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बगल के कमरे में जाकर देखा, मामा एक कुर्सी पर बैठे थे।
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उसी तरह उसके पैदा करने वाले ने उसके लिए टॉस कर लिया होगा और उसे इस ख़ाने में डाल दिया होगा जो उसकी क़िस्मत थी।
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वो बहुत देर तक ग़ुस्ल-ख़ाने में आईने के सामने सोचती रही उस के ज़ेहन में उस की सहेली की तमाम बातें गूंज रही थीं
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रानी साहिबा ने उसी वक्‍त स्याही को एक नौकर से पकड़ लाने के लिए कहने को भेज दिया।
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मुँह-दिखावे की रस्म अदा हुई।
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मैं भी यह कह दूंगा, शास्‍ती तजी ने आधे घंटे का समय दिया है।' शास्‍त्री गजानन्‍द जी गदगद हो गए।
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उस भीड़-भाड़ से बच्चा कहीं खो जाए तो क्या हो?
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कैसे थे ये नए लोग मैले और बौराए हुए।
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इस का ख़ावंद अमरीका में कारोबार करता है, सिंधी है।
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उसने कुछ मोहर कमर में बाँधीं, फिर एक सूखी लकड़ी से जमीन की मिट्टी हटा कर कई गड्ढे बनाये, उन्हें मोहरों से भर कर मिट्टी से ढँक दिया।
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वो ज़ोर से हँसा। दो लड़के हैं मगर दोनों सियाने उम्र के एक को फ़िलपाइन में बिज़नस करके दिया है, दूसरा जापान में है।
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वह जगह इतनी तंग और खुली हुई थी कि बिना मारने वाले का पता लगे कहीं से भी गोली आ सकती थी।
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बिरजू के बाप ने घूँघट में झुकी दोनों पुतोहूओं को देखा।
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मैंने दही बड़े नहीं मांगे थे दही पिटा करी मांगी थी।
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गाँव में किसी को मुँह दिखाने का साहस न होता।
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आज दो करोड़ से ज़्यादा की जायदाद मेरे पास है।
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उधर केबल बिछाने के लिए ज़मीन खोदी जा रही थी और बहुत से काले-काले पाइप रखे हुए थे।
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लक्षमण ने हुआ को एक गाली दी, छींका और रोने लगा।
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पंजा साहिब से लंबी लंबी किरपानें लिए चेहरों पर हवाईयां उड़ी हुई बाल बच्चे सहमे सहमे से, ऐसा मालूम होता था कि अपनी ही तलवार के घाव से ये लोग ख़ुद मर जाऐंगे।
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काले कोटवाले नौटंकी के मैनेजर नेपाली सिपाही के साथ दौड़े आए।
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' लड़की जिसकी उम्र आठ साल की थी, बड़े गंभीर स्वर में बोली-'' तुम मां से पैसा न मांगो।
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एक सुनार अपनी तराजू, बाट और कसौटी आदि लिए जमीन पर।
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पन्ना ने उसी वक्त चूल्हा जलाया और खाना बनाने बैठ गयी।
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"" सारे इलाके में हाहाकार मची हुई है, और आप उसके घर में बैठ के पूछते हो करम सिंह मारा गया?
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सबेरे-सबेरे छै बजे ही जेल से मुक्त कर दिए गए।
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और अपने मैके ख़त लिखने का उसे बड़ा चाव था।
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बिरजू बीती हुई बातों को भूल कर उठ खड़ा हुआ था और धूल झाड़ते हुए बरतन से टपकते गुड़ को ललचाई निगाह से देखने लगा था।
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अब भी आ गये सौ-पचास तो क्या है! ”
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बाँस लादने के लिए पचास रूपए भी दे कोई, हिरामन की गाड़ी नहीं मिलेगी।
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आनंदी--क्या कहूँ, यह मेरे भाग्य का फेर है!
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इसके विरुद्ध रग्घू अपने घर का अकेला था, वह भी दुर्बल, अशक्त और जवानी में बूढ़ा।
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बिरजू छोटी कड़ाही सिर पर औंधा कर वापस आया-' देख दिदिया, मलेटरी टोपी! इस पर दस लाठी मारने पर भी कुछ नहीं होता।' चंपिया चुपचाप बैठी रही, कुछ बोली नहीं, जरा-सी मुस्कराई भी नहीं।
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वो बोली: मैंने छः बरस तुम्हारा इंतिज़ार किया।
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मैंने जीवन में बहुत भूख देखी है—हर वक़्त की भूख—और अपनी भूख से प्राय: मैं व्याकुल हो जाता रहा हूँ।
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खलील- दूसरे के सिखाने से तुम किसी के घर में आग लगा दोगे?
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" सावित्री रसोईघर से हाथ धोकर बाहर आई और बोली-'' हींग तो बहुत-सी ले रखी है खान! अभी पंद्रह दिन हुए नहीं, तुमसे ही तो ली थी।
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हिरामन भाई से बढ़ कर भाभी की इज्जत करता है।
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..शायद महीने-दो महीने में रिपोर्ट आएगी।' मैं आज शायद और तकरीबन दोनों घर पर छोड़ आया हूँ।
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हीराबाई तमक कर बैठ गई-' अरे, पागल है क्या? जाओ, भागो! ...' पलटदास को लगा, गुस्साई हुई कंपनी की औरत की आँखों से चिनगारी निकल रही है- छटक्-छटक्! वह भागा।
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और जब और कड़वी बात न सूझे तब लोग धक्के मुक्के या गोली पर भी आ सकते थे।
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यह मानी हुई बात थी।
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' राजेन, तुम उदास हो!'''' तुम्हारा विवाह हो रहा है?'' राजेन्द्र ने पूछा। पद्मा उठकर खड़ी हो गयी।
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अगर तुम उसे हासिल कर सको तो कितना मज़ा रहे।
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उस समय गृहस्वामियों का यह खयाल होगा कि यदि ये सब उस खास जगह के अलावा किसी और जगह पर रखे जाएं तो बहुत बुरे लगेंगे।
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उसके विचारों में यह दुनिया इस छोर से उस छोर तक चोर-डकैत, मस्त, शराबी, साँप, बाघ, रोगों, मलेरिया,तिलचट्टे और अंग्रेजों से भरी पड़ी है।
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शास्त्रिणी के पिता को षोडशी कन्‍या के लिए पैंतालीस साल का वर बुरा नहीं लगा, धर्म की रक्षा के लिए।
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इसलिए चल-अचल संपत्ति की सुरक्षा के लिए जयगोपाल बाबू को आसाम की नौकरी छोड़कर ससुराल चले आना पड़ा।
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सड़क के एक किनारे एक मोटी डोरी की शक्ल में गेरुआ-झाग-फेन में उलझा पानी तेज़ी से सरकता आ रहा था।
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मुंशी- क्या तूने रास्ते में शक्कर फाँक ली थी।
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वहीं परिचय कराऊंगा।
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वो ख़ालिस इस्लामी तर्ज़ का लाल दुपट्टा ओढ़े थी और बाएं बकुल मारे हुए थी —
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तुम्हारा जस मरते दम तक गाऊँगी।
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" बाबा मैं मान सिंह हूँ चूहड़कान से" उस ने करम सिंह के घर के बरामदे में बैठे बूढ़े को हाथ जोड़ कर कहा।
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जीवन में एकबार विशेष काम से वे कोन्नगर तक गए थे।
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औरों के तो चार बरस में अपने पट्ठे तैयार हो जायेंगे।
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दूसरे लफ़्ज़ों में कोई जिन्न इस पर आशिक़ है जो इस को नहीं छोड़ता।
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लौट कर आता हूँ तो घास दूँगा, बदमासी मत करो!' बैलों ने कान हिलाए।
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उन्‍होंने फौरन लिखा कि पेड़ों को हटवाने या न हटवाने की जिम्‍मेदारी कृषि विभाग की ही है।
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तेरा बाप?" इतना कह कर वो इस बड़े की तक़रीबन ख़ाली पत्तल को उसे दिखा कर बड़ी हक़ारत से ज़मीन पर फेंक देती।
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बैठने के लिए तख्ते और रोक के लिए दोनों तरफ बाजू थे।
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शिबू हैरान था कि उस की माँ ने इतनी भीड़ में झुक कर उस का मुँह क्यूँ चूमा और एक गर्म गर्म क़तरा कहाँ से उस के गालों पर आ पड़ा।
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यूँ घबराओ नहीं।
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हर साल डेढ़ साल के बाद वो एक नया कीड़ा घर में रेंगता हुआ देख कर ख़ुश होते थे, और बच्चे की वजह से खाया पिया होली के जिस्म पर असर अंदाज़ नहीं होता था।
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सुख नंदन इसलिए साबुन के बुलबुलों को पसंद करता है कि वो बुलबुले और उन में चमकने वाले रंग उसे हर-रोज़ नहीं देखने पड़ते, यूँ कपड़े नहीं धोने होते ...
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सात बजे शाम को फ्रेज़र रोड से आगे बढ़ चुका था।
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सुबह-सुबह उसे प्यास नहीं थी पर कटोरी से एक बिस्कुट लेकर वह कुतरने लगा था।
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..जरा दाहिनी सड़क से गाड़ी हाँकना।' बैल जब दौड़ने लगे और पहिया जब चूँ-चूँ करके घरघराने लगा तो बिरजू से नहीं रहा गया-' उड़नजहाज की तरह उड़ाओ बप्पा!' गाड़ी जंगी के पिछवाड़े पहुँची।
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हरगोबिन बड़ी हवेली की टूटी ड्योढ़ी पार कर अंदर गया।
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पहले के हिसाब से तो यह पाल्हा छूकर लौट आने वाली बात होती जो निश्चय ही लोगों को नागवार गुजरती और, हो सकता है, सब कुछ अनसुनी कर वे उसे रात में रोक ही लेते।
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क्योंकि चन्द्रु को कोई दूसरी ज़िंदगी याद नहीं थी।
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आपका नाम क्या है
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पूछा, ‘ यह कौन सी सभा है? ’ उनके जिज्ञासा भाव पर गंभीर होकर, नोबुल पुरस्कार पाए हुए कुछ लोगों के नाम गिनाकर मैंने कहा, ‘ ये सब उसी सभा के सदस्य हैं। ’
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जिस के बाइस इस के पास कई आदमी जमा होगए।
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लेकिन पहले उस आँख से जो थोड़ा-बहुत दिखता था, ऑपरेशन के बाद वह भी बंद हो गया था।
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उन दिनों मुझे उन्निद्र रोग था।
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काश, मेरे पास एक मूवी कैमरा होता, एक टेप-रेकॉर्डर होता…तो क्या होता?
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इसके बाद केठानी अपने काम में लग गया और मैं बाहर चला गया।
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बहने भाईयों को पहिले कुछ खिलातीं, माला पहिनातीं, हाथ में नारियल देतीं और तिलक लगा कर हाथ में राखी बांधते हुए कहतीं," भाई इस राखी की लाज रखना लड़ाई के मैदान में कभी पीठ न दिखाना।
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पारो तुम भी?
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अन्त में एक बार लगान न पहुँचने पर जमींदार ने भक्तिन को बुलाकर दिन भर कड़ी धूप में रखा।
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पद्मा को एकटक प्रश्न की दृष्टि से देखते हुए राजेन्द्र ने रूमाल से उसके आँसू पोंछ दिये।
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शहर के जितने चोर-डाकू हें, सब इनसे मुहल्ले में जाकर ‘जागते रहो! जाते रहो!’ पुकारते हें।
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" दो साल चक्कर लगाता रहा, किसी ने बात नहीं सुनी।
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खज़ाने के तमाम कलर्क जानते थे कि मुंशी करीम बख़्श की रसाई बड़े साहब तक भी है।
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यानी बावजूद ज़मीन के गोल होने के काठ गोदाम दुनिया का टर्मिनस है।
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उस को सूती कपड़े पहनने की आदत थी।
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उसकी दी हुई हवा खाकर जीता हूँ, और उसकी तरफ़ से भौंकता हूँ।
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वही झील के नरम नरम बोसे और कोई छाती से लगा सिसकियाँ ले रहा था।
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ख़ून से लुथ्ड़ी हुई एक उंगली उस ने बच्चे के मुँह के साथ लगा दी, और हमेशा की नींद सौ गई।
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उसने अपना परिचय बताया तो वे एकदम-से हड़बड़ा उठे थे।
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लेकिन लोग वहीं रो देते।
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तकवाहे को सौदा लेने बाजार ( दूसरे गांव ) भेज दिया है।
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ढिबरी बुझा दे। .. .
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एक फरमायशी कहकहा लगा जिसे' शी-शी' की आवाज़ों ने बीच में ही दबा दिया।
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लक्षमण ने न जाना कि वो खोखली सी आवाज़ें सिर्फ़ गागरें निकालने की क़ीमत हैं।
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हिरामन ने जाते-जाते उलट कर कहा,' हाँ,हाँ, प्यास सभी को लगी है।
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चंपिया के बाप ने आँगन में आ कर देखा तो न रोशनी, न चिराग, न चूल्हे में आग। ...बात क्या है!
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बच्चों की उन्हें बड़ी चिंता थी।
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तनख़्वाह ज़्यादा से ज़्यादा सौ रुपय होगी मगर बड़े ठाट से रहता ज़ाहिर है कि रिश्वत खाता था यही वजह है कि सलीम अच्छे से अच्छा कपड़ा पहनता जेब ख़र्च भी उस को काफ़ी मिलता इस लिए कि वो अपने वालदैन का इकलौता लड़का था।
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