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वीर्य-रक्षा के नियम
बतलाने की आवश्यकता नहीं । साधारण से योग क्रिया मनुष्य को असाधारण लाभ पहुँइसलिये वोर्च्च संरक्षण के लिये योग बहुत गया है। हमारे ऋषि लोग भी योग के द्वारा ही अपने ब्रह्मचर्य व्रत का पूरा पालन करते थे ।
हमारे प्रचीन आचार्यों ने योग के भी अनेक भेद निर्धारित किये हैं। पर उन सबों के वर्णन की यहाँ पर आवश्यकता नहीं । हम यहाँ पर मूल योग को ही लिखना चाहते हैं । उसका भगवान श्री कृष्ण ने निम्नलिखित आदेश किया है ।
पवित्र स्थान पर, जो कि न तो बहुत ऊँचा हो और न नोचा हो, कुशासनी, मृगचर्म या वस्त्र विछा कर बैठना चाहिये । उस समय अपने मन को एकाग्र कर चित्त और इन्द्रियों के कर्मों को वश में करके अपनी आत्म-शुद्धि के लिये योग का अभ्यास करे ! समं कायशिरोग्रीवं धारयनचलं स्थिरम् । सम्प्रेक्ष्य नासिकामं एवं दिशश्चानवलोकयन् ॥ विगतभी ब्रह्मचारिवतेस्थितः । मनः संयम्य मच्चित्तो, युक्त आसीत मत्परः ॥
( श्रीमद्भगवदुर्गाता )
शरीर, ( मध्यभाग ) शिर और गर्दन को सीधे रखो । कोई अङ्ग इधर उधर डुलने न पावे । अर्थात् सब शरीर को स्थिर रखना चाहिये । किसी भी दिशा को न देखता हुआ अपनी दृष्टि को नासिका के अग्रभाग पर ठहराना चाहिये । शान्त चित्त, भयरहित और ब्रह्मचर्य व्रत में स्थित हो, मन को संयम कर आत्मनिष्ठ पुरुष मुझ ( परमात्मा ) में लीन होवे ।
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वीर्य-रक्षा के नियम बतलाने की आवश्यकता नहीं । साधारण से योग क्रिया मनुष्य को असाधारण लाभ पहुँइसलिये वोर्च्च संरक्षण के लिये योग बहुत गया है। हमारे ऋषि लोग भी योग के द्वारा ही अपने ब्रह्मचर्य व्रत का पूरा पालन करते थे । हमारे प्रचीन आचार्यों ने योग के भी अनेक भेद निर्धारित किये हैं। पर उन सबों के वर्णन की यहाँ पर आवश्यकता नहीं । हम यहाँ पर मूल योग को ही लिखना चाहते हैं । उसका भगवान श्री कृष्ण ने निम्नलिखित आदेश किया है । पवित्र स्थान पर, जो कि न तो बहुत ऊँचा हो और न नोचा हो, कुशासनी, मृगचर्म या वस्त्र विछा कर बैठना चाहिये । उस समय अपने मन को एकाग्र कर चित्त और इन्द्रियों के कर्मों को वश में करके अपनी आत्म-शुद्धि के लिये योग का अभ्यास करे ! समं कायशिरोग्रीवं धारयनचलं स्थिरम् । सम्प्रेक्ष्य नासिकामं एवं दिशश्चानवलोकयन् ॥ विगतभी ब्रह्मचारिवतेस्थितः । मनः संयम्य मच्चित्तो, युक्त आसीत मत्परः ॥ शरीर, शिर और गर्दन को सीधे रखो । कोई अङ्ग इधर उधर डुलने न पावे । अर्थात् सब शरीर को स्थिर रखना चाहिये । किसी भी दिशा को न देखता हुआ अपनी दृष्टि को नासिका के अग्रभाग पर ठहराना चाहिये । शान्त चित्त, भयरहित और ब्रह्मचर्य व्रत में स्थित हो, मन को संयम कर आत्मनिष्ठ पुरुष मुझ में लीन होवे ।
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बीते जमाने के बेहतरीन खलनायक को सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने उनके घर पर जाकर हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित अवार्ड दादासाहेब फाल्के से सम्मानित किया।
प्राण साहब की सेहत इन दिनों काफी खराब चल रही है जिसके कारण वह पिछले सप्ताह दिल्ली में आयोजित 60वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में शामिल नहीं हो पाये थे। यह अपने आप यह एक खास बात है कि जब किसी कलाकार को उसके घर पर फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया है।
मालूम हो कि बॉलीवुड के बेहतरीन खलनायक और नायाब अदाकार प्राण को दादा साहब फाल्के सम्मान के लिए चुना गया था एक ऐसा खलनायक जो कि नायक से ज्यादा लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता था।
जिसकी फोटो पोस्टर पर देखकर लोग सरेआम उसको गालियां देते थे, जिसकी आवाज में वो दम था, जिसे लोग सुनने के लिए हरपल बेकरार रहते थे और जब वह चरित्र अभिनेता के रूप में परिवर्तित हुआ तो लोगों ने उन्हें गले लगा लिया।
प्राण को फाल्के सम्मान से सम्मानित किये जाने पर जहां बॉलीवुड खुश है वहीं दूसरी ओर आम लोग भी इस बात से काफी प्रसन्न हैं। कुछ लोगों ने वनइंडिया से बात की और कहा कि प्राण साहब को यह सम्मान देर से मिला लेकिन मिल गया, यह बड़ी बात है। प्राण जैसा ना कोई था, है और ना ही होगा। वह बेहतरीन कलाकार हैं। प्राण साहब को हमारी ओर से बहुत बहुत बधाई। हमारी पूरी टीम भी बेहतरीन अदाकार प्राण साहब को बहुत-बहुत बधाई देती है।
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Don't Miss! बीते जमाने के बेहतरीन खलनायक को सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने उनके घर पर जाकर हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित अवार्ड दादासाहेब फाल्के से सम्मानित किया। प्राण साहब की सेहत इन दिनों काफी खराब चल रही है जिसके कारण वह पिछले सप्ताह दिल्ली में आयोजित साठवें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में शामिल नहीं हो पाये थे। यह अपने आप यह एक खास बात है कि जब किसी कलाकार को उसके घर पर फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया है। मालूम हो कि बॉलीवुड के बेहतरीन खलनायक और नायाब अदाकार प्राण को दादा साहब फाल्के सम्मान के लिए चुना गया था एक ऐसा खलनायक जो कि नायक से ज्यादा लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता था। जिसकी फोटो पोस्टर पर देखकर लोग सरेआम उसको गालियां देते थे, जिसकी आवाज में वो दम था, जिसे लोग सुनने के लिए हरपल बेकरार रहते थे और जब वह चरित्र अभिनेता के रूप में परिवर्तित हुआ तो लोगों ने उन्हें गले लगा लिया। प्राण को फाल्के सम्मान से सम्मानित किये जाने पर जहां बॉलीवुड खुश है वहीं दूसरी ओर आम लोग भी इस बात से काफी प्रसन्न हैं। कुछ लोगों ने वनइंडिया से बात की और कहा कि प्राण साहब को यह सम्मान देर से मिला लेकिन मिल गया, यह बड़ी बात है। प्राण जैसा ना कोई था, है और ना ही होगा। वह बेहतरीन कलाकार हैं। प्राण साहब को हमारी ओर से बहुत बहुत बधाई। हमारी पूरी टीम भी बेहतरीन अदाकार प्राण साहब को बहुत-बहुत बधाई देती है।
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Battlegrounds Mobile India (BGMI) यानी PUBG के इंडियन वर्जन बैटलग्राउंड मोबाइल इंडिया गेम को भारत में ऑफिशियली लॉन्च कर दिया गया है. गेम की लॉन्चिंग का ऐलान कंपनी के ऑफिशियल फेसबुक पेज से हुआ है. यह PUBG Mobile का इंडियन वर्जन गेम है, जिसे भारत सरकार ने पिछले साल देश की सुरक्षा, एकता और अखंडता का हवाला देते हुए बैन कर दिया था.
बैटलग्राउंड मोबाइल गेम को प्री-रजिस्टर्ड यूजर्स को डाउनलोड के लिए पहले ही उपलब्ध करा दिया गया था. वहीं अब Battlegrounds Mobile गेम के डेवलपर्स krafton ने Battlgrounds Mobile India के ऑफिशियल वर्जन को डाउनलोडिंग के लिए उपलब्ध कर दिया है.
Battlegrounds Mobile India गेम को अब आप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर पाएंगे. इसके अलावा, जिन यूजर्स ने इसे अर्ली ऐक्सेस के तहत डाउनलोड किया था उन्हें गूगल प्ले स्टोर पर इस गेम का अपडेट मिलेगा. बता दें कि अगर आप iOS बेस्ड ऑपरेटिंग सिस्टम वाला डिवाइस यूज करते हैं, तो आपको थोड़ा इंतजार करना होगा.
बैटलग्राउंड मोबाइल गेम की डेवलपर कंपनी Krafton ने यह साफ कर दिया है कि इस गेम को किसी भी थर्ड पार्टी स्टोर से डाउनोड करने की जरूरत नहीं है. इसमें यूजर्स को 19 अगस्त तक रिवार्ड प्वाइंट मिलेंगे. Krafton ने गेम की लॉन्चिंग पर सेलिब्रेशन ऑफर के तहत इन-गेम इवेंट का ऐलान किया है. कंपनी के अनुसार, BGMI गेम खेलने वाले किसी भी यूजर का डेटा स्टोर नहीं किया जाएगा.
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Battlegrounds Mobile India यानी PUBG के इंडियन वर्जन बैटलग्राउंड मोबाइल इंडिया गेम को भारत में ऑफिशियली लॉन्च कर दिया गया है. गेम की लॉन्चिंग का ऐलान कंपनी के ऑफिशियल फेसबुक पेज से हुआ है. यह PUBG Mobile का इंडियन वर्जन गेम है, जिसे भारत सरकार ने पिछले साल देश की सुरक्षा, एकता और अखंडता का हवाला देते हुए बैन कर दिया था. बैटलग्राउंड मोबाइल गेम को प्री-रजिस्टर्ड यूजर्स को डाउनलोड के लिए पहले ही उपलब्ध करा दिया गया था. वहीं अब Battlegrounds Mobile गेम के डेवलपर्स krafton ने Battlgrounds Mobile India के ऑफिशियल वर्जन को डाउनलोडिंग के लिए उपलब्ध कर दिया है. Battlegrounds Mobile India गेम को अब आप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर पाएंगे. इसके अलावा, जिन यूजर्स ने इसे अर्ली ऐक्सेस के तहत डाउनलोड किया था उन्हें गूगल प्ले स्टोर पर इस गेम का अपडेट मिलेगा. बता दें कि अगर आप iOS बेस्ड ऑपरेटिंग सिस्टम वाला डिवाइस यूज करते हैं, तो आपको थोड़ा इंतजार करना होगा. बैटलग्राउंड मोबाइल गेम की डेवलपर कंपनी Krafton ने यह साफ कर दिया है कि इस गेम को किसी भी थर्ड पार्टी स्टोर से डाउनोड करने की जरूरत नहीं है. इसमें यूजर्स को उन्नीस अगस्त तक रिवार्ड प्वाइंट मिलेंगे. Krafton ने गेम की लॉन्चिंग पर सेलिब्रेशन ऑफर के तहत इन-गेम इवेंट का ऐलान किया है. कंपनी के अनुसार, BGMI गेम खेलने वाले किसी भी यूजर का डेटा स्टोर नहीं किया जाएगा.
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कांग्रेस के कद्दवर नेता ज्योतिदित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जहा आक्रोश का माहौल है। वहीं पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बीजेपी के कार्यकर्ता सिंधिया के बीजेपी का दामन थामने पर एक दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी।
एक तरफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा ज्योतिराज सिंधिया का पुतला फूंका जा रहा है। दूसरी तरफ बीजेपी कार्यकर्ताओं कहना है कि, कांग्रेस का शुरुआत से यही हाल रहा है कांग्रेस हमेशा से दंगा कराने और आगजनी करने में माहिर रही है।
आपको बताते चलें कि, मध्य प्रदेश में कांग्रेस में बड़ी पैठ रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस की नीतियों से नाराज होकर बीजेपी का दामन थाम लिया है और बीजेपी ने ज्योतिरादित्य को राज्यसभा से उम्मीदवार भी घोषित कर दिया है। इसको लेकर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में उबाल है क्योंकि कमलनाथ की सरकार अब संकट के घेरे में खड़ी दिखाई दे रही है।
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कांग्रेस के कद्दवर नेता ज्योतिदित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जहा आक्रोश का माहौल है। वहीं पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बीजेपी के कार्यकर्ता सिंधिया के बीजेपी का दामन थामने पर एक दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। एक तरफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा ज्योतिराज सिंधिया का पुतला फूंका जा रहा है। दूसरी तरफ बीजेपी कार्यकर्ताओं कहना है कि, कांग्रेस का शुरुआत से यही हाल रहा है कांग्रेस हमेशा से दंगा कराने और आगजनी करने में माहिर रही है। आपको बताते चलें कि, मध्य प्रदेश में कांग्रेस में बड़ी पैठ रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस की नीतियों से नाराज होकर बीजेपी का दामन थाम लिया है और बीजेपी ने ज्योतिरादित्य को राज्यसभा से उम्मीदवार भी घोषित कर दिया है। इसको लेकर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में उबाल है क्योंकि कमलनाथ की सरकार अब संकट के घेरे में खड़ी दिखाई दे रही है।
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राजस्थान रॉयल्स और दिल्ली कैपिटल्स की टीम के बीच आईपीएल 2020 का 30वां मैच दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जा रहा है. इस मैच का टॉस दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया. पहले बल्लेबाजी करते हुए दिल्ली कैपिटल्स की शुरूआत बेहद खराब रही है.
इस मैच की पहली ही गेंद पर जोफ्रा आर्चर ने दिल्ली कैपिटल्स के ओपनर बल्लेबाज पृथ्वी शॉ को पवेलियन भेज दिया. जोफ्रा की पहली ही गेंद पिच पर टप्पा खाने के बाद अंदर आई और पृथ्वी शॉ का स्टंप ले उड़ी. जोफ्रा इस पूरे टूर्नामेंट में शानदार गेंदबाजी कर रहे हैं. उनका सामना कर पाना बल्लेबाजों के लिए काफी मुश्किल हो रहा है.
उन्होंने पृथ्वी शॉ को आउट करने के बाद अजिंक्य रहाणे को भी अपना शिकार बना लिया है. जोफ्रा ने अपने शुरूआती 2 ओवर में मात्र 5 रन देकर 2 विकेट हासिल कर लिए हैं.
पृथ्वी शॉ का विकेट हासिल करने के बाद जोफ्रा आर्चर ने बिहू डांस किया है. दरअसल बीहू असम का पारंपरिक डांस है और जोफ्रा की टीम के साथी खिलाड़ी रियान पराग असम से ही हैं.
राजस्थान रॉयल्स के युवा बल्लेबाज रियान पराग ने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच में 26 गेंद पर नॉटआउट 42 रनों की पारी खेली और राहुल तेवतिया के साथ मिलकर टीम को पांच विकेट से शानदार जीत दिलाई। रियान ने 19. 5 ओवर में छक्के के साथ टीम को जीत दिलाई और इसके बाद मैदान पर ही बीहू डांस करने लगे थे.
आप इस वीडियो में साफ़ देख सकते हैं कि कैसे जोफ्रा आर्चर ने दिल्ली कैपिटल्स के ओपनर बल्लेबाज पृथ्वी शॉ को पहली ही गेंद पर आउट करके अपनी टीम के साथी खिलाड़ी रियान पराग के साथ बिहू डांस किया.
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राजस्थान रॉयल्स और दिल्ली कैपिटल्स की टीम के बीच आईपीएल दो हज़ार बीस का तीसवां मैच दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जा रहा है. इस मैच का टॉस दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया. पहले बल्लेबाजी करते हुए दिल्ली कैपिटल्स की शुरूआत बेहद खराब रही है. इस मैच की पहली ही गेंद पर जोफ्रा आर्चर ने दिल्ली कैपिटल्स के ओपनर बल्लेबाज पृथ्वी शॉ को पवेलियन भेज दिया. जोफ्रा की पहली ही गेंद पिच पर टप्पा खाने के बाद अंदर आई और पृथ्वी शॉ का स्टंप ले उड़ी. जोफ्रा इस पूरे टूर्नामेंट में शानदार गेंदबाजी कर रहे हैं. उनका सामना कर पाना बल्लेबाजों के लिए काफी मुश्किल हो रहा है. उन्होंने पृथ्वी शॉ को आउट करने के बाद अजिंक्य रहाणे को भी अपना शिकार बना लिया है. जोफ्रा ने अपने शुरूआती दो ओवर में मात्र पाँच रन देकर दो विकेट हासिल कर लिए हैं. पृथ्वी शॉ का विकेट हासिल करने के बाद जोफ्रा आर्चर ने बिहू डांस किया है. दरअसल बीहू असम का पारंपरिक डांस है और जोफ्रा की टीम के साथी खिलाड़ी रियान पराग असम से ही हैं. राजस्थान रॉयल्स के युवा बल्लेबाज रियान पराग ने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच में छब्बीस गेंद पर नॉटआउट बयालीस रनों की पारी खेली और राहुल तेवतिया के साथ मिलकर टीम को पांच विकेट से शानदार जीत दिलाई। रियान ने उन्नीस. पाँच ओवर में छक्के के साथ टीम को जीत दिलाई और इसके बाद मैदान पर ही बीहू डांस करने लगे थे. आप इस वीडियो में साफ़ देख सकते हैं कि कैसे जोफ्रा आर्चर ने दिल्ली कैपिटल्स के ओपनर बल्लेबाज पृथ्वी शॉ को पहली ही गेंद पर आउट करके अपनी टीम के साथी खिलाड़ी रियान पराग के साथ बिहू डांस किया.
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न्यूयार्क, (भाषा)। बोस्टन हवाईअड्डे पर अपने मंत्री आजम खान को रोककर पूछताछ किए जाने से नाराज़ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अपने व्याख्यान का बहिष्कार करने के बाद अपने सम्मान में न्यूयार्क के महावाणिज्यदूत ज्ञानेश्वर मूले की ओर से आज यहां आयोजित होने वाला स्वागत समारोह भी रद्द कर दिया। न्यूयार्क में भारत के महावाणिज्यदूतावास की ओर से जारी विज्ञप्ति में केवल यह कहा गया, न्यूयार्क में भारत के महावाणिज्यदूतावास में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री अखिलेश कुमार यादव के सम्मान में 27 अप्रैल को आयोजित होने वाला समारोह अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण रद्द कर दिया गया है। हालांकि न तो मूले और न ही मंत्री (प्रेस एवं सूचना) एम राजाराम ने इस बारे में कोई टिप्पणी की कि समारोह को किस कारण से रद्द कर दिया गया। मूले ने बुधवार को न्यूयार्क में महावाणिज्यदूत का कार्यभार संभाला था। मूले के कार्यभार संभालने के बाद यह वाणिज्यदूतावास का पहला आधिकारिक कार्यक्रम था। वह इससे पहले मालदीव में भारत के राजदूत थे। आजम खान को रोककर पूछताछ किए जाने के विरोध में मुख्यमंत्री ने कल भी हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय में होने वाले अपने व्याख्यान का बहिष्कार कर दिया था। सम्मान समारोह के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय से पुष्टि हो जाने के बाद सभी प्रतिष्"ित भारतीय-अमेरिकियों, निर्वाचित अधिकारियों, न्यूयार्क में भारत के मित्रों और मीडिया को दो दिन पहले निमंत्रण भेज दिया गया था। इस बीच मूले ने न्यूयार्क की एशिया सोसाइटी में उनके सम्मान में आयोजित स्वागत समारोह से इतर `पीटीआई' से कल रात कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बोस्टन हवाईअड्डे पर राज्य सरकार के एक मंत्री का निरादर किया गया। उन्होंने कहा कि उनका मिशन भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं रोकने के लिए उचित स्तर पर मामले को उ"ाएगा। मूले ने स्वागत समारोह रद्द किए जाने पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि उनका मिशन विदेश मंत्रालय और गृह सुरक्षा मंत्रालय के सामने मज़बूत तरीके से इस मामले पर अपना विरोध दर्ज कराएगा। उन्होंने कहा, मैं मुख्यमंत्री से इस बारे में सूचना लेने और रणनीति तैयार करने के लिए मुलाकात कर रहा हूं। मुख्यमंत्री रविवार को न्यूयार्क के जेएफके हवाईअड्डे से भारत रवाना होंगे। सपा के वरिष्" नेता और उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री आजम खान अखिलेश के साथ अमेरिका आए थे। उन्हें गत बुधवार को बोस्टन हवाईअड्डे पर विमान से उतरने के बाद `पूछताछ' के लिए 10 मिनट तक रोककर रखा गया था।
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न्यूयार्क, । बोस्टन हवाईअड्डे पर अपने मंत्री आजम खान को रोककर पूछताछ किए जाने से नाराज़ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अपने व्याख्यान का बहिष्कार करने के बाद अपने सम्मान में न्यूयार्क के महावाणिज्यदूत ज्ञानेश्वर मूले की ओर से आज यहां आयोजित होने वाला स्वागत समारोह भी रद्द कर दिया। न्यूयार्क में भारत के महावाणिज्यदूतावास की ओर से जारी विज्ञप्ति में केवल यह कहा गया, न्यूयार्क में भारत के महावाणिज्यदूतावास में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री अखिलेश कुमार यादव के सम्मान में सत्ताईस अप्रैल को आयोजित होने वाला समारोह अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण रद्द कर दिया गया है। हालांकि न तो मूले और न ही मंत्री एम राजाराम ने इस बारे में कोई टिप्पणी की कि समारोह को किस कारण से रद्द कर दिया गया। मूले ने बुधवार को न्यूयार्क में महावाणिज्यदूत का कार्यभार संभाला था। मूले के कार्यभार संभालने के बाद यह वाणिज्यदूतावास का पहला आधिकारिक कार्यक्रम था। वह इससे पहले मालदीव में भारत के राजदूत थे। आजम खान को रोककर पूछताछ किए जाने के विरोध में मुख्यमंत्री ने कल भी हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय में होने वाले अपने व्याख्यान का बहिष्कार कर दिया था। सम्मान समारोह के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय से पुष्टि हो जाने के बाद सभी प्रतिष्"ित भारतीय-अमेरिकियों, निर्वाचित अधिकारियों, न्यूयार्क में भारत के मित्रों और मीडिया को दो दिन पहले निमंत्रण भेज दिया गया था। इस बीच मूले ने न्यूयार्क की एशिया सोसाइटी में उनके सम्मान में आयोजित स्वागत समारोह से इतर `पीटीआई' से कल रात कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बोस्टन हवाईअड्डे पर राज्य सरकार के एक मंत्री का निरादर किया गया। उन्होंने कहा कि उनका मिशन भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं रोकने के लिए उचित स्तर पर मामले को उ"ाएगा। मूले ने स्वागत समारोह रद्द किए जाने पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि उनका मिशन विदेश मंत्रालय और गृह सुरक्षा मंत्रालय के सामने मज़बूत तरीके से इस मामले पर अपना विरोध दर्ज कराएगा। उन्होंने कहा, मैं मुख्यमंत्री से इस बारे में सूचना लेने और रणनीति तैयार करने के लिए मुलाकात कर रहा हूं। मुख्यमंत्री रविवार को न्यूयार्क के जेएफके हवाईअड्डे से भारत रवाना होंगे। सपा के वरिष्" नेता और उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री आजम खान अखिलेश के साथ अमेरिका आए थे। उन्हें गत बुधवार को बोस्टन हवाईअड्डे पर विमान से उतरने के बाद `पूछताछ' के लिए दस मिनट तक रोककर रखा गया था।
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धर्म विश्वास प्रणाली का एक प्रकार है, लेकिन सभी विश्वास प्रणाली धर्म नहीं हैं। गैर-धार्मिक विश्वास प्रणालियों से धार्मिक को अलग करना कभी-कभी आसान होता है, लेकिन अन्य बार कठिन होता है, जैसा तर्कों के अनुसार लोगों द्वारा धर्म के रूप में योग्यता प्राप्त होती है। उन लक्षणों का एक सेट स्थापित करना जो धर्मों के चारों ओर मिलकर काम करते हैं, मदद कर सकते हैं, लेकिन यह हमेशा पर्याप्त नहीं होता है।
अंत में, कुछ मान्यताओं या विश्वास प्रणालियों को वर्गीकृत करना मुश्किल है।
धर्म शायद धर्म के साथ अक्सर भ्रमित होता है, भले ही धर्म स्वयं ही विश्वास प्रणाली के रूप में योग्य नहीं होता है, जबकि धर्म हमेशा करता है। दर्शन कभी-कभी धर्म से उलझन में पड़ता है क्योंकि दोनों विषयों में समान बुनियादी मुद्दों को शामिल किया जाता है। आध्यात्मिकता अक्सर धर्म होने के लिए गलत नहीं होती है - शायद क्योंकि धर्म ने एक बुरा नाम हासिल कर लिया है लेकिन लोग अभी भी मूलभूत सामान और विशेषताओं को बनाए रखना चाहते हैं।
यह समझना कि कैसे और क्यों धर्मवाद, दर्शन, आध्यात्मिकता, और अन्य मान्यताओं के समान और अलग हैं जो हम आम तौर पर सोचते हैं कि जब "धर्म" सोचता है कि केवल धर्म क्या है, यह समझने में बहुत मदद कर सकता है। कुछ लोग कहां धर्म की बाहरी सीमाएं झूठ बोलते हैं, जबकि अन्य हमें यह समझने में मदद करते हैं कि किस धर्म में आवश्यक रूप से शामिल है।
धर्म को अंधविश्वास से तुलना करने से शायद अधिकांश विश्वासियों को अपराध करना पड़ सकता है, लेकिन दोनों के बीच हाथ से खारिज होने की तुलना में बहुत अधिक समानताएं होती हैं।
माना जाता है कि हर धार्मिक आस्तिक अंधविश्वास नहीं है और कुछ अधार्मिक नास्तिक अंधविश्वासवादी हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों के बीच कोई संबंध नहीं है। दोनों प्रकृति की गैर-भौतिक समझ पर निर्भर करते हैं जो औसत व्यक्ति के साथ गहरे मनोवैज्ञानिक अनुनाद का प्रतीत होता है।
अधिकांश धार्मिक विश्वासियों ने इस विचार को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया है कि धर्म और असामान्य मान्यताओं के बीच कोई संबंध है।
इसके विपरीत, बाहरी लोग तुरंत ध्यान देंगे कि ऐसी कई समानताएं हैं जिन्हें आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता है। असाधारण मान्यताओं को एक धर्म के समान नहीं हो सकता है, लेकिन कभी-कभी वे करीब आते हैं।
चूंकि अधिकांश धर्म धर्मवादी होते हैं, और धर्मवाद पश्चिम में सबसे बड़े धर्मों के लिए इतना महत्वपूर्ण है, कई लोगों ने भ्रमित विचार हासिल किया है कि धर्म स्वयं किसी भी तरह धर्म के समान ही है, इस प्रकार धर्मों में जो कुछ भी जाता है उसे अनदेखा कर रहा है (स्वयं सहित , विचित्र रूप से पर्याप्त)। यहां तक कि कुछ नास्तिक भी इस त्रुटि का शिकार हो गए हैं।
धर्म और धार्मिक शब्द स्पष्ट रूप से एक ही जड़ से आते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे हमेशा मूल रूप से एक ही बात का संदर्भ लेते हैं। हकीकत में, विशेषण धार्मिक धर्म के धर्म के मुकाबले व्यापक उपयोग होता है।
धर्म और दर्शन दोनों ही समान प्रश्नों को संबोधित करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे एक ही बात हैं। सबसे स्पष्ट रूप से, दर्शन देवताओं से चमत्कार या रहस्योद्घाटन पर निर्भर नहीं है, दार्शनिक आम अनुष्ठानों में शामिल नहीं होते हैं, और दर्शन इस बात पर जोर नहीं देते कि विश्वास पर विश्वास को स्वीकार करने की आवश्यकता है।
कल्पना करना लोकप्रिय हो गया है कि दैवीय या पवित्रः धर्म और आध्यात्मिकता से संबंधित दो अलग-अलग तरीकों के बीच एक कठिन और तेज़ अंतर है।
धर्म को सामाजिक, सार्वजनिक और संगठित माध्यमों का वर्णन करना चाहिए, जिसके द्वारा लोग पवित्र या दिव्य से संबंधित होते हैं, जबकि आध्यात्मिकता को निजी तौर पर होने पर ऐसे संबंधों का वर्णन करना होता है। सच्चाई यह है कि ऐसा भेद पूरी तरह मान्य नहीं है।
एनिमिसम क्या है?
एनिमेशन यह विश्वास है कि प्रकृति में सब कुछ अपनी आत्मा या दिव्यता है।
मूर्तिपूजा क्या है?
मूर्तिपूजा जातिवादी या बहुवादी हो सकता है, लेकिन यह विशिष्ट है कि यह मुख्य रूप से प्रकृति के माध्यम से भगवान या देवताओं से संबंधित है।
शमनवाद क्या है?
शमनवाद उत्तरी एशिया के कुछ लोगों का एक एनिमस्टिक धर्म है जिसमें दृश्यमान और भावनात्मक दुनिया के बीच मध्यस्थता शमन द्वारा प्रभावित होती है। "
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धर्म विश्वास प्रणाली का एक प्रकार है, लेकिन सभी विश्वास प्रणाली धर्म नहीं हैं। गैर-धार्मिक विश्वास प्रणालियों से धार्मिक को अलग करना कभी-कभी आसान होता है, लेकिन अन्य बार कठिन होता है, जैसा तर्कों के अनुसार लोगों द्वारा धर्म के रूप में योग्यता प्राप्त होती है। उन लक्षणों का एक सेट स्थापित करना जो धर्मों के चारों ओर मिलकर काम करते हैं, मदद कर सकते हैं, लेकिन यह हमेशा पर्याप्त नहीं होता है। अंत में, कुछ मान्यताओं या विश्वास प्रणालियों को वर्गीकृत करना मुश्किल है। धर्म शायद धर्म के साथ अक्सर भ्रमित होता है, भले ही धर्म स्वयं ही विश्वास प्रणाली के रूप में योग्य नहीं होता है, जबकि धर्म हमेशा करता है। दर्शन कभी-कभी धर्म से उलझन में पड़ता है क्योंकि दोनों विषयों में समान बुनियादी मुद्दों को शामिल किया जाता है। आध्यात्मिकता अक्सर धर्म होने के लिए गलत नहीं होती है - शायद क्योंकि धर्म ने एक बुरा नाम हासिल कर लिया है लेकिन लोग अभी भी मूलभूत सामान और विशेषताओं को बनाए रखना चाहते हैं। यह समझना कि कैसे और क्यों धर्मवाद, दर्शन, आध्यात्मिकता, और अन्य मान्यताओं के समान और अलग हैं जो हम आम तौर पर सोचते हैं कि जब "धर्म" सोचता है कि केवल धर्म क्या है, यह समझने में बहुत मदद कर सकता है। कुछ लोग कहां धर्म की बाहरी सीमाएं झूठ बोलते हैं, जबकि अन्य हमें यह समझने में मदद करते हैं कि किस धर्म में आवश्यक रूप से शामिल है। धर्म को अंधविश्वास से तुलना करने से शायद अधिकांश विश्वासियों को अपराध करना पड़ सकता है, लेकिन दोनों के बीच हाथ से खारिज होने की तुलना में बहुत अधिक समानताएं होती हैं। माना जाता है कि हर धार्मिक आस्तिक अंधविश्वास नहीं है और कुछ अधार्मिक नास्तिक अंधविश्वासवादी हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों के बीच कोई संबंध नहीं है। दोनों प्रकृति की गैर-भौतिक समझ पर निर्भर करते हैं जो औसत व्यक्ति के साथ गहरे मनोवैज्ञानिक अनुनाद का प्रतीत होता है। अधिकांश धार्मिक विश्वासियों ने इस विचार को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया है कि धर्म और असामान्य मान्यताओं के बीच कोई संबंध है। इसके विपरीत, बाहरी लोग तुरंत ध्यान देंगे कि ऐसी कई समानताएं हैं जिन्हें आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता है। असाधारण मान्यताओं को एक धर्म के समान नहीं हो सकता है, लेकिन कभी-कभी वे करीब आते हैं। चूंकि अधिकांश धर्म धर्मवादी होते हैं, और धर्मवाद पश्चिम में सबसे बड़े धर्मों के लिए इतना महत्वपूर्ण है, कई लोगों ने भ्रमित विचार हासिल किया है कि धर्म स्वयं किसी भी तरह धर्म के समान ही है, इस प्रकार धर्मों में जो कुछ भी जाता है उसे अनदेखा कर रहा है । यहां तक कि कुछ नास्तिक भी इस त्रुटि का शिकार हो गए हैं। धर्म और धार्मिक शब्द स्पष्ट रूप से एक ही जड़ से आते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे हमेशा मूल रूप से एक ही बात का संदर्भ लेते हैं। हकीकत में, विशेषण धार्मिक धर्म के धर्म के मुकाबले व्यापक उपयोग होता है। धर्म और दर्शन दोनों ही समान प्रश्नों को संबोधित करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे एक ही बात हैं। सबसे स्पष्ट रूप से, दर्शन देवताओं से चमत्कार या रहस्योद्घाटन पर निर्भर नहीं है, दार्शनिक आम अनुष्ठानों में शामिल नहीं होते हैं, और दर्शन इस बात पर जोर नहीं देते कि विश्वास पर विश्वास को स्वीकार करने की आवश्यकता है। कल्पना करना लोकप्रिय हो गया है कि दैवीय या पवित्रः धर्म और आध्यात्मिकता से संबंधित दो अलग-अलग तरीकों के बीच एक कठिन और तेज़ अंतर है। धर्म को सामाजिक, सार्वजनिक और संगठित माध्यमों का वर्णन करना चाहिए, जिसके द्वारा लोग पवित्र या दिव्य से संबंधित होते हैं, जबकि आध्यात्मिकता को निजी तौर पर होने पर ऐसे संबंधों का वर्णन करना होता है। सच्चाई यह है कि ऐसा भेद पूरी तरह मान्य नहीं है। एनिमिसम क्या है? एनिमेशन यह विश्वास है कि प्रकृति में सब कुछ अपनी आत्मा या दिव्यता है। मूर्तिपूजा क्या है? मूर्तिपूजा जातिवादी या बहुवादी हो सकता है, लेकिन यह विशिष्ट है कि यह मुख्य रूप से प्रकृति के माध्यम से भगवान या देवताओं से संबंधित है। शमनवाद क्या है? शमनवाद उत्तरी एशिया के कुछ लोगों का एक एनिमस्टिक धर्म है जिसमें दृश्यमान और भावनात्मक दुनिया के बीच मध्यस्थता शमन द्वारा प्रभावित होती है। "
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Fact Check: एकनाथ शिंदे को मिला था बाल ठाकरे का आशीर्वाद, जानें वायरल फोटो की सच्चाई?
महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी सरकार सत्ता से बाहर हो चुकी है। शिंदे ने बीजेपी के साथ मिलकर अपनी सरकार बना ली है। उद्धव ठाकरे ने 29 जून को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर अपना इस्तीफा दिया था। अब सोशल मीडिया पर एक ब्लैक एंड व्हाइट फोटो वायरल हो रही है, जिसमें बाल ठाकरे को एक व्यक्ति के माथे पर तिलक लगाते हुए दिखाया गया है। दोनों नेता कई और लोगों से घिरे दिखाई दे रहे हैं। ट्विटर और फेसबुक पर फोटो शेयर करने वालों ने दावा किया कि इसमें शिवसेना संस्थापक को शिंदे को आशीर्वाद देते दिखाया गया है।
जैसा की सबको पता है कि शिंदे ने बाल ठाकरे के आदर्शों से भटकने के लिए एमवीए सरकार और उद्धव ठाकरे पर बार-बार हमला किया है। और इसी वजह से उन्होंने सरकार से अलग होने का भी फैसला किया। लेकिन शिंदे के होने के दावे वाली जिस फोटो को सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है, असल में जिस व्यक्ति को बाल ठाकरे तिलक लगा रहे हैं, वह एकनाथ शिंदे नहीं है, बल्कि दिवंगत शिवसेना नेता आनंद दिघे हैं।
फैक्ट चेक में सामने आया कि बीबीसी मराठी से लेकर मराठी अखबार लोकमत में भी यह फोटो प्रकाशित हो चुकी है। वहीं 26 अगस्त, 2021 का शिवसेना ने भी एक ट्वीट करते हुए दीघे को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि इसी फोटो के जरिए दी थी।
आपको बता दें कि आनंद दिघे बाल ठाकरे की पार्टी शिवसेना के दिग्गज नेता थे और बागी नेता एकनाथ शिंदे के राजनीतिक गुरु थे। महाराष्ट्र में चल रहे सियासी संकट के बीच शिंदे के गुरु, जिन्हें 'धर्मवीर' के नाम से जाना जाता है, उनकी जमकर चर्चा हुई थी। गौरतलब है कि साल 2001 में गणेश उत्सव के दौरान दीघे की कार हादसे का शिकार हो गई थी, जिसके बाद घायल आनंद दिघे की ठाणे के एक अस्पताल में सर्जरी हुई थी, लेकिन सर्जरी के बाद दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई।
दावा किया जा रहा है कि इस पुरानी तस्वीर में बाल ठाकरे एकनाथ शिंदे को आशीर्वाद दे रहे हैं।
दावा पूरी तरह से गलत है। इस फोटो में शिंदे नहीं बल्कि उनके गुरु आनंद दीघे हैं।
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Fact Check: एकनाथ शिंदे को मिला था बाल ठाकरे का आशीर्वाद, जानें वायरल फोटो की सच्चाई? महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी सरकार सत्ता से बाहर हो चुकी है। शिंदे ने बीजेपी के साथ मिलकर अपनी सरकार बना ली है। उद्धव ठाकरे ने उनतीस जून को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर अपना इस्तीफा दिया था। अब सोशल मीडिया पर एक ब्लैक एंड व्हाइट फोटो वायरल हो रही है, जिसमें बाल ठाकरे को एक व्यक्ति के माथे पर तिलक लगाते हुए दिखाया गया है। दोनों नेता कई और लोगों से घिरे दिखाई दे रहे हैं। ट्विटर और फेसबुक पर फोटो शेयर करने वालों ने दावा किया कि इसमें शिवसेना संस्थापक को शिंदे को आशीर्वाद देते दिखाया गया है। जैसा की सबको पता है कि शिंदे ने बाल ठाकरे के आदर्शों से भटकने के लिए एमवीए सरकार और उद्धव ठाकरे पर बार-बार हमला किया है। और इसी वजह से उन्होंने सरकार से अलग होने का भी फैसला किया। लेकिन शिंदे के होने के दावे वाली जिस फोटो को सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है, असल में जिस व्यक्ति को बाल ठाकरे तिलक लगा रहे हैं, वह एकनाथ शिंदे नहीं है, बल्कि दिवंगत शिवसेना नेता आनंद दिघे हैं। फैक्ट चेक में सामने आया कि बीबीसी मराठी से लेकर मराठी अखबार लोकमत में भी यह फोटो प्रकाशित हो चुकी है। वहीं छब्बीस अगस्त, दो हज़ार इक्कीस का शिवसेना ने भी एक ट्वीट करते हुए दीघे को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि इसी फोटो के जरिए दी थी। आपको बता दें कि आनंद दिघे बाल ठाकरे की पार्टी शिवसेना के दिग्गज नेता थे और बागी नेता एकनाथ शिंदे के राजनीतिक गुरु थे। महाराष्ट्र में चल रहे सियासी संकट के बीच शिंदे के गुरु, जिन्हें 'धर्मवीर' के नाम से जाना जाता है, उनकी जमकर चर्चा हुई थी। गौरतलब है कि साल दो हज़ार एक में गणेश उत्सव के दौरान दीघे की कार हादसे का शिकार हो गई थी, जिसके बाद घायल आनंद दिघे की ठाणे के एक अस्पताल में सर्जरी हुई थी, लेकिन सर्जरी के बाद दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई। दावा किया जा रहा है कि इस पुरानी तस्वीर में बाल ठाकरे एकनाथ शिंदे को आशीर्वाद दे रहे हैं। दावा पूरी तरह से गलत है। इस फोटो में शिंदे नहीं बल्कि उनके गुरु आनंद दीघे हैं।
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मेलबर्न, 28 दिसंबर पूर्व कप्तान माइकल वॉन और इयान बॉथम मौजूदा एशेज श्रृंखला में इंग्लैंड के आसानी से घुटने टेक देने के कारण शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं ।
आस्ट्रेलिया ने तीसरे टेस्ट के तीसरे दिन पहले ही सत्र में इंग्लैंड को दूसरी पारी में 68 रन पर आउट करके एक पारी और 14 रन से जीत दर्ज की । आस्ट्रेलिया ने श्रृंखला में 3 . 0 की विजयी बढत बना ली है ।
एशेज के इतिहास में किसी भी टीम के सबसे तेजी से श्रृंखला जीतने का यह रिकॉर्ड है ।
वॉन ने कहा कि अगर जो रूट की अगुवाई वाली टीम 2023 में अपनी धरती पर भी हार जाती है तो उन्हें हैरानी नहीं होगी ।
वहीं अपने समय के सर्वश्रेष्ठ हरफनमौलाओं में से एक बाथम ने कहा कि इंग्लैंड की टीम राह से भटक गई है ।
उन्होंने 'सेवन नेटवर्क ' से कहा ," मैं शर्मिंदा हूं । बारह दिन के भीतर एशेज हारना शर्मनाक है । इंग्लैंड की टीम राह से भटक गई है । हमें आत्ममंथन करने की जरूरत है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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मेलबर्न, अट्ठाईस दिसंबर पूर्व कप्तान माइकल वॉन और इयान बॉथम मौजूदा एशेज श्रृंखला में इंग्लैंड के आसानी से घुटने टेक देने के कारण शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं । आस्ट्रेलिया ने तीसरे टेस्ट के तीसरे दिन पहले ही सत्र में इंग्लैंड को दूसरी पारी में अड़सठ रन पर आउट करके एक पारी और चौदह रन से जीत दर्ज की । आस्ट्रेलिया ने श्रृंखला में तीन . शून्य की विजयी बढत बना ली है । एशेज के इतिहास में किसी भी टीम के सबसे तेजी से श्रृंखला जीतने का यह रिकॉर्ड है । वॉन ने कहा कि अगर जो रूट की अगुवाई वाली टीम दो हज़ार तेईस में अपनी धरती पर भी हार जाती है तो उन्हें हैरानी नहीं होगी । वहीं अपने समय के सर्वश्रेष्ठ हरफनमौलाओं में से एक बाथम ने कहा कि इंग्लैंड की टीम राह से भटक गई है । उन्होंने 'सेवन नेटवर्क ' से कहा ," मैं शर्मिंदा हूं । बारह दिन के भीतर एशेज हारना शर्मनाक है । इंग्लैंड की टीम राह से भटक गई है । हमें आत्ममंथन करने की जरूरत है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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बिहार के लोगों को अब पुल पर टोल टैक्स नहीं देना होगा। बिहार के पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने सोमवार को बताया कि लोगों को एक अप्रैल से राज्य सरकार या बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा बनाए गए किसी भी पुल पर टोल टैक्स नहीं देना पड़ेगा।
बिहार विधानसभा में पेश 2018-19 के लिए पथ निर्माण विभाग के 6889.12 करोड़ रुपए के बजटीय मांग पर चर्चा के बाद यादव ने घोषणा की कि लोगों को एक अप्रैल से राज्य सरकार या बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा बनाए गए किसी भी पुल पर टोल टैक्स नहीं अदा करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार का यह फैसला राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू नहीं होगा क्योंकि वह केंद्र सरकार के क्षेत्राधिकार में पड़ता है। यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि प्रदेश के बड़े पुलों और शहर की सड़कों पर समुचित रौशनी की व्यवस्था की जाएगी ताकि इन पुलों और सड़कों पर अंधेरा नहीं रहे।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने बिहार में कई और बड़ी सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है जिनमें दरभंगा होते हुए औरंगाबाद-जयनगर के बीच चार लेन सड़क, आरा होते हुए सासाराम-पटना के बीच चार लेन सड़क, सिवान, सीतामढी और मधुबनी जिला के उचैठ स्थान होते हुए सहरसा तक अयोध्या-जनकपुर राम-जानकी चार लेन मार्ग शामिल हैं।
ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।
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बिहार के लोगों को अब पुल पर टोल टैक्स नहीं देना होगा। बिहार के पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने सोमवार को बताया कि लोगों को एक अप्रैल से राज्य सरकार या बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा बनाए गए किसी भी पुल पर टोल टैक्स नहीं देना पड़ेगा। बिहार विधानसभा में पेश दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस के लिए पथ निर्माण विभाग के छः हज़ार आठ सौ नवासी.बारह करोड़ रुपए के बजटीय मांग पर चर्चा के बाद यादव ने घोषणा की कि लोगों को एक अप्रैल से राज्य सरकार या बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा बनाए गए किसी भी पुल पर टोल टैक्स नहीं अदा करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार का यह फैसला राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू नहीं होगा क्योंकि वह केंद्र सरकार के क्षेत्राधिकार में पड़ता है। यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि प्रदेश के बड़े पुलों और शहर की सड़कों पर समुचित रौशनी की व्यवस्था की जाएगी ताकि इन पुलों और सड़कों पर अंधेरा नहीं रहे। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने बिहार में कई और बड़ी सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है जिनमें दरभंगा होते हुए औरंगाबाद-जयनगर के बीच चार लेन सड़क, आरा होते हुए सासाराम-पटना के बीच चार लेन सड़क, सिवान, सीतामढी और मधुबनी जिला के उचैठ स्थान होते हुए सहरसा तक अयोध्या-जनकपुर राम-जानकी चार लेन मार्ग शामिल हैं। ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।
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रांची : राजधानी के तुपुदाना थाने क्षेत्र के हुलहुंडू में बुधवार तड़के करीब तीन बजे पशु तस्करों (Animal Smugglers) ने Lady Inspector Sandhya Topno की Pickup Van से रौंदकर जान ले ली।
SI की हत्या के बाद रांची पुलिस ने (Animal Smugglers) के खिलाफ घेराबंदी शुरू कर दी है। कई जगहों पर रांची पुलिस ने पशु तस्करों के खिलाफ अपनी दबिश बढ़ा दी है।
खूंटी जिला के तपकारा और रांची के सिकदरी थाना क्षेत्र में जांच बढ़ा दी गई है।
Animal Smugglers द्वारा तुपुदाना ओपी की महिला SI को Pickup Van से कुचलने वाला वाहन चालक पुलिस हिरासत में है।
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रांची : राजधानी के तुपुदाना थाने क्षेत्र के हुलहुंडू में बुधवार तड़के करीब तीन बजे पशु तस्करों ने Lady Inspector Sandhya Topno की Pickup Van से रौंदकर जान ले ली। SI की हत्या के बाद रांची पुलिस ने के खिलाफ घेराबंदी शुरू कर दी है। कई जगहों पर रांची पुलिस ने पशु तस्करों के खिलाफ अपनी दबिश बढ़ा दी है। खूंटी जिला के तपकारा और रांची के सिकदरी थाना क्षेत्र में जांच बढ़ा दी गई है। Animal Smugglers द्वारा तुपुदाना ओपी की महिला SI को Pickup Van से कुचलने वाला वाहन चालक पुलिस हिरासत में है।
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नई दिल्लीः पठानकोट आतंकी हमले के मास्टरमाइंड और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। इंटरपोल ने मसूद अजहर के भाई रऊफ और मुख्य हैंडलर काशिफ जॉन के खिलाफ भी नोटिस जारी किया है।
मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने की भारत की अर्जी पर संयुक्त राष्ट्र में चीन की ओर से अड़ंगा लगाए जाने के बाद इंटरपोल के एक्शन ने थोड़ी राहत जरूर दी है। मसूद अजहर पठानकोट एयरबेस में हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड है।
-सूत्रों के मुताबिक, मामले की जांच कर रही एनआईए ने सीबीआई के जरिए इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की अपील की थी।
-सीबीआई ने इंटरपोल से संपर्क साधा और हमले के मास्टरमाइंड के खिलाफ एक्शन के लिए तैयार किया।
-इसके साथ ही दाऊद के साथी जावेद चिकना के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुआ है।
-भारत की ओर से पाकिस्तान पर मसूद अजहर की गिरफ्तारी का दबाव भी बनाया गया था। लेकिन खास असर नहीं हुआ।
-हमले की वजह से भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाली विदेश सचिव स्तर की बातचीत भी रद्द हो गई थी।
-वहीं, पाक की ओर से जांच के लिए भारत आई संयुक्त टीम के हवाले से वहां की मीडिया ने दावा किया था कि पाकिस्तान का इस हमले में कोई हाथ नहीं है।
-पठानकोट आतंकी हमले के साजिशकर्ताओं में एक नाम उस शख्स का भी है जिसे साल 2010 में यूपीए सरकार ने पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने के लिए रिहा कर दिया था।
-जैश-ए-मोहम्मद के इसी आतंकी ने पठानकोट हमलों के दौरान फिदायीन स्क्वॉड को हैंडल किया था।
-शाहिद उन्हीं 25 आतंकियों में से एक है जिसे 28 मई 2010 को तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने के एवज में रिहा कर दिया था।
-ये आतंकी लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन और जैश-ए मोहम्मद के थे।
-पठानकोट हमले का फिदायीन अटैक हैंडलर शाहिद 11 साल तक भारतीय जेल में बंद रहा था।
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नई दिल्लीः पठानकोट आतंकी हमले के मास्टरमाइंड और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। इंटरपोल ने मसूद अजहर के भाई रऊफ और मुख्य हैंडलर काशिफ जॉन के खिलाफ भी नोटिस जारी किया है। मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने की भारत की अर्जी पर संयुक्त राष्ट्र में चीन की ओर से अड़ंगा लगाए जाने के बाद इंटरपोल के एक्शन ने थोड़ी राहत जरूर दी है। मसूद अजहर पठानकोट एयरबेस में हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड है। -सूत्रों के मुताबिक, मामले की जांच कर रही एनआईए ने सीबीआई के जरिए इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की अपील की थी। -सीबीआई ने इंटरपोल से संपर्क साधा और हमले के मास्टरमाइंड के खिलाफ एक्शन के लिए तैयार किया। -इसके साथ ही दाऊद के साथी जावेद चिकना के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुआ है। -भारत की ओर से पाकिस्तान पर मसूद अजहर की गिरफ्तारी का दबाव भी बनाया गया था। लेकिन खास असर नहीं हुआ। -हमले की वजह से भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाली विदेश सचिव स्तर की बातचीत भी रद्द हो गई थी। -वहीं, पाक की ओर से जांच के लिए भारत आई संयुक्त टीम के हवाले से वहां की मीडिया ने दावा किया था कि पाकिस्तान का इस हमले में कोई हाथ नहीं है। -पठानकोट आतंकी हमले के साजिशकर्ताओं में एक नाम उस शख्स का भी है जिसे साल दो हज़ार दस में यूपीए सरकार ने पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने के लिए रिहा कर दिया था। -जैश-ए-मोहम्मद के इसी आतंकी ने पठानकोट हमलों के दौरान फिदायीन स्क्वॉड को हैंडल किया था। -शाहिद उन्हीं पच्चीस आतंकियों में से एक है जिसे अट्ठाईस मई दो हज़ार दस को तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने के एवज में रिहा कर दिया था। -ये आतंकी लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन और जैश-ए मोहम्मद के थे। -पठानकोट हमले का फिदायीन अटैक हैंडलर शाहिद ग्यारह साल तक भारतीय जेल में बंद रहा था।
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कुश अग्रवाल बलौदाबाजार - लोक निर्माण एवं गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू 14 फरवरी को बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के दौरे पर आएंगे। निर्धारित दौरा कार्यक्रम के अनुसार ताम्रध्वज साहू इस दिन सवेरे 10 बजे रायपुर के पुलिस परेड मैदान से हेलीकाॅप्टर द्वारा रवाना होकर 10. 30 बजे दामाखेड़ा पहुंचेंगे।
दामाखेड़ा के हाई स्कूल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में साहू समाज के नव-निर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम के बाद दोपहर 11. 45 बजे हेलीकाॅप्टर से बिलाईगढ़ विकासखण्ड के ग्राम पवनी के लिए रवाना होकर सवा 12 बजे पवनी पहुंचेंगे। यहां हाई स्कूल मैदान में साहू समाज के नव-निर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। दोपहर 1. 30 बजे सरगुजा जिले के मैनपाट के लिए रवाना हो जाएंगे।
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कुश अग्रवाल बलौदाबाजार - लोक निर्माण एवं गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू चौदह फरवरी को बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के दौरे पर आएंगे। निर्धारित दौरा कार्यक्रम के अनुसार ताम्रध्वज साहू इस दिन सवेरे दस बजे रायपुर के पुलिस परेड मैदान से हेलीकाॅप्टर द्वारा रवाना होकर दस. तीस बजे दामाखेड़ा पहुंचेंगे। दामाखेड़ा के हाई स्कूल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में साहू समाज के नव-निर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम के बाद दोपहर ग्यारह. पैंतालीस बजे हेलीकाॅप्टर से बिलाईगढ़ विकासखण्ड के ग्राम पवनी के लिए रवाना होकर सवा बारह बजे पवनी पहुंचेंगे। यहां हाई स्कूल मैदान में साहू समाज के नव-निर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। दोपहर एक. तीस बजे सरगुजा जिले के मैनपाट के लिए रवाना हो जाएंगे।
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"केनफ्रॉन" क्या है (बूँदें बिल्कुल हम हैंपंजीकृत हैं), मुझे बिल्कुल कोई अवधारणा नहीं थी, इसलिए मैं विस्तार से "केनफ्रोन" के बारे में जानना चाहता था। डॉक्टरों और फार्मेसी कार्यकर्ता कभी-कभी भूल जाते हैं कि उनके सामने कोई मेडिकल शिक्षा के बिना एक व्यक्ति है, और इसलिए उनमें से अधिक जानकारी, उनको हल्का ढंग से रखने के लिए, प्रेषक तक नहीं पहुंचता है। निर्देशों को पढ़ने के बाद, मैंने इंटरनेट पर नशीली दवाओं के बारे में और कुछ जानने का फैसला किया।
यही वह बात है जो मुझे उन सभी तथ्यों की तुलना करके पता चला जो उस समय मेरे लिए ज्ञात थीं।
"केनफ्रॉन" का उपयोग गुर्दा रोगों के लिए किया जाता है, औरमूत्र पथ के रोग भी। यह एक फाइटो-दवा है, जिसे कई देशों के चिकित्सकों द्वारा एक प्रभावी उपाय माना जाता है। जर्मनी में, यह पहली बार 1 9 34 में जारी किया गया था, जो कि सत्तर साल पहले की तुलना में अधिक है। "केनफ्रॉन" की रचना में एक सोने-हजारों, प्रेमी और रोज़ागार शामिल हैं। दवा के घटक एंटीस्पास्मोदिक, एंटीसेप्टिक और एंटी-शोहेबिल प्रभाव को जीनाशकनी प्रणाली पर कर सकते हैं, गुर्दा समारोह के सामान्यीकरण को बढ़ावा देते हैं, और एक मूत्रवर्धक प्रभाव पड़ता है।
दवा क्या है? "कानेफ्रॉन" मौखिक प्रशासन (बूंदों) के लिए एक ड्रगे या समाधान के रूप में हो सकता है इसका समाधान पीली-भूरा रंग के साथ एक स्पष्ट तरल है।
निर्देशों के अनुसार, दवा के लिए सिफारिश की हैगुर्दे की जटिल उपचार (जैसे, pyelonephritis) और पुरानी मूत्राशय में संक्रमण (जैसे, मूत्राशयशोध), गुर्दे की पुरानी गैर संक्रामक सूजन के एक भाग के रूप में उपयोग करते हैं (यहां बीचवाला नेफ्रैटिस, स्तवकवृक्कशोथ शामिल हैं)। यह साधन है जिसके मूत्र पथरी के गठन को रोकता के रूप में दिखाया गया है।
पूर्वस्कूली उम्र के बच्चे - 15 बूंदों के लिए दिन में तीन बार,
स्कूल उम्र के बच्चे - 25 बूंदों के लिए दिन में तीन बार,
वयस्कों को एक दिन में 50 बार बूँदें चाहिए,
डॉक्टर ने हमें बड़े की बूँदें पीने की सलाह दीनिर्देश में पानी की मात्रा नहीं है, लेकिन "कानेफ्रॉन" की कोशिश करने पर, आप समझेंगे कि यह अच्छी सलाह है दवा का एक कड़वा स्वाद है, इसलिए बच्चे अन्य तरल पदार्थों के साथ इसे पतला कर सकते हैं।
समाधान को 25 डिग्री तक के तापमान पर एक सूखा, अंधेरी जगह में संग्रहित किया जाना चाहिए। बंद शीशी तीन साल के लिए जमा हो जाती है, छह महीनों के भीतर खुला होना चाहिए।
नशीली दवाओं में अल्कोहल की छोटी खुराक होती है, इसलिए शराब से पीड़ित रोगियों, या जो एंटीलॉक्की उपचार के पाठ्यक्रम को पार कर चुके हैं, "केनफ्रॉन" को नहीं लिया जाना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के समाधान (बूंदों) का उपयोग केवल चिकित्सा निर्देशों पर ही संभव है।
"केनफ्रॉन" के रिसेप्शन के दौरान आपको अधिक तरल पदार्थों का उपभोग करने की आवश्यकता है।
जब एक शीशी (जब आवश्यक दवा की मात्रा को मापते हुए) का प्रयोग करते हैं, तो इसे अनुलंब रूप से रखने की सलाह दी जाती है।
उपयोग करने से पहले, शीशी की सामग्री हिलती रहनी चाहिए।
केनफ्रान का उपयोग दक्षता के स्तर को कम नहीं करता है।
एक संभावित दुष्प्रभाव एक एलर्जी प्रतिक्रिया है।
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"केनफ्रॉन" क्या है , मुझे बिल्कुल कोई अवधारणा नहीं थी, इसलिए मैं विस्तार से "केनफ्रोन" के बारे में जानना चाहता था। डॉक्टरों और फार्मेसी कार्यकर्ता कभी-कभी भूल जाते हैं कि उनके सामने कोई मेडिकल शिक्षा के बिना एक व्यक्ति है, और इसलिए उनमें से अधिक जानकारी, उनको हल्का ढंग से रखने के लिए, प्रेषक तक नहीं पहुंचता है। निर्देशों को पढ़ने के बाद, मैंने इंटरनेट पर नशीली दवाओं के बारे में और कुछ जानने का फैसला किया। यही वह बात है जो मुझे उन सभी तथ्यों की तुलना करके पता चला जो उस समय मेरे लिए ज्ञात थीं। "केनफ्रॉन" का उपयोग गुर्दा रोगों के लिए किया जाता है, औरमूत्र पथ के रोग भी। यह एक फाइटो-दवा है, जिसे कई देशों के चिकित्सकों द्वारा एक प्रभावी उपाय माना जाता है। जर्मनी में, यह पहली बार एक नौ चौंतीस में जारी किया गया था, जो कि सत्तर साल पहले की तुलना में अधिक है। "केनफ्रॉन" की रचना में एक सोने-हजारों, प्रेमी और रोज़ागार शामिल हैं। दवा के घटक एंटीस्पास्मोदिक, एंटीसेप्टिक और एंटी-शोहेबिल प्रभाव को जीनाशकनी प्रणाली पर कर सकते हैं, गुर्दा समारोह के सामान्यीकरण को बढ़ावा देते हैं, और एक मूत्रवर्धक प्रभाव पड़ता है। दवा क्या है? "कानेफ्रॉन" मौखिक प्रशासन के लिए एक ड्रगे या समाधान के रूप में हो सकता है इसका समाधान पीली-भूरा रंग के साथ एक स्पष्ट तरल है। निर्देशों के अनुसार, दवा के लिए सिफारिश की हैगुर्दे की जटिल उपचार और पुरानी मूत्राशय में संक्रमण , गुर्दे की पुरानी गैर संक्रामक सूजन के एक भाग के रूप में उपयोग करते हैं । यह साधन है जिसके मूत्र पथरी के गठन को रोकता के रूप में दिखाया गया है। पूर्वस्कूली उम्र के बच्चे - पंद्रह बूंदों के लिए दिन में तीन बार, स्कूल उम्र के बच्चे - पच्चीस बूंदों के लिए दिन में तीन बार, वयस्कों को एक दिन में पचास बार बूँदें चाहिए, डॉक्टर ने हमें बड़े की बूँदें पीने की सलाह दीनिर्देश में पानी की मात्रा नहीं है, लेकिन "कानेफ्रॉन" की कोशिश करने पर, आप समझेंगे कि यह अच्छी सलाह है दवा का एक कड़वा स्वाद है, इसलिए बच्चे अन्य तरल पदार्थों के साथ इसे पतला कर सकते हैं। समाधान को पच्चीस डिग्री तक के तापमान पर एक सूखा, अंधेरी जगह में संग्रहित किया जाना चाहिए। बंद शीशी तीन साल के लिए जमा हो जाती है, छह महीनों के भीतर खुला होना चाहिए। नशीली दवाओं में अल्कोहल की छोटी खुराक होती है, इसलिए शराब से पीड़ित रोगियों, या जो एंटीलॉक्की उपचार के पाठ्यक्रम को पार कर चुके हैं, "केनफ्रॉन" को नहीं लिया जाना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के समाधान का उपयोग केवल चिकित्सा निर्देशों पर ही संभव है। "केनफ्रॉन" के रिसेप्शन के दौरान आपको अधिक तरल पदार्थों का उपभोग करने की आवश्यकता है। जब एक शीशी का प्रयोग करते हैं, तो इसे अनुलंब रूप से रखने की सलाह दी जाती है। उपयोग करने से पहले, शीशी की सामग्री हिलती रहनी चाहिए। केनफ्रान का उपयोग दक्षता के स्तर को कम नहीं करता है। एक संभावित दुष्प्रभाव एक एलर्जी प्रतिक्रिया है।
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कासगंजः जनपद के शहर कोतवाली क्षेत्र में दो पक्षों में हुए विवाद के बाद एक युवक की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या की वारदात के बाद वेखौफ़ हत्यारे मौके से तमंचा लहराते हुये फरार हो गए। इस सनसनीखेज हत्याकांड से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया है। पुलिस हमलावरों की गिरफ्तारी के लिये दबिश दे रही है।
जानकारी के मुताबिक नई बस्ती स्थिति मोहल्ला हुल्का में किसी बात को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। इसी दौरान युवक अकील पुत्र मकसूद की विरोधी पक्ष के लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या के उपरांत हत्यारे मौके से तमन्चा लहराते हुये फरार हो गए। इस सनसनीखेज हत्याकांड की सूचना के तत्काल बाद कासगंज एसपी रोहन पी वोत्रे ने मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया है।
दोनों पक्षों के बीच क्या विवाद था, अभी तक इसकी भी जानकारी सामने नहीं आयी है। पुलिस कप्तान ने मीडिया को बताया कि इस हत्याकांड के पीछे दो पक्षों में विवाद का पता चला है, जिसकी जानकारी की जा रही है। पुलिस ने फरार आरोपी समेत मामले में सभी नामजदों की धरपकड़ के लिये छह टीमों का गठन किया है।
युवक की हत्या के बाद क्षेत्र में भारी दहशत का माहौल व्याप्त हो है। मोके पर फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट टीम भी कार्य कर रही है, पुलिस की टीमे घटना मै शामिल लोगों की धरपकड़ को लगातार दबिशें दे रही हैं।
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कासगंजः जनपद के शहर कोतवाली क्षेत्र में दो पक्षों में हुए विवाद के बाद एक युवक की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या की वारदात के बाद वेखौफ़ हत्यारे मौके से तमंचा लहराते हुये फरार हो गए। इस सनसनीखेज हत्याकांड से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया है। पुलिस हमलावरों की गिरफ्तारी के लिये दबिश दे रही है। जानकारी के मुताबिक नई बस्ती स्थिति मोहल्ला हुल्का में किसी बात को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। इसी दौरान युवक अकील पुत्र मकसूद की विरोधी पक्ष के लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या के उपरांत हत्यारे मौके से तमन्चा लहराते हुये फरार हो गए। इस सनसनीखेज हत्याकांड की सूचना के तत्काल बाद कासगंज एसपी रोहन पी वोत्रे ने मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया है। दोनों पक्षों के बीच क्या विवाद था, अभी तक इसकी भी जानकारी सामने नहीं आयी है। पुलिस कप्तान ने मीडिया को बताया कि इस हत्याकांड के पीछे दो पक्षों में विवाद का पता चला है, जिसकी जानकारी की जा रही है। पुलिस ने फरार आरोपी समेत मामले में सभी नामजदों की धरपकड़ के लिये छह टीमों का गठन किया है। युवक की हत्या के बाद क्षेत्र में भारी दहशत का माहौल व्याप्त हो है। मोके पर फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट टीम भी कार्य कर रही है, पुलिस की टीमे घटना मै शामिल लोगों की धरपकड़ को लगातार दबिशें दे रही हैं।
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कुछ रंग प्यार के ऐसे भी प्रतिज्ञा कृष्णदासी जैसी टीवी शो में नजर आ चुकी एक्ट्रेस सना अमीन शेख ने अपनी 6 साल पुरानी शादी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। साल 2016 में उन्होंने डायरेक्टर एजाज शेख से निकाह किया था।
नई दिल्ली, जेएनएन। Sana Amin Sheikh Divorce: टीवी इंडस्ट्री की फेमस एक्ट्रेस सना अमीन शेख (Sana Amin Sheikh) एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं। एक्ट्रेस ने खुद खुलासा किया है उन्होंने अपने पति और डायरेक्टर एजाज शेख से तलाक ले लिया है। इस कपल ने अपनी छह साल पुरानी शादी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। सना 'कुछ रंग प्यार के ऐसे भी', 'प्रतिज्ञा', 'कृष्णदासी' जैसे टीवी सीरियल में नजर आ चुकीं है।
ईटाइम्स कि रिपोर्ट के मुताबिक एक्ट्रेस ने बताया है कि- 'एक महीने एक-दूसरे को जानने के बाद हमने शादी करने का फैसला किया था। हम एक-दूसरे को पसंद भी करते थे। ' 'हमारे पास भी समय नहीं था। हमारा शेड्यूल बहुत बिजी था इसलिए साथ समय बिता नहीं पाते थे। हमारे बीच कम्पैटिबिलिटी इशू थे। सना और एजाज दोनों ने इस शादी को बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हो सके।
'शादी के 6 साल बाद हम अलग हो गए। कई बार सुलह भी हुई क्योंकि हम शादी बचाना चाहते थे। जब दो लोग एक छत के नीचे खुश नहीं होते तो अलग हो जाना ही बेहतर है। जब हमें लगा कि अब इसे बचाने का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है तो हमने अपनी-अपनी लाइफ में आगे बढ़ने का फैसला किया। हम दोनों आधारिक रूप से अलग हो चुके हैं। '
इन दोनों की पहली मुलाकात 'कैसी ये यारियां सीजन 2' के प्रमोशनल शूट के दौरान हुई थी। पहले दोस्ती हुई फिर प्यार में बदल गई। 30 अगस्त साल 2015 को इन दोनों ने सगाई की थी। म इसके बाद 14 जनवरी, 2016 को इनकी शादी हो गई थी।
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कुछ रंग प्यार के ऐसे भी प्रतिज्ञा कृष्णदासी जैसी टीवी शो में नजर आ चुकी एक्ट्रेस सना अमीन शेख ने अपनी छः साल पुरानी शादी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। साल दो हज़ार सोलह में उन्होंने डायरेक्टर एजाज शेख से निकाह किया था। नई दिल्ली, जेएनएन। Sana Amin Sheikh Divorce: टीवी इंडस्ट्री की फेमस एक्ट्रेस सना अमीन शेख एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं। एक्ट्रेस ने खुद खुलासा किया है उन्होंने अपने पति और डायरेक्टर एजाज शेख से तलाक ले लिया है। इस कपल ने अपनी छह साल पुरानी शादी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। सना 'कुछ रंग प्यार के ऐसे भी', 'प्रतिज्ञा', 'कृष्णदासी' जैसे टीवी सीरियल में नजर आ चुकीं है। ईटाइम्स कि रिपोर्ट के मुताबिक एक्ट्रेस ने बताया है कि- 'एक महीने एक-दूसरे को जानने के बाद हमने शादी करने का फैसला किया था। हम एक-दूसरे को पसंद भी करते थे। ' 'हमारे पास भी समय नहीं था। हमारा शेड्यूल बहुत बिजी था इसलिए साथ समय बिता नहीं पाते थे। हमारे बीच कम्पैटिबिलिटी इशू थे। सना और एजाज दोनों ने इस शादी को बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हो सके। 'शादी के छः साल बाद हम अलग हो गए। कई बार सुलह भी हुई क्योंकि हम शादी बचाना चाहते थे। जब दो लोग एक छत के नीचे खुश नहीं होते तो अलग हो जाना ही बेहतर है। जब हमें लगा कि अब इसे बचाने का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है तो हमने अपनी-अपनी लाइफ में आगे बढ़ने का फैसला किया। हम दोनों आधारिक रूप से अलग हो चुके हैं। ' इन दोनों की पहली मुलाकात 'कैसी ये यारियां सीजन दो' के प्रमोशनल शूट के दौरान हुई थी। पहले दोस्ती हुई फिर प्यार में बदल गई। तीस अगस्त साल दो हज़ार पंद्रह को इन दोनों ने सगाई की थी। म इसके बाद चौदह जनवरी, दो हज़ार सोलह को इनकी शादी हो गई थी।
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आपत्तियों के प्रति आवेदक का उत्तर
आवेदक आयोग की वेबसाइट से भी आपत्तियां प्राप्त कर सकता है। आवेदक सूचना प्रकाशित होने की तारीख से 45 दिनों के भीतर सूचना के जवाब में प्राप्त आपत्तियों या सुझावों पर अपनी टिप्पणियां, यदि कोई हों, आयोग में फाइल करेगा।
अनुज्ञप्ति प्रदान करना
आवेदक, उपरोक्तानुसार सूचना के प्रकाशन की तारीख से 7 दिनों के भीतर एक शपथपत्र पर प्रकाशित सूचना के ब्यौरे उन समाचारपत्रों की प्रतियों के साथ जिनमें सूचना प्रकाशित की गई है, आयोग को प्रस्तुत करेगा।
आवेदन की सूचना को आवेदक द्वारा प्रकाशित किए जाने के पश्चात तथा प्राप्त आपत्तियों, यदि कोई हों, पर विचार किए जाने के पश्चात्, आयोग अनुज्ञप्ति प्रदान करने या इन्कार करने के लिए अनंतिम रूप से विनिश्चित कर सकेगा और यदि वह अनुज्ञप्ति प्रदान करने का विनिश्चय करता है तो वह ऐसा ऐसे विशिष्ट निबंधनों और शर्तों पर और सामान्य शर्तों में ऐसे उपांतरणों के साथ कर सकेगा जैसाकि आयोग विनिश्चत करे।
जब आयोग अनुज्ञप्ति प्रदान करने का विनिश्चय करता है, तो आयोग उस व्यक्ति के नाम और पते और ऐसे अन्य ब्यौरों, जो आवश्यक हों, की सूचना प्रकाशित करेगा जिसे वह अनुज्ञप्ति प्रदान करना चाहता है तथा जनता से सुझावों/आपत्तियों की ईप्सा करेगा ओर उन लोगों के लिए सुनवाई की तारीख भी उपदर्शित करेगा जो व्यक्तिगत रूप से सुने जाने चाहते हैं।
सभी सुझावों/आपत्तियों पर विचार करने के पश्चात् और सुने जाने के इच्छुक व्यक्तियों को व्यक्तिगत रूप से सुनने के पश्चात्, आयोग अंततः यह विनिश्चित कर सकेगा अनुज्ञप्ति प्रदान की जाए या उससे इन्कार किया जाए।
यदि आयोग अनुज्ञप्ति प्रदान करता है, तो आयोग का सचिव, अनुज्ञप्ति जारी कने के तुरंत पश्चात् अनुज्ञप्ति की एक-एक प्रति राज्य सरकार केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग और ऐसे अन्य व्यक्तियों को अग्रेषित करेगा जैसाकि आयोग आवश्यक समझे।
[भाग III -- खण्ड 4]
अनुज्ञप्ति से इन्कार
यदि आयोग अनुज्ञप्ति प्रदान करने के लिए आनत नहीं है तो आयोग, आवेदन रद्द करने के पूर्व, आवेदक को व्यक्तिगत रूप से सुने जाने का अवसर देगा।
5.10 अनुज्ञप्ति के प्रारंभ की तारीख
अनुज्ञप्ति उस तारीख से प्रारंभ होगी जैसाकि आयोग अनुज्ञप्ति प्रारंभ होने की तारीख का निदेश दे।
5.11 अनुज्ञप्ति का प्रतिसंहरण
अनुज्ञप्ति के प्रतिसंहरण के लिए कार्यवाहियां और / या अधिनियम की धारा 19 के अधीन कोई अन्य आदेश आयोग द्वारा एक आदेश के माध्यम से आरंभ किए जाएंगे। आयोग ऐसी कार्यवाहियां स्वप्रेरणा से या अनुज्ञप्तिधारी के आवेदन पर या किसी व्यक्ति से कोई शिकायत अथवा सूचना प्राप्त होने पर आरंभ कर सकेगा।
आयोग, अनुज्ञप्ति के प्रतिसंहरण के लिए कार्यवाहियों की सूचना अनुज्ञप्तिधारी और ऐसे अन्य व्यक्ति प्राधिकारी या निकाय को देगा जैसाकि आयोग समुचित समझे।
अधिनियम के उपबंधों और उसमें विहित प्रक्रिया के अधीन रहते हुए अनुज्ञप्ति के प्रतिसंहरण के लिए आयोग द्वारा जांच, जहां तक वह लागू हो, उसी रीति में की जाएगी जैसाकि इस समय प्रवृत्त आयोग के कारबार का संचालन विनियम, 2009 में उपबंधित है।
यदि आयोग अनुज्ञप्ति को प्रतिसंहृत करने का विनिश्चय करे तो आयोग प्रतिसंहरण आदेश की सूचना ऐसी तारीख बताते हुए अनुज्ञप्तिधारी को देगा जब से ऐसा प्रतिसंहरण प्रभावी होगा।
5.12 अनुज्ञप्ति का संशोधन
(1) आवेदक द्वारा अधिनियम की धारा 18 के अधीन अनुज्ञप्ति के निबंधनों और शर्तों का संशोधन करने के लिए आवेदन याचिका के रूप में किया जा सकेगा जैसा कि इस समय प्रवृत्त आयोग के कारबार संचालन विनियम, 2009 में उपबंधित है और इसके साथ प्रस्तावित संशोधन का कथन और लागू फीस सम्यकतः दिए जाएंगे।
[PART III-- SEC. 4]
आयोग, अनुज्ञप्ति प्रतिसंहृत करने के स्थान पर ऐसे निबंधन या शर्तें अधिरोपित करते हुए कोई अन्य आदेश पारित कर सकेगा जिनके अधीन अनुज्ञप्तिधारी को उसके पश्चात प्रचालन अनुज्ञात किया जाए।
आवेदक, संशोधन के लिए आवेदन की तारीख से सात दिनों के भीतर स्वीकृति और प्रस्तावित संशोधन (नों) की संख्या प्रस्तावित संशोधन (नों) के लिए कारण, प्रदत्त अनुज्ञप्ति के अधीन अनुज्ञप्तिधारी के कृत्यों के निर्वहन पर प्रस्तावित संशोधन (नों) का प्रभाव, ऐसे कृत्यों के निर्वहन के लिए प्रस्तावित वैकल्पिक व्यवस्था, यदि कोई हो, और ऐसी अन्य विशिष्टियों, जैसाकि आयोग निदेश दे, का संक्षिप्त विवरण देते हुए एक सूचना प्रकाशित करेगा।
विनियम 5.12 (2) के अधीन उपरोक्त प्रकाशन में ऐसे कार्यालयों के पते दिए जाएंगे जहां संशोधनों के लिए आवेदन का निरीक्षण किया जा सके और जहां से दस्तावेजों की प्रतियां क्रय की जा सकें और यह भी बताया जाएगा कि आवेदन के संबंध में प्रतिवेदन करने का इच्छुक प्रत्येक स्थानीय प्राधिकरण, उपयोगिता या व्यक्ति, प्रकाशन की तारीख से तीस दिनों के भीतर आयोग के सचिव को संबोधित एक पत्र लिखकर ऐसा कर सकता है।
यदि आयोग, किसी अनुज्ञप्तिधारी को प्रदत्त अनुज्ञप्ति के निबंधनों या शर्तों में संशोधन का प्रस्ताव स्वप्रेरणा से करे, तो आयोग प्रस्तावित संशोधन (नों), प्रस्तावित संशोधनों (नों) के कारण प्रदत्त अनुज्ञप्ति के अधीन अनुज्ञप्तिधारी के कृत्यों के निर्वहन पर प्रस्तावित संशोधन (नों) का प्रभाव, ऐसे कृत्यों के निर्वहन के लिए प्रस्तावित वैकल्पिक व्यवस्था, यदि कोई हो, और ऐसी अन्य विशिष्टियों, जैसाकि आयोग समुचित समझे, का संक्षिप्त विवरण देते हुए प्रस्तावित संशोधन (नों) की एक सूचना प्रकाशित करेगा।
[ भाग III - खण्ड 4] (5)
अनुज्ञप्ति के संशोधन के लिए किसी आवेदन पर विचार करते समय ब आयोग द्वारा लिखित रूप से अन्यथा विनिश्चित न किया जाए, अनुज्ञप्ति प्रदान किए जाने के लिए इन विनियमों में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया का, जहां तक लागू हो सके, अनुसरण किया जाएगा।
व्यापारी के कर्तव्य और बाध्यताएं
व्यापार संव्यवहारों से संबंधित कर्तव्य
विद्युत के क्रय और विक्रय के लिए व्यापारी सभी करार और आवश्यक संबंधित प्राधिकार और व्यवस्थाएं करेगा जो अनुज्ञप्ति के अधीन उसकी बाध्यताओं के निर्वहन के लिए अपेक्षित हों । व्यापार के माध्यम से विद्युत के प्रदाय के संबंध में आवश्यक रक्षोपाय या व्यापार की गई विद्युत के लिए संदाय को पक्षकारो के ध्य करारों में साम्मलित किया जाएगा।
विद्युत के प्रवहण के लिए संबंधित प्रत्येक पारेषण अनुज्ञप्तिधारी और वितरण अनुज्ञप्तिधारी के साथ व्यापारी खुला पहुंच करार करेगा जब तक कि व्यापारी के ग्राहक या विद्युत प्रदायकर्ता ने ऐसा खुला पहुंच करार न किया हो।
ऐसे करार, अन्य बातों के साथ-साथ यह उपबंध करते हैं कि ऊर्जा का आदानप्रदान, बिलिंग और संदाय आयोग द्वारा समय-समय पर अनुमोदित की जाने वाली बिलिंग और भुगतान संहिता के अनुसार किया जाएगा।
व्यापारी एक सुसंरचित संदाय सुरक्षा प्रणाली अर्थात संबंधित पक्षकारों को आपस में स्वीकार्य प्रत्यय पत्रों या किसी अन्य वरिष्ठ लिखत के माध्यम से, की व्यवस्था करेगा।
व्यापारी अपने ग्राहकों और सभी कारबारी संव्यवहारों का एक अद्यतन रजिस्टर या अभिलेख रखेगा।
व्यापारी, निम्नलिखित शर्तों के अधीन रहते हुए अनुज्ञप्त कारबार के संबंध में व्यापारी को विद्युत संबंधी सामान या सेवाएं उपलब्ध कराने या विद्युत के प्रदाय के
लिए, अपनी किसी समनुषंगी या नियंत्री कंपनी अथवा ऐसी नियंत्री कंपनी की समनुषंगी को लगा सकेगा :
संव्यवहार "उचित आधार पर और ऐसे मूल्य पर किए जाएंगे जो प्रचलित परिस्थितियों में उचित और युक्तियुक्त हों;
व्यापारी, वित्तीय वर्ष के दौरान किए गए इस विनियम में निर्दिष्ट सभी संव्यवहारों की प्रकृति के ब्यौरों की रिपोर्ट हर वित्तीय वर्ष के संबंध में आयोग को प्रस्तुत करेगा;
जहां तक विनियम 6.1 (6) (ग) की उपरोक्त अपेक्षा के अनुपालन का संबंध है, व्यापारी प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट से एक प्रमाणपत्र आयोग को प्रस्तुत करेगा; और
व्यापारी, ऐसे प्रत्येक संव्यवहार के होने के एक सप्ताह के भीतर सभी संव्यवहारों के ब्यौरे उनकी वेबसाइट पर उपलब्ध कराएगा और इस तरह उपलब्ध कराए गए ब्यौरे कम से कम तीन मास की अवधि तक उपलब्ध रहेंगे।
व्यापारी, अनुज्ञप्ति के संबंध में आयोग द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को उसके कर्तव्यों का पालन करने के लिए हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएगा।
उपभोक्ताओं के प्रदाय के संबंध में कर्तव्य
व्यापारी ऐसा कोई करार नहीं करेगा जिससे उसकी प्रधान स्थिति का दुरूपयोग होता हो या किसी ऐसे समुच्चय में प्रवेश नहीं करेगा जिससे विद्युत उद्योग में प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना हो ।
व्यापारी अपने कार्यालय में हमेशा अद्यतन विद्युत प्रदाय संहिता और प्रदाय के निबंधन और शर्तों की पर्याप्त संख्या में प्रतियां रखेगा और मांगे जाने पर किसी भी आवेदक को ऐसी प्रतियां ऐसी कीमत पर विक्रय करेगा जो सामान्य फोटोकापी प्रभारों से अधिक न हो।
[ भाग III - खण्ड 4]
तकनीकी संसाधन, पूंजी पर्याप्तता और उधार पात्रता
व्यापारी, उपरोक्त विनियम 3 में विनिर्दिष्ट तकनीकी संसाधन बनाए रखेगा और किसी परिवर्तन के ब्यौरे कारण बताते हुए आयोग को उपलब्ध कराएगा कि सामर्थ्य है, बनाए रखा है, जो उसके व्यापार की मात्रा की मांग पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
यदि किसी वित्तीय वर्ष में व्यापारों के व्यापार की मात्रा व्यापार की विनिर्दिष्ट मात्रा से बढ़ती है तो व्यापारी उच्चतर प्रवर्ग में अपने जाने की सूचना तुरंत आयोग को देगा और अपने शुद्ध मूल्य में लागू स्तर तक वृद्धि करेगा जैसाकि विनियम 4.3 में विनिर्दिष्ट है और आने वाले 30 अप्रैल तक वर्ष के शेष भाग के लिए यथानुपात शेष अनुज्ञप्ति फीस का संदाय करगा।
व्यापारी उसकी बहियों में संपूर्ण अवधि तक रहने वाले सभी ऋणों के लिए निवेश श्रेणी प्रत्यय रेटिंग (किसी प्रमुख स्वतंत्र प्रत्यय रेटिंग अभिकरण से प्राप्त) बनाए रखने के लिए युक्तियुक्त प्रयास करेगा।
अनुपालन और सूचना प्रस्तुतिकरण
व्यापारी, प्रत्येक तिमाही के अंत में ऐसे प्ररूप और रीति में, जैसा कि समय-समय पर आयोग द्वारा निदेश किया जाए, यह प्रदर्शित करने के लिए आयोग को सूचना उपलब्ध कराएगा कि उसने उपरोक्त विनियम 4.3 में उल्लिखित शुद्ध मूल्य मानदंड का अनुपालन किया है।
ऐसी घटना की रिपोर्ट न किए जाने की स्थिति में आयोग उसकी अनुज्ञप्ति के निलंबन के अतिरिक्त, उपरोक्त विनियम 6.3 ( 2 ) के अनुसार व्यापारी द्वारा देय अतिरिक्त अनुज्ञप्ति फीस के असंदाय/विलंबित संदाय के लिए विलंब संदाय अधिभार / ब्याज उद्ग्रहण करने के अलावा अधिनियम की धारा 142 के निबंधनों में व्यापारी पर शास्ति उसी रीति में और उस दर पर लगा सकेगा जैसाकि नीचे विनियम 6.5 (1) में विनिर्दिष्ट है।
व्यापारी विनियमों, संहिताओं, आदेशों और निदेश पत्रों का अनुपालन करेगा जैसेविद्युत वितरण में खुली पहुंच की चरणबद्धता पर विनियम, कार्य-निष्पादन के मानक, प्रदाय संहिता, बिलिंग संहिता और संतुलन तथा भुगतान संहिता आदि ।
जब तक इस आयोग द्वारा उपांतरित न किया जाए, अंतः राज्यिक व्यापार के लिए अधिनियम की धारा 86 ( 1 ) (ञ) के अधीन केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग द्वारा नियत व्यापार मार्जिन, इन विनियमों के अधीन अनुज्ञप्ति प्रदान किए जाने वाले व्यापारी को भी लागू होगा।
व्यापारी, आयोग को ऐसी सूचना प्रस्तुत करेगा जैसाकि व्यापारी के कार्य-निष्पादन की मानीटरिंग अनुज्ञप्ति के निबंधन और शर्तों के अनुपालन और कोई अन्य विधायी या विनियामक अपेक्षाओं के अनुपालन के लिए अपेक्षित हैं।
व्यापारी, राज्य भार प्रेषण केंद्र द्वारा जारी किसी निदेश का अनुपालन करेगा।
व्यापारी आंकड़े और अपनी कारबार योजना वार्षिक रूप से और निवेदन किए जाने पर भी आयोग, राज्य पारेषण उपयोगिता और एसएलडीसी को उपलब्ध कराएगा।
व्यापार मार्जिन अवधारण करने में आयोग को समर्थ बनाने के लिए व्यापारी ऐसे प्ररूप और ऐसी नीति में ब्यौरे फाइल करेगा जैसाकि आयोग समय-समय पर अपेक्षा करे!
व्यापारी, यथा शीघ्र साध्य रूप से आयोग को रिपोर्ट करेगा
(क) उसकी परिस्थितियों में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन जिससे अधिनियम, नियम और विनियम, आयोग द्वारा जारी निदेशों/आदेशों, राज्यग्रिड संहिता, करारों या अनुज्ञप्ति के अधीन बाध्यताओं को पूरा करने की समर्थता पर प्रभाव पड़ सकता हो; (ख) अधिनियम, नियमों और विनियमों के उपबंधों, आयोग द्वारा जारी निदेशों / आदेशों, राज्य ग्रिड संहिता, करार या अनुज्ञप्ति का कोई तात्विक भंग; और (ग) व्यापारी के शेयरधारण पैटर्न, स्वामित्व या प्रबंध में कोई बड़ा परिवर्तन ।
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आपत्तियों के प्रति आवेदक का उत्तर आवेदक आयोग की वेबसाइट से भी आपत्तियां प्राप्त कर सकता है। आवेदक सूचना प्रकाशित होने की तारीख से पैंतालीस दिनों के भीतर सूचना के जवाब में प्राप्त आपत्तियों या सुझावों पर अपनी टिप्पणियां, यदि कोई हों, आयोग में फाइल करेगा। अनुज्ञप्ति प्रदान करना आवेदक, उपरोक्तानुसार सूचना के प्रकाशन की तारीख से सात दिनों के भीतर एक शपथपत्र पर प्रकाशित सूचना के ब्यौरे उन समाचारपत्रों की प्रतियों के साथ जिनमें सूचना प्रकाशित की गई है, आयोग को प्रस्तुत करेगा। आवेदन की सूचना को आवेदक द्वारा प्रकाशित किए जाने के पश्चात तथा प्राप्त आपत्तियों, यदि कोई हों, पर विचार किए जाने के पश्चात्, आयोग अनुज्ञप्ति प्रदान करने या इन्कार करने के लिए अनंतिम रूप से विनिश्चित कर सकेगा और यदि वह अनुज्ञप्ति प्रदान करने का विनिश्चय करता है तो वह ऐसा ऐसे विशिष्ट निबंधनों और शर्तों पर और सामान्य शर्तों में ऐसे उपांतरणों के साथ कर सकेगा जैसाकि आयोग विनिश्चत करे। जब आयोग अनुज्ञप्ति प्रदान करने का विनिश्चय करता है, तो आयोग उस व्यक्ति के नाम और पते और ऐसे अन्य ब्यौरों, जो आवश्यक हों, की सूचना प्रकाशित करेगा जिसे वह अनुज्ञप्ति प्रदान करना चाहता है तथा जनता से सुझावों/आपत्तियों की ईप्सा करेगा ओर उन लोगों के लिए सुनवाई की तारीख भी उपदर्शित करेगा जो व्यक्तिगत रूप से सुने जाने चाहते हैं। सभी सुझावों/आपत्तियों पर विचार करने के पश्चात् और सुने जाने के इच्छुक व्यक्तियों को व्यक्तिगत रूप से सुनने के पश्चात्, आयोग अंततः यह विनिश्चित कर सकेगा अनुज्ञप्ति प्रदान की जाए या उससे इन्कार किया जाए। यदि आयोग अनुज्ञप्ति प्रदान करता है, तो आयोग का सचिव, अनुज्ञप्ति जारी कने के तुरंत पश्चात् अनुज्ञप्ति की एक-एक प्रति राज्य सरकार केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग और ऐसे अन्य व्यक्तियों को अग्रेषित करेगा जैसाकि आयोग आवश्यक समझे। [भाग III -- खण्ड चार] अनुज्ञप्ति से इन्कार यदि आयोग अनुज्ञप्ति प्रदान करने के लिए आनत नहीं है तो आयोग, आवेदन रद्द करने के पूर्व, आवेदक को व्यक्तिगत रूप से सुने जाने का अवसर देगा। पाँच.दस अनुज्ञप्ति के प्रारंभ की तारीख अनुज्ञप्ति उस तारीख से प्रारंभ होगी जैसाकि आयोग अनुज्ञप्ति प्रारंभ होने की तारीख का निदेश दे। पाँच.ग्यारह अनुज्ञप्ति का प्रतिसंहरण अनुज्ञप्ति के प्रतिसंहरण के लिए कार्यवाहियां और / या अधिनियम की धारा उन्नीस के अधीन कोई अन्य आदेश आयोग द्वारा एक आदेश के माध्यम से आरंभ किए जाएंगे। आयोग ऐसी कार्यवाहियां स्वप्रेरणा से या अनुज्ञप्तिधारी के आवेदन पर या किसी व्यक्ति से कोई शिकायत अथवा सूचना प्राप्त होने पर आरंभ कर सकेगा। आयोग, अनुज्ञप्ति के प्रतिसंहरण के लिए कार्यवाहियों की सूचना अनुज्ञप्तिधारी और ऐसे अन्य व्यक्ति प्राधिकारी या निकाय को देगा जैसाकि आयोग समुचित समझे। अधिनियम के उपबंधों और उसमें विहित प्रक्रिया के अधीन रहते हुए अनुज्ञप्ति के प्रतिसंहरण के लिए आयोग द्वारा जांच, जहां तक वह लागू हो, उसी रीति में की जाएगी जैसाकि इस समय प्रवृत्त आयोग के कारबार का संचालन विनियम, दो हज़ार नौ में उपबंधित है। यदि आयोग अनुज्ञप्ति को प्रतिसंहृत करने का विनिश्चय करे तो आयोग प्रतिसंहरण आदेश की सूचना ऐसी तारीख बताते हुए अनुज्ञप्तिधारी को देगा जब से ऐसा प्रतिसंहरण प्रभावी होगा। पाँच.बारह अनुज्ञप्ति का संशोधन आवेदक द्वारा अधिनियम की धारा अट्ठारह के अधीन अनुज्ञप्ति के निबंधनों और शर्तों का संशोधन करने के लिए आवेदन याचिका के रूप में किया जा सकेगा जैसा कि इस समय प्रवृत्त आयोग के कारबार संचालन विनियम, दो हज़ार नौ में उपबंधित है और इसके साथ प्रस्तावित संशोधन का कथन और लागू फीस सम्यकतः दिए जाएंगे। [PART III-- SEC. चार] आयोग, अनुज्ञप्ति प्रतिसंहृत करने के स्थान पर ऐसे निबंधन या शर्तें अधिरोपित करते हुए कोई अन्य आदेश पारित कर सकेगा जिनके अधीन अनुज्ञप्तिधारी को उसके पश्चात प्रचालन अनुज्ञात किया जाए। आवेदक, संशोधन के लिए आवेदन की तारीख से सात दिनों के भीतर स्वीकृति और प्रस्तावित संशोधन की संख्या प्रस्तावित संशोधन के लिए कारण, प्रदत्त अनुज्ञप्ति के अधीन अनुज्ञप्तिधारी के कृत्यों के निर्वहन पर प्रस्तावित संशोधन का प्रभाव, ऐसे कृत्यों के निर्वहन के लिए प्रस्तावित वैकल्पिक व्यवस्था, यदि कोई हो, और ऐसी अन्य विशिष्टियों, जैसाकि आयोग निदेश दे, का संक्षिप्त विवरण देते हुए एक सूचना प्रकाशित करेगा। विनियम पाँच.बारह के अधीन उपरोक्त प्रकाशन में ऐसे कार्यालयों के पते दिए जाएंगे जहां संशोधनों के लिए आवेदन का निरीक्षण किया जा सके और जहां से दस्तावेजों की प्रतियां क्रय की जा सकें और यह भी बताया जाएगा कि आवेदन के संबंध में प्रतिवेदन करने का इच्छुक प्रत्येक स्थानीय प्राधिकरण, उपयोगिता या व्यक्ति, प्रकाशन की तारीख से तीस दिनों के भीतर आयोग के सचिव को संबोधित एक पत्र लिखकर ऐसा कर सकता है। यदि आयोग, किसी अनुज्ञप्तिधारी को प्रदत्त अनुज्ञप्ति के निबंधनों या शर्तों में संशोधन का प्रस्ताव स्वप्रेरणा से करे, तो आयोग प्रस्तावित संशोधन , प्रस्तावित संशोधनों के कारण प्रदत्त अनुज्ञप्ति के अधीन अनुज्ञप्तिधारी के कृत्यों के निर्वहन पर प्रस्तावित संशोधन का प्रभाव, ऐसे कृत्यों के निर्वहन के लिए प्रस्तावित वैकल्पिक व्यवस्था, यदि कोई हो, और ऐसी अन्य विशिष्टियों, जैसाकि आयोग समुचित समझे, का संक्षिप्त विवरण देते हुए प्रस्तावित संशोधन की एक सूचना प्रकाशित करेगा। [ भाग III - खण्ड चार] अनुज्ञप्ति के संशोधन के लिए किसी आवेदन पर विचार करते समय ब आयोग द्वारा लिखित रूप से अन्यथा विनिश्चित न किया जाए, अनुज्ञप्ति प्रदान किए जाने के लिए इन विनियमों में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया का, जहां तक लागू हो सके, अनुसरण किया जाएगा। व्यापारी के कर्तव्य और बाध्यताएं व्यापार संव्यवहारों से संबंधित कर्तव्य विद्युत के क्रय और विक्रय के लिए व्यापारी सभी करार और आवश्यक संबंधित प्राधिकार और व्यवस्थाएं करेगा जो अनुज्ञप्ति के अधीन उसकी बाध्यताओं के निर्वहन के लिए अपेक्षित हों । व्यापार के माध्यम से विद्युत के प्रदाय के संबंध में आवश्यक रक्षोपाय या व्यापार की गई विद्युत के लिए संदाय को पक्षकारो के ध्य करारों में साम्मलित किया जाएगा। विद्युत के प्रवहण के लिए संबंधित प्रत्येक पारेषण अनुज्ञप्तिधारी और वितरण अनुज्ञप्तिधारी के साथ व्यापारी खुला पहुंच करार करेगा जब तक कि व्यापारी के ग्राहक या विद्युत प्रदायकर्ता ने ऐसा खुला पहुंच करार न किया हो। ऐसे करार, अन्य बातों के साथ-साथ यह उपबंध करते हैं कि ऊर्जा का आदानप्रदान, बिलिंग और संदाय आयोग द्वारा समय-समय पर अनुमोदित की जाने वाली बिलिंग और भुगतान संहिता के अनुसार किया जाएगा। व्यापारी एक सुसंरचित संदाय सुरक्षा प्रणाली अर्थात संबंधित पक्षकारों को आपस में स्वीकार्य प्रत्यय पत्रों या किसी अन्य वरिष्ठ लिखत के माध्यम से, की व्यवस्था करेगा। व्यापारी अपने ग्राहकों और सभी कारबारी संव्यवहारों का एक अद्यतन रजिस्टर या अभिलेख रखेगा। व्यापारी, निम्नलिखित शर्तों के अधीन रहते हुए अनुज्ञप्त कारबार के संबंध में व्यापारी को विद्युत संबंधी सामान या सेवाएं उपलब्ध कराने या विद्युत के प्रदाय के लिए, अपनी किसी समनुषंगी या नियंत्री कंपनी अथवा ऐसी नियंत्री कंपनी की समनुषंगी को लगा सकेगा : संव्यवहार "उचित आधार पर और ऐसे मूल्य पर किए जाएंगे जो प्रचलित परिस्थितियों में उचित और युक्तियुक्त हों; व्यापारी, वित्तीय वर्ष के दौरान किए गए इस विनियम में निर्दिष्ट सभी संव्यवहारों की प्रकृति के ब्यौरों की रिपोर्ट हर वित्तीय वर्ष के संबंध में आयोग को प्रस्तुत करेगा; जहां तक विनियम छः.एक की उपरोक्त अपेक्षा के अनुपालन का संबंध है, व्यापारी प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट से एक प्रमाणपत्र आयोग को प्रस्तुत करेगा; और व्यापारी, ऐसे प्रत्येक संव्यवहार के होने के एक सप्ताह के भीतर सभी संव्यवहारों के ब्यौरे उनकी वेबसाइट पर उपलब्ध कराएगा और इस तरह उपलब्ध कराए गए ब्यौरे कम से कम तीन मास की अवधि तक उपलब्ध रहेंगे। व्यापारी, अनुज्ञप्ति के संबंध में आयोग द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को उसके कर्तव्यों का पालन करने के लिए हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएगा। उपभोक्ताओं के प्रदाय के संबंध में कर्तव्य व्यापारी ऐसा कोई करार नहीं करेगा जिससे उसकी प्रधान स्थिति का दुरूपयोग होता हो या किसी ऐसे समुच्चय में प्रवेश नहीं करेगा जिससे विद्युत उद्योग में प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना हो । व्यापारी अपने कार्यालय में हमेशा अद्यतन विद्युत प्रदाय संहिता और प्रदाय के निबंधन और शर्तों की पर्याप्त संख्या में प्रतियां रखेगा और मांगे जाने पर किसी भी आवेदक को ऐसी प्रतियां ऐसी कीमत पर विक्रय करेगा जो सामान्य फोटोकापी प्रभारों से अधिक न हो। [ भाग III - खण्ड चार] तकनीकी संसाधन, पूंजी पर्याप्तता और उधार पात्रता व्यापारी, उपरोक्त विनियम तीन में विनिर्दिष्ट तकनीकी संसाधन बनाए रखेगा और किसी परिवर्तन के ब्यौरे कारण बताते हुए आयोग को उपलब्ध कराएगा कि सामर्थ्य है, बनाए रखा है, जो उसके व्यापार की मात्रा की मांग पूरा करने के लिए पर्याप्त है। यदि किसी वित्तीय वर्ष में व्यापारों के व्यापार की मात्रा व्यापार की विनिर्दिष्ट मात्रा से बढ़ती है तो व्यापारी उच्चतर प्रवर्ग में अपने जाने की सूचना तुरंत आयोग को देगा और अपने शुद्ध मूल्य में लागू स्तर तक वृद्धि करेगा जैसाकि विनियम चार.तीन में विनिर्दिष्ट है और आने वाले तीस अप्रैल तक वर्ष के शेष भाग के लिए यथानुपात शेष अनुज्ञप्ति फीस का संदाय करगा। व्यापारी उसकी बहियों में संपूर्ण अवधि तक रहने वाले सभी ऋणों के लिए निवेश श्रेणी प्रत्यय रेटिंग बनाए रखने के लिए युक्तियुक्त प्रयास करेगा। अनुपालन और सूचना प्रस्तुतिकरण व्यापारी, प्रत्येक तिमाही के अंत में ऐसे प्ररूप और रीति में, जैसा कि समय-समय पर आयोग द्वारा निदेश किया जाए, यह प्रदर्शित करने के लिए आयोग को सूचना उपलब्ध कराएगा कि उसने उपरोक्त विनियम चार.तीन में उल्लिखित शुद्ध मूल्य मानदंड का अनुपालन किया है। ऐसी घटना की रिपोर्ट न किए जाने की स्थिति में आयोग उसकी अनुज्ञप्ति के निलंबन के अतिरिक्त, उपरोक्त विनियम छः.तीन के अनुसार व्यापारी द्वारा देय अतिरिक्त अनुज्ञप्ति फीस के असंदाय/विलंबित संदाय के लिए विलंब संदाय अधिभार / ब्याज उद्ग्रहण करने के अलावा अधिनियम की धारा एक सौ बयालीस के निबंधनों में व्यापारी पर शास्ति उसी रीति में और उस दर पर लगा सकेगा जैसाकि नीचे विनियम छः.पाँच में विनिर्दिष्ट है। व्यापारी विनियमों, संहिताओं, आदेशों और निदेश पत्रों का अनुपालन करेगा जैसेविद्युत वितरण में खुली पहुंच की चरणबद्धता पर विनियम, कार्य-निष्पादन के मानक, प्रदाय संहिता, बिलिंग संहिता और संतुलन तथा भुगतान संहिता आदि । जब तक इस आयोग द्वारा उपांतरित न किया जाए, अंतः राज्यिक व्यापार के लिए अधिनियम की धारा छियासी के अधीन केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग द्वारा नियत व्यापार मार्जिन, इन विनियमों के अधीन अनुज्ञप्ति प्रदान किए जाने वाले व्यापारी को भी लागू होगा। व्यापारी, आयोग को ऐसी सूचना प्रस्तुत करेगा जैसाकि व्यापारी के कार्य-निष्पादन की मानीटरिंग अनुज्ञप्ति के निबंधन और शर्तों के अनुपालन और कोई अन्य विधायी या विनियामक अपेक्षाओं के अनुपालन के लिए अपेक्षित हैं। व्यापारी, राज्य भार प्रेषण केंद्र द्वारा जारी किसी निदेश का अनुपालन करेगा। व्यापारी आंकड़े और अपनी कारबार योजना वार्षिक रूप से और निवेदन किए जाने पर भी आयोग, राज्य पारेषण उपयोगिता और एसएलडीसी को उपलब्ध कराएगा। व्यापार मार्जिन अवधारण करने में आयोग को समर्थ बनाने के लिए व्यापारी ऐसे प्ररूप और ऐसी नीति में ब्यौरे फाइल करेगा जैसाकि आयोग समय-समय पर अपेक्षा करे! व्यापारी, यथा शीघ्र साध्य रूप से आयोग को रिपोर्ट करेगा उसकी परिस्थितियों में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन जिससे अधिनियम, नियम और विनियम, आयोग द्वारा जारी निदेशों/आदेशों, राज्यग्रिड संहिता, करारों या अनुज्ञप्ति के अधीन बाध्यताओं को पूरा करने की समर्थता पर प्रभाव पड़ सकता हो; अधिनियम, नियमों और विनियमों के उपबंधों, आयोग द्वारा जारी निदेशों / आदेशों, राज्य ग्रिड संहिता, करार या अनुज्ञप्ति का कोई तात्विक भंग; और व्यापारी के शेयरधारण पैटर्न, स्वामित्व या प्रबंध में कोई बड़ा परिवर्तन ।
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पूर्णिया : जिले से बड़े हादसे की खबर आ रही है. यहां सड़क हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई है. जबकि 2 लोग गंभीर रुप से घायल हो गए हैं.
खबर के मुताबिक पूर्णिया के ट्रक और एंबुलेंस में टक्कर हो गई, जिसकी वजह से मौके पर ही 3 लोगों की मौत हो गई और 2 लोग गंभीर रुप से घायल हो गए.
बताया जाता है कि ट्रक का टायर फटने की वजह से यह हादसा हुआ. यह सड़क हादसा पूर्णिया के जलालगढ़ इलाके के पास घटी है.
घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल ले जाया गया है, जहां दोनों का इलाज चल रहा है.
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पूर्णिया : जिले से बड़े हादसे की खबर आ रही है. यहां सड़क हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है. जबकि दो लोग गंभीर रुप से घायल हो गए हैं. खबर के मुताबिक पूर्णिया के ट्रक और एंबुलेंस में टक्कर हो गई, जिसकी वजह से मौके पर ही तीन लोगों की मौत हो गई और दो लोग गंभीर रुप से घायल हो गए. बताया जाता है कि ट्रक का टायर फटने की वजह से यह हादसा हुआ. यह सड़क हादसा पूर्णिया के जलालगढ़ इलाके के पास घटी है. घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल ले जाया गया है, जहां दोनों का इलाज चल रहा है.
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नई दिल्ली। पूरा उत्तर भारत गुरुवार को घने कोहरे की चपेट में रहा। पंजाब, हरियाणा, यूपी और दिल्ली में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। घने कोहरे के चलते रेल और एयर ट्रैफिक पर बुरा असर पड़ा है। मौसम विभाग के अनुसार कम से कम दो और दिन स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी।
राजधानी दिल्ली में घने कोहरे की वजह से गुरुवार सुबह 100 से अधिक ट्रेनें निर्धारित समय से अधिक देरी से चल रही हैं। उत्तरी रेलवे अधिकारी ने बताया, घने कोहरे की वजह से 100 ट्रेनें निर्धारित समय से देरी से चल रही हैं। अधिकारी ने बताया कि 14005 लिछवी एक्सप्रेस अपने तय समय से 31 घंटे देरी से चल रही है जबकि 12303 पूर्वा एक्सप्रेस 27 घंटे देरी से चल रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, सुबह 8.30 बजे 15 से 20 ट्रेनें 10 से अधिक घंटे की देरी से चल रही हैं जबकि 80 से अधिक ट्रेनें दो से पांच से अधिक समय की देरी से चल रही हैं। घने कोहरे की वजह से 12501 पूर्वोत्तर एक्सप्रेस और 15602 नई दिल्ली-सिल्चर एक्सप्रेस रद्द हो गई हैं। घने कोहरे के चलते इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से ऑपरेट होने वाली फ्लाइट्स पर भी असर पड़ा है। 6 से ज्यादा इंटरनेशनल और 7 घरेलू फ्लाइट्स लेट हुईं और 1 घरेलू फ्लाइट को कैंसल करना पड़ा।
दिल्ली का न्यूनतम तापमान 8.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो कि मौसम का सामान्य तापमान है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, तडक़े 5.30 बजे दृश्यता 400 मीटर थी, जो सुबह 8.30 बजे कम होकर 100 मीटर हो गई।
हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में भी गुरुवार सुबह घना कोहरा छाया रहा, जिसके कारण दोनों राज्यों में जनजीवन प्रभावित हुआ। दोनों राज्यों में कई स्थानों पर दृश्यता घटकर 50 मीटर से भी कम रह गई थी और ज्यादातर स्थानों पर न्यूनतम तापमान में गिरावट जारी रही। कुछ जगहों पर यह 5.5 डिग्री से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।
घने कोहरे के कारण सडक़, रेल और हवाई सेवाएं भी प्रभावित हुईं। हरियाणा के अंबाला और करनाल और पंजाब के अमृतसर और पटियाला में दृश्यता 50 मीटर से भी कम रही। अमृतसर में सीमा सुरक्षा बल के एक अधिकारी ने बताया कि पंजाब की 553 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर करीब शून्य दृश्यता के साथ घना कोहरा छाया रहा।
अमृतसर से दिल्ली को जोडऩे वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 1 भी कोहरे के कारण प्रभावित हुआ। अंबाला और हरियाणा तथा दिल्ली की कुंडली सीमा के बीच एनएच 1 पर कई इलाकों में घना कोहरा छाए होने की सूचना है।
गुरुग्राम, फरीदाबाद, झज्जर, हिसार, भिवानी, सोनीपत, पानीपत, करनाल और रोहतक जिलों समेत हरियाणा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कई हिस्सों में मध्यम से घना कोहरा छाए होने की सूचना है। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली और कुछ अन्य स्थानों पर आने और जाने वाली कुछ रेलगाडय़िां भी कोहरे के कारण देरी से चल रही हैं। पंजाब में अमृतसर, लुधियाना, भटिंडा, संगरूर, कपूरथला और जालंधर जिलों में कोहरा छाए होने की सूचना है।
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के जंगपुरा इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए।
सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है। जंगपुरा के ज्वेलरी शोरूम में चोरों ने सेंध लगाकर वारदात को अंजाम दे दिया। चोरों ने छत काटकर करीब 25 करोड़ रुपये के जेवरात चोरी कर लिए।
जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंगपुरा भोगल इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से 20-25 करोड़ रुपए के सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है।
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नई दिल्ली। पूरा उत्तर भारत गुरुवार को घने कोहरे की चपेट में रहा। पंजाब, हरियाणा, यूपी और दिल्ली में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। घने कोहरे के चलते रेल और एयर ट्रैफिक पर बुरा असर पड़ा है। मौसम विभाग के अनुसार कम से कम दो और दिन स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी। राजधानी दिल्ली में घने कोहरे की वजह से गुरुवार सुबह एक सौ से अधिक ट्रेनें निर्धारित समय से अधिक देरी से चल रही हैं। उत्तरी रेलवे अधिकारी ने बताया, घने कोहरे की वजह से एक सौ ट्रेनें निर्धारित समय से देरी से चल रही हैं। अधिकारी ने बताया कि चौदह हज़ार पाँच लिछवी एक्सप्रेस अपने तय समय से इकतीस घंटाटे देरी से चल रही है जबकि बारह हज़ार तीन सौ तीन पूर्वा एक्सप्रेस सत्ताईस घंटाटे देरी से चल रही है। अधिकारियों के मुताबिक, सुबह आठ.तीस बजे पंद्रह से बीस ट्रेनें दस से अधिक घंटे की देरी से चल रही हैं जबकि अस्सी से अधिक ट्रेनें दो से पांच से अधिक समय की देरी से चल रही हैं। घने कोहरे की वजह से बारह हज़ार पाँच सौ एक पूर्वोत्तर एक्सप्रेस और पंद्रह हज़ार छः सौ दो नई दिल्ली-सिल्चर एक्सप्रेस रद्द हो गई हैं। घने कोहरे के चलते इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से ऑपरेट होने वाली फ्लाइट्स पर भी असर पड़ा है। छः से ज्यादा इंटरनेशनल और सात घरेलू फ्लाइट्स लेट हुईं और एक घरेलू फ्लाइट को कैंसल करना पड़ा। दिल्ली का न्यूनतम तापमान आठ दशमलव सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो कि मौसम का सामान्य तापमान है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, तडक़े पाँच.तीस बजे दृश्यता चार सौ मीटर थी, जो सुबह आठ.तीस बजे कम होकर एक सौ मीटर हो गई। हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में भी गुरुवार सुबह घना कोहरा छाया रहा, जिसके कारण दोनों राज्यों में जनजीवन प्रभावित हुआ। दोनों राज्यों में कई स्थानों पर दृश्यता घटकर पचास मीटर से भी कम रह गई थी और ज्यादातर स्थानों पर न्यूनतम तापमान में गिरावट जारी रही। कुछ जगहों पर यह पाँच.पाँच डिग्री से आठ डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। घने कोहरे के कारण सडक़, रेल और हवाई सेवाएं भी प्रभावित हुईं। हरियाणा के अंबाला और करनाल और पंजाब के अमृतसर और पटियाला में दृश्यता पचास मीटर से भी कम रही। अमृतसर में सीमा सुरक्षा बल के एक अधिकारी ने बताया कि पंजाब की पाँच सौ तिरेपन किलोग्राममीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर करीब शून्य दृश्यता के साथ घना कोहरा छाया रहा। अमृतसर से दिल्ली को जोडऩे वाला राष्ट्रीय राजमार्ग एक भी कोहरे के कारण प्रभावित हुआ। अंबाला और हरियाणा तथा दिल्ली की कुंडली सीमा के बीच एनएच एक पर कई इलाकों में घना कोहरा छाए होने की सूचना है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, झज्जर, हिसार, भिवानी, सोनीपत, पानीपत, करनाल और रोहतक जिलों समेत हरियाणा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कई हिस्सों में मध्यम से घना कोहरा छाए होने की सूचना है। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली और कुछ अन्य स्थानों पर आने और जाने वाली कुछ रेलगाडय़िां भी कोहरे के कारण देरी से चल रही हैं। पंजाब में अमृतसर, लुधियाना, भटिंडा, संगरूर, कपूरथला और जालंधर जिलों में कोहरा छाए होने की सूचना है। नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के जंगपुरा इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है। जंगपुरा के ज्वेलरी शोरूम में चोरों ने सेंध लगाकर वारदात को अंजाम दे दिया। चोरों ने छत काटकर करीब पच्चीस करोड़ रुपये के जेवरात चोरी कर लिए। जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जंगपुरा भोगल इलाके में स्थित शोरूम को चोरों ने निशाना बनाया। दीवार काटकर चोर शोरूम में दाखिल हुए। यहां से बीस-पच्चीस करोड़ रुपए के सोना, हीरा और जेवरात चोरी करके फरार हो गए। सीसीटीवी की मदद से चोरों की तलाश की जा रही है।
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मुंबईः मुंबई के भायंदर में केशव सृष्टि में तीन दिन तक चली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में विचार किए गए विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार्यवाह श्री सुरेश उपाख्य भैयाजी जोशी ने पत्रकारों से विस्तार से चर्चा की।
भैयाजी जोशी ने कहा कि, राम मंदिर का मुद्दा करोड़ों हिंदुओं की भावना से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है और इस पर न्यायालय को शीघ्र विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज ने राम मंदिर को लेकर विगत 30 वर्षों से वर्तमान आंदोलन चलाया है। हिंदू समाज की अपेक्षा है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बने और इससे जुड़ी सभी बाधाएँ दूर हों। लेकिन ये प्रतीक्षा अब लंबी हो चुकी है। 2010 में उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे को लेकर फैसला दिया था। 2011 से ये मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। सर्वोच्च न्यायालय की तीन जजों की पुनर्गठित बेंच जो इस मामले की सुनवाई कर रही थी उसने फिर से इसे लंबे समय के लिए टाल दिया गया। जब न्यायालय से ये पूछा गया कि इस मामले की सुनवाई कब होगी तो कहा गया कि, हमारी अपनी प्राथमिकताएँ हैं। कब सुनना यह न्यायालय का अपना अधिकार है लेकिन न्यायालय के इस जवाब से हिंदू समाज अपने आपको अपमानित महसूस कर रहा है और ये बात समस्त हिंदू समाज के लिए आश्चर्यजनक और वेदनापूर्ण है। सर्वोच्च न्यायालय को इस मामले पर पुनर्विचार करना चाहिए। समाज को न्यायालय का सम्मान करना चाहिए और न्यायालय को भी सामान्य समाज की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
राम मंदिर के मुद्दे पर कानून व अध्यादेश के विकल्प पर भैयाजी ने कहा कि ये सरकार का अधिकार है कि वह इस पर कब विचार करे। उन्होंने कहा कि नरसिंह राव प्रणित केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में शपथ पत्र दिया था कि अगर उस स्थान की खुदाई में मंदिर होने के प्रमाण मिलेंगे तो सरकार वहाँ मंदिर बनाने के लिए सहायता करेगी। अब जबकि सर्वोच्च न्यायालय में पुरातत्व विभाग द्वारा दिए गए प्रमाणों से ये सिध्द हो चुका है कि वहाँ मंदिर का अस्तित्व रहा है, तो फिर वहाँ मंदिर बनाने को लेकर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर को लेकर हम सरकार पर कोई दबाव नहीं डाल रहे हैं बल्कि आपसी सहमति से इसका हल निकालने की बात कर रहे हैं। पूज्य संतों से बातचीत करनी चाहिए और हल निकालना चाहिए। कोई भी सरकार सहमति और कानून दोनों के संतुलन से चलती है। सरकार द्वारा मंदिर को लेकर कानून नहीं बनाने के प्रश्न पर भैयाजी ने कहा कि, सरकार के पास बहुमत तो है। फिर भी न्यायालयीन निर्णय से पहले कानून नहीं बनाना, सरकार का न्यायालय के प्रति विश्वास दर्शाता है। इस बात को आगे लेते जाते उन्होने कहा कि, लेकिन न्यायालय भी इस मुद्दे की संवेदनशीलता को समझे और इस पर विचार करे।
शबरीमाला को लेकर उन्होंने कहा कि ये मुद्दा महिलाओं के मंदिर में प्रवेश देना होता तो हम उसका समर्थन करते है। हिंदू समाज में कोई भी पूजा पति और पत्नी के बगैर पूरी नहीं होती। हिंदू परंपरा में स्त्री और पुरुष में कोई भेदभाव नहीं होता है। लेकिन मंदिरों के अपने नियम होते हैं, कोई भी समाज मात्र अधिकारों पर नहीं बल्कि परंपराओं और मान्यताओँ पर चलता है। सभी मंदिरों में महिलाओं को समान प्रवेश मिले लेकिन जहाँ कुछ मंदिरों की विशिष्ट परंपराओं का प्रश्न है इसमें उन मंदिरों की व्यवस्था से जुड़े लोगों से चर्चा किए बगैर कोई निर्णय लिया जाता है तो ये उचित नहीं। ऐसे निर्णय देते वक्त न्यायालय ने इन विषयों से जुडे सभी घटकों को एकमत करने का प्रयास करना चाहिए।
संघ की कार्यकारिणी मंडल की बैठक की चर्चा करते हुए भैयाजी ने कहा कि इसमें संघ के कार्यों की समीक्षा की गई । उन्होंने बताया कि विगत 6 वर्षों में हम तेज गति से आगे बढ़े हैं। इन 6 वर्षों में हमारा काम डेढ़ गुना बढ़ा है। आज देश भर में 35 हजार 500 गाँवों में संघ की शाखायें चल रही हैं। गत वर्ष की तुलना में इस साल हम 1400 नए स्थानों पर पहुँचे हैं। संघ की शाखा की संख्या 55825 हो चुकी है। गत एक वर्ष में 2200 शाखाओं की वृध्दि हुई है।
संघ का साप्तहिक मिलन 17 हजार गाँवों में नियमित रूप से हो रहा है। मासिक मिलन का कार्य 9 हजार स्थानों पर चल रहा है। 61 हजार स्थानों पर संघ प्रत्यक्ष कार्य कर रहा है। गत वर्ष की तुलना में संघ के स्वयंसेवकों की संख्या में एक लाख की वृध्दि हुई है। संघ अपने कार्य के विस्तार के लिए भौगोलिक दृष्टि से तालुका, ब्लाक, और मंडल बनाकर अपना कार्य कर रहा है। ऐसे लगभग 56 हजार 600 मंडल बनाए गए है, जिसमें से हम 32 हजार तक सीधे पहुँच चुके हैं।
देश भर में संघ के 1. 70 लाख सेवा प्रकल्प चल रहे हैं। ये सेवा कार्य ग्रामीण, आदिवासी और शहरी क्षेत्रों में चल रहे हैं। संघ द्वारा 25 बड़े अस्पताल, 12 ब्लड बैंक और वनवासी क्षेत्रों में एकल विद्यालय के माध्यम से एक शिक्षक वाले स्कूल 50 हजार से अधिक गाँवों में चलाए जा रहे हैं। कई गाँवों में फर्स्टएड की सेवा भी चलाई जा रही है और 10 हजार आरोग्य रक्षकों के माध्यम से सामान्य बीमारियों में ग्रामीणों को तत्काल चिकित्सा सुविधा दी जा सके। इसी तरह महिलाओं के 20 हजार सेल्फ हेल्प ग्रुप चल रहे हैं। इसके अलावा होस्टल, कोचिंग क्लास आदि का भी संचालन किया जा रहा है। गत वर्ष संघ के 30 हजार स्वयंसेवकों के माध्यम से देश भर में 2000 स्थानों पर 13 लाख पेड़ लगाए गए। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में सतत् कार्य किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कार्यकारी मंडल ने जल और पर्यावरण संरक्षण को गंभीरता से लिया है, और आने वाले दिनों में इस पर बड़े पैमाने पर कार्य किया जाएगा।
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मुंबईः मुंबई के भायंदर में केशव सृष्टि में तीन दिन तक चली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में विचार किए गए विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार्यवाह श्री सुरेश उपाख्य भैयाजी जोशी ने पत्रकारों से विस्तार से चर्चा की। भैयाजी जोशी ने कहा कि, राम मंदिर का मुद्दा करोड़ों हिंदुओं की भावना से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है और इस पर न्यायालय को शीघ्र विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज ने राम मंदिर को लेकर विगत तीस वर्षों से वर्तमान आंदोलन चलाया है। हिंदू समाज की अपेक्षा है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बने और इससे जुड़ी सभी बाधाएँ दूर हों। लेकिन ये प्रतीक्षा अब लंबी हो चुकी है। दो हज़ार दस में उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे को लेकर फैसला दिया था। दो हज़ार ग्यारह से ये मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। सर्वोच्च न्यायालय की तीन जजों की पुनर्गठित बेंच जो इस मामले की सुनवाई कर रही थी उसने फिर से इसे लंबे समय के लिए टाल दिया गया। जब न्यायालय से ये पूछा गया कि इस मामले की सुनवाई कब होगी तो कहा गया कि, हमारी अपनी प्राथमिकताएँ हैं। कब सुनना यह न्यायालय का अपना अधिकार है लेकिन न्यायालय के इस जवाब से हिंदू समाज अपने आपको अपमानित महसूस कर रहा है और ये बात समस्त हिंदू समाज के लिए आश्चर्यजनक और वेदनापूर्ण है। सर्वोच्च न्यायालय को इस मामले पर पुनर्विचार करना चाहिए। समाज को न्यायालय का सम्मान करना चाहिए और न्यायालय को भी सामान्य समाज की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। राम मंदिर के मुद्दे पर कानून व अध्यादेश के विकल्प पर भैयाजी ने कहा कि ये सरकार का अधिकार है कि वह इस पर कब विचार करे। उन्होंने कहा कि नरसिंह राव प्रणित केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में शपथ पत्र दिया था कि अगर उस स्थान की खुदाई में मंदिर होने के प्रमाण मिलेंगे तो सरकार वहाँ मंदिर बनाने के लिए सहायता करेगी। अब जबकि सर्वोच्च न्यायालय में पुरातत्व विभाग द्वारा दिए गए प्रमाणों से ये सिध्द हो चुका है कि वहाँ मंदिर का अस्तित्व रहा है, तो फिर वहाँ मंदिर बनाने को लेकर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर को लेकर हम सरकार पर कोई दबाव नहीं डाल रहे हैं बल्कि आपसी सहमति से इसका हल निकालने की बात कर रहे हैं। पूज्य संतों से बातचीत करनी चाहिए और हल निकालना चाहिए। कोई भी सरकार सहमति और कानून दोनों के संतुलन से चलती है। सरकार द्वारा मंदिर को लेकर कानून नहीं बनाने के प्रश्न पर भैयाजी ने कहा कि, सरकार के पास बहुमत तो है। फिर भी न्यायालयीन निर्णय से पहले कानून नहीं बनाना, सरकार का न्यायालय के प्रति विश्वास दर्शाता है। इस बात को आगे लेते जाते उन्होने कहा कि, लेकिन न्यायालय भी इस मुद्दे की संवेदनशीलता को समझे और इस पर विचार करे। शबरीमाला को लेकर उन्होंने कहा कि ये मुद्दा महिलाओं के मंदिर में प्रवेश देना होता तो हम उसका समर्थन करते है। हिंदू समाज में कोई भी पूजा पति और पत्नी के बगैर पूरी नहीं होती। हिंदू परंपरा में स्त्री और पुरुष में कोई भेदभाव नहीं होता है। लेकिन मंदिरों के अपने नियम होते हैं, कोई भी समाज मात्र अधिकारों पर नहीं बल्कि परंपराओं और मान्यताओँ पर चलता है। सभी मंदिरों में महिलाओं को समान प्रवेश मिले लेकिन जहाँ कुछ मंदिरों की विशिष्ट परंपराओं का प्रश्न है इसमें उन मंदिरों की व्यवस्था से जुड़े लोगों से चर्चा किए बगैर कोई निर्णय लिया जाता है तो ये उचित नहीं। ऐसे निर्णय देते वक्त न्यायालय ने इन विषयों से जुडे सभी घटकों को एकमत करने का प्रयास करना चाहिए। संघ की कार्यकारिणी मंडल की बैठक की चर्चा करते हुए भैयाजी ने कहा कि इसमें संघ के कार्यों की समीक्षा की गई । उन्होंने बताया कि विगत छः वर्षों में हम तेज गति से आगे बढ़े हैं। इन छः वर्षों में हमारा काम डेढ़ गुना बढ़ा है। आज देश भर में पैंतीस हजार पाँच सौ गाँवों में संघ की शाखायें चल रही हैं। गत वर्ष की तुलना में इस साल हम एक हज़ार चार सौ नए स्थानों पर पहुँचे हैं। संघ की शाखा की संख्या पचपन हज़ार आठ सौ पच्चीस हो चुकी है। गत एक वर्ष में दो हज़ार दो सौ शाखाओं की वृध्दि हुई है। संघ का साप्तहिक मिलन सत्रह हजार गाँवों में नियमित रूप से हो रहा है। मासिक मिलन का कार्य नौ हजार स्थानों पर चल रहा है। इकसठ हजार स्थानों पर संघ प्रत्यक्ष कार्य कर रहा है। गत वर्ष की तुलना में संघ के स्वयंसेवकों की संख्या में एक लाख की वृध्दि हुई है। संघ अपने कार्य के विस्तार के लिए भौगोलिक दृष्टि से तालुका, ब्लाक, और मंडल बनाकर अपना कार्य कर रहा है। ऐसे लगभग छप्पन हजार छः सौ मंडल बनाए गए है, जिसमें से हम बत्तीस हजार तक सीधे पहुँच चुके हैं। देश भर में संघ के एक. सत्तर लाख सेवा प्रकल्प चल रहे हैं। ये सेवा कार्य ग्रामीण, आदिवासी और शहरी क्षेत्रों में चल रहे हैं। संघ द्वारा पच्चीस बड़े अस्पताल, बारह ब्लड बैंक और वनवासी क्षेत्रों में एकल विद्यालय के माध्यम से एक शिक्षक वाले स्कूल पचास हजार से अधिक गाँवों में चलाए जा रहे हैं। कई गाँवों में फर्स्टएड की सेवा भी चलाई जा रही है और दस हजार आरोग्य रक्षकों के माध्यम से सामान्य बीमारियों में ग्रामीणों को तत्काल चिकित्सा सुविधा दी जा सके। इसी तरह महिलाओं के बीस हजार सेल्फ हेल्प ग्रुप चल रहे हैं। इसके अलावा होस्टल, कोचिंग क्लास आदि का भी संचालन किया जा रहा है। गत वर्ष संघ के तीस हजार स्वयंसेवकों के माध्यम से देश भर में दो हज़ार स्थानों पर तेरह लाख पेड़ लगाए गए। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में सतत् कार्य किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कार्यकारी मंडल ने जल और पर्यावरण संरक्षण को गंभीरता से लिया है, और आने वाले दिनों में इस पर बड़े पैमाने पर कार्य किया जाएगा।
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मची हुई है जिसकी सडायेंध में जनता का मस्तिष्क विकृत हुआ जा रहा हूं । यदि इस सडायंघ को मिटाना चाहते हैं, तो मिटाएँ लोडरों के सस्ते नुस्खों को
मेरो सिनेमा मे रुचि नहीं, और इसलिए अभिनेताओं के सम्बन्ध में कुछ भी कहने का स्वप को अधिकारी नहीं मानता। सुनी-सुनाई बातों के आधार पर किसी की टो-टिप्पणी करना ठीक नहीं रहता। लेकिन में तो एक दूसरी हो बात की ओर सकेत करना चाहता हूँ। जरा भगवान् नै सूरत दो, जरा गला साफ हुआ और चले अभिनेता बनने बबई की ओर ! बया इसलिए कि अभिनय क्ता से प्रेम है ? कभी नहीं । केवल इसलिए कि प्रसिद्धि प्राप्ति का इससे सुगम मार्ग अन्य नहीं है। में भी मानता हूँ कि यह प्रसिद्धि प्राप्ति का सुगमनम साधन है । राष्ट्रीय सप्राम के बड़े बड़े नेताओं के चेहरों को चमक और उनके प्रति जनता का आकर्षण फोका पड़ जाता है अभिनेताओं को उपस्थिति मे । इससे अधिक क्या होगा कि नेताओं को प्रतिमाओं के स्थान पर अभिनेताओं को प्रतिमाएं स्थापित किए जाने के प्रस्ताव किए जाय ? मेरो भाषा कुछ लोगों को आवश्यक्ता से अधिक स्टाक्षयुक्त लग सकती है, अतएव स्पष्ट पर दू कि मं अभिनय को कला मानता हूँ, किंतु आत्माहुति को उस कला से नीची जिसे सोसकर व्यक्ति स्व-जीवन को तिल-तिल जलाकर ध्येय की वेदो दो प्रकाशित करने में समर्थ होता है ।
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मची हुई है जिसकी सडायेंध में जनता का मस्तिष्क विकृत हुआ जा रहा हूं । यदि इस सडायंघ को मिटाना चाहते हैं, तो मिटाएँ लोडरों के सस्ते नुस्खों को मेरो सिनेमा मे रुचि नहीं, और इसलिए अभिनेताओं के सम्बन्ध में कुछ भी कहने का स्वप को अधिकारी नहीं मानता। सुनी-सुनाई बातों के आधार पर किसी की टो-टिप्पणी करना ठीक नहीं रहता। लेकिन में तो एक दूसरी हो बात की ओर सकेत करना चाहता हूँ। जरा भगवान् नै सूरत दो, जरा गला साफ हुआ और चले अभिनेता बनने बबई की ओर ! बया इसलिए कि अभिनय क्ता से प्रेम है ? कभी नहीं । केवल इसलिए कि प्रसिद्धि प्राप्ति का इससे सुगम मार्ग अन्य नहीं है। में भी मानता हूँ कि यह प्रसिद्धि प्राप्ति का सुगमनम साधन है । राष्ट्रीय सप्राम के बड़े बड़े नेताओं के चेहरों को चमक और उनके प्रति जनता का आकर्षण फोका पड़ जाता है अभिनेताओं को उपस्थिति मे । इससे अधिक क्या होगा कि नेताओं को प्रतिमाओं के स्थान पर अभिनेताओं को प्रतिमाएं स्थापित किए जाने के प्रस्ताव किए जाय ? मेरो भाषा कुछ लोगों को आवश्यक्ता से अधिक स्टाक्षयुक्त लग सकती है, अतएव स्पष्ट पर दू कि मं अभिनय को कला मानता हूँ, किंतु आत्माहुति को उस कला से नीची जिसे सोसकर व्यक्ति स्व-जीवन को तिल-तिल जलाकर ध्येय की वेदो दो प्रकाशित करने में समर्थ होता है ।
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होशियारपुर (निस) : जिले में 27 नये मामले सामने आने से कोविड-19 रोगियों की संख्या 1049 हो गई है। जिले से संबंधित दो कोविड-19 पीड़ितों की जालंधर के निजी अस्पतालों में मौत भी हो गई है। सिविल सर्जन डॉ. जसबीर सिंह ने बताया कि होशियारपुर जिले में रविवार को पाए गए 27 नए कोविड-19 रोगियों में से 8 मामले होशियारपुर शहर में गुरुनानक नगर, गौतम नगर, राम कॉलोनी कैंप, साहिबजादा अजीत सिंह नगर, एमएस मिल, बीरबल नगर, सेंट्रल टाउन और शंकर नगर से संबंधित हैं। इसके अलावा अज्जोवाल से 3, टांडा से 3, हारटा बडला से 3, तलवाड़ा से 2, चक्कोवाल से 2, मुकेरियां से 5 और हरियाना से संबंधित एक मरीज है। उधर, सेंट्रल टाउन निवासी 61 वर्षीया महिला और शंकर नगर निवासी 46 वर्षीय महिला, दोनों कोरोना पॉजिटिव थीं और दोनों महिलाओं को जालंधर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनकी मौत हो गई।
दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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होशियारपुर : जिले में सत्ताईस नये मामले सामने आने से कोविड-उन्नीस रोगियों की संख्या एक हज़ार उनचास हो गई है। जिले से संबंधित दो कोविड-उन्नीस पीड़ितों की जालंधर के निजी अस्पतालों में मौत भी हो गई है। सिविल सर्जन डॉ. जसबीर सिंह ने बताया कि होशियारपुर जिले में रविवार को पाए गए सत्ताईस नए कोविड-उन्नीस रोगियों में से आठ मामले होशियारपुर शहर में गुरुनानक नगर, गौतम नगर, राम कॉलोनी कैंप, साहिबजादा अजीत सिंह नगर, एमएस मिल, बीरबल नगर, सेंट्रल टाउन और शंकर नगर से संबंधित हैं। इसके अलावा अज्जोवाल से तीन, टांडा से तीन, हारटा बडला से तीन, तलवाड़ा से दो, चक्कोवाल से दो, मुकेरियां से पाँच और हरियाना से संबंधित एक मरीज है। उधर, सेंट्रल टाउन निवासी इकसठ वर्षीया महिला और शंकर नगर निवासी छियालीस वर्षीय महिला, दोनों कोरोना पॉजिटिव थीं और दोनों महिलाओं को जालंधर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उनकी मौत हो गई। दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने दो फरवरी, एक हज़ार आठ सौ इक्यासी को लाहौर से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है। 'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में पंद्रह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास , न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
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गौतमबुद्धनगर पुलिस ने ऑपरेशन क्लीन के तहत सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया है। थाना सेक्टर 20 इलाके के सेक्टर 18 स्थित 14 स्पा सेंटरों पर पुलिस ने छापेमारी की है। इस दौरान पुलिस की 15 टीमों ने एक साथ कार्रवाई की। छापेमारी में कुल 35 लड़के और लड़कियां गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें थाईलैंड की पांच विदेशी महिलाओं समेत 25 युवतियां हैं।
पुलिस ने बताया कि मौके से बीयर की खाली और भरी हुई कैन मिली हैं, इसके अलावा आपत्तिजनक वस्तुएं भी मौके से बरामद की गई हैं। पुलिस ने बताया कि यहां से प्रयोग किए और बिना प्रयोग हुए कंडोम भी मिले हैं। पुलिस के अनुसार स्पा सेंटरों में देह व्यापार होता था।
देर रात तक चली कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक लाख रुपये भी बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, तीन स्पा सेंटरों में युवक-युवतियां आपत्तिजनक हालत में मिले। एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि स्पा और मसाज सेंटर की आड़ में देह व्यापार कराए जाने की शिकायतें मिल रहीं थी।
जिसके बाद पुलिस ने 15 टीमों का गठन कर ऑपरेशन क्लीन चलाया। रविवार देर शाम को सभी टीमों ने स्पा और मसाज सेंटरों पर छापा मारा। एसएसपी ने बताया कि स्पा सेंटर के मालिकों के बारे में पता लगाया जा रहा है।
स्पा सेंटर पर हुई कार्रवाई की जानकारी स्थानीय पुलिस को नहीं दी गई थी। दूसरे सर्किल के सीओ के नेतृत्व में यहां कार्रवाई की गई। एसएसपी के मुताबिक स्थानीय पुलिस की भूमिका की जांच की जा रही है। अगर किसी पुलिसकर्मी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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गौतमबुद्धनगर पुलिस ने ऑपरेशन क्लीन के तहत सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया है। थाना सेक्टर बीस इलाके के सेक्टर अट्ठारह स्थित चौदह स्पा सेंटरों पर पुलिस ने छापेमारी की है। इस दौरान पुलिस की पंद्रह टीमों ने एक साथ कार्रवाई की। छापेमारी में कुल पैंतीस लड़के और लड़कियां गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें थाईलैंड की पांच विदेशी महिलाओं समेत पच्चीस युवतियां हैं। पुलिस ने बताया कि मौके से बीयर की खाली और भरी हुई कैन मिली हैं, इसके अलावा आपत्तिजनक वस्तुएं भी मौके से बरामद की गई हैं। पुलिस ने बताया कि यहां से प्रयोग किए और बिना प्रयोग हुए कंडोम भी मिले हैं। पुलिस के अनुसार स्पा सेंटरों में देह व्यापार होता था। देर रात तक चली कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक लाख रुपये भी बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, तीन स्पा सेंटरों में युवक-युवतियां आपत्तिजनक हालत में मिले। एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि स्पा और मसाज सेंटर की आड़ में देह व्यापार कराए जाने की शिकायतें मिल रहीं थी। जिसके बाद पुलिस ने पंद्रह टीमों का गठन कर ऑपरेशन क्लीन चलाया। रविवार देर शाम को सभी टीमों ने स्पा और मसाज सेंटरों पर छापा मारा। एसएसपी ने बताया कि स्पा सेंटर के मालिकों के बारे में पता लगाया जा रहा है। स्पा सेंटर पर हुई कार्रवाई की जानकारी स्थानीय पुलिस को नहीं दी गई थी। दूसरे सर्किल के सीओ के नेतृत्व में यहां कार्रवाई की गई। एसएसपी के मुताबिक स्थानीय पुलिस की भूमिका की जांच की जा रही है। अगर किसी पुलिसकर्मी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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पहले दो साल तक बच्चों को स्तनपान कराने से हर साल पांच साल तक की आयु के 8,20,000 से अधिक बच्चों की जाने बच सकती हैं. हाल ही में डब्ल्यूएचओ - यूनीसेफ ने ये जानकारी दी है.
स्तनपान को बढ़ावा देने के मकसद से ये जानकारी साझा की गई है. यूनीसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरीटा एच फोरे का कहना है कि स्तनपान कराने से आईक्यू , स्कूल जाने में तत्परता और उपस्थिति बेहतर होती है और यह वयस्क जीवन में उच्च आय से जुड़ा है. इससे मां को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी कम होता है. उन्होंने कहा कि इससे दुनियाभर में स्तनपान की दरों में सुधार किया जा सकता है और बच्चों को जीवन में अच्छी शुरुआत दी जा सकती हैं.
दिशा निर्देशों में स्तनपान की जगह दूसरे दूध के सीमित इस्तेमाल, ब्रेस्टफीडिंग, बोतल के इस्तेमाल पर अभिभावकों को शिक्षित करने और अस्पताल से मां - बच्चे को छुट्टी मिलने के बाद उन्हें सहयोग देने की सिफारिश भी की गई है.
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पहले दो साल तक बच्चों को स्तनपान कराने से हर साल पांच साल तक की आयु के आठ,बीस,शून्य से अधिक बच्चों की जाने बच सकती हैं. हाल ही में डब्ल्यूएचओ - यूनीसेफ ने ये जानकारी दी है. स्तनपान को बढ़ावा देने के मकसद से ये जानकारी साझा की गई है. यूनीसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरीटा एच फोरे का कहना है कि स्तनपान कराने से आईक्यू , स्कूल जाने में तत्परता और उपस्थिति बेहतर होती है और यह वयस्क जीवन में उच्च आय से जुड़ा है. इससे मां को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी कम होता है. उन्होंने कहा कि इससे दुनियाभर में स्तनपान की दरों में सुधार किया जा सकता है और बच्चों को जीवन में अच्छी शुरुआत दी जा सकती हैं. दिशा निर्देशों में स्तनपान की जगह दूसरे दूध के सीमित इस्तेमाल, ब्रेस्टफीडिंग, बोतल के इस्तेमाल पर अभिभावकों को शिक्षित करने और अस्पताल से मां - बच्चे को छुट्टी मिलने के बाद उन्हें सहयोग देने की सिफारिश भी की गई है.
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रामपुर में पुलिस ने खोए व चुराए हुए 49 फोन बरामद किए हैं। एसपी एके शुक्ला का दावा है कि अगर आपका मोबाइल चोरी हो जाएगा या गुम हो जाएगा। तो हम बरामद करा देंगे। साथ ही उन्होंने चोरों को भी चेतावनी देते हुए कहा है कि चोर मोबाइल ना चुराए अन्यथा उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की खास टेक्नोलॉजी और मैनुअल सपोर्ट से मोबाइल बरामद कर लिया जाएगा।
एसपी एके शुक्ला ने कहा कि कुछ लोगों को पकड़ा है। उनके खिलाफ कार्रवाई चल रही है। पुलिस का अपना खास सर्विलांस सिस्टम होता है। जिसके जरिए हर चुराया गया मोबाइल बरामद किया जा सकता है और यह मोबाइल भी उसी प्रकार बरामद किए गए हैं। यह चोरी के मोबाइल बिकने आए थे या फिर रिपेयरिंग के लिए दिए गए थे। जिसके चलते सर्विलांस की मदद से उन्हें जब्त कर लिया गया।
साइबर सेल की संयुक्त टीम के ने जो मोबाइलों को बरामद किया है। उनकी अनुमानित कीमत लगभग 6 लाख 33 हजार 770 रूपए है। हर मोबाइल की कीमत कम से कम 15 हजार से ज्यादा है। फोन स्वामियों द्वारा पुलिस कार्यालय में उपस्थित होकर अपने प्रार्थना पत्र दिे गए थे। जिनपर तत्काल कार्रवाई करते हुए सर्विलांस पर लगाया गया था। आज एसपी ने बरामद मोबाइलों को उनके मालिकों के सौंप दिया। सभी मोबाइल स्वामियों द्वारा पुलिस को धन्यवाद किया गया है।
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रामपुर में पुलिस ने खोए व चुराए हुए उनचास फोन बरामद किए हैं। एसपी एके शुक्ला का दावा है कि अगर आपका मोबाइल चोरी हो जाएगा या गुम हो जाएगा। तो हम बरामद करा देंगे। साथ ही उन्होंने चोरों को भी चेतावनी देते हुए कहा है कि चोर मोबाइल ना चुराए अन्यथा उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की खास टेक्नोलॉजी और मैनुअल सपोर्ट से मोबाइल बरामद कर लिया जाएगा। एसपी एके शुक्ला ने कहा कि कुछ लोगों को पकड़ा है। उनके खिलाफ कार्रवाई चल रही है। पुलिस का अपना खास सर्विलांस सिस्टम होता है। जिसके जरिए हर चुराया गया मोबाइल बरामद किया जा सकता है और यह मोबाइल भी उसी प्रकार बरामद किए गए हैं। यह चोरी के मोबाइल बिकने आए थे या फिर रिपेयरिंग के लिए दिए गए थे। जिसके चलते सर्विलांस की मदद से उन्हें जब्त कर लिया गया। साइबर सेल की संयुक्त टीम के ने जो मोबाइलों को बरामद किया है। उनकी अनुमानित कीमत लगभग छः लाख तैंतीस हजार सात सौ सत्तर रूपए है। हर मोबाइल की कीमत कम से कम पंद्रह हजार से ज्यादा है। फोन स्वामियों द्वारा पुलिस कार्यालय में उपस्थित होकर अपने प्रार्थना पत्र दिे गए थे। जिनपर तत्काल कार्रवाई करते हुए सर्विलांस पर लगाया गया था। आज एसपी ने बरामद मोबाइलों को उनके मालिकों के सौंप दिया। सभी मोबाइल स्वामियों द्वारा पुलिस को धन्यवाद किया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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राज एक्सप्रेस। दुनिया समेत देश के हर हिस्से में जहाँ कोरोना का कहर जारी है वहीं सुरक्षा और संक्रमण के खतरे को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं सुरक्षा के नजरिए से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में निशातपुरा क्षेत्र में स्थित कोच फैक्ट्री में 40 आइसोलेशन कोच तैयार किए गए हैं जिसे शासन के आदेश के बाद रवाना किया जाएगा।
इस सम्बन्ध में, रेलवे द्वारा आइसोलेशन कोच बनाए जाने को लेकर निर्देश जारी हुए थे जिसके बाद फैक्ट्री में कोरोना के मरीजों के लिए स्लीपर कोच को आइसोलेशन कोच में बदला गया और कोच को पूरी तरह से अस्पताल के वार्ड की तरह तैयार भी किया गया है। फिलहाल बताया जा रहा है कि रेलवे से आदेश मिलने के बाद इसे देश में जहां जरूरत हो वहां रवाना किया जाएगा। खास बात इस कोच में यह है कि डॉक्टर और स्टाफ के रुकने की व्यवस्था भी कोच में है।
इस सम्बन्ध में, फैक्ट्री में जहां आइसोलेशन कोच तैयार किए जा रहे हैं वहीं इसके अलावा मेडिकल स्टाफ के लिए कुछ जरूरी मेडिकल उपकरण तैयार करने का भी कार्य किया जा रहा है। यह सामान पहले रेलवे के अस्पतालों में सप्लाई किया जाएगा और फिर उसके बाद दूसरे सरकारी अस्पतालों में भेजा जाएगा।
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राज एक्सप्रेस। दुनिया समेत देश के हर हिस्से में जहाँ कोरोना का कहर जारी है वहीं सुरक्षा और संक्रमण के खतरे को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं सुरक्षा के नजरिए से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में निशातपुरा क्षेत्र में स्थित कोच फैक्ट्री में चालीस आइसोलेशन कोच तैयार किए गए हैं जिसे शासन के आदेश के बाद रवाना किया जाएगा। इस सम्बन्ध में, रेलवे द्वारा आइसोलेशन कोच बनाए जाने को लेकर निर्देश जारी हुए थे जिसके बाद फैक्ट्री में कोरोना के मरीजों के लिए स्लीपर कोच को आइसोलेशन कोच में बदला गया और कोच को पूरी तरह से अस्पताल के वार्ड की तरह तैयार भी किया गया है। फिलहाल बताया जा रहा है कि रेलवे से आदेश मिलने के बाद इसे देश में जहां जरूरत हो वहां रवाना किया जाएगा। खास बात इस कोच में यह है कि डॉक्टर और स्टाफ के रुकने की व्यवस्था भी कोच में है। इस सम्बन्ध में, फैक्ट्री में जहां आइसोलेशन कोच तैयार किए जा रहे हैं वहीं इसके अलावा मेडिकल स्टाफ के लिए कुछ जरूरी मेडिकल उपकरण तैयार करने का भी कार्य किया जा रहा है। यह सामान पहले रेलवे के अस्पतालों में सप्लाई किया जाएगा और फिर उसके बाद दूसरे सरकारी अस्पतालों में भेजा जाएगा। ताज़ा ख़बर पढ़ने के लिए आप हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। @rajexpresshindi के नाम से सर्च करें टेलीग्राम पर। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
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नेत्र रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ। Elif Betül Türkoğlu Şen ने विषय के बारे में जानकारी दी। लैक्रिमल ग्रंथि द्वारा निर्मित आंसू आंखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। यह ऊपरी और निचली पलकों में छिद्रों के माध्यम से अश्रु वाहिनी और नाक के अंदर बहती है।यदि इस वाहिनी में आंशिक या पूर्ण रुकावट है, तो सामान्य से अधिक आँसू आते हैं और आँख में पानी आता है।
आंसू वाहिनी बाधा एक जन्मजात या बाद की समस्या है।आंख की सतह पर होने वाले आँसू को बाहर निकालने वाली प्रणाली में अवरोधों को आंसू वाहिनी बाधा कहा जाता है।
लैक्रिमल डक्ट रुकावट का सबसे आम कारण जन्मजात रुकावट या आंसू वाहिनी के उस हिस्से में गंभीर स्टेनोसिस है जहां यह नाक में खुलता है। वयस्क व्यक्तियों में, हालांकि कोई विशेष कारण नहीं है, शारीरिक संरचना के कारण बीमारी वाले कई लोग महिलाएं हैं। बार-बार आंखों में सूजन, नाक पर जोर से चोट लगना, नाक की सर्जरी ऐसी स्थितियां हैं जो आंसू वाहिनी की रुकावट के लिए जमीन तैयार कर सकती हैं।
अश्रु वाहिनी रुकावट का सबसे स्पष्ट लक्षण दोनों आँखों में या एक आँख में पानी आना है। आंसू आँख की सतह को साफ करता है और आँख को नम करता है। तदनुसार, आँख में जलन, चुभने और गड़गड़ाहट नहीं होती है। संचय, संक्रमण हो सकता है इस संचित आंसू में इसके अलावा, गड़गड़ाहट, आंख के आसपास सूजन और अश्रु थैली की सूजन देखी जा सकती है।
टियर डक्ट ऑक्लूजन का इलाज कैसे होता है?
शिशुओं में, यह अनायास सुधार या मालिश के साथ बेहतर हो सकता है। हालांकि, अगर यह सुधार नहीं करता है और स्थायी पाया जाता है, तो एंटीबायोटिक ड्रॉप्स और आंसू वाहिनी की मालिश लागू की जा सकती है। इसके अलावा, नलिका में एक ट्यूब लगाई जा सकती है या आंसू वाहिनी की जांच की जा सकती है। वयस्क रोगियों में, अश्रु वाहिनी की रुकावट का एकमात्र इलाज एक शल्य प्रक्रिया है जिसे डेक्रियोसिस्टोरिनोस्टॉमी कहा जाता है। यह प्रक्रिया एक नया चैनल बनाती है।
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नेत्र रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ। Elif Betül Türkoğlu Şen ने विषय के बारे में जानकारी दी। लैक्रिमल ग्रंथि द्वारा निर्मित आंसू आंखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। यह ऊपरी और निचली पलकों में छिद्रों के माध्यम से अश्रु वाहिनी और नाक के अंदर बहती है।यदि इस वाहिनी में आंशिक या पूर्ण रुकावट है, तो सामान्य से अधिक आँसू आते हैं और आँख में पानी आता है। आंसू वाहिनी बाधा एक जन्मजात या बाद की समस्या है।आंख की सतह पर होने वाले आँसू को बाहर निकालने वाली प्रणाली में अवरोधों को आंसू वाहिनी बाधा कहा जाता है। लैक्रिमल डक्ट रुकावट का सबसे आम कारण जन्मजात रुकावट या आंसू वाहिनी के उस हिस्से में गंभीर स्टेनोसिस है जहां यह नाक में खुलता है। वयस्क व्यक्तियों में, हालांकि कोई विशेष कारण नहीं है, शारीरिक संरचना के कारण बीमारी वाले कई लोग महिलाएं हैं। बार-बार आंखों में सूजन, नाक पर जोर से चोट लगना, नाक की सर्जरी ऐसी स्थितियां हैं जो आंसू वाहिनी की रुकावट के लिए जमीन तैयार कर सकती हैं। अश्रु वाहिनी रुकावट का सबसे स्पष्ट लक्षण दोनों आँखों में या एक आँख में पानी आना है। आंसू आँख की सतह को साफ करता है और आँख को नम करता है। तदनुसार, आँख में जलन, चुभने और गड़गड़ाहट नहीं होती है। संचय, संक्रमण हो सकता है इस संचित आंसू में इसके अलावा, गड़गड़ाहट, आंख के आसपास सूजन और अश्रु थैली की सूजन देखी जा सकती है। टियर डक्ट ऑक्लूजन का इलाज कैसे होता है? शिशुओं में, यह अनायास सुधार या मालिश के साथ बेहतर हो सकता है। हालांकि, अगर यह सुधार नहीं करता है और स्थायी पाया जाता है, तो एंटीबायोटिक ड्रॉप्स और आंसू वाहिनी की मालिश लागू की जा सकती है। इसके अलावा, नलिका में एक ट्यूब लगाई जा सकती है या आंसू वाहिनी की जांच की जा सकती है। वयस्क रोगियों में, अश्रु वाहिनी की रुकावट का एकमात्र इलाज एक शल्य प्रक्रिया है जिसे डेक्रियोसिस्टोरिनोस्टॉमी कहा जाता है। यह प्रक्रिया एक नया चैनल बनाती है।
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संसद का बजट सत्र शुरू हो गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का इस दौरान बजट अभिभाषण हुआ. इससे पहले संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया से कहा कि भारत के उज्जवल भविष्य के लिए यह दशक बहुत ही महत्वपूर्ण है. आजादी के दीवानों ने जो सपने देखे थे, उन्हें तेज गति से पूरा करने का यह स्वर्णिम अवसर आया है. इस दशक का भरपूर उपयोग हो, इसको ध्यान में रखते हुए चर्चा हो. सभी प्रकार के विचारों का मंथन हो. लोकतंत्र की सभी मर्यादाओं का पालन करते हुए. जनआकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए इसे हम आगे बढ़ाएंगे.
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के इतिहास में पहली बार हुआ कि 2020 में एक नहीं, वित्तमंत्री को अलग-अलग पैकेज के रूप में एक प्रकार से 4-5 मिनी बजट देना पड़ा. यानी 2020 एक तरह से लगातार मिनी बजट का सिलसिला चलता रहा. इसलिए यह बजट भी उन 4-5 बजट की श्रृंखला में ही देखा जाएगा यह मुझे पूरा विश्वास है.
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संसद का बजट सत्र शुरू हो गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का इस दौरान बजट अभिभाषण हुआ. इससे पहले संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया से कहा कि भारत के उज्जवल भविष्य के लिए यह दशक बहुत ही महत्वपूर्ण है. आजादी के दीवानों ने जो सपने देखे थे, उन्हें तेज गति से पूरा करने का यह स्वर्णिम अवसर आया है. इस दशक का भरपूर उपयोग हो, इसको ध्यान में रखते हुए चर्चा हो. सभी प्रकार के विचारों का मंथन हो. लोकतंत्र की सभी मर्यादाओं का पालन करते हुए. जनआकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए इसे हम आगे बढ़ाएंगे. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के इतिहास में पहली बार हुआ कि दो हज़ार बीस में एक नहीं, वित्तमंत्री को अलग-अलग पैकेज के रूप में एक प्रकार से चार-पाँच मिनी बजट देना पड़ा. यानी दो हज़ार बीस एक तरह से लगातार मिनी बजट का सिलसिला चलता रहा. इसलिए यह बजट भी उन चार-पाँच बजट की श्रृंखला में ही देखा जाएगा यह मुझे पूरा विश्वास है.
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इटली ने जी-4 के देशों पर आरोप लगाया है कि वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए अन्य देशों को ब्लैकमेल कर रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण के दौरान इटली के राजदूत मार्सेलो स्पाताफ़ोरा ने यह गंभीर आरोप लगाया. जी-4 के देशों में भारत, ब्राज़ील, जर्मनी और जापान शामिल हैं.
इटली के राजदूत मार्सेलो स्पाताफ़ोरा ने आरोप लगाया कि चारों देश अपने अभियान में अन्य देशों का समर्थन हासिल करने के लिए वित्तीय दबाव डाल रहे हैं.
लंबे समय से इटली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नए सदस्यों को शामिल किए जाने का विरोध करता रहा है.
इटली उस प्रस्ताव का समर्थन करता है जिसमें कहा गया है कि सुरक्षा परिषद में 10 नए सदस्य देश शामिल किए जाएँगे और इसमें बारी-बारी से 10 नए देशों को मौक़ा मिलेगा.
सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए जी-4 के देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव पेश किया है जिस पर बहस जारी है. लेकिन इसे पास करने के लिए दो तिहाई सदस्य देशों का समर्थन आवश्यक है.
इसके लिए जी-4 के देश पिछले कई महीनों से अभियान चला रहे हैं. सोमवार को ही लंदन में जी-4 के विदेश मंत्रियों और अफ़्रीकी संघ के बीच बातचीत हुई.
हालाँकि बातचीत में कोई ठोस सहमति नहीं हो पाई लेकिन जी-4 के देशों ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है. जी-4 देशों का प्रस्ताव पास हो, इसके लिए अफ़्रीकी संघ का समर्थन मिलना काफ़ी मायने रखता है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान भी संयुक्त राष्ट्र में सुधार का समर्थन करते हैं. लेकिन उन्होंने पहली ही स्पष्ट कर दिया है कि वे सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्य देशों को वीटो का अधिकार दिए जाने के ख़िलाफ़ हैं.
जी-4 के देश सुरक्षा परिषद की सदस्यता 15 से बढ़ाकर 25 करना चाहते हैं. प्रस्ताव में इस बात का भी ज़िक्र है कि छह नए सदस्य देशों को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता दी जाए.
लेकिन नई योजना के तहत स्थायी सदस्य के रूप में ब्रिटेन, चीन, रूस, फ़्रांस और अमरीका के साथ शामिल होने वाले नए देशों को 15 साल तक वीटो का अधिकार नहीं मिलेगा.
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इटली ने जी-चार के देशों पर आरोप लगाया है कि वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए अन्य देशों को ब्लैकमेल कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण के दौरान इटली के राजदूत मार्सेलो स्पाताफ़ोरा ने यह गंभीर आरोप लगाया. जी-चार के देशों में भारत, ब्राज़ील, जर्मनी और जापान शामिल हैं. इटली के राजदूत मार्सेलो स्पाताफ़ोरा ने आरोप लगाया कि चारों देश अपने अभियान में अन्य देशों का समर्थन हासिल करने के लिए वित्तीय दबाव डाल रहे हैं. लंबे समय से इटली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नए सदस्यों को शामिल किए जाने का विरोध करता रहा है. इटली उस प्रस्ताव का समर्थन करता है जिसमें कहा गया है कि सुरक्षा परिषद में दस नए सदस्य देश शामिल किए जाएँगे और इसमें बारी-बारी से दस नए देशों को मौक़ा मिलेगा. सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए जी-चार के देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव पेश किया है जिस पर बहस जारी है. लेकिन इसे पास करने के लिए दो तिहाई सदस्य देशों का समर्थन आवश्यक है. इसके लिए जी-चार के देश पिछले कई महीनों से अभियान चला रहे हैं. सोमवार को ही लंदन में जी-चार के विदेश मंत्रियों और अफ़्रीकी संघ के बीच बातचीत हुई. हालाँकि बातचीत में कोई ठोस सहमति नहीं हो पाई लेकिन जी-चार के देशों ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है. जी-चार देशों का प्रस्ताव पास हो, इसके लिए अफ़्रीकी संघ का समर्थन मिलना काफ़ी मायने रखता है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान भी संयुक्त राष्ट्र में सुधार का समर्थन करते हैं. लेकिन उन्होंने पहली ही स्पष्ट कर दिया है कि वे सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्य देशों को वीटो का अधिकार दिए जाने के ख़िलाफ़ हैं. जी-चार के देश सुरक्षा परिषद की सदस्यता पंद्रह से बढ़ाकर पच्चीस करना चाहते हैं. प्रस्ताव में इस बात का भी ज़िक्र है कि छह नए सदस्य देशों को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता दी जाए. लेकिन नई योजना के तहत स्थायी सदस्य के रूप में ब्रिटेन, चीन, रूस, फ़्रांस और अमरीका के साथ शामिल होने वाले नए देशों को पंद्रह साल तक वीटो का अधिकार नहीं मिलेगा.
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बाड़मेर से हरिद्वार के लिए बस नहीं चलने के कारण सार्वजनिक श्मशान घाट के लॉकर अस्थियों से खचाखच भरे हैं। अस्थियां बाहर रखनी पड़ रही हैं। यूपी सरकार ने राजस्थान रोडवेज बसों को आने की अनुमति नहीं देने के कारण गरीब लोग अस्थियों का विसर्जन नहीं कर पा रहे हैं। गरीब लोग सरकार की निशुल्क अस्थि विसर्जन योजना पर निर्भर हैं।
बाड़मेर में कोरोना की दूसरी लहर में करीब 167 अस्थियां लॉकर में रखी गई थीं। इसमें से आर्थिक रूप से सक्षम 26 लोग अपनों की अस्थियां को ले गए हैं। कोरोना की दूसरी लहर में लॉकडाउन के बाद से बाड़मेर से हरिद्वार के लिए बस सेवा बंद है। बस सेवा शुरू नहीं होने के कारण बाड़मेर श्मशान घाट के लॉकर फुल हो गए हैं।
वर्तमान में बाड़मेर श्मशान घाट में 167 अस्थियां थीं। इसमें से 26 अस्थियां परिवार के लोग निजी वाहनों से हरिद्वार ले जाकर विर्सजन किया है। ऐसे कई लोग हैं जो निजी वाहन ले जाकर अस्थि विसर्जन नहीं करने में सक्षम नहीं हैं।
सार्वजनिक श्मशान समिति के संयोजक भैरू सिंह फुलवारिया ने बताया कि हमारे पास 6 अलमारी में 112 लॉकर हैं जो फुल हो गए हैं। कोरोना की दूसर लहर में 167 अस्थियां थीं। इसमें से कुछ दिन पहले 26 अस्थियां परिवारजन ले गए हैं, लेकिन अभी भी 141 अस्थियां लॉकर के बाहर रखी हैं। ऐसा सुनने में आ रहा है कि रोडवेज की बसें यूपी सरकार ने बंद कर रखी हैं। इस वजह से लोग अस्थि नहीं ले जा रहे हैं।
बाड़मेर रोडवेज के मुख्य प्रबंधक उमेश नागर ने बताया कि यूपी सरकार ने रोडवेज की बसों के संचालन के लिए इजाजत नहीं दी है। बसें यूपी होकर उत्तराखंड नहीं जा पा रही हैं। इस वजह से बाड़मेर सहित कई आगार में बस सेवा बंद है।
बाड़मेर आगार की बस भाडखा, शिव, पोकरण, फलोदी, बीकानेर, यूपी होते हुए हरिद्वार जाया करती थी लेकिन यूपी सरकार द्वारा बस की परमिशन नहीं नहीं देने के कारण बस सेवा बंद है।
राजस्थान सरकार ने कोरोना में निशुल्क कलश योजना हरिद्वार शुरू की थी। इस योजना के तहत दो लोग अस्थि लेकर हरिद्वार आ जा सकते हैं। यूपी सरकार ने राजस्थान रोडवेज बसों को आने की अनुमति नहीं देने के कारण यह बस सेवा शुरू ही नहीं हो पाई है।
बाड़मेर सार्वजनिक श्मशान घाट में अभी 150 से ज्यादा अस्थियां रखी हैं। इनमें से 112 अस्थियां लॉकर में तो बाकी पीपे, बाल्टी और डिब्बों में रखी हैं। एक तरह कोरोना की लहर में लोगों को अपनों को खोने का दर्द था तो दूसरी तरफ अब हालात सामान्य होने के बावजूद अपनों की अस्थियों का विसर्जन करने का दर्द सता रहा है।
सार्वजनिक श्मशान समिति के मुताबिक कोरोना काल में लोग अस्थियां घर लेकर नहीं जा रहे थे। तब हमने 6 अलमारियों में 112 लॉकर बनाए थे। उसमें अस्थियों के ऊपर उसका नाम लिख दिया जाता है ताकि अस्थियों की अदला-बदली न हो जाए। अब लॉकर फुल होने के बाद मजबूरी में अस्थियों को अब बाल्टी, पीपे, बक्से में रख रहे हैं। अस्थियों के आगे सुबह-शाम अगरबत्ती भी करते हैं और कीर्तन करते हैं।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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बाड़मेर से हरिद्वार के लिए बस नहीं चलने के कारण सार्वजनिक श्मशान घाट के लॉकर अस्थियों से खचाखच भरे हैं। अस्थियां बाहर रखनी पड़ रही हैं। यूपी सरकार ने राजस्थान रोडवेज बसों को आने की अनुमति नहीं देने के कारण गरीब लोग अस्थियों का विसर्जन नहीं कर पा रहे हैं। गरीब लोग सरकार की निशुल्क अस्थि विसर्जन योजना पर निर्भर हैं। बाड़मेर में कोरोना की दूसरी लहर में करीब एक सौ सरसठ अस्थियां लॉकर में रखी गई थीं। इसमें से आर्थिक रूप से सक्षम छब्बीस लोग अपनों की अस्थियां को ले गए हैं। कोरोना की दूसरी लहर में लॉकडाउन के बाद से बाड़मेर से हरिद्वार के लिए बस सेवा बंद है। बस सेवा शुरू नहीं होने के कारण बाड़मेर श्मशान घाट के लॉकर फुल हो गए हैं। वर्तमान में बाड़मेर श्मशान घाट में एक सौ सरसठ अस्थियां थीं। इसमें से छब्बीस अस्थियां परिवार के लोग निजी वाहनों से हरिद्वार ले जाकर विर्सजन किया है। ऐसे कई लोग हैं जो निजी वाहन ले जाकर अस्थि विसर्जन नहीं करने में सक्षम नहीं हैं। सार्वजनिक श्मशान समिति के संयोजक भैरू सिंह फुलवारिया ने बताया कि हमारे पास छः अलमारी में एक सौ बारह लॉकर हैं जो फुल हो गए हैं। कोरोना की दूसर लहर में एक सौ सरसठ अस्थियां थीं। इसमें से कुछ दिन पहले छब्बीस अस्थियां परिवारजन ले गए हैं, लेकिन अभी भी एक सौ इकतालीस अस्थियां लॉकर के बाहर रखी हैं। ऐसा सुनने में आ रहा है कि रोडवेज की बसें यूपी सरकार ने बंद कर रखी हैं। इस वजह से लोग अस्थि नहीं ले जा रहे हैं। बाड़मेर रोडवेज के मुख्य प्रबंधक उमेश नागर ने बताया कि यूपी सरकार ने रोडवेज की बसों के संचालन के लिए इजाजत नहीं दी है। बसें यूपी होकर उत्तराखंड नहीं जा पा रही हैं। इस वजह से बाड़मेर सहित कई आगार में बस सेवा बंद है। बाड़मेर आगार की बस भाडखा, शिव, पोकरण, फलोदी, बीकानेर, यूपी होते हुए हरिद्वार जाया करती थी लेकिन यूपी सरकार द्वारा बस की परमिशन नहीं नहीं देने के कारण बस सेवा बंद है। राजस्थान सरकार ने कोरोना में निशुल्क कलश योजना हरिद्वार शुरू की थी। इस योजना के तहत दो लोग अस्थि लेकर हरिद्वार आ जा सकते हैं। यूपी सरकार ने राजस्थान रोडवेज बसों को आने की अनुमति नहीं देने के कारण यह बस सेवा शुरू ही नहीं हो पाई है। बाड़मेर सार्वजनिक श्मशान घाट में अभी एक सौ पचास से ज्यादा अस्थियां रखी हैं। इनमें से एक सौ बारह अस्थियां लॉकर में तो बाकी पीपे, बाल्टी और डिब्बों में रखी हैं। एक तरह कोरोना की लहर में लोगों को अपनों को खोने का दर्द था तो दूसरी तरफ अब हालात सामान्य होने के बावजूद अपनों की अस्थियों का विसर्जन करने का दर्द सता रहा है। सार्वजनिक श्मशान समिति के मुताबिक कोरोना काल में लोग अस्थियां घर लेकर नहीं जा रहे थे। तब हमने छः अलमारियों में एक सौ बारह लॉकर बनाए थे। उसमें अस्थियों के ऊपर उसका नाम लिख दिया जाता है ताकि अस्थियों की अदला-बदली न हो जाए। अब लॉकर फुल होने के बाद मजबूरी में अस्थियों को अब बाल्टी, पीपे, बक्से में रख रहे हैं। अस्थियों के आगे सुबह-शाम अगरबत्ती भी करते हैं और कीर्तन करते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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बॉलीवुड के बड़े बड़े सितारों के बारे में ज्यादातर लोग जानते ही हैं और जानकारी रखते हैं, कि वो किसी फिल्म के लिए या इवेंट के कितने पैसे लेते हैं. लेकिन क्या आप छोटे परदे यानि कि टेलाविजन पर काम करने वाले सितारों के बारे में शायद ही ये जानते होंगे कि वे कि किस चीज के लिए, कितना चार्ज करते हैं.
टीवी पर काम करने वाले एक्टर्स एक्टिंग के साथ-साथ, समय समय पर कई शोज में एंकरिंग करते भी देखे जा सकते हैं. न केवल रियलिटी शोज, बल्कि पर्सनल इवेंट्स में भी उन्हें बतौर एक होस्ट देखा जा सकता है.
क्या कभी आपने सोचा है कि इन प्राइवेट शोज के लिए टेलीविजन के ये सितारे कितनी फीस लेते हैं. आज यहां हम बताते हैं कि टीवी स्टार्स प्राइवेट शोज से कितने पैसे कमाते हैं.
5 से 6 लाख रूपए प्रति शो : कृष्णा अभिषेक 'कॉमेडी नाइट्स लाइव' शो के मेन होस्ट हैं. अगर हम प्राइवेट शोज की बाते करें तो कृष्णा 5 से 6 लाख प्रति शो चार्ज करते हैं.
7 से 8 लाख रूपए प्रति शो : भारती सिंह भी कृष्णा अभिषेक के साथ 'कॉमेडी नाइट्स लाइव' शो होस्ट करती हैं. आपको जानकार हैरानी होगी कि भारती कृष्णा से ज्यादा फीस लेती हैं.
6 से 8 लाख रूपए प्रति शो : मनीष पॉल सब टीवी के कॉमेडी शो 'खटमल ए इश्क' में लीड रोल कर रहे हैं. वे रियलिटी शोज 'झलक दिखला जा' सीजन 5,6,7,8 और 9 के होस्ट रहे हैं.
3.5 से 5 लाख रूपए प्रति शो : गौहर खान ने टीवी पर सिंगिंग रियलिटी शो 'इंडियाज रॉ स्टार' को होस्ट किया है. 2016 में उन्होंने बतौर लीड एक्ट्रेस फिल्म 'फीवर' से बॉलीवुड डेब्यू किया है.
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बॉलीवुड के बड़े बड़े सितारों के बारे में ज्यादातर लोग जानते ही हैं और जानकारी रखते हैं, कि वो किसी फिल्म के लिए या इवेंट के कितने पैसे लेते हैं. लेकिन क्या आप छोटे परदे यानि कि टेलाविजन पर काम करने वाले सितारों के बारे में शायद ही ये जानते होंगे कि वे कि किस चीज के लिए, कितना चार्ज करते हैं. टीवी पर काम करने वाले एक्टर्स एक्टिंग के साथ-साथ, समय समय पर कई शोज में एंकरिंग करते भी देखे जा सकते हैं. न केवल रियलिटी शोज, बल्कि पर्सनल इवेंट्स में भी उन्हें बतौर एक होस्ट देखा जा सकता है. क्या कभी आपने सोचा है कि इन प्राइवेट शोज के लिए टेलीविजन के ये सितारे कितनी फीस लेते हैं. आज यहां हम बताते हैं कि टीवी स्टार्स प्राइवेट शोज से कितने पैसे कमाते हैं. पाँच से छः लाख रूपए प्रति शो : कृष्णा अभिषेक 'कॉमेडी नाइट्स लाइव' शो के मेन होस्ट हैं. अगर हम प्राइवेट शोज की बाते करें तो कृष्णा पाँच से छः लाख प्रति शो चार्ज करते हैं. सात से आठ लाख रूपए प्रति शो : भारती सिंह भी कृष्णा अभिषेक के साथ 'कॉमेडी नाइट्स लाइव' शो होस्ट करती हैं. आपको जानकार हैरानी होगी कि भारती कृष्णा से ज्यादा फीस लेती हैं. छः से आठ लाख रूपए प्रति शो : मनीष पॉल सब टीवी के कॉमेडी शो 'खटमल ए इश्क' में लीड रोल कर रहे हैं. वे रियलिटी शोज 'झलक दिखला जा' सीजन पाँच,छः,सात,आठ और नौ के होस्ट रहे हैं. तीन.पाँच से पाँच लाख रूपए प्रति शो : गौहर खान ने टीवी पर सिंगिंग रियलिटी शो 'इंडियाज रॉ स्टार' को होस्ट किया है. दो हज़ार सोलह में उन्होंने बतौर लीड एक्ट्रेस फिल्म 'फीवर' से बॉलीवुड डेब्यू किया है.
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Çankırı मेयर ने TCDD Taşımacılık AŞ का दौरा कियाः Çankırı मेयर इरफ़ान डिनक ने TCDD Taşımacılık के महाप्रबंधक वेसी कर्ट से उनके कार्यालय में मुलाकात की।
बैठक के दौरान, महाप्रबंधक वेसी कर्ट; इस बात पर जोर देते हुए कि Çankırı एक रेलवे शहर है, उन्होंने कहाः "Çankırı, जो अपनी स्विच फैक्ट्री, VADEMSAŞ और कार्यशालाओं के साथ उन्नत रेलवे उद्योग का केंद्र बन गया है, माल परिवहन में भी एक महत्वपूर्ण बिंदु पर है। कंकिरी में रेलवे का विकास, जो पिछले 15 वर्षों से अपनी प्राथमिकता वाली रेलवे नीतियों के साथ देश के सबसे गतिशील क्षेत्रों में से एक बन गया है, प्रांत के विकास और रोजगार में वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इरमाक-कराबुक-ज़ोंगुलडक लाइन के नवीनीकरण और आधुनिकीकरण के साथ, हमारे देश और क्षेत्रीय विकास में तेजी आई है। हमारे Çankırı का क्षितिज रेलवे के साथ और अधिक विस्तारित हो गया है। श्री डिनक, जो इतने महत्वपूर्ण शहर के मेयर के रूप में काम करना जारी रखते हैं, अपनी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के साथ शहर के विकास और आधुनिकीकरण में योगदान देते हैं।
Çankırı मेयर इरफ़ान डिनक ने भी कहा; यह कहते हुए कि कंकिरी के लोग रेलवे से प्यार करते हैं और रेलवे क्षेत्र से अपनी जीविका कमाते हैं; "मुझे उम्मीद है कि TCDD Taşımacılık AŞ, जो रेलवे परिवहन के उदारीकरण के साथ माल और यात्री परिवहन करने के लिए स्थापित किया गया था, हमारे देश और रेलवे क्षेत्र के लिए फायदेमंद होगा," उन्होंने कहा।
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Çankırı मेयर ने TCDD Taşımacılık AŞ का दौरा कियाः Çankırı मेयर इरफ़ान डिनक ने TCDD Taşımacılık के महाप्रबंधक वेसी कर्ट से उनके कार्यालय में मुलाकात की। बैठक के दौरान, महाप्रबंधक वेसी कर्ट; इस बात पर जोर देते हुए कि Çankırı एक रेलवे शहर है, उन्होंने कहाः "Çankırı, जो अपनी स्विच फैक्ट्री, VADEMSAŞ और कार्यशालाओं के साथ उन्नत रेलवे उद्योग का केंद्र बन गया है, माल परिवहन में भी एक महत्वपूर्ण बिंदु पर है। कंकिरी में रेलवे का विकास, जो पिछले पंद्रह वर्षों से अपनी प्राथमिकता वाली रेलवे नीतियों के साथ देश के सबसे गतिशील क्षेत्रों में से एक बन गया है, प्रांत के विकास और रोजगार में वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इरमाक-कराबुक-ज़ोंगुलडक लाइन के नवीनीकरण और आधुनिकीकरण के साथ, हमारे देश और क्षेत्रीय विकास में तेजी आई है। हमारे Çankırı का क्षितिज रेलवे के साथ और अधिक विस्तारित हो गया है। श्री डिनक, जो इतने महत्वपूर्ण शहर के मेयर के रूप में काम करना जारी रखते हैं, अपनी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के साथ शहर के विकास और आधुनिकीकरण में योगदान देते हैं। Çankırı मेयर इरफ़ान डिनक ने भी कहा; यह कहते हुए कि कंकिरी के लोग रेलवे से प्यार करते हैं और रेलवे क्षेत्र से अपनी जीविका कमाते हैं; "मुझे उम्मीद है कि TCDD Taşımacılık AŞ, जो रेलवे परिवहन के उदारीकरण के साथ माल और यात्री परिवहन करने के लिए स्थापित किया गया था, हमारे देश और रेलवे क्षेत्र के लिए फायदेमंद होगा," उन्होंने कहा।
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हमीरपुर-वन विभाग व शुभ प्रभात हैल्थ क्लब हमीरपुर के संयुक्त तत्त्वावधान में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। जिसमें वन मंडल अधिकारी एलसी बंदना ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की तथा पौैधे लगाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। विश्व पर्यावरण दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन हीरानगर के चिल्ड्रन पार्क में किया गया। इस दौरान विभिन्न पौधे रोपे गए। इस दौरान वन मंडल अधिकारी एलसी बंदना ने कहा कि आगामी दिनों में मानसून के दौैरान जिला भर में हजारों पौधे रोपित किए जाएंगे। इसके लिए तैयारियां कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि इस बार जिला भर में आगजनी की घटनाएं न के बराबर हुई हैं तथा इससे पर्यावरण को और संरक्षण मिला है। इस बार बेहतर पर्यावरण होने के कारण पौधारोपण अधिक किया जाएगा। इस दौरान शुभ प्रभात हैल्थ क्लब हमीरपुर के अध्यक्ष जेएन शर्मा ने भी अपने वन विभाग का सहयोग के लिए आभार जताया। इस दौरान क्लब के अध्यक्ष जेएन शर्मा के साथ ही वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेश बजाज, महासचिव आरएल भारद्वाज, रविंद्र ठाकुर, किशोर शर्मा, सुनील शर्मा, पुष्पा शर्मा, पूनम शर्मा, बिमला सहित वन विभाग कई अन्य कर्मी मौजूद रहे।
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हमीरपुर-वन विभाग व शुभ प्रभात हैल्थ क्लब हमीरपुर के संयुक्त तत्त्वावधान में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। जिसमें वन मंडल अधिकारी एलसी बंदना ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की तथा पौैधे लगाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। विश्व पर्यावरण दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन हीरानगर के चिल्ड्रन पार्क में किया गया। इस दौरान विभिन्न पौधे रोपे गए। इस दौरान वन मंडल अधिकारी एलसी बंदना ने कहा कि आगामी दिनों में मानसून के दौैरान जिला भर में हजारों पौधे रोपित किए जाएंगे। इसके लिए तैयारियां कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि इस बार जिला भर में आगजनी की घटनाएं न के बराबर हुई हैं तथा इससे पर्यावरण को और संरक्षण मिला है। इस बार बेहतर पर्यावरण होने के कारण पौधारोपण अधिक किया जाएगा। इस दौरान शुभ प्रभात हैल्थ क्लब हमीरपुर के अध्यक्ष जेएन शर्मा ने भी अपने वन विभाग का सहयोग के लिए आभार जताया। इस दौरान क्लब के अध्यक्ष जेएन शर्मा के साथ ही वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेश बजाज, महासचिव आरएल भारद्वाज, रविंद्र ठाकुर, किशोर शर्मा, सुनील शर्मा, पुष्पा शर्मा, पूनम शर्मा, बिमला सहित वन विभाग कई अन्य कर्मी मौजूद रहे।
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ओडिशा में नवीन पटनायक सरकार असमंजस की स्थिति के दौर से गुजर रह रही है। रविवार को ओडिशा सरकार में मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जाना है। लेकिन उससे एक दिन पहले ही सूबे की राजनीति और सरकार में बड़ा बदलाव देखने को मिला।
ओडिशा विधानसभा के स्पीकर निरंजन पुजारी और सरकार के 9 मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने वाले मंत्रियों में संजय दासबर्मा, अरुण साहू, पुष्पेंद्र सिंहदेव, प्रणब प्रकाश दास, सुदाम मार्डीं, प्रदीप पनिग्रही, देबी मिश्रा आदि के नाम प्रमुख हैं।
मंत्रियों के इस्तीफा देने के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक मीडीया से मुखातिब हुए। पटनायक ने कहा कि मंत्रियों ने संगठन में काम करने के लिए इस्तीफा दिया है।
माना जा रहा है कि विधानसभा के स्पीकर निरंजन पुजारी ने इसलिए इस्तीफा दिया है क्योंकि उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। गौरतबल है कि ओडिशा में नवीन पटनायक की सरकार है और उन्हें लोकप्रिय नेता माना जाता है। पर इसके बावजूद पिछले कुछ समय से बीजेपी अपने कदम जमाने में कामयाब हुई है। ओडिशा में हुए हालिया पंचायत चुनावों में बीजेपी ने जबर्दस्त प्रदर्शन किया था।
कहा जा रहा है कि बीजेपी के बेहतरीन प्रदर्शन को आगामी विधानसभा चुनाव में बीजू जनता दल हल्के में लेने की भूल नहीं करना चाहती। वहीं, यह भी संभावना जताई जा रही है कि मंत्रिमंडल में किया जाने वाले फेरबदल नवीन पटनायक की छवि को सुधारने के मद्देनजर किया जा रहा है।
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ओडिशा में नवीन पटनायक सरकार असमंजस की स्थिति के दौर से गुजर रह रही है। रविवार को ओडिशा सरकार में मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जाना है। लेकिन उससे एक दिन पहले ही सूबे की राजनीति और सरकार में बड़ा बदलाव देखने को मिला। ओडिशा विधानसभा के स्पीकर निरंजन पुजारी और सरकार के नौ मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने वाले मंत्रियों में संजय दासबर्मा, अरुण साहू, पुष्पेंद्र सिंहदेव, प्रणब प्रकाश दास, सुदाम मार्डीं, प्रदीप पनिग्रही, देबी मिश्रा आदि के नाम प्रमुख हैं। मंत्रियों के इस्तीफा देने के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक मीडीया से मुखातिब हुए। पटनायक ने कहा कि मंत्रियों ने संगठन में काम करने के लिए इस्तीफा दिया है। माना जा रहा है कि विधानसभा के स्पीकर निरंजन पुजारी ने इसलिए इस्तीफा दिया है क्योंकि उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। गौरतबल है कि ओडिशा में नवीन पटनायक की सरकार है और उन्हें लोकप्रिय नेता माना जाता है। पर इसके बावजूद पिछले कुछ समय से बीजेपी अपने कदम जमाने में कामयाब हुई है। ओडिशा में हुए हालिया पंचायत चुनावों में बीजेपी ने जबर्दस्त प्रदर्शन किया था। कहा जा रहा है कि बीजेपी के बेहतरीन प्रदर्शन को आगामी विधानसभा चुनाव में बीजू जनता दल हल्के में लेने की भूल नहीं करना चाहती। वहीं, यह भी संभावना जताई जा रही है कि मंत्रिमंडल में किया जाने वाले फेरबदल नवीन पटनायक की छवि को सुधारने के मद्देनजर किया जा रहा है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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गैस कीमतों के मुद्दे की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें सीधे तौर पर दखल दे दिया है। इसके तहत अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) न केवल इस मामले को देख रहा है, बल्कि उसने पेट्रोलियम मंत्रालय को गैस कीमतों को इस तरह निर्धारित करने का स्पष्ट संकेत भी दे दिया है, जिससे लोगों पर ज्यादा आर्थिक बोझ न पड़ने पाए।
पीएमओ ने गैस के दाम (बेस प्राइस) 4. 2 डॉलर (करीब 258 रुपये) प्रति एमएमबीटीयू (मिलियन मेट्रिक ब्रिटिश थर्मल यूनिट) रखने का संकेत दिया है, जबकि मूल्य निर्धारण के तयशुदा फार्मूले और गणनाओं के आधार पर गैस की नई कीमत 6 डॉलर से 6. 5 डॉलर (करीब 400 रुपये) प्रति एमएमबीटीयू तक बैठ सकती है। कीमतों के साथ ही पीएमओ ने बिजली और उर्वरक कंपनियों के लिए गैस प्राइस पूलिंग को लेकर भी अपने रुख से मंत्रालय को अवगत करा दिया है।
गैस कीमतें तय करने के लिए गठित सचिवों की समिति द्वारा हाल ही में अपनी सिफारिशें सौंपे जाने के बाद भी पीएमओ और पेट्रोलियम मंत्रालय गैस के दाम खुद तय करने का जिम्मा खुद संभाल रखा है और फिलहाल इस पर काम चल रहा है। नई गैस कीमतें 15 नवंबर तक तय हो जाने की उम्मीद है।
मामले से जुड़े सूत्रों का बताना है कि पीएमओ और मंत्रालय ने 6. 5 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू की बेस कीमत पर विचार करके पाया कि इसमें सेवा कर, मूल्य वर्धित कर (वैट) और केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) आदि को जोड़ने पर कीमत 7. 98 डॉलर (करीब 491 रुपये) प्रति एमएमबीटीयू तक बैठेगी। ऐसा होने पर इस बात के स्पष्ट संकेत जाएंगे सरकार गैस के दाम 8 डॉलर (करीब 493 रुपये) प्रति एमएमबीटीयू के स्तर पर रखना चाहती है।
इसे देखते हुए गैस कीमतों को ज्यादा स्वीकार्य तरीके से तय करने पर काम चल रहा है। इसके तहत मौजूदा भंडारों से निकली गैस के दाम 4. 2 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू और नए क्षेत्रों से निकली गैस के दाम 6. 5 डॉलर (400 रुपये) प्रति एमएमबीटीयू रखने का प्रस्ताव है।
गौरतलब है कि घरेलू स्तर पर गैस का कम उत्पादन और घरेलू और आयातित दोनों ही रूटों से मिल रही गैस की ऊंची कीमतों के चलते फिलहाल देश के ज्यादातर गैस आधारित बिजली संयंत्रों में बिजली का उत्पादन नहीं किया जा पा रहा है। इसे देखते हुए पीएमओ ने गैस की पूल प्राइसिंग के लिए कई तरह की ऐसी गणनाएं सुझाई हैं, जिनसे उपभोक्ताओं पर कीमतों का ज्यादा बोझ न पड़े और गैस की नई कीमतें सभी के लिए स्वीकार्य हों।
ऐसे में मौजूदा हालात को देखते हुए गैस कीमतों की पूलिंग के प्रस्ताव को समर्थन मिलता दिख रहा है। क्योंकि इससे ठप पड़े गैस आधारित पावर प्लांटों में उत्पादन शुरू करने की राह आसान हो सकती है। इन संयंत्रों के लिए फिलहाल 21 एमएमएससीएमडी गैस उपलब्ध है, जबकि जरूरत 63 एमएमएससीएमडी की है।
इन प्लांटों को 17. 38 डॉलर (करीब 1,070 रुपये) प्रति एमएमबीटीयू की दर से आरएलएनजी (रिलिक्वीफाइड गैसीफाइड नेचुरल गैस) की आपूर्ति हो रही है, जोकि काफी महंगी है। गैस उत्पादक महंगी कीमतों पर गैस का आयात करने के भी खिलाफ हैं क्योंकि इससे उनकी उत्पादन लागत काफी अधिक हो जाएगी और इस महंगी बिजली के लिए उन्हें बाजार में खरीदार नहीं मिलेंगे।
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गैस कीमतों के मुद्दे की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें सीधे तौर पर दखल दे दिया है। इसके तहत अब प्रधानमंत्री कार्यालय न केवल इस मामले को देख रहा है, बल्कि उसने पेट्रोलियम मंत्रालय को गैस कीमतों को इस तरह निर्धारित करने का स्पष्ट संकेत भी दे दिया है, जिससे लोगों पर ज्यादा आर्थिक बोझ न पड़ने पाए। पीएमओ ने गैस के दाम चार. दो डॉलर प्रति एमएमबीटीयू रखने का संकेत दिया है, जबकि मूल्य निर्धारण के तयशुदा फार्मूले और गणनाओं के आधार पर गैस की नई कीमत छः डॉलर से छः. पाँच डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक बैठ सकती है। कीमतों के साथ ही पीएमओ ने बिजली और उर्वरक कंपनियों के लिए गैस प्राइस पूलिंग को लेकर भी अपने रुख से मंत्रालय को अवगत करा दिया है। गैस कीमतें तय करने के लिए गठित सचिवों की समिति द्वारा हाल ही में अपनी सिफारिशें सौंपे जाने के बाद भी पीएमओ और पेट्रोलियम मंत्रालय गैस के दाम खुद तय करने का जिम्मा खुद संभाल रखा है और फिलहाल इस पर काम चल रहा है। नई गैस कीमतें पंद्रह नवंबर तक तय हो जाने की उम्मीद है। मामले से जुड़े सूत्रों का बताना है कि पीएमओ और मंत्रालय ने छः. पाँच डॉलर प्रति एमएमबीटीयू की बेस कीमत पर विचार करके पाया कि इसमें सेवा कर, मूल्य वर्धित कर और केंद्रीय बिक्री कर आदि को जोड़ने पर कीमत सात. अट्ठानवे डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक बैठेगी। ऐसा होने पर इस बात के स्पष्ट संकेत जाएंगे सरकार गैस के दाम आठ डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के स्तर पर रखना चाहती है। इसे देखते हुए गैस कीमतों को ज्यादा स्वीकार्य तरीके से तय करने पर काम चल रहा है। इसके तहत मौजूदा भंडारों से निकली गैस के दाम चार. दो डॉलर प्रति एमएमबीटीयू और नए क्षेत्रों से निकली गैस के दाम छः. पाँच डॉलर प्रति एमएमबीटीयू रखने का प्रस्ताव है। गौरतलब है कि घरेलू स्तर पर गैस का कम उत्पादन और घरेलू और आयातित दोनों ही रूटों से मिल रही गैस की ऊंची कीमतों के चलते फिलहाल देश के ज्यादातर गैस आधारित बिजली संयंत्रों में बिजली का उत्पादन नहीं किया जा पा रहा है। इसे देखते हुए पीएमओ ने गैस की पूल प्राइसिंग के लिए कई तरह की ऐसी गणनाएं सुझाई हैं, जिनसे उपभोक्ताओं पर कीमतों का ज्यादा बोझ न पड़े और गैस की नई कीमतें सभी के लिए स्वीकार्य हों। ऐसे में मौजूदा हालात को देखते हुए गैस कीमतों की पूलिंग के प्रस्ताव को समर्थन मिलता दिख रहा है। क्योंकि इससे ठप पड़े गैस आधारित पावर प्लांटों में उत्पादन शुरू करने की राह आसान हो सकती है। इन संयंत्रों के लिए फिलहाल इक्कीस एमएमएससीएमडी गैस उपलब्ध है, जबकि जरूरत तिरेसठ एमएमएससीएमडी की है। इन प्लांटों को सत्रह. अड़तीस डॉलर प्रति एमएमबीटीयू की दर से आरएलएनजी की आपूर्ति हो रही है, जोकि काफी महंगी है। गैस उत्पादक महंगी कीमतों पर गैस का आयात करने के भी खिलाफ हैं क्योंकि इससे उनकी उत्पादन लागत काफी अधिक हो जाएगी और इस महंगी बिजली के लिए उन्हें बाजार में खरीदार नहीं मिलेंगे।
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ALLAHABAD: विश्व डाक दिवस के मौके पर इस बार राष्ट्रीय डाक सप्ताह का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें आम पब्लिक को डाक विभाग की ओर से संचालित की जा रही सेवाओं के साथ ही अन्य गतिविधियों की जानकारी भी दी जाएगी। राष्ट्रीय डाक सप्ताह के बारे में निदेशक डाक सेवाएं इलाहाबाद परिक्षेत्र कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर आयोजित राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अन्तर्गत 9 से क्भ् अक्टूबर तक विविध आयोजन होंगे। जिसमें लोगों विभाग की ओर से संचालित सेवाओं का व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार किया जाएगा।
डाक निदेशक ने बताया कि नौ अक्टूबर को विश्व डाक दिवस, क्0 को बचत बैंक दिवस, क्क् अक्टूबर को मेल दिवस, क्फ् अक्टूबर को फिलेटली दिवस, क्ब् अक्टूबर को व्यवसाय विकास दिवस और क्भ् अक्टूबर को डाक जीवन बीमा दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इसमें व्यापक प्रचार प्रसार के साथ ही राजस्व अर्जन में वृद्धि पर जोर दिया जाएगा, उत्कृष्टता हेतु डाक कर्मियों को सम्मान, कस्टमर मीट, डाक टिकट संग्रह के प्रति युवाओं में अभिरुचि पैदा करने हेतु वर्कशाप, स्कूल छात्र छात्राओं द्वारा डाकघरों का विजिट, पत्र लेखन, प्रश्नोत्तरी व पेंटिंग प्रतियोगिताएं, बचत बैंक व डाक जीवन बीमा मेला इत्यादि का आयोजन भी इस सप्ताह में होंगे।
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ALLAHABAD: विश्व डाक दिवस के मौके पर इस बार राष्ट्रीय डाक सप्ताह का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें आम पब्लिक को डाक विभाग की ओर से संचालित की जा रही सेवाओं के साथ ही अन्य गतिविधियों की जानकारी भी दी जाएगी। राष्ट्रीय डाक सप्ताह के बारे में निदेशक डाक सेवाएं इलाहाबाद परिक्षेत्र कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि नौ अक्टूबर को विश्व डाक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर आयोजित राष्ट्रीय डाक सप्ताह के अन्तर्गत नौ से क्भ् अक्टूबर तक विविध आयोजन होंगे। जिसमें लोगों विभाग की ओर से संचालित सेवाओं का व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार किया जाएगा। डाक निदेशक ने बताया कि नौ अक्टूबर को विश्व डाक दिवस, क्शून्य को बचत बैंक दिवस, क्क् अक्टूबर को मेल दिवस, क्फ् अक्टूबर को फिलेटली दिवस, क्ब् अक्टूबर को व्यवसाय विकास दिवस और क्भ् अक्टूबर को डाक जीवन बीमा दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इसमें व्यापक प्रचार प्रसार के साथ ही राजस्व अर्जन में वृद्धि पर जोर दिया जाएगा, उत्कृष्टता हेतु डाक कर्मियों को सम्मान, कस्टमर मीट, डाक टिकट संग्रह के प्रति युवाओं में अभिरुचि पैदा करने हेतु वर्कशाप, स्कूल छात्र छात्राओं द्वारा डाकघरों का विजिट, पत्र लेखन, प्रश्नोत्तरी व पेंटिंग प्रतियोगिताएं, बचत बैंक व डाक जीवन बीमा मेला इत्यादि का आयोजन भी इस सप्ताह में होंगे।
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माना जाता है कि महबूबा ने सीएम की कुर्सी संभालने का फैसला तभी लिया जब उनके पास कोई चारा नहीं बचा था. तब तक अलगाववादी भी उनसे दूरी बना चुके थे - और पीडीपी के भी टूट जाने का खतरा मंडराने लगा था.
महबूबा मुफ्ती के लिए 2016 की शुरुआत ही खराब रही. 7 जनवरी को ही उनके पिता और तब के चीफ मिनिस्टर मुफ्ती मोहम्मद सईद का निधन हो गया और लंबे वक्त तक वो सदमे से नहीं उबर पाईं.
तमाम सोच विचार के बाद महबूबा ने सीएम की कुर्सी संभाली लेकिन एक के बाद एक घटनाओं ने पूरे साल उन्हें चैन नहीं लेने दिया. साल बीतते बीतते उनके परम विरोधी फारूक अब्दुल्ला ने दावा किया कि वो चाहते तो पीडीपी सरकार गिरा देते लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.
महबूबा के पिता की मौत के सदमे से उबरने में लंबा वक्त लगने कि सियासी वजह भी रही. मुफ्ती के जनाजे से आम कश्मीरियों का परहेज उनके लिए बड़ा सेटबैक रहा. ये तो सब मान कर चल ही रहे थे कि पीडीपी के समर्थक सत्ता के लिए उसके बीजेपी का दामन थामने से खफा हैं लेकिन महबूबा को भी ऐसी कभी आशंका न रही.
इसे भी पढ़ें : फारूक अब्दुल्ला के हुर्रियत के सपोर्ट के पीछे क्या सिर्फ महबूबा विरोध है?
मुफ्ती सईद की बेटी, पीडीपी की प्रमुख और बीजेपी का सपोर्ट होने के कारण महबूबा के कुर्सी पर बैठने में देर होने जैसी कोई बात ही नहीं थी - लेकिन इस उधेड़बुन में उन्होंने तीन महीने लगा दिये. उस दौरान उनकी बीजेपी नेता राम माधव से लेकर कश्मीर मामलों को सीधे देख रहे गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी कई बार बात और मुलाकातें हुईं.
महबूबा ने अपने भाई को भी आगे करने की कोशिश की. अचानक उन्हें लेकर पार्टी की जरूरी मीटिंग में ले पहुंचीं तो कयासों के दौर भी शुरू हो गये. पीडीपी के सीनियर नेताओं की भी वैसी ही अपेक्षाएं रहीं जैसी कहीं भी होती हैं.
माना जाता है कि महबूबा ने सीएम की कुर्सी संभालने का फैसला तभी लिया जब उनके पास कोई चारा नहीं बचा था. तब तक अलगाववादी भी उनसे दूरी बना चुके थे - और पीडीपी के भी टूट जाने का खतरा मंडराने लगा था.
आखिरकार 4 अप्रैल को महबूबा ने जम्मू और कश्मीर की पहली महिला मुख्यमंत्री के तौर पर कामकाज संभाला लेकिन वो कांटों भरी कुर्सी ही बनी रही.
हंदवाड़ा में एक किशोरी से छेड़छाड़ को लेकर बवाल अभी थमा नहीं कि श्रीनगर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में लोकल और बाहरी छात्रों के बीच टकराव से तनाव पैदा हो गया. फिर जैसे तैसे प्रशासन के काबू पा लेने के बाद महबूबा कुछ राहत महसूस कर रही होंगी कि कश्मीरी पंडितों के लिए कॉलोनी बसाने को लेकर विवाद होने लगा. ये मामला भी जैसे तैसे रफा दफा हुआ.
महबूबा सरकार अभी कुछ देर चैन की सांस भी नहीं ले पाई होगी कि 8 जुलाई को हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मार डाला गया. फिर क्या था, विरोध इस कदर होने लगा जैसे घाटी उबलने लगी हो.
महबूबा ने ये कह कर मरहम लगाने की कोशिश की कि उन्हें पता होता तो उनकी कोशिश होती कि उसका एनकाउंटर न हो. महबूबा की इन बातों का किसी पर कोई असर नहीं हुआ.
घाटी में सबसे लंबे कर्फ्यू में अब तक 96 लोग मारे जा चुके हैं जबकि जख्मी होने वालों की तादाद 12 हजार से भी ज्यादा बताई जा रही है जिनमें सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. सबसे बुरा हाल तो उन डेढ़ सौ लोगों का है जो पैलेट गन के शिकार हुए हैं. उनमें से कइयों के हमेशा के लिए अंधे हो जाने का खतरा पैदा हो गया है.
आधा साल तो जैसे तैसे गुजरा लेकिन बाकी हिस्सा तो ऐसा रहा जैसा शायद ही किसी ने सोचा हो. लोगों को घरों में इस कदर कैद रहना पड़ा कि ईद की नमाज तक के लिए उन्हें घरों या ज्यादा से ज्यादा कॉलोनी बाहर जाने की छूट नहीं मिली.
लंबे कर्फ्यू के चलते बच्चों की पढ़ाई पर भी खराब असर पड़ा, बस अच्छी बात यही रही कि इम्तिहान करा लिये गये. इम्तिहान में बच्चों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया जिससे उनके घरवालों की तकलीफ थोड़ी कम जरूर हुई होगी.
मुख्यमंत्री बनने के दो महीने बाद महबूबा चुनाव में उतरीं तो कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्हें उनकी जीत तक का भरोसा नहीं हुआ. अनंतनाग सीट उनके पिता मुफ्ती सईद के निधन से खाली हुई थी - लेकिन सारी आशंकाओं को मात देते हुए महबूबा ने 12 हजार वोटों के अंतर से चुनाव जीता. लेकिन कश्मीर के हालात से निबटने में सरकार द्वारा उठाए गये कदमों को नाकाफी मानते हुए पीडीपी सांसद तारिक हमीद कर्रा ने इस्तीफा दे दिया.
स्थानीय मुश्किलों के अलावा सीमा पार से होने वाली घुसपैठ तो पूरे साल चलती रही लेकिन उरी हमला सबसे बुरा रहा जब ड्यूटी के बाद सो रहे जवानों को शहादत के लिए मजबूर होना पड़ा.
बहरहाल अंत भला तो सब भला. उरी का बदला सर्जिकल स्ट्राइक के जरिये लिया गया और खास बात रही शहीद जवानों के साथियों को ऑपरेशन के लिए भेजा जाना. तमाम बुरे हालात के बीच एक और अच्छी बात रही कि महबूबा और मोदी सरकार हर कदम पर साथ नजर आये. बीजेपी और पीडीपी के गठबंधन को लेकर जो आशंकाएं जताई जा रही थीं - उसका ये बेहतर जवाब रहा. वैसे अब घाटी में बैंक, पोस्ट आफिस और दूसरे कामकाज सामान्य होते जा रहे हैं, हां - नोटबंदी ने देश के बाकी जगहों की तरह वहां भी मुश्किलें बढ़ाई हैं. लोगों के लिए राहत की बात ये है कि विधायक, मंत्री और खुद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती लगातार इलाकों का दौरा कर रही हैं - और लोगों से उनकी बातें सुन रही हैं.
कुल मिलाकर देखें तो महबूबा मुफ्ती और जम्मू-कश्मीर दोनों ही के लिए 2016 बहुत बुरा रहा. अब खुद महबूबा और कश्मीर के लोगों को भी यही उम्मीद होगी कि 2017 की सुबह अमन का पैगाम लेकर दस्तक दे.
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माना जाता है कि महबूबा ने सीएम की कुर्सी संभालने का फैसला तभी लिया जब उनके पास कोई चारा नहीं बचा था. तब तक अलगाववादी भी उनसे दूरी बना चुके थे - और पीडीपी के भी टूट जाने का खतरा मंडराने लगा था. महबूबा मुफ्ती के लिए दो हज़ार सोलह की शुरुआत ही खराब रही. सात जनवरी को ही उनके पिता और तब के चीफ मिनिस्टर मुफ्ती मोहम्मद सईद का निधन हो गया और लंबे वक्त तक वो सदमे से नहीं उबर पाईं. तमाम सोच विचार के बाद महबूबा ने सीएम की कुर्सी संभाली लेकिन एक के बाद एक घटनाओं ने पूरे साल उन्हें चैन नहीं लेने दिया. साल बीतते बीतते उनके परम विरोधी फारूक अब्दुल्ला ने दावा किया कि वो चाहते तो पीडीपी सरकार गिरा देते लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. महबूबा के पिता की मौत के सदमे से उबरने में लंबा वक्त लगने कि सियासी वजह भी रही. मुफ्ती के जनाजे से आम कश्मीरियों का परहेज उनके लिए बड़ा सेटबैक रहा. ये तो सब मान कर चल ही रहे थे कि पीडीपी के समर्थक सत्ता के लिए उसके बीजेपी का दामन थामने से खफा हैं लेकिन महबूबा को भी ऐसी कभी आशंका न रही. इसे भी पढ़ें : फारूक अब्दुल्ला के हुर्रियत के सपोर्ट के पीछे क्या सिर्फ महबूबा विरोध है? मुफ्ती सईद की बेटी, पीडीपी की प्रमुख और बीजेपी का सपोर्ट होने के कारण महबूबा के कुर्सी पर बैठने में देर होने जैसी कोई बात ही नहीं थी - लेकिन इस उधेड़बुन में उन्होंने तीन महीने लगा दिये. उस दौरान उनकी बीजेपी नेता राम माधव से लेकर कश्मीर मामलों को सीधे देख रहे गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी कई बार बात और मुलाकातें हुईं. महबूबा ने अपने भाई को भी आगे करने की कोशिश की. अचानक उन्हें लेकर पार्टी की जरूरी मीटिंग में ले पहुंचीं तो कयासों के दौर भी शुरू हो गये. पीडीपी के सीनियर नेताओं की भी वैसी ही अपेक्षाएं रहीं जैसी कहीं भी होती हैं. माना जाता है कि महबूबा ने सीएम की कुर्सी संभालने का फैसला तभी लिया जब उनके पास कोई चारा नहीं बचा था. तब तक अलगाववादी भी उनसे दूरी बना चुके थे - और पीडीपी के भी टूट जाने का खतरा मंडराने लगा था. आखिरकार चार अप्रैल को महबूबा ने जम्मू और कश्मीर की पहली महिला मुख्यमंत्री के तौर पर कामकाज संभाला लेकिन वो कांटों भरी कुर्सी ही बनी रही. हंदवाड़ा में एक किशोरी से छेड़छाड़ को लेकर बवाल अभी थमा नहीं कि श्रीनगर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में लोकल और बाहरी छात्रों के बीच टकराव से तनाव पैदा हो गया. फिर जैसे तैसे प्रशासन के काबू पा लेने के बाद महबूबा कुछ राहत महसूस कर रही होंगी कि कश्मीरी पंडितों के लिए कॉलोनी बसाने को लेकर विवाद होने लगा. ये मामला भी जैसे तैसे रफा दफा हुआ. महबूबा सरकार अभी कुछ देर चैन की सांस भी नहीं ले पाई होगी कि आठ जुलाई को हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मार डाला गया. फिर क्या था, विरोध इस कदर होने लगा जैसे घाटी उबलने लगी हो. महबूबा ने ये कह कर मरहम लगाने की कोशिश की कि उन्हें पता होता तो उनकी कोशिश होती कि उसका एनकाउंटर न हो. महबूबा की इन बातों का किसी पर कोई असर नहीं हुआ. घाटी में सबसे लंबे कर्फ्यू में अब तक छियानवे लोग मारे जा चुके हैं जबकि जख्मी होने वालों की तादाद बारह हजार से भी ज्यादा बताई जा रही है जिनमें सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. सबसे बुरा हाल तो उन डेढ़ सौ लोगों का है जो पैलेट गन के शिकार हुए हैं. उनमें से कइयों के हमेशा के लिए अंधे हो जाने का खतरा पैदा हो गया है. आधा साल तो जैसे तैसे गुजरा लेकिन बाकी हिस्सा तो ऐसा रहा जैसा शायद ही किसी ने सोचा हो. लोगों को घरों में इस कदर कैद रहना पड़ा कि ईद की नमाज तक के लिए उन्हें घरों या ज्यादा से ज्यादा कॉलोनी बाहर जाने की छूट नहीं मिली. लंबे कर्फ्यू के चलते बच्चों की पढ़ाई पर भी खराब असर पड़ा, बस अच्छी बात यही रही कि इम्तिहान करा लिये गये. इम्तिहान में बच्चों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया जिससे उनके घरवालों की तकलीफ थोड़ी कम जरूर हुई होगी. मुख्यमंत्री बनने के दो महीने बाद महबूबा चुनाव में उतरीं तो कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्हें उनकी जीत तक का भरोसा नहीं हुआ. अनंतनाग सीट उनके पिता मुफ्ती सईद के निधन से खाली हुई थी - लेकिन सारी आशंकाओं को मात देते हुए महबूबा ने बारह हजार वोटों के अंतर से चुनाव जीता. लेकिन कश्मीर के हालात से निबटने में सरकार द्वारा उठाए गये कदमों को नाकाफी मानते हुए पीडीपी सांसद तारिक हमीद कर्रा ने इस्तीफा दे दिया. स्थानीय मुश्किलों के अलावा सीमा पार से होने वाली घुसपैठ तो पूरे साल चलती रही लेकिन उरी हमला सबसे बुरा रहा जब ड्यूटी के बाद सो रहे जवानों को शहादत के लिए मजबूर होना पड़ा. बहरहाल अंत भला तो सब भला. उरी का बदला सर्जिकल स्ट्राइक के जरिये लिया गया और खास बात रही शहीद जवानों के साथियों को ऑपरेशन के लिए भेजा जाना. तमाम बुरे हालात के बीच एक और अच्छी बात रही कि महबूबा और मोदी सरकार हर कदम पर साथ नजर आये. बीजेपी और पीडीपी के गठबंधन को लेकर जो आशंकाएं जताई जा रही थीं - उसका ये बेहतर जवाब रहा. वैसे अब घाटी में बैंक, पोस्ट आफिस और दूसरे कामकाज सामान्य होते जा रहे हैं, हां - नोटबंदी ने देश के बाकी जगहों की तरह वहां भी मुश्किलें बढ़ाई हैं. लोगों के लिए राहत की बात ये है कि विधायक, मंत्री और खुद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती लगातार इलाकों का दौरा कर रही हैं - और लोगों से उनकी बातें सुन रही हैं. कुल मिलाकर देखें तो महबूबा मुफ्ती और जम्मू-कश्मीर दोनों ही के लिए दो हज़ार सोलह बहुत बुरा रहा. अब खुद महबूबा और कश्मीर के लोगों को भी यही उम्मीद होगी कि दो हज़ार सत्रह की सुबह अमन का पैगाम लेकर दस्तक दे.
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विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में हारने के बावजूद भारत की सायना नेहवाल गुरूवार को जारी हुई विश्व बैडमिंटन रैंकिंग में फिर से विश्व की नंबर एक महिला खिलाड़ी बन गई. सायना को गत रविवार को जकार्ता में विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में स्पेन की कैरोलिना मारिन के हाथों लगातार गेमों में हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन दिलचस्प है कि सायना हारने के बावजूद विजेता खिलाड़ी को पछाड़ फिर से शीर्ष पर पहुंच गई है. पहली बार विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल कर इतिहास रचने वाली देश की स्टार खिलाड़ी सायना 82792 रेटिंग अंक हासिल कर रैंकिंग में नंबर एक पर पहुंच गई जबकि लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन का खिताब जीतने वाली मारिन इस जीत के बावजूद अपने 80612 अंकों को ही बरकरार रख पाई हैं.
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विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में हारने के बावजूद भारत की सायना नेहवाल गुरूवार को जारी हुई विश्व बैडमिंटन रैंकिंग में फिर से विश्व की नंबर एक महिला खिलाड़ी बन गई. सायना को गत रविवार को जकार्ता में विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में स्पेन की कैरोलिना मारिन के हाथों लगातार गेमों में हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन दिलचस्प है कि सायना हारने के बावजूद विजेता खिलाड़ी को पछाड़ फिर से शीर्ष पर पहुंच गई है. पहली बार विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल कर इतिहास रचने वाली देश की स्टार खिलाड़ी सायना बयासी हज़ार सात सौ बानवे रेटिंग अंक हासिल कर रैंकिंग में नंबर एक पर पहुंच गई जबकि लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन का खिताब जीतने वाली मारिन इस जीत के बावजूद अपने अस्सी हज़ार छः सौ बारह अंकों को ही बरकरार रख पाई हैं.
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Don't Miss!
कैट का कहना है कि वो आज जो कुछ भी हैं सलमान खान की बदौलत हैं। कैटरीना के मुताबिक सलमान ने ही उन्हें यह सिखाया है कि किस तरह से मेहनत के जरिए सफलता पाई जाती है।
सलमान की एक्स गर्लफ्रेंड रह चुकी कैट के लिए आज सलमान गॉडफादर है। इतना ही नहीं वह सलमान से काफी कुछ सिखती भी हैं यही कारण है कि जब भी कैटरीना को सलमान के लिए कुछ करने का मौका मिलता है तो वह कभी भी पिछे नहीं रहती।
यही कारण है कि कैट ने सलमान की फिल्म बॉडीगार्ड में आइटम नंबर पर जम कर डांस किया है। अब वह जल्द ही सलमान के साथ यशराज फिल्मस की एक था टाइगर में पर्दे पर नज़र आएंगी।
My brother ki Dulhan is running on the boxoffice starring Imran Khan, Katrina Kaif Ali Zafar and Katrina kaif.
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Don't Miss! कैट का कहना है कि वो आज जो कुछ भी हैं सलमान खान की बदौलत हैं। कैटरीना के मुताबिक सलमान ने ही उन्हें यह सिखाया है कि किस तरह से मेहनत के जरिए सफलता पाई जाती है। सलमान की एक्स गर्लफ्रेंड रह चुकी कैट के लिए आज सलमान गॉडफादर है। इतना ही नहीं वह सलमान से काफी कुछ सिखती भी हैं यही कारण है कि जब भी कैटरीना को सलमान के लिए कुछ करने का मौका मिलता है तो वह कभी भी पिछे नहीं रहती। यही कारण है कि कैट ने सलमान की फिल्म बॉडीगार्ड में आइटम नंबर पर जम कर डांस किया है। अब वह जल्द ही सलमान के साथ यशराज फिल्मस की एक था टाइगर में पर्दे पर नज़र आएंगी। My brother ki Dulhan is running on the boxoffice starring Imran Khan, Katrina Kaif Ali Zafar and Katrina kaif.
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Quick links:
केंद्रीय मंत्री ने नीतीश कुमार पर हमला करते हुए कहा- बिहार में प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं है, इसी के चलते ऐसी घटनाएं होती हैं। पहले भी पुल टूट चुका है। नीतीश के विपक्षी एकता के प्रयासों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा- विपक्ष कभी एक जुट नहीं हो सकता है। नीतीश कुमार 18 साल से राज्य के मुख्यमंत्री हैं, वे अपनी पार्टी को मजबूत नहीं कर पाए, विपक्ष क्या मजबूत करेंगे। वो खुद बैशाखी के सहारे सरकार चला रहे हैं।
बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर करोड़ों की लागत से बन रहे पुल के गिर जाने के मामले पर बिहार बीजेपी के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने नीतीश सरकार पर हमला बोला है। बिहार बीजेपी नीतीश सरकार से इस मामले को लेकर लगातार सवाल कर रही है।
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Quick links: केंद्रीय मंत्री ने नीतीश कुमार पर हमला करते हुए कहा- बिहार में प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं है, इसी के चलते ऐसी घटनाएं होती हैं। पहले भी पुल टूट चुका है। नीतीश के विपक्षी एकता के प्रयासों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा- विपक्ष कभी एक जुट नहीं हो सकता है। नीतीश कुमार अट्ठारह साल से राज्य के मुख्यमंत्री हैं, वे अपनी पार्टी को मजबूत नहीं कर पाए, विपक्ष क्या मजबूत करेंगे। वो खुद बैशाखी के सहारे सरकार चला रहे हैं। बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर करोड़ों की लागत से बन रहे पुल के गिर जाने के मामले पर बिहार बीजेपी के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने नीतीश सरकार पर हमला बोला है। बिहार बीजेपी नीतीश सरकार से इस मामले को लेकर लगातार सवाल कर रही है।
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संसद का मॉनसून सत्र जहां हंगामे की भेंट चढ़ गया तो राज्यसभा में आखिरी दो दिनों में जिस तरह की घटनाएं हुईं, उसको लेकर सत्ता और विपक्ष एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ने में जुटा है। इस बीच गुरुवार शाम उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के चेयरमैन एम वेंकैया नायडू और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मुलाकात की और सदन में हुई घटनाओं पर विचार-विमर्श किया। सूत्रों के मुताबिक, दोनों ने सदन की गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाले सांसदों के खिलाफ सख्त कदम उठाने पर सहमति जाहिर की है।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों ने कुछ सांसदों के व्यवधान पैदा करने वाले व्यवहार पर चिंता जाहिर की। उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि इस तरह के व्यहार को बर्दाश्त ना किया जाए और उचित कदम उठाए जाने की जरूरत है। दोनों ही पीठासीन अधिकारियों ने विचार व्यक्त किया कि चेयर की ओर से बार-बार अपील के बावजूद नियमों और प्रक्रियाओं का के उल्लंघन से देश के सर्वोच्च सदन की गरिमा को नुकसान पहुंचा है और इसे गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है। सूत्रों के मुताबिक, नायडू और बिरला ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कराने का फैसला किया।
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संसद का मॉनसून सत्र जहां हंगामे की भेंट चढ़ गया तो राज्यसभा में आखिरी दो दिनों में जिस तरह की घटनाएं हुईं, उसको लेकर सत्ता और विपक्ष एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ने में जुटा है। इस बीच गुरुवार शाम उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के चेयरमैन एम वेंकैया नायडू और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मुलाकात की और सदन में हुई घटनाओं पर विचार-विमर्श किया। सूत्रों के मुताबिक, दोनों ने सदन की गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाले सांसदों के खिलाफ सख्त कदम उठाने पर सहमति जाहिर की है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों ने कुछ सांसदों के व्यवधान पैदा करने वाले व्यवहार पर चिंता जाहिर की। उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि इस तरह के व्यहार को बर्दाश्त ना किया जाए और उचित कदम उठाए जाने की जरूरत है। दोनों ही पीठासीन अधिकारियों ने विचार व्यक्त किया कि चेयर की ओर से बार-बार अपील के बावजूद नियमों और प्रक्रियाओं का के उल्लंघन से देश के सर्वोच्च सदन की गरिमा को नुकसान पहुंचा है और इसे गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है। सूत्रों के मुताबिक, नायडू और बिरला ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कराने का फैसला किया।
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हिमेश रेशमिया का एक कालजयी गीत है. 'मन का रेडियो बजने दे जरा. ' चुनावों के मौसम में मन की बात करना हालांकि बेमानी-सा है क्योंकि पहले तो यह सामान्य ज्ञान है कि आपके मन की किसी को पड़ी नहीं है, दूसरे क्योंकि प्रवचनी सुषमा स्वराज चुनावी हर्फो में सच कह ही चुकी हैं, 'चुनाव के आखिर में गिनती मनों की नहीं, मतों की होती है'. इसलिए जरूरी है कि तन-मन से ज्यादा धन-बल-शस्त्र-शत्रु-बदलाव-क्रांति-लहर-विकास-रोजगार-जाति जैसे शब्दों से वाक्य-विन्यास करें क्योंकि यही शब्द मतों की हर-हर गंगे हैं, डांस आफ डेमोक्रेसी में समां बांधने वाला संगीत है. इन्हीं में सब्जबाग दिखाने की ईश्वरीय शक्ति है. 2014 के इन आम चुनावों में वैसे भी सब्जबाग, ईश्वर और सोशल मीडिया ही परम सत्य है.
कुछ साल पहले का परम सत्य अलग था. तब चुनावों में राजनीतिक रैलियों का कोई विकल्प नहीं था. वही यथार्थ होता था और वहीं पर युद्ध समाप्त होता था. अब कई मैदान हैं जहां लड़ना है. टीवी अखबार तो थे भी, हैं भी लेकिन अब सोशल मीडिया के आक्रमण रूपी आगमन ने पार्टियों में ई-कार्यसेवकों की फौज खड़ी कर दी है. आप किसी रैली को तमाशे की ही तरह देखने चले गए और रात को जब लौटकर फेसबुक खोला तो पता चला आप उस पार्टी के पेज पर ऐसे टंगे हैं जैसे दशक पुराने उत्साही समर्थक हों. संवाद स्थापित करने वाले इन सब चतुर साधनों के बीच सीधा-साधा रेडियो कहीं पीछे छुप गया है. जैसे पुराने कपड़ों के ढेर के नीचे बचपन में दबा रह जाता था. और हम पृथ्वी का चक्कर लगाने में लगने वाली तेजी से पूरे घर में घूमते हुए उस मन के रेडियो को ढूंढ़ते थे और थोड़ी देर बाद थकने के बाद उसे भूलकर टीवी के सामने पालतीं मार बैठ जाते थे. आज भी वही हाल है. चुनाव प्रचार में रेडियो सबसे पीछे खड़ा एक हलका वार है.
आंकड़े आप से लेकिन अलग तरह से बात करते हैं. वे कहते हैं कि देश में तकरीबन 16 करोड़ लोग रेडियो सुनते हैं और जहां पिछले आम चुनावों में पार्टियों ने अपने एडवरटाइजिंग बजट का सिर्फ 2 से 5 प्रतिशत रेडियो एडवरटाइजिंग पर खर्च किया था, इस बार वही पार्टियां 10 से 15 प्रतिशत का खर्चा रेडियो पर कर रही हैं. देश के अलग-अलग शहरों के रेडियो जॉकी आंकड़े देते हैं कि इस चुनावी मौसम में दिल्ली जैसे बड़े शहरों में 10 सेकंड के रेडियो विज्ञापन की कीमत 1,000 रुपये से शुरू होती है और जबलपुर-जयपुर जैसे शहरों में तकरीबन 300 रुपए से. लेकिन चुनाव के दौर में आंकड़ों के फेर में कम ही पड़ना चाहिए. ये वह दौर होता है जब हमारी जनसंख्या के 0. 01 प्रतिशत का सेंपल साइज लेकर 'सभी' पूरे देश की सारी नब्जों को बिल्कुल सटीक पकड़ते हुए देश का सबसे बड़ा ओपिनियन पोल कराने का दावा करते हैं, और एक परिणाम के साथ दूसरा परिणाम मुफ्त बांटते हैं. इसके बाद एक शख्स की लहर बनती है, लहर जिसे फिर बवंडर बनाने पर काम शुरू होता है.
आंकड़ों से इतर रेडियो की खूबी यह है कि ये वहां पहुंचता है जहां टीवी और सोशल मीडिया नहीं पहुंच पाता. मोची की दुकान पर, रेहड़ी पर, गन्ने के मधुशाला रस वाले कोनों पर, पंद्रह का नींबू पानी बेचने वाले हाथ ठेलों पर, गांवों में, टीवी की डिजिटल क्रांति से दूर घरों में. शहरों में अपर होता जा रहा मिडिल क्लास इसे कार में सुनता है. दफ्तर और घर के बीच रोज छोटे-छोटे सफर करने वाले लोग रास्ते, बस और मेट्रो में. एक बड़ा शहरी तबका रेडियो सिर्फ और सिर्फ तभी सुनता है जब वह नाई की दुकान पर बैठा होता है. कुछ शहरी लोगों की जिंदगी का यह एक अहम पुराना हिस्सा है तो काफी लोगों की जिंदगी का यह बिल्कुल भी हिस्सा नहीं है. जिन लोगों के पास संचार और मनोरंजन के दूसरे विकल्प हैं उनके लिए राजनैतिक पार्टियां अपने चुनावी एडवरटाइजिंग बजट का 80 फीसदी पैसा खर्च करती हैं. लेकिन वे लोग, जो जनसंख्या में एक बड़ी भागीदारी रखते हैं, और सिर्फ रेडियो तक अपनी पहुंच, क्या उनकी राजनीतिक समझ को रेडियो प्रभावित कर पाता है?
जवाब 'ना' की तरफ ज्यादा झुकता है लेकिन उसे 'हैंस प्रूव्ड' करने से पहले रेडियो को लेकर की जा रही चुनावी प्रचार की कोशिशों पर लिखना जरूरी है. पिछले चुनावों से ज्यादा ध्यान, वक्त और पैसा इस बार रेडियो पर विज्ञापन और जिंगल्स के लिए खर्च हुआ है, साफ सुनाई देता है. भाजपा अपनी मार्केटिंग में आगे है, ये भी साफ है. मोदी सबको नमस्कार कर भारत के भाग्य को बदलने के लिए वोट मांग रहे हैं. सौगंध खा रहे हैं. 'शासक बहुत देख लिए आपने, एक सेवक को मौका देकर देखिए' और 'मैं आपको भरोसा देता हूं, आपके सपनों को पूरा करने के लिए मैं कोई कसर नहीं छोडूंगा' की रटंतू विद्यार्थियों-सी रट से रेडियो पटा पड़ा है. सारे नेताओं ने अपने-अपने वोटरों की नप्ती कर ली है जिनके आधार पर बड़ी-बड़ी कंपनियां विज्ञापन, नारे और जिंगल्स बना रही हैं और रेडियो जॉकी भी इन्हें गानों से ज्यादा सुना रहे हैं. क्योंकि उन्हें भरोसा है, अच्छे दिन आने वाले हैं.
लेकिन रेडियो पर आने वाले विज्ञापनों के अच्छे दिन कब आएंगे, कह नहीं सकते. रेडियो मिर्ची से जुड़े आरजे रूपक के अनुसार, 'रेडियो पर क्रिएटिविटी एक चैलेंज है. बजट की समस्या तो है ही लेकिन चुनावी विज्ञापन देने वाली पार्टियां सिर्फ अपनी बात जनता तक पहुंचाने में दिलचस्पी रखती है, उन्हें क्रिएटिविटी से कम ही मतलब होता है. ' रेडियो पर हमेशा से ही खराब स्तर के विज्ञापनों का बोलबाला रहा है. इस बार चुनाव प्रचार के रेडियो विज्ञापन भी उसी काई में लिपटे हुए हैं. पहले भी रहे हैं, लेकिन चूंकि इस बार पैसा बरसात की मुफ्त बौछारों-सा बहा है तो उम्मीद थी कि चुनावी विज्ञापन भी कोका-कोला विज्ञापनों के स्तर के तो होंगे ही. लेकिन ज्यादातर या तो टीवी पर आने वाले विज्ञापनों के आडियो ट्रैक भर हैं या फिर किसी चिरकुट कवि की मीटर पर चढ़ी आढ़ी-टेढ़ी नज्म. यह तो अच्छा हुआ कि चुनावों की इस ऋतु में गुलजार को दादा साहेब फालके सम्मान मिला और इस बहाने रेडियो ने गुलजार के गीत सुनाकर इन चुनावी विज्ञापनों से कुछ राहत दे दी. उसी दौरान यह खयाल भी आया कि काश चुनाव प्रचार भी गुलजारमय हो सकते! नफासत से, अदब से, बेअदब हुए बिना पार्टियां प्रचार करतीं. कोई पार्टी अपने प्रचार में 116 चांद की रातों का वादा करती, कोई कहती मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने हैं. कोई खाली बोर दोपहरों का ही मेनिफेस्टो में जिक्र कर देता, कोई आंखों को वीजा नहीं लगता जैसी गंभीर बात ही कह देता. कोई विज्ञापन भमीरी (झींगुर की आवाज के लिए प्रयुक्त शब्द) पढ़ने के बाद के सन्नाटों को समेट पाता, कोई तिल को तिल रहने देता, पहाड़ नहीं बनाता. लेकिन इस मुश्किल समय में, समय जो सदैव से मुश्किल रहा है, चुनाव रूमानी नहीं होते. उनमें कविता नहीं होती. वे तो प्रसून जोशी को भी साधारण कर देते हैं. और साधारण को असाधारण बताते जाते हैं. तब तक जब तक हम उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बना देते.
लेकिन अगर आप चुनाव और उनके प्रचार में कविता नहीं ढूंढते तो गंभीरता तो अवश्य ही ढूंढ़ते होंगे. मगर सरकारी उदासीनता ने रेडियो को कम अधिकार देकर उसे सिर्फ चुनावी विज्ञापनों और जिंगल्स तक ही सीमित कर दिया है. एक माध्यम जिसकी पहुंच सर्वाधिक होनी थी, उसकी हानि हो चुकी है. हमारे यहां रेडियो पर चुनावी बहस नहीं होती, नेता इंटरव्यू नहीं देते, गवर्नेंस पर बात नहीं करते, और यह सब अमेरिका जैसे अनेको देशों में होता रहा है. एक मशहूर आरजे के मुताबिक, 'आज के वक्त में आप कट कर नहीं रह सकते. सारी दुनिया पॉलिटिकल मुद्दों पर बात कर ही रही है लेकिन हम नहीं कर सकते. अजीब तो है, लेकिन नियम है, मानना पड़ता है. ' दिल्ली के एक दूसरे मशहूर एफएम के आरजे अपने गुस्से को छिपाते नहीं है, 'यह समझ नहीं आता कि मुझे नेता के बारे में बात करने की इजाजत नहीं है लेकिन उस नेता को मेरे चैनल पर अपना ही विज्ञापन देने की इजाजत है. क्यों भाई? और अगर मैंने कभी गलती से भी कुछ राजनैतिक बात रेडियो पर कर दी तो उसी वक्त मुझे नोटिस देकर निकाल दिया जाएगा. खतरनाक तानाशाही है रेडियो में. ' विज्ञापन और जिंगल्स के अलावा रेडियो अगर चुनाव के लिए कुछ करता है तो चुनाव आयोग से करार, जिसके बाद रेडियो जॉकी महीने भर लोगों को वोट डालने के लिए प्रोत्साहित करते रहते हैं. 92. 7 बिग एफएम, भोपाल स्टेशन से जुड़े आरजे रवि इस करनी से खुश भी हैं, 'हम लोग पिछले कुछ वक्त से हर एक घंटे में सुनने वाले को याद दिलाते हैं कि सीधी उंगली का उपयोग इस बार आपको जरूर करना है. बहुत मेहनत कर रहे हैं इसपर हम इस बार. ' लेकिन यह इसलिए होता है क्योंकि वोट करने के लिए जागरूकता लाना सोसाइटी में 'कूल' है अब. समाज सेवा की नई पीआर एक्सरसाइज. इसके अलावा कभी-भी कोई भी रेडियो जॉकी चुनाव से जुड़ी समझदारी भरी बात करता हुआ नहीं मिलता. हिंदुस्तान में आज भी रेडियो सिर्फ भूले-बिसरे गीत सुनाने वाला ही माध्यम है. गंभीरता उसकी फ्रीक्वेंसी नहीं है.
हालांकि रेडियो ने इतना तो कर ही दिया है कि रेहड़ी पर मूंगफली बेचने वाले मंगतू की मूंगफली के साथ मोदी भी बिक रहे हैं. लेकिन बस इतना ही. समाज की चेतना जागृति में कमर्शियल रेडियो का कोई योगदान नहीं है.
हिमेश रेशमिया का एक और कालजयी गीत है. जिंदगी जैसे एक रेडियो, अलग-अलग धुन सुनाती है. आपको दो बार उनका नाम पढ़कर और उसके आगे दो बार ही कालजयी आता देखकर क्रोध अवश्य आ रहा होगा, लेकिन आप यह तो मानेंगे ही न कि 'हम मोदी जी को लाने वाले हैं, अच्छे दिन आने वाले हैं' गीत की तुलना अगर आप हिमेश के इन गीतों से करेंगे तो हिमेश को मोदी से आगे ही पाएंगे!
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हिमेश रेशमिया का एक कालजयी गीत है. 'मन का रेडियो बजने दे जरा. ' चुनावों के मौसम में मन की बात करना हालांकि बेमानी-सा है क्योंकि पहले तो यह सामान्य ज्ञान है कि आपके मन की किसी को पड़ी नहीं है, दूसरे क्योंकि प्रवचनी सुषमा स्वराज चुनावी हर्फो में सच कह ही चुकी हैं, 'चुनाव के आखिर में गिनती मनों की नहीं, मतों की होती है'. इसलिए जरूरी है कि तन-मन से ज्यादा धन-बल-शस्त्र-शत्रु-बदलाव-क्रांति-लहर-विकास-रोजगार-जाति जैसे शब्दों से वाक्य-विन्यास करें क्योंकि यही शब्द मतों की हर-हर गंगे हैं, डांस आफ डेमोक्रेसी में समां बांधने वाला संगीत है. इन्हीं में सब्जबाग दिखाने की ईश्वरीय शक्ति है. दो हज़ार चौदह के इन आम चुनावों में वैसे भी सब्जबाग, ईश्वर और सोशल मीडिया ही परम सत्य है. कुछ साल पहले का परम सत्य अलग था. तब चुनावों में राजनीतिक रैलियों का कोई विकल्प नहीं था. वही यथार्थ होता था और वहीं पर युद्ध समाप्त होता था. अब कई मैदान हैं जहां लड़ना है. टीवी अखबार तो थे भी, हैं भी लेकिन अब सोशल मीडिया के आक्रमण रूपी आगमन ने पार्टियों में ई-कार्यसेवकों की फौज खड़ी कर दी है. आप किसी रैली को तमाशे की ही तरह देखने चले गए और रात को जब लौटकर फेसबुक खोला तो पता चला आप उस पार्टी के पेज पर ऐसे टंगे हैं जैसे दशक पुराने उत्साही समर्थक हों. संवाद स्थापित करने वाले इन सब चतुर साधनों के बीच सीधा-साधा रेडियो कहीं पीछे छुप गया है. जैसे पुराने कपड़ों के ढेर के नीचे बचपन में दबा रह जाता था. और हम पृथ्वी का चक्कर लगाने में लगने वाली तेजी से पूरे घर में घूमते हुए उस मन के रेडियो को ढूंढ़ते थे और थोड़ी देर बाद थकने के बाद उसे भूलकर टीवी के सामने पालतीं मार बैठ जाते थे. आज भी वही हाल है. चुनाव प्रचार में रेडियो सबसे पीछे खड़ा एक हलका वार है. आंकड़े आप से लेकिन अलग तरह से बात करते हैं. वे कहते हैं कि देश में तकरीबन सोलह करोड़ लोग रेडियो सुनते हैं और जहां पिछले आम चुनावों में पार्टियों ने अपने एडवरटाइजिंग बजट का सिर्फ दो से पाँच प्रतिशत रेडियो एडवरटाइजिंग पर खर्च किया था, इस बार वही पार्टियां दस से पंद्रह प्रतिशत का खर्चा रेडियो पर कर रही हैं. देश के अलग-अलग शहरों के रेडियो जॉकी आंकड़े देते हैं कि इस चुनावी मौसम में दिल्ली जैसे बड़े शहरों में दस सेकंड के रेडियो विज्ञापन की कीमत एक,शून्य रुपयापये से शुरू होती है और जबलपुर-जयपुर जैसे शहरों में तकरीबन तीन सौ रुपयापए से. लेकिन चुनाव के दौर में आंकड़ों के फेर में कम ही पड़ना चाहिए. ये वह दौर होता है जब हमारी जनसंख्या के शून्य. एक प्रतिशत का सेंपल साइज लेकर 'सभी' पूरे देश की सारी नब्जों को बिल्कुल सटीक पकड़ते हुए देश का सबसे बड़ा ओपिनियन पोल कराने का दावा करते हैं, और एक परिणाम के साथ दूसरा परिणाम मुफ्त बांटते हैं. इसके बाद एक शख्स की लहर बनती है, लहर जिसे फिर बवंडर बनाने पर काम शुरू होता है. आंकड़ों से इतर रेडियो की खूबी यह है कि ये वहां पहुंचता है जहां टीवी और सोशल मीडिया नहीं पहुंच पाता. मोची की दुकान पर, रेहड़ी पर, गन्ने के मधुशाला रस वाले कोनों पर, पंद्रह का नींबू पानी बेचने वाले हाथ ठेलों पर, गांवों में, टीवी की डिजिटल क्रांति से दूर घरों में. शहरों में अपर होता जा रहा मिडिल क्लास इसे कार में सुनता है. दफ्तर और घर के बीच रोज छोटे-छोटे सफर करने वाले लोग रास्ते, बस और मेट्रो में. एक बड़ा शहरी तबका रेडियो सिर्फ और सिर्फ तभी सुनता है जब वह नाई की दुकान पर बैठा होता है. कुछ शहरी लोगों की जिंदगी का यह एक अहम पुराना हिस्सा है तो काफी लोगों की जिंदगी का यह बिल्कुल भी हिस्सा नहीं है. जिन लोगों के पास संचार और मनोरंजन के दूसरे विकल्प हैं उनके लिए राजनैतिक पार्टियां अपने चुनावी एडवरटाइजिंग बजट का अस्सी फीसदी पैसा खर्च करती हैं. लेकिन वे लोग, जो जनसंख्या में एक बड़ी भागीदारी रखते हैं, और सिर्फ रेडियो तक अपनी पहुंच, क्या उनकी राजनीतिक समझ को रेडियो प्रभावित कर पाता है? जवाब 'ना' की तरफ ज्यादा झुकता है लेकिन उसे 'हैंस प्रूव्ड' करने से पहले रेडियो को लेकर की जा रही चुनावी प्रचार की कोशिशों पर लिखना जरूरी है. पिछले चुनावों से ज्यादा ध्यान, वक्त और पैसा इस बार रेडियो पर विज्ञापन और जिंगल्स के लिए खर्च हुआ है, साफ सुनाई देता है. भाजपा अपनी मार्केटिंग में आगे है, ये भी साफ है. मोदी सबको नमस्कार कर भारत के भाग्य को बदलने के लिए वोट मांग रहे हैं. सौगंध खा रहे हैं. 'शासक बहुत देख लिए आपने, एक सेवक को मौका देकर देखिए' और 'मैं आपको भरोसा देता हूं, आपके सपनों को पूरा करने के लिए मैं कोई कसर नहीं छोडूंगा' की रटंतू विद्यार्थियों-सी रट से रेडियो पटा पड़ा है. सारे नेताओं ने अपने-अपने वोटरों की नप्ती कर ली है जिनके आधार पर बड़ी-बड़ी कंपनियां विज्ञापन, नारे और जिंगल्स बना रही हैं और रेडियो जॉकी भी इन्हें गानों से ज्यादा सुना रहे हैं. क्योंकि उन्हें भरोसा है, अच्छे दिन आने वाले हैं. लेकिन रेडियो पर आने वाले विज्ञापनों के अच्छे दिन कब आएंगे, कह नहीं सकते. रेडियो मिर्ची से जुड़े आरजे रूपक के अनुसार, 'रेडियो पर क्रिएटिविटी एक चैलेंज है. बजट की समस्या तो है ही लेकिन चुनावी विज्ञापन देने वाली पार्टियां सिर्फ अपनी बात जनता तक पहुंचाने में दिलचस्पी रखती है, उन्हें क्रिएटिविटी से कम ही मतलब होता है. ' रेडियो पर हमेशा से ही खराब स्तर के विज्ञापनों का बोलबाला रहा है. इस बार चुनाव प्रचार के रेडियो विज्ञापन भी उसी काई में लिपटे हुए हैं. पहले भी रहे हैं, लेकिन चूंकि इस बार पैसा बरसात की मुफ्त बौछारों-सा बहा है तो उम्मीद थी कि चुनावी विज्ञापन भी कोका-कोला विज्ञापनों के स्तर के तो होंगे ही. लेकिन ज्यादातर या तो टीवी पर आने वाले विज्ञापनों के आडियो ट्रैक भर हैं या फिर किसी चिरकुट कवि की मीटर पर चढ़ी आढ़ी-टेढ़ी नज्म. यह तो अच्छा हुआ कि चुनावों की इस ऋतु में गुलजार को दादा साहेब फालके सम्मान मिला और इस बहाने रेडियो ने गुलजार के गीत सुनाकर इन चुनावी विज्ञापनों से कुछ राहत दे दी. उसी दौरान यह खयाल भी आया कि काश चुनाव प्रचार भी गुलजारमय हो सकते! नफासत से, अदब से, बेअदब हुए बिना पार्टियां प्रचार करतीं. कोई पार्टी अपने प्रचार में एक सौ सोलह चांद की रातों का वादा करती, कोई कहती मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने हैं. कोई खाली बोर दोपहरों का ही मेनिफेस्टो में जिक्र कर देता, कोई आंखों को वीजा नहीं लगता जैसी गंभीर बात ही कह देता. कोई विज्ञापन भमीरी पढ़ने के बाद के सन्नाटों को समेट पाता, कोई तिल को तिल रहने देता, पहाड़ नहीं बनाता. लेकिन इस मुश्किल समय में, समय जो सदैव से मुश्किल रहा है, चुनाव रूमानी नहीं होते. उनमें कविता नहीं होती. वे तो प्रसून जोशी को भी साधारण कर देते हैं. और साधारण को असाधारण बताते जाते हैं. तब तक जब तक हम उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बना देते. लेकिन अगर आप चुनाव और उनके प्रचार में कविता नहीं ढूंढते तो गंभीरता तो अवश्य ही ढूंढ़ते होंगे. मगर सरकारी उदासीनता ने रेडियो को कम अधिकार देकर उसे सिर्फ चुनावी विज्ञापनों और जिंगल्स तक ही सीमित कर दिया है. एक माध्यम जिसकी पहुंच सर्वाधिक होनी थी, उसकी हानि हो चुकी है. हमारे यहां रेडियो पर चुनावी बहस नहीं होती, नेता इंटरव्यू नहीं देते, गवर्नेंस पर बात नहीं करते, और यह सब अमेरिका जैसे अनेको देशों में होता रहा है. एक मशहूर आरजे के मुताबिक, 'आज के वक्त में आप कट कर नहीं रह सकते. सारी दुनिया पॉलिटिकल मुद्दों पर बात कर ही रही है लेकिन हम नहीं कर सकते. अजीब तो है, लेकिन नियम है, मानना पड़ता है. ' दिल्ली के एक दूसरे मशहूर एफएम के आरजे अपने गुस्से को छिपाते नहीं है, 'यह समझ नहीं आता कि मुझे नेता के बारे में बात करने की इजाजत नहीं है लेकिन उस नेता को मेरे चैनल पर अपना ही विज्ञापन देने की इजाजत है. क्यों भाई? और अगर मैंने कभी गलती से भी कुछ राजनैतिक बात रेडियो पर कर दी तो उसी वक्त मुझे नोटिस देकर निकाल दिया जाएगा. खतरनाक तानाशाही है रेडियो में. ' विज्ञापन और जिंगल्स के अलावा रेडियो अगर चुनाव के लिए कुछ करता है तो चुनाव आयोग से करार, जिसके बाद रेडियो जॉकी महीने भर लोगों को वोट डालने के लिए प्रोत्साहित करते रहते हैं. बानवे. सात बिग एफएम, भोपाल स्टेशन से जुड़े आरजे रवि इस करनी से खुश भी हैं, 'हम लोग पिछले कुछ वक्त से हर एक घंटे में सुनने वाले को याद दिलाते हैं कि सीधी उंगली का उपयोग इस बार आपको जरूर करना है. बहुत मेहनत कर रहे हैं इसपर हम इस बार. ' लेकिन यह इसलिए होता है क्योंकि वोट करने के लिए जागरूकता लाना सोसाइटी में 'कूल' है अब. समाज सेवा की नई पीआर एक्सरसाइज. इसके अलावा कभी-भी कोई भी रेडियो जॉकी चुनाव से जुड़ी समझदारी भरी बात करता हुआ नहीं मिलता. हिंदुस्तान में आज भी रेडियो सिर्फ भूले-बिसरे गीत सुनाने वाला ही माध्यम है. गंभीरता उसकी फ्रीक्वेंसी नहीं है. हालांकि रेडियो ने इतना तो कर ही दिया है कि रेहड़ी पर मूंगफली बेचने वाले मंगतू की मूंगफली के साथ मोदी भी बिक रहे हैं. लेकिन बस इतना ही. समाज की चेतना जागृति में कमर्शियल रेडियो का कोई योगदान नहीं है. हिमेश रेशमिया का एक और कालजयी गीत है. जिंदगी जैसे एक रेडियो, अलग-अलग धुन सुनाती है. आपको दो बार उनका नाम पढ़कर और उसके आगे दो बार ही कालजयी आता देखकर क्रोध अवश्य आ रहा होगा, लेकिन आप यह तो मानेंगे ही न कि 'हम मोदी जी को लाने वाले हैं, अच्छे दिन आने वाले हैं' गीत की तुलना अगर आप हिमेश के इन गीतों से करेंगे तो हिमेश को मोदी से आगे ही पाएंगे!
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झाबुआ-धार (टीम नईदुनिया)। इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग का इंदौर से पिटोल तक के हिस्से का सफर वाहन चालकों को बहुत महंगा पड़ रहा है। धार-झाबुआ होकर गुजरने वाली यह टोल सड़क पर जगह-जगह गड्डे हो गए हैं। इंदौर से पिटोल तक के हिस्से में 155 किमी सफर के लिए वाहन चालकों को एक ओर का टोल टैक्स ही 255 रुपए चुकाना पड़ता है। टोल दर ज्यादा होने के बादवजूद धार से इंदौर के बीच कई स्थानों पर सड़क खराब हो गई है। दस से ज्यादा स्थानों पर स्थिति खराब है। इधर, झाबुआ से राजगढ़ तक की यात्रा में वाहन चालकों को गड्डों से बचकर चलने का संघर्षपूर्ण सफर करना पड़ता है। माछलिया घाट में 16 किमी के हिस्से में फोरलेन बना ही नहीं है। घाट में घंटों यातायात जाम की स्थिति भी बार-बार पैदा होती है। सड़क बारिश की शुरुआत में ही दयनीय हालत में दिखने लगी है।
धार विधायक से लेकर झाबुआ के जिम्मेदारों ने परिवहन मंत्रालय दिल्ली में एक नहीं, बल्कि अनेक बार टोल राशि अधिक लेने की शिकायत की। अधिकारियों को जांच करने का कहा गया तो उन्होंने अपनी रिपोर्ट में टोल राशि नियमों के अनुरूप लेने की बात कही। बता दें कि इंदौर जिले के ग्राम मेठवाड़ा के टोल प्लाजा पर टोल राशि कार व हल्के वाहनों से 135 रुपये प्रतिदिन एक तरफ के लिए ली जाती है, वहीं दत्तीगांव टोल पर 110 रुपये लिए जाते हैं। इस मार्ग पर माछलिया घाट का निर्माण हो जाने पर टोल की राशि और भी अधिक हो जाएगी।
- धार व इंदौर जिले की सीमा पर मेठवाड़ा में है पहला टोल।
- धार जिले के दत्तीगांव में है दूसरा टोल।
- रोज 15 से 18 हजार वाहन गुजरते हैं।
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झाबुआ-धार । इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग का इंदौर से पिटोल तक के हिस्से का सफर वाहन चालकों को बहुत महंगा पड़ रहा है। धार-झाबुआ होकर गुजरने वाली यह टोल सड़क पर जगह-जगह गड्डे हो गए हैं। इंदौर से पिटोल तक के हिस्से में एक सौ पचपन किमी सफर के लिए वाहन चालकों को एक ओर का टोल टैक्स ही दो सौ पचपन रुपयापए चुकाना पड़ता है। टोल दर ज्यादा होने के बादवजूद धार से इंदौर के बीच कई स्थानों पर सड़क खराब हो गई है। दस से ज्यादा स्थानों पर स्थिति खराब है। इधर, झाबुआ से राजगढ़ तक की यात्रा में वाहन चालकों को गड्डों से बचकर चलने का संघर्षपूर्ण सफर करना पड़ता है। माछलिया घाट में सोलह किमी के हिस्से में फोरलेन बना ही नहीं है। घाट में घंटों यातायात जाम की स्थिति भी बार-बार पैदा होती है। सड़क बारिश की शुरुआत में ही दयनीय हालत में दिखने लगी है। धार विधायक से लेकर झाबुआ के जिम्मेदारों ने परिवहन मंत्रालय दिल्ली में एक नहीं, बल्कि अनेक बार टोल राशि अधिक लेने की शिकायत की। अधिकारियों को जांच करने का कहा गया तो उन्होंने अपनी रिपोर्ट में टोल राशि नियमों के अनुरूप लेने की बात कही। बता दें कि इंदौर जिले के ग्राम मेठवाड़ा के टोल प्लाजा पर टोल राशि कार व हल्के वाहनों से एक सौ पैंतीस रुपयापये प्रतिदिन एक तरफ के लिए ली जाती है, वहीं दत्तीगांव टोल पर एक सौ दस रुपयापये लिए जाते हैं। इस मार्ग पर माछलिया घाट का निर्माण हो जाने पर टोल की राशि और भी अधिक हो जाएगी। - धार व इंदौर जिले की सीमा पर मेठवाड़ा में है पहला टोल। - धार जिले के दत्तीगांव में है दूसरा टोल। - रोज पंद्रह से अट्ठारह हजार वाहन गुजरते हैं।
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Adityapur (sanjeev Mehta) : आदित्यपुर थाना क्षेत्र के टीचर ट्रेनिंग मोड़ पर शुक्रवार को दिनदहाड़े बदमाशों ने मोबाइल छिनतई का प्रयास किया. छिनतई में असफल होने पर बदमाशों ने युवक को मारपीट कर घायल कर दिया. बताया जाता है कि आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत टीचर ट्रेनिंग मोड़ पर लगभग शाम 5:30 बजे लालबाबू यादव के लड़के भीम यादव से एक बदमाश मोबाइल छिनतई कर रहा था.
इसका विरोध करने पर युवक ने फोन करके अपने साथियों को बुला लिया और भीम को मारपीट कर बुरी तरह घायल कर दिया. इसमें दो लोगों को चोट लगी है. घटना की सूचना मौजूद लोगों ने आदित्यपुर थाना को दी. साथ ही स्थानीय लोगों ने दौड़ाया तो आरोपी अपनी बाइक छोड़कर भाग गया है. मौके पर पहुंची पुलिस बाइक जब्त कर थाना ले आई है. दिनदहाड़े घटी इस घटना से आम जनता में काफी रोष है.
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Adityapur : आदित्यपुर थाना क्षेत्र के टीचर ट्रेनिंग मोड़ पर शुक्रवार को दिनदहाड़े बदमाशों ने मोबाइल छिनतई का प्रयास किया. छिनतई में असफल होने पर बदमाशों ने युवक को मारपीट कर घायल कर दिया. बताया जाता है कि आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत टीचर ट्रेनिंग मोड़ पर लगभग शाम पाँच:तीस बजे लालबाबू यादव के लड़के भीम यादव से एक बदमाश मोबाइल छिनतई कर रहा था. इसका विरोध करने पर युवक ने फोन करके अपने साथियों को बुला लिया और भीम को मारपीट कर बुरी तरह घायल कर दिया. इसमें दो लोगों को चोट लगी है. घटना की सूचना मौजूद लोगों ने आदित्यपुर थाना को दी. साथ ही स्थानीय लोगों ने दौड़ाया तो आरोपी अपनी बाइक छोड़कर भाग गया है. मौके पर पहुंची पुलिस बाइक जब्त कर थाना ले आई है. दिनदहाड़े घटी इस घटना से आम जनता में काफी रोष है.
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- Impetigo के लिए थेरेपीः क्या साइड इफेक्ट्स हैं?
Impetigo संक्रमण (लाइफन पीस) एक जीवाणु त्वचा संक्रमण है जो मुख्य रूप से बच्चों में होता है। इस संक्रमण के दौरान यह reddening और ब्लिस्टरिंग आता है। विशेष रूप से रोग के शुरुआती दिनों में अत्यधिक संक्रामक है, इसलिए उस व्यक्ति अलग किया जा और स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए।
- बुलबुले की फोड़ के बाद एक शहद पीले पपड़ी रोड़ा का सबसे महत्वपूर्ण सुविधाओं में से एक है। संक्रामक त्वचा रोग विशेष रूप से बच्चों को मिलता है।
एक पर बुलबुले रोड़ा contagiosum संक्रमण ( "संक्रामक दाने" के लिए लैटिन) दो रूपों में होते हैंः छोटा बुलबुला आकार और बुलबुला। "छोटा बुलबुला में छोटे बुलबुले है कि जल्दी से फट उठता के रूप में। लीक स्राव जल्दी से फिर से सूख जाता है और यह शहद से रंग परत रूपों," डॉ बताते हैं म्यूनिख के त्वचा विशेषज्ञ, हंस-उलरिच वोगेट।
"फिर भी बड़ा-बुलबुला आकार है Impetigo bullosa कहा जाता है। बुलबुले स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, लेकिन घुसपैठ दुर्लभ हैं। यह दोनों रूपों विभिन्न बैक्टीरिया के कारण होते हैंः आमतौर पर छोटे-बुलबुले के रूप में staphylococci और बड़ा-बुलबुला आकार स्ट्रेप्टोकोक्की", Voigt कहते हैं।
प्रेरणा संक्रमण विशेष रूप से अक्सर बच्चों को प्रभावित करता हैक्योंकि बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली अभी तक पूरी तरह से विकसित नहीं हुई है और इसलिए बैक्टीरिया इतनी अच्छी तरह से लड़ नहीं सकता है। रोगजनक त्वचा से त्वचा तक फैल जाते हैं। "बालवाड़ी में या स्कूल में बच्चों वयस्कों की तुलना में एक साथ खेलते हैं और कर रहे हैं एक साथ करीब। इसके अलावा, चोट के इन स्थलों पर बच्चों को भी खरोंच के लिए अधिक इच्छुक हैं। रोड़ा संक्रमण होते हैं अधिक बार," लाइफलाइन विशेषज्ञ वोइट कहते हैं।
बैक्टीरिया भी नासोफैरेनजील स्पेस में होता है। वहाँ पहले वे लक्षण पैदा नहीं करते, लेकिन जब बच्चे चेहरे में उदाहरण के लिए खरोंच, तो बैक्टीरिया त्वचा घुसना और संक्रमण पैदा कर सकता।
" Impetigo संक्रमण बुखार, सामान्य malaise और ठंड जैसे सामान्य लक्षणों का कारण बनता है, से गंभीर जटिलता एक गुर्दा संक्रमण हो सकता है, जिसके बाद गुर्दे की समस्या हो सकती है। शायद ही कभी यह आ जाता है संधि बुखार, यह बैक्टीरिया एलर्जी की प्रतिक्रिया है, जो खुद जोड़ों की सूजन के रूप में प्रकट होता है, "डॉ वोइट कहते हैं।
Impetigo के लिए थेरेपीः क्या साइड इफेक्ट्स हैं?
इंपेटिगो संक्रमण आमतौर पर एंटीबैक्टीरियल पदार्थों के साथ स्थानीय रूप से इलाज किया जाता है fusidic, "फ्यूसिडिक एसिड एक स्थानीय है एंटीबायोटिक दवाओं, जो आमतौर पर अच्छी तरह से काम करता है। तैयारी दिन में कई बार लागू की जानी चाहिए। सामान्य लक्षणों में, जैसे बुखार या मालाइज को मौखिक रूप से एंटीबायोटिक्स भी दिया जाता है। अन्यथा आपको एक पर जाना होगा अच्छी स्वच्छता विशेषज्ञों को बताते हुए, अपने आप को कीटाणुनाशक समाधान से साफ करना सबसे अच्छा है।
साइड इफेक्ट आमतौर पर impetigo के स्थानीय चिकित्सा से जुड़े नहीं हैं। "शायद ही कभी, fusidic को एलर्जी। अगर एलर्जी होती है, तैयारी परिवर्तित करने की। प्रणालीगत में है एंटीबायोटिक दवाओं के साथ थेरेपी दस्त का कारण बन सकती है"डॉ। वोगेट बताते हैं।
जब तक crusts ठीक, क्या लगभग आठ से दस दिन लगते हैं, प्रेरक रोगी है संक्रामक, किंडरगार्टन और स्कूल जैसे सार्वजनिक संस्थानों में बीमारी है दर्ज करना पड़ा हुआ, बच्चों को अलग किया जाना चाहिए और जब तक परतों को ठीक नहीं किया जाता है तब तक घर पर रहना चाहिए। "कई बच्चों को एक परिवार में रहते हैं, तो माता-पिता सुनिश्चित करें कि जब अंक अभी भी खुले हैं कि बच्चों को अलग से सोने और इस समय संपर्क से बचने के, विशेष रूप से शुरुआती दिनों में करना चाहिए। यह रोग विशेष रूप से वैसीक्युलर चरण में संक्रामक है"विशेषज्ञ Voigt बताते हैं।
बच्चों में, किसी को यह जांचना चाहिए कि बैक्टीरिया नाक और गले क्षेत्र में मौजूद है या नहीं। इस मामले में, इस क्षेत्र का इलाज किया जाना चाहिए। इसके लिए एक विशेष है नाक मरहमजो बैक्टीरिया को मार सकता है। "नाक मलहम दिन में तीन बार इस्तेमाल किया जाना चाहिए गड़बड़ी कीटाणुशोधन समाधान, एक दिन में, पूरे शरीर को एक कीटाणुशोधक साबुन से धोया जाना चाहिए, "Voigt की सिफारिश की।
तब स्नान और स्नान को एक कीटाणुशोधक के साथ छिड़का जाना चाहिए ताकि यह अन्य परिवार के सदस्यों को संक्रमित न करे। "तौलिए, कपड़े धोने, अंडरवियर, कपड़े और चादरें प्रतिदिन बदल दी जानी चाहिए कम से कम 60 डिग्री धो लें, टूथब्रश त्वचा विशेषज्ञ विओग कहते हैं, "तीन मिनट के लिए एक कुल्ला समाधान के साथ ब्रश करने के बाद कीटाणुशोधन किया जाना चाहिए।" स्वच्छता उपायों संचरण के जोखिम में योगदान Impetigo contagiosa कम करने के लिए।
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- Impetigo के लिए थेरेपीः क्या साइड इफेक्ट्स हैं? Impetigo संक्रमण एक जीवाणु त्वचा संक्रमण है जो मुख्य रूप से बच्चों में होता है। इस संक्रमण के दौरान यह reddening और ब्लिस्टरिंग आता है। विशेष रूप से रोग के शुरुआती दिनों में अत्यधिक संक्रामक है, इसलिए उस व्यक्ति अलग किया जा और स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए। - बुलबुले की फोड़ के बाद एक शहद पीले पपड़ी रोड़ा का सबसे महत्वपूर्ण सुविधाओं में से एक है। संक्रामक त्वचा रोग विशेष रूप से बच्चों को मिलता है। एक पर बुलबुले रोड़ा contagiosum संक्रमण दो रूपों में होते हैंः छोटा बुलबुला आकार और बुलबुला। "छोटा बुलबुला में छोटे बुलबुले है कि जल्दी से फट उठता के रूप में। लीक स्राव जल्दी से फिर से सूख जाता है और यह शहद से रंग परत रूपों," डॉ बताते हैं म्यूनिख के त्वचा विशेषज्ञ, हंस-उलरिच वोगेट। "फिर भी बड़ा-बुलबुला आकार है Impetigo bullosa कहा जाता है। बुलबुले स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, लेकिन घुसपैठ दुर्लभ हैं। यह दोनों रूपों विभिन्न बैक्टीरिया के कारण होते हैंः आमतौर पर छोटे-बुलबुले के रूप में staphylococci और बड़ा-बुलबुला आकार स्ट्रेप्टोकोक्की", Voigt कहते हैं। प्रेरणा संक्रमण विशेष रूप से अक्सर बच्चों को प्रभावित करता हैक्योंकि बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली अभी तक पूरी तरह से विकसित नहीं हुई है और इसलिए बैक्टीरिया इतनी अच्छी तरह से लड़ नहीं सकता है। रोगजनक त्वचा से त्वचा तक फैल जाते हैं। "बालवाड़ी में या स्कूल में बच्चों वयस्कों की तुलना में एक साथ खेलते हैं और कर रहे हैं एक साथ करीब। इसके अलावा, चोट के इन स्थलों पर बच्चों को भी खरोंच के लिए अधिक इच्छुक हैं। रोड़ा संक्रमण होते हैं अधिक बार," लाइफलाइन विशेषज्ञ वोइट कहते हैं। बैक्टीरिया भी नासोफैरेनजील स्पेस में होता है। वहाँ पहले वे लक्षण पैदा नहीं करते, लेकिन जब बच्चे चेहरे में उदाहरण के लिए खरोंच, तो बैक्टीरिया त्वचा घुसना और संक्रमण पैदा कर सकता। " Impetigo संक्रमण बुखार, सामान्य malaise और ठंड जैसे सामान्य लक्षणों का कारण बनता है, से गंभीर जटिलता एक गुर्दा संक्रमण हो सकता है, जिसके बाद गुर्दे की समस्या हो सकती है। शायद ही कभी यह आ जाता है संधि बुखार, यह बैक्टीरिया एलर्जी की प्रतिक्रिया है, जो खुद जोड़ों की सूजन के रूप में प्रकट होता है, "डॉ वोइट कहते हैं। Impetigo के लिए थेरेपीः क्या साइड इफेक्ट्स हैं? इंपेटिगो संक्रमण आमतौर पर एंटीबैक्टीरियल पदार्थों के साथ स्थानीय रूप से इलाज किया जाता है fusidic, "फ्यूसिडिक एसिड एक स्थानीय है एंटीबायोटिक दवाओं, जो आमतौर पर अच्छी तरह से काम करता है। तैयारी दिन में कई बार लागू की जानी चाहिए। सामान्य लक्षणों में, जैसे बुखार या मालाइज को मौखिक रूप से एंटीबायोटिक्स भी दिया जाता है। अन्यथा आपको एक पर जाना होगा अच्छी स्वच्छता विशेषज्ञों को बताते हुए, अपने आप को कीटाणुनाशक समाधान से साफ करना सबसे अच्छा है। साइड इफेक्ट आमतौर पर impetigo के स्थानीय चिकित्सा से जुड़े नहीं हैं। "शायद ही कभी, fusidic को एलर्जी। अगर एलर्जी होती है, तैयारी परिवर्तित करने की। प्रणालीगत में है एंटीबायोटिक दवाओं के साथ थेरेपी दस्त का कारण बन सकती है"डॉ। वोगेट बताते हैं। जब तक crusts ठीक, क्या लगभग आठ से दस दिन लगते हैं, प्रेरक रोगी है संक्रामक, किंडरगार्टन और स्कूल जैसे सार्वजनिक संस्थानों में बीमारी है दर्ज करना पड़ा हुआ, बच्चों को अलग किया जाना चाहिए और जब तक परतों को ठीक नहीं किया जाता है तब तक घर पर रहना चाहिए। "कई बच्चों को एक परिवार में रहते हैं, तो माता-पिता सुनिश्चित करें कि जब अंक अभी भी खुले हैं कि बच्चों को अलग से सोने और इस समय संपर्क से बचने के, विशेष रूप से शुरुआती दिनों में करना चाहिए। यह रोग विशेष रूप से वैसीक्युलर चरण में संक्रामक है"विशेषज्ञ Voigt बताते हैं। बच्चों में, किसी को यह जांचना चाहिए कि बैक्टीरिया नाक और गले क्षेत्र में मौजूद है या नहीं। इस मामले में, इस क्षेत्र का इलाज किया जाना चाहिए। इसके लिए एक विशेष है नाक मरहमजो बैक्टीरिया को मार सकता है। "नाक मलहम दिन में तीन बार इस्तेमाल किया जाना चाहिए गड़बड़ी कीटाणुशोधन समाधान, एक दिन में, पूरे शरीर को एक कीटाणुशोधक साबुन से धोया जाना चाहिए, "Voigt की सिफारिश की। तब स्नान और स्नान को एक कीटाणुशोधक के साथ छिड़का जाना चाहिए ताकि यह अन्य परिवार के सदस्यों को संक्रमित न करे। "तौलिए, कपड़े धोने, अंडरवियर, कपड़े और चादरें प्रतिदिन बदल दी जानी चाहिए कम से कम साठ डिग्री धो लें, टूथब्रश त्वचा विशेषज्ञ विओग कहते हैं, "तीन मिनट के लिए एक कुल्ला समाधान के साथ ब्रश करने के बाद कीटाणुशोधन किया जाना चाहिए।" स्वच्छता उपायों संचरण के जोखिम में योगदान Impetigo contagiosa कम करने के लिए।
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ईसा का नाम सबसे दुर्लभ और कहा जा सकता हैपूर्वी महिलाओं को देने वाले सभी का रहस्यमय। इसकी उत्पत्ति और अर्थ को समझना इतना आसान नहीं है, लेकिन हमने इस नाम को रखने वाली लड़कियों का सबसे पूरा विवरण एकत्र करने का प्रयास किया।
आज यह निर्धारित करना काफी मुश्किल हैजब नाम एजा पहली बार दिखाई दिया। और किस तरह के लोग अपनी बेटियों को बुलाए जाने वाले पहले व्यक्ति बन गए, इस तरह से भी एक विवादास्पद मतदान है। एक संस्करण के मुताबिक, ऐज़ा नाम प्राचीन तुर्किक प्रोटो-भाषा में पहली बार दिखाई दिया। चेचन की उत्पत्ति भी छूट नहीं दी जा सकती है। कुछ शोधकर्ता इस नाम में अरब जड़ों को खोजने में सक्षम थे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि ईसा नाम की उत्पत्ति कितनी विवादास्पद है, नाम का अर्थ बहुत विवाद नहीं करता है। विशेष रूप से, इस शब्द के अर्थ के दो रूप हैंः
- गोल्डन चंद्रमा;
उत्पत्ति और अर्थ निस्संदेह महत्वपूर्ण विशेषताओं हैं, लेकिन यह पता लगाना भी आवश्यक है कि लड़की के भालू के गुण क्या हैं।
ऐज़ू को शांत और शांत बच्चा कहा जा सकता है, लेकिनकई बार - यहां तक कि अज्ञान भी। इस तरह के बच्चे को शोर कंपनियों को पसंद नहीं है, अपने माता-पिता को लगातार बचपन के झुकावों के बारे में चिंता नहीं करेंगे। वह शायद ही कभी बातचीत शुरू करती है, केवल शांत और शांतिपूर्ण गेम पसंद करती है जिन्हें पहल और महान गतिविधि की आवश्यकता नहीं होती है। इसके अलावा, एक बच्चे के रूप में, ईसा खुद के साथ पूरी तरह से अकेला महसूस करता है। वह किताबें, हस्तशिल्प, ड्राइंग के साथ समय बिताना पसंद करती है। ऐसी दृढ़ता इस तथ्य के बावजूद कि अज़ू को सर्वश्रेष्ठ छात्रों के रैंकों में लाने में काफी सक्षम है, इस तथ्य के बावजूद कि उनकी जानकारी याद रखने की क्षमता औसत है। और लड़की की याददाश्त को मध्यस्थ कहा जा सकता है।
जब कोई लड़की प्रवेश करती है तो ईसा का नाम क्या होता हैवयस्क जीवन? वह अब उसका नाम कैसे दिखाएगी? वयस्क लड़की की प्राथमिकताओं बचपन में उन लोगों से बहुत अलग नहीं हैं। वह अभी भी एक शांत समझदार बनी हुई है, उसकी प्राथमिकताओं और शौकियों के लिए विदेशी जो युवा लोगों के लिए विशिष्ट हैं। हालांकि ऐजा के शानदार शिष्टाचार हैं, लेकिन वह बेहद शर्मीली है। यदि आप अपने युवाओं में इस गुणवत्ता से लड़ते नहीं हैं, तो यह भविष्य में कई समस्याएं पैदा कर सकता है। Ayzu एक "Turgenev लड़की" कहा जा सकता है, और यह छवि हमेशा उसके साथ रहेगी।
लेकिन उसके विनम्रता के बावजूद, एक लड़की के साथयह नाम हमेशा विपरीत लिंग के साथ लोकप्रिय है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ईसा एक रिश्ते में बेकार व्यवहार करता है। सफलता उसके सिर को नहीं फैलती है, और यदि ईसा एक रिश्ते से सहमत होता है, तो केवल वे लोग जो शादी में समाप्त होते हैं और संयुक्त बच्चों के जन्म होते हैं। किसी भी अन्य परिप्रेक्ष्य के लिए, वह संदेहजनक होगा।
अगर हम बात करें कि मनुष्य किस प्रकार का हो सकता हैएक लड़की की तरह, यह तर्क दिया जा सकता है कि इसके लिए आवश्यकताओं की सूची काफी बड़ी है। एक परिवार बनाने से ईसा अधिक गंभीरता से लेता है। मुख्य विशेषता जो एक लड़की को आकर्षित करती है वह विश्वसनीयता है, लेकिन इसकी पुष्टि न केवल शब्दों से होनी चाहिए, बल्कि व्यवहार में भी होनी चाहिए। ईसा को यकीन है कि एक आदमी को न केवल अपनी पत्नी और बच्चों के लिए बल्कि अपने दूसरे छमाही के निकटतम रिश्तेदारों के लिए भी जिम्मेदार होना चाहिए। केवल ऐसी शर्तों पर, ईसा उसके साथ अपने भाग्य को साझा करने के लिए सहमत होंगे।
पारिवारिक जीवन में, अज़ू को बुद्धिमान कहा जा सकता है,रोगी, लगभग पूर्ण पत्नी। उसके लिए, उसके पति के हित हमेशा पहले स्थान पर होंगे, और अगर कोई परिवार या कैरियर चुनने का सवाल है, तो वह बिना किसी संदेह के पहले का चयन करेगी। ईसा के उच्च नैतिक सिद्धांत उसे व्यभिचार करने की अनुमति नहीं देंगे, और वह वास्तविक वास्तविक कारण के बिना झगड़ा शुरू नहीं करेगा। निस्संदेह, ये गुण अभी भी काफी हद तक इस बात पर निर्भर हैं कि किस देश में और किन परंपराओं में आइजा को लाया गया था। नाम का मूल्य, इसके बावजूद, पुष्टि करता है कि वह बाहरी परिस्थितियों की परवाह किए बिना एक आदर्श पत्नी की भूमिका निभाने की कोशिश करेगी। किसी भी मामले में, वह अपने पति के विरोधाभास नहीं करने की कोशिश करेगी। विशेष रूप से बच्चों के लिए ईसा का दृष्टिकोण है। आदर्श पत्नी और घर की मालकिन की भूमिका के साथ, वह आदर्श मां की भूमिका भी निभाएंगी। अक्सर, एक ही नाम वाली लड़कियों के कई बच्चे होते हैं।
करियर के अवसरों के बारे में बात करने का समय है।ईसा नाम की लड़कियों के लिए। नाम का अर्थ बताता है कि लड़की को अपना ध्यान यथासंभव केंद्रित करने की कोशिश करनी चाहिए और कुछ आश्वासन प्राप्त करना चाहिए। केवल यही गुण उसे सफल होने में मदद करेंगे। वह अपने लिए एक एकाउंटेंट, अर्थशास्त्री, सचिव का पेशा चुन सकती है। लेकिन वह रचनात्मकता से संबंधित व्यवसायों में अधिक सफलता प्राप्त करेगी। अगर कोई लड़की अपने जुनून को काम में बदलने में सक्षम है, तो जीवन उसे खुद को महसूस करने का अवसर देगा। यह कहना सुरक्षित है कि रचनात्मक कार्यों में संलग्न होकर, एक लड़की खुद के साथ सद्भाव में हो सकती है।
भविष्य के पति ईसा के लिए वांछनीय नाम क्या हैं? सबसे पहले, यह रशीद, दिमित्री, वीर्य और अब्दुल्ला है। लेकिन अरिस्तारख, विक्टर, हकीम और डेनिस के साथ शादी से, विरोध करना वांछनीय है।
किस तरह के स्वर्ग संरक्षक की एक प्रेमिका हैजो इस असामान्य नाम ईसा को सहन करता है? नाम का मूल्य इस बात की पुष्टि करता है कि लड़की नेपच्यून द्वारा संरक्षित है। इसके अलावा, लड़की का चरित्र और उसकी किस्मत कुंभ राशि के संकेत से प्रभावित है।
ईसा के गहने को अधिमानतः पहना जाना चाहिए।माणिक या नीले पत्थर। रंग के बारे में, सूखे पीले, भूरे, नीले-हरे रंग का चयन करना बेहतर है, और आप ग्रे-बकाइन के साथ गुलाब-लाल भी जोड़ सकते हैं।
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ईसा का नाम सबसे दुर्लभ और कहा जा सकता हैपूर्वी महिलाओं को देने वाले सभी का रहस्यमय। इसकी उत्पत्ति और अर्थ को समझना इतना आसान नहीं है, लेकिन हमने इस नाम को रखने वाली लड़कियों का सबसे पूरा विवरण एकत्र करने का प्रयास किया। आज यह निर्धारित करना काफी मुश्किल हैजब नाम एजा पहली बार दिखाई दिया। और किस तरह के लोग अपनी बेटियों को बुलाए जाने वाले पहले व्यक्ति बन गए, इस तरह से भी एक विवादास्पद मतदान है। एक संस्करण के मुताबिक, ऐज़ा नाम प्राचीन तुर्किक प्रोटो-भाषा में पहली बार दिखाई दिया। चेचन की उत्पत्ति भी छूट नहीं दी जा सकती है। कुछ शोधकर्ता इस नाम में अरब जड़ों को खोजने में सक्षम थे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि ईसा नाम की उत्पत्ति कितनी विवादास्पद है, नाम का अर्थ बहुत विवाद नहीं करता है। विशेष रूप से, इस शब्द के अर्थ के दो रूप हैंः - गोल्डन चंद्रमा; उत्पत्ति और अर्थ निस्संदेह महत्वपूर्ण विशेषताओं हैं, लेकिन यह पता लगाना भी आवश्यक है कि लड़की के भालू के गुण क्या हैं। ऐज़ू को शांत और शांत बच्चा कहा जा सकता है, लेकिनकई बार - यहां तक कि अज्ञान भी। इस तरह के बच्चे को शोर कंपनियों को पसंद नहीं है, अपने माता-पिता को लगातार बचपन के झुकावों के बारे में चिंता नहीं करेंगे। वह शायद ही कभी बातचीत शुरू करती है, केवल शांत और शांतिपूर्ण गेम पसंद करती है जिन्हें पहल और महान गतिविधि की आवश्यकता नहीं होती है। इसके अलावा, एक बच्चे के रूप में, ईसा खुद के साथ पूरी तरह से अकेला महसूस करता है। वह किताबें, हस्तशिल्प, ड्राइंग के साथ समय बिताना पसंद करती है। ऐसी दृढ़ता इस तथ्य के बावजूद कि अज़ू को सर्वश्रेष्ठ छात्रों के रैंकों में लाने में काफी सक्षम है, इस तथ्य के बावजूद कि उनकी जानकारी याद रखने की क्षमता औसत है। और लड़की की याददाश्त को मध्यस्थ कहा जा सकता है। जब कोई लड़की प्रवेश करती है तो ईसा का नाम क्या होता हैवयस्क जीवन? वह अब उसका नाम कैसे दिखाएगी? वयस्क लड़की की प्राथमिकताओं बचपन में उन लोगों से बहुत अलग नहीं हैं। वह अभी भी एक शांत समझदार बनी हुई है, उसकी प्राथमिकताओं और शौकियों के लिए विदेशी जो युवा लोगों के लिए विशिष्ट हैं। हालांकि ऐजा के शानदार शिष्टाचार हैं, लेकिन वह बेहद शर्मीली है। यदि आप अपने युवाओं में इस गुणवत्ता से लड़ते नहीं हैं, तो यह भविष्य में कई समस्याएं पैदा कर सकता है। Ayzu एक "Turgenev लड़की" कहा जा सकता है, और यह छवि हमेशा उसके साथ रहेगी। लेकिन उसके विनम्रता के बावजूद, एक लड़की के साथयह नाम हमेशा विपरीत लिंग के साथ लोकप्रिय है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ईसा एक रिश्ते में बेकार व्यवहार करता है। सफलता उसके सिर को नहीं फैलती है, और यदि ईसा एक रिश्ते से सहमत होता है, तो केवल वे लोग जो शादी में समाप्त होते हैं और संयुक्त बच्चों के जन्म होते हैं। किसी भी अन्य परिप्रेक्ष्य के लिए, वह संदेहजनक होगा। अगर हम बात करें कि मनुष्य किस प्रकार का हो सकता हैएक लड़की की तरह, यह तर्क दिया जा सकता है कि इसके लिए आवश्यकताओं की सूची काफी बड़ी है। एक परिवार बनाने से ईसा अधिक गंभीरता से लेता है। मुख्य विशेषता जो एक लड़की को आकर्षित करती है वह विश्वसनीयता है, लेकिन इसकी पुष्टि न केवल शब्दों से होनी चाहिए, बल्कि व्यवहार में भी होनी चाहिए। ईसा को यकीन है कि एक आदमी को न केवल अपनी पत्नी और बच्चों के लिए बल्कि अपने दूसरे छमाही के निकटतम रिश्तेदारों के लिए भी जिम्मेदार होना चाहिए। केवल ऐसी शर्तों पर, ईसा उसके साथ अपने भाग्य को साझा करने के लिए सहमत होंगे। पारिवारिक जीवन में, अज़ू को बुद्धिमान कहा जा सकता है,रोगी, लगभग पूर्ण पत्नी। उसके लिए, उसके पति के हित हमेशा पहले स्थान पर होंगे, और अगर कोई परिवार या कैरियर चुनने का सवाल है, तो वह बिना किसी संदेह के पहले का चयन करेगी। ईसा के उच्च नैतिक सिद्धांत उसे व्यभिचार करने की अनुमति नहीं देंगे, और वह वास्तविक वास्तविक कारण के बिना झगड़ा शुरू नहीं करेगा। निस्संदेह, ये गुण अभी भी काफी हद तक इस बात पर निर्भर हैं कि किस देश में और किन परंपराओं में आइजा को लाया गया था। नाम का मूल्य, इसके बावजूद, पुष्टि करता है कि वह बाहरी परिस्थितियों की परवाह किए बिना एक आदर्श पत्नी की भूमिका निभाने की कोशिश करेगी। किसी भी मामले में, वह अपने पति के विरोधाभास नहीं करने की कोशिश करेगी। विशेष रूप से बच्चों के लिए ईसा का दृष्टिकोण है। आदर्श पत्नी और घर की मालकिन की भूमिका के साथ, वह आदर्श मां की भूमिका भी निभाएंगी। अक्सर, एक ही नाम वाली लड़कियों के कई बच्चे होते हैं। करियर के अवसरों के बारे में बात करने का समय है।ईसा नाम की लड़कियों के लिए। नाम का अर्थ बताता है कि लड़की को अपना ध्यान यथासंभव केंद्रित करने की कोशिश करनी चाहिए और कुछ आश्वासन प्राप्त करना चाहिए। केवल यही गुण उसे सफल होने में मदद करेंगे। वह अपने लिए एक एकाउंटेंट, अर्थशास्त्री, सचिव का पेशा चुन सकती है। लेकिन वह रचनात्मकता से संबंधित व्यवसायों में अधिक सफलता प्राप्त करेगी। अगर कोई लड़की अपने जुनून को काम में बदलने में सक्षम है, तो जीवन उसे खुद को महसूस करने का अवसर देगा। यह कहना सुरक्षित है कि रचनात्मक कार्यों में संलग्न होकर, एक लड़की खुद के साथ सद्भाव में हो सकती है। भविष्य के पति ईसा के लिए वांछनीय नाम क्या हैं? सबसे पहले, यह रशीद, दिमित्री, वीर्य और अब्दुल्ला है। लेकिन अरिस्तारख, विक्टर, हकीम और डेनिस के साथ शादी से, विरोध करना वांछनीय है। किस तरह के स्वर्ग संरक्षक की एक प्रेमिका हैजो इस असामान्य नाम ईसा को सहन करता है? नाम का मूल्य इस बात की पुष्टि करता है कि लड़की नेपच्यून द्वारा संरक्षित है। इसके अलावा, लड़की का चरित्र और उसकी किस्मत कुंभ राशि के संकेत से प्रभावित है। ईसा के गहने को अधिमानतः पहना जाना चाहिए।माणिक या नीले पत्थर। रंग के बारे में, सूखे पीले, भूरे, नीले-हरे रंग का चयन करना बेहतर है, और आप ग्रे-बकाइन के साथ गुलाब-लाल भी जोड़ सकते हैं।
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Apne র A
onwadndof pdna but we haathart wth my w
कला की मूर्ति गढ़ी है। वे हिन्दी के सुन्दरतम कलाकार है-इसमें कोई सन्देह नहीं कर सकता- और हाँ, उन्होंने जिस नवीन मार्ग को अपनाया है उससे यही आशा होती है कि वे महान् कलाकार के रूप में भी शीघ्र ही अवतरित होंगे। वे सुन्दर के कवि हैं - भविष्य में शिवं, सत्यं और विराट के कलाकार होकर हिन्दी को गौरवान्वित करेंगे- ऐसी आशा सर्वथा सुसंगत है। वे इस ओर प्रयासशील हैं-मैं सस्टि एक रच रहा नवल ।
SMUSUMAZ JUURI
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Apne র A onwadndof pdna but we haathart wth my w कला की मूर्ति गढ़ी है। वे हिन्दी के सुन्दरतम कलाकार है-इसमें कोई सन्देह नहीं कर सकता- और हाँ, उन्होंने जिस नवीन मार्ग को अपनाया है उससे यही आशा होती है कि वे महान् कलाकार के रूप में भी शीघ्र ही अवतरित होंगे। वे सुन्दर के कवि हैं - भविष्य में शिवं, सत्यं और विराट के कलाकार होकर हिन्दी को गौरवान्वित करेंगे- ऐसी आशा सर्वथा सुसंगत है। वे इस ओर प्रयासशील हैं-मैं सस्टि एक रच रहा नवल । SMUSUMAZ JUURI
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आज से गढ़वाली फीचर फिल्म कन्यादान देहरादून के सिनेमाघरों में लग चुकी है यह फिल्म सिलवर सिटी और गिलिट्ज सिनेमा में दिखाई जा रही है। जिसकी शो की टाइमिंग क्रमशः साढ़े 12 बजे व 4 बजे है। जनता को यह फिल्म काफी पंसद आ रही है आइये जानते हैं कैसी है यह फिल्म ।
कलाकार - गौरव गैरोला, शालिनी शाह, राजेश मालगुड़ी, रमेश रावत, गीता उनियाल, रीता भण्डारी, दिनेश बौड़ाई, रणबीर चैहान, मुनालश्री बिक्रम बिष्ट, नवल सेमवाल, मदन डुकलान व निशा भण्डारी हैं।
स्टोरीः कन्यादान फिल्म की कहानी दो फौजी दोस्तों के समधी बनने के वचन से शुरू होकर उत्तराखण्ड के पहाड़ी समाज में व्याप्त जातिवाद के ताने बानों में बुनी गयी है। जिसमें एक गरीब निःसंतान लोहार दम्पति को देवयोग से एक सवर्ण परिवार की नवजात बच्ची जंगल में मिलती है। मजबूरी में लौहार दम्पति इस उम्मीद में बच्ची को पालने का कठोर फैसला करते हैं कि शायद कभी तो कोई बच्ची को लेने आयेगा। समय बीतता है लड़की बड़ी होकर स्कूल काॅलेज जाती है जहां उसका प्यार एक सवंर्ण लड़के से हो जाता है और यहीं से गरीब लौहार दम्पति जातिवादी जुल्म के भयानक फेर में उलझ जाते हैं। कैसे यह उलझी हुई गुत्थी सुलझती है यह देखने के लिए आपको सिनेमाहाॅल में जाना होगा।
रिव्यूः फिल्म की स्टोरी काफी बेहतरीन लिखी गयी है निर्देशक ने पूरी कोशिश की है कलाकारों से सही काम लेने की, फिल्म कहीं भी दर्शकों को बोर नहीं करती है। फिल्म में काफी इमोशनल सीन दिखाये गये हैं यही वजह है कि दर्शकों को काफी पंसद आ रही है, और यह दर्शकों को इमोशनल करने पर मजबूर कर देती है। टैक्नीकली फिल्म थोड़ा सी वीक नजर आती है। कुल मिलाकर देखा जाये तो फिल्म अच्छी बनी है।
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आज से गढ़वाली फीचर फिल्म कन्यादान देहरादून के सिनेमाघरों में लग चुकी है यह फिल्म सिलवर सिटी और गिलिट्ज सिनेमा में दिखाई जा रही है। जिसकी शो की टाइमिंग क्रमशः साढ़े बारह बजे व चार बजे है। जनता को यह फिल्म काफी पंसद आ रही है आइये जानते हैं कैसी है यह फिल्म । कलाकार - गौरव गैरोला, शालिनी शाह, राजेश मालगुड़ी, रमेश रावत, गीता उनियाल, रीता भण्डारी, दिनेश बौड़ाई, रणबीर चैहान, मुनालश्री बिक्रम बिष्ट, नवल सेमवाल, मदन डुकलान व निशा भण्डारी हैं। स्टोरीः कन्यादान फिल्म की कहानी दो फौजी दोस्तों के समधी बनने के वचन से शुरू होकर उत्तराखण्ड के पहाड़ी समाज में व्याप्त जातिवाद के ताने बानों में बुनी गयी है। जिसमें एक गरीब निःसंतान लोहार दम्पति को देवयोग से एक सवर्ण परिवार की नवजात बच्ची जंगल में मिलती है। मजबूरी में लौहार दम्पति इस उम्मीद में बच्ची को पालने का कठोर फैसला करते हैं कि शायद कभी तो कोई बच्ची को लेने आयेगा। समय बीतता है लड़की बड़ी होकर स्कूल काॅलेज जाती है जहां उसका प्यार एक सवंर्ण लड़के से हो जाता है और यहीं से गरीब लौहार दम्पति जातिवादी जुल्म के भयानक फेर में उलझ जाते हैं। कैसे यह उलझी हुई गुत्थी सुलझती है यह देखने के लिए आपको सिनेमाहाॅल में जाना होगा। रिव्यूः फिल्म की स्टोरी काफी बेहतरीन लिखी गयी है निर्देशक ने पूरी कोशिश की है कलाकारों से सही काम लेने की, फिल्म कहीं भी दर्शकों को बोर नहीं करती है। फिल्म में काफी इमोशनल सीन दिखाये गये हैं यही वजह है कि दर्शकों को काफी पंसद आ रही है, और यह दर्शकों को इमोशनल करने पर मजबूर कर देती है। टैक्नीकली फिल्म थोड़ा सी वीक नजर आती है। कुल मिलाकर देखा जाये तो फिल्म अच्छी बनी है।
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शुक्रवार की रात ट्रक की भीषण टक्कर में ट्राली पलटने से गुरुपूर्णिमा पर्व को लेकर मंदिर दर्शन के लिए जा रहे 4 श्रद्धालुओं की मौके पर मौत हो गई थी और 19 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
जितेंद्र कुमार मौर्य, बाराबंकी यूपी के बाराबंकी जिले में श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर ट्राली हादसे को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुःख जताया है। सीएम ने घटना में अधिकारियों को मौके पर रह कर पीड़ितों की हर संभव मदद करने व घायलों को जल्द से जल्द बेहतर इलाज दिलाने के निर्देश दिए हैं। गुरु पूर्णिमा के मौके पर हुए इस हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 19 लोग घायल हुए थे।
राहत बचाव में लगे रहे अफ़सर शुक्रवार रात सीतापुर जिले से बाराबंकी के सतरिख क्षेत्र में मंजीठा स्थित नाग मंदिर में गुरुपूर्णिमा पर्व को लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए जा रहे थे। जिसमें देवां थाना क्षेत्र में देवां कुर्सी मार्ग के बदरुद्दीन पुर के पास श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर ट्राली में एक ट्रक ने भीषण टक्कर मार दी थी। जिसमें ट्राली पलटने से एक महिला समेत 4 की मौके पर दर्दनाक मौत हो गई। सूचना के बाद एसपी यमुना प्रसाद व अन्य पुलिस के आलाधिकारी मदद के लिए तत्काल मौके पर पहुंचे और घायलों को रेस्क्यू कर अस्पताल भिजवाया।
6 श्रद्धालुओं की हालत नाजुक चश्मदीद के मुताबिक ट्रैक्टर ट्राली में करीब 35 लोग सवार थे। जिसमें एक तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से ट्राली अनियंत्रित होकर पलट गई जिसके बाद ट्रक भी आगे गड्ढे में पलट गया था। देर रात तक घंटो चले रेस्क्यू कार्य में भारी पुलिस बल तैनात रहा। जिसमें 19 लोगों को गंभीर चोटें आई हैं जिनका जिला अस्पताल के ट्रामा में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार 6 लोगों की स्थिति नाज़ुक देखते हुए उन्हें लखनऊ ट्रामा सेंटर रिफर किया गया है जहां उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
घटना का मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान गुरुपूर्णिमा की रात हुए श्रद्धालुओं के साथ हुए भीषण सड़क दुर्घटना में मृतकों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ ने दुःख जताया है और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की है। इसके साथ घटना में घायलों के बेहतर इलाज कराने के लिए अफसरों को निर्देश साथ रहने के निर्देश दिए हैं।
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शुक्रवार की रात ट्रक की भीषण टक्कर में ट्राली पलटने से गुरुपूर्णिमा पर्व को लेकर मंदिर दर्शन के लिए जा रहे चार श्रद्धालुओं की मौके पर मौत हो गई थी और उन्नीस लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। जितेंद्र कुमार मौर्य, बाराबंकी यूपी के बाराबंकी जिले में श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर ट्राली हादसे को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुःख जताया है। सीएम ने घटना में अधिकारियों को मौके पर रह कर पीड़ितों की हर संभव मदद करने व घायलों को जल्द से जल्द बेहतर इलाज दिलाने के निर्देश दिए हैं। गुरु पूर्णिमा के मौके पर हुए इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई थी और करीब उन्नीस लोग घायल हुए थे। राहत बचाव में लगे रहे अफ़सर शुक्रवार रात सीतापुर जिले से बाराबंकी के सतरिख क्षेत्र में मंजीठा स्थित नाग मंदिर में गुरुपूर्णिमा पर्व को लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए जा रहे थे। जिसमें देवां थाना क्षेत्र में देवां कुर्सी मार्ग के बदरुद्दीन पुर के पास श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर ट्राली में एक ट्रक ने भीषण टक्कर मार दी थी। जिसमें ट्राली पलटने से एक महिला समेत चार की मौके पर दर्दनाक मौत हो गई। सूचना के बाद एसपी यमुना प्रसाद व अन्य पुलिस के आलाधिकारी मदद के लिए तत्काल मौके पर पहुंचे और घायलों को रेस्क्यू कर अस्पताल भिजवाया। छः श्रद्धालुओं की हालत नाजुक चश्मदीद के मुताबिक ट्रैक्टर ट्राली में करीब पैंतीस लोग सवार थे। जिसमें एक तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से ट्राली अनियंत्रित होकर पलट गई जिसके बाद ट्रक भी आगे गड्ढे में पलट गया था। देर रात तक घंटो चले रेस्क्यू कार्य में भारी पुलिस बल तैनात रहा। जिसमें उन्नीस लोगों को गंभीर चोटें आई हैं जिनका जिला अस्पताल के ट्रामा में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार छः लोगों की स्थिति नाज़ुक देखते हुए उन्हें लखनऊ ट्रामा सेंटर रिफर किया गया है जहां उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। घटना का मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान गुरुपूर्णिमा की रात हुए श्रद्धालुओं के साथ हुए भीषण सड़क दुर्घटना में मृतकों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ ने दुःख जताया है और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की है। इसके साथ घटना में घायलों के बेहतर इलाज कराने के लिए अफसरों को निर्देश साथ रहने के निर्देश दिए हैं।
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कुरुक्षेत्र, 15 दिसंबर (हप्र)
राज्यपाल की सचिव एवं केडीबी सदस्य सचिव जी अनुपमा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2020 के संग आनलाईल प्रणाली से ग्रामीण अंचल के लोगों के साथ-साथ विभिन्न देशों के लोगों को जोड़ा जाएगा। इस महोत्सव के अद्भुत झरोखों को कुरुक्षेत्र सिटी ही नहीं ग्राम सचिवालयों, सीएससी सेंटरों में भी दिखाने की व्यवस्था की जा रही है। इतना ही नहीं अतंर्राष्ट्रीय गीता सेमिनार के साथ 10 देशों ने अपनी सहमति कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के पास भिजवा दी है और केडीबी द्वारा तैयार की गई वेबसाईट के साथ भी 25 से ज्यादा देशों के लोग जुड़े हुए हैं। केडीबी सदस्य सचिव जी. अनुपमा मंगलवार को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सभागार में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2020 को लेकर की गई तैयारियों पर पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। इससे पहले केडीबी के सीईओ अनुभव मेहता ने महोत्सव के शैड्यूल, उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ ने प्रशासन द्वारा की व्यवस्थाओं, केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने विदेशों में होने वाले कार्यक्रमों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला।
गीता महोत्सव के कार्यक्रमों का आयोजन 17 से 25 दिसंबर तक किया जाएगा।
इस महोत्सव में गीता वैश्विक पाठ, दीपोत्सव, संत सम्मेलन मुख्य आकर्षण का केन्द्र रहेंगे। इस वर्ष पहली बार देश के 17 संस्कृत विश्विद्यालयों में कार्यक्रम होंगे और इन कार्यक्रमों से पूरे विश्व के लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इन विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय स्तर पर श्लोकोच्चारण जैसी प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 21 दिसंबर को ब्रह्मसरोवर पुरुषोत्तमपुरा बाग में गीता यज्ञ और केयूके में अंतर्राष्ट्रीय गीता सेमिनार का आयोजन होगा। इस गीता यज्ञ के साथ महोत्सव का विधिवत रुप से शुभारम्भ होगा और इस कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य करेंगे जबकि मुख्यातिथि के रूप में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर शिरकत करेंगे।
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कुरुक्षेत्र, पंद्रह दिसंबर राज्यपाल की सचिव एवं केडीबी सदस्य सचिव जी अनुपमा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-दो हज़ार बीस के संग आनलाईल प्रणाली से ग्रामीण अंचल के लोगों के साथ-साथ विभिन्न देशों के लोगों को जोड़ा जाएगा। इस महोत्सव के अद्भुत झरोखों को कुरुक्षेत्र सिटी ही नहीं ग्राम सचिवालयों, सीएससी सेंटरों में भी दिखाने की व्यवस्था की जा रही है। इतना ही नहीं अतंर्राष्ट्रीय गीता सेमिनार के साथ दस देशों ने अपनी सहमति कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के पास भिजवा दी है और केडीबी द्वारा तैयार की गई वेबसाईट के साथ भी पच्चीस से ज्यादा देशों के लोग जुड़े हुए हैं। केडीबी सदस्य सचिव जी. अनुपमा मंगलवार को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सभागार में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-दो हज़ार बीस को लेकर की गई तैयारियों पर पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। इससे पहले केडीबी के सीईओ अनुभव मेहता ने महोत्सव के शैड्यूल, उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ ने प्रशासन द्वारा की व्यवस्थाओं, केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने विदेशों में होने वाले कार्यक्रमों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। गीता महोत्सव के कार्यक्रमों का आयोजन सत्रह से पच्चीस दिसंबर तक किया जाएगा। इस महोत्सव में गीता वैश्विक पाठ, दीपोत्सव, संत सम्मेलन मुख्य आकर्षण का केन्द्र रहेंगे। इस वर्ष पहली बार देश के सत्रह संस्कृत विश्विद्यालयों में कार्यक्रम होंगे और इन कार्यक्रमों से पूरे विश्व के लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इन विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय स्तर पर श्लोकोच्चारण जैसी प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इक्कीस दिसंबर को ब्रह्मसरोवर पुरुषोत्तमपुरा बाग में गीता यज्ञ और केयूके में अंतर्राष्ट्रीय गीता सेमिनार का आयोजन होगा। इस गीता यज्ञ के साथ महोत्सव का विधिवत रुप से शुभारम्भ होगा और इस कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य करेंगे जबकि मुख्यातिथि के रूप में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर शिरकत करेंगे।
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लिवरपूल की टीम को दो सप्ताह पहले इस मैदान पर बर्नले ने 1-0 से हराया था और अब दूसरे डिवीजन में खिसकने से बचने के लिए संघर्ष कर रही ब्राइटन की टीम ने उसे इसी अंतर से पराजित किया।
लंदन, एपी। अपने घरेलू मैदान एनफील्ड पर इंग्लिश प्रीमियर लीग (ईपीएल) के 68 मैचों में अजेय रहने के बाद लिवरपूल को यहां लगातार दो मैचों में हार का सामना करना पड़ा। लिवरपूल की टीम को दो सप्ताह पहले इस मैदान पर बर्नले ने 1-0 से हराया था और अब दूसरे डिवीजन में खिसकने से बचने के लिए संघर्ष कर रही ब्राइटन की टीम ने उसे इसी अंतर से पराजित किया।
इससे लिवरपूल की खिताब का बचाव करने की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। लिवरपूल अब शीर्ष पर काबिज मैनचेस्टर सिटी (21 मैचों में 47 अंक) से सात अंक पीछे हो गया है, जबकि उसने एक मैच अधिक खेला है। मैनचेस्टर सिटी ने बर्नले को 2-0 से हराकर शीर्ष पर अपनी स्थिति मजबूत की। उसकी तरफ से गैब्रियल जीसस और रहीम स्टर्लिग ने गोल दागे। यह सिटी की सभी प्रतियोगिताओं में मिलाकर लगातार 13वीं जीत है।
ब्राइटन के लिए स्टीवन अलजाटे ने 56वें मिनट में गोल किया, जिसने लिवरपूल की तीसरे स्थान पर पहुंचने की उम्मीदों को झटका लगा। लीसेस्टर सिटी ने फुल्हम को 2-0 से हराकर 42 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल कर लिया।
मैनचेस्टर युनाइटेडट 44 अंक लेकर दूसरे स्थान पर है। लिवरपूल की टीम चौथे स्थान पर है, लेकिन वह पांचवें स्थान पर पहुंचने वाले वेस्ट हैम से केवल दो अंक आगे है। वेस्ट हैम ने एस्टन विला को 3-1 से हराया। एवर्टन उससे दो अंक पीछे छठे स्थान पर पहुंच गया। एवर्टन ने लीड्स को 2-1 से पराजित किया।
नापोली और अटलांटा के बीच इटालियन कप फुटबॉल टूर्नामेंट के सेमीफाइनल का पहले चरण का मैच गोलरहित बराबरी पर छूटा। डिएगो अर्मोडो माराडोना स्टेडियम में खेले गए इस मैच में अटलांटा के पास गोल करने के अच्छे मौके थे, लेकिन वह इसका फायदा नहीं उठा पाया। नापोली के गोलकीपर डेविड ऑस्पिना ने कई अच्छे बचाव किए। इस सेमीफाइनल का विजेता फाइनल में जुवेंटस या इंटर मिलान से भिड़ेगा।
जुवेंटस ने क्रिस्टियानो रोनाल्डो के दो गोल की मदद से मंगलवार को पहले चरण के सेमीफाइनल में 2-1 से जीत हासिल की थी। सेमीफाइनल के दूसरे चरण के मैच अगले सप्ताह खेले जाएंगे, जबकि फाइनल 19 मई को होगा। नापोली ने पिछले साल फाइनल में जुवेंटस को पेनाल्टी शूटआउट में हराकर खिताब जीता था।
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लिवरपूल की टीम को दो सप्ताह पहले इस मैदान पर बर्नले ने एक-शून्य से हराया था और अब दूसरे डिवीजन में खिसकने से बचने के लिए संघर्ष कर रही ब्राइटन की टीम ने उसे इसी अंतर से पराजित किया। लंदन, एपी। अपने घरेलू मैदान एनफील्ड पर इंग्लिश प्रीमियर लीग के अड़सठ मैचों में अजेय रहने के बाद लिवरपूल को यहां लगातार दो मैचों में हार का सामना करना पड़ा। लिवरपूल की टीम को दो सप्ताह पहले इस मैदान पर बर्नले ने एक-शून्य से हराया था और अब दूसरे डिवीजन में खिसकने से बचने के लिए संघर्ष कर रही ब्राइटन की टीम ने उसे इसी अंतर से पराजित किया। इससे लिवरपूल की खिताब का बचाव करने की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। लिवरपूल अब शीर्ष पर काबिज मैनचेस्टर सिटी से सात अंक पीछे हो गया है, जबकि उसने एक मैच अधिक खेला है। मैनचेस्टर सिटी ने बर्नले को दो-शून्य से हराकर शीर्ष पर अपनी स्थिति मजबूत की। उसकी तरफ से गैब्रियल जीसस और रहीम स्टर्लिग ने गोल दागे। यह सिटी की सभी प्रतियोगिताओं में मिलाकर लगातार तेरहवीं जीत है। ब्राइटन के लिए स्टीवन अलजाटे ने छप्पनवें मिनट में गोल किया, जिसने लिवरपूल की तीसरे स्थान पर पहुंचने की उम्मीदों को झटका लगा। लीसेस्टर सिटी ने फुल्हम को दो-शून्य से हराकर बयालीस अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल कर लिया। मैनचेस्टर युनाइटेडट चौंतालीस अंक लेकर दूसरे स्थान पर है। लिवरपूल की टीम चौथे स्थान पर है, लेकिन वह पांचवें स्थान पर पहुंचने वाले वेस्ट हैम से केवल दो अंक आगे है। वेस्ट हैम ने एस्टन विला को तीन-एक से हराया। एवर्टन उससे दो अंक पीछे छठे स्थान पर पहुंच गया। एवर्टन ने लीड्स को दो-एक से पराजित किया। नापोली और अटलांटा के बीच इटालियन कप फुटबॉल टूर्नामेंट के सेमीफाइनल का पहले चरण का मैच गोलरहित बराबरी पर छूटा। डिएगो अर्मोडो माराडोना स्टेडियम में खेले गए इस मैच में अटलांटा के पास गोल करने के अच्छे मौके थे, लेकिन वह इसका फायदा नहीं उठा पाया। नापोली के गोलकीपर डेविड ऑस्पिना ने कई अच्छे बचाव किए। इस सेमीफाइनल का विजेता फाइनल में जुवेंटस या इंटर मिलान से भिड़ेगा। जुवेंटस ने क्रिस्टियानो रोनाल्डो के दो गोल की मदद से मंगलवार को पहले चरण के सेमीफाइनल में दो-एक से जीत हासिल की थी। सेमीफाइनल के दूसरे चरण के मैच अगले सप्ताह खेले जाएंगे, जबकि फाइनल उन्नीस मई को होगा। नापोली ने पिछले साल फाइनल में जुवेंटस को पेनाल्टी शूटआउट में हराकर खिताब जीता था।
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Apara Ekadashi 2023 Date: एकादशी मन और शरीर को एकाग्र कर देती है, लेकिन हर एकादशी विशेष प्रभाव उत्पन्न करती है. ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी को अचला या अपरा एकादशी कहा जाता है. इसका पालन करने से व्यक्ति की गलतियों का प्रायश्चित होता है. इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति का नाम यश बढ़ता है. इसके प्रभाव से व्यक्ति के पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. यह व्रत व्यक्ति के संस्कारों को शुद्ध कर देता है.
अपरा एकादशी की तिथि (Apara Ekadashi 2023 Kab Hai)
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 15 मई को देर रात 02 बजकर 46 मिनट से लेकर अगले दिन 16 मई को रात 01 बजकर 03 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के चलते अपरा एकादशी का व्रत 15 मई को रखा जाएगा.
अपरा एकादशी के नियम (Apara Ekadashi 2023 Niyam)
अपरा एकादशी का व्रत दो प्रकार से रखा जाता है- निर्जल व्रत और फलाहारी या जलीय व्रत. निर्जल व्रत पूर्ण रूप से स्वस्थ व्यक्ति को ही रखना चाहिए. सामान्य लोगों को फलाहारी या जलीय उपवास रखना चाहिए. इस व्रत में भगवान त्रिविक्रम की पूजा की जाती है. इस व्रत में फल और जल का भोग लगाया जाता है. बेहतर होगा कि इस दिन केवल जल और फल का ही सेवन किया जाए.
- एकादशी के दिन चावल और जड़ों में उगने वाली सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए.
- एकादशी के दिन बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए. इस दिन सुबह देर तक नहीं सोना चाहिए.
अपरा एकादशी पर श्रीहरि की प्रतिमा को गंगाजल स्नान कराएं. हरि को केसर, चंदन, फूल, तुलसी की माला, पीले वस्त्र ,कलावा, फल चढ़ाएं. भगवान विष्णु को खीर या दूध से बने पकवान का भोग लगाएं. धूप और दीप जलाकर पीले आसन पर बैठें. तुलसी की माला से विष्णु गायत्री मंत्र का जाप करें और विष्णु के गायत्री मंत्र 'ऊँ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्। । ' का जाप करें. पूजा और मंत्र जप के बाद भगवान की धूप, दीप और कपूर से आरती करें. चरणामृत और प्रसाद ग्रहण करें.
पूजन के बाद श्री हरि की आरती करें. 'ऊं नमो नारायणाय या ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें. इसके बाद भगवान से अपनी मनोकामना कहें.
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Apara Ekadashi दो हज़ार तेईस Date: एकादशी मन और शरीर को एकाग्र कर देती है, लेकिन हर एकादशी विशेष प्रभाव उत्पन्न करती है. ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी को अचला या अपरा एकादशी कहा जाता है. इसका पालन करने से व्यक्ति की गलतियों का प्रायश्चित होता है. इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति का नाम यश बढ़ता है. इसके प्रभाव से व्यक्ति के पितरों की आत्मा को शांति मिलती है. यह व्रत व्यक्ति के संस्कारों को शुद्ध कर देता है. अपरा एकादशी की तिथि पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पंद्रह मई को देर रात दो बजकर छियालीस मिनट से लेकर अगले दिन सोलह मई को रात एक बजकर तीन मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के चलते अपरा एकादशी का व्रत पंद्रह मई को रखा जाएगा. अपरा एकादशी के नियम अपरा एकादशी का व्रत दो प्रकार से रखा जाता है- निर्जल व्रत और फलाहारी या जलीय व्रत. निर्जल व्रत पूर्ण रूप से स्वस्थ व्यक्ति को ही रखना चाहिए. सामान्य लोगों को फलाहारी या जलीय उपवास रखना चाहिए. इस व्रत में भगवान त्रिविक्रम की पूजा की जाती है. इस व्रत में फल और जल का भोग लगाया जाता है. बेहतर होगा कि इस दिन केवल जल और फल का ही सेवन किया जाए. - एकादशी के दिन चावल और जड़ों में उगने वाली सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए. - एकादशी के दिन बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए. इस दिन सुबह देर तक नहीं सोना चाहिए. अपरा एकादशी पर श्रीहरि की प्रतिमा को गंगाजल स्नान कराएं. हरि को केसर, चंदन, फूल, तुलसी की माला, पीले वस्त्र ,कलावा, फल चढ़ाएं. भगवान विष्णु को खीर या दूध से बने पकवान का भोग लगाएं. धूप और दीप जलाकर पीले आसन पर बैठें. तुलसी की माला से विष्णु गायत्री मंत्र का जाप करें और विष्णु के गायत्री मंत्र 'ऊँ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्। । ' का जाप करें. पूजा और मंत्र जप के बाद भगवान की धूप, दीप और कपूर से आरती करें. चरणामृत और प्रसाद ग्रहण करें. पूजन के बाद श्री हरि की आरती करें. 'ऊं नमो नारायणाय या ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें. इसके बाद भगवान से अपनी मनोकामना कहें.
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Ghatshila : झारखंड सरकार के स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री बन्ना गुप्ता के निर्देश पर प्रखंड कार्यालय में बुधवार को बीडीओ सीमा कुमारी की अध्यक्षता में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी मनोज कुमार के साथ प्रखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष संजय शाह और जिला प्रवक्ता शमशेर खान की उपस्थिति में बैठक की गयी. बैठक में प्रखंड कार्यालय के समीप के उप-स्वास्थ्य केंद्र को लेकर चर्चा हुई. कांग्रेसियों ने कहा कि पिछले दिनों स्वास्थ्य मंत्री ने मुसाबनी उप स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया था. निर्देश दिया था कि इसे सुचारू रूप से चलाया जाए. डॉक्टर की नियुक्ति की जाए. बावजूद यहां किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं है. मात्र एक कंपाउंडर के भरोसे यह उप-स्वास्थ्य केंद्र किसी तरह चल रहा है. कांग्रेसियों ने मांग की कि उप-स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे डॉक्टर की उपस्थिति अनिवार्य की जाये. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि जल्द ही इसका प्रस्ताव बनाकर जिला को भेजा जाएगा. इसकी एक प्रतिलिपि बीडीओ को उपलब्ध करायी जायगी. तबतक वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए सप्ताह में 3 दिन इस उप स्वास्थ्य केंद्र में आधा बेला डॉक्टर बैठेंगे. बीडीओ सीमा कुमारी ने कहा कि यह उप-स्वास्थ्य केंद्र आसपास के ग्रामीणों के लिए काफी जरूरी है. यहां डॉक्टरों के नियमित रूप से बैठने पर ग्रामीणों को ईलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. बैठक में संजय शाह, शमशेर खान, लक्ष्मण चंद्र बाग, कृष्णा पातर, सिकंदर शाह, मोसेस डेनियल, मोहम्मद मुस्तकीम, मोहम्मद अली आदि मौजूद थे.
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Ghatshila : झारखंड सरकार के स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री बन्ना गुप्ता के निर्देश पर प्रखंड कार्यालय में बुधवार को बीडीओ सीमा कुमारी की अध्यक्षता में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी मनोज कुमार के साथ प्रखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष संजय शाह और जिला प्रवक्ता शमशेर खान की उपस्थिति में बैठक की गयी. बैठक में प्रखंड कार्यालय के समीप के उप-स्वास्थ्य केंद्र को लेकर चर्चा हुई. कांग्रेसियों ने कहा कि पिछले दिनों स्वास्थ्य मंत्री ने मुसाबनी उप स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया था. निर्देश दिया था कि इसे सुचारू रूप से चलाया जाए. डॉक्टर की नियुक्ति की जाए. बावजूद यहां किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं है. मात्र एक कंपाउंडर के भरोसे यह उप-स्वास्थ्य केंद्र किसी तरह चल रहा है. कांग्रेसियों ने मांग की कि उप-स्वास्थ्य केंद्र में चौबीस घंटाटे डॉक्टर की उपस्थिति अनिवार्य की जाये. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि जल्द ही इसका प्रस्ताव बनाकर जिला को भेजा जाएगा. इसकी एक प्रतिलिपि बीडीओ को उपलब्ध करायी जायगी. तबतक वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए सप्ताह में तीन दिन इस उप स्वास्थ्य केंद्र में आधा बेला डॉक्टर बैठेंगे. बीडीओ सीमा कुमारी ने कहा कि यह उप-स्वास्थ्य केंद्र आसपास के ग्रामीणों के लिए काफी जरूरी है. यहां डॉक्टरों के नियमित रूप से बैठने पर ग्रामीणों को ईलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. बैठक में संजय शाह, शमशेर खान, लक्ष्मण चंद्र बाग, कृष्णा पातर, सिकंदर शाह, मोसेस डेनियल, मोहम्मद मुस्तकीम, मोहम्मद अली आदि मौजूद थे.
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देहरादून, 28 दिसंबर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित तीन पुलों का मंगलवार को डिजिटल माध्यम से उद्घाटन किया।
ये तीन पुल घासकू पुल, गौरीगढ़ पुल और बदामगढ़ हैं। घासकू पुल तवाघाट एवं घाटीबागर को जोड़ता है जबकि गौरीगढ़ पुल जौलजिबी एवं मुनस्यारी को तथा बदामगढ़ सेमली एवं ग्वालदम को जोड़ता है।
ये पुल उन 27 सीमा अवसंरचना परियोजनाओं का हिस्सा हैं जिनका सिंह ने मंगलवार को उद्घाटन किया।
सिंह ने इन परियोजनाओं का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन करने के बाद कहा कि अनियमित मौसम के बीच दुर्गम क्षेत्र में बीआरओ द्वारा बनायी जा रही सड़कों, पुलों एवं सुरंगों से स्थानों के बीच दूरियां घट रही हैं तथा सीमावर्ती क्षेत्र दिल्ली के करीब आ रहे हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी डिजिटल तरीके से इस कार्यक्रम में शामिल होते हुए कहा कि बीआरओ द्वारा बनायी जा रही सड़कों एवं पुलों से आत्मनिर्भर भारत का प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी का सपना साकार होगा।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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देहरादून, अट्ठाईस दिसंबर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड में सीमा सड़क संगठन द्वारा निर्मित तीन पुलों का मंगलवार को डिजिटल माध्यम से उद्घाटन किया। ये तीन पुल घासकू पुल, गौरीगढ़ पुल और बदामगढ़ हैं। घासकू पुल तवाघाट एवं घाटीबागर को जोड़ता है जबकि गौरीगढ़ पुल जौलजिबी एवं मुनस्यारी को तथा बदामगढ़ सेमली एवं ग्वालदम को जोड़ता है। ये पुल उन सत्ताईस सीमा अवसंरचना परियोजनाओं का हिस्सा हैं जिनका सिंह ने मंगलवार को उद्घाटन किया। सिंह ने इन परियोजनाओं का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन करने के बाद कहा कि अनियमित मौसम के बीच दुर्गम क्षेत्र में बीआरओ द्वारा बनायी जा रही सड़कों, पुलों एवं सुरंगों से स्थानों के बीच दूरियां घट रही हैं तथा सीमावर्ती क्षेत्र दिल्ली के करीब आ रहे हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी डिजिटल तरीके से इस कार्यक्रम में शामिल होते हुए कहा कि बीआरओ द्वारा बनायी जा रही सड़कों एवं पुलों से आत्मनिर्भर भारत का प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी का सपना साकार होगा। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में सांसदों के ऑफिस के निर्माण के लिए लुटियंस दिल्ली में सबसे पहले श्रम शक्ति भवन और परिवहन भवन को ढ़हाया जाएगा। यह जानकारी इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मास्टर प्लान तैयार करने वाली एचसीपी डिज़ाइन प्लानिंग एंड मैनजमेंट प्रा लि की तरफ से दी गयी है। मास्टर प्लान के अनुसार संसद भवन को सुरंग के द्वारा सांसदों के चैंबर से जोड़ा जाएगा।
एचसीपी के अधिकारियों ने बताया कि इन इमारतों के ध्वस्त होने के बाद यहां मौजूद मंत्रालयों और उनके कार्यालयों को अस्थायी रूप से गोल मार्केट , के जी मार्ग और अफ्रीका एवेन्यू के पास शिफ्ट किया जाएगा। हालांकि शिफ्टिंग का काम 2021 के अंत तक होगा। इस दौरान यहां काम करने वाले कर्मचारियों को अस्थायी तौर पर बनाई जाने वाली इमारतों में काम करना होगा। 2023 तक राजपथ के आस पास करीब 10 ब्लाक बन कर तैयार हो जायेंगे जिसके बाद अस्थायी तौर पर शिफ्ट किये गए कार्यालयों को यहां भेज दिया जाएगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार कई अन्य इमारतों को चरणबद्ध तरीके से गिराया जाएगा। जिसमें शास्त्री भवन, उद्योग भवन , निर्माण भवन , कृषि भवन समेत कई इमारत शामिल हैं। साथ ही सबसे आखिर में स्टेट ऑफ आर्ट कहे जाने वाले जवाहर लाल नेहरु भवन को भी ढ़हाया जाएगा। इस बेहद ही खूबसूरत इमारत का निर्माण दस साल पहले ही किया गया था।
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के प्रस्ताव के अनुसार प्रधानमंत्री के नए आवासीय कॉम्प्लेक्स में चार मंजिल वाली 10 इमारतें होगी। प्रधानमन्त्री के नए आवास को करीब 15 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के अनुसार नए संसद भवन में समितियों के छह कमरे होंगे जहाँ पर कामकाज होगा। इसके अलावा नए भवन में लोकसभा के 888 और राज्यसभा में 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी।
ज्ञात हो कि बीते 10 दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने संसद भवन के नए इमारत की आधारशिला रखी थी। हालांकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। लेकिन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह आश्वासन दिया हुआ है कि जब तक दायर हुई याचिकाओं पर कोई भी फैसला नहीं आ जाता है तब तक इस क्षेत्र में कोई तोड़ फोड़ या निर्माण नहीं किया जाएगा।
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सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में सांसदों के ऑफिस के निर्माण के लिए लुटियंस दिल्ली में सबसे पहले श्रम शक्ति भवन और परिवहन भवन को ढ़हाया जाएगा। यह जानकारी इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मास्टर प्लान तैयार करने वाली एचसीपी डिज़ाइन प्लानिंग एंड मैनजमेंट प्रा लि की तरफ से दी गयी है। मास्टर प्लान के अनुसार संसद भवन को सुरंग के द्वारा सांसदों के चैंबर से जोड़ा जाएगा। एचसीपी के अधिकारियों ने बताया कि इन इमारतों के ध्वस्त होने के बाद यहां मौजूद मंत्रालयों और उनके कार्यालयों को अस्थायी रूप से गोल मार्केट , के जी मार्ग और अफ्रीका एवेन्यू के पास शिफ्ट किया जाएगा। हालांकि शिफ्टिंग का काम दो हज़ार इक्कीस के अंत तक होगा। इस दौरान यहां काम करने वाले कर्मचारियों को अस्थायी तौर पर बनाई जाने वाली इमारतों में काम करना होगा। दो हज़ार तेईस तक राजपथ के आस पास करीब दस ब्लाक बन कर तैयार हो जायेंगे जिसके बाद अस्थायी तौर पर शिफ्ट किये गए कार्यालयों को यहां भेज दिया जाएगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार कई अन्य इमारतों को चरणबद्ध तरीके से गिराया जाएगा। जिसमें शास्त्री भवन, उद्योग भवन , निर्माण भवन , कृषि भवन समेत कई इमारत शामिल हैं। साथ ही सबसे आखिर में स्टेट ऑफ आर्ट कहे जाने वाले जवाहर लाल नेहरु भवन को भी ढ़हाया जाएगा। इस बेहद ही खूबसूरत इमारत का निर्माण दस साल पहले ही किया गया था। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के प्रस्ताव के अनुसार प्रधानमंत्री के नए आवासीय कॉम्प्लेक्स में चार मंजिल वाली दस इमारतें होगी। प्रधानमन्त्री के नए आवास को करीब पंद्रह एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के अनुसार नए संसद भवन में समितियों के छह कमरे होंगे जहाँ पर कामकाज होगा। इसके अलावा नए भवन में लोकसभा के आठ सौ अठासी और राज्यसभा में तीन सौ चौरासी सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी। ज्ञात हो कि बीते दस दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने संसद भवन के नए इमारत की आधारशिला रखी थी। हालांकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। लेकिन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह आश्वासन दिया हुआ है कि जब तक दायर हुई याचिकाओं पर कोई भी फैसला नहीं आ जाता है तब तक इस क्षेत्र में कोई तोड़ फोड़ या निर्माण नहीं किया जाएगा।
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नई दिल्लीः 'कपड़े उतारे बिना स्तन छूना यौन उत्पीड़न नहीं', बॉम्बे उच्च न्यायालय का यह फैसला बीते दिनों काफी विवादों में रहा, जिस पर अब शीर्ष अदालत ने भी रोक लगा दी है। अब बॉम्बे उच्च न्यायालय का ही एक और फैसला सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि नाबालिग लड़की का हाथ पकड़ना और पैंट की जिप खोलना पॉक्सो एक्ट के तहत यौन हमला नहीं माना जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने यह माना कि IPC की धारा 354-ए (1) (i) के तहत ऐसा करना 'यौन उत्पीड़न' की श्रेणी में आता है।
बता दें कि इससे पहले 19 जनवरी को बॉम्बे HC की इसी पीठ ने कहा था कि व्यक्ति ने बच्ची के स्तन को उसके कपड़े हटाए बिना स्पर्श किया था, इसलिए उसे यौन उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता। इसकी जगह यह IPC की धारा 354 के तहत महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने का अपराध बनता है। दरअसल, 50 साल के शख्स को पांच साल की बच्ची से छेड़छाड़ के लिए दोषी पाए जाने की सजा के खिलाफ दाखिल आपराधिक अपील पर नागपुर बेंच की जज पुष्पा गनेडीवाला की एकल पीठ ने फैसला दिया। दरअसल, सत्र न्यायालय ने 50 वर्षीय इस शख्स को दोषी ठहराया था और उसे POCSO की धारा 10 के तहत दंडनीय 'यौन उत्पीड़न' मानते हुए छह माह के लिए एक साधारण कारावास के साथ पांच वर्ष के कठोर कारावास और 25,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
बच्ची की मां ने एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद यह मामला उजागर हुआ। शिकायत में बच्ची की मां ने बताया था कि उसने आरोपी को देखा था, जिसकी पैंट की जिप खुली हुई थी और उसने उसकी बेटी का हाथ पकड़े हुए था। बाद में गवाही में उन्होंने कहा कि उसकी बेटी ने उसे बताया कि आरोपी ने अपने पैंट से लिंग (पेनिस) निकाला और उसे बेड पर आकर सोने को कहा। बहरहाल, एकल पीठ ने पॉस्को एक्ट की धारा 8, 10 और 12 को इस सजा के लिए उपयुक्त नहीं माना और आरोपी को धारा 354A (1) (i) के तहत दोषी करार दिया, जिसमें ज्यादातर तीन साल की कैद की सजा का प्रावधान है। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी ने पांच महीने जेल में सजा काट ली है, जो इस अपराध के लिए काफी हैं।
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नई दिल्लीः 'कपड़े उतारे बिना स्तन छूना यौन उत्पीड़न नहीं', बॉम्बे उच्च न्यायालय का यह फैसला बीते दिनों काफी विवादों में रहा, जिस पर अब शीर्ष अदालत ने भी रोक लगा दी है। अब बॉम्बे उच्च न्यायालय का ही एक और फैसला सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि नाबालिग लड़की का हाथ पकड़ना और पैंट की जिप खोलना पॉक्सो एक्ट के तहत यौन हमला नहीं माना जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने यह माना कि IPC की धारा तीन सौ चौवन-ए के तहत ऐसा करना 'यौन उत्पीड़न' की श्रेणी में आता है। बता दें कि इससे पहले उन्नीस जनवरी को बॉम्बे HC की इसी पीठ ने कहा था कि व्यक्ति ने बच्ची के स्तन को उसके कपड़े हटाए बिना स्पर्श किया था, इसलिए उसे यौन उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता। इसकी जगह यह IPC की धारा तीन सौ चौवन के तहत महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने का अपराध बनता है। दरअसल, पचास साल के शख्स को पांच साल की बच्ची से छेड़छाड़ के लिए दोषी पाए जाने की सजा के खिलाफ दाखिल आपराधिक अपील पर नागपुर बेंच की जज पुष्पा गनेडीवाला की एकल पीठ ने फैसला दिया। दरअसल, सत्र न्यायालय ने पचास वर्षीय इस शख्स को दोषी ठहराया था और उसे POCSO की धारा दस के तहत दंडनीय 'यौन उत्पीड़न' मानते हुए छह माह के लिए एक साधारण कारावास के साथ पांच वर्ष के कठोर कारावास और पच्चीस,शून्य रुपयापये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। बच्ची की मां ने एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद यह मामला उजागर हुआ। शिकायत में बच्ची की मां ने बताया था कि उसने आरोपी को देखा था, जिसकी पैंट की जिप खुली हुई थी और उसने उसकी बेटी का हाथ पकड़े हुए था। बाद में गवाही में उन्होंने कहा कि उसकी बेटी ने उसे बताया कि आरोपी ने अपने पैंट से लिंग निकाला और उसे बेड पर आकर सोने को कहा। बहरहाल, एकल पीठ ने पॉस्को एक्ट की धारा आठ, दस और बारह को इस सजा के लिए उपयुक्त नहीं माना और आरोपी को धारा तीन सौ चौवन एम्पीयर के तहत दोषी करार दिया, जिसमें ज्यादातर तीन साल की कैद की सजा का प्रावधान है। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी ने पांच महीने जेल में सजा काट ली है, जो इस अपराध के लिए काफी हैं।
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पंजाब । । हरियाणवीं डांसर सपना चौधरी देशभर में अपनी अदाओं का जलवा बिखेर रही हैं। वह अपने देसी डांस स्टाइल की वजह से बहुत मशहूर हैं। हाल ही में उन्होंने बॉलीवुड की एक फिल्म से इस इंडस्ट्री में डेब्यू किया है।
बता दें कि फिल्म का नाम 'दोस्ती के साइड इफेक्ट्स' है। इस फिल्म से अब उन्हें दर्शकों के दिलों में पहचान काफी आसानी से मिलेगी। फिल्म में सपना ने मुख्य रोल निभाया है। इस फिल्म में सपना चौधरी बेहद अलग अंदाज में नजर आ रही हैं।
अभी हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान जब सपना चौधरी से पूछा गया कि उन्हें फिल्मों में अभिनय करना सबसे ज्यादा भाता है या फिर स्टेज पर परफॉर्म करना। तो ऐसे में सपना ने बता या कि उन्हें स्टेज पर परफॉर्मेंस देना सबसे ज्यादा पसंद है।
उन्होंने कहा कि क्योंकि यहां पर बहुत मेहनत से काम होता है। 5 मिनट और कोई रिटेक नहीं होता। कोई दुबारा गाना प्ले नहीं किया जाता। अगर फैंस ने वन्स मोर कह दिया तो 5 मिनट और लग जाते हैं वरना काम जल्दी खत्म हो जाता है। फिर पैसे लो और बात खत्म। पैसे लो घर आ कर आराम से सो जाओ।
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पंजाब । । हरियाणवीं डांसर सपना चौधरी देशभर में अपनी अदाओं का जलवा बिखेर रही हैं। वह अपने देसी डांस स्टाइल की वजह से बहुत मशहूर हैं। हाल ही में उन्होंने बॉलीवुड की एक फिल्म से इस इंडस्ट्री में डेब्यू किया है। बता दें कि फिल्म का नाम 'दोस्ती के साइड इफेक्ट्स' है। इस फिल्म से अब उन्हें दर्शकों के दिलों में पहचान काफी आसानी से मिलेगी। फिल्म में सपना ने मुख्य रोल निभाया है। इस फिल्म में सपना चौधरी बेहद अलग अंदाज में नजर आ रही हैं। अभी हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान जब सपना चौधरी से पूछा गया कि उन्हें फिल्मों में अभिनय करना सबसे ज्यादा भाता है या फिर स्टेज पर परफॉर्म करना। तो ऐसे में सपना ने बता या कि उन्हें स्टेज पर परफॉर्मेंस देना सबसे ज्यादा पसंद है। उन्होंने कहा कि क्योंकि यहां पर बहुत मेहनत से काम होता है। पाँच मिनट और कोई रिटेक नहीं होता। कोई दुबारा गाना प्ले नहीं किया जाता। अगर फैंस ने वन्स मोर कह दिया तो पाँच मिनट और लग जाते हैं वरना काम जल्दी खत्म हो जाता है। फिर पैसे लो और बात खत्म। पैसे लो घर आ कर आराम से सो जाओ।
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केंद्रीय वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उत्पादकता में सुधार लाने की तकनीकों का उपयोग प्रशासन को साफ सुथरा बनाने, सार्वजनिक सेवाओं की विश्वसनीयता में सुधार लाने और कृषि उत्पादकता में वृद्धि करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सांख्यिकी संस्थान आईएसआई उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जो व्यापक पैमाने देश के लिए सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। श्री मुखर्जी आज नई दिल्ली में आईएसआई और दो अन्य प्रमुख संगठन क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया और रक्षा अनुसंधान विकास संगठन डीआरडीओ द्वारा आयोजित उत्पादकता, गुणवत्ता, विश्वसनीयता, श्रेष्ठीकरण और मॉडलिंग - आईसीपीक्यूआरओएम - 2011 पर अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। भारत के प्रधान मंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह द्वारा इस अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस का उद्घाटन किया गया था।
आईएसआई के संस्थापक प्रोफेसर पी सी महलानोबिस को याद करते हुए श्री मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने औद्योगिक प्रबंधकों, कार्यकर्ताओं, इंजीनियरों, टेक्नीशियनों और सरकारी अधिकारियों के वृहत पैमाने पर प्रशिक्षण के लिए एक सांख्यिकीय गुणवत्ता नियंत्रण आंदोलन शुरू करने की आवश्यकता महसूस की थी। श्री मुखर्जी ने यह भी कहा कि वहनीय कीमत पर आईएसआई द्वारा प्रदत्त प्रशिक्षण एवं समस्या समाधान सेवाओं से भारतीय उद्योग को काफी लाभ हुआ है।
श्री मुखर्जी ने कहा कि गुणवत्ता आंदोलन ने विश्वसनीयता, श्रेष्ठीकरण और मॉडलिंग टेकनीको समेत अनेक विषयों को एक साथ लाकर खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों को सफलतापूर्वक लागू करने से उद्योगों को अपने कार्य की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलती है।
वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ दशक पहले से अब स्थिति बदल गई है और अनेक क्षेत्रों में भारत को अब एक बड़ी ताकत के रूप में मान्यता मिली है। उन्होंने कहा कि समय के साथ-साथ गुण्वत्ता चुनौती का स्वरूप भी बदल गया है। श्री मुखर्जी ने कहा कि गुणवत्ता अर्हताएं भी काफी कठोर हो गई है और विपणन एवं मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों और अनेक सेवाओं पर अब ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए नई तकनीकों और दृष्टिकोणों को विकसित करने की आवश्यकता है और शोधकर्ताओं ने इस क्षेत्र में अनेक दृष्टिकोणों के साथ प्रयोग किया है। श्री मुखर्जी ने कहा कि आईएसआई में अनेक क्षेत्रों में सांख्यिकीय प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा देकर इस क्षेत्र में एक महत्वूर्ण भूमिका का निर्वाह किया है।
(Release ID :7799)
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केंद्रीय वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उत्पादकता में सुधार लाने की तकनीकों का उपयोग प्रशासन को साफ सुथरा बनाने, सार्वजनिक सेवाओं की विश्वसनीयता में सुधार लाने और कृषि उत्पादकता में वृद्धि करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सांख्यिकी संस्थान आईएसआई उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जो व्यापक पैमाने देश के लिए सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। श्री मुखर्जी आज नई दिल्ली में आईएसआई और दो अन्य प्रमुख संगठन क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया और रक्षा अनुसंधान विकास संगठन डीआरडीओ द्वारा आयोजित उत्पादकता, गुणवत्ता, विश्वसनीयता, श्रेष्ठीकरण और मॉडलिंग - आईसीपीक्यूआरओएम - दो हज़ार ग्यारह पर अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। भारत के प्रधान मंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह द्वारा इस अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस का उद्घाटन किया गया था। आईएसआई के संस्थापक प्रोफेसर पी सी महलानोबिस को याद करते हुए श्री मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने औद्योगिक प्रबंधकों, कार्यकर्ताओं, इंजीनियरों, टेक्नीशियनों और सरकारी अधिकारियों के वृहत पैमाने पर प्रशिक्षण के लिए एक सांख्यिकीय गुणवत्ता नियंत्रण आंदोलन शुरू करने की आवश्यकता महसूस की थी। श्री मुखर्जी ने यह भी कहा कि वहनीय कीमत पर आईएसआई द्वारा प्रदत्त प्रशिक्षण एवं समस्या समाधान सेवाओं से भारतीय उद्योग को काफी लाभ हुआ है। श्री मुखर्जी ने कहा कि गुणवत्ता आंदोलन ने विश्वसनीयता, श्रेष्ठीकरण और मॉडलिंग टेकनीको समेत अनेक विषयों को एक साथ लाकर खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों को सफलतापूर्वक लागू करने से उद्योगों को अपने कार्य की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलती है। वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ दशक पहले से अब स्थिति बदल गई है और अनेक क्षेत्रों में भारत को अब एक बड़ी ताकत के रूप में मान्यता मिली है। उन्होंने कहा कि समय के साथ-साथ गुण्वत्ता चुनौती का स्वरूप भी बदल गया है। श्री मुखर्जी ने कहा कि गुणवत्ता अर्हताएं भी काफी कठोर हो गई है और विपणन एवं मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों और अनेक सेवाओं पर अब ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए नई तकनीकों और दृष्टिकोणों को विकसित करने की आवश्यकता है और शोधकर्ताओं ने इस क्षेत्र में अनेक दृष्टिकोणों के साथ प्रयोग किया है। श्री मुखर्जी ने कहा कि आईएसआई में अनेक क्षेत्रों में सांख्यिकीय प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा देकर इस क्षेत्र में एक महत्वूर्ण भूमिका का निर्वाह किया है।
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घर में जब वास्तुशास्त्र के अनुसार चीजें व्यवस्थित रहती हैं, तो उसका सकारात्मक प्रभाव परिवार के सभी सदस्यों पर पड़ता है. वास्तु (Vastu) में परिवार के हर सदस्य के लिए बेडरूम का स्थान बताया गया है और बेडरूम में रखी जाने वाली वस्तुओं के बारे में भी जानकारी दी गई है. परिवार का मुखिया, बच्चे, बुजुर्ग, नवविवाहित आदि के लिए बेडरूम कहां होना चाहिए और बेडरूम में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसके बारे में जानते हैं तिरुपति के ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद् डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से.
1. घर के मालिक का बेडरूम दक्षिण या दक्षिण पश्चिम हिस्से में होना चाहिए. घर का मालिक वह होता है, जिसके फैसलों और आय से घर चलता है.
2. परिवार के जो बड़े बुजुर्ग सदस्य हैं, उनको उत्तर दिशा में स्थित बेडरूम का उपयोग करना चाहिए.
3. नवदंपत्ति यानी जिनका कुछ समय पहले ही विवाह हुआ है, उस पति और पति का बेडरूम वायव्य दिशा यानी उत्तर और पश्चिम के बीच या फिर उत्तर दिशा के मध्य में होना चाहिए.
4. घर के बच्चों का बेडरूम भी वायव्य कोण में होना अच्छा माना जाता है.
1. परिवार के किसी भी सदस्य का बेडरूम आग्नेय या ईशान कोण में नहीं होना चाहिए.
2. बेडरूम के अंदर पूजा स्थान या मंदिर नहीं होना चाहिए.
3. बेडरूम की खिड़किया उत्तर या पूर्व दिशा में होनी चाहिए.
4. अपने कमरे के अंदर भारी सामान या आलमारी को नैऋत्य कोण में रखना चाहिए.
5. बेडरूम में टीवी, हीटर या अन्य उपकरण रखने हों, तो उनको आग्नेय कोण में रखें.
6. बेडरूम में किसी भी बीम के ठीक नीचे पलंग न रखें. ऐसा करने से सेहत पर बूरा प्रभाव पड़ता है.
7. बेडरूम में ट्रेसिंग टेबल को पूर्व दिशा में, कूलर, पंखा या एसी को पश्चिम या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए.
8. बेडरूम को इस प्रकार से व्यवस्थित करना चाहिए कि उत्तर और पूर्व दिशा में पर्याप्त खाली जगह रहे.
9. बेडरूम के अंदर जुड़ा हुआ टॉयलेट दक्षिण या नैऋत्य कोण में बनवाना चाहिए.
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घर में जब वास्तुशास्त्र के अनुसार चीजें व्यवस्थित रहती हैं, तो उसका सकारात्मक प्रभाव परिवार के सभी सदस्यों पर पड़ता है. वास्तु में परिवार के हर सदस्य के लिए बेडरूम का स्थान बताया गया है और बेडरूम में रखी जाने वाली वस्तुओं के बारे में भी जानकारी दी गई है. परिवार का मुखिया, बच्चे, बुजुर्ग, नवविवाहित आदि के लिए बेडरूम कहां होना चाहिए और बेडरूम में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसके बारे में जानते हैं तिरुपति के ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद् डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से. एक. घर के मालिक का बेडरूम दक्षिण या दक्षिण पश्चिम हिस्से में होना चाहिए. घर का मालिक वह होता है, जिसके फैसलों और आय से घर चलता है. दो. परिवार के जो बड़े बुजुर्ग सदस्य हैं, उनको उत्तर दिशा में स्थित बेडरूम का उपयोग करना चाहिए. तीन. नवदंपत्ति यानी जिनका कुछ समय पहले ही विवाह हुआ है, उस पति और पति का बेडरूम वायव्य दिशा यानी उत्तर और पश्चिम के बीच या फिर उत्तर दिशा के मध्य में होना चाहिए. चार. घर के बच्चों का बेडरूम भी वायव्य कोण में होना अच्छा माना जाता है. एक. परिवार के किसी भी सदस्य का बेडरूम आग्नेय या ईशान कोण में नहीं होना चाहिए. दो. बेडरूम के अंदर पूजा स्थान या मंदिर नहीं होना चाहिए. तीन. बेडरूम की खिड़किया उत्तर या पूर्व दिशा में होनी चाहिए. चार. अपने कमरे के अंदर भारी सामान या आलमारी को नैऋत्य कोण में रखना चाहिए. पाँच. बेडरूम में टीवी, हीटर या अन्य उपकरण रखने हों, तो उनको आग्नेय कोण में रखें. छः. बेडरूम में किसी भी बीम के ठीक नीचे पलंग न रखें. ऐसा करने से सेहत पर बूरा प्रभाव पड़ता है. सात. बेडरूम में ट्रेसिंग टेबल को पूर्व दिशा में, कूलर, पंखा या एसी को पश्चिम या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए. आठ. बेडरूम को इस प्रकार से व्यवस्थित करना चाहिए कि उत्तर और पूर्व दिशा में पर्याप्त खाली जगह रहे. नौ. बेडरूम के अंदर जुड़ा हुआ टॉयलेट दक्षिण या नैऋत्य कोण में बनवाना चाहिए. .
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Gurugram Crime: गुरुग्राम में एक साले ने ही अपने पूर्व फौजी जीजा के सिर में गोली मार कर हत्या कर दी। घटना के बाद हत्यारोपी साला मौके से फरार हो गया। मृतक फौजी के भतीजे की तहरीर पर सेक्टर-10 थाना पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध मामला दर्ज कर उसकी तलाश के लिए कई टीमें गठित कर दी हैं, जो लगातार छापेमारी की कार्रवाई कर रही हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि, पूर्व फौजी और उनकी पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद चल रहा था। इस बात को लेकर जीजा-साले के बीच भी कई बार कहासुनी हो चुकी थी।
मृतक के भतीजे रुपेश कुमार ने पुलिस में तहरीर देते हुए बताया कि, देर रात एक बजे उनकी मां ने उसे सोते हुए उठाकर बताया कि, तुम्हारे चाचा हरविंद्र (42) को गोली मार दी गई है। जिसके बाद रुपेश अपनी गोशाला में कार्य करने वाले रमेश आचार्य को लेकर चाचा हरविंद्र के घर पहुंचे। रुपेश ने बताया कि, घर की तीसरी मंजिल पर बने बेडरूम में चाचा लहूलुहान हालत में पड़े थे। जब इस बारे में रुपेश ने अपनी चाची सरिता ने पूछा तो उन्होंने बताया कि, वह दूसरे कमरे में सो रही थी। गोली की आवाज सुनकर जब वह बाहर निकली तो अपने भाई नवीन कुमार को बरामदे से निकलते देखा। नवीन के हाथ में पिस्टल नुमा हथियार भी था।
जांच अधिकारी एएसआई अरुन कुमार ने बताया कि, हरविंद्र दो साल पहले सेना से रिटायर हुए थे। जिसके बाद अपने घर में रहकर वे सेना तथा पुलिस की तैयारी कर रहे युवाओं को कोचिंग देते थे। पहले वह दिल्ली के एक कोचिग सेंटर से जुड़े थे, लेकिन कोरोना संक्रमण के बढ़ने के बाद घर से ऑनलाइन कोचिंग दे रहे थे। मृतक के दो बच्चें भी हैं। हरविद्र को साले नवीन कुमार का घर में दखल देना पसंद नहीं था। जांच अधिकारी ने बताया कि, हरविंद्र की सिर में पीछे से गोली माकर हत्या की गई। पुलिस आरोपित नवीन की तलाश कर रही है। इसकी गिरफ्तारी होने के बाद पत्नी सरिता की भूमिका भी स्पष्ट हो जाएगी।
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Gurugram Crime: गुरुग्राम में एक साले ने ही अपने पूर्व फौजी जीजा के सिर में गोली मार कर हत्या कर दी। घटना के बाद हत्यारोपी साला मौके से फरार हो गया। मृतक फौजी के भतीजे की तहरीर पर सेक्टर-दस थाना पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध मामला दर्ज कर उसकी तलाश के लिए कई टीमें गठित कर दी हैं, जो लगातार छापेमारी की कार्रवाई कर रही हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि, पूर्व फौजी और उनकी पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद चल रहा था। इस बात को लेकर जीजा-साले के बीच भी कई बार कहासुनी हो चुकी थी। मृतक के भतीजे रुपेश कुमार ने पुलिस में तहरीर देते हुए बताया कि, देर रात एक बजे उनकी मां ने उसे सोते हुए उठाकर बताया कि, तुम्हारे चाचा हरविंद्र को गोली मार दी गई है। जिसके बाद रुपेश अपनी गोशाला में कार्य करने वाले रमेश आचार्य को लेकर चाचा हरविंद्र के घर पहुंचे। रुपेश ने बताया कि, घर की तीसरी मंजिल पर बने बेडरूम में चाचा लहूलुहान हालत में पड़े थे। जब इस बारे में रुपेश ने अपनी चाची सरिता ने पूछा तो उन्होंने बताया कि, वह दूसरे कमरे में सो रही थी। गोली की आवाज सुनकर जब वह बाहर निकली तो अपने भाई नवीन कुमार को बरामदे से निकलते देखा। नवीन के हाथ में पिस्टल नुमा हथियार भी था। जांच अधिकारी एएसआई अरुन कुमार ने बताया कि, हरविंद्र दो साल पहले सेना से रिटायर हुए थे। जिसके बाद अपने घर में रहकर वे सेना तथा पुलिस की तैयारी कर रहे युवाओं को कोचिंग देते थे। पहले वह दिल्ली के एक कोचिग सेंटर से जुड़े थे, लेकिन कोरोना संक्रमण के बढ़ने के बाद घर से ऑनलाइन कोचिंग दे रहे थे। मृतक के दो बच्चें भी हैं। हरविद्र को साले नवीन कुमार का घर में दखल देना पसंद नहीं था। जांच अधिकारी ने बताया कि, हरविंद्र की सिर में पीछे से गोली माकर हत्या की गई। पुलिस आरोपित नवीन की तलाश कर रही है। इसकी गिरफ्तारी होने के बाद पत्नी सरिता की भूमिका भी स्पष्ट हो जाएगी।
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दरअसल मलाइका ने कुछ घंटे पहले ही अपनी एक तस्वीर पोस्ट की है, जिसकी कई लोगों ने जमकर तारीफें की हैं, लेकिन कुछ लोगों को उनका मेकअप पसंद नहीं आ रहा। इस पोस्ट पर उनके फैन्स दो हिस्सों में बटे नजर आ रहे हैं।
कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने उन्हें बला की खूबसूरत बताया है तो कुछ उनके मेकअप को लेकर ट्रोल कर रहे हैं। उन्हें ट्रोल करने वालों में से एक ने लिखा है, 'आपके चेहरे पर मेकअप है या आप मेकअप पर हैं? ' एक ने लिखा है कि वह बिना मेकअप के ज्यादा अच्छी दिखती हैं।
हाल ही में इंटरनेट सेंसेशन रानू मंडल अपने मेकअप की वजह से खूब चर्चा में रहीं, जिसके बाद उनकी मेकअप आर्टिस्ट तक को ऑरिजनल विडियो के साथ सामने आना पड़ा। उन्हें लेकर तरह-तरह के मीम्स सोशल मीडिया पर वायरल हुए।
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दरअसल मलाइका ने कुछ घंटे पहले ही अपनी एक तस्वीर पोस्ट की है, जिसकी कई लोगों ने जमकर तारीफें की हैं, लेकिन कुछ लोगों को उनका मेकअप पसंद नहीं आ रहा। इस पोस्ट पर उनके फैन्स दो हिस्सों में बटे नजर आ रहे हैं। कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने उन्हें बला की खूबसूरत बताया है तो कुछ उनके मेकअप को लेकर ट्रोल कर रहे हैं। उन्हें ट्रोल करने वालों में से एक ने लिखा है, 'आपके चेहरे पर मेकअप है या आप मेकअप पर हैं? ' एक ने लिखा है कि वह बिना मेकअप के ज्यादा अच्छी दिखती हैं। हाल ही में इंटरनेट सेंसेशन रानू मंडल अपने मेकअप की वजह से खूब चर्चा में रहीं, जिसके बाद उनकी मेकअप आर्टिस्ट तक को ऑरिजनल विडियो के साथ सामने आना पड़ा। उन्हें लेकर तरह-तरह के मीम्स सोशल मीडिया पर वायरल हुए।
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इसका थोड़ा सा इज़हार भी करो ताकि पता चल जाए कि कौन भाई इज्तिमा से अपनी अपनी मस्जिदों से डिफ़ैन्स से, इस मस्जिद से चार महीने, चिल्ले की जमाते कौन कौन भाई नकद पेश करेगा, जल्दी बता दो ।
وآخر دعوانا عن الحمد لله رب العلمين
काएबात के अजाएबात
जो नज़र आता वह हक़ीक़त नहीं
मेरे भाईयों और दोस्तों ! दुनिया में जो हाल आते हैं उनका पैदा करने वाला तो अल्लाह ही है। ख़ैर आए या शर इरादा इसमें अल्लाह ही का होता है, असबाब बनते हैं इन्सानों के जरिये से चीज़ों के ज़रिये से लेकिन इस दुनिया में फैली हुई चीज़ों की कमी ज्यादती के ज़रिए से का बनना बिगड़ना नज़र आता है ।
नज़र आता है वह दरख़्त नहीं होता सिर्फ साया होता है। हालात अल्लाह तआला पैदा फरमाते हैं और चीजें भी अल्लाह तआला पैदा फ़रमाते हैं। हालात के ख़ज़ाने अल्लाह के पास अलग हैं और चीज़ों के ख़ज़ाने अल्लाह के पास अलग हैं । दुनिया में ज़ाहिरी तौर से एक दूसरे के साथ मिले हुए नज़र आते हैं, हक़ीक़त में ये दोनों अलग अलग हैं । जिस्म और जगह बनता है और रूह और जगह बनती है। रूह के बनने का निज़ाम और है और जिस्म के बनने का निज़ाम अलैहिदा है और अल्लाह तआला इन दोनों को माँ के पेट में जमा कर देता है। नज़र में दोनों एक लगते हैं हक़ीक़त में ऐसा नहीं है । जिस्म एक जगह से आया और रूह दूसरी जगह से आई है। ऐसे ही मेरे भाईयों चीजें आयीं,
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इसका थोड़ा सा इज़हार भी करो ताकि पता चल जाए कि कौन भाई इज्तिमा से अपनी अपनी मस्जिदों से डिफ़ैन्स से, इस मस्जिद से चार महीने, चिल्ले की जमाते कौन कौन भाई नकद पेश करेगा, जल्दी बता दो । وآخر دعوانا عن الحمد لله رب العلمين काएबात के अजाएबात जो नज़र आता वह हक़ीक़त नहीं मेरे भाईयों और दोस्तों ! दुनिया में जो हाल आते हैं उनका पैदा करने वाला तो अल्लाह ही है। ख़ैर आए या शर इरादा इसमें अल्लाह ही का होता है, असबाब बनते हैं इन्सानों के जरिये से चीज़ों के ज़रिये से लेकिन इस दुनिया में फैली हुई चीज़ों की कमी ज्यादती के ज़रिए से का बनना बिगड़ना नज़र आता है । नज़र आता है वह दरख़्त नहीं होता सिर्फ साया होता है। हालात अल्लाह तआला पैदा फरमाते हैं और चीजें भी अल्लाह तआला पैदा फ़रमाते हैं। हालात के ख़ज़ाने अल्लाह के पास अलग हैं और चीज़ों के ख़ज़ाने अल्लाह के पास अलग हैं । दुनिया में ज़ाहिरी तौर से एक दूसरे के साथ मिले हुए नज़र आते हैं, हक़ीक़त में ये दोनों अलग अलग हैं । जिस्म और जगह बनता है और रूह और जगह बनती है। रूह के बनने का निज़ाम और है और जिस्म के बनने का निज़ाम अलैहिदा है और अल्लाह तआला इन दोनों को माँ के पेट में जमा कर देता है। नज़र में दोनों एक लगते हैं हक़ीक़त में ऐसा नहीं है । जिस्म एक जगह से आया और रूह दूसरी जगह से आई है। ऐसे ही मेरे भाईयों चीजें आयीं,
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केंद्र ने 11 मई की संविधान पीठ के फैसले की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में ट्रांसफर पोस्टिंग के अधिकार दिल्ली सरकार के पास रहेंगे।
केंद्र राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण बनाने के लिए कल एक अध्यादेश लाई है, जिसके पास दिल्ली में सेवा करने वाले DANICS के सभी अधिकारियों और ग्रुप ए अधिकारियों के स्थानांतरण और पोस्टिंग की सिफारिश करने की शक्ति होगी।
बता दें, केंद्र ने अपने अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया है जिसमें कहा गया था कि दिल्ली में ट्रांसफर पोस्टिंग के अधिकार दिल्ली सरकार के पास रहेंगे।
केंद्र सरकार (Central Government) ने दिल्ली सरकार (Delhi Govt) को अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग (Transfer posting) का अधिकार देने का सुप्रीम कोर्ट (Suprme Court) का फैसला पलटने के लिए शुक्रवार को एक अध्यादेश जारी (Ordinance issued) कर दिया है।
अध्यादेश के मुताबिक ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी जिसके चेयरमैन दिल्ली के मुख्यमंत्री होंगे और चीफ सेक्रेटरी और प्रमुख सचिव गृह सदस्य होंगे। यह सिफारिश करेंगे और उप राज्यपाल की मंजूरी के बाद ट्रांसफर पोस्टिंग होंगी।
अध्यादेश के मुताबिक उपराज्यपाल अपनी मंजूरी देंगे तभी अधिकारी का ट्रांसफर होगा। केंद्र सरकार की इस अध्यादेश के बाद फिर से न्यायपालिका और मोदी सरकार के बीच में तनाव पैदा होने की आशंका है।
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केंद्र ने ग्यारह मई की संविधान पीठ के फैसले की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में ट्रांसफर पोस्टिंग के अधिकार दिल्ली सरकार के पास रहेंगे। केंद्र राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण बनाने के लिए कल एक अध्यादेश लाई है, जिसके पास दिल्ली में सेवा करने वाले DANICS के सभी अधिकारियों और ग्रुप ए अधिकारियों के स्थानांतरण और पोस्टिंग की सिफारिश करने की शक्ति होगी। बता दें, केंद्र ने अपने अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया है जिसमें कहा गया था कि दिल्ली में ट्रांसफर पोस्टिंग के अधिकार दिल्ली सरकार के पास रहेंगे। केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार को अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग का अधिकार देने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटने के लिए शुक्रवार को एक अध्यादेश जारी कर दिया है। अध्यादेश के मुताबिक ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी जिसके चेयरमैन दिल्ली के मुख्यमंत्री होंगे और चीफ सेक्रेटरी और प्रमुख सचिव गृह सदस्य होंगे। यह सिफारिश करेंगे और उप राज्यपाल की मंजूरी के बाद ट्रांसफर पोस्टिंग होंगी। अध्यादेश के मुताबिक उपराज्यपाल अपनी मंजूरी देंगे तभी अधिकारी का ट्रांसफर होगा। केंद्र सरकार की इस अध्यादेश के बाद फिर से न्यायपालिका और मोदी सरकार के बीच में तनाव पैदा होने की आशंका है।
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बैगन एक ऐसी सब्जी है, जो दुनिया में हर कहीं पाई और खाई जाती है। इसलिए कृषि वैज्ञानिकों ने इसकी कई प्रजातियां भी विकसित की हैं। इस मौसम में बैगन की खूब पैदावार होती है। दरअसल, बैगन सर्दी की ही सब्जी है। इसे कई तरह से पकाया जाता है। मगर पकौड़े के रूप में इसे कम ही लोग खाते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, असम और ओड़ीशा में बैगन के पकौड़े खूब पसंद किए जाते हैं। बंगाल में तो बेगुन भाजा काफी लोकप्रिय है। बिहार में बैगन का बजका बनता है। मगर बैगन को सामान्य पकौड़े की तरह भी खाया जा सकता है। महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में इसे भजिया कहते हैं।
बैगन भजिया का स्वाद प्याज, आलू, गोभी आदि के पकौड़ों से अलग और लाजवाब होता है। बैगन भजिया बनाना बहुत आसान है। इसे भी उसी तरह बनाते हैं, जैसे गोभी, आलू, प्याज आदि के पकौड़े बनाते हैं। इसके लिए बैगन आप चाहें तो बड़े आकार का गोल भी ले सकते हैं, पर लंबे वाले बैगन की भजिया देखने में भी सुंदर लगती है। अगर गोल वाला बैगन ले रहे हैं, तो उसे गोल आकार में काट सकते हैं। मोटाई एक इंच से अधिक न रखें, इस तरह बैगन जल्दी पक जाता है और उसका गूदा बेसन के साथ लगभग घुल-मिल जाता है। लंबे वाले बैगन को भी लंबाई के आकार में ही काटें और इससे अधिक मोटाई न रखें। यानी एक लंबे बैगन में तीन से चार टुकड़े बन सकते हैं।
काटने के बाद एक कटोरी में आधा चम्मच हल्दी पाउडर, आधा चम्मच बारीक पिसी लाल मिर्च, एक चम्मच धनिया पाउडर और आधा चम्मच नमक डाल कर अच्छी तरह मिला लें। इस मिश्रण से एक चुटकी मसाला निकाल कर बैगन के हर टुकड़े के दोनों तरफ डालें और अच्छी तरह फैला लें। अब इन टुकड़ों को ढंक कर अलग रख दें।
अब एक बड़े कटोरे में बैंगन की मात्रा के मुताबिक बेसन लें। यानी बेसन की मात्रा इतनी रखें कि सारे बैगन उसमें डुबोए जा सकें। बेसन में चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा चम्मच गरम मसाला, चौथाई चम्मच हींग पाउडर, जरूरत भर का नमक और एक चम्मच अजवाइन हथेली पर रगड़ कर डालें।
सारी सामग्री को मिला लें। थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए लगातार कमसे कम पंद्रह मिनट क फेंटते हुए गाढ़ा घोल तैयार करें। ध्यान रहे कि घोल पतला नहीं होना चाहिए, नहीं तो बैगन पर चढ़ेगा नहीं और तलते समय बह कर तेल में चला जाएगा। इस तरह पकौड़े का मजा किरकिरा होगा। फेंटने में कंजूसी कतई न करें, जितना फेटेंगे, उतना ही पकौड़ा अच्छा बनेगा।
कड़ाही में तलने के लिए भरपूर तेल गरम करें। तलने के लिए सरसों का तेल अच्छा रहता है। अगर यह पसंद न हो तो मूंगफली आदि का तेल भी ले सकते हैं। जब तेल अच्छी तरह गरम हो जाए, तो आंच मध्यम कर दें। अब बैगन के एक एक टुकड़े को पकड़ कर बेसन के घोल में डुबाएं और दोनों तरफ अच्छी तरह परत चढ़ जाने के बाद तेल में डालते जाएं। इस तरह सारे बैगन को तल लें। बैगन भजिया तैयार है। गरमागरम परोसें। इसके साथ हरी मिर्च, धनिया और लहसुन की चटनी अच्छी लगती है। चाहें तो, टमाटर सास तो सदाबहार चटनी है ही, उसके साथ खा सकते हैं।
मिर्च का नाम सुनते ही कई लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मगर मिर्च से डरने की जरूरत नहीं। मिर्च में कैल्शियम होता है, इसे खाने से दर्द सहन करने की क्षमता बढ़ती है। लाल मिर्च बेशक कम खाएं, पर हरी मिर्च का इस्तेमाल तो भोजन में किसी न किसी रूप में होना ही चाहिए। मिर्च की जितनी किस्में दुनिया भर में पाई जाती हैं, उतनी किसी सब्जी की नहीं पाई जाती।
इन्हीं में एक किस्म होती है सुंदरी मिर्च की। यह आकार-प्रकार में कुछ लंबी और खासी मोटी होती है। इसकी सब्जी भी बनती है और अचार भी। पकौड़े के लिए इसी मिर्च का उपयोग किया जाता है। राजस्थान में इसके पकौड़े खासे लोकप्रिय हैं। खाने के साथ इसे सलाद के रूप में भी परोसा जाता है। पर इसके वड़े यानी पकौड़े लाजवाब बनते हैं।
मिर्च के पकौड़े बनाना भी कोई मशक्कत का काम नहीं। इसके लिए मोटी वाली मिर्च लें। धोकर अच्छी तरह पोंछ लें। फिर सबसे पहले दांतेदार चाकू से हल्के हाथों से इसके ऊपर हिस्से को खुरच लें। छीलने का प्रयास न करें, केवल खुरच लें। इसलिए इस तरह इन पर बेसन अच्छी तरह चिपक जाता है। फिर एक तरफ से लंबाई में चीरा लगाएं और सारा बीज बाहर निकाल दें।
अब इसकी भरावन तैयार करें। आमतौर पर इसमें आलू की भरावन तैयार की जाती है। आप चाहें, तो इसमें पनीर का उपयोग भी कर सकते हैं। दो उबले आलू कद्दूकस कर लें, इतनी ही मात्रा में पनीर भी कद्दूकस करें। थोड़ा हरा धनिया, अदरक और कुछ हरी मिर्चें बारीक काट कर इसमें डालें। फिर जरूरत भर का नमक और आधा चम्मच गरम मसाला डाल कर अच्छी तरह मसल कर सारी सामग्री को मिला लें।
खोखल की हुई मिर्चों में यह भरावन डाल कर अच्छी तरह बंद करें। फिर जिस तरह ऊपर हम बैगन भाजा के लिए बेसन का घोल तैयार करने की बात कर चुके हैं, उसी तरह इसके लिए भी घोल तैयार करें और उसमें भरी हुई मिर्चों को लपेट कर तेल में तल लें। हरी मिर्च के वड़े तैयार हैं। गरमागरम परोसें।
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बैगन एक ऐसी सब्जी है, जो दुनिया में हर कहीं पाई और खाई जाती है। इसलिए कृषि वैज्ञानिकों ने इसकी कई प्रजातियां भी विकसित की हैं। इस मौसम में बैगन की खूब पैदावार होती है। दरअसल, बैगन सर्दी की ही सब्जी है। इसे कई तरह से पकाया जाता है। मगर पकौड़े के रूप में इसे कम ही लोग खाते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, असम और ओड़ीशा में बैगन के पकौड़े खूब पसंद किए जाते हैं। बंगाल में तो बेगुन भाजा काफी लोकप्रिय है। बिहार में बैगन का बजका बनता है। मगर बैगन को सामान्य पकौड़े की तरह भी खाया जा सकता है। महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में इसे भजिया कहते हैं। बैगन भजिया का स्वाद प्याज, आलू, गोभी आदि के पकौड़ों से अलग और लाजवाब होता है। बैगन भजिया बनाना बहुत आसान है। इसे भी उसी तरह बनाते हैं, जैसे गोभी, आलू, प्याज आदि के पकौड़े बनाते हैं। इसके लिए बैगन आप चाहें तो बड़े आकार का गोल भी ले सकते हैं, पर लंबे वाले बैगन की भजिया देखने में भी सुंदर लगती है। अगर गोल वाला बैगन ले रहे हैं, तो उसे गोल आकार में काट सकते हैं। मोटाई एक इंच से अधिक न रखें, इस तरह बैगन जल्दी पक जाता है और उसका गूदा बेसन के साथ लगभग घुल-मिल जाता है। लंबे वाले बैगन को भी लंबाई के आकार में ही काटें और इससे अधिक मोटाई न रखें। यानी एक लंबे बैगन में तीन से चार टुकड़े बन सकते हैं। काटने के बाद एक कटोरी में आधा चम्मच हल्दी पाउडर, आधा चम्मच बारीक पिसी लाल मिर्च, एक चम्मच धनिया पाउडर और आधा चम्मच नमक डाल कर अच्छी तरह मिला लें। इस मिश्रण से एक चुटकी मसाला निकाल कर बैगन के हर टुकड़े के दोनों तरफ डालें और अच्छी तरह फैला लें। अब इन टुकड़ों को ढंक कर अलग रख दें। अब एक बड़े कटोरे में बैंगन की मात्रा के मुताबिक बेसन लें। यानी बेसन की मात्रा इतनी रखें कि सारे बैगन उसमें डुबोए जा सकें। बेसन में चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा चम्मच गरम मसाला, चौथाई चम्मच हींग पाउडर, जरूरत भर का नमक और एक चम्मच अजवाइन हथेली पर रगड़ कर डालें। सारी सामग्री को मिला लें। थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए लगातार कमसे कम पंद्रह मिनट क फेंटते हुए गाढ़ा घोल तैयार करें। ध्यान रहे कि घोल पतला नहीं होना चाहिए, नहीं तो बैगन पर चढ़ेगा नहीं और तलते समय बह कर तेल में चला जाएगा। इस तरह पकौड़े का मजा किरकिरा होगा। फेंटने में कंजूसी कतई न करें, जितना फेटेंगे, उतना ही पकौड़ा अच्छा बनेगा। कड़ाही में तलने के लिए भरपूर तेल गरम करें। तलने के लिए सरसों का तेल अच्छा रहता है। अगर यह पसंद न हो तो मूंगफली आदि का तेल भी ले सकते हैं। जब तेल अच्छी तरह गरम हो जाए, तो आंच मध्यम कर दें। अब बैगन के एक एक टुकड़े को पकड़ कर बेसन के घोल में डुबाएं और दोनों तरफ अच्छी तरह परत चढ़ जाने के बाद तेल में डालते जाएं। इस तरह सारे बैगन को तल लें। बैगन भजिया तैयार है। गरमागरम परोसें। इसके साथ हरी मिर्च, धनिया और लहसुन की चटनी अच्छी लगती है। चाहें तो, टमाटर सास तो सदाबहार चटनी है ही, उसके साथ खा सकते हैं। मिर्च का नाम सुनते ही कई लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मगर मिर्च से डरने की जरूरत नहीं। मिर्च में कैल्शियम होता है, इसे खाने से दर्द सहन करने की क्षमता बढ़ती है। लाल मिर्च बेशक कम खाएं, पर हरी मिर्च का इस्तेमाल तो भोजन में किसी न किसी रूप में होना ही चाहिए। मिर्च की जितनी किस्में दुनिया भर में पाई जाती हैं, उतनी किसी सब्जी की नहीं पाई जाती। इन्हीं में एक किस्म होती है सुंदरी मिर्च की। यह आकार-प्रकार में कुछ लंबी और खासी मोटी होती है। इसकी सब्जी भी बनती है और अचार भी। पकौड़े के लिए इसी मिर्च का उपयोग किया जाता है। राजस्थान में इसके पकौड़े खासे लोकप्रिय हैं। खाने के साथ इसे सलाद के रूप में भी परोसा जाता है। पर इसके वड़े यानी पकौड़े लाजवाब बनते हैं। मिर्च के पकौड़े बनाना भी कोई मशक्कत का काम नहीं। इसके लिए मोटी वाली मिर्च लें। धोकर अच्छी तरह पोंछ लें। फिर सबसे पहले दांतेदार चाकू से हल्के हाथों से इसके ऊपर हिस्से को खुरच लें। छीलने का प्रयास न करें, केवल खुरच लें। इसलिए इस तरह इन पर बेसन अच्छी तरह चिपक जाता है। फिर एक तरफ से लंबाई में चीरा लगाएं और सारा बीज बाहर निकाल दें। अब इसकी भरावन तैयार करें। आमतौर पर इसमें आलू की भरावन तैयार की जाती है। आप चाहें, तो इसमें पनीर का उपयोग भी कर सकते हैं। दो उबले आलू कद्दूकस कर लें, इतनी ही मात्रा में पनीर भी कद्दूकस करें। थोड़ा हरा धनिया, अदरक और कुछ हरी मिर्चें बारीक काट कर इसमें डालें। फिर जरूरत भर का नमक और आधा चम्मच गरम मसाला डाल कर अच्छी तरह मसल कर सारी सामग्री को मिला लें। खोखल की हुई मिर्चों में यह भरावन डाल कर अच्छी तरह बंद करें। फिर जिस तरह ऊपर हम बैगन भाजा के लिए बेसन का घोल तैयार करने की बात कर चुके हैं, उसी तरह इसके लिए भी घोल तैयार करें और उसमें भरी हुई मिर्चों को लपेट कर तेल में तल लें। हरी मिर्च के वड़े तैयार हैं। गरमागरम परोसें।
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न होना बराबर है अर्थात् यदि ऐसा नियम न होता, तो भी वही परिणाम निकलता, जो इस नियम के होने से निकलता है ।
परन्तु उसके साथ ही यदि केवल यह नियम बना दिया जाय कि, जब तक सन्तान की इच्छा और आवश्यकता सिद्ध न हो, उस समय तक स्त्री या पुरुष को परस्पर सम्बन्ध करने की आशा ही न दी जाय, तो यह नियम सर्व-साधारण की शक्ति से बाहर है और हज़ार में एक मनुष्य का भी इस पर चलना सम्भव नहीं ! अतः इस कड़े नियम से भी वही परिणाम निकलेगा, जो उसके न होने से निकलता अर्थात् या तो लोग गुप्त रीति से इस नियम का उलङ्घन करेंगे या इस नियम से तङ्ग आकर खुलमखुल्ला इसका सामना करेंगे और अपने सुभीत के लिये अन्य नियम बना लेंगे। इस लिये इन दोनों के मध्यवर्ती एक ऐसा नियम बना दिया गया है कि, यदि स्त्री-पुरुष ब्रह्मचर्य के पालन में असमर्थ हों, तो वह विवाह करके सन्तानोत्पत्ति कर अपनी कामन्चेष्टा को इतना सन्तुष्ट करलें, जिससे मुख्य उद्देश अर्थात् मन्तानोत्पत्ति की पूर्ति हो जाय । लोक में भी यही देखने में आता है - स्त्री और पुरुषों के विवाह इसी उद्देश को ध्यान में रख कर किये जाते हैं।
कुछ लोगों का विचार है कि, विवाह का एक मात्र उद्देश स्त्रीपुरुष के प्रेम की वृद्धि है; परन्तु यह केवल वाग्जाल है। जब हम कहते हैं कि, गृहस्थ-प्रेम का आधिक्य ही विवाह का प्रयोजन है. तो हम केवल शब्दों की रोचकता पर ही मुग्ध होकर कहते हैं800
उनके अर्थों पर गम्भीर दृष्टि नहीं डालते। वस्तुतः प्रेम-वृद्धि से भी वही तात्पर्य्य है, जो ऊपर कहा गया है अर्थात् स्त्री और पुरुष में परस्पर संयोग की जो स्वाभाविक इच्छा है, उसको नियम के अनुकूल रखना ! सम्भव है कि, कोई ऐसा आक्षेप करने लगे कि, तुमने प्रेम जैसे उच्च-भाव को काम चेष्टा जैसे निकृष्ट भाव का समानार्थक समझ लिया; परन्तु यह बात नहीं है। दाम्पत्य प्रेम का वही अर्थ नहीं होता, जो भाई बहिन के प्रेम, पिता-पुत्र के प्रेम एवँ माता और पुत्री के प्रेम का होता है । वस्तुतः प्रेम शब्द पर पूर्ण विचार करने से ही पता चलता है कि, जब हम यह कहते हैं कि, अमुक स्त्री अमुक पुरुष से प्रेम करती है या अमुक पुरुष अमुक स्त्री से प्रेम करता है, तो इसका वही तात्पर्य नहीं होता, जो उस समय होता है, जब हम यह कहते हैं कि अमुक पुरुष अपने पुत्र से प्रेम करता है। रही उच्च-भाव या नोच-भाव की बातः उसके विषय में केवल इतना ही कहना पर्याप्त है कि, परमात्मा ने मनुष्य को जो-जो भाव दिये हैं, वह सभी उच्च और पवित्र हैं। केवल उनका सीमा से बढ़ जाना या दुष्ट-प्रयोग करना ही नीचता है ! जिस प्रकार स्त्री और पुरुष के प्रेम को सीमा से बढ़ जाने या दुरुपयोग की दशा में काम चेष्टा के दुष्ट नाम से सम्बोधित करते हैं, उसी प्रकार पिता और पुत्र के प्रेम को सीमा से बढ़ जाने या दुरुपयोग करने की दशा में मोह जैसे दूषित नाम से पुकारते हैं । बास वही है, उसमें कुछ भेद नहीं पड़ता !!
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न होना बराबर है अर्थात् यदि ऐसा नियम न होता, तो भी वही परिणाम निकलता, जो इस नियम के होने से निकलता है । परन्तु उसके साथ ही यदि केवल यह नियम बना दिया जाय कि, जब तक सन्तान की इच्छा और आवश्यकता सिद्ध न हो, उस समय तक स्त्री या पुरुष को परस्पर सम्बन्ध करने की आशा ही न दी जाय, तो यह नियम सर्व-साधारण की शक्ति से बाहर है और हज़ार में एक मनुष्य का भी इस पर चलना सम्भव नहीं ! अतः इस कड़े नियम से भी वही परिणाम निकलेगा, जो उसके न होने से निकलता अर्थात् या तो लोग गुप्त रीति से इस नियम का उलङ्घन करेंगे या इस नियम से तङ्ग आकर खुलमखुल्ला इसका सामना करेंगे और अपने सुभीत के लिये अन्य नियम बना लेंगे। इस लिये इन दोनों के मध्यवर्ती एक ऐसा नियम बना दिया गया है कि, यदि स्त्री-पुरुष ब्रह्मचर्य के पालन में असमर्थ हों, तो वह विवाह करके सन्तानोत्पत्ति कर अपनी कामन्चेष्टा को इतना सन्तुष्ट करलें, जिससे मुख्य उद्देश अर्थात् मन्तानोत्पत्ति की पूर्ति हो जाय । लोक में भी यही देखने में आता है - स्त्री और पुरुषों के विवाह इसी उद्देश को ध्यान में रख कर किये जाते हैं। कुछ लोगों का विचार है कि, विवाह का एक मात्र उद्देश स्त्रीपुरुष के प्रेम की वृद्धि है; परन्तु यह केवल वाग्जाल है। जब हम कहते हैं कि, गृहस्थ-प्रेम का आधिक्य ही विवाह का प्रयोजन है. तो हम केवल शब्दों की रोचकता पर ही मुग्ध होकर कहते हैंआठ सौ उनके अर्थों पर गम्भीर दृष्टि नहीं डालते। वस्तुतः प्रेम-वृद्धि से भी वही तात्पर्य्य है, जो ऊपर कहा गया है अर्थात् स्त्री और पुरुष में परस्पर संयोग की जो स्वाभाविक इच्छा है, उसको नियम के अनुकूल रखना ! सम्भव है कि, कोई ऐसा आक्षेप करने लगे कि, तुमने प्रेम जैसे उच्च-भाव को काम चेष्टा जैसे निकृष्ट भाव का समानार्थक समझ लिया; परन्तु यह बात नहीं है। दाम्पत्य प्रेम का वही अर्थ नहीं होता, जो भाई बहिन के प्रेम, पिता-पुत्र के प्रेम एवँ माता और पुत्री के प्रेम का होता है । वस्तुतः प्रेम शब्द पर पूर्ण विचार करने से ही पता चलता है कि, जब हम यह कहते हैं कि, अमुक स्त्री अमुक पुरुष से प्रेम करती है या अमुक पुरुष अमुक स्त्री से प्रेम करता है, तो इसका वही तात्पर्य नहीं होता, जो उस समय होता है, जब हम यह कहते हैं कि अमुक पुरुष अपने पुत्र से प्रेम करता है। रही उच्च-भाव या नोच-भाव की बातः उसके विषय में केवल इतना ही कहना पर्याप्त है कि, परमात्मा ने मनुष्य को जो-जो भाव दिये हैं, वह सभी उच्च और पवित्र हैं। केवल उनका सीमा से बढ़ जाना या दुष्ट-प्रयोग करना ही नीचता है ! जिस प्रकार स्त्री और पुरुष के प्रेम को सीमा से बढ़ जाने या दुरुपयोग की दशा में काम चेष्टा के दुष्ट नाम से सम्बोधित करते हैं, उसी प्रकार पिता और पुत्र के प्रेम को सीमा से बढ़ जाने या दुरुपयोग करने की दशा में मोह जैसे दूषित नाम से पुकारते हैं । बास वही है, उसमें कुछ भेद नहीं पड़ता !!
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येदियुरप्पा ने कहा, मैंने पीएम मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति के बारे में जानने की कोशिश की। मैंने प्रधानमंत्री से राज्य का बार-बार दौरा करने का अनुरोध किया है।
भाजपा के वयोवृद्ध नेता बी एस येदियुरप्पा ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक का महीने में कम से कम एक बार दौरा करने के उनके अनुरोध पर सहमति जताई है, जहां पार्टी का लक्ष्य 2023 के विधानसभा चुनावों में एक बार फिर सत्ता में वापस आने का है।
पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा शुक्रवार को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने नई दिल्ली आए। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में भाजपा को सत्ता में वापस आने से कोई ताकत नहीं रोक सकती।
'140 से ज्यादा सीटों के साथ सत्ता में वापस आएंगे'
येदियुरप्पा ने कहा, मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति के बारे में जानने की कोशिश की। मैंने प्रधानमंत्री से राज्य का बार-बार दौरा करने का अनुरोध किया है और उन्हें आश्वासन दिया है कि भाजपा भारी जीत हासिल करेगी। 140 से ज्यादा सीटों (कुल 224 में से) के साथ सत्ता में वापस आएंगे।
नई दिल्ली से लौटने के बाद यहां पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कि प्रधानमंत्री 2 सितंबर को मंगलुरु जा रहे हैं और वहां लाखों लोगों को इकट्ठा करने के लिए एक बड़े कार्यक्रम की योजना है।
उन्होंने आगे कहा, मैंने मोदी जी से महीने में कम से कम एक बार राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा करने का अनुरोध किया है, और वह इसके लिए सहमत हो गए हैं। मैंने इस संबंध में नड्डा से भी बात की है। हम पार्टी को मजबूत करेंगे और सभी प्रयास करेंगे। हाल ही में पार्टी के संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति में शामिल होने के बाद येदियुरप्पा की राष्ट्रीय राजधानी की यह पहली यात्रा थी।
येदियुरप्पा ने कहा कि राज्य के नेता पार्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से अगले कुछ दिनों में राज्यभर में दौरे शुरू करेंगे, कर्नाटक में भाजपा को सत्ता में वापस आने से कोई ताकत नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा, हमें विश्वास है कि लोग हमें आशीर्वाद देंगे. . कांग्रेस सत्ता में आने का सपना देख रही है, लेकिन हम उन्हें मौका नहीं देंगे और भाजपा सरकार बनाने के लिए एकजुट होकर काम करेंगे।
येदियुरप्पा ने सार्वजनिक कार्यों ठेकेदारों के संघ द्वारा मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ लगाए गए 40 प्रतिशत कमीशन के आरोप पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, कुछ मूर्ख किसी के प्रभाव में इस तरह के झूठे आरोप लगा रहे हैं, यह सच नहीं हो सकता। उन्होंने लोकायुक्त के पास जाने दें। इसकी जांच करवाएं, हमें कोई आपत्ति नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता सिद्धारमैया जानबूझकर ऐसा कर रहे हैं। हम विधानसभा में इसका (आरोपों का) जवाब देंगे। इसका कोई असर नहीं होगा, लोग जानते हैं कि ये झूठे आरोप हैं।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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येदियुरप्पा ने कहा, मैंने पीएम मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति के बारे में जानने की कोशिश की। मैंने प्रधानमंत्री से राज्य का बार-बार दौरा करने का अनुरोध किया है। भाजपा के वयोवृद्ध नेता बी एस येदियुरप्पा ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक का महीने में कम से कम एक बार दौरा करने के उनके अनुरोध पर सहमति जताई है, जहां पार्टी का लक्ष्य दो हज़ार तेईस के विधानसभा चुनावों में एक बार फिर सत्ता में वापस आने का है। पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा शुक्रवार को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने नई दिल्ली आए। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में भाजपा को सत्ता में वापस आने से कोई ताकत नहीं रोक सकती। 'एक सौ चालीस से ज्यादा सीटों के साथ सत्ता में वापस आएंगे' येदियुरप्पा ने कहा, मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति के बारे में जानने की कोशिश की। मैंने प्रधानमंत्री से राज्य का बार-बार दौरा करने का अनुरोध किया है और उन्हें आश्वासन दिया है कि भाजपा भारी जीत हासिल करेगी। एक सौ चालीस से ज्यादा सीटों के साथ सत्ता में वापस आएंगे। नई दिल्ली से लौटने के बाद यहां पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कि प्रधानमंत्री दो सितंबर को मंगलुरु जा रहे हैं और वहां लाखों लोगों को इकट्ठा करने के लिए एक बड़े कार्यक्रम की योजना है। उन्होंने आगे कहा, मैंने मोदी जी से महीने में कम से कम एक बार राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा करने का अनुरोध किया है, और वह इसके लिए सहमत हो गए हैं। मैंने इस संबंध में नड्डा से भी बात की है। हम पार्टी को मजबूत करेंगे और सभी प्रयास करेंगे। हाल ही में पार्टी के संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति में शामिल होने के बाद येदियुरप्पा की राष्ट्रीय राजधानी की यह पहली यात्रा थी। येदियुरप्पा ने कहा कि राज्य के नेता पार्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से अगले कुछ दिनों में राज्यभर में दौरे शुरू करेंगे, कर्नाटक में भाजपा को सत्ता में वापस आने से कोई ताकत नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा, हमें विश्वास है कि लोग हमें आशीर्वाद देंगे. . कांग्रेस सत्ता में आने का सपना देख रही है, लेकिन हम उन्हें मौका नहीं देंगे और भाजपा सरकार बनाने के लिए एकजुट होकर काम करेंगे। येदियुरप्पा ने सार्वजनिक कार्यों ठेकेदारों के संघ द्वारा मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ लगाए गए चालीस प्रतिशत कमीशन के आरोप पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, कुछ मूर्ख किसी के प्रभाव में इस तरह के झूठे आरोप लगा रहे हैं, यह सच नहीं हो सकता। उन्होंने लोकायुक्त के पास जाने दें। इसकी जांच करवाएं, हमें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता सिद्धारमैया जानबूझकर ऐसा कर रहे हैं। हम विधानसभा में इसका जवाब देंगे। इसका कोई असर नहीं होगा, लोग जानते हैं कि ये झूठे आरोप हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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ईजरायली पार्लियामेंट के स्पीकर आमिर ओहाना (Israeli Parliament Speaker Ohana) ने भारत की यात्रा शुरू करने से पहले कहा कि 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के साजिशकर्ताओं को भारी कीमत चुकानी होगी।
Mumbai Terror Attack 2008. ईजरायली पार्लियामेंट के स्पीकर आमिर ओहाना 31 मार्च से भारत की यात्रा करने वाले हैं। इससे पहले उन्होंने कहा कि 2008 के मुंबई में हुए आतंकी हमलों के साजिशकर्ताओं को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ईजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के करीबी विश्वासपात्र आमिर ओहाना ने पिछले साल स्पीकर का पदभार संभाला और 31 मार्च से भारत की चार दिनों की यात्रा करने वाले हैं। इससे पहले उन्होंने आतंकवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है और कहा कि भारत और ईजरायल दोनों देश आतंकवाद का सामना करते हैं। इसके खिलाफ हम संयुक्त लड़ाई लड़ेंगे।
ओहाना ने कहा कि हम सभी को 2008 में मुंबई में हुए घृणित आतंकवादी हमलों को याद है। इसमें 207 से अधिक लोगों की हत्या कर दी गई थी। इनमें 178 भारतीय और विदेश थे। दुर्भाग्य से ईजरायली और यहूदी भी मरने वालों में शामिल थे, जो चबाड हाउस में मारे गए थे। कहा कि यह न केवल भारत पर हमला था बल्कि यहूदियों और उनकी स्वतंत्रता पर भी हमला था। उन्होंने कहा कि भारत और ईजरायल के साझा मूल्यों पर यह आतंकी हमला था। ओहाना ने कहा कि इस हमले की साजिश रचने वाले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
ईजरायली पार्लियामेंट के स्पीकर आमिर ओहाना ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत और ईजरायल के अलावा सभी देशों को साथ आना होगा। कहा कि हमारे साझा मूल्य, हमारी चिंताएं, हमारे दर्द और रणनीतिक साझेदारी हमारे संबंधों को और मजबूत बनाती हैं। कहा कि मुझे जब विदेश यात्रा का पहला मौका मिला तो हमने भारत को चुना है। भारत के प्रमुख विकासशील शक्ति है। हमरी कई चीजें समान हैं और हमारे देश के किसी स्पीकर ने भारत की यात्रा नहीं की थी। कहा कि हमने जितने देशों की यात्रा की है, उनके विपरीत भारत कभी यहूदी विरोधी नहीं रहा है। यह अनोखी बात है।
भारत यात्रा के दौरान ओहाना अपने समकक्ष ओम बिरला के साथ दोनों संसदों के बीच एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। ताकि दोनों संस्थानों के बीच नॉलेज के आदान-प्रदान को और बेहतर बनाया जा सके। उनके साथ कानूनविद माइकल बिटन और इजराइल-भारत अंतर-संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष अमित हलेवी भी होंगे। ईजरायल का यह प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, विदेश मंत्री एस जयशंकर और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मुलाकात करेगा। साथ ही वे मुंबई का भी दौरा करेंगे, जहां चबाड़ हाउस में दिवंगत लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त करेंगे।
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ईजरायली पार्लियामेंट के स्पीकर आमिर ओहाना ने भारत की यात्रा शुरू करने से पहले कहा कि दो हज़ार आठ के मुंबई आतंकी हमलों के साजिशकर्ताओं को भारी कीमत चुकानी होगी। Mumbai Terror Attack दो हज़ार आठ. ईजरायली पार्लियामेंट के स्पीकर आमिर ओहाना इकतीस मार्च से भारत की यात्रा करने वाले हैं। इससे पहले उन्होंने कहा कि दो हज़ार आठ के मुंबई में हुए आतंकी हमलों के साजिशकर्ताओं को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ईजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के करीबी विश्वासपात्र आमिर ओहाना ने पिछले साल स्पीकर का पदभार संभाला और इकतीस मार्च से भारत की चार दिनों की यात्रा करने वाले हैं। इससे पहले उन्होंने आतंकवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है और कहा कि भारत और ईजरायल दोनों देश आतंकवाद का सामना करते हैं। इसके खिलाफ हम संयुक्त लड़ाई लड़ेंगे। ओहाना ने कहा कि हम सभी को दो हज़ार आठ में मुंबई में हुए घृणित आतंकवादी हमलों को याद है। इसमें दो सौ सात से अधिक लोगों की हत्या कर दी गई थी। इनमें एक सौ अठहत्तर भारतीय और विदेश थे। दुर्भाग्य से ईजरायली और यहूदी भी मरने वालों में शामिल थे, जो चबाड हाउस में मारे गए थे। कहा कि यह न केवल भारत पर हमला था बल्कि यहूदियों और उनकी स्वतंत्रता पर भी हमला था। उन्होंने कहा कि भारत और ईजरायल के साझा मूल्यों पर यह आतंकी हमला था। ओहाना ने कहा कि इस हमले की साजिश रचने वाले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ईजरायली पार्लियामेंट के स्पीकर आमिर ओहाना ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत और ईजरायल के अलावा सभी देशों को साथ आना होगा। कहा कि हमारे साझा मूल्य, हमारी चिंताएं, हमारे दर्द और रणनीतिक साझेदारी हमारे संबंधों को और मजबूत बनाती हैं। कहा कि मुझे जब विदेश यात्रा का पहला मौका मिला तो हमने भारत को चुना है। भारत के प्रमुख विकासशील शक्ति है। हमरी कई चीजें समान हैं और हमारे देश के किसी स्पीकर ने भारत की यात्रा नहीं की थी। कहा कि हमने जितने देशों की यात्रा की है, उनके विपरीत भारत कभी यहूदी विरोधी नहीं रहा है। यह अनोखी बात है। भारत यात्रा के दौरान ओहाना अपने समकक्ष ओम बिरला के साथ दोनों संसदों के बीच एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। ताकि दोनों संस्थानों के बीच नॉलेज के आदान-प्रदान को और बेहतर बनाया जा सके। उनके साथ कानूनविद माइकल बिटन और इजराइल-भारत अंतर-संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष अमित हलेवी भी होंगे। ईजरायल का यह प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, विदेश मंत्री एस जयशंकर और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मुलाकात करेगा। साथ ही वे मुंबई का भी दौरा करेंगे, जहां चबाड़ हाउस में दिवंगत लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त करेंगे।
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नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के सीएम की कुर्सी संभालने के बाद पहली बार पत्रकारों से रुबरू हुए सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि उनके शासन में टायर्ड और रिटायर्ड लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। हिमाचल को गुड गवर्नेंस देने के लिए हम सभी तैयार हैं। ये बात उन्होंने पीएम मोदी के साथ हुई शिष्टाचार बैठके के बाद कही। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को उनके शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने के लिए धन्यवाद। ठाकुर ने बताया कि मुलाकात के बाद पीएम ने कहा कि मेहनत करो, ताकि लोगों की उम्मीदों पर खरा उतर सको। सरकार के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर सीएम ठाकुर ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता पिछली सरकार द्वारा किए गए 46,500 करोड़ के कर्ज से निपटना है।
सीएम ने बताया कि हिमाचल एक पहाड़ी राज्य है और हमारे लिए कई चुनौतियां हैं, अच्छा होगा कि हमें केंद्र से विशेष पैकेज मिल जाए। केंद्र की सत्ता में बीजेपी काबिज है इसलिए पीएम को हमारे हालात की पूरी जानकारी है। ठाकुर ने राज्य की वीरभद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य में केंद्र की योजनाओं का सही इस्तेमाल नहीं किया इसलिए उनकी सरकार न सूबे के लोगों को पूरा लाभ देने की हरसंभव कोशिश करेगी।
सीएम जयराम ठाकुर ने बताया कि अब जंगल और खनन माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हिमाचल प्रदेश में सड़कों और हाई वे की खराब हालत को लेकर सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से ओर चार लेन के लिए अनुदान को मंजूरी मिल गई है। हम सड़कों की स्थिति को बेहतर करने की कोशिश करेंगे। राज्य में ड्रग्स के खतरे को लेकर ठाकुर ने कहा कि मैं विश्वास दिलाता हूं कि राज्य सरकार इसको लेकर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेगी।
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नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के सीएम की कुर्सी संभालने के बाद पहली बार पत्रकारों से रुबरू हुए सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि उनके शासन में टायर्ड और रिटायर्ड लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। हिमाचल को गुड गवर्नेंस देने के लिए हम सभी तैयार हैं। ये बात उन्होंने पीएम मोदी के साथ हुई शिष्टाचार बैठके के बाद कही। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को उनके शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने के लिए धन्यवाद। ठाकुर ने बताया कि मुलाकात के बाद पीएम ने कहा कि मेहनत करो, ताकि लोगों की उम्मीदों पर खरा उतर सको। सरकार के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर सीएम ठाकुर ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता पिछली सरकार द्वारा किए गए छियालीस,पाँच सौ करोड़ के कर्ज से निपटना है। सीएम ने बताया कि हिमाचल एक पहाड़ी राज्य है और हमारे लिए कई चुनौतियां हैं, अच्छा होगा कि हमें केंद्र से विशेष पैकेज मिल जाए। केंद्र की सत्ता में बीजेपी काबिज है इसलिए पीएम को हमारे हालात की पूरी जानकारी है। ठाकुर ने राज्य की वीरभद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य में केंद्र की योजनाओं का सही इस्तेमाल नहीं किया इसलिए उनकी सरकार न सूबे के लोगों को पूरा लाभ देने की हरसंभव कोशिश करेगी। सीएम जयराम ठाकुर ने बताया कि अब जंगल और खनन माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हिमाचल प्रदेश में सड़कों और हाई वे की खराब हालत को लेकर सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से ओर चार लेन के लिए अनुदान को मंजूरी मिल गई है। हम सड़कों की स्थिति को बेहतर करने की कोशिश करेंगे। राज्य में ड्रग्स के खतरे को लेकर ठाकुर ने कहा कि मैं विश्वास दिलाता हूं कि राज्य सरकार इसको लेकर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेगी।
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आदि प्रिय लगती है प्रस्तुत धारणा यह मान कर चलती है कि साहित्य को वर्ग संघर्ष आदि से दूर रहना चाहिये, क्योंकि यह राजनैतिक असंतोष कुछ दिन का है। परंतु यह प्रगतिशील साहित्य की पहली बात है। वह वर्गों का संघर्ष इसलिये नहीं दिखाता कि केवल घृरणा ही फैल जाये । वह संघर्ष के माध्यम से संसार में फैली बुराइयों को स्पष्ट करता है । वह यह प्रगट करता है कि एक सी भावनाओं का मनुष्य जब आर्थिक विषमता के भिन्न भिन्न प्रकार के स्वार्थों में पड़ता है तब उसे उनके अनुरूप ही बदल जाते देर नहीं लगती । प्रेमचंद ने ऐसे जमीदारों का चित्रण किया है जो बहुत अच्छे आदमी हैं, परंतु वर्ग स्वार्थ उन्हीं को क्रूरतम बना देता है । प्रगतिशील साहित्य यह प्रगट करता है कि समाज की पूरी जानकारी आवश्यक है। मनुष्य की भावनाओं का जन्म दैवी नहीं है वरन वह अपने भौतिक से प्रभावित होता है। सामान्य मानव में स्त्री पर बलात्कार देख कर क्रोध उत्पन्न होता है। परंतु यदि समाज में बलात्कार न्याय हो ( पैशाच पद्धति ) तो वह क्रोध नहीं होगा । प्रगतिशील चिंतन मनुष्य के वाह्य का विश्लेषण करके उसकी मनस्थितियों का सही चित्रण करता है। उसके बिना सामान्य 'मानव' की कल्पना अथ हीन है । गत्यात्मक समाज में एक ही घटना से सामान्य मानव में एक सी प्रतिक्रिया नहीं होती । मजदूर को भूख भूख से मरते देख कर पूंजीपति में दया क्यों उत्पन्न नहीं होती ? अपनी मां बहिनों के सम्मान के लिये प्राण देने वाला मनुष्य समाज में इतनी मां बहिनों को वेश्या बनते देख कर भी हाहाकार क्यों नहीं कर उठता ? विभिन्न परिस्थितियाँ विभिन्न भावनाओं को जन्म देती हैं। काव्य सामाजिक है यह हम कह ये, अन्यथा कवि अपनी बात दूसरों को सुनाना ही क्यों चाहता है ? वह लोक कल्याण चाहता है। लोक कल्याण की भावना में युगों में परिवर्तन होता रहता है । अतः भावनाओं में भी परिवर्त्तन होता है । प्रगतिशील साहित्य कभी यह नहीं कहता
कि पूंजीपति को अपने पुत्र की मृत्यु पर शोक नहीं होता। वह तो उसे उसकी सामाजिक परिस्थिति में सापेक्ष रख कर देखता है । वह यही मानता है कि एक वर्ग का स्वार्थ दूसरे वर्ग का स्वाथ नहीं होता । वेद के ब्राह्मण शूद्र का स्वार्थ एक नथा, न राम रावण का, न उपनिषद् के ऋषि और चाण्डाल का, न द्रोण और एकलब्य का, न बौद्ध और ब्राह्मण का, न तुलसी और कबीर का, न भारतेन्दु और रडयार्ड किप्लिंग का ।
प्रगतिशील साहित्य हो नहीं वरन् आज तक का साहित्य बदलता रहा है। उसका रूप बदला है । युग व्यवस्थाओं में लोक कल्याण की भावना ले जब कवियों ने विभिन्न वर्गों के मानवों की सामान्य वृत्तियों का सफल चित्रीकरण किया है, तभी वह अपनी उस मानवीयता के कारण सत्य बन सका है, जो कालांतर में भी हमारी मानवीयता को उदात्त से उदात्ततर बना सका हैं । साहित्य बदलता रहा है, तभी तो प्रगति आज से प्रारंभ नहीं होती, हम आदि से ही ढूंढने का प्रयत्न करते हैं । कब और किस प्रकार कवि मनुष्य की कल्याण गरिमा को अपने युग के बंधनों के ऊपर उठाकर दिखाया है, वही हमारे लिये प्रेरणाप्रद है । उसी मानबीयता में हम अपना तादात्म्य आज भी करते हैं। उनके युग बंधनों को तो हम स्वीकार नहीं करते । क्रिया प्रतिक्रिया इतिहास में होती आई है, परंतु उनका सामाजिक कारण अभी तक ज्ञात नहीं था, अब हम उसको पकड़ सके हैं। आज का प्रगतिशील दृष्टिकोण प्रतिक्रिया मात्र नहीं है, वरन् वह आज तक की विरासत की मानवीयता उदात्तस्वर को लेकर, नये मानव की प्रतिष्ठा में लगा हुआ संगीत है जो आगे के लिये पथ प्रशस्त करता है । यह जीवन का सर्वागीण चित्ररण है जो वर्ग संघर्ष को बुनियादी मानकर भो, केवल वर्ग संघर्ष को ही मनुष्य चेतना का पूर्णरूप नहीं मानता और यह भी नहीं मानता कि मनुष्य अपनी सामाजिकता के बिना भी मनुष्य बन सकता है। उसका दृष्टिकोण सापेक्षता के कारण
व्यापकतम है और संकुचित व्यक्तिवाद का इसीलिये वह विरोधी है ।
मम्मट ने काव्यपुरुष की कल्पना में ध्वनि, रीति, शब्द, अर्थ, अलंकार, गुण, वृत्तियों आदि का समन्वयकर रसवाद की स्थापना की थी । आधुनिक काल में श्री नंद दुलारे वाजपेयी और श्री गुलाबराय इसी प्रकार के नये रूप ढूंढने के प्रयत्न में हैं। परंतु भरत का रसवाद मूलतः साधारणीकरण पर निर्धारित हैं । यह याद रखना चाहिए कि बर्बर दास प्रथा का समाज, भरत के समय समाप्त हो रहा था और सामंतवाद का उदय हो रहा था । इससे पहले के रूप में वेदकालीन कविता है । वेद में जनता के विभिन्न रूपों को भी अभिव्यक्ति मिली है। पुरोहित वर्गों ने बाद में अपने स्वार्थ की सिद्धि करने वाली ऋचाओं को ही एकत्र करके हमारे सामने रख दिया है। आरण्यकों, ब्राह्मणों, उपनिषदों में ब्राह्मण पुरोहित वर्ग के हाथ में ही साहित्य और काव्य दिखाई देता है । महाभारत जैसा विशाल ग्रन्थ बर्बर दास प्रथा के टूटने के समय का ग्रंथ है, जिसने विभिन्न जातियों के वैमनस्य को दूर करने के प्रयत्न में जातियों की अन्तभुक्ति के साथ, आकार धारण किया है, किन्तु उसमें लड़खड़ाते समाज का भाग्यवाद सर्वोपरि है। सामंतवाद के उदय ने समाज में दास प्रथा को समाप्त करके अर्द्धगुलाम किस्म के किसान को जन्म दिया । और यह समाज में एक प्रगति थी । उस समय नये मानव ने भाग्यवाद को चुनौती दी और राम जैसे लोकनायक की भावना का उदय हुआ जो अपने पौरुष से समस्त विपत्तियों को मिटाता है। उस हलचल में स्त्री का वह रूप प्रगट होता है जो जीवन संग्राम में सीता के समान कांटों पर चलती है और अग्नि में प्रवेश करके अपनी पवित्रता का प्रमाण देती है, किन्तु धरती की बेटी अपमान न सहने के कारण सामाजिक व्यवस्था के सामने सिर नहीं झुकाती और सदेह वसुन्धरा में प्रवेश
करके प्रमाणित करती है कि मैं फिर धरती में मिल कर वहीं जाती हूँ जहाँ से आई थी ।
भरत के समय में पुरोहित वर्ग के हाथ से काव्य छीना जा रहा था। समाज की नयी शक्तियाँ विकास कर रहीं थीं। तब काव्य की व्याख्या हुई । और भरत ने पहले के छुटपुट चले आते रस संप्रदाय के विचारों को मथकर यह तथ्य निकाला कि मनुष्य समान हैं। अतः रसवाद के आधार पर, सामाजिक दृष्टिकोण ने, साधारणीकरण को स्वीकार करके, काव्य को जनता तक पहुँचाया ।
महाकवि कालिदास ने शकुन्तला को प्रेम की गरिमा दी और स्त्री के उस भव्य रूप को दिखाया, जो 'अबला' नाम से विद्रोह करता है। उसने विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध राष्ट्र को रघुवंश और कुमार संभव में जाग्रत किया। उसने मेघदूत में और ऋतुसंहार में विलास भी दिखाया, परन्तु प्रेम की मर्यादा अखंड स्थापित की । मेघदूत का प्रेम केवल संचारियों के सौंदर्य में समाप्त नहीं हो जाता, वरन् वह देश का वर्णन भी करता है। और व्यक्ति को एकांगी नहीं बनाता।
कालिदास के उपरांत जैसे-जैसे विदेशी आकी पगचाप के हिंदूकुश के परे ही सुनाई नहीं दो, वे भारत में नहीं आये, तब अपनी प्रगति को समाप्त कर चुकने वाला सामंतवाद जनता पर बोझ बन गया । परन्तु उत्पादन के साधन नहीं बदलने के कारण समाज की समस्याएँ उलझती ही चली गईं। भामह, दण्डी, अभिनवगुप्त, विश्वनाथ, कुन्तक, राजशेखर, और जगन्नाथ आदि ने नये-नये रूप दिये । इन्होंने ध्वनि, वक्रोक्ति, स्फोटवाद आदि के सिद्धान्तों द्वारा काव्य को दरबारी बनाने का प्रयत्न किया। जनसाधारण के लिये जो अधिकार भरत ने स्वीकार किया था,
इन लोगों ने बार-बार उस पर हमला करके, काव्य की नई परिभ स्थितियों के अनुसार, नई व्याख्या करने की चेष्टा करके, उसे जनता से छीन लेना चाहा । परन्तु वे इसमें असफल रहे तभी मम्मट ने समन्वयवाद का पथ पकड़ा था ।
प्रगतिशील साहित्य उसी साधारणीकरण के सिद्धांत का वर्त्तमान रूप है । वर्त्तमान होने के कारण वह रसवाद को ज्यों का त्यों 'स्त्रीकार नहीं करलेता ।
प्रगतिशील आलोचक यह मानता है कि मनुष्य 'सामान्य' है और उसकी 'सामान्यता' उसके चित्रण का आधार है, परन्तु वह इतना ही खंड सत्य नहीं देखता । वह युग के अनुरूप परिस्थिति में रखकर मनुष्य के 'सामान्य' को देखता है । जिस प्रकार सामंतकाल ने नाट्यशास्त्र के माध्यम से 'धीरोदात्त आदि नायक की कल्पना की प्रतिष्ठापना की थी उसी प्रकार नये रूपों को, नये सत्यों को प्रगतिशील लेखक स्थापित करता है । वह वर्ग संघर्ष को अपना और अतीत की सामाजिकता का वैज्ञानिक विश्लेषण मानता है। रसवादी जब कवि के वर्णित रस द्वारा युगांतर तक पाठक में उसी भाव और रस के उदय की कल्पना करता है, तब प्रगतिशील आलोचक उसे नहीं मानता । किन्तु मानव की प्रतिष्ठा, 'मानवीयता' का बर्णन, वह भी साहित्य का आधार मानता है, तभी वह भी इतिहास और साहित्य में भेद मानता है, वह मानवीयता के वर्णन को शीघ्र गत्यात्मक जगत में 'स्थिर रूप प्रतीत होने वाला गत्यात्मक' विषय मानता है। और नग्न मानवीयता को निराधार समझ कर उसे युग के वस्त्र पहनाता है और यही उसका 'कलाकला के लिये' वालों से भेद है । वह 'उपादेयतावाद' को भी सीमा मानता है । कला कला के लिये नहीं, मनुष्य के लिये हैं । मनुष्य समाज का प्राणी है। समाज का प्राणी आवश्यकताएँ देखता हैं । प्रगतिशील विचारक सौंदर्य सृष्टि के सामाजिक कल्याण वाले रूप
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आदि प्रिय लगती है प्रस्तुत धारणा यह मान कर चलती है कि साहित्य को वर्ग संघर्ष आदि से दूर रहना चाहिये, क्योंकि यह राजनैतिक असंतोष कुछ दिन का है। परंतु यह प्रगतिशील साहित्य की पहली बात है। वह वर्गों का संघर्ष इसलिये नहीं दिखाता कि केवल घृरणा ही फैल जाये । वह संघर्ष के माध्यम से संसार में फैली बुराइयों को स्पष्ट करता है । वह यह प्रगट करता है कि एक सी भावनाओं का मनुष्य जब आर्थिक विषमता के भिन्न भिन्न प्रकार के स्वार्थों में पड़ता है तब उसे उनके अनुरूप ही बदल जाते देर नहीं लगती । प्रेमचंद ने ऐसे जमीदारों का चित्रण किया है जो बहुत अच्छे आदमी हैं, परंतु वर्ग स्वार्थ उन्हीं को क्रूरतम बना देता है । प्रगतिशील साहित्य यह प्रगट करता है कि समाज की पूरी जानकारी आवश्यक है। मनुष्य की भावनाओं का जन्म दैवी नहीं है वरन वह अपने भौतिक से प्रभावित होता है। सामान्य मानव में स्त्री पर बलात्कार देख कर क्रोध उत्पन्न होता है। परंतु यदि समाज में बलात्कार न्याय हो तो वह क्रोध नहीं होगा । प्रगतिशील चिंतन मनुष्य के वाह्य का विश्लेषण करके उसकी मनस्थितियों का सही चित्रण करता है। उसके बिना सामान्य 'मानव' की कल्पना अथ हीन है । गत्यात्मक समाज में एक ही घटना से सामान्य मानव में एक सी प्रतिक्रिया नहीं होती । मजदूर को भूख भूख से मरते देख कर पूंजीपति में दया क्यों उत्पन्न नहीं होती ? अपनी मां बहिनों के सम्मान के लिये प्राण देने वाला मनुष्य समाज में इतनी मां बहिनों को वेश्या बनते देख कर भी हाहाकार क्यों नहीं कर उठता ? विभिन्न परिस्थितियाँ विभिन्न भावनाओं को जन्म देती हैं। काव्य सामाजिक है यह हम कह ये, अन्यथा कवि अपनी बात दूसरों को सुनाना ही क्यों चाहता है ? वह लोक कल्याण चाहता है। लोक कल्याण की भावना में युगों में परिवर्तन होता रहता है । अतः भावनाओं में भी परिवर्त्तन होता है । प्रगतिशील साहित्य कभी यह नहीं कहता कि पूंजीपति को अपने पुत्र की मृत्यु पर शोक नहीं होता। वह तो उसे उसकी सामाजिक परिस्थिति में सापेक्ष रख कर देखता है । वह यही मानता है कि एक वर्ग का स्वार्थ दूसरे वर्ग का स्वाथ नहीं होता । वेद के ब्राह्मण शूद्र का स्वार्थ एक नथा, न राम रावण का, न उपनिषद् के ऋषि और चाण्डाल का, न द्रोण और एकलब्य का, न बौद्ध और ब्राह्मण का, न तुलसी और कबीर का, न भारतेन्दु और रडयार्ड किप्लिंग का । प्रगतिशील साहित्य हो नहीं वरन् आज तक का साहित्य बदलता रहा है। उसका रूप बदला है । युग व्यवस्थाओं में लोक कल्याण की भावना ले जब कवियों ने विभिन्न वर्गों के मानवों की सामान्य वृत्तियों का सफल चित्रीकरण किया है, तभी वह अपनी उस मानवीयता के कारण सत्य बन सका है, जो कालांतर में भी हमारी मानवीयता को उदात्त से उदात्ततर बना सका हैं । साहित्य बदलता रहा है, तभी तो प्रगति आज से प्रारंभ नहीं होती, हम आदि से ही ढूंढने का प्रयत्न करते हैं । कब और किस प्रकार कवि मनुष्य की कल्याण गरिमा को अपने युग के बंधनों के ऊपर उठाकर दिखाया है, वही हमारे लिये प्रेरणाप्रद है । उसी मानबीयता में हम अपना तादात्म्य आज भी करते हैं। उनके युग बंधनों को तो हम स्वीकार नहीं करते । क्रिया प्रतिक्रिया इतिहास में होती आई है, परंतु उनका सामाजिक कारण अभी तक ज्ञात नहीं था, अब हम उसको पकड़ सके हैं। आज का प्रगतिशील दृष्टिकोण प्रतिक्रिया मात्र नहीं है, वरन् वह आज तक की विरासत की मानवीयता उदात्तस्वर को लेकर, नये मानव की प्रतिष्ठा में लगा हुआ संगीत है जो आगे के लिये पथ प्रशस्त करता है । यह जीवन का सर्वागीण चित्ररण है जो वर्ग संघर्ष को बुनियादी मानकर भो, केवल वर्ग संघर्ष को ही मनुष्य चेतना का पूर्णरूप नहीं मानता और यह भी नहीं मानता कि मनुष्य अपनी सामाजिकता के बिना भी मनुष्य बन सकता है। उसका दृष्टिकोण सापेक्षता के कारण व्यापकतम है और संकुचित व्यक्तिवाद का इसीलिये वह विरोधी है । मम्मट ने काव्यपुरुष की कल्पना में ध्वनि, रीति, शब्द, अर्थ, अलंकार, गुण, वृत्तियों आदि का समन्वयकर रसवाद की स्थापना की थी । आधुनिक काल में श्री नंद दुलारे वाजपेयी और श्री गुलाबराय इसी प्रकार के नये रूप ढूंढने के प्रयत्न में हैं। परंतु भरत का रसवाद मूलतः साधारणीकरण पर निर्धारित हैं । यह याद रखना चाहिए कि बर्बर दास प्रथा का समाज, भरत के समय समाप्त हो रहा था और सामंतवाद का उदय हो रहा था । इससे पहले के रूप में वेदकालीन कविता है । वेद में जनता के विभिन्न रूपों को भी अभिव्यक्ति मिली है। पुरोहित वर्गों ने बाद में अपने स्वार्थ की सिद्धि करने वाली ऋचाओं को ही एकत्र करके हमारे सामने रख दिया है। आरण्यकों, ब्राह्मणों, उपनिषदों में ब्राह्मण पुरोहित वर्ग के हाथ में ही साहित्य और काव्य दिखाई देता है । महाभारत जैसा विशाल ग्रन्थ बर्बर दास प्रथा के टूटने के समय का ग्रंथ है, जिसने विभिन्न जातियों के वैमनस्य को दूर करने के प्रयत्न में जातियों की अन्तभुक्ति के साथ, आकार धारण किया है, किन्तु उसमें लड़खड़ाते समाज का भाग्यवाद सर्वोपरि है। सामंतवाद के उदय ने समाज में दास प्रथा को समाप्त करके अर्द्धगुलाम किस्म के किसान को जन्म दिया । और यह समाज में एक प्रगति थी । उस समय नये मानव ने भाग्यवाद को चुनौती दी और राम जैसे लोकनायक की भावना का उदय हुआ जो अपने पौरुष से समस्त विपत्तियों को मिटाता है। उस हलचल में स्त्री का वह रूप प्रगट होता है जो जीवन संग्राम में सीता के समान कांटों पर चलती है और अग्नि में प्रवेश करके अपनी पवित्रता का प्रमाण देती है, किन्तु धरती की बेटी अपमान न सहने के कारण सामाजिक व्यवस्था के सामने सिर नहीं झुकाती और सदेह वसुन्धरा में प्रवेश करके प्रमाणित करती है कि मैं फिर धरती में मिल कर वहीं जाती हूँ जहाँ से आई थी । भरत के समय में पुरोहित वर्ग के हाथ से काव्य छीना जा रहा था। समाज की नयी शक्तियाँ विकास कर रहीं थीं। तब काव्य की व्याख्या हुई । और भरत ने पहले के छुटपुट चले आते रस संप्रदाय के विचारों को मथकर यह तथ्य निकाला कि मनुष्य समान हैं। अतः रसवाद के आधार पर, सामाजिक दृष्टिकोण ने, साधारणीकरण को स्वीकार करके, काव्य को जनता तक पहुँचाया । महाकवि कालिदास ने शकुन्तला को प्रेम की गरिमा दी और स्त्री के उस भव्य रूप को दिखाया, जो 'अबला' नाम से विद्रोह करता है। उसने विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध राष्ट्र को रघुवंश और कुमार संभव में जाग्रत किया। उसने मेघदूत में और ऋतुसंहार में विलास भी दिखाया, परन्तु प्रेम की मर्यादा अखंड स्थापित की । मेघदूत का प्रेम केवल संचारियों के सौंदर्य में समाप्त नहीं हो जाता, वरन् वह देश का वर्णन भी करता है। और व्यक्ति को एकांगी नहीं बनाता। कालिदास के उपरांत जैसे-जैसे विदेशी आकी पगचाप के हिंदूकुश के परे ही सुनाई नहीं दो, वे भारत में नहीं आये, तब अपनी प्रगति को समाप्त कर चुकने वाला सामंतवाद जनता पर बोझ बन गया । परन्तु उत्पादन के साधन नहीं बदलने के कारण समाज की समस्याएँ उलझती ही चली गईं। भामह, दण्डी, अभिनवगुप्त, विश्वनाथ, कुन्तक, राजशेखर, और जगन्नाथ आदि ने नये-नये रूप दिये । इन्होंने ध्वनि, वक्रोक्ति, स्फोटवाद आदि के सिद्धान्तों द्वारा काव्य को दरबारी बनाने का प्रयत्न किया। जनसाधारण के लिये जो अधिकार भरत ने स्वीकार किया था, इन लोगों ने बार-बार उस पर हमला करके, काव्य की नई परिभ स्थितियों के अनुसार, नई व्याख्या करने की चेष्टा करके, उसे जनता से छीन लेना चाहा । परन्तु वे इसमें असफल रहे तभी मम्मट ने समन्वयवाद का पथ पकड़ा था । प्रगतिशील साहित्य उसी साधारणीकरण के सिद्धांत का वर्त्तमान रूप है । वर्त्तमान होने के कारण वह रसवाद को ज्यों का त्यों 'स्त्रीकार नहीं करलेता । प्रगतिशील आलोचक यह मानता है कि मनुष्य 'सामान्य' है और उसकी 'सामान्यता' उसके चित्रण का आधार है, परन्तु वह इतना ही खंड सत्य नहीं देखता । वह युग के अनुरूप परिस्थिति में रखकर मनुष्य के 'सामान्य' को देखता है । जिस प्रकार सामंतकाल ने नाट्यशास्त्र के माध्यम से 'धीरोदात्त आदि नायक की कल्पना की प्रतिष्ठापना की थी उसी प्रकार नये रूपों को, नये सत्यों को प्रगतिशील लेखक स्थापित करता है । वह वर्ग संघर्ष को अपना और अतीत की सामाजिकता का वैज्ञानिक विश्लेषण मानता है। रसवादी जब कवि के वर्णित रस द्वारा युगांतर तक पाठक में उसी भाव और रस के उदय की कल्पना करता है, तब प्रगतिशील आलोचक उसे नहीं मानता । किन्तु मानव की प्रतिष्ठा, 'मानवीयता' का बर्णन, वह भी साहित्य का आधार मानता है, तभी वह भी इतिहास और साहित्य में भेद मानता है, वह मानवीयता के वर्णन को शीघ्र गत्यात्मक जगत में 'स्थिर रूप प्रतीत होने वाला गत्यात्मक' विषय मानता है। और नग्न मानवीयता को निराधार समझ कर उसे युग के वस्त्र पहनाता है और यही उसका 'कलाकला के लिये' वालों से भेद है । वह 'उपादेयतावाद' को भी सीमा मानता है । कला कला के लिये नहीं, मनुष्य के लिये हैं । मनुष्य समाज का प्राणी है। समाज का प्राणी आवश्यकताएँ देखता हैं । प्रगतिशील विचारक सौंदर्य सृष्टि के सामाजिक कल्याण वाले रूप
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प्रिलिम्स के लियेः
मेन्स के लियेः
चर्चा में क्यों?
हाल ही में कुछ विशेषज्ञों ने सलाह दी कि सरकार को पराली जलाने (Stubble Burning) के विकल्पों के कार्यान्वयन में तेज़ी लानी चाहिये।
- कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों की आलोचना का सामना कर रही केंद्र सरकार ने वायु आयोग विधेयक, 2021 में एक खंड को हटाने का निर्णय लिया था, जो किसानों को पराली जलाने हेतु दंडित करेगा और वायु की गुणवत्ता को कम करने में एक महत्त्वपूर्ण योगदानकर्त्ता है।
प्रमुख बिंदुः
पराली के बारे मेंः
- पराली जलाना, अगली फसल बोने के लिये फसल के अवशेषों को खेत में आग लगाने की क्रिया है।
- इसी क्रम में सर्दियों की फसल (रबी की फसल) बोने के लिये हरियाणा और पंजाब के किसानों द्वारा कम अंतराल पर फसल की बोआई की जाती है तथा अगर सर्दी की छोटी अवधि के कारण फसल बोआई में देरी होती है तो उन्हें काफी नुकसान हो सकता है, इसलिये पराली को जलना पराली की समस्या का सबसे सस्ता और तीव्र तरीका है।
- यदि पराली को खेत में छोड़ दिया जाता है, तो दीमक जैसे कीट आगामी फसल पर हमला कर सकते हैं।
- किसानों की अनिश्चित आर्थिक स्थिति उन्हें पराली हटाने के लिये महंँगे मशीनीकृत तरीकों का उपयोग करने की अनुमति नहीं देती है।
- पराली जलाने की यह प्रक्रिया अक्तूबर के आसपास शुरू होती है और नवंबर में अपने चरम पर होती है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का समय भी है।
प्रमुख कारणः
- प्रौद्योगिकीः
- मशीनीकृत कटाई के कारण समस्या उत्पन्न होती है जिससे खेतों में कई इंच फसल के अवशेष/ठूंठ (Stubble) रह जाते हैं।
- इससे पहले फसल के इन अतिरिक्त अवशेषों का उपयोग किसान खाना पकाने के लिये, घास के रूप में, अपने पशुओं को गर्म रखने के लिये या यहांँ तक कि घरों के लिये अतिरिक्त इन्सुलेशन के रूप में करते थे।
- लेकिन अब ऐसे उद्देश्यों के लिये पराली का उपयोग तार्किक नहीं रह गया है।
- कानूनों का प्रतिकूल प्रभावः
- पंजाब उप-जल संरक्षण अधिनियम (2009) के कार्यान्वयन से उत्तरी भारत में सर्दियों की शुरुआत के साथ पराली जलाने की समयावधि का भी संयोग बन गया।
- पीपीएसडब्ल्यू अधिनियम (2009) द्वारा निर्देशित जल की कमी को रोकने के लिये खरीफ मौसम के दौरान धान की देर से रोपाई करने से किसानों के पास अगली फसल हेतु फसल की कटाई और खेत तैयार करने के बीच बहुत कम समय बचता था, इसलिये किसान पराली जलाने का सहारा ले रहे हैं।
- उच्च सिलिका सामग्रीः
- उच्च सिलिका सामग्री के कारण गैर-बासमती चावल के मामले में चावल के भूसे को चारे के लिये उपयुक्त नहीं माना जाता है।
पराली जलाने के प्रभावः
- प्रदूषणः
- खुले में पराली जलाने से वातावरण में बड़ी मात्रा में ज़हरीले प्रदूषक उत्सर्जित होते हैं जिनमें मीथेन (CH4), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOC) और कार्सिनोजेनिक पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन जैसी हानिकारक गैसें होती हैं।
- वातावरण में छोड़े जाने के बाद ये प्रदूषक वातावरण में फैल जाते हैं, भौतिक और रासायनिक परिवर्तन से गुज़र सकते हैं तथा अंततः स्मॉग की मोटी चादर बनाकर मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
- मृदा उर्वरकताः
- भूसी को ज़मीन पर जलाने से मिट्टी के पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे यह कम उर्वरक हो जाती है।
- गर्मी उत्पन्न होनाः
- पराली जलाने से उत्पन्न गर्मी मिट्टी में प्रवेश करती है, जिससे नमी और उपयोगी रोगाणुओं को नुकसान होता है।
पराली जलाने के विकल्पः
- पराली का स्व-स्थानिक उपचारः उदाहरण के लिये 'ज़ीरो टिलर' मशीन द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन और बायो डीकंपोजर का उपयोग।
- गैर-स्थानिक उपचारः उदाहरण के लिये मवेशियों के चारे के रूप में चावल के भूसे का उपयोग।
- प्रौद्योगिकी का उपयोगः उदाहरण के लिये 'टर्बो हैप्पी सीडर' (THS) मशीन, जो पराली को उखाड़ सकती है और साफ किये गए क्षेत्र में बीज भी बो सकती है। इसके बाद पराली को खेत के लिये गीली घास के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- फसल पैटर्न में बदलावः यह अधिक मौलिक समाधान है।
- पराली जलाने पर अंकुश लगाने के लिये जुर्माना लगाना भारतीय सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के लिहाज़ से बेहतर विकल्प नहीं है। हमें वैकल्पिक समाधानों पर ध्यान देने की ज़रूरत है।
- यद्यपि सरकार मशीनों का वितरण कर रही है, किंतु स्व-स्थानिक प्रबंधन के लिये सभी को मशीनें नहीं मिल पाती हैं। सरकार को उनकी उपलब्धता सभी के लिये सुनिश्चित करनी चाहिये।
- इसी तरह गैर-स्थानिक उपचार प्रबंधन में कुछ कंपनियों ने अपने उपयोग के लिये पराली इकट्ठा करना शुरू कर दिया है, किंतु इस दृष्टिकोण को और अधिक बढ़ावा दिया जाना आवश्यक है।
- छोटे और सीमांत किसानों को विशेष रूप से, गैर-स्थानिक रणनीतियों को अपनाने के लिये समर्थन की आवश्यकता होती है, ताकि भूसे को मिट्टी में मिलाया जा सके और इसे जलाया नहीं जाए। समाधान तक पहुँचे बिना दंड अधिरोपित करना विकल्प नहीं है।
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प्रिलिम्स के लियेः मेन्स के लियेः चर्चा में क्यों? हाल ही में कुछ विशेषज्ञों ने सलाह दी कि सरकार को पराली जलाने के विकल्पों के कार्यान्वयन में तेज़ी लानी चाहिये। - कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों की आलोचना का सामना कर रही केंद्र सरकार ने वायु आयोग विधेयक, दो हज़ार इक्कीस में एक खंड को हटाने का निर्णय लिया था, जो किसानों को पराली जलाने हेतु दंडित करेगा और वायु की गुणवत्ता को कम करने में एक महत्त्वपूर्ण योगदानकर्त्ता है। प्रमुख बिंदुः पराली के बारे मेंः - पराली जलाना, अगली फसल बोने के लिये फसल के अवशेषों को खेत में आग लगाने की क्रिया है। - इसी क्रम में सर्दियों की फसल बोने के लिये हरियाणा और पंजाब के किसानों द्वारा कम अंतराल पर फसल की बोआई की जाती है तथा अगर सर्दी की छोटी अवधि के कारण फसल बोआई में देरी होती है तो उन्हें काफी नुकसान हो सकता है, इसलिये पराली को जलना पराली की समस्या का सबसे सस्ता और तीव्र तरीका है। - यदि पराली को खेत में छोड़ दिया जाता है, तो दीमक जैसे कीट आगामी फसल पर हमला कर सकते हैं। - किसानों की अनिश्चित आर्थिक स्थिति उन्हें पराली हटाने के लिये महंँगे मशीनीकृत तरीकों का उपयोग करने की अनुमति नहीं देती है। - पराली जलाने की यह प्रक्रिया अक्तूबर के आसपास शुरू होती है और नवंबर में अपने चरम पर होती है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का समय भी है। प्रमुख कारणः - प्रौद्योगिकीः - मशीनीकृत कटाई के कारण समस्या उत्पन्न होती है जिससे खेतों में कई इंच फसल के अवशेष/ठूंठ रह जाते हैं। - इससे पहले फसल के इन अतिरिक्त अवशेषों का उपयोग किसान खाना पकाने के लिये, घास के रूप में, अपने पशुओं को गर्म रखने के लिये या यहांँ तक कि घरों के लिये अतिरिक्त इन्सुलेशन के रूप में करते थे। - लेकिन अब ऐसे उद्देश्यों के लिये पराली का उपयोग तार्किक नहीं रह गया है। - कानूनों का प्रतिकूल प्रभावः - पंजाब उप-जल संरक्षण अधिनियम के कार्यान्वयन से उत्तरी भारत में सर्दियों की शुरुआत के साथ पराली जलाने की समयावधि का भी संयोग बन गया। - पीपीएसडब्ल्यू अधिनियम द्वारा निर्देशित जल की कमी को रोकने के लिये खरीफ मौसम के दौरान धान की देर से रोपाई करने से किसानों के पास अगली फसल हेतु फसल की कटाई और खेत तैयार करने के बीच बहुत कम समय बचता था, इसलिये किसान पराली जलाने का सहारा ले रहे हैं। - उच्च सिलिका सामग्रीः - उच्च सिलिका सामग्री के कारण गैर-बासमती चावल के मामले में चावल के भूसे को चारे के लिये उपयुक्त नहीं माना जाता है। पराली जलाने के प्रभावः - प्रदूषणः - खुले में पराली जलाने से वातावरण में बड़ी मात्रा में ज़हरीले प्रदूषक उत्सर्जित होते हैं जिनमें मीथेन , कार्बन मोनोऑक्साइड , वाष्पशील कार्बनिक यौगिक और कार्सिनोजेनिक पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन जैसी हानिकारक गैसें होती हैं। - वातावरण में छोड़े जाने के बाद ये प्रदूषक वातावरण में फैल जाते हैं, भौतिक और रासायनिक परिवर्तन से गुज़र सकते हैं तथा अंततः स्मॉग की मोटी चादर बनाकर मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। - मृदा उर्वरकताः - भूसी को ज़मीन पर जलाने से मिट्टी के पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे यह कम उर्वरक हो जाती है। - गर्मी उत्पन्न होनाः - पराली जलाने से उत्पन्न गर्मी मिट्टी में प्रवेश करती है, जिससे नमी और उपयोगी रोगाणुओं को नुकसान होता है। पराली जलाने के विकल्पः - पराली का स्व-स्थानिक उपचारः उदाहरण के लिये 'ज़ीरो टिलर' मशीन द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन और बायो डीकंपोजर का उपयोग। - गैर-स्थानिक उपचारः उदाहरण के लिये मवेशियों के चारे के रूप में चावल के भूसे का उपयोग। - प्रौद्योगिकी का उपयोगः उदाहरण के लिये 'टर्बो हैप्पी सीडर' मशीन, जो पराली को उखाड़ सकती है और साफ किये गए क्षेत्र में बीज भी बो सकती है। इसके बाद पराली को खेत के लिये गीली घास के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। - फसल पैटर्न में बदलावः यह अधिक मौलिक समाधान है। - पराली जलाने पर अंकुश लगाने के लिये जुर्माना लगाना भारतीय सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के लिहाज़ से बेहतर विकल्प नहीं है। हमें वैकल्पिक समाधानों पर ध्यान देने की ज़रूरत है। - यद्यपि सरकार मशीनों का वितरण कर रही है, किंतु स्व-स्थानिक प्रबंधन के लिये सभी को मशीनें नहीं मिल पाती हैं। सरकार को उनकी उपलब्धता सभी के लिये सुनिश्चित करनी चाहिये। - इसी तरह गैर-स्थानिक उपचार प्रबंधन में कुछ कंपनियों ने अपने उपयोग के लिये पराली इकट्ठा करना शुरू कर दिया है, किंतु इस दृष्टिकोण को और अधिक बढ़ावा दिया जाना आवश्यक है। - छोटे और सीमांत किसानों को विशेष रूप से, गैर-स्थानिक रणनीतियों को अपनाने के लिये समर्थन की आवश्यकता होती है, ताकि भूसे को मिट्टी में मिलाया जा सके और इसे जलाया नहीं जाए। समाधान तक पहुँचे बिना दंड अधिरोपित करना विकल्प नहीं है।
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पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने अग्निपथ योजना को लोकसभा चुनाव के पहले बड़ा स्कैम करार देते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के पहले लॉलीपॉप दिखाया जा रहा है.
भारतीय सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना (Agneepath Scheme) के विरोध के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने अग्निपथ योजना को बीजेपी का बड़ा स्कैम करार दिया है. सीएम ममता बनर्जी ने आसनसोल में शत्रुघ्न सिन्हा की जीत के बाद आयोजित धन्यवाद सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह बड़ा स्कैम है. एक कर्नल ने राज्य सरकार को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि अग्निपथ योजना के अग्निवीर (Agniveer) को राज्य सरकार नौकरी दे. उन्होंने कहा कि यह बीजेपी की डस्टबिन है. राज्य सरकार इसकी जिम्मेदारी क्यों लेगी? बता दें कि इसके पहले ममता बनर्जी ने अग्निवीर को बीजेपी का कैडर करार दिया था. उन्होंने कहा था कि उन्हें बंदूक की ट्रेनिंग दी जाएगी. वह आर्मी का सम्मान करती हैं, लेकिन यह घोषणा आर्मी ने नहीं की है. यह घोषणा गृह विभाग ने की है.
ममता बनर्जी ने मंगलवार को भी अग्निवीरों की सर्विस की रिटायरमेंट उम्र चार साल से बढाकर 65 साल करने की मांग की. ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना को लोकसभा चुनाव के पहले का लॉलीपॉप करार देते हुए कहा कि चुनाव के पहले उजाला लाया गया था और अब अग्निवीर का लॉलीपॉप दिखाया जा रहा है.
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पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने अग्निपथ योजना को लोकसभा चुनाव के पहले बड़ा स्कैम करार देते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के पहले लॉलीपॉप दिखाया जा रहा है. भारतीय सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना के विरोध के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अग्निपथ योजना को बीजेपी का बड़ा स्कैम करार दिया है. सीएम ममता बनर्जी ने आसनसोल में शत्रुघ्न सिन्हा की जीत के बाद आयोजित धन्यवाद सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह बड़ा स्कैम है. एक कर्नल ने राज्य सरकार को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि अग्निपथ योजना के अग्निवीर को राज्य सरकार नौकरी दे. उन्होंने कहा कि यह बीजेपी की डस्टबिन है. राज्य सरकार इसकी जिम्मेदारी क्यों लेगी? बता दें कि इसके पहले ममता बनर्जी ने अग्निवीर को बीजेपी का कैडर करार दिया था. उन्होंने कहा था कि उन्हें बंदूक की ट्रेनिंग दी जाएगी. वह आर्मी का सम्मान करती हैं, लेकिन यह घोषणा आर्मी ने नहीं की है. यह घोषणा गृह विभाग ने की है. ममता बनर्जी ने मंगलवार को भी अग्निवीरों की सर्विस की रिटायरमेंट उम्र चार साल से बढाकर पैंसठ साल करने की मांग की. ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना को लोकसभा चुनाव के पहले का लॉलीपॉप करार देते हुए कहा कि चुनाव के पहले उजाला लाया गया था और अब अग्निवीर का लॉलीपॉप दिखाया जा रहा है.
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यूरोप पहुंचने वाले प्रवासियों की संख्या बढ़ती जा रही है जिस पर चिंता जताई गई है.
यूरोपीय संघ की सीमा नियंत्रण एजेंसी फ्रंटेक्स ने इलाक़े में एक लाख सात हज़ार से ज्यादा प्रवासियों की आमद दर्ज की है.
बीते जुलाई महीने में जून की तुलना में लगभग 40 हज़ार अधिक प्रवासी यूरोप पहुंचे हैं.
ये सभी लोग गैर आधिकारिक ज़रियों से यूरोप पहुंचे हैं.
फ्रंटेक्स ने कहा है कि ये आपात स्थिति है जिसमें यूरोपीय संघ के सभी सदस्यों को उन देशों की मदद के लिए आगे आना चाहिए जो इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं.
ग्रीस, हंगरी और इटली वो देश हैं जहां सबसे अधिक प्रवासी पहुंचते हैं.
ज़्यादातर प्रवासी सीरियाई, अफ़गान और उप-सहारा अफ़्रीकी देशों के हैं.
ये लोग गरीबी और अस्थिरता से तंग आकर दूसरे देशों में शरण ले रहे हैं.
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यूरोप पहुंचने वाले प्रवासियों की संख्या बढ़ती जा रही है जिस पर चिंता जताई गई है. यूरोपीय संघ की सीमा नियंत्रण एजेंसी फ्रंटेक्स ने इलाक़े में एक लाख सात हज़ार से ज्यादा प्रवासियों की आमद दर्ज की है. बीते जुलाई महीने में जून की तुलना में लगभग चालीस हज़ार अधिक प्रवासी यूरोप पहुंचे हैं. ये सभी लोग गैर आधिकारिक ज़रियों से यूरोप पहुंचे हैं. फ्रंटेक्स ने कहा है कि ये आपात स्थिति है जिसमें यूरोपीय संघ के सभी सदस्यों को उन देशों की मदद के लिए आगे आना चाहिए जो इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं. ग्रीस, हंगरी और इटली वो देश हैं जहां सबसे अधिक प्रवासी पहुंचते हैं. ज़्यादातर प्रवासी सीरियाई, अफ़गान और उप-सहारा अफ़्रीकी देशों के हैं. ये लोग गरीबी और अस्थिरता से तंग आकर दूसरे देशों में शरण ले रहे हैं.
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रेलवे ने शुक्रवार को एक आदेश जारी किया है, जिसमें उसने मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए स्पेशल टैग को हटा दिया है. इसके साथ टिकट की कीमतों को तुरंत प्रभाव से कोविड-19 पूर्व पर वापस कर दिया गया है.
मुसाफिरों से किराये पर दबाव के बाद, रेलवे ने शुक्रवार को एक आदेश जारी किया है, जिसमें उसने मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए स्पेशल टैग को हटा दिया है. इसके साथ टिकट की कीमतों को तुरंत प्रभाव से कोविड-19 पूर्व पर वापस कर दिया गया है. जब से महामारी की वजह से लगाए गए लॉकडाउन में रियायतें दी गई थीं, उस समय से रेलवे केवल स्पेशल ट्रेनें चला रहा है.
यह लंबी दूरी की ट्रेनों के साथ शुरू हुआ था. और छोटी दूरी की पैसेंजर सेवाओं को भी स्पेशल ट्रेनों के तौर पर चलाया जा रहा है. इनका किराया थोड़ा ज्यादा है, जिससे लोगों को गैर-जरूरी सफर से बचने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके. जोनल रेलवे को शुक्रवार को एक खत में, रेलवे बोर्ड ने कहा कि ट्रेनें अब अपनी आम संख्या के साथ चलाई जाएंगी. और किराये वापस सामान्य कोरोना-पूर्व के स्तर पर कर दिए जाएंगे. स्पेशल ट्रेनों और हॉलिडे स्पेशल ट्रेनों के किराये थोड़े ज्यादा हैं.
रेलवे ने क्या कहा है?
12 नवंबर को आदेश में कहा गया है कि कोरोना महामारी को देखते हुए, सभी रेगुलर मेल/ एक्सप्रेस ट्रेनों को MSPC (मेल/ एक्सप्रेस स्पेशल) और HSP (हॉलिडे स्पेशल) के तौर पर चलाया जा रहा था. अब यह फैसला किया गया है कि MSPC और HSP ट्रेन सेवाएं, जो वर्किंग टाइम टेबल, 2021 में शामिल हैं, उन्हें रेगुलर संख्या के साथ चलाया जाएगा. इनके किराये ट्रेन के टाइप और संबंधित क्लास के लिए उपयुक्त के मुताबिक कीमत होगी. आदेश में बताया गया है कि इसे रेलवे बोर्ड के पैसेंजर मार्केटिंग डायरेक्टोरेट की सहमति के साथ जारी किया गया है.
हालांकि, आदेश में यह साफ नहीं किया गया है कि जोनल रेलवे को कोरोना पूर्व रेगुलर सेवाओं पर कब तक वापस लौटने की जरूरत है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई से कहा है कि जोनल रेलवे को निर्देश दे दिए गए हैं. जहां आदेश तुरंत प्रभाव के साथ है, प्रक्रिया में एक या दो दिन लग जाएंगे.
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अगले कुछ दिनों में 1,700 से ज्यादा ट्रेनों को दोबारा शुरू कर दिया जाएगा. पहली संख्या अब शून्य नहीं होगी, जैसा कि पहले स्पेशल ट्रेनों के मामलों में होता है. आदेश में यह नहीं बताया गया है कि स्पेशल ट्रेनों में जो छूट को वापस लिया गया था, क्या उसे दोबारा लागू किया जाएगा.
स्पेशल ट्रेनों को चलाने और बिना किसी छूट के साथ, रेलवे के रेवेन्यू में भी बड़ी ग्रोथ देखी गई है. रेलवे को 2021-22 की दूसरी तिमाही के दौरान पैसेंजर सेगमेंट से कमाई में 113 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
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रेलवे ने शुक्रवार को एक आदेश जारी किया है, जिसमें उसने मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए स्पेशल टैग को हटा दिया है. इसके साथ टिकट की कीमतों को तुरंत प्रभाव से कोविड-उन्नीस पूर्व पर वापस कर दिया गया है. मुसाफिरों से किराये पर दबाव के बाद, रेलवे ने शुक्रवार को एक आदेश जारी किया है, जिसमें उसने मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए स्पेशल टैग को हटा दिया है. इसके साथ टिकट की कीमतों को तुरंत प्रभाव से कोविड-उन्नीस पूर्व पर वापस कर दिया गया है. जब से महामारी की वजह से लगाए गए लॉकडाउन में रियायतें दी गई थीं, उस समय से रेलवे केवल स्पेशल ट्रेनें चला रहा है. यह लंबी दूरी की ट्रेनों के साथ शुरू हुआ था. और छोटी दूरी की पैसेंजर सेवाओं को भी स्पेशल ट्रेनों के तौर पर चलाया जा रहा है. इनका किराया थोड़ा ज्यादा है, जिससे लोगों को गैर-जरूरी सफर से बचने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके. जोनल रेलवे को शुक्रवार को एक खत में, रेलवे बोर्ड ने कहा कि ट्रेनें अब अपनी आम संख्या के साथ चलाई जाएंगी. और किराये वापस सामान्य कोरोना-पूर्व के स्तर पर कर दिए जाएंगे. स्पेशल ट्रेनों और हॉलिडे स्पेशल ट्रेनों के किराये थोड़े ज्यादा हैं. रेलवे ने क्या कहा है? बारह नवंबर को आदेश में कहा गया है कि कोरोना महामारी को देखते हुए, सभी रेगुलर मेल/ एक्सप्रेस ट्रेनों को MSPC और HSP के तौर पर चलाया जा रहा था. अब यह फैसला किया गया है कि MSPC और HSP ट्रेन सेवाएं, जो वर्किंग टाइम टेबल, दो हज़ार इक्कीस में शामिल हैं, उन्हें रेगुलर संख्या के साथ चलाया जाएगा. इनके किराये ट्रेन के टाइप और संबंधित क्लास के लिए उपयुक्त के मुताबिक कीमत होगी. आदेश में बताया गया है कि इसे रेलवे बोर्ड के पैसेंजर मार्केटिंग डायरेक्टोरेट की सहमति के साथ जारी किया गया है. हालांकि, आदेश में यह साफ नहीं किया गया है कि जोनल रेलवे को कोरोना पूर्व रेगुलर सेवाओं पर कब तक वापस लौटने की जरूरत है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई से कहा है कि जोनल रेलवे को निर्देश दे दिए गए हैं. जहां आदेश तुरंत प्रभाव के साथ है, प्रक्रिया में एक या दो दिन लग जाएंगे. एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अगले कुछ दिनों में एक,सात सौ से ज्यादा ट्रेनों को दोबारा शुरू कर दिया जाएगा. पहली संख्या अब शून्य नहीं होगी, जैसा कि पहले स्पेशल ट्रेनों के मामलों में होता है. आदेश में यह नहीं बताया गया है कि स्पेशल ट्रेनों में जो छूट को वापस लिया गया था, क्या उसे दोबारा लागू किया जाएगा. स्पेशल ट्रेनों को चलाने और बिना किसी छूट के साथ, रेलवे के रेवेन्यू में भी बड़ी ग्रोथ देखी गई है. रेलवे को दो हज़ार इक्कीस-बाईस की दूसरी तिमाही के दौरान पैसेंजर सेगमेंट से कमाई में एक सौ तेरह फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
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नगर पालिका के वार्ड संख्या 16 व 17 में नाला चोक होने के कारण सीवर का गंदा पानी घर में घुस रहा है। समस्या समाधान को लेकर पालिका अधिकारियों द्वारा संज्ञान न लेने से मोहल्ले के लोगों में रोष है। शुक्रवार को घर के सामने ही विरोध प्रदर्शन कर नारेबाजी की। चेताया कि मामले से आला अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
नगर पालिका परिषद अस्पताल गली के नागरिक ने पालिका प्रशासन पर आरोप लगाया कि सीवर के पानी की निकासी के मुख्य नाला को गिट्टी बालू बोरी में भरकर नाला को बन्द कर दिया गया है। जिसके कारण गली व स्थानीय नागरिकों के घर में सीवर का पानी प्रवेश कर रहा है। जिससे आमजनों में काफी आक्रोश है। मांग किया कि पालिका तत्काल उक्त समस्या का निवारण करे। मोहल्ला निवासी मोहम्मद मुस्तफा, नाजिया बेगम, नगमा बेगम, मुन्नी बानो, अनवर अली, नसीर अहमद, परवेज हाशमी, शमी मोहम्मद, मुस्तफा, नफीस, भोला, सत्तार, अख्तरी बेगम, हसीना बेगम, रुबीना बेगम, रईसा बेगम ने कहा कि गंदे पानी के कारण घर में रहना मुश्किल हो गया है। इसके कारण बीमारी फैलने की आशंका बनी हुई है। नगर विकास को लेकर सरकार की ओर से अकूत धन दिया जा रहा है, लेकिन विकास कहां हो रहा है, यह पता नहीं। कहा कि समस्या का समाधान समय पर नहीं किया गया तो मामले से डीएम को अवगत कराया जाएगा। लोगों ने अधिकारियों व चेयरमैन के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली।
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नगर पालिका के वार्ड संख्या सोलह व सत्रह में नाला चोक होने के कारण सीवर का गंदा पानी घर में घुस रहा है। समस्या समाधान को लेकर पालिका अधिकारियों द्वारा संज्ञान न लेने से मोहल्ले के लोगों में रोष है। शुक्रवार को घर के सामने ही विरोध प्रदर्शन कर नारेबाजी की। चेताया कि मामले से आला अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। नगर पालिका परिषद अस्पताल गली के नागरिक ने पालिका प्रशासन पर आरोप लगाया कि सीवर के पानी की निकासी के मुख्य नाला को गिट्टी बालू बोरी में भरकर नाला को बन्द कर दिया गया है। जिसके कारण गली व स्थानीय नागरिकों के घर में सीवर का पानी प्रवेश कर रहा है। जिससे आमजनों में काफी आक्रोश है। मांग किया कि पालिका तत्काल उक्त समस्या का निवारण करे। मोहल्ला निवासी मोहम्मद मुस्तफा, नाजिया बेगम, नगमा बेगम, मुन्नी बानो, अनवर अली, नसीर अहमद, परवेज हाशमी, शमी मोहम्मद, मुस्तफा, नफीस, भोला, सत्तार, अख्तरी बेगम, हसीना बेगम, रुबीना बेगम, रईसा बेगम ने कहा कि गंदे पानी के कारण घर में रहना मुश्किल हो गया है। इसके कारण बीमारी फैलने की आशंका बनी हुई है। नगर विकास को लेकर सरकार की ओर से अकूत धन दिया जा रहा है, लेकिन विकास कहां हो रहा है, यह पता नहीं। कहा कि समस्या का समाधान समय पर नहीं किया गया तो मामले से डीएम को अवगत कराया जाएगा। लोगों ने अधिकारियों व चेयरमैन के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली।
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Adityapur (Sanjeev Mehta) : गम्हरिया थाना क्षेत्र के इंडस्ट्रियल एरिया लार्ज सेक्टर स्थित वीके स्टील इंडस्ट्रीज के क्रेन ऑपरेटर मंगल थापा की संदिग्ध मौत के बाद कंपनी प्रबंधन ने बगैर परिजनों को जानकारी दिए शव को सदर अस्पताल भिजवा दिया गया. शव को अस्पताल भेजने के बाद मृतक के परिजनों को प्रबंधन द्वारा मौत की सूचना दी गई. सूचना पाकर परिजन नेपाल से यहां पहुंचे, मगर अब तक परिजनों को शव देखने नहीं दिया गया है. कंपनी के वरीय अधिकारी कन्हैया उपाध्याय द्वारा परिजनों को एक होटल में वार्ता के लिए बुलाया गया लेकिन शव को देखने नहीं दिया गया और न ही मुआवजा से संबंधित वार्ता की गई.
प्रबंधन के इस रुख को देखते हुए साथी कामगारों ने देर शाम परिजनों के साथ कंपनी गेट जाम कर दिया. बावजूद इसके प्रबंधन की ओर से कोई वार्ता करने नहीं पहुंचा. मामले की सूचना मिलते ही गम्हरिया थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची मगर प्रबंधन की ओर से किसी के सामने नहीं आने से वार्ता नहीं हो सका. बताया जा रहा है कि मृतक पिछले 15 सालों से कंपनी में काम कर रहा था. बुधवार की शाम ड्यूटी के दौरान मंगल की अचानक तबीयत खराब हो गई थी. जिसे ईएसआईसी अस्पताल ले जाया गया था. जहां से जरूरी दवाइयां देकर वापस भेज दिया गया. गुरुवार को पुनः उसकी तबीयत खराब हुई उसे फिर दोबारा ईएसआईसी अस्पताल ले जाया गया, मगर उसकी तबीयत और बिगड़ने लगी. वहां से कुछ जरूरी दवाइयां देकर फिर वापस कंपनी भेज दिया गया. इसी दौरान और अधिक तबीयत खराब होने से मृतक ने कंपनी में ही दम तोड़ दिया.
मृतक कंपनी के अंदर ही बने स्टाफ क्वार्टर में रहता था. वहां से बगैर किसी को सूचना दिए प्रबंधन द्वारा मृतक के शव को सदर अस्पताल भेज दिया गया. इसको लेकर मजदूरों में आक्रोश व्याप्त है. मौत की सूचना पर मृतक की पत्नी नेपाल से 2 बच्चों के साथ यहां पहुंची है, मगर उसे अब तक इंसाफ नहीं मिला है. यहां तक कि उसे अपने मृत पति का मुंह तक देखने नहीं दिया गया है, जो कहीं ना कहीं मजदूर के प्रति कंपनी की असंवेदनशीलता को दर्शाता है. घटना की सूचना मिलते ही नेपाली समुदाय के लोग कंपनी परिसर में इकट्ठा होने लगे. फिलहाल प्रबंधन की ओर से पक्ष रखने कोई सामने नहीं आया है.
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Adityapur : गम्हरिया थाना क्षेत्र के इंडस्ट्रियल एरिया लार्ज सेक्टर स्थित वीके स्टील इंडस्ट्रीज के क्रेन ऑपरेटर मंगल थापा की संदिग्ध मौत के बाद कंपनी प्रबंधन ने बगैर परिजनों को जानकारी दिए शव को सदर अस्पताल भिजवा दिया गया. शव को अस्पताल भेजने के बाद मृतक के परिजनों को प्रबंधन द्वारा मौत की सूचना दी गई. सूचना पाकर परिजन नेपाल से यहां पहुंचे, मगर अब तक परिजनों को शव देखने नहीं दिया गया है. कंपनी के वरीय अधिकारी कन्हैया उपाध्याय द्वारा परिजनों को एक होटल में वार्ता के लिए बुलाया गया लेकिन शव को देखने नहीं दिया गया और न ही मुआवजा से संबंधित वार्ता की गई. प्रबंधन के इस रुख को देखते हुए साथी कामगारों ने देर शाम परिजनों के साथ कंपनी गेट जाम कर दिया. बावजूद इसके प्रबंधन की ओर से कोई वार्ता करने नहीं पहुंचा. मामले की सूचना मिलते ही गम्हरिया थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची मगर प्रबंधन की ओर से किसी के सामने नहीं आने से वार्ता नहीं हो सका. बताया जा रहा है कि मृतक पिछले पंद्रह सालों से कंपनी में काम कर रहा था. बुधवार की शाम ड्यूटी के दौरान मंगल की अचानक तबीयत खराब हो गई थी. जिसे ईएसआईसी अस्पताल ले जाया गया था. जहां से जरूरी दवाइयां देकर वापस भेज दिया गया. गुरुवार को पुनः उसकी तबीयत खराब हुई उसे फिर दोबारा ईएसआईसी अस्पताल ले जाया गया, मगर उसकी तबीयत और बिगड़ने लगी. वहां से कुछ जरूरी दवाइयां देकर फिर वापस कंपनी भेज दिया गया. इसी दौरान और अधिक तबीयत खराब होने से मृतक ने कंपनी में ही दम तोड़ दिया. मृतक कंपनी के अंदर ही बने स्टाफ क्वार्टर में रहता था. वहां से बगैर किसी को सूचना दिए प्रबंधन द्वारा मृतक के शव को सदर अस्पताल भेज दिया गया. इसको लेकर मजदूरों में आक्रोश व्याप्त है. मौत की सूचना पर मृतक की पत्नी नेपाल से दो बच्चों के साथ यहां पहुंची है, मगर उसे अब तक इंसाफ नहीं मिला है. यहां तक कि उसे अपने मृत पति का मुंह तक देखने नहीं दिया गया है, जो कहीं ना कहीं मजदूर के प्रति कंपनी की असंवेदनशीलता को दर्शाता है. घटना की सूचना मिलते ही नेपाली समुदाय के लोग कंपनी परिसर में इकट्ठा होने लगे. फिलहाल प्रबंधन की ओर से पक्ष रखने कोई सामने नहीं आया है.
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पाकिस्तान नेशनल असेंबली में बोलते हुए, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज नेता अयाज सादिक ने खुलासा किया था कि आखिर क्यों इमरान सरकार ने विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को रिहा किया था.
पाकिस्तानी सांसद अयाज सादिक, जिन्होंने पाकिस्तान सरकार और सेना की आलोचना का सामना करते हुए खुलासा किया कि इमरान खान की अगुवाई वाली सरकार ने विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को भारत के हमले के डर से रिहा कर दिया था, उन्होंने कहा कि वह अपने बयान बार काबिज हैं और कहा कि वह "कई राज" जानते हैं, लेकिन कभी भी कोई गैर जिम्मेदाराना बयान नहीं दिया है.
दरअसल पाकिस्तान नेशनल असेंबली में बोलते हुए, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज नेता सादिक ने अपने एक भाषण के दौरान फरवरी 2019 की बैठक की घटनाओं को याद किया था. अयाज सादिक ने खुलासा किया कि आखिर क्यों इमरान सरकार ने विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को रिहा किया था.
उनके इस बयान की सत्तारूढ़ पार्टी के मंत्रियों ने काफी आलोचना की और इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के प्रमुख मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटनाओं के संबंध में "रिकॉर्ड को सही" करने की मांग की थी. पाकिस्तानी सेना ने कहा कि हमने भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन को जिनेवा कन्वेंशन के तहत छोड़ा था और पाकिस्तानी सांसद ने ऐसा कह कर हमें शर्मिंदा किया.
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पाकिस्तान नेशनल असेंबली में बोलते हुए, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज नेता अयाज सादिक ने खुलासा किया था कि आखिर क्यों इमरान सरकार ने विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को रिहा किया था. पाकिस्तानी सांसद अयाज सादिक, जिन्होंने पाकिस्तान सरकार और सेना की आलोचना का सामना करते हुए खुलासा किया कि इमरान खान की अगुवाई वाली सरकार ने विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को भारत के हमले के डर से रिहा कर दिया था, उन्होंने कहा कि वह अपने बयान बार काबिज हैं और कहा कि वह "कई राज" जानते हैं, लेकिन कभी भी कोई गैर जिम्मेदाराना बयान नहीं दिया है. दरअसल पाकिस्तान नेशनल असेंबली में बोलते हुए, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज नेता सादिक ने अपने एक भाषण के दौरान फरवरी दो हज़ार उन्नीस की बैठक की घटनाओं को याद किया था. अयाज सादिक ने खुलासा किया कि आखिर क्यों इमरान सरकार ने विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को रिहा किया था. उनके इस बयान की सत्तारूढ़ पार्टी के मंत्रियों ने काफी आलोचना की और इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के प्रमुख मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटनाओं के संबंध में "रिकॉर्ड को सही" करने की मांग की थी. पाकिस्तानी सेना ने कहा कि हमने भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन को जिनेवा कन्वेंशन के तहत छोड़ा था और पाकिस्तानी सांसद ने ऐसा कह कर हमें शर्मिंदा किया.
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आज आपका दिन बेहतरीन रहने वाला है । संतान की तरफ से कोई शुभ समाचार मिलेगा। आज आपका पूरा ध्यान अपने करियर को आगे बढ़ाने पर रहेगा। छात्रों के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करके आपको काफी अच्छा महसूस होगा। जीवनसाथी के साथ कहीं घूमने का प्लान बनायेंगे।प्रॉपर्टीसे जुड़े लोगों को फायदा होगा। भगवान गणेश को लड्डू का भोग लगायें, रुके हुये कार्य पूरे होंगे।
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आज आपका दिन बेहतरीन रहने वाला है । संतान की तरफ से कोई शुभ समाचार मिलेगा। आज आपका पूरा ध्यान अपने करियर को आगे बढ़ाने पर रहेगा। छात्रों के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करके आपको काफी अच्छा महसूस होगा। जीवनसाथी के साथ कहीं घूमने का प्लान बनायेंगे।प्रॉपर्टीसे जुड़े लोगों को फायदा होगा। भगवान गणेश को लड्डू का भोग लगायें, रुके हुये कार्य पूरे होंगे।
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ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग मोड में यहां बैचलर्स के 8 डिग्री प्रोग्राम हैं। इनमें आर्ट्स ऐंड टूरिजम स्टडीज, कंप्यूटर एप्लिकेशंस, सोशल वर्क, लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस, प्रिपेरटरी प्रोग्राम शामिल हैं। इनके अलावा बैचलर्स डिग्री प्रोग्राम में बीए, बीकॉम और बीएससी का भी ऑप्शन मौजूद है। वहीं मास्टर डिग्री में 26 प्रोग्राम और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा में यूनिवर्सिटी 30 प्रोग्राम का ऑप्शन देती है।
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ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग मोड में यहां बैचलर्स के आठ डिग्री प्रोग्राम हैं। इनमें आर्ट्स ऐंड टूरिजम स्टडीज, कंप्यूटर एप्लिकेशंस, सोशल वर्क, लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस, प्रिपेरटरी प्रोग्राम शामिल हैं। इनके अलावा बैचलर्स डिग्री प्रोग्राम में बीए, बीकॉम और बीएससी का भी ऑप्शन मौजूद है। वहीं मास्टर डिग्री में छब्बीस प्रोग्राम और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा में यूनिवर्सिटी तीस प्रोग्राम का ऑप्शन देती है।
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सांस्कृतिक इतिहास बताता है कि हिरण्यकशिपु उस हिरण्याक्ष के भाई थे जिसने ग्रेट डेजर्ट में स्वर्ण की खानों का पता लगाया था। उसने अपने भाई के वघ से दुखी होकर देवताओं पर आतंक मचाया : अनेक देवलोकों को विजित किया : संपूर्ण उत्तर-पश्चिम के फ़ारस और समूचे अफगानिस्तान को अपने अधीन कर लिया । इस दृष्टि से देखने पर नृसिंहावतार का हिरण्यकशिपु वराहावतार के हिरण्याक्ष के भाई ही था जिसके ऐतिहासिक अस्तित्व का संकेत मिला है ।
3. प्रह्लाद : प्रह्लाद बड़े हरि-भक्त थे । वे जीवन के संबंधों को निस्सार मानते थे । वे सज्जन-सांगत्य के द्वारा हरि-भक्ति पाना चाहते थे । वे भक्ति में आह्लाद का अनुभव करते थे । आह्लाद में स्थित होने के कारण ही वे हिरण्यकशिपु के सब अत्याचारों से बच गये । अव प्रह्लादको आह्लाद में स्थित जीवसत्ता के प्रतीक के रूप में समझ सकते है ।
5. वामनावतार
इस अवतार के दो मुख्य प्रतीक हैं- 1. वामन और 2. वलि । उनको प्रतीकात्मकता इस प्रकार है1. वामन : वामन शरीर से छोटे और बुद्धि से विराट मानव है । उनमें होमो सेपियन्स तथा एन्थ्रोपोएड युगों के संधिकाल की शारीरिक और मानसिक अवस्था का परिचय मिलता है । एन्थोपोत्राएड युग में मानव-सम प्राणियों का अस्तित्व रहा हो तो होमो सेपियन्स युग में अत्यन्त मेधावी लोगों का । अतएव वामन एन्थोपोआएड युग और होमो नेपियन्स युग के संधिकाल के पुराण प्रतीक
जब वलि दान देने के लिए तैयार हुए तब वामन ने तीनों पैरों में तीन लोक नाप लिये और शेष घ पैर को उनकी पीठ से नापकर उन्हें पाताल भेज दिया ।
द्रष्टव्य, वय रक्षाम, पृ० 43-44
अनुरनि गिरि से दियो गिराइ । राखि लियौ तहं त्रिभुवनराई ।
हरि जू तहँ हूँ करी सहाइ । नाग रहे सिर नीचे नाइ । ता०, 429 सूर स्याम वावन वपु धर्यो । वही, 439
ल) चारों वेद पढ़त मुख आगर, अति नुकंठ-सुर-गावन । वही, 440 ला) अपद - दुपद - पनु भाषा बुझत
इस घटना के आधार पर वामन को मानव विकास की उस अवस्था के प्रतीक मान जहाँ मनुष्य शारीरिक विकास की दृष्टि से किंचित् अपरिपुष्ट होकर भी के निमित्त सचेष्ट होने लगा था । वामन बाल-अभिप्राय के प्रतीक भी हैं दोनों तत्त्व - ग्रसहायावस्था, महत्तर शक्तियों की
2. बलि : वलि श्रात्माभिमानी दानी थे । इसलिए वे कभी भी अपनी बात से टलते नहीं थे । अपने गुरु शुक्राचार्य के मना करने पर भी उन्होंने वामन को दान दिया । 3 इससे स्पष्ट है कि बलि त्यागी अंह के प्रतीक हैं। 4
6. परशुराम अवतार
सूर से वरिंगत परशुराम अवतार के मुख्य प्रतीकों का अध्ययन नीचे किया गया है1. परशुराम : शब्दार्थ के आधार पर परशु (कुल्हाड़ी) राम ( रमरण करने वाला) को उस खिलाडी के प्रतीक मान सकते हैं जो कामोन्माद के बहाव एवं मानसिक ग्रावेगों के तूफान में रहते समय अपने अंतर्गत रहनेवाली काम भावनाओं पर परसु रखकर उनके प्रति विराग की भावना को उत्पन्न करता है ताकि प्रात्मा की उन्नति हो सके 15
परशुराम द्विज थे ।" किन्तु उनमें क्षत्रिय का वीरोचित साहस था । इसलिए पिता के एक क्षत्रिय द्वारा मारे जाने पर उन्होंने पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रियविहीन कर डाला । इस प्रकार परशुराम में ब्राह्मरण के साथ-साथ क्षत्रिय तत्त्वों, का समावेश है । श्रतएव परशुराम को उस प्रतीक के रूप में समझ सकते हैं जिसमें बुद्धि श्रीर पराक्रम का समुचित संयोग हो ।
मानव सभ्यता के विकास की दृष्टि से परशुराम शिकारी मानव युग तथा पशु-मानव-युग के संधि-काल का प्रतिनिधित्व करनेवाले पुरारण प्रतीक हैं। 7 वे
1 द्रष्टव्य, मध्यकालीन साहित्य में जनतारवाद, डॉ० कपिलदेव पांडेय, पृ० 677 2 मध्ययुगीन हिंदी साहित्य का लोकतात्विक अध्ययन, डॉ० सत्यद्र, पृ०393
The Puranas in the light of Modern Science, पृ० 233 वही, पृ० 235
तुम तो द्विज -
5 द्रष्टव्य, मध्यकालीन साहित्य में जनतारवाद, पृ० 681
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सांस्कृतिक इतिहास बताता है कि हिरण्यकशिपु उस हिरण्याक्ष के भाई थे जिसने ग्रेट डेजर्ट में स्वर्ण की खानों का पता लगाया था। उसने अपने भाई के वघ से दुखी होकर देवताओं पर आतंक मचाया : अनेक देवलोकों को विजित किया : संपूर्ण उत्तर-पश्चिम के फ़ारस और समूचे अफगानिस्तान को अपने अधीन कर लिया । इस दृष्टि से देखने पर नृसिंहावतार का हिरण्यकशिपु वराहावतार के हिरण्याक्ष के भाई ही था जिसके ऐतिहासिक अस्तित्व का संकेत मिला है । तीन. प्रह्लाद : प्रह्लाद बड़े हरि-भक्त थे । वे जीवन के संबंधों को निस्सार मानते थे । वे सज्जन-सांगत्य के द्वारा हरि-भक्ति पाना चाहते थे । वे भक्ति में आह्लाद का अनुभव करते थे । आह्लाद में स्थित होने के कारण ही वे हिरण्यकशिपु के सब अत्याचारों से बच गये । अव प्रह्लादको आह्लाद में स्थित जीवसत्ता के प्रतीक के रूप में समझ सकते है । पाँच. वामनावतार इस अवतार के दो मुख्य प्रतीक हैं- एक. वामन और दो. वलि । उनको प्रतीकात्मकता इस प्रकार हैएक. वामन : वामन शरीर से छोटे और बुद्धि से विराट मानव है । उनमें होमो सेपियन्स तथा एन्थ्रोपोएड युगों के संधिकाल की शारीरिक और मानसिक अवस्था का परिचय मिलता है । एन्थोपोत्राएड युग में मानव-सम प्राणियों का अस्तित्व रहा हो तो होमो सेपियन्स युग में अत्यन्त मेधावी लोगों का । अतएव वामन एन्थोपोआएड युग और होमो नेपियन्स युग के संधिकाल के पुराण प्रतीक जब वलि दान देने के लिए तैयार हुए तब वामन ने तीनों पैरों में तीन लोक नाप लिये और शेष घ पैर को उनकी पीठ से नापकर उन्हें पाताल भेज दिया । द्रष्टव्य, वय रक्षाम, पृशून्य तैंतालीस-चौंतालीस अनुरनि गिरि से दियो गिराइ । राखि लियौ तहं त्रिभुवनराई । हरि जू तहँ हूँ करी सहाइ । नाग रहे सिर नीचे नाइ । ताशून्य, चार सौ उनतीस सूर स्याम वावन वपु धर्यो । वही, चार सौ उनतालीस ल) चारों वेद पढ़त मुख आगर, अति नुकंठ-सुर-गावन । वही, चार सौ चालीस ला) अपद - दुपद - पनु भाषा बुझत इस घटना के आधार पर वामन को मानव विकास की उस अवस्था के प्रतीक मान जहाँ मनुष्य शारीरिक विकास की दृष्टि से किंचित् अपरिपुष्ट होकर भी के निमित्त सचेष्ट होने लगा था । वामन बाल-अभिप्राय के प्रतीक भी हैं दोनों तत्त्व - ग्रसहायावस्था, महत्तर शक्तियों की दो. बलि : वलि श्रात्माभिमानी दानी थे । इसलिए वे कभी भी अपनी बात से टलते नहीं थे । अपने गुरु शुक्राचार्य के मना करने पर भी उन्होंने वामन को दान दिया । तीन इससे स्पष्ट है कि बलि त्यागी अंह के प्रतीक हैं। चार छः. परशुराम अवतार सूर से वरिंगत परशुराम अवतार के मुख्य प्रतीकों का अध्ययन नीचे किया गया हैएक. परशुराम : शब्दार्थ के आधार पर परशु राम को उस खिलाडी के प्रतीक मान सकते हैं जो कामोन्माद के बहाव एवं मानसिक ग्रावेगों के तूफान में रहते समय अपने अंतर्गत रहनेवाली काम भावनाओं पर परसु रखकर उनके प्रति विराग की भावना को उत्पन्न करता है ताकि प्रात्मा की उन्नति हो सके पंद्रह परशुराम द्विज थे ।" किन्तु उनमें क्षत्रिय का वीरोचित साहस था । इसलिए पिता के एक क्षत्रिय द्वारा मारे जाने पर उन्होंने पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रियविहीन कर डाला । इस प्रकार परशुराम में ब्राह्मरण के साथ-साथ क्षत्रिय तत्त्वों, का समावेश है । श्रतएव परशुराम को उस प्रतीक के रूप में समझ सकते हैं जिसमें बुद्धि श्रीर पराक्रम का समुचित संयोग हो । मानव सभ्यता के विकास की दृष्टि से परशुराम शिकारी मानव युग तथा पशु-मानव-युग के संधि-काल का प्रतिनिधित्व करनेवाले पुरारण प्रतीक हैं। सात वे एक द्रष्टव्य, मध्यकालीन साहित्य में जनतारवाद, डॉशून्य कपिलदेव पांडेय, पृशून्य छः सौ सतहत्तर दो मध्ययुगीन हिंदी साहित्य का लोकतात्विक अध्ययन, डॉशून्य सत्यद्र, पृतीन सौ तिरानवे The Puranas in the light of Modern Science, पृशून्य दो सौ तैंतीस वही, पृशून्य दो सौ पैंतीस तुम तो द्विज - पाँच द्रष्टव्य, मध्यकालीन साहित्य में जनतारवाद, पृशून्य छः सौ इक्यासी
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जम्मू, 23 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर के दो नागरिक समझा जाता है कि अनजाने में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार कर पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में चले गए हैं।
पुंछ जिले के साजियन गांव के दो निवासी बशीर अहमद और गुलाम रसूल 12 सितंबर को घर से नियंत्रण रेखा की तरफ किसी काम से निकले थे।
पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, शनिवार को, उनके परिवारों ने पुलिस को सूचित किया कि दोनों उसके बाद से घर नहीं लौटे हैं। ऐसा माना जा रहा है किदोनों अनजाने में सीमा पार कर पाकिस्तानी हिस्से में चले गए हैं।
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जम्मू, तेईस सितंबर । जम्मू एवं कश्मीर के दो नागरिक समझा जाता है कि अनजाने में नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में चले गए हैं। पुंछ जिले के साजियन गांव के दो निवासी बशीर अहमद और गुलाम रसूल बारह सितंबर को घर से नियंत्रण रेखा की तरफ किसी काम से निकले थे। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, शनिवार को, उनके परिवारों ने पुलिस को सूचित किया कि दोनों उसके बाद से घर नहीं लौटे हैं। ऐसा माना जा रहा है किदोनों अनजाने में सीमा पार कर पाकिस्तानी हिस्से में चले गए हैं।
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पोकरण : पाकिस्तान की तरफ से लगातार हो रहे सीजफायर के उल्लंघन के बाद भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी को खबर मिली थी कि 26 जनवरी के दौरान आतंकवादी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने कि फ़िराक में है. इसके चलते सेना को मुस्तैद कर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था और प्रमुख शहरों कि सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई थी. वहीँ गंतरा दिवस के मौके पर मिलिट्री इंटेलिजेंस और जैसलमेर पुलिस की संयुक्त कार्यवाही में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है. इन तीनो संदिग्धों के पास से प्रतिबंधित सेटेलाइट फोन भी बरामद किये गए हैं.
मिली जानकारी के अनुसार तीनो को पोकरण के थाट गांव के पास से पकड़ा गया है. वहीँ पकड़े गए तीनो आरोपियों में से 2 अरब के नागरिक बताये गए हैं, जबकि एक नागरिक भारतीय है. भारतीय नागरिक हैदराबाद का रहने वाला है. पकड़े जाने के बाद इन तीनो से पूछताछ जारी है. मिलिट्री इंटेलीजेंस को बीती रात पोकरण थाट गांव के पास से सेटेलाइट फोन के इस्तेमाल होने के संकेत मिले थे. इसी पर कार्यवाही करते हुए मिलिट्री इंटेलीजेंस ने पोकरण पुलिस के साथ मिलकर तीनो आरोपियों को धर दबोचा. अरब नागरिकों की पहचान अलसभान और अलशमरी के रूप में हुई है. और इनके साथ जो भारतीय नागरिक था उसका नाम सैयद मोहसिन बताया जा रहा है.
पुलिस को जानकारी मिली की दोनों अरब के नागरिकों को सैयद मोहसिन ही यहाँ लाया था. वहीँ पुलिस ने बताया कि दोनों विदेशी आरोपियों के पास से तकरीबन 10 सेटेलाइट फोन बरामद किये गए हैं. वहीँ पुलिस एसपी गौरव यादव का कहना है कि सेटेलाइट फोन का इस्तेमाल गंभीर मुद्दा है और इसे लेकर पकड़े गए आरोपियों से सख्ती से पूछताछ कि जा रही है. आगे जानकारी देते हुए गौरव ने कहा कि पुलिस की पूछताछ पूरी हो जाने के बाद इन्हे खुफिया एजेंसियां को सौंप दिया जायेगा. फिर एजेंसी इनसे पूछताछ करेगी.
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पोकरण : पाकिस्तान की तरफ से लगातार हो रहे सीजफायर के उल्लंघन के बाद भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी को खबर मिली थी कि छब्बीस जनवरी के दौरान आतंकवादी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने कि फ़िराक में है. इसके चलते सेना को मुस्तैद कर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था और प्रमुख शहरों कि सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई थी. वहीँ गंतरा दिवस के मौके पर मिलिट्री इंटेलिजेंस और जैसलमेर पुलिस की संयुक्त कार्यवाही में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है. इन तीनो संदिग्धों के पास से प्रतिबंधित सेटेलाइट फोन भी बरामद किये गए हैं. मिली जानकारी के अनुसार तीनो को पोकरण के थाट गांव के पास से पकड़ा गया है. वहीँ पकड़े गए तीनो आरोपियों में से दो अरब के नागरिक बताये गए हैं, जबकि एक नागरिक भारतीय है. भारतीय नागरिक हैदराबाद का रहने वाला है. पकड़े जाने के बाद इन तीनो से पूछताछ जारी है. मिलिट्री इंटेलीजेंस को बीती रात पोकरण थाट गांव के पास से सेटेलाइट फोन के इस्तेमाल होने के संकेत मिले थे. इसी पर कार्यवाही करते हुए मिलिट्री इंटेलीजेंस ने पोकरण पुलिस के साथ मिलकर तीनो आरोपियों को धर दबोचा. अरब नागरिकों की पहचान अलसभान और अलशमरी के रूप में हुई है. और इनके साथ जो भारतीय नागरिक था उसका नाम सैयद मोहसिन बताया जा रहा है. पुलिस को जानकारी मिली की दोनों अरब के नागरिकों को सैयद मोहसिन ही यहाँ लाया था. वहीँ पुलिस ने बताया कि दोनों विदेशी आरोपियों के पास से तकरीबन दस सेटेलाइट फोन बरामद किये गए हैं. वहीँ पुलिस एसपी गौरव यादव का कहना है कि सेटेलाइट फोन का इस्तेमाल गंभीर मुद्दा है और इसे लेकर पकड़े गए आरोपियों से सख्ती से पूछताछ कि जा रही है. आगे जानकारी देते हुए गौरव ने कहा कि पुलिस की पूछताछ पूरी हो जाने के बाद इन्हे खुफिया एजेंसियां को सौंप दिया जायेगा. फिर एजेंसी इनसे पूछताछ करेगी.
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नई दिल्लीः पूर्व न्यायाधीश और स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद शहाबुद्दीन चुप्पू को निर्विरोध बांग्लादेश का 22वां राष्ट्रपति चुना गया है.
मुख्य चुनाव आयुक्त काजी हबीबुल अवल ने अगरगांव में चुनाव आयोग भवन में पत्रकारों से बात करते हुए यह घोषणा की.
भ्रष्टाचार निरोधक आयोग के एक पूर्व आयुक्त चौहत्तर वर्षीय शहाबुद्दीन चुप्पू को बांग्लादेश के 22वें राष्ट्रपति के रूप में निर्विरोध चुना गया और वे वर्तमान राष्ट्रपति मोहम्मद अब्दुल हामिद की जगह लेंगे.
समाचार एजेंसी 'यूएनबी' के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त काजी हबीबुल अवल ने रविवार को जमा किए गए उनके नामांकन पत्रों की जांच के बाद अवामी लीग सलाहकार परिषद के सदस्य और पार्टी द्वारा नामित चुप्पू को बांग्लादेश का निर्विरोध निर्वाचित राष्ट्रपति घोषित किया.
खबर में कहा गया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति की नियुक्ति पर सोमवार को एक गजट जारी किया गया.
हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.
302 सदस्यों के साथ, एएल पार्टी के पास 350 सीटों वाली राष्ट्रीय संसद में बहुमत है, और किसी अन्य पार्टी के पास राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को नामांकित करने की संख्या नहीं थी. नामांकन प्रक्रिया भी रविवार को समाप्त हो गई.
राष्ट्रपति के प्रेस सचिव ने यूएनबी को बताया कि हामिद ने फोन पर नवनिर्वाचित राष्ट्रपति का अभिवादन किया और सोमवार को उनकी सफलता की कामना की.
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, अवामी लीग की प्रमुख और प्रधानमंत्री शेख हसीना ने शहाबुद्दीन का नामांकन जमा करने के बाद फूलों का गुलदस्ता देकर स्वागत किया.
बांग्लादेश में सबसे लंबे समय तक राष्ट्रपति पद पर रहने वाले हामिद का कार्यकाल 23 अप्रैल को समाप्त होगा और संविधान के अनुसार वह तीसरा कार्यकाल नहीं रख सकते हैं.
अवामी लीग के वरिष्ठ नेता और सात बार के विधायक हामिद पिछले दो चुनावों में बांग्लादेश के राष्ट्रपति चुने गए थे. उन्होंने 24 अप्रैल, 2018 को अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली.
शहाबुद्दीन का जन्म 1949 में हुआ था और छात्र वर्षों से ही वे राजनीतिक जीवन जी रहे थे.
जिला और सत्र न्यायाधीश के पद से अपनी सेवानिवृत्ति के बाद चुप्पू ने स्वतंत्र भ्रष्टाचार विरोधी आयोग के आयुक्तों में से एक के रूप में कार्य किया. बाद में वे अवामी लीग सलाहकार परिषद के सदस्य बने, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता और टेक्नोक्रेट शामिल हैं. हालांकि,चुप्पू को राष्ट्र का प्रमुख बनने के लिए पार्टी पद छोड़ना होगा.
बांग्लादेश के उत्तरी जिले पबना के रहने वाले शहाबुद्दीन ने विभिन्न राजनीतिक और राज्य की भूमिकाएं निभाई हैं.
1971 में मुक्ति संग्राम के दौरान, शहाबुद्दीन उत्तरी क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी थे, एक छात्र नेता और स्वाधीन बांग्ला छत्र संग्राम परिषद के संयोजक के रूप में कार्यरत थे.
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व अवामी लीग प्रेसीडियम के सदस्य मोहम्मद नसीम के साथ उन्होंने युद्ध के दौरान पाबना जिले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
शहाबुद्दीन ने 1983 में न्यायिक सेवा में अपना करियर शुरू किया और 2006 तक जिला न्यायाधीश रहे. उन्होंने 2006 में लेबर कोर्ट के अध्यक्ष, 2008-2011 तक सुप्रीम कोर्ट के वकील और 2011-2016 तक एसीसी के आयुक्त के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया.
हालांकि राष्ट्रपति बांग्लादेश में राज्य का प्रमुख होता है, उसके पास कोई कार्यकारी शक्तियां नहीं होती हैं. यह बस एक औपचारिक पद है.
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नई दिल्लीः पूर्व न्यायाधीश और स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद शहाबुद्दीन चुप्पू को निर्विरोध बांग्लादेश का बाईसवां राष्ट्रपति चुना गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त काजी हबीबुल अवल ने अगरगांव में चुनाव आयोग भवन में पत्रकारों से बात करते हुए यह घोषणा की. भ्रष्टाचार निरोधक आयोग के एक पूर्व आयुक्त चौहत्तर वर्षीय शहाबुद्दीन चुप्पू को बांग्लादेश के बाईसवें राष्ट्रपति के रूप में निर्विरोध चुना गया और वे वर्तमान राष्ट्रपति मोहम्मद अब्दुल हामिद की जगह लेंगे. समाचार एजेंसी 'यूएनबी' के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त काजी हबीबुल अवल ने रविवार को जमा किए गए उनके नामांकन पत्रों की जांच के बाद अवामी लीग सलाहकार परिषद के सदस्य और पार्टी द्वारा नामित चुप्पू को बांग्लादेश का निर्विरोध निर्वाचित राष्ट्रपति घोषित किया. खबर में कहा गया है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति की नियुक्ति पर सोमवार को एक गजट जारी किया गया. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. तीन सौ दो सदस्यों के साथ, एएल पार्टी के पास तीन सौ पचास सीटों वाली राष्ट्रीय संसद में बहुमत है, और किसी अन्य पार्टी के पास राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को नामांकित करने की संख्या नहीं थी. नामांकन प्रक्रिया भी रविवार को समाप्त हो गई. राष्ट्रपति के प्रेस सचिव ने यूएनबी को बताया कि हामिद ने फोन पर नवनिर्वाचित राष्ट्रपति का अभिवादन किया और सोमवार को उनकी सफलता की कामना की. ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, अवामी लीग की प्रमुख और प्रधानमंत्री शेख हसीना ने शहाबुद्दीन का नामांकन जमा करने के बाद फूलों का गुलदस्ता देकर स्वागत किया. बांग्लादेश में सबसे लंबे समय तक राष्ट्रपति पद पर रहने वाले हामिद का कार्यकाल तेईस अप्रैल को समाप्त होगा और संविधान के अनुसार वह तीसरा कार्यकाल नहीं रख सकते हैं. अवामी लीग के वरिष्ठ नेता और सात बार के विधायक हामिद पिछले दो चुनावों में बांग्लादेश के राष्ट्रपति चुने गए थे. उन्होंने चौबीस अप्रैल, दो हज़ार अट्ठारह को अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली. शहाबुद्दीन का जन्म एक हज़ार नौ सौ उनचास में हुआ था और छात्र वर्षों से ही वे राजनीतिक जीवन जी रहे थे. जिला और सत्र न्यायाधीश के पद से अपनी सेवानिवृत्ति के बाद चुप्पू ने स्वतंत्र भ्रष्टाचार विरोधी आयोग के आयुक्तों में से एक के रूप में कार्य किया. बाद में वे अवामी लीग सलाहकार परिषद के सदस्य बने, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता और टेक्नोक्रेट शामिल हैं. हालांकि,चुप्पू को राष्ट्र का प्रमुख बनने के लिए पार्टी पद छोड़ना होगा. बांग्लादेश के उत्तरी जिले पबना के रहने वाले शहाबुद्दीन ने विभिन्न राजनीतिक और राज्य की भूमिकाएं निभाई हैं. एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में मुक्ति संग्राम के दौरान, शहाबुद्दीन उत्तरी क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी थे, एक छात्र नेता और स्वाधीन बांग्ला छत्र संग्राम परिषद के संयोजक के रूप में कार्यरत थे. ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व अवामी लीग प्रेसीडियम के सदस्य मोहम्मद नसीम के साथ उन्होंने युद्ध के दौरान पाबना जिले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. शहाबुद्दीन ने एक हज़ार नौ सौ तिरासी में न्यायिक सेवा में अपना करियर शुरू किया और दो हज़ार छः तक जिला न्यायाधीश रहे. उन्होंने दो हज़ार छः में लेबर कोर्ट के अध्यक्ष, दो हज़ार आठ-दो हज़ार ग्यारह तक सुप्रीम कोर्ट के वकील और दो हज़ार ग्यारह-दो हज़ार सोलह तक एसीसी के आयुक्त के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया. हालांकि राष्ट्रपति बांग्लादेश में राज्य का प्रमुख होता है, उसके पास कोई कार्यकारी शक्तियां नहीं होती हैं. यह बस एक औपचारिक पद है.
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शायद हर किसी ने रूस की स्वर्ण रिंग के बारे में सुना हैः यरोस्लाव, व्लादिमीर, रोस्तोव, कोस्तरोमा, इवानवा, Suzdal, Sergiev Posad, Pereslavl। इस मार्ग साधारण यात्रियों और तीर्थयात्रियों और स्थापत्य कला के प्रेमियों के बीच बहुत लोकप्रिय है। इन शहरों मास्को की आसान पहुंच के भीतर अपने स्वयं के हित में है, और उनमें से प्रत्येक के प्रत्येक। यरोस्लाव - लेकिन आज मार्ग की अनौपचारिक राजधानी है, जो पूरा रूस पर गर्व है के बारे में बात करने के लिए है।
व्यावहारिक रूप से सभी को "भालू कोने" अभिव्यक्ति को पता है,जिसका मतलब बहरा प्रांत है, जहां बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। लेकिन कुछ बताएंगे कि यह कहां से आया था। मंदी का कोना आधुनिक मरोस्लाव की साइट पर वोल्गा में कोटरोसल नदी के संगम से दूर स्थित मूर्तिपूजा निपटान होता था। उस समय राजधानी की भूमिका रोस्टोव द ग्रेट ने पूरी नदी पर बनाई थी, इसलिए व्यापार और सैन्य रणनीति के दृष्टिकोण से यह एक बहुत ही फायदेमंद स्थान था। योरोस्लाव, उपनाम वाइस, रोस्तोव राजकुमार ने इस जगह पर एक किले लगाने का फैसला किया, इसलिए उसने कब्जा कर लिया और निपटारे को जला दिया, मूर्तिपूजा मंदिरों को बर्बाद कर दिया। उसने उसे अपने नाम का नाम दिया - यारोस्लाव, और भालू हथियारों का कोट बन गया, जो लोग उसके सामने वहां रहते थे। यह ग्यारहवीं शताब्दी की शुरुआत में हुआ, इसलिए शहर की नींव का आधिकारिक वर्ष 1010 वर्ष है। 1218 में, वह यारोस्लाव प्रिंसिपलिटी का केंद्र बन गया, और 250 साल बाद - मास्को का हिस्सा। प्रिंस मिनिन और नागरिक पॉज़र्स्की ने निज़नी नोवगोरोड में पोलिश आक्रमणकारियों को बाहर निकालने के लिए लोगों के मिलिशिया को इकट्ठा करना शुरू किया, लेकिन यहां जारी रखा।
इस तथ्य के बावजूद कि शहर में मूर्तिपूजक जड़ें हैंबारहवीं शताब्दी यह ईसाई धर्म का केंद्र बन गया। यहां कई चर्च और मठ बनाए गए थे। सेंट पीटर्सबर्ग की स्थापना के बाद, एक शॉपिंग सेंटर के रूप में यारोस्लाव का महत्व कुछ हद तक खो गया था, लेकिन उद्योग विकसित होना शुरू हुआ।
अब यारोस्लाव इस क्षेत्र की राजधानी हैलगभग 500 हजार लोगों की आबादी, जो एक जीवित वास्तुशिल्प स्मारक और गतिशील रूप से क्षेत्र के विकासशील केंद्र की ज़िम्मेदारी को जोड़ती है। स्थान और परिवहन सुलभता रसद सुविधाजनक बनाती है, लेकिन, रूस के अधिकांश क्षेत्रों में, शहर ने व्यावहारिक रूप से विकास में रोक दिया है। अब, कम या ज्यादा सफल केवल एक मनोरंजक सेगमेंट कहा जा सकता है, हजारों जन्मदिन हजारों पार्क खोले गए थे, एननबलिंग पर अन्य काम किए गए थे। अब वह रूस की तथाकथित गोल्डन रिंग का हिस्सा है। यारोस्लाव दोनों विदेशियों और संप्रदायों के साथ लोकप्रिय है, लेकिन यह लंबे समय तक यहां रहने के लिए इतना बड़ा नहीं है, हालांकि इसमें एक निश्चित आकर्षण है जो आपको बार-बार वापस आ जाता है।
यरोस्लाव के चर्च दुनिया भर में मशहूर हैं, और कुछ भी नहीं। उनमें से ज्यादातर, केंद्र में केंद्रित कर रहे हैं शहर के पुराने हिस्से में। सुंदर दृश्य उन्हें और चलने ट्रेल्स के लिए खोलता है, लेकिन नाव सड़कों में बंधा हुआ के साथ, चित्र और भी शानदार लग रहा है। यरोस्लाव के दो मुख्य सड़कों -, शायद, इसके तटबंधों है। वोल्गा नदी के किनारे स्थित प्रोमेनेड,, विशेष रूप से उसके अंत में, चलने को आकर्षित करता है मोड़ में, साइट लगभग पूरी तरह से नष्ट कर दिया कीमा शहर धारणा कैथेड्रल, जो 2010 में बनाया गया था है। उसे इससे पहले कि ट्रिनिटी की एक मूर्ति है।
यहां, वोल्गा तटबंध पर, एक हैशहर के प्रतीकों से - बर्फ-सफेद आर्कर, 1840 में बनाया गया। यारोस्लाव की सड़कों को लगभग अपने मूल रूप में संरक्षित किया गया था, वे औद्योगिक विकास और आधुनिक इमारतों से बहुत प्रभावित थे। एपिफेनी स्क्वायर पर शहर के केंद्र में जाने से आप यरोस्लाव द वाइज़ के लिए एक स्मारक देख सकते हैं, जिसमें से एक ग्राफिक छवि 1000 रूबल के मूल्य पर है। शहर के निवासी कभी-कभी मजाक कर उसे "केक के साथ एक आदमी" कहते हैं। आसपास के, कोटरोस्ली वाटरफ्रंट के करीब, ट्रांसफिगरेशन मठ है। आम तौर पर, हर कदम पर रूढ़िवादी चर्चः माइकल महादूत, एलीया पैगंबर, जॉन द बैपटिस्ट, निकोलस गीले, एपिफेनी, क्राइस्ट की जन्म, इत्यादि।
वैसे, यारोस्लाव के सिनेमाघरों में सबसे अमीर औररूस में एक लंबा इतिहास, क्योंकि इस तरह की कला यहां से चली गई है। पहला नाटक ट्रूप 18 वीं शताब्दी में बनाया गया था, इसके संस्थापक फ्योडोर वोल्कोव के बाद, सेंट पीटर्सबर्ग का दौरा किया। वहां उन्होंने इतालवी रंगमंच के प्रदर्शन को देखा और इस मातृभूमि में इस कला के रूप को विकसित करने के लिए तैयार किया।
यरोस्लाव रूस की स्वर्ण रिंग के लिए व्यर्थ नहीं है। यह बिना कारण के भी है कि इसे इसकी राजधानी माना जाता है - शहर का ऐतिहासिक केंद्र यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। तो वैसे भी यहां एक यात्रा के लायक है।
यारोस्लाव और उसके स्मारकों के थिएटर, ज़ाहिर है,दिलचस्प है, लेकिन बच्चों के साथ यात्रियों के लिए, खासकर छोटे, अन्य मनोरंजन आवश्यक है। शहर में वे हैं - यहां कुछ साल पहले रूस में सबसे अच्छे चिड़ियाघर खोले गए थे। 2015 तक, यह अभी भी आंशिक रूप से पूरा हो रहा है, लेकिन सभी कार्यों के पूरा होने के बाद, एक सफारी पार्क यहां स्थित होगा, और 1,500 से अधिक विभिन्न विदेशी जानवरों का निपटारा होगा। इस पार्क का लाभ यह है कि जानवर निकट पिंजरों में नहीं रहते हैं, लेकिन पिंजरों में, यानी, जो परिस्थितियां संभव हो उतनी प्राकृतिक हैं। छोटे आगंतुक इसे यहां पसंद करते हैं।
यरोस्लाव अभी भी बहुत सुविधाजनक रूप से स्थित है। मॉस्को से आप इसे कार, बस, ट्रेन, या पानी के परिवहन से प्राप्त कर सकते हैं। उत्तरार्द्ध, वैसे, गर्मियों में बहुत लोकप्रिय है, क्योंकि नाव से आप एक परिचित शहर को पूरी तरह से नए तरीके से भी देख सकते हैं।
सड़क अपेक्षाकृत कम समय लेता है -खाते में यातायात जाम और स्टॉप को ध्यान में रखते हुए, शायद ही कभी 6 घंटे से अधिक हो जाता है। इस मामले में कार का लाभ लपेटने की क्षमता है, उदाहरण के लिए, रोस्टोव द ग्रेट या पेरेस्लाव-ज़लसेकी में, "गोल्डन रिंग" मार्ग का भी हिस्सा है।
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शायद हर किसी ने रूस की स्वर्ण रिंग के बारे में सुना हैः यरोस्लाव, व्लादिमीर, रोस्तोव, कोस्तरोमा, इवानवा, Suzdal, Sergiev Posad, Pereslavl। इस मार्ग साधारण यात्रियों और तीर्थयात्रियों और स्थापत्य कला के प्रेमियों के बीच बहुत लोकप्रिय है। इन शहरों मास्को की आसान पहुंच के भीतर अपने स्वयं के हित में है, और उनमें से प्रत्येक के प्रत्येक। यरोस्लाव - लेकिन आज मार्ग की अनौपचारिक राजधानी है, जो पूरा रूस पर गर्व है के बारे में बात करने के लिए है। व्यावहारिक रूप से सभी को "भालू कोने" अभिव्यक्ति को पता है,जिसका मतलब बहरा प्रांत है, जहां बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। लेकिन कुछ बताएंगे कि यह कहां से आया था। मंदी का कोना आधुनिक मरोस्लाव की साइट पर वोल्गा में कोटरोसल नदी के संगम से दूर स्थित मूर्तिपूजा निपटान होता था। उस समय राजधानी की भूमिका रोस्टोव द ग्रेट ने पूरी नदी पर बनाई थी, इसलिए व्यापार और सैन्य रणनीति के दृष्टिकोण से यह एक बहुत ही फायदेमंद स्थान था। योरोस्लाव, उपनाम वाइस, रोस्तोव राजकुमार ने इस जगह पर एक किले लगाने का फैसला किया, इसलिए उसने कब्जा कर लिया और निपटारे को जला दिया, मूर्तिपूजा मंदिरों को बर्बाद कर दिया। उसने उसे अपने नाम का नाम दिया - यारोस्लाव, और भालू हथियारों का कोट बन गया, जो लोग उसके सामने वहां रहते थे। यह ग्यारहवीं शताब्दी की शुरुआत में हुआ, इसलिए शहर की नींव का आधिकारिक वर्ष एक हज़ार दस वर्ष है। एक हज़ार दो सौ अट्ठारह में, वह यारोस्लाव प्रिंसिपलिटी का केंद्र बन गया, और दो सौ पचास साल बाद - मास्को का हिस्सा। प्रिंस मिनिन और नागरिक पॉज़र्स्की ने निज़नी नोवगोरोड में पोलिश आक्रमणकारियों को बाहर निकालने के लिए लोगों के मिलिशिया को इकट्ठा करना शुरू किया, लेकिन यहां जारी रखा। इस तथ्य के बावजूद कि शहर में मूर्तिपूजक जड़ें हैंबारहवीं शताब्दी यह ईसाई धर्म का केंद्र बन गया। यहां कई चर्च और मठ बनाए गए थे। सेंट पीटर्सबर्ग की स्थापना के बाद, एक शॉपिंग सेंटर के रूप में यारोस्लाव का महत्व कुछ हद तक खो गया था, लेकिन उद्योग विकसित होना शुरू हुआ। अब यारोस्लाव इस क्षेत्र की राजधानी हैलगभग पाँच सौ हजार लोगों की आबादी, जो एक जीवित वास्तुशिल्प स्मारक और गतिशील रूप से क्षेत्र के विकासशील केंद्र की ज़िम्मेदारी को जोड़ती है। स्थान और परिवहन सुलभता रसद सुविधाजनक बनाती है, लेकिन, रूस के अधिकांश क्षेत्रों में, शहर ने व्यावहारिक रूप से विकास में रोक दिया है। अब, कम या ज्यादा सफल केवल एक मनोरंजक सेगमेंट कहा जा सकता है, हजारों जन्मदिन हजारों पार्क खोले गए थे, एननबलिंग पर अन्य काम किए गए थे। अब वह रूस की तथाकथित गोल्डन रिंग का हिस्सा है। यारोस्लाव दोनों विदेशियों और संप्रदायों के साथ लोकप्रिय है, लेकिन यह लंबे समय तक यहां रहने के लिए इतना बड़ा नहीं है, हालांकि इसमें एक निश्चित आकर्षण है जो आपको बार-बार वापस आ जाता है। यरोस्लाव के चर्च दुनिया भर में मशहूर हैं, और कुछ भी नहीं। उनमें से ज्यादातर, केंद्र में केंद्रित कर रहे हैं शहर के पुराने हिस्से में। सुंदर दृश्य उन्हें और चलने ट्रेल्स के लिए खोलता है, लेकिन नाव सड़कों में बंधा हुआ के साथ, चित्र और भी शानदार लग रहा है। यरोस्लाव के दो मुख्य सड़कों -, शायद, इसके तटबंधों है। वोल्गा नदी के किनारे स्थित प्रोमेनेड,, विशेष रूप से उसके अंत में, चलने को आकर्षित करता है मोड़ में, साइट लगभग पूरी तरह से नष्ट कर दिया कीमा शहर धारणा कैथेड्रल, जो दो हज़ार दस में बनाया गया था है। उसे इससे पहले कि ट्रिनिटी की एक मूर्ति है। यहां, वोल्गा तटबंध पर, एक हैशहर के प्रतीकों से - बर्फ-सफेद आर्कर, एक हज़ार आठ सौ चालीस में बनाया गया। यारोस्लाव की सड़कों को लगभग अपने मूल रूप में संरक्षित किया गया था, वे औद्योगिक विकास और आधुनिक इमारतों से बहुत प्रभावित थे। एपिफेनी स्क्वायर पर शहर के केंद्र में जाने से आप यरोस्लाव द वाइज़ के लिए एक स्मारक देख सकते हैं, जिसमें से एक ग्राफिक छवि एक हज़ार रूबल के मूल्य पर है। शहर के निवासी कभी-कभी मजाक कर उसे "केक के साथ एक आदमी" कहते हैं। आसपास के, कोटरोस्ली वाटरफ्रंट के करीब, ट्रांसफिगरेशन मठ है। आम तौर पर, हर कदम पर रूढ़िवादी चर्चः माइकल महादूत, एलीया पैगंबर, जॉन द बैपटिस्ट, निकोलस गीले, एपिफेनी, क्राइस्ट की जन्म, इत्यादि। वैसे, यारोस्लाव के सिनेमाघरों में सबसे अमीर औररूस में एक लंबा इतिहास, क्योंकि इस तरह की कला यहां से चली गई है। पहला नाटक ट्रूप अट्ठारह वीं शताब्दी में बनाया गया था, इसके संस्थापक फ्योडोर वोल्कोव के बाद, सेंट पीटर्सबर्ग का दौरा किया। वहां उन्होंने इतालवी रंगमंच के प्रदर्शन को देखा और इस मातृभूमि में इस कला के रूप को विकसित करने के लिए तैयार किया। यरोस्लाव रूस की स्वर्ण रिंग के लिए व्यर्थ नहीं है। यह बिना कारण के भी है कि इसे इसकी राजधानी माना जाता है - शहर का ऐतिहासिक केंद्र यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। तो वैसे भी यहां एक यात्रा के लायक है। यारोस्लाव और उसके स्मारकों के थिएटर, ज़ाहिर है,दिलचस्प है, लेकिन बच्चों के साथ यात्रियों के लिए, खासकर छोटे, अन्य मनोरंजन आवश्यक है। शहर में वे हैं - यहां कुछ साल पहले रूस में सबसे अच्छे चिड़ियाघर खोले गए थे। दो हज़ार पंद्रह तक, यह अभी भी आंशिक रूप से पूरा हो रहा है, लेकिन सभी कार्यों के पूरा होने के बाद, एक सफारी पार्क यहां स्थित होगा, और एक,पाँच सौ से अधिक विभिन्न विदेशी जानवरों का निपटारा होगा। इस पार्क का लाभ यह है कि जानवर निकट पिंजरों में नहीं रहते हैं, लेकिन पिंजरों में, यानी, जो परिस्थितियां संभव हो उतनी प्राकृतिक हैं। छोटे आगंतुक इसे यहां पसंद करते हैं। यरोस्लाव अभी भी बहुत सुविधाजनक रूप से स्थित है। मॉस्को से आप इसे कार, बस, ट्रेन, या पानी के परिवहन से प्राप्त कर सकते हैं। उत्तरार्द्ध, वैसे, गर्मियों में बहुत लोकप्रिय है, क्योंकि नाव से आप एक परिचित शहर को पूरी तरह से नए तरीके से भी देख सकते हैं। सड़क अपेक्षाकृत कम समय लेता है -खाते में यातायात जाम और स्टॉप को ध्यान में रखते हुए, शायद ही कभी छः घंटाटे से अधिक हो जाता है। इस मामले में कार का लाभ लपेटने की क्षमता है, उदाहरण के लिए, रोस्टोव द ग्रेट या पेरेस्लाव-ज़लसेकी में, "गोल्डन रिंग" मार्ग का भी हिस्सा है।
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लेकिन गृह मंत्रालय (एमएचए) ने अभी तक अप्रवासन केंद्र को सूचित नहीं किया है।
एक अधिकारी ने बुधवार को कहा कि विस्तारा 1 अगस्त को अगरतला और बेंगलुरु के बीच एक उड़ान सेवा शुरू करेगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में इंडिगो और अकासा अगरतला-बेंगलुरु मार्ग पर तीन उड़ानें संचालित करती हैं।
"विस्तारा 1 अगस्त से अगरतला-बेंगलुरु मार्ग पर एक उड़ान संचालित करने के लिए निर्धारित है। उड़ान सीधे बेंगलुरु से यहां आएगी, और अगरतला से अपनी वापसी की यात्रा पर, यह गुवाहाटी से होकर जाएगी। इससे यात्रियों को अत्यधिक लाभ होगा," के निदेशक महाराजा बीर बिक्रम एयरपोर्ट केसी मीणा ने पीटीआई को बताया।
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मार्ग पर और उड़ानें शुरू करने का आग्रह किया था।
मीणा ने कहा कि स्पाइसजेट बांग्लादेश में अगरतला और चटगांव के बीच सेवाएं शुरू करने के लिए तैयार है, लेकिन गृह मंत्रालय (एमएचए) ने अभी तक अप्रवासन केंद्र को सूचित नहीं किया है।
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लेकिन गृह मंत्रालय ने अभी तक अप्रवासन केंद्र को सूचित नहीं किया है। एक अधिकारी ने बुधवार को कहा कि विस्तारा एक अगस्त को अगरतला और बेंगलुरु के बीच एक उड़ान सेवा शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इंडिगो और अकासा अगरतला-बेंगलुरु मार्ग पर तीन उड़ानें संचालित करती हैं। "विस्तारा एक अगस्त से अगरतला-बेंगलुरु मार्ग पर एक उड़ान संचालित करने के लिए निर्धारित है। उड़ान सीधे बेंगलुरु से यहां आएगी, और अगरतला से अपनी वापसी की यात्रा पर, यह गुवाहाटी से होकर जाएगी। इससे यात्रियों को अत्यधिक लाभ होगा," के निदेशक महाराजा बीर बिक्रम एयरपोर्ट केसी मीणा ने पीटीआई को बताया। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मार्ग पर और उड़ानें शुरू करने का आग्रह किया था। मीणा ने कहा कि स्पाइसजेट बांग्लादेश में अगरतला और चटगांव के बीच सेवाएं शुरू करने के लिए तैयार है, लेकिन गृह मंत्रालय ने अभी तक अप्रवासन केंद्र को सूचित नहीं किया है।
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बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती का 1 जुलाई को जन्मदिन है। रिया 30 साल की हो गई हैं। वह इस वक्त MTV Roadies S19 में नजर आ रही हैं। लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब वह इस लाइमलाइट की दुनिया से कोसों दूर थीं। वह वक्त था सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद का। जब एक्ट्रेस पर कई गंभीर आरोप लगे थे और इसके चलते उन्हें जेल जाना पड़ा था। रिया पर सुशांत को आत्महत्या के लिए उकसाने और उन्हें ड्रग्स देने का आरोप लगा था।
रिया को भायखुला जेल में रखा गया था। वहीं भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी मानवाधिकार वकील सुधा भारद्वाज को भी रखा गया था। सुधा ने मीडिया से बात करते हुए रिया चक्रवर्ती के बारे में बताया। उन्होंने बताया था कि कैदियों के साथ रिया का बर्ताव कैसा था।
सुधा ने बताया था कि रिया को कैदी बहुत पसंद किया करते थे, क्योंकि वह अन्य कैदियों के साथ मिल जुलकर रहती थीं। वह आम लोगों की तरह काम करती थीं और अच्छे से रहती थीं। जिस दिन उन्हें जेल से रिहा किया गया था,सारे कैदी उन्हें छोड़ने गेट तक गए थे। रिया के पास जो भी पैसे थे रिया ने उनकी मिठाई मंगवाकर कैदियों की खिलाई थी।
इस वक्त रिया रोडीज में लीड कर रही हैं। हाल ही में उन्होंने ऑडिशन के लिए आई एक लड़की को आपबीती सुनाई। रिया ने बताया कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उन्हें बहुत कुछ झेलना पड़ा था। लोग उन्हें बहुत भला बुरा कहते थे और उन्हें कई नाम भी दिए गए थे। लेकिन वह उनकी बातों पर ध्यान न देते हुए आगे बढ़ीं।
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बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती का एक जुलाई को जन्मदिन है। रिया तीस साल की हो गई हैं। वह इस वक्त MTV Roadies Sउन्नीस में नजर आ रही हैं। लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब वह इस लाइमलाइट की दुनिया से कोसों दूर थीं। वह वक्त था सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद का। जब एक्ट्रेस पर कई गंभीर आरोप लगे थे और इसके चलते उन्हें जेल जाना पड़ा था। रिया पर सुशांत को आत्महत्या के लिए उकसाने और उन्हें ड्रग्स देने का आरोप लगा था। रिया को भायखुला जेल में रखा गया था। वहीं भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी मानवाधिकार वकील सुधा भारद्वाज को भी रखा गया था। सुधा ने मीडिया से बात करते हुए रिया चक्रवर्ती के बारे में बताया। उन्होंने बताया था कि कैदियों के साथ रिया का बर्ताव कैसा था। सुधा ने बताया था कि रिया को कैदी बहुत पसंद किया करते थे, क्योंकि वह अन्य कैदियों के साथ मिल जुलकर रहती थीं। वह आम लोगों की तरह काम करती थीं और अच्छे से रहती थीं। जिस दिन उन्हें जेल से रिहा किया गया था,सारे कैदी उन्हें छोड़ने गेट तक गए थे। रिया के पास जो भी पैसे थे रिया ने उनकी मिठाई मंगवाकर कैदियों की खिलाई थी। इस वक्त रिया रोडीज में लीड कर रही हैं। हाल ही में उन्होंने ऑडिशन के लिए आई एक लड़की को आपबीती सुनाई। रिया ने बताया कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उन्हें बहुत कुछ झेलना पड़ा था। लोग उन्हें बहुत भला बुरा कहते थे और उन्हें कई नाम भी दिए गए थे। लेकिन वह उनकी बातों पर ध्यान न देते हुए आगे बढ़ीं।
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वाराणसी में आम आदमी पार्टी महानगर के कार्यकर्ताओं का 5 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल महानगर अध्यक्ष अखिलेश पाण्डेय के नेतृत्व में सहायक नगर आयुक्त को 4 सूत्रीय मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
रामनगर में पंचवटी मार्ग पर कूड़ा घर को हटाने, रामनगर में सफाई, गलियों के मरम्मत, को लेकर ज्ञापन सौंपा है। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नगर निगम कार्यालय के बाहर नारेबाजी की। क्षेत्र में फैले व्याप्त अव्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जताई।
पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि रामपुर रामनगर वार्ड के अमित वर्मा महासचिव कैंट विधानसभा महानगर वाराणसी विगत 7 दिनों से जनसमस्या को लेकर धरने पर बैठे हैं। आठवें दिन रविवार से भूख हड़ताल पर है। लेकिन अभी तक नगर निगम के अधिकारी या जिला प्रशासन का कोई भी अधिकारी धरना स्थल पर नहीं पहुंचा। कुड़ा घर मुख्य मार्ग और आवासीय व स्कूल मंदिर के समीप है। जिससे सुबह स्कूल जाने में बच्चों व ऑफिस जाने में आम नागरिकों को काफी व्यवधान उत्पन्न होता है।
इस संबंध में आम आदमी पार्टी महानगर अध्यक्ष के नेतृत्व में सोमवार को नगर आयुक्त से वार्ता कर अवगत कराया गया। नगर आयुक्त ने सुनिश्चित किया कि इस समस्या को जल्द से जल्द निस्तारित किया जाएगा।
आम आदमी पार्टी द्वारा चार सूत्री मांगों में कूड़ा घर को कहीं और शिफ्ट किया जाए। जो रिहायशी इलाके में है। वार्ड के सीवर लाइन खराब है। उसका मरम्मत या नई सीवर लाइन डाला जाए। गलियों को सीमेंटेड किया जाए। वार्ड की कर व्यवस्था स्थगित रखी जाए। तब तक जब तक कि यह सारी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से स्थापित नहीं हो जाती है।
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वाराणसी में आम आदमी पार्टी महानगर के कार्यकर्ताओं का पाँच सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल महानगर अध्यक्ष अखिलेश पाण्डेय के नेतृत्व में सहायक नगर आयुक्त को चार सूत्रीय मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। रामनगर में पंचवटी मार्ग पर कूड़ा घर को हटाने, रामनगर में सफाई, गलियों के मरम्मत, को लेकर ज्ञापन सौंपा है। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नगर निगम कार्यालय के बाहर नारेबाजी की। क्षेत्र में फैले व्याप्त अव्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जताई। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि रामपुर रामनगर वार्ड के अमित वर्मा महासचिव कैंट विधानसभा महानगर वाराणसी विगत सात दिनों से जनसमस्या को लेकर धरने पर बैठे हैं। आठवें दिन रविवार से भूख हड़ताल पर है। लेकिन अभी तक नगर निगम के अधिकारी या जिला प्रशासन का कोई भी अधिकारी धरना स्थल पर नहीं पहुंचा। कुड़ा घर मुख्य मार्ग और आवासीय व स्कूल मंदिर के समीप है। जिससे सुबह स्कूल जाने में बच्चों व ऑफिस जाने में आम नागरिकों को काफी व्यवधान उत्पन्न होता है। इस संबंध में आम आदमी पार्टी महानगर अध्यक्ष के नेतृत्व में सोमवार को नगर आयुक्त से वार्ता कर अवगत कराया गया। नगर आयुक्त ने सुनिश्चित किया कि इस समस्या को जल्द से जल्द निस्तारित किया जाएगा। आम आदमी पार्टी द्वारा चार सूत्री मांगों में कूड़ा घर को कहीं और शिफ्ट किया जाए। जो रिहायशी इलाके में है। वार्ड के सीवर लाइन खराब है। उसका मरम्मत या नई सीवर लाइन डाला जाए। गलियों को सीमेंटेड किया जाए। वार्ड की कर व्यवस्था स्थगित रखी जाए। तब तक जब तक कि यह सारी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से स्थापित नहीं हो जाती है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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Navneet Rana Case: हनुमान चालीसा पाठ विवाद से सुर्खियों में आने वाली निर्दलीय सांसद नवनीत कौर राणा के सामने में अब डी-गैंग की एंट्री हो गई है। शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने नवनीत राणा पर गंभीर आरोप लगाते हुए ट्वीट किया कि नवनीत राणा ने दाऊद के करीबी युसूफ लकड़ावाला से 80 लाख रुपए का लोन लिया था। युसूफ लकड़ावाला पर मनी लांड्रिंग का आरोप लगा था और ईडी ने इसे गिरफ्तार किया था। संजय राउत ने इस मामले में एक के बाद एक तीन ट्वीट किए और सबूत भी पेश करते हुए भाजपा नेताओं से सवाल पूछा है।
इससे पहले हनुमान चालीसा विवाद में न्यायिक हिरासत में चल रहीं अमरावती की सांसद नवनीत राणा के आरोप पर मुंबई पुलिस आयुक्त संजय पांडे ने वीडियो जारी कर इस बात का खंडन किया है कि उनके साथ पुलिस हिरासत में किसी प्रकार का अनुचित व्यवहार किया गया। दूसरी ओर सत्र न्यायालय ने मुंबई पुलिस से राणा दंपती की जमानत याचिका पर जवाब मांगा है। नवनीत राणा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि शनिवार को पुलिस हिरासत में रहने के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। उनकी जाति का उल्लेख करते हुए उन्हें पीने के लिए पानी तक नहीं दिया गया। उनके इस आरोप पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। लेकिन मंगलवार को मुंबई के पुलिस आयुक्त संजय पांडे ने अपने ट्वीटर पर एक वीडियो जारी कर उसके ऊपर लिखा कि क्या अब भी कुछ कहने की जरूरत है।
गौरतलब है कि सांसद राणा और उनके पति ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बांद्रा स्थित निजी निवास मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने की घोषणा की थी। हालांकि बाद में उन्होंने रविवार को प्रधानमंत्री की मुंबई यात्रा के समय महानगर की कानून-व्यवस्था न बिगड़ने देने का हवाला देकर अपनी योजना रद कर दी थी। लेकिन इसके बाद भी शनिवार शाम को ही राणा दंपती को राजद्रोह सहित कुछ अन्य धाराओं में गिरफ्तार कर लिया गया था। तब से दोनों 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं। मुंबई के एक सत्र न्यायालय ने राणा दंपती की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए मुंबई पुलिस से 29 अप्रैल को इस पर जवाब देने को कहा है।
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Navneet Rana Case: हनुमान चालीसा पाठ विवाद से सुर्खियों में आने वाली निर्दलीय सांसद नवनीत कौर राणा के सामने में अब डी-गैंग की एंट्री हो गई है। शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने नवनीत राणा पर गंभीर आरोप लगाते हुए ट्वीट किया कि नवनीत राणा ने दाऊद के करीबी युसूफ लकड़ावाला से अस्सी लाख रुपए का लोन लिया था। युसूफ लकड़ावाला पर मनी लांड्रिंग का आरोप लगा था और ईडी ने इसे गिरफ्तार किया था। संजय राउत ने इस मामले में एक के बाद एक तीन ट्वीट किए और सबूत भी पेश करते हुए भाजपा नेताओं से सवाल पूछा है। इससे पहले हनुमान चालीसा विवाद में न्यायिक हिरासत में चल रहीं अमरावती की सांसद नवनीत राणा के आरोप पर मुंबई पुलिस आयुक्त संजय पांडे ने वीडियो जारी कर इस बात का खंडन किया है कि उनके साथ पुलिस हिरासत में किसी प्रकार का अनुचित व्यवहार किया गया। दूसरी ओर सत्र न्यायालय ने मुंबई पुलिस से राणा दंपती की जमानत याचिका पर जवाब मांगा है। नवनीत राणा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि शनिवार को पुलिस हिरासत में रहने के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। उनकी जाति का उल्लेख करते हुए उन्हें पीने के लिए पानी तक नहीं दिया गया। उनके इस आरोप पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। लेकिन मंगलवार को मुंबई के पुलिस आयुक्त संजय पांडे ने अपने ट्वीटर पर एक वीडियो जारी कर उसके ऊपर लिखा कि क्या अब भी कुछ कहने की जरूरत है। गौरतलब है कि सांसद राणा और उनके पति ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बांद्रा स्थित निजी निवास मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने की घोषणा की थी। हालांकि बाद में उन्होंने रविवार को प्रधानमंत्री की मुंबई यात्रा के समय महानगर की कानून-व्यवस्था न बिगड़ने देने का हवाला देकर अपनी योजना रद कर दी थी। लेकिन इसके बाद भी शनिवार शाम को ही राणा दंपती को राजद्रोह सहित कुछ अन्य धाराओं में गिरफ्तार कर लिया गया था। तब से दोनों चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में हैं। मुंबई के एक सत्र न्यायालय ने राणा दंपती की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए मुंबई पुलिस से उनतीस अप्रैल को इस पर जवाब देने को कहा है।
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पुरुषों की ज्यादा जिम्मेदारी बनती है। ये अश्वस्त करने की कि महिलाओं को बराबर का हक और न्याय मिले। इस बात को खास जोर देकर कहते हैं गुरजोत सिंह कलेर। इस दिवस पर महिलाओं को बधाई देते हुए अपनी मां डॉ. परमप्रीत कौर घुम्मन की जेंडर डिस्क्रिमिनेशन पर लिखी कविता काे इंटरनेट पर रिलीज किया है।
कविता की पहली पंक्तियां- 'बोए जाते हैं बेटे और उग आती हैं बेटियां, खाद पानी बेटों में फिर भी लहलहाती हैं बेटियां' पढ़कर इस बात का बखूबी अंदाजा लगाया जा सकता है कि भले ही हम 21वीं सदी में जी रहे हैं और महिला सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। बावजूद इसके महिलाओं की स्थिति में आज भी कुछ खास बदलाव नहीं है। हालांकि सच यही है कि बेटों की तुलना में बेटियां ही अपने मां बाप के प्रति अपने कर्तव्यों को लेकर ज्यादा सजग, सेंसेटिव और इमोश्नल होती हैं।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए गुरजोत कहते हैं कि 1908 में जब अमरीका में लेबर मूवमेंट की शुरुआत हुई थी तो 15 हजार महिलाओं ने इस दिन न्यूयार्क में मार्च की इक्युअल वर्क इक्युअल पे,बेटर वर्किंग कंडिशन आदि को लेकर मार्च किया था और तब से इंटरनेशनल विमंस डे मनाया जाने लगा। लेकिन दुख इस बात का है कि इमने समय बाद भी कुछ ज्यादा बदलाव नहीं आया। उदाहरण देते हुए कहते हैं कि आज भी कुकिंग ऑयल,फेयरनेस क्रीम में महिलाओं को ही प्राइमरी रोल दिए जाते हैं जबकि डेयर डेविल,एडवेंचर एड्स में पुरुषों को ही प्रोजेक्ट किया जाता है।
लड़कियाें को खेलने के लिए बर्तन और डॉल्स देते हैं तो लड़कों के हाथों में बैट-बल्ला और हथियार थमा देते हैं। हमने रंगों को भी लड़कों और लड़कियों में बांट दिया है। लड़कियां पैदा होती हैं तो उनके लिए पिंक रंग की ड्रेस लाते हैं तो लड़कों के लिए ब्लू-ब्लैक। हमें ये समझना होगा कि इतने सालों बाद भी हमने इस दिन के मायनाें को समझते हुए क्या जीत हासिल की है और क्या नहीं कर पाए हैं। हम हमेशा बात करते हैं कि पुरुषों को महिलाओं की इज्जत करनी चाहिए। लेकिन एक कड़वा सच ये भी है कि बहुत से ऐसे मामले भी सामने आते हैं जहां महिलाएं ही महिलाओं की शाइन को डल करती हैं। महिलाएं भी महिलाओं की दुश्मन होती हैं।
बोले हमें जेंडर आइडेंटिटी को पहचानना होगा। स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग,सामाजिक कार्यकर्ता नौदीप कौर जैसी महिलाओं की आवाज दबाने की बजाय उन्हें अपना ओपिनियन रखने का मौका देना चाहिए। कमाला हैरिस US की पहली महिला वाइस प्रेसिडेंट बनी हैं। जैसिंडा केट लॉरेल अर्डरन एक महिला हैं और न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री हैं। ये महिलाएं ही तो हैं जो लहलहा रही हैं।
देश को हम भारत माता कहकर पुकारते हैं। यहां हम कंजक पूजन करते हैं और देवियों के माथा टेकने जाते हैं। फिर फीमेल फीटिसाइड क्यों करते हैं ? मोलेस्टेशन होती है तो ये क्यों कहते हैं लड़की की गलती होगी? छोटे कपड़ों की गलतियां क्यों निकालते हैं? सिंबोलिक तौर पर 8 मार्च मनाना गलत नहीं है लेकिन यही स्पिरिट 365 दिन जिंदा रहनी चाहिए।
गुरजोत ने बताया कि अपनी मां और बहन से उन्होंने यही सीखा है कि एक क्लियर ह्यूमन बीइंग रहें। अपने काम के प्रति समपर्ण और ईमानदारी जरूरी है। हर महिला को इज्जत दो।
गुरजोत कहते हैं कि समय के साथ पुलिसिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। ये अच्छी बात है। विमन पुलिस स्टेशन, पुलिस हेल्पलाइन बनी हैं। लेकिन यहां भी जेंडर सेंसेटाइजेशन महत्वपूर्ण है ताकि शिकायतकर्ता, पीड़ित अपने आप को ऑफेंडेड महसूस न करे। उसकी गरिमा बनी रहे। अच्छी बात ये भी है कि पुलिस डिपार्टमेंट इस दिशा में काम कर रहा है।
यहां बता दें कि पंजाब पुलिस का ये जांबाज ऑफिसर न सिर्फ अपनी प्रोफेशनल जिम्मेदारियों,बल्कि अपने जुनून की वजह से हमेशा चर्चा में रहता है। बेहतरीन पुलिसिंग के लिए गुरजोत को कई अवॉर्ड मिल चुके हैं। अगस्त 2018 में पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह से सम्मान मिला था। इसके अलावा कलेर में एक लेखक,कवि,गीतकार,गायक और माउंटनियर की खूबियां भी हैं। बूढ़े मां बाप की थीम पर पिछले महीने कलेर ने बंदेया नामक एक गाना सोशल मीडिया पर रिलीज किया था। मार्च 2017 में इनका अंग्रेजी सॉन्ग, माय हीरो फार्मर रिलीज हुआ था। जुलाई 2018 में इनकी किताब, न्यू इंडियाः द रियलिटी रीलोडेड रिलीज हुई थी। पिछले साल अगस्त में इंडियन आर्मी को समर्पित गीत-दिल से सलाम रिलीज कर चुके हैं। 15 हजार फुट की ऊंचाई से छलांग लगाकर पंजाब पुलिस में इतिहास रचते हुए इन्होंने पिछले साल मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के इनिशिएटिव- मिशन फतेह को समर्पित स्काई डाइव से कोरोना वॉरियर्स को सैल्यूट किया था।
बोए जाते हैं बेटे और उग आती हैं बेटियां, खाद पानी बेटों में फिर भी लहलहाती हैं बेटियां,
बात-बात पर रुलाते हैं बेटे और हमदर्दी में रोती हैं बेटियां,
भरी महफिल में बेइज्जत कर देते हैं बेटे,बिखरी हुई इज्जत को समेटती हैं तो बेटियां,
अफसोस है कि लोग दुआ मांगते हैं केवल बेटों के लंबे जीवन के लिए और गर्भ में मारी जाती हैं बेटियां,
अरे ओ बेदर्द लोगो सोचने का ढंग बदल डालो, बेटियों को भी बेटों की तरह गले से लगा लो,गले से लगा लो।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पुरुषों की ज्यादा जिम्मेदारी बनती है। ये अश्वस्त करने की कि महिलाओं को बराबर का हक और न्याय मिले। इस बात को खास जोर देकर कहते हैं गुरजोत सिंह कलेर। इस दिवस पर महिलाओं को बधाई देते हुए अपनी मां डॉ. परमप्रीत कौर घुम्मन की जेंडर डिस्क्रिमिनेशन पर लिखी कविता काे इंटरनेट पर रिलीज किया है। कविता की पहली पंक्तियां- 'बोए जाते हैं बेटे और उग आती हैं बेटियां, खाद पानी बेटों में फिर भी लहलहाती हैं बेटियां' पढ़कर इस बात का बखूबी अंदाजा लगाया जा सकता है कि भले ही हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे हैं और महिला सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। बावजूद इसके महिलाओं की स्थिति में आज भी कुछ खास बदलाव नहीं है। हालांकि सच यही है कि बेटों की तुलना में बेटियां ही अपने मां बाप के प्रति अपने कर्तव्यों को लेकर ज्यादा सजग, सेंसेटिव और इमोश्नल होती हैं। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए गुरजोत कहते हैं कि एक हज़ार नौ सौ आठ में जब अमरीका में लेबर मूवमेंट की शुरुआत हुई थी तो पंद्रह हजार महिलाओं ने इस दिन न्यूयार्क में मार्च की इक्युअल वर्क इक्युअल पे,बेटर वर्किंग कंडिशन आदि को लेकर मार्च किया था और तब से इंटरनेशनल विमंस डे मनाया जाने लगा। लेकिन दुख इस बात का है कि इमने समय बाद भी कुछ ज्यादा बदलाव नहीं आया। उदाहरण देते हुए कहते हैं कि आज भी कुकिंग ऑयल,फेयरनेस क्रीम में महिलाओं को ही प्राइमरी रोल दिए जाते हैं जबकि डेयर डेविल,एडवेंचर एड्स में पुरुषों को ही प्रोजेक्ट किया जाता है। लड़कियाें को खेलने के लिए बर्तन और डॉल्स देते हैं तो लड़कों के हाथों में बैट-बल्ला और हथियार थमा देते हैं। हमने रंगों को भी लड़कों और लड़कियों में बांट दिया है। लड़कियां पैदा होती हैं तो उनके लिए पिंक रंग की ड्रेस लाते हैं तो लड़कों के लिए ब्लू-ब्लैक। हमें ये समझना होगा कि इतने सालों बाद भी हमने इस दिन के मायनाें को समझते हुए क्या जीत हासिल की है और क्या नहीं कर पाए हैं। हम हमेशा बात करते हैं कि पुरुषों को महिलाओं की इज्जत करनी चाहिए। लेकिन एक कड़वा सच ये भी है कि बहुत से ऐसे मामले भी सामने आते हैं जहां महिलाएं ही महिलाओं की शाइन को डल करती हैं। महिलाएं भी महिलाओं की दुश्मन होती हैं। बोले हमें जेंडर आइडेंटिटी को पहचानना होगा। स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग,सामाजिक कार्यकर्ता नौदीप कौर जैसी महिलाओं की आवाज दबाने की बजाय उन्हें अपना ओपिनियन रखने का मौका देना चाहिए। कमाला हैरिस US की पहली महिला वाइस प्रेसिडेंट बनी हैं। जैसिंडा केट लॉरेल अर्डरन एक महिला हैं और न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री हैं। ये महिलाएं ही तो हैं जो लहलहा रही हैं। देश को हम भारत माता कहकर पुकारते हैं। यहां हम कंजक पूजन करते हैं और देवियों के माथा टेकने जाते हैं। फिर फीमेल फीटिसाइड क्यों करते हैं ? मोलेस्टेशन होती है तो ये क्यों कहते हैं लड़की की गलती होगी? छोटे कपड़ों की गलतियां क्यों निकालते हैं? सिंबोलिक तौर पर आठ मार्च मनाना गलत नहीं है लेकिन यही स्पिरिट तीन सौ पैंसठ दिन जिंदा रहनी चाहिए। गुरजोत ने बताया कि अपनी मां और बहन से उन्होंने यही सीखा है कि एक क्लियर ह्यूमन बीइंग रहें। अपने काम के प्रति समपर्ण और ईमानदारी जरूरी है। हर महिला को इज्जत दो। गुरजोत कहते हैं कि समय के साथ पुलिसिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। ये अच्छी बात है। विमन पुलिस स्टेशन, पुलिस हेल्पलाइन बनी हैं। लेकिन यहां भी जेंडर सेंसेटाइजेशन महत्वपूर्ण है ताकि शिकायतकर्ता, पीड़ित अपने आप को ऑफेंडेड महसूस न करे। उसकी गरिमा बनी रहे। अच्छी बात ये भी है कि पुलिस डिपार्टमेंट इस दिशा में काम कर रहा है। यहां बता दें कि पंजाब पुलिस का ये जांबाज ऑफिसर न सिर्फ अपनी प्रोफेशनल जिम्मेदारियों,बल्कि अपने जुनून की वजह से हमेशा चर्चा में रहता है। बेहतरीन पुलिसिंग के लिए गुरजोत को कई अवॉर्ड मिल चुके हैं। अगस्त दो हज़ार अट्ठारह में पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह से सम्मान मिला था। इसके अलावा कलेर में एक लेखक,कवि,गीतकार,गायक और माउंटनियर की खूबियां भी हैं। बूढ़े मां बाप की थीम पर पिछले महीने कलेर ने बंदेया नामक एक गाना सोशल मीडिया पर रिलीज किया था। मार्च दो हज़ार सत्रह में इनका अंग्रेजी सॉन्ग, माय हीरो फार्मर रिलीज हुआ था। जुलाई दो हज़ार अट्ठारह में इनकी किताब, न्यू इंडियाः द रियलिटी रीलोडेड रिलीज हुई थी। पिछले साल अगस्त में इंडियन आर्मी को समर्पित गीत-दिल से सलाम रिलीज कर चुके हैं। पंद्रह हजार फुट की ऊंचाई से छलांग लगाकर पंजाब पुलिस में इतिहास रचते हुए इन्होंने पिछले साल मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के इनिशिएटिव- मिशन फतेह को समर्पित स्काई डाइव से कोरोना वॉरियर्स को सैल्यूट किया था। बोए जाते हैं बेटे और उग आती हैं बेटियां, खाद पानी बेटों में फिर भी लहलहाती हैं बेटियां, बात-बात पर रुलाते हैं बेटे और हमदर्दी में रोती हैं बेटियां, भरी महफिल में बेइज्जत कर देते हैं बेटे,बिखरी हुई इज्जत को समेटती हैं तो बेटियां, अफसोस है कि लोग दुआ मांगते हैं केवल बेटों के लंबे जीवन के लिए और गर्भ में मारी जाती हैं बेटियां, अरे ओ बेदर्द लोगो सोचने का ढंग बदल डालो, बेटियों को भी बेटों की तरह गले से लगा लो,गले से लगा लो। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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लखनऊ की इस सीजन में 11 मैचों में यह आठवी जीत थी और अब इसके बाद टीम ने प्लेऑफ के लिए लगभग क्वालीफाई कर ही लिया है। मैच के बाद एलएसजी (LSG Team) के कप्तान केएल राहुल ने बड़ा बयान दिया।
केएल राहुल (KL Rahul) की कप्तानी वाली लखनऊ सुपर जायंट्स (Lucknow Super Giants) ने आईपीएल 2022 के 53वें मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स (Kolkata Knight Riders) को 75 रनों के बड़े अंतर से रौंदा। लखनऊ ने पहले बल्लेबाजी करते हुए क्विंटन डिकॉका के अर्धशतक के दम पर कोलकाता के सामने 177 रनों का लक्ष्य रखा था। इस स्कोर के सामने केकेआर की पूरी टीम 14. 3 ओवर में 101 रनों पर ढेर हो गई। लखनऊ की इस सीजन में 11 मैचों में यह आठवी जीत थी और अब इसके बाद टीम ने प्लेऑफ के लिए लगभग क्वालीफाई कर ही लिया है। मैच के बाद एलएसजी (LSG Team) के कप्तान केएल राहुल ने बड़ा बयान दिया है।
राहुल ने मैच समाप्त होने के बाद कहा, 'मैच के अधिकतर समय तक हमारा दबदबा था। एक रन आउट को छोड़कर हमने अच्छी बल्लेबाजी की। मुझे लगता है कि इस पिच पर 150 के पार का स्कोर सही होगा। लेकिन अंत में डिकॉक, दीपक और स्टोयनिस हमें 170 रनों के पार ले गए। गेंदबाजाजों द्वारा दबाव में अच्छी गेंदबाजी करना उनके कौशल को दिखाता है। हमारे गेंदबाज इस बात की चिंता किए बिना गेंदबाती करते हैं कि सामने कौन खेल रहा है। ये चीजें गेंदबाजों की काबिलेतारीफ है। '
लखनऊ सुपर जाएंट्स ने इस धमाकेदार जीत के साथ प्वाइंट्स टेबल में हार्दिक पांड्या की गुजरात टाइटंस से नंबर 1 का ताज छीन लिया है। लखनऊ 16 अंकों और गुजरात से बेहतर नेट रनरेट के दम पर शीर्ष पर है। वहीं कोलकाता नाइट राइडर्स को यह 11वें मुकाबले में 7वीं हार का सामना करना पड़ा है। श्रेयस अय्यर की टीम इस हार के साथ प्लेऑफ की दौड़ से बाहर होने की कगार पर है।
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लखनऊ की इस सीजन में ग्यारह मैचों में यह आठवी जीत थी और अब इसके बाद टीम ने प्लेऑफ के लिए लगभग क्वालीफाई कर ही लिया है। मैच के बाद एलएसजी के कप्तान केएल राहुल ने बड़ा बयान दिया। केएल राहुल की कप्तानी वाली लखनऊ सुपर जायंट्स ने आईपीएल दो हज़ार बाईस के तिरेपनवें मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स को पचहत्तर रनों के बड़े अंतर से रौंदा। लखनऊ ने पहले बल्लेबाजी करते हुए क्विंटन डिकॉका के अर्धशतक के दम पर कोलकाता के सामने एक सौ सतहत्तर रनों का लक्ष्य रखा था। इस स्कोर के सामने केकेआर की पूरी टीम चौदह. तीन ओवर में एक सौ एक रनों पर ढेर हो गई। लखनऊ की इस सीजन में ग्यारह मैचों में यह आठवी जीत थी और अब इसके बाद टीम ने प्लेऑफ के लिए लगभग क्वालीफाई कर ही लिया है। मैच के बाद एलएसजी के कप्तान केएल राहुल ने बड़ा बयान दिया है। राहुल ने मैच समाप्त होने के बाद कहा, 'मैच के अधिकतर समय तक हमारा दबदबा था। एक रन आउट को छोड़कर हमने अच्छी बल्लेबाजी की। मुझे लगता है कि इस पिच पर एक सौ पचास के पार का स्कोर सही होगा। लेकिन अंत में डिकॉक, दीपक और स्टोयनिस हमें एक सौ सत्तर रनों के पार ले गए। गेंदबाजाजों द्वारा दबाव में अच्छी गेंदबाजी करना उनके कौशल को दिखाता है। हमारे गेंदबाज इस बात की चिंता किए बिना गेंदबाती करते हैं कि सामने कौन खेल रहा है। ये चीजें गेंदबाजों की काबिलेतारीफ है। ' लखनऊ सुपर जाएंट्स ने इस धमाकेदार जीत के साथ प्वाइंट्स टेबल में हार्दिक पांड्या की गुजरात टाइटंस से नंबर एक का ताज छीन लिया है। लखनऊ सोलह अंकों और गुजरात से बेहतर नेट रनरेट के दम पर शीर्ष पर है। वहीं कोलकाता नाइट राइडर्स को यह ग्यारहवें मुकाबले में सातवीं हार का सामना करना पड़ा है। श्रेयस अय्यर की टीम इस हार के साथ प्लेऑफ की दौड़ से बाहर होने की कगार पर है।
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मरियम ने आरोप लगाया कि हमारे साथ मारपीट की गई। साथ में मौजूद एक आदमी के अपहरण की कोशिश भी की गई। 10 लाख की रंगदारी मांगने वाले ने खुद को अतीक अहमद का आदमी बताया।
प्रयागराज भले ही उत्तर प्रदेश सरकार बाहुबलियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही हो, लेकिन अभी भी अतीक अहमद के नाम का खौफ कम नहीं हुआ है। ताजा मामला प्रयागराज के धूमनगंज इलाके का है। यहां अपना मकान बनवा रही एक महिला से अतीक अहमद के नाम पर 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई है। पीड़ित महिला का आरोप है कि रंगदारी ना देने पर उसके साथ मारपीट की गई। साथ ही उसके साथ मौजूद एक शख्स को अगवा करने की कोशिश की गई। पुलिस पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्जकर मामले की जांच कर रही है।
कौशांबी जिले में सिराथू के रहने वाले नियाज अहमद ने कई साल पहले धूमनगंज के ट्रांसपोर्ट नगर चकमैदा पट्टी इलाके में एक जमीन खरीदी थी। वह जमीन पर अपना मकान बनवाना चाहते हैं, इसलिए उनकी पत्नी मरियम जमीन पर साफ-सफाई करवा रही थीं। आरोप है कि इसी दौरान वहां कुछ लोगों ने आकर उनके चल रहे काम को रुकवा दिया। मरियम ने आरोप लगाया कि हमारे साथ मारपीट की गई। साथ में मौजूद एक आदमी के अपहरण की कोशिश भी की गई। 10 लाख की रंगदारी मांगने वाले ने खुद को अतीक अहमद का आदमी बताया। रंगदारी न देने पर दोबारा जमीन पर काम ना होने देने धमकी भी दी गई।
पुलिस जांच में जुटी महिला की शिकायत पर प्रयागराज पुलिस ने अतीक अहमद के नाम पर रंगदारी मांगने वाले 5 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। धूमनगंज थाना प्रभारी ने बताया कि महिला के आरोपों की जांच की जा रही है। जिन लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है, उनका अतीक अहमद से कोई रिश्ता नहीं है।
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मरियम ने आरोप लगाया कि हमारे साथ मारपीट की गई। साथ में मौजूद एक आदमी के अपहरण की कोशिश भी की गई। दस लाख की रंगदारी मांगने वाले ने खुद को अतीक अहमद का आदमी बताया। प्रयागराज भले ही उत्तर प्रदेश सरकार बाहुबलियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही हो, लेकिन अभी भी अतीक अहमद के नाम का खौफ कम नहीं हुआ है। ताजा मामला प्रयागराज के धूमनगंज इलाके का है। यहां अपना मकान बनवा रही एक महिला से अतीक अहमद के नाम पर दस लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई है। पीड़ित महिला का आरोप है कि रंगदारी ना देने पर उसके साथ मारपीट की गई। साथ ही उसके साथ मौजूद एक शख्स को अगवा करने की कोशिश की गई। पुलिस पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्जकर मामले की जांच कर रही है। कौशांबी जिले में सिराथू के रहने वाले नियाज अहमद ने कई साल पहले धूमनगंज के ट्रांसपोर्ट नगर चकमैदा पट्टी इलाके में एक जमीन खरीदी थी। वह जमीन पर अपना मकान बनवाना चाहते हैं, इसलिए उनकी पत्नी मरियम जमीन पर साफ-सफाई करवा रही थीं। आरोप है कि इसी दौरान वहां कुछ लोगों ने आकर उनके चल रहे काम को रुकवा दिया। मरियम ने आरोप लगाया कि हमारे साथ मारपीट की गई। साथ में मौजूद एक आदमी के अपहरण की कोशिश भी की गई। दस लाख की रंगदारी मांगने वाले ने खुद को अतीक अहमद का आदमी बताया। रंगदारी न देने पर दोबारा जमीन पर काम ना होने देने धमकी भी दी गई। पुलिस जांच में जुटी महिला की शिकायत पर प्रयागराज पुलिस ने अतीक अहमद के नाम पर रंगदारी मांगने वाले पाँच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। धूमनगंज थाना प्रभारी ने बताया कि महिला के आरोपों की जांच की जा रही है। जिन लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है, उनका अतीक अहमद से कोई रिश्ता नहीं है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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दिल्ली से चुराई गई कारों को इंदौर में खपाया जा रहा है। ये काम गैरेज वाले कर रहे हैं। वे सुधरने आई कार को चोरी वाली कार से बदल देते हैं। कभी नंबर बदलकर तो कभी गाड़ी ही बदलकर लौटा दी जाती है। इंदौर में अब ऐसे तीन मामले सामने आ चुके हैं।
डीसीपी, क्राइम ब्रांच निमिष अग्रवाल ने बताया कि मामले में क्राइम ब्रांच ने दो आरोपियों को पकड़ा है। उनसे तीन कार भी बरामद की हैं। बदमाशों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। दरअसल कुछ वक्त पहले दिल्ली पुलिस चोरी की कारों की जांच के सिलसिले में इंदौर आई थी। इसके बाद से ही यहां क्राइम ब्रांच भी एक्टिव हो गई थी।
इसी दौरान खजराना क्षेत्र में रहने वाले दो मैकेनिक सोनू उर्फ इफ्तियार पिता अब्दुल रफीक और आफताब पिता अख्तर के पास संदिग्ध कारें होने की जानकारी मिली। पता चला कि उन्होंने दिल्ली से चोरी हुई कारों को इंदौर में खपाया है। इसमें एक मामला तो ऐसा था कि फरियादी को तीन महीने तक पता नहीं चला कि वह चोरी की गाड़ी ड्राइव कर रहा है।
डीसीपी अग्रवाल के मुताबिक फरियादी की स्विफ्ट कार का एक्सीडेंट (गड्ढे में गिरने की वजह से) हो गया था। लेकिन कुछ इश्यू की वजह से उन्होंने इंश्योरेंस क्लेम नहीं लिया। फरियादी ने अपनी कार सुधरने के लिए आरोपियों के गैरेज पर दी। बदमाशों ने दिल्ली की चोरी की कार को खपाने के लिए फरियादी की एक्सीडेंटल कार से बदल दिया, साथ ही रिपेयरिंग के नाम पर 1 लाख 30 हजार रुपए भी ले लिए।
बताया जा रहा है कि करीब तीन महीने से फरियादी दिल्ली से चोरी हुई कार ही ड्राइव कर रहा था। क्राइम ब्रांच ने इसकी जानकारी उसे दी तब जाकर उसे पता चला कि यह कार उसकी है ही नहीं। आरोपियों ने उसकी एक्सीडेंटल कार का क्या किया, इस बारे में पूछताछ की जा रही है।
डीसीपी ने बताया कि दूसरे मामले में आरोपियों ने एक i20 कार को उज्जैन के अंकित नाम के व्यक्ति को बेच दिया था। फरियादी के ही माध्यम से बदमाशों ने कार को बेचा। खास बात यह है कि दिल्ली की इस चोरी की कार को ट्रांसफर भी किया गया। यानी ट्रांसफर की पूरी प्रोसेस के साथ इसे बेचा गया। जो कार ट्रांसफर की गई है उसके संबंध में आरटीओ विभाग से भी जानकारी निकाली जाएगी। कार विभाग में कैसे ट्रांसफर हुई इसकी भी तफ्तीश की जाएगी। उम्मीद है कि इस मामले में आरोपियों की संख्या और भी बढ़ सकती है।
जब क्राइम ब्रांच ने इन चोरी की गाड़ियों की डिटेल निकाली तो उसे पता चला कि i20कार दिल्ली में कन्हैया नगर मेट्रो स्टेशन के पास से 14 जून 2022 को चोरी हुई थी। नीले रंग की स्विफ्ट कार लाजपत नगर दिल्ली से 19 जून 2021 को चोरी हुई थी और तीसरी कार (स्विफ्ट) मदनगिरी, अंबेडकर नगर दिल्ली से 25 मई 2022 को चोरी हुई थी। साथ ही यह भी पता चला कि इन तीनों कारों के चोरी होने की FIR भी दिल्ली के थानों में दर्ज है। बदमाश एक्सीडेंटल कारों को सस्ते में खरीदते, उनके डॉक्यूमेंट्स का दुरुपयोग कर चुराई हुई गाड़ी को बेचने का काम करते थे।
पुलिस का कहना है कि दिल्ली में कार चोरी करने वाला गिरोह कोई और है। जिनके संपर्क में ये दोनों बदमाश थे। जिसके चलते दिल्ली में चोरी हुई ये कारें इनके पास यहां तक पहुंची। अब ये दोनों इस चोर गिरोह के लोगों के संपर्क में कैसे आए। इनकी गैंग में और कितने लोग शामिल हैं, पुलिस इसकी पूछताछ कर रही है।
डीसीपी अग्रवाल ने बताया कि बदमाश अपने वाहनों को छुपाने के लिए बड़े शहरी सेंटर ही चुनते है। क्योंकि बड़े शहरों में गाड़ी को छिपाना और चलाना दोनों ही आसान होता है। इसलिए बदमाश अमूमन बड़े शहर सेंटरों को ही वाहन खपाने के लिए चुनते है। छोटे शहरों में गाड़ी के जल्दी ट्रेस होने या मुखबिरी होने का भी डर बना रहता है। हालांकि इस धोखाधड़ी के मामले में कई सवाल है जो क्राइम ब्रांच के सामने है जिनकी पूछताछ आरोपियों से की जा रही है। बताया जा रहा है कि इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं ली है।
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दिल्ली से चुराई गई कारों को इंदौर में खपाया जा रहा है। ये काम गैरेज वाले कर रहे हैं। वे सुधरने आई कार को चोरी वाली कार से बदल देते हैं। कभी नंबर बदलकर तो कभी गाड़ी ही बदलकर लौटा दी जाती है। इंदौर में अब ऐसे तीन मामले सामने आ चुके हैं। डीसीपी, क्राइम ब्रांच निमिष अग्रवाल ने बताया कि मामले में क्राइम ब्रांच ने दो आरोपियों को पकड़ा है। उनसे तीन कार भी बरामद की हैं। बदमाशों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। दरअसल कुछ वक्त पहले दिल्ली पुलिस चोरी की कारों की जांच के सिलसिले में इंदौर आई थी। इसके बाद से ही यहां क्राइम ब्रांच भी एक्टिव हो गई थी। इसी दौरान खजराना क्षेत्र में रहने वाले दो मैकेनिक सोनू उर्फ इफ्तियार पिता अब्दुल रफीक और आफताब पिता अख्तर के पास संदिग्ध कारें होने की जानकारी मिली। पता चला कि उन्होंने दिल्ली से चोरी हुई कारों को इंदौर में खपाया है। इसमें एक मामला तो ऐसा था कि फरियादी को तीन महीने तक पता नहीं चला कि वह चोरी की गाड़ी ड्राइव कर रहा है। डीसीपी अग्रवाल के मुताबिक फरियादी की स्विफ्ट कार का एक्सीडेंट हो गया था। लेकिन कुछ इश्यू की वजह से उन्होंने इंश्योरेंस क्लेम नहीं लिया। फरियादी ने अपनी कार सुधरने के लिए आरोपियों के गैरेज पर दी। बदमाशों ने दिल्ली की चोरी की कार को खपाने के लिए फरियादी की एक्सीडेंटल कार से बदल दिया, साथ ही रिपेयरिंग के नाम पर एक लाख तीस हजार रुपए भी ले लिए। बताया जा रहा है कि करीब तीन महीने से फरियादी दिल्ली से चोरी हुई कार ही ड्राइव कर रहा था। क्राइम ब्रांच ने इसकी जानकारी उसे दी तब जाकर उसे पता चला कि यह कार उसकी है ही नहीं। आरोपियों ने उसकी एक्सीडेंटल कार का क्या किया, इस बारे में पूछताछ की जा रही है। डीसीपी ने बताया कि दूसरे मामले में आरोपियों ने एक iबीस कार को उज्जैन के अंकित नाम के व्यक्ति को बेच दिया था। फरियादी के ही माध्यम से बदमाशों ने कार को बेचा। खास बात यह है कि दिल्ली की इस चोरी की कार को ट्रांसफर भी किया गया। यानी ट्रांसफर की पूरी प्रोसेस के साथ इसे बेचा गया। जो कार ट्रांसफर की गई है उसके संबंध में आरटीओ विभाग से भी जानकारी निकाली जाएगी। कार विभाग में कैसे ट्रांसफर हुई इसकी भी तफ्तीश की जाएगी। उम्मीद है कि इस मामले में आरोपियों की संख्या और भी बढ़ सकती है। जब क्राइम ब्रांच ने इन चोरी की गाड़ियों की डिटेल निकाली तो उसे पता चला कि iबीसकार दिल्ली में कन्हैया नगर मेट्रो स्टेशन के पास से चौदह जून दो हज़ार बाईस को चोरी हुई थी। नीले रंग की स्विफ्ट कार लाजपत नगर दिल्ली से उन्नीस जून दो हज़ार इक्कीस को चोरी हुई थी और तीसरी कार मदनगिरी, अंबेडकर नगर दिल्ली से पच्चीस मई दो हज़ार बाईस को चोरी हुई थी। साथ ही यह भी पता चला कि इन तीनों कारों के चोरी होने की FIR भी दिल्ली के थानों में दर्ज है। बदमाश एक्सीडेंटल कारों को सस्ते में खरीदते, उनके डॉक्यूमेंट्स का दुरुपयोग कर चुराई हुई गाड़ी को बेचने का काम करते थे। पुलिस का कहना है कि दिल्ली में कार चोरी करने वाला गिरोह कोई और है। जिनके संपर्क में ये दोनों बदमाश थे। जिसके चलते दिल्ली में चोरी हुई ये कारें इनके पास यहां तक पहुंची। अब ये दोनों इस चोर गिरोह के लोगों के संपर्क में कैसे आए। इनकी गैंग में और कितने लोग शामिल हैं, पुलिस इसकी पूछताछ कर रही है। डीसीपी अग्रवाल ने बताया कि बदमाश अपने वाहनों को छुपाने के लिए बड़े शहरी सेंटर ही चुनते है। क्योंकि बड़े शहरों में गाड़ी को छिपाना और चलाना दोनों ही आसान होता है। इसलिए बदमाश अमूमन बड़े शहर सेंटरों को ही वाहन खपाने के लिए चुनते है। छोटे शहरों में गाड़ी के जल्दी ट्रेस होने या मुखबिरी होने का भी डर बना रहता है। हालांकि इस धोखाधड़ी के मामले में कई सवाल है जो क्राइम ब्रांच के सामने है जिनकी पूछताछ आरोपियों से की जा रही है। बताया जा रहा है कि इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं ली है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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नये वर्ष की पहली अच्छी खबर स्वास्थ्य विभाग की ओर से आई है, कोरोना संक्रमण से जहाँ 2020 का पूरा समय लोगों को असुविधायों और परेशानियों से गुजरना पड़ा वहीं इस वर्ष के शुरू होते ही कोरोना वैक्सीन के आने की सूचना से जनता में खुशी की लहर है। आज प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर किये जा रहे ड्राई रन की स्थिति जानने के लिए पुरानी बस्ती स्थित शासकीय सरस्वती कन्या पूर्व माध्यमिक शाला पहुँचे, यहाँ उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से संवाद कर चरणबद्ध तरीके से मॉक ड्रिल की पूरी जानकारी प्राप्त की।
मॉक ड्रिल की जानकारी प्राप्त करने के उपरांत स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि प्रदेश के 7 जिलों में अभी ड्राई रन किया जा रहा है जिसमें रायपुर भी शामिल है, प्रथम चरण में फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन देने के उपरांत कोविन एप से रजिस्टर करने के लिए यह प्लेटफार्म सभी के लिए खोले जाने की संभावना है।
आपको बताते चले कि आज रायपुर के साथ बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर, गौरेला पेंड्रा मरवाही,राजनांदगांव और दुर्ग में कोरोना वैक्सीनेशन का मॉक ड्रील चल रहा है ।
प्रदेश में पिछले 8 दिनों में 24 से 31 दिसंबर के बीच 144 कोरोना मरीजों की मौत हुई। इस दौरान राजधानी में 22 संक्रमितों की जान गई है। हालांकि पूरे प्रदेश में दिसंबर में कम मरीज मिले। 1 से 31 दिसंबर तक प्रदेश में 42,253 कोरोना मरीज मिले हैं। इस दौरान 510 मरीजों की मौत हुई। जबकि दिसंबर के आखिरी सप्ताह में महीने की 28. 23 फीसदी यानी एक चौथाई से ज्यादा मौत हो गई। प्रदेश में अब तक कुल 3,380 मरीजों की मृत्यु हो चुकी है। इस बीच अब कोरोना से मौत कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। हालांकि यह राष्ट्रीय मृत्यु दर से कम है। प्रदेश में मृत्यु दर 1. 2 फीसदी है।
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नये वर्ष की पहली अच्छी खबर स्वास्थ्य विभाग की ओर से आई है, कोरोना संक्रमण से जहाँ दो हज़ार बीस का पूरा समय लोगों को असुविधायों और परेशानियों से गुजरना पड़ा वहीं इस वर्ष के शुरू होते ही कोरोना वैक्सीन के आने की सूचना से जनता में खुशी की लहर है। आज प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर किये जा रहे ड्राई रन की स्थिति जानने के लिए पुरानी बस्ती स्थित शासकीय सरस्वती कन्या पूर्व माध्यमिक शाला पहुँचे, यहाँ उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से संवाद कर चरणबद्ध तरीके से मॉक ड्रिल की पूरी जानकारी प्राप्त की। मॉक ड्रिल की जानकारी प्राप्त करने के उपरांत स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि प्रदेश के सात जिलों में अभी ड्राई रन किया जा रहा है जिसमें रायपुर भी शामिल है, प्रथम चरण में फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन देने के उपरांत कोविन एप से रजिस्टर करने के लिए यह प्लेटफार्म सभी के लिए खोले जाने की संभावना है। आपको बताते चले कि आज रायपुर के साथ बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर, गौरेला पेंड्रा मरवाही,राजनांदगांव और दुर्ग में कोरोना वैक्सीनेशन का मॉक ड्रील चल रहा है । प्रदेश में पिछले आठ दिनों में चौबीस से इकतीस दिसंबर के बीच एक सौ चौंतालीस कोरोना मरीजों की मौत हुई। इस दौरान राजधानी में बाईस संक्रमितों की जान गई है। हालांकि पूरे प्रदेश में दिसंबर में कम मरीज मिले। एक से इकतीस दिसंबर तक प्रदेश में बयालीस,दो सौ तिरेपन कोरोना मरीज मिले हैं। इस दौरान पाँच सौ दस मरीजों की मौत हुई। जबकि दिसंबर के आखिरी सप्ताह में महीने की अट्ठाईस. तेईस फीसदी यानी एक चौथाई से ज्यादा मौत हो गई। प्रदेश में अब तक कुल तीन,तीन सौ अस्सी मरीजों की मृत्यु हो चुकी है। इस बीच अब कोरोना से मौत कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। हालांकि यह राष्ट्रीय मृत्यु दर से कम है। प्रदेश में मृत्यु दर एक. दो फीसदी है।
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Предыдущая статья "Ренессанс пистолетов-пулеметов" вызвала довольно оживленную дискуссию, со всеми ее обычными принадлежностями: обвинениями автора, то есть меня, в дилетантстве, незнании азов и так далее. Многочисленные поклонники штурмовых винтовок привычно сыпали калибрами, кучностями и дальностями эффективной стрельбы, горячо выступали за оружие, которое бьет на 200, 300, 400 метров, и на основании этого аргумента считают применение пистолетов-пулеметов бредом. Однако чем больше было комментариев такого рода, тем сильнее создавалось ощущение, что высказавшиеся многочисленные специалисты, все, словно на подбор, с военным образованием и огромным боевым опытом, просто не имеют четкого представления, как именно и на какой дистанции идет бой.
यह पता लगाना कि वास्तव में चीजें कितनी कठिन हो गई हैं, इतनी मुश्किल नहीं है। प्रौद्योगिकी की प्रगति अब आपको पहले व्यक्ति से लड़ाई को देखने की अनुमति देती है। कई साल पहले सैनिकों के हेलमेट पर कैमरे लगाने की बहुत व्यापक प्रथा थी, जो कुछ भी होता है उसे शूट करते हैं। ऐसा करने वाले पहले अफगानिस्तान और इराक में अमेरिकी थे, और आप वर्ष के 2007 कहते हैं, वे वीडियो टेप (वे आमतौर पर मुकाबला फुटेज कहलाते हैं) कह सकते हैं। कैमरे तब इतने अच्छे नहीं थे, लेकिन उन्होंने फिर भी लड़ाई की तस्वीर दी। वर्तमान हेलमेट-माउंटेड कैमरे, जो अब कई सेनाओं द्वारा उपयोग किए जाते हैं, उच्च परिभाषा वीडियो बनाते हैं, जिसे देखने के बाद दृश्य में व्यक्तिगत उपस्थिति की पूरी भावना होती है।
कहा जाता है कि अमेरिकी नौसैनिकों को एक झड़प के रूप में कहा जाता है, एक नियम के रूप में, कुछ अनपेक्षित, टीमों के साथ घिरे हुए और छोटी टिप्पणियों के साथ, लेकिन यह आग के संपर्क के दौरान हेलमेट कैमरे दिखाते हैं, यह वास्तव में दिलचस्प है। अवलोकन ऐसे किए जा सकते हैं।
सबसे पहले, लगभग सभी लड़ाइयों जिसमें अमेरिकियों ने अपनी असॉल्ट राइफलों का इस्तेमाल किया था, वे 20-30 मीटर की दूरी पर थे। हालाँकि कैमरे थोड़ी दूरी तय करते हैं और आँख मीटर के साथ निर्धारित करना मुश्किल होता है, फिर भी, कुछ स्थलों, जैसे कि घरों, द्वैध, कारों, पेड़ों, झाड़ियों, हमें कम गुणवत्ता वाली रिकॉर्डिंग पर भी दूरी का अनुमान लगाने की अनुमति देते हैं। दूसरा तरीका कैमरा ऑपरेटर के आंदोलन की दृश्यमान दूरी की तुलना करना है (आप चरणों की गणना भी कर सकते हैं, वे विशेषता भारी बू द्वारा श्रव्य हैं), एक और दृश्यमान दूरी के साथ। उदाहरण के लिए, गाँव में लड़ाई के एक रिकॉर्ड पर। अमेरिकी कम, छाती-उच्च युगल पर बैठते हैं और उनके विपरीत घर की ओर गोली मारते हैं। सूरज कैमरे के खिलाफ था, क्योंकि जगहें धुंधली हैं। हालांकि, जब ऑपरेटर उस घर के चारों ओर घूमते थे, जो वे ड्यूवला के साथ बचाव कर रहे थे, तो स्थिति को बदलने के लिए, और जिस स्थान पर वे शूटिंग कर रहे थे उस जगह पर नज़र रखी, यह स्पष्ट हो गया कि लड़ाई सड़क पर लड़ी गई थी। फिर ऑपरेटर ने इसे पार कर लिया, जिससे 18 चरण बना, जो लगभग 10-12 मीटर देता है।
दूसरे, विरोधियों के लगभग सभी आग संपर्क रिकॉर्ड दिखाई नहीं देते हैं, भले ही वे बहुत करीब हैं। कई प्रविष्टियों में से, केवल दो दुश्मन देख सकते थेः एक अस्पष्ट काला सिल्हूट। इस तरह का पहला रिकॉर्ड हत्या अमेरिकी सैनिक के कैमरे से लिया गया। तालिबान द्वारा एक तीन-व्यक्ति गश्त पर अचानक हमला किया गया था, अमेरिकियों ने किसी तरह के गड्ढे में छिपाने का प्रयास किया (फील्ड किलेबंदी के लिए अमेरिकी तिरस्कार कभी-कभी अद्भुत होता है)। उन्होंने गोली चलाई, लेकिन रिकॉर्ड यह नहीं दिखाता कि कौन है। अंत में, अमेरिकियों में से एक मारा गया। ऑपरेटर ने साइड से किए गए शॉट को चालू किया, और दुश्मन ने कैमरा मारा, यह केवल कुछ मीटर दूर था। ऑपरेटर एक असाल्ट राइफल के हाथों में था, लेकिन उसने उसे फेंक दिया और दुश्मन पर एक गोली चलाई। उसके बाद, उसने भागने की कोशिश की, लेकिन वह घायल हो गया, और फिर एक जोरदार थप्पड़ और कैमरा बगल में गिर गया। दूसरी प्रविष्टि, एक अमेरिकी गश्त, धान की जांच के बीच पेड़ों के वृक्षारोपण का मुकाबला कर रही है (यह अफगानिस्तान का प्रमुख चावल उत्पादक क्षेत्र लगमन का प्रांत है) और तालिबान के गोले के नीचे आता है। कुछ समय के लिए, अमेरिकी लैंडिंग के दौरान आगे और पीछे भाग रहे हैं, लेकिन कुछ बिंदु पर ऑपरेटर पेड़ों के बीच की खाई में एक काले रंग का आंकड़ा देखता है और उसे अपनी राइफल से गोली मारता है। दुश्मन से दूरी 15 मीटर या तो है। अन्य मामलों में, लड़ाई के रिकॉर्ड पर दुश्मन दिखाई नहीं देता है।
इस बिंदु पर, यह स्पष्ट और स्पष्ट हो गया कि युद्ध फिल्मों द्वारा शूटिंग के बारे में युद्ध के बारे में व्यापक धारणा, युद्ध फिल्मों द्वारा उत्पन्न की गई थी (जिसमें, अधिक सिनेमाई स्पष्टता के लिए, सब कुछ पूरी तरह से दिखाई देता है, और पात्रों ने लक्ष्य को मारा), साथ ही साथ। । एक बात दूसरी पर सुपरइमोज़ करती है, एक शूटिंग रेंज में एक विकास लक्ष्य पर एके से सेना में शूटिंग करना सिनेमा इम्प्रेशन पर सुपरइम्पोज़ करता है, और किसी व्यक्ति के लिए यह समझना कठिन है कि वास्तविक युद्ध किसी भी फिल्म की तुलना में बहुत अधिक उबाऊ है, और दुश्मन एक लक्ष्य नहीं है, वह भी जीना चाहता है, वह छिपता है, भेस और चमक नहीं करने की कोशिश करता है। एक वास्तविक लड़ाई में, शूटिंग रेंज की तुलना में पूरी तरह से अलग कारक हैं। मानव आकृति 200 मीटर से अधिक की दूरी पर पहले से ही खराब रूप से अलग हो जाती है, भले ही वह व्यक्ति अपनी पूरी ऊंचाई पर चल रहा हो। लेकिन अगर दुश्मन छलाँग लगाता है, छुप-छुप कर बात करता है, तो उसे पास मानना भी बहुत मुश्किल है। एक वीडियो में, जहां एरिक पर पुल के ऊपर अमेरिकी गश्त की लड़ाई का फुटेज कैप्चर किया गया था, तालिबान इस पुल से झाड़ियों में एक्सएनयूएमएक्स मीटर में बैठ गया (ऑपरेटर ने तब उन पर हैंड ग्रेनेड फेंक दिया, लेकिन कैमरे पर उनके शॉट्स के केवल फ्लैश दिखाई दे रहे थे, जो तुरंत ही छिप गए थे। धूल और धुएं का एक बादल। यदि तीर दुश्मन को दिखाई नहीं देता है, तो 300 मीटर की दूरी पर उसकी हमला राइफल की उत्कृष्ट सटीकता के बारे में सभी बातें उसके लिए एक खाली आवाज़ बन जाती हैं।
हेलमेट कैमरों के साथ लड़ाई के रिकॉर्ड से इस दिलचस्प टिप्पणियों पर समाप्त नहीं होते हैं। इससे भी अधिक दिलचस्प है कि किस तरह का हथियार है और इसका उपयोग आग के संपर्क में कैसे किया जाता है।
तीसरा, लड़ाई के रिकॉर्ड की परीक्षा जारी रखते हुए, यह देखना मुश्किल नहीं है कि हाथापाई में असॉल्ट राइफलों से आग का संचालन, एक नियम के रूप में, एक गैर-लक्षित, भारी दुश्मन द्वारा किया जाता है। अक्सर, अमेरिकियों, युगल के पीछे बैठे, अपने सिर पर अपने राइफल को उठाते हैं और यादृच्छिक पर एक या दो मोड़ देते हैं। जिनके पास ग्रेनेड लांचर हैं, स्पष्ट रूप से उनका उपयोग करना पसंद करते हैं। आर्यक पर पुल के लिए लड़ाई में, ऑपरेटर ने पैरापेट के खिलाफ अपनी असॉल्ट राइफल को झुक दिया और एमएक्सएनयूएमएक्स ग्रेनेड लांचर को ले लिया, जिसे उसने राइफल से अलग कर दिया था।
चौथा, एक हल्की मशीन गन, जो किसी भी असॉल्ट राइफल की तुलना में बहुत अधिक सक्रिय रूप से लड़ाई में भाग लेती है, अप्रत्याशित रूप से व्यापक रूप से इस्तेमाल की गई है। बता दें, सड़क के पार किए गए तालिबान के साथ उपर्युक्त झड़प में, ऑपरेटर MX48 मशीन गन के साथ एक मशीन गनर था, और एक छोटी आग के संपर्क के लिए, केवल 20 मिनटों के बारे में, चार कारतूस पाउच खर्च किए गए, यानी 400 कारतूस। यदि एक सबयूनिट में एक मशीन गन है, तो इसे दुश्मन को हराने में मुख्य भूमिका सौंपी जाती है, दोनों हाथापाई और लंबी दूरी में। यदि लड़ाई 100-150 मीटर से अधिक की दूरी पर लड़ी जाती है, तो आग को मशीन गन और स्नाइपर राइफल्स से निकाल दिया जाता है, असॉल्ट राइफल्स वाले तीर केवल निरीक्षण करते हैं या आश्रय में कवर लेते हैं।
लड़ाई की वीडियो रिकॉर्डिंग के विचार से सामान्य निष्कर्ष (और यह, जो विशेष रूप से जोर दिया जाना चाहिए, एक उद्देश्य स्रोत है) निम्नानुसार हैः एक असॉल्ट राइफल वास्तविक लड़ाई में इसके लिए जिम्मेदार किसी भी चमत्कारी गुणों को नहीं दिखाती है। इसका उपयोग निकटतम मुकाबले में किया जाता है, और मुख्य रूप से अप्रभावित, अत्यधिक आग का संचालन करने के लिए उपयोग किया जाता है। यदि सबयूनिट में हल्की मशीन गन या ग्रेनेड लांचर हैं, तो दुश्मन को हराने का मुख्य कार्य उन पर रहता है, और असाल्ट राइफल व्यक्तिगत आत्मरक्षा के हथियार से ज्यादा कुछ नहीं है। इसलिए एक और निष्कर्षः हमला करने वाली राइफलों के लिए सटीकता और फायरिंग रेंज को हासिल करने में खर्च की गई सभी लागत और प्रयास (जिसमें उनकी सभी किस्मों के साथ एके भी शामिल हैं) काफी हद तक बर्बाद हो गए। असाल्ट राइफलों के निर्माण के लिए उपयोग किए जाने वाले बहुत महत्वपूर्ण संसाधनों का उपयोग बेहद अक्षमता से किया जाता है, और फिर केवल इसलिए कि एक बड़ा युद्ध नहीं हुआ जिसने इस तरह की विलासिता की अनुमति नहीं दी। इसलिए, असॉल्ट राइफलों को आधुनिक पनडुब्बी बंदूकों से बदला जा सकता है, बशर्ते, कि यूनिट में पर्याप्त संख्या में लाइट मशीन गन और राइफल ग्रेनेड लांचर हों।
वैसे, ग्रेनेड लांचर के बारे में। घरेलू अनुभव भी है कि सेनानियों उसे प्यार करते हैं और उसे अधिक बार उपयोग करने का प्रयास करते हैं। चेचन्या में युद्ध के दौरान इसका व्यापक रूप से उपयोग किया गया था, जहां 90% तक निशानेबाजों के पास GP-25 था। यह समझ में आता है, "ग्रेनेड लांचर" ने कई अवसर खोलेः ग्रेनेड फेंक के बाहर एक्सएनयूएमएक्स-एक्सएनयूएमएक्स मीटर पर दुश्मन के गुटों को पराजित करना, एक मोर्टार में आश्रय से शूटिंग करना, "इमारतों और कारों में खिड़कियां और कमरे संसाधित करना, आग लगाना, परेशान करना और यहां तक कि अचानक हार भी। दुश्मन के पास दिखाई दिया, जब कोई लक्ष्य करने का समय नहीं है। अनुभवी सेनानियों को एक साथ GP-100 से बाहर शूट करने की सलाह देते हैंः एक चार्ज, दूसरा शूट, यह ग्रेनेड लांचर के ट्रिगर को दाहिने हाथ से दबाने की सिफारिश की जाती है, मशीन के हैंडल को कंधे पर रखकर मोर्टार पर भी फायर किया जाता है। अच्छा सामान, सामान्य तौर पर। यह सच है, उसे एक सबर्बेलर मोर्टार कहा जाना चाहिए था, क्योंकि उसने द्वितीय विश्व युद्ध के एक हल्के पैदल सेना 150-mm मोर्टार के शीर्ष पर कब्जा कर लिया था, लेकिन यह स्वाद का मामला है।
एक और बात, और बहुत अधिक गंभीर यह है कि मशीन और जीपी-एक्सएनयूएमएक्स का संयोजन आदर्श से बहुत दूर है। यह पता चला, यद्यपि परिचित, लेकिन ल्यूरिड डिज़ाइन, जो मिखाइल कलाश्निकोव द्वारा सामना किए गए सभी एके एर्गोनॉमिक्स को पार कर गया था। हथियार बहुत भारी निकला (AK-25M कारतूस के साथ - 74 किलो, GP-3,9 एक ग्रेनेड -25 किलो, सिर्फ 1,7 किलो), सामने की तरफ पछाड़ते हुए, ग्रेनेड लांचर ट्रिगर की एक असहज स्थिति के साथ, जिसे उसके बाएं हाथ से एक असहज हाथ से दबाया जाना चाहिए। ग्रेनेड लांचर को लोड करने से पहले बैरल को ऊपर रखना और उसके खिलाफ आराम करना आवश्यक है ताकि यह ग्रेनेड लॉन्चर में ग्रेनेड को "डूबने" के लिए सुविधाजनक हो)। केवल GP-5,6 और उसके बाद के रीटार्ट की बहुत अच्छी सामरिक क्षमता सेनानियों को इन सभी असुविधाओं को सहन करने और उन्हें दरकिनार करने के लिए चाल के साथ आने के लिए मजबूर करती है।
कुछ उचित आपत्तियों में से एक में पिस्तौल-मशीन गन पुनर्जागरण की चर्चा के दौरान, ग्रेनेड लांचर के बारे में सवाल उठे। जैसे, इसे एक सबमशीन गन के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। सिद्धांत रूप में, अमेरिकी तरीके का पालन करना संभव होगा, जब उनके एमएक्सएनयूएमएक्स में अक्सर अपना स्वयं का बट होता है और इसे राइफल से अलग किया जाता है। लेकिन लड़ाई में, दो अलग-अलग प्रकार के हथियारों का उपयोग करना बहुत सुविधाजनक नहीं हैः एक हथियार को बंद करने के लिए समय बर्बाद होता है, दूसरे को लेने के लिए, और यह जीवन का खर्च कर सकता है। युद्ध की गर्मी में, आस्थगित हथियारों को भुलाया या खोया जा सकता है। इसलिए ग्रेनेड लांचर और मशीनगन का संयोजन उचित है। कुछ ऐसा ही एक सबमशीन बंदूक के साथ किया जा सकता है।
सभी नमूने इस संयोजन के लिए उपयुक्त नहीं हैं। उनमें से जिनके स्टोर सुरक्षात्मक ब्रैकेट के सामने स्थित हैं, उन्हें बाहर करना होगा, क्योंकि वे वास्तव में उनके साथ जीपी को निलंबित नहीं कर सकते हैं। कहते हैं, इस उद्देश्य के लिए पीपी "देवदार" उपयुक्त नहीं है। लेकिन यहां PP-2000, जिसमें स्टोर हैंडल में स्थित है, न केवल एक सबमशीन बंदूक पर जीपी स्थापित करने के लिए, बल्कि उनके गहन एकीकरण के लिए भी अप्रत्याशित संभावनाएं खोलता है। दरअसल, चूंकि अंडर-बैरल ग्रेनेड लांचर इतने व्यापक रूप से और उत्सुकता से करीबी लड़ाई में उपयोग किया जाता है, इसलिए इसे सभी सबमशीन बंदूकों पर स्थापित करने के लिए समझ में आता है। यह न केवल व्यक्तिगत लड़ाकू, बल्कि संपूर्ण इकाई की मारक क्षमता में नाटकीय रूप से वृद्धि करेगा। ऐसे पॉडस्टवोलनिकोव की एक पूरी पलटन का एक मोर्टार मोर्टार गोलाबारी के साथ काफी तुलनीय होगा। उसके पास अभी भी कुछ फायदे हैं, जिनके बारे में नीचे चर्चा की जाएगी। आप देखे जाने वाले उपकरणों को भी एकीकृत कर सकते हैं।
यदि आप जीपी को सभी सबमशीन गन पर रखते हैं, तो इसके निरंतर और नियमित उपयोग को देखते हुए, इसे गैर-हटाने योग्य बनाना बेहतर है। फिर आप सबमशीन बंदूक के ट्रिगर तंत्र के साथ ट्रिगर तंत्र को एकीकृत कर सकते हैं, और कुछ वजन में जीत सकते हैं, ग्रेनेड लांचर के अलग-अलग हैंडल को छोड़ सकते हैं। तो इस बारे में कैसे किया जा सकता है? PP-2000 में एक बड़े पैमाने पर प्लास्टिक ट्रिगर गार्ड है, जिसका इस्तेमाल मेटल पिन के साथ फायर कंट्रोल ग्रिप के रूप में किया जाता है। एक लेज़र डिज़ाइनर कभी-कभी इससे जुड़ा होता है। बैरल के किनारे से अग्नि नियंत्रण के बीच तक घुंडी 100 मिमी के बारे में है, और 170 हथौड़ा मिमी तक। यहाँ इस जगह में ग्रेनेड लांचर के लिए पूछ रहा है। GP-30, GP-25 का अधिक आधुनिक एनालॉग, 280 मिमी की कुल लंबाई है, जिसमें बैरल की लंबाई 205 मिमी है। हैंडल की लंबाई और ग्रेनेड लांचर के ट्रिगर के शरीर से, आप इसे सबमशीन बंदूक के ट्रिगर तंत्र में एकीकृत करके 40 मिमी से कम नहीं जीत सकते हैं। दो-सिलेंडर पैटर्न का उपयोग करके ऐसा करना आसान है, लेकिन आप एक ही ट्रिगर पर कारतूस और हथगोले के वंश को जोड़ सकते हैं।
परिणाम क्या है? एक ग्रेनेड लॉन्चर से लैस PP-2000 पर आधारित एक सबमशीन बंदूक, 470 मिमी की लंबाई के साथ एक मुड़े हुए बट (मूल संस्करण में 350 मिमी के खिलाफ) के साथ प्राप्त की जाती है, और कारतूस और हथगोले (2,6 किलो) के साथ कारतूस और ग्रेनेड के बिना लगभग 3,3 किलो वजन होता है। अतिरिक्त और बहुत मूर्त सामरिक क्षमताओं को प्राप्त करना, इस तरह के एक हथियार अपनी कॉम्पैक्टनेस (705 मिमी को बट के साथ 940 मिमी AK-74M के साथ एक बट के साथ बाहर रखा गया है) को बरकरार रखता है, जीपी के साथ AK-40M की तुलना में 74% पर एक छोटा वजन है (और यह इसके वजन में बचाया बारी 9 ग्रेनेड VOG-25 से मेल खाती है), यह स्थलों के एकीकरण और ट्रिगर तंत्र के कारण उपयोग करने के लिए अधिक सुविधाजनक हो जाता है। मूल PP-2000 में, मुख्य वजन हथियार के पीछे होता है, जो फायरिंग करते समय बैरल के मजबूत प्रहार की ओर जाता है। ग्रेनेड लांचर को जोड़ने से हथियार का संतुलन बना रहेगा, जिसका सटीकता और सटीकता पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
इस तरह के हथियार आधुनिक युद्ध के लिए और प्रत्येक लड़ाकू को उत्पन्न करने के लिए बहुत बेहतर हैं, जिनमें सामूहिक आयुध (हालांकि यह ग्रेनेड लांचर के बिना मूल संस्करण का उपयोग करने के लिए स्निपर और मशीन गनर के लिए बेहतर हो सकता है) शामिल हैं। दूरी में दुश्मन को हराने के लिए, एक VOG-25 ग्रेनेड या इसके एनालॉग्स का उपयोग किया जाएगा, जो बुलेट की तुलना में इसके लिए बेहतर है। बहुत अधिक संभावना है कि दुश्मन के ग्रेनेड या टुकड़े को पकड़ना, खराब दिखाई देना, आश्रय में छिपना, झाड़ियों, घास और अन्य वनस्पतियों द्वारा बंद करना, भले ही शूटिंग यादृच्छिक या ध्वनि या फ्लैश पर हो। यदि सभी सेनानियों के पास ऐसे हथियार हैं, तो आप ज्वालामुखियों के साथ "प्रक्रिया" कर सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि असॉल्ट राइफलों के अनुयायी इस तथ्य के साथ बहस नहीं करेंगे कि ग्रेनेड बुलेट से बार-बार चलने वाले मध्यवर्ती कारतूस की तुलना में बेहतर होगा।
ग्रेनेड लांचर, वैसे, आपको दुश्मन से शरीर के कवच की समस्या को हल करने की अनुमति देता है। वे वास्तव में गरीब सेनाओं में भी फैल गए। केवल कुछ कारणों से असॉल्ट राइफलों के अनुयायियों का मानना है कि व्यक्तिगत छोटे हथियारों को जरूरी रूप से दुश्मन के शरीर के कवच और एक हेलमेट को छेदना चाहिए, और हमेशा 200-300 मीटर के साथ। यहां, वे कहते हैं, असॉल्ट राइफल से बेहतर कुछ नहीं है। मेरी राय में, "ब्रोंक" की उपस्थिति एक अनसुलझी समस्या नहीं है। सबसे पहले, क्योंकि सेना में उपयोग किए जाने वाले अधिकांश प्रकार के शरीर कवच सबसे संरक्षित प्रकारों में से नहीं हैं। यह समझ में आता है, क्योंकि भारी शरीर का कवच पहनने के लिए भारी और बेहद असहज होता है। इसके अलावा, वे बहुत बार गर्दन और कूल्हों को खुला छोड़ देते हैं, शरीर के अत्यधिक कमजोर हिस्से जिससे बड़े रक्त वाहिकाएं गुजरती हैं। गर्दन या ऊपरी जांघ के लिए एक मर्मज्ञ बंदूक की गोली घाव या तो खून की कमी के कारण घातक होगी, या घायल व्यक्ति को तत्काल सर्जिकल सहायता और लंबे उपचार की आवश्यकता होगी। आप इन बॉडी पार्ट्स को एक सबमशीन बंदूक से भी मार सकते हैं, खासतौर पर नजदीकी मुकाबले में।
दूसरे, ग्रेनेड बेहतर है। यहां तक कि अगर कवच और हेलमेट ने टुकड़ों को रखा, तो सदमे की लहर और भ्रम इससे दूर नहीं जाते हैं। वॉली फायर ग्रेनेड में वैसे भी टुकड़ों में कमजोर धब्बे, समान गर्दन या जांघ मिलेंगे। तीसरा, अगर दुश्मन बुलेटप्रूफ बनियान में दिखाई देता है - सीधे आग के साथ ग्रेनेड मारा! 5,56 बुलेट मिमी की तुलना में ऊर्जा प्रभाव बहुत अधिक महत्वपूर्ण होगा। 50 मीटर पर, एक बुलेट में 1,5 kJ के बारे में गतिज ऊर्जा होती है, जबकि एक ग्रेनेड हिट 0,4 kJ देता है, और एक 48 ब्लास्ट 196,8 kJ को एक ग्रेनेड में विस्फोटक देता है। इसके अलावा, अच्छे पुराने विचारों को न भूलें। बहुत पहले सोवियत "ग्रेनेड लांचर" में, Iskra JCG-40, जिसे 1966 में बनाया गया था, लेकिन श्रृंखला में नहीं गया था, एक विखंडन-संचयी ग्रेनेड था, कुछ आंकड़ों के अनुसार, सही कोण 40 मिमी में प्रवेश किया गया था। आधुनिक राइफल ग्रेनेड लांचर के लिए एक समान ग्रेनेड बनाना इतना मुश्किल नहीं है, खासकर क्योंकि इसका उपयोग बाधाओं के पीछे लक्ष्य को हराने के लिए किया जा सकता है।
सामान्य तौर पर, ग्रेनेड लांचर के साथ एक टामी बंदूक का संयोजन, जिसे डिजाइन में कुछ बदलावों की आवश्यकता होगी, एक बहुत अच्छा परिणाम देगाः शक्तिशाली, हल्के और कॉम्पैक्ट हथियार, विशिष्ट लड़ाकू अभियानों की व्यापक रेंज के लिए उपयुक्त, एक इकाई के आयुध की संरचना में संयुक्त, सामूहिक आयुध के साथ, और सैन्य अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अधिक स्वीकार्य, विशेष रूप से एक बड़े युद्ध के मामले में, अपने मध्यवर्ती कारतूस के साथ एक राइफल की तुलना में।
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Предыдущая статья "Ренессанс пистолетов-пулеметов" вызвала довольно оживленную дискуссию, со всеми ее обычными принадлежностями: обвинениями автора, то есть меня, в дилетантстве, незнании азов и так далее. Многочисленные поклонники штурмовых винтовок привычно сыпали калибрами, кучностями и дальностями эффективной стрельбы, горячо выступали за оружие, которое бьет на दो सौ, तीन सौ, चार सौ метров, и на основании этого аргумента считают применение пистолетов-пулеметов бредом. Однако чем больше было комментариев такого рода, тем сильнее создавалось ощущение, что высказавшиеся многочисленные специалисты, все, словно на подбор, с военным образованием и огромным боевым опытом, просто не имеют четкого представления, как именно и на какой дистанции идет бой. यह पता लगाना कि वास्तव में चीजें कितनी कठिन हो गई हैं, इतनी मुश्किल नहीं है। प्रौद्योगिकी की प्रगति अब आपको पहले व्यक्ति से लड़ाई को देखने की अनुमति देती है। कई साल पहले सैनिकों के हेलमेट पर कैमरे लगाने की बहुत व्यापक प्रथा थी, जो कुछ भी होता है उसे शूट करते हैं। ऐसा करने वाले पहले अफगानिस्तान और इराक में अमेरिकी थे, और आप वर्ष के दो हज़ार सात कहते हैं, वे वीडियो टेप कह सकते हैं। कैमरे तब इतने अच्छे नहीं थे, लेकिन उन्होंने फिर भी लड़ाई की तस्वीर दी। वर्तमान हेलमेट-माउंटेड कैमरे, जो अब कई सेनाओं द्वारा उपयोग किए जाते हैं, उच्च परिभाषा वीडियो बनाते हैं, जिसे देखने के बाद दृश्य में व्यक्तिगत उपस्थिति की पूरी भावना होती है। कहा जाता है कि अमेरिकी नौसैनिकों को एक झड़प के रूप में कहा जाता है, एक नियम के रूप में, कुछ अनपेक्षित, टीमों के साथ घिरे हुए और छोटी टिप्पणियों के साथ, लेकिन यह आग के संपर्क के दौरान हेलमेट कैमरे दिखाते हैं, यह वास्तव में दिलचस्प है। अवलोकन ऐसे किए जा सकते हैं। सबसे पहले, लगभग सभी लड़ाइयों जिसमें अमेरिकियों ने अपनी असॉल्ट राइफलों का इस्तेमाल किया था, वे बीस-तीस मीटर की दूरी पर थे। हालाँकि कैमरे थोड़ी दूरी तय करते हैं और आँख मीटर के साथ निर्धारित करना मुश्किल होता है, फिर भी, कुछ स्थलों, जैसे कि घरों, द्वैध, कारों, पेड़ों, झाड़ियों, हमें कम गुणवत्ता वाली रिकॉर्डिंग पर भी दूरी का अनुमान लगाने की अनुमति देते हैं। दूसरा तरीका कैमरा ऑपरेटर के आंदोलन की दृश्यमान दूरी की तुलना करना है , एक और दृश्यमान दूरी के साथ। उदाहरण के लिए, गाँव में लड़ाई के एक रिकॉर्ड पर। अमेरिकी कम, छाती-उच्च युगल पर बैठते हैं और उनके विपरीत घर की ओर गोली मारते हैं। सूरज कैमरे के खिलाफ था, क्योंकि जगहें धुंधली हैं। हालांकि, जब ऑपरेटर उस घर के चारों ओर घूमते थे, जो वे ड्यूवला के साथ बचाव कर रहे थे, तो स्थिति को बदलने के लिए, और जिस स्थान पर वे शूटिंग कर रहे थे उस जगह पर नज़र रखी, यह स्पष्ट हो गया कि लड़ाई सड़क पर लड़ी गई थी। फिर ऑपरेटर ने इसे पार कर लिया, जिससे अट्ठारह चरण बना, जो लगभग दस-बारह मीटर देता है। दूसरे, विरोधियों के लगभग सभी आग संपर्क रिकॉर्ड दिखाई नहीं देते हैं, भले ही वे बहुत करीब हैं। कई प्रविष्टियों में से, केवल दो दुश्मन देख सकते थेः एक अस्पष्ट काला सिल्हूट। इस तरह का पहला रिकॉर्ड हत्या अमेरिकी सैनिक के कैमरे से लिया गया। तालिबान द्वारा एक तीन-व्यक्ति गश्त पर अचानक हमला किया गया था, अमेरिकियों ने किसी तरह के गड्ढे में छिपाने का प्रयास किया । उन्होंने गोली चलाई, लेकिन रिकॉर्ड यह नहीं दिखाता कि कौन है। अंत में, अमेरिकियों में से एक मारा गया। ऑपरेटर ने साइड से किए गए शॉट को चालू किया, और दुश्मन ने कैमरा मारा, यह केवल कुछ मीटर दूर था। ऑपरेटर एक असाल्ट राइफल के हाथों में था, लेकिन उसने उसे फेंक दिया और दुश्मन पर एक गोली चलाई। उसके बाद, उसने भागने की कोशिश की, लेकिन वह घायल हो गया, और फिर एक जोरदार थप्पड़ और कैमरा बगल में गिर गया। दूसरी प्रविष्टि, एक अमेरिकी गश्त, धान की जांच के बीच पेड़ों के वृक्षारोपण का मुकाबला कर रही है और तालिबान के गोले के नीचे आता है। कुछ समय के लिए, अमेरिकी लैंडिंग के दौरान आगे और पीछे भाग रहे हैं, लेकिन कुछ बिंदु पर ऑपरेटर पेड़ों के बीच की खाई में एक काले रंग का आंकड़ा देखता है और उसे अपनी राइफल से गोली मारता है। दुश्मन से दूरी पंद्रह मीटर या तो है। अन्य मामलों में, लड़ाई के रिकॉर्ड पर दुश्मन दिखाई नहीं देता है। इस बिंदु पर, यह स्पष्ट और स्पष्ट हो गया कि युद्ध फिल्मों द्वारा शूटिंग के बारे में युद्ध के बारे में व्यापक धारणा, युद्ध फिल्मों द्वारा उत्पन्न की गई थी , साथ ही साथ। । एक बात दूसरी पर सुपरइमोज़ करती है, एक शूटिंग रेंज में एक विकास लक्ष्य पर एके से सेना में शूटिंग करना सिनेमा इम्प्रेशन पर सुपरइम्पोज़ करता है, और किसी व्यक्ति के लिए यह समझना कठिन है कि वास्तविक युद्ध किसी भी फिल्म की तुलना में बहुत अधिक उबाऊ है, और दुश्मन एक लक्ष्य नहीं है, वह भी जीना चाहता है, वह छिपता है, भेस और चमक नहीं करने की कोशिश करता है। एक वास्तविक लड़ाई में, शूटिंग रेंज की तुलना में पूरी तरह से अलग कारक हैं। मानव आकृति दो सौ मीटर से अधिक की दूरी पर पहले से ही खराब रूप से अलग हो जाती है, भले ही वह व्यक्ति अपनी पूरी ऊंचाई पर चल रहा हो। लेकिन अगर दुश्मन छलाँग लगाता है, छुप-छुप कर बात करता है, तो उसे पास मानना भी बहुत मुश्किल है। एक वीडियो में, जहां एरिक पर पुल के ऊपर अमेरिकी गश्त की लड़ाई का फुटेज कैप्चर किया गया था, तालिबान इस पुल से झाड़ियों में एक्सएनयूएमएक्स मीटर में बैठ गया निम्नानुसार हैः एक असॉल्ट राइफल वास्तविक लड़ाई में इसके लिए जिम्मेदार किसी भी चमत्कारी गुणों को नहीं दिखाती है। इसका उपयोग निकटतम मुकाबले में किया जाता है, और मुख्य रूप से अप्रभावित, अत्यधिक आग का संचालन करने के लिए उपयोग किया जाता है। यदि सबयूनिट में हल्की मशीन गन या ग्रेनेड लांचर हैं, तो दुश्मन को हराने का मुख्य कार्य उन पर रहता है, और असाल्ट राइफल व्यक्तिगत आत्मरक्षा के हथियार से ज्यादा कुछ नहीं है। इसलिए एक और निष्कर्षः हमला करने वाली राइफलों के लिए सटीकता और फायरिंग रेंज को हासिल करने में खर्च की गई सभी लागत और प्रयास काफी हद तक बर्बाद हो गए। असाल्ट राइफलों के निर्माण के लिए उपयोग किए जाने वाले बहुत महत्वपूर्ण संसाधनों का उपयोग बेहद अक्षमता से किया जाता है, और फिर केवल इसलिए कि एक बड़ा युद्ध नहीं हुआ जिसने इस तरह की विलासिता की अनुमति नहीं दी। इसलिए, असॉल्ट राइफलों को आधुनिक पनडुब्बी बंदूकों से बदला जा सकता है, बशर्ते, कि यूनिट में पर्याप्त संख्या में लाइट मशीन गन और राइफल ग्रेनेड लांचर हों। वैसे, ग्रेनेड लांचर के बारे में। घरेलू अनुभव भी है कि सेनानियों उसे प्यार करते हैं और उसे अधिक बार उपयोग करने का प्रयास करते हैं। चेचन्या में युद्ध के दौरान इसका व्यापक रूप से उपयोग किया गया था, जहां नब्बे% तक निशानेबाजों के पास GP-पच्चीस था। यह समझ में आता है, "ग्रेनेड लांचर" ने कई अवसर खोलेः ग्रेनेड फेंक के बाहर एक्सएनयूएमएक्स-एक्सएनयूएमएक्स मीटर पर दुश्मन के गुटों को पराजित करना, एक मोर्टार में आश्रय से शूटिंग करना, "इमारतों और कारों में खिड़कियां और कमरे संसाधित करना, आग लगाना, परेशान करना और यहां तक कि अचानक हार भी। दुश्मन के पास दिखाई दिया, जब कोई लक्ष्य करने का समय नहीं है। अनुभवी सेनानियों को एक साथ GP-एक सौ से बाहर शूट करने की सलाह देते हैंः एक चार्ज, दूसरा शूट, यह ग्रेनेड लांचर के ट्रिगर को दाहिने हाथ से दबाने की सिफारिश की जाती है, मशीन के हैंडल को कंधे पर रखकर मोर्टार पर भी फायर किया जाता है। अच्छा सामान, सामान्य तौर पर। यह सच है, उसे एक सबर्बेलर मोर्टार कहा जाना चाहिए था, क्योंकि उसने द्वितीय विश्व युद्ध के एक हल्के पैदल सेना एक सौ पचास-mm मोर्टार के शीर्ष पर कब्जा कर लिया था, लेकिन यह स्वाद का मामला है। एक और बात, और बहुत अधिक गंभीर यह है कि मशीन और जीपी-एक्सएनयूएमएक्स का संयोजन आदर्श से बहुत दूर है। यह पता चला, यद्यपि परिचित, लेकिन ल्यूरिड डिज़ाइन, जो मिखाइल कलाश्निकोव द्वारा सामना किए गए सभी एके एर्गोनॉमिक्स को पार कर गया था। हथियार बहुत भारी निकला , सामने की तरफ पछाड़ते हुए, ग्रेनेड लांचर ट्रिगर की एक असहज स्थिति के साथ, जिसे उसके बाएं हाथ से एक असहज हाथ से दबाया जाना चाहिए। ग्रेनेड लांचर को लोड करने से पहले बैरल को ऊपर रखना और उसके खिलाफ आराम करना आवश्यक है ताकि यह ग्रेनेड लॉन्चर में ग्रेनेड को "डूबने" के लिए सुविधाजनक हो)। केवल GP-पाँच,छः और उसके बाद के रीटार्ट की बहुत अच्छी सामरिक क्षमता सेनानियों को इन सभी असुविधाओं को सहन करने और उन्हें दरकिनार करने के लिए चाल के साथ आने के लिए मजबूर करती है। कुछ उचित आपत्तियों में से एक में पिस्तौल-मशीन गन पुनर्जागरण की चर्चा के दौरान, ग्रेनेड लांचर के बारे में सवाल उठे। जैसे, इसे एक सबमशीन गन के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। सिद्धांत रूप में, अमेरिकी तरीके का पालन करना संभव होगा, जब उनके एमएक्सएनयूएमएक्स में अक्सर अपना स्वयं का बट होता है और इसे राइफल से अलग किया जाता है। लेकिन लड़ाई में, दो अलग-अलग प्रकार के हथियारों का उपयोग करना बहुत सुविधाजनक नहीं हैः एक हथियार को बंद करने के लिए समय बर्बाद होता है, दूसरे को लेने के लिए, और यह जीवन का खर्च कर सकता है। युद्ध की गर्मी में, आस्थगित हथियारों को भुलाया या खोया जा सकता है। इसलिए ग्रेनेड लांचर और मशीनगन का संयोजन उचित है। कुछ ऐसा ही एक सबमशीन बंदूक के साथ किया जा सकता है। सभी नमूने इस संयोजन के लिए उपयुक्त नहीं हैं। उनमें से जिनके स्टोर सुरक्षात्मक ब्रैकेट के सामने स्थित हैं, उन्हें बाहर करना होगा, क्योंकि वे वास्तव में उनके साथ जीपी को निलंबित नहीं कर सकते हैं। कहते हैं, इस उद्देश्य के लिए पीपी "देवदार" उपयुक्त नहीं है। लेकिन यहां PP-दो हज़ार, जिसमें स्टोर हैंडल में स्थित है, न केवल एक सबमशीन बंदूक पर जीपी स्थापित करने के लिए, बल्कि उनके गहन एकीकरण के लिए भी अप्रत्याशित संभावनाएं खोलता है। दरअसल, चूंकि अंडर-बैरल ग्रेनेड लांचर इतने व्यापक रूप से और उत्सुकता से करीबी लड़ाई में उपयोग किया जाता है, इसलिए इसे सभी सबमशीन बंदूकों पर स्थापित करने के लिए समझ में आता है। यह न केवल व्यक्तिगत लड़ाकू, बल्कि संपूर्ण इकाई की मारक क्षमता में नाटकीय रूप से वृद्धि करेगा। ऐसे पॉडस्टवोलनिकोव की एक पूरी पलटन का एक मोर्टार मोर्टार गोलाबारी के साथ काफी तुलनीय होगा। उसके पास अभी भी कुछ फायदे हैं, जिनके बारे में नीचे चर्चा की जाएगी। आप देखे जाने वाले उपकरणों को भी एकीकृत कर सकते हैं। यदि आप जीपी को सभी सबमशीन गन पर रखते हैं, तो इसके निरंतर और नियमित उपयोग को देखते हुए, इसे गैर-हटाने योग्य बनाना बेहतर है। फिर आप सबमशीन बंदूक के ट्रिगर तंत्र के साथ ट्रिगर तंत्र को एकीकृत कर सकते हैं, और कुछ वजन में जीत सकते हैं, ग्रेनेड लांचर के अलग-अलग हैंडल को छोड़ सकते हैं। तो इस बारे में कैसे किया जा सकता है? PP-दो हज़ार में एक बड़े पैमाने पर प्लास्टिक ट्रिगर गार्ड है, जिसका इस्तेमाल मेटल पिन के साथ फायर कंट्रोल ग्रिप के रूप में किया जाता है। एक लेज़र डिज़ाइनर कभी-कभी इससे जुड़ा होता है। बैरल के किनारे से अग्नि नियंत्रण के बीच तक घुंडी एक सौ मिमी के बारे में है, और एक सौ सत्तर हथौड़ा मिमी तक। यहाँ इस जगह में ग्रेनेड लांचर के लिए पूछ रहा है। GP-तीस, GP-पच्चीस का अधिक आधुनिक एनालॉग, दो सौ अस्सी मिमी की कुल लंबाई है, जिसमें बैरल की लंबाई दो सौ पाँच मिमी है। हैंडल की लंबाई और ग्रेनेड लांचर के ट्रिगर के शरीर से, आप इसे सबमशीन बंदूक के ट्रिगर तंत्र में एकीकृत करके चालीस मिमी से कम नहीं जीत सकते हैं। दो-सिलेंडर पैटर्न का उपयोग करके ऐसा करना आसान है, लेकिन आप एक ही ट्रिगर पर कारतूस और हथगोले के वंश को जोड़ सकते हैं। परिणाम क्या है? एक ग्रेनेड लॉन्चर से लैस PP-दो हज़ार पर आधारित एक सबमशीन बंदूक, चार सौ सत्तर मिमी की लंबाई के साथ एक मुड़े हुए बट के साथ प्राप्त की जाती है, और कारतूस और हथगोले के साथ कारतूस और ग्रेनेड के बिना लगभग तीन,तीन किलो वजन होता है। अतिरिक्त और बहुत मूर्त सामरिक क्षमताओं को प्राप्त करना, इस तरह के एक हथियार अपनी कॉम्पैक्टनेस को बरकरार रखता है, जीपी के साथ AK-चालीसM की तुलना में चौहत्तर% पर एक छोटा वजन है , यह स्थलों के एकीकरण और ट्रिगर तंत्र के कारण उपयोग करने के लिए अधिक सुविधाजनक हो जाता है। मूल PP-दो हज़ार में, मुख्य वजन हथियार के पीछे होता है, जो फायरिंग करते समय बैरल के मजबूत प्रहार की ओर जाता है। ग्रेनेड लांचर को जोड़ने से हथियार का संतुलन बना रहेगा, जिसका सटीकता और सटीकता पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस तरह के हथियार आधुनिक युद्ध के लिए और प्रत्येक लड़ाकू को उत्पन्न करने के लिए बहुत बेहतर हैं, जिनमें सामूहिक आयुध शामिल हैं। दूरी में दुश्मन को हराने के लिए, एक VOG-पच्चीस ग्रेनेड या इसके एनालॉग्स का उपयोग किया जाएगा, जो बुलेट की तुलना में इसके लिए बेहतर है। बहुत अधिक संभावना है कि दुश्मन के ग्रेनेड या टुकड़े को पकड़ना, खराब दिखाई देना, आश्रय में छिपना, झाड़ियों, घास और अन्य वनस्पतियों द्वारा बंद करना, भले ही शूटिंग यादृच्छिक या ध्वनि या फ्लैश पर हो। यदि सभी सेनानियों के पास ऐसे हथियार हैं, तो आप ज्वालामुखियों के साथ "प्रक्रिया" कर सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि असॉल्ट राइफलों के अनुयायी इस तथ्य के साथ बहस नहीं करेंगे कि ग्रेनेड बुलेट से बार-बार चलने वाले मध्यवर्ती कारतूस की तुलना में बेहतर होगा। ग्रेनेड लांचर, वैसे, आपको दुश्मन से शरीर के कवच की समस्या को हल करने की अनुमति देता है। वे वास्तव में गरीब सेनाओं में भी फैल गए। केवल कुछ कारणों से असॉल्ट राइफलों के अनुयायियों का मानना है कि व्यक्तिगत छोटे हथियारों को जरूरी रूप से दुश्मन के शरीर के कवच और एक हेलमेट को छेदना चाहिए, और हमेशा दो सौ-तीन सौ मीटर के साथ। यहां, वे कहते हैं, असॉल्ट राइफल से बेहतर कुछ नहीं है। मेरी राय में, "ब्रोंक" की उपस्थिति एक अनसुलझी समस्या नहीं है। सबसे पहले, क्योंकि सेना में उपयोग किए जाने वाले अधिकांश प्रकार के शरीर कवच सबसे संरक्षित प्रकारों में से नहीं हैं। यह समझ में आता है, क्योंकि भारी शरीर का कवच पहनने के लिए भारी और बेहद असहज होता है। इसके अलावा, वे बहुत बार गर्दन और कूल्हों को खुला छोड़ देते हैं, शरीर के अत्यधिक कमजोर हिस्से जिससे बड़े रक्त वाहिकाएं गुजरती हैं। गर्दन या ऊपरी जांघ के लिए एक मर्मज्ञ बंदूक की गोली घाव या तो खून की कमी के कारण घातक होगी, या घायल व्यक्ति को तत्काल सर्जिकल सहायता और लंबे उपचार की आवश्यकता होगी। आप इन बॉडी पार्ट्स को एक सबमशीन बंदूक से भी मार सकते हैं, खासतौर पर नजदीकी मुकाबले में। दूसरे, ग्रेनेड बेहतर है। यहां तक कि अगर कवच और हेलमेट ने टुकड़ों को रखा, तो सदमे की लहर और भ्रम इससे दूर नहीं जाते हैं। वॉली फायर ग्रेनेड में वैसे भी टुकड़ों में कमजोर धब्बे, समान गर्दन या जांघ मिलेंगे। तीसरा, अगर दुश्मन बुलेटप्रूफ बनियान में दिखाई देता है - सीधे आग के साथ ग्रेनेड मारा! पाँच,छप्पन बुलेट मिमी की तुलना में ऊर्जा प्रभाव बहुत अधिक महत्वपूर्ण होगा। पचास मीटर पर, एक बुलेट में एक,पाँच kJ के बारे में गतिज ऊर्जा होती है, जबकि एक ग्रेनेड हिट शून्य,चार kJ देता है, और एक अड़तालीस ब्लास्ट एक सौ छियानवे,आठ kJ को एक ग्रेनेड में विस्फोटक देता है। इसके अलावा, अच्छे पुराने विचारों को न भूलें। बहुत पहले सोवियत "ग्रेनेड लांचर" में, Iskra JCG-चालीस, जिसे एक हज़ार नौ सौ छयासठ में बनाया गया था, लेकिन श्रृंखला में नहीं गया था, एक विखंडन-संचयी ग्रेनेड था, कुछ आंकड़ों के अनुसार, सही कोण चालीस मिमी में प्रवेश किया गया था। आधुनिक राइफल ग्रेनेड लांचर के लिए एक समान ग्रेनेड बनाना इतना मुश्किल नहीं है, खासकर क्योंकि इसका उपयोग बाधाओं के पीछे लक्ष्य को हराने के लिए किया जा सकता है। सामान्य तौर पर, ग्रेनेड लांचर के साथ एक टामी बंदूक का संयोजन, जिसे डिजाइन में कुछ बदलावों की आवश्यकता होगी, एक बहुत अच्छा परिणाम देगाः शक्तिशाली, हल्के और कॉम्पैक्ट हथियार, विशिष्ट लड़ाकू अभियानों की व्यापक रेंज के लिए उपयुक्त, एक इकाई के आयुध की संरचना में संयुक्त, सामूहिक आयुध के साथ, और सैन्य अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अधिक स्वीकार्य, विशेष रूप से एक बड़े युद्ध के मामले में, अपने मध्यवर्ती कारतूस के साथ एक राइफल की तुलना में।
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दिल्ली के कालिंदी कुंज मेट्रो स्टेशन के पास भीषण आग लगी है. आग फर्नीचर मार्केट में लगी हुई है. मौके पर दमकल विभाग की 17 गाड़ियां पहुंची है और आग बुझाने की कोशिश की जा रही है. अभी किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन बताया जा रहा है कि आग के कारण लाखों रुपये के सामान जलकर खाक हो गए हैं.
कालिंदी कुंज मेट्रो स्टेशन के पास फर्नीचर मार्केट में सुबह तड़के करीब 5:30 बजे अचानक से आग लग गई. सूचना मिलने के तुरंत बाद फायर ब्रिगेड की तकरीबन 17 गाड़ियां पहुंच गई और आग पर काबू पाने में जुटी है. आग के कारणों का अभी पता नहीं लग पाया है.
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दिल्ली के कालिंदी कुंज मेट्रो स्टेशन के पास भीषण आग लगी है. आग फर्नीचर मार्केट में लगी हुई है. मौके पर दमकल विभाग की सत्रह गाड़ियां पहुंची है और आग बुझाने की कोशिश की जा रही है. अभी किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन बताया जा रहा है कि आग के कारण लाखों रुपये के सामान जलकर खाक हो गए हैं. कालिंदी कुंज मेट्रो स्टेशन के पास फर्नीचर मार्केट में सुबह तड़के करीब पाँच:तीस बजे अचानक से आग लग गई. सूचना मिलने के तुरंत बाद फायर ब्रिगेड की तकरीबन सत्रह गाड़ियां पहुंच गई और आग पर काबू पाने में जुटी है. आग के कारणों का अभी पता नहीं लग पाया है.
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राफेल नडाल ने एटीपी सिनसिनाटी मास्टर्स से बुधवार को अपना नाम वापस ले लिया है। आयोजकों ने कहा है कि उन्होंने टोरोंटो टूर्नामेंट से नाम वापस लेने के एक दिन बाद ही सिनसिनाटी मास्टर्स से भी नाम वापस लिया है। गौरतलब है कि स्पेन के ये स्टार खिलाड़ी जून में खेले गए फ्रेंच ओपन में खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले से ही बाएं पैर पर इंजरी के कारण बाहर हुए थे।
ग्रैंड स्लैम में गिनती के मामले में नोवाक जोकोविच और रोजर फेडडर के बराबर नडाल कोशिश करेंगे कि वे अपना पांचवां यूएस ओपन का खिताब इस साल जीतें। ये टूर्नामेंट 30 अगस्त से शुरू होने वाला है।
आपको बता दें कि इस साल अब तक खेले गए तीनों ग्रैंड स्लैम के विजेता नोवाक जोकोविच रहे हैं। अब उनकी कोशिश होगी कि वे इस साल का चौथा और आखिरी ग्रैंड स्लैम भी अपने नाम करें। सिनसिनाटी मास्टर्स से जोकोविच ने भी अपना नाम वापस ले लिया है। हाल ही में जोकोविच टोक्यो ओलंपिक में पदक हासिल करने का अवसर गंवा चुके थे।
34 वर्षीय जोकोविच 1969 के बाद पहले खिलाड़ी बन सकते हैं जिन्होंने एक साल में सभी ग्रैंड स्लैम जीते हों। साल 1969 में रॉड लेवर ने ये कारनामा किया था। हालांकि उन्होंने 'गोल्डन स्लैम' का अवसर पर अपने हाथों से जाने दिया। वे सेमीफाइनल मुकाबले में एलेक्जेंडर ज्वेरेव से हार गए थे।
40 वर्षीय रोजर फेडरर ने भी टोरोंटो और सिनसिनाटी से अपना नाम पिछले गुरुवार को वापस ले लिया था। उन्होंने यूएस ओपन के लिए फिटनेस खराब होने का डर वजह बताई थी।
फेडरर ने अपना आखिरी ग्रैंड स्लैनम 2018 में ऑस्ट्रेलियन ओपन के तौर पर जीता था। उन्होंने विंबलडन के क्वॉर्टरफाइनल में जगह बनाई थी लेकिन घुटने की चोट के कारण टोक्यो ओलंपिक में नहीं खेले थे।
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राफेल नडाल ने एटीपी सिनसिनाटी मास्टर्स से बुधवार को अपना नाम वापस ले लिया है। आयोजकों ने कहा है कि उन्होंने टोरोंटो टूर्नामेंट से नाम वापस लेने के एक दिन बाद ही सिनसिनाटी मास्टर्स से भी नाम वापस लिया है। गौरतलब है कि स्पेन के ये स्टार खिलाड़ी जून में खेले गए फ्रेंच ओपन में खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले से ही बाएं पैर पर इंजरी के कारण बाहर हुए थे। ग्रैंड स्लैम में गिनती के मामले में नोवाक जोकोविच और रोजर फेडडर के बराबर नडाल कोशिश करेंगे कि वे अपना पांचवां यूएस ओपन का खिताब इस साल जीतें। ये टूर्नामेंट तीस अगस्त से शुरू होने वाला है। आपको बता दें कि इस साल अब तक खेले गए तीनों ग्रैंड स्लैम के विजेता नोवाक जोकोविच रहे हैं। अब उनकी कोशिश होगी कि वे इस साल का चौथा और आखिरी ग्रैंड स्लैम भी अपने नाम करें। सिनसिनाटी मास्टर्स से जोकोविच ने भी अपना नाम वापस ले लिया है। हाल ही में जोकोविच टोक्यो ओलंपिक में पदक हासिल करने का अवसर गंवा चुके थे। चौंतीस वर्षीय जोकोविच एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर के बाद पहले खिलाड़ी बन सकते हैं जिन्होंने एक साल में सभी ग्रैंड स्लैम जीते हों। साल एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में रॉड लेवर ने ये कारनामा किया था। हालांकि उन्होंने 'गोल्डन स्लैम' का अवसर पर अपने हाथों से जाने दिया। वे सेमीफाइनल मुकाबले में एलेक्जेंडर ज्वेरेव से हार गए थे। चालीस वर्षीय रोजर फेडरर ने भी टोरोंटो और सिनसिनाटी से अपना नाम पिछले गुरुवार को वापस ले लिया था। उन्होंने यूएस ओपन के लिए फिटनेस खराब होने का डर वजह बताई थी। फेडरर ने अपना आखिरी ग्रैंड स्लैनम दो हज़ार अट्ठारह में ऑस्ट्रेलियन ओपन के तौर पर जीता था। उन्होंने विंबलडन के क्वॉर्टरफाइनल में जगह बनाई थी लेकिन घुटने की चोट के कारण टोक्यो ओलंपिक में नहीं खेले थे।
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जब तक हाजिर जवानी में चिढ़ाने का भाव रहता है तब तक तौ मैं
वह हास्य के क्षेत्र में बनती है व्यय एवं ताना हो सकता है किन्तु विशेष तथा रोग नहीं होना चाहिये जैसे निम्न उपरणों में व्यस्य एवं उपहास तो है
द्धे इन
नहीं ।
लड़का बोला चाहिये बीबी स्थानी साना बना सके जो बोली नटखट रानी बरे हमारी वान के मन बा भतार र री नटखट । हट हट तुमसे सभी गये हैं हार । -दिल्ली की शोखी
बाब पिया मत अब दफ्तर जाओ करैया में मा रानीकी तौ बड़ी न होनी दरकार
वास्तव में वही साना व्यंग्य या व्याजोकि ( irony ) का बात को सीधे न कह कर उगत्व के साथ कहा जाता है। जिससे भाव सुननमें प्रतारणा स्वरूप न लगे किन्तु मूलतः उसमें घृणा का कुमाव सम्मिविष्ट हो। इसमें की पाक मंगी या नामंगी का विशेष महत्व है ।
कमी कमी उचर ऐसा होता है कि बनायास हंसी वा जाती है जबकि का का यह वभिप्राय नही होता है। वह साधारण ढंग से प्रश्न की बिना सममे उत्तर दे देता है। इसकी बानता ही हास्योत्पादन मैंसहायक होती है। हास्यामिव्यक्ति का यह प्रश्न ही नहीं उठता। हास्योत्पत्ति के लिये यह बज्ञानता? की तो स्वाभाविक होती है बार की जान कर अपनायी जाती है यहां जानबूक करती है। वह को चिढ़ाने वार सिफलकामाव प्रश्नक्या
प्रधान रहता है । असे किसी से पूछा जाय कि वाप शराब क्यों पीते हैं और वह उत्तर देता है कि 'पिर्क नहीं तो क्या करूँ उसका ? तो प्रश्न पूछने वाला चिढ़ जायेगा ।
जहां भगवान
जाती है। जैसे निम्न
स्वामाविक होती है वह प्रश्नकर्ता को भी हंसी का में
हास्य व्यंग्य तक की हरिशंकर सिंह को अपने इतिहास ज्ञान पर बहुत गर्व था । एक बार उनके एक मित्र ने उनसे पूरा मई परसाई जरा यह तोता कि अकबर वहांगीर और शाहजहां को कहाँ कहाँ दफनाया गया है। * परसाई जी सोच में दूध नये, बो अपनी अपनी कड़ी में बफन होने और कहाँ
वास्तव में ऐसे घरों में बात को टालने का प्रयत्न रहता है, साथ ही अपनी शानता की ने का भी किसी से किसी से पूछा जाय • चौर की
क्या पक्ष्मान है और वह उपर दे उसकी दाढ़ी में तिनका होता है ।
के मुख से वायी बात हुनकर शेटा अपनेबापपूरा कर देना भी हाजिरवानी का एक प्रकार है - जैसे
कांता : बजी बाप सुनियेगा । आज कल तो यह बड़ी मजेदार बातें करने लगे हैं। ऐसे ब्रिलियेंट फिकरे कहते है कि
रमेश : एक हजार बाद के मरकरी बल्य भी फीले पड़ जाते हैं क्यों ? ( पृष्ठ ८२ रोशनी रेवतीसरन शर्मा पत्थर और बांस )
विनोय :हास्य का एक विनौष है ( humour ) है । वास्तव में शुद्धता की दृष्टि से हास्य का स्थान है हंसने सिलसिलाने और हास का पान है। यकी दृष्टि से विनोद की शुद्ध अभिव्यक्ति मात्र स्थिती रहती है बीर की कमी सिहासिलाइट में वास्तव में विनोद का साथ अपने प्राकृतिक रूप में तो मैत्रों की चमक और मुख की रेखाओं द्वरा
द्वारा ही व्यक होता है। जहां तक हास्य उत्पन्न करने का प्रश्न है के क्षेत्र में हास्य के क्षेत्र में बिनोद सबसे अधिक सशक एवं निर्दोष मनः स्थिति है। शिशु एवं बालकों में यही भाष रहता है। यह एक ऐसी कल्पना का रूप बसम्म शक है जिसकी सहायता से विचार या कल्पना का रूप असन्चदै विकृत अथवा इस प्रकार बद्भूत हो जाये कि उसका फल हास्य हो ।
इसका एक रूपसिहास माव से अपने उपर व्यंग्य करना अथवा कल्पना मैं अपने को हास्यासवत में डालकरउससे हास्य उत्पन्न करना है। इसमें होता एवं दोनों ही बामन्वित होते हैं। प्रायः मोटे, गंजे या अत्यन्त व्यक्ति अपने उपर ही व्यन्य करते है जैसे किसी मोटे व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति ने पूरा वाप वर्षों के चिढ़ाने पर गुस्सा क्यों नहीं होते क्यों कि मैं उसको मारने उनके पीछे पीछे नहीं भाग सकता इसलिये उन्होंने मुस्करा कर उत्तर दिया । भौजन के सम्बन्ध में भी प्रायः मारी शरीर वाले व्यक्ति कहा करते है बरे इतने से मेरे क्या होगा इतना तो कहीं पता भी नहीं चलेगा क्या सिहा रहे हो यह तो ऊंट के मुह मॅजीरे के समान है। स्थान के सम्बन्ध मैं मी असे इतनी जगह तो मरे बछे के लिये ही कम होगी।
--डाक्टर : ( हंसते हुए ) अरे नही माई नहीं । ऐसा न करना । वरना बाहर निकलते ही लोग मुझे हाथ हाथ नहीं लेगें ही बच्चे बरूर मेरे ऊपर पत्थर फैकीहुए पीछे पौड़ेगें। मेरा बदन जैसे ही भारी है जान बचाने के लिये मी नगा ।
( पृष्ठ १३° उतार चढ़ाव • रेवतीसरन शर्मा प्रत्थर एवं बांसू )
जिस तरह स्वयं पर व्यय रहता है उसी दूसरों की भी हास्यप्रद स्थिति में कल्पना क्या स्मरण हास्य उत्पन्न करता है। कमी कमी कुछ अपशब्द भी रहते हैं किन्तु वह सम्बन्ध की निकटता के प्रतीक होते हैं। देण अथवा कोष से उनका मात्र भी सम्बन्ध नहीं रहता है ।
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जब तक हाजिर जवानी में चिढ़ाने का भाव रहता है तब तक तौ मैं वह हास्य के क्षेत्र में बनती है व्यय एवं ताना हो सकता है किन्तु विशेष तथा रोग नहीं होना चाहिये जैसे निम्न उपरणों में व्यस्य एवं उपहास तो है द्धे इन नहीं । लड़का बोला चाहिये बीबी स्थानी साना बना सके जो बोली नटखट रानी बरे हमारी वान के मन बा भतार र री नटखट । हट हट तुमसे सभी गये हैं हार । -दिल्ली की शोखी बाब पिया मत अब दफ्तर जाओ करैया में मा रानीकी तौ बड़ी न होनी दरकार वास्तव में वही साना व्यंग्य या व्याजोकि का बात को सीधे न कह कर उगत्व के साथ कहा जाता है। जिससे भाव सुननमें प्रतारणा स्वरूप न लगे किन्तु मूलतः उसमें घृणा का कुमाव सम्मिविष्ट हो। इसमें की पाक मंगी या नामंगी का विशेष महत्व है । कमी कमी उचर ऐसा होता है कि बनायास हंसी वा जाती है जबकि का का यह वभिप्राय नही होता है। वह साधारण ढंग से प्रश्न की बिना सममे उत्तर दे देता है। इसकी बानता ही हास्योत्पादन मैंसहायक होती है। हास्यामिव्यक्ति का यह प्रश्न ही नहीं उठता। हास्योत्पत्ति के लिये यह बज्ञानता? की तो स्वाभाविक होती है बार की जान कर अपनायी जाती है यहां जानबूक करती है। वह को चिढ़ाने वार सिफलकामाव प्रश्नक्या प्रधान रहता है । असे किसी से पूछा जाय कि वाप शराब क्यों पीते हैं और वह उत्तर देता है कि 'पिर्क नहीं तो क्या करूँ उसका ? तो प्रश्न पूछने वाला चिढ़ जायेगा । जहां भगवान जाती है। जैसे निम्न स्वामाविक होती है वह प्रश्नकर्ता को भी हंसी का में हास्य व्यंग्य तक की हरिशंकर सिंह को अपने इतिहास ज्ञान पर बहुत गर्व था । एक बार उनके एक मित्र ने उनसे पूरा मई परसाई जरा यह तोता कि अकबर वहांगीर और शाहजहां को कहाँ कहाँ दफनाया गया है। * परसाई जी सोच में दूध नये, बो अपनी अपनी कड़ी में बफन होने और कहाँ वास्तव में ऐसे घरों में बात को टालने का प्रयत्न रहता है, साथ ही अपनी शानता की ने का भी किसी से किसी से पूछा जाय • चौर की क्या पक्ष्मान है और वह उपर दे उसकी दाढ़ी में तिनका होता है । के मुख से वायी बात हुनकर शेटा अपनेबापपूरा कर देना भी हाजिरवानी का एक प्रकार है - जैसे कांता : बजी बाप सुनियेगा । आज कल तो यह बड़ी मजेदार बातें करने लगे हैं। ऐसे ब्रिलियेंट फिकरे कहते है कि रमेश : एक हजार बाद के मरकरी बल्य भी फीले पड़ जाते हैं क्यों ? विनोय :हास्य का एक विनौष है है । वास्तव में शुद्धता की दृष्टि से हास्य का स्थान है हंसने सिलसिलाने और हास का पान है। यकी दृष्टि से विनोद की शुद्ध अभिव्यक्ति मात्र स्थिती रहती है बीर की कमी सिहासिलाइट में वास्तव में विनोद का साथ अपने प्राकृतिक रूप में तो मैत्रों की चमक और मुख की रेखाओं द्वरा द्वारा ही व्यक होता है। जहां तक हास्य उत्पन्न करने का प्रश्न है के क्षेत्र में हास्य के क्षेत्र में बिनोद सबसे अधिक सशक एवं निर्दोष मनः स्थिति है। शिशु एवं बालकों में यही भाष रहता है। यह एक ऐसी कल्पना का रूप बसम्म शक है जिसकी सहायता से विचार या कल्पना का रूप असन्चदै विकृत अथवा इस प्रकार बद्भूत हो जाये कि उसका फल हास्य हो । इसका एक रूपसिहास माव से अपने उपर व्यंग्य करना अथवा कल्पना मैं अपने को हास्यासवत में डालकरउससे हास्य उत्पन्न करना है। इसमें होता एवं दोनों ही बामन्वित होते हैं। प्रायः मोटे, गंजे या अत्यन्त व्यक्ति अपने उपर ही व्यन्य करते है जैसे किसी मोटे व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति ने पूरा वाप वर्षों के चिढ़ाने पर गुस्सा क्यों नहीं होते क्यों कि मैं उसको मारने उनके पीछे पीछे नहीं भाग सकता इसलिये उन्होंने मुस्करा कर उत्तर दिया । भौजन के सम्बन्ध में भी प्रायः मारी शरीर वाले व्यक्ति कहा करते है बरे इतने से मेरे क्या होगा इतना तो कहीं पता भी नहीं चलेगा क्या सिहा रहे हो यह तो ऊंट के मुह मॅजीरे के समान है। स्थान के सम्बन्ध मैं मी असे इतनी जगह तो मरे बछे के लिये ही कम होगी। --डाक्टर : अरे नही माई नहीं । ऐसा न करना । वरना बाहर निकलते ही लोग मुझे हाथ हाथ नहीं लेगें ही बच्चे बरूर मेरे ऊपर पत्थर फैकीहुए पीछे पौड़ेगें। मेरा बदन जैसे ही भारी है जान बचाने के लिये मी नगा । जिस तरह स्वयं पर व्यय रहता है उसी दूसरों की भी हास्यप्रद स्थिति में कल्पना क्या स्मरण हास्य उत्पन्न करता है। कमी कमी कुछ अपशब्द भी रहते हैं किन्तु वह सम्बन्ध की निकटता के प्रतीक होते हैं। देण अथवा कोष से उनका मात्र भी सम्बन्ध नहीं रहता है ।
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5 या 5 से अधिक व्यक्ति समूह के रुप में एक स्थान पर एकत्रित नही होंगे। अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति द्वारा किसी प्रकार के नए धार्मिक कार्यों, जुलूस,शोभायात्रा आदि का आयोजन नही किया जाएगा। व्यक्ति द्वारा किसी भी भवन पर ईट, पत्थर आदि के टुकड़ों को जमा नही किया जायेगा।
किसी भी व्यक्ति द्वारा इस अवधि में पडने वाले किसी भी पर्व के अवसर पर कोई नई परंपरा को कायम नही करेगा और न ही किसी को नई परंम्परा कायम नहीं की जाएगी। सोशल मीडिया पर किसी भी व्यक्ति द्वारा भड़काऊ अथवा अफवाह फैलाने संबंधित कोई पोस्ट नही करेगा। ग्रुप एडमिन का उत्तरदायित्व होगा कि उसे तत्काल डिलीट कराते हुए संबंधित व्यक्ति को ग्रुप से बाहर करेगा और स्थानीय पुलिस को सूचित करेगा।
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पाँच या पाँच से अधिक व्यक्ति समूह के रुप में एक स्थान पर एकत्रित नही होंगे। अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति द्वारा किसी प्रकार के नए धार्मिक कार्यों, जुलूस,शोभायात्रा आदि का आयोजन नही किया जाएगा। व्यक्ति द्वारा किसी भी भवन पर ईट, पत्थर आदि के टुकड़ों को जमा नही किया जायेगा। किसी भी व्यक्ति द्वारा इस अवधि में पडने वाले किसी भी पर्व के अवसर पर कोई नई परंपरा को कायम नही करेगा और न ही किसी को नई परंम्परा कायम नहीं की जाएगी। सोशल मीडिया पर किसी भी व्यक्ति द्वारा भड़काऊ अथवा अफवाह फैलाने संबंधित कोई पोस्ट नही करेगा। ग्रुप एडमिन का उत्तरदायित्व होगा कि उसे तत्काल डिलीट कराते हुए संबंधित व्यक्ति को ग्रुप से बाहर करेगा और स्थानीय पुलिस को सूचित करेगा।
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सौ रुपये लेकर दस्तावेज लिख दिया । आखिर, वह स्टाम्प खरीद ही चुके थे । कप्तान साहव पैसा लेकर लौटे, तो पलटन के दोस्त के भेजे सौ रुपये भी आ गये थे। उनके पास अब दो सौ रुपये थे ।
चन्द्रसिंह एक दिन बागेश्वर जा रहे थे । गोमती नदी के किनारे वागेश्वर मन्दिर है। वहाँ भीड़ लगी थी, आसपास के गाँवों से लोग भागे-भागे आ रहे थे । पूछने पर मालूम हुआ कि महात्मा गाँधी आये हैं । चन्द्रसिंह महात्मा गाँधी का नाम बहुत सुने थे, लेकिन उन्होंने उन्हें कभी देखा नहीं था । गाँधीजी के साथ मोहन जोशी और हरगोविन्द पंत भी थे । चन्द्रसिंह का अभी इनसे कोई परिचय नहीं था । चन्द्रसिंह वागेश्वर पहुँचे । देशी बाजे के साथ वहाँ गाँधीजी का स्वागत किया गया और डाक बँगले में ठहराया गया । सुना कि गाँधीजी 21 दिन का उपवास कर रहे हैं । अल्मोड़ा में उनकी मोटर के नीचे पद्मसिंह नाम का एक पुरुष दवकर मर गया था, इसीलिए वह उपवास कर रहे थे ।
उस दिन गाँधीजी का व्याख्यान होनेवाला था । भाषण मंच के सामने फौजी गांरखा टोपी पहिने चन्द्रसिंह बैठे थे । आते ही गाँधीजी की नजर उस टोपी पर पड़ी और वह उँगली से उस ओर दिखलाते हँसकर बोले- "क्या यह मुझे डराने के लिए यहाँ बैठे हैं ?" सभी लोग हँस पड़े । चन्द्रसिंह ने उठकर कहा- "अगर कोई मुझे दूसरी टोपी दे, तो मैं इसे उतारकर उसे पहनने के लिए तैयार हूँ।" किसी ने अपने झोले में से गाँधी टोपी निकालकर चन्द्रसिंह की तरफ फेंकी । चन्द्रसिंह ने उस टोपी को गाँधीजी की ओर फेंककर कहा- "मैं वूढ़े के हाथ से टोपी लूँगा ।" महात्माजी ने टोपी को चन्द्रसिंह की ओर फेंक दिया । चन्द्रसिंह ने उसे लेकर सिर पर रखते हुए खड़े होकर प्रतिज्ञा की कि मैं इसकी कीमत चुकाऊँगा । सभा में तालियाँ पिटीं । चन्द्रसिंह के लिए यह दिन अविस्मरणीय था । उन्होंने महात्माजी का दर्शन ही नहीं किया, उनके हाथ से टीपी पाई । यह काँटों का मुकुट था, जिसको सिर पर रखते खुशी के मारे उनकी आँखें डवडवा आईं । कुली-प्रथा कुमाऊँ से उठ गई थी । महात्माजी ने कुमाऊँवालों को सफलता पर बधाई दी । उसी समय स्वराज्य-भवन की उन्होंने नींव भी डाली ।
चन्द्रसिंह बागेश्वर में कुछ चीजें खरीदने गये थे। उन्हें खरीदकर मैगढ़ी लौट आये। एक हफ्ते और रहने के बाद 26 जून 1929 को वह अपनी पलटन के लिए रवाना हुए ।
नमक सत्याग्रह (1930 ई.)
मैगढ़ी से चलते वक्त न जाने क्यों चन्द्रसिंह को एक तरह की बेचैनी हो रही थी । चौदह वर्षों के अपने फौजी जीवन में वह प्रायः हर साल एकाध बार छुट्टी लेकर घर आते थे मगर उनका चित्त कभी ऐसा उदास नहीं हुआ । हो सकता है, नये गाँव में ले जाकर अपनी गृहस्थी अच्छी तरह जमा भी नहीं पाई थी कि उन्हें फिर न जाने कितने दिनों के लिए जाना पड़ रहा था । चलते वक्त सबसे पीछे आशीर्वाद उनकी सास ने दिया, जो सास बनने से पहिले भी उनसे परिचित थीं । अब वह अपने दामाद को फिर नहीं देखने को थीं ।
चन्द्रसिंह लंडीकोतल में 2-18 रा. ग. रा. में जा मिले । उनकी पलटन जुलाई से नवम्बर तक वहीं रही। मामूली कवायद-परेड और चाँदमारी के सिवा और कोई काम नहीं था । पहिले अखबार मँगाने का उन्होंने प्रबन्ध किया था, उसे उनके दोस्तों ने चालू रक्खा था । इस छुट्टी में उनको जो-जो खबरें मालूम हुईं और बागेश्वर में महात्मा गाँधी से कैसे दर्शन हुआ था, वह सब बातें उन्होंने अपने साथियों को बतलाईं । लाहौर षड्यन्त्र केस, दिल्ली बम केस चल रहे थे । चन्द्रसिंह और उनके अपने विचारवाले साथियों में बड़ी बेचैनी थी । वहाँ फौजी कैम्प में मिलकर बात करने का कोई अवसर नहीं था । लंडीकोतल की छावनी दूसरी छावनियों से भी बढ़कर जेलखाना थी । कैम्प के चारों ओर काँटेदार तारों की बाढ़ लगी थी । बाजार में जाने के लिए भी उन्हें कमाण्डर से छुट्टी लेनी पड़ती । महीने के अन्त में जब कभी 'विश्वमित्र' की कॉपी आती, तो उसको पढ़ने के लिए समय
220 / राहुल-वाङ्मय - 21 : जीवनी और संस्मरण
न मिलता । दिन में आदमी आते रहते थे, न जाने कौन खुफिया का काम कर रहा हो; और रात को बत्ती जलाने की मनाही थी । वह पठानों का इलाका था, जो संगीन के बल पर दबाकर रक्खे गये थे और हर वक्त अपने स्वतन्त्र अस्तित्व को दिखाने के लिए तैयार थे । बहुत कोशिश करने पर चन्द्रसिंह के दोस्तों ने ब्रिगेड के कैन्टोनमेन्ट बाजार में एक दर्जी से ठीक-ठाक किया । वहीं पर चन्द्रसिंह जाकर अखबारों को पढ़ आते । उनके दूसरे साथी भी इस काम के लिए वहीं जाया करते थे। राष्ट्रीयता की भावना अब थोड़े से लोगों का षड्यन्त्र नहीं था, वह बाँध तोड़कर भारत में बह रही थी। इसलिए अंग्रेजों ने हिन्दुस्तानी सैनिकों को चाहे जितना छन्द-बन्द से रखना चाहा हो, पर राष्ट्रीयता को रोक नहीं सकते थे।
गढ़वाली बटालियन की बदली पेशावर हुई । 21 नवम्बर 1929 को वह लंडीकोतल से रवाना हुई, और तीन दिन पैदल चलने के बाद पेशावर छावनी के निकल्सन लाइन में पहुँची। निकल्सन एक मशहूर अंग्रेज सेनापति था, जिसने 1857 ई. में दिल्ली को विद्रोहियों के हाथ से छीनने में सफलता प्राप्त की थी, उसी के नाम से इस लाइन या बैरक का नाम निकल्सन था । एक दूसरी लाइन हरिसिंह लाइन कही जाती थी । हरिसिंह महाराजा रणजीतसिंह का बहुत बड़ा सेनापति था । उसने पठानों को गुलाम बनाने के लिए उन पर बड़े अत्याचार किये थे । जमरूद किले में वह मारा गया था । हरिसिंह का नाम अंग्रेज क्यों अमर करना चाहते थे ? वह पठानों और सिक्खों (पंजाबियों) की सनातन शत्रुता का प्रतीक था, जिसको जीवित रखना अंग्रेज अपने हित की बात समझते थे । यह लाइनें जमरूद सड़क के किनारे ताकाल गाँव के पास अवस्थित हैं। उन दिनों पेशावर में चार बटालियनें रहती थीं-एक गोरा रेजिमेन्ट, दूसरी 2/7 रेजिमेन्ट, तीसरी चन्द्रसिंह की 2 / 18 रॉयल गढ़वाली राइफल और चौथी 4 / 11 सिक्ख बटालियन । इसके अतिरिक्त रिसाले का टूप, खच्चरवाला तोपखाना, विमान सेक्शन, मोटर कम्पनी, मलिशिया स्क्वाड्रन आदि भी थे । पेशावर अंग्रेजों का एक जबर्दस्त सैनिक गढ़ था, यह सबको मालूम है।
पेशावर छावनी में चारों पलटनें बारी-बारी से ब्रिगेड की ड्यूटी करती थीं । हरेक बटालियन को दो घंटे की नोटिस पर पेशावर शहर में जाने के लिए मुस्तैद रहने का हुकुम था । शहर में कोई बलवा हो जाय या आग लग जाय, तो तुरन्त फौज को भेजा जाता था । बटालियन जब ड्यूटी देती तो दूसरे बटालियन को सरहद के गवर्नर की सेवा, छावनी और किले की ड्यूटी, रसद गारद की ड्यूटी या मेडिकल कॉलेज की ड्यूटी करनी पड़ती । तीसरी बटालियन का काम होता पास के कबाइली अफरीदियों के आक्रमण से पेशावर के इलाके की हिफाजत करने के लिए हर वक्त तैयार रहना । चौथी बटालियन अफरीदी और सिनवारी कबाइलियों से पेशावर की हिफाजत के लिए तैयार रक्खी जाती ये ड्यूटियाँ चारों बटालियनें बारी-बारी से करतीं । इनके अतिरिक्त उन्हें पलटनों की मामूली रोजमर्रा की ड्यूटियाँ कवायद परेड करते ही रहना पड़ता था ।
चन्द्रसिंह की बटालियन को पहिले पहिल अफरीदियों के आक्रमण से बचाने की ड्यूटी पर लगाया गया । इस ड्यूटी में गारद लगाने की जरूरत नहीं पड़ती थी और बटालियन को रात भर छावनी के सामने लगे कँटीले तारों की लाइन में रहते पेट्रोल (पहरेदारी) का काम करना पड़ता था । बाकी समय कवायद-परेड में जाता । किसी शिकायत पर कम्पनी के कमाण्डर ने चन्द्रसिंह को हवलदार मेजरी से हटाकर कम्पनी क्वार्टर-मास्टरी हवलदार बना दिया । इसमें काम कम था । सिर्फ कम्पनी के रसद, गोला-बारूद, वर्दी आदि के देखने-भालने की जिम्मेदारी थी । लिखने-पढ़ने का काम कुछ ज्यादा था । कारण बतलाते हुए कम्पनी कमाण्डर ने कहा- "चन्द्रसिंह, तुम हुकुम के कामों में गफलत करते हो । मेरे पास शिकायत आई है कि तुम अपनी ड्यूटी पर हाजिर नहीं रहते । "
चन्द्रसिंह ने कहा-"हुजूर, मुझे तो तनखाह से गरज है, आप चाहे भंगियों के साथ रख दें ।" कम्पनी कमाण्डर अंग्रेज था, वह यह सुनकर जल मरा, उसका चेहरा सुर्ख हो गया । समझा होगा, देश में जो आग लगी हुई है, उसकी आँच हमारे इन क्रीत दासों को भी छू गई है।
चन्द्रसिंह को इससे कोई दुःख नहीं हुआ । तनखाह के ऊपर जो आठ रुपये मासिक मिलते थे, वह भी पहिले की तरह मिल रहे थे । क्वार्टर- मास्टर का काम होता है, रसद की देखभाल करना । घी, आलू, आदि वीर चन्द्रसिंह गढ़वाली / 221
सभी चीजों की सुविधा थी, साथ ही सिपाहियों की जवावदेही नहीं थी । वाजार जाने का मौका भी इसमें बहुत पेशावर छावनी से कैन्टोनमेन्ट (छावनी) बाजार एक मील पर पड़ता । विना प्लाटून कमाण्डर की आज्ञा के कोई सैनिक लाइन से बाहर नहीं जा सकता । इसलिए बाहर से खवर या समाचारपत्र लाना आसान नहीं था । दल का कोई आदमी उन्हें देखते ही पूछता- "महाशयजी, क्या खवर है ?" आर्यसमाजी होने से अब उनका नाम शायद महाशय भी पड़ गया था । इसी समय लाहौर में कांग्रेस की तैयारियाँ हो रही थीं । देश के बड़े-बड़े नेताओं के जोशीले वक्तव्य अखबारों में निकल रहे थे । उस वक्त कौन अभागा हो सकता था, जो देश की खबरों को जानने की उत्सुकता न रखता हो ? एक दिन चन्द्रसिंह नारायणसिंह के साथ यही पता लगाने के लिए सदर बाजार गये । वह चाहते थे, अखवार मँगाने का कोई इंतिजाम किया जाय । उस दिन इतवार था । दोनों फौजी वर्दी छोड़ सूट-बूट पहिन बिना इजाजत लिये सदर बाजार चले गये । एक मकान का दरवाजा खुला था और अन्दर से 'जय जगदीश हरे, पिता जय जगदीश हरे' की आवाज आ रही थी । चन्द्रसिंह समझ गये कि यह आर्यसमाज मन्दिर है। दोनों ही आर्यसमाजी थे, इसलिए निधड़क मकान के भीतर चले गये । देखा, वहाँ कितनी ही लड़कियाँ और स्त्रियाँ हवन करके आरती गा रही हैं। उन्हें देखकर अपनी गलती मालूम हुई और वह तुरन्त लौट पड़े । इस पर वहाँ बैठी एक महिला ने आश्वासन देकर पूछा- "आप यहाँ कैसे आ गये ?" चन्द्रसिंह ने नम्रतापूर्वक जवाब दिया- "वहिनजी, हम दोनों आर्यसमाजी हैं। आरती की आवाज सुनकर भीतर चले आये। हमें यह मालूम नहीं था कि यह स्त्री समाज है । गलती के लिए हमें क्षमा करें ।"
महिला ने कहा- "नहीं, नहीं, क्षमा माँगने की जरूरत नहीं । यहाँ भगवान की आरती हो रही है । आप भी इसमें शामिल हो सकते हैं।"
थोड़ा परिचय हो जाने के बाद चन्द्रसिंह ने अखवार की बात कही, महिला ने अपने भाई का परिचय दिया, जो आर्यसमाज का प्रधानमन्त्री था । महिला ने बताया कि आप उनके पास जायँ, वह अखवार का इंतिजाम कर देंगे । वह स्वयं लड़कियों के स्कूल की अध्यापिका थी ।
दोनों महिला के भाई की दूकान पर पहुँचे । संयोग से वह वहाँ मौजूद थे। उन्होंने अपनी गरज बतलाई, तो भाई ने अखबार मँगा देने की जिम्मेदारी ले ली । एक महीने का दाम तीन रुपया भी जमा कर दिया । उक्त सज्जन ने अपने नाम से अखबार मँगा लेने का जिम्मा ले लिया और पढ़ने के लिए 'चाँद' पत्रिका भी . दे दी। अखबार उन्हें कोई नहीं मिला, रुपये हजम हो गये ।
सदर बाजार में युक्तप्रदेश के एक हलवाई ने अपनी दूकान खोल रक्खी थी। अपने प्रदेश का होने के कारण चन्द्रसिंह ने उसके सामने भी अखवार का दुखड़ा रोया। हलवाई ने एक अखवारफरोश को बुला अपनी दूकान पर रोज का हिन्दी का एक अखबार रख जाने के लिए वचन ले लिया । चन्द्रसिंह ने यहाँ भी महीनेभर के लिए रुपये जमा कर दिये । यह इंतिजाम कुछ पक्का था । अपने में से सात-आठ निश्चित कर लिये थे, जो बारी-बारी से आकर यहाँ से अखबार ले जाते थे । कम्पनी में जब हाजिरी की पुकार हो जाती, तो एक-एक आदमी चन्द्रसिंह की कोठरी के भीतर आकर अखबार पढ़ जाता । रोशनी बाहर न जाय, इसके लिए दरवाजे पर कम्बल लगा दिया गया था । अखबार पढ़कर हरेक अपनी कम्पनी के अपने दलवाले सभी आदमियों को बातें सुनाता । अखबार तलाशी में मिल जाता, तो इसका भारी दण्ड भोगना पड़ता है, इसलिए पढ़कर रातों-रात उसे पानी में डालकर गला दिया जाता था और चन्द्रसिंह की अर्दली में रहनेवाला सिपाही उसे सबेरे कूड़े में
डाल आया करता ।
इस तरह वह अपनी भावना और तीव्र जिज्ञासा की तृप्ति किया करते थे। इसी बीच लाहौर में पं. जवाहरलाल नेहरू के सभापतित्व में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ। 26 दिसम्बर 1929 को 'पूर्ण स्वतन्त्रता भारत का लक्ष्य है', इसकी घोषणा की गई । सारे देश में जोश की लहर दौड़ रही थी । उसका एक अंश अखबारों द्वारा चन्द्रसिंह की बटालियन के जवानों में भी पहुँच रहा था। एक दिन अखबार लाने की बारी चन्द्रसिंह की थी । पेशावर में वायसराय के आने की खबर थी, इसलिए रात-दिन बैरक की सफाई और बटालियन की ड्रिल
222 / राहुल-वाङ्मय - 21 : जीवनी और संस्मरण
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सौ रुपये लेकर दस्तावेज लिख दिया । आखिर, वह स्टाम्प खरीद ही चुके थे । कप्तान साहव पैसा लेकर लौटे, तो पलटन के दोस्त के भेजे सौ रुपये भी आ गये थे। उनके पास अब दो सौ रुपये थे । चन्द्रसिंह एक दिन बागेश्वर जा रहे थे । गोमती नदी के किनारे वागेश्वर मन्दिर है। वहाँ भीड़ लगी थी, आसपास के गाँवों से लोग भागे-भागे आ रहे थे । पूछने पर मालूम हुआ कि महात्मा गाँधी आये हैं । चन्द्रसिंह महात्मा गाँधी का नाम बहुत सुने थे, लेकिन उन्होंने उन्हें कभी देखा नहीं था । गाँधीजी के साथ मोहन जोशी और हरगोविन्द पंत भी थे । चन्द्रसिंह का अभी इनसे कोई परिचय नहीं था । चन्द्रसिंह वागेश्वर पहुँचे । देशी बाजे के साथ वहाँ गाँधीजी का स्वागत किया गया और डाक बँगले में ठहराया गया । सुना कि गाँधीजी इक्कीस दिन का उपवास कर रहे हैं । अल्मोड़ा में उनकी मोटर के नीचे पद्मसिंह नाम का एक पुरुष दवकर मर गया था, इसीलिए वह उपवास कर रहे थे । उस दिन गाँधीजी का व्याख्यान होनेवाला था । भाषण मंच के सामने फौजी गांरखा टोपी पहिने चन्द्रसिंह बैठे थे । आते ही गाँधीजी की नजर उस टोपी पर पड़ी और वह उँगली से उस ओर दिखलाते हँसकर बोले- "क्या यह मुझे डराने के लिए यहाँ बैठे हैं ?" सभी लोग हँस पड़े । चन्द्रसिंह ने उठकर कहा- "अगर कोई मुझे दूसरी टोपी दे, तो मैं इसे उतारकर उसे पहनने के लिए तैयार हूँ।" किसी ने अपने झोले में से गाँधी टोपी निकालकर चन्द्रसिंह की तरफ फेंकी । चन्द्रसिंह ने उस टोपी को गाँधीजी की ओर फेंककर कहा- "मैं वूढ़े के हाथ से टोपी लूँगा ।" महात्माजी ने टोपी को चन्द्रसिंह की ओर फेंक दिया । चन्द्रसिंह ने उसे लेकर सिर पर रखते हुए खड़े होकर प्रतिज्ञा की कि मैं इसकी कीमत चुकाऊँगा । सभा में तालियाँ पिटीं । चन्द्रसिंह के लिए यह दिन अविस्मरणीय था । उन्होंने महात्माजी का दर्शन ही नहीं किया, उनके हाथ से टीपी पाई । यह काँटों का मुकुट था, जिसको सिर पर रखते खुशी के मारे उनकी आँखें डवडवा आईं । कुली-प्रथा कुमाऊँ से उठ गई थी । महात्माजी ने कुमाऊँवालों को सफलता पर बधाई दी । उसी समय स्वराज्य-भवन की उन्होंने नींव भी डाली । चन्द्रसिंह बागेश्वर में कुछ चीजें खरीदने गये थे। उन्हें खरीदकर मैगढ़ी लौट आये। एक हफ्ते और रहने के बाद छब्बीस जून एक हज़ार नौ सौ उनतीस को वह अपनी पलटन के लिए रवाना हुए । नमक सत्याग्रह मैगढ़ी से चलते वक्त न जाने क्यों चन्द्रसिंह को एक तरह की बेचैनी हो रही थी । चौदह वर्षों के अपने फौजी जीवन में वह प्रायः हर साल एकाध बार छुट्टी लेकर घर आते थे मगर उनका चित्त कभी ऐसा उदास नहीं हुआ । हो सकता है, नये गाँव में ले जाकर अपनी गृहस्थी अच्छी तरह जमा भी नहीं पाई थी कि उन्हें फिर न जाने कितने दिनों के लिए जाना पड़ रहा था । चलते वक्त सबसे पीछे आशीर्वाद उनकी सास ने दिया, जो सास बनने से पहिले भी उनसे परिचित थीं । अब वह अपने दामाद को फिर नहीं देखने को थीं । चन्द्रसिंह लंडीकोतल में दो-अट्ठारह रा. ग. रा. में जा मिले । उनकी पलटन जुलाई से नवम्बर तक वहीं रही। मामूली कवायद-परेड और चाँदमारी के सिवा और कोई काम नहीं था । पहिले अखबार मँगाने का उन्होंने प्रबन्ध किया था, उसे उनके दोस्तों ने चालू रक्खा था । इस छुट्टी में उनको जो-जो खबरें मालूम हुईं और बागेश्वर में महात्मा गाँधी से कैसे दर्शन हुआ था, वह सब बातें उन्होंने अपने साथियों को बतलाईं । लाहौर षड्यन्त्र केस, दिल्ली बम केस चल रहे थे । चन्द्रसिंह और उनके अपने विचारवाले साथियों में बड़ी बेचैनी थी । वहाँ फौजी कैम्प में मिलकर बात करने का कोई अवसर नहीं था । लंडीकोतल की छावनी दूसरी छावनियों से भी बढ़कर जेलखाना थी । कैम्प के चारों ओर काँटेदार तारों की बाढ़ लगी थी । बाजार में जाने के लिए भी उन्हें कमाण्डर से छुट्टी लेनी पड़ती । महीने के अन्त में जब कभी 'विश्वमित्र' की कॉपी आती, तो उसको पढ़ने के लिए समय दो सौ बीस / राहुल-वाङ्मय - इक्कीस : जीवनी और संस्मरण न मिलता । दिन में आदमी आते रहते थे, न जाने कौन खुफिया का काम कर रहा हो; और रात को बत्ती जलाने की मनाही थी । वह पठानों का इलाका था, जो संगीन के बल पर दबाकर रक्खे गये थे और हर वक्त अपने स्वतन्त्र अस्तित्व को दिखाने के लिए तैयार थे । बहुत कोशिश करने पर चन्द्रसिंह के दोस्तों ने ब्रिगेड के कैन्टोनमेन्ट बाजार में एक दर्जी से ठीक-ठाक किया । वहीं पर चन्द्रसिंह जाकर अखबारों को पढ़ आते । उनके दूसरे साथी भी इस काम के लिए वहीं जाया करते थे। राष्ट्रीयता की भावना अब थोड़े से लोगों का षड्यन्त्र नहीं था, वह बाँध तोड़कर भारत में बह रही थी। इसलिए अंग्रेजों ने हिन्दुस्तानी सैनिकों को चाहे जितना छन्द-बन्द से रखना चाहा हो, पर राष्ट्रीयता को रोक नहीं सकते थे। गढ़वाली बटालियन की बदली पेशावर हुई । इक्कीस नवम्बर एक हज़ार नौ सौ उनतीस को वह लंडीकोतल से रवाना हुई, और तीन दिन पैदल चलने के बाद पेशावर छावनी के निकल्सन लाइन में पहुँची। निकल्सन एक मशहूर अंग्रेज सेनापति था, जिसने एक हज़ार आठ सौ सत्तावन ई. में दिल्ली को विद्रोहियों के हाथ से छीनने में सफलता प्राप्त की थी, उसी के नाम से इस लाइन या बैरक का नाम निकल्सन था । एक दूसरी लाइन हरिसिंह लाइन कही जाती थी । हरिसिंह महाराजा रणजीतसिंह का बहुत बड़ा सेनापति था । उसने पठानों को गुलाम बनाने के लिए उन पर बड़े अत्याचार किये थे । जमरूद किले में वह मारा गया था । हरिसिंह का नाम अंग्रेज क्यों अमर करना चाहते थे ? वह पठानों और सिक्खों की सनातन शत्रुता का प्रतीक था, जिसको जीवित रखना अंग्रेज अपने हित की बात समझते थे । यह लाइनें जमरूद सड़क के किनारे ताकाल गाँव के पास अवस्थित हैं। उन दिनों पेशावर में चार बटालियनें रहती थीं-एक गोरा रेजिमेन्ट, दूसरी दो/सात रेजिमेन्ट, तीसरी चन्द्रसिंह की दो / अट्ठारह रॉयल गढ़वाली राइफल और चौथी चार / ग्यारह सिक्ख बटालियन । इसके अतिरिक्त रिसाले का टूप, खच्चरवाला तोपखाना, विमान सेक्शन, मोटर कम्पनी, मलिशिया स्क्वाड्रन आदि भी थे । पेशावर अंग्रेजों का एक जबर्दस्त सैनिक गढ़ था, यह सबको मालूम है। पेशावर छावनी में चारों पलटनें बारी-बारी से ब्रिगेड की ड्यूटी करती थीं । हरेक बटालियन को दो घंटे की नोटिस पर पेशावर शहर में जाने के लिए मुस्तैद रहने का हुकुम था । शहर में कोई बलवा हो जाय या आग लग जाय, तो तुरन्त फौज को भेजा जाता था । बटालियन जब ड्यूटी देती तो दूसरे बटालियन को सरहद के गवर्नर की सेवा, छावनी और किले की ड्यूटी, रसद गारद की ड्यूटी या मेडिकल कॉलेज की ड्यूटी करनी पड़ती । तीसरी बटालियन का काम होता पास के कबाइली अफरीदियों के आक्रमण से पेशावर के इलाके की हिफाजत करने के लिए हर वक्त तैयार रहना । चौथी बटालियन अफरीदी और सिनवारी कबाइलियों से पेशावर की हिफाजत के लिए तैयार रक्खी जाती ये ड्यूटियाँ चारों बटालियनें बारी-बारी से करतीं । इनके अतिरिक्त उन्हें पलटनों की मामूली रोजमर्रा की ड्यूटियाँ कवायद परेड करते ही रहना पड़ता था । चन्द्रसिंह की बटालियन को पहिले पहिल अफरीदियों के आक्रमण से बचाने की ड्यूटी पर लगाया गया । इस ड्यूटी में गारद लगाने की जरूरत नहीं पड़ती थी और बटालियन को रात भर छावनी के सामने लगे कँटीले तारों की लाइन में रहते पेट्रोल का काम करना पड़ता था । बाकी समय कवायद-परेड में जाता । किसी शिकायत पर कम्पनी के कमाण्डर ने चन्द्रसिंह को हवलदार मेजरी से हटाकर कम्पनी क्वार्टर-मास्टरी हवलदार बना दिया । इसमें काम कम था । सिर्फ कम्पनी के रसद, गोला-बारूद, वर्दी आदि के देखने-भालने की जिम्मेदारी थी । लिखने-पढ़ने का काम कुछ ज्यादा था । कारण बतलाते हुए कम्पनी कमाण्डर ने कहा- "चन्द्रसिंह, तुम हुकुम के कामों में गफलत करते हो । मेरे पास शिकायत आई है कि तुम अपनी ड्यूटी पर हाजिर नहीं रहते । " चन्द्रसिंह ने कहा-"हुजूर, मुझे तो तनखाह से गरज है, आप चाहे भंगियों के साथ रख दें ।" कम्पनी कमाण्डर अंग्रेज था, वह यह सुनकर जल मरा, उसका चेहरा सुर्ख हो गया । समझा होगा, देश में जो आग लगी हुई है, उसकी आँच हमारे इन क्रीत दासों को भी छू गई है। चन्द्रसिंह को इससे कोई दुःख नहीं हुआ । तनखाह के ऊपर जो आठ रुपये मासिक मिलते थे, वह भी पहिले की तरह मिल रहे थे । क्वार्टर- मास्टर का काम होता है, रसद की देखभाल करना । घी, आलू, आदि वीर चन्द्रसिंह गढ़वाली / दो सौ इक्कीस सभी चीजों की सुविधा थी, साथ ही सिपाहियों की जवावदेही नहीं थी । वाजार जाने का मौका भी इसमें बहुत पेशावर छावनी से कैन्टोनमेन्ट बाजार एक मील पर पड़ता । विना प्लाटून कमाण्डर की आज्ञा के कोई सैनिक लाइन से बाहर नहीं जा सकता । इसलिए बाहर से खवर या समाचारपत्र लाना आसान नहीं था । दल का कोई आदमी उन्हें देखते ही पूछता- "महाशयजी, क्या खवर है ?" आर्यसमाजी होने से अब उनका नाम शायद महाशय भी पड़ गया था । इसी समय लाहौर में कांग्रेस की तैयारियाँ हो रही थीं । देश के बड़े-बड़े नेताओं के जोशीले वक्तव्य अखबारों में निकल रहे थे । उस वक्त कौन अभागा हो सकता था, जो देश की खबरों को जानने की उत्सुकता न रखता हो ? एक दिन चन्द्रसिंह नारायणसिंह के साथ यही पता लगाने के लिए सदर बाजार गये । वह चाहते थे, अखवार मँगाने का कोई इंतिजाम किया जाय । उस दिन इतवार था । दोनों फौजी वर्दी छोड़ सूट-बूट पहिन बिना इजाजत लिये सदर बाजार चले गये । एक मकान का दरवाजा खुला था और अन्दर से 'जय जगदीश हरे, पिता जय जगदीश हरे' की आवाज आ रही थी । चन्द्रसिंह समझ गये कि यह आर्यसमाज मन्दिर है। दोनों ही आर्यसमाजी थे, इसलिए निधड़क मकान के भीतर चले गये । देखा, वहाँ कितनी ही लड़कियाँ और स्त्रियाँ हवन करके आरती गा रही हैं। उन्हें देखकर अपनी गलती मालूम हुई और वह तुरन्त लौट पड़े । इस पर वहाँ बैठी एक महिला ने आश्वासन देकर पूछा- "आप यहाँ कैसे आ गये ?" चन्द्रसिंह ने नम्रतापूर्वक जवाब दिया- "वहिनजी, हम दोनों आर्यसमाजी हैं। आरती की आवाज सुनकर भीतर चले आये। हमें यह मालूम नहीं था कि यह स्त्री समाज है । गलती के लिए हमें क्षमा करें ।" महिला ने कहा- "नहीं, नहीं, क्षमा माँगने की जरूरत नहीं । यहाँ भगवान की आरती हो रही है । आप भी इसमें शामिल हो सकते हैं।" थोड़ा परिचय हो जाने के बाद चन्द्रसिंह ने अखवार की बात कही, महिला ने अपने भाई का परिचय दिया, जो आर्यसमाज का प्रधानमन्त्री था । महिला ने बताया कि आप उनके पास जायँ, वह अखवार का इंतिजाम कर देंगे । वह स्वयं लड़कियों के स्कूल की अध्यापिका थी । दोनों महिला के भाई की दूकान पर पहुँचे । संयोग से वह वहाँ मौजूद थे। उन्होंने अपनी गरज बतलाई, तो भाई ने अखबार मँगा देने की जिम्मेदारी ले ली । एक महीने का दाम तीन रुपया भी जमा कर दिया । उक्त सज्जन ने अपने नाम से अखबार मँगा लेने का जिम्मा ले लिया और पढ़ने के लिए 'चाँद' पत्रिका भी . दे दी। अखबार उन्हें कोई नहीं मिला, रुपये हजम हो गये । सदर बाजार में युक्तप्रदेश के एक हलवाई ने अपनी दूकान खोल रक्खी थी। अपने प्रदेश का होने के कारण चन्द्रसिंह ने उसके सामने भी अखवार का दुखड़ा रोया। हलवाई ने एक अखवारफरोश को बुला अपनी दूकान पर रोज का हिन्दी का एक अखबार रख जाने के लिए वचन ले लिया । चन्द्रसिंह ने यहाँ भी महीनेभर के लिए रुपये जमा कर दिये । यह इंतिजाम कुछ पक्का था । अपने में से सात-आठ निश्चित कर लिये थे, जो बारी-बारी से आकर यहाँ से अखबार ले जाते थे । कम्पनी में जब हाजिरी की पुकार हो जाती, तो एक-एक आदमी चन्द्रसिंह की कोठरी के भीतर आकर अखबार पढ़ जाता । रोशनी बाहर न जाय, इसके लिए दरवाजे पर कम्बल लगा दिया गया था । अखबार पढ़कर हरेक अपनी कम्पनी के अपने दलवाले सभी आदमियों को बातें सुनाता । अखबार तलाशी में मिल जाता, तो इसका भारी दण्ड भोगना पड़ता है, इसलिए पढ़कर रातों-रात उसे पानी में डालकर गला दिया जाता था और चन्द्रसिंह की अर्दली में रहनेवाला सिपाही उसे सबेरे कूड़े में डाल आया करता । इस तरह वह अपनी भावना और तीव्र जिज्ञासा की तृप्ति किया करते थे। इसी बीच लाहौर में पं. जवाहरलाल नेहरू के सभापतित्व में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ। छब्बीस दिसम्बर एक हज़ार नौ सौ उनतीस को 'पूर्ण स्वतन्त्रता भारत का लक्ष्य है', इसकी घोषणा की गई । सारे देश में जोश की लहर दौड़ रही थी । उसका एक अंश अखबारों द्वारा चन्द्रसिंह की बटालियन के जवानों में भी पहुँच रहा था। एक दिन अखबार लाने की बारी चन्द्रसिंह की थी । पेशावर में वायसराय के आने की खबर थी, इसलिए रात-दिन बैरक की सफाई और बटालियन की ड्रिल दो सौ बाईस / राहुल-वाङ्मय - इक्कीस : जीवनी और संस्मरण
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