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दोनों उस कमरे में जो नसीमा का था दरवाज़े बंद कर के घंटों बैठी रहतीं। | 1 |
उनके मुख फूल की तरह खिल जाते। | 1 |
चतुरी को मैंने विदा किया। | 4 |
हीराबाई ने देखा, सचमुच नननपुर की सड़क बड़ी सूनी है। | 1 |
आँखों में सैंकड़ों ज़ख़्मी उमंगें सिमटी हैं। | 1 |
क़रीबन पाँच घंटे तक छोटा सा पंखा बार बार पानी में तर करके झलता रहता। | 1 |
चिट्ठी आये हुए तो आज १५ दिन हो गये है।" मान सिंह ने २-३ तेज-तेज साँसे ली। | 2 |
दियों को दिया-सलाई दिखाई गई। | 4 |
नहीं, और कोई तकलीफ़ नहीं होती! | 2 |
भीड़ में से कोई उसे समझाने लगा। वह आदमी उठकर खड़ा हो गया। | 4 |
अचानक मुसीबत नाज़िल हुई एक दूसरे ठेले की सूरत में। | 4 |
किरणों के जल से भरकर, जीवन में एक ही प्रकार की लहरें उठाती हुई, परिचय के प्रिय पथ पर बहा ले जाती है; जो सबसे बड़ी है, जिसके भीतर ही बड़े और छोटे के नाम में भ्रम है, वह स्वयं कभी छोटे और बड़े का निर्णय नहीं करती, उसकी दृष्टि में सभी बराबर हैं, क्योंकि सब उसी के हैं। | 1 |
ऐसे आवास में विद्या नहीं आती। | 3 |
जिस कमरे में कटहल रखे जाते थे वह एक नशीली गंध से गमक उठता था। | 1 |
“ मैं एक निहायत ही अदना इन्सान हूँ, ” | 2 |
पुरवा की औरतें बंदरियों की तरह अपने अपने बच्चों को कलेजों से लगाए फुर्ती थीं। | 1 |
हटा हाथ!” लड़के का हाथ उस मोटे हाथ के शिकंजे में निर्जीव-सा होकर हट गया। | 4 |
कसवा कर अमराई की ओर चल पड़े। | 4 |
ट्रक को सड़क पर खड़ी करके हम उसके घर गये। | 4 |
स्त्री आकर और भी आग लगायेगी। | 4 |
मैंने कहा चुप हो! मैं कुछ नहीं सुनना चाहता। | 2 |
मेरे प्रेम से तुम्हारे हृदय का एक-एक अणु छिद चुका है और यही कारण है कि मैं बिना संकोच के इस सत्य को प्रकट कर रही हूं कि तुम्हारी सुरक्षा और कम बोलना मुझे पसन्द नहीं। | 2 |
समुंद्र के किनारे हर फूल बंदर पर शाम के वक़्त स्टीमर लॉन्च मिल जाता था और साहिल के साथ साथ डेढ़ दो घंटे की मुसाफ़त के बाद उस के मैके गानो के बड़े मंदिर के ज़ंग ख़ुर्दा क्लस दिखाई देने लगते। | 1 |
यह इसलिए नहीं कि उसे अपने सास-ससुर, देवर या जेठ आदि घृणा थी; बल्कि उसका विचार था कि यदि बहुत कुछ सहने और तरह देने पर भी परिवार के साथ निर्वाह न हो सके, तो आये-दिन की कलह से जीवन को नष्ट करने की अपेक्षा यही उत्तम है कि अपनी खिचड़ी अलग पकायी जाय। | 1 |
कभी-कभी खरगोश, कबूतर आदि साँप के लिए आकर्षण बन जाते हैं और यदि जाली के घर में पानी निकलने के लिए बनी नालियों में से कोई खुली रह जाए तो उसका भीतर प्रवेश पा लेना सहज हो जाता है। | 1 |
आतंक जमाने के लिए लाठीचार्ज कराने का तुम्हें हुक्म था। | 2 |
अत: झोली के बारे में दोनों मित्रों की अभ्यस्त आलोचना न चल सकी। | 4 |
संवदिया डटकर खाता है और ‘अफर’ कर सोता है, किन्तु हरगोबिन को नींद नहीं आ रही है। | 4 |
घड़े के मुँह पर भी मोतिया के हार पड़े थे और माँ एक नया ख़रीदा हुआ पंखा हल्के हल्के हिला हिला कर मुँह में गोरी मैय्या गुनगुना रही थी। | 1 |
पिछले साल ही उसने अपनी गाड़ी बनवाई है। | 4 |
उसने बहुत दिनों के परिश्रम और उद्योग के बाद बी.ए. की डिग्री प्राप्त की थी। | 1 |
सौन्दर्य की वह ज्योति-राशि स्नेह-शिखाओं से वैसी ही अम्लान स्थिर है। | 1 |
' क्या बात है?'' मैंने उसका हालचाल पूछने के लिए सीधा सवाल किया। | 2 |
मामा ने आश्चर्य से कहा, मजाक कर रहे हैं क्या? | 2 |
चलो।' मोहन ने एक बार संयत दृष्टि से उसे देखा। | 4 |
पिछली बिहार में, मैं ना था। | 1 |
माली बहुत खुश था। | 1 |
लक्षमण ने दिल में कहा, यक़ीनन ये गधे मुझसे ज़्यादा बोझ उठा सकते हैं .... | 4 |
मैं कल्पना में देखने लगा, वह अच्छी तरह खाती नहीं; संध्या हो जाती है, वह बाल बांधना भूल जाती है। | 4 |
कल्याणी के पिता और कल्याणी से भेंट हुई है। | 1 |
अम्मां की आँख से ओझल। | 2 |
अब फ़र्ख़ंदा ने भी अपनी अम्मी से इजाज़त लेकर नसीमा के घर जाना शुरू कर दिया। | 4 |
फिर अंधेरे में ख़फ़ीफ़ से हंसने और बातें करने की आवाज़ें आने लगीं। | 4 |
तीन बार जेल जा चुके हैं, फिर कब चले जाएँ कुछ पता नहीं।' कुंती बोली," आदमी तो बुरा नहीं जान पड़ता।' राधाकृष्ण ने कहा," बुरा आदमी तो मैं भी नहीं कहता उसे, पर वह गौरी का पति होने लायक नहीं। | 2 |
वह बड़ा मूर्ख था। | 1 |
आज ही दो आने की शक्कर मँगवायी। | 2 |
बिरजू की माँ को अचानक याद आई चंपिया, सुनरी, लरेना की बीवी और जंगी की पुतोहू, ये चारों ही गाँव में बैसकोप का गीत गाना जानती हैं। | 4 |
मुद्दत के बाद आप ऐसे आदमी मिले हैं जिससे मैं अपने दिल की बातें कह सकता हूँ। | 2 |
मां की इच्छा थी, मेरे अपमान की बात जब समाज के लोग भूल जाएंगे तब विवाह का प्रयत्न करेंगी। | 1 |
वह क्या जानें कि अब्बाजान क्यों बदहवास चौधरी कायमअली के घर दौड़े जा रहे हैं। | 4 |
गधे उस की पीठ की जानिब कुम्हार के बर्तनों से लदे जा रहे थे। | 1 |
भोला भी जानता था कि मैंने उस की ऐसी बात कभी बर्दाश्त नहीं की। | 1 |
जिस कहारिन के भरोसे वे बच्चों को छोड़ गए थे, उसके भी तीन-चार बच्चे थे। | 1 |
सच कहता हूँ, पँचसीस तोड़ते समय उँगलियाँ काँप रही थीं | 2 |
परसों रोटी खाने को बुलाने गयी, तो मँड़ैया में बैठा रो रहा था। | 2 |
वह आदमी भी कमीज़ कन्धे पर रखे उस कमरे की तरफ़ चल दिया। | 4 |
बालों में लगाने के लिए ख़ास लखनऊ से मंगवाया हुआ आमले का तेल मिलता है। | 2 |
अकस्मात् उसे ध्यान आया। | 4 |
फिर किससे अलग हो जाऊँ? | 2 |
मैंने सोचा, ‘ इस समय राष्ट्रभाषा से राजभाषा का बढ़कर महत्त्व होगा। ’ | 2 |
मैंने सुबह सुनने के लिए कहा था, वह आया हुआ है। | 1 |
...हीराबाई? | 1 |
ज़मीन ने सबज़ सब्ज़-रंग के छोटे छोटे पौदे उगाए थे। | 1 |
गोया “दिल में बसाओ” प्रोग्राम को अमली जामा पहनाने के लिए मोहल्ला “मुल्ला शकूर” की इस कमेटी ने कई प्रभात फेरीयाँ निकालीं। | 4 |
वो अपने मैके हर ह फ़्ते जाती ......... .... . | 4 |
आवश्यक कागज़-पत्रों के कारण मेरे बाहर जाने पर कमरा बंद ही रहता है . | 1 |
जूते भी तो नहीं हैं। | 1 |
साँवली पारो को उसे परेशान करने में बड़ा मज़ा आता था। | 1 |
उस वक़्त सुख नंदन तुल रहा था। | 1 |
जानती नहीं, दो रोटियाँ होते ही दो मन हो जाते हैं। | 2 |
किसी प्रकार शंभूनाथ बुरी तरह हारकर मेरे पैरों पर आ गिरे,' मूंछों की रेखा पर ताव देते-देते केवल यही कामना करने लगा। | 4 |
आज वह नंगी पीठ पर साहब के डंडे खाएगा। | 2 |
बिंदा मुझसे कुछ बड़ी ही रही होगी; | 2 |
तभी तुम बहुत जानते हों अजी हजरत, यह चोरी करते हैं। | 2 |
हमारे पीछे भी तो गृहस्थी लगी है, बाल-बच्चों का पेट तो पालना ही होगा।' इसी प्रकार सोचते हुए वे अपने बंगले पहुँचे। | 2 |
चुपचाप बैठे रहिएगा। | 2 |
फुआ ने अँधेरे में टटोल कर तंबाकू का अंदाज किया ... | 4 |
मेरे मामू एक थाने में कानिसटिबिल हें। | 2 |
बस।'' इसके बाद से पद्मा के जीवन में आश्चर्यकर परिवर्तन हो गया। | 4 |
फिर दिया की एक लहर आती है और फिर पाक-ओ-साफ़। जब गरहन शुरू होता है और चांद की नूरानी इस्मत पर-दाग़ लग जाता है तो चंद लमहात के लिए चारों तरफ़ ख़ामोशी और फिर राम नाम का जाप शुरू होता है। | 1 |
उसके छोटे-बड़े कई बच्चे थे, सबसे बड़ी लड़की शादी लायक हो गई थी। | 1 |
परन्तु दुर्भाग्य, आज उन्हें स्वयं वे ही बातें अपने मुँह से कहनी पड़ी! | 4 |
आख़िर एक रोज़ फ़र्ख़ंदा की हालत बहुत बिगड़ गई। | 4 |
‘घरनी’ धानी घर छोड़कर मायके भागी जा रही है और उसका घरवाला ( पुरुष ) उसको मनाकर राह से लौटाने गया है। | 4 |
दोनों देर तक एक दुसरे के पास बैठे मन हल्का करते रहे। | 1 |
तब मँड़ाई हो जायगी। | 2 |
फिर सड़क के बीच खड़ा हो कर ज़ोर ज़ोर से हांपने लगा। | 4 |
लेकिन उसने सब ख़यालात का एक असबाती मर्दानगी से मुक़ाबला किया और भी बहुत से लोग मौजूद थे। | 4 |
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मानो अपने पति से उसका पुन: विवाह हुआ हो। | 1 |
दिन में कम-अज़-कम सौ मर्तबा कहती “ मैं उदास होगई हूँ। | 4 |
उन दिनों मैं गाँव में रहता था। | 1 |
उलट कर अपने खाली टप्पर की ओर देखने की हिम्मत नहीं होती है। | 4 |
यहां पर भी वही सामान था। | 1 |
उसने फिर से लाल चंद को पकड़ लिया और पूछा— “लाजो वाघा कैसे पहुँच गई? ” | 4 |
अपना हुक्का ले आई हो न फुआ?' फुआ को तंबाकू मिल जाए, तो रात-भर क्या, पाँच रात बैठ कर जाग सकती है। | 2 |
उस वक़्त कुम्हार ने आवाज़ दी। | 4 |
उन्हें यू नहीं दिखाई देता, गोया रास्ता इस से आगे कहीं ना जाएगा। | 1 |
बैल समझ गए उन्हें क्या करना है। | 4 |
बाबू के माँ बाप ने खाई। | 4 |
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