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पुष्पों को धूल में मिला दिया। | 2 |
जो भी जान-पहचान के लोग रास्ते में मिलते उन्हें दूर से ही बुला के आगे चल पड़ता। | 1 |
रांड, जानती भी है आज गहन है जो, बच्चा अंधा हो जाए तो तेरे ऐसी बेसवा उसे पालने चलेगी? ” | 2 |
वह गाँव में निकलता, तो इस तरह मुँह चुराये, सिर झुकाए मानो गो-हत्या की हो। | 1 |
इस बात पर विचार करना ही व्यर्थ था। | 0 |
मगर उस ने उसे कुछ भी न करने दिया। | 4 |
गे मइया, इसी दिन के लिए, यही दिखाने के लिए तुमने कोख में रखा था? | 2 |
हीराबाई भी कम नहीं। | 1 |
बैठिए, गदाधर जी' कोमल सभ्य कंठ से कहकर गजानंद जी अपनी कुर्सी पर बैठ गए। | 4 |
रात-भर उसका चित्त उद्विग्न रहा। | 4 |
इल्म उद्दीन ने उस से परेशानी की वजह दरयाफ़त किया, तो उस ने बताया कि उस का एक लड़की से मआशक़ा होगया था। | 4 |
दो-तीन महीने लगी रहेगी। | 2 |
क्या होता है? | 2 |
खौलते दूध से जले पैरों के साथ दरवाजे पर खड़ी बिंदा का रोना देख मैं तो हतबुद्धि सी हो रही। | 1 |
शशिकला गम्भीर हो गई। | 4 |
गोया उस के सब राज़ किसी को मालूम हो गए हों और किसी ना-मालूम खज़ाने के लुट जाने से वो मुफ़लिस हो गई हो—— | 1 |
“कह रहा हूँ हट जा, नहीं तो... ” | 2 |
हम दोनों चुप हो गए। | 4 |
महादेव फिर खाली पिंजड़ा लिये मेंढक की भाँति उचकता चला। | 4 |
बायीं आँख के नीचे हल्का-सा फफोला था। | 1 |
तुम मेरा भौंकना बन्द नहीं कर सकते। | 2 |
कारण उसकी मां नहीं है। | 1 |
उसकी अन्तरात्मा उसे समझा चुकी थी कि उसके माता-पिता उस नींद से न जगेंगे। | 1 |
जाड़े के मौसम में भी खाली देह! ...चेले-चाटी के साथ हैं ये लोग! लालमोहर ने लहसनवाँ को शांत किया। | 2 |
थोड़ी देर के बाद वह गुनगुनाने लगा-' सजन रे झूठ मति बोलो, खुदा के पास जाना है। | 4 |
' तुम अब जा रहे हो? जरा बैठ जाओ। मेरी बात सुनते जाओ।'' मैं पास ही चारपाई पर बैठ गया। | 2 |
रहमत उस झूठे बेईमान आदमी के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के अपशब्द सुना रहा था। | 1 |
कुत्थू राम ने आहिस्ता से जवाब दिया। | 4 |
पानी पीने के बाद उसने ड्राइवर की ओर इशारा कर बच्चे से उसके लिए भी पानी लाने के लिए कहा था। | 1 |
लड़की के हाथ में एक किताब थी। | 1 |
उस ने बहुत बुरी तरह शिकस्त खाई थी इस से क़ब्ल उस की ज़िंदगी में कई लड़कियां आचुकी थीं जो उस के अब्रू के इशारे पर चलती थीं | 1 |
यदि गाड़ी में निरगुन गाने वाला सूरदास नहीं आता, तो न जाने उसकी क्या हालत होती! | 4 |
उसकी उम्र अब 23 साल की हो गयी थी। | 1 |
इश्तिराकीयत, फ़लसफ़ा और अमल वहशी दरिंदे उन्हें नोच नोच कर खा रहे थे और कोई नहीं बोलता और कोई आगे नहीं बढ़ता और कोई अवाम में से इन्क़िलाब का दरवाज़ा नहीं खोलता और मैं रात की तारीकी आग और शरारों को छुपा के आगे बढ़ रही हूँ और मेरे डिब्बों में लोग शराब पी रहे हैं और महात्मा गांधी के जय कारे बुला रहे हैं। | 1 |
" मैं फलों के मौसम में झोली भरके ले जाता था। | 2 |
कुर्सी डालकर नौकर राजेन बाबू को बुलाने नीचे उतर गया। | 4 |
अब उनकी बाँह पर दाँत काट रहा था। | 2 |
मुंशी करीम बख़्श को ख़ुश करने के लिए वो हर महीने उस को याद-दहानी करा देते थे। | 1 |
मयूर कला प्रिय वीर पक्षी है, हिंसक मात्र नहीं। | 0 |
मा हिंदी तवादी मालवी एयूं रंग गियो गुजरात रे मा हिंदी रंग लागीव रे उस वक़्त वो एक उछलने कूदने वाली अल्हड़ छोकरी थी, एक बहर ओ क़ाफ़िया से आज़ाद नज़्म, जो चाहती थी पूरा हो जाता था। | 1 |
पर जैसे मेरे नाम की विशालता मेरे लिए दुर्वह है, वैसे ही लक्ष्मी की समृद्धि भक्तिन के कपाल की कुंचित रेखाओं में नहीं बँध सकी। ] | 1 |
इस दिन राखी थी। | 1 |
लड़का उन मगरमचछों को एक-दूसरे में विलीन होते देखता रहा। | 1 |
चंद मिनटों में चार सौ आदमी ख़त्म कर दिए गए और फिर मैं आगे चली। | 4 |
इसकी खबर शहर में फैल गई। और शाम तक मुहल्ले मुहल्ले से शायर जमा होना शुरू हो गए। | 4 |
इतने दिन तक रोज शाम को मैंने विनु दादा के घर जाकर उनको परेशान कर डाला था। | 1 |
अगर मेरी खाल तुम्हारे जूते बनाने के काम आये, तो खुशी से दे दूँ। | 2 |
मगर मौलवी साहब न रुके। | 4 |
एक बीमार नौजवान के साथ उसका कुत्ता भी ‘ कुंई-कुंई ’ करता हुआ नाव पर चढ़ आया। | 4 |
इस बार उसी स्वर को आंखों से देखा। | 4 |
उद्विग्नता के कारण पलक तक नहीं झपकी। | 4 |
अस्पताल के सामने की पटरी पर कई छोटे-छोटे घर और बरामदे हैं, जिनमें ये जीव-जन्तु तथा इनके कठिन हृदय जेलर दोनों निवास करते हैं। | 1 |
लगा कि... | 1 |
थकी हुई सीता महारानी के चरण टीपने की इच्छा प्रकट की उसने, हाथ की उँगलियों के इशारे से, मानो हारमोनियम की पटरियों पर नचा रहा हो। | 4 |
भैया की जगह मैं होता, तो डंडे से बात करता। | 2 |
बाबू जिसका काम से जी उचाट रहता था, अब दिन-भर घाट पर अपने बाप का हाथ बटाता। | 1 |
इतने बड़े सत्पात्र के माथे पर कलंक का इतना बड़ा दाग किस दुष्ट ग्रह ने इतना प्रचार करके गाजे-बाजे से समारोह करके आंक दिया? | 1 |
उसने पूछा। | 4 |
इंसान को अपने वाअदे से कभी फिरना नहीं चाहिए ” | 2 |
चतुरी सहज-गंभीर मुद्रा से बोला, ‘सोकर जगे तो बड़ी देर हुई, बुलाने की वजह से आया हुआ हूँ। ’ जिनमें शक्ति होती है, अवैतनिक शिक्षक वही हो सकते हैं। | 2 |
तू बुला पुलिस को। | 2 |
वह अपने सायबान में प्रातः से संध्या तक अँगीठी के सामने बैठा हुआ खटखट किया करता था। | 1 |
लालमोहर को लगता था, हीराबाई उसी की ओर देखती है। | 4 |
वो ना तो नबाब जादी थी और न सर्राफ़ जादी। | 1 |
“बहन की गाली मत दो!” लड़के का स्वर बहुत तीखा हो गया। | 2 |
रिक्शावाला बहादुर है। कहता है – | 1 |
कहीं लाठी चार्ज !- कहीं 144! सरकार की दमन की चक्की बड़े भयंकर रूप से चल रही थी। | 1 |
फिर चलती हुई चिलम में दम लगाकर धुआँ पीकर, सिर नीचे की ओर जोर से दबाकर नाक से धुवाँ निकालकर बैठे गले से बोला, ‘काकी रोटी भी करती थीं, बरतन भी मलती थीं और रामायण भी पढ़ती थीं। | 4 |
बीड़ी आदान-प्रदान करके हिरामन ने भी एकाध जान-पहचान कर ली। | 4 |
अब वो हर साल दो मर्तबा चाँद और सूरज से बदला लेते हैं और होली सोचती थी। | 1 |
दूसरी शादी न करने के अनेक कारण हैं। | 4 |
यही कारण है कि सवेरे के समय अपने छोटे- से कमरे में मेज के सामने बैठकर उस काबुली से गप-शप लड़ाकर बहुत कुछ भ्रमण का काम निकाल लिया करता हूँ। | 1 |
उन से पूछूंगी कि ये हरकत किस की थी। ” इल्म उद्दीन समझ गया। | 2 |
अब स्टेशन पर उतरकर किसी से कुछ पूछने की कोई जरूरत नहीं। | 4 |
तब तक यह तूफ़ान निकल ही जायगा। | 2 |
समुंद्र की एक बड़ी भारी उछाल आई। | 4 |
चालीस साल का हट्टा-कट्टा, काला-कलूटा, देहाती नौजवान अपनी गाड़ी और अपने बैलों के सिवाय दुनिया की किसी और बात में विशेष दिलचस्पी नहीं लेता। | 1 |
उनकी हिफ़ाज़त के लिए हर डिब्बे में दो सिपाही बंदूक़ें लेकर खड़े थे। | 1 |
पुरोहित के इर्द-गिर्द औरतों का ताँता लगा रहता था और औरतें उन्हें थालियों में सीधा और न जाने क्या क्या भेंट करतीं। | 1 |
वे अपने-अपने घर की ओर दौड़ पड़े। | 4 |
उतरकर देखा, प्लेटफार्म पर साहबों के अर्दलियों का दल सामान लिए गाड़ी की प्रतीक्षा कर रहा है। | 1 |
लड़के ने उसकी तरफ़ होंठ बिचका दिये, और एक पत्थर को पैर से ठोकर मारकर दूर उड़ा दिया। | 4 |
अंत समय उसने केदार को बुलाया था, पर केदार को ऊख में पानी देना था। | 1 |
एक दिन सबेरे ही रूकिया ने उनसे न जाने क्या कहा कि वे रामायण बन्दकर बार-बार आँखें पोंछती हुई बिंदा के घर चल दीं। | 4 |
और इस मामले की सारी अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी अपने सिर पर ले ली है। | 2 |
नहीं, बच्चे नहीं, पानी है। | 1 |
भोले ने दोनों हाथ मेरे गालों की झुर्रियों पर रक्खे। | 4 |
उस की बीवी के दिमाग़ का तवाज़ुन क़ायम नहीं। | 1 |
मैं जानती, ऐसे निर्मोहिए से पाला पड़ेगा, तो इस घर में भूल से न आती। | 2 |
इल्म उद्दीन ने उस से कहा “देखो, इस्क़ात वुस्कात की कोशिश न करो। | 4 |
उनकी अवस्था चालीस के ही आस-पास होगी। | 4 |
दूर, बहुत दूर, एक नामालूम, नाक़ाबिल-ए-उबूर, नाक़ाबिल-ए-पैमाइश समुंद्र की तरफ़... | 1 |
ठाकुर साहब को देखते ही दरोगा नियामत अली ने बिगड़ कर कहा--ठाकुर साहब! | 4 |
यह बेईमानी है, बहुत हो, तो दो-चार रुपये का नुकसान हुआ होगा। | 1 |
मेरे सामने भी खुली घाटी थी, दूर तक फैली पहाड़ी शृंखलाएँ थीं, बादल थे, चेयरिंग क्रास का सुनसान मोड़ था—और यहाँ भी कुछ उसी तरह मानवता ने दृश्यपट पर प्रवेश किया—अर्थात् एक पचास-पचपन साल का भला आदमी छड़ी टेकता दूर से आता दिखाई दिया। | 4 |
शशि ने सुनकर कोसना शुरू किया-" जो लोग इतनी बड़ी झूठी बदनामी कर रहे हैं, भगवान करे उनकी जीभ जल जाएे।" और अश्रु बहाती हुई सीधी वह पति के पास पहुंची तथा उनसे सब बात कह सुनाई। | 2 |
मैं अपनी बीवी से कुछ कहना चाहता हूँ। ” | 2 |
मन-ही-मन में उसने संकल्प किया कि चाहे कैसे ही दिन बीतें, वह पति के प्रति उद्दीप्त स्नेह की उज्ज्वलता को तनिक भी म्लान न होने देगी। | 4 |
तो उस के तुम ज़िम्मेदार हो”: और मैंने भूले को दोपहर के वक़्त सात शहज़ादों और सात शहज़ादियों की एक लंबी कहानी सुनाई। | 4 |
मामा बोले, यह क्या कह रहे हैं? | 2 |
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