेन है मुख्य उपनदियां पचेझा, ओस्कुया हैं दो सौ चौबीस किलोग्राममीटर की लंबाई की यात्रा करते हुए, वोल्खोव नदी का जल प्रसिद्ध लाडोगा झील में फैला हुआ है। यह अपेक्षाकृत छोटी नदी को अद्वितीय कहा जा सकता है इसका जल वर्तमान की दिशा बदल सकता है यह कैसे हो सकता है? बात यह है कि नदी के स्रोत और मुंह के बीच की ऊंचाई में अंतर बहुत बड़ा नहीं है, और जब पानी गिर जाता है, तो पानी के चारों ओर मुड़ता है तो वोल्वोव ने अपने वर्तमान की दिशा में परिवर्तन किया। इस नदी के तट पर नोव्गोरोड, नोवा लाडोगा, किरीशि के शहर हैं। नेविगेशन यहां बहुत विकसित किया गया है। नोवगोरोड के क्षेत्र में नदी की चौड़ाई लगभग दो सौ बीस मीटर है। बेशक, Volkhov पर मछली पकड़ने विशेष ध्यान देने योग्य है। नदी अपने मछली पकड़ने के मार्गों के लिए लंबे समय से प्रसिद्ध है। वैसे, मछली को लगभग हर जगह सफलतापूर्वक पकड़ा जा सकता है। हुक पर पाईक, एएसपी, पाइक पर्च, बरबोट, कैटफ़िश, पेर्च, गले, ब्रीम, व्हाइटफिश, ब्लूफ़िश, चेशन, धूमिल और रफ आते हैं। इसलिए किसी को पकड़ने के बिना छोड़ दिया जाएगा। Volkhov के पानी में नीचे से निपटने सफलतापूर्वक पकड़ा गया हैब्रीम, शेखोन, यज़्य, गस्टरू और, ज़ाहिर है, कैटफ़िश। मछली पकड़ने के लिए सबसे अच्छी जगह कावा, पचेव और ओस्कुया के मुंह में हैं कीड़े का एक गुच्छा चारा के रूप में उपयोग किया जाता है आकर्षण के बारे में मत भूलो किनारे से मछलियों को पकड़ना सबसे प्रभावी है बहुत से ब्रीम और हिरण हैं लेकिन Volkhov पर मछली पकड़ने इन प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध नहीं है। मछली पकड़ने के प्रशंसक यहाँ के लिए soms पकड़ा मछली का औसत आकार दस-पंद्रह किलो है। एक बड़ी कैटफ़िश रात में एक बुलेट और "केवोकॉम" द्वारा पहुंचने और गहरी खाइयों पर पकड़ी जा सकती है। लेकिन यहां सब कुछ अनुभव और भाग्य पर निर्भर करता है। मछुआरों के बीच सबसे बड़ी दिलचस्पी पर पकड़ रहा हैकताई। वैसे, इन स्थानों में बड़ी संख्या में शिकारियों की उपस्थिति वास्तव में प्रभावशाली है वोल्खोव पर मत्स्य पालन पाइक, झेंडर, एस्प और पर्च के कैच के लिए प्रसिद्ध है। ठीक है, अगर आप स्पिनर के साथ कैटफ़िश को ट्रोल करते हैं, तो आप सोच सकते हैं कि उस समय जानबूझ कर खर्च किया जाता है। आप किनारे और नाव से दोनों चारा पर पकड़ सकते हैं यह ट्रैक के लिए मछली के लिए बहुत प्रभावी है दिन के दौरान, पंद्रह किलो तक की छोटी कैटफ़िश और पाईक को पकड़ा जा सकता है। और अलमारियों पर भी ब्लैकहैड्स हैं कई जगहों पर, नदी की पूरी लंबाई के साथ, पहुंच में, बड़ी संख्या में एक पाईक पर्च है वह स्वेच्छा से दोनों wobblers और सिलिकॉन फँसाना चाहे के लिए चला जाता है यह शिकारी झील इल्मेन से नदी के जल में आता है, जिसमें पाइक और एस्प भी पाए जाते हैं। लेकिन यह स्वयं विक्खोव और उसकी सहायक नदियों में मछली के लिए बेहतर है। ज़शेचा ओस्केय, कावा, कोल्पिंकी, के्रेस्टी और पचेवझा के मच्छरों में पाया जा सकता है। वे उसे कताई के चम्मच-चारा और विनोोटेल पर पकड़ लेते हैं। Asp और औसत wobblers पर प्रतिक्रिया सामान्य तौर पर, यह तर्क दिया जा सकता है कि पूरे नदी में आपको बहुत ही आकर्षक जगह मिल सकती है। तो बिना, बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन अभी भी एक ट्रॉफी है, कोई भी नहीं छोड़ा जाएगा। शायद मछुआरों के लिए सबसे पसंदीदा जगह परVolkhov नदी Gruzino के गांव है यह Chudovsky जिले में स्थित है। यह समझौता नदी बैंक के पास है तो वह इतने सारे मछुआरों को खुद क्यों आकर्षित करता है? सबसे पहले, इन स्थानों की सुंदरता और जाहिर है, मछली की एक बड़ी संख्या की उपस्थिति। किनारे के लिए बहुत सुविधाजनक सुविधाएं हैं और कताई के लिए सक्रिय रूप से मछली का अवसर है। काटने, एक नियम के रूप में, आप इंतजार नहीं रखता पाईक यहाँ और एक अच्छा पर्च पकड़ा गया है। और इस गांव के लिए सड़कें ही मुश्किलें पैदा नहीं करती हैं। इसे मार्ग के लिए Pछत्तीस दृष्टिकोण। आप Chudovo शहर के माध्यम से ड्राइव कर सकते हैं, जो जॉर्जिया के चौदह किमी पश्चिम में स्थित है।
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नागरिक उड्डयन नियामक के निरीक्षण में सुरक्षा प्रोटोकॉल में खामियां पाए जाने के बाद एयर इंडिया के उड़ान सुरक्षा प्रमुख को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है। नागरिक उड्डयन निदेशालय ने कहा है कि 121 विमानों का दावा करने वाली एयर इंडिया का 25-26 जुलाई को 'आंतरिक ऑडिट, दुर्घटना निवारण कार्य और आवश्यक तकनीकी जनशक्ति की आवश्यकता' पर निरीक्षण किया गया था।
नागरिक उड्डयन निदेशालय ने एक बयान में कहा कि डीजीसीए निगरानी ने संगठन द्वारा किए गए दुर्घटना रोकथाम कार्य और विमानन सुरक्षा मैनुअल और प्रासंगिक नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के अनुसार अपेक्षित आवश्यकताओं में कमी देखी है। उन्होंने आगे कहा कि यह भी देखा गया कि एयरलाइंस के खिलाफ किए गए कुछ आंतरिक ऑडिट/स्पॉट जांच लापरवाही से किए गए और नियामक आवश्यकताओं के अनुसार नहीं किए गए।
एयरलाइन की कार्रवाई रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद, डीजीसीए ने संबंधित कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह भी कहा गया है कि, 'प्राप्त उत्तरों की समीक्षा के आधार पर, एयरलाइंस को निर्देश दिया जाता है कि वे डीजीसीए आवश्यकताओं के अनुपालन के संबंध में किसी भी ऑडिट/निगरानी/स्पॉट जांच को लापरवाह निरीक्षण में शामिल विशेष ऑडिटर को न सौंपें, जो परिश्रम की कमी को दर्शाता है।
यह भी कहा गया है कि इन खामियों के लिए मेसर्स एयर इंडिया के उड़ान सुरक्षा प्रमुख को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है।
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नागरिक उड्डयन नियामक के निरीक्षण में सुरक्षा प्रोटोकॉल में खामियां पाए जाने के बाद एयर इंडिया के उड़ान सुरक्षा प्रमुख को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है। नागरिक उड्डयन निदेशालय ने कहा है कि एक सौ इक्कीस विमानों का दावा करने वाली एयर इंडिया का पच्चीस-छब्बीस जुलाई को 'आंतरिक ऑडिट, दुर्घटना निवारण कार्य और आवश्यक तकनीकी जनशक्ति की आवश्यकता' पर निरीक्षण किया गया था। नागरिक उड्डयन निदेशालय ने एक बयान में कहा कि डीजीसीए निगरानी ने संगठन द्वारा किए गए दुर्घटना रोकथाम कार्य और विमानन सुरक्षा मैनुअल और प्रासंगिक नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के अनुसार अपेक्षित आवश्यकताओं में कमी देखी है। उन्होंने आगे कहा कि यह भी देखा गया कि एयरलाइंस के खिलाफ किए गए कुछ आंतरिक ऑडिट/स्पॉट जांच लापरवाही से किए गए और नियामक आवश्यकताओं के अनुसार नहीं किए गए। एयरलाइन की कार्रवाई रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद, डीजीसीए ने संबंधित कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह भी कहा गया है कि, 'प्राप्त उत्तरों की समीक्षा के आधार पर, एयरलाइंस को निर्देश दिया जाता है कि वे डीजीसीए आवश्यकताओं के अनुपालन के संबंध में किसी भी ऑडिट/निगरानी/स्पॉट जांच को लापरवाह निरीक्षण में शामिल विशेष ऑडिटर को न सौंपें, जो परिश्रम की कमी को दर्शाता है। यह भी कहा गया है कि इन खामियों के लिए मेसर्स एयर इंडिया के उड़ान सुरक्षा प्रमुख को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है।
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सूत्रों का कहना है कि मौजूदा चीफ जस्टिस आर. एम. लोढ़ा ने एच. एल. दत्तू के नाम वाली फाइल शुक्रवार को सरकार को सौंपी थी. इसके साथ ही पीएम के ऑफिस (PMO) की भी इस पर मुहर लग गई है. PMO की मंजूरी के बाद यह फाइल अब प्रेसीडेंट प्रणब मुखर्जी के पास जायेगी. आपको बता दें कि चीफ जस्टिस लोढ़ा इस महीने की 27 तारीख को रिटायर हो रहे हैं. इसके बाद दत्तू इस पद का कार्यभार संभालेंगे. गौरतलब है कि चीफ जस्टिस बनने के बाद दत्तू का कार्यकाल 1 साल से ज्यादा का होगा, वह दिसंबर 2015 में रिटायर होंगे.
जस्टिस दत्तू ऐसे समय में चीफ जस्टिस की कुर्सी संभालेंगे, जब नरेंद्र मोदी सरकार न्यायाधीशों की नियुक्ति की कोलेजियम सिस्टम को हटाने के लिये नेशनल जुडिशियल अपॉइनमेंट कमीशन लेकर आ रही है. इसके साथ ही बिल संसद के दोनों सदनों में पास हो चुका है, इसमें प्रावधान है कि एक 6 सदस्यीय आयोग न्यायाधीशों की नियुक्ति करेगा, जिसके मुखिया चीफ जस्टिस होंगे. जस्टिस दत्तू ने साल 2008 में बतौर जज SC ज्वॉइन किया था. 13 दिसंबर 1950 को जन्में जस्टिस आर. एल. दत्तू ने साल 2007 में कुछ महीनों के लिये छत्तीसगढ़ HC के मुख्य न्यायाधीश का पद भी संभाल चुके हैं.
सरकार द्वारा बनाये गये इस नये कानून के तहत 6 लोगों का कमीशन होगा, जो जजों के नाम का चयन करेंगे और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी से उन्हें जज बनाया जायेगा. इसमें भारत के चीफ जस्टिस, 2 सुप्रीम कोर्ट के जज, कानून मंत्री और 2 अन्य लोग शामिल होंगे. इन दो नामों का चयन हाई पावर कमेटी करेगी.
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सूत्रों का कहना है कि मौजूदा चीफ जस्टिस आर. एम. लोढ़ा ने एच. एल. दत्तू के नाम वाली फाइल शुक्रवार को सरकार को सौंपी थी. इसके साथ ही पीएम के ऑफिस की भी इस पर मुहर लग गई है. PMO की मंजूरी के बाद यह फाइल अब प्रेसीडेंट प्रणब मुखर्जी के पास जायेगी. आपको बता दें कि चीफ जस्टिस लोढ़ा इस महीने की सत्ताईस तारीख को रिटायर हो रहे हैं. इसके बाद दत्तू इस पद का कार्यभार संभालेंगे. गौरतलब है कि चीफ जस्टिस बनने के बाद दत्तू का कार्यकाल एक साल से ज्यादा का होगा, वह दिसंबर दो हज़ार पंद्रह में रिटायर होंगे. जस्टिस दत्तू ऐसे समय में चीफ जस्टिस की कुर्सी संभालेंगे, जब नरेंद्र मोदी सरकार न्यायाधीशों की नियुक्ति की कोलेजियम सिस्टम को हटाने के लिये नेशनल जुडिशियल अपॉइनमेंट कमीशन लेकर आ रही है. इसके साथ ही बिल संसद के दोनों सदनों में पास हो चुका है, इसमें प्रावधान है कि एक छः सदस्यीय आयोग न्यायाधीशों की नियुक्ति करेगा, जिसके मुखिया चीफ जस्टिस होंगे. जस्टिस दत्तू ने साल दो हज़ार आठ में बतौर जज SC ज्वॉइन किया था. तेरह दिसंबर एक हज़ार नौ सौ पचास को जन्में जस्टिस आर. एल. दत्तू ने साल दो हज़ार सात में कुछ महीनों के लिये छत्तीसगढ़ HC के मुख्य न्यायाधीश का पद भी संभाल चुके हैं. सरकार द्वारा बनाये गये इस नये कानून के तहत छः लोगों का कमीशन होगा, जो जजों के नाम का चयन करेंगे और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी से उन्हें जज बनाया जायेगा. इसमें भारत के चीफ जस्टिस, दो सुप्रीम कोर्ट के जज, कानून मंत्री और दो अन्य लोग शामिल होंगे. इन दो नामों का चयन हाई पावर कमेटी करेगी.
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बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान एक सुपरस्टार हैं इसमें कोई भी शक नहीं है.
आमिर खान भले ही अपनी प्रोफेशनल लाइफ को लेकर कितने भी परफेक्ट क्यों ना हो लेकिन उनके भीतर एक गंदी आदत भी है. जिससे बॉलीवुड की ना जाने कितनी ही अभिनेत्रियां परेशान हो चुकी हैं.
दरअसल आमिर खान अपने साथ काम करनेवाली अभिनेत्रियों के हाथों पर थूकने को लेकर काफी बदनाम है. कहा जाता है कि आमिर किसी बहाने से अभिनेत्रियों का हाथ थामते हैं और उसपर थूक देते हैं.
आखिर अभिनेत्रियों के हाथ पर थूकने के पीछे आमिर का क्या मकसद होता है. क्या वो सिर्फ मजाक में ही अभिनेत्रियों के हाथों पर थूक देते हैं या फिर इसके पीछे छुपा है कोई राज.
चलिए जानते है अभिनेत्रियों के हाथ पर थूकने के पीछे क्या हकीकत हैं.
दरअसल आमिर खान अभिनेत्रियों के हाथों पर थूकने की अपनी इस आदत के पीछे एक खास टोटका बताते हैं. आमिर की मानें तो वो जिस अभिनेत्री के हाथों पर थूक देते हैं वो देखते ही देखते बड़ी स्टार बन जाती है.
कहा जाता है कि आमिर हाथ देखने के बहाने अपनी हीरोइन्स का हाथ पकड़ते हैं और एक दो सवाल जवाब के बाद वो सीधे उनके हाथ पर थूक देते हैं. खबरों के मुताबिक आमिर ने एक बार माधुरी दीक्षित के साथ कुछ ऐसा ही किया था जिसके बाद गुस्से में माधुरी उनके पीछे हॉकी स्टिक लेकर भागी थीं.
आमिर ने इस तरह की हरकत प्रीति जिंटा और जूही चावला के साथ भी की है. लेकिन उन्हें अपनी इस हरकत पर कोई पछतावा नहीं है बल्कि उनका मानना है कि उनके ऐसा करने से अभिनेत्रियां स्टार बन जाती हैं.
आमिर के साथ फिल्म 'जो जीता वही सिकंदर' में नजर आनेवाली पूजा बेदी ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपनी ख्वाहिश जाहिर करते हुए कहा कि वो चाहती हैं कि आमिर उनकी बेटी आलिया के हाथ पर थूक दें.
इतना ही नहीं पूजा ने अपनी बेटी आलिया से भी कहा है कि वो आमिर अंकल से जाकर मिले और अपने हाथ पर थूकने के लिए कहे. पूजा कि मानें तो वह चाहती हैं कि उनकी बेटी आलिया भी एक स्टार बनें इसके लिए वो चाहती हैं कि आमिर उनकी बेटी के साथ वैसा ही करें जैसा वो बाकी हीरोइन्स के साथ करते हैं.
बहरहाल अभिनेत्रियों के हाथ पर थूकने के पीछे आमिर के इस टोटके में कितनी सच्चाई है यह तो हम नहीं बता सकते, लेकिन इतना जरूर कहेंगे कि अपनी इस आदत की वजह से आमिर अभिनेत्रियों के बीच बदनाम जरूर हैं.
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बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान एक सुपरस्टार हैं इसमें कोई भी शक नहीं है. आमिर खान भले ही अपनी प्रोफेशनल लाइफ को लेकर कितने भी परफेक्ट क्यों ना हो लेकिन उनके भीतर एक गंदी आदत भी है. जिससे बॉलीवुड की ना जाने कितनी ही अभिनेत्रियां परेशान हो चुकी हैं. दरअसल आमिर खान अपने साथ काम करनेवाली अभिनेत्रियों के हाथों पर थूकने को लेकर काफी बदनाम है. कहा जाता है कि आमिर किसी बहाने से अभिनेत्रियों का हाथ थामते हैं और उसपर थूक देते हैं. आखिर अभिनेत्रियों के हाथ पर थूकने के पीछे आमिर का क्या मकसद होता है. क्या वो सिर्फ मजाक में ही अभिनेत्रियों के हाथों पर थूक देते हैं या फिर इसके पीछे छुपा है कोई राज. चलिए जानते है अभिनेत्रियों के हाथ पर थूकने के पीछे क्या हकीकत हैं. दरअसल आमिर खान अभिनेत्रियों के हाथों पर थूकने की अपनी इस आदत के पीछे एक खास टोटका बताते हैं. आमिर की मानें तो वो जिस अभिनेत्री के हाथों पर थूक देते हैं वो देखते ही देखते बड़ी स्टार बन जाती है. कहा जाता है कि आमिर हाथ देखने के बहाने अपनी हीरोइन्स का हाथ पकड़ते हैं और एक दो सवाल जवाब के बाद वो सीधे उनके हाथ पर थूक देते हैं. खबरों के मुताबिक आमिर ने एक बार माधुरी दीक्षित के साथ कुछ ऐसा ही किया था जिसके बाद गुस्से में माधुरी उनके पीछे हॉकी स्टिक लेकर भागी थीं. आमिर ने इस तरह की हरकत प्रीति जिंटा और जूही चावला के साथ भी की है. लेकिन उन्हें अपनी इस हरकत पर कोई पछतावा नहीं है बल्कि उनका मानना है कि उनके ऐसा करने से अभिनेत्रियां स्टार बन जाती हैं. आमिर के साथ फिल्म 'जो जीता वही सिकंदर' में नजर आनेवाली पूजा बेदी ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपनी ख्वाहिश जाहिर करते हुए कहा कि वो चाहती हैं कि आमिर उनकी बेटी आलिया के हाथ पर थूक दें. इतना ही नहीं पूजा ने अपनी बेटी आलिया से भी कहा है कि वो आमिर अंकल से जाकर मिले और अपने हाथ पर थूकने के लिए कहे. पूजा कि मानें तो वह चाहती हैं कि उनकी बेटी आलिया भी एक स्टार बनें इसके लिए वो चाहती हैं कि आमिर उनकी बेटी के साथ वैसा ही करें जैसा वो बाकी हीरोइन्स के साथ करते हैं. बहरहाल अभिनेत्रियों के हाथ पर थूकने के पीछे आमिर के इस टोटके में कितनी सच्चाई है यह तो हम नहीं बता सकते, लेकिन इतना जरूर कहेंगे कि अपनी इस आदत की वजह से आमिर अभिनेत्रियों के बीच बदनाम जरूर हैं.
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बेंगलुरु, 28 दिसंबर (भाषा) कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष डी. के. शिवकुमार ने बुधवार को मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से कहा कि महाराष्ट्र के साथ सीमा विवाद पर उन्हें तत्काल सर्वदलीय शिष्टमंडल के साथ दिल्ली जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने बोम्मई पर इस मामले में सिर्फ "खोखली बयानबाजी" करने का भी आरोप लगाया।
बोम्मई ने कहा था कि कर्नाटक अपनी एक इंच जमीन भी महाराष्ट्र को नहीं देगा। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से इस मामले में सार्वजनिक रूप से आश्वासन देने को कहा।
सीमा मुद्दे पर महाराष्ट्र विधानमंडल में पारित प्रस्ताव को "गैर-जिम्मेदार और संघीय ढांचे के विरूद्ध" बताते हुए बोम्मई ने मंगलवार को कहा था कि राज्य की एक इंच जमीन भी नहीं छोड़ी जाएगी।
महाराष्ट्र विधानमंडल ने मंगलवार को कर्नाटक में मराठी भाषी 865 गांवों को महाराष्ट्र में शामिल करने के लिए "कानूनी कदम उठाने" के वास्ते प्रस्ताव पारित किया।
पिछले कुछ सप्ताह में दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद बढ़ गया है और दोनों राज्यों के नेता इस पर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। पुलिस ने बेलगावी में स्थिति तनावपूर्ण होने के मद्देनजर कई कन्नड़ तथा मराठी समर्थक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है।
दोनों राज्यों के बीच यह सीमा विवाद 1957 में भाषा के आधार पर इनके पुनर्गठन के वक्त का है। महाराष्ट्र पूर्ववर्ती बांबे प्रेसिडेंसी का हिस्सा रहे बेलगावी पर अपना दावा करता है क्योंकि वहां मराठी भाषियों की संख्या ज्यादा है। वह उन 865 मराठी भाषी गांवों पर भी दावा करता है जो फिलहाल कर्नाटक का हिस्सा हैं।
यह खबर 'भाषा' न्यूज़ एजेंसी से 'ऑटो-फीड' द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
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बेंगलुरु, अट्ठाईस दिसंबर कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष डी. के. शिवकुमार ने बुधवार को मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से कहा कि महाराष्ट्र के साथ सीमा विवाद पर उन्हें तत्काल सर्वदलीय शिष्टमंडल के साथ दिल्ली जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने बोम्मई पर इस मामले में सिर्फ "खोखली बयानबाजी" करने का भी आरोप लगाया। बोम्मई ने कहा था कि कर्नाटक अपनी एक इंच जमीन भी महाराष्ट्र को नहीं देगा। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से इस मामले में सार्वजनिक रूप से आश्वासन देने को कहा। सीमा मुद्दे पर महाराष्ट्र विधानमंडल में पारित प्रस्ताव को "गैर-जिम्मेदार और संघीय ढांचे के विरूद्ध" बताते हुए बोम्मई ने मंगलवार को कहा था कि राज्य की एक इंच जमीन भी नहीं छोड़ी जाएगी। महाराष्ट्र विधानमंडल ने मंगलवार को कर्नाटक में मराठी भाषी आठ सौ पैंसठ गांवों को महाराष्ट्र में शामिल करने के लिए "कानूनी कदम उठाने" के वास्ते प्रस्ताव पारित किया। पिछले कुछ सप्ताह में दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद बढ़ गया है और दोनों राज्यों के नेता इस पर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। पुलिस ने बेलगावी में स्थिति तनावपूर्ण होने के मद्देनजर कई कन्नड़ तथा मराठी समर्थक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। दोनों राज्यों के बीच यह सीमा विवाद एक हज़ार नौ सौ सत्तावन में भाषा के आधार पर इनके पुनर्गठन के वक्त का है। महाराष्ट्र पूर्ववर्ती बांबे प्रेसिडेंसी का हिस्सा रहे बेलगावी पर अपना दावा करता है क्योंकि वहां मराठी भाषियों की संख्या ज्यादा है। वह उन आठ सौ पैंसठ मराठी भाषी गांवों पर भी दावा करता है जो फिलहाल कर्नाटक का हिस्सा हैं। यह खबर 'भाषा' न्यूज़ एजेंसी से 'ऑटो-फीड' द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
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आप यदि किसी प्रतियोगी परीक्षा में हिस्सा लेते है तो पाते है की उसमें सामान्य ज्ञान के बहुत से प्रश्न अक्सर पूछे जाते है. कई बार तो यह भी होता है की हमारी गणित कमजोर होने की वजह से ये सामान्य ज्ञान ,सामान्य विज्ञान के प्रश्न हमें सफल होने में बड़ी मदद करते है . यदि आपका भी सामान्य ज्ञान अच्छा है तो आप भी जल्द ही सफलता पा सकते है.
प्रश्नः1 लैम्पों में प्रकाश उत्पन्न करने के काम में कौन सी गैस उपयोग में लायी जाती है?
प्रश्नः2 कच्चे फलों को पकाने में कौन सी गैस उपयोग में लायी जाती है?
प्रश्नः3 ऊनी कपड़ों की शुष्क धुलाई(Dry Cleaning) में कौन सी गैस उपयोग में लायी जाती है?
प्रश्नः 4 किस किसी परमाणु के रासायनिक गुण निम्न किस पर निर्भर करते हैं :
प्रश्नः 5 आयु निर्धारण में कार्बन के किस समस्थानिक का उपयोग करते हैं ?
प्रश्नः 6 नाभिकीय रिएक्टर में भारी जल का उपयोग का किस रूप में किया जाता है?
प्रश्नः 7 सूर्य के उच्च ताप का कारण क्या है?
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आप यदि किसी प्रतियोगी परीक्षा में हिस्सा लेते है तो पाते है की उसमें सामान्य ज्ञान के बहुत से प्रश्न अक्सर पूछे जाते है. कई बार तो यह भी होता है की हमारी गणित कमजोर होने की वजह से ये सामान्य ज्ञान ,सामान्य विज्ञान के प्रश्न हमें सफल होने में बड़ी मदद करते है . यदि आपका भी सामान्य ज्ञान अच्छा है तो आप भी जल्द ही सफलता पा सकते है. प्रश्नःएक लैम्पों में प्रकाश उत्पन्न करने के काम में कौन सी गैस उपयोग में लायी जाती है? प्रश्नःदो कच्चे फलों को पकाने में कौन सी गैस उपयोग में लायी जाती है? प्रश्नःतीन ऊनी कपड़ों की शुष्क धुलाई में कौन सी गैस उपयोग में लायी जाती है? प्रश्नः चार किस किसी परमाणु के रासायनिक गुण निम्न किस पर निर्भर करते हैं : प्रश्नः पाँच आयु निर्धारण में कार्बन के किस समस्थानिक का उपयोग करते हैं ? प्रश्नः छः नाभिकीय रिएक्टर में भारी जल का उपयोग का किस रूप में किया जाता है? प्रश्नः सात सूर्य के उच्च ताप का कारण क्या है?
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KATIHAR : जिले में अपराधी बेख़ौफ़ होकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं. ऐसी घटनाओं को अंजाम देकर अपराधी पुलिस को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं. इसी कड़ी में अज्ञात अपराधियों ने फोर व्हीलर सवार एक युवक को गोली मार दी. अस्पताल ले जाने से पहले ही युवक की मौके पर मौत हो गयी.
इस घटना को अंजाम देने के बाद अपराधी मौके से फरार हो गए. घटना कुरसेला थाना क्षेत्र के कबीर मठ एनएच 31 के समीप की बताई जा रही है. इस घटना की सूचना पुलिस को दी गयी. जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस मामले की जांच में जुट गयी है.
उधर इस घटना के बाद इलाके में अफरा तफरी का माहौल हो गया. अभी तक घटना के कारणों का पता नहीं चला है. ना ही पुलिस अभी किसी को गिरफ्तार कर पायी है. आरोपियों की धड़-पकड़ के लिए पुलिस छापेमारी में जुट गयी है.
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KATIHAR : जिले में अपराधी बेख़ौफ़ होकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं. ऐसी घटनाओं को अंजाम देकर अपराधी पुलिस को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं. इसी कड़ी में अज्ञात अपराधियों ने फोर व्हीलर सवार एक युवक को गोली मार दी. अस्पताल ले जाने से पहले ही युवक की मौके पर मौत हो गयी. इस घटना को अंजाम देने के बाद अपराधी मौके से फरार हो गए. घटना कुरसेला थाना क्षेत्र के कबीर मठ एनएच इकतीस के समीप की बताई जा रही है. इस घटना की सूचना पुलिस को दी गयी. जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस मामले की जांच में जुट गयी है. उधर इस घटना के बाद इलाके में अफरा तफरी का माहौल हो गया. अभी तक घटना के कारणों का पता नहीं चला है. ना ही पुलिस अभी किसी को गिरफ्तार कर पायी है. आरोपियों की धड़-पकड़ के लिए पुलिस छापेमारी में जुट गयी है.
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घाटमपुर विधानसभा उपचुनाव में दस नवंबर को होने वाली मतगणना से पहले पतारा विकासखंड के जहांगीराबाद गांव के बूथ में हुए मतदान में हुई गलती पकड़ में आने के बाद निर्वाचन आयोग और प्रत्याशियों से साझा की गई है।
कानपुर, जेएनएन। घाटमपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की मतगणना में जहांगीराबाद गांव के बूथ संख्या 173 ए की ईवीएम के वोट नहीं गिने जाएंगे। इसके पीछे पीठासीन अधिकारी की चूक सामने आई है। उन्होंने मॉक पोल के वोटों को डिलीट ही नहीं किया था और वास्तविक मतदान शुरू करा दिया था। मतगणना से पहले ही खामी पकड़ में आने के बाद निर्वाचन आयोग के साथ विभिन्न दलों के प्रत्याशियों को पूरे मामले से अवगत कराया गया है।
पतारा विकासखंड के जहांगीराबाद के प्राथमिक पाठशाला कक्ष संख्या-3 की बूथ संख्या 173 ए में कुल 311 वोट पड़े थे। सेक्टर व जोनल मजिस्ट्रेट और ऑब्जर्वर की पड़ताल के दौरान सामने आया कि पीठासीन अधिकारी ने ईवीएम से मॉक पोल के वोट हटाए बगैर वास्तविक मतदान शुरू करा दिया, जिसमें माक पोल के वोट भी शामिल हो गए हैं। रिटर्निंग ऑफीसर की रिपोर्ट के आधार पर उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं एडीएम (सिविल सप्लाई) बसंत अग्रवाल ने चूक से मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजकर अवगत कराया है।
रिटर्निंग अफसर एके श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंनेे शनिवार को तहसील में प्रत्याशियों की बैठक करके खामी की जानकारी दे दी है। बूथ 173 ए की ईवीएम के वोट नहीं गिने जाएंगे। उन्होंने बताया कि जीत-हार का अंतर ईवीएम में मौजूद वोटों से कम होने की दशा में वीवीपैट की पर्चियों की गिनती मॉकपोल के दौरान डाले गए वोटों को घटाकर की जाएगी।
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घाटमपुर विधानसभा उपचुनाव में दस नवंबर को होने वाली मतगणना से पहले पतारा विकासखंड के जहांगीराबाद गांव के बूथ में हुए मतदान में हुई गलती पकड़ में आने के बाद निर्वाचन आयोग और प्रत्याशियों से साझा की गई है। कानपुर, जेएनएन। घाटमपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की मतगणना में जहांगीराबाद गांव के बूथ संख्या एक सौ तिहत्तर ए की ईवीएम के वोट नहीं गिने जाएंगे। इसके पीछे पीठासीन अधिकारी की चूक सामने आई है। उन्होंने मॉक पोल के वोटों को डिलीट ही नहीं किया था और वास्तविक मतदान शुरू करा दिया था। मतगणना से पहले ही खामी पकड़ में आने के बाद निर्वाचन आयोग के साथ विभिन्न दलों के प्रत्याशियों को पूरे मामले से अवगत कराया गया है। पतारा विकासखंड के जहांगीराबाद के प्राथमिक पाठशाला कक्ष संख्या-तीन की बूथ संख्या एक सौ तिहत्तर ए में कुल तीन सौ ग्यारह वोट पड़े थे। सेक्टर व जोनल मजिस्ट्रेट और ऑब्जर्वर की पड़ताल के दौरान सामने आया कि पीठासीन अधिकारी ने ईवीएम से मॉक पोल के वोट हटाए बगैर वास्तविक मतदान शुरू करा दिया, जिसमें माक पोल के वोट भी शामिल हो गए हैं। रिटर्निंग ऑफीसर की रिपोर्ट के आधार पर उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं एडीएम बसंत अग्रवाल ने चूक से मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजकर अवगत कराया है। रिटर्निंग अफसर एके श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंनेे शनिवार को तहसील में प्रत्याशियों की बैठक करके खामी की जानकारी दे दी है। बूथ एक सौ तिहत्तर ए की ईवीएम के वोट नहीं गिने जाएंगे। उन्होंने बताया कि जीत-हार का अंतर ईवीएम में मौजूद वोटों से कम होने की दशा में वीवीपैट की पर्चियों की गिनती मॉकपोल के दौरान डाले गए वोटों को घटाकर की जाएगी।
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महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक पुरुष की मर्डर का मामला प्रकाश में आया है। उसकी मर्डर एक विवाहित मुसलमान स्त्री के साथ प्रेम संबंध होने के कारण की गई थी। दरअसल, स्वप्निल नागेश्वर नामक पुरुष एक मुसलमान स्त्री के साथ घूमता हुआ पाया गया था। जिसके बाद आठ से दस लोगों इस पुरुष को महाराष्ट्र के नांदेड़ के डंकीन क्षेत्र में लाए और पीट-पीट कर उसे मार डाला। मर्डर के 48 घंटे के अंदर ही पुलिस ने 7 आरोपियों को अरैस्ट कर लिया है। यह पूरी वारदात CCTV फुटेज में दर्ज हो गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों को चिन्हित किया और उन्हें पकड़ने में सफलता पाई। नांदेड़ शहर में हुई इस वारदात से शहर में तनाव फैल गया है। पुलिस अरैस्ट किए गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, स्वप्निल नागेश्वर एक मुसलमान स्त्री के साथ घूमता हुआ पाया गया था। इसके बाद स्त्री के समुदाय के ही आठ-दस लोग उन दोनों को ऑटो रिक्शा में किडनैप कर गोदावरी नदी के किनारे ले गए। यहां लाकर नागेश्वर को पीट-पीट कर मृत्यु के घाट उतार दिया और उस स्त्री की भी पिटाई की।
इस मर्डर मुकदमा के बाद पूरे शहर में तनाव का माहौल फैल गया। पुलिस पर भी शीघ्र से शीघ्र आरोपियों को अरैस्ट करने का दबाव था। यह पूरी घटना CCTV में दर्ज हो गई थी। इसी की सहायता से नांदेड़ के हवाई अड्डे क्षेत्र की पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल हुई। 7 अरेस्ट किए गए आरोपियों में मुख्य आरोपी का नाम शाहबाज एजाज खान बताया गया है। इसके साथ मोहम्मद सद्दाम मोहम्मद कुरैशी, मोहम्मद ओसामा मोहम्मद साजिद कुरैशी, शेख अयान शेख इमाम, सोहेल खान साहेब खान, सैयद फरहान, उबेद खान और युनूस खान को भी अरेस्ट किया गया हैं।
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महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक पुरुष की मर्डर का मामला प्रकाश में आया है। उसकी मर्डर एक विवाहित मुसलमान स्त्री के साथ प्रेम संबंध होने के कारण की गई थी। दरअसल, स्वप्निल नागेश्वर नामक पुरुष एक मुसलमान स्त्री के साथ घूमता हुआ पाया गया था। जिसके बाद आठ से दस लोगों इस पुरुष को महाराष्ट्र के नांदेड़ के डंकीन क्षेत्र में लाए और पीट-पीट कर उसे मार डाला। मर्डर के अड़तालीस घंटाटे के अंदर ही पुलिस ने सात आरोपियों को अरैस्ट कर लिया है। यह पूरी वारदात CCTV फुटेज में दर्ज हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों को चिन्हित किया और उन्हें पकड़ने में सफलता पाई। नांदेड़ शहर में हुई इस वारदात से शहर में तनाव फैल गया है। पुलिस अरैस्ट किए गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, स्वप्निल नागेश्वर एक मुसलमान स्त्री के साथ घूमता हुआ पाया गया था। इसके बाद स्त्री के समुदाय के ही आठ-दस लोग उन दोनों को ऑटो रिक्शा में किडनैप कर गोदावरी नदी के किनारे ले गए। यहां लाकर नागेश्वर को पीट-पीट कर मृत्यु के घाट उतार दिया और उस स्त्री की भी पिटाई की। इस मर्डर मुकदमा के बाद पूरे शहर में तनाव का माहौल फैल गया। पुलिस पर भी शीघ्र से शीघ्र आरोपियों को अरैस्ट करने का दबाव था। यह पूरी घटना CCTV में दर्ज हो गई थी। इसी की सहायता से नांदेड़ के हवाई अड्डे क्षेत्र की पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल हुई। सात अरेस्ट किए गए आरोपियों में मुख्य आरोपी का नाम शाहबाज एजाज खान बताया गया है। इसके साथ मोहम्मद सद्दाम मोहम्मद कुरैशी, मोहम्मद ओसामा मोहम्मद साजिद कुरैशी, शेख अयान शेख इमाम, सोहेल खान साहेब खान, सैयद फरहान, उबेद खान और युनूस खान को भी अरेस्ट किया गया हैं।
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भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अपने ग्राहकों को कार्डलेस कैश विदड्रॉल सुविधा देता है।
जागरण डॉट कॉम पर छपी खबर के अनुसार, इस सुविधा से ग्राहक डेबिट कार्ड के बिना बैंक के एटीएम से सुरक्षित रूप से और आसानी से नकदी निकाल सकते हैं। SBI के योनो ऐप के माध्यम से डेबिट कार्ड का उपयोग किए बिना एटीएम से नकदी निकाल सकते हैं।
1) इंटरनेट बैंकिंग ऐप YONO डाउनलोड करें।
2) लेन-देन आरंभ करने के लिए, 'YONO कैश विकल्प' पर जाएं।
3) इसके बाद एटीएम सेक्शन में जाएं और जितने पैसे निकालने हैं उसे दर्ज करें।
4) SBI आपके रजिस्टर्ड मोबाइल पर आपको योनो कैश ट्रांजेक्शन नंबर भेजेगा।
5) यह चार घंटे के लिए वैध है।
8) YONO कैश पिन दर्ज करें और मान्य करें।
9) लेन-देन की पूरी डिटेल और कैश लें।
क्या अन्य बैंक के एटीएम से नकदी निकालने के लिए इस सुविधा का उपयोग किया जा सकता है?
एसबीआई कार्डलेस कैश विद्ड्रॉल सुविधा का उपयोग केवल एसबीआई एटीएम पर किया जा सकता है। यह सुविधा एटीएम में डेबिट कार्ड और धोखाधड़ी को कम करने के लिए है।
SBI ग्राहक एक लेनदेन में न्यूनतम ₹ 500 और अधिकतम a 10,000 निकाल सकते हैं। यदि एटीएम में लेनदेन विफल हो जाता है तो हमें क्या करना चाहिए?
यदि आप कुछ तकनीकी खराबी के कारण एटीएम में लेनदेन विफल होने के कारण पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं और आपके खाते से राशि कट जाती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। बस अपने बैंक को तुरंत इसकी जानकारी दें।
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भारतीय स्टेट बैंक अपने ग्राहकों को कार्डलेस कैश विदड्रॉल सुविधा देता है। जागरण डॉट कॉम पर छपी खबर के अनुसार, इस सुविधा से ग्राहक डेबिट कार्ड के बिना बैंक के एटीएम से सुरक्षित रूप से और आसानी से नकदी निकाल सकते हैं। SBI के योनो ऐप के माध्यम से डेबिट कार्ड का उपयोग किए बिना एटीएम से नकदी निकाल सकते हैं। एक) इंटरनेट बैंकिंग ऐप YONO डाउनलोड करें। दो) लेन-देन आरंभ करने के लिए, 'YONO कैश विकल्प' पर जाएं। तीन) इसके बाद एटीएम सेक्शन में जाएं और जितने पैसे निकालने हैं उसे दर्ज करें। चार) SBI आपके रजिस्टर्ड मोबाइल पर आपको योनो कैश ट्रांजेक्शन नंबर भेजेगा। पाँच) यह चार घंटे के लिए वैध है। आठ) YONO कैश पिन दर्ज करें और मान्य करें। नौ) लेन-देन की पूरी डिटेल और कैश लें। क्या अन्य बैंक के एटीएम से नकदी निकालने के लिए इस सुविधा का उपयोग किया जा सकता है? एसबीआई कार्डलेस कैश विद्ड्रॉल सुविधा का उपयोग केवल एसबीआई एटीएम पर किया जा सकता है। यह सुविधा एटीएम में डेबिट कार्ड और धोखाधड़ी को कम करने के लिए है। SBI ग्राहक एक लेनदेन में न्यूनतम पाँच सौ रुपया और अधिकतम a दस,शून्य निकाल सकते हैं। यदि एटीएम में लेनदेन विफल हो जाता है तो हमें क्या करना चाहिए? यदि आप कुछ तकनीकी खराबी के कारण एटीएम में लेनदेन विफल होने के कारण पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं और आपके खाते से राशि कट जाती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। बस अपने बैंक को तुरंत इसकी जानकारी दें।
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राजस्थान (Rajasthan) के कोटा (Kota) सहित देश के कई राज्यों में सरकारी अस्पतालों में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की बड़ी कमी के मद्देनजर अगले वित्त वर्ष के बजट में इन अस्पतालों की स्थिति सुधारने की दिशा में बड़ा ऐलान हो सकता है।
सी. एम. वसुंधरा राजे ने राजस्थान के 2017-18 के बजट में सिगरेट को छोड़कर कोई नया टैक्स नहीं लगाया है।
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राजस्थान के कोटा सहित देश के कई राज्यों में सरकारी अस्पतालों में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की बड़ी कमी के मद्देनजर अगले वित्त वर्ष के बजट में इन अस्पतालों की स्थिति सुधारने की दिशा में बड़ा ऐलान हो सकता है। सी. एम. वसुंधरा राजे ने राजस्थान के दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह के बजट में सिगरेट को छोड़कर कोई नया टैक्स नहीं लगाया है।
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दो बच्चों की मां के प्यार में पागल युवक सऊदी अरब से भारत पहुंच गया। लेकिन, मुजफ्फरपुर स्टेशन पर पुलिस ने उन्हें संदिग्ध अवस्था में पकड़ा लिया।
दरअसल, सोमवार रात दो बजे रेल पुलिस ने जंक्शन पर बैठे युवक और युवती को पकड़ा। दोनों अकेले प्लेटफार्म के अंतिम छोड़ पर संदिग्ध अवस्था में बैठे थे। इतनी रात में दोनों को अकेला देख पुलिस पूछताछ करने पहुंची थी। ऐसे में दोनों घबराकर इधर-उधर भागने लगे। जिसके बाद महिला पुलिस की मदद से दोनों को पकड़ा और उन्हें थाने ले गई।
पूछताछ के दौरान युवक के पास से पासपोर्ट मिला। पासपोर्ट में सऊदी के एक शहर से मुंबई आने का एक टिकट मिला। वहीं, लड़की के पास से कुछ नहीं मिला। इसके बाद दोनों से अलग-अलग पूछताछ की गई। जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ।
मामले को लेकर रेल थानेदार दिनेश साहू ने बताया कि संदिग्ध अवस्था में दोनों को पकड़ा गया था। महिला यूपी की रहने वाली थी। किसी पक्ष ने शिकायत नहीं की है। दोनों के परिजन को बुलाया गया था। जहां से दोनों अपने-अपने परिजन के साथ निकल गए।
पूछताछ में युवक ने पुलिस को बताया कि वह मुजफ्फरपुर के ही गायघाट इलाके की रहने वाला है। उसकी उम्र करीब 25 वर्ष है। वह बीते तीन साल से सऊदी में रहकर सिलाई का काम करता था। लॉकडाउन के वक्त एक लाइव ऑनलाइन एप के बारे में जानकारी मिली। वह उसे इस्तेमाल करने लगा। उसी एप पर महिला से जान पहचान हुई। वह लाइव आती थी। उसे देखने के लिए वह ऑनलाइन एप पर महीने का 5 हजार तक रिचार्ज कराता था। उसका काम का समय भी पूरा करीब करीब हो चुका था। इसी बीच वह महिला से मिलने की चाहत बनाई। जिसके बाद उसने महिला को कहा की वह भारत आ रहा है। उससे मिलने के लिए लड़की भी मुंबई पहुंच जाती है। जहां से दोनों बिहार के मुजफ्फरपुर पहुंचते है।
वहीं, महिला ने पुलिस को बताया कि वह उत्तर प्रदेश की रहने वाली है। उसकी उम्र करीब 24 वर्ष है। उसकी शादी 4 साल पहले हुई थी। दो बच्चे है। दोनों की उम्र तीन वर्ष है। पति कोई काम नहीं करता है। वह ऑनलाइन एप इस्तेमाल करती थी। जहां से उसे महीने के 15 से 20 हजार रुपए आते थे। उसी से वह घर का खर्च चलाती थी।
इसी बीच युवक से जान पहचान हुई। मैं उससे प्यार करने लगी। दोनों मिलना भी चाहते थे। इसलिए मुंबई मिलने पहुंचे। वहा से वह युवक के साथ मुजफ्फरपुर बिहार पहुंची। जहां रेल पुलिस ने पकड़ लिया।
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दो बच्चों की मां के प्यार में पागल युवक सऊदी अरब से भारत पहुंच गया। लेकिन, मुजफ्फरपुर स्टेशन पर पुलिस ने उन्हें संदिग्ध अवस्था में पकड़ा लिया। दरअसल, सोमवार रात दो बजे रेल पुलिस ने जंक्शन पर बैठे युवक और युवती को पकड़ा। दोनों अकेले प्लेटफार्म के अंतिम छोड़ पर संदिग्ध अवस्था में बैठे थे। इतनी रात में दोनों को अकेला देख पुलिस पूछताछ करने पहुंची थी। ऐसे में दोनों घबराकर इधर-उधर भागने लगे। जिसके बाद महिला पुलिस की मदद से दोनों को पकड़ा और उन्हें थाने ले गई। पूछताछ के दौरान युवक के पास से पासपोर्ट मिला। पासपोर्ट में सऊदी के एक शहर से मुंबई आने का एक टिकट मिला। वहीं, लड़की के पास से कुछ नहीं मिला। इसके बाद दोनों से अलग-अलग पूछताछ की गई। जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ। मामले को लेकर रेल थानेदार दिनेश साहू ने बताया कि संदिग्ध अवस्था में दोनों को पकड़ा गया था। महिला यूपी की रहने वाली थी। किसी पक्ष ने शिकायत नहीं की है। दोनों के परिजन को बुलाया गया था। जहां से दोनों अपने-अपने परिजन के साथ निकल गए। पूछताछ में युवक ने पुलिस को बताया कि वह मुजफ्फरपुर के ही गायघाट इलाके की रहने वाला है। उसकी उम्र करीब पच्चीस वर्ष है। वह बीते तीन साल से सऊदी में रहकर सिलाई का काम करता था। लॉकडाउन के वक्त एक लाइव ऑनलाइन एप के बारे में जानकारी मिली। वह उसे इस्तेमाल करने लगा। उसी एप पर महिला से जान पहचान हुई। वह लाइव आती थी। उसे देखने के लिए वह ऑनलाइन एप पर महीने का पाँच हजार तक रिचार्ज कराता था। उसका काम का समय भी पूरा करीब करीब हो चुका था। इसी बीच वह महिला से मिलने की चाहत बनाई। जिसके बाद उसने महिला को कहा की वह भारत आ रहा है। उससे मिलने के लिए लड़की भी मुंबई पहुंच जाती है। जहां से दोनों बिहार के मुजफ्फरपुर पहुंचते है। वहीं, महिला ने पुलिस को बताया कि वह उत्तर प्रदेश की रहने वाली है। उसकी उम्र करीब चौबीस वर्ष है। उसकी शादी चार साल पहले हुई थी। दो बच्चे है। दोनों की उम्र तीन वर्ष है। पति कोई काम नहीं करता है। वह ऑनलाइन एप इस्तेमाल करती थी। जहां से उसे महीने के पंद्रह से बीस हजार रुपए आते थे। उसी से वह घर का खर्च चलाती थी। इसी बीच युवक से जान पहचान हुई। मैं उससे प्यार करने लगी। दोनों मिलना भी चाहते थे। इसलिए मुंबई मिलने पहुंचे। वहा से वह युवक के साथ मुजफ्फरपुर बिहार पहुंची। जहां रेल पुलिस ने पकड़ लिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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त्वचा के लिए बाजार में मिलने वाले ब्यूटी उत्पाद कैमिकल युक्त होते हैं जो हमारी त्वचा को और भी ज्यादा नुक्सान पहुंचाते हैं। तो इसलिए आज हम इस लेख में आपको त्वचा के लिए ऐसे घरेलू टिप्स लाए हैं जिनका कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं है।
जूएं मारने के लिए बाजार में मिलने वाले उत्पादों से हमें इंफेक्शन का खतरा रहता है और कभी ये उत्पाद काम ही नहीं करते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे बता रहे हैं जिनसे जूओं का जड़ से खात्मा होता है।
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त्वचा के लिए बाजार में मिलने वाले ब्यूटी उत्पाद कैमिकल युक्त होते हैं जो हमारी त्वचा को और भी ज्यादा नुक्सान पहुंचाते हैं। तो इसलिए आज हम इस लेख में आपको त्वचा के लिए ऐसे घरेलू टिप्स लाए हैं जिनका कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं है। जूएं मारने के लिए बाजार में मिलने वाले उत्पादों से हमें इंफेक्शन का खतरा रहता है और कभी ये उत्पाद काम ही नहीं करते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे बता रहे हैं जिनसे जूओं का जड़ से खात्मा होता है।
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जाता है तो ऐसे व्यय के विनियमन की प्रक्रिया भारत का संविधान के अनुच्छेद-205 में वर्णित है । महोदय, संविधान में... ( व्यवधान)
महोदय, भारत के संविधान के अनुच्छेद-205 में वर्णित है और संविधान में यह उल्लेख किया गया है कि The Governor shall if any money has been spent on any service during a financial year in excess of the amount granted for the service and for that year, cause to be laid before the House or the Houses of the Legislature of the State another statement showing the estimated amount of that expenditure or cause to be presented to the Legislative Assembly of the State a demand for such excess, as the case may be.
महोदय, संविधान के अनुच्छेद-205 के तहत जो स्वीकृत माँग के अतिरिक्त कई अपरिहार्य कारणों से ज्यादा खर्च हो गया है, उसी को विनियमित करने के लिये यह प्रस्ताव महामहिम राज्यपाल यथा स्थिति राज्य के विधान मंडल के सदन या सदनों के समक्ष उस व्यय कि प्राक्किलत रकम को दर्शित करने वाला दूसरा विवरण रखवाएगा । यह संवैधानिक बाध्यता है । भारत के संविधान के अनुच्छेद-205 की कंडिका 2 के अनुसार ऐसे किसी विवरण और व्यय या मॉग के संबंध में तथा राज्य की संचित निधि में से ऐसे व्यय या ऐसी मांग से संबंधित अनुदान की पूर्ति के लिये धन का विनियोग प्राधिकृत करने के लिए बनाई जाने वाली किसी विधि के संबंध में भी अनुच्छेद 202, अनुच्छेद 203 और अनुच्छेद 204 के उपबंध वैसे ही प्रभावी होंगे जैसे वे वार्षिक वित्तीय विवरण और उसमें वर्णित व्यय के संबंध में या किसी अनुदान की किसी मांग के संबंध में और राज्य की संचित निधि में से ऐसे व्यय की अनुदान की पूर्ति के लिए धन का विनियोग प्राधिकृत करने के लिए बनाई जाने वाली विधि के संबंध में प्रभावी है । भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक से प्राप्त वित्त लेखे, विनियोग लेखे एवं अन्य प्रतिवेदनों को विधान सभा में महामहिम की अनुशंसा पर उपस्थापित किया जाता है । उपस्थापन के उपरान्त लेखों/प्रतिवेदनों को लोक लेखा समिति के विचारार्थ भेजा जाता है । लोक लेखा समिति की अनुशंसा के आलोक में ही अधिकाई व्यय का विनियमन का प्रस्ताव दिया जा सकता है वरना नहीं ।
लोक लेखा समिति ने विभिन्न बैठकों में विचार कर प्रतिवेदन संख्या - 602, 603, 604, 607, 608, 609, 610, 611, 612 एवं 613 में अधिकाई व्यय के विनियमन की अनुशंसा की है । लोक लेखा समिति की अनुशंसा के आलोक में वर्ष 1981-82 से वर्ष 2014-15 तक के कुल अधिकाई व्यय में से 117.96 करोड़ रूपये के विनियमन के लिए विधेयक प्रस्तुत किया गया है । उक्त प्रतिवेदनों में विभिन्न वित्तीय वर्ष में निम्नलिखित राशि को विनियमित करने की अनुशंसा है । यह संवैधानिक बाध्यता है । यह पढ़ दें महोदय, या पटल पर रख दें ?
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जाता है तो ऐसे व्यय के विनियमन की प्रक्रिया भारत का संविधान के अनुच्छेद-दो सौ पाँच में वर्णित है । महोदय, संविधान में... महोदय, भारत के संविधान के अनुच्छेद-दो सौ पाँच में वर्णित है और संविधान में यह उल्लेख किया गया है कि The Governor shall if any money has been spent on any service during a financial year in excess of the amount granted for the service and for that year, cause to be laid before the House or the Houses of the Legislature of the State another statement showing the estimated amount of that expenditure or cause to be presented to the Legislative Assembly of the State a demand for such excess, as the case may be. महोदय, संविधान के अनुच्छेद-दो सौ पाँच के तहत जो स्वीकृत माँग के अतिरिक्त कई अपरिहार्य कारणों से ज्यादा खर्च हो गया है, उसी को विनियमित करने के लिये यह प्रस्ताव महामहिम राज्यपाल यथा स्थिति राज्य के विधान मंडल के सदन या सदनों के समक्ष उस व्यय कि प्राक्किलत रकम को दर्शित करने वाला दूसरा विवरण रखवाएगा । यह संवैधानिक बाध्यता है । भारत के संविधान के अनुच्छेद-दो सौ पाँच की कंडिका दो के अनुसार ऐसे किसी विवरण और व्यय या मॉग के संबंध में तथा राज्य की संचित निधि में से ऐसे व्यय या ऐसी मांग से संबंधित अनुदान की पूर्ति के लिये धन का विनियोग प्राधिकृत करने के लिए बनाई जाने वाली किसी विधि के संबंध में भी अनुच्छेद दो सौ दो, अनुच्छेद दो सौ तीन और अनुच्छेद दो सौ चार के उपबंध वैसे ही प्रभावी होंगे जैसे वे वार्षिक वित्तीय विवरण और उसमें वर्णित व्यय के संबंध में या किसी अनुदान की किसी मांग के संबंध में और राज्य की संचित निधि में से ऐसे व्यय की अनुदान की पूर्ति के लिए धन का विनियोग प्राधिकृत करने के लिए बनाई जाने वाली विधि के संबंध में प्रभावी है । भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक से प्राप्त वित्त लेखे, विनियोग लेखे एवं अन्य प्रतिवेदनों को विधान सभा में महामहिम की अनुशंसा पर उपस्थापित किया जाता है । उपस्थापन के उपरान्त लेखों/प्रतिवेदनों को लोक लेखा समिति के विचारार्थ भेजा जाता है । लोक लेखा समिति की अनुशंसा के आलोक में ही अधिकाई व्यय का विनियमन का प्रस्ताव दिया जा सकता है वरना नहीं । लोक लेखा समिति ने विभिन्न बैठकों में विचार कर प्रतिवेदन संख्या - छः सौ दो, छः सौ तीन, छः सौ चार, छः सौ सात, छः सौ आठ, छः सौ नौ, छः सौ दस, छः सौ ग्यारह, छः सौ बारह एवं छः सौ तेरह में अधिकाई व्यय के विनियमन की अनुशंसा की है । लोक लेखा समिति की अनुशंसा के आलोक में वर्ष एक हज़ार नौ सौ इक्यासी-बयासी से वर्ष दो हज़ार चौदह-पंद्रह तक के कुल अधिकाई व्यय में से एक सौ सत्रह.छियानवे करोड़ रूपये के विनियमन के लिए विधेयक प्रस्तुत किया गया है । उक्त प्रतिवेदनों में विभिन्न वित्तीय वर्ष में निम्नलिखित राशि को विनियमित करने की अनुशंसा है । यह संवैधानिक बाध्यता है । यह पढ़ दें महोदय, या पटल पर रख दें ?
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गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी की मुसीबतें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं. अब असम के बारपेटा जिले की एक स्थानीय अदालत ने पुलिस के साथ मारपीट मामले में उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है.
गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी (Jignesh Mevani) की मुसीबतें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं. अब असम के बारपेटा जिले की एक स्थानीय अदालत ने पुलिस के साथ मारपीट मामले में उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है. मेवाणी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के खिलाफ ट्वीट से संबंधित एक मामले में सोमवार को स्थानीय अदालत द्वारा जमानत दिए जाने के बाद असम पुलिस ने उन्हें चार दिन पहले एक महिला पुलिस अधिकारी पर हमला करने के आरोप में फिर गिरफ्तार कर लिया था. पुलिस ने कहा कि संबंधित अधिकारी ने कांग्रेस समर्थित विधायक मेवाणी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और उसके बाद उनके खिलाफ लोक सेवक को कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने, जानबूझकर चोट पहुंचाने आदि के आरोप में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था.
बारपेटा रोड थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार कथित घटना उस समय हुई जब महिला अधिकारी 21 अप्रैल को एक सरकारी वाहन में दलित नेता को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पनेसर और एक अन्य अधिकारी के साथ गुवाहाटी हवाई अड्डे से कोकराझार ले जा रही थीं. मेवाणी के वकील अंगशुमन बोरा ने कहा कि मेवाणी के खिलाफ आरोप 'अत्याचार' हैं और जब वह तीन दिनों तक पुलिस हिरासत में थे या जिस समय उनकी जमानत याचिका पर कोकराझार अदालत में बहस चल रही थी, उस समय बारपेटा मामले का कोई जिक्र नहीं था. बोरा ने कहा कि अचानक जमानत मिलने के बाद उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया.
कोकराझार प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट भावना काकोटी ने प्रधानमंत्री के खिलाफ उनके ट्वीट से संबंधित मामले में दो जमानतों के साथ 30,000 रुपये के मुचलके पर उन्हें जमानत दे दी. अदालत ने उन्हें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति को प्रलोभन, सार्वजनिक धमकी या वादा नहीं करने का निर्देश दिया. उन्हें अदालत से पूर्व अनुमति के बिना वह स्थान नहीं छोड़ने के लिए भी कहा गया था.
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गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी की मुसीबतें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं. अब असम के बारपेटा जिले की एक स्थानीय अदालत ने पुलिस के साथ मारपीट मामले में उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है. गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी की मुसीबतें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं. अब असम के बारपेटा जिले की एक स्थानीय अदालत ने पुलिस के साथ मारपीट मामले में उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है. मेवाणी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ ट्वीट से संबंधित एक मामले में सोमवार को स्थानीय अदालत द्वारा जमानत दिए जाने के बाद असम पुलिस ने उन्हें चार दिन पहले एक महिला पुलिस अधिकारी पर हमला करने के आरोप में फिर गिरफ्तार कर लिया था. पुलिस ने कहा कि संबंधित अधिकारी ने कांग्रेस समर्थित विधायक मेवाणी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और उसके बाद उनके खिलाफ लोक सेवक को कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने, जानबूझकर चोट पहुंचाने आदि के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. बारपेटा रोड थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार कथित घटना उस समय हुई जब महिला अधिकारी इक्कीस अप्रैल को एक सरकारी वाहन में दलित नेता को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पनेसर और एक अन्य अधिकारी के साथ गुवाहाटी हवाई अड्डे से कोकराझार ले जा रही थीं. मेवाणी के वकील अंगशुमन बोरा ने कहा कि मेवाणी के खिलाफ आरोप 'अत्याचार' हैं और जब वह तीन दिनों तक पुलिस हिरासत में थे या जिस समय उनकी जमानत याचिका पर कोकराझार अदालत में बहस चल रही थी, उस समय बारपेटा मामले का कोई जिक्र नहीं था. बोरा ने कहा कि अचानक जमानत मिलने के बाद उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया. कोकराझार प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट भावना काकोटी ने प्रधानमंत्री के खिलाफ उनके ट्वीट से संबंधित मामले में दो जमानतों के साथ तीस,शून्य रुपयापये के मुचलके पर उन्हें जमानत दे दी. अदालत ने उन्हें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मामले से जुड़े किसी भी व्यक्ति को प्रलोभन, सार्वजनिक धमकी या वादा नहीं करने का निर्देश दिया. उन्हें अदालत से पूर्व अनुमति के बिना वह स्थान नहीं छोड़ने के लिए भी कहा गया था.
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पुष्प कमल दहल प्रचंड का जन्म 11 दिसंबर 1954 को पोखरा के करीब कास्की जिले के धिकुरपोखरी में हुआ था। उन्होंने 1996 से 2006 तक एक दशक लंबे सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया था, जो अंततः नवंबर 2006 में व्यापक शांति समझौते पर हस्ताक्षर के साथ समाप्त हुआ। वह नेपाल में गृह युद्ध के बाद शांति प्रक्रिया और नेपाली संविधान सभा में नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी के नेता थे। 2008 के चुनाव में प्रचंड की पार्टी ने सबसे ज्यादा सीटें जीती और वह प्रधानमंत्री बने। 2009 में उन्होंने तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल रूकमंगुद कटवाल (General Rookmangud Katawal) को बर्खास्त करने की कोशिश की, लेकिन राष्ट्रपति राम बरन यादव ने विरोध किया, जिसके बाद उन्होंने टीवी पर आकर नाटकीय ढंग से इस्तीफा दे दिया।
प्रचंड के शुरुआती दिनों की बात करें तो उन्होंने अपने बचपन में गरीबी देखा। बाद में उनका झुकाव वामपंथी दलों की ओर बढ़ गया। उन्होंने 1981 में नेपाल की एक अंडरग्राउंड कम्युनिस्ट पार्टी जॉइन की। 1989 में वह पार्टी के नेता बने। 1990 में नेपाल में लोकतंत्र की बहाली के बावजूद प्रचंड 13 साल अंडरग्राउंड रहे। यह ऐसा समय था उनके बारे में कोई जानकारी नहीं थी, तब उन्होंने पार्टी के गुप्त विंग का नियंत्रण किया। जबकि यूनाइटेड पीपुल्फ फ्रंट का संसद में नेतृत्व बाबूराम भट्टाराई ने किया। 4 फरवरी 1996 को बाबूराम भट्टाराई ने नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बाहदुर देउबा को 40 मांगों वाली एक सूची दी। मांग पूरी न होने पर गृहयुद्ध की धमकी भी दी। इसमें राष्ट्रवाद, लोकतंत्र और आजीविका से संबंधित मांग थी। बाद में इन मांगों को 40 से घटा कर 24 कर दिया गया।
प्रचंड नेपाल के प्रधानमंत्री बनने से पहले गृह युद्ध के दौरान भी भारत आ चुके हैं। 2022 में वह अपनी तीन दिनों की यात्रा पर भारत आए थे। BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ उन्होंने दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का मुद्दा उठाया था। इसके साथ ही यहां उन्होंने 1950 के भारत नेपाल मैत्री समझौते की समीक्षा की मांग को उठाया था। उन्होंने कहा था कि कुछ मुद्दे इतिहास में मिले हैं, जिन्हें सुलझाना बहुत जरूरी है। प्रधानमंत्री बनने के बाद संभव है कि वह अब सरकार के स्तर पर एक बार फिर इस मुद्दे को उठाएं।
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पुष्प कमल दहल प्रचंड का जन्म ग्यारह दिसंबर एक हज़ार नौ सौ चौवन को पोखरा के करीब कास्की जिले के धिकुरपोखरी में हुआ था। उन्होंने एक हज़ार नौ सौ छियानवे से दो हज़ार छः तक एक दशक लंबे सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया था, जो अंततः नवंबर दो हज़ार छः में व्यापक शांति समझौते पर हस्ताक्षर के साथ समाप्त हुआ। वह नेपाल में गृह युद्ध के बाद शांति प्रक्रिया और नेपाली संविधान सभा में नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी के नेता थे। दो हज़ार आठ के चुनाव में प्रचंड की पार्टी ने सबसे ज्यादा सीटें जीती और वह प्रधानमंत्री बने। दो हज़ार नौ में उन्होंने तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल रूकमंगुद कटवाल को बर्खास्त करने की कोशिश की, लेकिन राष्ट्रपति राम बरन यादव ने विरोध किया, जिसके बाद उन्होंने टीवी पर आकर नाटकीय ढंग से इस्तीफा दे दिया। प्रचंड के शुरुआती दिनों की बात करें तो उन्होंने अपने बचपन में गरीबी देखा। बाद में उनका झुकाव वामपंथी दलों की ओर बढ़ गया। उन्होंने एक हज़ार नौ सौ इक्यासी में नेपाल की एक अंडरग्राउंड कम्युनिस्ट पार्टी जॉइन की। एक हज़ार नौ सौ नवासी में वह पार्टी के नेता बने। एक हज़ार नौ सौ नब्बे में नेपाल में लोकतंत्र की बहाली के बावजूद प्रचंड तेरह साल अंडरग्राउंड रहे। यह ऐसा समय था उनके बारे में कोई जानकारी नहीं थी, तब उन्होंने पार्टी के गुप्त विंग का नियंत्रण किया। जबकि यूनाइटेड पीपुल्फ फ्रंट का संसद में नेतृत्व बाबूराम भट्टाराई ने किया। चार फरवरी एक हज़ार नौ सौ छियानवे को बाबूराम भट्टाराई ने नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बाहदुर देउबा को चालीस मांगों वाली एक सूची दी। मांग पूरी न होने पर गृहयुद्ध की धमकी भी दी। इसमें राष्ट्रवाद, लोकतंत्र और आजीविका से संबंधित मांग थी। बाद में इन मांगों को चालीस से घटा कर चौबीस कर दिया गया। प्रचंड नेपाल के प्रधानमंत्री बनने से पहले गृह युद्ध के दौरान भी भारत आ चुके हैं। दो हज़ार बाईस में वह अपनी तीन दिनों की यात्रा पर भारत आए थे। BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ उन्होंने दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का मुद्दा उठाया था। इसके साथ ही यहां उन्होंने एक हज़ार नौ सौ पचास के भारत नेपाल मैत्री समझौते की समीक्षा की मांग को उठाया था। उन्होंने कहा था कि कुछ मुद्दे इतिहास में मिले हैं, जिन्हें सुलझाना बहुत जरूरी है। प्रधानमंत्री बनने के बाद संभव है कि वह अब सरकार के स्तर पर एक बार फिर इस मुद्दे को उठाएं।
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PATNA : पटना में एक बार फिर से अपराधियों का बेखौफ चेहरा सामने आया है। बेखौफ अपराधियों ने दिनदहाड़े भाजपा नेता की मां से पिस्टल कि नोक पर डेढ़ लाख के गहने लूट ले गए। इस बावत पाटलीपुत्रा थाने में मामला दर्ज कराया गया है।
घटना के संबंध में बताया गया है कि भाजपा नेता नीरज दुबे की मां शीला देवी कुर्जी अस्पताल जा रही थी। उन्होंने दीघा पॉलिटेक्निक के पास से ऑटो पकड़ा था।
बताया जा रहा है कि ऑटो पर पहले से ही तीन युवक बैठे थे। कुर्जी मोड़ के समीप पहुंचते ही ऑटो चालक और उस पर सवार 3 अपराधियों ने उनपर पिस्टल तान दिया और गले की चेन और कान की बाली पिस्टल के बल पर उतरवा कर ऑटो से उतार कर दानापुर की ओर फरार हो गए।
पीड़िता शीला देवी ने पाटलिपुत्र थाना में मामला दर्ज कराया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
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PATNA : पटना में एक बार फिर से अपराधियों का बेखौफ चेहरा सामने आया है। बेखौफ अपराधियों ने दिनदहाड़े भाजपा नेता की मां से पिस्टल कि नोक पर डेढ़ लाख के गहने लूट ले गए। इस बावत पाटलीपुत्रा थाने में मामला दर्ज कराया गया है। घटना के संबंध में बताया गया है कि भाजपा नेता नीरज दुबे की मां शीला देवी कुर्जी अस्पताल जा रही थी। उन्होंने दीघा पॉलिटेक्निक के पास से ऑटो पकड़ा था। बताया जा रहा है कि ऑटो पर पहले से ही तीन युवक बैठे थे। कुर्जी मोड़ के समीप पहुंचते ही ऑटो चालक और उस पर सवार तीन अपराधियों ने उनपर पिस्टल तान दिया और गले की चेन और कान की बाली पिस्टल के बल पर उतरवा कर ऑटो से उतार कर दानापुर की ओर फरार हो गए। पीड़िता शीला देवी ने पाटलिपुत्र थाना में मामला दर्ज कराया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
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भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच वनडे की सीरीज का आखिरी मैच रविवार को वेलिंगटन के वेस्टपैक स्टेडियम में खेला जाएगा। इस मैच से पहले न्यूजीलैंड के लिए एक बुरी खबर आ रही है। टीम के विस्फोटक खिलाड़ी मार्टिन गप्टिल का इस मैच में खेलना अभी तय नजर नहीं आ रहा है। मैच से पहले अभ्यास के दौरान गप्टिल चोटिल हो गए, भारत के खिलाफ पांचवे वनडे मैच के लिए गप्टिल चयन के लिए उपलब्ध होंगे या नहीं इसका फैसला रविवार को मैच से पहले किया जाएगा। टीम के फिजियो विजय वल्लभ की देख रेख में इस समय गप्टिल के फिटनेस पर कार्य किया जा रहा है। अगर गप्टिल इस मैच को मिस करते हैं तो कॉलिन मुनरो को एक बार फिर वनडे टीम में शामिल किया जा सकता है। मुनरो पहले तीन मैचों के दौरान फ्लॉप रहे थे, जिसके बाद चौथे मैच में उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। भारतीय टीम इस सीरीज को पहले ही अपने नाम कर चुकी है। इसके बावजूद टीम वेलिंगटन वनडे को जीत वापस लय में लौटना चाहेगी।
पहले तीन मैच में शानदार जीत हासिल करने के बाद भारतीय टीम को चौथे वनडे में शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था। नियमित कप्तान विराट कोहली की गैर-मौजूदगी में रोहित शर्मा के कंधो पर टीम को वापस जीत के ट्रैक पर लाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। युवा बल्लेबाज शुभमन गिल अपने डेब्यू मैच में कुछ खास कमाल नहीं कर सके थे, इसके बावजूद उन्हें अंतिम वनडे में प्लेइंग इलेवन में जगह दिया जा सकता है। गिल के पास इस मैच के दौरान अपनी छाप छोड़ने का सुनहरा मौका होगा।
भारतीय टीम न्यूजीलैंड दौरे को वर्ल्ड कप से पहले की तैयारी के रूप में देख रही है, लेकिन टीम कई मामलों में अब भी कमजोर दिखाई पड़ रही है। पिछले कुछ समय से मिडल ऑर्डर बल्लेबाज टीम की मुश्किलों को बढ़ाने का काम कर रहे हैं। चौथे नंबर पर अंबाती रायडू को कई मौके दिए जा चुके हैं, ऐसे में टीम अब उनकी जगह युवा ऋषभ पंत को इस नंबर पर खिला सकती है।
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भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच वनडे की सीरीज का आखिरी मैच रविवार को वेलिंगटन के वेस्टपैक स्टेडियम में खेला जाएगा। इस मैच से पहले न्यूजीलैंड के लिए एक बुरी खबर आ रही है। टीम के विस्फोटक खिलाड़ी मार्टिन गप्टिल का इस मैच में खेलना अभी तय नजर नहीं आ रहा है। मैच से पहले अभ्यास के दौरान गप्टिल चोटिल हो गए, भारत के खिलाफ पांचवे वनडे मैच के लिए गप्टिल चयन के लिए उपलब्ध होंगे या नहीं इसका फैसला रविवार को मैच से पहले किया जाएगा। टीम के फिजियो विजय वल्लभ की देख रेख में इस समय गप्टिल के फिटनेस पर कार्य किया जा रहा है। अगर गप्टिल इस मैच को मिस करते हैं तो कॉलिन मुनरो को एक बार फिर वनडे टीम में शामिल किया जा सकता है। मुनरो पहले तीन मैचों के दौरान फ्लॉप रहे थे, जिसके बाद चौथे मैच में उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। भारतीय टीम इस सीरीज को पहले ही अपने नाम कर चुकी है। इसके बावजूद टीम वेलिंगटन वनडे को जीत वापस लय में लौटना चाहेगी। पहले तीन मैच में शानदार जीत हासिल करने के बाद भारतीय टीम को चौथे वनडे में शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था। नियमित कप्तान विराट कोहली की गैर-मौजूदगी में रोहित शर्मा के कंधो पर टीम को वापस जीत के ट्रैक पर लाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। युवा बल्लेबाज शुभमन गिल अपने डेब्यू मैच में कुछ खास कमाल नहीं कर सके थे, इसके बावजूद उन्हें अंतिम वनडे में प्लेइंग इलेवन में जगह दिया जा सकता है। गिल के पास इस मैच के दौरान अपनी छाप छोड़ने का सुनहरा मौका होगा। भारतीय टीम न्यूजीलैंड दौरे को वर्ल्ड कप से पहले की तैयारी के रूप में देख रही है, लेकिन टीम कई मामलों में अब भी कमजोर दिखाई पड़ रही है। पिछले कुछ समय से मिडल ऑर्डर बल्लेबाज टीम की मुश्किलों को बढ़ाने का काम कर रहे हैं। चौथे नंबर पर अंबाती रायडू को कई मौके दिए जा चुके हैं, ऐसे में टीम अब उनकी जगह युवा ऋषभ पंत को इस नंबर पर खिला सकती है।
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Ramgarh: गुप्त सूचना के आधार पर रामगढ़ जिला अंतर्गत कुजू ओपी क्षेत्र के करमा स्थित मुस्लिम टोला के एक आवास से रविवार को कुजू पुलिस के द्वारा लगभग आधा क्विंटल प्रतिबंधित मांस बरामद किया गया साथ ही आवास के बाहर खड़ी दो बाइक को भी जब्त किया गया है. इस संबंध में कुजू ओपी प्रभारी धनंजय प्रसाद ने बताया कि गुप्त सूचना प्राप्त हुई कि करमा स्थित मुस्लिम टोला में गौ हत्या कर प्रतिबंधित मांस की तस्करी की जा रही है,जिसपर त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम गठित कर छापामारी की गई, जहां उक्त स्थल से प्रतिबंधित मांस बरामद कर लिया गया. साथ ही आवास के बाहर खड़ी दो बाइक को भी जब्त कर लिया गया. मौके से सभी लोग फरार हो गए. पुलिस के द्वारा सभी संबंधित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी अभियान चलाया जा रहा है.
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Ramgarh: गुप्त सूचना के आधार पर रामगढ़ जिला अंतर्गत कुजू ओपी क्षेत्र के करमा स्थित मुस्लिम टोला के एक आवास से रविवार को कुजू पुलिस के द्वारा लगभग आधा क्विंटल प्रतिबंधित मांस बरामद किया गया साथ ही आवास के बाहर खड़ी दो बाइक को भी जब्त किया गया है. इस संबंध में कुजू ओपी प्रभारी धनंजय प्रसाद ने बताया कि गुप्त सूचना प्राप्त हुई कि करमा स्थित मुस्लिम टोला में गौ हत्या कर प्रतिबंधित मांस की तस्करी की जा रही है,जिसपर त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम गठित कर छापामारी की गई, जहां उक्त स्थल से प्रतिबंधित मांस बरामद कर लिया गया. साथ ही आवास के बाहर खड़ी दो बाइक को भी जब्त कर लिया गया. मौके से सभी लोग फरार हो गए. पुलिस के द्वारा सभी संबंधित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी अभियान चलाया जा रहा है.
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भोपाल। अगर विरोधी दलों के नेता राजनीति में एक-दूसरे से मिलते हैं, तो ऐसी बैठकें मीडिया की सुर्खियां बनती हैं। ऐसी ही एक बैठक गुरुवार को मध्य प्रदेश में हुई। राज्य के गृह और जेल मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से मुलाकात की और उन्हें विधानसभा में विपक्ष का नेता बनने के लिए बधाई दी। इस मुलाकात की फोटो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है।
बता दें कि पार्टी ने विधानसभा में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को सौंपी है। बुधवार को, विधानसभा सचिवालय ने उन्हें विपक्ष का नेता बनाने के लिए एक अधिसूचना जारी की। सत्ता में होने के नाते, नरोत्तम मिश्रा गुरुवार को कमलनाथ को बधाई देने के लिए उनके निवास पर पहुंचे।
गृह मंत्री डॉ मिश्रा ने खुद ट्वीट कर बैठक की फोटो साझा की। उन्होंने लिखा कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के आवास पर उनकी व्यक्तिगत बैठक थी और विधानसभा में विपक्ष के नेता बनने पर उन्हें बधाई दी।
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भोपाल। अगर विरोधी दलों के नेता राजनीति में एक-दूसरे से मिलते हैं, तो ऐसी बैठकें मीडिया की सुर्खियां बनती हैं। ऐसी ही एक बैठक गुरुवार को मध्य प्रदेश में हुई। राज्य के गृह और जेल मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से मुलाकात की और उन्हें विधानसभा में विपक्ष का नेता बनने के लिए बधाई दी। इस मुलाकात की फोटो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। बता दें कि पार्टी ने विधानसभा में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को सौंपी है। बुधवार को, विधानसभा सचिवालय ने उन्हें विपक्ष का नेता बनाने के लिए एक अधिसूचना जारी की। सत्ता में होने के नाते, नरोत्तम मिश्रा गुरुवार को कमलनाथ को बधाई देने के लिए उनके निवास पर पहुंचे। गृह मंत्री डॉ मिश्रा ने खुद ट्वीट कर बैठक की फोटो साझा की। उन्होंने लिखा कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के आवास पर उनकी व्यक्तिगत बैठक थी और विधानसभा में विपक्ष के नेता बनने पर उन्हें बधाई दी।
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रणबीर और आलिया के अफेयर की खबरें अब किसी से छुपी नहीं रहीं। ये कपल भी इशारों-इशारों में इस बात को कई बार स्वीकार कर चुका है हालांकि आधिकारिक रूप से दोनों कुछ भी कहने से बचते रहे हैं। पिछले दिनों रणबीर और आलिया न्यूयॉर्क से लौट आए हैं जिसके बाद उन्हें कई बार मुंबई में स्पॉट किया गया।
बीती रात आलिया और रणबीर एक साथ कार में देखे गए। जहां पेपराजी की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। आलिया और रणबीर की कई तस्वीरें सामने आई हैं। दोनों एक दूसरे को देखकर स्माइल कर रहे हैं। इस दौरान आलिया ने ब्लू कलर की टीशर्ट पहन रखी है तो वहीं रणबीर ने रेड कलर की टीशर्ट के साथ ब्लू कलर का कैप लगा रखा है।
दरअसल, आलिया और रणबीर दोनों डायरेक्टर लव रंजन के घर पहुंचे थे। जहां साथ में ही सब ने डिनर किया। लव रंजन के घर के बाहर दोनों एक साथ कार में निकले। लव रंजन ने पिछले साल रणबीर कपूर और अजय देवगन के साथ फिल्म अनाउंस की थी हालांकि बीच में ऐसी भी खबरें आईं कि रणबीर फिल्म छोड़ सकते हैं। मामले में अभी तक कोई कंफर्मेशन नहीं आई है। ऐसे में हो सकता है कि रणबीर फिल्म के सिलसिले में लव रंजन के घर पहुंचे हों।
पिछले दिनों जब आलिया, रणबीर के साथ न्यूयॉर्क में थीं तो दोनों की वहां से कई फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। आलिया और रणबीर ने कुछ समय पहले ही अपनी फिल्म ब्रह्मास्त्र की शूटिंग पूरी की है। ये पहली बार होगा जब आलिया-रणबीर किसी फिल्म में साथ नजर आएंगे।
इस फिल्म को अयान मुखर्जी ने डायरेक्ट किया है। आलिया-रणबीर के अलावा फिल्म में अमिताभ बच्चन और मौनी रॉय भी नजर आएंगे। इसके अलावा आलिया जल्द ही संजय लीला भंसाली की फिल्म इंशाअल्लाह की शूटिंग भी शुरू करेंगी। फिल्म में आलिया के साथ सलमान खान भी नजर आएंगे।
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रणबीर और आलिया के अफेयर की खबरें अब किसी से छुपी नहीं रहीं। ये कपल भी इशारों-इशारों में इस बात को कई बार स्वीकार कर चुका है हालांकि आधिकारिक रूप से दोनों कुछ भी कहने से बचते रहे हैं। पिछले दिनों रणबीर और आलिया न्यूयॉर्क से लौट आए हैं जिसके बाद उन्हें कई बार मुंबई में स्पॉट किया गया। बीती रात आलिया और रणबीर एक साथ कार में देखे गए। जहां पेपराजी की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। आलिया और रणबीर की कई तस्वीरें सामने आई हैं। दोनों एक दूसरे को देखकर स्माइल कर रहे हैं। इस दौरान आलिया ने ब्लू कलर की टीशर्ट पहन रखी है तो वहीं रणबीर ने रेड कलर की टीशर्ट के साथ ब्लू कलर का कैप लगा रखा है। दरअसल, आलिया और रणबीर दोनों डायरेक्टर लव रंजन के घर पहुंचे थे। जहां साथ में ही सब ने डिनर किया। लव रंजन के घर के बाहर दोनों एक साथ कार में निकले। लव रंजन ने पिछले साल रणबीर कपूर और अजय देवगन के साथ फिल्म अनाउंस की थी हालांकि बीच में ऐसी भी खबरें आईं कि रणबीर फिल्म छोड़ सकते हैं। मामले में अभी तक कोई कंफर्मेशन नहीं आई है। ऐसे में हो सकता है कि रणबीर फिल्म के सिलसिले में लव रंजन के घर पहुंचे हों। पिछले दिनों जब आलिया, रणबीर के साथ न्यूयॉर्क में थीं तो दोनों की वहां से कई फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। आलिया और रणबीर ने कुछ समय पहले ही अपनी फिल्म ब्रह्मास्त्र की शूटिंग पूरी की है। ये पहली बार होगा जब आलिया-रणबीर किसी फिल्म में साथ नजर आएंगे। इस फिल्म को अयान मुखर्जी ने डायरेक्ट किया है। आलिया-रणबीर के अलावा फिल्म में अमिताभ बच्चन और मौनी रॉय भी नजर आएंगे। इसके अलावा आलिया जल्द ही संजय लीला भंसाली की फिल्म इंशाअल्लाह की शूटिंग भी शुरू करेंगी। फिल्म में आलिया के साथ सलमान खान भी नजर आएंगे।
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आज के तनाव भरे दौर में हर कोई टेंशन भगाने के नुस्खे तलाशने में लगा है। तो चलिए, एक नुस्खा हम आपको बताते हैं। नुस्खा बड़ा आसान है। इसे कोई भी, कहीं भी आजमा सकता है। यह नुस्खा है 'बर्ड वॉचिंग' यानी पंछियों का अवलोकन। हमारे आसपास अलग-अलग तरह के पक्षी चहचहाते-फुदकते रहते हैं।
अक्सर हम अपने काम में इतने व्यस्त रहते हैं कि इन्हें देखकर भी अनदेखा कर देते हैं। हां, कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बर्ड वॉचिंग का शौक पालते हैं और अकेले या फिर समूह में निकल पड़ते हैं पंछियों की खोज में। फिर ये घंटों उन्हें निहारते रहते हैं, उनकी गतिविधियां डायरी या कैमरे में दर्ज करते हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि यह शौक मन-मस्तिष्क को शांति पहुंचाने में बहुत कारगर है। अतः जो लोग अक्सर तनाव से घिरे रहते हैं, उन्हें बर्ड वॉचिंग के लिए जरूर समय निकालना चाहिए।
इसके लिए आपको कोई ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं पड़ेगी। बस, एक अच्छा बायनॉक्यूलर (दूरबीन) ले लीजिए और अपने इलाके में पाए जाने वाले पक्षियों की सचित्र जानकारी देने वाली किताब खरीद लाइए ताकि आप जो-जो पक्षी देखें, उनके नाम जान सकें। साथ ही यदि कैमरा भी ले जाएं, तो सोने में सुहागा।
अब बस, अपनी व्यस्त दिनचर्या में से समय निकालकर निकल पड़िए पक्षी-दर्शन को। बाग-बगीचों में जाइए, खुले मैदानों में जाइए। शहर के बाहरी इलाकों में, जहां हरियाली अधिक है, वहां आपको ये पंखों वाले मित्र अधिक संख्या में मिलेंगे। इन्हें डिस्टर्ब मत कीजिए, बस खामोशी से इनकी गतिविधियों को निहारते जाइए।
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आज के तनाव भरे दौर में हर कोई टेंशन भगाने के नुस्खे तलाशने में लगा है। तो चलिए, एक नुस्खा हम आपको बताते हैं। नुस्खा बड़ा आसान है। इसे कोई भी, कहीं भी आजमा सकता है। यह नुस्खा है 'बर्ड वॉचिंग' यानी पंछियों का अवलोकन। हमारे आसपास अलग-अलग तरह के पक्षी चहचहाते-फुदकते रहते हैं। अक्सर हम अपने काम में इतने व्यस्त रहते हैं कि इन्हें देखकर भी अनदेखा कर देते हैं। हां, कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बर्ड वॉचिंग का शौक पालते हैं और अकेले या फिर समूह में निकल पड़ते हैं पंछियों की खोज में। फिर ये घंटों उन्हें निहारते रहते हैं, उनकी गतिविधियां डायरी या कैमरे में दर्ज करते हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि यह शौक मन-मस्तिष्क को शांति पहुंचाने में बहुत कारगर है। अतः जो लोग अक्सर तनाव से घिरे रहते हैं, उन्हें बर्ड वॉचिंग के लिए जरूर समय निकालना चाहिए। इसके लिए आपको कोई ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं पड़ेगी। बस, एक अच्छा बायनॉक्यूलर ले लीजिए और अपने इलाके में पाए जाने वाले पक्षियों की सचित्र जानकारी देने वाली किताब खरीद लाइए ताकि आप जो-जो पक्षी देखें, उनके नाम जान सकें। साथ ही यदि कैमरा भी ले जाएं, तो सोने में सुहागा। अब बस, अपनी व्यस्त दिनचर्या में से समय निकालकर निकल पड़िए पक्षी-दर्शन को। बाग-बगीचों में जाइए, खुले मैदानों में जाइए। शहर के बाहरी इलाकों में, जहां हरियाली अधिक है, वहां आपको ये पंखों वाले मित्र अधिक संख्या में मिलेंगे। इन्हें डिस्टर्ब मत कीजिए, बस खामोशी से इनकी गतिविधियों को निहारते जाइए।
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Dhanbad: राज्य के उप स्वास्थ्य सचिव सीमा सदैव पूरी ने बुधवार को सदर अस्पताल का निरीक्षण किया. अस्पताल को पूर्ण रूप से शुरू करने को लेकर व्यवस्था के बाबत जानकारी ली.
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की पहल पर धनबाद सदर अस्पताल को पूर्ण रूप से अस्तित्व में लाने के लिए के लिए पूरी तैयारी कर ली गयी है. सदर अस्पताल को सुचारू रूप से शुरू करने के लिए आईसीयू समेत कई विभागों के मशीन की खरीदारी हो गई है. चिकित्सकों की बहाली और नियुक्ति के लिए प्रक्रिया चल रही है, जबकि कई विभागों के लिए जगह चिन्हित कर लिया गया है.
मीडिया को बताया कि नीचे तल्ले में इमरजेंसी, एक्सरे रूम, सोनोग्राफी के लिए कमरों का चयन किया गया है. कई अति आवश्यक सुविधाएं शुरू करने के लिए प्रक्रिया चल रही है. वही मरीजों के लिए आपरेशन थिएटर के लिए भी कमरे चिन्हित कर ली गयी है. स्वास्थ्य उप सचिव ने बताया कि सदर अस्पताल को पूर्ण रूप से अस्तित्व में लाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है. जल्द ही इसे शुरू कर लिया जाएगा.
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Dhanbad: राज्य के उप स्वास्थ्य सचिव सीमा सदैव पूरी ने बुधवार को सदर अस्पताल का निरीक्षण किया. अस्पताल को पूर्ण रूप से शुरू करने को लेकर व्यवस्था के बाबत जानकारी ली. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की पहल पर धनबाद सदर अस्पताल को पूर्ण रूप से अस्तित्व में लाने के लिए के लिए पूरी तैयारी कर ली गयी है. सदर अस्पताल को सुचारू रूप से शुरू करने के लिए आईसीयू समेत कई विभागों के मशीन की खरीदारी हो गई है. चिकित्सकों की बहाली और नियुक्ति के लिए प्रक्रिया चल रही है, जबकि कई विभागों के लिए जगह चिन्हित कर लिया गया है. मीडिया को बताया कि नीचे तल्ले में इमरजेंसी, एक्सरे रूम, सोनोग्राफी के लिए कमरों का चयन किया गया है. कई अति आवश्यक सुविधाएं शुरू करने के लिए प्रक्रिया चल रही है. वही मरीजों के लिए आपरेशन थिएटर के लिए भी कमरे चिन्हित कर ली गयी है. स्वास्थ्य उप सचिव ने बताया कि सदर अस्पताल को पूर्ण रूप से अस्तित्व में लाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है. जल्द ही इसे शुरू कर लिया जाएगा.
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अक्तूबर महीने के आगाज के साथ ही गुजरात में चुनावी सरगर्मी बढ़नी शुरु हो गई है। भाजपा नेता और गृह मंत्री अमित शाह मिशन गुजरात पर सक्रिय हो गए हैं। तो वहीं आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने तमाम बड़े नेताओं को गुजरात के रण में उतार दिया है। आप संयोजक केजरीवाल खुद गुजरात के दौरे कर रहे हैं तो उनके साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान उनके साथ आ रहे है। गांधी जयंती पर शाह ने पार्टी की कोर कमिटी की बैठक की तो वहीं आप ने सत्याग्रह का ऐलान कर दिया।
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अक्तूबर महीने के आगाज के साथ ही गुजरात में चुनावी सरगर्मी बढ़नी शुरु हो गई है। भाजपा नेता और गृह मंत्री अमित शाह मिशन गुजरात पर सक्रिय हो गए हैं। तो वहीं आम आदमी पार्टी ने अपने तमाम बड़े नेताओं को गुजरात के रण में उतार दिया है। आप संयोजक केजरीवाल खुद गुजरात के दौरे कर रहे हैं तो उनके साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान उनके साथ आ रहे है। गांधी जयंती पर शाह ने पार्टी की कोर कमिटी की बैठक की तो वहीं आप ने सत्याग्रह का ऐलान कर दिया।
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शादियों के दौरान आपने कई तस्वीरें देखी होंगी, जिसमें दूल्हा हेलीकॉप्टर से पहुंचता है तो कोई लग्जरी गाड़ी से बारात लेकर पहुंचता है. वहीं दौसा के लालसोट में एक शादी चर्चा का विषय बनी हुई है. इस शादी में बारात बैलगाड़ी से दुल्हन के घर पहुंची. इसे देखने के लिए काफी संख्या में ग्रामीण पहुंचे.
दूल्हे के पिता प्रहलाद मीणा गुजरात के अहमदाबाद में बिजनेस करते हैं. दुल्हन के परिवार को उम्मीद थी कि दूल्हा शानदार गाड़ियों से पहुंचेगा और बारातियों के लिए भी विशेष गाड़ियां होंगी, लेकिन जब बारात बैलगाड़ी से पहुंची तो सभी देखते रह गए.
दरअसल, रामगढ़ पचवारा क्षेत्र के अमराबाद निवासी भामाशाह प्रहलाद मीना ने अपने बेटे विनोद की बारात बैलगाड़ियों, ऊंट व घोड़ों पर निकाली. ये शादी आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. ऑर्केस्ट्रा की चमक-धमक से दूर पारंपरिक अंदाज में ऊंट और बैलगाड़ियों से बाराती पहुंचे. बारात के लिए ऊंटों और बैलों को सजाया गया.
जब बारात सड़क पर निकली तो लोग देखते ही रह गए. आठ ऊंटगाड़ियां, 7 बैलगाड़ियां, 10 ऊंट व 10 घोड़ों पर बाराती सवार थे. इस दौरान बारातियों का उत्साह देखते ही बन रहा था. बारात को अमराबाद से रायमलपूरा पहुंचने में तीन घंटे लगे. दूल्हा बैलगाड़ी पर सवार था. साथ में डीजे बज रहा था. बाराती ऊंट गाड़ियों पर नाचते गाते हुए चल रहे थे.
बताया जा रहा है कि शादी में विनोद के परिजनों ने सिर्फ एक नारियल और एक रुपया लेकर शादी कर ली. सारे जेवरात भी खुद ही लेकर पहुंचे. विनोद ने बताया कि समाज में दहेज की बड़ी समस्या है. इस परंपरा को तोड़कर एक अच्छी शुरुआत करेंगे.
दूल्हे के पिता प्रहलाद मीणा ने कहा कि हम किसान परिवार से आते हैं और किसानों के बीच पशुओं का महत्व है. पहले बैलगाड़ी पर ही बारात आती-जाती थी. समय के साथ अब सबकुछ बदल गया है. इसलिए इस परंपरा को युवाओं में वापस लाने के लिए यह पहल की है. दुल्हन ने कहा कि सुनते थे कि पहले के जमाने में बारात बैलगाड़ी पर आती थी. आज जब मेरी शादी में बाराती बैलगाड़ी से आए तो हमें बहुत अच्छा लगा. दूर-दूर से लोग बारातियों को देखने आए.
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शादियों के दौरान आपने कई तस्वीरें देखी होंगी, जिसमें दूल्हा हेलीकॉप्टर से पहुंचता है तो कोई लग्जरी गाड़ी से बारात लेकर पहुंचता है. वहीं दौसा के लालसोट में एक शादी चर्चा का विषय बनी हुई है. इस शादी में बारात बैलगाड़ी से दुल्हन के घर पहुंची. इसे देखने के लिए काफी संख्या में ग्रामीण पहुंचे. दूल्हे के पिता प्रहलाद मीणा गुजरात के अहमदाबाद में बिजनेस करते हैं. दुल्हन के परिवार को उम्मीद थी कि दूल्हा शानदार गाड़ियों से पहुंचेगा और बारातियों के लिए भी विशेष गाड़ियां होंगी, लेकिन जब बारात बैलगाड़ी से पहुंची तो सभी देखते रह गए. दरअसल, रामगढ़ पचवारा क्षेत्र के अमराबाद निवासी भामाशाह प्रहलाद मीना ने अपने बेटे विनोद की बारात बैलगाड़ियों, ऊंट व घोड़ों पर निकाली. ये शादी आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. ऑर्केस्ट्रा की चमक-धमक से दूर पारंपरिक अंदाज में ऊंट और बैलगाड़ियों से बाराती पहुंचे. बारात के लिए ऊंटों और बैलों को सजाया गया. जब बारात सड़क पर निकली तो लोग देखते ही रह गए. आठ ऊंटगाड़ियां, सात बैलगाड़ियां, दस ऊंट व दस घोड़ों पर बाराती सवार थे. इस दौरान बारातियों का उत्साह देखते ही बन रहा था. बारात को अमराबाद से रायमलपूरा पहुंचने में तीन घंटे लगे. दूल्हा बैलगाड़ी पर सवार था. साथ में डीजे बज रहा था. बाराती ऊंट गाड़ियों पर नाचते गाते हुए चल रहे थे. बताया जा रहा है कि शादी में विनोद के परिजनों ने सिर्फ एक नारियल और एक रुपया लेकर शादी कर ली. सारे जेवरात भी खुद ही लेकर पहुंचे. विनोद ने बताया कि समाज में दहेज की बड़ी समस्या है. इस परंपरा को तोड़कर एक अच्छी शुरुआत करेंगे. दूल्हे के पिता प्रहलाद मीणा ने कहा कि हम किसान परिवार से आते हैं और किसानों के बीच पशुओं का महत्व है. पहले बैलगाड़ी पर ही बारात आती-जाती थी. समय के साथ अब सबकुछ बदल गया है. इसलिए इस परंपरा को युवाओं में वापस लाने के लिए यह पहल की है. दुल्हन ने कहा कि सुनते थे कि पहले के जमाने में बारात बैलगाड़ी पर आती थी. आज जब मेरी शादी में बाराती बैलगाड़ी से आए तो हमें बहुत अच्छा लगा. दूर-दूर से लोग बारातियों को देखने आए.
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नरवाना, 11 जनवरी (अस)
बद्दोवाल टोल प्लाजा पर धरना दे रहे किसानों के बीच पहुंचे संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य योगेंद्र यादव ने कहा कि 13 जनवरी को लोहड़ी के अवसर पर आंदोलनरत किसान तीनों काले कृषि कानूनों की प्रतियां जला कर विरोध जताएंगे। यादव ने दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ा जन आंदोलन बन गया है। यादव ने कहा कि केंद्र की सरकार ने कोरोना काल का फायदा उठाकर देश के अन्नदाता पर यह तीन नए काले कानून थोपने का काम किया। सरकार का सोचना था कि जब तक ये कानून किसानों की समझ में आएंगे तब तक यह पूर्ण रूप से लागू हो चुके होंगे, लेकिन समय रहते सबसे पहले पंजाब के किसानों ने इन तीनों कृषि कानूनों की असलियत जानी और फिर इसका प्रचार पूरे देश के किसानों में शुरू किया।
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नरवाना, ग्यारह जनवरी बद्दोवाल टोल प्लाजा पर धरना दे रहे किसानों के बीच पहुंचे संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य योगेंद्र यादव ने कहा कि तेरह जनवरी को लोहड़ी के अवसर पर आंदोलनरत किसान तीनों काले कृषि कानूनों की प्रतियां जला कर विरोध जताएंगे। यादव ने दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ा जन आंदोलन बन गया है। यादव ने कहा कि केंद्र की सरकार ने कोरोना काल का फायदा उठाकर देश के अन्नदाता पर यह तीन नए काले कानून थोपने का काम किया। सरकार का सोचना था कि जब तक ये कानून किसानों की समझ में आएंगे तब तक यह पूर्ण रूप से लागू हो चुके होंगे, लेकिन समय रहते सबसे पहले पंजाब के किसानों ने इन तीनों कृषि कानूनों की असलियत जानी और फिर इसका प्रचार पूरे देश के किसानों में शुरू किया।
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बॉलीवुड स्टार्स को हर सिचुएशन में काम करना पड़ता है।
मुझे गर्मी के मौसम से कोई प्रॉब्लम नहीं है। मैं इस मौसम में भी आराम से अपने काम निपटाती हूं। मुझे सिर्फ बारिश का मौसम पसंद नहीं है। माना हॉट सीजन में शूटिंग करना आसान नहीं होता है, लेकिन मैंने अपनी पहली ही फिल्म 'दबंग' की शूटिंग यूपी में जब की थी, उन दिनों वहां बहुत गर्मी थी, काफी प्रॉब्लम भी होती थी। फिर भी मैंने अपना काम परफेक्ट तरीके से किया। इसलिए अब तो मुझे गर्मी के मौसम में भी आउटडोर शूट करने की आदत हो गई है।
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बॉलीवुड स्टार्स को हर सिचुएशन में काम करना पड़ता है। मुझे गर्मी के मौसम से कोई प्रॉब्लम नहीं है। मैं इस मौसम में भी आराम से अपने काम निपटाती हूं। मुझे सिर्फ बारिश का मौसम पसंद नहीं है। माना हॉट सीजन में शूटिंग करना आसान नहीं होता है, लेकिन मैंने अपनी पहली ही फिल्म 'दबंग' की शूटिंग यूपी में जब की थी, उन दिनों वहां बहुत गर्मी थी, काफी प्रॉब्लम भी होती थी। फिर भी मैंने अपना काम परफेक्ट तरीके से किया। इसलिए अब तो मुझे गर्मी के मौसम में भी आउटडोर शूट करने की आदत हो गई है।
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बाबा गरीबनाथ मंदिर के पास सड़क पर जलजमाव रहने और सड़क के सुदृढ़ीकरण काे लेकर विधायक विजेंद्र चाैधरी ने बीते जून में वहीं पर धरना दिया था। 3 घंटे तक राेड पर बैठे विधायक ने कहा था कि भक्त-श्रद्धालु गंदे पानी से हाेकर कैसे जाएंगे। अब विधायक उसी राेड व नाला निर्माण का विराेध कर रहे हैं।
नगर आयुक्त काे फाेन कर उन्हाेंने कहा कि यहां नाला बनाने से महज 6 परिवाराें काे ही फायदा हाेगा, इस नाले पर 18 लाख खर्च का क्या औचित्य है? उनके गुट के राकेश सिन्हा पप्पू समेत कई अन्य पार्षदाें ने भी नगर आयुक्त से मिलकर राेड निर्माण राेकने का आग्रह किया है। इनकी दलील है कि यह राेड ताे बेहतर है, इस पर 32 लाख खर्च करना रुपए की बर्बादी है।
इधर, नगर निगम में विराेधी गुट के स्थानीय वार्ड पार्षद केपी पप्पू ने राेड-नाला निर्माण के विराेध पर पलटवार किया है। उनका कहना है कि जून में यही सड़क विधायक काे काफी बदहाल दिख रही थी। घरने पर बैठे थे। अब बनने लगी ताे विराेध क्याें? उन्हाेंने सवाल किया कि कहीं विधायक से शिलान्यास नहीं कराना इसका कारण ताे नहीं?
मेयर सुरेश कुमार पर अविश्वास प्रस्ताव से नगर निगम की राजनीति बदली हुई है। पहले विधायक गुट के पार्षदाें का उन्हें समर्थन था। तब केपी पप्पू विराेधी गुट में थे। अब विधायक गुट डिप्टी मेयर के साथ हाे गया है। तब वार्ड पार्षद केपी पप्पू समेत कई पार्षद सुरेश कुमार के समर्थन में आ गए। ऐसे में विराेधी खेमे के पार्षदाें के वार्ड में याेजनाओं के चयन में अड़ंगा लगाया जा रहा है।
नगर आयुक्त ने कहा कि उन्हें राजनीति से मतलब नहीं है। स्थानीय पार्षद के प्रस्ताव पर तत्कालीन मेयर ने अनुशंसा की थी। विधायक भी धरने पर बैठे थे। बाबा गरीबनाथ मंदिर जानेवाली सड़क का धार्मिक महत्व है। यहां जलजमाव हाेता है। इसके आधार पर सड़क-नाला के सुदृढ़ीकरण का टेंडर हुआ। एक-दाे दिनाें में निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।
नगर विधायक विजेंद्र चाैधरी ने कहा कि बाबा गरीबनाथ मंदिर राेड का विराेध नहीं है। निगम की राशि की बर्बादी न हाे। महज 6 परिवारों के लिए 3 फीट नाले का क्या औचित्य? 18 लाख नाला पर खर्च हाेंगे। एस्टीमेट अधिकारी देख लें। अगल-बगल में भी कई सड़कें खराब हैं। राशि बचती है ताे उन पर खर्च हो। इसी उद्देश्य से नगर आयुक्त काे बाेला है कि वे इसे देख लें।
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बाबा गरीबनाथ मंदिर के पास सड़क पर जलजमाव रहने और सड़क के सुदृढ़ीकरण काे लेकर विधायक विजेंद्र चाैधरी ने बीते जून में वहीं पर धरना दिया था। तीन घंटाटे तक राेड पर बैठे विधायक ने कहा था कि भक्त-श्रद्धालु गंदे पानी से हाेकर कैसे जाएंगे। अब विधायक उसी राेड व नाला निर्माण का विराेध कर रहे हैं। नगर आयुक्त काे फाेन कर उन्हाेंने कहा कि यहां नाला बनाने से महज छः परिवाराें काे ही फायदा हाेगा, इस नाले पर अट्ठारह लाख खर्च का क्या औचित्य है? उनके गुट के राकेश सिन्हा पप्पू समेत कई अन्य पार्षदाें ने भी नगर आयुक्त से मिलकर राेड निर्माण राेकने का आग्रह किया है। इनकी दलील है कि यह राेड ताे बेहतर है, इस पर बत्तीस लाख खर्च करना रुपए की बर्बादी है। इधर, नगर निगम में विराेधी गुट के स्थानीय वार्ड पार्षद केपी पप्पू ने राेड-नाला निर्माण के विराेध पर पलटवार किया है। उनका कहना है कि जून में यही सड़क विधायक काे काफी बदहाल दिख रही थी। घरने पर बैठे थे। अब बनने लगी ताे विराेध क्याें? उन्हाेंने सवाल किया कि कहीं विधायक से शिलान्यास नहीं कराना इसका कारण ताे नहीं? मेयर सुरेश कुमार पर अविश्वास प्रस्ताव से नगर निगम की राजनीति बदली हुई है। पहले विधायक गुट के पार्षदाें का उन्हें समर्थन था। तब केपी पप्पू विराेधी गुट में थे। अब विधायक गुट डिप्टी मेयर के साथ हाे गया है। तब वार्ड पार्षद केपी पप्पू समेत कई पार्षद सुरेश कुमार के समर्थन में आ गए। ऐसे में विराेधी खेमे के पार्षदाें के वार्ड में याेजनाओं के चयन में अड़ंगा लगाया जा रहा है। नगर आयुक्त ने कहा कि उन्हें राजनीति से मतलब नहीं है। स्थानीय पार्षद के प्रस्ताव पर तत्कालीन मेयर ने अनुशंसा की थी। विधायक भी धरने पर बैठे थे। बाबा गरीबनाथ मंदिर जानेवाली सड़क का धार्मिक महत्व है। यहां जलजमाव हाेता है। इसके आधार पर सड़क-नाला के सुदृढ़ीकरण का टेंडर हुआ। एक-दाे दिनाें में निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। नगर विधायक विजेंद्र चाैधरी ने कहा कि बाबा गरीबनाथ मंदिर राेड का विराेध नहीं है। निगम की राशि की बर्बादी न हाे। महज छः परिवारों के लिए तीन फीट नाले का क्या औचित्य? अट्ठारह लाख नाला पर खर्च हाेंगे। एस्टीमेट अधिकारी देख लें। अगल-बगल में भी कई सड़कें खराब हैं। राशि बचती है ताे उन पर खर्च हो। इसी उद्देश्य से नगर आयुक्त काे बाेला है कि वे इसे देख लें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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बोकारो : शुक्रवार को कैशलेस के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए भारत सरकार के नीति आयोग द्वारा घोषित डिजिटल पेमेंट चैंपियनशिप अवॉर्ड बोकारो डीसी राय महिमापत रे को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित समारोह में यह सम्मान मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदान किया.
गौरतलब है कि कैशलेस सोसाइटी को बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग ने इनाम देने की घोषणा की थी. नीति आयोग ने जिलों और पंचायतों के लिए यह योजना बनाई है. इसके तहत देश के 10 जिले, जो सबसे पहले कैशलेस व्यवस्था को अपनायेंगे उन्हें नीति आयोग डिजिटल पेमेंट चैंपियनशिप अवॉर्ड से सम्मानित करेगा.
इसी योजना के तहत बोकारो जिला के दुगदा पश्चिमी व दुगदा दक्षिणी को डीसी ने निर्धारित समयावधि में कैशलेस बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और पुरस्कार हासिल किया. दोनों पंचायतों को सीएम रघुवर दास ने कैशलेस घोषित किया है. नीति आयोग के इस प्रयास से निश्चित ही कैशलेस को बढ़ावा मिलेगा.
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बोकारो : शुक्रवार को कैशलेस के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए भारत सरकार के नीति आयोग द्वारा घोषित डिजिटल पेमेंट चैंपियनशिप अवॉर्ड बोकारो डीसी राय महिमापत रे को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित समारोह में यह सम्मान मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदान किया. गौरतलब है कि कैशलेस सोसाइटी को बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग ने इनाम देने की घोषणा की थी. नीति आयोग ने जिलों और पंचायतों के लिए यह योजना बनाई है. इसके तहत देश के दस जिले, जो सबसे पहले कैशलेस व्यवस्था को अपनायेंगे उन्हें नीति आयोग डिजिटल पेमेंट चैंपियनशिप अवॉर्ड से सम्मानित करेगा. इसी योजना के तहत बोकारो जिला के दुगदा पश्चिमी व दुगदा दक्षिणी को डीसी ने निर्धारित समयावधि में कैशलेस बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और पुरस्कार हासिल किया. दोनों पंचायतों को सीएम रघुवर दास ने कैशलेस घोषित किया है. नीति आयोग के इस प्रयास से निश्चित ही कैशलेस को बढ़ावा मिलेगा.
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नयी दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का रहने वाले निशांत अग्रवाल ने संयुक्त प्रवेश परीक्षा (मुख्य) में 100 परसेंटाइल हासिल किया है, जबकि उनके जुड़वां भाई प्रणव ने इस परीक्षा में 99. 93 स्कोर हासिल किया है ।
इस परीक्षा का परिणाम मानव संसाधन विकास मंत्रालय के नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने शुक्रवार की रात घोषित की । पूरे देश में नौ ऐसे छात्र हैं जिन्होंने इस परीक्षा में 100 परसेंटाइल हासिल किया है । इस परीक्षा में कुल आठ लाख 69 हजार विद्यार्थी शामिल हुए थे।
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नयी दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का रहने वाले निशांत अग्रवाल ने संयुक्त प्रवेश परीक्षा में एक सौ परसेंटाइल हासिल किया है, जबकि उनके जुड़वां भाई प्रणव ने इस परीक्षा में निन्यानवे. तिरानवे स्कोर हासिल किया है । इस परीक्षा का परिणाम मानव संसाधन विकास मंत्रालय के नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने शुक्रवार की रात घोषित की । पूरे देश में नौ ऐसे छात्र हैं जिन्होंने इस परीक्षा में एक सौ परसेंटाइल हासिल किया है । इस परीक्षा में कुल आठ लाख उनहत्तर हजार विद्यार्थी शामिल हुए थे।
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नई दिल्लीः
सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर (Swara Bhasker)एक बार फिर चर्चा में हैं. अक्सर सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय वाली स्वरा भास्कर (Swara Bhasker)इस बार बीजेपी के एक सांसद को निशाने पर लिया और फटकार लगा दी. स्वरा के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स जमकर रिएक्ट कर रहे हैं. इसके बाद फैजाबाद के सांसद लल्लू सिंह को स्वरा से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी.
दरअसल हाल ही में स्वरा ने अपने फोटो के साथ एक पोस्ट शेयर किया था. पोस्ट को स्वरा ने कैप्शन दिया था- 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए...'. स्वरा के उस पोस्ट पर एक सोशल मीडिया यूजर्स ने घटिया और अश्लील कमेंट किया था. फैजाबाद से बीजेपी सांसद लल्लू सिंह ने उस अश्लील कमेंट को लाइक किया था. इसको लेकर स्वरा भड़क गई और ट्वीटर पर लल्लू सिंह को खूब फटकार लगाई.
इसके बाद लल्लू सिंह ट्रोल होने लगे तो उन्होंने ट्वीट करके क्षमा मांगी.
बता दें स्वरा अपनी बेबाक राय और कई विवादित बयानों से अक्सर चर्चा में रहती हैं. हाल ही में स्वरा का एक ट्वीट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था.स्वरा (Swara Bhaskar) ने जो ट्वीट किया है उसमें वह इस्तीफे का ऐलान कर रही हैं. स्वरा ने ट्वीट करते हुए लिखा, ' im resigning! Yeh raitaa mere bas ka nahi hai!.'
हुआ यूं कि भारत की गिरती जीडीपी (GDP) को देखते हुए एक सोशल मीडिया यूजर ने ट्वीट कर के स्वरा भास्कर (Swara Bhasker)(Swara Bhasker) से कहा था कि इसकी जिम्मेदारी आपको लेनी चाहिए. इस पर जवाब देते हुए स्वरा भास्कर (Swara Bhasker)ने ट्वीट में ये जवाब लिखा था.
बता दें कि पिछले 5 सालों में देश की विकास दर में सबसे बड़ी गिरावट आई है. इससे जीडीपी 5.8 से घटकर 5% तक जा पहुंची है. पिछले साल इस तिमाही मे देश का ग्रोथ रेट 8.2 फीसदी था. जबकि 2019-20 की पहली तिमाही अप्रैल से जून में जीडीपी 5% रहा. इससे पहले की तिमाही जनवरी-मार्च में 5.8% था. कृषि और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में सबसे बड़ी गिरावट हुई है. कृषि विकास दर घटकर 2 फीसदी पहुंची तो वहीं मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में विकास दर 12.2 से घटकर 0.6 तक जा पहुंची है.
बता दें कि स्वरा भास्कर (Swara Bhasker)(Swara Bhaskar) चुनावी प्रचार अभियानों में खूब नजर आईं थी. पहले बेगूसराय में कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) और फिर दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रचार अभियान में स्वरा भास्कर (Swara Bhasker)(Swara Bhaskar) ने हिस्सा लिया था.
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नई दिल्लीः सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर एक बार फिर चर्चा में हैं. अक्सर सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय वाली स्वरा भास्कर इस बार बीजेपी के एक सांसद को निशाने पर लिया और फटकार लगा दी. स्वरा के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स जमकर रिएक्ट कर रहे हैं. इसके बाद फैजाबाद के सांसद लल्लू सिंह को स्वरा से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी. दरअसल हाल ही में स्वरा ने अपने फोटो के साथ एक पोस्ट शेयर किया था. पोस्ट को स्वरा ने कैप्शन दिया था- 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए...'. स्वरा के उस पोस्ट पर एक सोशल मीडिया यूजर्स ने घटिया और अश्लील कमेंट किया था. फैजाबाद से बीजेपी सांसद लल्लू सिंह ने उस अश्लील कमेंट को लाइक किया था. इसको लेकर स्वरा भड़क गई और ट्वीटर पर लल्लू सिंह को खूब फटकार लगाई. इसके बाद लल्लू सिंह ट्रोल होने लगे तो उन्होंने ट्वीट करके क्षमा मांगी. बता दें स्वरा अपनी बेबाक राय और कई विवादित बयानों से अक्सर चर्चा में रहती हैं. हाल ही में स्वरा का एक ट्वीट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था.स्वरा ने जो ट्वीट किया है उसमें वह इस्तीफे का ऐलान कर रही हैं. स्वरा ने ट्वीट करते हुए लिखा, ' im resigning! Yeh raitaa mere bas ka nahi hai!.' हुआ यूं कि भारत की गिरती जीडीपी को देखते हुए एक सोशल मीडिया यूजर ने ट्वीट कर के स्वरा भास्कर से कहा था कि इसकी जिम्मेदारी आपको लेनी चाहिए. इस पर जवाब देते हुए स्वरा भास्कर ने ट्वीट में ये जवाब लिखा था. बता दें कि पिछले पाँच सालों में देश की विकास दर में सबसे बड़ी गिरावट आई है. इससे जीडीपी पाँच.आठ से घटकर पाँच% तक जा पहुंची है. पिछले साल इस तिमाही मे देश का ग्रोथ रेट आठ.दो फीसदी था. जबकि दो हज़ार उन्नीस-बीस की पहली तिमाही अप्रैल से जून में जीडीपी पाँच% रहा. इससे पहले की तिमाही जनवरी-मार्च में पाँच.आठ% था. कृषि और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में सबसे बड़ी गिरावट हुई है. कृषि विकास दर घटकर दो फीसदी पहुंची तो वहीं मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में विकास दर बारह.दो से घटकर शून्य.छः तक जा पहुंची है. बता दें कि स्वरा भास्कर चुनावी प्रचार अभियानों में खूब नजर आईं थी. पहले बेगूसराय में कन्हैया कुमार और फिर दिल्ली में आम आदमी पार्टी के प्रचार अभियान में स्वरा भास्कर ने हिस्सा लिया था.
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अगर आपको ओवरसाइज्ड होने की वजह से स्विमसूट चुनने में परेशानी हो रही है तो जानिए कुछ ऐसे स्विमसूट्स के बारे में जो हर तरह की फिगर पर फबते हैं।
इस कोरल स्वीमसूट में आपको परफेक्ट फिटिंग मिलेगी। अगर आपको क्लीवेज शोइंग स्वीमसूट्स में सहज महसूस नहीं होता तो इस तरह का स्वीम सूट आपके लिए अच्छा रहेगा।
ब्लैक कलर की ज्यादातर ड्रेसेस आप पर जमती हैं। इस कलर में आपकी खूबसूरती पूरी तरह निखरकर सामने आ जाती है। इस स्वीम सूट का हाल्टर नेक और हाईवेस्ट बॉटम इससे एक्स्ट्रा कवर दे रहा है। इस ड्रेस में आप सेक्सी दिखने के साथ-साथ सुपर स्टाइलिश नजर आएंगी।
अगर किसी दिन आपको स्वीमिंग की इच्छा ना हो लेकिन उस माहौल में आप कुछ वक्त अपने दोस्तों के साथ गुजारना चाहें तो इस तरह की स्ट्राइप्ड ड्रेस ट्राई कर सकती हैं। ऐसी ड्रेस आपको कंफर्टेबल लुक देती है और दिखने में भी यह काफी खूबसूरत है।
लंबे स्ट्राइप्स वाला यह पैटर्न आपके लंबे होने का अहसास देता है। अगर आपकी हाइट थोड़ी कम है तो इस तरह की ड्रेस में आप अपनी खूबसूरती फ्लॉन्ट कर सकती हैं। इससे आपको अपने प्रॉब्लम एरिया पर से ध्यान हटाने में मदद मिलेगी, साथ ही एक कॉन्फिडेंट लुक भी मिलेगा।
ब्लैक स्वीम सूट में एक्सपेरिमेंट करना चाहती हैं तो इस तरह का सेक्सी स्वीम सूट भी आजमा सकती हैं। इस तरह की ड्रेस का फायदा यह है कि यह बहुत ज्यादा रिवीलिंग नहीं है, इसीलिए इसमें आप पूरी तरह सहज रह सकती हैं और स्वीमिंग पर आसानी से फोकस कर सकती हैं।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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अगर आपको ओवरसाइज्ड होने की वजह से स्विमसूट चुनने में परेशानी हो रही है तो जानिए कुछ ऐसे स्विमसूट्स के बारे में जो हर तरह की फिगर पर फबते हैं। इस कोरल स्वीमसूट में आपको परफेक्ट फिटिंग मिलेगी। अगर आपको क्लीवेज शोइंग स्वीमसूट्स में सहज महसूस नहीं होता तो इस तरह का स्वीम सूट आपके लिए अच्छा रहेगा। ब्लैक कलर की ज्यादातर ड्रेसेस आप पर जमती हैं। इस कलर में आपकी खूबसूरती पूरी तरह निखरकर सामने आ जाती है। इस स्वीम सूट का हाल्टर नेक और हाईवेस्ट बॉटम इससे एक्स्ट्रा कवर दे रहा है। इस ड्रेस में आप सेक्सी दिखने के साथ-साथ सुपर स्टाइलिश नजर आएंगी। अगर किसी दिन आपको स्वीमिंग की इच्छा ना हो लेकिन उस माहौल में आप कुछ वक्त अपने दोस्तों के साथ गुजारना चाहें तो इस तरह की स्ट्राइप्ड ड्रेस ट्राई कर सकती हैं। ऐसी ड्रेस आपको कंफर्टेबल लुक देती है और दिखने में भी यह काफी खूबसूरत है। लंबे स्ट्राइप्स वाला यह पैटर्न आपके लंबे होने का अहसास देता है। अगर आपकी हाइट थोड़ी कम है तो इस तरह की ड्रेस में आप अपनी खूबसूरती फ्लॉन्ट कर सकती हैं। इससे आपको अपने प्रॉब्लम एरिया पर से ध्यान हटाने में मदद मिलेगी, साथ ही एक कॉन्फिडेंट लुक भी मिलेगा। ब्लैक स्वीम सूट में एक्सपेरिमेंट करना चाहती हैं तो इस तरह का सेक्सी स्वीम सूट भी आजमा सकती हैं। इस तरह की ड्रेस का फायदा यह है कि यह बहुत ज्यादा रिवीलिंग नहीं है, इसीलिए इसमें आप पूरी तरह सहज रह सकती हैं और स्वीमिंग पर आसानी से फोकस कर सकती हैं। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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- 8 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर!
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इस दिवाली पर एक साथ रिलीज हो चुकी है तीन बड़ी फिल्में। हाउसफुल 4, सांड की आंख और मेड इन चाइना। लेकिन इसके बावजूद कमाई के लिहाज से अभी भी अपनी झोली में करोड़ों बटोरते हुए ऋतिक रोशन और टाइगर श्रॅाफ की वॅार आगे निकल रही है।
20 दिन गुजर जाने के बाद भी अभी तक कई सिनेमाघर में वॅार के शो चलाए जा रहे हैं। साथ ही देश के साथ विदेश में वॅार की कमाई ने आने वाली सभी फिल्मों के लिए एक तगड़ा रिकॅार्ड सेट कर दिया है।
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खंडवा। 15 साल की लड़की का 30 साल के ड्राइवर से प्रेम प्रसंग होने पर वह गर्भवती भी हो गई। लड़की के माता-पिता आरोपी के खिलाफ थाने में केस दर्ज करवाने पहुंचे। सुनवाई नहीं हुई तो बाल कल्याण समिति में शिकायत दर्ज करवाई। समिति ने पत्र लिख पुलिस अधिकारियों को आरोपी के खिलाफ पॉक्सो में केस दर्ज करने की मांग की है। बेटी को लेकर माता-पिता बाल कल्याण समिति पहुंचे। जहां उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर की। परिजन ने बताया कि सुदामानगर में रहने वाले शिवा तायड़े (30) ने बेटी के साथ कई बार संबंध बनाया। शिकायत करने पहुंचे तो पदमनगर पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। समिति के सदस्यों पदमनगर पुलिस को केस दर्ज करने के लिए पत्र लिखा।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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खंडवा। पंद्रह साल की लड़की का तीस साल के ड्राइवर से प्रेम प्रसंग होने पर वह गर्भवती भी हो गई। लड़की के माता-पिता आरोपी के खिलाफ थाने में केस दर्ज करवाने पहुंचे। सुनवाई नहीं हुई तो बाल कल्याण समिति में शिकायत दर्ज करवाई। समिति ने पत्र लिख पुलिस अधिकारियों को आरोपी के खिलाफ पॉक्सो में केस दर्ज करने की मांग की है। बेटी को लेकर माता-पिता बाल कल्याण समिति पहुंचे। जहां उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर की। परिजन ने बताया कि सुदामानगर में रहने वाले शिवा तायड़े ने बेटी के साथ कई बार संबंध बनाया। शिकायत करने पहुंचे तो पदमनगर पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। समिति के सदस्यों पदमनगर पुलिस को केस दर्ज करने के लिए पत्र लिखा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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कपिल मिश्रा, शिवपुरी। शहर के देहात थाना क्षेत्र में स्थित ईदगाह परिसर के बाहर सरकारी जमीन पर अवैध दुकानें बनाकर अतिक्रमण करने के मामले में विश्व हिंदू परिसर व बजरंग दल ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने माधव चौक चौराहे से कलेक्ट्रेट तक नारेबाजी करते हुए रैली निकाली और प्रदर्शन कर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बनाई गई दुकानों को ढहाने की मांग की। हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं का कहना था कि अगर रन्नौद में गुरुद्वारा की बाउंड्रीवाल और सतनवाड़ा में एक बाबा की झोपडी पर जेसीबी चलाने वाले प्रशासन के अधिकारी इस मामले में मौन क्यों है? कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि वर्ष 2017 से ईदगाह परिसर के बाहर पर बनी दुकानों को आखिर क्यों नहीं ढहाया जा रहा है?
बता दें कि झांसी रोड पर वेटनरी हॉस्पिटल के पास सरकारी सर्वे नंबर 724 एवं 726 पर एक समुदाय विशेष के लोगों ने अतिक्रमण कर दुकानें बना ली हैं। तहसील न्यायालय सहित अपर कलेक्टर शिवपुरी द्वारा 24 सितंबर 2018 को उक्त निर्माण को अवैध घोषित कर अतिक्रमणकारी पर 4,69350 रुपए का जुर्माना लगाकर उक्त भूमि को शासकीय भूमि घोषित किया है। वहीं जिला प्रशासन द्वारा निर्माण अभी तक नहीं ढहाया गया। जिसे लेकर आज प्रदर्शन किया गया।
शिवपुरी कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह के द्वारा बजरंग दल व विहिप के कार्यकर्ताओं को बताया कि इस मामले में वक्फ बोर्ड का स्टे है। इस स्टे को हटवाने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं और हमारा वकील भी खड़ा हुआ है। जैसे ही स्टे हटेगा, अतिक्रमण को ढहा दिया जाएगा।
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कपिल मिश्रा, शिवपुरी। शहर के देहात थाना क्षेत्र में स्थित ईदगाह परिसर के बाहर सरकारी जमीन पर अवैध दुकानें बनाकर अतिक्रमण करने के मामले में विश्व हिंदू परिसर व बजरंग दल ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने माधव चौक चौराहे से कलेक्ट्रेट तक नारेबाजी करते हुए रैली निकाली और प्रदर्शन कर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बनाई गई दुकानों को ढहाने की मांग की। हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं का कहना था कि अगर रन्नौद में गुरुद्वारा की बाउंड्रीवाल और सतनवाड़ा में एक बाबा की झोपडी पर जेसीबी चलाने वाले प्रशासन के अधिकारी इस मामले में मौन क्यों है? कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि वर्ष दो हज़ार सत्रह से ईदगाह परिसर के बाहर पर बनी दुकानों को आखिर क्यों नहीं ढहाया जा रहा है? बता दें कि झांसी रोड पर वेटनरी हॉस्पिटल के पास सरकारी सर्वे नंबर सात सौ चौबीस एवं सात सौ छब्बीस पर एक समुदाय विशेष के लोगों ने अतिक्रमण कर दुकानें बना ली हैं। तहसील न्यायालय सहित अपर कलेक्टर शिवपुरी द्वारा चौबीस सितंबर दो हज़ार अट्ठारह को उक्त निर्माण को अवैध घोषित कर अतिक्रमणकारी पर चार,उनहत्तर हज़ार तीन सौ पचास रुपयापए का जुर्माना लगाकर उक्त भूमि को शासकीय भूमि घोषित किया है। वहीं जिला प्रशासन द्वारा निर्माण अभी तक नहीं ढहाया गया। जिसे लेकर आज प्रदर्शन किया गया। शिवपुरी कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह के द्वारा बजरंग दल व विहिप के कार्यकर्ताओं को बताया कि इस मामले में वक्फ बोर्ड का स्टे है। इस स्टे को हटवाने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं और हमारा वकील भी खड़ा हुआ है। जैसे ही स्टे हटेगा, अतिक्रमण को ढहा दिया जाएगा।
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सबगुरु न्यूज। कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष, नवमी तिथि, वार शनिवार, सम्वत 2078, हेमंत ऋतु, रवि दक्षिणायन, दोपहर 02. 43 बजे बाद दशमी तिथि प्रारम्भ। आज आपका दिन कैसा रहेगा जानने के लिए पढें राशिफल।
मेष :- आज व्यापार में लाभ होगा। नौकरी में उन्नति का योग बनेगा। संतान का सहयोग प्राप्त होगा। आज अधिक से अधिक काम करने की कोशिश करें क्योकि आपको आज के अपने सब कामों में सफलता मिलेगी। आप अपने किसी करीबी से सलाह ले सकते हैं। अगर आप अपनी चीज़ों का ध्यान नहीं रखेंगे, तो उनके खोने या चोरी होने की संभावना है। नजदीकी लोगों से कई मतभेद उभर सकते हैं। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। आज का दिन आपको एक मनोवैज्ञानिक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जो आपको निर्णय लेने में सहायता प्रदान करेगा। आपका मित्र आज आपको एक मूल्यवान प्रतिक्रिया दे सकता है।
मिथुन :- आज आपके व्यावसायिक स्थान पर कार्य भार बढ़ेगा। व्यापार-धंधे में लाभ होने की संभावना है। आपके घरेलू जीवन में अशांति का वातावरण देखने को मिल सकता है। बेहतर प्रयासों से आपको सफलता मिलेगी और आपकी आमदनी में भी वृद्धि की संभावना है। स्वास्थ्य सामान्य रूप से मध्यम रहेगा। अपना कार्य समय पर कर ले। बुजुर्गो के व्यवहार में कमी आ सकती है। जीवन साथी के साथ हाथ से हाथ मिला के चलना होगा। आप शांत होकर विचार करें और अपने काम पर ध्यान दे। किसी दुर्घटना कि वजह से चोट न लगे इसका खास ध्यान रखें। कारोबारी प्रतिस्पर्धा में यदि आगे निकलना है तो विश्लेषण भली-भांति कर लें।
कर्क :- आज अचानक से धन लाभ होने के योग है जिस से धन की तंगी दूर होगी। पारिवारिक सदस्य भी सहयोग व समर्थ देंगे। बुरे लोगों से दूर रहने की कोशिश करें। परिवार वालों की मांगों को पूरा करने में पूरा दिन और धन खर्च होगा आपका मजाकिया स्वभाव आपके चारों ओर के वातावरण को खुशनुमा बना देगा। आज वे कपड़े न पहनें जो आपके प्रिय को पसंद न हों। अपनों के साथ विनम्रता से पेश आए। आप अभी काफ़ी दबाव में होने के कारण आपको रिश्ते निभाने में मुश्किल हो सकती है। आपको सहकर्मियों की सहायता करनी पड़ेगी।
सिंह :- आज आपके दिमाग में मनोरंजन की बात छाई रहेगी। आगे कदम बढ़ाएं और आपने दोस्तों और परिवार जनों के साथ मिल कर कुछ खास करें। नौकरी-व्यवसाय के जगह भी साथी कर्मचारियों का और उच्च पदाधिकारियों का व्यवहार सहयोगपूर्ण न होने से मानसिक हताशा पैदा हो सकती है। संतान के संबंध में समस्या आएंगी। विरोधियों के साथ वाद-विवाद में उतरना अच्छा नहीं है। आज आप अपने सभी कामों को एक तरफ रख कर सिर्फ मौज-मस्ती करेंगे। आज आप ऐसे लोगों से जुड़ने से बचें जो आपकी प्रतिष्ठा को आघात पहुंचा सकते हैं। काम-काज से तनाव बढेगा। कोई नया काम या प्रोजेक्ट मिल सकता है।
कन्या :- आज कामकाज की जिज्ञासा बढ़ेगी। सुखवृद्धि एवं पारिवारिक उन्नति होगी। परिवार में क्लेश, मनमुटाव हो सकता है। निद्रा का अभाव रहेगा। मानहानि होने की आशंका है। आर्थिक योजनाओं में धन का निवेश हो सकता है। पड़ोसियों से किसी बात पर मतभेद की संभावना है। भविष्य को लेकर बेकार में चिंता करते रहना आपको बेचैन कर सकता है। मित्रों से मुलाकात होगी। कारोबार में अच्छी खबर मिलेगी। परिश्रम से इच्छित सफलता मिलेगी। शुभचिंतकों का हार्दिक सहयोग रहेगा। महत्वपूर्ण लोगों के साथ बातचीत करते वक़्त अपने शब्दों को गौर से चुनें।
तुला :- आज पैसों के संबंध में बड़े फैसले के लिए किसी से सलाह लेनी पड़ सकती है। कारोबार में इजाफा होगा। आमदनी के नए माध्यम नजर आएंगे। किसी पुराने प्रोजेक्ट या काम को शुरु करने के लिए आज का दिन शुभ है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए किसी से सिफारिश करवानी पड़ सकती है। आत्मविश्वास से कार्य सिद्ध होंगे। आर्थिक योजनाएं सफलतापूर्वक सिद्ध होंगी। मानसिक प्रसन्नता रहेगी। वस्त्राभूषण हेतु खर्च होगा। सफलता हासिल करने के लिए समय के साथ अपने विचारों में बदलाव लाएं। इससे आपका दृष्टिकोण व्यापक होगा, समझ का दायरा बढ़ेगा, व्यक्तित्व में निखार आएगा और दिमाग विकसित होगा।
वृश्चिक :- आज कार्यस्थल पर आपको सफलता मिलेगी। आपके ऑफिस में काम का बोझ बढ़ सकता है। व्यवसायिक प्रतिद्वंदी आज शांत रहेंगे। कार्यों में देरी होने की सम्भावना है। आज के दिन आपको थोडी बहुत प्रतिकूलताओं का सामना करना पड़ सकता है। व्यवसाय वर्ग से जुड़े हुए लोगों के लिए आज के दिन विदेश से लाभ प्राप्त हो सकते हैं। आपको इस अवसर का लाभ उठाने के लिए खुद को उसके अनुसार डालना होगा। आज के दिन आपके विरोधी भी दोस्ती का हाथ बढ़ाएंगे। जोखिम लेने से बचे। संयम रखे आपको सफलता जरूर मिलेगी। वाणी पर नियंत्रण रखें। आज आपकी सृजनात्मक शक्ति श्रेष्ठ रहेगी।
धनु :- आज परिवार से भरपूर सहयोग मिलेगा। मित्र भी आपके पक्ष में खड़े रहकर आपकी मदद करते नजर आएंगे। भाग्य आपके साथ है और सफलता आपके कदम चूमेगी। आज रिश्तों को समय दें। दोस्तों और परिजनों से बात करते समय सोच समझकर बोलें, किसी भी प्रकार के विवाद से बचें। आज किसी अनजान शख्स से सलाह ना लें। धन का अधिक से अधिक खर्च होगा। अपना व्यवहार सकारात्मक बनाए रखें। आपको आज अच्छे से प्रदर्शन करना होगा जिस वजह से आपको सभी लोगों से अपने काम के लिए सराहना मिलेगी। जल्द ही सफलता के द्वार खुलेंगे।
मकर :- आज आपको व्यापार-सम्बंधित कार्यों में लाभ होगा। आज का दिन आपके लिए सुखद समाचार ला सकता है। थोड़े प्रयत्न से आपको ज्यादा लाभ होगा। दिन के कामों को सेहत बाधित कर सकती है। विवाद सुलझाने का सही समय है। ऑफिस में संभलकर रहें वरना मुसीबत आएंगी। मुद्दों पर स्पष्टता से समस्याएं सुलझेगी। धैर्य से कार्य करें सफलता मिलेगी। धन का व्यय बढ़ेगा। अपनी दोस्ती सोच समझ कर करें। बुरे लोगो के संगत से बचे यह आपके लिए हानिकारक है। आज के दिन कार्यक्षेत्र में आप अपना आपा खो सकते हैं। संतान की जरूरतों पर ध्यान देना होगा।
कुंभ :- आज आप आनन्द का अनुभव करेंगे। काम पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे। मेहनत भी बहुत रहेगी। कुसंगति से बचें। कार्यक्षेत्र में अपनी महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए आप हर संभव कोशिश कर सकते हैं। जितना धैर्य रखेंगे आपके लिए उतना ही बेहतर होगा। कार्यों में भाग्य का साथ प्राप्त होगा। आप पैसा बना सकते हैं, बशर्ते आप अपनी जमा-पूंजी पारम्परिक तौर पर निवेश करें। परिवार के लोगों के साथ हंसी-मजाक से दिन खुशनुमा बीत सकता है। किसी भी नए कार्यो में रूकावट पैदा हो सकती है। अतः आप इस समय नये कार्य को शुरू न करें। क्रोध को अपने उपर हावी न होंने दें अन्यथा बनी बनाई योजनाओं पर पीनी फिर सकता है।
मीन :- आज अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। छोटी परेशानियां आपको घेरे रहेंगी। इस बात का विशेष ध्यान रखें की आपके फैसले से ऐसी किसी व्यक्ति को दुःख न हो जो आप पर भावनात्मक रूप से निर्भर है। आज आपका विशेष ध्यान दोस्तों पर रहेगा। आपकी सोच-विचार में असामान्य स्पष्टता रहेगी। किसी पुराने दोस्त से या तो आप मिलेंगे या उनमे से कोई आपसे मिलने आज अचानक चला आएगा। बिजनेस में नुकसान होने की आशंका है। आज का दिन सभी गलतफहमी को दूर करने और अपने रिश्ते के जीवन की शक्ति को नवीनीकृत करने के लिए एकदम सही है।
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सबगुरु न्यूज। कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष, नवमी तिथि, वार शनिवार, सम्वत दो हज़ार अठहत्तर, हेमंत ऋतु, रवि दक्षिणायन, दोपहर दो. तैंतालीस बजे बाद दशमी तिथि प्रारम्भ। आज आपका दिन कैसा रहेगा जानने के लिए पढें राशिफल। मेष :- आज व्यापार में लाभ होगा। नौकरी में उन्नति का योग बनेगा। संतान का सहयोग प्राप्त होगा। आज अधिक से अधिक काम करने की कोशिश करें क्योकि आपको आज के अपने सब कामों में सफलता मिलेगी। आप अपने किसी करीबी से सलाह ले सकते हैं। अगर आप अपनी चीज़ों का ध्यान नहीं रखेंगे, तो उनके खोने या चोरी होने की संभावना है। नजदीकी लोगों से कई मतभेद उभर सकते हैं। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। आज का दिन आपको एक मनोवैज्ञानिक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जो आपको निर्णय लेने में सहायता प्रदान करेगा। आपका मित्र आज आपको एक मूल्यवान प्रतिक्रिया दे सकता है। मिथुन :- आज आपके व्यावसायिक स्थान पर कार्य भार बढ़ेगा। व्यापार-धंधे में लाभ होने की संभावना है। आपके घरेलू जीवन में अशांति का वातावरण देखने को मिल सकता है। बेहतर प्रयासों से आपको सफलता मिलेगी और आपकी आमदनी में भी वृद्धि की संभावना है। स्वास्थ्य सामान्य रूप से मध्यम रहेगा। अपना कार्य समय पर कर ले। बुजुर्गो के व्यवहार में कमी आ सकती है। जीवन साथी के साथ हाथ से हाथ मिला के चलना होगा। आप शांत होकर विचार करें और अपने काम पर ध्यान दे। किसी दुर्घटना कि वजह से चोट न लगे इसका खास ध्यान रखें। कारोबारी प्रतिस्पर्धा में यदि आगे निकलना है तो विश्लेषण भली-भांति कर लें। कर्क :- आज अचानक से धन लाभ होने के योग है जिस से धन की तंगी दूर होगी। पारिवारिक सदस्य भी सहयोग व समर्थ देंगे। बुरे लोगों से दूर रहने की कोशिश करें। परिवार वालों की मांगों को पूरा करने में पूरा दिन और धन खर्च होगा आपका मजाकिया स्वभाव आपके चारों ओर के वातावरण को खुशनुमा बना देगा। आज वे कपड़े न पहनें जो आपके प्रिय को पसंद न हों। अपनों के साथ विनम्रता से पेश आए। आप अभी काफ़ी दबाव में होने के कारण आपको रिश्ते निभाने में मुश्किल हो सकती है। आपको सहकर्मियों की सहायता करनी पड़ेगी। सिंह :- आज आपके दिमाग में मनोरंजन की बात छाई रहेगी। आगे कदम बढ़ाएं और आपने दोस्तों और परिवार जनों के साथ मिल कर कुछ खास करें। नौकरी-व्यवसाय के जगह भी साथी कर्मचारियों का और उच्च पदाधिकारियों का व्यवहार सहयोगपूर्ण न होने से मानसिक हताशा पैदा हो सकती है। संतान के संबंध में समस्या आएंगी। विरोधियों के साथ वाद-विवाद में उतरना अच्छा नहीं है। आज आप अपने सभी कामों को एक तरफ रख कर सिर्फ मौज-मस्ती करेंगे। आज आप ऐसे लोगों से जुड़ने से बचें जो आपकी प्रतिष्ठा को आघात पहुंचा सकते हैं। काम-काज से तनाव बढेगा। कोई नया काम या प्रोजेक्ट मिल सकता है। कन्या :- आज कामकाज की जिज्ञासा बढ़ेगी। सुखवृद्धि एवं पारिवारिक उन्नति होगी। परिवार में क्लेश, मनमुटाव हो सकता है। निद्रा का अभाव रहेगा। मानहानि होने की आशंका है। आर्थिक योजनाओं में धन का निवेश हो सकता है। पड़ोसियों से किसी बात पर मतभेद की संभावना है। भविष्य को लेकर बेकार में चिंता करते रहना आपको बेचैन कर सकता है। मित्रों से मुलाकात होगी। कारोबार में अच्छी खबर मिलेगी। परिश्रम से इच्छित सफलता मिलेगी। शुभचिंतकों का हार्दिक सहयोग रहेगा। महत्वपूर्ण लोगों के साथ बातचीत करते वक़्त अपने शब्दों को गौर से चुनें। तुला :- आज पैसों के संबंध में बड़े फैसले के लिए किसी से सलाह लेनी पड़ सकती है। कारोबार में इजाफा होगा। आमदनी के नए माध्यम नजर आएंगे। किसी पुराने प्रोजेक्ट या काम को शुरु करने के लिए आज का दिन शुभ है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए किसी से सिफारिश करवानी पड़ सकती है। आत्मविश्वास से कार्य सिद्ध होंगे। आर्थिक योजनाएं सफलतापूर्वक सिद्ध होंगी। मानसिक प्रसन्नता रहेगी। वस्त्राभूषण हेतु खर्च होगा। सफलता हासिल करने के लिए समय के साथ अपने विचारों में बदलाव लाएं। इससे आपका दृष्टिकोण व्यापक होगा, समझ का दायरा बढ़ेगा, व्यक्तित्व में निखार आएगा और दिमाग विकसित होगा। वृश्चिक :- आज कार्यस्थल पर आपको सफलता मिलेगी। आपके ऑफिस में काम का बोझ बढ़ सकता है। व्यवसायिक प्रतिद्वंदी आज शांत रहेंगे। कार्यों में देरी होने की सम्भावना है। आज के दिन आपको थोडी बहुत प्रतिकूलताओं का सामना करना पड़ सकता है। व्यवसाय वर्ग से जुड़े हुए लोगों के लिए आज के दिन विदेश से लाभ प्राप्त हो सकते हैं। आपको इस अवसर का लाभ उठाने के लिए खुद को उसके अनुसार डालना होगा। आज के दिन आपके विरोधी भी दोस्ती का हाथ बढ़ाएंगे। जोखिम लेने से बचे। संयम रखे आपको सफलता जरूर मिलेगी। वाणी पर नियंत्रण रखें। आज आपकी सृजनात्मक शक्ति श्रेष्ठ रहेगी। धनु :- आज परिवार से भरपूर सहयोग मिलेगा। मित्र भी आपके पक्ष में खड़े रहकर आपकी मदद करते नजर आएंगे। भाग्य आपके साथ है और सफलता आपके कदम चूमेगी। आज रिश्तों को समय दें। दोस्तों और परिजनों से बात करते समय सोच समझकर बोलें, किसी भी प्रकार के विवाद से बचें। आज किसी अनजान शख्स से सलाह ना लें। धन का अधिक से अधिक खर्च होगा। अपना व्यवहार सकारात्मक बनाए रखें। आपको आज अच्छे से प्रदर्शन करना होगा जिस वजह से आपको सभी लोगों से अपने काम के लिए सराहना मिलेगी। जल्द ही सफलता के द्वार खुलेंगे। मकर :- आज आपको व्यापार-सम्बंधित कार्यों में लाभ होगा। आज का दिन आपके लिए सुखद समाचार ला सकता है। थोड़े प्रयत्न से आपको ज्यादा लाभ होगा। दिन के कामों को सेहत बाधित कर सकती है। विवाद सुलझाने का सही समय है। ऑफिस में संभलकर रहें वरना मुसीबत आएंगी। मुद्दों पर स्पष्टता से समस्याएं सुलझेगी। धैर्य से कार्य करें सफलता मिलेगी। धन का व्यय बढ़ेगा। अपनी दोस्ती सोच समझ कर करें। बुरे लोगो के संगत से बचे यह आपके लिए हानिकारक है। आज के दिन कार्यक्षेत्र में आप अपना आपा खो सकते हैं। संतान की जरूरतों पर ध्यान देना होगा। कुंभ :- आज आप आनन्द का अनुभव करेंगे। काम पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे। मेहनत भी बहुत रहेगी। कुसंगति से बचें। कार्यक्षेत्र में अपनी महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए आप हर संभव कोशिश कर सकते हैं। जितना धैर्य रखेंगे आपके लिए उतना ही बेहतर होगा। कार्यों में भाग्य का साथ प्राप्त होगा। आप पैसा बना सकते हैं, बशर्ते आप अपनी जमा-पूंजी पारम्परिक तौर पर निवेश करें। परिवार के लोगों के साथ हंसी-मजाक से दिन खुशनुमा बीत सकता है। किसी भी नए कार्यो में रूकावट पैदा हो सकती है। अतः आप इस समय नये कार्य को शुरू न करें। क्रोध को अपने उपर हावी न होंने दें अन्यथा बनी बनाई योजनाओं पर पीनी फिर सकता है। मीन :- आज अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। छोटी परेशानियां आपको घेरे रहेंगी। इस बात का विशेष ध्यान रखें की आपके फैसले से ऐसी किसी व्यक्ति को दुःख न हो जो आप पर भावनात्मक रूप से निर्भर है। आज आपका विशेष ध्यान दोस्तों पर रहेगा। आपकी सोच-विचार में असामान्य स्पष्टता रहेगी। किसी पुराने दोस्त से या तो आप मिलेंगे या उनमे से कोई आपसे मिलने आज अचानक चला आएगा। बिजनेस में नुकसान होने की आशंका है। आज का दिन सभी गलतफहमी को दूर करने और अपने रिश्ते के जीवन की शक्ति को नवीनीकृत करने के लिए एकदम सही है।
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केजरीवाल ने सचेत किया कि परीक्षाएं आयोजित करने से संक्रमण व्यापक स्तर पर फैल सकता है और परीक्षा केंद्रों में संक्रमण के बड़ी संख्या में मामले सामने आ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सीबीएसई ऑनलाइन परीक्षाओं और आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर छात्रों को अगली कक्षाओं में भेजने जैसे तरीकों को खोज सकता है।
सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं चार मई से आरंभ होंगी। कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के मद्देनजर इस परीक्षाओं को रद्द या स्थगित करने की मांग तेजी से बढ़ रही है।
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केजरीवाल ने सचेत किया कि परीक्षाएं आयोजित करने से संक्रमण व्यापक स्तर पर फैल सकता है और परीक्षा केंद्रों में संक्रमण के बड़ी संख्या में मामले सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सीबीएसई ऑनलाइन परीक्षाओं और आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर छात्रों को अगली कक्षाओं में भेजने जैसे तरीकों को खोज सकता है। सीबीएसई की दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं चार मई से आरंभ होंगी। कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के मद्देनजर इस परीक्षाओं को रद्द या स्थगित करने की मांग तेजी से बढ़ रही है।
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सच्ची घटना से प्रेरित ये फिल्म इंसानियत और उम्मीद की सशक्त दास्तान है।
फिल्म में कई ऐसे सीन है जहां बॉलीवुड अंदाज के ड्रामा की गुंजाइश थी लेकिन ज़बरदस्ती के डायलॉग और एक्शन के बिना फिल्म असलियत के करीब रखी गई है। ये कहीं भी खिंचती या बोर नहीं करती। इस कहानी में आप जैसे उन भारतीयों के साथ हो जाते हैं जो दूर कहीं जिंदगी और मौत के बीच फंसे हैं। फिल्म की रिसर्च और 1990 के कुवैत का री-क्रिएशन पर बेहद मेहनत की गई है। फिल्म में प्रिया सेठ की सिनेमैटोग्राफी भी कमाल की है।
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सच्ची घटना से प्रेरित ये फिल्म इंसानियत और उम्मीद की सशक्त दास्तान है। फिल्म में कई ऐसे सीन है जहां बॉलीवुड अंदाज के ड्रामा की गुंजाइश थी लेकिन ज़बरदस्ती के डायलॉग और एक्शन के बिना फिल्म असलियत के करीब रखी गई है। ये कहीं भी खिंचती या बोर नहीं करती। इस कहानी में आप जैसे उन भारतीयों के साथ हो जाते हैं जो दूर कहीं जिंदगी और मौत के बीच फंसे हैं। फिल्म की रिसर्च और एक हज़ार नौ सौ नब्बे के कुवैत का री-क्रिएशन पर बेहद मेहनत की गई है। फिल्म में प्रिया सेठ की सिनेमैटोग्राफी भी कमाल की है।
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नीति -आदर्श -सिद्धांत की दुहाई देकर देश की राजनीति की दिशा बदलने का दावा करने वाले "आप" तो बड़े वो निकले . . आपने दिल्ली का दिल तोड़ दिया , बड़ी उम्मीद से झोली भर -भर के दिल्लीवासियो ने दुआएं देकर आपका ऐतिहासिक विजय तिलक किया था . औरों की तरह आपने भी धोका दिया . आप भी बईमान निकले . २ साल में ही आपका दम फूल गया और खांसते -खांसते आप हांफने लगे .
चुनाव के समय हर दूसरी पार्टी के नेताओ पर ऐसे -वैसे जाने कैसे- कैसे आरोप लगाए आपने . . अपशब्दों तक का प्रयोग किया . . और अब आपके विधायक -मंत्रियो पर रिश्वत , नारी उत्पीडन , चार सो बीसी के आरोप लग रहे है . एक दर्जन "आप"के लोग हवालात और जेल की हवा खा चुके है कई और जेल जाने का रास्ता बना रहे है .
यह सही है की संसद और विधानसभाओं में ३०-३५ प्रतिशत जन प्रतिनिधि गंभीर और जघन्य आरोपो में नामजद है और उन पर कार्यवाही नहीं हुई , ये भी सही है की देश के प्रधान सेवक ने संसद में अपने प्रथम संबोधन में कहा था " संसद " में ऐसे वैसे आरोपो में नामजद सांसदों पर क़ानून बनाकर संसद से स्वच्छता अभियान शुरू किया जाएगा . . लेकिन ? जुम्लेबाजियो की राजनीति करते -करते देश के नागरिकों के हाथ में झाड़ू पकड़ा दी गयी .
दूसरों के पाप गिनाने से आप पुण्यात्मा नहीं हो जाते . . ये कहना भी पर्याप्त नहीं है की देखो दूसरो से हमारी पार्टी की कमीज कम गन्दी है . "आप" की बड़ी -बड़ी बातों , दर्शन और नीतियों से दिल्ली ही नहीं पूरे देश में नई हवा चली थी . . मतदाताओं को टोपी पहिनाने वाले कई राज दल आपकी तरह टोपी पहनने लगे थे . . लेकिन परस्पर प्रतिद्वंदी राजनीती करते करते "आप" भी दुसरे राजदलो की कूटनीति ,छल -प्रपंच लीला में शामिल हो गए . भाषा -मर्यादा की सीमा लांघकर आपने हर दूसरी पार्टी के नेताओं पर ऊँगली उठाई , अफसर -पूंजीपतियों को भी गरियाया . . ये कहावत जानते हुए की जिनके खुदके घर शीशे के होते है वो दूसरों के घर पर पत्थर नहीं फेंका करते . . . या " जिनके घर शीसे के होते है वे बत्तियां बुझा कर कपडे बदलते है " .... लेकिन "आप"के मंत्री तो सार्वजनिक तोर पर जो नहीं बोलना चाहिए , बोलते रहते है , कैमरे के सामने जो नहीं करना चाहिए . . कर देते है ...और मजा यह है पकडे भी जाते है .
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नीति -आदर्श -सिद्धांत की दुहाई देकर देश की राजनीति की दिशा बदलने का दावा करने वाले "आप" तो बड़े वो निकले . . आपने दिल्ली का दिल तोड़ दिया , बड़ी उम्मीद से झोली भर -भर के दिल्लीवासियो ने दुआएं देकर आपका ऐतिहासिक विजय तिलक किया था . औरों की तरह आपने भी धोका दिया . आप भी बईमान निकले . दो साल में ही आपका दम फूल गया और खांसते -खांसते आप हांफने लगे . चुनाव के समय हर दूसरी पार्टी के नेताओ पर ऐसे -वैसे जाने कैसे- कैसे आरोप लगाए आपने . . अपशब्दों तक का प्रयोग किया . . और अब आपके विधायक -मंत्रियो पर रिश्वत , नारी उत्पीडन , चार सो बीसी के आरोप लग रहे है . एक दर्जन "आप"के लोग हवालात और जेल की हवा खा चुके है कई और जेल जाने का रास्ता बना रहे है . यह सही है की संसद और विधानसभाओं में तीस-पैंतीस प्रतिशत जन प्रतिनिधि गंभीर और जघन्य आरोपो में नामजद है और उन पर कार्यवाही नहीं हुई , ये भी सही है की देश के प्रधान सेवक ने संसद में अपने प्रथम संबोधन में कहा था " संसद " में ऐसे वैसे आरोपो में नामजद सांसदों पर क़ानून बनाकर संसद से स्वच्छता अभियान शुरू किया जाएगा . . लेकिन ? जुम्लेबाजियो की राजनीति करते -करते देश के नागरिकों के हाथ में झाड़ू पकड़ा दी गयी . दूसरों के पाप गिनाने से आप पुण्यात्मा नहीं हो जाते . . ये कहना भी पर्याप्त नहीं है की देखो दूसरो से हमारी पार्टी की कमीज कम गन्दी है . "आप" की बड़ी -बड़ी बातों , दर्शन और नीतियों से दिल्ली ही नहीं पूरे देश में नई हवा चली थी . . मतदाताओं को टोपी पहिनाने वाले कई राज दल आपकी तरह टोपी पहनने लगे थे . . लेकिन परस्पर प्रतिद्वंदी राजनीती करते करते "आप" भी दुसरे राजदलो की कूटनीति ,छल -प्रपंच लीला में शामिल हो गए . भाषा -मर्यादा की सीमा लांघकर आपने हर दूसरी पार्टी के नेताओं पर ऊँगली उठाई , अफसर -पूंजीपतियों को भी गरियाया . . ये कहावत जानते हुए की जिनके खुदके घर शीशे के होते है वो दूसरों के घर पर पत्थर नहीं फेंका करते . . . या " जिनके घर शीसे के होते है वे बत्तियां बुझा कर कपडे बदलते है " .... लेकिन "आप"के मंत्री तो सार्वजनिक तोर पर जो नहीं बोलना चाहिए , बोलते रहते है , कैमरे के सामने जो नहीं करना चाहिए . . कर देते है ...और मजा यह है पकडे भी जाते है .
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किस निश्चित विचार में बैठकर व्यवस्था सोच रहे हो ? सद्गुण पर विश्वास करो। अविश्वास मत करो। शास्त्र मे कहा हैसच्चं भगवयो ।
यह गणधर का वचन है कि सत्य भगवान् है । सत्य की शरण लेना भगवान् की शरण लेना है । सत्य के प्रभाव से चमकती हुई तलवार फूल के सदृश नरम और विष, अमृत के समान गुणदायक हो जाते है । जिस सत्य की इतनी शक्ति है, उस पर असत्य के बराबर भी विश्वास नहीं करते ? कितने दुःख की बात है ।
बड़ो की देखा-देखी बच्चे भी झूठ बोलते हैं। वे अकसर अपने माँ-बाप से ही यह सबक सीखते है। पहले बच्चो को झूठी बातो मे आनन्द आता है और फिर वे स्वयं झूठ बोलने मे कुशल हो जाते हैं। इस प्रकार झूठ की परम्परा चल रही है।
बकील की स्त्री ने कहासत्य पर विश्वास रखना चाहिए । यदि सत्य से खाने को मिलेगा तो खाएँगे, अन्यथा भूखे रह लेगे । आप आज से झूठ का आसरा न लेने की प्रतिज्ञा कर लीजिए । हम लोग भूखे नही रहेगे, सत्य का प्रताप बड़ा है।
वकील पर पत्नी का प्रभाव पड़ा और उसने झूठे मुकदमे लेना त्याग दिया।
अगर बहिनें मेरी बात मान कर अपने अपने पति को उपदेश दे तो वे आप लोगो को कुछ ही समय में सुधार कर
सन्मार्ग पर ला सकती हैं। मगर कठिनाई तो यह है कि बहिनें भी सोने मे ही स्वर्ग समझती है, सोने मे ही सुख मान बैठी हैं। वे पति को उपदेश दे तो कैसे ? एक कवि ने कहा हैवह दरिद्रता होउ करत सज्जन कला ! अनाचार सु राज्य मिले तो नहिं भला ।
सज्जनता पूर्वक व्यवहार करते और रखते हुए यदि हम दरिद्र बन जाएँ, तो वह दरिद्रता नहीं, स्वर्ग का निवास है। पर झूठ-कपट, दगा आदि से राज्य मिलता हो तो वह किसी काम का नहीं ।
इस प्रकार का विश्वास और प्रेम चाहिए। तभी हृदय मे सन्तोष उत्पन्न होता है ।
कवि ने कहा है - जो शरीर तप के कारण दुर्बल है वह दबी हुई अग्नि के समान देदीप्यमान है। तपधारी मुनि का दुर्बल शरीर भी देवो के शरीर को लजाने वाला है।
तप की महिमा अद्भुत है । तप करने से न रोग होता है न दुःख होता है । यद्यपि तप से शरीर निर्बल दिखाई देता है परन्तु आत्मा निर्बल होने के बदले बलिष्ठ होता है।
जिस मनुष्य के शरीर पर सूजन चढ़ जाती है, जिसके हाथ, पाँव और सारा शरीर मोटा और चिकना हो जाता है, उसके लिए लोग कहते हैं - यह तो मरा ! ऐसे आदमी का मोटे होने के कारण कोई सत्कार करता है ?
इसी प्रकार जो अन्याय करके मोटे-ताजे बने हैं, उनके प्रति ज्ञानियों के हृदय में कोई आदरभाव नहीं होता। अगर कोई सत्य के सेवन से दुबले भी हुए ते ज्ञानी उस दुबले का सत्कार करेगे ।
राम का राज्य छूटा। वे वनवासी होकर घूमते-फिरे । परन्तु किसी ने उन्हें बुरा कहा ? इससे उनकी प्रतिष्ठा कम हुई ? 'नही !"
हरिश्चन्द्र ने अपना राजपाट दान देकर चाण्डाल की नौकरी की। उनकी रानी तारा को ब्राह्मण के घर वर्त्तन मांजने और पानी भरने की सेवा करनी पड़ी। यह सब किसके लिए ? 'सत्य के लिए ही !'
तो कुछ लोग कहते है कि हरिश्चन्द्र को दान देने से दु.ख भोगना पड़ा । कुपात्र को दान देने से भटकना पड़ा और चाण्डाल का सेवक बनना पड़ा ! ऐसा कहने वालो से क्या कहा जाय ? इस पर विस्तृत चर्चा करने का यहाँ अवकाश नही है। सिर्फ इतना कह देना पर्याप्त है कि कष्ट पड़ने के कारण ही कोई बुरा या पापी नहीं हो जाता। अंजना को क्या कष्ट सहन नहीं करने पड़े थे ? फिर क्या उसका शील भी पाप मे गिना जायगा ?
कमलावती का हाथ शील के लिए काटा गया, पर उसने शील का त्याग नहीं किया । शील की रक्षा के लिए चन्दनवाला विकी । उसने शील नही त्यागा तो क्या पाप किया था ?
सीता, अंजना, कमलावती, चन्दनबाला आदि महान् सत्तियों ने अपने शील की रक्षा के लिए कष्ट सहन किये थे । कष्ट
सहने के कारण शील पालने को अगर कोई पाप कहता है तो अन्याय करता है। इसी प्रकार दान देने वालों को अगर कोई पाप करने वाला कहता है, उनका तिरस्कार करता है तो ऐसा करना ही महापाप है।
मित्रो ! आप लोगों से कुछ और न बन पड़े तो कम से कम इस पाप से तो बचो। जिस दान का अनुमोदन असंख्य लोग करते हैं, उसको अगर मुट्ठी भर लोग पाप बतलाते हैं तो वह उनका दुर्भाग्य है । कामना करो कि उन्हें भी सुबुद्धि प्राप्त हो ।
दान मे पाप बताने वाले, दया करने में भी पाप कहते हैं। पर नेमिनाथ भगवान् के चरित्र को देखो। उन्हें विवाह नहीं करना था, फिर भी बरात सजाई। समारभ किया और प्रत्यक्ष
रूप से, मारे जाने वाले जीवों की रक्षा का बोध दिया । अन्त में दान देकर दान की महिमा भी प्रकट की।
तात्पर्य यह है कि दुर्गुणो का त्याग करने पर ही पर मात्मा के प्रति आपका प्रेम होगा और परमात्मप्रेम से आपका परमकल्याण होगा।
परमात्मा की स्तुति करने वालों को परमात्मा के नामस्मरण की महिमा पूरी तरह समझ लेनी चाहिए। नाम में क्या गुण है और क्या शक्ति है, इस बात को समझ कर परमात्मा का भजन किया जाय तो आत्मा में निराली ही जागृति हो जाती है।
नाम लेने का अधिकारी कौन है ? अर्थात् नाम कौन ले सकता है ? इस सम्बन्ध मे पद्मप्रभ की प्रार्थना मे कहा है कि धीवर, भील, कसाई, गोघातक, स्त्रीघातक, बाल-घातक, वेश्या, 'घुगल, छिनार, जुआरी, चोर, डाकू आदि कोई कैसा भी कुकर्मी क्यो न हो, सभी को भगवान् का भजन करने का अधिकार है। परन्तु वह पापो को बढ़ाने के लिए नहीं किन्तु घटाने के लिए है। जिसे रोग न हो वह दवा क्यों ले ? इसी प्रकार जिसमें पाप न हो उसे भजन करने की क्या है ? परन्तु जैसे दवा रोग बढ़ाने के लिए नहीं वरन् घटाने के लिए ली जाती है, इसी प्रकार भजन पाप बढ़ाने के लिए नहीं करना चाहिए - घटाने के लिए करना चाहिए । इस दृष्टि से जो परमात्मा का भजन करता है वह कैसा भी पापी क्यो न हो, उसकी आत्मा पवित्र बन जाती है। आजकल प्रायः पाप बढ़ाने के लिए परमात्मा का भजन किया जाता है, अर्थात् ऊपर से अपने आपको धर्मात्मा प्रकट करने के लिए लोग भजन करते हैं और भीतर कुछ और ही रचना होती है। ऐसा भजन करने वाले का उद्धार नहीं हो सकता ।
परमात्मा का भजन करना, उसके नाम को स्मरण करना, अपनी आत्मा को परमात्मा के सामने उसी तरह खड़ा करना है, जैसे ज्ञानी पुरुष अपनी आत्मा को परमात्मा के समक्ष खड़ी कर देते है। जिस प्रकार राजा के सामने अपने अपराध को स्वीकार करने से प्रायश्चित्त हो जाता है, उसी प्रकार परमात्मा के समक्ष अपने अपराध को शुद्ध अन्तःकरण से प्रकट कर देने पर प्रायचित्त हो जाता है।
इस प्रकार अपराध स्वीकार करने वाले के साहस पर जरा विचार करो। जो वीर होगा वही राजा के सामने अपना
अपराध स्वीकार करेगा । विचार कीजिए कि परमात्मा राजा से छोटा है या बड़ा ? अगर बड़ा है तो निष्कपट भाव से उससे प्रार्थना करो कि- प्रभो ! ऐसी कृपा कर, जिससे मै पापो से छुटकारा पा लूँ । ऐसा निश्चय करके परमात्मा को भजो तो अवश्य पापों से छुटकारा मिल जायगा ।
पाप से छूटने के लिए सुधर्मा स्वामी ने जम्बू स्वामी से क्या कहा ? उन्होने जम्बू स्वामी से कहा - 'भगवान् महावीर का बतलाया हुआ ज्ञान मैं तुझे सुनाता हूँ। और उन्होंने भगवान् का उपदेश जम्बूस्वामी को बतलाया। उस उपदेश का सार यह है -
पटमं हो अहंमा बितियं सचवयगति पन्नत्तं । दत्तमन्नायसंवरो य, बंमचेरयमारिग्गदत्तं च । तत्थ पढमं अहिंसा, तस-थावर सञ्चभूयखेमकरी । तोमे सभावणाओ किचि वोच्छ्रं गुरपदोसं ।।
सत्यभाषा, श्रदत्तादान परित्याग, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, यह पाँच व्रत भगवान् के उपदेश का सार है । इनमे अहसा का स्थान पहला है। अहिंसा और स्थावर सभी प्राणियों का क्षम करने वाली है।
यहाँ अहसा पहले बतलाई गई है। अहसा का अर्थ हैहिंसा न करना अर्थात् जिसमें किसी भी प्राणी की हानि न हो ।
प्रश्न किया जा सकता है -- प्राणी किसे कहना चाहिए ? उत्तर यह है । भगवान ने शास्त्र मे दस प्राण कहे है - (१) श्रोत्रेन्द्रियबलप्राण (२) चतुरिन्द्रियबलप्राण ( ३) घ्राणेन्द्रियबलप्राण
(४) रसनेन्द्रियबलप्राण (५) स्पर्शनेन्द्रिय बलप्राण (६) मनोबलप्राण (७) वचनबलप्राण (८) कायबलप्रारण (६) श्वासोच्छ्वासबलप्राण और (१०) आयुष्यबलप्राण । यह आयुष्य-प्राण शेष सब प्राणोका आधारभूत है । जिसमे यह प्रारण हो वह प्राणी कहलाता है। किसी मे पूरे और किसी मे अधूरे प्राण होते हैं। संज्ञी पंचेन्द्रिय के दसो प्राण होते हैं, असंज्ञी पंचेन्द्रिय के नौ प्रारण होते है, चौ-इन्द्रिय जीवों के आठ, त्रीन्द्रियों के सात द्वीन्द्रिय के छह और एकेन्द्रिय के चार प्रारण होते हैं। इन प्राणो का जिससे नाश हो वह हिंसा और जिससे नाश न हो वह
शास्त्र मे सभी कुछ स्पष्ट कर दिया गया है परन्तु आज कल कुछ लोगो ने एक नया तर्क खोज निकाला है । वे यह तो कहते है कि प्राणो का नाश करना हिंसा और नाश न करना अहिंसा है, मगर रक्षा क्या है ? रक्षा हिंसा है या हिंसा ?
कल्पना कीजिए, एक आदमी तलवार लेकर बकरा मारता है। दूसरा चुपचाप खड़ा है - न मारता है और न रक्षा करता है । तीसरा आदमी कहता है- मत मारो, अर्थात् वह बकरे की रक्षा करता है। अब इस तीसरे रक्षा करने वाले को क्या कहा जाय ? हिसक या अहिंसक ? पहला आदमी हिंसक है और दूसरा सिक, क्योंकि वह मारता नहीं है, लेकिन यह तीसरा मनुष्य किस गिनती में गिना जाय ?
ज्ञानीजन कहते हैं किसका अर्थ है- जिसमे हिंसा न हो, अथवा जो हिमा का विरोधी हो । अब वह तीसरा पुरुष, जिसने जीव की रक्षा की है और जीव को मारा नहीं है, उसे क्या हिंसक कहा जा सकता है ?
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किस निश्चित विचार में बैठकर व्यवस्था सोच रहे हो ? सद्गुण पर विश्वास करो। अविश्वास मत करो। शास्त्र मे कहा हैसच्चं भगवयो । यह गणधर का वचन है कि सत्य भगवान् है । सत्य की शरण लेना भगवान् की शरण लेना है । सत्य के प्रभाव से चमकती हुई तलवार फूल के सदृश नरम और विष, अमृत के समान गुणदायक हो जाते है । जिस सत्य की इतनी शक्ति है, उस पर असत्य के बराबर भी विश्वास नहीं करते ? कितने दुःख की बात है । बड़ो की देखा-देखी बच्चे भी झूठ बोलते हैं। वे अकसर अपने माँ-बाप से ही यह सबक सीखते है। पहले बच्चो को झूठी बातो मे आनन्द आता है और फिर वे स्वयं झूठ बोलने मे कुशल हो जाते हैं। इस प्रकार झूठ की परम्परा चल रही है। बकील की स्त्री ने कहासत्य पर विश्वास रखना चाहिए । यदि सत्य से खाने को मिलेगा तो खाएँगे, अन्यथा भूखे रह लेगे । आप आज से झूठ का आसरा न लेने की प्रतिज्ञा कर लीजिए । हम लोग भूखे नही रहेगे, सत्य का प्रताप बड़ा है। वकील पर पत्नी का प्रभाव पड़ा और उसने झूठे मुकदमे लेना त्याग दिया। अगर बहिनें मेरी बात मान कर अपने अपने पति को उपदेश दे तो वे आप लोगो को कुछ ही समय में सुधार कर सन्मार्ग पर ला सकती हैं। मगर कठिनाई तो यह है कि बहिनें भी सोने मे ही स्वर्ग समझती है, सोने मे ही सुख मान बैठी हैं। वे पति को उपदेश दे तो कैसे ? एक कवि ने कहा हैवह दरिद्रता होउ करत सज्जन कला ! अनाचार सु राज्य मिले तो नहिं भला । सज्जनता पूर्वक व्यवहार करते और रखते हुए यदि हम दरिद्र बन जाएँ, तो वह दरिद्रता नहीं, स्वर्ग का निवास है। पर झूठ-कपट, दगा आदि से राज्य मिलता हो तो वह किसी काम का नहीं । इस प्रकार का विश्वास और प्रेम चाहिए। तभी हृदय मे सन्तोष उत्पन्न होता है । कवि ने कहा है - जो शरीर तप के कारण दुर्बल है वह दबी हुई अग्नि के समान देदीप्यमान है। तपधारी मुनि का दुर्बल शरीर भी देवो के शरीर को लजाने वाला है। तप की महिमा अद्भुत है । तप करने से न रोग होता है न दुःख होता है । यद्यपि तप से शरीर निर्बल दिखाई देता है परन्तु आत्मा निर्बल होने के बदले बलिष्ठ होता है। जिस मनुष्य के शरीर पर सूजन चढ़ जाती है, जिसके हाथ, पाँव और सारा शरीर मोटा और चिकना हो जाता है, उसके लिए लोग कहते हैं - यह तो मरा ! ऐसे आदमी का मोटे होने के कारण कोई सत्कार करता है ? इसी प्रकार जो अन्याय करके मोटे-ताजे बने हैं, उनके प्रति ज्ञानियों के हृदय में कोई आदरभाव नहीं होता। अगर कोई सत्य के सेवन से दुबले भी हुए ते ज्ञानी उस दुबले का सत्कार करेगे । राम का राज्य छूटा। वे वनवासी होकर घूमते-फिरे । परन्तु किसी ने उन्हें बुरा कहा ? इससे उनकी प्रतिष्ठा कम हुई ? 'नही !" हरिश्चन्द्र ने अपना राजपाट दान देकर चाण्डाल की नौकरी की। उनकी रानी तारा को ब्राह्मण के घर वर्त्तन मांजने और पानी भरने की सेवा करनी पड़ी। यह सब किसके लिए ? 'सत्य के लिए ही !' तो कुछ लोग कहते है कि हरिश्चन्द्र को दान देने से दु.ख भोगना पड़ा । कुपात्र को दान देने से भटकना पड़ा और चाण्डाल का सेवक बनना पड़ा ! ऐसा कहने वालो से क्या कहा जाय ? इस पर विस्तृत चर्चा करने का यहाँ अवकाश नही है। सिर्फ इतना कह देना पर्याप्त है कि कष्ट पड़ने के कारण ही कोई बुरा या पापी नहीं हो जाता। अंजना को क्या कष्ट सहन नहीं करने पड़े थे ? फिर क्या उसका शील भी पाप मे गिना जायगा ? कमलावती का हाथ शील के लिए काटा गया, पर उसने शील का त्याग नहीं किया । शील की रक्षा के लिए चन्दनवाला विकी । उसने शील नही त्यागा तो क्या पाप किया था ? सीता, अंजना, कमलावती, चन्दनबाला आदि महान् सत्तियों ने अपने शील की रक्षा के लिए कष्ट सहन किये थे । कष्ट सहने के कारण शील पालने को अगर कोई पाप कहता है तो अन्याय करता है। इसी प्रकार दान देने वालों को अगर कोई पाप करने वाला कहता है, उनका तिरस्कार करता है तो ऐसा करना ही महापाप है। मित्रो ! आप लोगों से कुछ और न बन पड़े तो कम से कम इस पाप से तो बचो। जिस दान का अनुमोदन असंख्य लोग करते हैं, उसको अगर मुट्ठी भर लोग पाप बतलाते हैं तो वह उनका दुर्भाग्य है । कामना करो कि उन्हें भी सुबुद्धि प्राप्त हो । दान मे पाप बताने वाले, दया करने में भी पाप कहते हैं। पर नेमिनाथ भगवान् के चरित्र को देखो। उन्हें विवाह नहीं करना था, फिर भी बरात सजाई। समारभ किया और प्रत्यक्ष रूप से, मारे जाने वाले जीवों की रक्षा का बोध दिया । अन्त में दान देकर दान की महिमा भी प्रकट की। तात्पर्य यह है कि दुर्गुणो का त्याग करने पर ही पर मात्मा के प्रति आपका प्रेम होगा और परमात्मप्रेम से आपका परमकल्याण होगा। परमात्मा की स्तुति करने वालों को परमात्मा के नामस्मरण की महिमा पूरी तरह समझ लेनी चाहिए। नाम में क्या गुण है और क्या शक्ति है, इस बात को समझ कर परमात्मा का भजन किया जाय तो आत्मा में निराली ही जागृति हो जाती है। नाम लेने का अधिकारी कौन है ? अर्थात् नाम कौन ले सकता है ? इस सम्बन्ध मे पद्मप्रभ की प्रार्थना मे कहा है कि धीवर, भील, कसाई, गोघातक, स्त्रीघातक, बाल-घातक, वेश्या, 'घुगल, छिनार, जुआरी, चोर, डाकू आदि कोई कैसा भी कुकर्मी क्यो न हो, सभी को भगवान् का भजन करने का अधिकार है। परन्तु वह पापो को बढ़ाने के लिए नहीं किन्तु घटाने के लिए है। जिसे रोग न हो वह दवा क्यों ले ? इसी प्रकार जिसमें पाप न हो उसे भजन करने की क्या है ? परन्तु जैसे दवा रोग बढ़ाने के लिए नहीं वरन् घटाने के लिए ली जाती है, इसी प्रकार भजन पाप बढ़ाने के लिए नहीं करना चाहिए - घटाने के लिए करना चाहिए । इस दृष्टि से जो परमात्मा का भजन करता है वह कैसा भी पापी क्यो न हो, उसकी आत्मा पवित्र बन जाती है। आजकल प्रायः पाप बढ़ाने के लिए परमात्मा का भजन किया जाता है, अर्थात् ऊपर से अपने आपको धर्मात्मा प्रकट करने के लिए लोग भजन करते हैं और भीतर कुछ और ही रचना होती है। ऐसा भजन करने वाले का उद्धार नहीं हो सकता । परमात्मा का भजन करना, उसके नाम को स्मरण करना, अपनी आत्मा को परमात्मा के सामने उसी तरह खड़ा करना है, जैसे ज्ञानी पुरुष अपनी आत्मा को परमात्मा के समक्ष खड़ी कर देते है। जिस प्रकार राजा के सामने अपने अपराध को स्वीकार करने से प्रायश्चित्त हो जाता है, उसी प्रकार परमात्मा के समक्ष अपने अपराध को शुद्ध अन्तःकरण से प्रकट कर देने पर प्रायचित्त हो जाता है। इस प्रकार अपराध स्वीकार करने वाले के साहस पर जरा विचार करो। जो वीर होगा वही राजा के सामने अपना अपराध स्वीकार करेगा । विचार कीजिए कि परमात्मा राजा से छोटा है या बड़ा ? अगर बड़ा है तो निष्कपट भाव से उससे प्रार्थना करो कि- प्रभो ! ऐसी कृपा कर, जिससे मै पापो से छुटकारा पा लूँ । ऐसा निश्चय करके परमात्मा को भजो तो अवश्य पापों से छुटकारा मिल जायगा । पाप से छूटने के लिए सुधर्मा स्वामी ने जम्बू स्वामी से क्या कहा ? उन्होने जम्बू स्वामी से कहा - 'भगवान् महावीर का बतलाया हुआ ज्ञान मैं तुझे सुनाता हूँ। और उन्होंने भगवान् का उपदेश जम्बूस्वामी को बतलाया। उस उपदेश का सार यह है - पटमं हो अहंमा बितियं सचवयगति पन्नत्तं । दत्तमन्नायसंवरो य, बंमचेरयमारिग्गदत्तं च । तत्थ पढमं अहिंसा, तस-थावर सञ्चभूयखेमकरी । तोमे सभावणाओ किचि वोच्छ्रं गुरपदोसं ।। सत्यभाषा, श्रदत्तादान परित्याग, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, यह पाँच व्रत भगवान् के उपदेश का सार है । इनमे अहसा का स्थान पहला है। अहिंसा और स्थावर सभी प्राणियों का क्षम करने वाली है। यहाँ अहसा पहले बतलाई गई है। अहसा का अर्थ हैहिंसा न करना अर्थात् जिसमें किसी भी प्राणी की हानि न हो । प्रश्न किया जा सकता है -- प्राणी किसे कहना चाहिए ? उत्तर यह है । भगवान ने शास्त्र मे दस प्राण कहे है - श्रोत्रेन्द्रियबलप्राण चतुरिन्द्रियबलप्राण घ्राणेन्द्रियबलप्राण रसनेन्द्रियबलप्राण स्पर्शनेन्द्रिय बलप्राण मनोबलप्राण वचनबलप्राण कायबलप्रारण श्वासोच्छ्वासबलप्राण और आयुष्यबलप्राण । यह आयुष्य-प्राण शेष सब प्राणोका आधारभूत है । जिसमे यह प्रारण हो वह प्राणी कहलाता है। किसी मे पूरे और किसी मे अधूरे प्राण होते हैं। संज्ञी पंचेन्द्रिय के दसो प्राण होते हैं, असंज्ञी पंचेन्द्रिय के नौ प्रारण होते है, चौ-इन्द्रिय जीवों के आठ, त्रीन्द्रियों के सात द्वीन्द्रिय के छह और एकेन्द्रिय के चार प्रारण होते हैं। इन प्राणो का जिससे नाश हो वह हिंसा और जिससे नाश न हो वह शास्त्र मे सभी कुछ स्पष्ट कर दिया गया है परन्तु आज कल कुछ लोगो ने एक नया तर्क खोज निकाला है । वे यह तो कहते है कि प्राणो का नाश करना हिंसा और नाश न करना अहिंसा है, मगर रक्षा क्या है ? रक्षा हिंसा है या हिंसा ? कल्पना कीजिए, एक आदमी तलवार लेकर बकरा मारता है। दूसरा चुपचाप खड़ा है - न मारता है और न रक्षा करता है । तीसरा आदमी कहता है- मत मारो, अर्थात् वह बकरे की रक्षा करता है। अब इस तीसरे रक्षा करने वाले को क्या कहा जाय ? हिसक या अहिंसक ? पहला आदमी हिंसक है और दूसरा सिक, क्योंकि वह मारता नहीं है, लेकिन यह तीसरा मनुष्य किस गिनती में गिना जाय ? ज्ञानीजन कहते हैं किसका अर्थ है- जिसमे हिंसा न हो, अथवा जो हिमा का विरोधी हो । अब वह तीसरा पुरुष, जिसने जीव की रक्षा की है और जीव को मारा नहीं है, उसे क्या हिंसक कहा जा सकता है ?
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फिल्म गुड न्यूज में उनके साथ करीना कपूर खान, दिलजीत दोसांझ और कियारा आडवाणी ने काम किया है। इस फिल्म के ट्रेलर को फैंस ने जमकर पसंद किया था।
बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार एक के बाद एक हिट फिल्म फैंस के सामने पेश कर रहे हैं। वह 2019 के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले एक्टर भी बन गए हैं। जब जल्द वह फिल्म गुड न्यूज में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म के प्रमोशन में इन दिनों वह बिजी भी चल रहे हैं। हाल ही में फिल्म का एक डायलॉग प्रोमो रिलीज किया गया है जिस पर अक्षय ट्रोल हो रहे हैं।
फिल्म गुड न्यूज में उनके साथ करीना कपूर खान, दिलजीत दोसांझ और कियारा आडवाणी ने काम किया है। इस फिल्म के ट्रेलर को फैंस ने जमकर पसंद किया था। लेकिन अब ट्विटर पर फिल्म के डायलॉग को लेकर विवाद छिड़ गया है। जिसके बाद लोग अक्षय कुमार को ट्रोल कर रहे हैं।
ट्विटर पर यूजर्स ने गुड न्यूज के दूसरे ट्रेलर में अक्षय कुमार पर भगवान राम का अपमान करने का आरोप लगाया है। दरअसल, ट्रेलर में दिखाया कि एक शख्स कहता है, मेरे बच्चे का नाम होला राम है क्योंकि, यह होली के दिन पैदा हुआ था। ' इसपर अक्षय ने कहा, 'अच्छा हुआ लोहड़ी के दिन पैदा नहीं हुआ।
इसमें एक डबल मीनिंग जोक सुनने को मिलता है, जिसे सुनकर कुछ लोग नाराज हो गए हैं। इसके बाद फैंस ने अक्षय कुमार की क्लास लगा दी है। अक्षय को ट्रोल किए जाने के बाद बाद ट्विटर पर #AKSHAYABUSESLORDRAMA ट्रेंड करने लगा ।
But how dare you to Abuse Indian religion's and Hindu gods of India?
We indians will not tolerate it at all.
Hindu brother's Lord ram for cheap humour.
Shame on you deshdrohi Canadian.
But how dare you to Abuse Indian religion's and Hindu gods of India?
We indians will not tolerate it at all.
But Criminal Salman khan PR making fake paid news against Innocent Akshay.
Akshay kumar is true Nationalist.
Akshay kumar is true Nationalist.
He respect India from bottom of heart,
He respect Indian Army,
He respect India from bottom of heart,
He respect Indian Army,
आपको बता दें कि इस फिल्म को करण जौहर प्रोड्यूसर कर रहे हैं। वहीं फिल्म का निर्देशन राज मेहता ने किया है। यह फिल्म 27 दिसबंर को रिलीज होने वाली है। फिल्म के गाने दर्शकों को काफी पसंद आ रहे हैं।
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फिल्म गुड न्यूज में उनके साथ करीना कपूर खान, दिलजीत दोसांझ और कियारा आडवाणी ने काम किया है। इस फिल्म के ट्रेलर को फैंस ने जमकर पसंद किया था। बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार एक के बाद एक हिट फिल्म फैंस के सामने पेश कर रहे हैं। वह दो हज़ार उन्नीस के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले एक्टर भी बन गए हैं। जब जल्द वह फिल्म गुड न्यूज में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म के प्रमोशन में इन दिनों वह बिजी भी चल रहे हैं। हाल ही में फिल्म का एक डायलॉग प्रोमो रिलीज किया गया है जिस पर अक्षय ट्रोल हो रहे हैं। फिल्म गुड न्यूज में उनके साथ करीना कपूर खान, दिलजीत दोसांझ और कियारा आडवाणी ने काम किया है। इस फिल्म के ट्रेलर को फैंस ने जमकर पसंद किया था। लेकिन अब ट्विटर पर फिल्म के डायलॉग को लेकर विवाद छिड़ गया है। जिसके बाद लोग अक्षय कुमार को ट्रोल कर रहे हैं। ट्विटर पर यूजर्स ने गुड न्यूज के दूसरे ट्रेलर में अक्षय कुमार पर भगवान राम का अपमान करने का आरोप लगाया है। दरअसल, ट्रेलर में दिखाया कि एक शख्स कहता है, मेरे बच्चे का नाम होला राम है क्योंकि, यह होली के दिन पैदा हुआ था। ' इसपर अक्षय ने कहा, 'अच्छा हुआ लोहड़ी के दिन पैदा नहीं हुआ। इसमें एक डबल मीनिंग जोक सुनने को मिलता है, जिसे सुनकर कुछ लोग नाराज हो गए हैं। इसके बाद फैंस ने अक्षय कुमार की क्लास लगा दी है। अक्षय को ट्रोल किए जाने के बाद बाद ट्विटर पर #AKSHAYABUSESLORDRAMA ट्रेंड करने लगा । But how dare you to Abuse Indian religion's and Hindu gods of India? We indians will not tolerate it at all. Hindu brother's Lord ram for cheap humour. Shame on you deshdrohi Canadian. But how dare you to Abuse Indian religion's and Hindu gods of India? We indians will not tolerate it at all. But Criminal Salman khan PR making fake paid news against Innocent Akshay. Akshay kumar is true Nationalist. Akshay kumar is true Nationalist. He respect India from bottom of heart, He respect Indian Army, He respect India from bottom of heart, He respect Indian Army, आपको बता दें कि इस फिल्म को करण जौहर प्रोड्यूसर कर रहे हैं। वहीं फिल्म का निर्देशन राज मेहता ने किया है। यह फिल्म सत्ताईस दिसबंर को रिलीज होने वाली है। फिल्म के गाने दर्शकों को काफी पसंद आ रहे हैं।
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पटना,बिहार (हिंदी मिथिला न्यूज़)बिहार विद्यालय परीक्षा समिति(BSEB) 19 -21 इंटर वार्षिक परीक्षा के एडमिट कार्ड 17 जनवरी को किसी भी वक्त जारी हो सकती है। यह सम्पूर्ण जानकारी बिहार बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने बताया कि BSEB की आधिकारिक वेबसाइट seniorsecondary. biharboardonline. com पर एडमिट कार्ड 16 जनवरी को किसी भी वक्त जारी कर दिए जाएंगे और 31 जनवरी तक ये अधिकारिक वेवसाईट पर यह उपलब्ध रहेंगे। आपको बता दें कि बिहार बोर्ड इंटर की सभी संकायों की परीक्षा 1 फरवरी 2021 से 13 फरवरी 2021 के बीच आयोजित की जाएगी तथा इस एडमिट कार्ड को शिक्षण संस्थानों के प्रमुख अपने यूजर आईडी पासवर्ड के जरिए वेबसाइठ से डाउनलोड कर सकेंगे। इसके बाद हस्ताक्षर और मुहर के बाद ही ये एडमिट कार्ड स्टूडेंट्स को दिए जाएंगे। बिहार बोर्ड ने इंटरमीडिएट और मैट्रिक की वार्षिक परीक्षा 2021 का कार्यक्रम पहले ही जारी कर दिया है। बिहार बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने बताया कि परीक्षा के दौरान 15 मिनट प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए परीक्षार्थियों को दिया जाएगा तथा वैकल्पिक प्रश्नो की संख्या में भी बढ़ोतरी किया जाएगा।
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पटना,बिहार बिहार विद्यालय परीक्षा समिति उन्नीस -इक्कीस इंटर वार्षिक परीक्षा के एडमिट कार्ड सत्रह जनवरी को किसी भी वक्त जारी हो सकती है। यह सम्पूर्ण जानकारी बिहार बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने बताया कि BSEB की आधिकारिक वेबसाइट seniorsecondary. biharboardonline. com पर एडमिट कार्ड सोलह जनवरी को किसी भी वक्त जारी कर दिए जाएंगे और इकतीस जनवरी तक ये अधिकारिक वेवसाईट पर यह उपलब्ध रहेंगे। आपको बता दें कि बिहार बोर्ड इंटर की सभी संकायों की परीक्षा एक फरवरी दो हज़ार इक्कीस से तेरह फरवरी दो हज़ार इक्कीस के बीच आयोजित की जाएगी तथा इस एडमिट कार्ड को शिक्षण संस्थानों के प्रमुख अपने यूजर आईडी पासवर्ड के जरिए वेबसाइठ से डाउनलोड कर सकेंगे। इसके बाद हस्ताक्षर और मुहर के बाद ही ये एडमिट कार्ड स्टूडेंट्स को दिए जाएंगे। बिहार बोर्ड ने इंटरमीडिएट और मैट्रिक की वार्षिक परीक्षा दो हज़ार इक्कीस का कार्यक्रम पहले ही जारी कर दिया है। बिहार बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने बताया कि परीक्षा के दौरान पंद्रह मिनट प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए परीक्षार्थियों को दिया जाएगा तथा वैकल्पिक प्रश्नो की संख्या में भी बढ़ोतरी किया जाएगा।
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।आराधना (Aaradhana)
मंगल ग्रह मेष राशि का स्वामी माना जाता है। मेष राशि का आराध्य देव भगवान श्री गणेश को माना जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार आराधना नाम की लड़कियाँ मार्च या अप्रैल के महीने में पैदा होते हैं। आराधना नाम की लड़कियाँ नींद से जुड़ी समस्याएं, दांतों में दर्द, बुखार आना, चोट लगना, खून के साफ़ न होने की वजह से होने वाले रोग आदि से ग्रस्त होने की सम्भावना अधिक होती है। इस राशि के आराधना नाम की लड़कियों में पिट्युटरी ग्लैंड की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी, जबड़े और दिमाग से जुड़ी समस्याओं जैसे याददाश्त में कमी या भूलने की बीमारी होने की सम्भावना अधिक होती है। आराधना नाम की लड़कियाँ खाने पीने के भी बहुत शौक़ीन होते हैं और अकसर इसी आदत की वजह से पेट की समस्याओं से पीड़ित रहते हैं। मेष राशि के आराधना नाम की लड़कियाँ नयी पहल करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और काम के इतने शौक़ीन होते हैं कि लंबे समय तक काम करके भी थकते नहीं हैं।
अधिकतर माता-पिता अपने बच्चे को आराधना नाम देना चाहते हैं लेकिन इससे पहले वो इसका मतलब जानने का प्रयास नहीं करते हैं। आराधना नाम का मतलब पूजा, आराधना होता है। अपनी संतान को आराधना नाम देकर आप उसके जीवन को एक नई दिशा दे सकते हैं। इस वजह से भी बच्चे का नाम आराधना रखने से पहले उसका अर्थ पता होना चाहिए। आराधना नाम का अर्थ जानने के बाद आप भी अपने बच्चे को आराधना नाम आराम से दे सकते हैं। आराधना नाम के अर्थ यानी पूजा, आराधना का असर आप इनके स्वभाव में साफ़ देख सकते हैं। नीचे आराधना नाम की राशि, लकी नंबर और स्वभाव एवं पूजा, आराधना के बारे में विस्तार से बताया गया है।
जिनका नाम आराधना होता है, उनका ग्रह स्वामी मंगल और लकी नंबर 9 होता है। आराधना नाम की लड़कियां मानसिक रूप से मजबूत होती हैं और मुश्किलों का हिम्मत से सामना करती हैं। किसी भी काम की शुरुआत में भले ही इन्हें मेहनत करनी पड़े लेकिन उसमें निश्चित ही सफलता प्राप्त होती है। आराधना नाम वाली लड़कियां निडर होती हैं और कभी-कभी ये इनके लिए मुसीबत का कारण भी बन जाता है। 9 लकी नंबर वाली लड़कियों में नेता बनने के गुण होते हैं। जिन लड़कियों का नाम आराधना होता है, वे पूरी शिद्दत के साथ दोस्ती और दुश्मनी निभाती हैं।
आराधना नाम के व्यक्ति की राशि मेष होती है और ये साहसी, आत्मविश्वासी, महत्वाकांक्षी व जिज्ञासु होते हैं। आराधना की महिलाएं खतरों से खेलने का शौक रखती हैं। मेष राशि से जुड़ी आराधना नाम वाली लड़कियां नए काम की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले तैयार रहती हैं। आराधना नाम वाली लड़कियों में खूब एनर्जी होती है और ये हर चैलेंज का पूरी हिम्मत से सामना करती हैं। आराधना नाम की लड़कियों में काफी अहंकार व हठ होता है। करियर और पैसों के मामले में आराधना नाम की लड़कियों को किसी भी तरह का समझौता करना पसंद नहीं होता।
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।आराधना मंगल ग्रह मेष राशि का स्वामी माना जाता है। मेष राशि का आराध्य देव भगवान श्री गणेश को माना जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार आराधना नाम की लड़कियाँ मार्च या अप्रैल के महीने में पैदा होते हैं। आराधना नाम की लड़कियाँ नींद से जुड़ी समस्याएं, दांतों में दर्द, बुखार आना, चोट लगना, खून के साफ़ न होने की वजह से होने वाले रोग आदि से ग्रस्त होने की सम्भावना अधिक होती है। इस राशि के आराधना नाम की लड़कियों में पिट्युटरी ग्लैंड की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी, जबड़े और दिमाग से जुड़ी समस्याओं जैसे याददाश्त में कमी या भूलने की बीमारी होने की सम्भावना अधिक होती है। आराधना नाम की लड़कियाँ खाने पीने के भी बहुत शौक़ीन होते हैं और अकसर इसी आदत की वजह से पेट की समस्याओं से पीड़ित रहते हैं। मेष राशि के आराधना नाम की लड़कियाँ नयी पहल करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और काम के इतने शौक़ीन होते हैं कि लंबे समय तक काम करके भी थकते नहीं हैं। अधिकतर माता-पिता अपने बच्चे को आराधना नाम देना चाहते हैं लेकिन इससे पहले वो इसका मतलब जानने का प्रयास नहीं करते हैं। आराधना नाम का मतलब पूजा, आराधना होता है। अपनी संतान को आराधना नाम देकर आप उसके जीवन को एक नई दिशा दे सकते हैं। इस वजह से भी बच्चे का नाम आराधना रखने से पहले उसका अर्थ पता होना चाहिए। आराधना नाम का अर्थ जानने के बाद आप भी अपने बच्चे को आराधना नाम आराम से दे सकते हैं। आराधना नाम के अर्थ यानी पूजा, आराधना का असर आप इनके स्वभाव में साफ़ देख सकते हैं। नीचे आराधना नाम की राशि, लकी नंबर और स्वभाव एवं पूजा, आराधना के बारे में विस्तार से बताया गया है। जिनका नाम आराधना होता है, उनका ग्रह स्वामी मंगल और लकी नंबर नौ होता है। आराधना नाम की लड़कियां मानसिक रूप से मजबूत होती हैं और मुश्किलों का हिम्मत से सामना करती हैं। किसी भी काम की शुरुआत में भले ही इन्हें मेहनत करनी पड़े लेकिन उसमें निश्चित ही सफलता प्राप्त होती है। आराधना नाम वाली लड़कियां निडर होती हैं और कभी-कभी ये इनके लिए मुसीबत का कारण भी बन जाता है। नौ लकी नंबर वाली लड़कियों में नेता बनने के गुण होते हैं। जिन लड़कियों का नाम आराधना होता है, वे पूरी शिद्दत के साथ दोस्ती और दुश्मनी निभाती हैं। आराधना नाम के व्यक्ति की राशि मेष होती है और ये साहसी, आत्मविश्वासी, महत्वाकांक्षी व जिज्ञासु होते हैं। आराधना की महिलाएं खतरों से खेलने का शौक रखती हैं। मेष राशि से जुड़ी आराधना नाम वाली लड़कियां नए काम की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले तैयार रहती हैं। आराधना नाम वाली लड़कियों में खूब एनर्जी होती है और ये हर चैलेंज का पूरी हिम्मत से सामना करती हैं। आराधना नाम की लड़कियों में काफी अहंकार व हठ होता है। करियर और पैसों के मामले में आराधना नाम की लड़कियों को किसी भी तरह का समझौता करना पसंद नहीं होता।
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सीमा पर चीन से बढ़ते तनाव के बीच भारत को चीनी समर्थक बैंक एशियन इंप्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट बैंक (एआईंआईंबी) से करीब 4. 5 अरब डॉलर का कर्ज मिला है। इतना ही नहीं, भारत बीजिंग स्थित इस बैंक से कोरोना राहत कोष लेने में शीर्ष लाभाथा भी है। एआईंआईंबी की पांचवीं परिषद का वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर मंगलवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिग ने सदस्य देशों के लिए कोरोना राहत कोष स्थापित करने को लेकर बैंक की तारीफ की और कहा कि एआईंआईंबी को वैश्विक समान विकास को मजबूत करने वाला नया बहुपक्षीय विकास बैंक बनाना चाहिए। गौरतलब है कि यह बैंक खोलने का प्रास्ताव जिनपिग ने 2013 में रखा था और 2016 में यह बैंक खुला था। सबसे बड़े कर्जदार के रूप में भारत पर एआईंआईंबी त्रणों का लगभग 25 प्रातिशत बोझ है। एआईंआईंबी से भारत को कोरोना राहत के लिए जून और जुलाईं में व््रामशः 500 मिलियन डॉलर और 750 मिलियन डॉलर का कर्ज मिला है।
दूसरे चरण की लोन की स्वीवृति 17 जून को मिली थी। भारत को अब तक एआईंआईंबी से मिले 4. 5 अरब डॉलर के पंड के अलावा कईं बड़ी इंप्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए कर्ज मिलने वाला है। देशभर के कारोबारियों के संगठन कन्पेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (वैट) ने देश में चल रहे कड़े चीन विरोधी माहौल के बावजूद आईंसीआईंसीआईं बैंक द्वारा चीन के पीपुल्स बैंक से निवेश लिए जाने पर सख्त एतराज जताया है। वैट ने आईंसीआईंसीआईं बैंक की कड़ी आलोचना की और कहा कि भारतीय बैंक प्राणाली में पैठ बनाने की कोशिश में चीनी बैंक का यह दूसरा उदाहरण है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने इस साल की शुरुआत में एचडीएफसी बैंक में निवेश किया था। वैट ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से आग्राह किया है कि आईंसीआईंसीआईं और एचडीएफसी बैंक दोनों को चीनी बैंक का निवेश वापस करने का निर्देश दिया जाए। हालांकि यह दोनों अलग-अलग लेन-देन के मामले हैं पर इससे पता चलता है कि चीन किस तरह भारतीय अर्थव्यवस्था में अपने पांव जमाता जा रहा है। इससे भी दुखद यह है कि यह काम भारत सरकार की स्वीवृति के बाद हुआ होगा।
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सीमा पर चीन से बढ़ते तनाव के बीच भारत को चीनी समर्थक बैंक एशियन इंप्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट बैंक से करीब चार. पाँच अरब डॉलर का कर्ज मिला है। इतना ही नहीं, भारत बीजिंग स्थित इस बैंक से कोरोना राहत कोष लेने में शीर्ष लाभाथा भी है। एआईंआईंबी की पांचवीं परिषद का वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर मंगलवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिग ने सदस्य देशों के लिए कोरोना राहत कोष स्थापित करने को लेकर बैंक की तारीफ की और कहा कि एआईंआईंबी को वैश्विक समान विकास को मजबूत करने वाला नया बहुपक्षीय विकास बैंक बनाना चाहिए। गौरतलब है कि यह बैंक खोलने का प्रास्ताव जिनपिग ने दो हज़ार तेरह में रखा था और दो हज़ार सोलह में यह बैंक खुला था। सबसे बड़े कर्जदार के रूप में भारत पर एआईंआईंबी त्रणों का लगभग पच्चीस प्रातिशत बोझ है। एआईंआईंबी से भारत को कोरोना राहत के लिए जून और जुलाईं में व््रामशः पाँच सौ मिलियन डॉलर और सात सौ पचास मिलियन डॉलर का कर्ज मिला है। दूसरे चरण की लोन की स्वीवृति सत्रह जून को मिली थी। भारत को अब तक एआईंआईंबी से मिले चार. पाँच अरब डॉलर के पंड के अलावा कईं बड़ी इंप्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए कर्ज मिलने वाला है। देशभर के कारोबारियों के संगठन कन्पेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने देश में चल रहे कड़े चीन विरोधी माहौल के बावजूद आईंसीआईंसीआईं बैंक द्वारा चीन के पीपुल्स बैंक से निवेश लिए जाने पर सख्त एतराज जताया है। वैट ने आईंसीआईंसीआईं बैंक की कड़ी आलोचना की और कहा कि भारतीय बैंक प्राणाली में पैठ बनाने की कोशिश में चीनी बैंक का यह दूसरा उदाहरण है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने इस साल की शुरुआत में एचडीएफसी बैंक में निवेश किया था। वैट ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से आग्राह किया है कि आईंसीआईंसीआईं और एचडीएफसी बैंक दोनों को चीनी बैंक का निवेश वापस करने का निर्देश दिया जाए। हालांकि यह दोनों अलग-अलग लेन-देन के मामले हैं पर इससे पता चलता है कि चीन किस तरह भारतीय अर्थव्यवस्था में अपने पांव जमाता जा रहा है। इससे भी दुखद यह है कि यह काम भारत सरकार की स्वीवृति के बाद हुआ होगा।
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रायपुर। पेसा कानून का 25वां स्थापना दिवस धमतरी के नगरी ब्लॉक के ग्राम बोराई में मनाया गया। इस मौके पर पेसा कानून विशेषज्ञ अश्विनी कांगे द्वारा बेहद सरल तरीके से पेसा कानून के बारे में जानकारी दी गयी।
पेसा की रजत जयंती पर आयोजित भारत के मध्यक्षेत्र के पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों के सम्मेलन में आज 'अपने गांव में, अपना राज' स्थापित करने के लिए 7 राज्यों असम, झारखंड, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश से आये लोगों ने आवाज बुलंद की। उन्होंने अपनी-अपनी भाषा मे इसके लिए नारा लगाया।
असम से पहुंचे आदिवासी समुदाय के सदस्यों ने "मेंठाग रोग मेंठाग अजक कोंग" का नारा लगाया, झारखंड से आये लोगों ने "अबुवा दिशुम अबुवा राज" का नारा लगाया वहीं महाराष्ट्र के लोगों ने "आमच्या गावांत आमच्या सरकार" का नारा लगाया, उड़ीसा से आये लोगों ने "आमोरो गारे आमोरो शासन" का नारा दिया। जबकि मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के लोगों ने "मावा नाटे मावा राज" का नारा दिया।
पेसा के बारे में बताते हुए अश्वनी कांगे ने कहा कि इस साल और अगले साल केंद्र सरकार आजादी का अमृत महोत्सव मना रही है। 15 अगस्त 2022 को भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं। इस अमृत महोत्सव में छत्तीसगढ़ के पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों के आमजन भी अलग अलग अवसरों में सहभागी बनते आ रहे हैं। अमृत महोत्सव के साथ उनके लिए उत्सव का एक और कारण है। जल-जंगल-जमीन का अधिकार देने वाला पेसा कानून 24 दिसंबर 2021 को 25 साल का हो रहा है। इसलिए आदिवासियों के पास अमृत महोत्सव और रजत जयंती मनाये जाने का विषय एक साथ है।
उन्होंने इसको विस्तारित हुए कहा कि हर उत्सव खुशी का होता है, पर इस अमृत महोत्सव और रजत जयंती को लेकर पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों के लोगों के मन में आशंका है। थोड़ा डर भी है। सवाल है कि, "हम उत्सव मनायें की नहीं?" क्या यह दोनों उत्सव आम जनता के लिए सच में खुशहाली लाये हैं या फिर उनके जल-जंगल-जमीन को धीरे-धीरे निजी हाथों में दिए जाने की ख़ुशी में पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के लोगों का उपहास उड़ा रहे हैं?
इसके इतिहास में जाते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के 75 साल को देखें तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में जिस प्रकार हर प्रावधान और कानून लिखित में होता है वो आज तक जंगल में रहने वाले भोले भाले लोगों को समझ नहीं आ पाया है। ऐसा क्यों? क्योंकि आदिवासी समुदाय का लिखित संविधान और कानून नहीं होता है। वह तो अलिखित संविधान से चलते हैं। लेकिन जब हम खोजते है कि पिछले 75 साल में सरकारों के सैकड़ों अलिखित कानूनों में ऐसा कौन सा कानून है जो आदिवासियों के जल, जंगल,जमीन, संस्कृति और जीवन यापन के अलिखित कानूनों को समेटे हुए है तो एक ही नाम सामने आता है "पेसा कानून"।
सन 1996 की 24 दिसम्बर से लागू यह पेसा कानून के बारे में उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए आज यह चिंतन करने का अवसर दे रहा है कि क्या आजादी के 75 साल बाद भी जो स्वतंत्रता और आजादी सभी को मिली थी क्या वह आदिवासियों और पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के निवासियों को भी पूर्ण रूप से मिली है या पूर्व की आजादी भी उनसे धीरे-धीरे छिनती जा रही है।
पेसा कानून के लिए 25 साल में अब तक मध्य भारत के 10 राज्यों में जहां यह कानून लागू होता है उसमें से छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उड़ीसा और झारखंड मे नियम ही नहीं बने हैं। जिस कानून के नियम ही नहीं बने हों वह कानून 25 सालों में कैसे चला होगा यह सोचने का विषय है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार इस पर जवाब दे कि 25 सालों तक उन्होंने क्या किया है।
इन 25 सालों के लिए हमारी ओर से 25 सवाल तो खड़े करना तो लाजमी है। इन सभी के जवाब तो केंद्र और राज्य सरकार दोनों को ही देने होंगे। शायद इनका जवाब देते हुए वह इस बात पर चिंतन कर पाए कि संविधान के अनुच्छेद 40 में लिखित पंचायती राज व्यवस्थाओं को स्वायत्त इकाई बनाने के लिए सरकार ने अब तक क्या कदम उठाये हैं।
क्या उन्होंने ग्राम सभा और पंचायतों को स्वशासन की इकाई बनने के लिए कुछ पहल की है या उनके पूर्व में चले आ रहे स्वशासन को छीनने का काम किया है? अगर सरकार इस बात का जवाब नहीं दे पाती है तो हमें उनके नियत पर शक करना लाजमी है। 25 साल तक पेसा के झुनझुना से आदिवासी समाज और पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में रहने वाला हर समाज खेलता रहा है। अब समाज को कानून के साथ साथ वयस्क हो कर अपने अधिकार पाने के लिए स्वयं रोड पर,पंचायत पर, विधानसभा और लोकसभा के साथ साथ कोर्ट में अपनी लड़ाई लड़नी होगी, नहीं तो अगले 25 साल के लिए फिर पेसा के नाम का झुनझुना के साथ लालीपॉप पकड़ा दिया जायेगा।
कार्यशाला में प्रमुख रूप से सर्व आदिवासी समाज प्रदेश उपाध्यक्ष ललित नरेटी जी, झाडू राम नागेश सलाहकार गोड़वाना समाज, इतवारी नेताम, ईश्वर नेताम, भगवान सिंह नेताम, बलराम शोरी , मोहन मरकाम, निच्छल मरकाम, सोना राम नेताम हरक मंडावी , रामप्रसाद मरकाम, कुंदन साक्षी, बुधराम साक्षी, देवनाथ मरकाम , पिलाराम नेताम, मयाराम नागवंशी , सोपसिंग मंडावी, जिला पंचायत सदस्य मनोज साक्षी , सर्व आदिवासी समाज के युवा प्रभाग के अध्यक्ष प्रमोद कुंजाम, असम से अमृत इंगति, जयराम इंगहि, प्रदीप किलिंग,उड़ीसा से सुकडु मरकाम, अश्वनी नेताम, बुद्धु नेताम , मध्यप्रदेश से कमल किशोर आर्मो, कमलेश मरकाम, झारखंड से सूरज प्रसाद, महाराष्ट्र से चन्द्र शेखर पद्दा, परस राव , तेलंगाना से नेहरू मड़ावी, सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग अध्यक्ष जिला गौरेया, पेन्द्रा मरवाही मनीष धुर्वे , जीवन शांडिल्य, सूरजपुर जिला युवा प्रभाग अध्यक्ष राजा छितिज उइके शामिल रहे।
(छत्तीसगढ़ से जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)
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रायपुर। पेसा कानून का पच्चीसवां स्थापना दिवस धमतरी के नगरी ब्लॉक के ग्राम बोराई में मनाया गया। इस मौके पर पेसा कानून विशेषज्ञ अश्विनी कांगे द्वारा बेहद सरल तरीके से पेसा कानून के बारे में जानकारी दी गयी। पेसा की रजत जयंती पर आयोजित भारत के मध्यक्षेत्र के पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों के सम्मेलन में आज 'अपने गांव में, अपना राज' स्थापित करने के लिए सात राज्यों असम, झारखंड, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश से आये लोगों ने आवाज बुलंद की। उन्होंने अपनी-अपनी भाषा मे इसके लिए नारा लगाया। असम से पहुंचे आदिवासी समुदाय के सदस्यों ने "मेंठाग रोग मेंठाग अजक कोंग" का नारा लगाया, झारखंड से आये लोगों ने "अबुवा दिशुम अबुवा राज" का नारा लगाया वहीं महाराष्ट्र के लोगों ने "आमच्या गावांत आमच्या सरकार" का नारा लगाया, उड़ीसा से आये लोगों ने "आमोरो गारे आमोरो शासन" का नारा दिया। जबकि मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के लोगों ने "मावा नाटे मावा राज" का नारा दिया। पेसा के बारे में बताते हुए अश्वनी कांगे ने कहा कि इस साल और अगले साल केंद्र सरकार आजादी का अमृत महोत्सव मना रही है। पंद्रह अगस्त दो हज़ार बाईस को भारत की आजादी के पचहत्तर साल हो रहे हैं। इस अमृत महोत्सव में छत्तीसगढ़ के पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों के आमजन भी अलग अलग अवसरों में सहभागी बनते आ रहे हैं। अमृत महोत्सव के साथ उनके लिए उत्सव का एक और कारण है। जल-जंगल-जमीन का अधिकार देने वाला पेसा कानून चौबीस दिसंबर दो हज़ार इक्कीस को पच्चीस साल का हो रहा है। इसलिए आदिवासियों के पास अमृत महोत्सव और रजत जयंती मनाये जाने का विषय एक साथ है। उन्होंने इसको विस्तारित हुए कहा कि हर उत्सव खुशी का होता है, पर इस अमृत महोत्सव और रजत जयंती को लेकर पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों के लोगों के मन में आशंका है। थोड़ा डर भी है। सवाल है कि, "हम उत्सव मनायें की नहीं?" क्या यह दोनों उत्सव आम जनता के लिए सच में खुशहाली लाये हैं या फिर उनके जल-जंगल-जमीन को धीरे-धीरे निजी हाथों में दिए जाने की ख़ुशी में पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के लोगों का उपहास उड़ा रहे हैं? इसके इतिहास में जाते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के पचहत्तर साल को देखें तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में जिस प्रकार हर प्रावधान और कानून लिखित में होता है वो आज तक जंगल में रहने वाले भोले भाले लोगों को समझ नहीं आ पाया है। ऐसा क्यों? क्योंकि आदिवासी समुदाय का लिखित संविधान और कानून नहीं होता है। वह तो अलिखित संविधान से चलते हैं। लेकिन जब हम खोजते है कि पिछले पचहत्तर साल में सरकारों के सैकड़ों अलिखित कानूनों में ऐसा कौन सा कानून है जो आदिवासियों के जल, जंगल,जमीन, संस्कृति और जीवन यापन के अलिखित कानूनों को समेटे हुए है तो एक ही नाम सामने आता है "पेसा कानून"। सन एक हज़ार नौ सौ छियानवे की चौबीस दिसम्बर से लागू यह पेसा कानून के बारे में उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए आज यह चिंतन करने का अवसर दे रहा है कि क्या आजादी के पचहत्तर साल बाद भी जो स्वतंत्रता और आजादी सभी को मिली थी क्या वह आदिवासियों और पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के निवासियों को भी पूर्ण रूप से मिली है या पूर्व की आजादी भी उनसे धीरे-धीरे छिनती जा रही है। पेसा कानून के लिए पच्चीस साल में अब तक मध्य भारत के दस राज्यों में जहां यह कानून लागू होता है उसमें से छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उड़ीसा और झारखंड मे नियम ही नहीं बने हैं। जिस कानून के नियम ही नहीं बने हों वह कानून पच्चीस सालों में कैसे चला होगा यह सोचने का विषय है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार इस पर जवाब दे कि पच्चीस सालों तक उन्होंने क्या किया है। इन पच्चीस सालों के लिए हमारी ओर से पच्चीस सवाल तो खड़े करना तो लाजमी है। इन सभी के जवाब तो केंद्र और राज्य सरकार दोनों को ही देने होंगे। शायद इनका जवाब देते हुए वह इस बात पर चिंतन कर पाए कि संविधान के अनुच्छेद चालीस में लिखित पंचायती राज व्यवस्थाओं को स्वायत्त इकाई बनाने के लिए सरकार ने अब तक क्या कदम उठाये हैं। क्या उन्होंने ग्राम सभा और पंचायतों को स्वशासन की इकाई बनने के लिए कुछ पहल की है या उनके पूर्व में चले आ रहे स्वशासन को छीनने का काम किया है? अगर सरकार इस बात का जवाब नहीं दे पाती है तो हमें उनके नियत पर शक करना लाजमी है। पच्चीस साल तक पेसा के झुनझुना से आदिवासी समाज और पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में रहने वाला हर समाज खेलता रहा है। अब समाज को कानून के साथ साथ वयस्क हो कर अपने अधिकार पाने के लिए स्वयं रोड पर,पंचायत पर, विधानसभा और लोकसभा के साथ साथ कोर्ट में अपनी लड़ाई लड़नी होगी, नहीं तो अगले पच्चीस साल के लिए फिर पेसा के नाम का झुनझुना के साथ लालीपॉप पकड़ा दिया जायेगा। कार्यशाला में प्रमुख रूप से सर्व आदिवासी समाज प्रदेश उपाध्यक्ष ललित नरेटी जी, झाडू राम नागेश सलाहकार गोड़वाना समाज, इतवारी नेताम, ईश्वर नेताम, भगवान सिंह नेताम, बलराम शोरी , मोहन मरकाम, निच्छल मरकाम, सोना राम नेताम हरक मंडावी , रामप्रसाद मरकाम, कुंदन साक्षी, बुधराम साक्षी, देवनाथ मरकाम , पिलाराम नेताम, मयाराम नागवंशी , सोपसिंग मंडावी, जिला पंचायत सदस्य मनोज साक्षी , सर्व आदिवासी समाज के युवा प्रभाग के अध्यक्ष प्रमोद कुंजाम, असम से अमृत इंगति, जयराम इंगहि, प्रदीप किलिंग,उड़ीसा से सुकडु मरकाम, अश्वनी नेताम, बुद्धु नेताम , मध्यप्रदेश से कमल किशोर आर्मो, कमलेश मरकाम, झारखंड से सूरज प्रसाद, महाराष्ट्र से चन्द्र शेखर पद्दा, परस राव , तेलंगाना से नेहरू मड़ावी, सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग अध्यक्ष जिला गौरेया, पेन्द्रा मरवाही मनीष धुर्वे , जीवन शांडिल्य, सूरजपुर जिला युवा प्रभाग अध्यक्ष राजा छितिज उइके शामिल रहे।
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आप सभी जानते ही हैं नवरात्रि को खत्म होने में कुछ ही समय बचा है और आज नवरात्र का आंठवा दिन है. ऐसे में नवरात्रि के आंठवे दिन देवी महागौरी का पूजन होता है. जी हाँ, नवरात्र का आठवा दिन मां महागौरी को समर्पित रहता है. कहा जाता है इस दिन मां महागौरी की आराधना करने से एश्वर्य और सभी सुखों की प्राप्ति होती है. जी दरअसल ऐसी मान्यता है कि देवी महागौरी अमोघ फलदायिनी हैं और इनकी आराधना से पूर्व जन्मों के संचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं.
माता का सवरूप- ऐसे में देवी की पूजा कल्याणकारी मानी जाती है और माता गौरवर्णी है और इनके समस्त आभूषण और वस्त्र सफेद हैं इस कारण से देवी महागौरी को श्वेताम्बरधरा भी कहा जाता है. आप सभी जानते ही होंगे माता चारभुजा धारी है और इनका वाहन वृषभ है, इस कारण इसलिए देवी को वृषारूढ़ा भी कहा जाता है. आप सभी को बता दें कि देवी महागौरी का ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा है और नीचे वाला हाथ त्रिशूल धारण किया हुआ है. वहीँ ऊपर वाले बांए हाथ में डमरू है और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा है. जी दरअसल ऐसी मान्यता है कि देवी ने महादेव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी और इसी वजह से देवी का शरीर काला पड़ गया था, लेकिन माता महागौरी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इनके काले शरीर को गंगा के पवित्र और स्वच्छ जल से धोकर कांतिमय बना दिया था. इससे माता गौरवर्णी हो गई और इनको महागौरी नाम दिया गया.
माता महागौरी की पूजाविधि - आप माता महागौरी की पूजा करने के लिए सबसे पहले पीले वस्त्र धारण करें और उसके बाद माता को कुमकुम, अक्षत, हल्दी, मेंहदी, अबीर, गुलाल, चूड़ियां, वस्त्र आदि समर्पित करें. इसके बाद फल, मेवे, मिष्ठान्न का भोग लगाएं. अब इसके बाद माता के सामने दीपक और धूपबत्ती लगाएं और माता को पीले फूल अर्पित करें. ध्यान रहे ऊपर दिए गए मंत्र का जाप करें. कहते हैं अष्टमी की पूजा को मध्य रात्रि में करने से श्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती है.
माता महागौरी का भोग - आप आज देवी महागौरी को नारियल, हलवा, पूड़ी और सब्जी का भोग लगाकर उन्हें खुश कर सकते हैं.
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आप सभी जानते ही हैं नवरात्रि को खत्म होने में कुछ ही समय बचा है और आज नवरात्र का आंठवा दिन है. ऐसे में नवरात्रि के आंठवे दिन देवी महागौरी का पूजन होता है. जी हाँ, नवरात्र का आठवा दिन मां महागौरी को समर्पित रहता है. कहा जाता है इस दिन मां महागौरी की आराधना करने से एश्वर्य और सभी सुखों की प्राप्ति होती है. जी दरअसल ऐसी मान्यता है कि देवी महागौरी अमोघ फलदायिनी हैं और इनकी आराधना से पूर्व जन्मों के संचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं. माता का सवरूप- ऐसे में देवी की पूजा कल्याणकारी मानी जाती है और माता गौरवर्णी है और इनके समस्त आभूषण और वस्त्र सफेद हैं इस कारण से देवी महागौरी को श्वेताम्बरधरा भी कहा जाता है. आप सभी जानते ही होंगे माता चारभुजा धारी है और इनका वाहन वृषभ है, इस कारण इसलिए देवी को वृषारूढ़ा भी कहा जाता है. आप सभी को बता दें कि देवी महागौरी का ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा है और नीचे वाला हाथ त्रिशूल धारण किया हुआ है. वहीँ ऊपर वाले बांए हाथ में डमरू है और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा है. जी दरअसल ऐसी मान्यता है कि देवी ने महादेव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी और इसी वजह से देवी का शरीर काला पड़ गया था, लेकिन माता महागौरी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इनके काले शरीर को गंगा के पवित्र और स्वच्छ जल से धोकर कांतिमय बना दिया था. इससे माता गौरवर्णी हो गई और इनको महागौरी नाम दिया गया. माता महागौरी की पूजाविधि - आप माता महागौरी की पूजा करने के लिए सबसे पहले पीले वस्त्र धारण करें और उसके बाद माता को कुमकुम, अक्षत, हल्दी, मेंहदी, अबीर, गुलाल, चूड़ियां, वस्त्र आदि समर्पित करें. इसके बाद फल, मेवे, मिष्ठान्न का भोग लगाएं. अब इसके बाद माता के सामने दीपक और धूपबत्ती लगाएं और माता को पीले फूल अर्पित करें. ध्यान रहे ऊपर दिए गए मंत्र का जाप करें. कहते हैं अष्टमी की पूजा को मध्य रात्रि में करने से श्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती है. माता महागौरी का भोग - आप आज देवी महागौरी को नारियल, हलवा, पूड़ी और सब्जी का भोग लगाकर उन्हें खुश कर सकते हैं.
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लेकिन हमेशा नहीं, बिक्री के लिए वस्तुओं की कोई ऋण और देनदारियों, जो दस्तावेजों और योग्य काम कर रहे कर्मचारियों की एक निर्दोष सेट है के साथ एक प्रतिस्पर्धी कंपनी है।
अक्सर, बेचने संगठन किसी भी समस्याओं कि आने जब बहुत देर हो चुकी है। बिक्री के लिए एक व्यापार खरीदें - यह एक कठिन और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है, लेकिन सभी पहलुओं पर विचार और ध्यान से सभी दस्तावेज़ की जाँच, आप भविष्य में परेशानी का एक बहुत से बच सकते हैं। हम सबसे आम समस्या है कि जब खरीदने और बेचने के कारोबार के हो सकता है पर विचार करें।
- उद्यम के मालिक जान-बूझकर तथ्य यह है कि फर्म कुछ समय के लिए संचालित नहीं किया गया है छिपाना सकता है। फिर एक व्यवसाय खरीदने इसलिए चिकनी नहीं होगा, आप सबसे अधिक संभावना उत्पादन के नवीकरण में निवेश करने, वह यह है कि होगा पुनः चुनें कर्मियों, चलाने के विज्ञापन,, आप कंपनी पुनर्वास पर खर्च करना होगा।
- एक बेईमान व्यापारी भी उद्यम की आय बढ़ा सकते हैं कृत्रिम रूप से बढ़ा, , कार्यशील पूंजी कंपनी की सफलता की उपस्थिति दे रही है। नतीजतन, आप एक फुलाया कीमत पर एक कंपनी खरीदने के लिए, और पूर्व मालिक के लिए - बिक्री के लिए इस व्यवसाय - एक बड़ा प्लस।
- फर्म बकाया ऋण, ऋण और अवांछित दायित्वों हो सकता है। वहाँ तथाकथित छिपा ऋण कि खोजने के लिए असंभव हो सकता है, यहां तक कि उच्च गुणवत्ता वाले सत्यापन के साथ कर रहे हैं। इन तथ्यों के खरीदार केवल कुछ समय के बाद जाना जा सकता है, एक अप्रिय "आश्चर्य" बहुत फर्म की गतिविधियों अस्तव्यस्त कर सकते हैं।
- अक्सर बेचा कंपनी एक तीसरी पार्टी भी है कि इसके बारे में पता नहीं है पर फंसाया गया है। जब सरकारों इस तथ्य को समझते हैं, कंपनी के रद्द करने का खतरा है।
- यह होता है कि पूर्व मालिक, अपने पुराने फर्म बेचा एक नया, पूरी तरह से अनुरूप बेचने के लिए पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि एक योग्य कर्मचारियों, पूरे ग्राहक आधार के साथ लेता है, वास्तव में कुछ भी नहीं के साथ नए मालिक हो जाता है। ऐसे मामलों में, नए मालिक बेईमान विक्रेता के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते, कि के परिणाम में, कंपनी 'डूबता जा रहा है। "
अभी भी नुकसान है कि नए मालिक की उम्मीद की जा सकती की एक बड़ी संख्या है। उदाहरण के लिए, जब कंपनी को खरीदने, पिछले मालिक की संपत्ति खरीदार सूचित किए बिना हस्तांतरण कर सकते हैं, या यह है कि संपत्ति, कंपनी के साथ एक साथ हासिल कर ली प्रकट होता है, जल्द ही ध्वस्त कर दिया जाएगा।
व्यापार की खरीद बिक्री - यह जिसका अर्थ है आप को बेचने या एक कंपनी को खरीदने के लिए चाहते हैं, तो यह सबसे अच्छा होगा करने वाली एजेंसियों की बिक्री और कारोबार की खरीद के विशेषज्ञ, आप कई समस्याओं से बचने में मदद मिलेगी जो संपर्क करने के लिए।
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लेकिन हमेशा नहीं, बिक्री के लिए वस्तुओं की कोई ऋण और देनदारियों, जो दस्तावेजों और योग्य काम कर रहे कर्मचारियों की एक निर्दोष सेट है के साथ एक प्रतिस्पर्धी कंपनी है। अक्सर, बेचने संगठन किसी भी समस्याओं कि आने जब बहुत देर हो चुकी है। बिक्री के लिए एक व्यापार खरीदें - यह एक कठिन और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है, लेकिन सभी पहलुओं पर विचार और ध्यान से सभी दस्तावेज़ की जाँच, आप भविष्य में परेशानी का एक बहुत से बच सकते हैं। हम सबसे आम समस्या है कि जब खरीदने और बेचने के कारोबार के हो सकता है पर विचार करें। - उद्यम के मालिक जान-बूझकर तथ्य यह है कि फर्म कुछ समय के लिए संचालित नहीं किया गया है छिपाना सकता है। फिर एक व्यवसाय खरीदने इसलिए चिकनी नहीं होगा, आप सबसे अधिक संभावना उत्पादन के नवीकरण में निवेश करने, वह यह है कि होगा पुनः चुनें कर्मियों, चलाने के विज्ञापन,, आप कंपनी पुनर्वास पर खर्च करना होगा। - एक बेईमान व्यापारी भी उद्यम की आय बढ़ा सकते हैं कृत्रिम रूप से बढ़ा, , कार्यशील पूंजी कंपनी की सफलता की उपस्थिति दे रही है। नतीजतन, आप एक फुलाया कीमत पर एक कंपनी खरीदने के लिए, और पूर्व मालिक के लिए - बिक्री के लिए इस व्यवसाय - एक बड़ा प्लस। - फर्म बकाया ऋण, ऋण और अवांछित दायित्वों हो सकता है। वहाँ तथाकथित छिपा ऋण कि खोजने के लिए असंभव हो सकता है, यहां तक कि उच्च गुणवत्ता वाले सत्यापन के साथ कर रहे हैं। इन तथ्यों के खरीदार केवल कुछ समय के बाद जाना जा सकता है, एक अप्रिय "आश्चर्य" बहुत फर्म की गतिविधियों अस्तव्यस्त कर सकते हैं। - अक्सर बेचा कंपनी एक तीसरी पार्टी भी है कि इसके बारे में पता नहीं है पर फंसाया गया है। जब सरकारों इस तथ्य को समझते हैं, कंपनी के रद्द करने का खतरा है। - यह होता है कि पूर्व मालिक, अपने पुराने फर्म बेचा एक नया, पूरी तरह से अनुरूप बेचने के लिए पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि एक योग्य कर्मचारियों, पूरे ग्राहक आधार के साथ लेता है, वास्तव में कुछ भी नहीं के साथ नए मालिक हो जाता है। ऐसे मामलों में, नए मालिक बेईमान विक्रेता के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते, कि के परिणाम में, कंपनी 'डूबता जा रहा है। " अभी भी नुकसान है कि नए मालिक की उम्मीद की जा सकती की एक बड़ी संख्या है। उदाहरण के लिए, जब कंपनी को खरीदने, पिछले मालिक की संपत्ति खरीदार सूचित किए बिना हस्तांतरण कर सकते हैं, या यह है कि संपत्ति, कंपनी के साथ एक साथ हासिल कर ली प्रकट होता है, जल्द ही ध्वस्त कर दिया जाएगा। व्यापार की खरीद बिक्री - यह जिसका अर्थ है आप को बेचने या एक कंपनी को खरीदने के लिए चाहते हैं, तो यह सबसे अच्छा होगा करने वाली एजेंसियों की बिक्री और कारोबार की खरीद के विशेषज्ञ, आप कई समस्याओं से बचने में मदद मिलेगी जो संपर्क करने के लिए।
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राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान NSTI देहरादून की स्थापना भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के अन्तर्गत कार्यरत रोजगार एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGE&T) द्वारा वर्ष 1982 में की गई थी। इस संस्थान का सफल संचालन मंत्रालय के अधिकारियों, संस्थान के निदेशक, संकाय समुदाय, प्रशिक्षकों व प्रशिक्षणार्थियों के संयुक्त प्रयास व दूरदर्शिता का प्रतिफल है। इन सभी ने निरन्तर और कर्तव्यनिष्ठा के साथ संस्थान के दीर्घकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रमों जैसे शिल्प अनुदेशक प्रशिक्षण योजना (CITS) के अंतर्गत एक वर्षीय अवधि का अनुदेशक प्रशिक्षण कार्यक्रम, लघु अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा इंजीनियरों, पर्यवेक्षकों, तकनीशियनों व उद्योगों के कुशल व अर्द्धकुशल कामगारों और अन्य तकनीकी संस्थानों के नामित संकायो, जिनके वर्तमान कौशल स्तर में उन्नयन की आवश्यकता होती है, को सफल बनाने में अपना पूर्ण योगदान दिया। उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार नवीनतम तकनीक व अन्य सम्बन्धित क्षेत्र के पाठ्यक्रम का निर्माण और क्रियान्वयन सफलतापूर्वक संस्थान के समस्त कार्यरत कर्मियों द्वारा समय-समय पर होता रहता है। वर्तमान मे संस्थान द्वारा अनुदेशक प्रशिक्षण हेतु एक वर्षीय दीर्घकालीन प्रशिक्षण इलैक्ट्रोनिक मैकेनिक, इलैक्ट्रिशियन, कंम्प्यूटर साफटवेयर एप्लीकेशन तथा कंम्प्यूटर हार्डवेयर एवं नेटवर्किंग मैंटिनेस ट्रेड में तथा शिल्प प्रशिक्षण योजना (CTS) के अंतर्गत आईओटी स्मार्ट एग्रीकल्चर, सोलर तकनीशियन (इलैक्ट्रिशियन) तथा स्मार्ट हेल्थ केयर ट्रेड में प्रशिक्षण कार्यक्रम गुणवत्ता के साथ चलाये जा रहे हैं। आईबीएम कम्पनी के सहयोग से आईटी नेटवर्किंग और क्लाउड कम्प्यूटिंग में द्विवर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम वर्ष 2019 में शुरू किया गया। संस्थान की अपनी स्व सृजित एक उत्कृष्ट कार्य संस्कृति है जिससे इस क्षेत्र के उद्योगों तथा तकनीकी संस्थानों के साथ एक सहज और समन्वयपूर्ण सहभागिता का सेतु स्थापित किया गया है। लगभग 150 औद्योगिक प्रतिष्ठानों में अग्रगामी अप्रैंटिस प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुबन्ध का कार्यान्वयन और अनुवीक्षण (निगरानी) भी नियमित रूप से संस्थान द्वारा की जाती है। वर्तमान परिवेश में औद्योगिक संगठनों के लिए कुशल कामगारो का प्रशिक्षण आधुनिक तकनीकी के स्तर तक प्रदान करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। अतः प्रशिक्षण की गुणवत्ता और आधुनिकीकरण की मांग को पूरा करने के लिए संस्थान की प्रशिक्षण क्षमता में उन्नयन के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं जिससे वर्तमान में विद्यमान प्रशिक्षण प्रणाली को गतिशीलता और सुदृढ़ता प्रदान करके चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करने के लिए सक्षम बनाया जा सके जो आकांक्षी वर्ग की प्रशिक्षण आकांक्षाओं को पूरा करने मे सफल हो।
इस संस्थान को अनुदेशक प्रशिक्षण योजना के अन्तर्गत इलैक्ट्रिशियन, इलैक्ट्रोनिक मैकेनिक, कंम्प्यूटर हार्डवेयर एवं नेटवर्किंग मैंटिनेंस तथा कंम्प्यूटर साफटवेयर एप्लीकेशन इन चार ट्रेडो में देश के विभिन्न भागों में कार्यरत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के लिए आवयश्यक कुशल प्रशिक्षित अनुदेशकों की विशाल मांग को दृष्टिगत रखते हुए सुनियोजित और सुव्यवस्थित तरीके से शिल्प अनुदेशकों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लक्ष्य की पूर्ति का दायित्व सौंपा गया है। संस्थान का "उत्कृष्टता का केन्द्र" (CoE) के रूप में उच्चीकरण करते हुए विश्व बैंक पोषित व्यवसायिक प्रशिक्षण सुधार परियोजना (VTIP) के अन्तर्गत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में शिक्षणरत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के अनुदेशकों को प्रशिक्षण देने का उत्तदायित्व भी दिया गया है। संस्थान इंजीनियरों, पर्यवेक्षकों, तकनीकी कामगारों, कार्यकारियों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों के कुशल शिल्पकारों व प्रतिनिधियों तथा शैक्षणिक संस्थानों के कार्यरत संकायों के लिए नियमित रूप से पूरे वर्ष भर सीमित समयावधि के लघुकालीन पाठ्यक्रम तथा मांग अनुरूप निर्मित पाठ्यक्रम (Tailor Made) इनको आवश्यक कौशल प्रदान करने के लिए तथा वर्तमान कौशल के अद्यतन (Updation) हेतु सफलतापूर्वक आयोजित करता है।
अध्ययनरत बी०टैक, एम.एस.सी(इलैक्ट्रानिक), बी.एस.सी(आईटी) तथा डिप्लोमा छात्रों के लिए ग्रीष्मकालीन/प्रायोगिक/ औद्योगिक प्रशिक्षण का संचालन दक्षता केन्द्रित नवीनत प्रौद्योगिक विषय वस्तु के आधार पर इनके कौशल जनित कार्यकुशलता के उन्नयन हेतु संस्थान द्वारा किया जाता है। इस प्रशिक्षण में आधुनिक शिक्षण सामग्री, उपकरण, औजार तथा उन मशीनों का भी उपयोग किया जाता है जो उद्योगों मे विशेष रूप से चलन मे हैं। ऊपर वर्णित चारों व्यवसायों के लिए आवष्यक सभी संसाधन, मानक औजार सूची के अनुसार उपलब्ध हैं तथा संस्थान में अन्य आधुनिक और उद्योगपरख मशीन व उपकरण प्रशिक्षण की नवीन अवधारणा के अनुसार क्रय करके यथावत व्यवस्थित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त संस्थान में दीर्घ अनुभव प्राप्त, उत्कृष्ट प्रशिक्षण से परिमार्जित और स्वप्रेरणा युक्त तकनीक रूप से कुशल संकाय किसी भी अंतर्राष्ट्रीय मानक के सापेक्ष व्यवसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने मे पूर्ण सक्षम है। स्पष्ट अवधारणा का विकास तथा कौशल का उन्नयन व अद्यतन करना ही संस्थान का मुख्य उद्देश्य है।
इस संस्थान की क्षेत्र सीमा 16.95 एकड़ है। इसमें से 16.45 एकड़ भूमि पर प्रशासनिक अनुभाग, प्रशिक्षण अनुभाग, छात्रावास, कार्मिक आवास, विधुत सब स्टेशन, पम्प हाउस, पालीघर, अण्डर वाटर टैंक, ओपन जिम, पार्क, लीची का बगीचा, व सड़क आदि बनाये गई है। उद्योगों मे प्रचलित नवीनतम प्रौद्योगिकी केन्द्रित आधुनिक उपरकण, औजार तथा मशीनें, सभी शिक्षण सुविधाओं से सुसज्जित प्रयोगशालाओं में सुचारू रूप से व्यवस्थित किए गए हैं। इन प्रयोगलालाओं की अभिकल्पना व रूपरेखा को वर्तमान व भविष्य की प्रशिक्षण संभावनाओं का अवलोकन करके आरेखित किया गया है। संस्थान में कैन्टीन और छात्रावास की सुविधा भी आधुनिक स्तर के समरूप है।
राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI) देहरादून ग्रीन पार्क, निरंजनपुर, देहरादून में स्वच्छ पर्यावरण युक्त परिवेश में स्थित है। संस्थान देहरादून-जौलीग्रांट एयरपोर्ट से लगभग 25 किलोमीटर, देहरादून रेलवे स्टेशन से 5 किलोमीटर तथा अन्तराज्यीय बस अडडे से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नजदीकी प्रसिद्ध जगह मेन सब्जी मण्डी है। रेलवे स्टेशन व आईएसबीटी बस स्टैंड से ग्रीन पार्क तक आटो/रूट न० 5 के विक्रम या नगर बस सेवा/आटो आदि से आसानी से पंहुचा जा सकता है।
दूरदृष्टि (Vision) समाज को इलैट्रानिक और अग्रगमन मापयंत्रण (Process Instrumentation) इलैट्रानिक के क्षेत्र में उत्कृष्ट सर्वभौमिक मानदंड युक्त प्रशिक्षण प्रदाता संस्थान बनाना।
लक्ष्यः तकनीकी क्षेत्र में युवा पीढ़ी के सुनहरे भविष्य की संभावनाओं के निर्माण हेतु शिक्षाविदों और उद्योगों के दक्षता प्राप्ति की अवधारणा को एकीकृत करके उच्च गुणवत्त एवं उत्पादकता युक्त औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों तथा औद्योगिक प्रतिष्ठानों के कार्य बल पूर्ति के लिए विश्व स्तरीय अनुदेशकों का निर्माण करके औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की प्रशिक्षण प्रक्रिया मे सुधार और अद्यतन की प्राप्ति हेतु कौशल की श्रृंखला को नियमित रूप से प्रखर करते रहना।
गुणवत्ता नीतिः उत्कृष्ट मानक के अनुसार तथा मांग अनुरूप निर्मित प्रशिक्षण प्रदान करके हित धारकों की इच्छा पूर्ण करने के लिए प्रतिबद्ध है। हम संस्थान और उद्योगों के मध्य एक स्वस्थ, समन्वय व सहयोग पूर्ण परिवेश निर्मित करके सीखने की प्रक्रिया के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता का उत्पाद बनाने की कोशिश करेंगे।
National Skill Training Institute(NSTI), Dehradun was setup in the year 1982 by Directorate General of Employment & Training (DGET) under Ministry of Labour, Government of India. This has been possible because of the vision and concerted efforts of the Directors, faculties, staff and trainees of the institute, who have contributed untiringly to the major activities of the institute namely, Long Term (One Year duration) vocational (ITI) instructor training programme under CITS, Short Term Training for upgrading the skills of engineers, supervisors, technicians, industrial worker and faculties of technical institutions in designated and tailor made (need based) various technologies and discipline. The institute at present offers long term training programmes of CITS in Electronic Mechanic, Electrician , Computer Software Applications and Computer Hardware Network Maintenance. CTS programmes in IOT Smart Agriculture, Solar Technician and Smart Health care. In 2019 started two Year Diploma in IT Networking & Cloud computing in collaboration with IBM company. The institute has a very unique work culture and has a very strong network with industry and technical institutions. We also monitor around 150 establishments for implementing Apprenticeship programme. present context poses a number of challenges to the industrial training system and thus the role of the institute would be to build capacity and strengthen the existing system to meet those challenges and in turn fulfill its mandate.
This institute is entrusted with the mission of producing systematically trained Craft Instructors to meet the huge demand of various Industrial Training Institutions in our country under Craft Instructor Training Scheme (CITS) in four trades namely Electrician , Electronics Mechanic, Computer Hardware & Network Maintenance (CHNM) and Computer Software Applications (CSA), and has been upgraded as a Centre of Excellence (CoE) under the World Bank assisted VTIP to train the ITI instructors under IT Sector.
The Institute also imparting training and updating the skills of Engineers / Supervisors / Technicians / Executives/ Industrial Personnel & Faculties of educational institutions through courses of short duration conducted in modules and Tailor Made Courses as per the specific needs of Industries / Govt Est. / PSUs / Technical Institutions.
The Institute also conducts summer/practical/industrial training for the graduating B.Tech, M.Sc (Electronics), B.Sc (IT), M.Sc (IT) and Diploma Students The courses are conducted for skill up gradation through intensive skill oriented training by using the latest version of equipment and machinery used in industry. This institute has the state of art infrastructure in 4 trades apart from highly qualified, well experienced trained and highly motivated training faculty to provide training comparable to any international standards in Vocational Training. The emphasis of training is to develop clear concepts and upgrade the skills.
It is situated on a sprawling 16.95 acres land (16.45 acres Used as build up area for Training block, Girls hostel, boys hostel, staff quarters, substation, pump house, poly house, under ground water tanks,
sewerage tanks, open air gym, playground, central park, lichi bagh,
green belt and roads)with well designed workshops / laboratories equipped with latest machineries and training gadgets as par latest trends in Industries. Canteen and Hostel facilities with modern amenities' are also available in this institute.
NSTI is easily accessible as it is located at Green Park, Niranjanpur, Dehradun nearer to main sabji mandi, Dehradun in eco friendly atmosphere. This Institute is about 25 Km from Dehradun Airport and 5km from Dehradun Railway Station and 2km from ISBT, Dehradun. The nearest land mark is, opposite to main sabji mandi.Auto/Vikram (Route No-5)/Auto Rikshaw is available from Railway station and ISBT Bus Stand for reaching up to Green Park.
To be the premier institution in providing value based world class environment friendly skill training in Electronics and Process Instrumentation Sectors to the Society.
To continuously hone the skills String for improving and updating ITIs training activities to build world class instructors for ITIs & industrial workforces for higher quality & productivity, bridging the gap between academics and industries for better future prospects of young generation in the technical field.
We are committed to meet the needs of interested parties in terms of providing value added quality learning through Regular / Tailor Made Courses.
We shall create a healthy, harmonious Industry - Institute relationship to produce products of international quality of learning process.
We will strive to continually enhance the effectiveness of learning services by implementing ISO 29990:2010 standard in order to be globally competitive.
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राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान NSTI देहरादून की स्थापना भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के अन्तर्गत कार्यरत रोजगार एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय द्वारा वर्ष एक हज़ार नौ सौ बयासी में की गई थी। इस संस्थान का सफल संचालन मंत्रालय के अधिकारियों, संस्थान के निदेशक, संकाय समुदाय, प्रशिक्षकों व प्रशिक्षणार्थियों के संयुक्त प्रयास व दूरदर्शिता का प्रतिफल है। इन सभी ने निरन्तर और कर्तव्यनिष्ठा के साथ संस्थान के दीर्घकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रमों जैसे शिल्प अनुदेशक प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत एक वर्षीय अवधि का अनुदेशक प्रशिक्षण कार्यक्रम, लघु अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा इंजीनियरों, पर्यवेक्षकों, तकनीशियनों व उद्योगों के कुशल व अर्द्धकुशल कामगारों और अन्य तकनीकी संस्थानों के नामित संकायो, जिनके वर्तमान कौशल स्तर में उन्नयन की आवश्यकता होती है, को सफल बनाने में अपना पूर्ण योगदान दिया। उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार नवीनतम तकनीक व अन्य सम्बन्धित क्षेत्र के पाठ्यक्रम का निर्माण और क्रियान्वयन सफलतापूर्वक संस्थान के समस्त कार्यरत कर्मियों द्वारा समय-समय पर होता रहता है। वर्तमान मे संस्थान द्वारा अनुदेशक प्रशिक्षण हेतु एक वर्षीय दीर्घकालीन प्रशिक्षण इलैक्ट्रोनिक मैकेनिक, इलैक्ट्रिशियन, कंम्प्यूटर साफटवेयर एप्लीकेशन तथा कंम्प्यूटर हार्डवेयर एवं नेटवर्किंग मैंटिनेस ट्रेड में तथा शिल्प प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत आईओटी स्मार्ट एग्रीकल्चर, सोलर तकनीशियन तथा स्मार्ट हेल्थ केयर ट्रेड में प्रशिक्षण कार्यक्रम गुणवत्ता के साथ चलाये जा रहे हैं। आईबीएम कम्पनी के सहयोग से आईटी नेटवर्किंग और क्लाउड कम्प्यूटिंग में द्विवर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम वर्ष दो हज़ार उन्नीस में शुरू किया गया। संस्थान की अपनी स्व सृजित एक उत्कृष्ट कार्य संस्कृति है जिससे इस क्षेत्र के उद्योगों तथा तकनीकी संस्थानों के साथ एक सहज और समन्वयपूर्ण सहभागिता का सेतु स्थापित किया गया है। लगभग एक सौ पचास औद्योगिक प्रतिष्ठानों में अग्रगामी अप्रैंटिस प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुबन्ध का कार्यान्वयन और अनुवीक्षण भी नियमित रूप से संस्थान द्वारा की जाती है। वर्तमान परिवेश में औद्योगिक संगठनों के लिए कुशल कामगारो का प्रशिक्षण आधुनिक तकनीकी के स्तर तक प्रदान करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। अतः प्रशिक्षण की गुणवत्ता और आधुनिकीकरण की मांग को पूरा करने के लिए संस्थान की प्रशिक्षण क्षमता में उन्नयन के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं जिससे वर्तमान में विद्यमान प्रशिक्षण प्रणाली को गतिशीलता और सुदृढ़ता प्रदान करके चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करने के लिए सक्षम बनाया जा सके जो आकांक्षी वर्ग की प्रशिक्षण आकांक्षाओं को पूरा करने मे सफल हो। इस संस्थान को अनुदेशक प्रशिक्षण योजना के अन्तर्गत इलैक्ट्रिशियन, इलैक्ट्रोनिक मैकेनिक, कंम्प्यूटर हार्डवेयर एवं नेटवर्किंग मैंटिनेंस तथा कंम्प्यूटर साफटवेयर एप्लीकेशन इन चार ट्रेडो में देश के विभिन्न भागों में कार्यरत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के लिए आवयश्यक कुशल प्रशिक्षित अनुदेशकों की विशाल मांग को दृष्टिगत रखते हुए सुनियोजित और सुव्यवस्थित तरीके से शिल्प अनुदेशकों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लक्ष्य की पूर्ति का दायित्व सौंपा गया है। संस्थान का "उत्कृष्टता का केन्द्र" के रूप में उच्चीकरण करते हुए विश्व बैंक पोषित व्यवसायिक प्रशिक्षण सुधार परियोजना के अन्तर्गत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में शिक्षणरत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के अनुदेशकों को प्रशिक्षण देने का उत्तदायित्व भी दिया गया है। संस्थान इंजीनियरों, पर्यवेक्षकों, तकनीकी कामगारों, कार्यकारियों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों के कुशल शिल्पकारों व प्रतिनिधियों तथा शैक्षणिक संस्थानों के कार्यरत संकायों के लिए नियमित रूप से पूरे वर्ष भर सीमित समयावधि के लघुकालीन पाठ्यक्रम तथा मांग अनुरूप निर्मित पाठ्यक्रम इनको आवश्यक कौशल प्रदान करने के लिए तथा वर्तमान कौशल के अद्यतन हेतु सफलतापूर्वक आयोजित करता है। अध्ययनरत बीशून्यटैक, एम.एस.सी, बी.एस.सी तथा डिप्लोमा छात्रों के लिए ग्रीष्मकालीन/प्रायोगिक/ औद्योगिक प्रशिक्षण का संचालन दक्षता केन्द्रित नवीनत प्रौद्योगिक विषय वस्तु के आधार पर इनके कौशल जनित कार्यकुशलता के उन्नयन हेतु संस्थान द्वारा किया जाता है। इस प्रशिक्षण में आधुनिक शिक्षण सामग्री, उपकरण, औजार तथा उन मशीनों का भी उपयोग किया जाता है जो उद्योगों मे विशेष रूप से चलन मे हैं। ऊपर वर्णित चारों व्यवसायों के लिए आवष्यक सभी संसाधन, मानक औजार सूची के अनुसार उपलब्ध हैं तथा संस्थान में अन्य आधुनिक और उद्योगपरख मशीन व उपकरण प्रशिक्षण की नवीन अवधारणा के अनुसार क्रय करके यथावत व्यवस्थित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त संस्थान में दीर्घ अनुभव प्राप्त, उत्कृष्ट प्रशिक्षण से परिमार्जित और स्वप्रेरणा युक्त तकनीक रूप से कुशल संकाय किसी भी अंतर्राष्ट्रीय मानक के सापेक्ष व्यवसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने मे पूर्ण सक्षम है। स्पष्ट अवधारणा का विकास तथा कौशल का उन्नयन व अद्यतन करना ही संस्थान का मुख्य उद्देश्य है। इस संस्थान की क्षेत्र सीमा सोलह.पचानवे एकड़ है। इसमें से सोलह.पैंतालीस एकड़ भूमि पर प्रशासनिक अनुभाग, प्रशिक्षण अनुभाग, छात्रावास, कार्मिक आवास, विधुत सब स्टेशन, पम्प हाउस, पालीघर, अण्डर वाटर टैंक, ओपन जिम, पार्क, लीची का बगीचा, व सड़क आदि बनाये गई है। उद्योगों मे प्रचलित नवीनतम प्रौद्योगिकी केन्द्रित आधुनिक उपरकण, औजार तथा मशीनें, सभी शिक्षण सुविधाओं से सुसज्जित प्रयोगशालाओं में सुचारू रूप से व्यवस्थित किए गए हैं। इन प्रयोगलालाओं की अभिकल्पना व रूपरेखा को वर्तमान व भविष्य की प्रशिक्षण संभावनाओं का अवलोकन करके आरेखित किया गया है। संस्थान में कैन्टीन और छात्रावास की सुविधा भी आधुनिक स्तर के समरूप है। राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान देहरादून ग्रीन पार्क, निरंजनपुर, देहरादून में स्वच्छ पर्यावरण युक्त परिवेश में स्थित है। संस्थान देहरादून-जौलीग्रांट एयरपोर्ट से लगभग पच्चीस किलोग्राममीटर, देहरादून रेलवे स्टेशन से पाँच किलोग्राममीटर तथा अन्तराज्यीय बस अडडे से दो किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थित है। नजदीकी प्रसिद्ध जगह मेन सब्जी मण्डी है। रेलवे स्टेशन व आईएसबीटी बस स्टैंड से ग्रीन पार्क तक आटो/रूट नशून्य पाँच के विक्रम या नगर बस सेवा/आटो आदि से आसानी से पंहुचा जा सकता है। दूरदृष्टि समाज को इलैट्रानिक और अग्रगमन मापयंत्रण इलैट्रानिक के क्षेत्र में उत्कृष्ट सर्वभौमिक मानदंड युक्त प्रशिक्षण प्रदाता संस्थान बनाना। लक्ष्यः तकनीकी क्षेत्र में युवा पीढ़ी के सुनहरे भविष्य की संभावनाओं के निर्माण हेतु शिक्षाविदों और उद्योगों के दक्षता प्राप्ति की अवधारणा को एकीकृत करके उच्च गुणवत्त एवं उत्पादकता युक्त औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों तथा औद्योगिक प्रतिष्ठानों के कार्य बल पूर्ति के लिए विश्व स्तरीय अनुदेशकों का निर्माण करके औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की प्रशिक्षण प्रक्रिया मे सुधार और अद्यतन की प्राप्ति हेतु कौशल की श्रृंखला को नियमित रूप से प्रखर करते रहना। गुणवत्ता नीतिः उत्कृष्ट मानक के अनुसार तथा मांग अनुरूप निर्मित प्रशिक्षण प्रदान करके हित धारकों की इच्छा पूर्ण करने के लिए प्रतिबद्ध है। हम संस्थान और उद्योगों के मध्य एक स्वस्थ, समन्वय व सहयोग पूर्ण परिवेश निर्मित करके सीखने की प्रक्रिया के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता का उत्पाद बनाने की कोशिश करेंगे। National Skill Training Institute, Dehradun was setup in the year एक हज़ार नौ सौ बयासी by Directorate General of Employment & Training under Ministry of Labour, Government of India. This has been possible because of the vision and concerted efforts of the Directors, faculties, staff and trainees of the institute, who have contributed untiringly to the major activities of the institute namely, Long Term vocational instructor training programme under CITS, Short Term Training for upgrading the skills of engineers, supervisors, technicians, industrial worker and faculties of technical institutions in designated and tailor made various technologies and discipline. The institute at present offers long term training programmes of CITS in Electronic Mechanic, Electrician , Computer Software Applications and Computer Hardware Network Maintenance. CTS programmes in IOT Smart Agriculture, Solar Technician and Smart Health care. In दो हज़ार उन्नीस started two Year Diploma in IT Networking & Cloud computing in collaboration with IBM company. The institute has a very unique work culture and has a very strong network with industry and technical institutions. We also monitor around एक सौ पचास establishments for implementing Apprenticeship programme. present context poses a number of challenges to the industrial training system and thus the role of the institute would be to build capacity and strengthen the existing system to meet those challenges and in turn fulfill its mandate. This institute is entrusted with the mission of producing systematically trained Craft Instructors to meet the huge demand of various Industrial Training Institutions in our country under Craft Instructor Training Scheme in four trades namely Electrician , Electronics Mechanic, Computer Hardware & Network Maintenance and Computer Software Applications , and has been upgraded as a Centre of Excellence under the World Bank assisted VTIP to train the ITI instructors under IT Sector. The Institute also imparting training and updating the skills of Engineers / Supervisors / Technicians / Executives/ Industrial Personnel & Faculties of educational institutions through courses of short duration conducted in modules and Tailor Made Courses as per the specific needs of Industries / Govt Est. / PSUs / Technical Institutions. The Institute also conducts summer/practical/industrial training for the graduating B.Tech, M.Sc , B.Sc , M.Sc and Diploma Students The courses are conducted for skill up gradation through intensive skill oriented training by using the latest version of equipment and machinery used in industry. This institute has the state of art infrastructure in चार trades apart from highly qualified, well experienced trained and highly motivated training faculty to provide training comparable to any international standards in Vocational Training. The emphasis of training is to develop clear concepts and upgrade the skills. It is situated on a sprawling सोलह.पचानवे acres land with well designed workshops / laboratories equipped with latest machineries and training gadgets as par latest trends in Industries. Canteen and Hostel facilities with modern amenities' are also available in this institute. NSTI is easily accessible as it is located at Green Park, Niranjanpur, Dehradun nearer to main sabji mandi, Dehradun in eco friendly atmosphere. This Institute is about पच्चीस Km from Dehradun Airport and पाँच किलोमीटर from Dehradun Railway Station and दो किलोमीटर from ISBT, Dehradun. The nearest land mark is, opposite to main sabji mandi.Auto/Vikram /Auto Rikshaw is available from Railway station and ISBT Bus Stand for reaching up to Green Park. To be the premier institution in providing value based world class environment friendly skill training in Electronics and Process Instrumentation Sectors to the Society. To continuously hone the skills String for improving and updating ITIs training activities to build world class instructors for ITIs & industrial workforces for higher quality & productivity, bridging the gap between academics and industries for better future prospects of young generation in the technical field. We are committed to meet the needs of interested parties in terms of providing value added quality learning through Regular / Tailor Made Courses. We shall create a healthy, harmonious Industry - Institute relationship to produce products of international quality of learning process. We will strive to continually enhance the effectiveness of learning services by implementing ISO उनतीस हज़ार नौ सौ नब्बे:दो हज़ार दस standard in order to be globally competitive.
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प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में साढ़े चार लाख से ज्यादा भारतीय गैरकानूनी रूप से रह रहे हैं। इन अवैध प्रवासियों की संख्या में 2009 के बाद से कोई बदलाव नहीं आया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मेक्सिको की ओर से होने वाले अवैध प्रवेश में 2009 से 2012 के बीच गिरावट दर्ज की गई है। 2012 के आंकड़ों के आधार पर अमेरिका में कुल एक करोड़ बारह लाख लोग अवैध रूप से रह रहे हैं। इस संख्या में 2009 के बाद से कोई बदलाव नहीं आया है। न्यू हैंपशायर में अवैध प्रवासियों में सबसे अधिक संख्या भारतीयों की है।
इस तरह अवैध रूप से रह रहे कुल लोगों का चार फीसदी हैं। मंगलवार को जारी की गई इस रिपोर्ट में अनुमानित अवैध प्रवासी भारतीयों की संख्या 2012 के आंकड़ों पर आधारित है।
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प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में साढ़े चार लाख से ज्यादा भारतीय गैरकानूनी रूप से रह रहे हैं। इन अवैध प्रवासियों की संख्या में दो हज़ार नौ के बाद से कोई बदलाव नहीं आया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मेक्सिको की ओर से होने वाले अवैध प्रवेश में दो हज़ार नौ से दो हज़ार बारह के बीच गिरावट दर्ज की गई है। दो हज़ार बारह के आंकड़ों के आधार पर अमेरिका में कुल एक करोड़ बारह लाख लोग अवैध रूप से रह रहे हैं। इस संख्या में दो हज़ार नौ के बाद से कोई बदलाव नहीं आया है। न्यू हैंपशायर में अवैध प्रवासियों में सबसे अधिक संख्या भारतीयों की है। इस तरह अवैध रूप से रह रहे कुल लोगों का चार फीसदी हैं। मंगलवार को जारी की गई इस रिपोर्ट में अनुमानित अवैध प्रवासी भारतीयों की संख्या दो हज़ार बारह के आंकड़ों पर आधारित है। Share this:
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अनुषांगिक छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने ट्वीट किया है, "एबीवीपी का भ्रष्टाचार के खिलाफ बिना किसी भी समझौते के साफ स्टैंड है। जिसके चलते 1973 में नवनिर्माण आंदोलन को शुरु और मजबूत किया गया। एबीवीपी के इस प्रतिरोध की वजह से उस वक्त की गुजरात सरकार गिर गई थी..."। (मूल ट्विट का हिंदी अनुवाद)
एबीवीपी के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से ये ट्वीट 9 जुलाई 2020 को किया गया है। 9 जुलाई एबीवीपी का स्थापना दिवस होता है। इस ट्वीट के साथ एक फोटो भी पोस्ट किया गया है। दावा किया गया है कि ये फोटो एबीवीपी का है और 1973 नवनिर्माण आंदोलन का है। एबीवीपी का ट्वीट आप इस लिंक पर देख सकते हैं। (आर्काइवल लिंक)
ABVP's uncompromising stand against corruption initiated & strengthend the Navnirman Andolan in 1973. ABVP's protests led to falling of the then Gujarat government.
अब आइये, जरा इस फोटो की सच्चाई जानते हैं। जब इस फोटो के बारे में खोजबीन की गई तो ये इंटरनेट पर काफी जगह मौजूद मिला। एबीवीपी के अलावा हर जगह ये फोटो "महागुजरात आंदोलन" के संदर्भ में प्रकाशित किया गया है। महागुजरात आंदोलन, गुजरात के स्वतंत्र राज्य के निर्माण का आंदोलन था। इसी आंदोलन की बदौलत ही 1 मई 1960 को गुजरात एक स्वतंत्र राज्या बना था। पहले गुजरात महाराष्ट्र का ही हिस्सा था।
डीएनए की वेबसाइट पर 5 मई 2012 को महागुजरात आंदोलन पर एक रिपोर्ट पब्लिश हुई थी। जहां आप इस फोटो को देख सकते हैं। रिपोर्ट देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।
इसके अलावा भी अनेकों जगह पर ये फोटो महागुजरात आंदोलन के संदर्भ में पब्लिश हुआ है। एक जगह पर बताया गया है कि ये फोटो महागुजरात आंदोलन का है और 1956 का है। Gujarat.in नाम की वेबसाइट पर इस तरह का दावा है।
1 मई 2017 को अहमदाबाद में महागुजरात आंदोलन के नेता इंदुलाल याज्ञनिक की प्रतिमा का अनावरण किया गया। मुख्यमंत्री का ट्विट आप यहां देख सकते हैं।
इस मौके पर महागुजरात आंदोलन के फोटो के साथ साज-सज्जा भी की गई। इस साज-सज्जा में भी आप इस फोटो को देख सकते हैं। नवभारत टाइम्स ने गुजरात दिवस के मौके पर महागुजरात आंदोलन पर एक रिपोर्ट पब्लिश की थी। शीर्षक था "गुजरात दिवसः कहानी आज़ादी के बाद के सबसे बड़े जन आंदोलन की "। रिपोर्ट में आंदोलन के बारे में और इस आंदोलन के लोकप्रिय नेता इंदुलाल याज्ञनिक के बारे में विस्तार से लिखा है। नवभारत टाइम्स की इस रिपोर्ट में महागुजरात आंदोलन के फोटो के होर्डिंग्स में आप इस फोटो को साफ देख सकते हैं। रिपोर्ट देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।
इस प्रकार स्पष्ट है कि ये फोटो न तो एबीवीपी का है और न ही 1973 के नवनिर्माण आंदोलन का। ये फोटो महागुजरात आंदोलन का है और 1960 से पहले का है। एबीवीपी का दावा गलत है। ट्वीट की गई फोटो और जानकारी फ़ेक और भ्रामक है। फोटो को संदर्भ से काटकर गलत संदर्भ में खुद के शौर्यगान के लिए इस्तेमाल किया गया है।
लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। आप सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते रहते हैं।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषांगिक छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने ट्वीट किया है, "एबीवीपी का भ्रष्टाचार के खिलाफ बिना किसी भी समझौते के साफ स्टैंड है। जिसके चलते एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में नवनिर्माण आंदोलन को शुरु और मजबूत किया गया। एबीवीपी के इस प्रतिरोध की वजह से उस वक्त की गुजरात सरकार गिर गई थी..."। एबीवीपी के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से ये ट्वीट नौ जुलाई दो हज़ार बीस को किया गया है। नौ जुलाई एबीवीपी का स्थापना दिवस होता है। इस ट्वीट के साथ एक फोटो भी पोस्ट किया गया है। दावा किया गया है कि ये फोटो एबीवीपी का है और एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर नवनिर्माण आंदोलन का है। एबीवीपी का ट्वीट आप इस लिंक पर देख सकते हैं। ABVP's uncompromising stand against corruption initiated & strengthend the Navnirman Andolan in एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर. ABVP's protests led to falling of the then Gujarat government. अब आइये, जरा इस फोटो की सच्चाई जानते हैं। जब इस फोटो के बारे में खोजबीन की गई तो ये इंटरनेट पर काफी जगह मौजूद मिला। एबीवीपी के अलावा हर जगह ये फोटो "महागुजरात आंदोलन" के संदर्भ में प्रकाशित किया गया है। महागुजरात आंदोलन, गुजरात के स्वतंत्र राज्य के निर्माण का आंदोलन था। इसी आंदोलन की बदौलत ही एक मई एक हज़ार नौ सौ साठ को गुजरात एक स्वतंत्र राज्या बना था। पहले गुजरात महाराष्ट्र का ही हिस्सा था। डीएनए की वेबसाइट पर पाँच मई दो हज़ार बारह को महागुजरात आंदोलन पर एक रिपोर्ट पब्लिश हुई थी। जहां आप इस फोटो को देख सकते हैं। रिपोर्ट देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। इसके अलावा भी अनेकों जगह पर ये फोटो महागुजरात आंदोलन के संदर्भ में पब्लिश हुआ है। एक जगह पर बताया गया है कि ये फोटो महागुजरात आंदोलन का है और एक हज़ार नौ सौ छप्पन का है। Gujarat.in नाम की वेबसाइट पर इस तरह का दावा है। एक मई दो हज़ार सत्रह को अहमदाबाद में महागुजरात आंदोलन के नेता इंदुलाल याज्ञनिक की प्रतिमा का अनावरण किया गया। मुख्यमंत्री का ट्विट आप यहां देख सकते हैं। इस मौके पर महागुजरात आंदोलन के फोटो के साथ साज-सज्जा भी की गई। इस साज-सज्जा में भी आप इस फोटो को देख सकते हैं। नवभारत टाइम्स ने गुजरात दिवस के मौके पर महागुजरात आंदोलन पर एक रिपोर्ट पब्लिश की थी। शीर्षक था "गुजरात दिवसः कहानी आज़ादी के बाद के सबसे बड़े जन आंदोलन की "। रिपोर्ट में आंदोलन के बारे में और इस आंदोलन के लोकप्रिय नेता इंदुलाल याज्ञनिक के बारे में विस्तार से लिखा है। नवभारत टाइम्स की इस रिपोर्ट में महागुजरात आंदोलन के फोटो के होर्डिंग्स में आप इस फोटो को साफ देख सकते हैं। रिपोर्ट देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। इस प्रकार स्पष्ट है कि ये फोटो न तो एबीवीपी का है और न ही एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर के नवनिर्माण आंदोलन का। ये फोटो महागुजरात आंदोलन का है और एक हज़ार नौ सौ साठ से पहले का है। एबीवीपी का दावा गलत है। ट्वीट की गई फोटो और जानकारी फ़ेक और भ्रामक है। फोटो को संदर्भ से काटकर गलत संदर्भ में खुद के शौर्यगान के लिए इस्तेमाल किया गया है। लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं ट्रेनर हैं। आप सरकारी योजनाओं से संबंधित दावों और वायरल संदेशों की पड़ताल भी करते रहते हैं। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से देश में स्टार्टअप्स को प्रमोट करने को लेकर किए गए कई बड़े एलान. .
Airtel ने अपने 359 रुपये के प्रीपेड रिचार्ज प्लान में किए कुछ बदलाव, जानें इसके अन्य फायदें . .
मौलाना आजाद नेशनल फैलोशिप योजना को किया बंद. .
सपना चौधरी की एक बार फिर से मुश्किलें बढ़ी, जानें पूरा मामला . .
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से देश में स्टार्टअप्स को प्रमोट करने को लेकर किए गए कई बड़े एलान. . Airtel ने अपने तीन सौ उनसठ रुपयापये के प्रीपेड रिचार्ज प्लान में किए कुछ बदलाव, जानें इसके अन्य फायदें . . मौलाना आजाद नेशनल फैलोशिप योजना को किया बंद. . सपना चौधरी की एक बार फिर से मुश्किलें बढ़ी, जानें पूरा मामला . .
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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के एक काफिले पर हुए फिदायीं हमले में इस अर्धसैनिक बल के 40 जवानों की शहादत के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली थी। पुलवामा हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर पर हवाई हमला किया था, जिसके अगले ही दिन पाकिस्तान ने एफ-16 सहित 24 लड़ाकू विमानों के साथ भारत में घुसने की कोशिश की थी। भारत और पकिस्तान वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बीच झड़प के दौरान मिग-21 के गिरने के बाद पायलट पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में उतर गए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को हिरासत में ले लिया था। लेकिन एक मार्च को उन्हें भारत को वापस भी सौंप दिया था। अल्वी ने कहा कि भारत की कार्रवाई ने क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाला है।
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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में चौदह फरवरी को सीआरपीएफ के एक काफिले पर हुए फिदायीं हमले में इस अर्धसैनिक बल के चालीस जवानों की शहादत के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली थी। पुलवामा हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना ने छब्बीस फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर पर हवाई हमला किया था, जिसके अगले ही दिन पाकिस्तान ने एफ-सोलह सहित चौबीस लड़ाकू विमानों के साथ भारत में घुसने की कोशिश की थी। भारत और पकिस्तान वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बीच झड़प के दौरान मिग-इक्कीस के गिरने के बाद पायलट पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में उतर गए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को हिरासत में ले लिया था। लेकिन एक मार्च को उन्हें भारत को वापस भी सौंप दिया था। अल्वी ने कहा कि भारत की कार्रवाई ने क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाला है।
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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के महासचिव और तृणमूल के दूसरे नंबर के नेता अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि जो बागी उम्मीदवार पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं, उन्हें बाद में पार्टी में वापस लिए जाने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। पूर्वी मिदनापुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए, अभिषेक बनर्जी ने कहा, "मैंने विभिन्न स्रोतों से सुना है कि जो उम्मीदवार आम, केला या टॉर्च जैसे यादृच्छिक प्रतीकों का उपयोग करके चुनाव लड़ रहे हैं, वे तृणमूल कांग्रेस समर्थित स्वतंत्र उम्मीदवार होने का दावा कर रहे हैं। उनके झांसे में न आएं धोखा।
टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि टीएमसी छोड़ने वाले निर्दलीय उम्मीदवारों को वापस नहीं लिया जाएगा। पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव 8 जुलाई को होने हैं। जिला परिषदों, पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों में लगभग 75,000 उम्मीदवारों को चुनने के लिए लगभग 5. 67 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं।
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तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और तृणमूल के दूसरे नंबर के नेता अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि जो बागी उम्मीदवार पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं, उन्हें बाद में पार्टी में वापस लिए जाने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। पूर्वी मिदनापुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए, अभिषेक बनर्जी ने कहा, "मैंने विभिन्न स्रोतों से सुना है कि जो उम्मीदवार आम, केला या टॉर्च जैसे यादृच्छिक प्रतीकों का उपयोग करके चुनाव लड़ रहे हैं, वे तृणमूल कांग्रेस समर्थित स्वतंत्र उम्मीदवार होने का दावा कर रहे हैं। उनके झांसे में न आएं धोखा। टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि टीएमसी छोड़ने वाले निर्दलीय उम्मीदवारों को वापस नहीं लिया जाएगा। पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव आठ जुलाई को होने हैं। जिला परिषदों, पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों में लगभग पचहत्तर,शून्य उम्मीदवारों को चुनने के लिए लगभग पाँच. सरसठ करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं।
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Rudra- The Edge Of Darkness Trailer Release : अजय देवगन (Ajay Devgn) स्टारर सीरीज 'रुद्रा' (Rudra) का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है. इस सीरीज (Rudra Series Trailer) के जरिए अजय देवगन ओटीटी (OTT Web Series) सीरीज की दुनिया में डेब्यू कर रहे हैं. अजय देवगन की यह सीरीज ब्रिटिश साइकोलॉजिकल क्राइम ड्रामा सीरीज लूथर का रूपांतरण है। अजय देवगन इस सीरीज में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। अजय देवगन एक पुलिस अधिकारी के किरदार में हैं, खास बात ये है कि , सीरीज में अचानक ही अजय के किरदार में बदलाव आ जाएंगे. वह एक पुलिस अधिकारी से साइको क्रिमिनल बन जाएंगे। अजय देवगन की इस वेब सीरीज का निर्माण बीबीसी स्टूडियोज और एप्लॉइज एंटरटेनमेंट ने किया है। ये सीरीज डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर देखी जा सकेगी.
ट्रेलर को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉनस मिल रहा है, लोग कह रहे हैं कि ट्रेलर धमाकेदार है तो सीरीज बवाल होगी. किसी ने कहा-अजय देवगन का इंटेंस लुक किलर है. तो किसी ने कहा अजय देवगन सुपरहिट है. लोग इस सीरीज के ट्रेलर को मास्टरपीस बता रहे हैं.
कोरोना महामारी के बाद जब से सिनेमाघरों में फिल्मों की रिलीज पर लगाम सी लग गई है, ओटीटी पर फिल्मों और सीरीज की बहार आ गई है. अब तो बड़े-बड़े स्टार्स की फिल्में और सीरीज भी ओटीटी पर रिलीज के लिए तैयार हैं. इनमें से एक है अजय देवगन की रूद्र. कुछ वक्त पहले ही अजय देवगन की फिल्म भुज भी रिलीज हुई थी जो कि ओटीटी रिलीज ही थी.
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Rudra- The Edge Of Darkness Trailer Release : अजय देवगन स्टारर सीरीज 'रुद्रा' का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है. इस सीरीज के जरिए अजय देवगन ओटीटी सीरीज की दुनिया में डेब्यू कर रहे हैं. अजय देवगन की यह सीरीज ब्रिटिश साइकोलॉजिकल क्राइम ड्रामा सीरीज लूथर का रूपांतरण है। अजय देवगन इस सीरीज में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। अजय देवगन एक पुलिस अधिकारी के किरदार में हैं, खास बात ये है कि , सीरीज में अचानक ही अजय के किरदार में बदलाव आ जाएंगे. वह एक पुलिस अधिकारी से साइको क्रिमिनल बन जाएंगे। अजय देवगन की इस वेब सीरीज का निर्माण बीबीसी स्टूडियोज और एप्लॉइज एंटरटेनमेंट ने किया है। ये सीरीज डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर देखी जा सकेगी. ट्रेलर को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉनस मिल रहा है, लोग कह रहे हैं कि ट्रेलर धमाकेदार है तो सीरीज बवाल होगी. किसी ने कहा-अजय देवगन का इंटेंस लुक किलर है. तो किसी ने कहा अजय देवगन सुपरहिट है. लोग इस सीरीज के ट्रेलर को मास्टरपीस बता रहे हैं. कोरोना महामारी के बाद जब से सिनेमाघरों में फिल्मों की रिलीज पर लगाम सी लग गई है, ओटीटी पर फिल्मों और सीरीज की बहार आ गई है. अब तो बड़े-बड़े स्टार्स की फिल्में और सीरीज भी ओटीटी पर रिलीज के लिए तैयार हैं. इनमें से एक है अजय देवगन की रूद्र. कुछ वक्त पहले ही अजय देवगन की फिल्म भुज भी रिलीज हुई थी जो कि ओटीटी रिलीज ही थी.
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मुंबई । गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले रिलीज हुई शाहरुख खान अभिनीत फिल्म 'रईस' सिनेमाघरों में अपना जलवा बिखेर रही है। फिल्म ने सिर्फ तीन दिन में 59.83 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू लिया है। बॉक्स आफिस पर रईस ने शुक्रवार को कामकाजी दिन होने के बावजूद 13.11 करोड़ रुपये की कमाई की।
फिल्म ने पहले ही दिन बड़ी कमाई करते हुए 20.42 करोड़ रुपये कमाए थे। अगले दिन सारे रिकार्ड तोड़ते हुए रईस ने शानदार 26.30 करोड़ रुपये कमाए जो कि गणतंत्र दिवस के मौके पर फिल्म की कमाई का नया रिकॉर्ड है। फिल्म की रिलीज के तीसरे दिन शुक्रवार को फिल्म को सुबह के शो में 35 से 40 फीसदी और रात के शो में 90 फीसदी दर्शक मिले।
रईस ने अमेरिका में बुधवार को 347,000 डॉलर का कारोबार किया। खाड़ी देशों में फिल्म ने करीब 500,00 डॉलर का कारोबार किया है। ब्रिटेन में फिल्म ने 158,000 डॉलर कमाए तो आस्ट्रेलिया में दो दिन में यह आंकड़ा 268,000 डॉलर का रहा।
मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम 53वें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था।
अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
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मुंबई । गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले रिलीज हुई शाहरुख खान अभिनीत फिल्म 'रईस' सिनेमाघरों में अपना जलवा बिखेर रही है। फिल्म ने सिर्फ तीन दिन में उनसठ.तिरासी करोड़ रुपये का आंकड़ा छू लिया है। बॉक्स आफिस पर रईस ने शुक्रवार को कामकाजी दिन होने के बावजूद तेरह.ग्यारह करोड़ रुपये की कमाई की। फिल्म ने पहले ही दिन बड़ी कमाई करते हुए बीस.बयालीस करोड़ रुपये कमाए थे। अगले दिन सारे रिकार्ड तोड़ते हुए रईस ने शानदार छब्बीस.तीस करोड़ रुपये कमाए जो कि गणतंत्र दिवस के मौके पर फिल्म की कमाई का नया रिकॉर्ड है। फिल्म की रिलीज के तीसरे दिन शुक्रवार को फिल्म को सुबह के शो में पैंतीस से चालीस फीसदी और रात के शो में नब्बे फीसदी दर्शक मिले। रईस ने अमेरिका में बुधवार को तीन सौ सैंतालीस,शून्य डॉलर का कारोबार किया। खाड़ी देशों में फिल्म ने करीब पाँच सौ,शून्य डॉलर का कारोबार किया है। ब्रिटेन में फिल्म ने एक सौ अट्ठावन,शून्य डॉलर कमाए तो आस्ट्रेलिया में दो दिन में यह आंकड़ा दो सौ अड़सठ,शून्य डॉलर का रहा। मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस वहीदा रहमान का नाम तिरेपनवें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपने एक्स हैंडल पर दी है। उन्होंने अदाकारा के काम की तारीफ की है और कहा कि वो इसका ऐलान करके खुद सम्मानजनक महसूस कर रहे हैं। पिछले साल यह सम्मान आशा पारेख को मिला था। अनुराग ठाकुर ने ट्विटर पर लिखा, 'मुझे यह ऐलान करते हुए बेहद खुशी और सम्मान महसूस हो रहा है कि वहीदा रहमान जी को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए इस साल प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है।
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न्यूयॉर्क। वैज्ञानिकों ने एक ऎसे तारे की खोज की है जहां साढे तीन वर्ष का सूर्यग्रहण लगता है। ये दो तारे हैं जो कि पृथ्वी से एक हजार प्रकाश वर्ष दूर स्थित हैं। विज्ञानियों ने टीवाइसी 2505-672-1 युगल तारों में सबसे लंबे तथा सर्वाधिक अवधि के बाद लगने वाले ग्रहण का पता लगाया है। यह शोध एस्ट्रोनोमिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। वांडरबिल्ट विश्वविद्यालय के विज्ञानी जोए रोड्रिग्स ने अपने शोध में बताया कि दो विशेष खगोलीय पिंडों से यह खोज करना संभव हो पाया।
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न्यूयॉर्क। वैज्ञानिकों ने एक ऎसे तारे की खोज की है जहां साढे तीन वर्ष का सूर्यग्रहण लगता है। ये दो तारे हैं जो कि पृथ्वी से एक हजार प्रकाश वर्ष दूर स्थित हैं। विज्ञानियों ने टीवाइसी दो हज़ार पाँच सौ पाँच-छः सौ बहत्तर-एक युगल तारों में सबसे लंबे तथा सर्वाधिक अवधि के बाद लगने वाले ग्रहण का पता लगाया है। यह शोध एस्ट्रोनोमिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। वांडरबिल्ट विश्वविद्यालय के विज्ञानी जोए रोड्रिग्स ने अपने शोध में बताया कि दो विशेष खगोलीय पिंडों से यह खोज करना संभव हो पाया।
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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात में बड़े फैसले हुए हैं। जानें दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर चर्चा की।
पंजाब में हालात कुछ ठीक नहीं मालूम पड़ रहे हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वीरवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। यह बातचीत करीब 40 मिनट तक चली। इसमें पाकिस्तान से हो रही ड्रग तस्करी पर चर्चा हुई। साथ ही सीमा पर सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाने करने पर भी बात हुई। अब यह जानकारी सामने आई है कि केंद्र सरकार केंद्रीय सुरक्षा बलों की 50 कंपनियों को पंजाब भेजने का फैसला किया है। यह कंपनियां झारखंड से पंजाब पहुंचेंगी। इनमें CRPF की 10, RAF 8, BSF की 12, ITBP की 10 और SSB की 10 कंपनियां शामिल हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गृह मंत्री शाह को बताया कि पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। वह ड्रग माफियाओं को संरक्षण दे रहा है। कई खतरनाक गैंगस्टर गिरफ्तार किए गए हैं। सबसे बड़ी बात यह कि बैठक में अमृतपाल सिंह के मसले पर भी चर्चा हुई। हाल ही में उसके समर्थकों ने अजनाला में थाने में घुसकर हंगामा किया था। सनद रहे पंजाब राज्यपाल बीएल पुरोहित ने 1 मार्च को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। संकेत बड़े साफ हैं कि देश विरोधी गतिविधियों को किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सीएम मान ने ट्वीट कर जो जानकारी साझा की है उससे भी संकेत मिल रहे हैं कि पाकिस्तान के किसी भी नापाक मंसूबे को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। मान ने कहा- आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ सीमा पर ड्रोन और ड्रग्स के मुद्दे पर चर्चा की। सीमा पर कंटीले तार शिफ्ट करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। पंजाब का रुका हुआ ग्रामीण विकास कोष जल्द जारी करने की गुजारिश भी मैंने गृह मंत्री जी से की। अब केंद्र और पंजाब कानून-व्यवस्था के मसले पर एकजुट होकर काम करेंगे। बैठक में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर कंटीली तार के पास की जमीनों के संबंध में भी चर्चा की गई।
वहीं सूत्रों ने बताया कि सीएम मान ने अजनाला घटना से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में शाह को जानकारी दी। मालूम हो कि अमृतसर के अजनाला में 23 फरवरी को खालिस्तान से सहानुभूति रखने वाले अमृतपाल सिंह और उसके समर्थकों ने अपने एक साथी की रिहाई के लिए बवाल कर दिया था। ये लोग थाने में पुलिसकर्मियों से उलझ गए थे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बंदूकें और तलवारें थीं। आखिरकार पुलिस को प्रदर्शनकारियों की मांगे माननी पड़ी थीं। पुलिस ने कहा था कि वह अमृतपाल के सहयोगी और अपहरण मामले में आरोपी लवप्रीत सिंह को रिहा कर देगी। यह घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई थी।
गौरतलब है कि अमृतसर में जी-20 की 2 बैठकें होने वाली हैं। इसके लिए सैंकड़ों विदेशी डैलीगेट्स अमृतसर आएंगे। पाकिस्तान के बिल्कुल नजदीक होने जा रहे इस आयोजन के मद्देनजर सुरक्षा-व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए पंजाब पुलिस के आला अधिकारी लगातार केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के संपर्क में हैं। पंजाब सरकार की ओर से इसी आयोजन के दौरान होने वाले होला महल्ला जैसे बड़े आयोजन को लेकर भी चर्चा की गई है। मान सरकार ने केंद्र से गुजारिश की है कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल उपलब्ध कराए जाने की सख्त जरूरत है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर पंजाब में 6 से 16 मार्च तक इन कंपनियों को तैनात किए जाने की बात कही जा रही है। सूत्रों की मानें तो केंद्रीय सुरक्षा बलों की कंपनियों के जवानों को सभी प्रकार के दंगा रोधी उपकरणों और गोला बारूद से लैस कराया जाएगा। पंजाब में जो कंपनियां भेजी जाएंगी, उनमें 10 कंपनियां सीआरपीएफ और 8 कंपनियां आरएएफ की होंगी। सीआरपीएफ की 10 कंपनी झारखंड से पंजाब के लिए रवाना की जा रही हैं। आरएएफ की 4 कंपनियों को पंजाब भेजा जा रहा है।
पंजाब में गुरुवार को देश विरोधी और समाज विरोधी तत्वों से जुड़े 110 से अधिक ठिकानों पर व्यापक घेराबंदी करके सर्च आपरेशन चलाया गया। डीजीपी गौरव यादव के आदेश पर राज्य के सभी जिलों में एक ही समय छापेमारी की गई। पंजाब में इस कार्रवाई को रेयर माना जा रहा है। एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) ने बताया कि सीपी/एसएसपी को इन छापों की निजी तौर पर निगरानी करने के निर्देश जारी किए गए थे। सरकार ने पुलिस को अपेक्षित संख्या में टीमें गठित करने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि हाल ही में गिरफ्तार किए गैंगस्टरों और अपराधियों से सख्ती से पूछताछ की गई है। इनसे हैरान करने वाली जानकारियां मिली हैं। इन्हीं खुलासों के बाद पूरे सूबे में छापेमारी की योजना बनाई गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि देश-विरोधी तत्वों के संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी के लिए पंजाब पुलिस की 110 टीमें बनाई गई हैं। इन टीमों में 1000 से अधिक पुलिस जवानों को शामिल किया गया था। एडीजीपी शुक्ला ने बताया कि पुलिस टीमों ने घरों और अन्य स्थानों पर तलाशी की। संदिग्ध मोबाइल फोन के आंकड़े जुटाए गए हैं। इनकी छानबीन की जा रही है। कुछ संदिग्धों को हिरासत में भी लिया गया है।
दूसरी ओर केंद्र सरकार के अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय खालिस्तानी समर्थकों की गतिविधियां बेहद करीब से नजर रख रहा है। केंद्र सरकार पंजाब की स्थिति पर पैनी नजर बनाये हुए है। सीआरपीएफ की विशेष दंगा-रोधी यूनिट के लगभग 1,900 जवानों की तैनाती पंजाब में करने का फैसला लिया गया है। इन जवानों को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए भेजा जा रहा है। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब में कानून और व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए 18 कंपनियों की तैनाती का आदेश दिया था। बताया जाता है कि इन कंपनियों में लगभग 19,000 जवान शामिल हैं।
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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात में बड़े फैसले हुए हैं। जानें दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर चर्चा की। पंजाब में हालात कुछ ठीक नहीं मालूम पड़ रहे हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वीरवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। यह बातचीत करीब चालीस मिनट तक चली। इसमें पाकिस्तान से हो रही ड्रग तस्करी पर चर्चा हुई। साथ ही सीमा पर सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाने करने पर भी बात हुई। अब यह जानकारी सामने आई है कि केंद्र सरकार केंद्रीय सुरक्षा बलों की पचास कंपनियों को पंजाब भेजने का फैसला किया है। यह कंपनियां झारखंड से पंजाब पहुंचेंगी। इनमें CRPF की दस, RAF आठ, BSF की बारह, ITBP की दस और SSB की दस कंपनियां शामिल हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गृह मंत्री शाह को बताया कि पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। वह ड्रग माफियाओं को संरक्षण दे रहा है। कई खतरनाक गैंगस्टर गिरफ्तार किए गए हैं। सबसे बड़ी बात यह कि बैठक में अमृतपाल सिंह के मसले पर भी चर्चा हुई। हाल ही में उसके समर्थकों ने अजनाला में थाने में घुसकर हंगामा किया था। सनद रहे पंजाब राज्यपाल बीएल पुरोहित ने एक मार्च को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। संकेत बड़े साफ हैं कि देश विरोधी गतिविधियों को किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीएम मान ने ट्वीट कर जो जानकारी साझा की है उससे भी संकेत मिल रहे हैं कि पाकिस्तान के किसी भी नापाक मंसूबे को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। मान ने कहा- आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ सीमा पर ड्रोन और ड्रग्स के मुद्दे पर चर्चा की। सीमा पर कंटीले तार शिफ्ट करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। पंजाब का रुका हुआ ग्रामीण विकास कोष जल्द जारी करने की गुजारिश भी मैंने गृह मंत्री जी से की। अब केंद्र और पंजाब कानून-व्यवस्था के मसले पर एकजुट होकर काम करेंगे। बैठक में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर कंटीली तार के पास की जमीनों के संबंध में भी चर्चा की गई। वहीं सूत्रों ने बताया कि सीएम मान ने अजनाला घटना से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में शाह को जानकारी दी। मालूम हो कि अमृतसर के अजनाला में तेईस फरवरी को खालिस्तान से सहानुभूति रखने वाले अमृतपाल सिंह और उसके समर्थकों ने अपने एक साथी की रिहाई के लिए बवाल कर दिया था। ये लोग थाने में पुलिसकर्मियों से उलझ गए थे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बंदूकें और तलवारें थीं। आखिरकार पुलिस को प्रदर्शनकारियों की मांगे माननी पड़ी थीं। पुलिस ने कहा था कि वह अमृतपाल के सहयोगी और अपहरण मामले में आरोपी लवप्रीत सिंह को रिहा कर देगी। यह घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई थी। गौरतलब है कि अमृतसर में जी-बीस की दो बैठकें होने वाली हैं। इसके लिए सैंकड़ों विदेशी डैलीगेट्स अमृतसर आएंगे। पाकिस्तान के बिल्कुल नजदीक होने जा रहे इस आयोजन के मद्देनजर सुरक्षा-व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए पंजाब पुलिस के आला अधिकारी लगातार केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के संपर्क में हैं। पंजाब सरकार की ओर से इसी आयोजन के दौरान होने वाले होला महल्ला जैसे बड़े आयोजन को लेकर भी चर्चा की गई है। मान सरकार ने केंद्र से गुजारिश की है कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल उपलब्ध कराए जाने की सख्त जरूरत है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर पंजाब में छः से सोलह मार्च तक इन कंपनियों को तैनात किए जाने की बात कही जा रही है। सूत्रों की मानें तो केंद्रीय सुरक्षा बलों की कंपनियों के जवानों को सभी प्रकार के दंगा रोधी उपकरणों और गोला बारूद से लैस कराया जाएगा। पंजाब में जो कंपनियां भेजी जाएंगी, उनमें दस कंपनियां सीआरपीएफ और आठ कंपनियां आरएएफ की होंगी। सीआरपीएफ की दस कंपनी झारखंड से पंजाब के लिए रवाना की जा रही हैं। आरएएफ की चार कंपनियों को पंजाब भेजा जा रहा है। पंजाब में गुरुवार को देश विरोधी और समाज विरोधी तत्वों से जुड़े एक सौ दस से अधिक ठिकानों पर व्यापक घेराबंदी करके सर्च आपरेशन चलाया गया। डीजीपी गौरव यादव के आदेश पर राज्य के सभी जिलों में एक ही समय छापेमारी की गई। पंजाब में इस कार्रवाई को रेयर माना जा रहा है। एडीजीपी ने बताया कि सीपी/एसएसपी को इन छापों की निजी तौर पर निगरानी करने के निर्देश जारी किए गए थे। सरकार ने पुलिस को अपेक्षित संख्या में टीमें गठित करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि हाल ही में गिरफ्तार किए गैंगस्टरों और अपराधियों से सख्ती से पूछताछ की गई है। इनसे हैरान करने वाली जानकारियां मिली हैं। इन्हीं खुलासों के बाद पूरे सूबे में छापेमारी की योजना बनाई गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि देश-विरोधी तत्वों के संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी के लिए पंजाब पुलिस की एक सौ दस टीमें बनाई गई हैं। इन टीमों में एक हज़ार से अधिक पुलिस जवानों को शामिल किया गया था। एडीजीपी शुक्ला ने बताया कि पुलिस टीमों ने घरों और अन्य स्थानों पर तलाशी की। संदिग्ध मोबाइल फोन के आंकड़े जुटाए गए हैं। इनकी छानबीन की जा रही है। कुछ संदिग्धों को हिरासत में भी लिया गया है। दूसरी ओर केंद्र सरकार के अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय खालिस्तानी समर्थकों की गतिविधियां बेहद करीब से नजर रख रहा है। केंद्र सरकार पंजाब की स्थिति पर पैनी नजर बनाये हुए है। सीआरपीएफ की विशेष दंगा-रोधी यूनिट के लगभग एक,नौ सौ जवानों की तैनाती पंजाब में करने का फैसला लिया गया है। इन जवानों को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए भेजा जा रहा है। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब में कानून और व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए अट्ठारह कंपनियों की तैनाती का आदेश दिया था। बताया जाता है कि इन कंपनियों में लगभग उन्नीस,शून्य जवान शामिल हैं।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है जिसे केन्द्र सरकार से भारी अनुदान मिलता है। वह कोई सीया या सुन्नी वक्फ़ बोर्ड द्वारा संचालित मदरसा नहीं है जिसमें सरकार के कानून लागू नहीं होते। देश के सभी केन्द्रीय और राज्य सरकारों के शैक्षणिक प्रतिष्ठानों में आरक्षण की व्यवस्था लागू है, अलीगढ़ इसका अपवाद क्यों है? आश्चर्य है कि दलितों और पिछड़ों के तथाकथित मसीहा लालू, मुलायम और मायावती इस विषय पर बिल्कुल खामोश हैं। मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए इन नेताओं ने देश बंटवाया, समाज में विभाजन कराया और अब उसी के लिए दलितों और पिछड़ों के संवैधनिक अधिकारों को भी कुचले जाते हुए अपनी आंखों से देखकर भी चुप हैं। कल्पना कीजिए अगर ऐसी घटना काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में घटी होती तो मीडिया और इन नेताओं की क्या प्रतिक्रिया होती!
एक सोची-समझी योजना के तहत दलितों और पिछड़ों को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आरक्षण से वंचित किया जा रहा है। अभीतक की वर्तमान प्रवेश-नीति के अनुसार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में गैर मुस्लिमों की संख्या ४०% से अधिक हो ही नहीं सकती। इसके कारण वे हमेशा दबे रहते हैं। अपने त्योहार और कार्यक्रम भी खुलकर या बिना भय के नहीं मना सकते हैं। इस विश्वविद्यालय में अल्पसंख्यक हिन्दुओं की वही स्थिति है जो स्थिति बांग्ला देश या पाकिस्तान में हिन्दुओं की है। ध्यान रहे कि देश के बंटवारे की योजना करांची या लाहौर में नहीं बनी थी, बल्कि यह योजना अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में ही बनी थी। अधिकांश दलित और पिछड़े बहुसंख्यक हिन्दू समुदाय से आते हैं। अतः इनके लिए प्रवेश में आरक्षण लागू होते ही वहां की सांख्यिकी बदल जाएगी। इसीलिए अल्पसंख्यक संस्थान की आड़ में यह विश्वविद्यालय दलितों और पिछड़ों के संवैधानिक अधिकारों को नकार रहा है। भारतीय मुसलमानों की यह मानसिकता है कि जहां उन्हें लाभ मिलता है, वहां उन्हें भारतीय संविधान को मानने में कोई परहेज़ नहीं होता है लेकिन जहां उन्हें तनिक भी नुकसान कि आशंका होती है, वहां शरीयत, कुरान और मुस्लिम पर्सनल ला की दुहाई देने लगते हैं। अगर वे शरीयत के इतने ही भक्त होते, तो आपराधिक जुर्म में Indian Penal code की जगह सउदी अरब में लागू उन मुस्लिम कानूनों को लागू करने कि मांग क्यों नहीं करते, जहां चोरी करने की सज़ा दोनों हाथ काटकर दी जाती है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को UGC एवं केन्द्र सरकार से भारी मात्रा में धन और अनेकों सुविधाएं प्राप्त होती हैं, फिर वह अल्पसंख्यक संस्थान कैसे रहा? इस विश्वविद्यालय में एक और आरक्षण है जिसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है। यहां विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों के बच्चों के लिए भी आरक्षण का प्रावधान है, जो किसी केन्द्रीय विश्वविद्यालय में नहीं है।
अतः देशहित एवं दलितों तथा पिछड़ों के व्यापक हित में है कि इन समुदायों के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में अविलंब आरक्षण की व्यवस्था लागू की जाय। एक ही देश में दो तरह की व्यवस्था नहीं चल सकती। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय कोई कश्मीर नहीं है, जहां धारा ३७० लागू है।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है जिसे केन्द्र सरकार से भारी अनुदान मिलता है। वह कोई सीया या सुन्नी वक्फ़ बोर्ड द्वारा संचालित मदरसा नहीं है जिसमें सरकार के कानून लागू नहीं होते। देश के सभी केन्द्रीय और राज्य सरकारों के शैक्षणिक प्रतिष्ठानों में आरक्षण की व्यवस्था लागू है, अलीगढ़ इसका अपवाद क्यों है? आश्चर्य है कि दलितों और पिछड़ों के तथाकथित मसीहा लालू, मुलायम और मायावती इस विषय पर बिल्कुल खामोश हैं। मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए इन नेताओं ने देश बंटवाया, समाज में विभाजन कराया और अब उसी के लिए दलितों और पिछड़ों के संवैधनिक अधिकारों को भी कुचले जाते हुए अपनी आंखों से देखकर भी चुप हैं। कल्पना कीजिए अगर ऐसी घटना काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में घटी होती तो मीडिया और इन नेताओं की क्या प्रतिक्रिया होती!
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है जिसे केन्द्र सरकार से भारी अनुदान मिलता है। वह कोई सीया या सुन्नी वक्फ़ बोर्ड द्वारा संचालित मदरसा नहीं है जिसमें सरकार के कानून लागू नहीं होते। देश के सभी केन्द्रीय और राज्य सरकारों के शैक्षणिक प्रतिष्ठानों में आरक्षण की व्यवस्था लागू है, अलीगढ़ इसका अपवाद क्यों है? आश्चर्य है कि दलितों और पिछड़ों के तथाकथित मसीहा लालू, मुलायम और मायावती इस विषय पर बिल्कुल खामोश हैं। मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए इन नेताओं ने देश बंटवाया, समाज में विभाजन कराया और अब उसी के लिए दलितों और पिछड़ों के संवैधनिक अधिकारों को भी कुचले जाते हुए अपनी आंखों से देखकर भी चुप हैं। कल्पना कीजिए अगर ऐसी घटना काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में घटी होती तो मीडिया और इन नेताओं की क्या प्रतिक्रिया होती! एक सोची-समझी योजना के तहत दलितों और पिछड़ों को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आरक्षण से वंचित किया जा रहा है। अभीतक की वर्तमान प्रवेश-नीति के अनुसार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में गैर मुस्लिमों की संख्या चालीस% से अधिक हो ही नहीं सकती। इसके कारण वे हमेशा दबे रहते हैं। अपने त्योहार और कार्यक्रम भी खुलकर या बिना भय के नहीं मना सकते हैं। इस विश्वविद्यालय में अल्पसंख्यक हिन्दुओं की वही स्थिति है जो स्थिति बांग्ला देश या पाकिस्तान में हिन्दुओं की है। ध्यान रहे कि देश के बंटवारे की योजना करांची या लाहौर में नहीं बनी थी, बल्कि यह योजना अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में ही बनी थी। अधिकांश दलित और पिछड़े बहुसंख्यक हिन्दू समुदाय से आते हैं। अतः इनके लिए प्रवेश में आरक्षण लागू होते ही वहां की सांख्यिकी बदल जाएगी। इसीलिए अल्पसंख्यक संस्थान की आड़ में यह विश्वविद्यालय दलितों और पिछड़ों के संवैधानिक अधिकारों को नकार रहा है। भारतीय मुसलमानों की यह मानसिकता है कि जहां उन्हें लाभ मिलता है, वहां उन्हें भारतीय संविधान को मानने में कोई परहेज़ नहीं होता है लेकिन जहां उन्हें तनिक भी नुकसान कि आशंका होती है, वहां शरीयत, कुरान और मुस्लिम पर्सनल ला की दुहाई देने लगते हैं। अगर वे शरीयत के इतने ही भक्त होते, तो आपराधिक जुर्म में Indian Penal code की जगह सउदी अरब में लागू उन मुस्लिम कानूनों को लागू करने कि मांग क्यों नहीं करते, जहां चोरी करने की सज़ा दोनों हाथ काटकर दी जाती है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को UGC एवं केन्द्र सरकार से भारी मात्रा में धन और अनेकों सुविधाएं प्राप्त होती हैं, फिर वह अल्पसंख्यक संस्थान कैसे रहा? इस विश्वविद्यालय में एक और आरक्षण है जिसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है। यहां विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों के बच्चों के लिए भी आरक्षण का प्रावधान है, जो किसी केन्द्रीय विश्वविद्यालय में नहीं है। अतः देशहित एवं दलितों तथा पिछड़ों के व्यापक हित में है कि इन समुदायों के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में अविलंब आरक्षण की व्यवस्था लागू की जाय। एक ही देश में दो तरह की व्यवस्था नहीं चल सकती। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय कोई कश्मीर नहीं है, जहां धारा तीन सौ सत्तर लागू है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है जिसे केन्द्र सरकार से भारी अनुदान मिलता है। वह कोई सीया या सुन्नी वक्फ़ बोर्ड द्वारा संचालित मदरसा नहीं है जिसमें सरकार के कानून लागू नहीं होते। देश के सभी केन्द्रीय और राज्य सरकारों के शैक्षणिक प्रतिष्ठानों में आरक्षण की व्यवस्था लागू है, अलीगढ़ इसका अपवाद क्यों है? आश्चर्य है कि दलितों और पिछड़ों के तथाकथित मसीहा लालू, मुलायम और मायावती इस विषय पर बिल्कुल खामोश हैं। मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए इन नेताओं ने देश बंटवाया, समाज में विभाजन कराया और अब उसी के लिए दलितों और पिछड़ों के संवैधनिक अधिकारों को भी कुचले जाते हुए अपनी आंखों से देखकर भी चुप हैं। कल्पना कीजिए अगर ऐसी घटना काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में घटी होती तो मीडिया और इन नेताओं की क्या प्रतिक्रिया होती!
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यू इंडिया के निर्माण के संकल्प को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मंत्रिपरिषद का पुनर्गठन किया। राजनीतिक अनुभव तथा प्रशासनिक क्षमता को तवज्जो देते हुए आज चार राज्य मंत्रियों को कैबिनेट मंत्री बनाया तथा चार पूर्व नौकरशाहों समेत नौ नये चेहरों को अपनी मंत्रिपरिषद में जगह दी। कुल 13 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली और पीएम मोदी ने कई मंत्रियों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
1. निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्री बनाया गया है।
2. पीयूष गोयल को नया रेल मंत्री बनाया गया, वे कोयला मंत्रालय का प्रभार भी संभालेंगे।
3. धर्मेन्द्र प्रधान को पेट्रोलियम मंत्रालय के अलावा कौशल विकास मंत्रालय का प्रभार दिया गया।
4. मुख्तार अब्बास नकवी- अल्पसंख्यक मंत्रालय।
5. सुरेश प्रभु उद्योग और वाणिज्य मंत्री बनाए गए।
6. स्मृति ईरानी- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय।
7. नितिन गडकरी अब सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं पोत परिवहन के साथ जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय का प्रभार भी संभालेंगे।
8. उमा भारती से जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय का जिम्मा वापस ले लिया गया है। उमा को पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय का प्रभार दिया गया।
9. राज्यवर्द्धन सिंह राठौर को पदोन्नति देते हुए युवा एवं खेल मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। वे सूचना प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री भी बने रहेंगे।
10. डा. हर्षववर्द्धन को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान के साथ वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया।
11. गिरिराज सिंह को पदोन्नति देते हुए लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया।
4. अनंत कुमार हेगड़े को कौशल विकास राज्य मंत्री बनाया गया।
5. राजकुमार सिंह- ऊर्जा एवं नवीकरणीय एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार)
8. सत्यपाल सिंह को मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री और जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मंत्री बनाया गया।
9. के. जे. अल्फोंस को पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं राज्य मंत्री इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री बनाया गया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यू इंडिया के निर्माण के संकल्प को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मंत्रिपरिषद का पुनर्गठन किया। राजनीतिक अनुभव तथा प्रशासनिक क्षमता को तवज्जो देते हुए आज चार राज्य मंत्रियों को कैबिनेट मंत्री बनाया तथा चार पूर्व नौकरशाहों समेत नौ नये चेहरों को अपनी मंत्रिपरिषद में जगह दी। कुल तेरह मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली और पीएम मोदी ने कई मंत्रियों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। एक. निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्री बनाया गया है। दो. पीयूष गोयल को नया रेल मंत्री बनाया गया, वे कोयला मंत्रालय का प्रभार भी संभालेंगे। तीन. धर्मेन्द्र प्रधान को पेट्रोलियम मंत्रालय के अलावा कौशल विकास मंत्रालय का प्रभार दिया गया। चार. मुख्तार अब्बास नकवी- अल्पसंख्यक मंत्रालय। पाँच. सुरेश प्रभु उद्योग और वाणिज्य मंत्री बनाए गए। छः. स्मृति ईरानी- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय। सात. नितिन गडकरी अब सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं पोत परिवहन के साथ जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय का प्रभार भी संभालेंगे। आठ. उमा भारती से जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय का जिम्मा वापस ले लिया गया है। उमा को पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय का प्रभार दिया गया। नौ. राज्यवर्द्धन सिंह राठौर को पदोन्नति देते हुए युवा एवं खेल मंत्री बनाया गया। वे सूचना प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री भी बने रहेंगे। दस. डा. हर्षववर्द्धन को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान के साथ वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया। ग्यारह. गिरिराज सिंह को पदोन्नति देते हुए लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम मंत्री बनाया गया। चार. अनंत कुमार हेगड़े को कौशल विकास राज्य मंत्री बनाया गया। पाँच. राजकुमार सिंह- ऊर्जा एवं नवीकरणीय एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय आठ. सत्यपाल सिंह को मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री और जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मंत्री बनाया गया। नौ. के. जे. अल्फोंस को पर्यटन राज्य मंत्री एवं राज्य मंत्री इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री बनाया गया।
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रेलवे ने मंगलवार को घोषणा की कि उसने बड़े त्योहारी सीजन की भीड़ को पूरा करने के लिए 20 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच 392 'फेस्टिवल स्पेशल' चलाने की मंजूरी दे दी है। रेल मंत्रालय ने कहा कि इन ट्रेनों का किराया विशेष ट्रेनों के लिए लागू होगा। इसका अर्थ है कि यात्रा के वर्ग के आधार पर, मेल / एक्सप्रेस ट्रेनों के किराए की तुलना में टिकटों पर 10-30 प्रतिशत तक महंगा कर 'विशेष शुल्क' लगाया जाएगा।
वर्तमान मानदंडों के अनुसार, विशेष शुल्क को दूसरी श्रेणी के लिए मूल किराया के 10% और अन्य सभी वर्गों के लिए मूल किराया के 30% की दर से किराया के रूप में तय किया जाता है।
"त्योहारों की भीड़ को दूर करने के लिए, रेल मंत्रालय ने भारतीय रेलवे के ऊपर" फेस्टिवल स्पेशल "सेवाओं की 196 जोड़ियों (392 ट्रेनों) को 20 अक्टूबर 2020 और 30 नवंबर 2020 तक संचालित करने की मंजूरी दे दी है। इन फेस्टिवल के लिए किराया विशेष ट्रेनों के लिए लागू होगा, "मंत्रालय ने कहा। मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में, रेलवे बोर्ड ने कहा कि ये त्यौहार विशेष ट्रेनों को 55 किमी प्रति घंटे की गति से संचालित किया जाएगा।
आदेश में कहा गया है कि रेलवे ज़ोन द्वारा ट्रेनों की अनुसूची और बुकिंग को अंतिम रूप दिया जाएगा।
दुर्गा पूजा, दशहरा, दिवाली और छठ पूजा की आगामी अवकाश अवधि में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कोलकाता, पटना, वाराणसी, लखनऊ जैसे अन्य स्थानों के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। ये गाड़ियां केवल 40 दिनों की अवधि के लिए चलेंगी, इसके अलावा विशेष गाड़ियां जो राष्ट्रीय वाहक द्वारा तैनात की गई हैं। वर्तमान में कुल 666 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं जबकि सभी नियमित ट्रेनों को महामारी के मद्देनजर अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया गया है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ, वीके यादव ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि मंत्रालय राज्य सरकारों की मांग और महामारी की स्थिति के आधार पर यात्री ट्रेनों की स्थिति की भी समीक्षा करेगा।
उन्होंने कहा, 'हमने जोनों के महाप्रबंधकों के साथ बैठकें की हैं और स्थानीय प्रशासन के साथ बात करने और कोरोनावायरस की स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हमें एक रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है जिसके बाद हम तय करेंगे कि छुट्टियों के मौसम के दौरान कितनी ट्रेनें पेश की जा सकती हैं।
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रेलवे ने मंगलवार को घोषणा की कि उसने बड़े त्योहारी सीजन की भीड़ को पूरा करने के लिए बीस अक्टूबर से तीस नवंबर के बीच तीन सौ बानवे 'फेस्टिवल स्पेशल' चलाने की मंजूरी दे दी है। रेल मंत्रालय ने कहा कि इन ट्रेनों का किराया विशेष ट्रेनों के लिए लागू होगा। इसका अर्थ है कि यात्रा के वर्ग के आधार पर, मेल / एक्सप्रेस ट्रेनों के किराए की तुलना में टिकटों पर दस-तीस प्रतिशत तक महंगा कर 'विशेष शुल्क' लगाया जाएगा। वर्तमान मानदंडों के अनुसार, विशेष शुल्क को दूसरी श्रेणी के लिए मूल किराया के दस% और अन्य सभी वर्गों के लिए मूल किराया के तीस% की दर से किराया के रूप में तय किया जाता है। "त्योहारों की भीड़ को दूर करने के लिए, रेल मंत्रालय ने भारतीय रेलवे के ऊपर" फेस्टिवल स्पेशल "सेवाओं की एक सौ छियानवे जोड़ियों को बीस अक्टूबर दो हज़ार बीस और तीस नवंबर दो हज़ार बीस तक संचालित करने की मंजूरी दे दी है। इन फेस्टिवल के लिए किराया विशेष ट्रेनों के लिए लागू होगा, "मंत्रालय ने कहा। मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में, रेलवे बोर्ड ने कहा कि ये त्यौहार विशेष ट्रेनों को पचपन किमी प्रति घंटे की गति से संचालित किया जाएगा। आदेश में कहा गया है कि रेलवे ज़ोन द्वारा ट्रेनों की अनुसूची और बुकिंग को अंतिम रूप दिया जाएगा। दुर्गा पूजा, दशहरा, दिवाली और छठ पूजा की आगामी अवकाश अवधि में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कोलकाता, पटना, वाराणसी, लखनऊ जैसे अन्य स्थानों के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। ये गाड़ियां केवल चालीस दिनों की अवधि के लिए चलेंगी, इसके अलावा विशेष गाड़ियां जो राष्ट्रीय वाहक द्वारा तैनात की गई हैं। वर्तमान में कुल छः सौ छयासठ मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं जबकि सभी नियमित ट्रेनों को महामारी के मद्देनजर अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया गया है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ, वीके यादव ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि मंत्रालय राज्य सरकारों की मांग और महामारी की स्थिति के आधार पर यात्री ट्रेनों की स्थिति की भी समीक्षा करेगा। उन्होंने कहा, 'हमने जोनों के महाप्रबंधकों के साथ बैठकें की हैं और स्थानीय प्रशासन के साथ बात करने और कोरोनावायरस की स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हमें एक रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है जिसके बाद हम तय करेंगे कि छुट्टियों के मौसम के दौरान कितनी ट्रेनें पेश की जा सकती हैं।
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वीर अर्जुन संवाददाता विदिशा। मंगलवार को जिला मुख्यालय पर हुई बैठक में पटवारी राजस्व अभिलेखों के सुधार के निर्देश दिए गए। बैठक में सभी आरआई तहसीलदार तथा पटवारी मौजूद थे। बैठक में बताया गया कि परख में उपलब्धि परिलक्षित नहीं हो रही और पगति ठीक नहीं है। यदि इस बार बच गए तो अगली बैठक में बच नहीं पाओगे। एक सप्ताह के अंदर रणनीति बनाकर एरिया चुने और कैम्प लगाकर ज्यादा हितग्राहियों को लाभांवित किया जाए। यदि लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो सस्पेंड समझें, यह हिदायतें राजस्व अमले को दी गई हैं। इसी के साथ उन पर नकैल कसने की तमाम तैयारी भी निर्देशें का डोज देकर कर दी गई। बैठक में बताया गया कि राजस्व कार्य में गुणवत्ता लाने के लिए पटवारी बस्तों के निरीक्षण का रोस्टर बनाकर शत/पतिशत निरीक्षण एक वर्ष में एक बार अवश्य किया जाएगा। अभिवादित नामांतरण बंटवारे किए जा रहे है। उनमें गुणवत्ता बनाने के लिए सभी राजस्व अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यों की गुणवत्ता की जांच करेंगे। सीमांकन कार्यों की समीक्षा के दौरान मई माह तक 265 सीमांकन पूर्व की गई जबकि 250 लंबित है पटवारी दल बनाकर सारे सीमांकन पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। अधिकांश सीमांकन के नक्शे रहते हैं और सीमा चिह्न खो गए है जिसके लिए अभियान चलाकर राजस्व विभागों उन नक्शों को अपगेड करेगा। साथ ही जहां पर चारमीनारें नष्ट हो गई हैं उन्हें योजना बनाकर जांच कराई जाएगी ताकि ठीक ढंग से सीमांकन हो सके।
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वीर अर्जुन संवाददाता विदिशा। मंगलवार को जिला मुख्यालय पर हुई बैठक में पटवारी राजस्व अभिलेखों के सुधार के निर्देश दिए गए। बैठक में सभी आरआई तहसीलदार तथा पटवारी मौजूद थे। बैठक में बताया गया कि परख में उपलब्धि परिलक्षित नहीं हो रही और पगति ठीक नहीं है। यदि इस बार बच गए तो अगली बैठक में बच नहीं पाओगे। एक सप्ताह के अंदर रणनीति बनाकर एरिया चुने और कैम्प लगाकर ज्यादा हितग्राहियों को लाभांवित किया जाए। यदि लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो सस्पेंड समझें, यह हिदायतें राजस्व अमले को दी गई हैं। इसी के साथ उन पर नकैल कसने की तमाम तैयारी भी निर्देशें का डोज देकर कर दी गई। बैठक में बताया गया कि राजस्व कार्य में गुणवत्ता लाने के लिए पटवारी बस्तों के निरीक्षण का रोस्टर बनाकर शत/पतिशत निरीक्षण एक वर्ष में एक बार अवश्य किया जाएगा। अभिवादित नामांतरण बंटवारे किए जा रहे है। उनमें गुणवत्ता बनाने के लिए सभी राजस्व अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यों की गुणवत्ता की जांच करेंगे। सीमांकन कार्यों की समीक्षा के दौरान मई माह तक दो सौ पैंसठ सीमांकन पूर्व की गई जबकि दो सौ पचास लंबित है पटवारी दल बनाकर सारे सीमांकन पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। अधिकांश सीमांकन के नक्शे रहते हैं और सीमा चिह्न खो गए है जिसके लिए अभियान चलाकर राजस्व विभागों उन नक्शों को अपगेड करेगा। साथ ही जहां पर चारमीनारें नष्ट हो गई हैं उन्हें योजना बनाकर जांच कराई जाएगी ताकि ठीक ढंग से सीमांकन हो सके।
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एडिलेड : आस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंजबाज जेसन गिलेस्पी का मानना है कि भारतीय टीम के कोच अनिल कुबंले और कप्तान विराट कोहली के बीच अहम के टकराव के कारण कुंबले को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है। क्रिकेट डॉट कॉम डॉट एयू ने बुधवार को गिलेस्पी के हवाले से लिखा है, "कोहली बड़ी शख्सियत हैं, इसमें कोई शक नहीं हैं। "
उन्होंने कहा, "वह अच्छे खिलाड़ी हैं और उन्होंने कप्तान के तौर पर अच्छा काम किया है। बाहर से देख कर यह व्यक्तियों के बीच के अहम के टकराव का मामला लगता है। "
उन्होंने कहा, "अगर ऐसी बात है तो हर किसी को हाथ मिलाना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए। "
कुंबले ने मंगलवार को भारतीय टीम के मुख्य कोच के पद से इस्तीफा दे दिया जिसका कारण उन्होंने कोहली के साथ विवाद को बताया है।
कुबंले ने कहा है कि कोहली और उनकी साझेदारी लंबी चलने वाली नहीं थी।
गिलेस्पी ने कहा, "कोच और कप्तान की साझेदारी मजबूत होनी चाहिए। यह निश्चित है। दोनों को एक ही जगह होना चाहिए। "
उन्होंने कहा, "आप 'यस मैन' नहीं चाहते। कोच और कप्तान के बीच अच्छी साझेदारी अच्छी चर्चा और बहस से बनती है। वे हर चीज पर सहमत नहीं हो सकते। "
उन्होंने कहा, "आप उम्मीद नहीं करते कि कप्तान और कोच हमेशा एकमत हों। लेकिन, जब उनके पास एक ही लक्ष्य होगा तो हर स्थिति में चाहे वो एक दूसरे से आंख ना मिलाएं फिर भी वह इस पर काम करेंगे। "
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एडिलेड : आस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंजबाज जेसन गिलेस्पी का मानना है कि भारतीय टीम के कोच अनिल कुबंले और कप्तान विराट कोहली के बीच अहम के टकराव के कारण कुंबले को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है। क्रिकेट डॉट कॉम डॉट एयू ने बुधवार को गिलेस्पी के हवाले से लिखा है, "कोहली बड़ी शख्सियत हैं, इसमें कोई शक नहीं हैं। " उन्होंने कहा, "वह अच्छे खिलाड़ी हैं और उन्होंने कप्तान के तौर पर अच्छा काम किया है। बाहर से देख कर यह व्यक्तियों के बीच के अहम के टकराव का मामला लगता है। " उन्होंने कहा, "अगर ऐसी बात है तो हर किसी को हाथ मिलाना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए। " कुंबले ने मंगलवार को भारतीय टीम के मुख्य कोच के पद से इस्तीफा दे दिया जिसका कारण उन्होंने कोहली के साथ विवाद को बताया है। कुबंले ने कहा है कि कोहली और उनकी साझेदारी लंबी चलने वाली नहीं थी। गिलेस्पी ने कहा, "कोच और कप्तान की साझेदारी मजबूत होनी चाहिए। यह निश्चित है। दोनों को एक ही जगह होना चाहिए। " उन्होंने कहा, "आप 'यस मैन' नहीं चाहते। कोच और कप्तान के बीच अच्छी साझेदारी अच्छी चर्चा और बहस से बनती है। वे हर चीज पर सहमत नहीं हो सकते। " उन्होंने कहा, "आप उम्मीद नहीं करते कि कप्तान और कोच हमेशा एकमत हों। लेकिन, जब उनके पास एक ही लक्ष्य होगा तो हर स्थिति में चाहे वो एक दूसरे से आंख ना मिलाएं फिर भी वह इस पर काम करेंगे। "
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