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मिनी की झोली बादाम-किसमिस से भरी हुई थी। | 1 |
किस लिए आज ये देस बिदेस हो गया है। | 1 |
आख़िर में चीख़ने और कमरे से भागने की कोशिश करने लगी। | 4 |
लहरें पैदा होना शुरू होगईं। | 4 |
फिर भी चाहा की यदि माँ कहे की केठानी को बुला लेती हूँ तो मैं इस बार ज़रूर कह दूंगा की हाँ बुला लो पर इस बार माँ ने केवल उसके गारा-मिट्टी धोने की खबर भर दी और उसे फिर से नौकर रखने का प्रस्ताव न किया। | 4 |
दुल्हन के साथ गठरी लिए हुए कोई अधेड़ या बूढ़ा आदमी होता जो पुरानी मटमैली धोती के ऊपर नया सिला और गैरधुला, सफेद, चमकदार कुरता पहने होता जिसमें बटन नदारद होते। | 1 |
एक नौकर था, वह भी कल भाग गया। | 4 |
मैं- जो लोग आपको बौड़म कहते हैं, वे खुद बौड़म हैं। | 2 |
उसके बाप एक छोटी-सी रियासत के ताल्लुकेदार थे। | 1 |
गागर की भाबी बोली “मैं ने तो अपने लिए देवरानी ढूँढ भी ली है। ” लक्षमण के कान खड़े हो गए। | 2 |
एक जगह एक नेता का भाषण समाप्त हुआ था, और मज़दूर शामियाना उखाड़ रहे थे। | 1 |
वह अब चुप नहीं रह सका, ‘‘मोदिआइन काकी, बाकी-बकाया वसूलने का यह काबुली कायदा तो तुमने खूब सीखा है!’ ’ | 2 |
एक लड़की को छोड़कर उनके और कोई नहीं था। | 1 |
जब उसे छोड़ा गया, तो वह थोड़ी दूर जाकर और ज़ोर से गालियाँ देने लगा। | 4 |
ठाएं, ठाएं फिर भी खिड़कियाँ बंद होती गईं और फिर डिब्बे में एक खिड़की भी न खुली रही। | 4 |
वह खुल कर मुस्कराया-' गाँव की बोली आप समझिएगा?'' हूँ-ऊँ-ऊँ!' हीराबाई ने गर्दन हिलाई। | 4 |
वह बोला, “हमारे पास भी एक कोठरी थी। | 2 |
चेयरिंग क्रास पर पहुँचकर मैंने देखा कि उस वक़्त वहाँ मेरे सिवा एक भी आदमी नहीं है। | 4 |
झाड़ फूंक करने वाले बुलाए गए। | 4 |
एक प्रसंग पर आने के विचार से मैंने कहा, ‘चतुरी, तुम्हारे जूते की बड़ी तारीफ है। ’ | 4 |
भीतर से उसका पूरा जोर उभर रहा है। | 2 |
मैं बहुत ख़ुश हूँ। | 2 |
पन्ना इसी चिन्ता में पड़ी हुई थी कि सहसा उसे ख्याल आया, लड़के घर में नहीं हैं। | 1 |
इस ग़ैर-मामूली थकन के बाइस मैंने भोले की वो बात भी बर्दाश्त की। | 4 |
उसके किनारे एक बहुत बड़ा आम का पेड़ था जो खूब जमकर फलता था और बाग के पेड़ों से थोड़ा पहले पकना शुरू हो जाता था। | 1 |
मानों उसकी परछाही से दूर भागते हों। | 1 |
इस प्रोग्राम को हरकत में लाने के लिए मंदिर के पास मोहल्ले “मुल्ला शुकूर” में एक कमेटी क़ाएम हो गई और ग्यारह वोटों की अक्सरिय्यत से सुंदरलाल बाबू को इस का सेक्रेटरी चुन लिया गया। | 4 |
बाजार तुम जाते ही हो। ’ चतुरी को इस सहयोग से बड़ी खुशी हुई। | 4 |
मगर उम्र ऐसी थी कि बहुत जल्द भूल गई। | 4 |
बीस कोस की मंजिल भी कोई दूर की मंजिल है? | 1 |
कुछ नाजुक मिजाज भी हो गया। | 4 |
भेड़िए लागन हैं। | 2 |
लेकिन, यह सब आखिर कौम ही में हुआ है।'''' तो क्या किया जाय?'' स्फारित, स्फुरित आँखें, पत्नी ने पूछा। | 2 |
यहां मत्स्य क्रय-विक्रय केन्द्र भी है और तेल-फुलेल को दूकान भी, मानो दुर्गन्ध-सुगन्ध में समरसता स्थापित करने का अनुष्ठान है। | 1 |
ठीक इस समय राह में एक बड़े जोर का शोर सुनाई दिया। | 4 |
फिर कुछ देर रुक के बोला," एक कम है फौज में? | 2 |
टीशन की छोकरियों से!' बिरजू के माँ ने चुप हो कर अपनी आवाज अंदाजी कि उसकी बात जंगी के झोंपड़े तक साफ-साफ पहुँच गई होगी। | 4 |
दो लड़के हैं, एक लड़की। | 2 |
अर्थात् बाढ़ को मैंने भोगा है, शहरी आदमी की हैसियत से। | 1 |
उसकी दुलहिन डोली का परदा थोड़ा सरका कर देखती है। | 4 |
चरस की ओर देखते हुए उसने कहा, ‘काका, फिर कैसे काम बनेगा? ’ | 2 |
अब इसके पैसे कौन देगा। | 1 |
जब वो तहक्कुमाना अंदाज़ से बोलता और चल-बे कहता। | 1 |
-हाँ देखा, अच्छी तरह देखा हूँ! | 2 |
यही कारण था कि गॉँव की ललनाऍं उनकी निंदक थीं! | 1 |
रास्ता जाना हुआ। | 4 |
इस प्रकार की बातें सुनकर मुझे भी डर लग रहा था। | 1 |
पन्ना और मुलिया दोनों एक-दूसरे की सूरत से जलती थीं। | 1 |
अब के भी एक टोकरा देदो तो बड़ी मेहरबानी होगी। ” | 2 |
जज साहब ने पद्मा के सिर पर हाथ रखकर देखा, फिर लड़के की तरफ निगाह फेरकर पूछा,'' क्या तुमने बुखार देखा है?'''' जी हाँ, देखा है।'''' कितना है?'''' एक सौ तीन डिग्री।'''' मैंने रामेश्वरजी से कह दिया है, तुम आज यही रहोगे। | 2 |
सालगिरा में दस बारह रोज़ बाक़ी थे कि पड़ोस का मकान जो कुछ देर से ख़ाली पड़ा था पंजाबियों के एक ख़ानदान ने किराए पर उठा लिया। | 4 |
आज सज़ा सुनानी थी। | 1 |
उसके आने से बूढा कुछ परेशान सा लगा। | 4 |
दोनों पक्षि-शावकों के छटपटाने से लगता था, मानो पिंजड़ा ही सजीव और उड़ने योग्य हो गया है। | 1 |
विष्णु अत्तार की वसातत से लक्षमण को काला तेल मिल गया था। | 1 |
“छोड़ कहाँ आया होगा, जेब में रख ली होगी। | 2 |
सरदार ने कहा, जाति की बन्दिश क्या, जबकि जाति की इज्जत ही पानी में बही जा रही है! क्यों जी दीवान? | 2 |
हीराबाई घाट की ओर चली गई, गाँव की बहू-बेटी की तरह सिर नीचा कर के धीरे-धीरे। कौन कहेगा कि कंपनी की औरत है! ...औरत नहीं, लड़की। शायद कुमारी ही है। | 4 |
मैं अपने लिखने-पढ़ने के कमरे में बैठा हुआ हिसाब लिख रहा था। | 1 |
कल इनके हाथ-पैर हो जायेंगे, फिर कौन पूछता है! अपनी-अपनी मेहरियों का मुँह देखेंगे। | 2 |
हिंदू पनाह गज़ीनों का जत्था आ रहा था शायद, लोगों ने सर निकाल कर इधर उधर देखा। | 4 |
कभी कभी होली मय्या और काइस्थों की आँख बचा कर खाट पर सीधी पड़ जाती और एक शिकम पर कुतिया की तरह टांगों को अच्छी तरह से फैला कर जमाई लेती और फिर उसी वक़्त काँपते हुए हाथ से अपने नन्हे से दोज़ख़ को सहलाने लगती। | 1 |
सवा रुपया बनता था, उसने पारो से पौने दो रुपये तलब किए, जान-बूझ कर। ख़ूब लड़ाई हुई। | 4 |
तुम्हारा तकरीबन-तकरीबन अभी दफ़्तर में ही रहेगा और मेरा तकरीबन-तकरीबन कफ़न में पहुँच जाएगा। | 2 |
उन्होंने शंभूनाथ बाबू का शांत स्वभाव देखकर सोचा कि आदमी बिल्कुल निर्जीव है, तनिक भी तेज नहीं। | 4 |
और एक गिलास में आंगन के ही गुलाब के कुछ फूलों को तोड़कर, गुलदस्ते का स्वरूप दिया गया है। | 4 |
अस्थायी अलॉट हुए खेत उन्हें धीरज देते थे। | 1 |
केदार— भइया ने भाभी को डाँटा नहीं? | 2 |
एक अधेड़ आदमी था जिसने अपनी पगड़ी ज़मीन पर बिछा ली थी और हाथ पीछे करके तथा टाँगें फैलाकर उस पर बैठ गया था। | 1 |
तुम्हें कोई तरद्दुद नहीं करना चाहिए। ” | 2 |
मौलवी साहब ने कहा- तो कमबख्त, टाँकी मारता होगा। | 2 |
शास्त्रिणी जी पूरी तत्परता से पिकेटिंग करती रहीं। | 4 |
आनंदी खून का घूँट पी कर रह गयी। | 4 |
“ अच्छा जी!” वह बोला, “पर साहब,” और फिर स्वर में वही आत्मीयता लाकर उसने कहा, “बरसात का मौसम है। | 4 |
मेरी अक्ल अब और नहीं पहँुचती। | 2 |
फिर कभी नहीं जाएगी! | 4 |
मगर इस कमज़ोरी के बावजूद उस में कई कई मील पैदल चलने की हिम्मत थी। | 1 |
वह दोनों जून भोजन करता था,पर जैसे शत्रु के घर। भोला की शोकमग्न मूर्ति आँखों से न उतरती थी। | 1 |
तुम तो उस्ताद हो मीता!'' इस्स!' आसिन-कातिक का सूरज दो बाँस दिन रहते ही कुम्हला जाता है। | 2 |
रह गयी अकेली बड़ी बहुरिया। | 4 |
उन्होंने उसे इसलिए तो नहीं छोड़ा था कि वह कुछ दिनों के बाद ट्रक में बैठकर हिन्दुस्तान चला जाये। | 1 |
वो सर उठाए दुनिया व माफ़ीहा, गिर्द-ओ-पेश से बेख़बर उधर ही देखता रहा। | 4 |
फिर मैंने शादी कर ली। | 2 |
अभी मैं नहीं आ सकता। | 2 |
उधर कोतवाल बख्तावर सिंह का बुरा हाल था। | 1 |
साथ में उपदेश देने वाली प्रवृत्ति भी। | 1 |
शंभूनाथ बाबू ने इस बात में बिल्कुल योग नहीं दिया- किसी भी प्रसंग में कोई' हां' या' हूं' तक नहीं सुनाई पड़ी। | 4 |
मैं कौम की भलाई चाहता था, अब खुद ही नकटों का सिरताज हो रहा हूँ। | 2 |
“मुझे उसके साथ के कारण एक आत्मिक प्रसन्नता प्राप्त होती है, ” | 2 |
नीम-चमेली की गंध मेरे कमरे में हौले-हौले आने लगी . | 1 |
मैंने भुट्टा खाते हुए कहा। | 4 |
बक्सा ढोनेवाले ने नौटंकी के जोकर जैसा मुँह बना कर कहा,' लाटफारम से बाहर भागो। | 4 |
अगर होली इस पर सवार हो जाए तो फिर डेढ़ दो घंटे में वो चांदनी में नहाते हुए गोया सदियों से आश्ना क्लस दिखाई देने लगीं .... | 4 |
उसी तरह छड़ी पर भार दिये मेरी तरफ़ देख रहा था। | 1 |
क़मीस भी ख़राब हो रही थी। | 1 |
पर अब वह भी करें, तो क्या करें? | 1 |
दूसरे लोगों के बहुत से ख़ाने होते हैं। | 1 |
बच्चे खेलते खेलते हमारे पास आ गए। | 4 |
इत्यादि। मुझे मानना पड़ता कि यह बात बिलकुल असम्भव भी नहीं है। | 1 |
रोज़ कहीं न कहीं किसी न किसी जीनियस की चर्चा सुनने को मिल जाती है। | 0 |
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